text stringlengths 1 579 | label int64 0 5 |
|---|---|
वो इस ख़ला में देख रहा था, गली और सड़क के संगम पर, जहां आज छः माह के बाद उसने पारो को देखा था। | 1 |
ये देखो, तुम्हारे पहलू में क्या है। ” | 2 |
मैं तो किसी को तुम्हारी तरह बिसूरते नहीं देखती। | 2 |
जहां वो अब तक ठेला लगाता आरहा था। | 4 |
लालमोहर ने दूसरी शर्त सामने रखी-' गाँव में अगर यह बात मालूम हुई किसी तरह...!'' राम-राम!' दाँत से जीभ को काटते हुए कहा पलटदास ने। | 2 |
वो तो शायद उस दिन को कोसती होगी जिस दिन वो पैदा हो गया .. . | 1 |
मिनी की माँ एक सफेद चमकीला गोलाकार पदार्थ हाथ में लिए डाँट-डपटकर मिनी से पूछ रही थी," तूने यह अठन्नी पाई कहाँ से, बता?" मिनी ने कहा," काबुलीवाले ने दी है।"" काबुलीवाले से तूने अठन्नी ली कैसे, बता?" मिनी ने रोने का उपक्रम करते हुए कहा," मैंने माँगी नहीं थी, उसने आप ही दी है"। | 2 |
क्या? | 2 |
एक ठाकुर ने ठठोली की- और जो लोग सुरधाम चले गये। | 2 |
कोई अड़तालीस साल हुए, मैंने उसे ख़रीदा था। | 2 |
हर माह पाँच छः सौ रुपय कमा लेता था। | 1 |
मैं फिर लौट कर जा रही हूँ | 2 |
श्रीकंठ--सब हाल साफ-साफ कहा, तो मालूम हो। | 2 |
हिंदी में अनेक पुस्तकें इस पर प्रकाशित हैं, बल्कि प्रकाशन को सफल बनाने के लिए इस विषय की पुस्तकें आधार मानी गई हैं। | 1 |
बहुत कोशिश की गई, उस की हालत ठीक हो जाये लेकिन कामयाबी नसीब न हुई। | 4 |
तकवाहा सौदा देकर मोहन को जमींदार की ही दृष्टि से घूरता रहा। | 4 |
प्रकाश कुछ-कुछ था। | 1 |
मकई के भट्टों का रंग ज़मीन की तरह भूरा होता गया। | 1 |
‘‘चलो, पानी कैसे घुस गया है, वही देखना है,’’ कहकर हम रिक्शा पर बैठ गए। | 2 |
उसका घरवाला उसकी बात में रहता है। | 1 |
चारों अठनिया! बोली कि जब तक मेले में हो, रोज रात में आ कर देखना। | 4 |
पत्तल की जगह चमकती हुई चीनी की प्लेटें थीं। | 1 |
बच्चा पैदा नहीं होता तो इस में मेरा क्या क़ुसूर है। ” | 2 |
बूटासिंह से उसकी आशनाई थी। | 1 |
हीराबाई ने परख लिया, हिरामन सचमुच हीरा है। | 1 |
नन्हे भोले ने मेरे इस ख़याल की तस्दीक़ कर दी। | 1 |
गाड़े पसीने की कमाई हुई रोटी से तो दूध टपकता है। | 1 |
कहीं किसी के झगड़े चुकाता, कहीं साधु-संतों की सेवा करता। | 1 |
आख़िर जब मैं वहाँ से उठने को हुआ, तो बाहर का दरवाज़ा खुला और पाजामा-कमीज पहने एक आदमी अन्दर दाख़िल हुआ। | 4 |
मामला था, एक तेरह साल की बालिका को बेचने के लिए भगा ले जाने का, जुर्म साबित हो चुका था। | 1 |
कोई बढ़िया उसे चीख़ कर चुप करा देती है। | 1 |
रेजगारी दोनों में से किसी के पास नहीं थी। | 1 |
कहीं बीमार न पड़ जायँ। | 2 |
उसने लालमोहर को आँख के इशारे से कहा,' इस आदमी से बतियाने की जरूरत नहीं।' घन-घन-घन-धड़ाम! परदा उठ गया। | 4 |
इसीलिए, ठोस-ठोस काम वाला खर्च कहा। | 2 |
इलाहाबाद का अनुभव-रहित झल्लाया हुआ ग्रेजुएट इस बात को न समझ सका। | 4 |
पुरुष ने उसकी जेब में हाथ डालकर जेब की सब चीज़ें बाहर निकाल लीं। | 4 |
देवियां भी। वे मर्दों के बराबर हैं। | 1 |
केदार तो कल ही माँड़ने को कह रहा था; पर मैंने कहा, पहले ऊख में पानी दे लो, फिर आज माँड़ना, मँड़ाई तो दस दिन बाद भी हो सकती है, ऊख की सिंचाई न हुई तो सूख जायगी। | 2 |
जब से सत्याग्रह-संग्राम छिड़ा था, तभी से उसे फिकर थी कि न जाने कब सीताराम जी गिरफ्तार हो जाएँ। | 1 |
मामा ने कहा, यह क्या कह रहे हैं? | 2 |
उस में से चाबियों का गुच्छा निकाल कर वो भंडारे की तरफ़ चली गई। | 4 |
संध्या हो गयी थी। | 1 |
सिमराह के सरकारी कूप में पानी पी लेना।' गाड़ी गाँव से बाहर हो कर धान के खेतों के बगल से जाने लगी। | 4 |
मुंशी करीम बख़्श इकहरे जिस्म का आदमी था। | 1 |
वो रूमाल से अपने आँसू साफ़ करते हुए बोला तुमसे बातें करते हुए मुझे ख़्याल नहीं रहा। | 2 |
उसका मतलब साफ था। | 1 |
गौरी बोली “तुम एतिबार नहीं करते, तो मैं काला भैरव की सौगन्द लेती हूँ। | 2 |
सुंदर लाल ने उकड़ूं बैठते हुए कहा। | 4 |
लाऊड स्पीकर से अजीब तरह की आवाज़ें आतीं। | 1 |
बाप ने जिस मतलब से बात पलटी थी, वह उसकी समझ में न आया। | 4 |
पच्छिम की ओर, थाना के सामने सड़क पर मोटी डोरी की शक्ल में – मुंह में झाग-फेन लिए – | 1 |
चंपिया ने शकरकंद को मसल कर गोले बनाए और बिरजू सिर पर कड़ाही औंधा कर अपने बाप को दिखलाने लगा-' मलेटरी टोपी! इस पर दस लाठी मारने पर भी कुछ नहीं होगा!' सभी ठठा कर हँस पड़े। | 2 |
अभी इसके यहाँ से सेर भर घी ले गया हूँ। | 2 |
चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा था और दूर, असाढ़ी से हल्की हल्की आवाज़ें आ रही थीं। | 1 |
कन्या के पिता शंभूनाथ बाबू हरीश पर कितना विश्वास करते थे, इसका प्रमाण यह था कि विवाह के तीन दिन पहले उन्होंने मुझे पहली बार देखा और आशीर्वाद की रस्म पूरी कर गए। | 4 |
इतने में लालबिहारी ने फिर कहा--भाभी, भैया से मेरा प्रणाम कह दो। | 2 |
मिलती क्यों नहीं? | 0 |
चाय का प्याला उठाकर पीने लगे। | 4 |
काफी आलोचना के साथ। उससे हार्टिकल्चर विभाग का सेक्रेटरी साहित्यिक मिजाज का आदमी मालूम होता था। | 1 |
जमींदार साहब ने मेरी तरफ दिखाकर अंग्रेजी में धीरे से कुछ कहा। तब मैं कुछ दूर था, सुना नहीं। | 4 |
जीनियस के माथे के बल गहरे हो गये और उसके होंठों पर मुस्कराहट ज़रा और फैल गयी। | 4 |
लड़के ने गिरते-गिरते किसी तरह अपने को सँभाल लिया और झपटकर उसकी बाँह में दाँत गड़ा दिये। | 4 |
काम की सफलता या असफलता के बारे में कुछ भी न पूछकर कुंती ने नम्र स्वर में कहा," चलो हाथ-मुंह धो लो, चाय तैयार है। | 4 |
परन्तु केवल यही, कुछ और नहीं! सौन्दर्य और प्रेम का याद न आना ही अच्छा है।" कच-" बहुत-सी वस्तुएं हैं जो शब्दों द्वारा प्रकट नहीं हो सकतीं।" देवयानी- "हां, हां, मैं जानती हूं। | 2 |
जैसे उसका हलक़ ख़ून से भर गया हो। | 1 |
आनंदी ने लालबिहारी की शिकायत तो की थी, लेकिन अब मन में पछता रही थी वह स्वभाव से ही दयावती थी। | 1 |
इससे सर्वत्र उसकी खातिर होती थी। | 1 |
सुरजमुखी तेज देखते ही बोल उठी- ए मैन राजा साहब, सुनो, यह आदमी का बच्चा नहीं है, देवता है।' हिरामन ने लाटनी की बोली की नकल उतारते समय खूब डैम-फैट-लैट किया। | 4 |
सबसे बड़ा सितम है कि खिलाफत का रज़ाकार भी हूँ। | 2 |
उठिए, नींद तोड़िए! दो मुट्ठी जलपान कर लीजिए!' हीराबाई आँख खोल कर अचरज में पड़ गई। | 2 |
मेरी पहली बिहार का घर। मेरी पूरे चांद की रात की मुहब्बत। घर में रोशनी है। | 1 |
हरीश आदमी था रसिक, रस उंडेलकर वर्णन करने की उसमें शक्ति थी, और मेरा मन था तृर्षात्त। मैंने हरीश से कहा, एक बार मामा से बात चलाकर देखो! बैठक जमाने में हरीश अद्वितीय था। | 2 |
ये बिहार तुमने देखी, इस से अगली बिहार में तुम ना होगे। | 1 |
एक 20-21 वर्ष का हृष्ट-पुष्ट युवक था। | 1 |
उन्होंने टॉड का राजस्थान पढ़ा था। | 1 |
“क्या चाहिए साब?” उसने आकर अपनी गद्दी पर बैठते हुए पूछा। | 2 |
इसी से तो इंसान की ज़िंदगी का बाग़ सदा हराभरा रहता है। ” | 2 |
‘टुंग फुंग’ कुछ भी नहीं। | 1 |
चोंच अधिक बंकिम और पैनी हो गयी, गोल आँखों में इन्द्रनील की नीलाभ द्युति झलकने लगी। | 1 |
उसके अपने गाँव में कोई दर्जी का घर नहीं था। | 1 |
घर पर तौलता हूँ तो आध पाव गायब। | 2 |
सुरक्षित रहेगी हीराबाई! किधर की गाड़ी आ रही है? | 1 |
बनने को पंडित, पर नीयत ऐसी खराब! राम-राम !! लोगों को महादेव पर एक श्रद्धा-सी हो गयी। | 4 |
मैं लौट आता हूँ तब तक।' खाते समय धुन्नीराम और लहसनवाँ ने पलटदास की टोकरी-भर निंदा की। | 4 |
एक दिन किसी अधिक ऊँचाई पर बसे पर्वतीय ग्राम से बर्फ में भटकता हुआ एक भूटिया कुता दूकान पर आ गया और लूसी से उसकी मैत्री हो गई। | 4 |
मैं कोयला और तेल और लोहा लेकर कारख़ानों में जाऊँगी मैं किसानों के लिए नए हल और नई खाद मुहय्या करूँगी। | 4 |
वह मुझसे बिल्कुल सटकर काबुली के मुख और झोली की ओर संदेह से देखती खड़ी रही। | 4 |
पिछली बिहार में, मैं ना था और जर वालो के पेड़ फलों से लदे फंदे थे। | 1 |
जैसे कायनात पर ख़बासत की स्याही छा गई थी और सांस मेरे सीने में यूं उलझने लगी जैसे ये आहनी छाती अभी फट जाएगी और अंदर भड़कते हुए लाल लाल शोले इस जंगल को ख़ाक-ए-सियाह कर डालेंगे जो उस वक़्त मेरे आगे पीछे फैला हुआ था और जिसने इन पंद्रह औरतों को चश्म ज़दन में निगल लिया था। | 1 |
छोले-कुलचे वाले का रोज़गार गरम था, और कमेटी के नल के पास एक छोटा-मोटा क्यू लगा था। | 1 |
..... | 5 |
महुआ कोई बात नहीं सुनती। | 1 |
अब तो, भोंपा में भोंपू-भोंपू करके कौन गीत गाते हैं लोग! जा रे जमाना! छोकरा-नाच के गीत की याद आई हिरामन को-' सजनवा बैरी हो ग' य हमारो! सजनवा .....! अरे, चिठिया हो ते सब कोई बाँचे, चिठिया हो तो... . | 2 |
मुहल्ले में बच्चे शोर मचाते तो उस के कान फटने लगते। | 1 |
साहब के कमरे से घंटी हुई। | 4 |
कल तक अच्छी थी, आज एकाएक इतने जोर का बुखार, क्या सबब है?'' डॉक्टर ने प्रश्न की दृष्टि से रामेश्वरजी की तरफ देखा। | 2 |
आने के समय उसे अपने साथ प्रयाग लाना पड़ा। | 1 |
अपने गाँव के लालमोहर, धुन्नीराम और पलटदास वगैरह गाड़ीवानों के दल को देख कर हिरामन अचकचा गया। | 4 |
पनियां आ रहलौ है ?’’ ज़वाब में एक कुत्ते ने रोना शुरू किया। | 4 |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.