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प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
जान्दा जाह ना आवीं फेर ,
ओत्थे बेपरवाही ढेर ,
ओत्थे डहल1 खलोन्दे शेर ,
तूँ वी फँधिआ जावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
खूह विच्च यूसफ पायो ने ,
फड़ विच्च बाज़ार विकायो ने ,
तूँ कौडी मुल्ल पवावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
नेहुँ ला वेख जुलेखाँ लए ,
ओत्थे आशक तड़फण पए ,
मजनूँ करदा है है है ,
तूँ ओत्थों की ल्यावेंगा ?
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
ओत्थे इकनाँ पेवस्त2 लुहाइदे ,
इक्क आरेआँ नाल चिराईदे ,
इक्क सूली पकड़ चढ़ाईदे ,
ओत्थे तूँ वी सीस कटावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
घर कलाल दा तेरे पासे ,
ओत्थे आवण मस्त प्यासे ,
तूँ वी जीअ ललचावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
दिलबर हुण ग्यौं कित लौ3 ,
भलके की जाणा की हो ,
मस्ताँ दे ना कोल खलो ,
तूँ वी मस्त सदावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा ।
बुल्लिआ गैर शरा ना हो ,
सुक्ख दी नींदर भर के सौं ,
मुँहों ना अनलहक्क4 बगो5 ,
चढ़ सूली ढले गावेंगा ।
प्यारिआ सँभल के नेहुँ लगा , पिच्छों पछतावेंगा । | panjabi-pan |
राते बरस गओ पानी
राते बरस गओ पानी
काय राजा तुमने ना जानी ।
अंटा जो भीजे अटारी भींजी ,
भींजी है धुतिया पुरानी काय राजा
बाग जो भींजे बगीचा भींजे
माँलिन फिरे उतरानी काय राजा
कुंआ है भर गओ , तला है भर गओ
कहारिन फिरे बौरानी काय राजा
गैयां भीजी बछिया भींजीं
नदियन बढ़ गओ पानी काय राजा | bundeli-bns |
207
काज़ी मां ते बाप करार कीता हीर रांझने नाल वयाहुनी ए
असां ओसदे नाल चा सिदक कीता गल गोर1 दे तीक निभाहुनी ए
अन्त रांझे नूं हीर परना देनी कोई रोज दी एह पराहुनी ए
वारस शह ना जानदी मैं कमली खोरश2 शेर दी गधे ने डाहुनी ए | panjabi-pan |
बनी ! थूंई मत जाणे बना सा ऐकला रै
बनी थूंई मत जाणे बना सा ऐकला रै
झमकू थूंई मत जाणे " राइवर " ऐकला रै
साथे चूड़ीदार , चौपदार , हाकिम ने हवालदार
कागदियों से कांमदार , काका ऊभा किल्लेदार
भौमा ऊबा मज्जादार , सखाया सब लारोलार
फूल बिखौरे गजरों गंधियों रै
बनी थूंई मत जाणे बनासा एकला रै | rajasthani-raj |
धण पिआ मताए मताइआं जी
धण पिआ मताए मताइआं जी
जी पिआ कहो तो चीठी लिख गेरां
मेरा राजिड़ा
कहो तो सांडिआं भेजां जी
जी पिआ चीठी तो मजले मजले जा
मेरा राजिड़ा
सांडिआ जावै तावली जी
जी पिआ न्योंदूंगी बाप मेरे कै सीम
मेरा माईजाया
सीम सधै की पीपली जी
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के खेत
हाली हल बीरा जोतिआ रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के बाग
बांगा मैं कोल झिंगारिआ रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के कंुआ
कुंआ बठांदी झीमरी रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के ताल
ताल बणंदी बीरा धोबणी रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के गोरा
गोरा बठांदी बीरा गऊ चरै रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे के गाल
गाल बठांदी बीरा भंगणा रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे की परस
परसे पचे लोग बीरा
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे की पोल
पोल बठांदी रातां देई मेरी मां
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे की रसोई
रसोइए बठांदी बीरा बाह्मणी रे
रे बीरा न्योंदूंगी बाप मेरे का मुढला
मुढले बैठी भाबी आपणी
गोद खिलंदा भतीजड़ा जी
रे बीरा न्योंदूंगी रातां देई मायड आपणी
ताई चाचिआं का बीरा झूकमकारे
रे बिरा न्योंद्या कोए सब परवार
मेरा माई जाया
भूल चली छोटी बहनड़ी जी
हे बेबे बाहवड़ बाहवड़ मां की जाई
हे बहनड़ मेरी
हम न सिख बुध दे चलो जी
रे बीरा सिख बुध देइए न जाय
मेरा माई जाया
सिख सरीरे बीरा ऊपजै जी
रे बीरा ल्याइयो मेरे तीवल पचास
मेरा माई जाया
आंगी सिरकै बीरा डेढ सै जी
रे बीरा ल्याइओ मेरे मोहर पचास
मेरा माई जाया
रोक रुपइए बीरा पानसै जी
रे बीरा ल्याइओ मेरे काँसण की जेट
मेरा माई जाया
बीच ठणकदा रे बीरा बेल्वा जी
रे बीरा ल्याइया मेरै टोकणै दो चार
मेरा माई जाया
बीच खुड़कदा बीरा कडछा जी
रे बीरा ल्याइओ मेरै म्हेसां को लार
रे बीरा ल्याइयो मेरै चोलां की पोट
मेरा माई जाया
हरे हरे मूंग दिसावरी जी
रे बीरा ल्याइयो मेरै गोआं की लार
तलै चूंघते बाछड़ा जी
रे बीरा इतणा तो ले घर आइओ
मेरा माई जाया
या घर रहियो बीरा आपणे जी
हे बेबे इब कै तो इतणा ना हो
मेरा माई जाया
हे किस विध आवै तेरे भातिआं जो
रे बीरा मेरे आंगण राए चन्दन का पेड़
मेरा माई जाया
झट रै चढूं झट उतरू जी
रे बीरा कद की रे देखूं थी बाट
मेरा माई जाया
कद सीक आवै मेरे भातिआं जी
रे बीरा छोटी नणदल बोले से बोल
मेरा माई जाया
फिट भाबी तेरे भातिआं जी
रे बीरा छोटा देवर राख्या सै मान
मेरा माई जाया
वे आए भाबी तेरे भातिआं जी
रे बीरा सिर पर मटकी धरी ए उठा
मेरा माई जाया
सरवर पाणी बीरा मैं गई जी
रे बीरा तै कित लाई सै वार
मेरा माई जाया
सब तै पैले बीरा न्योंदिआ जी
हे बेबे मायड़ नै लाई सै वार
मेरी अम्मां जाई
तेरा ए भात सिजोबंदे जी
हे बेबे दरजी नै लाई सै वार
मेरी अम्मां जाई
तेरा दामण सीमदे जी
हे बेबे लीलगर ने लाई सै वार
तेरा चूंदड़ रगांवदे जी
हे बेबे मणिआर ने लाई सै वार
तेरी चूड़िआं जुड़ांवदे जी
हे बेबे सुनरे नै लाई सै वार
तेरा अगड़ घ्ज्ञड़ावले जी
हे बेबे भावज नै लाई सै वार
अपणा कंवर सिंगारदे जी
हे बीरा रांधूंगी चावल का भात
मेरा माई जाया
अपणै घर का बीरा टोकणा जी
हे बीरा जीमण बेठे देवर जेठ
मेरा माई जाया
उझल पड्या मेरा टोकणा जी
रे बीरा रांधूंगी अपणे घर का भात
मेरा माई जाया
बाबल का घर का बीरा टोकणा जी
रे बीरा जीमण बैठ्या
भातिआं का पेट पंसेरा
कड़छा बाज्या मेरै टोकणै जी
के बीरा खाई थी उड़दां की दाल
मेरा माई जाया
हग ए भर्या मेरा ओबरा जी
रे बीरा उठ्या ए आधड़ी सी रात
मेरा माई जाया
मूसल मार्या बीरा कांख मैं जी
रे बीरा मूसल मेरा दे कै बी जा
मेरा माई जाया
देवर जेठाणियां का सीर का जी
ऐ बेबे जाऊंगा कीकरिआं कै देस
मेरी मां की जाई
मूसल ल्याऊ बेबे साल का जी
रे बीरा मूसल तै और भतेरे
मेरा माई जाया
देवर जिठाणी बोली मारैंगी जी | haryanvi-bgc |
आसा की जोत
रैंन अँदिरिया गैल भुलानी ;
हिलबिलान हो गई जिँदगानी ।
मिरगा ढूँड़ रए कस्तूरी ,
आसा होत न उनकी पूरी ।
भरत चौकड़ीं देख मरीची
कितनी नाप लई है दूरी ।
सेंतमेंत हो रई नादानी ;
हिलबिलान हो रई जिँदगानी ।
कौन घरी में भाँवर पारी ,
घिरी बदरिया कारीकारी ।
धुरुब तरइया देख न पाए
कैसें गैल मिलै अबढारी ?
थेबौ खात फिरत अग्यानी ;
हिलबिलान हो गई जिँदगानी ।
दूर बजत कऊँ ढोलनगारे ,
बैरे हो गए कान हमारे ।
बेबस होकें सबई तराँ सें
भटक रए नित मारेमारे ।
चीर दए नभथल औ पानी ,
हिलबिलान हो रई जिँदगानी ।
आसा तौऊ पैले पार ,
कैसें कोऊ मानें हार ।
हार न मानी जब मकरी नें ,
गिरगिर चढ़त रई हरदार ।
चढ़ीचढ़ी मकरन्दो रानी ;
इक दिन पार लगै जिँदगानी । | bundeli-bns |
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े
नित्त मत्तीं देन्दी माँ धीआँ ,
क्यों फिरनी ऐं ऐंवें आ धीआँ ,
नी शरम हया ना गवा धीआँ ,
तूँ कदी ताँ समझ नादान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
चरखा मुफ्त तेरे हत्थ आया ,
पल्लिओं नहीओं कुझ खोल गवाया ,
नहीओं कदर मेहनत दा पाया ,
जद होया कम्म आसान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
चरखा बणिआ खातर तेरी ,
खेडण दी कर हिरस थोरेड़ी ,
होणा नहीओं होर वडेरी ,
मत कर कोई अज्ञान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
चरखा तेरा रंग रंगीला ,
रीस करेन्दा सभ कबीला ,
चलदे चारे कर लै हीला ,
हो घर दे विच्च आवादान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
इस चरखे दी कीमत भारी ,
तूँ की जाणे कदर गवारी ,
उच्ची नज़र फिरें हंकारी ,
विच्च आपणे शान गुमान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
मैं कूकाँ कर खलिआँ बाहीं ,
ना हो गाफल समझ कदाई ,
ऐसा चरखा घड़ना नहीं ,
फेर किसे तरखाण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
एह चरखा तूँ क्यों गवाया ,
क्यांे तूँ खेह दे विच्च रूलाया1 ,
जद दा हत्थ तेरे एह आया ,
तूँ कदे ना डाहिआ आण कुड़े ।
नित्त मत्तीं देण वलल्ली नूँ ,
इत भोलीकमली झल्ली नूँ ,
जद पवेगा वखत इकल्ली नूँ ,
तद हाए हाए करसी जाण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
मुढों2 दी तूँ रिज़क विहूणी ,
गोहड़िओं नाँ तूँ कत्ती पूणी ,
हुण क्यों फिरनी ए निम्मोझूणी ,
किस दा करें गुमान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
डिंगा तक्कला रास करा लै ,
नाल शताबी बाएड़ पवा लै ,
ज्यों कर वगे तिवें वगा लै ,
मत कर कोई अज्ञान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
अज घर विच्च नवीं कपाह कुड़े ,
तूँ झब झब वेलणाा डाह कुड़े ,
रूँ वेल पिंजावण जाह कुड़े ,
मुड़ कल्ल ना तेरा जाण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
तेरे नाल दीआँ सभ सइआँ नी ,
कत्त पूणिआँ सभना लइआँ नी ,
तैनूँ बैठी नूँ पिच्छे पइआँ नी ,
क्यों बैठी ऐं हुण हैरान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
दीवा आपणे पास जगावीं ,
कत्त कत्त सूत भर वट्टी पावीं ,
अक्खीं विचों रात लंघावीं ,
औखी कर के जान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
राज पेक्का3 दिन चार कुड़े ,
ना खेडो खेड गुज़ार कुड़े ,
ना हो वेहली कर कार कुड़े ,
घर बार ना कर वीरान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
तूँ सुतिआँ रैण गुज़ार नहीं ,
मुड़ औणा4 दूजी वार नहीं ,
फिर बैहणा ऐस भंडार नहीं ,
विच्च इक्को जेडे हाण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
तूँ सदा ना पेक्के रैहणा ए ,
ना पास अंबड़ी5 दे बैहणा ए ,
ना अंत विछोड़ा सैहणा ए
वस्स पएंगी सस्स ननाण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
कत्त लै नी कुझ कता लै नी ,
हुण ताणी तंद उणालै नी ,
तूँ आपणा दाज रंगा लै नी ,
तूँ तद होवें परधान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
जद घर बेगाने जावेंगी
मुड़ वत्त ना ओत्थों आवेंगी ,
ओत्थे जा के पछतावेंगी ,
कुझ अगदों कर समिआन कुड़े ।
अज्ज ऐडा तेरा कम्म कुड़े ,
क्यों होई ए बे गम कुड़े ,
की कर लैणा उस दम्म कुड़े ,
जद घर आए मेहमान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
जद सभ सइआँ टुर जाउणगीआँ ,
फिर ओत्थों मूल ना आउणगीआँ ,
आ चरखे मूल ना डाहुणगीआँ ,
तेरा त्रिंझण प्या वीराण कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
कर माण ना हुसन जवानी दा ,
प्रदेस6 ना रैहण सिलानी7 दा ,
कोई दुनिआँ झुठी फानी8 दा ,
ना रैहसी नाम निशान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े ।
इक औखा वेला आवेगा ,
सभ साक सैण भज जावेगा ,
कर मदद पार लंघावेगा ,
ओह बुल्ले दा सुलतान कुड़े ।
कर कत्तण वल ध्यान कुड़े । | panjabi-pan |
आला जडूका सायला रे राजा सूखा जडूका सायला नहीं रे
आला जडूका सायला रे राजा सूखा जडूका सायला नहीं रे
आला जडूका सायला रे राजा सूखा जडूका सायला नहीं रे
इंजनी जेनोमा का बंझोटी जा राजा धामू टीसो सेने मारे
इंजनी जेनोमा का बंझोटी जा राजा धामू टीसो सेने मारे
आमा रानी ककोटा केनवेन्ज राजा आमा रानी झूला में झूले
आमा रानी ककोटा केनवेन्ज राजा आमा रानी झूला में झूले
आमा रानी बंझोटी जा राजा धामू टाला कामाय सेने
आमा रानी बंझोटी जा राजा धामू टाला कामाय सेने
स्रोत व्यक्ति पार्वती बाई , ग्राम मातापुर | korku-kfq |
323
कच कवारिये लोहड़े दीये मारीए नी टूने हारीए आख की आहनी ए
भलयां ना बुरी काहे होवनी एं काई बुरी ही फाउनी फाहनी ए
असां भुखयां आन सवाल कीता केहियां गैब दियां ढुचरां डाहनी ए
विचों पकीए छैल उचकीए नीराह जांदड़े मिरग पई फाहनी ए
गल हो चुकी फेर छेड़नी ए होर शाख नूं मोड़ की वाहनी ए
घर जान सरदारां दे भीख मंगे साडा अरश1 दा किंगरा ढाहनी ए
केहा नाल परदेसियां वैर चायो चैंचल हारिये आख की आहनी ए
राह जांदड़े फकर खहेड़नी एं ढगी वाहरिये साहनां नूं डाहनी ए
घर पईअड़े2 धरोहियां फेरियां नेआ नीहरिए संग क्यों डाहुनी ए
जा शिकार दरया विच खेड मोईए केहियां मूत विच मछियां फाहुनी ए
वारस शाह फकीर नूं छेड़नी एं अखीं नाल क्यों खखरां लाहुनी ए | panjabi-pan |
ऐसी को खेले तोसे होरी
ऐसी को खेले तोसे होरी ॥ टेक
बारबार पिचकारी मारत , तापै बाँह मरोरी । ऐसी .
नन्द बाबा की गाय चराबो , हमसे करत बरजोरी ।
छाछ छीन खाते ग्वालिन की , करते माखन चोरी । ऐसी .
चोबा चन्दन और अरगजा , अबीर लिये भर झोरी ।
उड़त गुलाल लाल भये बादर , केसरि भरी कमोरी । ऐसी .
वृन्दावन की कुंज गलिन में , पावौं राधा गोरी
‘सूरदास’ आश तुम्हरे दरश की , चिरंजीवी ये जोरी । ऐसी . | braj-bra |
हरियाले बन्ने चीरा तो ले दूं तेरी मौज का
हरियाले बन्ने चीरा तो ले दूं तेरी मौज का
सहजादे बन्ने कच्ची कली ना तोड़ियो
हरियाले बन्ने मालन देगी गालियां हो तेरे ताई
रंगीले बन्ने पाकन दे रस होन दे
हरियाले बन्ने झुका दूंगी डालियां हो तेरे ताई
हरियाले बन्ने . . . | haryanvi-bgc |
ऐसी चुंदड़िया लाओ मेरे बाबा
ऐसी चुंदड़िया लाओ मेरे बाबा वाऊ पै रतन जड़ाइये
आधी चुनड़िया पै मानक मोती आधी पै रतन जड़ाइये
चुनड़ी ओढ़ लाजो बैठी है चौक पै केस लिये छिटकाये
अब का सरम रही है मेरे बाबला बैठी हूं चारों दल जोड़ कै
एक आपु दल दूजा बापु दल तीजा दल राजा भातिये
चौथा दल साजन का लड़का मुकुट बांध घर आइये
ऐसी चुंदड़िया लाओ मेरे बाबुल वाऊ पै रतन जड़ाइये | haryanvi-bgc |
कटोरनि पियली कोसिला रानी, अउरो सुमिन्त्रा रानी हे
कटोरनि1 पियली कोसिला रानी , अउरो सुमिन्त्रा रानी हे ।
ए ललना , सिलि2 धोइ पियलन केकइ रानी , तीनों रानी गरभ से हे ॥ 1 ॥
कोसिला रानी के मुँह पियराएल , देह दुबराएल3 हे ।
ए ललना , दसरथ मनहिं अनन्दे , कोसिला जरि4 रोपली हे ॥ 2 ॥
आधी राति बीतले पहर राति बीतले हे ।
ए ललना , कोसिला के भेल5 राजा रामचंदर , सुमित्रा के लछुमन हे ॥ 3 ॥
ए ललना , ककइ के भरथ भुआल , 6 तीनों महल सोहर हे ॥ 4 ॥
दुअरा से बोलथिन7 राजा दसरथ , सुन ए कोसिला रानी ।
ए रानी जी , कउन8 बरत रउरा9 कएल कि राम फलवा पाएल हे ॥ 5 ॥
सउरी10 से बोलथिन कोसिला रानी , सुन राजा दसरथ जी ।
ए राजा , बरत कइली एतवार , त राम फल पइली हे ॥ 6 ॥
कातिक मासे हम नेहइली , तुलसी दिया बरली11 हे ।
ए राजा , भूखल12 बराम्हन जेववली , 13 त राम फल पइली हे ॥ 7 ॥
माघ मासे नेहइली , 14 अगनियाँ15 न तपली16 हे ।
ए राजा , एहो कस्ट सहली , राम फल पइली हे ॥ 8 ॥
बैसाखहिं मासे नेहइली सुरूज गोड़ लगली17 हे ।
ए राजा , टूअर18 भगिना का पालली , त राम फल पइली हे ॥ 9 ॥
दुअरा से बोलथिन राजा दसरथ , सुन ए कोसिला रानी हे ।
ए रानी , सेर जोखि19 सोनवा लुटाएब , पसेरी जोखि रूपवा20 हे ॥ 10 ॥
ए रानी जी , सँउसे अजोधया लुटएबो , त राम के बधइया में ॥ 11 ॥
सउरी से बोलथिन केकइ रानी , सुन राजा दसरथ ।
ए राजा , कोसिला के भेल रामचंदर , सुमित्रा के लछुमन हे ॥ 12 ॥
ए राजा , केकइ के भरथ भुआल , जानिबुझि21 अजोधेया लुटइह ।
ए राजा , रामजी लिखल बनवास , अजोधेया मत लुटइह ॥ 13 ॥
सउरी से बोलथिन कोसिला रानी , सुन राजा दसरथ जी ।
राजा , छुटले22 बँझिनियाँ के नाम , बलइए से23 राम बन जइहें ,
बन से लवटि अइहें हे ॥ 14 ॥ | magahi-mag |
प्यारे बिन मसलत उठ जाणा
प्यारे बिन मसलत उठ जाणा ,
तूँ कदे ताँ होए सिआणा ।
कर लै चावड़1 चार दिवाड़े ,
थीसें अंत निमाणा ।
जुल्म करें की लोक सतावें ,
क्यों कीओ उलट कहाणा ।
जिस बाटे दा माण करें तूँ ,
सो भी संग ना जाणा ।
खामोश शहर नूँ वेख हमेशा ,
सारा जग इस माहि समाणा ।
भर भर पूरे लंघावे डाढा ,
मलकुल2 मौत मुहाणा ।
ऐथे जितने हैन सभ तिन ते ,
मैं गुनाहगार पुराणा ।
बुल्ला नौ दुश्मण तेरे नाल बुरे ,
विच्च हुण दुश्मन बल ढाणा ।
महिबूब रबानी करे असानी ,
दिलों खौफ जाए मलकाणा । | panjabi-pan |
576
लै के चलया अपने देस वले चल नढिए रब्ब दिवाई ए नी
चैधरानिए तखत हजारे दिए पंजां पीरां नूं वत घिणाईए नी
कढ खेड़यां तों रब्ब दिती ए तूं अते मुलक पहाड़ पहुंचाईए नी
हीर आखया ऐव जे जा वड़सां रन्नां आखसन उधली आईए नी
घत जादुड़ा देयों ने परी ठगी हूर आदमी दे हत्थ आईए नी
वारस शाह परेम दी जड़ी घती मसतानड़ी चा बनाईए नी | panjabi-pan |
तुमको मैं टोना करूँगी रे
तुमको मैं टोना करूँगी रे , बाली1 भोली का दुलहा ॥ 1 ॥
सेहरे में टोना भेजा , सेहरा बाँधि2 आया रे , मेरा असला3 दमदवा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , बाली भोली का दुलहा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , मेरा नेवता4 दमदवा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , मेरा झुकता5 दमदवा ॥ 2 ॥
जोड़े में टोना भेजा पेन्हि6 आया रे , मेरा असला दमदवा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , मेरा भोला दमदवा ॥ 3 ॥
मोजे में टोना भेजा , मोजा पेन्हि आया रे , मेरा नेवता दमदवा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , बाली भोली का दुलहा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , मेरी लाड़ो का दुलहा ।
तुझको मैं टोना करूँगी रे , मेरा दुलरा दमदवा ॥ 4 ॥ । | magahi-mag |
हे लठ्याली तू कैकी बौराण छ?
हे लठ्याली1 तू कैकी बौराण छ ?
धुँवाँसी धुपली2 , पाणी सी पतली ,
केलासी गलखी , नौण3सी गुँदगी ,
दिवा जसी जोत , कैकी बौराण छ ?
इनी मेरी होंदी जिकुड़ी4 मा सेंदी5 ।
बादल सी झड़ी , दूबला6 सी लड़ी ,
भीमल सी सेटकी7 लाबू8 सीठेलकी ,
फ्यूँली9 कीसी कली , कैकी बौराण छ ?
नाक मा छ तोता , जीभ मा क्वील ,
आँख्यों माआग , गालू मा गुलाब ।
हुड़कीसी कमर , कैकी बौराण छ ?
इनी मेरी होंदी , हथगुली मा10 सेन्दी ।
बाँदू11 मा की बाँद चाँदू मा की चाँद ।
चीणा12 जसी झम13 , पालिंगा14 सी डाली ।
हिंसर कीसी डाली , कैकी बौराण छ ?
घास काटद काटद , बणी छ गितांग15
हे लठ्याली दादू , कैकी बौराण छ ? | garhwali-gbm |
121
रांझे आखया आउ खां बैठ हीरे कोई खूब तदबीर बनाइए नी
माओं बाप तेरे दिलगीर हुंदे किवें ओहनां ते बात छपाइए नी
मिठी नायन नूं सद के गल कीजे जे तूं कहें तेरे घर आइए नी
मैं सयालां दे वेहड़े वड़ां नाहीं मैथों हीर नूं नित पुचाइए नी
दिने रात तेरे घर मेल साडा साडे सिर अहिसान चढ़ाइए नी
हीर पंज मोहरां हथ दितियां नी किवें मिठीए डौल बणाइए नी
कुड़ीयां पास ना खोहलणा भेत मूले गल जीउ दे विच लुकाइए नी
वारस शाह छुपाइए खलक1 कोलों भावें आपणा ही गुड़ खाइए नी | panjabi-pan |
कोई बरसन लागी काली बादली!
कोई बरसन लागी काली बादली
" डौलै तै डौलै , हालीड़ा , मैं फिरी
मन्ने किते न पाया थारा खेत । "
बरसन लागी काली बादली
" कोई चार बुलदांका , हालीड़ा , नीरना
दोए जणिएँ की छाक "
बरसन लागी काली बादली
" कितरज बोया , हालीड़ा , बाजरा ?
कोई कितरज बोई जवार ? "
बरसन लागी काली बादली
" थलियाँ तै बोया , गोरी धन , बाजरा ,
कोई डेराँ बोई जवार "
बरसन लागी काली बादली
भावार्थ
' देखो , काली बदली बरसने लगी है । " अजी ओ किसान , मैं मेंड़मेंड़ पर घूमीफिरी , तुम्हारा खेत मुझे कहीं
नहीं मिला । " और काली बदली बरसने लगी है । " चार बैलों के लिए मैं भूसा लाई हूँ , दो आदमियों के पीने
लायक छाछ । " और काली बदली यह बरसने लगी है ।
" गोरी धन , ज़रा किसी ऊँची मेड़ पर चढ़ कर निहारो , मेरे गोरे बैल के गले में बड़ी घंटी भी तो बज रही है । "
फिर काली बदली बरसने लगी है ।
" अजी ओ किसान , किस तरफ़ तुमने बाजरा बोया है ? और कहाँ बोई है जवार ? " काली बदली बरसने लगी
है ।
" गोरी धन , ऊपर के खेत में बाजरा बोया है और्नीचे के खेत में जवार । " और काली बदली बरसने रही है । ' | haryanvi-bgc |
पाँच बधावा म्हारे ये भल आया
पाँच बधावा म्हारे ये भल आया
आया तो कई ऐ म्हारा देस में
पेलो बधावो म्हारा ससरा घर भेज्यो
दूसरो बधावो म्हारा बाप क्यां
तीसरो बधावो म्हारा जेठ क्यां भेज्यों
चौथो बधावो म्हारा बीर क्यां
पाँचबो बधावो धन री कूंख से लाणी
जासे सरब सुख होय हो
ससरा सपूतां सूं सरंबद रेस्यां
बापरे बल आपने
सासू सपूती सूं सरबद रेस्यां
माय रे बल आपने
देवरजेठ सूं सदबद रेस्यां
लाज रे बल आपने
देराणीजेठाणी सूं सदबद रेसयां
काम रे बल आपने
ननंद भानेजां सूं सदबद रेस्या
बुगचा रे बल आपने
स्वामी सपूतां सूं सदबद रेसयां
रूप रे बल आपने
भरभर नैनां आज सूती
धीय बोलाई सासरे
नवरंग पेलो आज पेरियो पूत परण घर आविया
सुखदेव टूटिया , इच्छा पूरी
मन मनोरथ पाविया । | malvi-mup |
झनकारो झनकारो झनकारो
झनकारो झनकारो झनकारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो २
तुम हो बृज की सुन्दर गोरी , मैं मथुरा को मतवारो
चुंदरि चादर सभी रंगे हैं , फागुन ऐसे रखवारो ।
गौरी प्यारो…
सब सखिया मिल खेल रहे हैं , दिलवर को दिल है न्यारो
गौरी प्यारो…
अब के फागुन अर्ज करत हूँ , दिल कर दे मतवारो
गौरी प्यारो…
भृज मण्डल सब धूम मची है , खेलत सखिया सब मारो
लपटी झपटी वो बैंया मरोरे , मारे मोहन पिचकारी
गौरी प्यारो…
घूंघट खोल गुलाल मलत है , बंज करे वो बंजारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो २ | kumaoni-kfy |
दर्शन कूँ आनाकानी मत करै
वारे लाँगुरिया दर्शन कूँ आनाकानी मत करै ,
मैंने बोली है करौली की जात ॥ लँगुरिया .
वारे लाँगुरिया नैनन सुरमा मैंने सार कै ,
कोई बिन्दी लगाय लई माथ ॥ लँगुरिया .
वारे लाँगुरिया हाथन में कंगन मैंने पहिर लगये ,
और मेंहदीउ लगाय लई हाथ ॥ लँगुरिया .
वारे लाँगुरिया साड़ी तो पहिरी टैरालीन की ,
कोई साया तौ जामें चमकत जात ॥ लँगुरिया .
वारे लाँगुरिया कौन की सीख लई मान कै ,
जो करवे चले नाँय जात ॥ लँगुरिया .
वारे लाँगुरिया रूपया खरच कूँ मैंने रख लीने ,
तू तो निधरक चल ‘प्रभु’ साथ ॥ लाँगुरिया . | braj-bra |
फूली जालो काँस ब्बै, फूली जालो काँस
फूली जालो काँस1 ब्बै , फूली जालो काँस ,
म्योलड़ी2 बासदी ब्बै , फूलदा बुराँस
हिंसर की काँडी ब्वै , हिंसर की काँडी ,
मौली3 गैन डाली ब्बै , हरी ह्वैन डाँडी4 ।
गौड़ी देली दूद ब्बै , गौड़ी देली दूद ,
मेरी जिकूड़ी5 लगी ब्बै , तेरी खूद6 ।
काखड़ी को रैतू ब्वै , काखड़ी को रैतू ,
मैं खूद लगी ब्बै , तू बुलाई मैतू7 ।
दाथुड़ी को नोक ब्बै , दाथुड़ी की नौक ,
वासलो कफू ब्बै , मैत्यों8का चौक
सूपा भरी देण ब्बै , सूपा भरी देण ,
आग भमराली ब्बै , भैजो9 भेजी लेण10 ।
टोपी धोई छोई ब्बै टोपी धोई छोई ,
मैत्या डाँड देखी ब्बै , मैं आँदो रोई
झंगोरा की बाल ब्बै , झंगोरा की बाल ,
मैत को बाटो देखी ब्बै , आँखी ह्वैन लाल | garhwali-gbm |
540
छड देस जहान उजाड़ मली अजे जट नहीं पिछा छडदे ने
असां छडया एह ना मूल छडन वैरी मुढ कदीम तो हड दे ने
लीही पई मेरे उते झाड़यां दी पास जान नाही पिंज गड दे ने
वारस शाह जहान तों अक पए कल फकीर हुण लद दे ने | panjabi-pan |
आओ राधा नहाण चलां मेरे राम
आओ राधा नहाण चलां मेरे राम ।
म्हारा तो नहीं ए चलान
दूधां मैं रम रही मेरे राम ।
दूधां का कैसा हे गमान ,
आवै बिलाई पी जावै हरे राम । | haryanvi-bgc |
412
नवी नोचिए गुझिए यारने नी कारे हथीए चाक दिये पयारीए नी
पहले कम सवार हो बहे नियारी बेली घर लै जाए तूं डारीए नी
आप भली हो बहें ते असीं बुरियां करे खचरपो1 रूप शिंगारीए नी
आ जोगी नूं लईं छुडा साथों तुसां दोहां दी पैज सवारीए नी
वारस शाह हथ फड़े दी लाज हुंदी साथ करीए ते पार उतारीए नी | panjabi-pan |
ये मोरांगी डो ये मोरांगी आमानी
ये मोरांगी डो ये मोरांगी आमानी
ये मोरांगी डो ये मोरांगी आमानी
ये मोरांगी डो ये मोरांगी आमानी
उरा टोले मा अरुकेन डो मोरांगी रे
उरा टोले मा अरुकेन डो मोरांगी रे
इयां उरा कजलीवन डो बिंदरावनेन नी आरु मारे
इयां उरा कजलीवन डो बिंदरावनेन नी आरु मारे
इयां उरा कजलीवन डो बिंदरावनेन नी आरु मारे
ये मोरांगी डो ये मोरांगी
ये मोरांगी डो ये मोरांगी
सूबा नी पडूबे इया कूरई डो अजूमे मारे
सूबा नी पडूबे इया कूरई डो अजूमे मारे
सूबा नी पडूबे इया कूरई डो अजूमे मारे
ये झलजा जा ये झलजा
ये झलजा जा ये झलजा
मिया नी गीड़ी आमा सूसून नी घाले मारे
मिया नी गीड़ी आमा सूसून नी घाले मारे
मिया नी गीड़ी आमा सूसून नी घाले मारे
ये मोरांगी डो ये मोरांगी सूसूना जागा डो
ये मोरांगी डो ये मोरांगी सूसूना जागा डो
ये मोरांगी डो ये मोरांगी सूसूना जागा डो
डोगे डो मिया का खाटा नी बोचोगे मारे
डोगे डो मिया का खाटा नी बोचोगे मारे
डोगे डो मिया का खाटा नी बोचोगे मारे
स्रोत व्यक्ति लक्ष्मण पर्ते , ग्राम मुरलीखेड़ा | korku-kfq |
ईसुरी की फाग-16
ऐसी पिचकारी की घालन , कहाँ सीख लई लालन
कपड़ा भींज गये बड़बड़ के , जड़े हते जर तारन
अपुन फिरत भींजे सो भींजे , भिंजै जात ब्रजबालन
तिन्नी तरें छुअत छाती हो , लगत पीक गइ गालन
ईसुर अज मदन मोहन नें , कर डारी बेहालन । | bundeli-bns |
जीजी रलमिल गुड़ियां खेलती तूं चाली जीजा के साथ
जीजी रलमिल गुड़ियां खेलती तूं चाली जीजा के साथ
बाहण चाली सासरे ।
जीजा सुसरा का कहा मत गेरिये सुसरा धरम का बाप
बाहण चाली सासरे ।
जीजी सासू का कहा मत गेरिये सासू धरम की मां
बाहण चाली सासरे ।
जीजी जीजा का कहा मत गेरिये कटैं तेरे दिन रात
बाहण चाली सासरे ।
देवर संग का सुहेलड़ा जैसे धरम का बीर
बाहण चाली सासरे । | haryanvi-bgc |
विवाह गीत
मेहंदी गीत
घोड़ी के गीत | rajasthani-raj |
320
सच आख तूं रावला कहे सहती तेरा जिऊ केहड़ी गल लोड़दा ए
वेहड़े वड़दयां रिकतां छेड़ीयां ने कंडा विच कलेजे दे बोड़दा ए
बादशाहां दे बाग विच नाल चावड़ फिरे फुल गुलाब दा तोडदा ए
वारस शाह नूं शुतर1 मुहार बाझों डांग नाल कोई भुण मोड़दा ए | panjabi-pan |
शीश रामदेव जी ने पागा विराजे
शीश रामदेव जी ने पागा विराजे
पेचा रो अदक सरूप
हाथ मजीरा रामदेव जी ने
खांदे तंदूरा रा अदक सरूप
रूणीजा मंे रमी रया हो
कान में रामदेव जी ने मोती बिराजे
चूनी रो अदक सरूप
गळे रामदेव जी ने कंठी बिराजे
डोरा रो अदक सरूप
अंगे रामदेव जी ने बागी बिराजे
केसर रो अदक सरूप
हात रामदेव जी ने पोंची बिराजे
कड़ा रो अदक सरूप
पांव रामदेव जी ने मोजा बिराजे
मेंदी रो अदक सरूप | malvi-mup |
एक दिन करो सिंगार नार ने
एक दिन करो सिंगार नार ने तीहर पहर ली ,
सीसो लियो हाथ रेख दो नैनन बीच गही ।
लगा लियो अखियन में कजरा ,
या ढब ले रहो झिमार उठै ज्यों सावन को बदरा ।
नार इक सुआ सारी है ,
इत उत के चोटी परी लगे जैसे नागिन कारी है ।
आए रहे अंगिया पै जलसा ,
पीछे के चोटी बन्धी धरे दो सोरन के कलसा ।
नार में सोने की हंसली ,
हार हमेर गुलीबन्द एक माला मोतिन की असली ।
करै इस पायल झनकारो ,
झांझन चूरी सोठ करूला गोटे पै नारो
रचा लई हाथन में मेंहदी
मांगन में भरयो सिन्दूर धरी दो माथे पे बैंदी ।
पहर लई अंगलिन में गूंठी ,
जब लगी बिरह की भूख नार की फिर देही टूटी ।
गुदा लिया टूण्डी पे मोरा ,
हंसन की लगतार बीच में सारस को जोरा । | haryanvi-bgc |
335
असीं सहतीए डरिये ना मूल तैथों तिखे दीदड़े1 तैंडड़े सार2 दे नी
हाथी नहीं तसवीर दा किला ढाहे शेर फवियां3 तों नहीं हार दे नी
कहे कावां दे ढोर ना कदी मोए भूंड अखियां कदे ना मारदे नी
फट हैन लड़ाई दे असल ढाई होर कूड़ पसार पसार दे नी
इके मारना इके ते आप मरना इके नठ जाना अगे सार दे नी
हिंमत सुसत बरूत4 शुकीन भारे ओह गभरू किसे न कार दे नी
बन्ह तोरिये जंग नूं एक करके सगों अगलयां नूं पिछों मारदे नी
सड़न कपड़े होन तहकीक काले जेहड़े गोशटी5 हीन लुहार दे नी
झूठियां सेलियां नाल ना जोग हुंदा पथर गले ना लान फुहार दे नी
खैर दितयां माल ना होवे थोड़ा बोहल थुड़े ना चुगे गुटार6 दे नी
जदों चूहड़ेनूं जिन्न चा करे खजल झाड़ा करीदा नाल पैज़ार7 दे नी
तैं तां फिकर कीता साडे मारने दा तैनूं वेख लै यार हुण मारदे नी
जेहा करे कोई तेहा पांवदा ए सचे वायदे परवदगार दे नी
वारस शाह मियां रन्न भौंकनी नूं फकर पा जड़ियां8 चा मारदे नी | panjabi-pan |
नन्हीं नन्हीं कउड़िया दुलहा, फाँड़ा बान्हीं लेल
नन्हीं नन्हीं कउड़िया दुलहा , फाँड़ा1 बान्हीं लेल ।
चलि गेल अहो दुलहा , हाजीपुर हटिया ॥ 1 ॥
उहा2 से लावल3 दुलरू , मजुरवा4 लगल बेनियाँ ।
घामा5 के घमाएल कवन दुलहा , डोलाए मांगे हे बेनियाँ ॥ 2 ॥
कइरो डोलाऊँ परभु , मजुरवा लगल हे बेनियाँ ।
तोरो कवन बहिनी चोराइ लेलन हे बेनियाँ ॥ 3 ॥
आवे देहु अगहन दिनवाँ , उपजे देहु धनवाँ ।
अपनी कवन बहिनी बिदा करबों हे ससुररिया ॥ 4 ॥ | magahi-mag |
लीम म लिमोलई लागी श्रावण महिनो आयो जी
लीम म लिमोलई लागी , श्रावण महिनो आयो जी ।
हमारा तो मोठा भाई तुम खऽ नींद कसी आवऽ जी । ।
तुम्हारी तो छोटी बहेण सासरिया मऽ झूरऽ जी ।
झूरऽ तेखऽ झूरऽ देओ हमनी झूरनऽ देवां जी । । | nimadi-noe |
रुमाल
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो बाग़ लगायो सा
घुमण रे मिस आजो नैना रा लोभी
हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो थाळ परोस्यो सा
आप रे कारण म्हे तो भोजन परोस्यो सा
जीमण रे मिस आजो नैना रा लोभी
हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
लाल ननद भाई रा बीरा रे रुमाल म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो होद भरायो सा
नहावण रे मिस आजो नैना रा लोभि
हरियो रुमाल म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल म्हारो लेता जैजो | rajasthani-raj |
245
खाब रात दा जग दियां सभ गलां धन माल नूं मूल ना झूरिए नी
पंज भूत विकार ते उदर पानी नाल सबर संतोख दे पूरिए नी
एहो दुख ते सुख समान जाने जेहे शाल मशरू तेहे भूरिए नी
भोग आतमा दा रस कस त्यागो वारस गुरु नूं कहे वडूरिए नी | panjabi-pan |
नानी-सी गाय गटर-गैंगणी सौ पूला खाय
नानीसी गाय गटरगैंगणी , सौ पूला खाय ,
माता जमुना को पाणी पे , न्हार सामऽ जाय ,
ला ओ माय बकेड़ी । | nimadi-noe |
कान्हा बरसाणे में आ जाइयो बुलागी राधा प्यारी
कान्हा बरसाणे में आ जाइयो बुलागी राधा प्यारी
जो कान्हा तू राह न जाने डोले डोले आ जाइयो
बुलागी राधा प्यारी
ताता पानी धरिया ततेरा , तेरी गर्ज पड़े तो नहा जाइयो
बुलागी राधा प्यारी
पतली ते पतली पोई फुलकियां तेरी गर्ज पड़े तो खा जाइयो
बुलागी राधा प्यारी | haryanvi-bgc |
ईसुरी की फाग-22
तोरे नैना मतबारे
तिन घायल कर डारे
खंजन खरल सैल से पैने
बरछन से अनयारे
तरबारन सैं कमती नइयाँ
इनसें सबरई हारे
' ईसुर ' चले जात गैलारे
टेर बुला कैं मारे ।
भावार्थ
प्रिये , तुम्हारे नयन बहुत मतवाले हैं , जिन्होंने घायल कर दिया है । ये खंजन जैसे आकर्षक , विष के बुझे हुए , पर्वत शिखर की तरह नुकीले हैं और बरछी की तरह तीखे हैं ।
ये नयन तलवारों से कम नहीं हैं जिनसे सब हार जाते हैं । ईसुरी कहते हैं कि ये नयन राह चलते को बुला कर मार देते हैं । | bundeli-bns |
गोरी गोर बियासनी बच्ची मोरनी ए
गोरी गोर बियासनी बच्ची मोरनी ए
गोरे बाबुल की धीय बच्ची मोरनी ए
हाय हाय बच्ची मोरनी ए
के रे रोऊं सराह कै बच्ची मोरनी ए
के रे सुहावन बोल
किन तेरा डिब्बा खोलियां किन तेरा किया सिंगार
हिय बधूं उस माय का कैसे किया सिंगार
आंखों पट्टी देय ली छाती वज्र किवाड़
इस जानी का बाहुड़ै वहां गया ना बाहुड़ै
अपने घर बैठ
जब तैं घर ते नीकली मन्दे हो गए सौन
मन्दे सौन न जाइयो जाइयो सकुन विचार
आगे मिल गई लाकड़ी उल्टे घड़े पनिहार
छींकत मंजा ढाइयां उट्ठी दामन चीर
काल अचानक मारिया पहरे बैठे बार | haryanvi-bgc |
435
करामात लगायके शहर फूकां जड़ां खेड़यां दियां मुढों पट सुटां
फौजदार वांगूं दयां फूक अगा कर मुलक नूं चैड़ चपट सुटां
नाल फौज नाही पकड़ कुआरियां नूं हथ पैर ते नक कन कट सुटां
सहती हथ आवे पकड़ चूंडियां तों वांग टाट दी तपड़ी छट सुटां
पंज पीर जे बोहड़न आन मैंनूं दुख दरद कजीअड़े पट सुटां
हुकम रब्ब दे नाल मैं काल जीभा मगर लग के दूत नूं चट सुटां
होवे पार समुंदरों हीर जटी बुकां नाल समुंदर नूं छट सुटां | panjabi-pan |
आव रे चांद भैंसी बान्ध
" आव रे चांद , भैंसी बान्ध ।
चन्दा बाबा चन्दी दऽ
घीं मऽ रोटी वालई दऽ ।
नाना भाई खऽ भावऽ नी ,
न झुमका लाड़ी आवऽ नी । " | nimadi-noe |
कन्नी बुन्दे सोहणे, सिर ते छ्त्ते सै मणाँ दे (जांगली ढोला)
कन्नी बुन्दे सोहणे , सिर ते छत्ते सै मणाँ दे
उत्थे देवीं बाबला , जित्थे टाल्ह वणाँ दे
बहाँ चढ़ कचावे , कराँ सैल झनाँ दे
हिकनाँ नूँ वर ढहि पहुते , पुन्ने हिकना दे
झोली पये बाल थणाँ दे
भावार्थ
' कानों में सुन्दर बालियाँ हैं , सिर पर सौसौ मन के केश ,
हे पिता , मेरा विवाह वहाँ करना , जहाँ बड़ीबड़ी टहनियों वाले ' वण ' वृक्ष हों ।
मैं ऊँट की काठी पर चढ़ बैठूँ , चनाब नदी की सैर करूँ । '
फिर किसीकिसी को वर प्राप्त होने का वचन मिल गया
और स्तनों से दूध पीते बालक उनकी झोली में आ गए । | panjabi-pan |
334
रीस जोगियां दी तैथों नहीं हुंदी हवसां1 केहियां जटां रखाइयां दियां
बेशरम दी मुठ जयों पूछ पिदी जेहियां मुंजरां2 बेट3 दी धाइयां दियां
तानसैन जिहा राग नहीं हुंदा लख मतां जे होन अताइयां दियां
तेरी चराचर बिरकदी4 जीभ ऐवें जिवें जुतियां मरकदियां साइयां दियां
सिर मुंन दाढ़ी खेह लाइयां ई कदरां डिठयो एडियां चाइयां दियां
मुंडयां नाल घुलना मंदे बोल कहने नहीं चालियां भलयां दयां जाइयां दियां
नहीं कावयों चूहड़ा होवे वाकफ खबरां जानदे चूहड़े खाइयां दियां
नहीं फकर दे भेतदा तूं वाकफ खबरां तुध नूं महीं चराइयां दियां
चितड़ सवाह भरे वेखो मगर लगा जिवें कुतियां होन कसाइयां दियां
जेहड़ियां सुन उजाड़ विच वांग खवर कदरां उह की जानदियां दाइयां दियां
गधे वांग तूं रजयों करे मसती कछां सुंघनां रन्नां पराइयां दियां
पूछ गाईं दी मही नूं जोड़ नाए खुरियां मही नूं लाउना ए गाइयां दियां
हासा आंवदा वेख के सिफलया5 गलां तबा6 दीयां वेख खफनाइयां दियां
मियां कौन छुडावसी आन तैनूं धमकां पैनगियां जदों कुटाइयां दियां
गलां इशक देवालियां नाहीं फलियां कचे घड़े ते बहन रूढ़ाइयां दियां
परियां नाल देवां नूं की आखन जिनां वखियां भंनियां भाइयां दियां
एह इशक ना जानदे चाक चोबर खबरां जानदे रोटियां ढाइयां दियां
वारस शाह न बेटियां जिनां जाइयां उह की जाणदे कदरां जवाइयां दियां | panjabi-pan |
रंडुवा तो रोवै आधी रात
रंडुवा तो रोवै आधी रात सपने में देखी कामनी
कोई ना पीसे उसका पीसना कोई ना पूछै उसकी बात
हिलक हिलक रंडुवा रो रहा भाभी ने पूछी बात
सपने में देखी कामनी
कोई न रोटी बणा देवे उसे कोई न पूछे उसकी बात
सपने में देखी कामनी | haryanvi-bgc |
मैं तुझे पूछूँ लाड़ो बीबी, एके बाल नव कँगही
मैं तुझे पूछूँ लाड़ो बीबी , एके1 बाल नव कँगही2 ।
किनने3 तेरा बाल सँवारा है ? ॥ 1 ॥
दादी जो मेरी कवन दीदी बीबी , एके बाल नव कँगही ।
वही दादी बाल सँवारा है ॥ 2 ॥
मैं तुझे पूछूँ लाड़ो बीबी , एके बाल नव कँगही ।
किनने तेरा बाल सँवारा है ? ॥ 3 ॥
नानी जो मेरी कवन नानी बीबी , एके बाल नव कँगही ।
वही नानी बाल सँवारा है ॥ 4 ॥ | magahi-mag |
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा
एक झूला डाला मैंने बाबल के राज में
बाबल के राज में
संग की सहेली हे सावन का मेरा झूलणा
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलना
ए झूला डाला मैंने भैया के राज में
भैया के राज में
गोद भतीजा हे सावन का मेरा झूलना
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलना | haryanvi-bgc |
वीरांगना अवंतीबाई
इनकी शौर्यगाथा पर बाबू वृन्दावनलाल वर्मा ने ‘रामगढ़ की रानी’ उपन्यास लिखा है तथा केंद्रीय सरकार ने इनकी स्मृति में विशेष डाक टिकट जारी किया है ।
धन्न भूम भई मनकेड़ी की , जितै अवतरीं रानी ,
जुगनजुगन नौ जाहर हो गई उनकी अमर कहानी ;
बड़े प्रेम सैं चबा चुकी तीं , देसप्रेम कौ बीरा ,
जियतजियत नौ ई धरनी की , दूर करत रई पीरा ।
नगर मण्डला के बीरन में ऐसे भाव भरे ते ,
प्रान हाँत पै धर गोरन सैं , अपनें आप लरे ते ,
थरथर प्रान कँपे गोरन के , ई रानी के मारैं ,
डारडार हँतयार भगे ते , सुनसुन कै ललकारैं ।
हलहल गऔ रानी के मारें , बाडिंगटन कौ आसन ,
सोससोस रै गए ते दुसमन , अब का करबैं सासन ।
ऐसौ परो खदेरौ उनपै , प्रान बचाकैं भागे ,
कजन बचे रए रानी जू सैं , भाग सबई के जागे ।
सुनसुन कै दुक गए ते दुसमन , ऊ घुरवा कौ टापैं ,
लाललाल मों देख जुद्ध में , जिऊ अरियन के काँपैं ।
एक हाँत पाछैं रइँ उनसै , झाँसीवारी रानी ,
ई धरनी कौ कनकन कै रओ , उनकी सुजस कहानी ।
राज रामगढ़ की रानी की , है काँ किलौ पुरानौ ?
अपुन इए अब आजादी की , निउँ कौ पथरा मानौ ।
अमर बीरता के साके की , दै रओ किलौ गबाई ,
जी के भीतर देसभक्ति की , जगमग जोत जगाई ।
ऐसी अमर बीर रानी खौं , भूले काय कुजानें ,
जस की डोर दौर कै भइया , अपनी तरपै तानें ।
स्वार्थ भाव के इँदयारे में , नीतन्याय खौं भूले ,
उल्टीसूदी बातें गड़कै , ऊसई फिर रए फले ।
देसप्रेम की मीठौ अमरत , अपनें मन में घोलो ,
बीर अवंतीबाई जू की , एक साथ जय बोलो ।
महातीर्थ सी कर्म भूमि के , दरसन करबे जइयौ ,
भक्तिभाव सैं चिर समाधि पै , श्रद्धासुमन चढ़इयौ । | bundeli-bns |
175
हीर आखया रांझया कहर होया एथों उठ के चल जे चलना ई
दोवें उठ के लंबड़े राह1 पईए कोई असां ने देस ना मलना ई
जदों झुगड़े वड़ी मैं खेड़यां दे किसे असां नूं मोड़ ना घलना ई
मां बाप ने जदों वयाह दिती कोई असंा दा जोर ना चलना ई
असीं इशक दे आन मैदान रूझे2 बुरा सूरमे नूं रनों भजना ई
वारस शाह दे इशक फिराक दौड़े एह कटक फिर आख किस झलना ई | panjabi-pan |
उड़े हो गुलाल रोली हो रसिया
उड़े हो गुलाल रोली हो रसिया केसर कस्तूरी की चमचाई
उड़े हो गुलाल रोली हो रसिया
भर पिचकारी मेरे माथे पै मारी बिन्दी की आब उतारी हो रसिया
आज बृज में होली हो रसिया
भर पिचकारी मेरे मुखड़े पै मारी बेसर की आब उतारी हो रसिया
आज बृज में होली हो रसिया
भर पिचकारी मेरे छाती पै मारी माला की आब उतारी हो रसिया
आज बृज में होली हो रसिया
भर पिचकारी मेरे हाथां पै मारी गजरे की आब उतारी हो रसिया
आज बृज में होली हो रसिया
भर पिचकारी मेरे पायां पै मारी बिछुवा की आब उतारी हो रसिया
आज बृज में होली हो रसिया | haryanvi-bgc |
459
सहती खोलके थाल विच धयान कीता खंड चावलां दा थाल हो गया
छुटा तोर फकीर दे मोजजे1 दा विचों कुफर पाजी परे हो गया
जेहड़ा चलया निकल यकीन आहा करामात नूं देख खलो गया
गरम गजब दी आतशों आप आहा बरफ कसफ2 दे नाल समो गया
जिस नाल फकीरां दे अड़ी बधी ओह आपना आप वगो गया
पेवे डाढयां माड़यां केहा लेखा ओस खोह लया ओह हो गया
मरन वखत होया सड़ खतम लेखा जो कोई जमया छोह ने छोह गया
वारस शाह जो कीमिया3 नाल छूता सोना तांबयों तुरत ही हो गया | panjabi-pan |
247
जोगी छड जहान फकीर होए एस जग विच बहुत खुआरियां ने
लैन देन तेदगा अनियां करना लुट खुट ते चोरियां यारियां ने
ओह पुरख निरब्बान पद जा पहुंचे पंज इंदरियां जिनां ने मारियां ने
जोग दे के करो निहाल मैंनूं कहिया जिउ ते घुंढियां चाढ़ियां ने
एस जट गरीब नूं तार तिवें जिवें अगलीयां संगतां तारियां ने
वारस शाह मियां रब्ब शरम रखे जोग विच मुसीबतां भारियां ने | panjabi-pan |
बरसे महाराज झड़ाझड़ियाँ
बरसे महाराज झड़ाझड़ियाँ , सो धरती जैजैकार करै ।
पानी कौ पहलौ गिरो , मुतियन की लर झिलमिला उठी ,
कुछ सौंधीसौंधी महँक जगी , सोई माटी कुलबिला उठी ;
बह चलीं उरतियाँ गलिनगलिन , लरकन की गोलें जुरयाईं ,
कलकत उघरारे निकर परे , वे खेल चले चाईमाई ;
सबनें जीऐसौ पाओ है , या अमरित की रसधार झरै ।
भर गुच्छन जमना फूट कढ़ी गौहान हार गोरीनारी ,
जैसे धरती खें उढ़ा गओ , कोउ पीरुइया प्यारीप्यारी ;
सूकी कँदिया सकत्यान लगी , बिरछन पै आई नई उल्हन ,
जुड़रक में उतर खैजुअन सें चिनगुनीचिरइयाँ लगीं चुनन ;
नाचत करहायँ , मितकरे मगन , भारई अलग झनकार भरै ।
निँग चलीं गिँजाई गैल धरें , ई पखनीपखना मौज करें ,
लजबन्ती बीरबहूटिन सें हरयारी सेंदुर माँग भरें ।
फिर रहे कैंचुवा , पौहन के गुलगुले गिलाए में सरकत ,
कुछ ऐसउ कीरा बिचर परे , जिनखें दिखतइँ छाती धरकत ,
मालिक कौ भारी कटखानों , अनगिन्ते जीव निकार घरै ।
हिलुरो जल कंडीउतरावन , जब गिरो कलफया भदरभदर ,
नद्दीनारे गड़गड़ा उठे , पा धुआँधार की झिमरझिमर ;
अब आसातिसना दौर परी , छा गई जीउका जलाबम्म ,
करमार जुड़ाने बैठे हैं , करतूती कूदे घमाघम्म ,
कोउ ब्यामा छाँटै बौंड़बौंड़ , कोउ पूँछ पकर जग पार करै ।
बरसे महाराज झड़ाझड़ियाँ , सो धरती जैजैकार करै । । | bundeli-bns |
आया अयोध्या वाला कुवर दो
आया अयोध्या वाला कुवर दो
१ राजा जनक तो जग में हो ठाड़ा
शोभा वर्णी न जाई
उठ सभा दल देखण लागी
उग्या भवन का तारा . . .
कुवर दो . . .
२ यो रे धनुष कोई सी हाले न डोले ,
लख जोधा आजमाया
रावण सरीका पड्या खिसाणा
भवपती गरब हरायाँ . . .
कुवर दो . . .
३ लक्ष्मण सुणो बंधु रे भाई ,
गुरु की नी आज्ञा पाई
डावी भुजा सी धरणी क तोकु
धनुष की कोण बिसात . . .
कुवर दो . . .
४ गुरु की आज्ञा पाई राम न ,
चरणो म शीश नमाया
इनी रे भूमी पर है कोई योद्धा
धनुष का टुकड़ा उड़ाया
कुवर दो . . .
५ सिता रे ब्याही न राम घर आया ,
घरघर आनंद छाया
माता कौशल्या न आरती सजाई
राम बधाई घर लाया . . .
कुवर दो . . . | nimadi-noe |
373
जिस जट दे खेत नूं अग्ग लगी ओह रहिवां1 वढके गाह लया
लावेहार2 राखे विदा होए ना उमैद हो के जट राह लया
जेहड़े बाज तों काउं ने कूंज खोही सबर शुकर कर बाज फना लया
दुनियां छड उदासियां पैहन लइयां सयद वारसों हुण वारस शाह होया | panjabi-pan |
ऐ रानी डो ऐ रानी
ऐ रानी डो ऐ रानी
ऐ रानी डो ऐ रानी
साडी डरमे घोरा फलगो बिचायो डो रानी बोले
साडी डरमे घोरा फलगो बिचायो डो रानी बोले
ऐ रानी डो ऐ रानी बोले
ऐ रानी डो ऐ रानी बोले
साडी डरमे घोरा फलगो बिचायो डो रानी बोले
साडी डरमे घोरा फलगो बिचायो डो रानी बोले
ऐ राजा जा राजा बोले
ऐ राजा जा राजा बोले
चो सन्ठी साडी डरमे घोरा फलगो निचानो डो बोले
चो सन्ठी साडी डरमे घोरा फलगो निचानो डो बोले
ऐ रानी डो ऐ रानी बोले
ऐ रानी डो ऐ रानी बोले
घोरा फलगो लियेन नी विष्णु भगवान सुबान डो रानी बोले
घोरा फलगो लियेन नी विष्णु भगवान सुबान डो रानी बोले
स्रोत व्यक्ति नन्हेलाल , ग्राम झल्लार | korku-kfq |
163
हीर पुछके आपने माहीए नूं लिखवा जवाब चा टोरया ई
तुसां लिखया ते असां वाचया ई सानूं वावदयां ही लगा झोरया ई
असां धीदो नूं चा महींवाल कीता कदी टोरना तेनहीं लोड़या ई
कदे पान ना वल फेर ते पहुंचे शीशा चूर होया किसे जोड़या ई
गंगा गइयां न हडियां मुड़दियां ने गए वकत नूं किसे ना मोड़या ई
हथों छुटके तीर ना कदे मिलदे वारस छडना ते नहीं छोड़या ई | panjabi-pan |
सर्प दंश से सम्बन्धित मंत्र
बड़वा नीम की पाँच टहनी पत्ते वाली लेता है और पीड़ित व्यक्ति के सामने बैठकर सर्प का जहर उतारने के लिए मंत्र बोलता है , नीम की टहनियों को पीड़ित व्यक्ति के सिर से झाड़ा डालता है ।
जिसे सर्प काटा हो उसे पूर्व दिशा की ओर मुँह करके जमीन पर बैठा देते हैं , लाल धागा भीलट बाबा की मान लेकर बड़वा पीड़ित के दाहिने हाथ में बाँध देता । मान यह लेता है कि जहर उतर जायेगा तो सवा पाव शक्कर , पेठा , गेहूँ का आटा , घी लेकर प्रसाद बनाकर भीलट बाबा को भोग लगाकर , सबसे पहले भानेज
को प्रसाद देकर बाद में दूसरे लोगों को बाटूँगा ।
मंत्र1
चालक चलावनि बोर की मिठी लगडोडा
परोलो की पपड़ी काली कुत्ती गले काम से दर में घुसी
हाल हेर करी पकड़ा नवनागनी नव वाटा पड़या तो एक
वाटो दिवड़ खाई गयो कुआँमर जड़ी ताहॉ आया साथ हाथी
हाथी , हाथी रिस करें रोटा , रोटी भान दिया ,
ताह निकलीयो कालो नाग नाग का बेटा का नाम डुचकियो ,
उदालाल , पानलाल , धामन सुरित निल बागरे छिट परनी ,
मंत्र2
माथे काटनी नी मुड़ल में मेकिस जिप काटीन आरती में
मेकिस हजुर जामनी दाँव पाय खड़ो रहीन धोग दिस
मंत्र3
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ बाधीयो हिरन हिडोलो
दरिया न काँटा वड़ली न चाहाँ हिचारू छिट परली नागन ,
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ हिचारू लाड़ी , बाडी नागन फुफल , फुगारी
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ बाधीयो हिरन हिडोलो ,
ताहा हिचारू दिवेदो नागन धामन की नागन ,
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ बाँधीयो हिरन हिडोलो ,
चाहा गुयरो गुहराव छीबरो नागन ,
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ बाधीयो हिरन हिंडोलो ,
भुई सापन दरछायी
दरिया न काँटा वाकि वड़ली न चाहाँ बाधीयो हिरन हिंडोलो ,
आम्बासम्बा हिदल नाखे भिलड़ बाबो धुराव न दखनाव ,
हवा चाले हिड़ल हिचे , हिचे , हिचे टुट पड़ीयो ,
दरियाम पड़यो , रहीयो मगर माछलो चुसि डासियो खाई गयो
धरती गुजपिय उतारू मारसी नि उतरेतो तो सवाँ हाथ डन्डो उतारू
सातपुड़ी जमीन माता इस्माल जोगी निकालियो
तो कपन गाय न गोह आयो , ग्वालीया पोरिया हतला ग्वालियर
पोरिया क इस्माइल जोगी पूछियो कि निल्लो , पिल्लो वासड़ो
देखियो नी पोरिया कहीयो कि भरिया डूँगर में छ बाबा
निलो , पिल्लो वासड़ो ढंूढतोढूंढतो गयो , भरिया डूँगर में
जड़ गयो वासड़ो सोलह लौंग , सुपारिया , हाथ में लेदी
गुगेड़ी लाकुड़ काखम में लेधा झोलना चोटियालो नारियल
अगरबत्ती लोबान चुनियो कुकड़ा कोरी भाटी नो दारू
काचा सुत , सुती देधो वासड़ा मर पूजा पाट
कर देदी दाऔ झाटको मारियो तो दुधियो तलाब बनियो
जेवडियो झाटको मारियो तो खुन न तलाव बनियो
वासड़ो काटिन दाबल बनाया , जाल , कालो नाग
फुक मारिया निल्ली , पिल्ली जमीन हईगई स्वर्ग में निल्लो , पिल्लो बाण फुट गयो ,
मंत्र4
अम्बी न साम्बी जाल फेकेरे काला नागक धखा लागियो
काला नाग धरया गियो न दाबला भरने लागिया ,
रामलो , धामलो तपन लागियो आबी न तुलवारा मार ,
अदलिया फेरम रातु न दिसु गोबा वधवा लागिया ,
कागनी फेरम रातु न दिसु गोबा वधवा लागिया ,
आम्बीसाम्बी न जाल फेकेरे जोगी धुचकिया ,
नागन काजे धरी लेदो न दाबल मे भरी लेधो ,
चोकिया फेरन रातु न दिसु गोबा वधवा लागिया ,
आम्बी रे साम्बी जाल रे फेकेरे जोगी , लाड़ी बान्ड़ी ,
नागन फुफल फुगार ,
मादल फेरू रातु न दिसु वधवा लागिया गोबा ,
आम्बी रे साम्बी जाल रे फेकेरे जोगी उदालाल पानलाल ,
रातु रे दिनु रे वधवा लागिया रे गोबा धोल फेरू ,
रातु रे दिनु रे वधवा लागिया रे गोबा स्वर्ग ठलारो मार देधा ,
गोबा वधबा लागिया चटकिया फुटकिया ,
रामला गामला तपने लागिया ,
तिरसठ जात न जनवार डोलन लागिया
तिरसठ जात न जनवार दाबला
म भरीन जोगी शोरी मामा न
झोपल गयो शोरी मामा
काई की काई भाई काई लाइयो जोगी बोलियो
तिरसठ जात ना जनवार दाबला
म भरीन लाईरियो शोरी मामा
कहियो की जोगी इन्छु कटियाला
जनवार काजे डुडिया में बसाड़ी न
समुद्र पली पार कर देजी
कापन गाय न गोह लागिया
बिच्च म गुवालिया पोरिया आया जोगी काजे पूछन लागियो ,
इन्हु दाबला म काई लिजाई जोगी बाबा देधो दाबलो खोलिन
गुवालिया पोरिया देखिन घबराय गया
तिरसठ जनवार कहाँ ती लायो ,
कुसल दाँत लहरीयो फेन वालो तो रेड़ भात
ना तो गुवालिया पोरियो
बोलिया कि जा बाबा इन्हूंक समुदु पली घड़ छोड़िया
दरिया न काट वाकि वरली
इस्माइल जोगी जाई हिडोल बाधियो
हिचतहिचत दुट पड़यो गयो मगरमाच्छला
चुसी डसी खाई गयो ,
यह मंत्रांे के बाद में सभी देवीदेवता काम नाम बोलते हैं ।
सातपुड़ी जमीन मुण्डीया सी राफ वासींग नाग ,
बैलाबाबा , कुण्डी राणादेव , नाक में कुहतादेव , खाक में भवरा ,
एक तागीया बबल , थानिया सुपड़ काडिया , शिवाबाबा ,
महेश्वर वाला डेरा , नर्मदा माई , फुलबाई माता , बाघेश्वरी माता ,
काली माई , कालका माता , डामरा माता , महीमाता , गायमुख माता ,
भिलड़ देव , खेड़ा देवती , रानी काजल , भेस्टा कंुवर देव , नाहाराजा कुंवर ।
ऊँकारजी बाबा , सिंगाजी बाबा , गणपति बाबा ,
बलवारी बाबा , हनुमान , महाकालडेरा बाबा , हुनमान बाबा ,
रामभगवान , भिमा , माता कुन्ती , सितामाता , महादेव गोरा ,
चाँद , सूरज , मालदेव , उगवना , बुड़वना , तरफ मारा दरवाजे ।
यह मंत्र पूरा होने पर सर्प का जहर उतर जाता है , फिर उतारने वाला या बड़वा जंगल में जाता है और जंगली जड़ीबूटी खोजकर लाता है । जड़ीबूटी को बारीक पीसकर , पानी में घोलकर पिला देते हैं और वह सर्प का काटा हुआ अच्छा हो जाता है । | bhili-bhb |
340
आ नढीए गैब क्यों चाया ई साडे नाल की रिकता1 चाइयां नी
बेकसां दा कोई ना रब्ब बाझों तुसीं दोवं ननाण भरजाइयां नी
जेहड़ा रब्ब दे नाम ते भला करसी अगे मिलनगियां ओस भलाइयां नी
अगे तिन्हां दा हाल ज़बून2 होसी अखीं वेख करन जो बुरयाइयां नी | panjabi-pan |
नाई की तेरे लाम्बे लाम्बे खेस
नाई की तेरे लाम्बे लाम्बे खेस
आधे बिछा ल्यो आधे ओढ़ ल्यो
राजा जी मेरी मां के पाले खेस
क्यूंकर बिछा ल्यूं क्यूंकर ओढ ल्यूं
राजा जी तेरी चाल सरूप
जणू रै हाथी घूमै गाल मैं
राजा जी तेरा बोल सरूप
जणू रै पपीहा बोल्या रेल का
नाई की तेरा बोल सरूप
जणू रै कोयल बोली बाग में
नाई की तेरी चाल सरूप
जणू मुरगाई तिरगी ताल मैं | haryanvi-bgc |
145
मुंह उंगलां घत के कहनसभे कारे करन थीं एह ना संगदा ए
साडियां मंमियां टोंहदा छेड़ गलां पिछों होएके सुथणां सुंघदा ए
सानूं कठियां करें ते आप पिछों सान होएके टपदा रिंगदा ए
नाल बन्न के जोग नूं जोअ देंदा गुतां बन्न के खिचदा टंगदा ए
तेड़ां लाह घाई ते फिरे भौंदा भऊं भऊं मूतदा ते नाले त्रिंगदा ए
वारस शाह उजाड़ विच जाय के ते फुल साढियां कनां दे सुंघदा ए | panjabi-pan |
जौ गीवहां को उबटणों राय चमेली का तेल
जौ गीवहां को उबटणों राय चमेली का तेल
अत लाडो बैठ्यो उबटणै
मैल झड़े झड़ मैं पड़े नूर चढै गोरे अंग
अत लाडो बैठ्यो उबटणै
आ मेरी मायड़ देख ले तम देख्या सुख होय
अत लाडो बैठ्यो उबटणै
आ मेरी भुआ देखल्यो तमने आरतड़ा रो चाव
अत लाडो बैठ्यो उबटणै | haryanvi-bgc |
कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया
कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी
तू तौ जात हौ अकेली
कौनो संग न सहेली
गुण्डा रोकि लींहें तोहरी डगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी
भौजी बोलेलू तू बोली
सुनिके लागल हमरा गोली
काहे पड़ल बाड़ू हमरी नगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी
केतने दामुल फाँसी चढ़िगे
केतने गोली खाके मरिगे
केतने पीसत होइहैं जेल में चकरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी | bhojpuri-bho |
भोर
बीरन हो रओ भोर , दूदसीं डूबन लगीं तरइयाँ ।
बड़ी भुजाई नें बखरी कौ ,
टालटकोरा कर लऔ ।
माते जू के बड़े कुआ कौ ,
मीठौ पानी भर लऔ ।
मुरगन नें दई बाँग , डरइयँन बोली श्याम चिरइयाँ ।
बीरन हो रऔ भोरदूदसी डूबन लगीं तरइयाँ ।
मानकुँवर ने सारन कौ सब ,
कूराकरकट भर लऔ ।
दूद देत गइयनभैंसन खौं ,
दन्नों दर कैं घर दऔ ।
सौकारूँ कर लेब गोसली लगीं रमाँउन गइयाँ ।
बीरन हो रऔ भोर , दूदसी डूबन लगीं तरइयाँ ।
नन्नीं बउ नें दोउ भाँउन कौ ,
दई भाँ लऔ सबरौ ।
जुनइ रखाउन हरियन सै ,
डरुआ खेतन खौं डगरौ ,
कहा करइयाँ हौ आँगन में आगइ ऐन उरइयाँ ।
बीरन हो रऔ भोर , दूदसी डूबन लगीं तरइयाँ ।
बेर बीनवे कड़ गऔ पनुआँ
लैकैं बड़ौ ढिकौला ।
चून माँगबे आ गऔ दोरें
बी सादू , हरबोला ।
जो कजन्त कउँ झूँठी मानौं , हेरौ खोल किबइयाँ ।
बीरन हो रऔ भोर , दूदसी डूबन लगीं तरइयाँ ।
आलस छोड़ किसान , भोर
कर लेय काम जई अपनें ।
‘मित्र’ सदा बेइ सुक्ख उइाबै ,
दुक्ख न पाबै सपनें ।
मोय छोड़ नइँ कोऊ तोखौं भइया कमऊँ जगइयाँ ।
बीरन हो रऔ भोर , दूदसी डूबन लगी तरइयाँ । | bundeli-bns |
सूजैं इन आँखन अलबेली
सूजैं इन आँखन अलबेली
जग मैं रजऊ अकेली ।
भरकें मूठ गुलाल , धन्न वे ,
जिनके ऊपर मेली ।
भागवान जिनने पिचकारी ,
रजऊ के ऊपर ठेली ।
ई मइनाँ की आवन हम पै ,
मिली , मसा के झेली ।
अपकी बेराँ उननें ईसुर
फाग सासरें खेली । | bundeli-bns |
कई रेती में पीपल छाया
कई रेती में पीपल छाया
कई गेरा कुंडा खणाया
हो म्हारा गेरा गजानन्द आया
कई दाऊजी रे मन भाया
कई माता बई हरक बवाया
म्हारा गेरा गजानन्द आया
कई काकोजी रे मन भाया
कई काकीजी मोतीड़े बदाय ।
कई भैया रे मन भाया
कई भाभी बई कंकूड़े बदाया
कई मामाजी रा मन भाया
कई मामाजी हिदड़े बदाया | malvi-mup |
भानु भौंपेलो
हिंडवाणी कोट मा रन्दो1 छयो2 हंसा हिंडवाण ,
वो त होलो अनमातो3 धनमातो4
जैकी बार5 छन तिवारी , बत्तीस नीमदरी6 ,
मट्टी जसो अन्न होलो , ढुंग्यों7 जसो धन ,
बार छन बेटा जैका , अठार छन नाती ।
तब हिण्डवाणी कोट मा पड़े , बार बरस को अकाल ,
देखा बड़ा पेड़ा , न लायान भूक ,
छोटा न पड्यान दूख ।
हिण्डवाणी कोट मा , कनी तराइ8 मचीगे ,
रोन्दा छन , बराँदा9 भूखन नौना ,
देखीदेखीक , जिकुड़ी चिरेन्दी ।
बत्तीसू कुटूम तैकू , भूखन चचलाण10 लैगे ,
बड़ो आदमी छयो , हंसा हिण्डवाण ,
वैकू शरम ऐगे , अपणा आँसू पीगे ।
कै मू अपणी , विपता कया लाण ,
कै मू मैंन अब , मांगणक जाण ?
विता का दिनू , अपणा भी होंदा पराया ।
गाडे़11 वैन तब , खोड12 की लगोठी13 ,
मिठो जैर14 डाली , दिने बत्तीस कुटुम ।
तब बत्तीसों कुटुम , वैको स्वर्गवास ह्वैगे ,
अफू भी ढकी गै राजा , तिवारी का अडासा15 ।
वे को बैटा भानू , मामाकोट छयो जायँ
तब लौटी आये , हिण्डवाणी कोट मा ,
सूनो चौक देखे वैन , सूनकार तिवारी ,
घूमद ऊं बार तिवारियों , बाईस निमदारियों ,
तब देखीन वैन , अपणू बत्तीसों कुटम
जागू16 जागू मू मरियूं ।
तब चाखुड़ी17 सी रीटदो18 , भानू भौपेलो ,
रौंदू छ बराँदू , कपाल फोड़ीफोड़ी ।
कै मा नी सुणाँद , बदनामी की डर ,
लोक बोलला , रजा की कुटमदारी , भूखन मरी गए ।
शरम को मारो छौ वो , विपता को हारो ,
बत्तीस कुटम को वैन , एकू भारो लगाये ,
तब लीगे ऊं रविछाला19 मुंग ।
चिता बणाई वैन , अपणी जिकुड़ी
सल मा जगदी देखे फूकेन्दी ।
तब चिता कों राखो लीक , भानु भौपेलो ,
ऐगे हिण्डवाणी कोट माँग
सूनी तिवारी वै , तब खाण औन्दीन ,
तब बोल्द वो , भानू भौंपेलो :
मैंन यख रैक , क्या त करण ?
तब उतान्याँ वैन , राजों का कपड़ा ,
बणाये मालू20 की झगली , मालू की टोपली21 ,
छोड़याली तब वैन , हिण्डवाणी कोट ।
तब राजपाट छोड़ीक , शैरू 22 शैरू घूमद ,
एक शैर छोड़ी राजा , दूसरा शैर जान्द
दूसरा शेर छोड़ी , तीसरा चौथा शेर जान्द ।
छठा शेर मा जाँद , कालूनी कोट मा ,
कालूनी कोट मा , रन्दो छयो सजू कलूनी ।
तब सजु कलूनी मा , भानू जदेऊ23 लगौद ,
रजा तेरी बलया जौलू , मैं छऊँ गरीब छोरा ,
गरीब छोरा छऊँ , मैं नौकर धन्याल ।
छारा , नौकर धरलू , तिन तनखा क्या लेण ?
गरीब छोरा छऊँ , रोटी दियान कपड़ा ।
तउ सोचदू सजू , अछू नौकर मिले ,
त्वई लैख24 काम , डाँडू की मरूडी25 हमारी ,
डाँडों की करूड़ी , घास काटण की नौकरी ।
तब फेंक्याले वैन , मालू की झूली टोपली ,
सजून दिन्या , फट्यांपुराणा बस्तर ।
तब सामल पांजायाले , बतैले डाँडा को बाटो ,
वे डाँडा मरूड़ी बैठा , घास काटण ।
तब भानु भौपेलो गैगे , वीं डाँडा मरोड़ी ,
सजू कलूनी की छई , एक नोनी अमरावती ,
नोनी अमरावती , छई सुघर तरुणी ।
वींन देखे , छोरा एक औन्द , तब बोदे :
मैंन पैले बोल्याले , छोरा आँगण छूत न करी ।
मैं तेरा ब्वई26 बुवान27 , नौकर भेजेऊँ ,
ई डाँडा मरूड़ी , मैन घास काटण ।
तू अबी लोटी जा , धसेर छोरा ,
यख मर्द का नौं28 , माखो29 नी औन्दी ।
वा ज्योंज्यों ना करदी , छोरा अगाड़ी औन्दो ,
तब अमरावती , भौत गुस्सा ऐगे ;
न औ न औ छोरा , मैं आज
चाँदू30 बेन्दू31 बेलों32 मू , तेरी श्किार खेलौण ।
वा ज्योंज्यों ना करदी , छोरा अगाड़ी औन्दो
कैको होलो यो , निरभागी छोरा ,
कै अभागी माँ की , होली कोख सूनी ?
तब चढ़े वीं , सिंहणी को रोष
खोल्या वींन , चाँदू बेन्दू बेला ।
लम्बालम्बा सिंग छा ऊँका , बड़ा बड़ा आँखा ,
पड़ी गेन वो , वैकी धाद33 ।
दौड़दो छ दौड़दो छोरा , विपता को मारो ,
तब एक बिरछ , मारदो अंग्वाल ।
इना छया , चाँदू बेन्दू बेला
वै बिरछ सणी , जड़ उखाड़ कर्ण लैग्या ।
तब छोरा तै चढ़ी , छैत्री को जोश ,
सची होलू मैं हिंडवाण वंश को जायो ,
एक ही मुठीन चाँदू बेन्दू फोत34 होई जान ।
तब एक एक , मुठ्यों मा ही
वैन चाँदू बेन्दू , चित्त करीया लौन ।
हकदक रैगे तब , अमरावती रौतेली ,
यो छोरा होलू , मालू35 मा को माल ।
तब पूछदी वा , नौं गौं छोरा को ,
हे छोरी मैं छऊँ , हिंडवाणी कोट को रौतेलो ,
हंसा हिण्डवाड को बेटा , छऊँ मैं भानु भौपेलो ।
किस्मत को मारो छऊँ , बिता को हारो ,
आज बण्यू छऊँ , तेरो घास काटदारो ।
तब बोदे राणी अमरावती
राजों कू रोतूलू होलू तू , पर मैं | garhwali-gbm |
इक मेरी अख काशनी
नी इक मेरी अख काशनी ,
दूजा रात दे उन्नींद्रे ने मारेआ ,
शीशे ते तरेड़ पै गयी ,
वाल वौंदी ने धयान जदों मारेआ ,
इक मेरी अख . . . .
इक मेरी सस्स चंदरी ,
भैड़ी रोही दे किकर तों काली ,
गल्लेकथ्थे वीर भुन्नदी
नाले दवे मेरे माँपयां नू गाली ,
नी क़ेहडा उस चंदरी दा ,
नी मैं लाचीयाँ दा बाग उजाड़आ ,
इक मेरी अख काशनी . . .
दूजा मेरा दियोर निकड़ा ,
भैड़ा गोरियाँ रन्ना दा शौंकी ,
ढुक ढुक नेह्ड़े बैठदा ,
रख सामणे रंगीली चौंकी ,
नी इस्से गल तों डरदी ,
अजे तीक वी न घुण्ड नूँ उतारया ,
इक मेरी अख काशनी . . .
तीज़ा मेरा कंत ज़िम्वे ,
रात चानड़ी च दुध दा कटोरा ,
फिकड़े सिन्दूरी रंग दा ,
ओदे नैणा च गुलाबी डोरा ,
नी इको गल माड़ी उसदी ,
लाईलग नु है माँ ने विगाडिया । | panjabi-pan |
मनख्या बाघ
लोगूँ कु खेती कु काम नी होये पूरू1 ,
यो निभागी बाघ होईगे शुरू
एकी2 जागान3 बल हैकी4 जागा जाँद ,
जनानी चोरीक नौनोऊँ छ खाँद
कनो निरभागी यो बाग गीजी5 ,
हमारी आँखी आँसुन भीजी
एकी जनानी वैन मारे धाड़ो ,
मैं कू बाड़ी पकौण को करे भाड़ो ।
तैं को मालिक बवराँदो6 भौत ,
ये पापी बागक कब औली मौत ?
तै डाँडा का ऐंच दुगड़ी गौऊँ ,
तख बुडड़ी मारे वैन गौं का सौऊँ
तै बागन पकड़े बुडड़ी की गली ,
ब्वारी की पकड़ी छै वीं की नली
खाण दे बुडड़ी की ऐगे खैर ,
हम बाग की डर नी औंदा भैर7
तौं द्वारू तैं अब झट लावा ,
घमछंदे भायों रोटी खावा
ऐंसू का साल नी कैकी खैर ,
हम बाग की डर नी औंदा भैर
डरदामरदा औंदान वो घर ,
विरालों देखीक लगदी छ डर
रुमसूम्या8 बगत जु कुकर भूक्या ,
इना नामी वंधू जु ओबरा9 लूक्या
ओबरा लूक्या रऊसी10 माछा ,
पोटगा मा डर का नरसिंह नाच्या | garhwali-gbm |
सावां गीत
ऊँचा मां भाले रे ढेड्या सरग मारी भाणिंगलो
नेचो मां भाले रे ढेड्या सरग मारी भाणिंगलो
खाटले मां बसेरे ढेड्या सरग मारी भाणिंगलो
उटले मां बसेरे ढेड्या सरग मारी भाणिंगलो
सावां लाने वालों को बधाकर स्वागत कर घर में ले जाते हैं फिर औरतें गीत
गाती हैं । सावां लाने वालो को कहती हैं कि तुम ऊपर आसमान की ओर मत
देखो सरग आसमान हमारा भानजा लगता है । धरती , खटिया और चबूतरे पर
मत बैठो , ये भानेजभानजी लगते हैं । | bhili-bhb |
भाँवर गीत
मारो कवचड़ा पर , ढेड्या दासे झुणी ।
कवच आजड़ झांजड़ करे , ढेड्या दासे झुणी ।
पुर्यो चुली मेकण आयो , पुरयो धड़धड़ कांपे वो ।
विवाह के दिन फेरे के समय दूल्हे का छोटा भाई दुल्हन के लिए चोली लेकर दुल्हन के घर में जाता है । स्त्रियाँ कहती हैं ले लड़के मेरा कवच का घर है , भागना मत । कवच हिलती है तुझे लग जाएगी , भागना मत । वह लड़का जो चोली देने के लिये आया है , थरथर काँप रहा है । | bhili-bhb |
पानी भारेन जाऊसे वो मोरी मायू
पानी भारेन जाऊसे वो मोरी मायू
घर का सासू घाघर रोके
भागी भागी से आई से जावा मारो बेटी
भागी भागी के आई जा
मैं कैसी आऊंसे वो मोरी मायू
रास्ता में मिले होय तो सोटी न मारे
रोटी पावन जाऊंसे वो मोरी मायू
घर का जिठानी चूला न रोके
भागी भागी से आई से जावा मारो बेटी
भागी भागी के आई जा
स्रोत व्यक्ति शांतिलाल कासडे , ग्राम छुरीखाल | korku-kfq |
179
रांझे आखया मूंहों की बोलना ए घुट वट के दुखड़ा पीवना ई
मेरे सबर दी दाद जे रब्ब दिती खेड़े हीर सयाल ना जीवना ई
सबर दिलां दे मार जहान पटन उच्ची कासनूं असां बकीवना ई
तुसीं कमलियां इशक थीं नहीं वाकफ नेहुं लावणा निंम दा पीवना ई
वारस शाह जे चुप थीं दाद पाईए उची बोलयां वहीं विहीवना1 ई | panjabi-pan |
नीम्ब के लागी निम्बोली दादा हो
नीम्ब के लागी निम्बोली दादा हो
समधी की रीतगी न्यौली दादा हो
कन्या नै दो परणाय दादा हो
जांडां के लागी झींझ दादा हो
समधी नै आ गई नींद दादा हो
कन्या नै दो परणाय दादा हो
आकां कै लागै डोडे दादा हो
समधी के जुड़ गये गोडे दादा हो
कन्या नै दो परणाय दादा हो | haryanvi-bgc |
464
सानूं बखश अलाह दे नाम मियां साथों भुलयां एह गुनाह होया
कचा शीर पीता वंदा सदा भुले धुरों आदमों भुलना राह होया
आदम भुल के कणक नूं खा बैठा झट जंनतों हुकम फनाह होया
शैतान उसताद फरिशतयां दा भला सजदयों किधर दे राह होया
मुढों रूह भला कौल दे वड़या जुसा छड के अंत फनाह होया
कारूं भुल जकात थी शुभ होया वाहद ओस ते कहर अलाह होया
भुल जिकरीए लई पनाह होजम1 आरी नाल उह चोर दोफाह होया
अमलां बाझ दरगाह विच पैण पौले लोकां विच मियां वारस शाह होया | panjabi-pan |
आजा-बे हीरा मोर जोहथों रद्दा तोर
आजाबे हीरा मोर
आजाबे हीरा मोर
जोहथों रद्दा तोर
थाड़े घठोंधा मा रे
असाढ़ करथे घुरुरघारर
सावन म बरसे झिमिरझामर
तोर सुरता म रो रोके
बोहागे आंखी के काजर
भींजगे लुगरा के छोर
सुहावे नहीं अंगना घरदुवार
बिरखाहे सुर सिंगार
तोर बिना चारो कोती
लगथे कुलुप अंधियार
आके कर दे अंजोर
आँसू चलथे झरझरझर
हिरदे कांपे थरथरथर
बिन धारन कस पटिया
होगेंव में निचट अधर
कबले भेजबे खबर सोंच
आजाबे हीरा मोर
आजाबे हीरा मोर
जोहथों रद्दा तोर
थाड़े घठोंधा मा रे | chhattisgarhi-hne |
पाँच लाडू पाँच धरिया
पाँच लाडू पाँच धरिया
फलाणा राय पाँच पड़िया
नाचरे म्हारा गणपति
गणपतियो तो नाचेगो
सेरी में धूम मचायेगो
नाचरे म्हारा गणपति | malvi-mup |
लैवौ राम नाम इक सच्चा
लैवौ राम नाम इक सच्चा ।
दूर होय दुख दच्चा ।
हिरनाकस पिहलाद के लानैं ।
कौन तमासो रच्चा ।
सबरे बरतन पके अबाके ,
बो बर्तन रऔ कच्चा ।
बरत आग सैं कूँदत आ गए ,
मनजारो के बच्चा ।
लैलै राम निकारौ , ईसुर ,
मिल्लादुल्लाफुच्चा । | bundeli-bns |
28
आख रांझया भा की बनी तेरे देस बाप दा छड सिधार नाहीं
वीरा अम्बड़ी जाया जा नाहीं सानूं नाल फिराक1 दे मार नाहीं
एह बांदियां असीं गुलाम तेरे कोई होर विचार विचार नाहीं
बखश एह गुनाह तूं भाबियां नूं कौन जंमिआ जो गुनहगार नाहीं | panjabi-pan |
मेंहदी गीत
खेड़िखड़ि काइ रेते कर्या ।
खेड़िखड़ि काइ रेते कर्या ।
जड़ि गुयो मेहंदी नो बीज ।
हात रंग्या पाय रंग्या ।
जड़ि गुयो मेहंदी नो बीज ।
रंग चुवे ।
हे बनी जमीन मंे हल चलाकर , मेहंदी का बीज ढूँढा । बीज बोया , तब जाकर मेहंदी का पौधा तैयार हुआ । वही मेहंदी हमने तेरे हाथपैर में लगा दी है । देखो मेहंदी का रंग कैसे खिल रहा है ? | bhili-bhb |
445
आ सहतीए वासता रब्ब दा ई नाल भाबियां दे मिठा बोलीए नी
होईए पीड़ वंडावड़े शहदियां दे जहर बिछूआं वांग ना घोलीए नी
कम बंद होवे परदेसियां दा नाल मेहर दे गंड नूं खोलीए नी
तेरे जही ननान हो मेल करनी जिऊ जान भी उस तों घोलीए नी
जोगी चल मनाईए बाग विचों हथ बन्न के मिठड़ा बोलीए नी
जो कुझ कहे सो सिरे ते मन लईए गमी शादियों मूल ना डोलीए नी
चल नाल मेरे तूं तां भाग भरीए मेल करनीए विच वचोलीए नी
वारस शाह मेरा ते रांझे दा मेल होवे खंड दुध दे विच चा घोलीए नी | panjabi-pan |
147
वार घतियां कौन बलाए कुता दुरकार के परां ना मारदे हो
असां भईअड़े पिटियां हथ लाया तुसीं एतनी गल न नितारदे हो
फरफेजियां मकरियां ठकरियां नूं 1 मूंह ला के चा विगाड़दे हो
मुठी मुठी हां ऐड अपराध पैंदा धीयां सद के परहे विच मारदे हो
एह लुचा मुशटंइड़ा असीं कुड़ियां अजे सच ते झूठ नितारदे हो
पुरूष होय के पढियां नाल घुलदा तुसीं गल की चा निघारदे हो
वारस शाह मियां मरद सदा झूठे रन्नां सचियां सच की तारदे हो | panjabi-pan |
आयो महीनो भादों को
आयो महीनो भादों को ।
मन समझादूं1 बौत2 ।
या मिली जादों स्वामी जी
या प्रभु देदो मौत । | garhwali-gbm |
आओ फकीरो मेले चलीए
आओ फकीरो मेले चलीए ,
आरफ का सुण वाजा रे ।
अनहद शब्द सुणो बहु रंगी ,
तजीए भेख प्याज़ा रे ।
अनहद वाजा सरब मिलापी ,
नित्त वैरी सिरनाजा रे ।
मेरे बाज्झों मेला औतर ,
रूढ़ ग्या मूल व्याजा रे ।
करन फकीरी रस्ता आशक ,
कायम करो मन बाजा रे ।
बन्दा रब्ब भ्यों इक्क मगर सुक्ख ,
बुल्ला पड़ा जहान बराजा रे । | panjabi-pan |
कालू भण्डारी
होलो कालू भण्डारी मालू1 मा को माल ,
अन्न का कौठारा2 छा वैका , वसती3 का भण्डारा ।
गाडू4 घटड़े5 छई , धारू6 मरूड़े7 ,
धनमातो8 छौ , अनमातो9 ,
जोवनमातो छौ कालू स्यो भण्डारी ।
कालू भण्डारी छौ जब सोल बरस को ,
आदी रात मा तैं सुपिनो होयो ,
सुपिना मा देखे बैन स्या ध्यानमाला ,
देखे वैन वरफानी काँठो10
बरफानी कांठा देखे ध्यानमाला को डेरो11 ।
चाँदी की सेज देखे , सेना का फूल ,
आग जसो आँख देखी , दिया जसी जोत ।
वाणसी अरेण्डी12 देखी , दईसी तरेण्डो13 ,
नौणसी गलखी14 देखी , फूलूसी कुटखी15 ।
हिया सूरज देख , पीठी मा चन्दरमा ।
मुखड़ी को हास देखे , मणियों कू परकाश ,
कुमालीसी ठाणा16 देखे , सोवन17 की लटा ।
तब चचड़ैक18 उठै कालू , भिभड़ैक19 बैठे ,
तब जिया20 बोद21 : क्या ह्वैलो मेरा त्वई ?
आज को सुपिनो जिया , बोलणो नी औन्दो ।
ना ले बेटा कालू सुपिना को बामो22 ,
सुपिना मा बेटा , क्या नी देखेन्दो ?
कख नी जायेन्दो , क्या नी खायेन्दो ?
मैन ज्यूण मरण जिया हिंवाला ह्वैक औण ,
तख रन्दी माता , वा बाँद23 ध्यानमाला ।
कालू भण्डारी मोनीन24 मोयाले25 ,
तब पैटी26 गए वो तैं नवलीगढ़ ।
भैर27 को रूखो छयो कालू भीतर को भूखो ।
कथी28 समझाये जियान29 वो ,
चली आये वो ध्यानमाला का गढ़ ।
ध्यानमाला औणी छै पाणी का पंद्यारा30 ,
देखी औन्द कालू भण्डारीन वा ,
हे मेरा परभू वा बिजली कखन छूटे हैं
सुपिना मा देखी छै जनी31 , तनी32 ही छ नौनी या
आछरीसी सची , सरप कीसी बची ,
अर देखे ध्यानमालान कालू भण्डारी वो ,
बांको ज्बान छौ वो , बुराँस कोसी फूल ।
तू मेरी जिकुड़ी छै बांकी ध्यानमाला ,
त्वै मा मेरो ज्यू छ ।
सुपिना मा देखी तू , तब यख आयूँ ,
आज तू मैसणी33 प्रेम की भीख दे ।
तब ली गये वै तैं ध्यानमाला अपणा दगड़ा34 ,
कुछ दिन इनी ही रैन वो गुपती रूप मा ।
तब बोलदो कालू भण्डारी ,
कब तैं रण रौतेली इनू लकी लूकीक ।
तब ध्यानमाला का बुवा35 धरमदेव ,
कालू भण्डारी मिलण गैगे ।
सूण सूण धरमदेव ,
मैं आयौं डाँड्यों36 टपीक37 , गाडू38 बगीक39 ।
मैंन जिऊण मरण राजा ,
तेरी नौनी ध्यानमाला ल्याण ।
ऐलैन्दो बैलोन्दो तब राजा धरमदेव ,
मेरा राजा मा आयाँ होला
हैका राज से पाँच भड़ ,
साधी40 लौलो ऊँ तै जु कालू भण्डारी
ब्यौवोलो त्वे ध्यानमाला ।
कालू भण्डारी का जोंखा41 बबरैन42 ,
वैकी छाती का बाल जजरैन43 ।
उठाये तब्री वैन नंगी शमशीर ,
चली गये हैका शैर भडू साधण ।
इतना मा गंगाड़ी हाट44 को रूपू ,
आये ध्यानमाला मांगण ।
ब्यौ को दिन तब निच्छै ह्वै गये
पकोड़ा पकीन , हल्दी रंगीन ,
नवली गढ़ मा कनौ उच्छौ45 छाये ।
कालू भण्डारी लड़दू रैये भडू का सात ,
तैका कानू मा खवर नी पौंछी ।
पिता की मरजी , अपणी नी छै वीं की ,
करांदी46 छ किराँदो47 वा नौनी ध्यानमाला ।
तब सुमिरण करदे वा कालू भण्डारी ,
तेरी मेरी प्रीत दूजा जनम ताई ।
किसमत फूटे मेरी विधाता ,
जोडी को मलेऊ फंट्याओ ।
तब दैखे वैन ध्यानमाला रोणी छै बराणी ।
जाणी याले वैन होई गये कुछ खटको ,
रौड़दोदौड़दो आये माला का भौन ।
हे मेरी माला , क्या सोची छयो मैन ,
अर क्या करी गये दैव ?
कालू भण्डारी , हे कालू भण्डारी ,
मेरा पराणू को प्याो होलो कालू भण्डारी ।
मेरो सब कुछ तू छ , मैं छऊँ तेरी नारी ।
देखे वीन कालू भण्डारी , क्वांसी48 आँख्योंन ,
हाथ बुरैया49 छा वैका , खुटा50 छा फुक्यां51 ,
काडो52सी होयूं छौ वो सूखीक ।
मेरा बाबा येन कतना तरास सहे ?
गला लगाये वींन तब कालू भण्डारी ,
मरण जिऊण मैंन येक ही जाण ।
तब बोलदू कालू भण्डारी :
तेरी माया ध्यानमाला मैंकू स्वर्ग का सामल53 ।
कु जाणी क्या हेन्द विधाता की लेख ,
पर मैं औलू व्यौ का दिन ,
तू मेरी माला आखरी फेरो ना फेरी ।
तब वखन चलीगे वो कालू भण्डारी ।
कुछ दिन बाद आये ब्वौ को दिन ,
गंगाड़ीहाट मा तब बरात सजे ,
ब्यौ का ढोल दमौऊँ धारू गाडू गाजीन ।
नवलीगढ़ राज मा भी बजदे बड़ई ,
मंगल स्नान होंदू , माला लैरेन्दी54 पैरेन्दी ,
धार55 मा गँणी56 सी देखेदी माला ।
बोलदी तब वींकी जिया57 मुल58 हैंसी ,
ध्यानमाला होली राजौं का लैंख59 ।
गंगाड़ोहाट का रूपू गंगसारा की
तब नबलीगढ़ बरात चढ़े ।
मँगल पिठाई होये , षट रस भोजन ।
तब व्यौ को लगन आये , फेरों की बगत ,
छं फेरा फेरीन मालान , सातों नी फेरे
मैं अपणा गुरू देखण देवा ।
तबरेक60 ऐ गये तख साधू एक ,
कालू भण्डारी छ कालू भण्डारी ,
पछाणीयाले61 मुखड़ी वैकी मालान
वीं की आँख्यों मा तब आस खिलीगे ,
प्रफूल ह्वैगे तब वा ध्यानमाला
मेरा गुरू जी होला तरवारी62 नाच का गुरू ,
मैं देखणू चाँदऊँ जरा नाच आज ऊँको ।
तब गुरूसाधु वेदी का धोर63 ऐगे ,
नंगी शमशीर चमकाई वैन ,
एक फरकणा64 फुन्डो65 मारी , एक मारे उन्डो66
पिंडालू67 सी काटीन वैन , मोदड़ा68 सी फाड़ीन ।
कुछ भागीन , कुछ मान्या गईन ,
मान्या गये वो रूपू गंगसारो भी ।
तब वख मू ध्यानमाला ही छुटी गये ।
लौटी औन्दू तब वीं मू कालू भण्डारी
ओ मेरी माला आज जनम सुफल होये ,
अगास69 की जोन70 पाये मैंन फूलूसी डाली ।
तब जुकड़ा71 लेगे हाथू मा धरीले वा
आज मेरा मन की मुराद पूरी होये ।
तबरे लुक्यूँ उठे रूपू को भाई
लूला गंगोला वैको नऊँ छयो
मारी दिने वैन कालू भण्डारी धोखा मा ।
रोये बराये तब राणी ध्यानमाला ,
भटके जनी ऊखड़72 सी माछी ।
मैं क तैं पायूँ सोहाग हरचे73 ,
मैंक तैं मांगी भीख खतेण74 ,
कनो मैंक तई दैव रूठे ?
रखे दैणी जंगापर वींन कालू को सिर ,
बाई जांग पर धरे वो रूपू गैगसारो ।
रौंदी बरांदी चढ़े चिता ऐंच ,
सती होई गये तब ध्यानमाला | garhwali-gbm |
जेरेमा रेपे डो कोवा हेचकेन
जेरेमा रेपे डो कोवा हेचकेन
जेरेमा रेपे डो कोवा हेचकेन
आम्बे नी पाला रोकोमा रोको डो साडी मारे
आम्बे नी पाला रोकोमा रोको डो साडी मारे
देठ जाने डो भूट जाने
देठ जाने डो भूट जाने
डोरानी आम्बे पाला रोकामारो कोडो साडी मारे
डोरानी आम्बे पाला रोकामारो कोडो साडी मारे
स्रोत व्यक्ति संगीता , ग्राम कुकड़ापानी | korku-kfq |
किसिआं बान्ना हे न्योंदिए
किसिआं बान्ना हे न्योंदिए
घर किसिआं के हे जा
यू बनवाड़ा हे न्योंदिए
सिरी राम बन्ना हे न्योंदिए
घर राम जी के हे जा
यू बनवाड़ा हे न्योंदिए
फीडे मारे हे मोचड़े
चाले हे नान्हड़ी चाल
चादर ओढ़े ए तीन पटी
बैठ भाईआं के हे बीच
यू बनवाड़ा हे न्योंदिए | haryanvi-bgc |
ताकतवर बलवान बना
ताकतवर बलवान बना , क्यूं भुंडी सकल बनाई रे
के बुज्झेगा मन मेरे की घणी मुसीबत आई रे
दइ्र खुदा ने टांग बड़ी जो दो दो गज तक जाती रे
ऊपर बोज्झा लदे घणा जब तीन तीन बल खाती रे
पेट उभरमा छाती चठमा इडर से सज जाती रे
लगें रगड़के इडर के ना मिलता कोई हिमाती रे
धन धन तेरे नाती तेरी माता बाबल भाई रे
के बुज्झेगा मन मेरे की घणी मुसीबत आई रे | haryanvi-bgc |
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज , महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
तौपे पान चढ़े , तौपे फूल चढे़ , तो पै पान . . .
और चढ़े दूध की धार , हाँ धार । तेरे माथे .
तेरे गले में कण्ठा सोह रह्यौ , तेरे गले में . . .
तेरी झाँकी बनी विशाल , विशाल ,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यौ । श्री .
तेरी झाँकी बनी विशाल , विशाल ,
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ । श्री .
तेरी सात कोस की परिक्रमा , तेरी सात . . .
चकलेश्वर है विश्राम , विश्राम
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ ॥ श्री . | braj-bra |
गगा को मान बड़ा भारी
गंगा को मान बड़ा भारी ,
चलो बहनों मुक्ती सुधारी ।
तारन के लाने सहज में न आई ,
तप करके भागीरथ निकारी । चलो दीदी . . . .
गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में
भोला शिवत्रिपुरारी । चलो दीदी . . . .
तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं
गंगा की महिमा है न्यारी । चलो दीदी . . . .
जावे के लाने कछु अड़चन नैयां
दिन भर चले मोटर गाड़ी । चलो दीदी . . . .
गंगा जी जावें परम गति पावें
मन में विश्वास करो भारी । चलो दीदी . . . .
गंगा जी जावे खों सब कोई विचारे
भागों से मिले तारन हारी । चलो दीदी . . . . | bundeli-bns |
परोस दिये भाजी लड्डू पूरी पकवान जी
परोस दिये भाजी लड्डू पूरी पकवान जी
जीमो जीमो समधी पंच पकवान जी
बताओ बताओ समधी अपनी बात जी
मां हमारी चांदनी और बाबुल पूनो का चांद जी
हमारे सारे भाई राज कुंवर बहन रानी राधिका जी
बहू हमारी चम्पा की कली सोभा है रनिवास की
मां तुम्हारी नटनी और बाप तुम्हारा बटुआ जी
तुम सारे भाई बनजारे बहन तुम्हारी बांदियां सी जी | haryanvi-bgc |
नाचो डी टेन हाजे डाई नाचो डी टेन हाजे
नाचो डी टेन हाजे डाई नाचो डी टेन हाजे
नाचो डी टेन हाजे डाई नाचो डी टेन हाजे
नाचो डी टेन हाजे डाई नाचो डी टेन हाजे
आमा कोन डो आमा किमिन
हल्दी घाटो चोखा चावल मेंढा
बोकरा समाले जे ढाई
आमा बोको आमा किमिन हल्दी घाटी चोखा
आमा रानी आमा कोन की हल्दी
स्रोत व्यक्ति सीताराम बैठ , ग्राम टेमलावाड़ी | korku-kfq |
लीली घोड़िया बर असबरवा
लीली घोड़िया बर असबरवा , हाथ सोबरन के साँट1 हे सखी ।
राति देखल घर मोरे आयल , पेन्हि ओढ़ि धीय जमाइ2 हे सखी ॥ 1 ॥
औंठीपौंठी3 सूतल सारी4 सरहजबा5 पोथानी6 सूतल नीचे सास हे ।
ओते सुतूँ7ओते सुतूँ सासु पंडिताइन , लगि जयतो8 पेरवा9 के धूर हे ॥ 2 ॥
किया तोंहे हउ बाबू सात पाँच के जलमल , किया मलहोरिया10 तोहर बाप हे ।
नइ हम हिअइ11 सासु , सात पाँच के जलमल ।
हम हिअइ पंडितवा के पूत हे ।
मलहोरिया हइ12 रउरे लगवार13 हे ॥ 4 ॥
अइसन जमइया माइ हम न देखलूँ , रभसि रभसि14 पारे गारी हे ॥ 5 ॥ | magahi-mag |
पातर-पातर गोरिया के पतरी कमरिया
पातरपातर गोरिया के पतरी कमरिया
मोर सँवरिया रे पतरी डगरिया धैले जाय
पातर लपलप गोर पतरी अंगुरिया
मोर सँवरिया रे लचकत पनिया के जाय
सड़िया के आरीआरी गोटवा के जारी
मोर सँवरिया रे मटकत रहिया के जाय
गावेले महेंदर मिसिर दूहो रे पुरुबिया
मोरे सँवरिया रे , देखते में जिया ना अघाय । | bhojpuri-bho |
तेरौ जनम सुफल है जाय
तेरौ जनम सुफल है जाय लगायलै रज ब्रजधाम की । टेक ।
काट दें पाप तेरे ब्रजराज ,
लगाय लै परिकम्मा गिर्राज
बनें सब तेरे बिगड़े काज ।
दोहा काम तेरे बिगड़े सभी , दें बनाय वृजचन्द ।
करते भव से पार हैं , वे माधवचन्द मुकुन्द ॥
हृदय के पट खोल और , करि झाँकी श्याम की ॥ 1 ॥
मानसी गंगा कर स्नान ,
प्रेम से चरनामृत कर पान ,
लगा मंसा देवी से ध्यान ।
दोहा दर्शन कर महादेव के , पूरन करें मुराद ।
चकलेश्वर महादेव जी , हरें तेरी सब व्याधि ॥
हरें तेरी सब व्याधि , लगा लौ तू शिव नाम की ॥ 2 ॥
दान घाटी पै दूध चढ़ाय ,
प्रेम सै दै परसाद लगाय ,
बाँट विप्रन को भोग उठाय ।
दोहा परिकम्मा कर नेम से , सात बार तू यार ।
दण्डौती कर प्रेम से , है जाय भव से पार ॥
हे जाय भव से पार , लगा रट तू राधेश्याम की ॥
लगाय लै गोता चलती टैम ,
धार कै हर पूनों कौ नैम ,
करियो दर्शन उठिते खैम ।
दोहा कीने जितने पाप हैं , धुलें सभी अज्ञान ।
कामक्रोध और मोह को तजि मुरख नादान ॥
कहते ‘गेंदालाल’ भजन कर पुतली चाम की ॥ | braj-bra |
अफई उफून मोनई तुरीया
अफई उफून मोनई तुरीया
अफई उफून मोनई तुरीया
लिजा टियानेन इनी का टइईया
लिजा टियानेन इनी का टइईया
पोलका टियायेन इनी का टड़ईया
पोलका टियायेन इनी का टड़ईया
बिगड़ी फड़ीयेन इनी का टड़ईया
बिगड़ी फड़ीयेन इनी का टड़ईया
जाम लज्जेन इनी का टड़ई
जाम लज्जेन इनी का टड़ई
जाम लज्जेन इनी का टड़ई
स्रोत व्यक्ति परसराम पठारे , ग्राम लखनपुर | korku-kfq |
इंज सेनेवा सेनेवा जा राजा गावां सिरेन
इंज सेनेवा सेनेवा जा राजा गावां सिरेन
इंज सेनेवा सेनेवा जा राजा गावां सिरेन
गाना बजना जा सेने बोले
गाना बजना जा सेने बोले
बाकीमा सेने इयां रानी गावां सिरेन
बाकीमा सेने इयां रानी गावां सिरेन
गाना बजना डो बाकी सेने
गाना बजना डो बाकी सेने
गाँव का लोग जले डो रानी गावां सिरेन
गाँव का लोग जले डो रानी गावां सिरेन
गाना बजना डो बाकी सेने
गाना बजना डो बाकी सेने
जलने वालों को जलन दे राजा
जलने वालों को जलन दे राजा
बोलने वालों को बोलन दे राजा
बोलने वालों को बोलन दे राजा
गावां सिरेन गाना बजना जा इंज सेने
गावां सिरेन गाना बजना जा इंज सेने
बाकीमा सेने इयां डो रानी
बाकीमा सेने इयां डो रानी
बालेमा बोले इयां बारेन डो डो डो मारे
बालेमा बोले इयां बारेन डो डो डो मारे
बाकीमा सेने इयां डो रानी आमा जाने इयां जाने
बाकीमा सेने इयां डो रानी आमा जाने इयां जाने
कलंगी बारे डो हाजे बोले
कलंगी बारे डो हाजे बोले
स्रोत व्यक्ति पार्वती बाई , ग्राम मातापुर | korku-kfq |
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डारां खूबां दीयां मेलणां दे मेल आइयां हूरपरी दी होश गवांदियां ने
लख जटियां मुशक पलटियां ते आण पदमनी वाग सुहांदियां ने
बारां जात ते सत सनात1 ढुकी रंग रंग दीयां सूरतां आंदियां ने
परीजात जटेटियां नैण खूनी नाल हेक महीन दे गानदियां ने
उते भोछन सन पंज पलिए2 दे अते लुंगियां तेड़ झनादियां ने
नाल आरसी मुखड़ा देख सुन्दर खोल आशकां नूं तरसांदियां ने
इक खेल चादरां कढ छाती उपर वाड़यां झातियां पांदियां ने
इक वांग बसातियां3 कढ लाटू वीराराध4 दी नाफ5 दिखांदियां ने
इक ताड़ी मारदियां नचदियां ने इक शौहदियां घाड़ियां गांदियां ने
इक गायके कोइयां काग होइयां इक राह विच दोहरे लांदियां ने
इक आखदी मोर ना मार मेरा इक विच मसोलड़ा6 गांदियां ने
वारस शाह जिउ शेरगड़ कपट मेटन लख सगतां जिआरातां आंदियां ने | panjabi-pan |
Subsets and Splits
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