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केकर रोवले गँगा बही गेल, केकर रोवले समुन्दर हे
केकर1 रोवले गँगा बही गेल , केकर रोवले समुन्दर हे ।
केकर रोवले भिजलइ चदरिया , केकर अँखिया न लोर2 हे ॥ 1 ॥
अम्माँ के रोवले गँगा बही गेल , बाबूजी के रोवले समुन्दर हे ।
भइया के रोवले भिंजले चदरिया , भउजी के अँखिया न लोर हे ॥ 2 ॥
कवन कहल बेटी रोज रोज अइहें , कवन कहले छव मास हे ।
कवन कहले भउजी काज परोजन3 कवन कहले दूरि जाहु4 हे ॥ 3 ॥
अम्माँ कहले बेटी रोज रोज अइहें , बाबूजी कहले छव मास हे ।
भइया कहले बहिनी काज परोजन , भउजी कहलन दूरि जाहु हे ॥ 4 ॥
का तोरा भउजी हे नोन5 हाथ देली , न देली पउती6 पेहान7 हे ।
का तोरा भउजी हे चूल्हा चउका रोकली , काहे कहल दूरि जाहु हे ॥ 5 ॥ | magahi-mag |
समझा ले अपनो लाल री
समझा ले अपनो लाल री मेरी छुप गयो आज अटरिया में
मैं गोबर गेरन जाऊं मेरे संग चले है नन्द लाला
मेरो गोबर को तो गोबर बखेरो धर गयेा डुक्क कमरिया में
समझा ले अपनो लाल री . . .
मैं पानी भरने जाऊं मेरे संग चले है नन्द लाला
मेरो पानी को तो पानी पीयो मेरे कर गयो छेद मटकिया में
समझा ले अपनो लाल री . . .
मैं दूध बिलोवन जाऊं मेरे संग चले है नन्द लाला
मक्खन को मक्खन खायो मेरी कर गयो छेद मटकिया में
समझा ले अपनो लाल री . . . | haryanvi-bgc |
रलियो मांडपड़ो सुवावणो जी
जी ओ पेलो यो खंब मोती भर्योजी जी ओ दूसरो
यो खंब हीरा भर्योजी जी ओ रचो म्हारे मांडप हेट
आज रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी ।
जीओ तीसरो यो खंब चोखा भर्योजी जी ओ
चोथो यो खंब कंकु भर्योजी रचो म्हारा
मांडपड़ा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी ।
जीओ पांचमो यो खंब सुपारी भर्योजी
जीओ छटो यो खंब नारेलाँ भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी ।
जीओ सातमो यो खंब हलदी भर्योजी
जीओ आठमो यो खंब लोगाँ भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी ।
जीओ नवमो यो खंब डोड़ा भर्योजी
जीओ रचो म्हारा मांडवा हेट रलीयो मांडपड़ो सुवावणोजी । | malvi-mup |
449
सहती आखया पेट ने खुआर कीता कणक खा बहिश्त थी कढया ए
आई मैल तां जनत तों मिले धके रसा आन उमैद दा वढया ए
आख रहे फरिशते कणक दाना नहीं खावना हुकम कर छडया ए
सगों आदम ने हव्वा नूं खुआर कीता साथ उसदा एस ना छडया ए
वारस किसे दा असां ना बुरा कीता ऐवें नाम जहान तों छडया ए | panjabi-pan |
नाना म्हारा का ठुमक्या पांय
नाना म्हारा का ठुमक्या पांय ,
ठुमुक ठुमुक भाई वाड़ी मऽ जाऽय ।
वाड़ी मऽ का वनफल तोड़ तोड़ खाय ,
एतरा मंऽ आई गई मालेण मांय ।
मालेण मांय नऽ छोड़ई लिया झगा नऽ झूल ,
रड़ऽ कुढ़ऽ रे म्हारो नानो भाई ।
रस्ता मऽ मिली गई भूआ मांय ,
क्यों रड़ऽ रे म्हारा नारा भाई ।
नाना भाई नऽ तोड़ी लिया कमल का फूल ,
मालेंण मांय नऽ छोड़ई लिया झगा नऽ झूल ।
लऽ वो , मालण मांय , थारा कमल का फूल ,
दऽ म्हारा नाना का झगा नऽ झूल । | nimadi-noe |
माता यसोदा दही बिलोवे
माता यसोदा दही बिलोवे
कान्हूड़ो राड़ मचावै
दही को सपड़को कान्हे ने भावे
ले ले रे कान्हा दही रे गोड़ियो
बाहर सूँ बाबो नन्द जी आयो
तेरी कान्हूड़ो बहुत हठीलो
हार तोड़े मोती मांगे बालूड़ो | haryanvi-bgc |
365
मान मतिए रूप गुमान भरिए भैड़े कारीए गरब गहेलीए नी
एडे फंद फरेब ने याद तैनूं किसे वडे उस्ताद दी चेलीए नी
एस हुसन दी ना गुमान करीए मान मतीए गरब1 गहेलीए नी
तेरी भाबी दी नहीं प्रवाह सानूं वडी हीर दिये अंग सहेलीए नी
मिले सिर नूं ना विछोड़ दईए सगों विछड़े सिरां नूं मेलीए नी
केहा वैर फकीर दे नाल चायो पिछा छड अनोखिए लेलीए नी | panjabi-pan |
531
चुप हो जोगी सहज बोलया ए जटा कास नूं पकड़यो काहियां नूं
असीं छड जहान फकीर होए एहनां दौलतां ते बादशाहियां नूं
याद रब्ब दी छड कके करन झेडे ढूंढ़न उडदियां छड के फाहियां नूं
तेरे नाल ना चलियां नफा कोई मेरा इलम ना फुरे वियाहियां नूं
रन्न सचियां नूं करन चा झूठे रन्नां कैद करांदियां राहियां नूं
वारस कढ कुरान ते बहें मिंबर1 केहा अडयो मकर दियां फाहियां नूं | panjabi-pan |
मुरलिया बाजे जमुना तीर
मुरलिया बाजे जमुना तीर
बंशी बाजी जमुना तीर
हाथों के गहिने राधा पैरों में पहिने
ओढ़ आई उल्टा चीर रे । मुरलिया . . .
संग की सहेली मैंने कुआओं पे छोड़ी
छोड़ आई कुल की रीति रे । मुरलिया . . .
सास ननद मैंने सोवत छोड़ी
छोड़ आई साजन और बीर । मुरलिया . . .
ऐसे प्रेम रंगे सब मोहन
बिनती करूं मैं रघुबीर । मुरलिया . . . | bundeli-bns |
बाजरा कह मैं बड़ा अलबेल्ला
बाजरा कह मैं बड़ा अलबेल्ला
दो मुस्सल तैं लडूं अकेला
जै मिरी नाजो खिचड़ी खाय
फूलफाल कोठी हो जाय | haryanvi-bgc |
505
बारां बरस दी औड़ सी मिह बुठा लगा रंग फिर खुशक बगिचियां नूं
फौजदार तगयार बहाल होया बांझ तंबूयां अते गलिचियां नूं
बाहियां सुकियां सबज मुड़ फेर होइयां एस हुसन जमीन नूं सचियां नूं
वारस वांग किशती परेशान हां मैं पानी पहुंचया नूंह दे टिचियां नूं | panjabi-pan |
तैं कित पर पाओं पसारा ए?
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
कोई दम का एहना गुज़ारा ए ।
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
इक्क पलक छलकदा मेरा ए ।
कुझ कर लै एहो वेला ए ।
इक्क घड़ी गनीमत दिहाड़ा ए ।
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
इक्क रात सराँ दा रहणा ऐं ।
एत्थे आकर फुल्ल ना बहणा ऐं ।
कल्ल सभ दा कूच नकारा1 ए ।
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
तूँ ओस मकानों आया ऐं ।
एत्थे आदम2 बण समाया ऐं ।
हुण छड्ड मजलस कोई कारा ए ।
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
बुल्ला सहु एह भरम तुमारा ए ।
सिर चक्केआ परबत भारा ए ।
ओह मंज़ल राह ना खाहड़ा ए ।
तैं कित पर पाओं पसारा ए ?
तैं कित पर पाओं पसारा ए ।
कोई दम का एहना गुज़ारा ए । | panjabi-pan |
लाडो खेलै लौंग के बिरवे तल
लाडो खेलै लौंग के बिरवे तल
तेरे दादा ने लयी है बुलाय
चलो बीबी महलों में
तेरे बाबुल ने लयी है बुलाय
चलो बीबी महलों में
तेरे मामा ने लई है बुलाय
चलो बीबी महलों में
तेरी सजती सी आवै बारात
चलो बीबी महलों में
तेरे बजते से आवै निसान
तेरे उड़ते से आवै गुलाल
चलो बीबी महलों में
तेरा घोड़े पै सज रहा दूल्हा
पीछे बराती आवै साथ
चलो बीबी महलों में | haryanvi-bgc |
एक माय का पाँची ही पूतां
एक माय का पाँची ही पूतां
पांची का मता जुदाजुदा
पेलो पंडित के , में कासीजी जाऊँ
गंगा में न्हाऊँ , बिस्वनाथ भेंटूं
जेका धरम से में उद्धरूँ
दूसरो पंडित के में उज्जण जाऊँ
अवंती में न्हाऊँ , महाकाल भेंटूं
जेका धरम से में उद्धरूँ
तीसरो के में बाग लगाऊँ
तुलसा परणाऊँ , बामण जिमाऊँ
जेका धरम से में उद्धरूँ
चौथे पंडित के में बेण परणाऊँ
भाणेज परणाऊँ , जात जिमाऊँ
जेका धरम से में उद्धरूँ
पांचवों पंडित कईये नी जाणे
पेट भरी ने धंदो करूँ
हरहर जिवड़ा तू रयो रे उदासी
रयो रे लुभासी
बरत न कियो रे एकादशी
बरत एकादशी , धरम दुवादसी
तीरथ बड़ो रे बनारसी
एकादशी ना डाड़े जीमे छें थूली
अंतकाल प्रभु मारग भूली
एकादशी ना डाड़े जीमे छे खिचड़ी
अंतकाल प्रभु मेले बिछड़ी
एकादशी ना डाड़े पोड़ेढोले
अंतकाल प्रभु अवगत डोले
व्दासी ना डाड़े जीमे छे भाजी
अंतकाल प्रभु नइ्र छे राजी
व्दासी ना डाड़े जीमे छे कांसे
अंतकाल प्रभु मेले सांसे
व्दासी ना प्रभु डाड़े जीमे छे चोखा
अंतकाल प्रभु मारग सीधा
घी बिना धरम ना होय हो पंडित जी
पत्र बिना कुल ना उद्धरे
घृत बिना होम ना होय हो पंडित जी
तिल बिन ग्यारी न होय
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
हरि चरणा चित लागी | malvi-mup |
पाणी पिला दे भरतार
पाणी पिला दे भरतार
तिसाई मर गी खेत मैं
कोड्डी तो हो के पी ले नार
पाणी तो भर रह्या लेट मैं
क्यूं कर पिऊं भरतार
छोरट ते मेरे पेट में
न्यूं तो बता दे मेरी नार
किस ने तौं घाली खेत मैं
बड़िये जिठाणी चकचाल
जेठै ने घाली खेत मैं | haryanvi-bgc |
धार नगर का पापी हो राजा
धार नगर का पापी हो राजा
उन मेरी सेवा नई कर जाणी
करवा नगर का ठाकुर
उन मेरी सेवा नई कर जाणी
उन मेरी पाठ बंचाया
उन मेरी ओढ़नी ओढ़ाई
उन मेरी होम करायो
धार नगर का पापी राजा
उन्होंने मेरी सेवा करना नहीं जानी
करबा नगर का ठाकुर
उन्होंने मेरी सेवा करना जानी
उन्होंने पाठ कराया
उन्होंने ओढ़नी ओढ़ाई
उन्होंने हवन कराया | malvi-mup |
होरे कू खाडू रुड मा रुड आजे डो
होरे कू खाडू रुड मा रुड आजे डो
होरे कू खाडू रुड मा रुड आजे डो
जल्मी आयोम सोने की किवाडू खोलो
जल्मी आयोम सोने की किवाडू खोलो
हीरा लाल टेगेनवा डो जल्मी आयोम
हीरा लाल टेगेनवा डो जल्मी आयोम
स्रोत व्यक्ति माखन , ग्राम आमाखाल | korku-kfq |
ननदी अँगनमा चनन केरा हे गछिया
ननदी अँगनमा1 चनन ेकरा2 हे गछिया ।
ताहि चढ़ि बोलय कगवा कुबोलिया ॥ 1 ॥
मारबउ3 रे कगवा हम भरल बढ़निया4 ।
तोहरे कुबोली बोली पिया5 गेल परदेसवा
हमरा के छोड़ि गेल अपन कोहबरवा ॥ 2 ॥
काहे लागी मारमें6 गे भरल बढ़निया ।
हमरे बोलिया औतन7 पिया परदेसिया ॥ 3 ॥
तोहरे जे बोलिया औतन पिया परदेसिया ।
दही भात मिठवा8 खिलायम9 सोने थरिया10 ॥ 4 ॥
उड़ि उड़ि कगवा हे गेलइ नीम गछिया ।
धम से पहुँची गेलइ पिया परदेसिया ॥ 5 ॥ | magahi-mag |
सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया
सासु मोरा मारे राम बाँस के छिऊकिया
मोर ननदिया रे सुसुकत पनिया के जाय
छोटेमोटे पातर पियवा हँसि के ना बोले
मोर ननदिया रे से हू पियवा कहीं चलि जाय
गंगा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
मोर ननदिया रे पैयाँ धरत बिछलाय
कहत महेंदर श्याम इहो रे पुरुबिया
मोर ननदिया रे पिया बिनु रहलो ना जाय | bhojpuri-bho |
253
जोग करन सो मरन थीं होए असथिर जोग सिखीए सिखना आया ई
निहचा धार के गुरु दे सेव करिये एह भी जोगियां दा फरमाया ई
नाल सिदक यकीन दे बन्न तकवा धन्ने पथरों रब्ब नूं पाया ई
मैल दिल दी धो के साफ कीती तुरत गुरु ने रब्ब मिलाया ई
बचा सुनो इस विच कलबूत खाकी सचे रब्ब ने थां बनाया ई
वारस शाह मियां हमाओसत1 जापे सरब्ब मय भगवान नूं पाया ई | panjabi-pan |
अंजन की सीटी में
अंजन की सीटी में म्हारो मन डोले
चला चला रे डिलैवर गाड़ी हौले हौले
बीजळी को पंखो चाले , गूंज रयो जण भोरो
बैठी रेल में गाबा लाग्यो वो जाटां को छोरो
चला चला रे . . .
डूंगर भागे , नंदी भागे और भागे खेत
ढांडा की तो टोली भागे , उड़े रेत ही रेत
चला चला रे . . .
बड़ी जोर को चाले अंजन , देवे ज़ोर की सीटी
डब्बा डब्बा घूम रयो टोप वारो टी टी
चला चला रे . . .
जयपुर से जद गाड़ी चाली गाड़ी चाली मैं बैठी थी सूधी
असी जोर को धक्का लाग्यो जद मैं पड़ गयी उँधी
चला चला रे . . .
शब्दार्थ :
डलेवर ड्राईवर
गाबा गाने लगना
डूंगर पहाड़
नंदी नदी
ढांडा जानवर
जद जब जदी , जर और जण भी कहा जाता है
असी ऐसा , इतना | rajasthani-raj |
मेरी बावन गज की बूंद
मेरी बावन गज की बूंद सास डीब के बीच धरी हे री डीबे के बीच धरी
ओढ़ पहर पाणी जां सास पाड़छे में आण खड़ी हे री पाड़छे में आण खड़ी
पाणी भर के उल्टी आऊं , सास सन्टर के बीच खड़ी हे री सन्टर के बीच खड़ी
सासू जल्दी सी दौघड़ तार मेरी तो नाड़ी छूट लई हे री नाड़ी छूट लई
बाहरणै ते आया भरतार आज मां किसी खाट घली हे री किसी खाट घली
बेटा कहूं कही ना जा तेरी नोटंकी के नजर हुई तेरी रे नोटंकी नजर हुई
बैदा लेले डेढ़ हजार मेरी नौटंकी नै कर दै खड़ी हे रे नौटंकी करदे खड़ी
बच्चा पीसा ल्यूं ना एक तेरी नौटंकी मरी पड़ी हे रे नौटंकी मरी पड़ी
तनै याके करी भगवान मेरी तो माया लूट लई हे रे माया लूट लई
म्हारी सास केसी जोट आज इकले नै छोड़ चली हे रे इकलै ने छोड़ चली
पिलंग्या पै सोवण आली आज धरती में ल्हास पड़ी हे री धरती में ल्हास पड़ी
तेरा देबी बरगा रूप मुट्ठी भर राख होई हे रे मुट्ठी भर राख होई | haryanvi-bgc |
बागां मैं दुख सै बगीचां मैं दुख सै
बागां मैं दुख सै बगीचां मैं दुख सै
पेड़ कटै ए जद डालिआं मैं दुख सै
न्यूं मत जाणै ए बेबे
तालां मैं दुख सै ए कलिआं मैं दुख सै
ताल सुखए जद मछिआं मैं दुख सै
न्यूं मत जाणै ए बेबे
राणी मैं दुख सै रोहतास मैं दुख सै
भंगी घर पाणी भरै राजा मैं दुख सै
न्यूं मत जाणै ए बेबे
राम मैं दुख सै ए लिछमन मैं दुख सै
सीता हड़ी ए जद रावण मैं दुख सै
न्यूं मत जाणै ए बेबे | haryanvi-bgc |
तिलकी परन तिलन सें हलकी
तिलकी परन तिलन सें हलकी ,
बाँय गाल पै झलकी ।
मानौ चुई चाँद के ऊपर ।
बुंदकी जमना जल की ।
मानों फूल गुलाब के ऊपर ,
उड़ बैठन भई अलकी ।
के गोविन्द गुराई दै कैं ।
बैठ गये कर छलकी ।
जी में लगी ईसुरी जी के ,
दिल के दाब अतल की । | bundeli-bns |
कहमा उपजल झालर गुअवा
कहमा उपजल झालर गुअवा ,
कहमा डाटरि पान
इहो पान खैता रानू सरदार
रंगौता बतीसो मुख दाँत
सातो बहिन मंे कोसिका दुलारि छलै
तकरे से रंगाबै रानू दाँत
देखहोदेखहो आहे पिया
दाँत केर जोतिया
देखे देहो अपनी सुरतिया
अखनी ने देखे देबौ सुरतिया
घर में छै माय हे बहिन
जखनी जे देखे देबौ
दाँत केर जोतिया
तोहरा से होइतै पिरीत । | angika-anp |
सिया खड़ी पछताय कुस बन में हुए
सिया खड़ी पछताय कुस बन में हुए
जो यहां होती ललना की दाई
ललना देती जमाय सूरज देती पजाय
मुन्ना लेती खिलाए । कुस बन में हुए । ।
जो यहां होती ललना की नायन
मंगल देती गवाय चौक देती पुराय
न्हान देती नहलाय । कुस बन में हुए । ।
जो यहां होती ललना की दादी
चरुए देती धराय , खुसियां लेती मनाय
बाजे देती बजवाय । कुस बन में हुए । ।
जो यहां होती ललना की चाची
पलंगा देती बिछाय दीपक देती जलाय
घुट्टी देती बनाय । कुस बन में हुए । ।
जो यहां होती ललना की ताई
ललना लेती खिलाय मोहरें देती लुटाए
नेग देती दिलाय । कुस बन में हुए । ।
जो यहां होती ललना की बुआ
सतिये देती धराय काजल देती लगाय
दूध देती पिलवाय । कुस बन में हुए । । | haryanvi-bgc |
बसती बसत लोग बहुतेरे
बसती बसत लोग बहुतेरे ।
कौन काम के मोरें ।
बैठे रहत हजारन को दी ,
कबऊँ न जे दृग हेरे ।
गैल चलत गैलारे चर्चे ,
सब दिन साझ सबेरे ।
हाय दई उन दो ऑखन बिन ,
सब जग लगत अँधेरे ।
ईसुर फिर तक लेते उन खाँ
वे दिन विध ना फेरे । | bundeli-bns |
घर घर डोलऽहे नउनियाँ, त हाथ ले महाउर हे
घर घर डोलऽहे1 नउनियाँ , 2 त हाथ ले महाउर3 हे ।
राजा , मोरा तूँ रँगा दऽ पियरिया4 महल उठे सोहर हे ॥ 1 ॥
जसोदा जी नंद के बोलाय के सभे हाल पूछल हे ।
राजा , गुनी5 सभ अधिको न जाँचथि , हिरदा जुड़ाइ देहु6 ना ॥ 2 ॥
नंद कयलन धनदान से7 मन हरखायल हे ।
गेयानी गुनी सभ भेलन नेहाल8 अउरो कुछ चाहिए हे ? ॥ 3 ॥
किया तोरा चाह हउ9 नउनियाँ , माँगु मुँह खोली खोली गे ।
नउनियाँ , देबऊ में अजोधेया के राज , आउरो कछु चाहही10 गे ॥ 4 ॥
हँसि हँसि बोलहइ नउनियाँ त सुनहु बचन मोरा हे ।
राजा हम लेबो सोने के सिकड़िया , अजोधेया राज की करब हे ? ॥ 5 ॥
जसोदा जी देलकन11 सिकड़िया , रोहन12 गल हाँसुल13 हे ।
राजा देलन पाट पिताम्बर , महल उठे सोहर हे ॥ 6 ॥
आवहु नयना14 से गोतनी अउरो सभ सुन्नर15 हे ।
गावहु आज बधइया , महल उठे सोहर हे ॥ 7 ॥
बूढ़ीं सूढ़ी देलकन असिसववा जुअहु16 पूत पंडित हे ।
ललना , सुनरी के नयना जुड़ायल लोग बाग हरखित हे ॥ 8 ॥
जे इह सोहर गावल , गाइ सुनावल हे
ललना जलम जलम अहियात , पुतर फल पावल हे ॥ 9 ॥ | magahi-mag |
तूं क्यूँ रे पूत अकेलड़ा तेरा लाखी रे दादा तेरे साथ
तूं क्यूँ रे पूत अकेलड़ा तेरा लाखी रे दादा तेरे साथ
नौरंग रचा तेरा सेहरा
तंू क्यूं रे पूत अकेलड़ा तेरा काका रे ताऊ तेरे साथ
नौरंग रचा तेरा सेहरा
तूं क्यूं रे पूत अकेलड़ा तेरा लाखी रे बाब्बू तेरे साथ
नौरंग रचा तेरा सेहरा
तूं क्यूं रे पूत अकेलड़ा तेरा लाखी रे फूफा तेरे साथ
नौरंग रचा तेरा सेहरा
तूं क्यूं रे पूत अकेलड़ा तेरे भाइयां की जोड़ी तेरे साथ
नौरंग रचा तेरा सेहरा | haryanvi-bgc |
गाली गीत
काकड़ी नो वेलों , खड़ोखड़ो वाजे ।
याहिणिंक ढुके ते , घमघुले वाजे ।
बेनो निहिं मान्यो ने , भिलड़ा मा लायो ।
बेनो निहिं मान्यो ने , दात्याला मा लायो ।
बेनो निहिं मान्यो ने , डाहवाला मा लायो ।
बेनो निहिं मान्यो ने , ढुमाला मा लायो ।
बेनो निहिं मान्यो ने , दारूड्या मा लायो ।
ककड़ी का वेला खड़खड़ बज रहा है , समधन को ठोकें तो धमाधम आवाज आ रही है । बना नहीं माना अपनी मर्जी से लाड़ी पसंद की और ‘भिलड़ो’ में ले आया अर्थात्व्य वहार अच्छा नहीं है । बना नहीं माना , दाताकच्ची करने वालों में ले आया । घमंडियों में ले आया । धूम करने वाले घमंडियों में ले आया , दारू पीने वालों में ले आया । | bhili-bhb |
नागरजा
केको भाग लालो , केन करलो स्नान ।
तब बोदा सांवल भगीवान
तेरा बांजा वैराट मौसा , मैं चलदू बणौल ।
यनी फैलाये भगवानन लीला
गायों का करेन गोठ , भैसू का खरक
नन्दू का यख लगीन दूध का धारा ।
दूध का लगीन , नाज का कोठारा1 ।
बालपन मा ही बणी गये कृष्णा
नन्दू को ग्वैरे2 , गायों को गोपाल ।
गऊ चुगौंदू मोहन , वांसुली बजौंदू ।
चला भाई ग्वैर छोरौं , मथुरा वृन्दावन ,
बांसुली बजौला , कौथीक3 करला ।
तब बजाई कृष्णा त्वैन मोहन मुरली ,
तेरी मुरली सुणीक कामधेनुन चरणो4 छोड़याले ,
सभी ग्वैर छोरा मोहित करयाला ।
कुन्दन शैर मंग तेरी मुरली सणी ,
रुक्मणी रोज रंदी सुणन लगीं ।
कोंपलू5सी फलरुक्मणि सोना कीसी टुकड़ी ।
तालसी माछी6 , सरप कीसी बच्ची ।
सुण्याले तैंन मुरली अनबन7 भांती ,
मन होइगे मोहित , चित चंचल ।
भौ8 कुछ होई जाई मैंन मुरल्याक9 जाण ।
एसी एकी बांसुली अफू10 कनू होलू ?
पाणी कीसी बूंद की , नौण11सी गोंदकी ,
तै दिन वा रुकमणि लैरेन्दी12 पैरेन्दी ,
चलदी चलदी आइगे अघबाट ।
कृष्ण भगवान इना रैन छली ,
बीच बाट मां नदी दने उपजाई ।
अफू ह्वैगे भगवान धुनार13सी लम्बो ।
लुहारसी कालो , भाड़ कोसी मुछालो14 ।
तबरेकरुकमणि भली बणीक बांद
तख15 मुंग16 एक बोलण लैगे
हे धुनार छोरा तराई17 दियाल18 ।
तराई क्या लेण छोरा तराई बोल्याल ?
तराई क्या बेल्ण मैंन , भौं कुछ19 दियान ।
जनानी की जात , डोंडा20 मा बैठीगे ,
आधी गाड बीच कृष्ण भगवान
डोंडू खडू21 करयाले , पाणी मा छोड़याले ।
हे धुनार छोरा , मैं पल्या22 छोड़ गाड ।
पाल्या छोड़ लिजौलू त्वे , पैले23 तराई दियाल ।
कनु छै तू धुनार , अधबीच तराई तू लेन्दू ,
हजारू को धन दिउलू करोडू की माया ।
सुण सुण रुकमणी हजारू को धन ,
नी मांगदू , न करोड़ की माया ।
जरा रुबसी24 घीचीन25 राणी मैं भेना26 बोल्याल ।
हि रि27 रि कैक डोंडू लैगे बगण28 ,
डोंडू बगण लैगे , दिल लैगे डिगण ।
तै दिन रुकमणि राणी रोंदी छ तुडादी29 ,
ये काला औधूत तैं मैं भेना नी बोलौं ।
एक दिन संसार न मरी जाण ,
त्वै क तैं मैं कभी भेना नी बोलौं ।
डोंडा का डांड तैन ढीलो करीले ,
रुकमणि को शरील पंछीसी उड़ीगे ।
ऐथर देखदी पेथर राणी ,
हे भेना ठाकुर मैं पल्या छोड़ गाड ।
गर्वियों का गर्व तोड़या त्वैन ,
धजियों30 का तोड़या धज31 ।
तब भगवान न हैको छदम धारे ,
बणी गए प्रभु बांको चुरेड़32 ।
हाथ मा धरयालीन33 चूड़ी अनमन भांति ।
चूड़ी पैरयाला तुम स्वामियों की प्यारी ,
राजमती34 चूड़ी होली , भानुमती35 छेको36 ।
ढलकदी छणकदी37 रुकमणी औंदी ,
बोल रे बोल चुरेड़ , चूड़ियों को मोल ?
तै दिन भगवान त्वैन वीं को हात पकड़याले ,
राजौं की कन्या छई , क्या बैन बोदी :
हजारू को धन दिऊलू , करोडू की माया ।
हे चुरेड़े तू मेरो हात छोड़ दे ।
पैली मेरी चूड़ियों को मोल दियाल ।
सुण्याल रुकमणि , तू मैं कू
रुबसी घीचीन भेना बोल्याल ।
नौनी रुकमणि रोंदी छ तुड़ांदी ,
हेरदी छ देखदी राणी तब बोदी
हे मेरा भेना , मेरो हाथ छोड़याल
तब ऐगी रुकमणि मथुरा वृन्दावन ,
देख कना ऐन गोकुल का ग्वैर ।
सुण रुकमणि बोद कृष्ण भगीवान्
बिना ब्यौ राणी त्वै नो रखदू ।
कठा38 होई जावा मथुरा का ग्वैरू39 ,
ई का साथ मेरो ब्यौ करी देवा ।
ग्वैर छोरा क्वी40 बण्या बामण कुई औजी41 ,
घैंट्या42 केला कुलैं43 का स्तंभ ,
तै दिन तौंकू ब्यौ होई गये ।
पूतना रागसेण रदी कंस की बैण44 ।
कना बैन बोदू तब दुष्ट कंगस
कु जालू गोकल मेरा बैरी मान्यालो ?
तब पूतना रागसेण बोदेमैं जौलू गोकल मां
तू मेरा बैरी मारी औली त पूतना ,
त्वै मैं आदा राज द्योलो ।
तब पूतना रागसेण तयार होये ।
नहेन्दी व धुयेन्दी तब वा ,
स्यूंद शृंगार तब सजौण लगदे ।
तब धरे पूतनान मोहनी को रूप ,
अपनी दूधियों मांज विष चारियाले ,
रमकदी छमकदी जांदी पूतना रागसेण ,
रौड़दीदौड़दी गगे गोकुल का राज ।
यसोदा का पास जांद मुंडली नवौदे ।
तब पूतना रागसेण कना बैन बोदे
मैन सूणे दीदी तेरो नौनो होये ।
उंडो दे दी दीदी अपणा नौना ,
तुमारो बालक दीदी , भलो छ प्यारो ।
कृष्ण भगवान गोद मा गाडदे ।
तब पूतना रागसेण लाड करदे ,
हाती खुटी फलोसदी , घीची45 छ पेंदी46 ।
कृष्ण भगवान जी दीनू का दयाल ,
नरु का नारैन भक्तू का राम । | garhwali-gbm |
काया नही रे सुहाणी भजन बिन
काया नही रे सुहाणी भजन बिन
बिना लोण से दाल आलोणी . . .
भजन बिन . . . . . . . . .
१ गर्भवास म्हारी भक्ति क भूली न
बाहर हूई न भूलाणी
मोह माया म नर लिपट गयो
सोयो तो भूमि बिराणी . . .
भजन बिन . . .
२ हाड़ मास को बणीयो रे पिंजरो
उपर चम लिपटाणी
हाथ पाव मुख मस्तक धरीयाँ
आन उत्तम दीरे निसाणी . . .
भजन बिन . . .
३ भाई बंधु और कुंटूंब कबिला
इनका ही सच्चा जाय
राम नाम की कदर नी जाणी
बैठे जेठ जैठाणी . . .
भजन बिन . . .
४ लख चैरासी भटकी न आयो
याही म भूल भूलाणी
कहे गरु सिंगा सूणो भाई साधू
थारी काल करग धूल धाणी . . .
भजन बिन . . . | nimadi-noe |
54
केही हीर दी करे तारीफ शायर मथे चमकदा हुसन महताब1 दा जी
खूनी चूडियां रात जिउं चंद दुआले सुरख जिउं रंग शराब दा जी
नयन नरगसी मिरग ममोलड़े2 दे गलां टहकियां फुल गुलाब दा जी
भवां वांग कमान लाहौर दिसन कोई हुसन ना अंत हिसाब दा जी
सुरमा नैनां दी धार विच फब रिहा चड़या हिंदते कटक पंजाब दा जी
खुली विच त्रिंजनां लटकदी ए हाथी फिरे जिउं मसत नवाब दा जी
चेहरे सोहणे ते खत खाल बणदे खुशखत जिउं हरफ किताब दा जी
जेहड़े देखणे दे मुशताक आए वडा फाइदा इहनां दे बाब दा जी
चलो लैलतुल कदर3 दी करो जिआरत वारस शाह एह कम सबाब4 दा जी | panjabi-pan |
काय को दिवलो मैया, काय की बाती
काय को दिवलो मैया , काय की बाती
काय की लागी जगाजोत
सुन्ना को दिवलो , मैया रूपा की बाती
कपूर की लागी जगाजोत
पाँवा ने बिछिया सोवता ए माय
थारा अनबट से लागी रयो बाद | malvi-mup |
पढ़ो रे पोपट राजा राम का
पढ़ो रे पोपट राजा राम का ,
सीता माई न पढ़ायाँ
१ भाई रे पोपट थारा कारणा ,
खासा पिंजरा बणायाँ
उसका रंग सुरंग है
उपर चाप चड़ायाँ . . .
पढ़ो रे पोपट . . .
२ भाई रे पोपट थारा कारणा ,
खासा महल बणायाँ
ईट गीरी लख चार की
नर रयण नी पायाँ . . .
पढ़ो रे पोपट . . .
३ भाई रे पोपट थारा कारणा ,
खासा बाग लगायाँ
चंपा चमेली दवणो मोंगरो
वामे केवड़ा लगायाँ . . .
पढ़ो रे पोपट . . .
४ भाई रे पोपट थारा कारणा ,
खासा कुँवा खंडाया
कुँवा खडया घणा मोल का
पाणी पेण नी पायाँ . . .
पढ़ो रे पोपट . . .
५ अनहद बाजा हो बाजीया ,
आरे सतगुरु दरबार
सेन भगत जा की बिनती
राखो चरण अधारँ . . .
पढ़ो रे पोपट . . . | nimadi-noe |
पिया भरती मैं होले ना
पिया भरती मैं होले ना पट्टजा छतरापन का तोल
जरमन में जाके लड़िए अपने मां बापां का नां करिए
तैं तोपां के आगे अड़िए अपणी छाती ने दे खोल
पिया भरती में होले ना पट्टजा छतरापन का तोल | haryanvi-bgc |
पोड़ोसी माय डो पोड़ोसी माय डो माय डो
पोड़ोसी माय डो पोड़ोसी माय डो माय डो
पोड़ोसी माय डो पोड़ोसी माय डो माय डो
उरागा टालाड़ इयानी माय डो बान डूगू
उरागा टालाड़ इयानी माय डो बान डूगू
हिरामन बेटा जा हिरमन बेटा बेटा आमा
हिरामन बेटा जा हिरमन बेटा बेटा आमा
मायनी गाडा कोराटेन ओलेन मारे
मायनी गाडा कोराटेन ओलेन मारे
ऐ माय डो पोड़ोसी माय डो इयां मायनी
ऐ माय डो पोड़ोसी माय डो इयां मायनी
दुखिया सुखिया घाले मारे
दुखिया सुखिया घाले मारे
ऐ माय डो इयां माय डो चोज सांटी
ऐ माय डो इयां माय डो चोज सांटी
गाडा कोरा टेन ओलेन मारे
गाडा कोरा टेन ओलेन मारे
ऐ बेटा इयां जा बेटा उरागा टाला
ऐ बेटा इयां जा बेटा उरागा टाला
दुखिया सुखिया जा ढोगे मारे
दुखिया सुखिया जा ढोगे मारे
स्रोत व्यक्ति पार्वती बाई , ग्राम मातापुर | korku-kfq |
पैलो मास जो लागियोजी सायबा
पैलो मास जो लागियोजी सायबा
आल भोले मनजाय
अगरनी करावजो जी सायबा
देराणीजेठाणी रीसे बकेसी सायबा
कौन पुरावे हमारी साद
पीयरिये पोंचावो
दादाजी रा लाड़िलाजी सायबा
माता करेगा दूना लाड़
बीरा जीरा लाड़लाजी सायबा
भाभी पुरावे हमारी साद
अगरनी करावजो जी सायबा | malvi-mup |
जे देवी दयाल भई मोरे अगना
जे देवी दयाल , भई मोरे अंगना
देवी के हाथन दूध औ जलेबी
जो जूठन डाल चली मोरे अंगना । जे देवी . . .
देवी के हाथन फूलों की माला
जे माला डाल चली मोरे अंगना । जे देवी . . .
मैया के हाथन मोहरे अशर्फी
जे मोहरें डाल चली मोरे अंगना । जे देवी . . .
मैया के हाथन उड़िया झडूले
जे पलना डाल चली मोरे अंगना । जे देवी . . . | bundeli-bns |
रावटड़ी चढ़ सूत्या बाई का बाबा जी
रावटडी चढ़ सूत्या बाई का बाबा जी
चिंत्या मैं नींद ना आंवती जी म्हारा राज
रावटडी चढ़ सूत्या बाई का बाबला जी
चिंत्या मैं नींद ना आंवती जी म्हारा राज
के थारी सेज कुसेज
के मैहलां के माच्छर लागणै जी म्हारा राज
ना म्हारी सेज कुसेज
ना मैहलां के माच्छर लागणे जी म्हारा राज
म्हारै घर लाडलडी का ब्याह
चिंत्या मैं नींद ना आंवती जी म्हारा राज | haryanvi-bgc |
चवरी गीत
चवरि काटणे जाइ रह्या , रावताला ना का जवांयला ।
काटि लाया रावताला ना का जवांयला ।
चवरि गाड़े रावताला ना का जवांयला ।
रावताला ना कि कुवासणि चवरि वधावे वो ।
रावताला ना कि कुवासणि चवरि वधावे वो ।
रावताला ना कि कुवासणि चवरि सुति देवो ।
रावताला ना कि कुवासणि , वेंडा ढुलि देवो ।
रावतला गोत्र विशेष के जवाँई चवरी के लिये लकडियाँ काटने जा रहे हैं । रावतला के जवाँई चवरी काटकर ले आए । रावतला के जवाँई चवरी गाड़ रहे हैं । रावतला की कुँवारी लड़कियाँ चवरी बधा रही हैं । रावतला की कुँवारी लड़कियाँ कच्चा सूत चवरी में बाँध रही हैं ।
रावतला की कुँवारी लड़कियों से कहते हैं कि कुएँ से कलश भरकर पवित्र जल लाए हैं उसे दूल्हे के सिर पर उडेल दें । | bhili-bhb |
ढोल चन वे, लखाँ तेरियां मन्नियाँ
ढोल चन वे ,
लखाँ तेरियाँ मन्नियाँ ,
तू इक मन वे ,
ढोल मखणा ,
दिल पर्देसियाँ दा ,
राजी रखना ।
उची माड़ी ते दुध पई रिडकाँ ,
मेनू सारे टब्बर दियां झिडकाँ ,
मेनू तेरा इ दिलासा ,
वे चन्न वे . . .
वे बाजार विकेंदी बर्फी ,
मेनू ल्यादे दे निक्की जहि चरखी ,
ते दुक्खा दियाँ पूनियाँ ,
वे चन्न वे . . .
वे बाजार विके दुध कडया ,
माह़ी कंजरी दे नालों फडया ,
हाय एथों दिल सडया ,
वे चन्न वे । | panjabi-pan |
सगरे समैया कोसीमाय उठि बैठि गमैलौ
सगरे समैया कोसीमाय उठि बैठि गमैलौ
भदो मास कोसीमाय सजलौ बारात ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
मौरिया उड़ाहत
केओ तोरा जायत बरियात ।
मलिया तोरा आहे कोसीमाय
मौरिया उड़ाहत ,
नगरक लोग साजत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
डलवा उड़ाहत
केओ तोरा जायत बरियात ।
डोमरा तोरा आहे कोसीमाय
डलवा उड़ाहत
नगर के लोग जायत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
सड़िया उड़ाहत
केओ तोरा जायत बरियात । ।
कपड़िया तोरा आहे कोसीमाय
सड़िया उड़ाहत
तिरहुत लोग जायत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
चूड़िया उड़ाहत ,
केओ तोरा जायत बरियात ।
कपड़िया तोरा आहे कोसीमाय
कपड़ा उड़ाहत
तिरहुत लोग जायत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
हँसुली उड़ाहम ,
केओ तोरा जायत बरियात ।
सोनरा तोरा आहे कोसीमाय
हँसुली उड़ाहत
तिरहुत लोग साजत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
पनिया उड़ाहत
केओ तोरा साजत बरियात
सोनरा तोरा आहे कोसीमाय
पनिया उड़ाहत
तिरहुत लोग साजत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
सिनुरा उड़ाहत
केओ तोरा साजत बरियात ।
बहेलिया तोरा आहे कोसीमाय
सिनुरा उड़ाहत
तिरहुत लोग साजत बरियात । ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
तेलबा उड़ाहत
केओ तोरा साजत बरियात ।
तेलिया तोरा आहे कोसीमाय
तेलबा उड़ाहत
तिरहुत लोग साजत बरियात ।
केओ तोरा आहे कोसीमाय
टिकुली उड़ाहत
केओ तोरा साजत बरियात । ।
बहेलिया तोरा आहे कोसीमाय
टिकुली उड़ाहत
तिरहुत लोग साजत बरियात । | angika-anp |
रसीले नैन गोरी के रे
रसीले नैन गोरी के रे
चलो एक नार पानी को रे
मिला एक छेल गबरू सा रे
किसे तुम देख मचले हो रे
किसे तुम देख अटके हो रे
सूरत तेरी देख मचला हूं रे
जोबन तेरा देख अटका हूं रे
कहां तेरे चोट लागी है रे
कहां तेरे घाव भारी है रे
हिवड़े में मेरे चोट लागी है रे
कलेजे मेरे घाव भारी है रे
आओ ना मेरी सेज पर गोरी रे
रसीले नैन गोरी के रे | haryanvi-bgc |
बाबू सिर जोगे टोपी त न आएल
बाबू1 सिर जोगे2 टोपी त न आएल ।
बाबू के ठग के ले गेल , सुनहु लोगे ।
बाबू के सेंतिए3 ले गेल , सुनहु लोगे ।
रामजी कोमल बर लइका4 सुनहु लोगे ॥ 1 ॥
बाबू देह जोगे कुरता त न आएल ।
बाबू के ठग के ले गेल , सुनहु लोगे ।
बाबू के सेंतिए ले गेल , सुनहु लोगे ।
रामजी कोमल बर लइका , सुनहु लोेगे ॥ 2 ॥
बाबू गोड़ जोग धोती त न आएल ।
बाबू के ठग के ले गेल , सुनहु लोगे ।
बाबू के सेंतिए ले गेल , सुनहु लोगे ।
रामजी कोमल बर लइका , सुनहु लोगे ॥ 3 ॥ | magahi-mag |
सींकी के बढ़निया गे बेटी
सींकी के बढ़निया1 गे बेटी , सिरहनमा2 लाइ गे रखिहऽ ।
भोरे भिनसरवा3 गे बेटी , अँगनमा बाढ़ी4 गे लइहऽ ॥ 1 ॥
सेहो बढ़नमा5 गे बेटी , करखेतवा6 जाइऽ गे बिंगिह7 ।
सेहू जनमतइ8 गे बेटी , कदम जुड़ी9 छँहियाँ ॥ 2 ॥
सेहू तरे10 उतरइ गे बेटी , सतपँचुआ11 के जनमल12 दमदा ।
लँगटवा13 के जनमल दमदा ॥ 3 ॥ | magahi-mag |
बान डो बनवासी का घेरु माय भेरिया जाजोम वीले
बान डो बनवासी का घेरु माय भेरिया जाजोम वीले
भेरिया जाजोम बीले डो माय सोने कि दिवा वाले
सोने कि दिवा डो माय सोने कि दिवा उजाला में
कैनिया कुंवर खेले डो माय राजा खुडुमा खुडु हासे जाजोम बीले
रीटा जाजोम बीले डो माय कासे की ढिवा बाले
कासे कि ढिवा उजारेनी सीटा मीनू ख्याले
सीटा मीनू ख्याले डो मारा राजा जाम लान्जे
स्रोत व्यक्ति पार्वती बाई , ग्राम मातापुर | korku-kfq |
अंबे तो खबं बळे रे दिवला
अंबे तो खबं बळे रे दिवला
जाणू चतुरभुज जनमियां
जुगजुग जिवजो दाई हमारा
आतोसो दीनड़ झेलियो
जुगजुग जीवजो सासू हमारा
दस दन कुंवर खेलाविया
जुगजुग जीवजो जेठाणी हमारा
चखेत फूंको मेलियो
जुगजुग जीवजो देराणी हमारा
कंवळे खाट बिछाविया
जुगजुग जीवजो नणांद हमारा
कूका ने झगल्यो लाविया
कूका ने झूल टोपी लाविया
जुग जुग जीवजो ढ़ोली हमारा
अंगणा में ढ़ोल घोराविया
जुग जुग जीवजो पड़ोसण हमारा
दस दन मंगल गाविया
जुग जुग जोशी हमारा
कूका को नाम धराविया । | malvi-mup |
37
घर रब्ब दे मसजदां हुंदियां ने एथे गैर शरह नहीं वाड़ीये ओए
कुता अते फकीर पलीत होवे नाल दुर्रिआं1 बन्नके मारीये ओए
तारक हो सलवात2 दा पटे रखें लब्बों वालया मार पछाड़ीये ओए
नीवां कपड़ा होवे तां पाड़ दईये लमां होन दराज तां साड़ीये ओए
जेहड़ा फका असूल दा नहीं वाकफ ओहनू चा सूली उते चाड़ीये ओए
वारस शाह खुदा दे दुश्मनां नूं दूरों कुतियां वांग दुरकारीये ओए | panjabi-pan |
जरमन तेरा जाइयो नास
जरमन ने गोला मार्या
जा फूट्या अम्बर में
गारद में सिपाही भाजे
रोटी छोड़ गए लंगर में
उन बीरां का के जीणा
जिन के बालम छः नम्बर में | haryanvi-bgc |
बूँदा मनकौ हरन तुमारौ
बूँदा मनकौ हरन तुमारौ ।
जो लयें लेत हमारौ ।
बनौ रात घूंघट के भीतर ।
करै रात उजियारौ ।
अच्छे रंग धरे कारीगर ।
लाल , हरीरो , कारौ ।
ईसुर ऐसें डसें लेत है ।
जैसे नाँग लफारौ । | bundeli-bns |
481
अवल पैर पकड़े एतकाद कर के फेर नाल कलेजे दे लग गई
नवां तौर अजूबे दा नजर आया वेखो जाल पतंग ते अग गई
कही लग गई , चिंनग जग गई , खबर जग गई वज तलग गई
यारो ठगां दी रेवडी हीर जटी मुंह लगदयां यार नूं ठग गई
लगां मसत हो कमलियां करन गलां दुआ किसे फकीर दी वग गई
अगे धूंआं धुखंदड़ा जोगीड़े दा उतों फूक के छोकरी अग गई
यार यार दा बाग विच मेल होया गल हिजर दी दूर अलग गई
वारस टुटयां नूं रब्ब जोड़दा ए वेखी कमले नूं परी लग गई | panjabi-pan |
बेरहिं बेरी कोइल रे, तोहिं बरजों हे
बेरहिं बेरी1 कोइल2 रे , तोहिं बरजों3 हे ।
कोइल रे , आज बनवाँ4 चरन5 जनि जाहु ।
अहेरिया6 रजवा चलि अयतन7 हे ॥ 1 ॥
अयतन तऽ आवे दहुन अहेरिया रजवा हे ।
अहे सोने के पिंजरवा चढ़ि बइठम8 हे ।
अहेरिया रजवा का9 करतन10 हे ? ॥ 2 ॥
बेरहिं बेरी बेटी तोहिं बरजों हे ।
बेटी दुअरे खेलन जनि जाहु ।
कवन दुलहा चलि अयतन हे ॥ 3 ॥
अयतन तऽ आवे दहुन कवन दुलहा हे ।
अहे सोने पलकिया चढ़ि बइठम हे ।
कवन दुलहा का करतन हे ? ॥ 4 ॥
एक कोस गेल11 डाँड़ी12 दुइ कोस हे ।
अहे अम्मा रोवथि13 छतिया फाड़ि हे ।
गोदिया14 बेटी , आजु सुन्ना15 भेल हे ॥ 5 ॥
दुइ कोस गेल डाँड़ी , तीन कोस हे ।
अहे चाची रोवथि छतिया फाड़ि हे ।
सेजिया आजु बेटो , सुन्ना भेल हे ॥ 6 ॥
तीन कोस गेल डाँड़ी , चार कोस हे ।
अहो भउजी16 रोवथि छतिया फाड़ि हे ।
भनसा17 ननदी आजु सुन्ना भेल हे ॥ 7 ॥
चार कोस गेल डाँड़ी , पाँच कोस हे ।
अहे सखी सब रोयथिन छतिया फाड़ि हे ।
सलेहर18 आज सखी सुन्ना भेल हे ॥ 8 ॥ | magahi-mag |
मेरे दादा के पछवाड़े आले आले बांस खड़े
मेरे दादा के पछवाड़े आले आले बांस खड़े
समधी का लड़का नादान आंगन मोरे तप करे
अन्दर से निकली भर मोती का थाल ले
ले रे सज्जन के लड़के अंगना मोरा छोड़ दे
क्या करने तेरे मोती क्या करनी ये थालिया
तुम्हारे घर कन्या कुमारी हमें परणाय दो | haryanvi-bgc |
मैया जब मैं घर से चलूँ
मैया जब मैं घर से चलूँ बुलामें घर में ग्वालिन मोय ॥
अचक हाथ कौ झालौ देकै , मीठी बोलें देवर कह कैं ।
निधरक है जाँय साँकर देके ॥
दोहा झपट उतारें काछनी , मुरली लेंय छिनाय ।
मैं बालक ये धींगरी , मेरी कहा बसाय ॥
आपहु नाचैं मोय नचावें , कहा बताऊँ तोय ॥ 1 ॥
मैं भोरौ ये चतुर गुजरिया , एक दिन लेगई पकरि उँगरिया ,
फूटीसी याकी राम कुठरिया ।
दोहा धरी मटुकिया मो निकट , माखन की तत्काल ।
माखन दूँगी घनों सौ , चींटी बीनौ लाल ॥
मैंने याकी चींटी बीनी , ये पति संग गई सोय ॥ 2 ॥
एक दिना पनघट पे मैया , मैं बैठौएक दु्रम की छैंया ,
ढिंग बैठ्यो बलदाऊ भैया ।
दोहा लै पहुँची वहाँ गागरी , रिपटौ याकौ पाम ।
मेरे गोहन पड़ गई , धक्का दीनों श्याम ॥
गुलचा दे दे लाल किये , मैं ठाड़ौ रह्यौ रोय ॥ 3 ॥
तेरे मोंह पै करें बढ़ाई , बाहर निकसत करैं बुराई ,
ऐसी ब्रज की ढीठ लुगाई ।
दोहा इनकौ पतियारौ करे , मैं झूठौ ये शाह ।
चोर नाम मेरौ धरौ , होन न दिंगी ब्याह ॥
मोते इनने ऐसी कीनी , जैसी करै न कोय ॥ 4 ॥ | braj-bra |
तुम देवो रजा घर जावां
तुम देवो रजा घर जावां ,
राणी रनु बाई हो । ।
चूल्हा पर खीचड़ी खदबदऽ ,
राणी रानु बाई हो । ।
अंगारऽ सीजऽ दाळ ,
राणी रनु बाई हो । ।
ससराजी सूता द्वार ,
राणी रनु बाई हो । ।
सासुजी दीसे गाळ ,
राणी रनु बाई हो । ।
म्हारा स्वामी सोया सुख सेज ,
राणी रनु बाई हो । ।
तुम देवो रजा घर जावां ,
राणी रनु बाई हो । । | nimadi-noe |
सियाजी बाढ़ऽ हथिन अँगना
सियाजी बाढ़ऽ हथिन1 अँगना , माता निरखै2 हे ।
माइ हे , अब सीता बियाहन जोग3 सीता जोग बर चाही हे ॥ 1 ॥
हाँथ काय4 लेहु बराम्हन धोबिया , काँखे5 पोथिया हे ।
चलि जाहो नगर अजोधेया , सीता जोग बर चाही हे ॥ 2 ॥
काहाँ से बराम्हन बाइला6 काहाँ घाइला7 हे ।
कउन8 रिखी9 कनेया कुआँरी , कउन बर चाही हे ॥ 3 ॥
जनकपुर से हम बराम्हन आइलूँ10 अजोधेया घायलूँ हे ।
जनक रिखी कनेया कुआँरी , राम बर चाही हे ॥ 4 ॥
केरे11 उरेहल12 सिर मटुका13 तिलक चढ़ावल हे ।
अहे , केरे सजत बरियात , कउन सँग जायत हे ॥ 5 ॥
जनक उरेहल सिर मुटुका , तिलक चढ़ावल हे ।
अहे , दसरथ सजत बरियात , भरथ सँग जायेता14 हे ॥ 6 ॥ | magahi-mag |
सीस तेरे चीरा हरियाले बन्ने पेची अजब बहार
सीस तेरे चीरा हरियाले बन्ने पेची अजब बहार
काम तेरे मोती बन्ने चुन्नी अजब बहार
किसियो पोता ब्याहिये किसिये चढ़ा दहेज
स्याम नन्द विवाहिये जुन पूनो का चांद दिल्ली का सुल्तान
ब्याह बहू ले आइये हरियाले बन्ने उतरो राज द्वार
बहू उतारो ओबरे सोभा यह धमसाल
सोभा का क्या देखना जो बहू कुल की होय
जो मन मेलू होय
सास बहू जब लड़ पड़ी बन्ना किस की ओर
बाहर से भीतर गया हुआ बहू की ओर
एक दिना एक रात में जाय सराही ससुराल
नौ दस मास गरभ में बीते तब न सराही माय
आधा सोभा बांट दे जाय बसूं ससुराल
जब तैं रोया बन्ने खड़ी डुलाऊं थी सारी रात
सूखे तुझे सुलावती गीले रहती सोय रे हरियाले बन्ने
जो मैं ऐसा जानती क्यों रखती तेरी आस
तू क्या पाला सेंत में मेरी अम्मां तूने ठगा मेरा बाप
हमीं बिना आदर नहीं बापू जी ने दी बिसराय
हमीं हुए आदर हुआ पीहर से ली बुलाय
गडुवा से लडवा खाये खाई चरपरी सौंठ अर करकरा गौंद
मूंग चावल की खीचड़ी मेरी भोली अम्मा सुरही गऊ का घीय
कोने घुस घुस खावती
हम से एक जो गस्सा गिर पड़ा मेरी भोली अम्मां
नानी सी मर जाय बन्दर सी गुरराय मेरी भोली अम्मा | haryanvi-bgc |
430
घरों कढया अकल शहूर1 गया आदम जनतों कढ हैरान कीता
सजदे वासते अरश तों मिले धके जिवें रब्ब ने रद शैतान कीता
शदाद2 बहिश्त थीं रहया बाहर नमरूद3 मछर परेशान कीता
वारस शाह हैरान हो रिहा जोगी जिवें नूर हैरान तुफान कीता | panjabi-pan |
एक जलेबी तेल में
एक जलेबी तेल में ।
गांधी भेज्या जेल में । ।
जेल का फाटक गिया टूट ।
गांधी आया फोरन छूट । ।
सतागरह गांधी ने चलाया ।
देस म्हारा आजाद कराया । । | haryanvi-bgc |
गोर ए गणगौर माता खोल किँवाडी
पूजा शुरु करने के पहले
गोर ए गणगौर माता खोल किँवाडी ,
बाहर ऊबी थारी पूजन वाली ,
पूजो ए पुजावो सँइयो काँईकाँई माँगा ,
माँगा ए म्हेँ अनधन लाछर लिछमी जलहर जामी बाबुल माँगा ,
राताँ देई माँयड ,
कान्ह कँवर सो बीरो माँगा ,
राई रुक्मणी सी भौजाई ,
ऊँट चढ्यो बहनोई माँगा ,
चूनडवाली बहना ,
पून पिछोकड फूफो माँगा ,
माँडा पोवण भूवा ,
लाल दुमाल चाचो माँगा ,
चुडला वाली चाची ,
बिणजारो सो मामो माँगा ,
बिणजारी सी मामी ,
इतरो तो देई माता गोरजा ए ,
इतरो सो परिवार ,
दे ई तो पीयर सासरौ ए ,
सात भायाँ री जोड परण्याँ तो देई माता पातळा पति ए ,
साराँ मेँ सिरदार
पूजा शुरु करते हैँ
ऊँचो चँवरो चौकुटो ,
जल जमना रो नीर मँगावो जी ,
जठे ईसरदासजी सापड्या विराजे हैँ ,
बहू गोराँ ने गोर पुजावो जी ,
जठे कानीरामजी सापड्या बहु लाडल ने गोर पुजावो जी ,
जठे सूरजमलजी सापड्या ,
बाई रोवाँ ने गोर पुजावो जी ,
गोर पूजंता यूँ कैवे सायब या जोडी इभ् छल इसी तरह राखो जी ,
या जोडी इभ् छल राखो जी म्हारा चुडला रो सरव सोहागो जी ,
या जोडी इभ छल राखो जी म्हारै चुडला रे राखी बाँधो जी ।
दूब के साथ 8 बार पूजा करते हैँ
गोरगोर गोमती ,
ईसर पूजूँ पार्वतीजी ,
पार्वती का आलागीला ,
गोर का सोना का टीका ,
टीका दे ,
टमका दे राणी ,
बरत करे गोराँदे रानी ,
करताकरता आस आयो ,
मास आयो ,
खेरे खाण्डे लाडू आयो ,
लाडू ले बीरा ने दियो ,
बीरो ले गटकाय ग्यो ,
चूँदडी ओढाय ग्यो ,
चूँदड म्हारी इब छल ,
बीरो म्हारो अम्मर ,
राण्याँ पूजे राज मेँ ,
म्हेँ म्हाँका सवाग मेँ ,
राण्याँ ने राजपाट द्यो ,
म्हाँने अमर सवाग द्यो ,
राण्याँ को राजपाट तपतो जाय ,
म्हारो सरब सवाग बढतो जाय ओलजोल गेहूँ साठ ,
गौर बसे फूलाँ कै बास ,
म्हेँ बसाँ बाण्याँ कै बासकीडीकीडी कोडूल्यो ,
कीडी थारी जात है ,
जात है गुजरात हैसाडी मेँ सिँघाडा ,
बाडी मेँ बिजौराईसरगोरजा ,
दोन्यूँ जोडा ,
जोड्या जिमाया ,
जोड जँवारा ,
गेहूँ क्यारागणमण सोला ,
गणमण बीस ,
आ ए गौर कराँ पच्चीस
टीकी
आ टीकी बहू गोराँदे ने सोवै ,
तो ईसरदासजी बैठ घडावै ओ टीकी ,
रमाक झमाँ ,
टीकी ,
पानाँ क फूलाँ टीकी ,
हरयो नगीनो एआ टीकी बाई रोयणदे ने सोवै ,
तो सूरजमलजी बैठ घडावै ओ टीकी ,
रमाक झमाँ ,
टीकी ,
पानाँ क फूलाँ टीकी ,
हरयो नगीनो एआ टीकी बहू ने सोवै ,
तो बेटा बैठ घडावै ओ टीकी ,
रमाक झमाँ ,
टीकी ,
पानाँ क फूलाँ टीकी ,
हरयो नगीनो ऐ । | nimadi-noe |
सदेई
जाड़ो तसिगे1 प्रकृति बिजिगे2 ,
पशु वा पंछी सभी जी गयेन ।
जाड़ान जो सुन्न न होई गै तो ,
स्यो बौड़ि3 गे ल्वै रस सार प्राण ।
डाली व बोटी वण व वणोंदी ,
निर्लज्ज जाड़ान करेति नांगी ।
अनेक पैरया ालेन अब रंग की ,
बसन्त का स्वागत कत साड़ी ।
गाड4 गधेरा5 अर पंछी पौन ,
छया जो जाड़न सुन्न होया ।
कर्ण बसे कोलाहल लगि गैन ,
खुशी बसन्त की मनौण लैन ।
शरीरो कलेजा पहुँचौंण रायावायु ,
स्या घैंत स्वाणी6 अब लागदे छ ।
सुगन्ध फूल7 दगड़े मिलीक ,
अमृत पिलाई पुलकौंद पौन ।
सफेद रत्ता8 , पिंगला व नीला ,
भांति व भांति छन फल फूल्या ।
समीन्न यून प्रकृति पुरुष सी ,
सजाई दीने रति रंग भूमि ।
कुलूड़ि भि फूलि अर फ्यू ली फूली ,
गयेन फूली वण वो वणोंदी ।
गुलाब फूल्यों अर कूजों फूल्यो ,
फूली गयेन लगुले9 व झाड़ी ।
आरु , घिंघार अर आम डाले ,
निम्बू नारंगी भित फूलि गैन ।
चम्पाभि , पाईभि चमेलि फूलि ,
बुरांस घारूँ मंग अंचि फूल्यों ।
सिलंग फली सब ठौर फूली ,
गईन फूटि कलि कोंपलें भी ।
क्या घर क्या बोण10 सभी जगौं मां ,
सिलंग की बास सुवास फैली च ।
छन रंग नया ताजा अर रंग नाना ,
सुवास नाचा अर गीत नाना ।
अनेक नाना विधि का न स्येन ,
वि दिखेंद , सूंघेंद , सुणोंद जा ना ।
गीतु सुरिला छन पंछी गाणा ,
वीं कोकिला की पर प्यारि थक ।
सुणोंद चारू दिशि दूरुदूरु ,
दुखौंद ज्यू कू सहदेई कोछ ।
पंछी तु गाला छई मास ओरे ,
चेड़ो11 कफू12 बासलो चैत मास
सिलंग डाली पर फ्यूँलि गाली ,
ना पास केकु ज्युकड़ी13 झुरौंद ।
हल्या रयों मां छन मस्त रौंकणा ,
पाख्यों घस्यारे छन गीत गाणी ।
लगादू भौणे छन गीतू मांगे ,
स्वालू जवाब हुह्रौंण लागी ।
रैबार14 रै पार हिलांस15 प्यारी ,
कूकू करी कूकद लवि कूकू ।
झणन्यालि गैरीछ गदरियों मां ,
स्या म्योलड़ी भी कना गीत गाणी ।
भौंरा छया जो सुनसान ब्याले ,
स्ये आज फुलूफुल मांन गुजराण ।
यैं फुल की केशरी फुल वै मां ,
लिजाण लाग्यां छन स्वार्थि भौंरा
इनी निराली अर भांति भांति ,
छ काम होणु प्रकृति पुरुष को ।
सृष्टि छ सारी उत्सौव मनोणी ,
खुशी मनौणी खिलखील हंसणी ।
बसन्त ए मा रज तालबात ,
आयुँ छ गर्भाषय वीजु मांगे ।
जणन कु जन्तुजननी जनक को ,
छ जगजोड्यूँ जजग मांग गां तां ।
सिलंग नीस16 सहदेई बैठी ,
सुणणी छ देखणी बण की बहार ।
सैं मैलि डाली मुं सदानि औंदे ,
खुदेड़ सैदी खुद बिसरौण ।
सैदी कु औदे जब याद मैतै ,
दगड्17 याणियों की भि छ याद औंदा ।
वणू वणोंडो कि भि याद औंद ,
धारू व गाडू कि भि याद औंदा ।
चौंरी18 माँ बेठी च खुदेड़ सैदी ,
बौली सी होई खुद से सदेई ।
चड़ी सी रोटी भोर भरि ज्यू स्या रोंदे ,
इना इना वैन सुबैन बोदे ।
हे ऊँचि डांडयों19 तू नीसी20 आवा ,
धणी कुलांयों21 तु छांटि जावा ।
मैं ते दगीं छ खुद22 , मैतुड़ा23 की ,
बाबाजी को देखण देश देवा ।
मैतअकि मेरी तु पौन24 प्यारी ,
सुणों त रैबार25 तु मां को मेरी ।
गाडूगदअन्यों26 व हिलांस27 कफ्फू ,
मेतअका मेरा तुम गीत गावा ।
वारअ ऋतु बौड़लि28 बार मास ,
आली व जाली जनि दाई29 फेरो ।
आई निजाई निरभाग मैं कू ,
क्वी मी नि आई ऋतु मेरी दात30 ।
बसन्त मैना ासब का त माई ,
मेटेंण आला वहिण्यों कु अपणी ।
दीदीभुलीमिलीक गीत गालो ,
गला लगाली खुद विसराली ।
मैत्यों कि भेजी कपड़ों की छाल ,
पैलीं विसाली कनु से मिजाज ।
लड्यालि31 मेरो कुई माई होंदो ,
कलेऊ लौंदो व दुरौंदो पैणा32 ।
लठ्यालि होलो निरमाग मै त ,
पीठी नि की होयन माईवैणा ।
करीं पछिंण्डि छऊँ धौलि33 पार ,
गाऊ विदेशी , अर दूर देश ।
जवान ह्वै गयूं , लड़कालि34 भी गयूं ,
मेरी करी नी कैन खबर न सार ।
मैतअकि देवी छऊँ , झालीमाली ,
मेरी सुणियाल विपत्ति भारी ।
दियाल मैंकु इक भाई प्यारो ,
देखीक जैकु खुद बिसरौं में ।
भाई की मुखड़ी जब देखि लेंदो ,
होंदो सुफल जीवन यो त मेरो ।
मैं कूत नी छ कुछ और इच्छा ,
समान भाई नोछ , और नी छ की भी ।
देली तु जो यो वर आज मैंकू ,
मैं देउलो त्वै सरवाच देवी ।
जो भाई होलो तो अठ्वाड़ धूलो ,
पंडौङ नचौलो अर जात धू लो ।
खोंदू अभी नितर प्राण अपणों ,
सहाय ह्वै जा दुर्गाभवानी ।
देवी भवानी जननी जगत की ,
प्रसन्न होंदे वर तैंकु देंदे ।
होलो सदेउ इक भाई तेरो ,
बड़ो प्रतापी मिललो वो त्वैकू ।
आकाशवाणी इन वीं न सुणी ,
सुपनों छ यो या भरमौंणु की मैं ।
या मेरी होली कुल इष्ट देवी ,
दन्दौल35 नाना बिधि कर्दी मनमां ।
गई सदेई जब सांझ होये ,
सिलंग डालि सणी भेंट देण ।
धर्दी छ वा धीरज शांत होंदें ,
लगदे छ धन्धें पर स्थान धरका । | garhwali-gbm |
312
क्यों फकर दे नाल रिहाड़ पईए भला बखश सानूं मापे जीनिए नी
सप शीहनी वांग बुलैहनीए नी मास खानीए ते रत पीनीए नी
दुखी जिऊ दुखा ना भाग भरीए होईए चिड़ी ते कूंज लखीनीए नी
साथों निशा ना होसोया मूल तेरी सके खसम तों ना पतीनीए नी
चरखा चाय के नटनी मरद मारे किसे यार ना पकड़ मलीनीए नी
वारस शाह फकीर दे वैर पईए जरम ततीए करमां दीए हीनीए नी | panjabi-pan |
बर खोजन जब चललन बाबा हे, हाँथ गुलेल
बर खोजन1 जब चललन बाबा हे , हाँथ गुलेल2 मुँह पान हे ।
पुरूब खोजलन3 पछिम खोजलन , खोजलन मगह मनेर4 हे ॥ 1 ॥
खोजइते खोजइते गेलन अजोधेया नगरी , मिलि गेलन राजकुमार हे ।
राजा दसरथजी के चारियो बेटवा , हमें घर सीता कुँआर हे ॥ 2 ॥ | magahi-mag |
तीतर रै तूं बामै दाहने बोल
तीतर रै तूं बामै दाहने बोल , चढ़ते जमाई का सूण मणाइये जी मैं का राज
कोयल हे तूं बागां में जा बोल , चढ़ते जमाई नै सबद सुणाइये जी मैं का राज
सूरज हे तूं बादल में बड़जा , चढ़ते जमाई नै लागै घामड़ा जी मैं का राज
बादल रे तू झीणा बरस , चढ़ती लाडो की भीजै नौरंग चूंदड़ी जी मैं का राज
आंधी हे तूं झीणी झीणी चाल , चढ़ते जमाई का गरद भरै कपड़े जी मैं का राज
टीबी हे तूं ऊंची नीची हो , चढ़ते जमाई की दीखै पंचरंग पागड़ी जी मैं का राज | haryanvi-bgc |
शहर बाजार में जाइजो हो बना जी हो राज
शहर बाजार में जाइजो हो बना जी हो राज
पान मंगाय वो रंगतदार बनजी बांगा माहे
पांन खाय बनी सांभी सभी , बना हजी हो राजे
बनो खीचे बनी से हाथ . . . हो बांगा माहे
हाव्यलड़ों मत खीचों बना जी हो राजे
रुपया लेस्सूँ सात हजार . . . हो बांगा माहे
ऊधार फुझाब मैं नहीं करां हो राज
रुपया गिगलां सात हजार . . . हो बांगा माहे
शहर बाजरां मती जाइजो हो राज
म्हांने परदेसी रो कांई रे विसवास . . . हो बांगा माहे . . . | rajasthani-raj |
नन्द के द्वार मची होरी
बाबा नछ के द्वार मची होरी ॥ टेक
कै मन लाल गुलाल मँगाई , कै गाड़ी केशर घोरी ।
दस मन लाल गुलाल मँगाई , दस गाड़ी केशर घोरी । 1 ।
कौन के हाथ कनक पिचकारी , कौन के साथ रंग की पोरी ।
कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी , मनसुख हाथ रंग की पोरी । 2 ।
कै री बरस के कुँवर कन्हैया , कै री बरस राधा गोरी
सात बरस के कुँवर कन्हैया , पाँच बरस की राधा गोरी । 3 ।
घुटुवन कीच भई आँगन में , खेलैं रंग जोरी जोरी
चन्द्रमुखी भजु बालकृष्ण छवि बाबा नंद खड़े पोरी । 4 ॥ | braj-bra |
दिन उग्यो कूकड़ी बोले रे
दिन उग्यो कूकड़ी बोले रे
आई नव प्रभात
गवाँराँ गीगां हंस ल्यो रे
गयी अंधारी रात
नवाँ नवाँ हो झाड़ हाथ ले
सोत्डला में चालो चालो
खेतडला में चालो
अब हिम्मत , अब हिम्मत , अब हिम्मत ,
की है बात रे
आयो नव प्रभात
कान खोल के सुण लो जवानो
धरती सोणा निपजे रे ,
मेहनत सूँ , मेहनत सूँ , मेहनत सूँ
निपजे रे
गयी अंधारी रात
दिन उग्यो कूकड़ी बोले रे
आयो नव प्रभात | rajasthani-raj |
रोमैं लयें रागनी जी की
रोमैं लयें रागनी जी की ।
लगे सुनत मैं नीकी ।
कौऊ सास्त्र पुरान अठारा ।
चार बेद सो झीकी ।
गैरी भौत अथाह भरी है ।
थायमिलै ना ई की ।
ईसुर साँसऊँ सुरग नसैनी ,
रामायण तुलसी की । | bundeli-bns |
सावां गीत
आखो उंढालो काइ कर्यो रे ढेड्या ।
आखो उंढालो काई कर्यो ढेड्या ।
खड़ काट्यो ने पान तुड्या वो जीजी ।
खड़ काट्यो ने पान तुड्या वो जीजी ।
आखो उंढालो काइ कर्यो रे ढेड्या ।
आइणिं छिनाले नो डंड भर्यो रे ढेड्या ।
आइणिं छिनाले नो डंड भर्यो रे ढेड्या ।
आखो उंढालो काइ कर्यो रे ढेड्या ।
खड़ काट्यो ने पान तुड्या ने घर छायो रे ढेड्या ।
गर्मी का मौसम निकल गया तुमने सावां लाने में देर क्यों लगाई ? जीजी हमने
गर्मी में घास काटा और पत्ते तोड़े । गर्मी में समधन का दंड भरा । घास काटा , पत्ते
तोड़े और घर का छप्पर छाया ताकि पानी घर में न गिरे ।
सावां एक प्रकार का शगुन है , जिसे लेकर पुरुष ही जाते हैं । गीत वधू पक्ष की महिला
गाती हैं । यह गीत गाली का है , जिसे ‘निहाली’ कहते हैं । | bhili-bhb |
विवाह गीत
पिपलियो पान झलके वो नानी बेनुड़ी , पिपलियोपान झलके ।
मनावर्यो हाट जासुं वो नानि बेनुड़ी ।
खारिक खोपरों लावसुं वो नानि बेनुड़ी ।
बागुन हाट जासूं वो नानि बेनुड़ी ।
खर्यादाल्या लावसुं वो नानुड़ि बेनी ।
जोबट्यो हाट जासूं वो नानुड़ि बेनी ।
माजम ने हार काकणिं , लावसुं वो नानुड़ि बेनी ।
पीपल का पान चमक रहा है छोटी बनी । मनावर के हाट जावेंगे छोटी बनी और
खारकखोपरा लाएँगे । बाग के हाट जायेंगे और सेवचने जायेंगे । जोबट के हाट
जाएँगे और माजम व हारकंगन लाएँगे । | bhili-bhb |
257
रल चेलयां ने चा मता कीता बाल नाथ नूं पकड़ पथलयो ने
छड दवार उखाड़ भंडार चले जा राह ते वाट1 सब मलयो ने
सेलियां टोपियां कुश्रदां छड चले गुस्से जी दे नाल उथलयो ने
वारस शाह ना रब्ब बखील2 होवे चारे राह नसीब दे मलयो ने | panjabi-pan |
वा तो सात पापड़ की जोड़ी हो
वा तो सात पापड़ की जोड़ी हो
वे तो लईगया फलाणा राम चोरी हो
देख्यादेख्या फलाणी बाई चोरी हो
उनखे बांदिया फलाणी बाई चोरी हो
उनखे बांदिया मोया की डोरी हो
धीरयाधीर या उनखे सालाजी सेरी हो
अब तो छोड़ पनोती गोरी वो
मैं तो कदी नी करूँ पापड़ चोरी वो | malvi-mup |
ईसुरी की फाग-11
जो तुम छैल , छला हो जाते , परे उंगरियन राते
मौं मुँह पौंछत गालन के ऊपर , कजरा देत दिखाते
घरीघरी घूंघट खोलत में , नज़र सामने आते
' ईसुर ' दूर दरस के लानें , ऐसे काए ललाते ? | bundeli-bns |
कृष्ण हिंडोले बहना मेरी पड़ गये जी
कृष्ण हिंडोले बहना मेरी पड़ गये जी ,
ऐजी कोई आय रही अजब बहार ॥ 1 ॥
सावन महीना अधिक सुहावनौ जी ,
ऐजी जामें तीजन कौ त्यौहार ॥ 2 ॥
मथुरा जी की शोभा ना कोई कहि सके जी ,
ऐजी जहाँ पै कृष्ण लियौ अवतार ॥ 3 ॥
गोकुल में तो झूले बहना पालनो जी ,
ऐजी जहाँ लीला करीं अपार ॥ 4 ॥
वृन्दावन तो बहना सबते हैं बड़ौरी ,
एजी जहाँ कृष्ण करे रस ख्याल ॥ 5 ॥
मंदिर2 झूला बहना मेरी परि गये जी
एजी जामें झूलें नन्दकुमार ॥ 6 ॥
राग रंग तो घर घर है रहे जी ,
ऐजी बैकुण्ठ बन्यौ दरबार ॥ 7 ॥
बाग बगीचे चारों लग लग रहे जी ,
ऐजी जिनमें पक्षी रहे गुंजार ॥ 8 ॥
मोर पपैया कलरब करत हैं जी ,
ऐजी कोई कोयल बोलत डार ॥ 9 ॥
पावन यमुना बहना मेरी बहि रही जी ,
ऐजी कोई भमर लपेटा खाय ॥ 10 ॥
ब्रजभूमी की बहना छवि को कहैजी ,
ऐजी जहाँ कृष्ण चराईं गाय ॥ 11 ॥
महिमा बड़ी है बहना बैकुण्ठ तै जी ,
एजी यहाँ है रहे जै 2 कार ॥ 12 ॥ | braj-bra |
कहवाँ के डँड़िया कुनली
कहवाँ के डँड़िया1 कुनली2 अही डँड़िया कुनली ।
कहवाँ में लगले ओहार3 चढ़हु4 धनि डाँडि , चेतहु5 गिरहि6 आपन हे ॥ 1 ॥
कवन पुर के डँड़िया कुनली , अहो डँड़िया कुनली ।
कवन पुर में लगले ओहार , चढ़हु धनि डाँरि , चेतहु गिरहि आपन हे ॥ 2 ॥
गोड़ लागों , पइयाँ परों , अजी सइयाँ ठाकुर हे ।
बाबा के पोखरवा7 डाँड़ि बिलमावहु8 अम्मा से भेंट करम9 हे ॥ 3 ॥
कइसे में डाँरि बिलमायब , अहे धनि सुन्नर हे ।
तोर बाबा दहेजवा के सोंच में , अम्मा बिसमादल10 हे ॥ 4 ॥
रँचिएक11 डाँडि बिलमावहु , अजी सइयाँ ठाकुर हे ।
भेंटे देहु चाची हमार , सासु जे आपन हे ॥ 5 ॥
कइसे में डाँड़ि बिलमाऊँ , अहें धनि सुन्नर हे ।
बरवा12 पकवइत13 चाची बिसमादल हे ।
तिलक गिनइते चच्चा बिसमादल हे ॥ 6 ॥
रँचिएक डाँड़ि बिलमावहु , अजी सँइया ठाकुर हे ।
भेंटे देहु भउजी हमार , सरहज आपन हे ॥ 7 ॥
कइसे में डाँड़ि बिलमाऊँ , अहे धनि सुन्नर हे ।
पटवा14 फड़इते भउजी बिसमादल हे ।
भँउरिया15 घुमइते भइया बिसमादल हे ॥ 8 ॥ | magahi-mag |
7
हुकम1 मन्न के सजनां प्यारयां दा किस्सा अजब बहार दा जोड़या ए
फिकरा जोड़ के खूब दरूसत कीता नवां फुल गुलाब दा तोड़या ए
बहुत जीउ दे विच तरतीब करके फरहाद पहाड़ नू फोड़या ए
सभा वीन के जे़ब बना दिता जेहा अतर गुलाब नचोड़या ए | panjabi-pan |
355
महबूब अलाह दे लाडले हो एस वहुटड़ी नूं कोई सूल है जी
कोई गुझड़ा रोग है एस धाणा पई नित एह रहे रंजूल1 है जी
हथों लुढी वैंहदीं लाहू लथड़ी है वहुटी हो जांदी मखतूल2 है जी
मुंहों मिठड़ी लाड दे नाल बोले हर किसे दे नाल माकूल3 है जी
मूधा पया है झुगड़ा नित साडा एह वहुटड़ी घरे दा सूल है जी
मेरे वीर दे नाल है वैर एहदा जेहा काफरां दे नाल रसूल है जी
अगे एसदे साहुरे हथ बधी जो कुझ आखदी सब कबूल है जी
वारस पलंघ तों कदी तां उठ बैठे साडे ढिड दे विच डंडूल है जी | panjabi-pan |
319
जोगी हीर दे सौहरे जा वड़या भुखा जट जिउं फिर लालोरदा जी
आया खुशी दे नाल दहचद होके सूबेदार जिउं नवां लाहौर दा जी
धुस दे के वेहड़े विच आ वड़या कड कीता सू सन ते चोर दा जी
अनी खेड़यां दी पयारी वौहटीए नी हीरे सुख है चा टकोरदा जी
वारस शाह अगे हुण पई फाहवी शगन होया है जंग दे शोर दा जी | panjabi-pan |
138
पाड़ चुनियां सुथनां कुडतियां नूं चक वढ के चीकदा चोर वांगू
वते फिरन परावर जयों चंद दवाले गिरद पायलां पांदियां मोर वांगू
शाहूकार दा माल जयों विच कोटांदवाले चौंकियां फिरन लहौर वांगू
वारस शाह अगयारियां भखदियां दी एहदी प्रीत जो चंद चकोर वांगू | panjabi-pan |
हल्दी गीत
बेनी तारो पीठी रोलो , कुण चोलसे ?
बेनी तारो पीठी रोला , े कुण चोलसे ?
बेनी तारो पीठी रोलो , तारि भोजाइ चोलसे ।
बेनी तारो पीठी रोलो , तारि बहणिस चोलसे ।
बेनी तारो पीठी रोलो , तारि फुई चोलसे ।
बनी तुझे हल्दी कौन लगायेगा ? हे बनी तुम्हारी भौजाई , बहन और बुआ तुम्हें हल्दी लगाएँगी । | bhili-bhb |
चम चम चमके चुन्दडी
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
म्हारी तो रंग दे चुन्दडी बिण्जारा रे
म्हारे साहेबा रो , म्हारे पिवजी रो ,
म्हारा साहेबा रो रंगदे रूमाल रे बिण्जारा रे
म्हारा साहेबा रो रंगदे रूमाल रे बिण्जारा रे
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
जोधाणा सरीखा पैर मैं बिण्जारा रे
कोई सोनो तो घड़े रे सुनार रे बिण्जारा रे
कोई सोनो तो घड़े रे सुनार रे बिण्जारा रे
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
पायल घड़ दे बाजणी बिण्जारा रे
म्हारी नथली पळ्कादार रे बिण्जारा रे
म्हारी नथली पळ्कादार रे बिण्जारा रे
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे
कोई थोडो सो म्हारे सामे झांक रे बिण्जारा रे | rajasthani-raj |
105
रांझा आखदा हीर नूं मां तेरी सानूं फेर मुड़ रात दी चंबड़ी ए
मियां मन लै उसदे आखने नूं तेरी हीर पयारी दी अंबड़ी ए
किते जाइए उठ के घरीं बहीए अजे वयाह दी विथ ते लंबड़ी ए
वारस शाह इस इशक दे वनज विचों किसे पले न बधड़ी दमड़ी ए | panjabi-pan |
रूप तेरा चन्दा-सा खिल रिया
रूप तेरा चन्दासा खिल रिया ,
बे ने घढ़ी बैठ के ठाली
कर तावल वार भाजरी ,
जिसी दारू माँ आग लाग री
कलियाँदार घाघरी ,
पतली कम्मर लचकत चाली ।
भावार्थ
' तेरा रूप चांद की तरह खिलाखिलासा है । लगता है , भगवान ने तुझे फ़ुरसत में बैठ कर गढ़ा है । यह
सुनकर युवती वहाँ से भाग कर दूर चली गई । ऐसा लगा जैसे शराब में आग लग गई हो । कलीदार लहंगा पहने
वह अपनी पतली कमर को लचकाती हुई वहाँ से चली गई । ' | haryanvi-bgc |
डुगीकू डुगीकू खाडू राजन डेई
डुगीकू डुगीकू खाडू राजन डेई
डुगीकू डुगीकू खाडू राजन डेई
सुसून मारे चोजा मा आसीबा चोजा मा
सुसून मारे चोजा मा आसीबा चोजा मा
जुजुमवा डुगीकूखाडू जा सुसुन वा
जुजुमवा डुगीकूखाडू जा सुसुन वा
पैसो भी बागो धैला भी बागो
पैसो भी बागो धैला भी बागो
डुगूकी खाडू सुसून वा चाना भी दाना बागो जा
डुगूकी खाडू सुसून वा चाना भी दाना बागो जा
डुगीकू दाना बागो जा कालीमीटो डोंगोर जा
डुगीकू दाना बागो जा कालीमीटो डोंगोर जा
डुगीकू मिया नी मिटर जा डोंगोर बायल लाये जा
डुगीकू मिया नी मिटर जा डोंगोर बायल लाये जा
कुलू भी जोपे राजन जा डाई जा डाई
कुलू भी जोपे राजन जा डाई जा डाई
डुगीकू खाडू भी सुसून वा जा मारे
डुगीकू खाडू भी सुसून वा जा मारे
स्रोत व्यक्ति माखन , ग्राम आमाखाल | korku-kfq |
सीता राम सुमर लेवो
सीता राम सुमर लेवो ,
आरे तजी देवो सब काम
१ सपना की संपत भई ,
आरे बाध्यो जगराज
भोर भई उठ जागीयाँ
आरे जीनका कोण हवाल . . .
सीता हो राम . . .
२ बिगर पंख को सोरटो ,
आरे उड़ी चलीयो रे आकाश
रंग रुप वो को कछु नही
आरे वोक भुख नी प्यास . . .
सीता हो राम . . .
३ वायो सोनो नही निपजे ,
आरे मोती लग्या रे डाल
भाग बिना रे मोती ना मीले
तपस्या बीन राज . . .
सीता हो राम . . .
४ राजा दशरथ की हो अयोध्या ,
आरे सिर जाया रघुबीरा
माता हो जीनकी कोशल्याँ
आरे लक्ष्मण बलवीरा . . .
सीता हो राम . . .
५ अनहद बाजा हो बाजीया ,
आरे सतगुरु दरबार
सेन भगत जा की बिनती
राखो चरण आधार . . .
सीता हो राम . . . | nimadi-noe |
जसुदै दैंन उरानों जइये
जसुदै दैंन उरानों जइये ।
हाल लला कौ कइये ।
हीरा हाट बिचौली पैरी
चोली फटी दिखइये ।
कछुअक साँसी कछुअक झूँठी ,
जुरे मिले कैं कइये ,
आठ घरी दिन रात ‘ईसुरी’ ।
काँलौं कैं गम खइये । | bundeli-bns |
गूंगड़ा देशो नीला जोवेड़ा
गूंगड़ा देशो नीला जोवेड़ा
गूंगड़ा देशो नीला जोवेड़ा
रुन्डो रुन्डो टे जाटीये डो बेटा मारे
रुन्डो रुन्डो टे जाटीये डो बेटा मारे
रुन्डो रुन्डो जाटीये अरिको
अमा कंकार गाडा कोरा इयानी बेदी डाय वोडा माय मारे
रुन्डो रुन्डो जाटि अरिको
खिटी खोरा बा कंकार इयानी बेदी डाय माडो माय मारे
स्रोत व्यक्ति बालकराम सिलाले , ग्राम झल्लार | korku-kfq |
कब चुकबे, कब चुकबे चलनी कै गोंहुआँ हो न
कब चुकबे , कब चुकबे चलनी कै गोंहुआँ हो न ।
मोरा बीरन भइया आये अनवइया हो न । ।
बैइठहु न मोरे भइया रतनी पलँगिया हो न ।
बहिनी कहि जाऊ आपन हवलिया हो न । ।
नौ मन कूट्यों भइया नौ मन पीस्यों हो न ।
भइया पहिली टिकरिया मोर भोजनवा हो न । ।
भइया वोहू महैं कुकरा बिलरिया हो न । ।
भइया वोहू महैं गोरू चरवहवा हो न । ।
भइया वोहू महैं देवरा कलेवना हो न । ।
भइया वोहू महैं ननदी कलेवना हो न । ।
फटही लुगरिया भइया हमरा पखरुआ हो न ।
भइया वोहू महैं गोरू चरवहवा हो न । ।
भइया वोहू महैं ननदी ओढनिया हो न । ।
भइया वोहू महैं देवरा भगइया हो न । ।
ई दुख जिन कह्या बाबा के अगवा हो न ।
भइया सभवा बइठ बाबा रोइहैं हो न । ।
ई दुख जिन कह्या माई के अगवा हो न ।
भइया मचिया बइठ माई रोइहैं हो न । ।
ई दुख जिन कह्या सखिया के अगवा हो न ।
भइया खेलतै खेलत सखियाँ रोइहैं हो न । ।
ई दुख जिन कह्या बहिनी के अगवा हो न ।
भइया इहै सुनि गवने न जइहैं हो न । ।
ई दुख जिन कह्या भाभी के अगवा हो न ।
भइया राम रसोइयाँ तनवा मरिहैं हो न । ।
ई दुख कह्या भइया अगुआ के अगवा हो न ।
भइया जेन कीहें मोरी अगुअइया हो न । । | awadhi-awa |
हात रे भाई रे!
हात रे भाई रे
नाना की मांय पाणी खऽ गई , घर मऽ कुतरा कोंडी गई ।
कुतरा भूकसे होलई पर , नानों म्हारो सोवसे झोलई पर ।
आवों चिड़ीबाई दौड़ करी , नानो म्हारो सोवसे सौड़ करी ।
आवो चिड़ीबाई परात मऽ , नानो म्हारेा जासे बरात मंऽ ।
आवो चिड़ीबाई करूँ थारो याव ,
कथील को मूंदड़ो नऽ जुरूंग को हार
बाजरा को खीचड़ो नऽ मसूर की दाल ,
आवों चिड़ीबाई करूँ थारों याव ।
हात रे भाई रे | nimadi-noe |
गाम गाम धुपवा दियैले माँ कोसिका
गाम गाम धुपवा दियैले माँ कोसिका ,
माँ तोरा नहीं माया दरेग ,
बाजे लागल बिछिया अनोर ।
डेढ़ी डेढ़ी नैया गे कोसिका
घाटघाट चढ़ेबौ रोरिया
बाजे लागल बिछिया अनोर । ’’
धारे धारे चढ़ेबौ गे कोसिका
थार थार मिठइया ,
बाजे लागल बिछिया अनोर । | angika-anp |
दादा साहेब के घर पोता भयेल हे
बधैया
दादा साहेब के घर पोता भयेल हे ।
पोता निछाउर1 कछु देवऽ2 कि न ? ।
हमसे असीस3 कछु लेबऽ4 कि न ? ॥ 1 ॥
देबो5 मैं देबो पोती अन धन सोनवाँ ।
हमरा ही6 नाचबऽ आउ7 गयबऽ कि न ? ॥ 2 ॥
गयबो मैं गयबो दादा , दिनमा से रतिआ8 ।
अपन खजाना लुटयबऽ कि न ? ॥ 3 ॥
जुग जुग जिओ दादा तोहर होरिलवा9 ।
हमर ससुर घर पेठयबऽ कि न ? ॥ 4 ॥ | magahi-mag |
जे उट्ठ चल्लियों चाकरी, चाकरी वे माहिया
जे उट्ठ चल्लियों चाकरी , चाकरी वे माहिया
सान्नूँ वी लै चल्लीं नाल वे
अख्खियाँ नूँ नींद क्यों न आई वे
तूँ करेंगा चाकरी , चाकरी वे माहिया
मैं कत्तांगी सोहणा सूत वे
अख्खियाँ नूँ नींद क्यों न आई वे
इक्क ट्का तेरी चाकरी , चाकरी वे माहिया
लख्ख टके दा मेरा सूत वे
अख्खियाँ नूँ नींद क्यों न आई वे
भावार्थ
' यदि काम पर जाने के लिए तुम तैयार हो , काम पर जाने को प्रीतम तो मुझे भी अपने साथ ले चलो ।
अजी , मैं भी कहूँ , मुझे नींद क्यों नहीं आती ? तुम करोगे नौकरी , ओ मेरे प्रीतम और मैं कातूंगी सूत सुन्दर
मेरे प्रिय अजी , मैं भी सोचती हूँ , ये नींद क्यों नहीं आती ? एक रुपए की नौकरी तुम्हारी , ओ प्रीतम मेरा
सूत होगा एक लाख का । अजी , मैं भी कहूँ मुझे आख़िर नींद क्यों नहीं आती । ' | panjabi-pan |
401
रांझा वेखके बहुत हैरान होया पइयां दुध विच अवदियां फालड़ियां ने
गुसे नाल जो हशर नू जिमीउते जिउ विच कलीलियां1 चाड़ियां ने
चीणा2 चोग चमूनयां3 पायो ई मुन्न चलीए गोलीए दाढ़ियां ने
जिसते नबी दा रवा दरूद4 नाही अखीं फिरनना मूल उघाड़ियां ने
जैदा पवे परावना नांह मडा पंड नांह बझे विच साड़ियां ने
डुब मोए नी कासथी5 विच चीने वारस शाह ने बोलियां मारियां ने | panjabi-pan |
ऐली पैली सखरिया री पाल
ऐली पैली सखरिया री पाल
पालां रे तंबू तांणिया रे
जाये वनी रे बापाजी ने कैजो , के हस्ती तो सामां मेल जो जी
नहीं म्हारां देसलड़ा में रीत , भंवर पाला आवणों जी
जाय बनी रा काकाजी ने कैजो
घुड़ला तो सांमां भेजजो जी
नहीं म्हारे देशां में रीत , भेवर पाला चालणों जी
जाय बनीरा माता जी ने कैजो
सांमेला सामां मेल जो जी
नहीं म्हारे देशलड़ां में रीत
भंवर पाला आवणों री | rajasthani-raj |
548
निकल कोठयों तुरत तयार होया सहती आन हजूर सलाम कीता
बेड़ा ला बने असो आजजां दा रब्ब फजल तेरे उते आम कीता
मेरा यार मलावना वासता ई असां कम्म तेरा सरंजाम1 कीता
भाबी हथ फड़ायके टोर दिता कम खेड़यां दा सभ खास आम कीता
शरम मापयां दी सभो रोड़ दिती ससी नाल जिवें आदम जाम कीता
जो कुझ होवनी ने सीता नाल कीती अते दहसरे नाल जो राम कीता
वारस शाह आप जिस ते मेहरबान होवे उथे फजल ने आय कियाम कीता | panjabi-pan |
337
कहियां आन पंचायतां जोड़ियां नी असी रन्न नूं रेवड़ी जानने हां
फड़ी चिथ के लई लंघा पल विच तंबू वैर दे असीं ना तानने हां
लोक जागदे महरियांनाल परचन असीं खाब अंदर मौजां मानने हां
लो छानदे भंग ते शरबतां नूं असीं आदमी नजर विच छानने हां | panjabi-pan |
अँगना बहारइत चेरिया त सुनहऽ बचन मोरा हे
अँगना बहारइत1 चेरिया त सुनहऽ बचन मोरा हे ।
चेरिया , बबुआ जी के पारु न हँकरवा , 2 महलिया में कुछो काम हे ॥ 1 ॥
पोथिया जे बिगलन3 बबुआ दुअरवे पर , 4 अवरो दलनवा5 पर हे ।
मचिया बइठल तुहूँ भउजी , त सुनहऽ बचन मोरा हे ॥ 2 ॥
भउजी , कउची6 महलिया कुछो काम , त हमरा बोलावल जी ।
बबुआ , भइया जी के पारु न हँकरिया , त दरदे बेयाकुल जी ॥ 3 ॥
भइया , रउरा महलिया त कुछो काम , भउजी बोलावले जी ।
पसवा त फेंकलन परभु जी बेलवा तरे , अउरो बबूर तरे हे ।
भनसा7 पइसल तुहूँ धनियाँ , कउन काम हमरा बोलऽवलऽ जी ॥ 4 ॥
डाँर मोरा फाटे करइले8 जोगे , ओटिया चिल्हकि मारे हे ।
सामी , लामीलामी केसिया भसम9 लोटे , धरती अन्हार लागे हे ॥ 5 ॥
अतना बचनियाँ परभु जी सुनलन , त देबी जी मनावन चललन हे ।
देबी जी , तिरिया पर होहु न सहइया , अब न तिरिया पास जइबो हे ॥ 6 ॥
पहिले जे धनियाँ मोरा महितऽ , त अउरो में चूमि लेती हे ।
धनियाँ , मगही ढोली10 पनवा चभइती , 11त जँघिया बइठइती हे ।
धनियाँ , लाली रे रजइया हम ओढ़उती , त कोरबा12 ले के सुतती हे ॥ 7 ॥ | magahi-mag |
ये बहना डो ये बहना लेना डो
ये बहना डो ये बहना लेना डो
बुलवा ईन डायेन ये बहना डो
ये बहना बहना बुलवा डो ईन डायेन ये बहना डो
ये बहना बहना बुलवा डो ईन डाये ये डाई जा ये डाई
इयां उरान नी डायेन मारे कजली गाय नी कोनकेन मारे
ये डाई जा ये डाई इयां उरान जा कपली गेई जा
कोनकेन मारे ये बहना बुलवा डो
ईन डायेन ये बहना ये बहना ये बहना बहना बुलवा डो
ईन डायेन ये बहना डो ये बहना कपली गेई कोनकेन मारे
ये डाई जा ये डाई ईन भी से असली कोन्जई जा डाई
ये डाई जा झाडी टालटेन ईन उलडे मारे
स्रोत व्यक्ति माखन , ग्राम आमाखाल | korku-kfq |
कय गुने कलसा हे, कय गुने भार
कय1 गुने2 कलसा हे , कय गुने भार3
बोल हे कलसवा हे , के4 लेत भार ॥ 1 ॥
छव गुने कलसा हे , नव गुने भार ।
बोलथि5 जनइया6 रिखी7 हम लेबो भार ॥ 2 ॥
गंगाजल पानी देबो , पुंगीफल धान ।
चउमक8 बराय9 देबो , सगरो10 इँजोर11 ॥ 3 ॥
धन12 अनपुरना13 देइ , धन रउरा भाग ।
कलसा धराइ गेल14 जनइया रिखी के मड़वा ॥ 4 ॥ | magahi-mag |
Subsets and Splits
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