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चतरा। जिले के प्रतापपुर वन क्षेत्र के नंदई जंगल से जलावन के सूखी लकड़ी व घेरान लेकर जा रहे बुजुर्ग को उठक-बैठक कराना वन कर्मियों को महंगा पड़ा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्वीट के माध्यम से उपायुक्त को मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई करते हुए सूचित करने की बात कही हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इस मामले पर ट्वीट कर कहा कि माफिया पूरा जंगल साफ कर रहे हैं। तब सरकार कहां सो रही होती हैं। अपने उपयोग के लिए सुखी टहनियों को ले जा रहे गरीब आदिवासियों पर इस तरह का जुल्म करना कहां तक वाजिब हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक हैं। मालूम हो कि 28 जून को प्रतापपुर प्रखंड के नंदई जंगल से जलावन की सूखी लकड़ी व घेरान ले जा रहे बुजुर्ग को वन कर्मियों ने पकड़ा। जिसके बाद उन्हें उठक-बैठक करायी। साथ ही भविष्य में जंगल से लकड़ी नहीं काटने की चेतावनी दी गयी। थे। गया। बताया। था। वन कर्मियों द्वारा बुजुर्ग को उठक बैठक कराने मामले में उत्तरी वन प्रमंडल के डीएफओ राहुल मीणा ने जांच का आदेश दिया है. जांच का जिम्मा वन क्षेत्र पदाधिकारी सूर्य भूषण कुमार को सौंपा हैं. जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी वनकर्मियों के विरूद्ध कार्रवाईहोगी. डीएफओ ने कहा की बुजुर्ग के साथ अमानवीय गैर-संवैधानिक व्यवहार किया गया है. कानून हाथ में लेने वाले वनकर्मी को बख्शा नहीं जायेगा।
चतरा। जिले के प्रतापपुर वन क्षेत्र के नंदई जंगल से जलावन के सूखी लकड़ी व घेरान लेकर जा रहे बुजुर्ग को उठक-बैठक कराना वन कर्मियों को महंगा पड़ा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्वीट के माध्यम से उपायुक्त को मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई करते हुए सूचित करने की बात कही हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इस मामले पर ट्वीट कर कहा कि माफिया पूरा जंगल साफ कर रहे हैं। तब सरकार कहां सो रही होती हैं। अपने उपयोग के लिए सुखी टहनियों को ले जा रहे गरीब आदिवासियों पर इस तरह का जुल्म करना कहां तक वाजिब हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक हैं। मालूम हो कि अट्ठाईस जून को प्रतापपुर प्रखंड के नंदई जंगल से जलावन की सूखी लकड़ी व घेरान ले जा रहे बुजुर्ग को वन कर्मियों ने पकड़ा। जिसके बाद उन्हें उठक-बैठक करायी। साथ ही भविष्य में जंगल से लकड़ी नहीं काटने की चेतावनी दी गयी। थे। गया। बताया। था। वन कर्मियों द्वारा बुजुर्ग को उठक बैठक कराने मामले में उत्तरी वन प्रमंडल के डीएफओ राहुल मीणा ने जांच का आदेश दिया है. जांच का जिम्मा वन क्षेत्र पदाधिकारी सूर्य भूषण कुमार को सौंपा हैं. जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी वनकर्मियों के विरूद्ध कार्रवाईहोगी. डीएफओ ने कहा की बुजुर्ग के साथ अमानवीय गैर-संवैधानिक व्यवहार किया गया है. कानून हाथ में लेने वाले वनकर्मी को बख्शा नहीं जायेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि करीब 4 वर्षों बाद प्रवासी भारतीय सम्मेलन फिर से अपने मूल स्वरूप में हो रहा . ये सम्मेलन मध्य प्रदेश की उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है. मध्य प्रदेश के इंदौर में आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह अभी जिस शहर में हैं, वह अपने आप में अद्भुत है. लोग कहते हैं कि इंदौर एक शहर है, मैं कहता हूं कि इंदौर एक दौर है. पीएम मोदी ने कहा कि करीब 4 वर्षों बाद प्रवासी भारतीय सम्मेलन एक फिर से अपने मूल स्वरूप में हो रहा . ये सम्मेलन मध्य प्रदेश की उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के इतने अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग एक कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो वसुधैव कुटुंबकम् की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं. दुनिया में जब भारत की शांति और उसके लोकतंत्र की चर्चा होती है, तो इससे देश का गौरव बढ़ जाता है. आज भारत के पास सक्षम युवाओं की एक बड़ी तादाद है. हमारे युवाओं के पास स्किल भी है और काम करने के लिए जज्बा भी है. ये 'प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन' मध्य प्रदेश की धरती पर हो रहा है, जिसे देश का ह्रदय क्षेत्र कहा जाता है। मध्य प्रदेश में मां नर्मदा का जल, यहां के जंगल, आदिवासी परंपरा और यहां का अध्यात्म आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बनाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जो उपलब्धियां प्राप्त की हैं, वह असाधारण हैं. जब भारत कोविड महामारी के बीच वैक्सीन बना लेता है, जब भारत करोड़ों लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाता है, जब भारत बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनता है तो दुनिया के लोगों में क्योरिसीटी बढ़ती है कि भारत ये कैसे कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत को आशा और जिज्ञासा की दृष्टि से देखा जा रहा है. आज टॉप-5 इकोनॉमी वाले देशों में हमारा देश शामिल हो गया है. पूरे विश्व में भारत की बात सुनी जा रही है. उन्होंने कहा कि मैं सभी भारतीय प्रवासियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर कहता हूं. देश के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आपकी भूमिका विविध है. भारत स्पेस टेक्नोलोजी में रिकॉर्ड बना रहा है. कई देशों में भारत के लोग जाकर बसे हैं. वो देश उनका लाभ उठा रहे हैं, भारत का कोई व्यक्ति जब विदेश जाता है और वहां पर कोई भी उसे अपना मिल जाता है तो लगता है कि पूरा भारत उससे मिल गया है. मैं गुयाना के राष्ट्रपति और सूरीनाम के राष्ट्रपति का भी स्वागत करता हूं. उन्होंने जिन सुझावों को मेरे सामने रखा है, वह बहुत उपयोगी है.पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं के साथ ही वह प्रवासी युवा, जो भारत से जुड़े हैं, उन्हें भी हम प्रोत्साहित कर रहे हैं. इससे पहले शहर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भाजपा नेता विष्णुदत्त शर्मा और अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री की अगवानी की. बता दें कि प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन चार साल के अंतराल के बाद पहली बार भौतिक रूप से आयोजित किया जा रहा है. करीब 70 देशों के 3,500 से ज्यादा भारतवंशियों ने इसमें हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. इससे पहले प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2021 में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित किया गया था.
पीएम मोदी ने कहा कि करीब चार वर्षों बाद प्रवासी भारतीय सम्मेलन फिर से अपने मूल स्वरूप में हो रहा . ये सम्मेलन मध्य प्रदेश की उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है. मध्य प्रदेश के इंदौर में आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह अभी जिस शहर में हैं, वह अपने आप में अद्भुत है. लोग कहते हैं कि इंदौर एक शहर है, मैं कहता हूं कि इंदौर एक दौर है. पीएम मोदी ने कहा कि करीब चार वर्षों बाद प्रवासी भारतीय सम्मेलन एक फिर से अपने मूल स्वरूप में हो रहा . ये सम्मेलन मध्य प्रदेश की उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के इतने अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग एक कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो वसुधैव कुटुंबकम् की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं. दुनिया में जब भारत की शांति और उसके लोकतंत्र की चर्चा होती है, तो इससे देश का गौरव बढ़ जाता है. आज भारत के पास सक्षम युवाओं की एक बड़ी तादाद है. हमारे युवाओं के पास स्किल भी है और काम करने के लिए जज्बा भी है. ये 'प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन' मध्य प्रदेश की धरती पर हो रहा है, जिसे देश का ह्रदय क्षेत्र कहा जाता है। मध्य प्रदेश में मां नर्मदा का जल, यहां के जंगल, आदिवासी परंपरा और यहां का अध्यात्म आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बनाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जो उपलब्धियां प्राप्त की हैं, वह असाधारण हैं. जब भारत कोविड महामारी के बीच वैक्सीन बना लेता है, जब भारत करोड़ों लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाता है, जब भारत बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनता है तो दुनिया के लोगों में क्योरिसीटी बढ़ती है कि भारत ये कैसे कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत को आशा और जिज्ञासा की दृष्टि से देखा जा रहा है. आज टॉप-पाँच इकोनॉमी वाले देशों में हमारा देश शामिल हो गया है. पूरे विश्व में भारत की बात सुनी जा रही है. उन्होंने कहा कि मैं सभी भारतीय प्रवासियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर कहता हूं. देश के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आपकी भूमिका विविध है. भारत स्पेस टेक्नोलोजी में रिकॉर्ड बना रहा है. कई देशों में भारत के लोग जाकर बसे हैं. वो देश उनका लाभ उठा रहे हैं, भारत का कोई व्यक्ति जब विदेश जाता है और वहां पर कोई भी उसे अपना मिल जाता है तो लगता है कि पूरा भारत उससे मिल गया है. मैं गुयाना के राष्ट्रपति और सूरीनाम के राष्ट्रपति का भी स्वागत करता हूं. उन्होंने जिन सुझावों को मेरे सामने रखा है, वह बहुत उपयोगी है.पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं के साथ ही वह प्रवासी युवा, जो भारत से जुड़े हैं, उन्हें भी हम प्रोत्साहित कर रहे हैं. इससे पहले शहर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भाजपा नेता विष्णुदत्त शर्मा और अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री की अगवानी की. बता दें कि प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन चार साल के अंतराल के बाद पहली बार भौतिक रूप से आयोजित किया जा रहा है. करीब सत्तर देशों के तीन,पाँच सौ से ज्यादा भारतवंशियों ने इसमें हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. इससे पहले प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन दो हज़ार इक्कीस में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित किया गया था.
बालीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने अयोध्या मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक ट्वीट किया है। हुमा कुरैशी ने कहा "मेरे प्यारे भारतवासियों, आज अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। लोगों से फैसले का सम्मान करने की अपील की है। हुमा के ट्वीट पर खूब प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। My dear Indians, please respect the Supreme Court verdict on #AyodhyaCase today. We all need to heal together and move on from this as one nation ! ! ? ? आपको बता दें कि अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसला विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय पर सुनाया गया। फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी।
बालीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने अयोध्या मामले पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक ट्वीट किया है। हुमा कुरैशी ने कहा "मेरे प्यारे भारतवासियों, आज अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। लोगों से फैसले का सम्मान करने की अपील की है। हुमा के ट्वीट पर खूब प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। My dear Indians, please respect the Supreme Court verdict on #AyodhyaCase today. We all need to heal together and move on from this as one nation ! ! ? ? आपको बता दें कि अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसला विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय पर सुनाया गया। फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी।
काबुल : ban on women studying in college : अफगानिस्तान में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से और अगली सूचना आने तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। तालिबान सरकार की एक बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई। ban on women studying in college : उच्च शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियाउल्लाह हाशमी द्वारा साझा किए गए पत्र में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को प्रतिबंध जल्द से जल्द लागू करने और प्रतिबंध लगाने के बाद मंत्रालय को सूचित करने को कहा है। हाशमी ने अपने पत्र को ट्वीट भी किया और 'एसोसिएटेड प्रेस' को एक संदेश में इसकी सामग्री की पुष्टि की।
काबुल : ban on women studying in college : अफगानिस्तान में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से और अगली सूचना आने तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। तालिबान सरकार की एक बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई। ban on women studying in college : उच्च शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियाउल्लाह हाशमी द्वारा साझा किए गए पत्र में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को प्रतिबंध जल्द से जल्द लागू करने और प्रतिबंध लगाने के बाद मंत्रालय को सूचित करने को कहा है। हाशमी ने अपने पत्र को ट्वीट भी किया और 'एसोसिएटेड प्रेस' को एक संदेश में इसकी सामग्री की पुष्टि की।
जयनगर : जयनगर पेट्रोल पंप के समीप दो मोटरसाइकिल की आमने-सामने जोरदार टकर बुधवार की दोपहर हो गया। मिली जानकारी के अनुसार रधुनियाडीह निवासी आसीन मियां, तबस्सुम खातून अपने मोटरसाइकिल से कोडरमा की ओर जा रहे थे। वही विपरीत दिशा की ओर से सलैया पत्थलडीहा निवासी अर्जुन दास जोकि मरकच्चो की ओर जा रहा था। इसी बीच जय नगर पेट्रोल पंप के समीप दोनों वाहन में जोरदार टक्कर हो गई, और आसींद मियां तबस्सुम खातून एवं अर्जुन दास गंभीर रूप से घायल हो गए जिसकी सूचना जयनगर थाना को दी गई । वहीं घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मी और मुखिया इरफान अंसारी ने घायल लोगों को ग्रामीणों के सहयोग से जय नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया और प्राथमिक उपचार कर बेहतर इलाज के लिए तीनों को सदर अस्पताल कोडरमा भेजा गया।
जयनगर : जयनगर पेट्रोल पंप के समीप दो मोटरसाइकिल की आमने-सामने जोरदार टकर बुधवार की दोपहर हो गया। मिली जानकारी के अनुसार रधुनियाडीह निवासी आसीन मियां, तबस्सुम खातून अपने मोटरसाइकिल से कोडरमा की ओर जा रहे थे। वही विपरीत दिशा की ओर से सलैया पत्थलडीहा निवासी अर्जुन दास जोकि मरकच्चो की ओर जा रहा था। इसी बीच जय नगर पेट्रोल पंप के समीप दोनों वाहन में जोरदार टक्कर हो गई, और आसींद मियां तबस्सुम खातून एवं अर्जुन दास गंभीर रूप से घायल हो गए जिसकी सूचना जयनगर थाना को दी गई । वहीं घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मी और मुखिया इरफान अंसारी ने घायल लोगों को ग्रामीणों के सहयोग से जय नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया और प्राथमिक उपचार कर बेहतर इलाज के लिए तीनों को सदर अस्पताल कोडरमा भेजा गया।
न्यूज हैल्पलाइन . मुम्बई । जान्हवी कपूर की अपकमिंग फिल्म 'गुंजन सक्सेनाःद कारगिल गर्ल' को रिलीज होने में अब कुछ ही दिन बचें हुए है, और मेकर्स लोगों में फिल्म को लेकर उत्सुकता बनाएं रखने के लिए फिल्म से रिलेटेड कुछ ना कुछ सोशल मीडिया पर जारी करते रहते हैं। अब मेकर्स ने फिल्म का एक और सॉन्ग 'डोरी टूट गैय्या' आज रिलीज कर दिया है। अभिनेत्री जाह्नवी कपूर जल्द ही फिल्म 'गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल' में दिखाई देने वाली हैं. इस फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, सभी को इस फिल्म का इंतजार है. हाल ही में फिल्म का एक गाना रिलीज किया गया है. यह गाना बहुत भावुक कर देने वाला है और लोगों के दिलों को छू रहा है. इस गाने को शेयर करते हुए जाह्नवी ने लिखा "अपने सपनों को कभी मत छोड़ना".गाने को जान्हवी कपूर ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। गाना शेयर कर उन्होंने कैप्शन दिया, 'डोरी टूट गैय्या, अपने सपनों को कभी गिवअप मत करिए। #डोरी टूट गैय्या सॉन्ग आउट। 'गुंजन सक्सेनाःद कारगिल गर्ल' का 12 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर प्रिमियर होगा।'गाने में जान्हवी अपने पायलट बनने के सपनों को लेकर संघर्ष करती दिख रहीं हैं। इस गाने को रेखा भारद्वाज ने गाया है। म्युज़िक अमित त्रिवेदी ने कंपोज किया है और लिरिक्स कौसर मुनीर ने लिखें हैं।
न्यूज हैल्पलाइन . मुम्बई । जान्हवी कपूर की अपकमिंग फिल्म 'गुंजन सक्सेनाःद कारगिल गर्ल' को रिलीज होने में अब कुछ ही दिन बचें हुए है, और मेकर्स लोगों में फिल्म को लेकर उत्सुकता बनाएं रखने के लिए फिल्म से रिलेटेड कुछ ना कुछ सोशल मीडिया पर जारी करते रहते हैं। अब मेकर्स ने फिल्म का एक और सॉन्ग 'डोरी टूट गैय्या' आज रिलीज कर दिया है। अभिनेत्री जाह्नवी कपूर जल्द ही फिल्म 'गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल' में दिखाई देने वाली हैं. इस फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, सभी को इस फिल्म का इंतजार है. हाल ही में फिल्म का एक गाना रिलीज किया गया है. यह गाना बहुत भावुक कर देने वाला है और लोगों के दिलों को छू रहा है. इस गाने को शेयर करते हुए जाह्नवी ने लिखा "अपने सपनों को कभी मत छोड़ना".गाने को जान्हवी कपूर ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। गाना शेयर कर उन्होंने कैप्शन दिया, 'डोरी टूट गैय्या, अपने सपनों को कभी गिवअप मत करिए। #डोरी टूट गैय्या सॉन्ग आउट। 'गुंजन सक्सेनाःद कारगिल गर्ल' का बारह अगस्त को नेटफ्लिक्स पर प्रिमियर होगा।'गाने में जान्हवी अपने पायलट बनने के सपनों को लेकर संघर्ष करती दिख रहीं हैं। इस गाने को रेखा भारद्वाज ने गाया है। म्युज़िक अमित त्रिवेदी ने कंपोज किया है और लिरिक्स कौसर मुनीर ने लिखें हैं।
Bihar Election 2020: बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। तीन चरणों में मतदान के बाद 10 नवंबर को परिणामों का ऐलान होगा। नतीजों के बाद पता चल जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि बिहार में सीएम बनना जितना मुश्किल है उतना ही कठिन अपनी कुरसी को बताए रखना भी है। राज्य ने अभी तक 23 मुख्यमंत्री देखे हैं जिनमें से 13 तो साल भर के अंदर ही कुर्सी गंवा बैठे। आइए डालते हैं उन्हीं में से चंद पर एक नजरः
Bihar Election दो हज़ार बीस: बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। तीन चरणों में मतदान के बाद दस नवंबर को परिणामों का ऐलान होगा। नतीजों के बाद पता चल जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि बिहार में सीएम बनना जितना मुश्किल है उतना ही कठिन अपनी कुरसी को बताए रखना भी है। राज्य ने अभी तक तेईस मुख्यमंत्री देखे हैं जिनमें से तेरह तो साल भर के अंदर ही कुर्सी गंवा बैठे। आइए डालते हैं उन्हीं में से चंद पर एक नजरः
माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद 14 दिसंबर, 2017 को नई दिल्ली में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राज कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे। विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाता है। जागरूकता फैलाने के रूप में बीईई ऊर्जा उपभोग को कम करने में उद्योगों के प्रयासों को मान्यता प्रदान करने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान करता है। बीईई ऊर्जा संरक्षण विषय पर वार्षिक चित्रकला प्रतियोगिता के राष्ट्रीय विजेताओं को भी पुरस्कृत करता है। इस वर्ष राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में 1.22 करोड़ से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया था और 322 औद्योगिक ईकाइयों तथा प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिष्ठानों ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2017 के लिए प्रतिभागिता की थी। माननीय राष्ट्रपति इस वर्ष के राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार और राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता पुरस्कार प्रदान करेंगे। श्री कोविंद पुरस्कार विजेताओं के चित्रों की प्रदर्शनी भी देखेंगे। कार्यक्रम के दौरान उद्योग क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता की उपलब्धियों पर लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी।
माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद चौदह दिसंबर, दो हज़ार सत्रह को नई दिल्ली में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राज कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे। विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष चौदह दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाता है। जागरूकता फैलाने के रूप में बीईई ऊर्जा उपभोग को कम करने में उद्योगों के प्रयासों को मान्यता प्रदान करने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान करता है। बीईई ऊर्जा संरक्षण विषय पर वार्षिक चित्रकला प्रतियोगिता के राष्ट्रीय विजेताओं को भी पुरस्कृत करता है। इस वर्ष राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में एक.बाईस करोड़ से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया था और तीन सौ बाईस औद्योगिक ईकाइयों तथा प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिष्ठानों ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार दो हज़ार सत्रह के लिए प्रतिभागिता की थी। माननीय राष्ट्रपति इस वर्ष के राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार और राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता पुरस्कार प्रदान करेंगे। श्री कोविंद पुरस्कार विजेताओं के चित्रों की प्रदर्शनी भी देखेंगे। कार्यक्रम के दौरान उद्योग क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता की उपलब्धियों पर लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी।
अवैध शराब बिक्री मामले में अब पुलिस और एक्साइज विभाग ने तेवर कड़े कर लिए हैं। इस बार के लॉकडाउन के शराब तस्करी के मामलों को लेकर शुरू से ही सख्त नजर आ रहे गृह मंत्री अनिल विज पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। झज्जर जिले की जिस डिस्टिलरी की अवैध शराब प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर पकड़ी गई है, उस डिस्टिलरी से पुलिस जवानों को हटा दिया है। उनकी जगह अब पूर्व फौजी यानी स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) नजर रखेंगे। विगत दिवस एपिसॉड और रॉयल ग्रीन व्हिस्की ब्रांड के होलोग्राम नकली निकलने की रिपोर्ट पर गृह मंत्री अनिल विज ने कड़ा नोटिस लेते हुए इस बाबत डीजीपी मनोज यादव को पत्र लिखा है। दैनिक ट्रिब्यून द्वारा मंगलवार को प्रकाशित 'हरियाणा में नकली होलोग्राम लगा बेची जा रही थी दो नंबर की शराब' खबर को साथ भेजते हुए विज ने इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश डीजीपी को दिए हैं। उन्होंने एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। सूत्रों का कहना है कि विज के आदेशों के बाद डीजीपी ने हैदराबाद लैब की रिपोर्ट को लेकर आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी से भी बात की और उनसे रिपोर्ट की कॉपी मांगी, जिससे विभिन्न थानों में अवैध शराब को लेकर दर्ज एफआईआर में नयी धाराएं जोड़ी जा सकें। इतना ही नहीं, फतेहाबाद के एसपी ने आबकारी एवं कराधान आयुक्त से भूना पुलिस द्वारा पकड़ी गई शराब के होलोग्राम की रिपोर्ट को लेकर बात की है। बताते हैं कि इसी सप्ताह में यह रिपोर्ट भी हैदराबाद लैब से आ सकती है। इस बीच, पुलिस ने झज्जर की डिस्टलरी में तैनात पुलिस स्टाफ को हटा दिया है। उनकी लापरवाही के चलते यह फैसला लिया है। पुलिस जवानों की जगह अब पूर्व सैनिकों को डिस्टलरी में तैनात किया है ताकि अवैध तरीके से शराब डिस्टिलरी से बाहर न निकल सके। इधर, एक्साइज डिपार्टमेंट ने सिद्दीपुर लोवा (बहादुरगढ़) में अंग्रेजी शराब ठेके का लाइसेंस रद्द कर दिया है। ठेके की सिक्योरिटी भी जब्त कर ली है। यह ठेका राकेश कुमार के नाम पर था। पकड़ी गई। आरोप हैं कि अधिकांश शराब झज्जर की ही डिस्टिलरी से निकली थी। इस डिस्टिलरी के दो ब्रांड - एपिसॉड व रॉयन ग्रीन व्हिस्की को ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है। इन दोनों ही ब्रांड की व्हिस्की के होलोग्राम निकली मिले हैं। विभाग द्वारा अंदरखाने इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। लगातार पकड़ी जा रही शराब और पुलिस कार्रवाई के बीच फतेहाबाद पुलिस फिर से शराब का जखीरा पकड़ चुकी है। सोमवार को पुलिस ने 200 से अधिक शराब की पेटियां पकड़ीं। इनमें से 100 पेटी एपिसॉड व्हिस्की की हैं, जिसके होलोग्राम के सैंपल पहले भी फेल हो चुके हैं। 110 पेटी मूनवॉक की भी पकड़ी हैं, जो हरियाणा में पास ही नहीं है। गठबंधन सरकार घोटालों की सरकार बनकर रह गई है। पिछले साल भी शराब घोटाला हुआ और इस बार भी लॉकडाउन में मिलीभगत से अवैध तरीके से शराब बेची गई। बिना सरकारी संरक्षण के शराब माफिया इस तरह से हावी नहीं हो सकता। लॉकडाउन में शराब ठेकों के बंद होने के बावजूद अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ पुलिस सख्ती से निपटी है। नकली होलोग्राम मामले में डीजीपी को जांच करके विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। उन्हें एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।रिपोर्ट रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई होगी।
अवैध शराब बिक्री मामले में अब पुलिस और एक्साइज विभाग ने तेवर कड़े कर लिए हैं। इस बार के लॉकडाउन के शराब तस्करी के मामलों को लेकर शुरू से ही सख्त नजर आ रहे गृह मंत्री अनिल विज पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। झज्जर जिले की जिस डिस्टिलरी की अवैध शराब प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर पकड़ी गई है, उस डिस्टिलरी से पुलिस जवानों को हटा दिया है। उनकी जगह अब पूर्व फौजी यानी स्पेशल पुलिस ऑफिसर नजर रखेंगे। विगत दिवस एपिसॉड और रॉयल ग्रीन व्हिस्की ब्रांड के होलोग्राम नकली निकलने की रिपोर्ट पर गृह मंत्री अनिल विज ने कड़ा नोटिस लेते हुए इस बाबत डीजीपी मनोज यादव को पत्र लिखा है। दैनिक ट्रिब्यून द्वारा मंगलवार को प्रकाशित 'हरियाणा में नकली होलोग्राम लगा बेची जा रही थी दो नंबर की शराब' खबर को साथ भेजते हुए विज ने इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश डीजीपी को दिए हैं। उन्होंने एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। सूत्रों का कहना है कि विज के आदेशों के बाद डीजीपी ने हैदराबाद लैब की रिपोर्ट को लेकर आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी से भी बात की और उनसे रिपोर्ट की कॉपी मांगी, जिससे विभिन्न थानों में अवैध शराब को लेकर दर्ज एफआईआर में नयी धाराएं जोड़ी जा सकें। इतना ही नहीं, फतेहाबाद के एसपी ने आबकारी एवं कराधान आयुक्त से भूना पुलिस द्वारा पकड़ी गई शराब के होलोग्राम की रिपोर्ट को लेकर बात की है। बताते हैं कि इसी सप्ताह में यह रिपोर्ट भी हैदराबाद लैब से आ सकती है। इस बीच, पुलिस ने झज्जर की डिस्टलरी में तैनात पुलिस स्टाफ को हटा दिया है। उनकी लापरवाही के चलते यह फैसला लिया है। पुलिस जवानों की जगह अब पूर्व सैनिकों को डिस्टलरी में तैनात किया है ताकि अवैध तरीके से शराब डिस्टिलरी से बाहर न निकल सके। इधर, एक्साइज डिपार्टमेंट ने सिद्दीपुर लोवा में अंग्रेजी शराब ठेके का लाइसेंस रद्द कर दिया है। ठेके की सिक्योरिटी भी जब्त कर ली है। यह ठेका राकेश कुमार के नाम पर था। पकड़ी गई। आरोप हैं कि अधिकांश शराब झज्जर की ही डिस्टिलरी से निकली थी। इस डिस्टिलरी के दो ब्रांड - एपिसॉड व रॉयन ग्रीन व्हिस्की को ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है। इन दोनों ही ब्रांड की व्हिस्की के होलोग्राम निकली मिले हैं। विभाग द्वारा अंदरखाने इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। लगातार पकड़ी जा रही शराब और पुलिस कार्रवाई के बीच फतेहाबाद पुलिस फिर से शराब का जखीरा पकड़ चुकी है। सोमवार को पुलिस ने दो सौ से अधिक शराब की पेटियां पकड़ीं। इनमें से एक सौ पेटी एपिसॉड व्हिस्की की हैं, जिसके होलोग्राम के सैंपल पहले भी फेल हो चुके हैं। एक सौ दस पेटी मूनवॉक की भी पकड़ी हैं, जो हरियाणा में पास ही नहीं है। गठबंधन सरकार घोटालों की सरकार बनकर रह गई है। पिछले साल भी शराब घोटाला हुआ और इस बार भी लॉकडाउन में मिलीभगत से अवैध तरीके से शराब बेची गई। बिना सरकारी संरक्षण के शराब माफिया इस तरह से हावी नहीं हो सकता। लॉकडाउन में शराब ठेकों के बंद होने के बावजूद अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ पुलिस सख्ती से निपटी है। नकली होलोग्राम मामले में डीजीपी को जांच करके विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। उन्हें एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।रिपोर्ट रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई होगी।
पेरिसः विश्व की नंबर-1 महिला टेनिस खिलाड़ी अमेरिका की सेरेना विलियमस ने साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन के फाइनल में जगह बना ली है। फाइनल में सेरेना का सामना गर्बिने मुगुरुजा से होगा। सेरेना ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में किकि बेर्टेस को कड़े मुकाबले में 7-6 (7), 6-4 से मात देकर फाइनल तक की राह तय की। सेरेना लगातार दूसरे मैच में अपने श्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थीं। उन्होंने पहले सेट में दो सेट प्वाइंट का सामना किया लेकिन अंततः वह इन्हें बचाने में कामयाब रहीं। अगर वह इस खिताब को जीत जाती हैं तो यह उनकी पिछले चार साल में तीसरी जीत होगी। इससे पहले गर्बिने मुगुरुजा ने सेमीफाइनल में समांथा स्टोसुर को 6-2, 6-4 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। समांथा 2012 के बाद पहली बार ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में खेल रहीं थी। पहले सेट में मुगुरुजा ने 4-0 की बढ़त बना ली थी। इसके बाद समांथा ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन मुगुरुजा उनसे काफी आगे निकल चुकी थीं। दूसरा सेट भी पहले सेट की तरह रहा। मुगुरुजा ने शानदार खेल दिखाया और दूसरा सेट भी अपने नाम कर मैच जीतते हुए फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में सेरेना और मुगुरुजा के बीच अच्छे मुकाबले की उम्मीद है।
पेरिसः विश्व की नंबर-एक महिला टेनिस खिलाड़ी अमेरिका की सेरेना विलियमस ने साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन के फाइनल में जगह बना ली है। फाइनल में सेरेना का सामना गर्बिने मुगुरुजा से होगा। सेरेना ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में किकि बेर्टेस को कड़े मुकाबले में सात-छः , छः-चार से मात देकर फाइनल तक की राह तय की। सेरेना लगातार दूसरे मैच में अपने श्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थीं। उन्होंने पहले सेट में दो सेट प्वाइंट का सामना किया लेकिन अंततः वह इन्हें बचाने में कामयाब रहीं। अगर वह इस खिताब को जीत जाती हैं तो यह उनकी पिछले चार साल में तीसरी जीत होगी। इससे पहले गर्बिने मुगुरुजा ने सेमीफाइनल में समांथा स्टोसुर को छः-दो, छः-चार से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। समांथा दो हज़ार बारह के बाद पहली बार ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में खेल रहीं थी। पहले सेट में मुगुरुजा ने चार-शून्य की बढ़त बना ली थी। इसके बाद समांथा ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन मुगुरुजा उनसे काफी आगे निकल चुकी थीं। दूसरा सेट भी पहले सेट की तरह रहा। मुगुरुजा ने शानदार खेल दिखाया और दूसरा सेट भी अपने नाम कर मैच जीतते हुए फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में सेरेना और मुगुरुजा के बीच अच्छे मुकाबले की उम्मीद है।
Dhanbad: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 4 जुलाई को धनबाद पहुंचे. उनका हेलीकॉप्टर तय समय दोपहर 12. 45 बजे से सवा दो घंटा विलंब से 3 बजे बरवाअड्डा हवाई अड्डे पर लैंड किया. हवाई अड्डे पर जिला पुलिस के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया. सीएम के दोरे को लेकर शहर बरवाअडड़ा से लेकर कार्यक्रम स्थल गोल्फ ग्राउंड तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सभी चौक-चौराहों पर पुलिस की तैनाती की गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्तमान कार्यकाल में किसी सरकारी कार्यक्रम पहली बार धनबाद पहुंचे हैं. गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सीएम का काफिला हवाई अड्डे से गोल्फ ग्राउंड के लिए रवाना हुआ. वहां वे जिले की 512. 14 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे. साथ ही 18940 लोगों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण व 174 लोगों को नियुक्ति पत्र भी सौपेंगे. कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बन्ना गुप्ता, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह उपस्थित रहेगें. हवाई अड्डे पर धनबाद के डीसी संदीप सिंह, एसएसपी संजीव कुमार सहित जेएमएम और कांग्रेस के कई नेता पहुंचे थे.
Dhanbad: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चार जुलाई को धनबाद पहुंचे. उनका हेलीकॉप्टर तय समय दोपहर बारह. पैंतालीस बजे से सवा दो घंटा विलंब से तीन बजे बरवाअड्डा हवाई अड्डे पर लैंड किया. हवाई अड्डे पर जिला पुलिस के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया. सीएम के दोरे को लेकर शहर बरवाअडड़ा से लेकर कार्यक्रम स्थल गोल्फ ग्राउंड तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सभी चौक-चौराहों पर पुलिस की तैनाती की गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्तमान कार्यकाल में किसी सरकारी कार्यक्रम पहली बार धनबाद पहुंचे हैं. गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सीएम का काफिला हवाई अड्डे से गोल्फ ग्राउंड के लिए रवाना हुआ. वहां वे जिले की पाँच सौ बारह. चौदह करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे. साथ ही अट्ठारह हज़ार नौ सौ चालीस लोगों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण व एक सौ चौहत्तर लोगों को नियुक्ति पत्र भी सौपेंगे. कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बन्ना गुप्ता, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह उपस्थित रहेगें. हवाई अड्डे पर धनबाद के डीसी संदीप सिंह, एसएसपी संजीव कुमार सहित जेएमएम और कांग्रेस के कई नेता पहुंचे थे.
आयुष्मान् सारिपुत्र और मौद्गल्यायन जहाँ भगवान् थे वहाँ गये ।...। आयुष्मान् सारिपुत्रने भगवान्को कहा"भन्ते ! देवदत्त संघको फोळकर, पाँच सौ भिक्षुओंको लेकर जहाँ गया सी स है, वहाँ चला "सारिपुत्र ! तुम लोगोंको उन नये भिक्षुओंपर दया भी नहीं आई ? सारिपुत्र ! तुम लोग उन भिक्षुओंके आपमें पळनेसे पूर्वही जाओ । " उस समय बळी परिषद्के बीच बैठा देवदत्त धर्म-उपदेश कर रहा था । दे व द त्त ने दूरसे सारिपुत्र, मौद्गल्यायनको आते देखा । देखकर भिक्षुओंको आमंत्रित किया । "देखो भिक्षुओ ! कितना सु-आख्यात (= सु-उपदिष्ट ) मेरा धर्म है । जो श्रमण गौतमके अग्रश्रावक सारिपुत्र, मौद्गल्यायन हैं, वह भी मेरे पास आ रहे, मेरे धर्मको मानते हैं।" ऐसा कहनेपर कोकालिकने देवदत्तसे कहा"आवुस देवदत्त ! सारिपुत्र, मौद्गल्यायनका विश्वास मत करो । सारिपुत्र, मौद्गल्यायन बदनीयत (=पापेच्छ) है, पापक (= बुरी) इच्छाओंके वशमें हैं । " "आवुस, नहीं, उनका स्वागत है, क्योंकि वह मेरे धर्मपर विश्वास करते हैं । " तव देवदत्तने आयुष्मान् सारिपुत्रको आधा आसन ( देनेको) निमंत्रित किया -- "आओ आवुस ! सारिपुत्र ! यहाँ बैठो ।" "आवुस ! नहीं" ( कह ) आयुष्मान सारिपुत्र दूसरा आसन लेकर एक ओर बैठ गये । आयुष्मान् महामौद्गल्यायन भी एक आसन लेकर बैठ गये । तब देवदत्त बहुत रात तक भिक्षुओंको धार्मिक कथा. . . (कहता) आयुष्मान् सारिपुत्रसे वोला -- "आवुस ! सारिपुत्र ! ( इस समय ) भिक्षु आलस-प्रमाद - रहित हैं, तुम आवुस सारिपुत्र ! 'भिक्षुओंको धर्म-देशना करो, मेरी पीठ अगिया रही है, सो मैं लम्बा पळूंगा।' "अच्छा आवुस तव देवदत्त चौपेती संघाटीको विछवाकर दाहिनी बगलसे लेट गया । स्मृति-रहित संप्रजन्यरहित (होनेसे) उसे मुहूर्त भरमें ही निद्रा आ गई । तब आयुष्मान् सारिपुत्रने आदेशना-प्रातिहार्य (=व्याख्यानके चमत्कार) और अनुशासनीय-प्रातिहार्यके साथ, तथा आयुष्मान् महामौद्गल्यायनने ऋद्धि-प्रातिहार्य (= योग-चलके चमत्कार) के साथ भिक्षुओंको धर्म-उपदेश किया, अनुशासन किया । नव उन भिक्षुओंको .. .विरज- विमल धर्म-चक्षु उत्पन्न हुआ - जो कुछ समुदय धर्म (= उत्पन्न होनेवाला ) है, वह निरोध-धर्म (= विनाश होनेवाला) है०' । आयुष्मान् मारिपुत्रने भिक्षुओंको निमंत्रित किया"आबुसो ! चलो भगवान्के पास चलें, जो उस भगवान्के धर्मको पसंद करता है वह आवे ।" तब मारिपुत्र मौद्गल्यायन उन पाँच सौ भिक्षुओंको लेकर जहाँ वेणुवन था, वहाँ चले गये। तव कोकालिकने देवदत्तको उठाया "आबुम देवदत्त ! उठो, मैने कहा न था --आबुस देवदत्त ! सारिपुत्र, मौद्गल्यायनका विश्वास मत करो। ०।" तब देवदनको वहीं मुखने गर्म खून निकल पळा ...... तब सा रि.पु त्र, और मौ द्ग ल्या य न जहाँ भगवान् थे, वहाँ गये । जाकर भगवान्को अभिवादन कर, एक और बैठे। एक ओर बैठे आयुष्मान् सारिपुत्रने भगवान् से यह कहा
आयुष्मान् सारिपुत्र और मौद्गल्यायन जहाँ भगवान् थे वहाँ गये ।...। आयुष्मान् सारिपुत्रने भगवान्को कहा"भन्ते ! देवदत्त संघको फोळकर, पाँच सौ भिक्षुओंको लेकर जहाँ गया सी स है, वहाँ चला "सारिपुत्र ! तुम लोगोंको उन नये भिक्षुओंपर दया भी नहीं आई ? सारिपुत्र ! तुम लोग उन भिक्षुओंके आपमें पळनेसे पूर्वही जाओ । " उस समय बळी परिषद्के बीच बैठा देवदत्त धर्म-उपदेश कर रहा था । दे व द त्त ने दूरसे सारिपुत्र, मौद्गल्यायनको आते देखा । देखकर भिक्षुओंको आमंत्रित किया । "देखो भिक्षुओ ! कितना सु-आख्यात मेरा धर्म है । जो श्रमण गौतमके अग्रश्रावक सारिपुत्र, मौद्गल्यायन हैं, वह भी मेरे पास आ रहे, मेरे धर्मको मानते हैं।" ऐसा कहनेपर कोकालिकने देवदत्तसे कहा"आवुस देवदत्त ! सारिपुत्र, मौद्गल्यायनका विश्वास मत करो । सारिपुत्र, मौद्गल्यायन बदनीयत है, पापक इच्छाओंके वशमें हैं । " "आवुस, नहीं, उनका स्वागत है, क्योंकि वह मेरे धर्मपर विश्वास करते हैं । " तव देवदत्तने आयुष्मान् सारिपुत्रको आधा आसन निमंत्रित किया -- "आओ आवुस ! सारिपुत्र ! यहाँ बैठो ।" "आवुस ! नहीं" आयुष्मान सारिपुत्र दूसरा आसन लेकर एक ओर बैठ गये । आयुष्मान् महामौद्गल्यायन भी एक आसन लेकर बैठ गये । तब देवदत्त बहुत रात तक भिक्षुओंको धार्मिक कथा. . . आयुष्मान् सारिपुत्रसे वोला -- "आवुस ! सारिपुत्र ! भिक्षु आलस-प्रमाद - रहित हैं, तुम आवुस सारिपुत्र ! 'भिक्षुओंको धर्म-देशना करो, मेरी पीठ अगिया रही है, सो मैं लम्बा पळूंगा।' "अच्छा आवुस तव देवदत्त चौपेती संघाटीको विछवाकर दाहिनी बगलसे लेट गया । स्मृति-रहित संप्रजन्यरहित उसे मुहूर्त भरमें ही निद्रा आ गई । तब आयुष्मान् सारिपुत्रने आदेशना-प्रातिहार्य और अनुशासनीय-प्रातिहार्यके साथ, तथा आयुष्मान् महामौद्गल्यायनने ऋद्धि-प्रातिहार्य के साथ भिक्षुओंको धर्म-उपदेश किया, अनुशासन किया । नव उन भिक्षुओंको .. .विरज- विमल धर्म-चक्षु उत्पन्न हुआ - जो कुछ समुदय धर्म है, वह निरोध-धर्म हैशून्य' । आयुष्मान् मारिपुत्रने भिक्षुओंको निमंत्रित किया"आबुसो ! चलो भगवान्के पास चलें, जो उस भगवान्के धर्मको पसंद करता है वह आवे ।" तब मारिपुत्र मौद्गल्यायन उन पाँच सौ भिक्षुओंको लेकर जहाँ वेणुवन था, वहाँ चले गये। तव कोकालिकने देवदत्तको उठाया "आबुम देवदत्त ! उठो, मैने कहा न था --आबुस देवदत्त ! सारिपुत्र, मौद्गल्यायनका विश्वास मत करो। शून्य।" तब देवदनको वहीं मुखने गर्म खून निकल पळा ...... तब सा रि.पु त्र, और मौ द्ग ल्या य न जहाँ भगवान् थे, वहाँ गये । जाकर भगवान्को अभिवादन कर, एक और बैठे। एक ओर बैठे आयुष्मान् सारिपुत्रने भगवान् से यह कहा
पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से दुनिया भर में वैकल्पिक ईंधन के कई स्रोतों में से एक है इलैक्ट्रॉनिक वाहन। भारत में कुश्ती पहलवान संघर्ष कर रहे हैं। इन पहलवानों में ओलंपिक पदक विजेता भी शामिल हैं। राजनीतिक अवसरवाद का दूसरा नाम 'दल बदली' है, जिसने सिद्धांतवादिता, जन हितैषी राजनीति को बहुत चोट पहुंचाई है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे कीमती तोहफा है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है और संस्कार मनुष्य के जीवन का सार हैं। अगले वर्ष होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर वित्त वर्ष 2024 में नई सड़क तथा उच्च मार्ग परियोजनाओं में 25 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है जिसका असर अगले वर्षों की परियोजनाओं पर भी पड़ेगा और सरकार के लिए प्रतिदिन 50 किलोमीटर उच्च मार्ग बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होगा। गत सप्ताह अपनी कार की पिछली सीट पर बैठा मैं चाय की चुस्कियां ले रहा था जब मेरे ड्राइवर, जो छुट्टी पर गए मेरे पक्के ड्राइवर के बदल के तौर पर आया था, ने अचानक ब्रेक लगा दी जिससे मेरी गर्म चाय मेरे ऊपर गिर गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार ने हाल ही में अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद को छोडऩे के अपने अचानक फैसले से दोस्तों और दुश्मनों को समान रूप से आश्चर्यचकित कर दिया। 3 दिनों के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया। राष्ट्रवाद की परीक्षा सीमा पर होती है। देश की सीमा सिर्फ सुरक्षा बलों के शौर्य की ही नहीं, राजनीतिक नेतृत्व की समझ-बूझ की परीक्षा भी लेती है। पिछले साल भारत में लगभग 20 लाख साइबर क्राइम की रिपोर्टें दर्ज की गई हैं। इसका मतलब औसतन 5 हजार से भी ज्यादा अपराध प्रतिदिन दर्ज किए गए थे। जनसंख्या के मामले में हमारा देश विश्व में पहले स्थान पर आ गया है। यह हमारे लिए कोई उपलब्धि न होकर एक अभिशाप है। शादी समारोह, जन्मदिन पार्टियों, वर्षगांठों, सम्मेलनों, सैमीनारों तथा इसी प्रकार के अन्य कई मौकों पर भव्य दावतें उड़ाई जाती हैं। , सम्मेलनों, सैमीनारों तथा इसी प्रकार के अन्य कई मौकों पर भव्य दावतें उड़ाई जाती हैं। बजरंग बली के भक्त के रूप में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान नियंत्रण रेखा पर खोई हुई पाकिस्तानी लड़की को उसके माता-पिता से वर्चुअली मिलाते हैं। बीते शुक्रवार को किसी समय देश की सबसे बड़ी रही निजी एयरलाइन के यहां सी. बी. आई. के छापे पड़े। फिल्म अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, वह और भी बहुत कुछ कहती है, जिसका एक पक्ष भी हो सकता है। मंत्री राजनाथ सिंह ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (एस. सी. ओ. ) की मेजबानी करते हुए सभी सदस्यों को आतंकवाद के खिलाफ मिल-जुलकर लडऩे का न्यौता दिया। फ्रांस ने भारत के साथ मित्रता निभाने के लिए किसी दूसरे देश के दबाव का भी विचार नहीं किया और खुलकर भारत के साथ आ गया। वृष राशि वालों मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए दिन खास रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए लोगों से थोड़ा संभल कर रहने की जरूरत है। मिथुन राशि वालों सरकारी कामों में आप उच्च पद हासिल कर सकते हैं। खर्चों के बढ़ने से आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। कर्क राशि वालों आज आपको करियर से जुड़े बढ़िया नतीजे हासिल होंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी। तुला राशि वालों कार्यक्षेत्र में आज आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अधिकारी वर्ग आपकी भावुकता का फायदा उठा सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों किसी परिचित व्यक्ति की मदद से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हो सकता है। व्यवसाय में भाग्य आपके पक्ष में है। मकर राशि वालों कलात्मक गतिविधियों के जरिए आपको नई पहचान मिलेगी। प्रॉपर्टी पर निवेश करने के योग बन रहे हैं। कुंभ राशि वालों कार्यक्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करेंगे। घूमने-फिरने के लिहाज से आज का दिन बेहतर रहेगा। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से दुनिया भर में वैकल्पिक ईंधन के कई स्रोतों में से एक है इलैक्ट्रॉनिक वाहन। भारत में कुश्ती पहलवान संघर्ष कर रहे हैं। इन पहलवानों में ओलंपिक पदक विजेता भी शामिल हैं। राजनीतिक अवसरवाद का दूसरा नाम 'दल बदली' है, जिसने सिद्धांतवादिता, जन हितैषी राजनीति को बहुत चोट पहुंचाई है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे कीमती तोहफा है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है और संस्कार मनुष्य के जीवन का सार हैं। अगले वर्ष होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर वित्त वर्ष दो हज़ार चौबीस में नई सड़क तथा उच्च मार्ग परियोजनाओं में पच्चीस प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है जिसका असर अगले वर्षों की परियोजनाओं पर भी पड़ेगा और सरकार के लिए प्रतिदिन पचास किलोग्राममीटर उच्च मार्ग बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होगा। गत सप्ताह अपनी कार की पिछली सीट पर बैठा मैं चाय की चुस्कियां ले रहा था जब मेरे ड्राइवर, जो छुट्टी पर गए मेरे पक्के ड्राइवर के बदल के तौर पर आया था, ने अचानक ब्रेक लगा दी जिससे मेरी गर्म चाय मेरे ऊपर गिर गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने हाल ही में अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद को छोडऩे के अपने अचानक फैसले से दोस्तों और दुश्मनों को समान रूप से आश्चर्यचकित कर दिया। तीन दिनों के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया। राष्ट्रवाद की परीक्षा सीमा पर होती है। देश की सीमा सिर्फ सुरक्षा बलों के शौर्य की ही नहीं, राजनीतिक नेतृत्व की समझ-बूझ की परीक्षा भी लेती है। पिछले साल भारत में लगभग बीस लाख साइबर क्राइम की रिपोर्टें दर्ज की गई हैं। इसका मतलब औसतन पाँच हजार से भी ज्यादा अपराध प्रतिदिन दर्ज किए गए थे। जनसंख्या के मामले में हमारा देश विश्व में पहले स्थान पर आ गया है। यह हमारे लिए कोई उपलब्धि न होकर एक अभिशाप है। शादी समारोह, जन्मदिन पार्टियों, वर्षगांठों, सम्मेलनों, सैमीनारों तथा इसी प्रकार के अन्य कई मौकों पर भव्य दावतें उड़ाई जाती हैं। , सम्मेलनों, सैमीनारों तथा इसी प्रकार के अन्य कई मौकों पर भव्य दावतें उड़ाई जाती हैं। बजरंग बली के भक्त के रूप में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान नियंत्रण रेखा पर खोई हुई पाकिस्तानी लड़की को उसके माता-पिता से वर्चुअली मिलाते हैं। बीते शुक्रवार को किसी समय देश की सबसे बड़ी रही निजी एयरलाइन के यहां सी. बी. आई. के छापे पड़े। फिल्म अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, वह और भी बहुत कुछ कहती है, जिसका एक पक्ष भी हो सकता है। मंत्री राजनाथ सिंह ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन की मेजबानी करते हुए सभी सदस्यों को आतंकवाद के खिलाफ मिल-जुलकर लडऩे का न्यौता दिया। फ्रांस ने भारत के साथ मित्रता निभाने के लिए किसी दूसरे देश के दबाव का भी विचार नहीं किया और खुलकर भारत के साथ आ गया। वृष राशि वालों मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए दिन खास रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए लोगों से थोड़ा संभल कर रहने की जरूरत है। मिथुन राशि वालों सरकारी कामों में आप उच्च पद हासिल कर सकते हैं। खर्चों के बढ़ने से आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। कर्क राशि वालों आज आपको करियर से जुड़े बढ़िया नतीजे हासिल होंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी। तुला राशि वालों कार्यक्षेत्र में आज आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अधिकारी वर्ग आपकी भावुकता का फायदा उठा सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों किसी परिचित व्यक्ति की मदद से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हो सकता है। व्यवसाय में भाग्य आपके पक्ष में है। मकर राशि वालों कलात्मक गतिविधियों के जरिए आपको नई पहचान मिलेगी। प्रॉपर्टी पर निवेश करने के योग बन रहे हैं। कुंभ राशि वालों कार्यक्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करेंगे। घूमने-फिरने के लिहाज से आज का दिन बेहतर रहेगा। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
(www. arya-tv. com)रूस और यूक्रेन के बीच जंग 36वें दिन भी जारी है। अब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस आदेश पर साइन कर दिए हैं, जिसके मुताबिक आज से विदेशी खरीदारों को गैस के लिए भुगतान रूबल में ही करना होगा। पुतिन ने कहा कि अगर भुगतान नहीं होता है तो कॉन्ट्रैक्ट को रोक दिया जाएगा। वहीं, पुतिन के इस कदम को जर्मनी ने ब्लैकमेल बताते हुए खारिज कर दिया। जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्री रॉबर्ट हैबेक ने कहा कि पुतिन हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते। इसके अलावा ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इस मांग का विरोध किया है। इनका कहना है कि गैस खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट पहले यूरो या डॉलर में तय हुआ था और इस तरह बीच में इसे तोड़ा नहीं जा सकता है। इसके साथ रूस, यूरोप की लगभग एक तिहाई गैस की आपूर्ति करता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रूसी सेना ने 24 फरवरी को चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लिया था। यहां से अब रूसी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है। अधिकारी ने बताया, सैनिक चेर्नोबिल से दूर जा रहे हैं और बेलारूस में प्रवेश कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन पर हमले के मद्देनजर फ्यूल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए अगले छह महीनों तक रोज 10 लाख बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस ने कहा कि यूक्रेन में सैन्य आक्रमण के कारण रूस पर अमेरिका समेत कई देशों के आर्थिक प्रतिबंधों से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। - पुतिन ने कहा कि रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने के लिए विदेशी खरीदारों को रूसी बैंकों में रूबल खाते खुलवाने होंगे। आज से इन्हीं खातों से गैस आपूर्ति के लिए भुगतान स्वीकार किया जाएगा। - नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी सैनिक पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि डोनबास क्षेत्र के लिए एकत्र हो रहे हैं। - अमेरिका की एक कंपनी ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होते ही यूरोप में साइबर हमला हुआ था।
रूस और यूक्रेन के बीच जंग छत्तीसवें दिन भी जारी है। अब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस आदेश पर साइन कर दिए हैं, जिसके मुताबिक आज से विदेशी खरीदारों को गैस के लिए भुगतान रूबल में ही करना होगा। पुतिन ने कहा कि अगर भुगतान नहीं होता है तो कॉन्ट्रैक्ट को रोक दिया जाएगा। वहीं, पुतिन के इस कदम को जर्मनी ने ब्लैकमेल बताते हुए खारिज कर दिया। जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्री रॉबर्ट हैबेक ने कहा कि पुतिन हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते। इसके अलावा ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इस मांग का विरोध किया है। इनका कहना है कि गैस खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट पहले यूरो या डॉलर में तय हुआ था और इस तरह बीच में इसे तोड़ा नहीं जा सकता है। इसके साथ रूस, यूरोप की लगभग एक तिहाई गैस की आपूर्ति करता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रूसी सेना ने चौबीस फरवरी को चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कब्जा कर लिया था। यहां से अब रूसी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है। अधिकारी ने बताया, सैनिक चेर्नोबिल से दूर जा रहे हैं और बेलारूस में प्रवेश कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन पर हमले के मद्देनजर फ्यूल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए अगले छह महीनों तक रोज दस लाख बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस ने कहा कि यूक्रेन में सैन्य आक्रमण के कारण रूस पर अमेरिका समेत कई देशों के आर्थिक प्रतिबंधों से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। - पुतिन ने कहा कि रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने के लिए विदेशी खरीदारों को रूसी बैंकों में रूबल खाते खुलवाने होंगे। आज से इन्हीं खातों से गैस आपूर्ति के लिए भुगतान स्वीकार किया जाएगा। - नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी सैनिक पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि डोनबास क्षेत्र के लिए एकत्र हो रहे हैं। - अमेरिका की एक कंपनी ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होते ही यूरोप में साइबर हमला हुआ था।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। थाना (अंग्रेजीःPrison) एक ऐसी जगह होती है जहाँ पर चोर, डकैत, आतंक करने वालों को रखा जाता है। समाज में शांति स्थापित रहे इसके लिए हर देश का एक कानून होता है। कानून का उलंघन करने वालो को कानून का रखवाला यानि प्रहरी अथवा पुलिस पकड़ती है और जब तक उस पर न्यायालय से कोई सुनवाई नही हो जाता तब तक पुलिस उस आतंकी या दोषी को अपने गिरफ्त में रखती है। जेल, कारागार, कारावास आदी सभी एक ही शब्द थाना के पर्यायवाची हैं। . जरेमी बेंथम द्वारा निर्मित पनोप्टिकॉन की ड्राइंग (1791) पनोप्टिकॉन (Panopticon) जेरेमी बेन्थम द्वारा १८वीं शताब्दी में अभिकल्पित एक प्रकार की संस्थानिक भवन है। . थाना और पनोप्टिकॉन आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। थाना 9 संबंध है और पनोप्टिकॉन 3 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (9 + 3)। यह लेख थाना और पनोप्टिकॉन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। थाना एक ऐसी जगह होती है जहाँ पर चोर, डकैत, आतंक करने वालों को रखा जाता है। समाज में शांति स्थापित रहे इसके लिए हर देश का एक कानून होता है। कानून का उलंघन करने वालो को कानून का रखवाला यानि प्रहरी अथवा पुलिस पकड़ती है और जब तक उस पर न्यायालय से कोई सुनवाई नही हो जाता तब तक पुलिस उस आतंकी या दोषी को अपने गिरफ्त में रखती है। जेल, कारागार, कारावास आदी सभी एक ही शब्द थाना के पर्यायवाची हैं। . जरेमी बेंथम द्वारा निर्मित पनोप्टिकॉन की ड्राइंग पनोप्टिकॉन जेरेमी बेन्थम द्वारा अट्ठारहवीं शताब्दी में अभिकल्पित एक प्रकार की संस्थानिक भवन है। . थाना और पनोप्टिकॉन आम में शून्य बातें हैं । थाना नौ संबंध है और पनोप्टिकॉन तीन है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख थाना और पनोप्टिकॉन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
कोयंबटूर। यूक्रेन की सेना में एक स्वयंसेवी के रूप में शामिल होने वाला एक 21 वर्षीय भारतीय छात्र अब कोयंबटूर स्थित अपने घर लौटना चाहता है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के छात्र आर सैनीकेश पिछले महीने जॉर्जियाई राष्ट्रीय सेना में शामिल हुए थे, लेकिन पिछले महीने युद्ध छिड़ने के बाद यूक्रेन के समर्थन में रूसी सैनिकों से लड़ रहे थे। जॉर्जियाई राष्ट्रीय सेना एक अर्धसैनिक इकाई है जो ज्यादातर जातीय जॉर्जियाई स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई है। यह सैनिक युद्ध में यूक्रेन की तरफ से लड़ रहे हैं। उसके माता-पिता को तब पता चला जब कुछ दिन पहले केंद्रीय खुफिया अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और सैनीकेश का विवरण मांगा। सूत्रों ने बताया कि युवक के पिता रविचंद्रन ने तीन दिन पहले अपने बेटे से बात की थी। इस दौरान उसने घर लौटने की इच्छा जताई थी। चूंकि भारतीय अधिकारी इस मामले पर करीब से नजर रख रहे हैं, इसलिए रविचंद्रन को उम्मीद है कि उनका बेटा जल्द ही उनसे जुड़ जाएगा।
कोयंबटूर। यूक्रेन की सेना में एक स्वयंसेवी के रूप में शामिल होने वाला एक इक्कीस वर्षीय भारतीय छात्र अब कोयंबटूर स्थित अपने घर लौटना चाहता है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के छात्र आर सैनीकेश पिछले महीने जॉर्जियाई राष्ट्रीय सेना में शामिल हुए थे, लेकिन पिछले महीने युद्ध छिड़ने के बाद यूक्रेन के समर्थन में रूसी सैनिकों से लड़ रहे थे। जॉर्जियाई राष्ट्रीय सेना एक अर्धसैनिक इकाई है जो ज्यादातर जातीय जॉर्जियाई स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई है। यह सैनिक युद्ध में यूक्रेन की तरफ से लड़ रहे हैं। उसके माता-पिता को तब पता चला जब कुछ दिन पहले केंद्रीय खुफिया अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और सैनीकेश का विवरण मांगा। सूत्रों ने बताया कि युवक के पिता रविचंद्रन ने तीन दिन पहले अपने बेटे से बात की थी। इस दौरान उसने घर लौटने की इच्छा जताई थी। चूंकि भारतीय अधिकारी इस मामले पर करीब से नजर रख रहे हैं, इसलिए रविचंद्रन को उम्मीद है कि उनका बेटा जल्द ही उनसे जुड़ जाएगा।
गोरखपुर (ब्यूरो). थाने पर आए शिकायती पत्रों और अधिकारियों के यहां से आए शिकायती पत्रों का जांच कर समयबद्ध कार्रवाई करेंगे। इससे मामले का टाइमली निस्तारण हो सकेगा और फरियादियों को दौडऩा भी नहीं पड़ेगा। टीम फरियादियों को एक पर्ची भी देगी। एक पर्ची एसएसपी दफ्तर तो दूसरी पर्ची थाने पर रखी जाएगी। पर्चे में फरियादी का नाम, फोन नंबर, फोटो और शिकायत की डिटेल अंकित होगी। बांसगांव में दरोगा लक्ष्मीनारायण, बेलीपार में सतपाल सिंह, बेलघाट में रामनिधि पांडेय, कैंपियरगंज में सुरेश कुमार यादव, कैंट में शेरबहादुर यादव, चौरीचौरा में केशव, चिलुआताल में बालगंगाधर शुक्ला, गगहा में राजेश कुमार सिंह, गोला में राकेश सिंह, गोरखनाथ में रविंद्र प्रताप यादव, गुलरिहा में अरूण कुमार चौबे, हरपुर बुदहट में उदयभान सिंह, झंगहा में देवी शंकर पांडेय, खजनी में दिनेश बहादुर सिंह, खोराबार में संजय कुमार सिंह, कोतवाली में प्रमोद कुमार, पिपराइच में नितिन कुमार मिश्रा, पीपीगंज में पशुपति सिंह, शाहपुर में सुरेंद्र कुमार, सिकरीगंज में विंध्याचल शुक्ला, तिवारीपुर में राजबहादुर गुप्ता, उरूवा में रवि चौधरी, रामगढ़ताल में दरोगा शंभू, गीडा में दरोगा जय प्रकाश सिंह और महिला थाने में इंस्पेक्टर प्रीति सिंह के नेतृत्व में जनसुनवाई टीम बनाई गई है। एसएसपी डॉ। गौरव ग्रोवर ने शनिवार को पिपराइच, गुलरिहा, झंगहा और चौरीचौरा थाने का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जनसुनवाई टीम के बारे में जानकारी ली और उन्हें तत्काल फरियादियों के मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया। साथ ही एसएसपी ने महिला हेल्प डेस्क, थाना कार्यालय एवं संपूर्ण थाना परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने साफ सफाई रखने, अभिलेखों के बेहतर रखरखाव को कहा। इस दौरान उन्होंने अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने, पैदल गश्त करने को कहा। साथ ही एसएसपी ने गुलरिहा में दो दिन पूर्व हुए सुभाष हत्याकांड के बारे में जानकारी की ली कि अबतक क्या कार्रवाई हुई है। डीएम कृष्णा करूणेश और एसएसपी ने शनिवार को थाना समाधान दिवस पर कोतवाली थाने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने वहां लोगों की फरियाद सुनी। अधिकारियों ने आए मामलों के निस्तारण के जिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाने को कहा। साथ ही जिन मामलों का निस्तारण उच्चाधिकारी स्तर से किया जाना है उन पर रिपोर्ट लगाकर भेजने को कहा। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न की जाए जिससे आम जनमानस को बेवजह परेशान होना पड़े।
गोरखपुर . थाने पर आए शिकायती पत्रों और अधिकारियों के यहां से आए शिकायती पत्रों का जांच कर समयबद्ध कार्रवाई करेंगे। इससे मामले का टाइमली निस्तारण हो सकेगा और फरियादियों को दौडऩा भी नहीं पड़ेगा। टीम फरियादियों को एक पर्ची भी देगी। एक पर्ची एसएसपी दफ्तर तो दूसरी पर्ची थाने पर रखी जाएगी। पर्चे में फरियादी का नाम, फोन नंबर, फोटो और शिकायत की डिटेल अंकित होगी। बांसगांव में दरोगा लक्ष्मीनारायण, बेलीपार में सतपाल सिंह, बेलघाट में रामनिधि पांडेय, कैंपियरगंज में सुरेश कुमार यादव, कैंट में शेरबहादुर यादव, चौरीचौरा में केशव, चिलुआताल में बालगंगाधर शुक्ला, गगहा में राजेश कुमार सिंह, गोला में राकेश सिंह, गोरखनाथ में रविंद्र प्रताप यादव, गुलरिहा में अरूण कुमार चौबे, हरपुर बुदहट में उदयभान सिंह, झंगहा में देवी शंकर पांडेय, खजनी में दिनेश बहादुर सिंह, खोराबार में संजय कुमार सिंह, कोतवाली में प्रमोद कुमार, पिपराइच में नितिन कुमार मिश्रा, पीपीगंज में पशुपति सिंह, शाहपुर में सुरेंद्र कुमार, सिकरीगंज में विंध्याचल शुक्ला, तिवारीपुर में राजबहादुर गुप्ता, उरूवा में रवि चौधरी, रामगढ़ताल में दरोगा शंभू, गीडा में दरोगा जय प्रकाश सिंह और महिला थाने में इंस्पेक्टर प्रीति सिंह के नेतृत्व में जनसुनवाई टीम बनाई गई है। एसएसपी डॉ। गौरव ग्रोवर ने शनिवार को पिपराइच, गुलरिहा, झंगहा और चौरीचौरा थाने का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जनसुनवाई टीम के बारे में जानकारी ली और उन्हें तत्काल फरियादियों के मामले का निस्तारण करने का निर्देश दिया। साथ ही एसएसपी ने महिला हेल्प डेस्क, थाना कार्यालय एवं संपूर्ण थाना परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने साफ सफाई रखने, अभिलेखों के बेहतर रखरखाव को कहा। इस दौरान उन्होंने अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने, पैदल गश्त करने को कहा। साथ ही एसएसपी ने गुलरिहा में दो दिन पूर्व हुए सुभाष हत्याकांड के बारे में जानकारी की ली कि अबतक क्या कार्रवाई हुई है। डीएम कृष्णा करूणेश और एसएसपी ने शनिवार को थाना समाधान दिवस पर कोतवाली थाने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने वहां लोगों की फरियाद सुनी। अधिकारियों ने आए मामलों के निस्तारण के जिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाने को कहा। साथ ही जिन मामलों का निस्तारण उच्चाधिकारी स्तर से किया जाना है उन पर रिपोर्ट लगाकर भेजने को कहा। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न की जाए जिससे आम जनमानस को बेवजह परेशान होना पड़े।
1 से y t+x t, i के बराबर है। बीटा it प्रोबेबिलिटी (probability) y t+1 से y कैपिटल ा क्या है और अब X t, y के बराबर है, पहले से ही बीटा के लिए दिया गया है, और यह मेरे पैरामीटर थीटा दिया गया है और यही हम यहाँ देख रहे हैं। यह मेरा अल्फ़ा (alpha) i t बार बीटा it और यह t पर सभी मार्जिनालाइसिंग (marginalizing) के लिए पॉसिबल स्टेट्स (possible states) है। तो, यह j 1 से N के बराबर, अल्फा j t बीटा jt सिग्मा होगा। तो, यह मुझे गामा it के लिए समीकरण देता है। इसी प्रकार, आप zeta ij t के लिए देख सकते हैं जो कि प्रोबेबिलिटी (probability) X t के लिए है, i X t +1, j, Y । Yn थीटा के बराबर है। तो, उसी तरह से, आप इसे लिख सकते हैं प्रोबेबिलिटी (probability) X t, i X t+1, j के बराबर है, Y । थीटा, जिसे प्रोबेबिलिटी Y । थीटा द्वारा विभाजित । किया गया है, जो कि सभी संभावित । और j पर मार्जिनालाइसिंग (marginalizing) किया जाएगा। और आप कहेंगे कि प्रोबेबिलिटी (probability) X t, i x t+1, phi और j के सभी संभावित मानों के लिए jy । थीटा के बराबर है। अब, हमें यह दिखाना होगा कि अब वास्तव में यही सूत्र है। तो, यह क्या है? इसलिए, आपको इस समय बिंदु t और बिंदु t+1 पर स्टेट (state) दी जाती है। इसलिए, आप वास्तव में जो कर रहे हैं, वह यह है कि y 1 से yt में फारवर्ड प्रोसीजर (forward procedure) का उपयोग कर रहे हैं, और आपको समय बिंदु t पर स्टेट (state) i भी मिलेगा और आप बेकवर्ड प्रोसीजर (backward procedure) का उपयोग करेंगे क्योंकि आपको समय पर t+1 state j, बेकवर्ड प्रोसीजर (backward procedure) yt+ 2 से y केपिटल T के लिए स्टेट (state) दी गयी है। तो, यह वही है जो इसे अल्फा it में कैप्चर किया गया है, और यह j पर Beta j t+ 1 में कैप्चर की गई स्थिति है। फिर आप से j यानि aij और yt+1 ।j से जो कि आपका b jy t+ 1 है, में ट्रांजीशन प्रोबेबिलिटी (transition probability) की गणना करेगा। तो, यह समीकरण कुछ भी नहीं है, लेकिन Xti की संभावना के बराबर है। Xt+1,jY । थीटा के बराबर है, यह पूरा क्रम है और ये दोनों स्टेट्स (states) भी हैं। और इसी तरह आप यहां देख सकते हैं कि यह । और j के सभी पॉसिबल वेल्युस (possible values) से अधिक है। इसलिए, मुझे आशा है कि यह स्पष्ट है कि एक बार जब मैंने सभी संभावित अल्फा और बीटा गणना कर ली है जहा पिछले पेरामीटरस (parameters) थे, तो हम इस गामा it की गणना कर सकते हैं और zeta i j t-th जो एक निश्चित समय पर स्टेट (state) की प्रोबेबिलिटी (probability) है और a अनुक्रम i और j, t और t+1 समय पर हैं, यह हम अल्फा और बीटा का उपयोग करके गणना कर सकते हैं। अब, पिछले भाग में आते हैं, जैसे कि एक बार मैंने कुछ संभावनाएं पॉसिबल स्टेट पाथ्स (possible state paths) पर गणना की है तो मैं अपने पेरामीटरस (parameters) का फिर से कैसे
एक से y t+x t, i के बराबर है। बीटा it प्रोबेबिलिटी y t+एक से y कैपिटल ा क्या है और अब X t, y के बराबर है, पहले से ही बीटा के लिए दिया गया है, और यह मेरे पैरामीटर थीटा दिया गया है और यही हम यहाँ देख रहे हैं। यह मेरा अल्फ़ा i t बार बीटा it और यह t पर सभी मार्जिनालाइसिंग के लिए पॉसिबल स्टेट्स है। तो, यह j एक से N के बराबर, अल्फा j t बीटा jt सिग्मा होगा। तो, यह मुझे गामा it के लिए समीकरण देता है। इसी प्रकार, आप zeta ij t के लिए देख सकते हैं जो कि प्रोबेबिलिटी X t के लिए है, i X t +एक, j, Y । Yn थीटा के बराबर है। तो, उसी तरह से, आप इसे लिख सकते हैं प्रोबेबिलिटी X t, i X t+एक, j के बराबर है, Y । थीटा, जिसे प्रोबेबिलिटी Y । थीटा द्वारा विभाजित । किया गया है, जो कि सभी संभावित । और j पर मार्जिनालाइसिंग किया जाएगा। और आप कहेंगे कि प्रोबेबिलिटी X t, i x t+एक, phi और j के सभी संभावित मानों के लिए jy । थीटा के बराबर है। अब, हमें यह दिखाना होगा कि अब वास्तव में यही सूत्र है। तो, यह क्या है? इसलिए, आपको इस समय बिंदु t और बिंदु t+एक पर स्टेट दी जाती है। इसलिए, आप वास्तव में जो कर रहे हैं, वह यह है कि y एक से yt में फारवर्ड प्रोसीजर का उपयोग कर रहे हैं, और आपको समय बिंदु t पर स्टेट i भी मिलेगा और आप बेकवर्ड प्रोसीजर का उपयोग करेंगे क्योंकि आपको समय पर t+एक state j, बेकवर्ड प्रोसीजर yt+ दो से y केपिटल T के लिए स्टेट दी गयी है। तो, यह वही है जो इसे अल्फा it में कैप्चर किया गया है, और यह j पर Beta j t+ एक में कैप्चर की गई स्थिति है। फिर आप से j यानि aij और yt+एक ।j से जो कि आपका b jy t+ एक है, में ट्रांजीशन प्रोबेबिलिटी की गणना करेगा। तो, यह समीकरण कुछ भी नहीं है, लेकिन Xti की संभावना के बराबर है। Xt+एक,jY । थीटा के बराबर है, यह पूरा क्रम है और ये दोनों स्टेट्स भी हैं। और इसी तरह आप यहां देख सकते हैं कि यह । और j के सभी पॉसिबल वेल्युस से अधिक है। इसलिए, मुझे आशा है कि यह स्पष्ट है कि एक बार जब मैंने सभी संभावित अल्फा और बीटा गणना कर ली है जहा पिछले पेरामीटरस थे, तो हम इस गामा it की गणना कर सकते हैं और zeta i j t-th जो एक निश्चित समय पर स्टेट की प्रोबेबिलिटी है और a अनुक्रम i और j, t और t+एक समय पर हैं, यह हम अल्फा और बीटा का उपयोग करके गणना कर सकते हैं। अब, पिछले भाग में आते हैं, जैसे कि एक बार मैंने कुछ संभावनाएं पॉसिबल स्टेट पाथ्स पर गणना की है तो मैं अपने पेरामीटरस का फिर से कैसे
यूपी सरकार के निकाय चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों की जारी लिस्ट पर विवाद होने के बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पिछड़ा वर्ग का आयोग गठन करके रिजर्वेशन की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिए थे. लखनऊः सुप्रीम कोर्टने सोमवार को सुनवाई करते हुएउत्तर प्रदेशमेंनिकाय चुनाव को मंजूरी दे दी है. इस बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा OBC आयोग की रिपोर्ट स्वीकार कर ओबीसी आरक्षण के साथ निकाय चुनाव कराने का आदेश का स्वागत करते हैं. इसके साथ ही सीएम ने कहा कि कानूनी तरीके से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार समय से निकाय चुनाव कराने के लिए है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार के निकाय चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों की जारी लिस्ट पर विवाद होने के बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पिछड़ा वर्ग का आयोग गठन करके रिजर्वेशन की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिए थे. जिसके बाद आज कोर्ट ने यूपी सरकार को चुनावों को लिए नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया है. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा OBC आयोग की रिपोर्ट स्वीकार कर OBC आरक्षण के साथ नगरीय निकाय चुनाव कराने का आदेश स्वागत योग्य है। विधि सम्मत तरीके से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार समयबद्ध ढंग से नगरीय निकाय चुनाव कराने हेतु प्रतिबद्ध है। वहीं, यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि यदि कोर्ट परमिशन देता है तो वह अगले 2 दिनों के भीतर निकाय चुनावों के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को इजाजत दे दी है. मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की इजाजत मिलने के बाद भी निकाय चुनावों की तैयारियों में तकरीबन 20 से 25 दिन लेगेंगे. इस पर कहा जा रहा है कि अप्रैल के आखिरी हफ्तें में निकाय चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी चल रही है. ऐसे में मई के महीने में यूपी में निकाय चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं.
यूपी सरकार के निकाय चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों की जारी लिस्ट पर विवाद होने के बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पिछड़ा वर्ग का आयोग गठन करके रिजर्वेशन की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिए थे. लखनऊः सुप्रीम कोर्टने सोमवार को सुनवाई करते हुएउत्तर प्रदेशमेंनिकाय चुनाव को मंजूरी दे दी है. इस बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा OBC आयोग की रिपोर्ट स्वीकार कर ओबीसी आरक्षण के साथ निकाय चुनाव कराने का आदेश का स्वागत करते हैं. इसके साथ ही सीएम ने कहा कि कानूनी तरीके से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार समय से निकाय चुनाव कराने के लिए है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार के निकाय चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों की जारी लिस्ट पर विवाद होने के बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पिछड़ा वर्ग का आयोग गठन करके रिजर्वेशन की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिए थे. जिसके बाद आज कोर्ट ने यूपी सरकार को चुनावों को लिए नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया है. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा OBC आयोग की रिपोर्ट स्वीकार कर OBC आरक्षण के साथ नगरीय निकाय चुनाव कराने का आदेश स्वागत योग्य है। विधि सम्मत तरीके से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार समयबद्ध ढंग से नगरीय निकाय चुनाव कराने हेतु प्रतिबद्ध है। वहीं, यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि यदि कोर्ट परमिशन देता है तो वह अगले दो दिनों के भीतर निकाय चुनावों के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को इजाजत दे दी है. मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की इजाजत मिलने के बाद भी निकाय चुनावों की तैयारियों में तकरीबन बीस से पच्चीस दिन लेगेंगे. इस पर कहा जा रहा है कि अप्रैल के आखिरी हफ्तें में निकाय चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी चल रही है. ऐसे में मई के महीने में यूपी में निकाय चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं.
थकान, कम नींद लेना, लंबे समय तक स्क्रीन देखने, गलत खानपान के कारण आंखों के नीचे काले घेरे होने लगते हैं। खासतौर पर महिलाएं इससे परेशान रहती हैं। इसे दूर करने के लिए वैसे तो बाजार में कई तरह की क्रीम मिलती हैं। वहीं कई महिलाएं इसे मेकअप से छिपाने की कोशिश करती है। लेकिन सही से मेकअप ना करने पर डार्क सर्कल दिखाई देते हैं। ऐसे में आप हम कुछ मेकअप ट्रिक की मदद से इसे छिपाने के टिप्स बताते हैं। इससे आपके काले घेरे दूर होने के साथ आपको फ्लोलेस स्किन पाने में मदद मिलेगी। 2 चम्मच में पानी डाल कर फ्रिजर में जमने तक रखें। बाद में उन चम्मचों को अंडर आई एरिया के पास धीरे धीरे रगड़ें। आंखों के नीचे पड़े काले घेरे और दाग-धब्बे कम करने के लिए कलर करेक्टर्स का प्रयोग करना बेस्ट ऑप्शन है। ब्यूटी एक्सपर्ट अनुसार, एक कलर करेक्टर कलर व्हील का रूल फॉलो यानि विपरीत रंग एक-दूसरे को कैंसल करके डार्क सर्कलर कम करने का काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर हरे रंग के कलर करेक्टर स्किन की रेडनेस को कैंसल में कारगर है। इसकी जगह पर पीच और ओरेंज करेक्टर आंखों के नीचे के कालेपन को दूर करने में मदद करते हैं। इसके बाद मीडियम टू फुल कवरेज फाउंडेशन की मदद से पूरी स्किन को इवन टोन्ड लुक दें। इसे करने के लिए ब्यूटी स्पॉन्ज की मदद से फाउंडेशन को स्किन पर अच्छी तरह से ब्लेंड करते हुए लगाएं। इससे आपके चेहरे को फिनिश टच मिलेगा और स्किन फ्लोलेस नजर आएगी। चेहरे पर फाउंडेशन लगने के बाद कंसीलर इस्तेमाल करें। इसके लिए कंसीलर का अपनी स्किन टोन से मिलता जुलता शेड लेकर उसे दाग-धब्बे वाली जगह पर लगाएं। इससे अपने अंडर आई एरिया को हाई लाइट करने और चेहरे को लिफ्टेड लुक देने के लिए ऐसा कंसीलर इस्तेमाल करें जो स्किन टोन से एक दो शेड्स हल्के ही हो। कंसीलर के दाग-धब्बे छिपाने में मदद मिलती है। ऐसे में चेहरा साफ, ग्लोइंग नजर आता है। मेकअप पूरा होने के बाद इसे लॉक यानि सेट करने के लिए चेहरे को पाउडर लगाएं। इसके लिए ट्रांसलूसेंट पाउडर से मेकअप बेस को सेट करें। इससे आपका मेकअप लंबे समय तक बरकरार रहने में मदद मिलेगी। नोट- यह डार्क सर्कलर छिपाने के लिए एक साधारण मेकअप ट्रिक हैं। आप इन स्टेप्स को फॉलो करने से पहले एक किसी ब्यूटी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ताकि आपकी स्किन और मेकअप एकदम परफेक्ट व फ्लोरेस नजर आए।
थकान, कम नींद लेना, लंबे समय तक स्क्रीन देखने, गलत खानपान के कारण आंखों के नीचे काले घेरे होने लगते हैं। खासतौर पर महिलाएं इससे परेशान रहती हैं। इसे दूर करने के लिए वैसे तो बाजार में कई तरह की क्रीम मिलती हैं। वहीं कई महिलाएं इसे मेकअप से छिपाने की कोशिश करती है। लेकिन सही से मेकअप ना करने पर डार्क सर्कल दिखाई देते हैं। ऐसे में आप हम कुछ मेकअप ट्रिक की मदद से इसे छिपाने के टिप्स बताते हैं। इससे आपके काले घेरे दूर होने के साथ आपको फ्लोलेस स्किन पाने में मदद मिलेगी। दो चम्मच में पानी डाल कर फ्रिजर में जमने तक रखें। बाद में उन चम्मचों को अंडर आई एरिया के पास धीरे धीरे रगड़ें। आंखों के नीचे पड़े काले घेरे और दाग-धब्बे कम करने के लिए कलर करेक्टर्स का प्रयोग करना बेस्ट ऑप्शन है। ब्यूटी एक्सपर्ट अनुसार, एक कलर करेक्टर कलर व्हील का रूल फॉलो यानि विपरीत रंग एक-दूसरे को कैंसल करके डार्क सर्कलर कम करने का काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर हरे रंग के कलर करेक्टर स्किन की रेडनेस को कैंसल में कारगर है। इसकी जगह पर पीच और ओरेंज करेक्टर आंखों के नीचे के कालेपन को दूर करने में मदद करते हैं। इसके बाद मीडियम टू फुल कवरेज फाउंडेशन की मदद से पूरी स्किन को इवन टोन्ड लुक दें। इसे करने के लिए ब्यूटी स्पॉन्ज की मदद से फाउंडेशन को स्किन पर अच्छी तरह से ब्लेंड करते हुए लगाएं। इससे आपके चेहरे को फिनिश टच मिलेगा और स्किन फ्लोलेस नजर आएगी। चेहरे पर फाउंडेशन लगने के बाद कंसीलर इस्तेमाल करें। इसके लिए कंसीलर का अपनी स्किन टोन से मिलता जुलता शेड लेकर उसे दाग-धब्बे वाली जगह पर लगाएं। इससे अपने अंडर आई एरिया को हाई लाइट करने और चेहरे को लिफ्टेड लुक देने के लिए ऐसा कंसीलर इस्तेमाल करें जो स्किन टोन से एक दो शेड्स हल्के ही हो। कंसीलर के दाग-धब्बे छिपाने में मदद मिलती है। ऐसे में चेहरा साफ, ग्लोइंग नजर आता है। मेकअप पूरा होने के बाद इसे लॉक यानि सेट करने के लिए चेहरे को पाउडर लगाएं। इसके लिए ट्रांसलूसेंट पाउडर से मेकअप बेस को सेट करें। इससे आपका मेकअप लंबे समय तक बरकरार रहने में मदद मिलेगी। नोट- यह डार्क सर्कलर छिपाने के लिए एक साधारण मेकअप ट्रिक हैं। आप इन स्टेप्स को फॉलो करने से पहले एक किसी ब्यूटी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ताकि आपकी स्किन और मेकअप एकदम परफेक्ट व फ्लोरेस नजर आए।
भारतीय नौसेना ने अपने नवीनतम स्वदेशी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मोरमुगाओ का समुद्र में तैरने वाले सुपरसोनिक लक्ष्य का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. (Photo-News18) नई दिल्ली. भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने बीते रविवार को डेस्ट्रॉयर आईएनएस मोरमुगाओ (INS Mormugao) से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Brahmos Supersonic Cruise Missile) का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण ने नौसेना की समुद्र में मारक क्षमता और ताकत को साबित किया है. इसके ठीक एक सप्ताह बाद अब भारतीय नौसेना ने अपने नवीनतम स्वदेशी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस (INS) मोरमुगाओ से समुद्र में तैरने वाले सुपरसोनिक लक्ष्य का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह पहला प्रयास आईएन की फ्यूचर प्रूफ कॉम्बैट रेडीनेस और आत्म निर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है. इस सबके बाद भारत समुद्र में लगातार अपनी ताकत और मारक क्षमता को मजबूत बनाने का काम कर रहा है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक गोवा (Goa) के पश्चिमी तट पर ऐतिहासिक बंदरगाह शहर (Historic Port City) के नाम पर नामित, मोरमुगाओ ने संयोग से गत 19 दिसंबर, 2021 को अपनी पहली समुद्री यात्रा की थी, जब गोवा ने पुर्तगाली शासन (Portuguese Rule) से 60 साल की आजादी का जश्न मनाया. भारतीय नौसेना ने कहा कि जहाज की लंबाई 163 मीटर और चौड़ाई 7,400 टन के विस्थापन के साथ 17 मीटर है और इसे भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों (Warships) में से एक माना जा सकता है. जहाज को चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों द्वारा चलाया जाता है जिसमें संयुक्त गैस और गैस (COGAG) की व्यवस्था है. यह जहाज 30 समुद्री मील से अधिक की स्पीड प्राप्त करने में सक्षम है. जहाज ने स्टील्थ सुविधाओं को बढ़ाया है जिसके परिणामस्वरूप रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) कम हो गया है. मोरमुगाओ सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है. जहाज में एक आधुनिक निगरानी रडार लगा है जो जहाज की तोपखाना हथियार प्रणालियों (Gunnery Weapon Systems) को लक्षित डेटा प्रदान करता है. स्वदेशी विकसित रॉकेट लांचर, टारपीडो लॉन्चर और एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर जहाज को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (Anti-Submarine Warfare Capabilities) प्रदान करते हैं. रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने कहा कि यह परमाणु, जैविक और रासायनिक (NBC) युद्ध स्थितियों में लड़ने के लिए सुसज्जित है. . जुलाई में खरीदना है 25 हजार से कम में बेस्ट 5G स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
भारतीय नौसेना ने अपने नवीनतम स्वदेशी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मोरमुगाओ का समुद्र में तैरने वाले सुपरसोनिक लक्ष्य का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. नई दिल्ली. भारतीय नौसेना ने बीते रविवार को डेस्ट्रॉयर आईएनएस मोरमुगाओ से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण ने नौसेना की समुद्र में मारक क्षमता और ताकत को साबित किया है. इसके ठीक एक सप्ताह बाद अब भारतीय नौसेना ने अपने नवीनतम स्वदेशी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मोरमुगाओ से समुद्र में तैरने वाले सुपरसोनिक लक्ष्य का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह पहला प्रयास आईएन की फ्यूचर प्रूफ कॉम्बैट रेडीनेस और आत्म निर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है. इस सबके बाद भारत समुद्र में लगातार अपनी ताकत और मारक क्षमता को मजबूत बनाने का काम कर रहा है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक गोवा के पश्चिमी तट पर ऐतिहासिक बंदरगाह शहर के नाम पर नामित, मोरमुगाओ ने संयोग से गत उन्नीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस को अपनी पहली समुद्री यात्रा की थी, जब गोवा ने पुर्तगाली शासन से साठ साल की आजादी का जश्न मनाया. भारतीय नौसेना ने कहा कि जहाज की लंबाई एक सौ तिरेसठ मीटर और चौड़ाई सात,चार सौ टन के विस्थापन के साथ सत्रह मीटर है और इसे भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक माना जा सकता है. जहाज को चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों द्वारा चलाया जाता है जिसमें संयुक्त गैस और गैस की व्यवस्था है. यह जहाज तीस समुद्री मील से अधिक की स्पीड प्राप्त करने में सक्षम है. जहाज ने स्टील्थ सुविधाओं को बढ़ाया है जिसके परिणामस्वरूप रडार क्रॉस सेक्शन कम हो गया है. मोरमुगाओ सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है. जहाज में एक आधुनिक निगरानी रडार लगा है जो जहाज की तोपखाना हथियार प्रणालियों को लक्षित डेटा प्रदान करता है. स्वदेशी विकसित रॉकेट लांचर, टारपीडो लॉन्चर और एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर जहाज को पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता प्रदान करते हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध स्थितियों में लड़ने के लिए सुसज्जित है. . जुलाई में खरीदना है पच्चीस हजार से कम में बेस्ट पाँचG स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने जाने माने वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात में दर्ज प्राथमिकी के मद्देनजर पुलिस कार्रवाई पर शुक्रवार को रोक लगा दी और राज्य पुलिस से जवाब तलब किया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई सुनवाई के दौरान श्री भूषण की दलीलें सुनने के बाद गुजरात पुलिस को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। न्यायालय ने राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। इस बीच खंडपीठ ने भूषण के ख़िलाफ़ किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई और उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी। गौरतलब है कि भूषण के एक ट्वीट को लेकर सेना के एक सेवानिवृत जवान जयदेव जोशी की शिकायत पर उनके खिलाफ गुजरात के भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी में उन धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सरकारी आदेशों पर बेवजह टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। भूषण ने ट्वीट कर कहा था कि जब जबरन लॉकडाउन के कारण देश को करोड़ों का नुकसान हुआ, तो सरकार दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत धारावाहिकों का प्रसारण शुरू कर लोगों को अफीम खिला रही है।
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने जाने माने वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात में दर्ज प्राथमिकी के मद्देनजर पुलिस कार्रवाई पर शुक्रवार को रोक लगा दी और राज्य पुलिस से जवाब तलब किया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई सुनवाई के दौरान श्री भूषण की दलीलें सुनने के बाद गुजरात पुलिस को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। न्यायालय ने राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। इस बीच खंडपीठ ने भूषण के ख़िलाफ़ किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई और उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी। गौरतलब है कि भूषण के एक ट्वीट को लेकर सेना के एक सेवानिवृत जवान जयदेव जोशी की शिकायत पर उनके खिलाफ गुजरात के भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी में उन धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सरकारी आदेशों पर बेवजह टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। भूषण ने ट्वीट कर कहा था कि जब जबरन लॉकडाउन के कारण देश को करोड़ों का नुकसान हुआ, तो सरकार दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत धारावाहिकों का प्रसारण शुरू कर लोगों को अफीम खिला रही है।
सुजानपुर-धौलासिद्ध कल्याण समिति की बैठक समिति के प्रधान दलजीत कुमार राणा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों सहित समिति के महासचिव जगत राम, कोषाध्यक्ष चमेल सिंह, पूर्व पंचायत प्रधान उपाध्यक्ष कैप्टन कुलदीप ने भाग लिया। सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि धौलासिद्ध प्रोजेक्ट का निर्माण सरकार और जो भी निर्माणाधीन कंपनी कर रही है, वे गरीब लोगों की जो उनकी भूमि इस प्रोजेक्ट के अधिग्रहण में आ रही है, उनकी भूमि का उचित मूल्य लोगों को न देकर कम पैसे देकर रजिस्ट्री कर रही है। निर्माण कमेटी लोगों को गुमराह कर रही है कि आप भूमि नहीं भी दोगे तो बांध का निर्माण हर हाल में होगा और आपकी भूमि पानी में चली जाएगी। धौलासिद्ध कल्याण समिति के प्रधान रणजीत राणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भाखड़ा बांध एवं पौंग डैम के लोग आज भी तड़प रहे हैं। अगर जबरन लोगों के साथ गलत तरीके से भूमि लेने का कार्य किया गया, तो हमीरपुर-कांगड़ा के करीब 18 पंचायतों के लोग भूख-हड़ताल पर बैठ जाएंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार एवं निर्माणाधीन कंपनी की होगी। कल्याण समिति के प्रधान एवं समस्त सदस्यों ने कहा कि संबंधित विषय को विधानसभा तक पहुंचाया जाएगा और इस जबरन वसूली कार्य में जो भी लोग शामिल हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
सुजानपुर-धौलासिद्ध कल्याण समिति की बैठक समिति के प्रधान दलजीत कुमार राणा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों सहित समिति के महासचिव जगत राम, कोषाध्यक्ष चमेल सिंह, पूर्व पंचायत प्रधान उपाध्यक्ष कैप्टन कुलदीप ने भाग लिया। सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि धौलासिद्ध प्रोजेक्ट का निर्माण सरकार और जो भी निर्माणाधीन कंपनी कर रही है, वे गरीब लोगों की जो उनकी भूमि इस प्रोजेक्ट के अधिग्रहण में आ रही है, उनकी भूमि का उचित मूल्य लोगों को न देकर कम पैसे देकर रजिस्ट्री कर रही है। निर्माण कमेटी लोगों को गुमराह कर रही है कि आप भूमि नहीं भी दोगे तो बांध का निर्माण हर हाल में होगा और आपकी भूमि पानी में चली जाएगी। धौलासिद्ध कल्याण समिति के प्रधान रणजीत राणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भाखड़ा बांध एवं पौंग डैम के लोग आज भी तड़प रहे हैं। अगर जबरन लोगों के साथ गलत तरीके से भूमि लेने का कार्य किया गया, तो हमीरपुर-कांगड़ा के करीब अट्ठारह पंचायतों के लोग भूख-हड़ताल पर बैठ जाएंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार एवं निर्माणाधीन कंपनी की होगी। कल्याण समिति के प्रधान एवं समस्त सदस्यों ने कहा कि संबंधित विषय को विधानसभा तक पहुंचाया जाएगा और इस जबरन वसूली कार्य में जो भी लोग शामिल हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
Thursday August 06, 2020, बाटा, नाइके, एडिडास और प्यूमा जैसे प्रमुख फुटवियर ब्रांड बिना किसी चुनौती के बेहतर उत्पाद की गुणवत्ता का दावा कर सकते हैं। हालांकि, छोटी और नई भारतीय फुटवियर कंपनियां अपने उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को सही ठहराने में मदद के लिए लोकप्रिय ब्रांड वैल्यू पर भरोसा नहीं कर सकती हैं। भारतीय बाजार में यूरोपीय गुणवत्ता के जूते लॉन्च करने का फैसला करने वाले आगरा स्थित विरोला इंटरनेशनल के लिए यह समस्या कोई मुद्दा नहीं थी। यह अग्रणी फुटवियर निर्माता पहले से ही अपने ब्रांड अल्बर्टो टॉरेसी के तहत यूरोपीय बाजार के लिए जूते बना रहा था। जब विरोला 2010 में अल्बर्टो टॉरेसी को भारत लाया तो उसने व्यवसायी परिवार से ब्रांड के निदेशक के रूप में ईशान सचदेवा को नियुक्त किया। पिछले एक दशक में, ईशान ने अल्बर्टो टॉरेसी को एक लोकप्रिय औपचारिक और आकस्मिक जूते ब्रांड में विकसित किया है, जिसने अपना घरेलू कारोबार 35 करोड़ रुपये कर लिया है। ब्रांड के इतिहास के बारे में बात करते हुए ईशान ने योरस्टोरी को एक विशेष बातचीत में बतायाः प्रारंभ में ब्रांड के लिए प्राथमिक लक्ष्य इतालवी बाजार था। जब सचदेवा परिवार एक ब्रांड नाम के बारे में सोच रहा था, तो यह पता था कि इतालवी बाजार के अनुरूप नाम की आवश्यकता है। विरोला के पुराने अंतर्राष्ट्रीय डिजाइनरों में से एक का नाम अल्बर्टो टॉरेसी था। कोई अनूठा अर्थ नहीं होने के बावजूद यह नाम इतालवी बाजार के लिए काफी अच्छा था और विरोला इसके साथ आगे बढ़ गया। अंतर्राष्ट्रीय नाम के बावजूद अल्बर्टो टोरेसरी ब्रांड का निर्माण ईशान के लिए आसान नहीं था। सामग्री, डिजाइन, सौंदर्यशास्त्र, फिटिंग, आराम, आदि के लिए अनुसंधान और विकास में पर्याप्त प्रयास किया गया था। आयातित सामग्रियों से बने जूते भी कठोर मैनुफेक्चुरिंग प्रक्रियाओं और गुणवत्ता जांचों से गुजरते हैं, इससे पहले कि वे अप्रूव हों। ईशान कहते हैं, "हमें लगता है कि हमारे फुटवियर उत्पाद अपनी खुद की एक लीग में हैं। उन्हे पूरे शरीर का समर्थन करने और पैरों पर खिंचाव को कम करने के लिए शॉक कुशनिंग और मजबूत पकड़ वाले तलवों के साथ फिट किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाता है वे पूरी तरह से फिट बैठते हैं और आराम देते हैं। अल्बर्टो टॉरेसी की चप्पल और सैंडल पुरुषों के लिए 3,500 रुपये से अधिक की MRP पर हैं, जबकि इसके जूते 5,000 रुपये से अधिक की लागत पर हैं। उत्पाद अक्सर ब्रांड की वेबसाइट और लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर छूट पर होते हैं। ईशान का कहना है कि उत्पादों का मूल्य बाजार के अनुसार तय किया जाता है। वह कहते हैं, जब विरोला 1950 में शुरू किया गया था, तो इसे संस्थापकों की व्यक्तिगत बचत और दोस्तों और परिवार से लिए गए 25,000 रुपये से वित्त पोषित किया था। धीरे-धीरे, यह घरेलू बाजार के लिए अपने खुद के जूते बनाना शुरू कर दिया। 1989 में, उसने विरोला इंटरनेशनल नाम से अपने जूते का निर्यात शुरू किया। वर्तमान में, आगरा स्थित उद्यम की पांच व्यापारिक फैक्ट्रियाँ हैं, जिनमें अल्बर्टो टॉरेसी के जूते भी निर्मित होते हैं। कई दशकों से, आगरा को कानपुर, रानीपेट, वानीयंबादी, अंबूर, आदि के अलावा भारत में शीर्ष फुटवियर उत्पादन हब के रूप में जाना जाता है। शहरीकरण, उच्च डिस्पोजेबल आय और मीडिया प्रभाव उपभोक्ताओं की जरूरतों को बदल रहे हैं और ब्रांडों के लिए इन हब द्वारा उत्पादित फुटवियर के प्रकार तय कर रहे हैं। संगठित बाजार में प्रमुख खिलाड़ियों में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जैसे बाटा, नाइकी, एडिडास, प्यूमा, आदि शामिल हैं, लेकिन ग्राहकों की मांग इतनी तेजी से बदल रही है कि पुराने और नए दोनों प्रकार के फुटवियर ब्रांड इनोवेशन कर रहे हैं और असंगठित बाज़ार पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। ईशान कहते हैं, आज, ग्राहक प्रमुख ब्रांडों से भी सहज सेवा, उत्पाद की उपलब्धता और तेज डिलीवरी चाहते हैं। ईशान के अनुसार उत्पाद विकास और मैनुफेक्चुरिंग की गति में वृद्धि हुई है। वह कहते हैं, "जिस तरह से उत्पाद को बाजार में लाया जाता है, वह लचीलापन, लागत और उपलब्धता को काफी प्रभावित कर सकता है। अब हम आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक एकीकृत हो गए हैं और हमारे लिए प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन महत्वपूर्ण है।" संगठित खुदरा विक्रेता और ब्रांड आज आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुकूलन के बिना असंगठित बाजार का मुकाबला करने और लागत प्रभावी होने की उम्मीद नहीं कर सकते। शोध और बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, एडिडास, नाइकी जैसे अंतर्राष्ट्रीय लेबल की उपस्थिति के बावजूद भारत में फुटवियर क्षेत्र काफी हद तक खंडित है और 75 प्रतिशत के करीब उत्पादन असंगठित क्षेत्र से आता है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) शामिल हैं। ईशान ने माना कि अल्बर्टो टोरेसी ने "अपार प्रतिस्पर्धा का सामना किया है क्योंकि असंगठित खिलाड़ी उद्योग में प्रवेश करने और करों को कम करने का प्रयास करते हैं और यह केवल संगठित कंपनियों को प्रभावित करता है।" उनके अनुसार, ई-कॉमर्स, नोटबंदी और जीएसटी के कार्यान्वयन के प्रभाव के अलावा भारतीय चमड़ा बाजार में सुस्त वृद्धि ने ब्रांड की चुनौतियों को जोड़ा है, लेकिन कठिन दौर से गुजरने के बाद, इसका ध्यान ईकॉमर्स और इसकी वेबसाइट पर टिक गया है। वह कहते हैं, "हमने एक यूजर-फ्रेडली वेबसाइट का निर्माण किया, जो हमारे ग्राहकों के लिए आसान और परेशानी मुक्त खरीदारी सुनिश्चित करता है। हमारा ईकॉमर्स प्लैटफॉर्म अब तेजी से बढ़ता हुआ राजस्व चैनल है और सभी उत्पादन प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप दिया जा रहा है।" COVID-19 महामारी के कारण लोगों को घर पर अधिक समय बिताने के कारण फुटवियर उद्योग को एक झटका लगा है। ईशान कहते हैं कि औपचारिक जूते की श्रेणी, जो कि अल्बर्टो टॉरेसी का मुख्य आकर्षण है, इससे प्रभावित हुई है। ब्रांड का लक्ष्य कैजुअल फुटवियर पर फोकस बढ़ाना है। ब्रांड बाजार की मौजूदा मांगों को पूरा करते हुए आरामदायक और स्टाइलिश ओपन फुटवियर पर काम करना चाहता है। ग्राहकों को सक्रिय रूप से सुनने की प्रक्रिया और बाजार की बढ़ती मांग ईशान के मुख्य व्यावसायिक मूल्यों में से एक है। ईशान कहते हैं,
Thursday August छः, दो हज़ार बीस, बाटा, नाइके, एडिडास और प्यूमा जैसे प्रमुख फुटवियर ब्रांड बिना किसी चुनौती के बेहतर उत्पाद की गुणवत्ता का दावा कर सकते हैं। हालांकि, छोटी और नई भारतीय फुटवियर कंपनियां अपने उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को सही ठहराने में मदद के लिए लोकप्रिय ब्रांड वैल्यू पर भरोसा नहीं कर सकती हैं। भारतीय बाजार में यूरोपीय गुणवत्ता के जूते लॉन्च करने का फैसला करने वाले आगरा स्थित विरोला इंटरनेशनल के लिए यह समस्या कोई मुद्दा नहीं थी। यह अग्रणी फुटवियर निर्माता पहले से ही अपने ब्रांड अल्बर्टो टॉरेसी के तहत यूरोपीय बाजार के लिए जूते बना रहा था। जब विरोला दो हज़ार दस में अल्बर्टो टॉरेसी को भारत लाया तो उसने व्यवसायी परिवार से ब्रांड के निदेशक के रूप में ईशान सचदेवा को नियुक्त किया। पिछले एक दशक में, ईशान ने अल्बर्टो टॉरेसी को एक लोकप्रिय औपचारिक और आकस्मिक जूते ब्रांड में विकसित किया है, जिसने अपना घरेलू कारोबार पैंतीस करोड़ रुपये कर लिया है। ब्रांड के इतिहास के बारे में बात करते हुए ईशान ने योरस्टोरी को एक विशेष बातचीत में बतायाः प्रारंभ में ब्रांड के लिए प्राथमिक लक्ष्य इतालवी बाजार था। जब सचदेवा परिवार एक ब्रांड नाम के बारे में सोच रहा था, तो यह पता था कि इतालवी बाजार के अनुरूप नाम की आवश्यकता है। विरोला के पुराने अंतर्राष्ट्रीय डिजाइनरों में से एक का नाम अल्बर्टो टॉरेसी था। कोई अनूठा अर्थ नहीं होने के बावजूद यह नाम इतालवी बाजार के लिए काफी अच्छा था और विरोला इसके साथ आगे बढ़ गया। अंतर्राष्ट्रीय नाम के बावजूद अल्बर्टो टोरेसरी ब्रांड का निर्माण ईशान के लिए आसान नहीं था। सामग्री, डिजाइन, सौंदर्यशास्त्र, फिटिंग, आराम, आदि के लिए अनुसंधान और विकास में पर्याप्त प्रयास किया गया था। आयातित सामग्रियों से बने जूते भी कठोर मैनुफेक्चुरिंग प्रक्रियाओं और गुणवत्ता जांचों से गुजरते हैं, इससे पहले कि वे अप्रूव हों। ईशान कहते हैं, "हमें लगता है कि हमारे फुटवियर उत्पाद अपनी खुद की एक लीग में हैं। उन्हे पूरे शरीर का समर्थन करने और पैरों पर खिंचाव को कम करने के लिए शॉक कुशनिंग और मजबूत पकड़ वाले तलवों के साथ फिट किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाता है वे पूरी तरह से फिट बैठते हैं और आराम देते हैं। अल्बर्टो टॉरेसी की चप्पल और सैंडल पुरुषों के लिए तीन,पाँच सौ रुपयापये से अधिक की MRP पर हैं, जबकि इसके जूते पाँच,शून्य रुपयापये से अधिक की लागत पर हैं। उत्पाद अक्सर ब्रांड की वेबसाइट और लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर छूट पर होते हैं। ईशान का कहना है कि उत्पादों का मूल्य बाजार के अनुसार तय किया जाता है। वह कहते हैं, जब विरोला एक हज़ार नौ सौ पचास में शुरू किया गया था, तो इसे संस्थापकों की व्यक्तिगत बचत और दोस्तों और परिवार से लिए गए पच्चीस,शून्य रुपयापये से वित्त पोषित किया था। धीरे-धीरे, यह घरेलू बाजार के लिए अपने खुद के जूते बनाना शुरू कर दिया। एक हज़ार नौ सौ नवासी में, उसने विरोला इंटरनेशनल नाम से अपने जूते का निर्यात शुरू किया। वर्तमान में, आगरा स्थित उद्यम की पांच व्यापारिक फैक्ट्रियाँ हैं, जिनमें अल्बर्टो टॉरेसी के जूते भी निर्मित होते हैं। कई दशकों से, आगरा को कानपुर, रानीपेट, वानीयंबादी, अंबूर, आदि के अलावा भारत में शीर्ष फुटवियर उत्पादन हब के रूप में जाना जाता है। शहरीकरण, उच्च डिस्पोजेबल आय और मीडिया प्रभाव उपभोक्ताओं की जरूरतों को बदल रहे हैं और ब्रांडों के लिए इन हब द्वारा उत्पादित फुटवियर के प्रकार तय कर रहे हैं। संगठित बाजार में प्रमुख खिलाड़ियों में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जैसे बाटा, नाइकी, एडिडास, प्यूमा, आदि शामिल हैं, लेकिन ग्राहकों की मांग इतनी तेजी से बदल रही है कि पुराने और नए दोनों प्रकार के फुटवियर ब्रांड इनोवेशन कर रहे हैं और असंगठित बाज़ार पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। ईशान कहते हैं, आज, ग्राहक प्रमुख ब्रांडों से भी सहज सेवा, उत्पाद की उपलब्धता और तेज डिलीवरी चाहते हैं। ईशान के अनुसार उत्पाद विकास और मैनुफेक्चुरिंग की गति में वृद्धि हुई है। वह कहते हैं, "जिस तरह से उत्पाद को बाजार में लाया जाता है, वह लचीलापन, लागत और उपलब्धता को काफी प्रभावित कर सकता है। अब हम आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक एकीकृत हो गए हैं और हमारे लिए प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन महत्वपूर्ण है।" संगठित खुदरा विक्रेता और ब्रांड आज आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुकूलन के बिना असंगठित बाजार का मुकाबला करने और लागत प्रभावी होने की उम्मीद नहीं कर सकते। शोध और बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, एडिडास, नाइकी जैसे अंतर्राष्ट्रीय लेबल की उपस्थिति के बावजूद भारत में फुटवियर क्षेत्र काफी हद तक खंडित है और पचहत्तर प्रतिशत के करीब उत्पादन 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पर फोकस बढ़ाना है। ब्रांड बाजार की मौजूदा मांगों को पूरा करते हुए आरामदायक और स्टाइलिश ओपन फुटवियर पर काम करना चाहता है। ग्राहकों को सक्रिय रूप से सुनने की प्रक्रिया और बाजार की बढ़ती मांग ईशान के मुख्य व्यावसायिक मूल्यों में से एक है। ईशान कहते हैं,
NIA Raid: उधर पीएफआई के छापेमारी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह बड़ी बैठक भी कर रहे है। अमित शाह के साथ ही NSA अजीत डोभाल, डीजी एनआई और गृह सचिव मौजूद है। इसी बीच PFI छापेमारी को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का बयान सामने आया है। SDPI ने पीएफआई के ठिकानों पर केंद्र एजेंसी द्वारा सुबह से ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है और पीएफआई के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उसका विरोध किया है। नई दिल्ली। आतंक के खिलाफ आज राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ा प्रहार किया है। गुरुवार को एनआईए और ईडी ने केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 10 से ज्यादा राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI के ठिकानों पर रेड मारी है। इस छापेमारी के दौरान अलग-अलग राज्यों से पीएफआई से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार भी किया है। वहीं आतंकी कमर तोड़ने के लिए जांच एजेंसी के एक्शन के बाद अब पीएफआई के कार्यकर्ताओं की बौखलाहट देखने को मिल रही है। पीएफआई के लोग सड़कों पर उतर आए है। उसी के मद्देनजर अब दिल्ली में एनआई के दफ्तर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बता दें कि टेरर-फंडिंग को लेकर NIA और ईडी की ये अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी की है। इसके केरल, राजस्थान समेत कई राज्यों के पीएफआई के अध्यक्ष को गिरफ्तार किया जा चुका है। उधर पीएफआई के छापेमारी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह बड़ी बैठक भी कर रहे है। अमित शाह के साथ ही NSA अजीत डोभाल, डीजी एनआई और गृह सचिव मौजूद है। इसी बीच PFI छापेमारी को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का बयान सामने आया है। SDPI ने पीएफआई के ठिकानों पर केंद्र एजेंसी द्वारा सुबह से ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है और पीएफआई के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उसका विरोध किया है। पीएफआई का राजनीति विंग एसडीपीआई ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की नाकामी छिपाने और डर पैदा करने के लिए ये छापेमारी हो रही है। साथ ही विरोध की आवाज दबाने के लिए रेड मारी जा रही है। एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किए जाने का कड़ा विरोध जताते हैं।
NIA Raid: उधर पीएफआई के छापेमारी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह बड़ी बैठक भी कर रहे है। अमित शाह के साथ ही NSA अजीत डोभाल, डीजी एनआई और गृह सचिव मौजूद है। इसी बीच PFI छापेमारी को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का बयान सामने आया है। SDPI ने पीएफआई के ठिकानों पर केंद्र एजेंसी द्वारा सुबह से ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है और पीएफआई के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उसका विरोध किया है। नई दिल्ली। आतंक के खिलाफ आज राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय ने कड़ा प्रहार किया है। गुरुवार को एनआईए और ईडी ने केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत दस से ज्यादा राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI के ठिकानों पर रेड मारी है। इस छापेमारी के दौरान अलग-अलग राज्यों से पीएफआई से जुड़े एक सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार भी किया है। वहीं आतंकी कमर तोड़ने के लिए जांच एजेंसी के एक्शन के बाद अब पीएफआई के कार्यकर्ताओं की बौखलाहट देखने को मिल रही है। पीएफआई के लोग सड़कों पर उतर आए है। उसी के मद्देनजर अब दिल्ली में एनआई के दफ्तर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बता दें कि टेरर-फंडिंग को लेकर NIA और ईडी की ये अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी की है। इसके केरल, राजस्थान समेत कई राज्यों के पीएफआई के अध्यक्ष को गिरफ्तार किया जा चुका है। उधर पीएफआई के छापेमारी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह बड़ी बैठक भी कर रहे है। अमित शाह के साथ ही NSA अजीत डोभाल, डीजी एनआई और गृह सचिव मौजूद है। इसी बीच PFI छापेमारी को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का बयान सामने आया है। SDPI ने पीएफआई के ठिकानों पर केंद्र एजेंसी द्वारा सुबह से ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है और पीएफआई के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उसका विरोध किया है। पीएफआई का राजनीति विंग एसडीपीआई ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की नाकामी छिपाने और डर पैदा करने के लिए ये छापेमारी हो रही है। साथ ही विरोध की आवाज दबाने के लिए रेड मारी जा रही है। एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किए जाने का कड़ा विरोध जताते हैं।
नई दिल्लीः हरियाणा के गुरुग्राम से एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक टैक्सी चालक पर हिजाब और बुर्का पहनी महिला ने चाकू से हमला कर दिया। इलाज के लिए टैक्सी ड्राइवर को गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं, मौके पर तैनात गुरुग्राम पुलिस ने बुर्का-हिजाब पहनी महिला को हिरासत में ले लिया है और मामले की तफ़्तीश शुरू कर दी गई है। इस मामले में पुलिस के मुताबिक हिजाब-बुर्का पहने महिला विदेशी बताई जा रही है। अभी तक पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, महिला मिस्र 'Egypt' की रहने वाली है। अब उससे पूछताछ की जा रही है कि आखिर उसने टैक्सी ड्राइवर पर हमला किया। फिलहाल पुलिस की ओर से अभी ज्यादा जानकारी नहीं साझा की गई है।
नई दिल्लीः हरियाणा के गुरुग्राम से एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक टैक्सी चालक पर हिजाब और बुर्का पहनी महिला ने चाकू से हमला कर दिया। इलाज के लिए टैक्सी ड्राइवर को गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं, मौके पर तैनात गुरुग्राम पुलिस ने बुर्का-हिजाब पहनी महिला को हिरासत में ले लिया है और मामले की तफ़्तीश शुरू कर दी गई है। इस मामले में पुलिस के मुताबिक हिजाब-बुर्का पहने महिला विदेशी बताई जा रही है। अभी तक पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, महिला मिस्र 'Egypt' की रहने वाली है। अब उससे पूछताछ की जा रही है कि आखिर उसने टैक्सी ड्राइवर पर हमला किया। फिलहाल पुलिस की ओर से अभी ज्यादा जानकारी नहीं साझा की गई है।
Posted On: भारतीय नौसेना की टुकड़ी ने सेशेल्स गणराज्य के स्वाधीनता दिवस समारोह में सहभागिता के लिए सेशेल्स रक्षा बल (एसडीएफ) के उत्साही कर्मियों तथा गौरवान्वित नागरिकों के साथ हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना का स्वदेशी पोत आईएनएस कोलकाता, जो कि स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाज है, उसे 29 जून 2022 को सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया में तैनात किया गया था और इस महत्वपूर्ण अवसर को अधिक यादगार बनाने के लिए आईएनएस कोलकाता को शानदार तरीके से तैयार किया गया था। 3 जुलाई 2022 को रोश काइमन के यूनिटी स्टेडियम में आयोजित सैन्य परेड में भारतीय नौसेना के जवानों की एक मार्चिंग टुकड़ी संगीत बैंड के साथ शामिल हुई। आईएनएस कोलकाता की तैनाती ने वर्ष 1976 से सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस में भारतीय सैन्य दल की निरंतर भागीदारी को और भी विशिष्ट बना दिया। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन एमएस खुराना ने सेशेल्स के उप राष्ट्रपति महामहिम श्री अहमद अफीफ, विदेश व पर्यटन मंत्री महामहिम श्री सिल्वेस्टर राडेगोंडे, एसडीएफ के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ब्रिगेडियर माइकल रोसेट और सेशेल्स तटरक्षक बल के कमांडर कर्नल जीन अटाला से मुलाकात की। आईएनएस कोलकाता ने अपने ठहराव के दौरान एसडीएफ को डोर्नियर एयरक्राफ्ट के दो इंजन सौंपे, जिन्हें हैदराबाद के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में ओवरहाल किया गया था। एससीजी जहाजों के रखरखाव के लिए सेशेल्स तटरक्षक बल (एससीजी) को इंजीनियरिंग पुर्जों का एक सेट भी दिया गया। आईएनएस कोलकाता ने बड़ी संख्या में आगंतुकों और स्कूली बच्चों की मेजबानी की, जो भारतीय नौसेना के इस आधुनिक विध्वंसक पोत की क्षमताओं को देखकर प्रसन्न हुए। सेशेल्स में योग के प्रति उत्साही लोगों ने नौसैनिक पोत के डेक पर आयोजित योग सत्र के अनूठे अनुभव का आनंद लिया। एससीजी कर्मियों ने सेशेल्स वायु सेना के डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोल विमान के साथ सेशेल्स के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में संयुक्त निगरानी अभियान चलाने के लिए 29 जून से 03 जुलाई 2022 तक आईएनएस कोलकाता की संचालन गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस चरण के दौरान, आईएनएस कोलकाता ने भारतीय नौसेना द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण सहयोग कार्यक्रम के तहत एससीजी के कर्मियों को परिचालन प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की। भारत और सेशेल्स के बीच दीर्घ कालीन द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और भी सकारात्मक बढ़ावा तब मिला था, जब हाल ही में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने अप्रैल 2022 में सेशेल्स की यात्रा की थी। इसके बाद राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए सेशेल्स में आईएनएस कोलकाता की तैनाती, तकनीकी सहायता की उपलब्धता तथा इस दौरान सेशेल्स रक्षा बल के साथ पर्याप्त परिचालन गतिविधियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहायता के पैमाने तथा दायरे को और बढ़ा दिया है। आईएनएस कोलकाता की तैनाती "सागर" कार्यक्रम के दृष्टिकोण के अनुरूप थी, जो हिन्द महासागर में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देती है। भारत इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हिन्द महासागर के सभी समुद्री तटों पर क्षमता निर्माण और सामर्थ्य बढ़ाने के प्रयासों को निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Posted On: भारतीय नौसेना की टुकड़ी ने सेशेल्स गणराज्य के स्वाधीनता दिवस समारोह में सहभागिता के लिए सेशेल्स रक्षा बल के उत्साही कर्मियों तथा गौरवान्वित नागरिकों के साथ हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना का स्वदेशी पोत आईएनएस कोलकाता, जो कि स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाज है, उसे उनतीस जून दो हज़ार बाईस को सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया में तैनात किया गया था और इस महत्वपूर्ण अवसर को अधिक यादगार बनाने के लिए आईएनएस कोलकाता को शानदार तरीके से तैयार किया गया था। तीन जुलाई दो हज़ार बाईस को रोश काइमन के यूनिटी स्टेडियम में आयोजित सैन्य परेड में भारतीय नौसेना के जवानों की एक मार्चिंग टुकड़ी संगीत बैंड के साथ शामिल हुई। आईएनएस कोलकाता की तैनाती ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर से सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस में भारतीय सैन्य दल की निरंतर भागीदारी को और भी विशिष्ट बना दिया। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन एमएस खुराना ने सेशेल्स के उप राष्ट्रपति महामहिम श्री अहमद अफीफ, विदेश व पर्यटन मंत्री महामहिम श्री सिल्वेस्टर राडेगोंडे, एसडीएफ के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ब्रिगेडियर माइकल रोसेट और सेशेल्स तटरक्षक बल के कमांडर कर्नल जीन अटाला से मुलाकात की। आईएनएस कोलकाता ने अपने ठहराव के दौरान एसडीएफ को डोर्नियर एयरक्राफ्ट के दो इंजन सौंपे, जिन्हें हैदराबाद के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में ओवरहाल किया गया था। एससीजी जहाजों के रखरखाव के लिए सेशेल्स तटरक्षक बल को इंजीनियरिंग पुर्जों का एक सेट भी दिया गया। आईएनएस कोलकाता ने बड़ी संख्या में आगंतुकों और स्कूली बच्चों की मेजबानी की, जो भारतीय नौसेना के इस आधुनिक विध्वंसक पोत की क्षमताओं को देखकर प्रसन्न हुए। सेशेल्स में योग के प्रति उत्साही लोगों ने नौसैनिक पोत के डेक पर आयोजित योग सत्र के अनूठे अनुभव का आनंद लिया। एससीजी कर्मियों ने सेशेल्स वायु सेना के डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोल विमान के साथ सेशेल्स के विशेष आर्थिक क्षेत्र में संयुक्त निगरानी अभियान चलाने के लिए उनतीस जून से तीन जुलाई दो हज़ार बाईस तक आईएनएस कोलकाता की संचालन गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस चरण के दौरान, आईएनएस कोलकाता ने भारतीय नौसेना द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण सहयोग कार्यक्रम के तहत एससीजी के कर्मियों को परिचालन प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की। भारत और सेशेल्स के बीच दीर्घ कालीन द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और भी सकारात्मक बढ़ावा तब मिला था, जब हाल ही में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने अप्रैल दो हज़ार बाईस में सेशेल्स की यात्रा की थी। इसके बाद राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए सेशेल्स में आईएनएस कोलकाता की तैनाती, तकनीकी सहायता की उपलब्धता तथा इस दौरान सेशेल्स रक्षा बल के साथ पर्याप्त परिचालन गतिविधियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहायता के पैमाने तथा दायरे को और बढ़ा दिया है। आईएनएस कोलकाता की तैनाती "सागर" कार्यक्रम के दृष्टिकोण के अनुरूप थी, जो हिन्द महासागर में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देती है। भारत इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हिन्द महासागर के सभी समुद्री तटों पर क्षमता निर्माण और सामर्थ्य बढ़ाने के प्रयासों को निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्लीः दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में एक खेल शिक्षक ने आठ साल की एक बच्ची का यौन उत्पीड़न किया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारी ने कहा कि न्यू अशोक नगर पुलिस स्टेशन को दिन में एक पीसीआर कॉल मिली, जिसके बाद एक पुलिस टीम को घटनास्थल पर भेजा गया, जहां पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी इलाके के एक स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा है। . उन्होंने कहा, "उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 4-5 दिन पहले उनकी बेटी का खेल शिक्षक ने यौन उत्पीड़न किया था. " पीड़िता की काउंसलिंग और मेडिकल जांच कराई जा रही है। अधिकारी ने कहा कि आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। अतिरिक्त विवरण की प्रतीक्षा है।
नई दिल्लीः दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में एक खेल शिक्षक ने आठ साल की एक बच्ची का यौन उत्पीड़न किया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारी ने कहा कि न्यू अशोक नगर पुलिस स्टेशन को दिन में एक पीसीआर कॉल मिली, जिसके बाद एक पुलिस टीम को घटनास्थल पर भेजा गया, जहां पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी इलाके के एक स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा है। . उन्होंने कहा, "उन्होंने आरोप लगाया कि करीब चार-पाँच दिन पहले उनकी बेटी का खेल शिक्षक ने यौन उत्पीड़न किया था. " पीड़िता की काउंसलिंग और मेडिकल जांच कराई जा रही है। अधिकारी ने कहा कि आईपीसी की धारा तीन सौ छिहत्तर और पाँच सौ छः के तहत यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की धारा छः के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। अतिरिक्त विवरण की प्रतीक्षा है।
Ranchi : पश्चिम बंगाल में नोट के साथ पकड़े गए झारखंड के तीनों विधायकों इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल से पूछताछ जारी. जानकारी के अनुसार विधायकों ने पूरा पैसा का विवरण स्थानीय जिला प्रशासन को दे दिया है. विधायकों ने कहा कि वे गाड़ी खरीदने के लिए पश्चिम बंगाल गए थे. जो पैसा बरामद किया गया है, उससे गाड़ी खरीदा जाना है. लेकिन अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वह पैसे गाड़ी खरीदने के लिए था या कहीं और खपाने के लिए. सूचना मिल रही है कि झारखंड पुलिस की टीम बंगाल पहुंचने वाली है. बताते चलें कि विधायकों के पास से 48 लाख रुपए कैश बरामद हुए थे. शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुगली में झारखंड के तीन विधायकों जामताड़ा के इरफान अंसारी, खिजरी के राजेश कच्छप और कोलेबिरा के विक्सल कौंगाड़ी को गाड़ी में भारी मात्रा में कैश के साथ गिरफ्तार किया गया था.
Ranchi : पश्चिम बंगाल में नोट के साथ पकड़े गए झारखंड के तीनों विधायकों इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल से पूछताछ जारी. जानकारी के अनुसार विधायकों ने पूरा पैसा का विवरण स्थानीय जिला प्रशासन को दे दिया है. विधायकों ने कहा कि वे गाड़ी खरीदने के लिए पश्चिम बंगाल गए थे. जो पैसा बरामद किया गया है, उससे गाड़ी खरीदा जाना है. लेकिन अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वह पैसे गाड़ी खरीदने के लिए था या कहीं और खपाने के लिए. सूचना मिल रही है कि झारखंड पुलिस की टीम बंगाल पहुंचने वाली है. बताते चलें कि विधायकों के पास से अड़तालीस लाख रुपए कैश बरामद हुए थे. शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुगली में झारखंड के तीन विधायकों जामताड़ा के इरफान अंसारी, खिजरी के राजेश कच्छप और कोलेबिरा के विक्सल कौंगाड़ी को गाड़ी में भारी मात्रा में कैश के साथ गिरफ्तार किया गया था.
मंगलवार को सुबह तेज धूप निकली। दोपहर में कई बार बादल छाए। शाम को भी आसमान में एक बार फिर घने बादल छा गए, लगा कि तेज बारिश होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिनभर लोगों को उमस भरी गर्मी से दोचार होना पड़ा। मैक्सिमम टेम्प्रेचर 36. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम रहा। वहीं मिनिमम टेम्प्रेचर 26. 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से एक डिग्री कम रहा। मौसम विभाग ने बुधवार और गुरुवार को कई स्पेल में बारिश तो शुक्रवार और शनिवार को अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है। इससे टेम्प्रेचर में भी गिरावट देखने को मिलेगी। मैक्सिमम टेम्प्रेचर 35 डिग्री से कम तो मिनिमम टेम्प्रेचर 27 डिग्री से नीचे पहुंच सकता है।
मंगलवार को सुबह तेज धूप निकली। दोपहर में कई बार बादल छाए। शाम को भी आसमान में एक बार फिर घने बादल छा गए, लगा कि तेज बारिश होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिनभर लोगों को उमस भरी गर्मी से दोचार होना पड़ा। मैक्सिमम टेम्प्रेचर छत्तीस. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री कम रहा। वहीं मिनिमम टेम्प्रेचर छब्बीस. तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से एक डिग्री कम रहा। मौसम विभाग ने बुधवार और गुरुवार को कई स्पेल में बारिश तो शुक्रवार और शनिवार को अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है। इससे टेम्प्रेचर में भी गिरावट देखने को मिलेगी। मैक्सिमम टेम्प्रेचर पैंतीस डिग्री से कम तो मिनिमम टेम्प्रेचर सत्ताईस डिग्री से नीचे पहुंच सकता है।
Jio 5G Diwali: भारत में सबसे बड़े ग्राहक आधार वाली दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने घोषणा की है कि दिवाली से चुनिंदा शहरों को उसकी 5जी सेवाओं का लाभ मिलेगा। Jio True 5G के लॉन्च के साथ, कंपनी ग्राहकों को 5G नेटवर्क पर 1Gbps तक की स्पीड देगी। अगर आप बाकी से पहले Jio की 5G स्पीड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आप इसके वेलकम ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। Jio का दावा है कि उसकी 5G तकनीक 700MHz बैंड पर आधारित है और SA (स्टैंडअलोन) 5G सेवाओं की पेशकश करने वाली भारत की एकमात्र कंपनी है। Jio ने पहले ही चार शहरों - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और वाराणसी में 5G का परीक्षण शुरू कर दिया है। हालांकि, अगर आप इन शहरों में रहते हैं, तो भी आपको कंपनी की 5G सेवा से जुड़ने के लिए एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना होगा और लाभ स्वचालित नहीं होंगे। Jio 5G Diwali: Reliance Jio की 5G सेवा चुनिंदा शहरों में केवल आमंत्रण मोड में उपलब्ध है। यानी 5G सर्विस से जुड़ने के लिए आपको इनविटेशन की जरूरत होगी। सबसे पहले यह तय करें कि क्या आप इन चार शहरों में से किसी एक शहर में रहते हैं जहां जियो की 5जी सेवाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, आपके पास 5G सक्षम स्मार्टफोन होना चाहिए। इसके बाद Realme, OnePlus, Vivo, Samsung, Xiaomi और iQOO फोन यूजर्स वेलकम ऑफर का हिस्सा बनने की कोशिश कर सकते हैं। सबसे पहले आपको 5G फोन में MyJio ऐप इंस्टॉल करना होगा। यहां एप को ओपन करने और अपने जियो नंबर से लॉग इन करने के बाद आपको होम स्क्रीन दिखाई देगी। अगर आप ऐसे क्षेत्र में हैं जहां जियो की 5जी सेवाओं का परीक्षण किया जा रहा है, तो आपको सबसे ऊपर 'जियो वेलकम ऑफर' लिखा हुआ दिखाई देगा। इस कार्ड को टैप करने के बाद आप जियो की 5जी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे और आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। शीर्ष कार्ड पर टैप करने के बाद, स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई देगा, "धन्यवाद! आपकी यात्रा अब Jio True 5G के साथ शुरू होती है। " हालाँकि, कंपनी निर्दिष्ट करती है कि यदि उपयोगकर्ता का हैंडसेट 5G संगत है और Jio के 5G बैंड का समर्थन करता है, तो उसे 'Jio वेलकम ऑफ़र आमंत्रण' भेजा जाएगा। यह आमंत्रण मिलने के बाद ही 5जी इंटरनेट स्पीड का लाभ मिलना शुरू होगा।
Jio पाँचG Diwali: भारत में सबसे बड़े ग्राहक आधार वाली दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने घोषणा की है कि दिवाली से चुनिंदा शहरों को उसकी पाँचजी सेवाओं का लाभ मिलेगा। Jio True पाँचG के लॉन्च के साथ, कंपनी ग्राहकों को पाँचG नेटवर्क पर एकGbps तक की स्पीड देगी। अगर आप बाकी से पहले Jio की पाँचG स्पीड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आप इसके वेलकम ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। Jio का दावा है कि उसकी पाँचG तकनीक सात सौMHz बैंड पर आधारित है और SA पाँचG सेवाओं की पेशकश करने वाली भारत की एकमात्र कंपनी है। Jio ने पहले ही चार शहरों - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और वाराणसी में पाँचG का परीक्षण शुरू कर दिया है। हालांकि, अगर आप इन शहरों में रहते हैं, तो भी आपको कंपनी की पाँचG सेवा से जुड़ने के लिए एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना होगा और लाभ स्वचालित नहीं होंगे। Jio पाँचG Diwali: Reliance Jio की पाँचG सेवा चुनिंदा शहरों में केवल आमंत्रण मोड में उपलब्ध है। यानी पाँचG सर्विस से जुड़ने के लिए आपको इनविटेशन की जरूरत होगी। सबसे पहले यह तय करें कि क्या आप इन चार शहरों में से किसी एक शहर में रहते हैं जहां जियो की पाँचजी सेवाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, आपके पास पाँचG सक्षम स्मार्टफोन होना चाहिए। इसके बाद Realme, OnePlus, Vivo, Samsung, Xiaomi और iQOO फोन यूजर्स वेलकम ऑफर का हिस्सा बनने की कोशिश कर सकते हैं। सबसे पहले आपको पाँचG फोन में MyJio ऐप इंस्टॉल करना होगा। यहां एप को ओपन करने और अपने जियो नंबर से लॉग इन करने के बाद आपको होम स्क्रीन दिखाई देगी। अगर आप ऐसे क्षेत्र में हैं जहां जियो की पाँचजी सेवाओं का परीक्षण किया जा रहा है, तो आपको सबसे ऊपर 'जियो वेलकम ऑफर' लिखा हुआ दिखाई देगा। इस कार्ड को टैप करने के बाद आप जियो की पाँचजी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे और आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। शीर्ष कार्ड पर टैप करने के बाद, स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई देगा, "धन्यवाद! आपकी यात्रा अब Jio True पाँचG के साथ शुरू होती है। " हालाँकि, कंपनी निर्दिष्ट करती है कि यदि उपयोगकर्ता का हैंडसेट पाँचG संगत है और Jio के पाँचG बैंड का समर्थन करता है, तो उसे 'Jio वेलकम ऑफ़र आमंत्रण' भेजा जाएगा। यह आमंत्रण मिलने के बाद ही पाँचजी इंटरनेट स्पीड का लाभ मिलना शुरू होगा।
लाखों लोग मालवा मीमाड़ पश्चिमी राजस्थान से आये थे । बड़ा भारी मेला लगा था । भोजन की व्यवस्था एक दो ट्रकों व गाड़ियों में लापसी भरकर चलते हुए फावड़े से डालते थे। लोग थालियों की जगह कपड़ों पर लेकर खाते थे । तीन दिन भोजन चलता रहा । दिवान हरीसिंहजी के समय में भी कई गांवों में छोडाणा हुआ था। गांव गरणिया के सीरवीयों ने छोडाणा किया था । जिसका प्रमाण निम्न है । श्री ठाकरा साहबा राजश्री 105 श्री बालूसिंहजी साब कंवर साब श्री रामसिंहजी देव वचनांता । परगने जेतारण रे गांम गररिगयो सीरवी नाराज होयने श्री माताजी रो पाट राजाडंड ले गया और श्री दिवान साहब रा हुक्म सू मोती बाबो आयो चोदरियो ने ठाकर साब ने आपस को तना जो मेटने श्री माताजी रो पाट पाछो दस्तूर गाम गररिणया में पाट थापन कीयो ने मारी तरफ सू श्री माताजो रे केसर रो धान मरण 11) ईग्यारे गरणीया तोल रो भेंट कियो । जीमेय सु गउं 511) साडी पांच मरण गूजी 51) साडी पांच मरण जुमले ईग्यारे मण गरणिया तोल सू दीया जावसी "मारे गांव में सीरवो आबाद रेवेला जब तक दीया जावसी प्रो परवानो श्री जती बाबाजी भीकाजी रे सामने सो सनंन रेवे संवत 1996 रा आसाढ वद 9 तारीख 11-6-39 दा. कोसोरसिंह का. ठा. गरणिया वर्तमान दिवान साहब श्रीमान् माधवसिंहजी एक बार दिनांक 26-12-25 को जोधपुर महाराजा व महाराणीजी भटियाणीजी बिलाड़े पधारे थे उस समय महाराजा को गाजों बाजों से बधाकर लाया गया था। तथा बाड़ी महल में ठहराया खूब खातर की गई। महाराजा ने दिवान साहब को अपने सामने कुर्सी पर बैठाया और अच्छा कुरब दिया था । संवत् 1997 में आपने आई माता के मंदिर पर गाटरे लगवाकर छीरों डलवाई थी । तथा प्रवेश द्वार संगमरमर का बनवाया था। आई माता की कृपा से 1999 के पोह सुद 1 को आपके पुत्र रत्न हुवे । जिनका नाम माधवसिंहजी रखा । ग्राई माता की भक्ति करते हुवे संवत 2003 के आसोज सुदी 3 को आपका स्वर्गवास हो गया । स्वर्गवास के 6 माह बाद कुवर गोपालसिंहजी का जन्म हुआ था । दिवान हरीसिंहजी के स्वर्गवास के समय माधवसिंहजी मात्र 4 साल के थे । अतः माधवसिंहजी संवत् 2003 के आसोज सुद 3 को दिवान की गद्दी पर बिराजे । आजकल दिवान माधवसिंहजी सोजत क्षेत्र के विधायक हैं ।
लाखों लोग मालवा मीमाड़ पश्चिमी राजस्थान से आये थे । बड़ा भारी मेला लगा था । भोजन की व्यवस्था एक दो ट्रकों व गाड़ियों में लापसी भरकर चलते हुए फावड़े से डालते थे। लोग थालियों की जगह कपड़ों पर लेकर खाते थे । तीन दिन भोजन चलता रहा । दिवान हरीसिंहजी के समय में भी कई गांवों में छोडाणा हुआ था। गांव गरणिया के सीरवीयों ने छोडाणा किया था । जिसका प्रमाण निम्न है । श्री ठाकरा साहबा राजश्री एक सौ पाँच श्री बालूसिंहजी साब कंवर साब श्री रामसिंहजी देव वचनांता । परगने जेतारण रे गांम गररिगयो सीरवी नाराज होयने श्री माताजी रो पाट राजाडंड ले गया और श्री दिवान साहब रा हुक्म सू मोती बाबो आयो चोदरियो ने ठाकर साब ने आपस को तना जो मेटने श्री माताजी रो पाट पाछो दस्तूर गाम गररिणया में पाट थापन कीयो ने मारी तरफ सू श्री माताजो रे केसर रो धान मरण ग्यारह) ईग्यारे गरणीया तोल रो भेंट कियो । जीमेय सु गउं पाँच सौ ग्यारह) साडी पांच मरण गूजी इक्यावन) साडी पांच मरण जुमले ईग्यारे मण गरणिया तोल सू दीया जावसी "मारे गांव में सीरवो आबाद रेवेला जब तक दीया जावसी प्रो परवानो श्री जती बाबाजी भीकाजी रे सामने सो सनंन रेवे संवत एक हज़ार नौ सौ छियानवे रा आसाढ वद नौ तारीख ग्यारह जून उनतालीस दा. कोसोरसिंह का. ठा. गरणिया वर्तमान दिवान साहब श्रीमान् माधवसिंहजी एक बार दिनांक छब्बीस दिसंबर पच्चीस को जोधपुर महाराजा व महाराणीजी भटियाणीजी बिलाड़े पधारे थे उस समय महाराजा को गाजों बाजों से बधाकर लाया गया था। तथा बाड़ी महल में ठहराया खूब खातर की गई। महाराजा ने दिवान साहब को अपने सामने कुर्सी पर बैठाया और अच्छा कुरब दिया था । संवत् एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आपने आई माता के मंदिर पर गाटरे लगवाकर छीरों डलवाई थी । तथा प्रवेश द्वार संगमरमर का बनवाया था। आई माता की कृपा से एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के पोह सुद एक को आपके पुत्र रत्न हुवे । जिनका नाम माधवसिंहजी रखा । ग्राई माता की भक्ति करते हुवे संवत दो हज़ार तीन के आसोज सुदी तीन को आपका स्वर्गवास हो गया । स्वर्गवास के छः माह बाद कुवर गोपालसिंहजी का जन्म हुआ था । दिवान हरीसिंहजी के स्वर्गवास के समय माधवसिंहजी मात्र चार साल के थे । अतः माधवसिंहजी संवत् दो हज़ार तीन के आसोज सुद तीन को दिवान की गद्दी पर बिराजे । आजकल दिवान माधवसिंहजी सोजत क्षेत्र के विधायक हैं ।
27 साल के केएम आसिफ दाएं हाथ के मीडियम पेसर हैं, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में केरल लिए खेलते हैं, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका अब तक का प्रदर्शन काफी ठीक-ठाक रहा है। हालांकि आईपीएल 2018 की नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 40 लाख रुपय देकर अपने स्क्वॉड में शामिल किया था। केएम आसिफ ने आईपीएल में अपना अखिरी मैच साल 2018 में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेला था, जिसमें उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा था, उस मैच में उन्होंने 3 ओवर में 14. 30 के इकोनॉमी के साथ 43 रन दिए थे। हालांकि अपने आईपीएल करियर में वो अब तक दो ही मैच खेल पाए हैं, जिसमें वो 25. 0 की औसत और 12. 5 की खराब इकोनॉमी के साथ 75 रन देकर 3 विकेट ही ले पाए हैं। चेन्नई सुपर किंग्स की टीम केएम आसिफ को साल 2019 और 2020 के दोनों सीजन में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया था, ऐसे में पूरी उम्मीद है कि साल 2021 के पूरे सीजन एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग्स उन्हें बेंच बैठा सकती हैं।
सत्ताईस साल के केएम आसिफ दाएं हाथ के मीडियम पेसर हैं, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में केरल लिए खेलते हैं, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका अब तक का प्रदर्शन काफी ठीक-ठाक रहा है। हालांकि आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह की नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें चालीस लाख रुपय देकर अपने स्क्वॉड में शामिल किया था। केएम आसिफ ने आईपीएल में अपना अखिरी मैच साल दो हज़ार अट्ठारह में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेला था, जिसमें उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा था, उस मैच में उन्होंने तीन ओवर में चौदह. तीस के इकोनॉमी के साथ तैंतालीस रन दिए थे। हालांकि अपने आईपीएल करियर में वो अब तक दो ही मैच खेल पाए हैं, जिसमें वो पच्चीस. शून्य की औसत और बारह. पाँच की खराब इकोनॉमी के साथ पचहत्तर रन देकर तीन विकेट ही ले पाए हैं। चेन्नई सुपर किंग्स की टीम केएम आसिफ को साल दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस के दोनों सीजन में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया था, ऐसे में पूरी उम्मीद है कि साल दो हज़ार इक्कीस के पूरे सीजन एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग्स उन्हें बेंच बैठा सकती हैं।
आ सकती है । ज्यों ही वह प्रतिरोधी क्षेत्र में, जो १२० मील से नीचे है, प्रवेश करती है, त्यों ही वह वायु के कणों से रगड़ खाती है और पहले कोष्ण, फिर गर्म होती है और अंन्त में जल उठती है । इसी को हम टूटता हुआ तारा' कहते हैं । अधिकांश उल्काएँ तब तक जल कर समाप्त हो जाती हैं, जव वे पृथ्वी से ७० या ६० मील की दूरी तक आ चुकी होती हैं, किन्तु कोई-कोई अपेक्षाकृत बड़ी उल्काएँ पृथ्वी पर गिरने तक भी बची रह जाती हैं और बाद में शैलीय ढेर या 'उल्कापिंड' (मीट्योराइट) के रूप में पाई जाती हैं। इस प्रकार की एक विशेष रूप से बड़ी उल्का १९०८ में साइबेरिया में गिरी थी और वह जहाँ भूमि से टकराई थी, उसके चारों ओर पचास-पचास मील दूर तक उसने वृक्षों को भूमि पर लिटा दिया था । यदि वायुमंडल न होता, तो हम सारे ही समय उल्काओं की बमबारी के शिकार हुआ करते, और पृथ्वीतल पर जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण होता; परन्तु वायुमंडल द्वारा रोकथाम होने के कारण हमें इस बात से डरने की आवश्यकता नहीं है. कि कोई पत्थर हमारे सिर पर आ पड़ेगा । सम्पूर्ण इतिहास में केवल चार पाँच व्यक्तियों के ही उल्का पिंडों से घायल होने का पता चला है । ऊपरली वायु का सबसे सुन्दर प्रपंच असंदिग्ध रूप से 'ध्रुवीय ज्योति' या 'उत्तरी प्रकाश' है । ये प्रकाश सूर्य द्वारा फेंके जा रहे विद्युताविष्ट कणों के कारण उत्पन्न होते हैं; ये कण पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों की ओर आकृष्ट होते हैं और ऊपरी वायुमंडल से टकराते हैं, जिससे विचित्र चमक उत्पन्न होती है । सुदूर उत्तर और दक्षिण में ये ध्रुवीय ज्योतियाँ, जब सूर्य क्षितिज से नीचे हो, तब लगभग सारे ही समय देखी जा सकती हैं; इंग्लैंड में वे अपेक्षाकृत कम बार दिखाई पड़ती हैं, क्योंकि इंग्लैंड चुम्बकीय ध्रुव से दूर पड़ता है, परन्तु कभीसे कभी बड़े सुन्दर दृश्य दिखाई पड़ते हैं । उदाहरण के लिए, २६ जनवरी, १९३८ को दक्षिणी इंग्लैंड से देखने पर सारा आकाश बहुत ही शानदार लाल रंग में चमकता दिखाई दिया था, और बहुत से लोगों ने तो यह मान लिया था कि लंदन में आग लग गई है । निचली वायु का, जिसमें वादल, तूफान, कुहरे और चक्रवात ( साइक्लोन ) आते हैं, अध्ययन मौसम विज्ञान का विषय है, और उस पर एक अलग पूरी पुस्तक लिखी जा सकती है । लेकिन जब हम अपने ग्रह की चर्चा करते हैं, तब हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वायुमंडलीय आवरण पृथ्वी का एक महत्त्वपूर्ण भाग है । वायु के बिना जीवन कभी शुरू ही नहीं हो सकता था और तब पृथ्वी की कहानी अनलिखी ही रह जाती । अध्याय तेरह जब हम भूमि के किसी समतल प्रदेश पर, जैसे किसी लम्बे रेतीले समुद्र तट पर या घास के मैदान पर दृष्टि डालते हैं, तो हमें यह बात भली-भाँति समझ में आ जाती है कि शुरू के लोग क्यों यह मानते थे कि पृथ्वी चपटी (सपाट ) है । इस तथ्य को कि यह एक गोलक है, अवश्य ही अब से बहुत पहले स्वीकार कर लिया गया था, और इरैटोस्थीनीज़ नामक एक यूनानी वैज्ञानिक तो, जो ईसा से लगभग २५० वर्ष पहले हुआ था, पृथ्वी का आकार भी काफी कुछ सही-सही नाप पाने में समर्थ हुआ था; परन्तु उस समय भी यह माना जाता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केन्द्र है और सूर्य, चन्द्रमा तथा अन्य आकाशीय पिंड एक दिन में पृथ्वी का एक चक्कर लगा लेते हैं । अब से केवल ४०० वर्ष पहले तक भी इस विचार को गलत प्रमाणित नहीं किया जा सका था। आकाशीय पिंड एक दिन में एक बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए क्यों प्रतीत होते हैं, इसका कारण समझाना आसान है। पृथ्वी अपने अक्ष ( धुरी ) पर घूमती है ( २४ घंटे की अवधि में ) और इसके इस घूमने के कारण ही सूर्य और तारे घूमते हुए प्रतीत होते हैं । पृथ्वी का अक्ष आकाश में उत्तर की ओर ध्रुव ( पोलैरिस ) तारे के निकट एक बिन्दु की ओर संकेत करता है, और इसलिए ध्रुव तारा लगभग स्थिर, और अन्य प्रत्येक पिंड उसके चारों ओर चक्कर काटता हुआ प्रतीत होता है । ( यह बात सूर्य पर भी लागू होती है, परन्तु दिन में तो तारे सूर्य की चमक से छिप जाते हैं । ) भूमध्यरेखा के दक्षिण में ध्रुव तारा कभी दिखाई नहीं पड़ सकता, क्योंकि • पृथ्वी का गोलक बीच में आ जाता है; दक्षिणी ध्रुव की ओर कोई चमकीला तारा नहीं है; इसके अधिकतम निकट एक 'धुँधला-सा तारा है, जिसका नाम सिग्मा औक्टेन्टिस है । एकमात्र पिंड, जो सचमुच ही पृथ्वी की परिक्रमा करता है, चन्द्रमा अवश्य है । जैसा कि हम देख चुके हैं, इसका जन्म सम्भाव्यतः पृथ्वी से नहीं हुआ था, अपितु यह शुरू से ही एक पृथक् गोलक था; लेकिन अन्तरिक्ष में यह अन्य पिंडों की अपेक्षा हमारा कहीं अधिक निकट का पड़ौसी है और इस रूप में पृथ्वी पर इसका वड़ा प्रभाव है । विशेष रूप से, ज्वार-भाटों का यह मुख्य कारण है । ज्वार-भाटों को समझाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि यह कल्पना की जाये कि पृथ्वी पर सब जगह एक उथला समरूप समुद्र है, जैसा कि पृष्ठ १४८ पर दिये गये आरेख में दिखाया गया है । चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव इतना प्रवल होता है कि 'ज्वा' बिन्दु पर, चन्द्रमा के ठीक नीचे, पानी का ऊँचा ढेर लग जायेगा, और इसी प्रकार का एक दूसरा उभार पृथ्वी के दूसरी ओर 'ज्वा' विन्दु पर होगा । ( स्पष्टतः, यह आरेख पैमाने के अनुसार नहीं बनाया गया है, और इसमें जो पानी की परत दिखाई गई है, वह उसकी अपेक्षा कहीं अधिक गहरी है, जितनी कि वह कभी भी वस्तुतः हो सकती है । ) पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमते समय यह पानी का ढेर उसके साथ-साथ नहीं घूमेगा, अपितु चन्द्रमा के नीचे ही वना रहने का यत्न करेगा । इसका परिणाम यह होता है कि पृथ्वी के घूमते रहने पर भी पानी के ढेर वहीं बने रहते हैं, जहाँ कि वे हैं और पृथ्वी के हर चक्कर के साथ पृथ्वी की पूरी सतह पर चारों ओर फिर जाते हैं, जिससे प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन दो वार ज्वार आता है । क्योंकि चन्द्रमा भी अपने मार्ग पर गति कर रहा है, इस -- लिए ये पानी के ढेर स्वयं भी बिल्कुल गतिहीन नहीं हैं । वे चन्द्रमा का अनुकरण करते हुए धीरे-धीरे जगह वदलते रहते हैं और औसत रूप से किसी भी बन्दरगाह पर ज्वार प्रतिदिन पहले दिन की अपेक्षा ५० मिनट देर से आता है । ज्वाः \ जैसा कि हमें मालूम है, पृथ्वी सब ओर से इस प्रकार की जलीय परत से ढकी हुई नहीं है । कुछ महासागर अन्यों की अपेक्षा कहीं अधिक गहरे हैं और स्थल प्रदेश पानी के नियमित प्रवाह में बाधा डालते हैं, जिससे ज्वार उतने इकसार नहीं आते, जितने कि वे किसी पूर्णतया समुद्र से आवृत्त ग्रह पर आते । स्थानीय प्रभाव बहुत स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। उदाहरण के लिए, साउथम्पटन में समुद्र की तट रेखा की आकृति और वाइट के छोटे से द्वीप की विद्यमानता के कारण दोनों ज्वार तुरन्त एक के बाद एक आते हैं । सूर्य के द्वारा उठाये गये ज्वार चन्द्रमा के ज्वारों की अपेक्षा बहुत निर्बल होते हैं, फिर भी उनमें काफ़ी शक्ति होती है । जब सूर्य और चन्द्रमा, दोनों का खिंचाव एक ही दिशा में होता है, तब उसके फलस्वरूप ऊँचा या 'बृहत्' (स्प्रिंग ) ' ज्वार-भाटा आता है; जब सूर्य और चन्द्रमा का खिंचाव एकदूसरे के साथ समकोण बनाते हुए होता है, तव 'लघुतम' ( नीप ) ज्वार होता है, और वह कम प्रचंड होता है । इतना ही नहीं, समुद्रों की ही भाँति स्थल प्रदेशों पर भी ज्वारीय प्रभाव पड़ते हैं, अवश्य ही इन्हें विशेष उपकरणों के बिना नहीं पहचाना जा सकता; और वायुमंडल में भी ज्वार आते हैं । समस्त ब्रह्मांड में पृथ्वी की स्थिति क्या है, इसकी अपने मन में सही धारणा बनाने के लिए सौर मंडल के अन्य ग्रहों के साथ इसकी तुलना करना मनोरंजक होगा। इनमें से चार, बृहस्पति, शनि, अरुण ( यूरेनस) और वरुण (नैप्च्यून) अत्यधिक विशाल हैं - अकेले बृहस्पति में ही १३०० पृथ्वियाँ समा सकती हैं - और शुक्र लगभग पृथ्वी जितना ही वड़ा है, जबकि मंगल, अंग्रेजी शब्द 'स्प्रिंग टाइड' में 'स्प्रिंग' का वसन्त ऋतु से कोई सम्बन्ध नहीं है । यम (प्लूटो) और बुध निश्चित रूप से पृथ्वी से छोटे हैं । - विशालकाय ग्रह ठंडे और हमारे लिए अनाकर्षक हैं और उनके वायुमंडल विषैले हैं, और यम ( प्लूटो ) तथा बुध इतने छोटे हैं कि वे अपनी अधिकांश वायु खो चुके हैं, जो सम्भाव्यतः किसी समय उन पर थी; इस प्रकार केवल शुक्र और मंगल ही ऐसे हैं, जो थोड़ा बहुत पृथ्वी जैसे हैं । मंगल, जो सूर्य से पृथ्वी की अपेक्षा अधिक दूर है और जिसका व्यास पृथ्वी के व्यास से आधा है, एक ठंडा और शुष्क गोलक है, और वहाँ के वायुमंडल में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि वहाँ क्षुद्र पौधों के सिवाय अन्य कुछ भी जीवित नहीं रह सकता । शुक्र एक समस्या बना हुआ है । क्योंकि इसका आकार और द्रव्यमान लगभग ठीक पृथ्वी के जितना ही है, इसलिए इसे पृथ्वी की जैसी दशा में ही होना चाहिए, किन्तु यह है नहीं । इसका वायुमंडल अधिकतर कार्बन डाइ ऑक्साइड से वना हुआ है और इसकी सतह अवश्य ही भीषण रूप से गर्म होगी । प्रत्यक्षतः, वहाँ कोई वनस्पतियाँ नहीं हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड को ले कर उसके स्थान पर ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकें; और यह सम्भव है कि इस समय शुक्र उस दशा में हो, जिसमें पृथ्वी कैम्ब्रियन कल्प में थी - एक ऐसी दुनियाँ, जिसमें विशाल कोष्ण महासागर फैले हुए हैं, जिनमें जीवन के प्रथम चिह्न प्रकट होने शुरू हुए हैं । जब तक हम अन्तरिक्ष को पार करना न सीख लें, तब तक हम इस बात का निश्चयपूर्वक पता नहीं कर सकते, और अभी अनेक वर्षों तक शुक्र ग्रह पर हमारे पहुँच पाने की कोई सम्भावना नहीं है, फिर भी खोज करना मनोरंजक तो होगा ही । सौरमंडल से बाहर हम तारों पर आते हैं। प्रत्येक तारा अपने आप में एक सूर्य है, और सम्भाव्यतः इनमें से कुछ सूर्यो के अपने-अपने ग्रह हैं, यह भी सम्भाव्य है कि अन्य पृथ्वियाँ भी हों, जिन पर अन्य मनुष्य रहते हों, परन्तु इस क्षेत्र में दूरियाँ इतनी अधिक हैं कि हम कभी इस बात का निश्चयपूर्वक पता लगाने में समर्थ न होंगे। लेकिन यह विचार आनन्ददायक है कि शायद हम इस ब्रह्मांड में अकेले न हों । तो, पृथ्वी उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितना कि हम इसे किसी समय मानते थे । यह एक छोटा-सा ग्रह है, जो एक बिल्कुल सामान्य से सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा रहा है और इसमें कुछ भी विचित्रता नहीं है - शायद सिवांय इसके कि यह ऐसी दशा में है, जो पशुओं और मनुष्यों के विकास के लिए उपयुक्त है। अध्याय चौदह हमने पृथ्वी की युग-युगान्तर की कहानी की रूपरेखा प्रस्तुत की है । अब हमें केवल यह देखना है, कि हम पृथ्वी के भविष्य के इतिहास के विषय में क्या पता लगा सकते हैं और यह भविष्यवाणी करना शेष है कि आगे आने वाले करोड़ों वर्षों में क्या कुछ होने की सम्भावना है । यद्यपि तरुण पृथ्वी की सक्रियता शान्त हो गई है, फिर भी यह निश्चित है कि अभी उद्गार (विस्फोट), भूकम्प, पर्वत-निर्माण और विक्षोभ बहुत समय तक होते रहेंगे । समुद्र आगे बढ़ेंगे और पीछे हटेंगे, स्थल भागों पर पानी भरेगा और उनका स्थान लेने के लिए समुद्र की तलियाँ ऊपर उठेंगी । शायद ब्रिटेन फिर यूरोप के साथ जुड़ जायेगा; उत्तर सागर शायद फिर स्थल बन जाये और हो सकता है कि पुराने गोंडवानालैंड के कुछ भाग फिर पानी के नीचे से ऊपर उठ आयें । अब से दस लाख वर्ष बाद पृथ्वी का नक्शा वैसा ही दिखाई नहीं पड़ेगा, जैसा कि वह अब दिखाई पड़ता है । कोष्णतर जलवायु के लम्बे दौरों के बीच-बीच में हिम-युग भी आयेंगे और मनुष्य तथा पशु, दोनों ही ठीक उसी प्रकार बदलेंगे और विकसित होंगे, जैसे कि वे अतीत में होते आये हैं । किन्तु जहाँ तक हमारा सम्बन्ध है, ये परिवर्तन अपेक्षाकृत महत्त्वहीन हैं। यदि कोई नया हिम युग आया, उतना ही कठोर, जितना कि अत्यन्त नूतन कल्प का हिमनद का घोरतम दौर था, तो भी हम शायद उसके बाद भी बच ही जायेंगे, भले ही अपने आपको उन परिस्थितियों के अनुकूल -ढालना सीखने से पहले बहुत से लोग मर भी जायें । हमारा ज्ञान और कौशल हमें वचा लेगा और अपने कस्बों और शहरों को जलप्लावित क्षेत्रों से हटा कर नये स्थलों पर ले जाना 'हमारे लिए केवल 'असुविधाजनक' से बढ़ कर कुछ न होगा । • सबसे बड़ी समस्या और भी कहीं आगे भविष्य में निहित है । जिस प्रकार जीवन शुरू हुआ है, ठीक उसी प्रकार --कमसे-कम जहाँ तक पृथ्वी का सम्बन्ध है - यह अवश्य ही समाप्त भी होगा ही । हमारा यह ग्रह - पृथ्वी सदा निवास योग्य नहीं रहेगा । इस बात का कोई खतरा नहीं है कि यह अपना वायुमंडल गँवा बैठे और पृथ्वी की आन्तरिक ऊष्मा समाप्त हो जाने से भी कुछ विशेष वनेगा बिगड़ेगा नहीं, किन्तु हमें सदा स्मरण रखना चाहिए कि हम पूर्णतया सूर्य पर आश्रित हैं - और सूर्य स्वयं शाश्वत नहीं है । पहले यह समझा जाता था कि सूर्य धीरे-धीरे जल कर समाप्त हो रहा है और यह कि सुदूर भविष्य में एक ऐसा . . समय आयेगा, जब यह इतना पुराना और मन्द पड़ जायेगा कि पृथ्वी अतिशीतल हो जायेगी, यहाँ तक कि वायु भी जम कर ठोस चक्का बन जायेगी । इसका निश्चित रूप से अर्थ है कि सब जीवित वस्तुएँ समाप्त हो जायेंगी, किन्तु अव यह पता चला है कि यह प्रस्तुत चित्र गलत है । ज्यों-ज्यों सूर्य की आयु वढ़ रही है, त्यों-त्यों यह क्रमशः अधिक गर्म होता जा रहा है । अन्त में यह एक बार ज़ोर से चमकेगा और उसके बाद सिकुड़ कर एक छोटा-सा सघन तारा बन जायेगा, जो उससे बड़ा नहीं होगा, जितनी कि पृथ्वी अब है । इस प्रकार के वहुत से पुराने तारे इस समय ज्ञात हैं ( खगोल वैज्ञानिक उन्हें 'सफेद बौने' कहते हैं), परन्तु इस वात की संभावना नहीं है कि मनुष्य सूर्य की अन्त में होने वाली उस मृत्यु को देखने के लिए जीवित बच पायेंगे । पृथ्वी उस अपेक्षाकृत अल्पकालीन, किन्तु प्रचंड चमक से बच पाने की आशा नहीं कर सकती, जो इस प्रकार सिकुड़ने से पहले होती है । डॉक्टर ऊपिक द्वारा की गई गणनाओं से यह पता चलता प्रतीत होता है कि यह भीषण विपत्ति हम पर लगभग एक अरब वर्ष वाद आयेगी । यह एकाएक नहीं आयेगी । इससे पहले काफी चेतावनी मिलेगी; और यदि तब तक मानव जाति ब्रह्मांड के रहस्यों को जान चुकी होगी, जैसा कि हो सकता है, तो संभव है कि मानवता इस पृथ्वी को बिल्कुल छोड़ जाने और किसी अन्य सुख-सुविधायुक्त संसार में चली जाने में समर्थ हो जाये । हो सकता है कि हमारा अनुमान बिल्कुल ही गलत हो । हो सकता है कि सूर्य उस प्रकार चमके ही नहीं; हमारा वर्तमान ज्ञान इतना काफ़ी नहीं है कि हम निश्चयपूर्वक कुछ कह सकें, और किसी अन्य ग्रह पर चले जाने की बात हमारे वर्तमान स्तरों को देखते हुए निरी कल्पना की उड़ान ही है । किन्तु यदि डॉक्टर ऊपिक का आकलन ( अन्दाज़ा ) सही भी हो, तो भी हमारे सामने एक समूचा भू-वैज्ञानिक जीवन काल पड़ा है । एक अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का मुश्किल से आरम्भ ही हुआ था; अब से एक अरब वर्ष बाद, जब खतरा निकट आ पहुँचेगा, हो सकता है कि हम बचने का कोई रास्ता ढूंढ निकालें । चाहे जो हो, इस समय पृथ्वी एक सुखद स्थान है । हमने इसको जीता है और इसका अन्वेषण किया है और हमें एक महान् अवसर प्राप्त है कि हम शान्ति र समृद्धि में जीवनयापन कर सकें । हम इस सुअवसर को ग्रहण करते हैं या नहीं, यह पूर्णतया स्वयं हम पर ही निर्भर है ।
आ सकती है । ज्यों ही वह प्रतिरोधी क्षेत्र में, जो एक सौ बीस मील से नीचे है, प्रवेश करती है, त्यों ही वह वायु के कणों से रगड़ खाती है और पहले कोष्ण, फिर गर्म होती है और अंन्त में जल उठती है । इसी को हम टूटता हुआ तारा' कहते हैं । अधिकांश उल्काएँ तब तक जल कर समाप्त हो जाती हैं, जव वे पृथ्वी से सत्तर या साठ मील की दूरी तक आ चुकी होती हैं, किन्तु कोई-कोई अपेक्षाकृत बड़ी उल्काएँ पृथ्वी पर गिरने तक भी बची रह जाती हैं और बाद में शैलीय ढेर या 'उल्कापिंड' के रूप में पाई जाती हैं। इस प्रकार की एक विशेष रूप से बड़ी उल्का एक हज़ार नौ सौ आठ में साइबेरिया में गिरी थी और वह जहाँ भूमि से टकराई थी, उसके चारों ओर पचास-पचास मील दूर तक उसने वृक्षों को भूमि पर लिटा दिया था । यदि वायुमंडल न होता, तो हम सारे ही समय उल्काओं की बमबारी के शिकार हुआ करते, और पृथ्वीतल पर जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण होता; परन्तु वायुमंडल द्वारा रोकथाम होने के कारण हमें इस बात से डरने की आवश्यकता नहीं है. कि कोई पत्थर हमारे सिर पर आ पड़ेगा । सम्पूर्ण इतिहास में केवल चार पाँच व्यक्तियों के ही उल्का पिंडों से घायल होने का पता चला है । ऊपरली वायु का सबसे सुन्दर प्रपंच असंदिग्ध रूप से 'ध्रुवीय ज्योति' या 'उत्तरी प्रकाश' है । ये प्रकाश सूर्य द्वारा फेंके जा रहे विद्युताविष्ट कणों के कारण उत्पन्न होते हैं; ये कण पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों की ओर आकृष्ट होते हैं और ऊपरी वायुमंडल से टकराते हैं, जिससे विचित्र चमक उत्पन्न होती है । सुदूर उत्तर और दक्षिण में ये ध्रुवीय ज्योतियाँ, जब सूर्य क्षितिज से नीचे हो, तब लगभग सारे ही समय देखी जा सकती हैं; इंग्लैंड में वे अपेक्षाकृत कम बार दिखाई पड़ती हैं, क्योंकि इंग्लैंड चुम्बकीय ध्रुव से दूर पड़ता है, परन्तु कभीसे कभी बड़े सुन्दर दृश्य दिखाई पड़ते हैं । उदाहरण के लिए, छब्बीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अड़तीस को दक्षिणी इंग्लैंड से देखने पर सारा आकाश बहुत ही शानदार लाल रंग में चमकता दिखाई दिया था, और बहुत से लोगों ने तो यह मान लिया था कि लंदन में आग लग गई है । निचली वायु का, जिसमें वादल, तूफान, कुहरे और चक्रवात आते हैं, अध्ययन मौसम विज्ञान का विषय है, और उस पर एक अलग पूरी पुस्तक लिखी जा सकती है । लेकिन जब हम अपने ग्रह की चर्चा करते हैं, तब हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वायुमंडलीय आवरण पृथ्वी का एक महत्त्वपूर्ण भाग है । वायु के बिना जीवन कभी शुरू ही नहीं हो सकता था और तब पृथ्वी की कहानी अनलिखी ही रह जाती । अध्याय तेरह जब हम भूमि के किसी समतल प्रदेश पर, जैसे किसी लम्बे रेतीले समुद्र तट पर या घास के मैदान पर दृष्टि डालते हैं, तो हमें यह बात भली-भाँति समझ में आ जाती है कि शुरू के लोग क्यों यह मानते थे कि पृथ्वी चपटी है । इस तथ्य को कि यह एक गोलक है, अवश्य ही अब से बहुत पहले स्वीकार कर लिया गया था, और इरैटोस्थीनीज़ नामक एक यूनानी वैज्ञानिक तो, जो ईसा से लगभग दो सौ पचास वर्ष पहले हुआ था, पृथ्वी का आकार भी काफी कुछ सही-सही नाप पाने में समर्थ हुआ था; परन्तु उस समय भी यह माना जाता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केन्द्र है और सूर्य, चन्द्रमा तथा अन्य आकाशीय पिंड एक दिन में पृथ्वी का एक चक्कर लगा लेते हैं । अब से केवल चार सौ वर्ष पहले तक भी इस विचार को गलत प्रमाणित नहीं किया जा सका था। आकाशीय पिंड एक दिन में एक बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए क्यों प्रतीत होते हैं, इसका कारण समझाना आसान है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है और इसके इस घूमने के कारण ही सूर्य और तारे घूमते हुए प्रतीत होते हैं । पृथ्वी का अक्ष आकाश में उत्तर की ओर ध्रुव तारे के निकट एक बिन्दु की ओर संकेत करता है, और इसलिए ध्रुव तारा लगभग स्थिर, और अन्य प्रत्येक पिंड उसके चारों ओर चक्कर काटता हुआ प्रतीत होता है । भूमध्यरेखा के दक्षिण में ध्रुव तारा कभी दिखाई नहीं पड़ सकता, क्योंकि • पृथ्वी का गोलक बीच में आ जाता है; दक्षिणी ध्रुव की ओर कोई चमकीला तारा नहीं है; इसके अधिकतम निकट एक 'धुँधला-सा तारा है, जिसका नाम सिग्मा औक्टेन्टिस है । एकमात्र पिंड, जो सचमुच ही पृथ्वी की परिक्रमा करता है, चन्द्रमा अवश्य है । जैसा कि हम देख चुके हैं, इसका जन्म सम्भाव्यतः पृथ्वी से नहीं हुआ था, अपितु यह शुरू से ही एक पृथक् गोलक था; लेकिन अन्तरिक्ष में यह अन्य पिंडों की अपेक्षा हमारा कहीं अधिक निकट का पड़ौसी है और इस रूप में पृथ्वी पर इसका वड़ा प्रभाव है । विशेष रूप से, ज्वार-भाटों का यह मुख्य कारण है । ज्वार-भाटों को समझाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि यह कल्पना की जाये कि पृथ्वी पर सब जगह एक उथला समरूप समुद्र है, जैसा कि पृष्ठ एक सौ अड़तालीस पर दिये गये आरेख में दिखाया गया है । चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव इतना प्रवल होता है कि 'ज्वा' बिन्दु पर, चन्द्रमा के ठीक नीचे, पानी का ऊँचा ढेर लग जायेगा, और इसी प्रकार का एक दूसरा उभार पृथ्वी के दूसरी ओर 'ज्वा' विन्दु पर होगा । पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमते समय यह पानी का ढेर उसके साथ-साथ नहीं घूमेगा, अपितु चन्द्रमा के नीचे ही वना रहने का यत्न करेगा । इसका परिणाम यह होता है कि पृथ्वी के घूमते रहने पर भी पानी के ढेर वहीं बने रहते हैं, जहाँ कि वे हैं और पृथ्वी के हर चक्कर के साथ पृथ्वी की पूरी सतह पर चारों ओर फिर जाते हैं, जिससे प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन दो वार ज्वार आता है । क्योंकि चन्द्रमा भी अपने मार्ग पर गति कर रहा है, इस -- लिए ये पानी के ढेर स्वयं भी बिल्कुल गतिहीन नहीं हैं । वे चन्द्रमा का अनुकरण करते हुए धीरे-धीरे जगह वदलते रहते हैं और औसत रूप से किसी भी बन्दरगाह पर ज्वार प्रतिदिन पहले दिन की अपेक्षा पचास मिनट देर से आता है । ज्वाः \ जैसा कि हमें मालूम है, पृथ्वी सब ओर से इस प्रकार की जलीय परत से ढकी हुई नहीं है । कुछ महासागर अन्यों की अपेक्षा कहीं अधिक गहरे हैं और स्थल प्रदेश पानी के नियमित प्रवाह में बाधा डालते हैं, जिससे ज्वार उतने इकसार नहीं आते, जितने कि वे किसी पूर्णतया समुद्र से आवृत्त ग्रह पर आते । स्थानीय प्रभाव बहुत स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। उदाहरण के लिए, साउथम्पटन में समुद्र की तट रेखा की आकृति और वाइट के छोटे से द्वीप की विद्यमानता के कारण दोनों ज्वार तुरन्त एक के बाद एक आते हैं । सूर्य के द्वारा उठाये गये ज्वार चन्द्रमा के ज्वारों की अपेक्षा बहुत निर्बल होते हैं, फिर भी उनमें काफ़ी शक्ति होती है । जब सूर्य और चन्द्रमा, दोनों का खिंचाव एक ही दिशा में होता है, तब उसके फलस्वरूप ऊँचा या 'बृहत्' ' ज्वार-भाटा आता है; जब सूर्य और चन्द्रमा का खिंचाव एकदूसरे के साथ समकोण बनाते हुए होता है, तव 'लघुतम' ज्वार होता है, और वह कम प्रचंड होता है । इतना ही नहीं, समुद्रों की ही भाँति स्थल प्रदेशों पर भी ज्वारीय प्रभाव पड़ते हैं, अवश्य ही इन्हें विशेष उपकरणों के बिना नहीं पहचाना जा सकता; और वायुमंडल में भी ज्वार आते हैं । समस्त ब्रह्मांड में पृथ्वी की स्थिति क्या है, इसकी अपने मन में सही धारणा बनाने के लिए सौर मंडल के अन्य ग्रहों के साथ इसकी तुलना करना मनोरंजक होगा। इनमें से चार, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण अत्यधिक विशाल हैं - अकेले बृहस्पति में ही एक हज़ार तीन सौ पृथ्वियाँ समा सकती हैं - और शुक्र लगभग पृथ्वी जितना ही वड़ा है, जबकि मंगल, अंग्रेजी शब्द 'स्प्रिंग टाइड' में 'स्प्रिंग' का वसन्त ऋतु से कोई सम्बन्ध नहीं है । यम और बुध निश्चित रूप से पृथ्वी से छोटे हैं । - विशालकाय ग्रह ठंडे और हमारे लिए अनाकर्षक हैं और उनके वायुमंडल विषैले हैं, और यम तथा बुध इतने छोटे हैं कि वे अपनी अधिकांश वायु खो चुके हैं, जो सम्भाव्यतः किसी समय उन पर थी; इस प्रकार केवल शुक्र और मंगल ही ऐसे हैं, जो थोड़ा बहुत पृथ्वी जैसे हैं । मंगल, जो सूर्य से पृथ्वी की अपेक्षा अधिक दूर है और जिसका व्यास पृथ्वी के व्यास से आधा है, एक ठंडा और शुष्क गोलक है, और वहाँ के वायुमंडल में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि वहाँ क्षुद्र पौधों के सिवाय अन्य कुछ भी जीवित नहीं रह सकता । शुक्र एक समस्या बना हुआ है । क्योंकि इसका आकार और द्रव्यमान लगभग ठीक पृथ्वी के जितना ही है, इसलिए इसे पृथ्वी की जैसी दशा में ही होना चाहिए, किन्तु यह है नहीं । इसका वायुमंडल अधिकतर कार्बन डाइ ऑक्साइड से वना हुआ है और इसकी सतह अवश्य ही भीषण रूप से गर्म होगी । प्रत्यक्षतः, वहाँ कोई वनस्पतियाँ नहीं हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड को ले कर उसके स्थान पर ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकें; और यह सम्भव है कि इस समय शुक्र उस दशा में हो, जिसमें पृथ्वी कैम्ब्रियन कल्प में थी - एक ऐसी दुनियाँ, जिसमें विशाल कोष्ण महासागर फैले हुए हैं, जिनमें जीवन के प्रथम चिह्न प्रकट होने शुरू हुए हैं । जब तक हम अन्तरिक्ष को पार करना न सीख लें, तब तक हम इस बात का निश्चयपूर्वक पता नहीं कर सकते, और अभी अनेक वर्षों तक शुक्र ग्रह पर हमारे पहुँच पाने की कोई सम्भावना नहीं है, फिर भी खोज करना मनोरंजक तो होगा ही । सौरमंडल से बाहर हम तारों पर आते हैं। प्रत्येक तारा अपने आप में एक सूर्य है, और सम्भाव्यतः इनमें से कुछ सूर्यो के अपने-अपने ग्रह हैं, यह भी सम्भाव्य है कि अन्य पृथ्वियाँ भी हों, जिन पर अन्य मनुष्य रहते हों, परन्तु इस क्षेत्र में दूरियाँ इतनी अधिक हैं कि हम कभी इस बात का निश्चयपूर्वक पता लगाने में समर्थ न होंगे। लेकिन यह विचार आनन्ददायक है कि शायद हम इस ब्रह्मांड में अकेले न हों । तो, पृथ्वी उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितना कि हम इसे किसी समय मानते थे । यह एक छोटा-सा ग्रह है, जो एक बिल्कुल सामान्य से सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा रहा है और इसमें कुछ भी विचित्रता नहीं है - शायद सिवांय इसके कि यह ऐसी दशा में है, जो पशुओं और मनुष्यों के विकास के लिए उपयुक्त है। अध्याय चौदह हमने पृथ्वी की युग-युगान्तर की कहानी की रूपरेखा प्रस्तुत की है । अब हमें केवल यह देखना है, कि हम पृथ्वी के भविष्य के इतिहास के विषय में क्या पता लगा सकते हैं और यह भविष्यवाणी करना शेष है कि आगे आने वाले करोड़ों वर्षों में क्या कुछ होने की सम्भावना है । यद्यपि तरुण पृथ्वी की सक्रियता शान्त हो गई है, फिर भी यह निश्चित है कि अभी उद्गार , भूकम्प, पर्वत-निर्माण और विक्षोभ बहुत समय तक होते रहेंगे । समुद्र आगे बढ़ेंगे और पीछे हटेंगे, स्थल भागों पर पानी भरेगा और उनका स्थान लेने के लिए समुद्र की तलियाँ ऊपर उठेंगी । शायद ब्रिटेन फिर यूरोप के साथ जुड़ जायेगा; उत्तर सागर शायद फिर स्थल बन जाये और हो सकता है कि पुराने गोंडवानालैंड के कुछ भाग फिर पानी के नीचे से ऊपर उठ आयें । अब से दस लाख वर्ष बाद पृथ्वी का नक्शा वैसा ही दिखाई नहीं पड़ेगा, जैसा कि वह अब दिखाई पड़ता है । कोष्णतर जलवायु के लम्बे दौरों के बीच-बीच में हिम-युग भी आयेंगे और मनुष्य तथा पशु, दोनों ही ठीक उसी प्रकार बदलेंगे और विकसित होंगे, जैसे कि वे अतीत में होते आये हैं । किन्तु जहाँ तक हमारा सम्बन्ध है, ये परिवर्तन अपेक्षाकृत महत्त्वहीन हैं। यदि कोई नया हिम युग आया, उतना ही कठोर, जितना कि अत्यन्त नूतन कल्प का हिमनद का घोरतम दौर था, तो भी हम शायद उसके बाद भी बच ही जायेंगे, भले ही अपने आपको उन परिस्थितियों के अनुकूल -ढालना सीखने से पहले बहुत से लोग मर भी जायें । हमारा ज्ञान और कौशल हमें वचा लेगा और अपने कस्बों और शहरों को जलप्लावित क्षेत्रों से हटा कर नये स्थलों पर ले जाना 'हमारे लिए केवल 'असुविधाजनक' से बढ़ कर कुछ न होगा । • सबसे बड़ी समस्या और भी कहीं आगे भविष्य में निहित है । जिस प्रकार जीवन शुरू हुआ है, ठीक उसी प्रकार --कमसे-कम जहाँ तक पृथ्वी का सम्बन्ध है - यह अवश्य ही समाप्त भी होगा ही । हमारा यह ग्रह - पृथ्वी सदा निवास योग्य नहीं रहेगा । इस बात का कोई खतरा नहीं है कि यह अपना वायुमंडल गँवा बैठे और पृथ्वी की आन्तरिक ऊष्मा समाप्त हो जाने से भी कुछ विशेष वनेगा बिगड़ेगा नहीं, किन्तु हमें सदा स्मरण रखना चाहिए कि हम पूर्णतया सूर्य पर आश्रित हैं - और सूर्य स्वयं शाश्वत नहीं है । पहले यह समझा जाता था कि सूर्य धीरे-धीरे जल कर समाप्त हो रहा है और यह कि सुदूर भविष्य में एक ऐसा . . समय आयेगा, जब यह इतना पुराना और मन्द पड़ जायेगा कि पृथ्वी अतिशीतल हो जायेगी, यहाँ तक कि वायु भी जम कर ठोस चक्का बन जायेगी । इसका निश्चित रूप से अर्थ है कि सब जीवित वस्तुएँ समाप्त हो जायेंगी, किन्तु अव यह पता चला है कि यह प्रस्तुत चित्र गलत है । ज्यों-ज्यों सूर्य की आयु वढ़ रही है, त्यों-त्यों यह क्रमशः अधिक गर्म होता जा रहा है । अन्त में यह एक बार ज़ोर से चमकेगा और उसके बाद सिकुड़ कर एक छोटा-सा सघन तारा बन जायेगा, जो उससे बड़ा नहीं होगा, जितनी कि पृथ्वी अब है । इस प्रकार के वहुत से पुराने तारे इस समय ज्ञात हैं , परन्तु इस वात की संभावना नहीं है कि मनुष्य सूर्य की अन्त में होने वाली उस मृत्यु को देखने के लिए जीवित बच पायेंगे । पृथ्वी उस अपेक्षाकृत अल्पकालीन, किन्तु प्रचंड चमक से बच पाने की आशा नहीं कर सकती, जो इस प्रकार सिकुड़ने से पहले होती है । डॉक्टर ऊपिक द्वारा की गई गणनाओं से यह पता चलता प्रतीत होता है कि यह भीषण विपत्ति हम पर लगभग एक अरब वर्ष वाद आयेगी । यह एकाएक नहीं आयेगी । इससे पहले काफी चेतावनी मिलेगी; और यदि तब तक मानव जाति ब्रह्मांड के रहस्यों को जान चुकी होगी, जैसा कि हो सकता है, तो संभव है कि मानवता इस पृथ्वी को बिल्कुल छोड़ जाने और किसी अन्य सुख-सुविधायुक्त संसार में चली जाने में समर्थ हो जाये । हो सकता है कि हमारा अनुमान बिल्कुल ही गलत हो । हो सकता है कि सूर्य उस प्रकार चमके ही नहीं; हमारा वर्तमान ज्ञान इतना काफ़ी नहीं है कि हम निश्चयपूर्वक कुछ कह सकें, और किसी अन्य ग्रह पर चले जाने की बात हमारे वर्तमान स्तरों को देखते हुए निरी कल्पना की उड़ान ही है । किन्तु यदि डॉक्टर ऊपिक का आकलन सही भी हो, तो भी हमारे सामने एक समूचा भू-वैज्ञानिक जीवन काल पड़ा है । एक अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का मुश्किल से आरम्भ ही हुआ था; अब से एक अरब वर्ष बाद, जब खतरा निकट आ पहुँचेगा, हो सकता है कि हम बचने का कोई रास्ता ढूंढ निकालें । चाहे जो हो, इस समय पृथ्वी एक सुखद स्थान है । हमने इसको जीता है और इसका अन्वेषण किया है और हमें एक महान् अवसर प्राप्त है कि हम शान्ति र समृद्धि में जीवनयापन कर सकें । हम इस सुअवसर को ग्रहण करते हैं या नहीं, यह पूर्णतया स्वयं हम पर ही निर्भर है ।
इस दुनिया में मटन खाने के शौकीन लोगों की कोई कमी नहीं है. लेकिन इस स्वादिष्ट व्यंजन के पीछे न जाने कितने बकरों की बलि दी जाती है. मैं नहीं जानता कि प्रतिदिन कितने बकरों की बलि दी जाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां एक इंसान की बलि बकरे ने दी। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि इस शख्स की मौत किसी जिंदा बकरी ने नहीं बल्कि एक मरी हुई बकरी ने की थी. हाँ! ये चौंकाने वाला मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आया है. जहां प्रसिद्ध खोपा धाम में बकरों की बलि दी जाती थी. 50 वर्षीय बागर साय अपने परिवार के साथ सूरजपुर से लगे पर्री गांव के प्रसिद्ध खोपा धाम पहुंचे। उसने मन्नत मांगी, जिसके बाद वह बकरे की बलि देने मंदिर पहुंच गया। पूजा की गयी और बकरे की बलि दी गयी. इसके बाद मटन करी तैयार की गई. बागर ने मीट भाजी से बकरे की आंख निकाली और उसे खाने लगा. लेकिन ये आंख उनके गले में ही अटक गई. जैसे ही यह आंख उसके गले में फंसी तो उसे दर्द होने लगा। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद बागर को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. बागर की मौत से परिवार में मातम पसर गया है. रोने से सबका बुरा हाल हो जाता है.
इस दुनिया में मटन खाने के शौकीन लोगों की कोई कमी नहीं है. लेकिन इस स्वादिष्ट व्यंजन के पीछे न जाने कितने बकरों की बलि दी जाती है. मैं नहीं जानता कि प्रतिदिन कितने बकरों की बलि दी जाती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां एक इंसान की बलि बकरे ने दी। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि इस शख्स की मौत किसी जिंदा बकरी ने नहीं बल्कि एक मरी हुई बकरी ने की थी. हाँ! ये चौंकाने वाला मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आया है. जहां प्रसिद्ध खोपा धाम में बकरों की बलि दी जाती थी. पचास वर्षीय बागर साय अपने परिवार के साथ सूरजपुर से लगे पर्री गांव के प्रसिद्ध खोपा धाम पहुंचे। उसने मन्नत मांगी, जिसके बाद वह बकरे की बलि देने मंदिर पहुंच गया। पूजा की गयी और बकरे की बलि दी गयी. इसके बाद मटन करी तैयार की गई. बागर ने मीट भाजी से बकरे की आंख निकाली और उसे खाने लगा. लेकिन ये आंख उनके गले में ही अटक गई. जैसे ही यह आंख उसके गले में फंसी तो उसे दर्द होने लगा। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसके बाद बागर को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. बागर की मौत से परिवार में मातम पसर गया है. रोने से सबका बुरा हाल हो जाता है.
प्रध्याय १ सगुण भक्ति की सयंग्राहयता निर्गुण और सगुण भक्ति मे सगुण भक्ति की लोकप्रियता मयंविदित है । इसका मुख्य और मनोवैज्ञानिक कारण यह है कि निगपासना मे मीरम और स्सा दार्शनित्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया उसकी तुलना मे सगुण भक्ति में उपासना पा सरल, सहज एवं सर्वग्राह्य स्वरूप पाया गया। निर्गुण निराकार ब्रह्मतत्त्व को ज्ञान के माध्यम से समझ कर ग्रहण करना तथा योग-मार्ग वा सरलत घर उसी वटिन तपस्या में तत्मय रहना सबके लिए सभव नहीं । सगुणोपागना ज्ञान वे भाडम्पर से मुक्त रहने के बारण स्वाभाविक प्रतीत होती है और मनुष्यस्वभाव से अनुकूल एवं अनुरूप होने के कारण लोकप्रियता भी प्राप्त करती है । सगुणोपासना मे हृदयपक्ष वा प्रधान्य है जिसके फलस्वरूप हृदय मे उद्भूत होने वाली भावुकता का महत्व मनायास हो सत्यधिक हो जाना है। किन्तु निर्गुण भक्ति मे बुद्धिपक्ष की प्रधानता है जिसके परिणाम स्वरूप ज्ञान को मुख्य आधार मानना पड़ता है। निर्गुणोपासना में इसीलिए बुद्धि के भ्रमित होने और परिणामन मधुरे ज्ञान के कारण पग पग पर मिथ्याभिमान उत्पन्न हान की सम्भावना अधिक रहती है । हमारे देश में ईश्वर प्राप्ति के लिए ज्ञान-मार्ग, भक्ति मार्ग और वर्म-भार्ग वे नाम से तोन मार्ग माने गए हैं। ये तीनो मार्ग तन से चले प्रा रहे है जब से मानयजोवन मे परम कर्तव्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न हुई। समय समय पर परिस्थितिवश कभी किसी को प्रधान माना गया और कभी किसी का गौण । किन्तु युगो वे अनुभव के आधार पर मानव-मन ने भक्ति-माग को ही राजमार्ग अनुभव किया है । भक्ति-तत्त्व वे प्रवर्तक, प्रचारक एवं प्रमुख प्राचार्य श्री नारद मुनि ने भी अपने भक्ति-सूत्रो मे भक्ति को ज्ञान की अपेक्षा प्रधानता दी है। हिन्दी के लोकप्रिय एव १ "वहत वठिन समुझ कटिन साधत कठिन विदेव"। रामचरितमानस, उत्तर बाड, दोहा ११८, (ख) प्रथम पक्ति ।
प्रध्याय एक सगुण भक्ति की सयंग्राहयता निर्गुण और सगुण भक्ति मे सगुण भक्ति की लोकप्रियता मयंविदित है । इसका मुख्य और मनोवैज्ञानिक कारण यह है कि निगपासना मे मीरम और स्सा दार्शनित्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया उसकी तुलना मे सगुण भक्ति में उपासना पा सरल, सहज एवं सर्वग्राह्य स्वरूप पाया गया। निर्गुण निराकार ब्रह्मतत्त्व को ज्ञान के माध्यम से समझ कर ग्रहण करना तथा योग-मार्ग वा सरलत घर उसी वटिन तपस्या में तत्मय रहना सबके लिए सभव नहीं । सगुणोपागना ज्ञान वे भाडम्पर से मुक्त रहने के बारण स्वाभाविक प्रतीत होती है और मनुष्यस्वभाव से अनुकूल एवं अनुरूप होने के कारण लोकप्रियता भी प्राप्त करती है । सगुणोपासना मे हृदयपक्ष वा प्रधान्य है जिसके फलस्वरूप हृदय मे उद्भूत होने वाली भावुकता का महत्व मनायास हो सत्यधिक हो जाना है। किन्तु निर्गुण भक्ति मे बुद्धिपक्ष की प्रधानता है जिसके परिणाम स्वरूप ज्ञान को मुख्य आधार मानना पड़ता है। निर्गुणोपासना में इसीलिए बुद्धि के भ्रमित होने और परिणामन मधुरे ज्ञान के कारण पग पग पर मिथ्याभिमान उत्पन्न हान की सम्भावना अधिक रहती है । हमारे देश में ईश्वर प्राप्ति के लिए ज्ञान-मार्ग, भक्ति मार्ग और वर्म-भार्ग वे नाम से तोन मार्ग माने गए हैं। ये तीनो मार्ग तन से चले प्रा रहे है जब से मानयजोवन मे परम कर्तव्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न हुई। समय समय पर परिस्थितिवश कभी किसी को प्रधान माना गया और कभी किसी का गौण । किन्तु युगो वे अनुभव के आधार पर मानव-मन ने भक्ति-माग को ही राजमार्ग अनुभव किया है । भक्ति-तत्त्व वे प्रवर्तक, प्रचारक एवं प्रमुख प्राचार्य श्री नारद मुनि ने भी अपने भक्ति-सूत्रो मे भक्ति को ज्ञान की अपेक्षा प्रधानता दी है। हिन्दी के लोकप्रिय एव एक "वहत वठिन समुझ कटिन साधत कठिन विदेव"। रामचरितमानस, उत्तर बाड, दोहा एक सौ अट्ठारह, प्रथम पक्ति ।
पूर्व सीएम दिवंगत एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर उर्फ गुंजन (40) की हत्या उसकी पत्नी अपूर्वा शुक्ला तिवारी ने ही की थी। अपूर्वा ने अपने दोनों हाथों से रोहित का गला, नाक व मुंह दबाकर हत्या कर दी थी। हालांकि अभी तक इस हत्या के पीछे की वजह दूसरी महिला से रोहित के संबंध और प्रॉपर्टी को माना जा रहा था लेकिन हत्या के पीछे अब एक और बड़ा कारण सामने आ रहा है। बता दें कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बुधवार सुबह अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि अपूर्वा को तिवारी परिवार से बहुत चाहत थी। उसे लगा कि तिवारी परिवार के पास बहुत दौलत है। अपूर्वा राजनीति में जाना चाहती थी। उसे लगा कि तिवारी परिवार में शादी करने से उसे राजनीति में कहीं का टिकट मिल जाएगा। लेकिन तिवारी परिवार में आकर जब उसे पता लगा कि परिवार के पास न तो दौलत है और न ही राजनीति में कहीं कोई रसूख है तो उसके रोहित व परिवार से रिश्ते खराब होने लगे। वह कांग्रेस में इंटक की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही है। रोहित की मां उज्ज्वला तिवारी ने रोहित की हत्या का खुलासा होने के बाद मीडिया से कहा कि उसका बेटा होनहार था। अपूर्वा ने उसके बेटे को क्यों मारा। अगर उसके बेटे से संबंध ठीक नहीं थे तो उसे छोड़ देती।
पूर्व सीएम दिवंगत एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर उर्फ गुंजन की हत्या उसकी पत्नी अपूर्वा शुक्ला तिवारी ने ही की थी। अपूर्वा ने अपने दोनों हाथों से रोहित का गला, नाक व मुंह दबाकर हत्या कर दी थी। हालांकि अभी तक इस हत्या के पीछे की वजह दूसरी महिला से रोहित के संबंध और प्रॉपर्टी को माना जा रहा था लेकिन हत्या के पीछे अब एक और बड़ा कारण सामने आ रहा है। बता दें कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बुधवार सुबह अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि अपूर्वा को तिवारी परिवार से बहुत चाहत थी। उसे लगा कि तिवारी परिवार के पास बहुत दौलत है। अपूर्वा राजनीति में जाना चाहती थी। उसे लगा कि तिवारी परिवार में शादी करने से उसे राजनीति में कहीं का टिकट मिल जाएगा। लेकिन तिवारी परिवार में आकर जब उसे पता लगा कि परिवार के पास न तो दौलत है और न ही राजनीति में कहीं कोई रसूख है तो उसके रोहित व परिवार से रिश्ते खराब होने लगे। वह कांग्रेस में इंटक की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही है। रोहित की मां उज्ज्वला तिवारी ने रोहित की हत्या का खुलासा होने के बाद मीडिया से कहा कि उसका बेटा होनहार था। अपूर्वा ने उसके बेटे को क्यों मारा। अगर उसके बेटे से संबंध ठीक नहीं थे तो उसे छोड़ देती।
पनडुब्बी युद्ध की तीव्रता समुद्र में मित्र देशों के नुकसान में तेजी से वृद्धि हुई। मई 1915 तक, 92 जहाज तीन अधूरे महीनों में डूब गया थाः जर्मन नौकाएं प्रति दिन एक जहाज डूब रही थीं। बढ़ने लगा और पनडुब्बी की क्रूरता। पहले महीनों में, U-28 फ़ॉस्टनर के कप्तान "प्रसिद्ध हो गए," जिन्होंने पहली बार अकिला स्टीमर से आग पर जीवनरक्षक नौकाओं को फायर करने का आदेश दिया। फिर, प्रतीक्षा के साथ परेशान न होने का फैसला करने के बाद, उन्होंने चालक दल से पहले यात्री जहाज "फलाबा" को डूबो दिया और यात्रियों ने इसे छोड़ दिया था। महिलाओं और बच्चों सहित 104 आदमी को मार डाला। 7 मई एक घटना हुई जो पानी के नीचे युद्ध के प्रतीकों में से एक बन गई और पूरी दुनिया के युद्ध के आगे के पाठ्यक्रम को गंभीरता से प्रभावित किया। U-20 पनडुब्बी, जो कि कैप्टन वाल्टर श्वाइगर के पास है, आयरलैंड के तट पर एक विशाल लुसिटानिया यात्री जहाज डूब गया। जब जहाज न्यूयॉर्क में था, तब समाचार पत्रों के माध्यम से अमेरिका में जर्मन दूतावास ने विमान पर संभावित हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन लोग टिकट खरीदना जारी रखा। मई 7 पर, स्टीमर को U-20 द्वारा देखा गया था, जो उस समय तक एक टॉरपीडो को छोड़कर लगभग सभी गोला बारूद का उपयोग कर चुका था, और बेस पर लौटने वाला था। हालांकि, इस तरह के एक स्वादिष्ट लक्ष्य को पाकर, श्वीगर ने अपना विचार बदल दिया। सबसे बड़ा महासागर लाइनर टारपीडो था। पहले विस्फोट के तुरंत बाद, एक और विनाशकारी दूसरा विस्फोट सुनाई दिया। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य में न्यायिक आयोगों ने निष्कर्ष निकाला कि एयरलाइनर पर दो टॉरपीडो द्वारा हमला किया गया था। U-20 Schwierr के कमांडर ने तर्क दिया कि उन्होंने लोरितानिया में केवल एक टारपीडो को निकाल दिया था। दूसरे धमाके की उत्पत्ति की व्याख्या करने वाले कई संस्करण हैं, विशेष रूप से, स्टीम बॉयलरों को नुकसान, कोयले की धूल विस्फोट, जर्मनी में स्थानापन्न करने के लिए जानबूझकर कम करके या गोला-बारूद के अवैध विस्फोट को पकड़ में रखने के लिए। यह बहुत संभावना है कि अंग्रेजों ने गोला-बारूद को बोर्ड पर पहुंचाया, हालांकि उन्होंने इससे इनकार कर दिया। नतीजतन, यात्री लाइनर डूब गया, लगभग सौ बच्चों सहित 1198 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की संख्या में 128 अमेरिकी शामिल हैं, जिनमें "समाज की क्रीम" शामिल है, जिसने अमेरिका में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी। वाशिंगटन बर्लिन के बहाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था, जो संकेत देता था कि पोत एक ध्वज के बिना और एक छायांकित नाम के साथ जा रहा था, यात्रियों को खतरे से आगाह किया गया था, कि लुसिटानिया के टारपीडो के कारण उसके गोला बारूद की तस्करी हो रही थी। कि जर्मन सैन्य कमान लाइनर को सहायक क्रूजर के रूप में मानती थी। जर्मनी को एक तेज नोट भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सरकार इस तरह की त्रासदी की पुनरावृत्ति, अमेरिकी नागरिकों की मौत और व्यापारी जहाजों पर हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे सकती है। मई 21 पर, व्हाइट हाउस ने जर्मनी को सूचित किया कि जहाज पर किसी भी बाद के हमले को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा "जानबूझकर अमित्र कदम" माना जाएगा। 15 मई 1915 से लंदन समाचार समाचार पत्र के संस्करण में डूब "लुसीतानिया" का चित्रण। Отношения между странами крайне обострились. Газеты начали писать о скором вступлении США в войну на стороне Антанты. В Англии и США развернулась пропагандистская кампания о варварстве немецких подводников. Экс-президент США Теодор Рузвельт сравнил действия германского флота с «пиратством, превосходящим по масштабам любое убийство, когда-либо совершавшееся в старые пиратские времена». Командиры немецких подлодок были объявлены нелюдями. Черчилль цинично писал: «Несмотря на весь ужас произошедшего, мы должны рассматривать гибель «Лузитании» как важнейшее и благоприятное для стран Антанты событие. . . . Бедные дети, которые погибли в океане, ударили по германскому режиму беспощаднее, чем, возможно, 100 тысяч жертв». Есть версия, о том, что британцы фактически спланировали гибель лайнера, чтобы подставить немцев. जर्मन सैन्य-राजनीतिक नेतृत्व की योजनाओं में इस तरह की वृद्धि बिल्कुल भी नहीं थी। इस बार, बैठक में चांसलर बेट्टमैन-गोलवेग, जिसमें कैसर विल्हेम द्वितीय, उप विदेश मंत्री के रूप में राजदूत ट्रेटलर, ग्रैंड एडमिरल तिरपिट्ज़, एडमिरल बाचमन, मुलर भी शामिल थे, ने सक्रिय पानी के नीचे युद्ध को रोकने का सुझाव दिया। जनरल स्टाफ के प्रमुख फल्केनहिन ने भी राजनेताओं का समर्थन किया, उनका मानना था कि जर्मन सेना जमीन पर निर्णायक सफलता हासिल कर सकती है। नतीजतन, कैसर पनडुब्बी युद्ध को सीमित करने की आवश्यकता के बारे में आश्वस्त था। कील के बंदरगाह में अन्य नौकाओं के बीच सबमरीन U-20 (बाएं से दूसरी) जर्मन पनडुब्बी के लिए वर्ष के 1 जून 1915 ने नए प्रतिबंध लगाए हैं। अब से, उन्हें बड़े यात्री जहाजों को डूबने से मना किया गया था, भले ही वे ब्रिटिश से संबंधित हों, साथ ही साथ किसी भी तटस्थ जहाज। तिरपिट्ज़ और बछमन ने इस फैसले के विरोध में इस्तीफा दे दिया, लेकिन कैसर ने इसे स्वीकार नहीं किया। यह ध्यान देने योग्य है कि प्रतिबंधों के बावजूद, जर्मन पनडुब्बी बेड़े अभी भी दुश्मन के जहाजों को सक्रिय रूप से डूब रहा था। अगले महीनों में, डूबे हुए जहाजों की संख्या पिछले महीनों की तुलना में बढ़ गई। मई में, 66 जहाज डूब गए, जून में पहले से ही 73, जुलाई में - 97। उसी समय, जर्मनों ने पनडुब्बियों में लगभग नुकसान नहीं उठाया। मई में, उत्तरी सागर में जून में एक भी पनडुब्बी नहीं मरी, दो (U-14 और U-40)। मित्र राष्ट्र अभी भी एक प्रभावी पनडुब्बी रोधी रक्षा स्थापित नहीं कर सके। अगस्त में, 1915 सहयोगियों ने पहले से ही 121 हजार टन की कुल क्षमता के साथ 200 पोत खो दिया। लेकिन जल्द ही एक और घटना हुई, जिसने अंत में पनडुब्बी युद्ध का पहला चरण पूरा किया। अगस्त 19 पर, जर्मन U-24 पनडुब्बी ने अरबिका यात्री जहाज को डूबो दिया। उसी समय, 44 लोगों की मृत्यु हो गई। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपना कड़ा विरोध दोहराया, माफी और नुकसान की मांग की। वाशिंगटन में जर्मन राजदूत ने फिर से अमेरिकी सरकार को आश्वस्त किया कि पनडुब्बी युद्ध सीमित होगा। 26 अगस्त, जर्मन काउंसिल ने पनडुब्बी संचालन पर रोक लगाने का फैसला किया। जर्मनी के अगस्त 27 पनडुब्बी बेड़े ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सैन्य अभियानों को बाधित करने का आदेश दिया। पनडुब्बी युद्ध के लिए 30 अगस्त नए नियम पेश किए गए थे। पनडुब्बी बेड़े को इंग्लैंड के पश्चिमी तट और अंग्रेजी चैनल में ऑपरेशन के क्षेत्र को छोड़ने का आदेश दिया गया था। इसके अलावा, अब जहाजों को केवल समुद्र के कानून के तहत डूबने की अनुमति दी गई थी। यात्री जहाजों को डूबने से मना किया गया था, मालवाहक जहाज डूबने के लिए नहीं थे, लेकिन जब्त करने के लिए। इस प्रकार, पानी के नीचे युद्ध का पहला चरण समाप्त हो गया। पानी के नीचे युद्ध के पहले चरण में पनडुब्बी बेड़े की काफी संभावनाएं दिखाई दीं, खासकर जब पनडुब्बी रोधी रक्षा अप्रभावी थी। युद्ध की शुरुआत के बाद से, जहाज 1 300 000 टन के कुल विस्थापन से डूब गए थे। जर्मनी ने विभिन्न कारणों से 22 पनडुब्बियों को खो दिया। हालांकि, यह स्पष्ट था कि जर्मनी ने पनडुब्बी बेड़े की क्षमताओं को कम करके आंका था। वह इंग्लैंड की नौसेना की नाकाबंदी की ओर नहीं जा सका। ब्रिटेन के राज्य पर अंडरवाटर युद्ध का बहुत कम प्रभाव था। इंग्लैंड में बहुत अधिक वाणिज्यिक और नौसेना थी। जर्मनी के पास कुछ पनडुब्बी थीं और वे अभी भी परिपूर्ण से बहुत दूर थीं। इसके अलावा, यात्री जहाजों और नागरिकों की मौत के साथ पानी के नीचे युद्ध ने दुनिया में एक महान नकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण बना। इसके अलावा, सरकार को फेंकने, जिसने एक पूर्ण पैमाने पर पनडुब्बी युद्ध शुरू करने की हिम्मत नहीं की, पनडुब्बी को रोका। जर्मन एडमिरलों और सैन्य भूमि कमांड के निरंतर हस्तक्षेप के साथ दृढ़ता से हस्तक्षेप किया। नतीजतन, एडमिरल्स बच्चन और तिरपिट्ज़ ने इस्तीफा दे दिया। कैसर ने तिरपिट्ज़ को राजनीतिक कारणों से छोड़ दिया (वे लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय थे)। नौसिखिया मुख्यालय के प्रमुख के पद पर बछमन को जेनिंग वॉन होल्त्ज़ोफ़र्ड द्वारा बदल दिया गया, जो चांसलर के करीबी व्यक्ति थे, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के पक्ष में थे। उन्होंने पनडुब्बी के बेड़े के तह संचालन के पाठ्यक्रम को जारी रखा। सच है, वॉन होल्त्ज़ोर्फ ने जल्द ही अपने विचारों को संशोधित किया और कैसर और सरकार को कई ज्ञापन भेजे, जिसमें उन्होंने असीमित पनडुब्बी युद्ध को फिर से शुरू करने की आवश्यकता का तर्क दिया। उत्तरी सागर में "सीमित" पनडुब्बी युद्ध जारी रहा। आयरलैंड और पश्चिमी इंग्लैंड के तट पर, जर्मनों ने पानी के नीचे खननकर्ताओं की मदद से लड़ने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने बंदरगाहों और तटों पर खदानें बिछाईं। लेकिन केवल एक्सएनयूएमएक्स खानों को ले जाने वाली छोटी पनडुब्बियां दुश्मन के बेड़े की स्थिति को बहुत प्रभावित नहीं कर सकीं। जर्मन पनडुब्बी युद्ध के अन्य सिनेमाघरों में संचालितः भूमध्यसागरीय, काले और बाल्टिक समुद्रों में। यह सच है, इंग्लैंड के आसपास के समुद्रों में सैन्य अभियानों की गतिविधि से कई बार ऑपरेशन का पैमाना घटिया था। उदाहरण के लिए, काला सागर में केवल कुछ जर्मन पनडुब्बियां थीं, जो मुख्य रूप से टोही में लगी हुई थीं और रूसी बेड़े के लिए गंभीर खतरा पैदा नहीं कर सकती थीं। अंडरवाटर युद्ध भूमध्य में अधिक सक्रिय था, जहां ऑस्ट्रियाई और जर्मन पनडुब्बियों ने इटली, फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन के जहाजों पर हमला किया था। बाल्टिक सागर पर पनडुब्बी युद्ध भी आयोजित किया गया था, हालांकि रूसी और ब्रिटिश पनडुब्बियां यहां बहुत सक्रिय थीं। इसी समय, जर्मनों ने पनडुब्बी बेड़े की शक्ति को सक्रिय रूप से बढ़ाना जारी रखा और नई पनडुब्बियों का निर्माण किया। उन्होंने नाकाबंदी तोड़ने और रणनीतिक माल पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किए गए वास्तविक महासागर पनडुब्बी क्रूजर का निर्माण शुरू किया। इन पनडुब्बियों की एक बढ़ी हुई सीमा थी। वे शक्तिशाली हथियार प्राप्त करने वाले थेः 2 500-mm बंदूक, 18 2-mm बंदूक, 150 2-mm बंदूक में गोला बारूद के साथ 88 1500-mm टारपीडो ट्यूब। पहले जन्म के दो जहाज थे "Deutschland": "Deutschland" और "Bremen"। उनके पास 12 टन से अधिक का विस्थापन था, 5 / 25 नोड्स की पानी के नीचे की गति और XNUMX हजारों मील की भारी स्वायत्तता थी। पहली पनडुब्बी "Deutschland", जून 1916 में, रणनीतिक कच्चे माल के भार के लिए अमेरिका की एक परीक्षण यात्रा की। अधिकांश भाग के लिए, नाव सतह पर थी और केवल जब एक जहाज दिखाई दिया, पानी के नीचे चला गया और पेरिस्कोप के उपयोग के साथ चला गया, और अगर यह जोखिम भरा लग रहा था, तो यह पूरी तरह से पानी में छिपा हुआ था। बाल्टीमोर में इसकी उपस्थिति, जहां पनडुब्बी टन के रबर, 350 टन निकेल, 343 टन जस्ता और आधा टन जूट बोर्ड 83 पर लाई, ने दुनिया में एक बड़ी प्रतिध्वनि पैदा की। जर्मनी में ऐसे पनडुब्बी क्रूजर की उपस्थिति का मतलब था कि अब जर्मन अपने ठिकानों से काफी दूरी पर दुश्मन जहाजों पर हमला कर सकते हैं, जिसमें अमेरिका के तट भी शामिल हैं। अंग्रेजों ने पनडुब्बी को रोकने की कोशिश की, लेकिन अगस्त 24 पर वह सुरक्षित जर्मनी लौट आई। सितंबर में, जर्मनी ने प्रयोग दोहराने का फैसला किया। दो और नावों को संयुक्त राज्य के तटों पर भेजा गया - एक और पनडुब्बी क्रूजर ब्रेमेन और एक पनडुब्बी U-XNXX। "ब्रेमेन" अमेरिका नहीं पहुंचा, यह कहीं मर गया। और U-53 सुरक्षित रूप से न्यूपोर्ट पहुंचा, वहां ईंधन भरा और फिर से समुद्र में चला गया। लॉन्ग आइलैंड के तट से, उसने सात अंग्रेजी व्यापारिक जहाजों को डूबो दिया। तब पनडुब्बी सफलतापूर्वक हेलगोलैंड द्वीप पर बेस में लौट आई। नवंबर में, Deutschland ने 53 मिलियन डॉलर के कार्गो के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक और उड़ान भरी, जिसमें कीमती पत्थर, प्रतिभूति और दवाएं शामिल थीं। वह सफलतापूर्वक जर्मनी लौट आई। फरवरी में, पनडुब्बी क्रूजर 10 को जर्मन शाही बेड़े में स्थानांतरित कर दिया गया था और पानी के नीचे परिवहन से एक U-1917 सैन्य पनडुब्बी में फिर से बनाया गया था। जहाज ने एक्सएनयूएमएक्स को एक्सएनयूएमएक्स टॉरपीडो और दो एक्सएनयूएमएक्स-एमएम तोपों के साथ टारपीडो ट्यूबों से सुसज्जित किया। इस प्रकार, जर्मन पनडुब्बी से पता चला है कि वे अब दुश्मन की ट्रान्साटलांटिक व्यापार लाइनों पर कार्य कर सकते हैं। 1916 के अंत तक, केंद्रीय शक्तियों का मार्शल कानून तेजी से बिगड़ना शुरू हो गया। वर्ष के 1916 अभियान के दौरान, जर्मनी पश्चिम या पूर्व में निर्णायक सफलता हासिल नहीं कर सका। मानव संसाधनों में कमी, कच्चे माल और भोजन की कमी थी। यह स्पष्ट हो गया कि हमले के युद्ध में जर्मन ब्लॉक हार की प्रतीक्षा कर रहा था। जर्मनी में, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक "निर्दयी" पनडुब्बी युद्ध को नवीनीकृत किया जाना चाहिए। जैसा कि सैन्य इतिहासकार ए. एम. इनमें से, 1917 मिलियन टन सैन्य जरूरतों के लिए थे, शेष 16 मिलियन टन वर्ष के दौरान देश के जीवन के लिए आवश्यक थे। अगर हम कुल टन भार के बड़े प्रतिशत को नष्ट करने का प्रबंधन करते हैं, और तटस्थ जहाजों को डूबने की आशंका है, तो वे इंग्लैंड के लिए अपनी यात्राओं को समाप्त कर देंगे, फिर युद्ध की निरंतरता बाद के लिए असंभव होगी। " एक्सएनयूएमएक्स दिसंबर एक्सएनयूएमएक्स ऑफ द ईयर वॉन होल्टजॉन्डर ने चीफ ऑफ जनरल स्टाफ फील्ड मार्शल हिंडनबर्ग को एक व्यापक ज्ञापन के साथ संबोधित किया। दस्तावेज़ में, एडमिरल ने एक बार फिर एक अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह माना जाता था कि अगर इंग्लैंड को युद्ध से हटा लिया गया, तो पूरे एंटेंटे पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जो ब्रिटिश बेड़े की क्षमताओं पर निर्भर था। यह स्पष्ट है कि अमेरिकी युद्ध में प्रवेश करने के जोखिम को ध्यान में रखा गया था। हालांकि, एक असीमित पानी के नीचे के युद्ध के समर्थकों का मानना था कि भले ही वाशिंगटन एंटेंटे के साथ बैठे, लेकिन कोई विशेष खतरा नहीं था। संयुक्त राज्य अमेरिका के पास एक बड़ी भूमि सेना नहीं है जो फ्रांसीसी थिएटर में अपने सहयोगियों को मजबूत करेगी और अमेरिका पहले से ही एंटेंट देशों का समर्थन करता है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका के यूरोप में काफी बल बनाने और स्थानांतरित करने से पहले जर्मनों ने इंग्लैंड को अपने घुटनों पर लाने की आशा की। परिणामस्वरूप, वर्ष की जर्मन सरकार 27 जनवरी 1917 ने समुद्र में अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध को फिर से शुरू करने का फैसला किया। जनवरी 31 बर्लिन ने दुनिया को एक अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध की शुरुआत के बारे में सूचित किया है। 1916 के अंत में अंडरवाटर युद्ध - 1917 की शुरुआत। दिसंबर 9 1916 इंग्लैंड ने अंग्रेजी चैनल में तीन नागरिक स्टीमबोट्स की बाढ़ की सूचना दी। दिसंबर 11 पर, अंग्रेजी चैनल में, एक जर्मन पनडुब्बी ने स्टीमर रकीउरा को डूबो दिया, जो तटस्थ नॉर्वे का झंडा उडा रहा था। चालक दल भागने में सफल रहा। उसी दिन, सिसिली के तट से दूर, जर्मन पनडुब्बी UB-47 ब्रिटिश परिवहन मैगलन को डूब गई। 20 दिसंबरः एक जर्मन U-38 पनडुब्बी ने माल्टा के उत्तर-पूर्व में 72 मील में ब्रिटिश जहाज ईटन को डूबो दिया। 27 दिसंबर 1916, जर्मन UB-47 पनडुब्बी लेफ्टिनेंट-कमांडर स्टीनबॉयर की कमान के तहत सिसिली के तट से दूर, फ्रांसीसी युद्धपोत गोलुआ को खदेड़ दिया गया था। चालक दल को निकालने में कामयाब रहे, 4 आदमी को मार डाला। 1917 की शुरुआत के साथ, जर्मनों ने नाटकीय रूप से अपने पनडुब्बी बेड़े को आगे बढ़ाया। उसी पनडुब्बी के 1 जनवरी 1917 को पास में ही गिरा दिया गया और ब्रिटिश एयरलाइनर इवरनिया को डूबो दिया गया, जो मिस्र में सैनिकों को पहुंचा रही थी। चालक दल के कुशल कार्यों के लिए धन्यवाद, अधिकांश सैनिक नावों में भागने में सक्षम थे, 36 लोग मारे गए थे। केवल एक दिन में जनवरी के 2 वे डूब गए (मुख्य रूप से बिस्क की खाड़ी में और पुर्तगाल के तट से दूर) 12 जहाज - वाणिज्यिक जहाजों के 11 जो नॉर्वे, इंग्लैंड, फ्रांस, ग्रीस और स्पेन के थे, और रूसी युद्धपोत Peresvet। बाल्टिक में 19 वीं - 20 वीं शताब्दियों के मोड़ पर निर्मित पेर्सवेट तीन अलग-अलग युद्धपोतों (श्रृंखला में ओस्लीबिया और पोबेडा) की श्रृंखला का प्रमुख जहाज था। 1902, जहाज पोर्ट आर्थर में पहुंचा। रूसी-जापानी युद्ध के दौरान, यह जहाज पोर्ट आर्थर के बंदरगाह में डूब गया था, फिर जापानी द्वारा उठाया गया, मरम्मत की गई और "सागामी" नाम के तहत ऑपरेशन में डाल दिया गया। आर्कटिक महासागर के फ्लोटिला के लिए जहाजों की आवश्यकता के संबंध में, और संभव भागीदारी के लिए भी, कम से कम प्रतीकात्मक रूप से, भूमध्यसागरीय में मित्र राष्ट्रों के संचालन में, एक्सएनयूएमएक्स में रूस ने जापान को युद्ध ट्राफियां के रूप में विरासत में प्राप्त पूर्व रूसी जहाजों को बेचने के लिए कहा। । जापानी केवल तीन पुराने जहाजों को स्वीकार करने के लिए सहमत हुएः युद्धपोत "टैंगो" (पूर्व "पोल्टावा") और "सगास" और क्रूजर "सोया" (पूर्व "वैराग")। सगामी की खरीद रूस 7 मिलियन येन की लागत। 21 मार्च 1916, तीनों जहाज व्लादिवोस्तोक पहुंचे। अक्टूबर 1916 में, मरम्मत के बाद, पेरेज़वेट स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप गया। यह माना जाता था कि इंग्लैंड में जहाज का ओवरहाल सबसे पहले किया जाएगा, और फिर वह रूसी उत्तरी फ्लोटिला में शामिल होगा। लेकिन 2 में जनवरी में 1917 10 में पोर्ट नेन से 17. 30 में "Relight" धनुष द्वारा उड़ा दिया गया था और एक ही बार में दो खानों पर कठोर हो गया था। जहाज तेजी से डूब गया, और कमांडर ने चालक दल को भागने का आदेश दिया। केवल एक स्टीमबोट इसे कम करने में कामयाब रही। 17. 47 में, Peresvet पर इत्तला दे दी और डूब गया। आस-पास के अंग्रेजी विध्वंसक और फ्रांसीसी ट्रॉलर ने 557 लोगों को पानी से बाहर निकाल दिया, जिनमें से कई बाद में घाव और हाइपोथर्मिया से मर गए। मारे गए 252 टीम के सदस्य Peresvet। बाद में यह पता चला कि जहाज एक माइनफील्ड पर मारा गया था, जिसे जर्मन पनडुब्बी यू-एक्सएनयूएमएक्स द्वारा उजागर किया गया था। अगले कुछ दिनों में, भूमध्य सागर में जर्मन पनडुब्बियों और एंटेन्ते देशों और तटस्थ देशों के जहाज के बेस्क की खाड़ी में डूब गए - मुख्य रूप से कार्गो स्टीमर और ट्रैवेलर्स। जनवरी में बिस्काय की खाड़ी में 54 से 9 तक, इंग्लिश चैनल, नॉर्थ, मेडिटेरेनियन और बाल्टिक सी, जर्मन पनडुब्बियों ने 15 जहाज डूबे (अधिकांश ब्रिटिश थे, लेकिन फ्रेंच, नार्वे, डेनिश, स्वीडिश)। जर्मन पनडुब्बी को केवल एक नुकसान हुआ - जनवरी 29 पर, UB-14 पनडुब्बी अंग्रेजी चैनल में डूबी हुई थी। जनवरी 17 पर, अटलांटिक महासागर में, मदीरा के पुर्तगाली द्वीप के पास, जर्मन सहायक क्रूजर "मावे" ने अंग्रेजी व्यापारी जहाज को डूबो दिया। जनवरी में 16 से 22 तक, अटलांटिक महासागर में जर्मन पनडुब्बी डूब गई (मुख्य रूप से पुर्तगाल के तट और बिस्के की खाड़ी में) और भूमध्य सागर में एंटेन्ते देशों और तटस्थ देशों के वाणिज्यिक जहाजों की कुल 48। जनवरी में 23 और 29 के बीच, जर्मन U- नौकाओं ने 48 स्वीडिश, 1 स्पेनिश, 3 नार्वेजियन, 10 डेनिश और 1 डच सहित कुल 1 जहाज डूबे, इन देशों की तटस्थता के बावजूद। जनवरी में एक जर्मन पनडुब्बी द्वारा निर्धारित खदान पर आयरिश सागर में 25, ब्रिटिश सहायक क्रूजर "लॉरेंटिक" से टकराया। क्रूजर ने लिवरपूल से हैलिफ़ैक्स (कनाडा) तक पीछा किया और पहले से ही उत्तरी जलडमरूमध्य से बाहर निकलने के दौरान एक जर्मन खदान में आया। बोर्ड पर 378 लोगों की हत्या की। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शाही बेड़े के अन्य नुकसानों और अन्य बेड़े की तुलना में इस त्रासदी को हमेशा की तरह माना जा सकता था। इसके अलावा, लॉरेंटिक खुद भी एक युद्धपोत नहीं था और ब्रिटिश बेड़े की एक मूल्यवान इकाई नहीं था। यह एक यात्री लाइनर था, जल्दबाजी में युद्ध से पहले एक सहायक क्रूजर में परिवर्तित हो गया। इसका एकमात्र लाभ केवल एक उच्च गति था। हालाँकि, इस जहाज की मृत्यु ने ब्रिटिश सरकार का सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। जिस स्थान पर क्रूजर की मृत्यु हुई उसे तुरंत ब्रिटिश जहाजों के संरक्षण में ले जाया गया। बेड़े की कमान को गोताखोरों के आने का बेसब्री से इंतजार था। कारण यह था कि 3200 सोने की सलाखों से अधिक, यूके गोल्ड भंडार से लगभग 64 टन के कुल वजन के साथ 43 किलोग्राम वजन वाले बक्से में पैक किया गया, नीचे तक गया। क्रूजर ने उससे पहले मौजूद सभी रिकॉर्डों को तोड़ दिया, फिर भी एक भी जहाज ने इतना सोना नहीं उड़ाया। यूके के लिए खाद्य और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के भुगतान के रूप में अमेरिकी सरकार के लिए सोने का इरादा था। यह ध्यान देने योग्य है कि युद्ध के दौरान, वाशिंगटन एंटेंटे देशों और तटस्थ शक्तियों की आपूर्ति में बहुत समृद्ध था, और एक देनदार से एक वैश्विक लेनदार में बदल गया, क्योंकि युद्धरत शक्तियों को अमेरिकी आपूर्ति के लिए सोने में भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया था, और संयुक्त राज्य से ऋण भी लिया था। इस जहाज का नुकसान ब्रिटिश वित्त पर भारी पड़ा। जल्द ही जहाज की मृत्यु के स्थान पर गोताखोर आ गए। पानी के नीचे पहले वंश ने डूबे क्रूजर का पता लगाने और आगे के काम की योजना की रूपरेखा तैयार करने की अनुमति दी। जहाज बंदरगाह की तरफ स्थित था, इसका ऊपरी डेक समुद्र की सतह से केवल 18 मीटर था। पानी के भीतर काम के लिए एक विशेष जहाज विशेष उपकरण के साथ पहुंचा। चूंकि एडमिरल्टी को स्वयं जहाज को बचाने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन केवल इसकी सामग्री प्राप्त करने के लिए, विस्फोटक का उपयोग करने का निर्णय लिया गया था। काम की शुरुआत सफल रही, कई बक्से उठाए गए। लेकिन फिर एक तूफान आया जो पूरे एक सप्ताह तक चला। जब बचाव दल "लॉरेंटिक" में लौट आए, तो वे एक उदास दृष्टि से इंतजार कर रहे थे। तूफान की लहरों के प्रहार के तहत, पोत के पतवार को एक समझौते में बदल दिया गया था, जिसके माध्यम से गोताखोरों ने अपने पहले खोज को एक दरार में बदल दिया। जहाज भी स्थानांतरित हो गया और 30 मीटर की गहराई तक डूब गया। जब गोताखोरों ने खजाने के लिए अपना रास्ता साफ किया, तो वे यह जानकर हैरान रह गए कि सारा सोना गायब हो गया था। यह पता चला कि तूफान की कार्रवाई के तहत क्रूजर शीथिंग फैल गया, सभी सोना नीचे गिर गया और कहीं न कहीं, स्टील के टुकड़ों के नीचे था। नतीजतन, काम में जोरदार देरी हुई। विस्फोटकों की मदद से गोताखोरों ने अपना रास्ता बनाया, सोने की तलाश में। 1917 के पतन में, एक तूफान की अवधि की शुरुआत के कारण काम अस्थायी रूप से बाधित हो गया था। चूंकि अमेरिका ने एंटेंट के किनारे युद्ध में प्रवेश किया था, इसलिए काम को पश्चात की अवधि के लिए स्थगित कर दिया गया था। केवल 1919 में, बचाव जहाज फिर से क्रूजर की मृत्यु के स्थान पर पहुंच गया। और फिर से गोताखोरों को फिर से शुरू करना पड़ा। अब उन्हें पत्थरों और रेत को साफ करना था, जो एक घने द्रव्यमान में संकुचित थे और सीमेंट के समान थे। विस्फोटकों का उपयोग करना असंभव था, सोना अंततः सो जाएगा। क्रॉबर और होसेस का उपयोग करने वाले गोताखोर, जिनके माध्यम से उच्च दबाव में पानी की आपूर्ति की गई थी, "सीमेंट" के टुकड़े तोड़ दिए और उन्हें सतह पर भेज दिया। परिणामस्वरूप, 1924 वर्ष तक काम जारी रहा। खोज के दौरान, एक विशाल महासागर लाइनर को सचमुच टुकड़ों में काट दिया गया और समुद्र के तल के साथ खींच लिया गया। पूरी खोज अवधि के दौरान, गोताखोरों ने 5000 से अधिक गोता लगाया और लगभग सारा सोना ब्रिटिश खजाने को लौटा दिया। ब्रिटिश सहायक क्रूजर "लॉरेंटिक" अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध के पहले पांच दिनों में, जिसे आधिकारिक तौर पर जनवरी 31 पर एक्सएनयूएमएक्स घोषित किया गया था, एंटेंटे देशों के एक्सएनयूएमएक्स जहाज और एक अमेरिकी सहित तटस्थ शक्तियां अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर में पनडुब्बियों द्वारा डूब गईं थीं। फरवरी में 1917 और 60 के बीच, जर्मन पनडुब्बियों ने तटस्थ देशों से 6 जहाजों सहित 12 जहाजों को भर दिया। फरवरी में 77 से 13 तक की अवधि के दौरान, जर्मनों ने एंटेंट देशों और तटस्थ राज्यों के और भी अधिक व्यापारी जहाज डूबे - 13। 19 और 96 फरवरी के बीच, जर्मन 20 जहाज से डूब गए। फरवरी 26 से मार्च 71 तक, जर्मन पनडुब्बियों ने 27 जहाजों को भर दिया। 1917 के पहले तीन महीनों में, जर्मन पनडुब्बी 728 1 168 टन के कुल विस्थापन के साथ 000 जहाज डूब गए। परिणामस्वरूप, औसतन जर्मन इन महीनों के दौरान प्रति दिन 8 जहाजों को डुबो देते हैं। सच है, उनके नुकसान में भी वृद्धि हुई है - तीन महीने में एक्सएनयूएमएक्स पनडुब्बियां। हालांकि, नई पनडुब्बियों के निर्माण की गति भी बढ़ गई और जर्मनी में इसी अवधि के लिए एक्सएनयूएमएक्स पनडुब्बी जहाज का निर्माण किया। मुख्य समस्या अब प्रशिक्षित कर्मियों की कमी थी।
पनडुब्बी युद्ध की तीव्रता समुद्र में मित्र देशों के नुकसान में तेजी से वृद्धि हुई। मई एक हज़ार नौ सौ पंद्रह तक, बानवे जहाज तीन अधूरे महीनों में डूब गया थाः जर्मन नौकाएं प्रति दिन एक जहाज डूब रही थीं। बढ़ने लगा और पनडुब्बी की क्रूरता। पहले महीनों में, U-अट्ठाईस फ़ॉस्टनर के कप्तान "प्रसिद्ध हो गए," जिन्होंने पहली बार अकिला स्टीमर से आग पर जीवनरक्षक नौकाओं को फायर करने का आदेश दिया। फिर, प्रतीक्षा के साथ परेशान न होने का फैसला करने के बाद, उन्होंने चालक दल से पहले यात्री जहाज "फलाबा" को डूबो दिया और यात्रियों ने इसे छोड़ दिया था। महिलाओं और बच्चों सहित एक सौ चार आदमी को मार डाला। सात मई एक घटना हुई जो पानी के नीचे युद्ध के प्रतीकों में से एक बन गई और पूरी दुनिया के युद्ध के आगे के पाठ्यक्रम को गंभीरता से प्रभावित किया। U-बीस पनडुब्बी, जो कि कैप्टन वाल्टर श्वाइगर के पास है, आयरलैंड के तट पर एक विशाल लुसिटानिया यात्री जहाज डूब गया। जब जहाज न्यूयॉर्क में था, तब समाचार पत्रों के माध्यम से अमेरिका में जर्मन दूतावास ने विमान पर संभावित हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन लोग टिकट खरीदना जारी रखा। मई सात पर, स्टीमर को U-बीस द्वारा देखा गया था, जो उस समय तक एक टॉरपीडो को छोड़कर लगभग सभी गोला बारूद का उपयोग कर चुका था, और बेस पर लौटने वाला था। हालांकि, इस तरह के एक स्वादिष्ट लक्ष्य को पाकर, श्वीगर ने अपना विचार बदल दिया। सबसे बड़ा महासागर लाइनर टारपीडो था। पहले विस्फोट के तुरंत बाद, एक और विनाशकारी दूसरा विस्फोट सुनाई दिया। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य में न्यायिक आयोगों ने निष्कर्ष निकाला कि एयरलाइनर पर दो टॉरपीडो द्वारा हमला किया गया था। U-बीस Schwierr के कमांडर ने तर्क दिया कि उन्होंने लोरितानिया में केवल एक टारपीडो को निकाल दिया था। दूसरे धमाके की उत्पत्ति की व्याख्या करने वाले कई संस्करण हैं, विशेष रूप से, स्टीम बॉयलरों को नुकसान, कोयले की धूल विस्फोट, जर्मनी में स्थानापन्न करने के लिए जानबूझकर कम करके या गोला-बारूद के अवैध विस्फोट को पकड़ में रखने के लिए। यह बहुत संभावना है कि अंग्रेजों ने गोला-बारूद को बोर्ड पर पहुंचाया, हालांकि उन्होंने इससे इनकार कर दिया। नतीजतन, यात्री लाइनर डूब गया, लगभग सौ बच्चों सहित एक हज़ार एक सौ अट्ठानवे लोगों की मौत हो गई। मृतकों की संख्या में एक सौ अट्ठाईस अमेरिकी शामिल हैं, जिनमें "समाज की क्रीम" शामिल है, जिसने अमेरिका में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी। वाशिंगटन बर्लिन के बहाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था, जो संकेत देता था कि पोत एक ध्वज के बिना और एक छायांकित नाम के साथ जा रहा था, यात्रियों को खतरे से आगाह किया गया था, कि लुसिटानिया के टारपीडो के कारण उसके गोला बारूद की तस्करी हो रही थी। कि जर्मन सैन्य कमान लाइनर को सहायक क्रूजर के रूप में मानती थी। जर्मनी को एक तेज नोट भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सरकार इस तरह की त्रासदी की पुनरावृत्ति, अमेरिकी नागरिकों की मौत और व्यापारी जहाजों पर हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे सकती है। मई इक्कीस पर, व्हाइट हाउस ने जर्मनी को सूचित किया कि जहाज पर किसी भी बाद के हमले को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा "जानबूझकर अमित्र कदम" माना जाएगा। पंद्रह मई एक हज़ार नौ सौ पंद्रह से लंदन समाचार समाचार पत्र के संस्करण में डूब "लुसीतानिया" का चित्रण। Отношения между странами крайне обострились. Газеты начали писать о скором вступлении США в войну на стороне Антанты. В Англии и США развернулась пропагандистская кампания о варварстве немецких подводников. Экс-президент США Теодор Рузвельт сравнил действия германского флота с «пиратством, превосходящим по масштабам любое убийство, когда-либо совершавшееся в старые пиратские времена». Командиры немецких подлодок были объявлены нелюдями. Черчилль цинично писал: «Несмотря на весь ужас произошедшего, мы должны рассматривать гибель «Лузитании» как важнейшее и благоприятное для стран Антанты событие. . . . Бедные дети, которые погибли в океане, ударили по германскому режиму беспощаднее, чем, возможно, एक सौ тысяч жертв». Есть версия, о том, что британцы фактически спланировали гибель лайнера, чтобы подставить немцев. जर्मन सैन्य-राजनीतिक नेतृत्व की योजनाओं में इस तरह की वृद्धि बिल्कुल भी नहीं थी। इस बार, बैठक में चांसलर बेट्टमैन-गोलवेग, जिसमें कैसर विल्हेम द्वितीय, उप विदेश मंत्री के रूप में राजदूत ट्रेटलर, ग्रैंड एडमिरल तिरपिट्ज़, एडमिरल बाचमन, मुलर भी शामिल थे, ने सक्रिय पानी के नीचे युद्ध को रोकने का सुझाव दिया। जनरल स्टाफ के प्रमुख फल्केनहिन ने भी राजनेताओं का समर्थन किया, उनका मानना था कि जर्मन सेना जमीन पर निर्णायक सफलता हासिल कर सकती है। नतीजतन, कैसर पनडुब्बी युद्ध को सीमित करने की आवश्यकता के बारे में आश्वस्त था। कील के बंदरगाह में अन्य नौकाओं के बीच सबमरीन U-बीस जर्मन पनडुब्बी के लिए वर्ष के एक जून एक हज़ार नौ सौ पंद्रह ने नए प्रतिबंध लगाए हैं। अब से, उन्हें बड़े यात्री जहाजों को डूबने से मना किया गया था, भले ही वे ब्रिटिश से संबंधित हों, साथ ही साथ किसी भी तटस्थ जहाज। तिरपिट्ज़ और बछमन ने इस फैसले के विरोध में इस्तीफा दे दिया, लेकिन कैसर ने इसे स्वीकार नहीं किया। यह ध्यान देने योग्य है कि प्रतिबंधों के बावजूद, जर्मन पनडुब्बी बेड़े अभी भी दुश्मन के जहाजों को सक्रिय रूप से डूब रहा था। अगले महीनों में, डूबे हुए जहाजों की संख्या पिछले महीनों की तुलना में बढ़ गई। मई में, छयासठ जहाज डूब गए, जून में पहले से ही तिहत्तर, जुलाई में - सत्तानवे। उसी समय, जर्मनों ने पनडुब्बियों में लगभग नुकसान नहीं उठाया। मई में, उत्तरी सागर में जून में एक भी पनडुब्बी नहीं मरी, दो । मित्र राष्ट्र अभी भी एक प्रभावी पनडुब्बी रोधी रक्षा स्थापित नहीं कर सके। अगस्त में, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह सहयोगियों ने पहले से ही एक सौ इक्कीस हजार टन की कुल क्षमता के साथ दो सौ पोत खो दिया। लेकिन जल्द ही एक और घटना हुई, जिसने अंत में पनडुब्बी युद्ध का पहला चरण पूरा किया। अगस्त उन्नीस पर, जर्मन U-चौबीस पनडुब्बी ने अरबिका यात्री जहाज को डूबो दिया। उसी समय, चौंतालीस लोगों की मृत्यु हो गई। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपना कड़ा विरोध दोहराया, माफी और नुकसान की मांग की। वाशिंगटन में जर्मन राजदूत ने फिर से अमेरिकी सरकार को आश्वस्त किया कि पनडुब्बी युद्ध सीमित होगा। छब्बीस अगस्त, जर्मन काउंसिल ने पनडुब्बी संचालन पर रोक लगाने का फैसला किया। जर्मनी के अगस्त सत्ताईस पनडुब्बी बेड़े ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सैन्य अभियानों को बाधित करने का आदेश दिया। पनडुब्बी युद्ध के लिए तीस अगस्त नए नियम पेश किए गए थे। पनडुब्बी बेड़े को इंग्लैंड के पश्चिमी तट और अंग्रेजी चैनल में ऑपरेशन के क्षेत्र को छोड़ने का आदेश दिया गया था। इसके अलावा, अब जहाजों को केवल समुद्र के कानून के तहत डूबने की अनुमति दी गई थी। यात्री जहाजों को डूबने से मना किया गया था, मालवाहक जहाज डूबने के लिए नहीं थे, लेकिन जब्त करने के लिए। इस प्रकार, पानी के नीचे युद्ध का पहला चरण समाप्त हो गया। पानी के नीचे युद्ध के पहले चरण में पनडुब्बी बेड़े की काफी संभावनाएं दिखाई दीं, खासकर जब पनडुब्बी रोधी रक्षा अप्रभावी थी। युद्ध की शुरुआत के बाद से, जहाज एक तीन सौ शून्य टन के कुल विस्थापन से डूब गए थे। जर्मनी ने विभिन्न कारणों से बाईस पनडुब्बियों को खो दिया। हालांकि, यह स्पष्ट था कि जर्मनी ने पनडुब्बी बेड़े की क्षमताओं को कम करके आंका था। वह इंग्लैंड की नौसेना की नाकाबंदी की ओर नहीं जा सका। ब्रिटेन के राज्य पर अंडरवाटर युद्ध का बहुत कम प्रभाव था। इंग्लैंड में बहुत अधिक वाणिज्यिक और नौसेना थी। जर्मनी के पास कुछ पनडुब्बी थीं और वे अभी भी परिपूर्ण से बहुत दूर थीं। इसके अलावा, यात्री जहाजों और नागरिकों की मौत के साथ पानी के नीचे युद्ध ने दुनिया में एक महान नकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण बना। इसके अलावा, सरकार को फेंकने, जिसने एक पूर्ण पैमाने पर पनडुब्बी युद्ध शुरू करने की हिम्मत नहीं की, पनडुब्बी को रोका। जर्मन एडमिरलों और सैन्य भूमि कमांड के निरंतर हस्तक्षेप के साथ दृढ़ता से हस्तक्षेप किया। नतीजतन, एडमिरल्स बच्चन और तिरपिट्ज़ ने इस्तीफा दे दिया। कैसर ने तिरपिट्ज़ को राजनीतिक कारणों से छोड़ दिया । नौसिखिया मुख्यालय के प्रमुख के पद पर बछमन को जेनिंग वॉन होल्त्ज़ोफ़र्ड द्वारा बदल दिया गया, जो चांसलर के करीबी व्यक्ति थे, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के पक्ष में थे। उन्होंने पनडुब्बी के बेड़े के तह संचालन के पाठ्यक्रम को जारी रखा। सच है, वॉन होल्त्ज़ोर्फ ने जल्द ही अपने विचारों को संशोधित किया और कैसर और सरकार को कई ज्ञापन भेजे, जिसमें उन्होंने असीमित पनडुब्बी युद्ध को फिर से शुरू करने की आवश्यकता का तर्क दिया। उत्तरी सागर में "सीमित" पनडुब्बी युद्ध जारी रहा। आयरलैंड और पश्चिमी इंग्लैंड के तट पर, जर्मनों ने पानी के नीचे खननकर्ताओं की मदद से लड़ने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने बंदरगाहों और तटों पर खदानें बिछाईं। लेकिन केवल एक्सएनयूएमएक्स खानों को ले जाने वाली छोटी पनडुब्बियां दुश्मन के बेड़े की स्थिति को बहुत प्रभावित नहीं कर सकीं। जर्मन पनडुब्बी युद्ध के अन्य सिनेमाघरों में संचालितः भूमध्यसागरीय, काले और बाल्टिक समुद्रों में। यह सच है, इंग्लैंड के आसपास के समुद्रों में सैन्य अभियानों की गतिविधि से कई बार ऑपरेशन का पैमाना घटिया था। उदाहरण के लिए, काला सागर में केवल कुछ जर्मन पनडुब्बियां थीं, जो मुख्य रूप से टोही में लगी हुई थीं और रूसी बेड़े के लिए गंभीर खतरा पैदा नहीं कर सकती थीं। अंडरवाटर युद्ध भूमध्य में अधिक सक्रिय था, जहां ऑस्ट्रियाई और जर्मन पनडुब्बियों ने इटली, फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन के जहाजों पर हमला किया था। बाल्टिक सागर पर पनडुब्बी युद्ध भी आयोजित किया गया था, हालांकि रूसी और ब्रिटिश पनडुब्बियां यहां बहुत सक्रिय थीं। इसी समय, जर्मनों ने पनडुब्बी बेड़े की शक्ति को सक्रिय रूप से बढ़ाना जारी रखा और नई पनडुब्बियों का निर्माण किया। उन्होंने नाकाबंदी तोड़ने और रणनीतिक माल पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किए गए वास्तविक महासागर पनडुब्बी क्रूजर का निर्माण शुरू किया। इन पनडुब्बियों की एक बढ़ी हुई सीमा थी। वे शक्तिशाली हथियार प्राप्त करने वाले थेः दो पाँच सौ-mm बंदूक, अट्ठारह दो-mm बंदूक, एक सौ पचास दो-mm बंदूक में गोला बारूद के साथ अठासी एक हज़ार पाँच सौ-mm टारपीडो ट्यूब। पहले जन्म के दो जहाज थे "Deutschland": "Deutschland" और "Bremen"। उनके पास बारह टन से अधिक का विस्थापन था, पाँच / पच्चीस नोड्स की पानी के नीचे की गति और XNUMX हजारों मील की भारी स्वायत्तता थी। पहली पनडुब्बी "Deutschland", जून एक हज़ार नौ सौ सोलह में, रणनीतिक कच्चे माल के भार के लिए अमेरिका की एक परीक्षण यात्रा की। अधिकांश भाग के लिए, नाव सतह पर थी और केवल जब एक जहाज दिखाई दिया, पानी के नीचे चला गया और पेरिस्कोप के उपयोग के साथ चला गया, और अगर यह जोखिम भरा लग रहा था, तो यह पूरी तरह से पानी में छिपा हुआ था। बाल्टीमोर में इसकी उपस्थिति, जहां पनडुब्बी टन के रबर, तीन सौ पचास टन निकेल, तीन सौ तैंतालीस टन जस्ता और आधा टन जूट बोर्ड तिरासी पर लाई, ने दुनिया में एक बड़ी प्रतिध्वनि पैदा की। जर्मनी में ऐसे पनडुब्बी क्रूजर की उपस्थिति का मतलब था कि अब जर्मन अपने ठिकानों से काफी दूरी पर दुश्मन जहाजों पर हमला कर सकते हैं, जिसमें अमेरिका के तट भी शामिल हैं। अंग्रेजों ने पनडुब्बी को रोकने की कोशिश की, लेकिन अगस्त चौबीस पर वह सुरक्षित जर्मनी लौट आई। सितंबर में, जर्मनी ने प्रयोग दोहराने का फैसला किया। दो और नावों को संयुक्त राज्य के तटों पर भेजा गया - एक और पनडुब्बी क्रूजर ब्रेमेन और एक पनडुब्बी U-XNXX। "ब्रेमेन" अमेरिका नहीं पहुंचा, यह कहीं मर गया। और U-तिरेपन सुरक्षित रूप से न्यूपोर्ट पहुंचा, वहां ईंधन भरा और फिर से समुद्र में चला गया। लॉन्ग आइलैंड के तट से, उसने सात अंग्रेजी व्यापारिक जहाजों को डूबो दिया। तब पनडुब्बी सफलतापूर्वक हेलगोलैंड द्वीप पर बेस में लौट आई। नवंबर में, Deutschland ने तिरेपन मिलियन डॉलर के कार्गो के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक और उड़ान भरी, जिसमें कीमती पत्थर, प्रतिभूति और दवाएं शामिल थीं। वह सफलतापूर्वक जर्मनी लौट आई। फरवरी में, पनडुब्बी क्रूजर दस को जर्मन शाही बेड़े में स्थानांतरित कर दिया गया था और पानी के नीचे परिवहन से एक U-एक हज़ार नौ सौ सत्रह सैन्य पनडुब्बी में फिर से बनाया गया था। जहाज ने एक्सएनयूएमएक्स को एक्सएनयूएमएक्स टॉरपीडो और दो एक्सएनयूएमएक्स-एमएम तोपों के साथ टारपीडो ट्यूबों से सुसज्जित किया। इस प्रकार, जर्मन पनडुब्बी से पता चला है कि वे अब दुश्मन की ट्रान्साटलांटिक व्यापार लाइनों पर कार्य कर सकते हैं। एक हज़ार नौ सौ सोलह के अंत तक, केंद्रीय शक्तियों का मार्शल कानून तेजी से बिगड़ना शुरू हो गया। वर्ष के एक हज़ार नौ सौ सोलह अभियान के दौरान, जर्मनी पश्चिम या पूर्व में निर्णायक सफलता हासिल नहीं कर सका। मानव संसाधनों में कमी, कच्चे माल और भोजन की कमी थी। यह स्पष्ट हो गया कि हमले के युद्ध में जर्मन ब्लॉक हार की प्रतीक्षा कर रहा था। जर्मनी में, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक "निर्दयी" पनडुब्बी युद्ध को नवीनीकृत किया जाना चाहिए। जैसा कि सैन्य इतिहासकार ए. एम. इनमें से, एक हज़ार नौ सौ सत्रह मिलियन टन सैन्य जरूरतों के लिए थे, शेष सोलह मिलियन टन वर्ष के दौरान देश के जीवन के लिए आवश्यक थे। अगर हम कुल टन भार के बड़े प्रतिशत को नष्ट करने का प्रबंधन करते हैं, और तटस्थ जहाजों को डूबने की आशंका है, तो वे इंग्लैंड के लिए अपनी यात्राओं को समाप्त कर देंगे, फिर युद्ध की निरंतरता बाद के लिए असंभव होगी। " एक्सएनयूएमएक्स दिसंबर एक्सएनयूएमएक्स ऑफ द ईयर वॉन होल्टजॉन्डर ने चीफ ऑफ जनरल स्टाफ फील्ड मार्शल हिंडनबर्ग को एक व्यापक ज्ञापन के साथ संबोधित किया। दस्तावेज़ में, एडमिरल ने एक बार फिर एक अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह माना जाता था कि अगर इंग्लैंड को युद्ध से हटा लिया गया, तो पूरे एंटेंटे पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जो ब्रिटिश बेड़े की क्षमताओं पर निर्भर था। यह स्पष्ट है कि अमेरिकी युद्ध में प्रवेश करने के जोखिम को ध्यान में रखा गया था। हालांकि, एक असीमित पानी के नीचे के युद्ध के समर्थकों का मानना था कि भले ही वाशिंगटन एंटेंटे के साथ बैठे, लेकिन कोई विशेष खतरा नहीं था। संयुक्त राज्य अमेरिका के पास एक बड़ी भूमि सेना नहीं है जो फ्रांसीसी थिएटर में अपने सहयोगियों को मजबूत करेगी और अमेरिका पहले से ही एंटेंट देशों का समर्थन करता है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका के यूरोप में काफी बल बनाने और स्थानांतरित करने से पहले जर्मनों ने इंग्लैंड को अपने घुटनों पर लाने की आशा की। परिणामस्वरूप, वर्ष की जर्मन सरकार सत्ताईस जनवरी एक हज़ार नौ सौ सत्रह ने समुद्र में अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध को फिर से शुरू करने का फैसला किया। जनवरी इकतीस बर्लिन ने दुनिया को एक अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध की शुरुआत के बारे में सूचित किया है। एक हज़ार नौ सौ सोलह के अंत में अंडरवाटर युद्ध - एक हज़ार नौ सौ सत्रह की शुरुआत। दिसंबर नौ एक हज़ार नौ सौ सोलह इंग्लैंड ने अंग्रेजी चैनल में तीन नागरिक स्टीमबोट्स की बाढ़ की सूचना दी। दिसंबर ग्यारह पर, अंग्रेजी चैनल में, एक जर्मन पनडुब्बी ने स्टीमर रकीउरा को डूबो दिया, जो तटस्थ नॉर्वे का झंडा उडा रहा था। चालक दल भागने में सफल रहा। उसी दिन, सिसिली के तट से दूर, जर्मन पनडुब्बी UB-सैंतालीस ब्रिटिश परिवहन मैगलन को डूब गई। बीस दिसंबरः एक जर्मन U-अड़तीस पनडुब्बी ने माल्टा के उत्तर-पूर्व में बहत्तर मील में ब्रिटिश जहाज ईटन को डूबो दिया। सत्ताईस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ सोलह, जर्मन UB-सैंतालीस पनडुब्बी लेफ्टिनेंट-कमांडर स्टीनबॉयर की कमान के तहत सिसिली के तट से दूर, फ्रांसीसी युद्धपोत गोलुआ को खदेड़ दिया गया था। चालक दल को निकालने में कामयाब रहे, चार आदमी को मार डाला। एक हज़ार नौ सौ सत्रह की शुरुआत के साथ, जर्मनों ने नाटकीय रूप से अपने पनडुब्बी बेड़े को आगे बढ़ाया। उसी पनडुब्बी के एक जनवरी एक हज़ार नौ सौ सत्रह को पास में ही गिरा दिया गया और ब्रिटिश एयरलाइनर इवरनिया को डूबो दिया गया, जो मिस्र में सैनिकों को पहुंचा रही थी। चालक दल के कुशल कार्यों के लिए धन्यवाद, अधिकांश सैनिक नावों में भागने में सक्षम थे, छत्तीस लोग मारे गए थे। केवल एक दिन में जनवरी के दो वे डूब गए बारह जहाज - वाणिज्यिक जहाजों के ग्यारह जो नॉर्वे, इंग्लैंड, फ्रांस, ग्रीस और स्पेन के थे, और रूसी युद्धपोत Peresvet। बाल्टिक में उन्नीस वीं - बीस वीं शताब्दियों के मोड़ पर निर्मित पेर्सवेट तीन अलग-अलग युद्धपोतों की श्रृंखला का प्रमुख जहाज था। एक हज़ार नौ सौ दो, जहाज पोर्ट आर्थर में पहुंचा। रूसी-जापानी युद्ध के दौरान, यह जहाज पोर्ट आर्थर के बंदरगाह में डूब गया था, फिर जापानी द्वारा उठाया गया, मरम्मत की गई और "सागामी" नाम के तहत ऑपरेशन में डाल दिया गया। आर्कटिक महासागर के फ्लोटिला के लिए जहाजों की आवश्यकता के संबंध में, और संभव भागीदारी के लिए भी, कम से कम प्रतीकात्मक रूप से, भूमध्यसागरीय में मित्र राष्ट्रों के संचालन में, एक्सएनयूएमएक्स में रूस ने जापान को युद्ध ट्राफियां के रूप में विरासत में प्राप्त पूर्व रूसी जहाजों को बेचने के लिए कहा। । जापानी केवल तीन पुराने जहाजों को स्वीकार करने के लिए सहमत हुएः युद्धपोत "टैंगो" और "सगास" और क्रूजर "सोया" । सगामी की खरीद रूस सात मिलियन येन की लागत। इक्कीस मार्च एक हज़ार नौ सौ सोलह, तीनों जहाज व्लादिवोस्तोक पहुंचे। अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सोलह में, मरम्मत के बाद, पेरेज़वेट स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप गया। यह माना जाता था कि इंग्लैंड में जहाज का ओवरहाल सबसे पहले किया जाएगा, और फिर वह रूसी उत्तरी फ्लोटिला में शामिल होगा। लेकिन दो में जनवरी में एक हज़ार नौ सौ सत्रह दस में पोर्ट नेन से सत्रह. तीस में "Relight" धनुष द्वारा उड़ा दिया गया था और एक ही बार में दो खानों पर कठोर हो गया था। जहाज तेजी से डूब गया, और कमांडर ने चालक दल को भागने का आदेश दिया। केवल एक स्टीमबोट इसे कम करने में कामयाब रही। सत्रह. सैंतालीस में, Peresvet पर इत्तला दे दी और डूब गया। आस-पास के अंग्रेजी विध्वंसक और फ्रांसीसी ट्रॉलर ने पाँच सौ सत्तावन लोगों को पानी से बाहर निकाल दिया, जिनमें से कई बाद में घाव और हाइपोथर्मिया से मर गए। मारे गए दो सौ बावन टीम के सदस्य Peresvet। बाद में यह पता चला कि जहाज एक माइनफील्ड पर मारा गया था, जिसे जर्मन पनडुब्बी यू-एक्सएनयूएमएक्स द्वारा उजागर किया गया था। अगले कुछ दिनों में, भूमध्य सागर में जर्मन पनडुब्बियों और एंटेन्ते देशों और तटस्थ देशों के जहाज के बेस्क की खाड़ी में डूब गए - मुख्य रूप से कार्गो स्टीमर और ट्रैवेलर्स। जनवरी में बिस्काय की खाड़ी में चौवन से नौ तक, इंग्लिश चैनल, नॉर्थ, मेडिटेरेनियन और बाल्टिक सी, जर्मन पनडुब्बियों ने पंद्रह जहाज डूबे । जर्मन पनडुब्बी को केवल एक नुकसान हुआ - जनवरी उनतीस पर, UB-चौदह पनडुब्बी अंग्रेजी चैनल में डूबी हुई थी। जनवरी सत्रह पर, अटलांटिक महासागर में, मदीरा के पुर्तगाली द्वीप के पास, जर्मन सहायक क्रूजर "मावे" ने अंग्रेजी व्यापारी जहाज को डूबो दिया। जनवरी में सोलह से बाईस तक, अटलांटिक महासागर में जर्मन पनडुब्बी डूब गई और भूमध्य सागर में एंटेन्ते देशों और तटस्थ देशों के वाणिज्यिक जहाजों की कुल अड़तालीस। जनवरी में तेईस और उनतीस के बीच, जर्मन U- नौकाओं ने अड़तालीस स्वीडिश, एक स्पेनिश, तीन नार्वेजियन, दस डेनिश और एक डच सहित कुल एक जहाज डूबे, इन देशों की तटस्थता के बावजूद। जनवरी में एक जर्मन पनडुब्बी द्वारा निर्धारित खदान पर आयरिश सागर में पच्चीस, ब्रिटिश सहायक क्रूजर "लॉरेंटिक" से टकराया। क्रूजर ने लिवरपूल से हैलिफ़ैक्स तक पीछा किया और पहले से ही उत्तरी जलडमरूमध्य से बाहर निकलने के दौरान एक जर्मन खदान में आया। बोर्ड पर तीन सौ अठहत्तर लोगों की हत्या की। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शाही बेड़े के अन्य नुकसानों और अन्य बेड़े की तुलना में इस त्रासदी को हमेशा की तरह माना जा सकता था। इसके अलावा, लॉरेंटिक खुद भी एक युद्धपोत नहीं था और ब्रिटिश बेड़े की एक मूल्यवान इकाई नहीं था। यह एक यात्री लाइनर था, जल्दबाजी में युद्ध से पहले एक सहायक क्रूजर में परिवर्तित हो गया। इसका एकमात्र लाभ केवल एक उच्च गति था। हालाँकि, इस जहाज की मृत्यु ने ब्रिटिश सरकार का सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। जिस स्थान पर क्रूजर की मृत्यु हुई उसे तुरंत ब्रिटिश जहाजों के संरक्षण में ले जाया गया। बेड़े की कमान को गोताखोरों के आने का बेसब्री से इंतजार था। कारण यह था कि तीन हज़ार दो सौ सोने की सलाखों से अधिक, यूके गोल्ड भंडार से लगभग चौंसठ टन के कुल वजन के साथ तैंतालीस किलोग्रामग्राम वजन वाले बक्से में पैक किया गया, नीचे तक गया। क्रूजर ने उससे पहले मौजूद सभी रिकॉर्डों को तोड़ दिया, फिर भी एक भी जहाज ने इतना सोना नहीं उड़ाया। यूके के लिए खाद्य और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के भुगतान के रूप में अमेरिकी सरकार के लिए सोने का इरादा था। यह ध्यान देने योग्य है कि युद्ध के दौरान, वाशिंगटन एंटेंटे देशों और तटस्थ शक्तियों की आपूर्ति में बहुत समृद्ध था, और एक देनदार से एक वैश्विक लेनदार में बदल गया, क्योंकि युद्धरत शक्तियों को अमेरिकी आपूर्ति के लिए सोने में भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया था, और संयुक्त राज्य से ऋण भी लिया था। इस जहाज का नुकसान ब्रिटिश वित्त पर भारी पड़ा। जल्द ही जहाज की मृत्यु के स्थान पर गोताखोर आ गए। पानी के नीचे पहले वंश ने डूबे क्रूजर का पता लगाने और आगे के काम की योजना की रूपरेखा तैयार करने की अनुमति दी। जहाज बंदरगाह की तरफ स्थित था, इसका ऊपरी डेक समुद्र की सतह से केवल अट्ठारह मीटर था। पानी के भीतर काम के लिए एक विशेष जहाज विशेष उपकरण के साथ पहुंचा। चूंकि एडमिरल्टी को स्वयं जहाज को बचाने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन केवल इसकी सामग्री प्राप्त करने के लिए, विस्फोटक का उपयोग करने का निर्णय लिया गया था। काम की शुरुआत सफल रही, कई बक्से उठाए गए। लेकिन फिर एक तूफान आया जो पूरे एक सप्ताह तक चला। जब बचाव दल "लॉरेंटिक" में लौट आए, तो वे एक उदास दृष्टि से इंतजार कर रहे थे। तूफान की लहरों के प्रहार के तहत, पोत के पतवार को एक समझौते में बदल दिया गया था, जिसके माध्यम से गोताखोरों ने अपने पहले खोज को एक दरार में बदल दिया। जहाज भी स्थानांतरित हो गया और तीस मीटर की गहराई तक डूब गया। जब गोताखोरों ने खजाने के लिए अपना रास्ता साफ किया, तो वे यह जानकर हैरान रह गए कि सारा सोना गायब हो गया था। यह पता चला कि तूफान की कार्रवाई के तहत क्रूजर शीथिंग फैल गया, सभी सोना नीचे गिर गया और कहीं न कहीं, स्टील के टुकड़ों के नीचे था। नतीजतन, काम में जोरदार देरी हुई। विस्फोटकों की मदद से गोताखोरों ने अपना रास्ता बनाया, सोने की तलाश में। एक हज़ार नौ सौ सत्रह के पतन में, एक तूफान की अवधि की शुरुआत के कारण काम अस्थायी रूप से बाधित हो गया था। चूंकि अमेरिका ने एंटेंट के किनारे युद्ध में प्रवेश किया था, इसलिए काम को पश्चात की अवधि के लिए स्थगित कर दिया गया था। केवल एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में, बचाव जहाज फिर से क्रूजर की मृत्यु के स्थान पर पहुंच गया। और फिर से गोताखोरों को फिर से शुरू करना पड़ा। अब उन्हें पत्थरों और रेत को साफ करना था, जो एक घने द्रव्यमान में संकुचित थे और सीमेंट के समान थे। विस्फोटकों का उपयोग करना असंभव था, सोना अंततः सो जाएगा। क्रॉबर और होसेस का उपयोग करने वाले गोताखोर, जिनके माध्यम से उच्च दबाव में पानी की आपूर्ति की गई थी, "सीमेंट" के टुकड़े तोड़ दिए और उन्हें सतह पर भेज दिया। परिणामस्वरूप, एक हज़ार नौ सौ चौबीस वर्ष तक काम जारी रहा। खोज के दौरान, एक विशाल महासागर लाइनर को सचमुच टुकड़ों में काट दिया गया और समुद्र के तल के साथ खींच लिया गया। पूरी खोज अवधि के दौरान, गोताखोरों ने पाँच हज़ार से अधिक गोता लगाया और लगभग सारा सोना ब्रिटिश खजाने को लौटा दिया। ब्रिटिश सहायक क्रूजर "लॉरेंटिक" अप्रतिबंधित पनडुब्बी युद्ध के पहले पांच दिनों में, जिसे आधिकारिक तौर पर जनवरी इकतीस पर एक्सएनयूएमएक्स घोषित किया गया था, एंटेंटे देशों के एक्सएनयूएमएक्स जहाज और एक अमेरिकी सहित तटस्थ शक्तियां अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर में पनडुब्बियों द्वारा डूब गईं थीं। फरवरी में एक हज़ार नौ सौ सत्रह और साठ के बीच, जर्मन पनडुब्बियों ने तटस्थ देशों से छः जहाजों सहित बारह जहाजों को भर दिया। फरवरी में सतहत्तर से तेरह तक की अवधि के दौरान, जर्मनों ने एंटेंट देशों और तटस्थ राज्यों के और भी अधिक व्यापारी जहाज डूबे - तेरह। उन्नीस और छियानवे फरवरी के बीच, जर्मन बीस जहाज से डूब गए। फरवरी छब्बीस से मार्च इकहत्तर तक, जर्मन पनडुब्बियों ने सत्ताईस जहाजों को भर दिया। एक हज़ार नौ सौ सत्रह के पहले तीन महीनों में, जर्मन पनडुब्बी सात सौ अट्ठाईस एक एक सौ अड़सठ टन के कुल विस्थापन के साथ शून्य जहाज डूब गए। परिणामस्वरूप, औसतन जर्मन इन महीनों के दौरान प्रति दिन आठ जहाजों को डुबो देते हैं। सच है, उनके नुकसान में भी वृद्धि हुई है - तीन महीने में एक्सएनयूएमएक्स पनडुब्बियां। हालांकि, नई पनडुब्बियों के निर्माण की गति भी बढ़ गई और जर्मनी में इसी अवधि के लिए एक्सएनयूएमएक्स पनडुब्बी जहाज का निर्माण किया। मुख्य समस्या अब प्रशिक्षित कर्मियों की कमी थी।
मऊ जनपद के जिलाधिकारी अरुण कुमार की अध्यक्षता में बाढ़ पूर्व तैयारियों के संबंध में जनपद स्तरीय फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की तीसरी बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक के दौरान सहायक अभियंता सिंचाई विभाग ने बताया कि जनपद में बांधो की कुल संख्या 11 है, जिनमें से सिंचाई खंड मऊ के 9 एवम् बाढ़ खंड आजमगढ़ के 2 बांध शामिल है। इन समस्त बांधों का मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य संपन्न हो चुका है। जनपद मुख्यालय पर एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष की भी स्थापना की गई है, जिस का टोल फ्री नंबर 0547-2220707 है। इसके अलावा सिंचाई खंड मऊ एवं बाढ़ खंड आजमगढ़ में एक-एक बाढ़ चौकियां भी स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रिजर्व स्टॉक के रूप में ईसी बैग 53000,नायलान क्रेट 1676, मिर्जापुर स्टोन बॉर्डर 100 घन मीटर, जीआई वायर क्रैट 100,जियो बैग 2000 एवं गैवियान रोप 50 की मात्रा में रिजर्व के रूप में रखे गए हैं। बाढ़ से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु कर्मचारियों की 3 शिफ्टों में ड्यूटी लगा दी गई है, जो 24 घंटे अनवरत क्रियाशील रहेगी। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ से बचाव से संबंधित समस्त विभागों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान पशुपालन विभाग द्वारा निर्धारित कार्यों यथा पशुओं का टीकाकरण, बाढ़ के दौरान भूसा एवं हरे चारे की व्यवस्था आदि की तैयारियों के संबंध में संतोषजनक जवाब ना देने पर जिलाधिकारी ने डिप्टी सीवीओ का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी को छोटे गैस सिलेंडरों की पर्याप्त मात्रा रिजर्व स्टॉक में रखने को भी कहा। साथ ही केरोसीन का एलॉटमेंट अभी तक नहीं होने पर पत्राचार कर इस संबंध में सारी तैयारियां बाढ़ से पूर्व ही कर लेने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के अधिशासी अधिकारियों को जलमग्न क्षेत्रों में वर्षा के पानी के निकालने के लिए पंपों, विद्युत एवं डीजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायती राज विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित ग्रामों में समय से सैनिटाइजेशन कराने एवं नालियों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा। बाढ़ के दौरान जन सामान्य को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी को बाढ़ से प्रभावित गांवो में कुल हैंडपंपों की गणना करने एवं खराब हैंडपंप की मरम्मत आदि कार्य को पूर्ण करते हुए कल तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सिंचाई खंड मऊ एवं बाढ़ खंड आजमगढ़ के अधिशासी अभियंताओं को बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई खंड मऊ द्वारा अभी भी कुछ बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य पूर्ण ना होने पर कारण सहित लिखित रूप में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। ज्ञातव्य है की निरीक्षणों के दौरान जिला अधिकारी ने बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य को हर हाल में 30 जून तक पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने बाढ़ के दौरान शरणालय एवं बाढ़ चौकियों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश संबंधित उप जिलाधिकारियों को दिए। उन्होंने बाढ़ के दौरान सिर्फ बड़ी नावों का ही प्रयोग करने को कहा। छोटी नाव का प्रयोग किसी भी हालत में न करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। दोहरीघाट के निकट गोठा में सड़क की अत्यंत खराब स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने इस संबंध में शासन स्तर से पत्राचार करते हुए उसे ठीक कराने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से संबंधित विद्युत,चिकित्सा, पुलिस,राजस्व एवं लोक निर्माण विभाग को भी उनके लिए निर्धारित कार्यों को बाढ़ से पूर्व ही पूर्ण करने को कहा, जिससे बाढ़ के दौरान किसी भी विषम परिस्थिति से तत्काल निपटा जा सके। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी श्री प्रशांत नागर,नगर मजिस्ट्रेट श्री नीतीश कुमार सिंह सहित फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।
मऊ जनपद के जिलाधिकारी अरुण कुमार की अध्यक्षता में बाढ़ पूर्व तैयारियों के संबंध में जनपद स्तरीय फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप की तीसरी बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक के दौरान सहायक अभियंता सिंचाई विभाग ने बताया कि जनपद में बांधो की कुल संख्या ग्यारह है, जिनमें से सिंचाई खंड मऊ के नौ एवम् बाढ़ खंड आजमगढ़ के दो बांध शामिल है। इन समस्त बांधों का मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य संपन्न हो चुका है। जनपद मुख्यालय पर एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष की भी स्थापना की गई है, जिस का टोल फ्री नंबर पाँच सौ सैंतालीस-बाईस लाख बीस हज़ार सात सौ सात है। इसके अलावा सिंचाई खंड मऊ एवं बाढ़ खंड आजमगढ़ में एक-एक बाढ़ चौकियां भी स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रिजर्व स्टॉक के रूप में ईसी बैग तिरेपन हज़ार,नायलान क्रेट एक हज़ार छः सौ छिहत्तर, मिर्जापुर स्टोन बॉर्डर एक सौ घन मीटर, जीआई वायर क्रैट एक सौ,जियो बैग दो हज़ार एवं गैवियान रोप पचास की मात्रा में रिजर्व के रूप में रखे गए हैं। बाढ़ से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगा दी गई है, जो चौबीस घंटाटे अनवरत क्रियाशील रहेगी। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ से बचाव से संबंधित समस्त विभागों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान पशुपालन विभाग द्वारा निर्धारित कार्यों यथा पशुओं का टीकाकरण, बाढ़ के दौरान भूसा एवं हरे चारे की व्यवस्था आदि की तैयारियों के संबंध में संतोषजनक जवाब ना देने पर जिलाधिकारी ने डिप्टी सीवीओ का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी को छोटे गैस सिलेंडरों की पर्याप्त मात्रा रिजर्व स्टॉक में रखने को भी कहा। साथ ही केरोसीन का एलॉटमेंट अभी तक नहीं होने पर पत्राचार कर इस संबंध में सारी तैयारियां बाढ़ से पूर्व ही कर लेने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के अधिशासी अधिकारियों को जलमग्न क्षेत्रों में वर्षा के पानी के निकालने के लिए पंपों, विद्युत एवं डीजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायती राज विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित ग्रामों में समय से सैनिटाइजेशन कराने एवं नालियों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा। बाढ़ के दौरान जन सामान्य को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी को बाढ़ से प्रभावित गांवो में कुल हैंडपंपों की गणना करने एवं खराब हैंडपंप की मरम्मत आदि कार्य को पूर्ण करते हुए कल तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सिंचाई खंड मऊ एवं बाढ़ खंड आजमगढ़ के अधिशासी अभियंताओं को बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई खंड मऊ द्वारा अभी भी कुछ बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य पूर्ण ना होने पर कारण सहित लिखित रूप में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। ज्ञातव्य है की निरीक्षणों के दौरान जिला अधिकारी ने बांधों के मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य को हर हाल में तीस जून तक पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने बाढ़ के दौरान शरणालय एवं बाढ़ चौकियों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश संबंधित उप जिलाधिकारियों को दिए। उन्होंने बाढ़ के दौरान सिर्फ बड़ी नावों का ही प्रयोग करने को कहा। छोटी नाव का प्रयोग किसी भी हालत में न करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। दोहरीघाट के निकट गोठा में सड़क की अत्यंत खराब स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने इस संबंध में शासन स्तर से पत्राचार करते हुए उसे ठीक कराने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से संबंधित विद्युत,चिकित्सा, पुलिस,राजस्व एवं लोक निर्माण विभाग को भी उनके लिए निर्धारित कार्यों को बाढ़ से पूर्व ही पूर्ण करने को कहा, जिससे बाढ़ के दौरान किसी भी विषम परिस्थिति से तत्काल निपटा जा सके। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी श्री प्रशांत नागर,नगर मजिस्ट्रेट श्री नीतीश कुमार सिंह सहित फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप के समस्त सदस्य उपस्थित रहे।
भारतीय टेक कंपनियों में पूंजी लगाना निश्चित रूप से बेहद आकर्षक है। इन दिनों टेक कंपनियों में विदेशी धन की बाढ़ आ गई है। ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अभी हाल में रिकॉर्ड 26 हजार 797 करोड़ रुपए जुटाए हैं। फूड डिलीवरी कंपनी जोमेटो के शेयर ओवर सब्सक्राइब्ड रहे। पेमेंट कंपनी पेटीएम भी जल्द बाजार में आने वाली है। दरअसल, चीन के प्रति झुकाव कम होने से भारत में नए निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विदेशियों के लिए चीन के मुकाबले भारत अधिक युवा और खुला है। लेकिन, पास से देखने पर वह इस पैमाने पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता है। कुछ खूबियों के बावजूद यहां कारोबार चलाने में कई मुश्किलें हैं। आजीविका कमाने के लिए भारत कठिन जगह है। छोटी सी किराना दुकान के हर संचालक को इतनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है कि अमीर देशों के एमबीए शिक्षित मैनेजर धराशायी हो जाएं। फिर भी, भारत का कठिन कारोबारी माहौल एक अलग किस्म का व्यावसायिक जोशखरोश और प्रेरक स्थिति पैदा करता है। इसकी झलक उसके अच्छे स्टार्टअप में दिखाई देती है। बेंगलुरू के एक टेक इन्वेस्टर कहते हैं, भारत में कंप्यूटिंग की प्रतिभा पेटेंट स्तर की टेक्नोलॉजी की बजाय डिजाइन में है। यदि वेंचर कैपिटल जुड़ जाए और तकदीर साथ दे तो ऐसी कंपनी सामने आती है जो भारत और उसके बाहर प्रतिस्पर्धी हो सकती है। ध्यान खींचने वाली भारतीय टेक कंपनियां दो किस्म की हैं। पहली- अमीर देशों की कंपनियों के लिए सामान्य कामकाज करती हैं। इस श्रेणी में बड़े नाम हैं, इंफोसिस और टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विस। वे टेक्नोलॉजी से चलने वाली मध्यस्थ कंपनियां हैं। दूसरे तरह की कंपनियां अमेरिकी या चीनी टेक्नोलॉजी कारोबार के स्थानीय संस्करण हैं। उनकी मौजूदगी अपने बाजार में है। जैसे कि फ्लिपकार्ट भारतीय अमेजन है, ओला भारतीय उबर है और पेटीएम भारतीय अलीपे है। इस वक्त ऐसी कंपनियों के लिए बाजार में बहुत उत्साह है। नए निवेशक ऐसी कंपनियों को खरीदकर खुश हैं। उनकी सोच है, यदि कोई बिजनेस मॉडल बाहर पैसा बना सकता है तो वह भारत में उनके लिए भी पैसा कमा सकता है। इस हलचल के बीच सवाल उठता है क्या ऐसा संभव है। अमेजन में काम कर चुके दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने 2007 में फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी। उस समय ई-कॉमर्स के बाजार में बहुत गुंजाइश थी। 2013 में अमेजन ने स्वयं भारतीय बाजार में दस्तक दी। इस बीच पुरानी भारतीय कंपनियों को इस तथ्य का अहसास हुआ कि नई कंपनियां उनके उपभोक्ता फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ा सकती हैं। रिलायंस ने टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड में भारी निवेश किया है। उसके पास सुपरमार्केट का बड़ा नेटवर्क है। भारतीय बिजनेस में खासतौर से पुराना अनुभव बड़ी ताकत है। सरकारी नियम-कायदों को अपने पक्ष में करने की क्षमता के मामले में पुराने कारोबारी आगे हैं। निश्चित रूप से भारत के साथ कुछ खूबियां भी जुड़ी हैं। कंप्यूटिंग और व्यावसायिक प्रतिभा के कारण देश वेंचर केपिटल के लिए स्वाभाविक जगह है। यहां बदलाव लाने वाली नई कंपनियों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। लेकिन, वेंचर कैपिटल में आने वाला धन मौलिकता को आगे नहीं बढ़ाता है। हॉलीवुड प्रोड्यूसर के समान वेंचर केपिटल भी पुरानी हिट फिल्मों पर दांव लगाते हैं। भारत में धन कमाने की चमकीली संभावनाएं हैं पर केवल कुछ लोग ही उससे फायदा उठा सकते हैं। चीन के 7 लाख 44 हजार रुपए की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति औसत आय वर्तमान मूल्यों के अनुसार एक लाख 48 हजार रुपए से अधिक है। औसत आंकड़ों में भारत के अमीरों और गरीबों के बीच का अंतर छिप जाता है। देश का अधिकतर वर्कफोर्स औपचारिक रोजगार में नहीं है। उसकी आय औसत से भी कम है। कभी-कभार प्रभावशाली जी़डीपी दर के बावजूद भारत चीन जैसे तेज आर्थिक विकास के रास्ते पर नहीं चल रहा है। उसका सक्रिय बाजार अपेक्षाकृत बहुत छोटा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भारतीय टेक कंपनियों में पूंजी लगाना निश्चित रूप से बेहद आकर्षक है। इन दिनों टेक कंपनियों में विदेशी धन की बाढ़ आ गई है। ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अभी हाल में रिकॉर्ड छब्बीस हजार सात सौ सत्तानवे करोड़ रुपए जुटाए हैं। फूड डिलीवरी कंपनी जोमेटो के शेयर ओवर सब्सक्राइब्ड रहे। पेमेंट कंपनी पेटीएम भी जल्द बाजार में आने वाली है। दरअसल, चीन के प्रति झुकाव कम होने से भारत में नए निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विदेशियों के लिए चीन के मुकाबले भारत अधिक युवा और खुला है। लेकिन, पास से देखने पर वह इस पैमाने पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता है। कुछ खूबियों के बावजूद यहां कारोबार चलाने में कई मुश्किलें हैं। आजीविका कमाने के लिए भारत कठिन जगह है। छोटी सी किराना दुकान के हर संचालक को इतनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है कि अमीर देशों के एमबीए शिक्षित मैनेजर धराशायी हो जाएं। फिर भी, भारत का कठिन कारोबारी माहौल एक अलग किस्म का व्यावसायिक जोशखरोश और प्रेरक स्थिति पैदा करता है। इसकी झलक उसके अच्छे स्टार्टअप में दिखाई देती है। बेंगलुरू के एक टेक इन्वेस्टर कहते हैं, भारत में कंप्यूटिंग की प्रतिभा पेटेंट स्तर की टेक्नोलॉजी की बजाय डिजाइन में है। यदि वेंचर कैपिटल जुड़ जाए और तकदीर साथ दे तो ऐसी कंपनी सामने आती है जो भारत और उसके बाहर प्रतिस्पर्धी हो सकती है। ध्यान खींचने वाली भारतीय टेक कंपनियां दो किस्म की हैं। पहली- अमीर देशों की कंपनियों के लिए सामान्य कामकाज करती हैं। इस श्रेणी में बड़े नाम हैं, इंफोसिस और टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विस। वे टेक्नोलॉजी से चलने वाली मध्यस्थ कंपनियां हैं। दूसरे तरह की कंपनियां अमेरिकी या चीनी टेक्नोलॉजी कारोबार के स्थानीय संस्करण हैं। उनकी मौजूदगी अपने बाजार में है। जैसे कि फ्लिपकार्ट भारतीय अमेजन है, ओला भारतीय उबर है और पेटीएम भारतीय अलीपे है। इस वक्त ऐसी कंपनियों के लिए बाजार में बहुत उत्साह है। नए निवेशक ऐसी कंपनियों को खरीदकर खुश हैं। उनकी सोच है, यदि कोई बिजनेस मॉडल बाहर पैसा बना सकता है तो वह भारत में उनके लिए भी पैसा कमा सकता है। इस हलचल के बीच सवाल उठता है क्या ऐसा संभव है। अमेजन में काम कर चुके दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने दो हज़ार सात में फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी। उस समय ई-कॉमर्स के बाजार में बहुत गुंजाइश थी। दो हज़ार तेरह में अमेजन ने स्वयं भारतीय बाजार में दस्तक दी। इस बीच पुरानी भारतीय कंपनियों को इस तथ्य का अहसास हुआ कि नई कंपनियां उनके उपभोक्ता फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ा सकती हैं। रिलायंस ने टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड में भारी निवेश किया है। उसके पास सुपरमार्केट का बड़ा नेटवर्क है। भारतीय बिजनेस में खासतौर से पुराना अनुभव बड़ी ताकत है। सरकारी नियम-कायदों को अपने पक्ष में करने की क्षमता के मामले में पुराने कारोबारी आगे हैं। निश्चित रूप से भारत के साथ कुछ खूबियां भी जुड़ी हैं। कंप्यूटिंग और व्यावसायिक प्रतिभा के कारण देश वेंचर केपिटल के लिए स्वाभाविक जगह है। यहां बदलाव लाने वाली नई कंपनियों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। लेकिन, वेंचर कैपिटल में आने वाला धन मौलिकता को आगे नहीं बढ़ाता है। हॉलीवुड प्रोड्यूसर के समान वेंचर केपिटल भी पुरानी हिट फिल्मों पर दांव लगाते हैं। भारत में धन कमाने की चमकीली संभावनाएं हैं पर केवल कुछ लोग ही उससे फायदा उठा सकते हैं। चीन के सात लाख चौंतालीस हजार रुपए की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति औसत आय वर्तमान मूल्यों के अनुसार एक लाख अड़तालीस हजार रुपए से अधिक है। औसत आंकड़ों में भारत के अमीरों और गरीबों के बीच का अंतर छिप जाता है। देश का अधिकतर वर्कफोर्स औपचारिक रोजगार में नहीं है। उसकी आय औसत से भी कम है। कभी-कभार प्रभावशाली जी़डीपी दर के बावजूद भारत चीन जैसे तेज आर्थिक विकास के रास्ते पर नहीं चल रहा है। उसका सक्रिय बाजार अपेक्षाकृत बहुत छोटा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हमीरपुर। बीती 28 जून को यमुना नदी में उतराते मिले मछुवारे के शव के मामले में आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मृतक की मां ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। सदर कोतवाली क्षेत्र के भिलावां वार्ड निवासी संगीता देवी ने एसपी को दिए पत्र में बताया कि बीते 26 जून को उसके पुत्र अभिषेक निषाद को घर से मोहल्ले के जीतू उर्फ ज्ञानी, मिड़वा व कैलाश निषाद अपने साथ ले गए थे। भिलावां ठेका में उसे शराब पिलाई और इसके बाद अमित निषाद व अरुण सिंह ने मिलकर मारपीट की। बाद में यमुना नदी में डुबोकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों का 5-6 दिन पहले पुत्र से रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बारे में पुत्र ने बताया था। पीड़ित परिजनों ने उक्त सभी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। हमीरपुर। पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा ने जिले के अलग-अलग थानों व अन्य स्थानों में तैनात पुलिस कर्मियों को इधर से उधर किया है। पुलिस लाइन से 36 सिपाहियों को अलग-अलग थाने व यूपी 112 की तैनाती दी गई है। इसके साथ ही सदर कोतवाली से दो, राठ कोतवाली से तीन, सुमेरपुर से एक, सिसोलर के एक, मौदहा से एक, यूपी 112 से चार, पैरवी सेल से एक, जलालपुर थाने से एक, कुरारा से एक, जरिया से दो, ललपुरा से एक व डीसीआरबी से एक पुलिस कर्मी को स्थानांतरित करके दूसरे स्थान पर भेजा गया है।
हमीरपुर। बीती अट्ठाईस जून को यमुना नदी में उतराते मिले मछुवारे के शव के मामले में आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मृतक की मां ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। सदर कोतवाली क्षेत्र के भिलावां वार्ड निवासी संगीता देवी ने एसपी को दिए पत्र में बताया कि बीते छब्बीस जून को उसके पुत्र अभिषेक निषाद को घर से मोहल्ले के जीतू उर्फ ज्ञानी, मिड़वा व कैलाश निषाद अपने साथ ले गए थे। भिलावां ठेका में उसे शराब पिलाई और इसके बाद अमित निषाद व अरुण सिंह ने मिलकर मारपीट की। बाद में यमुना नदी में डुबोकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों का पाँच-छः दिन पहले पुत्र से रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बारे में पुत्र ने बताया था। पीड़ित परिजनों ने उक्त सभी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। हमीरपुर। पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा ने जिले के अलग-अलग थानों व अन्य स्थानों में तैनात पुलिस कर्मियों को इधर से उधर किया है। पुलिस लाइन से छत्तीस सिपाहियों को अलग-अलग थाने व यूपी एक सौ बारह की तैनाती दी गई है। इसके साथ ही सदर कोतवाली से दो, राठ कोतवाली से तीन, सुमेरपुर से एक, सिसोलर के एक, मौदहा से एक, यूपी एक सौ बारह से चार, पैरवी सेल से एक, जलालपुर थाने से एक, कुरारा से एक, जरिया से दो, ललपुरा से एक व डीसीआरबी से एक पुलिस कर्मी को स्थानांतरित करके दूसरे स्थान पर भेजा गया है।
यापनीयोंका प्रदेय यापनीय सम्प्रदायने आरम्भिक शताब्दियों में ही जन्म लेकर लगभग १४वीं शताब्दी तक जन साहित्यको अभिवृद्ध व जैन सस्कृतिको विकसित किया है। इसके शिलालेखीय उल्लेख आरम्भिक शतादियोसे ही मिलते हैं । यह उदारचेता सघ अनेकान्तमयी जैन संस्कृतिका परिपालक रहा है। यह कैसे लप्त हो गया यह चिन्तनीय है। इस बिलप्त सम्प्रदायका जैन साहित्य और संस्कृति के विकासमें अविस्मरणीय योगदान है । आचार और विचार दोनों ही दष्टियोंसे दिगम्बरोंसे अधिक मेल खानेसे तथा दिगम्बर यतियोंके मध्य इनका निवास होनेके कारण इनका साहित्य प्राय दिगम्बर साहित्य में अन्तर्भक्त हो गया जान पडता है। यापनीयोंके प्रदेयोंका हम मैद्धातिक साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टियोसे यहाँ सपेपमें विमर्श करते हैं। धार्मिक - जैन मनिकी साधना कठोर साधना है। जैन मुनि आत्माभिमुख होता है। इस आत्माभिमखताम तेहका भान बिसर जाता है। आत्माकी लगनमें बाह्य ममताएँ स्वत छूट जाती है। वह इतना आत्मबल सचित कर लेता है कि भीषण उपसर्गों और परीषहोको निर्विकार भाव से सहन करनेमें समर्थ हो जाता है। उत्कट बलसे रहित मुनियोके लिए इस कठोर मार्ग में स्खलनाओकी भी संभावनाए रहती है। भीषण दुर्भिक्ष आदि कारणोंसे इस आदर्श कठोर साधनामें शिथिलाचारिताने प्रवेश किया । शिथिलाचारिताका प्रवश हो स प्रदायभेदकी जड है । सम्प्रदायभेद जब पनप रहा था साधुओका एक समुदाय भगवान महावीरके आदर्श मार्गम किचित भी सरलताका प्रवेश वर्ज्य मान रहा था तो दूसरा समुदाय भीषण परिस्थितियोम शारीरिक सहननको मदवा में कुछ परिवर्तनको अनिवार्य मान रहा था। अपनी अपनी मान्यताके आग्रहन उनमें कटटरसाका समावेश कर दिया था । इन दोनों मान्यताओके बीचमें एक ऐसा भी साबु समुदाय था जिसने अहिंसक भगवान महावीरके तोर्थ के साथओको इस वचारिक हिंसाको रोकना चाहा। दोनों मान्यताओंमें समन्वय करना चाहा । उ होने एक ओर महावोर द्वारा उपविष्ट साधना मार्गको उत्सर्ग स्वीकार किया साथ हो परिवर्तित परिस्थितियोंमें समयको देखते हुए शारीरिक सहननका विचार कर अशक्त साधुओके लिए कुछ अपवाद मार्गको भी २५४ यापनीय और उनका साहित्य स्वीकार कर लिया। कट्टरता और असहिष्णताको त्याग कर एकीकरणका मार्ग प्रशस्त किया। समर्थ साधुके लिए चारित्रको दढतापूर्वक पालनेका ही उपदेश दिया अपवाद अनिवाय एवं विशिष्ट परिस्थितियोंमे मान्य किये गये। अपवाद मार्ग कहकर शिथिलाचारके अनावश्यक प्रवेशकी भी रोक दिया साथ ही अशक्तोंके लिए मुनिद्वार को बिल्कुल बद भी नहीं किया । यह उदारता सम्प्रदाय बापनीय सम्प्रदाय था। पर साम्प्रदायिक विद्वेषोंमें संघर्षों में इसकी उदारताको कही भी प्रश्रय नहीं मिला। दिगम्बरोने इसे जैनरभास कहा श्वेताम्बरोने उपेक्षासे मुँह फेर लिया । इस सम्प्रदायके जिसने भी आचार्य ज्ञात हुए है उनके साहित्यसे स्पष्ट है कि इन साधुओने कही भी अपने सम्प्रदाय आदिका उल्लेख नही किया है। साथ ही न तो इनके साहित्यमे कही भी अपनेसे विपरीत मायतावालोके प्रति आक्रोश या आक्षेप ही प्राप्त होता है। वे अपनी मान्यताओका भी उल्लेख करनेसे बचे है । उदाहरणार्थ भगवती आराधना व बिजयोदयामे कही स्पष्टत स्त्रीमुक्ति या केवलिभुक्तिका विधान नहीं है । यही बात स्वयभूके विषयम है। उन्होने तो अपने हरिवशपुराणको स्वसमय और परसमय दोनो विचारोको सहन करने वाली कहा है । पारभिय पुण हरिवसकहा ससमय-परसमयविचारसहा आचाय कुन्दकुदने नग्न मार्गके अतिरिक्त शेष मार्गोंको उमाग कहा है पर यापनीय उसे उभाग न कहकर अपवादमाग कहते हैं । यद्यपि भगवती आराधना और विजयोदयासे स्पष्ट है कि ये भी पूर्ण सयमके पालनके लिए अचलताको आवश्यक मानते हैं। इसके उपरान्त भी विजयोदयामे आचार्य कुन्दकुन्द व उनको गाथाओका प्रमाणरूपमे उल्लेख है । सिद्धसेन दिवाकर भी आचाय कुन्दकुन्दसे प्रभावित रहे हैं। अतिवादी प्रवृत्तियोसे बचनके कारण ही न तो ये दिगम्बरोको भाति आगम साहित्यसे वंचित रहे हैं और न इत्रताम्बरोकी भाँति इनका आगम-साहित्य शिथिलाचारकी पुष्टिका साधन बना है। जहाँ इन्होने सकलित ११ अगोको प्रमाण माना है वहाँ दष्टिवादके अशभत षटखण्डागमको भी शिरोषाय किया है। सचित ज्ञानराशिको एकाएक छोड नही दिया है। उदारतावादी दृष्टिकोण होन पर भी इनका चारित्र दिगम्बर यतियोस कथमपि न्यून नहीं है । भगवती आराधना विजयोदया और मलाचारके पारायणस स्पष्ट है कि आचरणमें शिथिलता इन्हें इष्ट नही थी । ये आचाय स्वयं चारित्रकी प्रतिमूर्ति रहे हैं। पाल्यकीर्तिके समाविमरणका स्मारक शिलालेख प्राप्त होता है तथा सिद्धसेन आदि मुनियोंके प्राप्त विवरणोंस उनके निर्मल चारित्रका परिचय मिलता है।
यापनीयोंका प्रदेय यापनीय सम्प्रदायने आरम्भिक शताब्दियों में ही जन्म लेकर लगभग चौदहवीं शताब्दी तक जन साहित्यको अभिवृद्ध व जैन सस्कृतिको विकसित किया है। इसके शिलालेखीय उल्लेख आरम्भिक शतादियोसे ही मिलते हैं । यह उदारचेता सघ अनेकान्तमयी जैन संस्कृतिका परिपालक रहा है। यह कैसे लप्त हो गया यह चिन्तनीय है। इस बिलप्त सम्प्रदायका जैन साहित्य और संस्कृति के विकासमें अविस्मरणीय योगदान है । आचार और विचार दोनों ही दष्टियोंसे दिगम्बरोंसे अधिक मेल खानेसे तथा दिगम्बर यतियोंके मध्य इनका निवास होनेके कारण इनका साहित्य प्राय दिगम्बर साहित्य में अन्तर्भक्त हो गया जान पडता है। यापनीयोंके प्रदेयोंका हम मैद्धातिक साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टियोसे यहाँ सपेपमें विमर्श करते हैं। धार्मिक - जैन मनिकी साधना कठोर साधना है। जैन मुनि आत्माभिमुख होता है। इस आत्माभिमखताम तेहका भान बिसर जाता है। आत्माकी लगनमें बाह्य ममताएँ स्वत छूट जाती है। वह इतना आत्मबल सचित कर लेता है कि भीषण उपसर्गों और परीषहोको निर्विकार भाव से सहन करनेमें समर्थ हो जाता है। उत्कट बलसे रहित मुनियोके लिए इस कठोर मार्ग में स्खलनाओकी भी संभावनाए रहती है। भीषण दुर्भिक्ष आदि कारणोंसे इस आदर्श कठोर साधनामें शिथिलाचारिताने प्रवेश किया । शिथिलाचारिताका प्रवश हो स प्रदायभेदकी जड है । सम्प्रदायभेद जब पनप रहा था साधुओका एक समुदाय भगवान महावीरके आदर्श मार्गम किचित भी सरलताका प्रवेश वर्ज्य मान रहा था तो दूसरा समुदाय भीषण परिस्थितियोम शारीरिक सहननको मदवा में कुछ परिवर्तनको अनिवार्य मान रहा था। अपनी अपनी मान्यताके आग्रहन उनमें कटटरसाका समावेश कर दिया था । इन दोनों मान्यताओके बीचमें एक ऐसा भी साबु समुदाय था जिसने अहिंसक भगवान महावीरके तोर्थ के साथओको इस वचारिक हिंसाको रोकना चाहा। दोनों मान्यताओंमें समन्वय करना चाहा । उ होने एक ओर महावोर द्वारा उपविष्ट साधना मार्गको उत्सर्ग स्वीकार किया साथ हो परिवर्तित परिस्थितियोंमें समयको देखते हुए शारीरिक सहननका विचार कर अशक्त साधुओके लिए कुछ अपवाद मार्गको भी दो सौ चौवन यापनीय और उनका साहित्य स्वीकार कर लिया। कट्टरता और असहिष्णताको त्याग कर एकीकरणका मार्ग प्रशस्त किया। समर्थ साधुके लिए चारित्रको दढतापूर्वक पालनेका ही उपदेश दिया अपवाद अनिवाय एवं विशिष्ट परिस्थितियोंमे मान्य किये गये। अपवाद मार्ग कहकर शिथिलाचारके अनावश्यक प्रवेशकी भी रोक दिया साथ ही अशक्तोंके लिए मुनिद्वार को बिल्कुल बद भी नहीं किया । यह उदारता सम्प्रदाय बापनीय सम्प्रदाय था। पर साम्प्रदायिक विद्वेषोंमें संघर्षों में इसकी उदारताको कही भी प्रश्रय नहीं मिला। दिगम्बरोने इसे जैनरभास कहा श्वेताम्बरोने उपेक्षासे मुँह फेर लिया । इस सम्प्रदायके जिसने भी आचार्य ज्ञात हुए है उनके साहित्यसे स्पष्ट है कि इन साधुओने कही भी अपने सम्प्रदाय आदिका उल्लेख नही किया है। साथ ही न तो इनके साहित्यमे कही भी अपनेसे विपरीत मायतावालोके प्रति आक्रोश या आक्षेप ही प्राप्त होता है। वे अपनी मान्यताओका भी उल्लेख करनेसे बचे है । उदाहरणार्थ भगवती आराधना व बिजयोदयामे कही स्पष्टत स्त्रीमुक्ति या केवलिभुक्तिका विधान नहीं है । यही बात स्वयभूके विषयम है। उन्होने तो अपने हरिवशपुराणको स्वसमय और परसमय दोनो विचारोको सहन करने वाली कहा है । पारभिय पुण हरिवसकहा ससमय-परसमयविचारसहा आचाय कुन्दकुदने नग्न मार्गके अतिरिक्त शेष मार्गोंको उमाग कहा है पर यापनीय उसे उभाग न कहकर अपवादमाग कहते हैं । यद्यपि भगवती आराधना और विजयोदयासे स्पष्ट है कि ये भी पूर्ण सयमके पालनके लिए अचलताको आवश्यक मानते हैं। इसके उपरान्त भी विजयोदयामे आचार्य कुन्दकुन्द व उनको गाथाओका प्रमाणरूपमे उल्लेख है । सिद्धसेन दिवाकर भी आचाय कुन्दकुन्दसे प्रभावित रहे हैं। अतिवादी प्रवृत्तियोसे बचनके कारण ही न तो ये दिगम्बरोको भाति आगम साहित्यसे वंचित रहे हैं और न इत्रताम्बरोकी भाँति इनका आगम-साहित्य शिथिलाचारकी पुष्टिका साधन बना है। जहाँ इन्होने सकलित ग्यारह अगोको प्रमाण माना है वहाँ दष्टिवादके अशभत षटखण्डागमको भी शिरोषाय किया है। सचित ज्ञानराशिको एकाएक छोड नही दिया है। उदारतावादी दृष्टिकोण होन पर भी इनका चारित्र दिगम्बर यतियोस कथमपि न्यून नहीं है । भगवती आराधना विजयोदया और मलाचारके पारायणस स्पष्ट है कि आचरणमें शिथिलता इन्हें इष्ट नही थी । ये आचाय स्वयं चारित्रकी प्रतिमूर्ति रहे हैं। पाल्यकीर्तिके समाविमरणका स्मारक शिलालेख प्राप्त होता है तथा सिद्धसेन आदि मुनियोंके प्राप्त विवरणोंस उनके निर्मल चारित्रका परिचय मिलता है।
राजमसंद। जिला बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर आखिरी दिन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष एवं सहसचिव का नामांकन जमा कराया गया। चुनाव अधिकारी गोपाल आचार्य ने बताया कि बार नौ दिसम्बर को आयोजित होने वाले एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए जयदेव कच्छावा, रामलाल जाट, भरत पालीवाल एवं कुशलेन्द्र दाधीच के नामांकन प्राप्त हुए। उपाध्यक्ष पद के लिए लक्ष्मीलाल माली, विक्रम कुमावत, राजसिंह चौधरी, सहसचिव पद पर दिनेश कुमार खटीक व पंकज जैन के नामांकन प्राप्त हुए हैं। वहीं, कोषाध्यक्ष पद पर महेश सेन, पुस्तकालय सचिव पद पर सुरेशचन्द्र आमेटा का एक-एक नामांकन ही आया है। आचार्य ने बताया कि एसोसिएशन के चुनाव नौ दिसम्बर को आयोजित किए जाएंगे। इसी दिन शाम 4:30 बजे परिणामों की घोषणा की जाएगी। साली के प्यार के लिए पत्नी की कर दी हत्या. . . जानें फिर क्या हुआ ?
राजमसंद। जिला बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर आखिरी दिन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष एवं सहसचिव का नामांकन जमा कराया गया। चुनाव अधिकारी गोपाल आचार्य ने बताया कि बार नौ दिसम्बर को आयोजित होने वाले एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए जयदेव कच्छावा, रामलाल जाट, भरत पालीवाल एवं कुशलेन्द्र दाधीच के नामांकन प्राप्त हुए। उपाध्यक्ष पद के लिए लक्ष्मीलाल माली, विक्रम कुमावत, राजसिंह चौधरी, सहसचिव पद पर दिनेश कुमार खटीक व पंकज जैन के नामांकन प्राप्त हुए हैं। वहीं, कोषाध्यक्ष पद पर महेश सेन, पुस्तकालय सचिव पद पर सुरेशचन्द्र आमेटा का एक-एक नामांकन ही आया है। आचार्य ने बताया कि एसोसिएशन के चुनाव नौ दिसम्बर को आयोजित किए जाएंगे। इसी दिन शाम चार:तीस बजे परिणामों की घोषणा की जाएगी। साली के प्यार के लिए पत्नी की कर दी हत्या. . . जानें फिर क्या हुआ ?
मैक्केन के अनुसार, मैटिस की यात्रा "यूक्रेन पर अमेरिकी नीति को समायोजित करने में मदद करेगी" और घातक हथियारों की आपूर्ति "स्थिति को स्थिर करने में मदद करेगी, जो पूरी दुनिया को उम्मीद है। " जब व्यक्तिगत राजनीतिज्ञ या राजनीतिक वैज्ञानिक कहते हैं, "पूरी दुनिया," यह समझना मुश्किल है कि वे किस तरह की दुनिया के बारे में बात कर रहे हैं। जैसा कि टीसीटी "रूस 60" पर राजनीतिक टॉक शो "1 मिनट" की पूर्व संध्या पर, मेजबान एवगेनी पोपोव ने खुद को व्यक्त किया, शायद यह "दूसरी दुनिया" है। तो यूजीन ने श्री सिटिन के बयान का जवाब दिया, जिन्होंने घोषणा की कि "पूरी दुनिया" देखती है कि मिन्स्क समझौते बर्बाद हो गए हैं और यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की उम्मीद है। मैक्केन के बयानों पर लौटते हुए . . . अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति "यूक्रेनी दिशा में पहला सही कदम उठा रहे हैं। " मैक्केन के शब्दों के आधार पर, यह माना जा सकता है कि महत्वपूर्ण मात्रा में संयुक्त राज्य अमेरिका के घातक हथियार पेंटागन के प्रमुख की यात्रा के बाद यूक्रेन जा सकते हैं। इसके कारण यूक्रेन और डोनबास के विषयों में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए समझ में आ जाएगा। इस विषय पर राज्य विभाग के प्रवक्ता की टिप्पणी (उद्धरण) रिया नोवोस्ती): हथियार कार्यक्रम के संबंध में, कोई निर्णय नहीं किया गया है। हम इस विशेष मुद्दे के संदर्भ में कुछ भी बाहर नहीं करते हैं। वर्तमान में यूक्रेन में कर्ट वॉकर है।
मैक्केन के अनुसार, मैटिस की यात्रा "यूक्रेन पर अमेरिकी नीति को समायोजित करने में मदद करेगी" और घातक हथियारों की आपूर्ति "स्थिति को स्थिर करने में मदद करेगी, जो पूरी दुनिया को उम्मीद है। " जब व्यक्तिगत राजनीतिज्ञ या राजनीतिक वैज्ञानिक कहते हैं, "पूरी दुनिया," यह समझना मुश्किल है कि वे किस तरह की दुनिया के बारे में बात कर रहे हैं। जैसा कि टीसीटी "रूस साठ" पर राजनीतिक टॉक शो "एक मिनट" की पूर्व संध्या पर, मेजबान एवगेनी पोपोव ने खुद को व्यक्त किया, शायद यह "दूसरी दुनिया" है। तो यूजीन ने श्री सिटिन के बयान का जवाब दिया, जिन्होंने घोषणा की कि "पूरी दुनिया" देखती है कि मिन्स्क समझौते बर्बाद हो गए हैं और यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की उम्मीद है। मैक्केन के बयानों पर लौटते हुए . . . अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति "यूक्रेनी दिशा में पहला सही कदम उठा रहे हैं। " मैक्केन के शब्दों के आधार पर, यह माना जा सकता है कि महत्वपूर्ण मात्रा में संयुक्त राज्य अमेरिका के घातक हथियार पेंटागन के प्रमुख की यात्रा के बाद यूक्रेन जा सकते हैं। इसके कारण यूक्रेन और डोनबास के विषयों में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए समझ में आ जाएगा। इस विषय पर राज्य विभाग के प्रवक्ता की टिप्पणी रिया नोवोस्ती): हथियार कार्यक्रम के संबंध में, कोई निर्णय नहीं किया गया है। हम इस विशेष मुद्दे के संदर्भ में कुछ भी बाहर नहीं करते हैं। वर्तमान में यूक्रेन में कर्ट वॉकर है।
चेहरे पर लडवपन झलव गया। फिर उसने गालिया बक्ते हुए सोल में में अपनी पिस्तौन निवानी और कुत्ते पर गोली चला दो । त्ते वी नाम ज़मीन में गड गयी। यह गुर्रान हुए ग्रसर की भार रगता रहा और तब अचानक ठंडा हो गया । ट्रस्ट की इमारत के प्रास-पास तथा सडक पर खड़े अफ्सरा और सैनिया ने गालोवी श्रावाज से चौंक्वर उधर दया । मरे कुत्ते पर नजर पडते ही वे अपने काम में फिर मशगूल हो गये। दूसरे हिस्सो से भी इतने दुवे गाली चलने की आवाज आती रही । अफ्भर ने काशवाई परिवार के सामने वे बगीचे का फाटक खोला । पुश्राल के रग जैस बालावाला विशालकाय अदली उसके साथ था । नानी वेरा अपना सिर ताने हुए उसकी आर बढी । येलेना निकालायेना झाडी में ही रुकी रही और दाना हाथो से अपनी चाटिया को सभाले रही । नानी वेरा के सामने अफ्सर अपनी लम्बी टागा पर जमकर तडा हो गया । नानी वा भी वद लम्बा था । अफ्सर की निस्तेज ग् झुवकर उस घने लगी। "तुम्हारा घर देखना है। हमारे साथ कौन चलेगा ?" उसने पूछा। वह सोचता था कि वह बहुत सही रूसी भाषा बालता था । उसको नजर नानी से हटकर येलेना निकातायेव्ना पर गयी जो अभी भी चाटिया थामे झाडी में खड़ी थी । अमर ने फिर नानी और दमा "हूह येलेना । इसके साथ जाओ । इसे घर दिखा दो, नानी ने क्क्श आवाज में कहा । वहु उद्विग्न मी लगती थी। "कुत्ते का मार डाला - अब ये आगे अब ये आगे क्या करगे ।' नानी वरा बोल उठी । अपनी चाटियो को अभी भी पकडे हुए येलेना निकोलायेन्ना पत्र क्यारियों से होती हुई घर की और जाने लगी। आश्चयचत्रित अफसर ने क्षण भर के लिए येलेना निकोलायेना का खा नानी का घूरने लगा । अपनी पीली भौह उठाते हुए बोला। उ तरण, चिक्ने चेहरे पर - कुलीन घर के लडने जैस चेहर पर उनके मन की चचलता झलक उठी। कुछ अजीब और अस्वाभाविक ढंग से ठमक ठमक्कर चलने हुई नानी ने घर की ओर रुख किया। अफसर और नौकर दाना जर पीछे पीछे चलने लगे । कोशेवोई परिवार के मकान में तीन कमरे थे और एक रसोईघर रसोईघर पार करने पर एक बडा-सा कमरा मिलता था जिसकी दो खिडकिया उन सडक की ओर खुलती थी जो सादोवाया सड़क के समानान्तर जाती था। यह खाने के कमरे के साथ साथ येलेना निकोलायेना का सान का कमरा भी था । उसी में एक सोपा था जिसपर भालेग सोया करता था। बादा ओर का दरवाजा एवं ऐसे कमरे में सुनता था जिसमें नियोकर कोरोस्तिलेव अपनी पत्नी और बच्चे के साथ रहा करता था। दाहिने तरफ का दरवाजा एक छोटे से कमरे में सुलता था जिसमें सुना। सोती थी। यह रमोईघर से सदा हुआ था और चपि रमाईघर का चूल्हा इसकी दीवार के पास ही था इसलिए उसकी गर्मी से कमरा बन हो गरम हो उठना था। खासवर गरमिया में तो इस छाट कमरे गरमी असा हो उठती थी। लेकिन दहात की गभी बूठी मौला क तरह नानी को भी गरमी में प्यार था। जब भी गरमी से बर हो उठती ता उग गिटी घो मान देती जो सामने ये बाग में निरंड झाडिया में ऊपर गुलती थी । अफ्सर रसोईघर में घुसा । चारो तरफ सरमरी निगाह दौड़ाते हुए वह खाने के कमरे में दाखिल हुआ । दरवाजे में से निकलते समय उसने सिर झुका लिया ताकि चौखट के साथ सिर नही टक्राये । कमरे को उसने अच्छी तरह देखा । कमरा उसे पसंद आया । दीवारो की सफेदी में वही धब्बे न थे और हर चीज़ साफ-सुथरी थी । पालिश से चमचमाते हुए पश पर घर की बनी सादी नयी चटाइया बिछी थी । मेज पर वफ़ जैसी सफेद धुली चादर बिछी थी। येलेना नियोलायेना वे साफसुघरे, उजले विछावन पर एवं के ऊपर एक छोटे-बडे, फूले फुलाये तकिये रखे थे, और उनपर जालीदार तक्यिापाश बिछे थे। खिडकिया के दासे पर फूला के गमले रग्वे थे । दरवाजा ताघत समय अफसर ने फिर सिर झुका लिया और तेजी से वोरोस्तिलेव वे कमरे में घुस गया । येलेना निकोलायेना खाने वे कमरे में हो रुकी रही । उसने अपने लम्बे, घने बालो की चाटियो में सूइया खास ली थी - उसे पता नहीं, उसने यह कब और क्से कर लिया । वह चौखट के सहारे पीछे की ओर युक्वर खडी थी । नानी वेरा, जमन के पीछे पीछे चलती रही। यह क्मरा भी जिसमे छोटी सी मेज पर लेखन सामग्री करीने से रखी थी, उसे बहुत पसद माया । भेज की बगल में टी-स्क्वेयर और ग्राफ रूल लटक रहे थे । Schön यह सतुष्ट स्वर में बोला । अचानक उसकी नजर उस सिकुडे मिवुडे बिछावन पर पड़ी, जिसपर पडे पडे येलेना निकोलायेन्ना कुछ ही देर पहले आसुआ में डूबी थी । वह तेजी से उसके निक्ट पहुंचा और कबल तथा चादर हटा मह बना अपनी दो कड़ी अगुलियो से तोशक की मुलायमित का लेने लगा। फिर वह झुक्कर कुछ सूघने लगा और तब नानी की ओर मुडा । खटमल तो नही है ? " भौंह चढाते हुए उसने पूछा ।
चेहरे पर लडवपन झलव गया। फिर उसने गालिया बक्ते हुए सोल में में अपनी पिस्तौन निवानी और कुत्ते पर गोली चला दो । त्ते वी नाम ज़मीन में गड गयी। यह गुर्रान हुए ग्रसर की भार रगता रहा और तब अचानक ठंडा हो गया । ट्रस्ट की इमारत के प्रास-पास तथा सडक पर खड़े अफ्सरा और सैनिया ने गालोवी श्रावाज से चौंक्वर उधर दया । मरे कुत्ते पर नजर पडते ही वे अपने काम में फिर मशगूल हो गये। दूसरे हिस्सो से भी इतने दुवे गाली चलने की आवाज आती रही । अफ्भर ने काशवाई परिवार के सामने वे बगीचे का फाटक खोला । पुश्राल के रग जैस बालावाला विशालकाय अदली उसके साथ था । नानी वेरा अपना सिर ताने हुए उसकी आर बढी । येलेना निकालायेना झाडी में ही रुकी रही और दाना हाथो से अपनी चाटिया को सभाले रही । नानी वेरा के सामने अफ्सर अपनी लम्बी टागा पर जमकर तडा हो गया । नानी वा भी वद लम्बा था । अफ्सर की निस्तेज ग् झुवकर उस घने लगी। "तुम्हारा घर देखना है। हमारे साथ कौन चलेगा ?" उसने पूछा। वह सोचता था कि वह बहुत सही रूसी भाषा बालता था । उसको नजर नानी से हटकर येलेना निकातायेव्ना पर गयी जो अभी भी चाटिया थामे झाडी में खड़ी थी । अमर ने फिर नानी और दमा "हूह येलेना । इसके साथ जाओ । इसे घर दिखा दो, नानी ने क्क्श आवाज में कहा । वहु उद्विग्न मी लगती थी। "कुत्ते का मार डाला - अब ये आगे अब ये आगे क्या करगे ।' नानी वरा बोल उठी । अपनी चाटियो को अभी भी पकडे हुए येलेना निकोलायेन्ना पत्र क्यारियों से होती हुई घर की और जाने लगी। आश्चयचत्रित अफसर ने क्षण भर के लिए येलेना निकोलायेना का खा नानी का घूरने लगा । अपनी पीली भौह उठाते हुए बोला। उ तरण, चिक्ने चेहरे पर - कुलीन घर के लडने जैस चेहर पर उनके मन की चचलता झलक उठी। कुछ अजीब और अस्वाभाविक ढंग से ठमक ठमक्कर चलने हुई नानी ने घर की ओर रुख किया। अफसर और नौकर दाना जर पीछे पीछे चलने लगे । कोशेवोई परिवार के मकान में तीन कमरे थे और एक रसोईघर रसोईघर पार करने पर एक बडा-सा कमरा मिलता था जिसकी दो खिडकिया उन सडक की ओर खुलती थी जो सादोवाया सड़क के समानान्तर जाती था। यह खाने के कमरे के साथ साथ येलेना निकोलायेना का सान का कमरा भी था । उसी में एक सोपा था जिसपर भालेग सोया करता था। बादा ओर का दरवाजा एवं ऐसे कमरे में सुनता था जिसमें नियोकर कोरोस्तिलेव अपनी पत्नी और बच्चे के साथ रहा करता था। दाहिने तरफ का दरवाजा एक छोटे से कमरे में सुलता था जिसमें सुना। सोती थी। यह रमोईघर से सदा हुआ था और चपि रमाईघर का चूल्हा इसकी दीवार के पास ही था इसलिए उसकी गर्मी से कमरा बन हो गरम हो उठना था। खासवर गरमिया में तो इस छाट कमरे गरमी असा हो उठती थी। लेकिन दहात की गभी बूठी मौला क तरह नानी को भी गरमी में प्यार था। जब भी गरमी से बर हो उठती ता उग गिटी घो मान देती जो सामने ये बाग में निरंड झाडिया में ऊपर गुलती थी । अफ्सर रसोईघर में घुसा । चारो तरफ सरमरी निगाह दौड़ाते हुए वह खाने के कमरे में दाखिल हुआ । दरवाजे में से निकलते समय उसने सिर झुका लिया ताकि चौखट के साथ सिर नही टक्राये । कमरे को उसने अच्छी तरह देखा । कमरा उसे पसंद आया । दीवारो की सफेदी में वही धब्बे न थे और हर चीज़ साफ-सुथरी थी । पालिश से चमचमाते हुए पश पर घर की बनी सादी नयी चटाइया बिछी थी । मेज पर वफ़ जैसी सफेद धुली चादर बिछी थी। येलेना नियोलायेना वे साफसुघरे, उजले विछावन पर एवं के ऊपर एक छोटे-बडे, फूले फुलाये तकिये रखे थे, और उनपर जालीदार तक्यिापाश बिछे थे। खिडकिया के दासे पर फूला के गमले रग्वे थे । दरवाजा ताघत समय अफसर ने फिर सिर झुका लिया और तेजी से वोरोस्तिलेव वे कमरे में घुस गया । येलेना निकोलायेना खाने वे कमरे में हो रुकी रही । उसने अपने लम्बे, घने बालो की चाटियो में सूइया खास ली थी - उसे पता नहीं, उसने यह कब और क्से कर लिया । वह चौखट के सहारे पीछे की ओर युक्वर खडी थी । नानी वेरा, जमन के पीछे पीछे चलती रही। यह क्मरा भी जिसमे छोटी सी मेज पर लेखन सामग्री करीने से रखी थी, उसे बहुत पसद माया । भेज की बगल में टी-स्क्वेयर और ग्राफ रूल लटक रहे थे । Schön यह सतुष्ट स्वर में बोला । अचानक उसकी नजर उस सिकुडे मिवुडे बिछावन पर पड़ी, जिसपर पडे पडे येलेना निकोलायेन्ना कुछ ही देर पहले आसुआ में डूबी थी । वह तेजी से उसके निक्ट पहुंचा और कबल तथा चादर हटा मह बना अपनी दो कड़ी अगुलियो से तोशक की मुलायमित का लेने लगा। फिर वह झुक्कर कुछ सूघने लगा और तब नानी की ओर मुडा । खटमल तो नही है ? " भौंह चढाते हुए उसने पूछा ।
दिल्ली ने बंगाल को पारी और 26 रन से रौंदकर रणजी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुणे। दिल्ली ने बंगाल को पारी और 26 रन से रौंदकर रणजी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश कर लिया। पहली पारी में 112 रन की महत्वपूर्ण बढ़त लेने के बाद दिल्ली के तेज गेंदबाज नवदीप सैनी और कुलवंत खेजरोलिया ने चार-चार विकेट बांटकर बंगाल को दूसरी पारी में 86 रन पर ढेर कर दिया। बंगाल ने दूसरी पारी में बहुत खराब शुरुआत की और पहले पांच विकेट 44 रनों के अंदर ही गंवा दिए। उपकप्तान सुदीप चटर्जी (21), कप्तान मनोज तिवारी (14) और विकेटकीपर श्रीवत्स गोस्वामी (17) अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। सलामी बल्लेबाज अभिषेक रमन (00) तीसरे ओवर की आखिरी गेंद पर तेज गेंदबाज विकास टोकस (1/11) का शिकार बने। इसके बाद अभिमन्यु ईश्वरन (13) और सुदीप ने दूसरे विकेट के लिए 27 रनों की छोटी साझेदारी की, लेकिन खेजरोलिया (4/40) ने ईश्वरन को आउट करके इस साझेदारी को भी तोड़ दिया। इसके बाद चटर्जी को नवदीप सैनी (4/35) ने बोल्ड कर दिया। दिल्ली ने लगातार विकेट चटकाकर बंगाल को आखिरकार 86 रनों पर ढेर कर दिया। इससे पहले दिल्ली ने दूसरे दिन के स्कोर 271 पर तीन से आगे खेलना शुरू किया और मुहम्मद शमी के छह विकेट की बदौलत 398 रनों पर ऑलआउट हो गई। कुणाल चंदेला और गौतम गंभीर के शतक के बाद तीसरे दिन हिम्मत सिंह ने भी 60 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। दिल्ली पहली पारी में 112 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त लेने में कामयाब रही थी। दिल्ली का अब फाइनल में सामना कर्नाटक और विदर्भ के बीच चल रहे सेमीफाइनल मुकाबले के विजेता से होगा।
दिल्ली ने बंगाल को पारी और छब्बीस रन से रौंदकर रणजी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुणे। दिल्ली ने बंगाल को पारी और छब्बीस रन से रौंदकर रणजी ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश कर लिया। पहली पारी में एक सौ बारह रन की महत्वपूर्ण बढ़त लेने के बाद दिल्ली के तेज गेंदबाज नवदीप सैनी और कुलवंत खेजरोलिया ने चार-चार विकेट बांटकर बंगाल को दूसरी पारी में छियासी रन पर ढेर कर दिया। बंगाल ने दूसरी पारी में बहुत खराब शुरुआत की और पहले पांच विकेट चौंतालीस रनों के अंदर ही गंवा दिए। उपकप्तान सुदीप चटर्जी , कप्तान मनोज तिवारी और विकेटकीपर श्रीवत्स गोस्वामी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। सलामी बल्लेबाज अभिषेक रमन तीसरे ओवर की आखिरी गेंद पर तेज गेंदबाज विकास टोकस का शिकार बने। इसके बाद अभिमन्यु ईश्वरन और सुदीप ने दूसरे विकेट के लिए सत्ताईस रनों की छोटी साझेदारी की, लेकिन खेजरोलिया ने ईश्वरन को आउट करके इस साझेदारी को भी तोड़ दिया। इसके बाद चटर्जी को नवदीप सैनी ने बोल्ड कर दिया। दिल्ली ने लगातार विकेट चटकाकर बंगाल को आखिरकार छियासी रनों पर ढेर कर दिया। इससे पहले दिल्ली ने दूसरे दिन के स्कोर दो सौ इकहत्तर पर तीन से आगे खेलना शुरू किया और मुहम्मद शमी के छह विकेट की बदौलत तीन सौ अट्ठानवे रनों पर ऑलआउट हो गई। कुणाल चंदेला और गौतम गंभीर के शतक के बाद तीसरे दिन हिम्मत सिंह ने भी साठ रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। दिल्ली पहली पारी में एक सौ बारह रनों की महत्वपूर्ण बढ़त लेने में कामयाब रही थी। दिल्ली का अब फाइनल में सामना कर्नाटक और विदर्भ के बीच चल रहे सेमीफाइनल मुकाबले के विजेता से होगा।
याद कीजिये जब एक बार आतंकवादियों ने रूस का विमान हाइजैक किया था तो क्या हुआ था? और आगे पढ़ना है इजराइल का विमान अपहरण पढ़ लीजिये. लेकिन भारत का एक विमान जब दिसंबर 1999 में हाइजैक किया गया था तो उस समय देश की जनता और कुछ राजनेताओं ने बहादुरी का परिचय नहीं दिया था. भारत डर गया था और वह झुक गया था. जिस सर को बड़े नाज से गीतों में उठाये फिरते हैं वह सर उस घटना में झुक गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस घटना का पूरा सच क्या था? क्योकि आप उस सच से वाकिफ नहीं हैं. इन्डियन एयरलाइन्स फ्लाईट 814 (वीटी-ईडीडब्ल्यू) (VT-EDW) का अपहरण शुक्रवार, 24 दिसम्बर 1999 को लगभग 05:30 बजे विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के कुछ ही समय बाद कर लिया गया था। जानकारी के अनुसार प्लेन को हाइजैक करने वाले आतंकवादी का नाम यह थे. आईसी-814 पर मौजूद मुख्य फ्लाईट अटेंडेंट अनिल शर्मा ने बाद में बताया कि एक नकाबपोश, चश्माधारी आदमी ने विमान को बम से उड़ा देने की धमकी दी थी और कप्तान देवी शरण को "पश्चिम की ओर उड़ान भरने" का आदेश दिया था. अपहरणकर्ता चाहते थे कि कप्तान शरण विमान को लखनऊ के ऊपर से होते हुए लाहौर की ओर ले जाएं लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने तुरंत इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया क्योंकि वे आतंकवादियों के साथ संबंध जोड़े जाने से प्रति सचेत थे. यह कहानी तो आप सभी जानते ही होंगे. लेकिन इससे आगे का सच आप आज पहली बार पढ़ने वाले हैं. तब देश के उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी विमान के रास्ते देश वापिस आ रहे थे. जब यह अपहरण हुआ तो इसकी कोई जानकारी प्रधानमंत्री जी को नहीं दी गयी थी. वह नहीं जानते थे कि देश में क्या हो रहा है. जबकि प्रधानमंत्री के विमान के पायलेट को यह सूचना दे दी गयी थी. लेकिन इस बात को कोई नहीं जानता है कि इस पायलेट को किसने मना किया था कि वह यह सुचना अटल जी को नहीं दे. इस देरी के पीछे कौन था कोई नहीं जानता है. इसके बाद विमान कई घंटों तक अमृतसर में रुका हुआ था लेकिन हमारे कमांडों वहां तक नहीं पहुँच पाते हैं. ऐसा बोला जाता है कि उनको विमान से एयरपोर्ट भेजना था लेकिन किसी भी विमान का इंतजाम नहीं हो पाया था. और जब वह सड़क के रास्ते गये तो वहां भरी जाम की वजह से देरी हो जाती है. यह बात किसी भी व्यक्ति के गले नहीं उतर पाती है कि सड़क पर जाम किसने लगवाया था? राज्य सरकार ने या अन्य किसी सरकार ने. अमृतसर से उड़कर विमान पाकिस्तान जाता है और भारत की आर्मी को देश की सरकार इसलिए पाकिस्तान नहीं भेज पाती है क्योकि अन्य पार्टियों का इस मुद्दे पर साथ नहीं मिल पा रहा था. इतना होते ही देश के प्रधानमंत्री के घर के बाहर कुछ विपक्ष के नेता सड़क पर हल्ला करने लगते हैं. इन नेताओं में वामपंथी भी शामिल थे और देश की एक बड़ी पार्टी के मुख्य नेता भी थे. सभी हल्ला करते हैं कि किसी भी हालत में सभी नागरिकों को सरकार बचाए. जो लोग बंधक थे उनको लोगों के परिवार वालों को कुछ नेता अपने साथ लेकर हल्ला करते हैं कि आतंकवादियों की सभी मांगे मानकर हमारे परिजनों को सरकार बचाए. लेकिन किसी को भी तब देश भक्ति और देशहित की बात याद नहीं आ रही थी. देश के कुछ नेता जिनका नाम नहीं लिया जा सकता है किन्तु वह उस समय विपक्ष की सरकार में थे ना जाने क्यों वह लोग इस भीड़ की अगुवाई कर रहे थे. सभी चाहते थे कि आतंवादियों को छोड़ो और उनको पैसे देकर उनके परिजनों को बचाया जाये. बीजेपी के नेता लोगों को मना रहे थे कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं. कई शहीद जवानों के परिजनों को सरकार सामने लाती है और लोगों को समझाती है कि इनके बच्चों ने अपनी जानपर खेल कर इनको पकड़ा है. लेकिन सभी लोग सिर्फ और सिर्फ यही कहते हैं कि हमारे परिजनों को बचाया जाए. इस पुरे विषय पर एक डॉक्युमेंट्री फिल्म बनी है जिसको देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर क्यों कुछ नेता और साथ ही साथ कश्मीर के भी एक नेता इस मुद्दे में काफी रूचि ले रहे थे. देश की जनता ने साहस का परिचय नहीं दिया था. वह भूल गयी थी कि इन आंतकवादियों को कैसे पकड़ा गया था जिन्हें हम आज छोड़ रहे हैं. सरकार ने सभी बंधकों को बचा लिया था. जो एक बड़ी बात कही जा सकती है. इस मामले में कुछ विपक्षी नेताओं की नीतियों पर शक होता है वह जिस तरह से हाईजेक लोगों के परिवार वालों की इस्तेमाल कर रहे थे वह भी शक के घेरे में नजर आता है. ऐसा बोला जा सकता है कि दाल में जरुर कुछ काला था जिसकी जाँच नहीं की गयी है. हमारी जनता ने भी रूस या इजराइल की तरह साहस दिखाया होता तो शायद आज पूरा विश्व हमपर गर्व कर सकता था. (यह लेख उस समय के प्रधानमंत्री के मीडिया सेल के एक पत्रकार के लेख से लिए आंकड़ों को आधार बनाकर लिखा गया है. इसका यंगिस्थान से कोई लेना देना नहीं है. यह लेखक चंद्रकांत सारस्वत के निजी विचार है.)
याद कीजिये जब एक बार आतंकवादियों ने रूस का विमान हाइजैक किया था तो क्या हुआ था? और आगे पढ़ना है इजराइल का विमान अपहरण पढ़ लीजिये. लेकिन भारत का एक विमान जब दिसंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में हाइजैक किया गया था तो उस समय देश की जनता और कुछ राजनेताओं ने बहादुरी का परिचय नहीं दिया था. भारत डर गया था और वह झुक गया था. जिस सर को बड़े नाज से गीतों में उठाये फिरते हैं वह सर उस घटना में झुक गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस घटना का पूरा सच क्या था? क्योकि आप उस सच से वाकिफ नहीं हैं. इन्डियन एयरलाइन्स फ्लाईट आठ सौ चौदह का अपहरण शुक्रवार, चौबीस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को लगभग पाँच:तीस बजे विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के कुछ ही समय बाद कर लिया गया था। जानकारी के अनुसार प्लेन को हाइजैक करने वाले आतंकवादी का नाम यह थे. आईसी-आठ सौ चौदह पर मौजूद मुख्य फ्लाईट अटेंडेंट अनिल शर्मा ने बाद में बताया कि एक नकाबपोश, चश्माधारी आदमी ने विमान को बम से उड़ा देने की धमकी दी थी और कप्तान देवी शरण को "पश्चिम की ओर उड़ान भरने" का आदेश दिया था. अपहरणकर्ता चाहते थे कि कप्तान शरण विमान को लखनऊ के ऊपर से होते हुए लाहौर की ओर ले जाएं लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने तुरंत इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया क्योंकि वे आतंकवादियों के साथ संबंध जोड़े जाने से प्रति सचेत थे. यह कहानी तो आप सभी जानते ही होंगे. लेकिन इससे आगे का सच आप आज पहली बार पढ़ने वाले हैं. तब देश के उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी विमान के रास्ते देश वापिस आ रहे थे. जब यह अपहरण हुआ तो इसकी कोई जानकारी प्रधानमंत्री जी को नहीं दी गयी थी. वह नहीं जानते थे कि देश में क्या हो रहा है. जबकि प्रधानमंत्री के विमान के पायलेट को यह सूचना दे दी गयी थी. लेकिन इस बात को कोई नहीं जानता है कि इस पायलेट को किसने मना किया था कि वह यह सुचना अटल जी को नहीं दे. इस देरी के पीछे कौन था कोई नहीं जानता है. इसके बाद विमान कई घंटों तक अमृतसर में रुका हुआ था लेकिन हमारे कमांडों वहां तक नहीं पहुँच पाते हैं. ऐसा बोला जाता है कि उनको विमान से एयरपोर्ट भेजना था लेकिन किसी भी विमान का इंतजाम नहीं हो पाया था. और जब वह सड़क के रास्ते गये तो वहां भरी जाम की वजह से देरी हो जाती है. यह बात किसी भी व्यक्ति के गले नहीं उतर पाती है कि सड़क पर जाम किसने लगवाया था? राज्य सरकार ने या अन्य किसी सरकार ने. अमृतसर से उड़कर विमान पाकिस्तान जाता है और भारत की आर्मी को देश की सरकार इसलिए पाकिस्तान नहीं भेज पाती है क्योकि अन्य पार्टियों का इस मुद्दे पर साथ नहीं मिल पा रहा था. इतना होते ही देश के प्रधानमंत्री के घर के बाहर कुछ विपक्ष के नेता सड़क पर हल्ला करने लगते हैं. इन नेताओं में वामपंथी भी शामिल थे और देश की एक बड़ी पार्टी के मुख्य नेता भी थे. सभी हल्ला करते हैं कि किसी भी हालत में सभी नागरिकों को सरकार बचाए. जो लोग बंधक थे उनको लोगों के परिवार वालों को कुछ नेता अपने साथ लेकर हल्ला करते हैं कि आतंकवादियों की सभी मांगे मानकर हमारे परिजनों को सरकार बचाए. लेकिन किसी को भी तब देश भक्ति और देशहित की बात याद नहीं आ रही थी. देश के कुछ नेता जिनका नाम नहीं लिया जा सकता है किन्तु वह उस समय विपक्ष की सरकार में थे ना जाने क्यों वह लोग इस भीड़ की अगुवाई कर रहे थे. सभी चाहते थे कि आतंवादियों को छोड़ो और उनको पैसे देकर उनके परिजनों को बचाया जाये. बीजेपी के नेता लोगों को मना रहे थे कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं. कई शहीद जवानों के परिजनों को सरकार सामने लाती है और लोगों को समझाती है कि इनके बच्चों ने अपनी जानपर खेल कर इनको पकड़ा है. लेकिन सभी लोग सिर्फ और सिर्फ यही कहते हैं कि हमारे परिजनों को बचाया जाए. इस पुरे विषय पर एक डॉक्युमेंट्री फिल्म बनी है जिसको देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर क्यों कुछ नेता और साथ ही साथ कश्मीर के भी एक नेता इस मुद्दे में काफी रूचि ले रहे थे. देश की जनता ने साहस का परिचय नहीं दिया था. वह भूल गयी थी कि इन आंतकवादियों को कैसे पकड़ा गया था जिन्हें हम आज छोड़ रहे हैं. सरकार ने सभी बंधकों को बचा लिया था. जो एक बड़ी बात कही जा सकती है. इस मामले में कुछ विपक्षी नेताओं की नीतियों पर शक होता है वह जिस तरह से हाईजेक लोगों के परिवार वालों की इस्तेमाल कर रहे थे वह भी शक के घेरे में नजर आता है. ऐसा बोला जा सकता है कि दाल में जरुर कुछ काला था जिसकी जाँच नहीं की गयी है. हमारी जनता ने भी रूस या इजराइल की तरह साहस दिखाया होता तो शायद आज पूरा विश्व हमपर गर्व कर सकता था.
दुनियाँ की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब, क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो; शोरिश से भागता हूँ, दिल ढूंढ़ता है मेरा, ऐसा सकूत जिसपर तक़रीर भी फ़िदा भी फ़िदा हो । मरता हूँ खामुशी पर ये आरजू है मेरी, दामन में कोह के एक छोटा-सा झोंपड़ा हो; आजाद फ़िक्र से हूँ, उजलत में दिन गुजारूँ, दुनियाँ के ग्रम का दिल से काँटा निकल गया हो । लज्जत सरोद की हो चिड़ियों के चहचहों में, चश्मे की शोरिशों में बाजा-सा बज रहा हो; गुल की कली चटककर पैग़ाम दे किसी का, साग़र जरा-सा गोया मुझको जहाँ-नुमा हो । हो हाथ का सिरहाना, सब्जे का हो बिछौना, शर्माये जिससे जलवत, खिलवत में वो अदा हो; मानूस इस क़दर हो सूरत से मेरी बुलबुल, नन्हे-से दिल में उसके खटका न कुछ भरा हो । सफ़अ बाँधे दोनों जानिब बूटे हरे-हरे हों, नदी का साफ़ पानी तस्वीर ले रहा हो ; हो दिल-फ़रेब ऐसा कुहसार का नजारा, पानी भी मौज बनकर उठ-उठके देखता हो । आगोश में जमीं के सोया हुआ हो सब्जा, फिर-फिरके झाड़ियों में पानी चमक रहा हो; पानी को छू रही हो झुक झुकके गुल की टहनी, जैसे हसीन कोई आईना देखता हो । मेहँदी लगाये सूरज जब शाम की दुलहन को, सुरखी लिये सुनहरी हर फूल की कबा हो; रातों को चलनेवाले रह जायें थकके जिस दम, उम्मीद उनकी मेरा टूटा हुआ दिया हो । बिजली चमक के उनको कुटिया मेरी दिखा दे, जब आस्माँ पे हरसूं बादल घिरा हुआ हो; पिछले पहर को कोयल वो सुबह की मुअज्जिन, मैं उसका हमनवा हूँ वह मेरी हमनवा हो । कानों पै हो न मेरे दैरो हरम का इहसाँ, रौजन को झोंपड़ी का मुझको सहरनुमा हो; फूलों को आये जिस दम शबनम वजू कराने, रोना मेरा बजू हो, नाला मेरी दुआ हो । इस खामुशी में जाएँ इतने बुलन्द नाले, तारों के काफ़िले को मेरी सदा दरा हो ; हर दर्दमन्द दिल को रोना मेरा रुला दे, बेहोश जो पड़े हैं, शायद उन्हें जगा दे। रब- खुदा आगोश - गोद, क्रोड़ अंजुमन सभा शोरिश शोरगुल, हलचल सकूत शांति कोह- पहाड़ उजलत - एकांत सरोद तारवाला एक बाजां झरना, सरिता सागर प्याला जिसमें दुनिया दीखे ( ईरान में जमशेद बादशाह के पास ऐसा ही प्याला था ।) गोया - मानों जहाँ-नुमा संसार दिखानेवाला जलवत - भीड़-भब्भड़, शोरगुल खिलवत - एकांत, निर्जन स्थान मानूस - मिलो हुई सफ़अ - कतार, पंक्ति जानिब - तरफ़ बूटे- पौधे, लता कुहसार - पहाड़ मौज़ - लहर कवा चोग्रा मुअज्जिन नमाज के समय अर्जा देनेवाला हमनवा - साथ गानेवाला रोजन छेद सहर-नुमा सबेरा बतानेवाला वजू नमाज के पहले हाथ-पैर धोना नाला रोकर प्रार्थना करना, बाह दरा • नगाड़ा, घंटे की आवाज (कारवाँ के निकलने के पहले का घंटा) बुलन्द ऊंचा, उच्च ए फ़सीले किश्वरे - हिन्दोस्ताँ ! चमता है तेरी पेशानी को झुककर आसमाँ ! तुझमें कुछ पैदा नहीं दैरीना-रोजी के निशाँ ! तू जवाँ है गदिशे-शांमो-सहर के दर्मियाँ ! एक जलवा था कलीमे-तूरे-सीना के लिए ! तू तजल्ली है सरापा चश्मे-बीना के लिए ! आती है नदी फ़राजे-कोह से गाती हुई, कौसर-ओ-तस्नीम की मौजों को शर्माती हुई ! आइना-सा शाहिदे- कुदरत को दिखलाती हुई, संगे-रह से गाह बचती, गाह टकराती हुई; छेड़ती जा इस इराके-दिलनशीं के साज को ए मुसाफ़िर, दिल समझता है तेरी आवाज को; लैलिये-शब खोलती है आके जब जुल्फ़े-रसा, दामने-दिल खोचती है आबशारों की सदा । वह खमोशी शाम की, जिसपर तकल्लुम हो फ़िदा ! वह दरख्तों पर तफ़क्कुर का समाँ छाया हुआ ! काँपता फिरता है क्या रंगे शफ़क़ कुहसार पर ! खुशनुमा लगता है यह गाजा तेरे रुख्सार पर !
दुनियाँ की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब, क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो; शोरिश से भागता हूँ, दिल ढूंढ़ता है मेरा, ऐसा सकूत जिसपर तक़रीर भी फ़िदा भी फ़िदा हो । मरता हूँ खामुशी पर ये आरजू है मेरी, दामन में कोह के एक छोटा-सा झोंपड़ा हो; आजाद फ़िक्र से हूँ, उजलत में दिन गुजारूँ, दुनियाँ के ग्रम का दिल से काँटा निकल गया हो । लज्जत सरोद की हो चिड़ियों के चहचहों में, चश्मे की शोरिशों में बाजा-सा बज रहा हो; गुल की कली चटककर पैग़ाम दे किसी का, साग़र जरा-सा गोया मुझको जहाँ-नुमा हो । हो हाथ का सिरहाना, सब्जे का हो बिछौना, शर्माये जिससे जलवत, खिलवत में वो अदा हो; मानूस इस क़दर हो सूरत से मेरी बुलबुल, नन्हे-से दिल में उसके खटका न कुछ भरा हो । सफ़अ बाँधे दोनों जानिब बूटे हरे-हरे हों, नदी का साफ़ पानी तस्वीर ले रहा हो ; हो दिल-फ़रेब ऐसा कुहसार का नजारा, पानी भी मौज बनकर उठ-उठके देखता हो । आगोश में जमीं के सोया हुआ हो सब्जा, फिर-फिरके झाड़ियों में पानी चमक रहा हो; पानी को छू रही हो झुक झुकके गुल की टहनी, जैसे हसीन कोई आईना देखता हो । मेहँदी लगाये सूरज जब शाम की दुलहन को, सुरखी लिये सुनहरी हर फूल की कबा हो; रातों को चलनेवाले रह जायें थकके जिस दम, उम्मीद उनकी मेरा टूटा हुआ दिया हो । बिजली चमक के उनको कुटिया मेरी दिखा दे, जब आस्माँ पे हरसूं बादल घिरा हुआ हो; पिछले पहर को कोयल वो सुबह की मुअज्जिन, मैं उसका हमनवा हूँ वह मेरी हमनवा हो । कानों पै हो न मेरे दैरो हरम का इहसाँ, रौजन को झोंपड़ी का मुझको सहरनुमा हो; फूलों को आये जिस दम शबनम वजू कराने, रोना मेरा बजू हो, नाला मेरी दुआ हो । इस खामुशी में जाएँ इतने बुलन्द नाले, तारों के काफ़िले को मेरी सदा दरा हो ; हर दर्दमन्द दिल को रोना मेरा रुला दे, बेहोश जो पड़े हैं, शायद उन्हें जगा दे। रब- खुदा आगोश - गोद, क्रोड़ अंजुमन सभा शोरिश शोरगुल, हलचल सकूत शांति कोह- पहाड़ उजलत - एकांत सरोद तारवाला एक बाजां झरना, सरिता सागर प्याला जिसमें दुनिया दीखे गोया - मानों जहाँ-नुमा संसार दिखानेवाला जलवत - भीड़-भब्भड़, शोरगुल खिलवत - एकांत, निर्जन स्थान मानूस - मिलो हुई सफ़अ - कतार, पंक्ति जानिब - तरफ़ बूटे- पौधे, लता कुहसार - पहाड़ मौज़ - लहर कवा चोग्रा मुअज्जिन नमाज के समय अर्जा देनेवाला हमनवा - साथ गानेवाला रोजन छेद सहर-नुमा सबेरा बतानेवाला वजू नमाज के पहले हाथ-पैर धोना नाला रोकर प्रार्थना करना, बाह दरा • नगाड़ा, घंटे की आवाज बुलन्द ऊंचा, उच्च ए फ़सीले किश्वरे - हिन्दोस्ताँ ! चमता है तेरी पेशानी को झुककर आसमाँ ! तुझमें कुछ पैदा नहीं दैरीना-रोजी के निशाँ ! तू जवाँ है गदिशे-शांमो-सहर के दर्मियाँ ! एक जलवा था कलीमे-तूरे-सीना के लिए ! तू तजल्ली है सरापा चश्मे-बीना के लिए ! आती है नदी फ़राजे-कोह से गाती हुई, कौसर-ओ-तस्नीम की मौजों को शर्माती हुई ! आइना-सा शाहिदे- कुदरत को दिखलाती हुई, संगे-रह से गाह बचती, गाह टकराती हुई; छेड़ती जा इस इराके-दिलनशीं के साज को ए मुसाफ़िर, दिल समझता है तेरी आवाज को; लैलिये-शब खोलती है आके जब जुल्फ़े-रसा, दामने-दिल खोचती है आबशारों की सदा । वह खमोशी शाम की, जिसपर तकल्लुम हो फ़िदा ! वह दरख्तों पर तफ़क्कुर का समाँ छाया हुआ ! काँपता फिरता है क्या रंगे शफ़क़ कुहसार पर ! खुशनुमा लगता है यह गाजा तेरे रुख्सार पर !
साल 1997 में चेतन आनंद (Chetan Anand) ने 82 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. अब प्रिया राजवंश (Priya Rajvansh) बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं. प्रिया राजवंश (Priya Rajvansh) अपने दौर की एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने लंदन से आकर भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी. 'हीर रांझा' (Heer Ranjha) जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरने वालीं प्रिया राजवंश का बचपन और जवानी काफी खुशहाल बीते, लेकिन उनके बुढ़ापे का एक दर्दनाक अंत हुआ. यह दर्दनाक अंत उन्हें अपने ही प्रेमी के बेटों के हाथों मौत से मिला. हम प्रिया राजवंश के जिस प्रेमी की बात कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि दिग्गज अभिनेता देव आनंद (Dev Anand) के बड़े भाई और हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक रहे चेतन आनंद (Chetan Anand) थे. तो चलिए प्रिया राजवंश की पुण्यतिथि (Priya Rajvansh Death Anniversary) पर जानते हैं कि वह चेतन आनंद से कैसे मिलीं और फिर कैसे उनकी मृत्यु हुई. प्रिया राजवंश का जन्म 30 दिसंबर, 1936 को हुआ था. उनका परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आया था. प्रिया का बचपन शिमला की गलियों में गुजरा. उन्होंने यहां पढ़ाई की और साथ ही थियटर्स में प्ले भी किए. यहां एक बार अपने जमाने के प्रख्यात अभिनेता बलराज साहनी (Balraj Sahani) की नजर प्रिया राजवंश पर पड़ी. बलराज साहनी भी उस वक्त फिल्मों के साथ-साथ थियटर्स भी किया करते थे. बलराज साहनी की सलाह पर प्रिया अपने अभिनय को निखारने के लिए लंदन गईं. वहां उन्होंने कई प्ले किए. 'वर्ल्ड विदआउट वुमेन' प्ले के लिए प्रिया राजवंश को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला था. 1967 में एक फिल्म आई थी- 'द लॉन्ग डुअल'. इसे लिखा था रणवीर सिंह ने. रणवीर सिंह इस फिल्म में प्रिया को लेना चाहते थे, लेकिन किन्ही वजहों के कारण इस फिल्म का काम होल्ड पर चला गया. इस दौरान रणवीर सिंह ने चेतन आनंद से बात की और उन्हें बताया कि तुम्हारी फिल्मों के लिए मेरी पहचान में एक नया चेहरा है. चेतन आनंद ने रणवीर सिंह से प्रिया की फोटो भेजने को कहा. जैसे ही चेतन ने प्रिया की तस्वीर देखी, वह उन्हें देखते ही रह गए. यहां आपको एक बात और बता दें कि प्रिया राजवंश नाम भी उन्हें चेतन आनंद ने ही दिया था. इससे पहले उनका नाम वीर सुंदर सिंह था. चेतन आनंद की लगभग हर फिल्म में प्रिया राजवंश को एक अभिनेत्री के तौर पर कास्ट किया जाता था. प्रिया राजवंश ने चेतन आनंद के साथ 'हकीकत', 'हीर रांझा', 'हंसते जख्म', 'हिंदुस्तान की कसम' और 'कुदरत' जैसी फिल्मों में काम किया. उन्होंने अपने करियर में ज्यादा फिल्में नहीं की थीं. एक साथ काम करते-करते चेतन आनंद और प्रिया राजवंश एक दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि वह लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे. हालांकि, चेतन पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बेटे भी थे. प्रिया के साथ रहने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी उमा को छोड़ दिया था. पर प्रिया और चेतन ने कभी भी शादी नहीं की और वह दोनों एक पार्टनर की तरह साथ रहने लगे. साल 1997 में चेतन आनंद ने 82 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. अब प्रिया राजवंश बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं. वह चेतन आनंद के जुहू वाले बंगले में रहती थीं. 27 मार्च, 2000 को एक दिन बंगले से वो खबर आई, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था. बंगले से प्रिया राजवंश की डेड बॉडी मिली. उनकी हत्या की गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेतन आनंद के बेटे केतन आनंद और विवेक आनंद ने अपने दो नौकरों के साथ मिलकर प्रिया राजवंश की हत्या की थी. चेतन आनंद के दोनों बेटों को प्रिया राजवंश की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा मिली थी. कहा जाता है कि उन्होंने प्रिया की हत्या अपने पिता का बंगला उनसे कब्जाने के लिए की थी. हालांकि, आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर प्रिया की हत्या के पीछे की असल वजह क्या थी, लेकिन उनका अंत बहुत ही दर्दनाक हुआ.
साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में चेतन आनंद ने बयासी साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. अब प्रिया राजवंश बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं. प्रिया राजवंश अपने दौर की एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने लंदन से आकर भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी. 'हीर रांझा' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरने वालीं प्रिया राजवंश का बचपन और जवानी काफी खुशहाल बीते, लेकिन उनके बुढ़ापे का एक दर्दनाक अंत हुआ. यह दर्दनाक अंत उन्हें अपने ही प्रेमी के बेटों के हाथों मौत से मिला. हम प्रिया राजवंश के जिस प्रेमी की बात कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि दिग्गज अभिनेता देव आनंद के बड़े भाई और हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक रहे चेतन आनंद थे. तो चलिए प्रिया राजवंश की पुण्यतिथि पर जानते हैं कि वह चेतन आनंद से कैसे मिलीं और फिर कैसे उनकी मृत्यु हुई. प्रिया राजवंश का जन्म तीस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस को हुआ था. उनका परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आया था. प्रिया का बचपन शिमला की गलियों में गुजरा. उन्होंने यहां पढ़ाई की और साथ ही थियटर्स में प्ले भी किए. यहां एक बार अपने जमाने के प्रख्यात अभिनेता बलराज साहनी की नजर प्रिया राजवंश पर पड़ी. बलराज साहनी भी उस वक्त फिल्मों के साथ-साथ थियटर्स भी किया करते थे. बलराज साहनी की सलाह पर प्रिया अपने अभिनय को निखारने के लिए लंदन गईं. वहां उन्होंने कई प्ले किए. 'वर्ल्ड विदआउट वुमेन' प्ले के लिए प्रिया राजवंश को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला था. एक हज़ार नौ सौ सरसठ में एक फिल्म आई थी- 'द लॉन्ग डुअल'. इसे लिखा था रणवीर सिंह ने. रणवीर सिंह इस फिल्म में प्रिया को लेना चाहते थे, लेकिन किन्ही वजहों के कारण इस फिल्म का काम होल्ड पर चला गया. इस दौरान रणवीर सिंह ने चेतन आनंद से बात की और उन्हें बताया कि तुम्हारी फिल्मों के लिए मेरी पहचान में एक नया चेहरा है. चेतन आनंद ने रणवीर सिंह से प्रिया की फोटो भेजने को कहा. जैसे ही चेतन ने प्रिया की तस्वीर देखी, वह उन्हें देखते ही रह गए. यहां आपको एक बात और बता दें कि प्रिया राजवंश नाम भी उन्हें चेतन आनंद ने ही दिया था. इससे पहले उनका नाम वीर सुंदर सिंह था. चेतन आनंद की लगभग हर फिल्म में प्रिया राजवंश को एक अभिनेत्री के तौर पर कास्ट किया जाता था. प्रिया राजवंश ने चेतन आनंद के साथ 'हकीकत', 'हीर रांझा', 'हंसते जख्म', 'हिंदुस्तान की कसम' और 'कुदरत' जैसी फिल्मों में काम किया. उन्होंने अपने करियर में ज्यादा फिल्में नहीं की थीं. एक साथ काम करते-करते चेतन आनंद और प्रिया राजवंश एक दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि वह लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे. हालांकि, चेतन पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बेटे भी थे. प्रिया के साथ रहने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी उमा को छोड़ दिया था. पर प्रिया और चेतन ने कभी भी शादी नहीं की और वह दोनों एक पार्टनर की तरह साथ रहने लगे. साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में चेतन आनंद ने बयासी साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. अब प्रिया राजवंश बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं. वह चेतन आनंद के जुहू वाले बंगले में रहती थीं. सत्ताईस मार्च, दो हज़ार को एक दिन बंगले से वो खबर आई, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था. बंगले से प्रिया राजवंश की डेड बॉडी मिली. उनकी हत्या की गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चेतन आनंद के बेटे केतन आनंद और विवेक आनंद ने अपने दो नौकरों के साथ मिलकर प्रिया राजवंश की हत्या की थी. चेतन आनंद के दोनों बेटों को प्रिया राजवंश की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा मिली थी. कहा जाता है कि उन्होंने प्रिया की हत्या अपने पिता का बंगला उनसे कब्जाने के लिए की थी. हालांकि, आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर प्रिया की हत्या के पीछे की असल वजह क्या थी, लेकिन उनका अंत बहुत ही दर्दनाक हुआ.
पार्टी और शिवसैनिकों के लिए यह पहला मौका है, जब शिवसेना के ठाकरे परिवार का कोई व्यक्ति सीधे चुनाव मैदान में उतर रहा है। आदित्य ने कहा कि वह पार्टी प्रमुख और अपने पिता उद्धव ठाकरे की इजाजत लेकर ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। मुंबई अपने दादा बाल ठाकरे और पिता उद्धव ठाकरे की राजनीतिक परंपरा को तोड़ते हुए आदित्य ठाकरे ने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने सोमवार को वर्ली में आयोजित शिवसैनिको को एक सम्मेलन में खुद यह ऐलान किया। वह वर्ली सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। पार्टी और शिवसैनिकों के लिए यह पहला मौका है, जब शिवसेना के ठाकरे परिवार का कोई व्यक्ति सीधे चुनाव मैदान में उतर रहा है। आदित्य ने कहा कि वह पार्टी प्रमुख और अपने पिता उद्धव ठाकरे की इजाजत लेकर ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। शिवसैनिकों के सम्मेलन में आदित्य ठाकरे ने कहा, 'मैं राजनीति के अलावा कुछ नहीं कर सकता। अगर आप लोग इजाजत देंगे, तो मैं विधानसभा का चुनाव लड़ने को तैयार हूं। ' वर्ली के लाला कॉलेज के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करने के लिए जब आदित्य मंच पर आए, तो जय शिवाजी, जय भवानी आदित्य ठाकरे आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं के नारों से पूरा हॉल गूंज उठा। आदित्य ठाकरे के चुनाव लड़ने की घोषणा ठाकरे परिवार के लिए भी ऐतिहासिक क्षण था। इसीलिए आदित्य की मां रश्मि ठाकरे और सामान्यतः राजनीतिक मंचों से दूर रहने वाले उनके छोटे भाई तेजस ठाकरे भी वहां मौजूद थे। तेजस ने जब आदित्य को बधाई दी, तो आदित्य ने उसे गले लगा लिया। हालांकि टिकट बांटने के काम में व्यस्त होने के कारण उद्धव ठाकरे कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। मजबूत महाराष्ट्र के लिए चुनाव मैदान में आदित्य ठाकरे ने कहा, 'मैं विधायक या मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनाव नहीं लड़ रहा। मैं एक नया और मजबूत महाराष्ट्र गढ़ने के लिए चुनाव मैदान में उतर रहा हूं। मैं जानता हूं कि राजनीति में एक फैसले से लाखों लोगों का भविष्य बदला जा सकता है। यही चुनाव लड़ने का सही वक्त है। महाराष्ट्र को कर्जमुक्त प्रदूषण मुक्त, बेरोजगारी मुक्त करने का यही वक्त है। शिवसेना की परंपरा 80 प्रतिशत समाजसेवा और 20 प्रतिशत राजनीति है। पिछले 10 वर्ष से मैं पूरे महाराष्ट्र में घूम रहा हूं। मुझे पूरे महाराष्ट्र के लिए काम करना है। ' मुझे किसी का भय नहीं आदित्य ने कहा, 'मेरे विरोध में चाहे कोई चुनाव लड़े, मुझे किसी का कोई भय नहीं है। लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का हक है। मेरे लिए यह एक एेतिहासिक क्षण हैं। मैंने लंबी छलांग लगाई है, लेकिन मैं इसलिए निर्भय हूं क्योंकि मुझे यह विश्वास है कि आप मुझे गिरने नहीं देंगे। ' एनसीपी उतारेगी मजबूत उम्मीदवार इधर, राकांपा नेता अजित पवार ने ऐलान किया है कि आदित्य ठाकरे को चुनाव में वर्ली सीट पर एनसीपी की मजबूत चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम आदित्य को खिलाफ मजबूत उम्मीदवार खड़ा करेंगे। इसकी घोषणा 2 अक्टूबर को की जाएगी।
पार्टी और शिवसैनिकों के लिए यह पहला मौका है, जब शिवसेना के ठाकरे परिवार का कोई व्यक्ति सीधे चुनाव मैदान में उतर रहा है। आदित्य ने कहा कि वह पार्टी प्रमुख और अपने पिता उद्धव ठाकरे की इजाजत लेकर ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। मुंबई अपने दादा बाल ठाकरे और पिता उद्धव ठाकरे की राजनीतिक परंपरा को तोड़ते हुए आदित्य ठाकरे ने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने सोमवार को वर्ली में आयोजित शिवसैनिको को एक सम्मेलन में खुद यह ऐलान किया। वह वर्ली सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। पार्टी और शिवसैनिकों के लिए यह पहला मौका है, जब शिवसेना के ठाकरे परिवार का कोई व्यक्ति सीधे चुनाव मैदान में उतर रहा है। आदित्य ने कहा कि वह पार्टी प्रमुख और अपने पिता उद्धव ठाकरे की इजाजत लेकर ही चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। शिवसैनिकों के सम्मेलन में आदित्य ठाकरे ने कहा, 'मैं राजनीति के अलावा कुछ नहीं कर सकता। अगर आप लोग इजाजत देंगे, तो मैं विधानसभा का चुनाव लड़ने को तैयार हूं। ' वर्ली के लाला कॉलेज के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करने के लिए जब आदित्य मंच पर आए, तो जय शिवाजी, जय भवानी आदित्य ठाकरे आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं के नारों से पूरा हॉल गूंज उठा। आदित्य ठाकरे के चुनाव लड़ने की घोषणा ठाकरे परिवार के लिए भी ऐतिहासिक क्षण था। इसीलिए आदित्य की मां रश्मि ठाकरे और सामान्यतः राजनीतिक मंचों से दूर रहने वाले उनके छोटे भाई तेजस ठाकरे भी वहां मौजूद थे। तेजस ने जब आदित्य को बधाई दी, तो आदित्य ने उसे गले लगा लिया। हालांकि टिकट बांटने के काम में व्यस्त होने के कारण उद्धव ठाकरे कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। मजबूत महाराष्ट्र के लिए चुनाव मैदान में आदित्य ठाकरे ने कहा, 'मैं विधायक या मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनाव नहीं लड़ रहा। मैं एक नया और मजबूत महाराष्ट्र गढ़ने के लिए चुनाव मैदान में उतर रहा हूं। मैं जानता हूं कि राजनीति में एक फैसले से लाखों लोगों का भविष्य बदला जा सकता है। यही चुनाव लड़ने का सही वक्त है। महाराष्ट्र को कर्जमुक्त प्रदूषण मुक्त, बेरोजगारी मुक्त करने का यही वक्त है। शिवसेना की परंपरा अस्सी प्रतिशत समाजसेवा और बीस प्रतिशत राजनीति है। पिछले दस वर्ष से मैं पूरे महाराष्ट्र में घूम रहा हूं। मुझे पूरे महाराष्ट्र के लिए काम करना है। ' मुझे किसी का भय नहीं आदित्य ने कहा, 'मेरे विरोध में चाहे कोई चुनाव लड़े, मुझे किसी का कोई भय नहीं है। लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का हक है। मेरे लिए यह एक एेतिहासिक क्षण हैं। मैंने लंबी छलांग लगाई है, लेकिन मैं इसलिए निर्भय हूं क्योंकि मुझे यह विश्वास है कि आप मुझे गिरने नहीं देंगे। ' एनसीपी उतारेगी मजबूत उम्मीदवार इधर, राकांपा नेता अजित पवार ने ऐलान किया है कि आदित्य ठाकरे को चुनाव में वर्ली सीट पर एनसीपी की मजबूत चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम आदित्य को खिलाफ मजबूत उम्मीदवार खड़ा करेंगे। इसकी घोषणा दो अक्टूबर को की जाएगी।
Shaheen Afridi Wedding: क्रिकेट जगत में इन दिनों शादियों का दौर जारी है. पाकिस्तान टीम के स्टार तेज गेंदबाज शाहीन शाह आफरीदी भी अब शादी के बंधन में बंध गए हैं. शाहीन ने पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद आफरीदी की बेटी अंशा से निकाह किया है. शाहीन और अंशा का यह निकाह 3 फरवरी को कराची में हुआ, जो पाकिस्तान समेत खेल जगत में काफी चर्चा में रहा है. इस निकाह पाकिस्तान टीम के कप्तान बाबर आजम, शादाब खान और पूर्व कप्तान सरफराज अहमद समेत कई स्टार प्लेयर शामिल हुए. इन सभी ने शाहीन की बारात में भी जमकर शान बढ़ाई. इनके कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. शाहीन आफरीदी और अंशा की सगाई दो साल पहले ही कर दी गई थी. कोरोना और लॉकडाउन के कारण निकाह नहीं हो सका था. अब बड़ी धूमधाम के साथ सिटी ऑफ लाइट कहे जाने वाले कराची शहर में यह निकाह हुआ. शाहीन और मेहमानों के कई फोटोज वायरल हुए हैं. बता दें कि भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट में इन दिनों धमाकेदार अंदाज में शादियों का सीजन चल रहा है. पिछले एक-दो महीने में भारतीय-पाकिस्तानी टीम के 5 स्टार क्रिकेटर्स शादी के बंधन में बंधे है. पिछले ही महीने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ ने मॉडल मुज्ना मसूद से निकाह किया था. इसके बाद पाकिस्तान के ही बल्लेबाज शान मसूद ने लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड निशा खान से शादी की. जबकि शादाब खान ने पाकिस्तानी टीम के कोच सकलैन मुश्ताक की बेटी को दुल्हनिया बनाया. फिर एक ऐसा भी दिन आया, जब भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट में एक साथ शहनाइयां बजीं. 23 जनवरी को भारतीय प्लेयर केएल राहुल और पाकिस्तानी ऑलराउंडर शादाब खान ने शादी की. राहुल ने अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड और बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी के साथ सात फेरे लिए. इसके बाद भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने भी 26 जनवरी को मेहा पटेल से शादी रचाई.
Shaheen Afridi Wedding: क्रिकेट जगत में इन दिनों शादियों का दौर जारी है. पाकिस्तान टीम के स्टार तेज गेंदबाज शाहीन शाह आफरीदी भी अब शादी के बंधन में बंध गए हैं. शाहीन ने पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद आफरीदी की बेटी अंशा से निकाह किया है. शाहीन और अंशा का यह निकाह तीन फरवरी को कराची में हुआ, जो पाकिस्तान समेत खेल जगत में काफी चर्चा में रहा है. इस निकाह पाकिस्तान टीम के कप्तान बाबर आजम, शादाब खान और पूर्व कप्तान सरफराज अहमद समेत कई स्टार प्लेयर शामिल हुए. इन सभी ने शाहीन की बारात में भी जमकर शान बढ़ाई. इनके कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. शाहीन आफरीदी और अंशा की सगाई दो साल पहले ही कर दी गई थी. कोरोना और लॉकडाउन के कारण निकाह नहीं हो सका था. अब बड़ी धूमधाम के साथ सिटी ऑफ लाइट कहे जाने वाले कराची शहर में यह निकाह हुआ. शाहीन और मेहमानों के कई फोटोज वायरल हुए हैं. बता दें कि भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट में इन दिनों धमाकेदार अंदाज में शादियों का सीजन चल रहा है. पिछले एक-दो महीने में भारतीय-पाकिस्तानी टीम के पाँच स्टार क्रिकेटर्स शादी के बंधन में बंधे है. पिछले ही महीने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ ने मॉडल मुज्ना मसूद से निकाह किया था. इसके बाद पाकिस्तान के ही बल्लेबाज शान मसूद ने लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड निशा खान से शादी की. जबकि शादाब खान ने पाकिस्तानी टीम के कोच सकलैन मुश्ताक की बेटी को दुल्हनिया बनाया. फिर एक ऐसा भी दिन आया, जब भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट में एक साथ शहनाइयां बजीं. तेईस जनवरी को भारतीय प्लेयर केएल राहुल और पाकिस्तानी ऑलराउंडर शादाब खान ने शादी की. राहुल ने अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड और बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी के साथ सात फेरे लिए. इसके बाद भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने भी छब्बीस जनवरी को मेहा पटेल से शादी रचाई.
पत्र : च० राजगोपालाचारीको कारण मुझसे कुछ कहा नही, लेकिन तुम्हे बहुत अटपटा लगा था, झुंझलाहट चाहे न भी हुई हो । मैने उनसे कहा कि तुम इतने भले आदमी हो कि अगर तुम्हे सचमुच अटपटा लगा होता तो मुझसे छिपाते नही, और छिपाना तुम्हारे स्वभावके विपरीत होगा । मैंने यह भी कहा कि खास इस मामलेमे तो तुमने मेरा प्रस्ताव पसन्द भी किया है, और अगर यह पता चले कि तुमने उसे पसन्द नही किया है और तुम अपनेको सचमुच बहुत अटपटी स्थितिमे पा रहे हो, तो भी मेरे लिए हर मौकेपर तुमसे या अन्य साथियोसे परामर्श कर सकना असम्भव है । मैने इससे आगे बढ़कर यह भी कहा कि इस ढगसे तो काम कर सकना लगभग असम्भव हो जायेगा । लोग साथ मिलकर काम तभी करते है जब उनके बीच बुनियादी सिद्धान्तोके ऊपर सहमति होती है और सामान्यत इन बुनियादी सिद्धान्तो परसे निकाले गये उनके निष्कर्ष एक जैसे ही होते है। और यदि कभी-कभी वे भिन्न निष्कर्षोपर पहुँचे तो भी समय रहते अपनी गलतीको स्वीकार कर लेनेसे उनकी दोस्ती और उनका जो समान उद्देश्य है, वे दोनो ही अक्षत रहते है । लेकिन मेरी किसी भी वातसे वल्लभभाई सन्तुष्ट नही हुए । तब 'कर्फ्यू बेल,' जिसपर हम दोनोकी परस्पर सहमति थी, ने हमारी रक्षा की और इस प्रकार हमारी यह वहस, जिसके खत्म होनेके लक्षण नहीं थे, खत्म हुई । लेकिन मैं इस निश्चय के साथ बिस्तरपर लेटा कि मै यह सारा मामला तुम्हारे सामने रखूंगा। तुम्हारा उत्तर जो भी होगा, उससे तुम्हारे वकीलको कुछ तसल्ली पहुँचेगी, और तुम जानते हो कि अगर तुम अपने वकीलके दोनो मुद्दोसे सहमति व्यक्त करोगे तो मुझे कोई गम नही होगा। उनके दोनो मुद्दे ये है पडित पचानन तर्करत्नके सामने मैने जो समझौता प्रस्ताव रखा था उसे ससारके सामने प्रकट करनेसे पहले मुझे तुमसे परामर्श करना चाहिए था, और दूसरे यह कि मैने निश्चित ही तुम्हे अटपटी स्थितिमे डाल दिया है। इन मुद्दोपर अपनी राय व्यक्त करनेके साथ ही तुम यह भी लिखना कि गुणावगुणके खयालसे तुम मेरे प्रस्तावको ठीक समझते हो या नही । कल यहाँ जो कुछ हुआ उसे एक दुखान्त नाटक ही कहा जायेगा । कल पाँच पडित और उनके पाँच सलाहकार नियत समयसे डेढ घटा पीछे जेलके फाटकपर पहुँचे और मेरे साथ सक्षिप्त टिप्पणियोके आदान-प्रदानमे ढाई घंटे लगा दिये। जिन तीन टिप्पणियोका' उनके और मेरे वीच आदान-प्रदान हुआ उन्हीने ढाई घटेका सारा समय ले लिया । आप विश्वास नही करेगे कि वे अन्दर आकर बातचीत करनेको इस कारण तैयार नही हुए क्योकि मैने उनके मसविदेमे जो एक शब्द जोड़ दिया था उसे उठानेको मै तैयार नही था । यह शब्द था 'अस्पृश्यो' शब्दके आगे जोडा गया एक विशेषण । यह विशेषण जो मैने लगाया था, यह था. "मौजूदा वर्गीकरणके । अनुसार । " निस्सन्देह इससे उनकी बहसका सारा विषय ही बदल जाता था । अत वे लौट गये । वेशक हमारा कहना यह नहीं है कि शास्त्रोमे अस्पृश्यताका स्थान है ही नही । हमारा कहना यह है कि जिस प्रकारकी अस्पृश्यता हम आज देखते है १. देखिए पृष्ठ ४०-४१ । उसका शास्त्रोमे कोई स्थान नही है। पडितोंसे यह सिद्ध करना अपेक्षित था कि अस्पृश्यताका जो स्वरूप आज प्रचलित है, शास्त्रोमे उस अस्पृश्यताका समर्थन किया गया है। यह चीज ईमानदारीसे सिद्ध नहीं की जा सकती। उनकी ओरसे जो भी शास्त्रोक्ति अभीतक की गई है उससे यह बात सिद्ध नही हुई है। हमारी ओरसे जो शास्त्री बोल रहे है वे वास्तवमे बहुत विद्वान लोग है और धर्मनिष्ठ भी है। वे ईमानदारीसे ऐसा मानते है कि वर्तमान ढगकी अस्पृश्यताका शास्त्रोमे कोई औचित्य नही है । वास्तविक अस्पृश्यता तो सदैव रहेगी। यह एक बहुत ठीक ढगका सफाई और स्वच्छताका नियम है जिसपर सारे ससारमे आचरण किया जाता है । अग्रेजीकी माइक्रोफिल्म ( एस० एन० १८९२२ ) से । ४९. पत्रः जॉर्ज जोजेफको प्रिय जोजेफ, तुम्हारा पत्र पाकर, और विशेषकर प्यारेलालके नाम तुम्हारे पत्रसे' मुझे जो प्रसन्नता हुई उसकी कल्पना तुम मेरे वर्णनकी अपेक्षा ज्यादा अच्छी तरह कर सकते हो । मै तुम्हारा पत्र उसतक पहुँचवानेकी कोशिश करूंगा। लेकिन उस पत्रके बारेमे मै दो चीजे कहना चाहूँगा । मेरा अनशन शाब्दिक अर्थमे आमरण अनशन नही था । इस जेलमें जो रोमन कैथॉलिक पादरी आता है वह मुझे जानता है, और मेरा अनशन शुरू होनेकी पूर्वसध्याको वह अपने करुणापूर्ण स्वभावके अनुसार केवल एक शब्द कहनेके लिए मेरे पास आया और उसने बताया कि वह आत्मघात और बलिदानके बीच क्या भेद मानता है । आत्मघाती व्यक्तिके मनमे नष्ट हो जानेका निश्चय रहता है । बलिदानका अर्थ है जीवनको खतरेमे डालना, और जितना बडा खतरा, उतना ही बड़ा त्याग । लेकिन इसमे खतरेसे आगेकी कोई बात नही होनी चाहिए। इस अन्तरको स्वीकार करके उससे सहमत होनेमे मुझे कोई हिचकिचाहट नही थी, और मेरा अनशन चूँकि सशर्त था इसलिए यह अनशन आत्मघात नही था बल्कि एक ऐसा अनशन था जिसमें मृत्युका खतरा तो था, लेकिन था खतरा ही, इससे ज्यादा कुछ नही । १. इस पत्र में जोजेफने प्यारेलालकी पुस्तक द एपिक फास्ट पर अपने विचार व्यक्त किये थे और लिखा था • " अन्तरकी आवाज या तो भ्रम है या ईश्वरको आवाज है। यदि यह सचमुच ईश्वरको आवाज है तो वह आत्म-हननकी सलाह नहीं दे सकती, क्योकि ईश्वर जो जीवन देता है उसे केवल वही समाप्त कर सकता है। पत्र : जॉर्ज जोजेफको तुम्हे यह जानकारी दिलचस्प लगेगी कि मेरे कुछ रोमन कैथॉलिक मित्रोने अनशनमे कोई दोष नही देखा है। बेशक, हिन्दू धर्ममे कुछ ऐसे आत्यन्तिक उदाहरण हिन्दू-धर्ममे भी है जिनमें जीवनका अन्त कर लेना एक अनिवार्य नियम है, लेकिन इनपर फिलहाल हमे विचार करनेकी जरूरत नही है । हिन्दू धर्म और अन्य धर्मोमें इस बातपर सामान्यरूपसे सहमति है कि आत्मघात करना पाप है। अब रही अन्तरकी आवाजकी बात । तुम्हारी इस बातसे मै पूरे दिलसे सहमत हो सकता हूँ कि ईश्वरकी आवाज कभी पाप-कर्मकी सलाह या उसका समर्थन नही कर सकती। पाप करनेका प्रोत्साहन केवल शैतान दे सकता है। लेकिन असली कठिनाई तब खड़ी होती है जब पापका प्रश्न स्वय विवादास्पद हो । जो लोग अमुक कार्यको पाप मानते है वे स्वभावतः इस दावेको अमान्य कर देगे कि उसकी प्रेरणा ईश्वरने दी थी । इसीलिए एक प्रश्न के उत्तरमे मैने कहा था कि आत्मरक्षा के हेतु तथा उस सत्यकी खातिर जिसकी मै पूजा करता हूँ, मैं जिस बातका विश्वास करता हूँ उसे कहनेको बाध्य हूँ, लेकिन मेरे दावेको प्रासंगिक प्रश्नोको तय करनेके लिए दिये गये तर्कोंका अंग नहीं माना जाना चाहिए । देखा गया कि विरोधियोने उस दावेको अप्रासंगिक ही माना । ईश्वरकी आवाज सुननेका दावा किसी दृष्टान्त विशेषमे ठीक था या गलत, इसका निर्धारण दावा करनेवालेकी मत्युके बाद ही किया जा सकता है, और कुछ असाधारण मामलोमे तो इसका निर्धारण तब भी कठिन हो सकता है। इन मामलोमे दम्भसे भी ज्यादा बड़ा खतरा आत्म-प्रवचनाका है जिसकी शिकार मानवजाति सरलतासे हो जाती है । आत्म-प्रवंचनासे ग्रस्त लोगोके लिए बड़े-बड़े कामोकी सिद्धि कर लेना सम्भव है और इसके बावजूद उनका यह दावा कि उनके कार्योंके पीछे ईश्वरीय आवाजकी प्रेरणा है, सर्वथा गलत हो सकता है। ये अन्तिम ढंगकी कठिनाइयाँ है, जो समयके अन्ततक बनी रहेंगी, किन्तु यदि सत्यको कुछ भी प्रगति करनी है, तो आत्म-प्रवचनासे ग्रस्त लोगोको पूरा मौका मिलना ही चाहिए । अन्तमे पापोकी स्वीकारोक्तिका प्रश्न आता है। तुमको शायद पता न हो कि मेरे कुछ कैथॉलिक मित्र भी है जिनकी मै बहुत कद्र करता हूँ। मेरा स्वभाव है कि मैं छपी हुई कितावी चीजोकी अपेक्षा व्यक्तिगत सम्पर्कसे ही ज्यादातर ज्ञान प्राप्त करता हूँ । ये मित्र अभीतक स्पष्टरूपसे यह नहीं बता सके है कि पापोकी स्वीकारोक्ति और पापोकी स्वीकारोक्ति सुननेवालेका क्या प्रयोजन और कार्य है । जिस व्यक्तिको पापकी कोई प्रतीति ही नही है वह क्या स्वीकार करेगा, और यदि प्रतीति हो, तो मैं यह तो समझ सकता हूँ कि स्वीकारोक्ति सुननेवाला पादरी पापी व्यक्तिको पापोसे मुक्त कर दे, किन्तु क्या वह प्रायश्चित करनेवालेके भविष्य के कार्योका भी निर्देशन कर सकता है ? स्वीकारोक्ति सुननेवाले पादरीके स्थानपर हिन्दू धर्म गुरु है। मैने किसी गुरुकी तलाश जीवन भर की है, ऐसा गुरु जिसके कन्धोपर मैं अपने सारे बोझ डाल सकूँ और केवल उसकी इच्छानुसार काम करता हुआ घूमता फिरूँ । लेकिन ऐसी १. बातचीतके लिए, देखिए परिशिष्ट २ ।
पत्र : चशून्य राजगोपालाचारीको कारण मुझसे कुछ कहा नही, लेकिन तुम्हे बहुत अटपटा लगा था, झुंझलाहट चाहे न भी हुई हो । मैने उनसे कहा कि तुम इतने भले आदमी हो कि अगर तुम्हे सचमुच अटपटा लगा होता तो मुझसे छिपाते नही, और छिपाना तुम्हारे स्वभावके विपरीत होगा । मैंने यह भी कहा कि खास इस मामलेमे तो तुमने मेरा प्रस्ताव पसन्द भी किया है, और अगर यह पता चले कि तुमने उसे पसन्द नही किया है और तुम अपनेको सचमुच बहुत अटपटी स्थितिमे पा रहे हो, तो भी मेरे लिए हर मौकेपर तुमसे या अन्य साथियोसे परामर्श कर सकना असम्भव है । मैने इससे आगे बढ़कर यह भी कहा कि इस ढगसे तो काम कर सकना लगभग असम्भव हो जायेगा । लोग साथ मिलकर काम तभी करते है जब उनके बीच बुनियादी सिद्धान्तोके ऊपर सहमति होती है और सामान्यत इन बुनियादी सिद्धान्तो परसे निकाले गये उनके निष्कर्ष एक जैसे ही होते है। और यदि कभी-कभी वे भिन्न निष्कर्षोपर पहुँचे तो भी समय रहते अपनी गलतीको स्वीकार कर लेनेसे उनकी दोस्ती और उनका जो समान उद्देश्य है, वे दोनो ही अक्षत रहते है । लेकिन मेरी किसी भी वातसे वल्लभभाई सन्तुष्ट नही हुए । तब 'कर्फ्यू बेल,' जिसपर हम दोनोकी परस्पर सहमति थी, ने हमारी रक्षा की और इस प्रकार हमारी यह वहस, जिसके खत्म होनेके लक्षण नहीं थे, खत्म हुई । लेकिन मैं इस निश्चय के साथ बिस्तरपर लेटा कि मै यह सारा मामला तुम्हारे सामने रखूंगा। तुम्हारा उत्तर जो भी होगा, उससे तुम्हारे वकीलको कुछ तसल्ली पहुँचेगी, और तुम जानते हो कि अगर तुम अपने वकीलके दोनो मुद्दोसे सहमति व्यक्त करोगे तो मुझे कोई गम नही होगा। उनके दोनो मुद्दे ये है पडित पचानन तर्करत्नके सामने मैने जो समझौता प्रस्ताव रखा था उसे ससारके सामने प्रकट करनेसे पहले मुझे तुमसे परामर्श करना चाहिए था, और दूसरे यह कि मैने निश्चित ही तुम्हे अटपटी स्थितिमे डाल दिया है। इन मुद्दोपर अपनी राय व्यक्त करनेके साथ ही तुम यह भी लिखना कि गुणावगुणके खयालसे तुम मेरे प्रस्तावको ठीक समझते हो या नही । कल यहाँ जो कुछ हुआ उसे एक दुखान्त नाटक ही कहा जायेगा । कल पाँच पडित और उनके पाँच सलाहकार नियत समयसे डेढ घटा पीछे जेलके फाटकपर पहुँचे और मेरे साथ सक्षिप्त टिप्पणियोके आदान-प्रदानमे ढाई घंटे लगा दिये। जिन तीन टिप्पणियोका' उनके और मेरे वीच आदान-प्रदान हुआ उन्हीने ढाई घटेका सारा समय ले लिया । आप विश्वास नही करेगे कि वे अन्दर आकर बातचीत करनेको इस कारण तैयार नही हुए क्योकि मैने उनके मसविदेमे जो एक शब्द जोड़ दिया था उसे उठानेको मै तैयार नही था । यह शब्द था 'अस्पृश्यो' शब्दके आगे जोडा गया एक विशेषण । यह विशेषण जो मैने लगाया था, यह था. "मौजूदा वर्गीकरणके । अनुसार । " निस्सन्देह इससे उनकी बहसका सारा विषय ही बदल जाता था । अत वे लौट गये । वेशक हमारा कहना यह नहीं है कि शास्त्रोमे अस्पृश्यताका स्थान है ही नही । हमारा कहना यह है कि जिस प्रकारकी अस्पृश्यता हम आज देखते है एक. देखिए पृष्ठ चालीस-इकतालीस । उसका शास्त्रोमे कोई स्थान नही है। पडितोंसे यह सिद्ध करना अपेक्षित था कि अस्पृश्यताका जो स्वरूप आज प्रचलित है, शास्त्रोमे उस अस्पृश्यताका समर्थन किया गया है। यह चीज ईमानदारीसे सिद्ध नहीं की जा सकती। उनकी ओरसे जो भी शास्त्रोक्ति अभीतक की गई है उससे यह बात सिद्ध नही हुई है। हमारी ओरसे जो शास्त्री बोल रहे है वे वास्तवमे बहुत विद्वान लोग है और धर्मनिष्ठ भी है। वे ईमानदारीसे ऐसा मानते है कि वर्तमान ढगकी अस्पृश्यताका शास्त्रोमे कोई औचित्य नही है । वास्तविक अस्पृश्यता तो सदैव रहेगी। यह एक बहुत ठीक ढगका सफाई और स्वच्छताका नियम है जिसपर सारे ससारमे आचरण किया जाता है । अग्रेजीकी माइक्रोफिल्म से । उनचास. पत्रः जॉर्ज जोजेफको प्रिय जोजेफ, तुम्हारा पत्र पाकर, और विशेषकर प्यारेलालके नाम तुम्हारे पत्रसे' मुझे जो प्रसन्नता हुई उसकी कल्पना तुम मेरे वर्णनकी अपेक्षा ज्यादा अच्छी तरह कर सकते हो । मै तुम्हारा पत्र उसतक पहुँचवानेकी कोशिश करूंगा। लेकिन उस पत्रके बारेमे मै दो चीजे कहना चाहूँगा । मेरा अनशन शाब्दिक अर्थमे आमरण अनशन नही था । इस जेलमें जो रोमन कैथॉलिक पादरी आता है वह मुझे जानता है, और मेरा अनशन शुरू होनेकी पूर्वसध्याको वह अपने करुणापूर्ण स्वभावके अनुसार केवल एक शब्द कहनेके लिए मेरे पास आया और उसने बताया कि वह आत्मघात और बलिदानके बीच क्या भेद मानता है । आत्मघाती व्यक्तिके मनमे नष्ट हो जानेका निश्चय रहता है । बलिदानका अर्थ है जीवनको खतरेमे डालना, और जितना बडा खतरा, उतना ही बड़ा त्याग । लेकिन इसमे खतरेसे आगेकी कोई बात नही होनी चाहिए। इस अन्तरको स्वीकार करके उससे सहमत होनेमे मुझे कोई हिचकिचाहट नही थी, और मेरा अनशन चूँकि सशर्त था इसलिए यह अनशन आत्मघात नही था बल्कि एक ऐसा अनशन था जिसमें मृत्युका खतरा तो था, लेकिन था खतरा ही, इससे ज्यादा कुछ नही । एक. इस पत्र में जोजेफने प्यारेलालकी पुस्तक द एपिक फास्ट पर अपने विचार व्यक्त किये थे और लिखा था • " अन्तरकी आवाज या तो भ्रम है या ईश्वरको आवाज है। यदि यह सचमुच ईश्वरको आवाज है तो वह आत्म-हननकी सलाह नहीं दे सकती, क्योकि ईश्वर जो जीवन देता है उसे केवल वही समाप्त कर सकता है। पत्र : जॉर्ज जोजेफको तुम्हे यह जानकारी दिलचस्प लगेगी कि मेरे कुछ रोमन कैथॉलिक मित्रोने अनशनमे कोई दोष नही देखा है। बेशक, हिन्दू धर्ममे कुछ ऐसे आत्यन्तिक उदाहरण हिन्दू-धर्ममे भी है जिनमें जीवनका अन्त कर लेना एक अनिवार्य नियम है, लेकिन इनपर फिलहाल हमे विचार करनेकी जरूरत नही है । हिन्दू धर्म और अन्य धर्मोमें इस बातपर सामान्यरूपसे सहमति है कि आत्मघात करना पाप है। अब रही अन्तरकी आवाजकी बात । तुम्हारी इस बातसे मै पूरे दिलसे सहमत हो सकता हूँ कि ईश्वरकी आवाज कभी पाप-कर्मकी सलाह या उसका समर्थन नही कर सकती। पाप करनेका प्रोत्साहन केवल शैतान दे सकता है। लेकिन असली कठिनाई तब खड़ी होती है जब पापका प्रश्न स्वय विवादास्पद हो । जो लोग अमुक कार्यको पाप मानते है वे स्वभावतः इस दावेको अमान्य कर देगे कि उसकी प्रेरणा ईश्वरने दी थी । इसीलिए एक प्रश्न के उत्तरमे मैने कहा था कि आत्मरक्षा के हेतु तथा उस सत्यकी खातिर जिसकी मै पूजा करता हूँ, मैं जिस बातका विश्वास करता हूँ उसे कहनेको बाध्य हूँ, लेकिन मेरे दावेको प्रासंगिक प्रश्नोको तय करनेके लिए दिये गये तर्कोंका अंग नहीं माना जाना चाहिए । देखा गया कि विरोधियोने उस दावेको अप्रासंगिक ही माना । ईश्वरकी आवाज सुननेका दावा किसी दृष्टान्त विशेषमे ठीक था या गलत, इसका निर्धारण दावा करनेवालेकी मत्युके बाद ही किया जा सकता है, और कुछ असाधारण मामलोमे तो इसका निर्धारण तब भी कठिन हो सकता है। इन मामलोमे दम्भसे भी ज्यादा बड़ा खतरा आत्म-प्रवचनाका है जिसकी शिकार मानवजाति सरलतासे हो जाती है । आत्म-प्रवंचनासे ग्रस्त लोगोके लिए बड़े-बड़े कामोकी सिद्धि कर लेना सम्भव है और इसके बावजूद उनका यह दावा कि उनके कार्योंके पीछे ईश्वरीय आवाजकी प्रेरणा है, सर्वथा गलत हो सकता है। ये अन्तिम ढंगकी कठिनाइयाँ है, जो समयके अन्ततक बनी रहेंगी, किन्तु यदि सत्यको कुछ भी प्रगति करनी है, तो आत्म-प्रवचनासे ग्रस्त लोगोको पूरा मौका मिलना ही चाहिए । अन्तमे पापोकी स्वीकारोक्तिका प्रश्न आता है। तुमको शायद पता न हो कि मेरे कुछ कैथॉलिक मित्र भी है जिनकी मै बहुत कद्र करता हूँ। मेरा स्वभाव है कि मैं छपी हुई कितावी चीजोकी अपेक्षा व्यक्तिगत सम्पर्कसे ही ज्यादातर ज्ञान प्राप्त करता हूँ । ये मित्र अभीतक स्पष्टरूपसे यह नहीं बता सके है कि पापोकी स्वीकारोक्ति और पापोकी स्वीकारोक्ति सुननेवालेका क्या प्रयोजन और कार्य है । जिस व्यक्तिको पापकी कोई प्रतीति ही नही है वह क्या स्वीकार करेगा, और यदि प्रतीति हो, तो मैं यह तो समझ सकता हूँ कि स्वीकारोक्ति सुननेवाला पादरी पापी व्यक्तिको पापोसे मुक्त कर दे, किन्तु क्या वह प्रायश्चित करनेवालेके भविष्य के कार्योका भी निर्देशन कर सकता है ? स्वीकारोक्ति सुननेवाले पादरीके स्थानपर हिन्दू धर्म गुरु है। मैने किसी गुरुकी तलाश जीवन भर की है, ऐसा गुरु जिसके कन्धोपर मैं अपने सारे बोझ डाल सकूँ और केवल उसकी इच्छानुसार काम करता हुआ घूमता फिरूँ । लेकिन ऐसी एक. बातचीतके लिए, देखिए परिशिष्ट दो ।
यह कोई रहस्य नहीं है कि कंप्यूटर हैवास्तव में एक सार्वभौमिक उपकरण कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया। पीसी संगीतकारों की मदद से उनके पटरियों पर कार्रवाई की जाती है, वैज्ञानिक उच्च गति वाले कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करते हैं, और कलाकार भी एक चित्रफलक के रूप में मॉनिटर का इस्तेमाल करते हैं। आज हम उन लोगों की रचनात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करेंगे जो पूरी दुनिया को अपने अकल्पनीय चित्रों के साथ जीत लेते हैं। कलाकारों के लिए कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए विशेष गोलियां तैयार की गईं, जहां ड्राइंग मॉनिटर पर प्रदर्शित की जाती है। इस अनुच्छेद में मैं आपको ऐसे बेहतरीन कार्यक्रमों से मिलवांगा जो इस तरह के सृजन पर कार्रवाई करते हैं। इस संपादक के अवसर पर विवादित आओसमीक्षा। कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह कार्यक्रम पहली नज़र में नियंत्रण का एक बहुत ही जटिल मेनू है, जिसमें नेविगेट करने में बहुत मुश्किल है। और यह वास्तव में है। मेनू को एक ही बार में सभी सेटिंग्स तक पहुंचने के लिए इस तरह की शैली में डिज़ाइन किया गया है। इसलिए, यह इतना भ्रमित हो गया लेकिन अंततः आप, हर किसी की तरह, इसे इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन कार्य क्षेत्र, इसके विपरीत, नए लोगों के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण है, क्योंकि सब कुछ यहां "अलमारियों" पर रखा गया है। सुविधाजनक और, सबसे महत्वपूर्ण बात, स्पष्ट टूल आइकन तुरंत आपको यह बताएं कि उनका क्या अर्थ है। इसलिए, बहुत से लोग एक सरल लेकिन कार्यात्मक इंटरफ़ेस पर ध्यान देते हैं। ऐसा मत सोचो कि यह संपादक केवल शुरुआती के लिए ही तैयार किया गया है, क्योंकि यह अनुभव के साथ कई कलाकारों को रोजगार देता है मानक के अनुसार, कार्यक्रम एसवीजी प्रारूप में सभी काम बचाता है, जो कई मोबाइल प्लेटफॉर्मों द्वारा समर्थित नहीं है। लेकिन इन फ़ाइलों को आसानी से परिवर्तित किया जा सकता है। ठीक है, यह माइक्रोसॉफ्ट से एक सृजन है निश्चित रूप से, बहुत से कुछ खास उम्मीद करते हैं, जो कि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ सभी उपकरणों पर कम से कम समर्थित होगा। लेकिन, दुर्भाग्य से, ऐसी उम्मीदें पूरी तरह से उचित नहीं हैं। आरंभ करने के लिए, शुरुआती लोगों के लिए कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह सबसे अच्छा प्रोग्राम नहीं है। इसका अंतरफलक जटिल है, हालांकि खिड़कियों के स्थान को अनुकूलित करना संभव है। साथ ही, सभी फ़ंक्शन विशेष शब्दों का उपयोग कर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो कि सबसे शुरुआती नहीं जानते हैं। किसी कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह प्रोग्राम विशिष्ट स्क्रीन रिजोल्यूशन (1366 x 768 पिक्सल) की आवश्यकता है, अन्यथा इसके साथ काम करना बहुत कठिन होगा लेकिन, इन सभी दोषों के बावजूद, उपयोगिता को ध्यान देना चाहिए। सब के बाद, यह लगभग सभी ड्राइंग के लिए आवश्यक उपकरण है, जो केवल ऊपर आ सकता है। एक उपयोगी सुविधा ब्रश और फिल्टर का एक सेट अतिरिक्त रूप से एम्बेड करने की क्षमता है। यह एप्लिकेशन नए लोगों के लिए अधिक है एक स्पष्ट इंटरफ़ेस संरचना, टूलटिप्स और अन्य फ़ंक्शन आपको संपादक को तुरंत समझने की अनुमति देते हैं। कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह कार्यक्रम कमजोर परिचालनात्मक विशेषताओं के लिए शमन है। इसका मतलब यह है कि भले ही आपके पास थोड़ी मात्रा में रैम हो, यह तथ्य आपको किसी भी समस्या का कारण नहीं देगा। डेवलपर्स ने सभी का ख्याल रखा इस प्रकार, यादगार कदमों की संख्या को कम करना संभव है और, तदनुसार, स्मृति खपत को कम करने के लिए। अधिष्ठापन लोडर का ही "वजन" 7 मेगाबाइट से अधिक नहीं है और जब आप इसे खोलते हैं, तो कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह प्रोग्राम लगभग 20 एमबी लेता है।
यह कोई रहस्य नहीं है कि कंप्यूटर हैवास्तव में एक सार्वभौमिक उपकरण कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया। पीसी संगीतकारों की मदद से उनके पटरियों पर कार्रवाई की जाती है, वैज्ञानिक उच्च गति वाले कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करते हैं, और कलाकार भी एक चित्रफलक के रूप में मॉनिटर का इस्तेमाल करते हैं। आज हम उन लोगों की रचनात्मकता पर ध्यान केन्द्रित करेंगे जो पूरी दुनिया को अपने अकल्पनीय चित्रों के साथ जीत लेते हैं। कलाकारों के लिए कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए विशेष गोलियां तैयार की गईं, जहां ड्राइंग मॉनिटर पर प्रदर्शित की जाती है। इस अनुच्छेद में मैं आपको ऐसे बेहतरीन कार्यक्रमों से मिलवांगा जो इस तरह के सृजन पर कार्रवाई करते हैं। इस संपादक के अवसर पर विवादित आओसमीक्षा। कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह कार्यक्रम पहली नज़र में नियंत्रण का एक बहुत ही जटिल मेनू है, जिसमें नेविगेट करने में बहुत मुश्किल है। और यह वास्तव में है। मेनू को एक ही बार में सभी सेटिंग्स तक पहुंचने के लिए इस तरह की शैली में डिज़ाइन किया गया है। इसलिए, यह इतना भ्रमित हो गया लेकिन अंततः आप, हर किसी की तरह, इसे इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन कार्य क्षेत्र, इसके विपरीत, नए लोगों के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण है, क्योंकि सब कुछ यहां "अलमारियों" पर रखा गया है। सुविधाजनक और, सबसे महत्वपूर्ण बात, स्पष्ट टूल आइकन तुरंत आपको यह बताएं कि उनका क्या अर्थ है। इसलिए, बहुत से लोग एक सरल लेकिन कार्यात्मक इंटरफ़ेस पर ध्यान देते हैं। ऐसा मत सोचो कि यह संपादक केवल शुरुआती के लिए ही तैयार किया गया है, क्योंकि यह अनुभव के साथ कई कलाकारों को रोजगार देता है मानक के अनुसार, कार्यक्रम एसवीजी प्रारूप में सभी काम बचाता है, जो कई मोबाइल प्लेटफॉर्मों द्वारा समर्थित नहीं है। लेकिन इन फ़ाइलों को आसानी से परिवर्तित किया जा सकता है। ठीक है, यह माइक्रोसॉफ्ट से एक सृजन है निश्चित रूप से, बहुत से कुछ खास उम्मीद करते हैं, जो कि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ सभी उपकरणों पर कम से कम समर्थित होगा। लेकिन, दुर्भाग्य से, ऐसी उम्मीदें पूरी तरह से उचित नहीं हैं। आरंभ करने के लिए, शुरुआती लोगों के लिए कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह सबसे अच्छा प्रोग्राम नहीं है। इसका अंतरफलक जटिल है, हालांकि खिड़कियों के स्थान को अनुकूलित करना संभव है। साथ ही, सभी फ़ंक्शन विशेष शब्दों का उपयोग कर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो कि सबसे शुरुआती नहीं जानते हैं। किसी कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह प्रोग्राम विशिष्ट स्क्रीन रिजोल्यूशन की आवश्यकता है, अन्यथा इसके साथ काम करना बहुत कठिन होगा लेकिन, इन सभी दोषों के बावजूद, उपयोगिता को ध्यान देना चाहिए। सब के बाद, यह लगभग सभी ड्राइंग के लिए आवश्यक उपकरण है, जो केवल ऊपर आ सकता है। एक उपयोगी सुविधा ब्रश और फिल्टर का एक सेट अतिरिक्त रूप से एम्बेड करने की क्षमता है। यह एप्लिकेशन नए लोगों के लिए अधिक है एक स्पष्ट इंटरफ़ेस संरचना, टूलटिप्स और अन्य फ़ंक्शन आपको संपादक को तुरंत समझने की अनुमति देते हैं। कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह कार्यक्रम कमजोर परिचालनात्मक विशेषताओं के लिए शमन है। इसका मतलब यह है कि भले ही आपके पास थोड़ी मात्रा में रैम हो, यह तथ्य आपको किसी भी समस्या का कारण नहीं देगा। डेवलपर्स ने सभी का ख्याल रखा इस प्रकार, यादगार कदमों की संख्या को कम करना संभव है और, तदनुसार, स्मृति खपत को कम करने के लिए। अधिष्ठापन लोडर का ही "वजन" सात मेगाबाइट से अधिक नहीं है और जब आप इसे खोलते हैं, तो कंप्यूटर पर ड्राइंग के लिए यह प्रोग्राम लगभग बीस एमबी लेता है।
Withdrawal of Indian [ श्री कुँवरलाल गुप्त ] आई थी तो इसके बारे में विदेश मंत्री को क्या कहना है ? श्री दिनेश सिंह मैंने देखा है कि कुछ अखबारों में शायद ऐसी बात छपवाने की कोशिश की गई है जिसका कि जिक्र माननीय सदस्य ने किया है कि जब महाराजाधिराज से बात हुई तो उन्होंने उसकी बात करना पसन्द नहीं किया लेकिन मेरा ऐसा ख्याल नहीं है । उनसे बहुत सी चीजों पर बातें हुई और मैं उन सब बातों का विवरण यहां देने में मजबूर हूँ । लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा मुझ को जाहिर नहीं किया कि वह इन बातों को नहीं करना चाहते हैं बल्कि उन्होंने मुझको फिर दावत दी कि मैं वहां जाऊँ और उनसे और बातें करूं । माननीय सदस्य उनको छपाने की कोशिश में हैं यह में जानता हूं लेकिन उससे उनका कोई फायदा होने वाला नहीं है । दूसरी बात जो. उन्होंने यू एन आई की कही तो मैं देखता हूं कि उनका बहुत निकट का सम्बन्ध है इन पत्रकार से जिनके बारे में वह ऐसा जिक्र कर रहे हैं । लेकिन शायद उस पत्रकार ने उनसे यह नहीं कहा कि मैं ने खुद उस पत्रकार से कहा था कि तुम बड़ी पुरानी खबर लाये हो । पंडितजी ने इस के पहले भी कह रक्खा है कि नेपाल के ऊपर जब कोई हमला होगा तो भारत मदद करेगा । इस लिये... श्री कँवरलाल गुप्तः उन्होंने इस खबर पर अपना कमेंट दिया या नहीं ? वह इस लिये रिलीज नहीं हो पाया कि कम्यूनिकेशन खराब था । उनको अगले दिन पता लगा । श्री दिनेश सिंहः मैं क्या जानूं कि क्यों नहीं रिलीज हो पाया । पत्रकार शायद माननीय सदस्य के बहुत निकट हैं और उन्होंने उनको बतलाया होगा कि क्यों रिलीज नहीं हो पाया, मुझसे तो बतलाया नहीं कि क्यों रिलीज नहीं हो पाया । उन्होंने जब मुझसे कहा तो मैं ने Military Mission etc. from Nepal (C. A.) उनसे कहा कि बड़ी पुरानी खबर लिये हुए हो । इसमें कितना सच है मैं नहीं कह सकता, लेकिन जहाँ तक नेपाल का सम्बन्ध है, पहले ही प्रधान मंत्री कह चुके हैं कि नेपाल के ऊपर कोई आक्रमण होगा तो हम उनकी मदद करेंगे। इस पर कोई नई बात कहने की ज़रूरत नहीं है । जहाँ तक माननीय सदस्य ने गोरखों के बारे में सवाल पूछा कि चीन गोरखों को अपनी फ़ौज में लेना चाहता है, इसके सम्बन्ध में चीन से नेपाल की क्या बात हो रही है मैं नहीं कह सकता । जहाँ तक उन्होंने यह जिक्र किया कि कुछ ऐसे देश हैं जो कि हमारे और नेपाल के सम्बन्धों को बिगाड़ना चाहते हैं, इस वक्त उनके नाम लेने से क्या फायदा ? एक दो की बात तो यहाँ हो ही गई है । उनके साथी उनके बगल में बैठे हैं, उन्होंने ही इसकी बात की। इसके ज्यादा गहराई में जाने से क्या फायदा ? श्री स० मो० बनर्जी ( कानपुर): मैं जानता हूं कि हमारे और नेपाल के सम्बन्ध काफ़ी पुराने हैं और हम लोग चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच मित्रता बनी रहे, चाहे सांस्कृतिक हो या राजनीतिक या कोई और । लेकिन हमारे सामने सवाल यह है कि जब श्री दिनेश सिंह वहाँ गये और यह भी वह समझते हैं कि वाकई जो उनकी माँग है कि वहां पर यहाँ के आदमी नहीं रहने चाहिये वह सही है तो उसको वहीं मान लिया जाना अच्छा होता क्योंकि वहाँ के फारेन से ट्री जब यहाँ तशरीफ लाये तब उन्होंने विज्ञप्ति निकाली । साफ तरीके से उन्होंने कहा कि हम लोग नहीं चाहते हैं कि यहाँ के लोग वहाँ रहें मैं चाहता हूं कि हिन्दुस्तान की सरकार इस डिमान्ड को पहले से मान लेती । लेकिन इसके साथ दूसरी चीजें भी हैं । नेपाल के कुछ लोग कौशिश कर रहे हैं कि हमारे देश के कुछ लोगों को ब्लैक मेल करें, हमारी सरकार को ब्लैक मेल करें । कुछ ही लोग ऐसे हैं,
Withdrawal of Indian [ श्री कुँवरलाल गुप्त ] आई थी तो इसके बारे में विदेश मंत्री को क्या कहना है ? श्री दिनेश सिंह मैंने देखा है कि कुछ अखबारों में शायद ऐसी बात छपवाने की कोशिश की गई है जिसका कि जिक्र माननीय सदस्य ने किया है कि जब महाराजाधिराज से बात हुई तो उन्होंने उसकी बात करना पसन्द नहीं किया लेकिन मेरा ऐसा ख्याल नहीं है । उनसे बहुत सी चीजों पर बातें हुई और मैं उन सब बातों का विवरण यहां देने में मजबूर हूँ । लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा मुझ को जाहिर नहीं किया कि वह इन बातों को नहीं करना चाहते हैं बल्कि उन्होंने मुझको फिर दावत दी कि मैं वहां जाऊँ और उनसे और बातें करूं । माननीय सदस्य उनको छपाने की कोशिश में हैं यह में जानता हूं लेकिन उससे उनका कोई फायदा होने वाला नहीं है । दूसरी बात जो. उन्होंने यू एन आई की कही तो मैं देखता हूं कि उनका बहुत निकट का सम्बन्ध है इन पत्रकार से जिनके बारे में वह ऐसा जिक्र कर रहे हैं । लेकिन शायद उस पत्रकार ने उनसे यह नहीं कहा कि मैं ने खुद उस पत्रकार से कहा था कि तुम बड़ी पुरानी खबर लाये हो । पंडितजी ने इस के पहले भी कह रक्खा है कि नेपाल के ऊपर जब कोई हमला होगा तो भारत मदद करेगा । इस लिये... श्री कँवरलाल गुप्तः उन्होंने इस खबर पर अपना कमेंट दिया या नहीं ? वह इस लिये रिलीज नहीं हो पाया कि कम्यूनिकेशन खराब था । उनको अगले दिन पता लगा । श्री दिनेश सिंहः मैं क्या जानूं कि क्यों नहीं रिलीज हो पाया । पत्रकार शायद माननीय सदस्य के बहुत निकट हैं और उन्होंने उनको बतलाया होगा कि क्यों रिलीज नहीं हो पाया, मुझसे तो बतलाया नहीं कि क्यों रिलीज नहीं हो पाया । उन्होंने जब मुझसे कहा तो मैं ने Military Mission etc. from Nepal उनसे कहा कि बड़ी पुरानी खबर लिये हुए हो । इसमें कितना सच है मैं नहीं कह सकता, लेकिन जहाँ तक नेपाल का सम्बन्ध है, पहले ही प्रधान मंत्री कह चुके हैं कि नेपाल के ऊपर कोई आक्रमण होगा तो हम उनकी मदद करेंगे। इस पर कोई नई बात कहने की ज़रूरत नहीं है । जहाँ तक माननीय सदस्य ने गोरखों के बारे में सवाल पूछा कि चीन गोरखों को अपनी फ़ौज में लेना चाहता है, इसके सम्बन्ध में चीन से नेपाल की क्या बात हो रही है मैं नहीं कह सकता । जहाँ तक उन्होंने यह जिक्र किया कि कुछ ऐसे देश हैं जो कि हमारे और नेपाल के सम्बन्धों को बिगाड़ना चाहते हैं, इस वक्त उनके नाम लेने से क्या फायदा ? एक दो की बात तो यहाँ हो ही गई है । उनके साथी उनके बगल में बैठे हैं, उन्होंने ही इसकी बात की। इसके ज्यादा गहराई में जाने से क्या फायदा ? श्री सशून्य मोशून्य बनर्जी : मैं जानता हूं कि हमारे और नेपाल के सम्बन्ध काफ़ी पुराने हैं और हम लोग चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच मित्रता बनी रहे, चाहे सांस्कृतिक हो या राजनीतिक या कोई और । लेकिन हमारे सामने सवाल यह है कि जब श्री दिनेश सिंह वहाँ गये और यह भी वह समझते हैं कि वाकई जो उनकी माँग है कि वहां पर यहाँ के आदमी नहीं रहने चाहिये वह सही है तो उसको वहीं मान लिया जाना अच्छा होता क्योंकि वहाँ के फारेन से ट्री जब यहाँ तशरीफ लाये तब उन्होंने विज्ञप्ति निकाली । साफ तरीके से उन्होंने कहा कि हम लोग नहीं चाहते हैं कि यहाँ के लोग वहाँ रहें मैं चाहता हूं कि हिन्दुस्तान की सरकार इस डिमान्ड को पहले से मान लेती । लेकिन इसके साथ दूसरी चीजें भी हैं । नेपाल के कुछ लोग कौशिश कर रहे हैं कि हमारे देश के कुछ लोगों को ब्लैक मेल करें, हमारी सरकार को ब्लैक मेल करें । कुछ ही लोग ऐसे हैं,
दिल्ली को एक बार फिर से दरिंदों ने शर्मासार किया है। हवस में अंधे एक हैवान में ने डेढ़ साली की मासूम को बनाया अपने हवस का शिकार। साउथ दिल्ली के हौजखास थाना इलाके में एक डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह वारदात राजधानी दिल्ली के हौजखास के शाहपुरजाट की है। एक दंपती अपने 3 बच्चों के साथ इसी कमरे में किराए पर रहता है। बच्चों के माता-पिता दिन में काम पर चले जाते थे, जबकि 2 बच्चे स्कूल जाते थे। माता-पिता ने दिन में कुछ घंटों के लिए अपनी बच्ची की देख-रेख के लिए संतोष नाम के युवक को रखा था। सोमवार के दिन में जब बच्ची की मां घर पहुंची तो घर की स्थिति देखा कर होश पाख्ते हो गए। उन्होंने देखा कि बच्ची के कपड़े पर खून लगा हुआ है। यह नजारा देखते ही उसने तुरन्त अपने पति को फोन कर बुलाया। पति ने घर पहुंच कर सब कुछ देखा और तुरंत पुलिस को बुलाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्ची को सफदरजंग अस्पताल भेज दिया। वहां डॉक्टरों ने बच्ची के साथ रेप की पुष्टि की। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी संतोष जिसकी उम्र 22 साल है उसे गिरफ्तार कर लिया। बच्ची के पिता ने बताया कि आरोपी संतोष उस वक्त कमरे में अकेला नहीं था, उसके साथ दूसरा शख्स भी वहां मौजूद था। लेकिन एडिशनल डीसीपी चिन्मय विस्वाल ने सिर्फ संतोष पर आरोप की पुष्टि की है। हालांकि फिलहाल इस मामले में पुलिस अभी जांच कर ही रही है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पीड़ित बच्ची से मिलने पहुंची। स्वाति मालीवाल ने मांग की है कि ऐसे आरोपियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। स्वाति मालीवाल ने कहा अगर ऐसे क्राइम पर नियंत्रण जल्द से जल्द नहीं की गई तो दिल्ली महिला आयोग तमाम विभागों के खिलाफ आंदोलन करेगी।
दिल्ली को एक बार फिर से दरिंदों ने शर्मासार किया है। हवस में अंधे एक हैवान में ने डेढ़ साली की मासूम को बनाया अपने हवस का शिकार। साउथ दिल्ली के हौजखास थाना इलाके में एक डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह वारदात राजधानी दिल्ली के हौजखास के शाहपुरजाट की है। एक दंपती अपने तीन बच्चों के साथ इसी कमरे में किराए पर रहता है। बच्चों के माता-पिता दिन में काम पर चले जाते थे, जबकि दो बच्चे स्कूल जाते थे। माता-पिता ने दिन में कुछ घंटों के लिए अपनी बच्ची की देख-रेख के लिए संतोष नाम के युवक को रखा था। सोमवार के दिन में जब बच्ची की मां घर पहुंची तो घर की स्थिति देखा कर होश पाख्ते हो गए। उन्होंने देखा कि बच्ची के कपड़े पर खून लगा हुआ है। यह नजारा देखते ही उसने तुरन्त अपने पति को फोन कर बुलाया। पति ने घर पहुंच कर सब कुछ देखा और तुरंत पुलिस को बुलाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्ची को सफदरजंग अस्पताल भेज दिया। वहां डॉक्टरों ने बच्ची के साथ रेप की पुष्टि की। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी संतोष जिसकी उम्र बाईस साल है उसे गिरफ्तार कर लिया। बच्ची के पिता ने बताया कि आरोपी संतोष उस वक्त कमरे में अकेला नहीं था, उसके साथ दूसरा शख्स भी वहां मौजूद था। लेकिन एडिशनल डीसीपी चिन्मय विस्वाल ने सिर्फ संतोष पर आरोप की पुष्टि की है। हालांकि फिलहाल इस मामले में पुलिस अभी जांच कर ही रही है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पीड़ित बच्ची से मिलने पहुंची। स्वाति मालीवाल ने मांग की है कि ऐसे आरोपियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। स्वाति मालीवाल ने कहा अगर ऐसे क्राइम पर नियंत्रण जल्द से जल्द नहीं की गई तो दिल्ली महिला आयोग तमाम विभागों के खिलाफ आंदोलन करेगी।
कहा जाता है कि सर्दियों में च्यवनप्राश का सेवन आपको कई दिक्कतों से दूर रखता है। इसका सबसे अच्छा और अहम फायदा ये है कि यह शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है। च्यवनप्राश 20-40 आयुर्वेदिक सामग्री का एक मिक्सचर होता है। सामग्री की संख्या बढ़ भी सकती है। पहले के टाइम में कुछ चवनप्राश ऐसे होते थे जिनमें 20 हर्ब्स मिलाए जाते थे, वहीं कुछ ऐसे भी होते थे जिनमें 80 से अधिक हर्ब्स मिलाए जाते हैं। इनकी ज्यादातर सामग्री जिनमें आंवला, ब्राह्मी आदि शामिल होते हैं, ऐसी होती है जिनमें इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। आइये हम आपको बताते हैं कि किस तरह चवनप्राश खाने से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है। एलर्जिक खांसी और सर्दी-जुकाम से पीड़ित कुछ लोगों पर एक अध्ययन किया गया और इन्हें नियमित रूप से च्यवनप्राश खिलाया गया। इसके बाद एलर्जी से पीड़ित लोगों का इम्यूनोग्लोब्यूलिन ई लेवल 50% तक कम हुआ जबकि 60% लोगों का बैक्टीरियल इंफेक्शन का इम्यूनोग्लोब्यूलिन ई लेवल 24% तक कम हुआ। जिसका मतलब ये हुआ कि लोगों में एलर्जिक इम्यून रिएक्शन घटने से वो इंफेक्शन का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं। एक और अध्ययन में ये निष्कर्ष भी निकला कि चवनप्राश से मैक्रोफेजिज कहलाने वाले इम्यूनिटी सेल्स की गतिविधि बढ़ा देता है। ये सेल्स नॉन-स्पेसिफिक इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जिससे कि इंफेक्शन का चांस घट जाता है। ये हैं च्यवनप्राश खाने के फायदे- च्यवनप्राश में इतनी आयुर्वेदिक औषधियां होती हैं जो फेफड़ों के काम को आसान करने के साथ-साथ शरीर में नमी को संतुलित करते है। च्यवनप्राश में आंवला, ब्राह्मी, बादाम तेल, अश्वगंधा आदि होते हैं जो मस्तिष्क के कार्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अनुसंधान से यह पता चलता है कि आयुर्वेद का यह फार्मूला यादाश्त को बढ़ाने, किसी भी चीज को सीखने की क्षमता को उन्नत करने, स्मृति बनाए रखने की क्षमता को बढ़ाते है।
कहा जाता है कि सर्दियों में च्यवनप्राश का सेवन आपको कई दिक्कतों से दूर रखता है। इसका सबसे अच्छा और अहम फायदा ये है कि यह शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है। च्यवनप्राश बीस-चालीस आयुर्वेदिक सामग्री का एक मिक्सचर होता है। सामग्री की संख्या बढ़ भी सकती है। पहले के टाइम में कुछ चवनप्राश ऐसे होते थे जिनमें बीस हर्ब्स मिलाए जाते थे, वहीं कुछ ऐसे भी होते थे जिनमें अस्सी से अधिक हर्ब्स मिलाए जाते हैं। इनकी ज्यादातर सामग्री जिनमें आंवला, ब्राह्मी आदि शामिल होते हैं, ऐसी होती है जिनमें इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। आइये हम आपको बताते हैं कि किस तरह चवनप्राश खाने से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है। एलर्जिक खांसी और सर्दी-जुकाम से पीड़ित कुछ लोगों पर एक अध्ययन किया गया और इन्हें नियमित रूप से च्यवनप्राश खिलाया गया। इसके बाद एलर्जी से पीड़ित लोगों का इम्यूनोग्लोब्यूलिन ई लेवल पचास% तक कम हुआ जबकि साठ% लोगों का बैक्टीरियल इंफेक्शन का इम्यूनोग्लोब्यूलिन ई लेवल चौबीस% तक कम हुआ। जिसका मतलब ये हुआ कि लोगों में एलर्जिक इम्यून रिएक्शन घटने से वो इंफेक्शन का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं। एक और अध्ययन में ये निष्कर्ष भी निकला कि चवनप्राश से मैक्रोफेजिज कहलाने वाले इम्यूनिटी सेल्स की गतिविधि बढ़ा देता है। ये सेल्स नॉन-स्पेसिफिक इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जिससे कि इंफेक्शन का चांस घट जाता है। ये हैं च्यवनप्राश खाने के फायदे- च्यवनप्राश में इतनी आयुर्वेदिक औषधियां होती हैं जो फेफड़ों के काम को आसान करने के साथ-साथ शरीर में नमी को संतुलित करते है। च्यवनप्राश में आंवला, ब्राह्मी, बादाम तेल, अश्वगंधा आदि होते हैं जो मस्तिष्क के कार्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अनुसंधान से यह पता चलता है कि आयुर्वेद का यह फार्मूला यादाश्त को बढ़ाने, किसी भी चीज को सीखने की क्षमता को उन्नत करने, स्मृति बनाए रखने की क्षमता को बढ़ाते है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 3 सितंबर 2014 को मुंबई में एक्सिस बैंक लिमिटेड के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज की स्थापना की। श्री आर. गांधी, गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक ने कॉलेज का उद्घाटन किया। श्री गांधी ने अपने भाषण में कहा कि कुछ भारतीय बैंकों ने विदेशी अधिकारक्षेत्रों में लोगों के जीवन और उद्यमों में प्रवेश करना आरंभ कर दिया है तथा मेजबान देशों की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ प्रासंगिकता ग्रहण की है। गृह देश के पर्यवेक्षक के रूप में रिज़र्व बैंक की बड़ी जिम्मेदारी है जिसकी पराकाष्ठा पर्यवेक्षी कॉजेलों की स्थापना के रूप में होती है जिसके माध्यम से पर्यवेक्षी सूचना और अवधारणा का विनिमय आसान हो जाता है। दिनभर के कार्यक्रम के दौरान मेजबान और गृह पर्यवेक्षकों ने पारस्परिक महत्व के कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और मेजबान पर्यवेक्षकों ने अपने-अपने देश में रिज़र्व बैंक के साथ एक्सिस बैंक लिमिटेड की उपस्थिति और परिचालन पर अपने विचार साझे किए। श्रीमती शिखा शर्मा, प्रबंधक निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नेतृत्व में एक्सिस बैंक लिमिटेड के शीर्ष प्रबंधन ने कॉलेज में सामान्य रूप से बैंक और विशेषरूप से इसकी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति के बारे में प्रस्तुतीकरण किया तथा मेजबान पर्यवेक्षकों के प्रश्नों के जवाब दिए। श्री पी. आर. रविमोहन, प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग ने कॉलेज की चर्चा की अध्यक्षता की और पर्यवेक्षण में नए दृष्टिकोण अर्थात जोखिम आधारित पर्यवेक्षण की जानकारी के साथ रिज़र्व बैंक की पर्यवेक्षी भूमिका के बारे में प्रस्तुतीकरण किया। श्री सदर्शन सेन, प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, बैकिंगं परिचालन और विकास विभाग ने देश में विनियामक व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण किया। पांच विदेशी अधिकारक्षेत्रों के नौ पर्यवेक्षकों ने एक्सिस बैंक लिमिटेड के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज में भाग लिया। भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशों में भारतीय बैंकों के सीमापार परिचालन के पर्यवेक्षण के भाग के रूप में उन बैंकों के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज स्थापित किए हैं जिनकी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति अच्छी है। इसने दिसंबर 2012 में ऐसे ही कॉलेज आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक तथा फरवरी 2014 में बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के लिए स्थापित किए हैं। पर्यवेक्षी कॉलेज स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य पर्यवेक्षकों के बीच सूचना विनिमय और सहयोग बढ़ाना है जिससे कि बैंकिंग समूह की जोखिम रूपरेखा की समझ में सुधार किया जा सके और अंतर्राष्ट्रीय रूप से सक्रिय बैंकों का अधिक प्रभावी पर्यवेक्षण हो सके। यह अपेक्षित है कि इन कॉलेजों से पर्यवेक्षकों के बीच पारस्परिक विश्वास और सहयोग में वृद्धि होगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने तीन सितंबर दो हज़ार चौदह को मुंबई में एक्सिस बैंक लिमिटेड के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज की स्थापना की। श्री आर. गांधी, गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक ने कॉलेज का उद्घाटन किया। श्री गांधी ने अपने भाषण में कहा कि कुछ भारतीय बैंकों ने विदेशी अधिकारक्षेत्रों में लोगों के जीवन और उद्यमों में प्रवेश करना आरंभ कर दिया है तथा मेजबान देशों की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ प्रासंगिकता ग्रहण की है। गृह देश के पर्यवेक्षक के रूप में रिज़र्व बैंक की बड़ी जिम्मेदारी है जिसकी पराकाष्ठा पर्यवेक्षी कॉजेलों की स्थापना के रूप में होती है जिसके माध्यम से पर्यवेक्षी सूचना और अवधारणा का विनिमय आसान हो जाता है। दिनभर के कार्यक्रम के दौरान मेजबान और गृह पर्यवेक्षकों ने पारस्परिक महत्व के कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और मेजबान पर्यवेक्षकों ने अपने-अपने देश में रिज़र्व बैंक के साथ एक्सिस बैंक लिमिटेड की उपस्थिति और परिचालन पर अपने विचार साझे किए। श्रीमती शिखा शर्मा, प्रबंधक निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नेतृत्व में एक्सिस बैंक लिमिटेड के शीर्ष प्रबंधन ने कॉलेज में सामान्य रूप से बैंक और विशेषरूप से इसकी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति के बारे में प्रस्तुतीकरण किया तथा मेजबान पर्यवेक्षकों के प्रश्नों के जवाब दिए। श्री पी. आर. रविमोहन, प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग ने कॉलेज की चर्चा की अध्यक्षता की और पर्यवेक्षण में नए दृष्टिकोण अर्थात जोखिम आधारित पर्यवेक्षण की जानकारी के साथ रिज़र्व बैंक की पर्यवेक्षी भूमिका के बारे में प्रस्तुतीकरण किया। श्री सदर्शन सेन, प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, बैकिंगं परिचालन और विकास विभाग ने देश में विनियामक व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण किया। पांच विदेशी अधिकारक्षेत्रों के नौ पर्यवेक्षकों ने एक्सिस बैंक लिमिटेड के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज में भाग लिया। भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशों में भारतीय बैंकों के सीमापार परिचालन के पर्यवेक्षण के भाग के रूप में उन बैंकों के लिए पर्यवेक्षी कॉलेज स्थापित किए हैं जिनकी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति अच्छी है। इसने दिसंबर दो हज़ार बारह में ऐसे ही कॉलेज आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक तथा फरवरी दो हज़ार चौदह में बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के लिए स्थापित किए हैं। पर्यवेक्षी कॉलेज स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य पर्यवेक्षकों के बीच सूचना विनिमय और सहयोग बढ़ाना है जिससे कि बैंकिंग समूह की जोखिम रूपरेखा की समझ में सुधार किया जा सके और अंतर्राष्ट्रीय रूप से सक्रिय बैंकों का अधिक प्रभावी पर्यवेक्षण हो सके। यह अपेक्षित है कि इन कॉलेजों से पर्यवेक्षकों के बीच पारस्परिक विश्वास और सहयोग में वृद्धि होगी।
12th CBSE Exam 2021 cancelled : सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है. 12th CBSE Exam 2021 cancelled : सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है. पीएम मोदी की मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया है. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा को रद्द (CBSE Board 12th Exam 2021 Cancelled) करने का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अन्य कैबिनेट मंत्रियों की मीटिंग हुई इसके बाद यह फैसला लिया गया. मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने कहा कि बोर्ड परीक्षा से कहीं ज्यादा छात्रों की सेहत महत्वपूर्ण है. 23 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में राज्य के सभी शिक्षा मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की गई थी. इस मीटिंग के बाद सभी राज्यों से वोट परीक्षा के आयोजन को लेकर सुझाव मांगे गए थे. बोर्ड परीक्षा रद्द कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. 31 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2 दिन का समय मांगा था. पीएम मोदी की मीटिंग के बाद बड़ा फैसला लिया गया है. सीबीएसई और ICSE 12वीं की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. डिटेल्स देखने के लिए यहां क्लिक करें. सीबीएसई ने बताया कि पिछले साल की तरह, यदि कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें ऐसा विकल्प प्रदान किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा देने जा रहे करीब 12 लाख और आईसीएससीई के 4 लाख छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी. यानी इस साल 12वीं के करीब 16 लाख छात्र बिना परीक्षा दिए पास हो सकेंगे. इस मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण और शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. बता दें कि तबियत बिगड़ने की वजह से शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक एम्स में भर्ती हैं. परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पीएम मोदी ने कहा कि स्टूडेंट्स का स्वास्थ्य और सुरक्षा बेहद जरूरी है. उस पहलू पर कोई समझौता नहीं होगा. स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर के बीच चिंता खत्म होनी चाहिए.
बारहth CBSE Exam दो हज़ार इक्कीस cancelled : सीबीएसई बारहवीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है. बारहth CBSE Exam दो हज़ार इक्कीस cancelled : सीबीएसई बारहवीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है. पीएम मोदी की मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया है. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अन्य कैबिनेट मंत्रियों की मीटिंग हुई इसके बाद यह फैसला लिया गया. मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बोर्ड परीक्षा से कहीं ज्यादा छात्रों की सेहत महत्वपूर्ण है. तेईस मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में राज्य के सभी शिक्षा मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की गई थी. इस मीटिंग के बाद सभी राज्यों से वोट परीक्षा के आयोजन को लेकर सुझाव मांगे गए थे. बोर्ड परीक्षा रद्द कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. इकतीस मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से दो दिन का समय मांगा था. पीएम मोदी की मीटिंग के बाद बड़ा फैसला लिया गया है. सीबीएसई और ICSE बारहवीं की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. डिटेल्स देखने के लिए यहां क्लिक करें. सीबीएसई ने बताया कि पिछले साल की तरह, यदि कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें ऐसा विकल्प प्रदान किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से सीबीएसई कक्षा बारह की परीक्षा देने जा रहे करीब बारह लाख और आईसीएससीई के चार लाख छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी. यानी इस साल बारहवीं के करीब सोलह लाख छात्र बिना परीक्षा दिए पास हो सकेंगे. इस मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण और शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. बता दें कि तबियत बिगड़ने की वजह से शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक एम्स में भर्ती हैं. परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पीएम मोदी ने कहा कि स्टूडेंट्स का स्वास्थ्य और सुरक्षा बेहद जरूरी है. उस पहलू पर कोई समझौता नहीं होगा. स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर के बीच चिंता खत्म होनी चाहिए.
Indian Army की ताकत हैं Soldiers की Family, Officers की बहादुरी में क्या है उनकी पत्नियों की भूमिका? Taliban Commander Sher Mohammad Abbas Stanikzai का Indian Army से क्या है कनेक्शन? पाकिस्तान के धोखे की पूरी कहानी, करगिल के 22 साल, जानिए क्या खोया क्या पाया? वो घायल फौजी जिनसे आर्मी ने मुंह मोड़ लिया! Pakistan में Army Vs Media, Journalist Hamid Mir की बताई General Rani का क्या है Indian Connection? Cyclone Yass से निपटने के लिए कैसी है NDRF, Indian Coast Guard और Indian Navy की तैयारी? MiG-21 कैसे बना Flying Coffin, इतने हादसों के बाद भी MiG 21 की उड़ान पर IAF नहीं लगा रहा है रोक? देश की पहली एंटी-कोविड मेडिसन बनाने वाले साईंटिस्ट से मुलाकात। DRDO-Dr Reddy's की कोरोना दवा आपको कब और कैसे मिलेगी?
Indian Army की ताकत हैं Soldiers की Family, Officers की बहादुरी में क्या है उनकी पत्नियों की भूमिका? Taliban Commander Sher Mohammad Abbas Stanikzai का Indian Army से क्या है कनेक्शन? पाकिस्तान के धोखे की पूरी कहानी, करगिल के बाईस साल, जानिए क्या खोया क्या पाया? वो घायल फौजी जिनसे आर्मी ने मुंह मोड़ लिया! Pakistan में Army Vs Media, Journalist Hamid Mir की बताई General Rani का क्या है Indian Connection? Cyclone Yass से निपटने के लिए कैसी है NDRF, Indian Coast Guard और Indian Navy की तैयारी? MiG-इक्कीस कैसे बना Flying Coffin, इतने हादसों के बाद भी MiG इक्कीस की उड़ान पर IAF नहीं लगा रहा है रोक? देश की पहली एंटी-कोविड मेडिसन बनाने वाले साईंटिस्ट से मुलाकात। DRDO-Dr Reddy's की कोरोना दवा आपको कब और कैसे मिलेगी?
Navodaya Vidyalaya Class 6 Admission 2023: नवोदय विद्यालय समिति में कक्षा 6 के लिए आवेदन करने वाले पैरेंट्स ध्यान दें, जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के लिए पंजीकरण 15 फरवरी को बंद हो जाएगा। एनवीएस इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं देगा, ऐसे में जल्द डायरेक्ट लिंक से आवेदन कर लें। - आधिकारिक वेबसाइट - navodaya. gov. in पर जाएं। अब उस लिंक पर क्लिक करें जिस पर लिखा हो, "The last date for submission of online application for class VI Jawahar Navodaya Vidyalaya Selection Test 2023 has been further extended up to 15th February,2023" - यहां एक नई वेबसाइट खुलेगी और छात्रों को "Click here for Class VI Registration" पर क्लिक करना होगा। यहां रजिस्ट्रेशन करें और फिर फॉर्म भरकर फीस भरें। America में Rahul Gandhi ने PM Modi पर साधा निशाना, 'कुछ लोग समझते है कि पीएम सब जानते हैं' Sakshi Murder Case में Delhi Police का बड़ा बयान- 'अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा. . . '
Navodaya Vidyalaya Class छः Admission दो हज़ार तेईस: नवोदय विद्यालय समिति में कक्षा छः के लिए आवेदन करने वाले पैरेंट्स ध्यान दें, जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के लिए पंजीकरण पंद्रह फरवरी को बंद हो जाएगा। एनवीएस इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं देगा, ऐसे में जल्द डायरेक्ट लिंक से आवेदन कर लें। - आधिकारिक वेबसाइट - navodaya. gov. in पर जाएं। अब उस लिंक पर क्लिक करें जिस पर लिखा हो, "The last date for submission of online application for class VI Jawahar Navodaya Vidyalaya Selection Test दो हज़ार तेईस has been further extended up to पंद्रह फ़रवरीruary,दो हज़ार तेईस" - यहां एक नई वेबसाइट खुलेगी और छात्रों को "Click here for Class VI Registration" पर क्लिक करना होगा। यहां रजिस्ट्रेशन करें और फिर फॉर्म भरकर फीस भरें। America में Rahul Gandhi ने PM Modi पर साधा निशाना, 'कुछ लोग समझते है कि पीएम सब जानते हैं' Sakshi Murder Case में Delhi Police का बड़ा बयान- 'अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा. . . '
एचएमवी कालेजिएट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्या प्रो. डा. अजय सरीन के दिशा-निर्देशन में स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए पारितंत्र को समझना विषय पर डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर के सौजन्य से 30वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2022 का एक दिवसीय जिला स्तरीय शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ सर्वमंगल कामना हेतु मंगल तिलक एवं ज्ञान की ज्योति प्रज्ज्वलित कर गायत्री मंत्र का गायन कर किया गया। इस अवसर पर प्राचार्या प्रो. डा. अजय सरीन ने कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में राजीव जोशी, डिप्टी डीईओ, हरजीत बावा, डीएम साइंस, जालंधर, राकेश कुमार, प्राचार्या, साईं दास सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जालंधर, राजेंद्र कुमार, लैक्चरार केमिस्ट्री, गर्वमेंट सीनियर स्कूल, गाखल, हरिदर्शन सिंह लैक्चरार केमिस्ट्री, गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, धहूरे एवं श्री राजेश शर्मा साइंस मास्टर, गर्वमेंट हाई स्कूल बस्ती बावा खेल जालंधर को प्रकृति का प्रतीक प्लांटर भेंट कर हार्दिक अभिनंदन किया एवं कहा कि हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। हम स्वस्थ रहकर ही अपने कार्य की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं। मैं आशा करती हूं कि आज की कार्यशाला से आप सभी शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी-अपनी संस्था में छात्र-छात्राओं को खोज आधारित गतिविधि द्वारा स्थानीय स्तर की परियोजना बनाएंगे और अनुसंधान आधारित कार्य करवा कर वैैज्ञानिक चेतना से स्थानीय एवं वैश्विक स्तर की गतिविधियों से जोडऩा आप शिक्षकों का धर्म है। उन्होंने शिक्षकों के व्यक्तित्व एवं विषय के प्रति विशेषज्ञता बनाए रखते हुए छात्राओं की जिज्ञासाओं को चरम सीमा तक ले जाने के लिए प्रेरित किया ताकि छात्राएं एक श्रेष्ठ भविष्य निर्माता के रूप में अग्रसर हो सकें। हरजीत बावा ने इस कार्यशाला को इस संस्था में आयोजित करने हेतु प्राचार्या एव स्कूल को-आर्डिनेटर का धन्यवाद किया।
एचएमवी कालेजिएट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्या प्रो. डा. अजय सरीन के दिशा-निर्देशन में स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए पारितंत्र को समझना विषय पर डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर के सौजन्य से तीसवीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-दो हज़ार बाईस का एक दिवसीय जिला स्तरीय शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ सर्वमंगल कामना हेतु मंगल तिलक एवं ज्ञान की ज्योति प्रज्ज्वलित कर गायत्री मंत्र का गायन कर किया गया। इस अवसर पर प्राचार्या प्रो. डा. अजय सरीन ने कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में राजीव जोशी, डिप्टी डीईओ, हरजीत बावा, डीएम साइंस, जालंधर, राकेश कुमार, प्राचार्या, साईं दास सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जालंधर, राजेंद्र कुमार, लैक्चरार केमिस्ट्री, गर्वमेंट सीनियर स्कूल, गाखल, हरिदर्शन सिंह लैक्चरार केमिस्ट्री, गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, धहूरे एवं श्री राजेश शर्मा साइंस मास्टर, गर्वमेंट हाई स्कूल बस्ती बावा खेल जालंधर को प्रकृति का प्रतीक प्लांटर भेंट कर हार्दिक अभिनंदन किया एवं कहा कि हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। हम स्वस्थ रहकर ही अपने कार्य की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं। मैं आशा करती हूं कि आज की कार्यशाला से आप सभी शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी-अपनी संस्था में छात्र-छात्राओं को खोज आधारित गतिविधि द्वारा स्थानीय स्तर की परियोजना बनाएंगे और अनुसंधान आधारित कार्य करवा कर वैैज्ञानिक चेतना से स्थानीय एवं वैश्विक स्तर की गतिविधियों से जोडऩा आप शिक्षकों का धर्म है। उन्होंने शिक्षकों के व्यक्तित्व एवं विषय के प्रति विशेषज्ञता बनाए रखते हुए छात्राओं की जिज्ञासाओं को चरम सीमा तक ले जाने के लिए प्रेरित किया ताकि छात्राएं एक श्रेष्ठ भविष्य निर्माता के रूप में अग्रसर हो सकें। हरजीत बावा ने इस कार्यशाला को इस संस्था में आयोजित करने हेतु प्राचार्या एव स्कूल को-आर्डिनेटर का धन्यवाद किया।
राष्ट्रीय विंटर कार्निवाल मनाली की तीसरी सांस्कृतिक संध्या पाश्र्व गायिका सुजाता मजूमदार, राखी गौतम व नरेंद्र ठाकुर के नाम रही। सुजाता मजूमदार ने मंच पर आते ही बालीवुड और पंजाबी गाने गाकर सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने माए नी मेरिये, दमादम मस्त कलंदर, झूम झूम झूम बाबा, तारे गिन गिन, लैला मैं लैला, दमा आ रो दम, पंजाबी गाना बिजुरिया, जय हो जैसे गाने गाकर समां बांध दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक बेहतरीन गीतों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। हिमाचल के मशहूर लोक गायक नरेंद्र ठाकुर ने झुरी रा करना की, बाटला फूटी रे नातिया बोतला फूटी रे जैसे गाने गाकर दर्शकों को नाचने पर विवश कर दिया। इससे पहले प्रेम देव, ट्विंकल, आईएस चांदनी, दोत राम पहाडिय़ा, अनुज शर्मा, नरेंद्र सिंह ठाकुर, बालक चौहान, सुरजित ठाकुर, प्रवेश निहलटा और दीपक गुप्ता ने गाने गाकर मनु रंग शाला की दर्शक दीर्घा का मनोरंजन किया।
राष्ट्रीय विंटर कार्निवाल मनाली की तीसरी सांस्कृतिक संध्या पाश्र्व गायिका सुजाता मजूमदार, राखी गौतम व नरेंद्र ठाकुर के नाम रही। सुजाता मजूमदार ने मंच पर आते ही बालीवुड और पंजाबी गाने गाकर सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने माए नी मेरिये, दमादम मस्त कलंदर, झूम झूम झूम बाबा, तारे गिन गिन, लैला मैं लैला, दमा आ रो दम, पंजाबी गाना बिजुरिया, जय हो जैसे गाने गाकर समां बांध दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक बेहतरीन गीतों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। हिमाचल के मशहूर लोक गायक नरेंद्र ठाकुर ने झुरी रा करना की, बाटला फूटी रे नातिया बोतला फूटी रे जैसे गाने गाकर दर्शकों को नाचने पर विवश कर दिया। इससे पहले प्रेम देव, ट्विंकल, आईएस चांदनी, दोत राम पहाडिय़ा, अनुज शर्मा, नरेंद्र सिंह ठाकुर, बालक चौहान, सुरजित ठाकुर, प्रवेश निहलटा और दीपक गुप्ता ने गाने गाकर मनु रंग शाला की दर्शक दीर्घा का मनोरंजन किया।
प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह ने आज नयी दिल्ली में छोटे, लघु और मंझोले उद्यमों को उनकी विशिष्ट उद्यमशीलता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण का पाठ इस प्रकार है : "छोटे, लघु और मध्यम उद्यम के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर आपके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई है। यह ऐसा अवसर है जब हम अपनी अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उद्यमियों और संस्थानों तथा व्यक्तियों के उत्कृष्ट योगदान की पहचान करते हैं। मैं आज के पुरस्कार विजेताओं का अभिनंदन करता हूं और उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। उनकी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने निरंतर मेहनत की है और कठिन आर्थिक स्थितियों के अंतर्गत व्यापारिक दक्षता सिध्द की है। मैं अनेक अवसरों पर पहले भी कह चुका हूं और आज फिर से दोहरा रहा हूं कि हमारी सरकार छोटे लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। यही वजह थी कि हमने छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए वर्ष 2004 में पृथक मंत्रालय की स्थापना की थी। मुझे खुशी है कि उस मंत्रालय ने अपनी स्थापना के बाद से बेहतर काम किया है। मैं छोटे, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री दिनशा पटेल और उनके प्रतिभाशाली अधिकारियों की टीम को इस बात के लिए बधाई और शुभकामना देता हूं कि वे इस क्षेत्र के प्रोत्साहन, विकास और विस्तार के लिए निरंतर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण क्षेत्र हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह करीब छह करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है और इसका कुल विनिर्मित उत्पादन में 45 प्रतिशत से अधिक तथा आयात से होने वाली हमारी आय में 40 प्रतिशत योगदान है। इसलिए इन उद्यमों का विकास और अच्छी हालत न केवल समूची अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि हमारे लोगों के बड़े हिस्से की जीविका और खुशहाली की रक्षा के लिए भी जरूरी है। छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों का हमारे युवाओं का कौशल विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान है। इससे युवाओं को अधिकारिता मिलती है जिससे वे गरिमा और आत्म-सम्मान का जीवन जीते हैं। तकनीकी कार्मिक शक्ति पैदा करने के अलावा इस क्षेत्र ने बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित किया है जिससे वे निश्चित समय सीमा के भीतर सफल उद्यमी बने हैं और इससे हमारे विशाल देश में उद्योगीकरण के प्रसार को गति देने में भी मदद मिली है। छोटे और लघु उद्यमों का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसलिए डॉ0 अर्जुन सेनगुप्ता के तहत असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना पिछली यूपीए सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम थी। इसका प्रयोजन इस क्षेत्र की जरूरतें पूरी करना और इसमें काम करने वाले लोगों की खुशहाली बढ़ाना है। इस आयोग ने अनेक उपयोगी सिफारिशें की हैं और हम उनमें से कुछ को पहले ही लागू भी कर चुके हैं। शेष सिफारिशों की जांच का कार्य जल्दी ही पूरा कर लिया जायेगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं, हाल ही में आई वैश्विक मंदी का दुष्प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। छोटे, लघु और मंझोले उद्यम भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। किन्तु मैं कुछ संतोष के साथ कह सकता हूं कि सरकार ने इस क्षेत्र की जरूरतों और सरोकारों पर ध्यान दिया है। दिसम्बर 2008 में इस क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैंने निर्देश जारी किए थे कि सम्मेलन में प्रस्तुत की गयी मांगों पर ध्यानपूर्वक विचार किया जाय। मुझे खुशी है कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से जो प्रोत्साहन पैकेज घोषित किए उनमें अनेक उपाय शामिल थे जिनसे इस क्षेत्र को काफी मदद मिली है। चालू वर्ष के लिए बजट में इन उपायों पर अमल किया गया है। किन्तु, मैं यह स्वीकार करता हूं कि इस महत्वूपर्ण क्षेत्र के पूर्ण विकास की संभावनाओं को सामने लाने के लिए कुछ और करने की आवश्यकता है। इसी प्रयास में मुझे दो दिन पहले इस क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में हिस्सा लेने का शुभ अवसर मिला। मैंने एक कार्य दल बनाने के निर्देश दिए जो इस क्षेत्र की बकाया कठिनाइयों को दूर करने के उपाय सुझायेगा। कार्य दल की सिफारिशें मिल जाने के बाद हम तीन महीने की समय सीमा के भीतर यह निर्णय करेंगे कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को राहत और सहायता उपलब्ध कराने के क्या और उपाय किए जायें। मैं आप सभी को आश्वासन देता हूं कि हमारी सरकार आपकी चिंताओं को दूर करने पर निरंतर गंभीरता और ईमानदारी से विचार करेगी। दो दिन पूर्व हुई बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया और यह सही भी है कि किसी भी व्यापार के लिए ऋण का प्रवाह आधारभूत आवश्यकता है। यह बात छोटे, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र पर भी लागू होती है। हमारी सरकार पांच वर्ष में छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए ऋण का प्रवाह दोगुना करने के प्रति वचनबध्द है। मुझे यह जान कर कुछ संतोष हुआ है कि इस क्षेत्र की ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बकाया ऋणों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 25 प्रतिशत वृद्वि दर्ज हुई है। आज हमने सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों को छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों को ऋण प्रदान करने में उनकी सराहनीय भूमिका के लिए सम्मानित किया है। मैं अन्य बैंकों से अपील करता हूं कि वे इन उद्यमों के लिए अधिक धन सुनिश्चित करें। अधिक मात्रा में ऋण की उपलब्धता से इन उद्यमों का तेजी से आधुनिकीकरण और विस्तार किया जा सकता है तथा साथ ही उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है। मैं छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों से अपील करता हूं कि वे उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी के रूप में वित्त के नए और उभरते हुए क्षेत्रों की भी खोज करें। हमारी सरकार का प्रयास इस क्षेत्र में उद्यमियों को सक्षम बनाने का है ताकि वे क्षमता निर्माण और कौशल विकास, ऋण, विपणन सहायता और गुणवत्तापूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए आसानी से सुविधाएं हासिल कर सकें। मेरा मानना है कि इससे वे अपनी परियोजनाओं को तेजी से लागू कर सकेंगे और बेहतर परिणाम हासिल कर सकेंगे। इस दिशा में देश भर में दो हजार समूहों की पहचान की गयी है और उनमें से पांच सौ समूहों में कुछ विशेष उपाय शुरू किए गए हैं। मुझे बताया गया है कि इन उपायों के प्रति उद्यमियों तथा अन्य सम्बध्द पक्षों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। मुझे ये जानकर भी खुशी हुई है कि खादी क्षेत्र में व्यापक सुधारों का एक कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना बनायी गयी है। यह कार्यक्रम एशियाई विकास बैंक की सहायता से चलाया जायेगा। मैं अर्थ-व्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को कुमुद बेन द्वारा प्रदान किए गए नेतृत्व के लिए उन्हें बधाई देता हूं। मैं राज्य सरकारों और बैंकों से अपील करता हूं कि वे सरकार की विभिन्न विकास एजेंसियों के साथ सक्रिय भागीदारी करते हुए इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए कड़ी मेहनत करें। छोटे, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने के लिए औद्योगिक संगठनों, तकनीकी निकायों और सभी अन्य सम्बध्द पक्षों के सहयोग से पूरी ईमानदारी के साथ राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम लागू करना होगा। मुझे विश्वास है कि मैन्युफैक्चरिंग, मिनी टूल रूमों, डिजाइन क्लिनिकों, बिजनेस इन्क्यूबेटरों और आईसीटी अनुप्रयोगों के लिए कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के साथ इन इकाइयों की प्रतिस्पर्धा में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी। स्वाभाविक है कि इसके लिए सभी सम्बध्द पक्षों को निरंतर प्रयास करने होंगे। मैं औद्योगिक संगठनों से अपील करता हूं कि वे इन कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठायें। छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध अवसरों और उनके द्वारा उठाई जा रही कठिनाइयों की साफ तस्वीर पेश करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए सही आंकड़ों की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि इस क्षेत्र की चौथी अखिल भारतीय गणना से छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। इससे उपयुक्त समय सीमा के भीतर नयी नीतियां तैयार करने और मौजूदा नीतियों को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी ताकि विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को अधिक प्रभावकारी ढंग से लागू किया जा सके। अंत में मैं एक बार फिर अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को पोषित और प्रोत्साहित करने के प्रति सरकार की वचनबध्दता दोहराता हूं। मैं आज के पुरस्कार विजेताओं को एक बार फिर बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि वे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के इस महत्पूर्ण क्षेत्र में अधिक संख्या में लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।" (Release ID :576)
प्रधानमंत्री डॉशून्य मनमोहन सिंह ने आज नयी दिल्ली में छोटे, लघु और मंझोले उद्यमों को उनकी विशिष्ट उद्यमशीलता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण का पाठ इस प्रकार है : "छोटे, लघु और मध्यम उद्यम के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर आपके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई है। यह ऐसा अवसर है जब हम अपनी अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उद्यमियों और संस्थानों तथा व्यक्तियों के उत्कृष्ट योगदान की पहचान करते हैं। मैं आज के पुरस्कार विजेताओं का अभिनंदन करता हूं और उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। उनकी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने निरंतर मेहनत की है और कठिन आर्थिक स्थितियों के अंतर्गत व्यापारिक दक्षता सिध्द की है। मैं अनेक अवसरों पर पहले भी कह चुका हूं और आज फिर से दोहरा रहा हूं कि हमारी सरकार छोटे लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। यही वजह थी कि हमने छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए वर्ष दो हज़ार चार में पृथक मंत्रालय की स्थापना की थी। मुझे खुशी है कि उस मंत्रालय ने अपनी स्थापना के बाद से बेहतर काम किया है। मैं छोटे, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री दिनशा पटेल और उनके प्रतिभाशाली अधिकारियों की टीम को इस बात के लिए बधाई और शुभकामना देता हूं कि वे इस क्षेत्र के प्रोत्साहन, विकास और विस्तार के लिए निरंतर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण क्षेत्र हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह करीब छह करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है और इसका कुल विनिर्मित उत्पादन में पैंतालीस प्रतिशत से अधिक तथा आयात से होने वाली हमारी आय में चालीस प्रतिशत योगदान है। इसलिए इन उद्यमों का विकास और अच्छी हालत न केवल समूची अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि हमारे लोगों के बड़े हिस्से की जीविका और खुशहाली की रक्षा के लिए भी जरूरी है। छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों का हमारे युवाओं का कौशल विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान है। इससे युवाओं को अधिकारिता मिलती है जिससे वे गरिमा और आत्म-सम्मान का जीवन जीते हैं। तकनीकी कार्मिक शक्ति पैदा करने के अलावा इस क्षेत्र ने बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित किया है जिससे वे निश्चित समय सीमा के भीतर सफल उद्यमी बने हैं और इससे हमारे विशाल देश में उद्योगीकरण के प्रसार को गति देने में भी मदद मिली है। छोटे और लघु उद्यमों का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसलिए डॉशून्य अर्जुन सेनगुप्ता के तहत असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना पिछली यूपीए सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम थी। इसका प्रयोजन इस क्षेत्र की जरूरतें पूरी करना और इसमें काम करने वाले लोगों की खुशहाली बढ़ाना है। इस आयोग ने अनेक उपयोगी सिफारिशें की हैं और हम उनमें से कुछ को पहले ही लागू भी कर चुके हैं। शेष सिफारिशों की जांच का कार्य जल्दी ही पूरा कर लिया जायेगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं, हाल ही में आई वैश्विक मंदी का दुष्प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। छोटे, लघु और मंझोले उद्यम भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। किन्तु मैं कुछ संतोष के साथ कह सकता हूं कि सरकार ने इस क्षेत्र की जरूरतों और सरोकारों पर ध्यान दिया है। दिसम्बर दो हज़ार आठ में इस क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैंने निर्देश जारी किए थे कि सम्मेलन में प्रस्तुत की गयी मांगों पर ध्यानपूर्वक विचार किया जाय। मुझे खुशी है कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से जो प्रोत्साहन पैकेज घोषित किए उनमें अनेक उपाय शामिल थे जिनसे इस क्षेत्र को काफी मदद मिली है। चालू वर्ष के लिए बजट में इन उपायों पर अमल किया गया है। किन्तु, मैं यह स्वीकार करता हूं कि इस महत्वूपर्ण क्षेत्र के पूर्ण विकास की संभावनाओं को सामने लाने के लिए कुछ और करने की आवश्यकता है। इसी प्रयास में मुझे दो दिन पहले इस क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में हिस्सा लेने का शुभ अवसर मिला। मैंने एक कार्य दल बनाने के निर्देश दिए जो इस क्षेत्र की बकाया कठिनाइयों को दूर करने के उपाय सुझायेगा। कार्य दल की सिफारिशें मिल जाने के बाद हम तीन महीने की समय सीमा के भीतर यह निर्णय करेंगे कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को राहत और सहायता उपलब्ध कराने के क्या और उपाय किए जायें। मैं आप सभी को आश्वासन देता हूं कि हमारी सरकार आपकी चिंताओं को दूर करने पर निरंतर गंभीरता और ईमानदारी से विचार करेगी। दो दिन पूर्व हुई बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया और यह सही भी है कि किसी भी व्यापार के लिए ऋण का प्रवाह आधारभूत आवश्यकता है। यह बात छोटे, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र पर भी लागू होती है। हमारी सरकार पांच वर्ष में छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए ऋण का प्रवाह दोगुना करने के प्रति वचनबध्द है। मुझे यह जान कर कुछ संतोष हुआ है कि इस क्षेत्र की ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बकाया ऋणों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब पच्चीस प्रतिशत वृद्वि दर्ज हुई है। आज हमने सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों को छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों को ऋण प्रदान करने में उनकी सराहनीय भूमिका के लिए सम्मानित किया है। मैं अन्य बैंकों से अपील करता हूं कि वे इन उद्यमों के लिए अधिक धन सुनिश्चित करें। अधिक मात्रा में ऋण की उपलब्धता से इन उद्यमों का तेजी से आधुनिकीकरण और विस्तार किया जा सकता है तथा साथ ही उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है। मैं छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों से अपील करता हूं कि वे उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी के रूप में वित्त के नए और उभरते हुए क्षेत्रों की भी खोज करें। हमारी सरकार का प्रयास इस क्षेत्र में उद्यमियों को सक्षम बनाने का है ताकि वे क्षमता निर्माण और कौशल विकास, ऋण, विपणन सहायता और गुणवत्तापूर्ण प्रौद्योगिकी के लिए आसानी से सुविधाएं हासिल कर सकें। मेरा मानना है कि इससे वे अपनी परियोजनाओं को तेजी से लागू कर सकेंगे और बेहतर परिणाम हासिल कर सकेंगे। इस दिशा में देश भर में दो हजार समूहों की पहचान की गयी है और उनमें से पांच सौ समूहों में कुछ विशेष उपाय शुरू किए गए हैं। मुझे बताया गया है कि इन उपायों के प्रति उद्यमियों तथा अन्य सम्बध्द पक्षों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। मुझे ये जानकर भी खुशी हुई है कि खादी क्षेत्र में व्यापक सुधारों का एक कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना बनायी गयी है। यह कार्यक्रम एशियाई विकास बैंक की सहायता से चलाया जायेगा। मैं अर्थ-व्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को कुमुद बेन द्वारा प्रदान किए गए नेतृत्व के लिए उन्हें बधाई देता हूं। मैं राज्य सरकारों और बैंकों से अपील करता हूं कि वे सरकार की विभिन्न विकास एजेंसियों के साथ सक्रिय भागीदारी करते हुए इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए कड़ी मेहनत करें। छोटे, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने के लिए औद्योगिक संगठनों, तकनीकी निकायों और सभी अन्य सम्बध्द पक्षों के सहयोग से पूरी ईमानदारी के साथ राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम लागू करना होगा। मुझे विश्वास है कि मैन्युफैक्चरिंग, मिनी टूल रूमों, डिजाइन क्लिनिकों, बिजनेस इन्क्यूबेटरों और आईसीटी अनुप्रयोगों के लिए कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के साथ इन इकाइयों की प्रतिस्पर्धा में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी। स्वाभाविक है कि इसके लिए सभी सम्बध्द पक्षों को निरंतर प्रयास करने होंगे। मैं औद्योगिक संगठनों से अपील करता हूं कि वे इन कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठायें। छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध अवसरों और उनके द्वारा उठाई जा रही कठिनाइयों की साफ तस्वीर पेश करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए सही आंकड़ों की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि इस क्षेत्र की चौथी अखिल भारतीय गणना से छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। इससे उपयुक्त समय सीमा के भीतर नयी नीतियां तैयार करने और मौजूदा नीतियों को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी ताकि विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को अधिक प्रभावकारी ढंग से लागू किया जा सके। अंत में मैं एक बार फिर अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को पोषित और प्रोत्साहित करने के प्रति सरकार की वचनबध्दता दोहराता हूं। मैं आज के पुरस्कार विजेताओं को एक बार फिर बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि वे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के इस महत्पूर्ण क्षेत्र में अधिक संख्या में लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।"
नई दिल्ली - वैश्विक स्तर पर रही गिरावट के बीच मंगलवार को दिल्ली थोक जिंस बाजार में खाद्य तेलों के साथ ही दालों और चीनी में स्थिरता रही, जबकि गेहूं और गुड़ में तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जुलाई वायदा चार रिंगिट लुढ़ककर 2379 रिंगिट प्रति टन रहा। जुलाई का अमरीकी सोया तेल वायदा भी 0. 11 सेंट की गिरावट में 30. 76 सेंट प्रति पाउंड बोला गया। स्थानीय बाजार में वनस्पति, सूरजमुखी, सोया रिफाइंड, सोया डिगम, सोया रिफाइंड, सरसों तेल, मूंगफली तेल और पाम ऑयल के भाव में टिकाव रहा। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
नई दिल्ली - वैश्विक स्तर पर रही गिरावट के बीच मंगलवार को दिल्ली थोक जिंस बाजार में खाद्य तेलों के साथ ही दालों और चीनी में स्थिरता रही, जबकि गेहूं और गुड़ में तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जुलाई वायदा चार रिंगिट लुढ़ककर दो हज़ार तीन सौ उन्यासी रिंगिट प्रति टन रहा। जुलाई का अमरीकी सोया तेल वायदा भी शून्य. ग्यारह सेंट की गिरावट में तीस. छिहत्तर सेंट प्रति पाउंड बोला गया। स्थानीय बाजार में वनस्पति, सूरजमुखी, सोया रिफाइंड, सोया डिगम, सोया रिफाइंड, सरसों तेल, मूंगफली तेल और पाम ऑयल के भाव में टिकाव रहा। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुए हादसे में साजिश की बू नजर आ रही है. जिस ट्रक से रायबरेली में पीड़िता की कार को टक्कर मारी गई है. उस ट्रक के नंबर प्लेट पर ग्रीस पुती हुई थी. इस वजह से ट्रक के नंबर को पढ़ा नहीं जा सकता है. इस हादसे में रेप पीड़ित लखनऊ के केजीएमयू में ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है. हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी ने दम तोड़ दिया है. वहीं केस के वकील की हालत भी बेहद नाजुक है. रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता अपने परिवार और वकील के साथ जेल में बंद चाचा से मिलने रायबरेली जा रही थी. इस दौरान बारिश के बीच रास्ते में एक ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मारी. बताया जा रहा है कि ट्रक रॉन्ग साइड से आ रहा था, और भिड़ंत इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. सबसे चौंकाने वाली बात ट्रक के नंबर प्लेट की है. रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीस पोतकर नंबर छिपाने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने ट्रक ड्राइवर और उसके मालिक को गिरफ्तार कर लिया है. नंबर प्लेट पर ग्रीस क्यों पोती गई इसकी जांच चल रही है. पुलिस का कहना है कि अक्सर आरटीओ से बचने के चक्कर में ओवरलोड ट्रक वाले नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करते हैं. लेकिन यहां एक और इत्तेफाक ये है कि ये ट्रक पूरी तरह से खाली थी. ऐसे में नंबर प्लेट पर लगी ग्रीस कई शक पैदा करती है. बता दें कि पिछले साल हाईकोर्ट के दखल के बाद पीड़िता को प्रशासन की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. लेकिन जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त पीड़िता के साथ कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था, पुलिस यहां भी जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रही है. कार में मौजूद सभी लोग इस केस में सीबीआई के गवाह थे. हादसे में 2 गवाह ने दम तोड़ दिया. वहीं मुख्य गवाह यानी पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है. पीड़िता के पिता की पहले ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है. लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्णन ने कहा है कि ट्रक के नंबर प्लेट पर मौजूद ग्रीस के बारे में उन्होंने जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी. यूपी पुलिस का कहना है रेप पीड़िता के साथ पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए मौजूद रहते हैं. घटना के दिन सुरक्षाकर्मी साथ क्यों नहीं थे, उन्नाव एसपी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि प्रथम दृष्टया पता चला है कि घटना के दिन इन्होंने खुद ही सुरक्षाकर्मियों को लेने से मना कर दिया था. रेप पीड़िता की मां ने इस घटना में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाया है. पीड़िता की मां ने कहा, "विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने करवाया है, वो अंदर है लेकिन उसके गुर्गे अंदर नहीं हैं, इसके पास अंदर फोन भी है, बैठे-बैठे सारा काम करा रहे हैं. " रेप पीड़िता के परिजनों के आरोप पर जब एडीजी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले में पीड़िता के परिवारजनों से बात करके ही इस बारे में कोई जानकारी देंगे.
उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुए हादसे में साजिश की बू नजर आ रही है. जिस ट्रक से रायबरेली में पीड़िता की कार को टक्कर मारी गई है. उस ट्रक के नंबर प्लेट पर ग्रीस पुती हुई थी. इस वजह से ट्रक के नंबर को पढ़ा नहीं जा सकता है. इस हादसे में रेप पीड़ित लखनऊ के केजीएमयू में ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है. हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी ने दम तोड़ दिया है. वहीं केस के वकील की हालत भी बेहद नाजुक है. रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता अपने परिवार और वकील के साथ जेल में बंद चाचा से मिलने रायबरेली जा रही थी. इस दौरान बारिश के बीच रास्ते में एक ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मारी. बताया जा रहा है कि ट्रक रॉन्ग साइड से आ रहा था, और भिड़ंत इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. सबसे चौंकाने वाली बात ट्रक के नंबर प्लेट की है. रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीस पोतकर नंबर छिपाने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने ट्रक ड्राइवर और उसके मालिक को गिरफ्तार कर लिया है. नंबर प्लेट पर ग्रीस क्यों पोती गई इसकी जांच चल रही है. पुलिस का कहना है कि अक्सर आरटीओ से बचने के चक्कर में ओवरलोड ट्रक वाले नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करते हैं. लेकिन यहां एक और इत्तेफाक ये है कि ये ट्रक पूरी तरह से खाली थी. ऐसे में नंबर प्लेट पर लगी ग्रीस कई शक पैदा करती है. बता दें कि पिछले साल हाईकोर्ट के दखल के बाद पीड़िता को प्रशासन की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. लेकिन जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त पीड़िता के साथ कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था, पुलिस यहां भी जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रही है. कार में मौजूद सभी लोग इस केस में सीबीआई के गवाह थे. हादसे में दो गवाह ने दम तोड़ दिया. वहीं मुख्य गवाह यानी पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है. पीड़िता के पिता की पहले ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है. लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्णन ने कहा है कि ट्रक के नंबर प्लेट पर मौजूद ग्रीस के बारे में उन्होंने जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी. यूपी पुलिस का कहना है रेप पीड़िता के साथ पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए मौजूद रहते हैं. घटना के दिन सुरक्षाकर्मी साथ क्यों नहीं थे, उन्नाव एसपी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि प्रथम दृष्टया पता चला है कि घटना के दिन इन्होंने खुद ही सुरक्षाकर्मियों को लेने से मना कर दिया था. रेप पीड़िता की मां ने इस घटना में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाया है. पीड़िता की मां ने कहा, "विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने करवाया है, वो अंदर है लेकिन उसके गुर्गे अंदर नहीं हैं, इसके पास अंदर फोन भी है, बैठे-बैठे सारा काम करा रहे हैं. " रेप पीड़िता के परिजनों के आरोप पर जब एडीजी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले में पीड़िता के परिवारजनों से बात करके ही इस बारे में कोई जानकारी देंगे.
एक नेता जी, चुनाव में हो गये खड़े, पहले करो कुछ वायदे, लोग इस बात पर थे अड़े। नेता जी ने गहराई से, बहुत सोचा और विचारा, उनके पास, चुनाव जीतने के लिए, नही था कोई चारा। जनता से करने चल पड़े, कुछ वायदे, सिर्फ कुर्सी ही पहुँचा सकती है, उन्हें फायदे। कि मैं हूँ हरिश्चन्द्र सत्यवादी, तन-मन मैला है, इसीलिए पहनता हूँ,शुद्ध खादी। भाइयों,मैं वचन भरता हूँ, चुनाव जीतने पर, मेल ट्रेन को, इस स्टेशन पर, रुकवाने का वायदा करता हूँ। नेता चुनाव में विजयी हो गया, और उसका, भी पूरा हो गया। अब मेल ट्रेन, इस छोटे स्टेशन पर रुकने लगी है, एक बड़ी उपलब्धि हो गयी है, किराया ऐक्सप्रैस का और, मेल ट्रेन पैसेन्जर हो गयी है। अब जनता करती है, किराया कम करने की फरियाद, नेता जी, दिलाते हैं याद। हमने अपने शासन में, बहुत विकास किया है, विकास की गति को मन्द कर दिया है। आजकल यही तो राजनीति है, जनता की, यही तो नियति है।
एक नेता जी, चुनाव में हो गये खड़े, पहले करो कुछ वायदे, लोग इस बात पर थे अड़े। नेता जी ने गहराई से, बहुत सोचा और विचारा, उनके पास, चुनाव जीतने के लिए, नही था कोई चारा। जनता से करने चल पड़े, कुछ वायदे, सिर्फ कुर्सी ही पहुँचा सकती है, उन्हें फायदे। कि मैं हूँ हरिश्चन्द्र सत्यवादी, तन-मन मैला है, इसीलिए पहनता हूँ,शुद्ध खादी। भाइयों,मैं वचन भरता हूँ, चुनाव जीतने पर, मेल ट्रेन को, इस स्टेशन पर, रुकवाने का वायदा करता हूँ। नेता चुनाव में विजयी हो गया, और उसका, भी पूरा हो गया। अब मेल ट्रेन, इस छोटे स्टेशन पर रुकने लगी है, एक बड़ी उपलब्धि हो गयी है, किराया ऐक्सप्रैस का और, मेल ट्रेन पैसेन्जर हो गयी है। अब जनता करती है, किराया कम करने की फरियाद, नेता जी, दिलाते हैं याद। हमने अपने शासन में, बहुत विकास किया है, विकास की गति को मन्द कर दिया है। आजकल यही तो राजनीति है, जनता की, यही तो नियति है।
कलौंजी का इस्तेमाल बहुत तरह की दवाईयों को बनाने में किया जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन मौजूद होते है. कलोंजी के इस्तेमाल से त्वचा और बालो को भी हैल्थी बनाया जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाएं जाते हैं, जो हमारी स्किन और बालो के बहुत फायदेमंद होते है. आज हम आपको कलौंजी के बालों और त्वचा पर होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे है. 1-आजकल हर कोई अपने बालो के झड़ने की समस्या से परेशान रहता है. अगर आप भी इसी समस्या से परेशान है तो इसके लिए मेथीदाने को पीसकर उसमे नारियल तेल और कलौंजी को मिलाकर एक पेस्ट बना ले. अब इस पेस्ट को अपने बालों पर लगा लें. ऐसा करने से आपके बाल झड़ना बंद हो जाएंगे. 2-अपने चेहरे से डेड स्किन को हटाने के लिए कलौंजी को पीसकर उसमे थोड़ा ऑलिव ऑयल मिला ले. अब इसे अपने चेहरे पर अच्छे से लगा लगे. आधे घंटे बाद ठन्डे पानी से अपने चेहरे को धो ले. इससे आपकी डेड स्किन की समस्या दूर हो जाएगी. इसके अलावा ये आपके चेहरे के सांवलापन भी दूर करने में मदद करेगी. 3-अगर आप फटी ऐड़ियों की समस्या से परेशान हैं तो कलौंजी को पीसकर पेस्ट बना ले. अब इसमें थोड़ी सी मलाई और नींबू मिलाकर अपनी फटी ऐड़ियों में लगाएं. ऐसा करने से आपकी फटी एड़िया मुलायम हो जाएंगी.
कलौंजी का इस्तेमाल बहुत तरह की दवाईयों को बनाने में किया जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन मौजूद होते है. कलोंजी के इस्तेमाल से त्वचा और बालो को भी हैल्थी बनाया जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाएं जाते हैं, जो हमारी स्किन और बालो के बहुत फायदेमंद होते है. आज हम आपको कलौंजी के बालों और त्वचा पर होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे है. एक-आजकल हर कोई अपने बालो के झड़ने की समस्या से परेशान रहता है. अगर आप भी इसी समस्या से परेशान है तो इसके लिए मेथीदाने को पीसकर उसमे नारियल तेल और कलौंजी को मिलाकर एक पेस्ट बना ले. अब इस पेस्ट को अपने बालों पर लगा लें. ऐसा करने से आपके बाल झड़ना बंद हो जाएंगे. दो-अपने चेहरे से डेड स्किन को हटाने के लिए कलौंजी को पीसकर उसमे थोड़ा ऑलिव ऑयल मिला ले. अब इसे अपने चेहरे पर अच्छे से लगा लगे. आधे घंटे बाद ठन्डे पानी से अपने चेहरे को धो ले. इससे आपकी डेड स्किन की समस्या दूर हो जाएगी. इसके अलावा ये आपके चेहरे के सांवलापन भी दूर करने में मदद करेगी. तीन-अगर आप फटी ऐड़ियों की समस्या से परेशान हैं तो कलौंजी को पीसकर पेस्ट बना ले. अब इसमें थोड़ी सी मलाई और नींबू मिलाकर अपनी फटी ऐड़ियों में लगाएं. ऐसा करने से आपकी फटी एड़िया मुलायम हो जाएंगी.
स्मृति ईरानी बाेलीं, 'सत्ता का सौदा कितना अजीब है' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अखिलेश और राहुल की दोस्ती को जमकर आड़े हाथों लिया। कहा कि सत्ता का सौदा कितना अजीब है। बुंदेलखंड पैकेज के नाम पर अखिलेश सरकार को घेरने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अब इनका साथ पसंद है। भाजपा की घोषणाओं का जिक्र करते हुए किसानों और युवाओं को रिझाया। मंगलवार को निर्धारित समय से लगभग दो घंटा देरी से आईं केंद्रीय मंत्री व अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने जहीर क्लब मैदान में भाजपा प्रत्याशी प्रकाश द्विवेदी के पक्ष में जनसभा की। कहा कि कांग्रेस ने 40 साल राज किया, लेकिन किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं दे पाई। सपा ने सत्ता पाने के बाद किसानों की अनदेखी कर दी। बुंदेलखंड दौरों पर कई बार आए राहुल गांधी खुद कहते रहे कि जो पैसा दिल्ली से भेजा गया अखिलेश सरकार ने गरीब परिवारों का सहयोग नहीं किया। आज सत्ता के लालच में गुंडों से हाथ मिला लिया। ईरानी ने किसानों को रिझाया कि भाजपा का संकल्प है सरकार बनी तो लघु व सीमांत किसानों का कर्ज माफ होगा। ब्याज मुक्त फसली ऋण भी दिया जाएगा। दूसरे का खेत जोतने वाले भूमिहीन किसान मजदूर प्रदेश में लगभग दो करोड़ हैं। दीनदयाल सुरक्षा बीमा योजना के तहत दो लाख तक मुफ्त बीमा होगा। गोधन योजना से इन्हीं भूमिहीन मजदूरों को गाय उपलब्ध कराकर रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। अहिल्या बाई योजना के तहत गरीब बालिकाओं को ग्रेजुएट तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। छात्रों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिलेगी। इसके बाद 50 फीसदी से ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों को ग्रेजुएट तक की शिक्षा में शुल्क नहीं देना होगा। युवाओं को बगैर लक्ष्मी दर्शन कराए नौकरी मिलेगी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शीलू बलात्कार कांड नहीं भूलीं। शीलू निषाद का जिक्र करते हुए कहा कि यही वह सड़क और चौराहा है जहां शीलू को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने व भाजपा कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किया था। उन्हें बर्दाश्त नहीं होता जब किसी बहन-बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
स्मृति ईरानी बाेलीं, 'सत्ता का सौदा कितना अजीब है' केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अखिलेश और राहुल की दोस्ती को जमकर आड़े हाथों लिया। कहा कि सत्ता का सौदा कितना अजीब है। बुंदेलखंड पैकेज के नाम पर अखिलेश सरकार को घेरने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अब इनका साथ पसंद है। भाजपा की घोषणाओं का जिक्र करते हुए किसानों और युवाओं को रिझाया। मंगलवार को निर्धारित समय से लगभग दो घंटा देरी से आईं केंद्रीय मंत्री व अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने जहीर क्लब मैदान में भाजपा प्रत्याशी प्रकाश द्विवेदी के पक्ष में जनसभा की। कहा कि कांग्रेस ने चालीस साल राज किया, लेकिन किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं दे पाई। सपा ने सत्ता पाने के बाद किसानों की अनदेखी कर दी। बुंदेलखंड दौरों पर कई बार आए राहुल गांधी खुद कहते रहे कि जो पैसा दिल्ली से भेजा गया अखिलेश सरकार ने गरीब परिवारों का सहयोग नहीं किया। आज सत्ता के लालच में गुंडों से हाथ मिला लिया। ईरानी ने किसानों को रिझाया कि भाजपा का संकल्प है सरकार बनी तो लघु व सीमांत किसानों का कर्ज माफ होगा। ब्याज मुक्त फसली ऋण भी दिया जाएगा। दूसरे का खेत जोतने वाले भूमिहीन किसान मजदूर प्रदेश में लगभग दो करोड़ हैं। दीनदयाल सुरक्षा बीमा योजना के तहत दो लाख तक मुफ्त बीमा होगा। गोधन योजना से इन्हीं भूमिहीन मजदूरों को गाय उपलब्ध कराकर रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। अहिल्या बाई योजना के तहत गरीब बालिकाओं को ग्रेजुएट तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। छात्रों को बारहवीं तक मुफ्त शिक्षा मिलेगी। इसके बाद पचास फीसदी से ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों को ग्रेजुएट तक की शिक्षा में शुल्क नहीं देना होगा। युवाओं को बगैर लक्ष्मी दर्शन कराए नौकरी मिलेगी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शीलू बलात्कार कांड नहीं भूलीं। शीलू निषाद का जिक्र करते हुए कहा कि यही वह सड़क और चौराहा है जहां शीलू को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने व भाजपा कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किया था। उन्हें बर्दाश्त नहीं होता जब किसी बहन-बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
फतेहपुर : विभाग नहीं ला पाया स्कूलों के "अच्छे दिन", सभी स्कूलों में नहीं हो सके कायाकल्प के कार्य। फतेहपुर : शासन ने भले ही परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे भी ऐसे तमाम स्कूल हैं जहां पर 'अमीर' करने का फैसला किया हो लेकिन उसकी मंशा धरातल पर पूरी तरह हकीकत का रूप नहीं ले सकी। जिले में अब ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सभी बिन्दुओं को संतृप्त नहीं हो सके। ऑपरेशन कायाकल्प में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पंचायत राज विभाग की अब प्राथमिकताएं बदल गई हैं। डेढ़ वर्ष पूर्व मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी डीएम को जारी भेजे गए पत्र में कहा था कि पंचायतीराज विभाग अब प्राथमिकता के तौर पर परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थापना करेगा। 14वें वित्त, राज्य वित्त, ग्राम विकास निधि एवं अन्य निधियों के द्वारा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं के स्तर से संतृप्त किया जाएगा। कार्यों की वरीयता सूची भी जारी की गई थी। कोरोना की में भी शासन ने निर्धारित बिन्दुओं की सूची जारी कर तय समय में संतृप्त करने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग भी आईवीआरएस कॉल के जरिए ऑपरेशन कायाकल्प की ग्राउन्ड शासन की मंशा के मुताबिक जीरो पर वस्तुस्थिति की समीक्षा कर रहा था। अब तक स्कूलों का कायाकल्प नहीं हो सका। शुरुआती तेजी के बाद सुस्त पड़े जिम्मेदार : शासन ने दो वर्ष पूर्व 14वें वित्त की धनराशि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थापना में खर्च करने का आदेश दिया था तो जागरूक ग्राम प्रधानों ने अनेक परिषदीय स्कूलों में फ्लोर टाइलिंग व दूसरे काम कराए थे लेकिन जब इसे ऑपरेशन कायाकल्प के रूप में अभियान का रूप दे दिया गया तो सभी बिन्दुओं को संतृप्त करने में जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाई। कई आदेशों में फंस गया कायाकल्प : जानकार बताते हैं कि शासन ने परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं एवं अन्य विकास कार्य कराने का आदेश दिया तो लगा कि जल्द ही सरकारी स्कूलों की दशा व दिशा बदल जाएगी लेकिन एक के बाद एक आए आदेशों से ऑपरेशन कायाकल्प को लेकर भ्रम की स्थिति हो गई। अब पंचायत राज विभाग अपने निदेशक के आदेश का हवाला दे रहा है। निर्देश के आदेश में कहा गया है कि ऑपरेशन कायाकल्प की बजाए गांवों में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवनों का निर्माण प्राथमिकता से कराया जाए। इस समय विभाग सामुदायिक शौचालयों व पंचायत भवनों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
फतेहपुर : विभाग नहीं ला पाया स्कूलों के "अच्छे दिन", सभी स्कूलों में नहीं हो सके कायाकल्प के कार्य। फतेहपुर : शासन ने भले ही परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे भी ऐसे तमाम स्कूल हैं जहां पर 'अमीर' करने का फैसला किया हो लेकिन उसकी मंशा धरातल पर पूरी तरह हकीकत का रूप नहीं ले सकी। जिले में अब ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सभी बिन्दुओं को संतृप्त नहीं हो सके। ऑपरेशन कायाकल्प में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पंचायत राज विभाग की अब प्राथमिकताएं बदल गई हैं। डेढ़ वर्ष पूर्व मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी डीएम को जारी भेजे गए पत्र में कहा था कि पंचायतीराज विभाग अब प्राथमिकता के तौर पर परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थापना करेगा। चौदहवें वित्त, राज्य वित्त, ग्राम विकास निधि एवं अन्य निधियों के द्वारा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं के स्तर से संतृप्त किया जाएगा। कार्यों की वरीयता सूची भी जारी की गई थी। कोरोना की में भी शासन ने निर्धारित बिन्दुओं की सूची जारी कर तय समय में संतृप्त करने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग भी आईवीआरएस कॉल के जरिए ऑपरेशन कायाकल्प की ग्राउन्ड शासन की मंशा के मुताबिक जीरो पर वस्तुस्थिति की समीक्षा कर रहा था। अब तक स्कूलों का कायाकल्प नहीं हो सका। शुरुआती तेजी के बाद सुस्त पड़े जिम्मेदार : शासन ने दो वर्ष पूर्व चौदहवें वित्त की धनराशि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थापना में खर्च करने का आदेश दिया था तो जागरूक ग्राम प्रधानों ने अनेक परिषदीय स्कूलों में फ्लोर टाइलिंग व दूसरे काम कराए थे लेकिन जब इसे ऑपरेशन कायाकल्प के रूप में अभियान का रूप दे दिया गया तो सभी बिन्दुओं को संतृप्त करने में जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाई। कई आदेशों में फंस गया कायाकल्प : जानकार बताते हैं कि शासन ने परिषदीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं एवं अन्य विकास कार्य कराने का आदेश दिया तो लगा कि जल्द ही सरकारी स्कूलों की दशा व दिशा बदल जाएगी लेकिन एक के बाद एक आए आदेशों से ऑपरेशन कायाकल्प को लेकर भ्रम की स्थिति हो गई। अब पंचायत राज विभाग अपने निदेशक के आदेश का हवाला दे रहा है। निर्देश के आदेश में कहा गया है कि ऑपरेशन कायाकल्प की बजाए गांवों में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवनों का निर्माण प्राथमिकता से कराया जाए। इस समय विभाग सामुदायिक शौचालयों व पंचायत भवनों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
चर्चा में क्यों? 22 अक्तूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी सेना समर्थित हमले और आम लोगों पर किये गए अत्याचार को प्रदर्शित करने के लिये केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में एक संग्रहालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। - नई दिल्ली में स्थापित होने वाले इस संग्रहालय में कश्मीर में हिंसा तथा आतंक को बढ़ावा देने और यहाँ की संस्कृति को नष्ट करने में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया जाएगा। - पाकिस्तानी सेना द्वारा समर्थित इस हमले के बाद तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्ज़े में चला गया था और हज़ारों हिंदुओं एवं सिखों को भारत की ओर पलायन करना पड़ा था। - पलायन के अलावा हज़ारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को इस हमले में अपनी जान गँवानी पड़ी थी। - इस संग्रहालय की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य आम लोगों को कश्मीर में आतंकवाद, अस्थिरता और अशांति फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में जानकारी देना है। - कश्मीर संकट के इतिहास की जड़ें वर्ष 1947 में खोजी जा सकती हैं, जब पाकिस्तान की सेना के इशारे पर तकरीबन 1000 आदिवासियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। - दरअसल विभाजन के दौरान जम्मू-कश्मीर रियासत को भारत अथवा पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उस समय के शासक महाराजा हरि सिंह ने इसे एक स्वतंत्र राज्य के रूप में रखने का फैसला किया। - 1947 में पाकिस्तान के पख्तून आदिवासियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया, इस स्थिति से निपटने के लिये महाराजा ने तत्कालीन भारतीय गवर्नर-जनरल माउंटबेटन से सैन्य मदद मांगी। - ध्यातव्य है कि पाकिस्तानी सेना ने हमलावरों को आक्रमण करने के लिये रसद, हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराए थे। इन्हें पाकिस्तान की सेना द्वारा निर्देश दिये जा रहे थे। - 26 अक्तूबर, 1947 को आक्रमणकारी श्रीनगर के करीब बारामूला पहुँच गए तथा उन्होंने स्थानीय लोगों पर काफी अत्याचार किये और हिंदू तथा सिखों को पलायन के लिये मजबूर कर दिया। - अंत में जब महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये तब जम्मू-कश्मीर औपचारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गया। - वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के पूर्व जम्मू-कश्मीर रियासत में कुल पाँच क्षेत्र शामिल थेः जम्मू, कश्मीर घाटी, लद्दाख, गिलगित वज़रात और गिलगित एजेंसी। - 22 अक्तूबर, 1947 में जब पाकिस्तान ने कश्मीर घाटी पर आक्रमण किया तब जम्मू-कश्मीर की रियासत का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया, जबकि शेष हिस्सा भारत के पास रह गया। पाकिस्तान के पास जम्मू-कश्मीर रियासत का जो हिस्सा है उसे पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) के नाम से जाना जाता है। - पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) पश्चिम में पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा से, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान से, उत्तर में चीन के शिनजियांग प्रांत से और पूर्व में भारत के जम्मू-कश्मीर से अपनी सीमा साझा करता है, इसीलिये अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का सामरिक महत्त्व काफी अधिक है।
चर्चा में क्यों? बाईस अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी सेना समर्थित हमले और आम लोगों पर किये गए अत्याचार को प्रदर्शित करने के लिये केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में एक संग्रहालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। - नई दिल्ली में स्थापित होने वाले इस संग्रहालय में कश्मीर में हिंसा तथा आतंक को बढ़ावा देने और यहाँ की संस्कृति को नष्ट करने में पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया जाएगा। - पाकिस्तानी सेना द्वारा समर्थित इस हमले के बाद तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्ज़े में चला गया था और हज़ारों हिंदुओं एवं सिखों को भारत की ओर पलायन करना पड़ा था। - पलायन के अलावा हज़ारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को इस हमले में अपनी जान गँवानी पड़ी थी। - इस संग्रहालय की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य आम लोगों को कश्मीर में आतंकवाद, अस्थिरता और अशांति फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में जानकारी देना है। - कश्मीर संकट के इतिहास की जड़ें वर्ष एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में खोजी जा सकती हैं, जब पाकिस्तान की सेना के इशारे पर तकरीबन एक हज़ार आदिवासियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। - दरअसल विभाजन के दौरान जम्मू-कश्मीर रियासत को भारत अथवा पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उस समय के शासक महाराजा हरि सिंह ने इसे एक स्वतंत्र राज्य के रूप में रखने का फैसला किया। - एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में पाकिस्तान के पख्तून आदिवासियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया, इस स्थिति से निपटने के लिये महाराजा ने तत्कालीन भारतीय गवर्नर-जनरल माउंटबेटन से सैन्य मदद मांगी। - ध्यातव्य है कि पाकिस्तानी सेना ने हमलावरों को आक्रमण करने के लिये रसद, हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराए थे। इन्हें पाकिस्तान की सेना द्वारा निर्देश दिये जा रहे थे। - छब्बीस अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आक्रमणकारी श्रीनगर के करीब बारामूला पहुँच गए तथा उन्होंने स्थानीय लोगों पर काफी अत्याचार किये और हिंदू तथा सिखों को पलायन के लिये मजबूर कर दिया। - अंत में जब महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये तब जम्मू-कश्मीर औपचारिक रूप से भारत का हिस्सा बन गया। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के पूर्व जम्मू-कश्मीर रियासत में कुल पाँच क्षेत्र शामिल थेः जम्मू, कश्मीर घाटी, लद्दाख, गिलगित वज़रात और गिलगित एजेंसी। - बाईस अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में जब पाकिस्तान ने कश्मीर घाटी पर आक्रमण किया तब जम्मू-कश्मीर की रियासत का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया, जबकि शेष हिस्सा भारत के पास रह गया। पाकिस्तान के पास जम्मू-कश्मीर रियासत का जो हिस्सा है उसे पाक-अधिकृत कश्मीर के नाम से जाना जाता है। - पाक-अधिकृत कश्मीर पश्चिम में पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा से, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान से, उत्तर में चीन के शिनजियांग प्रांत से और पूर्व में भारत के जम्मू-कश्मीर से अपनी सीमा साझा करता है, इसीलिये अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का सामरिक महत्त्व काफी अधिक है।
Nature Geoscience में प्रकाशित एक स्टडी में दावा किया गया है कि जमीन के नीचे चट्टान तरल रूप में मौजूद हैं और इनका अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि भविष्य में आने वाले भूकंप की स्थिति क्या हो सकती है? Research on Earth: आपने पौराणिक कहानियों में 'पाताल लोक' का जिक्र कई बार सुना होगा. उन कहानियों की मानें तो 'पताल लोक' एक ऐसी जगह है जहां पर आसुरी शक्तियां रहती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि अब 'पाताल लोक' सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं रहा क्योंकि गहरी रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने पाताल लोक तक पहुंचने की कोशिश की है. कई जगहों पर इस बात का जिक्र है कि अगर धरती की सतह से नीचे की एक गहरा गड्ढा खोदा जाए तो हम पाताल लोक तक पहुंच सकते हैं. कुछ ऐसा ही कारनामा वर्तमान समय में वैज्ञानिकों ने किया है. रिसर्च को जमीन से लगभग 100 मील नीचे एक चट्टान की परत मिली थी जो पूरी तरह से पिघली हुई थी. अब तक यह पहली बार है जब रिसर्चर्स जमीन के इतने नीचे तक पहुंच सके हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह परत एस्थेनोस्फीयर के नीचे है. एस्थोनोस्फीयर धरती के काफी नीचे है जो बहुत कमजोर परत है और यह हमेशा मूव करती रहती है. रिसर्चर बताते है कि एस्थोनोस्फीयर की स्टडी करने से हमें काफी कुछ जानकारियां मिल सकती हैं. रिसर्चर्स की मानें तो इसके अध्ययन से हमें टेक्टोनिक प्लेट्स में मूवमेंट का पता लगेगा, इसके अलावा इस बात की भी गणना की जा सकती है कि भविष्य में कब-कब भूकंप आ सकता है. वर्तमान समय में इस बात का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है कि भूकंप कब और कहां आएगा, फिर भी भूकंप के लिहाज से धरती को अलग-अलग रेंज में बांटा गया है. धरती के नीचे मिली चिपचिपी और तरल चीज का अध्ययन करके यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के रिसर्चर्स ने बताया इसका दायरा काफी बड़ा है. अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया कि इसका 44% हिस्सा प्लैनेट को घेरे हुए हो सकता है. इससे जुड़ी स्टडी को नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित किया गया है. जमीन के नीचे इस लेयर का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि बस में भविष्य में आने वाले भूकंप की स्थिति क्या हो सकती है.
Nature Geoscience में प्रकाशित एक स्टडी में दावा किया गया है कि जमीन के नीचे चट्टान तरल रूप में मौजूद हैं और इनका अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि भविष्य में आने वाले भूकंप की स्थिति क्या हो सकती है? Research on Earth: आपने पौराणिक कहानियों में 'पाताल लोक' का जिक्र कई बार सुना होगा. उन कहानियों की मानें तो 'पताल लोक' एक ऐसी जगह है जहां पर आसुरी शक्तियां रहती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि अब 'पाताल लोक' सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं रहा क्योंकि गहरी रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने पाताल लोक तक पहुंचने की कोशिश की है. कई जगहों पर इस बात का जिक्र है कि अगर धरती की सतह से नीचे की एक गहरा गड्ढा खोदा जाए तो हम पाताल लोक तक पहुंच सकते हैं. कुछ ऐसा ही कारनामा वर्तमान समय में वैज्ञानिकों ने किया है. रिसर्च को जमीन से लगभग एक सौ मील नीचे एक चट्टान की परत मिली थी जो पूरी तरह से पिघली हुई थी. अब तक यह पहली बार है जब रिसर्चर्स जमीन के इतने नीचे तक पहुंच सके हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह परत एस्थेनोस्फीयर के नीचे है. एस्थोनोस्फीयर धरती के काफी नीचे है जो बहुत कमजोर परत है और यह हमेशा मूव करती रहती है. रिसर्चर बताते है कि एस्थोनोस्फीयर की स्टडी करने से हमें काफी कुछ जानकारियां मिल सकती हैं. रिसर्चर्स की मानें तो इसके अध्ययन से हमें टेक्टोनिक प्लेट्स में मूवमेंट का पता लगेगा, इसके अलावा इस बात की भी गणना की जा सकती है कि भविष्य में कब-कब भूकंप आ सकता है. वर्तमान समय में इस बात का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है कि भूकंप कब और कहां आएगा, फिर भी भूकंप के लिहाज से धरती को अलग-अलग रेंज में बांटा गया है. धरती के नीचे मिली चिपचिपी और तरल चीज का अध्ययन करके यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के रिसर्चर्स ने बताया इसका दायरा काफी बड़ा है. अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया कि इसका चौंतालीस% हिस्सा प्लैनेट को घेरे हुए हो सकता है. इससे जुड़ी स्टडी को नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित किया गया है. जमीन के नीचे इस लेयर का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि बस में भविष्य में आने वाले भूकंप की स्थिति क्या हो सकती है.
Bron Breakker & Cora Jade: WWE NXT सुपरस्टार कोरा जेड (Cora Jade) की लेटेस्ट इंस्टाग्राम स्टोरी से यह खुलासा हुआ कि वो मौजूदा NXT चैंपियन ब्रॉन ब्रेकर (Bron Breakker) को डेट कर रही हैं। ब्रेकर कंपनी के सबसे चर्चित सुपरस्टार्स में से एक हैं और निश्चित ही मेन रोस्टर में जाकर बड़े स्टार्स के बीच अपना नाम बना सकते हैं। ब्रेकर का मौजूदा NXT चैंपियनशिप रन बहुत ही शानदार और प्रभावी है। वहीं 21 वर्षीय कोरा जेड NXT विमेंस डिवीजन की टॉप स्टार्स में से एक हैं। जेड ने हाल ही में सभी को चौंकाते हुए अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में ब्रॉन ब्रेकर की फोटो शेयर की जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि दोनों हाल ही में कहीं डेट पर गए हैं। ब्रॉन की फोटो पर उन्होंने "palette heart" फ़िल्टर उपयोग किया है। कोरा जेड के इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी के माध्यम से शेयर की गई ब्रेकर की फोटो ने रेसलिंग फैंस को चौंका दिया। फैंस ने भी बिना देर करे फोटो पर अपना रिएक्शन देना शुरू कर दिया। इस फैन का कहना है कि कोरा जेड और ब्रॉन ब्रेकर का एक-दूसरे को डेट करना अकल्पनीय है। मैं उनके लिए खुश हूं। इस फैन ने कहा कि मैं बहुत परेशान था लेकिन जब मैंने देखा कि कोरा और ब्रॉन ब्रेकर रिलेशन में हैं तब मैं खुश हो गया। ब्रॉन ब्रेकर हॉल ऑफ फेमर रिक स्टाइनर के बेटे हैं। उन्होंने 2021 में कंपनी के साथ डील साइन की थी। 2 साल से भी कम समय में ब्रॉन ने अपनी इन-रिंग स्किल्स और माइक प्रोमो से सभी को प्रभावित किया है। WWE के जानकारों का मानना है कि वो कंपनी के अगले मेगास्टार बन सकते हैं। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
Bron Breakker & Cora Jade: WWE NXT सुपरस्टार कोरा जेड की लेटेस्ट इंस्टाग्राम स्टोरी से यह खुलासा हुआ कि वो मौजूदा NXT चैंपियन ब्रॉन ब्रेकर को डेट कर रही हैं। ब्रेकर कंपनी के सबसे चर्चित सुपरस्टार्स में से एक हैं और निश्चित ही मेन रोस्टर में जाकर बड़े स्टार्स के बीच अपना नाम बना सकते हैं। ब्रेकर का मौजूदा NXT चैंपियनशिप रन बहुत ही शानदार और प्रभावी है। वहीं इक्कीस वर्षीय कोरा जेड NXT विमेंस डिवीजन की टॉप स्टार्स में से एक हैं। जेड ने हाल ही में सभी को चौंकाते हुए अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में ब्रॉन ब्रेकर की फोटो शेयर की जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि दोनों हाल ही में कहीं डेट पर गए हैं। ब्रॉन की फोटो पर उन्होंने "palette heart" फ़िल्टर उपयोग किया है। कोरा जेड के इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी के माध्यम से शेयर की गई ब्रेकर की फोटो ने रेसलिंग फैंस को चौंका दिया। फैंस ने भी बिना देर करे फोटो पर अपना रिएक्शन देना शुरू कर दिया। इस फैन का कहना है कि कोरा जेड और ब्रॉन ब्रेकर का एक-दूसरे को डेट करना अकल्पनीय है। मैं उनके लिए खुश हूं। इस फैन ने कहा कि मैं बहुत परेशान था लेकिन जब मैंने देखा कि कोरा और ब्रॉन ब्रेकर रिलेशन में हैं तब मैं खुश हो गया। ब्रॉन ब्रेकर हॉल ऑफ फेमर रिक स्टाइनर के बेटे हैं। उन्होंने दो हज़ार इक्कीस में कंपनी के साथ डील साइन की थी। दो साल से भी कम समय में ब्रॉन ने अपनी इन-रिंग स्किल्स और माइक प्रोमो से सभी को प्रभावित किया है। WWE के जानकारों का मानना है कि वो कंपनी के अगले मेगास्टार बन सकते हैं। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
हिमाचल के कांगड़ा स्थित जसवां-परागपुर से BJP उम्मीदवार कैबिनेट मंत्री बिक्रम ठाकुर ने आज प्रागपुर BDO कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किया। कैबिनेट मंत्री के नामांकन के दौरान भारी जन-सैलाब उमड़ा। लोगों की भीड़ देख गदगद हुए बिक्रम ठाकुर ने किसके साथ टक्कर के सवाल पर कहा कि क्यों पड़े हो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। इस दौरान बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जसवां-परागपुर में एक समान विकास किया है। दोनों जगह 2-2 SDM कार्यालय खोले हैं। 2-2 वीडियो कार्यालय हैं। सड़कों का जाल बिछाया है। उन्होंने कहा कि आज जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र एक मॉडल विधानसभा है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। जनता ने भी खुलकर आशीर्वाद दिया है। इससे पहले उन्होंने अपनी कुल देवी का आशीर्वाद लेकर प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। टिकट फाइनल होते ही ठाकुर ने कुल देवी के दरबार में हाजिरी लगाई। जिसके बाद वह जनता दरबार में हाजिरी लगाने उतरे। बिक्रम ठाकुर अब लगातार जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल के कांगड़ा स्थित जसवां-परागपुर से BJP उम्मीदवार कैबिनेट मंत्री बिक्रम ठाकुर ने आज प्रागपुर BDO कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किया। कैबिनेट मंत्री के नामांकन के दौरान भारी जन-सैलाब उमड़ा। लोगों की भीड़ देख गदगद हुए बिक्रम ठाकुर ने किसके साथ टक्कर के सवाल पर कहा कि क्यों पड़े हो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। इस दौरान बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जसवां-परागपुर में एक समान विकास किया है। दोनों जगह दो-दो SDM कार्यालय खोले हैं। दो-दो वीडियो कार्यालय हैं। सड़कों का जाल बिछाया है। उन्होंने कहा कि आज जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र एक मॉडल विधानसभा है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। जनता ने भी खुलकर आशीर्वाद दिया है। इससे पहले उन्होंने अपनी कुल देवी का आशीर्वाद लेकर प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। टिकट फाइनल होते ही ठाकुर ने कुल देवी के दरबार में हाजिरी लगाई। जिसके बाद वह जनता दरबार में हाजिरी लगाने उतरे। बिक्रम ठाकुर अब लगातार जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उम्र वर्ग और रंग के बावजूद हम सभी आराध्य हैं। हम, अपने तरीके से, स्त्री और आकर्षक लगते हैं। प्लस आकार के मोड जानते हैं कि पूर्ण सुंदरियों के लिए सुंदर कपड़े को कोमलता दी जाएगी। आखिरकार, हम में से प्रत्येक में देवी रहती है। एक अच्छी तरह से गठित संगठन की मदद से इसे सही ढंग से दिखाएं। रंगीन बटन, चमड़े के बेल्ट, भरे हुए आस्तीन, फूलों के पैटर्न, फीता और रिबन ट्रिम में कंट्रास्टिंग - और यह प्रवृत्ति में अब क्या है इसकी पूरी सूची नहीं है। फैशन-ओलंपस पर पूरी लड़कियों के लिए कपड़े की निम्नलिखित सुंदर शैलियों हैंः - पोशाक कोट; - शर्ट शैली में; - एक नाइट की याद ताजा करती है; - पैक; - बच्चे गुड़िया; - बैंडो और बस्टियर; - धुआं, हवादारता व्यक्तित्व; - असममित सौंदर्य; - साल; - एक टुकड़ा के साथ मामला। इस मौसम में पूर्ण के लिए सुंदर कपड़े इस तरह के रंगों में बने हैंः - फ़िरोज़ा; - पन्ना; - पीला; - लाल; - ग्रे; - काले; - बेज; - बैंगनी; - गुलाबी। लोकप्रियता के शीर्ष पर मोज़ेक, ज्यामितीय और पुष्प प्रिंट हैं। वसंत-गर्मी के लिए पहले से ही कपड़े तलाश रहे हैं? चमड़े ( पर्यावरण या प्राकृतिक), कैम्ब्रिक, शिफॉन, रेशम, organza, guipure, कपास से बनाए गए मॉडल को देखो। लंबाई व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर चुनेंः मिनी, मिडी या मैक्सी। यह न भूलें कि इसे आकर्षण और यौन रूपों पर सही ढंग से जोर देना चाहिए। आकर्षक महिलाओं, अपनी उपस्थिति के गुणों पर जोर देते हैं, बाहरी समस्या क्षेत्रों से छिपाने के लिए नहीं भूलते हैं। उदाहरण के लिए, वसा महिलाओं के लिए सुंदर ग्रीष्मकालीन कपड़े हैंः - Trapezoidal । यदि अतिरिक्त वजन पेट और कूल्हों में केंद्रित होता है, तो ए-सिल्हूट को वरीयता दें। वह आनुपातिकता जोड़ देगा। - साम्राज्य यदि आप पूरी जांघों से ध्यान हटाना चाहते हैं तो यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, fashionistas से भरा के लिए बहुत सुंदर कपड़े शानदार बस्ट पर जोर देने में मदद करते हैं। - फिट इसे एक विस्तृत गर्डल के साथ पूरक किया जाना चाहिए। खूबसूरत पैरों और आनुपातिक पूर्णता वाले महिलाओं पर पूरी तरह से बैठता है। अत्यधिक वजन - इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सभी अंधेरे डालने और दिन और रात चलने की जरूरत है। पूरी लड़कियों के लिए खूबसूरत युवा कपड़े देखें, जो कि प्रसिद्ध हॉलीवुड मेलिसा मेलिसा मैककार्नी द्वारा बनाई गई है। अपने ब्रांड सेवन 7 की रचनाओं को यह साबित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि हम में से प्रत्येक चौंकाने वाला लग सकता है। मुख्य बात यह है कि आप अपने अलमारी को सही ढंग से निर्धारित करने में सक्षम हों और अपने रूपों के बारे में शर्मिंदा न हों। यदि आप उत्सव की घटना में जा रहे हैं, तो निम्न पर नज़र डालेंः - साम्राज्य शैली में; - मैक्सी-सौंदर्य; - कढ़ाई sequins; - पतली पैरों वाली महिलाओं के लिए बेबी-डॉलर । खैर, और वह, वह कम वृद्धि! एक उपयुक्त प्रिंट, कपड़े, लंबाई चुनें, जूते के बारे में मत भूलना - और, वॉयला, स्टाइलिश पोशाक तैयार है। एक ऊर्ध्वाधर पट्टी या चित्रों में कपड़े पर कोशिश करने लायक है। पैर को वेज या ऊँची एड़ी पर नग्न जूते की मदद से दृष्टि से बढ़ाया जाता है। कम सुंदरियों से भरे सुंदर कपड़े की शैलियों का चयन किया जाना चाहिए, यह विचार करना कि छिपाने के लायक क्या हैः - कूल्हों हम अपने रूपों को संतुलित करने की कोशिश करते हैं। सहयोगी - एक ऊर्ध्वाधर पट्टी, एक वी आकार की neckline, एक हल्का शीर्ष और एक अंधेरा तल। - कमर की अनुपस्थिति । यहां यह दृढ़ता से जोर देने के लिए चोट नहीं पहुंचाएगा, नाटक करें कि आप एस्पेन कमर के मालिक हैं। इससे न केवल बेल्ट या बेल्ट की मदद मिलेगी, और छाती के सुंदर कपड़े की पूरी श्रृंखला के लिए जोर दिया जाएगा। - लश स्तन । बड़े पैमाने पर सजावटी तत्वों के बिना एकान्त मॉडल पर बारीकी से देखो जो इस क्षेत्र के आसपास के लोगों की नजर पर ध्यान केंद्रित करते हैं। Decollete त्रिकोणीय या दौर होना चाहिए। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर शाम के कपड़े भारी कपड़े से जरूरी नहीं हो सकते हैं। स्टाइलिस्ट सर्वसम्मति से जोर देते हैं कि हवादारता का प्रभाव मादा सिल्हूट को दृष्टि से हल्का करने में मदद करता है, और इसलिए औपचारिक रूप में साटन या रेशम परिधान शामिल हो सकता है। ढीले कपड़े से बचें। आपका यह हैः - एक गहरी वी-गर्दन, छाती क्षेत्र पर प्रभावी ढंग से जोर देती है; - एक मामला जो पेट को मजबूत करता है, आकृति को बढ़ा देता है और बस्ट को विशाल बनाता है; - साम्राज्य, पक्षों के चारों ओर छिपकर और साथ ही साथ कमज़ोर सेक्स के प्रतिनिधि की दिव्य शुरुआत पर जोर देना; - पतले पट्टियाँ घंटे का चश्मा सूट करेंगे, जो पूरे कंधों को संकीर्ण करना चाहिए; - एक आकार का सिल्हूट उबले हुए पेट को छुपाएगा; - एक गंध के साथ कपड़े सेक्स अपील देता है। ओपनवर्क प्रशंसा - इस मौसम में मास्ट-हेवी। इस प्रवृत्ति ने कई सत्रों के लिए फैशन ओलंपस के शीर्ष को नहीं छोड़ा है। यह किसी भी पैरामीटर के साथ अनूठा लड़की दिखता है। पूरी तरह से सुंदर guipure कपड़े - प्रकाश में बाहर जाने के लिए क्या जरूरत है। इसे शाही आकर्षण, कामुकता और चुंबकत्व के मालिकों को दें। क्या आप लालित्य चाहते हैं? काले, भूरे, सफेद, क्रीम या बेज रंग के कपड़ों का धनुष बनाओ। बेज परिधान जैकेट, कोट, एक ही रंग के ट्रेंच कोट के लिए उपयुक्त है। लसी लक्जरी के लिए बहुत सारे सामान की आवश्यकता नहीं है। रंगीन बालियां, हार और कंगन में हार्मोनिक्स चुनना आवश्यक है। एक विशाल हैंडबैग के बजाय उत्सव से बाहर निकलने के लिए, एक प्रवृत्ति क्लच या मिनोडियर पकड़ो। क्लासिक रंग चुनने के लिए जूते बेहतर होते हैं। यदि आप नग्न पसंद करते हैं, तो आप कभी हार नहीं पाएंगे। हम में से प्रत्येक अलमारी के इस तत्व में आकर्षक लग रहा है, खासकर अगर हम शिफॉन सौंदर्य के बारे में बात कर रहे हैं। वसा महिलाओं के लिए सुंदर, सुरुचिपूर्ण कपड़े सिर्फ आपके लिए देवी की तरह महसूस करने के लिए बने हैं। लटकन, sequins, मनके कढ़ाई, स्फटिक के साथ सजाया या गहने के बिना जा सकते हैं। इस किस्म के बीच, किसी भी फैशन कलाकार को अपना कुछ मिल जाएगा। जैसा ऊपर बताया गया है, एक कपड़े चुनने में खुद को सीमित न करें जिससे पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर लंबे कपड़े पहने जाते हैं। यह flirtatious pleating या किसी भी अन्य सामग्री हो सकता है। प्रिंट समस्या क्षेत्रों को छिपाना चाहिए, उदाहरण के लिए, शानदार नितंब फूलों के पैटर्न, सरल ज्यामितीय पैटर्न की मदद से छिपे हुए हैं। टॉयलेट आउटलेट का रंग अधिमानतः एक-स्वर या म्यूट होना चाहिए। वॉल्यूम को दृष्टि से कम करता है, इसलिए यह ठंडा रंग है। रोजमर्रा की जिंदगी में, पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर कपड़े कार्डिगन, जैकेट, जैकेट-जैकेट, एक बम, टखने के जूते, सैंडल और अन्य के साथ पूरक होने की सिफारिश की जाती है। पहली नज़र में असंगत चीजों को गठबंधन करने से डरो मत। उदाहरण के लिए, बुना हुआ कार्डिगन के साथ एक गिपुर ड्रेस डालें, इसे चमड़े के पट्टा पर बांधना - छवि में स्त्री और मर्दाना नोट्स का संयोजन हमेशा फैशन में होता है। एक और पूरी लड़कियों के लिए एक ही सुंदर पोशाक नवीनता का एक नोट ला सकती है, सिर्फ रूमाल पहने हुए या बदलते जूते पहनने वाले अन्य गहने, हैंडबैग को देख सकती है। उनके साथ, आप अंतहीन धनुष प्राप्त करते हैं, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पूरी सुंदरियों के लिए बुना हुआ कपड़ा से बने सुंदर कपड़े कैसे पहनें और कैसे पहनेंः - चमड़े या साबर से बने जूते के साथ एक लंबे कछुए पहनें; - प्रकाश या तटस्थ स्वरों की पोशाक उज्ज्वल सामान (कपड़े से बने बेल्ट, एक साटन स्कार्फ, एक फूल हार) के साथ विविधता प्रदान करती है; - पूर्ण रूप से पतले सुंदर कपड़े को सैंडल-ग्लैडीएटर, सफेद स्नीकर्स, युडोविमी नौकाओं से पहने जाने की सिफारिश की जाती है; - ठंड के मौसम में एक दैनिक लुकबुक के लिए आधार होगा, और इसलिए कोट, फैशनेबल जैकेट, आरामदायक कार्डिगन की सुंदरता का पूरक होगा। एक फ्लश पैक , एक रोमांटिक बेबी-गुड़िया या एक सेक्सी बॉक्स पहनने में संकोच न करें। आपको उस चीज़ पर नज़र डालना चाहिए जो पहली आकर्षण को बढ़ाता है। क्या आप एक व्यवसायी महिला हैं? एक जैकेट और ऊँची एड़ी के जूते के साथ तंग फिटिंग मॉडल को पूरा करें। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर पोशाक शैलियों को अपनी आकर्षकता में आत्मविश्वास की भावना देना चाहिए। स्टाइलिस्ट उन लोगों के लिए मिनी-कपड़ों पहनने की सलाह देते हैं जिनके पास सही पैर हैं। यह बहुत बहुमुखी है, पार्क में आराम करने, दोस्तों के साथ घूमने, रोमांटिक तारीख पर जाने के लिए उपयुक्त है। पूर्ण निर्जलीकरण के लिए एक बहुत ही सुंदर पोशाक को अपनी निर्दोष लंबाई और रंग योजना के लिए चुना जाना चाहिए। फैशन उद्योग में वर्तमान प्रवृत्तियों को एक पल के लिए भूल जाओ, आरामदायक, स्त्री और आश्चर्यजनक महसूस करने वाली कुछ चीज़ चुनें। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर कपड़े बहुत विविध हो सकते हैं। इस शानदारता को अपने आप में से कुछ को खोजने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है, जिस पर आत्मा झूठ बोलती है।
उम्र वर्ग और रंग के बावजूद हम सभी आराध्य हैं। हम, अपने तरीके से, स्त्री और आकर्षक लगते हैं। प्लस आकार के मोड जानते हैं कि पूर्ण सुंदरियों के लिए सुंदर कपड़े को कोमलता दी जाएगी। आखिरकार, हम में से प्रत्येक में देवी रहती है। एक अच्छी तरह से गठित संगठन की मदद से इसे सही ढंग से दिखाएं। रंगीन बटन, चमड़े के बेल्ट, भरे हुए आस्तीन, फूलों के पैटर्न, फीता और रिबन ट्रिम में कंट्रास्टिंग - और यह प्रवृत्ति में अब क्या है इसकी पूरी सूची नहीं है। फैशन-ओलंपस पर पूरी लड़कियों के लिए कपड़े की निम्नलिखित सुंदर शैलियों हैंः - पोशाक कोट; - शर्ट शैली में; - एक नाइट की याद ताजा करती है; - पैक; - बच्चे गुड़िया; - बैंडो और बस्टियर; - धुआं, हवादारता व्यक्तित्व; - असममित सौंदर्य; - साल; - एक टुकड़ा के साथ मामला। इस मौसम में पूर्ण के लिए सुंदर कपड़े इस तरह के रंगों में बने हैंः - फ़िरोज़ा; - पन्ना; - पीला; - लाल; - ग्रे; - काले; - बेज; - बैंगनी; - गुलाबी। लोकप्रियता के शीर्ष पर मोज़ेक, ज्यामितीय और पुष्प प्रिंट हैं। वसंत-गर्मी के लिए पहले से ही कपड़े तलाश रहे हैं? चमड़े , कैम्ब्रिक, शिफॉन, रेशम, organza, guipure, कपास से बनाए गए मॉडल को देखो। लंबाई व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर चुनेंः मिनी, मिडी या मैक्सी। यह न भूलें कि इसे आकर्षण और यौन रूपों पर सही ढंग से जोर देना चाहिए। आकर्षक महिलाओं, अपनी उपस्थिति के गुणों पर जोर देते हैं, बाहरी समस्या क्षेत्रों से छिपाने के लिए नहीं भूलते हैं। उदाहरण के लिए, वसा महिलाओं के लिए सुंदर ग्रीष्मकालीन कपड़े हैंः - Trapezoidal । यदि अतिरिक्त वजन पेट और कूल्हों में केंद्रित होता है, तो ए-सिल्हूट को वरीयता दें। वह आनुपातिकता जोड़ देगा। - साम्राज्य यदि आप पूरी जांघों से ध्यान हटाना चाहते हैं तो यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, fashionistas से भरा के लिए बहुत सुंदर कपड़े शानदार बस्ट पर जोर देने में मदद करते हैं। - फिट इसे एक विस्तृत गर्डल के साथ पूरक किया जाना चाहिए। खूबसूरत पैरों और आनुपातिक पूर्णता वाले महिलाओं पर पूरी तरह से बैठता है। अत्यधिक वजन - इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सभी अंधेरे डालने और दिन और रात चलने की जरूरत है। पूरी लड़कियों के लिए खूबसूरत युवा कपड़े देखें, जो कि प्रसिद्ध हॉलीवुड मेलिसा मेलिसा मैककार्नी द्वारा बनाई गई है। अपने ब्रांड सेवन सात की रचनाओं को यह साबित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि हम में से प्रत्येक चौंकाने वाला लग सकता है। मुख्य बात यह है कि आप अपने अलमारी को सही ढंग से निर्धारित करने में सक्षम हों और अपने रूपों के बारे में शर्मिंदा न हों। यदि आप उत्सव की घटना में जा रहे हैं, तो निम्न पर नज़र डालेंः - साम्राज्य शैली में; - मैक्सी-सौंदर्य; - कढ़ाई sequins; - पतली पैरों वाली महिलाओं के लिए बेबी-डॉलर । खैर, और वह, वह कम वृद्धि! एक उपयुक्त प्रिंट, कपड़े, लंबाई चुनें, जूते के बारे में मत भूलना - और, वॉयला, स्टाइलिश पोशाक तैयार है। एक ऊर्ध्वाधर पट्टी या चित्रों में कपड़े पर कोशिश करने लायक है। पैर को वेज या ऊँची एड़ी पर नग्न जूते की मदद से दृष्टि से बढ़ाया जाता है। कम सुंदरियों से भरे सुंदर कपड़े की शैलियों का चयन किया जाना चाहिए, यह विचार करना कि छिपाने के लायक क्या हैः - कूल्हों हम अपने रूपों को संतुलित करने की कोशिश करते हैं। सहयोगी - एक ऊर्ध्वाधर पट्टी, एक वी आकार की neckline, एक हल्का शीर्ष और एक अंधेरा तल। - कमर की अनुपस्थिति । यहां यह दृढ़ता से जोर देने के लिए चोट नहीं पहुंचाएगा, नाटक करें कि आप एस्पेन कमर के मालिक हैं। इससे न केवल बेल्ट या बेल्ट की मदद मिलेगी, और छाती के सुंदर कपड़े की पूरी श्रृंखला के लिए जोर दिया जाएगा। - लश स्तन । बड़े पैमाने पर सजावटी तत्वों के बिना एकान्त मॉडल पर बारीकी से देखो जो इस क्षेत्र के आसपास के लोगों की नजर पर ध्यान केंद्रित करते हैं। Decollete त्रिकोणीय या दौर होना चाहिए। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर शाम के कपड़े भारी कपड़े से जरूरी नहीं हो सकते हैं। स्टाइलिस्ट सर्वसम्मति से जोर देते हैं कि हवादारता का प्रभाव मादा सिल्हूट को दृष्टि से हल्का करने में मदद करता है, और इसलिए औपचारिक रूप में साटन या रेशम परिधान शामिल हो सकता है। ढीले कपड़े से बचें। आपका यह हैः - एक गहरी वी-गर्दन, छाती क्षेत्र पर प्रभावी ढंग से जोर देती है; - एक मामला जो पेट को मजबूत करता है, आकृति को बढ़ा देता है और बस्ट को विशाल बनाता है; - साम्राज्य, पक्षों के चारों ओर छिपकर और साथ ही साथ कमज़ोर सेक्स के प्रतिनिधि की दिव्य शुरुआत पर जोर देना; - पतले पट्टियाँ घंटे का चश्मा सूट करेंगे, जो पूरे कंधों को संकीर्ण करना चाहिए; - एक आकार का सिल्हूट उबले हुए पेट को छुपाएगा; - एक गंध के साथ कपड़े सेक्स अपील देता है। ओपनवर्क प्रशंसा - इस मौसम में मास्ट-हेवी। इस प्रवृत्ति ने कई सत्रों के लिए फैशन ओलंपस के शीर्ष को नहीं छोड़ा है। यह किसी भी पैरामीटर के साथ अनूठा लड़की दिखता है। पूरी तरह से सुंदर guipure कपड़े - प्रकाश में बाहर जाने के लिए क्या जरूरत है। इसे शाही आकर्षण, कामुकता और चुंबकत्व के मालिकों को दें। क्या आप लालित्य चाहते हैं? काले, भूरे, सफेद, क्रीम या बेज रंग के कपड़ों का धनुष बनाओ। बेज परिधान जैकेट, कोट, एक ही रंग के ट्रेंच कोट के लिए उपयुक्त है। लसी लक्जरी के लिए बहुत सारे सामान की आवश्यकता नहीं है। रंगीन बालियां, हार और कंगन में हार्मोनिक्स चुनना आवश्यक है। एक विशाल हैंडबैग के बजाय उत्सव से बाहर निकलने के लिए, एक प्रवृत्ति क्लच या मिनोडियर पकड़ो। क्लासिक रंग चुनने के लिए जूते बेहतर होते हैं। यदि आप नग्न पसंद करते हैं, तो आप कभी हार नहीं पाएंगे। हम में से प्रत्येक अलमारी के इस तत्व में आकर्षक लग रहा है, खासकर अगर हम शिफॉन सौंदर्य के बारे में बात कर रहे हैं। वसा महिलाओं के लिए सुंदर, सुरुचिपूर्ण कपड़े सिर्फ आपके लिए देवी की तरह महसूस करने के लिए बने हैं। लटकन, sequins, मनके कढ़ाई, स्फटिक के साथ सजाया या गहने के बिना जा सकते हैं। इस किस्म के बीच, किसी भी फैशन कलाकार को अपना कुछ मिल जाएगा। जैसा ऊपर बताया गया है, एक कपड़े चुनने में खुद को सीमित न करें जिससे पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर लंबे कपड़े पहने जाते हैं। यह flirtatious pleating या किसी भी अन्य सामग्री हो सकता है। प्रिंट समस्या क्षेत्रों को छिपाना चाहिए, उदाहरण के लिए, शानदार नितंब फूलों के पैटर्न, सरल ज्यामितीय पैटर्न की मदद से छिपे हुए हैं। टॉयलेट आउटलेट का रंग अधिमानतः एक-स्वर या म्यूट होना चाहिए। वॉल्यूम को दृष्टि से कम करता है, इसलिए यह ठंडा रंग है। रोजमर्रा की जिंदगी में, पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर कपड़े कार्डिगन, जैकेट, जैकेट-जैकेट, एक बम, टखने के जूते, सैंडल और अन्य के साथ पूरक होने की सिफारिश की जाती है। पहली नज़र में असंगत चीजों को गठबंधन करने से डरो मत। उदाहरण के लिए, बुना हुआ कार्डिगन के साथ एक गिपुर ड्रेस डालें, इसे चमड़े के पट्टा पर बांधना - छवि में स्त्री और मर्दाना नोट्स का संयोजन हमेशा फैशन में होता है। एक और पूरी लड़कियों के लिए एक ही सुंदर पोशाक नवीनता का एक नोट ला सकती है, सिर्फ रूमाल पहने हुए या बदलते जूते पहनने वाले अन्य गहने, हैंडबैग को देख सकती है। उनके साथ, आप अंतहीन धनुष प्राप्त करते हैं, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पूरी सुंदरियों के लिए बुना हुआ कपड़ा से बने सुंदर कपड़े कैसे पहनें और कैसे पहनेंः - चमड़े या साबर से बने जूते के साथ एक लंबे कछुए पहनें; - प्रकाश या तटस्थ स्वरों की पोशाक उज्ज्वल सामान के साथ विविधता प्रदान करती है; - पूर्ण रूप से पतले सुंदर कपड़े को सैंडल-ग्लैडीएटर, सफेद स्नीकर्स, युडोविमी नौकाओं से पहने जाने की सिफारिश की जाती है; - ठंड के मौसम में एक दैनिक लुकबुक के लिए आधार होगा, और इसलिए कोट, फैशनेबल जैकेट, आरामदायक कार्डिगन की सुंदरता का पूरक होगा। एक फ्लश पैक , एक रोमांटिक बेबी-गुड़िया या एक सेक्सी बॉक्स पहनने में संकोच न करें। आपको उस चीज़ पर नज़र डालना चाहिए जो पहली आकर्षण को बढ़ाता है। क्या आप एक व्यवसायी महिला हैं? एक जैकेट और ऊँची एड़ी के जूते के साथ तंग फिटिंग मॉडल को पूरा करें। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर पोशाक शैलियों को अपनी आकर्षकता में आत्मविश्वास की भावना देना चाहिए। स्टाइलिस्ट उन लोगों के लिए मिनी-कपड़ों पहनने की सलाह देते हैं जिनके पास सही पैर हैं। यह बहुत बहुमुखी है, पार्क में आराम करने, दोस्तों के साथ घूमने, रोमांटिक तारीख पर जाने के लिए उपयुक्त है। पूर्ण निर्जलीकरण के लिए एक बहुत ही सुंदर पोशाक को अपनी निर्दोष लंबाई और रंग योजना के लिए चुना जाना चाहिए। फैशन उद्योग में वर्तमान प्रवृत्तियों को एक पल के लिए भूल जाओ, आरामदायक, स्त्री और आश्चर्यजनक महसूस करने वाली कुछ चीज़ चुनें। पूर्ण महिलाओं के लिए सुंदर कपड़े बहुत विविध हो सकते हैं। इस शानदारता को अपने आप में से कुछ को खोजने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है, जिस पर आत्मा झूठ बोलती है।
पूर्णिया जिले में स्थित टीकापट्टी में बापू की यादें फिर से जिंदा होंगी। पूर्णिया से 65 किलोमीटर दूर टीकापट्टी आजादी की लड़ाई का केंद्र था। 1934 में भूकंप की त्रासदी के बाद चंदा एकत्रित करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 10 अप्रैल 1934 को टीकापट्टी आये थे। इस स्थान की एतिहासिकता को देखते हुए बापू की यादों को सहेजने की कवायद प्रशासन की ओर से शुरू कर दी गयी है। टीकापट्टी को प्रखंड बनाने की मांग भी लंबे समय से इलाके के लोगों के द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री अगले माह विकास यात्रा की शुरूआत करने वाले हैं। इस दौरान उनके टीकापट्टी आने की संभावना भी जतायी जा रही है। मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए टीकापट्टी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वह पहली बार यहां आये हैं। उन्होंने भरोसा दिया था कि वह जल्द ही सरकारी कार्यक्रम बनाकर यहां आयेंगे। उन्होंने ठीठरू मंडल को भी नमन किया था, जिन्होंने यहां स्वराज आश्रम के लिए पांच एकड़ जमीन दान दे दी थी। उनके आने पर यहां की दशा-दिशा बदलना तय है। बुधवार को जिलाधिकारी राहुल कुमार जब टीकापट्टी पहुंचे तो लोगों की उम्मीदें जग गई। गांधी सदन के कायाकल्प की आस भी जगी है। पूर्णिया से टीकापट्टी की दूरी भी काफी है। रूपौली प्रखंड से कई पंचायतें बीस से तीस किलोमीटर दूर हैं। टीकापट्टी में जहां गांधी जी आये थे, पहले वह खाली जगह थी। बाद में गांधी सदन का निर्माण किया गया। 1983 से इसी भवन में टीकापट्टी ओपी चलता रहा। 2007 में टीकापट्टी थाना बन गया। गांधी सदन के बगल में डायट है। दूसरी ओर बुनियादी विद्यालय है। जिला पदाधिकारी राहुल कुमार ने गांधी सदन का अवलोकन किया। गांधी जी के आगमन से लेकर इस स्थल के इतिहास को लेकर जानकारी जुटाई। सैलानियों के आकर्षण का केंद्र काझा कोठी की सुंदरता भी निखरेगी। जिलाधिकारी ने काझा कोठी जाकर मुआयना किया। करीब 30 एकड़ में फैले काझा कोठी के बीचोबीच पांच से दस एकड़ में बना तालाब भी है। पहले यहां बोटिंग होती थी। मगर कुछ वर्षों से यह बंद है। डीएम ने कहा कि काझा कोठी के विकास का प्लान तैयार किया जाएगा। जिलाधिकारी राहुल कुमार ने कहा कि भूकंप की त्रासदी के बाद महात्मा गांधी 1934 में टीकापट्टी आये थे। उन्होंने गांधी सदन जाकर जानकारी जुटाई है। यह विरासत स्थल है। गांधी जी की यादों को यहां जीवंत करने की कोशिश होगी। उन्होंने लोगों से पूछा कि यहां मान्यूमेंट वगैरह था या नहीं। जमीन की कितनी उपलब्धता है। विकास की क्या जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही विरासती स्थल को संवारने की कवायद की जायेगी। वह रानीपतरा स्थित सर्वोदय आश्रम भी जल्द जाएंगे। उन्होंने कहा कि टीकापट्टी को प्रखंड बनाने की मांग भी लोगों के द्वारा लंबे समय से की जा रही है।
पूर्णिया जिले में स्थित टीकापट्टी में बापू की यादें फिर से जिंदा होंगी। पूर्णिया से पैंसठ किलोग्राममीटर दूर टीकापट्टी आजादी की लड़ाई का केंद्र था। एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में भूकंप की त्रासदी के बाद चंदा एकत्रित करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को टीकापट्टी आये थे। इस स्थान की एतिहासिकता को देखते हुए बापू की यादों को सहेजने की कवायद प्रशासन की ओर से शुरू कर दी गयी है। टीकापट्टी को प्रखंड बनाने की मांग भी लंबे समय से इलाके के लोगों के द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री अगले माह विकास यात्रा की शुरूआत करने वाले हैं। इस दौरान उनके टीकापट्टी आने की संभावना भी जतायी जा रही है। मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए टीकापट्टी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वह पहली बार यहां आये हैं। उन्होंने भरोसा दिया था कि वह जल्द ही सरकारी कार्यक्रम बनाकर यहां आयेंगे। उन्होंने ठीठरू मंडल को भी नमन किया था, जिन्होंने यहां स्वराज आश्रम के लिए पांच एकड़ जमीन दान दे दी थी। उनके आने पर यहां की दशा-दिशा बदलना तय है। बुधवार को जिलाधिकारी राहुल कुमार जब टीकापट्टी पहुंचे तो लोगों की उम्मीदें जग गई। गांधी सदन के कायाकल्प की आस भी जगी है। पूर्णिया से टीकापट्टी की दूरी भी काफी है। रूपौली प्रखंड से कई पंचायतें बीस से तीस किलोमीटर दूर हैं। टीकापट्टी में जहां गांधी जी आये थे, पहले वह खाली जगह थी। बाद में गांधी सदन का निर्माण किया गया। एक हज़ार नौ सौ तिरासी से इसी भवन में टीकापट्टी ओपी चलता रहा। दो हज़ार सात में टीकापट्टी थाना बन गया। गांधी सदन के बगल में डायट है। दूसरी ओर बुनियादी विद्यालय है। जिला पदाधिकारी राहुल कुमार ने गांधी सदन का अवलोकन किया। गांधी जी के आगमन से लेकर इस स्थल के इतिहास को लेकर जानकारी जुटाई। सैलानियों के आकर्षण का केंद्र काझा कोठी की सुंदरता भी निखरेगी। जिलाधिकारी ने काझा कोठी जाकर मुआयना किया। करीब तीस एकड़ में फैले काझा कोठी के बीचोबीच पांच से दस एकड़ में बना तालाब भी है। पहले यहां बोटिंग होती थी। मगर कुछ वर्षों से यह बंद है। डीएम ने कहा कि काझा कोठी के विकास का प्लान तैयार किया जाएगा। जिलाधिकारी राहुल कुमार ने कहा कि भूकंप की त्रासदी के बाद महात्मा गांधी एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में टीकापट्टी आये थे। उन्होंने गांधी सदन जाकर जानकारी जुटाई है। यह विरासत स्थल है। गांधी जी की यादों को यहां जीवंत करने की कोशिश होगी। उन्होंने लोगों से पूछा कि यहां मान्यूमेंट वगैरह था या नहीं। जमीन की कितनी उपलब्धता है। विकास की क्या जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही विरासती स्थल को संवारने की कवायद की जायेगी। वह रानीपतरा स्थित सर्वोदय आश्रम भी जल्द जाएंगे। उन्होंने कहा कि टीकापट्टी को प्रखंड बनाने की मांग भी लोगों के द्वारा लंबे समय से की जा रही है।
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम में आ रहे तेजी से बदलाव से भारी बारिश की आशंका बढ़ती जा रही है। पैसिफिक क्षेत्र में कई परिवर्तनों की वजह से अगले एक सप्ताह तक खतरनाक बारिश की आशंका जताई जा रही है। लोगों को एहतियात बरतने के लिए अलर्ट जारी किया गया है। ब्रासीलिया। पूर्वोत्तर ब्राजील में मूसलाधार बारिश से कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लापता हो गए हैं। क्षेत्रीय विकास मंत्री डेनियल फरेरा ने उत्तरपूर्वी पेरनामबुको राज्य की राजधानी रेसिफे में बताया कि बारिश में 44 लोगों की मौत हो गई है जबकि 56 लापता हैं। बारिश के दौरान हुए हादसों में 25 घायल हैं। 3,957 लोग आश्रय के बिना रह रहे हैं तो 533 पलायन को मजबूर हुए हैं। ब्राजील में खराब मौसम के कारण घातक भूस्खलन और बाढ़ की स्थितियां हैं। बारिश की वजह से हुई मौतों की संख्या शनिवार को 34 से 44 हो गई है। भूस्खलन से कम से कम 28 लोगों की मौतें हुई है। भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर थीं और कीचड़ की धार उनके रास्ते में सब कुछ बहा ले गई थी। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि रविवार को भी भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है, लेकिन सुबह तूफान थम गया। राज्य के अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही मौसम खराब हुआ, करीब 1,200 कर्मियों ने खोज और बचाव कार्य फिर से शुरू कर दिया लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की आशंका है इसलिए आत्म-सुरक्षा उपायों को बनाए रखना है। जार्डिम मोंटेवेर्डे में भूस्खलन से शनिवार की सुबह 19 मौतें रिपोर्ट की गई। यह क्षेत्र रेसिफ़ और जबाताओ डॉस ग्वाररापेस की नगरपालिका के बीच की सीमा पर है। टीवी ग्लोबो को बताया कि एक अलग नगर पालिका में रहने वाले लुइज़ एस्टेवाओ अगुइआर ने आपदा में 11 रिश्तेदारों को खो दिया। उक्त व्यक्ति ने बहन, साले व परिवार के 11 लोग भूस्खलन में खो दिए हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने रविवार को कहा कि वह त्रासदी के बाद सोमवार को रेसिफ़ की यात्रा करेंगे। वह त्रासदी की स्थितियों का आंकलन करने के साथ लोगों से भी मिल सकते हैं। पिछले एक साल में, मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में सैकड़ों ब्राज़ीलियाई लोगों की मौत हो गई है। फरवरी में, रियो डी जनेरियो राज्य में, ब्राजील के तत्कालीन साम्राज्य की 19 वीं सदी की ग्रीष्मकालीन राजधानी पेट्रोपोलिस शहर में 230 से अधिक लोग मारे गए थे। पिछले अप्रैल महीने की शुरुआत में राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से 14 और लोगों की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राजील के अत्यधिक बरसात की वजह ला नीना द्वारा प्रशांत महासागर की साइक्लिकल कूलिंग और जलवायु परिवर्तन से बढ़ाया जा रहा है। क्योंकि गर्म वातावरण में अधिक पानी होता है, ग्लोबल वार्मिंग से अत्यधिक वर्षा से बाढ़ का खतरा और तीव्रता बढ़ जाती है। भारी बारिश के जोखिम को बढ़ता जा रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम में आ रहे तेजी से बदलाव से भारी बारिश की आशंका बढ़ती जा रही है। पैसिफिक क्षेत्र में कई परिवर्तनों की वजह से अगले एक सप्ताह तक खतरनाक बारिश की आशंका जताई जा रही है। लोगों को एहतियात बरतने के लिए अलर्ट जारी किया गया है। ब्रासीलिया। पूर्वोत्तर ब्राजील में मूसलाधार बारिश से कम से कम चौंतालीस लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लापता हो गए हैं। क्षेत्रीय विकास मंत्री डेनियल फरेरा ने उत्तरपूर्वी पेरनामबुको राज्य की राजधानी रेसिफे में बताया कि बारिश में चौंतालीस लोगों की मौत हो गई है जबकि छप्पन लापता हैं। बारिश के दौरान हुए हादसों में पच्चीस घायल हैं। तीन,नौ सौ सत्तावन लोग आश्रय के बिना रह रहे हैं तो पाँच सौ तैंतीस पलायन को मजबूर हुए हैं। ब्राजील में खराब मौसम के कारण घातक भूस्खलन और बाढ़ की स्थितियां हैं। बारिश की वजह से हुई मौतों की संख्या शनिवार को चौंतीस से चौंतालीस हो गई है। भूस्खलन से कम से कम अट्ठाईस लोगों की मौतें हुई है। भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर थीं और कीचड़ की धार उनके रास्ते में सब कुछ बहा ले गई थी। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि रविवार को भी भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है, लेकिन सुबह तूफान थम गया। राज्य के अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही मौसम खराब हुआ, करीब एक,दो सौ कर्मियों ने खोज और बचाव कार्य फिर से शुरू कर दिया लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की आशंका है इसलिए आत्म-सुरक्षा उपायों को बनाए रखना है। जार्डिम मोंटेवेर्डे में भूस्खलन से शनिवार की सुबह उन्नीस मौतें रिपोर्ट की गई। यह क्षेत्र रेसिफ़ और जबाताओ डॉस ग्वाररापेस की नगरपालिका के बीच की सीमा पर है। टीवी ग्लोबो को बताया कि एक अलग नगर पालिका में रहने वाले लुइज़ एस्टेवाओ अगुइआर ने आपदा में ग्यारह रिश्तेदारों को खो दिया। उक्त व्यक्ति ने बहन, साले व परिवार के ग्यारह लोग भूस्खलन में खो दिए हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने रविवार को कहा कि वह त्रासदी के बाद सोमवार को रेसिफ़ की यात्रा करेंगे। वह त्रासदी की स्थितियों का आंकलन करने के साथ लोगों से भी मिल सकते हैं। पिछले एक साल में, मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में सैकड़ों ब्राज़ीलियाई लोगों की मौत हो गई है। फरवरी में, रियो डी जनेरियो राज्य में, ब्राजील के तत्कालीन साम्राज्य की उन्नीस वीं सदी की ग्रीष्मकालीन राजधानी पेट्रोपोलिस शहर में दो सौ तीस से अधिक लोग मारे गए थे। पिछले अप्रैल महीने की शुरुआत में राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से चौदह और लोगों की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राजील के अत्यधिक बरसात की वजह ला नीना द्वारा प्रशांत महासागर की साइक्लिकल कूलिंग और जलवायु परिवर्तन से बढ़ाया जा रहा है। क्योंकि गर्म वातावरण में अधिक पानी होता है, ग्लोबल वार्मिंग से अत्यधिक वर्षा से बाढ़ का खतरा और तीव्रता बढ़ जाती है। भारी बारिश के जोखिम को बढ़ता जा रहा है।
किसुक कली को देखकर नायिका के भयभीत होकर नाहर के समान निहूरने में केवल क्रियासाम्य मात्र है, क्योंकि नाहर में भय की अवस्थिति नहीं होती। और भी - राती राती रचिरभरी-सी, विरही जन उर हु निकरी-सी । सव वन फूल फूलि अस भयो, अनि धनंग रंग जनु छयो । बड्डे फुंज वितान अस बने, ऊंचे प्रेम वितान जनु तने । बन बाहिर जु फुंज छुट छुटी, ते जनु उठी नटिनि की कुटी । एक विण राव असेटक चढ़यो, विरही मृग मारत रिस बढ़ यौ । पुहुप को चाप पनिच अलि किये, पंच बान पाँधों कर लिये । त्रिगुन पवन तुरंग चढ़ि आयो, वलमलि देस कुंवरि ढिंग भायो । रूपमंजरी दिखि हँसि परी, बदन सुवास निकसि अनुसरी । सो सुवास जब भौरन पाई, टूट पनिप सब तहँ चलि आई । इतनेहि माँझ उवरि गईं भाई, नातरु मार भारि तिहि आई ॥ १ प्रथम पंक्ति में रक्तिम पलाश-कलियों में विरही हृदय से साम्य की कल्पना केवल बाह्य रूप के आधार पर ही की गई है । सम्पूर्ण रूपक में दो स्थल विशेष रूप से द्रष्टव्य हैं। एक तो कामदेव रूपी नृपति के युद्ध अभियान में 'नटिनि की कुटो' की कल्पना मध्यकालीन शासकों के युद्ध अभियान के साथ नर्तकियों के नूपुर की भंकार का परिचय देती है; दूसरे, रूपक में घटना तत्व के माध्यम से परिगति में एक अप्रत्याशित परिवर्तन उपस्थित करके कवि ने अपने कुशल प्रबन्ध विन्यास का परिचय दिया है । भौंरों का रूपमंजरी के सौरभ पर आकर्षित होना, उनके द्वारा निर्मित कामदेव को पनिच का टूटना तथा रूपमंजरी का काम के प्रहार से वच जाने की कल्पना वास्तव में सराहनीय है । इसके अतिरिक्त - बड्डे तपत पहार से दिन दुपहर तहँ डाइन सी आई नन्ददासजी ने कहीं-कहीं लौकिक जगत के जड़-तत्वों पर भी मानव-चेतना का भारोपण किया है। परन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं है कि इसके द्वारा चित्र पूर्ण बन गया है : चुम्बन समंजु नासिका, वेसरि मुती भुलाय । अघर छुड़ावन पीव पै, मानो हाहा खाय ॥ ४ चुम्बन के कारण हिलती हुई वेसर के भूलते हुये मोती मानो नायक को इस बरजोरी के लिये निषेध करते हुये जान पड़ते हैं। ग्रीष्म-वर्णन में प्रयुक्त प्रतिशयोक्ति-मूलक प्रस्तुत विधान भी दर्शनीय है। प्रकृति -
किसुक कली को देखकर नायिका के भयभीत होकर नाहर के समान निहूरने में केवल क्रियासाम्य मात्र है, क्योंकि नाहर में भय की अवस्थिति नहीं होती। और भी - राती राती रचिरभरी-सी, विरही जन उर हु निकरी-सी । सव वन फूल फूलि अस भयो, अनि धनंग रंग जनु छयो । बड्डे फुंज वितान अस बने, ऊंचे प्रेम वितान जनु तने । बन बाहिर जु फुंज छुट छुटी, ते जनु उठी नटिनि की कुटी । एक विण राव असेटक चढ़यो, विरही मृग मारत रिस बढ़ यौ । पुहुप को चाप पनिच अलि किये, पंच बान पाँधों कर लिये । त्रिगुन पवन तुरंग चढ़ि आयो, वलमलि देस कुंवरि ढिंग भायो । रूपमंजरी दिखि हँसि परी, बदन सुवास निकसि अनुसरी । सो सुवास जब भौरन पाई, टूट पनिप सब तहँ चलि आई । इतनेहि माँझ उवरि गईं भाई, नातरु मार भारि तिहि आई ॥ एक प्रथम पंक्ति में रक्तिम पलाश-कलियों में विरही हृदय से साम्य की कल्पना केवल बाह्य रूप के आधार पर ही की गई है । सम्पूर्ण रूपक में दो स्थल विशेष रूप से द्रष्टव्य हैं। एक तो कामदेव रूपी नृपति के युद्ध अभियान में 'नटिनि की कुटो' की कल्पना मध्यकालीन शासकों के युद्ध अभियान के साथ नर्तकियों के नूपुर की भंकार का परिचय देती है; दूसरे, रूपक में घटना तत्व के माध्यम से परिगति में एक अप्रत्याशित परिवर्तन उपस्थित करके कवि ने अपने कुशल प्रबन्ध विन्यास का परिचय दिया है । भौंरों का रूपमंजरी के सौरभ पर आकर्षित होना, उनके द्वारा निर्मित कामदेव को पनिच का टूटना तथा रूपमंजरी का काम के प्रहार से वच जाने की कल्पना वास्तव में सराहनीय है । इसके अतिरिक्त - बड्डे तपत पहार से दिन दुपहर तहँ डाइन सी आई नन्ददासजी ने कहीं-कहीं लौकिक जगत के जड़-तत्वों पर भी मानव-चेतना का भारोपण किया है। परन्तु इसमें कोई सन्देह नहीं है कि इसके द्वारा चित्र पूर्ण बन गया है : चुम्बन समंजु नासिका, वेसरि मुती भुलाय । अघर छुड़ावन पीव पै, मानो हाहा खाय ॥ चार चुम्बन के कारण हिलती हुई वेसर के भूलते हुये मोती मानो नायक को इस बरजोरी के लिये निषेध करते हुये जान पड़ते हैं। ग्रीष्म-वर्णन में प्रयुक्त प्रतिशयोक्ति-मूलक प्रस्तुत विधान भी दर्शनीय है। प्रकृति -
प्लेटफार्म पर ज्यादा विकास कार्य नहीं हुआ था क्योंकि यहां कोई नगर या रिहायशी इलाका नहीं था, बस एक छोटा सा कस्बा ही था। प्लेटफार्म के नाम पर वहां एक बड़ा-सा टीन शेड डला था और एक हॉलनुमा कमरा था, जहां से वहां रुकने वाली गाड़ियों में सवार होने वाले यात्रियों को टिकट मिलता था। इस पूरे हिस्से की साफ-सफाई के लिए एक लड़की प्लेटफार्म पर एक कोने में रहती थी। अत्यधिक सांवली होने के कारण सभी लोग उसे कलूटी ही कहते थे, फिर यही उसका नाम हो गया। कलूटी को खुद याद नहीं था कि वह वहां से आई, कैसे आई? उसने तो जब से होश संभाला था, स्वयं को वहीं प्लेटफार्म पर ही पाया था। बचपन से वह वहां झाडू -बुहारी करती आ रही थी। स्टेशन मास्टर से उसे खाने को भोजन और पचास रूपये प्रतिमाह वेतन तथा साल में दो जोड़ी कपड़े मिल जाते थे। स्टेशन मास्टर तो कई बदल चुके थे, मगर कलूटी वहीं की वहीं थी, बस उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसका शरीर बढ़ गया था। कुछ दिनों से उसे नये स्टेशन मास्टर का व्यवहार कुछ ठीक नही लग रहा था। जब भी वह अपना भोजन लेने उनके कमरे नुमा आॅफिस में जाती तो मास्टर की निगाहें उसे घूरती सी प्रतीत होतीं। इसी वजह से आज सुबह से मास्टर से उसे अपना भोजन मांगने तक की हिम्मत नहीं पड़ी थी। अब शाम हो गई थी हालांकि उसका साहस अभी भी भोजन मांगने का नहीं हो रहा था। मगर पेट में भूख से चूहे दौड़ रहे थे। सारी गाड़ियां जा चुकी थीं इसलिए स्टेशन मास्टर भी थोड़ी देर में आॅफिस को ताला लगाकर पास ही स्थित अपने घर जाने वाला था। रह जायेगी सिर्फ कलूटी, कम्बल में लिपटकर खामोश पटरियों के बीच हालांकि चौकीदार भी प्लेटफार्म पर रहता था जो बीस वर्षों से कलूटी की पितासमान सुरक्षा भी कर रहा था, मगर आजकल वह छुट्टी लेकर काशी नहाने गया था। भूख महसूस होते ही कलूटी साहस जुटाकर स्टेशन मास्टर के आॅफिस की तरफ चल दी। आॅफिस में वह अलमारी में फाइलें रखकर ताला डाल रहा था। कलूटी ने धीमे स्वर में कहा, कलूटी सहमे कदमों से मेज की तरफ बढ़ने लगी। मेज पर एक पाॅलीथीन का पैकेट रखा था, जैसे ही कलूटी ने वह पैकेट उठाने को हाथ बढ़ाया, मास्टर ने उसका हाथ पकड़ लिया। कलूटी ने तेजी से हाथ छुड़ाया और घबरायें स्वर में बोली, "ये आप क्या कर रहे हैं मालिक-? 'पागल मत बन कलूटी-मैं सरकार से सिफारिश करके तुझे रहने को क्वार्टर भी दिलवा दूंगा" मास्टर ने कहा। "मैं अनपढ़ गंवार और बदसूरत, एक लावारिस जान हूं किसी दिन नाली में लाश फिंक जायेगी, मगर आप काहे को इतना बड़ा पाप करके अपना जन्म खराब करते हो। लड़की जात का सम्मान करो मास्टर जी, "कलूटी भर्राए स्वर में बोली। "मैं, प्लेटफार्म पर जो भी स्टेशन मास्टर होता है, उसकी छत्रछाया में खुद को ऐेसे ही सुरक्षित समझती थी, जैसे पिता के घर में पुत्री, मगर आज मैं सचमुच अनाथ हो गई। कलूटी अपने आंसू पोंछती हुई तेजी से प्लेटफार्म की ओर भाग गई मास्टर भी दस मिनट बाद ताला लगाकर अपने घर चला गया। रात का अंधकार बढ़कर चरम सीमा पार कर गया था, इस समय रात के दो बज रहे थे। कलूटी कम्बल ओढ़े प्लेटफार्म की एक पत्थरनुमा बैन्च पर लेटी थी। उसकी आंखों में कोसों तक नींद का नामोनिशान नहीं था। उसे अपनी जिन्दगी से आज पहली बार घृणा हो रही थी। विचारों की उथल-पुथल उसके अन्तर्मन को व्यथित कर रही थी, तभी उसके कानों में किसी बच्चे का रोता स्वर सुनाई दिया। रात के गहन सन्नाटे में बच्चे के रोने की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। कलूटी जल्दी से कम्बल हटाकर प्लेटफार्म से बाहर आई। प्लेटफार्म के जल रहे बल्ब से कुछ मद्धिम-सी रोशनी दिख रही थी, मगर रेल की पटरियों तक भी उसकी किरणें नहीं पहुंच पा रही थी। वह चंद्रमा की हल्की चांदनी में बच्चे की आवाज की दिशा में बढ़ने लगी। उसे इस बात का भी खौफ था कि कहीं कोई रेल ना आ जाये। यूं तो गाड़ी आने में काफी समय था, मगर फिर भी डर भी था ही। प्लेटफार्म से करीब पचास गज की दूरी वह पारकर आई थी तभी उसे रेल की पटरी के ऊपर एक परछाई सी लगी। कलूटी ने पास आकर देखा तो वह परछाई नहीं, बल्कि एक जीवित नवजात शिशु था। कलूटी ने शीघ्रता से उसे उठा लिया, उसने बहुत आवाजें दी मगर कहीं कोई जबाब नहीं मिला। बच्चे ने गोदी का स्पर्श पाते ही रोना बन्द कर दिया था। कलूटी उस बच्चे को लेकर प्लेटफार्म पर आ गई। बल्ब की रोशनी में कलूटी ने उस बच्चे का चेहरा देखा तो उसकी आंखें बरस पड़ी, उसे लगा कि बच्चे की मासूम निगाहें उससे कुछ कह रही हैं। कलूटी उसे अपने सीने से लगाकर भर्राए स्वर में बोली, "बेटा इस पढ़ी-लिखी दुनिया में सब उजले हैं, लावारिसों की भीड़ लगा दी है इनके कुकर्मों ने। सब गोरे भले ही दिखते हें मगर हैं सब मन के काले लेकिन कलूटी तुझे मरने के लिए नहीं छोड़ेगी। मैं तुझे सुबह होते ही यहां से दूर ले जाऊंगी। सुबह जब स्टेशन मास्टर अपने काम पर आया तो उसे कलूटी दिखाई नहीं दी हालांकि उसका कुछ नहीं गया था मगर फिर भी दिल के किसी कोने में यह अपराधबोध जरूर था कि कलूटी उसी की वजह से वहां से गई है।
प्लेटफार्म पर ज्यादा विकास कार्य नहीं हुआ था क्योंकि यहां कोई नगर या रिहायशी इलाका नहीं था, बस एक छोटा सा कस्बा ही था। प्लेटफार्म के नाम पर वहां एक बड़ा-सा टीन शेड डला था और एक हॉलनुमा कमरा था, जहां से वहां रुकने वाली गाड़ियों में सवार होने वाले यात्रियों को टिकट मिलता था। इस पूरे हिस्से की साफ-सफाई के लिए एक लड़की प्लेटफार्म पर एक कोने में रहती थी। अत्यधिक सांवली होने के कारण सभी लोग उसे कलूटी ही कहते थे, फिर यही उसका नाम हो गया। कलूटी को खुद याद नहीं था कि वह वहां से आई, कैसे आई? उसने तो जब से होश संभाला था, स्वयं को वहीं प्लेटफार्म पर ही पाया था। बचपन से वह वहां झाडू -बुहारी करती आ रही थी। स्टेशन मास्टर से उसे खाने को भोजन और पचास रूपये प्रतिमाह वेतन तथा साल में दो जोड़ी कपड़े मिल जाते थे। स्टेशन मास्टर तो कई बदल चुके थे, मगर कलूटी वहीं की वहीं थी, बस उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसका शरीर बढ़ गया था। कुछ दिनों से उसे नये स्टेशन मास्टर का व्यवहार कुछ ठीक नही लग रहा था। जब भी वह अपना भोजन लेने उनके कमरे नुमा आॅफिस में जाती तो मास्टर की निगाहें उसे घूरती सी प्रतीत होतीं। इसी वजह से आज सुबह से मास्टर से उसे अपना भोजन मांगने तक की हिम्मत नहीं पड़ी थी। अब शाम हो गई थी हालांकि उसका साहस अभी भी भोजन मांगने का नहीं हो रहा था। मगर पेट में भूख से चूहे दौड़ रहे थे। सारी गाड़ियां जा चुकी थीं इसलिए स्टेशन मास्टर भी थोड़ी देर में आॅफिस को ताला लगाकर पास ही स्थित अपने घर जाने वाला था। रह जायेगी सिर्फ कलूटी, कम्बल में लिपटकर खामोश पटरियों के बीच हालांकि चौकीदार भी प्लेटफार्म पर रहता था जो बीस वर्षों से कलूटी की पितासमान सुरक्षा भी कर रहा था, मगर आजकल वह छुट्टी लेकर काशी नहाने गया था। भूख महसूस होते ही कलूटी साहस जुटाकर स्टेशन मास्टर के आॅफिस की तरफ चल दी। आॅफिस में वह अलमारी में फाइलें रखकर ताला डाल रहा था। कलूटी ने धीमे स्वर में कहा, कलूटी सहमे कदमों से मेज की तरफ बढ़ने लगी। मेज पर एक पाॅलीथीन का पैकेट रखा था, जैसे ही कलूटी ने वह पैकेट उठाने को हाथ बढ़ाया, मास्टर ने उसका हाथ पकड़ लिया। कलूटी ने तेजी से हाथ छुड़ाया और घबरायें स्वर में बोली, "ये आप क्या कर रहे हैं मालिक-? 'पागल मत बन कलूटी-मैं सरकार से सिफारिश करके तुझे रहने को क्वार्टर भी दिलवा दूंगा" मास्टर ने कहा। "मैं अनपढ़ गंवार और बदसूरत, एक लावारिस जान हूं किसी दिन नाली में लाश फिंक जायेगी, मगर आप काहे को इतना बड़ा पाप करके अपना जन्म खराब करते हो। लड़की जात का सम्मान करो मास्टर जी, "कलूटी भर्राए स्वर में बोली। "मैं, प्लेटफार्म पर जो भी स्टेशन मास्टर होता है, उसकी छत्रछाया में खुद को ऐेसे ही सुरक्षित समझती थी, जैसे पिता के घर में पुत्री, मगर आज मैं सचमुच अनाथ हो गई। कलूटी अपने आंसू पोंछती हुई तेजी से प्लेटफार्म की ओर भाग गई मास्टर भी दस मिनट बाद ताला लगाकर अपने घर चला गया। रात का अंधकार बढ़कर चरम सीमा पार कर गया था, इस समय रात के दो बज रहे थे। कलूटी कम्बल ओढ़े प्लेटफार्म की एक पत्थरनुमा बैन्च पर लेटी थी। उसकी आंखों में कोसों तक नींद का नामोनिशान नहीं था। उसे अपनी जिन्दगी से आज पहली बार घृणा हो रही थी। विचारों की उथल-पुथल उसके अन्तर्मन को व्यथित कर रही थी, तभी उसके कानों में किसी बच्चे का रोता स्वर सुनाई दिया। रात के गहन सन्नाटे में बच्चे के रोने की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। कलूटी जल्दी से कम्बल हटाकर प्लेटफार्म से बाहर आई। प्लेटफार्म के जल रहे बल्ब से कुछ मद्धिम-सी रोशनी दिख रही थी, मगर रेल की पटरियों तक भी उसकी किरणें नहीं पहुंच पा रही थी। वह चंद्रमा की हल्की चांदनी में बच्चे की आवाज की दिशा में बढ़ने लगी। उसे इस बात का भी खौफ था कि कहीं कोई रेल ना आ जाये। यूं तो गाड़ी आने में काफी समय था, मगर फिर भी डर भी था ही। प्लेटफार्म से करीब पचास गज की दूरी वह पारकर आई थी तभी उसे रेल की पटरी के ऊपर एक परछाई सी लगी। कलूटी ने पास आकर देखा तो वह परछाई नहीं, बल्कि एक जीवित नवजात शिशु था। कलूटी ने शीघ्रता से उसे उठा लिया, उसने बहुत आवाजें दी मगर कहीं कोई जबाब नहीं मिला। बच्चे ने गोदी का स्पर्श पाते ही रोना बन्द कर दिया था। कलूटी उस बच्चे को लेकर प्लेटफार्म पर आ गई। बल्ब की रोशनी में कलूटी ने उस बच्चे का चेहरा देखा तो उसकी आंखें बरस पड़ी, उसे लगा कि बच्चे की मासूम निगाहें उससे कुछ कह रही हैं। कलूटी उसे अपने सीने से लगाकर भर्राए स्वर में बोली, "बेटा इस पढ़ी-लिखी दुनिया में सब उजले हैं, लावारिसों की भीड़ लगा दी है इनके कुकर्मों ने। सब गोरे भले ही दिखते हें मगर हैं सब मन के काले लेकिन कलूटी तुझे मरने के लिए नहीं छोड़ेगी। मैं तुझे सुबह होते ही यहां से दूर ले जाऊंगी। सुबह जब स्टेशन मास्टर अपने काम पर आया तो उसे कलूटी दिखाई नहीं दी हालांकि उसका कुछ नहीं गया था मगर फिर भी दिल के किसी कोने में यह अपराधबोध जरूर था कि कलूटी उसी की वजह से वहां से गई है।
निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड के क्यूट कपल्स की लिस्ट में शुमार होते हैं। दोनों के बीच का प्यार अक्सर उनके फैंस का दिल जीत लेता है। दोनों की कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आती रहती हैं। अब हाल ही में जो तस्वीरें सामने आई हैं। उन तस्वीरों में फैंस का ध्यान गया निक जोनस के फोन पर। जिसका वॉलपेपर वाकई में बेहद क्यूट है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों में निक और प्रियंका के बीच की बॉन्डिंग के बारे में साफ पता चलता है। दोनों की बॉन्डिंग निक के फोन के वॉलपेपल पर भी साफ झलक रही है। दोनों की रोमांटिक तस्वीरों के साथ अब ये तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल ये तस्वीरें एयरपोर्ट की है। जहां प्रियंका और निक एक साथ चेकआउट कर एयरपोर्ट से बाहर निकल रहे हैं। इस दौरान निक ने अपने हाथ में अपना फोन ले रखा है। जब फोन की लाइट जलती है तो उसमें उनका वॉलपेपर नजर आता है। निक के वॉलपेपर में प्रियंका के साथ की उनकी रोमांटिक तस्वीर दिखाई दे रही है। ये तस्वीर इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रही है। निक जोनस के इस वॉलपेपर पर उनके फैंस का भी ध्यान गया। फैंस ने भी तस्वीर में सबसे पहले वॉलपेपर को ही देखा। हालांकि निक और प्रियंका की ये तस्वीर काफी पुरानी है। लेकिन इससे दोनों के बीच का प्यार का पता चलता है।
निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड के क्यूट कपल्स की लिस्ट में शुमार होते हैं। दोनों के बीच का प्यार अक्सर उनके फैंस का दिल जीत लेता है। दोनों की कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आती रहती हैं। अब हाल ही में जो तस्वीरें सामने आई हैं। उन तस्वीरों में फैंस का ध्यान गया निक जोनस के फोन पर। जिसका वॉलपेपर वाकई में बेहद क्यूट है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों में निक और प्रियंका के बीच की बॉन्डिंग के बारे में साफ पता चलता है। दोनों की बॉन्डिंग निक के फोन के वॉलपेपल पर भी साफ झलक रही है। दोनों की रोमांटिक तस्वीरों के साथ अब ये तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल ये तस्वीरें एयरपोर्ट की है। जहां प्रियंका और निक एक साथ चेकआउट कर एयरपोर्ट से बाहर निकल रहे हैं। इस दौरान निक ने अपने हाथ में अपना फोन ले रखा है। जब फोन की लाइट जलती है तो उसमें उनका वॉलपेपर नजर आता है। निक के वॉलपेपर में प्रियंका के साथ की उनकी रोमांटिक तस्वीर दिखाई दे रही है। ये तस्वीर इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रही है। निक जोनस के इस वॉलपेपर पर उनके फैंस का भी ध्यान गया। फैंस ने भी तस्वीर में सबसे पहले वॉलपेपर को ही देखा। हालांकि निक और प्रियंका की ये तस्वीर काफी पुरानी है। लेकिन इससे दोनों के बीच का प्यार का पता चलता है।
Purush Nasbandi Kaise Hoti Hai: पुरुष नसबंदी को गर्भनिरोधक का एक सुरक्षित और प्रभावी रूप माना जाता है, जिसकी विफलता दर 1% से कम होती है। प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 30 मिनट लगते हैं। रिकवरी का समय आमतौर पर जल्दी होता है। Purush Nasbandi Kaise Hoti Hai: क्या आपको पता है कि महिलाओं की तरह पुरूषों की भी नसबंदी होती है? जी हाँ पुरूषों की भी नसबंदी होती है लेकिन इसमें प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। पुरुष नसबंदी (Vasectomy), या वासोलिगेशन, स्थायी गर्भनिरोधक के लिए एक वैकल्पिक शल्य प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में वास डेफेरेंस को काटना या अवरुद्ध करना शामिल होता है, जो नलिकाएं अंडकोष से लिंग तक शुक्राणु ले जाती हैं। प्रक्रिया का उद्देश्य गर्भावस्था को रोकना है। पुरुष नसबंदी प्रक्रिया के दौरान, एक सर्जन आमतौर पर अंडकोश में एक छोटा चीरा लगाएगा और वास डेफेरेंस का पता लगाएगा। सर्जन तब विभिन्न तरीकों का उपयोग करके ट्यूबों को काट या ब्लॉक कर देगा। एक बार जब नलिकाएं कट जाती हैं या अवरुद्ध हो जाती हैं, तो शुक्राणु अब वीर्य के साथ मिश्रित नहीं हो सकते हैं और स्खलन के दौरान शरीर छोड़ सकते हैं। पुरुष नसबंदी को गर्भनिरोधक का एक सुरक्षित और प्रभावी रूप माना जाता है, जिसकी विफलता दर 1% से कम होती है। प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 30 मिनट लगते हैं। रिकवरी का समय आमतौर पर जल्दी होता है। पुरुष नसबंदी क्यों की जाती है? (Why Vasectomy Is Done) पुरुष नसबंदी आमतौर पर जन्म नियंत्रण उद्देश्यों के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया गर्भनिरोधक का एक स्थायी रूप है और इसका उद्देश्य स्खलन के दौरान शुक्राणुओं की रिहाई को रोकना है, जिससे व्यक्ति के लिए अपने साथी को गर्भवती करना असंभव हो जाता है। पुरुष नसबंदी को अक्सर उन पुरुषों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है जो निश्चित हैं कि वे बच्चे पैदा नहीं करना चाहते हैं या उन्होंने अपना परिवार पूरा कर लिया है। इसे महिला नसबंदी (ट्यूबल लिगेशन) का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प भी माना जाता है। पुरुष नसबंदी एक अपेक्षाकृत सरल और त्वरित प्रक्रिया है। जन्म नियंत्रण के अन्य रूपों की तुलना में, पुरुष नसबंदी की विफलता दर बहुत कम है और इसे गर्भनिरोधक का एक अत्यधिक प्रभावी तरीका माना जाता है। पुरुष नसबंदी ऑपरेशन कैसे किया जाता है? (How is Vasectomy Done? ) -क्षेत्र को सुन्न करने के लिए रोगी को लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। -सर्जन वास डेफेरेंस तक पहुंचने के लिए अंडकोश में एक या दो छोटे चीरे लगाएगा, जो नलिकाएं हैं जो अंडकोष से शुक्राणु को लिंग तक ले जाती हैं। -सर्जन कई तकनीकों में से एक का उपयोग करके वास डेफेरेंस को काट या ब्लॉक कर देगा, जैसे कि काटना और बांधना, दागना, या एक छोटी धातु क्लिप के साथ सील करना। -सर्जन चीरों को टांके या सर्जिकल गोंद से बंद कर देगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में आमतौर पर लगभग 30 मिनट लगते हैं। प्रक्रिया के बाद रोगी को कुछ असुविधा और सूजन का अनुभव हो सकता है, लेकिन ये लक्षण आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। पुरुष नसबंदी ऑपरेशन के बाद देखभाल (Care after Vasectomy) -प्रक्रिया के बाद पहले 24-48 घंटों के लिए आराम करना और कम से कम एक सप्ताह के लिए ज़ोरदार गतिविधि या भारी सामान उठाने से बचना महत्वपूर्ण है। यह शल्य चिकित्सा क्षेत्र में रक्तस्राव और सूजन को रोकने में मदद कर सकता है। -एक बार में 20-30 मिनट के लिए अंडकोश पर बर्फ लगाने से, दिन में कई बार, सूजन और बेचैनी को कम करने में मदद मिल सकती है। -टाइट-फिटिंग अंडरवियर पहनना, जैसे जॉकस्ट्रैप, समर्थन प्रदान कर सकता है और अंडकोश में सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। -ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक, जैसे इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन, प्रक्रिया के बाद दर्द और परेशानी से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। -संक्रमण को रोकने के लिए शल्य चिकित्सा क्षेत्र को साफ और सूखा रखना महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया के बाद कम से कम एक सप्ताह तक नहाने, तैरने या पानी में भिगोने से बचें। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पुरुष नसबंदी जन्म नियंत्रण का एक स्थायी रूप है और यौन संचारित संक्रमणों से रक्षा नहीं करता है। इसलिए, जिन व्यक्तियों को एसटीआई का खतरा है, उन्हें खुद को और अपने साथी को बचाने के लिए गर्भनिरोधक की बाधा विधियों, जैसे कंडोम का उपयोग करना जारी रखना चाहिए।
Purush Nasbandi Kaise Hoti Hai: पुरुष नसबंदी को गर्भनिरोधक का एक सुरक्षित और प्रभावी रूप माना जाता है, जिसकी विफलता दर एक% से कम होती है। प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग तीस मिनट लगते हैं। रिकवरी का समय आमतौर पर जल्दी होता है। Purush Nasbandi Kaise Hoti Hai: क्या आपको पता है कि महिलाओं की तरह पुरूषों की भी नसबंदी होती है? जी हाँ पुरूषों की भी नसबंदी होती है लेकिन इसमें प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। पुरुष नसबंदी , या वासोलिगेशन, स्थायी गर्भनिरोधक के लिए एक वैकल्पिक शल्य प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में वास डेफेरेंस को काटना या अवरुद्ध करना शामिल होता है, जो नलिकाएं अंडकोष से लिंग तक शुक्राणु ले जाती हैं। प्रक्रिया का उद्देश्य गर्भावस्था को रोकना है। पुरुष नसबंदी प्रक्रिया के दौरान, एक सर्जन आमतौर पर अंडकोश में एक छोटा चीरा लगाएगा और वास डेफेरेंस का पता लगाएगा। सर्जन तब विभिन्न तरीकों का उपयोग करके ट्यूबों को काट या ब्लॉक कर देगा। एक बार जब नलिकाएं कट जाती हैं या अवरुद्ध हो जाती हैं, तो शुक्राणु अब वीर्य के साथ मिश्रित नहीं हो सकते हैं और स्खलन के दौरान शरीर छोड़ सकते हैं। पुरुष नसबंदी को गर्भनिरोधक का एक सुरक्षित और प्रभावी रूप माना जाता है, जिसकी विफलता दर एक% से कम होती है। प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग तीस मिनट लगते हैं। रिकवरी का समय आमतौर पर जल्दी होता है। पुरुष नसबंदी क्यों की जाती है? पुरुष नसबंदी आमतौर पर जन्म नियंत्रण उद्देश्यों के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया गर्भनिरोधक का एक स्थायी रूप है और इसका उद्देश्य स्खलन के दौरान शुक्राणुओं की रिहाई को रोकना है, जिससे व्यक्ति के लिए अपने साथी को गर्भवती करना असंभव हो जाता है। पुरुष नसबंदी को अक्सर उन पुरुषों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है जो निश्चित हैं कि वे बच्चे पैदा नहीं करना चाहते हैं या उन्होंने अपना परिवार पूरा कर लिया है। इसे महिला नसबंदी का एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प भी माना जाता है। पुरुष नसबंदी एक अपेक्षाकृत सरल और त्वरित प्रक्रिया है। जन्म नियंत्रण के अन्य रूपों की तुलना में, पुरुष नसबंदी की विफलता दर बहुत कम है और इसे गर्भनिरोधक का एक अत्यधिक प्रभावी तरीका माना जाता है। पुरुष नसबंदी ऑपरेशन कैसे किया जाता है? -क्षेत्र को सुन्न करने के लिए रोगी को लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। -सर्जन वास डेफेरेंस तक पहुंचने के लिए अंडकोश में एक या दो छोटे चीरे लगाएगा, जो नलिकाएं हैं जो अंडकोष से शुक्राणु को लिंग तक ले जाती हैं। -सर्जन कई तकनीकों में से एक का उपयोग करके वास डेफेरेंस को काट या ब्लॉक कर देगा, जैसे कि काटना और बांधना, दागना, या एक छोटी धातु क्लिप के साथ सील करना। -सर्जन चीरों को टांके या सर्जिकल गोंद से बंद कर देगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में आमतौर पर लगभग तीस मिनट लगते हैं। प्रक्रिया के बाद रोगी को कुछ असुविधा और सूजन का अनुभव हो सकता है, लेकिन ये लक्षण आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। पुरुष नसबंदी ऑपरेशन के बाद देखभाल -प्रक्रिया के बाद पहले चौबीस-अड़तालीस घंटाटों के लिए आराम करना और कम से कम एक सप्ताह के लिए ज़ोरदार गतिविधि या भारी सामान उठाने से बचना महत्वपूर्ण है। यह शल्य चिकित्सा क्षेत्र में रक्तस्राव और सूजन को रोकने में मदद कर सकता है। -एक बार में बीस-तीस मिनट के लिए अंडकोश पर बर्फ लगाने से, दिन में कई बार, सूजन और बेचैनी को कम करने में मदद मिल सकती है। -टाइट-फिटिंग अंडरवियर पहनना, जैसे जॉकस्ट्रैप, समर्थन प्रदान कर सकता है और अंडकोश में सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। -ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक, जैसे इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन, प्रक्रिया के बाद दर्द और परेशानी से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। -संक्रमण को रोकने के लिए शल्य चिकित्सा क्षेत्र को साफ और सूखा रखना महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया के बाद कम से कम एक सप्ताह तक नहाने, तैरने या पानी में भिगोने से बचें। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पुरुष नसबंदी जन्म नियंत्रण का एक स्थायी रूप है और यौन संचारित संक्रमणों से रक्षा नहीं करता है। इसलिए, जिन व्यक्तियों को एसटीआई का खतरा है, उन्हें खुद को और अपने साथी को बचाने के लिए गर्भनिरोधक की बाधा विधियों, जैसे कंडोम का उपयोग करना जारी रखना चाहिए।
राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल ने पक्षियों की मौत का कारण जानने के लिए भेजे गए ऊतक के नमूनों में बर्ड फ्लू की मौजूदगी की पुष्टि की। उपायुक्त एसएएस नगर गिरीश दयालन ने कहा कि वायरस का प्रसार रोकथाम का मुख्य तरीका प्रभावित पक्षियों को कलिंग करना है। डेरा बस्सी में दो प्रभावित पोल्ट्री फार्मों में 22 जनवरी को कलिंग प्रक्रिया शुरू होगी। पांच सदस्यों की पच्चीस टीमें डेरा बस्सी में अल्फा और रॉयल पोल्ट्री फार्म में पशु ध् पक्षी कॉलिंग शुरू करेंगी। प्रभावित इलाकों में 50000 से अधिक पक्षियों के मारे जाने की आशंका है। कॉलिंग टीमों को पीपीई किट और फेस शील्ड के साथ. साथ जेसीबी मशीनों सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए हैं और उचित संगरोध व्यवस्था की गई है। गिरीश दयालन ने कहाए ष्इन क्षेत्रों में मुर्गी पालन से संबंधित किसी भी व्यावसायिक गतिविधि की निगरानी के लिए प्रभावित क्षेत्र के दस किलोमीटर क्षेत्र को एक नियंत्रण क्षेत्र बनाया गया है। ष् पक्षियों की मौत (कौवे-प्रवासी पक्षी-जंगली पक्षी) की निगरानी के लिए जिले में दो रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) भी तैनात की गई हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार एवियन इन्फ्लूएंजा में शामिल वायरस को जानवरों से मनुष्यों में प्रेषित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल ने पक्षियों की मौत का कारण जानने के लिए भेजे गए ऊतक के नमूनों में बर्ड फ्लू की मौजूदगी की पुष्टि की। उपायुक्त एसएएस नगर गिरीश दयालन ने कहा कि वायरस का प्रसार रोकथाम का मुख्य तरीका प्रभावित पक्षियों को कलिंग करना है। डेरा बस्सी में दो प्रभावित पोल्ट्री फार्मों में बाईस जनवरी को कलिंग प्रक्रिया शुरू होगी। पांच सदस्यों की पच्चीस टीमें डेरा बस्सी में अल्फा और रॉयल पोल्ट्री फार्म में पशु ध् पक्षी कॉलिंग शुरू करेंगी। प्रभावित इलाकों में पचास हज़ार से अधिक पक्षियों के मारे जाने की आशंका है। कॉलिंग टीमों को पीपीई किट और फेस शील्ड के साथ. साथ जेसीबी मशीनों सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए हैं और उचित संगरोध व्यवस्था की गई है। गिरीश दयालन ने कहाए ष्इन क्षेत्रों में मुर्गी पालन से संबंधित किसी भी व्यावसायिक गतिविधि की निगरानी के लिए प्रभावित क्षेत्र के दस किलोमीटर क्षेत्र को एक नियंत्रण क्षेत्र बनाया गया है। ष् पक्षियों की मौत की निगरानी के लिए जिले में दो रैपिड रिस्पांस टीम भी तैनात की गई हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार एवियन इन्फ्लूएंजा में शामिल वायरस को जानवरों से मनुष्यों में प्रेषित किया जा सकता है।
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की सीरीज के दूसरे वनडे में मैदान पर उतरे बिना ही इतिहास रच दिया है. कोहली ने 400 इंटरनेशनल मैच खेलने वाले भारत के 8वें बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने ये उपलब्धि डॉ. वाइएस राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में बुधवार को हासिल की. श्रीलंका के खिलाफ वर्ष 2008 में वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले कोहली ने अब तक 241 वनडे, 84 टेस्ट और 75 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. कोहली से पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (664), महेंद्र सिंह धोनी (538), राहुल द्रविड़ (509), मोहम्मद अजहरुद्दीन (433), सौरव गांगुली (424), अनिल कुंबले (403) और युवराज सिंह (402) 400 या इससे अधिक इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं. ओवरऑल कोहली दुनिया के 33वें खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस जादुई आंकड़े को छुआ है. तेंदुलकर के बाद जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेला है वो हैं श्रीलंका के पूर्व बल्लेबाज माहेला जयवर्धने, जिन्होंने 652 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर श्रीलंका के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा (594), चौथे नंबर पर सनथ जयसूर्या (586) और पांचवें नंबर पर रिकी पोंटिंग (560) हैं. विशाखापत्तनम में विंडीज टीम के कप्तान कीरोन पोलार्ड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. तीन मैचों की सीरीज में भारतीय टीम 0-1 से पीछे है. ऐसे में टीम इंडिया के लिए ये मुकाबला 'करो या मरो' वाला है. चेन्नई में खेले गए पहले वनडे में विंडीज ने भारत को 8 विकेट से पराजित किया था. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट पर 287 रन बनाए थे. जवाब में विंडीज ने 13 गेंद बाकी रहते 2 विकेट के नुकसान पर मैच अपने नाम कर लिया था. इस मैच में विंडीज की ओर से शिमरोन हेटमायर और शाई होप ने शतकीय पारी खेली थी.
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के दूसरे वनडे में मैदान पर उतरे बिना ही इतिहास रच दिया है. कोहली ने चार सौ इंटरनेशनल मैच खेलने वाले भारत के आठवें बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने ये उपलब्धि डॉ. वाइएस राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में बुधवार को हासिल की. श्रीलंका के खिलाफ वर्ष दो हज़ार आठ में वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले कोहली ने अब तक दो सौ इकतालीस वनडे, चौरासी टेस्ट और पचहत्तर टी-बीस इंटरनेशनल मैच खेले हैं. कोहली से पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर , महेंद्र सिंह धोनी , राहुल द्रविड़ , मोहम्मद अजहरुद्दीन , सौरव गांगुली , अनिल कुंबले और युवराज सिंह चार सौ या इससे अधिक इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं. ओवरऑल कोहली दुनिया के तैंतीसवें खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस जादुई आंकड़े को छुआ है. तेंदुलकर के बाद जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेला है वो हैं श्रीलंका के पूर्व बल्लेबाज माहेला जयवर्धने, जिन्होंने छः सौ बावन इंटरनेशनल मैच खेले हैं. इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर श्रीलंका के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा , चौथे नंबर पर सनथ जयसूर्या और पांचवें नंबर पर रिकी पोंटिंग हैं. विशाखापत्तनम में विंडीज टीम के कप्तान कीरोन पोलार्ड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. तीन मैचों की सीरीज में भारतीय टीम शून्य-एक से पीछे है. ऐसे में टीम इंडिया के लिए ये मुकाबला 'करो या मरो' वाला है. चेन्नई में खेले गए पहले वनडे में विंडीज ने भारत को आठ विकेट से पराजित किया था. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पचास ओवर में आठ विकेट पर दो सौ सत्तासी रन बनाए थे. जवाब में विंडीज ने तेरह गेंद बाकी रहते दो विकेट के नुकसान पर मैच अपने नाम कर लिया था. इस मैच में विंडीज की ओर से शिमरोन हेटमायर और शाई होप ने शतकीय पारी खेली थी.
डीएम सुहास ने कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने की बात पर भी ज्यादा बल दिया। उल्लेखनीय है कि सोमवार को सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गौतमबुद्ध नगर जिले का दौरा किया था। दौरे का मकसद था जिले में कोरोना की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा। समीक्षा बैठक में मौजूद जिलाधिकारी बी. एन. सिंह, नोएडा विकास प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी सहित तमाम विभागों के अफसरों को सीएम ने आड़े हाथ ले लिया था। जब अफसरों ने मुख्यमंत्री को अपने किए हुए कार्य गिनाने चाहे तो वे बिफर पड़े। सीएम ने जिले की सरकारी मशीनरी को बुरी तरह लताड़ा। गुस्साये सीएम ने यहां तक कह डाला, 'बकवास बंद करो। तुम सब यहां राजनीति करते हो। " सूबे के सीएम के इस रुख को देखकर जिला प्रशासन के आला-अफसरों की घिघ्घी बंध गई थी। सीएम की इस मीटिंग से बाहर निकलते ही जिलाधिकारी (अब पूर्व) बी. एन. सिंह ने राज्य शासन से तीन महीने के लिए अवकाश पर जाने की अनुमति मांग ली। अवकाश पर जाने की अनुमति मांगते ही उनका वह गोपनीय पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आईएएस बीएन सिंह के पत्र का मीडिया में लीक होना, हुकूमत ने सरकारी सेवा और आचार संहिता का उल्लंघन माना। लिहाज यूपी सरकार ने पूरे मामले की जांच शुरू करवा दी। साथ ही बीएन सिंह को भी तत्काल गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम पद से हटाकर राजस्व विभाग में भेज दिया।
डीएम सुहास ने कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने की बात पर भी ज्यादा बल दिया। उल्लेखनीय है कि सोमवार को सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गौतमबुद्ध नगर जिले का दौरा किया था। दौरे का मकसद था जिले में कोरोना की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा। समीक्षा बैठक में मौजूद जिलाधिकारी बी. एन. सिंह, नोएडा विकास प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी सहित तमाम विभागों के अफसरों को सीएम ने आड़े हाथ ले लिया था। जब अफसरों ने मुख्यमंत्री को अपने किए हुए कार्य गिनाने चाहे तो वे बिफर पड़े। सीएम ने जिले की सरकारी मशीनरी को बुरी तरह लताड़ा। गुस्साये सीएम ने यहां तक कह डाला, 'बकवास बंद करो। तुम सब यहां राजनीति करते हो। " सूबे के सीएम के इस रुख को देखकर जिला प्रशासन के आला-अफसरों की घिघ्घी बंध गई थी। सीएम की इस मीटिंग से बाहर निकलते ही जिलाधिकारी बी. एन. सिंह ने राज्य शासन से तीन महीने के लिए अवकाश पर जाने की अनुमति मांग ली। अवकाश पर जाने की अनुमति मांगते ही उनका वह गोपनीय पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आईएएस बीएन सिंह के पत्र का मीडिया में लीक होना, हुकूमत ने सरकारी सेवा और आचार संहिता का उल्लंघन माना। लिहाज यूपी सरकार ने पूरे मामले की जांच शुरू करवा दी। साथ ही बीएन सिंह को भी तत्काल गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम पद से हटाकर राजस्व विभाग में भेज दिया।
भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन एक बार फिर प्रबंधन की लचर व्यवस्था से नाराज हो गए है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि हर महीने की पहली तारीख को मिलने वाला स्टायपेंड़ दो महीने देर से मिल रहा है। इस मामले को लेकर एसोसिएन ने जीएमसी डीन से लेकर डीएमई और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को ज्ञापन सौंपा है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन भोपाल के अध्यक्ष डॉ अमित टांडिया ने बताया कि नवंबर महीने का स्टायपेंड जनवरी में मिल पाया। आर्थिक रूप से कई छात्र कमजोर परिवारों से आते हैं ऐसे में स्टायपेंड़ देर से मिलने के कारण उन्हें गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। विभाग के अधिकारियों द्वारा हर बार फंड की कमी का हवाला दिया जाता है। पीजी काउंसिलिंग न होने के कारण जूनियर डॉक्टर्स का नया बैच नहीं आया। इस वजह से मौजूदा जूनियर डॉक्टर्स को ओवर टाइम करना पड़ रहा है। डॉ. टांडिया ने मंत्री सारंग और विभागीय अफसरों से इस समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।
भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन एक बार फिर प्रबंधन की लचर व्यवस्था से नाराज हो गए है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि हर महीने की पहली तारीख को मिलने वाला स्टायपेंड़ दो महीने देर से मिल रहा है। इस मामले को लेकर एसोसिएन ने जीएमसी डीन से लेकर डीएमई और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को ज्ञापन सौंपा है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन भोपाल के अध्यक्ष डॉ अमित टांडिया ने बताया कि नवंबर महीने का स्टायपेंड जनवरी में मिल पाया। आर्थिक रूप से कई छात्र कमजोर परिवारों से आते हैं ऐसे में स्टायपेंड़ देर से मिलने के कारण उन्हें गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। विभाग के अधिकारियों द्वारा हर बार फंड की कमी का हवाला दिया जाता है। पीजी काउंसिलिंग न होने के कारण जूनियर डॉक्टर्स का नया बैच नहीं आया। इस वजह से मौजूदा जूनियर डॉक्टर्स को ओवर टाइम करना पड़ रहा है। डॉ. टांडिया ने मंत्री सारंग और विभागीय अफसरों से इस समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के मुखिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राहत, बढ़त और बचत का जो सपना उन्होंने लोगां को बजट में दिखाया था उसकों अब वो आज से धरती पर उतार रहे है। हालांकि उनकी कई बजट घोषणाए लागू भी हो चुकी है। लेकिन आज से राजस्थान में महंगाई राहत कैंप की शुरूआत होने जा रही है। इन कैंप के माध्यम से राजस्थान के नागरिकों को सरकार की 10 बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा। आज से शुरू हो रहे इन राहत कैंप में जाने से पहले आपको अपने आवश्यक दस्तावेजों को भी साथ में ले जाना होगा। Copyright @ 2023 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के मुखिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राहत, बढ़त और बचत का जो सपना उन्होंने लोगां को बजट में दिखाया था उसकों अब वो आज से धरती पर उतार रहे है। हालांकि उनकी कई बजट घोषणाए लागू भी हो चुकी है। लेकिन आज से राजस्थान में महंगाई राहत कैंप की शुरूआत होने जा रही है। इन कैंप के माध्यम से राजस्थान के नागरिकों को सरकार की दस बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा। आज से शुरू हो रहे इन राहत कैंप में जाने से पहले आपको अपने आवश्यक दस्तावेजों को भी साथ में ले जाना होगा। Copyright @ दो हज़ार तेईस Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
देश में कोरोना का कहर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटों के भीतर कोरोना वायरस के 843 नए मामले सामने आए हैं । इस दौरान 2 मरीजों की मौत हो गई। डाटा के अनुसार, देश में 126 दिनों बाद यानी कि तकरीबन 4 महीने एक दिन में कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी आ रही है। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में H3N2 के मामलों के कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। देश में कोरोना वायरस के औसत एक महीने में करीब 6 गुना मामले बढ़ गए हैं। आपको बता दें कि एक महीने पहले 18 फरवरी को औसत दैनिक मामले 112 थे और 18 मार्च को यह केस बढ़कर 626 हो गए हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और कर्नाटक में कोरोना संक्रमण के मामले काफी बढ़ गए है। वहीं एक्टिव मामले कुल केस का 0. 01 फीसदी है। महामारी की क्या है स्थिति? स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा के मुताबिक, देश में फिल्हाल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 5,389 हो गई है। अभी तक देश में कुल 4,41,58,161 लोग कोविड से ठीक हो चुके हैं। जिसमें 5,30,799 मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना वायरस के 1,02,591 टेस्ट किए गए थे। वहीं कोरोना वैक्सीन की 2. 20 अरब खुराकें लगा दी जा चुकी हैं।
देश में कोरोना का कहर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। पिछले चौबीस घंटाटों के भीतर कोरोना वायरस के आठ सौ तैंतालीस नए मामले सामने आए हैं । इस दौरान दो मरीजों की मौत हो गई। डाटा के अनुसार, देश में एक सौ छब्बीस दिनों बाद यानी कि तकरीबन चार महीने एक दिन में कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी आ रही है। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में HतीनNदो के मामलों के कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। देश में कोरोना वायरस के औसत एक महीने में करीब छः गुना मामले बढ़ गए हैं। आपको बता दें कि एक महीने पहले अट्ठारह फरवरी को औसत दैनिक मामले एक सौ बारह थे और अट्ठारह मार्च को यह केस बढ़कर छः सौ छब्बीस हो गए हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और कर्नाटक में कोरोना संक्रमण के मामले काफी बढ़ गए है। वहीं एक्टिव मामले कुल केस का शून्य. एक फीसदी है। महामारी की क्या है स्थिति? स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा के मुताबिक, देश में फिल्हाल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर पाँच,तीन सौ नवासी हो गई है। अभी तक देश में कुल चार,इकतालीस,अट्ठावन,एक सौ इकसठ लोग कोविड से ठीक हो चुके हैं। जिसमें पाँच,तीस,सात सौ निन्यानवे मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं आपको बता दें कि पिछले चौबीस घंटाटों में देश में कोरोना वायरस के एक,दो,पाँच सौ इक्यानवे टेस्ट किए गए थे। वहीं कोरोना वैक्सीन की दो. बीस अरब खुराकें लगा दी जा चुकी हैं।
बलिया जिले के सिकंदरपुर के उप जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली के विरोध में कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करने के दौरान लॉकडाउन के उल्लंघन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर पुलिस ने सपा नेताओं पर सोमवार शाम कार्रवाई की। मामले में पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिजवी समेत पांच सपा नेताओं और 45 अज्ञात के खिलाफ पुलिस ने सोमवार शाम केस दर्ज कर लिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बलिया जिले के सिकंदरपुर के उप जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली के विरोध में कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करने के दौरान लॉकडाउन के उल्लंघन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर पुलिस ने सपा नेताओं पर सोमवार शाम कार्रवाई की। मामले में पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिजवी समेत पांच सपा नेताओं और पैंतालीस अज्ञात के खिलाफ पुलिस ने सोमवार शाम केस दर्ज कर लिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
संगड़ाह - स्वास्थ्य खंड संगड़ाह की 41 पंचायतों तथा साथ लगते शिमला जिला के कुपवी इलाके के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने वाले संगड़ाह अस्पताल में बिस्तर, स्टाफ, एंबुलेंस, एक्स-रे व अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में क्षेत्रवासियों की सेहत भगवान भरोसे है। अस्पताल की एक्स-रे मशीन गत दो सप्ताह से खराब होने से जहां मरीजों को प्राइवेट लैब में एक्स-रे करवाने के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं गाड़ी खराब होने से 108 एंबुलेंस सेवा भी गत एक सप्ताह से बंद है। मरीजों को निजी लैब में एक्सरे करवाने के लिए जहां 200 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं एंबुलेंस खराब होने के कारण गाड़ी अथवा टैक्सी हायर करने के लिए 200 से एक हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। चालकों के चार में से तीन पद खाली होने से सीएचसी की अपनी दो एंबुलेंस भी केवल शिविर लगने व दवाइयों की सप्लाई के दौरान ही आमतौर पर चलती है। आलम यह भी है कि अस्पताल के तीनों वार्ड में मात्र 15 बिस्तर मौजूद है तथा प्रतिदिन 30 से 40 मरीज यहां दाखिल होने के चलते एक-एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज कई बार देखे जाते हैं। गत 29 जुलाई को एक कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त सिरमौर भी सीपीएस लोक निर्माण विभाग के गृह क्षेत्र के इस स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों की दशा देख चुके हैं। प्रतिदिन 200 के करीब ओपीडी वाले क्षेत्र के 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इस एकमात्र अस्पताल के मौजूदा भवन में जगह के अभाव में जहां मात्र 15 बिस्तर मौजूद हैं, वहीं दवाइयों के स्टोर के लिए कमरे किराए पर लिए गए हैं। अस्पताल में स्टाफ की भी भारी कमी है तथा संगड़ाह सीएचसी तथा बीएमओ कार्यालय में वर्तमान में 15 के करीब पद खाली हैं। पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता रजनीश बंसल तथा अधिशाषी अभियंता केएल चौधरी ने कहा कि अस्पताल भवन के ठेकेदार को निर्धारित अवधि में भवन निर्माण करने को निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि भवन की निर्माण अवधि समाप्त होने तक निर्माण कार्य पूरा न होने पर ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बीएमओ संगड़ाह डा. संदीप शर्मा तथा सीएमओ सिरमौर डा. संजय शर्मा के अनुसार गत दिनों संगड़ाह अस्पताल में कुछ पद भरे जा चुके हैं तथा शेष खाली पदों को लेकर विभाग को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। 108 एंबुलेंस के शिमला जोन के प्रभारी आकाश के अनुसार संगड़ाह की 108 एंबुलेंस के ठीक होने तक आसपास के स्वास्थ्य संस्थानों की एंबुलेंस के स्टॉफ को यहां सेवाएं देने को कहा गया है। बीएमओ डा. संदीप शर्मा ने बताया कि एक्स-रे मशीन ठीक करवाने के लिए चंडीगढ़ से इंजीनियर बुलाया गया है।
संगड़ाह - स्वास्थ्य खंड संगड़ाह की इकतालीस पंचायतों तथा साथ लगते शिमला जिला के कुपवी इलाके के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने वाले संगड़ाह अस्पताल में बिस्तर, स्टाफ, एंबुलेंस, एक्स-रे व अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में क्षेत्रवासियों की सेहत भगवान भरोसे है। अस्पताल की एक्स-रे मशीन गत दो सप्ताह से खराब होने से जहां मरीजों को प्राइवेट लैब में एक्स-रे करवाने के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं गाड़ी खराब होने से एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा भी गत एक सप्ताह से बंद है। मरीजों को निजी लैब में एक्सरे करवाने के लिए जहां दो सौ रुपयापए खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं एंबुलेंस खराब होने के कारण गाड़ी अथवा टैक्सी हायर करने के लिए दो सौ से एक हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। चालकों के चार में से तीन पद खाली होने से सीएचसी की अपनी दो एंबुलेंस भी केवल शिविर लगने व दवाइयों की सप्लाई के दौरान ही आमतौर पर चलती है। आलम यह भी है कि अस्पताल के तीनों वार्ड में मात्र पंद्रह बिस्तर मौजूद है तथा प्रतिदिन तीस से चालीस मरीज यहां दाखिल होने के चलते एक-एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज कई बार देखे जाते हैं। गत उनतीस जुलाई को एक कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त सिरमौर भी सीपीएस लोक निर्माण विभाग के गृह क्षेत्र के इस स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों की दशा देख चुके हैं। प्रतिदिन दो सौ के करीब ओपीडी वाले क्षेत्र के चौबीस घंटाटे स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इस एकमात्र अस्पताल के मौजूदा भवन में जगह के अभाव में जहां मात्र पंद्रह बिस्तर मौजूद हैं, वहीं दवाइयों के स्टोर के लिए कमरे किराए पर लिए गए हैं। अस्पताल में स्टाफ की भी भारी कमी है तथा संगड़ाह सीएचसी तथा बीएमओ कार्यालय में वर्तमान में पंद्रह के करीब पद खाली हैं। पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता रजनीश बंसल तथा अधिशाषी अभियंता केएल चौधरी ने कहा कि अस्पताल भवन के ठेकेदार को निर्धारित अवधि में भवन निर्माण करने को निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि भवन की निर्माण अवधि समाप्त होने तक निर्माण कार्य पूरा न होने पर ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बीएमओ संगड़ाह डा. संदीप शर्मा तथा सीएमओ सिरमौर डा. संजय शर्मा के अनुसार गत दिनों संगड़ाह अस्पताल में कुछ पद भरे जा चुके हैं तथा शेष खाली पदों को लेकर विभाग को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। एक सौ आठ एंबुलेंस के शिमला जोन के प्रभारी आकाश के अनुसार संगड़ाह की एक सौ आठ एंबुलेंस के ठीक होने तक आसपास के स्वास्थ्य संस्थानों की एंबुलेंस के स्टॉफ को यहां सेवाएं देने को कहा गया है। बीएमओ डा. संदीप शर्मा ने बताया कि एक्स-रे मशीन ठीक करवाने के लिए चंडीगढ़ से इंजीनियर बुलाया गया है।
नियंत्रण का पालन लोक लेखा, आकलन, अधीनस्थ विधान, सरकारी उपक्रम तथा आश्वासन समिति जैसी संसदीय समितियों के कार्यों के द्वारा किया जाता है । भारत का लेखानियंत्रक तक महालेखा परीक्षक, जो संविधान के अनुसार एक सांविधिक प्राधिकरण है- संसद के सजग प्रहरी की तरह कार्य करता है और यह देखने के लिए लेखा परीक्षा करता है कि कार्यपालिका द्वारा किए गए व्यय संसद के द्वारा बहुमत से स्वीकृत और संस्वीकृत अनुदान के अनुसार ही हैं। भारत का लेखा नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक वित्तीय औचित्य की अवहेलना, धन का गबन जैसी वित्तीय अनियमितताओं तथा व्यतिक्रम संबंधी मामलों का विवरण लोकलेखा समिति को देता है ताकि वह आवश्यकतानुसार कार्रवाई कर सके। लेखा नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक द्वारा किए गए लेखा विनियोजन तथा विवरण की जाँच करते समय समिति जाँच की विस्तृत पद्धति का आचरण करती है। लोकलेखा समिति के द्वारा लेखा रिपोर्ट का पुनरीक्षण कार्यपालिका के विनियोजित अनुदानों पर संसद के वित्तीय नियंत्रण के चक्र को पूरा करता है। संपूर्ण प्रशासनिक कार्यप्रणाली विधानमंडल के प्रभावी नियंत्रण के अंतर्गत आती है। ऐसा. इसलिए है क्योंकि प्रत्येक कार्रवाई पर प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न पर एक स्थगन बहस और प्रत्येक स्थगन बहस पर एक सविस्तार बहस हो सकती है। इसके अतिरिक्त संसदीय समितियाँ भी सरकार पर नियंत्रण रख सकती हैं। 18.2 विधायी नियंत्रण की संकल्पना संसद राजस्व, व्यय, ऋणदान तथा लेखे- जोखे पर नियंत्रण कर सकती है। ऋणों को बढ़ाने, लोक व्यय के लिए संचित निधि में से धन निकालने, मौजूदा टैक्सों की दरों में वृद्धि तथा नए करों को लगाने के लिए विधायी स्वीकृति की आवश्यकता होती है। सार्वजनिक खातों की लोक लेखा समिति द्वारा जाँच की जाती है और एक सांविधिक प्राधिकरण द्वारा लेखा परीक्षण किया जाता है जो कि कार्यपालिका से स्वतंत्र होता है। भारतीय संदर्भ में, वित्तीय नियंत्रण के लिए निम्न चार नियमों का अनुसरण किया जाता है : i) मंत्रियों के रूप में कार्य करती हुई कार्यपालिका संसद के प्राधिकार के विना ऋणदान, कराधान के द्वारा या दूसरे किसी उपाय से धन का जुगाड़ नहीं कर सकती, व्ययों के प्रस्ताव, जिनके लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है केवल मंत्रीमंडल द्वारा ही पेश किए जाने चाहिए। ii) दूसरा नियम धन विधेयकों पर लोकसभा का एकमात्र नियंत्रण है। इसे पहले लोकसभा में पेश किया जाता है और लोकसभा के पास ही यह अधिकार है कि वह व्यय को प्राधिकृत करने के लिए ऋणों अथवा करों के रूप में धन की स्वीकृति दे सकती है। राज्यसभा अनुदान को अस्वीकार तो कर सकती है परन्तु इसे लागू नहीं करवा सकती है। iii) अनुदान की मांग सरकार द्वारा की जानी चाहिए। सरकार द्वारा अनुदान की मांग के अतिरिक्त किसी अनुदान को न तो राज्यसभा और न ही लोकसभा स्वीकृत कर सकती iv) इसी तरह, किसी भी नए कर अथवा मौजूदा कर में वृद्धि के प्रस्तावों का भी सरकार द्वारा पेश किया जाना आवश्यक है। भारत में प्रश्न, कार्य स्थगन प्रस्ताव, संकल्प, वोट, बजट तथा विधायी समिति लोक लेखा, आकलन, अधीनस्थ विधान, और आश्वासन समिति विधायी नियंत्रण के साधन हैं । विधायी नियंत्रण के इन तरीकों का वर्णन यहां संक्षेप में किया गया है : प्रश्न अवधि : प्रत्येक संसदीय दिवस का पहला घंटा प्रश्नों के लिए रखा गया है जिससे नियंत्रण प्रभावी हो जाता है। पूछे गए प्रश्न समूचे प्रशासन को सावधान कर सकते हैं। प्रश्न प्रशासन की नीतियों तथा गतिविधियों के विभिन्न पहलुओं पर जनता के ध्यान को प्रभावशाली ढंग से संकेन्द्रित करने का सफल साधन है। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई पर प्रश्न किया जा सकता है हालांकि सदस्य मंत्री को उत्तर देने के लिए विवश नहीं कर सकते। अध्यक्ष भी कुछ प्रश्नों को पूछने की अनुमति नहीं देता। आमतौर पर प्रश्न तथाकथित कमजोर मुद्दों पर सरकार पर प्रहार करने के लिए अथवा किसी विषय पर मंत्री की राय तथा सूचना प्राप्त करने के उद्देश्य से पूछे जाते हैं। बहुत से प्रश्न हल्के फुल्के हो सकते हैं। मगर कुछ सरकार को जबरदस्त हानि पहुंचाते हैं जैसे 1956 का जीवन बीमा निगम का विवाद केवल एक ही प्रश्न के उत्तर से शुरू हुआ था जिससे वित्तमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा था। यह उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने वाली सर्वप्रिय, सर्वविदित सामान्यतः प्रयोग में लाई जाने वाली विधि है। समय-समय पर सदस्य अपने प्रश्नों के द्वारा महत्वपूर्ण विषयों को उठाते रहे हैं । 2) कार्य स्थगन वादविवाद : यह एक दैनिक नियंत्रण का साधन है तथा सार्वजनिक हित के विशिष्ट तथा किसी भी अनिवार्य प्रश्न को सदन में बहस के लिए रखा जा सकता है। अगर पीठासीन अधिकारी की अनुमति हो तो उठाए गए विषय पर तत्काल बहस शुरू हो जाती है, इस प्रकार सदन के नियमित कार्य को स्थगित कर दिया जाता है। व्यवहार में, यह देखा गया है कि अध्यक्ष "तुरंत प्रकृति तथा जनहित" शब्द को व्याख्यायित करने की कोशिश नहीं करता है । 3) अधिनियम के संशोधन तथा अधिनियमन पर वाद-विवाद : किसी भी विधेयक के बार-बार पढ़ने से संसद के सदस्यों को विधेयक की सम्पूर्ण नीति की आलोचना करने में सहायता मिलती है। आलोचना से सरकार के हृदय में परिवर्तन भी हो सकता है। 'उदाहरण के लिए, सरकार ने 1957 में अत्यधिक विवादास्पद हिंदी कोड विधेयक को वापिस ले लिया था। इसी तरह जब कभी भी अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में प्रस्ताव पेश किया जाता है तो सदस्यों को एक बार फिर से उस पर चर्चा करने का अवसर मिलता है। बजट परिचर्चा : लेखे ( हिसाब ) पर बजट के विषय प्रवेश (परिचय) से संसद को बजट प्रस्तावों पर बहस करने के अनेक अवसर मिलते हैं। संसद सदस्यों को बजट पर चर्चा करने के लिए भिन्न स्थितियों में निम्न अवसर मिलते हैं : क) बजट के प्रस्तुतीकरण के बाद आम चर्चा होती है। इस अवसर पर चर्चा समूचे बजट अथवा उसके सिद्धांतों के किसी भी प्रश्न से संबंधित होती है। अनुदानों पर मतदान के समय दूसरा अवसर मिलता है। मांग की प्रत्येक मद पर चर्चा होती है। अगर उसमें उठाए गए विशिष्ट मद पर कटौती प्रस्ताव रखा जाता है तो चर्चा अत्यधिक तर्कसंगत है और इसे विशिष्ट विषय पर संकेन्द्रित किया जा सकता है। ग) वित्त विधेयक पर परिचर्चा से समूचे प्रशासन की चर्चा करने के अनेक अवसर मिलते हैं। जी. बी. मावलंकर के शब्दों में "यह एक स्वीकृत सिद्धांत है कि वित्त विधेयक में किसी भी विषय पर बहस की जा सकती है और किसी भी शिकायत पर खुले आम विचार-विमर्श किया जा सकता है। नियम यह है कि किसी भी. नागरिक को अपनी शिकायतों तथा विचारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए जब तक संसद उसे इस बात की पूर्ण छूट न दे दे। राष्ट्रपति का भाषण : बजट सत्र के शुरू होने पर राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है। भाषण सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और प्रत्येक मंत्रालय उससे संबंधित मांग के लिए उत्तरदायी होता है। राष्ट्रपति अपने भाषण में उन प्रमुख नीतियों तथा गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देता है जिन्हें कार्यपालिका निकट भविष्य में कार्यान्वित करने के लिए पूर्वाधिकृत कर चुकी होगी। संसद सदस्यों को प्रशासन के समूचे क्षेत्र की उसकी भूलचूक के तथाकथित कार्यों की समीक्षा करने का अवसर मिलता है। संसदीय समितियाँ : संसदीय समितियाँ - लोक लेखा समिति, आकलन समिति, लोक उपक्रम समिति अधीनस्थ विधान समिति तथा आश्वासन समिति प्रशासन पर त्रिीय नियंत्रण नियंत्रण के साधन हैं। पहली तीन समितियां तो वास्तविक तथा विस्तृत नियंत्रण करती है और आश्वासन समिति मंत्रियों द्वारा समय-समय पर सदन में दिए गए आश्वासनों तथा वचनों की छानबीन करती है और निम्न विषयों की जानकारी देती है - i) ऐसे वायदों तथा आश्वासनों को किस सीमा तक पूरा किया गया है, ii) कहाँ पूरा किया गया है, क्या ऐसे कार्यान्वयन को कम से कम समय में पूरा किया गया है । ऐसी समितियाँ मंत्रियों को अपने वायदों को पूरा करने के लिए सतर्क करती हैं। 7) लेखा परीक्षण : संसद लेखानियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक के द्वारा सरकारी व्ययों पर नियंत्रण करती है जो सभी सरकारी लेखों का हिसाब किताब रखता है ताकि सुनिश्चित कर सके कि संसद द्वारा स्वीकृत धन को बिना अनुपूरक वोट के बढ़ाया नहीं गया और धन का व्यय नियमों के अनुसार ही किया गया है। इस प्रकार वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में संसद के प्रति सरकार का उत्तरदायित्व लेखानियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक की रिपोर्टों से प्राप्त किया जाता है जिसे ठीक ही संसद का " "मार्गदर्शक, मित्र तथा तत्वज्ञ" माना गया है। बोध प्रश्न 1 टिप्पणी : i) अपने उत्तरों के लिए नीचे दिए गए स्थान का प्रयोग कीजिए । ii) अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों से मिलाइए। 1) विधायी नियंत्रण क्या है ? विधायी नियंत्रण के नियमों की चर्चा कीजिए । 2 ) विधायी नियंत्रण का प्रयोग करने वाले विभिन्न साधन कौन से हैं? व्याख्या कीजिए । 18. 3 विधायी नियंत्रण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि हालांकि बजट पर पूर्ण नियंत्रण इसी सदी की संकल्पना है मगर इसका विकास मध्ययुग के अंत में शुरू हुआ था जबकि राजा के अधिकार क्षेत्र में राजस्व एकत्र करना शामिल होता था। इस प्रकार बजट राजस्व तथा व्यय का एक विवरण था । युद्ध तथा अन्य आपात स्थितियों के दौरान जब राजा को राज्य के कार्यों के लिये अत्यधिक धन की आवश्यकता होती थी तो उसे कुलीन वर्ग की राय जानने के लिए उनसे परामर्श करना पड़ता था। अभी तक व्यय राजा का ही विशेषाधिकार था। 1688 की क्रांति के बाद "प्रतिनिधित्व के बिना राजस्व नहीं" नियम की स्थापना हुई। अभी भी व्यय नियंत्रण पर विधायी स्वीकृति की परम्परा शुरू हुई थी । लोक वित्त पर विधायी नियंत्रण की प्रथा सर्वप्रथम इंग्लैंड में शुरू हुई और लगातार विकसित होती गई। इस दिशा में किंग जॉन के शासन में उठाया गया पहला प्रयास व्यय की अपेक्षा राजस्व तथा प्राप्तियों (आय) पर नियंत्रण था। स्टुअर्ट की निरंकशता ने सभासदों को और अधिक आग्रही बना दिया और वे सरकारी व्यय पर नियंत्रण में भागीदारी का दावा करने लगे। मगर ऐसा अचानक नहीं हुआ अथवा किसी संगठित योजना रूपरेखा के अनुसार यह कार्यान्वित नहीं हुआ था या यह कोई नियोजित प्रयास नहीं था जो धीरे-धीरे विकसित हुआ हो। 1987 में लेखाकरण तथा विवरण पद्धति की स्थापना 1866 के राजकोष तथा लेखा परीक्षण विभाग अधिनियम के अंतर्गत लेखा परीक्षण प्रथा और 1866 में हाउस ऑफ कॉमन्स में लोकलेखों की स्थायी समिति का संविधान विधायी नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विकास थे। इस प्रकार लेखा परीक्षण तथा विवरण की आधुनिक प्रणाली का निर्माण हुआ जिसके अनुसार विधान मंडल राज्य की वित्त व्यवस्था पर नियंत्रण करते थे। भारत में विधायी नियंत्रण की प्रणाली लगभग इंग्लैंड में प्रचलित प्रणाली पर आधारित है। 18.4 संवैधानिक उपबंध, 1950 भारतीय संविधान अपने विभिन्न अनुच्छेदों में वित्तीय मामलों में विधायी प्रक्रिया की व्याख्या करता है। भारतीय संविधान के मुख्य उपबंध नीचे दिए गए हैं : अनुच्छेद 107(i) के अनुसार अनुच्छेद 109 तथा 117 के उपबंधों के अधीन धन विधेयक और अन्य वित्तीय विधेयकों के विषय में, एक विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है और अनुच्छेद 108 तथा 109 के उपबंध के अधीन कोई भी विधेयक संसद के एक सदन द्वारा पारित हुआ नहीं माना जाएगा जब तक दोनों सदन इससे सहमत न हों जाएँ, चाहे यह संशोधनों सहित अथवा ऐसे संशोधनों के बिना हो, मगर दोनों सदनों की सहमति जरूरी है। अनुच्छेद 109(i) के अनुसार एक धन विधेयक राज्यसभा में प्रारंभ नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 109(ii) लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक को राज्यसभा में उसके सुझावों के लिए भेजा जाता है और राज्यसभा को इस विधेयक की प्राप्ति की तिथि के पन्द्रह दिनों के अंतर्गत अपनी सिफारिशों सहित लोकसभा को वापिस भेजना होता है और लोकसभा राज्यसभा की सभी अथवा कुछ सिफारिशों को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत कर सकती है। अनुच्छेद 109(iii) के अनुसार अगर लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों में से किसी को स्वीकार करती है तो विधेयक राज्यसभा द्वारा बताए गए संशोधनों सहित दोनों सदनों द्वारा माना जाएगा। अनुच्छेद ।।2(i) से स्पष्ट है कि राष्ट्रपति को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के विषय में भारत सरकार के वर्ष भर के आकल्लित व्ययों तथा आय का विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखना होता है। ऐसे विवरण को "वार्षिक वित्तीय विवरण" कहा गया है । अनुच्छेद ।13 (i) के अनुसार भारत की संचित निधि पर प्रभारित व्यय से संबंधित काफी अनुमानों को संसद की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। मगर इस धारा में उन अनुमानों में से किसी पर भी संसद के किसी भी सदन में परिचर्चा को रोकने का प्रावधान नहीं है । अनुच्छेद 14 (i) के अनुसार ज्यों ही अनुच्छेद 113 के अधीन अनुदान लोकसभा द्वारा पेश हो जाएंगे त्यों ही सभी धन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि में से विनियोजन के लिए विधेयक प्रारंभ किया जाएगा : क) लोकसभा द्वारा किए गए अनुदान भारत की संचित निधि पर प्रभारित व्ययः मगर संसद के समक्ष पहले से रखे गए विवरण में दिखाए गए धन में किसी भी प्रकार से वृद्धि नहीं हो । अनुच्छेद 116 (i) के अनुसार लोकसभा के पास निम्न शक्तियाँ होंगी : क) उस व्यय के विषय में अनुच्छेद 114 के उपबंधों के अनुसार कानून को पारित करना. और ऐसे अनुदान की स्वीकृति के लिए अनुच्छेद 113 में निर्धारित प्रक्रिया की निष्पत्ति के विचाराधीन किसी वित्तीय वर्ष के अनुमानित व्यय के एक भाग के विषय में पहले से ही अनुदान बनाना। ख) जब सेवा के अनिश्चित स्वरूप अथवा विस्तार के कारण मांग वार्षिक वित्तीय विवरण में साधारणतया दिए गए ब्यौरे से निश्चित नहीं किये जा सकते तो भारत के संसाधनों पर आकस्मिक मांग को पूरा करने के लिए अनुदान करना । ग) एक विशिष्ट अनुदान बनाना, जो किसी वित्तीय वर्ष की सामायिक सेवा का हिस्सा नहीं होती और संसद के पास उन कार्यों जिनके लिए उक्त अनुदान किए गए हैं, भारत की संचित निधि में से धन निकालने का कानूनन अधिकार है। अनुच्छेद 117 (i) के अनुसार अनुच्छेद 110 के अधीन निर्दिष्ट मामलों में से किसी एक के लिए प्रावधान करने वाले संशोधन अथवा विधेयक को राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना शुरू नहीं किया जाएगा और ऐसे प्रावधान करने वाले विधेयक को राज्यसभा में शुरू नहीं किया जाएगा। किसी कर के उन्मूलन अथवा कटौती के लिए प्रावधान करने वाले संशोधन को प्रस्तुत करने के लिए ऐसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं होगी। अनुच्छेद 117 ( ख ) यह जानकारी देता है कि एक विधेयक, जो अगर कानून बन गया है और उस कार्यान्वयन शुरू हो चुका है, भारत की संचित निधि में से व्यय को पूरा करेगा और तब तक संसद के किसी भी सदन द्वारा पारित नहीं होगा जब तक राष्ट्रपति उस सदन को विधेयक के महत्व की सिफारिश न करे । बोध प्रश्न 2 टिप्पणी : i) अपने उत्तरों के लिए नीचे दिए गए स्थान का प्रयोग कीजिए । अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों के साथ मिलाइए । 1) विधायी नियंत्रण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए। 2) वित्तीय मामलों पर विधायी नियंत्रण के लिए भारतीय संविधान में दिए गए भिन्न उपबंधों की व्याख्या कीजिए । 18.5 कराधान पर नियंत्रण बजट का निर्माण तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक लोगों से आपेक्षित धन को इकट्ठा करने की पूर्वयोजना नहीं बन जाती । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सदन के समक्ष एक वित्त विधेयक रखा जाता है जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व प्रस्ताव अथवा कराधान को प्रस्तुत किया जाता है और इसमें वर्तमान कराधान योजनाओं को कुछ परिवर्तन के साथ अथवा वैसे का वैसा शामिल किया जाता है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र के सुप्रसिद्ध सिद्धांत के अनुरूप है कि विधि के प्राधिकरण के अतिरिक्त किसी भी अन्य के द्वारा न तो कोई कर लगाया जा सकेगा अथवा इकट्ठा किया जा सकेगा जैसा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 265 में स्पष्ट प्रस्तुत किया गया है। अतः जबकि विनियोजन विधेयक सरकार को संचित निधि में से धन का विनियोजन करने का अधिकार देता है तो वित्त विधेयक इसे करों को एकत्र करने का अधिकार देता है। वित्त विधेयक में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के वित्तीय (कराधान) प्रस्तावों को शामिल किया जाता है जिन्हें प्रति वर्ष संसद को पारित करना होता है। इसमें खुली बहस की जाती है। संशोधनों द्वारा किसी भी कर में कटौती अथवा उसके उन्मूलन का प्रस्ताव किया जा सकता है मगर हो सकता है नए करों अथवा मौजूदा करों की दर में कोई वृद्धि का प्रस्ताव न हो । संशोधित विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किया जाता है और राज्यसभा द्वारा विचार विमर्श के बाद यह राष्ट्रपति के पास उसके हस्ताक्षर के लिए जाता है, जिसके बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है । धन विधेयक का संबंध कराधान, ऋणदान अथवा व्ययों से होता है। बजट सत्र के शुरू होते ही बजट प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखे जाते हैं। धन विधेयकों के लिए प्राधिकार लोकसभा के पास ही है तथा इसीलिए लोकसभा ही विधेयक की आगे की कार्रवाई करती है। वित्त मंत्री लोकसभा के सामने वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करता है और उस प्रस्तुतीकरण के बाद दोनों सदनों में अलग-अलग समूचे वित्तीय वितरण पर आम चर्चा की जाती है। व्यय के किसी भी मद को आम बहस में छोड़ा नहीं जाता। मगर बहस केवल नीति से संबंधित सामान्य स्वरूप पर ही होनी चाहिए जिसमें सम्बद्ध विभागों के प्रशासन की समीक्षा तथा पुनरीक्षण हो तथा शायद सदस्य लोगों की शिकायतों को भी अभिव्यक्त करें । एक धन विधेयक किसी भी तरह निम्न संदर्भों में वित्त विधेयक से भिन्न होता हैः क) एक धन विधेयक केवल कराधान, ऋणदान अथवा व्यय के संबंधित होता है। जबकि वित्त विधेयक का क्षेत्र विस्तृत होता है जिसमें यह उपरोक्त के अलावा अन्य मामलों पर भी विचार करता है । धन विधेयक ऐसा विधेयक है जिसे लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित किया जाना होता है जबकि वित्त विधेयक के लिए ऐसा प्रमाण आवश्यक नहीं है । एक धन विधेयक को राज्यसभा को इसकी प्राप्ति के 14 दिनों के अंतर्गत अपनी सिफारिशों सहित, अगर हैं तो, जिन्हें मानना लोकसभा के लिए जरूरी नहीं होता, लोकसभा को लौटाना जरूरी होता है। एक वित्त विधेयक पर मतभेद को किसी भी तरह संयुक्त बैठक में उपस्थित सदस्यों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा दूर किया जा सकता है। 18.6 लोक व्यय पर नियंत्रण - एक मूल्यांकन विधान मंडल का कार्य लोक व्यय के लिए अनुदान पर मतदान से समाप्त नहीं होता। इसे यह भी देखना होता है कि दी गई निधि (धन) का उपयोग दिए गए निर्देशों के अनुसार निष्ठापूर्वक तथा किफायत से किया गया है। संसद को अपने संदेहों को भी दूर करना होता है कि (1) निधि को अनुमोदित उद्देश्यों के लिए ही प्रयुक्त किया गया है, (2) विनियुक्त राशि के अन्तर्गत ही, (3) व्यर्थ तथा बेतुके खर्चों से बचा गया है आदि। इस कार्य के लिए भारत के महानियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक के द्वारा सभी विभागीय खातों का अलग-अलग लेखा जोखा रखा जाता है जिसकी रिपोर्ट का परीक्षण किसी भी संसदीय समिति द्वारा होता है। संसद के प्रति राजनैतिक कार्यपालक का संयुक्त दायित्व संसदीय लोकतंत्र का आवश्यक गुण है। संसद द्वारा कार्यपालक पर किंया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण बटुए की डोरी पर नियंत्रण है। कार्यपालक संसद की स्वीकृति के बिना धन का व्यय नहीं कर सकता । भारतीय लेखा नियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक द्वारा लेखा परीक्षण व्यय पर संसद का नियंत्रण तभी पूर्ण है जब यह स्वयं निश्चित कर सके कि कार्यपालिका द्वारा किए गए खर्चे उन्हीं कार्यों के लिए किए गए हैं जिनकी अनुमति दी गई थी। ऐसा एक
नियंत्रण का पालन लोक लेखा, आकलन, अधीनस्थ विधान, सरकारी उपक्रम तथा आश्वासन समिति जैसी संसदीय समितियों के कार्यों के द्वारा किया जाता है । भारत का लेखानियंत्रक तक महालेखा परीक्षक, जो संविधान के अनुसार एक सांविधिक प्राधिकरण है- संसद के सजग प्रहरी की तरह कार्य करता है और यह देखने के लिए लेखा परीक्षा करता है कि कार्यपालिका द्वारा किए गए व्यय संसद के द्वारा बहुमत से स्वीकृत और संस्वीकृत अनुदान के अनुसार ही हैं। भारत का लेखा नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक वित्तीय औचित्य की अवहेलना, धन का गबन जैसी वित्तीय अनियमितताओं तथा व्यतिक्रम संबंधी मामलों का विवरण लोकलेखा समिति को देता है ताकि वह आवश्यकतानुसार कार्रवाई कर सके। लेखा नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक द्वारा किए गए लेखा विनियोजन तथा विवरण की जाँच करते समय समिति जाँच की विस्तृत पद्धति का आचरण करती है। लोकलेखा समिति के द्वारा लेखा रिपोर्ट का पुनरीक्षण कार्यपालिका के विनियोजित अनुदानों पर संसद के वित्तीय नियंत्रण के चक्र को पूरा करता है। संपूर्ण प्रशासनिक कार्यप्रणाली विधानमंडल के प्रभावी नियंत्रण के अंतर्गत आती है। ऐसा. इसलिए है क्योंकि प्रत्येक कार्रवाई पर प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न पर एक स्थगन बहस और प्रत्येक स्थगन बहस पर एक सविस्तार बहस हो सकती है। इसके अतिरिक्त संसदीय समितियाँ भी सरकार पर नियंत्रण रख सकती हैं। अट्ठारह.दो विधायी नियंत्रण की संकल्पना संसद राजस्व, व्यय, ऋणदान तथा लेखे- जोखे पर नियंत्रण कर सकती है। ऋणों को बढ़ाने, लोक व्यय के लिए संचित निधि में से धन निकालने, मौजूदा टैक्सों की दरों में वृद्धि तथा नए करों को लगाने के लिए विधायी स्वीकृति की आवश्यकता होती है। सार्वजनिक खातों की लोक लेखा समिति द्वारा जाँच की जाती है और एक सांविधिक प्राधिकरण द्वारा लेखा परीक्षण किया जाता है जो कि कार्यपालिका से स्वतंत्र होता है। भारतीय संदर्भ में, वित्तीय नियंत्रण के लिए निम्न चार नियमों का अनुसरण किया जाता है : i) मंत्रियों के रूप में कार्य करती हुई कार्यपालिका संसद के प्राधिकार के विना ऋणदान, कराधान के द्वारा या दूसरे किसी उपाय से धन का जुगाड़ नहीं कर सकती, व्ययों के प्रस्ताव, जिनके लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है केवल मंत्रीमंडल द्वारा ही पेश किए जाने चाहिए। ii) दूसरा नियम धन विधेयकों पर लोकसभा का एकमात्र नियंत्रण है। इसे पहले लोकसभा में पेश किया जाता है और लोकसभा के पास ही यह अधिकार है कि वह व्यय को प्राधिकृत करने के लिए ऋणों अथवा करों के रूप में धन की स्वीकृति दे सकती है। राज्यसभा अनुदान को अस्वीकार तो कर सकती है परन्तु इसे लागू नहीं करवा सकती है। iii) अनुदान की मांग सरकार द्वारा की जानी चाहिए। सरकार द्वारा अनुदान की मांग के अतिरिक्त किसी अनुदान को न तो राज्यसभा और न ही लोकसभा स्वीकृत कर सकती iv) इसी तरह, किसी भी नए कर अथवा मौजूदा कर में वृद्धि के प्रस्तावों का भी सरकार द्वारा पेश किया जाना आवश्यक है। भारत में प्रश्न, कार्य स्थगन प्रस्ताव, संकल्प, वोट, बजट तथा विधायी समिति लोक लेखा, आकलन, अधीनस्थ विधान, और आश्वासन समिति विधायी नियंत्रण के साधन हैं । विधायी नियंत्रण के इन तरीकों का वर्णन यहां संक्षेप में किया गया है : प्रश्न अवधि : प्रत्येक संसदीय दिवस का पहला घंटा प्रश्नों के लिए रखा गया है जिससे नियंत्रण प्रभावी हो जाता है। पूछे गए प्रश्न समूचे प्रशासन को सावधान कर सकते हैं। प्रश्न प्रशासन की नीतियों तथा गतिविधियों के विभिन्न पहलुओं पर जनता के ध्यान को प्रभावशाली ढंग से संकेन्द्रित करने का सफल साधन है। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई पर प्रश्न किया जा सकता है हालांकि सदस्य मंत्री को उत्तर देने के लिए विवश नहीं कर सकते। अध्यक्ष भी कुछ प्रश्नों को पूछने की अनुमति नहीं देता। आमतौर पर प्रश्न तथाकथित कमजोर मुद्दों पर सरकार पर प्रहार करने के लिए अथवा किसी विषय पर मंत्री की राय तथा सूचना प्राप्त करने के उद्देश्य से पूछे जाते हैं। बहुत से प्रश्न हल्के फुल्के हो सकते हैं। मगर कुछ सरकार को जबरदस्त हानि पहुंचाते हैं जैसे एक हज़ार नौ सौ छप्पन का जीवन बीमा निगम का विवाद केवल एक ही प्रश्न के उत्तर से शुरू हुआ था जिससे वित्तमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा था। यह उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने वाली सर्वप्रिय, सर्वविदित सामान्यतः प्रयोग में लाई जाने वाली विधि है। समय-समय पर सदस्य अपने प्रश्नों के द्वारा महत्वपूर्ण विषयों को उठाते रहे हैं । दो) कार्य स्थगन वादविवाद : यह एक दैनिक नियंत्रण का साधन है तथा सार्वजनिक हित के विशिष्ट तथा किसी भी अनिवार्य प्रश्न को सदन में बहस के लिए रखा जा सकता है। अगर पीठासीन अधिकारी की अनुमति हो तो उठाए गए विषय पर तत्काल बहस शुरू हो जाती है, इस प्रकार सदन के नियमित कार्य को स्थगित कर दिया जाता है। व्यवहार में, यह देखा गया है कि अध्यक्ष "तुरंत प्रकृति तथा जनहित" शब्द को व्याख्यायित करने की कोशिश नहीं करता है । तीन) अधिनियम के संशोधन तथा अधिनियमन पर वाद-विवाद : किसी भी विधेयक के बार-बार पढ़ने से संसद के सदस्यों को विधेयक की सम्पूर्ण नीति की आलोचना करने में सहायता मिलती है। आलोचना से सरकार के हृदय में परिवर्तन भी हो सकता है। 'उदाहरण के लिए, सरकार ने एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में अत्यधिक विवादास्पद हिंदी कोड विधेयक को वापिस ले लिया था। इसी तरह जब कभी भी अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में प्रस्ताव पेश किया जाता है तो सदस्यों को एक बार फिर से उस पर चर्चा करने का अवसर मिलता है। बजट परिचर्चा : लेखे पर बजट के विषय प्रवेश से संसद को बजट प्रस्तावों पर बहस करने के अनेक अवसर मिलते हैं। संसद सदस्यों को बजट पर चर्चा करने के लिए भिन्न स्थितियों में निम्न अवसर मिलते हैं : क) बजट के प्रस्तुतीकरण के बाद आम चर्चा होती है। इस अवसर पर चर्चा समूचे बजट अथवा उसके सिद्धांतों के किसी भी प्रश्न से संबंधित होती है। अनुदानों पर मतदान के समय दूसरा अवसर मिलता है। मांग की प्रत्येक मद पर चर्चा होती है। अगर उसमें उठाए गए विशिष्ट मद पर कटौती प्रस्ताव रखा जाता है तो चर्चा अत्यधिक तर्कसंगत है और इसे विशिष्ट विषय पर संकेन्द्रित किया जा सकता है। ग) वित्त विधेयक पर परिचर्चा से समूचे प्रशासन की चर्चा करने के अनेक अवसर मिलते हैं। जी. बी. मावलंकर के शब्दों में "यह एक स्वीकृत सिद्धांत है कि वित्त विधेयक में किसी भी विषय पर बहस की जा सकती है और किसी भी शिकायत पर खुले आम विचार-विमर्श किया जा सकता है। नियम यह है कि किसी भी. नागरिक को अपनी शिकायतों तथा विचारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए जब तक संसद उसे इस बात की पूर्ण छूट न दे दे। राष्ट्रपति का भाषण : बजट सत्र के शुरू होने पर राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है। भाषण सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और प्रत्येक मंत्रालय उससे संबंधित मांग के लिए उत्तरदायी होता है। राष्ट्रपति अपने भाषण में उन प्रमुख नीतियों तथा गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देता है जिन्हें कार्यपालिका निकट भविष्य में कार्यान्वित करने के लिए पूर्वाधिकृत कर चुकी होगी। संसद सदस्यों को प्रशासन के समूचे क्षेत्र की उसकी भूलचूक के तथाकथित कार्यों की समीक्षा करने का अवसर मिलता है। संसदीय समितियाँ : संसदीय समितियाँ - लोक लेखा समिति, आकलन समिति, लोक उपक्रम समिति अधीनस्थ विधान समिति तथा आश्वासन समिति प्रशासन पर त्रिीय नियंत्रण नियंत्रण के साधन हैं। पहली तीन समितियां तो वास्तविक तथा विस्तृत नियंत्रण करती है और आश्वासन समिति मंत्रियों द्वारा समय-समय पर सदन में दिए गए आश्वासनों तथा वचनों की छानबीन करती है और निम्न विषयों की जानकारी देती है - i) ऐसे वायदों तथा आश्वासनों को किस सीमा तक पूरा किया गया है, ii) कहाँ पूरा किया गया है, क्या ऐसे कार्यान्वयन को कम से कम समय में पूरा किया गया है । ऐसी समितियाँ मंत्रियों को अपने वायदों को पूरा करने के लिए सतर्क करती हैं। सात) लेखा परीक्षण : संसद लेखानियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक के द्वारा सरकारी व्ययों पर नियंत्रण करती है जो सभी सरकारी लेखों का हिसाब किताब रखता है ताकि सुनिश्चित कर सके कि संसद द्वारा स्वीकृत धन को बिना अनुपूरक वोट के बढ़ाया नहीं गया और धन का व्यय नियमों के अनुसार ही किया गया है। इस प्रकार वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में संसद के प्रति सरकार का उत्तरदायित्व लेखानियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक की रिपोर्टों से प्राप्त किया जाता है जिसे ठीक ही संसद का " "मार्गदर्शक, मित्र तथा तत्वज्ञ" माना गया है। बोध प्रश्न एक टिप्पणी : i) अपने उत्तरों के लिए नीचे दिए गए स्थान का प्रयोग कीजिए । ii) अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों से मिलाइए। एक) विधायी नियंत्रण क्या है ? विधायी नियंत्रण के नियमों की चर्चा कीजिए । दो ) विधायी नियंत्रण का प्रयोग करने वाले विभिन्न साधन कौन से हैं? व्याख्या कीजिए । अट्ठारह. तीन विधायी नियंत्रण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि हालांकि बजट पर पूर्ण नियंत्रण इसी सदी की संकल्पना है मगर इसका विकास मध्ययुग के अंत में शुरू हुआ था जबकि राजा के अधिकार क्षेत्र में राजस्व एकत्र करना शामिल होता था। इस प्रकार बजट राजस्व तथा व्यय का एक विवरण था । युद्ध तथा अन्य आपात स्थितियों के दौरान जब राजा को राज्य के कार्यों के लिये अत्यधिक धन की आवश्यकता होती थी तो उसे कुलीन वर्ग की राय जानने के लिए उनसे परामर्श करना पड़ता था। अभी तक व्यय राजा का ही विशेषाधिकार था। एक हज़ार छः सौ अठासी की क्रांति के बाद "प्रतिनिधित्व के बिना राजस्व नहीं" नियम की स्थापना हुई। अभी भी व्यय नियंत्रण पर विधायी स्वीकृति की परम्परा शुरू हुई थी । लोक वित्त पर विधायी नियंत्रण की प्रथा सर्वप्रथम इंग्लैंड में शुरू हुई और लगातार विकसित होती गई। इस दिशा में किंग जॉन के शासन में उठाया गया पहला प्रयास व्यय की अपेक्षा राजस्व तथा प्राप्तियों पर नियंत्रण था। स्टुअर्ट की निरंकशता ने सभासदों को और अधिक आग्रही बना दिया और वे सरकारी व्यय पर नियंत्रण में भागीदारी का दावा करने लगे। मगर ऐसा अचानक नहीं हुआ अथवा किसी संगठित योजना रूपरेखा के अनुसार यह कार्यान्वित नहीं हुआ था या यह कोई नियोजित प्रयास नहीं था जो धीरे-धीरे विकसित हुआ हो। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में लेखाकरण तथा विवरण पद्धति की स्थापना एक हज़ार आठ सौ छयासठ के राजकोष तथा लेखा परीक्षण विभाग अधिनियम के अंतर्गत लेखा परीक्षण प्रथा और एक हज़ार आठ सौ छयासठ में हाउस ऑफ कॉमन्स में लोकलेखों की स्थायी समिति का संविधान विधायी नियंत्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विकास थे। इस प्रकार लेखा परीक्षण तथा विवरण की आधुनिक प्रणाली का निर्माण हुआ जिसके अनुसार विधान मंडल राज्य की वित्त व्यवस्था पर नियंत्रण करते थे। भारत में विधायी नियंत्रण की प्रणाली लगभग इंग्लैंड में प्रचलित प्रणाली पर आधारित है। अट्ठारह.चार संवैधानिक उपबंध, एक हज़ार नौ सौ पचास भारतीय संविधान अपने विभिन्न अनुच्छेदों में वित्तीय मामलों में विधायी प्रक्रिया की व्याख्या करता है। भारतीय संविधान के मुख्य उपबंध नीचे दिए गए हैं : अनुच्छेद एक सौ सात के अनुसार अनुच्छेद एक सौ नौ तथा एक सौ सत्रह के उपबंधों के अधीन धन विधेयक और अन्य वित्तीय विधेयकों के विषय में, एक विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ किया जा सकता है और अनुच्छेद एक सौ आठ तथा एक सौ नौ के उपबंध के अधीन कोई भी विधेयक संसद के एक सदन द्वारा पारित हुआ नहीं माना जाएगा जब तक दोनों सदन इससे सहमत न हों जाएँ, चाहे यह संशोधनों सहित अथवा ऐसे संशोधनों के बिना हो, मगर दोनों सदनों की सहमति जरूरी है। अनुच्छेद एक सौ नौ के अनुसार एक धन विधेयक राज्यसभा में प्रारंभ नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद एक सौ नौ लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक को राज्यसभा में उसके सुझावों के लिए भेजा जाता है और राज्यसभा को इस विधेयक की प्राप्ति की तिथि के पन्द्रह दिनों के अंतर्गत अपनी सिफारिशों सहित लोकसभा को वापिस भेजना होता है और लोकसभा राज्यसभा की सभी अथवा कुछ सिफारिशों को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत कर सकती है। अनुच्छेद एक सौ नौ के अनुसार अगर लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों में से किसी को स्वीकार करती है तो विधेयक राज्यसभा द्वारा बताए गए संशोधनों सहित दोनों सदनों द्वारा माना जाएगा। अनुच्छेद ।।दो से स्पष्ट है कि राष्ट्रपति को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के विषय में भारत सरकार के वर्ष भर के आकल्लित व्ययों तथा आय का विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखना होता है। ऐसे विवरण को "वार्षिक वित्तीय विवरण" कहा गया है । अनुच्छेद ।तेरह के अनुसार भारत की संचित निधि पर प्रभारित व्यय से संबंधित काफी अनुमानों को संसद की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। मगर इस धारा में उन अनुमानों में से किसी पर भी संसद के किसी भी सदन में परिचर्चा को रोकने का प्रावधान नहीं है । अनुच्छेद चौदह के अनुसार ज्यों ही अनुच्छेद एक सौ तेरह के अधीन अनुदान लोकसभा द्वारा पेश हो जाएंगे त्यों ही सभी धन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि में से विनियोजन के लिए विधेयक प्रारंभ किया जाएगा : क) लोकसभा द्वारा किए गए अनुदान भारत की संचित निधि पर प्रभारित व्ययः मगर संसद के समक्ष पहले से रखे गए विवरण में दिखाए गए धन में किसी भी प्रकार से वृद्धि नहीं हो । अनुच्छेद एक सौ सोलह के अनुसार लोकसभा के पास निम्न शक्तियाँ होंगी : क) उस व्यय के विषय में अनुच्छेद एक सौ चौदह के उपबंधों के अनुसार कानून को पारित करना. और ऐसे अनुदान की स्वीकृति के लिए अनुच्छेद एक सौ तेरह में निर्धारित प्रक्रिया की निष्पत्ति के विचाराधीन किसी वित्तीय वर्ष के अनुमानित व्यय के एक भाग के विषय में पहले से ही अनुदान बनाना। ख) जब सेवा के अनिश्चित स्वरूप अथवा विस्तार के कारण मांग वार्षिक वित्तीय विवरण में साधारणतया दिए गए ब्यौरे से निश्चित नहीं किये जा सकते तो भारत के संसाधनों पर आकस्मिक मांग को पूरा करने के लिए अनुदान करना । ग) एक विशिष्ट अनुदान बनाना, जो किसी वित्तीय वर्ष की सामायिक सेवा का हिस्सा नहीं होती और संसद के पास उन कार्यों जिनके लिए उक्त अनुदान किए गए हैं, भारत की संचित निधि में से धन निकालने का कानूनन अधिकार है। अनुच्छेद एक सौ सत्रह के अनुसार अनुच्छेद एक सौ दस के अधीन निर्दिष्ट मामलों में से किसी एक के लिए प्रावधान करने वाले संशोधन अथवा विधेयक को राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना शुरू नहीं किया जाएगा और ऐसे प्रावधान करने वाले विधेयक को राज्यसभा में शुरू नहीं किया जाएगा। किसी कर के उन्मूलन अथवा कटौती के लिए प्रावधान करने वाले संशोधन को प्रस्तुत करने के लिए ऐसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं होगी। अनुच्छेद एक सौ सत्रह यह जानकारी देता है कि एक विधेयक, जो अगर कानून बन गया है और उस कार्यान्वयन शुरू हो चुका है, भारत की संचित निधि में से व्यय को पूरा करेगा और तब तक संसद के किसी भी सदन द्वारा पारित नहीं होगा जब तक राष्ट्रपति उस सदन को विधेयक के महत्व की सिफारिश न करे । बोध प्रश्न दो टिप्पणी : i) अपने उत्तरों के लिए नीचे दिए गए स्थान का प्रयोग कीजिए । अपने उत्तरों को इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों के साथ मिलाइए । एक) विधायी नियंत्रण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए। दो) वित्तीय मामलों पर विधायी नियंत्रण के लिए भारतीय संविधान में दिए गए भिन्न उपबंधों की व्याख्या कीजिए । अट्ठारह.पाँच कराधान पर नियंत्रण बजट का निर्माण तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक लोगों से आपेक्षित धन को इकट्ठा करने की पूर्वयोजना नहीं बन जाती । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सदन के समक्ष एक वित्त विधेयक रखा जाता है जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व प्रस्ताव अथवा कराधान को प्रस्तुत किया जाता है और इसमें वर्तमान कराधान योजनाओं को कुछ परिवर्तन के साथ अथवा वैसे का वैसा शामिल किया जाता है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र के सुप्रसिद्ध सिद्धांत के अनुरूप है कि विधि के प्राधिकरण के अतिरिक्त किसी भी अन्य के द्वारा न तो कोई कर लगाया जा सकेगा अथवा इकट्ठा किया जा सकेगा जैसा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद दो सौ पैंसठ में स्पष्ट प्रस्तुत किया गया है। अतः जबकि विनियोजन विधेयक सरकार को संचित निधि में से धन का विनियोजन करने का अधिकार देता है तो वित्त विधेयक इसे करों को एकत्र करने का अधिकार देता है। वित्त विधेयक में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को शामिल किया जाता है जिन्हें प्रति वर्ष संसद को पारित करना होता है। इसमें खुली बहस की जाती है। संशोधनों द्वारा किसी भी कर में कटौती अथवा उसके उन्मूलन का प्रस्ताव किया जा सकता है मगर हो सकता है नए करों अथवा मौजूदा करों की दर में कोई वृद्धि का प्रस्ताव न हो । संशोधित विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किया जाता है और राज्यसभा द्वारा विचार विमर्श के बाद यह राष्ट्रपति के पास उसके हस्ताक्षर के लिए जाता है, जिसके बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है । धन विधेयक का संबंध कराधान, ऋणदान अथवा व्ययों से होता है। बजट सत्र के शुरू होते ही बजट प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखे जाते हैं। धन विधेयकों के लिए प्राधिकार लोकसभा के पास ही है तथा इसीलिए लोकसभा ही विधेयक की आगे की कार्रवाई करती है। वित्त मंत्री लोकसभा के सामने वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करता है और उस प्रस्तुतीकरण के बाद दोनों सदनों में अलग-अलग समूचे वित्तीय वितरण पर आम चर्चा की जाती है। व्यय के किसी भी मद को आम बहस में छोड़ा नहीं जाता। मगर बहस केवल नीति से संबंधित सामान्य स्वरूप पर ही होनी चाहिए जिसमें सम्बद्ध विभागों के प्रशासन की समीक्षा तथा पुनरीक्षण हो तथा शायद सदस्य लोगों की शिकायतों को भी अभिव्यक्त करें । एक धन विधेयक किसी भी तरह निम्न संदर्भों में वित्त विधेयक से भिन्न होता हैः क) एक धन विधेयक केवल कराधान, ऋणदान अथवा व्यय के संबंधित होता है। जबकि वित्त विधेयक का क्षेत्र विस्तृत होता है जिसमें यह उपरोक्त के अलावा अन्य मामलों पर भी विचार करता है । धन विधेयक ऐसा विधेयक है जिसे लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित किया जाना होता है जबकि वित्त विधेयक के लिए ऐसा प्रमाण आवश्यक नहीं है । एक धन विधेयक को राज्यसभा को इसकी प्राप्ति के चौदह दिनों के अंतर्गत अपनी सिफारिशों सहित, अगर हैं तो, जिन्हें मानना लोकसभा के लिए जरूरी नहीं होता, लोकसभा को लौटाना जरूरी होता है। एक वित्त विधेयक पर मतभेद को किसी भी तरह संयुक्त बैठक में उपस्थित सदस्यों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा दूर किया जा सकता है। अट्ठारह.छः लोक व्यय पर नियंत्रण - एक मूल्यांकन विधान मंडल का कार्य लोक व्यय के लिए अनुदान पर मतदान से समाप्त नहीं होता। इसे यह भी देखना होता है कि दी गई निधि का उपयोग दिए गए निर्देशों के अनुसार निष्ठापूर्वक तथा किफायत से किया गया है। संसद को अपने संदेहों को भी दूर करना होता है कि निधि को अनुमोदित उद्देश्यों के लिए ही प्रयुक्त किया गया है, विनियुक्त राशि के अन्तर्गत ही, व्यर्थ तथा बेतुके खर्चों से बचा गया है आदि। इस कार्य के लिए भारत के महानियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक के द्वारा सभी विभागीय खातों का अलग-अलग लेखा जोखा रखा जाता है जिसकी रिपोर्ट का परीक्षण किसी भी संसदीय समिति द्वारा होता है। संसद के प्रति राजनैतिक कार्यपालक का संयुक्त दायित्व संसदीय लोकतंत्र का आवश्यक गुण है। संसद द्वारा कार्यपालक पर किंया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण बटुए की डोरी पर नियंत्रण है। कार्यपालक संसद की स्वीकृति के बिना धन का व्यय नहीं कर सकता । भारतीय लेखा नियंत्रक तथा लेखा महापरीक्षक द्वारा लेखा परीक्षण व्यय पर संसद का नियंत्रण तभी पूर्ण है जब यह स्वयं निश्चित कर सके कि कार्यपालिका द्वारा किए गए खर्चे उन्हीं कार्यों के लिए किए गए हैं जिनकी अनुमति दी गई थी। ऐसा एक
रविवार को दोपहर से पहले सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, जींद, भिवानी तथा दोपहर बाद सोनीपत, पानीपत, रोहतक, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और शाम के बाद एनसीआर दिल्ली, गुड़गांव आदि जिलों में हल्की बारिश हुई है। पूर्वानुमान के अनुसार हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, एनसीआर दिल्ली के इलाकों में मौसम ने करवट ले ली है। रविवार को सुबह से ही पूरे इलाके पर बादलों ने डेरा जमा लिया था। दोपहर से पहले सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, जींद, भिवानी तथा दोपहर बाद सोनीपत, पानीपत, रोहतक, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और शाम के बाद एनसीआर दिल्ली, गुड़गांव आदि सभी जगह पर हल्की बारिश हुई है। यह गतिविधियां वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय प्रणाली से अगले दो-तीन दिन तक बिखराव के रूप में जारी रहने की संभावनाएं हैं। वहीं दूसरी ओर पर्वतीय प्रदेशों पर भारी मात्रा में हिमपात हुआ है। इसके अलावा प्रदेश व पंजाब के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई है। जबकि जिले में सतनाली, महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी, अटेली, कनीना व नारनौल हल्की बारिश हुई। शीतलहर के बाद लगातार तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हो रही थी, यह बढ़ोतरी अभी जारी रहेगी। रविवार को नारनौल का न्यूनतम तापमान 12. 0 डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान 24. 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अब हल्की बरसात के बाद सोमवार को सुबह इलाके पर कोहरा छाया रहने की संभावनाएं बन रही है। इस बारे में राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब नोडल अधिकारी डा. चंद्रमोहन ने बताया कि उत्तरी पर्वतीय इलाकों से लगातार एक के बाद एक सक्रिय मौसम प्रणाली वैस्टर्न डिस्टरबेंस का प्रभाव जारी है। आज हुई हल्की बरसात फसलों के लिए सोना साबित होगी। उन्होंने कहा कि पुरानी कहावत है माह पौह को झारों चाहे फागून बरसो सारो यानि दिसंबर व जनवरी में हल्की बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होती है और सोना उगलती है। उन्होंने बताया कि 30 दिसंबर से आसमान साफ हो जाएगा और पवनों की दिशा उत्तरी हो जाएगी। जिसकी वजह से मैदानी राज्यों में न्यूनतम व अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज होगी और नमी बढ़ने की वजह से कोहरा की मात्रा में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में नये वर्ष का आगाज कड़ाके की ठंड से होगा और मैदानी राज्यों को एक नई शीत लहर का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि रात को आंशिक रूप से बादलवाई थी। बावजूद इसके रविवार को दिन का आगाज आकाश में छाए हल्की धुंध के साथ हुआ। दिन चढने के साथ धुंध छटने लगी। आकाश में बादल भी दिखाई देने लगे। हवा की गति कम होने तथा तापमान में गिरावट होने के चलते ठंड से कंपकपी छुटती रही। बीच बीच में सूर्य जरूर बादलों के बीच से झांका, लेकिन ठंड से राहत नही मिली। दोपहर बाद बूंदाबांदी शुरु हो गई और हवा की गति भी कुछ तेज हो गई। बूंदाबांदी को फसलों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। अगर बारिश होती है तो फसलों के लिए और ज्यादा फायदेमंद होगी।
रविवार को दोपहर से पहले सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, जींद, भिवानी तथा दोपहर बाद सोनीपत, पानीपत, रोहतक, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और शाम के बाद एनसीआर दिल्ली, गुड़गांव आदि जिलों में हल्की बारिश हुई है। पूर्वानुमान के अनुसार हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, एनसीआर दिल्ली के इलाकों में मौसम ने करवट ले ली है। रविवार को सुबह से ही पूरे इलाके पर बादलों ने डेरा जमा लिया था। दोपहर से पहले सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, जींद, भिवानी तथा दोपहर बाद सोनीपत, पानीपत, रोहतक, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और शाम के बाद एनसीआर दिल्ली, गुड़गांव आदि सभी जगह पर हल्की बारिश हुई है। यह गतिविधियां वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय प्रणाली से अगले दो-तीन दिन तक बिखराव के रूप में जारी रहने की संभावनाएं हैं। वहीं दूसरी ओर पर्वतीय प्रदेशों पर भारी मात्रा में हिमपात हुआ है। इसके अलावा प्रदेश व पंजाब के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई है। जबकि जिले में सतनाली, महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी, अटेली, कनीना व नारनौल हल्की बारिश हुई। शीतलहर के बाद लगातार तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हो रही थी, यह बढ़ोतरी अभी जारी रहेगी। रविवार को नारनौल का न्यूनतम तापमान बारह. शून्य डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान चौबीस. पाँच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अब हल्की बरसात के बाद सोमवार को सुबह इलाके पर कोहरा छाया रहने की संभावनाएं बन रही है। इस बारे में राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब नोडल अधिकारी डा. चंद्रमोहन ने बताया कि उत्तरी पर्वतीय इलाकों से लगातार एक के बाद एक सक्रिय मौसम प्रणाली वैस्टर्न डिस्टरबेंस का प्रभाव जारी है। आज हुई हल्की बरसात फसलों के लिए सोना साबित होगी। उन्होंने कहा कि पुरानी कहावत है माह पौह को झारों चाहे फागून बरसो सारो यानि दिसंबर व जनवरी में हल्की बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होती है और सोना उगलती है। उन्होंने बताया कि तीस दिसंबर से आसमान साफ हो जाएगा और पवनों की दिशा उत्तरी हो जाएगी। जिसकी वजह से मैदानी राज्यों में न्यूनतम व अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज होगी और नमी बढ़ने की वजह से कोहरा की मात्रा में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में नये वर्ष का आगाज कड़ाके की ठंड से होगा और मैदानी राज्यों को एक नई शीत लहर का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि रात को आंशिक रूप से बादलवाई थी। बावजूद इसके रविवार को दिन का आगाज आकाश में छाए हल्की धुंध के साथ हुआ। दिन चढने के साथ धुंध छटने लगी। आकाश में बादल भी दिखाई देने लगे। हवा की गति कम होने तथा तापमान में गिरावट होने के चलते ठंड से कंपकपी छुटती रही। बीच बीच में सूर्य जरूर बादलों के बीच से झांका, लेकिन ठंड से राहत नही मिली। दोपहर बाद बूंदाबांदी शुरु हो गई और हवा की गति भी कुछ तेज हो गई। बूंदाबांदी को फसलों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। अगर बारिश होती है तो फसलों के लिए और ज्यादा फायदेमंद होगी।
पेशावर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पेशावर रैली के दौरान यूट्यूब को डाउन कर दिया गया, जिससे लाखों-करोड़ों लोग उनका भाषण नहीं सुन सके। पूर्व प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले, कई लोगों ने ट्विटर पर शिकायत करना शुरू कर दिया था कि स्ट्रीमिंग वेबसाइट उनके लिए काम नहीं कर रही थी। जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर हैशटैग यूट्यूब डॉउन भी एक शीर्ष ट्रेंड के रूप में उभरा। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) द्वारा जारी प्रतिबंध के बावजूद, पूर्व पीएम इमरान खान ने जनता के लिए एक लाइव प्रसारण किया, जिससे यह व्यवधान आया।
पेशावर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पेशावर रैली के दौरान यूट्यूब को डाउन कर दिया गया, जिससे लाखों-करोड़ों लोग उनका भाषण नहीं सुन सके। पूर्व प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले, कई लोगों ने ट्विटर पर शिकायत करना शुरू कर दिया था कि स्ट्रीमिंग वेबसाइट उनके लिए काम नहीं कर रही थी। जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर हैशटैग यूट्यूब डॉउन भी एक शीर्ष ट्रेंड के रूप में उभरा। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा जारी प्रतिबंध के बावजूद, पूर्व पीएम इमरान खान ने जनता के लिए एक लाइव प्रसारण किया, जिससे यह व्यवधान आया।
Lalit Narayan Mithila Vishwavidyalaya: सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार पर कई आरोप लगे हैं। देर रात छात्राओं को फोन कर उल्टी सीधी और गंदी बात करते हैं. पटनाः बिहार में दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नही टूट पा रहा है. अब एक नया मामला सामने आया है. इस विश्वविद्यालय के सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार ने शिक्षा के मंदिर को शर्मसार किया है. विश्वविद्यालय की छात्राओं ने अखिलेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वे लड़कियों के साथ गंदा काम करते हैं. छात्राओं ने अश्लील चैट की शिकायत की है. उनका कहना है कि वे देर रात छात्राओं को फोन कर उल्टी सीधी और गंदी बात करते हैं. छात्राओं ने आरोप लगाया है कि अखिलेश कुमार रात में अपने घर पर भी आने की जिद करते हैं. खुद की नंगी तस्वीर भी भेजते हैं. साथ ही ये बात नहीं मानने पर परीक्षा में फेल कर देने के अलावा कई तरह की धमकी भी देते हैं. छात्राओं ने कहा कि सर के काले कारनामों में साथ नहीं देने पर वो फोन गाली भी देते हैं. साथ ही अपनी ऊंची धौंस जमाते हैं. बडे़ राजनितिक लोगों के साथ अपनी तस्वीर दिखा कर अपने प्रभाव में भी लाने का प्रयास भी करते हैं. लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना और शोषण के खिलाफ आखिरकार छात्र छात्राओं का गुस्सा फूटा जिसके बाद छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार के खिलाफ न सिर्फ लिखित शिकायत की बल्कि कई तरह के ऑडियो वीडियो और व्हाट्सएप चैट के सबूत भी दिए. छात्राओं ने सबूत पेश करते हुए गुरु जी की अश्लीलता के पोल खोले हैं. छात्राओं के अलावा छात्रों ने भी सहायक प्राचार्य पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि सर फोन पर मां-बहन की गालियां बकते हैं. कई दिनों से छात्र शिक्षक की काली करतूत झेल रहे थे. तंग आकर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी. वहीं, इस मामले में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र साह भी प्राचार्य के रवैये पर सवाल उठाते हुए अखिलेश प्रसाद के खिलाफ अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं. इसकी पुष्टि भी उन्होंने खुद की है. विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि छात्र-छात्राओं ने ऑडियो वीडियो सबूत के साथ अखिलेश कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत की है. तत्काल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट के बाद उचित कार्रवाई की जायेगी.
Lalit Narayan Mithila Vishwavidyalaya: सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार पर कई आरोप लगे हैं। देर रात छात्राओं को फोन कर उल्टी सीधी और गंदी बात करते हैं. पटनाः बिहार में दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नही टूट पा रहा है. अब एक नया मामला सामने आया है. इस विश्वविद्यालय के सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार ने शिक्षा के मंदिर को शर्मसार किया है. विश्वविद्यालय की छात्राओं ने अखिलेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वे लड़कियों के साथ गंदा काम करते हैं. छात्राओं ने अश्लील चैट की शिकायत की है. उनका कहना है कि वे देर रात छात्राओं को फोन कर उल्टी सीधी और गंदी बात करते हैं. छात्राओं ने आरोप लगाया है कि अखिलेश कुमार रात में अपने घर पर भी आने की जिद करते हैं. खुद की नंगी तस्वीर भी भेजते हैं. साथ ही ये बात नहीं मानने पर परीक्षा में फेल कर देने के अलावा कई तरह की धमकी भी देते हैं. छात्राओं ने कहा कि सर के काले कारनामों में साथ नहीं देने पर वो फोन गाली भी देते हैं. साथ ही अपनी ऊंची धौंस जमाते हैं. बडे़ राजनितिक लोगों के साथ अपनी तस्वीर दिखा कर अपने प्रभाव में भी लाने का प्रयास भी करते हैं. लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना और शोषण के खिलाफ आखिरकार छात्र छात्राओं का गुस्सा फूटा जिसके बाद छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार के खिलाफ न सिर्फ लिखित शिकायत की बल्कि कई तरह के ऑडियो वीडियो और व्हाट्सएप चैट के सबूत भी दिए. छात्राओं ने सबूत पेश करते हुए गुरु जी की अश्लीलता के पोल खोले हैं. छात्राओं के अलावा छात्रों ने भी सहायक प्राचार्य पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि सर फोन पर मां-बहन की गालियां बकते हैं. कई दिनों से छात्र शिक्षक की काली करतूत झेल रहे थे. तंग आकर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सहायक प्राचार्य अखिलेश कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी. वहीं, इस मामले में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र साह भी प्राचार्य के रवैये पर सवाल उठाते हुए अखिलेश प्रसाद के खिलाफ अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं. इसकी पुष्टि भी उन्होंने खुद की है. विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि छात्र-छात्राओं ने ऑडियो वीडियो सबूत के साथ अखिलेश कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत की है. तत्काल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट के बाद उचित कार्रवाई की जायेगी.
Dehradun , 06 जुलाई . तकनीक के दौर में पुस्तकालयों का भी स्वरूप बदल रहा है. ऐसे में उत्तराखंड की दून लाइब्रेरी को अब न केवल मॉडर्न दून लाइब्रेरी के रूप में आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है वरन यह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य का सहारा भी बन रही है. यही नहीं दून लाइब्रेरी पाठकों की संख्या में बढ़कर 4838 पहुंच गई है. वर्तमान में 35 हजार तक पुस्तकें उपलब्ध है. आर्थिक रूप से कमजोर हैं को मुफ्त मेंम्बरशिप की सुविधा है. Dehradun स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से दून लाइब्रेरी को मॉडर्न दून लाइब्रेरी के रूप में परेड ग्राउण्ड में लैन्सडाैन चौक के निकट तैयार किया गया है. वर्तमान में स्थापित मॉडर्न दून लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस है,जिसमें पाठकों को और बेहतर सुविधाएं दी जा रही है. यही वजह है कि जहां पूर्व में 4352 रजिस्टर्ड मेम्बर्स थे वहीं यह संख्या बढ़कर अब 4838 हो गई है, जबकि आजीवन सदस्यों की संख्या जो 500 थी. वर्तमान में इनकी संख्या 609 है. स्मार्ट सिटी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोनिया ने बताया कि मॉडर्न दून लाइब्रेरी को सभी पक्षों को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया है. यहां पाठकों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बन्धित किताबें,तकनीक,43 प्रकाशन, सामयिक घटनाओं के ज्ञान के लिए 25 समाचार पत्र, 30 सामान्य ज्ञान तथा 20 मैगजीन, साहित्य, कविता संग्रह, वकालत, भौगोलिक परिस्थितयां, इतिहास के साथ ही Uttarakhandकी संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देने वाली पुस्तकों को समाहित किया गया था. शिक्षा के साथ ही वहां हर वर्ग की मूलभूत सुविधाओं जैसे सभी तलों में महिलाओं,पुरुषों व विकलांगों की उपयोगिता के अनुरूप स्मार्ट टायलेट का निर्माण किया गया है. पीने के पानी की व्यवस्था,स्मार्ट लाइब्रेरी को ध्यान में रखते हुए बायोमैट्रिक व्यवस्था,लाइब्रेरी की सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से 26 सीसीटीवी कैमरा,50000 टैग,स्मार्ट स्क्रीन,हरित वातावरण युक्त ओपन एरिया थियेटर, विद्युत की समस्या को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पैनल की व्यवस्था,पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, आदि आधुनिक सुविधाओं के साथ शान्तिपूर्ण,हवादार व वातानुकूल वातावरण प्रदान किया गया है. दून लाइब्रेरी में छात्रों का पंजीकरण फीस 300 रुपये प्रतिवर्ष 1000 रुपये सिक्योरिटी रखी गई है. जो सक्षम है वह पंजीकरण फीस और सिक्योरिटी दे सकते हैं, लेकिन जो आर्थिक तौर पर कमजोर है उन्हें भी मॉडर्न दून लाइब्रेरी की सुविधाओं का लाभ मिल सके. इसके लिए जिला अधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dehradun स्मार्ट सिटी की ओर से ऐसे 100 मेम्बर्स जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं को मुफ्त मेम्बरशिप देने का प्रावधान किया गया है. उक्त लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित 50000 बुक्स का प्रावधान किया गया है. वर्तमान में 35 हजार तक पुस्तकें उपलब्ध हैं. वर्तमान समय में कई पाठक ऐसे हैं जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे लगभग 400 से 500 पाठकों के लिए अध्ययन की व्यवस्था की गई है. भूतल में सभी प्रशासनिक कक्ष जैसे निदेशक कक्ष लाइबेरियन कक्ष,टैक्निकल स्टॉफ कक्ष,कैफेटेरिआ, बीओ,एच और बैठक कक्ष, कम्यूनिटी हॉल( 16 पाठकों की धारण क्षमता सहित), बहुउद्देशीय हॉल (100 पाठकों की धारण क्षमता सहित) और बच्चों के लिये चिल्ड्रन सेक्शन निर्मित किया गया हैं. द्वितीय तल में 30 कम्प्यूटर सिस्टम सहित कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था है. जबकि अन्य तीन तलों में अध्ययन व बुक्स स्टकिंग के लिए पर्याप्त स्थान है.
Dehradun , छः जुलाई . तकनीक के दौर में पुस्तकालयों का भी स्वरूप बदल रहा है. ऐसे में उत्तराखंड की दून लाइब्रेरी को अब न केवल मॉडर्न दून लाइब्रेरी के रूप में आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है वरन यह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य का सहारा भी बन रही है. यही नहीं दून लाइब्रेरी पाठकों की संख्या में बढ़कर चार हज़ार आठ सौ अड़तीस पहुंच गई है. वर्तमान में पैंतीस हजार तक पुस्तकें उपलब्ध है. आर्थिक रूप से कमजोर हैं को मुफ्त मेंम्बरशिप की सुविधा है. Dehradun स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से दून लाइब्रेरी को मॉडर्न दून लाइब्रेरी के रूप में परेड ग्राउण्ड में लैन्सडाैन चौक के निकट तैयार किया गया है. वर्तमान में स्थापित मॉडर्न दून लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस है,जिसमें पाठकों को और बेहतर सुविधाएं दी जा रही है. यही वजह है कि जहां पूर्व में चार हज़ार तीन सौ बावन रजिस्टर्ड मेम्बर्स थे वहीं यह संख्या बढ़कर अब चार हज़ार आठ सौ अड़तीस हो गई है, जबकि आजीवन सदस्यों की संख्या जो पाँच सौ थी. वर्तमान में इनकी संख्या छः सौ नौ है. स्मार्ट सिटी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनिया ने बताया कि मॉडर्न दून लाइब्रेरी को सभी पक्षों को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया है. यहां पाठकों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बन्धित किताबें,तकनीक,तैंतालीस प्रकाशन, सामयिक घटनाओं के ज्ञान के लिए पच्चीस समाचार पत्र, तीस सामान्य ज्ञान तथा बीस मैगजीन, साहित्य, कविता संग्रह, वकालत, भौगोलिक परिस्थितयां, इतिहास के साथ ही Uttarakhandकी संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देने वाली पुस्तकों को समाहित किया गया था. शिक्षा के साथ ही वहां हर वर्ग की मूलभूत सुविधाओं जैसे सभी तलों में महिलाओं,पुरुषों व विकलांगों की उपयोगिता के अनुरूप स्मार्ट टायलेट का निर्माण किया गया है. पीने के पानी की व्यवस्था,स्मार्ट लाइब्रेरी को ध्यान में रखते हुए बायोमैट्रिक व्यवस्था,लाइब्रेरी की सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से छब्बीस सीसीटीवी कैमरा,पचास हज़ार टैग,स्मार्ट स्क्रीन,हरित वातावरण युक्त ओपन एरिया थियेटर, विद्युत की समस्या को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पैनल की व्यवस्था,पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, आदि आधुनिक सुविधाओं के साथ शान्तिपूर्ण,हवादार व वातानुकूल वातावरण प्रदान किया गया है. दून लाइब्रेरी में छात्रों का पंजीकरण फीस तीन सौ रुपयापये प्रतिवर्ष एक हज़ार रुपयापये सिक्योरिटी रखी गई है. जो सक्षम है वह पंजीकरण फीस और सिक्योरिटी दे सकते हैं, लेकिन जो आर्थिक तौर पर कमजोर है उन्हें भी मॉडर्न दून लाइब्रेरी की सुविधाओं का लाभ मिल सके. इसके लिए जिला अधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dehradun स्मार्ट सिटी की ओर से ऐसे एक सौ मेम्बर्स जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं को मुफ्त मेम्बरशिप देने का प्रावधान किया गया है. उक्त लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पचास हज़ार बुक्स का प्रावधान किया गया है. वर्तमान में पैंतीस हजार तक पुस्तकें उपलब्ध हैं. वर्तमान समय में कई पाठक ऐसे हैं जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे लगभग चार सौ से पाँच सौ पाठकों के लिए अध्ययन की व्यवस्था की गई है. भूतल में सभी प्रशासनिक कक्ष जैसे निदेशक कक्ष लाइबेरियन कक्ष,टैक्निकल स्टॉफ कक्ष,कैफेटेरिआ, बीओ,एच और बैठक कक्ष, कम्यूनिटी हॉल, बहुउद्देशीय हॉल और बच्चों के लिये चिल्ड्रन सेक्शन निर्मित किया गया हैं. द्वितीय तल में तीस कम्प्यूटर सिस्टम सहित कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था है. जबकि अन्य तीन तलों में अध्ययन व बुक्स स्टकिंग के लिए पर्याप्त स्थान है.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अभिषेक चौबे हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं। . विशाल भारद्वाज भारतीय हिन्दी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, पटकथा लेखक व निर्देशक हैं। उन्हे गॉडमदर और इश्किया के लिये सर्वश्रेष्ठ संगीत के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। विशाल के शब्दों मे "गुलजार" उनके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। . अभिषेक चौबे और विशाल भारद्वाज आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): निर्देशक, इश्किया। फ़िल्म निर्देशक एक जिम्मेदार वयक्ति जो अपनी देख-रेख में किसी परियोजना को पूरा करता हैं एवं अधिनस्तो को परियोजना के पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देता हैं। श्रेणीःसिनेमा श्रेणीःनिर्देशक. इश्किया 2010 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . अभिषेक चौबे 3 संबंध है और विशाल भारद्वाज 30 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 6.06% है = 2 / (3 + 30)। यह लेख अभिषेक चौबे और विशाल भारद्वाज के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अभिषेक चौबे हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं। . विशाल भारद्वाज भारतीय हिन्दी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, पटकथा लेखक व निर्देशक हैं। उन्हे गॉडमदर और इश्किया के लिये सर्वश्रेष्ठ संगीत के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। विशाल के शब्दों मे "गुलजार" उनके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। . अभिषेक चौबे और विशाल भारद्वाज आम में दो बातें हैं : निर्देशक, इश्किया। फ़िल्म निर्देशक एक जिम्मेदार वयक्ति जो अपनी देख-रेख में किसी परियोजना को पूरा करता हैं एवं अधिनस्तो को परियोजना के पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देता हैं। श्रेणीःसिनेमा श्रेणीःनिर्देशक. इश्किया दो हज़ार दस में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . अभिषेक चौबे तीन संबंध है और विशाल भारद्वाज तीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक छः.छः% है = दो / । यह लेख अभिषेक चौबे और विशाल भारद्वाज के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
कोई भी फैन्सी ड्रेस खरीदने से पहले अगर आप अपनी बॉडी शेप का टाइप जान लें तो आप खुद के लिए एक परफेक्ट ड्रेस ले सकती हैं। आपको अपने लिए एक ड्रेस खरीदनी है। आप एक शॉपिंग स्टोर में जाती हैं। ड्रेस ढूढ़ना शुरू करती हैं और आपकी पसंद की ड्रेस मिल भी जाती है। लेकिन ये क्या उस प्यारी खूबसूरत ड्रेस को ट्रायल करने के साथ ही आपके अरमान ठंडे पड़ जाते हैं। क्योंकि वह ड्रेस आपकी फिगर के ऊपर फब्ती नहीं है। वास्तव में वो ड्रेस बेकार नहीं थी बल्कि आपकी बॉडी शेप उस ड्रेस के अनुसार ठीक नहीं थी। कोई भी ड्रेस लेने से पहले हमको अपनी बॉडी शेप की जानकारी होना ज़रूरी होता है ताकि हम उसके अनुसार अपने लिए ड्रेस चुन सकें। आज हम आपको विभिन्न प्रकार के बॉडी शेप के बारे में बताएंगे और साथ ही आपको ये जानकारी भी देंगे कि किस बॉडी शेप पर किस तरह की ड्रेस अच्छी लगती हैं। इस तरह की बॉडी शेप में उपर का भाग नीच वाले भाग की तुलना में अधिक भारी होता है। इस तरह की बॉडी शेप वाले लोगों के कंधे थोड़े अधिक चौड़े होते हैं। बस्ट लाइन हैवी होती हैं जिसके कारण आपकी मिडरिफ भी काफी भारी नज़र आती है। इसलिए इस तरह के बॉडी शेप वालों के लिए A line या एम्पायर कट वाली ड्रेस ठीक रहती हैं। इसके अलावा आप प्रिंटेड ड्रेस या फ्लेयर्ड बॉटम और प्लाज़ो टाइप ड्रेस ट्राई कर सकती हैं। इस बॉडी शेप में नीचे वाला पार्ट आपके उपर वाले पार्ट की तुलना में भारी होता है। या यूं कहिए कि थाइस और बट आपकी अपर बॉडी की तुलना में हैवी होते हैं। इस तरह की बॉडीशेप को काफी सही माना जाता है। अगर आप इस बॉडी शेप में फिट होती हैं तो ए लाइन स्कर्ट, रफल टॉप और वाइड लेग्गड़ पैंट्स ट्राई कर सकती हैं। इसके अलावा क्रॉप टॉप, V, deep V और बोट नेक के जरिए आप अपने बॉटम को बैलेंस कर सकती हैं। इस बॉडी शेप वाले लोग कंधों से लेकर हिप तक पूरी तरह बैलेंस होते हैं। इस बॉडी शेप में आपके कंधे और हिप का मेज़रमेंट तकरीबन बराबर होती है। स्लीवलेस, स्ट्रेपलेस और sweetheart lines वाली ड्रेस ऐसी फिगर पर खूब जंचती हैं। इसके अलावा आप ब्लेज़र्स, लॉन्ग जैकेट्स को भी अपने पहनावे का हिस्सा बना सकती हैं। इस बॉडी शेप वाले लोगों को रफल और फ्रिल वाली ड्रेस अवॉइड करनी चाहिए। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
कोई भी फैन्सी ड्रेस खरीदने से पहले अगर आप अपनी बॉडी शेप का टाइप जान लें तो आप खुद के लिए एक परफेक्ट ड्रेस ले सकती हैं। आपको अपने लिए एक ड्रेस खरीदनी है। आप एक शॉपिंग स्टोर में जाती हैं। ड्रेस ढूढ़ना शुरू करती हैं और आपकी पसंद की ड्रेस मिल भी जाती है। लेकिन ये क्या उस प्यारी खूबसूरत ड्रेस को ट्रायल करने के साथ ही आपके अरमान ठंडे पड़ जाते हैं। क्योंकि वह ड्रेस आपकी फिगर के ऊपर फब्ती नहीं है। वास्तव में वो ड्रेस बेकार नहीं थी बल्कि आपकी बॉडी शेप उस ड्रेस के अनुसार ठीक नहीं थी। कोई भी ड्रेस लेने से पहले हमको अपनी बॉडी शेप की जानकारी होना ज़रूरी होता है ताकि हम उसके अनुसार अपने लिए ड्रेस चुन सकें। आज हम आपको विभिन्न प्रकार के बॉडी शेप के बारे में बताएंगे और साथ ही आपको ये जानकारी भी देंगे कि किस बॉडी शेप पर किस तरह की ड्रेस अच्छी लगती हैं। इस तरह की बॉडी शेप में उपर का भाग नीच वाले भाग की तुलना में अधिक भारी होता है। इस तरह की बॉडी शेप वाले लोगों के कंधे थोड़े अधिक चौड़े होते हैं। बस्ट लाइन हैवी होती हैं जिसके कारण आपकी मिडरिफ भी काफी भारी नज़र आती है। इसलिए इस तरह के बॉडी शेप वालों के लिए A line या एम्पायर कट वाली ड्रेस ठीक रहती हैं। इसके अलावा आप प्रिंटेड ड्रेस या फ्लेयर्ड बॉटम और प्लाज़ो टाइप ड्रेस ट्राई कर सकती हैं। इस बॉडी शेप में नीचे वाला पार्ट आपके उपर वाले पार्ट की तुलना में भारी होता है। या यूं कहिए कि थाइस और बट आपकी अपर बॉडी की तुलना में हैवी होते हैं। इस तरह की बॉडीशेप को काफी सही माना जाता है। अगर आप इस बॉडी शेप में फिट होती हैं तो ए लाइन स्कर्ट, रफल टॉप और वाइड लेग्गड़ पैंट्स ट्राई कर सकती हैं। इसके अलावा क्रॉप टॉप, V, deep V और बोट नेक के जरिए आप अपने बॉटम को बैलेंस कर सकती हैं। इस बॉडी शेप वाले लोग कंधों से लेकर हिप तक पूरी तरह बैलेंस होते हैं। इस बॉडी शेप में आपके कंधे और हिप का मेज़रमेंट तकरीबन बराबर होती है। स्लीवलेस, स्ट्रेपलेस और sweetheart lines वाली ड्रेस ऐसी फिगर पर खूब जंचती हैं। इसके अलावा आप ब्लेज़र्स, लॉन्ग जैकेट्स को भी अपने पहनावे का हिस्सा बना सकती हैं। इस बॉडी शेप वाले लोगों को रफल और फ्रिल वाली ड्रेस अवॉइड करनी चाहिए। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
पोखरण में शुक्रवार को चोरी की वारदात का मामला सामने आया है। जहां चोरों ने बड़े शातिराना तरीके से एक गोदाम से 25 से 30 लाख के माल पर हाथ साफ कर लिया। वारदात का खुलासा होते ही इलाके की व्यापारियों में हड़कंप मच गया। दरअसल मामला पोखरण के जैसलमेर रोड का है, जहां गुरुवार की देर रात्रि को अज्ञात चोरों ने जोधपुर-जैसलमेर सड़क मार्ग पर जुबली पेट्रोल पंप के पास राजू चांडक के गोदाम के ताले तोड़कर उसमें रखा लगभग 200 बोरी जीरा ट्रक में भरकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने बड़े शातिराना तरीके से शटर के नीचे जैक लगाकर शटर को तोड़ा और पूरी वारदात को अंजाम दिया। सुबह जब इसकी जानकारी गोदाम मालिक राजू चांडक को मिली, तो चोरी की बात सुनकर उसके हाथ पांव फूल गए और व पुलिस थाने पहुंचा। चोरी की वारदात की जानकारी मिलने के बाद थाना अधिकारी चुन्नीलाल विश्नोई मय जाब्ता घटनास्थल पर पहुंचे और चोरी की वारदात की बारीकी से छानबीन की। साथ ही उन्होंने वहां आसपास में लगे सीसीटीवी कैमरा से फुटेज निकालकर अज्ञात चोरों की तलाश में नाकाबंदी शुरू की। गोदाम मालिक राजू चांडक ने बताया कि लगभग 200 बोरी जीरा चोरी हुआ है। जिसकी कीमत 25 से 30 लाख रुपए है। वहीं अज्ञात चोरों द्वारा गोदाम से जीरा चोरी करने की वारदात का जैसे ही व्यापारियों को पता चला, तो व्यापारियों में हड़कंप मच गया। कई व्यापारी पुलिस थाने पहुंचे और पुलिस से इस मामले में बातचीत की। साथ ही उन्होंने इस प्रकार से चोरी की वारदात करने पर चिंता प्रकट की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पोखरण में शुक्रवार को चोरी की वारदात का मामला सामने आया है। जहां चोरों ने बड़े शातिराना तरीके से एक गोदाम से पच्चीस से तीस लाख के माल पर हाथ साफ कर लिया। वारदात का खुलासा होते ही इलाके की व्यापारियों में हड़कंप मच गया। दरअसल मामला पोखरण के जैसलमेर रोड का है, जहां गुरुवार की देर रात्रि को अज्ञात चोरों ने जोधपुर-जैसलमेर सड़क मार्ग पर जुबली पेट्रोल पंप के पास राजू चांडक के गोदाम के ताले तोड़कर उसमें रखा लगभग दो सौ बोरी जीरा ट्रक में भरकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने बड़े शातिराना तरीके से शटर के नीचे जैक लगाकर शटर को तोड़ा और पूरी वारदात को अंजाम दिया। सुबह जब इसकी जानकारी गोदाम मालिक राजू चांडक को मिली, तो चोरी की बात सुनकर उसके हाथ पांव फूल गए और व पुलिस थाने पहुंचा। चोरी की वारदात की जानकारी मिलने के बाद थाना अधिकारी चुन्नीलाल विश्नोई मय जाब्ता घटनास्थल पर पहुंचे और चोरी की वारदात की बारीकी से छानबीन की। साथ ही उन्होंने वहां आसपास में लगे सीसीटीवी कैमरा से फुटेज निकालकर अज्ञात चोरों की तलाश में नाकाबंदी शुरू की। गोदाम मालिक राजू चांडक ने बताया कि लगभग दो सौ बोरी जीरा चोरी हुआ है। जिसकी कीमत पच्चीस से तीस लाख रुपए है। वहीं अज्ञात चोरों द्वारा गोदाम से जीरा चोरी करने की वारदात का जैसे ही व्यापारियों को पता चला, तो व्यापारियों में हड़कंप मच गया। कई व्यापारी पुलिस थाने पहुंचे और पुलिस से इस मामले में बातचीत की। साथ ही उन्होंने इस प्रकार से चोरी की वारदात करने पर चिंता प्रकट की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रायपुर। ग्रामीण एवं शहरी इलाके में गर्भवती महिलाओं को प्रसव सुविधा एवं नसबंदी से लेकर दवा वितरण तक की जिम्मेदारी निभाने वाली मितानिनों ने गुरुवार को बूढ़ापारा धरना स्थल पर सुबह 11 से शाम 4 बजे तक धरना देकर रैली निकाली। छत्तीसगढ़ मितानिन संघ की प्रांताध्यक्ष श्रीमती एमडी आशा ने कहा कि अगर सरकार मांग पूरी नहीं कर सकती तो योजना बंद कर दे। उन्होंने 5 सूत्री मांग बनवाने जुटी मितानिनों के बीच एक दिवसीय धरने के दौरान कहा कि राज्य सरकार की योजना को गांव-गांव पहुंचाने वाली मितानिनों की पहली मांग हर माह तीन हजार रुपए वेतन के रूप में है। साथ ही लोगों तक पहुंचने के लिए साइकिल की मांग भी संघ द्वारा की जा रही है। मितानिनों को ड्रेस कोड़ से जोड़ने के साथ ही पढ़ी- लिखी मितानिन बहनों को 14 साल की सेवा के आधार पर नर्स की नौकरी देने की मांग लगातार राज्य सरकार द्वारा अनसुनी की जा रही है।
रायपुर। ग्रामीण एवं शहरी इलाके में गर्भवती महिलाओं को प्रसव सुविधा एवं नसबंदी से लेकर दवा वितरण तक की जिम्मेदारी निभाने वाली मितानिनों ने गुरुवार को बूढ़ापारा धरना स्थल पर सुबह ग्यारह से शाम चार बजे तक धरना देकर रैली निकाली। छत्तीसगढ़ मितानिन संघ की प्रांताध्यक्ष श्रीमती एमडी आशा ने कहा कि अगर सरकार मांग पूरी नहीं कर सकती तो योजना बंद कर दे। उन्होंने पाँच सूत्री मांग बनवाने जुटी मितानिनों के बीच एक दिवसीय धरने के दौरान कहा कि राज्य सरकार की योजना को गांव-गांव पहुंचाने वाली मितानिनों की पहली मांग हर माह तीन हजार रुपए वेतन के रूप में है। साथ ही लोगों तक पहुंचने के लिए साइकिल की मांग भी संघ द्वारा की जा रही है। मितानिनों को ड्रेस कोड़ से जोड़ने के साथ ही पढ़ी- लिखी मितानिन बहनों को चौदह साल की सेवा के आधार पर नर्स की नौकरी देने की मांग लगातार राज्य सरकार द्वारा अनसुनी की जा रही है।
नई दिल्लीः जुलाई के जीएसटी राजस्व के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौटने के संकेत मिल रहे हैं। जुलाई- 2021 में सकल GST राजस्व 1,16,393 करोड़ रुपये रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि, जुलाई 2021 के लिए माल और सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन फिर से एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। देश के सभी राज्यों में Covid -19 प्रतिबंधों में काफी ढील दी गई है और जुलाई का जीएसटी कलेक्शन दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था तेजी से ठीक हो रही है। "With the easing out of COVID restrictions, GST collection for July2021 has again crossed₹1 lakh crore, which clearly indicates that the economy is recovering at a fastpace. सीतारमण ने ट्वीट किया की Covid प्रतिबंधों में ढील के साथ, जुलाई 2021 का जीएसटी कलेक्शन फिर से एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था तेज गति से ठीक हो रही है। जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी आने वाले महीनों में भी जारी रहने की संभावना है। जुलाई में 1.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी कलेक्शन हुआ, जिसमें सीजीएसटी 22,197 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 28,541 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 57,864 करोड़ रुपये और उपकर 7,790 करोड़ रुपये (जिसमें 815 करोड़ रुपये माल आयात) शामिल हैं। व्हाट्सप्प पर चीनीमंडी के अपडेट्स प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें.
नई दिल्लीः जुलाई के जीएसटी राजस्व के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौटने के संकेत मिल रहे हैं। जुलाई- दो हज़ार इक्कीस में सकल GST राजस्व एक,सोलह,तीन सौ तिरानवे करोड़ रुपये रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि, जुलाई दो हज़ार इक्कीस के लिए माल और सेवा कर कलेक्शन फिर से एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। देश के सभी राज्यों में Covid -उन्नीस प्रतिबंधों में काफी ढील दी गई है और जुलाई का जीएसटी कलेक्शन दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था तेजी से ठीक हो रही है। "With the easing out of COVID restrictions, GST collection for Julyदो हज़ार इक्कीस has again crossedएक रुपया lakh crore, which clearly indicates that the economy is recovering at a fastpace. सीतारमण ने ट्वीट किया की Covid प्रतिबंधों में ढील के साथ, जुलाई दो हज़ार इक्कीस का जीएसटी कलेक्शन फिर से एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था तेज गति से ठीक हो रही है। जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी आने वाले महीनों में भी जारी रहने की संभावना है। जुलाई में एक.सोलह लाख करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी कलेक्शन हुआ, जिसमें सीजीएसटी बाईस,एक सौ सत्तानवे करोड़ रुपये, एसजीएसटी अट्ठाईस,पाँच सौ इकतालीस करोड़ रुपये, आईजीएसटी सत्तावन,आठ सौ चौंसठ करोड़ रुपये और उपकर सात,सात सौ नब्बे करोड़ रुपये शामिल हैं। व्हाट्सप्प पर चीनीमंडी के अपडेट्स प्राप्त करने के लिए, कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें.
जर्मनी की लक्जरी कार बनाने वाली कंपनी ऑडी ने कहा कि फरवरी में उसकी कार बिक्री में 95 फीसदी का इजाफा हुआ है। फरवरी में कंपनी की 113 कारें बिकीं। जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी की 58 कारें बिकी थी। भारतीय बाजार में ऑडी के कुछ मॉडलों में ए4, ए6, ए8, क्यू7, टीटी और आर8 का नाम शुमार है। भारत में कंपनी के 12 अधिकृत डीलर हैं।
जर्मनी की लक्जरी कार बनाने वाली कंपनी ऑडी ने कहा कि फरवरी में उसकी कार बिक्री में पचानवे फीसदी का इजाफा हुआ है। फरवरी में कंपनी की एक सौ तेरह कारें बिकीं। जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी की अट्ठावन कारें बिकी थी। भारतीय बाजार में ऑडी के कुछ मॉडलों में एचार, एछः, एआठ, क्यूसात, टीटी और आरआठ का नाम शुमार है। भारत में कंपनी के बारह अधिकृत डीलर हैं।
हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty) एक बार फिर टेलीविजन पर वापसी कर रहें हैं। हालांकि, अभी वो एक नये आने वाले शो के प्रोमो में ही नज़र आ रहे हैं। वो जल्द ही स्टार प्लस का आगामी शो 'चीकू की मम्मी दूर की' (Chikoo Ki Mummy Durr Kei) में नजर आने वाले हैं। मेकर्स ने शो का प्रोमो भी जारी कर दिया है। इस टीवी शो में ऐक्ट्रेस परिधि शर्मा (Paridhi Sharma) भी लीड रोल में नजर आएंगी। प्रोमो हुआ जारीः स्टार प्लस ने शो 'चीकू की मम्मी दूर की' (Chikoo Ki Mummy Durr Kei) का प्रोमो जारी किया है। यह धारावाहिक डांस पर आधारित है। सामने आए इस प्रोमो में वह चीकू नाम की लड़की का इंट्रोडक्शन देते और फिर उसके साथ अपना 'डिस्को डांसर' स्टेप करते नजर आ रहे हैं। इस शो में परिधि शर्मा लीड रोल निभा रही हैं। वो एक मां के रोल में है, जिसकी बेटी उनसे दूर हो गईं हैं। शो में मां और बेटी के कनेक्शन को जोड़ने के लिए डांस को जरिया बनाया है। क्या दिखाया है प्रोमो मेंः सामने आए इस प्रोमो में मिथुन चक्रवर्ती कह रहे हैं, "अपुन को याद आ रहा है अपुन का बचपन। वो छोटा सा गांव, वो छोटा सा घर और वो छोटा सा मैं। बड़ा था तो मेरा सपना, जिसे पूरा करने के लिए जरूरत थी दो पैरों की। फिर क्या था लगा दी एक छलांग। नन्ही चीकू भी एक छलांग लगाना चाहती है। इसके पास सिर्फ डांस की दौलत है। उसे इन हालातों से निकालने के लिए क्यों न हम सभी उसका साथ दें? हो सकता है, उसे कामयाबी मिल जाए? उसकी मम्मी, जो उससे दूर है, फिर से उसके पास आ जाए? " इस दिन से शुरू होगा शोः प्रोमो के आखिरी में दिखाया गया है कि, डांस करती हुई चीकू के सामने अचानक मिथुन पहुंचते हैं और चीकू उनके पैर छूती है। प्रोमो की एंडिंग मिथुन के गाने 'आई एम अ डिस्को डांसर' से होती है। यह शो 6 सितम्बर से शाम को 6 बजे स्टार प्लस और डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर आएगा। बता दें कि, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती खुद भी छोटे पर्दे पर काफी एक्टिव रहे हैं। उन्होंने डांस रिएलिटी शो 'डांस इंडिया डांस' में ग्रैंडमास्टर के तौर पर नजर आते थे। इसके अलावा मिथुन 'ड्रामा कम्पनी' के जज भी रह चुके हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मिथुन छोटे पर्दे से दूर हो गये थे और बीजेपी ज्वाइन करके चुनावी रैलियों में भी प्रचार किया। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर टेलीविजन पर वापसी कर रहें हैं। हालांकि, अभी वो एक नये आने वाले शो के प्रोमो में ही नज़र आ रहे हैं। वो जल्द ही स्टार प्लस का आगामी शो 'चीकू की मम्मी दूर की' में नजर आने वाले हैं। मेकर्स ने शो का प्रोमो भी जारी कर दिया है। इस टीवी शो में ऐक्ट्रेस परिधि शर्मा भी लीड रोल में नजर आएंगी। प्रोमो हुआ जारीः स्टार प्लस ने शो 'चीकू की मम्मी दूर की' का प्रोमो जारी किया है। यह धारावाहिक डांस पर आधारित है। सामने आए इस प्रोमो में वह चीकू नाम की लड़की का इंट्रोडक्शन देते और फिर उसके साथ अपना 'डिस्को डांसर' स्टेप करते नजर आ रहे हैं। इस शो में परिधि शर्मा लीड रोल निभा रही हैं। वो एक मां के रोल में है, जिसकी बेटी उनसे दूर हो गईं हैं। शो में मां और बेटी के कनेक्शन को जोड़ने के लिए डांस को जरिया बनाया है। क्या दिखाया है प्रोमो मेंः सामने आए इस प्रोमो में मिथुन चक्रवर्ती कह रहे हैं, "अपुन को याद आ रहा है अपुन का बचपन। वो छोटा सा गांव, वो छोटा सा घर और वो छोटा सा मैं। बड़ा था तो मेरा सपना, जिसे पूरा करने के लिए जरूरत थी दो पैरों की। फिर क्या था लगा दी एक छलांग। नन्ही चीकू भी एक छलांग लगाना चाहती है। इसके पास सिर्फ डांस की दौलत है। उसे इन हालातों से निकालने के लिए क्यों न हम सभी उसका साथ दें? हो सकता है, उसे कामयाबी मिल जाए? उसकी मम्मी, जो उससे दूर है, फिर से उसके पास आ जाए? " इस दिन से शुरू होगा शोः प्रोमो के आखिरी में दिखाया गया है कि, डांस करती हुई चीकू के सामने अचानक मिथुन पहुंचते हैं और चीकू उनके पैर छूती है। प्रोमो की एंडिंग मिथुन के गाने 'आई एम अ डिस्को डांसर' से होती है। यह शो छः सितम्बर से शाम को छः बजे स्टार प्लस और डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर आएगा। बता दें कि, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती खुद भी छोटे पर्दे पर काफी एक्टिव रहे हैं। उन्होंने डांस रिएलिटी शो 'डांस इंडिया डांस' में ग्रैंडमास्टर के तौर पर नजर आते थे। इसके अलावा मिथुन 'ड्रामा कम्पनी' के जज भी रह चुके हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मिथुन छोटे पर्दे से दूर हो गये थे और बीजेपी ज्वाइन करके चुनावी रैलियों में भी प्रचार किया। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।