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मुंबई। फिल्म 'ये दिल आशिकाना' तो आपको याद ही होगी। उसके गाने आज भी लोगों के जुबान पर हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही थी। आज हम इस फिल्म की हीरोइन के बारे में बात करेंगे। फिल्म की हीरोइन का नाम जिविधा शर्मा है। 'ये दिल आशिकाना' के बाद से यह एक्ट्रेस फिल्मों से गायब हो गई। जिविधा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मशहूर डायरेक्टर सुभाष घई की फिल्म 'ताल' से की थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लाकबस्टर साबित हुई लेकिन सारा क्रेडिट ऐश्वर्या को मिल गया। इसके बाद आई फिल्म ये दिल आशिकाना ने बॉक्स ऑफिस पर झंडे तो गाड़े लेकिन जिविधा के करियर पर इस कोई अच्छा असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होने साउथ की तरफ रुख कर लिया। लेकिन वहां भी उन्हे नाकामयाबी ही हाथ लगी। जिविधा को स्टारडम का असली मुकाम पंजाबी फिल्मों से हासिल हुआ। आपको बता दें कि जिविधा की शादी हो चुकी है और वह दो बच्चों की मां हैं। जिविधा 2002 में जैसी दिखती थीं आज वह पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गईं हैं। फिल्मों के अलावा जिविधा कई टीवी शो और विज्ञापनों में दिख चुकी हैं। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
मुंबई। फिल्म 'ये दिल आशिकाना' तो आपको याद ही होगी। उसके गाने आज भी लोगों के जुबान पर हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही थी। आज हम इस फिल्म की हीरोइन के बारे में बात करेंगे। फिल्म की हीरोइन का नाम जिविधा शर्मा है। 'ये दिल आशिकाना' के बाद से यह एक्ट्रेस फिल्मों से गायब हो गई। जिविधा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मशहूर डायरेक्टर सुभाष घई की फिल्म 'ताल' से की थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लाकबस्टर साबित हुई लेकिन सारा क्रेडिट ऐश्वर्या को मिल गया। इसके बाद आई फिल्म ये दिल आशिकाना ने बॉक्स ऑफिस पर झंडे तो गाड़े लेकिन जिविधा के करियर पर इस कोई अच्छा असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होने साउथ की तरफ रुख कर लिया। लेकिन वहां भी उन्हे नाकामयाबी ही हाथ लगी। जिविधा को स्टारडम का असली मुकाम पंजाबी फिल्मों से हासिल हुआ। आपको बता दें कि जिविधा की शादी हो चुकी है और वह दो बच्चों की मां हैं। जिविधा दो हज़ार दो में जैसी दिखती थीं आज वह पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गईं हैं। फिल्मों के अलावा जिविधा कई टीवी शो और विज्ञापनों में दिख चुकी हैं। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
जिसकी इंद्रियाँ आदि शांत नही हुई, ज्ञानीपुरुषकी दृष्टिमे अभी जो त्याग करनेके योग्य नही है, ऐसे मंद वैराग्यवान अथवा मोहबेराग्यवानके लिये त्यागको अपनाना प्रशस्त ही है, ऐसा कुछ जिनसिद्धांत नहीं है। पहले से ही जिसे सत्संगादिक योग न हो, तथा पूर्वकालके उत्तम संस्कारयुक्त वैराग्य न हो वह पुरुष कदाचित् आश्रमपूर्वक प्रवृत्ति करे तो इससे उसने एकांत भूल की है, ऐसा नहीं कहा जा सकता; यद्यपि उसे भी रातदिन उत्कृष्ट त्यागकी जागृति रखते हुए गृहस्थाश्रम आदिका सेवन करना प्रशस्त है । उत्तम संस्कारवाले पुरुष गृहस्थाश्रमको अपनाये बिना त्याग करें, उससे मनुष्यप्राणीकी वृद्धि रुक जाये, और उससे मोक्षसाधनके कारण रुक जाये, यह विचार करना अल्पदृष्टिसे योग्य दिखायी दे, क्योकि प्रत्यक्ष मनुष्यदेह जो मोक्षसाधनका हेतु होती थी उसे रोककर पुत्रादिकी कल्पनामे पड़कर, फिर वे मोक्षसानका माराधन करेंगे ही ऐसा निश्चय करके उनकी उत्पत्तिके लिये गृहस्थाश्रम मे पडना; और फिर उनकी उत्पत्ति होगी यह भी मान लेना और कदाचित् वे संयोग हुए तो जैसे अभी पुत्रोत्पत्तिक लिये इस पुरुषको रुकना पड़ा था वैसे उसे भी रुकना पडे, इससे तो किसीको उत्कृष्ट त्यागरूप मोक्षसाधन प्राप्त होनेके योगको न आने देने जैसा हो । और किसी किसी उत्तम संस्कारवान पुरुषके गृहस्थाश्रम प्राप्तिके पूर्वके त्यागसे वंशवृद्धि न हो ऐसा विचार करें तो वैसे उत्तम पुरुषके उपदेशसे अनेक जीव जो मनुष्य आदि प्राणियोका नाश करनेसे नही डरते, वे उपदेश पाकर वर्तमान में उस प्रकार मनुष्य आदि प्राणियोका नाश करनेसे क्यो न रुके ? तथा शुभवृत्ति होने से फिर मनुष्यभव क्यों न प्राप्त करें ? और इस तरह मनुष्यका रक्षण तथा वृद्धि भी सभव है । अलौकिक दृष्टिमे तो मनुष्य को हानि वृद्धि आदिका मुख्य विचार नही है, कल्याण-अकल्याणका मुख्य विचार है। एक राजा यदि अलौकिक दृष्टि प्राप्त करे तो अपने मोहसे हजारो मनुष्य प्राणियोका युद्धमें नाश होनेका हेतु देखकर बहुत बार बिना कारण वैसे युद्ध उत्पन्न न करे, जिससे बहुतसे मनुष्योका बचाव हो और उससे वंशवृद्धि होकर बहुतसे मनुष्य बढ़ें ऐसा विचार भी क्यो न किया जाये ? इंद्रियाँ अतृप्त हों, विशेष मोहप्रधान हो, मोहवैराग्यसे मात्र क्षणिक वैराग्य उत्पन्न हुआ हो और यथातथ्य सत्संगका योग न हो तो उसे दीक्षा देना प्रायः प्रशस्त नहीं कहा जा सकता, ऐसा कहे तो विरोध नही । परन्तु उत्तम संस्कारयुक्त और मोहाध, ये सब गृहस्थाश्रम भोगकर ही त्याग करें ऐसा प्रतिबन्ध करनेसे तो आयु आदिकी अनियमितता, योग प्राप्त होनेपर उसे दूर करना इत्यादि अनेक विरोधों से मोक्षसाधनका नाश करने जैसा होता है, और जिससे उत्तमता मानी जाती थी वह न हुआ, तो फिर मनुष्यभवको उत्तमता भी क्या है ? इत्यादि अनेक प्रकारसे विचार करनेसे लौकिक दृष्टि दूर होकर अलौकिक दृष्टिसे विचार जागृति होगी। बड़के बड़बट्टे या पीपलके गोदेकी वशवृद्धि के लिये उनका रक्षण करनेके हेतुसे कुछ उन्हें अभक्ष्य नही कहा है। उनमें कोमलता होती है, तब अनन्तकायका सम्भव है । इससे तथा उनके बदले दूसरी अनेक वस्तुओंसे चल सकता है, फिर भी उसीका ग्रहण करना, यह वृत्तिकी अति क्षुद्रता है, इसलिये अभक्ष्य कहा है, यह यथातथ्य लगने योग्य है । पानीकी बूंदमे असंख्यात जोव हैं, यह बात सच्ची है, परन्तु वैसा पानी पीनेसे पाप नही है ऐसा नहीं कहा । फिर उसके बदले गृहस्थ आदिको दूसरी वस्तुसे चल नहीं सकता, इसलिये अंगीकार किया जाता है, परन्तु साधुको तो वह भी लेनेकी आज्ञा प्रायः नहीं दी है । जब तक हो सके तब तक ज्ञानीपुरुषके वचनोको लौकिक दृष्टिके आशयमें न लेना योग्य है, और अलौकिक दृष्टि से विचारणीय है । उस अलौकिक दृष्टिके कारण यदि सन्मुख जीवके हृदयमे अंकित करनेको शक्ति हो तो अकित करना, नही तो इस विषयने अपना विशेष ज्ञान नहीं है ऐसा बताना तथा मोक्षमार्गमे केवल लौकिक विचार नही होता इत्यादि कारण यथाशक्ति बताकर सम्भावित समाधान करना, नहीं तो यथासम्भव वसे प्रसंगसे दूर रहना, यह ठीक है। वडवा, भादों सुदी ११, गुरु, १९५२ आज दिन पर्यंत इस आत्मासे मन, वचन और कायाके योगसे आप सम्बन्धी जो कुछ अविनय, आसातना गा अपराध हुआ हो उसकी शुद्ध अंतःकरणसे नम्रताभावसे मस्तक झुकाकर दोनों हाथ जोड़कर क्षमा माँगता हूँ। आपके समीपवासी भाइयोसे भी उसी प्रकारसे क्षमा माँगता हूँ। वडवा ( स्तंभतीर्थ के समीप), भादो सुदी ११, गुरु, १९५२ शुभेच्छासम्पन्न आर्य केशवलालके प्रति लींबडी । सहजात्मस्वरूपसे यथायोग्य प्राप्त हो । तीन पत्र प्राप्त हुए हैं। 'कुछ भी वृत्ति रोकते हुए, उसकी अपेक्षा विशेष अभिमान रहता है', तथा तृष्णा के प्रवाहमे चलते हुए बह जाते है, और उसकी गतिको रोकनेकी सामर्थ्य नही रहती ।' इत्यादि विवरण तथा क्षमापना और कर्कटी राक्षसीके 'योगवासिष्ठ' सम्बन्धी प्रसंगकी, जगतका भ्रम दूर करने के लिये विशेषता' लिखी यह सब विवरण पढा है। अभी लिखनेमे विशेष उपयोग नही रह सकता जिससे पत्रको पहुँच भी लिखनेसे रह जाती है। सक्षेपमे उन पत्रोका उत्तर निम्नलिखितसे विचारणीय है। (१) वृत्ति आदिका सयम अभिमानपूर्वक होता हो तो भो करना योग्य है । विशेषता इतनी है कि उस अभिमानके लिये निरतर खेद रखना। वैसा हो तो क्रमश वृत्ति आदिका संयम हो और तत्सम्बन्धी अभिमान भी न्यून होता जाय । (२) अनेक स्थलोपर विचारवान पुरुषोंने ऐसा कहा है कि ज्ञान होनेपर काम, क्रोध, तृष्णा आदि भाव निर्मूल हो जाते है, यह सत्य है । तथापि उन वचनोंका ऐसा परमार्थ नही है कि ज्ञान होनेसे पहले वे मद न पड़ें या कम न हो । यद्यपि उनका समूल छेदन तो ज्ञानसे होता है, परन्तु जब तक कषाय आदिको मंदता या न्यूनता न हो तब तक ज्ञान प्रायः उत्पन्न ही नही होता। ज्ञान प्राप्त होनेमे विचार मुख्य साधन है, और उस विचारके वैराग्य (भोगके प्रति अनासक्ति) तथा उपशम ( कषाय आदिकी बहुत ही मंदता, उनके प्रति विशेष खेद) ये दो मुख्य आधार हैं। ऐसा जानकर उसका निरंतर लक्ष्य रखकर वैसी परिणति करना योग्य है । सत्पुरुषके वचनके यथार्थ ग्रहणके बिना प्रायः विचारका उद्भव नहीं होता और सत्पुरुषके वचनका यथार्थ ग्रहण तभी होता है जब सत्पुरुषकी 'अनन्य आश्रय भक्ति' परिणत होती है, क्योंकि सत्पुरुषकी प्रतीति ही कल्याण होनेमे सर्वोत्तम निमित्त है । प्राय मे कारण परस्पर अन्योन्याश्रय जैसे हैं । कड़ी किसीकी मुख्यता है, और कही किसीकी मुख्यता है, तथापि ऐसा तो अनुभवमे आला है कि जो सच्चा मुमुक्षु हो, उसे सत्पुरुषकी 'आश्रयभक्ति', अहंभाव आदिके छेदनके लिये और अल्पकालये विचारदशा परिमित होनेके लिये उत्कृष्ट कारणरूप होती है ।
जिसकी इंद्रियाँ आदि शांत नही हुई, ज्ञानीपुरुषकी दृष्टिमे अभी जो त्याग करनेके योग्य नही है, ऐसे मंद वैराग्यवान अथवा मोहबेराग्यवानके लिये त्यागको अपनाना प्रशस्त ही है, ऐसा कुछ जिनसिद्धांत नहीं है। पहले से ही जिसे सत्संगादिक योग न हो, तथा पूर्वकालके उत्तम संस्कारयुक्त वैराग्य न हो वह पुरुष कदाचित् आश्रमपूर्वक प्रवृत्ति करे तो इससे उसने एकांत भूल की है, ऐसा नहीं कहा जा सकता; यद्यपि उसे भी रातदिन उत्कृष्ट त्यागकी जागृति रखते हुए गृहस्थाश्रम आदिका सेवन करना प्रशस्त है । उत्तम संस्कारवाले पुरुष गृहस्थाश्रमको अपनाये बिना त्याग करें, उससे मनुष्यप्राणीकी वृद्धि रुक जाये, और उससे मोक्षसाधनके कारण रुक जाये, यह विचार करना अल्पदृष्टिसे योग्य दिखायी दे, क्योकि प्रत्यक्ष मनुष्यदेह जो मोक्षसाधनका हेतु होती थी उसे रोककर पुत्रादिकी कल्पनामे पड़कर, फिर वे मोक्षसानका माराधन करेंगे ही ऐसा निश्चय करके उनकी उत्पत्तिके लिये गृहस्थाश्रम मे पडना; और फिर उनकी उत्पत्ति होगी यह भी मान लेना और कदाचित् वे संयोग हुए तो जैसे अभी पुत्रोत्पत्तिक लिये इस पुरुषको रुकना पड़ा था वैसे उसे भी रुकना पडे, इससे तो किसीको उत्कृष्ट त्यागरूप मोक्षसाधन प्राप्त होनेके योगको न आने देने जैसा हो । और किसी किसी उत्तम संस्कारवान पुरुषके गृहस्थाश्रम प्राप्तिके पूर्वके त्यागसे वंशवृद्धि न हो ऐसा विचार करें तो वैसे उत्तम पुरुषके उपदेशसे अनेक जीव जो मनुष्य आदि प्राणियोका नाश करनेसे नही डरते, वे उपदेश पाकर वर्तमान में उस प्रकार मनुष्य आदि प्राणियोका नाश करनेसे क्यो न रुके ? तथा शुभवृत्ति होने से फिर मनुष्यभव क्यों न प्राप्त करें ? और इस तरह मनुष्यका रक्षण तथा वृद्धि भी सभव है । अलौकिक दृष्टिमे तो मनुष्य को हानि वृद्धि आदिका मुख्य विचार नही है, कल्याण-अकल्याणका मुख्य विचार है। एक राजा यदि अलौकिक दृष्टि प्राप्त करे तो अपने मोहसे हजारो मनुष्य प्राणियोका युद्धमें नाश होनेका हेतु देखकर बहुत बार बिना कारण वैसे युद्ध उत्पन्न न करे, जिससे बहुतसे मनुष्योका बचाव हो और उससे वंशवृद्धि होकर बहुतसे मनुष्य बढ़ें ऐसा विचार भी क्यो न किया जाये ? इंद्रियाँ अतृप्त हों, विशेष मोहप्रधान हो, मोहवैराग्यसे मात्र क्षणिक वैराग्य उत्पन्न हुआ हो और यथातथ्य सत्संगका योग न हो तो उसे दीक्षा देना प्रायः प्रशस्त नहीं कहा जा सकता, ऐसा कहे तो विरोध नही । परन्तु उत्तम संस्कारयुक्त और मोहाध, ये सब गृहस्थाश्रम भोगकर ही त्याग करें ऐसा प्रतिबन्ध करनेसे तो आयु आदिकी अनियमितता, योग प्राप्त होनेपर उसे दूर करना इत्यादि अनेक विरोधों से मोक्षसाधनका नाश करने जैसा होता है, और जिससे उत्तमता मानी जाती थी वह न हुआ, तो फिर मनुष्यभवको उत्तमता भी क्या है ? इत्यादि अनेक प्रकारसे विचार करनेसे लौकिक दृष्टि दूर होकर अलौकिक दृष्टिसे विचार जागृति होगी। बड़के बड़बट्टे या पीपलके गोदेकी वशवृद्धि के लिये उनका रक्षण करनेके हेतुसे कुछ उन्हें अभक्ष्य नही कहा है। उनमें कोमलता होती है, तब अनन्तकायका सम्भव है । इससे तथा उनके बदले दूसरी अनेक वस्तुओंसे चल सकता है, फिर भी उसीका ग्रहण करना, यह वृत्तिकी अति क्षुद्रता है, इसलिये अभक्ष्य कहा है, यह यथातथ्य लगने योग्य है । पानीकी बूंदमे असंख्यात जोव हैं, यह बात सच्ची है, परन्तु वैसा पानी पीनेसे पाप नही है ऐसा नहीं कहा । फिर उसके बदले गृहस्थ आदिको दूसरी वस्तुसे चल नहीं सकता, इसलिये अंगीकार किया जाता है, परन्तु साधुको तो वह भी लेनेकी आज्ञा प्रायः नहीं दी है । जब तक हो सके तब तक ज्ञानीपुरुषके वचनोको लौकिक दृष्टिके आशयमें न लेना योग्य है, और अलौकिक दृष्टि से विचारणीय है । उस अलौकिक दृष्टिके कारण यदि सन्मुख जीवके हृदयमे अंकित करनेको शक्ति हो तो अकित करना, नही तो इस विषयने अपना विशेष ज्ञान नहीं है ऐसा बताना तथा मोक्षमार्गमे केवल लौकिक विचार नही होता इत्यादि कारण यथाशक्ति बताकर सम्भावित समाधान करना, नहीं तो यथासम्भव वसे प्रसंगसे दूर रहना, यह ठीक है। वडवा, भादों सुदी ग्यारह, गुरु, एक हज़ार नौ सौ बावन आज दिन पर्यंत इस आत्मासे मन, वचन और कायाके योगसे आप सम्बन्धी जो कुछ अविनय, आसातना गा अपराध हुआ हो उसकी शुद्ध अंतःकरणसे नम्रताभावसे मस्तक झुकाकर दोनों हाथ जोड़कर क्षमा माँगता हूँ। आपके समीपवासी भाइयोसे भी उसी प्रकारसे क्षमा माँगता हूँ। वडवा , भादो सुदी ग्यारह, गुरु, एक हज़ार नौ सौ बावन शुभेच्छासम्पन्न आर्य केशवलालके प्रति लींबडी । सहजात्मस्वरूपसे यथायोग्य प्राप्त हो । तीन पत्र प्राप्त हुए हैं। 'कुछ भी वृत्ति रोकते हुए, उसकी अपेक्षा विशेष अभिमान रहता है', तथा तृष्णा के प्रवाहमे चलते हुए बह जाते है, और उसकी गतिको रोकनेकी सामर्थ्य नही रहती ।' इत्यादि विवरण तथा क्षमापना और कर्कटी राक्षसीके 'योगवासिष्ठ' सम्बन्धी प्रसंगकी, जगतका भ्रम दूर करने के लिये विशेषता' लिखी यह सब विवरण पढा है। अभी लिखनेमे विशेष उपयोग नही रह सकता जिससे पत्रको पहुँच भी लिखनेसे रह जाती है। सक्षेपमे उन पत्रोका उत्तर निम्नलिखितसे विचारणीय है। वृत्ति आदिका सयम अभिमानपूर्वक होता हो तो भो करना योग्य है । विशेषता इतनी है कि उस अभिमानके लिये निरतर खेद रखना। वैसा हो तो क्रमश वृत्ति आदिका संयम हो और तत्सम्बन्धी अभिमान भी न्यून होता जाय । अनेक स्थलोपर विचारवान पुरुषोंने ऐसा कहा है कि ज्ञान होनेपर काम, क्रोध, तृष्णा आदि भाव निर्मूल हो जाते है, यह सत्य है । तथापि उन वचनोंका ऐसा परमार्थ नही है कि ज्ञान होनेसे पहले वे मद न पड़ें या कम न हो । यद्यपि उनका समूल छेदन तो ज्ञानसे होता है, परन्तु जब तक कषाय आदिको मंदता या न्यूनता न हो तब तक ज्ञान प्रायः उत्पन्न ही नही होता। ज्ञान प्राप्त होनेमे विचार मुख्य साधन है, और उस विचारके वैराग्य तथा उपशम ये दो मुख्य आधार हैं। ऐसा जानकर उसका निरंतर लक्ष्य रखकर वैसी परिणति करना योग्य है । सत्पुरुषके वचनके यथार्थ ग्रहणके बिना प्रायः विचारका उद्भव नहीं होता और सत्पुरुषके वचनका यथार्थ ग्रहण तभी होता है जब सत्पुरुषकी 'अनन्य आश्रय भक्ति' परिणत होती है, क्योंकि सत्पुरुषकी प्रतीति ही कल्याण होनेमे सर्वोत्तम निमित्त है । प्राय मे कारण परस्पर अन्योन्याश्रय जैसे हैं । कड़ी किसीकी मुख्यता है, और कही किसीकी मुख्यता है, तथापि ऐसा तो अनुभवमे आला है कि जो सच्चा मुमुक्षु हो, उसे सत्पुरुषकी 'आश्रयभक्ति', अहंभाव आदिके छेदनके लिये और अल्पकालये विचारदशा परिमित होनेके लिये उत्कृष्ट कारणरूप होती है ।
साल 2021 जाने को है और नया साल बस कुछ ही कदमों की दूरी पर है। सबके मन में फिर एक बार कोरोना की तीसरी लहर का डर तो सता रहा है लेकिन कलाकारों में इस बार हिम्मत और हौसला दोनों है। धारावाहिकों में काम करने वाले कलाकार पहले से ही इस बार तैयार हैं। अधिकतर ने कोरोना की दोनों वैक्सीन लगवा ली हैं। सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए शूटिंग पर काम कर रहे हैं और नए साल का स्वागत पूरे जोशोखरोश के साथ करने की इनकी पूरी तैयारी है। धारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई में अहिल्याबाई होल्कर का किरदार कर रही अभिनेत्री ऐतशा संझगिरी बताती हैं, "नए साल की पूर्व संध्या मेरे लिए बड़ी उत्साहजनक होती है। यह सेलिब्रेशन गुजरे साल को गर्मजोशी से विदा करने का एहसास जगाता है। यह अपनों के साथ नए साल का स्वागत करने का भी एक बढ़िया मौका होता है। तो मैं अपने नए साल की पूर्व संध्या ज्यादातर अपने दोस्तों के साथ मनाती हूं, जहां हम मिलकर बढ़िया वक्त बिताते हैं। इस साल 2022 में मैं बुलेट जर्नलिंग का नया संकल्प लेना चाहती हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह अपनी जिंदगी को लेकर जागरूक रहने का सबसे रचनात्मक और आसान तरीका है। " इसी धारावाहिक में खंडेराव का रोल निभा रहे गौरव अम्लानी कहते हैं, "2021 मेरे लिए कई मायनों में, खास तौर पर कुछ नया सीखने और अपना विकास करने के मामले में बेहद खास रहा। जहां साल की शुरुआत बड़ी अनिश्चित रही, वहीं साल के आखिरी तीन महीनों के दौरान में मुझे पुण्यश्लोक अहिल्याबाई जैसा शो मिला, जिसने मेरे लिए बहुत-सी चीजें बदल दीं। तो मैं कह सकता हूं कि यह साल मेरे लिए सबसे खास वर्षों में से एक रहा। नए साल का जश्न मनाने की बात हो तो मैं इसे अपने परिवार और किसी खास के साथ मनाता हूं। हम बढ़िया खाने के लिए बाहर जाते हैं और फिर गुरुद्वारा जाकर रात के 12 बजने का इंतजार करते हैं। मैं चाहता हूं कि मैं नतीजों की फिक्र किए बिना पूरी ईमानदारी से काम करता रहूं। मैं हमेशा भगवान की योजना में विश्वास रखता हूं और मैंने अब तक जो भी हासिल किया है, मैं हमेशा इसका आभारी रहूंगा। " धारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई में ही मल्हार राव होल्कर का रोल निभा रहे राजेश श्रृंगारपुरे बताते हैं, "2021 की विदाई पर मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ कुछ बढ़िया वक्त बिताऊंगा। 2022 के लिए मैं खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रखना चाहता हूं। मैं अपने सभी फैंस के लिए भी यही दुआ करता हूं कि वे सुरक्षित रहें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ नए साल का स्वागत करें। " धारावाहिक बड़े अच्छे लगते हैं 2 में प्रिया का रोल निभा रहीं दिशा परमार कहती हैं, "मैं अपने सभी फैंस को हैप्पी न्यू ईयर कहना चाहती हूं। उम्मीद करती हूं कि साल 2022 आप सभी की जिंदगी में ढेरों खुशियां और उम्मीदें लेकर आए। मैंने हमेशा धूमधाम से नए साल का स्वागत किया है क्योंकि यह आपके नए स्वरूप का उत्सव होता है। मैं प्रार्थना करती हूं कि 2022 एक ऐसा साल बने जिसमें हम सभी की जिंदगी में बेहतर बदलाव आए और हम अपने सपनों को हासिल करने के लिए और मेहनत करें। नए साल में हमारी इच्छाएं पूरी हों और हम एक बेहतर स्वरूप में सामने आएं। "
साल दो हज़ार इक्कीस जाने को है और नया साल बस कुछ ही कदमों की दूरी पर है। सबके मन में फिर एक बार कोरोना की तीसरी लहर का डर तो सता रहा है लेकिन कलाकारों में इस बार हिम्मत और हौसला दोनों है। धारावाहिकों में काम करने वाले कलाकार पहले से ही इस बार तैयार हैं। अधिकतर ने कोरोना की दोनों वैक्सीन लगवा ली हैं। सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए शूटिंग पर काम कर रहे हैं और नए साल का स्वागत पूरे जोशोखरोश के साथ करने की इनकी पूरी तैयारी है। धारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई में अहिल्याबाई होल्कर का किरदार कर रही अभिनेत्री ऐतशा संझगिरी बताती हैं, "नए साल की पूर्व संध्या मेरे लिए बड़ी उत्साहजनक होती है। यह सेलिब्रेशन गुजरे साल को गर्मजोशी से विदा करने का एहसास जगाता है। यह अपनों के साथ नए साल का स्वागत करने का भी एक बढ़िया मौका होता है। तो मैं अपने नए साल की पूर्व संध्या ज्यादातर अपने दोस्तों के साथ मनाती हूं, जहां हम मिलकर बढ़िया वक्त बिताते हैं। इस साल दो हज़ार बाईस में मैं बुलेट जर्नलिंग का नया संकल्प लेना चाहती हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह अपनी जिंदगी को लेकर जागरूक रहने का सबसे रचनात्मक और आसान तरीका है। " इसी धारावाहिक में खंडेराव का रोल निभा रहे गौरव अम्लानी कहते हैं, "दो हज़ार इक्कीस मेरे लिए कई मायनों में, खास तौर पर कुछ नया सीखने और अपना विकास करने के मामले में बेहद खास रहा। जहां साल की शुरुआत बड़ी अनिश्चित रही, वहीं साल के आखिरी तीन महीनों के दौरान में मुझे पुण्यश्लोक अहिल्याबाई जैसा शो मिला, जिसने मेरे लिए बहुत-सी चीजें बदल दीं। तो मैं कह सकता हूं कि यह साल मेरे लिए सबसे खास वर्षों में से एक रहा। नए साल का जश्न मनाने की बात हो तो मैं इसे अपने परिवार और किसी खास के साथ मनाता हूं। हम बढ़िया खाने के लिए बाहर जाते हैं और फिर गुरुद्वारा जाकर रात के बारह बजने का इंतजार करते हैं। मैं चाहता हूं कि मैं नतीजों की फिक्र किए बिना पूरी ईमानदारी से काम करता रहूं। मैं हमेशा भगवान की योजना में विश्वास रखता हूं और मैंने अब तक जो भी हासिल किया है, मैं हमेशा इसका आभारी रहूंगा। " धारावाहिक पुण्यश्लोक अहिल्याबाई में ही मल्हार राव होल्कर का रोल निभा रहे राजेश श्रृंगारपुरे बताते हैं, "दो हज़ार इक्कीस की विदाई पर मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ कुछ बढ़िया वक्त बिताऊंगा। दो हज़ार बाईस के लिए मैं खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रखना चाहता हूं। मैं अपने सभी फैंस के लिए भी यही दुआ करता हूं कि वे सुरक्षित रहें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ नए साल का स्वागत करें। " धारावाहिक बड़े अच्छे लगते हैं दो में प्रिया का रोल निभा रहीं दिशा परमार कहती हैं, "मैं अपने सभी फैंस को हैप्पी न्यू ईयर कहना चाहती हूं। उम्मीद करती हूं कि साल दो हज़ार बाईस आप सभी की जिंदगी में ढेरों खुशियां और उम्मीदें लेकर आए। मैंने हमेशा धूमधाम से नए साल का स्वागत किया है क्योंकि यह आपके नए स्वरूप का उत्सव होता है। मैं प्रार्थना करती हूं कि दो हज़ार बाईस एक ऐसा साल बने जिसमें हम सभी की जिंदगी में बेहतर बदलाव आए और हम अपने सपनों को हासिल करने के लिए और मेहनत करें। नए साल में हमारी इच्छाएं पूरी हों और हम एक बेहतर स्वरूप में सामने आएं। "
- Food । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।मंगलवार मई 23, 2023 04:34 PM ISTदेसी वाइब्स एक ऐसी जगह जहां आपको खाने के कई तरह विकल्प मिल जाएंगे. देसी व्यंजन से लेकर विदेशी व्यंजन तक, यहां सबकुछ मौजूद. इस रेस्टोरेंट में हरी-भरी मिर्ची के कढ़ी बहुत ही शानदार हैं. वेज खाने वालों के लिए और भी बेहतरीन विकल्प है. नॉन-वेज खाने वालों के लिए विकल्प ही विकल्प है. - Zara Hatke । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।शुक्रवार जनवरी 28, 2022 08:31 PM ISTसोशल मीडिया पर रोज़ कोई न कोई ख़बर वायरल होती ही रहती है. आज भी एक ख़बर वायरल हुई है. दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की पहचान ट्राम्स (Trams in Kolkata) के साथ है. मगर अब ट्राम्स इतिहास ही रह गया है.
- Food । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।मंगलवार मई तेईस, दो हज़ार तेईस चार:चौंतीस PM ISTदेसी वाइब्स एक ऐसी जगह जहां आपको खाने के कई तरह विकल्प मिल जाएंगे. देसी व्यंजन से लेकर विदेशी व्यंजन तक, यहां सबकुछ मौजूद. इस रेस्टोरेंट में हरी-भरी मिर्ची के कढ़ी बहुत ही शानदार हैं. वेज खाने वालों के लिए और भी बेहतरीन विकल्प है. नॉन-वेज खाने वालों के लिए विकल्प ही विकल्प है. - Zara Hatke । Written by: बिक्रम कुमार सिंह ।शुक्रवार जनवरी अट्ठाईस, दो हज़ार बाईस आठ:इकतीस PM ISTसोशल मीडिया पर रोज़ कोई न कोई ख़बर वायरल होती ही रहती है. आज भी एक ख़बर वायरल हुई है. दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की पहचान ट्राम्स के साथ है. मगर अब ट्राम्स इतिहास ही रह गया है.
गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार को श्मशान घाट के गलियारे की छत गिरने से 25 लोगों की मौत हो गई थी. (फाइल) गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद (Ghaziabad) के मुरादनगर (Muradnagar) में रविवार को श्मशान घाट (Cremation Ground Tragedy) के गलियारे की छत गिरने से 25 लोगों की मौत मामले में फरार चल रहे ठकेदार अजय त्यागी (Contractor Ajay Tyagi) को सोमवार देर शाम पुलिस को स्पेशल टीम ने गिरफ्तार कर लिया. अजय त्यागी हादसे का मुख्य आरोपी है. उस पर आरोप है कि निर्माण में घटिया सामान का इस्तेमाल किया गया जिसकी वजह से 15 दिन पहले बना यह गलियारा भरभराकर गिर गया और 25 लोगों की मौत हो गई. मंगलवार को पुलिस अजय त्यागी को कोर्ट में पेश करेगी. एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पुलिस की स्पेशल टीम ने ठेकेदार अजय त्यागी को गैर जनपद से गिरफ्तार किया है. पुलिस आरोपी को लेकर देर रात गाजियाबाद पहुंची. आरोपी को मंगलवार को गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा. इससे पहले सोमवार की सुबह मुरादनगर नगर पालिका की निहारिका सिंह, जूनियर इंजीनियर चंद्रपाल और सुपरवाइजर आशीष को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. .
गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार को श्मशान घाट के गलियारे की छत गिरने से पच्चीस लोगों की मौत हो गई थी. गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार को श्मशान घाट के गलियारे की छत गिरने से पच्चीस लोगों की मौत मामले में फरार चल रहे ठकेदार अजय त्यागी को सोमवार देर शाम पुलिस को स्पेशल टीम ने गिरफ्तार कर लिया. अजय त्यागी हादसे का मुख्य आरोपी है. उस पर आरोप है कि निर्माण में घटिया सामान का इस्तेमाल किया गया जिसकी वजह से पंद्रह दिन पहले बना यह गलियारा भरभराकर गिर गया और पच्चीस लोगों की मौत हो गई. मंगलवार को पुलिस अजय त्यागी को कोर्ट में पेश करेगी. एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पुलिस की स्पेशल टीम ने ठेकेदार अजय त्यागी को गैर जनपद से गिरफ्तार किया है. पुलिस आरोपी को लेकर देर रात गाजियाबाद पहुंची. आरोपी को मंगलवार को गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा. इससे पहले सोमवार की सुबह मुरादनगर नगर पालिका की निहारिका सिंह, जूनियर इंजीनियर चंद्रपाल और सुपरवाइजर आशीष को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. .
इस प्रकार लग्न बीतने पर समाज में उठा बवंडर शांत हो गया। फौरन 'श्री कडवा पाटीदार सुधारक समाज ने अपनी दूसरी वार्षिक बैठक' बडौदा में, वीरमगाम वाले देसाई करसनदास जयसिंह भाई (तत्कालीन जंबुसर के सब जज साहब) की अध्यक्षता में ता. २४, २५, २६ डीसम्बर, १९१० में बुलाई, जिसमें बडौदा के नेक नामदार गायकवाड सरकार सर सयाजीराव महाराज भी पधारे थे। साथ ही पाटडी, सूरत आदि स्थानों के कुछ नामी पुरुषों ने भी पधारकर हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं वे इस संस्था की श्रेष्ठ कार्यपद्धति देखकर सदस्य भी बने। अब पुराने ख्यालातवालों के मन दिनप्रतिदिन उदास होते गए। समाज की ओर से मा. गायकवाड सरकार को सन्मानपत्र देकर 'बालविवाह प्रतिबंधक निबंध समाज में पूर्णतया लागू कराने के लिये की गई मांग ने बालविवाह की मरणासन्न प्रथा को अंतिम चोट पहुंचाई। पुराने रिवाज की इस प्रकार जमींदोस्त हुई दीवार को पुनः खडी करके सुधार के उमड आये महासागर को थामने, बडौदा के पा. भगवानदासने संवत् १९६७ के आषाढ मास में श्री कडवा जाति हितदर्शक' (?) नाम से मासिक पत्रिका निकाली। वह उस समय बिलकुल निकम्मे सिद्ध हुए रिवाजों के पुनरुद्धार के लिए चार महीनों तक चिल्ल-पोंमचाकर स्वतः बंद हो गई। संवत् १६६८ में सूखा (अकाल) पडने से श्री पाटीदार सुधारक समाज की तीसरी वार्षिक सभा मौकूफ (निलम्बित) रही। ऐसे में मा. बम्बई सरकार ने पाटडी संस्थान के युवराज श्री दौलतसिंहजी साहब को फर्स्ट क्लास मेजिस्ट्रेट की सत्ता सौंपी, अतः गांव-गांव से उन पर सम्मान पत्रों की वर्षा होती रही । अहमदाबाद के समाज ने स्वंय उन्हें सम्मान पत्र देते हुए अनुरोध किया था कि 'बालविवाह की वर्तमान प्रथामें सुधार कर देने के लिए समाज के प्रति अपनी सत्ता का उपयोग करने की कृपा करें। फिर, अहमदाबाद के लग्न निमित्त के दोनों पक्षों के नेताओं का एक बड़ा प्रतिनिधि-मंडल भी मा. पाटडी दरबारश्री के समक्ष जाकर वैसी ही विनती कर आया । इससे मा. दरबारश्री ने लग्नप्रथ में सुधार करने हेतु समस्त समाज के नेताओं की ता. १२-३-१९१२ को सभा बुलवाई ।' सभा में लगभग सभी नेताओं ने सुधार करने में अपनी सहमति दी । लेकिन कुछ लोगों की नाराजगी के कारण मा. दरबारश्री ने गायकवाडी बन्धुओं के बाल विवाह प्रतिबंधक निबंध कानून पर विशेष विचार-विमर्श करके सुधार का फैसला प्रकट करना निलम्बित रखा । विद्यावृद्धि के लिए समस्त समाज का एक 'श्री कडवा पाटीदार हितवर्धक महामंडल' बनाया, जिसके फण्ड में स्वयं उन्होंने रु.१५००० दिये । वीरमगाम के देसाईश्री ने भी रु. ३००० लिखवाए। सभी सज्जनों ने तथा उपस्थित बंधुओं ने अपना यथाशक्ति योगदान दिया, जिससे फण्ड लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच गया । १. कडवा विजय पु.४, ११५ २. कडवा विजय पु.५, १२७
इस प्रकार लग्न बीतने पर समाज में उठा बवंडर शांत हो गया। फौरन 'श्री कडवा पाटीदार सुधारक समाज ने अपनी दूसरी वार्षिक बैठक' बडौदा में, वीरमगाम वाले देसाई करसनदास जयसिंह भाई की अध्यक्षता में ता. चौबीस, पच्चीस, छब्बीस डीसम्बर, एक हज़ार नौ सौ दस में बुलाई, जिसमें बडौदा के नेक नामदार गायकवाड सरकार सर सयाजीराव महाराज भी पधारे थे। साथ ही पाटडी, सूरत आदि स्थानों के कुछ नामी पुरुषों ने भी पधारकर हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं वे इस संस्था की श्रेष्ठ कार्यपद्धति देखकर सदस्य भी बने। अब पुराने ख्यालातवालों के मन दिनप्रतिदिन उदास होते गए। समाज की ओर से मा. गायकवाड सरकार को सन्मानपत्र देकर 'बालविवाह प्रतिबंधक निबंध समाज में पूर्णतया लागू कराने के लिये की गई मांग ने बालविवाह की मरणासन्न प्रथा को अंतिम चोट पहुंचाई। पुराने रिवाज की इस प्रकार जमींदोस्त हुई दीवार को पुनः खडी करके सुधार के उमड आये महासागर को थामने, बडौदा के पा. भगवानदासने संवत् एक हज़ार नौ सौ सरसठ के आषाढ मास में श्री कडवा जाति हितदर्शक' नाम से मासिक पत्रिका निकाली। वह उस समय बिलकुल निकम्मे सिद्ध हुए रिवाजों के पुनरुद्धार के लिए चार महीनों तक चिल्ल-पोंमचाकर स्वतः बंद हो गई। संवत् एक हज़ार छः सौ अड़सठ में सूखा पडने से श्री पाटीदार सुधारक समाज की तीसरी वार्षिक सभा मौकूफ रही। ऐसे में मा. बम्बई सरकार ने पाटडी संस्थान के युवराज श्री दौलतसिंहजी साहब को फर्स्ट क्लास मेजिस्ट्रेट की सत्ता सौंपी, अतः गांव-गांव से उन पर सम्मान पत्रों की वर्षा होती रही । अहमदाबाद के समाज ने स्वंय उन्हें सम्मान पत्र देते हुए अनुरोध किया था कि 'बालविवाह की वर्तमान प्रथामें सुधार कर देने के लिए समाज के प्रति अपनी सत्ता का उपयोग करने की कृपा करें। फिर, अहमदाबाद के लग्न निमित्त के दोनों पक्षों के नेताओं का एक बड़ा प्रतिनिधि-मंडल भी मा. पाटडी दरबारश्री के समक्ष जाकर वैसी ही विनती कर आया । इससे मा. दरबारश्री ने लग्नप्रथ में सुधार करने हेतु समस्त समाज के नेताओं की ता. बारह मार्च एक हज़ार नौ सौ बारह को सभा बुलवाई ।' सभा में लगभग सभी नेताओं ने सुधार करने में अपनी सहमति दी । लेकिन कुछ लोगों की नाराजगी के कारण मा. दरबारश्री ने गायकवाडी बन्धुओं के बाल विवाह प्रतिबंधक निबंध कानून पर विशेष विचार-विमर्श करके सुधार का फैसला प्रकट करना निलम्बित रखा । विद्यावृद्धि के लिए समस्त समाज का एक 'श्री कडवा पाटीदार हितवर्धक महामंडल' बनाया, जिसके फण्ड में स्वयं उन्होंने रु.पंद्रह हज़ार दिये । वीरमगाम के देसाईश्री ने भी रु. तीन हज़ार लिखवाए। सभी सज्जनों ने तथा उपस्थित बंधुओं ने अपना यथाशक्ति योगदान दिया, जिससे फण्ड लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच गया । एक. कडवा विजय पु.चार, एक सौ पंद्रह दो. कडवा विजय पु.पाँच, एक सौ सत्ताईस
इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः ग्राहकों को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने एक्शन लिया है। भ्रामक विज्ञापन दिखाने के मामले में प्राधिकरण ने ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर लि. (GSK Consumer Healthcare) को दोषी माना है और अब भारत में उक्त कंपनी का सेंसोडाइन उत्पाद का विज्ञापन बंद करने का आदेश दिया है। CCPA ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि नियमों के उल्लंघन को लेकर विज्ञापन पर पाबंदी लगायी गयी है। ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर के खिलाफ यह आदेश 27 जनवरी को पारित किया गया। एक सप्ताह में रोक लगाने का आदेश (Advertisement ban) CCPA ने ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन को देशभर में सेंसोडाइन (Sensodyne) के विज्ञापनों पर इस आदेश के एक सप्ताह के भीतर रोक लगाने को कहा है। सीसीपीए ने कहा कि जीएसके कंज्यूमर हेल्थकेयर को भारत में लागू कानून को दरकिनार करने और दांतों की संवेदनशीलता के प्रति उपभोक्ता की आशंका का फायदा उठाने के लिए विदेशी दंत चिकित्सकों को (विज्ञापन में) दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। नापतोल आनलाइन शॉपिंग लिमिटेड पर कार्रवाई (CCPA Action) प्राधिकरण ने उत्पादों के प्रचार-प्रसार में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार गतिविधियों के इस्तेमाल करने पर नापतोल (Naaptol) आनलाइन शॉपिंग लिमिटेड के खिलाफ भी आदेश पारित किया है। सीसीपीए ने 2 फरवरी को नापतोल को विज्ञापन बंद करने का आदेश दिया। CCPA ने नापतोल आनलाइन शॉपिंग को सेट आफ 2 गोल्ड ज्वेलरी मैग्नेटिक नी सपोर्ट और एक्यूप्रेशर योग स्लिपर्स के विज्ञापनों पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा नापतोल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा है कि Naaptol को उपभोक्ताओं को बिक्री के लिए उत्पादों की पेशकश करने वाले कार्यक्रम में यह उल्लेख करने के निर्देश दिए थे कि यह एक रिकार्डिड एपिसोड है और उत्पादन की सूची की लाइव स्थिति नहीं दिखाता है। कंपनी को प्रचार चलाने वाले अपने चैनल या प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है कि यह एक प्री-रिकॉर्डेड एपिसोड है। CCPA ने नापतोल को मई 2021 और जनवरी 2022 के बीच दर्ज शिकायतों का निवारण करने और 15 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।
इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः ग्राहकों को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने एक्शन लिया है। भ्रामक विज्ञापन दिखाने के मामले में प्राधिकरण ने ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर लि. को दोषी माना है और अब भारत में उक्त कंपनी का सेंसोडाइन उत्पाद का विज्ञापन बंद करने का आदेश दिया है। CCPA ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि नियमों के उल्लंघन को लेकर विज्ञापन पर पाबंदी लगायी गयी है। ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर के खिलाफ यह आदेश सत्ताईस जनवरी को पारित किया गया। एक सप्ताह में रोक लगाने का आदेश CCPA ने ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन को देशभर में सेंसोडाइन के विज्ञापनों पर इस आदेश के एक सप्ताह के भीतर रोक लगाने को कहा है। सीसीपीए ने कहा कि जीएसके कंज्यूमर हेल्थकेयर को भारत में लागू कानून को दरकिनार करने और दांतों की संवेदनशीलता के प्रति उपभोक्ता की आशंका का फायदा उठाने के लिए विदेशी दंत चिकित्सकों को दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। नापतोल आनलाइन शॉपिंग लिमिटेड पर कार्रवाई प्राधिकरण ने उत्पादों के प्रचार-प्रसार में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार गतिविधियों के इस्तेमाल करने पर नापतोल आनलाइन शॉपिंग लिमिटेड के खिलाफ भी आदेश पारित किया है। सीसीपीए ने दो फरवरी को नापतोल को विज्ञापन बंद करने का आदेश दिया। CCPA ने नापतोल आनलाइन शॉपिंग को सेट आफ दो गोल्ड ज्वेलरी मैग्नेटिक नी सपोर्ट और एक्यूप्रेशर योग स्लिपर्स के विज्ञापनों पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा नापतोल पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा है कि Naaptol को उपभोक्ताओं को बिक्री के लिए उत्पादों की पेशकश करने वाले कार्यक्रम में यह उल्लेख करने के निर्देश दिए थे कि यह एक रिकार्डिड एपिसोड है और उत्पादन की सूची की लाइव स्थिति नहीं दिखाता है। कंपनी को प्रचार चलाने वाले अपने चैनल या प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है कि यह एक प्री-रिकॉर्डेड एपिसोड है। CCPA ने नापतोल को मई दो हज़ार इक्कीस और जनवरी दो हज़ार बाईस के बीच दर्ज शिकायतों का निवारण करने और पंद्रह दिनों के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।
सिंहदेवगणिके कथनानुसार वे महाकवि और एक राज्यके महामात्यै थे । कविचन्द्रिका टीकाके कर्त्ता वादिराजने भी उन्हें ' महामात्यपदभृत् ' लिखा है । संकरालंकारके उदाहरण में कविने कहा है कि संसार में तीन ही रत्न हैं, एक अणहिल्लपाटण नगर, दूसरा कर्णदेवके पुत्र राजा जयसिंहदेव और तीसरा श्रीकलश नामका उनका हाँथी । इससे स्पष्ट होता है कि ये वाग्भट गुजरातके सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंहके समकालीन और उनके मंत्री थे । जयसिंहका राज्य-काल वि० सं० ११५० से ११९९ तक निश्चित हुआ श्वेताम्बराचार्य प्रभाचन्द्र ने अपने प्रभावकचरितमें लिखा है कि बाहड़ नामके धनी धर्मात्माने गुरुचरणों में प्रणाम करके पूछा कि कोई ऐसा प्रशंसनीय कार्य बतलाइए कि जिसमें धन व्यय किया जाय ? तब गुरुने भगवानका मन्दिर बनाने में धनकी सफलता बतलाई और तब वाग्भटने हिमालय के समान धवल और ऊँचा मन्दिर बनवाया और उसमें विराजमान करनेके लिए वर्द्धमान जिनकी प्रतिमा भी । वि० सं० ११७८ में मुनिचन्द्रसूरिका समाधिमरण हुआ और उसके एक वर्ष बाद वाग्भटने देवसूरिके द्वारा उक्त मूर्तिकी प्रतिष्ठा कराई । इससे पता लगता १ इदानीं ग्रन्थकार इदमलंकारकर्तृत्वख्यापनाय वाग्भटाभिधस्य महाकवे : महामात्यस्य तन्नाम गाथयैकया निदर्शयति । २- अणहिलपाटकपुरमवनिपतिः कर्णदेवनृपसूनुः । श्री कलशनामधेयः करी च रत्नानि जगतीह ॥ ३ देखो श्री दुर्गाशंकर शास्त्रीका ' गुजरातनो मध्यकालीन राजपूत इतिहास ।' पृ० २२५ ४ - अथास्ति बाह्डो नाम धनवान्धार्मिकाग्रणीः । गुरुपादान्प्रणम्याथ चक्रे विज्ञापनामसौ ।। आदिश्यतामतिश्लाघ्यं कृत्यं यत्र धनं व्यये । प्रभुराहालये जैने द्रव्यस्य सफलो व्ययः ।। आदेशानन्तरं तेनाकार्यत श्रीजिनालयः । हेमाद्रिधवलस्तुंगो दीप्यकुम्भमहामणिः ।। श्रीमंता वर्धमानस्याचीभरद्वि बमुत्तमम् । यत्तेजसा जिताश्चन्द्रकान्तमणिप्रभाः ॥
सिंहदेवगणिके कथनानुसार वे महाकवि और एक राज्यके महामात्यै थे । कविचन्द्रिका टीकाके कर्त्ता वादिराजने भी उन्हें ' महामात्यपदभृत् ' लिखा है । संकरालंकारके उदाहरण में कविने कहा है कि संसार में तीन ही रत्न हैं, एक अणहिल्लपाटण नगर, दूसरा कर्णदेवके पुत्र राजा जयसिंहदेव और तीसरा श्रीकलश नामका उनका हाँथी । इससे स्पष्ट होता है कि ये वाग्भट गुजरातके सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंहके समकालीन और उनके मंत्री थे । जयसिंहका राज्य-काल विशून्य संशून्य एक हज़ार एक सौ पचास से एक हज़ार एक सौ निन्यानवे तक निश्चित हुआ श्वेताम्बराचार्य प्रभाचन्द्र ने अपने प्रभावकचरितमें लिखा है कि बाहड़ नामके धनी धर्मात्माने गुरुचरणों में प्रणाम करके पूछा कि कोई ऐसा प्रशंसनीय कार्य बतलाइए कि जिसमें धन व्यय किया जाय ? तब गुरुने भगवानका मन्दिर बनाने में धनकी सफलता बतलाई और तब वाग्भटने हिमालय के समान धवल और ऊँचा मन्दिर बनवाया और उसमें विराजमान करनेके लिए वर्द्धमान जिनकी प्रतिमा भी । विशून्य संशून्य एक हज़ार एक सौ अठहत्तर में मुनिचन्द्रसूरिका समाधिमरण हुआ और उसके एक वर्ष बाद वाग्भटने देवसूरिके द्वारा उक्त मूर्तिकी प्रतिष्ठा कराई । इससे पता लगता एक इदानीं ग्रन्थकार इदमलंकारकर्तृत्वख्यापनाय वाग्भटाभिधस्य महाकवे : महामात्यस्य तन्नाम गाथयैकया निदर्शयति । दो- अणहिलपाटकपुरमवनिपतिः कर्णदेवनृपसूनुः । श्री कलशनामधेयः करी च रत्नानि जगतीह ॥ तीन देखो श्री दुर्गाशंकर शास्त्रीका ' गुजरातनो मध्यकालीन राजपूत इतिहास ।' पृशून्य दो सौ पच्चीस चार - अथास्ति बाह्डो नाम धनवान्धार्मिकाग्रणीः । गुरुपादान्प्रणम्याथ चक्रे विज्ञापनामसौ ।। आदिश्यतामतिश्लाघ्यं कृत्यं यत्र धनं व्यये । प्रभुराहालये जैने द्रव्यस्य सफलो व्ययः ।। आदेशानन्तरं तेनाकार्यत श्रीजिनालयः । हेमाद्रिधवलस्तुंगो दीप्यकुम्भमहामणिः ।। श्रीमंता वर्धमानस्याचीभरद्वि बमुत्तमम् । यत्तेजसा जिताश्चन्द्रकान्तमणिप्रभाः ॥
बेंगलुरु में विपक्षी बैठक में कई नेताओं ने अपनी दस्तक दी जिनमें RJD अध्यक्ष लालू यादव भी शामिल थे। लालू यादव ने बैठक में जाने से पहले कहा, "ये बैठक देश के लिए जरुरी है, हमें देश को बचाना है, लोकतंत्र को बचाना है। किसान, मजदूर, नौजवान सभी की रक्षा करनी है"। लोगों ने लालू की इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें "भ्रष्टाचार" कहा। खबर में आगे पढ़ें.. RJD अध्यक्ष लालू यादव के बयान पर कई लोगों ने उन्हें भ्रष्टाचारी कहा और कई लोगों ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कविता लिख डाली। आपको बता दें कि लालू यादव "चारा घोटाले" में जेल रह कर आए हैं और कई अन्य मामले उन पर दर्ज हैं। चारा-घोटाला मामला देश भर में एक चर्चित मुद्दा रहा है, जिसने बिहार की खूब बदनामी कराई। लालू यादव का सियासी करियर इसने तबाह कर दिया। RJD अध्यक्ष को इस घोटाले के चलते कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ा था और सांसद पद भी छोड़ना पड़ा था। डोरंडा कोषागार मामले में भी उन्हें पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने उन पर 60 लाख रुपया का जुर्माना भी लगाया था। यह मामला रांची से सम्बंधित है जिसने लालू यादव को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया था। 2004 से 2009 के दौरान भी रेलवे के कई जोन में लोगों को नौकरी दी गई थी। नौकरी के खिलाफ उन लोगों ने उस समय के रेल मंत्री लालू यादव और उनके परिजनों के नाम पर अपनी जमीन बेची थी। कई जमीनों को एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि रागिनी यादव और चंदा यादव एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड में पूर्व निदेशक थीं।
बेंगलुरु में विपक्षी बैठक में कई नेताओं ने अपनी दस्तक दी जिनमें RJD अध्यक्ष लालू यादव भी शामिल थे। लालू यादव ने बैठक में जाने से पहले कहा, "ये बैठक देश के लिए जरुरी है, हमें देश को बचाना है, लोकतंत्र को बचाना है। किसान, मजदूर, नौजवान सभी की रक्षा करनी है"। लोगों ने लालू की इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें "भ्रष्टाचार" कहा। खबर में आगे पढ़ें.. RJD अध्यक्ष लालू यादव के बयान पर कई लोगों ने उन्हें भ्रष्टाचारी कहा और कई लोगों ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कविता लिख डाली। आपको बता दें कि लालू यादव "चारा घोटाले" में जेल रह कर आए हैं और कई अन्य मामले उन पर दर्ज हैं। चारा-घोटाला मामला देश भर में एक चर्चित मुद्दा रहा है, जिसने बिहार की खूब बदनामी कराई। लालू यादव का सियासी करियर इसने तबाह कर दिया। RJD अध्यक्ष को इस घोटाले के चलते कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ा था और सांसद पद भी छोड़ना पड़ा था। डोरंडा कोषागार मामले में भी उन्हें पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने उन पर साठ लाख रुपया का जुर्माना भी लगाया था। यह मामला रांची से सम्बंधित है जिसने लालू यादव को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया था। दो हज़ार चार से दो हज़ार नौ के दौरान भी रेलवे के कई जोन में लोगों को नौकरी दी गई थी। नौकरी के खिलाफ उन लोगों ने उस समय के रेल मंत्री लालू यादव और उनके परिजनों के नाम पर अपनी जमीन बेची थी। कई जमीनों को एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि रागिनी यादव और चंदा यादव एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड में पूर्व निदेशक थीं।
सोना वायदा 0. 15 फीसदी यानी 68 रुपये बढ़कर 46,030 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में 0. 14 फीसदी यानी 86 रुपये की गिरावट आई और यह 62550 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही। आज घरेलू बाजार में सोने की वायदा कीमत में बढ़त आई लेकिन चांदी सस्ती हुई। भारतीय बाजारों में सोने की कीमत करीब चार महीने के निचले स्तर पर है। एमसीएक्स पर अक्तूबर का सोना वायदा 0. 15 फीसदी यानी 68 रुपये बढ़कर 46,030 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में 1. 3 फीसदी गिरावट आई है। चांदी की बात करें, तो इसमें 0. 14 फीसदी यानी 86 रुपये की गिरावट आई और यह 62550 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही। पिछले तीन सत्रों में चांदी की कीमत 1. 5 फीसदी से ज्यादा टूटी है। पीली धातु पिछले साल के उच्चतम स्तर (56200 रुपये प्रति 10 ग्राम) से 10,150 रुपये नीचे है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी नौकरी के आंकड़ों के कारण पिछले दिनों पीली धातु की कीमत में गिरावट आई है। निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना सिर्फ पांच दिन के लिए (नौ अगस्त से 13 अगस्त तक) खुली है। इसलिए अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो देर न करें। इसकी बिक्री पर होने वाले लाभ पर आयकर नियमों के तहत छूट के साथ और कई लाभ मिलेंगे। सरकार की ओर से गोल्ड बॉन्ड में निवेश के लिए यह वित्त वर्ष 2021-22 की पांचवीं श्रृंखला है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में बताया था कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड मई से लेकर सितंबर के बीच छह किस्तों में जारी किए जाएंगे। योजना के तहत आप 4,790 रुपये प्रति ग्राम पर सोना खरीद सकते हैं। गोल्ड बॉन्ड की खरीद ऑनलाइन तरीके से की जाती है तो सरकार ऐसे निवेशकों को 50 रुपये प्रति ग्राम की अतिरिक्त छूट देती है। गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि आठ साल की होती है और इस पर सालाना 2. 5 फीसदी का ब्याज मिलता है। देश की सोने की मांग बीते साल यानी 2020 में 35 फीसदी से अधिक घटकर 446. 4 टन रह गई। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
सोना वायदा शून्य. पंद्रह फीसदी यानी अड़सठ रुपयापये बढ़कर छियालीस,तीस रुपयापये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में शून्य. चौदह फीसदी यानी छियासी रुपयापये की गिरावट आई और यह बासठ हज़ार पाँच सौ पचास रुपयापये प्रति किलोग्राम पर रही। आज घरेलू बाजार में सोने की वायदा कीमत में बढ़त आई लेकिन चांदी सस्ती हुई। भारतीय बाजारों में सोने की कीमत करीब चार महीने के निचले स्तर पर है। एमसीएक्स पर अक्तूबर का सोना वायदा शून्य. पंद्रह फीसदी यानी अड़सठ रुपयापये बढ़कर छियालीस,तीस रुपयापये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में एक. तीन फीसदी गिरावट आई है। चांदी की बात करें, तो इसमें शून्य. चौदह फीसदी यानी छियासी रुपयापये की गिरावट आई और यह बासठ हज़ार पाँच सौ पचास रुपयापये प्रति किलोग्राम पर रही। पिछले तीन सत्रों में चांदी की कीमत एक. पाँच फीसदी से ज्यादा टूटी है। पीली धातु पिछले साल के उच्चतम स्तर से दस,एक सौ पचास रुपयापये नीचे है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी नौकरी के आंकड़ों के कारण पिछले दिनों पीली धातु की कीमत में गिरावट आई है। निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना सिर्फ पांच दिन के लिए खुली है। इसलिए अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो देर न करें। इसकी बिक्री पर होने वाले लाभ पर आयकर नियमों के तहत छूट के साथ और कई लाभ मिलेंगे। सरकार की ओर से गोल्ड बॉन्ड में निवेश के लिए यह वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस की पांचवीं श्रृंखला है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में बताया था कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड मई से लेकर सितंबर के बीच छह किस्तों में जारी किए जाएंगे। योजना के तहत आप चार,सात सौ नब्बे रुपयापये प्रति ग्राम पर सोना खरीद सकते हैं। गोल्ड बॉन्ड की खरीद ऑनलाइन तरीके से की जाती है तो सरकार ऐसे निवेशकों को पचास रुपयापये प्रति ग्राम की अतिरिक्त छूट देती है। गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि आठ साल की होती है और इस पर सालाना दो. पाँच फीसदी का ब्याज मिलता है। देश की सोने की मांग बीते साल यानी दो हज़ार बीस में पैंतीस फीसदी से अधिक घटकर चार सौ छियालीस. चार टन रह गई। विश्व स्वर्ण परिषद की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
किसी भी कंप्यूटर गेम में एक चरित्र खून बह रहा हैरैखिक और मानक नमूने से कोई विचलन नहीं। केवल कौशल के नाम बदलते हैं हालांकि, प्रत्येक आत्म-सम्मानित परियोजना अपने उत्साह को साधारण सूची में जोड़ने की कोशिश करती है। आज हम खेल "द विचर 2" के बारे में बात करेंगे। एक उत्परिवर्तक का उपयोग कैसे करें, यह क्या है और इसके लिए क्या है? यह क्या है? मुटगेन - ये मौत के बाद प्राणियों द्वारा आवंटित एक विशेष पदार्थ है। यह माध्यमिक चरित्र विशेषताओं को बढ़ाने के लिए बनाया गया है और खिलाड़ी की शक्ति को थोड़ा बढ़ा देता है। अगली बात जिसे आपको खेल के बारे में जानने की ज़रूरत है"विचर 2", - उत्परिवर्तजन और उनके गुण कुल मिलाकर, इस पदार्थ के विकास के तीन चरण हैं - कमजोर, साधारण और शक्तिशाली। प्रत्येक स्तर के साथ, बोनस सुविधाओं की संख्या बढ़ जाती है। कुल मिलाकर, 6 अलग-अलग प्रकार के उत्परिवर्तजन होते हैं और दो विशेष प्रकार होते हैं जिनके क्रम में स्तर नहीं होते हैं। खेल में "उत्परिवर्तक 2" उत्परिवर्तन का उपयोग करने से पहले पहले और मुख्य शर्त को पूरा करना होगा जो इस पदार्थ को रखने के लिए रिक्त स्थान युक्त कौशल सीखना है। सभी में 13 कौशल हैं जिनसे सुधार किया जा सकता हैउत्परिवर्तन का उपयोग करना उनमें से कुछ उपयोगी हैं, कुछ बहुत ज्यादा नहीं हैं, इसलिए आपको अपने लिए यह फैसला करना होगा कि क्या आपको उत्परिवर्ती के लिए अगले स्थान पाने के लिए कौशल अंक खर्च करना चाहिए या नहीं। इन कौशल को कम से कम एक स्तर प्राप्त करने के बाद, आप उत्परिवर्तक रखने के लिए सभी कोशिकाओं को खोलेंगे। आखिरकार हमें गेम "द विचर 2" में मुख्य प्रश्न मिलाः उत्परिवर्तन का उपयोग कैसे करें? चयनित एम्पलीफायर को स्थानांतरित करने के लिए, कौशल मेनू पर जाएं और निम्नानुसार आगे बढ़ेंः तथ्य यह है कि खेल महान काम कर रहा था के बावजूदलोगों की संख्या, सब कुछ से छोटे से विस्तार तक सोचने के लिए संभव नहीं था। इसलिए, खिलाड़ी खुद "द विचर 2" को परिष्कृत करने की कोशिश कर रहे हैं उत्परिवर्तन का उपयोग कैसे करें, हमने पहले ही पता लगाया है, लेकिन कौशल का क्या होता है जो उनकी कार्रवाई को बढ़ाता है? मुख्य समस्या यह है कि प्रवर्धनउत्परिवर्तन मौजूदा वाले पर काम नहीं करता है। यही है, इससे पहले कि आप स्लॉट में उत्परिवर्तक डालें, आप बेहतर कौशल पम्पिंग पहले चरण के लिए कौशल सीखना सबसे अच्छा है, और उसके बाद ही कोशिकाओं में उत्परिवर्तक को शुरू करना शुरू कर दें। उत्परिवर्तन की एक अन्य विशेषता यह है कि आप उन्हें निकालने नहीं कर सकते। उत्परिवर्तन एक बार और सभी के लिए होता है, इसलिए उन्हें सक्रिय करने से पहले कई बार सोचें।
किसी भी कंप्यूटर गेम में एक चरित्र खून बह रहा हैरैखिक और मानक नमूने से कोई विचलन नहीं। केवल कौशल के नाम बदलते हैं हालांकि, प्रत्येक आत्म-सम्मानित परियोजना अपने उत्साह को साधारण सूची में जोड़ने की कोशिश करती है। आज हम खेल "द विचर दो" के बारे में बात करेंगे। एक उत्परिवर्तक का उपयोग कैसे करें, यह क्या है और इसके लिए क्या है? यह क्या है? मुटगेन - ये मौत के बाद प्राणियों द्वारा आवंटित एक विशेष पदार्थ है। यह माध्यमिक चरित्र विशेषताओं को बढ़ाने के लिए बनाया गया है और खिलाड़ी की शक्ति को थोड़ा बढ़ा देता है। अगली बात जिसे आपको खेल के बारे में जानने की ज़रूरत है"विचर दो", - उत्परिवर्तजन और उनके गुण कुल मिलाकर, इस पदार्थ के विकास के तीन चरण हैं - कमजोर, साधारण और शक्तिशाली। प्रत्येक स्तर के साथ, बोनस सुविधाओं की संख्या बढ़ जाती है। कुल मिलाकर, छः अलग-अलग प्रकार के उत्परिवर्तजन होते हैं और दो विशेष प्रकार होते हैं जिनके क्रम में स्तर नहीं होते हैं। खेल में "उत्परिवर्तक दो" उत्परिवर्तन का उपयोग करने से पहले पहले और मुख्य शर्त को पूरा करना होगा जो इस पदार्थ को रखने के लिए रिक्त स्थान युक्त कौशल सीखना है। सभी में तेरह कौशल हैं जिनसे सुधार किया जा सकता हैउत्परिवर्तन का उपयोग करना उनमें से कुछ उपयोगी हैं, कुछ बहुत ज्यादा नहीं हैं, इसलिए आपको अपने लिए यह फैसला करना होगा कि क्या आपको उत्परिवर्ती के लिए अगले स्थान पाने के लिए कौशल अंक खर्च करना चाहिए या नहीं। इन कौशल को कम से कम एक स्तर प्राप्त करने के बाद, आप उत्परिवर्तक रखने के लिए सभी कोशिकाओं को खोलेंगे। आखिरकार हमें गेम "द विचर दो" में मुख्य प्रश्न मिलाः उत्परिवर्तन का उपयोग कैसे करें? चयनित एम्पलीफायर को स्थानांतरित करने के लिए, कौशल मेनू पर जाएं और निम्नानुसार आगे बढ़ेंः तथ्य यह है कि खेल महान काम कर रहा था के बावजूदलोगों की संख्या, सब कुछ से छोटे से विस्तार तक सोचने के लिए संभव नहीं था। इसलिए, खिलाड़ी खुद "द विचर दो" को परिष्कृत करने की कोशिश कर रहे हैं उत्परिवर्तन का उपयोग कैसे करें, हमने पहले ही पता लगाया है, लेकिन कौशल का क्या होता है जो उनकी कार्रवाई को बढ़ाता है? मुख्य समस्या यह है कि प्रवर्धनउत्परिवर्तन मौजूदा वाले पर काम नहीं करता है। यही है, इससे पहले कि आप स्लॉट में उत्परिवर्तक डालें, आप बेहतर कौशल पम्पिंग पहले चरण के लिए कौशल सीखना सबसे अच्छा है, और उसके बाद ही कोशिकाओं में उत्परिवर्तक को शुरू करना शुरू कर दें। उत्परिवर्तन की एक अन्य विशेषता यह है कि आप उन्हें निकालने नहीं कर सकते। उत्परिवर्तन एक बार और सभी के लिए होता है, इसलिए उन्हें सक्रिय करने से पहले कई बार सोचें।
TV Serials Update 8 November 2022: आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सभी लोग अभिमन्यु और अक्षरा को आशीर्वाद देते हैं। अक्षरा महिमा से सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने की बात कहती है लेकिन महिमा कुछ जवाब नहीं देती है। नई दिल्ली। छोटे पर्दे के पॉपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है और कुंडली भाग्य में रोजाना ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये रिश्ता क्या कहलाता है के बीते एपिसोड में आपने देखा कि महिमा मंजरी को भड़काने की कोशिश करती है और कहती है कि अक्षरा कभी इस घर की नहीं हो पाएगी लेकिन हमारा अभिमन्यु सिर्फ अक्षरा-अक्षरा करता रहेगा। अपकमिंग एपिसोड में मंजरी साफ लफ्जों में अक्षरा को चेतावनी देती है कि अब वो अभिमन्यु की आंखों में आंसू बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। वहीं कुंडली भाग्य में काव्या की जान अर्जुन के हाथों में हैं क्योंकि वहीं बम का वायर काटने वाला है। आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सभी लोग अभिमन्यु और अक्षरा को आशीर्वाद देते हैं। अक्षरा महिमा से सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने की बात कहती है लेकिन महिमा कुछ जवाब नहीं देती है। इसी बीच मौका देखकर मंजरी अक्षरा को चेतावनी देती है कि उसने अभिमन्यु को तड़पते देखा है और अब वो उसकी आंखों में आंसू बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। अक्षरा को अजीब लगता है लेकिन वो नजरअंदाज करती है। वहीं गोयनका हाउस में मिमी और स्वर्णा बात करते हैं कि दोनों बहनों का एक ही घर में रहना ठीक नहीं है। इसलिए भगवान भी नहीं चाहते। अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा कि महिमा को एक और झटका लगने वाला है। अभिमन्यु को बिरला अस्पताल का मेडिकल डायरेक्टर बना दिया जाएगा। वहीं कुंडली भाग्य में अर्जुन वायर काटने की कोशिश करता है लेकिन उसी वक्त गुंडे उसके हाथ में गोली मार देते हैं। अर्जुन हिम्मत नहीं हारता है और वो घायल होकर ही वायर काटकर बम काव्या के शरीर से निकालता है। अर्जुन अकेला बम को लेकर जाता है और उसे सुनसान इलाके में जाकर फेंक कर आता है। सभी लोग काव्या को लेकर घर आ जाते हैं जिसके बाद प्रीता पुलिस स्टेशन जाती है और गुंडे पर थप्पड़ों की बरसात कर देती है। जिसके बाद वो अर्जुन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराती है।
TV Serials Update आठ नवंबरember दो हज़ार बाईस: आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सभी लोग अभिमन्यु और अक्षरा को आशीर्वाद देते हैं। अक्षरा महिमा से सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने की बात कहती है लेकिन महिमा कुछ जवाब नहीं देती है। नई दिल्ली। छोटे पर्दे के पॉपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है और कुंडली भाग्य में रोजाना ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये रिश्ता क्या कहलाता है के बीते एपिसोड में आपने देखा कि महिमा मंजरी को भड़काने की कोशिश करती है और कहती है कि अक्षरा कभी इस घर की नहीं हो पाएगी लेकिन हमारा अभिमन्यु सिर्फ अक्षरा-अक्षरा करता रहेगा। अपकमिंग एपिसोड में मंजरी साफ लफ्जों में अक्षरा को चेतावनी देती है कि अब वो अभिमन्यु की आंखों में आंसू बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। वहीं कुंडली भाग्य में काव्या की जान अर्जुन के हाथों में हैं क्योंकि वहीं बम का वायर काटने वाला है। आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सभी लोग अभिमन्यु और अक्षरा को आशीर्वाद देते हैं। अक्षरा महिमा से सब कुछ भूलकर आगे बढ़ने की बात कहती है लेकिन महिमा कुछ जवाब नहीं देती है। इसी बीच मौका देखकर मंजरी अक्षरा को चेतावनी देती है कि उसने अभिमन्यु को तड़पते देखा है और अब वो उसकी आंखों में आंसू बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। अक्षरा को अजीब लगता है लेकिन वो नजरअंदाज करती है। वहीं गोयनका हाउस में मिमी और स्वर्णा बात करते हैं कि दोनों बहनों का एक ही घर में रहना ठीक नहीं है। इसलिए भगवान भी नहीं चाहते। अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा कि महिमा को एक और झटका लगने वाला है। अभिमन्यु को बिरला अस्पताल का मेडिकल डायरेक्टर बना दिया जाएगा। वहीं कुंडली भाग्य में अर्जुन वायर काटने की कोशिश करता है लेकिन उसी वक्त गुंडे उसके हाथ में गोली मार देते हैं। अर्जुन हिम्मत नहीं हारता है और वो घायल होकर ही वायर काटकर बम काव्या के शरीर से निकालता है। अर्जुन अकेला बम को लेकर जाता है और उसे सुनसान इलाके में जाकर फेंक कर आता है। सभी लोग काव्या को लेकर घर आ जाते हैं जिसके बाद प्रीता पुलिस स्टेशन जाती है और गुंडे पर थप्पड़ों की बरसात कर देती है। जिसके बाद वो अर्जुन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराती है।
रायपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक चार हजार 590 पशिक्षण सत्रों के माध्यम से एक लाख 61 हजार 622 पंचायत पतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों को पशिक्षण दिया गया हैं। इसके अलावा राज्य के पांच क्षेत्रीय पशिक्षण केन्द सरगुजा, बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़ और कुरूद में संचालित किए जा रहे है। इन पशिक्षण केन्दों में चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक पंचायत सचिवों और जनपद सदस्यों के लिए तीन हजार 283 पशिक्षण सत्रों का आयोजन कर एक हजार 967 लोगों को पशिक्षण दिया गया। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के स्थापना व्यय के लिए एक करोड़ 92 लाख आठ हजार रूपए का पावधान बजट में किया गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान की स्थापना शासन के सभी स्तरों के नव-निर्वाचित जन पतिनिधियों, लोक सेवकों एवं समाज संगठनों के पतिनिधियों की क्षमता विकास के उद्देश्य से किया गया हैं। राज्य शासन द्वारा 17 जनवरी 2011 को संस्थान के तहत स्वायतशासी संस्था के रूप में पंजीकृत करने की स्वीकृति पदान की गई है। राज्य के शेष तीन जिलों रायपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पतिनिधियों को राष्टाrय ग्राम स्वराज योजना के तहत पशिक्षण के माध्यम से क्षमता विकास के लिए आठ करोड़ 89 लाख रूपए की त्रिवर्षीय योजना केन्दीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है। इसमें केन्द द्वारा 75 पतिशत और राज्य द्वारा 25 पतिशत राशि खर्च की जाएगी। संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में जन-पतिनिधियों के पशिक्षण के लिए सरल भाषा में 12 पुस्तकें और सात डाक्यूमेन्ट्री फिल्म का निर्माण किया गया है।
रायपुर, । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक चार हजार पाँच सौ नब्बे पशिक्षण सत्रों के माध्यम से एक लाख इकसठ हजार छः सौ बाईस पंचायत पतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों को पशिक्षण दिया गया हैं। इसके अलावा राज्य के पांच क्षेत्रीय पशिक्षण केन्द सरगुजा, बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़ और कुरूद में संचालित किए जा रहे है। इन पशिक्षण केन्दों में चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक पंचायत सचिवों और जनपद सदस्यों के लिए तीन हजार दो सौ तिरासी पशिक्षण सत्रों का आयोजन कर एक हजार नौ सौ सरसठ लोगों को पशिक्षण दिया गया। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के स्थापना व्यय के लिए एक करोड़ बानवे लाख आठ हजार रूपए का पावधान बजट में किया गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान की स्थापना शासन के सभी स्तरों के नव-निर्वाचित जन पतिनिधियों, लोक सेवकों एवं समाज संगठनों के पतिनिधियों की क्षमता विकास के उद्देश्य से किया गया हैं। राज्य शासन द्वारा सत्रह जनवरी दो हज़ार ग्यारह को संस्थान के तहत स्वायतशासी संस्था के रूप में पंजीकृत करने की स्वीकृति पदान की गई है। राज्य के शेष तीन जिलों रायपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित पतिनिधियों को राष्टाrय ग्राम स्वराज योजना के तहत पशिक्षण के माध्यम से क्षमता विकास के लिए आठ करोड़ नवासी लाख रूपए की त्रिवर्षीय योजना केन्दीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है। इसमें केन्द द्वारा पचहत्तर पतिशत और राज्य द्वारा पच्चीस पतिशत राशि खर्च की जाएगी। संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में जन-पतिनिधियों के पशिक्षण के लिए सरल भाषा में बारह पुस्तकें और सात डाक्यूमेन्ट्री फिल्म का निर्माण किया गया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह की पांचवीं शाम कवि डॉ. कुमार विश्वास के गीतों से जवां हो उठी। लखनऊ को समर्पित गोमती का मचलता ये पानी भी है. . . गीत से कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले कुमार ने दो घंटे तक सभी को गुदगुदाया, युवा मन को टटोला, प्रेम का आभास कराया, टूटे मन को सांत्वना दी तो कुलपति और राजनेताओं की खिंचाई भी की। उनके गीतों में अटलजी को समर्पित इस शाम में पूर्व प्रधानमंत्री के लिए सम्मान दिखा तो कश्मीर के हालातों पर संजीदगी भी झलकी। कोविड-19 की वजह से काफी बंदिशों के साथ विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने दिया गया था। इसको देखते हुए कुमार विश्वास ने कुलपति से हालत सामान्य होने पर दोबारा बुलाने के लिए न्योता भी मांगा। कुमार विश्वास ने अटलजी की कर्मभूमि लखनऊ को नमन करते हुए अपने गीत 'गोमती का मचलता ये पानी भी है, हिंद के उस गदर की कहानी भी है। गंज हजरत चिकन चौक की आबरू, ये शाम-ए-अवध तर्जुमा रूबरू-रूबरू से कार्यक्रम की शुरुआत की तो पूरा कला प्रांगण तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने जवानी में कई गजलें अधूरी छूट जाती हैं. . . का भी वाचन किया। अटलजी की मशहूर कविता गीत नहीं गाता हूं, हार नहीं मानूंगा, गीत नया गाता हूं. . . सुनाया। इसके बाद डॉक्टर विश्वास ने ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता. . . गीत गाया तो युवाओं ने उनके शब्दों में अपने शब्द शामिल कर दिए। पराए आंसुओं से आंखें नम कर रहा हूं मैं, इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा. . . से युवाओं में प्रणय का भाव भरा तो वक्त के क्रूर कल का भरोसा नहीं, आज जी लो कल का भरोसा नहीं. . . सुनाकर टूटे दिलों को दिलासा भी दी। ताल को ताल की झंकृति तो मिले, रूप को भाव की आकृति तो मिले, मैं भी सपनों में आने लगूं आपके, पर मुझे आपकी स्वीकृति तो मिले. . . सुनाई तो प्रांगण तालियाें और सीटियाें से गूंज उठा। इसके बाद कश्मीर के हालात पर 'ऋषि की कश्यप की तपस्या ने तपाया है तुझे, ऋषि अगस्त ने हम वार बनाया है तुझे, तेरी सरगोशी पर कुर्बान मेरा वतन, मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन. . . सुनाकर सभी को देशभक्ति के भाव से भर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राकेश चंद्रा ने किया। कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास नेे चुटीले अंदाज तथा कटाक्षों से भी सभी को खूब हंसाया। मांस को लेकर हुई सख्ती पर उन्होंने कहा कि बाबा ने ऐसी व्यवस्था की कि चिकन केवल कपड़े पर ही रह गया। इसी तरह एंटी रोमियो स्क्वॉयड पर उन्होंने कहा कि मोदी कहते हैं कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा और यहां यह है कि न करूंगा न करने दूंगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह की पांचवीं शाम कवि डॉ. कुमार विश्वास के गीतों से जवां हो उठी। लखनऊ को समर्पित गोमती का मचलता ये पानी भी है. . . गीत से कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले कुमार ने दो घंटे तक सभी को गुदगुदाया, युवा मन को टटोला, प्रेम का आभास कराया, टूटे मन को सांत्वना दी तो कुलपति और राजनेताओं की खिंचाई भी की। उनके गीतों में अटलजी को समर्पित इस शाम में पूर्व प्रधानमंत्री के लिए सम्मान दिखा तो कश्मीर के हालातों पर संजीदगी भी झलकी। कोविड-उन्नीस की वजह से काफी बंदिशों के साथ विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने दिया गया था। इसको देखते हुए कुमार विश्वास ने कुलपति से हालत सामान्य होने पर दोबारा बुलाने के लिए न्योता भी मांगा। कुमार विश्वास ने अटलजी की कर्मभूमि लखनऊ को नमन करते हुए अपने गीत 'गोमती का मचलता ये पानी भी है, हिंद के उस गदर की कहानी भी है। गंज हजरत चिकन चौक की आबरू, ये शाम-ए-अवध तर्जुमा रूबरू-रूबरू से कार्यक्रम की शुरुआत की तो पूरा कला प्रांगण तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने जवानी में कई गजलें अधूरी छूट जाती हैं. . . का भी वाचन किया। अटलजी की मशहूर कविता गीत नहीं गाता हूं, हार नहीं मानूंगा, गीत नया गाता हूं. . . सुनाया। इसके बाद डॉक्टर विश्वास ने ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता. . . गीत गाया तो युवाओं ने उनके शब्दों में अपने शब्द शामिल कर दिए। पराए आंसुओं से आंखें नम कर रहा हूं मैं, इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा. . . से युवाओं में प्रणय का भाव भरा तो वक्त के क्रूर कल का भरोसा नहीं, आज जी लो कल का भरोसा नहीं. . . सुनाकर टूटे दिलों को दिलासा भी दी। ताल को ताल की झंकृति तो मिले, रूप को भाव की आकृति तो मिले, मैं भी सपनों में आने लगूं आपके, पर मुझे आपकी स्वीकृति तो मिले. . . सुनाई तो प्रांगण तालियाें और सीटियाें से गूंज उठा। इसके बाद कश्मीर के हालात पर 'ऋषि की कश्यप की तपस्या ने तपाया है तुझे, ऋषि अगस्त ने हम वार बनाया है तुझे, तेरी सरगोशी पर कुर्बान मेरा वतन, मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन. . . सुनाकर सभी को देशभक्ति के भाव से भर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राकेश चंद्रा ने किया। कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास नेे चुटीले अंदाज तथा कटाक्षों से भी सभी को खूब हंसाया। मांस को लेकर हुई सख्ती पर उन्होंने कहा कि बाबा ने ऐसी व्यवस्था की कि चिकन केवल कपड़े पर ही रह गया। इसी तरह एंटी रोमियो स्क्वॉयड पर उन्होंने कहा कि मोदी कहते हैं कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा और यहां यह है कि न करूंगा न करने दूंगा।
समाजवादी पार्टी के एमएलसी ने अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी है। उन्होंने कहा है कि वह होम आइसोलेशन में हैं। 2021 में वैक्सीन पर उठाए थे सवालसपा एमएलसी ने 2021 में कोरोना वैक्सीन पर कई सवाल भी खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस वैक्सीन का इस्तेमाल जनसंख्या घटाने या लोगों को नपुंसक बनाने के भी किया जा सकता है। उनके दावे के बाद एमएलसी पर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे। देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलेदेश में कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। बीते दो दिनों से दैनिक मामले तीन हजार के ऊपर आ रहे थे। वहीं बीते 24 घंटों में भी तीन हजार के आसपास के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद देश में सक्रिय कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 16,354 पहुंच चुकी है। वहीं, 24 घंटों में कोरोना से नौ लोगों की मौत हुई है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां पर भी कोरोना के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना से सावधान रहने की चेतावनी दी है। देश में अब संक्रमण दर बढ़कर दो प्रतिशत के पार पहुंच की है। वहीं साप्ताहिक संक्रमण दर भी 2. 03 प्रतिशत दर्ज की गई है। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
समाजवादी पार्टी के एमएलसी ने अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी है। उन्होंने कहा है कि वह होम आइसोलेशन में हैं। दो हज़ार इक्कीस में वैक्सीन पर उठाए थे सवालसपा एमएलसी ने दो हज़ार इक्कीस में कोरोना वैक्सीन पर कई सवाल भी खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस वैक्सीन का इस्तेमाल जनसंख्या घटाने या लोगों को नपुंसक बनाने के भी किया जा सकता है। उनके दावे के बाद एमएलसी पर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे। देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलेदेश में कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। बीते दो दिनों से दैनिक मामले तीन हजार के ऊपर आ रहे थे। वहीं बीते चौबीस घंटाटों में भी तीन हजार के आसपास के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद देश में सक्रिय कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या सोलह,तीन सौ चौवन पहुंच चुकी है। वहीं, चौबीस घंटाटों में कोरोना से नौ लोगों की मौत हुई है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां पर भी कोरोना के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना से सावधान रहने की चेतावनी दी है। देश में अब संक्रमण दर बढ़कर दो प्रतिशत के पार पहुंच की है। वहीं साप्ताहिक संक्रमण दर भी दो. तीन प्रतिशत दर्ज की गई है। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
एक होता है गिरना, एक होता है लुढ़कना. दोनों में बड़ा फर्क होता है. इंसान कई दफा गिरताहै. लेकिन लुढ़कता बहुत कम ही बार है. बचपने में लुढ़कता है, पहाड़ से गिरने पर लुढ़कता है. लुढ़कने में मजा सा भी आता है बशर्ते दांत ना टूटें और घुटने ना छीलें तो ये अच्छा होता है. खैर, सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है जिसे देख लोगों का दिन बन रहा है. दरअसल, एक डॉगी का बड़ा प्यारा सा वीडियो सामने आया है. ऐसा वीडियो जिसे देखने के बाद कहोगे कि भैया ऐसे तो लाइफ में एक बार सबको ही लुढ़कना चाहिए. ऐसे करके बहुत मजा आया होगा। बता दें की रेक्स चैपमैन ने यह वीडियो अपने ट्विटर पर शेयर किया है. इस वीडियो को अबतक 10 लाख व्यूज मिल चुके है. ये वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहा है. अगर वीडियो की बात करें तो इस वीडियो में एक डॉगी दौड़ता हुआ नजर आ रहा है, पहाड़ की चोटी से वो लुढ़कना शुरू होता है, सीधे नीचे तक लुढ़कता-लुढ़कता आता है. बीच-बीच में वो अपने मन से ही लुढ़कने लगता है. डॉग की मस्ती का लेवल अलग ही दिख रहा है इसमें। ऐसे डॉगी का लुढ़कना लोगो का काफी पसंद आ रहा है.
एक होता है गिरना, एक होता है लुढ़कना. दोनों में बड़ा फर्क होता है. इंसान कई दफा गिरताहै. लेकिन लुढ़कता बहुत कम ही बार है. बचपने में लुढ़कता है, पहाड़ से गिरने पर लुढ़कता है. लुढ़कने में मजा सा भी आता है बशर्ते दांत ना टूटें और घुटने ना छीलें तो ये अच्छा होता है. खैर, सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है जिसे देख लोगों का दिन बन रहा है. दरअसल, एक डॉगी का बड़ा प्यारा सा वीडियो सामने आया है. ऐसा वीडियो जिसे देखने के बाद कहोगे कि भैया ऐसे तो लाइफ में एक बार सबको ही लुढ़कना चाहिए. ऐसे करके बहुत मजा आया होगा। बता दें की रेक्स चैपमैन ने यह वीडियो अपने ट्विटर पर शेयर किया है. इस वीडियो को अबतक दस लाख व्यूज मिल चुके है. ये वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहा है. अगर वीडियो की बात करें तो इस वीडियो में एक डॉगी दौड़ता हुआ नजर आ रहा है, पहाड़ की चोटी से वो लुढ़कना शुरू होता है, सीधे नीचे तक लुढ़कता-लुढ़कता आता है. बीच-बीच में वो अपने मन से ही लुढ़कने लगता है. डॉग की मस्ती का लेवल अलग ही दिख रहा है इसमें। ऐसे डॉगी का लुढ़कना लोगो का काफी पसंद आ रहा है.
Posted On: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के डीआरडीओ मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा पर आज पुष्पांजलि अर्पित की गई। डीआरडीओ का स्थापना दिवस हर साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने महानिदेशकों और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत के मिसाइल मैन डॉ. कलाम की आवक्ष प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिसमें रक्षा प्रौद्योगिकियों पर लेख और वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली पर एक शब्दकोश, स्टोर मैनुअल और दिशानिर्देश (एसएमजी-2023), द्वैमासिक बुलेटिन इनसाइट तथा डीआरडीओ प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता की तीसरी वर्षगांठ का अंक भी शामिल था। डीआरडीओ की प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता को डीआरडीओ की वेबसाइट पर साझा किया जाएगा ताकि रक्षा उद्योग और शिक्षाविद तदनुसार अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की योजना बना सकें। डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. कमल नैन चोपड़ा द्वारा लिखित डीआरडीओ मोनोग्राफ 'इन्फ्रारेड सिग्नेचर, सेंसर्स एंड टेक्नोलॉजीज' पुस्तक का विमोचन भी डीआरडीओ के अध्यक्ष द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीआरडीओ कैलेंडर 2023 भी जारी किया गया। इसके अलावा, डीडी आर एंड डी के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष ने डीआरडीओ में अपनी सेवा के 25 वर्ष पूरे करने वाले सभी कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. समीर वी कामत ने डीआरडीओ बिरादरी को संबोधित किया, उन्होंने 2022 में कई प्रमुख मील के पत्थर हासिल करने के लिए सभी कर्मियों को बधाई दी। डॉ समीर ने आग्रह करते हुए कहा कि डीआरडीओ के कर्मी देश में रक्षा अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करें और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' दृष्टिकोण को साकार करने का प्रयास करें। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित कई गई प्रणालियां उपयोगकर्ताओं को वितरित कर दी गई हैं या उन्हें शामिल करने हेतु सौंप दी गई हैं। इनमें भारतीय वायु सेना के लिए मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, शक्ति ईडब्ल्यू सिस्टम, युद्धपोतों के लिए इंफ्रारेड सिग्नेचर सप्रेशन सिस्टम, सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के लिए ब्रेक पैराशूट, टी-90 टैंक हेतु लेजर रेंज फाइंडर के साथ कमांडर्स थर्मल इमेजिंग साइट, ध्वनि ऑटोमेटेड सोनार ट्रेनर, चार प्रकार के विकिरण कॉन्टेमिनेशन निगरानी प्रणाली, मिग-29 एयरक्रू हेलमेट और प्रेशर ब्रीदिंग ऑक्सीजन मास्क आदि शामिल हैं। डॉ. कामत ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित कई प्रणालियों को शामिल करने के लिए रक्षा खरीद बोर्ड और रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा आवश्यक स्वीकृति (एओएन) भी प्रदान की गई है। कुछ उल्लेखनीय प्रणालियों में ये शामिल हैंः सारंग ईएसएम सिस्टम, हल्के टैंक, टैक्टिकल एडवांस रेंज ऑग्मेंटेशन (तारा) किट, लॉन्ग रेंज गाइडेड बम (एलआरजीबी)-गौरव, नौसैना के लिए एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (एनएएसएम-एमआर), एनजीएमवी के लिए एयर सर्विलांस रडार, लो लेवल ट्रांसपोर्टेबल रडार (एलएलटीआर) -अश्विनी, नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल (एनजीएआरएम), प्रलय, पिनाका के लिए गाइडेड एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट एम्यूनिशन, सेल्फ-प्रोपेल्ड माइन ब्यूरो, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल-कमांड, एंटी-पर्सनल फ्रैगमेंटेशन माइन 'यूल्क', इन्फैंट्री फ्लोटिंग फुट ब्रिज और ब्रिज लेइंग टैंक (बीएलटी) टी-72 तथा एसीएडीए आदि। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने कहा कि आकाश हथियार प्रणाली के सैन्य संस्करण के ऑथोरिटी होल्डिंग सील्ड पर्टिकुलर्स (एएचएसपी) को मिसाइल सिस्टम्स क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी को सौंप दिया गया है। कई प्रमुख प्रणालियां या तो पूरी हो चुकी हैं या फिर उपयोगकर्ता मूल्यांकन के अंतिम चरण में हैं। इनमें एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), तीसरी पीढ़ी की हेलीकॉप्टर लॉन्च एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'हेलीना', एनएएमआईएस (ट्रैक्ड) और 'नाग' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, त्वरित प्रक्रिया की सतह से हवा में हमला करने वाली मिसाइल, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, मैकेनिकल माइन लेयर (स्व-चालित), 84 मिमी एंटी-थर्मल/एंटी-लेजर स्मोक ग्रेनेड, पिनाका एमआरएलएस के लिए एचईपीएफ और आरएचई (उन्नत) रॉकेट गोला बारूद, 125 मिमी एफएसएपीडीएस, वायु रक्षा अग्नि नियंत्रण रडार 'अतुल्य', पहाड़ों के लिए हथियार का पता लगाने वाला रडार, वी/यूएचएफ मैनपैक सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, पी-16 हैवी ड्रॉप सिस्टम, पोर्टेबल डाइवर डिटेक्शन सोनार सिस्टम, एडवांस्ड लाइट वेट टॉरपीडो तथा गगनयान मिशन के लिए समुद्री जल शोधन किट शामिल हैं। डॉ. कामत ने बताया कि कई प्रणालियां विकासात्मक परीक्षणों के दौर से गुजर रही हैं। इनमें समुद्रिका कार्यक्रम के तहत नौसेना के युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, दूसरे चरण की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर वाली एडी-1 मिसाइल, सुखोई-30 विमान से ब्रह्मोस का विस्तारित रेंज संस्करण, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज, अग्नि प्राइम, वर्टिकल लॉन्च-शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (वीएल-एसआरएसएएम), आकाश-न्यू जेनरेशन, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम), एनहैंस्ड रेंज पिनाका रॉकेट सिस्टम, हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट 'अभ्यास ', छोटे टर्बो फैन इंजन, कावेरी ड्राई इंजन डब्ल्यूएचएपी-सीबीआरएन, शत्रुघ्न और मैदानी एवं रेगिस्तानी इलाकों के लिए ईडब्ल्यू सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए ऐरे रडार 'उत्तम', उन्नत लाइट टोड ऐरे सोनार आदि शामिल हैं। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षणाधीन अधिकांश प्रणालियां अगले वर्ष तक उपयोगकर्ताओं को सौंप दी जाएंगी। उन्होंने संक्षेप में कहा कि साल 2022 में 26,000 करोड़ रुपये के पांच सीसीएस कार्यक्रम और 11,000 करोड़ रुपये की 55 अन्य परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इससे पहले स्वीकृत की गई 32 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) जैसे कुछ अन्य प्रमुख रक्षा योजनाएं भी सीसीएस द्वारा अनुमोदन के लिए विचाराधीन हैं। डॉ. कामत ने बताया कि पिछले एक साल में डीआरडीओ ने 145 टीओटी पर हस्ताक्षर किए हैं। आईपी सुरक्षा के लिए 160 पेटेंट दायर किए गए थे और 2022 के दौरान 100 स्वीकृत किए गए हैं। प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ) योजना के तहत कोष की सीमा को 10 करोड़ रुपये प्रति परियोजना से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। यह डीआरडीओ को अधिक जटिल तकनीकों के विकास के लिए रक्षा उद्योग का अधिकतम सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने बताया कि उन्नत नौसेना प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए नौसेना के नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन तथा टीडीएफ के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने जानकारी दी कि माननीय रक्षा मंत्री द्वारा डेयर टू ड्रीम प्रतियोगिता का चौथा संस्करण शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने अब कुल 15 डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए-सीओई) स्थापित किए हैं। वर्तमान में 1,183 करोड़ रुपये की लागत से शैक्षिक समुदाय के साथ 867 परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
Posted On: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के पैंसठवें स्थापना दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के डीआरडीओ मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा पर आज पुष्पांजलि अर्पित की गई। डीआरडीओ का स्थापना दिवस हर साल एक जनवरी को मनाया जाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने महानिदेशकों और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत के मिसाइल मैन डॉ. कलाम की आवक्ष प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिसमें रक्षा प्रौद्योगिकियों पर लेख और वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली पर एक शब्दकोश, स्टोर मैनुअल और दिशानिर्देश , द्वैमासिक बुलेटिन इनसाइट तथा डीआरडीओ प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता की तीसरी वर्षगांठ का अंक भी शामिल था। डीआरडीओ की प्रौद्योगिकी दूरदर्शिता को डीआरडीओ की वेबसाइट पर साझा किया जाएगा ताकि रक्षा उद्योग और शिक्षाविद तदनुसार अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की योजना बना सकें। डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. कमल नैन चोपड़ा द्वारा लिखित डीआरडीओ मोनोग्राफ 'इन्फ्रारेड सिग्नेचर, सेंसर्स एंड टेक्नोलॉजीज' पुस्तक का विमोचन भी डीआरडीओ के अध्यक्ष द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीआरडीओ कैलेंडर दो हज़ार तेईस भी जारी किया गया। इसके अलावा, डीडी आर एंड डी के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष ने डीआरडीओ में अपनी सेवा के पच्चीस वर्ष पूरे करने वाले सभी कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. समीर वी कामत ने डीआरडीओ बिरादरी को संबोधित किया, उन्होंने दो हज़ार बाईस में कई प्रमुख मील के पत्थर हासिल करने के लिए सभी कर्मियों को बधाई दी। डॉ समीर ने आग्रह करते हुए कहा कि डीआरडीओ के कर्मी देश में रक्षा अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करें और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' दृष्टिकोण को साकार करने का प्रयास करें। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित कई गई प्रणालियां उपयोगकर्ताओं को वितरित कर दी गई हैं या उन्हें शामिल करने हेतु सौंप दी गई हैं। इनमें भारतीय वायु सेना के लिए मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, शक्ति ईडब्ल्यू सिस्टम, युद्धपोतों के लिए इंफ्रारेड सिग्नेचर सप्रेशन सिस्टम, सुखोई-तीस लड़ाकू विमानों के लिए ब्रेक पैराशूट, टी-नब्बे टैंक हेतु लेजर रेंज फाइंडर के साथ कमांडर्स थर्मल इमेजिंग साइट, ध्वनि ऑटोमेटेड सोनार ट्रेनर, चार प्रकार के विकिरण कॉन्टेमिनेशन निगरानी प्रणाली, मिग-उनतीस एयरक्रू हेलमेट और प्रेशर ब्रीदिंग ऑक्सीजन मास्क आदि शामिल हैं। डॉ. कामत ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित कई प्रणालियों को शामिल करने के लिए रक्षा खरीद बोर्ड और रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा आवश्यक स्वीकृति भी प्रदान की गई है। कुछ उल्लेखनीय प्रणालियों में ये शामिल हैंः सारंग ईएसएम सिस्टम, हल्के टैंक, टैक्टिकल एडवांस रेंज ऑग्मेंटेशन किट, लॉन्ग रेंज गाइडेड बम -गौरव, नौसैना के लिए एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज , एनजीएमवी के लिए एयर सर्विलांस रडार, लो लेवल ट्रांसपोर्टेबल रडार -अश्विनी, नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल , प्रलय, पिनाका के लिए गाइडेड एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट एम्यूनिशन, सेल्फ-प्रोपेल्ड माइन ब्यूरो, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल-कमांड, एंटी-पर्सनल फ्रैगमेंटेशन माइन 'यूल्क', इन्फैंट्री फ्लोटिंग फुट ब्रिज और ब्रिज लेइंग टैंक टी-बहत्तर तथा एसीएडीए आदि। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने कहा कि आकाश हथियार प्रणाली के सैन्य संस्करण के ऑथोरिटी होल्डिंग सील्ड पर्टिकुलर्स को मिसाइल सिस्टम्स क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी को सौंप दिया गया है। कई प्रमुख प्रणालियां या तो पूरी हो चुकी हैं या फिर उपयोगकर्ता मूल्यांकन के अंतिम चरण में हैं। इनमें एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम , तीसरी पीढ़ी की हेलीकॉप्टर लॉन्च एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'हेलीना', एनएएमआईएस और 'नाग' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, त्वरित प्रक्रिया की सतह से हवा में हमला करने वाली मिसाइल, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, मैकेनिकल माइन लेयर , चौरासी मिमी एंटी-थर्मल/एंटी-लेजर स्मोक ग्रेनेड, पिनाका एमआरएलएस के लिए एचईपीएफ और आरएचई रॉकेट गोला बारूद, एक सौ पच्चीस मिमी एफएसएपीडीएस, वायु रक्षा अग्नि नियंत्रण रडार 'अतुल्य', पहाड़ों के लिए हथियार का पता लगाने वाला रडार, वी/यूएचएफ मैनपैक सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, पी-सोलह हैवी ड्रॉप सिस्टम, पोर्टेबल डाइवर डिटेक्शन सोनार सिस्टम, एडवांस्ड लाइट वेट टॉरपीडो तथा गगनयान मिशन के लिए समुद्री जल शोधन किट शामिल हैं। डॉ. कामत ने बताया कि कई प्रणालियां विकासात्मक परीक्षणों के दौर से गुजर रही हैं। इनमें समुद्रिका कार्यक्रम के तहत नौसेना के युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, दूसरे चरण की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर वाली एडी-एक मिसाइल, सुखोई-तीस विमान से ब्रह्मोस का विस्तारित रेंज संस्करण, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज, अग्नि प्राइम, वर्टिकल लॉन्च-शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल , आकाश-न्यू जेनरेशन, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल , एनहैंस्ड रेंज पिनाका रॉकेट सिस्टम, हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट 'अभ्यास ', छोटे टर्बो फैन इंजन, कावेरी ड्राई इंजन डब्ल्यूएचएपी-सीबीआरएन, शत्रुघ्न और मैदानी एवं रेगिस्तानी इलाकों के लिए ईडब्ल्यू सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए ऐरे रडार 'उत्तम', उन्नत लाइट टोड ऐरे सोनार आदि शामिल हैं। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षणाधीन अधिकांश प्रणालियां अगले वर्ष तक उपयोगकर्ताओं को सौंप दी जाएंगी। उन्होंने संक्षेप में कहा कि साल दो हज़ार बाईस में छब्बीस,शून्य करोड़ रुपये के पांच सीसीएस कार्यक्रम और ग्यारह,शून्य करोड़ रुपये की पचपन अन्य परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इससे पहले स्वीकृत की गई बत्तीस परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान जैसे कुछ अन्य प्रमुख रक्षा योजनाएं भी सीसीएस द्वारा अनुमोदन के लिए विचाराधीन हैं। डॉ. कामत ने बताया कि पिछले एक साल में डीआरडीओ ने एक सौ पैंतालीस टीओटी पर हस्ताक्षर किए हैं। आईपी सुरक्षा के लिए एक सौ साठ पेटेंट दायर किए गए थे और दो हज़ार बाईस के दौरान एक सौ स्वीकृत किए गए हैं। प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना के तहत कोष की सीमा को दस करोड़ रुपये प्रति परियोजना से बढ़ाकर पचास करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। यह डीआरडीओ को अधिक जटिल तकनीकों के विकास के लिए रक्षा उद्योग का अधिकतम सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने बताया कि उन्नत नौसेना प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए नौसेना के नवाचार और स्वदेशीकरण संगठन तथा टीडीएफ के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने जानकारी दी कि माननीय रक्षा मंत्री द्वारा डेयर टू ड्रीम प्रतियोगिता का चौथा संस्करण शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने अब कुल पंद्रह डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं। वर्तमान में एक,एक सौ तिरासी करोड़ रुपये की लागत से शैक्षिक समुदाय के साथ आठ सौ सरसठ परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
सफलताओं ने उसके सारे 'कु' को ढँक लिया । सफल इन्सानों की पंक्ति में है कुबेरसिह ! याद आती है·--! 1940 में, बिहार सोशलिस्ट पार्टी के एक प्रसिद्ध कलाकार नेता ने, पुराने पिण्टू होटल के एक कोनेवाले टेबल पर चाय पीते हुए, ओजपूर्ण भाषा में कहा था- "जितेन्द्र ! इस कुबेर के चक्रान्त में तुम किस तरह पड़ गये ?" वह तुम्हारा शोषण कर रहा है।" "आप अपने चक्र के चक्रवर्ती हैं, सदाबहारजी। दूसरे चक्र के चक्रवर्ती के बारे में आपको बोलने का पूरा हक है। हम लोग तो दरबारी हैं। जैसे इसके दरबार में, वैसे आप दरबार में !" सदाबहारजी ठठाकर हँस पड़े थे। मुग्ध होकर उन्होने जितेन्द्र की ठुड्डी छू ली-"मैं अपने लड़के का नाम जितेन्द्र ही रखूँगा ! "अच्छे लडके ! जरा इसका भी तो खयाल करो, लोग क्या कहते हैं ! भद्दी-भद्दी बातें !" "मैं जानता हूँ। आपके साथ रहूँ तो आपकी बदनामी भी इसी तरह फैलेगी ।" "अच्छा, एक बात बताओ ! जबकि तुम्हारे बॉस, माफ करना, तुमने अपने को दरबारी कहा है, तुम्हारे बॉस और पार्टी के अन्य लोग मिलने पर भी आँखे फेर लेते हैं, बाते तक नहीं करते, तुम मुझे खोजकर क्यों मिलने आते हो ? कोई रहस्य है ?" "बहुत बड़ा रहस्य ! आप मुझे स्नेह की दृष्टि से देखते हैं। मुँह फेर नही लेते मिलने पर, इसीलिए । शायद, आपके दिल के फौजी अधिकारियो को इसमे कोई दुर्गन्ध लगी है । है न ? निश्चय ही कहा होगा, जितेन्द्र से मेलजोल ठीक नही ।" सदाबहारजी ने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा था- "जीओ !" जितेन्द्र ने वचन दिया था, बिना माँगे ही- "आपको कोर्ट मार्शल से बचाने के लिए, हमारी यह मुलाकात अन्तिम हो !" सदाबहार की आँखें छलछला आयी थीं- "राजनीति बहुत-बहुत बलिदान माँगती है, जित्तन ! कुबेरसिंह सौभाग्यशाली है।" सचमुच, किस्मत का कुबेर है कुबेरसिंह ! सन् छत्तीस से चालीस तक उन्होंने तीन पार्टियों में डुबकी लगायी और हर बार घोंघे-सीपो के साथ एकाध मोती लेकर ऊपर हुआ । जितेन्द्र को हठात् पाकर, खुशी से खूबसूरत हो गया था उसका चेहरा- "समझते हो भैया ! मैंने खूब डुबकी लगाकर थाह ली है, हर पार्टी की गहराई की ! सच कहता हूँ, मुझे अब पूरा विश्वास हो गया । तुम्हारे सहयोग से मैं अपनी अपने मन की पार्टी बना सकूँगा । बोलो ! मुझे छोडोगे तो नहीं ?"... काशी-विद्यापीठ के स्नातक की तत्कालीन राजनीतिक चेतना को उकसाने मे सफल हुआ, कुबेरसिंह । नयी पार्टी बनाने की बात भी गयी जितेन्द्र को । कुबेरसिंह प्रसन्नता से गीत गाने लगा था; बेसुरे राग और गलत उच्चारण की याद है जितेन्द्र को आज भी - जोदी तोमारी डाकियो ना सुरे कोई ई-ई, तारपोड़े एकोला चोलो 596/ रेणु रचनावली-2
सफलताओं ने उसके सारे 'कु' को ढँक लिया । सफल इन्सानों की पंक्ति में है कुबेरसिह ! याद आती है·--! एक हज़ार नौ सौ चालीस में, बिहार सोशलिस्ट पार्टी के एक प्रसिद्ध कलाकार नेता ने, पुराने पिण्टू होटल के एक कोनेवाले टेबल पर चाय पीते हुए, ओजपूर्ण भाषा में कहा था- "जितेन्द्र ! इस कुबेर के चक्रान्त में तुम किस तरह पड़ गये ?" वह तुम्हारा शोषण कर रहा है।" "आप अपने चक्र के चक्रवर्ती हैं, सदाबहारजी। दूसरे चक्र के चक्रवर्ती के बारे में आपको बोलने का पूरा हक है। हम लोग तो दरबारी हैं। जैसे इसके दरबार में, वैसे आप दरबार में !" सदाबहारजी ठठाकर हँस पड़े थे। मुग्ध होकर उन्होने जितेन्द्र की ठुड्डी छू ली-"मैं अपने लड़के का नाम जितेन्द्र ही रखूँगा ! "अच्छे लडके ! जरा इसका भी तो खयाल करो, लोग क्या कहते हैं ! भद्दी-भद्दी बातें !" "मैं जानता हूँ। आपके साथ रहूँ तो आपकी बदनामी भी इसी तरह फैलेगी ।" "अच्छा, एक बात बताओ ! जबकि तुम्हारे बॉस, माफ करना, तुमने अपने को दरबारी कहा है, तुम्हारे बॉस और पार्टी के अन्य लोग मिलने पर भी आँखे फेर लेते हैं, बाते तक नहीं करते, तुम मुझे खोजकर क्यों मिलने आते हो ? कोई रहस्य है ?" "बहुत बड़ा रहस्य ! आप मुझे स्नेह की दृष्टि से देखते हैं। मुँह फेर नही लेते मिलने पर, इसीलिए । शायद, आपके दिल के फौजी अधिकारियो को इसमे कोई दुर्गन्ध लगी है । है न ? निश्चय ही कहा होगा, जितेन्द्र से मेलजोल ठीक नही ।" सदाबहारजी ने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा था- "जीओ !" जितेन्द्र ने वचन दिया था, बिना माँगे ही- "आपको कोर्ट मार्शल से बचाने के लिए, हमारी यह मुलाकात अन्तिम हो !" सदाबहार की आँखें छलछला आयी थीं- "राजनीति बहुत-बहुत बलिदान माँगती है, जित्तन ! कुबेरसिंह सौभाग्यशाली है।" सचमुच, किस्मत का कुबेर है कुबेरसिंह ! सन् छत्तीस से चालीस तक उन्होंने तीन पार्टियों में डुबकी लगायी और हर बार घोंघे-सीपो के साथ एकाध मोती लेकर ऊपर हुआ । जितेन्द्र को हठात् पाकर, खुशी से खूबसूरत हो गया था उसका चेहरा- "समझते हो भैया ! मैंने खूब डुबकी लगाकर थाह ली है, हर पार्टी की गहराई की ! सच कहता हूँ, मुझे अब पूरा विश्वास हो गया । तुम्हारे सहयोग से मैं अपनी अपने मन की पार्टी बना सकूँगा । बोलो ! मुझे छोडोगे तो नहीं ?"... काशी-विद्यापीठ के स्नातक की तत्कालीन राजनीतिक चेतना को उकसाने मे सफल हुआ, कुबेरसिंह । नयी पार्टी बनाने की बात भी गयी जितेन्द्र को । कुबेरसिंह प्रसन्नता से गीत गाने लगा था; बेसुरे राग और गलत उच्चारण की याद है जितेन्द्र को आज भी - जोदी तोमारी डाकियो ना सुरे कोई ई-ई, तारपोड़े एकोला चोलो पाँच सौ छियानवे/ रेणु रचनावली-दो
उधर, इस खास दिन पर वीरेंद्र सहवाग ने भी अपनी मां के नाम संदेश लिखा है. सहवाग ने ट्वीट किया, 'मुझे पहली नजर में प्यार होने पर भरोसा है. जब मैंने पहली बार अपनी आंखें खोलीं तभी से मुझे अपनी मां से बहुत प्यार है. ' इस मेसेज के साथ सहवाग ने अपनी मां की तस्वीर भी शेयर की है. उधर, दिल्ली डेयरडेविल्स के बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी मदर्स डे पर अपनी मां के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है. उन्होंने मां को प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत कहा है.
उधर, इस खास दिन पर वीरेंद्र सहवाग ने भी अपनी मां के नाम संदेश लिखा है. सहवाग ने ट्वीट किया, 'मुझे पहली नजर में प्यार होने पर भरोसा है. जब मैंने पहली बार अपनी आंखें खोलीं तभी से मुझे अपनी मां से बहुत प्यार है. ' इस मेसेज के साथ सहवाग ने अपनी मां की तस्वीर भी शेयर की है. उधर, दिल्ली डेयरडेविल्स के बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी मदर्स डे पर अपनी मां के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है. उन्होंने मां को प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत कहा है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
रीना राॅय आज अपना 63वां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रही हैं। रीना राॅय एक समय बाॅलीवुड की टाॅप की एक्ट्रेस में शुमार थी। इस दौरान उनकी जोड़ी बाॅलीवुड के कई स्टारों के साथ खूब जमी। इस दरम्यान उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी। कहा जाता है कि एक दौर में रीना राॅय हाईजेस्ट पेड एक्ट्रेस में शुमार थी। वह उन दिनों हेमा मालिनी एवं रेखा जैसी बड़ी एक्ट्रेस को टक्कर देती थी। रीना राय एक समय अपनी फिल्मों के साथ ही अपने अफेयर को लेकर भी जमकर सुर्खियों में रही। कहा जाता है कि रीना का शत्रुघ्न सिन्हा के साथ जमकर अफेयर चला। जब शत्रुघ्न से उन्हें धोखा मिला तो उन्होंने पाकिस्तान इस शख्स से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली। धीरे दोनों दोनों लोग एक-दूसरे के करीब आ गए और फिर शादी कर ली। लेकिन यहां भी उन्हें धोखा ही मिला। मीडिया रिपोर्ट्स की माने रीना राय एवं शत्रुघ्न सिन्हा एक समय एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दे रहे थे। लोग इनकी जोड़ी को खूब पसंद कर रहे थे। दोनों सितारों ने एकसाथ लगभग 16 फिल्में की। जिसमें 11 फिल्में सुपरहिट साबित हुई। रजनीकांत ने कहा मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, सभी रह गये थे दंग, बाद वह हुआ जिसे लोगों ने सोचा नहीं.. आॅन स्क्रीन इनकी जोड़ी हिट हुई तो रियल लाइफ में भी ये एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए। लेकिन कहा जाता है कि रीना राय से नजदीकियां होने के कारण शत्रुघ्न सिन्हा एक्ट्रेस पूनम सिन्हा को दिल दे बैठे और फिर शादी कर ली। शादी के बाद भी रीना राय एवं शत्रुघ्न का अफेयर जारी रहा। जब शत्रुघ्न की पत्नी को रीना राय के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने सख्त रूप अपनाते हुए रीना शत्रुघ्न से दूर रहने हिदायत दे डाली। प्यार में मिले धोखे को रीना राॅय बर्दाश्त न कर सकी और इस दौरान उनकी नजदीकियां पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसीन खान से बढ़ गई। धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गई और फिर दोनों ने शादी कर ली। लेकिन यह शादी काफी दिनों तक न चल सकी और बाद में दोनों के बीच तलाक हो गया। फिलहाल एक्ट्रेस राजनीति में एक्टिव हैं और मुम्बई में अपनी एक एक्टिंग स्कूल चलाती हैं।
रीना राॅय आज अपना तिरेसठवां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रही हैं। रीना राॅय एक समय बाॅलीवुड की टाॅप की एक्ट्रेस में शुमार थी। इस दौरान उनकी जोड़ी बाॅलीवुड के कई स्टारों के साथ खूब जमी। इस दरम्यान उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी। कहा जाता है कि एक दौर में रीना राॅय हाईजेस्ट पेड एक्ट्रेस में शुमार थी। वह उन दिनों हेमा मालिनी एवं रेखा जैसी बड़ी एक्ट्रेस को टक्कर देती थी। रीना राय एक समय अपनी फिल्मों के साथ ही अपने अफेयर को लेकर भी जमकर सुर्खियों में रही। कहा जाता है कि रीना का शत्रुघ्न सिन्हा के साथ जमकर अफेयर चला। जब शत्रुघ्न से उन्हें धोखा मिला तो उन्होंने पाकिस्तान इस शख्स से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली। धीरे दोनों दोनों लोग एक-दूसरे के करीब आ गए और फिर शादी कर ली। लेकिन यहां भी उन्हें धोखा ही मिला। मीडिया रिपोर्ट्स की माने रीना राय एवं शत्रुघ्न सिन्हा एक समय एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दे रहे थे। लोग इनकी जोड़ी को खूब पसंद कर रहे थे। दोनों सितारों ने एकसाथ लगभग सोलह फिल्में की। जिसमें ग्यारह फिल्में सुपरहिट साबित हुई। रजनीकांत ने कहा मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, सभी रह गये थे दंग, बाद वह हुआ जिसे लोगों ने सोचा नहीं.. आॅन स्क्रीन इनकी जोड़ी हिट हुई तो रियल लाइफ में भी ये एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए। लेकिन कहा जाता है कि रीना राय से नजदीकियां होने के कारण शत्रुघ्न सिन्हा एक्ट्रेस पूनम सिन्हा को दिल दे बैठे और फिर शादी कर ली। शादी के बाद भी रीना राय एवं शत्रुघ्न का अफेयर जारी रहा। जब शत्रुघ्न की पत्नी को रीना राय के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने सख्त रूप अपनाते हुए रीना शत्रुघ्न से दूर रहने हिदायत दे डाली। प्यार में मिले धोखे को रीना राॅय बर्दाश्त न कर सकी और इस दौरान उनकी नजदीकियां पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसीन खान से बढ़ गई। धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गई और फिर दोनों ने शादी कर ली। लेकिन यह शादी काफी दिनों तक न चल सकी और बाद में दोनों के बीच तलाक हो गया। फिलहाल एक्ट्रेस राजनीति में एक्टिव हैं और मुम्बई में अपनी एक एक्टिंग स्कूल चलाती हैं।
(राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा) राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षण केंद्र (एनसीएफई) के राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा (एनएफएलएटी) के लिए पंजीकरण 15 अक्टूबर 2016 से शुरू हो गए हैं। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था (एनआईएसएम), नवी मुंबई छठी से दसवीं कक्षा के सभी स्कूली विद्यार्थियों को राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा (एनसीएफई-एनएफएलएटी 2016-17) में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह परीक्षा आनलाइन (पर्याप्त आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले स्कूल के अंदर) और आफलाइन (स्कूल के अंदर पेन और पेपर) के माध्यम से आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो श्रेणियों अर्थात एनएफएलएटी कनिष्ठ (कक्षा 6 से 8) और एनएफएलएटी (कक्षा 9 और 10) में आयोजित की जाएगी। स्कूलों को अपने आपको आनलाइन पंजीकृत करना होगा। स्कूल का पंजीकरण होने के बाद संबंधित स्कूल द्वारा विद्यार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा। स्कूल को आनलाइन/आफलाइन परीक्षा मोड चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। स्कूल को अपने विद्यार्थियों के आनलाइन/आफलाइन परीक्षा का पर्यवेक्षण करना होगा तथा आनलाइन/आफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी किसी भी प्रकार की सहायता एनसीएफई/एनआईएसएम टीम द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूल एनसीएफई की वेबसाइट www.ncfeindia.org/nflat पर अपना नामांकन कर सकते हैं। ।* आनलाइन परीक्षा संबंधित स्कूलों में आयोजित की जाएगी जहां पर्याप्त आईटी इंफ्रास्ट्रक्चरऔर इंटरनेट कनेक्टिविटी है। ** आफलाइन परीक्षा संबंधित स्कूल में पेन और पेपर मोड के माध्यम से आयोजित की जाएगी। एनएफएलएटी और एनएफएलएटी कनिष्ठ परीक्षाओं की समयावधि 60 मिनट होगी और इसमें क्रमशः 75 और 50 प्रश्न होंगे। यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की जाएगी। पाठ्यक्रम से संबंधित ब्यौरे एनसीएफई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय स्कूल विजेताओं (शीर्ष 3 स्कूल) को प्रत्येक को 35000 का नकद ईनाम और एक शील्ड प्रदान की जाएगी तथा स्कूलों के राष्ट्रीय विजेता विद्यार्थियों (1+1 का जोड़ा) को प्रमाण-पत्र, मेडल और लेपटॉप दिए जाएंगे। क्षेत्रीय स्कूल विजेताओं (प्रत्येक अंचल में शीर्ष 3 स्कूल) को प्रत्येक को 25,000 का नकद ईनाम और शील्ड प्रदान की जाएगी तथा क्षेत्रीय विजेता विद्यार्थियों (1+1 का जोड़ा) को प्रमाण-पत्र, मेडल और लेपटॉप दिए जाएंगे। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था, एनएसआईएम भवन, प्लॉट नं. 82, सेक्टर-17, वाशी, नवी मुंबई - 400703, फोनः 022 - 66734600-02 I ई-मेलः nflat@nism.ac.in, वेबसाइटः www.ncfeindia.org I www.nism.ac.in । राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था (एनआईएसएम) को वित्तीय शिक्षण की राष्ट्रीय कार्यनीति के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में चिह्नित किया गया है। इस संबंध में एनआईएसएम ने भारत में सभी वित्तीय क्षेत्र विनियामकों जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) तथा पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की सहायता से राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षण केंद्र स्थापित किया है जिससे कि भारत में एक सहयोगात्मक तरीके से वित्तीय साक्षरता और समावेशन के कार्य को आगे बढ़ाया जा सके। एनसीएफई की राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा (एनसीएफई-एनएफएलएटी) इस दिशा में एक कदम है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करके एनसीएफई की योजना स्कूल विद्यार्थियों को वित्त की अवधारणों को सीखने के लिए प्रेरित करना है और साथ ही उनकी वित्तीय जागरूकता का आकलन भी करना है जिससे कि वे शुरुआती अवस्था में ही महत्वपूर्ण जीवन कौशल विकसित कर सके जिनसे बाद में अच्छे वित्तीय निर्णय ले सकेंगे।
राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षण केंद्र के राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा के लिए पंजीकरण पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार सोलह से शुरू हो गए हैं। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था , नवी मुंबई छठी से दसवीं कक्षा के सभी स्कूली विद्यार्थियों को राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह परीक्षा आनलाइन और आफलाइन के माध्यम से आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो श्रेणियों अर्थात एनएफएलएटी कनिष्ठ और एनएफएलएटी में आयोजित की जाएगी। स्कूलों को अपने आपको आनलाइन पंजीकृत करना होगा। स्कूल का पंजीकरण होने के बाद संबंधित स्कूल द्वारा विद्यार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा। स्कूल को आनलाइन/आफलाइन परीक्षा मोड चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। स्कूल को अपने विद्यार्थियों के आनलाइन/आफलाइन परीक्षा का पर्यवेक्षण करना होगा तथा आनलाइन/आफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी किसी भी प्रकार की सहायता एनसीएफई/एनआईएसएम टीम द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूल एनसीएफई की वेबसाइट www.ncfeindia.org/nflat पर अपना नामांकन कर सकते हैं। ।* आनलाइन परीक्षा संबंधित स्कूलों में आयोजित की जाएगी जहां पर्याप्त आईटी इंफ्रास्ट्रक्चरऔर इंटरनेट कनेक्टिविटी है। ** आफलाइन परीक्षा संबंधित स्कूल में पेन और पेपर मोड के माध्यम से आयोजित की जाएगी। एनएफएलएटी और एनएफएलएटी कनिष्ठ परीक्षाओं की समयावधि साठ मिनट होगी और इसमें क्रमशः पचहत्तर और पचास प्रश्न होंगे। यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की जाएगी। पाठ्यक्रम से संबंधित ब्यौरे एनसीएफई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय स्कूल विजेताओं को प्रत्येक को पैंतीस हज़ार का नकद ईनाम और एक शील्ड प्रदान की जाएगी तथा स्कूलों के राष्ट्रीय विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मेडल और लेपटॉप दिए जाएंगे। क्षेत्रीय स्कूल विजेताओं को प्रत्येक को पच्चीस,शून्य का नकद ईनाम और शील्ड प्रदान की जाएगी तथा क्षेत्रीय विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मेडल और लेपटॉप दिए जाएंगे। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था, एनएसआईएम भवन, प्लॉट नं. बयासी, सेक्टर-सत्रह, वाशी, नवी मुंबई - चार लाख सात सौ तीन, फोनः बाईस - छः करोड़ सरसठ लाख चौंतीस हज़ार छः सौ-दो I ई-मेलः nflat@nism.ac.in, वेबसाइटः www.ncfeindia.org I www.nism.ac.in । राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्था को वित्तीय शिक्षण की राष्ट्रीय कार्यनीति के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में चिह्नित किया गया है। इस संबंध में एनआईएसएम ने भारत में सभी वित्तीय क्षेत्र विनियामकों जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड , बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण तथा पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण की सहायता से राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षण केंद्र स्थापित किया है जिससे कि भारत में एक सहयोगात्मक तरीके से वित्तीय साक्षरता और समावेशन के कार्य को आगे बढ़ाया जा सके। एनसीएफई की राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता आकलन परीक्षा इस दिशा में एक कदम है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करके एनसीएफई की योजना स्कूल विद्यार्थियों को वित्त की अवधारणों को सीखने के लिए प्रेरित करना है और साथ ही उनकी वित्तीय जागरूकता का आकलन भी करना है जिससे कि वे शुरुआती अवस्था में ही महत्वपूर्ण जीवन कौशल विकसित कर सके जिनसे बाद में अच्छे वित्तीय निर्णय ले सकेंगे।
Telangana 12th Result Out: तेलंगाना स्टेट बोर्ड की इंटर की परीक्षा का रिजल्ट वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in, results.cgg.gov.in, manabadi.com, और manabadi.co.in पर जाकर चेक किया जा सकता है. TSBIE Inter Result Declared: तेलंगाना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन (TSBIE) ने कक्षा 12 का रिजल्ट जारी कर दिया है. TS इंटर रिजल्ट 2021 की वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in, results.cgg.gov.in, manabadi.com, और manabadi.co.in पर जारी किया गया है. छात्र अपना रिजल्ट इनमें से किसी भी वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं. महामारी के कारण, तेलंगाना सरकार ने सभी 4.5 लाख छात्रों को प्रमोट करने का फैसला किया था. ऐसा पहली बार है कि बोर्ड ने 100 फीसदी रिजल्ट दिया है, जिसका अर्थ है कि इस वर्ष सभी छात्र पास कर दिए गए हैं. वर्तमान में कक्षा 11 में और 2022 के टीएस इंटर बैच के लिए, तेलंगाना सरकार ने सभी स्कूलों को 1 जुलाई से फिर से खोलने का फैसला किया है. सभी छात्रों ने प्रैक्टिकल में पूरे अंक प्राप्त किए, जबकि थ्योरी के अंकों के रिजल्ट कक्षा 11 में उनके रिजल्ट के आधार पर होते हैं. अधिकांश छात्रों को फर्स्ट डिवीजन रैंक मिली है. 1.76 लाख से अधिक छात्रों ने ए ग्रेड प्राप्त किया. 1,04,886 छात्रों ने बी प्राप्त किया और 61,887 छात्रों ने सी ग्रेड प्राप्त किया. जबकि 1.08 लाख ने डी ग्रेड प्राप्त किया. छात्र नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक कर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. स्टेप 1: सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in पर जाएं. स्टेप 2: इसके बाद यहां पर दिए गए रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप 3: अब अपना रोल नंबर और जन्म तिथि आदि भरकर सबमिट करें. स्टेप 4: आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा. स्टेप 5: अपना रिजल्ट चेक कर लें. स्टेप 6: भविष्य के लिए अपने रिजल्ट का प्रिंट ले लें. तेलंगाना बोर्ड ने इंटर परीक्षा के छात्रों को टीएस इंटर रिजल्ट 2021 पर प्रश्नों के समाधान के लिए एक हेल्प डेस्क भी प्रदान किया है. छात्र अपनी शिकायत 040-24600110 और bigrs.telangana.gov.in पर कर सकते हैं.
Telangana बारहth Result Out: तेलंगाना स्टेट बोर्ड की इंटर की परीक्षा का रिजल्ट वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in, results.cgg.gov.in, manabadi.com, और manabadi.co.in पर जाकर चेक किया जा सकता है. TSBIE Inter Result Declared: तेलंगाना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन ने कक्षा बारह का रिजल्ट जारी कर दिया है. TS इंटर रिजल्ट दो हज़ार इक्कीस की वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in, results.cgg.gov.in, manabadi.com, और manabadi.co.in पर जारी किया गया है. छात्र अपना रिजल्ट इनमें से किसी भी वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं. महामारी के कारण, तेलंगाना सरकार ने सभी चार.पाँच लाख छात्रों को प्रमोट करने का फैसला किया था. ऐसा पहली बार है कि बोर्ड ने एक सौ फीसदी रिजल्ट दिया है, जिसका अर्थ है कि इस वर्ष सभी छात्र पास कर दिए गए हैं. वर्तमान में कक्षा ग्यारह में और दो हज़ार बाईस के टीएस इंटर बैच के लिए, तेलंगाना सरकार ने सभी स्कूलों को एक जुलाई से फिर से खोलने का फैसला किया है. सभी छात्रों ने प्रैक्टिकल में पूरे अंक प्राप्त किए, जबकि थ्योरी के अंकों के रिजल्ट कक्षा ग्यारह में उनके रिजल्ट के आधार पर होते हैं. अधिकांश छात्रों को फर्स्ट डिवीजन रैंक मिली है. एक.छिहत्तर लाख से अधिक छात्रों ने ए ग्रेड प्राप्त किया. एक,चार,आठ सौ छियासी छात्रों ने बी प्राप्त किया और इकसठ,आठ सौ सत्तासी छात्रों ने सी ग्रेड प्राप्त किया. जबकि एक.आठ लाख ने डी ग्रेड प्राप्त किया. छात्र नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक कर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. स्टेप एक: सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट tsbie.cgg.gov.in पर जाएं. स्टेप दो: इसके बाद यहां पर दिए गए रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप तीन: अब अपना रोल नंबर और जन्म तिथि आदि भरकर सबमिट करें. स्टेप चार: आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा. स्टेप पाँच: अपना रिजल्ट चेक कर लें. स्टेप छः: भविष्य के लिए अपने रिजल्ट का प्रिंट ले लें. तेलंगाना बोर्ड ने इंटर परीक्षा के छात्रों को टीएस इंटर रिजल्ट दो हज़ार इक्कीस पर प्रश्नों के समाधान के लिए एक हेल्प डेस्क भी प्रदान किया है. छात्र अपनी शिकायत चालीस-दो करोड़ छियालीस लाख एक सौ दस और bigrs.telangana.gov.in पर कर सकते हैं.
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते हैं। वह अभी टीम के साथ न्यूजीलैंड में हैं। वनडे सीरीज के तीसरे मैच के बाद वह सीरीज से वापस लौट जायेंगे। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान विराट कोहली ने मीडिया इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने अपने खेल और जिंदगी के बारे में कई खुलासे किये। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते हैं। वह अभी टीम के साथ न्यूजीलैंड में हैं। वनडे सीरीज के तीसरे मैच के बाद वह सीरीज से वापस लौट जायेंगे। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के दौरान विराट कोहली ने मीडिया इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने अपने खेल और जिंदगी के बारे में कई खुलासे किये। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें। अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें और साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपको जल्दी पहुंचा सकें।
90 के दशक में कई ऐसी फिल्में आईं जिनमें एक्टर्स ने डबर रोल प्ले किया। इनमें से कई सुपरहिट साबित हुईं। एक बार फिर से आने वाले कुछ महीनों में ऐसी तमाम फिल्में रिलीज होने वाली हैं जिनमें कई बड़े सुपरस्टार्स डबल रोल में नजर आएंगे। आइए जानते हैं उनके नामः शमशेरा में रणबीर कपूर पिता और पुत्र के डबल रोल में नजर आएंगे। एटली कुमार के डायरेक्शन में बन रही फिल्म जवान में शाहरुख खान दोहरी भूमिका में दिखेंगे। रोहित शेट्टी की अपकमिंग फिल्म सर्कस में रणवीर सिंह का डबल रोल है। प्रशांत नील की फिल्म सालार में प्रभास का डबल रोल है। साउथ सुपरस्टार डायरेक्टर शंकर की आने वाली फिल्म आरसी 15 में राम चरण डबल रोल प्ले कर रहे हैं। मणिरत्नम की आने वाली फिल्म पोन्नियिन सेल्वन में ऐश्वर्या राय का डबल रोल है। वह राजकुमारी नंदिनी और उनकी मां मंदाकिनी देवी के रोल में दिखेंगी। आदित्य रॉय कपूर अपनी अगली फिल्म गुमराह में दो जुड़वा भाइयों के रोल में नजर आएंगे। अनीस बज्मी की अपकमिंग फिल्म नो एंट्री 2 में अनिल कपूर, सलमान खान और फरदीन खान, तीनों डबल रोल में नजर आने वाले हैं।
नब्बे के दशक में कई ऐसी फिल्में आईं जिनमें एक्टर्स ने डबर रोल प्ले किया। इनमें से कई सुपरहिट साबित हुईं। एक बार फिर से आने वाले कुछ महीनों में ऐसी तमाम फिल्में रिलीज होने वाली हैं जिनमें कई बड़े सुपरस्टार्स डबल रोल में नजर आएंगे। आइए जानते हैं उनके नामः शमशेरा में रणबीर कपूर पिता और पुत्र के डबल रोल में नजर आएंगे। एटली कुमार के डायरेक्शन में बन रही फिल्म जवान में शाहरुख खान दोहरी भूमिका में दिखेंगे। रोहित शेट्टी की अपकमिंग फिल्म सर्कस में रणवीर सिंह का डबल रोल है। प्रशांत नील की फिल्म सालार में प्रभास का डबल रोल है। साउथ सुपरस्टार डायरेक्टर शंकर की आने वाली फिल्म आरसी पंद्रह में राम चरण डबल रोल प्ले कर रहे हैं। मणिरत्नम की आने वाली फिल्म पोन्नियिन सेल्वन में ऐश्वर्या राय का डबल रोल है। वह राजकुमारी नंदिनी और उनकी मां मंदाकिनी देवी के रोल में दिखेंगी। आदित्य रॉय कपूर अपनी अगली फिल्म गुमराह में दो जुड़वा भाइयों के रोल में नजर आएंगे। अनीस बज्मी की अपकमिंग फिल्म नो एंट्री दो में अनिल कपूर, सलमान खान और फरदीन खान, तीनों डबल रोल में नजर आने वाले हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सफल और सम्पन्न खेती नहीं हो सकती और पाँच एकड़ या एक एकड़ की खेती पर एक जोड़ी बैल या अन्य उपर्युक्त साधनों का भार बहन नहीं किया जा सकता। पहली बात तो यह है कि एक के बजाय कई परिवार साधनों का सम्मिलित एवं सहयोगी उपयोग करेंगे। एक कुएँ से कई खेतों की सिंचाई और एक जोड़ी बैल से कई की जोताई-बीआई हो सकती है। इसके अलावा चीन और जापान ने जमीन के छोटे से छोटे टुकड़ों को लेकर, बिना हल- बैल, खेती का उच्चतम मान स्थापित किया है। खेती केवल बैलों से ही नहीं, कुदाल और फावड़ों से भी की जाती है। इन तरीकों से केवल खेती हुई है सो बात नहीं, राष्ट्रीय उपज का श्रेष्ठतम मान भी स्थापित किया गया है। कल तक जो चीन भूख और रोग का शिकार था आज वह इन्हीं तरीकों से सुखी और अन्न-सम्पन्न है। कल का अभावग्रस्त चीन आज भारत जैसे कभी के अन्नसम्पन्न देश की क्षुधा निवारण के लिए अन्न देने जा रहा है। जापान जैसा पथरीला देश भी छोटे-छोटे टुकड़ों में कुदाल-फावड़ों से ग्वेती करके आज भारतीय अन्नाभाव से मुक्त हैं ।' स्वयं विनोबा जी ने अपने पावनार आश्रम में इसका सफल नमूना पेश किया है। युद्धग्रस्त इङ्गलैण्ड ने "फावड़ों की खेती" (हार्बेस्ट आवू द स्पेड ) से राष्ट्र की ग्वाद्य समस्या को हल करने १. चीन और जापान का उल्लेख करते समय हमारा लक्ष्य केवल उनके साम्पत्तिक परिमाण पर ही है। परन्तु साम्पत्तिक उत्पादन में जहाँ समाज-दर्शन ( Social Philosophy ) का प्रश्न उठता है वहाँ गांधी विचारधारा की रचनात्मक पद्धति उन सबसे कुल अलग, अपना स्वतन्त्र स्वरूप प्रकट करती है, इसे ध्यान में रखने की जरूरत है। गांधी विचारधारा में "विकेन्द्रीकरण" और "स्वावलम्बन", दो सूत्रात्मक शब्द आते हैं। यहाँ ये दोनों शब्द अन्योन्याश्रित भी माने जाते हैं। आज औद्योगिक देशों में भी विकेन्द्रीकरण की गर्म चर्चा है । इसका वहाँ केवल इतना ही अर्थ समझा जाता है कि बड़े-बड़े उद्योग और कारखानों का किसी एक स्थान पर संगठित और केन्द्रित रूप से काम न चना कर उन्हें अग-अलग स्थानों में टुकड़े-टुकड़े करके चलाया जाये; चूँकि यह केन्द्र में नहीं रहा इसलिए इसे केन्द्रित के विरुद्ध विकेन्द्रित नाम दिया जाता है। परन्तु गांधी का 'विकेन्द्रीकरण इससे बहुत आगे, बिल्कुल अलग की चीज है । "औद्योगिक विकेन्द्रीकरण और "रचनात्मक ( गान्धी ) विकेन्द्रीकरण में अन्तर यह है कि एक विकेन्द्रित होकर भी किसी एक केन्द्र से ही जीवन और गति प्राप्त करता है, किसी एक केन्द्र के ही नियन्त्रण में रहता है, जब कि गान्धी के विकेन्द्रीकरण में स्वावलम्बन और क्षेत्रस्थ स्वसम्पन्नता पहली शर्त है। रचनात्मक विकेन्द्रीकरण में संपुष्ट इकाइयों के योग से ही किसी सुदृढ़ केन्द्र का रूप स्थिर होता है, किसी सर्वग्राही केन्द्र के बल से निर्जीव, निःस्व, इकाइयों का परिचालन नहीं होता। (पृठ २६८ पर) की चेष्टा की थी. ( देखें "अन्नपूर्णा ", स० सा० सं० ) वस्तुतः (केवल जमीन की लम्बाई पर "आर्थिक पर्याप्त" की हद नहीं कायम की जा सकती, इसके साथ और भी अनेकों विचारणीय प्रश्न हैं । ३० गज x ६० गज का टुकड़ा पर्याप्त हो सकता है जब कि १०० एकड़ भी अपर्याप्त हो सकता है। इसका भी किशोरलाल भाई ने बहुत ही स्पष्ट रूप से 'हरिजन' में खुलासा किया है । २२१, आज संसार के सामने अन्नोत्पादन की विकट समस्या उपस्थिन हैं । अमेरिकी कृषि विभाग के प्रसिद्ध भू-वेत्ता, डा० चाल्स ई० केलॉग का अनुमान है कि संसार में इस समय दो अरब तीस करोड़ (२३००००००००) एकड़ भूमि अन्नोत्पादन के काम के लिए खाली पड़ी है। इस विशाल भू-खण्ड पर छोटे-छोटे परिवारों को बसा कर आसानी के साथ संसार की अन्न समस्या को हल किया जा सकता है और साथ ही साथ संसार की वेकारी की समस्या का समाधान भी प्राप्त हो सकता है। भारत के योजना आयोग का विचार है कि लगभग दस करोड़ ( १००००००००) किसानों को खेती से अलग करके दूसरे धन्धों में लगाने की जरूरन है जो असम्भव सा ही मालूम होता है। इसका हल विनोबा जी के भू-दान-यज्ञ और स्वावलम्बी साम्ययोग में प्राप्त होगा । यहाँ भोजन की गारण्टी और सबके लिए पूरे काम की व्यवस्था है । विडम्बना तो यह है कि आज देश में एक और भयंकर बेकारी और दूसरी ओर भूख और अभाव की बढ़ती हुई पेचीदगियों ने हमारे ऊपर दुहरी जिम्मेदारी लाद दी है - लोगों को पूरा काम और भरपेट भोजन मिलना चाहिये । यही ईमानदारी और नैतिकता है, यही सच्ची राजनीति रचनात्मक पद्धति में उद्योग धन्धे स्वावलम्बी और स्व-सम्पन्न होते हैं, केन्द्रों के विक्रय या वितरण भण्डार (Sale or Distributing depots ) नहीं होते। इसीलिए 'विकेन्द्रीकरण होते हुए भी वहाँ लोकशाही और जन-शक्ति के बजाय तानाशाही ( totalitarianism ) और 'कटरे' ( Regimentation ) की सत्ता रहती है। वहाँ मनुष्यों को कल-पुर्जों और पशुओं के समान चलाया और हाँका जाता है, परन्तु रचनात्मक पद्धति में प्रत्येक व्यक्ति स्वावलम्बी और समर्थ होने के कारण कुल का एक चेतन इकाई बनता है । जमीन के पुनर्वितरण की पाश्चात्य कल्पना और भू-दान-यज्ञ की रचनात्मक पीठिका में भी यही सैद्धांतिक अन्तर है। चीन और जापान की भूमि समस्या को समझते हुए इस बात को ध्यान में रखना होगा।
सफल और सम्पन्न खेती नहीं हो सकती और पाँच एकड़ या एक एकड़ की खेती पर एक जोड़ी बैल या अन्य उपर्युक्त साधनों का भार बहन नहीं किया जा सकता। पहली बात तो यह है कि एक के बजाय कई परिवार साधनों का सम्मिलित एवं सहयोगी उपयोग करेंगे। एक कुएँ से कई खेतों की सिंचाई और एक जोड़ी बैल से कई की जोताई-बीआई हो सकती है। इसके अलावा चीन और जापान ने जमीन के छोटे से छोटे टुकड़ों को लेकर, बिना हल- बैल, खेती का उच्चतम मान स्थापित किया है। खेती केवल बैलों से ही नहीं, कुदाल और फावड़ों से भी की जाती है। इन तरीकों से केवल खेती हुई है सो बात नहीं, राष्ट्रीय उपज का श्रेष्ठतम मान भी स्थापित किया गया है। कल तक जो चीन भूख और रोग का शिकार था आज वह इन्हीं तरीकों से सुखी और अन्न-सम्पन्न है। कल का अभावग्रस्त चीन आज भारत जैसे कभी के अन्नसम्पन्न देश की क्षुधा निवारण के लिए अन्न देने जा रहा है। जापान जैसा पथरीला देश भी छोटे-छोटे टुकड़ों में कुदाल-फावड़ों से ग्वेती करके आज भारतीय अन्नाभाव से मुक्त हैं ।' स्वयं विनोबा जी ने अपने पावनार आश्रम में इसका सफल नमूना पेश किया है। युद्धग्रस्त इङ्गलैण्ड ने "फावड़ों की खेती" से राष्ट्र की ग्वाद्य समस्या को हल करने एक. चीन और जापान का उल्लेख करते समय हमारा लक्ष्य केवल उनके साम्पत्तिक परिमाण पर ही है। परन्तु साम्पत्तिक उत्पादन में जहाँ समाज-दर्शन का प्रश्न उठता है वहाँ गांधी विचारधारा की रचनात्मक पद्धति उन सबसे कुल अलग, अपना स्वतन्त्र स्वरूप प्रकट करती है, इसे ध्यान में रखने की जरूरत है। गांधी विचारधारा में "विकेन्द्रीकरण" और "स्वावलम्बन", दो सूत्रात्मक शब्द आते हैं। यहाँ ये दोनों शब्द अन्योन्याश्रित भी माने जाते हैं। आज औद्योगिक देशों में भी विकेन्द्रीकरण की गर्म चर्चा है । इसका वहाँ केवल इतना ही अर्थ समझा जाता है कि बड़े-बड़े उद्योग और कारखानों का किसी एक स्थान पर संगठित और केन्द्रित रूप से काम न चना कर उन्हें अग-अलग स्थानों में टुकड़े-टुकड़े करके चलाया जाये; चूँकि यह केन्द्र में नहीं रहा इसलिए इसे केन्द्रित के विरुद्ध विकेन्द्रित नाम दिया जाता है। परन्तु गांधी का 'विकेन्द्रीकरण इससे बहुत आगे, बिल्कुल अलग की चीज है । "औद्योगिक विकेन्द्रीकरण और "रचनात्मक विकेन्द्रीकरण में अन्तर यह है कि एक विकेन्द्रित होकर भी किसी एक केन्द्र से ही जीवन और गति प्राप्त करता है, किसी एक केन्द्र के ही नियन्त्रण में रहता है, जब कि गान्धी के विकेन्द्रीकरण में स्वावलम्बन और क्षेत्रस्थ स्वसम्पन्नता पहली शर्त है। रचनात्मक विकेन्द्रीकरण में संपुष्ट इकाइयों के योग से ही किसी सुदृढ़ केन्द्र का रूप स्थिर होता है, किसी सर्वग्राही केन्द्र के बल से निर्जीव, निःस्व, इकाइयों का परिचालन नहीं होता। की चेष्टा की थी. वस्तुतः एकड़ भूमि अन्नोत्पादन के काम के लिए खाली पड़ी है। इस विशाल भू-खण्ड पर छोटे-छोटे परिवारों को बसा कर आसानी के साथ संसार की अन्न समस्या को हल किया जा सकता है और साथ ही साथ संसार की वेकारी की समस्या का समाधान भी प्राप्त हो सकता है। भारत के योजना आयोग का विचार है कि लगभग दस करोड़ किसानों को खेती से अलग करके दूसरे धन्धों में लगाने की जरूरन है जो असम्भव सा ही मालूम होता है। इसका हल विनोबा जी के भू-दान-यज्ञ और स्वावलम्बी साम्ययोग में प्राप्त होगा । यहाँ भोजन की गारण्टी और सबके लिए पूरे काम की व्यवस्था है । विडम्बना तो यह है कि आज देश में एक और भयंकर बेकारी और दूसरी ओर भूख और अभाव की बढ़ती हुई पेचीदगियों ने हमारे ऊपर दुहरी जिम्मेदारी लाद दी है - लोगों को पूरा काम और भरपेट भोजन मिलना चाहिये । यही ईमानदारी और नैतिकता है, यही सच्ची राजनीति रचनात्मक पद्धति में उद्योग धन्धे स्वावलम्बी और स्व-सम्पन्न होते हैं, केन्द्रों के विक्रय या वितरण भण्डार नहीं होते। इसीलिए 'विकेन्द्रीकरण होते हुए भी वहाँ लोकशाही और जन-शक्ति के बजाय तानाशाही और 'कटरे' की सत्ता रहती है। वहाँ मनुष्यों को कल-पुर्जों और पशुओं के समान चलाया और हाँका जाता है, परन्तु रचनात्मक पद्धति में प्रत्येक व्यक्ति स्वावलम्बी और समर्थ होने के कारण कुल का एक चेतन इकाई बनता है । जमीन के पुनर्वितरण की पाश्चात्य कल्पना और भू-दान-यज्ञ की रचनात्मक पीठिका में भी यही सैद्धांतिक अन्तर है। चीन और जापान की भूमि समस्या को समझते हुए इस बात को ध्यान में रखना होगा।
बथनाहा। थाना क्षेत्र के कमलदह गांव में विगत रविवार को दुपट्टा के फंदे से घर में लटकी मिली महिला के शव के मामले में बुधवार को मृतका के पति आलम अंसारी के बयान पर स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें ग्रामीण हैदर अंसारी, फरीद अंसारी, सोबराती अंसारी सहित नौ लोगों को नामजद करते हुए पूर्व की विवाद को लेकर मृतका शबाना खातून की हत्या करने का आरोप लगाया गया है। मालूम हो कि मो. आलम अंसारी आरा जिले में मजदूरी करने गया था। घर पर 30 वर्षिय उसकी पत्नी शबाना अकेली रहती थी। (एसं. )
बथनाहा। थाना क्षेत्र के कमलदह गांव में विगत रविवार को दुपट्टा के फंदे से घर में लटकी मिली महिला के शव के मामले में बुधवार को मृतका के पति आलम अंसारी के बयान पर स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें ग्रामीण हैदर अंसारी, फरीद अंसारी, सोबराती अंसारी सहित नौ लोगों को नामजद करते हुए पूर्व की विवाद को लेकर मृतका शबाना खातून की हत्या करने का आरोप लगाया गया है। मालूम हो कि मो. आलम अंसारी आरा जिले में मजदूरी करने गया था। घर पर तीस वर्षिय उसकी पत्नी शबाना अकेली रहती थी।
एकता कपूर को विश्वास है की, रजत टोकस और श्वेता बासु की जोड़ी छोटे परदे पर बिजलियाँ गिराएगी! 'चंद्रनंदिनी' में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की कहानी हैं जो की नफरत से लिखी गई मोहब्बत की दास्तां है। आज से टेलीकास्ट होने वाला शो 'चंद्र नंदिनी' का इंतजार दर्शक बेसब्री से कर रहे हैं। जिस तरह सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की प्रेम कहानी को प्रमोट किया जा रहा हैं उससे शो को देखने की जिज्ञासा बढ़ गयी हैं। प्रोमो देखने से यह जरूर लगता है कि यह एक प्रेम कहानी नहीं बल्कि बदले की भावना पर रची गई कहानी हो। शो 'चंद्र नंदिनी' के जरिए चंद्रगुप्त और उनकी योद्धा पत्नी राजकुमारी नंदिनी की प्रेम कहानी के बारे में बताया गया हैं। शो शाही जोड़े की कहानी और चंद्रगुप्त मौर्य की जिंदगी के अनछुए पन्नों को पलटेगी, जहां एक-दूसरे से नफरत करने वाले दो लोग एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं। शो मेकर्स एकता कपूर चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की कहानी नया अंदाज में दर्शको के सामने पेश करेगी, साथ ही दर्शको को लुभाने के लिए कहानी में अलग अलग ट्रैक डाले जायेंगे। जिससे शो में बहुत सारे धमाकेदार ट्विस एंड टन आएगे। 'चंद्र नंदिनी' शो में एक बार फिर रजत टोकस नजर आएंगे। इस बारे में एकता का कहना था कि वह अपने काम को लेकर बहुत सेंसटिव हैं इसीलिए उन्हें इस शो में लिया गया। रजत का कहना था, 'मैं ताकतवर सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का किरदार निभाने को लेकर बहुत उत्सुक हूं। उसकी और नंदिनी की कहानी टीवी पर अब तक दिखे शो से कतई अलग है। यह नफरत से लिखी गई मोहब्बत की दास्तां है। 'मकड़ी' और 'इकबाल' फिल्म में नजर आईं श्वेता बसु प्रसाद राजकुमारी नंदिनी के किरदार में नजर आएंगी। शो में अर्पित रंका राजा पद्मानंद, पापिया सेनगुप्ता मूरा, मानसी शर्मा रानी अवंतिका और मराठी कलाकार मनोज कोल्हाटकर चाणक्य के किरदार में है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
एकता कपूर को विश्वास है की, रजत टोकस और श्वेता बासु की जोड़ी छोटे परदे पर बिजलियाँ गिराएगी! 'चंद्रनंदिनी' में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की कहानी हैं जो की नफरत से लिखी गई मोहब्बत की दास्तां है। आज से टेलीकास्ट होने वाला शो 'चंद्र नंदिनी' का इंतजार दर्शक बेसब्री से कर रहे हैं। जिस तरह सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की प्रेम कहानी को प्रमोट किया जा रहा हैं उससे शो को देखने की जिज्ञासा बढ़ गयी हैं। प्रोमो देखने से यह जरूर लगता है कि यह एक प्रेम कहानी नहीं बल्कि बदले की भावना पर रची गई कहानी हो। शो 'चंद्र नंदिनी' के जरिए चंद्रगुप्त और उनकी योद्धा पत्नी राजकुमारी नंदिनी की प्रेम कहानी के बारे में बताया गया हैं। शो शाही जोड़े की कहानी और चंद्रगुप्त मौर्य की जिंदगी के अनछुए पन्नों को पलटेगी, जहां एक-दूसरे से नफरत करने वाले दो लोग एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं। शो मेकर्स एकता कपूर चंद्रगुप्त मौर्य और राजकुमारी नंदनी की कहानी नया अंदाज में दर्शको के सामने पेश करेगी, साथ ही दर्शको को लुभाने के लिए कहानी में अलग अलग ट्रैक डाले जायेंगे। जिससे शो में बहुत सारे धमाकेदार ट्विस एंड टन आएगे। 'चंद्र नंदिनी' शो में एक बार फिर रजत टोकस नजर आएंगे। इस बारे में एकता का कहना था कि वह अपने काम को लेकर बहुत सेंसटिव हैं इसीलिए उन्हें इस शो में लिया गया। रजत का कहना था, 'मैं ताकतवर सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का किरदार निभाने को लेकर बहुत उत्सुक हूं। उसकी और नंदिनी की कहानी टीवी पर अब तक दिखे शो से कतई अलग है। यह नफरत से लिखी गई मोहब्बत की दास्तां है। 'मकड़ी' और 'इकबाल' फिल्म में नजर आईं श्वेता बसु प्रसाद राजकुमारी नंदिनी के किरदार में नजर आएंगी। शो में अर्पित रंका राजा पद्मानंद, पापिया सेनगुप्ता मूरा, मानसी शर्मा रानी अवंतिका और मराठी कलाकार मनोज कोल्हाटकर चाणक्य के किरदार में है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद ) ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद ) ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
सर्दी के मौसम में कई लोग ठंड के मारे नहाने से कतराते हैं वही, कुछ लोग रोज नहाने में विश्वास रखते हैं। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसा शख्स भी है जो पिछले 67 साल से नहीं नहाया। लोग इस शख्स को दुनिया का सबसे गंदा और घिनौना आदमी कहते हैं, लेकिन उसकी अपनी पसंद है। दुनिया के इस सबसे गंदे आदमी का नाम Amou Jaji है जो अब 87 साल का हो चुका है। Amou Jaji ईरान के Dejgah गांव का रहने वाला है। यह शख्स आज से करीब 67 साल पहले यानि 20 साल की उम्र में आखिरी बार नहाया था। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले 67 साल से नहीं नहाने के बावजूद Amou Jaji एकदम स्वस्थ है। डॉक्टरों ने Amou Jaji के कई टेस्ट किए लेकिन हर बार वो स्वस्थ मिला और कोई भी बीमारी नहीं। अपने नहीं नहाने की वजह को लेकर Amou Jaji का कहना है कि नहाना उसके लिए अशुभ होता है क्योंकि ऐसा करने पर वो मर जाएगा। खबर है कि Amou Jaji सिर्फ नहाने के मामले में ही गंदा नहीं बल्कि वो खाने के मामले में भी गंदा है। वो सड़क पर मरे पड़े जानवरों को खाता है। इसके अलावा वो नाली का पानी भी पीता। Amou Jaji को साही खाना बहुत पसंद है। Amou Jaji के लाइफस्टाइल की वजह से उसका कोई दोस्त नहीं है। क्योंकि उससें इतनी बदबू आती है कि कोई उसके पास नहीं आना चाहता। हालांकि, अपनी इस अनोखी खूबी की वजह से Amou Jaji वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वैज्ञानिक और डॉक्टर रिसर्च के लिए Amou Jaji के पास आते रहते हैं।
सर्दी के मौसम में कई लोग ठंड के मारे नहाने से कतराते हैं वही, कुछ लोग रोज नहाने में विश्वास रखते हैं। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसा शख्स भी है जो पिछले सरसठ साल से नहीं नहाया। लोग इस शख्स को दुनिया का सबसे गंदा और घिनौना आदमी कहते हैं, लेकिन उसकी अपनी पसंद है। दुनिया के इस सबसे गंदे आदमी का नाम Amou Jaji है जो अब सत्तासी साल का हो चुका है। Amou Jaji ईरान के Dejgah गांव का रहने वाला है। यह शख्स आज से करीब सरसठ साल पहले यानि बीस साल की उम्र में आखिरी बार नहाया था। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले सरसठ साल से नहीं नहाने के बावजूद Amou Jaji एकदम स्वस्थ है। डॉक्टरों ने Amou Jaji के कई टेस्ट किए लेकिन हर बार वो स्वस्थ मिला और कोई भी बीमारी नहीं। अपने नहीं नहाने की वजह को लेकर Amou Jaji का कहना है कि नहाना उसके लिए अशुभ होता है क्योंकि ऐसा करने पर वो मर जाएगा। खबर है कि Amou Jaji सिर्फ नहाने के मामले में ही गंदा नहीं बल्कि वो खाने के मामले में भी गंदा है। वो सड़क पर मरे पड़े जानवरों को खाता है। इसके अलावा वो नाली का पानी भी पीता। Amou Jaji को साही खाना बहुत पसंद है। Amou Jaji के लाइफस्टाइल की वजह से उसका कोई दोस्त नहीं है। क्योंकि उससें इतनी बदबू आती है कि कोई उसके पास नहीं आना चाहता। हालांकि, अपनी इस अनोखी खूबी की वजह से Amou Jaji वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वैज्ञानिक और डॉक्टर रिसर्च के लिए Amou Jaji के पास आते रहते हैं।
(Sentosa Island) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की वार्ता के लिये सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप को चुना गया है, यह द्वीप विश्व के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। इस शिखर सम्मेलन के लिये सेंटोसा द्वीप को चुने जाने का निर्णय तार्किक है। यह सिंगापुर के मुख्य द्वीप के दक्षिणी तट से केवल आधा किलोमीटर दूर एक जलडमरू (Strait) के पार स्थित है। काफी एकांत में स्थित होने के कारण यह द्वीप न केवल गोपनीयता प्रदान करता है बल्कि दोनों देशों के नेताओं के लिये एक सुरक्षित जगह भी है। - इतिहास में यहाँ 400 से अधिक एलायड ट्रूप्स (सहयोगी सेना) के सैनिकों को कठोर स्थितियों में कैदी बनाकर रखने का उल्लेख मिलता था। - वर्ष 1942 में सिंगापुर पर जापानियों ने कब्जा कर लिया था। जिसके बाद यहाँ जापान विरोधी विचारधारा वाले लोगों की बड़ी संख्या में हत्या कर दी गई। सिंगापुर में रहने वाले चीनी नागरिकों सहित जापान विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले या संदेह वाले स्थानीय नागरिकों को सेंटोसा द्वीप पर फाँसी दे दी जाती थी। - यह एक ब्रिटिश सैन्य बेस और एक जापानी युद्ध बंदी शिविर (prisoner of war camp) रहा है। - 1972 तक सेंटोसा द्वीप को 'पुलाऊ बेलाकांग मति' (Pulau Blakang Mati) अर्थात् मृत्यु का द्वीप (Island of death from behind) नाम से जाना जाता था। - इसके बाद एक सरकारी अभियान के भाग के रूप में इसका नाम बदलकर रिसॉर्ट द्वीप कर दिया गया। हाल ही में हरियाणा के गुरुग्राम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority-DLSA) का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस (Digital Front Office) शुरू किया गया। यह देश का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो इस मॉडल को हरियाणा के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। - डिजिटल फ्रंट ऑफिस की स्थापना के बाद डीएलएसए का समस्त रिकॉर्ड डिजिटाइज़ किया जाएगा। अभी तक इन सभी रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिये रजिस्टरों का उपयोग किया जाता है। - फ्रंट ऑफिस से डीएलएसए के पास मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने हेतु आने वाले प्रार्थी को पैनल के किस अधिवक्ता के पास भेजा जाएगा, मामले की सुनवाई की तारीख आदि के संबंध में सभी जानकारियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। - डिजिटल फ्रंट ऑफिस को कॉल सेंटर से कनेक्ट किया जाएगा, ताकि किसी भी अभावग्रस्त व्यक्ति को फोन करके भी बताया जा सके कि उसे कानूनी तौर पर कैसे राहत मिल सकती है। - इसके साथ-साथ इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोगों को न्याय दिलाने में अधिक-से-अधिक सहायक प्रदान की जा सके। लोक शिकायतों का निपटान एवं करदाताओं की सेवा सीबीडीटी एवं आयकर विभाग के लिये शीर्ष प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। इसीलिये सीबीडीटी ने 1 जून से 15 जून, 2018 के पखवाड़े को प्रभाव-समाधान मसलों के लंबित अपील के त्वरित निपटान को समर्पित किया है। - आकलन अधिकारियों को ऐसे मामलों को शीर्ष प्राथमिकता देने एवं इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है, जिससे इस वजह से आने वाली शिकायतों का जल्द-से-जल्द निपटारा किया जा सके। - सभी करदाताओं, आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया) के स्थानीय चैप्टर्स एवं बार एसोसिएशंस से आग्रह किया गया है कि वे इस अवसर का उपयोग अपील प्रभाव एवं समाधान के तहत अपने लंबित मुद्दों के समाधान के लिये करे। - केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अंतर्गत एक सांविधिक प्राधिकरण के तौर पर कार्यरत है। अपने पदेन सामर्थ्य में इसके अधिकारी मंत्रालय के प्रभाग के तौर पर भी कार्य करते हैं जो प्रत्यक्ष कर के उदग्रहण तथा संग्रहण से संबंधित मामलों से व्यवहार करते हैं। - केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में एक अध्यक्ष तथा छह सदस्य शामिल होते हैं। - विभाग के शीर्ष निकाय के तौर पर केंद्रीय राजस्व बोर्ड, कर प्रबंधन का उत्तरदायित्व, केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1924 के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया। प्रारंभिक तौर पर बोर्ड को दोनों प्रकार के प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। - जब कर का प्रबंधन एक बोर्ड के लिये संभालना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हुआ तब बोर्ड को प्रभावी तिथि 1 जनवर, 1964 को दो भागों में विभक्त कर दिया गया जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड का नाम दिया गया। - यह द्विभाजन केद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 की धारा 3 के अंतर्गत दो बोर्डों के संविधान के अनुसार प्रस्तुत किया गया। खिलाड़ियों के कल्याण के संबंध में एक बड़े कदम के रूप में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिये पेंशन में ऊर्ध्वमुखी संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के तहत अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में पदक जीतने वालों के लिये पेंशन की वर्तमान राशि दोगुनी कर दी गई है। - ओलम्पिक/पैराओलम्पिक खेलों में पदक विजेता के लिये पेंशन को 20,000 रुपए किया गया है। - विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता (ओलम्पिक/एशियाई खेल प्रतिस्पर्धाओं) के लिये 16,000 रुपए। - विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में रजत/कांस्य पदक विजेता (ओलम्पिक/एशियाई खेल प्रतिस्पर्धाओं) और एशियाई खेलों/राष्ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता के लिये 14,000 रुपए। - एशियाई खेलों/राष्ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में रजत और कांस्य पदक विजेता के लिये 12,000 रुपए करने का निर्णय लिया गया है। - पैरा-ओलम्पिक खेलों एवं पैरा-एशियाई खेलों में पदक विजेताओं की पेंशन की राशि क्रमशः ओलम्पिक खेलों एवं एशियाई खेलों में पदक विजेताओं के समकक्ष होगी। - पेंशन के लिये चार वर्षों में एक बार आयोजित की जाने वाली विश्व चैम्पियनशिप पर ही विचार किया जाएगा। - संशोधित योजना में रेखांकित किया गया है कि खिलाड़ियों को इस योजना के तहत पेंशन के लिये आवेदन करने के समय सक्रिय खेल करियर से सेवानिवृत्त हो जाना चाहिये तथा 30 वर्ष की आयु पूरी कर लेनी चाहिये। - इस आशय की स्वीकृति खिलाड़ियों द्वारा आवेदन प्रारूप में ही दी जाएगी तथा आवेदक की उपलब्धियों के सत्यापन के लिये आवेदन को अग्रसारित करते समय एसएआई से भी इसकी पुष्टि की जाएगी। - वर्तमान पेंशनधारियों के मामले में पेंशन की राशि में संशोधन 1 अप्रैल, 2018 से प्रभावी होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की वार्ता के लिये सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप को चुना गया है, यह द्वीप विश्व के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। इस शिखर सम्मेलन के लिये सेंटोसा द्वीप को चुने जाने का निर्णय तार्किक है। यह सिंगापुर के मुख्य द्वीप के दक्षिणी तट से केवल आधा किलोमीटर दूर एक जलडमरू के पार स्थित है। काफी एकांत में स्थित होने के कारण यह द्वीप न केवल गोपनीयता प्रदान करता है बल्कि दोनों देशों के नेताओं के लिये एक सुरक्षित जगह भी है। - इतिहास में यहाँ चार सौ से अधिक एलायड ट्रूप्स के सैनिकों को कठोर स्थितियों में कैदी बनाकर रखने का उल्लेख मिलता था। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ बयालीस में सिंगापुर पर जापानियों ने कब्जा कर लिया था। जिसके बाद यहाँ जापान विरोधी विचारधारा वाले लोगों की बड़ी संख्या में हत्या कर दी गई। सिंगापुर में रहने वाले चीनी नागरिकों सहित जापान विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाले या संदेह वाले स्थानीय नागरिकों को सेंटोसा द्वीप पर फाँसी दे दी जाती थी। - यह एक ब्रिटिश सैन्य बेस और एक जापानी युद्ध बंदी शिविर रहा है। - एक हज़ार नौ सौ बहत्तर तक सेंटोसा द्वीप को 'पुलाऊ बेलाकांग मति' अर्थात् मृत्यु का द्वीप नाम से जाना जाता था। - इसके बाद एक सरकारी अभियान के भाग के रूप में इसका नाम बदलकर रिसॉर्ट द्वीप कर दिया गया। हाल ही में हरियाणा के गुरुग्राम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस शुरू किया गया। यह देश का पहला डिजिटल फ्रंट ऑफिस है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो इस मॉडल को हरियाणा के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। - डिजिटल फ्रंट ऑफिस की स्थापना के बाद डीएलएसए का समस्त रिकॉर्ड डिजिटाइज़ किया जाएगा। अभी तक इन सभी रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिये रजिस्टरों का उपयोग किया जाता है। - फ्रंट ऑफिस से डीएलएसए के पास मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने हेतु आने वाले प्रार्थी को पैनल के किस अधिवक्ता के पास भेजा जाएगा, मामले की सुनवाई की तारीख आदि के संबंध में सभी जानकारियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। - डिजिटल फ्रंट ऑफिस को कॉल सेंटर से कनेक्ट किया जाएगा, ताकि किसी भी अभावग्रस्त व्यक्ति को फोन करके भी बताया जा सके कि उसे कानूनी तौर पर कैसे राहत मिल सकती है। - इसके साथ-साथ इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोगों को न्याय दिलाने में अधिक-से-अधिक सहायक प्रदान की जा सके। लोक शिकायतों का निपटान एवं करदाताओं की सेवा सीबीडीटी एवं आयकर विभाग के लिये शीर्ष प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। इसीलिये सीबीडीटी ने एक जून से पंद्रह जून, दो हज़ार अट्ठारह के पखवाड़े को प्रभाव-समाधान मसलों के लंबित अपील के त्वरित निपटान को समर्पित किया है। - आकलन अधिकारियों को ऐसे मामलों को शीर्ष प्राथमिकता देने एवं इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है, जिससे इस वजह से आने वाली शिकायतों का जल्द-से-जल्द निपटारा किया जा सके। - सभी करदाताओं, आईसीएआई के स्थानीय चैप्टर्स एवं बार एसोसिएशंस से आग्रह किया गया है कि वे इस अवसर का उपयोग अपील प्रभाव एवं समाधान के तहत अपने लंबित मुद्दों के समाधान के लिये करे। - केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ के अंतर्गत एक सांविधिक प्राधिकरण के तौर पर कार्यरत है। अपने पदेन सामर्थ्य में इसके अधिकारी मंत्रालय के प्रभाग के तौर पर भी कार्य करते हैं जो प्रत्यक्ष कर के उदग्रहण तथा संग्रहण से संबंधित मामलों से व्यवहार करते हैं। - केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में एक अध्यक्ष तथा छह सदस्य शामिल होते हैं। - विभाग के शीर्ष निकाय के तौर पर केंद्रीय राजस्व बोर्ड, कर प्रबंधन का उत्तरदायित्व, केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौबीस के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया। प्रारंभिक तौर पर बोर्ड को दोनों प्रकार के प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। - जब कर का प्रबंधन एक बोर्ड के लिये संभालना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हुआ तब बोर्ड को प्रभावी तिथि एक जनवर, एक हज़ार नौ सौ चौंसठ को दो भागों में विभक्त कर दिया गया जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड का नाम दिया गया। - यह द्विभाजन केद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ की धारा तीन के अंतर्गत दो बोर्डों के संविधान के अनुसार प्रस्तुत किया गया। खिलाड़ियों के कल्याण के संबंध में एक बड़े कदम के रूप में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिये पेंशन में ऊर्ध्वमुखी संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के तहत अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में पदक जीतने वालों के लिये पेंशन की वर्तमान राशि दोगुनी कर दी गई है। - ओलम्पिक/पैराओलम्पिक खेलों में पदक विजेता के लिये पेंशन को बीस,शून्य रुपयापए किया गया है। - विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता के लिये सोलह,शून्य रुपयापए। - विश्व कप/विश्व चैम्पियनशिप में रजत/कांस्य पदक विजेता और एशियाई खेलों/राष्ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता के लिये चौदह,शून्य रुपयापए। - एशियाई खेलों/राष्ट्रमंडल खेलों/पैरा-एशियाई खेलों में रजत और कांस्य पदक विजेता के लिये बारह,शून्य रुपयापए करने का निर्णय लिया गया है। - पैरा-ओलम्पिक खेलों एवं पैरा-एशियाई खेलों में पदक विजेताओं की पेंशन की राशि क्रमशः ओलम्पिक खेलों एवं एशियाई खेलों में पदक विजेताओं के समकक्ष होगी। - पेंशन के लिये चार वर्षों में एक बार आयोजित की जाने वाली विश्व चैम्पियनशिप पर ही विचार किया जाएगा। - संशोधित योजना में रेखांकित किया गया है कि खिलाड़ियों को इस योजना के तहत पेंशन के लिये आवेदन करने के समय सक्रिय खेल करियर से सेवानिवृत्त हो जाना चाहिये तथा तीस वर्ष की आयु पूरी कर लेनी चाहिये। - इस आशय की स्वीकृति खिलाड़ियों द्वारा आवेदन प्रारूप में ही दी जाएगी तथा आवेदक की उपलब्धियों के सत्यापन के लिये आवेदन को अग्रसारित करते समय एसएआई से भी इसकी पुष्टि की जाएगी। - वर्तमान पेंशनधारियों के मामले में पेंशन की राशि में संशोधन एक अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह से प्रभावी होगा।
जिस अभूतपूर्व देवकी 'ब्रह्मा, विष्णु, शिवरूप शक्तियाँ है, वह भगवान् विष्णुका परम पद है---- शक्तयो यस्य देवस्य ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाः । भवन्त्यभूतपूर्वस्य तद् विष्णोः परमं पदम् ॥ ( विष्णुपुराण १ । ९ । ५६ ) उस सर्वनियन्ता 'ब्रह्मा' के रूप में सृष्टि, 'विष्णु के रूपमें विश्वका पालन तथा अन्त में 'रुद्र' रूपसे संहार करनेवाले त्रिमूर्तिधारीको नमन हैब्रह्मत्वे सृजते विश्वं स्थितौ पालयते पुनः । रुद्ररूपाय कल्पान्ते नमस्तुभ्यं त्रिमूर्तये ॥ ( विष्णुपुराण १ । १९ । ६६ ) बाणासुरकी रक्षा के लिये श्रीशंकरकी प्रार्थनापर श्रीभगवान् कहते हैं- 'शंकर ! आप मुझसे अपनेको सर्वथा अभिन्न देखिये । आप यह निश्चय जान लें कि जो मैं हूँ, वही आप है । अविद्यासे मोहित चित्तवाले भेददर्शी पुरुष ही हम दोनोंमें भेद दिखाते तथा बतलाते हैं ।" मत्तोऽविभिन्नमात्मानं द्रष्टुमर्हसि शंकर । योऽहं स त्वं....... अविद्यामोहितात्मानः पुरुषा भिन्नदर्शिनः । वदन्ति भेदं पश्यन्ति चावयोरन्तरं हर ॥ विष्णुपुराण ५ । ३३ । ४७-४९ ) श्रीमद्भागवत में शिवस्वरूप श्रीरुद्रद्वारा भीभगवान्की दिव्य स्तुतिके अनन्तर स्वभक्त बाणासुरकी रक्षाकी प्रार्थनापर श्रीभगवान्ने कहा है - 'भगवन् ! जो आप हमसे कहते हैं, हम आपका प्रिय करेंगे। आपकी इच्छाका हम अनुमोदन करते हैं।" यदात्य भगवंस्त्वन्नः करवाम प्रियं तव । भवतो यद् व्यवसितं तन्मे साध्वनुमोदितम् ॥ ( श्रीमद्भागवत १० । ६३ । ४६ ) शिवस्य हृदयं विष्णुर्विष्णोच हृदयं शिवः । शिवके हृदय विष्णु तथा विष्णुके हृदय शिवके अभिन्न तत्वका साक्षात् परिचय भगवान् श्रीविष्णुके शब्दों में प्राप्त कीजिये । दक्ष यज्ञ-विध्वंसके अनन्तर देव-स्तुतिसे श्रीशिवके प्रसन्न होनेपर पुनः यज्ञ प्रारम्भ होनेपर भगवान् विष्णुने प्रकट होकर जो कहा है, वह कथन प्रत्येक आन्तिक हिंदूके लिये मननीय है । अहं ब्रह्मा च शर्वश्व जगतः कारणं परम् । आरमेश्वर आत्मसायां समाविश्य सोऽहं गुणमयीं द्विज । सृजन् रक्षन् हरन् विश्वं दधे संज्ञां क्रियोचिताम् ॥ तस्मिन्ब्रह्मण्यद्वितीये केवले परमात्मनि । ब्रह्मच भूतानि भेदेनाज्ञोऽनुपश्यति ॥ यथा पुमान्न स्वाङ्गेषु शिरःपाण्यादिषु वन्चित् । पारक्यबुद्धिं कुरुत एवं भूतेषु त्रयाणामेभावानां यो न पश्यति वै भिदाम् । सर्वभूतात्मनां ब्रह्मन् स शान्तिमधिगच्छति ॥ ( श्रीमद्भागवत ४ । ७ । ५० - ५४) 'मैं, ब्रह्मा, शंकर- तीनों ही संसारके कारण हैं, सबके आत्मा, ईश्वर, साक्षी, स्वयंप्रकाश एवं उपाधिरहित हैं। ब्रह्मन् ! अपनी गुणमयी मायाका आश्रय लेकर मैं सृष्टि स्थिति संहार करते हुए उन चेष्टाओंके योग्य नाम ग्रहण करता हूँ । उस अद्वितीय, सजातीय विजायतीय-भेदरहित परतत्त्व परमात्मामें अज्ञानी जीव ही ब्रह्मा-रुद्रको भेदसे देखता है । जिस प्रकार पुरुष अपने सिर-हाथ आदि में परायी बुद्धि कभी नहीं करता, उसी प्रकार मेरा भक्त पुरुष 'भेद दृष्टि' नहीं करता । सबके आत्मा इन ब्रह्मा, विष्णु, शिवमें जो भेददृष्टिं नहीं करता, ब्रह्मन् ! वह पुरुष शाश्वत शान्ति पा लेता है ।। ब्राह्मणाः साधवः शान्ता निःसङ्गा भूतवत्सलाः । एकान्तभक्ता अस्मासु निर्वैराः समदर्शिनःन ते मय्यच्युतेऽजे च भिदामण्वपि चक्षते । ( श्रीमद्भागवन १२ । १० । २०-२२ ) भगवान् श्रीशंकर महर्षि मार्कण्डेयसे कहते हैं कि 'ब्राह्मण, साधु, शान्त, आसक्तिरहित सब जीव दयालु, हममें एकान्त भक्तिवाले, वैरभावनासे रहित, समदर्शी होते हैं । लोकपालों के साथ सारे लोक उनका बन्दन, पूजन तथा उपासना करते हैं । में, भगवान् ब्रह्मा तथा स्वयं विष्णु भी । उन ब्राह्मणोंके पूजन होनेका एक विशिष्ट कारण यह है कि वे ब्राह्मण मुझ शंकर, विष्णु तथा सामं अणुमात्र भी भेद नहीं देखते ।" भगवान् श्रीगमने लङ्कासे टाँटते हुए वाल्मीकीय रामायणमें श्रीरामेश्वरका दर्शन कराते हुए सीतामे कहा है'यहाँ प्रभु महादेव प्रसन्न हुए थे ।' 'शत्र पूर्व महादेवः प्रसादमकरोद् विभुः ।" 'रामस्य ईश्वरः अथवा राम ईश्वरी श्रीरामके ईश्वर अभया रामरूपी पैसे पी
जिस अभूतपूर्व देवकी 'ब्रह्मा, विष्णु, शिवरूप शक्तियाँ है, वह भगवान् विष्णुका परम पद है---- शक्तयो यस्य देवस्य ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाः । भवन्त्यभूतपूर्वस्य तद् विष्णोः परमं पदम् ॥ उस सर्वनियन्ता 'ब्रह्मा' के रूप में सृष्टि, 'विष्णु के रूपमें विश्वका पालन तथा अन्त में 'रुद्र' रूपसे संहार करनेवाले त्रिमूर्तिधारीको नमन हैब्रह्मत्वे सृजते विश्वं स्थितौ पालयते पुनः । रुद्ररूपाय कल्पान्ते नमस्तुभ्यं त्रिमूर्तये ॥ बाणासुरकी रक्षा के लिये श्रीशंकरकी प्रार्थनापर श्रीभगवान् कहते हैं- 'शंकर ! आप मुझसे अपनेको सर्वथा अभिन्न देखिये । आप यह निश्चय जान लें कि जो मैं हूँ, वही आप है । अविद्यासे मोहित चित्तवाले भेददर्शी पुरुष ही हम दोनोंमें भेद दिखाते तथा बतलाते हैं ।" मत्तोऽविभिन्नमात्मानं द्रष्टुमर्हसि शंकर । योऽहं स त्वं....... अविद्यामोहितात्मानः पुरुषा भिन्नदर्शिनः । वदन्ति भेदं पश्यन्ति चावयोरन्तरं हर ॥ विष्णुपुराण पाँच । तैंतीस । सैंतालीस-उनचास ) श्रीमद्भागवत में शिवस्वरूप श्रीरुद्रद्वारा भीभगवान्की दिव्य स्तुतिके अनन्तर स्वभक्त बाणासुरकी रक्षाकी प्रार्थनापर श्रीभगवान्ने कहा है - 'भगवन् ! जो आप हमसे कहते हैं, हम आपका प्रिय करेंगे। आपकी इच्छाका हम अनुमोदन करते हैं।" यदात्य भगवंस्त्वन्नः करवाम प्रियं तव । भवतो यद् व्यवसितं तन्मे साध्वनुमोदितम् ॥ शिवस्य हृदयं विष्णुर्विष्णोच हृदयं शिवः । शिवके हृदय विष्णु तथा विष्णुके हृदय शिवके अभिन्न तत्वका साक्षात् परिचय भगवान् श्रीविष्णुके शब्दों में प्राप्त कीजिये । दक्ष यज्ञ-विध्वंसके अनन्तर देव-स्तुतिसे श्रीशिवके प्रसन्न होनेपर पुनः यज्ञ प्रारम्भ होनेपर भगवान् विष्णुने प्रकट होकर जो कहा है, वह कथन प्रत्येक आन्तिक हिंदूके लिये मननीय है । अहं ब्रह्मा च शर्वश्व जगतः कारणं परम् । आरमेश्वर आत्मसायां समाविश्य सोऽहं गुणमयीं द्विज । सृजन् रक्षन् हरन् विश्वं दधे संज्ञां क्रियोचिताम् ॥ तस्मिन्ब्रह्मण्यद्वितीये केवले परमात्मनि । ब्रह्मच भूतानि भेदेनाज्ञोऽनुपश्यति ॥ यथा पुमान्न स्वाङ्गेषु शिरःपाण्यादिषु वन्चित् । पारक्यबुद्धिं कुरुत एवं भूतेषु त्रयाणामेभावानां यो न पश्यति वै भिदाम् । सर्वभूतात्मनां ब्रह्मन् स शान्तिमधिगच्छति ॥ 'मैं, ब्रह्मा, शंकर- तीनों ही संसारके कारण हैं, सबके आत्मा, ईश्वर, साक्षी, स्वयंप्रकाश एवं उपाधिरहित हैं। ब्रह्मन् ! अपनी गुणमयी मायाका आश्रय लेकर मैं सृष्टि स्थिति संहार करते हुए उन चेष्टाओंके योग्य नाम ग्रहण करता हूँ । उस अद्वितीय, सजातीय विजायतीय-भेदरहित परतत्त्व परमात्मामें अज्ञानी जीव ही ब्रह्मा-रुद्रको भेदसे देखता है । जिस प्रकार पुरुष अपने सिर-हाथ आदि में परायी बुद्धि कभी नहीं करता, उसी प्रकार मेरा भक्त पुरुष 'भेद दृष्टि' नहीं करता । सबके आत्मा इन ब्रह्मा, विष्णु, शिवमें जो भेददृष्टिं नहीं करता, ब्रह्मन् ! वह पुरुष शाश्वत शान्ति पा लेता है ।। ब्राह्मणाः साधवः शान्ता निःसङ्गा भूतवत्सलाः । एकान्तभक्ता अस्मासु निर्वैराः समदर्शिनःन ते मय्यच्युतेऽजे च भिदामण्वपि चक्षते । भगवान् श्रीशंकर महर्षि मार्कण्डेयसे कहते हैं कि 'ब्राह्मण, साधु, शान्त, आसक्तिरहित सब जीव दयालु, हममें एकान्त भक्तिवाले, वैरभावनासे रहित, समदर्शी होते हैं । लोकपालों के साथ सारे लोक उनका बन्दन, पूजन तथा उपासना करते हैं । में, भगवान् ब्रह्मा तथा स्वयं विष्णु भी । उन ब्राह्मणोंके पूजन होनेका एक विशिष्ट कारण यह है कि वे ब्राह्मण मुझ शंकर, विष्णु तथा सामं अणुमात्र भी भेद नहीं देखते ।" भगवान् श्रीगमने लङ्कासे टाँटते हुए वाल्मीकीय रामायणमें श्रीरामेश्वरका दर्शन कराते हुए सीतामे कहा है'यहाँ प्रभु महादेव प्रसन्न हुए थे ।' 'शत्र पूर्व महादेवः प्रसादमकरोद् विभुः ।" 'रामस्य ईश्वरः अथवा राम ईश्वरी श्रीरामके ईश्वर अभया रामरूपी पैसे पी
कांग्रेस इन दिनों शायद अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पंजाब, राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ में सियासी संकट देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के गुट के नेता दिल्ली में इकट्ठा होने लगे हैं। हालांकि, इन सबके बीच कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में 'पंजाब जैसी स्थिति' नहीं है। बुधवार को एएनआई से बात करते हुए बृहस्पति सिंह ने पुष्टि की कि सीएम में कोई बदलाव नहीं होगा और सभी मंत्रियों को आलाकमान का आशीर्वाद प्राप्त है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस में अंदरूनी कलह टीएस सिंहदेव की पार्टी के 2.5 साल के वादे के अनुसार सीएम भूपेश बघेल को नाराज करने की कोशिश के कारण है। हालांकि इसकी किसी ने भी कोई पुष्टि नहीं की है। 'सीएम में कोई बदलाव नहीं' बृहस्पति सिंह ने दिल्ली में एएनआई से कहा, "7-8 (कांग्रेस) विधायक दिल्ली आ चुके हैं। इसके अलावा कुल 15-16 विधायक दिल्ली आ सकते हैं। हम छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया से मिलेंगे। पार्टी आलाकमान, सभी विधायक और छत्तीसगढ़ के लोग सीएम भूपेश बघेल के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं। सरकार को केवल एक व्यक्ति को संतुष्ट करने के लिए अस्थिर नहीं किया जा सकता है।" इस बीच बताया जा रहा है कि बघेल खेमे और सिंहदेव के खेमे के 7-8 विधायक आलाकमान की राजनीतिक इच्छाशक्ति का पता लगाने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव सिंह भी दिल्ली दौरे पर आए थे। हालांकि उन्होंने इसे 'निजी यात्रा' बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी कांग्रेस आलाकमान से मिलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि छत्तीसगढ़ में कोई चुनाव नहीं होना था, इसलिए स्थिति अलग थी। सीएम परिवर्तन की 2.5 वर्षीय योजना को स्वीकार करते हुए सिंहदेव ने कहा कि अन्य बातों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, कांग्रेस के राज्य प्रमुख मोहन मरकाम ने कांग्रेस में किसी भी 'राजनीतिक उथल-पुथल' का खंडन करते हुए कहा, "सरकार और पार्टी समन्वय में काम कर रहे हैं"। रायपुर में हो रही राजनीतिक खींचतान को शांत करने के लिए पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अगले सप्ताह छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार गांधी दो दिन बस्तर और एक दिन सरगुजा का दौरा कर सकते हैं। जहां देव बार-बार सीएम बनने की अपनी इच्छा का संकेत दे चुके हैं, वहीं दूसरी ओर बघेल ने कहा है कि जब भी सोनिया गांधी या राहुल गांधी उन्हें ऐसा करने के लिए कहेंगे तो वह अपना पद छोड़ देंगे। बता दें, छत्तीसगढ़ में 2023 में चुनाव होने हैं।
कांग्रेस इन दिनों शायद अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पंजाब, राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ में सियासी संकट देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के गुट के नेता दिल्ली में इकट्ठा होने लगे हैं। हालांकि, इन सबके बीच कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में 'पंजाब जैसी स्थिति' नहीं है। बुधवार को एएनआई से बात करते हुए बृहस्पति सिंह ने पुष्टि की कि सीएम में कोई बदलाव नहीं होगा और सभी मंत्रियों को आलाकमान का आशीर्वाद प्राप्त है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस में अंदरूनी कलह टीएस सिंहदेव की पार्टी के दो.पाँच साल के वादे के अनुसार सीएम भूपेश बघेल को नाराज करने की कोशिश के कारण है। हालांकि इसकी किसी ने भी कोई पुष्टि नहीं की है। 'सीएम में कोई बदलाव नहीं' बृहस्पति सिंह ने दिल्ली में एएनआई से कहा, "सात-आठ विधायक दिल्ली आ चुके हैं। इसके अलावा कुल पंद्रह-सोलह विधायक दिल्ली आ सकते हैं। हम छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया से मिलेंगे। पार्टी आलाकमान, सभी विधायक और छत्तीसगढ़ के लोग सीएम भूपेश बघेल के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं। सरकार को केवल एक व्यक्ति को संतुष्ट करने के लिए अस्थिर नहीं किया जा सकता है।" इस बीच बताया जा रहा है कि बघेल खेमे और सिंहदेव के खेमे के सात-आठ विधायक आलाकमान की राजनीतिक इच्छाशक्ति का पता लगाने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव सिंह भी दिल्ली दौरे पर आए थे। हालांकि उन्होंने इसे 'निजी यात्रा' बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी कांग्रेस आलाकमान से मिलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि छत्तीसगढ़ में कोई चुनाव नहीं होना था, इसलिए स्थिति अलग थी। सीएम परिवर्तन की दो.पाँच वर्षीय योजना को स्वीकार करते हुए सिंहदेव ने कहा कि अन्य बातों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, कांग्रेस के राज्य प्रमुख मोहन मरकाम ने कांग्रेस में किसी भी 'राजनीतिक उथल-पुथल' का खंडन करते हुए कहा, "सरकार और पार्टी समन्वय में काम कर रहे हैं"। रायपुर में हो रही राजनीतिक खींचतान को शांत करने के लिए पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अगले सप्ताह छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार गांधी दो दिन बस्तर और एक दिन सरगुजा का दौरा कर सकते हैं। जहां देव बार-बार सीएम बनने की अपनी इच्छा का संकेत दे चुके हैं, वहीं दूसरी ओर बघेल ने कहा है कि जब भी सोनिया गांधी या राहुल गांधी उन्हें ऐसा करने के लिए कहेंगे तो वह अपना पद छोड़ देंगे। बता दें, छत्तीसगढ़ में दो हज़ार तेईस में चुनाव होने हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर एरिया खोले जाने की तैयारी (फ़ाइल तस्वीर) भोपाल. वैश्विक महामारी कोरोनावायरस (Pandemic coronavirus) आपदा और देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) के लंबे अंतराल के बाद अब वाइल्ड लाइफ (Wild life) प्रेमियों के लिए खुशखबरी आई है. वन विभाग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) का कोर एरिया 15 से 30 जून तक पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है. जानकारी के मुताबिक बारिश के मौसम में पर्यटक बफर जोन तक जा सकेंगे. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के रीजनल डायरेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की एडवाईजरी और गाइडलाईन को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिज़र्व को खोला जाए. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने इस सिलसिले में बैठक में तैयार किया गया एक प्रस्ताव शासन को भेजा है. हालांकि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व खुलने के बाद पर्यटकों को तय गाइडलाइन का पालन करना होगा. गौरतलब है कि इससे पहले कोरोना आपदा के बाद 20 मार्च को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. उस वक्त यह खबरें भी आई थीं कि टाइगर को भी कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है लिहाजा एहतियात के तौर पर रिजर्व को लॉकडाउन के दौरान बंद कर दिया गया था. - पर्यटकों को प्रवेश गाइडलाइन के आधार पर ही मिलेगा । 10 साल से कम और 65 साल से अधिक आयु के पर्यटकों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा. - आई. डी. कार्ड दूर से दिखाना होगा. - 6 पर्यटक एक ही परिवार से हैं तो उन्हें एक ही जिप्सी में प्रवेश दिया जायेगा. - अगर टूरिस्ट एक परिवार से नहीं हैं तो एक जिप्सी वाहन में 4 पर्यटक घूम सकेंगे. - सभी पर्यटक मास्क, सेनीटाइजर और दो गज दूरी के नियम का पालन करेंगे. - कोई पर्यटक पार्क के अन्दर गाड़ी से नीचे नहीं उतर सकेगा. - सेन्टर पॉइंट पर खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं होगी. - जिप्सी वाहन में प्रवेश और वापस आने पर वाहन मालिक को सेनीटाइज कराना होगा. - होटल मालिक पार्क जाने से पहले पर्यटकों की थर्मल स्क्रीनिंग करेंगे साथ ही पर्यटन गेट पर भी थर्मल स्क्रीनिंग होगी. - प्रवेश द्वार को रोज तीन बार सेनेटाइज किया जायेगा. - पर्यटकों के सम्पर्क में आने वाले जिप्सी चालक और गाइड मास्क और सेनीटाइजर का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगे. - कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर पार्क में प्रवेश नहीं दिया जायेगा. - रिज़र्व में जाने वाली सभी जिप्सी वाहन में सीट कवर नहीं होगा. - पार्क के अन्दर थूकना प्रतिबंधित रहेगा. - पानी की बॉटल और खाने-पीने की चीजें डस्टबिन में न डालकर वाहन के अन्दर रखना होगा. .
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर एरिया खोले जाने की तैयारी भोपाल. वैश्विक महामारी कोरोनावायरस आपदा और देशव्यापी लॉकडाउन के लंबे अंतराल के बाद अब वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए खुशखबरी आई है. वन विभाग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर एरिया पंद्रह से तीस जून तक पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है. जानकारी के मुताबिक बारिश के मौसम में पर्यटक बफर जोन तक जा सकेंगे. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के रीजनल डायरेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की एडवाईजरी और गाइडलाईन को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिज़र्व को खोला जाए. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने इस सिलसिले में बैठक में तैयार किया गया एक प्रस्ताव शासन को भेजा है. हालांकि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व खुलने के बाद पर्यटकों को तय गाइडलाइन का पालन करना होगा. गौरतलब है कि इससे पहले कोरोना आपदा के बाद बीस मार्च को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. उस वक्त यह खबरें भी आई थीं कि टाइगर को भी कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है लिहाजा एहतियात के तौर पर रिजर्व को लॉकडाउन के दौरान बंद कर दिया गया था. - पर्यटकों को प्रवेश गाइडलाइन के आधार पर ही मिलेगा । दस साल से कम और पैंसठ साल से अधिक आयु के पर्यटकों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा. - आई. डी. कार्ड दूर से दिखाना होगा. - छः पर्यटक एक ही परिवार से हैं तो उन्हें एक ही जिप्सी में प्रवेश दिया जायेगा. - अगर टूरिस्ट एक परिवार से नहीं हैं तो एक जिप्सी वाहन में चार पर्यटक घूम सकेंगे. - सभी पर्यटक मास्क, सेनीटाइजर और दो गज दूरी के नियम का पालन करेंगे. - कोई पर्यटक पार्क के अन्दर गाड़ी से नीचे नहीं उतर सकेगा. - सेन्टर पॉइंट पर खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं होगी. - जिप्सी वाहन में प्रवेश और वापस आने पर वाहन मालिक को सेनीटाइज कराना होगा. - होटल मालिक पार्क जाने से पहले पर्यटकों की थर्मल स्क्रीनिंग करेंगे साथ ही पर्यटन गेट पर भी थर्मल स्क्रीनिंग होगी. - प्रवेश द्वार को रोज तीन बार सेनेटाइज किया जायेगा. - पर्यटकों के सम्पर्क में आने वाले जिप्सी चालक और गाइड मास्क और सेनीटाइजर का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगे. - कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर पार्क में प्रवेश नहीं दिया जायेगा. - रिज़र्व में जाने वाली सभी जिप्सी वाहन में सीट कवर नहीं होगा. - पार्क के अन्दर थूकना प्रतिबंधित रहेगा. - पानी की बॉटल और खाने-पीने की चीजें डस्टबिन में न डालकर वाहन के अन्दर रखना होगा. .
भगवान महावीर या उनके सच्चे शिष्योंने बनवास स्वीकार किया हो, नग्नत्व धारण किया हो, गुफा पसंद की हो, घर तथा परिवारका त्याग किया हो, धन सम्पत्तिकी तरफ बैपर्वाही दिखलाई हो, ये सब प्रान्त रिक विकासमेंसे उत्पन्न होकर जरा भी विरुद्ध मालूम नहीं होते। परन्तु गले तक भोगतृष्णा में डूबे हुए तथा सच्चे जैनत्वकी साधना के लिये जरा भी सहनशीलत न रखनेवाले तथा उदारदृष्टि रहित मनुष्य जब घरबार छोड़ जंगल में दौड़ें; गुफावास स्वीकार करें, मा-बाप या आश्रितोंकी जवाबदारी फेंक दें तब तो उनका जीवन विसंवादी होवे ही और पीछे बदलते हुए नये 'संयोगांकैसाथ नया जीवन घड़ने की अशक्तिके (लोकवृत्तिके) कारण उनके जीवनमें विरोध मालूम पड़े, यह स्पष्ट है [वर्ष १, किरण ११, १२ और परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अस्मिता (अहंकृति)जैसी कोई वस्तु ही न थी ? क्या उस वक्त के राज्यकर्ता मात्र वीतराग दृष्टि से और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना से राज्य करते थे ? यदि इन सब प्रश्नोंका उत्तर यही हो कि जैसे साधारण कुटुम्बी गृहस्थ जैनत्व धारण करने के साथ अपने साधारण गृहव्यवहार चला सकता है तो प्रतिष्ठित तथा वैभवशाली गृहस्थ भी इसी प्रकार जैनत्वके साथ अपनी प्रतिष्ठाको सँभाल सकता है और इसी न्यायसे राजा तथा राजकर्मचारी भी अपने कार्यक्षेत्र में रहते हुए सचा जैनत्व, पाल सकते हैं, तब आजकी राजप्रकरणी समस्या का उत्तर भी यही है । अर्थात् राष्ट्रीयता और राजेप्रकरण के साथ सधे जैनत्व का ( यदि हृदय में प्रकटा हो तो ) कुछ भी विरोध नहीं । निःसन्देह यहाँ त्यागी वर्गमें गिने जाने वाले जैनकी बात विचारनी बाक़ी रहती है। त्यागीवर्गका राष्ट्रीय क्षेत्र और राजप्रकरण के साथ सम्बंध घटित नहीं हो सकता ऐसी कल्पना उत्पन्न होनेका कारण यह है कि राष्ट्रीय प्रवृत्तिमें शुभ द्धत्व जैसा तत्व ही नहीं और राजप्रकरण भी समभाव-वाला हो नहीं सकता ऐसी मान्यता रूढ हो गई है। परन्तु अनुभव हमको बतलाता है कि सभी इक्कीक़त ( यथार्थ वस्तुस्थिति ) ऐसी नहीं । यदि प्रवृत्ति करनेवाला स्वयं शुद्ध है वह हरेक जगह शुद्धिको ला सकता तथा सुरक्षित रख सकता है और यदि वह खुद ही शुद्ध न हो तो त्यागीवर्ग में रहते हुए भी सदा मैल तथा भ्रमणामें पड़ा रहता है। हमारे त्यागी माने जानेवाले जैनोंको खटपट, प्रपंच और अशुद्धिमें लिपटा हुआ क्या नहीं देखते ? यदि तटस्थ जैसे बड़े त्यागी वर्गमें एकाध व्यक्ति सचमुच जैन मिलनेका संभव हो तो आधुनिक राष्ट्रीय प्रवृत्ति और राजकीय क्षेत्र में कूदने 'राष्ट्रीय क्षेत्र और राजप्रकरण जैनोंके भाग लेने · ग्रा. न. लेने " विषयक पहले प्रश्न के सम्बन्ध में जानना चाहिये कि जैनत्वं व्यागों और गृहस्थ ऐसे दो वर्गों में विभाजित है। गृहस्थ जैनत्व यदि राजकर्ताओं तथा राज्य के मन्त्री, सेनाधिपति वगैरह अमलदारोंमें खुद "भगवान महावीर के समय में ही उत्पन्न हुआ था और इसके बारके २३०० वर्ष तक राजाओं तथा राज्य के "मुख्य अंमलदारों ( कर्मचारियों ) में जैनत्व लानेका "अथवा चले आते जैनत्वको स्थिर रखनेका भगीरथ * प्रयत्न जैनाचार्यों ने किया था तो फिर आज राष्ट्रीयता 'और जैनत्व के मध्य में विरोध किस लिये दिखाई देता है ? क्या में पुराने जमाने के राजा, राजकर्मचारी और उनका राजप्रकरण यह सब कुछ मनुष्यातीत या लोकोत्तर भूमि का था ? क्या उसमें राजखटपट, 'प्रपंच, या वासनाओंको जरा भी स्थान नहीं था या उस बर्फ के राजप्रकरण में उस वक्त की भावना के आश्विन, कार्तिक, वीरनि०सं०२४५६] वाले बड़े वर्ग में उससे अधिक श्रेष्ट गुणजैनत्वको धारण करने वाली अनेक व्यक्तियाँ क्या नहीं मिलतीं? जो जन्मसे भी जैन हैं । फिर त्यागी माने जानेवाले जैनवर्गमें भी राष्ट्रीयता और राजकीय क्षेत्र में समयोचित भाग लेने के उदाहरण जैन साधुसंघके इतिहास में क्या कमती हैं ? फेर हो तो वह इतना ही है कि उस वक्तकी भाग लेनेकी प्रवृत्तिमें साम्प्रदायिक भावना और नैतिक भावना साथ ही काम करती थीं; जब कि आज साम्प्रदायिक भावना जरा भी कार्यसाधक या उपयोगी हो सके ऐसा नहीं। इससे यदि नैतिक भावना और अर्पण वृत्ति हृदय में हो ( जिसका शुद्ध जैनत्वके साथ संपूर्ण मेल है ) तो गृहस्थ या त्यागी किसी भी जैनको, जैनत्वको जरा भी बाधा न आए तथा उलटा अधिक पोषण मिले इस रीतिसे, काम करनेका राष्ट्रीय तथा राजकीय क्षेत्र में पूर्ण अवकाश है। घर तथा व्यापार के क्षेत्रकी अपेक्षा राष्ट्र और राजकीय क्षेत्र बड़ा है, यह बात ठीक; परन्तु विश्वकी साथ अपना मेल होनेका दावा करने वाले जैनधर्मके लिये तो राष्ट्र और राजकीय क्षेत्र यह भी एक घर जैसा ही छोटासा क्षेत्र है। उलटा आज तो इस क्षेत्र में ऐसे कार्य शामिल हो गये हैं जिनका अधिकसे अधिक मेल जैनत्व (समभाव और सत्यदृष्टि ) के साथ ही है। मुख्य बात तो यह है कि किसी कार्य अथवा क्षेत्र के साथ जैनत्वका तादात्म्य संबंध नहीं । कार्य और क्षेत्र तो चाहे जो हो परंतु यदि जैनत्व की दृष्टि रखकर उसमें प्रवृत्ति होतो वह सब शुद्ध ही होगा । योग्य जान पड़ा था वह तो एकान्तिक त्याग ही था; परन्तु ऐसे त्यागके इच्छुकों तक सब एकाएक ऐसी भूमिका पर पहुँच नहीं सकते। इस लोकमानस से भगवान अनभिज्ञ न थे, इसी लिये वे उम्मीदवार के कमती या बढ़ती त्यागमें सम्मत होकर"मा पड़िबंध कुणड" - 'विलम्ब मत कर' ऐसा कह कर सम्मत होते गये । और बाकी की भोगवृत्ति तथा सामाजिक मर्यादाओंका नियमन करने वाले शाख उस वक्त भी थे और आगे भी रचे जायेंगे । 'स्मृति' जैसे लौकिक शास्त्र लोग आज तक घड़ते आए हैं और आगे भी घड़ेंगे। देश-कालानुसार लोग अपनी भोगमर्यादा के लिये नये नियम-नये व्यवहार घड़ेंगे, पुरानो में फेरफार करेंगे और बहुतोंको फेंक भी देंगे । इन लौकिक स्मृतियोमें भगवान पड़े ही नहीं। भगवान का ध्रुव सिद्धान्त त्यागका है । लौकिक नियमोंका चक्र उसके आस-पास उत्पाद व्ययकी तरह ध्रुव सिद्धान्तको बाधा न आए ऐसी रीतिसे फिरा करे, इतना ही देखना रहता है। इसी कारणसे जब कुलधर्म पालनेवालेके तौर पर जैनसमाज व्यवस्थित हुआ और फैलता गया तब उसने लौकिक नियमोंवाले भोग और सामाजिक मर्यादाका प्रतिपादन करने वाले अनेक शास्त्र रचे । जिस न्यायने भगवान के पीछे हजार वर्षों में समाजको जीता रक्खा वही न्याय समाजको जीता रहने के लिये हाथ ऊँचा करके कहना है कि 'तू सावधान हो, अपने निकट विस्तारको प्राप्त हुई परिस्थितिको देख और फिर समयानुसारिणी स्मृतियाँ रच । तू इतना ध्यान में रखना कि त्याग ही सपा लक्ष्य है; परंतु साथमें यह भी ध्यान में रखना कि त्यागविना त्यागका ढौंग तू करेगा तो जरूर मरंमा । और अपनी भोगमर्यादाको अनुकूल पड़े ऐसी रीति से दूसरा प्रश्न बिबाह प्रथा और जातपाँस आदिके सम्बंध-विषयका है। इस विषय में जानना चाहिये कि जैनत्वका प्रस्थान एकान्त त्यागवृत्तिमेंसे हुआ है। भगवान महावीरको जो कुछ अपनी साधनामेंसे देने सामाजिक जीवन की घटना करना; मात्र स्त्रीत्वके कारण या पुरुषत्व के कारण एककी भोगवत्ति अधिक है और दूसरेकी भोगवृ त्त कम है अथवा एकको अपनी वृत्तियाँ तृप्त करनेका चाहे जिस रीतिसे हक़ है और दूसरेको वृत्तियों भांग बननेका जन्मसिद्ध हक़ है, ऐसा कभी न मानना । समाजधर्म समाजको यह भी कहताहैकि सामाजिक स्मृतियाँ सदा काल एक जैसी होती ही नहीं। त्याग के अनन्य पक्षपाती गुरु ने भी जैनसमाजका बचाने के लिये अथवा उस वक्त की परिस्थिति के वश होकर आश्चर्य प्रदान करें ऐसे भोगमर्यादा वाले विधान किये हैं। वर्तमानकी नई जैन स्मृतियों में ६४ हजार या ९६ हजार तो क्या, बल्कि एक साथ दो स्त्रियां रखने वालेकी प्रतिष्ठाका प्रकरणभी नाशको प्राप्त होगा तब ही जैनसमाज सम्मानित धर्मसमाजोमें मुँह दिखा सकेगा। आजकल की नई स्मृतिके प्रकरणमं एक साथ पाँच पति रखने वाली द्रौपदा के सतीत्वकी प्रतिष्ठा नहीं हो; तो भी प्रामाणिक रूपमे पुनर्विवाह करने वाली स्त्रीके सतीत्वकी प्रतिष्ठाको दर्ज कियेही छुटकारा है। आजकल की स्मृतिमें चालीस वर्ष से अधिकी उम्रवाले व्यक्तिका कुमारी कन्या के साथ विवाह बलात्कार या व्यभिचार ही दर्ज किया जायगा। एक स्त्रीकी मौजूदगीमें दूसरी स्त्री करने वाले आजकल की जैनस्मृतिमे स्त्रीघातकी गिने जायँगे; क्योंकि आज नैतिक भावनाका बल जो चारों तरफ फैल रहा है उसकी अवगणना करके जैनसमाज सबके बीच मानपूर्वक रह ही नहीं सकता । जातपातक बन्धन कठोर करने या ढीले करने * देताम्बर समाजमें हिन्दुओं की तरह के पांच पति माने गये हैं, उसीको लक्ष्य करके यह कथन जान पड़ता है [ वर्ष १, किरण ११, १२ · यह भी व्यवहारकी अनुकूलता का ही प्रश्न होने से उसके विधान नये सिरेसे ही करने पड़ेंगे। इस विषय में प्राचीन शास्त्रों का आधार शोधन ही हो तो जैनसाहित्य में से मिल सके ऐसा है; परन्तु इस शोधकी मेहनत करनेकी अपेक्षा " ध्रुव जैनत्व" समभाव और सत्यदृष्टि क़ायम रखकर उसके ऊपर व्यवहारके अनुकूल पड़े ऐसी रीतिस जैनसमाजको जीवन अर्पण करने वाली लौकिक स्मृतियाँ रच लेनेमें ही अधिक श्रेय है । गुरु संस्थाको रखने या फेंक देने के प्रश्न विषयमें कहना यह है कि आज तक बहुत बार गुरुसंस्था फेंक दी गई है और तो भी वह खड़ी है। पार्श्वनाथ के पश्चात्मे विकृत होने वाली परम्पराको महावीरने फेंक दिया इससे कुछ गुरु संस्थाका अन्त नहीं आया। चैत्यवामी गये परन्तु समाजने दूसरी संस्था माँग ही ली । जतियोंके दिन पूरे होते गये उधर संवेगी साधु खड़े ही रहे । गुरुसंस्थाको फेंक देना इसका अर्थ यह नहीं कि मचे ज्ञान और सच्चे त्यागको फेंक देना । सदा ज्ञान और मचा त्याग यह ऐसी वस्तु है कि उसको प्रलय भी नष्ट नहीं कर सकता, तब गुरुसस्थाको फेंक देनका अर्थ क्या ? इसका अर्थ इतना ही है कि आजकल जो अज्ञान गुरुओंके कारण पुष्ट होता है, जिस विक्षेपसे समाज शोषित होता है उस अज्ञान तथा विक्षेप से बचने के लिये समाजको गुरुसंस्थाकं साथ असहकार करना । इस असहकार के अग्नितापके समय सच्चे गुरु जैसे होकर आगे निकल आवेंगे, जो मैले होगे वे या तो शुद्ध हो कर आगे आवेंगे और या जल कर भस्म हो जायंगे; परन्तु आजकल समाजको जिस प्रकारके ज्ञान और त्यागवाले गुरुओंकी जरूरत है ( सेवा लेनेवाले नहीं किन्तु संवा देनेवाले मार्गदर्श कोंकी जरूरत है) उस प्रकार के ज्ञान और त्यागवाले विविध वाहनोंकी मर्यादित भोगतृष्णा रखने वाले भगवान् के मुख्य उपासक अन्न, वस्त्र वगैरह सभी उत्पन्न करते और उनका व्यापार करते थे। जो मनुष्य दूसरेकी कन्याको विवाह कर घर रक्खे और अपनी कन्या दूसरेको विवाहन में धर्मनाश देखे वह मनुष्य या तो मूर्ख होना चाहिये और या चतुर हो तो जैनसमाजमें प्रतिष्ठित स्थान भोगने वाला नहीं होना हिये । जो मनुष्य कोयला, लकड़ी, चमड़ा और यंत्रोंका थोक उपयोग करे वह मनुष्य प्रकट रूपसे यदि बेंसे व्यापारका त्याग करता होगा तो इसका अर्थ यही है कि वह दूसरोंके पास वैसे व्यापार कराता है । करने में ही अधिक दोष है और कराने में तथा सम्मति देनमें कम दोप है ऐसा कुछ एकान्तिक कथन जैन शास्त्र में नहीं। अनेक बार करने की अपेक्षा कराने तथा सम्मति देनमें अधिक दोष होनेका संभव जैनशास्त्र मानता है। जो बौद्ध मांसका धंधा करने में पाप मान कर वैसा धंधा खुद न करते हुए मांस मात्र भोजनको निष्पाप मानते हैं उन बौद्धों को यदि जैनशास्त्र ऐसा कहता हो कि " तुम भले ही धंधा न करो परन्तु तुम्हारे द्वारा उपयोग में आते हुए मांसको तथ्यार करने वाले लोगों के पाप में तुम भागीदार हो हो," तो क्या वेही निष्पक्ष जैनशास्त्र केवल कुलधर्म होने के कारण जैनोंका यह बात कहते हुए हिचकेंगे ? नहीं, कभी नहीं। वे लो खुल्लमखुल्ला कहेंगे कि या तो भाग्य चीजांका त्याग करो और त्याग न करो तो जैसे उनके उत्पन्न करने और उनके व्यापार करने में पाप समझते हो वैसे दूसरों द्वारा तय्यार हुई और दूसरों के द्वारा पूरी की जाती उन चीजोके भांग में भी उतना ही पाप समझो। जैनशास्त्र तुमको अपनी मर्यादा बतलाएगा कि दोष या पापका सम्बन्ध भांगवृत्तिके साथ है। मात्र चीजोंके सम्बंध के साथ नहीं। जिस जमाने (काल) में मजदूरी ही रोटी है ऐसा सूत्र जगद्व्यापी होता होगा उस जमाने में समाज की अनिवार्य जरूरियात बाला मनुष्य अन्न, वस्त्र, रस, मकान, आदिको खुद उत्पन्न करने में और उनका खुद धंधा करनेमें दोष मानने वालेका या तो अविचारी मानेगा या धर्ममूद । गुरु उत्पन्न करने के लिये उनकी विकृत गुरुत्ववाली संस्था के साथ आज नहीं तो कल समाजको असहकार किये ही छुटकारा है। हाँ, गुरु संस्था में यदि कोई एकाध माईका लाल सच्चा गुरु जीवित होगा तो ऐसे कठोर प्रयोग के पहले ही गुरुसंस्थाको बर्बादी से बचा लेगा । जो व्यक्ति आन्तरराष्ट्रीय शान्तिपरिषद-जैसी परिषदों में उपस्थित हो कर जगतका समाधान हो सके ऐसी रीतिसे अहिंसाका तत्व समझा सकेगा, अथवा अपने अहिंसाबल पर वैसी परिषदोंके हिमायतियोंको अपने उपाश्रयमें आकर्षित कर सकेगा वही इस समय पीछे सच्चा जैनगुरु बन सकेगा । इस समयका एक साधारण जगत प्रथमकी अल्पता में से मुक्त हो कर विशालता में जाता है, वह कोई जातपाँत, सम्प्रदाय, परम्परा, वेप या भाषाकी खास पर्वाह किये बिना ही मात्र शुद्धज्ञान और शुद्ध त्यागका मार्ग देखता हुआ खड़ा है। इससे यदि वर्तमानकी गुरुसंस्था हमारी शक्तिवर्धक होने के बदल शक्तिबाधक ही होती हो तो उसकी और जैन समाजकी भलाई के लिये पहलेसे पहले अवसर पर समझदार मनुष्यको उसकी साथ असहकार करना यही एक मार्ग रहता है । यदि ऐसा मार्ग पकड़ने की परवानगी जैनशास्त्र मेसे ही प्राप्त करनी हो तो भी वह सुलभ है। गुलामीवृत्ति नवीन रचती नहीं और प्राचीन को सुधारती या फेंकती नहीं । इस वृत्ति के साथ भय और लालचकी सेना होती है। जिसे मद्गुणोंकी प्रतिष्ठा करनी होती है उसे गुलामी वृत्तिका बरक्का फेंक करके भी प्रेम तथा नम्रता कायम रखते हुए ही विचार करना उचित मालूम होता है। धंधा-विषयक अन्तिम प्रश्न के सम्बंध मे जैनशास्त्र की मर्यादा बहुत ही संक्षिम तथा स्पर्शरूप होते हुए भी सच्चा खुलासा करती है और वह यह कि जिस चीज का धंधा धर्मविरूद्ध या नीतिविरुद्ध हो तो उस चीज का उपभोग भी धर्म और नीतिविरुद्ध है। जैसे मांस और मद्य जैनपरम्परा के लिये वर्ज्य बतलाये गये हैं तो उनका व्यापार भी उतना ही निषेधपात्र है । अमुक वस्तुका व्यापार समाज न करे तो उसे उसका उपयोग भी छोड़ देना चाहिये । इसी कारण से अन्न, वस्त्र और उपसंहार धारणाकी अपेक्षा शास्त्रमर्यादा का लेख अधिक लम्बा हो गया है परन्तु मुझे जब स्पष्ट मालूम पड़ा कि इसके संक्षेप में स्पष्टता रहेगी इससे थोड़ा लम्बा करने की ज़रूरत पड़ी है । इस लेखमें मैंने शास्त्रोंके आधार जान कर ही उद्धृत नहीं किये; क्योंकि किसी भी विषयसम्बंध में अनुकुल और प्रतिकूल दोनों प्रकारके शास्त्रवाक्य मिल सकते हैं। अथवा एक वाक्यमें से दो बिरोधी अर्थ घटित किये जा सकते हैं। मैंने सामान्य तौर पर बुद्धिगम्य हो ऐसा ही प्रस्तुत करनेका प्रयत्न किया है; तो भी मुझे जो कुछ अल्पस्वल्प जैनशास्त्रका परिचय हुआ है, और वर्तमान समयका अनुभव मिला है उन दोनों की एक वाक्यता मनमें रखकर ही ऊपर की चर्चा की है। फिर भी मेरे इस विचारको विचारनेकी और उसमेंसे निरर्थकको छोड़ देनेकी सबको छूट है । जो मुझे मेरे विचार में भूल समझाएगा वह वयमें तथा जातिमें चाहे जो होते हुए भी मेरे आदरका पात्र अवश्य होगा । सम्पादकीय नोट श्रद्धा तथा मिथ्यात्वादिका आरोप लगा सकते हैं और ऐसा होना बहुत कुछ स्वाभाविक है; क्योंकि चिरकालीन संस्कार किसी भी नई बातके सामने आने पर उसे फेंका करते हैं - भले ही वह बात कितनी ही अच्छी क्यों न हो । जो लोग वर्तमान जैनशास्त्रोंको सर्वज्ञकी वाणीद्वारा भरे हुए रिकार्डो-जैसा समझते हैं और उनकी सभी बातोंको त्रिकालाबाधित अटल सत्य-जैसी मानते हैं उनके सामने यह लेख एक भिन्न ही प्रकार का विचार प्रस्तुत करता है और इस लिये इससे उस प्रकार के श्रद्धालु जगत में हलचलका पैदा होना कोई अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता। जिस साधुसंस्था पर, उसके सुधारकी दृष्टि से, लेख में भारी आक्रमण किया गया है उसके कुछ कर्णधार अथवा वे व्यक्ति तो, जिनके स्वार्थमें इस लेखके विचारोंसे बाधा पड़ती है, और भी अधिक रोष धारण कर सकते हैं और अपनी सत्ताको लेखकके विरुद्ध प्रयुक्त करनेका जघन्य प्रयत्न भी कर सकते हैं; परन्तु जो विचारक हैं उनकी ऐसी प्रवृत्ति नहीं हो सकती। वे धैर्य के साथ, शान्तिके साथ, संस्कारोंका पर्दा उठा कर और अच्छा समय निकाल कर इसकी प्रत्येक बातको तोलेंगे, जाँच करेंगे और गंभीरता के साथ विचार करने पर जो बात उन्हें अनुचित अथवा बाधित मालूम पड़ेगी उसके विरोधमें, हो सकेगा तो, कुछ युक्ति पुरस्सर लिखेंगे भी । लेखक महादयने, लेखके अन्त में खुद ही इस बात के लिये इच्छा व्यक्त की है कि विद्वान् लोग उन्हें उनकी भूल सुझाएँ - जो सुझाएँगे वे अवश्य उनके आदरके पात्र बनेंगे । वे विरोधसे डरने अथवा अप्रसन्न होने वाले नहीं हैं - उन्हें तो विरोधमें ही विकासका मार्ग नज़र आता है। अतः विद्वानोंको चाहिये कि वे इस विषय पर अथवा लेख में प्रस्तुत किये हुए सभी प्रश्नों पर ग हरा विचार करनेका परिश्रम उठाएँ । 'अनेकान्त' ऐसे सभी युक्ति पुरस्सर लेखोंका अभिनन्दन करनेके लिये तय्यार है जो इस विषय पर कुछ नया तथा गहरा प्रकाश डालते हों। परन्तु उनमेंसे कोई भी लेख-अनुकूल हो या प्रतिकूल- क्षोभ, कोप या साम्प्रदायिककट्टरता के प्रदर्शनको लिये हुए न होना चाहिये । यह लेख लेखक महोदयके कोई दो-चार-दस वर्ष के ही नहीं किन्तु जीवनभर के अध्ययन, मनन और अनुभवनका प्रतिफल जान पड़ता है; इससे आपके अध्ययनकी विशालता तथा गहराईका ही पता नहीं चलता बल्कि इस बातका भी बहुत कुछ पता चल जाता है कि आपकी दृष्टि कितनी विशाल है, विचार है स्वातंत्र्य तथा स्पष्टवादिताको लिये हुए निर्भीकताको आपने कहाँ तक अपनाया है और साम्प्रदायिक कट्टरता के आप कितने विरोधी हैं। यह लेख आपके शास्त्रीय तथा लौकिक दोनों प्रकार के अनुभव के साथ अनेकान्त के कितनेही रहस्यको लिये हुए है और इस लिये एक प्र कारका मार्मिक तथा विचारणीय लेख है। अभी तक इस प्रकारका लेख किसी दूसरे जैन विद्वानकी लेखनीसे प्रसूत हुआ हो, मुझे मालूम नहीं। परन्तु यह सब कुछ होते हुए भी इस लेख में कुछ त्रुटियाँ न हों- कोई भ्रान्ति न हो, यह नहीं कहा जा सकता। इसे पढ़ कर पढ़ कितने ही लोग भड़क सकते हैं, चिढ सकते हैं, अ
भगवान महावीर या उनके सच्चे शिष्योंने बनवास स्वीकार किया हो, नग्नत्व धारण किया हो, गुफा पसंद की हो, घर तथा परिवारका त्याग किया हो, धन सम्पत्तिकी तरफ बैपर्वाही दिखलाई हो, ये सब प्रान्त रिक विकासमेंसे उत्पन्न होकर जरा भी विरुद्ध मालूम नहीं होते। परन्तु गले तक भोगतृष्णा में डूबे हुए तथा सच्चे जैनत्वकी साधना के लिये जरा भी सहनशीलत न रखनेवाले तथा उदारदृष्टि रहित मनुष्य जब घरबार छोड़ जंगल में दौड़ें; गुफावास स्वीकार करें, मा-बाप या आश्रितोंकी जवाबदारी फेंक दें तब तो उनका जीवन विसंवादी होवे ही और पीछे बदलते हुए नये 'संयोगांकैसाथ नया जीवन घड़ने की अशक्तिके कारण उनके जीवनमें विरोध मालूम पड़े, यह स्पष्ट है [वर्ष एक, किरण ग्यारह, बारह और परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अस्मिता जैसी कोई वस्तु ही न थी ? क्या उस वक्त के राज्यकर्ता मात्र वीतराग दृष्टि से और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना से राज्य करते थे ? यदि इन सब प्रश्नोंका उत्तर यही हो कि जैसे साधारण कुटुम्बी गृहस्थ जैनत्व धारण करने के साथ अपने साधारण गृहव्यवहार चला सकता है तो प्रतिष्ठित तथा वैभवशाली गृहस्थ भी इसी प्रकार जैनत्वके साथ अपनी प्रतिष्ठाको सँभाल सकता है और इसी न्यायसे राजा तथा राजकर्मचारी भी अपने कार्यक्षेत्र में रहते हुए सचा जैनत्व, पाल सकते हैं, तब आजकी राजप्रकरणी समस्या का उत्तर भी यही है । अर्थात् राष्ट्रीयता और राजेप्रकरण के साथ सधे जैनत्व का कुछ भी विरोध नहीं । निःसन्देह यहाँ त्यागी वर्गमें गिने जाने वाले जैनकी बात विचारनी बाक़ी रहती है। त्यागीवर्गका राष्ट्रीय क्षेत्र और राजप्रकरण के साथ सम्बंध घटित नहीं हो सकता ऐसी कल्पना उत्पन्न होनेका कारण यह है कि राष्ट्रीय प्रवृत्तिमें शुभ द्धत्व जैसा तत्व ही नहीं और राजप्रकरण भी समभाव-वाला हो नहीं सकता ऐसी मान्यता रूढ हो गई है। परन्तु अनुभव हमको बतलाता है कि सभी इक्कीक़त ऐसी नहीं । यदि प्रवृत्ति करनेवाला स्वयं शुद्ध है वह हरेक जगह शुद्धिको ला सकता तथा सुरक्षित रख सकता है और यदि वह खुद ही शुद्ध न हो तो त्यागीवर्ग में रहते हुए भी सदा मैल तथा भ्रमणामें पड़ा रहता है। हमारे त्यागी माने जानेवाले जैनोंको खटपट, प्रपंच और अशुद्धिमें लिपटा हुआ क्या नहीं देखते ? यदि तटस्थ जैसे बड़े त्यागी वर्गमें एकाध व्यक्ति सचमुच जैन मिलनेका संभव हो तो आधुनिक राष्ट्रीय प्रवृत्ति और राजकीय क्षेत्र में कूदने 'राष्ट्रीय क्षेत्र और राजप्रकरण जैनोंके भाग लेने · ग्रा. न. लेने " विषयक पहले प्रश्न के सम्बन्ध में जानना चाहिये कि जैनत्वं व्यागों और गृहस्थ ऐसे दो वर्गों में विभाजित है। गृहस्थ जैनत्व यदि राजकर्ताओं तथा राज्य के मन्त्री, सेनाधिपति वगैरह अमलदारोंमें खुद "भगवान महावीर के समय में ही उत्पन्न हुआ था और इसके बारके दो हज़ार तीन सौ वर्ष तक राजाओं तथा राज्य के "मुख्य अंमलदारों में जैनत्व लानेका "अथवा चले आते जैनत्वको स्थिर रखनेका भगीरथ * प्रयत्न जैनाचार्यों ने किया था तो फिर आज राष्ट्रीयता 'और जैनत्व के मध्य में विरोध किस लिये दिखाई देता है ? क्या में पुराने जमाने के राजा, राजकर्मचारी और उनका राजप्रकरण यह सब कुछ मनुष्यातीत या लोकोत्तर भूमि का था ? क्या उसमें राजखटपट, 'प्रपंच, या वासनाओंको जरा भी स्थान नहीं था या उस बर्फ के राजप्रकरण में उस वक्त की भावना के आश्विन, कार्तिक, वीरनिशून्यसंदो हज़ार चार सौ छप्पन] वाले बड़े वर्ग में उससे अधिक श्रेष्ट गुणजैनत्वको धारण करने वाली अनेक व्यक्तियाँ क्या नहीं मिलतीं? जो जन्मसे भी जैन हैं । फिर त्यागी माने जानेवाले जैनवर्गमें भी राष्ट्रीयता और राजकीय क्षेत्र में समयोचित भाग लेने के उदाहरण जैन साधुसंघके इतिहास में क्या कमती हैं ? फेर हो तो वह इतना ही है कि उस वक्तकी भाग लेनेकी प्रवृत्तिमें साम्प्रदायिक भावना और नैतिक भावना साथ ही काम करती थीं; जब कि आज साम्प्रदायिक भावना जरा भी कार्यसाधक या उपयोगी हो सके ऐसा नहीं। इससे यदि नैतिक भावना और अर्पण वृत्ति हृदय में हो तो गृहस्थ या त्यागी किसी भी जैनको, जैनत्वको जरा भी बाधा न आए तथा उलटा अधिक पोषण मिले इस रीतिसे, काम करनेका राष्ट्रीय तथा राजकीय क्षेत्र में पूर्ण अवकाश है। घर तथा व्यापार के क्षेत्रकी अपेक्षा राष्ट्र और राजकीय क्षेत्र बड़ा है, यह बात ठीक; परन्तु विश्वकी साथ अपना मेल होनेका दावा करने वाले जैनधर्मके लिये तो राष्ट्र और राजकीय क्षेत्र यह भी एक घर जैसा ही छोटासा क्षेत्र है। उलटा आज तो इस क्षेत्र में ऐसे कार्य शामिल हो गये हैं जिनका अधिकसे अधिक मेल जैनत्व के साथ ही है। मुख्य बात तो यह है कि किसी कार्य अथवा क्षेत्र के साथ जैनत्वका तादात्म्य संबंध नहीं । कार्य और क्षेत्र तो चाहे जो हो परंतु यदि जैनत्व की दृष्टि रखकर उसमें प्रवृत्ति होतो वह सब शुद्ध ही होगा । योग्य जान पड़ा था वह तो एकान्तिक त्याग ही था; परन्तु ऐसे त्यागके इच्छुकों तक सब एकाएक ऐसी भूमिका पर पहुँच नहीं सकते। इस लोकमानस से भगवान अनभिज्ञ न थे, इसी लिये वे उम्मीदवार के कमती या बढ़ती त्यागमें सम्मत होकर"मा पड़िबंध कुणड" - 'विलम्ब मत कर' ऐसा कह कर सम्मत होते गये । और बाकी की भोगवृत्ति तथा सामाजिक मर्यादाओंका नियमन करने वाले शाख उस वक्त भी थे और आगे भी रचे जायेंगे । 'स्मृति' जैसे लौकिक शास्त्र लोग आज तक घड़ते आए हैं और आगे भी घड़ेंगे। देश-कालानुसार लोग अपनी भोगमर्यादा के लिये नये नियम-नये व्यवहार घड़ेंगे, पुरानो में फेरफार करेंगे और बहुतोंको फेंक भी देंगे । इन लौकिक स्मृतियोमें भगवान पड़े ही नहीं। भगवान का ध्रुव सिद्धान्त त्यागका है । लौकिक नियमोंका चक्र उसके आस-पास उत्पाद व्ययकी तरह ध्रुव सिद्धान्तको बाधा न आए ऐसी रीतिसे फिरा करे, इतना ही देखना रहता है। इसी कारणसे जब कुलधर्म पालनेवालेके तौर पर जैनसमाज व्यवस्थित हुआ और फैलता गया तब उसने लौकिक नियमोंवाले भोग और सामाजिक मर्यादाका प्रतिपादन करने वाले अनेक शास्त्र रचे । जिस न्यायने भगवान के पीछे हजार वर्षों में समाजको जीता रक्खा वही न्याय समाजको जीता रहने के लिये हाथ ऊँचा करके कहना है कि 'तू सावधान हो, अपने निकट विस्तारको प्राप्त हुई परिस्थितिको देख और फिर समयानुसारिणी स्मृतियाँ रच । तू इतना ध्यान में रखना कि त्याग ही सपा लक्ष्य है; परंतु साथमें यह भी ध्यान में रखना कि त्यागविना त्यागका ढौंग तू करेगा तो जरूर मरंमा । और अपनी भोगमर्यादाको अनुकूल पड़े ऐसी रीति से दूसरा प्रश्न बिबाह प्रथा और जातपाँस आदिके सम्बंध-विषयका है। इस विषय में जानना चाहिये कि जैनत्वका प्रस्थान एकान्त त्यागवृत्तिमेंसे हुआ है। भगवान महावीरको जो कुछ अपनी साधनामेंसे देने सामाजिक जीवन की घटना करना; मात्र स्त्रीत्वके कारण या पुरुषत्व के कारण एककी भोगवत्ति अधिक है और दूसरेकी भोगवृ त्त कम है अथवा एकको अपनी वृत्तियाँ तृप्त करनेका चाहे जिस रीतिसे हक़ है और दूसरेको वृत्तियों भांग बननेका जन्मसिद्ध हक़ है, ऐसा कभी न मानना । समाजधर्म समाजको यह भी कहताहैकि सामाजिक स्मृतियाँ सदा काल एक जैसी होती ही नहीं। त्याग के अनन्य पक्षपाती गुरु ने भी जैनसमाजका बचाने के लिये अथवा उस वक्त की परिस्थिति के वश होकर आश्चर्य प्रदान करें ऐसे भोगमर्यादा वाले विधान किये हैं। वर्तमानकी नई जैन स्मृतियों में चौंसठ हजार या छियानवे हजार तो क्या, बल्कि एक साथ दो स्त्रियां रखने वालेकी प्रतिष्ठाका प्रकरणभी नाशको प्राप्त होगा तब ही जैनसमाज सम्मानित धर्मसमाजोमें मुँह दिखा सकेगा। आजकल की नई स्मृतिके प्रकरणमं एक साथ पाँच पति रखने वाली द्रौपदा के सतीत्वकी प्रतिष्ठा नहीं हो; तो भी प्रामाणिक रूपमे पुनर्विवाह करने वाली स्त्रीके सतीत्वकी प्रतिष्ठाको दर्ज कियेही छुटकारा है। आजकल की स्मृतिमें चालीस वर्ष से अधिकी उम्रवाले व्यक्तिका कुमारी कन्या के साथ विवाह बलात्कार या व्यभिचार ही दर्ज किया जायगा। एक स्त्रीकी मौजूदगीमें दूसरी स्त्री करने वाले आजकल की जैनस्मृतिमे स्त्रीघातकी गिने जायँगे; क्योंकि आज नैतिक भावनाका बल जो चारों तरफ फैल रहा है उसकी अवगणना करके जैनसमाज सबके बीच मानपूर्वक रह ही नहीं सकता । जातपातक बन्धन कठोर करने या ढीले करने * देताम्बर समाजमें हिन्दुओं की तरह के पांच पति माने गये हैं, उसीको लक्ष्य करके यह कथन जान पड़ता है [ वर्ष एक, किरण ग्यारह, बारह · यह भी व्यवहारकी अनुकूलता का ही प्रश्न होने से उसके विधान नये सिरेसे ही करने पड़ेंगे। इस विषय में प्राचीन शास्त्रों का आधार शोधन ही हो तो जैनसाहित्य में से मिल सके ऐसा है; परन्तु इस शोधकी मेहनत करनेकी अपेक्षा " ध्रुव जैनत्व" समभाव और सत्यदृष्टि क़ायम रखकर उसके ऊपर व्यवहारके अनुकूल पड़े ऐसी रीतिस जैनसमाजको जीवन अर्पण करने वाली लौकिक स्मृतियाँ रच लेनेमें ही अधिक श्रेय है । गुरु संस्थाको रखने या फेंक देने के प्रश्न विषयमें कहना यह है कि आज तक बहुत बार गुरुसंस्था फेंक दी गई है और तो भी वह खड़ी है। पार्श्वनाथ के पश्चात्मे विकृत होने वाली परम्पराको महावीरने फेंक दिया इससे कुछ गुरु संस्थाका अन्त नहीं आया। चैत्यवामी गये परन्तु समाजने दूसरी संस्था माँग ही ली । जतियोंके दिन पूरे होते गये उधर संवेगी साधु खड़े ही रहे । गुरुसंस्थाको फेंक देना इसका अर्थ यह नहीं कि मचे ज्ञान और सच्चे त्यागको फेंक देना । सदा ज्ञान और मचा त्याग यह ऐसी वस्तु है कि उसको प्रलय भी नष्ट नहीं कर सकता, तब गुरुसस्थाको फेंक देनका अर्थ क्या ? इसका अर्थ इतना ही है कि आजकल जो अज्ञान गुरुओंके कारण पुष्ट होता है, जिस विक्षेपसे समाज शोषित होता है उस अज्ञान तथा विक्षेप से बचने के लिये समाजको गुरुसंस्थाकं साथ असहकार करना । इस असहकार के अग्नितापके समय सच्चे गुरु जैसे होकर आगे निकल आवेंगे, जो मैले होगे वे या तो शुद्ध हो कर आगे आवेंगे और या जल कर भस्म हो जायंगे; परन्तु आजकल समाजको जिस प्रकारके ज्ञान और त्यागवाले गुरुओंकी जरूरत है उस प्रकार के ज्ञान और त्यागवाले विविध वाहनोंकी मर्यादित भोगतृष्णा रखने वाले भगवान् के मुख्य उपासक अन्न, वस्त्र वगैरह सभी उत्पन्न करते और उनका व्यापार करते थे। जो मनुष्य दूसरेकी कन्याको विवाह कर घर रक्खे और अपनी कन्या दूसरेको विवाहन में धर्मनाश देखे वह मनुष्य या तो मूर्ख होना चाहिये और या चतुर हो तो जैनसमाजमें प्रतिष्ठित स्थान भोगने वाला नहीं होना हिये । जो मनुष्य कोयला, लकड़ी, चमड़ा और यंत्रोंका थोक उपयोग करे वह मनुष्य प्रकट रूपसे यदि बेंसे व्यापारका त्याग करता होगा तो इसका अर्थ यही है कि वह दूसरोंके पास वैसे व्यापार कराता है । करने में ही अधिक दोष है और कराने में तथा सम्मति देनमें कम दोप है ऐसा कुछ एकान्तिक कथन जैन शास्त्र में नहीं। अनेक बार करने की अपेक्षा कराने तथा सम्मति देनमें अधिक दोष होनेका संभव जैनशास्त्र मानता है। जो बौद्ध मांसका धंधा करने में पाप मान कर वैसा धंधा खुद न करते हुए मांस मात्र भोजनको निष्पाप मानते हैं उन बौद्धों को यदि जैनशास्त्र ऐसा कहता हो कि " तुम भले ही धंधा न करो परन्तु तुम्हारे द्वारा उपयोग में आते हुए मांसको तथ्यार करने वाले लोगों के पाप में तुम भागीदार हो हो," तो क्या वेही निष्पक्ष जैनशास्त्र केवल कुलधर्म होने के कारण जैनोंका यह बात कहते हुए हिचकेंगे ? नहीं, कभी नहीं। वे लो खुल्लमखुल्ला कहेंगे कि या तो भाग्य चीजांका त्याग करो और त्याग न करो तो जैसे उनके उत्पन्न करने और उनके व्यापार करने में पाप समझते हो वैसे दूसरों द्वारा तय्यार हुई और दूसरों के द्वारा पूरी की जाती उन चीजोके भांग में भी उतना ही पाप समझो। जैनशास्त्र तुमको अपनी मर्यादा बतलाएगा कि दोष या पापका सम्बन्ध भांगवृत्तिके साथ है। मात्र चीजोंके सम्बंध के साथ नहीं। जिस जमाने में मजदूरी ही रोटी है ऐसा सूत्र जगद्व्यापी होता होगा उस जमाने में समाज की अनिवार्य जरूरियात बाला मनुष्य अन्न, वस्त्र, रस, मकान, आदिको खुद उत्पन्न करने में और उनका खुद धंधा करनेमें दोष मानने वालेका या तो अविचारी मानेगा या धर्ममूद । गुरु उत्पन्न करने के लिये उनकी विकृत गुरुत्ववाली संस्था के साथ आज नहीं तो कल समाजको असहकार किये ही छुटकारा है। हाँ, गुरु संस्था में यदि कोई एकाध माईका लाल सच्चा गुरु जीवित होगा तो ऐसे कठोर प्रयोग के पहले ही गुरुसंस्थाको बर्बादी से बचा लेगा । जो व्यक्ति आन्तरराष्ट्रीय शान्तिपरिषद-जैसी परिषदों में उपस्थित हो कर जगतका समाधान हो सके ऐसी रीतिसे अहिंसाका तत्व समझा सकेगा, अथवा अपने अहिंसाबल पर वैसी परिषदोंके हिमायतियोंको अपने उपाश्रयमें आकर्षित कर सकेगा वही इस समय पीछे सच्चा जैनगुरु बन सकेगा । इस समयका एक साधारण जगत प्रथमकी अल्पता में से मुक्त हो कर विशालता में जाता है, वह कोई जातपाँत, सम्प्रदाय, परम्परा, वेप या भाषाकी खास पर्वाह किये बिना ही मात्र शुद्धज्ञान और शुद्ध त्यागका मार्ग देखता हुआ खड़ा है। इससे यदि वर्तमानकी गुरुसंस्था हमारी शक्तिवर्धक होने के बदल शक्तिबाधक ही होती हो तो उसकी और जैन समाजकी भलाई के लिये पहलेसे पहले अवसर पर समझदार मनुष्यको उसकी साथ असहकार करना यही एक मार्ग रहता है । यदि ऐसा मार्ग पकड़ने की परवानगी जैनशास्त्र मेसे ही प्राप्त करनी हो तो भी वह सुलभ है। गुलामीवृत्ति नवीन रचती नहीं और प्राचीन को सुधारती या फेंकती नहीं । इस वृत्ति के साथ भय और लालचकी सेना होती है। जिसे मद्गुणोंकी प्रतिष्ठा करनी होती है उसे गुलामी वृत्तिका बरक्का फेंक करके भी प्रेम तथा नम्रता कायम रखते हुए ही विचार करना उचित मालूम होता है। धंधा-विषयक अन्तिम प्रश्न के सम्बंध मे जैनशास्त्र की मर्यादा बहुत ही संक्षिम तथा स्पर्शरूप होते हुए भी सच्चा खुलासा करती है और वह यह कि जिस चीज का धंधा धर्मविरूद्ध या नीतिविरुद्ध हो तो उस चीज का उपभोग भी धर्म और नीतिविरुद्ध है। जैसे मांस और मद्य जैनपरम्परा के लिये वर्ज्य बतलाये गये हैं तो उनका व्यापार भी उतना ही निषेधपात्र है । अमुक वस्तुका व्यापार समाज न करे तो उसे उसका उपयोग भी छोड़ देना चाहिये । इसी कारण से अन्न, वस्त्र और उपसंहार धारणाकी अपेक्षा शास्त्रमर्यादा का लेख अधिक लम्बा हो गया है परन्तु मुझे जब स्पष्ट मालूम पड़ा कि इसके संक्षेप में स्पष्टता रहेगी इससे थोड़ा लम्बा करने की ज़रूरत पड़ी है । इस लेखमें मैंने शास्त्रोंके आधार जान कर ही उद्धृत नहीं किये; क्योंकि किसी भी विषयसम्बंध में अनुकुल और प्रतिकूल दोनों प्रकारके शास्त्रवाक्य मिल सकते हैं। अथवा एक वाक्यमें से दो बिरोधी अर्थ घटित किये जा सकते हैं। मैंने सामान्य तौर पर बुद्धिगम्य हो ऐसा ही प्रस्तुत करनेका प्रयत्न किया है; तो भी मुझे जो कुछ अल्पस्वल्प जैनशास्त्रका परिचय हुआ है, और वर्तमान समयका अनुभव मिला है उन दोनों की एक वाक्यता मनमें रखकर ही ऊपर की चर्चा की है। फिर भी मेरे इस विचारको विचारनेकी और उसमेंसे निरर्थकको छोड़ देनेकी सबको छूट है । जो मुझे मेरे विचार में भूल समझाएगा वह वयमें तथा जातिमें चाहे जो होते हुए भी मेरे आदरका पात्र अवश्य होगा । सम्पादकीय नोट श्रद्धा तथा मिथ्यात्वादिका आरोप लगा सकते हैं और ऐसा होना बहुत कुछ स्वाभाविक है; क्योंकि चिरकालीन संस्कार किसी भी नई बातके सामने आने पर उसे फेंका करते हैं - भले ही वह बात कितनी ही अच्छी क्यों न हो । जो लोग वर्तमान जैनशास्त्रोंको सर्वज्ञकी वाणीद्वारा भरे हुए रिकार्डो-जैसा समझते हैं और उनकी सभी बातोंको त्रिकालाबाधित अटल सत्य-जैसी मानते हैं उनके सामने यह लेख एक भिन्न ही प्रकार का विचार प्रस्तुत करता है और इस लिये इससे उस प्रकार के श्रद्धालु जगत में हलचलका पैदा होना कोई अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता। जिस साधुसंस्था पर, उसके सुधारकी दृष्टि से, लेख में भारी आक्रमण किया गया है उसके कुछ कर्णधार अथवा वे व्यक्ति तो, जिनके स्वार्थमें इस लेखके विचारोंसे बाधा पड़ती है, और भी अधिक रोष धारण कर सकते हैं और अपनी सत्ताको लेखकके विरुद्ध प्रयुक्त करनेका जघन्य प्रयत्न भी कर सकते हैं; परन्तु जो विचारक हैं उनकी ऐसी प्रवृत्ति नहीं हो सकती। वे धैर्य के साथ, शान्तिके साथ, संस्कारोंका पर्दा उठा कर और अच्छा समय निकाल कर इसकी प्रत्येक बातको तोलेंगे, जाँच करेंगे और गंभीरता के साथ विचार करने पर जो बात उन्हें अनुचित अथवा बाधित मालूम पड़ेगी उसके विरोधमें, हो सकेगा तो, कुछ युक्ति पुरस्सर लिखेंगे भी । लेखक महादयने, लेखके अन्त में खुद ही इस बात के लिये इच्छा व्यक्त की है कि विद्वान् लोग उन्हें उनकी भूल सुझाएँ - जो सुझाएँगे वे अवश्य उनके आदरके पात्र बनेंगे । वे विरोधसे डरने अथवा अप्रसन्न होने वाले नहीं हैं - उन्हें तो विरोधमें ही विकासका मार्ग नज़र आता है। अतः विद्वानोंको चाहिये कि वे इस विषय पर अथवा लेख में प्रस्तुत किये हुए सभी प्रश्नों पर ग हरा विचार करनेका परिश्रम उठाएँ । 'अनेकान्त' ऐसे सभी युक्ति पुरस्सर लेखोंका अभिनन्दन करनेके लिये तय्यार है जो इस विषय पर कुछ नया तथा गहरा प्रकाश डालते हों। परन्तु उनमेंसे कोई भी लेख-अनुकूल हो या प्रतिकूल- क्षोभ, कोप या साम्प्रदायिककट्टरता के प्रदर्शनको लिये हुए न होना चाहिये । यह लेख लेखक महोदयके कोई दो-चार-दस वर्ष के ही नहीं किन्तु जीवनभर के अध्ययन, मनन और अनुभवनका प्रतिफल जान पड़ता है; इससे आपके अध्ययनकी विशालता तथा गहराईका ही पता नहीं चलता बल्कि इस बातका भी बहुत कुछ पता चल जाता है कि आपकी दृष्टि कितनी विशाल है, विचार है स्वातंत्र्य तथा स्पष्टवादिताको लिये हुए निर्भीकताको आपने कहाँ तक अपनाया है और साम्प्रदायिक कट्टरता के आप कितने विरोधी हैं। यह लेख आपके शास्त्रीय तथा लौकिक दोनों प्रकार के अनुभव के साथ अनेकान्त के कितनेही रहस्यको लिये हुए है और इस लिये एक प्र कारका मार्मिक तथा विचारणीय लेख है। अभी तक इस प्रकारका लेख किसी दूसरे जैन विद्वानकी लेखनीसे प्रसूत हुआ हो, मुझे मालूम नहीं। परन्तु यह सब कुछ होते हुए भी इस लेख में कुछ त्रुटियाँ न हों- कोई भ्रान्ति न हो, यह नहीं कहा जा सकता। इसे पढ़ कर पढ़ कितने ही लोग भड़क सकते हैं, चिढ सकते हैं, अ
Posted On: आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (नेशनल मेडीसिनल प्लांट्स बोर्ड-एनएमपीबी) ने आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में देशभर में जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान की शुरूआत की है। इस कदम से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और हरित भारत का सपना पूरा होगा। अभियान के तहत, देशभर में अगले एक वर्ष में 75 हजार हेक्टेयर रकबे में जड़ी-बूटियों की खेती की जायेगी। कार्यक्रम की शुरूआत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और महाराष्ट्र के पुणे से की गई है। यह 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का दूसरा कार्यक्रम है। पुणे में औषधीय पौधे किसानों को बांटे गये। जो लोग पहले से जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया गया। अहमदनगर जिले के पारनेर से विधायक नीलेश लंके, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) के महानिदेशक डॉ. आसिम अली ख़ान और एनएमपीबी के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सांवल ने भिन्न-भिन्न स्थानों से कार्यक्रमों की अगुवाई की। डॉ. सांवल ने कहा, "इस प्रयास से देश में औषधीय पौधों की आपूर्ति में और तेजी आयेगी।" इस अवसर पर 75 किसानों को कुल मिलाकर 7500 औषधीय पौधे वितरित किये गये। इसके अलावा 75 हजार पौधे वितरित करने का लक्ष्य भी तय किया गया। सहारनपुर में उत्तर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्म सिंह सैनी, एनएमपीबी के अनुसंधान अधिकारी श्री सुनील दत्त और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों ने सम्बंधित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्म सिंह सैनी ने जड़ी-बूटियों की खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया। आसपास के कई जिलों से आये 150 किसानों को औषधीय पौधे निशुल्क वितरित किये गये। पौधों की पांच प्रजातियां वितरित की गईं, जिनमें पारिजात, बेल, नीम, अश्वगंधा और जामुन के पौधे शामिल थे। किसानों को जामुन के 750 पौधे अलग से निशुल्क बांटे गये। केंद्रीय आयुष मंत्री श्री सर्बानन्द सोनोवाल ने कहा कि औषधीय पौधों के सिलसिले में देश की अपार क्षमता है और 75,000 हेक्टेयर रकबे में जड़ी-बूटियों की खेती से देश में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस कदम से जड़ी-बूटियों की खेती किसानों की आय का बड़ा स्रोत बनेगी। दवाओं की उपलब्धता के मामले में देश भी आत्मनिर्भर होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ वर्षों में न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में औषधीय पौधों की मांग में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी देखने में आई है। यही कारण है कि अमेरिका में अश्वगंधा तीसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला उत्पाद बन गया है। इसके अलावा 'आजादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रमों के तहत वाई-ब्रेक एप्प की शुरूआत, रोगों का उपचार करने वाली आयुष दवाओं का वितरण, 'आयुष आपके द्वार' तथा स्कूलों-कॉलेजों के छात्रों के लिये व्याख्यानों का आयोजन शामिल है। वाई-ब्रेक एप्प पर वेबीनार और व्याख्यानों का आयोजन पांच सितंबर को किया जायेगा।
Posted On: आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में देशभर में जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान की शुरूआत की है। इस कदम से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और हरित भारत का सपना पूरा होगा। अभियान के तहत, देशभर में अगले एक वर्ष में पचहत्तर हजार हेक्टेयर रकबे में जड़ी-बूटियों की खेती की जायेगी। कार्यक्रम की शुरूआत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और महाराष्ट्र के पुणे से की गई है। यह 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का दूसरा कार्यक्रम है। पुणे में औषधीय पौधे किसानों को बांटे गये। जो लोग पहले से जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया गया। अहमदनगर जिले के पारनेर से विधायक नीलेश लंके, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. आसिम अली ख़ान और एनएमपीबी के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सांवल ने भिन्न-भिन्न स्थानों से कार्यक्रमों की अगुवाई की। डॉ. सांवल ने कहा, "इस प्रयास से देश में औषधीय पौधों की आपूर्ति में और तेजी आयेगी।" इस अवसर पर पचहत्तर किसानों को कुल मिलाकर सात हज़ार पाँच सौ औषधीय पौधे वितरित किये गये। इसके अलावा पचहत्तर हजार पौधे वितरित करने का लक्ष्य भी तय किया गया। सहारनपुर में उत्तर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी, एनएमपीबी के अनुसंधान अधिकारी श्री सुनील दत्त और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों ने सम्बंधित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी ने जड़ी-बूटियों की खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया। आसपास के कई जिलों से आये एक सौ पचास किसानों को औषधीय पौधे निशुल्क वितरित किये गये। पौधों की पांच प्रजातियां वितरित की गईं, जिनमें पारिजात, बेल, नीम, अश्वगंधा और जामुन के पौधे शामिल थे। किसानों को जामुन के सात सौ पचास पौधे अलग से निशुल्क बांटे गये। केंद्रीय आयुष मंत्री श्री सर्बानन्द सोनोवाल ने कहा कि औषधीय पौधों के सिलसिले में देश की अपार क्षमता है और पचहत्तर,शून्य हेक्टेयर रकबे में जड़ी-बूटियों की खेती से देश में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस कदम से जड़ी-बूटियों की खेती किसानों की आय का बड़ा स्रोत बनेगी। दवाओं की उपलब्धता के मामले में देश भी आत्मनिर्भर होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ वर्षों में न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में औषधीय पौधों की मांग में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी देखने में आई है। यही कारण है कि अमेरिका में अश्वगंधा तीसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला उत्पाद बन गया है। इसके अलावा 'आजादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रमों के तहत वाई-ब्रेक एप्प की शुरूआत, रोगों का उपचार करने वाली आयुष दवाओं का वितरण, 'आयुष आपके द्वार' तथा स्कूलों-कॉलेजों के छात्रों के लिये व्याख्यानों का आयोजन शामिल है। वाई-ब्रेक एप्प पर वेबीनार और व्याख्यानों का आयोजन पांच सितंबर को किया जायेगा।
ज्ञान-विज्ञानके नाश करनेवाले इस पापीको जय कर । (गुरु शास्त्रद्वारा आत्मानात्म-विवेकका नाम ज्ञान है और उसका विशेषरूप से अनुभव विज्ञान कहलाता है ) । तू यह जान कि इन्द्रियॉ, मन एवं बुद्धि, कामरूपी शत्रुके गढ़ की ये तीन डयौढ़ियाँ हैं, इनपर अधिकार पानेसे लोक-परलोक सभी जीते जाते है । वह इस प्रकार - इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः पर मनः । मनसस्तु परा बुद्धियों बुद्धेः परतस्तु सः ॥४२॥ ( वाह्य प्रपश्चसे ) इन्द्रियोंको परे (श्रेष्ट अन्तःस्थ व सूक्ष्म ) कहते हैं, इन्द्रियोंसे परे मन है, मनसे परे बुद्धि है और जो बुद्धिसे भी परे है वह आत्मा है। भावार्थ-दृश्य प्रपञ्च व शरीर इन दोनोंसे इन्द्रियाँ परे हैं, अर्थात् इन दोनोसे श्रेष्ठ, अन्तःस्थ व सूक्ष्म हैं। इन्द्रियोंको वश में करनेसे सभी संसार वश किया जा सकता है, जैसे वीणादुन्दुभी आदिबाजोंपर अधिकार पानेसे उनसे निकलनेयोग्य सभी स्वरोंपर अधिकार पाया जाता है। जब इन्द्रियों इस जीव के शत्रु हो जाती है तो सभी संसार इसका शत्रु हो जाता है । अर्थात् जव इन्द्रियों बेलगाम घोड़की तरह भोगपथमें मनमाने रूपले विचरने लग जाती हैं, तभी सम्पूर्ण संसार सशस्त्र इस जीव के विरुद्ध खड़ा हो जाता है । इन्द्रियोंसे घरे मन है, इन्द्रियोंपर अधिकार पाने मनपर भी कर पा सकते हैं, जैसे घोड़ेको पकड़नेसे सवार भी पकड़ा जाता है। मनसे परे बुद्धि है, अर्थात्, मनरूपी घोड़ेको पकड़नेसे बुद्धिरूपी सवार भी पकड़ा जाता है। और जो वुद्धिसे भी परे है वह आत्मा है, अर्थात् इन्द्रियों मन व बुद्धि पर अधिकार पानेसे कामरूपी शत्रुको पकड़ सकते हैं और फिर आत्म-साक्षात्कारद्वारा इसको भस्म कर सकते हैं ।
ज्ञान-विज्ञानके नाश करनेवाले इस पापीको जय कर । । तू यह जान कि इन्द्रियॉ, मन एवं बुद्धि, कामरूपी शत्रुके गढ़ की ये तीन डयौढ़ियाँ हैं, इनपर अधिकार पानेसे लोक-परलोक सभी जीते जाते है । वह इस प्रकार - इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः पर मनः । मनसस्तु परा बुद्धियों बुद्धेः परतस्तु सः ॥बयालीस॥ इन्द्रियोंको परे कहते हैं, इन्द्रियोंसे परे मन है, मनसे परे बुद्धि है और जो बुद्धिसे भी परे है वह आत्मा है। भावार्थ-दृश्य प्रपञ्च व शरीर इन दोनोंसे इन्द्रियाँ परे हैं, अर्थात् इन दोनोसे श्रेष्ठ, अन्तःस्थ व सूक्ष्म हैं। इन्द्रियोंको वश में करनेसे सभी संसार वश किया जा सकता है, जैसे वीणादुन्दुभी आदिबाजोंपर अधिकार पानेसे उनसे निकलनेयोग्य सभी स्वरोंपर अधिकार पाया जाता है। जब इन्द्रियों इस जीव के शत्रु हो जाती है तो सभी संसार इसका शत्रु हो जाता है । अर्थात् जव इन्द्रियों बेलगाम घोड़की तरह भोगपथमें मनमाने रूपले विचरने लग जाती हैं, तभी सम्पूर्ण संसार सशस्त्र इस जीव के विरुद्ध खड़ा हो जाता है । इन्द्रियोंसे घरे मन है, इन्द्रियोंपर अधिकार पाने मनपर भी कर पा सकते हैं, जैसे घोड़ेको पकड़नेसे सवार भी पकड़ा जाता है। मनसे परे बुद्धि है, अर्थात्, मनरूपी घोड़ेको पकड़नेसे बुद्धिरूपी सवार भी पकड़ा जाता है। और जो वुद्धिसे भी परे है वह आत्मा है, अर्थात् इन्द्रियों मन व बुद्धि पर अधिकार पानेसे कामरूपी शत्रुको पकड़ सकते हैं और फिर आत्म-साक्षात्कारद्वारा इसको भस्म कर सकते हैं ।
Lok Sabha Election 2024: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अपने पुराने सहयोगियों से फिर से गठबंधन कर रही है। इस कड़ी में शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) और भाजपा (BJP) गठबंधन की चर्चा भी तेज होने लगी है। Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में एक साल से भी कम समय बचा है। लिहाजा सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। इस सिलसिले में भाजपा ने भी नए गठबंधन बनाने शुरू कर दिए हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) और भाजपा (BJP) में एक बार फिर गठबंधन हो सकता है। सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) को पंजाब भाजपा बनाने के बाद दोनों पार्टियों के बीच फिर से गठबंधन होने का संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने 6 जुलाई को दोपहर में चंडीगढ़ (Chandigarh) स्थित प्रदेश कार्यालय में बैठक बुलाई है। बैठक में पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों और हलका प्रभारियों को हाजिर रहने को कहा गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करेगी और आने वाले चुनाव को देखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार करेगी। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) ने 4 जुलाई को चार राज्यों में अपने प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं, जिनमें पंजाब (Punjab) भी शामिल है। प्रदेश में सुनील जाखड़ को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। बता दें कि जाखड़ की पंजाब में हिंदू और सिख समाज दोनों में अच्छी पकड़ है। बीजेपी ने पहले की तरह अकाली दल से गठबंधन कर हिंदू-सिख भाईचारा नीति पर चलने का संकेत दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में शिरोमणि अकाली दल से हरसिमरत कौर या सुखबीर सिंह बादल को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच साल 1996 में पहला गठबंधन हुआ था। अकाली दल एनडीए के सबसे पुराने साथियों में से एक था, लेकिन 2021 में कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया था। इसके बाद अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal) के निधन पर पीएम नरेन्द्र मोदी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उसके बाद से ही दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा होने लगी थी।
Lok Sabha Election दो हज़ार चौबीस: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अपने पुराने सहयोगियों से फिर से गठबंधन कर रही है। इस कड़ी में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन की चर्चा भी तेज होने लगी है। Lok Sabha Election दो हज़ार चौबीस: लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौबीस में एक साल से भी कम समय बचा है। लिहाजा सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। इस सिलसिले में भाजपा ने भी नए गठबंधन बनाने शुरू कर दिए हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो शिरोमणि अकाली दल और भाजपा में एक बार फिर गठबंधन हो सकता है। सुनील जाखड़ को पंजाब भाजपा बनाने के बाद दोनों पार्टियों के बीच फिर से गठबंधन होने का संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने छः जुलाई को दोपहर में चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कार्यालय में बैठक बुलाई है। बैठक में पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों और हलका प्रभारियों को हाजिर रहने को कहा गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करेगी और आने वाले चुनाव को देखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार करेगी। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने चार जुलाई को चार राज्यों में अपने प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं, जिनमें पंजाब भी शामिल है। प्रदेश में सुनील जाखड़ को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। बता दें कि जाखड़ की पंजाब में हिंदू और सिख समाज दोनों में अच्छी पकड़ है। बीजेपी ने पहले की तरह अकाली दल से गठबंधन कर हिंदू-सिख भाईचारा नीति पर चलने का संकेत दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में शिरोमणि अकाली दल से हरसिमरत कौर या सुखबीर सिंह बादल को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में पहला गठबंधन हुआ था। अकाली दल एनडीए के सबसे पुराने साथियों में से एक था, लेकिन दो हज़ार इक्कीस में कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया था। इसके बाद अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निधन पर पीएम नरेन्द्र मोदी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उसके बाद से ही दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा होने लगी थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर दिए विवादित बयान पर हमला बोला है। सोमवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालिया हो चुकी है और निराश है। वे पहले ही चुनाव में हार मान चुकी हैं। कर्नाटक के मतदाता व्यक्तिगत हमलों पसंद नहीं करते हैं। बता दें कि प्रियांक खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें 'नालायक' कहा था। प्रियांक खड़गे ने कहा था कि दिल्ली में नालायक बेटा बैठा है। बेटा नालायक हो, तो घर कैसे चलाएंगे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए आपत्तिजनक बात कही थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर दिए विवादित बयान पर हमला बोला है। सोमवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालिया हो चुकी है और निराश है। वे पहले ही चुनाव में हार मान चुकी हैं। कर्नाटक के मतदाता व्यक्तिगत हमलों पसंद नहीं करते हैं। बता दें कि प्रियांक खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें 'नालायक' कहा था। प्रियांक खड़गे ने कहा था कि दिल्ली में नालायक बेटा बैठा है। बेटा नालायक हो, तो घर कैसे चलाएंगे। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए आपत्तिजनक बात कही थी।
महोदय/ महोदया, कृपया उपर्युक्त विषय पर 04 अगस्त 2005 का परिपत्र सं.आरपीसीडी.केंका.आरएफ. बीसी.26/07.02.03/2005-06 और 21 अक्तूबर 2015 का परिपत्र सं डीसीबीआर. केंका. आरसीबीडी.बीसी.सं.5/19.51.026/2015-16 देखें। 2. राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों (एसटीसीबी/सीसीबी) को अधिक लचीलापन (flexibility) प्रदान करने की दृष्टि से मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई है और यह निर्णय लिया गया है कि एसटीसीबी/सीसीबी द्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) लिखतों में निवेश किया जाएः कुल गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश किसी बैंक के गत वर्ष के 31 मार्च को कुल जमाराशियों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। एसटीसीबी/सीसीबी निम्नलिखत लिखतों में निवेश कर सकते हैंः (ए) "ए" या समतुल्य और उच्चतर रेट प्राप्त वाणिज्यिक पेपर (सीपी), ऋण पत्र (डिबेंचर) और बॉण्ड। (बी) ऋण पारस्परिक निधि तथा मुद्रा बाजार पारस्परिक निधि की इकाइयां। (सी) बाजार आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) कंपनियां (एमआईसी), जैसे- भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), विश्वव्यापी वित्तीय दूरसंचार सोसाइटी (स्विफ्ट) के शेयरों में। (ए) बेमियादी कर्ज लिखतों में निवेश करने की अनुमति नहीं है। (बी) अखिल भारतीय वित्त संस्थाओं (एआईएफआई) की इक्विटी में नए सिरे से निवेश करने की अनुमति नहीं है। इस संस्थाओं में विद्यमान शेयरधारिता को चरणबद्ध रूप से तीन साल के भीतर समाप्त किया जाए और उस समय तक जब तक वे बैंक की बहियों में धारित हैं उन्हें 2.1 में निर्धारित सीमा की गणना के लिए गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात निवेश के रूप में माना जाए। (सी) ऋण पारस्परिक निधि और मुद्रा बाज़ार पारस्परिक निधि के अलावा अन्य पारस्परिक निधि की इकाइयों में निवेश करने की अनुमति नहीं है। ऋण /मुद्रा बाजार पारस्परिक निधि की इकाइयों के अलावा अन्य पारस्परिक निधि की इकाइयों में किए गए मौजूदा निवेशों का विनिवेश किया जाना चाहिए। तथा उस समय तक जब तक वे बैंक के खातों में धारित हैं उन्हें 2.1 में निर्धारित सीमा की गणना के लिए गैर - सांविधिक चल निधि अनुपात निवेश के रूप में माना जाएगा। तथापि, बैंक जोखिम प्रबंध नीति की इस प्रकार समीक्षा करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी पारस्परिक निधि की किसी भी योजना में अनुपात से अधिक उनका निवेश नहीं है। (डी) गैर सूचिबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश उपर्युक्त 2.2(ए) में निर्धारित एक न्यूनतम रेटिंग के आधार पर किया जाना चाहिए और कभी भी बैंक के कुल गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। जहां बैंकों ने पहले ही निर्धारित सीमा को पार कर लिया है वहाँ ऐसी प्रतिभूतियों में और निवेश नहीं किया जाना चाहिए। गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात ऋण प्रतिभूतियों (प्राथमिक और द्वितीयक बाज़ार) में जहां पर प्रतिभूति, प्रतिभूति-विनिमय (stock exchange) में सूचिबद्ध किए जाने के लिए प्रस्तावित है, ऐसी स्थिति में निवेश करते समय इसे सूचिबद्ध प्रतिभूति में किए गए निवेश के रूप में माना जाए। उसके बाद यदि प्रतिभूति को विनिर्दिष्ट समय के अंदर सूचबद्ध नहीं किया जाता है तो उक्त निवेश को गैर सूचिबद्ध गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा की गणना करने के लिए गिना जाएगा। इस संदर्भ में गैर सूचिबद्ध गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियां यदि 10 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो जाती हैं तो बैंक को गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियों (दानों प्राथमिक और द्वितीयक बाज़ार) में निवेश करने के लिए अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक गैर सूचिबद्ध प्रतिभूतियों में किए गए निवेश को 10 प्रतिशत की सीमा के अंतर्गत नहीं लाया जाता है । (ई) अत्यधिक बट्टा/शून्य कूपन बॉण्डों में निवेश उपर्युक्त 2.2 (ए) में विनिर्दिष्ट न्यूनतम रेटिंग तथा समतुल्य बाज़ार प्रतिफल के अधीन होगा । शून्य कूपन बॉण्डों में निवेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक जारीकर्ता द्वारा सभी उपार्जित ब्याज हेतु निक्षेप निधि तैयार नहीं करते तथा तरल निवेश/प्रतिभूति (सरकारी बॉण्डों में) के रूप में निवेश नहीं करते हैं । (एफ) ऋण पारस्परिक निधि और मुद्रा बाज़ार पारस्परिक निधि तथा वाणिज्यिक पत्रों को छोड़कर गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश एक वर्ष से अधिक की मूल परिपक्वता वाला निवेश होगा । (जी) गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात श्रेणी के तहत सभी नए निवेशों को केवल "मौजूदा" श्रेणी में वर्गीकृत किया जाए और इन श्रेणियों में किए गए निवेशों को यथा लागू बाज़ार पर दर्शाया जाए। (एच) सभी गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों को एकल/समूह प्रतिपक्षकार जोखिम के लिए निर्धारित विवेकपूर्ण सीमाओं के अंतर्गत किया जाना चाहिए। (आई) राज्य सहकारी बैंक/केंद्रीय सहकारी बैंक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक के अलावा) द्वारा जारी किए जाने वाले जमा प्रमाणपत्र (CDs) में निवेश कर सकते हैं तथा ऐसी अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित समर्थक सीमा (umbrella limit) के अंतर्गत अल्पावधि संसाधन जुटाने के लिए अनुमति प्रदान की गयी हो। जमा प्रमाणपत्र (CDs) में किए गए निवेश को अंतर-बैंक जमा के रूप में माना जाएगा और उपर्युक्त 2.1 में गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों पर निर्धारित सीमा की गणना करने के लिए इस प्रकार किए गए निवेश को नहीं गिना जाएगा। राज्य सहकारी बैंक / केंद्रीय सहकारी बैंक अपनी निवेश नीति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि यह नीति भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप हो। बैंक, गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों के संदर्भ में जोखिमों का पता लगाने और उनका विश्लेषण करने के लिए अपने यहां उचित जोखिम प्रबंधन प्रणाली की स्थापना करें और समय पर निवारण उपाय करें। एसटीसीबी/सीसीबी के निदेशक मंडल द्वारा कम से कम छमाही अंतराल पर गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों के निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा की जानी चाहिएः (ए) रिर्पोटिंग अवधि के दौरान कुल कारोबार (निवेश और विनिवेश) (डी) जारीकर्ताओं /बैंक की बहियों में धारित प्रतिभूति निर्गमों की रेटिंग में परिवर्तन तथा उसके परिणामस्वरूप संविभाग की गुणवत्ता में हानि। (ई) गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात श्रेणी के अंतर्गत अनर्जक निवेशों की सीमा और उनके लिए पर्याप्त प्रावधान। एसटीसीबी/सीसीबी बैंकों को अनुबंध में दर्शाये गए अनुसार तुलन-पत्र में "लेखे पर टिप्पणियां" के अंतर्गत गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों तथा अनर्जक निवेशों के जारीकर्तावार संघटन का ब्यौरा प्रकट करना चाहिए। (रीनी अजित) एसटीसीबी/सीसीबी गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश पोर्टफोलियो के संदर्भ में अपने तुलन-पत्र में "लेखा पर टिप्पणियां" शीर्ष के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकटीकरण करेंः ।(रुपया लाखों में) ।सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) ।वित्तीय संस्थाएं (एफआई) ।राशि (रुपया लाखों में)
महोदय/ महोदया, कृपया उपर्युक्त विषय पर चार अगस्त दो हज़ार पाँच का परिपत्र सं.आरपीसीडी.केंका.आरएफ. बीसी.छब्बीस/सात.दो.तीन/दो हज़ार पाँच-छः और इक्कीस अक्तूबर दो हज़ार पंद्रह का परिपत्र सं डीसीबीआर. केंका. आरसीबीडी.बीसी.सं.पाँच/उन्नीस.इक्यावन.छब्बीस/दो हज़ार पंद्रह-सोलह देखें। दो. राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंकों को अधिक लचीलापन प्रदान करने की दृष्टि से मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई है और यह निर्णय लिया गया है कि एसटीसीबी/सीसीबी द्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात लिखतों में निवेश किया जाएः कुल गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश किसी बैंक के गत वर्ष के इकतीस मार्च को कुल जमाराशियों के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। एसटीसीबी/सीसीबी निम्नलिखत लिखतों में निवेश कर सकते हैंः "ए" या समतुल्य और उच्चतर रेट प्राप्त वाणिज्यिक पेपर , ऋण पत्र और बॉण्ड। ऋण पारस्परिक निधि तथा मुद्रा बाजार पारस्परिक निधि की इकाइयां। बाजार आधारभूत संरचना कंपनियां , जैसे- भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड , भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम , विश्वव्यापी वित्तीय दूरसंचार सोसाइटी के शेयरों में। बेमियादी कर्ज लिखतों में निवेश करने की अनुमति नहीं है। अखिल भारतीय वित्त संस्थाओं की इक्विटी में नए सिरे से निवेश करने की अनुमति नहीं है। इस संस्थाओं में विद्यमान शेयरधारिता को चरणबद्ध रूप से तीन साल के भीतर समाप्त किया जाए और उस समय तक जब तक वे बैंक की बहियों में धारित हैं उन्हें दो.एक में निर्धारित सीमा की गणना के लिए गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात निवेश के रूप में माना जाए। ऋण पारस्परिक निधि और मुद्रा बाज़ार पारस्परिक निधि के अलावा अन्य पारस्परिक निधि की इकाइयों में निवेश करने की अनुमति नहीं है। ऋण /मुद्रा बाजार पारस्परिक निधि की इकाइयों के अलावा अन्य पारस्परिक निधि की इकाइयों में किए गए मौजूदा निवेशों का विनिवेश किया जाना चाहिए। तथा उस समय तक जब तक वे बैंक के खातों में धारित हैं उन्हें दो.एक में निर्धारित सीमा की गणना के लिए गैर - सांविधिक चल निधि अनुपात निवेश के रूप में माना जाएगा। तथापि, बैंक जोखिम प्रबंध नीति की इस प्रकार समीक्षा करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी पारस्परिक निधि की किसी भी योजना में अनुपात से अधिक उनका निवेश नहीं है। गैर सूचिबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश उपर्युक्त दो.दो में निर्धारित एक न्यूनतम रेटिंग के आधार पर किया जाना चाहिए और कभी भी बैंक के कुल गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। जहां बैंकों ने पहले ही निर्धारित सीमा को पार कर लिया है वहाँ ऐसी प्रतिभूतियों में और निवेश नहीं किया जाना चाहिए। गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात ऋण प्रतिभूतियों में जहां पर प्रतिभूति, प्रतिभूति-विनिमय में सूचिबद्ध किए जाने के लिए प्रस्तावित है, ऐसी स्थिति में निवेश करते समय इसे सूचिबद्ध प्रतिभूति में किए गए निवेश के रूप में माना जाए। उसके बाद यदि प्रतिभूति को विनिर्दिष्ट समय के अंदर सूचबद्ध नहीं किया जाता है तो उक्त निवेश को गैर सूचिबद्ध गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियों के लिए निर्धारित दस प्रतिशत की सीमा की गणना करने के लिए गिना जाएगा। इस संदर्भ में गैर सूचिबद्ध गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियां यदि दस प्रतिशत की सीमा से अधिक हो जाती हैं तो बैंक को गैर-सांविधिक चल निधि अनुपात प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक गैर सूचिबद्ध प्रतिभूतियों में किए गए निवेश को दस प्रतिशत की सीमा के अंतर्गत नहीं लाया जाता है । अत्यधिक बट्टा/शून्य कूपन बॉण्डों में निवेश उपर्युक्त दो.दो में विनिर्दिष्ट न्यूनतम रेटिंग तथा समतुल्य बाज़ार प्रतिफल के अधीन होगा । शून्य कूपन बॉण्डों में निवेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक जारीकर्ता द्वारा सभी उपार्जित ब्याज हेतु निक्षेप निधि तैयार नहीं करते तथा तरल निवेश/प्रतिभूति के रूप में निवेश नहीं करते हैं । ऋण पारस्परिक निधि और मुद्रा बाज़ार पारस्परिक निधि तथा वाणिज्यिक पत्रों को छोड़कर गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश एक वर्ष से अधिक की मूल परिपक्वता वाला निवेश होगा । गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात श्रेणी के तहत सभी नए निवेशों को केवल "मौजूदा" श्रेणी में वर्गीकृत किया जाए और इन श्रेणियों में किए गए निवेशों को यथा लागू बाज़ार पर दर्शाया जाए। सभी गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों को एकल/समूह प्रतिपक्षकार जोखिम के लिए निर्धारित विवेकपूर्ण सीमाओं के अंतर्गत किया जाना चाहिए। राज्य सहकारी बैंक/केंद्रीय सहकारी बैंक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले जमा प्रमाणपत्र में निवेश कर सकते हैं तथा ऐसी अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित समर्थक सीमा के अंतर्गत अल्पावधि संसाधन जुटाने के लिए अनुमति प्रदान की गयी हो। जमा प्रमाणपत्र में किए गए निवेश को अंतर-बैंक जमा के रूप में माना जाएगा और उपर्युक्त दो.एक में गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों पर निर्धारित सीमा की गणना करने के लिए इस प्रकार किए गए निवेश को नहीं गिना जाएगा। राज्य सहकारी बैंक / केंद्रीय सहकारी बैंक अपनी निवेश नीति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि यह नीति भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप हो। बैंक, गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों के संदर्भ में जोखिमों का पता लगाने और उनका विश्लेषण करने के लिए अपने यहां उचित जोखिम प्रबंधन प्रणाली की स्थापना करें और समय पर निवारण उपाय करें। एसटीसीबी/सीसीबी के निदेशक मंडल द्वारा कम से कम छमाही अंतराल पर गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों के निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा की जानी चाहिएः रिर्पोटिंग अवधि के दौरान कुल कारोबार जारीकर्ताओं /बैंक की बहियों में धारित प्रतिभूति निर्गमों की रेटिंग में परिवर्तन तथा उसके परिणामस्वरूप संविभाग की गुणवत्ता में हानि। गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात श्रेणी के अंतर्गत अनर्जक निवेशों की सीमा और उनके लिए पर्याप्त प्रावधान। एसटीसीबी/सीसीबी बैंकों को अनुबंध में दर्शाये गए अनुसार तुलन-पत्र में "लेखे पर टिप्पणियां" के अंतर्गत गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेशों तथा अनर्जक निवेशों के जारीकर्तावार संघटन का ब्यौरा प्रकट करना चाहिए। एसटीसीबी/सीसीबी गैर-सांविधिक चलनिधि अनुपात निवेश पोर्टफोलियो के संदर्भ में अपने तुलन-पत्र में "लेखा पर टिप्पणियां" शीर्ष के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकटीकरण करेंः । ।सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ।वित्तीय संस्थाएं ।राशि
भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एस.एच कपाड़िया ने आज विधि और न्याय मंत्री डा0 एम. वीरप्पा मोइली द्वारा लिखित श्री रामायण महान्वेषणम नामक पुस्तक का विमोचन किया। रामायण की कथा पीढी-दर पीढी सुनाई जाती रही है। हमारी संस्कृति से ये बहुत ही गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस अवसर पर अपने संबोधन में, डॉ0 वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस पुस्तक में रामतत्त्व या राम कथा के सच्चे सिध्दान्तों को धर्म निर्पेक्षता और आधुनिक दृष्टिकोण के माध्यम से खोजने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि अपने स्वप्न को समाज के सामने रख दिया है। उन्होंने इसे अपने हदय की ऑंखों से देखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि एक दिन उनका स्वप्न हमारे देश का स्वप्न होगा और हमारी राष्ट्रीय चेतना के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए सच्चा आशीर्वाद भी मिलेगा। श्री मोइली ने दो हजार वर्ष पुरानी राम कथा में आधुनिक विषयों का बड़ी चतुराई और सरलता से समावेश किया है। श्री रामायण महान्वेषणम कन्नड़ महाकाव्य का अनुवाद है। श्री मोइली को भारत के राष्ट्रपति से सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित मूर्ति देवी पुरस्कार मिल चुका है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एस.एच कपाड़िया ने आज विधि और न्याय मंत्री डाशून्य एम. वीरप्पा मोइली द्वारा लिखित श्री रामायण महान्वेषणम नामक पुस्तक का विमोचन किया। रामायण की कथा पीढी-दर पीढी सुनाई जाती रही है। हमारी संस्कृति से ये बहुत ही गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस अवसर पर अपने संबोधन में, डॉशून्य वीरप्पा मोइली ने कहा कि इस पुस्तक में रामतत्त्व या राम कथा के सच्चे सिध्दान्तों को धर्म निर्पेक्षता और आधुनिक दृष्टिकोण के माध्यम से खोजने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि अपने स्वप्न को समाज के सामने रख दिया है। उन्होंने इसे अपने हदय की ऑंखों से देखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि एक दिन उनका स्वप्न हमारे देश का स्वप्न होगा और हमारी राष्ट्रीय चेतना के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए सच्चा आशीर्वाद भी मिलेगा। श्री मोइली ने दो हजार वर्ष पुरानी राम कथा में आधुनिक विषयों का बड़ी चतुराई और सरलता से समावेश किया है। श्री रामायण महान्वेषणम कन्नड़ महाकाव्य का अनुवाद है। श्री मोइली को भारत के राष्ट्रपति से सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित मूर्ति देवी पुरस्कार मिल चुका है।
देवबंद- मां त्रिपुर बाला सुंदरी मेला प्रांगण में बने महामंत्री रामकरण बौद्ध व मेंविभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उप जिलाधिकारी को एक पत्र प्रेषित कर मेला शुरू होने से पूर्व अम्बेडकर द्वार निर्माण की मांग की। उल्लेखनीय है कि पिछले 7 वर्षों से अंबेडकर जागरूक मंच एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग डॉक्टर अंबेडकर शताब्दी द्वार की निर्माण की मांग कर रहे हैं। यह द्वार सन 1991 में अंबेडकर जागरुक मंच ने बनवाया था। सड़क चौड़ीकरण को लेकर नगर पालिका परिषद ने उप जिला अधिकारी को अवगत कराते हुए मंच को एक पत्र लिखा था। मंच ने कुछ मांगे नगरपालिका के सामने रखी थी , उन सभी मांगों को मानते हुए नगर पालिका परिषद ने डॉ आंबेडकर शताब्दी द्वार को अपने खर्चे से त्रिपुर मां बाला सुंदरी मेला प्रांगण में सरकारी जमीन पर पुनः स्थापित करने के हेतु एक स्वीकृति पत्र रामकरण बोध महामंत्री अंबेडकर जागरूक मंच को जारी किया था। परंतु निरंतर द्वार निर्माण की मांग करने पर भी नगर पालिका परिषद ने द्वारा निर्माण नहीं किया। उप जिला अधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद को मांगों का निस्तारण करने के लिए आदेशित कर दिया है । इस अवसर पर समाजसेवी रजनीश एडवोकेट, दलित सेना जिला अध्यक्ष शिव कुमार, भीम आर्मी से दीपक बौद्ध, शौर्य अंबेडकर, रविकांत,
देवबंद- मां त्रिपुर बाला सुंदरी मेला प्रांगण में बने महामंत्री रामकरण बौद्ध व मेंविभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उप जिलाधिकारी को एक पत्र प्रेषित कर मेला शुरू होने से पूर्व अम्बेडकर द्वार निर्माण की मांग की। उल्लेखनीय है कि पिछले सात वर्षों से अंबेडकर जागरूक मंच एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग डॉक्टर अंबेडकर शताब्दी द्वार की निर्माण की मांग कर रहे हैं। यह द्वार सन एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में अंबेडकर जागरुक मंच ने बनवाया था। सड़क चौड़ीकरण को लेकर नगर पालिका परिषद ने उप जिला अधिकारी को अवगत कराते हुए मंच को एक पत्र लिखा था। मंच ने कुछ मांगे नगरपालिका के सामने रखी थी , उन सभी मांगों को मानते हुए नगर पालिका परिषद ने डॉ आंबेडकर शताब्दी द्वार को अपने खर्चे से त्रिपुर मां बाला सुंदरी मेला प्रांगण में सरकारी जमीन पर पुनः स्थापित करने के हेतु एक स्वीकृति पत्र रामकरण बोध महामंत्री अंबेडकर जागरूक मंच को जारी किया था। परंतु निरंतर द्वार निर्माण की मांग करने पर भी नगर पालिका परिषद ने द्वारा निर्माण नहीं किया। उप जिला अधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद को मांगों का निस्तारण करने के लिए आदेशित कर दिया है । इस अवसर पर समाजसेवी रजनीश एडवोकेट, दलित सेना जिला अध्यक्ष शिव कुमार, भीम आर्मी से दीपक बौद्ध, शौर्य अंबेडकर, रविकांत,
श्री नरेन्द्रनाथ पाश्चात्य शिक्षा में शिक्षित हो एक विकट सकटपूर्ण दशा में आ पड़े थे। एक और मान्य का सर्वसहनशील आस्तिस्यवाद और सार्वमोनिक सनातन अध्यात्मिक आदर्श और दूसरी ओर पाश्चात्य की बड़ जिशसा की दुन्दुभि ध्वनि सत्य के सन्धानी नरेन्द्रनाथ पाश्चात्य भाव से प्रभावित होने पर भी आत्मविस्मृत नहुये। घर कदम से सत्य की खोज में अभियान आरम्भ किया। ऐसी दशा में साधक शिरोमणि श्रीरामकृष्ण के सन्धान में एक दिन दक्षिणेश्वर गये। उन्हें देखकर पादचाय शिक्षा प्रदीत नरेन्द्रनाथ के कृष्ठ में प्रश्न ध्वनित हुआ, "आपने भगवान का दर्शन किया है ।" शान्त, परन्तु हद स्वर में श्रीरामकृष्ण ने उत्तर दिया, 'हाँ, मैंने उनको देखा है, जैसा तुम्हें देख रहा हूँ उससे भी उनका प्रत्यक्ष किया है।" निर्वाक विस्मय में नरेन्द्रनाथ ने उत्कण होकर ये वचन सुने । नरेन्द्रनाथ की पलकरहित मुख्य दृष्टि पुजारी के पवित्र मुम्बमण्डल पर निबद्ध हुई । शिष्य के श्रद्धानत मस्तक पर प्रेमिक पुष्य ने वरदहस्त रखकर प्रेमपूर्ण आशीर्वाद किया। श्रीरामकृष्ण ये पवित्र स्पर्श से नरेन्द्रनाथ का सेन हृदय का जमा हुआ सन्देश, अविराम और नालिस्ता सूर्योदय से अन्यकार का जैसे अन्त हो जाता है, उसी प्रकार दूर हो गया और उम्ग्वल ज्ञानापेक से उनका हृदय तथा मन उद्भामित हो उठा। इस प्रसंग में आगे चलकर सामी विवेकानंद ( नरेन्द्रनाथ ) अपने गुरु श्रीरामकृष्ण से जिस तरह सेा, धर्म के गूढ़ तालर्य को जान मये, वह घटना विशेष तरह से स्मरण योग्य है । सन् १८८४६० की घटना है, श्री रामकृष्णदणे में अपने कमरे में मतों के बीच मेटे हुये है। वैव धर्म की आलोचना के मन में उस धर्म के सारे मर्म को टाकुर मधेर में समाते हुये कह रहे है, "नाम में हचि, बीन पर दया है। इसी की व्याख्या करते हुये कृष्ण का ही जगत् ससार इसी बोध में सभी जीवों में" कहते हुये सहसा समाधिस्थ हो गये। बाद में ऊद्धवाह्य दशा प्राप्त हो कहने लगे, " जीव पर दया, जीव पर दया, दूर शाला कीटाणुकीट तू जीव पर दया करेगा ? दया करने वाला तू कौन ? नहीं, नहीं, जीव पर दया नहीं, शिव के बोध में जीव की सेवा ।" उपस्थित भक्तों ने ठाकुर द्वारा भाव के भाग में उच्चारित इस महावाक्य को सुना तो सही, परन्तु नरेन्द्रनाथ ही उसका यथार्थ मर्म समझने में समर्थ हुये। वे समझे कि बन के बेदान्त को घर में लाया जा सकता है। कमरे से बाहर आकर नरेन्द्रनाथ गुरु माइयों से वोले कि उन्होंने ठाकुर के बचन में आज नवीन आलोक का सुन्धान पाया है। ठाकुर ने द्वैतवादी की भक्ति और अद्वैतवादी के ज्ञान का एक महान सामजस्य का विधान किया है। योगी साधु संन्यासी निर्जन अरण्य में गिरि-हर में बैठ जिस अद्वैत ज्ञान की साधना करते हैं, उसी ब्रह्मतत्व को समाज के विभिन्न स्तरों में रहते हुए सभी अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य में उपग्ध कर धन्य हो सकते हैं। एक ही ईश्वर जीव और जगत् के रूप में नाम एवं रूप के माध्यम से विचित्र भाव से प्रकट है। जो शिव के बोध में जीव की सेवा कर सकेंगे बेदी समय पर अपने को शुद्ध मुद्ध मुक्त स्वभाव जानने में समर्थ होंगे । उनका प्रत्येक कर्म उपासना के सदृश हो जायगा । भविष्य में स्वामीजी ने स्वरचित " सखा के प्रति " कविता में इस अनुभूति को मर्मस्पर्शी भाषा में लिखित में रूप में रख छोड़ा है :+ "ब्रह्म से कोट परमाणु, सदभूत में वही प्रेममय । सखे, करो प्राण मन शरीर अर्पण इन सब के चरणों पर ।। बहुरूप में जो सम्मुख तेरे इन्हें छोड़ कहीं दूढ़ोगे ईश्वर को । जो करे जीव से प्रेम वही करता है सेवा ईश्वर की * बीच में शिवबोध टापुर श्री रामकृष्ण के मन में कितना स्वाभाविक था, निम्नोस घटना दर्शाती है। "मथुरा के साथ काशी, वृन्दावन आदि तीर्थों के दर्शन की यात्रा में येयनाथधाम निकट एक गाव एववालों के दुसदारिद्रय देखकर बाबा (श्रीरामकृष्ण) का हृदय करण से पिघल गया। उन्होने मयुरा से का "तुम तो था के दीवान हो । इनके बाल तेल, एक घाती और मरपेट एक दिन के भोजन का प्रबंध कर दो।" मथुरा ने पहले वो कुछ अनमनाते हुए कहा, "बाबा, तीथ में बहुत खर्च हो, यह भी देराजा हूँ कि बहुत से लोग है- हेंलिनेपिलाने से सकते हैं। ऐसी दशा में क्या कहते हैं।" यह बात सुने कौन ? ग्राम वासियों के दुख देखकर बाबा की आँखों से अनवरत ओतुओं की धारा बह रही है, हृदय में अपूर्वकरणका आवेग है। उन्होंने, "दूर शाल, तेरा नैन बाउंगा। मैं इसी के पास रहूग, इनका कोई अपना बा नहीं है, इहे छोड़कर नहीं जाऊँगा।" यह कह कर चालक जैसी हि में दरिद्रों के माठे । उनकी वैसी करुणा देखकर मधुग ने पक से कपड़ा मगाकर, "बाचा' मे बहे के मुताबिक काम करवाये । बाग भी वालों का आनन्द देर में फूरकर इंसते हँसते उनसे विन हो मथुरा के साथ की गये।" इससे यह प्रतीत होता है कि परमदम देव के विचार में तीर्थदर्शन से नरनारायण की सेवा छोटी नहीं । गोपाल की माँ और महिला भक्त वृद पूर्वोत मनीदिरों और दीदी के अतिरिक्त जिन आध्यातिक शक्ति समान मदान् महिलाओं ने इस समय ठाकुर भीकृष्ण * श्री श्रीराम सोटा गुमाई १०२४४१४५ को केन्द्र बनाकर अपने जीवन का गठन कर लिया था, उनमें गोपाल की माँ ( श्रीमती अवीरमणि देवी ) योगीन माँ ( श्रीमती योगीन्द्र मोहिनी विश्वास ), गोपाल माँ ( श्रीमती गोलाप सुन्दरी देवी ) इत्यादि का नाम चिरस्मरणीय बन गया है। यहाँ पर ठाकुर की अन्तरङ्ग भक्तसाधिका श्रीमती अधोरमणि देवी ( गोपाल की माँ ) के भक्ति मंडित जीवनवृत्त की केवल दो घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है। अधोरमणि यो एक द्रि ब्राह्मण की पुत्री । बचपन में ही उनका विवाद हो गया था। कुछ दिनों के बाद से विधवा हो गई। यही बालविधवा गंगातट पर एक देवालय में शरण पाकर बड़ी निष्ठा के साथ भगवान की गोपाल मूर्ति की उपासना एकाग्र चित से करने लगीं। इसी तरह उनके जीवन के तीस साल से अधिक बीत गये। इसी समय दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में एक सिद्ध साधक रहते हैं, सुनकर एक दिन उनके दर्शन के लिये यहाँ गई । इस प्रकार इस सौ के जीवन में पहले पहल ठाकुर के दर्शन हुए। प्रथम दर्शन के दिन से साधिका आह्मणी अपने हृदय में परमहंस देव पर एक प्रबल आकर्षण का अनुभव करने लगी। जिसके कारण इन्हें अ अक्सर दक्षिणेश्वर आना पड़ता था। इस तरह और कुछ दिन बीतने पर एक दिन रात के अन्तिम प्रहर में नप में निरत ब्राह्मणी ने सविस्मय देखा परमहंस देव उनकी बगल में बैठे हुए है - दाहिना हाथ मुठ्ठी बना हुआ अधरों पर मन्द-मन्द हास्य । साहस कर ब्राह्मणी ने ज्योंही अपने बायें हाथ से दाहिने हाथ को हुआ एक समावनीय परिवर्तन हो गया। परमहंसदेव की मूर्ति कहाँ विलीन हो गई और उनके स्थान में "नवीन नीरदश्याम नीलेन्द्रवरलोचनम् बाल गोपाल मूर्ति घुटनों के बल चढ़ती हुई आह्मणी की गोद पर आने की चेष्टा कर रही है। यह देखकर अपार आनन्द में आत्मविस्मृत हो ब्राह्मणी ने गोपाल को अपनी छाती से - शताब्दी-जयन्ती प्रन्थमाला चिरा लिया। साथ-साथ गोपाल के सेक्दो दुलारों ने उन्हें विल बना दिया। उस आनन्द की प्रबल तरंगों में ब्राह्मणी की सारे संसार की सुध जाती रही और अपने बारे में भी उन्हें कोई दोश नहीं रहा। वे गोपाल को छाती से चिपका कर चली दक्षिणेसर। अयंदीन ऊर्द्धव दृष्टि, औचल धूल में लोट रहा है, मुख मैं "गोपाल गोपाल" की रट, इस दशा में एक्दम थी थीठाकुर के कमरे में आ पहुँची। ठाकुर ने भी उन्हें कितने स्नेह से दिन भर अपने पास रखा और हाथों से भोजन कराया । सध्या समय पिर गोपाल को वक्ष में लगाकर वे कमरहाटी सोट आई। उनके जीवन में एक अपूर्व आध्यात्मिक प्रवाह दो माह तक अतित चलता रहा। उसके बाद जब वे समझी कि उनके इस ओर टाकुर अभिन्न है तब प्रमशः यह भाव शान्त होता गया । तभी से टाकुर को वे गोपाल कहकर पुकारती थीं, टापुर भी उन्हें गोपाल की माँ कहकर सम्बोधित करते थे। इतने दिनों में उनका गोपाल की म का नाम सार्थक हुआ। श्यामपुर में दक्षिणेश्वर में एक बड़ी मी भक्तगोष्ठी म गई। दिनदिन से नर नारी शान्ति मास करने के लिये उनके अमय प्रदायी चरणों की शरण में आने लगे। ठाकुर जानते थे कि विभ्रान्त जनममाज के सामने लाग और सेना के उच्च आदर्श की स्थापना किये बिना उन्हें अमृत के पात्र नहीं बनाया जा सकता। इसलिए उन्होंने अविवाहित कुमार वाले गुरकों के धर्म जीवन के गठन का अधिक ध्यान दिया । ठाइर यहा करते थे, "मोआना मन नहीं देने से ईश्वर पपूर्ण दर्शन भी नहीं हो सकते । बाल्या मन पूर्ण टनके अपने पास दो, स्त्री, पुत्र, धन, सम्पदा, मान, यश आदि पार्थिव विषयों में बिलर नहीं गया है। अभी से यन करने से सोलहों आना मना ईश्वर पर अर्पण कर उनके दर्शन पा कृतार्थ हो सकेंगे, इसी कारण इन्हें धर्म पथ पर परिचालित करने में मेरा इतना आग्रह है।" ठाकुर के विश्राम रक्षित अथक परिश्रम से उनका वरिष्ट शरीर, दिन पर दिन दुवैल होता जा रहा था । सन् १८८५ ई० के ग्रीष्मकाल से बे सहसा गले में एक व्यगा का अनुभव करने लगे। बहुतों की यद धारणा हुई कि ग्रीष्म की कड़ी गर्मी में अत्यधिक बरफ दिए हुए शरबत आदि के पीने और भक्तों के साथ अविरत भगवत् प्रसंग करते रहने के कारण इस तरह के दर्द का उद्भव हुआ है। परन्तु इस कठिन बिमारी के रहते हुए भक्तों के बहुत आग्रह करने के कारण ठाकूर वैष्णवों के पानीहाटी के प्रसिद्ध महोत्सव में (रघुनाथ दास का चूड़ा का महोत्सव ) भाग लेगे गये, वहाँ पहुँचते ही कीर्तनानन्द में और उद्दाम नृत्य में मस्त हो गये। दोपहर की कड़ी धूप में देर तक इस प्रकार रहने के कारण उनके गले का दर्द और भी बढ़ गया। अनुभवी चिकित्सकों ने अच्छी तरह से रोग की परीक्षा के बाद निर्णय किया कि धर्मयाचकों को जो कठ व्याधि होती है वही व्याधि (Clergyman's sore throat) उन्हें भी हुई है। क्रमशः गले से सून निकलने लगा। रोग अत्यधिक बढ़ जाने के कारण उनकी चिकित्सा का उत्तम प्रबन्ध करने के लिए नरेन्द्रनाथ, गिरीशचन्द्र घोष, महेन्द्र गुप्त आदि सबों ने इशामपुर महल्ले में मकान किराया लेवर सन् १८८५ ई के अक्टूबर माह के मध्य भाग में ठाकुर को ले आये और उन दिनों के प्रसिद्ध होमियोवैथिक चिकित्सक डा० महेन्द्रलाल सरकार की चिकित्सा में रखा उदारचित्त डा० सरकार जान गये कि भक्तगण बड़े क्प्ष्ट से अर्थ व्यवस्था कर टाकुर की चिकित्सा करवा रहे हैं, उन्होंने कहा, "मैं बिना पारिश्रमिक लिये यथासाध्य इनकी चिकित्सा कर तुमलोगों के सत्कर्म में
श्री नरेन्द्रनाथ पाश्चात्य शिक्षा में शिक्षित हो एक विकट सकटपूर्ण दशा में आ पड़े थे। एक और मान्य का सर्वसहनशील आस्तिस्यवाद और सार्वमोनिक सनातन अध्यात्मिक आदर्श और दूसरी ओर पाश्चात्य की बड़ जिशसा की दुन्दुभि ध्वनि सत्य के सन्धानी नरेन्द्रनाथ पाश्चात्य भाव से प्रभावित होने पर भी आत्मविस्मृत नहुये। घर कदम से सत्य की खोज में अभियान आरम्भ किया। ऐसी दशा में साधक शिरोमणि श्रीरामकृष्ण के सन्धान में एक दिन दक्षिणेश्वर गये। उन्हें देखकर पादचाय शिक्षा प्रदीत नरेन्द्रनाथ के कृष्ठ में प्रश्न ध्वनित हुआ, "आपने भगवान का दर्शन किया है ।" शान्त, परन्तु हद स्वर में श्रीरामकृष्ण ने उत्तर दिया, 'हाँ, मैंने उनको देखा है, जैसा तुम्हें देख रहा हूँ उससे भी उनका प्रत्यक्ष किया है।" निर्वाक विस्मय में नरेन्द्रनाथ ने उत्कण होकर ये वचन सुने । नरेन्द्रनाथ की पलकरहित मुख्य दृष्टि पुजारी के पवित्र मुम्बमण्डल पर निबद्ध हुई । शिष्य के श्रद्धानत मस्तक पर प्रेमिक पुष्य ने वरदहस्त रखकर प्रेमपूर्ण आशीर्वाद किया। श्रीरामकृष्ण ये पवित्र स्पर्श से नरेन्द्रनाथ का सेन हृदय का जमा हुआ सन्देश, अविराम और नालिस्ता सूर्योदय से अन्यकार का जैसे अन्त हो जाता है, उसी प्रकार दूर हो गया और उम्ग्वल ज्ञानापेक से उनका हृदय तथा मन उद्भामित हो उठा। इस प्रसंग में आगे चलकर सामी विवेकानंद अपने गुरु श्रीरामकृष्ण से जिस तरह सेा, धर्म के गूढ़ तालर्य को जान मये, वह घटना विशेष तरह से स्मरण योग्य है । सन् एक लाख अठासी हज़ार चार सौ साठ की घटना है, श्री रामकृष्णदणे में अपने कमरे में मतों के बीच मेटे हुये है। वैव धर्म की आलोचना के मन में उस धर्म के सारे मर्म को टाकुर मधेर में समाते हुये कह रहे है, "नाम में हचि, बीन पर दया है। इसी की व्याख्या करते हुये कृष्ण का ही जगत् ससार इसी बोध में सभी जीवों में" कहते हुये सहसा समाधिस्थ हो गये। बाद में ऊद्धवाह्य दशा प्राप्त हो कहने लगे, " जीव पर दया, जीव पर दया, दूर शाला कीटाणुकीट तू जीव पर दया करेगा ? दया करने वाला तू कौन ? नहीं, नहीं, जीव पर दया नहीं, शिव के बोध में जीव की सेवा ।" उपस्थित भक्तों ने ठाकुर द्वारा भाव के भाग में उच्चारित इस महावाक्य को सुना तो सही, परन्तु नरेन्द्रनाथ ही उसका यथार्थ मर्म समझने में समर्थ हुये। वे समझे कि बन के बेदान्त को घर में लाया जा सकता है। कमरे से बाहर आकर नरेन्द्रनाथ गुरु माइयों से वोले कि उन्होंने ठाकुर के बचन में आज नवीन आलोक का सुन्धान पाया है। ठाकुर ने द्वैतवादी की भक्ति और अद्वैतवादी के ज्ञान का एक महान सामजस्य का विधान किया है। योगी साधु संन्यासी निर्जन अरण्य में गिरि-हर में बैठ जिस अद्वैत ज्ञान की साधना करते हैं, उसी ब्रह्मतत्व को समाज के विभिन्न स्तरों में रहते हुए सभी अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य में उपग्ध कर धन्य हो सकते हैं। एक ही ईश्वर जीव और जगत् के रूप में नाम एवं रूप के माध्यम से विचित्र भाव से प्रकट है। जो शिव के बोध में जीव की सेवा कर सकेंगे बेदी समय पर अपने को शुद्ध मुद्ध मुक्त स्वभाव जानने में समर्थ होंगे । उनका प्रत्येक कर्म उपासना के सदृश हो जायगा । भविष्य में स्वामीजी ने स्वरचित " सखा के प्रति " कविता में इस अनुभूति को मर्मस्पर्शी भाषा में लिखित में रूप में रख छोड़ा है :+ "ब्रह्म से कोट परमाणु, सदभूत में वही प्रेममय । सखे, करो प्राण मन शरीर अर्पण इन सब के चरणों पर ।। बहुरूप में जो सम्मुख तेरे इन्हें छोड़ कहीं दूढ़ोगे ईश्वर को । जो करे जीव से प्रेम वही करता है सेवा ईश्वर की * बीच में शिवबोध टापुर श्री रामकृष्ण के मन में कितना स्वाभाविक था, निम्नोस घटना दर्शाती है। "मथुरा के साथ काशी, वृन्दावन आदि तीर्थों के दर्शन की यात्रा में येयनाथधाम निकट एक गाव एववालों के दुसदारिद्रय देखकर बाबा का हृदय करण से पिघल गया। उन्होने मयुरा से का "तुम तो था के दीवान हो । इनके बाल तेल, एक घाती और मरपेट एक दिन के भोजन का प्रबंध कर दो।" मथुरा ने पहले वो कुछ अनमनाते हुए कहा, "बाबा, तीथ में बहुत खर्च हो, यह भी देराजा हूँ कि बहुत से लोग है- हेंलिनेपिलाने से सकते हैं। ऐसी दशा में क्या कहते हैं।" यह बात सुने कौन ? ग्राम वासियों के दुख देखकर बाबा की आँखों से अनवरत ओतुओं की धारा बह रही है, हृदय में अपूर्वकरणका आवेग है। उन्होंने, "दूर शाल, तेरा नैन बाउंगा। मैं इसी के पास रहूग, इनका कोई अपना बा नहीं है, इहे छोड़कर नहीं जाऊँगा।" यह कह कर चालक जैसी हि में दरिद्रों के माठे । उनकी वैसी करुणा देखकर मधुग ने पक से कपड़ा मगाकर, "बाचा' मे बहे के मुताबिक काम करवाये । बाग भी वालों का आनन्द देर में फूरकर इंसते हँसते उनसे विन हो मथुरा के साथ की गये।" इससे यह प्रतीत होता है कि परमदम देव के विचार में तीर्थदर्शन से नरनारायण की सेवा छोटी नहीं । गोपाल की माँ और महिला भक्त वृद पूर्वोत मनीदिरों और दीदी के अतिरिक्त जिन आध्यातिक शक्ति समान मदान् महिलाओं ने इस समय ठाकुर भीकृष्ण * श्री श्रीराम सोटा गुमाई एक करोड़ दो लाख चौंतालीस हज़ार एक सौ पैंतालीस को केन्द्र बनाकर अपने जीवन का गठन कर लिया था, उनमें गोपाल की माँ योगीन माँ , गोपाल माँ इत्यादि का नाम चिरस्मरणीय बन गया है। यहाँ पर ठाकुर की अन्तरङ्ग भक्तसाधिका श्रीमती अधोरमणि देवी के भक्ति मंडित जीवनवृत्त की केवल दो घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है। अधोरमणि यो एक द्रि ब्राह्मण की पुत्री । बचपन में ही उनका विवाद हो गया था। कुछ दिनों के बाद से विधवा हो गई। यही बालविधवा गंगातट पर एक देवालय में शरण पाकर बड़ी निष्ठा के साथ भगवान की गोपाल मूर्ति की उपासना एकाग्र चित से करने लगीं। इसी तरह उनके जीवन के तीस साल से अधिक बीत गये। इसी समय दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में एक सिद्ध साधक रहते हैं, सुनकर एक दिन उनके दर्शन के लिये यहाँ गई । इस प्रकार इस सौ के जीवन में पहले पहल ठाकुर के दर्शन हुए। प्रथम दर्शन के दिन से साधिका आह्मणी अपने हृदय में परमहंस देव पर एक प्रबल आकर्षण का अनुभव करने लगी। जिसके कारण इन्हें अ अक्सर दक्षिणेश्वर आना पड़ता था। इस तरह और कुछ दिन बीतने पर एक दिन रात के अन्तिम प्रहर में नप में निरत ब्राह्मणी ने सविस्मय देखा परमहंस देव उनकी बगल में बैठे हुए है - दाहिना हाथ मुठ्ठी बना हुआ अधरों पर मन्द-मन्द हास्य । साहस कर ब्राह्मणी ने ज्योंही अपने बायें हाथ से दाहिने हाथ को हुआ एक समावनीय परिवर्तन हो गया। परमहंसदेव की मूर्ति कहाँ विलीन हो गई और उनके स्थान में "नवीन नीरदश्याम नीलेन्द्रवरलोचनम् बाल गोपाल मूर्ति घुटनों के बल चढ़ती हुई आह्मणी की गोद पर आने की चेष्टा कर रही है। यह देखकर अपार आनन्द में आत्मविस्मृत हो ब्राह्मणी ने गोपाल को अपनी छाती से - शताब्दी-जयन्ती प्रन्थमाला चिरा लिया। साथ-साथ गोपाल के सेक्दो दुलारों ने उन्हें विल बना दिया। उस आनन्द की प्रबल तरंगों में ब्राह्मणी की सारे संसार की सुध जाती रही और अपने बारे में भी उन्हें कोई दोश नहीं रहा। वे गोपाल को छाती से चिपका कर चली दक्षिणेसर। अयंदीन ऊर्द्धव दृष्टि, औचल धूल में लोट रहा है, मुख मैं "गोपाल गोपाल" की रट, इस दशा में एक्दम थी थीठाकुर के कमरे में आ पहुँची। ठाकुर ने भी उन्हें कितने स्नेह से दिन भर अपने पास रखा और हाथों से भोजन कराया । सध्या समय पिर गोपाल को वक्ष में लगाकर वे कमरहाटी सोट आई। उनके जीवन में एक अपूर्व आध्यात्मिक प्रवाह दो माह तक अतित चलता रहा। उसके बाद जब वे समझी कि उनके इस ओर टाकुर अभिन्न है तब प्रमशः यह भाव शान्त होता गया । तभी से टाकुर को वे गोपाल कहकर पुकारती थीं, टापुर भी उन्हें गोपाल की माँ कहकर सम्बोधित करते थे। इतने दिनों में उनका गोपाल की म का नाम सार्थक हुआ। श्यामपुर में दक्षिणेश्वर में एक बड़ी मी भक्तगोष्ठी म गई। दिनदिन से नर नारी शान्ति मास करने के लिये उनके अमय प्रदायी चरणों की शरण में आने लगे। ठाकुर जानते थे कि विभ्रान्त जनममाज के सामने लाग और सेना के उच्च आदर्श की स्थापना किये बिना उन्हें अमृत के पात्र नहीं बनाया जा सकता। इसलिए उन्होंने अविवाहित कुमार वाले गुरकों के धर्म जीवन के गठन का अधिक ध्यान दिया । ठाइर यहा करते थे, "मोआना मन नहीं देने से ईश्वर पपूर्ण दर्शन भी नहीं हो सकते । बाल्या मन पूर्ण टनके अपने पास दो, स्त्री, पुत्र, धन, सम्पदा, मान, यश आदि पार्थिव विषयों में बिलर नहीं गया है। अभी से यन करने से सोलहों आना मना ईश्वर पर अर्पण कर उनके दर्शन पा कृतार्थ हो सकेंगे, इसी कारण इन्हें धर्म पथ पर परिचालित करने में मेरा इतना आग्रह है।" ठाकुर के विश्राम रक्षित अथक परिश्रम से उनका वरिष्ट शरीर, दिन पर दिन दुवैल होता जा रहा था । सन् एक हज़ार आठ सौ पचासी ईशून्य के ग्रीष्मकाल से बे सहसा गले में एक व्यगा का अनुभव करने लगे। बहुतों की यद धारणा हुई कि ग्रीष्म की कड़ी गर्मी में अत्यधिक बरफ दिए हुए शरबत आदि के पीने और भक्तों के साथ अविरत भगवत् प्रसंग करते रहने के कारण इस तरह के दर्द का उद्भव हुआ है। परन्तु इस कठिन बिमारी के रहते हुए भक्तों के बहुत आग्रह करने के कारण ठाकूर वैष्णवों के पानीहाटी के प्रसिद्ध महोत्सव में भाग लेगे गये, वहाँ पहुँचते ही कीर्तनानन्द में और उद्दाम नृत्य में मस्त हो गये। दोपहर की कड़ी धूप में देर तक इस प्रकार रहने के कारण उनके गले का दर्द और भी बढ़ गया। अनुभवी चिकित्सकों ने अच्छी तरह से रोग की परीक्षा के बाद निर्णय किया कि धर्मयाचकों को जो कठ व्याधि होती है वही व्याधि उन्हें भी हुई है। क्रमशः गले से सून निकलने लगा। रोग अत्यधिक बढ़ जाने के कारण उनकी चिकित्सा का उत्तम प्रबन्ध करने के लिए नरेन्द्रनाथ, गिरीशचन्द्र घोष, महेन्द्र गुप्त आदि सबों ने इशामपुर महल्ले में मकान किराया लेवर सन् एक हज़ार आठ सौ पचासी ई के अक्टूबर माह के मध्य भाग में ठाकुर को ले आये और उन दिनों के प्रसिद्ध होमियोवैथिक चिकित्सक डाशून्य महेन्द्रलाल सरकार की चिकित्सा में रखा उदारचित्त डाशून्य सरकार जान गये कि भक्तगण बड़े क्प्ष्ट से अर्थ व्यवस्था कर टाकुर की चिकित्सा करवा रहे हैं, उन्होंने कहा, "मैं बिना पारिश्रमिक लिये यथासाध्य इनकी चिकित्सा कर तुमलोगों के सत्कर्म में
दुर्मिला, फिरोट और त्रिभंगी हैं। इनमें सुन्दरो, दुर्मिला और किरीट मध्ययुगीन हिंदी काव्यपरम्परा के वर्णिक सवैया हैं। इनके विकास के सम्बन्ध में स्वतंत्र रूप से आगामो पृष्ठों में विचार किया जायगा गीता वस्तुतः 'हरिगीता' ( २८ मात्रा वाले छंद) का ही २० वर्ण वाला भेद है, इसका विवेचन हम 'हरिगीता' के साथ तुलना करते हुए करेंगे। वर्णिक त्रिभंगी भी वस्तुतः ४२ मात्रा वाला ( ३४ अक्षर का ) दण्डक छन्द है तथा इसका निरूपण मात्रिक त्रिभंगी के सम्बन्ध मे द्रष्टव्य है, जहाँ तुलनार्थ इसका विवेचन किया जा रहा है। चर्चरी अवशिष्ट वर्णिक छंद है, जिसे हम उक्त छंदों की तरह हो मूलतः मात्रिक छंद मानते हैं। प्राकृतपैगढम् के अनुसार इस छंद की चर्णिक गणव्यवस्था 'र स ज ज म र' है । इस प्रकार यह १८ वर्णों का २६ मात्रा प्रस्तार का छंद है। इसकी मात्रिक गण व्यवस्था हम यों मान सकते हैं : - 'पचकल + ४ चतुष्कल + पंचकल' । मध्य के दोनों चतुष्कळ 'पयोधर' (ISI, जगरण ) होते हैं । पाद के आदि में 'गुरु' ( 5 ) और पादांत में 'लघु गुरु' ( 15 ) की व्यवस्था पाई जाती है । यह छंद 'हरिगोतिका' की तरह क्रमशः तीन, घार, तीन, चार मात्रा के तालखंडों में गाया जाता है। इसकी समता हम २६ मात्रिक 'इरिगोत' से कर सकते हैं, जिसकी उत्थापनिका इसकी वर्णिक गणव्यवस्था से विलकुल मिलती है । इस छंद का 'चर्चरी' नाम भी इस बात का संकेत करता है कि यह मूलतः 'चर्चरी' नृत्य के साथ गाया जाने वाला छद है। 'चर्चरी' चस्तुतः 'चर्चरी' नृत्य के साथ गाये जाने मात्रिक तालच्छद की सामान्य संज्ञा है । यही कारण है कि विक्रमोर्वशीय में ऐसी कई चर्चरीगोतियाँ मिलती हैं, जो इस छन्द से समानता नहीं रखती। जिनदत्त सूरि ने पिछले दिनों 'चाँचरि' में जिस छन्द का प्रयोग किया है, वह प्रस्तुत 'घर्चरी' न होकर "ळवगम' के वजन का २१ मात्रा का छन्द है । वस्तुतः जिस प्रकार अपभ्रंश 'रासक' छन्द भी १. दे० अनुशीलन २०३ २. दे० अनुशीलन ६ १८५ ३. दे० अनुशीलन ६ १९३ अनेक तरह का था और यह 'रास' भुस्य से संबद्ध होने के कारण भनेक धन्यों की सामान्य संग्रा हो गई थी, जैसे ही भारम में वर्ष' मी बन्दों की सामान्य सम्रा थी। धीरे धीरे धीरे मट्ट कवियों के यहाँ यह नाम केवळ १८ वर्ण वाळो विशेष बर्णिक गयाप्रक्रिया के २६ मात्रिक एम्प के धर्म में सीमित हो गया । प्राकृतपेंगलम् और मात्रिक छद मावगम का मिलेव महस्व मात्रिक विवेचन को दृष्टि से है। यहीं हमें हुछ ऐसे छेदों का सबसे पहले पता है जो म भवा युगीम हिंदी काम्पपरम्परा में काफी प्रचलित है। माि मन्त्रों का विवेचन करते समय माहवपगढम् के समाइक ने उन्हीं को चुना है, को मह कवियों के यहाँ प्रयुक्त होते रहे हैं और इस दृष्टि से यहाँ महम ४५ मात्रिक छका सोदाहरण मिळता है। माग के माह का दृष्टिकास स्वयम् और हेमचन्द्र की भाँति समी मात्र प्रस्वारी के भाषद बन्दों की मी देना न होकर वे प्रायोगिक दृष्टिकोण है। यही कारण है यहाँ कि ग्रीक वैसे परवर्ती प्राकृत छन्द व उनके विविध मिमिट रूपों का विवेचन नहीं मि। अप बन्यों में भी प्रका संग्रह मह कवियों के व्यवहार में अमिक भानेवाले बच्चों को पुनया है और इस दृष्टि से एक ही मात्रामस्वार के कोबर सेवा है, जिनका प्रयोग काफी था। जैसे ३२ मात्रा प्रस्वार के पद्मावती जैसे का विवरण मिलेगा, किंतु कई मात्रा मस्वारों में बदरों का दबाका एक महीं मिटा। मिश्रित में भी वडा और इन्होको जुमा गया मागम के मात्रिक छरों को ऐतिहासिक विकास क्रम की दृि से दो वर्गों में बाँटा जा सकता है। एक से छो प्राकृत इम परम्परा से सबद्ध है, जैसे गाया और इसके विविध प्ररोह बन्दको सम्म परम्परा से संबद्ध पादा रिक्रो दुमि, दोहा, सोरठा आदि । छम् के मात्रिक छन्दों का अनुसीमम इम इन्ही दो बाँड कर करेंगे ।
दुर्मिला, फिरोट और त्रिभंगी हैं। इनमें सुन्दरो, दुर्मिला और किरीट मध्ययुगीन हिंदी काव्यपरम्परा के वर्णिक सवैया हैं। इनके विकास के सम्बन्ध में स्वतंत्र रूप से आगामो पृष्ठों में विचार किया जायगा गीता वस्तुतः 'हरिगीता' का ही बीस वर्ण वाला भेद है, इसका विवेचन हम 'हरिगीता' के साथ तुलना करते हुए करेंगे। वर्णिक त्रिभंगी भी वस्तुतः बयालीस मात्रा वाला दण्डक छन्द है तथा इसका निरूपण मात्रिक त्रिभंगी के सम्बन्ध मे द्रष्टव्य है, जहाँ तुलनार्थ इसका विवेचन किया जा रहा है। चर्चरी अवशिष्ट वर्णिक छंद है, जिसे हम उक्त छंदों की तरह हो मूलतः मात्रिक छंद मानते हैं। प्राकृतपैगढम् के अनुसार इस छंद की चर्णिक गणव्यवस्था 'र स ज ज म र' है । इस प्रकार यह अट्ठारह वर्णों का छब्बीस मात्रा प्रस्तार का छंद है। इसकी मात्रिक गण व्यवस्था हम यों मान सकते हैं : - 'पचकल + चार चतुष्कल + पंचकल' । मध्य के दोनों चतुष्कळ 'पयोधर' होते हैं । पाद के आदि में 'गुरु' और पादांत में 'लघु गुरु' की व्यवस्था पाई जाती है । यह छंद 'हरिगोतिका' की तरह क्रमशः तीन, घार, तीन, चार मात्रा के तालखंडों में गाया जाता है। इसकी समता हम छब्बीस मात्रिक 'इरिगोत' से कर सकते हैं, जिसकी उत्थापनिका इसकी वर्णिक गणव्यवस्था से विलकुल मिलती है । इस छंद का 'चर्चरी' नाम भी इस बात का संकेत करता है कि यह मूलतः 'चर्चरी' नृत्य के साथ गाया जाने वाला छद है। 'चर्चरी' चस्तुतः 'चर्चरी' नृत्य के साथ गाये जाने मात्रिक तालच्छद की सामान्य संज्ञा है । यही कारण है कि विक्रमोर्वशीय में ऐसी कई चर्चरीगोतियाँ मिलती हैं, जो इस छन्द से समानता नहीं रखती। जिनदत्त सूरि ने पिछले दिनों 'चाँचरि' में जिस छन्द का प्रयोग किया है, वह प्रस्तुत 'घर्चरी' न होकर "ळवगम' के वजन का इक्कीस मात्रा का छन्द है । वस्तुतः जिस प्रकार अपभ्रंश 'रासक' छन्द भी एक. देशून्य अनुशीलन दो सौ तीन दो. देशून्य अनुशीलन छः एक सौ पचासी तीन. देशून्य अनुशीलन छः एक सौ तिरानवे अनेक तरह का था और यह 'रास' भुस्य से संबद्ध होने के कारण भनेक धन्यों की सामान्य संग्रा हो गई थी, जैसे ही भारम में वर्ष' मी बन्दों की सामान्य सम्रा थी। धीरे धीरे धीरे मट्ट कवियों के यहाँ यह नाम केवळ अट्ठारह वर्ण वाळो विशेष बर्णिक गयाप्रक्रिया के छब्बीस मात्रिक एम्प के धर्म में सीमित हो गया । प्राकृतपेंगलम् और मात्रिक छद मावगम का मिलेव महस्व मात्रिक विवेचन को दृष्टि से है। यहीं हमें हुछ ऐसे छेदों का सबसे पहले पता है जो म भवा युगीम हिंदी काम्पपरम्परा में काफी प्रचलित है। माि मन्त्रों का विवेचन करते समय माहवपगढम् के समाइक ने उन्हीं को चुना है, को मह कवियों के यहाँ प्रयुक्त होते रहे हैं और इस दृष्टि से यहाँ महम पैंतालीस मात्रिक छका सोदाहरण मिळता है। माग के माह का दृष्टिकास स्वयम् और हेमचन्द्र की भाँति समी मात्र प्रस्वारी के भाषद बन्दों की मी देना न होकर वे प्रायोगिक दृष्टिकोण है। यही कारण है यहाँ कि ग्रीक वैसे परवर्ती प्राकृत छन्द व उनके विविध मिमिट रूपों का विवेचन नहीं मि। अप बन्यों में भी प्रका संग्रह मह कवियों के व्यवहार में अमिक भानेवाले बच्चों को पुनया है और इस दृष्टि से एक ही मात्रामस्वार के कोबर सेवा है, जिनका प्रयोग काफी था। जैसे बत्तीस मात्रा प्रस्वार के पद्मावती जैसे का विवरण मिलेगा, किंतु कई मात्रा मस्वारों में बदरों का दबाका एक महीं मिटा। मिश्रित में भी वडा और इन्होको जुमा गया मागम के मात्रिक छरों को ऐतिहासिक विकास क्रम की दृि से दो वर्गों में बाँटा जा सकता है। एक से छो प्राकृत इम परम्परा से सबद्ध है, जैसे गाया और इसके विविध प्ररोह बन्दको सम्म परम्परा से संबद्ध पादा रिक्रो दुमि, दोहा, सोरठा आदि । छम् के मात्रिक छन्दों का अनुसीमम इम इन्ही दो बाँड कर करेंगे ।
भोपाल/नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। शिवराज ने पूछा है कि नेशनल हेरल्ड मामले में राहुल ने कोई गड़बड़ नहीं की तो वे डर क्यों रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। शिवराज ने दिल्ली में कहा कि सच यह है कि राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार किया है। अब जब भ्रष्टाचार की जांच हो रही है तो जांच एजेंसी पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने कुछ गड़बड़ नहीं किया तो राहुल गांधी और कांग्रेस को किस बात का डर। वे ईडी को जाकर सच बता सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जनता कांग्रेस के इस ढोंग को समझ चुकी है। नेशनल हेरल्ड प्रकरण में राहुल और सोनिया गांधी को ईडी ने समन भेजा था। सोमवार को राहुल गांधी ईडी के सामने पेश हुए। उनसे तीन घंटे तक पूछताछ हुई। इधर, कांग्रेस नेतृत्व को जारी समन के खिलाफ पार्टी ने सत्याग्रह मार्च का आयोजन किया। इसमें कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए ईडी की कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कांग्रेस की राष्ट्रीय नेतृत्व को परेशान कर रही है।
भोपाल/नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। शिवराज ने पूछा है कि नेशनल हेरल्ड मामले में राहुल ने कोई गड़बड़ नहीं की तो वे डर क्यों रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। शिवराज ने दिल्ली में कहा कि सच यह है कि राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार किया है। अब जब भ्रष्टाचार की जांच हो रही है तो जांच एजेंसी पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने कुछ गड़बड़ नहीं किया तो राहुल गांधी और कांग्रेस को किस बात का डर। वे ईडी को जाकर सच बता सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जनता कांग्रेस के इस ढोंग को समझ चुकी है। नेशनल हेरल्ड प्रकरण में राहुल और सोनिया गांधी को ईडी ने समन भेजा था। सोमवार को राहुल गांधी ईडी के सामने पेश हुए। उनसे तीन घंटे तक पूछताछ हुई। इधर, कांग्रेस नेतृत्व को जारी समन के खिलाफ पार्टी ने सत्याग्रह मार्च का आयोजन किया। इसमें कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलते हुए ईडी की कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कांग्रेस की राष्ट्रीय नेतृत्व को परेशान कर रही है।
उत्तराखंड में नई सरकार का गठन हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। धामी के साथ आठ अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। नई कैबिनेट में धामी ने पांच पुराने चेहरों को बरकार रखा है तो तीन नए चेहरे भी शामिल किए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
उत्तराखंड में नई सरकार का गठन हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के बारहवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। धामी के साथ आठ अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। नई कैबिनेट में धामी ने पांच पुराने चेहरों को बरकार रखा है तो तीन नए चेहरे भी शामिल किए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
झारखंड के सरायकेला जिले (Jharkhand Saraikela) में पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार युवक आजाद नगर मानगो का रहने वाला है. उसकी पहचान इमरान अहमद के रूप में की गई है. पुलिस आरोपी पर केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है. जानकारी के अनुसार, आदित्यपुर थाना प्रभारी आलोक दुबे ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मुस्लिम बस्ती रोड के पास कुछ लोग ब्राउन शुगर की खरीद और बिक्री कर रहे हैं. इस सूचना के बाद पुलिस की टीम ने मुस्लिम बस्ती के इमामबाड़ा के पास पहुंचकर छानबीन की. पुलिस के पहुंचते ही ब्राउन शुगर बेचने वाले भागने लगे. इस दौरान पुलिस ने एक युवक को दौड़कर पकड़ा लिया. पुुलिस ने जब युवक की तलाशी ली तो उसके पास से 58 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की गई. गिरफ्तार आरोपी मानगो के आजाद नगर थाना क्षेत्र का रहनेवाला है. थाना प्रभारी ने बताया कि ब्राउन शुगर के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा. छापेमारी अभियान में थाना प्रभारी के अलावा सब इंस्पेक्टर सतवीर सिंह, मकसूद अहमद, सुमन कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, संजीत कुमार आदि शामिल थे.
झारखंड के सरायकेला जिले में पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार युवक आजाद नगर मानगो का रहने वाला है. उसकी पहचान इमरान अहमद के रूप में की गई है. पुलिस आरोपी पर केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है. जानकारी के अनुसार, आदित्यपुर थाना प्रभारी आलोक दुबे ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मुस्लिम बस्ती रोड के पास कुछ लोग ब्राउन शुगर की खरीद और बिक्री कर रहे हैं. इस सूचना के बाद पुलिस की टीम ने मुस्लिम बस्ती के इमामबाड़ा के पास पहुंचकर छानबीन की. पुलिस के पहुंचते ही ब्राउन शुगर बेचने वाले भागने लगे. इस दौरान पुलिस ने एक युवक को दौड़कर पकड़ा लिया. पुुलिस ने जब युवक की तलाशी ली तो उसके पास से अट्ठावन पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की गई. गिरफ्तार आरोपी मानगो के आजाद नगर थाना क्षेत्र का रहनेवाला है. थाना प्रभारी ने बताया कि ब्राउन शुगर के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा. छापेमारी अभियान में थाना प्रभारी के अलावा सब इंस्पेक्टर सतवीर सिंह, मकसूद अहमद, सुमन कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, संजीत कुमार आदि शामिल थे.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एक जे-1 वीजा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सांस्कृतिक आदान प्रदान को प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रमों, खासकर अमेरिका में चिकित्सा और व्यवसाय का प्रशिक्षण लेने वाले आगंतुकों के विनिमय हेतु जारी किया जाने वाला गैर-आप्रवासी वीजा है। सभी आवेदकों को योग्यता मापदंड पूरा करना तथा निजी क्षेत्र या सरकारी कार्यक्रम द्वारा प्रायोजित किया जाना अनिवार्य है। . संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जे-1 वीजा और संयुक्त राज्य आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। जे-1 वीजा 5 संबंध है और संयुक्त राज्य 107 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (5 + 107)। यह लेख जे-1 वीजा और संयुक्त राज्य के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एक जे-एक वीजा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सांस्कृतिक आदान प्रदान को प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रमों, खासकर अमेरिका में चिकित्सा और व्यवसाय का प्रशिक्षण लेने वाले आगंतुकों के विनिमय हेतु जारी किया जाने वाला गैर-आप्रवासी वीजा है। सभी आवेदकों को योग्यता मापदंड पूरा करना तथा निजी क्षेत्र या सरकारी कार्यक्रम द्वारा प्रायोजित किया जाना अनिवार्य है। . संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जे-एक वीजा और संयुक्त राज्य आम में शून्य बातें हैं । जे-एक वीजा पाँच संबंध है और संयुक्त राज्य एक सौ सात है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख जे-एक वीजा और संयुक्त राज्य के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
MEERUT गंगानगर स्थित आईआईएमटी कॉलेज में सांस्कृतिक प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता में विद्या नॉलेज पार्क, गौरी विद्यापीठ, कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज एवं कैश कॉलेज ने भाग लिया। इस अवसर पर चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता ने स्टूडेंट्स का हौसला अफजाई की। इस दौरान क्विज एवं डांस प्रतियोगिता में कैश कॉलेज ने बाजी मारी। इस दौरान निदेशक डॉ। आशीष अग्रवाल ने सभी आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीबीए विभागाध्यक्ष डॉ। मयंक जैन, बीसीए विभागाध्यक्ष डॉ। नीरज शर्मा व बीजेएमसी विभागाध्यक्ष डॉ। नरेंद्र मिश्रा, लता सिंह, डॉ। नीरज चौहान, डॉ। विरेंद्र सिंह आदि का योगदान रहा।
MEERUT गंगानगर स्थित आईआईएमटी कॉलेज में सांस्कृतिक प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता में विद्या नॉलेज पार्क, गौरी विद्यापीठ, कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज एवं कैश कॉलेज ने भाग लिया। इस अवसर पर चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता ने स्टूडेंट्स का हौसला अफजाई की। इस दौरान क्विज एवं डांस प्रतियोगिता में कैश कॉलेज ने बाजी मारी। इस दौरान निदेशक डॉ। आशीष अग्रवाल ने सभी आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीबीए विभागाध्यक्ष डॉ। मयंक जैन, बीसीए विभागाध्यक्ष डॉ। नीरज शर्मा व बीजेएमसी विभागाध्यक्ष डॉ। नरेंद्र मिश्रा, लता सिंह, डॉ। नीरज चौहान, डॉ। विरेंद्र सिंह आदि का योगदान रहा।
हिंदुस्तान में रहकर पाकिस्तान के नारे लगाने वाले देश प्रेमियों को आज पाकिस्तान के हालात देखकर भी क्या पाकिस्तान के ऊपर गर्व करने का भाव जाग्रत हो रहा है? क्या हिंदुस्तान की सुदृढ़ नीतियां हमारा अभिमान बनकर सामने नहीं आ रही हैं? क्या आज अपने देश को शीर्षस्थ देखकर भी पाकिस्तान के प्रति प्रेम उत्पन्न हो रहा है? पाकिस्तान जो हथियारों के मामलों में तो अग्रणी रहा पर अपने देश के लोगों के जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति में असफल हो गया. पाकिस्तान की दयनीय दशा से वहां की जनता का जो हाल है वह काफी विचलित कर देनेवाला है. आजादी के बाद विभाजन होने से हिंदुस्तान और पाकिस्तान दो अलग रुप हो गए पाक के पाकिस्तानी, हिंंद के हिंदुस्तान उनकी पहचान हो गई. दोनों का एक ही दिन जन्म हुआ पर सोच अलग रही. भारत वसुधैव कुटुम्बकम् के रास्ते पर चला और आगे बढ़ा. पाकिस्तान आतंकवाद के रास्ते चला और डूब गया. भले ही ये एक-दूसरे से निभाकर चलते हों पर सच्चाई ये है कि पाकिस्तान हमारा दोस्त कभी बना ही नहीं. एक प्रतिद्वन्दी बना रहा. हमेशा हमें नुकसान पहुंचाने की भावना से ही ग्रसित रहा. मन में नफरत पालने वाला पाक कभी आंतरिक संबंधों की गहराई तक पहुंच ही नहीं पाया. भारतीयों के प्रति उसकी ईर्ष्या कभी कम नहीं हुई. जगजाहिर है कि वह आतंक का पर्याय है. आतंकी गतिविधियों को जन्म देने वाला हमारी बराबरी कभी कर ही नहीं सकता. विभाजन के बाद से पाक ने भारत को कभी अपना माना ही नहीं. आज शांत छवि वाला भारत अपनी सुदृढ़ व स्वच्छ नीतियों के कारण ऊंचाइयों को छू रहा है और पाकिस्तान के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि लोग अन्न के दानों के लिए तरस रहें हैं. जीवन की अनिवार्य आवश्यकता अनाज के लिए जान दे रहें हैं. हथियारों को जीवन का अनिवार्य अंग समझने वाले देश के पास अपने लोगों का पेट भरने के लिए खाना भी नसीब नहीं हो रहा है. जबकि भारत में कोरोना काल से आगे आने वाले कुछ सालों तक मुफ्त अनाज घर-घर पहुंचाया जा रहा है. दुर्दशा को प्राप्त हुआ आतंकी देश आज कितनी बेचारगी झेल रहा है. एक ओर जहां सारे संसार में भारत का नाम है. देश के प्रधानमंत्री की कार्य शैली और निर्णयों से एकजुट भारत उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहा है. वहीं पाक कमजोर नीतियों के कारण भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है. हर वस्तु की महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. कुछ भी खरीद पाना उसकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है. आटे जैसी जरुरत के लिए छीना-झपटी, एक दूसरे को आहत करना. इससे ज्यादा बुरा तो कुछ हो ही नहीं सकता. कैसा वक्त आ गया है? कहना गलत ना होगा कि जैसी करनी वैसी भरनी. शीर्षस्थ लोगों के गलत निर्णय के कारण पाक डूबने के कगार पर है. भूख से बड़ा कुछ नहीं होता. आज भूख से पीड़ित पाकिस्तान के बच्चे-बूढ़े, महिलाएं घंटों लाइन में लगकर भी आटा हासिल नहीं कर पा रहे हैं. उनके हथियार किसी काम नहीं आ रहे हैं. जनता का जो हश्र हो रहा है. वो किसी पीड़ा से कम नहीं है. आज पाकिस्तान के नागरिक हिंदुस्तान की प्रशंसा कर रहे हैं. यही सोच रहे होंगे शायद कि वो भी हिंदुस्तान के नागरिक होते. पाक बिलख रहा है. पाक भले ही हमें शत्रु मानता हो पर आज के जो हालात है उससे मन द्रवित हो रहा है. वहां के लोगों की व्याकुलता और विलाप बेचैन कर रहा है. यद्यपि पाक में अच्छी मात्रा में अन्न होता है पर ना जाने किस नीति के कारण इतनी महंगाई हो गई. भारत में मिनटों में ऑनलाइन ही घर पर आटा आ जाता है वहां पाकिस्तान में संघर्ष हो रहा है. खाद्य पदार्थों की मूल्य वृद्धि से लोग आशंकित हो रहे हैं. दिन-प्रतिदिन महंगाई बढ़ जाती है. पाक की स्थिति लंका जैसी ना हो जाए. कंगाली के द्वार पर पहुंचा पाक कुछ भी खरीदने के लायक नहीं है. बंदरगाह पर सामान लेकर जहाज खड़े हैं पर उसकी स्थिति ऐसी नहीं है कि पैसे देकर सामान ले सके. बिजली की किल्लत से अलग परेशानी है. कई शहरों के अंधेरे में डूबने से जनता की मुसीबतों में 'कंगाली में आटा गीला' वाली बात हो गई है. परमाणु सम्पन्न पाक भूखा मर रहा है. हथियारों से व बमों से घर भरने वाले पाक ने अच्छी नीतियों के तहत यदि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया होता तो जनता को इतना झेलना नहीं पड़ता. देश के ऐसे हालात नहीं होते. पाक जो इस समय दया का पात्र है दरअसल दया के लायक ही नहीं है. भारत को हर समय नुकसान पहुंचाने वाले पाक की दयनीय दशा के बावजूद भारत उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है. कट्टरवादी विचारधारा वाला पाक अपनी कटट्रता के कारण आज विनाश के कगार पर पहुंच गया है. उसका मुद्रा भंडारण खत्म हो गया है. उसका भविष्य अंधेरे में डूबता नजर आ रहा है. मतलबी पाक ने सदैव स्वार्थ के वशीभूत होकर सब देशों से संबंध रखें दूसरे देशों ने हमेशा उसकी मदद की पर वह आतंकी सोच से बाहर ही नहीं आया, आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा. आतंकवाद की फैक्टरी में आतंक का प्रशिक्षण देकर अपना भविष्य बनाता रहा. हर लड़ाई जीतने के ख्वाब देखता रहा पर जिंंदगी की लड़ाई ही हार गया, हार भी स्वयं से ही, ना कोई हमला हुआ, ना कोई विस्फोट पर सब धराशाई हो गया. हथियारों से, बम से पेट की भूख शांत नहीं होती. शांत सुखी जीवन के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति होना ही जरुरी है जिसकी पाक ने कभी चिंता नहीं की. पाकिस्तान में रहने वाले आज हमारी नीतियों की प्रशंसा कर रहे हैं. वहां के वक्तव्य जो हमें छलनी करते रहे हैं हमारा गुणगान कर रहे हैं. अपने देश की अव्यवस्था से असंतुष्ट जनता भारत के कुशल नेतृत्व की प्रशंसक है. हमारे देश के साथ सदैव दोरंगा व्यवहार करने वाले पाक ने आतंकी गतिविधियों और दिखावे की भावना में भरकर सदैव अहित करना चाहा है. आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मिलकर चलने की कोशिश भारत की सुनीतियां ही हैं, पर पाकिस्तान से विश्वास की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. पाकिस्तान में कोई निवेश भी नहीं करना चाहता और भारत जी 20 में नेतृत्व कर रहा है. बाढ़ के कारण उसका अनाज नष्ट हुआ और भारत से तीन बार युद्ध में उसने मुंह की ही खाई है. आर्थिक रुप से उसकी कमर टूटी है. कभी भी नेक इरादे नहीं रखने वाले स्वार्थी पाक के लिए अपने को आतंकवादी ना मानना उसका वहम है और आज उसका भ्रम टूट रहा है.
हिंदुस्तान में रहकर पाकिस्तान के नारे लगाने वाले देश प्रेमियों को आज पाकिस्तान के हालात देखकर भी क्या पाकिस्तान के ऊपर गर्व करने का भाव जाग्रत हो रहा है? क्या हिंदुस्तान की सुदृढ़ नीतियां हमारा अभिमान बनकर सामने नहीं आ रही हैं? क्या आज अपने देश को शीर्षस्थ देखकर भी पाकिस्तान के प्रति प्रेम उत्पन्न हो रहा है? पाकिस्तान जो हथियारों के मामलों में तो अग्रणी रहा पर अपने देश के लोगों के जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति में असफल हो गया. पाकिस्तान की दयनीय दशा से वहां की जनता का जो हाल है वह काफी विचलित कर देनेवाला है. आजादी के बाद विभाजन होने से हिंदुस्तान और पाकिस्तान दो अलग रुप हो गए पाक के पाकिस्तानी, हिंंद के हिंदुस्तान उनकी पहचान हो गई. दोनों का एक ही दिन जन्म हुआ पर सोच अलग रही. भारत वसुधैव कुटुम्बकम् के रास्ते पर चला और आगे बढ़ा. पाकिस्तान आतंकवाद के रास्ते चला और डूब गया. भले ही ये एक-दूसरे से निभाकर चलते हों पर सच्चाई ये है कि पाकिस्तान हमारा दोस्त कभी बना ही नहीं. एक प्रतिद्वन्दी बना रहा. हमेशा हमें नुकसान पहुंचाने की भावना से ही ग्रसित रहा. मन में नफरत पालने वाला पाक कभी आंतरिक संबंधों की गहराई तक पहुंच ही नहीं पाया. भारतीयों के प्रति उसकी ईर्ष्या कभी कम नहीं हुई. जगजाहिर है कि वह आतंक का पर्याय है. आतंकी गतिविधियों को जन्म देने वाला हमारी बराबरी कभी कर ही नहीं सकता. विभाजन के बाद से पाक ने भारत को कभी अपना माना ही नहीं. आज शांत छवि वाला भारत अपनी सुदृढ़ व स्वच्छ नीतियों के कारण ऊंचाइयों को छू रहा है और पाकिस्तान के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि लोग अन्न के दानों के लिए तरस रहें हैं. जीवन की अनिवार्य आवश्यकता अनाज के लिए जान दे रहें हैं. हथियारों को जीवन का अनिवार्य अंग समझने वाले देश के पास अपने लोगों का पेट भरने के लिए खाना भी नसीब नहीं हो रहा है. जबकि भारत में कोरोना काल से आगे आने वाले कुछ सालों तक मुफ्त अनाज घर-घर पहुंचाया जा रहा है. दुर्दशा को प्राप्त हुआ आतंकी देश आज कितनी बेचारगी झेल रहा है. एक ओर जहां सारे संसार में भारत का नाम है. देश के प्रधानमंत्री की कार्य शैली और निर्णयों से एकजुट भारत उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहा है. वहीं पाक कमजोर नीतियों के कारण भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है. हर वस्तु की महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. कुछ भी खरीद पाना उसकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है. आटे जैसी जरुरत के लिए छीना-झपटी, एक दूसरे को आहत करना. इससे ज्यादा बुरा तो कुछ हो ही नहीं सकता. कैसा वक्त आ गया है? कहना गलत ना होगा कि जैसी करनी वैसी भरनी. शीर्षस्थ लोगों के गलत निर्णय के कारण पाक डूबने के कगार पर है. भूख से बड़ा कुछ नहीं होता. आज भूख से पीड़ित पाकिस्तान के बच्चे-बूढ़े, महिलाएं घंटों लाइन में लगकर भी आटा हासिल नहीं कर पा रहे हैं. उनके हथियार किसी काम नहीं आ रहे हैं. जनता का जो हश्र हो रहा है. वो किसी पीड़ा से कम नहीं है. आज पाकिस्तान के नागरिक हिंदुस्तान की प्रशंसा कर रहे हैं. यही सोच रहे होंगे शायद कि वो भी हिंदुस्तान के नागरिक होते. पाक बिलख रहा है. पाक भले ही हमें शत्रु मानता हो पर आज के जो हालात है उससे मन द्रवित हो रहा है. वहां के लोगों की व्याकुलता और विलाप बेचैन कर रहा है. यद्यपि पाक में अच्छी मात्रा में अन्न होता है पर ना जाने किस नीति के कारण इतनी महंगाई हो गई. भारत में मिनटों में ऑनलाइन ही घर पर आटा आ जाता है वहां पाकिस्तान में संघर्ष हो रहा है. खाद्य पदार्थों की मूल्य वृद्धि से लोग आशंकित हो रहे हैं. दिन-प्रतिदिन महंगाई बढ़ जाती है. पाक की स्थिति लंका जैसी ना हो जाए. कंगाली के द्वार पर पहुंचा पाक कुछ भी खरीदने के लायक नहीं है. बंदरगाह पर सामान लेकर जहाज खड़े हैं पर उसकी स्थिति ऐसी नहीं है कि पैसे देकर सामान ले सके. बिजली की किल्लत से अलग परेशानी है. कई शहरों के अंधेरे में डूबने से जनता की मुसीबतों में 'कंगाली में आटा गीला' वाली बात हो गई है. परमाणु सम्पन्न पाक भूखा मर रहा है. हथियारों से व बमों से घर भरने वाले पाक ने अच्छी नीतियों के तहत यदि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया होता तो जनता को इतना झेलना नहीं पड़ता. देश के ऐसे हालात नहीं होते. पाक जो इस समय दया का पात्र है दरअसल दया के लायक ही नहीं है. भारत को हर समय नुकसान पहुंचाने वाले पाक की दयनीय दशा के बावजूद भारत उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है. कट्टरवादी विचारधारा वाला पाक अपनी कटट्रता के कारण आज विनाश के कगार पर पहुंच गया है. उसका मुद्रा भंडारण खत्म हो गया है. उसका भविष्य अंधेरे में डूबता नजर आ रहा है. मतलबी पाक ने सदैव स्वार्थ के वशीभूत होकर सब देशों से संबंध रखें दूसरे देशों ने हमेशा उसकी मदद की पर वह आतंकी सोच से बाहर ही नहीं आया, आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा. आतंकवाद की फैक्टरी में आतंक का प्रशिक्षण देकर अपना भविष्य बनाता रहा. हर लड़ाई जीतने के ख्वाब देखता रहा पर जिंंदगी की लड़ाई ही हार गया, हार भी स्वयं से ही, ना कोई हमला हुआ, ना कोई विस्फोट पर सब धराशाई हो गया. हथियारों से, बम से पेट की भूख शांत नहीं होती. शांत सुखी जीवन के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति होना ही जरुरी है जिसकी पाक ने कभी चिंता नहीं की. पाकिस्तान में रहने वाले आज हमारी नीतियों की प्रशंसा कर रहे हैं. वहां के वक्तव्य जो हमें छलनी करते रहे हैं हमारा गुणगान कर रहे हैं. अपने देश की अव्यवस्था से असंतुष्ट जनता भारत के कुशल नेतृत्व की प्रशंसक है. हमारे देश के साथ सदैव दोरंगा व्यवहार करने वाले पाक ने आतंकी गतिविधियों और दिखावे की भावना में भरकर सदैव अहित करना चाहा है. आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की मिलकर चलने की कोशिश भारत की सुनीतियां ही हैं, पर पाकिस्तान से विश्वास की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. पाकिस्तान में कोई निवेश भी नहीं करना चाहता और भारत जी बीस में नेतृत्व कर रहा है. बाढ़ के कारण उसका अनाज नष्ट हुआ और भारत से तीन बार युद्ध में उसने मुंह की ही खाई है. आर्थिक रुप से उसकी कमर टूटी है. कभी भी नेक इरादे नहीं रखने वाले स्वार्थी पाक के लिए अपने को आतंकवादी ना मानना उसका वहम है और आज उसका भ्रम टूट रहा है.
देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ी सुविधा दी है. अब एसबीआई के ग्राहक किसी भी बैंक के एटीएम से बिना डेबिट कार्ड के कैश निकाल सकते हैं. यानी अब आपका एटीएम खो जाए या घर पर छूट जाए तो भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. एसबीआई की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए खास 'इंटरऑपरेबल कार्डलेस कैश विड्रॉल' सुविधा की शुरुआत की है. इसके तहत एसबीआई के ग्राहक एटीएम कार्ड का इस्तेमाल किए बिना एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं. अब तक यह सुविधा सिर्फ एसबीआई बैंक एटीएम पर ही मिलती थी. लेकिन अब आप किसी भी बैंक एटीएम से बिना एटीएम कार्ड कैश निकाल सकते हैं. कैसे निकालें पैसे? एसबीआई ने डिजिटल बैंकिंग ऐप यानी योनो को नए रूप में लेकर आया है. इसे समय और जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया गया है, ताकि ग्राहकों को ज्यादा सुविधा मिल सके. अब किसी भी बैंक के ग्राहक यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए एसबीआई का ऐप यानी योनो का इस्तेमाल कर सकते हैं. एसबीआई ने 68वें बैंक दिवस पर ये बदलाव किए हैं. अब एसबीआई के योनो ऐप का नाम 'योनो फोर एवरी इंडियन' हो गया है. योनो के नए रूप में आने के बाद अब यह हर किसी के लिए काम का हो गया है. बैंक ने बताया कि अब अब किसी भी बैंक के ग्राहक योनो ऐप पर स्कैन एंड पे, पे बाय कॉन्टैक्ट्स, रिक्वेस्ट मनी समेत यूपीआई के सभी का इस्तेमाल कर सकते हैं. यानी अब सरे बैंक ग्राहकों के लिए योनो ऐप काम उपयोगी हो गया है. इस फैसले के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा कि एसबीआई अत्याधुनिक डिजिटल बैंकिंग समाधान मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. यह बैंक हर भारतीय को वित्तीय आजादी और सहूलियत से सशक्त बनाता है. हमारे ग्राहकों की सुविधा, सहूलियत और उनके सुखद डिजिटल अनुभव की अपेक्षाओं को देखते हुए बैंक ने योनो ऐप में ये बड़े बदलाव किए हैं.
देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपने ग्राहकों को बड़ी सुविधा दी है. अब एसबीआई के ग्राहक किसी भी बैंक के एटीएम से बिना डेबिट कार्ड के कैश निकाल सकते हैं. यानी अब आपका एटीएम खो जाए या घर पर छूट जाए तो भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. एसबीआई की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए खास 'इंटरऑपरेबल कार्डलेस कैश विड्रॉल' सुविधा की शुरुआत की है. इसके तहत एसबीआई के ग्राहक एटीएम कार्ड का इस्तेमाल किए बिना एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं. अब तक यह सुविधा सिर्फ एसबीआई बैंक एटीएम पर ही मिलती थी. लेकिन अब आप किसी भी बैंक एटीएम से बिना एटीएम कार्ड कैश निकाल सकते हैं. कैसे निकालें पैसे? एसबीआई ने डिजिटल बैंकिंग ऐप यानी योनो को नए रूप में लेकर आया है. इसे समय और जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया गया है, ताकि ग्राहकों को ज्यादा सुविधा मिल सके. अब किसी भी बैंक के ग्राहक यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए एसबीआई का ऐप यानी योनो का इस्तेमाल कर सकते हैं. एसबीआई ने अड़सठवें बैंक दिवस पर ये बदलाव किए हैं. अब एसबीआई के योनो ऐप का नाम 'योनो फोर एवरी इंडियन' हो गया है. योनो के नए रूप में आने के बाद अब यह हर किसी के लिए काम का हो गया है. बैंक ने बताया कि अब अब किसी भी बैंक के ग्राहक योनो ऐप पर स्कैन एंड पे, पे बाय कॉन्टैक्ट्स, रिक्वेस्ट मनी समेत यूपीआई के सभी का इस्तेमाल कर सकते हैं. यानी अब सरे बैंक ग्राहकों के लिए योनो ऐप काम उपयोगी हो गया है. इस फैसले के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा कि एसबीआई अत्याधुनिक डिजिटल बैंकिंग समाधान मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. यह बैंक हर भारतीय को वित्तीय आजादी और सहूलियत से सशक्त बनाता है. हमारे ग्राहकों की सुविधा, सहूलियत और उनके सुखद डिजिटल अनुभव की अपेक्षाओं को देखते हुए बैंक ने योनो ऐप में ये बड़े बदलाव किए हैं.
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भले ही सीबीएसई और सीआईएससीई के बाद शुरू हुईं हों, लेकिन बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी करने में यूपी बोर्ड अव्वल रहेगा। यह दावा बोर्ड के अधिकारी कर रहे हैं। वर्ष 2023 की सीआईएससीई की परीक्षाएं 13 फरवरी और सीबीएसई की परीक्षा 15 फरवरी से शुरू हुईं थीं। वहीं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 16 फरवरी से शुरू हुईं। इसके बाद भी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं चार मार्च तक समाप्त हो रही हैं। यूपी बोर्ड की तरफ से होली के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की तैयारी है। इसकी शुरुआत 18 मार्च से होगी। मूल्यांकन कार्य के लिए बोर्ड की तरफ से कॉपियों के मूल्यांकन के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद परिणाम को तैयार करने की कवायद शुरू हो जाएगी। ऐसे में उम्मीद है कि यूपी बोर्ड की तरफ से मई के पहले सप्ताह में बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी किया जा सकता है। सीबीएसई की बोर्ड की परीक्षाएं पांच अप्रैल तक संचालित होगी। सीआईएससीई की बोर्ड की परीक्षाओं का संचालन 27 मार्च तक होंगे। बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि परीक्षा शुरू करने में यूपी बोर्ड भले ही पीछे रहा, लेकिन मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में अव्वल रहेगा।
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भले ही सीबीएसई और सीआईएससीई के बाद शुरू हुईं हों, लेकिन बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी करने में यूपी बोर्ड अव्वल रहेगा। यह दावा बोर्ड के अधिकारी कर रहे हैं। वर्ष दो हज़ार तेईस की सीआईएससीई की परीक्षाएं तेरह फरवरी और सीबीएसई की परीक्षा पंद्रह फरवरी से शुरू हुईं थीं। वहीं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं सोलह फरवरी से शुरू हुईं। इसके बाद भी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं चार मार्च तक समाप्त हो रही हैं। यूपी बोर्ड की तरफ से होली के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की तैयारी है। इसकी शुरुआत अट्ठारह मार्च से होगी। मूल्यांकन कार्य के लिए बोर्ड की तरफ से कॉपियों के मूल्यांकन के लिए पंद्रह दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद परिणाम को तैयार करने की कवायद शुरू हो जाएगी। ऐसे में उम्मीद है कि यूपी बोर्ड की तरफ से मई के पहले सप्ताह में बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी किया जा सकता है। सीबीएसई की बोर्ड की परीक्षाएं पांच अप्रैल तक संचालित होगी। सीआईएससीई की बोर्ड की परीक्षाओं का संचालन सत्ताईस मार्च तक होंगे। बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि परीक्षा शुरू करने में यूपी बोर्ड भले ही पीछे रहा, लेकिन मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में अव्वल रहेगा।
सपिन या सवयीकरणा अवसर । विष्णुपुराण (३।१३।२६) ने भी ऐसे ही नियम बनलाये हैं और सपिण्डीकरण को एकोद्दिष्ट श्राद्ध कहा है। अपरार्क (५० ५४०) ने लम्बे विवेचन के उपरान्त आहिताग्नि के लिए तीन काल दिये हैंः १२वाँ दिन, आशौचावधि के एवं मृत्यु के उपरान्त प्रथम अमावस्या के बीच मे कोई दिन या आशौच के उपरान्त प्रथम अमावस्या । इसने उनके लिए जिन्होंने पवित्र अम्नियां नहीं जलायी है (अर्थात् जो आहिताग्नि नहीं है) चार काल दिने हैं, यथा- एक वर्ष, छः मासो, तीन पक्षों या किसी शुभ अवसर मे। मदनपारिजात (१० ६३१) ने व्यास का एक दलोक उद्धृत कर कहा है कि सपिण्डन श्राद्ध के लिए १२ वाँ दिन उपयुक्त है, क्योंकि कुलाचार बहुत है, मनुष्य की आयु छोटी है और शरीर अस्थिर है।' विष्णुधर्मसूत्र ( २१।२० ) ने व्यवस्था दी है कि शूद्रों के लिए मृत्यु के पश्चात् केवल १२व दिन (बिना मन्त्रो के ) सपिण्डीकरण के लिए निश्चित है। गोभिल ने कहा है कि सपिण्डीकरण के उपरान्त प्रति मास श्राद्ध नहीं करने चाहिए, किन्तु गोतम (या शौनक, जैसा कि अपराकं, १० ५४३ ने कहा है) वा मत है कि उनका सम्पादन एकोद्दिष्ट श्राद्धों की पद्धति के अनुसार हो सकता है। मट्टोजि" वा कथन है कि जब एक वर्ष के पूर्व एपिण्डीकरण हो जाता है तो उसके (सपिण्डीकरण के ) पूर्व ही पोटश श्राद्धों का सम्पादन हो जाना चाहिए, किन्तु इसके उपरान्त भी वर्ष या उचित कालों मे मासिक श्राद्ध किये जाने चाहिए। याज्ञ० (१।२५५) एव विष्णुध ० (२१।२३) मे आया है कि यदि एक वर्ष के भीतर ही सपिण्डीकरण हो जाय, तब भी एक वर्ष तक मृत ब्राह्मण के लिए एक घडा जल एव भोजन देते रहना चाहिए। उदाना का कथन है कि उस स्थिति में जब कि सभी उत्तराधिकारी अलग-अलग हो जाते हैं, एक ही व्यक्ति (ज्येष्ठ पुत्र ) द्वारा नव श्राद्धी, पोडश श्राद्ध एवं सपिण्डीकरण का सम्पादन किया जाना चाहिए, किन्तु प्रचेता मे व्यवस्था दी है कि एक वर्ष के पश्चात् प्रत्येक पुत्र अलग-अलग श्राद्ध कर सकता है।" शाखायनगृह्य० ( ५१९ ), कौपीतकिगृह्य० (४५२), बी० पितृमेघसूत्र (३११२११२), कात्यायन (कण्डिका ५ ), पाश० ( १/२५३-२५४), विष्णुपुराण (३।१३।२७), विष्णुध ० (२१११२-२३), पद्म० (सृष्टि १०/२२ - २३), मार्कण्डेय ० (२८११२-१८), गरुड० (११२२०), विष्णुधर्मोत्तर ० ( २१७७), स्मृत्ययंसार (५० ५७-५८), निर्णयसिन्धु ( ३, पू० ६१४) आदि प्रन्यों में सपिण्डन या सपिण्डीकरण की पद्धति दी हुई है। यह सक्षेप मे निम्न है ब्राह्मणों को एक दिन पूर्व आमन्त्रित किया जाता है, अग्नीकरण होता है और जब ब्राह्मण लोग भोजन करते रहते हैं उस समय वैदिक मन्त्रों का पाठ होता है (बी० पितृमेघसूत्र, ३।१२।१२) । वैश्वदेव ब्राह्मणों का सम्मान किया जाता है, इसमे काम एव काल विश्वेदेव होते हैं (बृहस्पति, अपराकं, १० ४७८, वत्पतह, श्रा०, पृ० १४२ एव स्मृतिच०, श्रा०, पृ० ४४२-४४३), धूप एवं दीप दिये जाते हैं और 'स्वघा' एव 'नमस्कार' होते हैं। चन्दनलेप, जल एवं तिल से युक्त चार पात्र अध्यं के लिए तैयार किये जाते हैं, जिनमे एक प्रेत के लिए और तीन उसके पितरो के ६. आनम्त्यात्कुलधर्माणी पुसां चैवायुषः क्षयात् । अस्थिरत्वाच्छरीरस्य द्वादशाहो प्रशस्पते ।। व्यास (मदन पा०० पू० ६३१) । था०शि० को ० ( पू० ३५०) ने इसे व्याघ्र को उक्ति माना है। और देखिए भट्टोजि (चतुर्वि शसिमत०, ५० १७६) एवं श्राद्धतत्त्व (५० ३०१ ) । ७. यदा संवत्सरः प्रागेव सपिण्डीकरणं क्रिमते तदा यद्यपि षोडश श्राद्धानि ततः प्रागेव कृतानि, श्राद्धानि थोडशादत्त्वा न कुर्यात्त सपिण्डनम् इति वृद्धवसिष्ठोक्तेः, तपापि स्वस्वकाले पुनरपि मासिकादीन्यावर्तनीयानि । भट्टोजि (चतुर्विंशतिमतसंग्रह, १० १७१) ८. नवधाद्धं सपिण्डत्वं भावान्यपि च घोडश एकनव हि कार्याणि संविभक्त ने ध्वपि ॥ उशना (अपराकं, पु०५२४; मिता०, याज्ञ० ११२५५) यह श्लोक गरुड़० (प्रेतखण्ड, ३४।१२८-१२९ ) मे भी आया है ।
सपिन या सवयीकरणा अवसर । विष्णुपुराण ने भी ऐसे ही नियम बनलाये हैं और सपिण्डीकरण को एकोद्दिष्ट श्राद्ध कहा है। अपरार्क ने लम्बे विवेचन के उपरान्त आहिताग्नि के लिए तीन काल दिये हैंः बारहवाँ दिन, आशौचावधि के एवं मृत्यु के उपरान्त प्रथम अमावस्या के बीच मे कोई दिन या आशौच के उपरान्त प्रथम अमावस्या । इसने उनके लिए जिन्होंने पवित्र अम्नियां नहीं जलायी है चार काल दिने हैं, यथा- एक वर्ष, छः मासो, तीन पक्षों या किसी शुभ अवसर मे। मदनपारिजात ने व्यास का एक दलोक उद्धृत कर कहा है कि सपिण्डन श्राद्ध के लिए बारह वाँ दिन उपयुक्त है, क्योंकि कुलाचार बहुत है, मनुष्य की आयु छोटी है और शरीर अस्थिर है।' विष्णुधर्मसूत्र ने व्यवस्था दी है कि शूद्रों के लिए मृत्यु के पश्चात् केवल बारहव दिन सपिण्डीकरण के लिए निश्चित है। गोभिल ने कहा है कि सपिण्डीकरण के उपरान्त प्रति मास श्राद्ध नहीं करने चाहिए, किन्तु गोतम वा मत है कि उनका सम्पादन एकोद्दिष्ट श्राद्धों की पद्धति के अनुसार हो सकता है। मट्टोजि" वा कथन है कि जब एक वर्ष के पूर्व एपिण्डीकरण हो जाता है तो उसके पूर्व ही पोटश श्राद्धों का सम्पादन हो जाना चाहिए, किन्तु इसके उपरान्त भी वर्ष या उचित कालों मे मासिक श्राद्ध किये जाने चाहिए। याज्ञशून्य एव विष्णुध शून्य मे आया है कि यदि एक वर्ष के भीतर ही सपिण्डीकरण हो जाय, तब भी एक वर्ष तक मृत ब्राह्मण के लिए एक घडा जल एव भोजन देते रहना चाहिए। उदाना का कथन है कि उस स्थिति में जब कि सभी उत्तराधिकारी अलग-अलग हो जाते हैं, एक ही व्यक्ति द्वारा नव श्राद्धी, पोडश श्राद्ध एवं सपिण्डीकरण का सम्पादन किया जाना चाहिए, किन्तु प्रचेता मे व्यवस्था दी है कि एक वर्ष के पश्चात् प्रत्येक पुत्र अलग-अलग श्राद्ध कर सकता है।" शाखायनगृह्यशून्य , कौपीतकिगृह्यशून्य , बीशून्य पितृमेघसूत्र , कात्यायन , पाशशून्य , विष्णुपुराण , विष्णुध शून्य , पद्मशून्य , मार्कण्डेय शून्य , गरुडशून्य , विष्णुधर्मोत्तर शून्य , स्मृत्ययंसार , निर्णयसिन्धु आदि प्रन्यों में सपिण्डन या सपिण्डीकरण की पद्धति दी हुई है। यह सक्षेप मे निम्न है ब्राह्मणों को एक दिन पूर्व आमन्त्रित किया जाता है, अग्नीकरण होता है और जब ब्राह्मण लोग भोजन करते रहते हैं उस समय वैदिक मन्त्रों का पाठ होता है । वैश्वदेव ब्राह्मणों का सम्मान किया जाता है, इसमे काम एव काल विश्वेदेव होते हैं , धूप एवं दीप दिये जाते हैं और 'स्वघा' एव 'नमस्कार' होते हैं। चन्दनलेप, जल एवं तिल से युक्त चार पात्र अध्यं के लिए तैयार किये जाते हैं, जिनमे एक प्रेत के लिए और तीन उसके पितरो के छः. आनम्त्यात्कुलधर्माणी पुसां चैवायुषः क्षयात् । अस्थिरत्वाच्छरीरस्य द्वादशाहो प्रशस्पते ।। व्यास । थाशून्यशिशून्य को शून्य ने इसे व्याघ्र को उक्ति माना है। और देखिए भट्टोजि एवं श्राद्धतत्त्व । सात. यदा संवत्सरः प्रागेव सपिण्डीकरणं क्रिमते तदा यद्यपि षोडश श्राद्धानि ततः प्रागेव कृतानि, श्राद्धानि थोडशादत्त्वा न कुर्यात्त सपिण्डनम् इति वृद्धवसिष्ठोक्तेः, तपापि स्वस्वकाले पुनरपि मासिकादीन्यावर्तनीयानि । भट्टोजि आठ. नवधाद्धं सपिण्डत्वं भावान्यपि च घोडश एकनव हि कार्याणि संविभक्त ने ध्वपि ॥ उशना यह श्लोक गरुड़शून्य मे भी आया है ।
हनी ट्रैप केस में जो पांच हार्ड डिस्क पांचों आरोपी महिलाओं ;जिनमें एक 18 साल की युवती हैद्ध के कब्जे से बरामद हुईं हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स मिले हैं, उनसे प्रदेश की सत्ता हिल रही है। यहां तक कि अब जांच पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। भोपाल। हनी ट्रैप केस में जो पांच हार्ड डिस्क पांचों आरोपी महिलाओं ;जिनमें एक 18 साल की युवती हैद्ध के कब्जे से बरामद हुईं हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स मिले हैं, उनसे प्रदेश की सत्ता हिल रही है। यहां तक कि अब जांच पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि हार्ड डिस्क में एक पूर्व राज्यपाल व एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ दो मौजूदा मंत्रियों, तीन पूर्व मंत्रियों, एक पूर्व सांसद, एक राजनैतिक पार्टी संगठन के बड़े नेताओं के नाम हैं। इनके अलावा अफसरों के नामों की तो भरमार है। इससे पुलिस के गला घिर आया है, घिग्घी बंध गई है। इसीलिए अभी तक जांच एजेंसियां इस केस में शामिल होने के बाद भी कुछ उजागर नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से अंदर की खबरें बाहर आ रही हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो आईपीएस अफसर हनी में ट्रैप हो गए हैं, वे जांच को प्रभावित कर रहे हैं। क्योंकि जांचकर्ता तो उनके महकमे के ही हैं। मौजूदा मंत्रियों तक के नाम आ रहे हैं तो अब जांच में ये सब कैसे उजागर किया जाए। जिस विवेचक इंदौर के पलालिया थाना टीआई ने जांच में तेजी दिखाई तो उसे निपटा दिया। अब पुलिस दम साधे काम कर रही है। सुंदरियों के जाल में राजनेताओं के अलावा पांच आईएएस अधिकारी, डीजी रैंक के एक आईपीएस अधिकारी, एडीजी रैंक के दो अधिकारी, एडिशनल एसपी रैंक के दो अधिकारी, सीएसपी रैंक के तीन अधिकारी, 10 बड़े बिल्डर और कारोबारी, एक मौजूदा मंत्री के ओएसडी, एक विधायक, सागर के एक नेता, इंदौर के एक नेता के साथ मौजूदा सरकार और पूर्व सरकार के कई नेताओं के नाम हैं। इससे दोनों ही पार्टियों के रसूक पर बट्टा लग रहा है। श्वेता जैन अगर भाजपा से जुड़ी रही है तो बरखा भटनागर सोनी कांग्रेस से जुड़ रही है। दोनों के बहुत से फोटो कई दिग्गजों के साथ हैं। दोनों ही पार्टियां अपने सफेदपोशों को पहचानती भी हैं। इसलिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के बजाए मामले की तह तक जांच होने की मांग कर रही हैं। - पूर्व राज्यपाल, जो दो-दो राज्यों में पद संभालने वाले वरिष्ठ राजनेता हैं, ने मध्यप्रदेश में रहते हुए इन महिलाओं की खूब मदद की थी। - राजनीति में ऊंची छलांग भरते हुए मुख्यमंत्री के ओहदे तक पहुंच गए एक राजनेता ने तो एक हनी को पीछा छुड़ाने की कीमत एक फ्लैट दिलाकर चुकाई थी। - एक पूर्व सांसद ने एक हनी की मदद करके सौंदर्य का सुख लिया, लेकिन वह उनके गले की हड़्डी बन गया। बताते हैं कि एक मोटी रकम उन्हें इसके लिए चुकानी पड़ी और सांसदी का टिकट कटा सो अलग। - हनी गैंग की श्वेता जैन की कभी बीजेपी में तूती बोलती थी। सागर के प्रभार रहे मंत्री उसके प्रभाव में आने से नहीं चूके। इसलिए श्वेता कभी टिकट की मुख्य दावेदार रही तो कभी किशोर न्यायालय बोर्ड और बाल कल्याण समिति की सदस्य बनी। - इस केस में हाईप्रोफाइल नाम सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल दी गयी। तीन दिन की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद फिर से कोर्ट में पेश किया गया और पुलिस ने सभी 6 आरोपियों की फिर से रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने पर्याप्त सबूत नहीं होने के चलते रिमांड देने से इंकार कर दिया। - प्रदेश के गृहमंत्री कह चुके है कि यह हाईप्रोफाइल मामला है। इस मामले में किसी दोषी को बक्शा नहीं जायेगा, लेकिन इंदौर पुलिस की जांच से फिलहाल किसी बड़े नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर पुलिस को जब पुख्ता सबूत मिले है, फिर इन सबूतों को सार्वजानिक क्यों नहीं किया जा रहा है। जो दोषी पाये गये है, उन पर शिंकजा नहीं कसा जा रहा है। पुलिस ने दावा किया है कि मामले की मुख्य आरोपी आरती दयाल के मोबाइल के कई वीडियो क्लिप बरामद की गयी है, लेकिन पुलिस इन वीडियों क्लिप को न तो सार्वजानिक कर रही है और न ही दोषियों के नाम बता रही है।
हनी ट्रैप केस में जो पांच हार्ड डिस्क पांचों आरोपी महिलाओं ;जिनमें एक अट्ठारह साल की युवती हैद्ध के कब्जे से बरामद हुईं हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स मिले हैं, उनसे प्रदेश की सत्ता हिल रही है। यहां तक कि अब जांच पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। भोपाल। हनी ट्रैप केस में जो पांच हार्ड डिस्क पांचों आरोपी महिलाओं ;जिनमें एक अट्ठारह साल की युवती हैद्ध के कब्जे से बरामद हुईं हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स मिले हैं, उनसे प्रदेश की सत्ता हिल रही है। यहां तक कि अब जांच पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि हार्ड डिस्क में एक पूर्व राज्यपाल व एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ दो मौजूदा मंत्रियों, तीन पूर्व मंत्रियों, एक पूर्व सांसद, एक राजनैतिक पार्टी संगठन के बड़े नेताओं के नाम हैं। इनके अलावा अफसरों के नामों की तो भरमार है। इससे पुलिस के गला घिर आया है, घिग्घी बंध गई है। इसीलिए अभी तक जांच एजेंसियां इस केस में शामिल होने के बाद भी कुछ उजागर नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से अंदर की खबरें बाहर आ रही हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो आईपीएस अफसर हनी में ट्रैप हो गए हैं, वे जांच को प्रभावित कर रहे हैं। क्योंकि जांचकर्ता तो उनके महकमे के ही हैं। मौजूदा मंत्रियों तक के नाम आ रहे हैं तो अब जांच में ये सब कैसे उजागर किया जाए। जिस विवेचक इंदौर के पलालिया थाना टीआई ने जांच में तेजी दिखाई तो उसे निपटा दिया। अब पुलिस दम साधे काम कर रही है। सुंदरियों के जाल में राजनेताओं के अलावा पांच आईएएस अधिकारी, डीजी रैंक के एक आईपीएस अधिकारी, एडीजी रैंक के दो अधिकारी, एडिशनल एसपी रैंक के दो अधिकारी, सीएसपी रैंक के तीन अधिकारी, दस बड़े बिल्डर और कारोबारी, एक मौजूदा मंत्री के ओएसडी, एक विधायक, सागर के एक नेता, इंदौर के एक नेता के साथ मौजूदा सरकार और पूर्व सरकार के कई नेताओं के नाम हैं। इससे दोनों ही पार्टियों के रसूक पर बट्टा लग रहा है। श्वेता जैन अगर भाजपा से जुड़ी रही है तो बरखा भटनागर सोनी कांग्रेस से जुड़ रही है। दोनों के बहुत से फोटो कई दिग्गजों के साथ हैं। दोनों ही पार्टियां अपने सफेदपोशों को पहचानती भी हैं। इसलिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के बजाए मामले की तह तक जांच होने की मांग कर रही हैं। - पूर्व राज्यपाल, जो दो-दो राज्यों में पद संभालने वाले वरिष्ठ राजनेता हैं, ने मध्यप्रदेश में रहते हुए इन महिलाओं की खूब मदद की थी। - राजनीति में ऊंची छलांग भरते हुए मुख्यमंत्री के ओहदे तक पहुंच गए एक राजनेता ने तो एक हनी को पीछा छुड़ाने की कीमत एक फ्लैट दिलाकर चुकाई थी। - एक पूर्व सांसद ने एक हनी की मदद करके सौंदर्य का सुख लिया, लेकिन वह उनके गले की हड़्डी बन गया। बताते हैं कि एक मोटी रकम उन्हें इसके लिए चुकानी पड़ी और सांसदी का टिकट कटा सो अलग। - हनी गैंग की श्वेता जैन की कभी बीजेपी में तूती बोलती थी। सागर के प्रभार रहे मंत्री उसके प्रभाव में आने से नहीं चूके। इसलिए श्वेता कभी टिकट की मुख्य दावेदार रही तो कभी किशोर न्यायालय बोर्ड और बाल कल्याण समिति की सदस्य बनी। - इस केस में हाईप्रोफाइल नाम सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल दी गयी। तीन दिन की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद फिर से कोर्ट में पेश किया गया और पुलिस ने सभी छः आरोपियों की फिर से रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने पर्याप्त सबूत नहीं होने के चलते रिमांड देने से इंकार कर दिया। - प्रदेश के गृहमंत्री कह चुके है कि यह हाईप्रोफाइल मामला है। इस मामले में किसी दोषी को बक्शा नहीं जायेगा, लेकिन इंदौर पुलिस की जांच से फिलहाल किसी बड़े नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर पुलिस को जब पुख्ता सबूत मिले है, फिर इन सबूतों को सार्वजानिक क्यों नहीं किया जा रहा है। जो दोषी पाये गये है, उन पर शिंकजा नहीं कसा जा रहा है। पुलिस ने दावा किया है कि मामले की मुख्य आरोपी आरती दयाल के मोबाइल के कई वीडियो क्लिप बरामद की गयी है, लेकिन पुलिस इन वीडियों क्लिप को न तो सार्वजानिक कर रही है और न ही दोषियों के नाम बता रही है।
संबलपुर। नारी सेवा संघ की ओर से निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया। नारी सेवा सदन में लगाए गए इस शिविर में 300 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई और दवा वितरित किया गया। संघ की अध्यक्षा राजेश्वरी जेना के संयोजन में लगाए इस शिविर का संचालन डा. प्रकाश परिडा, डा. तनूज मिश्र एवं डा. मुकेशचंद्र मिश्र ने किया। शिविर के आयोजन में संघ के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सक्रिय सहयोग किया।
संबलपुर। नारी सेवा संघ की ओर से निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया। नारी सेवा सदन में लगाए गए इस शिविर में तीन सौ से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई और दवा वितरित किया गया। संघ की अध्यक्षा राजेश्वरी जेना के संयोजन में लगाए इस शिविर का संचालन डा. प्रकाश परिडा, डा. तनूज मिश्र एवं डा. मुकेशचंद्र मिश्र ने किया। शिविर के आयोजन में संघ के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सक्रिय सहयोग किया।
दरभंगा छोड़ धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने पहुंचे पूर्व क्रिकेटर व कांग्रेस नेता कीर्ति झा आजाद को जीत मिलेगी या हार, यह 23 मई को पता चल जाएगा. धनबाद सीट पर उनका मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी पीएन सिंह से रहा. पीएन सिंह 2009 और 2014 में यहां से जीत दर्ज करा चुके हैं. तीसरी बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद को लोग कीर्ति आजाद के नाम से जानते हैं. कीर्ति आजाद ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1993 में बीजेपी से की. वह दिल्ली की गोल मार्केट विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने. 1993 से 1998 तक कीर्ति आजाद दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे. 1999 में वह लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. 2009 में कीर्ति आजाद दरभंगा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. 2014 में उन्होंने फिर अली अशरफ फातमी को दरभंगा सीट पर हराया. कीर्ति आजाद का जन्म 2 जनवरी 1959 को बिहार के पूर्णिया में हुआ. आजाद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल की. उनके पिता भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे. वह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. कीर्ति आजाद के परिवार में पत्नी पूनम और दो बच्चे पुत्र सूर्या और पुत्री सौम्या हैं. 1976 में कीर्ति आजाद ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की. वह दिल्ली टीम में ऑलराउंडर थे. 1980 में उन्होंने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया. उसी साल पाकिस्तान के खिलाफ शारजाह में अपना आखिरी वनडे मैच खेला. 1981 में उन्होंने वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया. 1983 में अहमदाबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला. कीर्ति आजाद को इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ उल्लेखनीय पारियां खेलने के लिए याद किये जाते हैं. वह प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर भी हैं. कीर्ति आजाद को 2015 में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप गढ़ने की सजा मिली. बीजेपी से उन्हें निलंबित कर दिया गया. कीर्ति आजाद ने डेल्ही क्रिकेट एसोसिएशन में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में अरुण जेटली पर आरोप लगाया था. इसके बाद वह बीजेपी से दूरी बनाने लगे. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 18 फरवरी 2019 को कीर्ति आजाद ने बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस ने उन्हें दरभंगा की बजाय धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतारा. .
दरभंगा छोड़ धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने पहुंचे पूर्व क्रिकेटर व कांग्रेस नेता कीर्ति झा आजाद को जीत मिलेगी या हार, यह तेईस मई को पता चल जाएगा. धनबाद सीट पर उनका मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी पीएन सिंह से रहा. पीएन सिंह दो हज़ार नौ और दो हज़ार चौदह में यहां से जीत दर्ज करा चुके हैं. तीसरी बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे कीर्तिवर्धन भागवत झा आजाद को लोग कीर्ति आजाद के नाम से जानते हैं. कीर्ति आजाद ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में बीजेपी से की. वह दिल्ली की गोल मार्केट विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने. एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे तक कीर्ति आजाद दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे. एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में वह लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. दो हज़ार नौ में कीर्ति आजाद दरभंगा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. दो हज़ार चौदह में उन्होंने फिर अली अशरफ फातमी को दरभंगा सीट पर हराया. कीर्ति आजाद का जन्म दो जनवरी एक हज़ार नौ सौ उनसठ को बिहार के पूर्णिया में हुआ. आजाद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल की. उनके पिता भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे. वह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. कीर्ति आजाद के परिवार में पत्नी पूनम और दो बच्चे पुत्र सूर्या और पुत्री सौम्या हैं. एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में कीर्ति आजाद ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की. वह दिल्ली टीम में ऑलराउंडर थे. एक हज़ार नौ सौ अस्सी में उन्होंने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया. उसी साल पाकिस्तान के खिलाफ शारजाह में अपना आखिरी वनडे मैच खेला. एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में उन्होंने वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया. एक हज़ार नौ सौ तिरासी में अहमदाबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला. कीर्ति आजाद को इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ उल्लेखनीय पारियां खेलने के लिए याद किये जाते हैं. वह प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर भी हैं. कीर्ति आजाद को दो हज़ार पंद्रह में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप गढ़ने की सजा मिली. बीजेपी से उन्हें निलंबित कर दिया गया. कीर्ति आजाद ने डेल्ही क्रिकेट एसोसिएशन में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में अरुण जेटली पर आरोप लगाया था. इसके बाद वह बीजेपी से दूरी बनाने लगे. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अट्ठारह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को कीर्ति आजाद ने बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस ने उन्हें दरभंगा की बजाय धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतारा. .
दुबई, (भाषा)। शारजाह में एक पाकिस्तानी नागरिक की मृत्यु के मामले में मौत की सजा पाए 17 भारतीयों ने मामले में किसी तरह की सुलह से इंकार कर दिया है। मृतक पाकिस्तानी नागरिक के परिवार ने अदालत के सामने यह कहा कि वह मुआवजा लेकर सुलह करने को तैयार है। इन 17 भारतीय नागरिकों में से 16 पंजाब और एक हरियाणा राज्य का निवासी है। इन लोगों को शारजाह की अदालत ने इस साल मार्च महीने में मिसरी नाजिर खान नामक पाकिस्तानी मूल के एक नागरिक की हत्या के आरोप में दोषी पाया था। अदालत ने इनके लिए मौत की सजा मुकर्रर की थी। भारतीय नागरिकों के वकील बिंदु सुरेश छेत्तर ने कहा मृतक पाकिस्तानी नागरिक के परिवारवालों ने अदालत को बताया कि हत्या मामले में वह मुआवजा लेने को तैयार हैं लेकिन हमने मना कर दिया क्योंकि मामला हमारे पक्ष में है। छेत्तर ने प्रेट्र से कहा अभियोजन पक्ष हत्या, कत्ल के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार और घटनास्थल को लेकर किसी तरह का संबंध कायम करने में नाकाम रहा है। चूंकि अदालत के सामने अभी तक कोई भी हथियार पेश नहीं किया गया है इसलिए बाकी के सबूतों को नहीं स्वीकारा जा सकता। यह अभियोजन पक्ष का काम है कि हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार को वह अदालत के सामने प्रस्तुत करे। हालांकि कई सुनवाइयों के बाद भी ऐसा नहीं हो सका है। अदालत ने इस पूरे मामले को देखते हुए अगली सुनवाई 17 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। अगली सुनवाई के लिए ज्यादा गवाहों को पेश करने की बात भी कही गई है।
दुबई, । शारजाह में एक पाकिस्तानी नागरिक की मृत्यु के मामले में मौत की सजा पाए सत्रह भारतीयों ने मामले में किसी तरह की सुलह से इंकार कर दिया है। मृतक पाकिस्तानी नागरिक के परिवार ने अदालत के सामने यह कहा कि वह मुआवजा लेकर सुलह करने को तैयार है। इन सत्रह भारतीय नागरिकों में से सोलह पंजाब और एक हरियाणा राज्य का निवासी है। इन लोगों को शारजाह की अदालत ने इस साल मार्च महीने में मिसरी नाजिर खान नामक पाकिस्तानी मूल के एक नागरिक की हत्या के आरोप में दोषी पाया था। अदालत ने इनके लिए मौत की सजा मुकर्रर की थी। भारतीय नागरिकों के वकील बिंदु सुरेश छेत्तर ने कहा मृतक पाकिस्तानी नागरिक के परिवारवालों ने अदालत को बताया कि हत्या मामले में वह मुआवजा लेने को तैयार हैं लेकिन हमने मना कर दिया क्योंकि मामला हमारे पक्ष में है। छेत्तर ने प्रेट्र से कहा अभियोजन पक्ष हत्या, कत्ल के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार और घटनास्थल को लेकर किसी तरह का संबंध कायम करने में नाकाम रहा है। चूंकि अदालत के सामने अभी तक कोई भी हथियार पेश नहीं किया गया है इसलिए बाकी के सबूतों को नहीं स्वीकारा जा सकता। यह अभियोजन पक्ष का काम है कि हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार को वह अदालत के सामने प्रस्तुत करे। हालांकि कई सुनवाइयों के बाद भी ऐसा नहीं हो सका है। अदालत ने इस पूरे मामले को देखते हुए अगली सुनवाई सत्रह फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। अगली सुनवाई के लिए ज्यादा गवाहों को पेश करने की बात भी कही गई है।
यथीर्थ आदर्श जीवन विमोषण, - ये सवं आश्रम में बंधे पड़े थे। महारानीने इन पड़े. लोगों को पहचानकर छुड़वा दिया। अन्तमें बच्चोंको फुसलाकर घोड़ा भी दिलवा दिया । जहां नश्वमेधशाला थी वहां वाल्मीकि मुनि अपने दोनों शिष्यों लव-कुशके साथ उपस्थित मुनिमण्डलीमें पहुंचे। इन दोनों शिष्योंने वीणापर जो रामायणका गान किया उसे सुन सारी अश्वमेघशाला मुग्ध हो गयी। जिस समय महारानी जानकीके परित्यागका प्रसङ्ग गानमें आया उस समय महाराज रामचन्द्र के नेत भी आंसुमसे डबडया गये। उन्हें निरपराध जानकीका त्याग उस समय बहुत हो दुःख देने लगा। उन्होंने कहा कि यदि इस यज्ञशाला में सारी जनताके समक्ष जानकी अपनी शुद्धि प्रमाणित करे तो मैं अंगीकार कर सकता हूँ । अब शिष्य के साथ महारानी जानकीने प्रवेश किया। उनका शरीर दुबलाकर कांटा हो गया था। सिर्फ चाम और हाड़ हो दिखाई देते थे । मस्तक लम्बी २ जटामसे परिवेष्टित था। महारानी चोर वल्कल पहने जिस समय यहां आय, एक बार सन्नाटा छा गया। अपनी शुद्धि के सावित करने के लिये क जानेपर महारानीने कहा- "यदि मैंने आर्यपुतसे भिन्न मनुष्य की कमी चिन्तनातक ने की हो तो भूतधात्रो देवो मुझे अपने में स्थान देकर अंगीकार करें यद्यपि राजा रामचन्द्रने अपना विवाद नहीं किया था, पर यशमें अङ्गिनीकी स्वर्णमयी प्रतिमा रखी थी, क्योंकि बिना भारतीय जीवन, अर्द्धाङ्गिनीके यह सम्पन्न नहीं हो सकता था। देखकर महारानीके हृदयमें जलन हो उठी थी । कि उन्हें जोवन वो जान पड़ता था । उस प्रतिमाको यही कारण था उनके यह कहते हो आश्चर्यकी घटना हुई। पृथ्वी फटी और काञ्चन सिंहासन नागकी फणपर रखा हुआ निकला। उसोपर -बैठकर उन्होंने पातालमें प्रवेश किया। वाल्मीकिके कहनेसे लवकुशको रामचन्द्रजीने ले लिया। यज्ञ विसर्जन कर रामचन्द्रने अपने पुत्रों और भतोजोंको राज्य दे सय भाइयों के साथ सरयूमें, अपनेको गोता मार विलोन कर डाला और साकेतवासी हुए। चाचकवृन्द! एक रामचरितसे ही अनेक गुण एकत्रित किये जा सकते हैं, यदि कोई तत्वान्वेषी उक्त चरितमें उनका अन्वेषण, करे । राजा दशरथने जो मित्रमाव रोमपाद राजाके प्रति दिखलाया शायदही कोई दिखलाता हो । राजा रोमपादके कोई सन्तति नहीं थी पर उनके प्रिय मित्र राजा दशरथको शान्ता नामक कन्या. थी । राजांने सोचा कि मैं सन्ततिवाला हूं और मेरे मित्र रोमपाद बेसन्ततिके है यह ठीक नहीं। मुझे उचित है कि में अपनी कन्या उन्हें देहू । यह विचार कार्य में परिणत कर दोनों मित्र आपसमें सन्ततिवाले हुए । सहानुभूति और समवेदनाका सच्चा. उदाहरण इससे भी बढ़कर होगा ? क्या कोई भी सभ्य देश, इससे बढ़कर तो क्या, इसकी समतामें एक मी उदाहरण दे सकता है ?. स्त्री-पुरुषका ज्ञान होना, खासकर बहुत हो छोटो अवस्था में जिस समय एकाग्र मनसे उत्तमोत्तम गुणोंका उपार्जन होता है, क्योंकि उसके लिये बालकों को अभ्यास दिलाया जाता' स्वाभाविक बात है, परन्तु ज्यों ज्यों अवस्था बढ़ती है त्यो त्य चालकका एकाग्र मन स्त्रो जातिको और अनुरक्त होता जाता है । इसी अनुरक्तिका परिणाम उपनयनके उपरान्त विवाद है जिसे सम्पन्न कर भारतीय गृहस्थाश्रममें सहर्ष प्रवेश करते हैं। पर यदि स्त्री-पुरुषका ज्ञान न हो तो बालक और भी समधिक गुणोंका उपार्जन कर सकता है, क्योंकि मस्तिष्क एक ओरके सिवा दूसरी ओर आकृष्ट नहीं होगा। ऋष्यशृङ्ग महात्मा विभाण्डकके पुत्र थे और वे इकलौते पुत्र थे। उनके जीवन-सादे जीवन की ओर दृष्टि डालिये और देखिये कि उसमें कितनी सादगी और सिधाई भरी पड़ी है। इससे चढ़फर सादगी व सिधाई और क्या हो सकती है कि वेश्याए सुसज्जित वेश्याएं घड़ी घड़ी नौकाओंपर कृत्रिम पुष्प वाटिका लगाकर आश्रम-फलोंके स्थान में शहरको अपूर्व नी हुई मिठाइयोंको लेकर उन महात्माके आश्रम में गर्यो और उन्हें फुसलाकर रोमपाद राजाके राज्य में ले आयीं जिनके प्रतापसे सूप घृष्टि हुई। जय विभाण्डकजी पहुंचे तो उनका कार कर अपनी कन्या-तुल् शान्ताका ऋके साथ विवाह कर दिया। ऐसा सादगीका नमूना क्या किसी भी देशमें देखा गया है ?" पाश्चात्य जगत इसे निरा जंगलीपन कह डालेगा । पर दर
यथीर्थ आदर्श जीवन विमोषण, - ये सवं आश्रम में बंधे पड़े थे। महारानीने इन पड़े. लोगों को पहचानकर छुड़वा दिया। अन्तमें बच्चोंको फुसलाकर घोड़ा भी दिलवा दिया । जहां नश्वमेधशाला थी वहां वाल्मीकि मुनि अपने दोनों शिष्यों लव-कुशके साथ उपस्थित मुनिमण्डलीमें पहुंचे। इन दोनों शिष्योंने वीणापर जो रामायणका गान किया उसे सुन सारी अश्वमेघशाला मुग्ध हो गयी। जिस समय महारानी जानकीके परित्यागका प्रसङ्ग गानमें आया उस समय महाराज रामचन्द्र के नेत भी आंसुमसे डबडया गये। उन्हें निरपराध जानकीका त्याग उस समय बहुत हो दुःख देने लगा। उन्होंने कहा कि यदि इस यज्ञशाला में सारी जनताके समक्ष जानकी अपनी शुद्धि प्रमाणित करे तो मैं अंगीकार कर सकता हूँ । अब शिष्य के साथ महारानी जानकीने प्रवेश किया। उनका शरीर दुबलाकर कांटा हो गया था। सिर्फ चाम और हाड़ हो दिखाई देते थे । मस्तक लम्बी दो जटामसे परिवेष्टित था। महारानी चोर वल्कल पहने जिस समय यहां आय, एक बार सन्नाटा छा गया। अपनी शुद्धि के सावित करने के लिये क जानेपर महारानीने कहा- "यदि मैंने आर्यपुतसे भिन्न मनुष्य की कमी चिन्तनातक ने की हो तो भूतधात्रो देवो मुझे अपने में स्थान देकर अंगीकार करें यद्यपि राजा रामचन्द्रने अपना विवाद नहीं किया था, पर यशमें अङ्गिनीकी स्वर्णमयी प्रतिमा रखी थी, क्योंकि बिना भारतीय जीवन, अर्द्धाङ्गिनीके यह सम्पन्न नहीं हो सकता था। देखकर महारानीके हृदयमें जलन हो उठी थी । कि उन्हें जोवन वो जान पड़ता था । उस प्रतिमाको यही कारण था उनके यह कहते हो आश्चर्यकी घटना हुई। पृथ्वी फटी और काञ्चन सिंहासन नागकी फणपर रखा हुआ निकला। उसोपर -बैठकर उन्होंने पातालमें प्रवेश किया। वाल्मीकिके कहनेसे लवकुशको रामचन्द्रजीने ले लिया। यज्ञ विसर्जन कर रामचन्द्रने अपने पुत्रों और भतोजोंको राज्य दे सय भाइयों के साथ सरयूमें, अपनेको गोता मार विलोन कर डाला और साकेतवासी हुए। चाचकवृन्द! एक रामचरितसे ही अनेक गुण एकत्रित किये जा सकते हैं, यदि कोई तत्वान्वेषी उक्त चरितमें उनका अन्वेषण, करे । राजा दशरथने जो मित्रमाव रोमपाद राजाके प्रति दिखलाया शायदही कोई दिखलाता हो । राजा रोमपादके कोई सन्तति नहीं थी पर उनके प्रिय मित्र राजा दशरथको शान्ता नामक कन्या. थी । राजांने सोचा कि मैं सन्ततिवाला हूं और मेरे मित्र रोमपाद बेसन्ततिके है यह ठीक नहीं। मुझे उचित है कि में अपनी कन्या उन्हें देहू । यह विचार कार्य में परिणत कर दोनों मित्र आपसमें सन्ततिवाले हुए । सहानुभूति और समवेदनाका सच्चा. उदाहरण इससे भी बढ़कर होगा ? क्या कोई भी सभ्य देश, इससे बढ़कर तो क्या, इसकी समतामें एक मी उदाहरण दे सकता है ?. स्त्री-पुरुषका ज्ञान होना, खासकर बहुत हो छोटो अवस्था में जिस समय एकाग्र मनसे उत्तमोत्तम गुणोंका उपार्जन होता है, क्योंकि उसके लिये बालकों को अभ्यास दिलाया जाता' स्वाभाविक बात है, परन्तु ज्यों ज्यों अवस्था बढ़ती है त्यो त्य चालकका एकाग्र मन स्त्रो जातिको और अनुरक्त होता जाता है । इसी अनुरक्तिका परिणाम उपनयनके उपरान्त विवाद है जिसे सम्पन्न कर भारतीय गृहस्थाश्रममें सहर्ष प्रवेश करते हैं। पर यदि स्त्री-पुरुषका ज्ञान न हो तो बालक और भी समधिक गुणोंका उपार्जन कर सकता है, क्योंकि मस्तिष्क एक ओरके सिवा दूसरी ओर आकृष्ट नहीं होगा। ऋष्यशृङ्ग महात्मा विभाण्डकके पुत्र थे और वे इकलौते पुत्र थे। उनके जीवन-सादे जीवन की ओर दृष्टि डालिये और देखिये कि उसमें कितनी सादगी और सिधाई भरी पड़ी है। इससे चढ़फर सादगी व सिधाई और क्या हो सकती है कि वेश्याए सुसज्जित वेश्याएं घड़ी घड़ी नौकाओंपर कृत्रिम पुष्प वाटिका लगाकर आश्रम-फलोंके स्थान में शहरको अपूर्व नी हुई मिठाइयोंको लेकर उन महात्माके आश्रम में गर्यो और उन्हें फुसलाकर रोमपाद राजाके राज्य में ले आयीं जिनके प्रतापसे सूप घृष्टि हुई। जय विभाण्डकजी पहुंचे तो उनका कार कर अपनी कन्या-तुल् शान्ताका ऋके साथ विवाह कर दिया। ऐसा सादगीका नमूना क्या किसी भी देशमें देखा गया है ?" पाश्चात्य जगत इसे निरा जंगलीपन कह डालेगा । पर दर
कोविड-19 से महाराष्ट्र बुरी तरह प्रभावित है। यहां अभी तक 1 लाख 76 हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना वर्ष 1934 में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। लाल बागचा राजा के इतिहास में पहली बार भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी। मुंबई स्थित लालबागचा राजाज गणेशोत्सव मंडल ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यह फैसला किया है। मंडल के अधिकारियों ने बताया कि इसकी जगह पर रक्त दान शिविर लगाया जाएगा। गणेशोत्सव के 11 दिनों में मंडल बढ़ चढ़कर सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेगा। आयोजन मंडल ने कहा कि उसी स्थान पर रक्त दान शिविर, प्लाज्मा दान शिविर लगाया जाएगा। साथ ही, एलओसी और एलएसी पर शहीद हुए जवानों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। ऐसा पहली बार हो रहा है जब लालबागचा राजा की मूर्ति नहीं स्थापित होगी। सचिव सुधीर साल्वी ने कहा कि मंडल मुख्यमंत्री राहत कोष में भी दान करेगा। गौरतलब है कि हर साल मुंबई में गणेशोत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। जहां लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए जमा होते हैं। गणेशोत्सव भाद्र मास की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। इसबार यह 22 अगस्त को पड़ रहा है। कोविड-19 से महाराष्ट्र बुरी तरह प्रभावित है। यहां अभी तक 1 लाख 76 हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना वर्ष 1934 में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि लालबाग राजा अपने लोगों को स्वस्थ देखना चाहते हैं, यही वजह है कि इस साल न कोई मूर्ति होगी, न ही विसर्जन होगा।
कोविड-उन्नीस से महाराष्ट्र बुरी तरह प्रभावित है। यहां अभी तक एक लाख छिहत्तर हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। लाल बागचा राजा के इतिहास में पहली बार भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी। मुंबई स्थित लालबागचा राजाज गणेशोत्सव मंडल ने कोविड-उन्नीस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यह फैसला किया है। मंडल के अधिकारियों ने बताया कि इसकी जगह पर रक्त दान शिविर लगाया जाएगा। गणेशोत्सव के ग्यारह दिनों में मंडल बढ़ चढ़कर सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेगा। आयोजन मंडल ने कहा कि उसी स्थान पर रक्त दान शिविर, प्लाज्मा दान शिविर लगाया जाएगा। साथ ही, एलओसी और एलएसी पर शहीद हुए जवानों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। ऐसा पहली बार हो रहा है जब लालबागचा राजा की मूर्ति नहीं स्थापित होगी। सचिव सुधीर साल्वी ने कहा कि मंडल मुख्यमंत्री राहत कोष में भी दान करेगा। गौरतलब है कि हर साल मुंबई में गणेशोत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। जहां लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश का आशीर्वाद पाने के लिए जमा होते हैं। गणेशोत्सव भाद्र मास की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे गणेश चतुर्थी भी कहते हैं। इसबार यह बाईस अगस्त को पड़ रहा है। कोविड-उन्नीस से महाराष्ट्र बुरी तरह प्रभावित है। यहां अभी तक एक लाख छिहत्तर हजार से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि लालबाग राजा अपने लोगों को स्वस्थ देखना चाहते हैं, यही वजह है कि इस साल न कोई मूर्ति होगी, न ही विसर्जन होगा।
अब तक के सबसे बड़े सोशल मीडिया डेटा लीक का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साइबर पुलिस के मुताबिक, इस डेटा लीक में करीब 16. 8 करोड़ सरकारी और गैर सरकारी खातों का डेटा चोरी हो गया। इसमें 2. 55 लाख सैन्य अधिकारियों का डेटा भी शामिल है। इस डेटा लीक को देश का सबसे बड़ा डेटा लीक बताया जा रहा है. इस पूरे गैंग को तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस ने पकड़ा है. ये लोग 140 अलग-अलग कैटेगरी में डेटा बेच रहे थे। इसमें सेना के जवानों का डेटा, देश के तमाम लोगों के फोन नंबर, नीट के छात्रों की गुप्त जानकारियां आदि शामिल हैं। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर एम. स्टीफन रवींद्र ने यह जानकारी दी। इस मामले में सात डेटा ब्रोकर्स को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी नोएडा में एक कॉल सेंटर के जरिए डाटा कलेक्ट कर रहे थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि चोरी किए गए डेटा को 100 साइबर बदमाशों को बेचा गया था। इस डेटा लीक में 1. 2 करोड़ व्हाट्सएप यूजर्स और 17 लाख फेसबुक यूजर्स का डेटा शामिल है। सेना कर्मियों के डेटा में उनकी वर्तमान रैंक, ईमेल आईडी, पोस्टिंग का स्थान आदि शामिल हैं। इस डेटा का इस्तेमाल सैन्य जासूसी के लिए किया जा सकता है। पुलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने महज 2,000 रुपये में 50,000 लोगों का डेटा बेच दिया। डीसीपी (साइबर क्राइम विंग) रीतिराज ने इस संबंध में कहा कि साइबराबाद पुलिस की साइबर क्राइम विंग को गोपनीय और संवेदनशील डेटा की खरीद-बिक्री की शिकायत मिली थी. पुलिस पिछले दो महीने से इस मामले पर काम कर रही थी। इससे पहले नवंबर 2022 में भारत, अमेरिका, सऊदी अरब और मिस्र समेत 84 देशों के व्हाट्सएप यूजर्स का डेटा लीक हुआ था और यह डेटा ऑनलाइन भी बेचा गया था। दुनिया भर के लगभग 48. 7 करोड़ व्हाट्सएप यूजर्स का डेटा हैक कर लिया गया था। हैक किए गए डेटा में 84 देशों के व्हाट्सएप यूजर्स के मोबाइल नंबर भी शामिल थे। जिनमें से 61. 62 लाख फोन नंबर भारतीयों के थे।
अब तक के सबसे बड़े सोशल मीडिया डेटा लीक का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साइबर पुलिस के मुताबिक, इस डेटा लीक में करीब सोलह. आठ करोड़ सरकारी और गैर सरकारी खातों का डेटा चोरी हो गया। इसमें दो. पचपन लाख सैन्य अधिकारियों का डेटा भी शामिल है। इस डेटा लीक को देश का सबसे बड़ा डेटा लीक बताया जा रहा है. इस पूरे गैंग को तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस ने पकड़ा है. ये लोग एक सौ चालीस अलग-अलग कैटेगरी में डेटा बेच रहे थे। इसमें सेना के जवानों का डेटा, देश के तमाम लोगों के फोन नंबर, नीट के छात्रों की गुप्त जानकारियां आदि शामिल हैं। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर एम. स्टीफन रवींद्र ने यह जानकारी दी। इस मामले में सात डेटा ब्रोकर्स को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी नोएडा में एक कॉल सेंटर के जरिए डाटा कलेक्ट कर रहे थे। आरोपी ने स्वीकार किया कि चोरी किए गए डेटा को एक सौ साइबर बदमाशों को बेचा गया था। इस डेटा लीक में एक. दो करोड़ व्हाट्सएप यूजर्स और सत्रह लाख फेसबुक यूजर्स का डेटा शामिल है। सेना कर्मियों के डेटा में उनकी वर्तमान रैंक, ईमेल आईडी, पोस्टिंग का स्थान आदि शामिल हैं। इस डेटा का इस्तेमाल सैन्य जासूसी के लिए किया जा सकता है। पुलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने महज दो,शून्य रुपयापये में पचास,शून्य लोगों का डेटा बेच दिया। डीसीपी रीतिराज ने इस संबंध में कहा कि साइबराबाद पुलिस की साइबर क्राइम विंग को गोपनीय और संवेदनशील डेटा की खरीद-बिक्री की शिकायत मिली थी. पुलिस पिछले दो महीने से इस मामले पर काम कर रही थी। इससे पहले नवंबर दो हज़ार बाईस में भारत, अमेरिका, सऊदी अरब और मिस्र समेत चौरासी देशों के व्हाट्सएप यूजर्स का डेटा लीक हुआ था और यह डेटा ऑनलाइन भी बेचा गया था। दुनिया भर के लगभग अड़तालीस. सात करोड़ व्हाट्सएप यूजर्स का डेटा हैक कर लिया गया था। हैक किए गए डेटा में चौरासी देशों के व्हाट्सएप यूजर्स के मोबाइल नंबर भी शामिल थे। जिनमें से इकसठ. बासठ लाख फोन नंबर भारतीयों के थे।
चमड़े के पतलून या लेगिंग के बारे में कई महिलाओं और लड़कियों की शर्मिंदगी के बावजूद, यह मॉडल काफी सार्वभौमिक है, और इसे विभिन्न चीजों के साथ जोड़ा जा सकता है, मुख्य बात यह है कि चीज के चरित्र और शैली को सही ढंग से चुनना है। हाल ही में, डिजाइनर न केवल पार्टियों के लिए लेगिंग पहनते हैं, बल्कि उन्हें रोज पहनते हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि वे बहुत सुविधाजनक और व्यावहारिक हैं। तो, महिलाओं के चमड़े के लेगिंग पहनने के साथ क्या? सबसे पहले, आपको याद रखना चाहिए कि जो भी आप इस मॉडल पर डालते हैं, उसे किसी भी मामले में भरें नहीं। लेगिंग पतलून नहीं हैं। दूसरा, लेगिंग के रूप में ऐसे तंग-फिटिंग मॉडल विशेष रूप से पतली आकृति और सीधे पैरों वाली लड़कियों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यदि आप ऐसे रूपों के मालिक नहीं हैं, तो बेहतर अन्य मॉडल खोजें। लेगिंग को बढ़ाए गए और छोटे जैकेट, ब्लाउज, स्वेटर, ब्लाउज, कार्डिगन के साथ सुरक्षित रूप से पहना जा सकता है। यदि आपकी कूल्हें सही नहीं हैं, तो शीर्ष की लंबाई ऐसी होनी चाहिए कि वे पूरी तरह से खुले नहीं हैं। इस नियम का पालन पुराने महिलाओं द्वारा किया जाना चाहिए। युवा लड़कियां छोटी वेट्स और ब्लाउज के साथ सुरक्षित रूप से लेगिंग पहन सकती हैं। काले चमड़े के लेगिंग को सफेद से कोरल तक, पूरी तरह से अलग रंगों की चीजों से सुरक्षित रूप से पहना जा सकता है। जूते से उच्च जूते, जूते-नौकाओं या टखने के जूते का चयन करना आवश्यक है। वैसे, यदि आप पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हैं कि कौन सी लेगिंग खरीदना है, तो आप इस मौसम में फैशनेबल मैट चमड़े के लेगिंग का बेहतर चयन करेंगे। यह मॉडल सबसे सार्वभौमिक है, और इतना हड़ताली नहीं है। एक और विकल्प चमड़े के आवेषण के साथ leggings है। वे आपको वांछित स्टाइलिश छवि बनाने की अनुमति देंगे, और फिर भी बहुत बोल्ड और चमकदार नहीं दिखेंगे। जैसा कि आप देख सकते हैं, लेगिंग के कई फायदे हैं, इसलिए उन्हें खरीदने और पहनने से डरो मत।
चमड़े के पतलून या लेगिंग के बारे में कई महिलाओं और लड़कियों की शर्मिंदगी के बावजूद, यह मॉडल काफी सार्वभौमिक है, और इसे विभिन्न चीजों के साथ जोड़ा जा सकता है, मुख्य बात यह है कि चीज के चरित्र और शैली को सही ढंग से चुनना है। हाल ही में, डिजाइनर न केवल पार्टियों के लिए लेगिंग पहनते हैं, बल्कि उन्हें रोज पहनते हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि वे बहुत सुविधाजनक और व्यावहारिक हैं। तो, महिलाओं के चमड़े के लेगिंग पहनने के साथ क्या? सबसे पहले, आपको याद रखना चाहिए कि जो भी आप इस मॉडल पर डालते हैं, उसे किसी भी मामले में भरें नहीं। लेगिंग पतलून नहीं हैं। दूसरा, लेगिंग के रूप में ऐसे तंग-फिटिंग मॉडल विशेष रूप से पतली आकृति और सीधे पैरों वाली लड़कियों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यदि आप ऐसे रूपों के मालिक नहीं हैं, तो बेहतर अन्य मॉडल खोजें। लेगिंग को बढ़ाए गए और छोटे जैकेट, ब्लाउज, स्वेटर, ब्लाउज, कार्डिगन के साथ सुरक्षित रूप से पहना जा सकता है। यदि आपकी कूल्हें सही नहीं हैं, तो शीर्ष की लंबाई ऐसी होनी चाहिए कि वे पूरी तरह से खुले नहीं हैं। इस नियम का पालन पुराने महिलाओं द्वारा किया जाना चाहिए। युवा लड़कियां छोटी वेट्स और ब्लाउज के साथ सुरक्षित रूप से लेगिंग पहन सकती हैं। काले चमड़े के लेगिंग को सफेद से कोरल तक, पूरी तरह से अलग रंगों की चीजों से सुरक्षित रूप से पहना जा सकता है। जूते से उच्च जूते, जूते-नौकाओं या टखने के जूते का चयन करना आवश्यक है। वैसे, यदि आप पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हैं कि कौन सी लेगिंग खरीदना है, तो आप इस मौसम में फैशनेबल मैट चमड़े के लेगिंग का बेहतर चयन करेंगे। यह मॉडल सबसे सार्वभौमिक है, और इतना हड़ताली नहीं है। एक और विकल्प चमड़े के आवेषण के साथ leggings है। वे आपको वांछित स्टाइलिश छवि बनाने की अनुमति देंगे, और फिर भी बहुत बोल्ड और चमकदार नहीं दिखेंगे। जैसा कि आप देख सकते हैं, लेगिंग के कई फायदे हैं, इसलिए उन्हें खरीदने और पहनने से डरो मत।
ब्रिटेन के गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क ने कहा है कि दुनिया भर में मौजूद चरमपंथियों का एक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा जिसके आधार पर चरमपंथी पृष्ठभूमि वाले लोगों को देश में दाख़िल होने से रोक दिया जाएगा. चार्ल्स क्लार्क ने कहा कि इस रिकॉर्ड में कट्टरपंथी धर्म प्रचार और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली वेबसाइटों और लेखों को 'असहनीय व्यवहार' की सूची में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम इस सूची में शामिल होगा उन्हें ब्रिटेन से बाहर निकाला जा सकता है. चार्ल्स क्लार्क ने बुधवार को संसद में बताया कि लंदन बम धमाकों में मारे गए लोगों की शिनाख़्त हो चुकी है लेकिन उन्होंने मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका भी जताई. उन्होंने बताया कि अस्पतालों अब भी 27 लोगों का इलाज चल रहा है. चार्ल्स क्लार्क ने कहा कि लंदन बम धमाकों से प्रभावित परिवारों को सहायता और सलाह-मशविरा दिया जा रहा है. गृह मंत्री मंत्री ने बताया कि ब्रिटेन ने जॉर्डन के साथ एक सहमति-पत्र पर दस्तख़त किए हैं जिनके तहत जॉर्डन के जिन नागरिकों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का संदेह होगा उन्हें जॉर्डन भेजा जा सकेगा. जॉर्डन मूल के मौलवी अबू क़तादा को इस सहमति-पत्र के तहत वापस जॉर्डन भेजा सकता है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुसार ब्रिटेन लोगों को ऐसे देशों में वापस नहीं भेज सकता जहाँ उनके साथ दुर्व्यवहार होने या मौत की सज़ा मिलने की संभावना हो. लेकिन अगर किसी देश के साथ इस बारे में समझौता हो जाता है तो यह पाबंदी हट जाती है और इसी तरह का समझौता जॉर्डन से किया गया है. सरकार कई उत्तर अफ्रीकी देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते करने पर विचार कर रही है. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के प्रवक्ता ने कहा कि जॉर्डन के साथ समझौते के बाद जॉर्डन के ब्रिटेन में रहने वाले बहुत से लोगों को वापस भेजा जा सकता है लेकिन प्रवक्ता ने इस बारे में और विवरण देने से इनकार कर दिया.
ब्रिटेन के गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क ने कहा है कि दुनिया भर में मौजूद चरमपंथियों का एक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा जिसके आधार पर चरमपंथी पृष्ठभूमि वाले लोगों को देश में दाख़िल होने से रोक दिया जाएगा. चार्ल्स क्लार्क ने कहा कि इस रिकॉर्ड में कट्टरपंथी धर्म प्रचार और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली वेबसाइटों और लेखों को 'असहनीय व्यवहार' की सूची में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम इस सूची में शामिल होगा उन्हें ब्रिटेन से बाहर निकाला जा सकता है. चार्ल्स क्लार्क ने बुधवार को संसद में बताया कि लंदन बम धमाकों में मारे गए लोगों की शिनाख़्त हो चुकी है लेकिन उन्होंने मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका भी जताई. उन्होंने बताया कि अस्पतालों अब भी सत्ताईस लोगों का इलाज चल रहा है. चार्ल्स क्लार्क ने कहा कि लंदन बम धमाकों से प्रभावित परिवारों को सहायता और सलाह-मशविरा दिया जा रहा है. गृह मंत्री मंत्री ने बताया कि ब्रिटेन ने जॉर्डन के साथ एक सहमति-पत्र पर दस्तख़त किए हैं जिनके तहत जॉर्डन के जिन नागरिकों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का संदेह होगा उन्हें जॉर्डन भेजा जा सकेगा. जॉर्डन मूल के मौलवी अबू क़तादा को इस सहमति-पत्र के तहत वापस जॉर्डन भेजा सकता है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुसार ब्रिटेन लोगों को ऐसे देशों में वापस नहीं भेज सकता जहाँ उनके साथ दुर्व्यवहार होने या मौत की सज़ा मिलने की संभावना हो. लेकिन अगर किसी देश के साथ इस बारे में समझौता हो जाता है तो यह पाबंदी हट जाती है और इसी तरह का समझौता जॉर्डन से किया गया है. सरकार कई उत्तर अफ्रीकी देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते करने पर विचार कर रही है. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के प्रवक्ता ने कहा कि जॉर्डन के साथ समझौते के बाद जॉर्डन के ब्रिटेन में रहने वाले बहुत से लोगों को वापस भेजा जा सकता है लेकिन प्रवक्ता ने इस बारे में और विवरण देने से इनकार कर दिया.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की खूबसूरत एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) का नया वीडियो सॉन्ग (Akshara Singh Song Jhulaniya)सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है. इस गाने में एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की अदाएं देखकर घायल हो रहे हैं. दरअसल, इस गाने में एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की अदाएं देखने लायक हैं. गाने में जो उन्होंने ड्रेस पहना है वह फैंस को घायल कर दे रहा है. इसके साथ ही उनकी खूबसूरती तो लाजवाब है ही. इस सॉन्ग का कुछ अंश अक्षरा सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी पोस्ट किया है. अक्षरा सिंह के चाहने वालों ने यहां पर भी उन पर अपना प्यार लुटा रहे हैं. इंस्टाग्राम अकाउंट पर रेड हार्ट की बौछार हो रही है. अक्षरा सिंह खूबसूरत शॉर्ट नाइटी में गाने में अपनी अदाएं बिखेर रही हैं. उनके साथ करण खन्ना उनकी रोमांटिक अदाओं के सामने बिलकुल बेबस हो गए हैं. गाने की खास बात ये है कि इसे गाया भी खुद अक्षरा सिंह ने औक डांस भी उन्होंने ही किया है. गाना शेयर करते हुए अक्षरा सिंह ने फैन्स से पूछा भी है कि उनकी ये नई कोशिश फैंस को कितनी पसंद आई है. कैप्शन में अक्षरा सिंह ने लिखा है कि मेरा नया गाना झुलनिया रिलीज हो गया है. फैन्स इसे देखें और बताएं कि उन्हें ये नई कोशिश कैसी लगी. इसके साथ ही अक्षरा सिंह ने फैंस से ज्यादा से ज्यादा रील्स बनाने की भी अपील की है. अक्षरा सिंह और करण खन्ना का ये सॉन्ग रोमांटिक सॉन्ग है. यह गाना भोजपुरी टी सीरीज पर रिलीज हुआ है. इस गाने को हर प्लेटफॉर्म पर जी भर कर प्यार मिल रहा है. अक्षरा सिंह के अंदाज के साथ साथ उनकी आवाज पर भी फैन्स अब लट्टू हो रहे हैं. फैन्स जम कर हार्ट और फायर वाले इमोजी शेयर कर अपना प्यार दिखा रहे हैं.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की खूबसूरत एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का नया वीडियो सॉन्ग सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है. इस गाने में एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की अदाएं देखकर घायल हो रहे हैं. दरअसल, इस गाने में एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की अदाएं देखने लायक हैं. गाने में जो उन्होंने ड्रेस पहना है वह फैंस को घायल कर दे रहा है. इसके साथ ही उनकी खूबसूरती तो लाजवाब है ही. इस सॉन्ग का कुछ अंश अक्षरा सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी पोस्ट किया है. अक्षरा सिंह के चाहने वालों ने यहां पर भी उन पर अपना प्यार लुटा रहे हैं. इंस्टाग्राम अकाउंट पर रेड हार्ट की बौछार हो रही है. अक्षरा सिंह खूबसूरत शॉर्ट नाइटी में गाने में अपनी अदाएं बिखेर रही हैं. उनके साथ करण खन्ना उनकी रोमांटिक अदाओं के सामने बिलकुल बेबस हो गए हैं. गाने की खास बात ये है कि इसे गाया भी खुद अक्षरा सिंह ने औक डांस भी उन्होंने ही किया है. गाना शेयर करते हुए अक्षरा सिंह ने फैन्स से पूछा भी है कि उनकी ये नई कोशिश फैंस को कितनी पसंद आई है. कैप्शन में अक्षरा सिंह ने लिखा है कि मेरा नया गाना झुलनिया रिलीज हो गया है. फैन्स इसे देखें और बताएं कि उन्हें ये नई कोशिश कैसी लगी. इसके साथ ही अक्षरा सिंह ने फैंस से ज्यादा से ज्यादा रील्स बनाने की भी अपील की है. अक्षरा सिंह और करण खन्ना का ये सॉन्ग रोमांटिक सॉन्ग है. यह गाना भोजपुरी टी सीरीज पर रिलीज हुआ है. इस गाने को हर प्लेटफॉर्म पर जी भर कर प्यार मिल रहा है. अक्षरा सिंह के अंदाज के साथ साथ उनकी आवाज पर भी फैन्स अब लट्टू हो रहे हैं. फैन्स जम कर हार्ट और फायर वाले इमोजी शेयर कर अपना प्यार दिखा रहे हैं.
बाबैन, 23 दिसंबर (निस) बाबैन के गांव ईशरहेड़ी में मां शेरवाली मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया गया। इस कार्यक्रम में गांव के नंबरदार जगदीश सिंह व शाहबाद शुगर मिल के निदेशक एवं समाजसेवी रणबीर सिंह डांडा ईशरहेड़ी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत करके मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया। इस मौके पर पंडित रामकरण शर्मा ने विधिवत तरीके से भूमि पूजन करवाकर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मौके पर नंबरदार जगदीश सिंह व समाजसेवी रणबीर सिंह डांडा ईशरहेड़ी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी गांववासी मंदिर के निर्माण में तन मन धन से एंव आर्थिक सहयोग देकर सभी पुण्य के भागीदार बनें। इस मौके पर मंदिर कमेटी के प्रधान धर्मपाल सिंह, जगतार सिंह, नैब सिंह, अमरीक सिंह, संदीप गर्ग, पालाराम, प्रेमचंद, सुरेंद्र सिंह, बलविन्द्र सिंह, लखविन्द्र सिंह, राजेश, प्रदीप कुमार व अन्य कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
बाबैन, तेईस दिसंबर बाबैन के गांव ईशरहेड़ी में मां शेरवाली मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया गया। इस कार्यक्रम में गांव के नंबरदार जगदीश सिंह व शाहबाद शुगर मिल के निदेशक एवं समाजसेवी रणबीर सिंह डांडा ईशरहेड़ी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत करके मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया। इस मौके पर पंडित रामकरण शर्मा ने विधिवत तरीके से भूमि पूजन करवाकर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मौके पर नंबरदार जगदीश सिंह व समाजसेवी रणबीर सिंह डांडा ईशरहेड़ी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी गांववासी मंदिर के निर्माण में तन मन धन से एंव आर्थिक सहयोग देकर सभी पुण्य के भागीदार बनें। इस मौके पर मंदिर कमेटी के प्रधान धर्मपाल सिंह, जगतार सिंह, नैब सिंह, अमरीक सिंह, संदीप गर्ग, पालाराम, प्रेमचंद, सुरेंद्र सिंह, बलविन्द्र सिंह, लखविन्द्र सिंह, राजेश, प्रदीप कुमार व अन्य कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
PATNA : पूर्णिया के पूर्व सांसद पिछले 20 दिनों से राजधानीवासियों की सेवा में जुटे हैं। पिछले दिनों जहां पटना में बारिश से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति के दौरान जलकैदी बने लोगों को खाना, पानी और अन्य जरुरतों का सामान मुहैया कराने के लिए खुद बाढ़ग्रस्त इलाकों में वे लगातार पहुंचे थे. वहीं अब पानी के कम होने के बाद मच्छरों के प्रकोप से बचाने के अभियान में जुटे है। इसके लिए उन्होंने अब राजधानीवासियों को 1 दर्जन फागिग मशीन भेंट किया है। आज उन्होंने कई इलाकों में फागिग कर इन मशीनों की खुद जांच की उसके बाद उसे ट्रैक्टर पर लादकर राजधानी के जलजमाव वाले क्षेत्रों में फागिग के लिए रवाना किया। जाप के सदस्य स्थानीय लोगों की मदद से इलाको में फागिग करेंगे और लोगों को मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी डेंगू, मलेरिया से बचाने में मदद करेंगे। गौरतलब है कि राजधानी पटना के जलकैदी बने लोगो के लिए पप्पू यादव पिछले दिनो मसीहा साबित हुए थे। जल जमाव वाले वैेसे क्षेत्रों में भी उन्होंने राहत पहुंचाने का काम किया था जहां प्रशासन नहीं पहुंचा था। पप्पू यादव लगातार घरों के अंदर कैद लोगों तक खाना-पानी, बच्चों के लिए दूध, विस्किट के साथ अन्य जरुरत की चीजें पहुंचाई थी। वे सुबह 9 बजे ही सामानों को लेकर बाढ़ग्रस्त इलाको के लिए निकल पड़ते थे और देर रात तक लोगों के बीच वितरित करते थे।
PATNA : पूर्णिया के पूर्व सांसद पिछले बीस दिनों से राजधानीवासियों की सेवा में जुटे हैं। पिछले दिनों जहां पटना में बारिश से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति के दौरान जलकैदी बने लोगों को खाना, पानी और अन्य जरुरतों का सामान मुहैया कराने के लिए खुद बाढ़ग्रस्त इलाकों में वे लगातार पहुंचे थे. वहीं अब पानी के कम होने के बाद मच्छरों के प्रकोप से बचाने के अभियान में जुटे है। इसके लिए उन्होंने अब राजधानीवासियों को एक दर्जन फागिग मशीन भेंट किया है। आज उन्होंने कई इलाकों में फागिग कर इन मशीनों की खुद जांच की उसके बाद उसे ट्रैक्टर पर लादकर राजधानी के जलजमाव वाले क्षेत्रों में फागिग के लिए रवाना किया। जाप के सदस्य स्थानीय लोगों की मदद से इलाको में फागिग करेंगे और लोगों को मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी डेंगू, मलेरिया से बचाने में मदद करेंगे। गौरतलब है कि राजधानी पटना के जलकैदी बने लोगो के लिए पप्पू यादव पिछले दिनो मसीहा साबित हुए थे। जल जमाव वाले वैेसे क्षेत्रों में भी उन्होंने राहत पहुंचाने का काम किया था जहां प्रशासन नहीं पहुंचा था। पप्पू यादव लगातार घरों के अंदर कैद लोगों तक खाना-पानी, बच्चों के लिए दूध, विस्किट के साथ अन्य जरुरत की चीजें पहुंचाई थी। वे सुबह नौ बजे ही सामानों को लेकर बाढ़ग्रस्त इलाको के लिए निकल पड़ते थे और देर रात तक लोगों के बीच वितरित करते थे।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) चुनावों के लिए मतगणना शनिवार को उस समय रोक दी गई, जब एक राजनीतिक दल के दो प्रमुख उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ मतगणना केंद्र में घुसे और बैलेट बॉक्स छीनने की कोशिश करने लगे। विश्वविद्यालय चुनाव समिति ने यह जानकारी दी। छात्रसंघ चुनाव के लिए मतगणना शुक्रवार को शाम 5. 30 बजे मतदान खत्म होने के बाद शुक्रवार रात 10 बजे शुरू हुई थी। शनिवार तड़के चार बजे के आसपास मतगणना केंद्र की खिड़कियां तोड़ दी गई। इसका विरोध कर रहे कुछ छात्र घायल भी हुए हैं।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों के लिए मतगणना शनिवार को उस समय रोक दी गई, जब एक राजनीतिक दल के दो प्रमुख उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ मतगणना केंद्र में घुसे और बैलेट बॉक्स छीनने की कोशिश करने लगे। विश्वविद्यालय चुनाव समिति ने यह जानकारी दी। छात्रसंघ चुनाव के लिए मतगणना शुक्रवार को शाम पाँच. तीस बजे मतदान खत्म होने के बाद शुक्रवार रात दस बजे शुरू हुई थी। शनिवार तड़के चार बजे के आसपास मतगणना केंद्र की खिड़कियां तोड़ दी गई। इसका विरोध कर रहे कुछ छात्र घायल भी हुए हैं।
कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि वह 19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान किसानों के कल्याण और मूल्य वृद्धि से जुड़े मुद्दों को उठाएगी। "किसानों का मुद्दा और महंगाई, हम पहले दिन संसद में उठाएंगे। हम इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। हम संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश करेंगे, "कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां संवाददाताओं से कहा। बुधवार को पार्टी ने संसद में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए एक बैठक की। मूल्य वृद्धि, आर्थिक विकास, बेरोजगारी और अन्य पर एनडीए सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी देश के किसानों, गरीब और मध्यम वर्गों के साथ खड़ी है और यह "सड़क से संसद तक" मूल्य वृद्धि पर लड़ रही है। यह देखते हुए कि दुनिया भर की सरकारों ने COVID-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए लोगों को बहुत राहत प्रदान की है, उन्होंने दावा किया कि यह आज भी नहीं पता है कि एनडीए सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा किसके लिए की गई है। केंद्र में फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि महामारी के मद्देनजर आम लोगों को राहत दिए बिना, सरकार ने अप्रत्यक्ष करों और अन्य के माध्यम से गरीबों सहित लोगों पर भारी बोझ डाला। उन्होंने ईंधन पर कथित उच्च करों के लिए तेलंगाना में टीआरएस सरकार पर भी हमला किया। तेलंगाना में कांग्रेस पेट्रोल और डीजल पर करों की कथित उच्च दर के विरोध में शुक्रवार को यहां 'चलो राजभवन' कार्यक्रम आयोजित करेगी।
कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि वह उन्नीस जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान किसानों के कल्याण और मूल्य वृद्धि से जुड़े मुद्दों को उठाएगी। "किसानों का मुद्दा और महंगाई, हम पहले दिन संसद में उठाएंगे। हम इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। हम संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश करेंगे, "कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां संवाददाताओं से कहा। बुधवार को पार्टी ने संसद में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए एक बैठक की। मूल्य वृद्धि, आर्थिक विकास, बेरोजगारी और अन्य पर एनडीए सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी देश के किसानों, गरीब और मध्यम वर्गों के साथ खड़ी है और यह "सड़क से संसद तक" मूल्य वृद्धि पर लड़ रही है। यह देखते हुए कि दुनिया भर की सरकारों ने COVID-उन्नीस महामारी के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए लोगों को बहुत राहत प्रदान की है, उन्होंने दावा किया कि यह आज भी नहीं पता है कि एनडीए सरकार द्वारा घोषित बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा किसके लिए की गई है। केंद्र में फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि महामारी के मद्देनजर आम लोगों को राहत दिए बिना, सरकार ने अप्रत्यक्ष करों और अन्य के माध्यम से गरीबों सहित लोगों पर भारी बोझ डाला। उन्होंने ईंधन पर कथित उच्च करों के लिए तेलंगाना में टीआरएस सरकार पर भी हमला किया। तेलंगाना में कांग्रेस पेट्रोल और डीजल पर करों की कथित उच्च दर के विरोध में शुक्रवार को यहां 'चलो राजभवन' कार्यक्रम आयोजित करेगी।
उसीको च्यवन कल्याणक मानना छोड़कर आश्विन बदी १३ को त्रिशला माताके उदर में भगवान् पधारे उसीको च्यवन कल्याणक मान्यकर लेवें, क्योंकि-नीच गौत्रके विपाक से आश्चर्यरूप तथा ब्राह्मण लोगोंसे जैनियोंकी निन्दापूर्वक मिथ्यात्व बढ़नेका कारण तो आषाढ़ शुदी ६ को देवानन्दा माताके उदर में भगवान् उत्पन्न हुए सो वहां जन्म होने से ही होता जिसको अर्थात् उपरकी सब बातोंको मिटाने के लिये त्रिशला माताके उदर में पधारे हैं इसीलिये तो उपरोक्त शास्त्रकार महाराजने उसीको भवकी गिनती में लिया । इस जगह परभी विवेकी तत्त्वज्ञोंको न्याय दृष्टि से विचार करना चाहिये कि जब त्रिशलामाताके उदर में भगवान् पधारे तब ही तीर्थंकर भगवान् उत्पन्न होने सम्बन्धी चौदह स्वप्नोंका विस्तारसे वर्णन वगैरह कार्य भी सिद्धार्थ राजाके वहां हुए इसलिये आश्विन बदी १३ को भगवान्के उत्पन्न होनेको च्यवन कल्याणकत्वपना निश्चय करके निःसन्देहता पूर्वक स्त्रयं सिद्ध हो चुका, इसलिये आश्विन बढ़ी ९३ को त्रिशला माता के उदर में भगवान्का पधारना हुआ सो गर्भापहाररूप च्यवन कल्याणकको शास्त्र वाक्य प्रमाण करनेवाले आत्मार्थी तो कोई भी कदापि काले निषेध नहीं करेगा परन्तु दीर्घ संसारी सिध्यात्वियोंके अन्तरका हठवादको तो तीर्थंकर गणधर भी छोड़ाने समर्थ नहीं होसकते तो मेरा लिखना किस हिसाबमें अर्थात् उपरका मेरा लेख सत्यग्रहणाभिलाषी श्रीजिनाज्ञाके आराधकोंको तो हितकारी होगा नतु अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी दुर्लभबोधिजनोंको और सर्वगच्छवालों के माननीय पूज्य श्रीअभयदेव सूरिजी के वचमानुसार श्रीसमवायांगजी थोथे अङ्गकी वृत्तिके वाक्यसै आश्विन बदी १३ को त्रिशलामाताके उदर में भगवान, पधारनेको उपर्युक्त कारणोंसे कल्याणकत्वपना सिद्ध करके पाठक गणको यहां दिखाया तथा इन्हीं महाराजके वचनानुसार श्रीस्थानांगजी तीसरे अङ्गकी वृत्तिके वाक्यसे और श्री कल्पसूत्रादि अनेक शास्त्रोंके वाक्योंसे छ कल्याणक श्री वीरप्रसुके प्रत्यक्षपने सिद्ध होते भी ऐसा कौन श्रीजिनाज्ञा विराधक सारीकर्मा निर्लज्जहोगा सो शास्त्र प्रमाण और युक्किपूर्वक प्रत्यक्षसिद्ध बातको भी निषेध करके अपने गच्छकदाग्रहके हठवादके मिथ्यात्त्वको स्थापन करनेका परिश्रम करके भोले जीवोंको भ्रमानेके लिये आगेवान होगा जिसकी तो अब थोड़े ही समय में यह ग्रन्थ प्रगट हुए बाद परीक्षा हो जावेगा और भी पाठकवर्गको विनय विजयजीकी धर्म ठगाईकी मायाचारीका नमूनादिखाता हूं, कि-देखो-खास आपने ही श्री कल्पसूत्रके मूलपाठानुसार सौधर्मेन्द्र ने भगवान्को ब्राह्मण कुलसे क्षत्रिय कुलमें पधारनेका किया सो आचाररूपी धर्म तथा कल्या णकारी है इसलिये गर्भापहार करना निश्चय करके युक्कही है ॥ ऐसा लिखा- जिसका पाठ भावार्थ सहित उपरमें ही छप गया है और फिर ऋषभदत्त ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घर में भगवान्के पधारनेकी व्याख्या करते विशेष करके १ श्लोक में "भव्यजीवोंका कल्याण करनेवाले श्रीवीरप्रभु अच्छा मुहूर्त्त देखकर ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घरे पधारे " ऐसे मतलबकी व्याख्या करी सो श्लोक भी इसीही ग्रन्थके पृष्ठ ५०४ में छप गया है। अब इस जगह परमी विवेकी सज्जनोंको पक्षपात रहित हो करके न्याय दृष्टि से विचार करना चाहिये कि देवानन्दा ब्राह्मणीके उदरसे त्रिशला क्षत्रियाणीके उदर में इन्द्रने भगवान्का पधारना किया सोही गर्भापहार होमेको खास आप विनय विजयजी ही अपनी बनाई बोधिका में प्रगटपने गर्भापहार करानेका इन्द्रका धर्म है कल्याणकारी है सो निश्च य करके युक्तही है और भव्यजीवोंका कल्याणके लिये अच्छा मुहूर्त्त देखकर ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घर में भगवान् पधारे इस तरहका लिखते हैं सो अनन्तपुण्यवाला एक भव अवतारी अनेक तीर्थ कर महाराजोंका भक्त और निर्मल सभ्यत्वरत्नके तथा अवधिज्ञानके धरनेवाला सौधर्मेन्द्रको तो गर्भापहारका होना कल्याणकारी ठहरा तब तो श्री वीरप्रभुके भक्त आत्मार्थी अन्य जीवोंको तो निःसन्देहतापूर्वक निश्चय करके गर्भापहार कल्याणकारी स्वयं सिद्ध होगया इससे तो गर्भापहारको विनय विजयजीके लिखनेके अनुसार भी कल्याणकत्वपना प्रगटपने सिद्ध होता है तथापि विनयविजयजीमे उसीको अतिन्दनौक लिखकर अपने अन्धपरंपरा के मिथ्यात्वकी भ्रमजाल में भोले जीवोंको गेरनेके लिये कल्याणकत्वपमेसे निषेध करनेका परि श्रम किया तो उनकी तात्पर्यार्थ में विवेक बुद्धिकी विकलता कहीजावे, या-जानबुझकर अपने गच्छकदाग्रहकी कल्पित बातको स्थापन करनेरूप अभिनिवेशिकमिथ्यात्व कहाजावे, अथवा विवेक बुद्धि के बिना अपने लिखे वाक्यका भी अर्थ भूल करके तत्त्वज्ञोंसे अपने विद्वत्ताकी हांसी करानेका कारण कहा जावे सो तो निष्पक्षपाती विवेकी पाठकगण अपनी बुद्धिसे आपही विचार लेना चाहिये । और भी देखिये बड़ेही खेदके साथ बहुतही आश्चर्य की बात है कि विनयविजयजीने एक जगह तो गर्भापहारके करानेका इन्द्रका धर्म तथा अवश्य कर्तव्य और कल्याणकारी लिखा फिर इसी बातको अपने अन्तर मिथ्यात्व से पूर्वापरविरोधि वाक्यका भय न करके अतिनिन्दनीक लिखते विवेक बुद्धि बिना विद्वानासे अपनी हांसी करानेकी कुछ भी अपने हृदय में लज्जा नहीं रखखी परन्तु वर्तमान में गच्छकदाग्रहके अन्धपरंपरा में चलने वाले विवेक शून्यतासे साध्वाभास लोग प्रतिवर्षे श्रीपर्युषणा पर्व धर्मध्यानकै दिनोंमें कल्याणकारी बातको भी अति निन्दनीक कहते हुए धर्माधर्मका विचार किये बिना गाडरीह प्रवाहसे निज परके सम्यक्त्वरत्नको नष्ट करनेका और अनन्त भव भ्रमणका हेतु करते कुछ भी लज्जा नहीं रखते हैं। हा हा अति खेदः । इस पञ्चम कालमें तत्वज्ञान रहित, विवेक विकल, विद्वत्ताके अभिमान रूपी अजीर्ण ताक रोगसे ग्रस्त, जैनाभास, उत्सूत्रभाषक, तथा श्रीवीरप्रभुके निन्दक, भारीकर्मे प्राणियोंने शास्त्रों के प्रत्यक्ष प्रसाणोंको भी उत्थापन करके सत्य बातका निषेध करनेके लिये कुयक्कियोंके भ्रमका और भगवंतकी आशातनाका कारण तथा गाढ़ मिथ्यात्व बढ़ानेवाला कैसा कल्पित मार्गको चलाया और चला रहे हैं जिन्होंकी आत्माका संसार में परिभ्रमणका पार कब आवेगा जिसको तो श्रीज्ञानीजी महाराज जाने और ऐसे मिथ्यात्वके मार्ग में जिनाज्ञा विराधक दीर्घ संसारीके सिवाय आत्मार्थी तो कोई भी फसनेका संभव नहीं है तथापि कोई अज्ञान दशासे फसगये होवे उन्होंका तत्काल उद्धार करके श्रीजिनाज्ञा मुजब सत्य बातकी शुद्ध श्रद्धा सम्यक्त्वरत्न उसकी प्राप्तिके लिये ही यह मेरा लिखना अल्पसंसारीको उपयोगी हो सकेगा नतु मिथ्यात्वी दीर्घ संसारके लिये क्योंकि जो सत्यग्रहणकाभिलाषी आत्मार्थी प्राणी होगा सो तो शास्त्रों के प्रमाणानुसार तथा यक्तिपूर्वक सत्य बातको देखते ही तत्काल उसीको ग्रहणकरके अपने अंधपरंपरा के कदाग्रहका शीघ्र त्याग करेगा और भगवान्की आज्ञा मुजब अपने भात्म कल्याण करनेके कार्य में उद्यम करेगा और अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी दीर्घ संदारी होगा सो तो सत्य बातका ग्रहण करने के बदले अपने कल्पित मन्तव्यके कदाग्रहको विशेष पुष्ठकरता हुआ भोले जीवोंको उसीके भ्रममें गेरने के लिये उत्सूत्रभाषणोंका और कुयुक्लियोंके विकल्पोंका संग्रह करके विशेष मिथ्यात्व बढ़ानेका कारण नहीं करेगा तोभी बहुत ही अच्छा है और ऋषभदत्त ब्राह्मणके घरे भगवान्का उत्पन्न होना सो नीच गौत्रका विपाक तथा आश्चर्य रूप होने से गुप्तपने रहे क्योंकि तीर्थंकर की उत्पत्ति सम्बन्धी दुनिया में कोई भी बात प्रगट नहीं हुई जिसको तो कल्याणक मानते हैं और नीच गौत्रका विपाक भोगे बाद भगवान् सिद्धार्थ राजाके घरे पधारे सो प्रगटपने तीर्थंकर उत्पत्तिका बड़ा महोत्सव हुआ तथा तीर्थंकर उत्पत्ति सम्बन्धी दुनिया में भी प्रगटपने बात हुई और शास्त्रकारोंने भी उसीको कल्याणक माना और श्रीपार्श्वनाथस्वामीके श्रीनेमिनाथस्वामी के तथा श्रीआदिनाथस्वामीके तीर्थंकरत्वपने उत्पन्न होने मे माताके चौदह स्वप्नोंकी व्याख्या करने सम्बन्धी भलामण शास्त्रकारोंने श्रीवीरप्रभुके गर्भापहारसे त्रिशलामाताके चौदह स्वप्नोंकी खुलासा पूर्वक दी है इससे भी गर्भापहारको कल्याणकत्वपना सिद्ध है क्योंकि जो गर्भापहारको च्यवन कल्याणककी प्राप्ति नहीं होती तो शास्त्रकार महाराज श्रीपार्श्वनाथस्वामी आदि तीर्थंकर महाराजोंके च्यवन कल्याणक सम्बन्धी चौदह स्वप्नोंका विस्तार करनेके लिये उसीकी भलामण कदापि नहीं देते परन्तु प्रगटपने दी है इसलिये सामान्यता होनेसे गर्भापहारको कल्याणत्वपनेकी अवश्यमेव प्रगटपने प्राप्ति है तथापि उसीका निषेध करके कल्याणक नमाननेके आग्रह में फसकर विशेष करके उसोकी निन्दा करना सो तो प्रत्यक्षपने गच्छकदाग्रह के अभिनिवेशिक मिथ्यात्वके सिवाय और क्या होगा सो पाठकगण स्वयं विचार लेवेंगे, - तथा और भी देखिये गर्भापहारको अति निन्दनीक कहने वाले गच्छसमत्वियको हृदय में विवेक बुद्धि लाकर थोड़ासा भी तो विचार करना चाहिये कि कोई अल्प बुद्धिवाला सामान्य पुरुष भी जान बुझकर निन्दनीक काम नहीं कर सकता है तो फिर अनन्तबुवाले निर्मलअवधिज्ञानी और अनेक तीर्थ कर महाराजोंके परम भक्त तथा धर्मदेशना सुननेवाले एकभव करके ही मोक्ष में जानेवाले सौधर्मेन्द्रने जानबुझ करके गर्भापहारका अतिनिन्दनीक काम क्यों किया, क्योंकि तुम्हारे मन्तव्य मुजब तो गर्भापहार हुआ सो अति निन्दनीक हुआ सो अतिनिन्दनीक काम नहीं होना चाहिये तबतो ब्राह्मण कुल में ऋषभदत्त ब्राह्मणके घर में भगवान्का जन्म होता तो आप लोगोंके अच्छा होता परन्तु शास्त्रकार महाराजोंने तो ब्राह्मण कुलमें भगवान्का जन्म होना अच्छा नहीं समझा और इन्द्र महाराजने भी भगवान्का ब्राह्मण कुल में उत्पन्न होना तथा वहां ब्राह्मण कुल में ही जन्म होना इसको अच्छा नहीं याने अनुचित समझ करके ही तो अपने और दूसरोंके हितके लिये तथा भगवान्की सक्तिके लिये गर्भापहारसे भगवान्को उत्तम कुलमें पधारनेका किया सो उसीको शास्त्रकारोंने खुलासापूर्वक लिखा इससे प्रत्यक्षपने सिद्ध होता है कि गर्भापहार अतिनिन्दनीक नहीं किन्तु अतीव उत्तम तथा कल्याणकारी है इसलिये जो श्रीजिनाज्ञाके अराधक आत्माथ होवेगें सो तो इन्द्र महाराजकी तरह गर्भापहारको अतीव उत्तम तथा कल्याणकारी सान्य करेगें जिन्होंका शुद्ध श्रद्धा से आत्म कल्याण भी शोधू होजानेका संभव है और श्रीजिनाज्ञाके विराधक बहुलसंसारी गच्छंकदाग्रह के मिथ्या हटवादी अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी होवेगें सो ही अति उत्तम कल्याणकारी गर्भापहारको अतिनिन्दनीक तथा अकल्याणकारी कहके श्री वीरप्रभुकी आशातना तथा भव्यजीवोंके आत्म साधनमें विन करेगें और करानेका कारण करेगें जिन्होंकी आत्माका कल्याण होना बहुत ही मुश्किल है इस बातको विवेकी तत्त्वज्ञ पाठक गण स्वयं विचार लेवेंगे, - और अब गर्भापहारको अतिनिन्दनीक कहके श्रीवीर प्रभुकी आशातनासे तथा भोले जीवोंको गच्छकदाग्रहका मिथ्यात्वके भ्रम में गेरनेके लिये उत्सूत्र भाषण से संसार में परिभ्रमणका हेतु करनेवालोंकी अज्ञानताको दूर करने के उपकारके लिये तथा भोले जीवोंके मिथ्यात्व रूपी भ्रमको दूर करके सम्यक्त्व रूपी रत्नकी प्राप्तिका उपकारके लिये गर्भापहारको अतिउत्तमतापूर्वक कल्याणकत्वपना सिद्ध करनेवाला एक दृष्टान्तकी युक्ति के अमृत रूपी औषधको यहां दिखाता हूं जिससे कदाग्रहियों के अन्तर मिथ्यात्व रूप अन्धकारके रोगकी शांति होनेसे सम्यग्ज्ञानका स्वयं प्रकाश होजावेगा, सो देखो - जैसे- गर्भावासका निवास तथा जन्म, जरा, रोग, शोक, आधि, व्याधि, उपाधि, संयोग, वियोग, मृत्यु आदि दुःखोंसे व्याप्त, तथा अशुचि दुर्गन्धमय सात धातुओंसे मिलित मनुष्यका शरीर सो देवताओं के शरीरसे अनन्तगुणाहीण होतेभी उसी में धर्मसाधनका तथा मोक्षगमनका कारण होनेसे उसीको उत्तम कहा, तथा रोगरहित अनन्तशक्तिवाला अनन्तस्वरूपकी कांतिवाला अनन्तसुखवाला नवग्रैवेक निवासी देवताके शरीरको भी दीर्घ संसारी मिथ्यात्वीके लिये बुरा कहा और छेदन भेदन ताडण सारण रोग शोकादि अनन्त दुखोंवाला अतीव दुर्गन्धमय सातवीं नरक वासीके शरीरको भी सम्यक्त्वधारी अल्प संसारीवाले के लिये श्रेष्ठ कहा, तैसेही भगवा६८
उसीको च्यवन कल्याणक मानना छोड़कर आश्विन बदी तेरह को त्रिशला माताके उदर में भगवान् पधारे उसीको च्यवन कल्याणक मान्यकर लेवें, क्योंकि-नीच गौत्रके विपाक से आश्चर्यरूप तथा ब्राह्मण लोगोंसे जैनियोंकी निन्दापूर्वक मिथ्यात्व बढ़नेका कारण तो आषाढ़ शुदी छः को देवानन्दा माताके उदर में भगवान् उत्पन्न हुए सो वहां जन्म होने से ही होता जिसको अर्थात् उपरकी सब बातोंको मिटाने के लिये त्रिशला माताके उदर में पधारे हैं इसीलिये तो उपरोक्त शास्त्रकार महाराजने उसीको भवकी गिनती में लिया । इस जगह परभी विवेकी तत्त्वज्ञोंको न्याय दृष्टि से विचार करना चाहिये कि जब त्रिशलामाताके उदर में भगवान् पधारे तब ही तीर्थंकर भगवान् उत्पन्न होने सम्बन्धी चौदह स्वप्नोंका विस्तारसे वर्णन वगैरह कार्य भी सिद्धार्थ राजाके वहां हुए इसलिये आश्विन बदी तेरह को भगवान्के उत्पन्न होनेको च्यवन कल्याणकत्वपना निश्चय करके निःसन्देहता पूर्वक स्त्रयं सिद्ध हो चुका, इसलिये आश्विन बढ़ी तिरानवे को त्रिशला माता के उदर में भगवान्का पधारना हुआ सो गर्भापहाररूप च्यवन कल्याणकको शास्त्र वाक्य प्रमाण करनेवाले आत्मार्थी तो कोई भी कदापि काले निषेध नहीं करेगा परन्तु दीर्घ संसारी सिध्यात्वियोंके अन्तरका हठवादको तो तीर्थंकर गणधर भी छोड़ाने समर्थ नहीं होसकते तो मेरा लिखना किस हिसाबमें अर्थात् उपरका मेरा लेख सत्यग्रहणाभिलाषी श्रीजिनाज्ञाके आराधकोंको तो हितकारी होगा नतु अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी दुर्लभबोधिजनोंको और सर्वगच्छवालों के माननीय पूज्य श्रीअभयदेव सूरिजी के वचमानुसार श्रीसमवायांगजी थोथे अङ्गकी वृत्तिके वाक्यसै आश्विन बदी तेरह को त्रिशलामाताके उदर में भगवान, पधारनेको उपर्युक्त कारणोंसे कल्याणकत्वपना सिद्ध करके पाठक गणको यहां दिखाया तथा इन्हीं महाराजके वचनानुसार श्रीस्थानांगजी तीसरे अङ्गकी वृत्तिके वाक्यसे और श्री कल्पसूत्रादि अनेक शास्त्रोंके वाक्योंसे छ कल्याणक श्री वीरप्रसुके प्रत्यक्षपने सिद्ध होते भी ऐसा कौन श्रीजिनाज्ञा विराधक सारीकर्मा निर्लज्जहोगा सो शास्त्र प्रमाण और युक्किपूर्वक प्रत्यक्षसिद्ध बातको भी निषेध करके अपने गच्छकदाग्रहके हठवादके मिथ्यात्त्वको स्थापन करनेका परिश्रम करके भोले जीवोंको भ्रमानेके लिये आगेवान होगा जिसकी तो अब थोड़े ही समय में यह ग्रन्थ प्रगट हुए बाद परीक्षा हो जावेगा और भी पाठकवर्गको विनय विजयजीकी धर्म ठगाईकी मायाचारीका नमूनादिखाता हूं, कि-देखो-खास आपने ही श्री कल्पसूत्रके मूलपाठानुसार सौधर्मेन्द्र ने भगवान्को ब्राह्मण कुलसे क्षत्रिय कुलमें पधारनेका किया सो आचाररूपी धर्म तथा कल्या णकारी है इसलिये गर्भापहार करना निश्चय करके युक्कही है ॥ ऐसा लिखा- जिसका पाठ भावार्थ सहित उपरमें ही छप गया है और फिर ऋषभदत्त ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घर में भगवान्के पधारनेकी व्याख्या करते विशेष करके एक श्लोक में "भव्यजीवोंका कल्याण करनेवाले श्रीवीरप्रभु अच्छा मुहूर्त्त देखकर ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घरे पधारे " ऐसे मतलबकी व्याख्या करी सो श्लोक भी इसीही ग्रन्थके पृष्ठ पाँच सौ चार में छप गया है। अब इस जगह परमी विवेकी सज्जनोंको पक्षपात रहित हो करके न्याय दृष्टि से विचार करना चाहिये कि देवानन्दा ब्राह्मणीके उदरसे त्रिशला क्षत्रियाणीके उदर में इन्द्रने भगवान्का पधारना किया सोही गर्भापहार होमेको खास आप विनय विजयजी ही अपनी बनाई बोधिका में प्रगटपने गर्भापहार करानेका इन्द्रका धर्म है कल्याणकारी है सो निश्च य करके युक्तही है और भव्यजीवोंका कल्याणके लिये अच्छा मुहूर्त्त देखकर ब्राह्मणके घरसे सिद्धार्थ राजाके घर में भगवान् पधारे इस तरहका लिखते हैं सो अनन्तपुण्यवाला एक भव अवतारी अनेक तीर्थ कर महाराजोंका भक्त और निर्मल सभ्यत्वरत्नके तथा अवधिज्ञानके धरनेवाला सौधर्मेन्द्रको तो गर्भापहारका होना कल्याणकारी ठहरा तब तो श्री वीरप्रभुके भक्त आत्मार्थी अन्य जीवोंको तो निःसन्देहतापूर्वक निश्चय करके गर्भापहार कल्याणकारी स्वयं सिद्ध होगया इससे तो गर्भापहारको विनय विजयजीके लिखनेके अनुसार भी कल्याणकत्वपना प्रगटपने सिद्ध होता है तथापि विनयविजयजीमे उसीको अतिन्दनौक लिखकर अपने अन्धपरंपरा के मिथ्यात्वकी भ्रमजाल में भोले जीवोंको गेरनेके लिये कल्याणकत्वपमेसे निषेध करनेका परि श्रम किया तो उनकी तात्पर्यार्थ में विवेक बुद्धिकी विकलता कहीजावे, या-जानबुझकर अपने गच्छकदाग्रहकी कल्पित बातको स्थापन करनेरूप अभिनिवेशिकमिथ्यात्व कहाजावे, अथवा विवेक बुद्धि के बिना अपने लिखे वाक्यका भी अर्थ भूल करके तत्त्वज्ञोंसे अपने विद्वत्ताकी हांसी करानेका कारण कहा जावे सो तो निष्पक्षपाती विवेकी पाठकगण अपनी बुद्धिसे आपही विचार लेना चाहिये । और भी देखिये बड़ेही खेदके साथ बहुतही आश्चर्य की बात है कि विनयविजयजीने एक जगह तो गर्भापहारके करानेका इन्द्रका धर्म तथा अवश्य कर्तव्य और कल्याणकारी लिखा फिर इसी बातको अपने अन्तर मिथ्यात्व से पूर्वापरविरोधि वाक्यका भय न करके अतिनिन्दनीक लिखते विवेक बुद्धि बिना विद्वानासे अपनी हांसी करानेकी कुछ भी अपने हृदय में लज्जा नहीं रखखी परन्तु वर्तमान में गच्छकदाग्रहके अन्धपरंपरा में चलने वाले विवेक शून्यतासे साध्वाभास लोग प्रतिवर्षे श्रीपर्युषणा पर्व धर्मध्यानकै दिनोंमें कल्याणकारी बातको भी अति निन्दनीक कहते हुए धर्माधर्मका विचार किये बिना गाडरीह प्रवाहसे निज परके सम्यक्त्वरत्नको नष्ट करनेका और अनन्त भव भ्रमणका हेतु करते कुछ भी लज्जा नहीं रखते हैं। हा हा अति खेदः । इस पञ्चम कालमें तत्वज्ञान रहित, विवेक विकल, विद्वत्ताके अभिमान रूपी अजीर्ण ताक रोगसे ग्रस्त, जैनाभास, उत्सूत्रभाषक, तथा श्रीवीरप्रभुके निन्दक, भारीकर्मे प्राणियोंने शास्त्रों के प्रत्यक्ष प्रसाणोंको भी उत्थापन करके सत्य बातका निषेध करनेके लिये कुयक्कियोंके भ्रमका और भगवंतकी आशातनाका कारण तथा गाढ़ मिथ्यात्व बढ़ानेवाला कैसा कल्पित मार्गको चलाया और चला रहे हैं जिन्होंकी आत्माका संसार में परिभ्रमणका पार कब आवेगा जिसको तो श्रीज्ञानीजी महाराज जाने और ऐसे मिथ्यात्वके मार्ग में जिनाज्ञा विराधक दीर्घ संसारीके सिवाय आत्मार्थी तो कोई भी फसनेका संभव नहीं है तथापि कोई अज्ञान दशासे फसगये होवे उन्होंका तत्काल उद्धार करके श्रीजिनाज्ञा मुजब सत्य बातकी शुद्ध श्रद्धा सम्यक्त्वरत्न उसकी प्राप्तिके लिये ही यह मेरा लिखना अल्पसंसारीको उपयोगी हो सकेगा नतु मिथ्यात्वी दीर्घ संसारके लिये क्योंकि जो सत्यग्रहणकाभिलाषी आत्मार्थी प्राणी होगा सो तो शास्त्रों के प्रमाणानुसार तथा यक्तिपूर्वक सत्य बातको देखते ही तत्काल उसीको ग्रहणकरके अपने अंधपरंपरा के कदाग्रहका शीघ्र त्याग करेगा और भगवान्की आज्ञा मुजब अपने भात्म कल्याण करनेके कार्य में उद्यम करेगा और अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी दीर्घ संदारी होगा सो तो सत्य बातका ग्रहण करने के बदले अपने कल्पित मन्तव्यके कदाग्रहको विशेष पुष्ठकरता हुआ भोले जीवोंको उसीके भ्रममें गेरने के लिये उत्सूत्रभाषणोंका और कुयुक्लियोंके विकल्पोंका संग्रह करके विशेष मिथ्यात्व बढ़ानेका कारण नहीं करेगा तोभी बहुत ही अच्छा है और ऋषभदत्त ब्राह्मणके घरे भगवान्का उत्पन्न होना सो नीच गौत्रका विपाक तथा आश्चर्य रूप होने से गुप्तपने रहे क्योंकि तीर्थंकर की उत्पत्ति सम्बन्धी दुनिया में कोई भी बात प्रगट नहीं हुई जिसको तो कल्याणक मानते हैं और नीच गौत्रका विपाक भोगे बाद भगवान् सिद्धार्थ राजाके घरे पधारे सो प्रगटपने तीर्थंकर उत्पत्तिका बड़ा महोत्सव हुआ तथा तीर्थंकर उत्पत्ति सम्बन्धी दुनिया में भी प्रगटपने बात हुई और शास्त्रकारोंने भी उसीको कल्याणक माना और श्रीपार्श्वनाथस्वामीके श्रीनेमिनाथस्वामी के तथा श्रीआदिनाथस्वामीके तीर्थंकरत्वपने उत्पन्न होने मे माताके चौदह स्वप्नोंकी व्याख्या करने सम्बन्धी भलामण शास्त्रकारोंने श्रीवीरप्रभुके गर्भापहारसे त्रिशलामाताके चौदह स्वप्नोंकी खुलासा पूर्वक दी है इससे भी गर्भापहारको कल्याणकत्वपना सिद्ध है क्योंकि जो गर्भापहारको च्यवन कल्याणककी प्राप्ति नहीं होती तो शास्त्रकार महाराज श्रीपार्श्वनाथस्वामी आदि तीर्थंकर महाराजोंके च्यवन कल्याणक सम्बन्धी चौदह स्वप्नोंका विस्तार करनेके लिये उसीकी भलामण कदापि नहीं देते परन्तु प्रगटपने दी है इसलिये सामान्यता होनेसे गर्भापहारको कल्याणत्वपनेकी अवश्यमेव प्रगटपने प्राप्ति है तथापि उसीका निषेध करके कल्याणक नमाननेके आग्रह में फसकर विशेष करके उसोकी निन्दा करना सो तो प्रत्यक्षपने गच्छकदाग्रह के अभिनिवेशिक मिथ्यात्वके सिवाय और क्या होगा सो पाठकगण स्वयं विचार लेवेंगे, - तथा और भी देखिये गर्भापहारको अति निन्दनीक कहने वाले गच्छसमत्वियको हृदय में विवेक बुद्धि लाकर थोड़ासा भी तो विचार करना चाहिये कि कोई अल्प बुद्धिवाला सामान्य पुरुष भी जान बुझकर निन्दनीक काम नहीं कर सकता है तो फिर अनन्तबुवाले निर्मलअवधिज्ञानी और अनेक तीर्थ कर महाराजोंके परम भक्त तथा धर्मदेशना सुननेवाले एकभव करके ही मोक्ष में जानेवाले सौधर्मेन्द्रने जानबुझ करके गर्भापहारका अतिनिन्दनीक काम क्यों किया, क्योंकि तुम्हारे मन्तव्य मुजब तो गर्भापहार हुआ सो अति निन्दनीक हुआ सो अतिनिन्दनीक काम नहीं होना चाहिये तबतो ब्राह्मण कुल में ऋषभदत्त ब्राह्मणके घर में भगवान्का जन्म होता तो आप लोगोंके अच्छा होता परन्तु शास्त्रकार महाराजोंने तो ब्राह्मण कुलमें भगवान्का जन्म होना अच्छा नहीं समझा और इन्द्र महाराजने भी भगवान्का ब्राह्मण कुल में उत्पन्न होना तथा वहां ब्राह्मण कुल में ही जन्म होना इसको अच्छा नहीं याने अनुचित समझ करके ही तो अपने और दूसरोंके हितके लिये तथा भगवान्की सक्तिके लिये गर्भापहारसे भगवान्को उत्तम कुलमें पधारनेका किया सो उसीको शास्त्रकारोंने खुलासापूर्वक लिखा इससे प्रत्यक्षपने सिद्ध होता है कि गर्भापहार अतिनिन्दनीक नहीं किन्तु अतीव उत्तम तथा कल्याणकारी है इसलिये जो श्रीजिनाज्ञाके अराधक आत्माथ होवेगें सो तो इन्द्र महाराजकी तरह गर्भापहारको अतीव उत्तम तथा कल्याणकारी सान्य करेगें जिन्होंका शुद्ध श्रद्धा से आत्म कल्याण भी शोधू होजानेका संभव है और श्रीजिनाज्ञाके विराधक बहुलसंसारी गच्छंकदाग्रह के मिथ्या हटवादी अभिनिवेशिक मिथ्यात्वी होवेगें सो ही अति उत्तम कल्याणकारी गर्भापहारको अतिनिन्दनीक तथा अकल्याणकारी कहके श्री वीरप्रभुकी आशातना तथा भव्यजीवोंके आत्म साधनमें विन करेगें और करानेका कारण करेगें जिन्होंकी आत्माका कल्याण होना बहुत ही मुश्किल है इस बातको विवेकी तत्त्वज्ञ पाठक गण स्वयं विचार लेवेंगे, - और अब गर्भापहारको अतिनिन्दनीक कहके श्रीवीर प्रभुकी आशातनासे तथा भोले जीवोंको गच्छकदाग्रहका मिथ्यात्वके भ्रम में गेरनेके लिये उत्सूत्र भाषण से संसार में परिभ्रमणका हेतु करनेवालोंकी अज्ञानताको दूर करने के उपकारके लिये तथा भोले जीवोंके मिथ्यात्व रूपी भ्रमको दूर करके सम्यक्त्व रूपी रत्नकी प्राप्तिका उपकारके लिये गर्भापहारको अतिउत्तमतापूर्वक कल्याणकत्वपना सिद्ध करनेवाला एक दृष्टान्तकी युक्ति के अमृत रूपी औषधको यहां दिखाता हूं जिससे कदाग्रहियों के अन्तर मिथ्यात्व रूप अन्धकारके रोगकी शांति होनेसे सम्यग्ज्ञानका स्वयं प्रकाश होजावेगा, सो देखो - जैसे- गर्भावासका निवास तथा जन्म, जरा, रोग, शोक, आधि, व्याधि, उपाधि, संयोग, वियोग, मृत्यु आदि दुःखोंसे व्याप्त, तथा अशुचि दुर्गन्धमय सात धातुओंसे मिलित मनुष्यका शरीर सो देवताओं के शरीरसे अनन्तगुणाहीण होतेभी उसी में धर्मसाधनका तथा मोक्षगमनका कारण होनेसे उसीको उत्तम कहा, तथा रोगरहित अनन्तशक्तिवाला अनन्तस्वरूपकी कांतिवाला अनन्तसुखवाला नवग्रैवेक निवासी देवताके शरीरको भी दीर्घ संसारी मिथ्यात्वीके लिये बुरा कहा और छेदन भेदन ताडण सारण रोग शोकादि अनन्त दुखोंवाला अतीव दुर्गन्धमय सातवीं नरक वासीके शरीरको भी सम्यक्त्वधारी अल्प संसारीवाले के लिये श्रेष्ठ कहा, तैसेही भगवाअड़सठ
हाल ही में Redmi General Manager, Lu Weibing, ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अपकमिंग Redmi K20 series में यूज़र्स को Dual-Band GPS सपोर्ट मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फ़ोन को कंपनी 28 मई को लॉन्च करने वाली है। इससे पहले ही इस Redmi K20 स्मार्टफोन को लेकर कई खबरें सामने आ रहीं हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि यह स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर से लैस हो सकता है। साथ ही एक ताज़ा पोस्टर टीज़ किया गया है जिसमें स्मार्टफोन को gradient blue design के साथ पेश किया गया है। साथ ही इसमें पॉप-अप कैमरा होने की भी उम्मीद की जा रही है। चीन में आधिकारिक लॉन्च से पहले Redmi अपने आगामी Redmi K20 से संबंधित टीज़र जारी कर रही है। लेटेस्ट टीज़र में कंपनी ने खुलासा किया है कि रेडमी K20 में अल्ट्रा-लाइनर स्पीकर बड़े 0.9 सीसी फिजिकल कैविटी में होगा। साथ ही हाल ही में आये टीज़र से इस बात का का भी पता चला था कि Redmi K20 बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस के लिए गेम टर्बो 2.0 के साथ आएगा। यह गेम टर्बो फीचर का नया अवतार होगा। आपको बता दें कि इस फीचर को नए मीयूआई ग्लोबल बीटा अपडेट के ज़रिए Poco F1 में शामिल किया गया था। Weibo पर Redmi ने Redmi K20 में डीसी डिमिंग फीचर दिए जाने की बात कही है और साथ ही डिवाइस को हाइ-रेज़ ऑडियो सपोर्ट के साथ लाने की बात कही गयी है। इसमें 3.5 एमएम हेडफोन जैक होगा। स्मार्टफोन के बारे में एडवांस्ड ऑडियो एक्सपीरियंस देने का दावा है। Redmi K20 को जहां चीन में 28 मई को लॉन्च किया जाएगा, वहीं इसे भारत में कब लाया जाएगा, इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में 4,000 एमएएच की बैटरी, 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर दिया जा सकता और साथ ही Redmi K20 फुल-एचडी + रिज़ॉल्यूशन के साथ 6.39-इंच के एमोलेड डिस्प्ले के साथ दो रैम वेरिएंट में आ सकता है जिसमें 6 जीबी और 8 जीबी रैम शामिल हैं। वहीँ स्टोरेज में 64 जीबी, 128 जीबी और 256 जीबी स्टोरेज दिया जा सकता है। स्मार्टफोन में 4,000 एमएएच की बैटरी और 48 मेगापिक्सल का कैमरा सेंसर हो सकता है। नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें!
हाल ही में Redmi General Manager, Lu Weibing, ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अपकमिंग Redmi Kबीस series में यूज़र्स को Dual-Band GPS सपोर्ट मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फ़ोन को कंपनी अट्ठाईस मई को लॉन्च करने वाली है। इससे पहले ही इस Redmi Kबीस स्मार्टफोन को लेकर कई खबरें सामने आ रहीं हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि यह स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन प्रोसेसर से लैस हो सकता है। साथ ही एक ताज़ा पोस्टर टीज़ किया गया है जिसमें स्मार्टफोन को gradient blue design के साथ पेश किया गया है। साथ ही इसमें पॉप-अप कैमरा होने की भी उम्मीद की जा रही है। चीन में आधिकारिक लॉन्च से पहले Redmi अपने आगामी Redmi Kबीस से संबंधित टीज़र जारी कर रही है। लेटेस्ट टीज़र में कंपनी ने खुलासा किया है कि रेडमी Kबीस में अल्ट्रा-लाइनर स्पीकर बड़े शून्य.नौ सीसी फिजिकल कैविटी में होगा। साथ ही हाल ही में आये टीज़र से इस बात का का भी पता चला था कि Redmi Kबीस बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस के लिए गेम टर्बो दो.शून्य के साथ आएगा। यह गेम टर्बो फीचर का नया अवतार होगा। आपको बता दें कि इस फीचर को नए मीयूआई ग्लोबल बीटा अपडेट के ज़रिए Poco Fएक में शामिल किया गया था। Weibo पर Redmi ने Redmi Kबीस में डीसी डिमिंग फीचर दिए जाने की बात कही है और साथ ही डिवाइस को हाइ-रेज़ ऑडियो सपोर्ट के साथ लाने की बात कही गयी है। इसमें तीन.पाँच एमएम हेडफोन जैक होगा। स्मार्टफोन के बारे में एडवांस्ड ऑडियो एक्सपीरियंस देने का दावा है। Redmi Kबीस को जहां चीन में अट्ठाईस मई को लॉन्च किया जाएगा, वहीं इसे भारत में कब लाया जाएगा, इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में चार,शून्य एमएएच की बैटरी, अड़तालीस मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन प्रोसेसर दिया जा सकता और साथ ही Redmi Kबीस फुल-एचडी + रिज़ॉल्यूशन के साथ छः.उनतालीस-इंच के एमोलेड डिस्प्ले के साथ दो रैम वेरिएंट में आ सकता है जिसमें छः जीबी और आठ जीबी रैम शामिल हैं। वहीँ स्टोरेज में चौंसठ जीबी, एक सौ अट्ठाईस जीबी और दो सौ छप्पन जीबी स्टोरेज दिया जा सकता है। स्मार्टफोन में चार,शून्य एमएएच की बैटरी और अड़तालीस मेगापिक्सल का कैमरा सेंसर हो सकता है। नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें!
भिंड, 6 जून। नायब तहसीलदार के रीडर को लोकायुक्त की टीम ने सोमवार के दिन ₹10000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। नायब तहसीलदार का रीडर नामांतरण के बदले में एक किसान से यह रिश्वत ले रहा था। किसान ने इस बात की शिकायत लोकायुक्त ग्वालियर में की थी। इसके बाद लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने योजना बनाते हुए रिश्वतखोर बाबू को पकड़ लिया। टुडीला गांव के किसान नेतराम कुशवाहा ने अपने पिताजी और चाचा जी की जमीन बंटवारे का एक आवेदन तहसील में लगाया था लेकिन यहां उनके लगाए गए आवेदन पर कोई काम नहीं हो रहा था। जिसके बाद नेतराम ने जब नायब तहसीलदार के रीडर मनीष शर्मा से संपर्क किया तो मनीष शर्मा ने उनका काम करने के बदले में ₹15000 की रिश्वत मांगी। नेतराम कुशवाहा से जब रीडर ने ₹15000 की रिश्वत मांगी तो नेतराम सीधा ग्वालियर लोकायुक्त के पास पहुंचा और यहां उसने रीडर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की बात बताई। इसके बाद ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने इस मामले में कार्रवाई करना शुरू कर दिया। लोकायुक्त की टीम ने नेतराम कुशवाहा को एक टेप रिकॉर्डर दिया। इस टेप रिकॉर्डर में नेतराम कुशवाहा ने मनीष शर्मा से रिश्वत लेनदेन की बातचीत रिकॉर्ड कर ली और इसी रिकॉर्ड बातचीत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने रीडर मनीष शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया और इसके बाद उसे पकड़ने की योजना बनाई। लोकायुक्त की टीम की योजना के अनुसार नेतराम कुशवाहा ₹10000 की रिश्वत लेकर गोहद पहुंचा। यहां रीडर मनीष शर्मा ने अपनी निजी कार में बैठकर रिश्वत के ₹10000 ले लिए। इसके बाद नेतराम कार से उतर गया। इशारा पाते ही लोकायुक्त की टीम ने रीडर मनीष शर्मा को पकड़ लिया।
भिंड, छः जून। नायब तहसीलदार के रीडर को लोकायुक्त की टीम ने सोमवार के दिन दस हज़ार रुपया की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। नायब तहसीलदार का रीडर नामांतरण के बदले में एक किसान से यह रिश्वत ले रहा था। किसान ने इस बात की शिकायत लोकायुक्त ग्वालियर में की थी। इसके बाद लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने योजना बनाते हुए रिश्वतखोर बाबू को पकड़ लिया। टुडीला गांव के किसान नेतराम कुशवाहा ने अपने पिताजी और चाचा जी की जमीन बंटवारे का एक आवेदन तहसील में लगाया था लेकिन यहां उनके लगाए गए आवेदन पर कोई काम नहीं हो रहा था। जिसके बाद नेतराम ने जब नायब तहसीलदार के रीडर मनीष शर्मा से संपर्क किया तो मनीष शर्मा ने उनका काम करने के बदले में पंद्रह हज़ार रुपया की रिश्वत मांगी। नेतराम कुशवाहा से जब रीडर ने पंद्रह हज़ार रुपया की रिश्वत मांगी तो नेतराम सीधा ग्वालियर लोकायुक्त के पास पहुंचा और यहां उसने रीडर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की बात बताई। इसके बाद ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने इस मामले में कार्रवाई करना शुरू कर दिया। लोकायुक्त की टीम ने नेतराम कुशवाहा को एक टेप रिकॉर्डर दिया। इस टेप रिकॉर्डर में नेतराम कुशवाहा ने मनीष शर्मा से रिश्वत लेनदेन की बातचीत रिकॉर्ड कर ली और इसी रिकॉर्ड बातचीत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने रीडर मनीष शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया और इसके बाद उसे पकड़ने की योजना बनाई। लोकायुक्त की टीम की योजना के अनुसार नेतराम कुशवाहा दस हज़ार रुपया की रिश्वत लेकर गोहद पहुंचा। यहां रीडर मनीष शर्मा ने अपनी निजी कार में बैठकर रिश्वत के दस हज़ार रुपया ले लिए। इसके बाद नेतराम कार से उतर गया। इशारा पाते ही लोकायुक्त की टीम ने रीडर मनीष शर्मा को पकड़ लिया।
भारत में त्यौहार हो या शादी, हर अवसर पर कुछ न कुछ मज़ेदार खाने को मिल ही जाता हैं और लोग भी खूब चटकारे लेकर इन व्यंजनों का मज़ा लेने से नहीं चूकते। बाँदा शहर के ब्लॉक तिन्दवारी में ऐसी परम्परा है जो काफी समय से चली आ रही हैं। यहाँ शादियों में दो व्यंजन ऐसे बनते हैं, जो अगर न बने तो वह शादी नहीं मानी जाती। इन वव्यंजनों का नाम माठ लड्डू और गूना हैं । यह दोनों चीज़े देसी वह शुद्ध चने के बेसन और सत्तू से बनती हैं। ऐसा माना जाता है कि इन व्यनजनों को अगर लड़की के साथ उसके ससुराल भेजा जाता है तो वह शुभ माना जाता है। यह व्यंजन केवल शादियों में ही बनते हैं और लड़की के मायके से बनकर उसके साथ ससुराल भेजे जाते हैं। वैसे आज कल शादी, त्यौहार मैरिज हाल में होने लगी है, और इनका फैशन भी बदल गया है लेकिन कुछ चीज़े ऐसी है जिनकी परम्परा आज भी कायम है , जैसे यहाँ के माठ लड्डू और गूना । घर के बड़े-बूढ़े तो इस प्रथा को मानते ही है, नवजवान लोग भी इस प्रथा में काफी विश्वास रखते हैं। वहाँ के निवासी रितेश कुमार गुप्ता का कहना है कि ये दोनों व्यजन जितना शादियों में खाने में अच्छे लगते है, उतना अगर इन्हे आम दिनों में बनाया जाए तो इनके स्वाद में कमी लगती है, चाहे जितने भी अच्छे क्यूँ न बने हो। वह कहते है कि कुछ चीज़े समय के हिसाब से सही लगती है। अलग स्थानों पर अलग चीज़ों की बात ही कुछ और होती है।
भारत में त्यौहार हो या शादी, हर अवसर पर कुछ न कुछ मज़ेदार खाने को मिल ही जाता हैं और लोग भी खूब चटकारे लेकर इन व्यंजनों का मज़ा लेने से नहीं चूकते। बाँदा शहर के ब्लॉक तिन्दवारी में ऐसी परम्परा है जो काफी समय से चली आ रही हैं। यहाँ शादियों में दो व्यंजन ऐसे बनते हैं, जो अगर न बने तो वह शादी नहीं मानी जाती। इन वव्यंजनों का नाम माठ लड्डू और गूना हैं । यह दोनों चीज़े देसी वह शुद्ध चने के बेसन और सत्तू से बनती हैं। ऐसा माना जाता है कि इन व्यनजनों को अगर लड़की के साथ उसके ससुराल भेजा जाता है तो वह शुभ माना जाता है। यह व्यंजन केवल शादियों में ही बनते हैं और लड़की के मायके से बनकर उसके साथ ससुराल भेजे जाते हैं। वैसे आज कल शादी, त्यौहार मैरिज हाल में होने लगी है, और इनका फैशन भी बदल गया है लेकिन कुछ चीज़े ऐसी है जिनकी परम्परा आज भी कायम है , जैसे यहाँ के माठ लड्डू और गूना । घर के बड़े-बूढ़े तो इस प्रथा को मानते ही है, नवजवान लोग भी इस प्रथा में काफी विश्वास रखते हैं। वहाँ के निवासी रितेश कुमार गुप्ता का कहना है कि ये दोनों व्यजन जितना शादियों में खाने में अच्छे लगते है, उतना अगर इन्हे आम दिनों में बनाया जाए तो इनके स्वाद में कमी लगती है, चाहे जितने भी अच्छे क्यूँ न बने हो। वह कहते है कि कुछ चीज़े समय के हिसाब से सही लगती है। अलग स्थानों पर अलग चीज़ों की बात ही कुछ और होती है।
गीता जयंती महोत्सव की शुरुआत हवन-यज्ञ और मंत्रोच्चारण से हुई। सांसद नायब सिंह सैनी व विधायक लीलाराम ने हवन-यज्ञ में पूर्ण आहूति डाली और मंत्रोच्चारण के बीच हमारी सामाजिक और आध्यात्मिक परंपरा का निर्वाह करते हुए प्रवचनों को भी सुना। हवन-यज्ञ के बाद सांसद और विधायक ने सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंंभ नारियल तोड़कर किया। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति द्वारा लगाए गए आध्यात्मिक पंडाल में ज्योति प्रज्वलित की और इसी के साथ ही उन्होंने एक-एक करके सभी स्टॉलों का अवलोकन किया। सांसद नायब सिंह सैनी ने इस मौके पर अपनी अभिव्यक्ति में कहा कि गीता जयंती महोत्सव हमारी संस्कृति और सभ्यता को उजागर करता ही है और साथ ही हमारे पुरखों और पूर्वजों ने हमें जो सीख दी है उसको आगे बढ़ाने की जरूरत है। विधायक लीला राम ने कहा कि कुरूक्षेत्र गीता की जन्म स्थली है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सांसद नायब सिंह सैनी और विधायक लीला राम ने ज्योति प्रज्वलित करके की। जिला प्रशासन द्वारा सांसद और विधायक को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। मलिक, कार्यकारी अधिकारी हिमांशु लाटका, राहुल शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। गीता जयंती समारोह स्थल पर यज्ञ-हवन की व्यवस्था डॉ. मनोज शर्मा द्वारा करवाई गई। आचार्य रामकुमार शर्मा, राधेश्याम, मुकेश, राजेश, विनायक, शुभम सहित समाजसेवी संस्थाओं और ऐच्छिक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य विद्वान भी मौजूद रहे। नगाड़ा पार्टी, कच्ची घोड़ी, लौंग मैन, बीन-बांसुरी, हरियाणवी आर्केस्ट्रा, शिव नृत्य ने दर्शकों को खूब मंत्र मुग्ध किया।
गीता जयंती महोत्सव की शुरुआत हवन-यज्ञ और मंत्रोच्चारण से हुई। सांसद नायब सिंह सैनी व विधायक लीलाराम ने हवन-यज्ञ में पूर्ण आहूति डाली और मंत्रोच्चारण के बीच हमारी सामाजिक और आध्यात्मिक परंपरा का निर्वाह करते हुए प्रवचनों को भी सुना। हवन-यज्ञ के बाद सांसद और विधायक ने सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंंभ नारियल तोड़कर किया। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति द्वारा लगाए गए आध्यात्मिक पंडाल में ज्योति प्रज्वलित की और इसी के साथ ही उन्होंने एक-एक करके सभी स्टॉलों का अवलोकन किया। सांसद नायब सिंह सैनी ने इस मौके पर अपनी अभिव्यक्ति में कहा कि गीता जयंती महोत्सव हमारी संस्कृति और सभ्यता को उजागर करता ही है और साथ ही हमारे पुरखों और पूर्वजों ने हमें जो सीख दी है उसको आगे बढ़ाने की जरूरत है। विधायक लीला राम ने कहा कि कुरूक्षेत्र गीता की जन्म स्थली है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सांसद नायब सिंह सैनी और विधायक लीला राम ने ज्योति प्रज्वलित करके की। जिला प्रशासन द्वारा सांसद और विधायक को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। मलिक, कार्यकारी अधिकारी हिमांशु लाटका, राहुल शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। गीता जयंती समारोह स्थल पर यज्ञ-हवन की व्यवस्था डॉ. मनोज शर्मा द्वारा करवाई गई। आचार्य रामकुमार शर्मा, राधेश्याम, मुकेश, राजेश, विनायक, शुभम सहित समाजसेवी संस्थाओं और ऐच्छिक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य विद्वान भी मौजूद रहे। नगाड़ा पार्टी, कच्ची घोड़ी, लौंग मैन, बीन-बांसुरी, हरियाणवी आर्केस्ट्रा, शिव नृत्य ने दर्शकों को खूब मंत्र मुग्ध किया।
जेहि कर कुबरि सीघ्रो कीन्हों, जेहि कर गोप बचाय लिये रे । जेहि कर जगत विचित्र बनायो, जेहि कर प्रभु सुर काज किये रे ।। सोइ कर श्याम धरहिं 'श्यामा' सिर तबहूँ कि भव सन्ताप हिये रे । जेहि कर विषधर कालिहि नाथ्यो, जेहि कर अम्बर फेर दिये रे ।। - श्यामबाला देवी, कानपुर भ्रमर ! तू क्यों होता प्रेमान्ध १ जग में प्रेमी दुख पाते हैं, नहीं ज्ञात मकरंद ? इससे कहती हूँ मत आना, कभी हमारे फंद । माना, कमल परम कोमल है, उज्ज्वल है ज्यों चन्द, पर आखिर वह पंकज ही है, तू रसिकों का इन्द्र । नाच नाच कर उसके ऊपर, क्यों गातानित छंद ? नहीं जानता, संध्या होते, होगा खिलना बंद ? रह तू मुझ से दूर सदा ही, सुन ले ऐ मतिमंद ।। भ्रमर है नहीं किसी के फंद । कोमल कमल परम उज्वल है, नहीं भ्रमर है अन्ध । उसकी ही खुशबू भाती है, उसकी ही दुर्गन्ध ।। शशि का डर कुछ रहा नहीं है, निर्भय है मकरंद । हाँ, वह नित गावेगा उस पर प्रेम सने कुछ छंद । विपदायें आती हैं आवें - वे भी हैं स्वच्छन्द । अगर उसे रस के लेने में, होगा अधिक विलंब ।। तो उसको परवाह नहीं है, हो जाने दो बन्द । मधुप कमल की परिक्रमा में लेगा अति आनन्द ।। भ्रमरा इसमें न्याय निरखता - हो चकोर का चंद। भोले कमल ! सत्य कहना तुम क्या वह है मतिमंद ? - सरला देवी, भिंड, ग्वालियर कली से --- कली, तेरी यह सुन्दर काँति, दीखती कोमलता का रूप । भ्रांति की है प्रतिमा साकार, प्रवञ्चकता की केलि अनूप ॥ किन्तु प्रेमी की अविरल टेक, मिलन आशा का सुन्दर राग । त्यागमय फिर नैसर्गिक गान, राग में राग-हीन अनुराग ।। हृदय की विह्वलता में लीन, निराशा के तम में प्रवृत्त । प्ररणय में वीतराग संगीत, गीत गाता हो कर उद्भ्रान्त । देख तेरा पट हृदय विदीर्ण, दया के भावों में संलग्न । प्रणय-पथ में होकर आरूढ़, निछावर हो जाता हो मौन ॥ शीत में अग्नि-शिखा को देख, तुम्हारे नेह भंग की बात । जान, करता है हाहाकार, कृष्ण उसका हो जाता गात । किन्तु आशा की किंचित क्षीण, रश्मि का पाकर भी आभास । चूमता है चरणों की रेणु, मधुप करता मधु में विश्वास । मान उसको रमरणी का मान, 'मान' पर खो देता निज ताप । पोंछता है नयनों का नीर, सुनाता है अपना संताप ।। प्रणय में प्रेम-नेम का भाव, भाव ही है जीवन का सार । भाव में भाव-हीनता देख, मधुप भावुक करता गुजार ।। तुम्हारी निष्ठुरता पर सॉस, छोड़ता है ज्वाला का स्रोत । इसीसे तो तव निष्ठुर गात, अभि से होता ओतप्रोत । रूप का वह सारा अभिमान, तरुण-यौवन का उन्मद वेष । स्रसता सौरभ का सुविकास, नहीं रहता कुछ भी अवशेष । प्रिया का यह मुरझाना देख, देख उसके जीवन का अन्त । बहाता है नयनों का नीर, नीर में गाकर राग अनन्त ।। कभी पुष्पों के जाकर पास, कभी लतिका के सुन्दर देश । प्रेम का गाता है वह गान, प्रणय का ही देता सन्देश । प्रेम जीवन का है उत्सर्ग, प्रेम ही है जग का सुविधान । प्रेम है अखिल विश्व का तत्व, प्रेम ही में मिलते भगवान ।। प्रेम-रस का कर सुन्दर पान, कली का छुट जाता अभिमान । लताएँ हो जातीं नवनीत, हाय ! नारी का 'चञ्चल-मान' ।। नहीं करता है वह दृगपात, नहीं करता कलियों से प्रेम । प्रिया की निष्ठुरता कर याद, निभाता है प्रेमी का नेम ॥ लताओं की कलियों के पास और रोदन करता है नित्य । सुनाता है करके गुञ्जार, 'रूप का ही है रूप अनित्य ।। सींचता है वह चिर-इतिहास, याचता है नहिं सौरभ-दान । अन्य रमणी से करना प्रेम, प्रेम का करना है अपमान ।। मधुप प्रेमी का सत्य-स्नेह, निठुर कलियों का निष्ठुर मान । देख रोएगा यह संसार, 'मान पर हो जाना बलिदान' ॥ - महादेवी शर्मा, लाहौर एरे मलिन्द मन ! तू किस रंग में रँगा है। संसार घोर बन में, दुख दैत्य के भवन में, मकरंद-मोद ढूंढ़े, हा मोह ने ठगा है। सुख शांति को स्वजन में, ज्यों फूल को गगन में, पाने की हर समय तू, उद्योग में लगा है। ये मालती चमेली, आपत्ति की सहेली, सर्वस्व दे उन्हें तू, नव नेह में पगा है । जो कल कली खिली थी, आमोद से मिली थी, वे नहीं दिखातीं, फिर भी न तू जगा है। जिस फूल पर निछावर, करता है प्रारण भी वर, हा मूढ़ वह सदा ही, देता तुझे दग़ा है । बहु वेदना सही है, जाती न जो कही है, मिथ्या सुरस का लोभी, अव भी नहीं भगा है ।
जेहि कर कुबरि सीघ्रो कीन्हों, जेहि कर गोप बचाय लिये रे । जेहि कर जगत विचित्र बनायो, जेहि कर प्रभु सुर काज किये रे ।। सोइ कर श्याम धरहिं 'श्यामा' सिर तबहूँ कि भव सन्ताप हिये रे । जेहि कर विषधर कालिहि नाथ्यो, जेहि कर अम्बर फेर दिये रे ।। - श्यामबाला देवी, कानपुर भ्रमर ! तू क्यों होता प्रेमान्ध एक जग में प्रेमी दुख पाते हैं, नहीं ज्ञात मकरंद ? इससे कहती हूँ मत आना, कभी हमारे फंद । माना, कमल परम कोमल है, उज्ज्वल है ज्यों चन्द, पर आखिर वह पंकज ही है, तू रसिकों का इन्द्र । नाच नाच कर उसके ऊपर, क्यों गातानित छंद ? नहीं जानता, संध्या होते, होगा खिलना बंद ? रह तू मुझ से दूर सदा ही, सुन ले ऐ मतिमंद ।। भ्रमर है नहीं किसी के फंद । कोमल कमल परम उज्वल है, नहीं भ्रमर है अन्ध । उसकी ही खुशबू भाती है, उसकी ही दुर्गन्ध ।। शशि का डर कुछ रहा नहीं है, निर्भय है मकरंद । हाँ, वह नित गावेगा उस पर प्रेम सने कुछ छंद । विपदायें आती हैं आवें - वे भी हैं स्वच्छन्द । अगर उसे रस के लेने में, होगा अधिक विलंब ।। तो उसको परवाह नहीं है, हो जाने दो बन्द । मधुप कमल की परिक्रमा में लेगा अति आनन्द ।। भ्रमरा इसमें न्याय निरखता - हो चकोर का चंद। भोले कमल ! सत्य कहना तुम क्या वह है मतिमंद ? - सरला देवी, भिंड, ग्वालियर कली से --- कली, तेरी यह सुन्दर काँति, दीखती कोमलता का रूप । भ्रांति की है प्रतिमा साकार, प्रवञ्चकता की केलि अनूप ॥ किन्तु प्रेमी की अविरल टेक, मिलन आशा का सुन्दर राग । त्यागमय फिर नैसर्गिक गान, राग में राग-हीन अनुराग ।। हृदय की विह्वलता में लीन, निराशा के तम में प्रवृत्त । प्ररणय में वीतराग संगीत, गीत गाता हो कर उद्भ्रान्त । देख तेरा पट हृदय विदीर्ण, दया के भावों में संलग्न । प्रणय-पथ में होकर आरूढ़, निछावर हो जाता हो मौन ॥ शीत में अग्नि-शिखा को देख, तुम्हारे नेह भंग की बात । जान, करता है हाहाकार, कृष्ण उसका हो जाता गात । किन्तु आशा की किंचित क्षीण, रश्मि का पाकर भी आभास । चूमता है चरणों की रेणु, मधुप करता मधु में विश्वास । मान उसको रमरणी का मान, 'मान' पर खो देता निज ताप । पोंछता है नयनों का नीर, सुनाता है अपना संताप ।। प्रणय में प्रेम-नेम का भाव, भाव ही है जीवन का सार । भाव में भाव-हीनता देख, मधुप भावुक करता गुजार ।। तुम्हारी निष्ठुरता पर सॉस, छोड़ता है ज्वाला का स्रोत । इसीसे तो तव निष्ठुर गात, अभि से होता ओतप्रोत । रूप का वह सारा अभिमान, तरुण-यौवन का उन्मद वेष । स्रसता सौरभ का सुविकास, नहीं रहता कुछ भी अवशेष । प्रिया का यह मुरझाना देख, देख उसके जीवन का अन्त । बहाता है नयनों का नीर, नीर में गाकर राग अनन्त ।। कभी पुष्पों के जाकर पास, कभी लतिका के सुन्दर देश । प्रेम का गाता है वह गान, प्रणय का ही देता सन्देश । प्रेम जीवन का है उत्सर्ग, प्रेम ही है जग का सुविधान । प्रेम है अखिल विश्व का तत्व, प्रेम ही में मिलते भगवान ।। प्रेम-रस का कर सुन्दर पान, कली का छुट जाता अभिमान । लताएँ हो जातीं नवनीत, हाय ! नारी का 'चञ्चल-मान' ।। नहीं करता है वह दृगपात, नहीं करता कलियों से प्रेम । प्रिया की निष्ठुरता कर याद, निभाता है प्रेमी का नेम ॥ लताओं की कलियों के पास और रोदन करता है नित्य । सुनाता है करके गुञ्जार, 'रूप का ही है रूप अनित्य ।। सींचता है वह चिर-इतिहास, याचता है नहिं सौरभ-दान । अन्य रमणी से करना प्रेम, प्रेम का करना है अपमान ।। मधुप प्रेमी का सत्य-स्नेह, निठुर कलियों का निष्ठुर मान । देख रोएगा यह संसार, 'मान पर हो जाना बलिदान' ॥ - महादेवी शर्मा, लाहौर एरे मलिन्द मन ! तू किस रंग में रँगा है। संसार घोर बन में, दुख दैत्य के भवन में, मकरंद-मोद ढूंढ़े, हा मोह ने ठगा है। सुख शांति को स्वजन में, ज्यों फूल को गगन में, पाने की हर समय तू, उद्योग में लगा है। ये मालती चमेली, आपत्ति की सहेली, सर्वस्व दे उन्हें तू, नव नेह में पगा है । जो कल कली खिली थी, आमोद से मिली थी, वे नहीं दिखातीं, फिर भी न तू जगा है। जिस फूल पर निछावर, करता है प्रारण भी वर, हा मूढ़ वह सदा ही, देता तुझे दग़ा है । बहु वेदना सही है, जाती न जो कही है, मिथ्या सुरस का लोभी, अव भी नहीं भगा है ।
चर्चा में क्यों? राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के विरुद्ध लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा के कृत्य को संज्ञेय और गैर-ज़मानती अपराध घोषित करने वाले अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है। - ध्यातव्य है कि देश भर में स्वास्थ्यकर्मियों के के विरुद्ध हो रही हिंसा में बढ़ोतरी को देखते हुए 22 अप्रैल, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी बैठक में महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन को मंज़ूरी दी थी, ताकि महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और उनकी संपत्ति (आवास तथा कार्यस्थल) की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। - महामारी रोग अधिनियम, 1897 में यह संशोधन स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा के कृत्य को संज्ञेय तथा गैर-ज़मानती अपराध बनाता है और स्वास्थ्यकर्मी को हुई क्षति अथवा उसकी संपत्ति को हुई क्षति के लिये मुआवज़े का प्रावधान करता है। - वर्तमान अध्यादेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में मौजूदा महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा या संपत्ति का नुकसान होने पर दोषी के साथ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाए। - अध्यादेश में हिंसा की जो परिभाषा दी गई है उसमें उत्पीड़न तथा शारीरिक चोट के अतिरिक्त संपत्ति को नुकसान पहुँचाना भी शामिल है। - अध्यादेश के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों में सार्वजनिक तथा नैदानिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता जैसे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल कार्यकर्त्ता तथा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता शामिल हैं। - इसके अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मी की परिभाषा में ऐसे सभी लोगों को भी शामिल किया गया है जिन्हें इस महामारी के प्रकोप को रोकने या इसके प्रसार को रोकने के लिये अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त है। - अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा करने पर 3 माह से लेकर 5 वर्ष तक कैद और 50000 रुपए से लेकर 200000 रुपए तक जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है। वहीं गंभीर चोट के मामले में 6 माह से 7 वर्ष तक कैद और 100000 रुपए से 500000 रुपए तक जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है। - इसके अतिरिक्त अपराधी पीड़ित को मुआवजे का भुगतान करने और संपत्ति के नुकसान का भुगतान करने के लिये भी उत्तरदायी होगा। ध्यातव्य है कि संपत्ति के नुकसान की स्थिति में भुगतान बाज़ार मूल्य का दोगुना होगा। - अध्यादेश के अनुसार, 30 दिनों की अवधि के भीतर इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी द्वारा अपराधों की जाँच की जाएगी। - COVID-19 महामारी के दौरान ऐसी कई घटनाएँ देखी गई हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा की गई और उन्हें लक्षित करके उन पर हमले किये गए, जिससे उन्हें अपने कर्त्तव्यों के निर्वाह में बाधाओं का सामना कर पड़ा। - चौबीसों घंटे कार्य करने और बिना किसी स्वार्थ के मानव जीवन को बचाने के बावजूद चिकित्सा समुदाय के सदस्यों को उत्पीड़न का सामना कर पड़ रहा है। - कई लोगों स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोनावायरस (COVID-19) का वाहक मान रहे हैं, जिसके कारण उन्हें चौतरफा संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। - ऐसी स्थिति चिकित्सा समुदाय को अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन करने और उनके मनोबल को बनाए रखने से रोकती है, जो वैश्विक स्वास्थ्य संकट के इस समय में एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। - स्वास्थ्यकर्मी COVID-19 के प्रसार से रोकने और उस महामारी से लड़ने में हमारे अग्रिम पंक्ति के सैनिक हैं। ये लोग दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। - मौजूदा समय में सभी स्वास्थ्यकर्मी सर्वोच्च सम्मान और प्रोत्साहन के हकदार हैं, किंतु उन्हें इस महामारी के दौर में हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, बीते कुछ दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा की कुछ घटनाएँ सामने आई हैं, इस घटनाओं के कारण चिकित्सा समुदाय का मनोबल काफी गिरता जाता है। - आशा है कि इस अध्यादेश के माध्यम से चिकित्सा समुदाय में विश्वास पैदा करने में मदद मिलेगी और वे मौजूदा कठिन परिस्थितियों अपने महान पेशे के माध्यम से अपना बहुमूल्य योगदान देते रहें।
चर्चा में क्यों? राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोरोना वायरस महामारी के विरुद्ध लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा के कृत्य को संज्ञेय और गैर-ज़मानती अपराध घोषित करने वाले अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है। - ध्यातव्य है कि देश भर में स्वास्थ्यकर्मियों के के विरुद्ध हो रही हिंसा में बढ़ोतरी को देखते हुए बाईस अप्रैल, दो हज़ार बीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी बैठक में महामारी रोग अधिनियम, एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे में संशोधन को मंज़ूरी दी थी, ताकि महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। - महामारी रोग अधिनियम, एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे में यह संशोधन स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा के कृत्य को संज्ञेय तथा गैर-ज़मानती अपराध बनाता है और स्वास्थ्यकर्मी को हुई क्षति अथवा उसकी संपत्ति को हुई क्षति के लिये मुआवज़े का प्रावधान करता है। - वर्तमान अध्यादेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में मौजूदा महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा या संपत्ति का नुकसान होने पर दोषी के साथ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाए। - अध्यादेश में हिंसा की जो परिभाषा दी गई है उसमें उत्पीड़न तथा शारीरिक चोट के अतिरिक्त संपत्ति को नुकसान पहुँचाना भी शामिल है। - अध्यादेश के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों में सार्वजनिक तथा नैदानिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता जैसे डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल कार्यकर्त्ता तथा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता शामिल हैं। - इसके अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मी की परिभाषा में ऐसे सभी लोगों को भी शामिल किया गया है जिन्हें इस महामारी के प्रकोप को रोकने या इसके प्रसार को रोकने के लिये अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त है। - अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा करने पर तीन माह से लेकर पाँच वर्ष तक कैद और पचास हज़ार रुपयापए से लेकर दो लाख रुपयापए तक जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है। वहीं गंभीर चोट के मामले में छः माह से सात वर्ष तक कैद और एक लाख रुपयापए से पाँच लाख रुपयापए तक जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है। - इसके अतिरिक्त अपराधी पीड़ित को मुआवजे का भुगतान करने और संपत्ति के नुकसान का भुगतान करने के लिये भी उत्तरदायी होगा। ध्यातव्य है कि संपत्ति के नुकसान की स्थिति में भुगतान बाज़ार मूल्य का दोगुना होगा। - अध्यादेश के अनुसार, तीस दिनों की अवधि के भीतर इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी द्वारा अपराधों की जाँच की जाएगी। - COVID-उन्नीस महामारी के दौरान ऐसी कई घटनाएँ देखी गई हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा की गई और उन्हें लक्षित करके उन पर हमले किये गए, जिससे उन्हें अपने कर्त्तव्यों के निर्वाह में बाधाओं का सामना कर पड़ा। - चौबीसों घंटे कार्य करने और बिना किसी स्वार्थ के मानव जीवन को बचाने के बावजूद चिकित्सा समुदाय के सदस्यों को उत्पीड़न का सामना कर पड़ रहा है। - कई लोगों स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोनावायरस का वाहक मान रहे हैं, जिसके कारण उन्हें चौतरफा संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। - ऐसी स्थिति चिकित्सा समुदाय को अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन करने और उनके मनोबल को बनाए रखने से रोकती है, जो वैश्विक स्वास्थ्य संकट के इस समय में एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। - स्वास्थ्यकर्मी COVID-उन्नीस के प्रसार से रोकने और उस महामारी से लड़ने में हमारे अग्रिम पंक्ति के सैनिक हैं। ये लोग दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। - मौजूदा समय में सभी स्वास्थ्यकर्मी सर्वोच्च सम्मान और प्रोत्साहन के हकदार हैं, किंतु उन्हें इस महामारी के दौर में हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, बीते कुछ दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा की कुछ घटनाएँ सामने आई हैं, इस घटनाओं के कारण चिकित्सा समुदाय का मनोबल काफी गिरता जाता है। - आशा है कि इस अध्यादेश के माध्यम से चिकित्सा समुदाय में विश्वास पैदा करने में मदद मिलेगी और वे मौजूदा कठिन परिस्थितियों अपने महान पेशे के माध्यम से अपना बहुमूल्य योगदान देते रहें।
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की मुंबई में गिरफ्तार के बाद बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सवाल किया कि तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे कौन सी ताकत थी? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तीस्ता के पीछे सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी थी. तीस्ता सोनिया गांधी (यूपीए के दौरान) द्वारा गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति की सदस्य थीं. बीजेपी नेता ने बताया कि सोनिया गांधी के निर्देश पर केंद्र ने शिक्षा के लिए करीब 1. 5 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे. तीस्ता ने मोदीजी को बदनाम करने के लिए पैम्फलेट छापने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया. अदालत ने भी माना कि जो पैसा गरीबों के पास जाना था, उसका इस्तेमाल व्यक्तिगत और भौतिकवादी उपयोगों के लिए किया गया था. तीस्ता एंड कंपनी ने इन पैसों का निजी इस्तेमाल किया है. संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुन को कहा कि मामले को जबरन चलाया जा रहा है. ऐसे सभी लोग जिन्होंने साजिश की, उन्हें कटघरे में खड़ा होना पड़ा है. हमें ऐसा लगता है कि असंतुष्ट अधिकारियों और अन्य लोगों ने इस मुद्दे को जबरन चलाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि यह झूठ फैलाया गया कि कौसर बानो का गर्भ काट दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ये सारी बातें गलत साबित हुईं. मदीना के रेप की कहानी तीस्ता ने रची थी. तीस्ता ने ही गवाहों को झूठी कहानी बताने के लिए कहा था. तीस्ता के एनजीओ के पूर्व कर्मचारी रेयाज खान पठान ने अपनी शिकायत में कहा था कि लगभग सभी हलफनामे तीस्ता ने बनाए थे. इस पर गवाहों ने हस्ताक्षर किए थे और गवाहों को हलफनामे की कॉपी भी नहीं दी गई थी. दंगे के शिकार जाहिद खान ने तीस्ता के एनजीओ पर धर्म के नाम पर निर्दोष पीड़ितों (दंगों के) को गुमराह करने का आरोप लगाया है. तीस्ता और उनके पति के दो एनजीओ हैं. मुसलमानों की मदद के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों को जूते, वाइन, हवाई टिकट जैसे निजी इस्तेमाल में खर्च किया जाता था. संबित पात्रा ने कहा कि तीस्ता व उनके पति जावेद ने गुलबर्ग सोसायटी बनाने के नाम पर वसूले पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिए. बीजेपी नेता संबित पात्रा ने शनिवार को कहा कि नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन 20 से अधिक वर्षों तक जांच के दायरे में रहा लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं खोई. उन्हें व्यवस्था पर पूरा भरोसा था. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कभी भी हंगामा नहीं करने के लिए कहा. विपक्ष को इससे सीख लेनी चाहिए. मालूम हो कि गुजरात दंगा मामले में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को SIT की क्लीनचिट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी. गुजरात दंगा मामले में झूठी जानकारी देने के आरोप में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया. अहमदाबाद शहर की पुलिस अपराध शाखा के इंस्पेक्टर दर्शनसिंह बी बराड की शिकायत पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. गुजरात एटीएस ने मुंबई पहुंचकर तीस्ता सीतलवाड़ को उनके घर से गिरफ्तार किया. वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को अरेस्ट कर लिया है. अब दोनों को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने जकिया जाफरी के जरिए कोर्ट में कई याचिकाएं लगाईं और एसआईटी प्रमुख और दूसरे आयोग को गलत जानकारियां दीं. 468- धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करना. 471- जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना. 194- दोष साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना. 212- अपराधी को शरण देना. 218- पब्लिक सर्वेंट द्वारा किसी को सजा या संपत्ति जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड तैयार करना. 211- खुद को चोट पहुंचाकर हमले का झूठा आरोप लगाना. - 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था. इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी. - कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं, क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं. तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थीं, जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थीं बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थीं. जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था. - सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले को राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे. दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने SIT के सामने बयान दिया था जो कि निराधार और झूठे साबित हुए, क्योंकि जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे. सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले 9 दिसंबर 2021 को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी. 2002 में गुजरात दंगों के दौरान जाकिया जाफरी के पति तब कांग्रेस से विधायक रहे एहसान जाफरी को दंगाई भीड़ ने मार डाला था. गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एहसान जाफरी भी मारे गए थे. एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने SIT की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी. एसआईटी की रिपोर्ट में प्रदेश के उच्च पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई थी. एसआईटी ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों की ओर से गोधरा ट्रेन अग्निकांड और उसके बाद हुए दंगे भड़काने में किसी भी साजिश को नकार दिया था. साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने SIT की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया की शिकायत खारिज कर दी थी.
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की मुंबई में गिरफ्तार के बाद बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सवाल किया कि तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे कौन सी ताकत थी? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तीस्ता के पीछे सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी थी. तीस्ता सोनिया गांधी द्वारा गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति की सदस्य थीं. बीजेपी नेता ने बताया कि सोनिया गांधी के निर्देश पर केंद्र ने शिक्षा के लिए करीब एक. पाँच करोड़ रुपये मुहैया कराए थे. तीस्ता ने मोदीजी को बदनाम करने के लिए पैम्फलेट छापने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया. अदालत ने भी माना कि जो पैसा गरीबों के पास जाना था, उसका इस्तेमाल व्यक्तिगत और भौतिकवादी उपयोगों के लिए किया गया था. तीस्ता एंड कंपनी ने इन पैसों का निजी इस्तेमाल किया है. संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चौबीस जुन को कहा कि मामले को जबरन चलाया जा रहा है. ऐसे सभी लोग जिन्होंने साजिश की, उन्हें कटघरे में खड़ा होना पड़ा है. हमें ऐसा लगता है कि असंतुष्ट अधिकारियों और अन्य लोगों ने इस मुद्दे को जबरन चलाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि यह झूठ फैलाया गया कि कौसर बानो का गर्भ काट दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ये सारी बातें गलत साबित हुईं. मदीना के रेप की कहानी तीस्ता ने रची थी. तीस्ता ने ही गवाहों को झूठी कहानी बताने के लिए कहा था. तीस्ता के एनजीओ के पूर्व कर्मचारी रेयाज खान पठान ने अपनी शिकायत में कहा था कि लगभग सभी हलफनामे तीस्ता ने बनाए थे. इस पर गवाहों ने हस्ताक्षर किए थे और गवाहों को हलफनामे की कॉपी भी नहीं दी गई थी. दंगे के शिकार जाहिद खान ने तीस्ता के एनजीओ पर धर्म के नाम पर निर्दोष पीड़ितों को गुमराह करने का आरोप लगाया है. तीस्ता और उनके पति के दो एनजीओ हैं. मुसलमानों की मदद के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों को जूते, वाइन, हवाई टिकट जैसे निजी इस्तेमाल में खर्च किया जाता था. संबित पात्रा ने कहा कि तीस्ता व उनके पति जावेद ने गुलबर्ग सोसायटी बनाने के नाम पर वसूले पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिए. बीजेपी नेता संबित पात्रा ने शनिवार को कहा कि नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन बीस से अधिक वर्षों तक जांच के दायरे में रहा लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं खोई. उन्हें व्यवस्था पर पूरा भरोसा था. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कभी भी हंगामा नहीं करने के लिए कहा. विपक्ष को इससे सीख लेनी चाहिए. मालूम हो कि गुजरात दंगा मामले में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को SIT की क्लीनचिट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका चौबीस जून को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी. गुजरात दंगा मामले में झूठी जानकारी देने के आरोप में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया. अहमदाबाद शहर की पुलिस अपराध शाखा के इंस्पेक्टर दर्शनसिंह बी बराड की शिकायत पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. गुजरात एटीएस ने मुंबई पहुंचकर तीस्ता सीतलवाड़ को उनके घर से गिरफ्तार किया. वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को अरेस्ट कर लिया है. अब दोनों को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने जकिया जाफरी के जरिए कोर्ट में कई याचिकाएं लगाईं और एसआईटी प्रमुख और दूसरे आयोग को गलत जानकारियां दीं. चार सौ अड़सठ- धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करना. चार सौ इकहत्तर- जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना. एक सौ चौरानवे- दोष साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना. दो सौ बारह- अपराधी को शरण देना. दो सौ अट्ठारह- पब्लिक सर्वेंट द्वारा किसी को सजा या संपत्ति जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड तैयार करना. दो सौ ग्यारह- खुद को चोट पहुंचाकर हमले का झूठा आरोप लगाना. - चौबीस जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था. इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी. - कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं, क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं. तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थीं, जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थीं बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थीं. जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था. - सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले को राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे. दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने SIT के सामने बयान दिया था जो कि निराधार और झूठे साबित हुए, क्योंकि जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे. सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले नौ दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी. दो हज़ार दो में गुजरात दंगों के दौरान जाकिया जाफरी के पति तब कांग्रेस से विधायक रहे एहसान जाफरी को दंगाई भीड़ ने मार डाला था. गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एहसान जाफरी भी मारे गए थे. एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने SIT की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी. एसआईटी की रिपोर्ट में प्रदेश के उच्च पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई थी. एसआईटी ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों की ओर से गोधरा ट्रेन अग्निकांड और उसके बाद हुए दंगे भड़काने में किसी भी साजिश को नकार दिया था. साल दो हज़ार सत्रह में गुजरात हाईकोर्ट ने SIT की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया की शिकायत खारिज कर दी थी.
सोवियत संघ के बारे में बात हो रही है, यह कहना है कि यह राज्य के इतिहास में काफी एक कठिन दौर था आवश्यक है। यही कारण है कि अपने विभाजन के लिए कारणों इतना विविध है। लेकिन फिर भी, क्यों वहाँ एक था सोवियत संघ के पतन के और सीआईएस के गठन? यह निम्नलिखित घटनाओं के कई द्वारा पदोन्नत किया गया थाः 1. सामाजिक और आर्थिक संकट है, जो गणराज्यों के बीच आर्थिक संबंधों का टूटना का एक परिणाम के रूप में पैदा हुई, वहाँ जातीय संघर्ष, जो सोवियत प्रणाली के विनाश के लिए योगदान दिया थे। तो, 1988 में, बाल्टिक राज्यों, लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया सोवियत संघ के बाहर एक रास्ता के लिए जा रहे हैं। एक ही वर्ष में अर्मेनियाई-अज़रबैंजानी संघर्ष शुरू होता है। और 1990 में, गणराज्य के सभी संप्रभुता की घोषणा। 2. कम्युनिस्ट पार्टी है, जो 90-91 साल में एक बहुदलीय प्रणाली की स्थापना का कारण था के पतन, बारी में अभिनय दलों संघ को भंग करने का प्रस्ताव रखा। सोवियत संघ के पतन और सीआईएस के गठन तथ्य यह है कि संघ सेंटर, असमर्थ एक लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पर पकड़ करने के लिए, सैन्य बल का उपयोग कर के कारण भी था (दुशांबे, फ़रग़ना, और दूसरों के रूप में त्बिलिसी, बाकू, रीगा, विनियस और मॉस्को में है, साथ ही। )। इन सभी घटनाओं को भी एक संघ संधि है, जो के विकास के गणराज्यों की नोवो-Ogaryovo बलों प्रतिनिधि में जगह ले ली के निर्माण की धमकी के लिए योगदान दिया। वोट से अधिक अनुबंध है, जो मौजूद लोगों के बहुमत के परिणामस्वरूप की चर्चा सोवियत संघ के संरक्षण के पक्ष में था। एक नई परियोजना सोवियत संघ के पतन और CCV के निर्माण, समान प्रभु गणराज्यों की है कि प्रत्याशित था। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 20 अगस्त, 1991 के लिए निर्धारित था, लेकिन गणतंत्र के कई स्वतंत्र राज्यों के निर्माण के बारे इसलिए और सूचित करने के लिए मना कर दिया। लोग हैं, जो उस समय सोवियत संघ में उच्च रैंकिंग पदों का एक बहुत, लियोनिद गोर्बाचेव की स्थापना करने की सलाह दी आपातकाल की स्थिति देश में है, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। राज्य नेतृत्व के अधिकांश शक्तियों पर कब्जा करने का प्रयास किया है, वह स्वीकार नहीं किया सोवियत संघ और सीआईएस के एक पतन नहीं है। हालांकि, तख्तापलट का प्रयास विफल क्योंकि लोगों की जनता उनके राजनीतिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए। यह इस तथ्य के विभाजन संघ के त्वरण के लिए योगदान दिया, गोर्बाचेव विश्वसनीयता खो और येल्तसिन लोकप्रियता हासिल की। जल्द ही आठ गणराज्यों उनकी स्वतंत्रता की घोषणा की। पहले से ही दिसंबर में आठवें संघ संधि अस्तित्व के लिए, यूक्रेन, बेलारूस और रूस वार्ता में सीआईएस के निर्माण पर समझौते तक पहुंचने के लिए रह गए हैं, तो वे इस राष्ट्रमंडल में शामिल होने के लिए अन्य राज्यों को आमंत्रित किया। सोवियत संघ और सीआईएस के गठन के पतन के पूर्व गणराज्यों के लिए नए अवसर खोल दिया है। यह के बीच अनुबंध का एक बहुत पर हस्ताक्षर किए स्वतंत्र राज्यों (एक वित्तीय जगह बनाने के लिए, सामूहिक सुरक्षा, सहयोग और साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में निपटान के एकीकरण के बारे में)। इस प्रकार, सीआईएस के अस्तित्व की पूरी अवधि के दौरान यह नौ से अधिक द्वारा हस्ताक्षर किए गए कानूनी कृत्यों रक्षा, सुरक्षा, खुली सीमाएं हैं, और अधिक के संबंध में। अगर हम सोवियत संघ के पतन के परिणामों पर विचार करें, यह निम्नलिखित ध्यान दिया जाना चाहिएः 1. दुनिया एक भी आर्थिक, राजनीतिक और मीडिया प्रणाली बन गया है। 2. एक नए राज्यों के साथ-साथ गणराज्यों कि पहले आपस में सबसे क्रूर युद्ध थे की बड़ी संख्या। 3. द युनाईटेड स्टेट्स और नाटो देशों पूर्व गणराज्यों के साथ सहयोग करने के लिए शुरू। इस प्रकार, सोवियत संघ के पतन के कारणों की एक संख्या के लिए किया था, लेकिन यह अपरिहार्य था। बाद में, गणराज्यों के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कृति और जीवन की गुणवत्ता के साथ स्वतंत्र राज्य थे। हालांकि के गठन के नकारात्मक प्रभावों को देखते हैं स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल, सुना और आम जनता की इच्छा के समग्र अभिव्यक्ति प्राप्त किए जाते हैं।
सोवियत संघ के बारे में बात हो रही है, यह कहना है कि यह राज्य के इतिहास में काफी एक कठिन दौर था आवश्यक है। यही कारण है कि अपने विभाजन के लिए कारणों इतना विविध है। लेकिन फिर भी, क्यों वहाँ एक था सोवियत संघ के पतन के और सीआईएस के गठन? यह निम्नलिखित घटनाओं के कई द्वारा पदोन्नत किया गया थाः एक. सामाजिक और आर्थिक संकट है, जो गणराज्यों के बीच आर्थिक संबंधों का टूटना का एक परिणाम के रूप में पैदा हुई, वहाँ जातीय संघर्ष, जो सोवियत प्रणाली के विनाश के लिए योगदान दिया थे। तो, एक हज़ार नौ सौ अठासी में, बाल्टिक राज्यों, लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया सोवियत संघ के बाहर एक रास्ता के लिए जा रहे हैं। एक ही वर्ष में अर्मेनियाई-अज़रबैंजानी संघर्ष शुरू होता है। और एक हज़ार नौ सौ नब्बे में, गणराज्य के सभी संप्रभुता की घोषणा। दो. कम्युनिस्ट पार्टी है, जो नब्बे-इक्यानवे साल में एक बहुदलीय प्रणाली की स्थापना का कारण था के पतन, बारी में अभिनय दलों संघ को भंग करने का प्रस्ताव रखा। सोवियत संघ के पतन और सीआईएस के गठन तथ्य यह है कि संघ सेंटर, असमर्थ एक लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पर पकड़ करने के लिए, सैन्य बल का उपयोग कर के कारण भी था । इन सभी घटनाओं को भी एक संघ संधि है, जो के विकास के गणराज्यों की नोवो-Ogaryovo बलों प्रतिनिधि में जगह ले ली के निर्माण की धमकी के लिए योगदान दिया। वोट से अधिक अनुबंध है, जो मौजूद लोगों के बहुमत के परिणामस्वरूप की चर्चा सोवियत संघ के संरक्षण के पक्ष में था। एक नई परियोजना सोवियत संघ के पतन और CCV के निर्माण, समान प्रभु गणराज्यों की है कि प्रत्याशित था। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बीस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के लिए निर्धारित था, लेकिन गणतंत्र के कई स्वतंत्र राज्यों के निर्माण के बारे इसलिए और सूचित करने के लिए मना कर दिया। लोग हैं, जो उस समय सोवियत संघ में उच्च रैंकिंग पदों का एक बहुत, लियोनिद गोर्बाचेव की स्थापना करने की सलाह दी आपातकाल की स्थिति देश में है, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। राज्य नेतृत्व के अधिकांश शक्तियों पर कब्जा करने का प्रयास किया है, वह स्वीकार नहीं किया सोवियत संघ और सीआईएस के एक पतन नहीं है। हालांकि, तख्तापलट का प्रयास विफल क्योंकि लोगों की जनता उनके राजनीतिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए। यह इस तथ्य के विभाजन संघ के त्वरण के लिए योगदान दिया, गोर्बाचेव विश्वसनीयता खो और येल्तसिन लोकप्रियता हासिल की। जल्द ही आठ गणराज्यों उनकी स्वतंत्रता की घोषणा की। पहले से ही दिसंबर में आठवें संघ संधि अस्तित्व के लिए, यूक्रेन, बेलारूस और रूस वार्ता में सीआईएस के निर्माण पर समझौते तक पहुंचने के लिए रह गए हैं, तो वे इस राष्ट्रमंडल में शामिल होने के लिए अन्य राज्यों को आमंत्रित किया। सोवियत संघ और सीआईएस के गठन के पतन के पूर्व गणराज्यों के लिए नए अवसर खोल दिया है। यह के बीच अनुबंध का एक बहुत पर हस्ताक्षर किए स्वतंत्र राज्यों । इस प्रकार, सीआईएस के अस्तित्व की पूरी अवधि के दौरान यह नौ से अधिक द्वारा हस्ताक्षर किए गए कानूनी कृत्यों रक्षा, सुरक्षा, खुली सीमाएं हैं, और अधिक के संबंध में। अगर हम सोवियत संघ के पतन के परिणामों पर विचार करें, यह निम्नलिखित ध्यान दिया जाना चाहिएः एक. दुनिया एक भी आर्थिक, राजनीतिक और मीडिया प्रणाली बन गया है। दो. एक नए राज्यों के साथ-साथ गणराज्यों कि पहले आपस में सबसे क्रूर युद्ध थे की बड़ी संख्या। तीन. द युनाईटेड स्टेट्स और नाटो देशों पूर्व गणराज्यों के साथ सहयोग करने के लिए शुरू। इस प्रकार, सोवियत संघ के पतन के कारणों की एक संख्या के लिए किया था, लेकिन यह अपरिहार्य था। बाद में, गणराज्यों के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कृति और जीवन की गुणवत्ता के साथ स्वतंत्र राज्य थे। हालांकि के गठन के नकारात्मक प्रभावों को देखते हैं स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल, सुना और आम जनता की इच्छा के समग्र अभिव्यक्ति प्राप्त किए जाते हैं।
आईसीआईसीआई बैंक के जो कार्डहोल्डर क्रेड, रेडजिराफ, माईगेट, पेटीएम और मैजिकब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म से रेंट चुकाते हैं, उन्हें किराये की रकम पर 1 फीसद फी देनी होगी. आईसीआईसीआई बैंक ने सबसे पहले इस फी की शुरुआत की है. प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों के नाम एक मैसेज भेजा है. मैसेज में लिखा गया है कि क्रेडिट कार्ड से रेंट चुकाने पर अतिरिक्त 1 परसेंट की फी देनी होगी. इसका अर्थ हुआ कि आप 10,000 रुपये का किराया अपने आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से चुकाते हैं, तो उस पर अतिरिक्त 100 रुपया देना होगा जो कि बैंक की फीस होगी. बैंक ने मैसेज में लिखा है, प्रिय ग्राहक, 20 अक्टूबर 2022 से आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से रेंट देने पर 1 परसेंट का शुल्क लिया जाएगा. आईसीआईसीआई बैंक के जो कार्डहोल्डर क्रेड, रेडजिराफ, माईगेट, पेटीएम और मैजिकब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म से रेंट चुकाते हैं, उन्हें किराये की रकम पर 1 फीसद फी देनी होगी. अभी तक कोई बैंक या क्रेडिट कार्ड यह फी नहीं ले रहे थे, लेकिन आईसीआईसीआई बैंक ने इसे शुरू कर दिया है. इस काम में आईसीआईसीआई बैंक पहला बैंक है जिसने क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर फी लेना शुरू किया है. माना जा रहा है कि बाकी बैंक भी इस नियम को लागू कर सकते हैं. नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के रेसिपिएंट ऑप्शन में मकान मालिक का बैंक अकाउंट या यूपीआई एड्रेस दर्ज करना होता है. ऊपर बताए गए पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ये जानकारी देनी होती है जिसके बाद अपने क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन होता है. इसके लिए क्रेड जैसे पेमेंट प्लेटफॉर्म ग्राहक से हर ट्रांजैक्शन पर 0.46 से 2.36 परसेंट तक कन्वीनिएंस फी वसूलते हैं. मर्चेट डिस्काउंट रेट यानी कि एमडीआर की भरपाई के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मर्चेंट से कन्वीनिएंस फी लेते हैं. यह फी कार्ड से पेमेंट करने के बदले ली जाती है. चूंकि रेंट चुकाने पर मकान मालिक ही मर्चेंट होता है जो रेंट प्राप्त करने पर कोई फी नहीं दे सकता, इसलिए पेमेंट प्लेटफॉर्म यूजर से ट्रांजैक्शन फी के रूप में पैसा वसूलते हैं. इसलिए ध्यान रखें कि आईसीआईसीआई बैंक के मामले में 1 फीसद फी के अलावा यूजर को ट्रांजैक्शन फी भी देनी होगी. इंडस्ट्री के एक्सपर्ट का मानना है कि पेमेंट प्लेटफॉर्म पर रेंट के नाम पर फंड ट्रांसफर के दुरुपयोग को रोकने के लिए नई फी लगाई गई है. ऐसा देखा जाता है कि ग्राहक मकान मालिक के नाम पर अपने परिवार और दोस्तों के नाम पेमेंट प्लेटफॉर्म में दर्ज कर देते हैं और उनके खाते में पैसे भेजते हैं. इसके बाद वे कैश ले लेते हैं. अगर क्रेडिट कार्ड से एटीएम से कैश निकाला जाए तो बैंक उसके लिए 2.5 से 3 परसेंट तक फी वसूलते हैं. पेमेंट प्लेटफॉर्म पर इस तरह की कोई फी नहीं लगती. इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर फी लगाई गई है.
आईसीआईसीआई बैंक के जो कार्डहोल्डर क्रेड, रेडजिराफ, माईगेट, पेटीएम और मैजिकब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म से रेंट चुकाते हैं, उन्हें किराये की रकम पर एक फीसद फी देनी होगी. आईसीआईसीआई बैंक ने सबसे पहले इस फी की शुरुआत की है. प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों के नाम एक मैसेज भेजा है. मैसेज में लिखा गया है कि क्रेडिट कार्ड से रेंट चुकाने पर अतिरिक्त एक परसेंट की फी देनी होगी. इसका अर्थ हुआ कि आप दस,शून्य रुपयापये का किराया अपने आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से चुकाते हैं, तो उस पर अतिरिक्त एक सौ रुपयापया देना होगा जो कि बैंक की फीस होगी. बैंक ने मैसेज में लिखा है, प्रिय ग्राहक, बीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस से आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से रेंट देने पर एक परसेंट का शुल्क लिया जाएगा. आईसीआईसीआई बैंक के जो कार्डहोल्डर क्रेड, रेडजिराफ, माईगेट, पेटीएम और मैजिकब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म से रेंट चुकाते हैं, उन्हें किराये की रकम पर एक फीसद फी देनी होगी. अभी तक कोई बैंक या क्रेडिट कार्ड यह फी नहीं ले रहे थे, लेकिन आईसीआईसीआई बैंक ने इसे शुरू कर दिया है. इस काम में आईसीआईसीआई बैंक पहला बैंक है जिसने क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर फी लेना शुरू किया है. माना जा रहा है कि बाकी बैंक भी इस नियम को लागू कर सकते हैं. नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के रेसिपिएंट ऑप्शन में मकान मालिक का बैंक अकाउंट या यूपीआई एड्रेस दर्ज करना होता है. ऊपर बताए गए पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ये जानकारी देनी होती है जिसके बाद अपने क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन होता है. इसके लिए क्रेड जैसे पेमेंट प्लेटफॉर्म ग्राहक से हर ट्रांजैक्शन पर शून्य.छियालीस से दो.छत्तीस परसेंट तक कन्वीनिएंस फी वसूलते हैं. मर्चेट डिस्काउंट रेट यानी कि एमडीआर की भरपाई के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मर्चेंट से कन्वीनिएंस फी लेते हैं. यह फी कार्ड से पेमेंट करने के बदले ली जाती है. चूंकि रेंट चुकाने पर मकान मालिक ही मर्चेंट होता है जो रेंट प्राप्त करने पर कोई फी नहीं दे सकता, इसलिए पेमेंट प्लेटफॉर्म यूजर से ट्रांजैक्शन फी के रूप में पैसा वसूलते हैं. इसलिए ध्यान रखें कि आईसीआईसीआई बैंक के मामले में एक फीसद फी के अलावा यूजर को ट्रांजैक्शन फी भी देनी होगी. इंडस्ट्री के एक्सपर्ट का मानना है कि पेमेंट प्लेटफॉर्म पर रेंट के नाम पर फंड ट्रांसफर के दुरुपयोग को रोकने के लिए नई फी लगाई गई है. ऐसा देखा जाता है कि ग्राहक मकान मालिक के नाम पर अपने परिवार और दोस्तों के नाम पेमेंट प्लेटफॉर्म में दर्ज कर देते हैं और उनके खाते में पैसे भेजते हैं. इसके बाद वे कैश ले लेते हैं. अगर क्रेडिट कार्ड से एटीएम से कैश निकाला जाए तो बैंक उसके लिए दो.पाँच से तीन परसेंट तक फी वसूलते हैं. पेमेंट प्लेटफॉर्म पर इस तरह की कोई फी नहीं लगती. इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर फी लगाई गई है.
करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि इनकी गाड़ी की बीडीडीएस टीम की उपस्थिति में तलाशी लेने पर एक देसी पिस्तौल, 31 कारतूस और 3 IEDs बरामद हुई हैं। बीडीडीएस टीम मौके पर मौजूद है और आगे की कार्रवाई कर रही है। करनालः हरियाणा के करनाल पुलिस ने चार संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लिया और उनके पास से विस्फोटक बरामद किया। करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि जांच जारी है। इनका मकसद क्या था। खालिस्तानी आतंक को नाकाम किया गया है। करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि इनकी गाड़ी की बीडीडीएस टीम की उपस्थिति में तलाशी लेने पर एक देसी पिस्तौल, 31 कारतूस और 3 IEDs बरामद हुई हैं। बीडीडीएस टीम मौके पर मौजूद है और आगे की कार्रवाई कर रही है। मधुबन थाने में FIR दर्ज़ की है। गंगा राम पुनिया ने आगे कहा कि पता चला है कि ये फिरोजपुर से सप्लाई लेकर आए थे और आदिलाबाद(तेलंगाना) के आसपास इनको सप्लाई रखकर आनी थी। 3 आरोपी फिरोजपुर के रहने वाले हैं और एक आरोपी लुधियाना का रहने वाला है। आरोपी एक पाक-आधारित व्यक्ति के संपर्क में थे, जिसने उन्हें आदिलाबाद, तेलंगाना में हथियार और गोला-बारूद छोड़ने के लिए कहा था। आरोपी गुरप्रीत को फिरोजपुर जिले में ड्रोन के जरिए सीमा पार से भेजे गए विस्फोटक मिले। इससे पहले, उन्होंने नांदेड़ में विस्फोटक गिराए। प्राथमिकी दर्ज की है। करनाल में बरामद विस्फोटक पर हरियाणा के सीएम एमएल खट्टर ने कहा कि आरोपियों को विस्फोटकों के साथ पकड़ा गया क्योंकि वे हरियाणा से गुजर रहे थे। पुलिस गहन जांच कर रही है। कंटनेर की जांच जारी है। पुलिस ने जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि इनकी गाड़ी की बीडीडीएस टीम की उपस्थिति में तलाशी लेने पर एक देसी पिस्तौल, इकतीस कारतूस और तीन IEDs बरामद हुई हैं। बीडीडीएस टीम मौके पर मौजूद है और आगे की कार्रवाई कर रही है। करनालः हरियाणा के करनाल पुलिस ने चार संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लिया और उनके पास से विस्फोटक बरामद किया। करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि जांच जारी है। इनका मकसद क्या था। खालिस्तानी आतंक को नाकाम किया गया है। करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने कहा कि इनकी गाड़ी की बीडीडीएस टीम की उपस्थिति में तलाशी लेने पर एक देसी पिस्तौल, इकतीस कारतूस और तीन IEDs बरामद हुई हैं। बीडीडीएस टीम मौके पर मौजूद है और आगे की कार्रवाई कर रही है। मधुबन थाने में FIR दर्ज़ की है। गंगा राम पुनिया ने आगे कहा कि पता चला है कि ये फिरोजपुर से सप्लाई लेकर आए थे और आदिलाबाद के आसपास इनको सप्लाई रखकर आनी थी। तीन आरोपी फिरोजपुर के रहने वाले हैं और एक आरोपी लुधियाना का रहने वाला है। आरोपी एक पाक-आधारित व्यक्ति के संपर्क में थे, जिसने उन्हें आदिलाबाद, तेलंगाना में हथियार और गोला-बारूद छोड़ने के लिए कहा था। आरोपी गुरप्रीत को फिरोजपुर जिले में ड्रोन के जरिए सीमा पार से भेजे गए विस्फोटक मिले। इससे पहले, उन्होंने नांदेड़ में विस्फोटक गिराए। प्राथमिकी दर्ज की है। करनाल में बरामद विस्फोटक पर हरियाणा के सीएम एमएल खट्टर ने कहा कि आरोपियों को विस्फोटकों के साथ पकड़ा गया क्योंकि वे हरियाणा से गुजर रहे थे। पुलिस गहन जांच कर रही है। कंटनेर की जांच जारी है। पुलिस ने जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
- #Kanpurकर्ज लेकर अर्जुन ने पत्नी सविता को पढ़ाया, नर्स बनने के बाद बोली- 'तुम काले हो, स्टेटस भी नहीं करता मैच' - #KanpurUP: गौ माता के साथ सेक्स की सनक, कई गायों को बनाया निशाना, CCTV Footage हुआ वायरल, जानें कौन है दरिंदा? उत्तर भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का कहर लगातार जारी है। ताजा मिली जानकारी के अनुसार यूपी के कानपुर में ठंड के चलते पिछले एक हफ्ते में दिल और मस्तिष्क के स्ट्रोक से अबतक 108 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 7 दिनों के ये आंकड़े एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा जारी किये गए हैं। जिनमे 51 की मौत अस्पताल में हुई जबकि 57 मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई। हृदयरोग संस्थान के डायरेक्टर डॉ विनय कृष्ण का कहना है कि इस बार पड़ी अचानक ठण्ड से हार्ट अटैक की समस्या बढ़ गई है और ठंड से इतनी मौते एक गंभीर विषय है। दरअसल, कानपुर में 1 जनवरी से 8 जनवरी यानी 7 दिनों के बीच भीषण ठंड के कारण हुए हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक से कुल 108 मौतें हुई हैं। जानकारी अनुसार 51 व्यक्तियो की इलाज के दौरान हार्टअटैक से और 57 व्यक्तियों की हृदयरोग संस्थान पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कानपुर में सर्दी ने इस बार 50 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पारा लगातार नए नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती ठंड अब जानलेवा होती जा रही है क्योंकि हार्टअटैक और ब्रेन स्ट्रोक से मरने वालों का आंकड़ा रोज बढ़ता ही जा रहा है। कानपुर के लक्ष्मीपति सिंघानिया हृदय संस्थान ने पिछले 7 दिनों का जो आंकड़ा जारी किया है, उसमें अधिकतर व्यक्ति 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं। बता दें कि कानपुर का कार्डियोलॉजी अस्पताल आसपास के जिलों में हृदय रोग का सबसे बेहतरीन अस्पताल है। लेकिन ठंड की वजह से यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कार्डियोलॉजी संस्थान ने जो आंकड़े जारी किए है उसके मुताबिक कानपुर में हार्ट अटैक से ज्यादा लोगों की मौतें सामने आई हैं। हृदय रोग संस्थान के डायरेक्टर विनय कृष्णा की माने तो इस वक्त बुजुर्गों को बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। भीषण ठंड में खून जमने लगता है और नसे सिकुड़ने लगती है, जिससे हार्टअटैक की संभावनाएं बढ़ जाती है। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगो को बहुत एहतियात बरतने की आवश्यकता है। ऐसे में वो अचानक घर से बाहर न निकले क्योकि टेम्परेचर बदलने से भी खतरा बढ़ जाता है। साथ ही उन्होंने हृदयरोग के मरीजों को सलाह देते हुए कहा है कि जिनकी दवाईयां चल रही है, उनको अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके दवा का डोज़ बढ़ा लेना चाहिए। आपको बता दें कि पिछले 7 दिनों में हुई 108 मौतों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग ठण्ड की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। जिन 51 मरीजों की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हुई है, उनमे से 25 व्यक्ति 60 साल से ज्यादा के थे और 12 लोग 50-60 की उम्र के थे। वहीं 9 लोग 40-50 साल के और 5 व्यक्ति 30 से 40 वर्ष के बीच के थे। हालांकि 30-40 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों की मौत का आंकड़ा भले ही कम हो परन्तु यह एक चिंताजनक विषय है क्योंकि आमतौर पर इतनी कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक की समस्या नहीं होती है। इसलिए जरूरी है कि हर आयु वर्ग के लोग सचेत रहें और बुजुर्गों के लिए ठंड से बचने का उचित इंतेज़ाम करें।
- #Kanpurकर्ज लेकर अर्जुन ने पत्नी सविता को पढ़ाया, नर्स बनने के बाद बोली- 'तुम काले हो, स्टेटस भी नहीं करता मैच' - #KanpurUP: गौ माता के साथ सेक्स की सनक, कई गायों को बनाया निशाना, CCTV Footage हुआ वायरल, जानें कौन है दरिंदा? उत्तर भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का कहर लगातार जारी है। ताजा मिली जानकारी के अनुसार यूपी के कानपुर में ठंड के चलते पिछले एक हफ्ते में दिल और मस्तिष्क के स्ट्रोक से अबतक एक सौ आठ लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले सात दिनों के ये आंकड़े एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा जारी किये गए हैं। जिनमे इक्यावन की मौत अस्पताल में हुई जबकि सत्तावन मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई। हृदयरोग संस्थान के डायरेक्टर डॉ विनय कृष्ण का कहना है कि इस बार पड़ी अचानक ठण्ड से हार्ट अटैक की समस्या बढ़ गई है और ठंड से इतनी मौते एक गंभीर विषय है। दरअसल, कानपुर में एक जनवरी से आठ जनवरी यानी सात दिनों के बीच भीषण ठंड के कारण हुए हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक से कुल एक सौ आठ मौतें हुई हैं। जानकारी अनुसार इक्यावन व्यक्तियो की इलाज के दौरान हार्टअटैक से और सत्तावन व्यक्तियों की हृदयरोग संस्थान पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कानपुर में सर्दी ने इस बार पचास साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पारा लगातार नए नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बढ़ती ठंड अब जानलेवा होती जा रही है क्योंकि हार्टअटैक और ब्रेन स्ट्रोक से मरने वालों का आंकड़ा रोज बढ़ता ही जा रहा है। कानपुर के लक्ष्मीपति सिंघानिया हृदय संस्थान ने पिछले सात दिनों का जो आंकड़ा जारी किया है, उसमें अधिकतर व्यक्ति पचास वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं। बता दें कि कानपुर का कार्डियोलॉजी अस्पताल आसपास के जिलों में हृदय रोग का सबसे बेहतरीन अस्पताल है। लेकिन ठंड की वजह से यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कार्डियोलॉजी संस्थान ने जो आंकड़े जारी किए है उसके मुताबिक कानपुर में हार्ट अटैक से ज्यादा लोगों की मौतें सामने आई हैं। हृदय रोग संस्थान के डायरेक्टर विनय कृष्णा की माने तो इस वक्त बुजुर्गों को बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। भीषण ठंड में खून जमने लगता है और नसे सिकुड़ने लगती है, जिससे हार्टअटैक की संभावनाएं बढ़ जाती है। साठ साल से ज्यादा उम्र के लोगो को बहुत एहतियात बरतने की आवश्यकता है। ऐसे में वो अचानक घर से बाहर न निकले क्योकि टेम्परेचर बदलने से भी खतरा बढ़ जाता है। साथ ही उन्होंने हृदयरोग के मरीजों को सलाह देते हुए कहा है कि जिनकी दवाईयां चल रही है, उनको अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके दवा का डोज़ बढ़ा लेना चाहिए। आपको बता दें कि पिछले सात दिनों में हुई एक सौ आठ मौतों में सबसे ज्यादा बुजुर्ग ठण्ड की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। जिन इक्यावन मरीजों की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हुई है, उनमे से पच्चीस व्यक्ति साठ साल से ज्यादा के थे और बारह लोग पचास-साठ की उम्र के थे। वहीं नौ लोग चालीस-पचास साल के और पाँच व्यक्ति तीस से चालीस वर्ष के बीच के थे। हालांकि तीस-चालीस वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों की मौत का आंकड़ा भले ही कम हो परन्तु यह एक चिंताजनक विषय है क्योंकि आमतौर पर इतनी कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक की समस्या नहीं होती है। इसलिए जरूरी है कि हर आयु वर्ग के लोग सचेत रहें और बुजुर्गों के लिए ठंड से बचने का उचित इंतेज़ाम करें।
नांदगांव खंडेश्वर-/दि. 21 बैंक द्वारा वेतन दिया जाए, इस मांग के लिए यहां के सफाई कर्मचारियों द्वारा गत पांच दिनों से आंदोलन जारी है. सीटू के नेतृत्व में यह आंदोलन छेड़ा गया है. जुलाई-अगस्त इन दो महीने का बकाया वेतन बैंक द्वारा मिले, इस मुख्य मांग के लिए विगत पांच दिनों से आंदोलन शुरु है. बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. 2011 के कामगार कानून में ऑनलाइन पेमेंट करना, ऐसा नियोजन है, बावजूद इसके नगर पंचायत के सफाई कर्मचारियों को ऑफलाइन पगार देने का प्रकार गत तीन वर्षों से शुरु है. ऑफलाइन वेतन देना, यह कानूनन अपराध है. 30 मार्च 2020 से वेतन का परतावा दे, वेतन की समस्या जब तक हल नहीं होती, तब तक ठेकेदारों की सुरक्षा आरक्षित रखी जाये, घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका किसी को भी दिया गया, तब भी सफाई कर्मचारी के रुप में इनका ही चयन किया जाये, यूएनआय कार्ड सहित पासवर्ड दिया जाये, गणवेश व अत्यावश्यक साधनों की आपूर्ति की जाये, आदि मांगों की ओर से इस आंदोलन के माध्यम से ध्यानाकर्षित किया जा रहा है. आंदोलन में दिनेश अंबाडकर, जयेन्द्र सुने, दीपक पिंगले, प्रणाल सोनवणे, लक्ष्मण झिमटे, संजय ढोके, अरुणा फुरसुंगे, शशिकला घोडाम, कविता मसराम, इंदिरा उईके, अशोक बनकर, पुंडलिक पुंड, सुषमा रावेकर, नारायण सोनवणे, विट्ठल झिमटे आदि का सहभाग है.
नांदगांव खंडेश्वर-/दि. इक्कीस बैंक द्वारा वेतन दिया जाए, इस मांग के लिए यहां के सफाई कर्मचारियों द्वारा गत पांच दिनों से आंदोलन जारी है. सीटू के नेतृत्व में यह आंदोलन छेड़ा गया है. जुलाई-अगस्त इन दो महीने का बकाया वेतन बैंक द्वारा मिले, इस मुख्य मांग के लिए विगत पांच दिनों से आंदोलन शुरु है. बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. दो हज़ार ग्यारह के कामगार कानून में ऑनलाइन पेमेंट करना, ऐसा नियोजन है, बावजूद इसके नगर पंचायत के सफाई कर्मचारियों को ऑफलाइन पगार देने का प्रकार गत तीन वर्षों से शुरु है. ऑफलाइन वेतन देना, यह कानूनन अपराध है. तीस मार्च दो हज़ार बीस से वेतन का परतावा दे, वेतन की समस्या जब तक हल नहीं होती, तब तक ठेकेदारों की सुरक्षा आरक्षित रखी जाये, घनकचरा व्यवस्थापन का ठेका किसी को भी दिया गया, तब भी सफाई कर्मचारी के रुप में इनका ही चयन किया जाये, यूएनआय कार्ड सहित पासवर्ड दिया जाये, गणवेश व अत्यावश्यक साधनों की आपूर्ति की जाये, आदि मांगों की ओर से इस आंदोलन के माध्यम से ध्यानाकर्षित किया जा रहा है. आंदोलन में दिनेश अंबाडकर, जयेन्द्र सुने, दीपक पिंगले, प्रणाल सोनवणे, लक्ष्मण झिमटे, संजय ढोके, अरुणा फुरसुंगे, शशिकला घोडाम, कविता मसराम, इंदिरा उईके, अशोक बनकर, पुंडलिक पुंड, सुषमा रावेकर, नारायण सोनवणे, विट्ठल झिमटे आदि का सहभाग है.
सोलन - कृषि उपज मंडी समिति के नवनियुक्त चेयरमैन संजीव कश्यप ने कहा कि जिला की सभी सब्जी मंडियों में किसान-बागबानों का शोषण न हो ऐसी नीति लाएंगे। चेयरमैन बनने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत में कहा कि मंडियों में किसान-बागबानों एवं आढ़तियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जितनी भी समस्याएं होगी, सभी का विधिवत रूप से समय-समय पर हल किया जाएगा। कश्यप ने कहा कि बाहरी राज्यों से मंडी में पहुंच रहे खरीददारों की वेरिफिकेशन का कार्य युद्धस्तर पर किया जाएगा, ताकि कोई भी खरीददार किसान-बागबान की खून पसीने की कमाई को चपत न लगा सके। इसके लिए विशेष समाधान निकालेंगे। गौर रहे कि संजीव कश्यप 2007 से 2012 तक मंडी समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व सहकारिता मंत्री डा. राजीव सहजल ने संजीव कश्यप की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कश्यप के पास किसान के तौर पर अनुभव है, जिसका मंडी समिति को फायदा होगा। पांच दिन पहले ही 'दिव्य हिमाचल' ने उठाया था मुद्दा प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' ने पांच दिन पूर्व ही इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। दिव्य हिमाचल ने सोमवार को प्रकाशित स्थानीय संस्करण के संडे डायरी में सोलन मार्केट कमेटी के अध्यक्ष की कुर्सी खाली नामक शीर्षक से विस्तारपूर्वक समाचार प्रकाशित किया। इसके दूसरे ही दिन सोमवार को सरकार की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में सरकारी एवं गैर सरकारी सदस्यों को शामिल किया गया।
सोलन - कृषि उपज मंडी समिति के नवनियुक्त चेयरमैन संजीव कश्यप ने कहा कि जिला की सभी सब्जी मंडियों में किसान-बागबानों का शोषण न हो ऐसी नीति लाएंगे। चेयरमैन बनने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत में कहा कि मंडियों में किसान-बागबानों एवं आढ़तियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जितनी भी समस्याएं होगी, सभी का विधिवत रूप से समय-समय पर हल किया जाएगा। कश्यप ने कहा कि बाहरी राज्यों से मंडी में पहुंच रहे खरीददारों की वेरिफिकेशन का कार्य युद्धस्तर पर किया जाएगा, ताकि कोई भी खरीददार किसान-बागबान की खून पसीने की कमाई को चपत न लगा सके। इसके लिए विशेष समाधान निकालेंगे। गौर रहे कि संजीव कश्यप दो हज़ार सात से दो हज़ार बारह तक मंडी समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व सहकारिता मंत्री डा. राजीव सहजल ने संजीव कश्यप की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कश्यप के पास किसान के तौर पर अनुभव है, जिसका मंडी समिति को फायदा होगा। पांच दिन पहले ही 'दिव्य हिमाचल' ने उठाया था मुद्दा प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' ने पांच दिन पूर्व ही इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। दिव्य हिमाचल ने सोमवार को प्रकाशित स्थानीय संस्करण के संडे डायरी में सोलन मार्केट कमेटी के अध्यक्ष की कुर्सी खाली नामक शीर्षक से विस्तारपूर्वक समाचार प्रकाशित किया। इसके दूसरे ही दिन सोमवार को सरकार की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में सरकारी एवं गैर सरकारी सदस्यों को शामिल किया गया।
कानपुर (भाषा)। ग्रीन पार्क में 10 और 13 मई को होने वाले गुजरात लायंस के दो आईपीएल मैचों की बिक्री आज से कानपुर में काउंटर के जरिए शुरू हो गई है। कानपुर में आज से 10 स्थानों पर आईपीएल के टिकट खरीदे जा सकते है जबकि लखनऊ में कल 22 अप्रैल से पांच स्थानों पर इन दोनों मैचों के आईपीएल टिकट खरीदे जा सकेंगे। आईपीएल के टिकटों की आनलाइन बिक्री एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुकी है और कम कीमत वाले सारे टिकट पहले ही आन लाइन बिक चुके है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के निदेशक एस के अग्रवाल ने बताया कि आज कानपुर शहर में दस स्थानों पर आईपीएल टिकट मिलने शुुरू हो गए है। यह टिकट 1000, 1500, 2500, 4000 व 14 हजार रुपए के है। एक व्यक्ति को दस से अधिक टिकट नही मिलेंगे, टिकट खरीदने के लिये पैनकार्ड की फोटोकापी देना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि पैनकार्ड की अनिवार्यता इनकम टैक्स विभाग के निर्देश पर की गई है और इसका ब्यौरा इनकम टैक्स विभाग को जाएगा, इसीलिए किसी भी एक व्यक्ति को दस से अधिक टिकट नही मिलेंगे। उन्होंने बताया कि लखनउ के बहुत से क्रिकेट प्रेमी मैच देखने कानपुर आते है इसलिए उनकी आसानी के लिए कल से लखनउ में भी पांच काउंटर आईपीएल टिकटों के लिए खेले जाएंगे।
कानपुर । ग्रीन पार्क में दस और तेरह मई को होने वाले गुजरात लायंस के दो आईपीएल मैचों की बिक्री आज से कानपुर में काउंटर के जरिए शुरू हो गई है। कानपुर में आज से दस स्थानों पर आईपीएल के टिकट खरीदे जा सकते है जबकि लखनऊ में कल बाईस अप्रैल से पांच स्थानों पर इन दोनों मैचों के आईपीएल टिकट खरीदे जा सकेंगे। आईपीएल के टिकटों की आनलाइन बिक्री एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुकी है और कम कीमत वाले सारे टिकट पहले ही आन लाइन बिक चुके है। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के निदेशक एस के अग्रवाल ने बताया कि आज कानपुर शहर में दस स्थानों पर आईपीएल टिकट मिलने शुुरू हो गए है। यह टिकट एक हज़ार, एक हज़ार पाँच सौ, दो हज़ार पाँच सौ, चार हज़ार व चौदह हजार रुपए के है। एक व्यक्ति को दस से अधिक टिकट नही मिलेंगे, टिकट खरीदने के लिये पैनकार्ड की फोटोकापी देना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि पैनकार्ड की अनिवार्यता इनकम टैक्स विभाग के निर्देश पर की गई है और इसका ब्यौरा इनकम टैक्स विभाग को जाएगा, इसीलिए किसी भी एक व्यक्ति को दस से अधिक टिकट नही मिलेंगे। उन्होंने बताया कि लखनउ के बहुत से क्रिकेट प्रेमी मैच देखने कानपुर आते है इसलिए उनकी आसानी के लिए कल से लखनउ में भी पांच काउंटर आईपीएल टिकटों के लिए खेले जाएंगे।
Manoharpur (Ajay Singh) : गोइलकेरा थाना हत्याकांड मामले में फरार दोनों अभियुक्त डीबर कोड़ाह एवं कदमा बोयपाई को गोइलकेरा पुलिस गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक गोइलकेरा थाना हत्याकांड 35/17 दिनांक 25. 9. 17 धारा 302 /201/ 34 भा0 द0 वि0 मामले में दोनों ही अभियुक्त फरार थे. उन दोनों के फरार होने के चलते न्यायालय ने लाल वारंटी अभियुक्त घोषित किया था. वहीं पुलिस द्वारा गिरफ्तार डीबर कोड़ाह और कदमा बोयपाई को शुक्रवार को जेल भेज दिया गया है.
Manoharpur : गोइलकेरा थाना हत्याकांड मामले में फरार दोनों अभियुक्त डीबर कोड़ाह एवं कदमा बोयपाई को गोइलकेरा पुलिस गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक गोइलकेरा थाना हत्याकांड पैंतीस/सत्रह दिनांक पच्चीस. नौ. सत्रह धारा तीन सौ दो /दो सौ एक/ चौंतीस भाशून्य दशून्य विशून्य मामले में दोनों ही अभियुक्त फरार थे. उन दोनों के फरार होने के चलते न्यायालय ने लाल वारंटी अभियुक्त घोषित किया था. वहीं पुलिस द्वारा गिरफ्तार डीबर कोड़ाह और कदमा बोयपाई को शुक्रवार को जेल भेज दिया गया है.
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के दूसरे चक्र के फाइनल के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम तैयार है। पैट कमिंस के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया पहली बार इस फाइनल में पहुंचने में सफल हुई है। उनके सामने रोहित शर्मा की कप्तानी वाली मजबूत भारतीय क्रिकेट टीम है। WTC 2021-23 में ऑस्ट्रेलिया ने शीर्ष पर रहते हुए खिताबी मुकाबले में अपनी जगह बनाई थी। 7 जून से होने वाले फाइनल मुकाबले के लिए ऑस्ट्रेलिया की संभावित एकादश पर नजर डालते हैं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से उस्मान ख्वाजा और डेविड वार्नर पारी की शुरुआत कर सकते हैं। भले ही वार्नर का पिछले कुछ समय टेस्ट में अच्छा नहीं रहा हो, लेकिन उसके बावजूद उन पर भरोसा जताया जा सकता है। दूसरी तरफ ख्वाजा ने टेस्ट में हालिया समय में कमाल किया था। उन्होंने भारत के खिलाफ अपने पिछले टेस्ट में 180 रन की पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम उनसे ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। ऑस्ट्रेलिया से नंबर 3 पर मार्नस लाबुशेन बल्लेबाजी करेंगे। वह पिछले कुछ समय से विश्व क्रिकेट में निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके बाद स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड अन्य बल्लेबाज हो सकते हैं। टेस्ट करियर में रनों का अम्बार लगा चुके स्मिथ को भारत के खिलाफ बल्लेबाजी करना पसंद हैं। वह भारतीय टीम के खिलाफ 65 की औसत से 1,887 रन बना चुके हैं। सम्भवतः मध्यक्रम में हेड बल्लेबाजी करते दिखेंगे। कैमरून ग्रीन ऑस्ट्रेलिया की टीम से इकलौते ऑलराउंडर हो सकते हैं। वह अच्छी बल्लेबाजी के अलावा तेज गेंदबाजी का उम्दा विकल्प भी देते हैं। विकेटकीपर में कंगारू टीम एलेक्स कैरी के साथ जा सकती है। उन्होंने 19 टेस्ट में 1 शतक और 3 अर्धशतकों की मदद से 689 रन बना चुके हैं। उनके अलावा 15 सदस्यीय टीम में जोश इंग्लिश दूसरे विकेटकीपर हैं, जिन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू नहीं किया है। जोश हेजलवुड फिटनेस कारणों से इस फाइनल से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह पर माइकल नेसर को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। हालांकि, कप्तान कमिंस यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्कॉट बोलैंड को फाइनल में मौका मिलेगा। ऐसे में कंगारू टीम में कमिंस, मिचेल स्टार्क और बोलैंड तेज गेंदबाज होंगे, जबकि नाथन लियोन इकलौते स्पिन गेंदबाज होंगे। बता दें, लियोन भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक विकेट (116) लेने वाले खिलाड़ी हैं।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के दूसरे चक्र के फाइनल के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम तैयार है। पैट कमिंस के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया पहली बार इस फाइनल में पहुंचने में सफल हुई है। उनके सामने रोहित शर्मा की कप्तानी वाली मजबूत भारतीय क्रिकेट टीम है। WTC दो हज़ार इक्कीस-तेईस में ऑस्ट्रेलिया ने शीर्ष पर रहते हुए खिताबी मुकाबले में अपनी जगह बनाई थी। सात जून से होने वाले फाइनल मुकाबले के लिए ऑस्ट्रेलिया की संभावित एकादश पर नजर डालते हैं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से उस्मान ख्वाजा और डेविड वार्नर पारी की शुरुआत कर सकते हैं। भले ही वार्नर का पिछले कुछ समय टेस्ट में अच्छा नहीं रहा हो, लेकिन उसके बावजूद उन पर भरोसा जताया जा सकता है। दूसरी तरफ ख्वाजा ने टेस्ट में हालिया समय में कमाल किया था। उन्होंने भारत के खिलाफ अपने पिछले टेस्ट में एक सौ अस्सी रन की पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम उनसे ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद करेगी। ऑस्ट्रेलिया से नंबर तीन पर मार्नस लाबुशेन बल्लेबाजी करेंगे। वह पिछले कुछ समय से विश्व क्रिकेट में निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके बाद स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड अन्य बल्लेबाज हो सकते हैं। टेस्ट करियर में रनों का अम्बार लगा चुके स्मिथ को भारत के खिलाफ बल्लेबाजी करना पसंद हैं। वह भारतीय टीम के खिलाफ पैंसठ की औसत से एक,आठ सौ सत्तासी रन बना चुके हैं। सम्भवतः मध्यक्रम में हेड बल्लेबाजी करते दिखेंगे। कैमरून ग्रीन ऑस्ट्रेलिया की टीम से इकलौते ऑलराउंडर हो सकते हैं। वह अच्छी बल्लेबाजी के अलावा तेज गेंदबाजी का उम्दा विकल्प भी देते हैं। विकेटकीपर में कंगारू टीम एलेक्स कैरी के साथ जा सकती है। उन्होंने उन्नीस टेस्ट में एक शतक और तीन अर्धशतकों की मदद से छः सौ नवासी रन बना चुके हैं। उनके अलावा पंद्रह सदस्यीय टीम में जोश इंग्लिश दूसरे विकेटकीपर हैं, जिन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू नहीं किया है। जोश हेजलवुड फिटनेस कारणों से इस फाइनल से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह पर माइकल नेसर को पंद्रह सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। हालांकि, कप्तान कमिंस यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्कॉट बोलैंड को फाइनल में मौका मिलेगा। ऐसे में कंगारू टीम में कमिंस, मिचेल स्टार्क और बोलैंड तेज गेंदबाज होंगे, जबकि नाथन लियोन इकलौते स्पिन गेंदबाज होंगे। बता दें, लियोन भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं।
नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद शशि थरूर ने कहा, मैें खड़गे साहब का बहुत सम्मान करता हूं। अगर कई लोग नामांकन दाखिल करेंगे तो अच्छी बात है और लोगों को भी विकल्प मिलेगा। मैंने किसी को नीचा दिखाने के लिए ऐसा नहीं किया है। नयी दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, झारखंड कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी ने भी पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मतदान 17 अक्टूबर को होगा और इसके परिणाम 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को उनके कार्यालय में अपना नामांकन पत्र सौंपा। इससे पहले थरूर ढोल-नगाड़े की थाप के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) मुख्यालय पहुंचे। नामांकन दाखिल करने से पहले थरूर ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद शशि थरूर ने कहा, मैें खड़गे साहब का बहुत सम्मान करता हूं। अगर कई लोग नामांकन दाखिल करेंगे तो अच्छी बात है और लोगों को भी विकल्प मिलेगा। मैंने किसी को नीचा दिखाने के लिए ऐसा नहीं किया है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमें एक साथ काम करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि वे हमारी पार्टी के भीष्म पितामह हैं। शशि थरूर ने बताया कि उनको 50 लोगों ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा 60 होगा क्योंकि एक और जगह से फॉर्म आ रहा है जिसे हम 3 बजे के पहले दाखिल करेंगे। देश के 12 राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमारी मदद की है। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके अशोक गहलोत ने मल्लिकार्जुन के नामांकन दाखिल करने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुभव का लाभ पूरी कांग्रेस को मिलेगा। हमें इस बात की बहुत खुशी है। वहीं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा नामांकन दाखिल करने के निर्णय का स्वागत किया है। हुड्डा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वे चयनित होंगे। भूपिंदर सिंह और मैंने प्रस्तावक के तौर पर उनके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं झारखंड कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी ने नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, मैंने आज पार्टी अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। पार्टी नेताओं का जो भी निर्णय होगा उसका सम्मान करेंगे। वहीं नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले उन्होंने कहा था कि वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और देश देख रहा है कि एक किसान का बेटा जिसे भारतीय वायु सेना के साथ सेवा करने का अनुभव है, राज्य सरकार में मंत्री और झारखंड विधानसभा के उपनेता के रूप में चुना गया है, वह भी एआईसीसी के पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। गौरतलब है कि अशोक गहलोत के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि अपने सहयोगी मल्लिकार्जुन खड़गे के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगे। वहीं खबर है कि कांग्रेस के जी-23 समूह का कोई नेता कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं दाखिल करेगा।
नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद शशि थरूर ने कहा, मैें खड़गे साहब का बहुत सम्मान करता हूं। अगर कई लोग नामांकन दाखिल करेंगे तो अच्छी बात है और लोगों को भी विकल्प मिलेगा। मैंने किसी को नीचा दिखाने के लिए ऐसा नहीं किया है। नयी दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, झारखंड कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी ने भी पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मतदान सत्रह अक्टूबर को होगा और इसके परिणाम उन्नीस अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को उनके कार्यालय में अपना नामांकन पत्र सौंपा। इससे पहले थरूर ढोल-नगाड़े की थाप के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस समिति मुख्यालय पहुंचे। नामांकन दाखिल करने से पहले थरूर ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद शशि थरूर ने कहा, मैें खड़गे साहब का बहुत सम्मान करता हूं। अगर कई लोग नामांकन दाखिल करेंगे तो अच्छी बात है और लोगों को भी विकल्प मिलेगा। मैंने किसी को नीचा दिखाने के लिए ऐसा नहीं किया है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमें एक साथ काम करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि वे हमारी पार्टी के भीष्म पितामह हैं। शशि थरूर ने बताया कि उनको पचास लोगों ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा साठ होगा क्योंकि एक और जगह से फॉर्म आ रहा है जिसे हम तीन बजे के पहले दाखिल करेंगे। देश के बारह राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमारी मदद की है। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके अशोक गहलोत ने मल्लिकार्जुन के नामांकन दाखिल करने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह है। मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुभव का लाभ पूरी कांग्रेस को मिलेगा। हमें इस बात की बहुत खुशी है। वहीं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा नामांकन दाखिल करने के निर्णय का स्वागत किया है। हुड्डा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वे चयनित होंगे। भूपिंदर सिंह और मैंने प्रस्तावक के तौर पर उनके नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं झारखंड कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी ने नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, मैंने आज पार्टी अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। पार्टी नेताओं का जो भी निर्णय होगा उसका सम्मान करेंगे। वहीं नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले उन्होंने कहा था कि वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और देश देख रहा है कि एक किसान का बेटा जिसे भारतीय वायु सेना के साथ सेवा करने का अनुभव है, राज्य सरकार में मंत्री और झारखंड विधानसभा के उपनेता के रूप में चुना गया है, वह भी एआईसीसी के पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। गौरतलब है कि अशोक गहलोत के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि अपने सहयोगी मल्लिकार्जुन खड़गे के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगे। वहीं खबर है कि कांग्रेस के जी-तेईस समूह का कोई नेता कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं दाखिल करेगा।
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश (UP) के नोएडा (Noida) में रेप का ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बाद सोमवार को 81 साल का एक स्केच आर्टिस्ट को गिरफ्तार किया है। दरअसल, इस शख्स पर 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ 'डिजिटल रेप' (Digital Rape) करने का आरोप लगा है। नाबालिग की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (रेप), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब 'डिजिटल रेप' का नाम सुनकर लोगों के मन में यह ख्याल आ रहा है कि, भला डिजिटल रेप का मतलब क्या होता है, तो चलिए जानते हैं। नोएडा के इस मामले के सामने आने से 'डिजिटल रेप' पर एक बार फिर बहस छिड़ चुकी है। असल में डिजिटल रेप का नाता इंटरनेट से नहीं है। दरअसल, डिजिटल का नाम सुनते ही लोगों के मन में यह ख्याल आ रहा है कि, इसका नाता सोशल मीडिया, इंटरनेट से होगा। लेकिन ऐसा नहीं है, यह एक तरह का रेप ही होता है, जिसमें ज़्यादातर नाबालिगों को अपना शिकार बनाया जाता है। वहीं कई बार तो ऐसा भी होता है कि, छोटी बच्चियां समझ नहीं पाती कि आखिर उनके साथ हुआ क्या है या क्या हो रहा? क्या होता है डिजिटल रेप? भारत में साल 2012 से पहले डिजिटल रेप को परिभाषित नहीं किया गया था। लेकिन, निर्भया केस के बाद डिजिटल रेप को परिभाषित किया गया। जिसके बाद डिजिटल रेप को भी रेप के कैटेगरी में डाला गया। डिजिटल रेप की परिभाषा यह है कि, अगर कोई शख्स किसी लड़की या महिला की बिना सहमति के उसके प्राइवेट पार्ट्स को अपने उंगलियों या अंगूठे से छेड़ता है, तो उसे 'डिजिटल रेप' कहा जाता है। वहीं पुलिस के अनुसार, अंग्रेजी में उंगली, अंगूठा, पैर की अंगुली को भी डिजिट कहा जाता है, इसलिए इस तरह के तरीके को डिजिटल रेप की कैटेगरी में रखा गया है। वैसे तो 'डिजिटल रेप' का कोई भी लड़की या महिला शिकार हो सकती है। लेकिन, इससे सबसे ज़्यादा खतरा नाबालिग बच्चियों और अबोध को रहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नाबालिग या छोटी बच्चियों को इस तरह की हरकत को समझना पाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए भारत में अभी भी डिजिटल रेप के मामले बेहद कम केस दर्ज होते हैं। जबकि, आंकड़ों कहते हैं कि अकेले साल 2020 में 2655 मामले 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप के दर्ज हुए थे। क्या था नोएडा का केस? यूपी के नोएडा में डिजिटल रेप का जो मामला सामने आया है, जिसमें 81 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। इसमें आरोप है कि नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न तब शुरू हुआ, जब वह केवल 10 वर्ष की थी। इस मामले का आरोपी एक 81 वर्षीय कलाकार है। इस मामले में पीड़िता आरोपी के लिव इन पार्टनर के एक कर्मचारी की बेटी बताई जाती है, जिसे बेहतर शिक्षा के लिए साल 2015 में उस दंपति के साथ रहने के लिए भेजा गया था। निर्भया केस के बाद साल 2013 के बाद रेप का मतलब अब केवल इंटरकोर्स तर सीमित नहीं रह गया है। बल्कि, अब एक महिला के मुंह, योनि या गुदा में किसी भी हद तक प्रवेश को भी रेप करार दिया गया है। इसमें लिंग के अलावा उंगली, शरीर के दूसरे अंग और वस्तु का इस्तेमाल भी शामिल है। ऐसे में यौन शोषण के विभिन्न तरीकों को अपराध में शामिल कर लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों को कानूनी रूप से मज़बूत करने की कोशिश की गई है और तभी से डिजिटल रेप को भी परिभाषित किया गया है।
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के नोएडा में रेप का ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बाद सोमवार को इक्यासी साल का एक स्केच आर्टिस्ट को गिरफ्तार किया है। दरअसल, इस शख्स पर सत्रह साल की नाबालिग लड़की के साथ 'डिजिटल रेप' करने का आरोप लगा है। नाबालिग की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर , तीन सौ तेईस , पाँच सौ छः और पॉक्सो एक्ट की धारा पाँच और छः के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब 'डिजिटल रेप' का नाम सुनकर लोगों के मन में यह ख्याल आ रहा है कि, भला डिजिटल रेप का मतलब क्या होता है, तो चलिए जानते हैं। नोएडा के इस मामले के सामने आने से 'डिजिटल रेप' पर एक बार फिर बहस छिड़ चुकी है। असल में डिजिटल रेप का नाता इंटरनेट से नहीं है। दरअसल, डिजिटल का नाम सुनते ही लोगों के मन में यह ख्याल आ रहा है कि, इसका नाता सोशल मीडिया, इंटरनेट से होगा। लेकिन ऐसा नहीं है, यह एक तरह का रेप ही होता है, जिसमें ज़्यादातर नाबालिगों को अपना शिकार बनाया जाता है। वहीं कई बार तो ऐसा भी होता है कि, छोटी बच्चियां समझ नहीं पाती कि आखिर उनके साथ हुआ क्या है या क्या हो रहा? क्या होता है डिजिटल रेप? भारत में साल दो हज़ार बारह से पहले डिजिटल रेप को परिभाषित नहीं किया गया था। लेकिन, निर्भया केस के बाद डिजिटल रेप को परिभाषित किया गया। जिसके बाद डिजिटल रेप को भी रेप के कैटेगरी में डाला गया। डिजिटल रेप की परिभाषा यह है कि, अगर कोई शख्स किसी लड़की या महिला की बिना सहमति के उसके प्राइवेट पार्ट्स को अपने उंगलियों या अंगूठे से छेड़ता है, तो उसे 'डिजिटल रेप' कहा जाता है। वहीं पुलिस के अनुसार, अंग्रेजी में उंगली, अंगूठा, पैर की अंगुली को भी डिजिट कहा जाता है, इसलिए इस तरह के तरीके को डिजिटल रेप की कैटेगरी में रखा गया है। वैसे तो 'डिजिटल रेप' का कोई भी लड़की या महिला शिकार हो सकती है। लेकिन, इससे सबसे ज़्यादा खतरा नाबालिग बच्चियों और अबोध को रहता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि नाबालिग या छोटी बच्चियों को इस तरह की हरकत को समझना पाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए भारत में अभी भी डिजिटल रेप के मामले बेहद कम केस दर्ज होते हैं। जबकि, आंकड़ों कहते हैं कि अकेले साल दो हज़ार बीस में दो हज़ार छः सौ पचपन मामले अट्ठारह साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप के दर्ज हुए थे। क्या था नोएडा का केस? यूपी के नोएडा में डिजिटल रेप का जो मामला सामने आया है, जिसमें इक्यासी साल के आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। इसमें आरोप है कि नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न तब शुरू हुआ, जब वह केवल दस वर्ष की थी। इस मामले का आरोपी एक इक्यासी वर्षीय कलाकार है। इस मामले में पीड़िता आरोपी के लिव इन पार्टनर के एक कर्मचारी की बेटी बताई जाती है, जिसे बेहतर शिक्षा के लिए साल दो हज़ार पंद्रह में उस दंपति के साथ रहने के लिए भेजा गया था। निर्भया केस के बाद साल दो हज़ार तेरह के बाद रेप का मतलब अब केवल इंटरकोर्स तर सीमित नहीं रह गया है। बल्कि, अब एक महिला के मुंह, योनि या गुदा में किसी भी हद तक प्रवेश को भी रेप करार दिया गया है। इसमें लिंग के अलावा उंगली, शरीर के दूसरे अंग और वस्तु का इस्तेमाल भी शामिल है। ऐसे में यौन शोषण के विभिन्न तरीकों को अपराध में शामिल कर लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों को कानूनी रूप से मज़बूत करने की कोशिश की गई है और तभी से डिजिटल रेप को भी परिभाषित किया गया है।
है; उसके ऊपर का चौथाई आगे को निकलती हुई पाँच पट्टियों में बँटा है। उसके ऊपर के तीसरे चौथाई में चारों ओर दो-दो गवाक्ष-मुखों का अंकन है और सबसे ऊपर के चौथाई में सिंहयुग्म, चारों ओर है और उनके बीच में वृक्ष है। स्तम्भ का यह अंकन साँची के स्तम्भ के क्रम में ही है पर दो बातों में उससे भिन्न है। एक तो इसका अलंकरण अधिक भारी है, दूसरे इस स्तम्भ में कटावदार घण्ट-शीर्ष के स्थान पर लता-पत्रयुक्त कुम्भ है। यह अन्तिम विशेषता उसे साँची के मन्दिर से अलग करती है । एरण के नृसिंह मन्दिर के स्तम्भों का तिगोवा के स्तम्भों से काफी साम्य है। जहाँ तक बैठकी और दण्ड का सम्बन्ध है, दोनों प्रायः एक से हैं । तिगोवा के स्तम्भ के समान ही बैठकी में वृक्ष के साथ सिंह-युग्म हैं, उसके नीचे की बैठकी में गवाक्ष-मुख है, अन्तर यह है कि इसमें दो के स्थान पर तीन हैं। उसके नीचे तिगोवा के समान ही दो और बैठकी हैं पर इसमें पाँच पतली पट्टियों के स्थान पर एक चौड़ी पट्टी है और उसके नीचे काफी चौड़ी चौथी बैठकी। उसके नीचे तिगोवा के स्तम्भों के समान ही लतापत्रयुक्त कुम्भ है। उसके नीचे के दुहरे कण्ठे के अलंकरण में कुछ भिन्नता है और फिर उसी तरह सोलह-पहल और अठपहल दण्ड है। इसके दण्ड मे बीच में कीर्तिमुखों और झालरों का अलंकरण है जो तिगोवा में नहीं है। नीचे के आधार का सपाट चौकोर रूप ने यहाँ एक सर्वथा नया रूप लिया है। वह पाँच भागों में बँट गया है और सीढ़ीनुमा रूप धारण कर लिया है। इस प्रकार यह स्तम्भ तिगोवा के स्तम्भ के क्रम में होते उससे कुछ अधिक विस्तृत और विकसित है । इस प्रकार यह तिगोवा के मन्दिर के बाद का है, किन्तु बहुत बाद का नहीं। एरण के वराह मन्दिर के स्तम्भ पूर्वोल्लिखित स्तम्भों से अपने अलंकरणों में सर्वथा भिन्न है। इसका आधार छोटे-बड़े नौ कारनीसों में बँटा है। उनमें बीच का एक बड़ा कार्नीस नुकीला न होकर गोल है। इस आधार के ऊपर चौकोर स्तम्भ दण्ड है जो चारों ओर तापत्र युक्त कुम्भ से अलंकृत है। इसमे लतापत्र नीचे तक आये हैं। उसके ऊपर लगभग आधा भाग सोलहपहल है। जिसके ऊपरी भाग में इस्ति-नख का अंकन है और चारों ओर जंजीर से लटकता घण्टा है। उसके ऊपर उलटे कमल का कण्ठ है जिसके ऊपर-नीचे के समान ही पत्रलतायुक्त कुम्भ है। उसके ऊपर पुनः आमलकीनुमा गोळ कण्ठ है जिसके ऊपर एक बैठकी है जिस पर दो गुँथे हुए सर्पः हैं और कोनों पर घुटनों पर खड़ी मानवाकृति। इस बैठकी के ऊपर कटे हुए खरबूजे की तरह कण्ठ है, उस पर पुनः चौकोर बैठकी है जो दो भागों में बॅटी है। दोनों भाग दो भिन्न ढंग से अलंकृत हैं। इसके ऊपर सम्भव है सिंह युग्म रहे हों पर वह उपलब्ध नहीं हैं। अपने इस रूप में ये स्तम्भ नृसिंह मन्दिर के स्तम्भों से कहीं अधिक विकसित हैं। इसमें उससे सम्बन्ध जोड़ने वाला कुम्भ ही है पर उसमें भी काफी भिन्नता है। इससे अनुमान होता है कि वराइमन्दिर नृसिंहमन्दिर से कम-से-कम पचास वर्ष पीछे का होगा । एरण के विष्णुमन्दिर के स्तम्भ का आधार वराहमन्दिर के स्तम्भों के आधार सरीखा ही है तथा उसमें बैठकी के सबसे ऊपरी भाग में वृक्षयुक्त सिंह का अंकन है। इस प्रकार यह भी उपयुक्त स्तम्भों के क्रम में आता है किन्तु यह बहुत बाद का है। यह उसके मध्य भाग से प्रकट होता है जो अपने रूप और अलंकरण में अन्य सभी मन्दिरों के स्तम्भों से भिन्न है । नचना-कुठारा और भूमरा तथा देवगढ़ में स्तम्भ यथास्थान प्राप्त नहीं हुए हैं और जो कुछ भी उपलब्ध हैं उनसे उनकी समुचित कल्पना नहीं उभरती, अतः उनकी चर्चा का कोई महत्त्व नहीं है। कुण्डा के शंकरमढ़ में मूलतः मण्डप नहीं था। पीछे के मण्डप के संकेत ही मिलते हैं। अतः उसके स्तम्भों के सम्बन्ध में भी कुछ नहीं कहा जा सकता । मुकुन्ददर्रा का मन्दिर स्वयं मण्डप सरीखा है। उसका निर्माण स्तम्भों पर ही हुआ है। पर उसके स्तम्भ उपर्युक्त स्तम्भों की परम्परा से सर्वथा भिन्न हैं। वे स्तूपों की वेदिकाओं के स्तम्भों की परम्परा में जान पड़ते हैं। उसमे चारों ओर बस फुल्लकमल का सादा अलंकरण हुआ है। गुप्तकालीन लयण और चिने मन्दिरों को उपर्युक्त विबेचन के आधार पर निम्नलिखित काल-क्रम मे रखा जा सकता हैः १. कुण्डा का शंकरमढ़ ३५० ई० से पूर्व । २. साँची मन्दिर ३५०-३७५ ई० । ३. मुकुन्द दर्रा मन्दिर लगभग ४०० ई० । ४. सनकानिक लयण ( उदयगिरि) ४०२ ई० । ५. वीरसेन ( तवा ) लयण (उदयगिरि) ४०२-४१२ ई० । ६. जैन लयण ( उदयगिरि) ४१५ ई० । ७. तिगोवा का मन्दिर लगभग ४२५ ई० । ८. एरण का नृसिंह मन्दिर ४३०-४५० ई० । ९. एरण का वराह मन्दिर ४८५-५०० ई० । १०. अमृत लयण (उदयगिरि) ५००ई० । ११. एरण का विष्णु मन्दिर ५००-५५० ई० । १२. भूमरा ५००-५५० ई० । १३. नचना कुठारा का मन्दिर ५००-५५० ई० । १४. देवगढ़ का मन्दिर ६०० ३० । १५. मुण्डेश्वरी मन्दिर ६०० ई० । कीर्ति स्तम्भ और ध्वज-स्तम्भ - मौर्य सम्राट् अशोक ने स्थान-स्थान पर स्तम्भ खड़ा कर उन पर अपना धर्म-शासन अंकित कराया था। स्तम्भों पर अभिलेख अंकन की यह परम्परा उसने स्वयं स्थापित की थी अथवा वह पूर्व की किसी परम्परा का अनुगमन था, कहा नहीं जा सकता। परवर्ती काल में म्पराएँ देखने में आती हैं । (१) शासकों ने अपनी कीर्ति स्तम्भों पर अभिलेखों को अंकित कराया । (२) धर्मानुगामिनी जनता ने अपनी धार्मिक भावना के द्योतकस्वरूप मन्दिरों के सामने ध्वजस्तम्भ खड़े कराये । ध्वजस्तम्भों की परम्परा ईसा पूर्व की शताब्दी में बेसनगर में देखने में आता है। वहाँ से अनेक स्तम्भशीर्ष उपलब्ध हुए हैं। कीर्ति स्तम्भों की परम्परा कत्र स्थापित हुई कहा नहीं जा सकता। समुद्रगुप्त की प्रशस्ति सर्व प्रथम इलाहाबाद में स्थित एक स्तम्भ पर देखने में आती है। किन्तु यह स्तम्भ मूलतः उसका अपना न था। वरन् उससे पहले अशोक ने उस पर अपना लेख अंकित कराया था। तदनन्तर कीर्तिस्तम्भ के रूप में चन्द्र का मेहरौली (दिल्ली) स्तम्भ प्राप्त होता है। यह स्तम्भ लोहे का बना २३ फुट ८ इंच लम्बा और आकार में गोल है। यह नीचे से ऊपर क्रमशः पतला होता गया है। उसका नीचे का व्यास १६ इंच और ऊपर १२ इंच है। यह नीचे से ऊपर तक लेख के अंश को छोड़ कर एकदम सादा है। ऊपर सिरे पर अशोक स्तम्भों की परम्परा में कटावदार घण्टे का शीर्ष है। उसके ऊपर एक के ऊपर एक पाँच कण्ठ हैं। नीचे और ऊपर के कण्ठ सादे और बीच के तीन कण्ठ आमलकीनुमा हैं। उसके ऊपर एक चौकोर बैठकी है। इस बैठकी के ऊपर विष्णु अथवा गरुड़ की मूर्ति रही होगी जो अब अनुपलब्ध है। स्कन्दगुप्त की प्रशस्तियुक्त पत्थर का स्तम्भ कदाचित् कीर्ति-स्तम्भ की अपेक्षा ध्वज स्तम्भ ही विवरण हमें उपलब्ध न हो सका । भितरी (जिला गाजीपुर ) में है। यह रहा होगा। किन्तु इस स्तम्भ का स्कन्दगुप्त के काल का एक ध्वजस्तम्भ कहाँव (जिवा देवरिया) में है । यह स्तम्भ भी सम्भवतः अभी तक कहीं प्रकाशित नहीं है। पत्थर का बना यह स्तम्भ नीचे चौकोर है जिसके एक भाग में पार्श्वनाथ का उच्चित्रण हुआ है। उसके ऊपर कुछ अंश अठपहल है। फिर वह गोल है जिसमें गहरे कटाव हैं। उसके ऊपर कीर्तिमुख का अंकन है और तब कटावदार घण्टानुमा उसी प्रकार का शीर्ष है, जिस प्रकार का शीर्ष चन्द्र के मेहरौली स्तम्भ में है। इसके ऊपर बैठकी के चारों ओर चार तीर्थंकरों का उच्चित्रण है। तदनन्तर बुधगुप्त के शासनकाल में मातृविष्णु और धन्यविष्णु नामक दो भाइयों ने एरण में गरुड़ध्वज स्थापित किया था। यह स्तम्भ आज भी अपने स्थान पर अक्षुण्ण है । यह स्तम्भ ४३ फुट ऊँचा और तेरह फुट वर्गाकार आधार पर खड़ा है । इसका नीचे २० फुट तक २ फुट सवा दस इंच वर्गाकार है, उसके ऊपर आठ फुट तक अठपहल है। और तब साढ़े तीन फुट ऊँचा, तीन फुट व्यास का कंटावदार घण्टे की शकल का शीर्ष है। उसके ऊपर डेढ़ फुट की बैठकी है जिसके ऊपर तीन फुट की दूसरी बैठकी है जिसका नीचे का आधा भाग सादा है और ऊपर के आधे भाग में चारों ओर बैठे हुए सिंह-युग्म हैं और तब उसके ऊपर ५ फुट ऊँची गरुड़ की दोरुखी मूर्ति है जिसके पीछे चक्र का अंकन है । मन्दसौर में यशोधर्मन विष्णुवर्धन का कीर्ति स्तम्भ प्राप्त हुआ है; किन्तु इसका गोल दण्ड ही उपलब्ध हुआ है और उसमें लेख के अतिरिक्त और कुछ उल्लेखनीय नहीं है।
है; उसके ऊपर का चौथाई आगे को निकलती हुई पाँच पट्टियों में बँटा है। उसके ऊपर के तीसरे चौथाई में चारों ओर दो-दो गवाक्ष-मुखों का अंकन है और सबसे ऊपर के चौथाई में सिंहयुग्म, चारों ओर है और उनके बीच में वृक्ष है। स्तम्भ का यह अंकन साँची के स्तम्भ के क्रम में ही है पर दो बातों में उससे भिन्न है। एक तो इसका अलंकरण अधिक भारी है, दूसरे इस स्तम्भ में कटावदार घण्ट-शीर्ष के स्थान पर लता-पत्रयुक्त कुम्भ है। यह अन्तिम विशेषता उसे साँची के मन्दिर से अलग करती है । एरण के नृसिंह मन्दिर के स्तम्भों का तिगोवा के स्तम्भों से काफी साम्य है। जहाँ तक बैठकी और दण्ड का सम्बन्ध है, दोनों प्रायः एक से हैं । तिगोवा के स्तम्भ के समान ही बैठकी में वृक्ष के साथ सिंह-युग्म हैं, उसके नीचे की बैठकी में गवाक्ष-मुख है, अन्तर यह है कि इसमें दो के स्थान पर तीन हैं। उसके नीचे तिगोवा के समान ही दो और बैठकी हैं पर इसमें पाँच पतली पट्टियों के स्थान पर एक चौड़ी पट्टी है और उसके नीचे काफी चौड़ी चौथी बैठकी। उसके नीचे तिगोवा के स्तम्भों के समान ही लतापत्रयुक्त कुम्भ है। उसके नीचे के दुहरे कण्ठे के अलंकरण में कुछ भिन्नता है और फिर उसी तरह सोलह-पहल और अठपहल दण्ड है। इसके दण्ड मे बीच में कीर्तिमुखों और झालरों का अलंकरण है जो तिगोवा में नहीं है। नीचे के आधार का सपाट चौकोर रूप ने यहाँ एक सर्वथा नया रूप लिया है। वह पाँच भागों में बँट गया है और सीढ़ीनुमा रूप धारण कर लिया है। इस प्रकार यह स्तम्भ तिगोवा के स्तम्भ के क्रम में होते उससे कुछ अधिक विस्तृत और विकसित है । इस प्रकार यह तिगोवा के मन्दिर के बाद का है, किन्तु बहुत बाद का नहीं। एरण के वराह मन्दिर के स्तम्भ पूर्वोल्लिखित स्तम्भों से अपने अलंकरणों में सर्वथा भिन्न है। इसका आधार छोटे-बड़े नौ कारनीसों में बँटा है। उनमें बीच का एक बड़ा कार्नीस नुकीला न होकर गोल है। इस आधार के ऊपर चौकोर स्तम्भ दण्ड है जो चारों ओर तापत्र युक्त कुम्भ से अलंकृत है। इसमे लतापत्र नीचे तक आये हैं। उसके ऊपर लगभग आधा भाग सोलहपहल है। जिसके ऊपरी भाग में इस्ति-नख का अंकन है और चारों ओर जंजीर से लटकता घण्टा है। उसके ऊपर उलटे कमल का कण्ठ है जिसके ऊपर-नीचे के समान ही पत्रलतायुक्त कुम्भ है। उसके ऊपर पुनः आमलकीनुमा गोळ कण्ठ है जिसके ऊपर एक बैठकी है जिस पर दो गुँथे हुए सर्पः हैं और कोनों पर घुटनों पर खड़ी मानवाकृति। इस बैठकी के ऊपर कटे हुए खरबूजे की तरह कण्ठ है, उस पर पुनः चौकोर बैठकी है जो दो भागों में बॅटी है। दोनों भाग दो भिन्न ढंग से अलंकृत हैं। इसके ऊपर सम्भव है सिंह युग्म रहे हों पर वह उपलब्ध नहीं हैं। अपने इस रूप में ये स्तम्भ नृसिंह मन्दिर के स्तम्भों से कहीं अधिक विकसित हैं। इसमें उससे सम्बन्ध जोड़ने वाला कुम्भ ही है पर उसमें भी काफी भिन्नता है। इससे अनुमान होता है कि वराइमन्दिर नृसिंहमन्दिर से कम-से-कम पचास वर्ष पीछे का होगा । एरण के विष्णुमन्दिर के स्तम्भ का आधार वराहमन्दिर के स्तम्भों के आधार सरीखा ही है तथा उसमें बैठकी के सबसे ऊपरी भाग में वृक्षयुक्त सिंह का अंकन है। इस प्रकार यह भी उपयुक्त स्तम्भों के क्रम में आता है किन्तु यह बहुत बाद का है। यह उसके मध्य भाग से प्रकट होता है जो अपने रूप और अलंकरण में अन्य सभी मन्दिरों के स्तम्भों से भिन्न है । नचना-कुठारा और भूमरा तथा देवगढ़ में स्तम्भ यथास्थान प्राप्त नहीं हुए हैं और जो कुछ भी उपलब्ध हैं उनसे उनकी समुचित कल्पना नहीं उभरती, अतः उनकी चर्चा का कोई महत्त्व नहीं है। कुण्डा के शंकरमढ़ में मूलतः मण्डप नहीं था। पीछे के मण्डप के संकेत ही मिलते हैं। अतः उसके स्तम्भों के सम्बन्ध में भी कुछ नहीं कहा जा सकता । मुकुन्ददर्रा का मन्दिर स्वयं मण्डप सरीखा है। उसका निर्माण स्तम्भों पर ही हुआ है। पर उसके स्तम्भ उपर्युक्त स्तम्भों की परम्परा से सर्वथा भिन्न हैं। वे स्तूपों की वेदिकाओं के स्तम्भों की परम्परा में जान पड़ते हैं। उसमे चारों ओर बस फुल्लकमल का सादा अलंकरण हुआ है। गुप्तकालीन लयण और चिने मन्दिरों को उपर्युक्त विबेचन के आधार पर निम्नलिखित काल-क्रम मे रखा जा सकता हैः एक. कुण्डा का शंकरमढ़ तीन सौ पचास ईशून्य से पूर्व । दो. साँची मन्दिर तीन सौ पचास-तीन सौ पचहत्तर ईशून्य । तीन. मुकुन्द दर्रा मन्दिर लगभग चार सौ ईशून्य । चार. सनकानिक लयण चार सौ दो ईशून्य । पाँच. वीरसेन लयण चार सौ दो-चार सौ बारह ईशून्य । छः. जैन लयण चार सौ पंद्रह ईशून्य । सात. तिगोवा का मन्दिर लगभग चार सौ पच्चीस ईशून्य । आठ. एरण का नृसिंह मन्दिर चार सौ तीस-चार सौ पचास ईशून्य । नौ. एरण का वराह मन्दिर चार सौ पचासी-पाँच सौ ईशून्य । दस. अमृत लयण पाँच सौईशून्य । ग्यारह. एरण का विष्णु मन्दिर पाँच सौ-पाँच सौ पचास ईशून्य । बारह. भूमरा पाँच सौ-पाँच सौ पचास ईशून्य । तेरह. नचना कुठारा का मन्दिर पाँच सौ-पाँच सौ पचास ईशून्य । चौदह. देवगढ़ का मन्दिर छः सौ तीस । पंद्रह. मुण्डेश्वरी मन्दिर छः सौ ईशून्य । कीर्ति स्तम्भ और ध्वज-स्तम्भ - मौर्य सम्राट् अशोक ने स्थान-स्थान पर स्तम्भ खड़ा कर उन पर अपना धर्म-शासन अंकित कराया था। स्तम्भों पर अभिलेख अंकन की यह परम्परा उसने स्वयं स्थापित की थी अथवा वह पूर्व की किसी परम्परा का अनुगमन था, कहा नहीं जा सकता। परवर्ती काल में म्पराएँ देखने में आती हैं । शासकों ने अपनी कीर्ति स्तम्भों पर अभिलेखों को अंकित कराया । धर्मानुगामिनी जनता ने अपनी धार्मिक भावना के द्योतकस्वरूप मन्दिरों के सामने ध्वजस्तम्भ खड़े कराये । ध्वजस्तम्भों की परम्परा ईसा पूर्व की शताब्दी में बेसनगर में देखने में आता है। वहाँ से अनेक स्तम्भशीर्ष उपलब्ध हुए हैं। कीर्ति स्तम्भों की परम्परा कत्र स्थापित हुई कहा नहीं जा सकता। समुद्रगुप्त की प्रशस्ति सर्व प्रथम इलाहाबाद में स्थित एक स्तम्भ पर देखने में आती है। किन्तु यह स्तम्भ मूलतः उसका अपना न था। वरन् उससे पहले अशोक ने उस पर अपना लेख अंकित कराया था। तदनन्तर कीर्तिस्तम्भ के रूप में चन्द्र का मेहरौली स्तम्भ प्राप्त होता है। यह स्तम्भ लोहे का बना तेईस फुट आठ इंच लम्बा और आकार में गोल है। यह नीचे से ऊपर क्रमशः पतला होता गया है। उसका नीचे का व्यास सोलह इंच और ऊपर बारह इंच है। यह नीचे से ऊपर तक लेख के अंश को छोड़ कर एकदम सादा है। ऊपर सिरे पर अशोक स्तम्भों की परम्परा में कटावदार घण्टे का शीर्ष है। उसके ऊपर एक के ऊपर एक पाँच कण्ठ हैं। नीचे और ऊपर के कण्ठ सादे और बीच के तीन कण्ठ आमलकीनुमा हैं। उसके ऊपर एक चौकोर बैठकी है। इस बैठकी के ऊपर विष्णु अथवा गरुड़ की मूर्ति रही होगी जो अब अनुपलब्ध है। स्कन्दगुप्त की प्रशस्तियुक्त पत्थर का स्तम्भ कदाचित् कीर्ति-स्तम्भ की अपेक्षा ध्वज स्तम्भ ही विवरण हमें उपलब्ध न हो सका । भितरी में है। यह रहा होगा। किन्तु इस स्तम्भ का स्कन्दगुप्त के काल का एक ध्वजस्तम्भ कहाँव में है । यह स्तम्भ भी सम्भवतः अभी तक कहीं प्रकाशित नहीं है। पत्थर का बना यह स्तम्भ नीचे चौकोर है जिसके एक भाग में पार्श्वनाथ का उच्चित्रण हुआ है। उसके ऊपर कुछ अंश अठपहल है। फिर वह गोल है जिसमें गहरे कटाव हैं। उसके ऊपर कीर्तिमुख का अंकन है और तब कटावदार घण्टानुमा उसी प्रकार का शीर्ष है, जिस प्रकार का शीर्ष चन्द्र के मेहरौली स्तम्भ में है। इसके ऊपर बैठकी के चारों ओर चार तीर्थंकरों का उच्चित्रण है। तदनन्तर बुधगुप्त के शासनकाल में मातृविष्णु और धन्यविष्णु नामक दो भाइयों ने एरण में गरुड़ध्वज स्थापित किया था। यह स्तम्भ आज भी अपने स्थान पर अक्षुण्ण है । यह स्तम्भ तैंतालीस फुट ऊँचा और तेरह फुट वर्गाकार आधार पर खड़ा है । इसका नीचे बीस फुट तक दो फुट सवा दस इंच वर्गाकार है, उसके ऊपर आठ फुट तक अठपहल है। और तब साढ़े तीन फुट ऊँचा, तीन फुट व्यास का कंटावदार घण्टे की शकल का शीर्ष है। उसके ऊपर डेढ़ फुट की बैठकी है जिसके ऊपर तीन फुट की दूसरी बैठकी है जिसका नीचे का आधा भाग सादा है और ऊपर के आधे भाग में चारों ओर बैठे हुए सिंह-युग्म हैं और तब उसके ऊपर पाँच फुट ऊँची गरुड़ की दोरुखी मूर्ति है जिसके पीछे चक्र का अंकन है । मन्दसौर में यशोधर्मन विष्णुवर्धन का कीर्ति स्तम्भ प्राप्त हुआ है; किन्तु इसका गोल दण्ड ही उपलब्ध हुआ है और उसमें लेख के अतिरिक्त और कुछ उल्लेखनीय नहीं है।
भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने बुधवार को बीसीसीआई के कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि वह टीवी शो पर महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी के लिए 'विनम्रतापूर्वक माफी मांगते हैं', जिन्हें सेक्सिस्ट और स्त्री विरोधी करार दिया गया. नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 24 घंटे का समय दिया गया था, पंड्या ने कहा कि उन्हें महसूस नहीं हुआ कि उनकी टिप्पणी असभ्य मानी जाएगी. पता चला है कि पंड्या ने भारतीय टीम प्रबंधन और यहां अपने साथियों से माफी मांग ली है. इस शो पर उनके साथी लोकेश राहुल ने भी शिरकत की, हालाकि वह महिलाओं और रिश्तों पर पूछे गये सवालों पर अधिक संयमित दिखे. पंड्या इस समय भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में हैं जहां टीम ने पहली बार ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज अपने नाम की. वह 12 जनवरी से सिडनी में शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज में खेलेंगे.
भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने बुधवार को बीसीसीआई के कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि वह टीवी शो पर महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी के लिए 'विनम्रतापूर्वक माफी मांगते हैं', जिन्हें सेक्सिस्ट और स्त्री विरोधी करार दिया गया. नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें चौबीस घंटाटे का समय दिया गया था, पंड्या ने कहा कि उन्हें महसूस नहीं हुआ कि उनकी टिप्पणी असभ्य मानी जाएगी. पता चला है कि पंड्या ने भारतीय टीम प्रबंधन और यहां अपने साथियों से माफी मांग ली है. इस शो पर उनके साथी लोकेश राहुल ने भी शिरकत की, हालाकि वह महिलाओं और रिश्तों पर पूछे गये सवालों पर अधिक संयमित दिखे. पंड्या इस समय भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में हैं जहां टीम ने पहली बार ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज अपने नाम की. वह बारह जनवरी से सिडनी में शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज में खेलेंगे.
बिजनौर में अपनी मां के साथ पैदल दवा लेने जा रही बच्ची को तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया। हादसे में बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बच्ची की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामला नजीबाबाद थाना क्षेत्र का है। यहां अमान नगर हरिद्वार रोड पर रविवार दोपहर करीब एक बजे 14 साल की जोया अपनी मां के साथ पैदल दवा लेने जा रही थी। तभी पीछे आ रही एक तेज रफ्तार कार ने बच्ची को टक्कर मार दी। कार का नंबर यूके07एएक्स 2869 बताया जा रहा है। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी कार चालक को पकड़ लिया। सीओ गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कार चालक एक महिला को कार चलाना सिखा रहा था। तभी अमान नगर में भीड़भाड़ वाली जगह पर उसकी कार अनियंत्रित हो गई। इसके बाद तेज रफ्तार कार ने जोया को टक्कर मार दी। इससे जोया की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिजनौर में अपनी मां के साथ पैदल दवा लेने जा रही बच्ची को तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया। हादसे में बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बच्ची की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामला नजीबाबाद थाना क्षेत्र का है। यहां अमान नगर हरिद्वार रोड पर रविवार दोपहर करीब एक बजे चौदह साल की जोया अपनी मां के साथ पैदल दवा लेने जा रही थी। तभी पीछे आ रही एक तेज रफ्तार कार ने बच्ची को टक्कर मार दी। कार का नंबर यूकेसातएएक्स दो हज़ार आठ सौ उनहत्तर बताया जा रहा है। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। हादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी कार चालक को पकड़ लिया। सीओ गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कार चालक एक महिला को कार चलाना सिखा रहा था। तभी अमान नगर में भीड़भाड़ वाली जगह पर उसकी कार अनियंत्रित हो गई। इसके बाद तेज रफ्तार कार ने जोया को टक्कर मार दी। इससे जोया की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बुलंदशहर एसआईटी की टीम ने सुदीक्षा भाटी की मौत के मामले में दोनों बुलेट-सवार युवकों को गिरफ्तार किया है। यह पता चला है कि घटना छेड़छाड़ या स्टंट नहीं थी, बल्कि टैंकर को बचाने के लिए एक सड़क दुर्घटना में हुई थी। पुलिस आज प्रेस कांफ्रेंस कर इस मामले में अहम खुलासा कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में बुलंदशहर एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने कहा कि जो भी खुलासा होगा वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया जाएगा। हालाँकि, इशारे में, उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ भी नहीं दिखाया गया है। बुलंदशहर पुलिस सुदीक्षा मौत मामले के रहस्य को सुलझाने की तैयारी कर रही है। पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपी बाइकर्स ने इस पर अपना हाथ जमाया है। पुलिस द्वारा पकड़े गए दो बुलेट सवारों में एक 53 वर्षीय राज मिस्त्री और दूसरा एक अकाउंटेंट है। पुलिस के मुताबिक, उनकी बाइक एक दुर्घटना थी। दूसरी ओर, एसआईटी प्रभारी ने कहा कि पुलिस ने बुलंदशहर से स्याना के बीच पड़ने वाले गांवों की बुलेट मोटरसाइकिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। सीओ देवेश सिंह ने कहा कि काम मुश्किल था, लेकिन हम आरोपियों तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, इसलिए हमें इसमें सफलता मिली। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में 10,000 से अधिक बुलेट बाइक की खोज की। पुलिस की कई टीमें इस पर काम कर रही थीं। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के डेरी स्कैनर गाँव की रहने वाली विद्वान छात्रा सुदीक्षा भाटी की 10 अगस्त को बुलंदशहर के औरंगाबाद इलाके में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब परिवार के सदस्यों ने कहा कि छेड़छाड़ के कारण मौत जैसी बातें ।
बुलंदशहर एसआईटी की टीम ने सुदीक्षा भाटी की मौत के मामले में दोनों बुलेट-सवार युवकों को गिरफ्तार किया है। यह पता चला है कि घटना छेड़छाड़ या स्टंट नहीं थी, बल्कि टैंकर को बचाने के लिए एक सड़क दुर्घटना में हुई थी। पुलिस आज प्रेस कांफ्रेंस कर इस मामले में अहम खुलासा कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में बुलंदशहर एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने कहा कि जो भी खुलासा होगा वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया जाएगा। हालाँकि, इशारे में, उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ भी नहीं दिखाया गया है। बुलंदशहर पुलिस सुदीक्षा मौत मामले के रहस्य को सुलझाने की तैयारी कर रही है। पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपी बाइकर्स ने इस पर अपना हाथ जमाया है। पुलिस द्वारा पकड़े गए दो बुलेट सवारों में एक तिरेपन वर्षीय राज मिस्त्री और दूसरा एक अकाउंटेंट है। पुलिस के मुताबिक, उनकी बाइक एक दुर्घटना थी। दूसरी ओर, एसआईटी प्रभारी ने कहा कि पुलिस ने बुलंदशहर से स्याना के बीच पड़ने वाले गांवों की बुलेट मोटरसाइकिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। सीओ देवेश सिंह ने कहा कि काम मुश्किल था, लेकिन हम आरोपियों तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, इसलिए हमें इसमें सफलता मिली। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में दस,शून्य से अधिक बुलेट बाइक की खोज की। पुलिस की कई टीमें इस पर काम कर रही थीं। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के डेरी स्कैनर गाँव की रहने वाली विद्वान छात्रा सुदीक्षा भाटी की दस अगस्त को बुलंदशहर के औरंगाबाद इलाके में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब परिवार के सदस्यों ने कहा कि छेड़छाड़ के कारण मौत जैसी बातें ।
Today Tarot Card Reading: आज आप करीबियों से सुख सौख्य बांटेंगे तथा कार्यक्षेत्र में सकारात्मक अवसर बनेंगे. अपनी बात पर टीके रहेंगे. आज आपकी सुविधाओं में वृद्धि होगी. Dainik Tarot Card Prediction: तुला राशि के लिए द वर्ल्ड का कार्ड इस प्रकार के संकेत दे रहा है कि आज आप नए संबंधों और करियर व्यापार की ओर बढ़ने के प्रयास बनाए रखेंगे. नवीन वस्तुओं और विचारों को अपनाएंगे. पुराने मामलों को त्यागने की सोच रहेगी. रचनात्मक कार्यों के लिए बेहतर प्रयास बनाए रखेंगे. आर्थिक वाणिज्यिक नीतियों को गति प्रदान करेंगे. कला कौशल से स्वयं के गुणों को उभारेंगे. करीबियों को प्रभावित करेंगे. आधुनिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. समकक्षों और बड़ों का साथ बना रहेगा. अपनों के साथ सुखद क्षणों को साझा करेंगे. परीचितों की संख्या में वृद्धि होगी. विभिन्न मोर्चों पर सफलता का प्रतिशत बढ़ाएंगे. महत्वपूर्ण विषयों पर फोकस बनाए रखेंगे. प्रस्तावों की प्राप्ति बनी रहेगी. कैसा रहेगा आज का दिन ? - घर परिवार में सुख का वातावरण बना रहेगा तथा अपनों के प्रति विनम्रता और आदरभाव बढ़ेगा. - वक्त पर जरूरी निर्णय ले पाएंगे और बड़ी उपलब्धियों के कारण गौरव मेहसूस करेंगे. - शुभ लाभ को बढ़ावा मिलेगा तथा आत्मसम्मान का भाव बना रहेगा. - आकर्षक कार्यगति बनाए रखेंगे और खानपान ऊंचा होगा. - अन्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और जिम्मेदारों से तालमेल व सामंजस्य रहेगा. - व्यक्तिगत मामलों में सुख सौख्य बना रहेगा. - अपरिचितों से भेंट मुलाकात होगी तथा संकोच से बचें. करीबियों से सुख सौख्य बांटेंगे. - दीर्घकालिक योजनाएं साझा करेंगे. कार्यक्षेत्र में सकारात्मक अवसर बनेंगे. - अपनी बात पर सहमति बनाए रखें और सुविधाओं में वृद्धि बनी रहेगी.
Today Tarot Card Reading: आज आप करीबियों से सुख सौख्य बांटेंगे तथा कार्यक्षेत्र में सकारात्मक अवसर बनेंगे. अपनी बात पर टीके रहेंगे. आज आपकी सुविधाओं में वृद्धि होगी. Dainik Tarot Card Prediction: तुला राशि के लिए द वर्ल्ड का कार्ड इस प्रकार के संकेत दे रहा है कि आज आप नए संबंधों और करियर व्यापार की ओर बढ़ने के प्रयास बनाए रखेंगे. नवीन वस्तुओं और विचारों को अपनाएंगे. पुराने मामलों को त्यागने की सोच रहेगी. रचनात्मक कार्यों के लिए बेहतर प्रयास बनाए रखेंगे. आर्थिक वाणिज्यिक नीतियों को गति प्रदान करेंगे. कला कौशल से स्वयं के गुणों को उभारेंगे. करीबियों को प्रभावित करेंगे. आधुनिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. समकक्षों और बड़ों का साथ बना रहेगा. अपनों के साथ सुखद क्षणों को साझा करेंगे. परीचितों की संख्या में वृद्धि होगी. विभिन्न मोर्चों पर सफलता का प्रतिशत बढ़ाएंगे. महत्वपूर्ण विषयों पर फोकस बनाए रखेंगे. प्रस्तावों की प्राप्ति बनी रहेगी. कैसा रहेगा आज का दिन ? - घर परिवार में सुख का वातावरण बना रहेगा तथा अपनों के प्रति विनम्रता और आदरभाव बढ़ेगा. - वक्त पर जरूरी निर्णय ले पाएंगे और बड़ी उपलब्धियों के कारण गौरव मेहसूस करेंगे. - शुभ लाभ को बढ़ावा मिलेगा तथा आत्मसम्मान का भाव बना रहेगा. - आकर्षक कार्यगति बनाए रखेंगे और खानपान ऊंचा होगा. - अन्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और जिम्मेदारों से तालमेल व सामंजस्य रहेगा. - व्यक्तिगत मामलों में सुख सौख्य बना रहेगा. - अपरिचितों से भेंट मुलाकात होगी तथा संकोच से बचें. करीबियों से सुख सौख्य बांटेंगे. - दीर्घकालिक योजनाएं साझा करेंगे. कार्यक्षेत्र में सकारात्मक अवसर बनेंगे. - अपनी बात पर सहमति बनाए रखें और सुविधाओं में वृद्धि बनी रहेगी.
धर्मशाला -देवभूमि हिमाचल प्रदेश की शांत वादियां इन दिनों पूरी तरह से अशांत हो गई हंै। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में लगातार तीन मर्डर केस होने से समस्त क्षेत्र में दहशत का माहौल है। रानीताल में बैजनाथ के टैक्सी चालक के मर्डर केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं लंबागांव में हुए 32 वर्षीय युवक मर्डर मामले में भी आरोपी को हिरासत में ले लिया है। वहीं नूरपुर में भी दिवाली को देर शाम मर्डर हुआ है, जिसके संदिग्ध आरोपियों को पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। उक्त तीनों में से दो मामलों में शराब और जुआ खेलने के बाद साथियों ने ही अपने दोस्तों के मौत के घाट उतारा है। जबकि 22 सितंबर को हुई टैक्सी चालक मौत मामले में बड़ा चौकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें आरोपी सेना के जवान ने पत्नी से चालक के संबंध होने के शक पर उसे खतरनाक तरीके से मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस लूट का मामला समझकर मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए पिछले एक माह से प्रयास कर रही थी। अब आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। वहीं कांगड़ा के ही लंबागांव में तीन दोस्तों के एक साथ शराब पीने के बाद लड़ाई झगड़ा होने से 32 वर्षीय युवा को पत्थर से मारकर ही मौत के घाट उतार दिया है। आरोपी दिनेश कुमार ने पहले अश्वनी को पत्थर मारकर बुरी तरह घायल कर दिया। जबकि इसके बाद राजीव कुमार पुत्र श्रवण सिंह को भी पत्थर मारकर मौत के घाट उतारक सड़क में ही फेंक दिया। आरोपी को पकड़ने के बाद पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं नूरपुर में भी दिवाली की रात मर्डर होने का मामला सामने आया है। जिसमें जुआ खेलते व शराब पीने के बाद आपस में लड़ने के बाद व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया है। पुलिस ने मामले की कड़ी छानबीन करते हुए शक के आधार पर साथियों से पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं देर रात तक आरोपी को भी हिरासत में ले लिया जाएगा। बहरहाल शांत प्रदेश में लगातार सामने आ रहे सनसनीखेज मर्डर मामले से समस्त क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है।
धर्मशाला -देवभूमि हिमाचल प्रदेश की शांत वादियां इन दिनों पूरी तरह से अशांत हो गई हंै। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में लगातार तीन मर्डर केस होने से समस्त क्षेत्र में दहशत का माहौल है। रानीताल में बैजनाथ के टैक्सी चालक के मर्डर केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं लंबागांव में हुए बत्तीस वर्षीय युवक मर्डर मामले में भी आरोपी को हिरासत में ले लिया है। वहीं नूरपुर में भी दिवाली को देर शाम मर्डर हुआ है, जिसके संदिग्ध आरोपियों को पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। उक्त तीनों में से दो मामलों में शराब और जुआ खेलने के बाद साथियों ने ही अपने दोस्तों के मौत के घाट उतारा है। जबकि बाईस सितंबर को हुई टैक्सी चालक मौत मामले में बड़ा चौकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें आरोपी सेना के जवान ने पत्नी से चालक के संबंध होने के शक पर उसे खतरनाक तरीके से मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस लूट का मामला समझकर मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए पिछले एक माह से प्रयास कर रही थी। अब आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। वहीं कांगड़ा के ही लंबागांव में तीन दोस्तों के एक साथ शराब पीने के बाद लड़ाई झगड़ा होने से बत्तीस वर्षीय युवा को पत्थर से मारकर ही मौत के घाट उतार दिया है। आरोपी दिनेश कुमार ने पहले अश्वनी को पत्थर मारकर बुरी तरह घायल कर दिया। जबकि इसके बाद राजीव कुमार पुत्र श्रवण सिंह को भी पत्थर मारकर मौत के घाट उतारक सड़क में ही फेंक दिया। आरोपी को पकड़ने के बाद पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं नूरपुर में भी दिवाली की रात मर्डर होने का मामला सामने आया है। जिसमें जुआ खेलते व शराब पीने के बाद आपस में लड़ने के बाद व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया है। पुलिस ने मामले की कड़ी छानबीन करते हुए शक के आधार पर साथियों से पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं देर रात तक आरोपी को भी हिरासत में ले लिया जाएगा। बहरहाल शांत प्रदेश में लगातार सामने आ रहे सनसनीखेज मर्डर मामले से समस्त क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है।
प्रत्येक परिवार में एक बच्चे के जन्म के साथ,हर्षित मुसीबत। , कपड़े, खिलौने, बिस्तर, और, ज़ाहिर है घुमक्कड़ - युवा माता-पिता अपने बच्चे को सब कुछ का सबसे अच्छा था करना चाहते हैं। चपलता, लागत, वजन, आकार, एक कार डिजाइन में परिवहन के लिए आसानः जब बच्चे के माता-पिता के लिए पहला वाहन का चयन कई कारकों पर विचार कर रहे हैं। अगर आपके घर में एक सुखद घटना आ गई है, और आपअपने टुकड़ों के लिए एक घुमक्कड़ की तलाश में, हम आपको जर्मन और पोलिश निर्माताओं द्वारा सहयोग में किए गए उज्ज्वल और सुरुचिपूर्ण मॉडल पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। हम आरामदायक और बहुत आकर्षक घुमक्कड़ रेंडियर को ध्यान में रखते हैं। वे पूरी तरह से हमारे देश के जलवायु के अनुकूल हैं। पूरे सेट में विशाल भेड़ के बच्चे, प्राकृतिक भेड़ के बच्चे से लिफाफे शामिल हैं। चेसिस की चौड़ाई की तरह ऊंची इमारतों के निवासियों के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण विवरण माना जाता है। यह डिज़ाइन किया गया है ताकि घुमक्कड़ आसानी से किसी भी लिफ्ट में प्रवेश कर सके। जर्मनी में रेन्डी घुमक्कड़ विकसित और निर्मित किए जा रहे हैं, लेकिन पोलैंड में इकट्ठे किए जा रहे हैं। इस प्रकार, उत्पादकों ने उत्कृष्ट गुणवत्ता और उचित मूल्य का एक सफल अनुपात हासिल किया है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य बनाना हैबच्चों के लिए गर्म, आरामदायक और भरोसेमंद घुमक्कड़। सभी मॉडलों में गुणवत्ता के आवश्यक प्रमाण पत्र होते हैं, पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बने होते हैं, इसलिए बच्चे के स्वास्थ्य के लिए कोई खतरा न बनें। घुमक्कड़ रेंडी के लिए गारंटी एक साल से भी कम नहीं है, जो उनकी विश्वसनीयता को इंगित करती है। इस तथ्य के बावजूद कि घुमक्कड़ के रूसी बाजाररेंडियर हाल ही में दिखाई दिया (2013), वे पहले से ही रूसी खरीदारों के बीच लोकप्रियता प्राप्त कर चुके हैं। कई ने कंपनी के सार्वभौमिक मॉडल की विविधता की सराहना की। "रेनडियर" क्यों चुनें? कैरिएज रेंडियर के पास कई आवश्यक कार्य हैं। मॉडल "1 में 2" में एक पालना और आरामदायक चलने वाली इकाई शामिल है। वे जन्म से चार साल तक "मालिकों" के लिए लक्षित हैं। खरीदारों रंगों की एक बड़ी संख्या से एक मॉडल चुन सकते हैं, इसलिए एक घुमक्कड़ को ढूंढना मुश्किल नहीं होगा जो आपकी आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करता है। सभी गाड़ियों में एक गद्दे के साथ एक लाइनर है। पालना एक पालना के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप जुड़वां पैदा हुए थे, तो आपके लिए कंपनी ने रेंडियर ट्विन विकसित किया था। इसमें एक पालना के आकार में वृद्धि हुई है। यह एक बहुत सुविधाजनक और उच्च गुणवत्ता वाला मॉडल है। और अब हम आपको कंपनी के कुछ घुमक्कड़ पेश करेंगे, जो ग्राहकों के मुताबिक लोकप्रिय हैं। नवजात शिशु के लिए यह अद्भुत मॉडलअधिकतम पूर्ण सेट के साथ, विकर पालना बेक्ड चमड़े के साथ तैयार किया जाता है। आपका बच्चा एक विशाल कोट में आरामदायक महसूस करेगा, जो 80x38 सेमी मापता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चेसिस केवल 5 9 सेमी चौड़ा है, जो एक संकीर्ण लिफ्ट में ड्राइव करना आसान बनाता है। यह मॉडल आप में से दूसरों से अलग हैक्रैडल का आकार चुनना संभव है - बड़ा या बहुत बड़ा। इस घुमक्कड़ के पूरे सेट में एक फर लिफाफा और घुमक्कड़ के हैंडल पर एक गर्म मफ शामिल है। रेंडियर विकलिना "1 में 2" यह एक अद्भुत स्टाइल और सौंदर्य घुमक्कड़ है। मैं इस पर अधिक विस्तार से रहना चाहूंगा। यह घुमक्कड़, रेंडियर "2 में 1", "कुलीन" की श्रेणी से संबंधित है, लेकिन इस तथ्य के कारण कि यह जर्मनी में विकसित हुआ था, और पोलैंड जा रहा था, इसकी सस्ती कीमत (38,700 रूबल) है। एक खूबसूरत विकर टोकरी के साथ मूल पालना किसी को उदासीन नहीं छोड़ देगा, और पालना के अंदर एक चमकदार इको-पूंछ रजाईदार सफेद के साथ तैयार किया जाता है, जो चमकदार कपड़े से सजाया जाता है। फ्रेम चिकनी घटता और अनुग्रह से प्रतिष्ठित है। एक निश्चित ठाठ एक महंगा चमड़े के हैंडल जोड़ता है। जर्मनी के विशेषज्ञों ने विशेष रूप से रूसी उपभोक्ताओं के लिए इस मॉडल को विकसित किया है, इसलिए यह सर्दियों के लिए आदर्श है। किट में शामिल हैंः - पालने; - मां के लिए एक बैग; - चमड़े के हैंडल के साथ चेसिस; - एक चलने वाला ब्लॉक; - inflatable पहियों (यदि आप चाहते हैं तो आप उन्हें चुन सकते हैंः सफेद या काला, 30 या 35 सेमी व्यास); - पैरों पर एक गर्म क्लोक; - प्राकृतिक फर से बना एक लिफाफा; - सामान की टोकरी; - मच्छर जाल; - रेनकोट। रेंडियर लिली "1 में 2" और अब हम आपको मॉडल की नवीनता पेश करते हैं2015 की श्रृंखला। यह रूस के लिए जर्मन डिजाइनरों द्वारा विकसित किया गया था। एक सुंदर, स्टाइलिश और साथ ही एक क्लासिक घुमक्कड़ बेक्ड चमड़े से बना है। यह एक बहुत ही व्यावहारिक सामग्री है - इसे साफ करना आसान है, यह गंदगी से डरता नहीं है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि यह मॉडल केंद्रीय और दक्षिणी रूस के लिए आदर्श है, जहां अक्सर सर्दियों में स्लैश होता है। ऊंचाई हेडरेस्ट पांच में समायोजित किया जा सकता हैविभिन्न पदों, पेड़ के नीचे बच्चों को ठंड से बचाता है। पैरों पर चमड़े के केप बारिश के खिलाफ सुरक्षा करता है, और स्टाइलिश हुड सूर्य की सीधी किरणों से ढका होगा। यह कॉम्पैक्ट घुमक्कड़ आसानी से कार में प्रवेश करता हैलिफ्ट और कार में। आरामदायक हैंडल ऊंचाई में मां की ऊंचाई के लिए समायोज्य है, और बड़े inflatable पहियों आप किसी भी बाधाओं को दूर करने की अनुमति देता है। भेड़ का बच्चा से बना एक लिफाफा शामिल है। और मेरी मां के पास एक सुंदर चमड़े का थैला है। यूनिवर्सल रेंडियर घुमक्कड़ "3 में 1" समीक्षा उत्साही हो जाती है। यह इस तथ्य के कारण है कि वे न केवल बच्चे के लिए सुविधाजनक हैं, बल्कि मां के लिए भी सुविधाजनक हैं। रेंडियर विकलिना "1 में 3" यह शानदार घुमक्कड़, एक पुस्तिका के साथ समाप्त हुआत्वचा, अधिकतम मानव निर्मित है। विशेष रूप से माता-पिता एक विस्तृत पालना (80x38 सेमी) नोट करते हैं, जिसमें बच्चे "कपड़ों" में भी विशाल है। बहुत सुविधाजनक संकीर्ण चेसिस (5 9 सेमी), जिससे आप सबसे कम दरवाजे में जा सकते हैं। रेंडियर स्टाइल "1 में 3" यह एक महान किट है जिसमें सब कुछ शामिल हैबच्चे के लिए जरूरी - एक पालना, एक चलने वाला ब्लॉक, एक फर लिफाफा, एक कार सीट। सुनिश्चित करें कि इस तरह के घुमक्कड़ में बच्चे हमेशा और किसी भी मौसम में आरामदायक रहेगा। कंपनी के नवीनतम विकास में से एक। एक सार्वभौमिक किट माता-पिता की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह रेंडियर घुमक्कड़ "3 में 1" में एक पालना, एक ऑटोमार्मर, एक पैदल चलने वाला ब्लॉक और एक फर लिफाफा होता है। यह पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बना है और इसलिए बच्चे को पूरी तरह से हानिरहित है। कंपनी रंगों का एक बड़ा चयन प्रदान करता है। एक घुमक्कड़ की पसंद हमेशा माता-पिता शामिल हैगंभीरता से। आखिरकार, इस मामले में यह उनके बच्चे की सुविधा और सुरक्षा के बारे में है। एक नियम के रूप में, खरीदने से पहले, वे विभिन्न निर्माताओं से कई प्रस्तावों पर पुनर्विचार करते हैं। और आज अधिक से अधिक वे रेनडियर के व्हीलचेयर चुनते हैं। समीक्षाओं के आधार पर, यह विकल्प पूरी तरह से उचित है। माताओं ने तुरंत बच्चे के लिए शानदार डिजाइन और सुविधा को नोट किया। वे उपकरण से पूरी तरह से संतुष्ट हैं, खासकर वे जर्मन लिफाफे के लिए जर्मन विशेषज्ञों का आभारी हैं, जो रूसी स्थितियों में बहुत उपयोगी हैं। पॉप तकनीकी विशेषताओं से संतुष्ट हैं,जिसमें बच्चे के गाड़ियां रेंडियर हैं। उन्हें पसंद है कि वे हल्के, कॉम्पैक्ट, पैदल चलने वाले ब्लॉक किसी भी कार में शामिल हैं, और कार की सीट वाले मॉडल, उनकी राय में, सिर्फ एक देवता है। इसलिए, इन व्हीलचेयर के मालिक उन्हें खरीदने की सलाह देते हैं।
प्रत्येक परिवार में एक बच्चे के जन्म के साथ,हर्षित मुसीबत। , कपड़े, खिलौने, बिस्तर, और, ज़ाहिर है घुमक्कड़ - युवा माता-पिता अपने बच्चे को सब कुछ का सबसे अच्छा था करना चाहते हैं। चपलता, लागत, वजन, आकार, एक कार डिजाइन में परिवहन के लिए आसानः जब बच्चे के माता-पिता के लिए पहला वाहन का चयन कई कारकों पर विचार कर रहे हैं। अगर आपके घर में एक सुखद घटना आ गई है, और आपअपने टुकड़ों के लिए एक घुमक्कड़ की तलाश में, हम आपको जर्मन और पोलिश निर्माताओं द्वारा सहयोग में किए गए उज्ज्वल और सुरुचिपूर्ण मॉडल पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। हम आरामदायक और बहुत आकर्षक घुमक्कड़ रेंडियर को ध्यान में रखते हैं। वे पूरी तरह से हमारे देश के जलवायु के अनुकूल हैं। पूरे सेट में विशाल भेड़ के बच्चे, प्राकृतिक भेड़ के बच्चे से लिफाफे शामिल हैं। चेसिस की चौड़ाई की तरह ऊंची इमारतों के निवासियों के लिए इस तरह के एक महत्वपूर्ण विवरण माना जाता है। यह डिज़ाइन किया गया है ताकि घुमक्कड़ आसानी से किसी भी लिफ्ट में प्रवेश कर सके। जर्मनी में रेन्डी घुमक्कड़ विकसित और निर्मित किए जा रहे हैं, लेकिन पोलैंड में इकट्ठे किए जा रहे हैं। इस प्रकार, उत्पादकों ने उत्कृष्ट गुणवत्ता और उचित मूल्य का एक सफल अनुपात हासिल किया है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य बनाना हैबच्चों के लिए गर्म, आरामदायक और भरोसेमंद घुमक्कड़। सभी मॉडलों में गुणवत्ता के आवश्यक प्रमाण पत्र होते हैं, पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बने होते हैं, इसलिए बच्चे के स्वास्थ्य के लिए कोई खतरा न बनें। घुमक्कड़ रेंडी के लिए गारंटी एक साल से भी कम नहीं है, जो उनकी विश्वसनीयता को इंगित करती है। इस तथ्य के बावजूद कि घुमक्कड़ के रूसी बाजाररेंडियर हाल ही में दिखाई दिया , वे पहले से ही रूसी खरीदारों के बीच लोकप्रियता प्राप्त कर चुके हैं। कई ने कंपनी के सार्वभौमिक मॉडल की विविधता की सराहना की। "रेनडियर" क्यों चुनें? कैरिएज रेंडियर के पास कई आवश्यक कार्य हैं। मॉडल "एक में दो" में एक पालना और आरामदायक चलने वाली इकाई शामिल है। वे जन्म से चार साल तक "मालिकों" के लिए लक्षित हैं। खरीदारों रंगों की एक बड़ी संख्या से एक मॉडल चुन सकते हैं, इसलिए एक घुमक्कड़ को ढूंढना मुश्किल नहीं होगा जो आपकी आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करता है। सभी गाड़ियों में एक गद्दे के साथ एक लाइनर है। पालना एक पालना के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप जुड़वां पैदा हुए थे, तो आपके लिए कंपनी ने रेंडियर ट्विन विकसित किया था। इसमें एक पालना के आकार में वृद्धि हुई है। यह एक बहुत सुविधाजनक और उच्च गुणवत्ता वाला मॉडल है। और अब हम आपको कंपनी के कुछ घुमक्कड़ पेश करेंगे, जो ग्राहकों के मुताबिक लोकप्रिय हैं। नवजात शिशु के लिए यह अद्भुत मॉडलअधिकतम पूर्ण सेट के साथ, विकर पालना बेक्ड चमड़े के साथ तैयार किया जाता है। आपका बच्चा एक विशाल कोट में आरामदायक महसूस करेगा, जो अस्सीxअड़तीस सेमी मापता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चेसिस केवल पाँच नौ सेमी चौड़ा है, जो एक संकीर्ण लिफ्ट में ड्राइव करना आसान बनाता है। यह मॉडल आप में से दूसरों से अलग हैक्रैडल का आकार चुनना संभव है - बड़ा या बहुत बड़ा। इस घुमक्कड़ के पूरे सेट में एक फर लिफाफा और घुमक्कड़ के हैंडल पर एक गर्म मफ शामिल है। रेंडियर विकलिना "एक में दो" यह एक अद्भुत स्टाइल और सौंदर्य घुमक्कड़ है। मैं इस पर अधिक विस्तार से रहना चाहूंगा। यह घुमक्कड़, रेंडियर "दो में एक", "कुलीन" की श्रेणी से संबंधित है, लेकिन इस तथ्य के कारण कि यह जर्मनी में विकसित हुआ था, और पोलैंड जा रहा था, इसकी सस्ती कीमत है। एक खूबसूरत विकर टोकरी के साथ मूल पालना किसी को उदासीन नहीं छोड़ देगा, और पालना के अंदर एक चमकदार इको-पूंछ रजाईदार सफेद के साथ तैयार किया जाता है, जो चमकदार कपड़े से सजाया जाता है। फ्रेम चिकनी घटता और अनुग्रह से प्रतिष्ठित है। एक निश्चित ठाठ एक महंगा चमड़े के हैंडल जोड़ता है। जर्मनी के विशेषज्ञों ने विशेष रूप से रूसी उपभोक्ताओं के लिए इस मॉडल को विकसित किया है, इसलिए यह सर्दियों के लिए आदर्श है। किट में शामिल हैंः - पालने; - मां के लिए एक बैग; - चमड़े के हैंडल के साथ चेसिस; - एक चलने वाला ब्लॉक; - inflatable पहियों ; - पैरों पर एक गर्म क्लोक; - प्राकृतिक फर से बना एक लिफाफा; - सामान की टोकरी; - मच्छर जाल; - रेनकोट। रेंडियर लिली "एक में दो" और अब हम आपको मॉडल की नवीनता पेश करते हैंदो हज़ार पंद्रह की श्रृंखला। यह रूस के लिए जर्मन डिजाइनरों द्वारा विकसित किया गया था। एक सुंदर, स्टाइलिश और साथ ही एक क्लासिक घुमक्कड़ बेक्ड चमड़े से बना है। यह एक बहुत ही व्यावहारिक सामग्री है - इसे साफ करना आसान है, यह गंदगी से डरता नहीं है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि यह मॉडल केंद्रीय और दक्षिणी रूस के लिए आदर्श है, जहां अक्सर सर्दियों में स्लैश होता है। ऊंचाई हेडरेस्ट पांच में समायोजित किया जा सकता हैविभिन्न पदों, पेड़ के नीचे बच्चों को ठंड से बचाता है। पैरों पर चमड़े के केप बारिश के खिलाफ सुरक्षा करता है, और स्टाइलिश हुड सूर्य की सीधी किरणों से ढका होगा। यह कॉम्पैक्ट घुमक्कड़ आसानी से कार में प्रवेश करता हैलिफ्ट और कार में। आरामदायक हैंडल ऊंचाई में मां की ऊंचाई के लिए समायोज्य है, और बड़े inflatable पहियों आप किसी भी बाधाओं को दूर करने की अनुमति देता है। भेड़ का बच्चा से बना एक लिफाफा शामिल है। और मेरी मां के पास एक सुंदर चमड़े का थैला है। यूनिवर्सल रेंडियर घुमक्कड़ "तीन में एक" समीक्षा उत्साही हो जाती है। यह इस तथ्य के कारण है कि वे न केवल बच्चे के लिए सुविधाजनक हैं, बल्कि मां के लिए भी सुविधाजनक हैं। रेंडियर विकलिना "एक में तीन" यह शानदार घुमक्कड़, एक पुस्तिका के साथ समाप्त हुआत्वचा, अधिकतम मानव निर्मित है। विशेष रूप से माता-पिता एक विस्तृत पालना नोट करते हैं, जिसमें बच्चे "कपड़ों" में भी विशाल है। बहुत सुविधाजनक संकीर्ण चेसिस , जिससे आप सबसे कम दरवाजे में जा सकते हैं। रेंडियर स्टाइल "एक में तीन" यह एक महान किट है जिसमें सब कुछ शामिल हैबच्चे के लिए जरूरी - एक पालना, एक चलने वाला ब्लॉक, एक फर लिफाफा, एक कार सीट। सुनिश्चित करें कि इस तरह के घुमक्कड़ में बच्चे हमेशा और किसी भी मौसम में आरामदायक रहेगा। कंपनी के नवीनतम विकास में से एक। एक सार्वभौमिक किट माता-पिता की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह रेंडियर घुमक्कड़ "तीन में एक" में एक पालना, एक ऑटोमार्मर, एक पैदल चलने वाला ब्लॉक और एक फर लिफाफा होता है। यह पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बना है और इसलिए बच्चे को पूरी तरह से हानिरहित है। कंपनी रंगों का एक बड़ा चयन प्रदान करता है। एक घुमक्कड़ की पसंद हमेशा माता-पिता शामिल हैगंभीरता से। आखिरकार, इस मामले में यह उनके बच्चे की सुविधा और सुरक्षा के बारे में है। एक नियम के रूप में, खरीदने से पहले, वे विभिन्न निर्माताओं से कई प्रस्तावों पर पुनर्विचार करते हैं। और आज अधिक से अधिक वे रेनडियर के व्हीलचेयर चुनते हैं। समीक्षाओं के आधार पर, यह विकल्प पूरी तरह से उचित है। माताओं ने तुरंत बच्चे के लिए शानदार डिजाइन और सुविधा को नोट किया। वे उपकरण से पूरी तरह से संतुष्ट हैं, खासकर वे जर्मन लिफाफे के लिए जर्मन विशेषज्ञों का आभारी हैं, जो रूसी स्थितियों में बहुत उपयोगी हैं। पॉप तकनीकी विशेषताओं से संतुष्ट हैं,जिसमें बच्चे के गाड़ियां रेंडियर हैं। उन्हें पसंद है कि वे हल्के, कॉम्पैक्ट, पैदल चलने वाले ब्लॉक किसी भी कार में शामिल हैं, और कार की सीट वाले मॉडल, उनकी राय में, सिर्फ एक देवता है। इसलिए, इन व्हीलचेयर के मालिक उन्हें खरीदने की सलाह देते हैं।
हॉलीवुड की सुपर सितारा एंजेलिना जोली शौकिया तौर पर गहनों के डिजाइन बनाती हैं और उनका चैरिटी ट्रस्ट इन गहनों को लगभग सौ दुकानों के माध्यम से पूरे विश्व में बेचता है। इसके लाभ से आम जनता की भलाई के काम किए जाते हैं। हाल ही में एंजेलिना के ट्रस्ट ने वर्षों से संकट से जूझते अफगानिस्तान में कन्याओं के लिए एक स्कूल की स्थापना की है और निकट भविष्य में इस तरह के कुछ और स्कूल खोले जाएंगे। विगत वर्ष वे सीरिया के दौरे पर गई थीं और वहां के हालात देख रो पड़ी थीं। ज्ञातव्य है कि एंजेलिना पहले भी अफगानिस्तान का दौरा कर चुकी हैं और राजनीतिक षड्यंत्र के शिकार लोगों से मिल चुकी हैं। यह संभव है कि आहत मानवता के लिए कुछ करने के प्रयास में एक कलाकार की संवेदनाओं को धार मिलती है और इस तरह के अनुभव उनके अभिनय में उनकी मदद करते हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि एंजेलिना स्वयं के अभिनय को मांजने के लिए आहत लोगों की मदद करती हैं। नेक इरादों पर संदेह नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में गौरतलब बात यह है कि अमेरिकी सरकार बम बरसाती है और वहां के कलाकार जख्मों पर मरहम लगाते हैं। इसे मिलीभगत का खेल नहीं कह सकते। एंजेलिना के कामों का रिकॉर्ड उनके पक्ष में है। अमेरिका की सरकार अमेरिका के जनसमूह की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। हमारा हॉलीवुड फिल्मों के द्वारा अमेरिका के आम आदमी की पसंद-नापसंद को समझने का तरीका उतना ही गलत होगा, जितना किसी भी देश के द्वारा भारत को उसके सतही सिनेमा से समझने का दावा करना। क्या विगत 65 वर्षों में भारत की सरकारों द्वारा किए गए कार्य भारत के अवाम की आकांक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं। जनता द्वारा चुनी हुई सरकारें जनभावना के अनुरूप आचरण करती हों - यह संदिग्ध है। यह संभव है कि एंजेलिना जोली ने बुश को वोट दिया हो और उसे इसका अफसोस भी न हो, परंतु वे आहत अफगानिस्तान को राहत देने का प्रयास भी करती हैं अर्थात लोकप्रिय लहरों से प्रभावित हमारा राजनीतिक मत हमारी संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता। चीन का अवाम अपने देश के नेताओं का समर्थन नहीं करता। चीन में युवा वर्ग अंडरग्राउंड क्लब में रॉक संगीत के मजे लेता है, जबकि चीन की कम्युनिस्ट सरकार अमेरिकन जीवन-शैली का विरोध करती है। क्या पाकिस्तान का आम आदमी यह चाहता है कि उसकी सरकार पड़ोसी देश में आतंक मचाने वालों की मदद करे? पाकिस्तान का आम आदमी तो अपने ही देश में हिंसा के तांडव से परेशान है। सारांश यह कि अवाम के मतों से ही चुनी हुई सरकारें, उसी अवाम की संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। यह काम साहित्य करता है, विशेषकर कविता करती है। कभी-कभी यह काम सिनेमा भी करता है। कोई भी सरकार के आला अफसर या मंत्री साहित्य से कतई जुड़े नहीं हैं, इसलिए आम आदमी की संवेदना से अनभिज्ञ हैं। इतना ही नहीं तमाम शिक्षण संस्थाओं में साहित्य के छात्रों की संख्या विज्ञान या कॉमर्स के छात्रों से बहुत कम है। शिक्षण संस्थाओं में लोग वही विषय पढ़ते हैं, जिससे उन्हें नौकरियां मिलें या दहेज लाने वाली पत्नियां मिलें। नौकरी और छोकरी सोच का केंद्र हो तो साहित्य भला कौन साधे और क्यों साधे? एंजेलिना जोली ने अपने वक्तव्य में 'चिल्ड्रन ऑफ काइसिस' कहा है अर्थात युद्धरत या लगभग युद्ध जैसे माहौल को भुगतने वाले देशों के बच्चों की उन्हें चिंता है। उनकी सरकार ने इराक या अफगानिस्तान में इतने बम बरसाए हैं कि शायद ही कोई उद्यान वहां सुरक्षित हो या सड़कें सुरक्षित हों। इन मुल्कों में संकट के समय पैदा हुए बच्चे संभवतः चली हुई कारतूस के खोल से खेलते होंगे। उनके खेलने के लिए शायद ही कोई उद्यान बचा हो। उनके फेफड़ों में बारूद भर गई होगी। उनका लालन-पालन ध्वस्त इमारतों के बीच हो रहा है। उन्हें लोरियां सुनने के बदले खतरे के सायरन सुनने पड़े हैं। रोती-बिलखती मां के आंचल में दूध कहां से आता, वे नीर पीकर पल रहे हैं। अगर ये बच्चे जवां होकर स्वयं हथियार हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं। अमेरिका को नहीं मालूम कि वह क्या बो रहा है? एंजेलिना द्वारा खोले गए स्कूल कोशिश कर सकते हैं कि ये बच्चे हथियार न बनें। एक तरह से वे ध्वस्त तोप के दहाने में चिडिय़ा का घोंसला बनाने का प्रयास कर रही हैं। कविता इस तरह जीवित रहती है। वही मनुष्य का आखिरी संबल है। यह सच है कि कविता से पेट नहीं भरता, परंतु पेट भरने से ही कोई जीता भी तो नहीं। एंजेलिना जोली ने बच्चे गोद भी लिए हैं। प्रचारित तौर पर युवा केंद्रित दुनिया में बच्चों और बूढ़ों के लिए स्थान नहीं होता, परंतु प्रचार कब सच होता है। मानवीय करुणा की धुरी पर ही संसार चल रहा है। इस प्रकरण से यह भी ज्ञात होता है कि अभिनय से प्ाप्त लोकप्रियता का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए कैसे किया जा सकता है। रमेश तलवार के नाटक 'काबुलीवाला की वापसी' में रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी 'काबुलीवाला' जिस पर बंगाली और हिंदी में फिल्में बन चुकी हैं, के आगे की घटनाओं की कल्पना है कि किस तरह काबुलीवाला की प्रिय बालिका की डॉक्टर बेटी अफगानिस्तान जाकर घायलों की सेवा करते हुए उस दयामय काबुलीवाले की अपनी बेटी या उसके वंशजों को खोजती है, जिसने उसकी मां के बचपन में अपनी बेटी की छवि देखकर अपार स्नेह दिया था। स्वार्थहीन कार्य अनजान दुर्गम स्थानों पर कोंपलों के रूप में उगते हैं।
हॉलीवुड की सुपर सितारा एंजेलिना जोली शौकिया तौर पर गहनों के डिजाइन बनाती हैं और उनका चैरिटी ट्रस्ट इन गहनों को लगभग सौ दुकानों के माध्यम से पूरे विश्व में बेचता है। इसके लाभ से आम जनता की भलाई के काम किए जाते हैं। हाल ही में एंजेलिना के ट्रस्ट ने वर्षों से संकट से जूझते अफगानिस्तान में कन्याओं के लिए एक स्कूल की स्थापना की है और निकट भविष्य में इस तरह के कुछ और स्कूल खोले जाएंगे। विगत वर्ष वे सीरिया के दौरे पर गई थीं और वहां के हालात देख रो पड़ी थीं। ज्ञातव्य है कि एंजेलिना पहले भी अफगानिस्तान का दौरा कर चुकी हैं और राजनीतिक षड्यंत्र के शिकार लोगों से मिल चुकी हैं। यह संभव है कि आहत मानवता के लिए कुछ करने के प्रयास में एक कलाकार की संवेदनाओं को धार मिलती है और इस तरह के अनुभव उनके अभिनय में उनकी मदद करते हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि एंजेलिना स्वयं के अभिनय को मांजने के लिए आहत लोगों की मदद करती हैं। नेक इरादों पर संदेह नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में गौरतलब बात यह है कि अमेरिकी सरकार बम बरसाती है और वहां के कलाकार जख्मों पर मरहम लगाते हैं। इसे मिलीभगत का खेल नहीं कह सकते। एंजेलिना के कामों का रिकॉर्ड उनके पक्ष में है। अमेरिका की सरकार अमेरिका के जनसमूह की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। हमारा हॉलीवुड फिल्मों के द्वारा अमेरिका के आम आदमी की पसंद-नापसंद को समझने का तरीका उतना ही गलत होगा, जितना किसी भी देश के द्वारा भारत को उसके सतही सिनेमा से समझने का दावा करना। क्या विगत पैंसठ वर्षों में भारत की सरकारों द्वारा किए गए कार्य भारत के अवाम की आकांक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं। जनता द्वारा चुनी हुई सरकारें जनभावना के अनुरूप आचरण करती हों - यह संदिग्ध है। यह संभव है कि एंजेलिना जोली ने बुश को वोट दिया हो और उसे इसका अफसोस भी न हो, परंतु वे आहत अफगानिस्तान को राहत देने का प्रयास भी करती हैं अर्थात लोकप्रिय लहरों से प्रभावित हमारा राजनीतिक मत हमारी संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता। चीन का अवाम अपने देश के नेताओं का समर्थन नहीं करता। चीन में युवा वर्ग अंडरग्राउंड क्लब में रॉक संगीत के मजे लेता है, जबकि चीन की कम्युनिस्ट सरकार अमेरिकन जीवन-शैली का विरोध करती है। क्या पाकिस्तान का आम आदमी यह चाहता है कि उसकी सरकार पड़ोसी देश में आतंक मचाने वालों की मदद करे? पाकिस्तान का आम आदमी तो अपने ही देश में हिंसा के तांडव से परेशान है। सारांश यह कि अवाम के मतों से ही चुनी हुई सरकारें, उसी अवाम की संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। यह काम साहित्य करता है, विशेषकर कविता करती है। कभी-कभी यह काम सिनेमा भी करता है। कोई भी सरकार के आला अफसर या मंत्री साहित्य से कतई जुड़े नहीं हैं, इसलिए आम आदमी की संवेदना से अनभिज्ञ हैं। इतना ही नहीं तमाम शिक्षण संस्थाओं में साहित्य के छात्रों की संख्या विज्ञान या कॉमर्स के छात्रों से बहुत कम है। शिक्षण संस्थाओं में लोग वही विषय पढ़ते हैं, जिससे उन्हें नौकरियां मिलें या दहेज लाने वाली पत्नियां मिलें। नौकरी और छोकरी सोच का केंद्र हो तो साहित्य भला कौन साधे और क्यों साधे? एंजेलिना जोली ने अपने वक्तव्य में 'चिल्ड्रन ऑफ काइसिस' कहा है अर्थात युद्धरत या लगभग युद्ध जैसे माहौल को भुगतने वाले देशों के बच्चों की उन्हें चिंता है। उनकी सरकार ने इराक या अफगानिस्तान में इतने बम बरसाए हैं कि शायद ही कोई उद्यान वहां सुरक्षित हो या सड़कें सुरक्षित हों। इन मुल्कों में संकट के समय पैदा हुए बच्चे संभवतः चली हुई कारतूस के खोल से खेलते होंगे। उनके खेलने के लिए शायद ही कोई उद्यान बचा हो। उनके फेफड़ों में बारूद भर गई होगी। उनका लालन-पालन ध्वस्त इमारतों के बीच हो रहा है। उन्हें लोरियां सुनने के बदले खतरे के सायरन सुनने पड़े हैं। रोती-बिलखती मां के आंचल में दूध कहां से आता, वे नीर पीकर पल रहे हैं। अगर ये बच्चे जवां होकर स्वयं हथियार हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं। अमेरिका को नहीं मालूम कि वह क्या बो रहा है? एंजेलिना द्वारा खोले गए स्कूल कोशिश कर सकते हैं कि ये बच्चे हथियार न बनें। एक तरह से वे ध्वस्त तोप के दहाने में चिडिय़ा का घोंसला बनाने का प्रयास कर रही हैं। कविता इस तरह जीवित रहती है। वही मनुष्य का आखिरी संबल है। यह सच है कि कविता से पेट नहीं भरता, परंतु पेट भरने से ही कोई जीता भी तो नहीं। एंजेलिना जोली ने बच्चे गोद भी लिए हैं। प्रचारित तौर पर युवा केंद्रित दुनिया में बच्चों और बूढ़ों के लिए स्थान नहीं होता, परंतु प्रचार कब सच होता है। मानवीय करुणा की धुरी पर ही संसार चल रहा है। इस प्रकरण से यह भी ज्ञात होता है कि अभिनय से प्ाप्त लोकप्रियता का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए कैसे किया जा सकता है। रमेश तलवार के नाटक 'काबुलीवाला की वापसी' में रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी 'काबुलीवाला' जिस पर बंगाली और हिंदी में फिल्में बन चुकी हैं, के आगे की घटनाओं की कल्पना है कि किस तरह काबुलीवाला की प्रिय बालिका की डॉक्टर बेटी अफगानिस्तान जाकर घायलों की सेवा करते हुए उस दयामय काबुलीवाले की अपनी बेटी या उसके वंशजों को खोजती है, जिसने उसकी मां के बचपन में अपनी बेटी की छवि देखकर अपार स्नेह दिया था। स्वार्थहीन कार्य अनजान दुर्गम स्थानों पर कोंपलों के रूप में उगते हैं।
दिल्ली में अब प्रति किलो सीएनजी का दाम 75.61 रुपये हो गया है. CNG Price Hiked: 6 दिनों के भीतर दूसरी बार सीएनजी के दाम बढ़ गए हैं. शनिवार यानी 21 मई, 2022 को गैस सप्लाई कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में सीएनजी के दामों में फिर बढ़ोतरी कर दी है. पिछले 6 दिनों के भीतर ही सीएनजी के दाम दूसरी बार बढ़ाए गए हैं. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, आज आईजीएल ने प्रति किलोग्राम सीएनजी पर 2 रुपये की बढ़ोतरी की है. दिल्ली में अब प्रति किलो सीएनजी का दाम 75.61 रुपये हो गया है. नई कीमत 21 मई की सुबह 6 बजे से लागू हो गई है. बता दें कि इसके पहले 15 मई को दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमत में 2 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे. और उसके पहले जाएं तो 14 अप्रैल को सीएनजी के दाम ढाई रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे.
दिल्ली में अब प्रति किलो सीएनजी का दाम पचहत्तर दशमलव इकसठ रुपयापये हो गया है. CNG Price Hiked: छः दिनों के भीतर दूसरी बार सीएनजी के दाम बढ़ गए हैं. शनिवार यानी इक्कीस मई, दो हज़ार बाईस को गैस सप्लाई कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में सीएनजी के दामों में फिर बढ़ोतरी कर दी है. पिछले छः दिनों के भीतर ही सीएनजी के दाम दूसरी बार बढ़ाए गए हैं. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, आज आईजीएल ने प्रति किलोग्राम सीएनजी पर दो रुपयापये की बढ़ोतरी की है. दिल्ली में अब प्रति किलो सीएनजी का दाम पचहत्तर दशमलव इकसठ रुपयापये हो गया है. नई कीमत इक्कीस मई की सुबह छः बजे से लागू हो गई है. बता दें कि इसके पहले पंद्रह मई को दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमत में दो रुपयापए प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे. और उसके पहले जाएं तो चौदह अप्रैल को सीएनजी के दाम ढाई रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए थे.
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने मंगलवार को केंद्रीय बजट 2022-23 में कृषि क्षेत्र से संबंधित 'खोखले दावों' को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि कानूनों के खिलाफ सफल आंदोलन चलाने के लिये किसानों से 'बदला' लिया। केंद्र सरकार ने उन तीन कृषि कानूनों को अब रद्द कर दिया है। इस साल 2022 किसान की आय दोगुनी करने के 6 वर्ष पूरे हो गए हैं हर बजट में कम से कम इस पर बोला जाता था इस बार एक शब्द भी नहीं बोला गया. इस साल 2022 किसान की आय दोगुनी करने के 6 वर्ष पूरे हो गए हैं हर बजट में कम से कम इस पर बोला जाता था इस बार एक शब्द भी नहीं बोला गया. Looks like even the finance minister knew that no theatrics, dialogues or poems can hide the reality that this simple table captures. Looks like even the finance minister knew that no theatrics, dialogues or poems can hide the reality that this simple table captures. उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'आज बजट में मोदी सरकार ने MSP का बजट पिछले साल से काफी कम कर दिया। 2021-22 में MSP पे खरीदी का बजट 248000 करोड़ था जो 2022-23 के बजट में घट कर 237000 करोड़ रह गया,वह भी सिर्फ धान और गेहू की खरीदी के लिए। ऐसा लगता है सरकार दूसरे फसलों की MSP पे खरीदी करना ही नहीं चाहती है। ' अपने दूसरे ट्वीट में वह लिखते हैं, 'किसानों को #बजट2022 में सरकार ने दिया भारी धोखा। किसानों की दो गुनी आय करने, सम्मान निधि, 2 करोड़ रोजगार, एमएसपी, खाद - बीज, डीजल और कीटनाशक पर कोई राहत नहीं। एमएसपी पर फसल खरीद में बजट एलोकेशन से फसलों में होगा घाटा। '
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने मंगलवार को केंद्रीय बजट दो हज़ार बाईस-तेईस में कृषि क्षेत्र से संबंधित 'खोखले दावों' को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि कानूनों के खिलाफ सफल आंदोलन चलाने के लिये किसानों से 'बदला' लिया। केंद्र सरकार ने उन तीन कृषि कानूनों को अब रद्द कर दिया है। इस साल दो हज़ार बाईस किसान की आय दोगुनी करने के छः वर्ष पूरे हो गए हैं हर बजट में कम से कम इस पर बोला जाता था इस बार एक शब्द भी नहीं बोला गया. इस साल दो हज़ार बाईस किसान की आय दोगुनी करने के छः वर्ष पूरे हो गए हैं हर बजट में कम से कम इस पर बोला जाता था इस बार एक शब्द भी नहीं बोला गया. Looks like even the finance minister knew that no theatrics, dialogues or poems can hide the reality that this simple table captures. Looks like even the finance minister knew that no theatrics, dialogues or poems can hide the reality that this simple table captures. उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'आज बजट में मोदी सरकार ने MSP का बजट पिछले साल से काफी कम कर दिया। दो हज़ार इक्कीस-बाईस में MSP पे खरीदी का बजट दो लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ था जो दो हज़ार बाईस-तेईस के बजट में घट कर दो लाख सैंतीस हज़ार करोड़ रह गया,वह भी सिर्फ धान और गेहू की खरीदी के लिए। ऐसा लगता है सरकार दूसरे फसलों की MSP पे खरीदी करना ही नहीं चाहती है। ' अपने दूसरे ट्वीट में वह लिखते हैं, 'किसानों को #बजटदो हज़ार बाईस में सरकार ने दिया भारी धोखा। किसानों की दो गुनी आय करने, सम्मान निधि, दो करोड़ रोजगार, एमएसपी, खाद - बीज, डीजल और कीटनाशक पर कोई राहत नहीं। एमएसपी पर फसल खरीद में बजट एलोकेशन से फसलों में होगा घाटा। '
भोपालः क्या आप फूडी हैं? अगर हां, तो आपने कई तरह के फूड आइटम्स खाए होंगे। लेकिन भारत में कई जगहों पर ऐसे फूड कॉम्बिनेशन मिलते हैं, जिनके बारे में सुनकर आपको हैरत होगी। पहले आपको लगेगा कि कोई इन्हें खा कैसे सकता है? लेकिन जब आप इन्हें टेस्ट करेंगे, तो इनके फैन हो जाएंगे।
भोपालः क्या आप फूडी हैं? अगर हां, तो आपने कई तरह के फूड आइटम्स खाए होंगे। लेकिन भारत में कई जगहों पर ऐसे फूड कॉम्बिनेशन मिलते हैं, जिनके बारे में सुनकर आपको हैरत होगी। पहले आपको लगेगा कि कोई इन्हें खा कैसे सकता है? लेकिन जब आप इन्हें टेस्ट करेंगे, तो इनके फैन हो जाएंगे।
नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस के कैंपस में घुसने और छात्रों को पीटने के संबंधित कई वीडियो सामने आ रहे हैं। बता दें कि 15 दिसंबर को जामिया में पुलिस कार्रवाई से जुड़े तीन वीडियो सामने आए हैं। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल किया है। भाजपा ने कहा कि जिन लोगों के हाथ में पत्थर दिखाई दे रहे है, वो कौन है। अगर वो छात्र है तो उनके हाथ में पत्थर क्या कर रहे हैं। भाजपा की ओर से पूछा गया कि कॉलेज में कंप्यूटर या कलम से पढ़ाई होती है तो फिर पत्थर से ये कौन सी पढ़ाई हो रही है। भाजपा प्रवक्ता जे वी एल नरसिम्हा ने कहा कि छात्र है तो उन्होंने नकाब पहनकर अपनी पहचान क्यों छुपाई है। जामिया के बाहर कितना शांति पूर्ण प्रदर्शन चल रहा था कि चार बसों में आग लगा दी गई। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को भी अराजक तत्वों का समर्थन करने वाली पार्टी कहा। उनके साथ कांग्रेस अपनी संवेदना जताती है। लेकिन पुलिस बल के जवान जो देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी कुबार्नी देते हैं, कांग्रेस उनके खिलाफ सवाल उठाती है। देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के पक्ष में लगातार बोलना आज कांग्रेस की नीति बन गई है। Jamia video viral, BJP said what education is being done with stone? जामिया वीडियो वायरल, भाजपा ने कहा पत्थर से कौन-सी पढ़ाई हो रही है?
नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस के कैंपस में घुसने और छात्रों को पीटने के संबंधित कई वीडियो सामने आ रहे हैं। बता दें कि पंद्रह दिसंबर को जामिया में पुलिस कार्रवाई से जुड़े तीन वीडियो सामने आए हैं। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल किया है। भाजपा ने कहा कि जिन लोगों के हाथ में पत्थर दिखाई दे रहे है, वो कौन है। अगर वो छात्र है तो उनके हाथ में पत्थर क्या कर रहे हैं। भाजपा की ओर से पूछा गया कि कॉलेज में कंप्यूटर या कलम से पढ़ाई होती है तो फिर पत्थर से ये कौन सी पढ़ाई हो रही है। भाजपा प्रवक्ता जे वी एल नरसिम्हा ने कहा कि छात्र है तो उन्होंने नकाब पहनकर अपनी पहचान क्यों छुपाई है। जामिया के बाहर कितना शांति पूर्ण प्रदर्शन चल रहा था कि चार बसों में आग लगा दी गई। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को भी अराजक तत्वों का समर्थन करने वाली पार्टी कहा। उनके साथ कांग्रेस अपनी संवेदना जताती है। लेकिन पुलिस बल के जवान जो देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी कुबार्नी देते हैं, कांग्रेस उनके खिलाफ सवाल उठाती है। देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के पक्ष में लगातार बोलना आज कांग्रेस की नीति बन गई है। Jamia video viral, BJP said what education is being done with stone? जामिया वीडियो वायरल, भाजपा ने कहा पत्थर से कौन-सी पढ़ाई हो रही है?
कोलंबो - श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सनथ जयसूर्या ने अपने देश के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जाहिर की है। जयसूर्या ने श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे लोगों का समर्थन किया है। उन्होंने ने देश की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पूर्व क्रिकेटर ने भारत को बड़ा भाई बताया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के पड़ोसी और बड़े भाई के रूप में भारत ने हमेशा हमारी मदद की है। हम भारत सरकार और पीएम मोदी के आभारी हैं। हमारे लिए, मौजूदा परिदृश्य के कारण जीवित रहना आसान नहीं है। हम भारत और अन्य देशों की मदद से इससे बाहर निकलने की उम्मीद करते हैं। जयसूर्या ने कहा कि देश के लोग कई महीनों से इस स्थिति से गुजर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग इस स्थिति से गुजऱ रहे हैं।
कोलंबो - श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सनथ जयसूर्या ने अपने देश के मौजूदा हालात को लेकर चिंता जाहिर की है। जयसूर्या ने श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे लोगों का समर्थन किया है। उन्होंने ने देश की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पूर्व क्रिकेटर ने भारत को बड़ा भाई बताया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के पड़ोसी और बड़े भाई के रूप में भारत ने हमेशा हमारी मदद की है। हम भारत सरकार और पीएम मोदी के आभारी हैं। हमारे लिए, मौजूदा परिदृश्य के कारण जीवित रहना आसान नहीं है। हम भारत और अन्य देशों की मदद से इससे बाहर निकलने की उम्मीद करते हैं। जयसूर्या ने कहा कि देश के लोग कई महीनों से इस स्थिति से गुजर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग इस स्थिति से गुजऱ रहे हैं।