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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को कड़ाके की सर्दी जारी रही और पारा गिरकर 2. 6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। यह पिछले पांच साल में दिसंबर महीने के दौरान सबसे ठंडा दिन रहा। हिमाचल प्रदेश में शीत लहर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। इसके तेज होने से राज्य के अधिकतर इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पंजाब और हरियाणा में लोगों को शीतलहर से कोई राहत नहीं मिली। दो सप्ताह से सामान्य से कम चला आ रहा तापमान मंगलवार को और गिर गया। सप्ताह के मध्य से शुरू हुई शीतलहर शनिवार तक खत्म होने की संभावना थी। शहर में आज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने के साथ आज दिसंबर का सबसे ठंडा दिन है। कश्मीर में स्थानीय भाषा में "चिल्लई कलां" कहलाने वाली, 40 दिन की सर्वाधिक भीषण ठंड शुक्रवार को शुष्क मौसम के साथ शुरू हो गयी। घाटी एवं लद्दाख क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप जारी है क्योंकि राज्य में न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से नीचे बना हुआ है। हरियाणा में हिसार क्षेत्र का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां का न्यूनतम तापमान 2. 9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जबकि अमृतसर और लुधियाना का तापमान क्रमशः 3. 6 डिग्री और 4. 0 डिग्री रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग ने कहा कि रात के तापमान में और गिरावट के साथ एक सप्ताह और ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है। श्रीनगर में बीती रात मौसम की सबसे ठंडी रात रही जहां तापमान शून्य से 4. 2 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। कारगिल जिले का द्रास शहर राज्य का सर्वाधिक ठंड शहर रहा, जहां तापमान शून्य से 19. 0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। पंजाब और हरियाणा में शुक्रवार को ठंड बढ़ गई। दोनों राज्यों में बठिंडा सबसे ठंडी जगह रही, जहां न्यूनतम तापामन 4. 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। देश के उत्तरी राज्य जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी ने लोगों को परेशान कर रखा है तो वहीं दक्षिण में चेन्नई हवाईअड्डे पर घने कोहरे की वजह से विमान सेवाएं प्रभावित हुईं। उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में आज शीतलहर का प्रकोप जारी रहा। कश्मीर में तापमान में और गिरावट दर्ज की गई और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे रहा। मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में अगले दो-तीन दिनों में जम्मू क्षेत्र, कश्मीर घाटी और लद्दाख क्षेत्र में रात के तापामन में और गिरावट आने की संभावना जताई है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल सहित देश के उत्तरी राज्य आज भी शीतलहर से जूझते रहे। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के हिस्सों में कोहरा छाया रहा। रेल अधिकारी ने बताया कि कोहरे के कारण उत्तर भारत आने-जाने वाली 22 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, तीन के समय में परिवर्तन किया गया और सुबह छह बजे तक 49 ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही थीं। हिमाचल प्रदेश का केलॉन्ग में माइनस 10 डिग्री की मार से सब कुछ फ्रीज़ होने लगा है। पानी बर्फ बन रहा है औऱ जिंदगी जमती जा रही है। हिमाचल जैसा हाहाकार कश्मीर में भी है। श्रीनगर की डल झील तो जम ही चुकी है।
दिल्ली-एनसीआर में शनिवार को कड़ाके की सर्दी जारी रही और पारा गिरकर दो. छः डिग्री सेल्सियस पर आ गया। यह पिछले पांच साल में दिसंबर महीने के दौरान सबसे ठंडा दिन रहा। हिमाचल प्रदेश में शीत लहर का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। इसके तेज होने से राज्य के अधिकतर इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पंजाब और हरियाणा में लोगों को शीतलहर से कोई राहत नहीं मिली। दो सप्ताह से सामान्य से कम चला आ रहा तापमान मंगलवार को और गिर गया। सप्ताह के मध्य से शुरू हुई शीतलहर शनिवार तक खत्म होने की संभावना थी। शहर में आज का तापमान चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने के साथ आज दिसंबर का सबसे ठंडा दिन है। कश्मीर में स्थानीय भाषा में "चिल्लई कलां" कहलाने वाली, चालीस दिन की सर्वाधिक भीषण ठंड शुक्रवार को शुष्क मौसम के साथ शुरू हो गयी। घाटी एवं लद्दाख क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप जारी है क्योंकि राज्य में न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से नीचे बना हुआ है। हरियाणा में हिसार क्षेत्र का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां का न्यूनतम तापमान दो. नौ डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जबकि अमृतसर और लुधियाना का तापमान क्रमशः तीन. छः डिग्री और चार. शून्य डिग्री रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग ने कहा कि रात के तापमान में और गिरावट के साथ एक सप्ताह और ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है। श्रीनगर में बीती रात मौसम की सबसे ठंडी रात रही जहां तापमान शून्य से चार. दो डिग्री नीचे दर्ज किया गया। कारगिल जिले का द्रास शहर राज्य का सर्वाधिक ठंड शहर रहा, जहां तापमान शून्य से उन्नीस. शून्य डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। पंजाब और हरियाणा में शुक्रवार को ठंड बढ़ गई। दोनों राज्यों में बठिंडा सबसे ठंडी जगह रही, जहां न्यूनतम तापामन चार. पाँच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। देश के उत्तरी राज्य जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी ने लोगों को परेशान कर रखा है तो वहीं दक्षिण में चेन्नई हवाईअड्डे पर घने कोहरे की वजह से विमान सेवाएं प्रभावित हुईं। उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में आज शीतलहर का प्रकोप जारी रहा। कश्मीर में तापमान में और गिरावट दर्ज की गई और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे रहा। मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में अगले दो-तीन दिनों में जम्मू क्षेत्र, कश्मीर घाटी और लद्दाख क्षेत्र में रात के तापामन में और गिरावट आने की संभावना जताई है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल सहित देश के उत्तरी राज्य आज भी शीतलहर से जूझते रहे। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के हिस्सों में कोहरा छाया रहा। रेल अधिकारी ने बताया कि कोहरे के कारण उत्तर भारत आने-जाने वाली बाईस ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, तीन के समय में परिवर्तन किया गया और सुबह छह बजे तक उनचास ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही थीं। हिमाचल प्रदेश का केलॉन्ग में माइनस दस डिग्री की मार से सब कुछ फ्रीज़ होने लगा है। पानी बर्फ बन रहा है औऱ जिंदगी जमती जा रही है। हिमाचल जैसा हाहाकार कश्मीर में भी है। श्रीनगर की डल झील तो जम ही चुकी है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। घनानंद की काव्य रचनाओं का अंग्रेज़ी अनुवाद घनानंद (१६७३- १७६०) रीतिकाल की तीन प्रमुख काव्यधाराओं- रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त के अंतिम काव्यधारा के अग्रणी कवि हैं। ये 'आनंदघन' नाम स भी प्रसिद्ध हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रीतिमुक्त घनानन्द का समय सं. यामाका (जोड़े) में दस अध्याय होते हैं, प्रत्येक एक अलग विषय से निपटते हैं; उदाहरण के लिए, जड़ों के साथ पहला सौदा। एक सामान्य अध्याय (इस पैटर्न से कई भिन्नताएं हैं) तीन भागों में है। पहला भाग पहचान के प्रश्नों से संबंधित हैः "क्या अच्छी जड़ जड़ है?" "लेकिन जड़ अच्छी जड़ है?" पूरे यामाका में उनके उत्तरों के साथ, विपरीत प्रश्नों के ऐसे जोड़े शामिल हैं। इसलिए इसका नाम, जिसका मतलब है जोड़े। दूसरा भाग उठने से संबंधित हैः "किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके लिए फॉर्म कुल मिला है, क्या भावना पूरी तरह उत्पन्न होती है?" तीसरा हिस्सा समझने से संबंधित हैः "क्या कोई व्यक्ति जो आंखों के आधार को समझता है वह कान आधार को समझता है?" संक्षेप में, यह मनोवैज्ञानिक घटनाओं से निपट रहा है। श्रेणीःअलंकार. घनानन्द और यमक अलंकार आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। घनानन्द 28 संबंध है और यमक अलंकार 0 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (28 + 0)। यह लेख घनानन्द और यमक अलंकार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। घनानंद की काव्य रचनाओं का अंग्रेज़ी अनुवाद घनानंद रीतिकाल की तीन प्रमुख काव्यधाराओं- रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त के अंतिम काव्यधारा के अग्रणी कवि हैं। ये 'आनंदघन' नाम स भी प्रसिद्ध हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रीतिमुक्त घनानन्द का समय सं. यामाका में दस अध्याय होते हैं, प्रत्येक एक अलग विषय से निपटते हैं; उदाहरण के लिए, जड़ों के साथ पहला सौदा। एक सामान्य अध्याय तीन भागों में है। पहला भाग पहचान के प्रश्नों से संबंधित हैः "क्या अच्छी जड़ जड़ है?" "लेकिन जड़ अच्छी जड़ है?" पूरे यामाका में उनके उत्तरों के साथ, विपरीत प्रश्नों के ऐसे जोड़े शामिल हैं। इसलिए इसका नाम, जिसका मतलब है जोड़े। दूसरा भाग उठने से संबंधित हैः "किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके लिए फॉर्म कुल मिला है, क्या भावना पूरी तरह उत्पन्न होती है?" तीसरा हिस्सा समझने से संबंधित हैः "क्या कोई व्यक्ति जो आंखों के आधार को समझता है वह कान आधार को समझता है?" संक्षेप में, यह मनोवैज्ञानिक घटनाओं से निपट रहा है। श्रेणीःअलंकार. घनानन्द और यमक अलंकार आम में शून्य बातें हैं । घनानन्द अट्ठाईस संबंध है और यमक अलंकार शून्य है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख घनानन्द और यमक अलंकार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
अंतरराष्ट्रीय ऑटिज्म दिवस पर सृजन स्पास्टिक सोसाइटी, रोशनी सोसाइटी की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों के सहयोग और उनकी परेशानी पर चर्चा की गई। इस दौरान ऑटिज्म पीड़ित बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। पीलीकोठी स्थित सृजन स्पास्टिक सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निदेशक समाज कल्याण विनोद गिरी गोस्वामी रहे। उन्होंने कहा केंद्र और राज्य सरकार ऑटिज्म सहित सभी प्रकार की दिव्यांगों के लिए नई योजनाएं चला रही हैं। जल्द ही दिव्यांगों के लिए एक मल्टी परपज कार्ड बनाया जाएगा। इसके प्रयोग से दिव्यांग सभी तरह की सरकारी सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। इस दौरान ऑटिज्म पीड़ित बच्चों ने कई कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इसमें श्रद्धा कांडपाल, कैलाश पाठक, नंदन कांडपाल आदि उपस्थित रहे। वहीं रोशनी सोसाइटी की ओर से नैनीताल रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में अभिभावकों को जागरूक किया। कार्यक्रम में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों की कई प्रतियोगिताएं कराई गई। कार्यक्रम में गोविंद मेहरा, हेमा परगाई, सचिन शाह, विनीता वर्मा, कैलाश जोशी, शेखर कांडपाल, मधु शर्मा आदि मौजूद रही।
अंतरराष्ट्रीय ऑटिज्म दिवस पर सृजन स्पास्टिक सोसाइटी, रोशनी सोसाइटी की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों के सहयोग और उनकी परेशानी पर चर्चा की गई। इस दौरान ऑटिज्म पीड़ित बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। पीलीकोठी स्थित सृजन स्पास्टिक सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निदेशक समाज कल्याण विनोद गिरी गोस्वामी रहे। उन्होंने कहा केंद्र और राज्य सरकार ऑटिज्म सहित सभी प्रकार की दिव्यांगों के लिए नई योजनाएं चला रही हैं। जल्द ही दिव्यांगों के लिए एक मल्टी परपज कार्ड बनाया जाएगा। इसके प्रयोग से दिव्यांग सभी तरह की सरकारी सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। इस दौरान ऑटिज्म पीड़ित बच्चों ने कई कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इसमें श्रद्धा कांडपाल, कैलाश पाठक, नंदन कांडपाल आदि उपस्थित रहे। वहीं रोशनी सोसाइटी की ओर से नैनीताल रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में अभिभावकों को जागरूक किया। कार्यक्रम में ऑटिज्म पीड़ित बच्चों की कई प्रतियोगिताएं कराई गई। कार्यक्रम में गोविंद मेहरा, हेमा परगाई, सचिन शाह, विनीता वर्मा, कैलाश जोशी, शेखर कांडपाल, मधु शर्मा आदि मौजूद रही।
• तू आरती उतार * १६१* 'माया ! नुके इस मूर्ति का स्मरण हो रहा है। मा हमेशा इसकी पूजा करती थी। उस समय मैं बिलकुल छोटा था। मारती उतारती और में हाथ जोड़कर श्राँखें मूँदे खड़ा रहता था। उस पाँच मिनट के अरसे में बुके नाता के प्रत्यक्ष दर्शन होते थे। आरती के पश्चात् ना नुके प्रसाद देती तब मैं उनसे पूछता, मा. माताजी कहाँ चली गई ? ना मुझे मूर्ति बताकर कहती थी कि यह तो रहीं । लेकिन मेरा मन मानता न था। मैं कहता कि नहीं मा, माताजी तो चली गई; यहाँ मेरे सामने मेरे सिर पर हाथ रखे खड़ी थीं; अभी हाल चली गई और मैं फिर खेलने में लग जाता। रतनसिंह के साथ मैं बुड़सवारी के लिए चला जाता था। दूर-दूर के बर्फीले शिखरों को निहारता हुआ मैं अष्टभुजा के मन्दिर में जाता तत्र यह दृश्य मुझे याद हो श्रातां । नुझे एकाकीपन का अनुभव होता और घर आकर मा से कहता था कि मा, चलो, आरती उतारो; मैं आँखें नँदे खड़ा रहूँगा। मा मुझे खूत्र प्यार करती, मेरा सिर चूम लेती। माया, इस मूर्ति को मैं कैसे भूल सकता हूँ १ किसी देवी श्रावेश से प्रेरित वह उठा और माया की ओर देखने लगा। 'माया, चलो, तुम भारती उतारो ! जल्दी करो माया, चलो।" उसके शब्द मानवीय नहीं दैवी प्रेरणा से श्रोत-प्रोत थे। वह अभिभूत-सा मूर्ति के समक्ष पहुँचा और आँखें मँदकर कहने लगा, 'ना, माया को तुम मेरी मा बना दो ! ना, माया. को तुम मेरी मा बना दो ! आरती उतारो मा, आरती उतारो ! माया ने श्रारती ली और घंटी बजाते हुए आरती उतारने लगी। रंतिनाथ के नेत्रों से अविरल अश्रुधारा वह रही थी। माया भी रो रही थी। रणधीर और बच्चे भावाविष्ट से पीछे खड्ड़े थे । उस पाँच मिनट की अवधि में रंतिनाथ ने भगवती के साक्षात् दर्शन किये। उसके हृदय में विज्ली-सी कड़क उठी और वह स्वयं विश्वरूप बन गया। देखते-हीदेखते उसके पाँव लड़खड़ाये और वह धरती पर गिर पड़ा। उसके नेत्र और हथेलियाँ खुली थीं। वह मरा नहीं; किन्तु मृत्यु के उस पार पहुँचकर विश्वमय हो गया था । सामान्य चेतना तिरोहित होकर उसमें महान् चेतना का आविर्भाव हो गया था। उसके मुखमंडल पर प्रकाश की किरणें फूट रही थीं और शरीर से विद्युत् धाराएँ निकलने लगी थीं। रणधीर ने उसका सशं किया, तो झटके के साथ पल हट
• तू आरती उतार * एक सौ इकसठ* 'माया ! नुके इस मूर्ति का स्मरण हो रहा है। मा हमेशा इसकी पूजा करती थी। उस समय मैं बिलकुल छोटा था। मारती उतारती और में हाथ जोड़कर श्राँखें मूँदे खड़ा रहता था। उस पाँच मिनट के अरसे में बुके नाता के प्रत्यक्ष दर्शन होते थे। आरती के पश्चात् ना नुके प्रसाद देती तब मैं उनसे पूछता, मा. माताजी कहाँ चली गई ? ना मुझे मूर्ति बताकर कहती थी कि यह तो रहीं । लेकिन मेरा मन मानता न था। मैं कहता कि नहीं मा, माताजी तो चली गई; यहाँ मेरे सामने मेरे सिर पर हाथ रखे खड़ी थीं; अभी हाल चली गई और मैं फिर खेलने में लग जाता। रतनसिंह के साथ मैं बुड़सवारी के लिए चला जाता था। दूर-दूर के बर्फीले शिखरों को निहारता हुआ मैं अष्टभुजा के मन्दिर में जाता तत्र यह दृश्य मुझे याद हो श्रातां । नुझे एकाकीपन का अनुभव होता और घर आकर मा से कहता था कि मा, चलो, आरती उतारो; मैं आँखें नँदे खड़ा रहूँगा। मा मुझे खूत्र प्यार करती, मेरा सिर चूम लेती। माया, इस मूर्ति को मैं कैसे भूल सकता हूँ एक किसी देवी श्रावेश से प्रेरित वह उठा और माया की ओर देखने लगा। 'माया, चलो, तुम भारती उतारो ! जल्दी करो माया, चलो।" उसके शब्द मानवीय नहीं दैवी प्रेरणा से श्रोत-प्रोत थे। वह अभिभूत-सा मूर्ति के समक्ष पहुँचा और आँखें मँदकर कहने लगा, 'ना, माया को तुम मेरी मा बना दो ! ना, माया. को तुम मेरी मा बना दो ! आरती उतारो मा, आरती उतारो ! माया ने श्रारती ली और घंटी बजाते हुए आरती उतारने लगी। रंतिनाथ के नेत्रों से अविरल अश्रुधारा वह रही थी। माया भी रो रही थी। रणधीर और बच्चे भावाविष्ट से पीछे खड्ड़े थे । उस पाँच मिनट की अवधि में रंतिनाथ ने भगवती के साक्षात् दर्शन किये। उसके हृदय में विज्ली-सी कड़क उठी और वह स्वयं विश्वरूप बन गया। देखते-हीदेखते उसके पाँव लड़खड़ाये और वह धरती पर गिर पड़ा। उसके नेत्र और हथेलियाँ खुली थीं। वह मरा नहीं; किन्तु मृत्यु के उस पार पहुँचकर विश्वमय हो गया था । सामान्य चेतना तिरोहित होकर उसमें महान् चेतना का आविर्भाव हो गया था। उसके मुखमंडल पर प्रकाश की किरणें फूट रही थीं और शरीर से विद्युत् धाराएँ निकलने लगी थीं। रणधीर ने उसका सशं किया, तो झटके के साथ पल हट
पश्चिमी सिंहभूम जिले में 06 बड़े जलाशय और अनेक खदान तालाब हैं। जिसका निर्माण सिंचाई के उद्देश्य से किया गया है। बड़े डैम और जलाशय निर्माण के दौरान क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। विस्थापित होने के कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। यही कारण है कि कई युवा मुख्य धारा से विचलित होकर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो गए थे। लेकिन अब क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। लौह अयस्क खनन के बाद खाली पड़े खदानों में बारिश का पानी हो जाने से यह क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां नौका विहार से जहां पर्यटन को बढ़ावा मिला है, वहीं मछली पालन से ग्रामीणों को आजीविका का साधन मिल गया है। ग्रामीण अब मछली पालन कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रहे हैं। वहीं जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से भी सार्थक पहल कर विस्थापितों को केज पद्धति से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस प्रयास का अब सार्थक परिणाम नजर आने लगा है। क्षेत्र के युवाओं को जहां रोजगार मिला हैं, वहीं इलाके में अब लोगों को अच्छी और ताजी मछलियां मिलने लगी हैं। पहले अधिकांश मछलियों को दक्षिण भारत के राज्यों और पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता था। अब क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही अच्छी मछलियां मिल रही हैं। सुदूरवर्ती क्षेत्र में जलाशय और खदान तालाब रहने के कारण लोग पहले वहां जाने से डरते थे। लेकिन देखते ही देखते तस्वीर बदलती चली गई। अब सभी जलाशयों में पर्यटन के दृष्टिकोण से मोटर बोट और पैडल बोट दिया गया है। ये सभी बोट मत्स्य जीवी समितियों को संचालन के लिए दिया गया है, ताकि वे केज पद्धति से मछली उत्पादन के साथ-साथ पर्यटन के माध्यम से भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सके। पश्चिमी सिंहभूम के सदर प्रखंड में मोदी जलाशय, चक्रधरपुर प्रखंड में जैनासाई जलाशय और बंदगांव प्रखंड में नकटी जलाशय की गिनती मध्यम परियोजनाओं में होती है। इसके अलावा सोनुआ प्रखंड में पनसुआ जलाशय, मंझगांव प्रखंड में बेलमा जलाशय और मंझारी प्रखंड में तोरलो जलाशय की गिनती लघु सिंचाई परियोजना में होती है। इसके अलावा 02 खदान तालाब सदर प्रखंड में कमरहातु तालाब और जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब मौजूद है। बताया गया है कि नकटी और पनसुआ सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण असामाजिक गतिविधियां बहुत ज्यादा थी, लेकिन अब जिला प्रशासन की ओर से मोट रबोट उपलब्ध करा देने के बाद असामाजिक गतिविधियों में बेहद कमी देखी गई है। जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब में महिला समूह की ओर से केज पद्धति से मछली पालन कर अपनी आजीविका को चलाया जा रहा है। केज पद्धति से मछली पालन करने पर एक केज बैटरी से लगभग 03 से 04 टन मछली का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। जिससे लगभग 1. 5 लाख से 02 लाख तक की आमदनी कमाया जा सकता है। वर्तमान में जिले में लगभग विभिन्न जलाशयों में 400 केज बैटरी मौजूद है। अगर पर्यटन के क्षेत्र में देखा जाए तो मत्स्य पालन समिति की ओर जानकारी साझा किया गया कि पर्यटन के सीजन के समय मोटर वोट से उन्होंने लगभग प्रतिमाह 1. 5 लाख से 02 लाख तक कि आमदनी आसानी से अर्जित किया है। बंदगांव प्रखंड के समाजसेवी सुब्रत सेन की पहल से क्षेत्र के कई लोगों की तकदीर बदल गई। उन्होंने रोजगार ढूंढने के क्रम में यह पाया कि नकटी जलाशय में मछली पालन से अच्छी आमदनी हो सकती है। जिसके बाद वे जिला मत्स्य पदाधिकारी के संपर्क में आए और उन्हें सुझाव दिया कि विस्थापितों की एक समिति बनाई जाए। इस समिति को केज पद्धति से मछली पालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिससे क्षेत्र के कई ग्रामीणों को काफी फायदा मिला। सोनुवा प्रखंड के पोड़ाहाट निवासी दयानंद पाठक को रोजगार की तलाश में हर साल मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ता था। लेकिन अब मछली पालन कर गांव में ही अच्छी आमदनी कर रहे हैं। उन्हें रोजगार के लिए अब दूसरों का दरवाजा खटखटाना नहीं पडता है। सोनुवा प्रखंड के युधिष्ठिर भुमिज बेहद गरीब परिवार से आते हैं। इनके पास खेती करने के लिए भी पार्यप्त जमीन नहीं है जिसमे कि इनका जीवन यापन हो सके। परिवार का पेट पालने के लिए इनको मजदूरी भी करनी पड़ती थी। इनकी स्थिति इतनी दयनीय थी की चाह कर भी घर परिवार को छोड़ कर दूसरे जगह काम करने नहीं जा सकते थे। एक अच्छे रोजगार की उम्मीद की किरण जब दिखी तब वो मत्स्य विभाग के सम्पर्क में आए, जहाँ उन्हें सलाह दी गई की विस्थापित लोगों के साथ समिति से जुड़ कर केज में मछली पालन कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण आसानी से कर सकते हैं। वाकई में उनकी उम्मीद आज विश्वास में परिवर्तित हो गई है एवं आज खुशहाल जीवन जी रहे हैं। सोनुआ प्रखंड के बोयाकेड़ा निवासी अर्जुन महामात्रा की जमीन जलाशय परियोजना के लिए चली गई। जिसके कारण वे बेरोजगार हो गए। बेरोजगार होने के बाद छोटी दुकान कर आजीविका चलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें अच्छी आमदनी नहीं हो रही थी। अब मच्छी पालन से पूरे परिवार की तकदीर बदल गई। योजना का फायदा उठाकर उन्होंने अपना अच्छा मकान भी बनवा लिया। वहीं बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
पश्चिमी सिंहभूम जिले में छः बड़े जलाशय और अनेक खदान तालाब हैं। जिसका निर्माण सिंचाई के उद्देश्य से किया गया है। बड़े डैम और जलाशय निर्माण के दौरान क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। विस्थापित होने के कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। यही कारण है कि कई युवा मुख्य धारा से विचलित होकर असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो गए थे। लेकिन अब क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। लौह अयस्क खनन के बाद खाली पड़े खदानों में बारिश का पानी हो जाने से यह क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां नौका विहार से जहां पर्यटन को बढ़ावा मिला है, वहीं मछली पालन से ग्रामीणों को आजीविका का साधन मिल गया है। ग्रामीण अब मछली पालन कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रहे हैं। वहीं जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से भी सार्थक पहल कर विस्थापितों को केज पद्धति से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस प्रयास का अब सार्थक परिणाम नजर आने लगा है। क्षेत्र के युवाओं को जहां रोजगार मिला हैं, वहीं इलाके में अब लोगों को अच्छी और ताजी मछलियां मिलने लगी हैं। पहले अधिकांश मछलियों को दक्षिण भारत के राज्यों और पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता था। अब क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही अच्छी मछलियां मिल रही हैं। सुदूरवर्ती क्षेत्र में जलाशय और खदान तालाब रहने के कारण लोग पहले वहां जाने से डरते थे। लेकिन देखते ही देखते तस्वीर बदलती चली गई। अब सभी जलाशयों में पर्यटन के दृष्टिकोण से मोटर बोट और पैडल बोट दिया गया है। ये सभी बोट मत्स्य जीवी समितियों को संचालन के लिए दिया गया है, ताकि वे केज पद्धति से मछली उत्पादन के साथ-साथ पर्यटन के माध्यम से भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सके। पश्चिमी सिंहभूम के सदर प्रखंड में मोदी जलाशय, चक्रधरपुर प्रखंड में जैनासाई जलाशय और बंदगांव प्रखंड में नकटी जलाशय की गिनती मध्यम परियोजनाओं में होती है। इसके अलावा सोनुआ प्रखंड में पनसुआ जलाशय, मंझगांव प्रखंड में बेलमा जलाशय और मंझारी प्रखंड में तोरलो जलाशय की गिनती लघु सिंचाई परियोजना में होती है। इसके अलावा दो खदान तालाब सदर प्रखंड में कमरहातु तालाब और जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब मौजूद है। बताया गया है कि नकटी और पनसुआ सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण असामाजिक गतिविधियां बहुत ज्यादा थी, लेकिन अब जिला प्रशासन की ओर से मोट रबोट उपलब्ध करा देने के बाद असामाजिक गतिविधियों में बेहद कमी देखी गई है। जगन्नाथपुर प्रखंड के करंजिया तालाब में महिला समूह की ओर से केज पद्धति से मछली पालन कर अपनी आजीविका को चलाया जा रहा है। केज पद्धति से मछली पालन करने पर एक केज बैटरी से लगभग तीन से चार टन मछली का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। जिससे लगभग एक. पाँच लाख से दो लाख तक की आमदनी कमाया जा सकता है। वर्तमान में जिले में लगभग विभिन्न जलाशयों में चार सौ केज बैटरी मौजूद है। अगर पर्यटन के क्षेत्र में देखा जाए तो मत्स्य पालन समिति की ओर जानकारी साझा किया गया कि पर्यटन के सीजन के समय मोटर वोट से उन्होंने लगभग प्रतिमाह एक. पाँच लाख से दो लाख तक कि आमदनी आसानी से अर्जित किया है। बंदगांव प्रखंड के समाजसेवी सुब्रत सेन की पहल से क्षेत्र के कई लोगों की तकदीर बदल गई। उन्होंने रोजगार ढूंढने के क्रम में यह पाया कि नकटी जलाशय में मछली पालन से अच्छी आमदनी हो सकती है। जिसके बाद वे जिला मत्स्य पदाधिकारी के संपर्क में आए और उन्हें सुझाव दिया कि विस्थापितों की एक समिति बनाई जाए। इस समिति को केज पद्धति से मछली पालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिससे क्षेत्र के कई ग्रामीणों को काफी फायदा मिला। सोनुवा प्रखंड के पोड़ाहाट निवासी दयानंद पाठक को रोजगार की तलाश में हर साल मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ता था। लेकिन अब मछली पालन कर गांव में ही अच्छी आमदनी कर रहे हैं। उन्हें रोजगार के लिए अब दूसरों का दरवाजा खटखटाना नहीं पडता है। सोनुवा प्रखंड के युधिष्ठिर भुमिज बेहद गरीब परिवार से आते हैं। इनके पास खेती करने के लिए भी पार्यप्त जमीन नहीं है जिसमे कि इनका जीवन यापन हो सके। परिवार का पेट पालने के लिए इनको मजदूरी भी करनी पड़ती थी। इनकी स्थिति इतनी दयनीय थी की चाह कर भी घर परिवार को छोड़ कर दूसरे जगह काम करने नहीं जा सकते थे। एक अच्छे रोजगार की उम्मीद की किरण जब दिखी तब वो मत्स्य विभाग के सम्पर्क में आए, जहाँ उन्हें सलाह दी गई की विस्थापित लोगों के साथ समिति से जुड़ कर केज में मछली पालन कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण आसानी से कर सकते हैं। वाकई में उनकी उम्मीद आज विश्वास में परिवर्तित हो गई है एवं आज खुशहाल जीवन जी रहे हैं। सोनुआ प्रखंड के बोयाकेड़ा निवासी अर्जुन महामात्रा की जमीन जलाशय परियोजना के लिए चली गई। जिसके कारण वे बेरोजगार हो गए। बेरोजगार होने के बाद छोटी दुकान कर आजीविका चलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें अच्छी आमदनी नहीं हो रही थी। अब मच्छी पालन से पूरे परिवार की तकदीर बदल गई। योजना का फायदा उठाकर उन्होंने अपना अच्छा मकान भी बनवा लिया। वहीं बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
DU Recruitment: दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई है। इच्छुक और पदों के लिए योग्यता रखने वाले उम्मीदवार मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के 75 पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के लिए भर्ती कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, अंग्रेजी सहित अन्य विषयों के लिए होगी। डीयू के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में निकली भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को www. mlnce. org पर जाना होगा। आवेदन की आखिरी तारीख 10 जनवरी 2023 है। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
DU Recruitment: दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई है। इच्छुक और पदों के लिए योग्यता रखने वाले उम्मीदवार मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पचहत्तर पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के लिए भर्ती कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, अंग्रेजी सहित अन्य विषयों के लिए होगी। डीयू के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में निकली भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को www. mlnce. org पर जाना होगा। आवेदन की आखिरी तारीख दस जनवरी दो हज़ार तेईस है। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
रहमी एम. कोक संग्रहालय, तुर्की का पहला और एकमात्र औद्योगिक संग्रहालय, नई वस्तुओं के साथ अपने संग्रह का विस्तार करना जारी रखता है। संग्रहालय की नवीनतम वस्तु 1903 कैडिलैक है। कैडिलैक अपने सिंगल-सिलेंडर इंजन, इच्छुक स्टीयरिंग व्हील, ब्रास लैंप और एयर हॉर्न के साथ प्रदर्शित होता है, जो ऑटोमोटिव उद्योग में अपने उत्साही लोगों को इतिहास लिखता है। रहमी एम. कोक संग्रहालय, जो आज उद्योग, परिवहन और संचार के इतिहास की किंवदंतियों से युक्त 14 हजार से अधिक वस्तुओं के साथ अतीत को जीवित रखता है, एक नई वस्तु का घर है। 1903 कैडिलैक को संग्रहालय के क्लासिक कार संग्रह में जोड़ा गया है। कैडिलैक, जिसने न केवल अपने समय में ध्यान आकर्षित किया, बल्कि अपने समय से पहले के विकास का मार्गदर्शन भी किया, 1902 में हेनरी लेलैंड द्वारा निर्मित किया गया था। कार के पहले प्रोटोटाइप का नाम फ्रांसीसी खोजकर्ता एंटोनी डी ला मोटे कैडिलैक के नाम पर रखा गया, जिन्होंने 1701 में डेट्रॉइट शहर की स्थापना की थी, जिसे मॉडल ए कहा जाता था। हालांकि पहला कैडिलैक घोड़े द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी की उपस्थिति से पूरी तरह से अलग नहीं हुआ था, यह घुमावदार स्टीयरिंग व्हील, एक्सल पिन, क्लच और ब्रेक पेडल जैसे तकनीकी विवरणों के साथ बाहर खड़ा था। जनवरी 1903 में न्यू यॉर्क ऑटो शो में इसे प्राप्त रुचि के बाद, 2 मॉडल ए मॉडल का आदेश दिया गया था। कैडिलैक के पूरी तरह से डिज़ाइन किए गए सिंगल-सिलेंडर इंजन में अधिकांश सिंगल-सिलेंडर इंजनों की तुलना में अधिक शक्ति थी और लोकप्रिय बना रहा, हालांकि 300 और 1909 के बीच चार-सिलेंडर मॉडल भी तैयार किए गए थे। कार, जो रहमी एम. कोक संग्रहालय में प्रदर्शित है और सबसे पुरानी कैडिलैक होने का अनुमान है, में रियर-एंट्री रियर सीट ऐड-ऑन है, जो रिलीज के समय एक अतिरिक्त शुल्क के अधीन था। इसी अवधि में, पीतल के लैंप, एयर हॉर्न और साइड-माउंटेड टोकरियाँ भी हैं, जिन्हें अतिरिक्त सामान के रूप में पेश किया गया था। वाहन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता सहिष्णुता प्रणाली है, जिसका उपयोग पहली बार 1850 में हथियार उद्योग में किया गया था, लेकिन यह ज्यादा नहीं फैला। सहिष्णुता प्रणाली, जो भागों के बीच आदान-प्रदान की अनुमति देती है और प्रदर्शन, रखरखाव, मरम्मत में आसानी और लंबे जीवन के लिए आवश्यक है, आज उद्योग की हर शाखा में उपयोग की जाती है।
रहमी एम. कोक संग्रहालय, तुर्की का पहला और एकमात्र औद्योगिक संग्रहालय, नई वस्तुओं के साथ अपने संग्रह का विस्तार करना जारी रखता है। संग्रहालय की नवीनतम वस्तु एक हज़ार नौ सौ तीन कैडिलैक है। कैडिलैक अपने सिंगल-सिलेंडर इंजन, इच्छुक स्टीयरिंग व्हील, ब्रास लैंप और एयर हॉर्न के साथ प्रदर्शित होता है, जो ऑटोमोटिव उद्योग में अपने उत्साही लोगों को इतिहास लिखता है। रहमी एम. कोक संग्रहालय, जो आज उद्योग, परिवहन और संचार के इतिहास की किंवदंतियों से युक्त चौदह हजार से अधिक वस्तुओं के साथ अतीत को जीवित रखता है, एक नई वस्तु का घर है। एक हज़ार नौ सौ तीन कैडिलैक को संग्रहालय के क्लासिक कार संग्रह में जोड़ा गया है। कैडिलैक, जिसने न केवल अपने समय में ध्यान आकर्षित किया, बल्कि अपने समय से पहले के विकास का मार्गदर्शन भी किया, एक हज़ार नौ सौ दो में हेनरी लेलैंड द्वारा निर्मित किया गया था। कार के पहले प्रोटोटाइप का नाम फ्रांसीसी खोजकर्ता एंटोनी डी ला मोटे कैडिलैक के नाम पर रखा गया, जिन्होंने एक हज़ार सात सौ एक में डेट्रॉइट शहर की स्थापना की थी, जिसे मॉडल ए कहा जाता था। हालांकि पहला कैडिलैक घोड़े द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी की उपस्थिति से पूरी तरह से अलग नहीं हुआ था, यह घुमावदार स्टीयरिंग व्हील, एक्सल पिन, क्लच और ब्रेक पेडल जैसे तकनीकी विवरणों के साथ बाहर खड़ा था। जनवरी एक हज़ार नौ सौ तीन में न्यू यॉर्क ऑटो शो में इसे प्राप्त रुचि के बाद, दो मॉडल ए मॉडल का आदेश दिया गया था। कैडिलैक के पूरी तरह से डिज़ाइन किए गए सिंगल-सिलेंडर इंजन में अधिकांश सिंगल-सिलेंडर इंजनों की तुलना में अधिक शक्ति थी और लोकप्रिय बना रहा, हालांकि तीन सौ और एक हज़ार नौ सौ नौ के बीच चार-सिलेंडर मॉडल भी तैयार किए गए थे। कार, जो रहमी एम. कोक संग्रहालय में प्रदर्शित है और सबसे पुरानी कैडिलैक होने का अनुमान है, में रियर-एंट्री रियर सीट ऐड-ऑन है, जो रिलीज के समय एक अतिरिक्त शुल्क के अधीन था। इसी अवधि में, पीतल के लैंप, एयर हॉर्न और साइड-माउंटेड टोकरियाँ भी हैं, जिन्हें अतिरिक्त सामान के रूप में पेश किया गया था। वाहन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता सहिष्णुता प्रणाली है, जिसका उपयोग पहली बार एक हज़ार आठ सौ पचास में हथियार उद्योग में किया गया था, लेकिन यह ज्यादा नहीं फैला। सहिष्णुता प्रणाली, जो भागों के बीच आदान-प्रदान की अनुमति देती है और प्रदर्शन, रखरखाव, मरम्मत में आसानी और लंबे जीवन के लिए आवश्यक है, आज उद्योग की हर शाखा में उपयोग की जाती है।
नई दिल्ली. एक बड़ी खबर के अनुसार ED ने दिल्ली शराब घोटाले (Delhi Liquor Scam मामले में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी के बेटे राघव मगुंटा को आज गिरफ्तार कर लिया है। जी हां आज दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाला मामले में ED ने एक और गिरफ्तारी की है। ED ने YSR कांग्रेस पार्टी के ओंगोले से सांसद मंगुटा श्रीनिवासुलु रेड्डी (Magunta Srinivasulu Reddy) के बेटे मगुंटा राघव रेड्डी (Magunta Raghava Reddy) को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार उन पर इस कथित घोटाले में एक बड़ी भूमिका निभाने या होने का संदेह है। ऐसी भी खबर है कि कि मगुंटा राघव रेड्डी ने दिल्ली की नई आबकारी नीति के कथित घोटाले की योजना को तैयार करने और फिर उससे अनुचित लाभ हासिल करने में भी अपनी एक बड़ी भूमिका निभाई। जानकारी को कि, कुछ दिनों पहले ED ने अपनी दूसरी चार्जशीट में कथित तौर पर कहा था कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता के साथ राघव रेड्डी भी इंडोस्पिरिट का वास्तविक मालिक है। इतना ही नहीं कथित तौर पर कविता ने शराब व्यवसायी अरुण रामचंद्र पिल्लई के जरिये अपनी हिस्सेदारी को नियंत्रित किया करती थी। इस गैरकानूनी कृत्य में उनका साथ देने वाले व्यवसायी विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली ऊथा गौतम और समीर महेंद्रू को CBI ने बीते साल ही चार्जशीट में आरोपी बनाया था।
नई दिल्ली. एक बड़ी खबर के अनुसार ED ने दिल्ली शराब घोटाले के बेटे मगुंटा राघव रेड्डी को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार उन पर इस कथित घोटाले में एक बड़ी भूमिका निभाने या होने का संदेह है। ऐसी भी खबर है कि कि मगुंटा राघव रेड्डी ने दिल्ली की नई आबकारी नीति के कथित घोटाले की योजना को तैयार करने और फिर उससे अनुचित लाभ हासिल करने में भी अपनी एक बड़ी भूमिका निभाई। जानकारी को कि, कुछ दिनों पहले ED ने अपनी दूसरी चार्जशीट में कथित तौर पर कहा था कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता के साथ राघव रेड्डी भी इंडोस्पिरिट का वास्तविक मालिक है। इतना ही नहीं कथित तौर पर कविता ने शराब व्यवसायी अरुण रामचंद्र पिल्लई के जरिये अपनी हिस्सेदारी को नियंत्रित किया करती थी। इस गैरकानूनी कृत्य में उनका साथ देने वाले व्यवसायी विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली ऊथा गौतम और समीर महेंद्रू को CBI ने बीते साल ही चार्जशीट में आरोपी बनाया था।
मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. वह अक्सर पॉलिटिकल और सोशल मुद्दों पर भी अपने ही अंदाज में ट्वीट करते हैं. हाल ही में उन्होंने खुद को लुंगी मूवमेंट का लीडर बताया. कोरोना काल के दौरान ज्यादातर लोग अपने घर से ही काम कर रहे हैं. ऐसे में इस 'वर्क फ्रॉम होम' के कई फायदे और नुकसान हैं. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) अधिकतर वर्क फ्रॉम होम, वेबिनार से रिलेटेड पोस्ट करते रहते हैं. कुछ दिनों पहले उनका 'लुंगी' से जुड़ा एक पोस्ट कर भी काफी पॉपुलर हुआ था जिसमें उन्होंने बताया था कि वो वीडियो कॉल पर शर्ट के नीचे लुंगी पहन कर बैठते हैं. जिसके बाद कई लोगों ने खुद को उससे रिलेट करते हुए बताया था कि वो भी ऐसा ही करते हैं. देश के मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. वह अक्सर पॉलिटिकल और सोशल मुद्दों पर भी अपने ही अंदाज में ट्वीट करते हैं. हाल ही में उन्होंने खुद को लुंगी मूवमेंट का लीडर बताया. आनंद महिंद्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ऐसा मीम शेयर किया जिसे देखकर वो खुद कुर्सी से उछल पड़े. दरअसल, ये पोस्ट इन दिनों लाइफ रूटीन के बारे में है जिसमें कोरोना के चलते जिंदगी घर पर सिमट सी गयी है. ऑफिस, स्कूल, शॉपिंग जैसे सभी काम आजकल कंप्यूटर पर बीते बैठे किए जा रहे हैं. महिंद्रा के इस 'न्यू नॉर्मल' पोस्ट को देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए. लोगों को ये मीम काफी पसंद आया जिसके बाद यूजर्स ने सोशल मीडिया पर ऐसे ही सिमिलर पोस्ट शेयर किए. एक यूजर ने आनंद महिंद्रा के ट्वीट पर कमेंट करते हुए कहा कि चेयर पर लुंगी के साथ बैठने से कुछ चीजें बेहतर हो जाती हैं. जिसके जवाब में महिंद्रा ने लिखा, "आप लुंगी मूवमेंट के लीडर को सिखा रहे हैं." सोशल मीडिया पर लोगों को आनंद महिंद्रा का ये पोस्ट और मजेदार जवाब काफी पसंद आया. यूजर्स इसपर अपने मजेदार रिएक्शन और एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं. Haha I'm very well aware sir. I'm looking to make a permanent lungi crossover.
मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. वह अक्सर पॉलिटिकल और सोशल मुद्दों पर भी अपने ही अंदाज में ट्वीट करते हैं. हाल ही में उन्होंने खुद को लुंगी मूवमेंट का लीडर बताया. कोरोना काल के दौरान ज्यादातर लोग अपने घर से ही काम कर रहे हैं. ऐसे में इस 'वर्क फ्रॉम होम' के कई फायदे और नुकसान हैं. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा अधिकतर वर्क फ्रॉम होम, वेबिनार से रिलेटेड पोस्ट करते रहते हैं. कुछ दिनों पहले उनका 'लुंगी' से जुड़ा एक पोस्ट कर भी काफी पॉपुलर हुआ था जिसमें उन्होंने बताया था कि वो वीडियो कॉल पर शर्ट के नीचे लुंगी पहन कर बैठते हैं. जिसके बाद कई लोगों ने खुद को उससे रिलेट करते हुए बताया था कि वो भी ऐसा ही करते हैं. देश के मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. वह अक्सर पॉलिटिकल और सोशल मुद्दों पर भी अपने ही अंदाज में ट्वीट करते हैं. हाल ही में उन्होंने खुद को लुंगी मूवमेंट का लीडर बताया. आनंद महिंद्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ऐसा मीम शेयर किया जिसे देखकर वो खुद कुर्सी से उछल पड़े. दरअसल, ये पोस्ट इन दिनों लाइफ रूटीन के बारे में है जिसमें कोरोना के चलते जिंदगी घर पर सिमट सी गयी है. ऑफिस, स्कूल, शॉपिंग जैसे सभी काम आजकल कंप्यूटर पर बीते बैठे किए जा रहे हैं. महिंद्रा के इस 'न्यू नॉर्मल' पोस्ट को देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए. लोगों को ये मीम काफी पसंद आया जिसके बाद यूजर्स ने सोशल मीडिया पर ऐसे ही सिमिलर पोस्ट शेयर किए. एक यूजर ने आनंद महिंद्रा के ट्वीट पर कमेंट करते हुए कहा कि चेयर पर लुंगी के साथ बैठने से कुछ चीजें बेहतर हो जाती हैं. जिसके जवाब में महिंद्रा ने लिखा, "आप लुंगी मूवमेंट के लीडर को सिखा रहे हैं." सोशल मीडिया पर लोगों को आनंद महिंद्रा का ये पोस्ट और मजेदार जवाब काफी पसंद आया. यूजर्स इसपर अपने मजेदार रिएक्शन और एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं. Haha I'm very well aware sir. I'm looking to make a permanent lungi crossover.
भाता - नास्ता । भामण्डल - तेज का समूह ( सूर्य्यमुखी ) । महमूदी - मुसलमानी जमाने का एक प्रकार का चांदी का सिक्का । मातहत - आधीन, तावेदार । मुँहपत्ति - बोलते समय जीवों की रक्षार्थ मुख के आगे रखने के लिये छोटे वस्त्र का टुकड़ा । मूल गंभारा - देखो-गंभारा । मूलनायक- मंदिर की मुख्य प्रभु - प्रतिमा । यक्ष - व्यंतर देव की एक जाति । यति - साधु । वाहन आदि का उपयोग करने वाले तथा द्रव्य को पास रखने वाले । जैन साधुओं के भेद विशेष में 'यति' शब्द रूढ हो गया है । यंत्र - मंत्र विशेष जिसमें खुदा या लिखा हो । रंग मण्डप -- सभा मण्डप रजोहरण - ओघा शब्द देखो । रीक्षा - गाड़ी जो कि मजदूर खींचते हैं । लंछन- जिन प्रतिमाओं के चिह्न विशेष । लाग. या लागा-कर । लुंचन- हाथ से बालों को उखाड़ना जो कि जैन साधु करते हैं । वसहि - वसति, देव मंदिर । वासक्षेप - सुगंधी चूर्ण ( भुक्की ) वासुदेव - भरत क्षेत्र के तीन खण्डों को भोगनेवाला । विहरमान जिन-वर्त्तमान काल के तीर्थकर जो कि हाल महाविदेह क्षेत्र में हैं । विहार - परिभ्रमण । शक्कनिका - चील । शाश्वत् - नित्य, अमर संघ - साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविकाओं का समूह । संघवी - संघपति । सप्तक्षेत्र - धर्म के सात स्थान, (मूर्त्ति, मंदिर, ज्ञान साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका ) । सभामंडप - मंदिर का बड़ा मंडप । समवसरण - संपूर्ण अनुकूलता वाली, देवों से रचित तीर्थकर प्रभु की विशाल - दिव्य व्याख्यान शाला । सामायिक - राग-द्वेष रहित होके दो घड़ी ( ४८ मिनिट ) तक समभाव में रहना ।
भाता - नास्ता । भामण्डल - तेज का समूह । महमूदी - मुसलमानी जमाने का एक प्रकार का चांदी का सिक्का । मातहत - आधीन, तावेदार । मुँहपत्ति - बोलते समय जीवों की रक्षार्थ मुख के आगे रखने के लिये छोटे वस्त्र का टुकड़ा । मूल गंभारा - देखो-गंभारा । मूलनायक- मंदिर की मुख्य प्रभु - प्रतिमा । यक्ष - व्यंतर देव की एक जाति । यति - साधु । वाहन आदि का उपयोग करने वाले तथा द्रव्य को पास रखने वाले । जैन साधुओं के भेद विशेष में 'यति' शब्द रूढ हो गया है । यंत्र - मंत्र विशेष जिसमें खुदा या लिखा हो । रंग मण्डप -- सभा मण्डप रजोहरण - ओघा शब्द देखो । रीक्षा - गाड़ी जो कि मजदूर खींचते हैं । लंछन- जिन प्रतिमाओं के चिह्न विशेष । लाग. या लागा-कर । लुंचन- हाथ से बालों को उखाड़ना जो कि जैन साधु करते हैं । वसहि - वसति, देव मंदिर । वासक्षेप - सुगंधी चूर्ण वासुदेव - भरत क्षेत्र के तीन खण्डों को भोगनेवाला । विहरमान जिन-वर्त्तमान काल के तीर्थकर जो कि हाल महाविदेह क्षेत्र में हैं । विहार - परिभ्रमण । शक्कनिका - चील । शाश्वत् - नित्य, अमर संघ - साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविकाओं का समूह । संघवी - संघपति । सप्तक्षेत्र - धर्म के सात स्थान, । सभामंडप - मंदिर का बड़ा मंडप । समवसरण - संपूर्ण अनुकूलता वाली, देवों से रचित तीर्थकर प्रभु की विशाल - दिव्य व्याख्यान शाला । सामायिक - राग-द्वेष रहित होके दो घड़ी तक समभाव में रहना ।
भोपाल। विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिला निर्वाचन शाखा द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई है। शहर की विधानसभाओं में मतदाता सूची के सुधार का कार्य किया जा रहा है। बीएलओ घर -घर जाकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का काम कर रहे हैं। इसी बीच इंटरनेट मीडिया से नरेला विधानसभा की मतदाता सूची के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर आशीष सिंह को शिकायतें मिल रही थी। जिससे वह खुद अपनी टीम के साथ मतदाता सूची की जांच करने रविवार को विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे और जांच करने के साथ निरीक्षण किया। इसके अलावा मतदाताओं से बातचीत कर क्षेत्र के बारे में जानकारी भी जुटाई। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि जब टीम सहित नरेला विधानसभा क्षेत्र का निरीक्षण किया और मतदाता सूची की जांच कराई गई तो पता चला कि वास्तविकता में 50 या उससे अधिक मतदाता एक ही घर में निवास न करते हुए अलग-अलग घरों में रहते हैं। साथ ही जांच में यह भी पता चला कि एक ही अनुभाव क्षेत्र में विकसित अवैध कालोनियाें में घरों के नंबर एक होने के कारण इस तरह की विसंगतियां तकनीकि कारणों से प्रदर्शित हो रही हैं। निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने एक महीने में नरेला विधानसभा की मतदाता सूची से सभी तरह की विसंगतियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार एवं जिला छोड़कर चले गए या फिर ऐसे मतदात जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके नाम हटाने का काम भी किया जा रहा है। इस संबंध में सभी बीएलओ, निर्वाचन शाखा के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह समय पर काम पूरा कर लें। जिससे आने वाले चुनाव के दौरान किसी तरह की कोई समस्या न आए।
भोपाल। विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिला निर्वाचन शाखा द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई है। शहर की विधानसभाओं में मतदाता सूची के सुधार का कार्य किया जा रहा है। बीएलओ घर -घर जाकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का काम कर रहे हैं। इसी बीच इंटरनेट मीडिया से नरेला विधानसभा की मतदाता सूची के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर आशीष सिंह को शिकायतें मिल रही थी। जिससे वह खुद अपनी टीम के साथ मतदाता सूची की जांच करने रविवार को विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे और जांच करने के साथ निरीक्षण किया। इसके अलावा मतदाताओं से बातचीत कर क्षेत्र के बारे में जानकारी भी जुटाई। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि जब टीम सहित नरेला विधानसभा क्षेत्र का निरीक्षण किया और मतदाता सूची की जांच कराई गई तो पता चला कि वास्तविकता में पचास या उससे अधिक मतदाता एक ही घर में निवास न करते हुए अलग-अलग घरों में रहते हैं। साथ ही जांच में यह भी पता चला कि एक ही अनुभाव क्षेत्र में विकसित अवैध कालोनियाें में घरों के नंबर एक होने के कारण इस तरह की विसंगतियां तकनीकि कारणों से प्रदर्शित हो रही हैं। निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने एक महीने में नरेला विधानसभा की मतदाता सूची से सभी तरह की विसंगतियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार एवं जिला छोड़कर चले गए या फिर ऐसे मतदात जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके नाम हटाने का काम भी किया जा रहा है। इस संबंध में सभी बीएलओ, निर्वाचन शाखा के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह समय पर काम पूरा कर लें। जिससे आने वाले चुनाव के दौरान किसी तरह की कोई समस्या न आए।
बॉलीवुड की खूबसूरत मोहतरमा व अपनी अदाकारी से आज भी लोगो के दिलो पर अपना राज कायम किए हुए अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर से अपनी आगमी फिल्म 'रंगून' के लिए आजकल सुर्खियों में बनी हुई है. आपको बता दे की फिल्म 'रंगून' में हमे कंगना के साथ में अभिनेता शाहिद कपूर व सैफ अली खान का भी दमदार अभिनय देखने को मिलने वाला है. फिल्म के लिए पहले हमे कंगना व शाहिद के बीच में पंगो के बारे में भी पता चला था लेकिन फिर बाद में फिर से सबकुछ ठीकठाक हो गया. बात करे फिल्म के बारे में तो फिल्म के कुछ सॉन्ग व ट्रेलर भी पूर्व में दर्शको के द्वारा खासा पसन्द भी किए जा रहे है. अब फिर से 'रंगून' की यह खूबसूरत मोहतरमा अपने बयान को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है जी हाँ, दो नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत ने फ़िल्म 'क्वीन' और 'तनु वेड्स मनु" से बॉलीवुड में अपनी ख़ास जगह बनाई है. एक दशक से बॉलीवुड में काम कर रही कंगना ने बॉलीवुड में दोस्त नहीं बनाए और इसी वजह से वो अपने आप को सफल मानती हैं. अभिनेत्री ने फ़िल्म इंडस्ट्री में होने वाली दोस्ती पर अपनी राय रखते हुए कहा, "मैं सफल हूँ क्योंकि यहाँ मेरा कोई दोस्त नहीं है. अगर आपके दोस्त सफल हो जाते हैं या सिर्फ आप सफल हो जाते हो तो रिश्ते उलझ जाते हैं. काम पर जब इंसानी जज़्बात आ जाते हैं तो कड़वाहट आ जाती है और आप सही फैसला नहीं ले पाते. "
बॉलीवुड की खूबसूरत मोहतरमा व अपनी अदाकारी से आज भी लोगो के दिलो पर अपना राज कायम किए हुए अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर से अपनी आगमी फिल्म 'रंगून' के लिए आजकल सुर्खियों में बनी हुई है. आपको बता दे की फिल्म 'रंगून' में हमे कंगना के साथ में अभिनेता शाहिद कपूर व सैफ अली खान का भी दमदार अभिनय देखने को मिलने वाला है. फिल्म के लिए पहले हमे कंगना व शाहिद के बीच में पंगो के बारे में भी पता चला था लेकिन फिर बाद में फिर से सबकुछ ठीकठाक हो गया. बात करे फिल्म के बारे में तो फिल्म के कुछ सॉन्ग व ट्रेलर भी पूर्व में दर्शको के द्वारा खासा पसन्द भी किए जा रहे है. अब फिर से 'रंगून' की यह खूबसूरत मोहतरमा अपने बयान को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है जी हाँ, दो नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत ने फ़िल्म 'क्वीन' और 'तनु वेड्स मनु" से बॉलीवुड में अपनी ख़ास जगह बनाई है. एक दशक से बॉलीवुड में काम कर रही कंगना ने बॉलीवुड में दोस्त नहीं बनाए और इसी वजह से वो अपने आप को सफल मानती हैं. अभिनेत्री ने फ़िल्म इंडस्ट्री में होने वाली दोस्ती पर अपनी राय रखते हुए कहा, "मैं सफल हूँ क्योंकि यहाँ मेरा कोई दोस्त नहीं है. अगर आपके दोस्त सफल हो जाते हैं या सिर्फ आप सफल हो जाते हो तो रिश्ते उलझ जाते हैं. काम पर जब इंसानी जज़्बात आ जाते हैं तो कड़वाहट आ जाती है और आप सही फैसला नहीं ले पाते. "
खुद को भाजपा का नेता बताकर एक महिला से बदसलूकी करने और रौब झाड़ने वाला स्थानीय नेता श्रीकांत त्यागी वीडियो वायरल होने के बाद से फरार है. उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है. उसकी दबिश के लिए पुलिस ने 4 टीमें गठित की हैं. पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की पत्नी और ड्राइवर समेत 4 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि श्रीकांत की तलाश जारी है. ये पूरा मामला नोएडा की ग्रैंड ओमैक्स सोसायटी का है. यहां श्रीकांत त्यागी और एक महिला के बीच पार्क में अतिक्रमण को लेकर बहस हुई और उसके बाद श्रीकांत त्यागी ने महिला के साथ बदसलूकी की. इसका वीडियो वायरल हो गया. इस बीच नोएडा से भाजपा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी पहुंच चुके हैं. सोसायटी के कॉमन एरिया में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद हैं. पीड़ित महिला ने महेश शर्मा से बात करते हुए बताया- मैं माली से बात कर रही थी. वो गाली देने लगे. उसे जेल जाना चाहिए, जो भी अतिक्रमण है उसे तुड़वाया जाना चाहिए. सोसायटी की सचिव यहां रहने लायक नहीं हैं. इनके चचेरे भाई अथॉरिटी में हैं, शायद इसलिए कार्रवाई नहीं हुई. इस अतिक्रमण को लेकर पहले भी शिकायत की गई थी. मैंने इस काम को 24 घंटे के लिए रुकवाया था. सांसद महेश शर्मा ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लिया है. मैंने पुलिसकर्मियों से कहा है उसे 48 घंटे में गिरफ्तार किया जाए. पुलिस कोर्ट से वारंट लेने गई है. ये जांच का विषय है कि श्रीकांत त्यागी कौन है. मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में इसे आजतक किसी कार्यक्रम में नहीं देखा है. यहां मौजूद महिलाओं ने बताया कि जिस वक्त ये विवाद हुआ उस समय कई महिलाएं वहां मौजूद थीं. उनका कहना कि जिस भाषा का प्रयोग हुआ वो सुनकर सभी स्तब्ध रह गई. पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की गाड़ियों को जब्त कर लिया है. त्यागी की कुल 4 गाड़ियों को जब्त किया गया है. इसमें से एक गाड़ी फॉर्च्यूनर है जो लखनऊ के नंबर पर रजिस्टर्ड है. आजतक की टीम उस पते पर पहुंची जिस पर फॉर्च्यूनर को खरीदा गया था. यहां जाकर पता चला कि ये अपार्टमेंट अंकिता द्विवेदी का है. वहीं लखनऊ आरटीओ दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक ये फ्लैट अभिनव वोरा का है. इस सबके बीच भाजपा का कहना है कि श्रीकांत त्यागी का पार्टी से कोई संबंध नहीं है. पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा - श्रीकांत त्यागी का बीजेपी से कोई लेना देना नहीं है. वहीं पार्टी के किसान मोर्चा के अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने भी कहा कि श्रीकांत त्यागी नाम का व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य नहीं है. किसान मोर्चा की कोई युवा समिति भी नहीं है. सरकार उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करे जिसने महिला के साथ अभद्रता की है. वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिया है. आयोग ने पुलिस से इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तेजी से जांच करने के लिए कहा है.
खुद को भाजपा का नेता बताकर एक महिला से बदसलूकी करने और रौब झाड़ने वाला स्थानीय नेता श्रीकांत त्यागी वीडियो वायरल होने के बाद से फरार है. उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है. उसकी दबिश के लिए पुलिस ने चार टीमें गठित की हैं. पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की पत्नी और ड्राइवर समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि श्रीकांत की तलाश जारी है. ये पूरा मामला नोएडा की ग्रैंड ओमैक्स सोसायटी का है. यहां श्रीकांत त्यागी और एक महिला के बीच पार्क में अतिक्रमण को लेकर बहस हुई और उसके बाद श्रीकांत त्यागी ने महिला के साथ बदसलूकी की. इसका वीडियो वायरल हो गया. इस बीच नोएडा से भाजपा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी पहुंच चुके हैं. सोसायटी के कॉमन एरिया में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद हैं. पीड़ित महिला ने महेश शर्मा से बात करते हुए बताया- मैं माली से बात कर रही थी. वो गाली देने लगे. उसे जेल जाना चाहिए, जो भी अतिक्रमण है उसे तुड़वाया जाना चाहिए. सोसायटी की सचिव यहां रहने लायक नहीं हैं. इनके चचेरे भाई अथॉरिटी में हैं, शायद इसलिए कार्रवाई नहीं हुई. इस अतिक्रमण को लेकर पहले भी शिकायत की गई थी. मैंने इस काम को चौबीस घंटाटे के लिए रुकवाया था. सांसद महेश शर्मा ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लिया है. मैंने पुलिसकर्मियों से कहा है उसे अड़तालीस घंटाटे में गिरफ्तार किया जाए. पुलिस कोर्ट से वारंट लेने गई है. ये जांच का विषय है कि श्रीकांत त्यागी कौन है. मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में इसे आजतक किसी कार्यक्रम में नहीं देखा है. यहां मौजूद महिलाओं ने बताया कि जिस वक्त ये विवाद हुआ उस समय कई महिलाएं वहां मौजूद थीं. उनका कहना कि जिस भाषा का प्रयोग हुआ वो सुनकर सभी स्तब्ध रह गई. पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की गाड़ियों को जब्त कर लिया है. त्यागी की कुल चार गाड़ियों को जब्त किया गया है. इसमें से एक गाड़ी फॉर्च्यूनर है जो लखनऊ के नंबर पर रजिस्टर्ड है. आजतक की टीम उस पते पर पहुंची जिस पर फॉर्च्यूनर को खरीदा गया था. यहां जाकर पता चला कि ये अपार्टमेंट अंकिता द्विवेदी का है. वहीं लखनऊ आरटीओ दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक ये फ्लैट अभिनव वोरा का है. इस सबके बीच भाजपा का कहना है कि श्रीकांत त्यागी का पार्टी से कोई संबंध नहीं है. पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा - श्रीकांत त्यागी का बीजेपी से कोई लेना देना नहीं है. वहीं पार्टी के किसान मोर्चा के अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने भी कहा कि श्रीकांत त्यागी नाम का व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य नहीं है. किसान मोर्चा की कोई युवा समिति भी नहीं है. सरकार उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करे जिसने महिला के साथ अभद्रता की है. वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिया है. आयोग ने पुलिस से इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तेजी से जांच करने के लिए कहा है.
नई दिल्ली। एक अप्रैल 2019 से कम दर पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करने का विकल्प चुनने वाली जो रियल एस्टेट कंपनियां कुल आपूर्ति का 80 प्रतिशत पंजीकृत डीलरों से नहीं खरीद पायी हैं, उनके पास खरीद में रह गयी कमी पर जीएसटी भरने के लिये 30 जून तक का समय है। जीएसटी परिषद ने एक अप्रैल 2019 से उन रियल एस्टेट कंपनियों को आवासीय इकाइयों के लिये पांच प्रतिशत और किफायती आवास के लिये एक प्रतिशत की दर से जीएसटी भरने का विकल्प दिया था, जो इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ नहीं लेना चाहती हैं। हालांकि, यह विकल्प चुनने वाली कंपनियों को पंजीकृत डीलरों से कम से कम 80 प्रतिशत इनपुट खरीदना अनिवार्य किया गया था। नियम के मुताबिक इस खरीद में जो भी कमी रह जायेगी, उसके ऊपर जीएसटी भरना होगा। इसके लिये रियल एस्टेट डेवलपर्स द्वारा इनपुट या इनपुट सेवाओं के रूप में उपयोग की जाने वाली आपूर्ति पर 18 प्रतिशत और सीमेंट के लिये 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी भुगतान करना होगा। राजस्व विभाग ने 24 जून को केंद्रीय कर के प्रधान मुख्य आयुक्तों को दिये निर्देश में कहा, कि 80 प्रतिशत की सीमा से कम खरीद होने की स्थिति में, प्रवर्तक या डेवलपर को इनपुट के मूल्य पर कर का भुगतान करना पड़ेगा। इस तरह की कमी वाले इनपुट सेवाओं और इस कर का भुगतान एक निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से वित्त वर्ष के बाद तिमाही के अंत तक आम पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जायेगा। इस तरह वित्त वर्ष 2019-20 के लिये इस तरह की कमी पर कर का भुगतान 30 जून 2020 तक किया जाना है। एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि एक और पांच प्रतिशत के निचले कर दायरे में आने वाले रियल एस्टेट डेवलपर्स पर कर देनदारियों का काफी दबाव है। उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग किये बिना 30 जून तक नकद में इसका भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र अभी इस देनदारी की समयसीमा में विस्तार की उम्मीद कर रहा है, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण उसके आय के स्रोत पहले ही बाधित चल रहे हैं।
नई दिल्ली। एक अप्रैल दो हज़ार उन्नीस से कम दर पर माल एवं सेवा कर का भुगतान करने का विकल्प चुनने वाली जो रियल एस्टेट कंपनियां कुल आपूर्ति का अस्सी प्रतिशत पंजीकृत डीलरों से नहीं खरीद पायी हैं, उनके पास खरीद में रह गयी कमी पर जीएसटी भरने के लिये तीस जून तक का समय है। जीएसटी परिषद ने एक अप्रैल दो हज़ार उन्नीस से उन रियल एस्टेट कंपनियों को आवासीय इकाइयों के लिये पांच प्रतिशत और किफायती आवास के लिये एक प्रतिशत की दर से जीएसटी भरने का विकल्प दिया था, जो इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं लेना चाहती हैं। हालांकि, यह विकल्प चुनने वाली कंपनियों को पंजीकृत डीलरों से कम से कम अस्सी प्रतिशत इनपुट खरीदना अनिवार्य किया गया था। नियम के मुताबिक इस खरीद में जो भी कमी रह जायेगी, उसके ऊपर जीएसटी भरना होगा। इसके लिये रियल एस्टेट डेवलपर्स द्वारा इनपुट या इनपुट सेवाओं के रूप में उपयोग की जाने वाली आपूर्ति पर अट्ठारह प्रतिशत और सीमेंट के लिये अट्ठाईस प्रतिशत की दर से जीएसटी भुगतान करना होगा। राजस्व विभाग ने चौबीस जून को केंद्रीय कर के प्रधान मुख्य आयुक्तों को दिये निर्देश में कहा, कि अस्सी प्रतिशत की सीमा से कम खरीद होने की स्थिति में, प्रवर्तक या डेवलपर को इनपुट के मूल्य पर कर का भुगतान करना पड़ेगा। इस तरह की कमी वाले इनपुट सेवाओं और इस कर का भुगतान एक निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से वित्त वर्ष के बाद तिमाही के अंत तक आम पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जायेगा। इस तरह वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के लिये इस तरह की कमी पर कर का भुगतान तीस जून दो हज़ार बीस तक किया जाना है। एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि एक और पांच प्रतिशत के निचले कर दायरे में आने वाले रियल एस्टेट डेवलपर्स पर कर देनदारियों का काफी दबाव है। उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग किये बिना तीस जून तक नकद में इसका भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र अभी इस देनदारी की समयसीमा में विस्तार की उम्मीद कर रहा है, क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण उसके आय के स्रोत पहले ही बाधित चल रहे हैं।
समस्तीपुर, बिहार ( मिथिला हिन्दी न्यूज कार्यालय ) । समस्तीपुर जिले के पटोरी अनुमण्डल क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व के दुसरे दिन भी छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया । जिस में प्रशासन की ओर से जगह जगह पर ट्रैफिक व्यवस्था व सुरक्षा व्यवस्था किया गया था । बता दें कि अनुमंडल क्षेत्र के धमौन, बघरा, रसलपुर, सरारी घाट, पत्थर घाट जैसे गंगा नदी पर दर्जनों घाट पर पटोरी अनुमंडल एसडीओ मोहम्मद शफीक पटोरी अनुमंडल एसडीपीओ विजय कुमार मोहनपुर प्रखंड पूर्व प्रमुख कमल कांत राय, पूर्व मुखिया अरविंद कुमार उर्फ डोमन राय इत्यादि लोगों ने घाटों का भ्रमण किया साथ ही साथ छठ व्रतियों को चेतावनी दिया गया था कि गंगा नदी में खतरे के चिंह के अंदर ही पानी में खड़ा होए । साथ ही साथ प्रशासन ने छोटे-छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान रखने का अपील किया।
समस्तीपुर, बिहार । समस्तीपुर जिले के पटोरी अनुमण्डल क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व के दुसरे दिन भी छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया । जिस में प्रशासन की ओर से जगह जगह पर ट्रैफिक व्यवस्था व सुरक्षा व्यवस्था किया गया था । बता दें कि अनुमंडल क्षेत्र के धमौन, बघरा, रसलपुर, सरारी घाट, पत्थर घाट जैसे गंगा नदी पर दर्जनों घाट पर पटोरी अनुमंडल एसडीओ मोहम्मद शफीक पटोरी अनुमंडल एसडीपीओ विजय कुमार मोहनपुर प्रखंड पूर्व प्रमुख कमल कांत राय, पूर्व मुखिया अरविंद कुमार उर्फ डोमन राय इत्यादि लोगों ने घाटों का भ्रमण किया साथ ही साथ छठ व्रतियों को चेतावनी दिया गया था कि गंगा नदी में खतरे के चिंह के अंदर ही पानी में खड़ा होए । साथ ही साथ प्रशासन ने छोटे-छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान रखने का अपील किया।
- कल तक अधिकारी बोलते रहे रेलवे के रिकॉर्ड मे भिटौनी रेलवे लाइन से निकाला गया लोहा पूरा, फिर आरोपी के पास बरामद हुआ लोहा कहां का! ! ! जबलपुर। आरपीएफ ने लोहा चोरी करने वाले ठेकेदार सोमू श्रीवास्तव और चोरी का लोहा ढ़ोने वाले वाहन एवं वाहन चालक पीर मोहम्मद को गिरफ्तार तो कर लिया गया है लेकिन जो माल जब्त किया है वह माल चोरी की मात्रा में बहुत कम है। सूत्र बताते हंै की जो लोहा चोरी हुआ है उसमे लोहा की मात्रा 13 टन थी। लेकिन अभी तक आरपीएफ ने मात्र कुछ टन लोहा ही जब्त किया है। लोहा चोरी के आर पी एफ थाने मे 15-20 मामले अज्ञात मे दर्ज है जिसमें भी लोहा चोरी ठेकादर सोमू श्रीवास्तव ने करवाई है। लेकिन अभी तक मामलो मे कार्यवाही नही की। आरपीएफ चाहे तो सोमू श्रीवास्तव को रिमांड मे लेकर राज उगलवा सकती है । ठेकादर सोमू श्रीवास्तव को जब आरपीएफ ने गिरफ्तर किया तब वह अपनी करनी पर पछता रहा था और बार बार कह रहा था की रेल्वे के साउथ ऑफिस के एक बड़े अधिकारी का इस लोहा चोरी मे बड़ा हाथ है। लेकिन रेल्वे के एक बड़े अधिकारी द्वारा रेल्वे साउथ ऑफिस के अधिकारी को यह अश्वासन दिया था की चिंता मत करो मे सबको बचा लूंगा। रेल्वे साउथ ऑफिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की इस लोहा चोरी कांड मे अहम भूमिका है, जिसके आदेश मे लोहा चोरी किया गया एवं जब उसको पता चला की लोहा चोरी होने की जानकारी आरपीएफ एवं वरिष्ठ अधिकारी तक लग गई है तब उस अधिकारी ने चोरी की हुई जगह पर अपने स्टॉक मे पड़ा लोहे को भिटोनी रेल्वे लाईन के पास डलवा कर अपने विभाग को एक रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें रेल लाईन से निकला लोहा स्क्रैप के तौर पर उक्त स्थान पर दर्शाया गया। एक उसी अधिकारी ने अपने अधिनस्त कर्मचरियों के लिखित बयान कराये गए एवं इतना भय पैदा कर दिया ताकि वह लोग पलटे न। आरपीएफ की कार्यवाही पर भी प्रश्नचिन्ह! लोहा चोरी के पूरे कांड मे ठेकेदार सोमू श्रीवास्तव के साथ आरपीएफ का एसआई भी शामिल है, लेकिन अभी सिर्फ सोमू श्रीवास्तव ही पेश हुआ है। सूत्र बताते है की जिस गैस कटर से लोहे की पाते काटी गई उसका मालिक, जिसकी मशीन थी एवं उसको काटने वाले कर्मचारी जिसने लोहे को गाड़ी में लोड किया, वह कर्मचारी के साथ-साथ बाकी का लोहा किस कबाड़ी को बेचा तथा वह लोहा कहां गया इन सबकी जांच बारीकी से करनी होगी। सोमू श्रीवास्तव 20-25 बार लोहा चोरी के मामले मे पकड़ चुका है लेकिन आरपीएफ थाने के अंदर ही मामला रफा-दफा कर दिया जाता था, वह भी बिना मामला दर्ज किये । वहीं सोमू आरपीएफ के कॉमण्डेंट से तगड़ी सेटिंग का हवाला देकर लोहा चोरी की घटना को अंजाम देता था।
- कल तक अधिकारी बोलते रहे रेलवे के रिकॉर्ड मे भिटौनी रेलवे लाइन से निकाला गया लोहा पूरा, फिर आरोपी के पास बरामद हुआ लोहा कहां का! ! ! जबलपुर। आरपीएफ ने लोहा चोरी करने वाले ठेकेदार सोमू श्रीवास्तव और चोरी का लोहा ढ़ोने वाले वाहन एवं वाहन चालक पीर मोहम्मद को गिरफ्तार तो कर लिया गया है लेकिन जो माल जब्त किया है वह माल चोरी की मात्रा में बहुत कम है। सूत्र बताते हंै की जो लोहा चोरी हुआ है उसमे लोहा की मात्रा तेरह टन थी। लेकिन अभी तक आरपीएफ ने मात्र कुछ टन लोहा ही जब्त किया है। लोहा चोरी के आर पी एफ थाने मे पंद्रह-बीस मामले अज्ञात मे दर्ज है जिसमें भी लोहा चोरी ठेकादर सोमू श्रीवास्तव ने करवाई है। लेकिन अभी तक मामलो मे कार्यवाही नही की। आरपीएफ चाहे तो सोमू श्रीवास्तव को रिमांड मे लेकर राज उगलवा सकती है । ठेकादर सोमू श्रीवास्तव को जब आरपीएफ ने गिरफ्तर किया तब वह अपनी करनी पर पछता रहा था और बार बार कह रहा था की रेल्वे के साउथ ऑफिस के एक बड़े अधिकारी का इस लोहा चोरी मे बड़ा हाथ है। लेकिन रेल्वे के एक बड़े अधिकारी द्वारा रेल्वे साउथ ऑफिस के अधिकारी को यह अश्वासन दिया था की चिंता मत करो मे सबको बचा लूंगा। रेल्वे साउथ ऑफिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की इस लोहा चोरी कांड मे अहम भूमिका है, जिसके आदेश मे लोहा चोरी किया गया एवं जब उसको पता चला की लोहा चोरी होने की जानकारी आरपीएफ एवं वरिष्ठ अधिकारी तक लग गई है तब उस अधिकारी ने चोरी की हुई जगह पर अपने स्टॉक मे पड़ा लोहे को भिटोनी रेल्वे लाईन के पास डलवा कर अपने विभाग को एक रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें रेल लाईन से निकला लोहा स्क्रैप के तौर पर उक्त स्थान पर दर्शाया गया। एक उसी अधिकारी ने अपने अधिनस्त कर्मचरियों के लिखित बयान कराये गए एवं इतना भय पैदा कर दिया ताकि वह लोग पलटे न। आरपीएफ की कार्यवाही पर भी प्रश्नचिन्ह! लोहा चोरी के पूरे कांड मे ठेकेदार सोमू श्रीवास्तव के साथ आरपीएफ का एसआई भी शामिल है, लेकिन अभी सिर्फ सोमू श्रीवास्तव ही पेश हुआ है। सूत्र बताते है की जिस गैस कटर से लोहे की पाते काटी गई उसका मालिक, जिसकी मशीन थी एवं उसको काटने वाले कर्मचारी जिसने लोहे को गाड़ी में लोड किया, वह कर्मचारी के साथ-साथ बाकी का लोहा किस कबाड़ी को बेचा तथा वह लोहा कहां गया इन सबकी जांच बारीकी से करनी होगी। सोमू श्रीवास्तव बीस-पच्चीस बार लोहा चोरी के मामले मे पकड़ चुका है लेकिन आरपीएफ थाने के अंदर ही मामला रफा-दफा कर दिया जाता था, वह भी बिना मामला दर्ज किये । वहीं सोमू आरपीएफ के कॉमण्डेंट से तगड़ी सेटिंग का हवाला देकर लोहा चोरी की घटना को अंजाम देता था।
कोलकाता। एवरेडी इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड (ईआईआईएल) ने कंपनी में दो संयुक्त मुख्य वित्तीय अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये नियुक्तियां एवरेडी इंडस्ट्रीज की मूल कंपनी विलियमसन मेगोर समूह द्वारा रणनीतिक भागीदार की तलाश किये जाने की चर्चा के बीच की गईं हैं। एवरेडी इंडस्ट्रीज ने हालांकि इन नियुक्तियों को कंपनी में संभावति किसी भी तरह के पुनर्गठन कार्यों से जोड़े जाने से इनकार किया है। उसने कहा कि ये नियुक्तियां कर्मचारियों को उनके करियर में आगे बढ़ाने के तहत उठाया गया कदम है। एवरेडी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने इंद्रनील रॉय चौधरी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष- वित्त, और बिभू रंजन शाह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष - लेखा और बैंकिंग को संयुक्त मुख्य वित्त अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया है। सुवमाय शाह कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक बने रहेंगे। वह लंबे समय तक कंपनी के मुख्य वितत अधिकारी रहे हैं। कंपनी ने इससे पहले कहा था कि वह हिस्सेदारी बिक्री के जरिये कंपनी में तीन से चार हजार करोड़ रुपये प्रापत करना चाहती है। इसके लिये रणनीतिक भागीदार को भी शामिल किया जा सकता है। बी एम खैतान के नेतृत्व वाले विलियमसन मेगॉर समूह ने एवरेडी इंडस्ट्रीज में रणनीति भागीदार की तलाश के लिये कोटक महिन्द्रा बैंक को नियुक्त किया है। समूह ने हालांकि कहा है कि उसका एवरेडी इंडस्ट्रीज से पूरी तरह बाहर होने का कोई इरादा नहीं है। पिछले वित्त वर्ष में एवरेडी इंडस्ट्रीज का कुल कारोबार 1,450 करोड़ रुपये रहा और चालू वित्त वर्ष में उसका कारोबार 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। कंपनी की 27 मई को निदेशक मंडल की बैठक है।
कोलकाता। एवरेडी इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड ने कंपनी में दो संयुक्त मुख्य वित्तीय अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये नियुक्तियां एवरेडी इंडस्ट्रीज की मूल कंपनी विलियमसन मेगोर समूह द्वारा रणनीतिक भागीदार की तलाश किये जाने की चर्चा के बीच की गईं हैं। एवरेडी इंडस्ट्रीज ने हालांकि इन नियुक्तियों को कंपनी में संभावति किसी भी तरह के पुनर्गठन कार्यों से जोड़े जाने से इनकार किया है। उसने कहा कि ये नियुक्तियां कर्मचारियों को उनके करियर में आगे बढ़ाने के तहत उठाया गया कदम है। एवरेडी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने इंद्रनील रॉय चौधरी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष- वित्त, और बिभू रंजन शाह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष - लेखा और बैंकिंग को संयुक्त मुख्य वित्त अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया है। सुवमाय शाह कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक बने रहेंगे। वह लंबे समय तक कंपनी के मुख्य वितत अधिकारी रहे हैं। कंपनी ने इससे पहले कहा था कि वह हिस्सेदारी बिक्री के जरिये कंपनी में तीन से चार हजार करोड़ रुपये प्रापत करना चाहती है। इसके लिये रणनीतिक भागीदार को भी शामिल किया जा सकता है। बी एम खैतान के नेतृत्व वाले विलियमसन मेगॉर समूह ने एवरेडी इंडस्ट्रीज में रणनीति भागीदार की तलाश के लिये कोटक महिन्द्रा बैंक को नियुक्त किया है। समूह ने हालांकि कहा है कि उसका एवरेडी इंडस्ट्रीज से पूरी तरह बाहर होने का कोई इरादा नहीं है। पिछले वित्त वर्ष में एवरेडी इंडस्ट्रीज का कुल कारोबार एक,चार सौ पचास करोड़ रुपये रहा और चालू वित्त वर्ष में उसका कारोबार एक,छः सौ करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। कंपनी की सत्ताईस मई को निदेशक मंडल की बैठक है।
देश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटना का शिकार होना एक आम बात हो गई है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि गाड़ी चलाने वाले अधिकतर लोग अपना मौलिक कर्तव्य भूल जाते हैं। उन्हें यह नहीं पता की सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी संविधान में दर्ज मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। हमारे देश के कानून-व्यवस्था काफी कमजोर है, जिसके चलते जनता अपना संविधान भूल जाती है। यही वजह है कि आए दिन धनाढ्य लोग सड़कों पर मामूली बातों के लिए जान लेने या देने की हद तक जाकर लड़ाई कर लेते हैं। सरकार से आग्रह है कि ऐसी घटना से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
देश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटना का शिकार होना एक आम बात हो गई है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि गाड़ी चलाने वाले अधिकतर लोग अपना मौलिक कर्तव्य भूल जाते हैं। उन्हें यह नहीं पता की सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी संविधान में दर्ज मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। हमारे देश के कानून-व्यवस्था काफी कमजोर है, जिसके चलते जनता अपना संविधान भूल जाती है। यही वजह है कि आए दिन धनाढ्य लोग सड़कों पर मामूली बातों के लिए जान लेने या देने की हद तक जाकर लड़ाई कर लेते हैं। सरकार से आग्रह है कि ऐसी घटना से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
Dhanbad : धनबाद ( Dhanbad) नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी से 13 जून से लगातार ईडी की पूछताछ से गुस्साये कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. धनबाद में 16 जून गुरुवार को युवा कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष कुमार गौरव के नेतृत्व में के रणधीर वर्मा चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया. युवा सदस्यों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. पुतला दहन में दर्जनों की संख्या में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद थे. युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष कुमार गौरव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तानाशाह है. यह सरकार द्वेष की भावना से राहुल गांधी को ईडी के जरिये प्रताड़ित करा रही है. इसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस सरकार में ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स तोते की तरह काम कर रहे हैं. इतनी गंदी राजनीति कभी कांग्रेस की सरकार में नही हुई. उन्होंने कहा कि अगर जल्द भाजपा अपनी गंदी राजनीति बंद नहीं करेगी तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी.
Dhanbad : धनबाद नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी से तेरह जून से लगातार ईडी की पूछताछ से गुस्साये कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. धनबाद में सोलह जून गुरुवार को युवा कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष कुमार गौरव के नेतृत्व में के रणधीर वर्मा चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया. युवा सदस्यों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. पुतला दहन में दर्जनों की संख्या में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद थे. युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष कुमार गौरव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तानाशाह है. यह सरकार द्वेष की भावना से राहुल गांधी को ईडी के जरिये प्रताड़ित करा रही है. इसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस सरकार में ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स तोते की तरह काम कर रहे हैं. इतनी गंदी राजनीति कभी कांग्रेस की सरकार में नही हुई. उन्होंने कहा कि अगर जल्द भाजपा अपनी गंदी राजनीति बंद नहीं करेगी तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी.
होंठ मुस्कान को ही नहीं बल्कि व्यक्तित्व को भी निखारते हैं। इसलिए अपने चेहरे के साथ-साथ होठों का ख्याल भी रखना चाहिए। दरअसल, होंठ शरीर का एक संवेदनशील हिस्सा है जिसे बहुत देखभाल की जरुरत पड़ती है। अक्सर महिलाएं होंठो के फटने, सूखने और दरारे पड़ने की वजह से परेशान रहती हैं। लीजिए हम आपके लिए लेकर आए है ऐसे कुछ प्राकृतिक उपचार जिसके प्रयोग से आप अपने होठों की सुंदरता बनाए रख सकती हैं। जैतून के तेल- जैसे त्वचा से डेथ स्किन हटती है उसी तरह होठों से भी डेथ स्किन निकलती है। जो होठों को रुखा, बेजान कर देती है। होठों से निकली इस बेजान त्वचा के कारण होंठ अपनी प्राकृतिक सुंदरता खो देते हैं। लेकिन आप इसे दोबारा पा सकती हैं। जी हां, अगर आप एक चम्मच जैतून के तेल के साथ एक चम्मच ब्राउन शुगर मिलाकर अपने होठों पर लगाएं तो होठों की इन समस्याओं से निजात पा सकती हैं। दालचीनी- दालचीनी में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं। दालचीनी का उपयोग कर आप अपने होठों की खोई लाली और बेजान परत को ठीक कर सकती हैं। आप बस दालचीनी के पाउडर को अपनी पसंद के किसी भी तेल जैसे बादाम, नारियल के साथ मिला कर एक शीशी में रख लें और उसे रोज नियमित रूप से रात में सोने से पहले होंठो पर मसाज करें। कुछ दिन बाद आप पाएंगी की आपके होंठ पहले से अच्छे हो गए हैं। नारियल का तेल- नारियल का तेल एक प्राकृतिक तेल है। नारियल का तेल बहुत सारे गुणों से भरपूर होता है। इसके इस्तेमाल से होंठ सूखते नहीं। अगर आप नारियल के तेल की कुछ बूंदे रोजाना लगाए तो आप होंठो की होने वाली समस्या से निजात पा सकती हैं।
होंठ मुस्कान को ही नहीं बल्कि व्यक्तित्व को भी निखारते हैं। इसलिए अपने चेहरे के साथ-साथ होठों का ख्याल भी रखना चाहिए। दरअसल, होंठ शरीर का एक संवेदनशील हिस्सा है जिसे बहुत देखभाल की जरुरत पड़ती है। अक्सर महिलाएं होंठो के फटने, सूखने और दरारे पड़ने की वजह से परेशान रहती हैं। लीजिए हम आपके लिए लेकर आए है ऐसे कुछ प्राकृतिक उपचार जिसके प्रयोग से आप अपने होठों की सुंदरता बनाए रख सकती हैं। जैतून के तेल- जैसे त्वचा से डेथ स्किन हटती है उसी तरह होठों से भी डेथ स्किन निकलती है। जो होठों को रुखा, बेजान कर देती है। होठों से निकली इस बेजान त्वचा के कारण होंठ अपनी प्राकृतिक सुंदरता खो देते हैं। लेकिन आप इसे दोबारा पा सकती हैं। जी हां, अगर आप एक चम्मच जैतून के तेल के साथ एक चम्मच ब्राउन शुगर मिलाकर अपने होठों पर लगाएं तो होठों की इन समस्याओं से निजात पा सकती हैं। दालचीनी- दालचीनी में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं। दालचीनी का उपयोग कर आप अपने होठों की खोई लाली और बेजान परत को ठीक कर सकती हैं। आप बस दालचीनी के पाउडर को अपनी पसंद के किसी भी तेल जैसे बादाम, नारियल के साथ मिला कर एक शीशी में रख लें और उसे रोज नियमित रूप से रात में सोने से पहले होंठो पर मसाज करें। कुछ दिन बाद आप पाएंगी की आपके होंठ पहले से अच्छे हो गए हैं। नारियल का तेल- नारियल का तेल एक प्राकृतिक तेल है। नारियल का तेल बहुत सारे गुणों से भरपूर होता है। इसके इस्तेमाल से होंठ सूखते नहीं। अगर आप नारियल के तेल की कुछ बूंदे रोजाना लगाए तो आप होंठो की होने वाली समस्या से निजात पा सकती हैं।
DEHRADUN : दून के टैलेंट ने हर फिल्ड में अपना लोहा मनवाया है। इस बार शहर के दो अगल-अलग संस्थानों के स्टूडेंट ने सोलर सिस्टम और विंड एनर्जी से चलित व्हीकल के रूप में डिफरेंट मॉडल तैयार किए हैं। सहस्त्रधारा रोड स्थित ब्ल्यू माउंटेन ग्रुप ऑफ इंजीनियर कॉलेजज के ब् स्टूडेंट ने न्यूमैट्रिक इलेक्ट्रिकल सोलर व्हीकल तैयार किया है। जो सोलर सिस्टम से चलने के साथ ही अल्टरनेट फैन के रूप में विंड एनर्जी से भी चलता है। सोलर सिस्टम के लिए इसमें क्ख् वोल्ट का एक पैनल लगा है। जिसमें 7 एंपियर की बैटरी भी है। जो ब् से भ् घंटे का बैकअप देती है। वहीं दूसरी ओर विंड एनर्जी इलेक्ट्रिक एनर्जी में परिवर्तित होकर भी इस मॉडल का संचालन करती है। दिखने में यह बच्चों की कार नुमा है। जो आसानी से ख्भ् से फ्0 केजी वेट उठा लेती है। मैकेनिकल ऑटोमोबाइल लास्ट इयर के स्टूडेंट कमलेश जोशी ने बताया कि उनके साथ सागर फरासी, कमलकिशोर व शिवेन्द्र नेगी ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया है। करीब भ् से म् हजार रुपए के खर्चे में उन्होंने ख् महीने के समय में इसे तैयार किया है। आशीष ने बताया कि यह पर्यावरण संरक्षण और फ्यूल की बचत करने में कारगार साबित होगी। भविष्य में वह इसके कॉमर्शियल यूज के लिए तैयार करेंगे। इसके लिए वह स्पीड और अन्य डिजाइन पर इसका प्रयोग करेंगे। वहीं दूसरी ओर देव भूमि ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट के बीटेक मैकेनिकल के स्टूडेंट ने एक सौर ऊर्जा चलित गोल्फ कार्ट, ऑल टेरेन व्हीकल ऑफ रोड बाइक तैयार किया है। जो डीसी मोटर प्रणाली पर काम करता है। इस डिजाइन को आशुतोष जोशी, हर्ष प्रकाश, संजय बिष्ट, सर्वेश्वर, देवेश जोशी, आनंद विजय झा और विश्वदीप ने तैयार किया है। आशुतोष ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से इको फ्रेंडली है जो पूरी तरह से पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद करेगी। संस्थान के चेयरनमैन संजय बंसल ने बताया कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को ब्8 स्टूडेंट ने मिलकर करीब ब् महीने में तैयार किया है। उन्होंने इसका श्रेय मैकेनिकल विभाग के सभी स्टूडेंट और टीचर्स को दिया है। बतौर दिशा निर्देश प्रोजेक्ट में डा। चंद्र किशोर, सैफुल्ला जफर, जीतेन्द्र शर्मा, अनुज रतूड़ी ने दिया है।
DEHRADUN : दून के टैलेंट ने हर फिल्ड में अपना लोहा मनवाया है। इस बार शहर के दो अगल-अलग संस्थानों के स्टूडेंट ने सोलर सिस्टम और विंड एनर्जी से चलित व्हीकल के रूप में डिफरेंट मॉडल तैयार किए हैं। सहस्त्रधारा रोड स्थित ब्ल्यू माउंटेन ग्रुप ऑफ इंजीनियर कॉलेजज के ब् स्टूडेंट ने न्यूमैट्रिक इलेक्ट्रिकल सोलर व्हीकल तैयार किया है। जो सोलर सिस्टम से चलने के साथ ही अल्टरनेट फैन के रूप में विंड एनर्जी से भी चलता है। सोलर सिस्टम के लिए इसमें क्ख् वोल्ट का एक पैनल लगा है। जिसमें सात एंपियर की बैटरी भी है। जो ब् से भ् घंटे का बैकअप देती है। वहीं दूसरी ओर विंड एनर्जी इलेक्ट्रिक एनर्जी में परिवर्तित होकर भी इस मॉडल का संचालन करती है। दिखने में यह बच्चों की कार नुमा है। जो आसानी से ख्भ् से फ्शून्य केजी वेट उठा लेती है। मैकेनिकल ऑटोमोबाइल लास्ट इयर के स्टूडेंट कमलेश जोशी ने बताया कि उनके साथ सागर फरासी, कमलकिशोर व शिवेन्द्र नेगी ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया है। करीब भ् से म् हजार रुपए के खर्चे में उन्होंने ख् महीने के समय में इसे तैयार किया है। आशीष ने बताया कि यह पर्यावरण संरक्षण और फ्यूल की बचत करने में कारगार साबित होगी। भविष्य में वह इसके कॉमर्शियल यूज के लिए तैयार करेंगे। इसके लिए वह स्पीड और अन्य डिजाइन पर इसका प्रयोग करेंगे। वहीं दूसरी ओर देव भूमि ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट के बीटेक मैकेनिकल के स्टूडेंट ने एक सौर ऊर्जा चलित गोल्फ कार्ट, ऑल टेरेन व्हीकल ऑफ रोड बाइक तैयार किया है। जो डीसी मोटर प्रणाली पर काम करता है। इस डिजाइन को आशुतोष जोशी, हर्ष प्रकाश, संजय बिष्ट, सर्वेश्वर, देवेश जोशी, आनंद विजय झा और विश्वदीप ने तैयार किया है। आशुतोष ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से इको फ्रेंडली है जो पूरी तरह से पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद करेगी। संस्थान के चेयरनमैन संजय बंसल ने बताया कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को ब्आठ स्टूडेंट ने मिलकर करीब ब् महीने में तैयार किया है। उन्होंने इसका श्रेय मैकेनिकल विभाग के सभी स्टूडेंट और टीचर्स को दिया है। बतौर दिशा निर्देश प्रोजेक्ट में डा। चंद्र किशोर, सैफुल्ला जफर, जीतेन्द्र शर्मा, अनुज रतूड़ी ने दिया है।
राजधानी रायपुर में एक लॉ छात्र को हनीट्रैप में फंसाकर डेढ़ लाख रूपए की वसूली करने वाली युवती को डीडी नगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लॉ स्टूडेंट अजय कुमार चौरे ने इस संबंध में रिपोर्ट कराई थी। आरोपी युवती ने अजय के अश्लील वीडियो और फोटोज भी बना लिए थे, मामले में बताया जा रहा है कि अजय पहले से शादीशुदा है। आरोपी युवती अजय पर शादी का दबाव बना रही थी। पुलिस ने युवती को गिरफ्तार करने के बाद मामले में आगे जांच शुरू कर दी है।
राजधानी रायपुर में एक लॉ छात्र को हनीट्रैप में फंसाकर डेढ़ लाख रूपए की वसूली करने वाली युवती को डीडी नगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लॉ स्टूडेंट अजय कुमार चौरे ने इस संबंध में रिपोर्ट कराई थी। आरोपी युवती ने अजय के अश्लील वीडियो और फोटोज भी बना लिए थे, मामले में बताया जा रहा है कि अजय पहले से शादीशुदा है। आरोपी युवती अजय पर शादी का दबाव बना रही थी। पुलिस ने युवती को गिरफ्तार करने के बाद मामले में आगे जांच शुरू कर दी है।
Siphene -M Tablet डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई टैबलेट में मिलती है। यह दवाई खासतौर से महिला बांझपन के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा, Siphene -M Tablet के कुछ अन्य प्रयोग भी हैं, जिनके बारें में आगे बताया गया है। आयु, लिंग और रोगी की पिछली स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार Siphene -M Tablet की खुराक दी जाती है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। इन दुष्परिणामों के अलावा Siphene -M Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Siphene -M Tablet के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भवती महिलाओं पर Siphene -M Tablet का प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर इस दवा का प्रभाव अज्ञात है। इसके अतिरिक्त Siphene -M Tablet का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Siphene -M Tablet से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। इनके आलावा कुछ अन्य समस्याएं भी हैं जिनमें Siphene -M Tablet लेने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बारे में जानकरी के लिए आगे पढ़ें। इन उपरोक्त परिस्थितियों के अलावा Siphene -M Tablet कुछ अन्य दवाओं के साथ लिए जाने पर गंभीर प्रतिक्रिया कर सकती है। इन प्रतिक्रियाओं की विस्तृत सूची नीचे दी गई है। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Siphene -M Tablet लेना सुरक्षित है और इसकी लत लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Siphene -M Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Siphene -M Tablet की खुराक अलग हो सकती है। क्या Siphene -M Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? प्रेेग्नेंट महिलाओं के शरीर में Siphene के विपरीत प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए इसको लेने से पहले दवा के बारे में डॉक्टर से पूरी तरह जानकारी लेना जरूरी होता है। क्या Siphene -M Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? कुछ समय से स्तनपान कराने वाली महिला को Siphene से किस तरह के प्रभाव होंगे, इस विषय पर किसी भी विशेषज्ञ का कोई मत नहीं हैं। इसलिए डॉक्टर से परार्मश के बाद ही इसका सेवन करें। Siphene -M Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Siphene किडनी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है। Siphene -M Tablet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Siphene का सेवन आप बिना डॉक्टर कि सलाह के भी कर सकते हैं और ये दवा आपके लीवर की सेहत को हानि नहीं पहुंचाएगी। क्या ह्रदय पर Siphene -M Tablet का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर कुछ ही मामलों में Siphene का विपरित प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह प्रभाव बहुत कम होता है, जिससे कोई परेशानी नहीं होती है। क्या Siphene -M Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Siphene -M Tablet को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Siphene -M Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? हां, आप Siphene -M Tablet को लेने के बाद वाहन चलाने या उद्योग में मशीन के पास भी काम कर सकते हैं। क्या Siphene -M Tablet को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Siphene -M Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, मस्तिष्क विकार में Siphene -M Tablet का उपयोग कारगर नहीं है। क्या Siphene -M Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? शोध कार्यों न हो पाने के कारण इस बारे में कहना मुश्किल है कि Siphene -M Tablet और खाने को साथ में लेने से क्या असर होगा। जब Siphene -M Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Siphene -M Tablet का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Clomid® (clomiphene citrate)
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पॉलिसी कहा गया। में कोर्ट मार्शल होने का आदेश जारी कर दिया गया है। पढ़िए वो गाना जिसकी वजह से मार्क हॉल का कोर्ट मार्शल होगा। अमेरिका के युद्ध विरोधियों का कहना है कि ये गुस्से की अभिव्यक्ति है। होगा : फिर तुम फिर किसी का स्टॉप लॉस नहीं करोगे। है। लेकिन अमेरिकी लोकतंत्र इस गाने को सहन नहीं कर पा रहा है।
पॉलिसी कहा गया। में कोर्ट मार्शल होने का आदेश जारी कर दिया गया है। पढ़िए वो गाना जिसकी वजह से मार्क हॉल का कोर्ट मार्शल होगा। अमेरिका के युद्ध विरोधियों का कहना है कि ये गुस्से की अभिव्यक्ति है। होगा : फिर तुम फिर किसी का स्टॉप लॉस नहीं करोगे। है। लेकिन अमेरिकी लोकतंत्र इस गाने को सहन नहीं कर पा रहा है।
जालोर जिले के नारणावास वन क्षेत्र में जलस्रोत सूखने से वन्यजीवों का जीवन संकट में है। 1132. 05 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र में वन विभाग की ओर से एक भी जलस्रोत नहीं बनवाया गया है। ऐसे में भीषण गर्मी के मौसम में वन्यजीव पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी रूप सिंह राठौड़ और नारणावास सरपंच जशोदा कंवर ने बताया कि पानी के अभाव में वन्यजीवों का जीवन संकट में है। पानी की तलाश में वन्यजीवों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। फिर भी उनको पानी नसीब नहीं हो रहा है। राजस्थान में जहां एक तरफ गर्मी अपना सितम ढा रही है। वहीं जंगली जानवर एवं पशु-पक्षी पानी के लिए तरस रहे हैं। गर्मी में पानी नहीं मिलने से अपनी जान तक गंवा रहे हैं। लेकिन इन बेजुबानों की आवाज कोई नहीं सुन रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थिति में वन विभाग का दायित्व है कि वे स्थाई पक्के जलस्रोत बना कर टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाएं। ताकि वन्यजीवों को पीने का पानी मिल सके। उन्होंने बताया कि नारणावास क्षेत्र में कई प्रजातियों के बड़ी संख्या में वन्यजीव स्थाई रूप से रहते हैं। भीषण गर्मी के दौर में वन्यजीव और जंगली जानवरों की हालत खराब है। नारणावास क्षेत्र में बड़ा इलाका वन विभाग का है। जहां पर बड़ी संख्या में वन्यजीव विचरण करते है। इस मामले में उपवन सरंक्षक यादवेंद्र सिंह चुंडावत ने बताया कि सरकार की ओर से वन्यजीव क्षेत्र में पानी की व्यवस्था के लिए बजट दिया जा रहा हैं। भामाशाहों के सहयोग से भी पानी की व्यवस्था करवाने की पूरी कोशिश की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जालोर जिले के नारणावास वन क्षेत्र में जलस्रोत सूखने से वन्यजीवों का जीवन संकट में है। एक हज़ार एक सौ बत्तीस. पाँच हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र में वन विभाग की ओर से एक भी जलस्रोत नहीं बनवाया गया है। ऐसे में भीषण गर्मी के मौसम में वन्यजीव पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी रूप सिंह राठौड़ और नारणावास सरपंच जशोदा कंवर ने बताया कि पानी के अभाव में वन्यजीवों का जीवन संकट में है। पानी की तलाश में वन्यजीवों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। फिर भी उनको पानी नसीब नहीं हो रहा है। राजस्थान में जहां एक तरफ गर्मी अपना सितम ढा रही है। वहीं जंगली जानवर एवं पशु-पक्षी पानी के लिए तरस रहे हैं। गर्मी में पानी नहीं मिलने से अपनी जान तक गंवा रहे हैं। लेकिन इन बेजुबानों की आवाज कोई नहीं सुन रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थिति में वन विभाग का दायित्व है कि वे स्थाई पक्के जलस्रोत बना कर टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाएं। ताकि वन्यजीवों को पीने का पानी मिल सके। उन्होंने बताया कि नारणावास क्षेत्र में कई प्रजातियों के बड़ी संख्या में वन्यजीव स्थाई रूप से रहते हैं। भीषण गर्मी के दौर में वन्यजीव और जंगली जानवरों की हालत खराब है। नारणावास क्षेत्र में बड़ा इलाका वन विभाग का है। जहां पर बड़ी संख्या में वन्यजीव विचरण करते है। इस मामले में उपवन सरंक्षक यादवेंद्र सिंह चुंडावत ने बताया कि सरकार की ओर से वन्यजीव क्षेत्र में पानी की व्यवस्था के लिए बजट दिया जा रहा हैं। भामाशाहों के सहयोग से भी पानी की व्यवस्था करवाने की पूरी कोशिश की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई ने मध्यप्रदेश को 9 विकेट से हराकर अपना विजय अभियान जारी रखा। मुंबई की यह लगातार तीसरी जीत है जिसने ग्रुप डी के पहले दो मैचों में मिजोरम और हरियाणा को हराया। वहीं दूसरी ओर दिल्ली ने नागालैंड को 8 विकेट से हराया है। दिल्ली ने गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर ग्रुप ई के मुकाबले में नागालैंड को 8 विकेट से हराया। टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण करने का फैसला करने के बाद दिल्ली ने नागालैंड को 20 ओवर में 9 विकेट पर 75 रन पर रोकने के बाद महज 12. 3 ओवर में 2 विकेट पर 78 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। बायें हाथ के स्पिनर पवन नेगी ने 3 विकेट झटके जबकि ललित यादव, एस भाटी और करण डागर ने एक-एक विकेट लिये। नागालैंड के लिए सिर्फ एम वोट्सा, एस. एस. मुंधे और आई लेमतुर ही दोहरे आंकड़ें में पहुंच सकें। दिल्ली के लिए ध्रुव शोरे ने 27 और नितिश राणा ने नाबाद 20 रन बनाये। ग्रुप के अन्य मैच में सौराष्ट्र ने गुजरात को आसानी से 57 रन से हराया।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई ने मध्यप्रदेश को नौ विकेट से हराकर अपना विजय अभियान जारी रखा। मुंबई की यह लगातार तीसरी जीत है जिसने ग्रुप डी के पहले दो मैचों में मिजोरम और हरियाणा को हराया। वहीं दूसरी ओर दिल्ली ने नागालैंड को आठ विकेट से हराया है। दिल्ली ने गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर ग्रुप ई के मुकाबले में नागालैंड को आठ विकेट से हराया। टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण करने का फैसला करने के बाद दिल्ली ने नागालैंड को बीस ओवर में नौ विकेट पर पचहत्तर रन पर रोकने के बाद महज बारह. तीन ओवर में दो विकेट पर अठहत्तर रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। बायें हाथ के स्पिनर पवन नेगी ने तीन विकेट झटके जबकि ललित यादव, एस भाटी और करण डागर ने एक-एक विकेट लिये। नागालैंड के लिए सिर्फ एम वोट्सा, एस. एस. मुंधे और आई लेमतुर ही दोहरे आंकड़ें में पहुंच सकें। दिल्ली के लिए ध्रुव शोरे ने सत्ताईस और नितिश राणा ने नाबाद बीस रन बनाये। ग्रुप के अन्य मैच में सौराष्ट्र ने गुजरात को आसानी से सत्तावन रन से हराया।
हमीरपुर, 9 मार्च (निस) राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को जिला मुख्यालय के हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए नवाचार और नई तकनीकें अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्व में केवल वही देश प्रगति कर रहे हैं जिन्होंने नई तकनीकों को प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने 162 विद्यार्थियों को डिग्रियां और 43 को मेडल प्रदान किए जिनमें 22 स्वर्ण पदक और 21 रजत पदक शामिल हैं। राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, बिग डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, बायो-टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में बदलाव इंजीनियरिंग के पारंपरिक तरीकों को चुनौती दे रहे हैं। हमारे पास इन प्रौद्योगिकियों का पूरा उपयोग कर देश को एक नए स्तर पर ले जाने का सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अधिकतम युवाओं को सर्वोत्तम शिक्षा, ज्ञान और कौशल प्रदान किया जाए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर दरूही में रूद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने 9.78 करोड़ से बनने वाले गर्ल्ज हॉस्टल भवन की आधारशिला भी रखी।
हमीरपुर, नौ मार्च राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को जिला मुख्यालय के हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए नवाचार और नई तकनीकें अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्व में केवल वही देश प्रगति कर रहे हैं जिन्होंने नई तकनीकों को प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने एक सौ बासठ विद्यार्थियों को डिग्रियां और तैंतालीस को मेडल प्रदान किए जिनमें बाईस स्वर्ण पदक और इक्कीस रजत पदक शामिल हैं। राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, बिग डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, बायो-टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में बदलाव इंजीनियरिंग के पारंपरिक तरीकों को चुनौती दे रहे हैं। हमारे पास इन प्रौद्योगिकियों का पूरा उपयोग कर देश को एक नए स्तर पर ले जाने का सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अधिकतम युवाओं को सर्वोत्तम शिक्षा, ज्ञान और कौशल प्रदान किया जाए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर दरूही में रूद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने नौ.अठहत्तर करोड़ से बनने वाले गर्ल्ज हॉस्टल भवन की आधारशिला भी रखी।
कुत्तों की कोई नस्ल, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे चरित्र औरवह आदतों में अलग नहीं थी, उसके प्रशंसकों के पास है। कोई छोटे कमरे के कुत्तों के बारे में पागल है, कोई मध्यम आकार के पालतू जानवर रखने के लिए पसंद करता है। लेकिन ऐसे लोग हैं जो केवल बहुत बड़े, मजबूत कुत्तों को पसंद करते हैं। और इस तरह के एक पूर्वाग्रह में आश्चर्य की बात नहीं है। आखिरकार, उचित प्रशिक्षण के साथ, इस तरह की नस्लों के बहुमत के प्रतिनिधियों की प्राकृतिक क्षमता, केवल एक समर्पित मित्र, बल्कि एक अजेय लड़ाकू और intercessor भी प्राप्त करना संभव बनाता है। एक बड़ा कुत्ता पाने के लिए, ज़ाहिर है, केवल लायक हैउन कुत्ते प्रजनकों जिनके रखरखाव के लिए पर्याप्त पैसा है। इसके अलावा, ऐसी अधिकांश नस्लों के मालिक को देखभाल और प्रशिक्षण के संबंध में कुछ कौशल रखने की आवश्यकता होती है। नीचे हम दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों को पाठक का ध्यान प्रस्तुत करते हैं। इस नस्ल को उन लोगों द्वारा चुना जाना चाहिए जो देखना चाहते हैंउसका पालतू न केवल बहादुर और दृढ़ है, बल्कि अभिजात वर्ग भी है। दुनिया में हमारे शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों में पहली जगह - अंग्रेजी मास्टिफ़, एक सुन्दर जानवर जो एक कट्टरपंथी चरित्र के साथ है। नस्ल काफी पुरानी है। जनजातीय प्रजनन बहुत समय पहले शुरू हुआ - लगभग 1400। बाद में, यह लगभग कई बार गायब हो गया और फिर उत्साही लोगों द्वारा बहाल किया गया। इन कुत्तों के आकार वास्तव में अलग हैंविशाल। Withers पर, वे 76 सेमी की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। मानकों के अनुसार, अंग्रेजी मास्टिफ़ का वजन 80 किलो से कम नहीं होना चाहिए। इन कुत्तों के बाहरी हिस्से की विशिष्टताओं में शामिल हैंः - एक आयताकार, भारी सिर; - उच्च सेट त्रिभुज कान; - एक शक्तिशाली शरीर और अंग; - भारी उच्च पूंछ। अंग्रेजी मास्टिफ़ का रंग केवल अंधेरा हो सकता है। थूथन पर एक काला मुखौटा की आवश्यकता होती है। नस्ल की एक विशेषता विशेषता वास्तव में हैएक टाइटैनिक शांत। शुद्ध रूप से बाहरी रूप से ऐसा कुत्ता भी बहुत सुस्त लग सकता है। हालांकि, अंग्रेजी मास्टिफ अभी भी भावनाओं को दिखाने में सक्षम हैं, भले ही बहुत तूफानी न हों। इसके अलावा, ये बड़े कुत्ते अपने स्वामी, वफादार और फिर भी बहादुर से गहराई से जुड़े हुए हैं। और हम दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों पर विचार करना जारी रखते हैं। इन बड़े कुत्तों को भी शौकियों द्वारा बहुत सराहना की जाती हैपूरी दुनिया के पालतू जानवर। इस नस्ल को बहुत लंबे समय तक नस्ल दें। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलबाई ने 3-6 हजार साल पहले किसानों को रखा था। और इन कुत्तों के बाहरी हिस्से को हमारे दिनों में व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित बना दिया गया है। प्राचीन काल में, ये कुत्तों मुख्य रूप से भेड़ और बकरियों को झुकाव में लगे थे। शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों में दूसरे स्थान परअलबाई की दुनिया हमारे द्वारा रखी गई है, क्योंकि यह छह सेंटीमीटर (70 सेमी) के विकास में अंग्रेजी मास्टिफ़ से कम है। लेकिन साथ ही उसका वजन लगभग समान है - 80 किलो। ये कुत्ते बहुत प्रभावशाली लगते हैं। नस्ल की मुख्य विशेषताएं हैंः - एक विशाल सिर और एक विशाल थूथन; - एक मोटी अंडकोट के साथ हार्ड ऊन। अलबाई के कान और पूंछ आमतौर पर शुरुआती में डॉक किए जाते हैंउम्र। यह परंपरा प्राचीन काल में वापस जाती है। इस प्रकार चरवाहों ने ऐसा किया ताकि कुत्तों के साथ लंबे संक्रमण के दौरान कुत्तों ने शरीर के इन हिस्सों को स्थिर नहीं किया। अलबाई में रंग अलग हो सकता है। मानक काले, सफेद, भूरे, पंख, ब्रिंडल, ब्राउन, पाइबाल्ड और स्पॉटी की अनुमति देते हैं। अलबाई की देखभाल, शीर्ष 10 में शामिल हैदुनिया में मजबूत कुत्ते, बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन निश्चित रूप से, जब इस तरह के एक बड़े कुत्ते को रखा जाता है, तो कुछ सावधानी बरतनी चाहिए। अलबाई चरित्र की मुख्य विशेषताएं हैंः - इंद्रियों के प्रकटीकरण में संयम; - "बाहरी लोगों" की ओर आक्रामकता; - अन्य पालतू जानवरों के साथ अच्छी तरह से पाने की क्षमता। पिल्ला तुरंत दिखाना चाहिए कि घर में कौन हैनेता। अन्यथा, भविष्य में उनके पालन-पोषण के साथ विभिन्न प्रकार की समस्याएं होंगी। सड़क पर इस नस्ल के प्रतिनिधि के साथ चलना, आपको निश्चित रूप से एक पट्टा का उपयोग करना चाहिए। दुनिया में बड़ी नस्लों, अच्छी हैंअपवाद के बिना हर किसी के लिए जाना जाता है। हमारे द्वारा प्रतिनिधित्व में तीसरे स्थान पर दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों - rottweiler। विशेष तन निशान वाले इन अंधेरे बड़े कुत्ते लंबे समय से घरेलू प्रजनकों का शौक रहा है। यह नस्ल बहुत पुरानी है। यह प्राचीन मिस्र में भी जाना जाता था। Rottweilers घरों और गज की सुरक्षा, और शिकार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनकी अधिकतम ऊंचाई 69 सेमी है और उनका वजन 60 किलो है। इस नस्ल की मुख्य विशिष्ट विशेषताएं हैंः - विकास और शरीर की लंबाई के अनुपात 1: 2; - छोटे पंजे; रोट्टवेइलर में टिंचर विभिन्न स्थानों पर स्थित हो सकते हैं - आंखों में, गाल, गर्दन के निचले हिस्से, पूंछ के नीचे, सामने के पंजे आदि। बड़े आकार के बावजूद एक विशेष शांति,Rottweilers अलग नहीं है। उनका चरित्र बहुत ऊर्जावान है और कुछ तरीकों से भी हिंसक है। कई कुत्ते प्रजनकों को इन जानवरों को बहुत चालाक और चालाक माना जाता है, लेकिन वे बल्कि मोटे और सुस्त हैं। छोटे बच्चों के साथ एक परिवार में एक rottweiler पाने के लिए वैसे भी इसके लायक नहीं है। एक कुत्ता, इसे ध्यान में रखकर, बच्चों को जिक्र नहीं करने के लिए भी एक बड़े बच्चे को हुक और डंप कर सकता है। हमारे शीर्ष 10 सबसे मजबूत में चौथे स्थान परदुनिया में कुत्तों - अमेरिकी बुलडॉग। इसकी वृद्धि 58 सेमी तक पहुंच सकती है, और वजन - 58 किलोग्राम तक। यह नस्ल उस रूप में दिखाई दी जिसमें इसे अब दर्शाया गया है, बहुत पहले नहीं - 1 9वीं शताब्दी में। इसका मुख्य उद्देश्य हमेशा बड़े जानवरों के साथ लड़ाई में भागीदारी माना जाता था, मुख्य रूप से बैल के साथ। अमेरिकी बुलडॉग के पूर्व-टेरियर की विशिष्टताओं के लिए ये हैंः - एथलेटिक निर्माण; - मजबूत कॉम्पैक्ट बॉडी; - एक विस्तृत वर्ग थूथन; अमेरिकी बुलडॉग का कोट रंग सफेद होना चाहिए (या सफेद अंक के साथ)। अमेरिकी बुलडॉग, जो चौथे स्थान पर हैदुनिया के सबसे मजबूत कुत्तों के शीर्ष 10 में - जानवर बहुत जिद्दी, संदिग्ध और जानबूझकर है। इसके अलावा, ये कुत्ते अजनबियों के लिए बहुत अनुकूल नहीं हैं। पिल्ला को हमेशा स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसके चारों ओर हर कोई उसे और उसके मालिक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है। अन्यथा, बढ़ने के बाद, वह हर किसी को काट देगा। इन कुत्तों को अन्य जानवरों के संपर्कों के संबंध में भी उठाने की जरूरत है। एक बिल्ली, एक मुर्गी, एक भेड़ या एक बकरी जो दृष्टि के क्षेत्र में दिखाई दी है, ऐसे कुत्ते को आसानी से अपंग या यहां तक कि मार दिया जा सकता है। हमारे पांचवें स्थान पर कौन रखा जा सकता हैदुनिया में शीर्ष 10 सबसे मजबूत कुत्ते? तुर्की कंगल एक चरवाहे की नस्ल है, जो इस अधिकार के योग्य है। ऊंचाई के संदर्भ में, ये कुत्ते अलबाई और अंग्रेजी मास्टिफ़ तक भी बेहतर हैं। लेकिन साथ ही वे एक अधिक परिष्कृत संविधान द्वारा प्रतिष्ठित हैं और बहुत कम वजन। इन कुत्तों की ऊंचाई सूखने वालों पर 77 सेमी तक पहुंच सकती है, वजन 50 किलो है। इन कुत्तों के बाहरी भाग की मुख्य विशेषताएं हैंः - शक्तिशाली गर्दन; - पूंछ वापस झुकना; - छोटा मोटी कोट। तुर्की कंगला ऊन कभी सफेद नहीं होता हैअन्य चरवाहा कुत्तों की तरह रंग। मानक केवल लाल, भूरे, भूरे या पीले रंग के रंगों की अनुमति देते हैं। इस कंगला के चेहरे पर एक काला मुखौटा होना चाहिए। कंगल लोग और जानवरों से संबंधित हैंकाफी उदार लेकिन केवल अपने क्षेत्र के बाहर। अजनबियों के लिए, ये कुत्ते हमेशा आक्रामकता दिखाते हैं। कंगलों के व्यवहार की विशिष्टताओं, अन्य चीजों के साथ, अथकता और शक्ति शामिल हैं। पहले, चरवाहे कम से कम 200 सिर के झुंड की रक्षा के लिए केवल एक ऐसे कुत्ते का उपयोग कर सकते थे। इन कुत्तों के सूखने वालों की ऊंचाई 68 सेमी तक पहुंच सकती है, औरवे 50 किलो वजन का वजन करते हैं। यही कारण है कि हमने दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों, ब्राजीलियाई मास्टिफ़ में छठे स्थान पर रखा। इस नस्ल को 17 वीं शताब्दी के आसपास दक्षिण अमेरिका में पैदा हुआ था। मुख्य रूप से हेसिंडा और वृक्षारोपण की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, इस नस्ल अक्सर भागने वाले दासों की खोज में भाग लेती है। इस तथ्य के बावजूद कि ये कुत्ते बड़े पैमाने पर हैं, उनके शरीर सामंजस्यपूर्ण और पूरी तरह से सममित हैं। पहली जगह ब्राजील के मास्टिफ के बाहरी हिस्से की विशेषताएं शामिल हैंः - बड़ा भारी सिर; - डूपिंग होंठ के साथ चौड़ा थूथन; - गर्दन में गुना गुना बनाने की उपस्थिति; - लघु घने चमकदार ऊन। इस नस्ल के कुत्तों में शरीर का रंग कोई भी हो सकता है। मानकों में केवल माउस और सफेद शामिल नहीं है। कुत्ता बहुत बहादुर और गर्म-स्वभावपूर्ण है औरमजबूत। बहुत से लोग इन कुत्तों को बहुत अधिक विश्वास करते हैं। हालांकि, इन सब के साथ, ब्राजील के मास्टिफ काफी आज्ञाकारी और मरीज कुत्तों (बच्चों के संबंध में) सहित हैं। हमारे शीर्ष 10 सबसे मजबूत स्थान के सातवें स्थान परदुनिया में कुत्तों - dogo argentino। यह नस्ल शिकार के समूह से संबंधित है। इसे अर्जेंटीना में 20 के दशक में वापस ले लिया गया था। इसलिए इसका नाम। प्रजनन में प्रजनन का उद्देश्य मुख्य रूप से एक अच्छा बड़ा खेल शिकारी - सूअर, प्यूमा, जगुआर इत्यादि प्राप्त करना था। ये कुत्ते पूरे पैक के साथ जंगली जानवरों का पीछा करते थे। अर्जेंटीना कुत्तों का वजन 45 किलो तक पहुंच सकता है, और सूखने वालों की ऊंचाई - 68 सेमी। इन कुत्तों के बाहरी भाग की मुख्य विशेषताएं में शामिल हैंः - लघु ऊन जिसे विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है; - शक्तिशाली गर्दन, मजबूत पैर, प्रभावशाली शरीर; - लंबी लटकती पूंछ; मानक के अनुसार, अर्जेंटीना कुत्तों का रंग केवल सफेद, नट या क्रीम हो सकता है। डोगो अर्जेंटीनो, शीर्ष 10 सबसे मजबूत में से एक हैदुनिया में कुत्तों (नीचे दी गई तस्वीर दृष्टि से इस नस्ल की भव्यता दिखाती है) साहसी, ऊर्जावान और साथ ही साथ काफी शांतिपूर्ण है। लेकिन ऐसे पालतू जानवर जो इस तरह के पिल्ला को खरीदने का फैसला करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि किसी भी मामले में वह परिवार में नेता बनने की कोशिश करेगा। इस नस्ल के प्रतिनिधि को बिना शर्त रूप से मालिक का पालन करना बेहद मुश्किल है। आवश्यक पदानुक्रम केवल शुरुआती उम्र से पिल्ला को ठीक से उठाकर बनाया जा सकता है। अपने मालिक dogo argentino का मूडबहुत अच्छा महसूस करो। और इतने सारे कि वे बिना किसी स्पष्ट कारण के, मेजबान की चिंताओं के कथित स्रोत वाले लोगों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए, अर्जेंटीना कुत्तों को अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखने के लिए सिखाया जाना चाहिए। इस शिकार नस्ल के मानकों को 90 के दशक में अनुमोदित किया गया थाक्रमशः। पैदा हुआ यह दक्षिण अफ्रीका के केनेल क्लब था। Withers पर ऊंचाई 66 सेमी, और वजन - 37 किलो तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया में हमारे शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों की आठवीं जगह - रोड्सियन रिजबैक। रिजबैक की एक मूल विशेषता इसकी पीठ पर एक हड़ताली ऊन कंघी की उपस्थिति है। आप इस नस्ल को दूसरों से भी अलग कर सकते हैंः - उच्च कान; - मजबूत मांसपेशियां; - सुंदर प्रकाश शरीर; - धीरे-धीरे पतला, थोड़ा घुमावदार पूंछ। मानकों को केवल गर्म, काफी हल्के कोट रंग की अनुमति है। इस कुत्ते का चरित्र अधिकार और प्रभुत्व का प्रभुत्व हैबेचैनी। अपार्टमेंट में इन जानवरों को रखने के लिए सिफारिश नहीं की जाती है। ऐसी स्थितियों के लिए, यह बहुत सक्रिय और ऊर्जावान है। पशु गर्व और कुशल हैं, लेकिन वे अपने मालिक से बहुत जल्दी जुड़े हुए हैं। रिजबैक की विशेषताओं में से एक यह है कि वे पूरी तरह गर्मी और सूखे से डरते नहीं हैं। बल्कि भयानक बाहरी के बावजूदप्रजातियां, इस नस्ल के कुत्तों को शांत, दयालु और शांतिपूर्ण माना जाता है। उनके आकार काफी बड़े हैं - 63 सेमी, 32 किलो। यही कारण है कि हम उन्हें दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों में नौवें स्थान पर डाल देते हैं। 1 9वीं शताब्दी में जर्मन मुक्केबाज पैदा हुए थे। नस्ल गार्ड और शिकार के समूह से संबंधित है। ऐसा लगता है कि एक जर्मन मुक्केबाज बहुत तंग है,साफ और प्रभावशाली। मानकों के अनुसार, विशेष रूप से प्रभावशाली उनके जबड़े हैं, जिन विकृतियों की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, जर्मन मुक्केबाज द्वारा प्रतिष्ठित हैः - यहां तक कि गहरी छाती; - अच्छी तरह से विकसित मांसपेशियों; - sinewy अंग। ऐसा लगता था कि जर्मन मुक्केबाज विशेष रूप से सफेद होना चाहिए। अब मानक इस कुत्ते के केवल ब्रिंडल या लाल कोट रंग की अनुमति देते हैं। नस्ल के प्रतिनिधि बहुत उत्सुक, स्मार्ट,भरोसेमंद और अपने स्वामी से जुड़ा हुआ है। जर्मन मुक्केबाजों के पास एक मजबूत मानसिकता है और कमजोर लोगों के साथ अच्छी तरह से व्यवहार करते हैं। सोफे द्वारा यह नस्ल किसी भी तरह लागू नहीं होता है। बॉक्सर बहुत सक्रिय हैं और नए अनुभव पाने के लिए प्यार करते हैं। इसलिए, उन्हें पाने के लिए केवल उन पालतू प्रेमी हैं जो शहर के बाहर रहते हैं। कमरे में, जर्मन मुक्केबाज की अप्रयुक्त ऊर्जा निश्चित रूप से gnawed फर्नीचर, टूटे घरेलू उपकरणों और खरोंच लकड़ी की छत में फैल जाएगा। पृथ्वी पर अन्य बड़ी नस्लें क्या पाई जाती हैं? दुनिया के हमारे शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली कुत्तों के दसवें स्थान पर, साइबेरियाई हुस्की भी एक बड़ा कुत्ता है। कुछ हज़ार साल पहले चुक्ची इन जानवरों को लाया था। दुर्भाग्य से, सोवियत काल में साइबेरियाई हुस्की को असंगत नस्ल के रूप में पहचाना गया था। केवल इस तथ्य के कारण उन्हें बचाने के लिए संभव था कि क्रांति से पहले भी कई अमेरिकियों ने ऐसे कुत्तों को उनके पास लाया। हमारे देश में, इस नस्ल ने केवल 90 के दशक में नस्ल पैदा करना शुरू किया। सूखने वालों में साइबेरियाई भूसी 60 सेमी तक पहुंच सकती है। इन जानवरों का अधिकतम वजन 28 किग्रा है। नस्लों के मानकों में शामिल हैंः - सीधे कान; - शराबी पूंछ; - अच्छी तरह से विकसित मांसपेशियों; - कमाना गर्दन; - अच्छी तरह से परिभाषित कंधे ब्लेड के साथ सीधे वापस; - अच्छा लेकिन छुपा शरीर लाइनें नहीं। इन कुत्तों का रंग, भेड़िये की तरह कुछ दिखने में, सफेद से काले रंग के कुछ भी हो सकता है।
कुत्तों की कोई नस्ल, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे चरित्र औरवह आदतों में अलग नहीं थी, उसके प्रशंसकों के पास है। कोई छोटे कमरे के कुत्तों के बारे में पागल है, कोई मध्यम आकार के पालतू जानवर रखने के लिए पसंद करता है। लेकिन ऐसे लोग हैं जो केवल बहुत बड़े, मजबूत कुत्तों को पसंद करते हैं। और इस तरह के एक पूर्वाग्रह में आश्चर्य की बात नहीं है। आखिरकार, उचित प्रशिक्षण के साथ, इस तरह की नस्लों के बहुमत के प्रतिनिधियों की प्राकृतिक क्षमता, केवल एक समर्पित मित्र, बल्कि एक अजेय लड़ाकू और intercessor भी प्राप्त करना संभव बनाता है। एक बड़ा कुत्ता पाने के लिए, ज़ाहिर है, केवल लायक हैउन कुत्ते प्रजनकों जिनके रखरखाव के लिए पर्याप्त पैसा है। इसके अलावा, ऐसी अधिकांश नस्लों के मालिक को देखभाल और प्रशिक्षण के संबंध में कुछ कौशल रखने की आवश्यकता होती है। नीचे हम दुनिया के शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों को पाठक का ध्यान प्रस्तुत करते हैं। इस नस्ल को उन लोगों द्वारा चुना जाना चाहिए जो देखना चाहते हैंउसका पालतू न केवल बहादुर और दृढ़ है, बल्कि अभिजात वर्ग भी है। दुनिया में हमारे शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों में पहली जगह - अंग्रेजी मास्टिफ़, एक सुन्दर जानवर जो एक कट्टरपंथी चरित्र के साथ है। नस्ल काफी पुरानी है। जनजातीय प्रजनन बहुत समय पहले शुरू हुआ - लगभग एक हज़ार चार सौ। बाद में, यह लगभग कई बार गायब हो गया और फिर उत्साही लोगों द्वारा बहाल किया गया। इन कुत्तों के आकार वास्तव में अलग हैंविशाल। Withers पर, वे छिहत्तर सेमी की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। मानकों के अनुसार, अंग्रेजी मास्टिफ़ का वजन अस्सी किलो से कम नहीं होना चाहिए। इन कुत्तों के बाहरी हिस्से की विशिष्टताओं में शामिल हैंः - एक आयताकार, भारी सिर; - उच्च सेट त्रिभुज कान; - एक शक्तिशाली शरीर और अंग; - भारी उच्च पूंछ। अंग्रेजी मास्टिफ़ का रंग केवल अंधेरा हो सकता है। थूथन पर एक काला मुखौटा की आवश्यकता होती है। नस्ल की एक विशेषता विशेषता वास्तव में हैएक टाइटैनिक शांत। शुद्ध रूप से बाहरी रूप से ऐसा कुत्ता भी बहुत सुस्त लग सकता है। हालांकि, अंग्रेजी मास्टिफ अभी भी भावनाओं को दिखाने में सक्षम हैं, भले ही बहुत तूफानी न हों। इसके अलावा, ये बड़े कुत्ते अपने स्वामी, वफादार और फिर भी बहादुर से गहराई से जुड़े हुए हैं। और हम दुनिया के शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों पर विचार करना जारी रखते हैं। इन बड़े कुत्तों को भी शौकियों द्वारा बहुत सराहना की जाती हैपूरी दुनिया के पालतू जानवर। इस नस्ल को बहुत लंबे समय तक नस्ल दें। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलबाई ने तीन-छः हजार साल पहले किसानों को रखा था। और इन कुत्तों के बाहरी हिस्से को हमारे दिनों में व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तित बना दिया गया है। प्राचीन काल में, ये कुत्तों मुख्य रूप से भेड़ और बकरियों को झुकाव में लगे थे। शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों में दूसरे स्थान परअलबाई की दुनिया हमारे द्वारा रखी गई है, क्योंकि यह छह सेंटीमीटर के विकास में अंग्रेजी मास्टिफ़ से कम है। लेकिन साथ ही उसका वजन लगभग समान है - अस्सी किलो। ये कुत्ते बहुत प्रभावशाली लगते हैं। नस्ल की मुख्य विशेषताएं हैंः - एक विशाल सिर और एक विशाल थूथन; - एक मोटी अंडकोट के साथ हार्ड ऊन। अलबाई के कान और पूंछ आमतौर पर शुरुआती में डॉक किए जाते हैंउम्र। यह परंपरा प्राचीन काल में वापस जाती है। इस प्रकार चरवाहों ने ऐसा किया ताकि कुत्तों के साथ लंबे संक्रमण के दौरान कुत्तों ने शरीर के इन हिस्सों को स्थिर नहीं किया। अलबाई में रंग अलग हो सकता है। मानक काले, सफेद, भूरे, पंख, ब्रिंडल, ब्राउन, पाइबाल्ड और स्पॉटी की अनुमति देते हैं। अलबाई की देखभाल, शीर्ष दस में शामिल हैदुनिया में मजबूत कुत्ते, बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन निश्चित रूप से, जब इस तरह के एक बड़े कुत्ते को रखा जाता है, तो कुछ सावधानी बरतनी चाहिए। अलबाई चरित्र की मुख्य विशेषताएं हैंः - इंद्रियों के प्रकटीकरण में संयम; - "बाहरी लोगों" की ओर आक्रामकता; - अन्य पालतू जानवरों के साथ अच्छी तरह से पाने की क्षमता। पिल्ला तुरंत दिखाना चाहिए कि घर में कौन हैनेता। अन्यथा, भविष्य में उनके पालन-पोषण के साथ विभिन्न प्रकार की समस्याएं होंगी। सड़क पर इस नस्ल के प्रतिनिधि के साथ चलना, आपको निश्चित रूप से एक पट्टा का उपयोग करना चाहिए। दुनिया में बड़ी नस्लों, अच्छी हैंअपवाद के बिना हर किसी के लिए जाना जाता है। हमारे द्वारा प्रतिनिधित्व में तीसरे स्थान पर दुनिया के शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों - rottweiler। विशेष तन निशान वाले इन अंधेरे बड़े कुत्ते लंबे समय से घरेलू प्रजनकों का शौक रहा है। यह नस्ल बहुत पुरानी है। यह प्राचीन मिस्र में भी जाना जाता था। Rottweilers घरों और गज की सुरक्षा, और शिकार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनकी अधिकतम ऊंचाई उनहत्तर सेमी है और उनका वजन साठ किलो है। इस नस्ल की मुख्य विशिष्ट विशेषताएं हैंः - विकास और शरीर की लंबाई के अनुपात एक: दो; - छोटे पंजे; रोट्टवेइलर में टिंचर विभिन्न स्थानों पर स्थित हो सकते हैं - आंखों में, गाल, गर्दन के निचले हिस्से, पूंछ के नीचे, सामने के पंजे आदि। बड़े आकार के बावजूद एक विशेष शांति,Rottweilers अलग नहीं है। उनका चरित्र बहुत ऊर्जावान है और कुछ तरीकों से भी हिंसक है। कई कुत्ते प्रजनकों को इन जानवरों को बहुत चालाक और चालाक माना जाता है, लेकिन वे बल्कि मोटे और सुस्त हैं। छोटे बच्चों के साथ एक परिवार में एक rottweiler पाने के लिए वैसे भी इसके लायक नहीं है। एक कुत्ता, इसे ध्यान में रखकर, बच्चों को जिक्र नहीं करने के लिए भी एक बड़े बच्चे को हुक और डंप कर सकता है। हमारे शीर्ष दस सबसे मजबूत में चौथे स्थान परदुनिया में कुत्तों - अमेरिकी बुलडॉग। इसकी वृद्धि अट्ठावन सेमी तक पहुंच सकती है, और वजन - अट्ठावन किलोग्रामग्राम तक। यह नस्ल उस रूप में दिखाई दी जिसमें इसे अब दर्शाया गया है, बहुत पहले नहीं - एक नौवीं शताब्दी में। इसका मुख्य उद्देश्य हमेशा बड़े जानवरों के साथ लड़ाई में भागीदारी माना जाता था, मुख्य रूप से बैल के साथ। अमेरिकी बुलडॉग के पूर्व-टेरियर की विशिष्टताओं के लिए ये हैंः - एथलेटिक निर्माण; - मजबूत कॉम्पैक्ट बॉडी; - एक विस्तृत वर्ग थूथन; अमेरिकी बुलडॉग का कोट रंग सफेद होना चाहिए । अमेरिकी बुलडॉग, जो चौथे स्थान पर हैदुनिया के सबसे मजबूत कुत्तों के शीर्ष दस में - जानवर बहुत जिद्दी, संदिग्ध और जानबूझकर है। इसके अलावा, ये कुत्ते अजनबियों के लिए बहुत अनुकूल नहीं हैं। पिल्ला को हमेशा स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसके चारों ओर हर कोई उसे और उसके मालिक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है। अन्यथा, बढ़ने के बाद, वह हर किसी को काट देगा। इन कुत्तों को अन्य जानवरों के संपर्कों के संबंध में भी उठाने की जरूरत है। एक बिल्ली, एक मुर्गी, एक भेड़ या एक बकरी जो दृष्टि के क्षेत्र में दिखाई दी है, ऐसे कुत्ते को आसानी से अपंग या यहां तक कि मार दिया जा सकता है। हमारे पांचवें स्थान पर कौन रखा जा सकता हैदुनिया में शीर्ष दस सबसे मजबूत कुत्ते? तुर्की कंगल एक चरवाहे की नस्ल है, जो इस अधिकार के योग्य है। ऊंचाई के संदर्भ में, ये कुत्ते अलबाई और अंग्रेजी मास्टिफ़ तक भी बेहतर हैं। लेकिन साथ ही वे एक अधिक परिष्कृत संविधान द्वारा प्रतिष्ठित हैं और बहुत कम वजन। इन कुत्तों की ऊंचाई सूखने वालों पर सतहत्तर सेमी तक पहुंच सकती है, वजन पचास किलो है। इन कुत्तों के बाहरी भाग की मुख्य विशेषताएं हैंः - शक्तिशाली गर्दन; - पूंछ वापस झुकना; - छोटा मोटी कोट। तुर्की कंगला ऊन कभी सफेद नहीं होता हैअन्य चरवाहा कुत्तों की तरह रंग। मानक केवल लाल, भूरे, भूरे या पीले रंग के रंगों की अनुमति देते हैं। इस कंगला के चेहरे पर एक काला मुखौटा होना चाहिए। कंगल लोग और जानवरों से संबंधित हैंकाफी उदार लेकिन केवल अपने क्षेत्र के बाहर। अजनबियों के लिए, ये कुत्ते हमेशा आक्रामकता दिखाते हैं। कंगलों के व्यवहार की विशिष्टताओं, अन्य चीजों के साथ, अथकता और शक्ति शामिल हैं। पहले, चरवाहे कम से कम दो सौ सिर के झुंड की रक्षा के लिए केवल एक ऐसे कुत्ते का उपयोग कर सकते थे। इन कुत्तों के सूखने वालों की ऊंचाई अड़सठ सेमी तक पहुंच सकती है, औरवे पचास किलो वजन का वजन करते हैं। यही कारण है कि हमने दुनिया के शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों, ब्राजीलियाई मास्टिफ़ में छठे स्थान पर रखा। इस नस्ल को सत्रह वीं शताब्दी के आसपास दक्षिण अमेरिका में पैदा हुआ था। मुख्य रूप से हेसिंडा और वृक्षारोपण की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, इस नस्ल अक्सर भागने वाले दासों की खोज में भाग लेती है। इस तथ्य के बावजूद कि ये कुत्ते बड़े पैमाने पर हैं, उनके शरीर सामंजस्यपूर्ण और पूरी तरह से सममित हैं। पहली जगह ब्राजील के मास्टिफ के बाहरी हिस्से की विशेषताएं शामिल हैंः - बड़ा भारी सिर; - डूपिंग होंठ के साथ चौड़ा थूथन; - गर्दन में गुना गुना बनाने की उपस्थिति; - लघु घने चमकदार ऊन। इस नस्ल के कुत्तों में शरीर का रंग कोई भी हो सकता है। मानकों में केवल माउस और सफेद शामिल नहीं है। कुत्ता बहुत बहादुर और गर्म-स्वभावपूर्ण है औरमजबूत। बहुत से लोग इन कुत्तों को बहुत अधिक विश्वास करते हैं। हालांकि, इन सब के साथ, ब्राजील के मास्टिफ काफी आज्ञाकारी और मरीज कुत्तों सहित हैं। हमारे शीर्ष दस सबसे मजबूत स्थान के सातवें स्थान परदुनिया में कुत्तों - dogo argentino। यह नस्ल शिकार के समूह से संबंधित है। इसे अर्जेंटीना में बीस के दशक में वापस ले लिया गया था। इसलिए इसका नाम। प्रजनन में प्रजनन का उद्देश्य मुख्य रूप से एक अच्छा बड़ा खेल शिकारी - सूअर, प्यूमा, जगुआर इत्यादि प्राप्त करना था। ये कुत्ते पूरे पैक के साथ जंगली जानवरों का पीछा करते थे। अर्जेंटीना कुत्तों का वजन पैंतालीस किलो तक पहुंच सकता है, और सूखने वालों की ऊंचाई - अड़सठ सेमी। इन कुत्तों के बाहरी भाग की मुख्य विशेषताएं में शामिल हैंः - लघु ऊन जिसे विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है; - शक्तिशाली गर्दन, मजबूत पैर, प्रभावशाली शरीर; - लंबी लटकती पूंछ; मानक के अनुसार, अर्जेंटीना कुत्तों का रंग केवल सफेद, नट या क्रीम हो सकता है। डोगो अर्जेंटीनो, शीर्ष दस सबसे मजबूत में से एक हैदुनिया में कुत्तों साहसी, ऊर्जावान और साथ ही साथ काफी शांतिपूर्ण है। लेकिन ऐसे पालतू जानवर जो इस तरह के पिल्ला को खरीदने का फैसला करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि किसी भी मामले में वह परिवार में नेता बनने की कोशिश करेगा। इस नस्ल के प्रतिनिधि को बिना शर्त रूप से मालिक का पालन करना बेहद मुश्किल है। आवश्यक पदानुक्रम केवल शुरुआती उम्र से पिल्ला को ठीक से उठाकर बनाया जा सकता है। अपने मालिक dogo argentino का मूडबहुत अच्छा महसूस करो। और इतने सारे कि वे बिना किसी स्पष्ट कारण के, मेजबान की चिंताओं के कथित स्रोत वाले लोगों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए, अर्जेंटीना कुत्तों को अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखने के लिए सिखाया जाना चाहिए। इस शिकार नस्ल के मानकों को नब्बे के दशक में अनुमोदित किया गया थाक्रमशः। पैदा हुआ यह दक्षिण अफ्रीका के केनेल क्लब था। Withers पर ऊंचाई छयासठ सेमी, और वजन - सैंतीस किलो तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया में हमारे शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों की आठवीं जगह - रोड्सियन रिजबैक। रिजबैक की एक मूल विशेषता इसकी पीठ पर एक हड़ताली ऊन कंघी की उपस्थिति है। आप इस नस्ल को दूसरों से भी अलग कर सकते हैंः - उच्च कान; - मजबूत मांसपेशियां; - सुंदर प्रकाश शरीर; - धीरे-धीरे पतला, थोड़ा घुमावदार पूंछ। मानकों को केवल गर्म, काफी हल्के कोट रंग की अनुमति है। इस कुत्ते का चरित्र अधिकार और प्रभुत्व का प्रभुत्व हैबेचैनी। अपार्टमेंट में इन जानवरों को रखने के लिए सिफारिश नहीं की जाती है। ऐसी स्थितियों के लिए, यह बहुत सक्रिय और ऊर्जावान है। पशु गर्व और कुशल हैं, लेकिन वे अपने मालिक से बहुत जल्दी जुड़े हुए हैं। रिजबैक की विशेषताओं में से एक यह है कि वे पूरी तरह गर्मी और सूखे से डरते नहीं हैं। बल्कि भयानक बाहरी के बावजूदप्रजातियां, इस नस्ल के कुत्तों को शांत, दयालु और शांतिपूर्ण माना जाता है। उनके आकार काफी बड़े हैं - तिरेसठ सेमी, बत्तीस किलो। यही कारण है कि हम उन्हें दुनिया के शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों में नौवें स्थान पर डाल देते हैं। एक नौवीं शताब्दी में जर्मन मुक्केबाज पैदा हुए थे। नस्ल गार्ड और शिकार के समूह से संबंधित है। ऐसा लगता है कि एक जर्मन मुक्केबाज बहुत तंग है,साफ और प्रभावशाली। मानकों के अनुसार, विशेष रूप से प्रभावशाली उनके जबड़े हैं, जिन विकृतियों की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, जर्मन मुक्केबाज द्वारा प्रतिष्ठित हैः - यहां तक कि गहरी छाती; - अच्छी तरह से विकसित मांसपेशियों; - sinewy अंग। ऐसा लगता था कि जर्मन मुक्केबाज विशेष रूप से सफेद होना चाहिए। अब मानक इस कुत्ते के केवल ब्रिंडल या लाल कोट रंग की अनुमति देते हैं। नस्ल के प्रतिनिधि बहुत उत्सुक, स्मार्ट,भरोसेमंद और अपने स्वामी से जुड़ा हुआ है। जर्मन मुक्केबाजों के पास एक मजबूत मानसिकता है और कमजोर लोगों के साथ अच्छी तरह से व्यवहार करते हैं। सोफे द्वारा यह नस्ल किसी भी तरह लागू नहीं होता है। बॉक्सर बहुत सक्रिय हैं और नए अनुभव पाने के लिए प्यार करते हैं। इसलिए, उन्हें पाने के लिए केवल उन पालतू प्रेमी हैं जो शहर के बाहर रहते हैं। कमरे में, जर्मन मुक्केबाज की अप्रयुक्त ऊर्जा निश्चित रूप से gnawed फर्नीचर, टूटे घरेलू उपकरणों और खरोंच लकड़ी की छत में फैल जाएगा। पृथ्वी पर अन्य बड़ी नस्लें क्या पाई जाती हैं? दुनिया के हमारे शीर्ष दस सबसे शक्तिशाली कुत्तों के दसवें स्थान पर, साइबेरियाई हुस्की भी एक बड़ा कुत्ता है। कुछ हज़ार साल पहले चुक्ची इन जानवरों को लाया था। दुर्भाग्य से, सोवियत काल में साइबेरियाई हुस्की को असंगत नस्ल के रूप में पहचाना गया था। केवल इस तथ्य के कारण उन्हें बचाने के लिए संभव था कि क्रांति से पहले भी कई अमेरिकियों ने ऐसे कुत्तों को उनके पास लाया। हमारे देश में, इस नस्ल ने केवल नब्बे के दशक में नस्ल पैदा करना शुरू किया। सूखने वालों में साइबेरियाई भूसी साठ सेमी तक पहुंच सकती है। इन जानवरों का अधिकतम वजन अट्ठाईस किग्रा है। नस्लों के मानकों में शामिल हैंः - सीधे कान; - शराबी पूंछ; - अच्छी तरह से विकसित मांसपेशियों; - कमाना गर्दन; - अच्छी तरह से परिभाषित कंधे ब्लेड के साथ सीधे वापस; - अच्छा लेकिन छुपा शरीर लाइनें नहीं। इन कुत्तों का रंग, भेड़िये की तरह कुछ दिखने में, सफेद से काले रंग के कुछ भी हो सकता है।
आगामी अगस्त माह में होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड एक से कांग्रेस की ओर से युवा कांग्रेस नेता मनवर खान कायमखानी टिकट की दमदार दावेदारी करने जा रहे हैं। उनकी दावेदारी का दम ये है कि एक तो वे इस इलाके में पिछले तकरीबन 25 साल से सक्रिय हैं और दूसरा ये कि इस वार्ड के कुल लगभग आठ हजार मतदाताओं में से एक हजार दो सौ अल्पसंख्यक मतदाता हैं। मनजी भाई के नाम से सुपरिचित मनवर खान का व्यवसाय वार्ड के अंतर्गत आने वाले रीजनल कॉलेज के सामने मुख्य मार्ग पर तकरीबन 27 साल से है और उनका इलाके के सभी लोगों से सीधा व्यक्तिगत संपर्क है। कांग्रेस में उनकी सक्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अजमेर से पुष्कर या पुष्कर से अजमेर आते-जाते वक्त शायद ही ऐसा कोई वीआईपी हो, जिसका उनकी ओर से रीजनल कॉलेज चौराहे के पास स्वागत न किया गया हो। 21 दिसम्बर 1968 को जन्मे मनवर खान कांग्रेस में 1991 से सक्रिय हैं। वे एनएसयूआई, युवक कांग्रेस व अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। 1995 से लेकर अब तक जितने भी नगर परिषद व विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई है। यदि ये कहा जाए कि कोटड़ा व नौसर में उनकी टीम की वजह से ही कांग्रेस का जनाधार बना हुआ है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनकी चुनावी तैयारी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्टर भी शाया कर दिया है। इसके अतिरिक्त कायमखानी शोध संस्थान, श्री वीर तेजा सर्वधर्म समिति व श्री रामदेव बाबा समिति, कोटड़ा आदि से जुड़ कर सामाजिक कार्य करते रहे हैं। वर्तमान में व्यवसाय के रूप में एंगलिकन एजुकेशन प्रा. लि. और रोज-आना रेस्टोरेंट का संचालन कर रहे हैं। आगामी अगस्त माह में होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड एक से कांग्रेस की ओर से युवा कांग्रेस नेता मनवर खान कायमखानी टिकट की दमदार दावेदारी करने जा रहे हैं। उनकी दावेदारी का दम ये है कि एक तो वे इस इलाके में पिछले तकरीबन 25 साल से सक्रिय हैं और दूसरा ये कि इस वार्ड के कुल लगभग आठ हजार मतदाताओं में से एक हजार दो सौ अल्पसंख्यक मतदाता हैं।
आगामी अगस्त माह में होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड एक से कांग्रेस की ओर से युवा कांग्रेस नेता मनवर खान कायमखानी टिकट की दमदार दावेदारी करने जा रहे हैं। उनकी दावेदारी का दम ये है कि एक तो वे इस इलाके में पिछले तकरीबन पच्चीस साल से सक्रिय हैं और दूसरा ये कि इस वार्ड के कुल लगभग आठ हजार मतदाताओं में से एक हजार दो सौ अल्पसंख्यक मतदाता हैं। मनजी भाई के नाम से सुपरिचित मनवर खान का व्यवसाय वार्ड के अंतर्गत आने वाले रीजनल कॉलेज के सामने मुख्य मार्ग पर तकरीबन सत्ताईस साल से है और उनका इलाके के सभी लोगों से सीधा व्यक्तिगत संपर्क है। कांग्रेस में उनकी सक्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अजमेर से पुष्कर या पुष्कर से अजमेर आते-जाते वक्त शायद ही ऐसा कोई वीआईपी हो, जिसका उनकी ओर से रीजनल कॉलेज चौराहे के पास स्वागत न किया गया हो। इक्कीस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ अड़सठ को जन्मे मनवर खान कांग्रेस में एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से सक्रिय हैं। वे एनएसयूआई, युवक कांग्रेस व अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। एक हज़ार नौ सौ पचानवे से लेकर अब तक जितने भी नगर परिषद व विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई है। यदि ये कहा जाए कि कोटड़ा व नौसर में उनकी टीम की वजह से ही कांग्रेस का जनाधार बना हुआ है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनकी चुनावी तैयारी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्टर भी शाया कर दिया है। इसके अतिरिक्त कायमखानी शोध संस्थान, श्री वीर तेजा सर्वधर्म समिति व श्री रामदेव बाबा समिति, कोटड़ा आदि से जुड़ कर सामाजिक कार्य करते रहे हैं। वर्तमान में व्यवसाय के रूप में एंगलिकन एजुकेशन प्रा. लि. और रोज-आना रेस्टोरेंट का संचालन कर रहे हैं। आगामी अगस्त माह में होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड एक से कांग्रेस की ओर से युवा कांग्रेस नेता मनवर खान कायमखानी टिकट की दमदार दावेदारी करने जा रहे हैं। उनकी दावेदारी का दम ये है कि एक तो वे इस इलाके में पिछले तकरीबन पच्चीस साल से सक्रिय हैं और दूसरा ये कि इस वार्ड के कुल लगभग आठ हजार मतदाताओं में से एक हजार दो सौ अल्पसंख्यक मतदाता हैं।
भीमगोड़ा खेमानंद मार्ग के पास शनिवार रात को हाथियों का झुंड आने से अफरातफरी मच गई। लोगों के दहशत का माहैल बना हुआ है। आंधे घंटे की मशक्कत के बाद हाथियों को भगाया गया। इस दौरान वन कर्मियों ने सक्रियता दिखाई और हाथी की निगरानी की। उत्तरी हरिद्वार के कई इलाकों में हाथियों का आना आम बात है। हाथियों की सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इस कारण राजाजी की खड़खड़ी चौकी में 8 वनकर्मियों की तैनाती की गई है। शनिवार रात को 8 हाथियों का झुंड खड़खड़ी भीमगोड़ा में आ गया। हाथी को देख लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंच गए और हाथी आबादी क्षेत्र में न आये इसके लिए निगरानी करने लगे। लोग छत पर चढ़कर हाथियों की वीडियो बनाने लगे। हाथी बागरो नदी से होते हुए भीमगोड़ा की ओर आ गए थे। झुंड को दोबा जंगल में भेजा गया। अगले दो दिन वनकर्मी यहां निगरानी भी करेंगे। रेंजर विजय सैनी ने बताया कि हाथी को रात में ही जंगल की ओर खदेड़ दिया गया था। किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
भीमगोड़ा खेमानंद मार्ग के पास शनिवार रात को हाथियों का झुंड आने से अफरातफरी मच गई। लोगों के दहशत का माहैल बना हुआ है। आंधे घंटे की मशक्कत के बाद हाथियों को भगाया गया। इस दौरान वन कर्मियों ने सक्रियता दिखाई और हाथी की निगरानी की। उत्तरी हरिद्वार के कई इलाकों में हाथियों का आना आम बात है। हाथियों की सुरक्षा के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इस कारण राजाजी की खड़खड़ी चौकी में आठ वनकर्मियों की तैनाती की गई है। शनिवार रात को आठ हाथियों का झुंड खड़खड़ी भीमगोड़ा में आ गया। हाथी को देख लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंच गए और हाथी आबादी क्षेत्र में न आये इसके लिए निगरानी करने लगे। लोग छत पर चढ़कर हाथियों की वीडियो बनाने लगे। हाथी बागरो नदी से होते हुए भीमगोड़ा की ओर आ गए थे। झुंड को दोबा जंगल में भेजा गया। अगले दो दिन वनकर्मी यहां निगरानी भी करेंगे। रेंजर विजय सैनी ने बताया कि हाथी को रात में ही जंगल की ओर खदेड़ दिया गया था। किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
लोग आपदा को अवसर में बदलने का मौक़ा नहीं छोड़ते हैं, बशर्ते आपदा ख़ुद उन पर न हो. जो लोग ऐसा करते हैं, उन्हें आम दुनिया में मौकापरस्त कहा जाता है. हालांकि, एडवरटाइज़िंग की दुनिया में इसे मास्टरस्टोक की तरह लिया जाता है. Kent RO Systems, बहुत ही फ़ेमस कंपनी है. शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने इसका नाम नहीं सुना हो. घर-घर में कंपनी की ब्रांड एंबेस्डर हेमा मालिनी आपको इस कंपनी का पानी पीती मिल जाएंगी. बॉलिवुड की ड्रीम गर्ल का एक ही सवाल होता है 'क्या आपका प्यूरीफ़ायर भी घुली हुई अशुद्धियां निकालता है? ' 130 करोड़ देशवासी भी गंगा क़सम खाकर न में सिर हिला देते हैं. खैर, अब ये कंपनी सिर्फ़ पानी से अशुद्धियां नहीं निकाल रही है, बल्क़ि दूसरों के घरों में खाना बनाकर ख़ुद के लिए दो वक़्त की रोटी कमाने वाली मेड को भी निकालने की व्यवस्था कर रही है. कंपनी ने आटा गूंथने वाली डिवाइस का विज्ञापन निकाला है. इसमें लोगों से कहा गया कि वो अपनी मेड को आटा गूंधने न दें क्योंकि हो सकता है कि उनके हाथ संक्रमित हों. ये एड कुछ यूं हैं. इस विज्ञापन के सर्कुलेट होते ही सोशल मीडिया पर बवाल कट गया है. जिनको Kent RO का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है, वो भी नलके का पानी पी-पीकर गरिया रहे हैं. लोगों ने कंपनी पर कमज़ोर वर्गों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया, उनका कहना है कि इस तरह का एड 'सेक्सिस्ट' और 'क्लासिस्ट' है. ऐसे में लोग कंपनी का बहिष्कार करने की भी बात कर रहे हैं. Withdraw such advertisements. . हम तो कंपनी को यही सलाह देंगे कि एक प्यूरीफ़ायर अपने विज्ञापनों पर भी लगा लीजिए, काहे कि इत्ती अशुद्धियां आपकी कंपनी को बहुत ज़्यादा ही संक्रमित कर देंगी.
लोग आपदा को अवसर में बदलने का मौक़ा नहीं छोड़ते हैं, बशर्ते आपदा ख़ुद उन पर न हो. जो लोग ऐसा करते हैं, उन्हें आम दुनिया में मौकापरस्त कहा जाता है. हालांकि, एडवरटाइज़िंग की दुनिया में इसे मास्टरस्टोक की तरह लिया जाता है. Kent RO Systems, बहुत ही फ़ेमस कंपनी है. शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने इसका नाम नहीं सुना हो. घर-घर में कंपनी की ब्रांड एंबेस्डर हेमा मालिनी आपको इस कंपनी का पानी पीती मिल जाएंगी. बॉलिवुड की ड्रीम गर्ल का एक ही सवाल होता है 'क्या आपका प्यूरीफ़ायर भी घुली हुई अशुद्धियां निकालता है? ' एक सौ तीस करोड़ देशवासी भी गंगा क़सम खाकर न में सिर हिला देते हैं. खैर, अब ये कंपनी सिर्फ़ पानी से अशुद्धियां नहीं निकाल रही है, बल्क़ि दूसरों के घरों में खाना बनाकर ख़ुद के लिए दो वक़्त की रोटी कमाने वाली मेड को भी निकालने की व्यवस्था कर रही है. कंपनी ने आटा गूंथने वाली डिवाइस का विज्ञापन निकाला है. इसमें लोगों से कहा गया कि वो अपनी मेड को आटा गूंधने न दें क्योंकि हो सकता है कि उनके हाथ संक्रमित हों. ये एड कुछ यूं हैं. इस विज्ञापन के सर्कुलेट होते ही सोशल मीडिया पर बवाल कट गया है. जिनको Kent RO का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है, वो भी नलके का पानी पी-पीकर गरिया रहे हैं. लोगों ने कंपनी पर कमज़ोर वर्गों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया, उनका कहना है कि इस तरह का एड 'सेक्सिस्ट' और 'क्लासिस्ट' है. ऐसे में लोग कंपनी का बहिष्कार करने की भी बात कर रहे हैं. Withdraw such advertisements. . हम तो कंपनी को यही सलाह देंगे कि एक प्यूरीफ़ायर अपने विज्ञापनों पर भी लगा लीजिए, काहे कि इत्ती अशुद्धियां आपकी कंपनी को बहुत ज़्यादा ही संक्रमित कर देंगी.
मुंबई. एक्टर और डायरेक्टर सतीश कौशिक अब हमारे बीच में नहीं रहे हैं। एक्टर ने 66 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। एक्टर को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया लेकिन एक्टर को बचाया नहीं जा सका। सतीश के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर है। सभी स्टार्स सतीश को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। एक्टर अनुपम खेर ने ट्वीट कर लिखा- जानता हूं 'मृत्यु ही इस दुनिया का अंतिम सच है! ' पर ये बात मैं जीते जी कभी अपने जिगरी दोस्त सतीश कौशिक के बारे में लिखूंगा, ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। 45 साल की दोस्ती पर ऐसे अचानक पूर्णविराम! ओम् शांति! अजय देवगन ने दुख जाहिर करते हुए लिखा- सतीश जी (कौशिक) के निधन की दुखद खबर से नींद खुली। मैंने ऑन और ऑफ स्क्रीन उनके साथ हंसी-मजाक किया है। उनकी उपस्थिति ने एक फ्रेम भर दिया। जिंदगी में भी हम जब भी मिले वो मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आए। उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं। RIP सतीश जी।
मुंबई. एक्टर और डायरेक्टर सतीश कौशिक अब हमारे बीच में नहीं रहे हैं। एक्टर ने छयासठ की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। एक्टर को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया लेकिन एक्टर को बचाया नहीं जा सका। सतीश के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर है। सभी स्टार्स सतीश को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। एक्टर अनुपम खेर ने ट्वीट कर लिखा- जानता हूं 'मृत्यु ही इस दुनिया का अंतिम सच है! ' पर ये बात मैं जीते जी कभी अपने जिगरी दोस्त सतीश कौशिक के बारे में लिखूंगा, ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। पैंतालीस साल की दोस्ती पर ऐसे अचानक पूर्णविराम! ओम् शांति! अजय देवगन ने दुख जाहिर करते हुए लिखा- सतीश जी के निधन की दुखद खबर से नींद खुली। मैंने ऑन और ऑफ स्क्रीन उनके साथ हंसी-मजाक किया है। उनकी उपस्थिति ने एक फ्रेम भर दिया। जिंदगी में भी हम जब भी मिले वो मेरे चेहरे पर मुस्कान ले आए। उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं। RIP सतीश जी।
अभी तक आप अपने IRCTC की यूजर आईडी से 6 टिकट बुक करा सकते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव किए गए हैं. अब एक यूजर अपने IRCTC अकाउंट से 24 टिकट बुक करा सकता है. यदि आपका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक नहीं है तो आप सिर्फ 12 टिकट बुक करा सकते हैं. वहीं ,अगर आपका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक है तो अब 24 टिकट आप एक महीने में बुक करा सकते हैं. आइए जान लेते हैं आधार को IRCTC अकाउंट से कैसे लिंक करें. सबसे पहले www. irctc. co. in पर जाएं. अब वेबसाइट पर यूजर आईडी और पासवर्ड डालकर लॉगइन करें. ऊपर मेनू ऑप्शन में जाकर अकाउंट पर click कर लिंक Aadhaar करें. आधार पर अंकित नाम,पता ,नंबर एवं मांगी हुई सारी जानकारी भरें. चेक बॉक्स टिक कर OTP भरें और अपडेट बटन पर क्लिक कर सब्मिट करें. आधार कार्ड लिंक होने के बाद आपको कंफर्मेशन मैसेज आ जाएगा.
अभी तक आप अपने IRCTC की यूजर आईडी से छः टिकट बुक करा सकते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव किए गए हैं. अब एक यूजर अपने IRCTC अकाउंट से चौबीस टिकट बुक करा सकता है. यदि आपका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक नहीं है तो आप सिर्फ बारह टिकट बुक करा सकते हैं. वहीं ,अगर आपका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक है तो अब चौबीस टिकट आप एक महीने में बुक करा सकते हैं. आइए जान लेते हैं आधार को IRCTC अकाउंट से कैसे लिंक करें. सबसे पहले www. irctc. co. in पर जाएं. अब वेबसाइट पर यूजर आईडी और पासवर्ड डालकर लॉगइन करें. ऊपर मेनू ऑप्शन में जाकर अकाउंट पर click कर लिंक Aadhaar करें. आधार पर अंकित नाम,पता ,नंबर एवं मांगी हुई सारी जानकारी भरें. चेक बॉक्स टिक कर OTP भरें और अपडेट बटन पर क्लिक कर सब्मिट करें. आधार कार्ड लिंक होने के बाद आपको कंफर्मेशन मैसेज आ जाएगा.
निस्वार्थ भावना से श्रोतप्रोत रहती है, सन्तति विछोह में उसका वात्सल्य-क्ति हृदय जिस प्रकार तड़प-तड़पकर कराह उठता है, उसी तीव्र अनुभूति का अनुभव करने के लिए भक्त जन लालायित रहते है । अपने उपास्य देव को बाल सौजन्य के इस स्निग्ध रूप से अनुरंजित कर, अपने हृदय की पुरुषोचित प्रवृत्तियों में नारी के निःस्फूह और निःस्वार्थ प्रेम प्रारोपण कर मानों इन भक्तों ने चिर अभिक्षप्त नारी समाज के स्नेहसिक्त मानस तथा निस्पृह त्याग को मान्यता प्रदान की । जीवन के अभिशापों के मध्य मध्यकालीन नारी अपने नारीत्व की रक्षा करती हुई सन्तोष प्राप्त करती थी, माँ के वात्सल्य तथा नारी हृदय के माधुर्य के सहारे ही वह अपनी नीरसता में रस की सृष्टि कर सकती थी, यद्यपि इस त्याग और बलिदान का प्रतिदान लौकिकताजन्य स्वार्थ के कारण उसे नहीं प्राप्त हो सका, पर लौकिक जीवन से परे अपनी मुक्ति का मार्ग पाने का प्रयास करने वाले इन प्रेमी भक्तों ने, जिनके हृदय में कृष्ण प्रेम का प्रवाह सागर हिलोरें ले रहा था, नारी-हृदय की मूल भावनाओं को ही अपने हृदय से अनुभूत तथा बाणी द्वारा अभिव्यक्त कर, नारी की महानता और निःस्पृहता की साक्षी दी । कृष्ण के प्रति इस अनुराग को अभिव्यक्ति के लिए उन्होंने अपने को नन्द नहीं यशोदा माना । यशोदा का कृष्ण के प्रति स्नेह तथा तद्जनित उल्लास उनके हो हृदय का अनुराग तथा उल्लास था। निर्गुरण पंथ की नारी-भर्त्सना नारी के मातृ श्रंश की अनुभूति से सिक्त अनेक उक्तियों में घुलकर बह गई । मातृ रूप की प्रतीक यशोदा है। यशोदा के भाग्य की सराहना करते-करते भक्तों ने अनेक बार उनके सुख की कल्पना को देवताओं, ऋषियों तथा मुनियों की शक्ति के परे वतलाकर बार-बार योग, ज्ञान इत्यादि पर सगुरण भक्ति की इस पुण्य अनुभूति की विजय घोषित की। कृष्ण के शैशव, बाल्यकाल और किशोरकाल में यशोदा के मातृ-हृदय का सुन्दर विकास चित्रित है, कृष्ण की बालोचित भोली-भाली उक्तियों के प्रति यशोदा की गद्गद् भावना, उनके नटवरपन के प्रति उनकी प्रेमभरी खोक, राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रति उनका मातोचित उल्लास, साधारण नारी-जीवन के मातृ रूप के ही चित्रण है। यशोदा का निस्पृह दुलार, कृष्ण के प्रति उनका अटूट प्यार, भक्तों का आदर्श है । शिशु कृष्ण की माँ के रूप से लेकर किशोर कुष्ण की माँ के रूप तक उनका चित्रण अनुपम है। वात्सल्य के संयोग तथा वियोग दोनों ही पक्ष लिये गये हैं, एक ओर भाँ यशोदा पुत्र के वालरूप और सलोनी छवि पर बलिहारी जाती हुई कहती हैलालन तेरे मुख पर हौं बारी । बाल-गोपाल लगे इन नैननि रोग बलाय तुम्हारी ।। और दूसरी और उनकी कृष्ण-वियोगजन्य उक्तियाँ मर्मस्थल पर आघात करतो हूँ यद्यपि मन समुभावत लोग । शूल होत नवनीत देख मेरे मोहन के मुख जोग ।। वात्सल्य - भावना की मुख्य प्रतीक यद्यपि यशोदा ही हैं पर गोपियाँ भी इस से प्रोत-प्रोत हैं, इन गोपियों में वह ब्रजांगनाएँ हैं जिनमें वात्सल्य ही प्रधान हूँ कृष्ण की बाल लीलाशों में उनका हृदय पूर्ण रूप से रम जाता है । जो कुछ कहे ब्रजवधू सोई-सोई करत, तोतरे बैन रोय परत वस्तु जब भारी न उठत, तब चूम मुख जननी उर सों लगावै ॥ बैन काह लोनी मुख चाही रहत, बदन हँसि स्वभुज बीच लं लै कलोलै । धाम को काम ब्रजबाम सब भूमि रहो, कान्ह बलराम के संग डोले ॥ वात्सल्य रस से रंजित इन गोपियों को प्रजांगना की संज्ञा दी गई है। बालक के प्रति प्रकर्षरण नारी की प्रधान प्रकृति होती है। प्रतः सूर परमानन्ददास, नन्ददास इत्यादि कवियों को मातृ-श्रनुभूतियों के चित्रण ने उन्हें बहुत आकर्षित किया, इससे अधिक नैकट्य उन्हें यशोदा के सातृ रूप में प्राप्त हुआ । यशोदा के चित्र में अपनी ही कोमल भावनामों के अंत के द्वारा उन्हें पूर्व हर्ष और गर्व दोनों ही हुआ होगा । यद्यपि उस युग को नारी भर्त्सना और उपेक्षा में कतिपय स्त्रियों के स्वर मिले हुए हैं, यह विवाद है कि अपनी भावनाओं के इस उच्च मूल्यांकन से उन्हें आत्मश्लाघा की भावना अवश्य भाई होगी। यशोदा के मातृ रूप में केवल माताओं को ही अपनी अभिव्यक्ति नहीं मिलती बल्कि नारीमात्र को उनके रूप में अपनी छाया दृष्टिगत होती है। साधना के मार्ग में भी इसी प्रकार उनके जीवन में एक अंश के चित्ररण तथा हार्दिक सहानुभूति को प्रभिव्यक्ति के कारण कृष्ण भक्ति की ओर स्त्रियों को स्वभावतः आकर्षण हुआ । कृष्ण की नन्हीं-नन्हीं दंतुलिया, उनकी किलकारी बालसुलभ क्रीड़ाएँ तथा दैनिक क्रियाओं इत्यादि के वर्णन में कवियों में साधारण जोवन से अनेक उपकरण लेकर अपनी रचनाएँ की थीं। शिशु के प्रति सहज स्नेह, उनको कीड़ाओं से उत्पन्न श्रवार उल्लास, वियोगजनित प्राकुलता इत्यादि मुख्य भाव से सम्बन्धित अनेक संचारी तथा प्रतुभाव नारी-जीवन के ही चित्र थे । तालीन वारी ने प्राचार्यो द्वारा अपने जीवन के इस आध्यात्मिक प्रारोपण पर इलाधा का अनुभव चाहे न किया हो, पर आज की नारी उस भावना की कल्पना तथा विचार पर विना गर्व किये नहीं रह सकती । माधुर्य प्रीति भक्ति का सर्वप्रधान अंश है। प्रेम अथवा रति शृंगार एक दूसरे के पर्याय तो नहीं बन सकते। अनेक प्राचार्यों ने भक्ति को एक स्वतन्त्र रस माना
निस्वार्थ भावना से श्रोतप्रोत रहती है, सन्तति विछोह में उसका वात्सल्य-क्ति हृदय जिस प्रकार तड़प-तड़पकर कराह उठता है, उसी तीव्र अनुभूति का अनुभव करने के लिए भक्त जन लालायित रहते है । अपने उपास्य देव को बाल सौजन्य के इस स्निग्ध रूप से अनुरंजित कर, अपने हृदय की पुरुषोचित प्रवृत्तियों में नारी के निःस्फूह और निःस्वार्थ प्रेम प्रारोपण कर मानों इन भक्तों ने चिर अभिक्षप्त नारी समाज के स्नेहसिक्त मानस तथा निस्पृह त्याग को मान्यता प्रदान की । जीवन के अभिशापों के मध्य मध्यकालीन नारी अपने नारीत्व की रक्षा करती हुई सन्तोष प्राप्त करती थी, माँ के वात्सल्य तथा नारी हृदय के माधुर्य के सहारे ही वह अपनी नीरसता में रस की सृष्टि कर सकती थी, यद्यपि इस त्याग और बलिदान का प्रतिदान लौकिकताजन्य स्वार्थ के कारण उसे नहीं प्राप्त हो सका, पर लौकिक जीवन से परे अपनी मुक्ति का मार्ग पाने का प्रयास करने वाले इन प्रेमी भक्तों ने, जिनके हृदय में कृष्ण प्रेम का प्रवाह सागर हिलोरें ले रहा था, नारी-हृदय की मूल भावनाओं को ही अपने हृदय से अनुभूत तथा बाणी द्वारा अभिव्यक्त कर, नारी की महानता और निःस्पृहता की साक्षी दी । कृष्ण के प्रति इस अनुराग को अभिव्यक्ति के लिए उन्होंने अपने को नन्द नहीं यशोदा माना । यशोदा का कृष्ण के प्रति स्नेह तथा तद्जनित उल्लास उनके हो हृदय का अनुराग तथा उल्लास था। निर्गुरण पंथ की नारी-भर्त्सना नारी के मातृ श्रंश की अनुभूति से सिक्त अनेक उक्तियों में घुलकर बह गई । मातृ रूप की प्रतीक यशोदा है। यशोदा के भाग्य की सराहना करते-करते भक्तों ने अनेक बार उनके सुख की कल्पना को देवताओं, ऋषियों तथा मुनियों की शक्ति के परे वतलाकर बार-बार योग, ज्ञान इत्यादि पर सगुरण भक्ति की इस पुण्य अनुभूति की विजय घोषित की। कृष्ण के शैशव, बाल्यकाल और किशोरकाल में यशोदा के मातृ-हृदय का सुन्दर विकास चित्रित है, कृष्ण की बालोचित भोली-भाली उक्तियों के प्रति यशोदा की गद्गद् भावना, उनके नटवरपन के प्रति उनकी प्रेमभरी खोक, राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रति उनका मातोचित उल्लास, साधारण नारी-जीवन के मातृ रूप के ही चित्रण है। यशोदा का निस्पृह दुलार, कृष्ण के प्रति उनका अटूट प्यार, भक्तों का आदर्श है । शिशु कृष्ण की माँ के रूप से लेकर किशोर कुष्ण की माँ के रूप तक उनका चित्रण अनुपम है। वात्सल्य के संयोग तथा वियोग दोनों ही पक्ष लिये गये हैं, एक ओर भाँ यशोदा पुत्र के वालरूप और सलोनी छवि पर बलिहारी जाती हुई कहती हैलालन तेरे मुख पर हौं बारी । बाल-गोपाल लगे इन नैननि रोग बलाय तुम्हारी ।। और दूसरी और उनकी कृष्ण-वियोगजन्य उक्तियाँ मर्मस्थल पर आघात करतो हूँ यद्यपि मन समुभावत लोग । शूल होत नवनीत देख मेरे मोहन के मुख जोग ।। वात्सल्य - भावना की मुख्य प्रतीक यद्यपि यशोदा ही हैं पर गोपियाँ भी इस से प्रोत-प्रोत हैं, इन गोपियों में वह ब्रजांगनाएँ हैं जिनमें वात्सल्य ही प्रधान हूँ कृष्ण की बाल लीलाशों में उनका हृदय पूर्ण रूप से रम जाता है । जो कुछ कहे ब्रजवधू सोई-सोई करत, तोतरे बैन रोय परत वस्तु जब भारी न उठत, तब चूम मुख जननी उर सों लगावै ॥ बैन काह लोनी मुख चाही रहत, बदन हँसि स्वभुज बीच लं लै कलोलै । धाम को काम ब्रजबाम सब भूमि रहो, कान्ह बलराम के संग डोले ॥ वात्सल्य रस से रंजित इन गोपियों को प्रजांगना की संज्ञा दी गई है। बालक के प्रति प्रकर्षरण नारी की प्रधान प्रकृति होती है। प्रतः सूर परमानन्ददास, नन्ददास इत्यादि कवियों को मातृ-श्रनुभूतियों के चित्रण ने उन्हें बहुत आकर्षित किया, इससे अधिक नैकट्य उन्हें यशोदा के सातृ रूप में प्राप्त हुआ । यशोदा के चित्र में अपनी ही कोमल भावनामों के अंत के द्वारा उन्हें पूर्व हर्ष और गर्व दोनों ही हुआ होगा । यद्यपि उस युग को नारी भर्त्सना और उपेक्षा में कतिपय स्त्रियों के स्वर मिले हुए हैं, यह विवाद है कि अपनी भावनाओं के इस उच्च मूल्यांकन से उन्हें आत्मश्लाघा की भावना अवश्य भाई होगी। यशोदा के मातृ रूप में केवल माताओं को ही अपनी अभिव्यक्ति नहीं मिलती बल्कि नारीमात्र को उनके रूप में अपनी छाया दृष्टिगत होती है। साधना के मार्ग में भी इसी प्रकार उनके जीवन में एक अंश के चित्ररण तथा हार्दिक सहानुभूति को प्रभिव्यक्ति के कारण कृष्ण भक्ति की ओर स्त्रियों को स्वभावतः आकर्षण हुआ । कृष्ण की नन्हीं-नन्हीं दंतुलिया, उनकी किलकारी बालसुलभ क्रीड़ाएँ तथा दैनिक क्रियाओं इत्यादि के वर्णन में कवियों में साधारण जोवन से अनेक उपकरण लेकर अपनी रचनाएँ की थीं। शिशु के प्रति सहज स्नेह, उनको कीड़ाओं से उत्पन्न श्रवार उल्लास, वियोगजनित प्राकुलता इत्यादि मुख्य भाव से सम्बन्धित अनेक संचारी तथा प्रतुभाव नारी-जीवन के ही चित्र थे । तालीन वारी ने प्राचार्यो द्वारा अपने जीवन के इस आध्यात्मिक प्रारोपण पर इलाधा का अनुभव चाहे न किया हो, पर आज की नारी उस भावना की कल्पना तथा विचार पर विना गर्व किये नहीं रह सकती । माधुर्य प्रीति भक्ति का सर्वप्रधान अंश है। प्रेम अथवा रति शृंगार एक दूसरे के पर्याय तो नहीं बन सकते। अनेक प्राचार्यों ने भक्ति को एक स्वतन्त्र रस माना
1 कलेरा में हिचकी हिचकी के साथ पसीना, हिचकी के बाद ऐंठन, मतली व कमजोरी । हिचकी के कारण सिर, गर्दन, हाथ पांव टेढ़ा हो कএ নा जाता है; विकार ।" ,,, । सिकुटा ६-३०-तेज आवाजके साथ खतरेनाक़ हिलकी; के के साथ सिर व गर्दन पीछे के तरफ टेढ़ा होजाता है। ऊंचाई, आंख चढ़ जाना, कृमी के कारण हिचकी कार्वी भेज ३० - जरासा हिलने से हिचकी, खाहोश खाने पीने से हिचको । पेट फूलना । हायोसायंमस ६-३० - हिचकी के साथ चेखबरी से पेशाब होना. मुंह मे फेन, हिचकी के साथ पेट में ऐंठन व पेट बोलना, बेहोशी बिछावन खसोटना, ऐंठनः। 1267 इग्नेशिया ३० २०० - खाने पीने से हिचकी ज्यादा होना, तमाम बदन काँपता है। मानसिक उत्तेजना से हिचकी । पल्सेटिला ६-३० - हिचकी के साथ दम फूलना, नींद के साथ या कुछ पीने से हिचकी, प्यास न होना, तेल, घी, चर्चा की चीज खाने से हिचकी' । फसफोरस ६-३० - मोजन के बाद तेज हिचको, बिना कारण से हिचको, वायें करवट लेटने से हिचकी बढ़ती है । चायना ६३० - हिचकी के साथ सट्टा ढेकार, पेट फूलना । कुप्रम ऐंसेट ३ - जल्द २ तेज़ हिचकी, जर आवाज के
एक कलेरा में हिचकी हिचकी के साथ पसीना, हिचकी के बाद ऐंठन, मतली व कमजोरी । हिचकी के कारण सिर, गर्दन, हाथ पांव टेढ़ा हो कএ নा जाता है; विकार ।" ,,, । सिकुटा छः-तीस-तेज आवाजके साथ खतरेनाक़ हिलकी; के के साथ सिर व गर्दन पीछे के तरफ टेढ़ा होजाता है। ऊंचाई, आंख चढ़ जाना, कृमी के कारण हिचकी कार्वी भेज तीस - जरासा हिलने से हिचकी, खाहोश खाने पीने से हिचको । पेट फूलना । हायोसायंमस छः-तीस - हिचकी के साथ चेखबरी से पेशाब होना. मुंह मे फेन, हिचकी के साथ पेट में ऐंठन व पेट बोलना, बेहोशी बिछावन खसोटना, ऐंठनः। एक हज़ार दो सौ सरसठ इग्नेशिया तीस दो सौ - खाने पीने से हिचकी ज्यादा होना, तमाम बदन काँपता है। मानसिक उत्तेजना से हिचकी । पल्सेटिला छः-तीस - हिचकी के साथ दम फूलना, नींद के साथ या कुछ पीने से हिचकी, प्यास न होना, तेल, घी, चर्चा की चीज खाने से हिचकी' । फसफोरस छः-तीस - मोजन के बाद तेज हिचको, बिना कारण से हिचको, वायें करवट लेटने से हिचकी बढ़ती है । चायना छः सौ तीस - हिचकी के साथ सट्टा ढेकार, पेट फूलना । कुप्रम ऐंसेट तीन - जल्द दो तेज़ हिचकी, जर आवाज के
जान-पहचान और संपर्क की घनिष्ठता बढ़ने पर यार-दोस्तों की मंडली जुड़ती गयी । विद्यालय की सीमा छोड़ने पर खत्ता-दड़ी, धुन्ना, अंटा, और लट्टू खेलने की ऐसी बान पड़ी कि दूसरी कोई भी बात अच्छी नही लगती थी । खाना खाते समय मन खत्ता-दड़ी के साथ गुड़कने लग जाता ; पढ़ते समय धुन्ना के डण्डों में सराबोर हो जाता । धुन्ने की जीत में कोई लकड़ियों की जीत थोड़े ही होती थी, गढ़- किलों की जीत होती थी । जीते हुए अंटों के बहाने तो मानो चमकते सितारे ही जेबों में छिपे रहते । लट्टू की गरणाटी के बहाने मेरे अंतस की सारी दुनिया ही घूमने लगती । जाग्रत अवस्था में जीती हुई लकड़ियां व काच की गोलियां तो सुरक्षित रहतीं, लेकिन नीद में जीता हुआ राज्य आंख खुलते ही वापस छिन जाता । सपने में खोये हुए अंटों और धुन्नों का वास्तविक खजाने की लूट से भी ज्यादा दुख होता । दिन, पर्वत से ढले झरने की भांति प्रबल वेग से ढल रहे थे । रात-दिन से आगे छलांगें भर रही थी और दिन-रात से आगे चौकड़ियां भर रहा था। समझ नही पड़ता कि आज अंटा, धुन्ना और लट्टू खेले बिना दिन क्योंकर अस्त होता है और रात किस तरह ढलती है ? उन दिनों तो इस बात के लिए भगवान के कहे का भी विश्वास नहीं करता । मगर आज तो उन बातो को बरस पचास बीत गये । घोड़ों की क्या बिसात, उन बीती बातों को तो रॉकेट भी नही पहुंच सकता । कभी-कभार तो मन में यह संदेह होने लगता है कि पिछली सारी ख्यात अख्यात मेरे ही जीवन में बीती या किसी और के ? वह बालक क्या मैं ही था ? यदि सचमुच मैं ही था तो मेरी उसी काया में वे अनगिन स्वरूप कहां लुप्त हो गये ? वह बाल्य - रूप कहां दुबक गया ? वह चंचल यौवन कहां ओझल हो गया ? उन दिनों तो ऐसा महसूस होता था कि धुन्ना, खत्ता-दड़ी और अंटा खेलने के सिवाय मनुष्य दूसरे काम करता ही क्यों है ? क्यों इधर-उधर ललचाता है और क्यों प्रपंच करता है ? क्यों चाकरी करता है, क्यों व्यापार करता है और क्यो खेती करता है ? किन्तु आज स्वय मुझे ही धुन्ना, खत्ता - दडी, अंटा और लट्टू खेले हुए युग बीत गये ! कभी भी वापस खेलने की इच्छा नही हुई । फकत आज तुम्हें यह पाती लिखते समय अंतस में दुबकी हुई पुरानी बातें कुलबुला उठी है। मेरा - मुझ से ही यह अलंध्य फासला कैसे हो गया ? क्यों हो गया ? तुम्हारे माध्यम से मैं स्वयं अपने-आपसे यह सवाल कर रहा हूं ! बीती हुई सारी जिन्दगी ही एक बड़ा सवाल बन गयी है, जिसका जवाब देना चाहूं तो दे नही सकूगा ? और मुझे यों ही जवाब देने से बेहद खीज है । परीक्षा के डर से भी जवाब देने की इच्छा नही होती थी । स्वयं मनुष्य ही अपने आप में एक भरकम और अंतिम सवाल है। सवाल-दर-सवाल परस्पर गुथे हुए हैं, जिसका कही भी कोई उत्तर नही है। मिथ्या संतोष को बहलाने की खातिर जवाब मिलता भी है तो थोड़ी देर के लिए, फिर अगले ही क्षण वह जवाब ही स्वय एक सवाल बन कर फुफकारने लगता है ! बात कुछ भटक गयी, फिर से सीधी राह लौटता हू । तो--- गुरुओं के ठोले-घूसों का कुछ ऐसा करिश्मा हुआ इरपिंदर, कि मैं बरस गुजरने के पहले-पहले कोरी पाटी पर सन्नाट लिखने लग गया, छपी हुई पोथी फर्राट बांचने लगा । ऐसा महसूस होने लगा, जैसे उस पढ़ाई के बहाने मैं प्रकृति का अगम रहस्य खोल रहा हूं । पाटी पर अंकित अक्षर आंखों के सामने नाचने लगते । आंखों की दृष्टि के द्वारा हृदय के भीतर प्रवेश करने वाले अक्षर अनहद घूमर की धमा-चौकड़ी मचाने लगते । दूसरी कक्षा पास करके तीसरी मे आया । अंग्रेजी राज्य की दुहाई गांव-गांव तक फैल चुकी थी। गुरुओं का मन भी अंग्रेजी सिखाने के लिए व्याकुल रहता था। मगर राम-जाने क्यों मेरे मन में अंग्रेजी का ऐसा आतंक पैदा हुआ कि याद करने के पहले ही उसे भूल जाता । अंग्रेजी की ए, बी, सी, डी, तो मेरी सीढ़ी [अर्थी] ही निकालती थी । बेइन्तहा मार खाने पर इस म्लेच्छ भाषा से ऐसा मन फटा कि अब भी अनगिन पुस्तकें बांचने के बावजूद न तो अच्छी तरह अंग्रेजी बोल सकता हू और न लिख सकता हू । सदा-सदैव इस से किनारा करने का आखिर यह परिणाम हुआ ! अब भी किसी हिन्दुस्तानी को फर्राट अंग्रेजी बोलते सुनता हू तो ऐसा प्रतीत होता है कि सर्कस का चतुर बंदर गिटपिट-गिटपिट नकल कर रहा है । या कोई होशियार मिट्ठू रटे-रटाये बोलों की उलटी कर रहा है । उन दिनों अंग्रेजी का फकत यही मायना समझता था कि यह मार खाने की विद्या है । जब अंग्रेजों ने भी अपने अधीन गुलामों पर जुल्म करने में कोई कसर नहीं रखी तो उनकी भाषा क्यों हम पर रहम करेगी ? एक मर्तबा सयोग की बात ऐसी बनी कि अंग्रेजी के गुरु आनंदीलालजी ने मुझ से अंग्रेजी के किसी शब्द की स्पेलिंग पूछी। आधी-अधूरी जानता था, वह भी भूल गया । होंठों पर अंजलि का संकेत करके प्याऊ की तरफ रवाना हो गया। अपने हाथ से ही पानी पीने लगा तो पीछा करते मा 'ट सा'ब आग-बबूला होकर भड़क उठे । वे केवल नाम मात्र के ही आनदीलालजी थे. विद्यार्थियों को दुख पहुंचाने में उनका कोई जवाब नही था । कान उमेठ कर मुझे बुरी तरह पीटा - लातों में, घूसों से और ठोलों से । पसली में किसी एक घूस की असह्य चोट से मै मूच्छित हो गया। विद्या मीखने के निमित्त मार जरूरी होते हुए भी मुझे वैसी बेजा मार का सपने में भी अनुमान नहीं था । होश आते ही गुस्सा तो ऐसा भभका कि गुरुजी की लुग्धी बना दूं, मगर कुछ भी राह नहीं सूझी। फिर भी थकी हुई निर्बल देह में वैताल प्रवेश करन के बाद मुझ से सब्र नही रखा गया । गुरुजी की दक्षिणा' मटकियो को चुकायी। एक-एक ठोकर के साथ-ही-साथ तमाम मटकियों का सफाया हो गया। यह तो सांप्रत यमराज को चुनौती थी। फिर आनंदीलालजी पीटने के आनंद मे क्यों कसर रखते ? सटाक्-सटाक् बल खाती बेत से ठौरकुठौर सारा शरीर धुन डाला। चौडी नीली रेखाओं से तमाम शरीर में जाली चित्रित हो गयी । सरस्वती देवी का महाप्रसाद इसी रूप में मिलता था । तब से मेरे रोम-रोम में अंग्रेजी के प्रति भयंकर उबकाई पैठ गयी । किन्तु संयोग की ऐसी बेजा कारस्तानी इरपिदर, कि पिछले चालीस बरस से अंग्रेजी बांचने के सिवाय दूसरा विकल्प ही नहीं है । नितनेम की तरह अंग्रेजी की पोथियों का पारायण करना पड़ता है, किन्तु उस दिन के आतंक से ऐसा कुण्ठाग्रस्त हुआ कि आज दिन भी न अंग्रेजी बोल पाता हूं और न लिख पाता हूं । मानो यह कोई चेत- अचेत कुकर्म हो । बांचने की विशेषता के लिए अंग्रेजी भाषा का कोई श्रेय नही । 'विलायत' की बजाय यदि म फ्रांस या जर्मनी के गुलाम होते तो फ्रेंच या जर्मन सीखनी पड़ती । अंग्रेजों के पहले फारसी का ऐसा ही बोलबाला था। गुलाम स्वप्न में भी आजादी का स्वाद नहीं चख सकता । इस परम पूजनीय देश की पावन धरती को परदेशियो के चरण स्पर्श का उछाह बेशुमार है । आजादी के ये चालीस बरस ही आज पवित्र गंगा-जमुना के लिए असह्य हो गये हैं । गुलामी की मधुर स्मृति जन-मन में छटपटाने लगी है । नौकरी करने वाले अह्लकार का एक पांव घर में तो दूसरा गली में । सुमेरजी वाभा की बदली बाड़मेर हुई तो मुझे भी पढ़ने के लिए बाड़मेर जाना पड़ा । आखिर छंटते-छंटते हम तीन जने ही बाकी बचे । जैतारण मे मिडल स्कूल नही था । इसलिए कुबेरजी वाभा को पाचवी कक्षा के बाद बिलाड़ा जाने की खातिर मजबूर होना पड़ा । मैंने और खूमदानजी ने जैतारण की जमपुरी से टी. सी. कटायी । वे मुझ से एक क्लास टी.सी. आगे थे । जोधपुर के 'बड़े-ऐसण' पहली बार रेल के इंजन का आर्त्तनाद सुना । सही पता नहीं लगा कि वह आर्त्तनाद अंग्रेजी में था, हिन्दी में या मारवाड़ी में ? गोरों की हिकमत से बनाये इंजन शायद अंग्रेजी में ही आतंनाद करते होंगे । श्वास-प्रश्वास के साथ काले स्याह धुएं के वगूले-ही-बगूले ! भक्ख-भक्ख की कर्कश आवाज के साथ वह लोहे की पटरियों पर फिसल रहा था । दैत्य - खईस के समान वीभत्स आकृति ! बेहद खौफनाक, मानो पिछले जन्म में अंग्रेजी का अध्यापक हो । लंबी-ही-लंबी रेल के अनगिनत डिब्बों से आखिर वह इंजन जुड़ा । प्रचड वैताल की तरह एक नथुने से काला धुआं और दूसरे नथुने से उबलती भाप ! एक नथुना सर पर और दूसरा पांव तले । मेरी आंखें चकन-बकन ! माथा आक-वाक ! गोरो की कारीगरी का कोई तूमार है भला ! सारी दुनिया पर राज्य करें तो भी कम है ! गांव की तमाम बस्ती समाये जितनी बडी गाड़ी । डिब्बे - ही - डिब्बे । न बैल जुते हुए और न घोड़े ! किस तरह चलेगी? यह गाड़ी तो दस हाथियों से भी नहीं खिच पायेगी ! गार्ड-बाबू की दूसरी या तीसरी सीटी के साथ ही इंजन ने जोर से आर्त्तनाद किया और चीखता - चिल्लाता आगे रपटने लगा । हड्डी-हड्डी मचक गयी होगी । परस्पर एक-दूसरे से गुथे हुए डिब्बे अपनी जगह छोड़ने के साथ ही चीत्कार करते हुए गुड़कने लगे । रेल तो सचमुच रवाना हो गयी लगती है ! अब किसी के रोकने पर रुकेगी थोड़े ही ! धीरे-धीरे बवडर की नाई वेग बढने लगा - खड़द-खड़द का डका बजाता हुआ । मानो कोई तूफान पटरियों पर धन्नाट भागने लगा हो । रेल को पकड़ने के लिए एक-एक झाड़-झंखाड़ उसका पीछा करने लगा, पर रेल तो रेल ही थी, किसी की पकड़ में नहीं आयी। स्टेशन आने पर अपने आप रुकती तो रुकती, नही तो अप्रतिहत गति से हाहाकार मचाती हुई दौड़ रही थी। ईश्वर न करे, शैतान भी मेहर-माया रखे - यदि पटरियों से फिसल पड़ी तो धरती के टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे । यही बातें मुझे सोचनी चाहिए थी तो मैंने शायद यही बातें सोची होंगी । काफी देर बाद अपनी कर्कश ताल के साथ रेल ने न जाने किस तरह की लोरी सुनायी कि अत्यधिक आश्चर्य व आशंका के बावजूद मेरी आंखें स्वतः ही मुदने लगी और मैं नींद की गोद में अचेत हो गया । सुमेरजी वाभा के झिंझोड़ने पर मैंने आखें खोली । कुली दनादन सामान उतार रहे थे । मेरी चेतना के परे ही बरबस वाड़मेर स्टेशन आ गया ! तो क्या हठीली रेल अपनी निरंकुश धत् में ही उड़ती जा रही थी ! थकावट मिटाने के बहाने वह तेजी से सांस खींच रही थी । दौड़ते-दौड़ते आखिर बेदम होकर हांफना पड़े तो इस में आश्चर्य की क्या बात ? सूरज से भी काफी देर बाद - घड़ी-डेढ़-घड़ी के उपरांत मेरी आंख खुली । अपरिचित स्टेशन । अजनबी मानुस । अजाना हाट-बाजार। अजानी राह । अजाने घर । अजाने गाछ-बिरछ । अजाने कुत्ते और अजाने ही कौए । पर जानी-पहचानी-सी कांव-कांव ! मानो मेरे शुभागमन का सहर्ष स्वागत कर रहे हों । राम-जाने उन कौओं को किस तरह यह सुराग लगा कि अंग्रेजी मे निपट ठोट बालक समय आने पर संयोग के चमत्कार से मातृभाषा के मर्मज्ञ पाठकों का अविस्मरणीय कथानवीस बनेगा ! इस पुस्तक की भूमिका के माध्यम से तुमने मेरी इसी सृजन-यात्रा की खातिर उत्सुकता प्रकट की थी । सचमुच, तुम्हारे उकसाने पर मैंने मुड़ कर पीछे देखा, चिर विस्मृत यात्रा के पदचिह्नों पर नजर गड़ायी । निस्संदेह मुझे कभी इस बात की अ शंका नही थी कि सृजन को बाद देकर मुझे उसकी कोख का हिसाब भी समझाना पड़ेगा। प्रसव के दौरान छटपटाती मां के लिए संतान को जन्म देना तो वाकई कष्टप्रद है, पर उस से भी बड़ी यातना है- प्रजनन की प्रक्रिया को अक्षरों के द्वारा व्यक्त करना । मैं आज वैसी ही गुत्थी में उलझ गया हूं । दूसरे दिन मैं और खूमजी वाभा स्कूल मे भरती होने के लिए हाब- गाब रवाना हुए तो रास्ते में सिपाहियों के साथ हथकड़ी और वेडियों में जकड़े सात-आठेक कैदी मिले । उन दिनों मुझे कैदियों से जबरदस्त डर लगता था । चोर, डाकू और हत्यारे ! देखते ही कंपकंपी छूटने लगती । समूचा शरीर रोमाचित हो उठता । उन कैदियों पर नजर पडते ही जैतारण की एक वीभत्स स्मृति का दंश मेरे हृदय मे गड़ गया-खुले चौक में मोटी लकड़ियों की टिकटी जमीन के भीतर गहरी गड़ी हुई । एक कैदी के हाथ-पांव, पूरमपूर चौड़े उस टिकटी से बंधे हुए । चारों तरफ मनुष्यों की तमाणबीन भीड़ । बेंतों का आदेश होते ही दो मेहतरों ने पानी में भीगी हुई कंटीली छड़ियां संभाली । एक मेहतर ने कैदी की लटकती तहमद उठाकर कमर से बांधी। उसकी बैठक पूरमपूर उघड़ गयी ! मैं गिनती अच्छी तरह जानता था । कंटीली छड़ी के प्रहार उड़ने लगे - एक... दो... तीन.........चार.......! प्रहार-दर-प्रहार वह कैदी इस कदर जोर से चिल्लाया कि मेरा समूचा शरीर थरथर कांपने लगा । कानों में जैसे खौलता तेल रिस रहा हो । फिर भी गिनती करूं इतना होश अवश्य था - पांच छः सात... । मनुष्य का ऐसा दर्दनाक चीत्कार पहली बार ही सुना था, मगर आज भी याद आने पर कंपकंपी छूटने लगती है। मेरे खयाल से उस कैदी का वह चीत्कार अब भी मिटा नहीं है ! तमाशा देखने की उत्सुक भीड़ में से कुछ शूरमा जोर से हंसे । आज सोचता हू कि हंसने वाले वे वीतराग व्यक्ति ज्यादा अपराधी थे या वह कैदी ? पंद्रह... सोलह... सत्रह । गिनती में कतई चूक नहीं थी । मानो मेरे शरीर को धुनते वे कंटीले प्रहार अचानक थम गये हों। कैदी को भी राहत का सांस मिला होगा । गिनती की संख्या तो अब भी काफी शेष है, मगर सजा की सीमा तो सत्रह बेंतों के उपरांत ही चुक गयी । हाकिम की मेहरबानी ! कैदी के नितंबों से खून झरने लगा। उस दिन की वह भयंकर छबि बरसों तक मुझे बेचैन करती रही । कैदी का वह हृदयविदारक चीत्कार, कंटीली बेंतों के प्रहार ! नितंबों से रिसता लहू ! हाथ-पांव बंधे हुए ! साथ-ही-साथ मुंह में डूंजा खसोल उसका मुह बांध देते तो बेहतर था । खाना खाते समय मुझे उबकाई तो नहीं आती। इरपिंदर ! आठ-दस बरस से एक सवाल मुझे निरंतर पछाड़ रहा है कि जब नेता, मंत्री, वकील, जज, डॉक्टर, साहूकार, संपादक, पंडे-पुजारी, मौलवी, प्रोफेसर, पुलिस, लेखक, आलोचक और अफसर इत्यादि - ये उजले-बुक अजगर जेलो से बाहर है तो जेलों के भीतर कौन हैं ? ? क्यू हैं ? ? ये श्रीमंत... ये सिरायत जेलों के बाहर गुलछरें उड़ा रहे हैं तो कानून के भरकम पोथों का मायना क्या है ? इन जेलों की सार्थकता क्या है ? यह बेकार इतना खर्च खाता फिर किसलिए ? भेड़ियों के हवाले इन निरीह भेड़ों की कब तक रखवाली होगी ? जब अपराधियों के जिम्मे ही सिंहासन है तो इन्हें कौन दंडित करेगा ? ये तो दंड सुनाने वाले हैं, तब इन्हें कौन सजा सुनाये ? आजकल आठों-पहर ऐसे सवालो के चाबुक मुझ पर बरसते रहते हैं ! क्षत-विक्षत करते है । कही मेरा सर तो नहीं चकरा गया ? इन सवालों का जवाब कौन गुरु जानता है ? केवल जानने मात्र से क्या होगा ? सरे आम दहाड़ने की हिम्मत चाहिए । वह इस देश के बाशिंदों से बिलकुल निःशेष हो गयी है । आजादी का छीका हाथ लगने पर वे पूरमपूर गुलाम हो गये हैं। मनुष्यों का रूप धर ढाणी-ढाणी, गांव-गांव और नगर-नगर गंडक, चीते, नाहर, जरख, बिज्जू, बन - बिलाव, नाग, अजगर, चील, गिद्ध, बाज, सिकरे और कौए मौज कर रहे हैं । प्रति वर्ष इनकी नफरी बढ़ रही है - असंख्य, अपरम्पार ! बढ़ते-बढ़ते सत्तर करोड़ के आसपास इनकी आबादी फैल गयी है । जानवरों की उपमा देने पर मनुष्य बुरा मानेगे या जानवर ? तुम्हे क्या लगता है ? तुम्हारा प्रत्युत्तर बांचने से मुझे काफी राहत मिलेगी । हमेशा की तरह देरी से जवाब न देकर, जरा जल्दी देना । आज की बात अलहदा है । उस दिन की बात अलहदा थी । इसी एक नाम से कक्षा में हाजरी देता था और आज भी उसी नाम से मेरी पहचान है । अधिकांश मित्रअधिकांश ही क्यों, लगभग सभी घनिष्ठ मित्र विजयदान देथा के बदले बिज्जी के नाम से संबोधित करते है । इस कोरे-मोरे एकल संबोधन के तहत क्या मैं सदावंत एक ही व्यक्ति रहा ? आठ-दस बरसों से एक - एक क्षण में बदलता रहा हू । कल था सो आज नही । आज हूं सो परसा नहीं रहूंगा, सवेरे ह सो सांझ नही । सांझ हू सो रात नही । रात हू सो प्रभात नही । फिर भी नाम का संबोधन जीवन पर्यन्त एक ही रहेगा । अर्जुन और कृष्ण भगवान के सहस्र नामों का मर्म अब कही अच्छी तरह समझ मे आने लगा है । जैतारण वाले कैदी की दारुण स्मृति में उलझा हुआ मैं स्कूल पहुंचा। मटिया निकर, मटिया कमीज । पीली टोपी ! बेहद दुबला-पतला । मरियल टांगें । डेढ़ अंगुल का ललाट । बदसूरत काठी । खूमजी वाभा काफी कुछ फबते और सुंदर थे । स्कूल के मनमौजी छात्रों ने मेरा हुलिया देखा तो उसी दिन से चिढ़ाने लगे। मन पूरमपूर कसैला हो उठा । पर जोर क्या करता, निपट निजोरी बात थी । भरती होने पर कोई पांच-सातेक दिन जैसे-तैसे कट गये । एक दिन क्लास में अंग्रेजी पढ़ाते समय मा'ट सा'ब ने मुझे पाठ बाचने का आदेश किया। धूजती टांगों पर बड़ी मुश्किल से खड़ा हो सका । अंग्रेजी के नाम पर फकत बुखार ही नही चढ़ा । बोलना शुरू किया तो जीभ मानो चिपक गयी। आधी मूर्च्छा की हालत में दो- एक पंक्तियां बड़ी मुश्किल से पढ़ पाया कि सारी क्लास एक साथ जोर से ठहाका मारकर हंस पड़ी । उच्चारण की चार-पांचेक ऐसी ही गलतिया हो गयी थी। रोकर नीचे बैठ गया। अंग्रेजी के लिए उस दिन बचे-खुचे उत्साह पर भी पाला पड़ गया । फांसी के तख्ते की बनिस्बत मुझे अंग्रेजी का डर ज्यादा लगता था । न किसी दौड़ मे पारंगत था और न किसी खेल में । हिन्दी, गणित और संस्कृत में काफी तर्राट था । मगर अंग्रेजी में एकदम भोट । तिस पर स्कूल में कभी खेल-कूद की प्रतियोगिता होती तो मंगते की नाई जीतने वाले की तरफ ललचाई निगाह से देखता । इधर एक ही घर मे बूमदानजी छोटी या लंबी दौड़ में एक भी इनाम नही छोड़ते । जिस किसी में भाग लेते उस में अव्वल । इनाम-ही- इनाम बुहार कर लाते । अक्सर टोकरी छोटी पड़ जाती । तेल की बोतल, काच, रेशमी रूमाल, बनियान, तौलिये इत्यादि । और मेरे पास कुछ भी नही । वही स्कूल का बस्ता और वही पीली टोपी । खूब ही लज्जित होता । शर्म के मारे केवल जमीन में गड़ना शेष रहता। क्या करता, जमीन फटती ही नहीं थी। अपने आप से घिन होने लगी। सचमुच मुझे कुछ ऐसा ही महसूस होता कि सूरज का प्रकाश फकत खूमदानजी की खातिर ही चमकता है और रात का काला - गहन अंधियारा फकत मेरे लेखे घुटन फैलाता है। करवट बदलते-बदलते काफी रात ढलने पर नीद आती। नीद के सपनो में भी सब से ढंगी रहता । दौड़ते-दौड़ते लड़खड़ा कर गिर पड़ता । न जगने पर शांति और न नीद में चैन । नग आकर हिन्दी, संस्कृत व गणित से कुश्ती लडता । कद-काठी में सब से छोटा और दुबला होने के कारण लडकियो के साथ बैठने की इजाजत मिल जाती थी। लड़कियो के सामने हेटी न लगे, मन-ही-मन ऐसी तरकीबें सोचता। किसी सीगे मे नाम करने की खातिर मन खूब छटपटाता । आखिर मर खप कर संस्कृत और हिन्दी में पूर्ण सफलता प्राप्त की । संस्कृत के पंडितजी ने एक बार डिक्टेशन दिया तो एक भी अशुद्धि नही ! मैं संस्कृत में हमेशा अव्वल रहता और हेड मा 'ट सा'ब की बिटिया दोयम । नाम था मृदुलता देवी । मगर हम सभी उसे देवी के नाम से ही पुकारते थे । हिन्दी में कई मर्त्तबा मैं अव्वल रहता और कई मर्तबा नृसिंह राजपुरोहित । मेरा सब से पुराना दोस्त । आज तक राजस्थानी साहित्य में अपनी गणित के जोर से आगे बढ़ता र है । पर मैं अब भी लेखक की बनिस्बत बंधु के रूप में उसका ज्यादा लिहाज रखता हूं । संस्कृत के रूप मुझे इस तरह कंठस्थ थे, मानो पिछले जन्म से ही रट रखे हों। चारों लड़कियां मुझ से संस्कृत सीखती थी । संस्कृत के पंडितजी ब्रह्मचारी के गुमान में क्लास के अतिरिक्त और कहीं भी लड़कियों से बात नहीं करते थे ; इसलिए मेरा भाग्य खुल गया । पर देवी से घनिष्ठ आत्मीयता की बानगी ही निराली थी । उसकी पालर सूरत और गुलाबी होंठों की स्मित मुस्कान देखते ही पीतल के सचित्र ग्लास के धारोष्ण झाग मेरी आंखों के सामने तैरने लगते । उसकी मुस्कान वैसी ही अबोट और पावन थी। फिर भी किसी-न-किसी सीगे चर्चित होने के लिए मन खूब ही कसमसाता, पर कोई भी युक्ति पार नही पड़ी । हिन्दी और संस्कृत के प्रताप से मेरे नाम की फुसफुसाहट स्कूल के पत्थरों में फैलने लगी । दिन-ब-दिन परिचय का दायरा बढ़ने लगा । किसी दूसरे माध्यम से पार नहीं पड़ी तो कुबद और कुलंगों की ओर मेरा मन स्वतः ही खिंचने लगा । और कुछ ही दिनों में हिन्दी व संस्कृत की अपेक्षा बदमाशी के सीगे में मेरा नाम भीतर ही भीतर चमकने लगा । कभी-कभार हेड माट सा'ब यों ही अपनी रौ मे प्रार्थना के बाद पूछ बैठते कि स्कूल में सबसे ज्यादा बदमाश कौन है ? यह सवाल सुनते ही मैं तो सर नवा कर चुपचाप खड़ा हो जाता । पर मेरे अतिरिक्त स्कूल के तमाम छोटे-बड़े विद्यार्थी एक साथ उत्साह से मेरा नाम लेते । कभी कोई दूसरा नाम भूल-चूक से भी उनकी जबान पर नहीं आया। पान चबाते हुए हेड-मा'ट सा'ब मुस्करा कर मुझे इशारा करते - 'इधर आ चोट्टे...।' मै पूरी तरह सर झुकाये चुपचाप विनम्रतापूर्वक उनके सामने खड़ा हो जाता। वे दुलार से कान उमेठ कर हलकी-सी दो-चार थप्पड़ लगाते । वे शायद मन-ही-मन सोचते होंगे कि पिछी-सा हुलिया और नाम हाथी से भी भारी । सच इरपिंदर, सब के सामने मार खाने के बावजूद मैं भीतर ही भीतर खुशी से फूल उठता । उन दिनों स्कूल के सारी दुनिया से बड़ा मालूम होता था। बुरा हो चाहे भला, मेरा नाम तो स्कूल में उफन ही रहा था । हेड मा ट सा'ब जब भी पूछते, बदनामी के सीगे में मेरा एकछत्र नाम सब के कंठ से हुंकार मचाता । आराम से गहरी नीद आने लगी। पांखों के बिना ही रात के अंधियारे में अलंध्य उड़ानें भरने लगा । अंधियारे में आंखें बंद कर लेने पर भी मुझे मंद-मंद उजाला दिखायी पड़ता । उन दिनों हमारी कक्षा में एक अजीब ही विषय था - नेचर स्टडी । मूलचंदजी मा'ट सा'ब पढ़ाते थे । ओछा और धुगधुगा शरीर, कसा हुआ गोल मुह, कायरी आंखें, छोटी गर्दन । पढ़ाते समय ज्यादातर उनकी निगाह लड़कियो के इर्द-गिर्द ही मंडराती रहती । अबोध बालक होते हुए भी मैंने उनके कुटिल अंतस की जासूसी कर ली थी । भीतर ही भीतर भाड़ के चने की तरह भडकता । नेचर स्टडी मे वे बिना किसी अपवाद के हमेशा देवी को सबसे ज्यादा नंबर देते थे । एक बार उन्होंने उसे घर पर पढ़ाने का न्यौता दिया ! एकल-छड़ा कुंवारा मास्टर था । पढ़ाने की मंशा का मायना मैं अच्छी तरह समझ गया । मौका मिलते ही देवी को वहां जाने की खातिर मना किया, खूब मना किया; पर वह भोली अबोध कब्बु नहीं मानी सो नही मानी । उलटे मुझे ही लतेड़ सुननी पड़ी कि मैं बेकार ही वहम कर रहा यह फकत मेरे मन का ही मैल है । भला, पढ़ाने वाले पूजनीय गुरु ऐसे लंपट थोड़े ही होते हैं। सच इरपिंदर, वह वैसे ही आदर्श बाप की वैसी ही निर्मल लाडली थी, जिनकी सूरत निहारने से तीन भव का पाप धुलता है। आज भी जी भर कर उनकी स्तुति करूं तो भी कम है। उन दिनों की नैसर्गिक छवि को कलम से आंकने की खातिर मन बिकता है । स्कूल में इकडंकी बदमाश होने के कारण छोटी-मोटी चौकड़ी अपने-आप जुड़ गयी थी । तत्काल यार-दोस्तों को इकट्ठा किया और महाभारत की योजना सोच ली । बार-बार मना करने पर देवी नहीं मानी तो मुझे सतर्क होना पड़ा । ऐयारी का माकूल मोर्चा बनाया । समाचार मिलते ही हम सात-आठेक योद्धा मूलचंदजी मा'ट सा'ब के घर के पिछवाड़े अंग्रेजी बबूलों की ओट मे छिप गये। पहले से ही हाथों में अंग्रेजी । बबूल की कंटीली छड़ियां थाम रखी थी। जिस आशंका की अविकल प्रतीक्षा थी, उसकी अस्पष्ट-सी फुसफुसाहट सुनाई पडी- 'मा'ट सा'ब.. माट सा'ब... मै तो आपकी बेटी... ... के समान हूं । नही.. मा 'ट सा'व... नही ।' जैसे सारा आकाश ही धरती पर उलट पड़ा हो । मेरा रोम-रोम बिजली के सांत्र में ढल गया । फटाफट हत्था लांघ कर भीतर कूदे । डरी-सहमी हिरणी की आहत निगाह से देवी ने मेरी ओर झांका । मानो अचीते देव अवतरित हुए हों । उसकी सिहरन नही मिटी तब तक हम गुरुजी को अंधाधुंध दक्षिणा चुकाते रहे । अंग्रेजी बबूल के कांटे इस कदर सार्थक होंगे, सपने में भी नहीं सोचा था । संज्ञा - विहीन गुरुजी ने जाने-अनजाने कोई प्रतिरोध नही किया । आखिरं हाथ । न जवाब दिया तो हम दरवाजा उघाड़ कर देवी के साथ बाहर निकल आये । उसे तब भी विश्वास नही हुआ कि वह दैत्य की गुफा से बाहर आ गयी और मैं उस के साथ हूं । उस अचीते दुःस्वप्न से वह तब भी पूर्णतया मुक्त नही हुई थी। अनुभवों की दृष्टि से नितात अपरिपक्व उम्र होते हुए भी यह बात बिना सोचे ही मेरी समझ में आ गई कि मेरा कहा टालने के फलस्वरूप उलाहना देने का यह उचित अवसर नही है । फिर कोई अवांछित बकवास न करके हेड मा 'ट सा'ब को यह भेद बताने की राय जाहिर की तो वह तुरंत मान गयी । गढ़-किला जीतने का उत्साह लिये हम सभी देवी के साथ घर की सीढ़ियां चढ़ने लगे- बेंतों के प्रमाण सहित । हेड मा'ट सा'ब ने पान चबाते हुए अत्यधिक धैर्य से हमारी अंट-शट वार्ता सुनी । न कुछ बोल और न कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दरसायी । पान की पीक के बहाने मानो कोई हलाहल जहर का घूट गले उतारा हो । दहकती आंखो से उन्होंने मेरी पीठ थपथपायी और शाबाशी दी। आज तुम्हें यह पत्र लिखते समय, वाकई ऐसा महसूस हो रहा है इरपिंदर कि हेड मा 'ट सा'ब का वह अदृष्ट हाथ अभी-अभी मेरी पीठ थपथपा रहा है और वे अदृष्ट अधखुले होंठ मुझे बार-बार शाबाशी दे रहे हैं । देवी ठेठ सीढ़ियों तक नीचे हमें छोड़ने आयी । ऐसा महसूस हुआ कि मैं नीचे उतरने की बजाय ऊपर-ही- ऊपर चढ़ रहा हूं। उस के एक-एक कदम मे मेरा एहसान मानने का पहाड़ी बोझ व्यक्त हो रहा था । चार आंखो में तीन लोक के असंख्य गीतों ने जैसे अनहद गुजार गुनगुनायी हो । उस मांगलिक वेला के दौरान मैं दुनिया का सर्वोपरि सुखी बन्दा था । चुटकियों की रफ्तार से तुरंत रात ढली । हजार-हजार आलोक से प्रमुदित सूरज के बदले जैसे मैं ही उदित हुआ हूं । मेरी दुर्बल मरियल काठी में अनंत आनंद और अप्रतिम प्रकाश जगमगा रहा था । हमेशा की तरह उस दिन भी प्रार्थना का वैसा ही नितनेम हुआ । हेड मांट सा'ब ने खुद अपने हाथों से पेटी बजायी। चारों लड़कियो ने सदैव की भांति आगे-आगे प्रार्थना गायी। उस दिन मेरा स्वर मेरे अनजाने ही अपनेआप तेज व सुरीला हो गया था । मैने चुपके से झांका - हेड मा 'ट सा'ब की आंखों मे अंगारे दहक रहे थे । प्रार्थना संपूर्ण होते ही हेड मा 'ट सा'ब किचित् भी सयम नहीं रख सके । नेचर स्टडी के मूलचंदजी को भद्दे संबोधन से पुकार कर पास आने के लिए हाथ का इशारा किया । तमतमाये मुह से रक्तिम फुहार-सी छूटी । दहाड़ते हुए बोले, 'दोगले कुत्ते, इधर मर.....!' मुझे स्वप्न में भी यह विश्वास नहीं था कि हेड मा 'ट सा व खचाखच भरी सभा म सरेआम अपने मुंह से वह कुकर्म प्रकट कर देंगे । देवी ने एक बार भी मेरी तरफ नही देखा । आखें नीची किये पाव के अंगूठे से चुपचाप धूल कुचर रही थी । आज लाख चेष्टा करने पर भी पुख्ता तौर से सही अंदाज नहीं कर पाता कि वह बायें अंगूठे से धूल से कुचर रही थी या दाहिने अंगूठे से । हेड मा ट सा'ब न निःशंक खुले आम मूलचंद पुराण सुनाया। फिर हाथ के इशारे से मुझे पास बुलाकर मेरी पीठ थपथपायी । पान चबाते -चबाते ही भरी सभा में मेरे प्रति आभार प्रकट करके बोले, 'इस बदमाश खोके ने मेरी बेटी और तुम्हारी देवी की लाज बचायी.. ।' काफी कुछ बोलना चाहते थे, पर उसके बाद कुछ भी बोल नहीं सके। उस दिन शायद पहली बार यत्किचित् आभास हुआ कि मौन की भाषा भी कम ताकतवर नही होती ! बेहद दुबला-पतला होने के कारण सभी विद्यार्थी मुझे 'खोका' कहकर पुकारते थे । पर इरपिंदर, उस समय बीस गामा पहलवान होते तो भी मैं उन्हें टिकने नहीं देता। एक-एक को बारी- सर ऐसा पछाड़ता कि ताजिदगी याद रखते । सचमुच, एक ऐसा ही अपूर्व जोश मेरे रोम-रोम में बिजली की नाई चमक रहा था और आज उम्र की ढलती वेला में भी उस प्राचीन बानगी का स्वाद नही भूला । उन दिनों जोधपुर रियासत मे सभी विभागों के सर्वोच्च अधिकारी अंग्रेज ही होते थे । शिक्षा विभाग का निदेशक ए. पी. कॉक्स नाम का अंग्रेज था । अत्यधिक मिलनसार, बेइन्तहा उदार । हमारे हेड मा 'ट सा'ब की बहुत ही उज्जत करता था। कॉक्स साहब ने कई मर्त्तवा अपनी चौपामनी स्कूल मे उनकी बदली के आदेश निकाले, मगर बाड़मेर की जनता ने उन्हें एक बार भी विदाई नही दी । सारा बाजार बंद । सारा कामकाज ठप्प । और उदार कॉक्स साहब ने भी जनता की मर्यादा को एक बार भी खंडित नही किया। तार-पर-तार खड़खडाने से उन्हें मन मार कर वापस तार से ही बदली रद्द करनी पड़ती । वह एक-से-एक आला चुनिदा अध्यापक चौपासनी स्कूल मे रखता था, पर हमारे हेड मा'ट सा'ब को वह नही बुला सका, जिसकी उसे बेइन्तहा खुशी थी । आजादी के बाद कुछ वैसे असली 'सा'ब' हम हिन्दुस्तान में रख लेते तो अच्छा रहता । अपने काले साहबों को कुछ तो नसीहत मिलती । वाकई ए. पी. कॉक्स अकृत्रिम उदारता व निष्ठा का आदर्श पुतला था ! मरा तब तक न्यूजीलैण्ड से उसके पत्र चंद मित्रों के नाम बराबर आते रहते । अब तुम्ही बताओ इरपिंदर कि वह सौ टंच विशुद्ध सोना था कि नही ? हेड मा 'ट सा'ब न नेचर स्टडी के अध्यापक मूलचंदजी को अदेर मौकूफ करके कॉक्स सा'ब के नाम दस्ती कागज भेजा तो उन्होंने बिना जांच-पड़ताल किये उनकी बात रख ली। उन की बात से मुकरना तो न्याय व सच्चाई से मुकरना होता । ऐसे थे गर्व-गुमान के योग्य हमारे पूज्य हेड माट सा'ब । देवी के चिरअविस्मरणीय बापू । उस दिन वाली प्रार्थना तो जैसे मेरी ही खातिर हुई हो । मुझे ऐसा अनहद गुमान हुआ कि क्या बताऊ ? मेरा सिप्पा जमने में कोई कमर बाकी नही रही । तत्पश्चात् हेड मा'ट सा'ब ने तो सर्वोपरि बदमाश का नाम जानने की कभी उत्कंठा प्रकट नहीं की, पर मेरे अंतस में कही गहरे दबी लालमा उस सवाल की खातिर भीतर ही भीतर फड़फड़ा रही थी, इस में कोई संदेह नहीं । आज तुम्हारे सामने व्यर्थ के शिष्टाचार का दिखावा करूं तो सत्य की मर्यादा विकृत होगी ! यदि उस दिन हेड मा 'ट सा'ब अपने मुह से मूलचंदजी की बात सरे आम उजागर नहीं करते तो आज मुझे लिखते समय दो बार सोचना पडता । किन्तु उस खांटी बन्दे ने बाप होकर जब बेटी के बुरे भले की रंचमात्र भी चिन्ता न करके निर्भय - निशंक सबके सामने सत्य पर पर्दा नही डाला तो आज किसे, कैसी जोखिम है ? जोखिम तो उस दिन थी । पर सत्य की टेक रखने वाले जवामर्द बिरले ही जन्म लेते है । सुना है कि धरती बीज नही चुराती, किन्तु इरपिंदर, आजकल तो कुछ ऐसी आशंका खटकने लगी है कि सफेद पोश प्रतिष्ठित चोरों के पावन चरण का स्पर्श पाकर कही धरती तो चोरी कर्ना नही सीख गयी ? मुझे तो अब यह पुख्ता विश्वास होने लगा है कि अपनी धरती से सत्य का बीज बिल्कुल नदारद हो जायेगा । हा, तो उस दिन बाल-प्रीत की निर्मल आत्मीयता के वशीभूत कल्पना के उड़न खटोल पर राजकुमार की तरह आकाश मे चक्कर काटने लगा। 'खोका' का संबोधन तब भी मेरे दिल में कही काटे-सा खटक रहा था । ऐसा क्या गुल खिलाऊ कि लोग मेरे नाम का यथेष्ट सम्मान करें । मेरा नाम उच्चरित करते समय उनका मुह भर आये । शनिवार की नियमित सभा मे रटे-रटाये सवैये, मनहर छद और कवित्त तो सुनाता ही था । तालियों की गड़गड़ाहट उड़ने लगी थी । आखिर सोचते विचारते, बुझतेघुटते एक अटकल सूझी कि दूसरो की कविता नहीं सुना कर खुद कविता बनाऊं तो ज्यादा धाक जमेगी । बलवती आकाक्षा के उकसाने पर नृसिह राजपुरोहित से सलाह-मशविरा किया । वह तो जैसे इसी सुझाव की प्रतीक्षा कर रहा था । तुरंत मान गया । साधुओ के वेश मे बैर्गिये नाले की ओट में चोरी करने वाले तीन चोरों पर दोनों ने साथ बैठ कर कविता करने की सोची। एक- एक पंक्ति पूरी होने पर मानो इंद्रलोक का राज्य हाथ लगता । स्कूल में समय मिलता तो स्कूल में और बोर्डिंग में समय मिलता तो बोडिंग मे नृसिंह के पास अपूर्व खुशी में उड़ कर जाता । सिकंदर को भी अपनी विजय का डंका सुनते समय ऐसा आनंद तो क्या हुआ होगा, जितना हमें वह पहली कविता सम्पूर्ण करने पर हुआ। स्कूल के कण-कण में हमारे नाम की प्रतिध्वनि सुनायी पड़ने लगी कि मैने व नृसिंह ने कविता बनायी है, कविता ! हां कविता !! मानो धरती पर कोई नया चांद उगा हो । उन दिनों कविता का कुछ ऐसा ही दबदबा था । कई अध्यापकों ने पूछताछ की तो मैंने अभिमान के साथ विनम्र हामी भरी । फिर तो मैने हेकड़ी हेकड़ी मे संस्कृत के चार-पांच श्लोक भी बनाये । पडितजी ने भरे स्कूल के सामने मेरी हिम्मत बधायी । इतने जोर से मेरी पीठ थपथपायी कि सारे शरीर में सनसनाहट-सी फैल गयी। फिर भी दर्द की जगह आंखों में खुशी के मोती भर आये थे। उस दिन की भविष्यवाणी आज की तरह याद है कि मैं पंडितजी का होनहार विद्यार्थी समय आने पर, सारे देश में अपना नाम रौशन करूंगा । गाडी के नीचे चलने वाले कुत्ते की तरह मेरे मन में भी इसी गलतफहमी का ज्वार हिलोरे भरने लगा कि स्कूल की गाड़ी मेरे बूते पर ही चलती है। उन दिनों स्कूल की चहारदीवारी में ही समूची दुनिया समायी हुई थी । हमेशा कविता करना तो हाथ की बात नही थी, पर हमेशा कुबद करना तो हाथ की बात थी । नामवरी का लहू तो होठों लग चुका था । दूसरों की रटी हुई कविताओं की तुलना में मेरी अपनी कविताएं खराब लगती थीं । मगर बदमाशी मे मेरी होड करने वाला कोई नहीं था । नामवरी का उछाह इस राह धीरे-धीरे तुष्ट होने लगा । नादान देवी समझाने की चेष्टा करती; पर निरर्थक । आखिर समझ तो अपनी ही काम देती है, इरपिंदर । शाहजी की सीख फलसे तक । वह कई वार नाराज होती, रूठती, पर बदमाशी की लत मुझ से नही छूटी । कविता की सफलता अभी काफी दूर थी । उस मे नामवरी हासिल करने के लिए बरसों - बरसों तक धैर्य रखने की दरकार थी । बदमाशी के सतोष का चमत्कार तो हाथोहाथ मिलता था । हमारे परिवार मे कुबेरजी वाभा के पास कविता लिखने का अच्छा खासा हुनर था । पढ़ाई और खेलकूद के प्रति उत्साह भी कम नहीं था। बिलाड़ा से सातवी कक्षा पास करके वे आगे पढ़ने के लिए जोबनेर भरती हुए। मुझ से मन पसद कविताएं नहीं लिखी गयी तो मै उनकी कविताएं याद करके सुनाने लगा। सुनने वालो की आंखे ऊंची ललाट में चढ़ जाती । पर मन से छिपी तो कोई चोरी नही होती, इरपिंदर ! मैं स्वयं तो अपना बूता जानता ही था । वैसी कविताएं लिखना मेरे वश की बात नही थी । एक दफा तो शनिवार की सभा में ऐसा ठाट जमा कि क्या बताऊ ! पूरी कविता तो फिलहाल याद नहीं है, पर उसकी अंतिम कड़ी भुलना चाहूं तो भी भूल नही सकता : अड़ी अगरेजी छोड़, धारौ अंग रेजी को काफी लम्बी कविता थी, सात-आठेक मनहर छंदों की । अंग्रेजी फैशन और अंग्रेजी भाषा की बुराई से सराबोर । मेरा मनचीता प्रतिशोध ! ऐसी मालजादी अंग्रेजी छोड़ कर सारे देशवासियो अंग रेजी धारण करो । रेजी कहते हैं हाथों से कती बुनी खादी को । महात्मा गांधी की दुलारी खादी ! फिर क्या कसर बाकी रहती । तालियों पर तालियों की गड़गड़ाहट ! तीसरी बार सुनने के बाद भी श्रोताओं का मन नहीं भरा । हेड मा ट सा'ब ने अत्यधिक खुशी में छक कर मुझे शाबाशी दी। देवी के आनंद का भी वारापार नहीं था । उस रात दमकते सितारों के बीच उसका मन भी दमका होगा, जरूर दमका होगा। मुझे स्वयं भी कुछ देर के लिए यह भ्रम हुआ कि इस अथाह यश-कीत्ति का दावेदार मैं ही हूं । पर उस रात के सघन अधियारे मे मेरी आंखों के सामने यह स्पष्ट हो गया कि यह तो सरासर चोरी की नामवरी है। क्योंकर कबूल करूं ? किसी एक व्यक्ति को तो सच्चा भेद बताये बिना क्षण भर के लिए चैन नही पड़ेगा । सारी रात नीद नही आयी। पर सवेरे सूरज के छलछलाते उजाले में सब कुछ फिर से अंधियारे के बीच दब गया । समय से घडी डेढ़-घडी पहले स्कूल पहुंचा, पर सिले हुए होंठ तो खुले ही नही । हेड मा ट सा'ब का घर स्कूल से एकदम सटा हुआ ही था । भीतर ही भीतर मन तो खूब ही छटपटाया, मगर जिसे भेद बताना था, उसे नही बता सका । आज पहली बार यह रहस्य उजागर कर रहा हू । मन-ही-मन कुण्ठाग्रस्त होकर मैने उस दिन ज्यादा बदमाशी की। पर साथ ही साथ यह दृढ़ संकल्प किया कि कुबेरजी वाभा जैसी कविताए करके ही दम लूगा । अन्यथा मनुष्य की जिंदगी पाकर धूल ही फांकी । इस तरह जीने को धिक्कार है । इसकी अपेक्षा तो मौत ज्यादा श्रेयस्कर है । पहले ही कहा था कि सरकारी अहलकार का एक पांव दफ्तर में तो दूसरा गली में । सुमेरजी वाभा की बदली जोधपुर हो गयी । सुनते ही ऐसा लगा कि बाड़मेर छूटने के साथ मेरे प्राण भी छूट जायेंगे । इस तरह की अविच्छिन्न आत्मीय मडली से क्योंकर दूर छिटक सकूगा ? वियोग की दाह सुलगते ही यार-दोस्तो की घनिष्ठता का अहसास हुआ। वे कोई मित्र थोड़े ही थे, तारों का जमघट था, जमघट नृसिह, आसूलाल, रामजीवन, राधेश्वर, गिरधारी, हमीरसिंह, मेघसंह इत्यादि... इत्यादि ! आखिरी नाम के आगे इत्यादि इत्यादि की अर्गला जड़ने पर निश्चय ही तुम्हारी मुस्कान थमेगी नही । हरगिज नही थमेगी । पर वह नाम कलम की कालिख द्वारा प्रकट होते ही निर्मल प्रेम की मर्यादा भ्रष्ट हो जायेगी । बादला के पानी में कीच घुल जायेगा । बिजली की पावन दमक पर काजल की तूलिका फिर जायेगी । ऐसा महसूस हुआ कि जैसे फूलों पर मंडराती तितली की पाखे कतर ली गयी हो । तितली मे पांखो के अलावा शेष बचता ही क्या है ? नृसिंह वाली बोडिंग मे भरती होकर वही पढ़ने के लिए सुमेरजी वाभा के सामने डरते-डरते मशा प्रकट की, पर पार नही पड़ी । सयोग तो अपनी लीला अपने हिसाब से रचता है । जितना 'अंजल' था उतना सपना देख लिया। सपने की क्या बिसात ? टूट कर ही रहता है । आंख खुलने के साथ ही सुहाना सपना ध्वस्त हो गया । एक ही क्षण में एक साथ । आशाओं के बादल महल की ढेरी होने मे यह देर लगी, इरपिंदर ! सभी यार-दोस्त गले मिल-मिल कर खूब ही रोये, पर जाने वाले के लिए रुकना हाथ की बात नहीं थी । क्यों तो कलमुंही रेल ने इतनी दूर लाकर जोर से पछाड़ा और अब क्यों क्षत-विक्षत पिड को सहेज कर वापस ले जा रही है ? प्रीत के घरौदे रौंद कर इसे क्या हाथ लगेगा ? पर जिसके निःश्वास से ही काला धुआं निकले, उस से कुछ आशा रखना ही बेकार है। आज तो अधिकांश मित्रों के नाम सोचने पर भी याद नहीं आते, पर उस दिन वाकई वियोग की दाह का कोई पार नहीं था। वैसे घनिष्ठ अंतरंग मित्र पीछे रह गये और मैं अकेला जीवित मुर्दे की तरह आधे-अधूरे होश में गाड़ी रवाना होने के साथ जुदा हो गया । उस समय नृसिंह ने जाली के धागों से गुंथी एक थैली और एक पेन मुझे सौंपा । अत्यधिक स्नेह के साथ, उछाह के साथ । वह थैली उसके हाथ से गुंथी हुई थी चार आंखों से, एक ही सांचे में ढले मोती झार-झार बरसने लगे। पर लम्बा-ही-लम्बा अजगर फुफकारे भरता सब यात्रियों को अपनी ओजरी में समेट कर आगे रपटता ही गया, रपटता ही गया । कलेजे को मसलता हुआ, रौदता हुआ । इत्यादि-इत्यादि बातों पर वही विराम-चिह्न जड़ गया । वसोले की तीखी-तच्च धार से कच्ची कदली के टुकड़े होने पर उन्हें वापस कैसे जोड़ा जा सकता है ? बदली की अशुभ खबर मिलने के बाद एक व्यक्ति से भेंट करने की हिम्मत नही हुई । वह तो स्वयं अपने आप से अपना ही वियोग था, इरपिंदर ! कोई क्योंकर सहन कर सकता है । जीवन और मृत्यु का वियोग तो समझ में आता है, पर मौत-स-मौत का वियोग तो विधात्री भी नही जानती । चार-पांच दिन तक किस तरह अपने-आप से छिपता रहा, आज चाहूं तो भी विश्वास नहीं होता। वैसी शूरवीरता से तो कायरता लाख गुना श्रेष्ठ है। आज दिन तक वापस उस से मिलन नहीं हुआ। उस दिन का 'खोका' और आज का 'बिज्जी' एक ही व्यक्ति है क्या ? मुझे तो ऐसा नही लगता । और न दो मानने के लिए ही मन राजी होता है ! कैसे स्नेहमयी है संयोग की लीला !! कैसी निर्मम है संयोग की लीला !!! तब का जोधपुर शहर भी बाड़मेर से बहुत बड़ा और विचित्र था । दरबार हाईस्कूल, बाड़मेर के मिडल स्कूल में अत्यधिक ठसके वाला था । हेड मास्टर सिंहल साहब के नाम के पत्थर तैरते थे । शहर का चुनिंदा स्कूल था । वैसे ही नामजद गुरु और वैसे ही कुशल विद्यार्थी ! कुए के मेंढ़क ने जैसे विशाल सरोवर मे छलांग मारी हो । कई दिन तक तो घबराया-घबराया-सा रहा । मानो अपने ठिकाने पर स्वयं खो गया हूं । किसी तरह का कोई संपट ही नहीं जुड़ पाया । जगल की नीलगाय बस्ती मे आने पर जिस तरह होश भूल जाती है, ठीक मेरी भी वही हालत हुई । पर धीरे-धीरे कविता के बूते पर आश्वस्त होने लगा। खिलाड़ी और दौड़ने वालों की पूछ काफी थी। खूमदानजी ने तो आते ही अपनी धाक जमा ली । वे फुटबाल के निहायत उम्दा खिलाड़ी थे । सौ गज की दौड़ मे दांत भींचकर दौड़ते तो अव्वल नंबर में कोई खामी नहीं रहती। पर मैं तो खेल-कूद में एकदम अनाड़ी था। फिर भी नामवरी की भूख तो किसी तरह शांत होना ही नहीं चाहती थी। कुछ तो कविता ने बाजी रखी और कुछ वाद-विवाद की प्रतियोगिता ने । पर बदमाशी, कुबद व कुलंगों का पलड़ा तब भी भारी था । छठी कक्षा पास करके सातवीं में आया तब तक काफी शोहरत हासिल कर ली थी। आज तो भाषण व साक्षात्कार के नाम से कलेजा धुकधुक करने लगता है, पर उन दिनों मंच पर सामने खड़ा
जान-पहचान और संपर्क की घनिष्ठता बढ़ने पर यार-दोस्तों की मंडली जुड़ती गयी । विद्यालय की सीमा छोड़ने पर खत्ता-दड़ी, धुन्ना, अंटा, और लट्टू खेलने की ऐसी बान पड़ी कि दूसरी कोई भी बात अच्छी नही लगती थी । खाना खाते समय मन खत्ता-दड़ी के साथ गुड़कने लग जाता ; पढ़ते समय धुन्ना के डण्डों में सराबोर हो जाता । धुन्ने की जीत में कोई लकड़ियों की जीत थोड़े ही होती थी, गढ़- किलों की जीत होती थी । जीते हुए अंटों के बहाने तो मानो चमकते सितारे ही जेबों में छिपे रहते । लट्टू की गरणाटी के बहाने मेरे अंतस की सारी दुनिया ही घूमने लगती । जाग्रत अवस्था में जीती हुई लकड़ियां व काच की गोलियां तो सुरक्षित रहतीं, लेकिन नीद में जीता हुआ राज्य आंख खुलते ही वापस छिन जाता । सपने में खोये हुए अंटों और धुन्नों का वास्तविक खजाने की लूट से भी ज्यादा दुख होता । दिन, पर्वत से ढले झरने की भांति प्रबल वेग से ढल रहे थे । रात-दिन से आगे छलांगें भर रही थी और दिन-रात से आगे चौकड़ियां भर रहा था। समझ नही पड़ता कि आज अंटा, धुन्ना और लट्टू खेले बिना दिन क्योंकर अस्त होता है और रात किस तरह ढलती है ? उन दिनों तो इस बात के लिए भगवान के कहे का भी विश्वास नहीं करता । मगर आज तो उन बातो को बरस पचास बीत गये । घोड़ों की क्या बिसात, उन बीती बातों को तो रॉकेट भी नही पहुंच सकता । कभी-कभार तो मन में यह संदेह होने लगता है कि पिछली सारी ख्यात अख्यात मेरे ही जीवन में बीती या किसी और के ? वह बालक क्या मैं ही था ? यदि सचमुच मैं ही था तो मेरी उसी काया में वे अनगिन स्वरूप कहां लुप्त हो गये ? वह बाल्य - रूप कहां दुबक गया ? वह चंचल यौवन कहां ओझल हो गया ? उन दिनों तो ऐसा महसूस होता था कि धुन्ना, खत्ता-दड़ी और अंटा खेलने के सिवाय मनुष्य दूसरे काम करता ही क्यों है ? क्यों इधर-उधर ललचाता है और क्यों प्रपंच करता है ? क्यों चाकरी करता है, क्यों व्यापार करता है और क्यो खेती करता है ? किन्तु आज स्वय मुझे ही धुन्ना, खत्ता - दडी, अंटा और लट्टू खेले हुए युग बीत गये ! कभी भी वापस खेलने की इच्छा नही हुई । फकत आज तुम्हें यह पाती लिखते समय अंतस में दुबकी हुई पुरानी बातें कुलबुला उठी है। मेरा - मुझ से ही यह अलंध्य फासला कैसे हो गया ? क्यों हो गया ? तुम्हारे माध्यम से मैं स्वयं अपने-आपसे यह सवाल कर रहा हूं ! बीती हुई सारी जिन्दगी ही एक बड़ा सवाल बन गयी है, जिसका जवाब देना चाहूं तो दे नही सकूगा ? और मुझे यों ही जवाब देने से बेहद खीज है । परीक्षा के डर से भी जवाब देने की इच्छा नही होती थी । स्वयं मनुष्य ही अपने आप में एक भरकम और अंतिम सवाल है। सवाल-दर-सवाल परस्पर गुथे हुए हैं, जिसका कही भी कोई उत्तर नही है। मिथ्या संतोष को बहलाने की खातिर जवाब मिलता भी है तो थोड़ी देर के लिए, फिर अगले ही क्षण वह जवाब ही स्वय एक सवाल बन कर फुफकारने लगता है ! बात कुछ भटक गयी, फिर से सीधी राह लौटता हू । तो--- गुरुओं के ठोले-घूसों का कुछ ऐसा करिश्मा हुआ इरपिंदर, कि मैं बरस गुजरने के पहले-पहले कोरी पाटी पर सन्नाट लिखने लग गया, छपी हुई पोथी फर्राट बांचने लगा । ऐसा महसूस होने लगा, जैसे उस पढ़ाई के बहाने मैं प्रकृति का अगम रहस्य खोल रहा हूं । पाटी पर अंकित अक्षर आंखों के सामने नाचने लगते । आंखों की दृष्टि के द्वारा हृदय के भीतर प्रवेश करने वाले अक्षर अनहद घूमर की धमा-चौकड़ी मचाने लगते । दूसरी कक्षा पास करके तीसरी मे आया । अंग्रेजी राज्य की दुहाई गांव-गांव तक फैल चुकी थी। गुरुओं का मन भी अंग्रेजी सिखाने के लिए व्याकुल रहता था। मगर राम-जाने क्यों मेरे मन में अंग्रेजी का ऐसा आतंक पैदा हुआ कि याद करने के पहले ही उसे भूल जाता । अंग्रेजी की ए, बी, सी, डी, तो मेरी सीढ़ी [अर्थी] ही निकालती थी । बेइन्तहा मार खाने पर इस म्लेच्छ भाषा से ऐसा मन फटा कि अब भी अनगिन पुस्तकें बांचने के बावजूद न तो अच्छी तरह अंग्रेजी बोल सकता हू और न लिख सकता हू । सदा-सदैव इस से किनारा करने का आखिर यह परिणाम हुआ ! अब भी किसी हिन्दुस्तानी को फर्राट अंग्रेजी बोलते सुनता हू तो ऐसा प्रतीत होता है कि सर्कस का चतुर बंदर गिटपिट-गिटपिट नकल कर रहा है । या कोई होशियार मिट्ठू रटे-रटाये बोलों की उलटी कर रहा है । उन दिनों अंग्रेजी का फकत यही मायना समझता था कि यह मार खाने की विद्या है । जब अंग्रेजों ने भी अपने अधीन गुलामों पर जुल्म करने में कोई कसर नहीं रखी तो उनकी भाषा क्यों हम पर रहम करेगी ? एक मर्तबा सयोग की बात ऐसी बनी कि अंग्रेजी के गुरु आनंदीलालजी ने मुझ से अंग्रेजी के किसी शब्द की स्पेलिंग पूछी। आधी-अधूरी जानता था, वह भी भूल गया । होंठों पर अंजलि का संकेत करके प्याऊ की तरफ रवाना हो गया। अपने हाथ से ही पानी पीने लगा तो पीछा करते मा 'ट सा'ब आग-बबूला होकर भड़क उठे । वे केवल नाम मात्र के ही आनदीलालजी थे. विद्यार्थियों को दुख पहुंचाने में उनका कोई जवाब नही था । कान उमेठ कर मुझे बुरी तरह पीटा - लातों में, घूसों से और ठोलों से । पसली में किसी एक घूस की असह्य चोट से मै मूच्छित हो गया। विद्या मीखने के निमित्त मार जरूरी होते हुए भी मुझे वैसी बेजा मार का सपने में भी अनुमान नहीं था । होश आते ही गुस्सा तो ऐसा भभका कि गुरुजी की लुग्धी बना दूं, मगर कुछ भी राह नहीं सूझी। फिर भी थकी हुई निर्बल देह में वैताल प्रवेश करन के बाद मुझ से सब्र नही रखा गया । गुरुजी की दक्षिणा' मटकियो को चुकायी। एक-एक ठोकर के साथ-ही-साथ तमाम मटकियों का सफाया हो गया। यह तो सांप्रत यमराज को चुनौती थी। फिर आनंदीलालजी पीटने के आनंद मे क्यों कसर रखते ? सटाक्-सटाक् बल खाती बेत से ठौरकुठौर सारा शरीर धुन डाला। चौडी नीली रेखाओं से तमाम शरीर में जाली चित्रित हो गयी । सरस्वती देवी का महाप्रसाद इसी रूप में मिलता था । तब से मेरे रोम-रोम में अंग्रेजी के प्रति भयंकर उबकाई पैठ गयी । किन्तु संयोग की ऐसी बेजा कारस्तानी इरपिदर, कि पिछले चालीस बरस से अंग्रेजी बांचने के सिवाय दूसरा विकल्प ही नहीं है । नितनेम की तरह अंग्रेजी की पोथियों का पारायण करना पड़ता है, किन्तु उस दिन के आतंक से ऐसा कुण्ठाग्रस्त हुआ कि आज दिन भी न अंग्रेजी बोल पाता हूं और न लिख पाता हूं । मानो यह कोई चेत- अचेत कुकर्म हो । बांचने की विशेषता के लिए अंग्रेजी भाषा का कोई श्रेय नही । 'विलायत' की बजाय यदि म फ्रांस या जर्मनी के गुलाम होते तो फ्रेंच या जर्मन सीखनी पड़ती । अंग्रेजों के पहले फारसी का ऐसा ही बोलबाला था। गुलाम स्वप्न में भी आजादी का स्वाद नहीं चख सकता । इस परम पूजनीय देश की पावन धरती को परदेशियो के चरण स्पर्श का उछाह बेशुमार है । आजादी के ये चालीस बरस ही आज पवित्र गंगा-जमुना के लिए असह्य हो गये हैं । गुलामी की मधुर स्मृति जन-मन में छटपटाने लगी है । नौकरी करने वाले अह्लकार का एक पांव घर में तो दूसरा गली में । सुमेरजी वाभा की बदली बाड़मेर हुई तो मुझे भी पढ़ने के लिए बाड़मेर जाना पड़ा । आखिर छंटते-छंटते हम तीन जने ही बाकी बचे । जैतारण मे मिडल स्कूल नही था । इसलिए कुबेरजी वाभा को पाचवी कक्षा के बाद बिलाड़ा जाने की खातिर मजबूर होना पड़ा । मैंने और खूमदानजी ने जैतारण की जमपुरी से टी. सी. कटायी । वे मुझ से एक क्लास टी.सी. आगे थे । जोधपुर के 'बड़े-ऐसण' पहली बार रेल के इंजन का आर्त्तनाद सुना । सही पता नहीं लगा कि वह आर्त्तनाद अंग्रेजी में था, हिन्दी में या मारवाड़ी में ? गोरों की हिकमत से बनाये इंजन शायद अंग्रेजी में ही आतंनाद करते होंगे । श्वास-प्रश्वास के साथ काले स्याह धुएं के वगूले-ही-बगूले ! भक्ख-भक्ख की कर्कश आवाज के साथ वह लोहे की पटरियों पर फिसल रहा था । दैत्य - खईस के समान वीभत्स आकृति ! बेहद खौफनाक, मानो पिछले जन्म में अंग्रेजी का अध्यापक हो । लंबी-ही-लंबी रेल के अनगिनत डिब्बों से आखिर वह इंजन जुड़ा । प्रचड वैताल की तरह एक नथुने से काला धुआं और दूसरे नथुने से उबलती भाप ! एक नथुना सर पर और दूसरा पांव तले । मेरी आंखें चकन-बकन ! माथा आक-वाक ! गोरो की कारीगरी का कोई तूमार है भला ! सारी दुनिया पर राज्य करें तो भी कम है ! गांव की तमाम बस्ती समाये जितनी बडी गाड़ी । डिब्बे - ही - डिब्बे । न बैल जुते हुए और न घोड़े ! किस तरह चलेगी? यह गाड़ी तो दस हाथियों से भी नहीं खिच पायेगी ! गार्ड-बाबू की दूसरी या तीसरी सीटी के साथ ही इंजन ने जोर से आर्त्तनाद किया और चीखता - चिल्लाता आगे रपटने लगा । हड्डी-हड्डी मचक गयी होगी । परस्पर एक-दूसरे से गुथे हुए डिब्बे अपनी जगह छोड़ने के साथ ही चीत्कार करते हुए गुड़कने लगे । रेल तो सचमुच रवाना हो गयी लगती है ! अब किसी के रोकने पर रुकेगी थोड़े ही ! धीरे-धीरे बवडर की नाई वेग बढने लगा - खड़द-खड़द का डका बजाता हुआ । मानो कोई तूफान पटरियों पर धन्नाट भागने लगा हो । रेल को पकड़ने के लिए एक-एक झाड़-झंखाड़ उसका पीछा करने लगा, पर रेल तो रेल ही थी, किसी की पकड़ में नहीं आयी। स्टेशन आने पर अपने आप रुकती तो रुकती, नही तो अप्रतिहत गति से हाहाकार मचाती हुई दौड़ रही थी। ईश्वर न करे, शैतान भी मेहर-माया रखे - यदि पटरियों से फिसल पड़ी तो धरती के टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे । यही बातें मुझे सोचनी चाहिए थी तो मैंने शायद यही बातें सोची होंगी । काफी देर बाद अपनी कर्कश ताल के साथ रेल ने न जाने किस तरह की लोरी सुनायी कि अत्यधिक आश्चर्य व आशंका के बावजूद मेरी आंखें स्वतः ही मुदने लगी और मैं नींद की गोद में अचेत हो गया । सुमेरजी वाभा के झिंझोड़ने पर मैंने आखें खोली । कुली दनादन सामान उतार रहे थे । मेरी चेतना के परे ही बरबस वाड़मेर स्टेशन आ गया ! तो क्या हठीली रेल अपनी निरंकुश धत् में ही उड़ती जा रही थी ! थकावट मिटाने के बहाने वह तेजी से सांस खींच रही थी । दौड़ते-दौड़ते आखिर बेदम होकर हांफना पड़े तो इस में आश्चर्य की क्या बात ? सूरज से भी काफी देर बाद - घड़ी-डेढ़-घड़ी के उपरांत मेरी आंख खुली । अपरिचित स्टेशन । अजनबी मानुस । अजाना हाट-बाजार। अजानी राह । अजाने घर । अजाने गाछ-बिरछ । अजाने कुत्ते और अजाने ही कौए । पर जानी-पहचानी-सी कांव-कांव ! मानो मेरे शुभागमन का सहर्ष स्वागत कर रहे हों । राम-जाने उन कौओं को किस तरह यह सुराग लगा कि अंग्रेजी मे निपट ठोट बालक समय आने पर संयोग के चमत्कार से मातृभाषा के मर्मज्ञ पाठकों का अविस्मरणीय कथानवीस बनेगा ! इस पुस्तक की भूमिका के माध्यम से तुमने मेरी इसी सृजन-यात्रा की खातिर उत्सुकता प्रकट की थी । सचमुच, तुम्हारे उकसाने पर मैंने मुड़ कर पीछे देखा, चिर विस्मृत यात्रा के पदचिह्नों पर नजर गड़ायी । निस्संदेह मुझे कभी इस बात की अ शंका नही थी कि सृजन को बाद देकर मुझे उसकी कोख का हिसाब भी समझाना पड़ेगा। प्रसव के दौरान छटपटाती मां के लिए संतान को जन्म देना तो वाकई कष्टप्रद है, पर उस से भी बड़ी यातना है- प्रजनन की प्रक्रिया को अक्षरों के द्वारा व्यक्त करना । मैं आज वैसी ही गुत्थी में उलझ गया हूं । दूसरे दिन मैं और खूमजी वाभा स्कूल मे भरती होने के लिए हाब- गाब रवाना हुए तो रास्ते में सिपाहियों के साथ हथकड़ी और वेडियों में जकड़े सात-आठेक कैदी मिले । उन दिनों मुझे कैदियों से जबरदस्त डर लगता था । चोर, डाकू और हत्यारे ! देखते ही कंपकंपी छूटने लगती । समूचा शरीर रोमाचित हो उठता । उन कैदियों पर नजर पडते ही जैतारण की एक वीभत्स स्मृति का दंश मेरे हृदय मे गड़ गया-खुले चौक में मोटी लकड़ियों की टिकटी जमीन के भीतर गहरी गड़ी हुई । एक कैदी के हाथ-पांव, पूरमपूर चौड़े उस टिकटी से बंधे हुए । चारों तरफ मनुष्यों की तमाणबीन भीड़ । बेंतों का आदेश होते ही दो मेहतरों ने पानी में भीगी हुई कंटीली छड़ियां संभाली । एक मेहतर ने कैदी की लटकती तहमद उठाकर कमर से बांधी। उसकी बैठक पूरमपूर उघड़ गयी ! मैं गिनती अच्छी तरह जानता था । कंटीली छड़ी के प्रहार उड़ने लगे - एक... दो... तीन.........चार.......! प्रहार-दर-प्रहार वह कैदी इस कदर जोर से चिल्लाया कि मेरा समूचा शरीर थरथर कांपने लगा । कानों में जैसे खौलता तेल रिस रहा हो । फिर भी गिनती करूं इतना होश अवश्य था - पांच छः सात... । मनुष्य का ऐसा दर्दनाक चीत्कार पहली बार ही सुना था, मगर आज भी याद आने पर कंपकंपी छूटने लगती है। मेरे खयाल से उस कैदी का वह चीत्कार अब भी मिटा नहीं है ! तमाशा देखने की उत्सुक भीड़ में से कुछ शूरमा जोर से हंसे । आज सोचता हू कि हंसने वाले वे वीतराग व्यक्ति ज्यादा अपराधी थे या वह कैदी ? पंद्रह... सोलह... सत्रह । गिनती में कतई चूक नहीं थी । मानो मेरे शरीर को धुनते वे कंटीले प्रहार अचानक थम गये हों। कैदी को भी राहत का सांस मिला होगा । गिनती की संख्या तो अब भी काफी शेष है, मगर सजा की सीमा तो सत्रह बेंतों के उपरांत ही चुक गयी । हाकिम की मेहरबानी ! कैदी के नितंबों से खून झरने लगा। उस दिन की वह भयंकर छबि बरसों तक मुझे बेचैन करती रही । कैदी का वह हृदयविदारक चीत्कार, कंटीली बेंतों के प्रहार ! नितंबों से रिसता लहू ! हाथ-पांव बंधे हुए ! साथ-ही-साथ मुंह में डूंजा खसोल उसका मुह बांध देते तो बेहतर था । खाना खाते समय मुझे उबकाई तो नहीं आती। इरपिंदर ! आठ-दस बरस से एक सवाल मुझे निरंतर पछाड़ रहा है कि जब नेता, मंत्री, वकील, जज, डॉक्टर, साहूकार, संपादक, पंडे-पुजारी, मौलवी, प्रोफेसर, पुलिस, लेखक, आलोचक और अफसर इत्यादि - ये उजले-बुक अजगर जेलो से बाहर है तो जेलों के भीतर कौन हैं ? ? क्यू हैं ? ? ये श्रीमंत... ये सिरायत जेलों के बाहर गुलछरें उड़ा रहे हैं तो कानून के भरकम पोथों का मायना क्या है ? इन जेलों की सार्थकता क्या है ? यह बेकार इतना खर्च खाता फिर किसलिए ? भेड़ियों के हवाले इन निरीह भेड़ों की कब तक रखवाली होगी ? जब अपराधियों के जिम्मे ही सिंहासन है तो इन्हें कौन दंडित करेगा ? ये तो दंड सुनाने वाले हैं, तब इन्हें कौन सजा सुनाये ? आजकल आठों-पहर ऐसे सवालो के चाबुक मुझ पर बरसते रहते हैं ! क्षत-विक्षत करते है । कही मेरा सर तो नहीं चकरा गया ? इन सवालों का जवाब कौन गुरु जानता है ? केवल जानने मात्र से क्या होगा ? सरे आम दहाड़ने की हिम्मत चाहिए । वह इस देश के बाशिंदों से बिलकुल निःशेष हो गयी है । आजादी का छीका हाथ लगने पर वे पूरमपूर गुलाम हो गये हैं। मनुष्यों का रूप धर ढाणी-ढाणी, गांव-गांव और नगर-नगर गंडक, चीते, नाहर, जरख, बिज्जू, बन - बिलाव, नाग, अजगर, चील, गिद्ध, बाज, सिकरे और कौए मौज कर रहे हैं । प्रति वर्ष इनकी नफरी बढ़ रही है - असंख्य, अपरम्पार ! बढ़ते-बढ़ते सत्तर करोड़ के आसपास इनकी आबादी फैल गयी है । जानवरों की उपमा देने पर मनुष्य बुरा मानेगे या जानवर ? तुम्हे क्या लगता है ? तुम्हारा प्रत्युत्तर बांचने से मुझे काफी राहत मिलेगी । हमेशा की तरह देरी से जवाब न देकर, जरा जल्दी देना । आज की बात अलहदा है । उस दिन की बात अलहदा थी । इसी एक नाम से कक्षा में हाजरी देता था और आज भी उसी नाम से मेरी पहचान है । अधिकांश मित्रअधिकांश ही क्यों, लगभग सभी घनिष्ठ मित्र विजयदान देथा के बदले बिज्जी के नाम से संबोधित करते है । इस कोरे-मोरे एकल संबोधन के तहत क्या मैं सदावंत एक ही व्यक्ति रहा ? आठ-दस बरसों से एक - एक क्षण में बदलता रहा हू । कल था सो आज नही । आज हूं सो परसा नहीं रहूंगा, सवेरे ह सो सांझ नही । सांझ हू सो रात नही । रात हू सो प्रभात नही । फिर भी नाम का संबोधन जीवन पर्यन्त एक ही रहेगा । अर्जुन और कृष्ण भगवान के सहस्र नामों का मर्म अब कही अच्छी तरह समझ मे आने लगा है । जैतारण वाले कैदी की दारुण स्मृति में उलझा हुआ मैं स्कूल पहुंचा। मटिया निकर, मटिया कमीज । पीली टोपी ! बेहद दुबला-पतला । मरियल टांगें । डेढ़ अंगुल का ललाट । बदसूरत काठी । खूमजी वाभा काफी कुछ फबते और सुंदर थे । स्कूल के मनमौजी छात्रों ने मेरा हुलिया देखा तो उसी दिन से चिढ़ाने लगे। मन पूरमपूर कसैला हो उठा । पर जोर क्या करता, निपट निजोरी बात थी । भरती होने पर कोई पांच-सातेक दिन जैसे-तैसे कट गये । एक दिन क्लास में अंग्रेजी पढ़ाते समय मा'ट सा'ब ने मुझे पाठ बाचने का आदेश किया। धूजती टांगों पर बड़ी मुश्किल से खड़ा हो सका । अंग्रेजी के नाम पर फकत बुखार ही नही चढ़ा । बोलना शुरू किया तो जीभ मानो चिपक गयी। आधी मूर्च्छा की हालत में दो- एक पंक्तियां बड़ी मुश्किल से पढ़ पाया कि सारी क्लास एक साथ जोर से ठहाका मारकर हंस पड़ी । उच्चारण की चार-पांचेक ऐसी ही गलतिया हो गयी थी। रोकर नीचे बैठ गया। अंग्रेजी के लिए उस दिन बचे-खुचे उत्साह पर भी पाला पड़ गया । फांसी के तख्ते की बनिस्बत मुझे अंग्रेजी का डर ज्यादा लगता था । न किसी दौड़ मे पारंगत था और न किसी खेल में । हिन्दी, गणित और संस्कृत में काफी तर्राट था । मगर अंग्रेजी में एकदम भोट । तिस पर स्कूल में कभी खेल-कूद की प्रतियोगिता होती तो मंगते की नाई जीतने वाले की तरफ ललचाई निगाह से देखता । इधर एक ही घर मे बूमदानजी छोटी या लंबी दौड़ में एक भी इनाम नही छोड़ते । जिस किसी में भाग लेते उस में अव्वल । इनाम-ही- इनाम बुहार कर लाते । अक्सर टोकरी छोटी पड़ जाती । तेल की बोतल, काच, रेशमी रूमाल, बनियान, तौलिये इत्यादि । और मेरे पास कुछ भी नही । वही स्कूल का बस्ता और वही पीली टोपी । खूब ही लज्जित होता । शर्म के मारे केवल जमीन में गड़ना शेष रहता। क्या करता, जमीन फटती ही नहीं थी। अपने आप से घिन होने लगी। सचमुच मुझे कुछ ऐसा ही महसूस होता कि सूरज का प्रकाश फकत खूमदानजी की खातिर ही चमकता है और रात का काला - गहन अंधियारा फकत मेरे लेखे घुटन फैलाता है। करवट बदलते-बदलते काफी रात ढलने पर नीद आती। नीद के सपनो में भी सब से ढंगी रहता । दौड़ते-दौड़ते लड़खड़ा कर गिर पड़ता । न जगने पर शांति और न नीद में चैन । नग आकर हिन्दी, संस्कृत व गणित से कुश्ती लडता । कद-काठी में सब से छोटा और दुबला होने के कारण लडकियो के साथ बैठने की इजाजत मिल जाती थी। लड़कियो के सामने हेटी न लगे, मन-ही-मन ऐसी तरकीबें सोचता। किसी सीगे मे नाम करने की खातिर मन खूब छटपटाता । आखिर मर खप कर संस्कृत और हिन्दी में पूर्ण सफलता प्राप्त की । संस्कृत के पंडितजी ने एक बार डिक्टेशन दिया तो एक भी अशुद्धि नही ! मैं संस्कृत में हमेशा अव्वल रहता और हेड मा 'ट सा'ब की बिटिया दोयम । नाम था मृदुलता देवी । मगर हम सभी उसे देवी के नाम से ही पुकारते थे । हिन्दी में कई मर्त्तबा मैं अव्वल रहता और कई मर्तबा नृसिंह राजपुरोहित । मेरा सब से पुराना दोस्त । आज तक राजस्थानी साहित्य में अपनी गणित के जोर से आगे बढ़ता र है । पर मैं अब भी लेखक की बनिस्बत बंधु के रूप में उसका ज्यादा लिहाज रखता हूं । संस्कृत के रूप मुझे इस तरह कंठस्थ थे, मानो पिछले जन्म से ही रट रखे हों। चारों लड़कियां मुझ से संस्कृत सीखती थी । संस्कृत के पंडितजी ब्रह्मचारी के गुमान में क्लास के अतिरिक्त और कहीं भी लड़कियों से बात नहीं करते थे ; इसलिए मेरा भाग्य खुल गया । पर देवी से घनिष्ठ आत्मीयता की बानगी ही निराली थी । उसकी पालर सूरत और गुलाबी होंठों की स्मित मुस्कान देखते ही पीतल के सचित्र ग्लास के धारोष्ण झाग मेरी आंखों के सामने तैरने लगते । उसकी मुस्कान वैसी ही अबोट और पावन थी। फिर भी किसी-न-किसी सीगे चर्चित होने के लिए मन खूब ही कसमसाता, पर कोई भी युक्ति पार नही पड़ी । हिन्दी और संस्कृत के प्रताप से मेरे नाम की फुसफुसाहट स्कूल के पत्थरों में फैलने लगी । दिन-ब-दिन परिचय का दायरा बढ़ने लगा । किसी दूसरे माध्यम से पार नहीं पड़ी तो कुबद और कुलंगों की ओर मेरा मन स्वतः ही खिंचने लगा । और कुछ ही दिनों में हिन्दी व संस्कृत की अपेक्षा बदमाशी के सीगे में मेरा नाम भीतर ही भीतर चमकने लगा । कभी-कभार हेड माट सा'ब यों ही अपनी रौ मे प्रार्थना के बाद पूछ बैठते कि स्कूल में सबसे ज्यादा बदमाश कौन है ? यह सवाल सुनते ही मैं तो सर नवा कर चुपचाप खड़ा हो जाता । पर मेरे अतिरिक्त स्कूल के तमाम छोटे-बड़े विद्यार्थी एक साथ उत्साह से मेरा नाम लेते । कभी कोई दूसरा नाम भूल-चूक से भी उनकी जबान पर नहीं आया। पान चबाते हुए हेड-मा'ट सा'ब मुस्करा कर मुझे इशारा करते - 'इधर आ चोट्टे...।' मै पूरी तरह सर झुकाये चुपचाप विनम्रतापूर्वक उनके सामने खड़ा हो जाता। वे दुलार से कान उमेठ कर हलकी-सी दो-चार थप्पड़ लगाते । वे शायद मन-ही-मन सोचते होंगे कि पिछी-सा हुलिया और नाम हाथी से भी भारी । सच इरपिंदर, सब के सामने मार खाने के बावजूद मैं भीतर ही भीतर खुशी से फूल उठता । उन दिनों स्कूल के सारी दुनिया से बड़ा मालूम होता था। बुरा हो चाहे भला, मेरा नाम तो स्कूल में उफन ही रहा था । हेड मा ट सा'ब जब भी पूछते, बदनामी के सीगे में मेरा एकछत्र नाम सब के कंठ से हुंकार मचाता । आराम से गहरी नीद आने लगी। पांखों के बिना ही रात के अंधियारे में अलंध्य उड़ानें भरने लगा । अंधियारे में आंखें बंद कर लेने पर भी मुझे मंद-मंद उजाला दिखायी पड़ता । उन दिनों हमारी कक्षा में एक अजीब ही विषय था - नेचर स्टडी । मूलचंदजी मा'ट सा'ब पढ़ाते थे । ओछा और धुगधुगा शरीर, कसा हुआ गोल मुह, कायरी आंखें, छोटी गर्दन । पढ़ाते समय ज्यादातर उनकी निगाह लड़कियो के इर्द-गिर्द ही मंडराती रहती । अबोध बालक होते हुए भी मैंने उनके कुटिल अंतस की जासूसी कर ली थी । भीतर ही भीतर भाड़ के चने की तरह भडकता । नेचर स्टडी मे वे बिना किसी अपवाद के हमेशा देवी को सबसे ज्यादा नंबर देते थे । एक बार उन्होंने उसे घर पर पढ़ाने का न्यौता दिया ! एकल-छड़ा कुंवारा मास्टर था । पढ़ाने की मंशा का मायना मैं अच्छी तरह समझ गया । मौका मिलते ही देवी को वहां जाने की खातिर मना किया, खूब मना किया; पर वह भोली अबोध कब्बु नहीं मानी सो नही मानी । उलटे मुझे ही लतेड़ सुननी पड़ी कि मैं बेकार ही वहम कर रहा यह फकत मेरे मन का ही मैल है । भला, पढ़ाने वाले पूजनीय गुरु ऐसे लंपट थोड़े ही होते हैं। सच इरपिंदर, वह वैसे ही आदर्श बाप की वैसी ही निर्मल लाडली थी, जिनकी सूरत निहारने से तीन भव का पाप धुलता है। आज भी जी भर कर उनकी स्तुति करूं तो भी कम है। उन दिनों की नैसर्गिक छवि को कलम से आंकने की खातिर मन बिकता है । स्कूल में इकडंकी बदमाश होने के कारण छोटी-मोटी चौकड़ी अपने-आप जुड़ गयी थी । तत्काल यार-दोस्तों को इकट्ठा किया और महाभारत की योजना सोच ली । बार-बार मना करने पर देवी नहीं मानी तो मुझे सतर्क होना पड़ा । ऐयारी का माकूल मोर्चा बनाया । समाचार मिलते ही हम सात-आठेक योद्धा मूलचंदजी मा'ट सा'ब के घर के पिछवाड़े अंग्रेजी बबूलों की ओट मे छिप गये। पहले से ही हाथों में अंग्रेजी । बबूल की कंटीली छड़ियां थाम रखी थी। जिस आशंका की अविकल प्रतीक्षा थी, उसकी अस्पष्ट-सी फुसफुसाहट सुनाई पडी- 'मा'ट सा'ब.. माट सा'ब... मै तो आपकी बेटी... ... के समान हूं । नही.. मा 'ट सा'व... नही ।' जैसे सारा आकाश ही धरती पर उलट पड़ा हो । मेरा रोम-रोम बिजली के सांत्र में ढल गया । फटाफट हत्था लांघ कर भीतर कूदे । डरी-सहमी हिरणी की आहत निगाह से देवी ने मेरी ओर झांका । मानो अचीते देव अवतरित हुए हों । उसकी सिहरन नही मिटी तब तक हम गुरुजी को अंधाधुंध दक्षिणा चुकाते रहे । अंग्रेजी बबूल के कांटे इस कदर सार्थक होंगे, सपने में भी नहीं सोचा था । संज्ञा - विहीन गुरुजी ने जाने-अनजाने कोई प्रतिरोध नही किया । आखिरं हाथ । न जवाब दिया तो हम दरवाजा उघाड़ कर देवी के साथ बाहर निकल आये । उसे तब भी विश्वास नही हुआ कि वह दैत्य की गुफा से बाहर आ गयी और मैं उस के साथ हूं । उस अचीते दुःस्वप्न से वह तब भी पूर्णतया मुक्त नही हुई थी। अनुभवों की दृष्टि से नितात अपरिपक्व उम्र होते हुए भी यह बात बिना सोचे ही मेरी समझ में आ गई कि मेरा कहा टालने के फलस्वरूप उलाहना देने का यह उचित अवसर नही है । फिर कोई अवांछित बकवास न करके हेड मा 'ट सा'ब को यह भेद बताने की राय जाहिर की तो वह तुरंत मान गयी । गढ़-किला जीतने का उत्साह लिये हम सभी देवी के साथ घर की सीढ़ियां चढ़ने लगे- बेंतों के प्रमाण सहित । हेड मा'ट सा'ब ने पान चबाते हुए अत्यधिक धैर्य से हमारी अंट-शट वार्ता सुनी । न कुछ बोल और न कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दरसायी । पान की पीक के बहाने मानो कोई हलाहल जहर का घूट गले उतारा हो । दहकती आंखो से उन्होंने मेरी पीठ थपथपायी और शाबाशी दी। आज तुम्हें यह पत्र लिखते समय, वाकई ऐसा महसूस हो रहा है इरपिंदर कि हेड मा 'ट सा'ब का वह अदृष्ट हाथ अभी-अभी मेरी पीठ थपथपा रहा है और वे अदृष्ट अधखुले होंठ मुझे बार-बार शाबाशी दे रहे हैं । देवी ठेठ सीढ़ियों तक नीचे हमें छोड़ने आयी । ऐसा महसूस हुआ कि मैं नीचे उतरने की बजाय ऊपर-ही- ऊपर चढ़ रहा हूं। उस के एक-एक कदम मे मेरा एहसान मानने का पहाड़ी बोझ व्यक्त हो रहा था । चार आंखो में तीन लोक के असंख्य गीतों ने जैसे अनहद गुजार गुनगुनायी हो । उस मांगलिक वेला के दौरान मैं दुनिया का सर्वोपरि सुखी बन्दा था । चुटकियों की रफ्तार से तुरंत रात ढली । हजार-हजार आलोक से प्रमुदित सूरज के बदले जैसे मैं ही उदित हुआ हूं । मेरी दुर्बल मरियल काठी में अनंत आनंद और अप्रतिम प्रकाश जगमगा रहा था । हमेशा की तरह उस दिन भी प्रार्थना का वैसा ही नितनेम हुआ । हेड मांट सा'ब ने खुद अपने हाथों से पेटी बजायी। चारों लड़कियो ने सदैव की भांति आगे-आगे प्रार्थना गायी। उस दिन मेरा स्वर मेरे अनजाने ही अपनेआप तेज व सुरीला हो गया था । मैने चुपके से झांका - हेड मा 'ट सा'ब की आंखों मे अंगारे दहक रहे थे । प्रार्थना संपूर्ण होते ही हेड मा 'ट सा'ब किचित् भी सयम नहीं रख सके । नेचर स्टडी के मूलचंदजी को भद्दे संबोधन से पुकार कर पास आने के लिए हाथ का इशारा किया । तमतमाये मुह से रक्तिम फुहार-सी छूटी । दहाड़ते हुए बोले, 'दोगले कुत्ते, इधर मर.....!' मुझे स्वप्न में भी यह विश्वास नहीं था कि हेड मा 'ट सा व खचाखच भरी सभा म सरेआम अपने मुंह से वह कुकर्म प्रकट कर देंगे । देवी ने एक बार भी मेरी तरफ नही देखा । आखें नीची किये पाव के अंगूठे से चुपचाप धूल कुचर रही थी । आज लाख चेष्टा करने पर भी पुख्ता तौर से सही अंदाज नहीं कर पाता कि वह बायें अंगूठे से धूल से कुचर रही थी या दाहिने अंगूठे से । हेड मा ट सा'ब न निःशंक खुले आम मूलचंद पुराण सुनाया। फिर हाथ के इशारे से मुझे पास बुलाकर मेरी पीठ थपथपायी । पान चबाते -चबाते ही भरी सभा में मेरे प्रति आभार प्रकट करके बोले, 'इस बदमाश खोके ने मेरी बेटी और तुम्हारी देवी की लाज बचायी.. ।' काफी कुछ बोलना चाहते थे, पर उसके बाद कुछ भी बोल नहीं सके। उस दिन शायद पहली बार यत्किचित् आभास हुआ कि मौन की भाषा भी कम ताकतवर नही होती ! बेहद दुबला-पतला होने के कारण सभी विद्यार्थी मुझे 'खोका' कहकर पुकारते थे । पर इरपिंदर, उस समय बीस गामा पहलवान होते तो भी मैं उन्हें टिकने नहीं देता। एक-एक को बारी- सर ऐसा पछाड़ता कि ताजिदगी याद रखते । सचमुच, एक ऐसा ही अपूर्व जोश मेरे रोम-रोम में बिजली की नाई चमक रहा था और आज उम्र की ढलती वेला में भी उस प्राचीन बानगी का स्वाद नही भूला । उन दिनों जोधपुर रियासत मे सभी विभागों के सर्वोच्च अधिकारी अंग्रेज ही होते थे । शिक्षा विभाग का निदेशक ए. पी. कॉक्स नाम का अंग्रेज था । अत्यधिक मिलनसार, बेइन्तहा उदार । हमारे हेड मा 'ट सा'ब की बहुत ही उज्जत करता था। कॉक्स साहब ने कई मर्त्तवा अपनी चौपामनी स्कूल मे उनकी बदली के आदेश निकाले, मगर बाड़मेर की जनता ने उन्हें एक बार भी विदाई नही दी । सारा बाजार बंद । सारा कामकाज ठप्प । और उदार कॉक्स साहब ने भी जनता की मर्यादा को एक बार भी खंडित नही किया। तार-पर-तार खड़खडाने से उन्हें मन मार कर वापस तार से ही बदली रद्द करनी पड़ती । वह एक-से-एक आला चुनिदा अध्यापक चौपासनी स्कूल मे रखता था, पर हमारे हेड मा'ट सा'ब को वह नही बुला सका, जिसकी उसे बेइन्तहा खुशी थी । आजादी के बाद कुछ वैसे असली 'सा'ब' हम हिन्दुस्तान में रख लेते तो अच्छा रहता । अपने काले साहबों को कुछ तो नसीहत मिलती । वाकई ए. पी. कॉक्स अकृत्रिम उदारता व निष्ठा का आदर्श पुतला था ! मरा तब तक न्यूजीलैण्ड से उसके पत्र चंद मित्रों के नाम बराबर आते रहते । अब तुम्ही बताओ इरपिंदर कि वह सौ टंच विशुद्ध सोना था कि नही ? हेड मा 'ट सा'ब न नेचर स्टडी के अध्यापक मूलचंदजी को अदेर मौकूफ करके कॉक्स सा'ब के नाम दस्ती कागज भेजा तो उन्होंने बिना जांच-पड़ताल किये उनकी बात रख ली। उन की बात से मुकरना तो न्याय व सच्चाई से मुकरना होता । ऐसे थे गर्व-गुमान के योग्य हमारे पूज्य हेड माट सा'ब । देवी के चिरअविस्मरणीय बापू । उस दिन वाली प्रार्थना तो जैसे मेरी ही खातिर हुई हो । मुझे ऐसा अनहद गुमान हुआ कि क्या बताऊ ? मेरा सिप्पा जमने में कोई कमर बाकी नही रही । तत्पश्चात् हेड मा'ट सा'ब ने तो सर्वोपरि बदमाश का नाम जानने की कभी उत्कंठा प्रकट नहीं की, पर मेरे अंतस में कही गहरे दबी लालमा उस सवाल की खातिर भीतर ही भीतर फड़फड़ा रही थी, इस में कोई संदेह नहीं । आज तुम्हारे सामने व्यर्थ के शिष्टाचार का दिखावा करूं तो सत्य की मर्यादा विकृत होगी ! यदि उस दिन हेड मा 'ट सा'ब अपने मुह से मूलचंदजी की बात सरे आम उजागर नहीं करते तो आज मुझे लिखते समय दो बार सोचना पडता । किन्तु उस खांटी बन्दे ने बाप होकर जब बेटी के बुरे भले की रंचमात्र भी चिन्ता न करके निर्भय - निशंक सबके सामने सत्य पर पर्दा नही डाला तो आज किसे, कैसी जोखिम है ? जोखिम तो उस दिन थी । पर सत्य की टेक रखने वाले जवामर्द बिरले ही जन्म लेते है । सुना है कि धरती बीज नही चुराती, किन्तु इरपिंदर, आजकल तो कुछ ऐसी आशंका खटकने लगी है कि सफेद पोश प्रतिष्ठित चोरों के पावन चरण का स्पर्श पाकर कही धरती तो चोरी कर्ना नही सीख गयी ? मुझे तो अब यह पुख्ता विश्वास होने लगा है कि अपनी धरती से सत्य का बीज बिल्कुल नदारद हो जायेगा । हा, तो उस दिन बाल-प्रीत की निर्मल आत्मीयता के वशीभूत कल्पना के उड़न खटोल पर राजकुमार की तरह आकाश मे चक्कर काटने लगा। 'खोका' का संबोधन तब भी मेरे दिल में कही काटे-सा खटक रहा था । ऐसा क्या गुल खिलाऊ कि लोग मेरे नाम का यथेष्ट सम्मान करें । मेरा नाम उच्चरित करते समय उनका मुह भर आये । शनिवार की नियमित सभा मे रटे-रटाये सवैये, मनहर छद और कवित्त तो सुनाता ही था । तालियों की गड़गड़ाहट उड़ने लगी थी । आखिर सोचते विचारते, बुझतेघुटते एक अटकल सूझी कि दूसरो की कविता नहीं सुना कर खुद कविता बनाऊं तो ज्यादा धाक जमेगी । बलवती आकाक्षा के उकसाने पर नृसिह राजपुरोहित से सलाह-मशविरा किया । वह तो जैसे इसी सुझाव की प्रतीक्षा कर रहा था । तुरंत मान गया । साधुओ के वेश मे बैर्गिये नाले की ओट में चोरी करने वाले तीन चोरों पर दोनों ने साथ बैठ कर कविता करने की सोची। एक- एक पंक्ति पूरी होने पर मानो इंद्रलोक का राज्य हाथ लगता । स्कूल में समय मिलता तो स्कूल में और बोर्डिंग में समय मिलता तो बोडिंग मे नृसिंह के पास अपूर्व खुशी में उड़ कर जाता । सिकंदर को भी अपनी विजय का डंका सुनते समय ऐसा आनंद तो क्या हुआ होगा, जितना हमें वह पहली कविता सम्पूर्ण करने पर हुआ। स्कूल के कण-कण में हमारे नाम की प्रतिध्वनि सुनायी पड़ने लगी कि मैने व नृसिंह ने कविता बनायी है, कविता ! हां कविता !! मानो धरती पर कोई नया चांद उगा हो । उन दिनों कविता का कुछ ऐसा ही दबदबा था । कई अध्यापकों ने पूछताछ की तो मैंने अभिमान के साथ विनम्र हामी भरी । फिर तो मैने हेकड़ी हेकड़ी मे संस्कृत के चार-पांच श्लोक भी बनाये । पडितजी ने भरे स्कूल के सामने मेरी हिम्मत बधायी । इतने जोर से मेरी पीठ थपथपायी कि सारे शरीर में सनसनाहट-सी फैल गयी। फिर भी दर्द की जगह आंखों में खुशी के मोती भर आये थे। उस दिन की भविष्यवाणी आज की तरह याद है कि मैं पंडितजी का होनहार विद्यार्थी समय आने पर, सारे देश में अपना नाम रौशन करूंगा । गाडी के नीचे चलने वाले कुत्ते की तरह मेरे मन में भी इसी गलतफहमी का ज्वार हिलोरे भरने लगा कि स्कूल की गाड़ी मेरे बूते पर ही चलती है। उन दिनों स्कूल की चहारदीवारी में ही समूची दुनिया समायी हुई थी । हमेशा कविता करना तो हाथ की बात नही थी, पर हमेशा कुबद करना तो हाथ की बात थी । नामवरी का लहू तो होठों लग चुका था । दूसरों की रटी हुई कविताओं की तुलना में मेरी अपनी कविताएं खराब लगती थीं । मगर बदमाशी मे मेरी होड करने वाला कोई नहीं था । नामवरी का उछाह इस राह धीरे-धीरे तुष्ट होने लगा । नादान देवी समझाने की चेष्टा करती; पर निरर्थक । आखिर समझ तो अपनी ही काम देती है, इरपिंदर । शाहजी की सीख फलसे तक । वह कई वार नाराज होती, रूठती, पर बदमाशी की लत मुझ से नही छूटी । कविता की सफलता अभी काफी दूर थी । उस मे नामवरी हासिल करने के लिए बरसों - बरसों तक धैर्य रखने की दरकार थी । बदमाशी के सतोष का चमत्कार तो हाथोहाथ मिलता था । हमारे परिवार मे कुबेरजी वाभा के पास कविता लिखने का अच्छा खासा हुनर था । पढ़ाई और खेलकूद के प्रति उत्साह भी कम नहीं था। बिलाड़ा से सातवी कक्षा पास करके वे आगे पढ़ने के लिए जोबनेर भरती हुए। मुझ से मन पसद कविताएं नहीं लिखी गयी तो मै उनकी कविताएं याद करके सुनाने लगा। सुनने वालो की आंखे ऊंची ललाट में चढ़ जाती । पर मन से छिपी तो कोई चोरी नही होती, इरपिंदर ! मैं स्वयं तो अपना बूता जानता ही था । वैसी कविताएं लिखना मेरे वश की बात नही थी । एक दफा तो शनिवार की सभा में ऐसा ठाट जमा कि क्या बताऊ ! पूरी कविता तो फिलहाल याद नहीं है, पर उसकी अंतिम कड़ी भुलना चाहूं तो भी भूल नही सकता : अड़ी अगरेजी छोड़, धारौ अंग रेजी को काफी लम्बी कविता थी, सात-आठेक मनहर छंदों की । अंग्रेजी फैशन और अंग्रेजी भाषा की बुराई से सराबोर । मेरा मनचीता प्रतिशोध ! ऐसी मालजादी अंग्रेजी छोड़ कर सारे देशवासियो अंग रेजी धारण करो । रेजी कहते हैं हाथों से कती बुनी खादी को । महात्मा गांधी की दुलारी खादी ! फिर क्या कसर बाकी रहती । तालियों पर तालियों की गड़गड़ाहट ! तीसरी बार सुनने के बाद भी श्रोताओं का मन नहीं भरा । हेड मा ट सा'ब ने अत्यधिक खुशी में छक कर मुझे शाबाशी दी। देवी के आनंद का भी वारापार नहीं था । उस रात दमकते सितारों के बीच उसका मन भी दमका होगा, जरूर दमका होगा। मुझे स्वयं भी कुछ देर के लिए यह भ्रम हुआ कि इस अथाह यश-कीत्ति का दावेदार मैं ही हूं । पर उस रात के सघन अधियारे मे मेरी आंखों के सामने यह स्पष्ट हो गया कि यह तो सरासर चोरी की नामवरी है। क्योंकर कबूल करूं ? किसी एक व्यक्ति को तो सच्चा भेद बताये बिना क्षण भर के लिए चैन नही पड़ेगा । सारी रात नीद नही आयी। पर सवेरे सूरज के छलछलाते उजाले में सब कुछ फिर से अंधियारे के बीच दब गया । समय से घडी डेढ़-घडी पहले स्कूल पहुंचा, पर सिले हुए होंठ तो खुले ही नही । हेड मा ट सा'ब का घर स्कूल से एकदम सटा हुआ ही था । भीतर ही भीतर मन तो खूब ही छटपटाया, मगर जिसे भेद बताना था, उसे नही बता सका । आज पहली बार यह रहस्य उजागर कर रहा हू । मन-ही-मन कुण्ठाग्रस्त होकर मैने उस दिन ज्यादा बदमाशी की। पर साथ ही साथ यह दृढ़ संकल्प किया कि कुबेरजी वाभा जैसी कविताए करके ही दम लूगा । अन्यथा मनुष्य की जिंदगी पाकर धूल ही फांकी । इस तरह जीने को धिक्कार है । इसकी अपेक्षा तो मौत ज्यादा श्रेयस्कर है । पहले ही कहा था कि सरकारी अहलकार का एक पांव दफ्तर में तो दूसरा गली में । सुमेरजी वाभा की बदली जोधपुर हो गयी । सुनते ही ऐसा लगा कि बाड़मेर छूटने के साथ मेरे प्राण भी छूट जायेंगे । इस तरह की अविच्छिन्न आत्मीय मडली से क्योंकर दूर छिटक सकूगा ? वियोग की दाह सुलगते ही यार-दोस्तो की घनिष्ठता का अहसास हुआ। वे कोई मित्र थोड़े ही थे, तारों का जमघट था, जमघट नृसिह, आसूलाल, रामजीवन, राधेश्वर, गिरधारी, हमीरसिंह, मेघसंह इत्यादि... इत्यादि ! आखिरी नाम के आगे इत्यादि इत्यादि की अर्गला जड़ने पर निश्चय ही तुम्हारी मुस्कान थमेगी नही । हरगिज नही थमेगी । पर वह नाम कलम की कालिख द्वारा प्रकट होते ही निर्मल प्रेम की मर्यादा भ्रष्ट हो जायेगी । बादला के पानी में कीच घुल जायेगा । बिजली की पावन दमक पर काजल की तूलिका फिर जायेगी । ऐसा महसूस हुआ कि जैसे फूलों पर मंडराती तितली की पाखे कतर ली गयी हो । तितली मे पांखो के अलावा शेष बचता ही क्या है ? नृसिंह वाली बोडिंग मे भरती होकर वही पढ़ने के लिए सुमेरजी वाभा के सामने डरते-डरते मशा प्रकट की, पर पार नही पड़ी । सयोग तो अपनी लीला अपने हिसाब से रचता है । जितना 'अंजल' था उतना सपना देख लिया। सपने की क्या बिसात ? टूट कर ही रहता है । आंख खुलने के साथ ही सुहाना सपना ध्वस्त हो गया । एक ही क्षण में एक साथ । आशाओं के बादल महल की ढेरी होने मे यह देर लगी, इरपिंदर ! सभी यार-दोस्त गले मिल-मिल कर खूब ही रोये, पर जाने वाले के लिए रुकना हाथ की बात नहीं थी । क्यों तो कलमुंही रेल ने इतनी दूर लाकर जोर से पछाड़ा और अब क्यों क्षत-विक्षत पिड को सहेज कर वापस ले जा रही है ? प्रीत के घरौदे रौंद कर इसे क्या हाथ लगेगा ? पर जिसके निःश्वास से ही काला धुआं निकले, उस से कुछ आशा रखना ही बेकार है। आज तो अधिकांश मित्रों के नाम सोचने पर भी याद नहीं आते, पर उस दिन वाकई वियोग की दाह का कोई पार नहीं था। वैसे घनिष्ठ अंतरंग मित्र पीछे रह गये और मैं अकेला जीवित मुर्दे की तरह आधे-अधूरे होश में गाड़ी रवाना होने के साथ जुदा हो गया । उस समय नृसिंह ने जाली के धागों से गुंथी एक थैली और एक पेन मुझे सौंपा । अत्यधिक स्नेह के साथ, उछाह के साथ । वह थैली उसके हाथ से गुंथी हुई थी चार आंखों से, एक ही सांचे में ढले मोती झार-झार बरसने लगे। पर लम्बा-ही-लम्बा अजगर फुफकारे भरता सब यात्रियों को अपनी ओजरी में समेट कर आगे रपटता ही गया, रपटता ही गया । कलेजे को मसलता हुआ, रौदता हुआ । इत्यादि-इत्यादि बातों पर वही विराम-चिह्न जड़ गया । वसोले की तीखी-तच्च धार से कच्ची कदली के टुकड़े होने पर उन्हें वापस कैसे जोड़ा जा सकता है ? बदली की अशुभ खबर मिलने के बाद एक व्यक्ति से भेंट करने की हिम्मत नही हुई । वह तो स्वयं अपने आप से अपना ही वियोग था, इरपिंदर ! कोई क्योंकर सहन कर सकता है । जीवन और मृत्यु का वियोग तो समझ में आता है, पर मौत-स-मौत का वियोग तो विधात्री भी नही जानती । चार-पांच दिन तक किस तरह अपने-आप से छिपता रहा, आज चाहूं तो भी विश्वास नहीं होता। वैसी शूरवीरता से तो कायरता लाख गुना श्रेष्ठ है। आज दिन तक वापस उस से मिलन नहीं हुआ। उस दिन का 'खोका' और आज का 'बिज्जी' एक ही व्यक्ति है क्या ? मुझे तो ऐसा नही लगता । और न दो मानने के लिए ही मन राजी होता है ! कैसे स्नेहमयी है संयोग की लीला !! कैसी निर्मम है संयोग की लीला !!! तब का जोधपुर शहर भी बाड़मेर से बहुत बड़ा और विचित्र था । दरबार हाईस्कूल, बाड़मेर के मिडल स्कूल में अत्यधिक ठसके वाला था । हेड मास्टर सिंहल साहब के नाम के पत्थर तैरते थे । शहर का चुनिंदा स्कूल था । वैसे ही नामजद गुरु और वैसे ही कुशल विद्यार्थी ! कुए के मेंढ़क ने जैसे विशाल सरोवर मे छलांग मारी हो । कई दिन तक तो घबराया-घबराया-सा रहा । मानो अपने ठिकाने पर स्वयं खो गया हूं । किसी तरह का कोई संपट ही नहीं जुड़ पाया । जगल की नीलगाय बस्ती मे आने पर जिस तरह होश भूल जाती है, ठीक मेरी भी वही हालत हुई । पर धीरे-धीरे कविता के बूते पर आश्वस्त होने लगा। खिलाड़ी और दौड़ने वालों की पूछ काफी थी। खूमदानजी ने तो आते ही अपनी धाक जमा ली । वे फुटबाल के निहायत उम्दा खिलाड़ी थे । सौ गज की दौड़ मे दांत भींचकर दौड़ते तो अव्वल नंबर में कोई खामी नहीं रहती। पर मैं तो खेल-कूद में एकदम अनाड़ी था। फिर भी नामवरी की भूख तो किसी तरह शांत होना ही नहीं चाहती थी। कुछ तो कविता ने बाजी रखी और कुछ वाद-विवाद की प्रतियोगिता ने । पर बदमाशी, कुबद व कुलंगों का पलड़ा तब भी भारी था । छठी कक्षा पास करके सातवीं में आया तब तक काफी शोहरत हासिल कर ली थी। आज तो भाषण व साक्षात्कार के नाम से कलेजा धुकधुक करने लगता है, पर उन दिनों मंच पर सामने खड़ा
चतुर्थ शास्त्रार्थ मियानी (सरगोधा ) श्री पण्ठित ठाकुर अमरसिंह जी शास्त्रार्थ केशरीमुझको श्री प्रधान जी पर पूरा भरोसा है मैं शास्त्रार्थ जारी करता हूं, सुनिये संस्कार विधि मुण्डन संस्कार की विधि में "शिवो नामासि ....." इस मन्त्र द्वारा परमेश्वर को नमस्ते है, उस्तरे को कदापि नहीं। और जहां उस्तरे को नमस्ते की गई है, उस जगह को श्री प्रधान जी आपको बतायेंगे, तथा दिखायेंगे वह सच्चे पुरुष हैं। मैं उन पर पूर्ण विश्वास रखता हूं। "मूसल-उलूखल" की पूजा संस्कार विधि में कहीं नहीं लिखी है। पञ्चयज्ञों में एक "बलिवंश्वदेव यज्ञ" है। उसमें "मूसलउलूखल" के नाम से कुछ अन्न का भाग भोजन से पूर्व इसलिये निकाल कर रखने का विधान है कि मूसल और ओखली से कई कृमि, कीट, आदि के अंग भंग हो जाते हैं और अनजाने में ही हो जाते हैं । उनका प्रायश्चित रूप यह कार्य है । जिससे उन दुःखी प्राणियों को कुछ उसी स्थान पर खाद्मपदार्थ मिल जाये, वह मूसल और उलूखल के खाने के लिए नहीं, उनके द्वारा जो प्राणी पीड़ित हुए हों, उनके लिये अन्न भाग रक्खा जाना चाहिये ! जैसे दान करते समय, लोग धर्मशाला, पाठशाला, स्कूल, गुरुकुल, आदि के नाम पर धन दान देते हैं ऐसे ही यह मूसल उलूखल के खाने के लिए नहीं, उनके द्वारा जिन प्राणियों को पीड़ा पहुंची हो, उनके लिये वह भाग होता है देखिये मनुस्मृति के श्लोक ८८ और इसके भी आगे-पीछे देख सकते हैं । दण्ड और जूते की पूजा दिखाइये कहां लिखी हैं ? तथा यह भी बताइये कि दण्ड और जूता आपके कौन से देव तथा कौन से देवों की मूर्तियां हैं ? हम भोजन करते समय "ओ३म् अन्नपते ." आदि मन्त्र बोलते हैं। पुरानी परिपाटी है कि, वस्त्र पहिनें तो मन्त्र बोलें, ब्रह्मचारी दण्ड धारण करें तो मन्त्र बोले, समावर्तन के समय जूता पहनें तो मन्त्र बोलें, सामान्य व्यवहारों में बहुत मन्त्रों तथा उनके अर्थों का ज्ञान हो जाय, यह उन मन्त्रों के बोलने का प्रयोजन होता है इससे ईश्वर की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करना कैसे सिद्ध हो गया ? पटेला भी कोई न आपका देव है, न वह ईश्वर की मूर्ति, ! महर्षि दयानन्द जी ने लिखा है कि, खेतों में गन्दे पदार्थ न डाले जावें, अच्छा खाद डालने से अन्नादि पदार्थ अच्छे पैदा होते हैं। आपको अगर पता न हो तो किसी समझदार ( अनुभवी) माली से ही पूछ लीजिये कि सोंठिया, सोफिया और दूधिया एवं आम, सोंठ, सोंफ आदि के अर्क और दूध आदि का बीजों और भूमि में सेचन करने से आम्रफल में उनका प्रभाव आता है। आपके प्रश्नों के उत्तर दे दिये, मेरे पहले प्रश्नों के उत्तर आप नहीं दे सके, नये और सुनिये तथा नोट कीजिये । शैव तथा शैवों के ग्रन्थ कहते हैं कि - शिव ही परमेश्वर थे, उन्होंने ही ब्रह्मा, विष्णु तथा सृष्टि को बनाया । वैष्णव तथा उनके ग्रन्थ कहते हैं कि, विष्णु ही परमेश्वर हैं विष्णु ने ही सृष्टि तथा शिव और ब्रह्मा को बनाया । कोई पुराण कहता है, ब्रह्मा ने ही सबको बनाया । शाक्त कहते हैं कि शक्ति ने ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा सृष्टि को बनाया, आप पहले यह निर्णय कीजिये कि इनमें से ईश्वर कौन है ? और किसकी मूर्ति ईश्वर की मूर्ति मानी जावेगी ? जब आपके ईश्वर का निश्चय ही नहीं तो मूर्ति किसकी ? पुराणों में कहा है। दुर्गाने शिव सूर्यस्थ, वैष्णवाख्यान मेव च । यः करोति विमूढ़ात्मा गार्दभों योनिमाविशेत् ॥३१॥ भविष्य पुराण मध्य पर्व २, अध्याय ७ श्लोक ३१, इसमें कहा गया है कि दुर्गा के आगे शिव, सूर्य या विष्णु की स्तुति जो मनुष्य करता है, वह मूढ़ "गधे" की योनि में जाता है । हिरणाकुश और प्रहलाद में यह मतभेद बताया गया है कि हिरणाकुश कहता था कि, विष्णु को छोड़
चतुर्थ शास्त्रार्थ मियानी श्री पण्ठित ठाकुर अमरसिंह जी शास्त्रार्थ केशरीमुझको श्री प्रधान जी पर पूरा भरोसा है मैं शास्त्रार्थ जारी करता हूं, सुनिये संस्कार विधि मुण्डन संस्कार की विधि में "शिवो नामासि ....." इस मन्त्र द्वारा परमेश्वर को नमस्ते है, उस्तरे को कदापि नहीं। और जहां उस्तरे को नमस्ते की गई है, उस जगह को श्री प्रधान जी आपको बतायेंगे, तथा दिखायेंगे वह सच्चे पुरुष हैं। मैं उन पर पूर्ण विश्वास रखता हूं। "मूसल-उलूखल" की पूजा संस्कार विधि में कहीं नहीं लिखी है। पञ्चयज्ञों में एक "बलिवंश्वदेव यज्ञ" है। उसमें "मूसलउलूखल" के नाम से कुछ अन्न का भाग भोजन से पूर्व इसलिये निकाल कर रखने का विधान है कि मूसल और ओखली से कई कृमि, कीट, आदि के अंग भंग हो जाते हैं और अनजाने में ही हो जाते हैं । उनका प्रायश्चित रूप यह कार्य है । जिससे उन दुःखी प्राणियों को कुछ उसी स्थान पर खाद्मपदार्थ मिल जाये, वह मूसल और उलूखल के खाने के लिए नहीं, उनके द्वारा जो प्राणी पीड़ित हुए हों, उनके लिये अन्न भाग रक्खा जाना चाहिये ! जैसे दान करते समय, लोग धर्मशाला, पाठशाला, स्कूल, गुरुकुल, आदि के नाम पर धन दान देते हैं ऐसे ही यह मूसल उलूखल के खाने के लिए नहीं, उनके द्वारा जिन प्राणियों को पीड़ा पहुंची हो, उनके लिये वह भाग होता है देखिये मनुस्मृति के श्लोक अठासी और इसके भी आगे-पीछे देख सकते हैं । दण्ड और जूते की पूजा दिखाइये कहां लिखी हैं ? तथा यह भी बताइये कि दण्ड और जूता आपके कौन से देव तथा कौन से देवों की मूर्तियां हैं ? हम भोजन करते समय "ओतीनम् अन्नपते ." आदि मन्त्र बोलते हैं। पुरानी परिपाटी है कि, वस्त्र पहिनें तो मन्त्र बोलें, ब्रह्मचारी दण्ड धारण करें तो मन्त्र बोले, समावर्तन के समय जूता पहनें तो मन्त्र बोलें, सामान्य व्यवहारों में बहुत मन्त्रों तथा उनके अर्थों का ज्ञान हो जाय, यह उन मन्त्रों के बोलने का प्रयोजन होता है इससे ईश्वर की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करना कैसे सिद्ध हो गया ? पटेला भी कोई न आपका देव है, न वह ईश्वर की मूर्ति, ! महर्षि दयानन्द जी ने लिखा है कि, खेतों में गन्दे पदार्थ न डाले जावें, अच्छा खाद डालने से अन्नादि पदार्थ अच्छे पैदा होते हैं। आपको अगर पता न हो तो किसी समझदार माली से ही पूछ लीजिये कि सोंठिया, सोफिया और दूधिया एवं आम, सोंठ, सोंफ आदि के अर्क और दूध आदि का बीजों और भूमि में सेचन करने से आम्रफल में उनका प्रभाव आता है। आपके प्रश्नों के उत्तर दे दिये, मेरे पहले प्रश्नों के उत्तर आप नहीं दे सके, नये और सुनिये तथा नोट कीजिये । शैव तथा शैवों के ग्रन्थ कहते हैं कि - शिव ही परमेश्वर थे, उन्होंने ही ब्रह्मा, विष्णु तथा सृष्टि को बनाया । वैष्णव तथा उनके ग्रन्थ कहते हैं कि, विष्णु ही परमेश्वर हैं विष्णु ने ही सृष्टि तथा शिव और ब्रह्मा को बनाया । कोई पुराण कहता है, ब्रह्मा ने ही सबको बनाया । शाक्त कहते हैं कि शक्ति ने ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा सृष्टि को बनाया, आप पहले यह निर्णय कीजिये कि इनमें से ईश्वर कौन है ? और किसकी मूर्ति ईश्वर की मूर्ति मानी जावेगी ? जब आपके ईश्वर का निश्चय ही नहीं तो मूर्ति किसकी ? पुराणों में कहा है। दुर्गाने शिव सूर्यस्थ, वैष्णवाख्यान मेव च । यः करोति विमूढ़ात्मा गार्दभों योनिमाविशेत् ॥इकतीस॥ भविष्य पुराण मध्य पर्व दो, अध्याय सात श्लोक इकतीस, इसमें कहा गया है कि दुर्गा के आगे शिव, सूर्य या विष्णु की स्तुति जो मनुष्य करता है, वह मूढ़ "गधे" की योनि में जाता है । हिरणाकुश और प्रहलाद में यह मतभेद बताया गया है कि हिरणाकुश कहता था कि, विष्णु को छोड़
क्रिकेट और इस खेल फैंस के लिए ये गणतंत्र दिवस खास इसलिए भी है, क्योंकि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया फतह कर लौटी है. भारत के 72वें गणतंत्र दिस पर देशभक्ति उबाल लेती दिखी. एक दूसरे को मुबारकबाद देने का सिलसिला सा चल पड़ा. और चले भी क्यों दिन ही जो इतना खास है. और, उससे भी अहम बात ये कि ये दिन देशहित से जुड़ा है. 26 जनवरी या यूं कहें कि गणतंत्र दिवस के नाम पर हर भारतवासी के दिल में एक जोश और उमंग दिखता है. बहरहाल, इस खास दिन की मुबारकरबाद देने का दौर भारतीय क्रिकेट में भी देखने को मिला. फिर चाहे क्रिकेटर्स एक दूसरे को विश करते दिखे हों या देश के उन करोड़ों क्रिकेट फैंस को जिनकी वजह से वो स्टार बने या कभी उनके दिलों पर राज किया. भारतीय क्रिकेटरों की मुबारकबाद सोशल मीडिया पर छाई रही. पर जो सबसे खास संदेश हिंदुस्तान के लोगों के नाम रहा, वो पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग की ओर से आया. सहवाग ने ट्वीट कर उन तमाम क्रिकेट फैंस से अपील की है कि टीम की जीत का जश्न मनाने के बाद भारतीय झंडे को फेंके नहीं, उसका सम्मान करें, मान रखें. May the sun in his course visit no land more free, more happy, more lovely, more prosperous than our own Bharat. Happy Republic Day ?? ?? क्रिकेट और इस खेल फैंस के लिए ये गणतंत्र दिवस खास इसलिए भी है, क्योंकि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया फतह कर लौटी है. उसने उस गाबा में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ा, जहां मेजबान टीम पिछले 32 साल से नहीं हारी थी. बहरहाल, अब भारतीय टीम के सामने एक नई चुनौती है. और, ये चैलेंज है अंग्रेजों का. विराट एंड कंपनी के लिए अच्छी बात ये है कि मुकाबला उन्हें अपने घर में खेलना है. इंग्लैंड की टीम श्रीलंका को उसके घर में हराकर भारत आ रही है. इसलिए उन्हें हल्के में लेने की भूल तो टीम इंडिया कतई नहीं करेगी. यानी, जीत मिलेगी, जश्न भी मनेगा, बस उस जश्न में सहवाग की अपील को को भारतीय फैंस को ध्यान में रखना होगा.
क्रिकेट और इस खेल फैंस के लिए ये गणतंत्र दिवस खास इसलिए भी है, क्योंकि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया फतह कर लौटी है. भारत के बहत्तरवें गणतंत्र दिस पर देशभक्ति उबाल लेती दिखी. एक दूसरे को मुबारकबाद देने का सिलसिला सा चल पड़ा. और चले भी क्यों दिन ही जो इतना खास है. और, उससे भी अहम बात ये कि ये दिन देशहित से जुड़ा है. छब्बीस जनवरी या यूं कहें कि गणतंत्र दिवस के नाम पर हर भारतवासी के दिल में एक जोश और उमंग दिखता है. बहरहाल, इस खास दिन की मुबारकरबाद देने का दौर भारतीय क्रिकेट में भी देखने को मिला. फिर चाहे क्रिकेटर्स एक दूसरे को विश करते दिखे हों या देश के उन करोड़ों क्रिकेट फैंस को जिनकी वजह से वो स्टार बने या कभी उनके दिलों पर राज किया. भारतीय क्रिकेटरों की मुबारकबाद सोशल मीडिया पर छाई रही. पर जो सबसे खास संदेश हिंदुस्तान के लोगों के नाम रहा, वो पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग की ओर से आया. सहवाग ने ट्वीट कर उन तमाम क्रिकेट फैंस से अपील की है कि टीम की जीत का जश्न मनाने के बाद भारतीय झंडे को फेंके नहीं, उसका सम्मान करें, मान रखें. May the sun in his course visit no land more free, more happy, more lovely, more prosperous than our own Bharat. Happy Republic Day ?? ?? क्रिकेट और इस खेल फैंस के लिए ये गणतंत्र दिवस खास इसलिए भी है, क्योंकि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया फतह कर लौटी है. उसने उस गाबा में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ा, जहां मेजबान टीम पिछले बत्तीस साल से नहीं हारी थी. बहरहाल, अब भारतीय टीम के सामने एक नई चुनौती है. और, ये चैलेंज है अंग्रेजों का. विराट एंड कंपनी के लिए अच्छी बात ये है कि मुकाबला उन्हें अपने घर में खेलना है. इंग्लैंड की टीम श्रीलंका को उसके घर में हराकर भारत आ रही है. इसलिए उन्हें हल्के में लेने की भूल तो टीम इंडिया कतई नहीं करेगी. यानी, जीत मिलेगी, जश्न भी मनेगा, बस उस जश्न में सहवाग की अपील को को भारतीय फैंस को ध्यान में रखना होगा.
प्रसादज यस्य विभोरदित्या पुत्रकारणम् । वधार्थ सुर दैत्यदानवरक्षसाम् ॥१६॥ ययानिवशजस्थाथ वसदेवस्य धीमत । बुल पुण्य यत कर्म भेजे नारायण प्रभु ।।१६८ सागरा समवम्पन्त चेलुश्च धरणीधरा. । जज्जलुश्चाग्निहोत्राणि जायमाने जनार्दने ॥१६S शिवाश्च प्रवदुर्वाता प्रशान्तिमभवद्रज । ज्योतीप्यभ्यधिव रेजुर्जायमाने जनार्दने ।। २०० अभिजिताम नक्षत्र जयन्ती नाम शर्वरी । मुहूर्ती विजयो नाम यत्र जानो जनार्दन ।।२०१ अव्यक्त शाश्वत कृष्णो हरिनारायण प्रभु । जायते स्मैव भगवान् नयननयन् प्रजा ।।२०२ क्योकि भव्यय नारायस न प्रभव दिया अर्थात् जन्म ग्रहण किया था देवनारायण हावर सातन हरि हुए थ ॥१६५ जिगने पहिल पादि पुरुष प्रजापति वा सृजन किया था वह यादव नन्दन प्रदिनि के भी पुल के स्वरूप वो प्राप्त बार देव विष्णु नाम से प्रसिद्ध हुए थे और इन्द्र व छोटे भाई बन गये थे ।। १६६ ।। जिम विभु के पदिति के पुत्र होन का पारण मेवल प्रसाद ही है । जोरि देवी के देय-दानव पौर रागगो व वध करन के लिये ही हुआ था ।।१६७।। गजा ययाति के वश में जन्म देन बाने धीयान बहुत पुत्र है जिसमप्रभु नारायण ने जन्म ग्रहण वर व मं किया था ॥१६८॥ भगवान् जनादन वे उत्पन्न होते व समय मे समस्त सागर बम्पमा हागय थे और सब पवत चलायमान हागय थे मौर भारो मोर मि क्षेत्र उतिहराय थे ॥ १६६॥ पराउबहन बरने लगीज ने प्रान्ति प्राप्ती भगगन् जाादन में जायमान हो। पर ज्योतिया परपं प्रिया से होकर शोभित हो रही थी ।।२००१॥ उा समय में अभिजिद नाम नापा-जयी नाम पर विजय नाम याना मुलं पानि समय में भगवार जनार्दन ने अपना जन्म प्रहण किया था ।।२०१॥ अव्यक्त - शाश्वत - प्रभु नारायण हरि श्रीकृष्ण भगवान् नेत्रो के द्वारा प्रजा को मुग्ध करते हुए उत्पन्न हुए थे । २०२।। आकाशात् पुष्पवृष्टी ववर्षं निदशेश्वरः । गोभिर्मङ्गलयुक्ताभिः स्तुवन्तो मधुसूदनम् । महर्षय सगन्धर्वा उपतस्थु सहस्रश. ।।२०३ वमुदेवस्तु त रात्रौ जात पुनमधोक्षजम् । श्रीवत्सलक्षरण दृष्ट्वा दिवि दिव्यंः मुलक्षणं । उवाच वसुदेव स्व रूप सहार वै प्रभो ॥२०४ भीतोऽह कसतस्तात एलदेव प्रवीम्यहम् । मम पुत्रा हतास्तेन ज्येास्तेऽद्भुतदशना ।।२०५ वसुदेववच श्रुत्वा रूप स हृतवान् प्रभु । अनुज्ञात पिता त्वेन नन्दगापगृह गत । उग्रसेनमते तिष्ठन् यशोदायें तदा ददौ ॥२०६ तुल्यकालन्तु गभिण्यो यशोदा देवकी तथा । यशोदा नन्दगोपस्य पत्नी सा नन्दगोपते ॥२०७ विदशेश्वरी ने सपा से पुष्पो की वर्षा की थी और भगवान् मधुसूदन की मङ्गलमयी वासियों के द्वारा स्तुति की थी। उस समय सहस्रो ही महपिगण-गन्धव लोग वहाँ पर स्लवन गान करने के लिये उपस्थित होगये थे ।। २०३।। वसुदेव ने तो रात्रि के समय में भगवान् अधोक्षज को पुत्र के रूप मे उत्पन्न हुए देखकर जोकि धोवल के चिह्न मे युक्त और समस्त अन्य दिव्य लक्षणों मे भन्वित थे वसुदेवजी ने कहा -- प्रभो । इस समय आप स्वरूप वा सहरण वय । २०४। हे तात । मैं राजा बस से भयभीत हो रहा हूँ यही कारण है कि मैं इस समय आपसे यह निवेदन कर रहा हूँ । इन क्स ने प्रद्भुत दर्जन वाल मेरे भारस ज्येष्ठ पुत्रो को मार डाला है ।। २०५॥ वसुदेव के इस विनिवेदित वचन को सुनकर भगवान ने अपने उम स्वरूप का संवरण कर लिया था। उनके द्वारा पिता वसुदेव मनुज्ञात होकर इनको लेकर नन्दगोप के गृह पर चले गये थे। उप्रसेन के मन में रहते हुए उस समय उन्हें यशोदा के
प्रसादज यस्य विभोरदित्या पुत्रकारणम् । वधार्थ सुर दैत्यदानवरक्षसाम् ॥सोलह॥ ययानिवशजस्थाथ वसदेवस्य धीमत । बुल पुण्य यत कर्म भेजे नारायण प्रभु ।।एक सौ अड़सठ सागरा समवम्पन्त चेलुश्च धरणीधरा. । जज्जलुश्चाग्निहोत्राणि जायमाने जनार्दने ॥सोलहS शिवाश्च प्रवदुर्वाता प्रशान्तिमभवद्रज । ज्योतीप्यभ्यधिव रेजुर्जायमाने जनार्दने ।। दो सौ अभिजिताम नक्षत्र जयन्ती नाम शर्वरी । मुहूर्ती विजयो नाम यत्र जानो जनार्दन ।।दो सौ एक अव्यक्त शाश्वत कृष्णो हरिनारायण प्रभु । जायते स्मैव भगवान् नयननयन् प्रजा ।।दो सौ दो क्योकि भव्यय नारायस न प्रभव दिया अर्थात् जन्म ग्रहण किया था देवनारायण हावर सातन हरि हुए थ ॥एक सौ पैंसठ जिगने पहिल पादि पुरुष प्रजापति वा सृजन किया था वह यादव नन्दन प्रदिनि के भी पुल के स्वरूप वो प्राप्त बार देव विष्णु नाम से प्रसिद्ध हुए थे और इन्द्र व छोटे भाई बन गये थे ।। एक सौ छयासठ ।। जिम विभु के पदिति के पुत्र होन का पारण मेवल प्रसाद ही है । जोरि देवी के देय-दानव पौर रागगो व वध करन के लिये ही हुआ था ।।एक सौ सरसठ।। गजा ययाति के वश में जन्म देन बाने धीयान बहुत पुत्र है जिसमप्रभु नारायण ने जन्म ग्रहण वर व मं किया था ॥एक सौ अड़सठ॥ भगवान् जनादन वे उत्पन्न होते व समय मे समस्त सागर बम्पमा हागय थे और सब पवत चलायमान हागय थे मौर भारो मोर मि क्षेत्र उतिहराय थे ॥ एक सौ छयासठ॥ पराउबहन बरने लगीज ने प्रान्ति प्राप्ती भगगन् जाादन में जायमान हो। पर ज्योतिया परपं प्रिया से होकर शोभित हो रही थी ।।दो हज़ार एक॥ उा समय में अभिजिद नाम नापा-जयी नाम पर विजय नाम याना मुलं पानि समय में भगवार जनार्दन ने अपना जन्म प्रहण किया था ।।दो सौ एक॥ अव्यक्त - शाश्वत - प्रभु नारायण हरि श्रीकृष्ण भगवान् नेत्रो के द्वारा प्रजा को मुग्ध करते हुए उत्पन्न हुए थे । दो सौ दो।। आकाशात् पुष्पवृष्टी ववर्षं निदशेश्वरः । गोभिर्मङ्गलयुक्ताभिः स्तुवन्तो मधुसूदनम् । महर्षय सगन्धर्वा उपतस्थु सहस्रश. ।।दो सौ तीन वमुदेवस्तु त रात्रौ जात पुनमधोक्षजम् । श्रीवत्सलक्षरण दृष्ट्वा दिवि दिव्यंः मुलक्षणं । उवाच वसुदेव स्व रूप सहार वै प्रभो ॥दो सौ चार भीतोऽह कसतस्तात एलदेव प्रवीम्यहम् । मम पुत्रा हतास्तेन ज्येास्तेऽद्भुतदशना ।।दो सौ पाँच वसुदेववच श्रुत्वा रूप स हृतवान् प्रभु । अनुज्ञात पिता त्वेन नन्दगापगृह गत । उग्रसेनमते तिष्ठन् यशोदायें तदा ददौ ॥दो सौ छः तुल्यकालन्तु गभिण्यो यशोदा देवकी तथा । यशोदा नन्दगोपस्य पत्नी सा नन्दगोपते ॥दो सौ सात विदशेश्वरी ने सपा से पुष्पो की वर्षा की थी और भगवान् मधुसूदन की मङ्गलमयी वासियों के द्वारा स्तुति की थी। उस समय सहस्रो ही महपिगण-गन्धव लोग वहाँ पर स्लवन गान करने के लिये उपस्थित होगये थे ।। दो सौ तीन।। वसुदेव ने तो रात्रि के समय में भगवान् अधोक्षज को पुत्र के रूप मे उत्पन्न हुए देखकर जोकि धोवल के चिह्न मे युक्त और समस्त अन्य दिव्य लक्षणों मे भन्वित थे वसुदेवजी ने कहा -- प्रभो । इस समय आप स्वरूप वा सहरण वय । दो सौ चार। हे तात । मैं राजा बस से भयभीत हो रहा हूँ यही कारण है कि मैं इस समय आपसे यह निवेदन कर रहा हूँ । इन क्स ने प्रद्भुत दर्जन वाल मेरे भारस ज्येष्ठ पुत्रो को मार डाला है ।। दो सौ पाँच॥ वसुदेव के इस विनिवेदित वचन को सुनकर भगवान ने अपने उम स्वरूप का संवरण कर लिया था। उनके द्वारा पिता वसुदेव मनुज्ञात होकर इनको लेकर नन्दगोप के गृह पर चले गये थे। उप्रसेन के मन में रहते हुए उस समय उन्हें यशोदा के
World TB Day 2022 दो माह में ठीक हो जाती है टीबी लेकिन दवा लेते रहना जरूर। मेरठ में 2020-21 में 86 प्रतिशत मरीज ठीक हुए नए मरीज। आसपास बुखार एवं खांसी वाले मरीजों को बलगम जांच कराने के लिए प्रेरित करें। मेरठ, जागरण संवाददाता। World TB Day 2022 अगर आप वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने में योगदान देना चाहते हैं तो आसपास बुखार एवं खांसी वाले मरीजों को बलगम जांच कराने के लिए प्रेरित करें। उन्हें भरोसा दें कि सिर्फ दो माह के नियमित इलाज से टीबी ठीक हो जाएगी, जबकि छह माह तक इलाज लेने से दोबारा बीमारी उभरने का रिस्क नहीं रहता। उधर, गरीब टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं एनजीओ आगे आ रहे हैं। करीब 38 लाख जनसंख्या वाले मेरठ में बड़ी संख्या में टीबी रोगी मिलते रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि घनी बस्तियों में यह बीमारी ज्यादा फैली। लेकिन नई दवाओं की खोज एवं मरीजों को जल्द पता करने से इलाज आसान हुआ। जिले में वर्तमान में 1074 डाट एवं सरकारी केंद्रों पर 1699, जबकि निजी चिकित्सकों के यहां 426 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में 9219 मरीजों में से 7925 यानी करीब 86 प्रतिशत, जबकि वर्ष 2021 में 5538 में से 3306 मरीज ठीक हो चुके हैं। नौ से 19 मार्च 2022 तक सर्च अभियान में आठ लाख आबादी में से 1573 लक्षणयुक्त मरीज खोजे गए, जिसमें से 191 टीबी की पुष्टि हुई। टीबी दिवस पर मेडिकल कालेज के फार्मेसी विभाग में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में 11 सौ से ज्यादा गरीब मरीजों के पोषणयुक्त खानपान के लिए खर्च जुटाया जाएगा। वर्तमान में मरीजों को पांच सौ रूपए प्रति माह मिलता है। दो माह तक चार दवाओं की खुराक देने से मरीज की टीबी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है, और वो दूसरों को बीमारी फैला नहीं सककता। लेकिन शरीर की कोशिकाओं में बैक्टीरिया छुपा रह जाता है, जो बाद में टीबी फिर उभार देता है। इसलिए छह माह तक नियमित रूप से दवा लेने से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। बलगम का कल्चर कराकर देखा जाता है कि बैक्टीरिया मरा या नहीं। टीबी की दवाएं लिवर व आंख को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं, इसलिए जांच जरूरी है। बोन एवं ब्रेन टीबी में सालभर तक दवा खानी पड़ती है। टीबी कोई असाध्य बीमारी नहीं है। उच्च मनोबल के साथ इलाज कराएं, रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है। लेकिन बीच में इलाज छोडऩे से दोबारा बीमारी बेहद घातक रूप में उभरती है। इसलिए लापरवाही न करें। बीमारी को कतई न छुपाएं। स्वास्थ्य विभाग के पास जांच व इलाज का पूरा बंदोबस्त है। एक बार खांसने पर टीबी रोगी हवा में 50 हजार से ज्यादा बैक्टीरिया छोड़ता है, जो कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमित कर सकता है। लोगों को हाईप्रोटीनयुक्त खानपान लेना चाहिए।
World TB Day दो हज़ार बाईस दो माह में ठीक हो जाती है टीबी लेकिन दवा लेते रहना जरूर। मेरठ में दो हज़ार बीस-इक्कीस में छियासी प्रतिशत मरीज ठीक हुए नए मरीज। आसपास बुखार एवं खांसी वाले मरीजों को बलगम जांच कराने के लिए प्रेरित करें। मेरठ, जागरण संवाददाता। World TB Day दो हज़ार बाईस अगर आप वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक भारत को टीबी मुक्त बनाने में योगदान देना चाहते हैं तो आसपास बुखार एवं खांसी वाले मरीजों को बलगम जांच कराने के लिए प्रेरित करें। उन्हें भरोसा दें कि सिर्फ दो माह के नियमित इलाज से टीबी ठीक हो जाएगी, जबकि छह माह तक इलाज लेने से दोबारा बीमारी उभरने का रिस्क नहीं रहता। उधर, गरीब टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं एनजीओ आगे आ रहे हैं। करीब अड़तीस लाख जनसंख्या वाले मेरठ में बड़ी संख्या में टीबी रोगी मिलते रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि घनी बस्तियों में यह बीमारी ज्यादा फैली। लेकिन नई दवाओं की खोज एवं मरीजों को जल्द पता करने से इलाज आसान हुआ। जिले में वर्तमान में एक हज़ार चौहत्तर डाट एवं सरकारी केंद्रों पर एक हज़ार छः सौ निन्यानवे, जबकि निजी चिकित्सकों के यहां चार सौ छब्बीस टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक दो हज़ार बीस में नौ हज़ार दो सौ उन्नीस मरीजों में से सात हज़ार नौ सौ पच्चीस यानी करीब छियासी प्रतिशत, जबकि वर्ष दो हज़ार इक्कीस में पाँच हज़ार पाँच सौ अड़तीस में से तीन हज़ार तीन सौ छः मरीज ठीक हो चुके हैं। नौ से उन्नीस मार्च दो हज़ार बाईस तक सर्च अभियान में आठ लाख आबादी में से एक हज़ार पाँच सौ तिहत्तर लक्षणयुक्त मरीज खोजे गए, जिसमें से एक सौ इक्यानवे टीबी की पुष्टि हुई। टीबी दिवस पर मेडिकल कालेज के फार्मेसी विभाग में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में ग्यारह सौ से ज्यादा गरीब मरीजों के पोषणयुक्त खानपान के लिए खर्च जुटाया जाएगा। वर्तमान में मरीजों को पांच सौ रूपए प्रति माह मिलता है। दो माह तक चार दवाओं की खुराक देने से मरीज की टीबी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है, और वो दूसरों को बीमारी फैला नहीं सककता। लेकिन शरीर की कोशिकाओं में बैक्टीरिया छुपा रह जाता है, जो बाद में टीबी फिर उभार देता है। इसलिए छह माह तक नियमित रूप से दवा लेने से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। बलगम का कल्चर कराकर देखा जाता है कि बैक्टीरिया मरा या नहीं। टीबी की दवाएं लिवर व आंख को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं, इसलिए जांच जरूरी है। बोन एवं ब्रेन टीबी में सालभर तक दवा खानी पड़ती है। टीबी कोई असाध्य बीमारी नहीं है। उच्च मनोबल के साथ इलाज कराएं, रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है। लेकिन बीच में इलाज छोडऩे से दोबारा बीमारी बेहद घातक रूप में उभरती है। इसलिए लापरवाही न करें। बीमारी को कतई न छुपाएं। स्वास्थ्य विभाग के पास जांच व इलाज का पूरा बंदोबस्त है। एक बार खांसने पर टीबी रोगी हवा में पचास हजार से ज्यादा बैक्टीरिया छोड़ता है, जो कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमित कर सकता है। लोगों को हाईप्रोटीनयुक्त खानपान लेना चाहिए।
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है । (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। प्रश्नाधीन क्षेत्र के निकट 2 पक्की पुलिया बनाई जाने के परिप्रेक्ष्य में अतिरिक्त पुलिया निर्माण कराना आवश्यक नहीं होने के कारण। (ग) जी नहीं, नहर की खुदाई स्वीकृत रेखांकन अनुसार की जाना प्रतिवेदित है। स्थल पर विसंगति नहीं पाई जाने से शेष प्रश्नांश उत्पन्न नहीं होते है। परिशिष्ट - "चालीस" शराब उत्पादक इकाइयाँ 108. ( क्र. 3762 ) श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में कितनी शराब उत्पादक इकाइयाँ संचालित हैं? उनके नाम एवं उनके द्वारा कौन-कौन सी शराब उत्पादित की जाती है? (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार उक्त शराब इकाइयों के मालिक एवं साझेदार कौन-कौन हैं? उनके नाम एवं निवास स्थान क्या है ? (ग) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में वित्तीय वर्ष 2014-15 में इनका वार्षिक उत्पादन कितना रहा ? (घ) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रत्येक माह में इन इकाईयों ने कितनी शराब एवं अन्य उत्पादों का उत्पाद किया? यह शराब एवं अन्य उत्पाद कब-कब कितनी मात्रा में कहाँ-कहाँ भेजे गए ? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जिला छतरपुर में मेसर्स जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव के नाम से एक शराब उत्पादन इकाई स्थापित व संचालित है। इस इकाई में आसवनी (डी- 1) लायसेंस, विदेशी मदिरा बॉटलिंग ( एफ. एल.-9) लायसेंस, ब्रुअरी (बी-3) लायसेंस एवं देशी मदिरा बॉटलिंग (सी.एस. - 1 - बी) लायसेंस अन्तर्गत क्रमशः रेक्टिफाईड स्पिरिट/ ई. एन. ए., विदेशी मदिरा, बीयर तथा देशी मदिरा उत्पादित की जाती है। (ख) रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज हरियाणा एवं दिल्ली के अनुसार जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव के संचालक मण्डल में निम्नलिखित मालिक एवं साझेदार है। 1. श्री विपिन चन्द्र अग्रवाल निवासी डिस्टिलरी परिसर नौगांव, जिला छतरपुर 2. श्री जगदीश चन्द्र अग्रवाल, निवासी - 8ए/ 15 डब्ल्यू. ई. ए. करोलबाग, नईदिल्ली 3. श्रीमती क्षमा अग्रवाल, निवासी-डिस्टिलरी परिसर नौगांव, जिला छतरपुर 4. श्रीमती राधा अग्रवाल, निवासी डिस्टिलरी परिसर नौगांव जिला छतरपुर (ग) वित्तीय वर्ष 2014-15 की अवधि में लायसेंस वार वार्षिक उत्पादन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- एक अनुसार है। (घ) वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रत्येक माह में उत्पादित, परिवहन एवं निर्यात की गई शराब एवं अन्य उत्पादों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - दो, तीन, चार एवं पाँच अनुसार है। नगरपालिका गुना में दिए गए ठेला 109. ( क्र. 3788 ) श्री पन्नालाल शाक्य : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगरपालिका गुना में दर्ज हितग्राहियों जैसे बीड़ी मजदूर, कामकाजी महिला हाथ ठेला मजदूर, विधवा पेंशन, सामाजिक सुरक्षा निधि से प्राप्त सहायता प्राप्त सहायता राशि 2014-15 उपलब्ध करावें? (ख) नगरपालिका गुना क्षेत्र में विगत 05 वर्षों से किन-किन संस्थाओं को ठेका दिया गया है तथा इस सम्बंध में जारी निविदा विज्ञप्ति आवेदन पत्र का विवरण उपलब्ध करावें? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) बीड़ी मजदूरी योजना लागू नहीं है। नगर पालिका परिषद् गुना में वर्ष 2014-15 में योजनावार हितग्राहियों की संख्या एवं सहायता राशि का विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) नगर पालिका परिषद् गुना में 05 वर्षों में दिये गये ठेकों का विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। परिशिष्ट "इकतालीस" नरबाई जलाने पर प्रतिबंधक कानून का निर्माण 110. ( क्र. 3792 ) श्री मोती कश्यप : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्लोबल वार्मिंग से ऋतुओं में आए तथा राज्य के महानगरों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मात्रा व अनुपात से अधिक हो तो और उसे संतुलित करने की दिशा में किस प्रकार के प्रयत्न किये गये है? (ख) राज्य में फसलों की नरवाई को जलाने की परम्परा से वायुमण्डल के ताप में कितना प्रभाव पड़ता है और कहाँ तक उचित माना जा सकता है? (ग) क्या विभाग ने प्रश्नांश (ख) की रोकथाम के लिये कोई अधिनियम बनाया है और उसमें राजस्व और पुलिस विभाग की कोई भूमिका सुनिश्चित की है? नहीं, तो कब तक बना लिया जावेगा? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा राज्य के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में की जा रही परिवेशीय वायु गुणवत्ता में आर, एस.पी.एम. का स्तर निर्धारित मानकों से कुछ अधिक है। शेष पैरामीटर सल्फर डाईऑक्साईड, नाइट्रोजन ऑक्साईड निर्धारित मानकों के अनुरूप है। प्रयत्नों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) राज्य में फसलों की नरवाई को जलाने के संबंध में भोपाल के निकट बैरसिया के ग्राम-रोडिंया तथा जिला-रायसेन के ग्राम-समनापुर के खेत में प्रायोगिक अध्ययन किया गया है। जिसमें परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई है। (ग) उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में कोई कार्यवाही अपेक्षित नहीं हैं। परिशिष्ट - "बयालीस" आदिवासी कृषि भूमि का पंजीयन 111. ( क्र. 3869 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र सैलाना अंतर्गत आदिवासी जाति की कृषि भूमि गैर आदिवासी जाति के नाम रजिस्ट्री (पंजीयन) करने के क्या नियम निर्धारित है? नियम की प्रति देवें? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में क्या कलेक्टर को आदिवासी जाति की कृषि भूमि का पंजीयन गैर आदिवासी जाति के नाम करने के लिये अनुमति प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है? नियम सहित बतावें तथा वर्ष 2013-14 से आज दिनांक तक सैलाना विधानसभा अंतर्गत कलेक्टर द्वारा ऐसे कितने प्रकरणों में किस आधार पर अनुमति दी गई? (ग) क्या सैलाना विधान सभा अंतर्गत आदिवासी जाति की कृषि भूमि को गैर आदिवासी जाति के नाम पंजीयन में शासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी है? क्या दायित्व निर्धारित करेंगे? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा-165 (6) के प्रावधानों के तहत विधानसभा क्षेत्र सैलाना अधिसूचित जनजाति क्षेत्र होने से आदिवासी जाति की कृषि भूमि गैर आदिवासी जाति के नाम पंजीयन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। नियमों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। वर्ष 2013-14 से प्रश्न दिनांक तक सैलाना विधानसभा अन्तर्गत कलेक्टर रतलाम द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है। (ग) उप पंजीयक द्वारा नियमों का पालन किया जा रहा है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। शराब दुकानों के ठेके 112. (क्र. 3871 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सैलाना अंतर्गत शासन द्वारा वर्तमान कितनी अंग्रेजी शराब की दुकानों के ठेके किस-किस नाम से किन नियमों के तहत आवंटित किये गये? (ख) क्या प्रश्नांश (क) के संदर्भ में सैलाना विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत अंग्रेजी शराब दुकान के ठेकेदारों द्वारा आस-पास के गांवों में डायरी बनाकर पुलिस अधिकारियों से साठ-गांठ कर शराब विक्रय किया जा रहा है? यदि हाँ, तो ठेकेदार एवं पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध शासन क्या कार्यवाही करेगा? (ग) क्या शासन इस प्रकार के भ्रष्टाचार एवं अवैध शराब विक्रय पर कोई कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्यों ? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विधान सभा क्षेत्र सैलाना अन्तर्गत वर्तमान में 03 अंग्रेजी शराब की दुकानें यथा सैलाना, बाजना एवं रावटी में संचालित है। दुकानों के ठेकेदारों के नाम की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा-1 के अधीन जारी मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 29 दिनांक 21 जनवरी 2015 से जारी विज्ञप्ति अनुसार वर्ष 2015-16 के लिए उपरोक्त दुकानों का आवंटन टेण्डर द्वारा प्राप्त उच्चतम ऑफर अनुसार लायसेंसियो को किया गया है। (ख) पुलिस अधीक्षक जिला रतलाम के प्रतिवेदन अनुसार सैलाना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत थाने में दिनांक 01.01.2015 से अब तक अवैध शराब के 393 प्रकरण पंजीबद्ध कर 41042 लीटर शराब जप्त की गई है। शराब विक्रय संबंधी किसी भी ठेकेदार से पुलिस की सांठ-गांठ नहीं है। ऐसी गतिविधियों की शिकायत प्रमाणित होने पर नियमानुसार संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी । (ग) विधानसभा क्षेत्र सैलाना अन्तर्गत संचालित मदिरा दुकानों के ठेकेदारों द्वारा वैध स्त्रोतों से प्राप्त वैध ड्यूटी पेड शराब का विक्रय किया जाता है। अवैध शराब विक्रय के संबंध में जिला आबकारी प्रशासन को शिकायत प्राप्त होने पर नियमों के अन्तर्गत कार्यवाही की जाती है। वर्ष 2015-16 के दौरान (जनवरी 2016 अंत तक) सैलाना विधानसभा क्षेत्र में अवैध विदेशी मदिरा विक्रय, परिवहन एवं धारण के कुल 03 प्रकरण प्रकाश में आये है। संबंधित के विरूद्ध न्यायालयीन प्रकरण कायम कर विधिवत कार्यवाही की गई है। परिशिष्ट - "तैंतालीस" पेंच नहर हेतु कृषकों की भूमि अधिग्रहण 113. ( क्र. 3892 ) श्री दिनेश राय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले की सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पेंच नहर का निर्माण किया जा रहा है? उक्त नहर के निर्माण हेतु कितने कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है? (ख) प्रश्नांश (क) के नहर निर्माण हेतु जिन कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था ? उनको प्रश्न दिनांक तक मुआवजा क्यों नहीं दिया गया ? इसके लिए कौन उत्तरदायी है? उन्हें कब तक मुआवजा का भुगतान कर दिया जायेगा? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जी हाँ । अब तक 896 कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इनमें से 787 कृषकों को मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। भू-अर्जन की प्रक्रिया सतत् है जिसके पूर्ण होने पर भुगतान किया जाना संभव है। जिला कलेक्टर को अतिशीघ्र भुगतान करने के लिए लिखा गया है। किसी अधिकारी के उत्तरदायी होने की स्थिति नहीं है। दोषियों की पहचान कर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराना 114. ( क्र. 3956 ) श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रीवा जिले में दिनांक 1.4.15 से प्रश्न दिनांक तक कितने खम्भों में लगे एल्यूमीनियम के तारों (कंडक्टर) को निकाल कर उनके जगह में विद्युत प्रवाह हेतु खम्भों में केबिलों का उपयोग किया जा रहा है? अगर हाँ तो कितने फीडरों में केबिलीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया तथा कितने शेष हैं? कार्य किनके द्वारा किस मान से कराये जा रहे हैं? अगर ठेकेदारों द्वारा कार्य कराये जा रहे हैं तो कब-कब निविदा की कार्यवाही की गई? अगर केबिलिंग का कार्य नियम विरूद्ध दिया गया तो इसके लिए कौन दोषी हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में उपयोग की जा रही केबिले किस-किस एजेन्सी से कितनी-कितनी लागत से रीवा संभाग हेतु खरीदी गई? क्या शासन के मापदण्डों का पालन करते हुए क्रय की कार्यवाही की गई? क्रय पूर्व इनकी गुणवत्ता की जाँच कराई गई तो विवरण देवें? केबिलों के जलने एवं टूटने की कितनी शिकायतें अधीक्षण (संचा- संधा) कार्यालय रीवा में प्राप्त हुई, का विवरण देवें? (ग) प्रश्नांश (क) हाँ तो बिजली के खम्भों से कितने किलो मीटर के एल्यूमीनियम (कंडक्टर) के तार निकाले गए? उनकी मात्रा, स्टॉक, स्टोर में कब-कब दर्ज की गई ? (घ) यदि प्रश्नांश ( ख ) एवं (ग) अनुसार केबिलों के लगाने हेतु निविदा में गड़बड़ी की गई तो क्या उसकी जाँच के साथ केबिलों की गुणवत्ता में कमी की भी जाँच उपरांत दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे? साथ ही निकाले गए कंडक्टरों की अवैध बिक्री के लिए भी दोषियों की पहचान कर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करायेंगे? तो कब तक? अगर नहीं तो क्यों? ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ रीवा जिले में दिनांक 01.04.15 से प्रश्न दिनांक तक 5484 खम्भों में लगे एलयूमिनियम के तारों (कंडक्टर) को निकाल कर उनकी जगह में विद्युत प्रदाय हेतु केबिलों का उपयोग किया जा रहा है। 34 फीडरों में केबलीकरण का कार्य किया जा रहा है तथा 82 फीडरों में केबिलीकरण का कार्य शेष है। कार्य ठेकेदार एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर फीडर विभक्तिकरण एवं आर. ए. पी.डी.आर.पी. योजनांतर्गत कराये जा रहे है। रीवा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में उक्त केबिलीकरण के कार्य हेतु मेसर्स बजाज इलेक्ट्रिकल लि. मुम्बई को अवार्ड क्र. एमडी/ईजेड/एफएस/एफ 08 / लाट-7-आर / रीवा साउथ/आई. /1992 दिनांक 14.05.15 एवं मेसर्स व्ही. टी. एल. लि. नई दिल्ली को अवार्ड क्र. एमडी/ईजेड / एफएस // एफ 08/लाट-6-आर/रीवा नाथ / आई / 1882 दिनांक 05.05.15 को जारी किया गया है। रीवा जिले के शहरी क्षेत्र में प्रश्नाधीन कार्य मेसर्स जी.ई.टी.लि. चेन्नई को अवार्ड क्र. सीएमडी/ईजेड / आरएपीडीआरपी/लाट-16 / रीवा / आई / 13 दिनांक 25.03.11 को जारी किया गया था। मेसर्स जी.ई.टी.लि. चेन्नई द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्य न करने के कारण आदेश क्रमांक 3033 दिनांक 09.12.14 के माध्यम से उन्हें जारी अवार्ड निरस्त कर दिया गया था एवं शेष कार्य को वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर टर्न की कांट्रेक्टर की रिस्क एण्ड कास्ट के आधार पर वितरण कंपनी द्वारा पंजीकृत अ/ब श्रेणी के स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। केबिलिंग का कार्य कार्यदेशों के वर्णित शर्तों के अनुसार एवं जारी निर्देशों के अनुरूप पंजीकृत ठेकेदारों से नियमानुसार कराया जा रहा है। अतः इस हेतु कोई दोषी नहीं है। (ख) केबिलीकरण कार्य के लिए वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर किये जा रहे कार्य हेतु कंपनी स्तर पर संपूर्ण कंपनी क्षेत्र हेतु केबल क्रय कर क्षेत्रीय भण्डार से आवश्यकतानुसार मैदानी उपयोग हेतु समय-समय पर प्रदाय की जाती है। रीवा संभाग हेतु अलग से केबल क्रय नहीं की गई है। ठेकेदार कंपनियों द्वारा विभिन्न एजेन्सियों से खरीदी गई केबिल, एजेन्सी के नाम एवं लागत के विवरण सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। जी हाँ, मापदण्डों का पालन करते हुए नियमानुसार क्रय प्रक्रिया अपनाई गई है। क्रय पूर्व केबिल की गुणवत्ता की जाँच स्वतंत्र एजेन्सी द्वारा कराई गई जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। केबिलों के जलने एवं टूटने की 54 शिकायतें प्राप्त हुई जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। उक्त प्राप्त सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है। (ग) बिजली के खम्भों से लगभग 946 कि.मी. एल्यूमीनियम के तार निकाले गये। निकाले गये तार की मात्रा, विभागीय / ठेकेदार कंपनी के स्टोर में स्टॉक एवं क्षेत्रीय भण्डार, सतना को वापिस की गयी मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "स" एवं "द " अनुसार है। (घ) केबिलों के लगाने हेतु निविदा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और न ही केबिलों की गुणवत्ता की जाँच में कोई कमी हुई है। इसी प्रकार निकाले गये कंडक्टर का समुचित रिकार्ड संधारित किया जा रहा है। अतः उक्त संबंध में किसी के दोषी होने अथवा कोई कार्यवाही किये जाने का प्रश्न नहीं उठता। अवैध खनिज परिवहन के दोषियों की पहचान कर कार्यवाही बावत् 115. ( क्र. 3957 ) श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले अन्तर्गत खनिज साधन विभाग द्वारा अवैध खनिज परिवहनों एवं अवैध खनन के कितने प्रकरण तैयार कर उन पर क्या कार्यवाही की गयी ? उन पर रायल्टी चोरी एवं अवैध रेत उत्खनन के कितने प्रकरण खनिज विभाग द्वारा वर्ष 2012 से प्रश्नांश दिनांक तक तैयार किये गये? साथ ही अवैध उत्खनन एवं रायल्टी चोरी बंद करने की शासन की क्या कार्ययोजना है? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में खनिज विभाग द्वारा तैयार प्रकरणों पर कब-कब क्या-क्या कार्यवाही की गयी? वर्तमान में प्रकरणों की क्या स्थिति है ओव्हर लोडिंग के कितने प्रकरण तैयार किये गये ? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में खनिज विभाग द्वारा रीवा जिले में अवैध खनिज परिवहन करने, अवैध रूप से खनिजों के खनन एवं उपयोग पर रोक लगाने पर क्या कार्य योजना तैयार की है? जिससे खनिज संपदा दोहन पर रोक लगायी जा सके? साथ ही खदानों की पटाई एवं समतलीकरण कराने की क्या कार्ययोजना शासन ने तैयार की है? खनिज उत्खनन करने के पूर्व खदानों की अगर पटाई / समतलीकरण नहीं की जाती तो उसका उत्तरदायित्व किस पर निहित किया जावेगा? (घ) रीवा जिले में कितनी ऐसी खनिज खदानें हैं जिनकी नीलामी की जाकर कितनी राजस्व की वसूली की गयी ? प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के अनुसार अगर संबंधित अधिकारियों द्वारा सतत् निरीक्षण कर खनिज सम्पदा के दोहन एवं रायल्टी चोरी एवं खदानों के पटाई न करने से प्रकरण तैयार कर कार्यवाही नहीं की तो संबंधितों की पहचान कर वसूली के साथ कब तक कार्यवाही प्रस्तावित करेंगे? ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्नाधीन जिले में माह जनवरी 2012 से प्रश्न दिनांक तक खनिजों के अवैध परिवहन के 590 एवं अवैध खनन के 74 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अवैध परिवहन के प्रकरणों में आरोपित अर्थदण्ड की वसूली की गई है। अवैध उत्खनन के प्रकरण नियमानुसार कलेक्टर /अपर कलेक्टर / अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष निराकरण हेतु प्रेषित किए गए हैं। अवैध उत्खनन के दर्ज प्रकरणों में रेत खनिज का कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन की रोकथाम हेतु खनिज नियमों में दण्डात्मक प्रावधान हैं। इनकी रोकथाम हेतु जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित है। खनिजों के अवैध उत्खनन / परिवहन की रोकथाम हेतु संभागीय उड़नदस्ता कार्यशील है। इसके अतिरिक्त जिले में पदस्थ खनिज अमले द्वारा नियमित रूप से इसके संबंध में कार्यवाही की जाती है । (ख) प्रश्नांश 'क' के उत्तर में इस संबंध में जानकारी दी गई है। जिले में वाहनों की जाँच के दौरान अवैध परिवहन के जो 590 प्रकरण दर्ज किए गए थे, उनमें से 81 प्रकरण ऐसे थे जिनमें वाहनों में अभिवहन पास में दर्ज मात्रा से अधिक खनिज मात्रा पाई गई थी। इन सभी प्रकरणों में आरोपित अर्थदण्ड की वसूली की गई है। (ग) जिले में पदस्थ अमले द्वारा, गठित टास्क फोर्स द्वारा एवं संभागीय उड़नदस्ते द्वारा खनिजों के अवैध उत्खनन / परिवहन की रोकथाम हेतु कार्यवाही की जाती है। खदान की समयावधि समाप्त हो जाने के पश्चात् खदान बंद करने की योजना के प्रावधान नियमों में है। इसका पालन न किए जाने पर संबंधित पट्टेदार के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के नियमों में प्रावधान हैं। (घ) प्रश्नाधीन जिले में 27 खदानें नीलाम किए जाने हेतु चिन्हित हैं। इन खदानों की नीलामी कुल उच्चतम बोली रूपए 40,56,500/- (चालीस लाख छप्पन हजार पाँच सौ) में की गई है। इनकी नीलामी से प्रतिभूति के रूप में राशि रूपए 12, 16,950 /- एवं रायल्टी के रूप में रूपए 24,62,920/- प्राप्त हुई है। प्रश्नांश 'क', 'ख' एवं 'ग' में दिए उत्तर के प्रकाश में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। मीटर वाचकों का नियमितीकरण 116. ( क्र. 3982 ) पं. रमाकान्त तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी जबलपुर के अधीनस्थ रीवा जिले में सन् 2006 में लिखित परीक्षा कर मैरिट सूची के आधार पर मीटर वाचकों का चयन किया गया एवं सन् 2015 में उन्हें हटा दिया गया ? (ख) म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में मीटर वाचक योजना के परिपत्र 2012 में जो पूर्व में मीटर वाचक 5 वर्ष 3 वर्ष कार्य किये हैं तो उन्हें नयी भर्ती में अनुभव का लाभ क्या दिया जा रहा है या नहीं? (ग) म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी रीवा वृत्त में सन् 2006 में लिखित परीक्षा के माध्यम से रीवा जिले में कितने मीटर वाचकों का चयन किया गया था एवं आज वर्तमान में कितने मीटर वाचक पूर्व में काम कर रहे थे? उन्हें क्या अभी काम में रखा गया है या नहीं? (घ) क्या म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में सन् 2006 एवं सन् 2012 में चयनित मीटर वाचकों की योग्यता आई.टी.आई एवं अभियांत्रिकी डिग्री एवं उसके समकक्ष स्नातक डिग्री प्राप्त मीटर वाचकों के भविष्य को ध्यान में रखा जावेगा? यदि हाँ, तो बतायें ? ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत प्रश्नाधीन क्षेत्र में सन् 2006 में लिखित परीक्षा कर मैरिट सूची के आधार पर मीटर वाचकों का चयन किया गया था तथा अनुबंध अवधि समाप्ति उपरान्त मीटर वाचक स्वमेव पृथक हो गये, उन्हें हटाये जाने का प्रश्न नहीं उठता। (ख) मीटर वाचक योजना से संबंधित पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के परिपत्र 2012 में पूर्व में मीटर वाचकों द्वारा किये गये कार्य के अनुभव का लाभ दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। (ग) म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अन्तर्गत रीवा जिले में सन् 2006 में लिखित परीक्षा के माध्यम से 448 मीटर वाचकों का चयन किया गया था। उच्च न्यायालय, जबलपुर के स्थगन आदेश के तहत् वर्तमान में 2 मीटर वाचक कार्यरत् हैं। (घ) म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ठेका मीटर वाचकों के चयन हेतु निर्धारित की गई नीति 2006 में अनुबंध अवधि एक वर्ष तथा कार्य संतोषजनक पाए जाने पर आगामी एक वर्ष की वृद्धि किये जाने का प्रावधान था। इसी प्रकार ठेका मीटर वाचक योजना 2012 एवं 2013 में जारी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के परिपत्र के अनुसार ठेके की अवधि कुल दो वर्ष हो जाने के उपरान्त कार्य संतोषजनक पाए जाने पर पुनः एक वर्ष के लिए बढ़ाई जाने का प्रावधान था। इस प्रकार ठेके की अवधि एक बार में अधिकतम 3 वर्ष रखे जाने का प्रावधान था। अतः इसके उपरान्त ठेके की अवधि को बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही 117. ( क्र. 3983 ) पं. रमाकान्त तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुख्य नगर पालिका अधिकारी त्यौंथर जिला रीवा द्वारा आय कर, वाणिज्य कर एवं उपकर की कटौती राशि मार्च 2015 में निर्धारित मद में जमा की जानी थी? मार्ग सी.एम. ओ. त्यौंथर द्वारा अभी तक यह राशि जमा नहीं किया गया है एवं उक्त तीनों मदों की राशि पृथक से कब तक जमा करेगें? (ख) अनुविभागीय अधिकारी त्यौंथर के द्वारा इसकी जाँच दिनांक 11.12.2015 को की गई? जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दोषी पाया गया हैं एवं सी. एम. ओ. त्यौंथर द्वारा लिखित में झूठी जानकारी दी गई हैं ? इसके विरूद्ध क्या निलंबन की कार्यवाही की गई हैं? यदि नहीं, की गई तो कब तक की जावेगी? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। आयकर वाणिज्य कर एवं उपकर की कटौती राशि दिनांक 31 मार्च, 2016 तक जाम करा दी जावेगी। (ख) जी हाँ। अनुविभागीय अधिकारी, अनुविभाग के प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरण की जाँच की जा रही है। संपूर्ण जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। बांध निर्माण कार्य गुणवत्ता हीन होना 118. ( क्र. 3992 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) निवास विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत दहरा जलाशय निर्माण की स्वीकृति कब दी गई है तथा कितनी राशि की स्वीकृति दी गई है? बांध निर्माण में कुल कितने किसानों की कितनी जमीन अधिग्रहित की गई है? अधिग्रहित जमीन का मुआवजा किस आधार पर दिया गया है तथा उक्त जलाशय के निर्माण से कितनी जमीन की सिंचाई होगी ? (ख) जलाशय निर्माण में नींव स्तर से किस तरह के काम का मापदंड तय किये गये है? क्या बांध निर्माण कार्य निर्धारित मापदण्ड के अनुसार हो रहा है? निर्माण कार्य का निरीक्षण समय-समय पर सक्षम अधिकारियों के द्वारा कब-कब किया गया? (ग) क्या निर्माण एजेंसी के द्वारा जाँच अधिकारियों को धमकाया जाता है ? क्या ऐसी निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्यवाही करेगे, ताकि अधिकारी निर्भय होकर गुणवत्ता पूर्ण कार्य करा सके? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) देहरा लघु सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 27.08.2013 को रू. 230.25 लाख की सैच्य क्षेत्र 107 हेक्टर के लिए दी गई। बांध के शीर्ष कार्य में 54 किसानों की 8.325 हेक्टर भूमि अधिग्रहित की गई जिसका मुआवजा भू-अर्जन अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया गया। (ख) तकनीकी स्वीकृति अनुसार । जी हाँ । जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि श्री प्रवीण कटारे द्वारा उपयंत्री श्री एम. एम. अंसारी के साथ मारपीट की जाने के अपराध की सूचना थाना नारायणगंज में दिनांक 03.02.2016 को दी जाना प्रतिवेदित है। जी हाँ, निर्माण एजेंसी को "कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया जा चुका है। परिशिष्ट- "चौवालीस" जल उपभोक्ता अध्यक्ष पद पर पदस्थ व्यक्ति की जानकारी 119. ( क्र. 3995 ) श्री आर. डी. प्रजापति : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या छतरपुर जिले के अंतर्गत तहसील लवकुश नगर में श्री रमेश पटेल जल उपभोक्ता क्र. 74 धरमपुरा निवासी देवपुर अध्यक्ष जल उपभोक्ता का चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए थे? क्या उक्त चुनाव दिनांक 17.05.2015 में सम्पन्न हुआ था? (ख) क्या प्रश्न (क) में वर्णित उक्त व्यक्ति को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील लवकुश नगर द्वारा प्रकरण क्रमांक 28/अ 89 अ/2008-09 में पारित आदेश दिनांक 17.11.2009 में 32 लाख 2 हजार रूपये को दोषी करार देते हुये 6 वर्ष के लिये चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य / वंचित किया गया था ? (ग) क्या सत्र न्यायाधीश छतरपुर द्वारा प्रकरण क्र. 40/2009 के पारित निर्णय दिनांक 11.05.2010 में गबन का दोषी पाते 6 वर्ष कारावास एवं 40 हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया था ? (घ) क्या उक्त व्यक्ति किसी भी चुनाव में भाग लेने हेतु पात्र हैं? यदि नहीं, तो वर्तमान में अध्यक्ष जल उपभोक्ता समिति जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह सकता हैं? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी हैं तथा दोषी अधिकारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई ? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी? जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ, जी हाँ । (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। (घ) जी नहीं। पद से पृथक करने की कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजनगर के समक्ष विचाराधीन है। विचाराधीन कार्रवाई वृहद स्वरूप की होने के कारण प्रकरण के निराकरण होने तक किसी अधिकारी का दोष निर्धारित किया जाना संभव नहीं है। लोकायुक्त द्वारा जाँच 120. ( क्र. 3996 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 17.11.15 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सागर द्वारा मेसर्स शिवा ट्रेडर्स प्रो. सुरेश यादव से तीन लाख रूपये की रिश्वत लेते डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर संभाग सागर एच. एस. ठाकुर व असि. कमिश्नर ए.सी. जलज रावत पकड़ गये थे? (ख) क्या लोकायुक्त की कार्यवाही के बाद एच. एस. ठाकुर को अपील डिवीजन भोपाल में पदस्थ किया गया है क्या यह नियम विरुद्ध है क्या यह लोकायुक्त के प्रकरण की जाँच में अपने पद का प्रभाव डाल सकतें है, क्योंकि सागर संभाग भोपाल डिवीजन अपील के अधीनस्थ आता है? (ग) क्या (क), (ख) में वर्णित अधिकारियों की लोकायुक्त में प्रकरण चलने तक कहीं पदस्थ किया जाना उचित है ? यदि हाँ, तो नियम
जल संसाधन मंत्री : जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है । जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। प्रश्नाधीन क्षेत्र के निकट दो पक्की पुलिया बनाई जाने के परिप्रेक्ष्य में अतिरिक्त पुलिया निर्माण कराना आवश्यक नहीं होने के कारण। जी नहीं, नहर की खुदाई स्वीकृत रेखांकन अनुसार की जाना प्रतिवेदित है। स्थल पर विसंगति नहीं पाई जाने से शेष प्रश्नांश उत्पन्न नहीं होते है। परिशिष्ट - "चालीस" शराब उत्पादक इकाइयाँ एक सौ आठ. श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि छतरपुर जिले में कितनी शराब उत्पादक इकाइयाँ संचालित हैं? उनके नाम एवं उनके द्वारा कौन-कौन सी शराब उत्पादित की जाती है? प्रश्नांश के अनुसार उक्त शराब इकाइयों के मालिक एवं साझेदार कौन-कौन हैं? उनके नाम एवं निवास स्थान क्या है ? प्रश्नांश के अनुक्रम में वित्तीय वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह में इनका वार्षिक उत्पादन कितना रहा ? प्रश्नांश के अनुक्रम में वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रत्येक माह में इन इकाईयों ने कितनी शराब एवं अन्य उत्पादों का उत्पाद किया? यह शराब एवं अन्य उत्पाद कब-कब कितनी मात्रा में कहाँ-कहाँ भेजे गए ? जल संसाधन मंत्री : जिला छतरपुर में मेसर्स जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव के नाम से एक शराब उत्पादन इकाई स्थापित व संचालित है। इस इकाई में आसवनी लायसेंस, विदेशी मदिरा बॉटलिंग लायसेंस, ब्रुअरी लायसेंस एवं देशी मदिरा बॉटलिंग लायसेंस अन्तर्गत क्रमशः रेक्टिफाईड स्पिरिट/ ई. एन. ए., विदेशी मदिरा, बीयर तथा देशी मदिरा उत्पादित की जाती है। रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज हरियाणा एवं दिल्ली के अनुसार जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव के संचालक मण्डल में निम्नलिखित मालिक एवं साझेदार है। एक. श्री विपिन चन्द्र अग्रवाल निवासी डिस्टिलरी परिसर नौगांव, जिला छतरपुर दो. श्री जगदीश चन्द्र अग्रवाल, निवासी - आठए/ पंद्रह डब्ल्यू. ई. ए. करोलबाग, नईदिल्ली तीन. श्रीमती क्षमा अग्रवाल, निवासी-डिस्टिलरी परिसर नौगांव, जिला छतरपुर चार. श्रीमती राधा अग्रवाल, निवासी डिस्टिलरी परिसर नौगांव जिला छतरपुर वित्तीय वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह की अवधि में लायसेंस वार वार्षिक उत्पादन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- एक अनुसार है। वित्तीय वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में प्रत्येक माह में उत्पादित, परिवहन एवं निर्यात की गई शराब एवं अन्य उत्पादों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - दो, तीन, चार एवं पाँच अनुसार है। नगरपालिका गुना में दिए गए ठेला एक सौ नौ. श्री पन्नालाल शाक्य : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि नगरपालिका गुना में दर्ज हितग्राहियों जैसे बीड़ी मजदूर, कामकाजी महिला हाथ ठेला मजदूर, विधवा पेंशन, सामाजिक सुरक्षा निधि से प्राप्त सहायता प्राप्त सहायता राशि दो हज़ार चौदह-पंद्रह उपलब्ध करावें? नगरपालिका गुना क्षेत्र में विगत पाँच वर्षों से किन-किन संस्थाओं को ठेका दिया गया है तथा इस सम्बंध में जारी निविदा विज्ञप्ति आवेदन पत्र का विवरण उपलब्ध करावें? मुख्यमंत्री : बीड़ी मजदूरी योजना लागू नहीं है। नगर पालिका परिषद् गुना में वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह में योजनावार हितग्राहियों की संख्या एवं सहायता राशि का विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। नगर पालिका परिषद् गुना में पाँच वर्षों में दिये गये ठेकों का विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। परिशिष्ट "इकतालीस" नरबाई जलाने पर प्रतिबंधक कानून का निर्माण एक सौ दस. श्री मोती कश्यप : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि ग्लोबल वार्मिंग से ऋतुओं में आए तथा राज्य के महानगरों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मात्रा व अनुपात से अधिक हो तो और उसे संतुलित करने की दिशा में किस प्रकार के प्रयत्न किये गये है? राज्य में फसलों की नरवाई को जलाने की परम्परा से वायुमण्डल के ताप में कितना प्रभाव पड़ता है और कहाँ तक उचित माना जा सकता है? क्या विभाग ने प्रश्नांश की रोकथाम के लिये कोई अधिनियम बनाया है और उसमें राजस्व और पुलिस विभाग की कोई भूमिका सुनिश्चित की है? नहीं, तो कब तक बना लिया जावेगा? मुख्यमंत्री : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा राज्य के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में की जा रही परिवेशीय वायु गुणवत्ता में आर, एस.पी.एम. का स्तर निर्धारित मानकों से कुछ अधिक है। शेष पैरामीटर सल्फर डाईऑक्साईड, नाइट्रोजन ऑक्साईड निर्धारित मानकों के अनुरूप है। प्रयत्नों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। राज्य में फसलों की नरवाई को जलाने के संबंध में भोपाल के निकट बैरसिया के ग्राम-रोडिंया तथा जिला-रायसेन के ग्राम-समनापुर के खेत में प्रायोगिक अध्ययन किया गया है। जिसमें परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाई गई है। उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में कोई कार्यवाही अपेक्षित नहीं हैं। परिशिष्ट - "बयालीस" आदिवासी कृषि भूमि का पंजीयन एक सौ ग्यारह. श्रीमती संगीता चारेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधानसभा क्षेत्र सैलाना अंतर्गत आदिवासी जाति की कृषि भूमि गैर आदिवासी जाति के नाम रजिस्ट्री करने के क्या नियम निर्धारित है? नियम की प्रति देवें? प्रश्नांश के प्रकाश में क्या कलेक्टर को आदिवासी जाति की कृषि भूमि का पंजीयन गैर आदिवासी जाति के नाम करने के लिये अनुमति प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है? नियम सहित बतावें तथा वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह से आज दिनांक तक सैलाना विधानसभा अंतर्गत कलेक्टर द्वारा ऐसे कितने प्रकरणों में किस आधार पर अनुमति दी गई? क्या सैलाना विधान सभा अंतर्गत आदिवासी जाति की कृषि भूमि को गैर आदिवासी जाति के नाम पंजीयन में शासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी है? क्या दायित्व निर्धारित करेंगे? जल संसाधन मंत्री : मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, एक हज़ार नौ सौ उनसठ की धारा-एक सौ पैंसठ के प्रावधानों के तहत विधानसभा क्षेत्र सैलाना अधिसूचित जनजाति क्षेत्र होने से आदिवासी जाति की कृषि भूमि गैर आदिवासी जाति के नाम पंजीयन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। नियमों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी नहीं। वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह से प्रश्न दिनांक तक सैलाना विधानसभा अन्तर्गत कलेक्टर रतलाम द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है। उप पंजीयक द्वारा नियमों का पालन किया जा रहा है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। शराब दुकानों के ठेके एक सौ बारह. श्रीमती संगीता चारेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधान सभा क्षेत्र सैलाना अंतर्गत शासन द्वारा वर्तमान कितनी अंग्रेजी शराब की दुकानों के ठेके किस-किस नाम से किन नियमों के तहत आवंटित किये गये? क्या प्रश्नांश के संदर्भ में सैलाना विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत अंग्रेजी शराब दुकान के ठेकेदारों द्वारा आस-पास के गांवों में डायरी बनाकर पुलिस अधिकारियों से साठ-गांठ कर शराब विक्रय किया जा रहा है? यदि हाँ, तो ठेकेदार एवं पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध शासन क्या कार्यवाही करेगा? क्या शासन इस प्रकार के भ्रष्टाचार एवं अवैध शराब विक्रय पर कोई कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्यों ? जल संसाधन मंत्री : विधान सभा क्षेत्र सैलाना अन्तर्गत वर्तमान में तीन अंग्रेजी शराब की दुकानें यथा सैलाना, बाजना एवं रावटी में संचालित है। दुकानों के ठेकेदारों के नाम की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। आबकारी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा-एक के अधीन जारी मध्यप्रदेश राजपत्र क्रमांक उनतीस दिनांक इक्कीस जनवरी दो हज़ार पंद्रह से जारी विज्ञप्ति अनुसार वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह के लिए उपरोक्त दुकानों का आवंटन टेण्डर द्वारा प्राप्त उच्चतम ऑफर अनुसार लायसेंसियो को किया गया है। पुलिस अधीक्षक जिला रतलाम के प्रतिवेदन अनुसार सैलाना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत थाने में दिनांक एक.एक.दो हज़ार पंद्रह से अब तक अवैध शराब के तीन सौ तिरानवे प्रकरण पंजीबद्ध कर इकतालीस हज़ार बयालीस लीटरटर शराब जप्त की गई है। शराब विक्रय संबंधी किसी भी ठेकेदार से पुलिस की सांठ-गांठ नहीं है। ऐसी गतिविधियों की शिकायत प्रमाणित होने पर नियमानुसार संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी । विधानसभा क्षेत्र सैलाना अन्तर्गत संचालित मदिरा दुकानों के ठेकेदारों द्वारा वैध स्त्रोतों से प्राप्त वैध ड्यूटी पेड शराब का विक्रय किया जाता है। अवैध शराब विक्रय के संबंध में जिला आबकारी प्रशासन को शिकायत प्राप्त होने पर नियमों के अन्तर्गत कार्यवाही की जाती है। वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह के दौरान सैलाना विधानसभा क्षेत्र में अवैध विदेशी मदिरा विक्रय, परिवहन एवं धारण के कुल तीन प्रकरण प्रकाश में आये है। संबंधित के विरूद्ध न्यायालयीन प्रकरण कायम कर विधिवत कार्यवाही की गई है। परिशिष्ट - "तैंतालीस" पेंच नहर हेतु कृषकों की भूमि अधिग्रहण एक सौ तेरह. श्री दिनेश राय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि सिवनी जिले की सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पेंच नहर का निर्माण किया जा रहा है? उक्त नहर के निर्माण हेतु कितने कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है? प्रश्नांश के नहर निर्माण हेतु जिन कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था ? उनको प्रश्न दिनांक तक मुआवजा क्यों नहीं दिया गया ? इसके लिए कौन उत्तरदायी है? उन्हें कब तक मुआवजा का भुगतान कर दिया जायेगा? जल संसाधन मंत्री : एवं जी हाँ । अब तक आठ सौ छियानवे कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इनमें से सात सौ सत्तासी कृषकों को मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। भू-अर्जन की प्रक्रिया सतत् है जिसके पूर्ण होने पर भुगतान किया जाना संभव है। जिला कलेक्टर को अतिशीघ्र भुगतान करने के लिए लिखा गया है। किसी अधिकारी के उत्तरदायी होने की स्थिति नहीं है। दोषियों की पहचान कर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराना एक सौ चौदह. श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या रीवा जिले में दिनांक एक.चार.पंद्रह से प्रश्न दिनांक तक कितने खम्भों में लगे एल्यूमीनियम के तारों को निकाल कर उनके जगह में विद्युत प्रवाह हेतु खम्भों में केबिलों का उपयोग किया जा रहा है? अगर हाँ तो कितने फीडरों में केबिलीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया तथा कितने शेष हैं? कार्य किनके द्वारा किस मान से कराये जा रहे हैं? अगर ठेकेदारों द्वारा कार्य कराये जा रहे हैं तो कब-कब निविदा की कार्यवाही की गई? अगर केबिलिंग का कार्य नियम विरूद्ध दिया गया तो इसके लिए कौन दोषी हैं? प्रश्नांश के संदर्भ में उपयोग की जा रही केबिले किस-किस एजेन्सी से कितनी-कितनी लागत से रीवा संभाग हेतु खरीदी गई? क्या शासन के मापदण्डों का पालन करते हुए क्रय की कार्यवाही की गई? क्रय पूर्व इनकी गुणवत्ता की जाँच कराई गई तो विवरण देवें? केबिलों के जलने एवं टूटने की कितनी शिकायतें अधीक्षण कार्यालय रीवा में प्राप्त हुई, का विवरण देवें? प्रश्नांश हाँ तो बिजली के खम्भों से कितने किलो मीटर के एल्यूमीनियम के तार निकाले गए? उनकी मात्रा, स्टॉक, स्टोर में कब-कब दर्ज की गई ? यदि प्रश्नांश एवं अनुसार केबिलों के लगाने हेतु निविदा में गड़बड़ी की गई तो क्या उसकी जाँच के साथ केबिलों की गुणवत्ता में कमी की भी जाँच उपरांत दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे? साथ ही निकाले गए कंडक्टरों की अवैध बिक्री के लिए भी दोषियों की पहचान कर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करायेंगे? तो कब तक? अगर नहीं तो क्यों? ऊर्जा मंत्री : जी हाँ रीवा जिले में दिनांक एक.चार.पंद्रह से प्रश्न दिनांक तक पाँच हज़ार चार सौ चौरासी खम्भों में लगे एलयूमिनियम के तारों को निकाल कर उनकी जगह में विद्युत प्रदाय हेतु केबिलों का उपयोग किया जा रहा है। चौंतीस फीडरों में केबलीकरण का कार्य किया जा रहा है तथा बयासी फीडरों में केबिलीकरण का कार्य शेष है। कार्य ठेकेदार एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर फीडर विभक्तिकरण एवं आर. ए. पी.डी.आर.पी. योजनांतर्गत कराये जा रहे है। रीवा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में उक्त केबिलीकरण के कार्य हेतु मेसर्स बजाज इलेक्ट्रिकल लि. मुम्बई को अवार्ड क्र. एमडी/ईजेड/एफएस/एफ आठ / लाट-सात-आर / रीवा साउथ/आई. /एक हज़ार नौ सौ बानवे दिनांक चौदह.पाँच.पंद्रह एवं मेसर्स व्ही. टी. एल. लि. नई दिल्ली को अवार्ड क्र. एमडी/ईजेड / एफएस // एफ आठ/लाट-छः-आर/रीवा नाथ / आई / एक हज़ार आठ सौ बयासी दिनांक पाँच.पाँच.पंद्रह को जारी किया गया है। रीवा जिले के शहरी क्षेत्र में प्रश्नाधीन कार्य मेसर्स जी.ई.टी.लि. चेन्नई को अवार्ड क्र. सीएमडी/ईजेड / आरएपीडीआरपी/लाट-सोलह / रीवा / आई / तेरह दिनांक पच्चीस.तीन.ग्यारह को जारी किया गया था। मेसर्स जी.ई.टी.लि. चेन्नई द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्य न करने के कारण आदेश क्रमांक तीन हज़ार तैंतीस दिनांक नौ.बारह.चौदह के माध्यम से उन्हें जारी अवार्ड निरस्त कर दिया गया था एवं शेष कार्य को वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर टर्न की कांट्रेक्टर की रिस्क एण्ड कास्ट के आधार पर वितरण कंपनी द्वारा पंजीकृत अ/ब श्रेणी के स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है। केबिलिंग का कार्य कार्यदेशों के वर्णित शर्तों के अनुसार एवं जारी निर्देशों के अनुरूप पंजीकृत ठेकेदारों से नियमानुसार कराया जा रहा है। अतः इस हेतु कोई दोषी नहीं है। केबिलीकरण कार्य के लिए वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्तर पर किये जा रहे कार्य हेतु कंपनी स्तर पर संपूर्ण कंपनी क्षेत्र हेतु केबल क्रय कर क्षेत्रीय भण्डार से आवश्यकतानुसार मैदानी उपयोग हेतु समय-समय पर प्रदाय की जाती है। रीवा संभाग हेतु अलग से केबल क्रय नहीं की गई है। ठेकेदार कंपनियों द्वारा विभिन्न एजेन्सियों से खरीदी गई केबिल, एजेन्सी के नाम एवं लागत के विवरण सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। जी हाँ, मापदण्डों का पालन करते हुए नियमानुसार क्रय प्रक्रिया अपनाई गई है। क्रय पूर्व केबिल की गुणवत्ता की जाँच स्वतंत्र एजेन्सी द्वारा कराई गई जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। केबिलों के जलने एवं टूटने की चौवन शिकायतें प्राप्त हुई जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। उक्त प्राप्त सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है। बिजली के खम्भों से लगभग नौ सौ छियालीस कि.मी. एल्यूमीनियम के तार निकाले गये। निकाले गये तार की मात्रा, विभागीय / ठेकेदार कंपनी के स्टोर में स्टॉक एवं क्षेत्रीय भण्डार, सतना को वापिस की गयी मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "स" एवं "द " अनुसार है। केबिलों के लगाने हेतु निविदा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और न ही केबिलों की गुणवत्ता की जाँच में कोई कमी हुई है। इसी प्रकार निकाले गये कंडक्टर का समुचित रिकार्ड संधारित किया जा रहा है। अतः उक्त संबंध में किसी के दोषी होने अथवा कोई कार्यवाही किये जाने का प्रश्न नहीं उठता। अवैध खनिज परिवहन के दोषियों की पहचान कर कार्यवाही बावत् एक सौ पंद्रह. श्री सुन्दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि रीवा जिले अन्तर्गत खनिज साधन विभाग द्वारा अवैध खनिज परिवहनों एवं अवैध खनन के कितने प्रकरण तैयार कर उन पर क्या कार्यवाही की गयी ? उन पर रायल्टी चोरी एवं अवैध रेत उत्खनन के कितने प्रकरण खनिज विभाग द्वारा वर्ष दो हज़ार बारह से प्रश्नांश दिनांक तक तैयार किये गये? साथ ही अवैध उत्खनन एवं रायल्टी चोरी बंद करने की शासन की क्या कार्ययोजना है? प्रश्नांश के संदर्भ में खनिज विभाग द्वारा तैयार प्रकरणों पर कब-कब क्या-क्या कार्यवाही की गयी? वर्तमान में प्रकरणों की क्या स्थिति है ओव्हर लोडिंग के कितने प्रकरण तैयार किये गये ? प्रश्नांश एवं के संदर्भ में खनिज विभाग द्वारा रीवा जिले में अवैध खनिज परिवहन करने, अवैध रूप से खनिजों के खनन एवं उपयोग पर रोक लगाने पर क्या कार्य योजना तैयार की है? जिससे खनिज संपदा दोहन पर रोक लगायी जा सके? साथ ही खदानों की पटाई एवं समतलीकरण कराने की क्या कार्ययोजना शासन ने तैयार की है? खनिज उत्खनन करने के पूर्व खदानों की अगर पटाई / समतलीकरण नहीं की जाती तो उसका उत्तरदायित्व किस पर निहित किया जावेगा? रीवा जिले में कितनी ऐसी खनिज खदानें हैं जिनकी नीलामी की जाकर कितनी राजस्व की वसूली की गयी ? प्रश्नांश , एवं के अनुसार अगर संबंधित अधिकारियों द्वारा सतत् निरीक्षण कर खनिज सम्पदा के दोहन एवं रायल्टी चोरी एवं खदानों के पटाई न करने से प्रकरण तैयार कर कार्यवाही नहीं की तो संबंधितों की पहचान कर वसूली के साथ कब तक कार्यवाही प्रस्तावित करेंगे? ऊर्जा मंत्री : प्रश्नाधीन जिले में माह जनवरी दो हज़ार बारह से प्रश्न दिनांक तक खनिजों के अवैध परिवहन के पाँच सौ नब्बे एवं अवैध खनन के चौहत्तर प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अवैध परिवहन के प्रकरणों में आरोपित अर्थदण्ड की वसूली की गई है। अवैध उत्खनन के प्रकरण नियमानुसार कलेक्टर /अपर कलेक्टर / अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष निराकरण हेतु प्रेषित किए गए हैं। अवैध उत्खनन के दर्ज प्रकरणों में रेत खनिज का कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन की रोकथाम हेतु खनिज नियमों में दण्डात्मक प्रावधान हैं। इनकी रोकथाम हेतु जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित है। खनिजों के अवैध उत्खनन / परिवहन की रोकथाम हेतु संभागीय उड़नदस्ता कार्यशील है। इसके अतिरिक्त जिले में पदस्थ खनिज अमले द्वारा नियमित रूप से इसके संबंध में कार्यवाही की जाती है । प्रश्नांश 'क' के उत्तर में इस संबंध में जानकारी दी गई है। जिले में वाहनों की जाँच के दौरान अवैध परिवहन के जो पाँच सौ नब्बे प्रकरण दर्ज किए गए थे, उनमें से इक्यासी प्रकरण ऐसे थे जिनमें वाहनों में अभिवहन पास में दर्ज मात्रा से अधिक खनिज मात्रा पाई गई थी। इन सभी प्रकरणों में आरोपित अर्थदण्ड की वसूली की गई है। जिले में पदस्थ अमले द्वारा, गठित टास्क फोर्स द्वारा एवं संभागीय उड़नदस्ते द्वारा खनिजों के अवैध उत्खनन / परिवहन की रोकथाम हेतु कार्यवाही की जाती है। खदान की समयावधि समाप्त हो जाने के पश्चात् खदान बंद करने की योजना के प्रावधान नियमों में है। इसका पालन न किए जाने पर संबंधित पट्टेदार के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने के नियमों में प्रावधान हैं। प्रश्नाधीन जिले में सत्ताईस खदानें नीलाम किए जाने हेतु चिन्हित हैं। इन खदानों की नीलामी कुल उच्चतम बोली रूपए चालीस,छप्पन,पाँच सौ/- में की गई है। इनकी नीलामी से प्रतिभूति के रूप में राशि रूपए बारह, सोलह,नौ सौ पचास /- एवं रायल्टी के रूप में रूपए चौबीस,बासठ,नौ सौ बीस/- प्राप्त हुई है। प्रश्नांश 'क', 'ख' एवं 'ग' में दिए उत्तर के प्रकाश में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। मीटर वाचकों का नियमितीकरण एक सौ सोलह. पं. रमाकान्त तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी जबलपुर के अधीनस्थ रीवा जिले में सन् दो हज़ार छः में लिखित परीक्षा कर मैरिट सूची के आधार पर मीटर वाचकों का चयन किया गया एवं सन् दो हज़ार पंद्रह में उन्हें हटा दिया गया ? म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में मीटर वाचक योजना के परिपत्र दो हज़ार बारह में जो पूर्व में मीटर वाचक पाँच वर्ष तीन वर्ष कार्य किये हैं तो उन्हें नयी भर्ती में अनुभव का लाभ क्या दिया जा रहा है या नहीं? म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी रीवा वृत्त में सन् दो हज़ार छः में लिखित परीक्षा के माध्यम से रीवा जिले में कितने मीटर वाचकों का चयन किया गया था एवं आज वर्तमान में कितने मीटर वाचक पूर्व में काम कर रहे थे? उन्हें क्या अभी काम में रखा गया है या नहीं? क्या म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में सन् दो हज़ार छः एवं सन् दो हज़ार बारह में चयनित मीटर वाचकों की योग्यता आई.टी.आई एवं अभियांत्रिकी डिग्री एवं उसके समकक्ष स्नातक डिग्री प्राप्त मीटर वाचकों के भविष्य को ध्यान में रखा जावेगा? यदि हाँ, तो बतायें ? ऊर्जा मंत्री : पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत प्रश्नाधीन क्षेत्र में सन् दो हज़ार छः में लिखित परीक्षा कर मैरिट सूची के आधार पर मीटर वाचकों का चयन किया गया था तथा अनुबंध अवधि समाप्ति उपरान्त मीटर वाचक स्वमेव पृथक हो गये, उन्हें हटाये जाने का प्रश्न नहीं उठता। मीटर वाचक योजना से संबंधित पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के परिपत्र दो हज़ार बारह में पूर्व में मीटर वाचकों द्वारा किये गये कार्य के अनुभव का लाभ दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अन्तर्गत रीवा जिले में सन् दो हज़ार छः में लिखित परीक्षा के माध्यम से चार सौ अड़तालीस मीटर वाचकों का चयन किया गया था। उच्च न्यायालय, जबलपुर के स्थगन आदेश के तहत् वर्तमान में दो मीटर वाचक कार्यरत् हैं। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ठेका मीटर वाचकों के चयन हेतु निर्धारित की गई नीति दो हज़ार छः में अनुबंध अवधि एक वर्ष तथा कार्य संतोषजनक पाए जाने पर आगामी एक वर्ष की वृद्धि किये जाने का प्रावधान था। इसी प्रकार ठेका मीटर वाचक योजना दो हज़ार बारह एवं दो हज़ार तेरह में जारी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के परिपत्र के अनुसार ठेके की अवधि कुल दो वर्ष हो जाने के उपरान्त कार्य संतोषजनक पाए जाने पर पुनः एक वर्ष के लिए बढ़ाई जाने का प्रावधान था। इस प्रकार ठेके की अवधि एक बार में अधिकतम तीन वर्ष रखे जाने का प्रावधान था। अतः इसके उपरान्त ठेके की अवधि को बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही एक सौ सत्रह. पं. रमाकान्त तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी त्यौंथर जिला रीवा द्वारा आय कर, वाणिज्य कर एवं उपकर की कटौती राशि मार्च दो हज़ार पंद्रह में निर्धारित मद में जमा की जानी थी? मार्ग सी.एम. ओ. त्यौंथर द्वारा अभी तक यह राशि जमा नहीं किया गया है एवं उक्त तीनों मदों की राशि पृथक से कब तक जमा करेगें? अनुविभागीय अधिकारी त्यौंथर के द्वारा इसकी जाँच दिनांक ग्यारह.बारह.दो हज़ार पंद्रह को की गई? जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दोषी पाया गया हैं एवं सी. एम. ओ. त्यौंथर द्वारा लिखित में झूठी जानकारी दी गई हैं ? इसके विरूद्ध क्या निलंबन की कार्यवाही की गई हैं? यदि नहीं, की गई तो कब तक की जावेगी? मुख्यमंत्री : जी हाँ। आयकर वाणिज्य कर एवं उपकर की कटौती राशि दिनांक इकतीस मार्च, दो हज़ार सोलह तक जाम करा दी जावेगी। जी हाँ। अनुविभागीय अधिकारी, अनुविभाग के प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरण की जाँच की जा रही है। संपूर्ण जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। बांध निर्माण कार्य गुणवत्ता हीन होना एक सौ अट्ठारह. श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि निवास विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत दहरा जलाशय निर्माण की स्वीकृति कब दी गई है तथा कितनी राशि की स्वीकृति दी गई है? बांध निर्माण में कुल कितने किसानों की कितनी जमीन अधिग्रहित की गई है? अधिग्रहित जमीन का मुआवजा किस आधार पर दिया गया है तथा उक्त जलाशय के निर्माण से कितनी जमीन की सिंचाई होगी ? जलाशय निर्माण में नींव स्तर से किस तरह के काम का मापदंड तय किये गये है? क्या बांध निर्माण कार्य निर्धारित मापदण्ड के अनुसार हो रहा है? निर्माण कार्य का निरीक्षण समय-समय पर सक्षम अधिकारियों के द्वारा कब-कब किया गया? क्या निर्माण एजेंसी के द्वारा जाँच अधिकारियों को धमकाया जाता है ? क्या ऐसी निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्यवाही करेगे, ताकि अधिकारी निर्भय होकर गुणवत्ता पूर्ण कार्य करा सके? जल संसाधन मंत्री : देहरा लघु सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक सत्ताईस.आठ.दो हज़ार तेरह को रू. दो सौ तीस.पच्चीस लाख की सैच्य क्षेत्र एक सौ सात हेक्टर के लिए दी गई। बांध के शीर्ष कार्य में चौवन किसानों की आठ.तीन सौ पच्चीस हेक्टर भूमि अधिग्रहित की गई जिसका मुआवजा भू-अर्जन अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया गया। तकनीकी स्वीकृति अनुसार । जी हाँ । जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि श्री प्रवीण कटारे द्वारा उपयंत्री श्री एम. एम. अंसारी के साथ मारपीट की जाने के अपराध की सूचना थाना नारायणगंज में दिनांक तीन.दो.दो हज़ार सोलह को दी जाना प्रतिवेदित है। जी हाँ, निर्माण एजेंसी को "कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया जा चुका है। परिशिष्ट- "चौवालीस" जल उपभोक्ता अध्यक्ष पद पर पदस्थ व्यक्ति की जानकारी एक सौ उन्नीस. श्री आर. डी. प्रजापति : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या छतरपुर जिले के अंतर्गत तहसील लवकुश नगर में श्री रमेश पटेल जल उपभोक्ता क्र. चौहत्तर धरमपुरा निवासी देवपुर अध्यक्ष जल उपभोक्ता का चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए थे? क्या उक्त चुनाव दिनांक सत्रह.पाँच.दो हज़ार पंद्रह में सम्पन्न हुआ था? क्या प्रश्न में वर्णित उक्त व्यक्ति को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील लवकुश नगर द्वारा प्रकरण क्रमांक अट्ठाईस/अ नवासी अ/दो हज़ार आठ-नौ में पारित आदेश दिनांक सत्रह.ग्यारह.दो हज़ार नौ में बत्तीस लाख दो हजार रूपये को दोषी करार देते हुये छः वर्ष के लिये चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य / वंचित किया गया था ? क्या सत्र न्यायाधीश छतरपुर द्वारा प्रकरण क्र. चालीस/दो हज़ार नौ के पारित निर्णय दिनांक ग्यारह.पाँच.दो हज़ार दस में गबन का दोषी पाते छः वर्ष कारावास एवं चालीस हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया था ? क्या उक्त व्यक्ति किसी भी चुनाव में भाग लेने हेतु पात्र हैं? यदि नहीं, तो वर्तमान में अध्यक्ष जल उपभोक्ता समिति जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह सकता हैं? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी हैं तथा दोषी अधिकारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई ? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी? जल संसाधन मंत्री : जी हाँ, जी हाँ । जी हाँ। जी नहीं। जी नहीं। पद से पृथक करने की कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी राजनगर के समक्ष विचाराधीन है। विचाराधीन कार्रवाई वृहद स्वरूप की होने के कारण प्रकरण के निराकरण होने तक किसी अधिकारी का दोष निर्धारित किया जाना संभव नहीं है। लोकायुक्त द्वारा जाँच एक सौ बीस. श्री आर.डी. प्रजापति : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या दिनांक सत्रह.ग्यारह.पंद्रह को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सागर द्वारा मेसर्स शिवा ट्रेडर्स प्रो. सुरेश यादव से तीन लाख रूपये की रिश्वत लेते डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर संभाग सागर एच. एस. ठाकुर व असि. कमिश्नर ए.सी. जलज रावत पकड़ गये थे? क्या लोकायुक्त की कार्यवाही के बाद एच. एस. ठाकुर को अपील डिवीजन भोपाल में पदस्थ किया गया है क्या यह नियम विरुद्ध है क्या यह लोकायुक्त के प्रकरण की जाँच में अपने पद का प्रभाव डाल सकतें है, क्योंकि सागर संभाग भोपाल डिवीजन अपील के अधीनस्थ आता है? क्या , में वर्णित अधिकारियों की लोकायुक्त में प्रकरण चलने तक कहीं पदस्थ किया जाना उचित है ? यदि हाँ, तो नियम
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम (John Abraham) बहुत जल्द कॉमेडी फिल्म 'पागलपंती' (Pagalpanti) में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म का मजेदार ट्रेलर रिलीज हुआ था जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बता दें अब फिल्म का दूसरा ट्रेलर रिलीज किया गया है। इस फिल्म के नए ट्रेलर में जॉन, अरशद और पुलकित की कॉमेडी देखने को मिल रही है। फिल्म में अनिल कपूर (anil kapoor), इलियाना डी क्रूज (ileana d'cruz), अरशद वारसी (arshad warsi), पुलकित सम्राट (pulkit samrat), कृति खरबंदा (kriti kharbanda), उर्वशी रौतेला (urvashi rautela) और सौरभ शुक्ला (saurabh shukla) जैसे सितारे भी नजर आ रहे हैं। इस फिल्म के साथ जॉन और अनीश बज्मी (anees bazmee) एकबार फिर से साथ आ रहे हैं। बज्मी ने 'वेलकम बैक' (welcome back) नो एंट्री (no entry), वेलकम (welcome), सिंह इज किंग (singh is king), रेडी (reddy) और मुबारकां (mubarka) जैसी फिल्मों का निर्देशन (direction) किया हुआ है। इसके निर्माता भूषण कुमार (bhushan kumar)और कृष्णन कुमार (krishnan kumar) हैं। 'पागलपंती' का ट्रेलर बेहद मजेदार है इसकी शुरुआत होती है एक ऐसे डायलॉग से जिसे सुनकर ही आप समझ जाएंगे कि फिल्म देखने में कितना मजा आने वाला है। डायलॉग है 'दिमाग मत लगाना क्योंकि इनमें है ही नहीं'। फिर जॉन, अरशद और पुलकित इसमें कॉमेडी का तड़का लगाते हैं। ट्रेलर आपको हंसा हंसा कर लोटपोट कर देगा। ट्रेलर में सभी की जबरदस्त एक्टिंग देखने को मिल रही है। कुछ समय पहले फिल्म को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई थी। फिल्म की रिलीज डेट को एक बार फिर बदला गया था। खबरों के अनुसार फिल्म पहले 6 दिसंबर को रिलीज होनी थी पर इसके बाद फिर इसकी रिलीज डेट को बदल कर 22 नवंबर कर दिया गया। फिल्म लंदन में शूट की गई है।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम बहुत जल्द कॉमेडी फिल्म 'पागलपंती' में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म का मजेदार ट्रेलर रिलीज हुआ था जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बता दें अब फिल्म का दूसरा ट्रेलर रिलीज किया गया है। इस फिल्म के नए ट्रेलर में जॉन, अरशद और पुलकित की कॉमेडी देखने को मिल रही है। फिल्म में अनिल कपूर , इलियाना डी क्रूज , अरशद वारसी , पुलकित सम्राट , कृति खरबंदा , उर्वशी रौतेला और सौरभ शुक्ला जैसे सितारे भी नजर आ रहे हैं। इस फिल्म के साथ जॉन और अनीश बज्मी एकबार फिर से साथ आ रहे हैं। बज्मी ने 'वेलकम बैक' नो एंट्री , वेलकम , सिंह इज किंग , रेडी और मुबारकां जैसी फिल्मों का निर्देशन किया हुआ है। इसके निर्माता भूषण कुमार और कृष्णन कुमार हैं। 'पागलपंती' का ट्रेलर बेहद मजेदार है इसकी शुरुआत होती है एक ऐसे डायलॉग से जिसे सुनकर ही आप समझ जाएंगे कि फिल्म देखने में कितना मजा आने वाला है। डायलॉग है 'दिमाग मत लगाना क्योंकि इनमें है ही नहीं'। फिर जॉन, अरशद और पुलकित इसमें कॉमेडी का तड़का लगाते हैं। ट्रेलर आपको हंसा हंसा कर लोटपोट कर देगा। ट्रेलर में सभी की जबरदस्त एक्टिंग देखने को मिल रही है। कुछ समय पहले फिल्म को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई थी। फिल्म की रिलीज डेट को एक बार फिर बदला गया था। खबरों के अनुसार फिल्म पहले छः दिसंबर को रिलीज होनी थी पर इसके बाद फिर इसकी रिलीज डेट को बदल कर बाईस नवंबर कर दिया गया। फिल्म लंदन में शूट की गई है।
हाल में ही साउथ अफ्रीका और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज खत्म हुए है. इस सीरीज में जहाँ साउथ अफ्रीका के बल्लेबाज़ कुछ ख़ास नही कर सके हैं. वही श्रीलंका के दिमुथ करुणारत्ने का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है. उन्होंने इस सीरीज के हर मैच में अर्धशतक बनाया है. ऐसे में मैच के बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन को लेकर बात की. आप को बता दे इस सीरीज में दिमुथ ने तीन अर्धशतक और एक शतक बनाया है.
हाल में ही साउथ अफ्रीका और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज खत्म हुए है. इस सीरीज में जहाँ साउथ अफ्रीका के बल्लेबाज़ कुछ ख़ास नही कर सके हैं. वही श्रीलंका के दिमुथ करुणारत्ने का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है. उन्होंने इस सीरीज के हर मैच में अर्धशतक बनाया है. ऐसे में मैच के बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन को लेकर बात की. आप को बता दे इस सीरीज में दिमुथ ने तीन अर्धशतक और एक शतक बनाया है.
- 6 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 6 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सितारे अपने काम, अफेयर और विवादों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं और इस वक्त अफेयर को लेकर सिद्धार्थ मल्होत्रा चर्चा का विषय हैं। उनका नाम लगातार कियारा आडवाणी से जोड़ा जाता है और लोग कई तरह के कमेंट करते हैं। हालांकि दोनों ने किसी तरह का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। लेकिन इस वक्त एक वीडियो वायरल हो रहा है जो कि आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगा। सिद्धार्थ मल्होत्रा अपनी फिल्म थैंक गॉड के दौरान यंग कियारा से मिले और उसका नाम सुनते ही उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। जी हां, स्क्रीनिंग के एक वीडियो में, सिद्धार्थ इसी नाम की एक युवा बच्ची से मिले, वीडियो में शरमाते हुए दिख रहे हैं। Salman Khan हुए शर्टलेस, Bhai Dooj के मौके पर ऐसे दी शुभकामनाएं! इस वीडियो में आप सुन सकते हैं कि एक महिला कहती है, "यह मेरी बेटी कियारा है। " इसके बाद सिद्धार्थ ने शरमाते हुए जवाब दिया, "ओह कियारा? नाइस। " वह फिर मुस्कुराते है और तस्वीर क्लिक करना जारी रखते है। ऐसा काफी कम देखा जाता है कि इस तरह का कुछ कैमरे में कैद हो। हालांकि सिद्धार्थ मल्होत्रा इस समय काफी खुश थे और फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान उनके साथ सेल्फी लेने वालों की भीड़ थी। सिद्धार्थ मल्होत्रा की इस फिल्म की दमदार शुरुआत हो चुकी है और फैंस इसको काफी प्यार दे रहे हैँ। फिल्म ने अपने पहले ही दिन 8. 50 करोड़ का बिजनेस किया है जो कि अच्छा नंबर माना जा रहा है। सिद्धार्थ इस फिल्म में अजय देवगन के साथ दिख रहे हैं। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
- छः hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - छः hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सितारे अपने काम, अफेयर और विवादों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं और इस वक्त अफेयर को लेकर सिद्धार्थ मल्होत्रा चर्चा का विषय हैं। उनका नाम लगातार कियारा आडवाणी से जोड़ा जाता है और लोग कई तरह के कमेंट करते हैं। हालांकि दोनों ने किसी तरह का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। लेकिन इस वक्त एक वीडियो वायरल हो रहा है जो कि आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगा। सिद्धार्थ मल्होत्रा अपनी फिल्म थैंक गॉड के दौरान यंग कियारा से मिले और उसका नाम सुनते ही उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। जी हां, स्क्रीनिंग के एक वीडियो में, सिद्धार्थ इसी नाम की एक युवा बच्ची से मिले, वीडियो में शरमाते हुए दिख रहे हैं। Salman Khan हुए शर्टलेस, Bhai Dooj के मौके पर ऐसे दी शुभकामनाएं! इस वीडियो में आप सुन सकते हैं कि एक महिला कहती है, "यह मेरी बेटी कियारा है। " इसके बाद सिद्धार्थ ने शरमाते हुए जवाब दिया, "ओह कियारा? नाइस। " वह फिर मुस्कुराते है और तस्वीर क्लिक करना जारी रखते है। ऐसा काफी कम देखा जाता है कि इस तरह का कुछ कैमरे में कैद हो। हालांकि सिद्धार्थ मल्होत्रा इस समय काफी खुश थे और फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान उनके साथ सेल्फी लेने वालों की भीड़ थी। सिद्धार्थ मल्होत्रा की इस फिल्म की दमदार शुरुआत हो चुकी है और फैंस इसको काफी प्यार दे रहे हैँ। फिल्म ने अपने पहले ही दिन आठ. पचास करोड़ का बिजनेस किया है जो कि अच्छा नंबर माना जा रहा है। सिद्धार्थ इस फिल्म में अजय देवगन के साथ दिख रहे हैं। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
पंचकूला, 2 मार्च (ट्रिन्यू) रोडवेज के हटाये चालक-परिचालक बुधवार को विधानसभा का घेराव करने में नाकाम रहे। पुलिस ने उन्हें बेलाविस्टा के पीछे की सड़क पर ही अवरोधक खड़े करके आगे बढ़ने से रोक दिया। करीब तीन घंटे चालक-परिचालक मुख्य सड़क पर ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इसके बाद मौके पर पहुंचे रोडवेज के स्थानीय डिपो के महाप्रबंधक को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्राप्त जानकारी के अनुसार हटाये गये चालक-परिचालक दोपहर करीब एक बजे धरना स्थल से विधानसभा का घेराव करने के लिये निकले। पुलिस ने बेलाविस्टा होटल के पीछे की सड़क पर अवरोधक खड़े करके उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चालक-परिचालकों ने भी अवरोधक पार करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने भाजपा और जजपा सरकार के खिलाफ जरूर जमकर नारेबाजी की। रोडवेज जीएम रवींद्र पाठक मौके पर पहुंचे। काफी समय पर ज्ञापन देने के लेकर कमेटी सदस्यों में विचार-विमर्श होता रहा। आखिर में वे जीएम को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन देने पर सहमत हो गये। इससे पहले धरना स्थल पर सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान इंद्र सिंह बधाना, प्रवक्ता श्रवण जांगड़ा ने चालक-परिचालकों को संबोधित किया।
पंचकूला, दो मार्च रोडवेज के हटाये चालक-परिचालक बुधवार को विधानसभा का घेराव करने में नाकाम रहे। पुलिस ने उन्हें बेलाविस्टा के पीछे की सड़क पर ही अवरोधक खड़े करके आगे बढ़ने से रोक दिया। करीब तीन घंटे चालक-परिचालक मुख्य सड़क पर ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इसके बाद मौके पर पहुंचे रोडवेज के स्थानीय डिपो के महाप्रबंधक को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्राप्त जानकारी के अनुसार हटाये गये चालक-परिचालक दोपहर करीब एक बजे धरना स्थल से विधानसभा का घेराव करने के लिये निकले। पुलिस ने बेलाविस्टा होटल के पीछे की सड़क पर अवरोधक खड़े करके उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चालक-परिचालकों ने भी अवरोधक पार करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने भाजपा और जजपा सरकार के खिलाफ जरूर जमकर नारेबाजी की। रोडवेज जीएम रवींद्र पाठक मौके पर पहुंचे। काफी समय पर ज्ञापन देने के लेकर कमेटी सदस्यों में विचार-विमर्श होता रहा। आखिर में वे जीएम को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन देने पर सहमत हो गये। इससे पहले धरना स्थल पर सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान इंद्र सिंह बधाना, प्रवक्ता श्रवण जांगड़ा ने चालक-परिचालकों को संबोधित किया।
यमुनानगर, 25 मार्च (हप्र) वाहनों रिपेयर का काम अब शहर की सड़कों पर नहीं होगा। इसके कारण आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए 2 जगह अाॅटो मार्केट बनाने का निर्णय लिया है। निगम हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास होनेे के बाद एस्टीमेट व डिजाइनिंग की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अगले सप्ताह संबंधित एजेंसी के अधिकारी दौरा करेंगे। एक अाॅटो मार्केट बाईपास पुल के पास चांदपुर व दूसरी तेजली खेल परिसर के पास निगम की खाली पड़ी जगह में बनेगी। यहां शहर से लाइट व्हीकल (कार, ट्रैक्टर, ऑटो, टू-व्हीलर) रिपेयरिंग की दुकानें शिफ्ट होंगी। निगम के एक्सईएन विकास बाल्याण का कहना है कि यमुनानगर-जगाधरी में ऐसी दुकानों की संख्या कम नहीं है जहां सड़कों पर ही कार, अाॅटो व अन्य वाहनों की रिपेयर का काम किया जाता है। रेलवे रोड पर रामपुरा हनुमान मंदिर से सिविल अस्पताल तक दोनों ओर दुकानें हैं। जगाधरी में महाराजा अग्रसेन चौक से बूड़िया चौक तक भी रिपेयरिंग की दुकानें हैं। इसके अलावा पुराना हमीदा में एनएच से लेकर जगह-जगह स्टेट हाईवे सहित शहरी सड़कों पर 500 से ज्यादा लाइट व्हीकल रिपेयर का काम किया जाता है। फुटपाथ पर पूरी तरह दुकानदारों का कब्जा है। सड़कों पर ही वाहन खड़े रहते हैं। जिसके चलते जाम की स्थिति बनी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम की ओर से यह निर्णय लिया गया है।
यमुनानगर, पच्चीस मार्च वाहनों रिपेयर का काम अब शहर की सड़कों पर नहीं होगा। इसके कारण आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए दो जगह अाॅटो मार्केट बनाने का निर्णय लिया है। निगम हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास होनेे के बाद एस्टीमेट व डिजाइनिंग की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अगले सप्ताह संबंधित एजेंसी के अधिकारी दौरा करेंगे। एक अाॅटो मार्केट बाईपास पुल के पास चांदपुर व दूसरी तेजली खेल परिसर के पास निगम की खाली पड़ी जगह में बनेगी। यहां शहर से लाइट व्हीकल रिपेयरिंग की दुकानें शिफ्ट होंगी। निगम के एक्सईएन विकास बाल्याण का कहना है कि यमुनानगर-जगाधरी में ऐसी दुकानों की संख्या कम नहीं है जहां सड़कों पर ही कार, अाॅटो व अन्य वाहनों की रिपेयर का काम किया जाता है। रेलवे रोड पर रामपुरा हनुमान मंदिर से सिविल अस्पताल तक दोनों ओर दुकानें हैं। जगाधरी में महाराजा अग्रसेन चौक से बूड़िया चौक तक भी रिपेयरिंग की दुकानें हैं। इसके अलावा पुराना हमीदा में एनएच से लेकर जगह-जगह स्टेट हाईवे सहित शहरी सड़कों पर पाँच सौ से ज्यादा लाइट व्हीकल रिपेयर का काम किया जाता है। फुटपाथ पर पूरी तरह दुकानदारों का कब्जा है। सड़कों पर ही वाहन खड़े रहते हैं। जिसके चलते जाम की स्थिति बनी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम की ओर से यह निर्णय लिया गया है।
चंडीगढ़। हाल ही में पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ( CM Bhagwant Man ) ने आप सरकार में कैबिनेट मंत्री विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजकर उन लोगों की नींद छीन ली है जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं या रहें हैं। अब कांग्रेस ( Congress ) के ऐसे नेताओं की चैन पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ( Former CM Amrinder Singh ) ने यह बताकर छीन ली है कि वह बहुत जल्द सीएम भगवंत मान से मिलेंगे और अपने सरकार में कांग्रेस के भ्रष्ट मंत्रियों व नेताओं ( Congress Corrupt Leaders ) की सूची सौपेंगे। खास तौर से जो पिछली सरकार में अवैध रेत खनन ( Illegal Sand Mining ) में शामिल रहे हैं। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ( Former CM Amrinder Singh ) के इस दांव से कुछ कांग्रेसियों में खलबली मची हुई है। ताजा अपडेट के मुताबिक अमरिंदर की सूची में ऐसे 6 मंत्रियों के नाम शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने अपने नाम का ऐलान नहीं किया है। बताया तो ये भी जा रहा है कि पूर्व सीएम शराब के L1 का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाले को भी बेनकाब कर सकते हैं। पंजाब कांग्रेस के नेताओं ( Punjab Congress Leaders ) को डर है कि कहीं कैप्टन उनका नाम न दे दें। कांग्रेस नेताओं में यह डर इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भ्रष्टाचार के मसले पर सीएम मान ने अपने मंत्रिमंडल के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. विजय सिंगला को बर्खास्त कर न केवल केस दर्ज कराया बल्कि उन्हें जेल तक पहुंचा चुके हैं। पूर्व मंत्री डॉ.विजय सिंगला अब रोपड़ जेल में है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने भी इस बाी की पुष्टि की है। पीएलसी के प्रवक्ता बलियावाल ने कहा कि कैप्टन सांसद पत्नी के साथ सीएम से मिलेंगे। पटियाला में कुछ डेवलपमेंट के फंड रोके गए हैं, उसके बारे में बताएंगे। हमारे कुछ पुराने दोस्तों की मांग है कि भ्रष्ट मंत्रियों और विधायकों के नाम बताएं जाएं। कैप्टन जरूर वहां नाम बताएंगे। किसने अवैध माइनिंग की, किसने पंजाब को लूटा? पंजाब ( Punjab News ) के सीएम पद से हटाये जाने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस आलाकमान को ऐसे नेताओं की सूची सौंपते हुए कार्रवाई की बात कही थी लेकिन पार्टी नेतृत्व ने भ्रष्टों पर कार्रवाई करने की जगह कैप्टन को ही सीएम पद से हटा दिया। कैप्टन उन्हें कैबिनेट से हटाना चाहते थे। वह फंड हाईकमान को भी दिए गए। पहले दोस्त अच्छे थे तो अब दुश्मनी भी अच्छी तरह से निभाएंगे। दरअसल, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ( Former CM Amrinder Singh ) ने हाल ही में कहा था कि उनके पास अवैध रेत खनन में शामिल कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों के नाम की सूची हैं यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान ( CM Bhagwant Man ) ने मांगेंगे तो वह जरूर पूरी लिस्ट सौंप देंगे। कैप्टन का यह बयान उस समय आया था, जब पूर्व कांग्रेसी डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने उन्हें करप्ट मंत्रियों के नाम बताने को कहा था। इसके बाद अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला ने भी कैप्टन को कहा था कि वह नाम बताएं या फिर कांग्रेस को बदनाम न करें। (जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुँह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रू-ब-रू कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं। हमारे द्वारा उद्घाटित रिपोर्ट्स और कहानियाँ अक्सर बदलाव का सबब बनती रही है। साथ ही सरकार और सरकारी अधिकारियों को मजबूर करती रही हैं कि वे नागरिकों को उन सभी चीजों और सेवाओं को मुहैया करवाएं जिनकी उन्हें दरकार है। लाजिमी है कि इस तरह की जन-पत्रकारिता को जारी रखने के लिए हमें लगातार आपके मूल्यवान समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है। सहयोग राशि के रूप में आपके द्वारा बढ़ाया गया हर हाथ जनज्वार को अधिक साहस और वित्तीय सामर्थ्य देगा जिसका सीधा परिणाम यह होगा कि आपकी और आपके आस-पास रहने वाले लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाली हर ख़बर और रिपोर्ट को सामने लाने में जनज्वार कभी पीछे नहीं रहेगा, इसलिए आगे आयें और जनज्वार को आर्थिक सहयोग दें।)
चंडीगढ़। हाल ही में पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने आप सरकार में कैबिनेट मंत्री विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजकर उन लोगों की नींद छीन ली है जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं या रहें हैं। अब कांग्रेस के ऐसे नेताओं की चैन पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने यह बताकर छीन ली है कि वह बहुत जल्द सीएम भगवंत मान से मिलेंगे और अपने सरकार में कांग्रेस के भ्रष्ट मंत्रियों व नेताओं की सूची सौपेंगे। खास तौर से जो पिछली सरकार में अवैध रेत खनन में शामिल रहे हैं। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस दांव से कुछ कांग्रेसियों में खलबली मची हुई है। ताजा अपडेट के मुताबिक अमरिंदर की सूची में ऐसे छः मंत्रियों के नाम शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने अपने नाम का ऐलान नहीं किया है। बताया तो ये भी जा रहा है कि पूर्व सीएम शराब के Lएक का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाले को भी बेनकाब कर सकते हैं। पंजाब कांग्रेस के नेताओं को डर है कि कहीं कैप्टन उनका नाम न दे दें। कांग्रेस नेताओं में यह डर इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भ्रष्टाचार के मसले पर सीएम मान ने अपने मंत्रिमंडल के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. विजय सिंगला को बर्खास्त कर न केवल केस दर्ज कराया बल्कि उन्हें जेल तक पहुंचा चुके हैं। पूर्व मंत्री डॉ.विजय सिंगला अब रोपड़ जेल में है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने भी इस बाी की पुष्टि की है। पीएलसी के प्रवक्ता बलियावाल ने कहा कि कैप्टन सांसद पत्नी के साथ सीएम से मिलेंगे। पटियाला में कुछ डेवलपमेंट के फंड रोके गए हैं, उसके बारे में बताएंगे। हमारे कुछ पुराने दोस्तों की मांग है कि भ्रष्ट मंत्रियों और विधायकों के नाम बताएं जाएं। कैप्टन जरूर वहां नाम बताएंगे। किसने अवैध माइनिंग की, किसने पंजाब को लूटा? पंजाब के सीएम पद से हटाये जाने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस आलाकमान को ऐसे नेताओं की सूची सौंपते हुए कार्रवाई की बात कही थी लेकिन पार्टी नेतृत्व ने भ्रष्टों पर कार्रवाई करने की जगह कैप्टन को ही सीएम पद से हटा दिया। कैप्टन उन्हें कैबिनेट से हटाना चाहते थे। वह फंड हाईकमान को भी दिए गए। पहले दोस्त अच्छे थे तो अब दुश्मनी भी अच्छी तरह से निभाएंगे। दरअसल, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में कहा था कि उनके पास अवैध रेत खनन में शामिल कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों के नाम की सूची हैं यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मांगेंगे तो वह जरूर पूरी लिस्ट सौंप देंगे। कैप्टन का यह बयान उस समय आया था, जब पूर्व कांग्रेसी डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने उन्हें करप्ट मंत्रियों के नाम बताने को कहा था। इसके बाद अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला ने भी कैप्टन को कहा था कि वह नाम बताएं या फिर कांग्रेस को बदनाम न करें।
क्रम. संख्या. 2. कोविड-19 महामारी के चलते जन स्वास्थ्य आपातकाल और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी आदेशों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप भारत निर्वाचन आयोग ने 03 अप्रैल 2020 को संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के अनुच्छेद 16 के अनुरूप एक आदेश जारी किया था और निर्देश दिया था कि उपर्युक्त रिक्तियों पर उचित समय में बाद में चुनाव कराये जाएंगे। 28 सितंबर, 2020 (सोमवार) 05 अक्टूबर, 2020 (सोमवार) 06 अक्टूबर, 2020 (मंगलवार) 08 अक्टूबर, 2020 (गुरुवार) 22 अक्टूबर, 2020 (गुरुवार) 12 नवंबर, 2020 (गुरुवार) 14 नवंबर, 2020 (शनिवार) - इन चुनावों को देखते हुए निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। और अधिक विवरण के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के नीचे दिए गए इस लिंक पर क्लिक करेंः I. चुनाव से जुड़ी हर एक गतिविधि के दौरान सभी को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। II. चुनाव प्रक्रिया के दौरान हॉल/कमरे/परिसर में प्रवेश परः (a) सभी व्यक्तियों के तापमान की जांच। (b) सभी केन्द्रों पर सैनिटाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। III. कोविड-19 के संदर्भ में राज्य सरकार और गृह मंत्रालय द्वारा जारी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जाएगा। IV. यथासंभव चुनाव प्रक्रिया के लिए बड़े परिसरों की पहचान की जाएगी ताकि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जा सके। V. कोविड-19 संबंधी दिशा-निर्देशों के पूर्ण पालन हेतु चुनाव कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए पर्याप्त वाहनों का प्रबंध किया जाएगा।
क्रम. संख्या. दो. कोविड-उन्नीस महामारी के चलते जन स्वास्थ्य आपातकाल और आपदा प्रबंधन अधिनियम दो हज़ार पाँच के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी आदेशों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप भारत निर्वाचन आयोग ने तीन अप्रैल दो हज़ार बीस को संविधान के अनुच्छेद तीन सौ चौबीस के अंतर्गत लोक प्रतिनिधि अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन के अनुच्छेद सोलह के अनुरूप एक आदेश जारी किया था और निर्देश दिया था कि उपर्युक्त रिक्तियों पर उचित समय में बाद में चुनाव कराये जाएंगे। अट्ठाईस सितंबर, दो हज़ार बीस पाँच अक्टूबर, दो हज़ार बीस छः अक्टूबर, दो हज़ार बीस आठ अक्टूबर, दो हज़ार बीस बाईस अक्टूबर, दो हज़ार बीस बारह नवंबर, दो हज़ार बीस चौदह नवंबर, दो हज़ार बीस - इन चुनावों को देखते हुए निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। और अधिक विवरण के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के नीचे दिए गए इस लिंक पर क्लिक करेंः I. चुनाव से जुड़ी हर एक गतिविधि के दौरान सभी को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। II. चुनाव प्रक्रिया के दौरान हॉल/कमरे/परिसर में प्रवेश परः सभी व्यक्तियों के तापमान की जांच। सभी केन्द्रों पर सैनिटाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। III. कोविड-उन्नीस के संदर्भ में राज्य सरकार और गृह मंत्रालय द्वारा जारी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जाएगा। IV. यथासंभव चुनाव प्रक्रिया के लिए बड़े परिसरों की पहचान की जाएगी ताकि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जा सके। V. कोविड-उन्नीस संबंधी दिशा-निर्देशों के पूर्ण पालन हेतु चुनाव कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए पर्याप्त वाहनों का प्रबंध किया जाएगा।
सिकंदराराऊ। कासगंज रोड स्थित गांव नावली लालपुर में रविवार की सुबह पुराने सरकारी स्कूल की जमीन से होकर ट्रैक्टर निकालने को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। आधा घंटा तक दोनों पक्षों के बीच पथराव मारपीट का दौर चला। सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने भी मारपीट का दौर चलता रहा। मारपीट में दो महिला समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए। दोनों पक्षों ने अपनी रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस ने घायलों का चिकित्सीय परीक्षण कराया है। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गांव निवासी रामनरेश पुत्र विशंभर ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि वो सुबह ट्रैक्टर लेकर खेत पर जा रहा था। रास्ते में गांव के ही श्रीनिवास के पुत्र शिवेन्द्र, दिनेश, अनिल, दीपेश यादव ने रोक लिया तथा ट्रैक्टर नहीं निकलने दिया। विरोध करने पर ये लोग लाठी डंडे लेकर आ गए तथा मारपीट करने लगे। इन लोगों ने पथराव भी किया। इसमें मां उर्मिला देवी, भाभी गुड्डी देवी, भतीजा बाबी घायल हो गया। दूसरे पक्ष के दिनेश कुमार पुत्र श्री निवास ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि गांव के ही रामविरेश उसके घर में होकर ट्रैक्टर निकाला। इसका विरोध किया तो वीरेश, श्रीकिशन, ब्रजेश, सीटू, बांबी, हरिओम, अजय, संजू आ गए और घर में घुस कर मारपीट पथराव करने लगे। कुल्हाड़ी के प्रहार से शिवेंद्र घायल हो गया। प्रकरण में दोनों पक्षों के शिवेंद्र कुमार, दिनेश, रामनरेश, बांबी, उर्मिला पत्नी विशंभर सिंह गुड्डी देेवी पत्नी वीरेश घायल हो गए। कोतवाल डीके सिसौदिया ने बताया कि पहले गांव में सरकारी स्कूल को इन लोगों के बजुर्गों ने जमीन दी थी। अब स्कूल गांव से बाहर बन गया जमीन खाली हो गयी। इसको लेकर दोनों पक्षों का मामला अदालत में चल रहा है। एक पक्ष उस जगह में खूंटा गाड़ रहा था तभी दूसरे पक्ष का एक ट्रैक्टर लेकर आ गया इसी बात पर भिड़ंत हो गया। पुलिस ने प्रकरण में देवेंद्र पुत्र श्रीनिवास, दिनेश, रामविरेश, बॉबी को गिरफ्तार कर लिया है।
सिकंदराराऊ। कासगंज रोड स्थित गांव नावली लालपुर में रविवार की सुबह पुराने सरकारी स्कूल की जमीन से होकर ट्रैक्टर निकालने को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। आधा घंटा तक दोनों पक्षों के बीच पथराव मारपीट का दौर चला। सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने भी मारपीट का दौर चलता रहा। मारपीट में दो महिला समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए। दोनों पक्षों ने अपनी रिपोर्ट दर्ज करा दी है। पुलिस ने घायलों का चिकित्सीय परीक्षण कराया है। पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गांव निवासी रामनरेश पुत्र विशंभर ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि वो सुबह ट्रैक्टर लेकर खेत पर जा रहा था। रास्ते में गांव के ही श्रीनिवास के पुत्र शिवेन्द्र, दिनेश, अनिल, दीपेश यादव ने रोक लिया तथा ट्रैक्टर नहीं निकलने दिया। विरोध करने पर ये लोग लाठी डंडे लेकर आ गए तथा मारपीट करने लगे। इन लोगों ने पथराव भी किया। इसमें मां उर्मिला देवी, भाभी गुड्डी देवी, भतीजा बाबी घायल हो गया। दूसरे पक्ष के दिनेश कुमार पुत्र श्री निवास ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि गांव के ही रामविरेश उसके घर में होकर ट्रैक्टर निकाला। इसका विरोध किया तो वीरेश, श्रीकिशन, ब्रजेश, सीटू, बांबी, हरिओम, अजय, संजू आ गए और घर में घुस कर मारपीट पथराव करने लगे। कुल्हाड़ी के प्रहार से शिवेंद्र घायल हो गया। प्रकरण में दोनों पक्षों के शिवेंद्र कुमार, दिनेश, रामनरेश, बांबी, उर्मिला पत्नी विशंभर सिंह गुड्डी देेवी पत्नी वीरेश घायल हो गए। कोतवाल डीके सिसौदिया ने बताया कि पहले गांव में सरकारी स्कूल को इन लोगों के बजुर्गों ने जमीन दी थी। अब स्कूल गांव से बाहर बन गया जमीन खाली हो गयी। इसको लेकर दोनों पक्षों का मामला अदालत में चल रहा है। एक पक्ष उस जगह में खूंटा गाड़ रहा था तभी दूसरे पक्ष का एक ट्रैक्टर लेकर आ गया इसी बात पर भिड़ंत हो गया। पुलिस ने प्रकरण में देवेंद्र पुत्र श्रीनिवास, दिनेश, रामविरेश, बॉबी को गिरफ्तार कर लिया है।
इंदौर। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। पिछले कुछ समय से इस बात की अटकले लगाई जा रही थी कि उन्हें यह पदभार दिया जा सकता है। जैसे ही उनके प्रशंसकों को इस बात की सूचना मिली पूरे मालवा-निमाड़ में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्हें यह पद देने के पीछे हरियाणा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका को माना जा रहा है। हरियाणा की सफलता के कारण भारतीय जनता पार्टी उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां सौंपती रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व के लगातार संपर्क और कार्यों में लिप्त होने के कारण यह माना जा रहा था कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व अपनी टीम में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगा। वहीं प्रदेश प्रभारी अनिल जैन को पुरस्कृत करते हुए महासचिव बनाया गया है। पार्टी के ऐतिहासिक सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी संभालने वाले पार्टी सचिव अरुण सिंह को भी महासचिव बना दिया गया है। हालांकि अभी भी महासचिव के दो पद रिक्त हैं। अध्यक्ष बनने के बाद शाह ने एक विस्तार जरूर किया था, लेकिन उसे अधूरा माना जा रहा था। खासकर चुनावी मामलों में शाह मंत्री बनकर सरकार में जा चुके पुराने महामंत्रियों से ही काम ले रहे थे। इस बीच यह कयास भी लगने लगे थे कि दोबारा विस्तार शायद न हो। खासकर तब जबकि अगले सात-आठ महीनों में संगठन चुनाव होने ही वाला है। लेकिन बुधवार को शाह ने टीम विस्तार की घोषणा कर दी। नए विस्तार में उत्तर प्रदेश के प्रभारी व वरिष्ठ नेता ओम माथुर समेत श्याम जाजू और अविनाश राय खन्ना को उपाध्यक्ष बनाया गया है। जाजू को सचिव पद से प्रोन्नत किया गया है। वहीं सचिवों की नियुक्ति में जम्मू-कश्मीर को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। चुनाव के वक्त भाजपा में शामिल हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी फारूख खान को सचिव बनाया गया है। दिल्ली से सांसद महेश गिरी, ओडिशा से सुरेश पुजारी और मध्य प्रदेश से महेंद्र सिंह को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है।
इंदौर। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। पिछले कुछ समय से इस बात की अटकले लगाई जा रही थी कि उन्हें यह पदभार दिया जा सकता है। जैसे ही उनके प्रशंसकों को इस बात की सूचना मिली पूरे मालवा-निमाड़ में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्हें यह पद देने के पीछे हरियाणा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका को माना जा रहा है। हरियाणा की सफलता के कारण भारतीय जनता पार्टी उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां सौंपती रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व के लगातार संपर्क और कार्यों में लिप्त होने के कारण यह माना जा रहा था कि उन्हें केंद्रीय नेतृत्व अपनी टीम में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगा। वहीं प्रदेश प्रभारी अनिल जैन को पुरस्कृत करते हुए महासचिव बनाया गया है। पार्टी के ऐतिहासिक सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी संभालने वाले पार्टी सचिव अरुण सिंह को भी महासचिव बना दिया गया है। हालांकि अभी भी महासचिव के दो पद रिक्त हैं। अध्यक्ष बनने के बाद शाह ने एक विस्तार जरूर किया था, लेकिन उसे अधूरा माना जा रहा था। खासकर चुनावी मामलों में शाह मंत्री बनकर सरकार में जा चुके पुराने महामंत्रियों से ही काम ले रहे थे। इस बीच यह कयास भी लगने लगे थे कि दोबारा विस्तार शायद न हो। खासकर तब जबकि अगले सात-आठ महीनों में संगठन चुनाव होने ही वाला है। लेकिन बुधवार को शाह ने टीम विस्तार की घोषणा कर दी। नए विस्तार में उत्तर प्रदेश के प्रभारी व वरिष्ठ नेता ओम माथुर समेत श्याम जाजू और अविनाश राय खन्ना को उपाध्यक्ष बनाया गया है। जाजू को सचिव पद से प्रोन्नत किया गया है। वहीं सचिवों की नियुक्ति में जम्मू-कश्मीर को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। चुनाव के वक्त भाजपा में शामिल हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी फारूख खान को सचिव बनाया गया है। दिल्ली से सांसद महेश गिरी, ओडिशा से सुरेश पुजारी और मध्य प्रदेश से महेंद्र सिंह को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है।
Budget 2022-23 India Date and Time : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को संसद में यूनियन बजट 2022-23 पेश करेंगी। संसद में वित्त मंत्री का बजट भाषण दिन के 11 बजे शुरू होगा। यह उनका चौथा भाषण है। बजट 2022 का सीधा प्रसारण संसद के आधिकारिक चैनल संसद टीवी और राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन पर होगा। इसे संसद टीवी के यूट्यूब चैनल पर भी देखा जा सकता है। वित्त मंत्री के पिछले बजट भाषण को देखें तो उनका यह संबोधन लंबा हो सकता है। सबसे लंबा बजट भाषण का रिकॉर्ड सीतारमण के ही नाम पर है। उन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए 2 घंटे 42 मिनट लंबा भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने जुलाई 2019 में बनाए गए अपने ही 2 घंटे एवं 17 मिनट लंबे भाषण के रिकॉर्ड को तोड़ा था। बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक चलेगा। बजट सत्र के पहले हिस्से में 10 बैठकें और दूसरे हिस्से में 19 बैठके होंगी। कोरोना के खतरे को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अलग-अलग समय पर होगी। सदन में सोशल डिस्टैंसिंग का सख्ती से पालन होगा। राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 10 बजे से शाम तीन बजे तक और लोकसभा की कार्यवाही शाम चार बजे से रात नौ बजे तक चलेगी। पिछली बार वित्त मंत्री ने पेपरलेस बजट पेश किया था। वह पारंपरिक 'बही खाते' की जगह टैबलेट लेकर आई थीं। बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के साथ होगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Business News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
Budget दो हज़ार बाईस-तेईस India Date and Time : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को संसद में यूनियन बजट दो हज़ार बाईस-तेईस पेश करेंगी। संसद में वित्त मंत्री का बजट भाषण दिन के ग्यारह बजे शुरू होगा। यह उनका चौथा भाषण है। बजट दो हज़ार बाईस का सीधा प्रसारण संसद के आधिकारिक चैनल संसद टीवी और राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन पर होगा। इसे संसद टीवी के यूट्यूब चैनल पर भी देखा जा सकता है। वित्त मंत्री के पिछले बजट भाषण को देखें तो उनका यह संबोधन लंबा हो सकता है। सबसे लंबा बजट भाषण का रिकॉर्ड सीतारमण के ही नाम पर है। उन्होंने वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस का बजट पेश करते हुए दो घंटाटे बयालीस मिनट लंबा भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने जुलाई दो हज़ार उन्नीस में बनाए गए अपने ही दो घंटाटे एवं सत्रह मिनट लंबे भाषण के रिकॉर्ड को तोड़ा था। बजट सत्र का पहला चरण इकतीस जनवरी से ग्यारह फरवरी तक चलेगा। बजट सत्र के पहले हिस्से में दस बैठकें और दूसरे हिस्से में उन्नीस बैठके होंगी। कोरोना के खतरे को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अलग-अलग समय पर होगी। सदन में सोशल डिस्टैंसिंग का सख्ती से पालन होगा। राज्यसभा की कार्यवाही सुबह दस बजे से शाम तीन बजे तक और लोकसभा की कार्यवाही शाम चार बजे से रात नौ बजे तक चलेगी। पिछली बार वित्त मंत्री ने पेपरलेस बजट पेश किया था। वह पारंपरिक 'बही खाते' की जगह टैबलेट लेकर आई थीं। बजट सत्र की शुरुआत इकतीस जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के साथ होगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Business News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
आइए जानते है Renault Kiger की भारत में संभावित कीमत क्या हो सकती है. इसके साथ ही Renault Kiger का मुकाबला किन कारों से होगा. Renault अपनी सबसे सस्ती एसयूवी Kiger को भारत में 15 फरवरी को लॉन्च करने वाली है. रेनॉ की इस कार का मुकाबला Nissan's Magnite से होगा. आपको बता दें निसान की ये कार इस समय देश की सबसे सस्ती एसयूवी है. ऐसे में Renault Kiger के लॉन्च होने के बाद इस सेगमेंट में इन दोनों एसयूवी के बीच तगड़ा मुकाबला होगा. रेनॉ ने इस कार को दो इंजन वेरिएंट में लॉन्च किया है. जिसमें आपको पहला विकल्प आपको 1. 0-लीटर टर्बोचार्ज्ड 3 सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलेगा. जो 100 Ps की पावर और 160 Nm का टार्क जनरेट करता है. वहीं दूसरे विकल्प में आपको 1. 0 L का पेट्रोल इंजन मिलेगा. जो 72 Ps की पावर और 96Nm का टॉर्क जनरेट करती है. इसके साथ ही रेनॉ ने इन दोनों इंजन विकल्प के साथ 5 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन दिया है. नई Renault Kiger में कंपनी टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ डिजिटल इंस्ट्रूमेंट पैनल, एम्बिएंट लाइटिंग और कनेक्टिविटी सिस्टम जैसे फीचर्स दे सकती है. टेस्टिंग मॉडल को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसका डिजाइन ज्यादातर अपने कॉन्सेप्ट मॉडल जैसा ही होगा. इसका अर्थ है कि कंपनी इसमें स्पलिट हेडलैंप के साथ LED डेटाइम रनिंग लाइट्स के साथ फ्लेयर्ड व्हील आर्क और साइड क्लैड्डिंग जैसे फीचर्स भी दे सकती है. जानकारों का मानना है कि Renault KIGER की संभावित कीमत 5 लाख 50 हजार रुपये आसपास हो सकती है. ऐसे में Renault KIGER का सीधा मुकाबला निसान मैग्नाइट से होगा.
आइए जानते है Renault Kiger की भारत में संभावित कीमत क्या हो सकती है. इसके साथ ही Renault Kiger का मुकाबला किन कारों से होगा. Renault अपनी सबसे सस्ती एसयूवी Kiger को भारत में पंद्रह फरवरी को लॉन्च करने वाली है. रेनॉ की इस कार का मुकाबला Nissan's Magnite से होगा. आपको बता दें निसान की ये कार इस समय देश की सबसे सस्ती एसयूवी है. ऐसे में Renault Kiger के लॉन्च होने के बाद इस सेगमेंट में इन दोनों एसयूवी के बीच तगड़ा मुकाबला होगा. रेनॉ ने इस कार को दो इंजन वेरिएंट में लॉन्च किया है. जिसमें आपको पहला विकल्प आपको एक. शून्य-लीटर टर्बोचार्ज्ड तीन सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलेगा. जो एक सौ Ps की पावर और एक सौ साठ Nm का टार्क जनरेट करता है. वहीं दूसरे विकल्प में आपको एक. शून्य L का पेट्रोल इंजन मिलेगा. जो बहत्तर Ps की पावर और छियानवेNm का टॉर्क जनरेट करती है. इसके साथ ही रेनॉ ने इन दोनों इंजन विकल्प के साथ पाँच स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन दिया है. नई Renault Kiger में कंपनी टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ डिजिटल इंस्ट्रूमेंट पैनल, एम्बिएंट लाइटिंग और कनेक्टिविटी सिस्टम जैसे फीचर्स दे सकती है. टेस्टिंग मॉडल को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसका डिजाइन ज्यादातर अपने कॉन्सेप्ट मॉडल जैसा ही होगा. इसका अर्थ है कि कंपनी इसमें स्पलिट हेडलैंप के साथ LED डेटाइम रनिंग लाइट्स के साथ फ्लेयर्ड व्हील आर्क और साइड क्लैड्डिंग जैसे फीचर्स भी दे सकती है. जानकारों का मानना है कि Renault KIGER की संभावित कीमत पाँच लाख पचास हजार रुपये आसपास हो सकती है. ऐसे में Renault KIGER का सीधा मुकाबला निसान मैग्नाइट से होगा.
आजकल खराब लाइफस्टाइल के चलते हमें कभी भी कोई भी रोग हो सकता है। ऐसे में कैंसर भी किसी भी जगह की कोशिकाओं में ग्रोथ कर सकता है। आंतों का कैंसर आजकल खराब लाइफस्टाइल के कारण ज्यादा ग्रो कर रहा है। आजकल खराब लाइफस्टाइल के चलते हमें कभी भी कोई भी रोग हो सकता है। ऐसे में कैंसर भी किसी भी जगह की कोशिकाओं में ग्रोथ कर सकता है। आंतों का कैंसर आजकल खराब लाइफस्टाइल के कारण ज्यादा ग्रो कर रहा है। जिसके लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है और इसके लक्षणों को जानने के बाद आप को सावधान हो जाना चाहिए। Colorectal Cancer: डाइजेस्टिव सिस्टम में जिस तरह लिवर एक महत्वपूर्ण पार्ट होता है. उसी तरह आंतें भी पाचन तंत्र का हिस्सा होती हैं. आंतों की सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. जो लोग खानपान सही नहीं रखते हैं. दूषित चीजों का सेवन भी आंतोें के लिए हानिकारक होता है. आमतौर पर खराब जीवनशैली के चलते आंतोें का कैंसर होने का खतरा रहता है. लेकिन अन्य रोगों की तरह आंतों के कैंसर के भी लक्षण दिखाई देते हैं. इन लक्षणों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए. जानने की कोशिश करते हैं कि आंतों के क्या लक्षण होते हैं? ध्यान रहे आंतों का कैंसर होने पर कई दिनों तक पेट खराब रहता है और डायरिया,मल का पतला होना जैसी परेशानियां दिखाई देने लगती है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो समझ जाना चाहिए कि इस समय आपको डॉक्टर की जरूरत है और इस लक्षण को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर आपके शौच करते समय ब्लीडिंग होती है, मल का रंग गहरा हो जाना, पेट में दर्द रहना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. यदि शौच करते समय ब्लीडिंग हो रही है तो अनदेखा नहीं करना चाहिए. हालांकि यह लक्षण पाइल्स का भी होता है. लेकिन इसे इग्नोर बिल्कुल ना करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। आंतों का कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर पेशेंट का बिना कुछ वर्कआउट किए ही तेजी से वजन कम होने लगता है. यदि बिना कारण वजन कम हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है. वजन कम होना हमेशा थायराइड नहीं होता है। इस बात का ध्यान रखें और डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। आंतों का कैंसर होने पर पेशेंट का पेट पूरी तरह एक बार में साफ नहीं हो पाता है. बार बार फ्रेश होने का मन करता है. यह कोलोरेक्टल कैंसर का एक लक्षण है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) कहता है कि अधिक मोटापा होना कोलोरेक्टल कैंसर एक बड़ा कारण है. पेट के आसपास चर्बी इकट्ठा होने पर कोलोरेक्टल कैंसर हो जा सकता है.
आजकल खराब लाइफस्टाइल के चलते हमें कभी भी कोई भी रोग हो सकता है। ऐसे में कैंसर भी किसी भी जगह की कोशिकाओं में ग्रोथ कर सकता है। आंतों का कैंसर आजकल खराब लाइफस्टाइल के कारण ज्यादा ग्रो कर रहा है। आजकल खराब लाइफस्टाइल के चलते हमें कभी भी कोई भी रोग हो सकता है। ऐसे में कैंसर भी किसी भी जगह की कोशिकाओं में ग्रोथ कर सकता है। आंतों का कैंसर आजकल खराब लाइफस्टाइल के कारण ज्यादा ग्रो कर रहा है। जिसके लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है और इसके लक्षणों को जानने के बाद आप को सावधान हो जाना चाहिए। Colorectal Cancer: डाइजेस्टिव सिस्टम में जिस तरह लिवर एक महत्वपूर्ण पार्ट होता है. उसी तरह आंतें भी पाचन तंत्र का हिस्सा होती हैं. आंतों की सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. जो लोग खानपान सही नहीं रखते हैं. दूषित चीजों का सेवन भी आंतोें के लिए हानिकारक होता है. आमतौर पर खराब जीवनशैली के चलते आंतोें का कैंसर होने का खतरा रहता है. लेकिन अन्य रोगों की तरह आंतों के कैंसर के भी लक्षण दिखाई देते हैं. इन लक्षणों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए. जानने की कोशिश करते हैं कि आंतों के क्या लक्षण होते हैं? ध्यान रहे आंतों का कैंसर होने पर कई दिनों तक पेट खराब रहता है और डायरिया,मल का पतला होना जैसी परेशानियां दिखाई देने लगती है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो समझ जाना चाहिए कि इस समय आपको डॉक्टर की जरूरत है और इस लक्षण को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर आपके शौच करते समय ब्लीडिंग होती है, मल का रंग गहरा हो जाना, पेट में दर्द रहना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. यदि शौच करते समय ब्लीडिंग हो रही है तो अनदेखा नहीं करना चाहिए. हालांकि यह लक्षण पाइल्स का भी होता है. लेकिन इसे इग्नोर बिल्कुल ना करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। आंतों का कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर पेशेंट का बिना कुछ वर्कआउट किए ही तेजी से वजन कम होने लगता है. यदि बिना कारण वजन कम हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है. वजन कम होना हमेशा थायराइड नहीं होता है। इस बात का ध्यान रखें और डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। आंतों का कैंसर होने पर पेशेंट का पेट पूरी तरह एक बार में साफ नहीं हो पाता है. बार बार फ्रेश होने का मन करता है. यह कोलोरेक्टल कैंसर का एक लक्षण है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन कहता है कि अधिक मोटापा होना कोलोरेक्टल कैंसर एक बड़ा कारण है. पेट के आसपास चर्बी इकट्ठा होने पर कोलोरेक्टल कैंसर हो जा सकता है.
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत जारी सूची में लापरवाही बरते जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने सूची में करीब 2600 छात्रों का नाम जारी किया है। इसमें 600 से अधिक छात्रों को एलाट हुए स्कूल का पता अधूरा दर्शाया गया है। इसका सीधा खामियाजा अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने 18 अप्रैल को लाटरी प्रक्रिया के बाद 25 अप्रैल को आरटीई की दाखिला सूची जारी की थी। एक सप्ताह तक तो शिक्षा विभाग, स्कूलों को सूची भेजने का राग अलापता रहा। जब स्कूलों तक सूची पहुंची तो उसमें विभाग और एनआइसी की खामियां मिलीं। अभिभावकों ने इसकी शिकायत विभाग से की। मामला गले की फांस न बन जाए इसके लिए विभाग ने सूची संशोधन का काम शुरू कर दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी स्कूलों के पते में गड़बड़ी नहीं है। रानी लक्ष्मी बाई, पायनियर स्कूल समेत कुछ स्कूलों के पते में थोड़ी त्रुटि है। जिसे सुधारा जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के अधिकार के तहत जारी सूची में लापरवाही बरते जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने सूची में करीब दो हज़ार छः सौ छात्रों का नाम जारी किया है। इसमें छः सौ से अधिक छात्रों को एलाट हुए स्कूल का पता अधूरा दर्शाया गया है। इसका सीधा खामियाजा अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अट्ठारह अप्रैल को लाटरी प्रक्रिया के बाद पच्चीस अप्रैल को आरटीई की दाखिला सूची जारी की थी। एक सप्ताह तक तो शिक्षा विभाग, स्कूलों को सूची भेजने का राग अलापता रहा। जब स्कूलों तक सूची पहुंची तो उसमें विभाग और एनआइसी की खामियां मिलीं। अभिभावकों ने इसकी शिकायत विभाग से की। मामला गले की फांस न बन जाए इसके लिए विभाग ने सूची संशोधन का काम शुरू कर दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी स्कूलों के पते में गड़बड़ी नहीं है। रानी लक्ष्मी बाई, पायनियर स्कूल समेत कुछ स्कूलों के पते में थोड़ी त्रुटि है। जिसे सुधारा जा रहा है।
भारत देश और यहां के लोगों का सांपों से पुराना संबंध रहा है। हिंदू धर्म में सांपों को भगवान का दर्जा दिया गया है। नागपंचमी के दिन पूरे भारत में सांपों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। वहीं, सांपों को देखते ही काफी लोग डर के मारे सहम जाते हैं और उनके पसीने छुटने लगते है। हो भी क्यूं ना, अगर किसी सांप ने किसी को काट लिया तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। लेकिन महाराष्ट्र का एक ऐसा गांव है, जहां के लोगों का सांपों से पुराना और गहरा नाता है। यहां के लोग इन्हीं सांपों के बीच रहना पसंद करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं राज्य के सोलापुर में स्थित शेतफल गांव की, जहां सांपों का खुले दिल से स्वागत किया जाता है। इस गांव में दिनदहाड़े कोबरा जैसे खतरनाक और जहरीले सांप घूमते रहते हैं और यहां के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। करीब 2600 लोगों के इस गांव में ना ही कोई सांप किसी को काटता है और ना ही कोई व्यक्ति इन सांपों को हानि पहुंचाते हैं। बल्कि इनका अपने घरों में स्वागत करते हैं और इनकी पूजा करते हैं। यहां के बच्चे भी इन्हीं सांपों के बीच पलते हैं। गांव के स्कूलों में भी इन सांपों को देख सकते हैं। खास बात यह है कि इस गांव में अब तक सांपों ने किसी व्यक्ति को नहीं काटा है। यहां के लोग सांपों को इस कदर मानते हैं कि अगर कोई नए घर का निर्माण करवाता है तो घर में एक छोटी सी जगह सांपों के लिए रखता है, जहां वे आकर रह सकें। इस स्थान को यहां के लोग देवस्थानम कहा जाता है। परम्परा की शुरुआत कब और कैसे हुई?
भारत देश और यहां के लोगों का सांपों से पुराना संबंध रहा है। हिंदू धर्म में सांपों को भगवान का दर्जा दिया गया है। नागपंचमी के दिन पूरे भारत में सांपों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। वहीं, सांपों को देखते ही काफी लोग डर के मारे सहम जाते हैं और उनके पसीने छुटने लगते है। हो भी क्यूं ना, अगर किसी सांप ने किसी को काट लिया तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। लेकिन महाराष्ट्र का एक ऐसा गांव है, जहां के लोगों का सांपों से पुराना और गहरा नाता है। यहां के लोग इन्हीं सांपों के बीच रहना पसंद करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं राज्य के सोलापुर में स्थित शेतफल गांव की, जहां सांपों का खुले दिल से स्वागत किया जाता है। इस गांव में दिनदहाड़े कोबरा जैसे खतरनाक और जहरीले सांप घूमते रहते हैं और यहां के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। करीब दो हज़ार छः सौ लोगों के इस गांव में ना ही कोई सांप किसी को काटता है और ना ही कोई व्यक्ति इन सांपों को हानि पहुंचाते हैं। बल्कि इनका अपने घरों में स्वागत करते हैं और इनकी पूजा करते हैं। यहां के बच्चे भी इन्हीं सांपों के बीच पलते हैं। गांव के स्कूलों में भी इन सांपों को देख सकते हैं। खास बात यह है कि इस गांव में अब तक सांपों ने किसी व्यक्ति को नहीं काटा है। यहां के लोग सांपों को इस कदर मानते हैं कि अगर कोई नए घर का निर्माण करवाता है तो घर में एक छोटी सी जगह सांपों के लिए रखता है, जहां वे आकर रह सकें। इस स्थान को यहां के लोग देवस्थानम कहा जाता है। परम्परा की शुरुआत कब और कैसे हुई?
जागरण टीम, जगदीशपुर : इसे मजबूरी कहें या खुदगर्जी। बात जो भी हो पर तस्वीर तो यही इशारा कर रही है कि यहां शिक्षा व्यवस्था के हालात ठीक नहीं हैं। पिछले नौ दिनों से स्कूलों में नया शिक्षण सत्र चल रहा है पर बच्चों की उपस्थिति न के बराबर है। यह तब है जब बेसिक शिक्षा महकमा पूरे दम खम के साथ गांव-गांव स्कूल चलो अभियान के तहत रैलियां निकाल रहा है। ऐसा भी नहीं कि गांव के प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की भरमार हो। वहां भी अभी बच्चों का सूखा ही दिख रहा है। हां यह बात दीगर है कि शहर के कान्वेंट स्कूलों में बच्चों की अच्छी खासी तादात पहुंचने लगी है। यहां के गांवों में आलम यह है कि दो जून की रोटी की जुगत में बड़े तो खेतों में मजदूरी कर अपना पसीना बहा ही रहे हैं उनके बच्चे भी खेतों में पड़ी गेहूं की बालियां बीन कर घर चलाने में अपनों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। इन तमाम कोशिशों के बीच जीवन का सबसे अहम हिस्सा शिक्षा ही उनसे दूर होता जा रहा है। कहने को तो जिले के सरकारी स्कूलों में दो लाख बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इस तस्वीर के साथ ही नए शिक्षण सत्र में बच्चों की उपस्थिति की पड़ताल करें तो कई चौकाने वाले सच सामने आ जाते हैं। स्कूलों में पिछले नौ दिनों में कहने मात्र को बच्चे आ रहे हैं। कहीं भी 50 फीसद से अधिक उपस्थिति नहीं है। यह वह आंकड़े हैं जो बेसिक शिक्षा महकमें ने खुद जुटाए हैं। हालात तो इससे भी बदतर हैं। दोपहर का भोजन व शासन की तमाम योजनाओं के बाद बच्चों की स्कूलों से यह बेरुखी तमाम सवाल खड़े करने वाली है। अम्मी अब्बू की मदद को बीन रहे गेहूं की बाली शनिवार को सुबह से ही गर्मी सबाब पर थी। जगदीशपुर क्षेत्र के रमजानी के पुरवा गांव में तेज धूप में छोटे-छोटे बच्चे शाइमा व कैफ आसमान से बरस रही आग की चिंता किए बगैर नन्हें नन्हें हाथों से कटे हुए गेहूं के खेत में छूट गई बालियों को एकत्र कर उन्हें बोरी में भर रहे थे। बच्चों में अपने अभिभावकों के प्रति प्रेम, स्नेह व जिम्मेदारी की झलक साफ नजर आ रही थी।
जागरण टीम, जगदीशपुर : इसे मजबूरी कहें या खुदगर्जी। बात जो भी हो पर तस्वीर तो यही इशारा कर रही है कि यहां शिक्षा व्यवस्था के हालात ठीक नहीं हैं। पिछले नौ दिनों से स्कूलों में नया शिक्षण सत्र चल रहा है पर बच्चों की उपस्थिति न के बराबर है। यह तब है जब बेसिक शिक्षा महकमा पूरे दम खम के साथ गांव-गांव स्कूल चलो अभियान के तहत रैलियां निकाल रहा है। ऐसा भी नहीं कि गांव के प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की भरमार हो। वहां भी अभी बच्चों का सूखा ही दिख रहा है। हां यह बात दीगर है कि शहर के कान्वेंट स्कूलों में बच्चों की अच्छी खासी तादात पहुंचने लगी है। यहां के गांवों में आलम यह है कि दो जून की रोटी की जुगत में बड़े तो खेतों में मजदूरी कर अपना पसीना बहा ही रहे हैं उनके बच्चे भी खेतों में पड़ी गेहूं की बालियां बीन कर घर चलाने में अपनों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। इन तमाम कोशिशों के बीच जीवन का सबसे अहम हिस्सा शिक्षा ही उनसे दूर होता जा रहा है। कहने को तो जिले के सरकारी स्कूलों में दो लाख बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इस तस्वीर के साथ ही नए शिक्षण सत्र में बच्चों की उपस्थिति की पड़ताल करें तो कई चौकाने वाले सच सामने आ जाते हैं। स्कूलों में पिछले नौ दिनों में कहने मात्र को बच्चे आ रहे हैं। कहीं भी पचास फीसद से अधिक उपस्थिति नहीं है। यह वह आंकड़े हैं जो बेसिक शिक्षा महकमें ने खुद जुटाए हैं। हालात तो इससे भी बदतर हैं। दोपहर का भोजन व शासन की तमाम योजनाओं के बाद बच्चों की स्कूलों से यह बेरुखी तमाम सवाल खड़े करने वाली है। अम्मी अब्बू की मदद को बीन रहे गेहूं की बाली शनिवार को सुबह से ही गर्मी सबाब पर थी। जगदीशपुर क्षेत्र के रमजानी के पुरवा गांव में तेज धूप में छोटे-छोटे बच्चे शाइमा व कैफ आसमान से बरस रही आग की चिंता किए बगैर नन्हें नन्हें हाथों से कटे हुए गेहूं के खेत में छूट गई बालियों को एकत्र कर उन्हें बोरी में भर रहे थे। बच्चों में अपने अभिभावकों के प्रति प्रेम, स्नेह व जिम्मेदारी की झलक साफ नजर आ रही थी।
SITAMARIHI : भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों डकैती की घटनाएं आम हो गई हैं। ताजा मामला सीतामढ़ी के कन्हौली थाना क्षेत्र स्थित कन्हौली वार्ड संख्या चार की है। जहां बेखौफ बदमाशों ने एक सेवानिवृत शिक्षक के घर भीषण डकैती की वारदात को अंजाम दिया है। इस दौरान डकैत करीब 17 लाख की संपत्ति लूटकर मौके से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची मामले की तफ्तीश में जुट गई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की देर रात 20 से अधिक डकैतों ने सेवानिवृत शिक्षक रामस्वरूप मंडल के घर धावा बोला दिया। ताला टूटने की आवाज सुनकर जब रामस्वरूप मंडल मौके पर पहुंचे तो डकैतों ने उन्हे बंधक बना लिया। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को बंधक बनाकर लूटपाट की घटना को अंजाम दिया। इस दौरान डकैतों ने हर कमरे की तलाशी ली और जो कुछ मिला उसे लेकर फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक डकैतों ने आभूषण और कैश समेत करीब 17 लाख की संपत्ति लूट ली। जाते-जाते डकैत घर में लगे सीसीटीवी का सीडीआर भी अपने साथ लेते गए। पीड़ित शिक्षक ने बताया कि लगभग आधे घंटे तक डकैतों ने जमकर उत्पात मचाया। ग्रामीणों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस पूरे मामले के छानबीन में जुट गई है। पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने से रोकने के लिए डकैतों ने बम धमाके भी किए।
SITAMARIHI : भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों डकैती की घटनाएं आम हो गई हैं। ताजा मामला सीतामढ़ी के कन्हौली थाना क्षेत्र स्थित कन्हौली वार्ड संख्या चार की है। जहां बेखौफ बदमाशों ने एक सेवानिवृत शिक्षक के घर भीषण डकैती की वारदात को अंजाम दिया है। इस दौरान डकैत करीब सत्रह लाख की संपत्ति लूटकर मौके से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची मामले की तफ्तीश में जुट गई है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की देर रात बीस से अधिक डकैतों ने सेवानिवृत शिक्षक रामस्वरूप मंडल के घर धावा बोला दिया। ताला टूटने की आवाज सुनकर जब रामस्वरूप मंडल मौके पर पहुंचे तो डकैतों ने उन्हे बंधक बना लिया। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को बंधक बनाकर लूटपाट की घटना को अंजाम दिया। इस दौरान डकैतों ने हर कमरे की तलाशी ली और जो कुछ मिला उसे लेकर फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक डकैतों ने आभूषण और कैश समेत करीब सत्रह लाख की संपत्ति लूट ली। जाते-जाते डकैत घर में लगे सीसीटीवी का सीडीआर भी अपने साथ लेते गए। पीड़ित शिक्षक ने बताया कि लगभग आधे घंटे तक डकैतों ने जमकर उत्पात मचाया। ग्रामीणों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस पूरे मामले के छानबीन में जुट गई है। पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने से रोकने के लिए डकैतों ने बम धमाके भी किए।
बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी ने अपना नामांकन दायर कर दिया है. दोनों भाई की सीट पर मतदान दूसरे चरण में 3 नवंबर को होना है. तेजस्वी एक बार जहां फिर से राघोपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, तेज प्रताप ने अपनी सीट बदल ली है. तेज प्रताप पिछली बार महुआ से विधायक निर्वाचित हुए थे, लेकिन इसबार वे हसनपुर से चुनाव मैदान में हैं. तेज प्रताप ने 13 अक्टूबर को हसनपुर से नामांकन किया, वहीं तेजस्वी ने 14 अक्टूबर को राघोपुर से पर्चा भरा. दोनों भाइयों ने नामांकन पत्र के साथ जो एफिडेविट जमा किया है, उसमें कुछ बेहद दिलचस्प बातें सामने आई हैं. दोनों भाइयों की जोड़ी अगर देखी जाए तो एफिडेविट के मुताबिक तेज प्रताप गरीब हैं और उनके छोटे भाई तेजस्वी उनसे अमीर. दरअसल, एफिडेविट के मुताबिक तेजस्वी यादव की संपत्ति में साल 2015 से लेकर 2020 के बीच दोगुने से अधिक का इजाफा हुआ है. साल 2020 में तेजस्वी यादव के पास तकरीबन 5. 88 करोड़ की संपत्ति है. 2015 में तेजस्वी ने जब एफिडेविट दायर किया था, तब उनके पास तकरीबन 2. 32 करोड़ की संपत्ति थी. वहीं, तेज प्रताप के पास 2020 में कुल 2. 83 करोड़ की संपत्ति है. यानी संपत्ति के लिहाज से बड़े भाई पर छोटा भाई भारी पड़ता दिख रहा है. गाड़ियों की बात करें तो तेज प्रताप के पास 15. 46 लाख की सीबीआर 1000 आरआर सुपर बाइक के साथ-साथ 29. 43 लाख की बीएमडब्ल्यू कार भी है. लेकिन छोटे भाई तेजस्वी बिल्कुल पैदल हैं यानी उन्होंने एफिडेविट में बताया है कि उनके पास कोई गाड़ी नहीं है. देश के विकास के लिए दिए जाने वाले टैक्स में भी तेजस्वी यादव पिछले 5 साल में फिसड्डी साबित हो रहे हैं. तेजस्वी ने 2015-2016 में तकरीबन 40 लाख का टैक्स दिया था, मगर पिछले 5 साल में उनके टैक्स की राशि कम होते जा रही है और 2019-2020 में उन्होंने केवल 2. 89 लाख रुपये टैक्स जमा किया है. दोनों भाइयों के उम्र के बारे में बात करें तो 2015 में जो घालमेल सामने देखने को मिला था वह 2020 में भी जारी है, यानी कि एफिडेविट में बड़ा भाई को छोटा दिखाया गया है और छोटा भाई बड़ा. साल 2015 में भी तेज प्रताप की उम्र छोटे तेजस्वी से एक साल कम थी.
बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी ने अपना नामांकन दायर कर दिया है. दोनों भाई की सीट पर मतदान दूसरे चरण में तीन नवंबर को होना है. तेजस्वी एक बार जहां फिर से राघोपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, तेज प्रताप ने अपनी सीट बदल ली है. तेज प्रताप पिछली बार महुआ से विधायक निर्वाचित हुए थे, लेकिन इसबार वे हसनपुर से चुनाव मैदान में हैं. तेज प्रताप ने तेरह अक्टूबर को हसनपुर से नामांकन किया, वहीं तेजस्वी ने चौदह अक्टूबर को राघोपुर से पर्चा भरा. दोनों भाइयों ने नामांकन पत्र के साथ जो एफिडेविट जमा किया है, उसमें कुछ बेहद दिलचस्प बातें सामने आई हैं. दोनों भाइयों की जोड़ी अगर देखी जाए तो एफिडेविट के मुताबिक तेज प्रताप गरीब हैं और उनके छोटे भाई तेजस्वी उनसे अमीर. दरअसल, एफिडेविट के मुताबिक तेजस्वी यादव की संपत्ति में साल दो हज़ार पंद्रह से लेकर दो हज़ार बीस के बीच दोगुने से अधिक का इजाफा हुआ है. साल दो हज़ार बीस में तेजस्वी यादव के पास तकरीबन पाँच. अठासी करोड़ की संपत्ति है. दो हज़ार पंद्रह में तेजस्वी ने जब एफिडेविट दायर किया था, तब उनके पास तकरीबन दो. बत्तीस करोड़ की संपत्ति थी. वहीं, तेज प्रताप के पास दो हज़ार बीस में कुल दो. तिरासी करोड़ की संपत्ति है. यानी संपत्ति के लिहाज से बड़े भाई पर छोटा भाई भारी पड़ता दिख रहा है. गाड़ियों की बात करें तो तेज प्रताप के पास पंद्रह. छियालीस लाख की सीबीआर एक हज़ार आरआर सुपर बाइक के साथ-साथ उनतीस. तैंतालीस लाख की बीएमडब्ल्यू कार भी है. लेकिन छोटे भाई तेजस्वी बिल्कुल पैदल हैं यानी उन्होंने एफिडेविट में बताया है कि उनके पास कोई गाड़ी नहीं है. देश के विकास के लिए दिए जाने वाले टैक्स में भी तेजस्वी यादव पिछले पाँच साल में फिसड्डी साबित हो रहे हैं. तेजस्वी ने दो हज़ार पंद्रह-दो हज़ार सोलह में तकरीबन चालीस लाख का टैक्स दिया था, मगर पिछले पाँच साल में उनके टैक्स की राशि कम होते जा रही है और दो हज़ार उन्नीस-दो हज़ार बीस में उन्होंने केवल दो. नवासी लाख रुपये टैक्स जमा किया है. दोनों भाइयों के उम्र के बारे में बात करें तो दो हज़ार पंद्रह में जो घालमेल सामने देखने को मिला था वह दो हज़ार बीस में भी जारी है, यानी कि एफिडेविट में बड़ा भाई को छोटा दिखाया गया है और छोटा भाई बड़ा. साल दो हज़ार पंद्रह में भी तेज प्रताप की उम्र छोटे तेजस्वी से एक साल कम थी.
रायपुरः 12 सूत्रीय मांगों को लेकर देश के 10 से अधिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 28 व 29 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल में केंद्र व सरकार के कर्मचारी, बैंक, बीमा, दूरसंचार, रक्षा, संगठित, असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन के अलावा मजदूर संगठनों के कर्मचारी शामिल होंगे। 28 मार्च को जिला मुख्यालय में धरना दिया जाएगा और 29 मार्च को राजधानी रायपुर के बुढ़ातालाब में विशाल सभा के माध्यम से केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। सीजेडआईईए के महासचिव धमराज महापात्र, इंटक के अध्यक्ष संजय सिंह, तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के चंद्रशेखर तिवारी ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में ने 12 सूत्रीय मांगों के संदर्भ में उन्होंने बताया कि श्रम संहिता रद्द करें, ईडीएसए (आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अधिनियम) समाप्त करने, कृषि कानून वापसी के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के 6 सूत्रीय मांग को पूरा करने, नेशनल मोनिटाइजेशन नीति को रद्द करने, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण की नीति पर तत्काल रोक लगाने, हर किस्म का निजीकरण बंद करने, गैर आयकर दाता परिवार को प्रतिमाह 7500 रुपये नगद और खाद्य सहायता प्रदान करने, मनरेगा के आबंटन में वृद्धि करने, शहरी गरीबों को भी रोजगार गारंटी कानून का लाभ देने, सभी अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों को सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने,आंगनबाड़ी, मितातिन, मध्यान्ह भोजन और अन्य योजना कर्मियों के लिए वैधानिक न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना, महामारी के दौरान जनता की सेवा करने वाले अग्रिम पंक्ति के कार्यकतार्ओं को सुरक्षा और बीमा सुविधा, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और सुधारने के लिए संपदा कर आदि के माध्यम से अमीरों पर कर लगाकर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक आवश्यकताओं में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने, पेट्रोलियम उत्पाद पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कटौती करने तथा मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने, ठेका श्रमिक, योजना कर्मियों का नियमितीकरण करने और सभी को समान काम का सामान वेतन देने, नई पेंशन योजना को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में पर्याप्त वृद्धि किए जाने की मांग शामिल हैं।
रायपुरः बारह सूत्रीय मांगों को लेकर देश के दस से अधिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अट्ठाईस व उनतीस मार्च को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल में केंद्र व सरकार के कर्मचारी, बैंक, बीमा, दूरसंचार, रक्षा, संगठित, असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन के अलावा मजदूर संगठनों के कर्मचारी शामिल होंगे। अट्ठाईस मार्च को जिला मुख्यालय में धरना दिया जाएगा और उनतीस मार्च को राजधानी रायपुर के बुढ़ातालाब में विशाल सभा के माध्यम से केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। सीजेडआईईए के महासचिव धमराज महापात्र, इंटक के अध्यक्ष संजय सिंह, तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के चंद्रशेखर तिवारी ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में ने बारह सूत्रीय मांगों के संदर्भ में उन्होंने बताया कि श्रम संहिता रद्द करें, ईडीएसए समाप्त करने, कृषि कानून वापसी के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के छः सूत्रीय मांग को पूरा करने, नेशनल मोनिटाइजेशन नीति को रद्द करने, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण की नीति पर तत्काल रोक लगाने, हर किस्म का निजीकरण बंद करने, गैर आयकर दाता परिवार को प्रतिमाह सात हज़ार पाँच सौ रुपयापये नगद और खाद्य सहायता प्रदान करने, मनरेगा के आबंटन में वृद्धि करने, शहरी गरीबों को भी रोजगार गारंटी कानून का लाभ देने, सभी अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों को सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने,आंगनबाड़ी, मितातिन, मध्यान्ह भोजन और अन्य योजना कर्मियों के लिए वैधानिक न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना, महामारी के दौरान जनता की सेवा करने वाले अग्रिम पंक्ति के कार्यकतार्ओं को सुरक्षा और बीमा सुविधा, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और सुधारने के लिए संपदा कर आदि के माध्यम से अमीरों पर कर लगाकर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक आवश्यकताओं में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने, पेट्रोलियम उत्पाद पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कटौती करने तथा मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने, ठेका श्रमिक, योजना कर्मियों का नियमितीकरण करने और सभी को समान काम का सामान वेतन देने, नई पेंशन योजना को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में पर्याप्त वृद्धि किए जाने की मांग शामिल हैं।
एक किसी पुरानी फिल्म में डायलॉग है कि प्यार में दीवाने बहुत देखे लेकिन जो प्यार में पागल हो जाए ऐसे दीवाने बहुत कम देखे। कई बार यह डायलॉग वास्तव में चरितार्थ होता दिख जाता है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जब एक लड़की का प्रेमी उससे इतना ज्यादा प्रेम करता था कि लड़की स्कूल एग्जाम में फेल हो गई तो उसे यह बात इतनी बुरी लगी कि उसने स्कूल में आग लगा दी। दरअसल, यह घटना मिस्र की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कपल काफी समय से रिलेशनशिप में थे और लड़का अपनी प्रेमिका से बेइंतिहा मोहब्बत करता था। इसी बीच लड़की की परीक्षाएं चल रही थीं। लेकिन जब उसका रिजल्ट आया तो वह फेल हो गई। उसने डर के मारे पहले तो लड़के से नहीं बताया। लेकिन जब आखिरकार लड़के को पता चला तो गजब हो गया। लड़के ने अपनी प्रेमिका के ऊपर गुस्सा नहीं दिखाया बल्कि उसने अपना दिमाग कहीं और लगा दिया। वह सीधे स्कूल पहुंच गया और अपने कुछ साथियों के साथ पूरे स्कूल के दफ्तर में आग लगा दी। उसने आग लगाने के लिए जिस भी चीज की जरूरत समझी उसका प्रयोग ताकि आग सही से लगे। स्कूल के दफ्तर में रखे सारे दस्तावेज जल गए। जैसे ही इस बात का पता चला, लड़के को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भी बताया जा रहा है कि लड़का और लड़की जल्द ही शादी करने वाले थे। लड़के ने यह भी सोचा कि कहीं शादी एक साल बाद फिर ना टल जाए, इसलिए उसने स्कूल में ही आग लगा दी। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
एक किसी पुरानी फिल्म में डायलॉग है कि प्यार में दीवाने बहुत देखे लेकिन जो प्यार में पागल हो जाए ऐसे दीवाने बहुत कम देखे। कई बार यह डायलॉग वास्तव में चरितार्थ होता दिख जाता है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जब एक लड़की का प्रेमी उससे इतना ज्यादा प्रेम करता था कि लड़की स्कूल एग्जाम में फेल हो गई तो उसे यह बात इतनी बुरी लगी कि उसने स्कूल में आग लगा दी। दरअसल, यह घटना मिस्र की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कपल काफी समय से रिलेशनशिप में थे और लड़का अपनी प्रेमिका से बेइंतिहा मोहब्बत करता था। इसी बीच लड़की की परीक्षाएं चल रही थीं। लेकिन जब उसका रिजल्ट आया तो वह फेल हो गई। उसने डर के मारे पहले तो लड़के से नहीं बताया। लेकिन जब आखिरकार लड़के को पता चला तो गजब हो गया। लड़के ने अपनी प्रेमिका के ऊपर गुस्सा नहीं दिखाया बल्कि उसने अपना दिमाग कहीं और लगा दिया। वह सीधे स्कूल पहुंच गया और अपने कुछ साथियों के साथ पूरे स्कूल के दफ्तर में आग लगा दी। उसने आग लगाने के लिए जिस भी चीज की जरूरत समझी उसका प्रयोग ताकि आग सही से लगे। स्कूल के दफ्तर में रखे सारे दस्तावेज जल गए। जैसे ही इस बात का पता चला, लड़के को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भी बताया जा रहा है कि लड़का और लड़की जल्द ही शादी करने वाले थे। लड़के ने यह भी सोचा कि कहीं शादी एक साल बाद फिर ना टल जाए, इसलिए उसने स्कूल में ही आग लगा दी। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
मंझोली स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रहे शिकायतकर्ता अमित चंद्रा ने बताया कि 2021 सितंबर को मैं वेरिफायर ऑफिसर के पद पर पदस्थ हुआ और ई-वित्त सॉफ्टवेयर जो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का होता है, उसे देखा तो उसमें लाखों रुपए के फर्जी बिल मिले। दस्तावेजों को देखकर जांच की गई तो पता चला कि खटारा गाड़ी को लगवाकर प्रतिमाह 25 हजार रुपए का बिल बनाया गया। इसके अलावा कर्मचारियों की ट्रेनिंग हुई नहीं और चाय, समोसा के नाम पर हजारों रुपए खर्च कर दिए। अमित चंद्रा ने बताया कि चाय, फोटो कॉपी के जो बिल लगे थे, वह मंझौली से 25 किलोमीटर दूर सिहोरा के हैं। इसे देखकर समझ आया कि महज चाय लाने के लिए कर्मचारी क्या मंझौली से सिहोरा जाते थे। चाय, नाश्ता, फोटो कॉपी के सभी बिल सिहोरा के मिले हैं, इसको लेकर जब BMO पारस ठाकुर से पूछा गया तो उन्होंने धमकी देकर चुप रहने को कहा। इसकी शिकायत मैंने मिशन संचालक भोपाल, जबलपुर सीएमएचओ से भी की पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। उल्टा मेरे ऊपर ही आरोप लगाकर मेरा ट्रांसफर करवा दिया गया। इस ट्रांसफर आर्डर के खिलाफ अमित चंद्रा ने हाईकोर्ट की शरण ली। अमित चंद्रा के अधिवक्ता ने याचिका के साथ वह सभी दस्तावेज भी लगा दिए, जिनके कारण विवाद की स्थिति बनी और अमित चंद्रा का ट्रांसफर किया गया। चाय बिस्कुट का बिल देखकर हाईकोर्ट ने तत्काल अमित चंद्रा के ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी एवं राज्य सरकार के अलावा संबंधित BMO डॉ. पारस ठाकुर और एनआरएचएम यानी नेशनल रूरल हेल्थ मिशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ✔ इसी प्रकार की जानकारियों और समाचार के लिए कृपया यहां क्लिक करके हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें एवं यहां क्लिक करके हमारा टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें। क्योंकि भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल पर कुछ स्पेशल भी होता है।
मंझोली स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रहे शिकायतकर्ता अमित चंद्रा ने बताया कि दो हज़ार इक्कीस सितंबर को मैं वेरिफायर ऑफिसर के पद पर पदस्थ हुआ और ई-वित्त सॉफ्टवेयर जो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का होता है, उसे देखा तो उसमें लाखों रुपए के फर्जी बिल मिले। दस्तावेजों को देखकर जांच की गई तो पता चला कि खटारा गाड़ी को लगवाकर प्रतिमाह पच्चीस हजार रुपए का बिल बनाया गया। इसके अलावा कर्मचारियों की ट्रेनिंग हुई नहीं और चाय, समोसा के नाम पर हजारों रुपए खर्च कर दिए। अमित चंद्रा ने बताया कि चाय, फोटो कॉपी के जो बिल लगे थे, वह मंझौली से पच्चीस किलोग्राममीटर दूर सिहोरा के हैं। इसे देखकर समझ आया कि महज चाय लाने के लिए कर्मचारी क्या मंझौली से सिहोरा जाते थे। चाय, नाश्ता, फोटो कॉपी के सभी बिल सिहोरा के मिले हैं, इसको लेकर जब BMO पारस ठाकुर से पूछा गया तो उन्होंने धमकी देकर चुप रहने को कहा। इसकी शिकायत मैंने मिशन संचालक भोपाल, जबलपुर सीएमएचओ से भी की पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। उल्टा मेरे ऊपर ही आरोप लगाकर मेरा ट्रांसफर करवा दिया गया। इस ट्रांसफर आर्डर के खिलाफ अमित चंद्रा ने हाईकोर्ट की शरण ली। अमित चंद्रा के अधिवक्ता ने याचिका के साथ वह सभी दस्तावेज भी लगा दिए, जिनके कारण विवाद की स्थिति बनी और अमित चंद्रा का ट्रांसफर किया गया। चाय बिस्कुट का बिल देखकर हाईकोर्ट ने तत्काल अमित चंद्रा के ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगा दी एवं राज्य सरकार के अलावा संबंधित BMO डॉ. पारस ठाकुर और एनआरएचएम यानी नेशनल रूरल हेल्थ मिशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ✔ इसी प्रकार की जानकारियों और समाचार के लिए कृपया यहां क्लिक करके हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें एवं यहां क्लिक करके हमारा टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें। क्योंकि भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल पर कुछ स्पेशल भी होता है।
निज तिरस्करिणी लपेटे, अभय चल दो आज जग से, अब, पायिन रूप देखो, सूत्त से होकर निलग से, कई पूर्व समान धर्म्मा जा चुके है इसी मग से, नित्य जाते है इसी पथ, जो पधारे जग सदन में । मद्र ध्वनि गूंजी गगन म । मनुज जीवन में रहे जो सर विवादी और अनमिल, उहै त नीमय पनाने आ गई है मृत्यु झिल मिल, स्वनित लयमय, ताल झक्त, क्यों न अभिनन स्नन उठें सिल 2 लहरें तन अमर स्वर मृत्यु तौर्यत्रि वणन म । म पनि गूंजी गगन में । के द्रीय कारागार बरेली दिनाक १६ जनवरी, १६४४ २ अदृश्यकारी पटावरण ३ गान चाद्य नृत्य साम्य
निज तिरस्करिणी लपेटे, अभय चल दो आज जग से, अब, पायिन रूप देखो, सूत्त से होकर निलग से, कई पूर्व समान धर्म्मा जा चुके है इसी मग से, नित्य जाते है इसी पथ, जो पधारे जग सदन में । मद्र ध्वनि गूंजी गगन म । मनुज जीवन में रहे जो सर विवादी और अनमिल, उहै त नीमय पनाने आ गई है मृत्यु झिल मिल, स्वनित लयमय, ताल झक्त, क्यों न अभिनन स्नन उठें सिल दो लहरें तन अमर स्वर मृत्यु तौर्यत्रि वणन म । म पनि गूंजी गगन में । के द्रीय कारागार बरेली दिनाक सोलह जनवरी, एक हज़ार छः सौ चौंतालीस दो अदृश्यकारी पटावरण तीन गान चाद्य नृत्य साम्य
आग और दोषपूर्ण ब्रेकिंग सिस्टम की एक श्रृंखला के बाद, हुंडई मोटर कंपनी अपने सबसे अधिक बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (EV), कोना EV की घरेलू बिक्री समाप्त हो जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोषपूर्ण प्रणालियों ने बड़े पैमाने पर रिकॉल किया। YTN के अनुसार, हुंडई दक्षिण कोरिया में कोना ईवी की बिक्री की समाप्ति की समीक्षा कर रही थी, जबकि जोयॉन्ग डेली ने एक अज्ञात स्रोत का हवाला देते हुए कहा कि यूरोप में बिक्री जारी रहेगी। कोना ईवी यूरोप के सबसे ज्यादा बिकने वाले ईवीएस में शुमार है। कुल के तीन-चौथाई से अधिक के लिए अपने घर बाजार खाते के बाहर मॉडल की बिक्री। ऑटोमेकर ने रिपोर्टों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया, लेकिन रायटर को बताया, हम विभिन्न विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं क्योंकि हम Ioniq 5 क्रॉसओवर इलेक्ट्रिक वाहन को लॉन्च करने की तैयारी करते हैं। अक्टूबर में, हुंडई ने दक्षिण कोरिया में कोना ईवीएस को याद किया क्योंकि शॉर्ट सर्किट के जोखिम के कारण संभवतः इसकी उच्च-वोल्टेज बैटरी कोशिकाओं के दोषपूर्ण निर्माण के कारण हुआ था। रिकॉल, जिसमें सॉफ्टवेयर अपडेट और निरीक्षण के बाद बैटरी प्रतिस्थापन शामिल हैं, उसमे सितंबर 2017 से मार्च 2020 के दौरान निर्मित 25,564 कोना ईवी शामिल हैं।
आग और दोषपूर्ण ब्रेकिंग सिस्टम की एक श्रृंखला के बाद, हुंडई मोटर कंपनी अपने सबसे अधिक बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहन , कोना EV की घरेलू बिक्री समाप्त हो जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोषपूर्ण प्रणालियों ने बड़े पैमाने पर रिकॉल किया। YTN के अनुसार, हुंडई दक्षिण कोरिया में कोना ईवी की बिक्री की समाप्ति की समीक्षा कर रही थी, जबकि जोयॉन्ग डेली ने एक अज्ञात स्रोत का हवाला देते हुए कहा कि यूरोप में बिक्री जारी रहेगी। कोना ईवी यूरोप के सबसे ज्यादा बिकने वाले ईवीएस में शुमार है। कुल के तीन-चौथाई से अधिक के लिए अपने घर बाजार खाते के बाहर मॉडल की बिक्री। ऑटोमेकर ने रिपोर्टों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया, लेकिन रायटर को बताया, हम विभिन्न विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं क्योंकि हम Ioniq पाँच क्रॉसओवर इलेक्ट्रिक वाहन को लॉन्च करने की तैयारी करते हैं। अक्टूबर में, हुंडई ने दक्षिण कोरिया में कोना ईवीएस को याद किया क्योंकि शॉर्ट सर्किट के जोखिम के कारण संभवतः इसकी उच्च-वोल्टेज बैटरी कोशिकाओं के दोषपूर्ण निर्माण के कारण हुआ था। रिकॉल, जिसमें सॉफ्टवेयर अपडेट और निरीक्षण के बाद बैटरी प्रतिस्थापन शामिल हैं, उसमे सितंबर दो हज़ार सत्रह से मार्च दो हज़ार बीस के दौरान निर्मित पच्चीस,पाँच सौ चौंसठ कोना ईवी शामिल हैं।
भारत में यूज्ड लग्जरी कारों का बाजार पिछले कुछ सालों से बढ़ रहा है। हमने कई अच्छी तरह से मेंटेन की गई लग्जरी कारों और एसयूवी को आकर्षक कीमत पर बेचा है। ज्यादातर समय इन लग्जरी कारों के पिछले मालिकों ने कार को अच्छी तरह से बनाए रखा होगा और यह अगले खरीदार को विश्वास दिलाता है। लग्जरी कारों की तेजी से घटती प्रकृति के कारण, ये आम तौर पर बहुत सस्ती कीमत के लिए उपलब्ध हैं। इनमें से कई कारें इसकी मूल कीमत से आधे से भी कम पर पेश की जाती हैं। हमारी वेबसाइट पर कई पुरानी लग्जरी कारें हैं और यहां हमारे पास Audi, BMW & Range Rover लक्जरी कारों और एसयूवी का एक समूह है जो बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इस वीडियो को Baba Luxury Car ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो की शुरुआत विक्रेता द्वारा प्रीमियम सेडान के बारे में बात करने से होती है जो बिक्री के लिए उपलब्ध हैं लेकिन, हम इस लेख में केवल लग्जरी कारों के बारे में बात करेंगे। वीडियो में दिख रही पहली लग्ज़री कार BMW 5-Series सेडान है। वीडियो में Grey coloured sedan अच्छी तरह से मेनटेन की हुई दिख रही है। कार पर मामूली खरोंच के निशान हैं, लेकिन इसमें कहीं भी कोई बड़ा सेंध नहीं लगा है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, कंपनी फिट अलॉय व्हील, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर वगैरह मिलते हैं। सेडान में कंपनी फिटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, लेदर सीट कवर, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट्स, इलेक्ट्रिक सनरूफ, क्रूज़ कंट्रोल, रियर एसी वेंट, मैनुअल विंडो कर्टेन जैसी सुविधाओं के साथ ब्लैक और बेज ड्यूल टोन इंटीरियर मिलते हैं। पीछे के यात्रियों के लिए और इतने पर। विवरण के लिए, यह एक 2008 मॉडल पेट्रोल स्वचालित सेडान है। कार हरियाणा में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत 4.45 लाख रुपये है। अगली कार Audi A4 सेडान है। काली सेडान अच्छी स्थिति में दिखती है। बंपर पर मामूली खरोंच के निशान हैं। इसके अलावा कार पर कोई बड़ा डेंट नजर नहीं आ रहा है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, कंपनी फिट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप वगैरह मिलते हैं। आगे बढ़ते हुए, सेडान में ग्रे और बेज ड्यूल टोन इंटीरियर मिलते हैं। कार में कंपनी फिटेड एंटरटेनमेंट स्क्रीन, डुअल जोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट कवर, लेदर सीट कवर, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, रियर एसी वेंट, क्रूज कंट्रोल, इलेक्ट्रिक सनरूफ आदि मिलते हैं। विवरण के लिए, यह एक 2013 मॉडल डीजल स्वचालित सेडान है। कार उत्तर प्रदेश में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत 9.95 लाख रुपये है। इसके बाद विक्रेता एक Audi A4 सफेद सेडान दिखाता है। बम्पर पर मामूली खरोंच के साथ कार साफ दिखती है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, आफ्टरमार्केट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, बूट लिप स्पॉइलर वगैरह मिलते हैं। कार डुअल टोन केबिन के साथ आती है और इसमें इलेक्ट्रिक सनरूफ, लेदर सीट कवर, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट्स आदि जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह 2013 मॉडल की डीजल ऑटोमैटिक सेडान है। कार हरियाणा में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत 9.25 लाख रुपये है। वीडियो में आखिरी कार Range Rover इवोक है। सफेद रंग की ये SUV अच्छी तरह से मेंटेन की हुई दिखती है. कार पर मामूली खरोंच और खरोंच के निशान हैं। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, कंपनी फिट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप वगैरह मिलते हैं। एसयूवी डुअल से इंटीरियर के साथ कंपनी फिटेड टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, क्रूज कंट्रोल, बड़े पैनोरमिक ग्लास टॉप रूफ, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीटें, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, लेदर सीट कवर आदि जैसी सुविधाओं के साथ आती है। विवरण के लिए, यह 2012 मॉडल डीजल स्वचालित एसयूवी है। एसयूवी हरियाणा में पंजीकृत है और इस एसयूवी की कीमत 17.45 लाख रुपये है।
भारत में यूज्ड लग्जरी कारों का बाजार पिछले कुछ सालों से बढ़ रहा है। हमने कई अच्छी तरह से मेंटेन की गई लग्जरी कारों और एसयूवी को आकर्षक कीमत पर बेचा है। ज्यादातर समय इन लग्जरी कारों के पिछले मालिकों ने कार को अच्छी तरह से बनाए रखा होगा और यह अगले खरीदार को विश्वास दिलाता है। लग्जरी कारों की तेजी से घटती प्रकृति के कारण, ये आम तौर पर बहुत सस्ती कीमत के लिए उपलब्ध हैं। इनमें से कई कारें इसकी मूल कीमत से आधे से भी कम पर पेश की जाती हैं। हमारी वेबसाइट पर कई पुरानी लग्जरी कारें हैं और यहां हमारे पास Audi, BMW & Range Rover लक्जरी कारों और एसयूवी का एक समूह है जो बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इस वीडियो को Baba Luxury Car ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो की शुरुआत विक्रेता द्वारा प्रीमियम सेडान के बारे में बात करने से होती है जो बिक्री के लिए उपलब्ध हैं लेकिन, हम इस लेख में केवल लग्जरी कारों के बारे में बात करेंगे। वीडियो में दिख रही पहली लग्ज़री कार BMW पाँच-Series सेडान है। वीडियो में Grey coloured sedan अच्छी तरह से मेनटेन की हुई दिख रही है। कार पर मामूली खरोंच के निशान हैं, लेकिन इसमें कहीं भी कोई बड़ा सेंध नहीं लगा है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, कंपनी फिट अलॉय व्हील, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर वगैरह मिलते हैं। सेडान में कंपनी फिटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, लेदर सीट कवर, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट्स, इलेक्ट्रिक सनरूफ, क्रूज़ कंट्रोल, रियर एसी वेंट, मैनुअल विंडो कर्टेन जैसी सुविधाओं के साथ ब्लैक और बेज ड्यूल टोन इंटीरियर मिलते हैं। पीछे के यात्रियों के लिए और इतने पर। विवरण के लिए, यह एक दो हज़ार आठ मॉडल पेट्रोल स्वचालित सेडान है। कार हरियाणा में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत चार.पैंतालीस लाख रुपये है। अगली कार Audi Aचार सेडान है। काली सेडान अच्छी स्थिति में दिखती है। बंपर पर मामूली खरोंच के निशान हैं। इसके अलावा कार पर कोई बड़ा डेंट नजर नहीं आ रहा है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, कंपनी फिट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप वगैरह मिलते हैं। आगे बढ़ते हुए, सेडान में ग्रे और बेज ड्यूल टोन इंटीरियर मिलते हैं। कार में कंपनी फिटेड एंटरटेनमेंट स्क्रीन, डुअल जोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट कवर, लेदर सीट कवर, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, रियर एसी वेंट, क्रूज कंट्रोल, इलेक्ट्रिक सनरूफ आदि मिलते हैं। विवरण के लिए, यह एक दो हज़ार तेरह मॉडल डीजल स्वचालित सेडान है। कार उत्तर प्रदेश में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत नौ.पचानवे लाख रुपये है। इसके बाद विक्रेता एक Audi Aचार सफेद सेडान दिखाता है। बम्पर पर मामूली खरोंच के साथ कार साफ दिखती है। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, आफ्टरमार्केट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, बूट लिप स्पॉइलर वगैरह मिलते हैं। कार डुअल टोन केबिन के साथ आती है और इसमें इलेक्ट्रिक सनरूफ, लेदर सीट कवर, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीट्स आदि जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह दो हज़ार तेरह मॉडल की डीजल ऑटोमैटिक सेडान है। कार हरियाणा में पंजीकृत है और इस सेडान की कीमत नौ.पच्चीस लाख रुपये है। वीडियो में आखिरी कार Range Rover इवोक है। सफेद रंग की ये SUV अच्छी तरह से मेंटेन की हुई दिखती है. कार पर मामूली खरोंच और खरोंच के निशान हैं। कार में प्रोजेक्टर हेडलैंप, कंपनी फिट अलॉय व्हील, एलईडी टेल लैंप वगैरह मिलते हैं। एसयूवी डुअल से इंटीरियर के साथ कंपनी फिटेड टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, मल्टी-फंक्शन स्टीयरिंग व्हील, क्रूज कंट्रोल, बड़े पैनोरमिक ग्लास टॉप रूफ, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल सीटें, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, लेदर सीट कवर आदि जैसी सुविधाओं के साथ आती है। विवरण के लिए, यह दो हज़ार बारह मॉडल डीजल स्वचालित एसयूवी है। एसयूवी हरियाणा में पंजीकृत है और इस एसयूवी की कीमत सत्रह.पैंतालीस लाख रुपये है।
*** *** *** *** *** *** *** *** (समाप्ति काल) देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्। । विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत । । Taurus Horoscope 07 April 2022: आज का दिन आपके लिए शांतिप्रिय रहेगा। यदि आपके आस-पड़ोस अथवा कार्यक्षेत्र में कोई वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी, तो उसे भी आप अपने शांत स्वभाव के कारण ठीक करने में सफल रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में जोखिम न लें। कोर्ट व कचहरी के काम निबटेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। बेवजह खर्च होगा। तनाव रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। जल्दबाजी न करें। शत्रु पस्त होंगे। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। शारीरिक कष्ट संभव है। शासन सत्ता का भी आपको गठजोड़ लाभ मिलता दिख रहा है, जो लोग राजनीति की दिशा में हाथ आजमा रहे हैं, उनको आज सफलता अवश्य प्राप्त होगी, लेकिन विद्यार्थियों को आज अपने सीनियर से मदद लेनी पड़ सकती है, तभी वह अपनी परीक्षा में सफलता हासिल कर सकेंगे। सायंकाल के समय आपको कुछ व्यक्तियों के मिलने से अनावश्यक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। (लगभग-वास्तविक समय के समीप) नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । इस मंत्र का उच्चारण करें-: अग्नि वास ज्ञान -: यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु, चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु । दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ, नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् । । शिव वास एवं फल -: भद्रा वास एवं फल -: स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागमः। मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी। । *अशोक षष्ठी (बंगाल) तादृशी जायते बुध्दिर्व्यवसायोऽपि तादृशः । सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता । । । । चा o नी o। । सर्व शक्तिमान के इच्छा से ही बुद्धि काम करती है, वही कर्मो को नियंत्रीत करता है. उसी की इच्छा से आस पास में मदद करने वाले आ जाते है. यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् । , तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥ , जब यह मनुष्य सत्त्वगुण की वृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब तो उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकों को प्राप्त होता है॥ ,14॥ , आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन) (व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)
*** *** *** *** *** *** *** *** देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्। । विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत । । Taurus Horoscope सात अप्रैलil दो हज़ार बाईस: आज का दिन आपके लिए शांतिप्रिय रहेगा। यदि आपके आस-पड़ोस अथवा कार्यक्षेत्र में कोई वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी, तो उसे भी आप अपने शांत स्वभाव के कारण ठीक करने में सफल रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में जोखिम न लें। कोर्ट व कचहरी के काम निबटेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। बेवजह खर्च होगा। तनाव रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। जल्दबाजी न करें। शत्रु पस्त होंगे। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। शारीरिक कष्ट संभव है। शासन सत्ता का भी आपको गठजोड़ लाभ मिलता दिख रहा है, जो लोग राजनीति की दिशा में हाथ आजमा रहे हैं, उनको आज सफलता अवश्य प्राप्त होगी, लेकिन विद्यार्थियों को आज अपने सीनियर से मदद लेनी पड़ सकती है, तभी वह अपनी परीक्षा में सफलता हासिल कर सकेंगे। सायंकाल के समय आपको कुछ व्यक्तियों के मिलने से अनावश्यक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । इस मंत्र का उच्चारण करें-: अग्नि वास ज्ञान -: यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु, चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु । दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ, नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् । । शिव वास एवं फल -: भद्रा वास एवं फल -: स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागमः। मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी। । *अशोक षष्ठी तादृशी जायते बुध्दिर्व्यवसायोऽपि तादृशः । सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता । । । । चा o नी o। । सर्व शक्तिमान के इच्छा से ही बुद्धि काम करती है, वही कर्मो को नियंत्रीत करता है. उसी की इच्छा से आस पास में मदद करने वाले आ जाते है. यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् । , तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥ , जब यह मनुष्य सत्त्वगुण की वृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब तो उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकों को प्राप्त होता है॥ ,चौदह॥ , आचार्य नीरज पाराशर
हैदराबादः इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी कर विवादों में घिरे विधायक टी. राजा सिंह को कोर्ट से जमानत मिल गई है और वह पुलिस की हिरासत से रिहा हो गए हैं। इसके बाद से ही मुस्लिम समुदाय भड़क गया है और हैदराबाद में जमकर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। देर रात से ही हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं और हजारों मुस्लिम रात को सड़कों पर हंगामा करते रहे। इसे देखते हुए बड़ी तादाद में पुलिस बल की तैनाती की गई है, मगर हिंसक भीड़ का प्रदर्शन जारी है। मुस्लिमों का कहना है कि टी. राजा सिंह को रिहा किया जाना गलत है। इससे पहले मंगलवार को भी हैदराबाद में जमकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे और टी. राजा सिंह के खिलाफ पुलिस के सामने ही 'सिर तन से जुदा' जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए गए थे। चारमीनार पर मंगलवार की देर रात बड़ी तादाद में मुसलमान जुटे और उन्होंने टी. राजा सिंह को फांसी पर चढाने की मांग की। कई स्थानों पर टी. राजा सिंह के पुतले भी फूंके गए हैं। पुलिस की तरफ से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का भी सहारा लिया गया, मगर रुक-रुक कर लोग आते रहे। शहर के चारमीनार, गुलजार हौज और वट्टापल्ली इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस की दो गाड़ियों को तोड़ डाला, साथ ही इस दौरान एक टैक्सी में भी तोड़फोड़ की गई। अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी इस मामले में कूद गई है। AIMIM के विधायक अहमद बलाला रात को 2:45 बजे प्रदर्शनकारियों के पास जा पहुंचे। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि टी. राजा सिंह को हिरासत में ही रखा जाए। वहीं, भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) नेता लड्डू यादव के घर पर भी बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। दरअसल उनके मोहल्ले में मुस्लिम भीड़ घुस गई थी और जमकर बवाल किया था। ऐसे में लड्डू यादव की सुरक्षा को देखते हुए वहां पुलिसबल तैनात किया गया है।
हैदराबादः इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी कर विवादों में घिरे विधायक टी. राजा सिंह को कोर्ट से जमानत मिल गई है और वह पुलिस की हिरासत से रिहा हो गए हैं। इसके बाद से ही मुस्लिम समुदाय भड़क गया है और हैदराबाद में जमकर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। देर रात से ही हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं और हजारों मुस्लिम रात को सड़कों पर हंगामा करते रहे। इसे देखते हुए बड़ी तादाद में पुलिस बल की तैनाती की गई है, मगर हिंसक भीड़ का प्रदर्शन जारी है। मुस्लिमों का कहना है कि टी. राजा सिंह को रिहा किया जाना गलत है। इससे पहले मंगलवार को भी हैदराबाद में जमकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे और टी. राजा सिंह के खिलाफ पुलिस के सामने ही 'सिर तन से जुदा' जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए गए थे। चारमीनार पर मंगलवार की देर रात बड़ी तादाद में मुसलमान जुटे और उन्होंने टी. राजा सिंह को फांसी पर चढाने की मांग की। कई स्थानों पर टी. राजा सिंह के पुतले भी फूंके गए हैं। पुलिस की तरफ से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का भी सहारा लिया गया, मगर रुक-रुक कर लोग आते रहे। शहर के चारमीनार, गुलजार हौज और वट्टापल्ली इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस की दो गाड़ियों को तोड़ डाला, साथ ही इस दौरान एक टैक्सी में भी तोड़फोड़ की गई। अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी इस मामले में कूद गई है। AIMIM के विधायक अहमद बलाला रात को दो:पैंतालीस बजे प्रदर्शनकारियों के पास जा पहुंचे। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि टी. राजा सिंह को हिरासत में ही रखा जाए। वहीं, भाजपा युवा मोर्चा नेता लड्डू यादव के घर पर भी बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। दरअसल उनके मोहल्ले में मुस्लिम भीड़ घुस गई थी और जमकर बवाल किया था। ऐसे में लड्डू यादव की सुरक्षा को देखते हुए वहां पुलिसबल तैनात किया गया है।
मयंक चतुर्वेदी मूलतः ग्वालियर, म. प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम. फिल तथा पी-एच. डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।
मयंक चतुर्वेदी मूलतः ग्वालियर, म. प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। ग्यारह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम. फिल तथा पी-एच. डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।
GORAKHPUR: डीडीयूजीयू में ग्रेजुएशन एडमिशन के दूसरे दिन प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दीक्षा भवन पहुंचे थे। कुछ अभ्यर्थी अकेले आए थे तो कई के साथ उनके अभिभवक भी पहुंचे थे। भीड़ अधिक होने के कारण दीक्षा भवन के बाहर भीड़ तो काफी हुई थी, लेकिन पर्याप्त सिक्योरिटी के कारण कुछ झड़पों के अलावा किसी तरह की समस्या नहीं होने पाई। यह जरूर रहा कि दीक्षा भवन के बाहर अभिभावकों के लिए बैठने सहित अन्य चीजों के उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। डीडीयू में नए छात्र प्रवेश ले रहे हैं, ऐसे में उनकी सहायता के नाम पर अपनी नेतागिरी चमकाने का इससे बढि़या मौका छात्र नेताओं को कहां मिलने वाला था। अभ्यर्थियों की मदद करने के लिए रविवार को भी ऐसे छात्र नेता बड़ी संख्या में दीक्षा भवन के बाहर खड़े रहे। हालांकि बड़ी-बड़ी गाडि़यों से कैंपस में आए छात्र नेता मदद करते कम और रौब जमाते ज्यादा नजर आए। बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए आए अभिभावक दीक्षा भवन के बाहर ही खड़े थे। अंदर जाने की मनाही के कारण शौच के लिए अभिभावकों को काफी परेशान होना पड़ा। दीक्षा भवन के आसपास मोबाइल टॉयलेट का इंतजाम नहीं किया गया था। संवाद भवन के सामने स्पोर्ट्स बिल्डिंग के पास एक मात्र मोबाइल टॉयलेट खड़ा था। जिसके कारण अभिभावकों को दीक्षा भवन से चलकर यहां तक आना पड़ता था।
GORAKHPUR: डीडीयूजीयू में ग्रेजुएशन एडमिशन के दूसरे दिन प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दीक्षा भवन पहुंचे थे। कुछ अभ्यर्थी अकेले आए थे तो कई के साथ उनके अभिभवक भी पहुंचे थे। भीड़ अधिक होने के कारण दीक्षा भवन के बाहर भीड़ तो काफी हुई थी, लेकिन पर्याप्त सिक्योरिटी के कारण कुछ झड़पों के अलावा किसी तरह की समस्या नहीं होने पाई। यह जरूर रहा कि दीक्षा भवन के बाहर अभिभावकों के लिए बैठने सहित अन्य चीजों के उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। डीडीयू में नए छात्र प्रवेश ले रहे हैं, ऐसे में उनकी सहायता के नाम पर अपनी नेतागिरी चमकाने का इससे बढि़या मौका छात्र नेताओं को कहां मिलने वाला था। अभ्यर्थियों की मदद करने के लिए रविवार को भी ऐसे छात्र नेता बड़ी संख्या में दीक्षा भवन के बाहर खड़े रहे। हालांकि बड़ी-बड़ी गाडि़यों से कैंपस में आए छात्र नेता मदद करते कम और रौब जमाते ज्यादा नजर आए। बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए आए अभिभावक दीक्षा भवन के बाहर ही खड़े थे। अंदर जाने की मनाही के कारण शौच के लिए अभिभावकों को काफी परेशान होना पड़ा। दीक्षा भवन के आसपास मोबाइल टॉयलेट का इंतजाम नहीं किया गया था। संवाद भवन के सामने स्पोर्ट्स बिल्डिंग के पास एक मात्र मोबाइल टॉयलेट खड़ा था। जिसके कारण अभिभावकों को दीक्षा भवन से चलकर यहां तक आना पड़ता था।
मुंबई। बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री कंगना रनौत संजय दत्त के जीवन पर आधारित फिल्म में काम नहीं कर रही है। बॉलीवुड निर्देशक राज कुमार हिरानी, संजय दत्त के जीवन पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। चर्चा है कि इस फिल्म में रणबीर कपूर, संजय दत्त की भूमिका निभा सकते हैं। कहा जा रहा था कि कंगना रनौत भी फिल्म में काम कर रही है लेकिन उन्होंने इस खबर को खारिज कर दिया है। कंगना ने कहा है कि इस फिल्म के लिए उनसे संपर्क नहीं किया गया है। कंगना ने कहा है कि वह फिलहाल विशाल भारद्वाज की फिल्म 'रंगून' में व्यस्त हैं और हिरानी की फिल्म में काम नहीं कर रही हैं। चर्चा थी कि कंगना इस फिल्म में रणवीर कपूर और दीपिका पादुकोण के साथ पर्दे पर नजर आने वाली थी। बताया जाता है कि फिल्म में संजय दत्त की जिंदगी का 17 साल की उम्र से लेकर अभी तक का सफर दिखाया जाएगा। चर्चा है कि हिरानी साल 2017 के क्रिसमस पर संजय की बायोपिक रिलीज कर सकते हैं।
मुंबई। बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्री कंगना रनौत संजय दत्त के जीवन पर आधारित फिल्म में काम नहीं कर रही है। बॉलीवुड निर्देशक राज कुमार हिरानी, संजय दत्त के जीवन पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। चर्चा है कि इस फिल्म में रणबीर कपूर, संजय दत्त की भूमिका निभा सकते हैं। कहा जा रहा था कि कंगना रनौत भी फिल्म में काम कर रही है लेकिन उन्होंने इस खबर को खारिज कर दिया है। कंगना ने कहा है कि इस फिल्म के लिए उनसे संपर्क नहीं किया गया है। कंगना ने कहा है कि वह फिलहाल विशाल भारद्वाज की फिल्म 'रंगून' में व्यस्त हैं और हिरानी की फिल्म में काम नहीं कर रही हैं। चर्चा थी कि कंगना इस फिल्म में रणवीर कपूर और दीपिका पादुकोण के साथ पर्दे पर नजर आने वाली थी। बताया जाता है कि फिल्म में संजय दत्त की जिंदगी का सत्रह साल की उम्र से लेकर अभी तक का सफर दिखाया जाएगा। चर्चा है कि हिरानी साल दो हज़ार सत्रह के क्रिसमस पर संजय की बायोपिक रिलीज कर सकते हैं।
जिले में एक युवक ने अपने बड़े भाई की चाकू मार कर कथित तौर पर हत्या कर दी। बिजनौरः जिले में एक युवक ने अपने बड़े भाई की चाकू मार कर कथित तौर पर हत्या कर दी। पुलिस ने बुधवार को बताया थाना नगीना के मौहल्ला लुहारी सराय में मंगलवार की रात सिराजुद्दीन के छोटे बेटे जफर ने अपने बड़े भाई अलाउद्दीन की घर में सीने पर चाकू से प्रहार कर कथित तौर पर हत्या कर दी और फरार हो गया। थाना प्रभारी राजेश तिवारी के अनुसार, शुरूआती पूछताछ में पता चला है कि अलाउद्दीन और उसकी पत्नी में झगड़ा हो रहा था। जफर के रोकने पर दोनों में बहस हो गयी फिर गुस्से में जफर ने भाई पर चाकू से वार कर दिया। (भाषा)
जिले में एक युवक ने अपने बड़े भाई की चाकू मार कर कथित तौर पर हत्या कर दी। बिजनौरः जिले में एक युवक ने अपने बड़े भाई की चाकू मार कर कथित तौर पर हत्या कर दी। पुलिस ने बुधवार को बताया थाना नगीना के मौहल्ला लुहारी सराय में मंगलवार की रात सिराजुद्दीन के छोटे बेटे जफर ने अपने बड़े भाई अलाउद्दीन की घर में सीने पर चाकू से प्रहार कर कथित तौर पर हत्या कर दी और फरार हो गया। थाना प्रभारी राजेश तिवारी के अनुसार, शुरूआती पूछताछ में पता चला है कि अलाउद्दीन और उसकी पत्नी में झगड़ा हो रहा था। जफर के रोकने पर दोनों में बहस हो गयी फिर गुस्से में जफर ने भाई पर चाकू से वार कर दिया।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय बवंडर आया हुआ है। हनुमान चालीसा के मुद्दे पर बयानों के जरिए शिवसेना और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा मातोश्री के बाहर पाठ करने में नाकाम रहीं लेकिन कहा कि उनका मकसद पूरा हुआ। बता दें इस समय वो अपने पति के साथ न्यायिक हिरासत में हैं। हनुमान चालीसा के मुद्दे पर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने चुप्पी तोड़ी और कहा कि अच्छा होता कि घर पर हनुमान चालीसा का पाठ पढ़तीं। हम जानते हैं कि दादागीरी को किस तरह तोड़ा जाता है। 'गदाधारी हिंदुत्व की चाहत' उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ना चाहते हैं तो घर आकर पढ़िए। लेकिन यदि दादागीरी करेंगे को उसका जवाब देने आता है। उनसे जब पूछा गया कि आपकी पार्टी ने हिंदुत्व को भुला दिया है तो उनका जवाब था कि शिवसेना भगवान हनुमान की तरह गदाधारी है। पिछले कुछ दिनों से कहा जा रहा था कि हमने हिंदुत्व को भुला दिया है। क्या हिंदुत्व धोती है। बाबरी मस्जिद के समय बीजेपी कहां थी। बाला साहेब ठाकरे ने भी कहा था कि वो घंटाधारी हिंदुत्व नहीं चाहते हैं। वो इस तरह का हिंदुत्व चाहते हैं जो आतंकियों से लड़ सके।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय बवंडर आया हुआ है। हनुमान चालीसा के मुद्दे पर बयानों के जरिए शिवसेना और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा मातोश्री के बाहर पाठ करने में नाकाम रहीं लेकिन कहा कि उनका मकसद पूरा हुआ। बता दें इस समय वो अपने पति के साथ न्यायिक हिरासत में हैं। हनुमान चालीसा के मुद्दे पर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने चुप्पी तोड़ी और कहा कि अच्छा होता कि घर पर हनुमान चालीसा का पाठ पढ़तीं। हम जानते हैं कि दादागीरी को किस तरह तोड़ा जाता है। 'गदाधारी हिंदुत्व की चाहत' उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ना चाहते हैं तो घर आकर पढ़िए। लेकिन यदि दादागीरी करेंगे को उसका जवाब देने आता है। उनसे जब पूछा गया कि आपकी पार्टी ने हिंदुत्व को भुला दिया है तो उनका जवाब था कि शिवसेना भगवान हनुमान की तरह गदाधारी है। पिछले कुछ दिनों से कहा जा रहा था कि हमने हिंदुत्व को भुला दिया है। क्या हिंदुत्व धोती है। बाबरी मस्जिद के समय बीजेपी कहां थी। बाला साहेब ठाकरे ने भी कहा था कि वो घंटाधारी हिंदुत्व नहीं चाहते हैं। वो इस तरह का हिंदुत्व चाहते हैं जो आतंकियों से लड़ सके।
पुरस्कार स्वरूप सरकार से कुछ राजनीतिक टुकड़े पा जाते थे उसी प्रकार काश्मीर में भी नागरिक अधिकारों एवं जिम्मेदार हुकूमत की मांग अधिकांश मुसलमानों ने ही की ( क्योंकि डोगराशाही के अभिशाप का अधिकांश में उन्हीं को शिकार होना पड़ा था) और हिन्दू तथा सिख (जो के अनुपात से कहीं नौकरियां हथियाये बैठे थे ) बराबर राज्य के साथ ही रहे। उन्हें स्वस्थ राजनीति के अभाव में अधिकारों सुख, शान्ति और नौकरियों के लिये किसी संगठित जन-मोर्चे की बजाय महाराजा की कृपा पर ही अधिक भरोसा था । हमसे कई मुसलमानों ने यह शिकायत की कि यहां के हिन्दू और सिख इसी तरजीह के कारण कभी किसी राजनीतिक तहरीक में काफी संख्या में शरीक नहीं हुए। इससे मुसलमानों का उनके प्रति रोष होना स्वाभाविक ही है। पर जहां जहां कबाइलियों का अधिकार हुआ और महाराजा का हाथ हिन्दुओं एवं सिखों की रक्षा नहीं कर सका, वहां वे स्थानीय मुसलमानों की दया पर ही छूट गये । कुछ को इस स्थिति में अपने जान माल से हाथ धोना और कुछ की स्थानीयवादीने में डाल कर भी रक्षा की । ऐसे अनेक हिन्दू और सिख, जो कु तो मजबूरन और कुछ बाद में स्वेच्छा से मुसलमान हो गये हैं, अब बापस अपने धर्म में आने को तैयार नहीं। उन्हें भय है कि गैरमुस्लिम होकर अधिक दिन मुस्लिम गांवों में सुरक्षापूर्वक नहीं रह सकेंगे । काश्मीर गांवों की लूट का वर्णन, जो बहुत कुछ पत्रों में चुका है, यहाँ असामयिक ही नहीं अरुचिकरसा भी प्रतीत होता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जब कबाइलियों ने मुजफ्फराबाद पर आक्रमण किया, तो उनका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं और सिखों को ही लूटना - मारना था। इसीलिये उनका नारा था 'सरदार का सर और हिन्दू का जर !' हमारे सामने ऐसे डावद उदाहरण आये, जहां ( विशेष तौर पर मुजफ्फराबाद और बारामूला में ( कई स्थानीय मुसलमानों ने लीगी गुर्गों के बहकावे में आकर कबाइलियों का साथ दिया। अनेक स्थानों में में भी वे शामिल थे । लीग को हिमायती जिस डोगरा शाही से मुसलमानों को उद्धार करने का दम भरते हैं, उसी डोगराशाही के टुकड़ों पर पलने वाले अनेक लीगी अधिकारियों ने गैरमुस्लिम जनता को लूटने-मारने की पाकिस्तानी योजना की रूप रेखा बनाने में मदद की है और हमला होने पर न सिर्फ स्वयं ही, के साथ कबाइलियों के साथ शिरकत भी की है। रेवेन्यू, जंगलात और पुलिस विभागों के अनेक उच्च पदाधिकारियों को इन जुरमों में गिरफ्तार किया गया है। अब तक उन पर कैसा मुकदमा चलाया जायगा या उन्हें क्या सजा दी जायगी इस सम्बन्ध में हमारे सुनने में कुछ नहीं आया। इसमें कोई सन्देह नहीं कि ऐसे मुसलमानों की संख्या अधिक नहीं हैं, पर इनके जुरमों का गुरुत्व काफी बढ़ा है। जिन ऊंचे और जिम्मेदार पदों पर ये थे, उनके अधिकारों का सर्वथा दुरुपयोग कर और जिस राज्य के टुकड़े पर ये पलते रहे थे, उसके प्रति नमकहरामी कर इन्होंने काश्मीर के लोगों में हिन्दू मुस्लिम विद्वेष का वह जहर भरा है, जिसके दुष्परिणाम की अभी केवल कल्पना ही की जा सकती है। इन्हीं के जहरीले प्रचार का फल नेशनल कान्फ्रेंस को आज भोगना पड़ रहा है। जिन स्थानों को भारतीय सेना ने कबालियों को भगा कर वापस अपने अधिकार में ले लिया है, वहां लीग के अनेक प्रचारक हिन्दुओं के वापस बसाये जाने में तरह-तरह की बाधाएं खड़ी कर रहे हैं । एक तो वह लूट-मार के कारण अपने घर-गांव छोड़कर भागे हुए हिन्दू और सिख स्वयं अपने पुराने स्थानों में जाकर फिर आबाद होने को उत्सुक एवं राजी नहीं, फिर कतिपय मुसलमानों के रुख से तो वे और भी अच्छा दिखाने लगे हैं। कई जगह स्थानीय मुसलमानों ने अपने हिन्दू और सिख पड़ोसियों का जो माल लूटा है, वे उसे वापस करने को तैयार नहीं । यदि नेशनल कान्फ्रेंस, जो आजकल काश्मीर का अन्तरिम शासन संभाले हुये है, उन्हें लूट का माल लौटाने के लिये मजबूर या राजी करती है, तो लीग की तरफ से कहा जाता है कि महाराजा के हिन्दू नौकर मुसलमानों पर असाधारण जुल्म ज्यादतियां कर रहे हैं जिससे मुसलमानों को काश्मीर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। पर सचाई यह है कि इन बदमाश और लुटेरे मुसलमानों के साथ भी नेशनल कान्फ्रेंस बड़ी नरमी और समदारी से पेश आरही है। हमने जब उसके कुछ मंत्रियों से इस रुख के पुनर्वास की व्यवस्था में बाधक होने की बात कही, तो वे बोले निःसन्देह इससे कार्य उस गति से तो नहीं हो पा रहा था जिससे कि होना चाहिये । पर हम मुसलमानों के साथ इसलिये भी जान बूझ कर सख्ती नहीं कर रहे कि कल यदि जनमत संग्रह हो, तो उन्हें अपने सहधर्मियों को बरगलाने का यह नया बहाना न मिले ! इससे एक ओर जहां हिन्दू और सिख नेशनल नीति से जरा असन्तुष्ट हैं वहां मुसलमानों पर कोई खास असर पड़ा नहीं देखा गया। उनकी राजनीति के पीछे एक शरारत भरी स्वार्थ नीति है जिसका सचाई, ईमानदारी और भलभ साहत से कोई वास्ता नहीं । नेशनल कान्फ्रेंस को जिसे एक ओर महाराजा की संकीर्णता के कारण भी पूरे शासनाधिकार भी प्राप्त नहीं हैं और दूसरी ओर जनमत संग्रह में मुसलमानों के विद्रोह के डर से उनके साथ जायज सख्ती भी नहीं की जा रही, जिससे हिन्दुओं एवं सिखों में सन्तोष ही नहीं, कान्फ्रेंस के मुस्लिमपक्षीय होने तक की बात कही जा रही है। इस समय जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है उनकी बाहर के लोग ठीक ठीक कल्पना भी नहीं कर सकते। आज उसके सामने दो विकल्प हैं । नुसलमानों पर सख्ती कर हिन्दुओं और सिखों को लूटा हुआ माल वापस दिलाना या काश्मीर को पाकिस्तान में जाने से बचाना । पर इसका मतलब यह नहीं कि हिन्दुओं और सिखों का लूटा हुआ माल मुसलमानों से वापस दिलाने की कास ने कोई चेष्टा ही न की हो । यह माल कबाइलियों द्वारा लूटे गये माल का एक बहुत छोटा सा अंश ही था लोगों को समझा बुझाकर इसे वापिस दिलाने के लिये कान्फ्रेंस ने प्रयत्न किया है और इसमें वह सफल भी हुई है। इसी प्रयत्न के फलस्वरूप अब कई स्थानों पर मुसलमान स्वयं लूट का माल लौटा रहे हैं । काश्मीर से लौटने के बाद एक प्रश्न जो अक्सर हम से पूछा गया और आज भी पूछा जाता है, वह यह है कि काश्मीर में यदि जनमत संग्रह हो, तो वह भारत के साथ रहेगा या पाकिस्तान के साथ ? जो कुछ हमने काश्मीर में देखा-सुना और लोगों से पूछ पाछ की उसके आधार पर हमें तो अधिकांश लोग नेशनल कान्फ्रेंस और शेख अब्दुल्ला के पक्ष में ही नजर आये । जैसा कि हम पहले कह आये हैं अर्थनीतिक दृष्टि से काश्मीर की अस्तित्व रक्षा के लिये हिन्दुस्तान के साथ उसका सम्बन्ध रहना जरूरी सा हो जाता है। यह मसला साम्प्रदायिक कदापि नहीं है। पर एक खतरा नजर दिखाई देता है । वह यह कि लीग के गुप्त और प्रकट रूप से होने वाले जिस प्रचार कार्य का हमें से काश्मीर में परिचय मिला और जिसका उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त में प्रयोग किये जाने की बात हमने सुनी है, उससे हमारी यह य और असत्य द्वारा लीग वाले काश्मीर के भोले भाले लोगों को धोखा शायद दे सकें। उदाहरण के तौर पर यदि उत्तर पश्चिम सीमान्न की तरह काश्मीर में भी वे मतदाता के हाथ पर कुरान रखकर उससे कहें कि यह कुरान और नबी को रजील करने वाले काफिरों के साथ रहना चाहते हैं या अपने हम मजहब पाकिस्तानियों के साथ, तो ताज्जुब नहीं कि और धर्मभीरु ग्रामीण मुसलमान इस प्रोपेगंडा की शरारत के शिकार हो जाये साथ ही हमें यह भी विश्वास है कि नेशनल कान्फ्रेंस इस शरारत से वहां के मुसलमानों को बचाने की चेष्टा करेगी। इसके लिये कान्फ्रेंस के हाथ मजबूत किये जाने चाहिये । और वह तभी सम्भव है जब कि शासन की पूरी जिम्मेदारी और पूरे अधिकार कान्फ्रेंस को सौंप दिये जायं । आज तो महाराजा और भारत सरकार का मतभेद तथा आशकाए इसमें बाधक सिद्ध हो रही हैं। पता नहीं इनसे वे कब मुक्त होंगे।
पुरस्कार स्वरूप सरकार से कुछ राजनीतिक टुकड़े पा जाते थे उसी प्रकार काश्मीर में भी नागरिक अधिकारों एवं जिम्मेदार हुकूमत की मांग अधिकांश मुसलमानों ने ही की और हिन्दू तथा सिख बराबर राज्य के साथ ही रहे। उन्हें स्वस्थ राजनीति के अभाव में अधिकारों सुख, शान्ति और नौकरियों के लिये किसी संगठित जन-मोर्चे की बजाय महाराजा की कृपा पर ही अधिक भरोसा था । हमसे कई मुसलमानों ने यह शिकायत की कि यहां के हिन्दू और सिख इसी तरजीह के कारण कभी किसी राजनीतिक तहरीक में काफी संख्या में शरीक नहीं हुए। इससे मुसलमानों का उनके प्रति रोष होना स्वाभाविक ही है। पर जहां जहां कबाइलियों का अधिकार हुआ और महाराजा का हाथ हिन्दुओं एवं सिखों की रक्षा नहीं कर सका, वहां वे स्थानीय मुसलमानों की दया पर ही छूट गये । कुछ को इस स्थिति में अपने जान माल से हाथ धोना और कुछ की स्थानीयवादीने में डाल कर भी रक्षा की । ऐसे अनेक हिन्दू और सिख, जो कु तो मजबूरन और कुछ बाद में स्वेच्छा से मुसलमान हो गये हैं, अब बापस अपने धर्म में आने को तैयार नहीं। उन्हें भय है कि गैरमुस्लिम होकर अधिक दिन मुस्लिम गांवों में सुरक्षापूर्वक नहीं रह सकेंगे । काश्मीर गांवों की लूट का वर्णन, जो बहुत कुछ पत्रों में चुका है, यहाँ असामयिक ही नहीं अरुचिकरसा भी प्रतीत होता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जब कबाइलियों ने मुजफ्फराबाद पर आक्रमण किया, तो उनका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं और सिखों को ही लूटना - मारना था। इसीलिये उनका नारा था 'सरदार का सर और हिन्दू का जर !' हमारे सामने ऐसे डावद उदाहरण आये, जहां ( विशेष तौर पर मुजफ्फराबाद और बारामूला में ( कई स्थानीय मुसलमानों ने लीगी गुर्गों के बहकावे में आकर कबाइलियों का साथ दिया। अनेक स्थानों में में भी वे शामिल थे । लीग को हिमायती जिस डोगरा शाही से मुसलमानों को उद्धार करने का दम भरते हैं, उसी डोगराशाही के टुकड़ों पर पलने वाले अनेक लीगी अधिकारियों ने गैरमुस्लिम जनता को लूटने-मारने की पाकिस्तानी योजना की रूप रेखा बनाने में मदद की है और हमला होने पर न सिर्फ स्वयं ही, के साथ कबाइलियों के साथ शिरकत भी की है। रेवेन्यू, जंगलात और पुलिस विभागों के अनेक उच्च पदाधिकारियों को इन जुरमों में गिरफ्तार किया गया है। अब तक उन पर कैसा मुकदमा चलाया जायगा या उन्हें क्या सजा दी जायगी इस सम्बन्ध में हमारे सुनने में कुछ नहीं आया। इसमें कोई सन्देह नहीं कि ऐसे मुसलमानों की संख्या अधिक नहीं हैं, पर इनके जुरमों का गुरुत्व काफी बढ़ा है। जिन ऊंचे और जिम्मेदार पदों पर ये थे, उनके अधिकारों का सर्वथा दुरुपयोग कर और जिस राज्य के टुकड़े पर ये पलते रहे थे, उसके प्रति नमकहरामी कर इन्होंने काश्मीर के लोगों में हिन्दू मुस्लिम विद्वेष का वह जहर भरा है, जिसके दुष्परिणाम की अभी केवल कल्पना ही की जा सकती है। इन्हीं के जहरीले प्रचार का फल नेशनल कान्फ्रेंस को आज भोगना पड़ रहा है। जिन स्थानों को भारतीय सेना ने कबालियों को भगा कर वापस अपने अधिकार में ले लिया है, वहां लीग के अनेक प्रचारक हिन्दुओं के वापस बसाये जाने में तरह-तरह की बाधाएं खड़ी कर रहे हैं । एक तो वह लूट-मार के कारण अपने घर-गांव छोड़कर भागे हुए हिन्दू और सिख स्वयं अपने पुराने स्थानों में जाकर फिर आबाद होने को उत्सुक एवं राजी नहीं, फिर कतिपय मुसलमानों के रुख से तो वे और भी अच्छा दिखाने लगे हैं। कई जगह स्थानीय मुसलमानों ने अपने हिन्दू और सिख पड़ोसियों का जो माल लूटा है, वे उसे वापस करने को तैयार नहीं । यदि नेशनल कान्फ्रेंस, जो आजकल काश्मीर का अन्तरिम शासन संभाले हुये है, उन्हें लूट का माल लौटाने के लिये मजबूर या राजी करती है, तो लीग की तरफ से कहा जाता है कि महाराजा के हिन्दू नौकर मुसलमानों पर असाधारण जुल्म ज्यादतियां कर रहे हैं जिससे मुसलमानों को काश्मीर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। पर सचाई यह है कि इन बदमाश और लुटेरे मुसलमानों के साथ भी नेशनल कान्फ्रेंस बड़ी नरमी और समदारी से पेश आरही है। हमने जब उसके कुछ मंत्रियों से इस रुख के पुनर्वास की व्यवस्था में बाधक होने की बात कही, तो वे बोले निःसन्देह इससे कार्य उस गति से तो नहीं हो पा रहा था जिससे कि होना चाहिये । पर हम मुसलमानों के साथ इसलिये भी जान बूझ कर सख्ती नहीं कर रहे कि कल यदि जनमत संग्रह हो, तो उन्हें अपने सहधर्मियों को बरगलाने का यह नया बहाना न मिले ! इससे एक ओर जहां हिन्दू और सिख नेशनल नीति से जरा असन्तुष्ट हैं वहां मुसलमानों पर कोई खास असर पड़ा नहीं देखा गया। उनकी राजनीति के पीछे एक शरारत भरी स्वार्थ नीति है जिसका सचाई, ईमानदारी और भलभ साहत से कोई वास्ता नहीं । नेशनल कान्फ्रेंस को जिसे एक ओर महाराजा की संकीर्णता के कारण भी पूरे शासनाधिकार भी प्राप्त नहीं हैं और दूसरी ओर जनमत संग्रह में मुसलमानों के विद्रोह के डर से उनके साथ जायज सख्ती भी नहीं की जा रही, जिससे हिन्दुओं एवं सिखों में सन्तोष ही नहीं, कान्फ्रेंस के मुस्लिमपक्षीय होने तक की बात कही जा रही है। इस समय जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है उनकी बाहर के लोग ठीक ठीक कल्पना भी नहीं कर सकते। आज उसके सामने दो विकल्प हैं । नुसलमानों पर सख्ती कर हिन्दुओं और सिखों को लूटा हुआ माल वापस दिलाना या काश्मीर को पाकिस्तान में जाने से बचाना । पर इसका मतलब यह नहीं कि हिन्दुओं और सिखों का लूटा हुआ माल मुसलमानों से वापस दिलाने की कास ने कोई चेष्टा ही न की हो । यह माल कबाइलियों द्वारा लूटे गये माल का एक बहुत छोटा सा अंश ही था लोगों को समझा बुझाकर इसे वापिस दिलाने के लिये कान्फ्रेंस ने प्रयत्न किया है और इसमें वह सफल भी हुई है। इसी प्रयत्न के फलस्वरूप अब कई स्थानों पर मुसलमान स्वयं लूट का माल लौटा रहे हैं । काश्मीर से लौटने के बाद एक प्रश्न जो अक्सर हम से पूछा गया और आज भी पूछा जाता है, वह यह है कि काश्मीर में यदि जनमत संग्रह हो, तो वह भारत के साथ रहेगा या पाकिस्तान के साथ ? जो कुछ हमने काश्मीर में देखा-सुना और लोगों से पूछ पाछ की उसके आधार पर हमें तो अधिकांश लोग नेशनल कान्फ्रेंस और शेख अब्दुल्ला के पक्ष में ही नजर आये । जैसा कि हम पहले कह आये हैं अर्थनीतिक दृष्टि से काश्मीर की अस्तित्व रक्षा के लिये हिन्दुस्तान के साथ उसका सम्बन्ध रहना जरूरी सा हो जाता है। यह मसला साम्प्रदायिक कदापि नहीं है। पर एक खतरा नजर दिखाई देता है । वह यह कि लीग के गुप्त और प्रकट रूप से होने वाले जिस प्रचार कार्य का हमें से काश्मीर में परिचय मिला और जिसका उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त में प्रयोग किये जाने की बात हमने सुनी है, उससे हमारी यह य और असत्य द्वारा लीग वाले काश्मीर के भोले भाले लोगों को धोखा शायद दे सकें। उदाहरण के तौर पर यदि उत्तर पश्चिम सीमान्न की तरह काश्मीर में भी वे मतदाता के हाथ पर कुरान रखकर उससे कहें कि यह कुरान और नबी को रजील करने वाले काफिरों के साथ रहना चाहते हैं या अपने हम मजहब पाकिस्तानियों के साथ, तो ताज्जुब नहीं कि और धर्मभीरु ग्रामीण मुसलमान इस प्रोपेगंडा की शरारत के शिकार हो जाये साथ ही हमें यह भी विश्वास है कि नेशनल कान्फ्रेंस इस शरारत से वहां के मुसलमानों को बचाने की चेष्टा करेगी। इसके लिये कान्फ्रेंस के हाथ मजबूत किये जाने चाहिये । और वह तभी सम्भव है जब कि शासन की पूरी जिम्मेदारी और पूरे अधिकार कान्फ्रेंस को सौंप दिये जायं । आज तो महाराजा और भारत सरकार का मतभेद तथा आशकाए इसमें बाधक सिद्ध हो रही हैं। पता नहीं इनसे वे कब मुक्त होंगे।
"मेमोरी लिखी नहीं जा सकती" त्रुटि का कारण क्या है? विशेष कैलकुलेटर का उपयोग कर "डीओटीए 2" उपकरण की लागत का पता कैसे लगा सकता है? मैं "संपर्क" नाम कैसे बदल सकता हूं? खनन क्या है? बिटकॉइन माइनिंग, लाइटकॉन माइनिंग या माइनिंग सोलो कैसे है?
"मेमोरी लिखी नहीं जा सकती" त्रुटि का कारण क्या है? विशेष कैलकुलेटर का उपयोग कर "डीओटीए दो" उपकरण की लागत का पता कैसे लगा सकता है? मैं "संपर्क" नाम कैसे बदल सकता हूं? खनन क्या है? बिटकॉइन माइनिंग, लाइटकॉन माइनिंग या माइनिंग सोलो कैसे है?
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आगरा का किला एक यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल है। यह किला भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित है। इसके लगभग 2.5 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में ही विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताज महल मौजूद है। इस किले को कुछ इतिहासकार चारदीवारी से घिरी प्रासाद महल नगरी कहना बेहतर मानते हैं। यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण किला है। भारत के मुगल सम्राट बाबर, हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगज़ेब यहां रहा करते थे, व यहीं से पूरे भारत पर शासन किया करते थे। यहां राज्य का सर्वाधिक खजाना, सम्पत्ति व टकसाल थी। यहाँ विदेशी राजदूत, यात्री व उच्च पदस्थ लोगों का आना जाना लगा रहता था, जिन्होंने भारत के इतिहास को रचा। . महमूद ग़ज़नवी (971-1030) मध्य अफ़ग़ानिस्तान में केन्द्रित गज़नवी वंश का एक महत्वपूर्ण शासक था जो पूर्वी ईरान भूमि में साम्राज्य विस्तार के लिए जाना जाता है। वह तुर्क मूल का था और अपने समकालीन (और बाद के) सल्जूक़ तुर्कों की तरह पूर्व में एक सुन्नी इस्लामी साम्राज्य बनाने में सफल हुआ। उसके द्वारा जीते गए प्रदेशों में आज का पूर्वी ईरान, अफगानिस्तान और संलग्न मध्य-एशिया (सम्मिलिलित रूप से ख़ोरासान), पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत शामिल थे। उनके युद्धों में फ़ातिमी सुल्तानों (शिया), काबुल शाहिया राजाओं (हिन्दू) और कश्मीर का नाम प्रमुखता से आता है। भारत में इस्लामी शासन लाने और आक्रमण के दौरान लूटपाट मचाने के कारण भारतीय हिन्दू समाज में उनको एक आक्रामक शासक के रूप में जाना जाता है। वह पिता के वंश से तुर्क था पर उसने फ़ारसी भाषा के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाँलांकि उसके दरबारी कवि फ़िरदौसी ने शाहनामे की रचना की पर वो हमेशा कवि का समर्थक नहीं रहा था। ग़ज़नी, जो मध्य अफ़गानिस्तान में स्थित एक छोटा शहर था, को उन्होंने साम्राज्य के धनी और प्रांतीय शहर के रूप में बदल गया। बग़दाद के इस्लामी (अब्बासी) ख़लीफ़ा ने उनको सुल्तान की पदवी दी। . आगरा का किला और महमूद ग़ज़नवी आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। आगरा का किला 60 संबंध है और महमूद ग़ज़नवी 25 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (60 + 25)। यह लेख आगरा का किला और महमूद ग़ज़नवी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आगरा का किला एक यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल है। यह किला भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित है। इसके लगभग दो दशमलव पाँच किलोग्राममीटर उत्तर-पश्चिम में ही विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताज महल मौजूद है। इस किले को कुछ इतिहासकार चारदीवारी से घिरी प्रासाद महल नगरी कहना बेहतर मानते हैं। यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण किला है। भारत के मुगल सम्राट बाबर, हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगज़ेब यहां रहा करते थे, व यहीं से पूरे भारत पर शासन किया करते थे। यहां राज्य का सर्वाधिक खजाना, सम्पत्ति व टकसाल थी। यहाँ विदेशी राजदूत, यात्री व उच्च पदस्थ लोगों का आना जाना लगा रहता था, जिन्होंने भारत के इतिहास को रचा। . महमूद ग़ज़नवी मध्य अफ़ग़ानिस्तान में केन्द्रित गज़नवी वंश का एक महत्वपूर्ण शासक था जो पूर्वी ईरान भूमि में साम्राज्य विस्तार के लिए जाना जाता है। वह तुर्क मूल का था और अपने समकालीन सल्जूक़ तुर्कों की तरह पूर्व में एक सुन्नी इस्लामी साम्राज्य बनाने में सफल हुआ। उसके द्वारा जीते गए प्रदेशों में आज का पूर्वी ईरान, अफगानिस्तान और संलग्न मध्य-एशिया , पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत शामिल थे। उनके युद्धों में फ़ातिमी सुल्तानों , काबुल शाहिया राजाओं और कश्मीर का नाम प्रमुखता से आता है। भारत में इस्लामी शासन लाने और आक्रमण के दौरान लूटपाट मचाने के कारण भारतीय हिन्दू समाज में उनको एक आक्रामक शासक के रूप में जाना जाता है। वह पिता के वंश से तुर्क था पर उसने फ़ारसी भाषा के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाँलांकि उसके दरबारी कवि फ़िरदौसी ने शाहनामे की रचना की पर वो हमेशा कवि का समर्थक नहीं रहा था। ग़ज़नी, जो मध्य अफ़गानिस्तान में स्थित एक छोटा शहर था, को उन्होंने साम्राज्य के धनी और प्रांतीय शहर के रूप में बदल गया। बग़दाद के इस्लामी ख़लीफ़ा ने उनको सुल्तान की पदवी दी। . आगरा का किला और महमूद ग़ज़नवी आम में शून्य बातें हैं । आगरा का किला साठ संबंध है और महमूद ग़ज़नवी पच्चीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख आगरा का किला और महमूद ग़ज़नवी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
नई दिल्लीः नवरात्रि के तीसरे दिन के मौके पर, पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देवी चंद्रघंटा का आशीर्वाद मांगते हुए उम्मीद जताई कि उनका आशीर्वाद उनके भक्तों के जीवन से सभी नकारात्मक शक्तियों को परास्त कर देगा. पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'मां चंद्रघंटा के चरणों में नमन. देवी चंद्रघंटा अपने सभी भक्तों को नकारात्मक शक्तियों पर जीत का आशीर्वाद दें. ' इसके साथ ही पीएम मोदी ने माता चंद्रघंटा से जुड़ी स्तुति भी साझा की है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले, नवरात्रि के प्रथम दिन पीएम मोदी ने कामना करते हुए कहा था कि यह त्योहार सभी के जीवन में शक्ति, अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि लाए. बता दें कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. शरद (शरद ऋतु) नवरात्रि के उत्सव में देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा करने की प्रथा है. यह त्योहार पूरे देश में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. बता दें कि 7 अक्टूबर से नवरात्रि का पर्व आरंभ हो गया है. आगामी नौ दिनों में, भक्त देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं. शरद नवरात्रि के तौर पर भी जाना जाता है, इस मौके को देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर जीत का प्रतीक माना जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. शरद नवरात्रि के 10वें दिन को दशहरा या विजयादशमी के तौर पर मनाया जाता है. नवरात्रि का त्यौहार 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. इस वर्ष अष्टमी 13 अक्टूबर को है जबकि दशमी 15 अक्टूबर को है.
नई दिल्लीः नवरात्रि के तीसरे दिन के मौके पर, पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देवी चंद्रघंटा का आशीर्वाद मांगते हुए उम्मीद जताई कि उनका आशीर्वाद उनके भक्तों के जीवन से सभी नकारात्मक शक्तियों को परास्त कर देगा. पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'मां चंद्रघंटा के चरणों में नमन. देवी चंद्रघंटा अपने सभी भक्तों को नकारात्मक शक्तियों पर जीत का आशीर्वाद दें. ' इसके साथ ही पीएम मोदी ने माता चंद्रघंटा से जुड़ी स्तुति भी साझा की है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले, नवरात्रि के प्रथम दिन पीएम मोदी ने कामना करते हुए कहा था कि यह त्योहार सभी के जीवन में शक्ति, अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि लाए. बता दें कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. शरद नवरात्रि के उत्सव में देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा करने की प्रथा है. यह त्योहार पूरे देश में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. बता दें कि सात अक्टूबर से नवरात्रि का पर्व आरंभ हो गया है. आगामी नौ दिनों में, भक्त देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं. शरद नवरात्रि के तौर पर भी जाना जाता है, इस मौके को देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर जीत का प्रतीक माना जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. शरद नवरात्रि के दसवें दिन को दशहरा या विजयादशमी के तौर पर मनाया जाता है. नवरात्रि का त्यौहार सात अक्टूबर से पंद्रह अक्टूबर तक मनाया जाएगा. इस वर्ष अष्टमी तेरह अक्टूबर को है जबकि दशमी पंद्रह अक्टूबर को है.
चेन्नईः अभिनेता रजनीकांत ने शनिवार को अपने जन्मदिन 12 दिसंबर को एक राजनीतिक दल लॉन्च करने की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है. पिछले साल न्यू ईयर की शाम को अपने राजनीति में उतरने के ऐलान करते हुए उन्होंने कहा था कि वे अपने फैंस क्लब रजनी मक्कल मन्दरम को राजनितिक पार्टी में तब्दील करने वाले हैं. राजिनिकांत ने कोलकाता में अपनी आगामी फिल्म 'पेटटा' की एक महीने तक शूटिंग करने के बाद तमिल नाडु लौटने पर मीडिया को बताया कि मेरे जन्मदिन पर पार्टी लांच करने के लिए कोई योजना नहीं है, अभी इसमें और समय लगेगा, हमे कुछ काम पुरे करने हैं, जिसके लिए तैयारियां की जा रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी लांच का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है, लेकिन अभी इसमें और थोड़ा समय लगेगा. रजनीकांत अपने संगठन को लॉन्च करने से पहले इस बात की अटकलों से भी चिंतित हैं कि क्या वे बीजेपी के साथ मिलकर काम करेंगे. हालाँकि उनके प्रशंसकों के बीच बड़ी उम्मीद थी कि वह पार्टी लॉन्च के बारे में आधिकारिक घोषणा करेंगे. हालाँकि रजनीकांत इस बारे में जल्दी नहीं दिखा रहे हैं, उनका कहना है कि सारा काम होने के बाद ही पार्टी को लांच किया जाएगा.
चेन्नईः अभिनेता रजनीकांत ने शनिवार को अपने जन्मदिन बारह दिसंबर को एक राजनीतिक दल लॉन्च करने की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है. पिछले साल न्यू ईयर की शाम को अपने राजनीति में उतरने के ऐलान करते हुए उन्होंने कहा था कि वे अपने फैंस क्लब रजनी मक्कल मन्दरम को राजनितिक पार्टी में तब्दील करने वाले हैं. राजिनिकांत ने कोलकाता में अपनी आगामी फिल्म 'पेटटा' की एक महीने तक शूटिंग करने के बाद तमिल नाडु लौटने पर मीडिया को बताया कि मेरे जन्मदिन पर पार्टी लांच करने के लिए कोई योजना नहीं है, अभी इसमें और समय लगेगा, हमे कुछ काम पुरे करने हैं, जिसके लिए तैयारियां की जा रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी लांच का नब्बे प्रतिशत काम पूरा हो गया है, लेकिन अभी इसमें और थोड़ा समय लगेगा. रजनीकांत अपने संगठन को लॉन्च करने से पहले इस बात की अटकलों से भी चिंतित हैं कि क्या वे बीजेपी के साथ मिलकर काम करेंगे. हालाँकि उनके प्रशंसकों के बीच बड़ी उम्मीद थी कि वह पार्टी लॉन्च के बारे में आधिकारिक घोषणा करेंगे. हालाँकि रजनीकांत इस बारे में जल्दी नहीं दिखा रहे हैं, उनका कहना है कि सारा काम होने के बाद ही पार्टी को लांच किया जाएगा.
दिल्ली की एक अदालत ने अपनी 'लिव-इन पार्टनर' श्रद्धा वालकर की हत्या करने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ आरोप तय करने के संबंध में शनिवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। श्रद्धा वालकर के पिता विकास वालकर ने मंगलवार को मांग की कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के माता-पिता से पूछताछ की जाए। दिल्ली श्रद्धा हत्याकांड के आरोपी की न्यायिक हिरासत को एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है। आफताब अमीन पूनावाला की न्यायिक हिरासत मंगलवार को और 14 दिनों के लिए बढ़ा दी। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में अपनी सह-जीवन साथी श्रद्धा वालकर की हत्या करने और शव के 35 टुकड़े करने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को शनिवार को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या करने और बाद में उसके शरीर को कई टुकड़ों में काटने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आफताब 6 मई को श्रद्धा के साथ हिमाचल प्रदेश के तोश कस्बा गया था और वहां गांजा खरीदा था।
दिल्ली की एक अदालत ने अपनी 'लिव-इन पार्टनर' श्रद्धा वालकर की हत्या करने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ आरोप तय करने के संबंध में शनिवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। श्रद्धा वालकर के पिता विकास वालकर ने मंगलवार को मांग की कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के माता-पिता से पूछताछ की जाए। दिल्ली श्रद्धा हत्याकांड के आरोपी की न्यायिक हिरासत को एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है। आफताब अमीन पूनावाला की न्यायिक हिरासत मंगलवार को और चौदह दिनों के लिए बढ़ा दी। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में अपनी सह-जीवन साथी श्रद्धा वालकर की हत्या करने और शव के पैंतीस टुकड़े करने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को शनिवार को तेरह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या करने और बाद में उसके शरीर को कई टुकड़ों में काटने के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आफताब छः मई को श्रद्धा के साथ हिमाचल प्रदेश के तोश कस्बा गया था और वहां गांजा खरीदा था।
नयनतारा नहीं, सामंथा को ऑफर हुई थी शाहरुख की 'जवान' शाहरुख खान ने अपनी नई फिल्म 'जवान' का टीजर के साथ ऐलान कर दिया है। इसके बाद हर तरफ फिल्म की चर्चा है। फिल्म में शाहरुख के साथ मुख्य भूमिका में तमिल फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री नयनतारा नजर आएंगी। अब बॉलीवुड फैन्स के बीच नयनतारा की चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म में फीमेल लीड के लिए नयनतारा पहली पसंद नहीं थीं। यह फिल्म पहले सामंथा रुथ प्रभु को ऑफर की गई थी। 2019 में इस फिल्म का ऑफर दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री सामंथा को दिया गया था। उस वक्त सामंथा ने फिल्म को मना कर दिया और फिल्म नयनतारा की झोली में आ गई। खबरों की मानें तो सामंथा तब अपने पति नागा चैतन्य के साथ अपना परिवार बढ़ाने का सोच रही थीं। सामंथा OTT शो 'द फैमिली मैन 2' में नजर आई थीं। बीते दिनों फिल्म 'पुष्पा' के आइटम सॉन्ग 'ऊ अंतावा' से उन्होंने सुर्खियां बटोरी। दक्षिण भारतीय सिनेमा में नागा और सामंथा का ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन रोमांस काफी मशहूर है। 2017 में सामंथा और नागा ने सात फेरे लिए थे। हालांकि, करीब तीन साल बाद, 2021 में दोनों ने आपसी सहमती से तलाक ले लिया। तमिल के मशहूर निर्देशक एटली फिल्म 'जवान' का निर्देशन कर रहे हैं। यह एटली की पहली हिंदी फिल्म है। अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा, प्रियामणि, अभिनेता सुनील ग्रोवर और कॉमेडियन योगी बाबू भी फिल्म का हिस्सा हैं। शाहरुख की यह फिल्म 2 जून, 2023 को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है। 'जवान' के अलावा शाहरुख अपनी दो अन्य फिल्मों 'पठान' और 'डंकी' में भी व्यस्त हैं। ये तीनों फिल्में 2023 में रिलीज होंगी। टीजर रिलीज होने के बाद से फिल्म में शाहरुख के लुक की तुलना 1990 में आई हॉलीवुड की फिल्म 'डार्कमैन' से हो रही है। टीजर में शाहरुख के पूरे चेहरे पर पट्टी बंधी दिख रही है और वह घायल नजर आ रहे हैं। फिल्म 'डार्कमैन' में अभिनेता लियाम नीसन भी कुछ इसी अंदाज में नजर आए थे। शाहरुख के इस लुक के लिए प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में शाहरुख डबल रोल में नजर आने वाले हैं।
नयनतारा नहीं, सामंथा को ऑफर हुई थी शाहरुख की 'जवान' शाहरुख खान ने अपनी नई फिल्म 'जवान' का टीजर के साथ ऐलान कर दिया है। इसके बाद हर तरफ फिल्म की चर्चा है। फिल्म में शाहरुख के साथ मुख्य भूमिका में तमिल फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री नयनतारा नजर आएंगी। अब बॉलीवुड फैन्स के बीच नयनतारा की चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म में फीमेल लीड के लिए नयनतारा पहली पसंद नहीं थीं। यह फिल्म पहले सामंथा रुथ प्रभु को ऑफर की गई थी। दो हज़ार उन्नीस में इस फिल्म का ऑफर दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री सामंथा को दिया गया था। उस वक्त सामंथा ने फिल्म को मना कर दिया और फिल्म नयनतारा की झोली में आ गई। खबरों की मानें तो सामंथा तब अपने पति नागा चैतन्य के साथ अपना परिवार बढ़ाने का सोच रही थीं। सामंथा OTT शो 'द फैमिली मैन दो' में नजर आई थीं। बीते दिनों फिल्म 'पुष्पा' के आइटम सॉन्ग 'ऊ अंतावा' से उन्होंने सुर्खियां बटोरी। दक्षिण भारतीय सिनेमा में नागा और सामंथा का ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन रोमांस काफी मशहूर है। दो हज़ार सत्रह में सामंथा और नागा ने सात फेरे लिए थे। हालांकि, करीब तीन साल बाद, दो हज़ार इक्कीस में दोनों ने आपसी सहमती से तलाक ले लिया। तमिल के मशहूर निर्देशक एटली फिल्म 'जवान' का निर्देशन कर रहे हैं। यह एटली की पहली हिंदी फिल्म है। अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा, प्रियामणि, अभिनेता सुनील ग्रोवर और कॉमेडियन योगी बाबू भी फिल्म का हिस्सा हैं। शाहरुख की यह फिल्म दो जून, दो हज़ार तेईस को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है। 'जवान' के अलावा शाहरुख अपनी दो अन्य फिल्मों 'पठान' और 'डंकी' में भी व्यस्त हैं। ये तीनों फिल्में दो हज़ार तेईस में रिलीज होंगी। टीजर रिलीज होने के बाद से फिल्म में शाहरुख के लुक की तुलना एक हज़ार नौ सौ नब्बे में आई हॉलीवुड की फिल्म 'डार्कमैन' से हो रही है। टीजर में शाहरुख के पूरे चेहरे पर पट्टी बंधी दिख रही है और वह घायल नजर आ रहे हैं। फिल्म 'डार्कमैन' में अभिनेता लियाम नीसन भी कुछ इसी अंदाज में नजर आए थे। शाहरुख के इस लुक के लिए प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में शाहरुख डबल रोल में नजर आने वाले हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज विधानसभा में नियोजन नीति, गवर्नमेंट की योजना सहित अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. विधानसभा में इस दौरान हेमंत सोरेन विरोधियों पर जमकर बरसे. हमारे 1932 आधारित क्षेत्रीय नीति पर पर केंद्र निर्णय लेगा. हमारे आरक्षण पर भी केंद्र ही निर्णय लेगा. केंद्र के नेता आते हैं अपनी योजना का शिलान्यास करते हैं चले जाते हैं. राज्य गवर्नमेंट को सूचना तक नहीं देते. आज भी केंद्र गवर्नमेंट का एक कार्यक्रम चल रहा है लेकिन गवर्नमेंट के लोग सबसे नीचे की लिस्ट में है. सबको मान सम्मान से जीने का अधिकार है. इस एकता पर हमला हो रहा है. एक सांसद हमारी विधायक दीपिका पर भद्दी टिप्पणी करता है. मैं ये नहीं कहता की संज्ञान में ले लेकिन यह गंदी और भद्दी बात है. हमारे विपक्ष के लोगों को आचरण है वह इस राज्य को एक चारागाह के रूप में देख रहे हैं. विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, आज गैर बीजेपी शासित सीएम को राष्ट्र के बाहर जाने की इजाजत नहीं है. इन्होंने नेपाल तक जाने में पाबंदी बना रखा है. इन्होंने जो बाहर हवा फैला रखी है इन्हें डर है कहीं कोई जाकर उस गुब्बारे पर सुई ना मार दे. हमने नहीं किया किसी और ना कर दिया. आज जिन ऑफिसरों के विरूद्ध कार्रवाई हो रही है वो इनके साथ ही थे. इनके समय के पाप को हमारे मत्थे पर चढ़ाया जा रहा है. अभी तो राज्य ने चलना प्रारम्भ किया है. हेमंत सोरेन ने रोजगार के मामले पर बोला कि हम चाहते हैं कि तीसरे और चौथे दर्जे में झारखंड के लोगों को जॉब दें लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहे हैं. हम एकदम कट्टर विचारधारा वाले के लोग हैं. हमारी 1932 के प्रति जो प्रयास है उसे हम जारी रहेंगे. हमें पता था कि अड़चन आयेगी, विपक्ष के माध्यम से अड़चन आयी. विपक्ष में ऐसा नहीं है कि सभी बाहरी है. इसमें कुछ मूलवासी और आदिवासी भी हैं. यह भी रोबोट की किरदार में है ऊपर से जो आदेश होता है उसके साथ ही यह चलते हैं. मरांडी, मुंडा ,महतो होना ही झारखंड का हितैषी होना नहीं है. यदि आप सच में झारखंड के हितैषी है तो आपको अपनी सीमा तय करनी होगी, आप किस पक्ष में हैं इस पक्ष में या उस पक्ष में. मुझे याद है कि 1985 को लेकर नीति बनी थी. बहुत मिठाई बांटी गयी थी, अब हमसे प्रश्न है कि क्यों 1932 नहीं लाते. हम लेकर आयें तो यह दूसरी तरफ खड़े हो जाते हैं. हमारे लिए प्रश्न है कि हम क्या करें. सहूलियत की राजनीति नहीं होनी चाहिए. 27 फीसदी का आरक्षण किसने राज्य में समाप्त किया. यदि विज्ञापन निकला भी तो न्यायालय कचहरी करके ये फंसा देते हैं. अभी जो वर्तमान स्थिति पैदा हुई है वो ऐसे ही नहीं हुई है. उन सभी चीजों का आंकलन करते हुए होगी. सीएम हेमंत सोरेन ने कहा,आपने बाहरियों को भर दिया है. कोडरमा में 173 पदों में बाहरी हुई जिनमें 43 लोग बाहरी है. आज जेपीएससी में बहाली हुई है कितने फीसदी लोग बाहरी है गिन कर बता दीजिए. सीएम हेमंत सोरेन ने नियोजन नीति का जिक्र करते हुए बोला नीति भी समय पर आयेगी. आज जो समझौता हुआ उसे कमजोरी ना समझें. शेर का बच्चा लंबी छलांग के लिए दो कदम पीछे आया है. वो समय भी आयेगा. हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी के मुद्दे का जिक्र करते हुए बोला कि यह गलत है यह हालत नहीं होनी चाहिए कि लोग एक दूसरे की मर्डर कर दें. आज बोलने की आजादी नहीं है, आप बोलेंगे तो कारागार में डाल दिए जायेंगे. मदर ऑफ डेमोक्रेसी को फादर ऑफ पावर ने कुचल डाला है. अपने संबोधन की आरंभ करते हुए बोला कि विपक्ष ने कई प्रश्नों किए हैं. मैंने भी बोला था कि इसका उत्तर दूंगा. इस दौरान हंगामा जारी रहा. सीएम ने हेमंत सोरेन ने कहा, एक प्रश्न का उत्तर तो सुन लो भई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन के सभी सदस्यों को आने वाले त्योहार, सरहुल, रामनवमी, रमजान के लिए शुभकामनाएं देता हूं. मैं बोला से बात प्रारम्भ करू मैं समझ नहीं पा रहा हूं. हम कहां खड़े हैं मैं समझ नहीं पा रहा कि हम अमृत काल में खड़े हैं या आपात काल में खड़े हैं समझ नहीं पा रहा. कहावत है कि सियार शेर का खाल पहन लेगा तो शेर नहीं होगा, यही हाल विपक्ष का है. एक तरफ सीएम का संबोधन जारी था तो दूसरी तरफ विपक्ष के विरोध पर बोला कि लोकसभा सत्ता पक्ष की वजह से नहीं चल रहा. सदन में नोंक झोंक टिका टिप्पणी होती रहती है यह आम बात है. हंसी मजाक होता है, कई गंभीर बातें भी आती है. हमें इतना ध्यान रखना चाहिए कि इसे पूरा राज्य और राष्ट्र देख रहा है. हमारा कैसा आचरण है, हम किस आचरण के साथ राज्य के लोगों के लिए दिशा तय करते हैं इसलिए इन्हें अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए. सदन में मुख्यमंत्री ने कहा, यह बात सच है कि गवर्नमेंट बहुमत से चलती है लेकिन सदन सहमति से चलता है. बीजेपी अब 1932 के समर्थन में होने की बात कहती है लेकिन बीजेपी का सदस्य ही 1932 का विरोध करता है. यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने एक तस्वीर भी दिखाई. मुख्यमंत्री ने पूछा कि यह 1932 के समर्थक है या 1985 के समर्थक हैं इन्हें यह बताना चाहिए. कल दिल्ली में एक पोस्टर लगा उसे लेकर कई लोगों को अरैस्ट किया गया लेकिन यहां भी कई लोग इसी तरह के पोस्टर लगा रहे हैं. यह हिंदुस्तान का आजादी के बाद पहली बार ऐसी स्थिति है. ऐसे में राष्ट्र विश्व गुरु कैसे बनेगा. जब हम झारखंड के लोगों के लिए थर्ड और फार्थ ग्रेड की जॉब के लिए कानून बनाते हैं तो यही लोग विरोध करते हैं. यह ढोंगी लोग है. वर्तमान गवर्नमेंट ना राज्य में किसी की जातपात पर राजनीति करती है ना इन्हें अलग ढंग से देखते हैं. मां को सबसे अधिक अपने कमजोर बच्चे की चिंता रहती है. हमारी भी यही सोच रही है. ये राजनीतिक, आर्थिक स्तर पर शक्तिशाली हैं औऱ यह आदिवासियों को कैसे पीछे किया जाए इस पर इनका ध्यान रहता है. आज जो हालात है राज्य गवर्नमेंट को केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है. हेमंत सोरेन ने कहा, आज जिस तरह प्रबंध चल रही है आने वाला समय बेहतर संकेत नहीं है. महंगाई में रॉकेट का इंजन लग गया है, यह ठहर नहीं रही है. पेट्रोल - डीजल की मूल्य आसमान पर है. आज कहीं पर भी एक भी स्थान बता दें जहां गरीब, किसान, मजदूर को राहत दिया हो. ये हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में चढ़ाने की बात करते थे सारे हवाई अड्डे बेच दिए. पांच रुपए का प्लेटफॉर्म टिकट सौ रुपए का हो गया. यदि इनके बजट में देखेंगे तो किसान सम्मान निधि का बजट घटा दिया गया है. किसान इस राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी है उनके कमर को तोड़ने का कोशिश कर रहे हैं. किसान ने लंबा विरोध किया और अब एक बार फिर किसान दिल्ली कूच करने का निर्णय ले रहे हैं. चंद लोगों की मुट्ठी में यह राष्ट्र है. आज विपक्ष जोरदार हमला कर रहा है तो संवैधानिक संस्थाओं को दुरुपयोग कर उनकी आवाज दबाने की प्रयास की जा रही है. हेमंत सोरेन ने कहा, अमृतकाल में कौन हैं जो अमृत पी रहे हैं, आज भी लोग जिल्लत की जीवन जी रहे हैं. यह कैसा अमृत काल है. इन लोगों ने गवर्नमेंट आते ही राष्ट्र में ऐसे - ऐसे कारनामे किए हैं कि ना किसान, ना मजदूर, ना व्यापारी अपने पैरों में खड़े नहीं हो पा रहा. पांच सालों में 76 फीसदी एमएसएमई को कोई फायदा नहीं हुआ आमदनी घट गयी. आज राष्ट्र में 45 करोड़ बेरोजगार हो गये हैं. ऐसा लगता है दो - पांच व्यापारी ही विधान बन गये हैं. इनके कार्यकाल में राष्ट्र में 12 लाख से अधिक व्यापारी ने खुदकुशी कर ली है. दस लाख करोड़ से अधिक इन्होंने अपने व्यापारियों साथियों का कर माफ कर दिया. आज रोजाना लगभग एक हजार लोग खुदकुशी कर रहे हैं. यह हालात किस वजह से पैदा हुई जो करने में नहीं बोलने में भरोसा रखता है. राष्ट्र में एक कहावत चला था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा, आज राष्ट्र में स्थिति है ना काम करूंगा ना करने दूंगा. गैर बीजेपी वाले राज्यों के साथ जो व्यवहार चल रहा है वो किसी से छिपा नहीं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, यही लोग है जो कहते थे कि झारखंड के युवा इतने योग्य नहीं है कि इन्हें जॉब मिले. यही लोग कहते थे. तपोवन मंदिर की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया. गवर्नमेंट ने 14 करोड़ रुपए की योजना उस स्थान को दी. ये लोग हिंदुओं के शत्रु है, यह हिंदु के नाम पर वोट बटोरते हैं, हमने पुरानी पेंशन बहाल किया. यह धमकी देते हैं कि राज्य का पैसा रोक लिया जायेगा. हम सरकारी कर्मचारी का पैसा शेयर बाजार पर लगाने के लिए नहीं छोड़ सकते. एक समय था जब 11 लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गये थे. हमने राज्यों में लोगों के भोजन की जिम्मेदारी अपने कांधे पर ली है. राज्य में पहले साढ़े छह लाख लोगों को पेंशन मिलता था आज 20 लाख 65 हजार लोगों को पेंशन मिलता है. आंदोलन की उपज यह राज्य है, कई सालों तक लोग आंदोलन करते रहे, आंदोलनकारियों को पेंशन देने के लिए समय नहीं मिला. इतना कुछ बेच डाला फिर भी उनके लिए पेंशन नहीं था.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज विधानसभा में नियोजन नीति, गवर्नमेंट की योजना सहित अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. विधानसभा में इस दौरान हेमंत सोरेन विरोधियों पर जमकर बरसे. हमारे एक हज़ार नौ सौ बत्तीस आधारित क्षेत्रीय नीति पर पर केंद्र निर्णय लेगा. हमारे आरक्षण पर भी केंद्र ही निर्णय लेगा. केंद्र के नेता आते हैं अपनी योजना का शिलान्यास करते हैं चले जाते हैं. राज्य गवर्नमेंट को सूचना तक नहीं देते. आज भी केंद्र गवर्नमेंट का एक कार्यक्रम चल रहा है लेकिन गवर्नमेंट के लोग सबसे नीचे की लिस्ट में है. सबको मान सम्मान से जीने का अधिकार है. इस एकता पर हमला हो रहा है. एक सांसद हमारी विधायक दीपिका पर भद्दी टिप्पणी करता है. मैं ये नहीं कहता की संज्ञान में ले लेकिन यह गंदी और भद्दी बात है. हमारे विपक्ष के लोगों को आचरण है वह इस राज्य को एक चारागाह के रूप में देख रहे हैं. विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, आज गैर बीजेपी शासित सीएम को राष्ट्र के बाहर जाने की इजाजत नहीं है. इन्होंने नेपाल तक जाने में पाबंदी बना रखा है. इन्होंने जो बाहर हवा फैला रखी है इन्हें डर है कहीं कोई जाकर उस गुब्बारे पर सुई ना मार दे. हमने नहीं किया किसी और ना कर दिया. आज जिन ऑफिसरों के विरूद्ध कार्रवाई हो रही है वो इनके साथ ही थे. इनके समय के पाप को हमारे मत्थे पर चढ़ाया जा रहा है. अभी तो राज्य ने चलना प्रारम्भ किया है. हेमंत सोरेन ने रोजगार के मामले पर बोला कि हम चाहते हैं कि तीसरे और चौथे दर्जे में झारखंड के लोगों को जॉब दें लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहे हैं. हम एकदम कट्टर विचारधारा वाले के लोग हैं. हमारी एक हज़ार नौ सौ बत्तीस के प्रति जो प्रयास है उसे हम जारी रहेंगे. हमें पता था कि अड़चन आयेगी, विपक्ष के माध्यम से अड़चन आयी. विपक्ष में ऐसा नहीं है कि सभी बाहरी है. इसमें कुछ मूलवासी और आदिवासी भी हैं. यह भी रोबोट की किरदार में है ऊपर से जो आदेश होता है उसके साथ ही यह चलते हैं. मरांडी, मुंडा ,महतो होना ही झारखंड का हितैषी होना नहीं है. यदि आप सच में झारखंड के हितैषी है तो आपको अपनी सीमा तय करनी होगी, आप किस पक्ष में हैं इस पक्ष में या उस पक्ष में. मुझे याद है कि एक हज़ार नौ सौ पचासी को लेकर नीति बनी थी. बहुत मिठाई बांटी गयी थी, अब हमसे प्रश्न है कि क्यों एक हज़ार नौ सौ बत्तीस नहीं लाते. हम लेकर आयें तो यह दूसरी तरफ खड़े हो जाते हैं. हमारे लिए प्रश्न है कि हम क्या करें. सहूलियत की राजनीति नहीं होनी चाहिए. सत्ताईस फीसदी का आरक्षण किसने राज्य में समाप्त किया. यदि विज्ञापन निकला भी तो न्यायालय कचहरी करके ये फंसा देते हैं. अभी जो वर्तमान स्थिति पैदा हुई है वो ऐसे ही नहीं हुई है. उन सभी चीजों का आंकलन करते हुए होगी. सीएम हेमंत सोरेन ने कहा,आपने बाहरियों को भर दिया है. कोडरमा में एक सौ तिहत्तर पदों में बाहरी हुई जिनमें तैंतालीस लोग बाहरी है. आज जेपीएससी में बहाली हुई है कितने फीसदी लोग बाहरी है गिन कर बता दीजिए. सीएम हेमंत सोरेन ने नियोजन नीति का जिक्र करते हुए बोला नीति भी समय पर आयेगी. आज जो समझौता हुआ उसे कमजोरी ना समझें. शेर का बच्चा लंबी छलांग के लिए दो कदम पीछे आया है. वो समय भी आयेगा. हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी के मुद्दे का जिक्र करते हुए बोला कि यह गलत है यह हालत नहीं होनी चाहिए कि लोग एक दूसरे की मर्डर कर दें. आज बोलने की आजादी नहीं है, आप बोलेंगे तो कारागार में डाल दिए जायेंगे. मदर ऑफ डेमोक्रेसी को फादर ऑफ पावर ने कुचल डाला है. अपने संबोधन की आरंभ करते हुए बोला कि विपक्ष ने कई प्रश्नों किए हैं. मैंने भी बोला था कि इसका उत्तर दूंगा. इस दौरान हंगामा जारी रहा. सीएम ने हेमंत सोरेन ने कहा, एक प्रश्न का उत्तर तो सुन लो भई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन के सभी सदस्यों को आने वाले त्योहार, सरहुल, रामनवमी, रमजान के लिए शुभकामनाएं देता हूं. मैं बोला से बात प्रारम्भ करू मैं समझ नहीं पा रहा हूं. हम कहां खड़े हैं मैं समझ नहीं पा रहा कि हम अमृत काल में खड़े हैं या आपात काल में खड़े हैं समझ नहीं पा रहा. कहावत है कि सियार शेर का खाल पहन लेगा तो शेर नहीं होगा, यही हाल विपक्ष का है. एक तरफ सीएम का संबोधन जारी था तो दूसरी तरफ विपक्ष के विरोध पर बोला कि लोकसभा सत्ता पक्ष की वजह से नहीं चल रहा. सदन में नोंक झोंक टिका टिप्पणी होती रहती है यह आम बात है. हंसी मजाक होता है, कई गंभीर बातें भी आती है. हमें इतना ध्यान रखना चाहिए कि इसे पूरा राज्य और राष्ट्र देख रहा है. हमारा कैसा आचरण है, हम किस आचरण के साथ राज्य के लोगों के लिए दिशा तय करते हैं इसलिए इन्हें अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए. सदन में मुख्यमंत्री ने कहा, यह बात सच है कि गवर्नमेंट बहुमत से चलती है लेकिन सदन सहमति से चलता है. बीजेपी अब एक हज़ार नौ सौ बत्तीस के समर्थन में होने की बात कहती है लेकिन बीजेपी का सदस्य ही एक हज़ार नौ सौ बत्तीस का विरोध करता है. यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने एक तस्वीर भी दिखाई. मुख्यमंत्री ने पूछा कि यह एक हज़ार नौ सौ बत्तीस के समर्थक है या एक हज़ार नौ सौ पचासी के समर्थक हैं इन्हें यह बताना चाहिए. कल दिल्ली में एक पोस्टर लगा उसे लेकर कई लोगों को अरैस्ट किया गया लेकिन यहां भी कई लोग इसी तरह के पोस्टर लगा रहे हैं. यह हिंदुस्तान का आजादी के बाद पहली बार ऐसी स्थिति है. ऐसे में राष्ट्र विश्व गुरु कैसे बनेगा. जब हम झारखंड के लोगों के लिए थर्ड और फार्थ ग्रेड की जॉब के लिए कानून बनाते हैं तो यही लोग विरोध करते हैं. यह ढोंगी लोग है. वर्तमान गवर्नमेंट ना राज्य में किसी की जातपात पर राजनीति करती है ना इन्हें अलग ढंग से देखते हैं. मां को सबसे अधिक अपने कमजोर बच्चे की चिंता रहती है. हमारी भी यही सोच रही है. ये राजनीतिक, आर्थिक स्तर पर शक्तिशाली हैं औऱ यह आदिवासियों को कैसे पीछे किया जाए इस पर इनका ध्यान रहता है. आज जो हालात है राज्य गवर्नमेंट को केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है. हेमंत सोरेन ने कहा, आज जिस तरह प्रबंध चल रही है आने वाला समय बेहतर संकेत नहीं है. महंगाई में रॉकेट का इंजन लग गया है, यह ठहर नहीं रही है. पेट्रोल - डीजल की मूल्य आसमान पर है. आज कहीं पर भी एक भी स्थान बता दें जहां गरीब, किसान, मजदूर को राहत दिया हो. ये हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में चढ़ाने की बात करते थे सारे हवाई अड्डे बेच दिए. पांच रुपए का प्लेटफॉर्म टिकट सौ रुपए का हो गया. यदि इनके बजट में देखेंगे तो किसान सम्मान निधि का बजट घटा दिया गया है. किसान इस राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी है उनके कमर को तोड़ने का कोशिश कर रहे हैं. किसान ने लंबा विरोध किया और अब एक बार फिर किसान दिल्ली कूच करने का निर्णय ले रहे हैं. चंद लोगों की मुट्ठी में यह राष्ट्र है. आज विपक्ष जोरदार हमला कर रहा है तो संवैधानिक संस्थाओं को दुरुपयोग कर उनकी आवाज दबाने की प्रयास की जा रही है. हेमंत सोरेन ने कहा, अमृतकाल में कौन हैं जो अमृत पी रहे हैं, आज भी लोग जिल्लत की जीवन जी रहे हैं. यह कैसा अमृत काल है. इन लोगों ने गवर्नमेंट आते ही राष्ट्र में ऐसे - ऐसे कारनामे किए हैं कि ना किसान, ना मजदूर, ना व्यापारी अपने पैरों में खड़े नहीं हो पा रहा. पांच सालों में छिहत्तर फीसदी एमएसएमई को कोई फायदा नहीं हुआ आमदनी घट गयी. आज राष्ट्र में पैंतालीस करोड़ बेरोजगार हो गये हैं. ऐसा लगता है दो - पांच व्यापारी ही विधान बन गये हैं. इनके कार्यकाल में राष्ट्र में बारह लाख से अधिक व्यापारी ने खुदकुशी कर ली है. दस लाख करोड़ से अधिक इन्होंने अपने व्यापारियों साथियों का कर माफ कर दिया. आज रोजाना लगभग एक हजार लोग खुदकुशी कर रहे हैं. यह हालात किस वजह से पैदा हुई जो करने में नहीं बोलने में भरोसा रखता है. राष्ट्र में एक कहावत चला था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा, आज राष्ट्र में स्थिति है ना काम करूंगा ना करने दूंगा. गैर बीजेपी वाले राज्यों के साथ जो व्यवहार चल रहा है वो किसी से छिपा नहीं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, यही लोग है जो कहते थे कि झारखंड के युवा इतने योग्य नहीं है कि इन्हें जॉब मिले. यही लोग कहते थे. तपोवन मंदिर की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया. गवर्नमेंट ने चौदह करोड़ रुपए की योजना उस स्थान को दी. ये लोग हिंदुओं के शत्रु है, यह हिंदु के नाम पर वोट बटोरते हैं, हमने पुरानी पेंशन बहाल किया. यह धमकी देते हैं कि राज्य का पैसा रोक लिया जायेगा. हम सरकारी कर्मचारी का पैसा शेयर बाजार पर लगाने के लिए नहीं छोड़ सकते. एक समय था जब ग्यारह लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गये थे. हमने राज्यों में लोगों के भोजन की जिम्मेदारी अपने कांधे पर ली है. राज्य में पहले साढ़े छह लाख लोगों को पेंशन मिलता था आज बीस लाख पैंसठ हजार लोगों को पेंशन मिलता है. आंदोलन की उपज यह राज्य है, कई सालों तक लोग आंदोलन करते रहे, आंदोलनकारियों को पेंशन देने के लिए समय नहीं मिला. इतना कुछ बेच डाला फिर भी उनके लिए पेंशन नहीं था.
यहां पास में एक मंदिर में उत्सव के दौरान हुई झड़प में मारे गए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता अरुण कुमार के घर पहुंचे मुरलीधरन ने माकपा से अपनी 'हिंसक राजनीति' को खत्म करने को कहा। कुछ दिन पहले एक गांव में मंदिर में हुए उत्सव के दौरान झड़प में घायल हुए अरुण कुमार (28) ने शुक्रवार को जिले के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कुमार पर माकपा और उसके युवा संगठन डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। मुरलीधरन ने यहां पत्रकारों से कहा, 'विडंबना यह है कि राजनीतिक विरोधियों की हत्या की होड़ में लगी माकपा ने राज्य के बजट में विश्व शांति के लिए दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्हें विश्व शांति को लेकर नाटक करने से पहले केरल में शांति कायम करने की जरूरत है। "
यहां पास में एक मंदिर में उत्सव के दौरान हुई झड़प में मारे गए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अरुण कुमार के घर पहुंचे मुरलीधरन ने माकपा से अपनी 'हिंसक राजनीति' को खत्म करने को कहा। कुछ दिन पहले एक गांव में मंदिर में हुए उत्सव के दौरान झड़प में घायल हुए अरुण कुमार ने शुक्रवार को जिले के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कुमार पर माकपा और उसके युवा संगठन डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। मुरलीधरन ने यहां पत्रकारों से कहा, 'विडंबना यह है कि राजनीतिक विरोधियों की हत्या की होड़ में लगी माकपा ने राज्य के बजट में विश्व शांति के लिए दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्हें विश्व शांति को लेकर नाटक करने से पहले केरल में शांति कायम करने की जरूरत है। "
कृषिक/अकृषिक 0.134 कृषिक/अकृषिक 0.253 कृषिक/अकृषिक 0.074 । हमीद अहमद, अब्दुल हमीद, मन्जूर अहमद पुत्रगण हनीफ, श्रीमती जिल्लू बेगम पत्नी हनीफ, मु० फरीदुदीन, मु० जहरदीन, मु० नसीरदीन, मु० अफीजुदीन पुत्रगण । मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, सुमन पत्नी ओमप्रकाश, श्रीमती सरस्वती मिश्रा पत्नी स्व. कृष्ण मुरारी, श्रीमती सरिता मिश्रा पत्नी रणजीत ग्राम । निवासी। सड़क पी0डब्ल्यू0डी0। विश्वनाथ, बैजनाथ, रामसुमेर, अमरनाथ पुत्रगण । जोखन, रामकिशुन, अरविन्द कुमार, राजीव कुमार । पुत्रगण शिवनाथ ग्राम निवासी । वीरू, साजिद अली पुत्रगण कोमल, इसलाम पुत्र वास । अली, रफील अहमद, मुस्तफा, हमीद पुत्रगण अनवर । अली, मु० अकील, मु0 शकील नाबा0 पुत्रगण समद संरक्षिका हजरतुननिशा, हजरतुननिशा पत्नी समद, । चन्द्रज्योति पत्नी बैजनाथ ग्राम निवासी लोक निमार्ण विभाग। । अदालत पुत्र सोमई, केदार प्रसाद, मोहन प्रसाद, । शिवकुमार पुत्रगण रामदुलारे, चतुर्गन, हरिश्चन्द्र, शिवचन्द पुत्रगण रामसवारे, रामकेश, मुन्नीलाल, । वीरेन्दर, जितेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र नाबा0 पुत्रगण गणेश संरक्षिका मु० सिमिरता माता पत्नी गणेश, श्रीमती कौसरनिशा पत्नी खलील, शाहआलम पुत्र जुल्हे आलम ग्राम निवासी। सड़क पी0डब्ल्यू0डी0। मु० रफील, मु० सफीक पुत्रगण रूआव अली, गनीउल्लह । पुत्र मो0 सफी, श्रीमती ममता पत्नी रामदास ग्राम निवासी। पी0डब्ल्यू0डी0। । इफ्तखार हुसेन, बरकत अली पुत्रगण किसमत अली, शायरा बानो पत्नी किसमत अली, असवारूल पुत्र अनवर । अली, श्रीमती मलका खातरीन पत्नी अनवर अली, कृषिक/अकृषिक 0.446 । अब्दुल हक, असलम, सद्दाम पुत्रगण शोहरत अली, खुशबुननिशा पत्नी शोहरत अली, इम्तियाज अली, तैयब । अली पुत्रगण हाफिज अली, रमजान अली गुफरान अली, लाल रहमान पुत्रगण जौवाद अली, मु० खराबुद्दीन, मु० जहरूदीन, मु० नसीरूदीन, मु० हफीजुदीन पुत्रगण मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, । शाबान पत्नी जौवाद ग्राम निवासी । । रामदुलारे, रामआसरे पुत्रगण गजराज, चतुर्गुन, । हरिश्चन्द, शिवचन्द पुत्रगण रामसवारे, श्रीमती तारादेवी । पत्नी रामसवारे ग्राम निवासी । । असबारूल पुत्र अनवर अली, श्रीमती मलका खातरिन पत्नी अनवर अली, इम्तियाज अली, तैयब अली पुत्रगण हाफिज अली, रमजान अली, गुफरान अली लाल रहमान । पुत्रगण जौल्वाद, अब्दुल हक, असलम, सद्दाम पुत्रगण । शोहरत अली, खुशबूनिशा पत्नी शोहरत अली, । सबरन्ननिशा पत्नी तैयब अली, मु० खरीबुद्दीन, मु० जहीरदीन, नसीरदीन, मु० हफीजुद्दीन पुत्रगण मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, शाबान पत्नी जौवाद अली ग्राम निवासी, सड़क पी0डब्ल्यू0डी0। (७८) बरकत अली, इसराक अली, मोहम्मद शाकीर अली । पुत्रगण मकबूल, घिसियावन पुत्र तहसील ग्राम निवासी । सड़क पी0डब्ल्यूडी । बरकत अली, इसराक अली, मोहम्मद शाकीर अली पुत्रगण मकबूल, घिसियावन पुत्र तहसील ग्राम निवासी । (८४) । सड़क जंगल
कृषिक/अकृषिक शून्य.एक सौ चौंतीस कृषिक/अकृषिक शून्य.दो सौ तिरेपन कृषिक/अकृषिक शून्य.चौहत्तर । हमीद अहमद, अब्दुल हमीद, मन्जूर अहमद पुत्रगण हनीफ, श्रीमती जिल्लू बेगम पत्नी हनीफ, मुशून्य फरीदुदीन, मुशून्य जहरदीन, मुशून्य नसीरदीन, मुशून्य अफीजुदीन पुत्रगण । मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, सुमन पत्नी ओमप्रकाश, श्रीमती सरस्वती मिश्रा पत्नी स्व. कृष्ण मुरारी, श्रीमती सरिता मिश्रा पत्नी रणजीत ग्राम । निवासी। सड़क पीशून्यडब्ल्यूशून्यडीशून्य। विश्वनाथ, बैजनाथ, रामसुमेर, अमरनाथ पुत्रगण । जोखन, रामकिशुन, अरविन्द कुमार, राजीव कुमार । पुत्रगण शिवनाथ ग्राम निवासी । वीरू, साजिद अली पुत्रगण कोमल, इसलाम पुत्र वास । अली, रफील अहमद, मुस्तफा, हमीद पुत्रगण अनवर । अली, मुशून्य अकील, मुशून्य शकील नाबाशून्य पुत्रगण समद संरक्षिका हजरतुननिशा, हजरतुननिशा पत्नी समद, । चन्द्रज्योति पत्नी बैजनाथ ग्राम निवासी लोक निमार्ण विभाग। । अदालत पुत्र सोमई, केदार प्रसाद, मोहन प्रसाद, । शिवकुमार पुत्रगण रामदुलारे, चतुर्गन, हरिश्चन्द्र, शिवचन्द पुत्रगण रामसवारे, रामकेश, मुन्नीलाल, । वीरेन्दर, जितेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र नाबाशून्य पुत्रगण गणेश संरक्षिका मुशून्य सिमिरता माता पत्नी गणेश, श्रीमती कौसरनिशा पत्नी खलील, शाहआलम पुत्र जुल्हे आलम ग्राम निवासी। सड़क पीशून्यडब्ल्यूशून्यडीशून्य। मुशून्य रफील, मुशून्य सफीक पुत्रगण रूआव अली, गनीउल्लह । पुत्र मोशून्य सफी, श्रीमती ममता पत्नी रामदास ग्राम निवासी। पीशून्यडब्ल्यूशून्यडीशून्य। । इफ्तखार हुसेन, बरकत अली पुत्रगण किसमत अली, शायरा बानो पत्नी किसमत अली, असवारूल पुत्र अनवर । अली, श्रीमती मलका खातरीन पत्नी अनवर अली, कृषिक/अकृषिक शून्य.चार सौ छियालीस । अब्दुल हक, असलम, सद्दाम पुत्रगण शोहरत अली, खुशबुननिशा पत्नी शोहरत अली, इम्तियाज अली, तैयब । अली पुत्रगण हाफिज अली, रमजान अली गुफरान अली, लाल रहमान पुत्रगण जौवाद अली, मुशून्य खराबुद्दीन, मुशून्य जहरूदीन, मुशून्य नसीरूदीन, मुशून्य हफीजुदीन पुत्रगण मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, । शाबान पत्नी जौवाद ग्राम निवासी । । रामदुलारे, रामआसरे पुत्रगण गजराज, चतुर्गुन, । हरिश्चन्द, शिवचन्द पुत्रगण रामसवारे, श्रीमती तारादेवी । पत्नी रामसवारे ग्राम निवासी । । असबारूल पुत्र अनवर अली, श्रीमती मलका खातरिन पत्नी अनवर अली, इम्तियाज अली, तैयब अली पुत्रगण हाफिज अली, रमजान अली, गुफरान अली लाल रहमान । पुत्रगण जौल्वाद, अब्दुल हक, असलम, सद्दाम पुत्रगण । शोहरत अली, खुशबूनिशा पत्नी शोहरत अली, । सबरन्ननिशा पत्नी तैयब अली, मुशून्य खरीबुद्दीन, मुशून्य जहीरदीन, नसीरदीन, मुशून्य हफीजुद्दीन पुत्रगण मोहरत अली, श्रीमती तरीकुननिशा पत्नी मोहरत अली, शाबान पत्नी जौवाद अली ग्राम निवासी, सड़क पीशून्यडब्ल्यूशून्यडीशून्य। बरकत अली, इसराक अली, मोहम्मद शाकीर अली । पुत्रगण मकबूल, घिसियावन पुत्र तहसील ग्राम निवासी । सड़क पीशून्यडब्ल्यूडी । बरकत अली, इसराक अली, मोहम्मद शाकीर अली पुत्रगण मकबूल, घिसियावन पुत्र तहसील ग्राम निवासी । । सड़क जंगल
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसने राजीव गाँधी हत्याकांड के दो संदिग्ध श्रीलंकाई नागरिकों को छोड़ देने को कहा था. सीबीआई का मानना है कि इन श्रीलंकाई नागरिकों ने 1991 में राजीव गाँधी की हत्या में प्रमुख भूमिका निभाई थी. सीबीआई की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में 25 अप्रैल के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस अपील में कहा गया है कि 'लिंगम और वसंथम की राजीव गाँधी हत्याकांड में भूमिका थी'. सीबीआई का कहना है कि विशेष जाँच दल की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि ये लोग एलटीटीई से नज़दीक से जुड़े थे. लिंगम और वसंथम को श्रीलंकाई शरणार्थियों के चेंगलपट्ट स्थित शिविर में रखा गया है. उन्हें वैध दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. राजीव हत्याकांड की जाँच कर रहे जैन आयोग ने सीबीआई से मल्टी डिस्पि्लनरी मॉनिटरिंग एजेंसी(एमडीएमए) गठित करने और 21 संदिग्ध लोगों की हत्याकांड में भूमिका की जाँच के लिए कहा था. सीबीआई की अपील में कहा गया है कि हालांकि 21 लोगों की सूची में इन दोनों के नाम नहीं हैं. लेकिन जाँच एजेंसियों को ऐसी सूचनाएँ मिलीं थीं जिनसे संदेह होता है कि इन लोगों की राजीव गाँधी हत्याकांड में बड़ी भूमिका थी. ग़ौरतलब है कि 1991 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक बम विस्फोट में राजीव गांधी की मौत हो गई थी.
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसने राजीव गाँधी हत्याकांड के दो संदिग्ध श्रीलंकाई नागरिकों को छोड़ देने को कहा था. सीबीआई का मानना है कि इन श्रीलंकाई नागरिकों ने एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में राजीव गाँधी की हत्या में प्रमुख भूमिका निभाई थी. सीबीआई की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में पच्चीस अप्रैल के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस अपील में कहा गया है कि 'लिंगम और वसंथम की राजीव गाँधी हत्याकांड में भूमिका थी'. सीबीआई का कहना है कि विशेष जाँच दल की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि ये लोग एलटीटीई से नज़दीक से जुड़े थे. लिंगम और वसंथम को श्रीलंकाई शरणार्थियों के चेंगलपट्ट स्थित शिविर में रखा गया है. उन्हें वैध दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. राजीव हत्याकांड की जाँच कर रहे जैन आयोग ने सीबीआई से मल्टी डिस्पि्लनरी मॉनिटरिंग एजेंसी गठित करने और इक्कीस संदिग्ध लोगों की हत्याकांड में भूमिका की जाँच के लिए कहा था. सीबीआई की अपील में कहा गया है कि हालांकि इक्कीस लोगों की सूची में इन दोनों के नाम नहीं हैं. लेकिन जाँच एजेंसियों को ऐसी सूचनाएँ मिलीं थीं जिनसे संदेह होता है कि इन लोगों की राजीव गाँधी हत्याकांड में बड़ी भूमिका थी. ग़ौरतलब है कि एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक बम विस्फोट में राजीव गांधी की मौत हो गई थी.
हरियाणा के सिरसा में शुक्रवार को जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल पहुंचे। उन्होंने कालांवाली में एक निजी सम्मान समारोह में शिरकत की। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा के बयानों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जगदीश झींडा कहते हैं कि उनका इस्तीफा DC और राज्यपाल ने लेना था। ऐसा में सवाल यह उठता है कि क्या झींडा कोई चीफ मिनिस्टर थोड़ा हैं जो उनका इस्तीफा राज्यपाल लेंगे। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष की कुर्सी सेवा की कुर्सी है जो सिख संगतों व मैंबरों ने उन्हें दी है। प्रदेश के गुरुद्वारों की देखभाल संभाल लें फिर चुनाव भी होंगे। झींडा अपनी प्रधानगी वाली कुर्सी को अच्छी तरह प्रेस करके तैयार कर लें और सिख संगतों और मैंबरों ने चाहा तो उन्हें प्रधानगी मिल जाएगी। जगदीश झींडा अपनी याददाश्त को खो चुके हैं, सुबह वाली बात दोपहर में भूल जाते हैं और दोपहर वाली बात शाम को भूल जाते हैं। झींडा गलत बयानबाजी बंद करें व चंडीगढ़ के हरियाणा भवन में हुई बातों को याद करें कि मिलकर प्रचार करेंगे व प्रदेश के गुरुद्वारों की देखभाल करेंगे। दादूवाल ने कहा कि आपसी कलह व फूट का लाभ बादल परिवार को होगा। जिससे वे प्रचार करेंगे कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी आपस में लड़ रहे हैं। दादूवाल के अनुसार वे कानून मुताबिक अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष पद के लिए नहीं सिख धर्म का प्रचार व सेवा के लिए काम कर रहे है। वह बिना अध्यक्ष के भी काम करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के सिरसा में शुक्रवार को जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल पहुंचे। उन्होंने कालांवाली में एक निजी सम्मान समारोह में शिरकत की। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा के बयानों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जगदीश झींडा कहते हैं कि उनका इस्तीफा DC और राज्यपाल ने लेना था। ऐसा में सवाल यह उठता है कि क्या झींडा कोई चीफ मिनिस्टर थोड़ा हैं जो उनका इस्तीफा राज्यपाल लेंगे। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष की कुर्सी सेवा की कुर्सी है जो सिख संगतों व मैंबरों ने उन्हें दी है। प्रदेश के गुरुद्वारों की देखभाल संभाल लें फिर चुनाव भी होंगे। झींडा अपनी प्रधानगी वाली कुर्सी को अच्छी तरह प्रेस करके तैयार कर लें और सिख संगतों और मैंबरों ने चाहा तो उन्हें प्रधानगी मिल जाएगी। जगदीश झींडा अपनी याददाश्त को खो चुके हैं, सुबह वाली बात दोपहर में भूल जाते हैं और दोपहर वाली बात शाम को भूल जाते हैं। झींडा गलत बयानबाजी बंद करें व चंडीगढ़ के हरियाणा भवन में हुई बातों को याद करें कि मिलकर प्रचार करेंगे व प्रदेश के गुरुद्वारों की देखभाल करेंगे। दादूवाल ने कहा कि आपसी कलह व फूट का लाभ बादल परिवार को होगा। जिससे वे प्रचार करेंगे कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी आपस में लड़ रहे हैं। दादूवाल के अनुसार वे कानून मुताबिक अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष पद के लिए नहीं सिख धर्म का प्रचार व सेवा के लिए काम कर रहे है। वह बिना अध्यक्ष के भी काम करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Happy Durga Navami 2019 (Maha Navami) Wishes Images, Messages, Photos, and Status: नवरात्रि के नौ दिनों में से सबसे महत्वपूर्ण दिन महा नवमी है। इस वर्ष, महा नवमी 7 अक्टूबर, 2019 को मनाई जाएगी। यह दिन देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच लंबे समय से चली आ रही लड़ाई का अंतिम दिन है। इस खास त्योहार पर आप अपनों को ग्रीटिंग्स, मैसेज और SMS के जरिए विश कर सकते हैं और उन्हें इस दिन के महत्व के बारे में बता सकते हैं। साथ ही उन्हें ढेर सारी बधाई भी दे सकते हैं।
Happy Durga Navami दो हज़ार उन्नीस Wishes Images, Messages, Photos, and Status: नवरात्रि के नौ दिनों में से सबसे महत्वपूर्ण दिन महा नवमी है। इस वर्ष, महा नवमी सात अक्टूबर, दो हज़ार उन्नीस को मनाई जाएगी। यह दिन देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच लंबे समय से चली आ रही लड़ाई का अंतिम दिन है। इस खास त्योहार पर आप अपनों को ग्रीटिंग्स, मैसेज और SMS के जरिए विश कर सकते हैं और उन्हें इस दिन के महत्व के बारे में बता सकते हैं। साथ ही उन्हें ढेर सारी बधाई भी दे सकते हैं।
विश्व एकादश की कमान दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस को सौंपी गई है। पाकिस्तान में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बहाली के लिए फ्लॉवर का काफी योगदान रहा है। उन्होंने कई खिलाडिय़ों से बात करके उन्हें पाकिस्तान में खेलने के लिए राजी किया। क्रिकइंफो ने फ्लॉवर के हवाले से लिखा है, शुरुआत में मुझे यह देखना था कि इस दौरान कौन-कौनसे खिलाड़ी व्यस्त हैं और शुरुआत में हमने तारीखें तय नहीं की थी तो यह थोड़ा मुश्किल था कि कौन उस समय उपलब्ध रहेगा। इसके बाद मैंने कुछ खिलाडिय़ों से संपर्क किया।
विश्व एकादश की कमान दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस को सौंपी गई है। पाकिस्तान में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बहाली के लिए फ्लॉवर का काफी योगदान रहा है। उन्होंने कई खिलाडिय़ों से बात करके उन्हें पाकिस्तान में खेलने के लिए राजी किया। क्रिकइंफो ने फ्लॉवर के हवाले से लिखा है, शुरुआत में मुझे यह देखना था कि इस दौरान कौन-कौनसे खिलाड़ी व्यस्त हैं और शुरुआत में हमने तारीखें तय नहीं की थी तो यह थोड़ा मुश्किल था कि कौन उस समय उपलब्ध रहेगा। इसके बाद मैंने कुछ खिलाडिय़ों से संपर्क किया।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! शुगर के लेवल को नियंत्रण में रखने के लिए डॉक्टर के सलाह के अनुसार डायट लें और नियमित रूप से व्यायाम करने की कोशिश करें। हमेशा अपने शुगर के स्तर की जाँच करें ताकि आप स्वस्थ जीवन जी सके। पढ़े- सेक्स करने का सही समय क्या होता है? डाइबीटिज के रोगी के लिए एक बहुत बड़ी समस्या यह होती है कि सेक्स के दौरान शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव होता रहता है। ब्लड-शुगर कम होने पर थकान महसूस होता है और हाई होने पर पुरूषों के इरेक्शन और महिलाओं के कामोत्तेजना में कमी आ जाती है। इसलिए सेक्स करने के पहले शुगर की जाँच कर लेने से मधुमेह रोगी सही तरह से सेक्स जीवन का आनंद उठा पायेंगे। मार्डन मेडिसन के जगत में हर समस्या का समाधान है। इस क्षेत्र में डॉक्टर से सलाह ले लेना ज़रूरी होता है। डॉक्टर से सलाह लेकर मधुमेहग्रस्त पुरूष सिलडेनालीफ (sildenafil), फॉस्फोडाएसटेरस इनहीबीटर्स (phosphodiesterase inhibitors) और वैसोडीलेटर्स (vasodilators) आदि दवाईयों का सेवन कर सकते हैं। इन दवाईयों से उनके लिंग में रक्त का प्रवाह अच्छी तरह से हो पाता है जिससे अच्छी तरह से इरेक्शन हो पाता है। सिलडेनफील (sildenafil) दवा से महिलाओं का सेक्स जीवन बेहतर हो पाता है। योनि सुखापन (vaginal dryness) की समस्या एस्ट्रोजन लुब्रीकेंट से ठीक किया जा सकता है। मधुमेह के समस्या से सिर्फ रोगी ही प्रभावित नहीं होता है इसके साथ उसका पार्टनर भी प्रभावित होता है। अपने साथी के साथ अपनी समस्या का जिक्र करने से आप समस्या को समाधान करने का रास्ता पा सकते हैं। सेक्स जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्यार होना ज़रूरी होता है। इसलिए रिश्ते को मजबूत करने के लिए एक दूसरे को समय दें और प्यार के पलों को एक साथ गुजारने की कोशिश कीजिए। हिन्दी के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिए हमारा हिन्दी सेक्शन देखिए। लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! शुगर के लेवल को नियंत्रण में रखने के लिए डॉक्टर के सलाह के अनुसार डायट लें और नियमित रूप से व्यायाम करने की कोशिश करें। हमेशा अपने शुगर के स्तर की जाँच करें ताकि आप स्वस्थ जीवन जी सके। पढ़े- सेक्स करने का सही समय क्या होता है? डाइबीटिज के रोगी के लिए एक बहुत बड़ी समस्या यह होती है कि सेक्स के दौरान शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव होता रहता है। ब्लड-शुगर कम होने पर थकान महसूस होता है और हाई होने पर पुरूषों के इरेक्शन और महिलाओं के कामोत्तेजना में कमी आ जाती है। इसलिए सेक्स करने के पहले शुगर की जाँच कर लेने से मधुमेह रोगी सही तरह से सेक्स जीवन का आनंद उठा पायेंगे। मार्डन मेडिसन के जगत में हर समस्या का समाधान है। इस क्षेत्र में डॉक्टर से सलाह ले लेना ज़रूरी होता है। डॉक्टर से सलाह लेकर मधुमेहग्रस्त पुरूष सिलडेनालीफ , फॉस्फोडाएसटेरस इनहीबीटर्स और वैसोडीलेटर्स आदि दवाईयों का सेवन कर सकते हैं। इन दवाईयों से उनके लिंग में रक्त का प्रवाह अच्छी तरह से हो पाता है जिससे अच्छी तरह से इरेक्शन हो पाता है। सिलडेनफील दवा से महिलाओं का सेक्स जीवन बेहतर हो पाता है। योनि सुखापन की समस्या एस्ट्रोजन लुब्रीकेंट से ठीक किया जा सकता है। मधुमेह के समस्या से सिर्फ रोगी ही प्रभावित नहीं होता है इसके साथ उसका पार्टनर भी प्रभावित होता है। अपने साथी के साथ अपनी समस्या का जिक्र करने से आप समस्या को समाधान करने का रास्ता पा सकते हैं। सेक्स जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्यार होना ज़रूरी होता है। इसलिए रिश्ते को मजबूत करने के लिए एक दूसरे को समय दें और प्यार के पलों को एक साथ गुजारने की कोशिश कीजिए। हिन्दी के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिए हमारा हिन्दी सेक्शन देखिए। लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।
चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने घोषणा की है कि भारत में पहला रेडमी टीवी 17 मार्च, 2021 को लॉन्च किया जाएगा। शाओमी इंडिया हेड मनु कुमार जैन ने हाल ही में रेडमी नोट 10 सीरीज लॉन्च के दौरान बताया कि रेडमी टीवी मॉडल्स भारत में भी लॉन्च किए जाएंगे। अब तक भारत में शाओमी का फोकस Mi स्मार्ट टीवी लाइनअप पर रहा है, जिसके ज्यादातर मॉडल्स को बजट और मिडरेंज प्राइस पर अलग-अलग स्क्रीन साइज में उतारा गया है। शाओमी ने रेडमी टीवी से जुड़ी ज्यादा जानकारी शेयर नहीं की है, हालांकि सामने आए पोस्टर में कंपनी ने 'XL एक्सपीरियंस' टीज किया है। कयास लग रहे है कि कंपनी के रेडमी सबब्रैंड का पहला टीवी प्रीमियम सेगमेंट में बड़े स्क्रीन साइज के साथ आ सकता है। भारत में रेडमी ने स्मार्टफोन्स के अलावा फिटनेस बैंड, इयरफोन्स और वायरलेस इयरबड्स भी लॉन्च किए हैं। स्मार्ट टीवी सेगमेंट में कदम रखना मौजूदा मार्केट ट्रेंड्स में बदलाव की कोशिश हो सकता है। कंपनी की होम कंट्री चीन में पहला रेडमी टीवी पिछले साल मार्च में लॉन्च किया गया था। इसके बाद कंपनी रेडमी स्मार्ट टीवी X50, रेडमी स्मार्ट टीवी X55, रेडमी स्मार्ट टीवी X65, रेडमी स्मार्ट टीवी A सीरीज और रेडमी स्मार्ट टीवी A65 लॉन्च कर चुकी है। हाल ही में रेडमी ने 86 इंच डिस्प्ले साइज वाला रेडमी स्मार्ट टीवी मैक्स UHD टीवी लॉन्च किया है, जिसका रीब्रैंडेड वर्जन भारतीय मार्केट में भी उतारा जा सकता है। चीन में बीते दिनों लॉन्च किए गए रेडमी टीवी के फीचर्स की बात करें तो इसमें LED-बैकलिट स्क्रीन HDR सपोर्ट के साथ दी गई है। 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आने वाले बड़े डिस्प्ले के अलावा इसमें डॉल्बी एटमॉस, DTS-HD सपोर्ट और 25W का साउंड आउटपुट मिलता है। क्वॉड-कोर CPU के साथ आने वाला यह स्मार्ट टीवी 2GB रैम और 32GB इंटरनल स्टोरेज देता है। चीन में कंपनी इसे MIUI TV 3. 0 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ लेकर आई है। अगर यूजर्स भारत में बड़ी स्क्रीन वाला स्मार्ट टीवी खरीदना चाहते हैं तो सैमसंग और LG जैसी कंपनियों की ओर से विकल्प मिलते हैं, जिनकी कीमत ज्यादा है। वहीं, शाओमी का सबसे बड़े डिस्प्ले साइज वाला टीवी 55 इंच स्क्रीन के साथ आता है। संभव है कि 86 इंच डिस्प्ले साइज वाले नए रेडमी टीवी को भारतीय मार्केट में 'XL एक्सपीरियंस' देने के लिए लॉन्च किया जाए। चीन में इसकी कीमत 7,999 युआन (लगभग 91,000 रुपये) रखी गई है।
चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने घोषणा की है कि भारत में पहला रेडमी टीवी सत्रह मार्च, दो हज़ार इक्कीस को लॉन्च किया जाएगा। शाओमी इंडिया हेड मनु कुमार जैन ने हाल ही में रेडमी नोट दस सीरीज लॉन्च के दौरान बताया कि रेडमी टीवी मॉडल्स भारत में भी लॉन्च किए जाएंगे। अब तक भारत में शाओमी का फोकस Mi स्मार्ट टीवी लाइनअप पर रहा है, जिसके ज्यादातर मॉडल्स को बजट और मिडरेंज प्राइस पर अलग-अलग स्क्रीन साइज में उतारा गया है। शाओमी ने रेडमी टीवी से जुड़ी ज्यादा जानकारी शेयर नहीं की है, हालांकि सामने आए पोस्टर में कंपनी ने 'XL एक्सपीरियंस' टीज किया है। कयास लग रहे है कि कंपनी के रेडमी सबब्रैंड का पहला टीवी प्रीमियम सेगमेंट में बड़े स्क्रीन साइज के साथ आ सकता है। भारत में रेडमी ने स्मार्टफोन्स के अलावा फिटनेस बैंड, इयरफोन्स और वायरलेस इयरबड्स भी लॉन्च किए हैं। स्मार्ट टीवी सेगमेंट में कदम रखना मौजूदा मार्केट ट्रेंड्स में बदलाव की कोशिश हो सकता है। कंपनी की होम कंट्री चीन में पहला रेडमी टीवी पिछले साल मार्च में लॉन्च किया गया था। इसके बाद कंपनी रेडमी स्मार्ट टीवी Xपचास, रेडमी स्मार्ट टीवी Xपचपन, रेडमी स्मार्ट टीवी Xपैंसठ, रेडमी स्मार्ट टीवी A सीरीज और रेडमी स्मार्ट टीवी Aपैंसठ लॉन्च कर चुकी है। हाल ही में रेडमी ने छियासी इंच डिस्प्ले साइज वाला रेडमी स्मार्ट टीवी मैक्स UHD टीवी लॉन्च किया है, जिसका रीब्रैंडेड वर्जन भारतीय मार्केट में भी उतारा जा सकता है। चीन में बीते दिनों लॉन्च किए गए रेडमी टीवी के फीचर्स की बात करें तो इसमें LED-बैकलिट स्क्रीन HDR सपोर्ट के साथ दी गई है। एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ आने वाले बड़े डिस्प्ले के अलावा इसमें डॉल्बी एटमॉस, DTS-HD सपोर्ट और पच्चीस वाट का साउंड आउटपुट मिलता है। क्वॉड-कोर CPU के साथ आने वाला यह स्मार्ट टीवी दोGB रैम और बत्तीसGB इंटरनल स्टोरेज देता है। चीन में कंपनी इसे MIUI TV तीन. शून्य ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ लेकर आई है। अगर यूजर्स भारत में बड़ी स्क्रीन वाला स्मार्ट टीवी खरीदना चाहते हैं तो सैमसंग और LG जैसी कंपनियों की ओर से विकल्प मिलते हैं, जिनकी कीमत ज्यादा है। वहीं, शाओमी का सबसे बड़े डिस्प्ले साइज वाला टीवी पचपन इंच स्क्रीन के साथ आता है। संभव है कि छियासी इंच डिस्प्ले साइज वाले नए रेडमी टीवी को भारतीय मार्केट में 'XL एक्सपीरियंस' देने के लिए लॉन्च किया जाए। चीन में इसकी कीमत सात,नौ सौ निन्यानवे युआन रखी गई है।
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्सपा) को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इन क्षेत्रों को 'अशांत क्षेत्रों' के रूप में अधिसूचित किया है। गृह मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है अफ्सपा को अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलंग और लोंगडिंग जिलों में और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थाना क्षेत्रों में 31 मार्च 2019 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार, अब, अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्सपा) 1958 की धारा 3 के तहत 1 अक्टूबर 2018 से 31 मार्च 2019 तक, जब तक कि इस अवधि से पहले इसे हटा नहीं लिया जाता, अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है। म्यांमार की सीमा से लगे इन तीन जिलों को जनवरी 2016 में अफस्पा के अधीन लाया गया था। सरकार ने 1 अप्रैल को अपने पहले की अधिसूचना में इन तीन जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थानों के क्षेत्रों को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया था। ये आठ पुलिस थाने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम केमांग जिले के बालेमु और भालुकपोंग, पूर्वी केमांग जिले में सिजोसा, पपुमपारे जिले में बलीजान, नामसाई जिले में नामसाई और महादेवपुर, निचले दिबांग घाटी जिले में रोइंग और लोहित जिले में सुनपुरा है। गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार यह निर्णय राज्य के इन तीन जिलों और आठ पुलिस स्टेशन की कानून व व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया है।
नई दिल्ली, तीन अक्टूबर । केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में सशस्त्र बल अधिनियम को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इन क्षेत्रों को 'अशांत क्षेत्रों' के रूप में अधिसूचित किया है। गृह मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है अफ्सपा को अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलंग और लोंगडिंग जिलों में और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थाना क्षेत्रों में इकतीस मार्च दो हज़ार उन्नीस तक के लिए बढ़ा दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार, अब, अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को सशस्त्र बल अधिनियम एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन की धारा तीन के तहत एक अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह से इकतीस मार्च दो हज़ार उन्नीस तक, जब तक कि इस अवधि से पहले इसे हटा नहीं लिया जाता, अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है। म्यांमार की सीमा से लगे इन तीन जिलों को जनवरी दो हज़ार सोलह में अफस्पा के अधीन लाया गया था। सरकार ने एक अप्रैल को अपने पहले की अधिसूचना में इन तीन जिलों और असम की सीमा से लगे आठ पुलिस थानों के क्षेत्रों को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया था। ये आठ पुलिस थाने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम केमांग जिले के बालेमु और भालुकपोंग, पूर्वी केमांग जिले में सिजोसा, पपुमपारे जिले में बलीजान, नामसाई जिले में नामसाई और महादेवपुर, निचले दिबांग घाटी जिले में रोइंग और लोहित जिले में सुनपुरा है। गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार यह निर्णय राज्य के इन तीन जिलों और आठ पुलिस स्टेशन की कानून व व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया है।
नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) के इलाज के लिए दुनिया में डॉक्टर, वैज्ञानिक और तमाम शोधकर्ता गहन शोध में लगे हैं. इसके साथ ही पूरी दुनिया इसके प्रसार को रोकने के लिए भी पूरी कोशिशें कर रही है. इन्हीं में से एक शोध में वैज्ञानिक हवा, पानी और तमाम सतहों पर कोरोना वायरस को खत्म करने के तरीके खोजने में लगे हैं. सांता बारबरा के सॉलिड स्टेट लाइटिंग और एनर्जी इलेक्ट्रॉनिक सेंटर (SSLEEC) के शोधकर्ता एक ऐसी एलईडी बनाने की कोशिश में लगे हैं जो हवा और पानी सहित सभी सतहों को सार्स कोव-2 से संक्रमण मुक्त (decontaminate) कर सकती है. शोधकर्ताओं को अल्ट्रावॉयलेट (UV) एलईडी से बहुत उम्मीदें हैं. शोध में शामिल क्रिस्चियन जोलनर इस तकनीक के सैनेटाइजेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया में उपयोग पर सालों से काम रहे हैं. उनका कहना है कि चिकित्सकीय क्षेत्र में अल्ट्रावॉयलेट डिस्इंफेक्शन उत्पादों का एक बाजार पहले ही मौजूद है. हाल ही में नोवल कोरोना वायरस को अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से बेअसर करने की शक्ति पर लोगों का ध्यान गया है. अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से संक्रमण मुक्त करने की तकनीक दुनिया में नई नहीं है. सार्स कोव-2 के मामले में अभी बड़े पैमाने पर इस तकनीक की उपयोगिता साबित नहीं हुई है फिर भी SSLEEC की एक सहायक कंपनी ने हाल ही में बताया है कि अल्ट्रावॉयलेट एलईडी उत्पादों से केवल 30 सेकेंड में ही इस वायरस का 99. 9 प्रतिशत कीटाणुशोधन (sterilization) हो सकता है. अल्ट्रावॉलेट प्रकाश कई तरह के होते हैं. इनमें से यूवी-ए और यूवी-बी सूर्य से आने वाली किरणों के साथ आते हैं जबकि यूवी-सी मानव निर्मित उपकरणों से ही बनता हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार उच्च स्तरीय यूवी सी एलईडी एल्यूमीनियम गैलियम नाइट्राइड की सतह परसिलकॉन कार्बाइड के एक प्रारूप (Substrate) लगाकर उच्च गुणवत्ता यूवीसी मिलती है. आमतौर पर इस तरह की तकनीक का उपयोग वाटर प्यूरीफायर्स में किया जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यूवी-सी एलईडी तकनीक लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के अभियान में गेम चेंजर हो सकती है. इस तकनीक से अब तक इस्तेमाल की जा रही यूवीसी तकनीकों से सस्ती आसान और सुलभ होगी. प्रो. जोलनर के मुताबकि इस तकनीक को ऐसे सिस्टम से भी जोड़ा जा सकता है जो तभी काम करे जब आसपास कोई न हो. उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर भी यह पानी को सस्ते में, बिना किसी केमिकल के साफ करने की आसान सुविधा मिलेगी. यह कोविड19 के मामले में भी एक गेम चेंजर हो सकती है. जोलनर के साथी फिलहाल किफायती और सटीक यूवी-सी लाइट एमिटर्स के उत्पादन पर अपना ध्यान लगा रहे हैं. यूवी सी किरणें इंसानों के लिए हानिकारक नहीं हैं ऐसा नहीं है. 260-285 नैनो मीटर रेंज की ये किरणें अभी डिस्इंफेक्शन तकनीक में प्रयोग में लाई जा रही हैं. ये इंसानी त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. बेशक नियंत्रित हालातों में जहां इन किरणों के मानवीय संपर्क में आनी की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाए, वहां उपयोगिता बहुत दिखाई देती है. ऐसा वाटर प्यूरीफायर्स में होता है और ऐसे मामलों में प्रयोग सफल भी हो सकता है. वहीं मेडिकल उपकरणों को नियंत्रित हालातों में सैनेटाइज करने के काम में यह तकनीक बहुत कारगर होगी इसमें कोई शक नहीं है. इसके अलावा इस तकनीक का सुरक्षित तरीके से उपयोग कब और कैसे हो सकता है यह भी एक अलग शोध का विषय है. तमाम आशंकाओं के बाद भी जहां सार्स कोव-2 का संक्रमण अभी तक नहीं रुक पा रहा है, इस शोध के नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं. Coronavirus: जानें चीन ने रूस से आने वालों की सूचना देने पर क्यो रखा इनाम? .
नई दिल्ली. कोरोना वायरस के इलाज के लिए दुनिया में डॉक्टर, वैज्ञानिक और तमाम शोधकर्ता गहन शोध में लगे हैं. इसके साथ ही पूरी दुनिया इसके प्रसार को रोकने के लिए भी पूरी कोशिशें कर रही है. इन्हीं में से एक शोध में वैज्ञानिक हवा, पानी और तमाम सतहों पर कोरोना वायरस को खत्म करने के तरीके खोजने में लगे हैं. सांता बारबरा के सॉलिड स्टेट लाइटिंग और एनर्जी इलेक्ट्रॉनिक सेंटर के शोधकर्ता एक ऐसी एलईडी बनाने की कोशिश में लगे हैं जो हवा और पानी सहित सभी सतहों को सार्स कोव-दो से संक्रमण मुक्त कर सकती है. शोधकर्ताओं को अल्ट्रावॉयलेट एलईडी से बहुत उम्मीदें हैं. शोध में शामिल क्रिस्चियन जोलनर इस तकनीक के सैनेटाइजेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया में उपयोग पर सालों से काम रहे हैं. उनका कहना है कि चिकित्सकीय क्षेत्र में अल्ट्रावॉयलेट डिस्इंफेक्शन उत्पादों का एक बाजार पहले ही मौजूद है. हाल ही में नोवल कोरोना वायरस को अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से बेअसर करने की शक्ति पर लोगों का ध्यान गया है. अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश से संक्रमण मुक्त करने की तकनीक दुनिया में नई नहीं है. सार्स कोव-दो के मामले में अभी बड़े पैमाने पर इस तकनीक की उपयोगिता साबित नहीं हुई है फिर भी SSLEEC की एक सहायक कंपनी ने हाल ही में बताया है कि अल्ट्रावॉयलेट एलईडी उत्पादों से केवल तीस सेकेंड में ही इस वायरस का निन्यानवे. नौ प्रतिशत कीटाणुशोधन हो सकता है. अल्ट्रावॉलेट प्रकाश कई तरह के होते हैं. इनमें से यूवी-ए और यूवी-बी सूर्य से आने वाली किरणों के साथ आते हैं जबकि यूवी-सी मानव निर्मित उपकरणों से ही बनता हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार उच्च स्तरीय यूवी सी एलईडी एल्यूमीनियम गैलियम नाइट्राइड की सतह परसिलकॉन कार्बाइड के एक प्रारूप लगाकर उच्च गुणवत्ता यूवीसी मिलती है. आमतौर पर इस तरह की तकनीक का उपयोग वाटर प्यूरीफायर्स में किया जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यूवी-सी एलईडी तकनीक लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के अभियान में गेम चेंजर हो सकती है. इस तकनीक से अब तक इस्तेमाल की जा रही यूवीसी तकनीकों से सस्ती आसान और सुलभ होगी. प्रो. जोलनर के मुताबकि इस तकनीक को ऐसे सिस्टम से भी जोड़ा जा सकता है जो तभी काम करे जब आसपास कोई न हो. उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर भी यह पानी को सस्ते में, बिना किसी केमिकल के साफ करने की आसान सुविधा मिलेगी. यह कोविडउन्नीस के मामले में भी एक गेम चेंजर हो सकती है. जोलनर के साथी फिलहाल किफायती और सटीक यूवी-सी लाइट एमिटर्स के उत्पादन पर अपना ध्यान लगा रहे हैं. यूवी सी किरणें इंसानों के लिए हानिकारक नहीं हैं ऐसा नहीं है. दो सौ साठ-दो सौ पचासी नैनो मीटर रेंज की ये किरणें अभी डिस्इंफेक्शन तकनीक में प्रयोग में लाई जा रही हैं. ये इंसानी त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. बेशक नियंत्रित हालातों में जहां इन किरणों के मानवीय संपर्क में आनी की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाए, वहां उपयोगिता बहुत दिखाई देती है. ऐसा वाटर प्यूरीफायर्स में होता है और ऐसे मामलों में प्रयोग सफल भी हो सकता है. वहीं मेडिकल उपकरणों को नियंत्रित हालातों में सैनेटाइज करने के काम में यह तकनीक बहुत कारगर होगी इसमें कोई शक नहीं है. इसके अलावा इस तकनीक का सुरक्षित तरीके से उपयोग कब और कैसे हो सकता है यह भी एक अलग शोध का विषय है. तमाम आशंकाओं के बाद भी जहां सार्स कोव-दो का संक्रमण अभी तक नहीं रुक पा रहा है, इस शोध के नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं. Coronavirus: जानें चीन ने रूस से आने वालों की सूचना देने पर क्यो रखा इनाम? .
नोएडा. राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में बड़ा दर्दनाक हादसा हुआ है. कार और ट्रैक्टर की आमने-सामने भिड़ंत में कार सवार मां और बेटे की दर्दनाक मौत हो गई है. वहीं हादसे में ट्रैक्टर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं. यह हादसा दनकौर के अट्टा गुजरान के पास हुआ. जानकारी के मुताबिक, हाइवे पर स्विफ्ट कार और ट्रैक्टर की आमने सामने की भीषण टक्कर हुई है. हादसे में कार सवार मां बेटे की मौके पर ही मौत हो गई. ट्रैक्टर सवार दो युवक घायल है. घायलों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. कार सवार युवक अपनी मां को मेरठ से दवा दिलाकर फरीदाबाद अपने घर लौट रहा था. ये एक्सीडेंट अट्टा गुजरान गांव के पास हुआ है. ये दनकौर थाना क्षेत्र के ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे की घटना है.
नोएडा. राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में बड़ा दर्दनाक हादसा हुआ है. कार और ट्रैक्टर की आमने-सामने भिड़ंत में कार सवार मां और बेटे की दर्दनाक मौत हो गई है. वहीं हादसे में ट्रैक्टर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं. यह हादसा दनकौर के अट्टा गुजरान के पास हुआ. जानकारी के मुताबिक, हाइवे पर स्विफ्ट कार और ट्रैक्टर की आमने सामने की भीषण टक्कर हुई है. हादसे में कार सवार मां बेटे की मौके पर ही मौत हो गई. ट्रैक्टर सवार दो युवक घायल है. घायलों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. कार सवार युवक अपनी मां को मेरठ से दवा दिलाकर फरीदाबाद अपने घर लौट रहा था. ये एक्सीडेंट अट्टा गुजरान गांव के पास हुआ है. ये दनकौर थाना क्षेत्र के ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे की घटना है.
वग्गणाहिं च केवडियं खेत्तं फोसिढं ? लोगस्स असंखेज्जदिभागो सव्वलोगो वा । असं खेज्जपदसियदव्ववग्गण पहुडि जाव सुहुमणिगोदवग्गणे त्ति ताव एदासिं वग्गणाणमेगसेडीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? अदीदवमाणेण सव्वलोगो । महाखंघदव्ववग्गणाए केवडियं खेत्तं फोसिदं १ वट्टमाणेणं लोगो देमणो । अदीदेण सव्वलोगो । एवं णाणासेडिफोसणं परूत्रेयव्वं । णवरि परमाणुपोग्गलदव्यवग्गणप्पगुडि जाव सुहमणिगोदवग्गणे त्ति ताव एदाहि वग्गणाहि केवडियं खेत्तं फोसिद ? सव्वलोगो । महाखंघदव्ववग्गणाए केवडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगो दमणो सव्वलोगो वा । एवं पोसणाणुगमो त्ति समत्तमणियोगद्दार । एग सेडिकालाणुगमेण परमाणुपोग्गलदव्ववग्गणा केवचिरं कालादो होदि ? वग्गणादेसेण सव्वद्धा । दुपदेसियवग्गणप्प हुडि जात्र धुवखंघदव्ववग्गणे त्ति ताव पत्तेयं पत्तेयं एवं चैव सव्वत्थ वत्तव्वा । अचित्तअद्भुवखंधव्यवग्गणा केवचिरं कालादो होदि ? जहण्णेण एगसमयं, उक्कस्सेण अणंतकालमसंखेज्जा पोग्गलपरियट्टा । एवं णेयव्वं जाव महाखंघद्रव्ववग्गणे त्ति । पत्तेयसीर-वादरणिगोद-सुहुमणिगांद्वग्गणाणमोरालिय-तेजा- कम्मइयपरमाणुपोग्गले हि तेसि विस्सासुवचयपोग्गलेहि य भेदसंघादं द्रव्य वर्गकितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है। लोकके असंख्यातवें भाग उमाण और सब लोकनमारण क्षेत्रका स्पर्शन किया है। असंख्यातप्रदेशी द्रव्यवर्गणा से लेकर सूक्ष्मनिगांद द्रव्यवर्गणा तक इन वर्गणाओकी एक श्रेरिंगने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? अतीत और वर्तमान कालमं सब लोकका स्पर्शन किया है। महास्कन्धद्रव्यवर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? वर्तमान में कुछ कम लोकप्रमाण क्षेत्रका और अतीत काल में सब लोकका स्पर्शन किया है। इसी प्रकार नाना एका स्पर्शन कहना चाहिए । इतनी विशेषता है कि परमाणुपुद्गलद्रव्यवर्गणावे लेकर सूक्ष्मनिगांदवर्गरणा तक इन वर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? सब लोकप्रमाण क्षेत्रका स्पर्शन किया है। महास्कन्धद्रव्यवर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? कुछ कम लोकप्रमाण क्षेत्रका और सब लोकका स्पर्शन किया है । इस प्रकार स्पर्शनानुगम अनुयोगद्वार समाप्त हुआ । एकश्रेणिकालानुगमकी अपेक्षा परमाणुपुद्गलद्रव्य वर्गरणाका कितना काल है ? वगणादेशकी अपेक्षा सब काल है। द्विदेशी वर्गणा से लेकर ध्रुवम्कन्धद्रव्यवर्गरणा तक प्रत्येक वर्गणाका सर्वत्र इसी प्रकार काल कहना चाहिए । अचित्तध्रुवस्कन्धद्रव्यवर्गणाका कितना काल है ? जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट अनन्त काल है जो असंख्यात पुद्गल परिवर्तनप्रमाण है। इसीप्रकार महास्कन्धद्रव्यवर्गणा तक जानना चाहिए । प्रत्येकशरीर, बादरनिगांद और सूक्ष्मनिगोद वर्गरणाओ के औदारिकशरीर, तैजसशरीर और कार्मरणशरीरोंके पुद्गलों द्वारा तथा उनके विखसोपचयों १. प्र०का०प्रत्योः 'महासंघदनवग्गणाए केवडियं खत्तं फोसिदं श्री महास्वंबदव्यवग्गणाए केवडियं वत्तं फॉसिदं माण' इति पाठः ।
वग्गणाहिं च केवडियं खेत्तं फोसिढं ? लोगस्स असंखेज्जदिभागो सव्वलोगो वा । असं खेज्जपदसियदव्ववग्गण पहुडि जाव सुहुमणिगोदवग्गणे त्ति ताव एदासिं वग्गणाणमेगसेडीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? अदीदवमाणेण सव्वलोगो । महाखंघदव्ववग्गणाए केवडियं खेत्तं फोसिदं एक वट्टमाणेणं लोगो देमणो । अदीदेण सव्वलोगो । एवं णाणासेडिफोसणं परूत्रेयव्वं । णवरि परमाणुपोग्गलदव्यवग्गणप्पगुडि जाव सुहमणिगोदवग्गणे त्ति ताव एदाहि वग्गणाहि केवडियं खेत्तं फोसिद ? सव्वलोगो । महाखंघदव्ववग्गणाए केवडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगो दमणो सव्वलोगो वा । एवं पोसणाणुगमो त्ति समत्तमणियोगद्दार । एग सेडिकालाणुगमेण परमाणुपोग्गलदव्ववग्गणा केवचिरं कालादो होदि ? वग्गणादेसेण सव्वद्धा । दुपदेसियवग्गणप्प हुडि जात्र धुवखंघदव्ववग्गणे त्ति ताव पत्तेयं पत्तेयं एवं चैव सव्वत्थ वत्तव्वा । अचित्तअद्भुवखंधव्यवग्गणा केवचिरं कालादो होदि ? जहण्णेण एगसमयं, उक्कस्सेण अणंतकालमसंखेज्जा पोग्गलपरियट्टा । एवं णेयव्वं जाव महाखंघद्रव्ववग्गणे त्ति । पत्तेयसीर-वादरणिगोद-सुहुमणिगांद्वग्गणाणमोरालिय-तेजा- कम्मइयपरमाणुपोग्गले हि तेसि विस्सासुवचयपोग्गलेहि य भेदसंघादं द्रव्य वर्गकितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है। लोकके असंख्यातवें भाग उमाण और सब लोकनमारण क्षेत्रका स्पर्शन किया है। असंख्यातप्रदेशी द्रव्यवर्गणा से लेकर सूक्ष्मनिगांद द्रव्यवर्गणा तक इन वर्गणाओकी एक श्रेरिंगने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? अतीत और वर्तमान कालमं सब लोकका स्पर्शन किया है। महास्कन्धद्रव्यवर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? वर्तमान में कुछ कम लोकप्रमाण क्षेत्रका और अतीत काल में सब लोकका स्पर्शन किया है। इसी प्रकार नाना एका स्पर्शन कहना चाहिए । इतनी विशेषता है कि परमाणुपुद्गलद्रव्यवर्गणावे लेकर सूक्ष्मनिगांदवर्गरणा तक इन वर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? सब लोकप्रमाण क्षेत्रका स्पर्शन किया है। महास्कन्धद्रव्यवर्गरणाने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? कुछ कम लोकप्रमाण क्षेत्रका और सब लोकका स्पर्शन किया है । इस प्रकार स्पर्शनानुगम अनुयोगद्वार समाप्त हुआ । एकश्रेणिकालानुगमकी अपेक्षा परमाणुपुद्गलद्रव्य वर्गरणाका कितना काल है ? वगणादेशकी अपेक्षा सब काल है। द्विदेशी वर्गणा से लेकर ध्रुवम्कन्धद्रव्यवर्गरणा तक प्रत्येक वर्गणाका सर्वत्र इसी प्रकार काल कहना चाहिए । अचित्तध्रुवस्कन्धद्रव्यवर्गणाका कितना काल है ? जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट अनन्त काल है जो असंख्यात पुद्गल परिवर्तनप्रमाण है। इसीप्रकार महास्कन्धद्रव्यवर्गणा तक जानना चाहिए । प्रत्येकशरीर, बादरनिगांद और सूक्ष्मनिगोद वर्गरणाओ के औदारिकशरीर, तैजसशरीर और कार्मरणशरीरोंके पुद्गलों द्वारा तथा उनके विखसोपचयों एक. प्रशून्यकाशून्यप्रत्योः 'महासंघदनवग्गणाए केवडियं खत्तं फोसिदं श्री महास्वंबदव्यवग्गणाए केवडियं वत्तं फॉसिदं माण' इति पाठः ।
-नारदसंहिता । जन्मराश्यष्टमझेंषु दोषा नश्यंति भावतः ॥ क्रूरग्रहेक्षितो युक्तो द्विस्वभावोपि भंगदः ॥ २२ ॥ फिर वे जन्मलग्रमें तथा आठवें घरमें स्थित होवें तो स्वभावमे ही सब दोष नष्ट होजाते हैं और क्रूरग्रहमे युक्त तथा दृष्ट पापग्रह कार्यको भंग करता है ।। २२ ॥ बाने शभरदृष्टश्च शुभयुक्तेक्षितः शुभः ।। वस्वंत्यादिपच संग्रहे तृणकाष्ठयोः ।। याम्यदिग्गमनं शय्या कुर्यान्त्री गृहगोपनम् ॥ २३ ॥ गमनसमय वह पापग्रह शुभग्रहों से दृष्ट नहीं हो तो अशुभ है और शुभमहामे युक्त तथा दृष्ट हो तो शुभ जानना। और अनिष्टशका अर्ध उत्तरर्भाग आदि, रेवतीपर्यंत पांच नक्षत्र पंचक कहलाते हैं तिनमे तृण काठ आदिका संग्रह नहीं करना और दक्षिणदिशामें गमन नहीं करना, शय्या नहीं बनानी, घर नहीं छावना ।। २३ ।। जन्मोदये लग्नगते दिग्लग्ने लग्नगोपि वा ।। शुभे चतुर्षु केंद्रेपु याते शत्रुक्षयो भवेत् ॥ २४ ॥ जन्मलग्न शुभग्रहों से युक्तहो तिस लग्नमें अथवा दिग्वारि लग्नमें तथा शुभग्रह चारों केंद्रों में प्राप्त होनके समय गमन करे तो शत्रु नष्ट होवें ।। २४ ।। शीर्षोदये लग्नगते दिग्लने लग्नतोपि वा ।। शुभवर्गेथ वा लग्ने यातुः शत्रुक्षयो भवेत् ॥ २५ ॥
-नारदसंहिता । जन्मराश्यष्टमझेंषु दोषा नश्यंति भावतः ॥ क्रूरग्रहेक्षितो युक्तो द्विस्वभावोपि भंगदः ॥ बाईस ॥ फिर वे जन्मलग्रमें तथा आठवें घरमें स्थित होवें तो स्वभावमे ही सब दोष नष्ट होजाते हैं और क्रूरग्रहमे युक्त तथा दृष्ट पापग्रह कार्यको भंग करता है ।। बाईस ॥ बाने शभरदृष्टश्च शुभयुक्तेक्षितः शुभः ।। वस्वंत्यादिपच संग्रहे तृणकाष्ठयोः ।। याम्यदिग्गमनं शय्या कुर्यान्त्री गृहगोपनम् ॥ तेईस ॥ गमनसमय वह पापग्रह शुभग्रहों से दृष्ट नहीं हो तो अशुभ है और शुभमहामे युक्त तथा दृष्ट हो तो शुभ जानना। और अनिष्टशका अर्ध उत्तरर्भाग आदि, रेवतीपर्यंत पांच नक्षत्र पंचक कहलाते हैं तिनमे तृण काठ आदिका संग्रह नहीं करना और दक्षिणदिशामें गमन नहीं करना, शय्या नहीं बनानी, घर नहीं छावना ।। तेईस ।। जन्मोदये लग्नगते दिग्लग्ने लग्नगोपि वा ।। शुभे चतुर्षु केंद्रेपु याते शत्रुक्षयो भवेत् ॥ चौबीस ॥ जन्मलग्न शुभग्रहों से युक्तहो तिस लग्नमें अथवा दिग्वारि लग्नमें तथा शुभग्रह चारों केंद्रों में प्राप्त होनके समय गमन करे तो शत्रु नष्ट होवें ।। चौबीस ।। शीर्षोदये लग्नगते दिग्लने लग्नतोपि वा ।। शुभवर्गेथ वा लग्ने यातुः शत्रुक्षयो भवेत् ॥ पच्चीस ॥
Bihar Politics: क्या 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर डील फाइनल हो गई है? जिस तरह से नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर पहुंचे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से उनकी मीटिंग हुई। इस दौरान तेजस्वी यादव, ललन सिंह भी मौजूद रहे। मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे ऐतिहासिक बताया है। लगता है आप ऑफलाइन हो चुके हैं।
Bihar Politics: क्या दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव को लेकर डील फाइनल हो गई है? जिस तरह से नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर पहुंचे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से उनकी मीटिंग हुई। इस दौरान तेजस्वी यादव, ललन सिंह भी मौजूद रहे। मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे ऐतिहासिक बताया है। लगता है आप ऑफलाइन हो चुके हैं।
जौनपुर। उप्र मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ द्वारा संचालित मौलवी/मुंशी (सेकेण्ड्र) आलिया (सीनियर सेकेन्ड्री) कामिल एवं फाजिल परीक्षा वर्ष-2023 जनपद के 11 केन्द्रों जिनमें शहदेव ऋषीकुल एजुकेशन उच्च माध्यमिक सुल्तानपुर, मदरसा रफीकुल इस्लाम निस्वां गौराबादशाहपुर, जगवन्ती गर्ल्स इण्टर कालेज जयरामपुर मड़यिाहूँ , मॉ कैलाशी इण्टर कालेज मुंगराबादशाहपुर, हफीजउल्ला नाना इण्टर कालेज शाही तालाब खेतासराय, मदरसा चश्में हयात रेहटी त्रिलोचन बड़ागाव जलालपुर, मदरसा अरबिया रियाजुल उलूम मछलीशहर, मदरसा फैजानुल उलूम मछलीशहर, मदरसा जामिया मोमिना लिलबनात सिपाह, मदरसा उमर आसिम लिलबनात मुर्की केराकत, मदरसा अबरे रहमत मझगवां कला पर संचालित हो रही है। परीक्षा 17 मई से 24 मई के मध्य सम्पन्न होगी। मोलवी/मुंशी सेकेन्ड्री की परीक्षा प्रथम पाली पूर्वान्ह 8 बजे से 11 बजे तथा आलीया, कालिम एवम फाजिल की परीक्षायें द्वितीय पाली अपरान्ह 2 बजे से सायं 5 बजे तक संचालित हो रही है। परीक्षा में कुल 3072 परीक्षार्थी सम्मिलित हो रहे हैं। कुल 2003 परीक्षार्थी में से 1459 उपस्थित रहे। सायं की पाली में सीनियर सेकेन्ड्री में 444 परीक्षार्थियों में से 382 उपस्थित एवं 62 अनुपस्थित, कामिल के 452 में से 410 उपस्थित 42 अनुपस्थित एवं फाजिल के 157 परीक्षार्थियों में 148 उपस्थित एवं 9 अनुपस्थित रहे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा कुल पॉच परीक्षा केन्द्रों शहदेव ऋषिकुल एजुकेशन उच्च माध्यमिक सुल्तानपुर, जगवन्ती गर्ल्स इका जयरामपुर मड़यिाहॅू, मदरसा चश्में हयात रेहटी त्रिलोचन, बड़ागॉव जलालपुर, हफीजउल्ला नाना इका शाही तालाब खेतासराय, मदरसा जामियॉ मोमिना लिलबनात सिपाह का निरीक्षण किया गया। परीक्षा केन्द्र के सभी परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरा लगे हुये हैं जिसकी मॉनीटिरंग रजिस्ट्रार कार्यालय एवं निदेशालय स्तर से की जा रही है। इसके साथ ही साथ जिलाधिकारी द्वारा परीक्षा केन्द्रों हेतु स्टेटिक मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट तथा सचल दल की नियुक्ति परीक्षा को नकल विहीन सूचितापूर्ण एवं सकुशल सम्पन्न कराने हेतु किया गया।
जौनपुर। उप्र मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ द्वारा संचालित मौलवी/मुंशी आलिया कामिल एवं फाजिल परीक्षा वर्ष-दो हज़ार तेईस जनपद के ग्यारह केन्द्रों जिनमें शहदेव ऋषीकुल एजुकेशन उच्च माध्यमिक सुल्तानपुर, मदरसा रफीकुल इस्लाम निस्वां गौराबादशाहपुर, जगवन्ती गर्ल्स इण्टर कालेज जयरामपुर मड़यिाहूँ , मॉ कैलाशी इण्टर कालेज मुंगराबादशाहपुर, हफीजउल्ला नाना इण्टर कालेज शाही तालाब खेतासराय, मदरसा चश्में हयात रेहटी त्रिलोचन बड़ागाव जलालपुर, मदरसा अरबिया रियाजुल उलूम मछलीशहर, मदरसा फैजानुल उलूम मछलीशहर, मदरसा जामिया मोमिना लिलबनात सिपाह, मदरसा उमर आसिम लिलबनात मुर्की केराकत, मदरसा अबरे रहमत मझगवां कला पर संचालित हो रही है। परीक्षा सत्रह मई से चौबीस मई के मध्य सम्पन्न होगी। मोलवी/मुंशी सेकेन्ड्री की परीक्षा प्रथम पाली पूर्वान्ह आठ बजे से ग्यारह बजे तथा आलीया, कालिम एवम फाजिल की परीक्षायें द्वितीय पाली अपरान्ह दो बजे से सायं पाँच बजे तक संचालित हो रही है। परीक्षा में कुल तीन हज़ार बहत्तर परीक्षार्थी सम्मिलित हो रहे हैं। कुल दो हज़ार तीन परीक्षार्थी में से एक हज़ार चार सौ उनसठ उपस्थित रहे। सायं की पाली में सीनियर सेकेन्ड्री में चार सौ चौंतालीस परीक्षार्थियों में से तीन सौ बयासी उपस्थित एवं बासठ अनुपस्थित, कामिल के चार सौ बावन में से चार सौ दस उपस्थित बयालीस अनुपस्थित एवं फाजिल के एक सौ सत्तावन परीक्षार्थियों में एक सौ अड़तालीस उपस्थित एवं नौ अनुपस्थित रहे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा कुल पॉच परीक्षा केन्द्रों शहदेव ऋषिकुल एजुकेशन उच्च माध्यमिक सुल्तानपुर, जगवन्ती गर्ल्स इका जयरामपुर मड़यिाहॅू, मदरसा चश्में हयात रेहटी त्रिलोचन, बड़ागॉव जलालपुर, हफीजउल्ला नाना इका शाही तालाब खेतासराय, मदरसा जामियॉ मोमिना लिलबनात सिपाह का निरीक्षण किया गया। परीक्षा केन्द्र के सभी परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरा लगे हुये हैं जिसकी मॉनीटिरंग रजिस्ट्रार कार्यालय एवं निदेशालय स्तर से की जा रही है। इसके साथ ही साथ जिलाधिकारी द्वारा परीक्षा केन्द्रों हेतु स्टेटिक मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्ट्रेट तथा सचल दल की नियुक्ति परीक्षा को नकल विहीन सूचितापूर्ण एवं सकुशल सम्पन्न कराने हेतु किया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों का मेडिकल टेस्ट भी कराया, जिसमें यह सामने आया कि सुरेंद्र शराब के नशे में था. राजस्थान के अलवर में दो लोगों पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक मुस्लिम कपल के साथ बदसलूकी की और जबरन उनसे जय श्री राम बुलवाया. यह कपल हरियाणा का रहने वाला है. पीड़ित युवक और युवती की शिकायत के आधार पर अलवर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों आरोपियों को 18 अक्टूबर तक के लिए न्याययिक रिमांड पर भेज दिया गया है. यह घटना शनिवार आधीरात की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों की पहचान 23 वर्षीय वंश भारद्वाज और 32 साल के सुरेंद्र मोहन भाटिया के रूप में हुई है. पीड़ित युवक अपनी पत्नी के साथ बस स्टैंड पर खड़े होकर बस का इंतजार कर रहा था. करीब साढे ग्याहर बजे सुरेंद्र और वंश मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे. दोनों ने युवक के साथ पहले तो बदसलूकी की और फिर बाद में उससे और उसकी पत्नी से जबरन जय श्री राम भी बुलवाया. आरोपियों में से एक ने युवकी की पत्नी के साथ छेड़छाड़ भी की. पुलिस ने दोनों आरोपियों का मेडिकल टेस्ट भी कराया, जिसमें यह सामने आया कि सुरेंद्र शराब के नशे में था. दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 354ए, 386, 295 और 509 के तहत केस दर्ज किया है. अलवर में यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है. इसी साल अलवर में कुछ लड़कों ने एक कपल की बेरहमी से पिटाई की थी और फिर बाद में उन्होंने युवती के साथ गैंगरेप भी किया.
पुलिस ने दोनों आरोपियों का मेडिकल टेस्ट भी कराया, जिसमें यह सामने आया कि सुरेंद्र शराब के नशे में था. राजस्थान के अलवर में दो लोगों पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक मुस्लिम कपल के साथ बदसलूकी की और जबरन उनसे जय श्री राम बुलवाया. यह कपल हरियाणा का रहने वाला है. पीड़ित युवक और युवती की शिकायत के आधार पर अलवर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों आरोपियों को अट्ठारह अक्टूबर तक के लिए न्याययिक रिमांड पर भेज दिया गया है. यह घटना शनिवार आधीरात की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों की पहचान तेईस वर्षीय वंश भारद्वाज और बत्तीस साल के सुरेंद्र मोहन भाटिया के रूप में हुई है. पीड़ित युवक अपनी पत्नी के साथ बस स्टैंड पर खड़े होकर बस का इंतजार कर रहा था. करीब साढे ग्याहर बजे सुरेंद्र और वंश मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे. दोनों ने युवक के साथ पहले तो बदसलूकी की और फिर बाद में उससे और उसकी पत्नी से जबरन जय श्री राम भी बुलवाया. आरोपियों में से एक ने युवकी की पत्नी के साथ छेड़छाड़ भी की. पुलिस ने दोनों आरोपियों का मेडिकल टेस्ट भी कराया, जिसमें यह सामने आया कि सुरेंद्र शराब के नशे में था. दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा तीन सौ तेईस, तीन सौ चौवनए, तीन सौ छियासी, दो सौ पचानवे और पाँच सौ नौ के तहत केस दर्ज किया है. अलवर में यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है. इसी साल अलवर में कुछ लड़कों ने एक कपल की बेरहमी से पिटाई की थी और फिर बाद में उन्होंने युवती के साथ गैंगरेप भी किया.
लखनऊ। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने शोले फिल्म के डायलॉग की तर्ज पर भ्रष्टाचारियों पर पर निशाना साधते हुए कहा कि जब 100-100 मील तक बच्चा भ्रष्टाचार करता है तो मां कहती है सो जा वरना केजरीवाल आ जाएगा। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवादी दो तरह के होते हैं। एक आतंकवादी जनता को डराता है। दूसरा आतंकवादी भ्रष्टाचारियों को डराता है। . . . और केजरीवाल भ्रष्टाचारियों को डराता है। शोले पिक्चर में डायलॉग है न. . . जब 100-100 मील तक बच्चा भ्रष्टाचार करता है तो मां कहती है सो जा वरना केजरीवाल आ जाएगा। आप संयोजक ने कहा कि BJP ने सारी एजेंसियों के छापे पड़वाए, लेकिन उनको कुछ नहीं मिला। मेरे पूछने पर उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में कोई कवि है, जिसने बताया कि केजरीवाल आतंकवादी है। मोदी जी सारी एजेंसियों हटाइए और उस कवि को रखिए। वह बताएंगे कि कौन आतंकवादी है। उन्होंने रविवार को समाजवादी पार्टी को घेरने के लिए अहमदाबाद बम धमाकों समेत ऐसी विभिन्न घटनाओं में साइकिल का इस्तेमाल किए जाने संबंधी तंज को साइकिल चलाने वाले गरीबों पर चोट करार दिया। उन्होंने कहा कि यूपी में किसी को भी बहुमत ना मिले और भाजपा को बाहर रखने के लिए अगर हमारी जरूरत पड़ी तथा अगर हम सरकार में शामिल हुए तो जिसकी भी सरकार होगी उससे मैं अपनी सारी गारंटी पूरी करा लूंगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर उन्हें आतंकवादी कहने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश पर 70 साल तक राज करने के बावजूद इन दोनों पार्टियों के पास गिनाने को एक भी काम नहीं है, इसीलिए वे केजरीवाल को आतंकवादी कह रहे हैं।
लखनऊ। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने शोले फिल्म के डायलॉग की तर्ज पर भ्रष्टाचारियों पर पर निशाना साधते हुए कहा कि जब एक सौ-एक सौ मील तक बच्चा भ्रष्टाचार करता है तो मां कहती है सो जा वरना केजरीवाल आ जाएगा। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवादी दो तरह के होते हैं। एक आतंकवादी जनता को डराता है। दूसरा आतंकवादी भ्रष्टाचारियों को डराता है। . . . और केजरीवाल भ्रष्टाचारियों को डराता है। शोले पिक्चर में डायलॉग है न. . . जब एक सौ-एक सौ मील तक बच्चा भ्रष्टाचार करता है तो मां कहती है सो जा वरना केजरीवाल आ जाएगा। आप संयोजक ने कहा कि BJP ने सारी एजेंसियों के छापे पड़वाए, लेकिन उनको कुछ नहीं मिला। मेरे पूछने पर उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में कोई कवि है, जिसने बताया कि केजरीवाल आतंकवादी है। मोदी जी सारी एजेंसियों हटाइए और उस कवि को रखिए। वह बताएंगे कि कौन आतंकवादी है। उन्होंने रविवार को समाजवादी पार्टी को घेरने के लिए अहमदाबाद बम धमाकों समेत ऐसी विभिन्न घटनाओं में साइकिल का इस्तेमाल किए जाने संबंधी तंज को साइकिल चलाने वाले गरीबों पर चोट करार दिया। उन्होंने कहा कि यूपी में किसी को भी बहुमत ना मिले और भाजपा को बाहर रखने के लिए अगर हमारी जरूरत पड़ी तथा अगर हम सरकार में शामिल हुए तो जिसकी भी सरकार होगी उससे मैं अपनी सारी गारंटी पूरी करा लूंगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर उन्हें आतंकवादी कहने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश पर सत्तर साल तक राज करने के बावजूद इन दोनों पार्टियों के पास गिनाने को एक भी काम नहीं है, इसीलिए वे केजरीवाल को आतंकवादी कह रहे हैं।
श्रम कार्ड (e-Shram Card) की चर्चा बहुत हो रही है. इस कार्ड को लोग बड़ी संख्या में बनवा भी रहे हैं, क्योंकि कार्ड होल्डर्स को इस कार्ड से कई फायदे होते हैं. दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा ई-श्रम योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत ई-श्रम कार्ड (e-Shram Card) बनता है. इस कार्ड से कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, जैसे- किस्तों में आर्थिक लाभ, 2 लाख रुपए का बीमा कवर, घर बनाने के लिए आर्थिक मदद औऱ कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आदि. इस सबके बीच क्या आप जानते हैं कि ये कार्ड कौन बनवा सकता है और कौन नहीं? तो चलिए आज हम इस ई- श्रम कार्ड को बनवाने की पात्रता (eligibility) के बारे में बताते हैं. कौन बनवा सकता है ई-श्रम? (Who can make e-Shram? ) जिन लोगों की आयु 16 से 59 साल के बीच है, वो लोग ई-श्रम कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. ध्यान रहे कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग ही ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरीके से ई-श्रम कार्ड (e-Shram Card) बनवा सकते हैं. इन लोगों का नहीं बनेगा ई-श्रम कार्ड (E-shram card will not be made for these people) जो लोग पहले से किसी पेंशन या सरकारी योजना का लाभ उठा रहे हैं, वो लोग ई-श्रम कार्ड (e-Shram Card) लेने के पात्र नहीं होंगे. अगर ये लोग आवेदन भी करते हैं, तो यह रिजेक्ट हो जाएगा. इसके अलावा जो लोग टैक्स स्लैब में आते हैं या फिर इनकम टैक्स भरते हैं, वो ई-श्रम कार्ड नहीं बन सकते हैं. इसके अलावा जो लोग सीपीएस/ एनपीएस/ ईपीएफओ/ ईएसआईसी जैसी योजनाओं का लाभ लेते हैं, उन्हें ये कार्ड नहीं मिलेगा. मुफ्त में करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन (You can register for free) बता दें कि आधार कार्ड के साथ ई-श्रम पोर्टल (e-Shram Portal) की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है. आप अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सीएससी और पोस्ट ऑफिस से ई-श्रम कार्ड के लिए मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. जरुरी दस्तावेज (Required Documents) इसके लिए आपको आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. इसके बाद सामाजिक सुरक्षा योजना या राज्य/केंद्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा.
श्रम कार्ड की चर्चा बहुत हो रही है. इस कार्ड को लोग बड़ी संख्या में बनवा भी रहे हैं, क्योंकि कार्ड होल्डर्स को इस कार्ड से कई फायदे होते हैं. दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा ई-श्रम योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत ई-श्रम कार्ड बनता है. इस कार्ड से कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं, जैसे- किस्तों में आर्थिक लाभ, दो लाख रुपए का बीमा कवर, घर बनाने के लिए आर्थिक मदद औऱ कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आदि. इस सबके बीच क्या आप जानते हैं कि ये कार्ड कौन बनवा सकता है और कौन नहीं? तो चलिए आज हम इस ई- श्रम कार्ड को बनवाने की पात्रता के बारे में बताते हैं. कौन बनवा सकता है ई-श्रम? जिन लोगों की आयु सोलह से उनसठ साल के बीच है, वो लोग ई-श्रम कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. ध्यान रहे कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोग ही ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरीके से ई-श्रम कार्ड बनवा सकते हैं. इन लोगों का नहीं बनेगा ई-श्रम कार्ड जो लोग पहले से किसी पेंशन या सरकारी योजना का लाभ उठा रहे हैं, वो लोग ई-श्रम कार्ड लेने के पात्र नहीं होंगे. अगर ये लोग आवेदन भी करते हैं, तो यह रिजेक्ट हो जाएगा. इसके अलावा जो लोग टैक्स स्लैब में आते हैं या फिर इनकम टैक्स भरते हैं, वो ई-श्रम कार्ड नहीं बन सकते हैं. इसके अलावा जो लोग सीपीएस/ एनपीएस/ ईपीएफओ/ ईएसआईसी जैसी योजनाओं का लाभ लेते हैं, उन्हें ये कार्ड नहीं मिलेगा. मुफ्त में करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन बता दें कि आधार कार्ड के साथ ई-श्रम पोर्टल की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है. आप अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सीएससी और पोस्ट ऑफिस से ई-श्रम कार्ड के लिए मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. जरुरी दस्तावेज इसके लिए आपको आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. इसके बाद सामाजिक सुरक्षा योजना या राज्य/केंद्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा.
राजाराम मंडल/मधुबनी. पारंपरिक खेती के साथ-साथ अगर आप आम, लीची, केला, कटहल, पपीता आदि की भी खेती करते हैं, तो इससे बड़े पैमाने पर मुनाफा हो सकता है. जो किसान इस तकनीक को समझने लगे हैं, वह धीरे-धीरे अब आर्थिक रूप से संपन्न होने लगे हैं, मधुबनी जिले के भी कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फलों और सब्जियों की खेती करने लगे हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजह कुछ ही वर्षों में बहुत मजबूत हो गई है. केला की खेती में कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. मधुबनी जिले के महरेल गांव के कुछ किसान इसको समझ चुके हैं और कई वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं. इससे उन्हें कम मेहनत में अच्छी कमाई हो रही है. यहां के जगदेव महतो कमला नदी के किनारे 5 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे 10 साल में सिर्फ एक बार केले का पौधा लगाते हैं. उसके बाद कुछ नहीं करते हैं. फिर भी इसकी खेती से अच्छी कमाई हो जाती है. वे बताते हैं कि समय-समय पर केला के पौधों को सहारा देना पड़ता है. ताकि केले के बंच का साइज 5 से 6 फीट का हो जाए. फिर एक बंच से 1000 रुपए तक की कमाई हो जाती है. साल में तीन लाख तक की कर लेते हैं कमाईजगदेव महतो कहते हैं कि काफी कम मेहनत में उन्हें सालाना 2 से 3 लाख की कमाई हो जाती है. उन्होंने बताया कि वे तीन किस्म का केला लगाते हैं. इसमें भोस और मालभोग प्रमुख है. अब केले की फार्मिंग का ख्याल उनके बेटे उमा महतो रखते हैं. उमा महतो बताते हैं कि अगर सही से ध्यान दिया जाए तोकेले की फार्मिंग में कमाई बहुत है. उन्होंने बताया किकेले की खेत में कभी-कभी जहरीले सांप आ जाते हैं. इससे तरीके से निपटा जाता है. .
राजाराम मंडल/मधुबनी. पारंपरिक खेती के साथ-साथ अगर आप आम, लीची, केला, कटहल, पपीता आदि की भी खेती करते हैं, तो इससे बड़े पैमाने पर मुनाफा हो सकता है. जो किसान इस तकनीक को समझने लगे हैं, वह धीरे-धीरे अब आर्थिक रूप से संपन्न होने लगे हैं, मधुबनी जिले के भी कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फलों और सब्जियों की खेती करने लगे हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजह कुछ ही वर्षों में बहुत मजबूत हो गई है. केला की खेती में कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. मधुबनी जिले के महरेल गांव के कुछ किसान इसको समझ चुके हैं और कई वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं. इससे उन्हें कम मेहनत में अच्छी कमाई हो रही है. यहां के जगदेव महतो कमला नदी के किनारे पाँच एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे दस साल में सिर्फ एक बार केले का पौधा लगाते हैं. उसके बाद कुछ नहीं करते हैं. फिर भी इसकी खेती से अच्छी कमाई हो जाती है. वे बताते हैं कि समय-समय पर केला के पौधों को सहारा देना पड़ता है. ताकि केले के बंच का साइज पाँच से छः फीट का हो जाए. फिर एक बंच से एक हज़ार रुपयापए तक की कमाई हो जाती है. साल में तीन लाख तक की कर लेते हैं कमाईजगदेव महतो कहते हैं कि काफी कम मेहनत में उन्हें सालाना दो से तीन लाख की कमाई हो जाती है. उन्होंने बताया कि वे तीन किस्म का केला लगाते हैं. इसमें भोस और मालभोग प्रमुख है. अब केले की फार्मिंग का ख्याल उनके बेटे उमा महतो रखते हैं. उमा महतो बताते हैं कि अगर सही से ध्यान दिया जाए तोकेले की फार्मिंग में कमाई बहुत है. उन्होंने बताया किकेले की खेत में कभी-कभी जहरीले सांप आ जाते हैं. इससे तरीके से निपटा जाता है. .
दिल्ली के प्रगति मैदान टनल में बाइक सवार चार बदमाशों ने एक डिलीवरी एजेंट की कैब गन पॉइंट पर रोक कर 2 लाख रुपए लूट लिए। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को बताया कि घटना 24 जून दोपहर 3 बजे के आसपास की है। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दो बाइक सवार 4 बदमाश एक कार का पीछा कर टनल में बीच सड़क उसे रोकते हैं। फिर एक बदमाश गन निकालकर कार के सामने खड़ा हो जाता है। बाकी के उसके तीन अन्य साथी कार के दोनों तरफ का गेट खोलते हैं और कैश भरा बैग लेकर फरार हो जाते हैं। CCTV फुटेज में घटना के दौरान टनल से कई कार और बाइक सवार गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं, हालांकि कोई भी रुकता नहीं है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अभी तक तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित साजन कुमार पटेल चांदनी चौक स्थित ओमिया इंटरप्राइजेज में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते हैं। 24 जून को वो अपने साथी जिगर पटेल के साथ चांदनी चौक से गुरुग्राम के लिए निकले थे। उनके पास पैसों से भरा बैग था। बैग उनके क्लाइंट को डिलीवरी करना था। दोनों ने लाल किला से एक कैब बुक की और रिंग रोड पर गुरुग्राम जाते समय वो प्रगति मैदान वाली टनल में दाखिल हुए। तभी दो बाइक पर सवार 4 बदमाशों ने पिस्टल दिखाकर कैब रोकी और बैग लूटकर भाग गए। इसके बाद साजन कुमार ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। उसने पुलिस को बताया कि बैग में करीब 1. 5 से 2 लाख रुपए कैश थे। पुलिस ने बताया कि यह टनल लगभग 1. 5 किलोमीटर लंबा है। 16 सिक्योरिटी गार्ड टनल की सुरक्षा करते हैं। यह टनल नई दिल्ली को सराय काले खां और नोएडा से जोड़ती है। घटना के वक्त टनल की एंट्री और एग्जिट पर दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को लेकर उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना से इस्तीफा मांगा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा- LG को इस्तीफा देना चाहिए। किसी ऐसे व्यक्ति को उपराज्यपाल बनाया जाए जो दिल्ली के लोगों को सुरक्षा दे सके। केजरीवाल ने कहा- अगर केंद्र सरकार दिल्ली को सुरक्षित नहीं बना सकती तो हमें सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दें। हम आपको दिखाएंगे कि किसी शहर को उसके नागरिकों के लिए कैसे सुरक्षित बनाया जाता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दिल्ली के प्रगति मैदान टनल में बाइक सवार चार बदमाशों ने एक डिलीवरी एजेंट की कैब गन पॉइंट पर रोक कर दो लाख रुपए लूट लिए। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को बताया कि घटना चौबीस जून दोपहर तीन बजे के आसपास की है। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दो बाइक सवार चार बदमाश एक कार का पीछा कर टनल में बीच सड़क उसे रोकते हैं। फिर एक बदमाश गन निकालकर कार के सामने खड़ा हो जाता है। बाकी के उसके तीन अन्य साथी कार के दोनों तरफ का गेट खोलते हैं और कैश भरा बैग लेकर फरार हो जाते हैं। CCTV फुटेज में घटना के दौरान टनल से कई कार और बाइक सवार गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं, हालांकि कोई भी रुकता नहीं है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अभी तक तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित साजन कुमार पटेल चांदनी चौक स्थित ओमिया इंटरप्राइजेज में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते हैं। चौबीस जून को वो अपने साथी जिगर पटेल के साथ चांदनी चौक से गुरुग्राम के लिए निकले थे। उनके पास पैसों से भरा बैग था। बैग उनके क्लाइंट को डिलीवरी करना था। दोनों ने लाल किला से एक कैब बुक की और रिंग रोड पर गुरुग्राम जाते समय वो प्रगति मैदान वाली टनल में दाखिल हुए। तभी दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने पिस्टल दिखाकर कैब रोकी और बैग लूटकर भाग गए। इसके बाद साजन कुमार ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। उसने पुलिस को बताया कि बैग में करीब एक. पाँच से दो लाख रुपए कैश थे। पुलिस ने बताया कि यह टनल लगभग एक. पाँच किलोग्राममीटर लंबा है। सोलह सिक्योरिटी गार्ड टनल की सुरक्षा करते हैं। यह टनल नई दिल्ली को सराय काले खां और नोएडा से जोड़ती है। घटना के वक्त टनल की एंट्री और एग्जिट पर दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को लेकर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से इस्तीफा मांगा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा- LG को इस्तीफा देना चाहिए। किसी ऐसे व्यक्ति को उपराज्यपाल बनाया जाए जो दिल्ली के लोगों को सुरक्षा दे सके। केजरीवाल ने कहा- अगर केंद्र सरकार दिल्ली को सुरक्षित नहीं बना सकती तो हमें सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दें। हम आपको दिखाएंगे कि किसी शहर को उसके नागरिकों के लिए कैसे सुरक्षित बनाया जाता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.