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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मौसम का मिजाज बदल गया है। मंगलवार को पूरे दिन बूंदाबांदी और रातभर झमाझम बारिश के बाद ठंड बढ़ गई है। बुधवार की सुबह भी बूंदाबांदी हुई। वहीं आज तापमान के और नीचे जाने के आसार हैं। आने वाले कुछ दिनों तक दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं।
बारिश के बाद ठंड का असर तेज हो गया है। बुधवार को सुबह की शुरुआत बूंदाबांदी से ही हुई। ऐसे में धूप नहीं खिलने से लोग ठंड से बेहाल रहे। बर्फीली हवाओं के चलने के साथ सुबह मौसम के रुख में आया बदलाव अभी भी जारी है। लोग अपने घरों में दुबके हैं।
बर्फीली हवाओं के चलने से सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा आज वाहनों का आवागमन भी कम है। वहीं, बाजार में रूम हीटर और ठंड से बचने के लिए लोग गर्म वस्त्र की खरीद करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आज सुबह से ही आसमान में बादल छाए हैं। तेज हवा भी चल रही है। इसकी वजह से पिछले दिनों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस हो रही है। वहीं रातभर हुई बारिश ने ठंड और बढ़ा दी है। घर से निकले लोग ठंड से बचने के लिए काफी परेशान हैं। जहां कहीं पर अलाव जलते दिख रहा, लोग वहीं ठहर जा रहे हैं।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि बुधवार यानी आज सुबह से शुरू हुई हल्की बारिश दिनभर जारी रह सकती है। 15 मिलीमीटर बारिश और करीब 20-22 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलने की वजह से तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। दिन का तापमान 20 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।
मंगलवार की देर रात से शुरू हुई बारिश बुधवार की सुबह तक जारी रही। ऐसे में किसानों को राहत मिली है। किसान पन्ने लाल, धर्मेंद्र कुमार और राम करन आदि कहना है कि हल्की बारिश से रबी की फसल को फायदा होगा।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मौसम का मिजाज बदल गया है। मंगलवार को पूरे दिन बूंदाबांदी और रातभर झमाझम बारिश के बाद ठंड बढ़ गई है। बुधवार की सुबह भी बूंदाबांदी हुई। वहीं आज तापमान के और नीचे जाने के आसार हैं। आने वाले कुछ दिनों तक दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। बारिश के बाद ठंड का असर तेज हो गया है। बुधवार को सुबह की शुरुआत बूंदाबांदी से ही हुई। ऐसे में धूप नहीं खिलने से लोग ठंड से बेहाल रहे। बर्फीली हवाओं के चलने के साथ सुबह मौसम के रुख में आया बदलाव अभी भी जारी है। लोग अपने घरों में दुबके हैं। बर्फीली हवाओं के चलने से सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा आज वाहनों का आवागमन भी कम है। वहीं, बाजार में रूम हीटर और ठंड से बचने के लिए लोग गर्म वस्त्र की खरीद करते हुए दिखाई दे रहे हैं। आज सुबह से ही आसमान में बादल छाए हैं। तेज हवा भी चल रही है। इसकी वजह से पिछले दिनों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस हो रही है। वहीं रातभर हुई बारिश ने ठंड और बढ़ा दी है। घर से निकले लोग ठंड से बचने के लिए काफी परेशान हैं। जहां कहीं पर अलाव जलते दिख रहा, लोग वहीं ठहर जा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि बुधवार यानी आज सुबह से शुरू हुई हल्की बारिश दिनभर जारी रह सकती है। पंद्रह मिलीमीटर बारिश और करीब बीस-बाईस किलोग्राममीटर की रफ्तार से हवा चलने की वजह से तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। दिन का तापमान बीस डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। मंगलवार की देर रात से शुरू हुई बारिश बुधवार की सुबह तक जारी रही। ऐसे में किसानों को राहत मिली है। किसान पन्ने लाल, धर्मेंद्र कुमार और राम करन आदि कहना है कि हल्की बारिश से रबी की फसल को फायदा होगा।
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आगरा। ईशान कॉलेज एक ऐसी जेनरेशन तैयार कर रहा है, जो बुलंद इमारतों और नई तकनीक से भविष्य को संवारेंगे। कॉलेज की स्थापना वर्ष 2009 में इसी सोच के साथ की गई थी। यह एक मात्र ऐसा संस्थान है, जिसका उद्देश्य निरंतर शिक्षा का स्तर बढ़ाने के साथ छात्रों को शिक्षण संबंधी प्रत्येक सुविधा को उपलब्ध कराना है।
ईशान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त एवं उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद एवं प्राविधिक शिक्षा परिषद लखनऊ से संबंद्ध संस्थान हैं। स्टूडेंट की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा बहुत ही कम शुल्क में चार विभिन्न प्रकार के कोर्स कराता है।
ईशान से अपना पाठ्यक्रम पूर्ण करने के बाद छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जॉब प्लेसमेंट की सुविधा भी कैम्पस प्लेसमेंट द्वारा उपल? ध है। इसके लिए ईशान में अलग से ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल मौजूद है, जिसमें कम्यूनिकेशन लैब, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट लैब, कैरियर काउंसलिंग सेंटर आदि की व्यवस्था है, जिसके द्वारा छात्रों को कम्पनियों के व्यवहार के अनुसार ढाला जाता है, ताकि इंटरव्यू के दौरान वह खुद को एक उपयुक्त कर्मचारी साबित कर सकें।
ईशान में शोध एवं विकास का कार्य प्रतिदिन के दैनिक कार्यो का हिस्सा है, जिसके द्वारा शिक्षकों एवं छात्रों को संस्था में ऐसा मंच मिल सके, जो इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उन्हें अग्रणी बना सके। इस संदर्थ में हाल ही में दो दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन संस्थान के कैम्पस में एनआईटी इलाहबाद द्वारा किया गया, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिकों, रिसर्च स्कॉलर एवं नामी संस्थानों के शिक्षकों एवं सदस्यों ने अपनी उपस्थित दर्ज कराई। संस्थान द्वारा ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जिसके द्वारा प्रत्येक छात्र छात्राओं को सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सके। संस्थान का यह उद्देश्य उच्च गुणवत्तापरक शिक्षा पद्धित का प्रयोग करके छात्रों को प्रेक्टिकल जानकारी उपलब्ध कराना है।
ईशान कॉलेज में एडमीशन के लिए यूपीटीयू द्वारा आयोजित एंट्रेस एग्जाम देना होता है, इसके अलावा सीधे प्रवेश भी कॉलेज में लिए जाते हैं। कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र फरह स्थित कॉलेज कैम्पस से प्राप्त किया जा सकता है। कॉलेज में एडमीशन शुरू हो चुके हैं।
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आगरा। ईशान कॉलेज एक ऐसी जेनरेशन तैयार कर रहा है, जो बुलंद इमारतों और नई तकनीक से भविष्य को संवारेंगे। कॉलेज की स्थापना वर्ष दो हज़ार नौ में इसी सोच के साथ की गई थी। यह एक मात्र ऐसा संस्थान है, जिसका उद्देश्य निरंतर शिक्षा का स्तर बढ़ाने के साथ छात्रों को शिक्षण संबंधी प्रत्येक सुविधा को उपलब्ध कराना है। ईशान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त एवं उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद एवं प्राविधिक शिक्षा परिषद लखनऊ से संबंद्ध संस्थान हैं। स्टूडेंट की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा बहुत ही कम शुल्क में चार विभिन्न प्रकार के कोर्स कराता है। ईशान से अपना पाठ्यक्रम पूर्ण करने के बाद छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जॉब प्लेसमेंट की सुविधा भी कैम्पस प्लेसमेंट द्वारा उपल? ध है। इसके लिए ईशान में अलग से ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल मौजूद है, जिसमें कम्यूनिकेशन लैब, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट लैब, कैरियर काउंसलिंग सेंटर आदि की व्यवस्था है, जिसके द्वारा छात्रों को कम्पनियों के व्यवहार के अनुसार ढाला जाता है, ताकि इंटरव्यू के दौरान वह खुद को एक उपयुक्त कर्मचारी साबित कर सकें। ईशान में शोध एवं विकास का कार्य प्रतिदिन के दैनिक कार्यो का हिस्सा है, जिसके द्वारा शिक्षकों एवं छात्रों को संस्था में ऐसा मंच मिल सके, जो इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उन्हें अग्रणी बना सके। इस संदर्थ में हाल ही में दो दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन संस्थान के कैम्पस में एनआईटी इलाहबाद द्वारा किया गया, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिकों, रिसर्च स्कॉलर एवं नामी संस्थानों के शिक्षकों एवं सदस्यों ने अपनी उपस्थित दर्ज कराई। संस्थान द्वारा ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जिसके द्वारा प्रत्येक छात्र छात्राओं को सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सके। संस्थान का यह उद्देश्य उच्च गुणवत्तापरक शिक्षा पद्धित का प्रयोग करके छात्रों को प्रेक्टिकल जानकारी उपलब्ध कराना है। ईशान कॉलेज में एडमीशन के लिए यूपीटीयू द्वारा आयोजित एंट्रेस एग्जाम देना होता है, इसके अलावा सीधे प्रवेश भी कॉलेज में लिए जाते हैं। कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र फरह स्थित कॉलेज कैम्पस से प्राप्त किया जा सकता है। कॉलेज में एडमीशन शुरू हो चुके हैं।
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मलेशिया की राजधानी कुआलालाम्पुर में इस्लामी देशों का शिखर सम्मेलन गुरुरवार की सुबह शुरु हुआ जिसमें ईरान, और तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष, क़तर नरेश और मलेशिया के प्रधानमंत्री सहित मुस्लिम देशों के सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि तथा बुद्धिजीवी भाग ले रहे हैं।
कुआलालाम्पुर-2019 बैठक के शुरु होने से पहले बैठक में शामिल विभिन्नदेशों के राष्ट्राध्यक्षों ने यादगारी फ़ोटो खिंचवाई और उसके बाद मलेशिया नरेश सुलतान अब्दुल्लाह के भाषण के साथ यह बैठक आधिकारिक रूप से शुरु हो गयी।
इसके बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद ने बैठक को संबोधित करते हुए इस्लामोफ़ोबिया के षड्यंत्रों का मुक़ाबला करने पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बैठक से पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए अच्छे और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और मुस्लिम जगत के कल्याण के लिए मूल कामों के रास्ते प्रशस्त होंगे।
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद ने कहा कि हमें चाहिए कि पश्चिम पर निर्भरता को समाप्त और कम करने के लिए रास्ते तलाश करें ताकि इस्लाम के दुश्मनों के मुक़ाबले में अपनी रक्षा कर सकें। उन्होंने कि बावजूद इसके कि मलेशिया एक बाहुल्य मुस्लिम देश है फिर भी यहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग भी रहते हैं जो अपने अपने अंदाज़ में अपने कार्यक्रम आयोजित करते हैं। (AK)
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मलेशिया की राजधानी कुआलालाम्पुर में इस्लामी देशों का शिखर सम्मेलन गुरुरवार की सुबह शुरु हुआ जिसमें ईरान, और तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष, क़तर नरेश और मलेशिया के प्रधानमंत्री सहित मुस्लिम देशों के सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि तथा बुद्धिजीवी भाग ले रहे हैं। कुआलालाम्पुर-दो हज़ार उन्नीस बैठक के शुरु होने से पहले बैठक में शामिल विभिन्नदेशों के राष्ट्राध्यक्षों ने यादगारी फ़ोटो खिंचवाई और उसके बाद मलेशिया नरेश सुलतान अब्दुल्लाह के भाषण के साथ यह बैठक आधिकारिक रूप से शुरु हो गयी। इसके बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद ने बैठक को संबोधित करते हुए इस्लामोफ़ोबिया के षड्यंत्रों का मुक़ाबला करने पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बैठक से पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए अच्छे और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और मुस्लिम जगत के कल्याण के लिए मूल कामों के रास्ते प्रशस्त होंगे। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद ने कहा कि हमें चाहिए कि पश्चिम पर निर्भरता को समाप्त और कम करने के लिए रास्ते तलाश करें ताकि इस्लाम के दुश्मनों के मुक़ाबले में अपनी रक्षा कर सकें। उन्होंने कि बावजूद इसके कि मलेशिया एक बाहुल्य मुस्लिम देश है फिर भी यहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग भी रहते हैं जो अपने अपने अंदाज़ में अपने कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
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व्यापारियों के एक प्रमुख संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक फरवरी से कानाफूसी अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वे अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों और अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों से उस पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे जो उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन देगा।
कैट एक फरवरी से देश भर में एक देश-एक व्यापारी-दस वोट अभियान को भी शुरू करेगा। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा। इसके तहत लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाएगा। कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि व्यापारी इस देश का सबसे श्रमशील समाज है। दिन रात वह अपने कार्य के माध्यम से देश के लोगों की सेवा करता है, सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
लेकिन इसके बाद भी उसे एक वर्ग के रुप में समझते हुए सरकार उसकी मांगों पर विचार नहीं करती। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सभी व्यापारी एक व्यापारी वर्ग के तहत वोट नहीं करता। लेकिन अगर उसका पूरा वोट सिर्फ व्यापार के हितों को ध्यान में रखते हुए पड़ने लगे, तो कोई भी सरकार उनकी मांगों को अनसूना नहीं कर सकेगी। उनकी कोशिश है कि व्यापारी समाज इस सच्चाई को समझे। उन्होंने कहा कि एक फरवरी से देश के 100 शहरों से एक साथ इस अभियान की शुरुआत होगी।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों की टीम अपने क्षेत्र के व्यापारियों से संपर्क करेगी और उन्हें उनकी शक्ति का एहसास कराते हुए देश की अर्थव्यवस्था में व्यापारियों के योगदान को बताते हुए एक होकर चुनाव में अपने संगठन के निर्देशानुसार मतदान करने की अपील करेगी। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी से 15 मार्च तक देश के प्रत्येक राज्य में एक रथयात्रा भी निकाली जाएगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी बड़ा अभियान चलाया जाएगा।
कैट के मुताबिक ऑनलाइन बाजार से सात करोड़ व्यापारियों और उनके माध्यम से रोजगार पा रहे करोड़ों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट आ गया है। वे अपने भारी पूंजी बल के दम पर छोटे व्यापारियों को बाजार से हटा रही हैं। व्यापारियों की मांग पर अब जब सरकार ऑनलाइन बाजार की मार्केट पर नियम बना रही है तो ये सरकार को यह कहकर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही हैं कि इससे भारत में निवेश खत्म हो जाएगा।
कैट के मुताबिक इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से पहले इन व्यापारियों के माध्यम से ही देश का काम चल रहा था। कैट की अपील है कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में न आए और कंपनियों के साथ सामान्य व्यापारी को भी बराबर का अवसर दे।
देश में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसाई हैं। इससे लगभग 45 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। ये व्यापारी प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं और सरकार को भारी मात्रा में राजस्व देते हैं। लेकिन ऑनलाइन बाजार के दबाव में इस वर्ग की कमर टूट रही है। व्यापारी बराबरी का मौका पाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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व्यापारियों के एक प्रमुख संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स ने एक फरवरी से कानाफूसी अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वे अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों और अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों से उस पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे जो उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन देगा। कैट एक फरवरी से देश भर में एक देश-एक व्यापारी-दस वोट अभियान को भी शुरू करेगा। यह अभियान तीस अप्रैल तक चलेगा। इसके तहत लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाएगा। कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि व्यापारी इस देश का सबसे श्रमशील समाज है। दिन रात वह अपने कार्य के माध्यम से देश के लोगों की सेवा करता है, सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। लेकिन इसके बाद भी उसे एक वर्ग के रुप में समझते हुए सरकार उसकी मांगों पर विचार नहीं करती। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सभी व्यापारी एक व्यापारी वर्ग के तहत वोट नहीं करता। लेकिन अगर उसका पूरा वोट सिर्फ व्यापार के हितों को ध्यान में रखते हुए पड़ने लगे, तो कोई भी सरकार उनकी मांगों को अनसूना नहीं कर सकेगी। उनकी कोशिश है कि व्यापारी समाज इस सच्चाई को समझे। उन्होंने कहा कि एक फरवरी से देश के एक सौ शहरों से एक साथ इस अभियान की शुरुआत होगी। स्थानीय व्यापारिक संगठनों की टीम अपने क्षेत्र के व्यापारियों से संपर्क करेगी और उन्हें उनकी शक्ति का एहसास कराते हुए देश की अर्थव्यवस्था में व्यापारियों के योगदान को बताते हुए एक होकर चुनाव में अपने संगठन के निर्देशानुसार मतदान करने की अपील करेगी। उन्होंने कहा कि पंद्रह फरवरी से पंद्रह मार्च तक देश के प्रत्येक राज्य में एक रथयात्रा भी निकाली जाएगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कैट के मुताबिक ऑनलाइन बाजार से सात करोड़ व्यापारियों और उनके माध्यम से रोजगार पा रहे करोड़ों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट आ गया है। वे अपने भारी पूंजी बल के दम पर छोटे व्यापारियों को बाजार से हटा रही हैं। व्यापारियों की मांग पर अब जब सरकार ऑनलाइन बाजार की मार्केट पर नियम बना रही है तो ये सरकार को यह कहकर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही हैं कि इससे भारत में निवेश खत्म हो जाएगा। कैट के मुताबिक इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से पहले इन व्यापारियों के माध्यम से ही देश का काम चल रहा था। कैट की अपील है कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में न आए और कंपनियों के साथ सामान्य व्यापारी को भी बराबर का अवसर दे। देश में लगभग सात करोड़ छोटे व्यवसाई हैं। इससे लगभग पैंतालीस करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। ये व्यापारी प्रतिवर्ष लगभग बयालीस लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं और सरकार को भारी मात्रा में राजस्व देते हैं। लेकिन ऑनलाइन बाजार के दबाव में इस वर्ग की कमर टूट रही है। व्यापारी बराबरी का मौका पाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान आज पाली-तानाखार विधायक मोहितराम केरकेट्टा के गृह ग्राम पोलमी पहुंचे और उनकी स्वर्गीय माताश्री के दशगात्र एवं शोकसभा कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्व. श्रीमती जुगरीबाई केरकेट्टा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाजंलि दी और शोकाकुल परिवारजनों से भेंटकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
इस अवसर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, स्कूल शिक्षा एवं कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कंवर, मरवाही विधायक डॉ. केके ध्रुव, ग्राम पंचायत पोलमी की सरपंच सुनीता केरकेट्टा, उपसरपंच बद्री नारायण कैवर्त सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान आज पाली-तानाखार विधायक मोहितराम केरकेट्टा के गृह ग्राम पोलमी पहुंचे और उनकी स्वर्गीय माताश्री के दशगात्र एवं शोकसभा कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्व. श्रीमती जुगरीबाई केरकेट्टा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाजंलि दी और शोकाकुल परिवारजनों से भेंटकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। इस अवसर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, स्कूल शिक्षा एवं कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कंवर, मरवाही विधायक डॉ. केके ध्रुव, ग्राम पंचायत पोलमी की सरपंच सुनीता केरकेट्टा, उपसरपंच बद्री नारायण कैवर्त सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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हमीरपुर -राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हमीरपुर के अध्यापकों ने खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी हमीरपुर के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मांग पत्र प्रेषित किया है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक हमीरपुर अध्यक्ष नरेश शर्मा ने बताया कि संघ ने मांग की है कि वर्ष 2004 के पश्चात लगे कर्मचारियों को ग्रेजुएटी बैनीफिट नहीं मिल रहा है, इसे पंजाब सरकार के आधार पर शीघ्र लागू किया जाए। पाठशालाओं में हाजिरी के लिए लगी बायोमीट्रिक मशीनें महज शोपिस बनी हुई हैं। इनमें अध्यापकों की दो-दो घंटे तक हाजिरी नहीं लग पा रही है। इन मशीनों को या तो हटाया जाए या फिर इन्हें लगाने वाले कर्मचारियों को रेगुलर निगरानी के आदेश दिए जाएं। न्यू पेंशन स्कीम को शीघ्र बंद करके ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जाए। संघ ने मांग की है कि शीघ्र अतिशीघ्र इन मांगों को बजट सत्र में पारित किया जाए। 4-9-14 एसीपी स्कीम कर्मचारियों के साथ छलावा है, इसे बंद कर पुरानी एसीपी स्कीम लागू की जाए। अध्यापकों के लिए बनाई जा रही ट्रांसफर पॉलिसी कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात है, इसे बंद किया जाए। कर्मचारियों का वेतनमान पंजाब पैटर्न से हटाकर केंद्र पैटर्न से जोड़ा जाए तथा इसे शीघ्र लागू किया जाए। उन्होंने मांग की है कि शिक्षकों की मांगों को बजट सत्र में जल्द से जल्द पारित किया जाए। इस दौरान शिक्षकों में अशोक कुमार, संजीव चंदेल, कुलदीप सिंह, वरुण ठाकुर सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
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हमीरपुर -राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हमीरपुर के अध्यापकों ने खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी हमीरपुर के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मांग पत्र प्रेषित किया है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक हमीरपुर अध्यक्ष नरेश शर्मा ने बताया कि संघ ने मांग की है कि वर्ष दो हज़ार चार के पश्चात लगे कर्मचारियों को ग्रेजुएटी बैनीफिट नहीं मिल रहा है, इसे पंजाब सरकार के आधार पर शीघ्र लागू किया जाए। पाठशालाओं में हाजिरी के लिए लगी बायोमीट्रिक मशीनें महज शोपिस बनी हुई हैं। इनमें अध्यापकों की दो-दो घंटे तक हाजिरी नहीं लग पा रही है। इन मशीनों को या तो हटाया जाए या फिर इन्हें लगाने वाले कर्मचारियों को रेगुलर निगरानी के आदेश दिए जाएं। न्यू पेंशन स्कीम को शीघ्र बंद करके ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जाए। संघ ने मांग की है कि शीघ्र अतिशीघ्र इन मांगों को बजट सत्र में पारित किया जाए। चार सितंबर चौदह एसीपी स्कीम कर्मचारियों के साथ छलावा है, इसे बंद कर पुरानी एसीपी स्कीम लागू की जाए। अध्यापकों के लिए बनाई जा रही ट्रांसफर पॉलिसी कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात है, इसे बंद किया जाए। कर्मचारियों का वेतनमान पंजाब पैटर्न से हटाकर केंद्र पैटर्न से जोड़ा जाए तथा इसे शीघ्र लागू किया जाए। उन्होंने मांग की है कि शिक्षकों की मांगों को बजट सत्र में जल्द से जल्द पारित किया जाए। इस दौरान शिक्षकों में अशोक कुमार, संजीव चंदेल, कुलदीप सिंह, वरुण ठाकुर सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
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UP Elections 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के लिए आज यानी बुधवार को मतदान हो रहा है. चौथे चरण के मतदान से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से अपील करते हुए कहा कि सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए मताधिकार का प्रयोग जरूर करें. योगी ने अपने ट्विट हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, उ. प्र. विधानसभा चुनाव-2022 का आज चतुर्थ चरण है. भयमुक्त, दंगामुक्त, अपराधमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश के लिए, विकासयुक्त और सुरक्षायुक्त अपने सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए सभी सम्मानित मतदाता गण अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें. उन्होंने आगे लिखा, अतः ध्यान रहे. . . पहले मतदान फिर जलपान.
उत्तर विधानसभा चुनाव का आज चौथा चरण है. चौथे चरण के लिए 624 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. इस चरण में नौ जिलों की 59 सीटों पर वोटिंग हो रही है. जिन जिलों में आज वोट डाले जा रहे हैं उनमें फतेहपुर, लखनऊ, रायबरेली, लखीमपुर खीसी, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव और बांदा शामिल है. इस चरण में कुल 2 करो 12 लाख से अधिक मतदाता 624 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.
भयमुक्त, दंगामुक्त, अपराधमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश के लिए, विकासयुक्त और सुरक्षायुक्त अपने सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए सभी सम्मानित मतदाता गण अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें।
बता दें कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इन 59 में से 51 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. वहीं समाजवादी पार्टी सिर्फ चार सीटें ही जीत पाई थी. वहीं बसपा के खाते में सिर्फ तीन सीटें गई थीं वहीं बीजेपी के सहयोगी दल अपना दल-सोनेलाल को एक सीट मिली थी.
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सात चरणों में हो रहा है. पहले चरण के लिए मतदान 10 फरवरी, दूसरे चरण के लिए वोटिंग 14 और तीसरे चरण का मतदान 20 फरवरी को हो चुका है. वहीं पांचवे चरण के लिए 27 फरवरी को होगा. छठवें चरण के लिए वोटिंग 3 मार्च और सातवां और आखिरी चरण 7 मार्च को होगा. वहीं वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी और उसी दिन परिणाम जारी कर दिए जाएंगे.
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UP Elections दो हज़ार बाईस: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के लिए आज यानी बुधवार को मतदान हो रहा है. चौथे चरण के मतदान से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से अपील करते हुए कहा कि सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए मताधिकार का प्रयोग जरूर करें. योगी ने अपने ट्विट हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, उ. प्र. विधानसभा चुनाव-दो हज़ार बाईस का आज चतुर्थ चरण है. भयमुक्त, दंगामुक्त, अपराधमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश के लिए, विकासयुक्त और सुरक्षायुक्त अपने सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए सभी सम्मानित मतदाता गण अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें. उन्होंने आगे लिखा, अतः ध्यान रहे. . . पहले मतदान फिर जलपान. उत्तर विधानसभा चुनाव का आज चौथा चरण है. चौथे चरण के लिए छः सौ चौबीस उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. इस चरण में नौ जिलों की उनसठ सीटों पर वोटिंग हो रही है. जिन जिलों में आज वोट डाले जा रहे हैं उनमें फतेहपुर, लखनऊ, रायबरेली, लखीमपुर खीसी, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव और बांदा शामिल है. इस चरण में कुल दो करो बारह लाख से अधिक मतदाता छः सौ चौबीस उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. भयमुक्त, दंगामुक्त, अपराधमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश के लिए, विकासयुक्त और सुरक्षायुक्त अपने सपनों का उत्तर प्रदेश बनाने के लिए सभी सम्मानित मतदाता गण अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। बता दें कि साल दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में इन उनसठ में से इक्यावन सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. वहीं समाजवादी पार्टी सिर्फ चार सीटें ही जीत पाई थी. वहीं बसपा के खाते में सिर्फ तीन सीटें गई थीं वहीं बीजेपी के सहयोगी दल अपना दल-सोनेलाल को एक सीट मिली थी. बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सात चरणों में हो रहा है. पहले चरण के लिए मतदान दस फरवरी, दूसरे चरण के लिए वोटिंग चौदह और तीसरे चरण का मतदान बीस फरवरी को हो चुका है. वहीं पांचवे चरण के लिए सत्ताईस फरवरी को होगा. छठवें चरण के लिए वोटिंग तीन मार्च और सातवां और आखिरी चरण सात मार्च को होगा. वहीं वोटों की गिनती दस मार्च को होगी और उसी दिन परिणाम जारी कर दिए जाएंगे.
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Adipurush: 'ऐसी टपोरी भाषा...', आदिपुरुष के डायलॉग पर भड़की कांग्रेस, जानें क्या कहा?
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया जिससे साफ जाहिर होता है कि अब यह मामला आम दर्शकों के बीच ही नहीं, बल्कि सियासतदानों के बीच भी विवाद का विषय बनेगी। हालांकि, अभी तक बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आएगी।
नई दिल्ली। फिल्म 'आदिपुरुष' को लेकर जारी विरोध पहले महज दर्शकों की परिधि तक ही सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब इस पूरे विवाद पर सियासतदान भी कूद रहे हैं। बहुत मुमकिन है कि फिल्म को लेकर जारी विवाद में सभी सियासतदान अपने लिए सियासी हित तलाशने की कोशिश करेंगे। इस बीच इसी कोशिश में कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत भी जुट गई है। उन्होंने आदिपुरुष को लेकर जारी बवाल पर ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने जहा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र किया, तो वहीं मनोज मुंतशिर को भी आड़े हाथों लिया है। दरअसल, मनोज मुंतिशर ने ही फिल्म के डॉयलॉग लिखे हैं, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश है। फिल्म देख चुके दर्शकों का कहना है कि फिल्म में असभ्य शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। भगवान हनुमान से लेकर मां तक के मुख से अमर्यादित संवाद बुलवाए गए हैं।
इस बीच फिल्म डॉयलॉग लिखने वाले मनोज मंतुशिर मीडिया के सामने आए और उन्होंने बताया कि क्यों ऐसा संवाद लिखा गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि आजकल के लोग खुद इस फिल्म से कनेक्ट कर सकें, इसलिए ऐसी भाषा शैली का उपयोग किया गया। इस बीच उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर क्यों सिर्फ भगवान हनुमान की भाषा शैली और संवाद पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अगर सवाल ही उठ रहे हैं, तो भगवान राम और मां सीता की भाषा शैली और संवाद पर भी उठने चाहिए। हालांकि, फिल्म में मां सीता को भारत की बेटी बताने की वजह से नेपाल के लोगों में आक्रोश है। नेपाल के सभी सिनेमाघरों में फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जब तक फिल्म के संवाद में बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक फिल्म रिलीज नहीं की जाएगी।
हमारे आराध्य भगवान श्रीराम मर्यादापुरुषोत्तम है और प्रभु श्री हनुमान सौम्यता और गम्भीरता का प्रतीक हैं।
इस बीच अब कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालती हुई सुप्रिया श्रीनेत ने मनोज मंतुशिर को निशाने पर लिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, 'हमारे आराध्य भगवान श्रीराम मर्यादापुरुषोत्तम है और प्रभु श्री हनुमान सौम्यता और गम्भीरता का प्रतीक हैं। 1987 में जब श्री रामानन्द सागर ने रामायण धारावाहिक बनाया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व० राजीव गांधी जी ने कहा था कि " 'रामायण' ने लाखों दर्शकों के मन-मस्तिष्क को प्रज्वलित कर दिया है। 'रामायण' ने विशेषतौर पर देश के युवाओं में भारत की महान संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों का संचार किया है। " उस रामायण के लेखक रामानन्द सागर जी थे, जिन्होंने करोड़ों लोगों की आस्था को टपोरी भाषा से आहत नहीं किया अपितु सियाराम की एक मधुर, सौम्य और मनमोहक छवि समाज के मन-मस्तिष्क पर अंकित कर दी। धर्म और धर्म के कारोबार में यही अंतर है। अपनी चाटुकारिता के बल पर सस्ती लोकप्रियता तो मिल जाएगी, बड़े शो भी मिल जाते हैं, लेकिन हुनर ना होना आड़े ज़रूर आता है। जो हनुमान को 'तेरे बाप की जली' कहलवा दे, वो लेखक तो विद्रूप है ही, लेकिन हिंदू भी बड़ा भोंडे क़िस्म का है।
इस बीच उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया जिससे साफ परिलक्षित होता है कि अब यह मामला आम दर्शकों के बीच ही नहीं, बल्कि सियासतदानों के बीच भी विवाद का केंद्र बन रहा है। हालांकि, अभी तक बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बहुत मुमकिन है कि अगर बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती है, तो कांग्रेस अपने हाथ से ये मौका नहीं जाने देगी। वैसे भी इस साल के अंत में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके अलावा अगले वर्ष लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बजेगा, तो ऐसे में इस दौरान आने वाले सभी मुद्दों में अपने लिए सियासी हित तलाशने की कोशिश सभी पार्टियों की ओर से की जाएगी। वहीं, अब यह पूरा मामला कोर्ट में भी पहुंच चुका है। दरअसल, हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है, लेकिन यहां गौर करने वाली बात है कि बेशक लोगों में फिल्म को लेकर आक्रोश और विरोध का आलम हो, लेकिन फिल्म की कलेक्शन बता रही है कि लोगों में फिल्म को देखने की आतुरता अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
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Adipurush: 'ऐसी टपोरी भाषा...', आदिपुरुष के डायलॉग पर भड़की कांग्रेस, जानें क्या कहा? उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया जिससे साफ जाहिर होता है कि अब यह मामला आम दर्शकों के बीच ही नहीं, बल्कि सियासतदानों के बीच भी विवाद का विषय बनेगी। हालांकि, अभी तक बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आएगी। नई दिल्ली। फिल्म 'आदिपुरुष' को लेकर जारी विरोध पहले महज दर्शकों की परिधि तक ही सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब इस पूरे विवाद पर सियासतदान भी कूद रहे हैं। बहुत मुमकिन है कि फिल्म को लेकर जारी विवाद में सभी सियासतदान अपने लिए सियासी हित तलाशने की कोशिश करेंगे। इस बीच इसी कोशिश में कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत भी जुट गई है। उन्होंने आदिपुरुष को लेकर जारी बवाल पर ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने जहा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र किया, तो वहीं मनोज मुंतशिर को भी आड़े हाथों लिया है। दरअसल, मनोज मुंतिशर ने ही फिल्म के डॉयलॉग लिखे हैं, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश है। फिल्म देख चुके दर्शकों का कहना है कि फिल्म में असभ्य शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। भगवान हनुमान से लेकर मां तक के मुख से अमर्यादित संवाद बुलवाए गए हैं। इस बीच फिल्म डॉयलॉग लिखने वाले मनोज मंतुशिर मीडिया के सामने आए और उन्होंने बताया कि क्यों ऐसा संवाद लिखा गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि आजकल के लोग खुद इस फिल्म से कनेक्ट कर सकें, इसलिए ऐसी भाषा शैली का उपयोग किया गया। इस बीच उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर क्यों सिर्फ भगवान हनुमान की भाषा शैली और संवाद पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अगर सवाल ही उठ रहे हैं, तो भगवान राम और मां सीता की भाषा शैली और संवाद पर भी उठने चाहिए। हालांकि, फिल्म में मां सीता को भारत की बेटी बताने की वजह से नेपाल के लोगों में आक्रोश है। नेपाल के सभी सिनेमाघरों में फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि जब तक फिल्म के संवाद में बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक फिल्म रिलीज नहीं की जाएगी। हमारे आराध्य भगवान श्रीराम मर्यादापुरुषोत्तम है और प्रभु श्री हनुमान सौम्यता और गम्भीरता का प्रतीक हैं। इस बीच अब कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालती हुई सुप्रिया श्रीनेत ने मनोज मंतुशिर को निशाने पर लिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, 'हमारे आराध्य भगवान श्रीराम मर्यादापुरुषोत्तम है और प्रभु श्री हनुमान सौम्यता और गम्भीरता का प्रतीक हैं। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में जब श्री रामानन्द सागर ने रामायण धारावाहिक बनाया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वशून्य राजीव गांधी जी ने कहा था कि " 'रामायण' ने लाखों दर्शकों के मन-मस्तिष्क को प्रज्वलित कर दिया है। 'रामायण' ने विशेषतौर पर देश के युवाओं में भारत की महान संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों का संचार किया है। " उस रामायण के लेखक रामानन्द सागर जी थे, जिन्होंने करोड़ों लोगों की आस्था को टपोरी भाषा से आहत नहीं किया अपितु सियाराम की एक मधुर, सौम्य और मनमोहक छवि समाज के मन-मस्तिष्क पर अंकित कर दी। धर्म और धर्म के कारोबार में यही अंतर है। अपनी चाटुकारिता के बल पर सस्ती लोकप्रियता तो मिल जाएगी, बड़े शो भी मिल जाते हैं, लेकिन हुनर ना होना आड़े ज़रूर आता है। जो हनुमान को 'तेरे बाप की जली' कहलवा दे, वो लेखक तो विद्रूप है ही, लेकिन हिंदू भी बड़ा भोंडे क़िस्म का है। इस बीच उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी जिक्र किया जिससे साफ परिलक्षित होता है कि अब यह मामला आम दर्शकों के बीच ही नहीं, बल्कि सियासतदानों के बीच भी विवाद का केंद्र बन रहा है। हालांकि, अभी तक बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बहुत मुमकिन है कि अगर बीजेपी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती है, तो कांग्रेस अपने हाथ से ये मौका नहीं जाने देगी। वैसे भी इस साल के अंत में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके अलावा अगले वर्ष लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बजेगा, तो ऐसे में इस दौरान आने वाले सभी मुद्दों में अपने लिए सियासी हित तलाशने की कोशिश सभी पार्टियों की ओर से की जाएगी। वहीं, अब यह पूरा मामला कोर्ट में भी पहुंच चुका है। दरअसल, हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है, लेकिन यहां गौर करने वाली बात है कि बेशक लोगों में फिल्म को लेकर आक्रोश और विरोध का आलम हो, लेकिन फिल्म की कलेक्शन बता रही है कि लोगों में फिल्म को देखने की आतुरता अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
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अनुपमा में हर दिन नए ट्विस्ट आ रहे हैं। इस समय शो में दिखाया जा रहा है कि 5 साल पहले अनुज से अलग होने के बाद अनुपमा, अमेरिका जाकर अपनी नई जर्नी की शुरुआत करती है।
अब शो में दिखाया जा रहा है कि अनुपमा अमेरिका में एक पंजाबी रेस्टोरेंट में काम कर रही है। वो सुबह-सुबह वहां साफ सफाई करने के बाद, पूजा करने के लिए दीया जलाएगी।
ऐसे में वहां पर फायर अलार्म बजने लगेगा। इस वजह से रेस्टोरेंट में हंगामा हो जाएगा। तभी वहां पर अनुपमा का नया दोस्त विक्रम पहुंच जाएगा और फिर वो उसे फायर अलार्म के बारे में बताएगा।
इतना ही नहीं, विक्रम, अनुपमा को आगे से इस चीज को ध्यान में रखने की नसीहत देगा। दूसरी तरफ अनुज की श्रुति से सगाई हो गई है। वहीं अनुपमा की श्रुति से मुलाकात हो चुकी है।
फिर सुबह-सुबह श्रुति, राध्या (छोटी अनु) के साथ रेस्टोरेंट जाएगी। इस मौके पर छोटी अनु रेस्टोरेंट के बाहर ही रुकेगी और रेस्टोरेंट के अंदर श्रुति, अनुपमा से बातों में लग जाएगी।
श्रुति, अनुपमा को जोशी बेन के नाम से पुकारती है। इसके बाद श्रुति बाहर आकर राध्या को जोशी बेन के बारे में बताती है और उनसे मिलने के लिए कहती है, लेकिन राध्या मना कर देती है।
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अनुपमा में हर दिन नए ट्विस्ट आ रहे हैं। इस समय शो में दिखाया जा रहा है कि पाँच साल पहले अनुज से अलग होने के बाद अनुपमा, अमेरिका जाकर अपनी नई जर्नी की शुरुआत करती है। अब शो में दिखाया जा रहा है कि अनुपमा अमेरिका में एक पंजाबी रेस्टोरेंट में काम कर रही है। वो सुबह-सुबह वहां साफ सफाई करने के बाद, पूजा करने के लिए दीया जलाएगी। ऐसे में वहां पर फायर अलार्म बजने लगेगा। इस वजह से रेस्टोरेंट में हंगामा हो जाएगा। तभी वहां पर अनुपमा का नया दोस्त विक्रम पहुंच जाएगा और फिर वो उसे फायर अलार्म के बारे में बताएगा। इतना ही नहीं, विक्रम, अनुपमा को आगे से इस चीज को ध्यान में रखने की नसीहत देगा। दूसरी तरफ अनुज की श्रुति से सगाई हो गई है। वहीं अनुपमा की श्रुति से मुलाकात हो चुकी है। फिर सुबह-सुबह श्रुति, राध्या के साथ रेस्टोरेंट जाएगी। इस मौके पर छोटी अनु रेस्टोरेंट के बाहर ही रुकेगी और रेस्टोरेंट के अंदर श्रुति, अनुपमा से बातों में लग जाएगी। श्रुति, अनुपमा को जोशी बेन के नाम से पुकारती है। इसके बाद श्रुति बाहर आकर राध्या को जोशी बेन के बारे में बताती है और उनसे मिलने के लिए कहती है, लेकिन राध्या मना कर देती है।
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बक्सरः सभी पंचायत के किसानों का धान का बीज सरकार द्वारा निर्धारित मुल्य पर धान का बीज वितरण किया जा रहा है । कृषि समन्वयक एवं किसान सलाहकारों के संयुक्त हड़ताल के कारण सरकार द्वारा अनुदान पर धान का बीज किसानों को वितरण किए जाने वाले धान बीज पूरी तरह प्रभावित हो गया है । जिसके कारण प्राइवेट बीज दुकानदार की चांदी कट रही है । धान का बीज 60 रूपया से 80 रूपया प्रतिकिलो की वसूली की जा रही है । जिससे किसानों को आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है । किसानों की बिषम स्थिति को देखते हुए जिला कृषि पदाधिकारी एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजय कुमार शर्मा के द्वारा 300 क्वींटल धान का बीज की उपलब्धता ई. किसान भवन काराकाट (गोडारी) में की गई है ।
जिसका वितरण ई. किसान भवन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक वितरण हेतू चार-चार कर्मियों को लगाया गया है । सरकार के स्तर से धान बीज का मुल्य 6. 20 से लेकर 27 रूपया प्रतिकिलो की दर से वितरण किया जा रहा है । प्रखंड के बीटीएम अजित सिह, एटीएम रविकांत एवं दो गैर हड़तालिक किसान सलाहकार मो. ईमरान,हरेंद्र कुमार रात दिन एक करके 500 से अधिक किसानों को बीज उठाव हेतु ओटीपी परमिट निर्गत कर दिया गया है । किसान ओटीपी के आधार पर सस्ती दर पर ई. किसान भवन काराकाट गोडारी से प्राप्त करके हर्ष व्यक्त कर रहे हैं । आज बुधवार को बहुत सारे किसानों के द्वारा धान बीज का उठाव किया गया जिसमें किसान विश्वनाथ शर्मा दनवार, लक्ष्मण कुमार सकला , अरबिन्द कुमार दनवार, चनामुन्नी देवी गम्हरिया इत्यादि किसानों ने मार्केट के मुल्य से कम दर पर बीज का उठाव कर राहत महसूस कर रहे हैं ।
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बक्सरः सभी पंचायत के किसानों का धान का बीज सरकार द्वारा निर्धारित मुल्य पर धान का बीज वितरण किया जा रहा है । कृषि समन्वयक एवं किसान सलाहकारों के संयुक्त हड़ताल के कारण सरकार द्वारा अनुदान पर धान का बीज किसानों को वितरण किए जाने वाले धान बीज पूरी तरह प्रभावित हो गया है । जिसके कारण प्राइवेट बीज दुकानदार की चांदी कट रही है । धान का बीज साठ रूपया से अस्सी रूपया प्रतिकिलो की वसूली की जा रही है । जिससे किसानों को आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है । किसानों की बिषम स्थिति को देखते हुए जिला कृषि पदाधिकारी एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजय कुमार शर्मा के द्वारा तीन सौ क्वींटल धान का बीज की उपलब्धता ई. किसान भवन काराकाट में की गई है । जिसका वितरण ई. किसान भवन में सुबह नौ बजे से शाम पाँच बजे तक वितरण हेतू चार-चार कर्मियों को लगाया गया है । सरकार के स्तर से धान बीज का मुल्य छः. बीस से लेकर सत्ताईस रूपया प्रतिकिलो की दर से वितरण किया जा रहा है । प्रखंड के बीटीएम अजित सिह, एटीएम रविकांत एवं दो गैर हड़तालिक किसान सलाहकार मो. ईमरान,हरेंद्र कुमार रात दिन एक करके पाँच सौ से अधिक किसानों को बीज उठाव हेतु ओटीपी परमिट निर्गत कर दिया गया है । किसान ओटीपी के आधार पर सस्ती दर पर ई. किसान भवन काराकाट गोडारी से प्राप्त करके हर्ष व्यक्त कर रहे हैं । आज बुधवार को बहुत सारे किसानों के द्वारा धान बीज का उठाव किया गया जिसमें किसान विश्वनाथ शर्मा दनवार, लक्ष्मण कुमार सकला , अरबिन्द कुमार दनवार, चनामुन्नी देवी गम्हरिया इत्यादि किसानों ने मार्केट के मुल्य से कम दर पर बीज का उठाव कर राहत महसूस कर रहे हैं ।
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India vs Australia: पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वसीम जाफर ने टीम इंडिया के कप्तान अजिंक्य रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच से पहले सीक्रेट मैसेज दिया है।
India vs Australia: पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वसीम जाफर आए दिन कोई न कोई पोस्ट या मीम शेयर करके चर्चा में बने रहते हैं। वसीम जाफर द्वारा किए गए ट्वीट को फैंस भी पढ़ना काफी पसंद करते हैं। इस बीच वसीम जाफर ने ट्वीट कर टीम इंडिया के कप्तान अंजिक्य रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच से पहले सीक्रेट मैसेज दिया है।
वसीम जाफर ने अंग्रेजी में एक पहेली ट्वीट कर लिखा, 'आज मेरे पास झील के किनारे अच्छी फिल्टर कॉफी थी। कमाल है कि मछली कैसे पानी के भीतर सांस ले सकती है। फिर मैं डोम्बिवली के एक पुराने महल में बम्पिंग करने से पहले चे ग्वेरा के एक स्थान से गुजरा जो अब बोरीवली में एक रेस्तरां है।'
जाफर ने इस पहेली को पोस्ट करने के बाद इसे डिकोड करने के लिए कहा है साथ ही उन्होंने अपने इस ट्वीट में अंजिक्य रहाणे को भी टैग किया है। वसीम जाफर की यह पहेली काफी मुश्किल है जिसको डिकोड कर पाना फैंस के लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है। हालांकि कुछ फैंस इसे डिकोड कर कह रहे हैं कि इस पहेली में सिडनी टेस्ट मैच में टीम इंडिया को किन खिलाड़ियों को खिलाना चाहिए उसका संदेश छिपा है।
हम इस पहेली को डिकोड करने में आपकी थोड़ी मदद करते हैं। फिल्टर कॉफी से वसीम जाफर का मतलब केएल राहुल से है वहीं मछली से मतलब शुभमन गिल Che Guevara से मतलब चेतेश्वर पुजारा डोम्बिवली से मतलब अंजिक्य रहाणे और बोरीवली से उनका मतलब रोहित शर्मा से है। शायद इस ट्वीट के माध्यम से वसीम जाफर रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच में यही बल्लेबाजी ऑर्डर रखने के लिए कह हों।
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India vs Australia: पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वसीम जाफर ने टीम इंडिया के कप्तान अजिंक्य रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच से पहले सीक्रेट मैसेज दिया है। India vs Australia: पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वसीम जाफर आए दिन कोई न कोई पोस्ट या मीम शेयर करके चर्चा में बने रहते हैं। वसीम जाफर द्वारा किए गए ट्वीट को फैंस भी पढ़ना काफी पसंद करते हैं। इस बीच वसीम जाफर ने ट्वीट कर टीम इंडिया के कप्तान अंजिक्य रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच से पहले सीक्रेट मैसेज दिया है। वसीम जाफर ने अंग्रेजी में एक पहेली ट्वीट कर लिखा, 'आज मेरे पास झील के किनारे अच्छी फिल्टर कॉफी थी। कमाल है कि मछली कैसे पानी के भीतर सांस ले सकती है। फिर मैं डोम्बिवली के एक पुराने महल में बम्पिंग करने से पहले चे ग्वेरा के एक स्थान से गुजरा जो अब बोरीवली में एक रेस्तरां है।' जाफर ने इस पहेली को पोस्ट करने के बाद इसे डिकोड करने के लिए कहा है साथ ही उन्होंने अपने इस ट्वीट में अंजिक्य रहाणे को भी टैग किया है। वसीम जाफर की यह पहेली काफी मुश्किल है जिसको डिकोड कर पाना फैंस के लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है। हालांकि कुछ फैंस इसे डिकोड कर कह रहे हैं कि इस पहेली में सिडनी टेस्ट मैच में टीम इंडिया को किन खिलाड़ियों को खिलाना चाहिए उसका संदेश छिपा है। हम इस पहेली को डिकोड करने में आपकी थोड़ी मदद करते हैं। फिल्टर कॉफी से वसीम जाफर का मतलब केएल राहुल से है वहीं मछली से मतलब शुभमन गिल Che Guevara से मतलब चेतेश्वर पुजारा डोम्बिवली से मतलब अंजिक्य रहाणे और बोरीवली से उनका मतलब रोहित शर्मा से है। शायद इस ट्वीट के माध्यम से वसीम जाफर रहाणे को सिडनी टेस्ट मैच में यही बल्लेबाजी ऑर्डर रखने के लिए कह हों।
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Parineeti-Raghav: परी और राघव दोनों अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे थे। जहां कि तस्वीरें दोनों ने अपने अकाउंट पर शेयर किया था। अब इनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है जिसमें दोनों स्वर्ण मंदिर में सेवा करते दिख रहे है। वीडिया में साफ देखा जा सकता हैं कि परी और राघव बर्तन धोते दिख रहे हैं।
Parineeti-Raghav: सगाई के बाद कपल स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे। परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की सोशल मीडिया पर स्वर्ण मंदिर की कई फोटो और वीडियोज वायरल हो रही है। जहां परिणीति क्रीम कलर के सूट में दिखाई दी वहीं राघव व्हाइट कुर्ता में नजर आए जिसमें वह बेहद ही हैंडसम दिख रहे हैं।
Parineeti-Raghav Engagement: खबरें आ रही है कि दिल्ली और पंजाब के सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा परिणीति की बहन प्रियंका चोपड़ा, पीसी की मां मधु चोपड़ा के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। अब इन सब खबरों के बीच प्रियंका चोपड़ा को एयरपोर्ट पर स्पॉट भी किया गया है।
हालांकि दोनों खुल कर अपने रिलेशनशिप को लेकर बात नहीं कर रहे हैं. इसी बीच खबरें आ रही हैं कि परिणीति और राघव की सगाई 13 मई यानी इसी शनिवार को होने वाली है. दिल्ली के मानसिंह रोड़ पर कपूरथला हाउस में दोनों की सगाई का फंक्शन रखा गया है.
Parineeti Chopra: परिणीति चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की हैं जिसमें उन्होंने अपनी एक फोटो साझा की हैं। अब उस फोटो में ऐसा क्या खास हैं जो वो चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, परिणीति चोपड़ा ने एक फोटो पोस्ट की हैं जिसमें वह मिरर सेल्फी भी दिख रही हैं। इस फोटो के साथ एक्ट्रेस ने कैप्शन में चश्मिश लिखा हैं।
Bollywood Controversy: आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिसके बारे में बेहद कम लोग ही जानते होंगे। आपको बता दें कि अर्जुन कपूर ने परिणिति चोपड़ा के साथ फिल्म इश्कजादे में साथ काम किया था। ये अर्जुन और परिणिति दोनों की ही बतौर मेन लीड पहली फिल्म थी, जो सुपरहिट रही थी।
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Parineeti-Raghav: परी और राघव दोनों अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे थे। जहां कि तस्वीरें दोनों ने अपने अकाउंट पर शेयर किया था। अब इनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है जिसमें दोनों स्वर्ण मंदिर में सेवा करते दिख रहे है। वीडिया में साफ देखा जा सकता हैं कि परी और राघव बर्तन धोते दिख रहे हैं। Parineeti-Raghav: सगाई के बाद कपल स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे। परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की सोशल मीडिया पर स्वर्ण मंदिर की कई फोटो और वीडियोज वायरल हो रही है। जहां परिणीति क्रीम कलर के सूट में दिखाई दी वहीं राघव व्हाइट कुर्ता में नजर आए जिसमें वह बेहद ही हैंडसम दिख रहे हैं। Parineeti-Raghav Engagement: खबरें आ रही है कि दिल्ली और पंजाब के सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा परिणीति की बहन प्रियंका चोपड़ा, पीसी की मां मधु चोपड़ा के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। अब इन सब खबरों के बीच प्रियंका चोपड़ा को एयरपोर्ट पर स्पॉट भी किया गया है। हालांकि दोनों खुल कर अपने रिलेशनशिप को लेकर बात नहीं कर रहे हैं. इसी बीच खबरें आ रही हैं कि परिणीति और राघव की सगाई तेरह मई यानी इसी शनिवार को होने वाली है. दिल्ली के मानसिंह रोड़ पर कपूरथला हाउस में दोनों की सगाई का फंक्शन रखा गया है. Parineeti Chopra: परिणीति चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की हैं जिसमें उन्होंने अपनी एक फोटो साझा की हैं। अब उस फोटो में ऐसा क्या खास हैं जो वो चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, परिणीति चोपड़ा ने एक फोटो पोस्ट की हैं जिसमें वह मिरर सेल्फी भी दिख रही हैं। इस फोटो के साथ एक्ट्रेस ने कैप्शन में चश्मिश लिखा हैं। Bollywood Controversy: आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिसके बारे में बेहद कम लोग ही जानते होंगे। आपको बता दें कि अर्जुन कपूर ने परिणिति चोपड़ा के साथ फिल्म इश्कजादे में साथ काम किया था। ये अर्जुन और परिणिति दोनों की ही बतौर मेन लीड पहली फिल्म थी, जो सुपरहिट रही थी।
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भोपाल : दरअसल Board of Secondary Education (MP Board) ने बीती तीन अक्टूबर को निर्देश जारी कर हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षा की तारीख घोषित कर दी थीं। निर्देश में कहा गया था कि दोनों कक्षाओं की प्रायोगिक परीक्षाएं 13 फरवरी से 25 मार्च 2023 के बीच और सैद्धांतिक परीक्षाएं 15 फरवरी से 20 मार्च 2023 के बीच आयोजित की जाएंगी। वार्षिक परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होने पर माशिमं के सदस्यों ने विरोध किया।
मंडल के कुछ सदस्यों का कहना था कि विद्यार्थियों को पढऩे का समय नहीं पाता है। पंद्रह फरवरी से परीक्षा शुरू होने पर कोर्स भी अधूरा रहता है। इससे परीक्षा एक मार्च से आयोजित करवाई जाए। बोर्ड के सदस्यों के प्रस्ताव पर साधारण सभा की हाल ही में आयोजित बैठक में एक मार्च से परीक्षा शुरू करवाने का निर्णय ले लिया गया है। एक मार्च से परीक्षा शुरू होने से फरवरी में प्रैक्टिकल की परीक्षाएं संपन्न करवाई जाएगी। मंडल द्वारा परीक्षा विस्तृत टाइम टेबिल जल्द घोषित किया जाएगा।
कोरोना कॉल से मंडल ने दसवीं-बारहवीं की फरवरी से परीक्षाएं आयोजित करने की शुरुआत की थी। इस बार भी मंडल ने पंद्रह फरवरी से परीक्षाएं शुरू करने की तिथि घोषित कर दी थी। फरवरी में परीक्षाएं शुरू करने से विद्यार्थियों को इससे फायदा मिल रहा था। मुख्य परीक्षा फरवरी में शुरू होकर मार्च में समाप्त हो जाती थी।
मार्च के पहले सप्ताह में ही परीक्षाएं समाप्त होने से विद्यार्थियों को नीट, जेईई जैसी परीक्षा की तैयारी करने के लिए समय मिल जाता था। लेकिन मार्च में परीक्षा शुरू होकर अप्रैल तक परीक्षा होने से विद्यार्थियों को नीट, जेईई जैसी परीक्षा के लिए अब पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।
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भोपाल : दरअसल Board of Secondary Education ने बीती तीन अक्टूबर को निर्देश जारी कर हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षा की तारीख घोषित कर दी थीं। निर्देश में कहा गया था कि दोनों कक्षाओं की प्रायोगिक परीक्षाएं तेरह फरवरी से पच्चीस मार्च दो हज़ार तेईस के बीच और सैद्धांतिक परीक्षाएं पंद्रह फरवरी से बीस मार्च दो हज़ार तेईस के बीच आयोजित की जाएंगी। वार्षिक परीक्षाएं पंद्रह फरवरी से शुरू होने पर माशिमं के सदस्यों ने विरोध किया। मंडल के कुछ सदस्यों का कहना था कि विद्यार्थियों को पढऩे का समय नहीं पाता है। पंद्रह फरवरी से परीक्षा शुरू होने पर कोर्स भी अधूरा रहता है। इससे परीक्षा एक मार्च से आयोजित करवाई जाए। बोर्ड के सदस्यों के प्रस्ताव पर साधारण सभा की हाल ही में आयोजित बैठक में एक मार्च से परीक्षा शुरू करवाने का निर्णय ले लिया गया है। एक मार्च से परीक्षा शुरू होने से फरवरी में प्रैक्टिकल की परीक्षाएं संपन्न करवाई जाएगी। मंडल द्वारा परीक्षा विस्तृत टाइम टेबिल जल्द घोषित किया जाएगा। कोरोना कॉल से मंडल ने दसवीं-बारहवीं की फरवरी से परीक्षाएं आयोजित करने की शुरुआत की थी। इस बार भी मंडल ने पंद्रह फरवरी से परीक्षाएं शुरू करने की तिथि घोषित कर दी थी। फरवरी में परीक्षाएं शुरू करने से विद्यार्थियों को इससे फायदा मिल रहा था। मुख्य परीक्षा फरवरी में शुरू होकर मार्च में समाप्त हो जाती थी। मार्च के पहले सप्ताह में ही परीक्षाएं समाप्त होने से विद्यार्थियों को नीट, जेईई जैसी परीक्षा की तैयारी करने के लिए समय मिल जाता था। लेकिन मार्च में परीक्षा शुरू होकर अप्रैल तक परीक्षा होने से विद्यार्थियों को नीट, जेईई जैसी परीक्षा के लिए अब पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।
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आईपीएल 2022 में हार्दिक पांड्या की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस को एक और हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि ये टीम की अभी तक तीसरी ही हार है, इसके बाद भी टीम के कप्तान हार्दिक पांड्या काफी निराश दिखाई दिए। पांड्या की पुरानी आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस ने जीटी को एक रोचक मुकाबले में पांच रन से हरा दिया था। मैच के बाद हार्दिक पांड्या ने कहा कि आखिरी ओवर में नौ रन आसानी से बन सकते थे, लेकिन दो खिलाड़ियों का रन आउट होना उनकी टीम पर भारी पड़ गया। हार्दिक पांड्या और राहुल तेवतिया मैच में रन आउट हुए जिससे मुंबई इंडियंस ने डेनियल सैम्स की अंतिम ओवर में शानदार गेंदबाजी की बदौलत जीत हासिल कर ली।
आपको बता दें कि गुजरात टाइटंस को अंतिम ओवर में नौ रन चाहिए थे लेकिन डेनियल सैम्स ने छह गेंद में केवल तीन रन दिए जिसमें राहुल तेवतिया रन आउट भी हुए। हार्दिक पांड्या ने हार का ठीकरा बल्लेबाजों पर फोड़ा और कहा कि मुझे लगता है कि बल्लेबाजों ने हमें निराश किया। टी20 मैचों में आप लगातार हार नहीं सकते। इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते, क्योंकि हम इस तरह के मैच जीते हैं। हमने गलतियां की जिसका खामियाजा भुगता। हमने अपनी पारी में 19. 2 ओवर तक अच्छा क्रिकेट खेला, एक या दो हिट अंतर ला सकते थे। हमें इसे अंतिम ओवर तक नहीं पहुंचाना चाहिए था।
हार्दिक पांड्या ने गेंदबाजों के प्रदर्शन की तारीफ की क्योंकि मुंबई इंडियंस अच्छी शुरुआत के बावजूद छह विकेट पर 177 रन का स्कोर ही बना सकी थी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि गेंदबाजों ने शानदार काम किया और 170 रन के स्कोर पर ही रोक दिया क्योंकि वे 200 रन की ओर बढ़ रहे थे। उधर मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि अंत में यह करीबी मुकाबला हो गया। हम लंबे समय से जीत की तलाश में थे, जिससे यह संतोष वाली जीत थी। भाग्य हमारे पक्ष में होना ही था। हमने स्कोर में 15-20 रन कम बनाए, उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की।
(Bhasha inputs)
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आईपीएल दो हज़ार बाईस में हार्दिक पांड्या की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस को एक और हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि ये टीम की अभी तक तीसरी ही हार है, इसके बाद भी टीम के कप्तान हार्दिक पांड्या काफी निराश दिखाई दिए। पांड्या की पुरानी आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस ने जीटी को एक रोचक मुकाबले में पांच रन से हरा दिया था। मैच के बाद हार्दिक पांड्या ने कहा कि आखिरी ओवर में नौ रन आसानी से बन सकते थे, लेकिन दो खिलाड़ियों का रन आउट होना उनकी टीम पर भारी पड़ गया। हार्दिक पांड्या और राहुल तेवतिया मैच में रन आउट हुए जिससे मुंबई इंडियंस ने डेनियल सैम्स की अंतिम ओवर में शानदार गेंदबाजी की बदौलत जीत हासिल कर ली। आपको बता दें कि गुजरात टाइटंस को अंतिम ओवर में नौ रन चाहिए थे लेकिन डेनियल सैम्स ने छह गेंद में केवल तीन रन दिए जिसमें राहुल तेवतिया रन आउट भी हुए। हार्दिक पांड्या ने हार का ठीकरा बल्लेबाजों पर फोड़ा और कहा कि मुझे लगता है कि बल्लेबाजों ने हमें निराश किया। टीबीस मैचों में आप लगातार हार नहीं सकते। इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते, क्योंकि हम इस तरह के मैच जीते हैं। हमने गलतियां की जिसका खामियाजा भुगता। हमने अपनी पारी में उन्नीस. दो ओवर तक अच्छा क्रिकेट खेला, एक या दो हिट अंतर ला सकते थे। हमें इसे अंतिम ओवर तक नहीं पहुंचाना चाहिए था। हार्दिक पांड्या ने गेंदबाजों के प्रदर्शन की तारीफ की क्योंकि मुंबई इंडियंस अच्छी शुरुआत के बावजूद छह विकेट पर एक सौ सतहत्तर रन का स्कोर ही बना सकी थी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि गेंदबाजों ने शानदार काम किया और एक सौ सत्तर रन के स्कोर पर ही रोक दिया क्योंकि वे दो सौ रन की ओर बढ़ रहे थे। उधर मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि अंत में यह करीबी मुकाबला हो गया। हम लंबे समय से जीत की तलाश में थे, जिससे यह संतोष वाली जीत थी। भाग्य हमारे पक्ष में होना ही था। हमने स्कोर में पंद्रह-बीस रन कम बनाए, उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की।
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Monday September 13, 2021,
बेंगलुरु की रहने वाली 11 वर्षीय मान्या हर्षा सब्जियों के छिलकों से ईको-फ्रैंडली कागज बना रही हैं। वह भारत में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली (Waste Management System) में सुधार करने का प्रयास कर रही है। वह एक वॉलेंटियर के रूप में अलग-अलग ग्रीन एक्टिविटीज़ में भाग लेती है और पर्यावरण को बचाने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें UN-Water द्वारा मान्यता प्राप्त है।
मान्या हर्षा का मानना है, "इस दुनिया में कुछ भी तब तक अपशिष्ट नहीं होता जब तक आप उसे अपशिष्ट नहीं मानते।"
मान्या, बेंगलुरु के Vibgyor High BTM स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ रही हैं और वह खुद को एक इको-एक्टिविस्ट मानती हैं, जो अपना समय पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाने में बिताती हैं। अपनी दादी के घर के हरे-भरे परिवेश में पली-बढ़ी, मान्या हमेशा प्रकृति से प्यार करती थी। जब उन्होंने शहर में कचरा की समस्या को और खराब होते देखा तो उनसे रहा नहीं गया, और वह इसके प्रति लोगों को जागरुक करने के बारे में सोचने लगी।
अब तक, उन्होंने बच्चों के साथ वॉकथॉन (children's walkathons) का आयोजन किया है, पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक ब्लॉग भी बनाया है, और इतना ही नहीं, इस विषय पर वह अब तक पांच किताबें लिख चुकी हैं, और दो और किताबों पर काम जारी है। लगातार कचरा प्रदूषण की समस्या से लड़ने के लिए उन्होंने हाल ही में मार्कोनहल्ली बांध (Markonahalli Dam) और वरका बीच (Varca Beach) पर एक सफाई अभियान का भी आयोजन किया।
मान्या कहती हैं, "मैं हर दिन को पृथ्वी दिवस (Earth Day) के रूप में मनाती हूं। मेरा मानना है कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने परिवेश और प्रकृति की देखभाल करें।"
HindustanTimes की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी की छुट्टियों के दौरान मान्या ने हजारों पेड़ों को बिना किसी खर्च के बचाने का एक नया तरीका निकाला। उनकी विधि से केवल 10 प्याज के छिलकों का उपयोग करके 2 से 3 A4 साइज की पेपर शीट तैयार की जा सकती हैं।
कागज बनाने का उनका पहला प्रयास पूरी तरह विफल रहा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, वह तब तक तकनीक में सुधार करती रही जब तक कि वह विभिन्न रंगों और पैटर्न में पेपर नहीं बना लेती।
मान्या कहती है, "मैं इस तरह धरती माता का विनाश होते नहीं देख सकती थी। वह हमारी माँ है, और उसके बच्चों के रूप में यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने माता-पिता के लिए आवाज़ उठाएं। मुझे भी ऐसा ही महसूस होता है। मैं अपनी धरती मां की पूजा करती हूं और उसके लिए खड़ी होऊंगी और बोलूंगी।"
मान्या को इस स्वतंत्रता दिवस पर Earth.org India Network से 'Rising of India' का खिताब मिला है।
TheOptimistCitizen की एक रिपोर्ट के अनुसार, मान्या का मानना है, "जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसके लिए खुद कदम उठाएं, उपदेश देना बंद करें और अभ्यास करना शुरू करें। पर्यावरण संकट से निपटने के लिए यही सही मंत्र है।"
रिपोर्ट में आगे बताया गया है, "अपने 9वें जन्मदिन पर उन्होंने अपने स्कूल परिसर में 25 पौधे लगाए और अपनी आवासीय सोसायटी में पौधे बांटे। 51वें पृथ्वी दिवस पर मान्या ने अपने अपार्टमेंट परिसर के चारों ओर 51 पौधे लगाने का संकल्प लिया। यंग एक्टिविस्ट बच्चों की डिजिटल मैगजीन Sunshine Fortnightly की चीफ़ एडिटर भी हैं। इस मैगजीन के जरिए, वह अपने रिडर्स को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करती है। अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से, मान्या ने अपने 'Each One Plant One Campaign' के एक भाग के रूप में वृक्षारोपण अभियान के लिए 46 स्वयंसेवकों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। इसके अलावा, उन्होंने प्रकृति की रक्षा पर एक कन्नड़ रैप और अपने स्कूल में Strike Off Plastic एंथम की रचना और रिकॉर्ड किया है।
दुनिया भर में कई लोग मान्या के #vegetablepaper से प्रेरित होकर घर पर ही अपना पेपर बनाना शुरू कर चुके हैं। गीले अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण के लिए उनके पर्यावरण-टिकाऊ दृष्टिकोण ने कई लोगों को प्रभावित किया है। मान्या ने विभिन्न संगठनों और स्कूलों को रोज़मर्रा की रसोई के कचरे को सब्जी के कागज में बदलने के बारे में अतिथि वार्ता दी है।
LifeBeyondNumbers की एक रिपोर्ट के अनुसार, मान्या कन्नड़ भाषा की सबसे कम उम्र की लेखिका भी हैं। उनकी पुस्तक "नीरिना पुतानी संरक्षकारु" (द वाटर हीरोज) वर्तमान पानी की समस्या पर ध्यान देती है और इसका आसान जवाब है कि युवा पर्यावरण की रक्षा के लिए एक साथ पालन कर सकते हैं। प्राकृतिक दुनिया पर लिखा गई यह उनकी दूसरी किताब है।
प्रकृति पर किताब लिखने वाली मान्या, को सबसे छोटी उम्र में यह कारनामा करने के लिए India Book of Records ने खिताब से नवाजा है।
YourStory की फ्लैगशिप स्टार्टअप-टेक और लीडरशिप कॉन्फ्रेंस 25-30 अक्टूबर, 2021 को अपने 13वें संस्करण के साथ शुरू होने जा रही है। TechSparks के बारे में अधिक अपडेट्स पाने के लिए साइन अप करें या पार्टनरशिप और स्पीकर के अवसरों में अपनी रुचि व्यक्त करने के लिए यहां साइन अप करें।
TechSparks 2021 के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें।
Tech30 2021 के लिए आवेदन अब खुले हैं, जो भारत के 30 सबसे होनहार टेक स्टार्टअप्स की सूची है। Tech30 2021 स्टार्टअप बनने के लिए यहां शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए अप्लाई करें या नॉमिनेट करें।
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Monday September तेरह, दो हज़ार इक्कीस, बेंगलुरु की रहने वाली ग्यारह वर्षीय मान्या हर्षा सब्जियों के छिलकों से ईको-फ्रैंडली कागज बना रही हैं। वह भारत में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में सुधार करने का प्रयास कर रही है। वह एक वॉलेंटियर के रूप में अलग-अलग ग्रीन एक्टिविटीज़ में भाग लेती है और पर्यावरण को बचाने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें UN-Water द्वारा मान्यता प्राप्त है। मान्या हर्षा का मानना है, "इस दुनिया में कुछ भी तब तक अपशिष्ट नहीं होता जब तक आप उसे अपशिष्ट नहीं मानते।" मान्या, बेंगलुरु के Vibgyor High BTM स्कूल में कक्षा छः में पढ़ रही हैं और वह खुद को एक इको-एक्टिविस्ट मानती हैं, जो अपना समय पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाने में बिताती हैं। अपनी दादी के घर के हरे-भरे परिवेश में पली-बढ़ी, मान्या हमेशा प्रकृति से प्यार करती थी। जब उन्होंने शहर में कचरा की समस्या को और खराब होते देखा तो उनसे रहा नहीं गया, और वह इसके प्रति लोगों को जागरुक करने के बारे में सोचने लगी। अब तक, उन्होंने बच्चों के साथ वॉकथॉन का आयोजन किया है, पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक ब्लॉग भी बनाया है, और इतना ही नहीं, इस विषय पर वह अब तक पांच किताबें लिख चुकी हैं, और दो और किताबों पर काम जारी है। लगातार कचरा प्रदूषण की समस्या से लड़ने के लिए उन्होंने हाल ही में मार्कोनहल्ली बांध और वरका बीच पर एक सफाई अभियान का भी आयोजन किया। मान्या कहती हैं, "मैं हर दिन को पृथ्वी दिवस के रूप में मनाती हूं। मेरा मानना है कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने परिवेश और प्रकृति की देखभाल करें।" HindustanTimes की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी की छुट्टियों के दौरान मान्या ने हजारों पेड़ों को बिना किसी खर्च के बचाने का एक नया तरीका निकाला। उनकी विधि से केवल दस प्याज के छिलकों का उपयोग करके दो से तीन Aचार साइज की पेपर शीट तैयार की जा सकती हैं। कागज बनाने का उनका पहला प्रयास पूरी तरह विफल रहा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, वह तब तक तकनीक में सुधार करती रही जब तक कि वह विभिन्न रंगों और पैटर्न में पेपर नहीं बना लेती। मान्या कहती है, "मैं इस तरह धरती माता का विनाश होते नहीं देख सकती थी। वह हमारी माँ है, और उसके बच्चों के रूप में यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने माता-पिता के लिए आवाज़ उठाएं। मुझे भी ऐसा ही महसूस होता है। मैं अपनी धरती मां की पूजा करती हूं और उसके लिए खड़ी होऊंगी और बोलूंगी।" मान्या को इस स्वतंत्रता दिवस पर Earth.org India Network से 'Rising of India' का खिताब मिला है। TheOptimistCitizen की एक रिपोर्ट के अनुसार, मान्या का मानना है, "जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसके लिए खुद कदम उठाएं, उपदेश देना बंद करें और अभ्यास करना शुरू करें। पर्यावरण संकट से निपटने के लिए यही सही मंत्र है।" रिपोर्ट में आगे बताया गया है, "अपने नौवें जन्मदिन पर उन्होंने अपने स्कूल परिसर में पच्चीस पौधे लगाए और अपनी आवासीय सोसायटी में पौधे बांटे। इक्यावनवें पृथ्वी दिवस पर मान्या ने अपने अपार्टमेंट परिसर के चारों ओर इक्यावन पौधे लगाने का संकल्प लिया। यंग एक्टिविस्ट बच्चों की डिजिटल मैगजीन Sunshine Fortnightly की चीफ़ एडिटर भी हैं। इस मैगजीन के जरिए, वह अपने रिडर्स को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करती है। अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से, मान्या ने अपने 'Each One Plant One Campaign' के एक भाग के रूप में वृक्षारोपण अभियान के लिए छियालीस स्वयंसेवकों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। इसके अलावा, उन्होंने प्रकृति की रक्षा पर एक कन्नड़ रैप और अपने स्कूल में Strike Off Plastic एंथम की रचना और रिकॉर्ड किया है। दुनिया भर में कई लोग मान्या के #vegetablepaper से प्रेरित होकर घर पर ही अपना पेपर बनाना शुरू कर चुके हैं। गीले अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण के लिए उनके पर्यावरण-टिकाऊ दृष्टिकोण ने कई लोगों को प्रभावित किया है। मान्या ने विभिन्न संगठनों और स्कूलों को रोज़मर्रा की रसोई के कचरे को सब्जी के कागज में बदलने के बारे में अतिथि वार्ता दी है। LifeBeyondNumbers की एक रिपोर्ट के अनुसार, मान्या कन्नड़ भाषा की सबसे कम उम्र की लेखिका भी हैं। उनकी पुस्तक "नीरिना पुतानी संरक्षकारु" वर्तमान पानी की समस्या पर ध्यान देती है और इसका आसान जवाब है कि युवा पर्यावरण की रक्षा के लिए एक साथ पालन कर सकते हैं। प्राकृतिक दुनिया पर लिखा गई यह उनकी दूसरी किताब है। प्रकृति पर किताब लिखने वाली मान्या, को सबसे छोटी उम्र में यह कारनामा करने के लिए India Book of Records ने खिताब से नवाजा है। YourStory की फ्लैगशिप स्टार्टअप-टेक और लीडरशिप कॉन्फ्रेंस पच्चीस-तीस अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को अपने तेरहवें संस्करण के साथ शुरू होने जा रही है। TechSparks के बारे में अधिक अपडेट्स पाने के लिए साइन अप करें या पार्टनरशिप और स्पीकर के अवसरों में अपनी रुचि व्यक्त करने के लिए यहां साइन अप करें। TechSparks दो हज़ार इक्कीस के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें। Techतीस दो हज़ार इक्कीस के लिए आवेदन अब खुले हैं, जो भारत के तीस सबसे होनहार टेक स्टार्टअप्स की सूची है। Techतीस दो हज़ार इक्कीस स्टार्टअप बनने के लिए यहां शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए अप्लाई करें या नॉमिनेट करें।
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हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी की जीभ काटने वाले वाले को लेकर भाजपा ने गजेंद्र पर कार्रवाई की है। बता दें कि जीतन राम मांझी ने ब्राह्मण समाज पर विवादित बयान दिया था। जिसपर बिहार भाजपा के नेता गजेंद्र झा ने ऐलान किया था कि जो भी ब्राह्मण का बेटा मांझी की जुबान काटकर मेरे सामने लायेगा उसे वो 11 लाख रुपये का ईनाम देंगे।
बता दें कि पार्टी ने गजेंद्र झा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा कि किसी के लिए भी अमर्यादित भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्टी में हिंसा की बात स्वीकार्य नहीं है। मालूम हो कि गजेंद्र झा से भाजपा ने उनके बयान को लेकर 15 दिन में जवाब मांगा था। लेकिन गजेंद्र झा अपने बयान पर टिके रहे। वहीं इस मामले में बिहार भाजपा ने कहा कि मांझी पर दिया गया बयान अनापेक्षित होने के कारण पार्टी के अनुशासन के हमेशा विपरीत है।
वहीं इससे पहले गजेंद्र झा के बयान पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने भी पलटवार किया था। पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा था कि मांझी के लिए लगातार अभद्र टिप्पणी की हो रही है। दानिश ने कहा कि जीतन राम मांझी की जुबान काटने की बात क्या दलितों का अपमान करना नहीं है? उन्होंने कहा कि मैं बिहार बीजेपी के आला नेताओं से कहना चाहता हूं कि वह ऐसे बयान देने वाले अपने लोगों को समझाएं कि यह सब ठीक नहीं है।
बता दें कि मांझी की पार्टी से विरोध दर्ज कराने के बाद भाजपा ने गजेंद्र झा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर माफी तो मांग ली है। इसके बाद भी ब्राह्मण समाज ने मांझी का विरोध जारी रखा है।
सोमवार को जीतन राम मांझी के खिलाफ बिहार के कोर्ट और अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज की गई। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
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हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी की जीभ काटने वाले वाले को लेकर भाजपा ने गजेंद्र पर कार्रवाई की है। बता दें कि जीतन राम मांझी ने ब्राह्मण समाज पर विवादित बयान दिया था। जिसपर बिहार भाजपा के नेता गजेंद्र झा ने ऐलान किया था कि जो भी ब्राह्मण का बेटा मांझी की जुबान काटकर मेरे सामने लायेगा उसे वो ग्यारह लाख रुपये का ईनाम देंगे। बता दें कि पार्टी ने गजेंद्र झा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा कि किसी के लिए भी अमर्यादित भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पार्टी में हिंसा की बात स्वीकार्य नहीं है। मालूम हो कि गजेंद्र झा से भाजपा ने उनके बयान को लेकर पंद्रह दिन में जवाब मांगा था। लेकिन गजेंद्र झा अपने बयान पर टिके रहे। वहीं इस मामले में बिहार भाजपा ने कहा कि मांझी पर दिया गया बयान अनापेक्षित होने के कारण पार्टी के अनुशासन के हमेशा विपरीत है। वहीं इससे पहले गजेंद्र झा के बयान पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने भी पलटवार किया था। पार्टी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा था कि मांझी के लिए लगातार अभद्र टिप्पणी की हो रही है। दानिश ने कहा कि जीतन राम मांझी की जुबान काटने की बात क्या दलितों का अपमान करना नहीं है? उन्होंने कहा कि मैं बिहार बीजेपी के आला नेताओं से कहना चाहता हूं कि वह ऐसे बयान देने वाले अपने लोगों को समझाएं कि यह सब ठीक नहीं है। बता दें कि मांझी की पार्टी से विरोध दर्ज कराने के बाद भाजपा ने गजेंद्र झा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर माफी तो मांग ली है। इसके बाद भी ब्राह्मण समाज ने मांझी का विरोध जारी रखा है। सोमवार को जीतन राम मांझी के खिलाफ बिहार के कोर्ट और अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज की गई। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
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भारत में फैमिली कारों की डिमांड लगातार बढ़ रही है.
नई दिल्ली. SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) से मिले आंकड़ों के मुताबिक, यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) ने भारत में 2022 में 1. 9 मिलियन यूनिट से अधिक की बिक्री की. यह पिछले साल बेचे गए कुल व्हीकल्स (3. 8 मिलियन) का 50 प्रतिशत है. 17,54,282 यूनिट्स की कलेक्टिव सेल के साथ, एसयूवी और एमपीवी ने देश में कुल यूवी बिक्री का 91 प्रतिशत देखा गया .
Citroen भारत में एक तीन-पंक्ति SUV की टेस्टिंग कर रही है जिसका नाम C3 Aircross होने की संभावना है. खबर है कि मॉडल को 5 और 7-सीट कॉन्फ़िगरेशन के साथ उपलब्ध कराया जाएगा. यह C3 हैचबैक पर आधारित होगी और स्टेलेंटिस सीएमपी आर्किटेक्चर पर आधारित होगी. C3 हैच के बाद, नई Citroen 7-सीटर SUV फ्रेंच ऑटोमेकर की C-क्यूबेड परियोजना के तहत आने वाली दूसरी पेशकश होगी. मॉडल में हुड के नीचे 1. 2L, 3-सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन हो सकता है. इकाई 110bhp की पीक पावर और 190Nm का टार्क बनाती है.
निसान ने हाल ही में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कार के साथ भारतीय बाजार के लिए एक नई 7-सीटर एमपीवी की पुष्टि की है. तीन-पंक्ति वाला मॉडल Renault Triber पर आधारित होगा जो 1. 0L, 3-सिलेंडर स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ उपलब्ध है. मोटर 71bhp की पीक पावर और 96Nm का टार्क देता है. इसमें टर्बो पेट्रोल इंजन का भी विकल्प हो सकता है. दिखने में नई निसान 7-सीटर एमपीवी ट्राइबर से अलग होगी. इसकी स्टाइलिंग Nissan Magnite सबकॉम्पैक्ट SUV से प्रेरित हो सकती है.
Toyota Kirloskar Motor ने 'Toyota Rumion' नेमप्लेट को ट्रेडमार्क किया था, जिसका इस्तेमाल इसके Maruti Suzuki Ertiga के संस्करण के लिए किए जाने की संभावना है. जैसा कि आप जानते हैं, जापानी वाहन निर्माता पहले से ही दक्षिण अफ्रीका में एमपीवी बेच रहा है. इसका ज्यादातर डिजाइन और स्टाइल अर्टिगा जैसा ही है. हालांकि इसमें अलग तरह से डिजाइन की गई ग्रिल है जिस पर टोयोटा का बैज है. अंदर, एमपीवी में लकड़ी के ट्रिम के साथ एक काला इंटीरियर थीम है. रुमियन को शक्ति प्रदान करने वाला वही 1. 5L स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल SHVS इंजन है जो 103bhp और 138Nm बनाता है.
Mahindra Bolero Neo Plus के भी इस साल सड़कों पर उतरने की उम्मीद है. हालांकि, कार निर्माता ने अभी तक इसके लॉन्च विवरण का खुलासा नहीं किया है. SUV को 2. 2L mHawk डीजल इंजन से पावर्ड होगी जो मैनुअल और ऑटोमेटिक दोनों गियरबॉक्स के साथ हो सकता है. मॉडल लाइनअप को दो ट्रिम्स - P4 और P10 - और दो सीटिंग कॉन्फ़िगरेशन - 7-सीट और 9-सीट में पेश किया जाएगा.
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भारत में फैमिली कारों की डिमांड लगातार बढ़ रही है. नई दिल्ली. SIAM से मिले आंकड़ों के मुताबिक, यूटिलिटी व्हीकल्स ने भारत में दो हज़ार बाईस में एक. नौ मिलियन यूनिट से अधिक की बिक्री की. यह पिछले साल बेचे गए कुल व्हीकल्स का पचास प्रतिशत है. सत्रह,चौवन,दो सौ बयासी यूनिट्स की कलेक्टिव सेल के साथ, एसयूवी और एमपीवी ने देश में कुल यूवी बिक्री का इक्यानवे प्रतिशत देखा गया . Citroen भारत में एक तीन-पंक्ति SUV की टेस्टिंग कर रही है जिसका नाम Cतीन Aircross होने की संभावना है. खबर है कि मॉडल को पाँच और सात-सीट कॉन्फ़िगरेशन के साथ उपलब्ध कराया जाएगा. यह Cतीन हैचबैक पर आधारित होगी और स्टेलेंटिस सीएमपी आर्किटेक्चर पर आधारित होगी. Cतीन हैच के बाद, नई Citroen सात-सीटर SUV फ्रेंच ऑटोमेकर की C-क्यूबेड परियोजना के तहत आने वाली दूसरी पेशकश होगी. मॉडल में हुड के नीचे एक. दोL, तीन-सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन हो सकता है. इकाई एक सौ दसbhp की पीक पावर और एक सौ नब्बेNm का टार्क बनाती है. निसान ने हाल ही में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कार के साथ भारतीय बाजार के लिए एक नई सात-सीटर एमपीवी की पुष्टि की है. तीन-पंक्ति वाला मॉडल Renault Triber पर आधारित होगा जो एक. शून्यL, तीन-सिलेंडर स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ उपलब्ध है. मोटर इकहत्तरbhp की पीक पावर और छियानवेNm का टार्क देता है. इसमें टर्बो पेट्रोल इंजन का भी विकल्प हो सकता है. दिखने में नई निसान सात-सीटर एमपीवी ट्राइबर से अलग होगी. इसकी स्टाइलिंग Nissan Magnite सबकॉम्पैक्ट SUV से प्रेरित हो सकती है. Toyota Kirloskar Motor ने 'Toyota Rumion' नेमप्लेट को ट्रेडमार्क किया था, जिसका इस्तेमाल इसके Maruti Suzuki Ertiga के संस्करण के लिए किए जाने की संभावना है. जैसा कि आप जानते हैं, जापानी वाहन निर्माता पहले से ही दक्षिण अफ्रीका में एमपीवी बेच रहा है. इसका ज्यादातर डिजाइन और स्टाइल अर्टिगा जैसा ही है. हालांकि इसमें अलग तरह से डिजाइन की गई ग्रिल है जिस पर टोयोटा का बैज है. अंदर, एमपीवी में लकड़ी के ट्रिम के साथ एक काला इंटीरियर थीम है. रुमियन को शक्ति प्रदान करने वाला वही एक. पाँचL स्वाभाविक रूप से एस्पिरेटेड पेट्रोल SHVS इंजन है जो एक सौ तीनbhp और एक सौ अड़तीसNm बनाता है. Mahindra Bolero Neo Plus के भी इस साल सड़कों पर उतरने की उम्मीद है. हालांकि, कार निर्माता ने अभी तक इसके लॉन्च विवरण का खुलासा नहीं किया है. SUV को दो. दोL mHawk डीजल इंजन से पावर्ड होगी जो मैनुअल और ऑटोमेटिक दोनों गियरबॉक्स के साथ हो सकता है. मॉडल लाइनअप को दो ट्रिम्स - Pचार और Pदस - और दो सीटिंग कॉन्फ़िगरेशन - सात-सीट और नौ-सीट में पेश किया जाएगा. .
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कैलाश विजयवर्गीय के दिल में ये कसक कैसी, नड्डा से बातचीत का पब्लिक में खुलासा क्यों?
लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने जेपी नड्डा को फोन किया. नड्डा ने उनसे कहा कि वो उन्हें बनाना तो कुछ और चाहते थे, लेकिन अभी यही ठीक है. ये बात खुद विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने कही. आखिर इस बात को सार्वजनिक करने की जरूरत क्या थी?
एक महीने के भीतर अमित शाह के तीन दौरे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की तैनाती. ये वो बिंदु हैं, जो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में मध्य प्रदेश की अहमियत प्रदर्शित कर रहे हैं. मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में सबसे ऊपर आता है, जहां राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की पकड़ और बीजेपी का संगठन सबसे मजबूत माना जाता है. लेकिन चुनावी सर्वे, पिछले नतीजे और राज्य से आ रही खबरों ने पार्टी नेतृत्व के चेहरे पर शिकन पैदा कर दी है.
हालिया सर्वे बता रहे हैं कि बीजेपी की हालत इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले चिंताजनक है. मध्य भारत के महत्वपूर्ण राज्य को बीजेपी हरगिज भी अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहती. ऐसे में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वो लगातार मध्य प्रदेश में दौरे कर रहे हैं. अपने करीबियों और विश्वासपात्र नेताओं को राज्य में जिम्मेदारी दे रहे हैं. इसी लिस्ट में एक नाम कैलाश विजयवर्गीय का भी है.
बीजेपी ने शनिवार को केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची जारी की. इस सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम ठीक उसी जगह पर मौजूद था, जहां पिछले लगभग एक दशक से वो काबिज हैं. उन्हें पार्टी ने फिर एक बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाया. वो लगातार चौथी बार इस पद पर हैं. उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में कोई भी मंत्री इतने लंबे समय तक महामंत्री के पद पर नहीं रहा है. शाम होते-होते मध्य प्रदेश बीजेपी ने चुनाव प्रबंधन समिति का भी ऐलान कर दिया.
इस समिति में भी संयोजक नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी प्रदेश प्रमुख वीडी शर्मा के बाद तीसरा नाम कैलाश विजयवर्गीय का था. वहीं लगभग एक महीने पहले पार्टी ने उन्हें पांचों चुनावी राज्यों के पॉलिटिकल फीडबैक विंग की कमान भी सौंपी थी. पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद से कैलाश विजयवर्गीय को लगातार किसी बड़े काम की तलाश थी. पार्टी ने चुनावों से पहले चुनाव प्रबंधन समिति में जगह दे और एक बार फिर से राष्ट्रीय महामंत्री बना, उनकी इस मांग को पूरा किया, लेकिन फिर भी कैलाश विजयवर्गीय के दिल में शायद कसक रह गई है.
नड्डा से बातचीत को सबके सामने रखने की जरूरत क्या?
राजनीति के जानकारों का कहना है कि विजयवर्गीय को ये बात बताने की कोई विशेष जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया. इसका मतलब ये निकाला जा सकता है कि वो राजनीतिक गलियारों में एक मुद्दा छोड़ना चाहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें कुछ बड़ा या कुछ अलग देने के मूड में है. सवाल उठता है कि ऐसा क्या था जो नड्डा उन्हें देना चाहते थे? राजनीतिक गलियारों में बहुत पहले से चर्चा हैं कि मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह चौहान के विकल्प के तौर पर लिए जाने वाले नामों में कैलाश विजयवर्गीय का भी नाम है. शायद विजयवर्गीय इसी के बारे में कहना चाहते हों!
इसपर वरिष्ठ पत्रकार डॉ सत्य प्रकाश शर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाना राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा का काम नहीं है. हां, वो विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष जरूर बना सकते थे. क्योंकि मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले काफी समय से अध्यक्ष पद को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठन में कमजोर दिखती पकड़ और सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ हल्की ट्यूनिंग उन्हें इस पद से हटाए जाने के कयासों की वजह बनते रहे हैं. ऐसे में अगर बीजेपी अध्यक्ष बदलती तो विजयवर्गीय को चुन सकती थी.
सत्य प्रकाश शर्मा आगे बताते हैं कि ऐसा करने से चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के पद पर विजयवर्गीय की दावेदारी मजबूत हो जाती, क्योंकि चुनाव संयोजक, चुनाव प्रबंधक और राज्य प्रमुख के पद पर काबिज व्यक्ति का चुनावी कामकाज मे अहम रोल रहता है. इस पद पर काबिज शख्स मुख्यमंत्री पद पर मजबूत दावेदारी ठोक सकता है, क्योंकि चुनाव उसी की निगरानी में हुआ है. शर्मा ये भी बताते हैं कि चुनावों में चार महीने शेष हैं और ऐसे में अगर पार्टी सीएम या सीएम फेस बदलती है, तो इसका जनता में गलत संदेश जाएगा.
ऐसे में बीजेपी अभी भी केंद्रीय नेतृत्व में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर ही आगे बढ़ रही है. इसलिए सीधे-सीधे विजयवर्गीय को सीएम बनाने का तो सवाल ही नहीं है. हां अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी इस पद पर दावेदारी मानी जा सकती है. हालांकि ये भी साफ है कि बीजेपी आगामी चुनावों के लिए अब तक कोई चेहरा तय नहीं कर सकी है. एक और वरिष्ठ पत्रकार का इस मसले पर कहना है कि विजयवर्गीय राज्य और संगठन के लगभग सभी पद पर रह चुके हैं, बस सीएम बनना बाकी है, जिसको लेकर उन्होंने नड्डा के साथ हुई बातचीत को सार्वजनिक किया. ताकि कम से कम राजनीतिक गलियारों में तो ये हवा उड़ा ही दी जाए.
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कैलाश विजयवर्गीय के दिल में ये कसक कैसी, नड्डा से बातचीत का पब्लिक में खुलासा क्यों? लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने जेपी नड्डा को फोन किया. नड्डा ने उनसे कहा कि वो उन्हें बनाना तो कुछ और चाहते थे, लेकिन अभी यही ठीक है. ये बात खुद विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने कही. आखिर इस बात को सार्वजनिक करने की जरूरत क्या थी? एक महीने के भीतर अमित शाह के तीन दौरे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की तैनाती. ये वो बिंदु हैं, जो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में मध्य प्रदेश की अहमियत प्रदर्शित कर रहे हैं. मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में सबसे ऊपर आता है, जहां राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की पकड़ और बीजेपी का संगठन सबसे मजबूत माना जाता है. लेकिन चुनावी सर्वे, पिछले नतीजे और राज्य से आ रही खबरों ने पार्टी नेतृत्व के चेहरे पर शिकन पैदा कर दी है. हालिया सर्वे बता रहे हैं कि बीजेपी की हालत इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले चिंताजनक है. मध्य भारत के महत्वपूर्ण राज्य को बीजेपी हरगिज भी अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहती. ऐसे में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वो लगातार मध्य प्रदेश में दौरे कर रहे हैं. अपने करीबियों और विश्वासपात्र नेताओं को राज्य में जिम्मेदारी दे रहे हैं. इसी लिस्ट में एक नाम कैलाश विजयवर्गीय का भी है. बीजेपी ने शनिवार को केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची जारी की. इस सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम ठीक उसी जगह पर मौजूद था, जहां पिछले लगभग एक दशक से वो काबिज हैं. उन्हें पार्टी ने फिर एक बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाया. वो लगातार चौथी बार इस पद पर हैं. उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में कोई भी मंत्री इतने लंबे समय तक महामंत्री के पद पर नहीं रहा है. शाम होते-होते मध्य प्रदेश बीजेपी ने चुनाव प्रबंधन समिति का भी ऐलान कर दिया. इस समिति में भी संयोजक नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी प्रदेश प्रमुख वीडी शर्मा के बाद तीसरा नाम कैलाश विजयवर्गीय का था. वहीं लगभग एक महीने पहले पार्टी ने उन्हें पांचों चुनावी राज्यों के पॉलिटिकल फीडबैक विंग की कमान भी सौंपी थी. पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद से कैलाश विजयवर्गीय को लगातार किसी बड़े काम की तलाश थी. पार्टी ने चुनावों से पहले चुनाव प्रबंधन समिति में जगह दे और एक बार फिर से राष्ट्रीय महामंत्री बना, उनकी इस मांग को पूरा किया, लेकिन फिर भी कैलाश विजयवर्गीय के दिल में शायद कसक रह गई है. नड्डा से बातचीत को सबके सामने रखने की जरूरत क्या? राजनीति के जानकारों का कहना है कि विजयवर्गीय को ये बात बताने की कोई विशेष जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया. इसका मतलब ये निकाला जा सकता है कि वो राजनीतिक गलियारों में एक मुद्दा छोड़ना चाहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें कुछ बड़ा या कुछ अलग देने के मूड में है. सवाल उठता है कि ऐसा क्या था जो नड्डा उन्हें देना चाहते थे? राजनीतिक गलियारों में बहुत पहले से चर्चा हैं कि मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह चौहान के विकल्प के तौर पर लिए जाने वाले नामों में कैलाश विजयवर्गीय का भी नाम है. शायद विजयवर्गीय इसी के बारे में कहना चाहते हों! इसपर वरिष्ठ पत्रकार डॉ सत्य प्रकाश शर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाना राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा का काम नहीं है. हां, वो विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष जरूर बना सकते थे. क्योंकि मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले काफी समय से अध्यक्ष पद को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठन में कमजोर दिखती पकड़ और सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ हल्की ट्यूनिंग उन्हें इस पद से हटाए जाने के कयासों की वजह बनते रहे हैं. ऐसे में अगर बीजेपी अध्यक्ष बदलती तो विजयवर्गीय को चुन सकती थी. सत्य प्रकाश शर्मा आगे बताते हैं कि ऐसा करने से चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के पद पर विजयवर्गीय की दावेदारी मजबूत हो जाती, क्योंकि चुनाव संयोजक, चुनाव प्रबंधक और राज्य प्रमुख के पद पर काबिज व्यक्ति का चुनावी कामकाज मे अहम रोल रहता है. इस पद पर काबिज शख्स मुख्यमंत्री पद पर मजबूत दावेदारी ठोक सकता है, क्योंकि चुनाव उसी की निगरानी में हुआ है. शर्मा ये भी बताते हैं कि चुनावों में चार महीने शेष हैं और ऐसे में अगर पार्टी सीएम या सीएम फेस बदलती है, तो इसका जनता में गलत संदेश जाएगा. ऐसे में बीजेपी अभी भी केंद्रीय नेतृत्व में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर ही आगे बढ़ रही है. इसलिए सीधे-सीधे विजयवर्गीय को सीएम बनाने का तो सवाल ही नहीं है. हां अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी इस पद पर दावेदारी मानी जा सकती है. हालांकि ये भी साफ है कि बीजेपी आगामी चुनावों के लिए अब तक कोई चेहरा तय नहीं कर सकी है. एक और वरिष्ठ पत्रकार का इस मसले पर कहना है कि विजयवर्गीय राज्य और संगठन के लगभग सभी पद पर रह चुके हैं, बस सीएम बनना बाकी है, जिसको लेकर उन्होंने नड्डा के साथ हुई बातचीत को सार्वजनिक किया. ताकि कम से कम राजनीतिक गलियारों में तो ये हवा उड़ा ही दी जाए.
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रही। इसके चलते तापमान दस से गिरकर 3. 1 डिग्री हो गया।
रूद्रप्रयाग सहित जिले के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। मसूरी में हल्की बारिश के साथ काले बादल छाए रहे। इससे ठंड बढ गई। उत्तरकाशी में सुबह से तेज हवाएं चलीं और ऊंचाई वाले इलाकों गंगोत्री, हर्षिल, दयारा, सुक्की, डोडीताल, सहित यमुनोत्री, भैरव घाटी, जानकी चट्टी में हल्की बर्फबारी हुई।
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रही। इसके चलते तापमान दस से गिरकर तीन. एक डिग्री हो गया। रूद्रप्रयाग सहित जिले के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। मसूरी में हल्की बारिश के साथ काले बादल छाए रहे। इससे ठंड बढ गई। उत्तरकाशी में सुबह से तेज हवाएं चलीं और ऊंचाई वाले इलाकों गंगोत्री, हर्षिल, दयारा, सुक्की, डोडीताल, सहित यमुनोत्री, भैरव घाटी, जानकी चट्टी में हल्की बर्फबारी हुई।
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Valentine's Day 2022: बॉलीवुड एक्टर विक्रांत मेसी ने वैलेंटाइन डे के प्लान के बारे में बताया है। इसके साथ विक्रांत मेसी ने अपनी पार्टनर शीतल ठाकुर को लेकर भी बात की है।
Valentine's Day 2022: बॉलिवुड एक्टर विक्रांत मेसी (Vikrant Massey) ने अपने वैलेंटाइन डे (Valentine Day) को लेकर प्लान के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि उनका कोई खास प्लान नहीं क्योंकि वह 8-10 घंटे ट्रैवल करने वाले हैं। इसके साथ ही विक्रांत मेसी ने बताया है कि वह पंजाब जाने वाले हैं इसलिए वहां का अच्छा खाना खाने का प्लान है। एक्टर ने अपनी पार्टनर शीतल ठाकुर (Sheetal Thakur) के साथ अपनी शादी को लेकर बात की। दरअसल, विक्रांत मेसी और शीतल ठाकुर की शादी दो बार टल चुकी है। उन्होंने बताया कि वह शीतल ठाकुर की स्ट्रेट फॉर्वड नेचर से इंप्रेस भी होते हैं और इरीटेट भी होते हैं।
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Valentine's Day दो हज़ार बाईस: बॉलीवुड एक्टर विक्रांत मेसी ने वैलेंटाइन डे के प्लान के बारे में बताया है। इसके साथ विक्रांत मेसी ने अपनी पार्टनर शीतल ठाकुर को लेकर भी बात की है। Valentine's Day दो हज़ार बाईस: बॉलिवुड एक्टर विक्रांत मेसी ने अपने वैलेंटाइन डे को लेकर प्लान के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि उनका कोई खास प्लान नहीं क्योंकि वह आठ-दस घंटाटे ट्रैवल करने वाले हैं। इसके साथ ही विक्रांत मेसी ने बताया है कि वह पंजाब जाने वाले हैं इसलिए वहां का अच्छा खाना खाने का प्लान है। एक्टर ने अपनी पार्टनर शीतल ठाकुर के साथ अपनी शादी को लेकर बात की। दरअसल, विक्रांत मेसी और शीतल ठाकुर की शादी दो बार टल चुकी है। उन्होंने बताया कि वह शीतल ठाकुर की स्ट्रेट फॉर्वड नेचर से इंप्रेस भी होते हैं और इरीटेट भी होते हैं।
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की स्थिति में आत्मा के दर्पण में विषय का पूर्ण प्रतिबिम्ब ही नहीं उभरता वरन् आत्मा और विषय की एकाकारता हो जाती है । ऐसी स्थिति में वेद्यान्तर- शून्यता तथा स्व-पर-ज्ञान का विलयन हो जाता है । संवेदना की वास्तविक स्थिति में ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान की एकाकारता हो जाती है । यह स्थिति भावुक या सहृदय की ही हो सकती है । इसी स्थिति में कवि या कलाकार रचना की ओर प्रवृत्त होती है ।
वस्तुत संवेदना ( वेदन की सम = समतावस्था) वेदन = ज्ञान की समतावस्था है । ऐन्द्रिय ज्ञान चाहे गंध-संवेदना हो या रूप संवेदना अथवा स्पर्श या श्रवण संवेदना होंऐन्द्रिय होने पर उसकी वास्तविकता का पूर्व बोध नहीं हो सकेगा, केवल किञ्चिद् ज्ञान मात्र ही हो सकेगा। जब तक ऐन्द्रिय बोध का सम्पूर्ण प्रतिफल आत्मा में न हो अर्थात् आत्मा में ऐन्द्रिय बोध समाविष्ट न हो जाय, संवेदना नहीं हो सकती है। इसीलिए संवेदना वेदन ज्ञान की समतावस्था है। इस ज्ञान की समतावस्था में बोद्धा का अस्तित्व विलीन हो जाता है। यह विलयन उसकी भावुकता तथा संवेद्य वस्तु पर निर्भर करता है। कुछ लोग समुद्दीपकों से कम ही प्रभावित होते हैं और कुछ उद्दीपन मात्र से ही भावुक हो जाते है। जो जितना भावुक होगा, वह उतना ही संवेदनशील होगा ।
संवेदना का 'सम' शब्द सोऽहम् का प्रत्याहार रूप है। 'सः अहम्' दो पदों के पूर्व पद 'स' और उत्तर पद के 'म' से सम् पद निर्मित होता है जिसका अर्थ होता है 'वह' 'मैं' हूँ। इस संवेदना का अर्थ होता है 'वह मैं हूँ' का 'ज्ञान होना' । 'वह' पद दृश्य या संवेद्य पदार्थ का द्योतक है। यह संवेद्य जब तक 'अहम्' 'मैं' के रूप में परिवर्तित नहीं हो जाता तब तक संवेदना नहीं हो सकती है। 'मैं' पद आत्मा का द्योतक है। संवेद्य का आत्माकार में परिवर्तित हो जाना ही संवेदना है। जैसे- अरूणिम पुष्प स्फटिक में प्रतिबिम्बत होकर स्फटिक को अरूणिम बनाता हुआ वह स्फटिक के आकार के रूप में परिवर्तित हो जाता है उसी प्रकार विषय आत्मा में प्रतिबिम्बत होकर आत्माकार हो जाता
है। 97 इन तथ्यों की विवेचना से यह कहा जा सकता है कि 'संवेदना' व्यक्ति के चित्त या मन की वह दशा है जहाँ ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त किसी के सुखात्मक-दुःखात्मक भाव में चेतना या आत्मा के विलीन हो जाने से उसका प्रथक् अस्तित्व समाप्त हो जाता है
यद्यपि सभी संवेदनाएँ विषय और ज्ञानेन्द्रिय सापेक्ष हैं किन्तु इन सबका पर्यवसान चित्त (मनू) में ही होने के कारण संवेदनाओं का चित्तात्मक होना सिद्ध होता है। चित्त सुखात्मक दुखात्मक और मोहात्मक होता है। कोई भी संवेदना तटस्थात्मक नहीं हो सकती है। संसार में चार प्रकार के प्राणी - सुखी, दुःखी, पुण्यात्मा और अपुण्यात्मा होतें है। सुखी के प्रति मैत्री भाव रखना चाहिए, किन्तु बहुत से लोग सुखी के प्रति ईर्ष्या रखते है। दुःखी के प्रति सज्जन के मन में करूणा उत्पन्न होती है तथा दुष्टों के मन में हर्ष उत्पन्न होता है। पुण्यात्मा को देखकर सज्जन मुदित होते हैं और अपुण्यात्माओं की उपेक्षा करते हैं
लोक-जीवन में उपर्युक्त सभी प्रकार के भाव देखे जाते हैं। कवि इन सभी भावों का मर्मस्पर्शी चित्रण अपनी कविता में करता है। कुशल कवि स्वाभाविक वर्णन को चित्ताकर्षक बना देता है। उसकी लेखनी स्वाभाविक पाषाण-खण्ड को रत्न बना देती है जिसकी चमक चिरस्थायी रहती है ।
सुखात्मक संवेदनाओं की अभिलाषा सभी प्राणी में रहती है। विश्व का प्रत्येक प्राणी सुख से प्रेम और दुःख से घृणा करता है। सुख-दुःख न विषयगत ही है और न आत्मगत । एक वस्तु किसी के लिए भले ही सुखात्मक हो किन्तु दूसरों के लिए दुःखात्मक होती है तथा तीसरे के लिए मोहात्मक भी हो सकती है। इसलिए सुख-दुःख उभयात्मक है। साहित्य अपने कलात्मक सौन्दर्य से आनन्द प्रदान करता है चाहे वह दुःखात्मक ही क्यों न हो क्योंकि साहित्यिक संवेदनाओं की चर्वणा आनन्द मे ही समाप्त होती है ।
सुखात्मक संवेदनाए लौकिक दृष्टि से सुखमूलक हैं। जिन वस्तुओं की सम्प्रति से अन्तःकरण आह्लादित होता है अर्थात् चित्त का विकास हो जाता है अथवा चित्त विश्रान्त हो जाता है वे वस्तुएँ सुखात्मक संवेदनाओं के कारण होते है । चित्त की विश्रान्ति ही सुख है और अविश्रान्ति दुःख है । श्रृंगार, धन-धान्य, प्रिय आदि की प्राप्ति का वर्णन पाठक को ऐन्द्रिय सुख प्रदान करता है। हास-परिहास, वसन्त, प्राकृतिक सौन्दर्य आदि के वर्णन से चित्त प्रमुदित हो जाता है। इसलिए इनकी संवेदनाएं सुखात्मक होती है।
दुःखात्मक संवेदनाओं मे चित्त संकुचित हो जाता है। दुःखात्मक संवेदनाओं का साहित्य में अधिक महत्व है
वाल्मीकि की करूणा ही श्लोक रूप में परिणीत हुई थी । दुःखात्मक संवेदनाएँ लोक-जीवन का अंग बनती जा रही है। इसका भुक्तभोगी कवि ही इनकी संवेदना को समझ सकता है। इस प्रकार के जनों की श्वासों में निरन्तर अग्नि-ज्वाला धधकती रहती है जिसकी उष्मा में वह निरन्तर तपता हुआ अपनी जीवन यात्रा को पूरा करता है । दुःखात्मक संवेदनाएं प्रिय का आत्यन्तिक वियोग, धन का विनाश, अकाल और दुर्घटनाओं की विभीषिका, शोषकों के आंतक आदि सामाजिक अपराधों की उर्वर भूमि में जन्म लेकर सहृदय को करूणार्द्र बनाती हैं ।
मोहात्मक संवेदनाएँ तमोगुण प्रधान होती है । शोषकों के अत्याचार घृणा और क्रोध को जन्म देते हैं। लोक जीवन में ऐसे लोगों को बहुतायत देखा जाता है, जो मोह ग्रस्त होकर या तो अकर्मण्य हो जाते हैं अथवा अनैतिक आचरण को जीवन का अंग बना लेते हैं। उनके क्रियाकलाप अमानवीय होते है किन्तु वे उसी पङ्क में फँसकर ही सुख का अन्वेषण करते रहते है। ऐसे व्यक्तियों के जीवन से सम्बन्धित रचनाएँ मोहात्मक-संवेदनाओं को जन्म देती है ।
संवेदनाएं साहित्य को जन्म देती हैं और साहित्य में संवेदनाएँ समाहित रहती हैं । दूसरे शब्दों में कहें तो संवेदना ही साहित्य है और साहित्य ही संवेदना हैं । साहित्य के शब्द केवल शब्द नहीं होतें हैं वरन् उसमें प्रवाहित संवेदनाओं के कारण ही उनका महत्व है। साहित्य के शब्द यदि संवेदनात्मक अर्थों के रूप में अपने को परिवर्तित नहीं कर पाते तो वे शब्द केवल झंकार मात्र बनकर रह जाते हैं। संवेदनाओं के माध्यम से कवि या साहित्यकार समाज, प्रकृति व मानव जीवन की विविधताओं को अपने मन-मस्तिष्क व हृदय-सिन्धु में अंकित करता है, पुनः लेखनी से अजस्र प्रवाहित होने वाले विविध प्रकार के मनोरम रंगो से उन भावों को नूतन व मर्मस्पर्शी रूप प्रदान करता है । । साहित्य में लोक-संवेदनाओं का महत्व
'लोक-संवेदना' का अर्थ है "लोक-जीवन की संवेदना ।" आचार्य भरत ने
"नाट्यशास्त्र" में बताया है कि नाट्य लोकवृत्त लोक व्यवहार का अनुकरण करने वाला है जिसमें अनेक प्रकार के भावों तथा विभिन्न अवस्थाओं का समन्वय रहता है । 98 इस नाट्य मे सम्पूर्ण ज्ञान, शिल्प, विधा, कला और योग का समावेश रहता है। इनकी दृष्टि में नाट्य दुःखार्त, क्षमार्त तथा शोकार्त जनों को विश्रन्ति = सुख (आनन्द) प्रदान करने वाला है । 100 भरत - मुनि का उपर्युक्त कथन यह सिद्ध करता है कि उत्तम काव्य लोक - जीवन (जन - साधारण) के व्यवहारों का मार्मिक चित्रण करने वाला होता है। समाज में श्रमार्त, दुःखार्त और शोकार्तो का बाहुल्य है। ये जनसाधारण अपनी जीवनवृत्तियों को काव्य में पाकर शीघ्रातिशीघ्र साधारणीकरण की अवस्था को प्राप्त हो जाते है। इसीलिए उन्हें आनन्द की प्राप्ति होती है। वस्तुतः सुख और दुःख से मिश्रित लोक व्यवहार जब अभिनय अथवा काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है तभी लोक में विनोद जनक सिद्ध होता है। 101
कवि जिस स्वभाव का होता है, उसकी कविता भी उसी प्रकार की होती है। जो कवि लोक जीवन की संवेदनाओं के रंगों से अपनी रचनाओं को चित्रित करता है, उसकी रचना अत्यधिक प्रभावशालिनी होती है। वही कवि सफल है जो अपनी अनुभूतियों को उसी रूप में प्रेक्षक तक पहुॅचा सके। 'काव्य का ध्येय यह कदापि नही है कि जो वस्तु एक हृदय में घटित होती है उसका प्रेषण करके दूसरों के लिए उसे बोधगम्य बना दिया जाय, वरन् इसका काम है दूसरे व्यक्ति में भी ऐसी मनोदशा की उत्पत्ति कराना जो कि कवि की उस मनोदशा के अनुकूल हो, जो अभिव्यक्ति द्वारा बहिर्मुख हो जाती है । 102
यह स्थिति तभी सम्भव होती है जब कवि लोक-जीवन के मार्मिक भावों को अपनी कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। लोक जीवन को प्रत्यक्ष करने वाला कवि सभी वस्तुओं को प्रत्यक्ष कर लेता है। कवि की वास्तविक अनुभूतियाँ ही कलात्मक भावों का रूप धारण करती है, जिसका परिणाम यह होता है कि कवि स्वयं जिस भावों का सूक्ष्मता से भोग करता है इसी भावों के तल तक पाठक को पहुँचाने में सफल होता है।
कवि-प्रतिभा की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी कृतियों में लोक जीवन की संवेदनाओं का कितना व्यापक्तव अथवा वैविध्य मौलिक रूप में प्रभावी ढंग से उपस्थित किया गया है ।
लोक-संवेदनाएं मूलतः जन-साधारण के सुख-दुःख की गहरी अनुभूति कराती हैं। लोक-साहित्य में लोक-संवेदनाओं का जो रूप दिखाई पड़ता है, इतना सजग और सहज रूप उन कवियों के काव्य में नही प्राप्त होता जो लोक-प्रतिबद्ध होने का दंभ भरते हैं ।
वस्तुतः लोक साहित्य साधारण दुःखी जनों का स्वयं का भोगा हुआ साहित्य है, उसमें तरह
किसी की कृत्रिमता नहीं रहती क्योंकि उसका प्रवाह हृदय से होता है। इसमें बौद्धिकता
का विलास नहीं रहता है। कुछ प्रतिवद्ध कवि लोक पीड़ा को मार्मिक रूप में व्यक्त करने
में सफल सिद्ध हुए हैं परन्तु अनेक कवियों में केवल लोक जीवन का बाह्य स्पर्श मात्र ही दिखाई पड़ता है। लोक संवेदनाओं का सच्चा रूप - उन किसानों के श्रम की बूँदों में, जो गेहूँ और धान की बालियों में परिणत होकर बाजारों में पानी के भाव बिकते हैं उन श्रमिकों की हड्डियों में, जो कारखानों की आग में पिघलती रहती है उन श्रमिक युवतियों के फटेहाल - यौवन में, जिसे पेट की आग बुझाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता उन दीन-हीन बालकों की पीड़ा में, जो प्लेटफार्मों पर फटे दोना को लूटने के लिए आपस में लड़ते रहते हैं, होटलों में दो वक्त की रोटी प्राप्त करने के लिए दिन-रात श्रम किया करते हैं तथा बँधुआ मजदूर की जिन्दगी जीने के लिए विवश रहते हैं - भूख की ज्वाला में पुत्र-पुत्रियों से घिरी हुई उन महिलाओं के दर्द में, जिनके पति अपने प्राण हथेली पर लेकर घर से बहुत दूर कुछ कमाने गये हैं, एवं मेहनतकश श्रमिक स्त्रियों के असहनीय परिश्रम, जो क्षुधानल में जलती हुई भी खेतों में धान रोपती हुई गाती रहती है, जिनके जीवन का शैशव जाड़ों की शीत-भरी रात में पुआलों में तथा यौवन गर्मी की दोपहर में खेत-खलिहानों में तथा वृद्धावस्था सड़क के पड़े ढेले की भाँति बीतता है दिखाई पड़ता
लोक-संवेदना वस्तुतः जीवन के उस अन्तःकरण की अभिव्यक्ति है जिसमें सहजता, सरसता, सिसृक्षा, जिजीविषा और दुर्धर्ष बाधाओं से संघर्ष करने की प्रबल अभिलाषा रहती है। जिसके द्वारा मानव हारकर भी विजय की अभिलाषा ही नहीं करता वरन् सन्नद्ध होकर विकराल काल से युद्ध कर प्रलय को सृजन में परिवर्तित करता रहता है ।
साहित्य की विशालता लोक-परम्परा से प्राप्त रीति-रिवाज, आचार-विचार, संस्कारों एवं संस्कृति का अनुपालन विविध प्रकार के अविश्वसनीय लगने वाले क्रिया-कलापों पर
विश्वास, शकुन अपशकुन, व्रत-त्योहारों के प्रति देवमूलक आस्था आदि क्रिया-कलापों के सूक्ष्म निरीक्षण का प्रतिफलन है। साहित्यकारों ने लोकजीवन के उफनते हुए समुद्र को केवल दूर से ही नहीं देखा, वरन् उसमें डूबकर उसके खारेपन के साथ ही उसके लावण्यमय रूप का आस्वादन करते हुए उसके हृदय तल के रत्नों को निकालकर उन रत्नों से अपनी कविता - कामिनी को सॅवारा ।
विश्व का सम्पूर्ण साहित्य सुखात्मक, दुःखात्मक तथा मोहात्मक संवेदनाओं की विवेचना करता है। उनके पात्रों मे वैशिष्ट्य भले ही हो, लेकिन संवेदनाओं में अन्तर नहीं है। यह बात दूसरी है कि अभिजात्य साहित्य में भौतिक-विलास तथा बौद्धिक कीड़ा का समावेश अधिक होने से लोक-साहित्य की भाँति हृदय की सहजता व सरसता कम दिखाई पड़ती है, पर लोक-संवेदनाओं से वह शून्य नहीं है। शिष्ट साहित्य का दीपक भी लोक-संवेदनाओं की स्नेहिल वर्तिका के प्रकाश से अन्धकार का भेदन करता रहा है । वस्तुतः साहित्य और लोक का सम्बन्ध गत्यात्मक और इतना अन्तरंग है कि विद्यमान रहने पर भी सतत मुखर नहीं होता है ।
लोक-संवेदनाओं के माध्यम से ही साहित्य में भारतीय संस्कृति में व्याप्त धार्मिक, सहिष्णुता, नैतिकता, समन्वय, समानता व विश्ववन्धुत्व जैसी भावनाओं का समावेश हुआ है । यह भारतीय संस्कृति भारत में रहने वाले हर भारतीय के संस्कारों में चेतन या अचेतन रूप में रची-बसी है जिसका आलोक कविताओं में उतर कर जन-जन को आप्लावित करता रहता है। रामायण और महाभारत की कथाओं ने भारतीय जन-मानस को अत्यधिक प्रभावित किया । फलतः लोक-गीतों में राम व कृष्ण से सम्बन्धित कथाओं का बाहुल्य देखा जा सकता है। इन महापुरुषों से सम्बन्धित गीतों को जन्म, मुण्डन, विवाहादि संस्कारो मे गाया भी जाता है । लोक गीतों की श्रुति - परम्परा वैदिक साहित्य के उदात्तत्व को उपस्थित करती है। जिस प्रकार किसी बात की प्रमाणिकता के लिए हम
वैदिक साहित्य के शब्दार्थों में डूब जाते है उसी प्रकार श्रुति - परम्परा को आज भी स्थिर रखने वाले लोक-गीतों की संवेदनाएँ साहित्य के लिए उपजीव्य है ।
जो कवि लोक-हृदय में पूर्ण रूप से समाया रहता है, उसी की कविता सरसता, सहजता को बिखेरती व काल-सीमा के बन्धनों को तोड़ती हुई वैश्वीकरण को प्राप्त होती है। एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से भिन्न है किन्तु लोक हृदय की अन्तर्भूमियों में कुछ ऐसी समानता होती है जो भिन्न-भिन्न देश, संस्कृति और जाति के मनुष्यों को एक ही क्षण में अपने में विलीन कर देती है। इसीलिए किसी एक देश-काल का साहित्य पूरे विश्व में प्रतिष्ठित हो जाता है ।
मार्क्स ने कला के सम्बन्ध में कहा है कि- कला जनोपयोगी होनी चाहिए और उसके द्वारा समाज के दलित वर्गों की मूक वेदनाओं, भावनाओं तथा आशाओं एवं निराशाओं की अभिव्यंजना होनी चाहिए। अतीत की कला महलों में पत्नी थी धनिक सत्ताधरियों के आमोद-प्रमोद का साधन बनी रही, परन्तु अब उसे जन-साधारण के सुख-दुःख, हास्य तथा अश्रुपात में भाग लेना पड़ेगा और इसी में उसकी सार्थकता निहित है। कला के प्रति मार्क्स का यह दृष्टिकोण काव्य मे लोक संवेदनाओं की अनिवार्यता
प्रकट करता है ।
लोक-संवेदनाओं में विश्वबन्धुत्व का भाव, पड़ोसी तथा समाज के प्रति प्रेम, मानव के प्रति प्रेम और श्रद्धा तथा एक दूसरे के हित के लिए आत्म-बलिदान की भावना निहित है। अतः साहित्य में इन संवेदनाओं की उपादेयता स्वयं सिद्ध है।
लोक-संवेदानाओं से तादात्म्य रखने वाला कवि अहं की चहारदीवारी से बाहर निकलकर समाज व जीवन के गूढ़ यथार्थ-सत्यों से साक्षात्कार कर उनमें व्याप्त विसंगतियों, विषमताओं व विडम्बनाओं के मूल कारणों को खोजकर अपनी कविता के माध्यम से उन्हें जग-जाहिर करता हुआ उनके खिलाफ जनमत तैयार करने में योग देता
है, ताकि समाज में सत्य, न्याय, प्रेम, नैतिकता, सहिष्णुता, समानता आदि मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा हो सके । अतः कहा जा सकता है कि लोक संवेदनाओं से परिपूर्ण साहित्य समाज को नैतिक व मानवीय आधार पर सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इस वैज्ञानिक युग के बढ़ते प्रभाव ने जहाँ विश्व की दूरी कम कर दी है, वहीं मनुष्य से मनुष्य की दूरी को बढ़ाया है। आज मनुष्य भौतिक विकास की लालसा में मनुष्यता की तिलाञ्जलि दे रहा है। ऐसी भयावह स्थिति में लोक-संवेदनाओं से संवलित साहित्य मानव का हित चिन्तक है । सभ्यता और भौतिकता की वृद्धि में मानव की हृदयगत कोमल भावनाओं पर प्रहार किया जिसके परिणाम स्वरूप साहित्य में अत्यधिक बौद्धिकता दिखाई पड़ती है। बौद्धिक - साहित्य अनिष्टकारी तो नही है पर लोक में उनकी पकड़ बिल्कुल न होने से उसका मूल्य आम जनता की दृष्टि से नगण्य है। स्पष्ट है कि भौतिकता के बढ़ते प्रभाव से साहित्य को लोक-संवेदनाएँ ही बचा सकती हैं क्योंकि इन लोक-संवेदनाओं में ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्य समाहित है जो जन-जन को सही व स्वस्थ दिशा देने में समर्थ हैं । ये मूल्य हैं त्याग की भावना, सहज निश्छलता, परस्पर सौहार्द की भावना, धर्म-परम्पराओं के प्रति अनुराग की भावना आदि । त्याग की भावना स्वार्थ संकुचित मनुष्य के हृदय को विशालता प्रदान करती है। सहज निश्छलता लोभी व चतुर मनुष्य को आडम्बरमय जीवन की संकीर्ण गुफा से निकालकर विश्वबंधुत्व की धारा में प्रवाहित करने में सक्षम है। परस्पर सौहार्द्र की भावना नैतिकता तथा धर्म-परम्पराओं के प्रति अनुराग की भावना विश्रृङ्खलित मानव समाज को पाप के पङ्क से निकालकर उसे 'सत्यं शिवं और सुन्दरम' के रहस्य का साक्षात्कार कराकर परमानन्द प्रदान करने में पर्याप्त कराने में पर्याप्त है ।
अन्ततः कहा जा सकता है कि इस भौतिकवादी युग में लोक संवेदनाओं से युक्त साहित्य ही मनुष्य की प्रकृति विजयनी वैज्ञानिक लालसा को ध्वस्त कर, उसके आन्तरिक सन्तुलन, अनुशासन और उसके उत्कर्ष को लोकमंगलकारी बना सकता है, तथाकथित सम्य पुरूष की बर्बरता तथा अहङ्कार शीतला को नम्रता, सरसता और सहृदयता में परिवर्तित कर सकता है क्योंकि इन्ही लोक संवेदनाओं में समरसता की अजस्र धारा प्रवाहित होती रहती है ।
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की स्थिति में आत्मा के दर्पण में विषय का पूर्ण प्रतिबिम्ब ही नहीं उभरता वरन् आत्मा और विषय की एकाकारता हो जाती है । ऐसी स्थिति में वेद्यान्तर- शून्यता तथा स्व-पर-ज्ञान का विलयन हो जाता है । संवेदना की वास्तविक स्थिति में ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान की एकाकारता हो जाती है । यह स्थिति भावुक या सहृदय की ही हो सकती है । इसी स्थिति में कवि या कलाकार रचना की ओर प्रवृत्त होती है । वस्तुत संवेदना वेदन = ज्ञान की समतावस्था है । ऐन्द्रिय ज्ञान चाहे गंध-संवेदना हो या रूप संवेदना अथवा स्पर्श या श्रवण संवेदना होंऐन्द्रिय होने पर उसकी वास्तविकता का पूर्व बोध नहीं हो सकेगा, केवल किञ्चिद् ज्ञान मात्र ही हो सकेगा। जब तक ऐन्द्रिय बोध का सम्पूर्ण प्रतिफल आत्मा में न हो अर्थात् आत्मा में ऐन्द्रिय बोध समाविष्ट न हो जाय, संवेदना नहीं हो सकती है। इसीलिए संवेदना वेदन ज्ञान की समतावस्था है। इस ज्ञान की समतावस्था में बोद्धा का अस्तित्व विलीन हो जाता है। यह विलयन उसकी भावुकता तथा संवेद्य वस्तु पर निर्भर करता है। कुछ लोग समुद्दीपकों से कम ही प्रभावित होते हैं और कुछ उद्दीपन मात्र से ही भावुक हो जाते है। जो जितना भावुक होगा, वह उतना ही संवेदनशील होगा । संवेदना का 'सम' शब्द सोऽहम् का प्रत्याहार रूप है। 'सः अहम्' दो पदों के पूर्व पद 'स' और उत्तर पद के 'म' से सम् पद निर्मित होता है जिसका अर्थ होता है 'वह' 'मैं' हूँ। इस संवेदना का अर्थ होता है 'वह मैं हूँ' का 'ज्ञान होना' । 'वह' पद दृश्य या संवेद्य पदार्थ का द्योतक है। यह संवेद्य जब तक 'अहम्' 'मैं' के रूप में परिवर्तित नहीं हो जाता तब तक संवेदना नहीं हो सकती है। 'मैं' पद आत्मा का द्योतक है। संवेद्य का आत्माकार में परिवर्तित हो जाना ही संवेदना है। जैसे- अरूणिम पुष्प स्फटिक में प्रतिबिम्बत होकर स्फटिक को अरूणिम बनाता हुआ वह स्फटिक के आकार के रूप में परिवर्तित हो जाता है उसी प्रकार विषय आत्मा में प्रतिबिम्बत होकर आत्माकार हो जाता है। सत्तानवे इन तथ्यों की विवेचना से यह कहा जा सकता है कि 'संवेदना' व्यक्ति के चित्त या मन की वह दशा है जहाँ ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त किसी के सुखात्मक-दुःखात्मक भाव में चेतना या आत्मा के विलीन हो जाने से उसका प्रथक् अस्तित्व समाप्त हो जाता है यद्यपि सभी संवेदनाएँ विषय और ज्ञानेन्द्रिय सापेक्ष हैं किन्तु इन सबका पर्यवसान चित्त में ही होने के कारण संवेदनाओं का चित्तात्मक होना सिद्ध होता है। चित्त सुखात्मक दुखात्मक और मोहात्मक होता है। कोई भी संवेदना तटस्थात्मक नहीं हो सकती है। संसार में चार प्रकार के प्राणी - सुखी, दुःखी, पुण्यात्मा और अपुण्यात्मा होतें है। सुखी के प्रति मैत्री भाव रखना चाहिए, किन्तु बहुत से लोग सुखी के प्रति ईर्ष्या रखते है। दुःखी के प्रति सज्जन के मन में करूणा उत्पन्न होती है तथा दुष्टों के मन में हर्ष उत्पन्न होता है। पुण्यात्मा को देखकर सज्जन मुदित होते हैं और अपुण्यात्माओं की उपेक्षा करते हैं लोक-जीवन में उपर्युक्त सभी प्रकार के भाव देखे जाते हैं। कवि इन सभी भावों का मर्मस्पर्शी चित्रण अपनी कविता में करता है। कुशल कवि स्वाभाविक वर्णन को चित्ताकर्षक बना देता है। उसकी लेखनी स्वाभाविक पाषाण-खण्ड को रत्न बना देती है जिसकी चमक चिरस्थायी रहती है । सुखात्मक संवेदनाओं की अभिलाषा सभी प्राणी में रहती है। विश्व का प्रत्येक प्राणी सुख से प्रेम और दुःख से घृणा करता है। सुख-दुःख न विषयगत ही है और न आत्मगत । एक वस्तु किसी के लिए भले ही सुखात्मक हो किन्तु दूसरों के लिए दुःखात्मक होती है तथा तीसरे के लिए मोहात्मक भी हो सकती है। इसलिए सुख-दुःख उभयात्मक है। साहित्य अपने कलात्मक सौन्दर्य से आनन्द प्रदान करता है चाहे वह दुःखात्मक ही क्यों न हो क्योंकि साहित्यिक संवेदनाओं की चर्वणा आनन्द मे ही समाप्त होती है । सुखात्मक संवेदनाए लौकिक दृष्टि से सुखमूलक हैं। जिन वस्तुओं की सम्प्रति से अन्तःकरण आह्लादित होता है अर्थात् चित्त का विकास हो जाता है अथवा चित्त विश्रान्त हो जाता है वे वस्तुएँ सुखात्मक संवेदनाओं के कारण होते है । चित्त की विश्रान्ति ही सुख है और अविश्रान्ति दुःख है । श्रृंगार, धन-धान्य, प्रिय आदि की प्राप्ति का वर्णन पाठक को ऐन्द्रिय सुख प्रदान करता है। हास-परिहास, वसन्त, प्राकृतिक सौन्दर्य आदि के वर्णन से चित्त प्रमुदित हो जाता है। इसलिए इनकी संवेदनाएं सुखात्मक होती है। दुःखात्मक संवेदनाओं मे चित्त संकुचित हो जाता है। दुःखात्मक संवेदनाओं का साहित्य में अधिक महत्व है वाल्मीकि की करूणा ही श्लोक रूप में परिणीत हुई थी । दुःखात्मक संवेदनाएँ लोक-जीवन का अंग बनती जा रही है। इसका भुक्तभोगी कवि ही इनकी संवेदना को समझ सकता है। इस प्रकार के जनों की श्वासों में निरन्तर अग्नि-ज्वाला धधकती रहती है जिसकी उष्मा में वह निरन्तर तपता हुआ अपनी जीवन यात्रा को पूरा करता है । दुःखात्मक संवेदनाएं प्रिय का आत्यन्तिक वियोग, धन का विनाश, अकाल और दुर्घटनाओं की विभीषिका, शोषकों के आंतक आदि सामाजिक अपराधों की उर्वर भूमि में जन्म लेकर सहृदय को करूणार्द्र बनाती हैं । मोहात्मक संवेदनाएँ तमोगुण प्रधान होती है । शोषकों के अत्याचार घृणा और क्रोध को जन्म देते हैं। लोक जीवन में ऐसे लोगों को बहुतायत देखा जाता है, जो मोह ग्रस्त होकर या तो अकर्मण्य हो जाते हैं अथवा अनैतिक आचरण को जीवन का अंग बना लेते हैं। उनके क्रियाकलाप अमानवीय होते है किन्तु वे उसी पङ्क में फँसकर ही सुख का अन्वेषण करते रहते है। ऐसे व्यक्तियों के जीवन से सम्बन्धित रचनाएँ मोहात्मक-संवेदनाओं को जन्म देती है । संवेदनाएं साहित्य को जन्म देती हैं और साहित्य में संवेदनाएँ समाहित रहती हैं । दूसरे शब्दों में कहें तो संवेदना ही साहित्य है और साहित्य ही संवेदना हैं । साहित्य के शब्द केवल शब्द नहीं होतें हैं वरन् उसमें प्रवाहित संवेदनाओं के कारण ही उनका महत्व है। साहित्य के शब्द यदि संवेदनात्मक अर्थों के रूप में अपने को परिवर्तित नहीं कर पाते तो वे शब्द केवल झंकार मात्र बनकर रह जाते हैं। संवेदनाओं के माध्यम से कवि या साहित्यकार समाज, प्रकृति व मानव जीवन की विविधताओं को अपने मन-मस्तिष्क व हृदय-सिन्धु में अंकित करता है, पुनः लेखनी से अजस्र प्रवाहित होने वाले विविध प्रकार के मनोरम रंगो से उन भावों को नूतन व मर्मस्पर्शी रूप प्रदान करता है । । साहित्य में लोक-संवेदनाओं का महत्व 'लोक-संवेदना' का अर्थ है "लोक-जीवन की संवेदना ।" आचार्य भरत ने "नाट्यशास्त्र" में बताया है कि नाट्य लोकवृत्त लोक व्यवहार का अनुकरण करने वाला है जिसमें अनेक प्रकार के भावों तथा विभिन्न अवस्थाओं का समन्वय रहता है । अट्ठानवे इस नाट्य मे सम्पूर्ण ज्ञान, शिल्प, विधा, कला और योग का समावेश रहता है। इनकी दृष्टि में नाट्य दुःखार्त, क्षमार्त तथा शोकार्त जनों को विश्रन्ति = सुख प्रदान करने वाला है । एक सौ भरत - मुनि का उपर्युक्त कथन यह सिद्ध करता है कि उत्तम काव्य लोक - जीवन के व्यवहारों का मार्मिक चित्रण करने वाला होता है। समाज में श्रमार्त, दुःखार्त और शोकार्तो का बाहुल्य है। ये जनसाधारण अपनी जीवनवृत्तियों को काव्य में पाकर शीघ्रातिशीघ्र साधारणीकरण की अवस्था को प्राप्त हो जाते है। इसीलिए उन्हें आनन्द की प्राप्ति होती है। वस्तुतः सुख और दुःख से मिश्रित लोक व्यवहार जब अभिनय अथवा काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है तभी लोक में विनोद जनक सिद्ध होता है। एक सौ एक कवि जिस स्वभाव का होता है, उसकी कविता भी उसी प्रकार की होती है। जो कवि लोक जीवन की संवेदनाओं के रंगों से अपनी रचनाओं को चित्रित करता है, उसकी रचना अत्यधिक प्रभावशालिनी होती है। वही कवि सफल है जो अपनी अनुभूतियों को उसी रूप में प्रेक्षक तक पहुॅचा सके। 'काव्य का ध्येय यह कदापि नही है कि जो वस्तु एक हृदय में घटित होती है उसका प्रेषण करके दूसरों के लिए उसे बोधगम्य बना दिया जाय, वरन् इसका काम है दूसरे व्यक्ति में भी ऐसी मनोदशा की उत्पत्ति कराना जो कि कवि की उस मनोदशा के अनुकूल हो, जो अभिव्यक्ति द्वारा बहिर्मुख हो जाती है । एक सौ दो यह स्थिति तभी सम्भव होती है जब कवि लोक-जीवन के मार्मिक भावों को अपनी कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। लोक जीवन को प्रत्यक्ष करने वाला कवि सभी वस्तुओं को प्रत्यक्ष कर लेता है। कवि की वास्तविक अनुभूतियाँ ही कलात्मक भावों का रूप धारण करती है, जिसका परिणाम यह होता है कि कवि स्वयं जिस भावों का सूक्ष्मता से भोग करता है इसी भावों के तल तक पाठक को पहुँचाने में सफल होता है। कवि-प्रतिभा की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी कृतियों में लोक जीवन की संवेदनाओं का कितना व्यापक्तव अथवा वैविध्य मौलिक रूप में प्रभावी ढंग से उपस्थित किया गया है । लोक-संवेदनाएं मूलतः जन-साधारण के सुख-दुःख की गहरी अनुभूति कराती हैं। लोक-साहित्य में लोक-संवेदनाओं का जो रूप दिखाई पड़ता है, इतना सजग और सहज रूप उन कवियों के काव्य में नही प्राप्त होता जो लोक-प्रतिबद्ध होने का दंभ भरते हैं । वस्तुतः लोक साहित्य साधारण दुःखी जनों का स्वयं का भोगा हुआ साहित्य है, उसमें तरह किसी की कृत्रिमता नहीं रहती क्योंकि उसका प्रवाह हृदय से होता है। इसमें बौद्धिकता का विलास नहीं रहता है। कुछ प्रतिवद्ध कवि लोक पीड़ा को मार्मिक रूप में व्यक्त करने में सफल सिद्ध हुए हैं परन्तु अनेक कवियों में केवल लोक जीवन का बाह्य स्पर्श मात्र ही दिखाई पड़ता है। लोक संवेदनाओं का सच्चा रूप - उन किसानों के श्रम की बूँदों में, जो गेहूँ और धान की बालियों में परिणत होकर बाजारों में पानी के भाव बिकते हैं उन श्रमिकों की हड्डियों में, जो कारखानों की आग में पिघलती रहती है उन श्रमिक युवतियों के फटेहाल - यौवन में, जिसे पेट की आग बुझाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता उन दीन-हीन बालकों की पीड़ा में, जो प्लेटफार्मों पर फटे दोना को लूटने के लिए आपस में लड़ते रहते हैं, होटलों में दो वक्त की रोटी प्राप्त करने के लिए दिन-रात श्रम किया करते हैं तथा बँधुआ मजदूर की जिन्दगी जीने के लिए विवश रहते हैं - भूख की ज्वाला में पुत्र-पुत्रियों से घिरी हुई उन महिलाओं के दर्द में, जिनके पति अपने प्राण हथेली पर लेकर घर से बहुत दूर कुछ कमाने गये हैं, एवं मेहनतकश श्रमिक स्त्रियों के असहनीय परिश्रम, जो क्षुधानल में जलती हुई भी खेतों में धान रोपती हुई गाती रहती है, जिनके जीवन का शैशव जाड़ों की शीत-भरी रात में पुआलों में तथा यौवन गर्मी की दोपहर में खेत-खलिहानों में तथा वृद्धावस्था सड़क के पड़े ढेले की भाँति बीतता है दिखाई पड़ता लोक-संवेदना वस्तुतः जीवन के उस अन्तःकरण की अभिव्यक्ति है जिसमें सहजता, सरसता, सिसृक्षा, जिजीविषा और दुर्धर्ष बाधाओं से संघर्ष करने की प्रबल अभिलाषा रहती है। जिसके द्वारा मानव हारकर भी विजय की अभिलाषा ही नहीं करता वरन् सन्नद्ध होकर विकराल काल से युद्ध कर प्रलय को सृजन में परिवर्तित करता रहता है । साहित्य की विशालता लोक-परम्परा से प्राप्त रीति-रिवाज, आचार-विचार, संस्कारों एवं संस्कृति का अनुपालन विविध प्रकार के अविश्वसनीय लगने वाले क्रिया-कलापों पर विश्वास, शकुन अपशकुन, व्रत-त्योहारों के प्रति देवमूलक आस्था आदि क्रिया-कलापों के सूक्ष्म निरीक्षण का प्रतिफलन है। साहित्यकारों ने लोकजीवन के उफनते हुए समुद्र को केवल दूर से ही नहीं देखा, वरन् उसमें डूबकर उसके खारेपन के साथ ही उसके लावण्यमय रूप का आस्वादन करते हुए उसके हृदय तल के रत्नों को निकालकर उन रत्नों से अपनी कविता - कामिनी को सॅवारा । विश्व का सम्पूर्ण साहित्य सुखात्मक, दुःखात्मक तथा मोहात्मक संवेदनाओं की विवेचना करता है। उनके पात्रों मे वैशिष्ट्य भले ही हो, लेकिन संवेदनाओं में अन्तर नहीं है। यह बात दूसरी है कि अभिजात्य साहित्य में भौतिक-विलास तथा बौद्धिक कीड़ा का समावेश अधिक होने से लोक-साहित्य की भाँति हृदय की सहजता व सरसता कम दिखाई पड़ती है, पर लोक-संवेदनाओं से वह शून्य नहीं है। शिष्ट साहित्य का दीपक भी लोक-संवेदनाओं की स्नेहिल वर्तिका के प्रकाश से अन्धकार का भेदन करता रहा है । वस्तुतः साहित्य और लोक का सम्बन्ध गत्यात्मक और इतना अन्तरंग है कि विद्यमान रहने पर भी सतत मुखर नहीं होता है । लोक-संवेदनाओं के माध्यम से ही साहित्य में भारतीय संस्कृति में व्याप्त धार्मिक, सहिष्णुता, नैतिकता, समन्वय, समानता व विश्ववन्धुत्व जैसी भावनाओं का समावेश हुआ है । यह भारतीय संस्कृति भारत में रहने वाले हर भारतीय के संस्कारों में चेतन या अचेतन रूप में रची-बसी है जिसका आलोक कविताओं में उतर कर जन-जन को आप्लावित करता रहता है। रामायण और महाभारत की कथाओं ने भारतीय जन-मानस को अत्यधिक प्रभावित किया । फलतः लोक-गीतों में राम व कृष्ण से सम्बन्धित कथाओं का बाहुल्य देखा जा सकता है। इन महापुरुषों से सम्बन्धित गीतों को जन्म, मुण्डन, विवाहादि संस्कारो मे गाया भी जाता है । लोक गीतों की श्रुति - परम्परा वैदिक साहित्य के उदात्तत्व को उपस्थित करती है। जिस प्रकार किसी बात की प्रमाणिकता के लिए हम वैदिक साहित्य के शब्दार्थों में डूब जाते है उसी प्रकार श्रुति - परम्परा को आज भी स्थिर रखने वाले लोक-गीतों की संवेदनाएँ साहित्य के लिए उपजीव्य है । जो कवि लोक-हृदय में पूर्ण रूप से समाया रहता है, उसी की कविता सरसता, सहजता को बिखेरती व काल-सीमा के बन्धनों को तोड़ती हुई वैश्वीकरण को प्राप्त होती है। एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से भिन्न है किन्तु लोक हृदय की अन्तर्भूमियों में कुछ ऐसी समानता होती है जो भिन्न-भिन्न देश, संस्कृति और जाति के मनुष्यों को एक ही क्षण में अपने में विलीन कर देती है। इसीलिए किसी एक देश-काल का साहित्य पूरे विश्व में प्रतिष्ठित हो जाता है । मार्क्स ने कला के सम्बन्ध में कहा है कि- कला जनोपयोगी होनी चाहिए और उसके द्वारा समाज के दलित वर्गों की मूक वेदनाओं, भावनाओं तथा आशाओं एवं निराशाओं की अभिव्यंजना होनी चाहिए। अतीत की कला महलों में पत्नी थी धनिक सत्ताधरियों के आमोद-प्रमोद का साधन बनी रही, परन्तु अब उसे जन-साधारण के सुख-दुःख, हास्य तथा अश्रुपात में भाग लेना पड़ेगा और इसी में उसकी सार्थकता निहित है। कला के प्रति मार्क्स का यह दृष्टिकोण काव्य मे लोक संवेदनाओं की अनिवार्यता प्रकट करता है । लोक-संवेदनाओं में विश्वबन्धुत्व का भाव, पड़ोसी तथा समाज के प्रति प्रेम, मानव के प्रति प्रेम और श्रद्धा तथा एक दूसरे के हित के लिए आत्म-बलिदान की भावना निहित है। अतः साहित्य में इन संवेदनाओं की उपादेयता स्वयं सिद्ध है। लोक-संवेदानाओं से तादात्म्य रखने वाला कवि अहं की चहारदीवारी से बाहर निकलकर समाज व जीवन के गूढ़ यथार्थ-सत्यों से साक्षात्कार कर उनमें व्याप्त विसंगतियों, विषमताओं व विडम्बनाओं के मूल कारणों को खोजकर अपनी कविता के माध्यम से उन्हें जग-जाहिर करता हुआ उनके खिलाफ जनमत तैयार करने में योग देता है, ताकि समाज में सत्य, न्याय, प्रेम, नैतिकता, सहिष्णुता, समानता आदि मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा हो सके । अतः कहा जा सकता है कि लोक संवेदनाओं से परिपूर्ण साहित्य समाज को नैतिक व मानवीय आधार पर सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस वैज्ञानिक युग के बढ़ते प्रभाव ने जहाँ विश्व की दूरी कम कर दी है, वहीं मनुष्य से मनुष्य की दूरी को बढ़ाया है। आज मनुष्य भौतिक विकास की लालसा में मनुष्यता की तिलाञ्जलि दे रहा है। ऐसी भयावह स्थिति में लोक-संवेदनाओं से संवलित साहित्य मानव का हित चिन्तक है । सभ्यता और भौतिकता की वृद्धि में मानव की हृदयगत कोमल भावनाओं पर प्रहार किया जिसके परिणाम स्वरूप साहित्य में अत्यधिक बौद्धिकता दिखाई पड़ती है। बौद्धिक - साहित्य अनिष्टकारी तो नही है पर लोक में उनकी पकड़ बिल्कुल न होने से उसका मूल्य आम जनता की दृष्टि से नगण्य है। स्पष्ट है कि भौतिकता के बढ़ते प्रभाव से साहित्य को लोक-संवेदनाएँ ही बचा सकती हैं क्योंकि इन लोक-संवेदनाओं में ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्य समाहित है जो जन-जन को सही व स्वस्थ दिशा देने में समर्थ हैं । ये मूल्य हैं त्याग की भावना, सहज निश्छलता, परस्पर सौहार्द की भावना, धर्म-परम्पराओं के प्रति अनुराग की भावना आदि । त्याग की भावना स्वार्थ संकुचित मनुष्य के हृदय को विशालता प्रदान करती है। सहज निश्छलता लोभी व चतुर मनुष्य को आडम्बरमय जीवन की संकीर्ण गुफा से निकालकर विश्वबंधुत्व की धारा में प्रवाहित करने में सक्षम है। परस्पर सौहार्द्र की भावना नैतिकता तथा धर्म-परम्पराओं के प्रति अनुराग की भावना विश्रृङ्खलित मानव समाज को पाप के पङ्क से निकालकर उसे 'सत्यं शिवं और सुन्दरम' के रहस्य का साक्षात्कार कराकर परमानन्द प्रदान करने में पर्याप्त कराने में पर्याप्त है । अन्ततः कहा जा सकता है कि इस भौतिकवादी युग में लोक संवेदनाओं से युक्त साहित्य ही मनुष्य की प्रकृति विजयनी वैज्ञानिक लालसा को ध्वस्त कर, उसके आन्तरिक सन्तुलन, अनुशासन और उसके उत्कर्ष को लोकमंगलकारी बना सकता है, तथाकथित सम्य पुरूष की बर्बरता तथा अहङ्कार शीतला को नम्रता, सरसता और सहृदयता में परिवर्तित कर सकता है क्योंकि इन्ही लोक संवेदनाओं में समरसता की अजस्र धारा प्रवाहित होती रहती है ।
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अमरावती/दि. २७ - जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है. इसी पार्श्वभूमि पर बेड, उपचार साधनसामुग्री को लेकर नियमित जिला प्रशासन को जानकारी देना आवश्यक है. ग्रामीण इलाकों में महामारी पर नियंत्रण पाना जरूरी है. इसके लिए ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग ने सर्तक रहकर काम करना चाहिए. यह निर्देश राज्य की महिला व बालविकास मंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने दिए. जिले की विविध तहसीलों में कोरोना प्रतिबंधात्मक उपाययोजनाओं का ब्यौरा लेने के लिए सभी तहसील स्वास्थ्य अधिकारियों की पालकमंत्री की अध्यक्षता में झूम एप के जरिए बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में जिलाधिकारी शैलेश नवाल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिलीप रणमले सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे. पालकमंत्री ठाकुर ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मरीज संख्या ना बढे इसके लिए सजग रहकर काम करना आवश्यक है. इससे पूर्व जांच व जनजागृति के लिए ग्रामीण इलाकों में विविध सर्वेक्षण किया जा रहा है.
व्यक्तियों में कोरोना के लक्षण पाए जाने पर प्रिवेंटीव औषधोपचार समय पर शुरू करना चाहिए. ताकि बीमारियों पर समय पर नियंत्रण पाना संभव है. तहसील स्तर पर रहनेवाले उपचार सुविधा के अलावा टीकाकरण आदि पहलुओं का सनियंत्रण करने के लिए तहसीलस्तरीय समिति गठित की गई है. इस समिति द्वारा प्रत्येक पहलुओं को जांचकर कार्रवाई करनी चाहिए व जिला प्रशासन से समन्वय साधना चाहिए. टीकाकरण केंद्र पर भीड़ ना हो इसके लिए टोकन सिस्टीम भी चलायी जाए ताकि भीड़ को टाला जा सके और नागरिकों का भी समय बच सके.
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अमरावती/दि. सत्ताईस - जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है. इसी पार्श्वभूमि पर बेड, उपचार साधनसामुग्री को लेकर नियमित जिला प्रशासन को जानकारी देना आवश्यक है. ग्रामीण इलाकों में महामारी पर नियंत्रण पाना जरूरी है. इसके लिए ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग ने सर्तक रहकर काम करना चाहिए. यह निर्देश राज्य की महिला व बालविकास मंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने दिए. जिले की विविध तहसीलों में कोरोना प्रतिबंधात्मक उपाययोजनाओं का ब्यौरा लेने के लिए सभी तहसील स्वास्थ्य अधिकारियों की पालकमंत्री की अध्यक्षता में झूम एप के जरिए बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में जिलाधिकारी शैलेश नवाल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिलीप रणमले सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे. पालकमंत्री ठाकुर ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मरीज संख्या ना बढे इसके लिए सजग रहकर काम करना आवश्यक है. इससे पूर्व जांच व जनजागृति के लिए ग्रामीण इलाकों में विविध सर्वेक्षण किया जा रहा है. व्यक्तियों में कोरोना के लक्षण पाए जाने पर प्रिवेंटीव औषधोपचार समय पर शुरू करना चाहिए. ताकि बीमारियों पर समय पर नियंत्रण पाना संभव है. तहसील स्तर पर रहनेवाले उपचार सुविधा के अलावा टीकाकरण आदि पहलुओं का सनियंत्रण करने के लिए तहसीलस्तरीय समिति गठित की गई है. इस समिति द्वारा प्रत्येक पहलुओं को जांचकर कार्रवाई करनी चाहिए व जिला प्रशासन से समन्वय साधना चाहिए. टीकाकरण केंद्र पर भीड़ ना हो इसके लिए टोकन सिस्टीम भी चलायी जाए ताकि भीड़ को टाला जा सके और नागरिकों का भी समय बच सके.
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प्रो. जोशी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जन कल्याणकारी योजनाएं दम तोड़ रही है. मायावती सरकार के दौरान यह योजना भ्रष्टाचार के नजर हो गयी थी वही समाजवादी पार्टी सरकार ने इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया. कांग्रेस के नेतृत्व यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नरेगा, जनअधिकार का कानून, ग्रामीण स्वास्थ मिशन, मध्याह्न भोजन, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं सहित अनेक योजनाएं एवं कानूनी अधिकार देश को दिया था. परन्तु उत्तर प्रदेश की बसपा एवं सपा सरकारों ने उस पर ध्यान नहीं दिया. आज जब उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक जनपद सूखाग्रस्त घोषित हो चुके है, ऐसे में भी नरेगा और खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत अनाज वितरण का कार्य ना किया जाना जनता के साथ घोर अन्याय है.
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प्रो. जोशी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जन कल्याणकारी योजनाएं दम तोड़ रही है. मायावती सरकार के दौरान यह योजना भ्रष्टाचार के नजर हो गयी थी वही समाजवादी पार्टी सरकार ने इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया. कांग्रेस के नेतृत्व यूपीए सरकार ने महात्मा गांधी नरेगा, जनअधिकार का कानून, ग्रामीण स्वास्थ मिशन, मध्याह्न भोजन, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं सहित अनेक योजनाएं एवं कानूनी अधिकार देश को दिया था. परन्तु उत्तर प्रदेश की बसपा एवं सपा सरकारों ने उस पर ध्यान नहीं दिया. आज जब उत्तर प्रदेश में पचास से अधिक जनपद सूखाग्रस्त घोषित हो चुके है, ऐसे में भी नरेगा और खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत अनाज वितरण का कार्य ना किया जाना जनता के साथ घोर अन्याय है.
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नई दिल्लीः अपने विधानसभा क्षेत्र की एक महिला से कथित रेप के आरोप में जेल जा चुके दिल्ली के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार अब एमसीडी चुनावों में बीजेपी के लिए प्रचार करते दिखे. संदीप कुमार के बीजेपी के लिए वोट मांगने से बीजेपी नेता असहज हो गए. जहां लोगों ने बीजेपी को संदीप कुमार के बीजेपी में आने के लिए आड़े हाथों लिया और खरी खोटी सुनाई वहीं बीजेपी ने भी आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि यह एक सोची समझी चाल हो सकती है.
बीजेपी प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने एक ट्वीट कर साफ कहा है कि यह सभी जान लें कि संदीप कुमार बीजेपी में शामिल नहीं हुए और न ही पार्टी ने उन्हें आमंत्रण दिया है. नुपूर का कहना है कि यह एक साजिश हो सकती है.
दूसरे ट्वीट में नुपूर ने कहा कि संदीप 'राशन कार्ड' कुमार को अभी भी आम आदमी पार्टी ने निष्कासित नहीं किया है. उन्होंने कहा कि संदीप अभी भी आम आदमी पार्टी का विधायक है. और पार्टी विधायकों की गिनती में उसे शामिल किया जाता है. नुपूर शर्मा ने इस मामले में एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरा और हमला करते हुए कहा कि रेप का वीडियो वायरल होने के बाद केजरीवाल 15 दिनों तक उसे बचाते रहे.
उधर, दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस खबर के आते ही ट्वीट के जरिए मीडिया में साफ कर दिया था कि बीजेपी का संदीप कुमार से कोई लेना देना नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि हमने उसे कभी पार्टी के प्रचार के लिए नहीं बुलाया. वह मीडिया वालों के साथ आया. जैसे ही वह आया बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उसे रैली के स्थान से वापस भेज दिया.
बता दें कि संदीप कुमार की कथित सेक्स सीडी सार्वजनिक होने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था. संदीप कुमार की कथित सेक्स की सीडी सामने आने के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था. तब संदीप कुमार दिल्ली की सरकार में एससी/एसटी कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री थे. मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें पद से हटा दिया था.
संदीप कुमार को पिछले साल नंवबर में एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत मिली थी. कोर्ट ने कुमार को निर्देश दिया था कि वह अपना पासपोर्ट जमा करें और गवाहों को प्रभावित नहीं करें. उन्हें तीन सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में थे.
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नई दिल्लीः अपने विधानसभा क्षेत्र की एक महिला से कथित रेप के आरोप में जेल जा चुके दिल्ली के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार अब एमसीडी चुनावों में बीजेपी के लिए प्रचार करते दिखे. संदीप कुमार के बीजेपी के लिए वोट मांगने से बीजेपी नेता असहज हो गए. जहां लोगों ने बीजेपी को संदीप कुमार के बीजेपी में आने के लिए आड़े हाथों लिया और खरी खोटी सुनाई वहीं बीजेपी ने भी आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि यह एक सोची समझी चाल हो सकती है. बीजेपी प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने एक ट्वीट कर साफ कहा है कि यह सभी जान लें कि संदीप कुमार बीजेपी में शामिल नहीं हुए और न ही पार्टी ने उन्हें आमंत्रण दिया है. नुपूर का कहना है कि यह एक साजिश हो सकती है. दूसरे ट्वीट में नुपूर ने कहा कि संदीप 'राशन कार्ड' कुमार को अभी भी आम आदमी पार्टी ने निष्कासित नहीं किया है. उन्होंने कहा कि संदीप अभी भी आम आदमी पार्टी का विधायक है. और पार्टी विधायकों की गिनती में उसे शामिल किया जाता है. नुपूर शर्मा ने इस मामले में एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरा और हमला करते हुए कहा कि रेप का वीडियो वायरल होने के बाद केजरीवाल पंद्रह दिनों तक उसे बचाते रहे. उधर, दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस खबर के आते ही ट्वीट के जरिए मीडिया में साफ कर दिया था कि बीजेपी का संदीप कुमार से कोई लेना देना नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि हमने उसे कभी पार्टी के प्रचार के लिए नहीं बुलाया. वह मीडिया वालों के साथ आया. जैसे ही वह आया बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उसे रैली के स्थान से वापस भेज दिया. बता दें कि संदीप कुमार की कथित सेक्स सीडी सार्वजनिक होने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था. संदीप कुमार की कथित सेक्स की सीडी सामने आने के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था. तब संदीप कुमार दिल्ली की सरकार में एससी/एसटी कल्याण और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री थे. मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें पद से हटा दिया था. संदीप कुमार को पिछले साल नंवबर में एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत मिली थी. कोर्ट ने कुमार को निर्देश दिया था कि वह अपना पासपोर्ट जमा करें और गवाहों को प्रभावित नहीं करें. उन्हें तीन सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में थे.
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कोन्या मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका ने बताया कि बस स्टेशन - कैंपस ट्राम लाइन पर लाइन रखरखाव का काम पूरा हो चुका है।
नगर पालिका द्वारा दिए गए लिखित बयान में कहा गयाः "बस स्टेशन - कैंपस ट्राम लाइन पर लाइन रखरखाव का काम, जो 7 अगस्त को कोन्या मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका द्वारा शुरू किया गया था, पूरा हो चुका है। ट्राम लाइन शुक्रवार, 18 अगस्त को 05:50 बजे कैंपस और अलादीन के बीच फिर से सेवा शुरू कर देगी। इसके अलावा, सेल्कुक विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार, 19 अगस्त और रविवार, 20 अगस्त को होने वाली परीक्षाओं के लिए परिसर में ट्राम भी सेवा प्रदान करेंगी।
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कोन्या मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका ने बताया कि बस स्टेशन - कैंपस ट्राम लाइन पर लाइन रखरखाव का काम पूरा हो चुका है। नगर पालिका द्वारा दिए गए लिखित बयान में कहा गयाः "बस स्टेशन - कैंपस ट्राम लाइन पर लाइन रखरखाव का काम, जो सात अगस्त को कोन्या मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका द्वारा शुरू किया गया था, पूरा हो चुका है। ट्राम लाइन शुक्रवार, अट्ठारह अगस्त को पाँच:पचास बजे कैंपस और अलादीन के बीच फिर से सेवा शुरू कर देगी। इसके अलावा, सेल्कुक विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार, उन्नीस अगस्त और रविवार, बीस अगस्त को होने वाली परीक्षाओं के लिए परिसर में ट्राम भी सेवा प्रदान करेंगी।
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- खुदरा निवेशकों और उसमें से भी नए निवेशकों के भरोसे शेयर बाज़ार में गति दिखाई दे रही है। तमाम रिकार्ड बताते हैं कि अनेकानेक कारणों से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाज़ार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है और काफी पैसा निकाल भी चुके हैं। दूसरी तरफ, नए और घरेलू निवेशक पैसा लगाने लगे हैं। जिसके कारण बाज़ार में उछाल तो है लेकिन क्या यह अच्छा संकेत है?
पिछले छह महीने में भारत का शेयर बाज़ार काफी बदल गया है। विदेशी निवेशकों ने 1. 65 लाख करोड़ के शेयर बेच दिए हैं। उनके बाद जो हाई नेटवर्थ निवेशक हैं जो दो लाख रुपये से ज़्यादा निवेश करते हैं, इन लोगों ने भी अपना हिस्सा बेच दिया है। मैं कोई बाज़ार का जानकार नहीं हूं लेकिन बीच-बीच में सीखने का प्रयास करता हूं। इस विश्लेषण से मुझे यही समझ आया कि अनुभवी और समझदार लोग बाज़ार से निकल गए हैं। उनके निकलने से बाज़ार गिरे न इसलिए घरेलू संस्थागत निवेशक DII ने पिछले छह महीने में दो लाख करोड़ का निवेश किया है। इसके कारण निफ्टी और सेंसेक्स का स्तर भी काफी बढ़ा है।
प्रशांत जैन की बात को ध्यान में रखना चाहिए। मैं नहीं कह रहा कि बाज़ार से डर जाएँ लेकिन, सतर्क रहने में कोई बुराई नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस के जार्ज मैथ्यू और संदीप सिंह की रिपोर्ट के आधार पर मैं हिन्दी में लिख रहा हूं क्योंकि कोविड के दो वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपना पैसा बैंकों से निकाल कर शेयर बाज़ार में लगाया है। बैंकों में ब्याज दर काफ़ी कम है। दूसरी तरफ़, अमरीका में ब्याज दर बढ़ा तो विदेशी निवेशक अपना पैसा वहाँ ले जा रहे हैं। इसका मतलब यही है कि अनुभवी खिलाड़ी भी यही चाहता है कि बैंकों में ब्याज दर ज़्यादा मिले ताकि उसका पैसा सुरक्षित रहे। कहीं ऐसा न हो कि समझदार लोग अपना पैसा बनाकर एक असुरक्षित बाज़ार नए लोगों के लिए छोड़ गए हैं।
एक्सप्रेस ने बताया है कि मार्च 2015 में खुदरा निवेशकों की भागीदारी 6. 12 प्रतिशत थी जो बढ़ कर मार्च 2022 में 7. 42 प्रतिशत हो गई है। तब खुदरा निवेशकों का 5. 26 लाख करोड़ बाज़ार में लगा था, जो बढ़कर 19. 16 लाख करोड़ हो गया है। प्राइम डेटाबेस के प्रणब हल्दिया का कहना है कि कोविड के दो वर्षों के दौरान लोगों ने शेयर बाज़ार में पैसे लगाने शुरू किए हैं, जो अभी तक जारी है। पिछले दो वर्षों में बाज़ार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी ज़बरदस्त तरीके से बढ़ी है। 31 मार्च 2022 तक डीमेट खातों की संख्या 8. 97 करोड़ हो गई। मार्च 2020 में करीब सवा दो करोड़ थी। इस संख्या से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितनी तेज़ी से लोगों ने बैंकों से पैसे निकाल कर शेयर बाज़ार में लगाए हैं। दूसरी तरफ उतनी ही तेज़ी से अनुभवी लोग पैसा निकाल कर ब्याज दर की तलाश में अमरीका जा रहे हैं। वहां ब्याज दर में बढ़ोत्तरी हुई है। तो जो अनुभवी है, वो निकाल कर रहा है क्योंकि ब्याज दर अधिक मिल रहा है। वहीं जो नया नया है, ब्याज दर नहीं मिलने के कारण शेयर बाज़ार में जा रहा है।
इस तरह से शेयर बाज़ार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी सर्वकालिक रुप से अधिक है। 31 मार्च 2022 को 23. 34 प्रतिशत हो गई है और विदेशी निवेशकों की भागीदारी घट कर 20. 15 प्रतिशत हो गई। सात साल पहले शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 23. 32 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और घरेलू निवेशकों का योगदान केवल 18. 47 प्रतिशत था। घरेलु निवेशकों में कई प्रकार के किरदार होते हैं। HNI, DII के अलावा खुदरा निवेशक होते हैं। जैसे हम और आप। अगर आप बाज़ार में नए खिलाड़ी हैं तो ध्यान से निवेश करें। नई-नई जानकारी हासिल करते रहें। बाकी भगवान मालिक है।
- जीएसटी संग्रह की ख़बरें पहले पन्ने पर और पहले नंबर छपी हैं। इस बार जीएसटी संग्रह का नया रिकार्ड बना है। अप्रैल के महीने में 1. 67 लाख करोड़ का संग्रह हुआ है। इसमें बिहार का कितना योगदान है? महाराष्ट्र में जहां जीएसटी संग्रह में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं बिहार में जीएसटी संग्रह माइनस दो प्रतिशत रहा है यानी घट गया है। यह बता रहा है कि हिन्दी प्रदेश का एक बड़े राज्य की आर्थिक हालत क्या है। झारखंड ने इस बार वाणिज्य कर की वसूली में 26 प्रतिशत की वृद्धि की है। इसमें जीएसटी और वैध भी शामिल है।
अख़बारों में कहा गया है कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि को दो तरह से देखा जा सकता है। पहला, इससे संकेत मिलते हैं कि अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर है। दूसरा, लागत मूल्य में वृद्धि के कारण जीएसटी संग्रह बढ़ा है। चीज़ों के दाम काफी बढ़े हैं। जब दाम बढ़ेंगे तो उस पर लगने वाला टैक्स भी बढ़ेगा। महंगाई के कारण जीएसटी का रिकार्ड शानदार है? इस पर इस क्षेत्र को समझने वाले ही बेहतर बता सकते हैं।
एक तीसरा कारण यह है कि जब तक अगला अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करता है, आप इनपुट क्रेडिट नहीं ले सकते हैं। इस कारण से आप जिससे माल ख़रीदते हैं,उस पर दबाव रहता है कि वह रिटर्न दायर करे, तभी तो आप क्रेडिट ले पाएंगे। यही नहीं जीएसटी टैक्स प्रशासन ने लोगों से काफी सख्ती की है कि वे अपना समय पर रिटर्न भरें। इसमें उनकी भी मेहनत है। इस बार रिटर्न भरने वालों की संख्या भी ज़्यादा है। ऐसा लग रहा है कि इस बार ठीक से व्यापारी वर्ग योगदान कर पा रहे हैं। उनके पास टैक्स से बचने के रास्ते बंद हो रहे हैं। यह काफ़ी अच्छा है।
3. EMI बढ़ने लगी है। भारतीय रिज़र्व बैंक की तरफ़ से भी संकेत मिल रहे हैं कि ब्याज दरों में वृद्धि हो सकती है। मध्यम वर्ग कितनी मार झेलेगा, यह तो वही जानता है।
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- खुदरा निवेशकों और उसमें से भी नए निवेशकों के भरोसे शेयर बाज़ार में गति दिखाई दे रही है। तमाम रिकार्ड बताते हैं कि अनेकानेक कारणों से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाज़ार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है और काफी पैसा निकाल भी चुके हैं। दूसरी तरफ, नए और घरेलू निवेशक पैसा लगाने लगे हैं। जिसके कारण बाज़ार में उछाल तो है लेकिन क्या यह अच्छा संकेत है? पिछले छह महीने में भारत का शेयर बाज़ार काफी बदल गया है। विदेशी निवेशकों ने एक. पैंसठ लाख करोड़ के शेयर बेच दिए हैं। उनके बाद जो हाई नेटवर्थ निवेशक हैं जो दो लाख रुपये से ज़्यादा निवेश करते हैं, इन लोगों ने भी अपना हिस्सा बेच दिया है। मैं कोई बाज़ार का जानकार नहीं हूं लेकिन बीच-बीच में सीखने का प्रयास करता हूं। इस विश्लेषण से मुझे यही समझ आया कि अनुभवी और समझदार लोग बाज़ार से निकल गए हैं। उनके निकलने से बाज़ार गिरे न इसलिए घरेलू संस्थागत निवेशक DII ने पिछले छह महीने में दो लाख करोड़ का निवेश किया है। इसके कारण निफ्टी और सेंसेक्स का स्तर भी काफी बढ़ा है। प्रशांत जैन की बात को ध्यान में रखना चाहिए। मैं नहीं कह रहा कि बाज़ार से डर जाएँ लेकिन, सतर्क रहने में कोई बुराई नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस के जार्ज मैथ्यू और संदीप सिंह की रिपोर्ट के आधार पर मैं हिन्दी में लिख रहा हूं क्योंकि कोविड के दो वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपना पैसा बैंकों से निकाल कर शेयर बाज़ार में लगाया है। बैंकों में ब्याज दर काफ़ी कम है। दूसरी तरफ़, अमरीका में ब्याज दर बढ़ा तो विदेशी निवेशक अपना पैसा वहाँ ले जा रहे हैं। इसका मतलब यही है कि अनुभवी खिलाड़ी भी यही चाहता है कि बैंकों में ब्याज दर ज़्यादा मिले ताकि उसका पैसा सुरक्षित रहे। कहीं ऐसा न हो कि समझदार लोग अपना पैसा बनाकर एक असुरक्षित बाज़ार नए लोगों के लिए छोड़ गए हैं। एक्सप्रेस ने बताया है कि मार्च दो हज़ार पंद्रह में खुदरा निवेशकों की भागीदारी छः. बारह प्रतिशत थी जो बढ़ कर मार्च दो हज़ार बाईस में सात. बयालीस प्रतिशत हो गई है। तब खुदरा निवेशकों का पाँच. छब्बीस लाख करोड़ बाज़ार में लगा था, जो बढ़कर उन्नीस. सोलह लाख करोड़ हो गया है। प्राइम डेटाबेस के प्रणब हल्दिया का कहना है कि कोविड के दो वर्षों के दौरान लोगों ने शेयर बाज़ार में पैसे लगाने शुरू किए हैं, जो अभी तक जारी है। पिछले दो वर्षों में बाज़ार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी ज़बरदस्त तरीके से बढ़ी है। इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक डीमेट खातों की संख्या आठ. सत्तानवे करोड़ हो गई। मार्च दो हज़ार बीस में करीब सवा दो करोड़ थी। इस संख्या से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितनी तेज़ी से लोगों ने बैंकों से पैसे निकाल कर शेयर बाज़ार में लगाए हैं। दूसरी तरफ उतनी ही तेज़ी से अनुभवी लोग पैसा निकाल कर ब्याज दर की तलाश में अमरीका जा रहे हैं। वहां ब्याज दर में बढ़ोत्तरी हुई है। तो जो अनुभवी है, वो निकाल कर रहा है क्योंकि ब्याज दर अधिक मिल रहा है। वहीं जो नया नया है, ब्याज दर नहीं मिलने के कारण शेयर बाज़ार में जा रहा है। इस तरह से शेयर बाज़ार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी सर्वकालिक रुप से अधिक है। इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस को तेईस. चौंतीस प्रतिशत हो गई है और विदेशी निवेशकों की भागीदारी घट कर बीस. पंद्रह प्रतिशत हो गई। सात साल पहले शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी तेईस. बत्तीस प्रतिशत तक पहुंच गई थी और घरेलू निवेशकों का योगदान केवल अट्ठारह. सैंतालीस प्रतिशत था। घरेलु निवेशकों में कई प्रकार के किरदार होते हैं। HNI, DII के अलावा खुदरा निवेशक होते हैं। जैसे हम और आप। अगर आप बाज़ार में नए खिलाड़ी हैं तो ध्यान से निवेश करें। नई-नई जानकारी हासिल करते रहें। बाकी भगवान मालिक है। - जीएसटी संग्रह की ख़बरें पहले पन्ने पर और पहले नंबर छपी हैं। इस बार जीएसटी संग्रह का नया रिकार्ड बना है। अप्रैल के महीने में एक. सरसठ लाख करोड़ का संग्रह हुआ है। इसमें बिहार का कितना योगदान है? महाराष्ट्र में जहां जीएसटी संग्रह में पच्चीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं बिहार में जीएसटी संग्रह माइनस दो प्रतिशत रहा है यानी घट गया है। यह बता रहा है कि हिन्दी प्रदेश का एक बड़े राज्य की आर्थिक हालत क्या है। झारखंड ने इस बार वाणिज्य कर की वसूली में छब्बीस प्रतिशत की वृद्धि की है। इसमें जीएसटी और वैध भी शामिल है। अख़बारों में कहा गया है कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि को दो तरह से देखा जा सकता है। पहला, इससे संकेत मिलते हैं कि अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर है। दूसरा, लागत मूल्य में वृद्धि के कारण जीएसटी संग्रह बढ़ा है। चीज़ों के दाम काफी बढ़े हैं। जब दाम बढ़ेंगे तो उस पर लगने वाला टैक्स भी बढ़ेगा। महंगाई के कारण जीएसटी का रिकार्ड शानदार है? इस पर इस क्षेत्र को समझने वाले ही बेहतर बता सकते हैं। एक तीसरा कारण यह है कि जब तक अगला अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करता है, आप इनपुट क्रेडिट नहीं ले सकते हैं। इस कारण से आप जिससे माल ख़रीदते हैं,उस पर दबाव रहता है कि वह रिटर्न दायर करे, तभी तो आप क्रेडिट ले पाएंगे। यही नहीं जीएसटी टैक्स प्रशासन ने लोगों से काफी सख्ती की है कि वे अपना समय पर रिटर्न भरें। इसमें उनकी भी मेहनत है। इस बार रिटर्न भरने वालों की संख्या भी ज़्यादा है। ऐसा लग रहा है कि इस बार ठीक से व्यापारी वर्ग योगदान कर पा रहे हैं। उनके पास टैक्स से बचने के रास्ते बंद हो रहे हैं। यह काफ़ी अच्छा है। तीन. EMI बढ़ने लगी है। भारतीय रिज़र्व बैंक की तरफ़ से भी संकेत मिल रहे हैं कि ब्याज दरों में वृद्धि हो सकती है। मध्यम वर्ग कितनी मार झेलेगा, यह तो वही जानता है।
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली आजकल सातवें आसमान पर हैं. जब से उनके घर में नन्ही परी का जन्म हुआ है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है.
अब अनुष्का की डिलीवरी के दस दिन बाद वे बान्द्रा में स्पॉट किए गए. बताया गया कि वे अनुष्का को क्लिनिक लेकर गए थे. सोशल मीडिया पर उनकी उस विजिट की कई तस्वीरें वायरल रहीं.
वैसे तो विरुष्का की हर फोटो का ट्रेंड करना लाजिमी रहता है, लेकिन इस बार फैन्स थोड़े कन्फ्यूज्ड नजर आए और इस कन्फ्यूजन की वजह बने खुद विराट कोहली.
दरअसल वायरल फोटोज में विराट कोहली को दो चश्मों के साथ देखा जा सकता है. एक चश्मा तो उन्होंने आंखों पर लगा रखा है, वहीं दूसरा चश्मा उनकी शर्ट पर लटक रहा है.
अब एक साथ दो चश्मों को देख फैन्स के मन में कई तरह के सवाल आ रहे हैं. कोई पूछ रहा है कि क्रिकेटर ने ऐसा लुक क्यों अपनाया है तो कोई जानना चाह रहा है कि इन दो चश्मों का रहस्य क्या है.
इस कन्फ्यूजन को खुद विराट ने तो दूर नहीं किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि एक चश्मा तो क्रिकेटर की नजर वाला है, वहीं दूसरा वे धूप से बचने के लिए पहनते हैं. इससे पहले भी विराट को ऐसे ही दो चश्मों के साथ देखा गया है.
मालूम हो कि इसी महीने की 11 तारीख को विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर गुड न्यूज शेयर की थी. उन्होंने बताया था कि वे पिता बन गए हैं. उनकी उस पोस्ट ने कुछ ही मिनट में सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था.
पोस्ट में लिखा था- हम दोनों को यह बात बताते हुए खुशी हो रही है कि आज दोपहर हमारे यहां बेटी हुई है. हम आपके प्यार और मंगलकामनाओं के लिए दिल से आभारी हैं. अनुष्का और बेटी, दोनों बिल्कुल ठीक हैं.
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली आजकल सातवें आसमान पर हैं. जब से उनके घर में नन्ही परी का जन्म हुआ है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. अब अनुष्का की डिलीवरी के दस दिन बाद वे बान्द्रा में स्पॉट किए गए. बताया गया कि वे अनुष्का को क्लिनिक लेकर गए थे. सोशल मीडिया पर उनकी उस विजिट की कई तस्वीरें वायरल रहीं. वैसे तो विरुष्का की हर फोटो का ट्रेंड करना लाजिमी रहता है, लेकिन इस बार फैन्स थोड़े कन्फ्यूज्ड नजर आए और इस कन्फ्यूजन की वजह बने खुद विराट कोहली. दरअसल वायरल फोटोज में विराट कोहली को दो चश्मों के साथ देखा जा सकता है. एक चश्मा तो उन्होंने आंखों पर लगा रखा है, वहीं दूसरा चश्मा उनकी शर्ट पर लटक रहा है. अब एक साथ दो चश्मों को देख फैन्स के मन में कई तरह के सवाल आ रहे हैं. कोई पूछ रहा है कि क्रिकेटर ने ऐसा लुक क्यों अपनाया है तो कोई जानना चाह रहा है कि इन दो चश्मों का रहस्य क्या है. इस कन्फ्यूजन को खुद विराट ने तो दूर नहीं किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि एक चश्मा तो क्रिकेटर की नजर वाला है, वहीं दूसरा वे धूप से बचने के लिए पहनते हैं. इससे पहले भी विराट को ऐसे ही दो चश्मों के साथ देखा गया है. मालूम हो कि इसी महीने की ग्यारह तारीख को विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर गुड न्यूज शेयर की थी. उन्होंने बताया था कि वे पिता बन गए हैं. उनकी उस पोस्ट ने कुछ ही मिनट में सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. पोस्ट में लिखा था- हम दोनों को यह बात बताते हुए खुशी हो रही है कि आज दोपहर हमारे यहां बेटी हुई है. हम आपके प्यार और मंगलकामनाओं के लिए दिल से आभारी हैं. अनुष्का और बेटी, दोनों बिल्कुल ठीक हैं.
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गुरुवार तड़के सुबह कश्मीर के शोपियां में सेना के काफिले पर आतंकियों ने हमला कर दिया। इस हमले में एक मेजर और एक जवान शहीद हो गए। वहींं, एक जवान के घायल होने की खबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि हमले के बाद सभी आतंकी फरार हो गए। फिलहाल सेना इनकी तलाश कर रही है।
बता दें कि तीन आतंकवादियों ने सेना के काफिले पर फायरिंग की। इसमें एक मेजर और दो जवान घायल हो गए। गायल अवस्था में इन जवानों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन मेजर और एक जवान की मौत हो गई। एक जवान का अभी भी इलाज चल रहा है। मेजर का नाम कमलेश पांडे है। ये 62 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे।
सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, आतंकियों ने आर्मी के काफिले पर हमला तब किया जब पांडे अपनी टीम के साथ सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। जानकारी मिलने के बाद पांडे एक गांव की तरफ बढ़े, तभी इन आतंकियों ने हैवी फायरिंग शुरू कर दी।
उधर, साउथ कश्मीर के कुलगाम में दो आतंकियों के मारे जाने की खबर है। डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि सिक्युरिटी फोर्सेस को जिले में आतंकवादी के बारे में जानकारी मिली थी। उसके बाद सुरक्षा बलों ने जिले के गोपालपोरा में घेराबंदी कर दो आतंकवादियों को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन इन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दोनों आतंकवादी मारे गये। घटनास्थल से दो हथियार मिले हैं। आतंकवादियों के खिलाफ अभियान खत्म गया है। मारे गये आतंकवादियों की पहचान की जा रही है। बात दें सेना को इससे पहले मंगलवार को तब बड़ी कामयाबी मिली थी, जब उसने पुलवामा में लश्कर के कश्मीर चीफ अबु दुजाना को ढेर कर दिया था।
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गुरुवार तड़के सुबह कश्मीर के शोपियां में सेना के काफिले पर आतंकियों ने हमला कर दिया। इस हमले में एक मेजर और एक जवान शहीद हो गए। वहींं, एक जवान के घायल होने की खबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि हमले के बाद सभी आतंकी फरार हो गए। फिलहाल सेना इनकी तलाश कर रही है। बता दें कि तीन आतंकवादियों ने सेना के काफिले पर फायरिंग की। इसमें एक मेजर और दो जवान घायल हो गए। गायल अवस्था में इन जवानों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन मेजर और एक जवान की मौत हो गई। एक जवान का अभी भी इलाज चल रहा है। मेजर का नाम कमलेश पांडे है। ये बासठ राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, आतंकियों ने आर्मी के काफिले पर हमला तब किया जब पांडे अपनी टीम के साथ सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। जानकारी मिलने के बाद पांडे एक गांव की तरफ बढ़े, तभी इन आतंकियों ने हैवी फायरिंग शुरू कर दी। उधर, साउथ कश्मीर के कुलगाम में दो आतंकियों के मारे जाने की खबर है। डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि सिक्युरिटी फोर्सेस को जिले में आतंकवादी के बारे में जानकारी मिली थी। उसके बाद सुरक्षा बलों ने जिले के गोपालपोरा में घेराबंदी कर दो आतंकवादियों को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन इन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दोनों आतंकवादी मारे गये। घटनास्थल से दो हथियार मिले हैं। आतंकवादियों के खिलाफ अभियान खत्म गया है। मारे गये आतंकवादियों की पहचान की जा रही है। बात दें सेना को इससे पहले मंगलवार को तब बड़ी कामयाबी मिली थी, जब उसने पुलवामा में लश्कर के कश्मीर चीफ अबु दुजाना को ढेर कर दिया था।
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माँ का हर बार का रोना... ऐसे आने का क्या मतलब है? सुबह आती है और शाम को निकल जाती है। थोड़ा सा रूक जा, आधे घंटे में खाना बन जाता है। शाम का खाना खाकर चले जाना।
मैंने घड़ी की तरफ देखा, माँ को झिड़का - माँ पाँच बजे कोई खाने का समय होता है क्या?
माँ ने फिर कहा - बस घोड़े पर सवार होकर आते हो, ठीक से बात तक नहीं हो पाती, एक समय के खाने में क्या-क्या तेरी पसंद का खिला सकती हूँ। फिर तू हर बात में तो मना-मना करती रहती है।
पापा की आँखें बरजती है, ऐसे मानो मिलने तो आ जाती है। लेकिन माँ की आँसुओं से धुँधलाई आँखें ये बरजना देख ही नहीं पाती है। आँसू तो यहाँ भी आ जाते हैं। अबीर अधीर होने लगे हैं और पापा भी... अबीर की अधीरता मेरी आँखों में आ पहुँचे आँसुओं को लेकर है तो पापा की समय को लेकर.... हमेशा सेफ साइड चलते हैं। बारिश का समय है, जल्दी निकल जाओ तो अच्छा है। माँ पैक करती जा रही है, लंगडा आम, देसी आम का रस, भुट्टे का हलवा, अबीर के लिए रबड़ी, नया बना अचार और मैं कह रही हूँ, इतना खाने का समय ही नहीं है। शेड्यूल इतना फिक्स है कि कहीं अलग से कुछ जुड़ नहीं पाता है। दादी कहती हैं - बेटा मिठाई तो खाने के साथ भी खा सकते हो दोनों टाइम खाना खाती है या नहीं... औऱ नया-नया अचार को बहन-बेटी को खिलाए बिना क्या गले से उतरे... ?
अब उनसे कैसे कहें कि मिठाई खाना कम कर दिया है। बैठे-बैठे का काम और उस पर मिठाई.... मोटे हो जाएँगें सो तो है ही, लेकिन बीमारी-सीमारी का भी तो डर...!
माँ हिदायत दे रही है - घर पहुँचते ही अचार को छोड़कर सब कुछ फ्रिज में रख देना, देख कुछ खराब नहीं हो जाए।
पापा अब चिढ़ने लगे हैं, बस.... बस बहुत हो गया। चलो अब जाओ... देर करने से रात हो जाएगी। बारिश के दिन है और समय कैसा तो खराब चल रहा है!
माँ से गले मिली तो दादी ने दोनों को बाँहों में भर लिया। तुझे खुश देखकर मेरा जनम सार्थक हो गया। पापा और अबीर इस असहज स्थिति से बचने के लिए पहले ही गाड़ी के पास पहुँच गए थे।
आषाढ़ खत्म होने को है। दो-तीन दौर बारिश के हो चुके हैं तो हर जगह हरियाली नजर आ रही है। जगह-जगह धरती पर हरी घास उग आई है। पेड़-पौधे भी धुले-धुले चमक रहे हैं। बादल छाए हुए हैं, और शाम गहरी हो रही है। हम सफर में है, न तो माँ का घर साथ है और न ही अपना घर... दोनों ही घर के सिरे छूटे हुए हैं, ठेठ वर्तमान। माँ के घर की गर्माहट, बचपना और भावुकता से बाहर आ गई और अपने घर के अहसास से अभी बहुत दूर हूँ। गोकुल काका ने हाथ बढ़ाकर म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया। गाना तैरने लगा - ये मौसम आया है... कितने सालों में... आजा खो जाए ख्वाबों-खयालों में.... . । कहाँ हूँ, क्या हूँ, कहाँ जा रही हूँ, क्यों जा रही हूँ? जैसे सवालों से बहुत-बहुत दूर.... . । शहर की सीमा से बाहर हुए तो अबीर कुछ सहज हुए... अभी तक हम दोनों के बीच मेरा पर्स पड़ा हुआ था, अब अबीर ने उसे उठा कर पीछे रख दिया और थोड़ा पास सरक आए.... शायद शहर का भी लिहाज पाल रहे थे, मुझे हँसी आ गई, लेकिन अबीर का ध्यान नहीं गया। हाथ पर हाथ रखा - खुश.... ?
आँसू छलक आए, जवाब नहीं निकला, सिर हिला दिया। सीधे आँखों में उतर आए।
मुझे सहज करने की गरज से उन्हें हाथ को थोड़ा सहलाया.... और फिर बाहर देखने लगे.... थोड़ी देर में बड़ी-बड़ी बूँदें गिरने लगी.... अबीर ने अपना हाथ बाहर कर कुछ बूँदें हथेली पर ली और मेरी ओर उछाल दी। मैंने भी ऐसा ही किया... दोनों ही खिलखिला पड़े.... गाड़ी चलाते हुए गोकुल काका को भी हँसी आ गई। आधा रास्ता पार कर चुके थे।
एकाएक यूँ लगा कि ये सफर यूँ ही चलता रहे.... क्यों जरूरी है दुनिया का बीच में आ जाना.... . ? अंदर-बाहर जादू-सा फैला हुआ है, बाहर प्रकृति जादू कर रही है और अंदर अबीर.... । गोकुल काका के होने का लिहाज है, फिर भी बार-बार उँगलियों से सिहरा रहे हैं। आश्चर्य है, अभी कुछ भी याद नहीं आ रहा है। अबीर को कल से जल्दी निकलना होगा, अम्मा तो कल डॉक्टर को दिखाना है, और मुझे कल से नया चैप्टर पढ़ाना है, जिसे इससे पहले मैंने कभी नहीं पढ़ा और घर पर थी तो बहुत चिंतित थी, यहाँ याद करके भी उस चिंता का अंश तक नहीं पकड़ पा रही हूँ। रिमझिम बारिश अब भी हो रही थी। गोकुल काका चाय पिएँगे.... - अबीर के बोलने से मैं लौट कर आई।
और पकोड़े भी.... - मैं शरारत से मुस्कुराई।
यहाँ मिलेंगे तो.... - अबीर ने बाहर देखते हुए ही कहा।
नहीं मिलेंगे तो भी....
अबकी अबीर ने चौंक कर देखा.... क्यों क्या मेरी इतनी-सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते? - मैंने मान दिखाया।
वो मुस्कुराए, जो हुक्म रानी साहिबा... मैं खिलखिलाकर हँस पड़ी।
गोकुल काका ने एक तरफ कर गाड़ी खड़ी की और पूछा - मैं चाय यहीं ले आऊँ भैयाजी? बाहर बारिश हो रही है।
तो क्या हुआ... गल थोड़े ही जाएँगें, चलेंगे.... - अबीर ने कहा।
उस छोटी-सी गुमटी में इक्का-दुक्का लोग ही बैठे थे। लोहे की टेबलों और पत्थर की पट्टी से कुर्सी का काम लिया जा रहा है। मैं जाकर पट्टी पर बैठ गई.... तेल गर्म हो रहा था, अबीर ने जाकर पूछा - पकोड़े हैं क्या?
सामने खड़े एक मध्यवय के पुरुष ने कहा - नहीं है जी, अभी तो आलूबड़े तैयार हो रहे हैं।
अबीर ने कहा- बस इसी में थोड़ा-सा मसाला और प्याज डालकर पकोड़े बनाओ भैया।
मैं तब तक अबीर के पास जाकर खड़ी हो गई। - नहीं, आलूबड़े ही खाएँगे।
दुकानदार ने कहा - अभी बन जाते हैं जी पकोड़े.... क्या देर लगती है। अबीर ने भी हाँ में हाँ मिलाई।
ऊँ हू.... आलूबड़े ही खाने हैं। - मैंने ठुनकते हुए कहा। अबीर ने फिर चौंक कर मेरी तरफ देखा... अजीब हो, अभी तो पकोड़ों की फरमाई कर रही थीं और अब.... ।
अरे यार मुझे यदि आलूबड़े ही खाने हो तो.... . - इस बार थोड़ी बनावटी चिढ़ दिखाई।
ओके.... - अबीर ने हथियार डाल दिए।
लहसन डले गर्मागर्म आलूबड़े और अदरक वाली गर्म चाय.... दुकान के रेडियो पर बजता गाना - बैरिया वे.... ओ... ओ किया क्या कुसूर मैंने तेरा वे.... . , बारिश.... . ओ गॉड.... बस इसी तरह सफर में जीवन कट जाए.... सपना, रोमांस.... सफर.... . । निकलने लगे तो चिप्स का बड़ा सा पैकेट लाकर अबीर ने मेरे हाथ में थमाया.... आँखों से बहुत-सारा कुछ उमड़ा.... अबीर ने उसे अपनी आँखों से थाम लिया। बारिश थोड़ी तेज हो गई। गोकुल काका भागकर गाड़ी की तरफ गए और छाता लेकर आए। मुझे थोड़ी शर्म आई... अरे, इतनी बारिश नहीं हो रही है काका, पहुँच जाते। अबीर ने छाता खोलकर मुझे थमाया और खुद दौड़कर गाड़ी में जाकर बैठ गए।
मौसम कैसा तो साँवला-सुरमई हो रहा था, कोई पागल कैसे नहीं हो जाए.... फिर से गाना - मौसम-मौसम, लवली मौसम, कसक अनजानी ये मद्धम-मद्धम, चलो घुल जाए मौसम में हम.... हाँ... इसी मौसम में घुल जाए ये सफर.... ये सफर.... बस चलता रहे.... नहीं तो हम गुम हो जाएँ। ना जाने कहाँ से फिर आँसू निकल पड़े.... . ।
धीरे से बादलों के साथ रात भी जुगलबंदी करने आ पहुँची। अँधेरा थोड़ा गहराने लगा। अपने शहर की सीमा में दाखिल हो गए। ट्रेफिक, रोशनी और जाम.... छुट्टी के दिन का उन्मुक्त माहौल। गाड़ी अब रेंग-रेंग कर चल रही थी। कुल 8 किमी के रास्ते को पार करने में पूरा आधा घंटा लग गया।
कॉलोनी में घुसे तो अँधेरा.... घर के बाहर गाड़ी रूकी तो देखकर चौंक गए.... अँधेरा घुप्प पड़ा है। अम्माँजी बाहर ही इंतजार करती मिली। पैर छुए तो बजाय आशीर्वाद देने के फट पड़ी - ई देखो, मरा इनवर्टर भी गया। दोपहर से बिजली नहीं है। कब से अँधेरे में ही बैठी है। ऊ.... शकुन भी नहीं आई।
मैंने अबीर की तरफ देखा और अबीर ने मेरी तरफ... हम दोनों बेबसी में मुस्कुराए.... सफर के साथ ही रोमांस भी खत्म हो गया.... अब तो खाँटी दुनियादारी है.... ।
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माँ का हर बार का रोना... ऐसे आने का क्या मतलब है? सुबह आती है और शाम को निकल जाती है। थोड़ा सा रूक जा, आधे घंटे में खाना बन जाता है। शाम का खाना खाकर चले जाना। मैंने घड़ी की तरफ देखा, माँ को झिड़का - माँ पाँच बजे कोई खाने का समय होता है क्या? माँ ने फिर कहा - बस घोड़े पर सवार होकर आते हो, ठीक से बात तक नहीं हो पाती, एक समय के खाने में क्या-क्या तेरी पसंद का खिला सकती हूँ। फिर तू हर बात में तो मना-मना करती रहती है। पापा की आँखें बरजती है, ऐसे मानो मिलने तो आ जाती है। लेकिन माँ की आँसुओं से धुँधलाई आँखें ये बरजना देख ही नहीं पाती है। आँसू तो यहाँ भी आ जाते हैं। अबीर अधीर होने लगे हैं और पापा भी... अबीर की अधीरता मेरी आँखों में आ पहुँचे आँसुओं को लेकर है तो पापा की समय को लेकर.... हमेशा सेफ साइड चलते हैं। बारिश का समय है, जल्दी निकल जाओ तो अच्छा है। माँ पैक करती जा रही है, लंगडा आम, देसी आम का रस, भुट्टे का हलवा, अबीर के लिए रबड़ी, नया बना अचार और मैं कह रही हूँ, इतना खाने का समय ही नहीं है। शेड्यूल इतना फिक्स है कि कहीं अलग से कुछ जुड़ नहीं पाता है। दादी कहती हैं - बेटा मिठाई तो खाने के साथ भी खा सकते हो दोनों टाइम खाना खाती है या नहीं... औऱ नया-नया अचार को बहन-बेटी को खिलाए बिना क्या गले से उतरे... ? अब उनसे कैसे कहें कि मिठाई खाना कम कर दिया है। बैठे-बैठे का काम और उस पर मिठाई.... मोटे हो जाएँगें सो तो है ही, लेकिन बीमारी-सीमारी का भी तो डर...! माँ हिदायत दे रही है - घर पहुँचते ही अचार को छोड़कर सब कुछ फ्रिज में रख देना, देख कुछ खराब नहीं हो जाए। पापा अब चिढ़ने लगे हैं, बस.... बस बहुत हो गया। चलो अब जाओ... देर करने से रात हो जाएगी। बारिश के दिन है और समय कैसा तो खराब चल रहा है! माँ से गले मिली तो दादी ने दोनों को बाँहों में भर लिया। तुझे खुश देखकर मेरा जनम सार्थक हो गया। पापा और अबीर इस असहज स्थिति से बचने के लिए पहले ही गाड़ी के पास पहुँच गए थे। आषाढ़ खत्म होने को है। दो-तीन दौर बारिश के हो चुके हैं तो हर जगह हरियाली नजर आ रही है। जगह-जगह धरती पर हरी घास उग आई है। पेड़-पौधे भी धुले-धुले चमक रहे हैं। बादल छाए हुए हैं, और शाम गहरी हो रही है। हम सफर में है, न तो माँ का घर साथ है और न ही अपना घर... दोनों ही घर के सिरे छूटे हुए हैं, ठेठ वर्तमान। माँ के घर की गर्माहट, बचपना और भावुकता से बाहर आ गई और अपने घर के अहसास से अभी बहुत दूर हूँ। गोकुल काका ने हाथ बढ़ाकर म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया। गाना तैरने लगा - ये मौसम आया है... कितने सालों में... आजा खो जाए ख्वाबों-खयालों में.... . । कहाँ हूँ, क्या हूँ, कहाँ जा रही हूँ, क्यों जा रही हूँ? जैसे सवालों से बहुत-बहुत दूर.... . । शहर की सीमा से बाहर हुए तो अबीर कुछ सहज हुए... अभी तक हम दोनों के बीच मेरा पर्स पड़ा हुआ था, अब अबीर ने उसे उठा कर पीछे रख दिया और थोड़ा पास सरक आए.... शायद शहर का भी लिहाज पाल रहे थे, मुझे हँसी आ गई, लेकिन अबीर का ध्यान नहीं गया। हाथ पर हाथ रखा - खुश.... ? आँसू छलक आए, जवाब नहीं निकला, सिर हिला दिया। सीधे आँखों में उतर आए। मुझे सहज करने की गरज से उन्हें हाथ को थोड़ा सहलाया.... और फिर बाहर देखने लगे.... थोड़ी देर में बड़ी-बड़ी बूँदें गिरने लगी.... अबीर ने अपना हाथ बाहर कर कुछ बूँदें हथेली पर ली और मेरी ओर उछाल दी। मैंने भी ऐसा ही किया... दोनों ही खिलखिला पड़े.... गाड़ी चलाते हुए गोकुल काका को भी हँसी आ गई। आधा रास्ता पार कर चुके थे। एकाएक यूँ लगा कि ये सफर यूँ ही चलता रहे.... क्यों जरूरी है दुनिया का बीच में आ जाना.... . ? अंदर-बाहर जादू-सा फैला हुआ है, बाहर प्रकृति जादू कर रही है और अंदर अबीर.... । गोकुल काका के होने का लिहाज है, फिर भी बार-बार उँगलियों से सिहरा रहे हैं। आश्चर्य है, अभी कुछ भी याद नहीं आ रहा है। अबीर को कल से जल्दी निकलना होगा, अम्मा तो कल डॉक्टर को दिखाना है, और मुझे कल से नया चैप्टर पढ़ाना है, जिसे इससे पहले मैंने कभी नहीं पढ़ा और घर पर थी तो बहुत चिंतित थी, यहाँ याद करके भी उस चिंता का अंश तक नहीं पकड़ पा रही हूँ। रिमझिम बारिश अब भी हो रही थी। गोकुल काका चाय पिएँगे.... - अबीर के बोलने से मैं लौट कर आई। और पकोड़े भी.... - मैं शरारत से मुस्कुराई। यहाँ मिलेंगे तो.... - अबीर ने बाहर देखते हुए ही कहा। नहीं मिलेंगे तो भी.... अबकी अबीर ने चौंक कर देखा.... क्यों क्या मेरी इतनी-सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते? - मैंने मान दिखाया। वो मुस्कुराए, जो हुक्म रानी साहिबा... मैं खिलखिलाकर हँस पड़ी। गोकुल काका ने एक तरफ कर गाड़ी खड़ी की और पूछा - मैं चाय यहीं ले आऊँ भैयाजी? बाहर बारिश हो रही है। तो क्या हुआ... गल थोड़े ही जाएँगें, चलेंगे.... - अबीर ने कहा। उस छोटी-सी गुमटी में इक्का-दुक्का लोग ही बैठे थे। लोहे की टेबलों और पत्थर की पट्टी से कुर्सी का काम लिया जा रहा है। मैं जाकर पट्टी पर बैठ गई.... तेल गर्म हो रहा था, अबीर ने जाकर पूछा - पकोड़े हैं क्या? सामने खड़े एक मध्यवय के पुरुष ने कहा - नहीं है जी, अभी तो आलूबड़े तैयार हो रहे हैं। अबीर ने कहा- बस इसी में थोड़ा-सा मसाला और प्याज डालकर पकोड़े बनाओ भैया। मैं तब तक अबीर के पास जाकर खड़ी हो गई। - नहीं, आलूबड़े ही खाएँगे। दुकानदार ने कहा - अभी बन जाते हैं जी पकोड़े.... क्या देर लगती है। अबीर ने भी हाँ में हाँ मिलाई। ऊँ हू.... आलूबड़े ही खाने हैं। - मैंने ठुनकते हुए कहा। अबीर ने फिर चौंक कर मेरी तरफ देखा... अजीब हो, अभी तो पकोड़ों की फरमाई कर रही थीं और अब.... । अरे यार मुझे यदि आलूबड़े ही खाने हो तो.... . - इस बार थोड़ी बनावटी चिढ़ दिखाई। ओके.... - अबीर ने हथियार डाल दिए। लहसन डले गर्मागर्म आलूबड़े और अदरक वाली गर्म चाय.... दुकान के रेडियो पर बजता गाना - बैरिया वे.... ओ... ओ किया क्या कुसूर मैंने तेरा वे.... . , बारिश.... . ओ गॉड.... बस इसी तरह सफर में जीवन कट जाए.... सपना, रोमांस.... सफर.... . । निकलने लगे तो चिप्स का बड़ा सा पैकेट लाकर अबीर ने मेरे हाथ में थमाया.... आँखों से बहुत-सारा कुछ उमड़ा.... अबीर ने उसे अपनी आँखों से थाम लिया। बारिश थोड़ी तेज हो गई। गोकुल काका भागकर गाड़ी की तरफ गए और छाता लेकर आए। मुझे थोड़ी शर्म आई... अरे, इतनी बारिश नहीं हो रही है काका, पहुँच जाते। अबीर ने छाता खोलकर मुझे थमाया और खुद दौड़कर गाड़ी में जाकर बैठ गए। मौसम कैसा तो साँवला-सुरमई हो रहा था, कोई पागल कैसे नहीं हो जाए.... फिर से गाना - मौसम-मौसम, लवली मौसम, कसक अनजानी ये मद्धम-मद्धम, चलो घुल जाए मौसम में हम.... हाँ... इसी मौसम में घुल जाए ये सफर.... ये सफर.... बस चलता रहे.... नहीं तो हम गुम हो जाएँ। ना जाने कहाँ से फिर आँसू निकल पड़े.... . । धीरे से बादलों के साथ रात भी जुगलबंदी करने आ पहुँची। अँधेरा थोड़ा गहराने लगा। अपने शहर की सीमा में दाखिल हो गए। ट्रेफिक, रोशनी और जाम.... छुट्टी के दिन का उन्मुक्त माहौल। गाड़ी अब रेंग-रेंग कर चल रही थी। कुल आठ किमी के रास्ते को पार करने में पूरा आधा घंटा लग गया। कॉलोनी में घुसे तो अँधेरा.... घर के बाहर गाड़ी रूकी तो देखकर चौंक गए.... अँधेरा घुप्प पड़ा है। अम्माँजी बाहर ही इंतजार करती मिली। पैर छुए तो बजाय आशीर्वाद देने के फट पड़ी - ई देखो, मरा इनवर्टर भी गया। दोपहर से बिजली नहीं है। कब से अँधेरे में ही बैठी है। ऊ.... शकुन भी नहीं आई। मैंने अबीर की तरफ देखा और अबीर ने मेरी तरफ... हम दोनों बेबसी में मुस्कुराए.... सफर के साथ ही रोमांस भी खत्म हो गया.... अब तो खाँटी दुनियादारी है.... ।
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Esha Gupta Hot Photos: बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा ईशा गुप्ता की लेटेस्ट तस्वीरों ने इंटरनेट पर कोहराम मचा रखा है. अभिनेत्री ने अपनी एक से बढ़कर एक हॉट और सेक्सी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की है जिसे देखकर हर किसी के पसीने छुट गए हैं. 36 साल की उम्र में भी ईशा अपने सेक्सी पर्सनालिटी से सभी का मन मोह रही हैं और उनका दिल जीत रही हैं.
ईशा ने हाल ही में इंटरनेट पर अपनी बोल्ड फोटोज पोस्ट की थी जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया था और अब इंटरनेट पर उन्होंने अपनी बेहद ग्लैमरस तस्वीरों को साझा किया है जिसमें उनका अंदाज देखकर हर कोई उनका दिवाना हो चला है. ईशा ने सेक्सी ब्लैक गाउन पहनकर अपना हॉट फोटोशूट कराया है जिसकी फोटोज सभी का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.
ईशा ने हाल ही में प्रकाश झा की सीरीज 'आश्राम 3' में अपने बोल्ड अंदाज से सभी को हैरान कर दिया है. शो में बॉबी देओल संग उनका एक इरोटिक सॉन्ग है जो हाल ही में इंटरनेट पर काफी चर्चा में था. सोशल मीडिया पर भी ईशा काफी सक्रिय रहती हैं और अपने चाहनेवालों को एंटरटेन करती रहती हैं.
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Esha Gupta Hot Photos: बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा ईशा गुप्ता की लेटेस्ट तस्वीरों ने इंटरनेट पर कोहराम मचा रखा है. अभिनेत्री ने अपनी एक से बढ़कर एक हॉट और सेक्सी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की है जिसे देखकर हर किसी के पसीने छुट गए हैं. छत्तीस साल की उम्र में भी ईशा अपने सेक्सी पर्सनालिटी से सभी का मन मोह रही हैं और उनका दिल जीत रही हैं. ईशा ने हाल ही में इंटरनेट पर अपनी बोल्ड फोटोज पोस्ट की थी जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया था और अब इंटरनेट पर उन्होंने अपनी बेहद ग्लैमरस तस्वीरों को साझा किया है जिसमें उनका अंदाज देखकर हर कोई उनका दिवाना हो चला है. ईशा ने सेक्सी ब्लैक गाउन पहनकर अपना हॉट फोटोशूट कराया है जिसकी फोटोज सभी का ध्यान आकर्षित कर रही हैं. ईशा ने हाल ही में प्रकाश झा की सीरीज 'आश्राम तीन' में अपने बोल्ड अंदाज से सभी को हैरान कर दिया है. शो में बॉबी देओल संग उनका एक इरोटिक सॉन्ग है जो हाल ही में इंटरनेट पर काफी चर्चा में था. सोशल मीडिया पर भी ईशा काफी सक्रिय रहती हैं और अपने चाहनेवालों को एंटरटेन करती रहती हैं.
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नई दुनिया ज्वाइन किया : लड़ाई जारी रखने का ऐलान : पटना की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा ने आखिरकार आखिरी सहारा प्रणाम बोल ही दिया। उन्होंने सहारा समूह से अपना जुड़ाव खत्म करने का ऐलान कर दिया है। वे राष्ट्रीय सहारा, पटना में कार्यरत थीं। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रबंधन को भेज दिया है। उनका सहारा के मैनेजर यादवेश से विवाद हो गया था। उन्होंने यादवेश पर अभद्रता करने का आरोप लगाया था और इसकी शिकायत निवेदिता ने कई जगहों-मंचों पर की। उधर, निवेदिता पर यादवेश ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पहले सस्पेंड कराया और बाद में प्रबंधन के जरिए तबादला करा दिया। निवेदिता को राष्ट्रीय सहारा, देहरादून जाने के लिए कह दिया गया। इसे एक और अन्याय बताते हुए निवेदिता ने देहरादून जाने से इनकार कर दिया। उधर, सहारा प्रबंधन निवेदिता के मामले पर जांच कराने की बात कहता रहा लेकिन करीब नौ महीने के इंतजार के बाद जब निवेदिता को कोई नतीजा निकलता नहीं दिखा तो उन्होंने सहारा को बाय बोल देने का निर्णय ले लिया।
[caption id="attachment_14937" align="alignright"]निवेदिता झा[/caption]राष्ट्रीय सहारा, पटना की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा का निलंबन सहारा ग्रुप को वापस लेना पड़ा है। निवेदिता ने 18 मई को फिर से पटना में राष्ट्रीय सहारा के आफिस में ज्वाइन कर लिया लेकिन अगले ही दिन प्रबंधन ने उनका तबादला राष्ट्रीय सहारा के देहरादून आफिस कर दिया। निवेदिता ने तबादले को बदले की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने प्रबंधन को अपनी असहमति से वाकिफ करा दिया है। साथ ही, देहरादून जाने से भी इनकार कर दिया। भड़ास4मीडिया से बातचीत में निवेदिता झा ने बताया कि उनके साथ प्रबंधन के लोगों ने अभद्रता की और बाद में अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर निलंबन की जो कार्रवाई की, उसके खिलाफ उन्होंने महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया।
राष्ट्रीय सहारा, पटना में हड़कंप मचा हुआ है। आफिस की लड़ाई सड़क पर पहुंचने वाली है। कुछ महीनों पहले राष्ट्रीय सहारा, पटना यूनिट के हेड बनाए गए यादवेश के खिलाफ इसी संस्थान की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा जंग का ऐलान कर चुकी हैं। निवेदिता ने अभद्रता का आरोप लगाया है। यादवेश ने अनुशासनहीनता का आरोप जड़ा है। यादवेश की रिपोर्ट पर सहारा प्रबंधन ने निवेदिता को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि आफिस आने-जाने के दौरान रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ जाएगा, यह किसी को अंदेशा नहीं था। घटनाक्रम के मुताबिक राष्ट्रीय सहारा, पटना के एचआर विभाग की तरफ से निवेदिता को आफिस आने-जाने के दौरान रजिस्टर पर हस्ताक्षर न करने के लिए पिछले दिनों नोटिस जारी किया गया था।
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नई दुनिया ज्वाइन किया : लड़ाई जारी रखने का ऐलान : पटना की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा ने आखिरकार आखिरी सहारा प्रणाम बोल ही दिया। उन्होंने सहारा समूह से अपना जुड़ाव खत्म करने का ऐलान कर दिया है। वे राष्ट्रीय सहारा, पटना में कार्यरत थीं। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रबंधन को भेज दिया है। उनका सहारा के मैनेजर यादवेश से विवाद हो गया था। उन्होंने यादवेश पर अभद्रता करने का आरोप लगाया था और इसकी शिकायत निवेदिता ने कई जगहों-मंचों पर की। उधर, निवेदिता पर यादवेश ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पहले सस्पेंड कराया और बाद में प्रबंधन के जरिए तबादला करा दिया। निवेदिता को राष्ट्रीय सहारा, देहरादून जाने के लिए कह दिया गया। इसे एक और अन्याय बताते हुए निवेदिता ने देहरादून जाने से इनकार कर दिया। उधर, सहारा प्रबंधन निवेदिता के मामले पर जांच कराने की बात कहता रहा लेकिन करीब नौ महीने के इंतजार के बाद जब निवेदिता को कोई नतीजा निकलता नहीं दिखा तो उन्होंने सहारा को बाय बोल देने का निर्णय ले लिया। [caption id="attachment_चौदह हज़ार नौ सौ सैंतीस" align="alignright"]निवेदिता झा[/caption]राष्ट्रीय सहारा, पटना की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा का निलंबन सहारा ग्रुप को वापस लेना पड़ा है। निवेदिता ने अट्ठारह मई को फिर से पटना में राष्ट्रीय सहारा के आफिस में ज्वाइन कर लिया लेकिन अगले ही दिन प्रबंधन ने उनका तबादला राष्ट्रीय सहारा के देहरादून आफिस कर दिया। निवेदिता ने तबादले को बदले की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने प्रबंधन को अपनी असहमति से वाकिफ करा दिया है। साथ ही, देहरादून जाने से भी इनकार कर दिया। भड़ासचारमीडिया से बातचीत में निवेदिता झा ने बताया कि उनके साथ प्रबंधन के लोगों ने अभद्रता की और बाद में अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर निलंबन की जो कार्रवाई की, उसके खिलाफ उन्होंने महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। राष्ट्रीय सहारा, पटना में हड़कंप मचा हुआ है। आफिस की लड़ाई सड़क पर पहुंचने वाली है। कुछ महीनों पहले राष्ट्रीय सहारा, पटना यूनिट के हेड बनाए गए यादवेश के खिलाफ इसी संस्थान की वरिष्ठ पत्रकार निवेदिता झा जंग का ऐलान कर चुकी हैं। निवेदिता ने अभद्रता का आरोप लगाया है। यादवेश ने अनुशासनहीनता का आरोप जड़ा है। यादवेश की रिपोर्ट पर सहारा प्रबंधन ने निवेदिता को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि आफिस आने-जाने के दौरान रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ जाएगा, यह किसी को अंदेशा नहीं था। घटनाक्रम के मुताबिक राष्ट्रीय सहारा, पटना के एचआर विभाग की तरफ से निवेदिता को आफिस आने-जाने के दौरान रजिस्टर पर हस्ताक्षर न करने के लिए पिछले दिनों नोटिस जारी किया गया था।
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को नहीं मानते (चार्वाक के अनुयायी) गोर जो मानव को भौतिक शरीर मात्र ही मानते हैं उनके लिये तो क्षणिक इन्द्रिय सुस ओर ऐहिक भोग विलास के सिवाय जीवन का और उद्देश्य हो ही क्या सकता है ? इसलिये उनका तो यही सिद्धान्त है कि "यावज्जोवेत्सुख जोवेत्" - जब तक जीवे सुख रो जीवे । मुग्न अपनी सभी नैसर्गिक इच्छाओ के पूरी होने पर और इन्द्रियों के विषयों के भोग करने पर ही प्राप्त हो सकता है। मथुर शब्दो के श्रवण, कोमल वस्तुओं के स्पर्श, सुन्दर रूपो के देखने, स्वादिष्ट वस्तुओं के खाने, और सुगन्वित पदार्थों के सूंघने और और सुन्दर स्त्रियों और पुरुषो के सहवास, समाज में ऊँचे पदो की प्राप्ति, और दूसरों के ऊपर प्रभुत्व आदि से प्राप्त होने वाले जो ससार के सुस हैं वे ही जोवन का उद्देश्य है । उनको जिस प्रकार भी प्राप्त किया जा सके वही आचार और व्यवहार उचित आचरण है। मसार में अधिकाश मनुष्य इस प्रकार के सुखो को निरन्तर प्राप्त करते रहना ही जीवन का उद्देश्य समझते आये हैं । इस उद्देश्य का नाम नैतिक ग्रथो में "काम" है। काम ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ या सब श्रेष्ठ मूल्य (Value ) है। इसको बहुत लोग मानते माये हैं और आजकल तो, चाहे कोई विचार क्षेत्र में काम को परम पुरपार्थ माने या न माने, व्यवहार और जीवन में तो प्रायः सभी काम को ही परम पुरुषार्थ समझते हैं। आधुनिक सभ्यता और मस्कृति तो काम-प्रवान ही है। मासारिक सुख पाने के लिये ही सब लोग जीवन पर्यन्त प्रयत्नशील रहते हैं। आजकल के जितने वैज्ञानिक माविष्कार हैं वे सब मानव जीवन को अधिक से अधिक सुखी और भोगी बनाने के लिये हैं। संस्कृति का अर्थ ही मानव की वे क्रियायें हैं जो उसको ऐन्द्रिय विषयो द्वारा अधिक से अधिक सुख दें। आजकल की राज व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि सव प्राणियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन, वस्त्र और निवास स्थान प्राप्त हो सके और उनके जीवन सुरक्षित रह सकें । विषय-सुख और कामोपभोग के आधुनिक युग में अनन्त प्रकार के साधन लोगो को प्राप्त हैं और नित्य प्रति नये नये साधनो का आविष्कार होता जा रहा है और इसका भी वैज्ञानिक लोग प्रयत्न कर रहे हैं कि मनुष्यो की विषयों के भोग करने की शक्ति बढे और उनकी मायु भी अधिक हो सके, जिससे बहुत दिनो तक ययाति की नाई वे युवा रह कर विपय भोग का रस पान कर देते हुए सुखी रह सकें ।
जो लोग काम को ही जीवन का एकमात्र अर्थ (मूल्य ) या उद्देश्य समझते हैं वे कई बातो को भूल जाते हैं। एक तो यह है कि भोगो के विषयों को प्राप्त करने के लिये धन और दूसरे साधनो की, जो धन से ही प्राप्त होते हैं, आवश्यकता है। दूसरी, विपयो के भोगो के भोगने से मनुष्य की उनको भोगने की और उम भोग से सुख पाने की शक्ति का ह्रास होता है। यति भोगी थोडे ही दिनो भोग भोगने योग्य नही रहता । तीसरी यह कि विषयों के भोग से नाना रोगों की उत्पत्ति होती है और जो भोग आरम्भ में सुख देने वाले
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को नहीं मानते गोर जो मानव को भौतिक शरीर मात्र ही मानते हैं उनके लिये तो क्षणिक इन्द्रिय सुस ओर ऐहिक भोग विलास के सिवाय जीवन का और उद्देश्य हो ही क्या सकता है ? इसलिये उनका तो यही सिद्धान्त है कि "यावज्जोवेत्सुख जोवेत्" - जब तक जीवे सुख रो जीवे । मुग्न अपनी सभी नैसर्गिक इच्छाओ के पूरी होने पर और इन्द्रियों के विषयों के भोग करने पर ही प्राप्त हो सकता है। मथुर शब्दो के श्रवण, कोमल वस्तुओं के स्पर्श, सुन्दर रूपो के देखने, स्वादिष्ट वस्तुओं के खाने, और सुगन्वित पदार्थों के सूंघने और और सुन्दर स्त्रियों और पुरुषो के सहवास, समाज में ऊँचे पदो की प्राप्ति, और दूसरों के ऊपर प्रभुत्व आदि से प्राप्त होने वाले जो ससार के सुस हैं वे ही जोवन का उद्देश्य है । उनको जिस प्रकार भी प्राप्त किया जा सके वही आचार और व्यवहार उचित आचरण है। मसार में अधिकाश मनुष्य इस प्रकार के सुखो को निरन्तर प्राप्त करते रहना ही जीवन का उद्देश्य समझते आये हैं । इस उद्देश्य का नाम नैतिक ग्रथो में "काम" है। काम ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ या सब श्रेष्ठ मूल्य है। इसको बहुत लोग मानते माये हैं और आजकल तो, चाहे कोई विचार क्षेत्र में काम को परम पुरपार्थ माने या न माने, व्यवहार और जीवन में तो प्रायः सभी काम को ही परम पुरुषार्थ समझते हैं। आधुनिक सभ्यता और मस्कृति तो काम-प्रवान ही है। मासारिक सुख पाने के लिये ही सब लोग जीवन पर्यन्त प्रयत्नशील रहते हैं। आजकल के जितने वैज्ञानिक माविष्कार हैं वे सब मानव जीवन को अधिक से अधिक सुखी और भोगी बनाने के लिये हैं। संस्कृति का अर्थ ही मानव की वे क्रियायें हैं जो उसको ऐन्द्रिय विषयो द्वारा अधिक से अधिक सुख दें। आजकल की राज व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि सव प्राणियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन, वस्त्र और निवास स्थान प्राप्त हो सके और उनके जीवन सुरक्षित रह सकें । विषय-सुख और कामोपभोग के आधुनिक युग में अनन्त प्रकार के साधन लोगो को प्राप्त हैं और नित्य प्रति नये नये साधनो का आविष्कार होता जा रहा है और इसका भी वैज्ञानिक लोग प्रयत्न कर रहे हैं कि मनुष्यो की विषयों के भोग करने की शक्ति बढे और उनकी मायु भी अधिक हो सके, जिससे बहुत दिनो तक ययाति की नाई वे युवा रह कर विपय भोग का रस पान कर देते हुए सुखी रह सकें । जो लोग काम को ही जीवन का एकमात्र अर्थ या उद्देश्य समझते हैं वे कई बातो को भूल जाते हैं। एक तो यह है कि भोगो के विषयों को प्राप्त करने के लिये धन और दूसरे साधनो की, जो धन से ही प्राप्त होते हैं, आवश्यकता है। दूसरी, विपयो के भोगो के भोगने से मनुष्य की उनको भोगने की और उम भोग से सुख पाने की शक्ति का ह्रास होता है। यति भोगी थोडे ही दिनो भोग भोगने योग्य नही रहता । तीसरी यह कि विषयों के भोग से नाना रोगों की उत्पत्ति होती है और जो भोग आरम्भ में सुख देने वाले
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सिद्धाता का आगमन हूवा नाही । रुपया हजार दोय २०००) पाच सात आदम्यॉ के जाबै बै खरचि पड्या । एक साधर्मी डालूराम की उहा ही पर्याय पूरी हुई । वा सिद्धाता के रक्षिक देव डालूराम कै स्वप्नै आए थे । तानै ऐसा कह्या हे भाई तू या सिद्धाता नै लेने आया है सो एसिद्धात वा देश विषै नाही पधारैगे । उहा म्लेच्छ पुरषा का राज है । तातै जाने का नाही । बहुरि या बात के उपाय करने मै वरस च्यारि पाच लागा । पाच विश्वा अरू भी उपाय वर्ते है ।
औरगाबाद सूँ सौ कोस परै एक मलयखेडा है । तहां भी तीनूँ सिद्धात बिराजै है । सो नौरगाबाद विषै बडे-बडे लखेस्वरी, विशेष पुन्यवान, जाकी जिहाज चालै, अर जाका नवाब सहायक, ऐसा नेमीदास, अविचलराय, अमृतराय, अमीचन्द, मजलसिराय, हुकमचन्द, कौलापति आदि सौ पचास पाणीपथ्या अग्रवाले जैनी साधर्मी उहा है । ताकै मलयखेडा स सिद्धान्त मंगायबे का उपाय है । सो देखिए ए कार्य सू बने विषै कठिनता विशेष है, ताकी वार्ता जानूगे ।
और हम मेवाड़ विषै गए थे । सो उहा चीतोडगढ है । ताकै तलै तलहटी नग्र बसै है । सो उहा तलहटी विषै हवेली निर्मापरण के थि भौमि खरगतै एक भैहरा निकस्या । ता विषै सोला बिब फटिकमरिग सादृश्य महा-मनोज्ञ उपमा-रहित पद्म प्रसरण बिराजमान पद्रा सोला बरस का पुरुष के प्रकार सादृश्य परिमाण नै लीया जिनबिब नीसरे । ता विषै एक महाराज बावन के साल का प्रतिष्ठया हरया मौहरा का अतिसय सहित नीसरे । और घर जिनबिब वा उपकरण धातु के नीसरे ता विषै सुवर्ण पीतल सादृश्य दीसै ते नीसरे । सो धातु का महाराजि तौ गढ उपरि भैहरा विषै बिराजै है । उपरि किल्लादार वा जोगी रहै है । ताकै हाथि ता भैहरा की कूची है। और पाषाण के बिब तलहटी के मन्दिर विषै बिराजै है । घर सौ उहां महाजन लोगा का है । ता विषै आजैनी है। महेश्वरी है । सो उहा की आधे यात्रा हम करि आए । ताके दरसरण का लाभ की महिमा वचन अगोचर है । सो भी वार्ता थे जानूगे ।
और कोई थाकै मनविषै प्रश्न होय वा सदेह होय ताकी विशुद्धता होयगी । और गोमट्टसारादि ग्रथा की अनेक अपूर्व चर्चा जानूगे । इहा घरणा भाया कै गोमटसारादि ग्रथा का अध्ययन पाईए है । और घरी बाया के व्याकरण वा गोमटसारजी की चर्चा का ज्ञान पाईए है। विशेष धर्म बुद्धि है ताका मिलाप होयगा । सारां ही विषै भाईजी टोडरमलजी के ज्ञान का क्षयोपशम श्रलोकीक है जो गोमट्टसारादि ग्रंथां की संपूर्ण लाख श्लोक टीका बरगाई और पांच सात ग्रंथां का टीका बरणायवे का उपाय है । सो श्रायु की अधिकता हुवां बर्णगा । र धवल महाधवलादि ग्रंथां के खोलबा का उपाय कीया वा उहां दक्षिरण देस सूं पांच सात और ग्रंथ ताड़पत्रां विषै कर्णाटी लिपि मै लिख्या इहां पधारे है, ताकूं मलजी बांचे है, वाका यथार्थ व्याख्यान करै है वा करर्णाटी लिपि मै लिखिले है । इत्यादि न्याय व्याकरण गरिगत छंद अलंकार का याकै ज्ञान पाईए है । ऐसे पुरुष महंत बुद्धि का धारक ईं काल विषै होनां दुर्लभ है । तातै यां मिले सर्व सदेह दूरि होइ है। घरणी लिखबा करि कहा, श्रापरणां हेत का बांछीक पुरुष सीघ्र प्राय यासू मिलाप करो । और भी देश देश के साधर्मी भाई श्रावैगे तासू मिलाप होयगा ।
और इहा दश बारा लेखक सदैव सासते जिनवारणी लिखते है वा सोधते है । और एक ब्राह्मण पंडित महैनदार चाकर राख्या है सो बीस तीस लडके बालकन कू न्याय व्याकरण गरिगत शास्त्र पढावै है । और सौ पचास भाई वा बाया चर्चा व्याकरण का अध्ययन करै है । नित्य सौ पचास जायगा जिन पूजन होइ है । इत्यादि इहा जिन धर्म की विशेष महिमा जाननी ।
और ई नग्र विषै सात विसन का अभाव है। भावार्थ ई नग्र विषै कलाल कसाई वेश्या न पाईए है । अर जीव हिंसा की भी मनाई है । राजा का नाम माधवसिंह है । ताके राज विषै वर्त्तमान एते कुविसन दरबार की आज्ञा न पाईए है । अर जैनी लोग का समूह बसै है । दरबार के मुतसद्दी सर्व जैनी है और साहूकार लोग सर्व जैनी है । जद्यपि और भी है परि गौणता रूप है, मुख्यता रूप नाही । छह सात
दस हजार जैनी महाजना का घर पाईए है । पैसा जैनी लोगा का समूह और नग्र विषै नाही । और इहा के देश विषै सर्वत्र मुख्यपर श्रावगी लोग बसै है । तातै एह नग्र वा देश बहोत निर्मल पवित्र है । तातै धर्मात्मा पुरुष बसने का स्थान है। बतौ ए साक्षात धर्मपुरी है ।
बहुरि देखो ए प्रारणी कर्म कार्य के अथितौ समुद्र पर्यंत जाय है वा विवाहादिक के कार्य विषै भी सौ पचास कोस जाय है, अर मनमान्या द्रव्यादिक खरचै है । ताका फल तौ नर्क निगोदादि है । ता कार्य विषै तौ या जीव केसी असक्तता पाईए है, सो ए तौ वासना सर्व जीवनि के बिना सिखाई हुई स्वयमेव बरिण रही है, परतु धर्म की लगनि कोई सत्पुरुषा के ही पाईए है ।
विषय - कार्य के पोषने वाले तौ पैड - पैड विषै देखिए है, परमार्थ कार्य के उपदेशक वा रोचक महादुर्लभ बिरले ठिकार कोई काल विषै पाईए है । तातै याकी प्रापती महाभाग्य कै उदै काललब्धि के अनुसार होय है । यह मनुष्य पर्याय जावक खिनभगर ' है, ता विषै भी प्रबार के काल मै जावक अल्प बीजुरी का चमत्कारवत थिति है । ताकै विषै नफा टोटा बहुत है । एका तरफ नै तौ विषय कषाय का फल नरकादिक त ससार का दुख है । एका तरफ नै सुभ सुद्ध धर्म का फल स्वर्ग मोक्ष है । थोड़ा सा पररणामा का विशेष करि कार्य विषै एता तफावत परै है । सर्व बात विषै एह न्याय है । बीज तौ सर्व का तुछ 3 ही होइ है अर फल वाका अरपार लागे है, तातै ज्ञानी विचक्षण पुरषन के एक धर्म ही उपादेय है ।
तानसागर पर्यंत काल एकेन्द्री विषै वितीत करै है तब एक पर्याय त्रस का पाव है । सास पर्याय का पायबा दुर्लभ है तो मनुक्ष पर्याय पायबा की कहा बात । ता विषै भी उच्च कुल, पूरी आयु, इन्द्री प्रबल, निरोग शरीर, आजीवका की थिरता, सुभ क्षेत्र, सुभ काल, जिनधर्म का अनुराग, ज्ञान का विशेष क्षयोपशम, परणामा की विशुद्धता, ए अनुक्रम करि दुर्लभ सू दुर्लभ ए जीव पावै है । कैसै दुर्लभ
अतर, 3 छोटा
૨ क्षरणभगुर,
पाव है ? वा सयोग मिल्या है सो पूर्व अनादि काल का नही मिल्या होगा । जै औसा सजोग मिल्या होय तो फेरि ससार विषै क्या नै रहै ? जिनधर्म का प्रताप ऐसा नाही क साची प्रतीति आया फेरि ससार के दुख कू पावै । तातै थे बुद्धिमान हौ । जामै अपना हित सधै सो करना । धर्म के अर्थी पुरुष नै तौ थोडा सा ही उपदेश घरगा होइ परगमै है । घरणी कहवा करि कहा ।
और ई चीठी की नकल दश बीस और चीठी उतराय उहा के आसपास जहा जैनी लोग वसते होइ तहा भेजनी । ए चीठी सर्व जैनी भाया कू एकठे करि ताकै बीचि वाचरणी । ताकू याका रहस्य सर्व कू समझाय दैना । चीठी की पहोचि सितावी' पाछी लिखनी । लिख्या बिनां चीठी पहोची वा न पहोची की खबर पड़े नाही । प्रवा न की खबर नाही । मिती माह वदि ६ सवत् १८२१ का । आबा पड
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सिद्धाता का आगमन हूवा नाही । रुपया हजार दोय दो हज़ार) पाच सात आदम्यॉ के जाबै बै खरचि पड्या । एक साधर्मी डालूराम की उहा ही पर्याय पूरी हुई । वा सिद्धाता के रक्षिक देव डालूराम कै स्वप्नै आए थे । तानै ऐसा कह्या हे भाई तू या सिद्धाता नै लेने आया है सो एसिद्धात वा देश विषै नाही पधारैगे । उहा म्लेच्छ पुरषा का राज है । तातै जाने का नाही । बहुरि या बात के उपाय करने मै वरस च्यारि पाच लागा । पाच विश्वा अरू भी उपाय वर्ते है । औरगाबाद सूँ सौ कोस परै एक मलयखेडा है । तहां भी तीनूँ सिद्धात बिराजै है । सो नौरगाबाद विषै बडे-बडे लखेस्वरी, विशेष पुन्यवान, जाकी जिहाज चालै, अर जाका नवाब सहायक, ऐसा नेमीदास, अविचलराय, अमृतराय, अमीचन्द, मजलसिराय, हुकमचन्द, कौलापति आदि सौ पचास पाणीपथ्या अग्रवाले जैनी साधर्मी उहा है । ताकै मलयखेडा स सिद्धान्त मंगायबे का उपाय है । सो देखिए ए कार्य सू बने विषै कठिनता विशेष है, ताकी वार्ता जानूगे । और हम मेवाड़ विषै गए थे । सो उहा चीतोडगढ है । ताकै तलै तलहटी नग्र बसै है । सो उहा तलहटी विषै हवेली निर्मापरण के थि भौमि खरगतै एक भैहरा निकस्या । ता विषै सोला बिब फटिकमरिग सादृश्य महा-मनोज्ञ उपमा-रहित पद्म प्रसरण बिराजमान पद्रा सोला बरस का पुरुष के प्रकार सादृश्य परिमाण नै लीया जिनबिब नीसरे । ता विषै एक महाराज बावन के साल का प्रतिष्ठया हरया मौहरा का अतिसय सहित नीसरे । और घर जिनबिब वा उपकरण धातु के नीसरे ता विषै सुवर्ण पीतल सादृश्य दीसै ते नीसरे । सो धातु का महाराजि तौ गढ उपरि भैहरा विषै बिराजै है । उपरि किल्लादार वा जोगी रहै है । ताकै हाथि ता भैहरा की कूची है। और पाषाण के बिब तलहटी के मन्दिर विषै बिराजै है । घर सौ उहां महाजन लोगा का है । ता विषै आजैनी है। महेश्वरी है । सो उहा की आधे यात्रा हम करि आए । ताके दरसरण का लाभ की महिमा वचन अगोचर है । सो भी वार्ता थे जानूगे । और कोई थाकै मनविषै प्रश्न होय वा सदेह होय ताकी विशुद्धता होयगी । और गोमट्टसारादि ग्रथा की अनेक अपूर्व चर्चा जानूगे । इहा घरणा भाया कै गोमटसारादि ग्रथा का अध्ययन पाईए है । और घरी बाया के व्याकरण वा गोमटसारजी की चर्चा का ज्ञान पाईए है। विशेष धर्म बुद्धि है ताका मिलाप होयगा । सारां ही विषै भाईजी टोडरमलजी के ज्ञान का क्षयोपशम श्रलोकीक है जो गोमट्टसारादि ग्रंथां की संपूर्ण लाख श्लोक टीका बरगाई और पांच सात ग्रंथां का टीका बरणायवे का उपाय है । सो श्रायु की अधिकता हुवां बर्णगा । र धवल महाधवलादि ग्रंथां के खोलबा का उपाय कीया वा उहां दक्षिरण देस सूं पांच सात और ग्रंथ ताड़पत्रां विषै कर्णाटी लिपि मै लिख्या इहां पधारे है, ताकूं मलजी बांचे है, वाका यथार्थ व्याख्यान करै है वा करर्णाटी लिपि मै लिखिले है । इत्यादि न्याय व्याकरण गरिगत छंद अलंकार का याकै ज्ञान पाईए है । ऐसे पुरुष महंत बुद्धि का धारक ईं काल विषै होनां दुर्लभ है । तातै यां मिले सर्व सदेह दूरि होइ है। घरणी लिखबा करि कहा, श्रापरणां हेत का बांछीक पुरुष सीघ्र प्राय यासू मिलाप करो । और भी देश देश के साधर्मी भाई श्रावैगे तासू मिलाप होयगा । और इहा दश बारा लेखक सदैव सासते जिनवारणी लिखते है वा सोधते है । और एक ब्राह्मण पंडित महैनदार चाकर राख्या है सो बीस तीस लडके बालकन कू न्याय व्याकरण गरिगत शास्त्र पढावै है । और सौ पचास भाई वा बाया चर्चा व्याकरण का अध्ययन करै है । नित्य सौ पचास जायगा जिन पूजन होइ है । इत्यादि इहा जिन धर्म की विशेष महिमा जाननी । और ई नग्र विषै सात विसन का अभाव है। भावार्थ ई नग्र विषै कलाल कसाई वेश्या न पाईए है । अर जीव हिंसा की भी मनाई है । राजा का नाम माधवसिंह है । ताके राज विषै वर्त्तमान एते कुविसन दरबार की आज्ञा न पाईए है । अर जैनी लोग का समूह बसै है । दरबार के मुतसद्दी सर्व जैनी है और साहूकार लोग सर्व जैनी है । जद्यपि और भी है परि गौणता रूप है, मुख्यता रूप नाही । छह सात दस हजार जैनी महाजना का घर पाईए है । पैसा जैनी लोगा का समूह और नग्र विषै नाही । और इहा के देश विषै सर्वत्र मुख्यपर श्रावगी लोग बसै है । तातै एह नग्र वा देश बहोत निर्मल पवित्र है । तातै धर्मात्मा पुरुष बसने का स्थान है। बतौ ए साक्षात धर्मपुरी है । बहुरि देखो ए प्रारणी कर्म कार्य के अथितौ समुद्र पर्यंत जाय है वा विवाहादिक के कार्य विषै भी सौ पचास कोस जाय है, अर मनमान्या द्रव्यादिक खरचै है । ताका फल तौ नर्क निगोदादि है । ता कार्य विषै तौ या जीव केसी असक्तता पाईए है, सो ए तौ वासना सर्व जीवनि के बिना सिखाई हुई स्वयमेव बरिण रही है, परतु धर्म की लगनि कोई सत्पुरुषा के ही पाईए है । विषय - कार्य के पोषने वाले तौ पैड - पैड विषै देखिए है, परमार्थ कार्य के उपदेशक वा रोचक महादुर्लभ बिरले ठिकार कोई काल विषै पाईए है । तातै याकी प्रापती महाभाग्य कै उदै काललब्धि के अनुसार होय है । यह मनुष्य पर्याय जावक खिनभगर ' है, ता विषै भी प्रबार के काल मै जावक अल्प बीजुरी का चमत्कारवत थिति है । ताकै विषै नफा टोटा बहुत है । एका तरफ नै तौ विषय कषाय का फल नरकादिक त ससार का दुख है । एका तरफ नै सुभ सुद्ध धर्म का फल स्वर्ग मोक्ष है । थोड़ा सा पररणामा का विशेष करि कार्य विषै एता तफावत परै है । सर्व बात विषै एह न्याय है । बीज तौ सर्व का तुछ तीन ही होइ है अर फल वाका अरपार लागे है, तातै ज्ञानी विचक्षण पुरषन के एक धर्म ही उपादेय है । तानसागर पर्यंत काल एकेन्द्री विषै वितीत करै है तब एक पर्याय त्रस का पाव है । सास पर्याय का पायबा दुर्लभ है तो मनुक्ष पर्याय पायबा की कहा बात । ता विषै भी उच्च कुल, पूरी आयु, इन्द्री प्रबल, निरोग शरीर, आजीवका की थिरता, सुभ क्षेत्र, सुभ काल, जिनधर्म का अनुराग, ज्ञान का विशेष क्षयोपशम, परणामा की विशुद्धता, ए अनुक्रम करि दुर्लभ सू दुर्लभ ए जीव पावै है । कैसै दुर्लभ अतर, तीन छोटा दो क्षरणभगुर, पाव है ? वा सयोग मिल्या है सो पूर्व अनादि काल का नही मिल्या होगा । जै औसा सजोग मिल्या होय तो फेरि ससार विषै क्या नै रहै ? जिनधर्म का प्रताप ऐसा नाही क साची प्रतीति आया फेरि ससार के दुख कू पावै । तातै थे बुद्धिमान हौ । जामै अपना हित सधै सो करना । धर्म के अर्थी पुरुष नै तौ थोडा सा ही उपदेश घरगा होइ परगमै है । घरणी कहवा करि कहा । और ई चीठी की नकल दश बीस और चीठी उतराय उहा के आसपास जहा जैनी लोग वसते होइ तहा भेजनी । ए चीठी सर्व जैनी भाया कू एकठे करि ताकै बीचि वाचरणी । ताकू याका रहस्य सर्व कू समझाय दैना । चीठी की पहोचि सितावी' पाछी लिखनी । लिख्या बिनां चीठी पहोची वा न पहोची की खबर पड़े नाही । प्रवा न की खबर नाही । मिती माह वदि छः सवत् एक हज़ार आठ सौ इक्कीस का । आबा पड
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ALLAHABAD: शहर से दूर सरायममरेज एरिया में फ्राइडे को शादी के बाद लौट रही पिकअप अनियंत्रित होकर पटल गई। एक्सीडेंट इतना जबरदस्त था कि स्पॉट पर ही दूल्हे के भाई की मौत हो गई जबकि चार अन्य जख्मी हो गए। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक फूलपुर के रहने वाले शकील की शादी थी। बारात वापस फूलपुर से लौट रही थी। शकील का भाई वकील पिकअप से बारात का सामान वापस लेकर लौट रहा था। रास्ते में सरायममरेज एरिया में गाड़ी अनियंत्रित हो गई और सामने एक साइकिल वाले को टक्कर मारते हुए पेड़ से टकरा कर पलट गई। इस हादसे में साइकिल सवार दूधनाथ और प्रकाश भी जख्मी हो गए। गाड़ी में बैठे दूल्हे के भाई की मौत हो गई और अन्य दो जख्मी हो गए।
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ALLAHABAD: शहर से दूर सरायममरेज एरिया में फ्राइडे को शादी के बाद लौट रही पिकअप अनियंत्रित होकर पटल गई। एक्सीडेंट इतना जबरदस्त था कि स्पॉट पर ही दूल्हे के भाई की मौत हो गई जबकि चार अन्य जख्मी हो गए। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक फूलपुर के रहने वाले शकील की शादी थी। बारात वापस फूलपुर से लौट रही थी। शकील का भाई वकील पिकअप से बारात का सामान वापस लेकर लौट रहा था। रास्ते में सरायममरेज एरिया में गाड़ी अनियंत्रित हो गई और सामने एक साइकिल वाले को टक्कर मारते हुए पेड़ से टकरा कर पलट गई। इस हादसे में साइकिल सवार दूधनाथ और प्रकाश भी जख्मी हो गए। गाड़ी में बैठे दूल्हे के भाई की मौत हो गई और अन्य दो जख्मी हो गए।
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पटना. नीति आयोग की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल नहीं होने पर लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने गहरी आपत्ति जताई है. उन्होंने शनिवार को कहा कि नीतीश कुमार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण बैठक में शामिल नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विरोध करते-करते वह बिहार और बिहारियों का विरोध करने लगे हैं. जब चुनाव आता है तब नीतीश विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हैं. नीति आयोग की बैठक हो रही है तो उसमें जाकर नीतीश अपनी बात को तो रख सकते थे लेकिन वे इस बैठक का विरोध कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि नीति आयोग की यह एक महत्वपूर्ण बैठक है. यहां जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार और बिहारियों के लिए तमाम तरीके की सुविधाओं और व्यवस्थाओं और केंद्र सरकार और बिहार सरकार के तालमेल को लेकर प्रस्तावों को रख सकते थे. नीतीश कुमार विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हैं पर इतनी महत्वपूर्ण बैठक का बहिष्कार करना भारतीय लोकतंत्र के लिए कहीं से उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती ही यही है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष तमाम मतभेदों के बावजूद जब देश और प्रदेश की बात आती है तो एक साथ और एक मंच पर आकर चर्चा करते हैं. नीति आयोग की बैठक भी एक ऐसा ही मंच है जहां पर आप आकर चर्चा कर सकते हैं. विचार विमर्श कर सकते हैं. मतभेद होने के बावजूद प्रदेश की हित को लेकर बात रख सकते हैं. पर ऐसी बैठक का बहिष्कार करना दिखाता है कि मुख्यमंत्री सिर्फ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पूरी तरह से नीतीश के इस निर्णय की निंदा करती है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बैठक में नहीं जाकर बिहार और बिहारियों को जो कई लाभ मिल सकते थे उसे मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ा दी है.
नए संसद भवन के उद्घाटन के बहिष्कार का कई विपक्षी दलों के निर्णय को चिराग पासवान ने अनुचित करार दिया. उन्होंने बहिष्कार को नकारात्मक करार दिया. साथ ही कहा कि नए संसद भवन का निर्माण एक नए पड़ाव की ओर भारतीय राजनीति को बढ़ाने का काम कर रही है. भारत को एक नई संसद में ले जा रही है और लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी. यह मांग भाजपा या एनडीए नहीं कर रही थी बल्कि पिछले कई वर्षों से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी. उन्होंने कहा कि वे 2014 में जब पहली बार सांसद बने तब भी नए संसद के निर्माण की बातें उठी थी. उन्होंने कहा कि यहां तक कि मेरे पिताजी रामविलास पासवान जब केंद्रीय मंत्री के तौर पर यूपीए में थे तब भी नए संसद भवन निर्माण की बातें होती थी. अब इसके निर्माण के बाद विपक्ष का विरोध अनुचित है.
चिराग ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद जब बिहार विधानमंडल के विस्तारित खंड का निर्माण कराते हैं तो उसके शिलान्यास या उद्घाटन में राज्यपाल को नहीं बुलाते हैं. वहीं अब वे विरोध की राजनीति के लिए राष्ट्रपति का नाम लेकर उद्घाटन का बहिष्कार कर रहे हैं. यह सब वे सिर्फ दिखावा के लिए कर रहे हैं.
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पटना. नीति आयोग की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल नहीं होने पर लोजपा के प्रमुख चिराग पासवान ने गहरी आपत्ति जताई है. उन्होंने शनिवार को कहा कि नीतीश कुमार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण बैठक में शामिल नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विरोध करते-करते वह बिहार और बिहारियों का विरोध करने लगे हैं. जब चुनाव आता है तब नीतीश विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हैं. नीति आयोग की बैठक हो रही है तो उसमें जाकर नीतीश अपनी बात को तो रख सकते थे लेकिन वे इस बैठक का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नीति आयोग की यह एक महत्वपूर्ण बैठक है. यहां जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार और बिहारियों के लिए तमाम तरीके की सुविधाओं और व्यवस्थाओं और केंद्र सरकार और बिहार सरकार के तालमेल को लेकर प्रस्तावों को रख सकते थे. नीतीश कुमार विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हैं पर इतनी महत्वपूर्ण बैठक का बहिष्कार करना भारतीय लोकतंत्र के लिए कहीं से उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती ही यही है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष तमाम मतभेदों के बावजूद जब देश और प्रदेश की बात आती है तो एक साथ और एक मंच पर आकर चर्चा करते हैं. नीति आयोग की बैठक भी एक ऐसा ही मंच है जहां पर आप आकर चर्चा कर सकते हैं. विचार विमर्श कर सकते हैं. मतभेद होने के बावजूद प्रदेश की हित को लेकर बात रख सकते हैं. पर ऐसी बैठक का बहिष्कार करना दिखाता है कि मुख्यमंत्री सिर्फ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पूरी तरह से नीतीश के इस निर्णय की निंदा करती है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस बैठक में नहीं जाकर बिहार और बिहारियों को जो कई लाभ मिल सकते थे उसे मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ा दी है. नए संसद भवन के उद्घाटन के बहिष्कार का कई विपक्षी दलों के निर्णय को चिराग पासवान ने अनुचित करार दिया. उन्होंने बहिष्कार को नकारात्मक करार दिया. साथ ही कहा कि नए संसद भवन का निर्माण एक नए पड़ाव की ओर भारतीय राजनीति को बढ़ाने का काम कर रही है. भारत को एक नई संसद में ले जा रही है और लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी. यह मांग भाजपा या एनडीए नहीं कर रही थी बल्कि पिछले कई वर्षों से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी. उन्होंने कहा कि वे दो हज़ार चौदह में जब पहली बार सांसद बने तब भी नए संसद के निर्माण की बातें उठी थी. उन्होंने कहा कि यहां तक कि मेरे पिताजी रामविलास पासवान जब केंद्रीय मंत्री के तौर पर यूपीए में थे तब भी नए संसद भवन निर्माण की बातें होती थी. अब इसके निर्माण के बाद विपक्ष का विरोध अनुचित है. चिराग ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद जब बिहार विधानमंडल के विस्तारित खंड का निर्माण कराते हैं तो उसके शिलान्यास या उद्घाटन में राज्यपाल को नहीं बुलाते हैं. वहीं अब वे विरोध की राजनीति के लिए राष्ट्रपति का नाम लेकर उद्घाटन का बहिष्कार कर रहे हैं. यह सब वे सिर्फ दिखावा के लिए कर रहे हैं.
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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित बिकरु गांव में गुरुवार रात को आठ पुलिसवाले शहीद हो गए थे। अब इस हत्याकांड में सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूपी में अपराधियों को सत्ता का संरक्षण है। कानून व्यवस्था उनके सामने नतमस्तक है। कीमत हमारे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी व जवान चुका रहे हैं।
उन्होंने मंगलवार को ट्वीट करके कहा- देश में हत्याओं के आंकड़ें देखें तो यूपी पिछले 3 सालों से लगातार टॉप पर रहा है। हर दिन औसतन 12 हत्या के मामले आते हैं। 2016-2018 के बीच में बच्चों पर होने वाले अपराध यूपी में 24 प्रतिशत बढ़ गए। प्रियंका गांधी ने कहा है कि प्रदेश के गृह विभाग और सीएम ने इन आंकड़ों पर पर्दा डालने के अलावा किया ही क्या है? आज उसका नतीजा है कि यूपी में अपराधी बेलगाम हैं। उनको सत्ता का संरक्षण है।
प्रियंका ने कहा कि कानपुर कांड में शहीद हुए पुलिस अधिकारी देवेन्द्र मिश्र का वरिष्ठ अधिकारियों को मार्च में लिखा गया पत्र इस नृशंस वारदात का अलार्म था। आज कई खबरें आ रही हैं कि वो पत्र गायब है। ये सारे तथ्य यूपी के गृह विभाग की कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्न उठाते हैं।
कानपुर के बिकरु गांव में 8 पुलिसवालों की हत्या के मामले में 3 दिन बाद बड़ा खुलासा हुआ है। गैंगस्टर विकास दुबे और उसकी गैंग से मुठभेड़ में जान गंवाने वाले बिल्हौर डीएसपी देवेंद्र मिश्रा का एक लेटर सामने आया है, जो करीब तीन माह पहले कानपुर के तब के एसएसपी अनंत देव को लिखा गया था। इस चिट्ठी में मिश्रा ने चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के बीच मिलीभगत की आशंका जताई थी। डीएसपी ने यह भी चेताया था कि अगर जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी घटना हो सकती है।
कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने एसएसपी दफ्तर से सभी लेटर तलब किए हैं। कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया- सीओ की ओर से एसएसपी को जो लेटर लिखने की बात सामने आ रही है, वह एसएसपी से लेकर सीओ कार्यालय में नहीं मिल रहा है। उसकी न तो कोई डिस्पैच होने की तारीख है और न ही रिसीविंग की।
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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित बिकरु गांव में गुरुवार रात को आठ पुलिसवाले शहीद हो गए थे। अब इस हत्याकांड में सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूपी में अपराधियों को सत्ता का संरक्षण है। कानून व्यवस्था उनके सामने नतमस्तक है। कीमत हमारे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी व जवान चुका रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को ट्वीट करके कहा- देश में हत्याओं के आंकड़ें देखें तो यूपी पिछले तीन सालों से लगातार टॉप पर रहा है। हर दिन औसतन बारह हत्या के मामले आते हैं। दो हज़ार सोलह-दो हज़ार अट्ठारह के बीच में बच्चों पर होने वाले अपराध यूपी में चौबीस प्रतिशत बढ़ गए। प्रियंका गांधी ने कहा है कि प्रदेश के गृह विभाग और सीएम ने इन आंकड़ों पर पर्दा डालने के अलावा किया ही क्या है? आज उसका नतीजा है कि यूपी में अपराधी बेलगाम हैं। उनको सत्ता का संरक्षण है। प्रियंका ने कहा कि कानपुर कांड में शहीद हुए पुलिस अधिकारी देवेन्द्र मिश्र का वरिष्ठ अधिकारियों को मार्च में लिखा गया पत्र इस नृशंस वारदात का अलार्म था। आज कई खबरें आ रही हैं कि वो पत्र गायब है। ये सारे तथ्य यूपी के गृह विभाग की कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्न उठाते हैं। कानपुर के बिकरु गांव में आठ पुलिसवालों की हत्या के मामले में तीन दिन बाद बड़ा खुलासा हुआ है। गैंगस्टर विकास दुबे और उसकी गैंग से मुठभेड़ में जान गंवाने वाले बिल्हौर डीएसपी देवेंद्र मिश्रा का एक लेटर सामने आया है, जो करीब तीन माह पहले कानपुर के तब के एसएसपी अनंत देव को लिखा गया था। इस चिट्ठी में मिश्रा ने चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के बीच मिलीभगत की आशंका जताई थी। डीएसपी ने यह भी चेताया था कि अगर जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी घटना हो सकती है। कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने एसएसपी दफ्तर से सभी लेटर तलब किए हैं। कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया- सीओ की ओर से एसएसपी को जो लेटर लिखने की बात सामने आ रही है, वह एसएसपी से लेकर सीओ कार्यालय में नहीं मिल रहा है। उसकी न तो कोई डिस्पैच होने की तारीख है और न ही रिसीविंग की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पर्यटकों व स्थानीय लोगों ने नाच-गाकर व एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर नए साल का स्वागत किया। इस दौरान होटलों में देर रात तक नए साल का जश्न जारी रहा। शहर के सभी होटलों ने इस मौके पर डीजे पार्टी और लाइव बैंड का आयोजन किया था। होटलों में पर्यटकों के मनोरंजन के लिए डांस पार्टी, डाइन एंड डांस, कपल डांस व बेबी डांस हुआ। कई होटलों में गजल का कार्यक्रम भी करवाया गया। इस दौरान होटलों में न्यू ईयर केक भी काटा गया। देर रात तक होटलों में पार्टी चलती रही। शहर के साथ-साथ कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा सहित आसपास के पर्यटन स्थलों के होटलों में नववर्ष की पार्टी में पर्यटकों ने खूब मस्ती की। एचपीटीडीसी के होटलों सहित सभी प्राइवेट होटलों में इस दौरान पर्यटकों को हिमाचली व्यंजन भी परोसे गए। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अधिकारियों सहित रिज पर घूमने का लुत्फ उठाया व सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
वहीं न्यू ईयर की पूर्व संध्या व दिन के समय जहां लोग बधाइयां व जश्न मनाते नजर आए, वहीं देर रात को पुलिस ने कई शरारती तत्वों को भी खदेड़ा। कइयों को पुलिस ने इस दौरान चेतावनी भी दी। लोगों ने देर शाम तक जश्र मनाया लेकिन कुछ लोग नशे की हालत में पुलिस जवानों के साथ ही उलझ पड़े। पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों ने नाटी डालकर न्यू ईयर का जश्र मनाया। पुलिस ने लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। न्यू ईयर का जिम्मा बड़े पुलिस अधिकारियों सहित 250 जवानों को सौंपा गया। महिला पुलिस भी शाम को ड्यूटी देती नजर आईं। रिज पर इतनी भीड़ रही कि लोगों के बीच भी जमकर धक्का-मुक्की चली। हजारों के हिसाब से लोग रिज व मालरोड पर पहुंचे। लोगों को चलने की भी जगह नहीं थी। शहर को सुरक्षा की दृष्टि से 6 सैक्टरों में बांटा गया था। प्रत्येक सैक्टर में एक अधिकारी तैनात रहा। पुलिस का सबसे ज्यादा पहरा शाम के समय में रिज व मालरोड पर रहा।
रिज मैदान पर कोरोना फैलने को भी खुला न्यौता दिया गया। यहां 100 में से सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों ने मास्क पहने थे। जबकि सरकार के निर्देश थे कि भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में लोग मास्क पहनें, लेकिन सरकार के नियमों की भी लोगों ने धज्जियां उड़ाईं। यह जश्र लोगों को भारी पड़ सकता है।
क्रिसमस से न्यू ईयर तक 80 हजार से अधिक गाड़ियों की आवाजाही हुई है। ये गाड़ियां शिमला शहर में आईं व वापस गईं। 30 दिसम्बर को सोलन की तरफ से 5332 गाड़ियां प्रवेश हुईं, वहीं शिमला से सोलन तक 10037 गाड़ियां गईं। इसके अलावा 31 दिसम्बर को सुबह 8 बजे से 2 बजे तक सोलन से शिमला की ओर 4669 व शिमला से सोलन की तरफ 2410 गाड़ियां गईं। हालांकि शाम तक गाड़ियों की संख्या इससे भी ज्यादा बढ़ी।
नववर्ष के जश्र के लिए शनिवार को 70 हजार से अधिक पर्यटक शिमला पहुंचे। शिमला सहित आसपास के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों ने नए साल का जश्र मनाया। अधिकतर पर्यटक पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली से पर्यटक शिमला पहुंचे। इससे पूर्व क्रिसमस पार्टी के लिए यहां 50 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। पर्यटक शिमला के साथ-साथ नारकंडा, कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा व चायल घूमने आते हैं।
न्यू ईयर की पूर्व संध्या पर राजधानी जाम हो गई। दिन के समय तो लोगों को उतनी ज्यादा जाम से परेशानी नहीं हुई, लेकिन संध्या के समय शहर पूरी तरह से जाम हो गया। ऐसे में जाम को बहाल करने के लिए पुलिस के भी पसीने छूट गए। शहर में दिन के समय में भी गाड़ियां सुबह से ही आराम-आराम से सरकती रहीं। शाम के समय में जाम कुछ इस तरह से लग गया कि लोगों को मिनटों का सफर घंटों में तय हुआ। इस दौरान पर्यटकों सहित लोगों को दिक्कतें झेलने में मजबूर होना पड़ा।
पर्यटन केंद्र में बीते शुक्रवार को हुए हल्के हिमपात को देखने के लिए शनिवार सुबह ही भारी संख्या में सैलानी कुफरी पहुंचे। कुफरी स्थित महासु पीक की चोटी पर जमीं बर्फ में दिनभर पर्यटक मौज-मस्ती करते रहे। शनिवार को दिन भर साफ मौसम व खिली धूप के बीच पर्यटक घोड़ों की सवारी, सैल्फी व बर्फ के बीच फोटोग्राफी का आनन्द लेते रहे। दूसरी तरफ ए यूजमैंट पार्क हिपहिप हुर्रे में आईस्केटिंग को लेकर भी सैलानी काफी खुश नजर आ रहे थे।
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सैलानी राज्य के आय के स्त्रोत हैं। बाहरी राज्यों से यह यहां घूमने आते हैं। इन्हें किसी प्रकार से तंग न किया जाए। इस संबंध में जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि शिमला, मनाली, कसौली व धर्मशाला सहित पर्यटन स्थलों में ढाबे रेस्तरां को 24 घंटे खोलने के आदेश पहले ही दे दिए गए हैं।
पुलिस ने बढ़ी वोल्वों बसों को शहर में प्रवेश नहीं होना दिया। बसों को टुटीकंडी बाईपास से तारादेवी भेजा गया, वहीं कई गाड़ियां ऐसी थीं जो बिना किसी कारणों के शहर के तरफ आना चाह रही थीं, ऐसे में उन गाड़ियों को भी शहर में प्रवेश नहीं होने दिया गया।
New Year के जश्न में डूबा शिमला, रिज मैदान पर जमकर थिरके पर्यटक व स्थानीय लोग Reviewed by News Himachali on January 01, 2023 Rating:
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पर्यटकों व स्थानीय लोगों ने नाच-गाकर व एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर नए साल का स्वागत किया। इस दौरान होटलों में देर रात तक नए साल का जश्न जारी रहा। शहर के सभी होटलों ने इस मौके पर डीजे पार्टी और लाइव बैंड का आयोजन किया था। होटलों में पर्यटकों के मनोरंजन के लिए डांस पार्टी, डाइन एंड डांस, कपल डांस व बेबी डांस हुआ। कई होटलों में गजल का कार्यक्रम भी करवाया गया। इस दौरान होटलों में न्यू ईयर केक भी काटा गया। देर रात तक होटलों में पार्टी चलती रही। शहर के साथ-साथ कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा सहित आसपास के पर्यटन स्थलों के होटलों में नववर्ष की पार्टी में पर्यटकों ने खूब मस्ती की। एचपीटीडीसी के होटलों सहित सभी प्राइवेट होटलों में इस दौरान पर्यटकों को हिमाचली व्यंजन भी परोसे गए। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अधिकारियों सहित रिज पर घूमने का लुत्फ उठाया व सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वहीं न्यू ईयर की पूर्व संध्या व दिन के समय जहां लोग बधाइयां व जश्न मनाते नजर आए, वहीं देर रात को पुलिस ने कई शरारती तत्वों को भी खदेड़ा। कइयों को पुलिस ने इस दौरान चेतावनी भी दी। लोगों ने देर शाम तक जश्र मनाया लेकिन कुछ लोग नशे की हालत में पुलिस जवानों के साथ ही उलझ पड़े। पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों ने नाटी डालकर न्यू ईयर का जश्र मनाया। पुलिस ने लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। न्यू ईयर का जिम्मा बड़े पुलिस अधिकारियों सहित दो सौ पचास जवानों को सौंपा गया। महिला पुलिस भी शाम को ड्यूटी देती नजर आईं। रिज पर इतनी भीड़ रही कि लोगों के बीच भी जमकर धक्का-मुक्की चली। हजारों के हिसाब से लोग रिज व मालरोड पर पहुंचे। लोगों को चलने की भी जगह नहीं थी। शहर को सुरक्षा की दृष्टि से छः सैक्टरों में बांटा गया था। प्रत्येक सैक्टर में एक अधिकारी तैनात रहा। पुलिस का सबसे ज्यादा पहरा शाम के समय में रिज व मालरोड पर रहा। रिज मैदान पर कोरोना फैलने को भी खुला न्यौता दिया गया। यहां एक सौ में से सिर्फ पाँच प्रतिशत लोगों ने मास्क पहने थे। जबकि सरकार के निर्देश थे कि भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में लोग मास्क पहनें, लेकिन सरकार के नियमों की भी लोगों ने धज्जियां उड़ाईं। यह जश्र लोगों को भारी पड़ सकता है। क्रिसमस से न्यू ईयर तक अस्सी हजार से अधिक गाड़ियों की आवाजाही हुई है। ये गाड़ियां शिमला शहर में आईं व वापस गईं। तीस दिसम्बर को सोलन की तरफ से पाँच हज़ार तीन सौ बत्तीस गाड़ियां प्रवेश हुईं, वहीं शिमला से सोलन तक दस हज़ार सैंतीस गाड़ियां गईं। इसके अलावा इकतीस दिसम्बर को सुबह आठ बजे से दो बजे तक सोलन से शिमला की ओर चार हज़ार छः सौ उनहत्तर व शिमला से सोलन की तरफ दो हज़ार चार सौ दस गाड़ियां गईं। हालांकि शाम तक गाड़ियों की संख्या इससे भी ज्यादा बढ़ी। नववर्ष के जश्र के लिए शनिवार को सत्तर हजार से अधिक पर्यटक शिमला पहुंचे। शिमला सहित आसपास के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों ने नए साल का जश्र मनाया। अधिकतर पर्यटक पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली से पर्यटक शिमला पहुंचे। इससे पूर्व क्रिसमस पार्टी के लिए यहां पचास हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। पर्यटक शिमला के साथ-साथ नारकंडा, कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा व चायल घूमने आते हैं। न्यू ईयर की पूर्व संध्या पर राजधानी जाम हो गई। दिन के समय तो लोगों को उतनी ज्यादा जाम से परेशानी नहीं हुई, लेकिन संध्या के समय शहर पूरी तरह से जाम हो गया। ऐसे में जाम को बहाल करने के लिए पुलिस के भी पसीने छूट गए। शहर में दिन के समय में भी गाड़ियां सुबह से ही आराम-आराम से सरकती रहीं। शाम के समय में जाम कुछ इस तरह से लग गया कि लोगों को मिनटों का सफर घंटों में तय हुआ। इस दौरान पर्यटकों सहित लोगों को दिक्कतें झेलने में मजबूर होना पड़ा। पर्यटन केंद्र में बीते शुक्रवार को हुए हल्के हिमपात को देखने के लिए शनिवार सुबह ही भारी संख्या में सैलानी कुफरी पहुंचे। कुफरी स्थित महासु पीक की चोटी पर जमीं बर्फ में दिनभर पर्यटक मौज-मस्ती करते रहे। शनिवार को दिन भर साफ मौसम व खिली धूप के बीच पर्यटक घोड़ों की सवारी, सैल्फी व बर्फ के बीच फोटोग्राफी का आनन्द लेते रहे। दूसरी तरफ ए यूजमैंट पार्क हिपहिप हुर्रे में आईस्केटिंग को लेकर भी सैलानी काफी खुश नजर आ रहे थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सैलानी राज्य के आय के स्त्रोत हैं। बाहरी राज्यों से यह यहां घूमने आते हैं। इन्हें किसी प्रकार से तंग न किया जाए। इस संबंध में जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि शिमला, मनाली, कसौली व धर्मशाला सहित पर्यटन स्थलों में ढाबे रेस्तरां को चौबीस घंटाटे खोलने के आदेश पहले ही दे दिए गए हैं। पुलिस ने बढ़ी वोल्वों बसों को शहर में प्रवेश नहीं होना दिया। बसों को टुटीकंडी बाईपास से तारादेवी भेजा गया, वहीं कई गाड़ियां ऐसी थीं जो बिना किसी कारणों के शहर के तरफ आना चाह रही थीं, ऐसे में उन गाड़ियों को भी शहर में प्रवेश नहीं होने दिया गया। New Year के जश्न में डूबा शिमला, रिज मैदान पर जमकर थिरके पर्यटक व स्थानीय लोग Reviewed by News Himachali on January एक, दो हज़ार तेईस Rating:
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में न केवल भौतिक ज्ञान बल्कि आध्यात्मिक शांति और एक मजबूत दिमाग भी सफलता के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया भौतिकवादी सोच के सहारे आगे बढ़ रही है, लेकिन भारत की विशिष्टता इस बात में है कि उसकी सोच और दृष्टिकोण आधुनिक होने के साथ-साथ पारंपरिक भी था, जो देश को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है।
यहां छात्रों और अभिभावकों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, बिड़ला ने जोर देकर कहा कि यह भारत के सभ्यतागत मूल्यों के कारण है कि आज विकसित दुनिया के सभी सक्षम डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक भारतीय मूल के हैं।
बदलते दौर में नए और उभरते करियर विकल्पों का जिक्र करते हुए बिड़ला ने कहा कि समय के साथ छात्रों की जरूरतें और प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं।
उन्होंने कहा कि करियर 5जी, एआई, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में उभर रहा है।
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि रोजगार मांगने के बजाय, भारतीय युवा आज अपने स्टार्ट-अप के आधार पर नौकरी प्रदाता बन गए हैं और यह युवाओं का आत्मविश्वास है जो पूरे देश को आगे ले जा रहा है।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में न केवल भौतिक ज्ञान बल्कि आध्यात्मिक शांति और एक मजबूत दिमाग भी सफलता के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भौतिकवादी सोच के सहारे आगे बढ़ रही है, लेकिन भारत की विशिष्टता इस बात में है कि उसकी सोच और दृष्टिकोण आधुनिक होने के साथ-साथ पारंपरिक भी था, जो देश को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। यहां छात्रों और अभिभावकों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, बिड़ला ने जोर देकर कहा कि यह भारत के सभ्यतागत मूल्यों के कारण है कि आज विकसित दुनिया के सभी सक्षम डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक भारतीय मूल के हैं। बदलते दौर में नए और उभरते करियर विकल्पों का जिक्र करते हुए बिड़ला ने कहा कि समय के साथ छात्रों की जरूरतें और प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि करियर पाँचजी, एआई, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में उभर रहा है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि रोजगार मांगने के बजाय, भारतीय युवा आज अपने स्टार्ट-अप के आधार पर नौकरी प्रदाता बन गए हैं और यह युवाओं का आत्मविश्वास है जो पूरे देश को आगे ले जा रहा है।
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शरद ऋतु करने का सबसे अच्छा बार माना जाता है मशरूम कटाई। मशरूम सबसे अधिक इन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। इसके पोषण मूल्य के अनुसार, वे दूध, मांस और बेहतरीन किस्म से अलग नहीं है। मशरूम के विशिष्ट जल-काली मिर्च स्वाद के संबंध में, हमारे परिचारिका लंबे सीखा था पूर्व भिगोने द्वारा यह से छुटकारा पाने के लिए कैसे। आज के प्रकाशन पढ़ने के बाद, आप अचार बनाने और उत्पाद की रेह की मौजूदा तरीकों के बारे में सीखना होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि दूध मशरूम कटाई के रूप में मुश्किल के रूप में यह पहली नज़र में लग सकता है नहीं है। एक ही प्रक्रिया की जटिलताओं के कुछ पढ़ा है। अचार और नमकीन के लिए लगभग किसी भी मशरूम के लिए उपयुक्त हैं। केवल बात यह है कि प्रारंभिक अवस्था में किया जाना चाहिए - पुराने नमूनों में से छुटकारा पाने के लिए है। यह भी सुनिश्चित करें कि वे धब्बे और अन्य क्षति नहीं था बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। wormholes और कीड़ों के साथ मशरूम का प्रयोग न करें।
मशरूम टोपी नमक मिलाना से पहले एक कड़ी ब्रश के साथ धोने के लिए सिफारिश की है। यह सबसे अच्छा इस उद्देश्य स्टील स्पंज के लिए उपयुक्त है। करने के लिए harvestable उत्पाद अधिक कोमल हो गया है, उसके पानी है, जो हर चार घंटे परिवर्तित किया जाना चाहिए में पूर्व भिगो। यह सरल प्रक्रिया विशेषता कड़वा स्वाद से छुटकारा मिल जाएगा।
स्टोर तैयार उत्पाद एक गिलास कंटेनर में वांछित है। इसके अलावा, आप रोग़न टैंक का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन वे दरारें, चिप्स और जंग की उपस्थिति के लिए पहले से जांच की जानी चाहिए। खराब पैन भंडारण कवक के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि याद रखना महत्वपूर्ण है , नमकीन मशरूम से अधिक छह माह पहले पकाया, अब उपभोग के लिए उपयुक्त है। मसालेदार रूप में और बारह महीने की तुलना में अब और नहीं के लिए भंडारित किया जा सकता है।
तिथि करने के लिए, वहाँ दूध मशरूम की खरीद के विभिन्न तरीके हैं। सबसे लोकप्रिय नमक मिलाना और अचार कर रहे हैं। सूखे या फ्रोजन मशरूम आगे उपयोग के लिए अनुपयुक्त हैं।
अधिकांश लोगों को यह देखते हुए कि इन मशरूम ज्यादा उन है कि अचार के साथ कवर किया गया स्वादिष्ट है यह नमकीन पसंद करते हैं,। पकाया हुआ मशरूम इस तरह से प्राप्त कर रहे हैं बहुत स्वादिष्ट और अच्छी तरह से खस्ता है। हालांकि, दूसरी विधि इसलिए भी कि यह सुरक्षित माना जाता है आधुनिक गृहिणियों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
यह सबसे आसान तरीकों में से एक है। इसका मुख्य लाभ मशरूम पूर्व भिगोने के लिए जरूरत की कमी है। इस मामले में यह एक सरल सफाई उत्पाद प्रतिबंधित करने के लिए संभव है। नमकीन पानी का सवाल है, तो यह तरल पदार्थ के हर लीटर पर पकाना नमक के दो बड़े चम्मच, तेज पत्ता, काली मिर्च मटर, सौंफ़ बीज, सहिजन और लहसुन का उपयोग करना होगा।
सर्दियों जटिलताओं के बिना पारित कर दिया के लिए खाली दूध मशरूम के लिए, आप सख्ती से सिफारिश की प्रौद्योगिकी का पालन करने की जरूरत है। मशरूम की प्रारंभिक अवस्था में हल्के से नमकीन पानी में उबाल। अपने थके हुए, एक घंटे के एक चौथाई के बारे में कवर किया। यह नमक के साथ यह अति नहीं महत्वपूर्ण है। desyatilitrovuyu पर क्षमता इस घटक के तीन से अधिक बड़े चम्मच डाल करने के लिए पर्याप्त है।
इसके अलावा मशरूम दस मिनट के लिए ऊपर नुस्खा और नमकीन फोड़ा के अनुसार तैयार अग्रिम में भेजा जाता है। फिर मशरूम योक के तहत भेजा है, और जब तक प्रतीक्षा करें वे पूरी तरह से शांत कर रहे हैं। इसके बाद, कंटेनर एक ठंडे स्थान में एक सप्ताह के लिए भिगो गया था। सात दिनों मशरूम बैंकों पहले से निष्फल पर रखी हैं के बाद, नमकीन पानी से भर जाता है, वनस्पति तेल और सील प्लास्टिक lids के एक चम्मच जोड़ा जाता है। एक और तीन या चार हफ्तों के बाद उत्पाद के उपयोग के लिए तैयार है।
ऐसा लगता है कि इस तरह से खाली दूध मशरूम दिनों कोई चालीस से कम है। आप न केवल ड्रम, लेकिन यह भी साधारण कांच के जार उपयोग कर सकते हैं। पहले मामले कवक में अधिक स्वादिष्ट और सुगन्धित प्राप्त कर रहे हैं।
लेकिन आज के वास्तविकता यह है कि नहीं हर गृहिणी प्राकृतिक लकड़ी से बना एक बैरल का उपयोग करना संभव है। इसके अलावा, नहीं सभी परिवारों मशरूम की बड़ी मात्रा में खपत करते हैं। इसलिए, नमक एक मानक गिलास कंटेनर में हो सकता है।
इन प्रयोजनों के लिए, आम तौर पर लीटर कंटेनर का उपयोग करें। प्रारंभ में प्रत्येक जार में रखाः
- दो या तीन lavrushki।
- सहिजन पत्ते।
- लहसुन की लौंग के एक जोड़े।
- दस किशमिश और चेरी पत्ते।
- तीन डिल छाता के तनों।
- नमक के दो बड़े चम्मच।
इसके बाद, कंटेनर presoaked कवक मसालों के साथ जोड़ रहा है, ध्यान से डाला और उनके पानी tamped। जार भरा है और एक साफ जाली Kapron पलकों के साथ कवर किया, और फिर फ्रिज के लिए भेजा। के बारे में एक महीने के बाद उत्पाद के उपयोग के लिए तैयार है। सर्दियों ठंड प्रक्रिया में मशरूम नमक के रूप में समझा, एक महत्वपूर्ण बारीकियों का उल्लेख नहीं। इस तरह मशरूम की सेवा करने से पहले अच्छी तरह से rinsed होना चाहिए।
यह ध्यान देने योग्य है कि मशरूम इस पुराने तरीके से पकाया जाता है, प्राकृतिक लकड़ी की गंध के साथ गर्भवती है, और इसलिए वे बहुत स्वादिष्ट हैं। दूध मशरूम कटाई बिना किसी कठिनाई के जगह ले ली के लिए, यह ठीक इन अनुपात का पालन करने के लिए आवश्यक है।
बैरल पूर्व धोये और लथपथ मशरूम के दस किलोग्राम खड़ी। वहाँ भी नमक की 400 ग्राम, सौंफ़ डंठल, लहसुन, सहिजन, किशमिश और चेरी के पत्तों के पांच सिर भेजें। सभी ढेर परतों। यह महत्वपूर्ण है कि शीर्ष सिर्फ थे सहिजन पत्ते। बैरल एक बाँझ जाली है, जो एक लकड़ी के चक्र और उत्पीड़न पर रखा गया है के साथ कवर किया।
कंटेनर की सामग्री को नियमित रूप से मोल्ड के लिए निरीक्षण कर रहे हैं। यह की घटना के तुरंत निपटाया, परिवर्तन जाली और इलाज चक्र और योक के मामले में। लगभग एक महीने बाद मशरूम उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। वे प्रति बैरल से निकाल दिए जाते बाँझ दस्ताने पहने हुए पूर्व।
कैसे गोभी के पत्तों के साथ सफेद मशरूम अचार के लिए?
हरियाली की उपस्थिति मशरूम एक स्वादिष्ट और सुगन्धित बना देता है। इसलिए, कई गृहिणियों अक्सर यह नुस्खा का उपयोग करें। खाली करने के लिए सफेद दूध मशरूम जल्दी और परेशानी के बिना पारित कर दिया, यदि आप पहले से सभी आवश्यक घटक पर शेयर करना चाहिए। अपने रसोई घर में ऐसा करने के लिए इस तरह के घटकों होना चाहिएः
- आठ गोभी पत्ते।
- सफेद दूध मशरूम की पांच किलोग्राम।
- डिल छाते के दस टहनी।
- नमक की 200 ग्राम।
- लहसुन के प्रमुख।
- सहिजन जड़।
- बीस किशमिश और चेरी पत्ते।
पूर्व तैयार मशरूम blanched। जड़ी बूटी शांत चल रहा है पानी में धोया जाता है। गोभी के पत्तों का सवाल है, जिनमें से प्रत्येक छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित है।
एक तीन लीटर स्वच्छ जार रखा मशरूम में, हरे, का एक हिस्सा नमक के साथ छिड़का और एक लहसुन प्रेस के माध्यम से पारित कर दिया। परतें कंटेनर भरने से पहले बारी-बारी से कर रहे हैं। पकवान तो एक ढक्कन के साथ कवर, कार्गो के शीर्ष पर रखा और तैयार है जब तक एक ठंडे स्थान में भेज सकते हैं।
ऐसा लगता है कि खाली काले मशरूम यह नुस्खा के लिए इतना आसान है कि यह समस्याओं के बिना भी एक अनुभवहीन कुक संभाल सकता है। सामग्री की एक न्यूनतम सेट के उपयोग के बावजूद, मशरूम काफी स्वादिष्ट प्राप्त कर रहे हैं। इससे पहले कि आप प्रक्रिया शुरू, आप सुनिश्चित करें कि आपके निपटान में है कि वहाँ करना चाहिएः
- ताजा काले मशरूम की पांच पाउंड।
- बड़ी नमक की 250 ग्राम।
ताजा कच्चे निकालें पालन गंदगी के साथ, सभी संदिग्ध क्षेत्रों और एक अच्छा धोने काट दिया। इस तरह का इलाज मशरूम ठंडे पानी के साथ, एक विशाल enameled बर्तन में भेजा और प्रेस नीचे दबाएं ताकि मुख्य घटक पूरी तरह से तरल में डूब जाता है कर रहे हैं। सभी कड़वाहट मशरूम शरीर के पांच दिनों के दूर रहने के बाद। इसके तुरंत बाद, आप अगले, सबसे महत्वपूर्ण कदम के लिए आगे बढ़ सकते हैं।
सर्दियों एक त्वरित गति से पारित कर दिया के लिए खाली दूध मशरूम के लिए, बड़े उदाहरणों उसे कई छोटे टुकड़ों में काट करने के लिए वांछनीय है। भिगो और तैयार मशरूम एक गहरी विस्तृत कटोरी में रखा जाता है, एक बड़ी टेबल नमक की परतों interspersing। किसी भी फ्लैट वस्तु (एक थाली, कवर या बोर्ड) के शीर्ष पर रखा, एक लोड के खिलाफ लगाए और तीन दिनों के लिए छोड़ रहा है। सामग्री हर दिन के टैंक हड़कंप मच गया, टोपी नुकसान न कोशिश कर रहा। इस समय के बाद, पहले से अचार पारी तैयार जार और गैर धातु कवर के साथ कवर किया। कसकर पैक बर्तन फ्रिज में या तहखाने में आगे भंडारण के लिए भेजा जाता है। दो महीने बाद, मशरूम उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
इससे पहले कि कैसे मशरूम अचार के लिए सर्दियों के लिए, आप सभी आवश्यक सामग्री पर शेयर करना चाहिए। इस मामले में, अपने रसोई घर होना चाहिएः
- ताजा मशरूम की Desyatilitrovoe बाल्टी।
- नमक की 330 ग्राम।
- कम से कम पांच बड़े प्याज बल्ब।
इससे पहले कि आप मशरूम नमक मिलाना शुरू निश्चित रूप से तैयार करने के लिए की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, वे साफ कर, अच्छी तरह से धोया और तीन से पांच दिन के लिए भिगो, पानी समय-समय पर बदलते। इस समय के बाद वे एक बड़ी कड़ाही में रखा जाता है, नमक और प्याज के छल्ले के साथ बारी-बारी से। आखिरी परत पर कुछ फ्लैट डाल दिया और माल डाल दिया।
छह सप्ताह बाद मशरूम मशरूम, कटाई, जिनमें से आज के लेख में देखा जाता है, स्वच्छ कांच के जार में रखा और फ्रिज में भेज देते हैं।
जैसा कि पहले उल्लेख, काले मशरूम सशर्त खाद्य मशरूम माना जाता है। इसलिए, वे अक्सर गर्म विधि काटा जाता है। आदेश में अग्रिम में आवश्यक उत्पादों को शेयर करने के लिए स्वादिष्ट और स्वादिष्ट नाश्ता जरूरत बाहर कर दिया है। में अपने रसोई घर होना चाहिएः
- ताजा काले मशरूम की आधा किलोग्राम।
- पानी की चार लीटर।
- नमक के छह बड़े चम्मच।
- पंद्रह मटर काली मिर्च।
- कार्नेशन।
- तेज पत्ता।
- पांच मटर allspice।
- सात छाते डिल।
खाली दूध मशरूम के लिए आवश्यक घटक की खोज में हस्तक्षेप नहीं हुआ है, उपरोक्त सूची आप साफ पानी नमकीन के लिए और तेल के साथ भरने की जरूरत है।
पहली बात यह है मशरूम करना है। वे धोया जाता है, सारी गंदगी एक छोटा सा ब्रश का उपयोग कर हटाने के। फिर मशरूम साफ ठंडे पानी डालना और तीन घंटे के लिए छोड़ दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में भिगो दें करने के लिए आवश्यक नहीं है लायक है। लेकिन तुम यह करने के लिए, के बाद तीन घंटे विशाल सॉस पैन में पानी की चार लीटर से भरा है और इंतजार कर रहे थे जब तक यह फोड़े, यह बड़े नमक और मशरूम भेजने का फैसला करते हैं। में खाना पकाने की प्रक्रिया है, जो फोम की सतह पर के बारे में बीस मिनट के लिए चलेगा गठन किया जा सकता, हटा दिया जाना चाहिए जो।
इस बीच, एक अलग पैन में नमकीन खाना बनाना। उबलते पानी की एक कंटेनर में यह अंत तेज पत्ता, लौंग, नमक और मिर्च के दो प्रकार जोड़ा गया है करने के लिए। छाते सोआ, और तुरंत स्टोव बंद करने के लिए भेजा नमकीन के अंत में।
वेल्डेड मशरूम कांच अतिरिक्त तरल पदार्थ के साथ उन्हें एक कोलंडर में विश्राम कर, उन्हें एक साफ़ कंटेनर में निहित है और गर्म नमकीन पानी डालना। मशरूम पॉप अप यही कारण है कि, वे फ्लैट प्लेट जिस पर प्रेस लगाया गया है दबाया जाता है। एक ठंडे स्थान में है कि साफ कंटेनर के बाद। तीन दिनों के बाद, मशरूम, एक पूर्व तैयार जार में बाहर रखी हैं नमकीन डालना, उच्च गुणवत्ता वाले वनस्पति तेलों की एक छोटी राशि, गैर धातु कवर कवर जोड़ा गया था और तहखाने में या कोठरी में छिपा हुआ है। एक महीने बाद, मसालेदार मशरूम मेज पर ला सकते हैं।
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शरद ऋतु करने का सबसे अच्छा बार माना जाता है मशरूम कटाई। मशरूम सबसे अधिक इन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। इसके पोषण मूल्य के अनुसार, वे दूध, मांस और बेहतरीन किस्म से अलग नहीं है। मशरूम के विशिष्ट जल-काली मिर्च स्वाद के संबंध में, हमारे परिचारिका लंबे सीखा था पूर्व भिगोने द्वारा यह से छुटकारा पाने के लिए कैसे। आज के प्रकाशन पढ़ने के बाद, आप अचार बनाने और उत्पाद की रेह की मौजूदा तरीकों के बारे में सीखना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि दूध मशरूम कटाई के रूप में मुश्किल के रूप में यह पहली नज़र में लग सकता है नहीं है। एक ही प्रक्रिया की जटिलताओं के कुछ पढ़ा है। अचार और नमकीन के लिए लगभग किसी भी मशरूम के लिए उपयुक्त हैं। केवल बात यह है कि प्रारंभिक अवस्था में किया जाना चाहिए - पुराने नमूनों में से छुटकारा पाने के लिए है। यह भी सुनिश्चित करें कि वे धब्बे और अन्य क्षति नहीं था बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। wormholes और कीड़ों के साथ मशरूम का प्रयोग न करें। मशरूम टोपी नमक मिलाना से पहले एक कड़ी ब्रश के साथ धोने के लिए सिफारिश की है। यह सबसे अच्छा इस उद्देश्य स्टील स्पंज के लिए उपयुक्त है। करने के लिए harvestable उत्पाद अधिक कोमल हो गया है, उसके पानी है, जो हर चार घंटे परिवर्तित किया जाना चाहिए में पूर्व भिगो। यह सरल प्रक्रिया विशेषता कड़वा स्वाद से छुटकारा मिल जाएगा। स्टोर तैयार उत्पाद एक गिलास कंटेनर में वांछित है। इसके अलावा, आप रोग़न टैंक का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन वे दरारें, चिप्स और जंग की उपस्थिति के लिए पहले से जांच की जानी चाहिए। खराब पैन भंडारण कवक के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि याद रखना महत्वपूर्ण है , नमकीन मशरूम से अधिक छह माह पहले पकाया, अब उपभोग के लिए उपयुक्त है। मसालेदार रूप में और बारह महीने की तुलना में अब और नहीं के लिए भंडारित किया जा सकता है। तिथि करने के लिए, वहाँ दूध मशरूम की खरीद के विभिन्न तरीके हैं। सबसे लोकप्रिय नमक मिलाना और अचार कर रहे हैं। सूखे या फ्रोजन मशरूम आगे उपयोग के लिए अनुपयुक्त हैं। अधिकांश लोगों को यह देखते हुए कि इन मशरूम ज्यादा उन है कि अचार के साथ कवर किया गया स्वादिष्ट है यह नमकीन पसंद करते हैं,। पकाया हुआ मशरूम इस तरह से प्राप्त कर रहे हैं बहुत स्वादिष्ट और अच्छी तरह से खस्ता है। हालांकि, दूसरी विधि इसलिए भी कि यह सुरक्षित माना जाता है आधुनिक गृहिणियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह सबसे आसान तरीकों में से एक है। इसका मुख्य लाभ मशरूम पूर्व भिगोने के लिए जरूरत की कमी है। इस मामले में यह एक सरल सफाई उत्पाद प्रतिबंधित करने के लिए संभव है। नमकीन पानी का सवाल है, तो यह तरल पदार्थ के हर लीटर पर पकाना नमक के दो बड़े चम्मच, तेज पत्ता, काली मिर्च मटर, सौंफ़ बीज, सहिजन और लहसुन का उपयोग करना होगा। सर्दियों जटिलताओं के बिना पारित कर दिया के लिए खाली दूध मशरूम के लिए, आप सख्ती से सिफारिश की प्रौद्योगिकी का पालन करने की जरूरत है। मशरूम की प्रारंभिक अवस्था में हल्के से नमकीन पानी में उबाल। अपने थके हुए, एक घंटे के एक चौथाई के बारे में कवर किया। यह नमक के साथ यह अति नहीं महत्वपूर्ण है। desyatilitrovuyu पर क्षमता इस घटक के तीन से अधिक बड़े चम्मच डाल करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा मशरूम दस मिनट के लिए ऊपर नुस्खा और नमकीन फोड़ा के अनुसार तैयार अग्रिम में भेजा जाता है। फिर मशरूम योक के तहत भेजा है, और जब तक प्रतीक्षा करें वे पूरी तरह से शांत कर रहे हैं। इसके बाद, कंटेनर एक ठंडे स्थान में एक सप्ताह के लिए भिगो गया था। सात दिनों मशरूम बैंकों पहले से निष्फल पर रखी हैं के बाद, नमकीन पानी से भर जाता है, वनस्पति तेल और सील प्लास्टिक lids के एक चम्मच जोड़ा जाता है। एक और तीन या चार हफ्तों के बाद उत्पाद के उपयोग के लिए तैयार है। ऐसा लगता है कि इस तरह से खाली दूध मशरूम दिनों कोई चालीस से कम है। आप न केवल ड्रम, लेकिन यह भी साधारण कांच के जार उपयोग कर सकते हैं। पहले मामले कवक में अधिक स्वादिष्ट और सुगन्धित प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन आज के वास्तविकता यह है कि नहीं हर गृहिणी प्राकृतिक लकड़ी से बना एक बैरल का उपयोग करना संभव है। इसके अलावा, नहीं सभी परिवारों मशरूम की बड़ी मात्रा में खपत करते हैं। इसलिए, नमक एक मानक गिलास कंटेनर में हो सकता है। इन प्रयोजनों के लिए, आम तौर पर लीटर कंटेनर का उपयोग करें। प्रारंभ में प्रत्येक जार में रखाः - दो या तीन lavrushki। - सहिजन पत्ते। - लहसुन की लौंग के एक जोड़े। - दस किशमिश और चेरी पत्ते। - तीन डिल छाता के तनों। - नमक के दो बड़े चम्मच। इसके बाद, कंटेनर presoaked कवक मसालों के साथ जोड़ रहा है, ध्यान से डाला और उनके पानी tamped। जार भरा है और एक साफ जाली Kapron पलकों के साथ कवर किया, और फिर फ्रिज के लिए भेजा। के बारे में एक महीने के बाद उत्पाद के उपयोग के लिए तैयार है। सर्दियों ठंड प्रक्रिया में मशरूम नमक के रूप में समझा, एक महत्वपूर्ण बारीकियों का उल्लेख नहीं। इस तरह मशरूम की सेवा करने से पहले अच्छी तरह से rinsed होना चाहिए। यह ध्यान देने योग्य है कि मशरूम इस पुराने तरीके से पकाया जाता है, प्राकृतिक लकड़ी की गंध के साथ गर्भवती है, और इसलिए वे बहुत स्वादिष्ट हैं। दूध मशरूम कटाई बिना किसी कठिनाई के जगह ले ली के लिए, यह ठीक इन अनुपात का पालन करने के लिए आवश्यक है। बैरल पूर्व धोये और लथपथ मशरूम के दस किलोग्राम खड़ी। वहाँ भी नमक की चार सौ ग्राम, सौंफ़ डंठल, लहसुन, सहिजन, किशमिश और चेरी के पत्तों के पांच सिर भेजें। सभी ढेर परतों। यह महत्वपूर्ण है कि शीर्ष सिर्फ थे सहिजन पत्ते। बैरल एक बाँझ जाली है, जो एक लकड़ी के चक्र और उत्पीड़न पर रखा गया है के साथ कवर किया। कंटेनर की सामग्री को नियमित रूप से मोल्ड के लिए निरीक्षण कर रहे हैं। यह की घटना के तुरंत निपटाया, परिवर्तन जाली और इलाज चक्र और योक के मामले में। लगभग एक महीने बाद मशरूम उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। वे प्रति बैरल से निकाल दिए जाते बाँझ दस्ताने पहने हुए पूर्व। कैसे गोभी के पत्तों के साथ सफेद मशरूम अचार के लिए? हरियाली की उपस्थिति मशरूम एक स्वादिष्ट और सुगन्धित बना देता है। इसलिए, कई गृहिणियों अक्सर यह नुस्खा का उपयोग करें। खाली करने के लिए सफेद दूध मशरूम जल्दी और परेशानी के बिना पारित कर दिया, यदि आप पहले से सभी आवश्यक घटक पर शेयर करना चाहिए। अपने रसोई घर में ऐसा करने के लिए इस तरह के घटकों होना चाहिएः - आठ गोभी पत्ते। - सफेद दूध मशरूम की पांच किलोग्राम। - डिल छाते के दस टहनी। - नमक की दो सौ ग्राम। - लहसुन के प्रमुख। - सहिजन जड़। - बीस किशमिश और चेरी पत्ते। पूर्व तैयार मशरूम blanched। जड़ी बूटी शांत चल रहा है पानी में धोया जाता है। गोभी के पत्तों का सवाल है, जिनमें से प्रत्येक छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित है। एक तीन लीटर स्वच्छ जार रखा मशरूम में, हरे, का एक हिस्सा नमक के साथ छिड़का और एक लहसुन प्रेस के माध्यम से पारित कर दिया। परतें कंटेनर भरने से पहले बारी-बारी से कर रहे हैं। पकवान तो एक ढक्कन के साथ कवर, कार्गो के शीर्ष पर रखा और तैयार है जब तक एक ठंडे स्थान में भेज सकते हैं। ऐसा लगता है कि खाली काले मशरूम यह नुस्खा के लिए इतना आसान है कि यह समस्याओं के बिना भी एक अनुभवहीन कुक संभाल सकता है। सामग्री की एक न्यूनतम सेट के उपयोग के बावजूद, मशरूम काफी स्वादिष्ट प्राप्त कर रहे हैं। इससे पहले कि आप प्रक्रिया शुरू, आप सुनिश्चित करें कि आपके निपटान में है कि वहाँ करना चाहिएः - ताजा काले मशरूम की पांच पाउंड। - बड़ी नमक की दो सौ पचास ग्राम। ताजा कच्चे निकालें पालन गंदगी के साथ, सभी संदिग्ध क्षेत्रों और एक अच्छा धोने काट दिया। इस तरह का इलाज मशरूम ठंडे पानी के साथ, एक विशाल enameled बर्तन में भेजा और प्रेस नीचे दबाएं ताकि मुख्य घटक पूरी तरह से तरल में डूब जाता है कर रहे हैं। सभी कड़वाहट मशरूम शरीर के पांच दिनों के दूर रहने के बाद। इसके तुरंत बाद, आप अगले, सबसे महत्वपूर्ण कदम के लिए आगे बढ़ सकते हैं। सर्दियों एक त्वरित गति से पारित कर दिया के लिए खाली दूध मशरूम के लिए, बड़े उदाहरणों उसे कई छोटे टुकड़ों में काट करने के लिए वांछनीय है। भिगो और तैयार मशरूम एक गहरी विस्तृत कटोरी में रखा जाता है, एक बड़ी टेबल नमक की परतों interspersing। किसी भी फ्लैट वस्तु के शीर्ष पर रखा, एक लोड के खिलाफ लगाए और तीन दिनों के लिए छोड़ रहा है। सामग्री हर दिन के टैंक हड़कंप मच गया, टोपी नुकसान न कोशिश कर रहा। इस समय के बाद, पहले से अचार पारी तैयार जार और गैर धातु कवर के साथ कवर किया। कसकर पैक बर्तन फ्रिज में या तहखाने में आगे भंडारण के लिए भेजा जाता है। दो महीने बाद, मशरूम उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इससे पहले कि कैसे मशरूम अचार के लिए सर्दियों के लिए, आप सभी आवश्यक सामग्री पर शेयर करना चाहिए। इस मामले में, अपने रसोई घर होना चाहिएः - ताजा मशरूम की Desyatilitrovoe बाल्टी। - नमक की तीन सौ तीस ग्राम। - कम से कम पांच बड़े प्याज बल्ब। इससे पहले कि आप मशरूम नमक मिलाना शुरू निश्चित रूप से तैयार करने के लिए की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, वे साफ कर, अच्छी तरह से धोया और तीन से पांच दिन के लिए भिगो, पानी समय-समय पर बदलते। इस समय के बाद वे एक बड़ी कड़ाही में रखा जाता है, नमक और प्याज के छल्ले के साथ बारी-बारी से। आखिरी परत पर कुछ फ्लैट डाल दिया और माल डाल दिया। छह सप्ताह बाद मशरूम मशरूम, कटाई, जिनमें से आज के लेख में देखा जाता है, स्वच्छ कांच के जार में रखा और फ्रिज में भेज देते हैं। जैसा कि पहले उल्लेख, काले मशरूम सशर्त खाद्य मशरूम माना जाता है। इसलिए, वे अक्सर गर्म विधि काटा जाता है। आदेश में अग्रिम में आवश्यक उत्पादों को शेयर करने के लिए स्वादिष्ट और स्वादिष्ट नाश्ता जरूरत बाहर कर दिया है। में अपने रसोई घर होना चाहिएः - ताजा काले मशरूम की आधा किलोग्राम। - पानी की चार लीटर। - नमक के छह बड़े चम्मच। - पंद्रह मटर काली मिर्च। - कार्नेशन। - तेज पत्ता। - पांच मटर allspice। - सात छाते डिल। खाली दूध मशरूम के लिए आवश्यक घटक की खोज में हस्तक्षेप नहीं हुआ है, उपरोक्त सूची आप साफ पानी नमकीन के लिए और तेल के साथ भरने की जरूरत है। पहली बात यह है मशरूम करना है। वे धोया जाता है, सारी गंदगी एक छोटा सा ब्रश का उपयोग कर हटाने के। फिर मशरूम साफ ठंडे पानी डालना और तीन घंटे के लिए छोड़ दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में भिगो दें करने के लिए आवश्यक नहीं है लायक है। लेकिन तुम यह करने के लिए, के बाद तीन घंटे विशाल सॉस पैन में पानी की चार लीटर से भरा है और इंतजार कर रहे थे जब तक यह फोड़े, यह बड़े नमक और मशरूम भेजने का फैसला करते हैं। में खाना पकाने की प्रक्रिया है, जो फोम की सतह पर के बारे में बीस मिनट के लिए चलेगा गठन किया जा सकता, हटा दिया जाना चाहिए जो। इस बीच, एक अलग पैन में नमकीन खाना बनाना। उबलते पानी की एक कंटेनर में यह अंत तेज पत्ता, लौंग, नमक और मिर्च के दो प्रकार जोड़ा गया है करने के लिए। छाते सोआ, और तुरंत स्टोव बंद करने के लिए भेजा नमकीन के अंत में। वेल्डेड मशरूम कांच अतिरिक्त तरल पदार्थ के साथ उन्हें एक कोलंडर में विश्राम कर, उन्हें एक साफ़ कंटेनर में निहित है और गर्म नमकीन पानी डालना। मशरूम पॉप अप यही कारण है कि, वे फ्लैट प्लेट जिस पर प्रेस लगाया गया है दबाया जाता है। एक ठंडे स्थान में है कि साफ कंटेनर के बाद। तीन दिनों के बाद, मशरूम, एक पूर्व तैयार जार में बाहर रखी हैं नमकीन डालना, उच्च गुणवत्ता वाले वनस्पति तेलों की एक छोटी राशि, गैर धातु कवर कवर जोड़ा गया था और तहखाने में या कोठरी में छिपा हुआ है। एक महीने बाद, मसालेदार मशरूम मेज पर ला सकते हैं।
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मोतिहारी। सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान राजकीय पोलिटेकनिक सेंटर पर मोबाइल व चीट पकड़े जाने पर तीन परीक्षार्थियों पर नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गयी है। केसरिया के परीक्षार्थी राहुल कुमार के पास से सेलफोन व बिजुलपुर के परीक्षार्थी बालकरण पासवान के पास चीट पूर्जे मिले थे। वहीं पंडित उगम पाण्डेय सेंटर पर कदाचार के आरोप में परीक्षार्थी वशिष्ठ नारायण सिंह को निष्कासित किया गया था।
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मोतिहारी। सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान राजकीय पोलिटेकनिक सेंटर पर मोबाइल व चीट पकड़े जाने पर तीन परीक्षार्थियों पर नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गयी है। केसरिया के परीक्षार्थी राहुल कुमार के पास से सेलफोन व बिजुलपुर के परीक्षार्थी बालकरण पासवान के पास चीट पूर्जे मिले थे। वहीं पंडित उगम पाण्डेय सेंटर पर कदाचार के आरोप में परीक्षार्थी वशिष्ठ नारायण सिंह को निष्कासित किया गया था।
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जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हर तरफ मोटिवेशन बहुत जरूरी होता है. एक नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन और एक अच्छे करियर के लिए रिजल्ट का अच्छा होना बेशक जरूरी है, पर वह हमारी सारी जिंदगी की मेहनत पर मोहर नहीं लगा सकता है. इसी बात को सच साबित करने के लिए एक तस्वीर शेयर की है.
आप सभी ने साल 2009 में बनी फिल्म थ्री इडियट का डायलॉग कामयाबी के पीछे मत भागो, काबिल बनो, कामयाबी झक मार के तुम्हारे पास आएगी तो जरूर सुनी होगी. ये बातें सुनने में सबको बड़ी अच्छी लगती है लेकिन फॉलो बहुत कम लोग करते हैं और जो करते हैं वो वाकई कामयाबी की सीढ़ी को बड़ी आसानी चढ़ जाते हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि सिविल सर्विस के लिए लोगों को काफी पढ़ना पड़ता है. इसलिए ये एवरेज लोगों का फील्ड नहीं है. लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है. इन दिनों सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA)पर एक IAS अधिकारी की खबर तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें बताया गया है कि एक एवरेज स्टूडेंट कैसे आईएएस अधिकारी बन गया.
छत्तीसगढ़ के आईएएस (IAS) अफसर Awanish Sharan ने कम अंक लाने वाले बच्चों को प्रेरित करने के लिए साथी IAS की मार्कशीट को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है. जो इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि सफलता के लिए नंबर नहीं टैलेंट मायने रखता है.
भरूच के कलेक्टर तुषार सुमेरा ने अपनी दसवीं की मार्कशीट शेयर करते हुए लिखा है कि उन्हें दसवीं में सिर्फ पासिंग मार्क्स आए थे.
(IAS) अफसर Awanish Sharan के इस ट्वीट को खबर लिखे जाने तक 16 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है तो वहीं 3000 से ज्यादा लोगों ने उनके पोस्ट को रि-ट्वीट भी किया है. इसके अलावा कई लोगों ने इस पर कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है.
? काफ़ी बच्चों के लिए ये प्रेरणा के स्रोत होंगे । और बच्चों ही क्यों, उनके माता पिता के लिए भी।
मुझे लगता है भले पूरा संसार इनसे निराश होगा लेकिन इन्हें ज़रूर माता पिता दोनो का या माताजी का आशीर्वाद, प्रहोत्साहन और धैर्य मिला होगा ।
हम जैसे के लिए प्रेरणा.
एक यूजर ने तस्वीर पर कमेंट कर लिखा, ' जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हर तरफ मोटिवेशन बहुत जरूरी होता है. एक नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन और एक अच्छे करियर के लिए रिजल्ट का अच्छा होना बेशक जरूरी है, पर वह हमारी सारी जिंदगी की मेहनत पर मोहर नहीं लगा सकता है.' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ' इससे वाकई बच्चों को काफी प्रेरणा मिलेगी..! इसके अलावा और भी कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
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जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हर तरफ मोटिवेशन बहुत जरूरी होता है. एक नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन और एक अच्छे करियर के लिए रिजल्ट का अच्छा होना बेशक जरूरी है, पर वह हमारी सारी जिंदगी की मेहनत पर मोहर नहीं लगा सकता है. इसी बात को सच साबित करने के लिए एक तस्वीर शेयर की है. आप सभी ने साल दो हज़ार नौ में बनी फिल्म थ्री इडियट का डायलॉग कामयाबी के पीछे मत भागो, काबिल बनो, कामयाबी झक मार के तुम्हारे पास आएगी तो जरूर सुनी होगी. ये बातें सुनने में सबको बड़ी अच्छी लगती है लेकिन फॉलो बहुत कम लोग करते हैं और जो करते हैं वो वाकई कामयाबी की सीढ़ी को बड़ी आसानी चढ़ जाते हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि सिविल सर्विस के लिए लोगों को काफी पढ़ना पड़ता है. इसलिए ये एवरेज लोगों का फील्ड नहीं है. लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक IAS अधिकारी की खबर तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें बताया गया है कि एक एवरेज स्टूडेंट कैसे आईएएस अधिकारी बन गया. छत्तीसगढ़ के आईएएस अफसर Awanish Sharan ने कम अंक लाने वाले बच्चों को प्रेरित करने के लिए साथी IAS की मार्कशीट को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है. जो इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि सफलता के लिए नंबर नहीं टैलेंट मायने रखता है. भरूच के कलेक्टर तुषार सुमेरा ने अपनी दसवीं की मार्कशीट शेयर करते हुए लिखा है कि उन्हें दसवीं में सिर्फ पासिंग मार्क्स आए थे. अफसर Awanish Sharan के इस ट्वीट को खबर लिखे जाने तक सोलह हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है तो वहीं तीन हज़ार से ज्यादा लोगों ने उनके पोस्ट को रि-ट्वीट भी किया है. इसके अलावा कई लोगों ने इस पर कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. ? काफ़ी बच्चों के लिए ये प्रेरणा के स्रोत होंगे । और बच्चों ही क्यों, उनके माता पिता के लिए भी। मुझे लगता है भले पूरा संसार इनसे निराश होगा लेकिन इन्हें ज़रूर माता पिता दोनो का या माताजी का आशीर्वाद, प्रहोत्साहन और धैर्य मिला होगा । हम जैसे के लिए प्रेरणा. एक यूजर ने तस्वीर पर कमेंट कर लिखा, ' जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हर तरफ मोटिवेशन बहुत जरूरी होता है. एक नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन और एक अच्छे करियर के लिए रिजल्ट का अच्छा होना बेशक जरूरी है, पर वह हमारी सारी जिंदगी की मेहनत पर मोहर नहीं लगा सकता है.' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ' इससे वाकई बच्चों को काफी प्रेरणा मिलेगी..! इसके अलावा और भी कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
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नोएडा में पार्किंग विवाद को लेकर एक पति-पत्नी और उनके भाई को जमकर पीटा गया है. मारपीट करने वालों ने उनको जान से भी मारने की धमकी दी. मारपीट की पूरी घटना CCTV में कैद हो गई. लेकिन बिल्डिंग के मेंटिनेंस स्टाफ ने उसे डिलिट कर दिया ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिले. लेकिन वहां मौजूद लोगो ने CCTV और मारपीट का पूरा वीडियो अपने फोन में बना लिया.
दरअसल तापस का चचेरा भाई सुबह 6 बजे अपनी कार से तापस के घर पर कार विजिटर पार्किंग में खड़ी कर तापस के फ़्लैट में चला गया. दोपहर के समय तापस अपनी एक साल की बेटी को डॉक्टर दिखने के लिए अपनी पत्नी और भाई के साथ नीचे पार्किंग में आया तो देखा की कार में लॉक लगा हुआ है. जिसके बाद तापस ने गार्ड को बुलाकर पूछा कि गाड़ी में लॉक क्यों लगा है. गार्ड ने कहा की इन्होंने गाड़ी अंदर खड़ी की है, उसका चार्ज जमा करना होगा.
तापस ने मेंटिनेंस स्टाफ कौसर से बात की तो उन्होंने कहा की 2000 रुपये पैनल्टी जमा करो तब गाड़ी बाहार जाएगी. इसके बाद विवाद हो गया और तापस ने जब 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना देने की कोशिश की तो वहां खड़े बाउंसरों और गार्डों ने तापस और उसकी पत्नी व भाई से मारपीट की. इस पिटाई में तापस की पत्नी का हाथ फैक्चर हो गया है तो वहीं तापस को भी काफी काफी चोटें आईं हैं. (रिपोर्ट-कुनाल जायसवाल)
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नोएडा में पार्किंग विवाद को लेकर एक पति-पत्नी और उनके भाई को जमकर पीटा गया है. मारपीट करने वालों ने उनको जान से भी मारने की धमकी दी. मारपीट की पूरी घटना CCTV में कैद हो गई. लेकिन बिल्डिंग के मेंटिनेंस स्टाफ ने उसे डिलिट कर दिया ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिले. लेकिन वहां मौजूद लोगो ने CCTV और मारपीट का पूरा वीडियो अपने फोन में बना लिया. दरअसल तापस का चचेरा भाई सुबह छः बजे अपनी कार से तापस के घर पर कार विजिटर पार्किंग में खड़ी कर तापस के फ़्लैट में चला गया. दोपहर के समय तापस अपनी एक साल की बेटी को डॉक्टर दिखने के लिए अपनी पत्नी और भाई के साथ नीचे पार्किंग में आया तो देखा की कार में लॉक लगा हुआ है. जिसके बाद तापस ने गार्ड को बुलाकर पूछा कि गाड़ी में लॉक क्यों लगा है. गार्ड ने कहा की इन्होंने गाड़ी अंदर खड़ी की है, उसका चार्ज जमा करना होगा. तापस ने मेंटिनेंस स्टाफ कौसर से बात की तो उन्होंने कहा की दो हज़ार रुपयापये पैनल्टी जमा करो तब गाड़ी बाहार जाएगी. इसके बाद विवाद हो गया और तापस ने जब एक सौ नंबर डायल कर पुलिस को सूचना देने की कोशिश की तो वहां खड़े बाउंसरों और गार्डों ने तापस और उसकी पत्नी व भाई से मारपीट की. इस पिटाई में तापस की पत्नी का हाथ फैक्चर हो गया है तो वहीं तापस को भी काफी काफी चोटें आईं हैं. ये भी पढ़ेंः .
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केएल राहुल को वेस्टइंडीज के खिलाफ ड्रॉप कर दिया गया था. (AFP)
मुंबई. इंग्लैंड में साल 2019 में खेले गए क्रिकेट विश्व कप (Cricket world Cup 2019) कप का अंत भारत के लिए दुखद रहा. इस वर्ल्ड कप में भारत लीग मैचों में शीर्ष स्थान पर रहा था. टीम इंडिया (Team India) को लीग मैचों के दौरान एक हार सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ मिली. जबकि मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए पहले सेमीफाइनल में भारत को न्यूजीलैंड (New Zealand) ने शिकस्त दी. कीवी टीम ने पहले खेलते हुए 8 विकेट पर 239 रन बनाए. जवाब में भारत जीत से 18 रन पीछे रह गया. इस हार के बाद विराट कोहली की टीम इंडिया का सफर विश्व कप में समाप्त हो गया था.
खिलाड़ियों की चोट से परेशान टीम इंडिया विश्व कप में लीग चरण में सभी टीमों से आगे थी. भारतीय खिलाड़ी शिखर धवन (Shikhar Dhawan) को चोट लगी जिसके चलते वह बाहर हो गए. इसके बाद विजय शंकर (Vijay Shankar) चोटिल हुए वह भी वर्ल्ड कप से बाहर हो गए. फिर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को बुलाया गया. इसके मतलब यह था कि केएल राहुल (KL Rahul) नंबर चार पर बैटिंग करेंगे. लेकिन उन्हें प्रमोट कर रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ पारी की शुरूआत करवाई गई. केएल राहुल के लिए यह विश्व कप अच्छा रहा और उन्होंने 9 मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक के जरिए 361 रन बनाए.
विश्व कप के ठीक बाद टीम इंडिया वेस्टइंडीज दौरे पर गई. जहां केएल राहुल को वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली. उनके लिए यह एक ऐसा अऩुभव था जिसके बारे में उन्होंने बात की है. राहुल ने बताया कि क्रिस गेल ने उन्हें इस झटके से कैसे उबारा. एक कार्यक्रम के दौरान बात करते हुए उन्होंने कहा, मुझे याद है कि 2019 में विश्व कप खेला, इसके बाद हम सीरीज खेलने वेस्टइंडीज गए थे, विश्व कप में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन वेस्टइंडीज गए और मुझे बाहर कर दिया. मैंने क्रिस गेल (Chris Gayle) को मैसेज किया. उन्होंने कहा पूल में आओ, मैं शराब पी रहा हूं. केएल राहुल ने कहा कि यह क्रिस गेल का 300वां वनडे था. वह बहुत खुश थे उनके कुछ दोस्त भी थे. मैं पूल के पास गया वह आए और मेरे पास बैठ गए. क्रिस गेल ने मुझे पूछा तुम क्यों नहीं खेल रहे हो.
मैंने क्रिस गेल से कहा कि आपको पता है. मैं स्पष्ट रूप से निराश था. क्योंकि मैं विश्व कप में खेला और यहां नहीं खेल रहा हूं. क्रिस गेल ने मुझसे कहा, देखिए आप हमेशा कह सकते हैं कि आप 100 कारणों के चलते नहीं खेल रहे हैं, लेकिन यह आपके हाथ में है कि आप खेलते हैं या नहीं, यदि आपके लिए 70 का स्कोर प्रर्याप्त नहीं है तो 150 बनाएं, यदि आप 150 बना रहे हैं वो प्रर्याप्त नहीं है तो 200 बनाएं, इस तरह आपको चीजों को देखने की जरूरत है. आपके लिए आईपीएल के सीजन में 600 रन प्रर्याप्त नहीं हैं तो 800 बनाएं. जैसे आप विश्व कप में 50, 60 का स्कोर करते रहे, आपको इसे परिवर्तित करना चाहिए और 100-120 बनाना चाहिए फिर किसी की ताकत नहीं जो आपको खेलने से रोक सके.
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'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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केएल राहुल को वेस्टइंडीज के खिलाफ ड्रॉप कर दिया गया था. मुंबई. इंग्लैंड में साल दो हज़ार उन्नीस में खेले गए क्रिकेट विश्व कप कप का अंत भारत के लिए दुखद रहा. इस वर्ल्ड कप में भारत लीग मैचों में शीर्ष स्थान पर रहा था. टीम इंडिया को लीग मैचों के दौरान एक हार सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ मिली. जबकि मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए पहले सेमीफाइनल में भारत को न्यूजीलैंड ने शिकस्त दी. कीवी टीम ने पहले खेलते हुए आठ विकेट पर दो सौ उनतालीस रन बनाए. जवाब में भारत जीत से अट्ठारह रन पीछे रह गया. इस हार के बाद विराट कोहली की टीम इंडिया का सफर विश्व कप में समाप्त हो गया था. खिलाड़ियों की चोट से परेशान टीम इंडिया विश्व कप में लीग चरण में सभी टीमों से आगे थी. भारतीय खिलाड़ी शिखर धवन को चोट लगी जिसके चलते वह बाहर हो गए. इसके बाद विजय शंकर चोटिल हुए वह भी वर्ल्ड कप से बाहर हो गए. फिर ऋषभ पंत को बुलाया गया. इसके मतलब यह था कि केएल राहुल नंबर चार पर बैटिंग करेंगे. लेकिन उन्हें प्रमोट कर रोहित शर्मा के साथ पारी की शुरूआत करवाई गई. केएल राहुल के लिए यह विश्व कप अच्छा रहा और उन्होंने नौ मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक के जरिए तीन सौ इकसठ रन बनाए. विश्व कप के ठीक बाद टीम इंडिया वेस्टइंडीज दौरे पर गई. जहां केएल राहुल को वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली. उनके लिए यह एक ऐसा अऩुभव था जिसके बारे में उन्होंने बात की है. राहुल ने बताया कि क्रिस गेल ने उन्हें इस झटके से कैसे उबारा. एक कार्यक्रम के दौरान बात करते हुए उन्होंने कहा, मुझे याद है कि दो हज़ार उन्नीस में विश्व कप खेला, इसके बाद हम सीरीज खेलने वेस्टइंडीज गए थे, विश्व कप में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन वेस्टइंडीज गए और मुझे बाहर कर दिया. मैंने क्रिस गेल को मैसेज किया. उन्होंने कहा पूल में आओ, मैं शराब पी रहा हूं. केएल राहुल ने कहा कि यह क्रिस गेल का तीन सौवां वनडे था. वह बहुत खुश थे उनके कुछ दोस्त भी थे. मैं पूल के पास गया वह आए और मेरे पास बैठ गए. क्रिस गेल ने मुझे पूछा तुम क्यों नहीं खेल रहे हो. मैंने क्रिस गेल से कहा कि आपको पता है. मैं स्पष्ट रूप से निराश था. क्योंकि मैं विश्व कप में खेला और यहां नहीं खेल रहा हूं. क्रिस गेल ने मुझसे कहा, देखिए आप हमेशा कह सकते हैं कि आप एक सौ कारणों के चलते नहीं खेल रहे हैं, लेकिन यह आपके हाथ में है कि आप खेलते हैं या नहीं, यदि आपके लिए सत्तर का स्कोर प्रर्याप्त नहीं है तो एक सौ पचास बनाएं, यदि आप एक सौ पचास बना रहे हैं वो प्रर्याप्त नहीं है तो दो सौ बनाएं, इस तरह आपको चीजों को देखने की जरूरत है. आपके लिए आईपीएल के सीजन में छः सौ रन प्रर्याप्त नहीं हैं तो आठ सौ बनाएं. जैसे आप विश्व कप में पचास, साठ का स्कोर करते रहे, आपको इसे परिवर्तित करना चाहिए और एक सौ-एक सौ बीस बनाना चाहिए फिर किसी की ताकत नहीं जो आपको खेलने से रोक सके. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को केंद्र गवर्नमेंट पर सियासी प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए बोला कि वह अडाणी मुद्दे को लेकर मुखर रूप से बोल रहे कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी की आवाज दबाना चाहती है.
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को केंद्र गवर्नमेंट पर सियासी प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए बोला कि वह अडाणी मुद्दे को लेकर मुखर रूप से बोल रहे कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी की आवाज दबाना चाहती है.
इसके साथ ही पायलट ने बोला कि राहुल गांधी को सजा सुनाए जाने से लेकर उसके बाद तक का सारा घटनाक्रम राष्ट्र के लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है.
पायलट ने जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाकों के मुद्दे में चार आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा बरी किए जाने को गंभीर मामला बताया.
स्वास्थ्य का अधिकार (आरटीएच) विधेयक के विरूद्ध निजी डॉक्टरों के आंदोलन पर पायलट ने बोला कि किसी भी पक्ष को अड़ियल रवैया नहीं रखना चाहिए.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि गवर्नमेंट की मंशा ठीक हो सकती है कि हम 'यूनिवर्सल हेल्थ' के लक्ष्य पर खरे उतरें. लेकिन आज जो हालात बने हैं, उसमें मुझे लगता है कि गवर्नमेंट को हड़ताली चिकित्सा कर्मियों की बात सुनकर कहीं न कहीं ऐसा रास्ता भी निकालना चाहिए कि आम जनता प्रभावित न हो. निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के रुख को भी सुना जाना चाहिए.
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राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को केंद्र गवर्नमेंट पर सियासी प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए बोला कि वह अडाणी मुद्दे को लेकर मुखर रूप से बोल रहे कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी की आवाज दबाना चाहती है. राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बृहस्पतिवार को केंद्र गवर्नमेंट पर सियासी प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए बोला कि वह अडाणी मुद्दे को लेकर मुखर रूप से बोल रहे कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी की आवाज दबाना चाहती है. इसके साथ ही पायलट ने बोला कि राहुल गांधी को सजा सुनाए जाने से लेकर उसके बाद तक का सारा घटनाक्रम राष्ट्र के लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है. पायलट ने जयपुर में सिलसिलेवार बम धमाकों के मुद्दे में चार आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा बरी किए जाने को गंभीर मामला बताया. स्वास्थ्य का अधिकार विधेयक के विरूद्ध निजी डॉक्टरों के आंदोलन पर पायलट ने बोला कि किसी भी पक्ष को अड़ियल रवैया नहीं रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि गवर्नमेंट की मंशा ठीक हो सकती है कि हम 'यूनिवर्सल हेल्थ' के लक्ष्य पर खरे उतरें. लेकिन आज जो हालात बने हैं, उसमें मुझे लगता है कि गवर्नमेंट को हड़ताली चिकित्सा कर्मियों की बात सुनकर कहीं न कहीं ऐसा रास्ता भी निकालना चाहिए कि आम जनता प्रभावित न हो. निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के रुख को भी सुना जाना चाहिए.
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कराचीः पीसीबी अध्यक्ष शहरयार खान ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज अगले महीने नहीं होने पर पूरे साल नहीं हो सकेगी। शहरयार ने कहा, समय पर सीरीज नहीं होने पर मुझे नहीं लगता कि यह अगले पूरे साल हो सकेगी क्योंकि दोनों टीमों की 2016 में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज और टी-20 विश्व कप दो अलग अलग बातें हैं।
शहरयार ने कहा, यह दो देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज और टी-20 विश्व कप आईसीसी का टूर्नामेंट है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि पीसीबी को मार्च में टी-20 विश्व कप के लिए टीम भारत भेजने के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। शहरयार ने कहा, हम हालात पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान के मुताल्लिक भारत के मौजूदा माहौल में हमें सरकार से इजाजत लेनी होगी कि क्या हालात टीम को वहां भेजने के लिए महफूज हैं।
श्रीलंका में संक्षिप्त द्विपक्षीय सीरीज को लेकर भारत सरकार द्वारा अभी तक मंजूरी नहीं दिए जाने से शहरयार निराश दिखे। उन्होंने कहा, मुझे पता है कि सीरीज के आयोजन की मेरी कोशिशों को लेकर कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन आखिर में हम इतना ही चाहते हैं कि या तो अभी यह सीरीज हो या हमें अगले एक साल इंतजार करना होगा। भारत को दोनों बोर्ड के बीच हुए एमओयू का सम्मान करना चाहिए।
शहरयार ने यह भी कहा कि भारत अगर सीरीज खेलने को राजी नहीं होता तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन वह दिवालिया नहीं हो जाएगा। उन्होंने कहा, अल्लाह के फजल से हमारी माली हालत अच्छी है। यह सीरीज नहीं होने से हमें नुकसान तो होगा, लेकिन इसके यह मायने नहीं है कि हम बिल्कुल तंगहाल हो जाएंगे। पीसीबी प्रमुख ने कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है और आईसीसी भी चाहती है कि सीरीज जल्दी हो। उन्होंने कहा, हम कुछ दिन और भारत के जवाब का इंतजार करेंगे जिसके बाद आगे बढ़ना होगा।
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कराचीः पीसीबी अध्यक्ष शहरयार खान ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज अगले महीने नहीं होने पर पूरे साल नहीं हो सकेगी। शहरयार ने कहा, समय पर सीरीज नहीं होने पर मुझे नहीं लगता कि यह अगले पूरे साल हो सकेगी क्योंकि दोनों टीमों की दो हज़ार सोलह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज और टी-बीस विश्व कप दो अलग अलग बातें हैं। शहरयार ने कहा, यह दो देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज और टी-बीस विश्व कप आईसीसी का टूर्नामेंट है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि पीसीबी को मार्च में टी-बीस विश्व कप के लिए टीम भारत भेजने के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। शहरयार ने कहा, हम हालात पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान के मुताल्लिक भारत के मौजूदा माहौल में हमें सरकार से इजाजत लेनी होगी कि क्या हालात टीम को वहां भेजने के लिए महफूज हैं। श्रीलंका में संक्षिप्त द्विपक्षीय सीरीज को लेकर भारत सरकार द्वारा अभी तक मंजूरी नहीं दिए जाने से शहरयार निराश दिखे। उन्होंने कहा, मुझे पता है कि सीरीज के आयोजन की मेरी कोशिशों को लेकर कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन आखिर में हम इतना ही चाहते हैं कि या तो अभी यह सीरीज हो या हमें अगले एक साल इंतजार करना होगा। भारत को दोनों बोर्ड के बीच हुए एमओयू का सम्मान करना चाहिए। शहरयार ने यह भी कहा कि भारत अगर सीरीज खेलने को राजी नहीं होता तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन वह दिवालिया नहीं हो जाएगा। उन्होंने कहा, अल्लाह के फजल से हमारी माली हालत अच्छी है। यह सीरीज नहीं होने से हमें नुकसान तो होगा, लेकिन इसके यह मायने नहीं है कि हम बिल्कुल तंगहाल हो जाएंगे। पीसीबी प्रमुख ने कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है और आईसीसी भी चाहती है कि सीरीज जल्दी हो। उन्होंने कहा, हम कुछ दिन और भारत के जवाब का इंतजार करेंगे जिसके बाद आगे बढ़ना होगा।
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- Movies सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली!
- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate?
स्पाइसी एग कैसरोल एक स्पेशल ब्रेकफास्ट रेसीपी है। ऐसा इसलिये क्योंकि एक तो यह झट से बन जाता है और दूसरा ये कि यह थोड़ा अलग सा है। आपको इसे बनाने में बिल्कुल भी समय नहीं लगेगा। यह मसालेदार इस लिये होता है क्योंकि इसमें अंडे के पीले भाग में मसाला मिलाया जाता है।
अंडा सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है इसलिये ब्रेकफास्ट में इसे खाना तो बनता ही है। इसमें ढेर सारा प्रोटीन होता है जो मासपेशियां बनाने के लिये बहुत उपयोगी है। तो अगर आप जिम जाते हैं तो स्पाइसी एग कैसरोल जरुर बनाएं।
- सबसे पहले अंडो को उबालिये, फिर छीलिये और दो भागो में काटिये।
- अब अंडे का पीला भाग निकालिये और उसे एक कटोरे में डालिये।
- इसे चम्मच से मसल लीजिये, फिर इसमें मसाले डालिये, काली मिर्च, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला और नमक।
- इसके बाद पीले भाग के मिश्रण में ऑलिव ऑयल और नींबू का रस मिलाइये।
- अब जब मिश्रण अच्छी तरह से मिल जाए तब चम्मच दृारा मिश्रण को निकाल कर खाली अंडे में भरिये।
- अब अंडे को कटी धनिया से सजा कर सर्व कीजिये।
GET THE BEST BOLDSKY STORIES!
Spicy boiled eggs is a special breakfast recipe. Firstly, because this egg casserole is slightly unusual and secondly because it is a very quick breakfast recipe.
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने असम के हिरासत केंद्रों में कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने के साथ ही निजी मुचलके की राशि भी एक लाख रुपये से घटाकर पांच हजार रुपये कर दी है.
बीते दो सप्ताह में मणिपुर में कम से कम पांच ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्होंने कोरोना संकट से निपटने को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली एन. बीरेन सिंह सरकार पर सवाल उठाए थे. सरकार की आलोचना पर खामियाज़ा भुगतने वालों में उपमुख्यमंत्री से लेकर सरकारी कर्मचारी और एक शोधार्थी भी शामिल हैं.
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने घोषणा की है कि त्रिपुरा में कोरोना संक्रमित लोगों के इलाज के दौरान किसी डॉक्टर या नर्स की मौत पर उनके परिवार वालों को रोज़गार मिलेगा.
कोरोनावायरस के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से जेल में बंद क़ैदियों की रिहाई के लिए एक पैनल गठित करने को कहा है. यह पैनल सात साल तक की सज़ा से संबंधित अपराधों के सज़ायाफ़्ता या इतने ही समय की सज़ा होने के अपराध के आरोपी विचाराधीन क़ैदियों की अंतरिम ज़मानत या पैरोल पर रिहाई के बारे में निर्णय देगा.
कोरोना वायरस के मद्देनज़र असम के एक गैर सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ऐसी ही राहत उन लोगों को भी दिए जाने की आवश्यकता है, जिन्हें फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी नागरिक घोषित किए जाने के बाद हिरासत में रखा गया है.
पुलिस के अनुसार, नगांव ज़िले के ढींग विधानसभा क्षेत्र से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक अमीनुल इस्लाम का एक कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे राज्य में कोरोना का इलाज कर रहे अस्पतालों और क्वारंटाइन सेंटरों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं.
अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने 19 मार्च को ऊपरी सुबानसिरी ज़िले में मैकमोहन रेखा के पास अस्पीला सेक्टर से 21 वर्षीय एक युवक का अपहरण कर लिया था, उसका अब तक कुछ पता नहीं चला है.
कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने 700 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है. इस कदम का स्वागत करते हुए एमेनस्टी इंडिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हिरासत केंद्रों में विदेशी घोषित किए गए और संदिग्ध नागरिकों को भी तत्काल रिहा किया जाए.
मुंबई के कलीना इलाके का मामला. पुलिस ने एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट के तहत अज्ञात बाइकर के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया. दिल्ली में बीते मार्च महीने में मणिपुर की ही एक अन्य युवती को कोरोना कहकर उस पर एक युवक ने पान थूक दिया था.
दीमापुर ज़िला प्रशासन ने एक अप्रैल की सुबह छह बजे से तीन अप्रैल, 2020 की मध्य रात्रि तक सभी दुकानों, वाणिज्यिक एवं निजी प्रतिष्ठानों को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिया है.
असम सरकार ने ऐलान किया है कि 58 लाख परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एक अप्रैल से निशुल्क चावल उपलब्ध कराए जाएंगे.
यह घटना रविवार रात मुखर्जी नगर के विजय नगर इलाके में हुई थी. आरोपी की पहचान 40 वर्षीय गौरव वोहरा के रूप में हुई है.
देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले बढ़कर तकरीबन 500 हुए. पूर्वोत्तर में संक्रमण का पहला मामला सामने आया. मणिपुर में 23 वर्षीय युवती को वायरस से संक्रमित पाया गया.
दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल कर रही हैं छात्रा. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस से आरोपी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने को कहा.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि असम के छह डिटेंशन सेंटर, जहां घोषित विदेशी या दोषी विदेशियों को रखा जाता है. इनमें 3331 लोगों को रखने की क्षमता है. इससे पहले सरकार ने बताया था कि बीते तीन साल में असम के डिटेंशन सेंटर में 29 लोगों की मौत हो चुकी है.
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने असम के हिरासत केंद्रों में कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने के साथ ही निजी मुचलके की राशि भी एक लाख रुपये से घटाकर पांच हजार रुपये कर दी है. बीते दो सप्ताह में मणिपुर में कम से कम पांच ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्होंने कोरोना संकट से निपटने को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली एन. बीरेन सिंह सरकार पर सवाल उठाए थे. सरकार की आलोचना पर खामियाज़ा भुगतने वालों में उपमुख्यमंत्री से लेकर सरकारी कर्मचारी और एक शोधार्थी भी शामिल हैं. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने घोषणा की है कि त्रिपुरा में कोरोना संक्रमित लोगों के इलाज के दौरान किसी डॉक्टर या नर्स की मौत पर उनके परिवार वालों को रोज़गार मिलेगा. कोरोनावायरस के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से जेल में बंद क़ैदियों की रिहाई के लिए एक पैनल गठित करने को कहा है. यह पैनल सात साल तक की सज़ा से संबंधित अपराधों के सज़ायाफ़्ता या इतने ही समय की सज़ा होने के अपराध के आरोपी विचाराधीन क़ैदियों की अंतरिम ज़मानत या पैरोल पर रिहाई के बारे में निर्णय देगा. कोरोना वायरस के मद्देनज़र असम के एक गैर सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ऐसी ही राहत उन लोगों को भी दिए जाने की आवश्यकता है, जिन्हें फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी नागरिक घोषित किए जाने के बाद हिरासत में रखा गया है. पुलिस के अनुसार, नगांव ज़िले के ढींग विधानसभा क्षेत्र से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक अमीनुल इस्लाम का एक कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे राज्य में कोरोना का इलाज कर रहे अस्पतालों और क्वारंटाइन सेंटरों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने उन्नीस मार्च को ऊपरी सुबानसिरी ज़िले में मैकमोहन रेखा के पास अस्पीला सेक्टर से इक्कीस वर्षीय एक युवक का अपहरण कर लिया था, उसका अब तक कुछ पता नहीं चला है. कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने सात सौ कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है. इस कदम का स्वागत करते हुए एमेनस्टी इंडिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हिरासत केंद्रों में विदेशी घोषित किए गए और संदिग्ध नागरिकों को भी तत्काल रिहा किया जाए. मुंबई के कलीना इलाके का मामला. पुलिस ने एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट के तहत अज्ञात बाइकर के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया. दिल्ली में बीते मार्च महीने में मणिपुर की ही एक अन्य युवती को कोरोना कहकर उस पर एक युवक ने पान थूक दिया था. दीमापुर ज़िला प्रशासन ने एक अप्रैल की सुबह छह बजे से तीन अप्रैल, दो हज़ार बीस की मध्य रात्रि तक सभी दुकानों, वाणिज्यिक एवं निजी प्रतिष्ठानों को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिया है. असम सरकार ने ऐलान किया है कि अट्ठावन लाख परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एक अप्रैल से निशुल्क चावल उपलब्ध कराए जाएंगे. यह घटना रविवार रात मुखर्जी नगर के विजय नगर इलाके में हुई थी. आरोपी की पहचान चालीस वर्षीय गौरव वोहरा के रूप में हुई है. देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले बढ़कर तकरीबन पाँच सौ हुए. पूर्वोत्तर में संक्रमण का पहला मामला सामने आया. मणिपुर में तेईस वर्षीय युवती को वायरस से संक्रमित पाया गया. दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल कर रही हैं छात्रा. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस से आरोपी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने को कहा. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि असम के छह डिटेंशन सेंटर, जहां घोषित विदेशी या दोषी विदेशियों को रखा जाता है. इनमें तीन हज़ार तीन सौ इकतीस लोगों को रखने की क्षमता है. इससे पहले सरकार ने बताया था कि बीते तीन साल में असम के डिटेंशन सेंटर में उनतीस लोगों की मौत हो चुकी है.
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३. स्वरो की अनुनासिकता
इतिहास के दौरान में कुछ अनुनासिक स्वर प्रक्ट हुए हैं, जो प्राचीन परवर्ती अनुनासिक स्पर्श से नही निवले । यह उस समय होता है जब कि स्वरो की प्रधान अनुनासिक ध्वनि अनुकूल स्थिति में प्रकट होने लगती है, और मुख्यत जब वह दीर्घ हो जाती है, और जब वह अ के साथ प्रवट होती है [ सेवांतनेअर द लोकेले प्रतीक दै होत एत्यूद ( उच्च अध्ययन की व्यावहारिक शिक्षण संस्था की अर्द्धशती), १० ६१]।
वेद के समय से ही यह चला आ रहा है कि कुछ अन्त्य स्वर जिनकी स्थिरता आधे ने अथवा सामान्य दीर्घ के द्विगुणित से ( अर्थात् प्लुति ) अधिक हो जाती है, वे अनुमासिक हो जाते हैं, इसी प्रकार विवृत्ति या विच्छेद के अन्तर्गत कुछ अ हो जाते है (और केवल दीर्घ या प्रसारित ही नहीं 1 ७९२ अ त्रिष्टुभ् के अंत में अभिनन्त में एंवै}, निस्सन्देह विस्मयादिबोधक शब्द पविन ओम्, प्राचीनकालीन साधारण ध्वनि ( औं । ), की व्युत्पत्ति यही है । यह केवल शैली की अपेक्षा कुछ और है, जिसकी तुलना मलावार की अभिनेत्रियों द्वारा किये गये प्राकृत के अनुनासिक उच्चारण से की जा सकती है (पिशरोती, बी० एस० ओ० एस०, V, १० ३०९), स्वय पाणिनि ने वाक्याश के अत में ह्रस्व और दीर्घ अ, इ और उ की अनुनासिकता स्वीकार की है। यही बात आधुनिक युग तक चली आती है, म०दि० बहु० औं (अथ-), तरी (वहि), सि० प्रिं (प्रिय-) में । आधुनिक भाषाओं में सभी दीर्घ स्वर, मध्य वी भांति हो, अनुनासिक ध्वनि विकसित करने की प्रवृत्ति प्रकट करते हैं, म० वेंस (केश), हिं० ऊँट् ( उष्ट्र - ), सौनु (सर्प - ), आँख (अक्षि), ऊँचा ( उच्च ), पु० हि० तेल (तैल ) । ये अनियमित रूप से बँटे हुए हैं, बगाली में, जिसमें हि० पोयो (पुस्तक - ) के विरुद्ध पुँथी है हि० साँप् (सर्प-) के विरुद्ध सापू मिलता हूँ, किन्तु जो कुछ लिखा जाता है और जो उच्चारण है उसमें अन्तर कैसे किया जाय ?
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तीन. स्वरो की अनुनासिकता इतिहास के दौरान में कुछ अनुनासिक स्वर प्रक्ट हुए हैं, जो प्राचीन परवर्ती अनुनासिक स्पर्श से नही निवले । यह उस समय होता है जब कि स्वरो की प्रधान अनुनासिक ध्वनि अनुकूल स्थिति में प्रकट होने लगती है, और मुख्यत जब वह दीर्घ हो जाती है, और जब वह अ के साथ प्रवट होती है [ सेवांतनेअर द लोकेले प्रतीक दै होत एत्यूद , दस इकसठ]। वेद के समय से ही यह चला आ रहा है कि कुछ अन्त्य स्वर जिनकी स्थिरता आधे ने अथवा सामान्य दीर्घ के द्विगुणित से अधिक हो जाती है, वे अनुमासिक हो जाते हैं, इसी प्रकार विवृत्ति या विच्छेद के अन्तर्गत कुछ अ हो जाते है , की व्युत्पत्ति यही है । यह केवल शैली की अपेक्षा कुछ और है, जिसकी तुलना मलावार की अभिनेत्रियों द्वारा किये गये प्राकृत के अनुनासिक उच्चारण से की जा सकती है , स्वय पाणिनि ने वाक्याश के अत में ह्रस्व और दीर्घ अ, इ और उ की अनुनासिकता स्वीकार की है। यही बात आधुनिक युग तक चली आती है, मशून्यदिशून्य बहुशून्य औं , तरी , सिशून्य प्रिं में । आधुनिक भाषाओं में सभी दीर्घ स्वर, मध्य वी भांति हो, अनुनासिक ध्वनि विकसित करने की प्रवृत्ति प्रकट करते हैं, मशून्य वेंस , हिंशून्य ऊँट् , सौनु , आँख , ऊँचा , पुशून्य हिशून्य तेल । ये अनियमित रूप से बँटे हुए हैं, बगाली में, जिसमें हिशून्य पोयो के विरुद्ध पुँथी है हिशून्य साँप् के विरुद्ध सापू मिलता हूँ, किन्तु जो कुछ लिखा जाता है और जो उच्चारण है उसमें अन्तर कैसे किया जाय ?
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[ फारिका ६७
चतुर्थ द्वार है। प्रथम और द्वितीय द्वार नेपथ्यगृहसे सम्बद्ध है। इसी प्रकार तृतीय द्वार भी नेपथ्यगृहसे सम्वद्ध है । इसलिए ९६वें श्लोकमे वरिंगत नेपथ्यगृह वाले दो द्वारोके बाद उससे सम्वद्ध तृतीय द्वारका वर्णन होना चाहिए । और उसके बाद 'जनप्रवेशन' अर्थात् सामाजिक जनोके प्रवेशकेलिए नियत चतुर्थ द्वारका वर्णन होना चाहिए । इस दृष्टि से यदि विचार किया जाय तो ९७ वें श्लोक के पूर्वार्द्ध उत्तरार्द्ध भागोके क्रममें परिवर्तन करना होगा। इस श्लोक के पूर्वार्द्ध भागमें 'जनप्रवेशन' अर्थात् सामाजिकोके प्रवेश वाले चतुर्थं द्वारका वर्णन किया गया है इसलिए उसको वादमे और पूर्व-सस्करणो में जो भाग उत्तराद्धंके रूप में छपा है उसको पहिले अर्थात् पूर्वार्द्ध के रूप में रखना चाहिए ।
पाठसमीक्षा - इस क्रमपरिवर्तनके अतिरिक्त तृतीय द्वारका वर्णन करने वाले उत्तरार्द्ध भागके पाठ में कुछ और भी सशोधन करने होगे । तृतीय द्वारका प्रयोजन अभिनवगुप्तने यह बतलाया है कि उस द्वारसे नट परिवार नाटघ-मण्डपके भीतर प्रवेश करता है । इस दृष्टि से इस तृतीय द्वारका स्थान नेपथ्यगृह के पीछेकी भोर अर्थात् नाट्य-मण्डपके पश्चिम भागमें होना चाहिए । ऐसी दशा में 'रगस्याभिमुख कार्यं की सगति ठीक नहीं लगती है । नेपथ्यगृहके पश्चिमकी ओर जो द्वार बनाया जायगा उसको 'रगस्याभिमुख' रगके सामनेका द्वार साधारणतः नही कहा जा सकता है । नेपथ्यगृहके सामनेका भाग कहा जा सकता है । रगमण्डपके सामनेकी भोर तो मण्डपका मुख्य द्वार सामाजिक जनोके प्रवेशकेलिए बनना ही है । नटजनोका नेपथ्यगृह में प्रवेश कराने वाला तृतीय द्वार नाट्य-मण्डपके पीछे की ओर जहाँ बनता है उसे नेपथ्यगृह के सामने कहा जा सकता है । इसलिए यहाँ 'रगस्याभिमुख कार्यं' के स्थानपर 'नेपथ्याभिमुख कार्य पाठ अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है । इसके आगे 'द्वितीय द्वारमेव तु' इस प्रकारका पाठ पूर्व-सस्करणो में छपा है । किन्तु वह भी ठोक प्रतीत नही होता है । यह द्वार द्वितीय द्वार नही अपितु तृतीय द्वार है । अत 'द्वितीय' द्वारमेव तु' के स्थानपर 'तृतीय' द्वारमेव तु' पाठ होना चाहिए । इस प्रकार इन सब बातो को ध्यान में रखनेपर इस श्लोकका पाठ निम्न प्रकार बनता है -
नेपथ्याभिमुख कार्यं तृतीय द्वारमेव तु । जनप्रवेशन चान्यदाभिमुख्येन कारयेत् ॥
ऐसा पाठ रखने से श्लोकका अर्थ पूर्ण तथा स्पष्ट हो जाता है । उस दशा में भी नेपथ्याभिमुख' शब्दकी विशेष व्यास्या करनी होगी। किन्तु 'रगस्याभिमुख कार्यं द्वितीय द्वारमेव तु' इस पाठकी तो कोई सगति ही नही लगती है। 'नेपथ्याभिमुख कार्य तृतीय द्वारमेव तु' यह पाठ उसकी अपेक्षा कही अधिक सगत बैठता है अत हमने सशोधित रूप में इसी पाठको प्रस्तुत किया है ।
पाठसमीक्षा - यह भरतके मूल इलोकके पाठका संशोधन हुआ । किन्तु इस स्थलकी अभिनवभारती के पाठमें भी कुछ त्रुटि है । पूर्व-सस्करणो में इस प्रसगकी अभिनव भारतीका पाठ निम्न प्रकार छपा हैजनप्रवेशन च तृतीय द्वार नेपथ्यमृहस्य येन भार्यामादाय नटपरिवार प्रविशति । अन्यत्तु द्वारमाभिरुयेन पूर्वस्या दिशि कुर्यात् । द्वारवृत्या सामाजिकजनप्रवेशार्थम् ।
इस पाठमे 'जनप्रवेशनच' पाठ ग्रस्थानमें छप गया है । इसे 'अन्यत्तु' के बाद रखना चाहिए । उस दशा में 'अन्यन्तु जनप्रवेशन द्वारमाभिमुरयेन पूर्वस्या दिशि वुर्यात् यह सुसगत पाठ बन जाता है । मत हमने संशोधित रुपये इसी पाठको प्रस्तुत किया है ।
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[ फारिका सरसठ चतुर्थ द्वार है। प्रथम और द्वितीय द्वार नेपथ्यगृहसे सम्बद्ध है। इसी प्रकार तृतीय द्वार भी नेपथ्यगृहसे सम्वद्ध है । इसलिए छियानवेवें श्लोकमे वरिंगत नेपथ्यगृह वाले दो द्वारोके बाद उससे सम्वद्ध तृतीय द्वारका वर्णन होना चाहिए । और उसके बाद 'जनप्रवेशन' अर्थात् सामाजिक जनोके प्रवेशकेलिए नियत चतुर्थ द्वारका वर्णन होना चाहिए । इस दृष्टि से यदि विचार किया जाय तो सत्तानवे वें श्लोक के पूर्वार्द्ध उत्तरार्द्ध भागोके क्रममें परिवर्तन करना होगा। इस श्लोक के पूर्वार्द्ध भागमें 'जनप्रवेशन' अर्थात् सामाजिकोके प्रवेश वाले चतुर्थं द्वारका वर्णन किया गया है इसलिए उसको वादमे और पूर्व-सस्करणो में जो भाग उत्तराद्धंके रूप में छपा है उसको पहिले अर्थात् पूर्वार्द्ध के रूप में रखना चाहिए । पाठसमीक्षा - इस क्रमपरिवर्तनके अतिरिक्त तृतीय द्वारका वर्णन करने वाले उत्तरार्द्ध भागके पाठ में कुछ और भी सशोधन करने होगे । तृतीय द्वारका प्रयोजन अभिनवगुप्तने यह बतलाया है कि उस द्वारसे नट परिवार नाटघ-मण्डपके भीतर प्रवेश करता है । इस दृष्टि से इस तृतीय द्वारका स्थान नेपथ्यगृह के पीछेकी भोर अर्थात् नाट्य-मण्डपके पश्चिम भागमें होना चाहिए । ऐसी दशा में 'रगस्याभिमुख कार्यं की सगति ठीक नहीं लगती है । नेपथ्यगृहके पश्चिमकी ओर जो द्वार बनाया जायगा उसको 'रगस्याभिमुख' रगके सामनेका द्वार साधारणतः नही कहा जा सकता है । नेपथ्यगृहके सामनेका भाग कहा जा सकता है । रगमण्डपके सामनेकी भोर तो मण्डपका मुख्य द्वार सामाजिक जनोके प्रवेशकेलिए बनना ही है । नटजनोका नेपथ्यगृह में प्रवेश कराने वाला तृतीय द्वार नाट्य-मण्डपके पीछे की ओर जहाँ बनता है उसे नेपथ्यगृह के सामने कहा जा सकता है । इसलिए यहाँ 'रगस्याभिमुख कार्यं' के स्थानपर 'नेपथ्याभिमुख कार्य पाठ अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है । इसके आगे 'द्वितीय द्वारमेव तु' इस प्रकारका पाठ पूर्व-सस्करणो में छपा है । किन्तु वह भी ठोक प्रतीत नही होता है । यह द्वार द्वितीय द्वार नही अपितु तृतीय द्वार है । अत 'द्वितीय' द्वारमेव तु' के स्थानपर 'तृतीय' द्वारमेव तु' पाठ होना चाहिए । इस प्रकार इन सब बातो को ध्यान में रखनेपर इस श्लोकका पाठ निम्न प्रकार बनता है - नेपथ्याभिमुख कार्यं तृतीय द्वारमेव तु । जनप्रवेशन चान्यदाभिमुख्येन कारयेत् ॥ ऐसा पाठ रखने से श्लोकका अर्थ पूर्ण तथा स्पष्ट हो जाता है । उस दशा में भी नेपथ्याभिमुख' शब्दकी विशेष व्यास्या करनी होगी। किन्तु 'रगस्याभिमुख कार्यं द्वितीय द्वारमेव तु' इस पाठकी तो कोई सगति ही नही लगती है। 'नेपथ्याभिमुख कार्य तृतीय द्वारमेव तु' यह पाठ उसकी अपेक्षा कही अधिक सगत बैठता है अत हमने सशोधित रूप में इसी पाठको प्रस्तुत किया है । पाठसमीक्षा - यह भरतके मूल इलोकके पाठका संशोधन हुआ । किन्तु इस स्थलकी अभिनवभारती के पाठमें भी कुछ त्रुटि है । पूर्व-सस्करणो में इस प्रसगकी अभिनव भारतीका पाठ निम्न प्रकार छपा हैजनप्रवेशन च तृतीय द्वार नेपथ्यमृहस्य येन भार्यामादाय नटपरिवार प्रविशति । अन्यत्तु द्वारमाभिरुयेन पूर्वस्या दिशि कुर्यात् । द्वारवृत्या सामाजिकजनप्रवेशार्थम् । इस पाठमे 'जनप्रवेशनच' पाठ ग्रस्थानमें छप गया है । इसे 'अन्यत्तु' के बाद रखना चाहिए । उस दशा में 'अन्यन्तु जनप्रवेशन द्वारमाभिमुरयेन पूर्वस्या दिशि वुर्यात् यह सुसगत पाठ बन जाता है । मत हमने संशोधित रुपये इसी पाठको प्रस्तुत किया है ।
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Tejashwi Yadav Baby: इस टाइम लालू के परिवार में खुशी का माहौल है। दरअसल लालू प्रसाद के छोटे बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पिता बन गए हैं। सोमवार को डिप्टी तेजस्वी यादव को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई है, जिसके बाद लालू परिवार में खुशियों का माहौल है। तेजस्वी ने इसे ईश्वर का उपहार बताया और ट्विटर के जरिये तस्वीर शेयर करते हुये अपने पिता बनने की जानकारी दी।
बता दें कि नवरात्रि के मौके पर लालू-राबड़ी के घर पोती के आगमन से परिवार में खुशियों का माहौल है। परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे को बधाई देने में लगे हैं। बता दें, आज सुबह तेजस्वी यादव और राजश्री को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई है। राजश्री कुछ दिन पहले ही अस्पताल भर्ती हुई थी जिसके बाद राबड़ी देवी पटना से दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं। आज राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती समेत पूरा परिवार राजश्री के साथ अस्पताल मौजूद रहा।
पुत्री के जन्म की खुशियां बांटते हुए तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट कर लिखा- ईश्वर ने आनंदित होकर पुत्री रत्न के रूप में उपहार भेजा है। वहीं बहन रोहिणी आचार्य ने पोस्ट कर खुशी जताई है। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के पिता बनने के साथ ही सबसे पहले बहन रोहिणी आचार्य ने पुत्री को हाथ में लिए हुए तेजस्वी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा- भाई-भाभी के चेहरे पर खिली मुस्कान रहे,मेरे घर में खुशियों का सदा यूँही वास रहे, मन सुख के सागर में गोते भरे,पापा बनने की खुशी में भाई तेजस्वी के चेहरे पे ऐसी खुशियां झलके। इसके बाद इस बात की जानकारी देते हुए की उतरी रत्न की प्राप्ति हुई है।
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Tejashwi Yadav Baby: इस टाइम लालू के परिवार में खुशी का माहौल है। दरअसल लालू प्रसाद के छोटे बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पिता बन गए हैं। सोमवार को डिप्टी तेजस्वी यादव को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई है, जिसके बाद लालू परिवार में खुशियों का माहौल है। तेजस्वी ने इसे ईश्वर का उपहार बताया और ट्विटर के जरिये तस्वीर शेयर करते हुये अपने पिता बनने की जानकारी दी। बता दें कि नवरात्रि के मौके पर लालू-राबड़ी के घर पोती के आगमन से परिवार में खुशियों का माहौल है। परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे को बधाई देने में लगे हैं। बता दें, आज सुबह तेजस्वी यादव और राजश्री को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई है। राजश्री कुछ दिन पहले ही अस्पताल भर्ती हुई थी जिसके बाद राबड़ी देवी पटना से दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं। आज राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती समेत पूरा परिवार राजश्री के साथ अस्पताल मौजूद रहा। पुत्री के जन्म की खुशियां बांटते हुए तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट कर लिखा- ईश्वर ने आनंदित होकर पुत्री रत्न के रूप में उपहार भेजा है। वहीं बहन रोहिणी आचार्य ने पोस्ट कर खुशी जताई है। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के पिता बनने के साथ ही सबसे पहले बहन रोहिणी आचार्य ने पुत्री को हाथ में लिए हुए तेजस्वी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा- भाई-भाभी के चेहरे पर खिली मुस्कान रहे,मेरे घर में खुशियों का सदा यूँही वास रहे, मन सुख के सागर में गोते भरे,पापा बनने की खुशी में भाई तेजस्वी के चेहरे पे ऐसी खुशियां झलके। इसके बाद इस बात की जानकारी देते हुए की उतरी रत्न की प्राप्ति हुई है।
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रियादः सऊदी अरब ने अचानक इजरायली उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया।
इसकारण दुबई के लिए रवाना होने से पहले बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायल एयरलाइंस की उड़ान में पांच घंटे की देरी हुई।
फिलहाल सऊदी अरब ने इसकी कोई वजह नहीं जाहिर की है। इजरायल की उड़ान स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे उड़ान भरने वाली थी।
लेकिन सऊदी अरब ने आवश्यक परमिट देने से इनकार कर दिया।
बाद में अल इजरायल की फ्लाइट मंगलवार दोपहर को सऊदी हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति के साथ दुबई के लिए रवाना हुई थी।
सऊदी अरब ने परमिट क्यों नहीं दिया, इसकी वजह पता नहीं चल सकी है।
बहरहाल, नवंबर में, सऊदी अरब ने कहा था कि वहां इजरायल की उड़ानों को दुबई के रास्ते में अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देने वाले हैं, लेकिन मंगलवार को तेल अवीव से दुबई की पहली उड़ान भरने के कुछ घंटे पहले यह फैसला किया गया।
सऊदी अरब के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति के बिना तेल अवीव-दुबई मार्ग इजरायल से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उड़ानों के लिए मुफीद नहीं होता है।
अगर सऊदी अरब के बजाय दूसरा रास्ता चुना जाए,तब इजरायल से दुबई पहुंचने में तीन के बजाय आठ घंटे से अधिक का समय लगता है।
इजरायल और यूएई के बीच वाणिज्यिक उड़ानें अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद शुरू हुई थीं।
इस समझौता के चलते इजरायल और यूएई के बीच रिश्ते सामान्य हो गए थे। बाद में मोरक्को और सूडान के साथ बहरीन भी ऐतिहासिक सौदे में शामिल हो गया था।
इजरायल के साथ अरब देशों यूएई, मोरक्को, सूडान और बहरीन ने पिछले साल 15 सितंबर को अब्राहम समझौता किया था।
हालांकि इस समझौते में सऊदी अरब शामिल नहीं था।
सऊदी अरब ने अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल करने की अनुमति न देने का यह फैसला उस समय किया है, जब फिलिस्तीन-इजरायल के बीच 11 दिनों के संघर्ष के बाद सीजफायर का ऐलान किया गया है।
सीजफायर के ऐलान के साथ ही इजरायल के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो गईं।
ऐसा पहली बार हुआ था जब हमास के रॉकेट हमलों के बाद तेल अवीव से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद करनी पड़ी थीं।
इस बीच, अमेरिका की एयरलाइन कंपनियों यूनाइडेट, डेल्टा और अमेरिकन ने कहा कि इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद वे तेल अवीव तक अपनी उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू कर रहे हैं।
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रियादः सऊदी अरब ने अचानक इजरायली उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इसकारण दुबई के लिए रवाना होने से पहले बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायल एयरलाइंस की उड़ान में पांच घंटे की देरी हुई। फिलहाल सऊदी अरब ने इसकी कोई वजह नहीं जाहिर की है। इजरायल की उड़ान स्थानीय समयानुसार सुबह नौ बजे उड़ान भरने वाली थी। लेकिन सऊदी अरब ने आवश्यक परमिट देने से इनकार कर दिया। बाद में अल इजरायल की फ्लाइट मंगलवार दोपहर को सऊदी हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति के साथ दुबई के लिए रवाना हुई थी। सऊदी अरब ने परमिट क्यों नहीं दिया, इसकी वजह पता नहीं चल सकी है। बहरहाल, नवंबर में, सऊदी अरब ने कहा था कि वहां इजरायल की उड़ानों को दुबई के रास्ते में अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देने वाले हैं, लेकिन मंगलवार को तेल अवीव से दुबई की पहली उड़ान भरने के कुछ घंटे पहले यह फैसला किया गया। सऊदी अरब के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति के बिना तेल अवीव-दुबई मार्ग इजरायल से संयुक्त अरब अमीरात के उड़ानों के लिए मुफीद नहीं होता है। अगर सऊदी अरब के बजाय दूसरा रास्ता चुना जाए,तब इजरायल से दुबई पहुंचने में तीन के बजाय आठ घंटे से अधिक का समय लगता है। इजरायल और यूएई के बीच वाणिज्यिक उड़ानें अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद शुरू हुई थीं। इस समझौता के चलते इजरायल और यूएई के बीच रिश्ते सामान्य हो गए थे। बाद में मोरक्को और सूडान के साथ बहरीन भी ऐतिहासिक सौदे में शामिल हो गया था। इजरायल के साथ अरब देशों यूएई, मोरक्को, सूडान और बहरीन ने पिछले साल पंद्रह सितंबर को अब्राहम समझौता किया था। हालांकि इस समझौते में सऊदी अरब शामिल नहीं था। सऊदी अरब ने अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल करने की अनुमति न देने का यह फैसला उस समय किया है, जब फिलिस्तीन-इजरायल के बीच ग्यारह दिनों के संघर्ष के बाद सीजफायर का ऐलान किया गया है। सीजफायर के ऐलान के साथ ही इजरायल के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो गईं। ऐसा पहली बार हुआ था जब हमास के रॉकेट हमलों के बाद तेल अवीव से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद करनी पड़ी थीं। इस बीच, अमेरिका की एयरलाइन कंपनियों यूनाइडेट, डेल्टा और अमेरिकन ने कहा कि इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद वे तेल अवीव तक अपनी उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू कर रहे हैं।
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यशवंत गंजीर - कुरुद। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम सेमरा (सेंनचुवा)में शुक्रवार रात अपनी पत्नी की हत्या कर फरार गया था। जिसे पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा।
मिली जानकारी के अनुसार, कुरुद थानांतर्गत ग्राम सेमरा(सेंनचुवा )में कोटवार ने शनिवार सुबह इस घटना की सूचना दी कि गांव के जीवन सेन पिता गुहलेद राम सेन ने अपनी पत्नी सुलेखा बाई सेन 47 वर्ष की सिर में किसी वजनी वस्तु से वार कर बड़ी निर्दयता पूर्वक हत्या कर दी है। इसके बाद इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पहुंचे। जो मौका मुआयना किया। घर के खाट में पत्नी सुलेखा की लाश पड़ी थी। जिसके सिर में किसी वजनी वस्तु के संघातिक वार से सिर कुचल गया है।
पुलिस ने बताया कि, आरोपी जीवन लाल सेन 50 साल कोई कामकाज नही करता था। उसके दो लड़के लीलेश कुमार सेन 32 साल विवाहित और दूसरा लेमन कुमार सेन 29 साल अविवाहित है जो उनसे अलग रह दूसरे गांव में काम कर जीवन यापन करते हैं। माता पिता भी उनसे अलग रहता है। घर मे सिर्फ दोनो पति पत्नी रहते थे। 17 मार्च को दोनो में किसी बात को लेकर विवाद हुआ। जिसमें जीवन ने गुस्से में आकर किसी वजनी वस्तु से सिर में वार कर पत्नी की नृशंस हत्या कर दी और फरार हो गया।
आरोपी पति हत्या की वारदात को अंजाम देक कुरुद के समीप गांव भोथली में अपने रिश्तेदार के घर छुपा था। जिसे दिनभर तलाशबीन करने के बाद पुलिस ने देर शाम घेराबंदी कर पकड़ा लिया गया है। बहरहाल आरोपी के खिलाफ धारा 302 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्यवाही की गई है। हत्या की वजह क्या है उसका खुलासा आज पुलिस करेगी।
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यशवंत गंजीर - कुरुद। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम सेमरा में शुक्रवार रात अपनी पत्नी की हत्या कर फरार गया था। जिसे पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा। मिली जानकारी के अनुसार, कुरुद थानांतर्गत ग्राम सेमरामें कोटवार ने शनिवार सुबह इस घटना की सूचना दी कि गांव के जीवन सेन पिता गुहलेद राम सेन ने अपनी पत्नी सुलेखा बाई सेन सैंतालीस वर्ष की सिर में किसी वजनी वस्तु से वार कर बड़ी निर्दयता पूर्वक हत्या कर दी है। इसके बाद इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पहुंचे। जो मौका मुआयना किया। घर के खाट में पत्नी सुलेखा की लाश पड़ी थी। जिसके सिर में किसी वजनी वस्तु के संघातिक वार से सिर कुचल गया है। पुलिस ने बताया कि, आरोपी जीवन लाल सेन पचास साल कोई कामकाज नही करता था। उसके दो लड़के लीलेश कुमार सेन बत्तीस साल विवाहित और दूसरा लेमन कुमार सेन उनतीस साल अविवाहित है जो उनसे अलग रह दूसरे गांव में काम कर जीवन यापन करते हैं। माता पिता भी उनसे अलग रहता है। घर मे सिर्फ दोनो पति पत्नी रहते थे। सत्रह मार्च को दोनो में किसी बात को लेकर विवाद हुआ। जिसमें जीवन ने गुस्से में आकर किसी वजनी वस्तु से सिर में वार कर पत्नी की नृशंस हत्या कर दी और फरार हो गया। आरोपी पति हत्या की वारदात को अंजाम देक कुरुद के समीप गांव भोथली में अपने रिश्तेदार के घर छुपा था। जिसे दिनभर तलाशबीन करने के बाद पुलिस ने देर शाम घेराबंदी कर पकड़ा लिया गया है। बहरहाल आरोपी के खिलाफ धारा तीन सौ दो के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्यवाही की गई है। हत्या की वजह क्या है उसका खुलासा आज पुलिस करेगी।
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जिंदगी में कई मौके ऐसे आते हैं जब आपको-हमको, हर किसी को जरूरत पड़ती है सोचने की। इंसान ये सोचता है कि वो क्या कर रहा है, या फिर क्या उसे करना चाहिए। एक उधेड़बुन चल जाती है। इंसान के सामने कई सवाल खड़े हो जाते हैं। कई बार तो बंदा खुद को कोसने लगता है। कई बार हार जाता है। पर इसी बीच कुछ असल जिंदगी के सीन सामने आ जाते हैं। जो आपको अहसास करवाते हैं कि जिनके साथ कुदरत ने, दुनिया ने इतनी बुरी की उन्होंने हार नहीं मानी। तो आप हार क्यों मानो। एक वीडियो सामने आया है। बैसाखी हाथ में लेकर बच्चा फुटबॉल खेल रहा है। जीना इसी का नाम है।
तो देखा कि कुणाल हाथ में बैसाखी थामें एक ही पैर से फुटबॉल की किक मारते हैं। यहां तक कि वो बड़े सही तरीके से फुटबॉल खेल रहे हैं। कुणाल की कहानी बताती है कि जिंदगी हारने का नाम तो नहीं। इतनी छोटी उम्र में महज 45 सेकेंड का ये वीडियो जिंदगी के प्रति ना जाने कितनों की सोच बदलने का दम रखता है। कुछ भी हो जाए दोस्तों लेकिन लाइफ में हिम्मत नहीं हारनी, बल्कि उसे एंजॉय करना है। सामना करना है उसका। क्योंकि वो भी एक पार्ट है लाइफ का।
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जिंदगी में कई मौके ऐसे आते हैं जब आपको-हमको, हर किसी को जरूरत पड़ती है सोचने की। इंसान ये सोचता है कि वो क्या कर रहा है, या फिर क्या उसे करना चाहिए। एक उधेड़बुन चल जाती है। इंसान के सामने कई सवाल खड़े हो जाते हैं। कई बार तो बंदा खुद को कोसने लगता है। कई बार हार जाता है। पर इसी बीच कुछ असल जिंदगी के सीन सामने आ जाते हैं। जो आपको अहसास करवाते हैं कि जिनके साथ कुदरत ने, दुनिया ने इतनी बुरी की उन्होंने हार नहीं मानी। तो आप हार क्यों मानो। एक वीडियो सामने आया है। बैसाखी हाथ में लेकर बच्चा फुटबॉल खेल रहा है। जीना इसी का नाम है। तो देखा कि कुणाल हाथ में बैसाखी थामें एक ही पैर से फुटबॉल की किक मारते हैं। यहां तक कि वो बड़े सही तरीके से फुटबॉल खेल रहे हैं। कुणाल की कहानी बताती है कि जिंदगी हारने का नाम तो नहीं। इतनी छोटी उम्र में महज पैंतालीस सेकेंड का ये वीडियो जिंदगी के प्रति ना जाने कितनों की सोच बदलने का दम रखता है। कुछ भी हो जाए दोस्तों लेकिन लाइफ में हिम्मत नहीं हारनी, बल्कि उसे एंजॉय करना है। सामना करना है उसका। क्योंकि वो भी एक पार्ट है लाइफ का।
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रिलायंस जियो ने उपभोक्ताओं के बजट को ध्यान में रखकर 199 रुपये वाले प्लान को बाजार में उतारा है। उपभोक्ता को इस पैक में प्रतिदिन 1. 5 जीबी डाटा ( कुल 42 जीबी डाटा) मिलेगा। साथ ही यूजर्स जियो-टू-जियो नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग कर सकेंगे। हालांकि, कंपनी अन्य नेटवर्क पर कॉल करने के लिए 1,000 एफयूपी मिनट के साथ 100 एसएमएस देगी। वहीं, इस पैक की समय सीमा 28 दिनों की है।
कंपनी ने 248 रुपये वाला प्लान मार्केट में उपलब्ध है। यूजर्स को इस पैक में प्रतिदिन 1. 5 जीबी डाटा मिलेगा। साथ ही यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर सकेंगे। इसके अलावा कंपनी यूजर्स को एयरटेल एक्सट्रीम प्रीमियम एप का एक्सेस देगी, जिसमें लाइव टीवी, 10,000 फिल्म और न्यूज की सेवा शामिल हैं। वहीं, इस पैक की वैधता 28 दिनों की है।
कंपनी ने 249 रुपये वाला प्रीपेड प्लान यूजर्स के लिए पेश किया है। यूजर्स को इस प्लान में रोजाना 1. 5 जीबी डाटा और 100 एसएमएस की सुविधा मिलेगी। साथ ही यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग कर सकेंगे। वहीं, इस पैक की समय सीमा 28 दिनों की है।
आपको जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के तीनों प्रीपेड प्लांस में 28 दिनों की वैधता मिलेगी। इसके साथ ही तीनों कंपनियां आपको रोजाना 1. 5 जीबी डाटा और एसएमएस की सुविधा देगी। वहीं, जियो के प्लान की बात करें तो आपको कम कीमत में सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए आपको आईयूसी चार्ज देना होगा। तो दूसरी तरफ एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के प्लान में आप किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर सकेंगे। हालांकि, इन दोनों प्लांस के लिए आपको जियो की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।
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रिलायंस जियो ने उपभोक्ताओं के बजट को ध्यान में रखकर एक सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान को बाजार में उतारा है। उपभोक्ता को इस पैक में प्रतिदिन एक. पाँच जीबी डाटा मिलेगा। साथ ही यूजर्स जियो-टू-जियो नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग कर सकेंगे। हालांकि, कंपनी अन्य नेटवर्क पर कॉल करने के लिए एक,शून्य एफयूपी मिनट के साथ एक सौ एसएमएस देगी। वहीं, इस पैक की समय सीमा अट्ठाईस दिनों की है। कंपनी ने दो सौ अड़तालीस रुपयापये वाला प्लान मार्केट में उपलब्ध है। यूजर्स को इस पैक में प्रतिदिन एक. पाँच जीबी डाटा मिलेगा। साथ ही यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर सकेंगे। इसके अलावा कंपनी यूजर्स को एयरटेल एक्सट्रीम प्रीमियम एप का एक्सेस देगी, जिसमें लाइव टीवी, दस,शून्य फिल्म और न्यूज की सेवा शामिल हैं। वहीं, इस पैक की वैधता अट्ठाईस दिनों की है। कंपनी ने दो सौ उनचास रुपयापये वाला प्रीपेड प्लान यूजर्स के लिए पेश किया है। यूजर्स को इस प्लान में रोजाना एक. पाँच जीबी डाटा और एक सौ एसएमएस की सुविधा मिलेगी। साथ ही यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग कर सकेंगे। वहीं, इस पैक की समय सीमा अट्ठाईस दिनों की है। आपको जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के तीनों प्रीपेड प्लांस में अट्ठाईस दिनों की वैधता मिलेगी। इसके साथ ही तीनों कंपनियां आपको रोजाना एक. पाँच जीबी डाटा और एसएमएस की सुविधा देगी। वहीं, जियो के प्लान की बात करें तो आपको कम कीमत में सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अन्य नेटवर्क पर कॉलिंग के लिए आपको आईयूसी चार्ज देना होगा। तो दूसरी तरफ एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के प्लान में आप किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल कर सकेंगे। हालांकि, इन दोनों प्लांस के लिए आपको जियो की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।
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GK Question Top Current Affairs: अगर अच्छी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं तो फिर आपको उसके मुताबिक अलग अलग फील्ड की जानकारी भी रखनी होगी.
Current Affairs Questions: पढ़ाई के बाद नौकरी करना सबकी प्रायोरिटी होती है और वो भी अच्छी नौकरी करना. अब अच्छी नौकरी की बात है तो उसे पाना भी आसान नहीं होगा. अगर अच्छी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं तो फिर आपको उसके मुताबिक अलग अलग फील्ड की जानकारी भी रखनी होगी. आज हम आपको जनरल नॉलेज के सवाल बता रहे हैं जोकि आपके लिए बहुत जरूरी हैं.
सवालः भारत की मानक समय रेखा कौन सी है ?
जवाबः 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा.
सवालः अर्जुन पुरस्कार की शुरुआत किस साल हुई ?
सवालः मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय कौन थे ?
जवाबः बिनोवा भावे.
सवालः स्वांग किस राज्य का प्रसिद्ध लोकनृत्य कला है ?
जवाबः हरियाणा.
सवालः भारत में वर्तमान में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं ?
सवालः कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका फैसला कौन करता है ?
जवाबः लोकसभा अध्यक्ष.
सवालः अंग्रेजों के नमक कानून के विरुद्ध महात्मा गांधी ने कौन सा आंदोलन शुरू किया था ?
जवाबः सविनय अवज्ञा आंदोलन.
सवालः भारत में जिप्सम का सबसे ज्यादा उत्पादन किस राज्य में होता है ?
जवाबः राजस्थान.
सवालः ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपना पहला कारखाना कहां खोला था ?
जवाबः सूरत.
सवालः ' बुली ' शब्द का प्ररोग किस खेल में किया जाता है ?
जवाबः हॉकी.
सवालः किस भारतीय एथलीट को ' उड़न परी ' के नाम से पुकारा जाता है ?
जवाबः पीटी उषा.
सवालः किस शहर को झीलों की नगरी कहते हैं ?
जवाबः उदयपुर.
सवालः आर्यसमाज की स्थापना कब की गई थी ?
जवाबः सन् 1875 ई. में.
सवालः वेदों में सबसे प्राचीन वेद कौन सा है ?
जवाबः ऋग्वेद.
सवालः भाभा परमाणु अनुसन्धान केंद्र कहां स्थित है ?
सवालः 1928 के बारदोली आन्दोलन का नेतृत्व किसने किया था ?
जवाबः सरदार बल्लभ भाई पटेल.
सवालः किसने खालसा पंथ की स्थापना की थी ?
जवाबः गुरु गोविंद सिंह.
सवालः भारत की पहली महिला I.P.S. अधिकारी कौन हैं.
जवाबः किरण बेदी.
सवालः कथक किस राज्य का शास्त्रीय नृत्य है ?
जवाबः उत्तर प्रदेश.
सवालः ' चाइनामैन ' शब्द का प्रयोग किस खेल में होता है ?
जवाबः क्रिकेट.
सवालः ऑस्कर पुरस्कार का संबंध किस क्षेत्र से है ?
जवाबः सिनेमा.
सवालः पटना का प्राचीन नाम क्या था ?
जवाबः पाटलिपुत्र.
सवालः आगा खां कप का संबंध किस खेल से है ?
जवाबः हॉकी.
सवालः बांदीपुर अभयारण्य किस राज्य में स्थित है ?
जवाबः कर्नाटक.
सवालः कौन इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे ?
जवाबः बदरुद्दीन तैयब.
सवालः किस मुगल शासक ने " दीन - ए - इलाही " धर्म चलाया था ?
जवाबः अकबर.
सवालः भूस्थिर उपग्रह की पृथ्वी से ऊंचाई कितनी होती है ?
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GK Question Top Current Affairs: अगर अच्छी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं तो फिर आपको उसके मुताबिक अलग अलग फील्ड की जानकारी भी रखनी होगी. Current Affairs Questions: पढ़ाई के बाद नौकरी करना सबकी प्रायोरिटी होती है और वो भी अच्छी नौकरी करना. अब अच्छी नौकरी की बात है तो उसे पाना भी आसान नहीं होगा. अगर अच्छी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं तो फिर आपको उसके मुताबिक अलग अलग फील्ड की जानकारी भी रखनी होगी. आज हम आपको जनरल नॉलेज के सवाल बता रहे हैं जोकि आपके लिए बहुत जरूरी हैं. सवालः भारत की मानक समय रेखा कौन सी है ? जवाबः बयासी.पाँच डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा. सवालः अर्जुन पुरस्कार की शुरुआत किस साल हुई ? सवालः मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय कौन थे ? जवाबः बिनोवा भावे. सवालः स्वांग किस राज्य का प्रसिद्ध लोकनृत्य कला है ? जवाबः हरियाणा. सवालः भारत में वर्तमान में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं ? सवालः कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका फैसला कौन करता है ? जवाबः लोकसभा अध्यक्ष. सवालः अंग्रेजों के नमक कानून के विरुद्ध महात्मा गांधी ने कौन सा आंदोलन शुरू किया था ? जवाबः सविनय अवज्ञा आंदोलन. सवालः भारत में जिप्सम का सबसे ज्यादा उत्पादन किस राज्य में होता है ? जवाबः राजस्थान. सवालः ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपना पहला कारखाना कहां खोला था ? जवाबः सूरत. सवालः ' बुली ' शब्द का प्ररोग किस खेल में किया जाता है ? जवाबः हॉकी. सवालः किस भारतीय एथलीट को ' उड़न परी ' के नाम से पुकारा जाता है ? जवाबः पीटी उषा. सवालः किस शहर को झीलों की नगरी कहते हैं ? जवाबः उदयपुर. सवालः आर्यसमाज की स्थापना कब की गई थी ? जवाबः सन् एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर ई. में. सवालः वेदों में सबसे प्राचीन वेद कौन सा है ? जवाबः ऋग्वेद. सवालः भाभा परमाणु अनुसन्धान केंद्र कहां स्थित है ? सवालः एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस के बारदोली आन्दोलन का नेतृत्व किसने किया था ? जवाबः सरदार बल्लभ भाई पटेल. सवालः किसने खालसा पंथ की स्थापना की थी ? जवाबः गुरु गोविंद सिंह. सवालः भारत की पहली महिला I.P.S. अधिकारी कौन हैं. जवाबः किरण बेदी. सवालः कथक किस राज्य का शास्त्रीय नृत्य है ? जवाबः उत्तर प्रदेश. सवालः ' चाइनामैन ' शब्द का प्रयोग किस खेल में होता है ? जवाबः क्रिकेट. सवालः ऑस्कर पुरस्कार का संबंध किस क्षेत्र से है ? जवाबः सिनेमा. सवालः पटना का प्राचीन नाम क्या था ? जवाबः पाटलिपुत्र. सवालः आगा खां कप का संबंध किस खेल से है ? जवाबः हॉकी. सवालः बांदीपुर अभयारण्य किस राज्य में स्थित है ? जवाबः कर्नाटक. सवालः कौन इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष थे ? जवाबः बदरुद्दीन तैयब. सवालः किस मुगल शासक ने " दीन - ए - इलाही " धर्म चलाया था ? जवाबः अकबर. सवालः भूस्थिर उपग्रह की पृथ्वी से ऊंचाई कितनी होती है ?
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वाशिंगटनः भारत के सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों द्वारा प्रमुख तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले एच1बी वीजा को अमेरिका और विस्तार नहीं देने संबंधी नियम बनाने पर विचार कर रहा है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'खरीदो अमेरिकी सामान, रोजगार दो अमेरिकी को' (बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन) पहल का हिस्सा है। इस कदम से ऐसे हजारों विदेशी कर्मचारी जिनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है उनके द्वारा एच1बी वीजा कायम रखने पर सीधे रोक लग जाएगी। (1 मिनट के कारण जुडवां बच्चों ने लिया अलग-अलग साल में जन्म )
अमेरिका की समाचार संवाद समिति मैकक्लैची के डीसी ब्यूरो की रपट के अनुसार इस संबंध में एक प्रस्ताव अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग के प्रमुखों के बीच साझा किया गया है। यह ट्रंप की 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' पहल का हिस्सा है, जिसके बारे में उन्होंने अपने 2016 के चुनावी अभियान में वादा किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य एच1बी वीजा के दुरुपयोग को रोकना है। साथ ही जिन लोगों के पास पहले से ग्रीनकार्ड है उनके लिए इस वीजा की अवधि बढ़ाने वाले प्रावधान को खत्म करना है।
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वाशिंगटनः भारत के सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों द्वारा प्रमुख तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले एचएकबी वीजा को अमेरिका और विस्तार नहीं देने संबंधी नियम बनाने पर विचार कर रहा है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'खरीदो अमेरिकी सामान, रोजगार दो अमेरिकी को' पहल का हिस्सा है। इस कदम से ऐसे हजारों विदेशी कर्मचारी जिनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है उनके द्वारा एचएकबी वीजा कायम रखने पर सीधे रोक लग जाएगी। अमेरिका की समाचार संवाद समिति मैकक्लैची के डीसी ब्यूरो की रपट के अनुसार इस संबंध में एक प्रस्ताव अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग के प्रमुखों के बीच साझा किया गया है। यह ट्रंप की 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' पहल का हिस्सा है, जिसके बारे में उन्होंने अपने दो हज़ार सोलह के चुनावी अभियान में वादा किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य एचएकबी वीजा के दुरुपयोग को रोकना है। साथ ही जिन लोगों के पास पहले से ग्रीनकार्ड है उनके लिए इस वीजा की अवधि बढ़ाने वाले प्रावधान को खत्म करना है।
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पेरिस. यूरो फुटबॉल कप का फाइनल मुकाबला रविवार को मेजबान टीम फ्रांस और पुर्तगाल के बीच होगा. विशेषज्ञों के मुताबिक आज के इस खिताबी भिड़ंत में फ्रांस का पलड़ा भारी रहने वाला है. वैसे भी पिछले 41 सालों से पुर्तगाल फ्रांस को नहीं हरा सका है.
बता दें कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो की जबरदस्त फॉर्म की बदौलत जर्मनी को हराकर फ्रांस ने फाइनल में प्रवेश किया है और अब उसकी नजरें 1984 यूरो चैम्पियनशिप और 1998 विश्व कप के बाद अपनी सरजमीं पर तीसरा बड़ा खिताब जीतने पर है.
वहीं पुर्तगाल के लिए मैच बेहद ही खास है, क्योंकि यूरो कप में इससे पहले सिर्फ एक बार ही पुर्तगाल फाइनल तक पहुंचा है. 2004 में हुए उस फाइनल मैच में ग्रीस ने पुर्तगाल को 1-0 से हराकर खिताब से रोक दिया था.
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पेरिस. यूरो फुटबॉल कप का फाइनल मुकाबला रविवार को मेजबान टीम फ्रांस और पुर्तगाल के बीच होगा. विशेषज्ञों के मुताबिक आज के इस खिताबी भिड़ंत में फ्रांस का पलड़ा भारी रहने वाला है. वैसे भी पिछले इकतालीस सालों से पुर्तगाल फ्रांस को नहीं हरा सका है. बता दें कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो की जबरदस्त फॉर्म की बदौलत जर्मनी को हराकर फ्रांस ने फाइनल में प्रवेश किया है और अब उसकी नजरें एक हज़ार नौ सौ चौरासी यूरो चैम्पियनशिप और एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे विश्व कप के बाद अपनी सरजमीं पर तीसरा बड़ा खिताब जीतने पर है. वहीं पुर्तगाल के लिए मैच बेहद ही खास है, क्योंकि यूरो कप में इससे पहले सिर्फ एक बार ही पुर्तगाल फाइनल तक पहुंचा है. दो हज़ार चार में हुए उस फाइनल मैच में ग्रीस ने पुर्तगाल को एक-शून्य से हराकर खिताब से रोक दिया था.
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बीसीसीआई के कड़े विरोध के बावजूद आईसीसी ने रेवेन्यू बंटवारे के नए मॉडल को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकृति दे दी है। दुबई में आईसीसी मुख्यालय में 2 से 4 फरवरी के बीच हुई आईसीसी बोर्ड मीटिंग में यह फैसला किया गया। इसके अलावा भी कई अहम बातों पर फैसला हुआ। साल 2014 में आईसीसी बोर्ड ने बिग- मॉडल के तहत रेवेन्यू के बंटवारे को मंजूरी दी थी। इस मॉडल के तहत आईसीसी की आमदनी में सबसे बड़ा हिस्सा भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को मिलता था।
नए मॉडल के तहत बीसीसीआई को बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। साल 2014 में एन श्रीनिवासन के आईसीसी अध्यक्ष रहते जो मॉडल लाया गया था। उसके अनुसार बीसीसीआई को साल 2023 तक आईसीसी से 34 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आमदनी होती। इस मॉडल को लाने के पीछे श्रीनिवासन का तर्क था कि इन तीन देशों की वजह से ही आईसीसी को सबसे ज्यादा आय होती है इसलिए लाभ में इनकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बनती है।
बिग थ्री मॉडल का टेस्ट खेलने वाले अन्य देशों के अलावा इससे लाभ पाने वाले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी विरोध किया। इस कारण भारत पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया। इस मामले पर जब वोटिंग हुई तो जिंबाब्वे ने खुद को वोटिंग से अगल रखा। हालांकि बीसीसीआई को नए मॉडल से 2015 से 2023 के बीच 29 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय होने की उम्मीद है। यह आय बिग थ्री मॉडल की तुलना में 34 प्रतिशत कम होगी।
साल 2007 से 2015 के बीच जिस फॉर्मूले के तरह रेवेन्यू का बटवारा होता था उसके तहत सभी पूर्णकालिक सदस्यों को लगभग 5. 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलते थे। नए फॉर्मूले के तहत बीसीसीई को 29 करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलेंगे। इसका मतलब बीसीसीआई अब सबसे ज्यादा आमदनी करने वाला पूर्ण कालिक सदस्य होगा लेकिन जो कि पुराने मॉडल की तुलना में 452 प्रतिशत ज्यादा है। आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर का कहना है कि जब बीसीसीआई को पहले से ज्यादा राशि मिल रही है फिर भी उसे परेशानी क्यों है?
बीसीसीआई बिग थ्री सिस्टम के अंतर्गत 757 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4500 लाख डॉलर की राशि चाह रहा था। अभी जो वृद्धि हुई है वह केवल 452 प्रतिशत है। 2015-2023 के रेवेन्यू सायकल के दौरान भारत में आयोजित टी-20 विश्व आयोजित हुई एक मात्र आईसीसी स्पर्धा है। रेवेन्यू के बटवारे के बारे में स्पष्टता नहीं होने के कारण अब तक उससे संबंधित राशि का वितरण नहीं हो सका है।
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बीसीसीआई के कड़े विरोध के बावजूद आईसीसी ने रेवेन्यू बंटवारे के नए मॉडल को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकृति दे दी है। दुबई में आईसीसी मुख्यालय में दो से चार फरवरी के बीच हुई आईसीसी बोर्ड मीटिंग में यह फैसला किया गया। इसके अलावा भी कई अहम बातों पर फैसला हुआ। साल दो हज़ार चौदह में आईसीसी बोर्ड ने बिग- मॉडल के तहत रेवेन्यू के बंटवारे को मंजूरी दी थी। इस मॉडल के तहत आईसीसी की आमदनी में सबसे बड़ा हिस्सा भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को मिलता था। नए मॉडल के तहत बीसीसीआई को बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। साल दो हज़ार चौदह में एन श्रीनिवासन के आईसीसी अध्यक्ष रहते जो मॉडल लाया गया था। उसके अनुसार बीसीसीआई को साल दो हज़ार तेईस तक आईसीसी से चौंतीस करोड़ अमेरिकी डॉलर की आमदनी होती। इस मॉडल को लाने के पीछे श्रीनिवासन का तर्क था कि इन तीन देशों की वजह से ही आईसीसी को सबसे ज्यादा आय होती है इसलिए लाभ में इनकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बनती है। बिग थ्री मॉडल का टेस्ट खेलने वाले अन्य देशों के अलावा इससे लाभ पाने वाले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी विरोध किया। इस कारण भारत पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया। इस मामले पर जब वोटिंग हुई तो जिंबाब्वे ने खुद को वोटिंग से अगल रखा। हालांकि बीसीसीआई को नए मॉडल से दो हज़ार पंद्रह से दो हज़ार तेईस के बीच उनतीस करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय होने की उम्मीद है। यह आय बिग थ्री मॉडल की तुलना में चौंतीस प्रतिशत कम होगी। साल दो हज़ार सात से दो हज़ार पंद्रह के बीच जिस फॉर्मूले के तरह रेवेन्यू का बटवारा होता था उसके तहत सभी पूर्णकालिक सदस्यों को लगभग पाँच. पच्चीस करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलते थे। नए फॉर्मूले के तहत बीसीसीई को उनतीस करोड़ अमेरिकी डॉलर मिलेंगे। इसका मतलब बीसीसीआई अब सबसे ज्यादा आमदनी करने वाला पूर्ण कालिक सदस्य होगा लेकिन जो कि पुराने मॉडल की तुलना में चार सौ बावन प्रतिशत ज्यादा है। आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर का कहना है कि जब बीसीसीआई को पहले से ज्यादा राशि मिल रही है फिर भी उसे परेशानी क्यों है? बीसीसीआई बिग थ्री सिस्टम के अंतर्गत सात सौ सत्तावन प्रतिशत की वृद्धि के साथ चार हज़ार पाँच सौ लाख डॉलर की राशि चाह रहा था। अभी जो वृद्धि हुई है वह केवल चार सौ बावन प्रतिशत है। दो हज़ार पंद्रह-दो हज़ार तेईस के रेवेन्यू सायकल के दौरान भारत में आयोजित टी-बीस विश्व आयोजित हुई एक मात्र आईसीसी स्पर्धा है। रेवेन्यू के बटवारे के बारे में स्पष्टता नहीं होने के कारण अब तक उससे संबंधित राशि का वितरण नहीं हो सका है।
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1. गिफ्ट बैग पर कलर और लोगो की जांच करेंः
2. डस्ट बैग पर गोल्ड लेटर्स में लिखे ब्रैंड नेम की खोज करेंः
3. असली रसीद की मांग करेंः
4. बिलकुल सीधी स्टिचेज़ की तलाश करेंः
5. फ्रेयिंग (fraying) के निशान देखेंः
6. ये सुनिश्चित करें की बेल्ट के बकल्स बेल्ट में सोल्डर हैंः
7. पहचान कराने वाले गुच्ची स्टैम्प की जांच करेंः
8. सीरियल नंबर वेरीफाई करेंः
9. Monogram GG Beige belt को कलर और GG पैटर्न के लिए जांचेंः
10. Black Imprime belt के '"double G" बकल पर मैटेलिक फिनिश के लिए देखेंः
11. गुच्ची बेल्ट्स पर "double G" लोगो जांचेंः
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एक. गिफ्ट बैग पर कलर और लोगो की जांच करेंः दो. डस्ट बैग पर गोल्ड लेटर्स में लिखे ब्रैंड नेम की खोज करेंः तीन. असली रसीद की मांग करेंः चार. बिलकुल सीधी स्टिचेज़ की तलाश करेंः पाँच. फ्रेयिंग के निशान देखेंः छः. ये सुनिश्चित करें की बेल्ट के बकल्स बेल्ट में सोल्डर हैंः सात. पहचान कराने वाले गुच्ची स्टैम्प की जांच करेंः आठ. सीरियल नंबर वेरीफाई करेंः नौ. Monogram GG Beige belt को कलर और GG पैटर्न के लिए जांचेंः दस. Black Imprime belt के '"double G" बकल पर मैटेलिक फिनिश के लिए देखेंः ग्यारह. गुच्ची बेल्ट्स पर "double G" लोगो जांचेंः
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विपक्षी दलों के नेताओं को ममता बनर्जी के पत्र लिखने के मामले में बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष के मुंह से लोकतंत्र का उपदेश उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण के विपरीत है।
कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी नेताओं को पत्र लिखने पर बुधवार को बीजेपी ने उन्हें आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष के मुंह से लोकतंत्र का उपदेश उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण के विपरीत है। बता दें कि बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत गैर-बीजेपी नेताओं को पत्र लिखा है और केंद्र की बीजेपी सरकार पर लोकतंत्र और संविधान पर हमले का आरोप लगाया है।
ममता ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद केन्द्र-राज्य संबंध कभी इतने खराब नहीं थे, जितने अब हैं। बीजेपी महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने बनर्जी के इस पत्र के मद्देनजर ट्वीट किया, 'ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का उपदेश शोभा नही देता है। उनके कार्यकर्ता बीजेपी उम्मीदवारों पर हमले करते हैं। मतदाताओं को धमकाते हैं। बूथ पर कब्जा करते हैं और अंत में उसके नेता लोकतंत्र पर उपदेश देते हैं। ' राज्य में दूसरे चरण के मतदान से पहले बनर्जी का यह पत्र तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया।
पत्र में बनर्जी ने कहा, 'मैं भारत में लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर बीजेपी और केन्द्र में उसकी सरकार द्वारा किए गए कई हमलों को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत कराने के लिए आपको, और गैर-बीजेपी दलों के कई नेताओं को पत्र लिख रही हूं। '
तीन पृष्ठ का यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा एनसीपी के नेता शरद पवार, डीएमके के एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिव सेना के उद्धव ठाकरे, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन रेड्डी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती और सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य के नाम लिखा गया है।
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विपक्षी दलों के नेताओं को ममता बनर्जी के पत्र लिखने के मामले में बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष के मुंह से लोकतंत्र का उपदेश उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण के विपरीत है। कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी नेताओं को पत्र लिखने पर बुधवार को बीजेपी ने उन्हें आड़े हाथ लिया है। बीजेपी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष के मुंह से लोकतंत्र का उपदेश उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण के विपरीत है। बता दें कि बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत गैर-बीजेपी नेताओं को पत्र लिखा है और केंद्र की बीजेपी सरकार पर लोकतंत्र और संविधान पर हमले का आरोप लगाया है। ममता ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद केन्द्र-राज्य संबंध कभी इतने खराब नहीं थे, जितने अब हैं। बीजेपी महासचिव बीएल संतोष ने बनर्जी के इस पत्र के मद्देनजर ट्वीट किया, 'ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र का उपदेश शोभा नही देता है। उनके कार्यकर्ता बीजेपी उम्मीदवारों पर हमले करते हैं। मतदाताओं को धमकाते हैं। बूथ पर कब्जा करते हैं और अंत में उसके नेता लोकतंत्र पर उपदेश देते हैं। ' राज्य में दूसरे चरण के मतदान से पहले बनर्जी का यह पत्र तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया। पत्र में बनर्जी ने कहा, 'मैं भारत में लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर बीजेपी और केन्द्र में उसकी सरकार द्वारा किए गए कई हमलों को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत कराने के लिए आपको, और गैर-बीजेपी दलों के कई नेताओं को पत्र लिख रही हूं। ' तीन पृष्ठ का यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा एनसीपी के नेता शरद पवार, डीएमके के एमके स्टालिन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिव सेना के उद्धव ठाकरे, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के जगन रेड्डी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती और सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य के नाम लिखा गया है।
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श्रीनगर। बांदीपुरा सेक्टर में मंगलावर सुबह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन आतंकियों के पास भी 2000 के नए नोट बरामद किए गए है।
उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ खत्म हो गई है। जिसमें दो आतंकियों को मार गिराया है। यहां के हंजन गांव के रिहायशी इलाके में आतंकियों के छुपे होने की खबर मिली थी, जिसके बाद इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक मुठभेड़ खत्म हो चुकी है लेकिन सेना ने इसके बाद से पूरे इलाके में सर्च अभियान शुरू किया है। सेना को आशंका है कि यहां पर कुछ और आतंकी भी छिपे हो सकते हैं, लिहाजा यहां पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं लाइन ऑफ कंट्रोल के पास आरएस पुरा सेक्टर में सेना ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिये को भी मार गिराया है।
दरअसल नोटबंदी से बदली परिस्थितियों के बाद आतंकियों में भी हताशा फैल चुकी है। राज्य में जगह-जगह पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह से बंद हो गई हैं।
इसकी वजह पत्थरबाजों को देने के लिए नए नोटों का न होना भी है। यही वजह है कि वादी में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। बाजारों में रौनक एक बार फिर से लौट रही है। सडक़ों पर भी निजी वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर सीमा पर पाकिस्तान की ओर से हो रही सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं बदस्तूर जारी हैं।
वहीं कई चौकियों को भी नष्ट कर दिया गया है। लेेकिन पाकिस्तान की ओर से हो रही भारी गोलाबारी की वजह से सीमा से सटे गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त है। कुछ लोग अपना घर छोडक़र दूसरी जगहों पर जाने के लिए मजबूर हैं।
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श्रीनगर। बांदीपुरा सेक्टर में मंगलावर सुबह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन आतंकियों के पास भी दो हज़ार के नए नोट बरामद किए गए है। उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ खत्म हो गई है। जिसमें दो आतंकियों को मार गिराया है। यहां के हंजन गांव के रिहायशी इलाके में आतंकियों के छुपे होने की खबर मिली थी, जिसके बाद इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक मुठभेड़ खत्म हो चुकी है लेकिन सेना ने इसके बाद से पूरे इलाके में सर्च अभियान शुरू किया है। सेना को आशंका है कि यहां पर कुछ और आतंकी भी छिपे हो सकते हैं, लिहाजा यहां पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। वहीं लाइन ऑफ कंट्रोल के पास आरएस पुरा सेक्टर में सेना ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिये को भी मार गिराया है। दरअसल नोटबंदी से बदली परिस्थितियों के बाद आतंकियों में भी हताशा फैल चुकी है। राज्य में जगह-जगह पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह से बंद हो गई हैं। इसकी वजह पत्थरबाजों को देने के लिए नए नोटों का न होना भी है। यही वजह है कि वादी में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। बाजारों में रौनक एक बार फिर से लौट रही है। सडक़ों पर भी निजी वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है। दूसरी ओर सीमा पर पाकिस्तान की ओर से हो रही सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं बदस्तूर जारी हैं। वहीं कई चौकियों को भी नष्ट कर दिया गया है। लेेकिन पाकिस्तान की ओर से हो रही भारी गोलाबारी की वजह से सीमा से सटे गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त है। कुछ लोग अपना घर छोडक़र दूसरी जगहों पर जाने के लिए मजबूर हैं।
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कानपुर,(एजेंसी/वार्ता): उत्तर प्रदेश में कानपुर के नवाबगंज क्षेत्र में मंगलवार को फ्रिज का कंप्रेशर फटने से गर्भवती महिला और बच्चे समेत सात लोगल घायल हो गए।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि डायल 112 को सूचना मिली कि पहलवानपुरवा मोहल्ला निवासी वंशराज के मकान में पहली मंजिल पर तेज धमाका हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस को मकान में रहने वाले सुनील सागर उनकी पत्नी अनीता, गर्भवती सोनी उनके पति विष्णु, रामकिशोर उनकी पत्नी ननकी और 12 वर्षीय बच्चा आदर्श घायल अवस्था में मिले।
पुलिस ने तत्काल सभी घायलों को इलाकाई लोगों की मदद से तत्काल गंभीर रूप से झुलसी अनीता सागर और उनके पति सुनील को उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया जबकि अन्य को एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया है। उन्होने बताया कि प्रथम दृष्टया विस्फोट का कारण फ्रिज का कंप्रेशर फटना बताया गया है मगर हादसे के सही कारणों की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम के साथ अग्निशमन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की है।
अपर पुलिस आयुक्त मो. अकमल खान ने बताया कि आसपास के लोगों से बातचीत करने से पता चला है कि हादसा कंप्रेशर फटने से हुआ है। फिर भी हादसे के कारणों की सही जांच के लिए फॉरेंसिक टीम और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से घटना की जांच कर रहे हैं।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ेः- भिंडी कई पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन करने से सेहत को मिलेगा फायदा!
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कानपुर,: उत्तर प्रदेश में कानपुर के नवाबगंज क्षेत्र में मंगलवार को फ्रिज का कंप्रेशर फटने से गर्भवती महिला और बच्चे समेत सात लोगल घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि डायल एक सौ बारह को सूचना मिली कि पहलवानपुरवा मोहल्ला निवासी वंशराज के मकान में पहली मंजिल पर तेज धमाका हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस को मकान में रहने वाले सुनील सागर उनकी पत्नी अनीता, गर्भवती सोनी उनके पति विष्णु, रामकिशोर उनकी पत्नी ननकी और बारह वर्षीय बच्चा आदर्श घायल अवस्था में मिले। पुलिस ने तत्काल सभी घायलों को इलाकाई लोगों की मदद से तत्काल गंभीर रूप से झुलसी अनीता सागर और उनके पति सुनील को उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया जबकि अन्य को एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया है। उन्होने बताया कि प्रथम दृष्टया विस्फोट का कारण फ्रिज का कंप्रेशर फटना बताया गया है मगर हादसे के सही कारणों की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम के साथ अग्निशमन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल की है। अपर पुलिस आयुक्त मो. अकमल खान ने बताया कि आसपास के लोगों से बातचीत करने से पता चला है कि हादसा कंप्रेशर फटने से हुआ है। फिर भी हादसे के कारणों की सही जांच के लिए फॉरेंसिक टीम और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से घटना की जांच कर रहे हैं। - यह भी पढ़ेः- भिंडी कई पोषक तत्वों से भरपूर, सेवन करने से सेहत को मिलेगा फायदा!
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राकेश दुबे@प्रतिदिन। आजादी के लगभग सात दशक होने वाले हैं, फिर भी भारत में जाति-प्रथा कितनी मजबूत है और दलितों के लिए जीवन कितना कठिन है। तमिलनाडू में एक दलित युवक अपने से ऊंची जाति की एक युवती से शादी करने के कारण मौत के घाट उतर दिया गया । गंभीर बात यह है कि इस तरह की जातिवादी हिंसा बजाय घटने के, बढ़ रही है। तमिलनाडु ब्राह्मणवाद विरोधी बड़े आंदोलनों का केंद्र रहा है और इसकी वजह से वहां बड़े सामाजिक परिवर्तन भी हुए हैं। खासकर के कामराज के मुख्यमंत्री रहते हुए दलितों व पिछड़ी जातियों के उत्थान और उनके बच्चों को शिक्षा देने की बहुत परिवर्तनकारी कोशिश तमिलनाडु में हुई। के कामराज को स्कूलों में मिड-डे मील कार्यक्रम का प्रवर्तक भी माना जाता है। कामराज ने जाति-भेद खत्म करने के लिए सभी स्कूली बच्चों को एक जैसा यूनिफॉर्म मुफ्त देने की योजना भी लागू की थी। इन सभी वजहों से तमिलनाडु का तेजी से सामाजिक विकास हुआ और जाति आधारित भेदभाव भी घटे। जातिवाद की भूमिका फिर सत्तर के दशक में बढ़नी शुरू हुई, जब राजनेताओं ने जातियों का वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस दौरान कई जाति आधारित संगठन और राजनीतिक पार्टियां बनीं और दलितों पर अत्याचार भी बढ़े।
इस बीच राजनीति में कई पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियां सबसे ज्यादा ताकतवर हो गई थीं और इन्होंने आत्मसम्मान की चाह रखने वाले दलितों का हिंसक विरोध शुरू किया। यह जातिगत विद्वेष अब अपने चरम पर है, लेकिन तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ की वजह से इसके खिलाफ कदम नहीं उठातीं। तमिलनाडु के कुछ दक्षिणी जिलों में स्थिति यह है कि स्कूलों में बच्चे कलाई में अलग-अलग रंग के धागे या पट्टियां बांधकर आते हैं, जिनसे उनकी जाति पहचानी जाए। यहां तक कि माथे पर तिलक या बिंदी या बनियान का रंग भी जाति के अनुसार होता है। इस वजह से स्कूलों में ही बच्चे जाति आधारित कथित दुश्मन और दोस्त की पहचान करना सीख जाते हैं। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पिछले दिनों आई एक खबर के मुताबिक, एक जिले के कलेक्टर ने स्कूलों में कलाई पर किसी भी रंग के धागे या पट्टियां बांधने पर पाबंदी लगा दी, लेकिन ऐसे आदेशों पर अमल करवाना तकरीबन नामुमकिन होता है।
एक शताब्दी पहले पिछड़ी जातियां व दलित, सवर्णों के वर्चस्व के खिलाफ एकजुट थे, लेकिन अब दलित उन्हीं पिछड़ी जातियों की हिंसा और अत्याचार के शिकार हो रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति पूरे देश में है, जिसकी वजह से समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद समूह अब भी उस बराबरी से वंचित हैं, जिसका वादा हमारे गणतंत्र में किया गया है।
- श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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राकेश दुबे@प्रतिदिन। आजादी के लगभग सात दशक होने वाले हैं, फिर भी भारत में जाति-प्रथा कितनी मजबूत है और दलितों के लिए जीवन कितना कठिन है। तमिलनाडू में एक दलित युवक अपने से ऊंची जाति की एक युवती से शादी करने के कारण मौत के घाट उतर दिया गया । गंभीर बात यह है कि इस तरह की जातिवादी हिंसा बजाय घटने के, बढ़ रही है। तमिलनाडु ब्राह्मणवाद विरोधी बड़े आंदोलनों का केंद्र रहा है और इसकी वजह से वहां बड़े सामाजिक परिवर्तन भी हुए हैं। खासकर के कामराज के मुख्यमंत्री रहते हुए दलितों व पिछड़ी जातियों के उत्थान और उनके बच्चों को शिक्षा देने की बहुत परिवर्तनकारी कोशिश तमिलनाडु में हुई। के कामराज को स्कूलों में मिड-डे मील कार्यक्रम का प्रवर्तक भी माना जाता है। कामराज ने जाति-भेद खत्म करने के लिए सभी स्कूली बच्चों को एक जैसा यूनिफॉर्म मुफ्त देने की योजना भी लागू की थी। इन सभी वजहों से तमिलनाडु का तेजी से सामाजिक विकास हुआ और जाति आधारित भेदभाव भी घटे। जातिवाद की भूमिका फिर सत्तर के दशक में बढ़नी शुरू हुई, जब राजनेताओं ने जातियों का वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस दौरान कई जाति आधारित संगठन और राजनीतिक पार्टियां बनीं और दलितों पर अत्याचार भी बढ़े। इस बीच राजनीति में कई पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियां सबसे ज्यादा ताकतवर हो गई थीं और इन्होंने आत्मसम्मान की चाह रखने वाले दलितों का हिंसक विरोध शुरू किया। यह जातिगत विद्वेष अब अपने चरम पर है, लेकिन तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने स्वार्थ की वजह से इसके खिलाफ कदम नहीं उठातीं। तमिलनाडु के कुछ दक्षिणी जिलों में स्थिति यह है कि स्कूलों में बच्चे कलाई में अलग-अलग रंग के धागे या पट्टियां बांधकर आते हैं, जिनसे उनकी जाति पहचानी जाए। यहां तक कि माथे पर तिलक या बिंदी या बनियान का रंग भी जाति के अनुसार होता है। इस वजह से स्कूलों में ही बच्चे जाति आधारित कथित दुश्मन और दोस्त की पहचान करना सीख जाते हैं। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पिछले दिनों आई एक खबर के मुताबिक, एक जिले के कलेक्टर ने स्कूलों में कलाई पर किसी भी रंग के धागे या पट्टियां बांधने पर पाबंदी लगा दी, लेकिन ऐसे आदेशों पर अमल करवाना तकरीबन नामुमकिन होता है। एक शताब्दी पहले पिछड़ी जातियां व दलित, सवर्णों के वर्चस्व के खिलाफ एकजुट थे, लेकिन अब दलित उन्हीं पिछड़ी जातियों की हिंसा और अत्याचार के शिकार हो रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति पूरे देश में है, जिसकी वजह से समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद समूह अब भी उस बराबरी से वंचित हैं, जिसका वादा हमारे गणतंत्र में किया गया है। - श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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Key For Happy Relationship:टीवी जगत के डैशिग और हैंडसम अभिनेता एजाज खान ने मशहूर रियलिटी शो 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में जब हिस्सा लिया तो अपनी लेडी लव पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia) से उनकी मुलाकात हुई। शो के बाद भी इन दोनों ने अपने रिश्ते को मज़बूती के साथ निभाया और हाल ही में एजाज ने अपने पिता से भी पवित्रा की मुलाकात करायी। अब कयास लगाए जा रहा है एजाज और पवित्रा जल्द ही शादी कर सकते हैं। वहीं, एजाज ने अपने रिश्ते को सफल और खुशहाल बनाने के सीक्रेट्स के बारे में भी मीडिया से बात की है। (Key For Happy Relationship)
काव्यांजलि सीरियल से घर-घर में लोगों के फेवरेट बने अभिनेता एजाज खान ने एक सफल रिलेशनशिप का सीक्रेट शेयर किया और यह मजेदार है। एजाज ने एक सफल रिश्ते के लिए समझदारी के साथ काम लेने की सलाह दी। अभिनेता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, जितनी जल्दी हो सके सॉरी बोलो। भले ही आप सही हों या गलत। तर्क को भूल जाओ। कभी-कभी रिश्तों में तर्क-वितर्क नहीं तलाशना चाहिए। बस कहो 'ठीक है, जो हुआ उसके लिए मुझे दुख है और बेबी चलो अब आगे बढ़ते हैं'।
45 वर्षीय अभिनेता और पवित्रा सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के लिए प्यार भरी तस्वीरें साझा करते रहते हैं। इस जोड़े को गायक राहुल वैद्य की शादी में एक साथ देखा गया था। अपने काम के बारे में बात करते हुए, एजाज वर्तमान में वेब-सीरीज सिटी ऑफ ड्रीम्स के दूसरे सीजन की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं, जो एक राजनीतिक ड्रामा है। 'सिटी ऑफ ड्रीम्स' सीजन 2 में सचिन पिलगांवकर, अतुल कुलकर्णी, प्रिया बापट, संदीप कुलकर्णी और उदय टिकेकर सहित अन्य मराठी और हिंदी कलाकार भी हैं।
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Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Key For Happy Relationship:टीवी जगत के डैशिग और हैंडसम अभिनेता एजाज खान ने मशहूर रियलिटी शो 'बिग बॉस' के चौदहवें सीजन में जब हिस्सा लिया तो अपनी लेडी लव पवित्रा पुनिया से उनकी मुलाकात हुई। शो के बाद भी इन दोनों ने अपने रिश्ते को मज़बूती के साथ निभाया और हाल ही में एजाज ने अपने पिता से भी पवित्रा की मुलाकात करायी। अब कयास लगाए जा रहा है एजाज और पवित्रा जल्द ही शादी कर सकते हैं। वहीं, एजाज ने अपने रिश्ते को सफल और खुशहाल बनाने के सीक्रेट्स के बारे में भी मीडिया से बात की है। काव्यांजलि सीरियल से घर-घर में लोगों के फेवरेट बने अभिनेता एजाज खान ने एक सफल रिलेशनशिप का सीक्रेट शेयर किया और यह मजेदार है। एजाज ने एक सफल रिश्ते के लिए समझदारी के साथ काम लेने की सलाह दी। अभिनेता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, जितनी जल्दी हो सके सॉरी बोलो। भले ही आप सही हों या गलत। तर्क को भूल जाओ। कभी-कभी रिश्तों में तर्क-वितर्क नहीं तलाशना चाहिए। बस कहो 'ठीक है, जो हुआ उसके लिए मुझे दुख है और बेबी चलो अब आगे बढ़ते हैं'। पैंतालीस वर्षीय अभिनेता और पवित्रा सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के लिए प्यार भरी तस्वीरें साझा करते रहते हैं। इस जोड़े को गायक राहुल वैद्य की शादी में एक साथ देखा गया था। अपने काम के बारे में बात करते हुए, एजाज वर्तमान में वेब-सीरीज सिटी ऑफ ड्रीम्स के दूसरे सीजन की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं, जो एक राजनीतिक ड्रामा है। 'सिटी ऑफ ड्रीम्स' सीजन दो में सचिन पिलगांवकर, अतुल कुलकर्णी, प्रिया बापट, संदीप कुलकर्णी और उदय टिकेकर सहित अन्य मराठी और हिंदी कलाकार भी हैं।
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Chandil (Dilip Kumar) : इंटर कॉलेज तिरुलडीह का छात्र सुहेब अंसारी इंटरमीडिएट कला संकाय की परीक्षा में सरायकेला खरसावां जिले का सेकेंड टॉपर बना है. तिरूलडीह में छड़ सीमेंट का व्यवसाय करने वाले असलम अंसारी के बेटे सुहेब के जिला का सेकेंड टॉपर बनने से कॉलेज में खुशी की लहर है. सुहेब की मां अफसाना गृहिणी है और बेटे को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित करती है.
सरायकेला-खरसावां जिला में इंटरमीडिएट कला संकाय में सेकंड टॉपर बनने वाले सुहेब का सपना इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का है. इनकम टैक्स ऑफिसर बंन कर सोहेब भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा है. उच्च शिक्षा हासिल कर वह लोगों को उसका वाजिब हक दिलाना चाहता है. सुहेब ने अपने सफलता का क्रेडिट माता पिता को दिया है.
आर्ट्स संकाय में जिला के टॉप पांच विद्यार्थी.
एससी रेलवे इंटर कॉलेज सीनी तुषार अग्रवाल 454, इंटर कॉलेज तिरुलडीह सुहेब अंसारी 446, एसएस+2 हाई स्कूल गम्हरिया रोहित टुडू 440, केजीबीवी राजनगर मंदाकिनी महतो 438, केजीबीवी राजनगर अमिशा महतो 437.
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Chandil : इंटर कॉलेज तिरुलडीह का छात्र सुहेब अंसारी इंटरमीडिएट कला संकाय की परीक्षा में सरायकेला खरसावां जिले का सेकेंड टॉपर बना है. तिरूलडीह में छड़ सीमेंट का व्यवसाय करने वाले असलम अंसारी के बेटे सुहेब के जिला का सेकेंड टॉपर बनने से कॉलेज में खुशी की लहर है. सुहेब की मां अफसाना गृहिणी है और बेटे को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित करती है. सरायकेला-खरसावां जिला में इंटरमीडिएट कला संकाय में सेकंड टॉपर बनने वाले सुहेब का सपना इनकम टैक्स ऑफिसर बनने का है. इनकम टैक्स ऑफिसर बंन कर सोहेब भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा है. उच्च शिक्षा हासिल कर वह लोगों को उसका वाजिब हक दिलाना चाहता है. सुहेब ने अपने सफलता का क्रेडिट माता पिता को दिया है. आर्ट्स संकाय में जिला के टॉप पांच विद्यार्थी. एससी रेलवे इंटर कॉलेज सीनी तुषार अग्रवाल चार सौ चौवन, इंटर कॉलेज तिरुलडीह सुहेब अंसारी चार सौ छियालीस, एसएस+दो हाई स्कूल गम्हरिया रोहित टुडू चार सौ चालीस, केजीबीवी राजनगर मंदाकिनी महतो चार सौ अड़तीस, केजीबीवी राजनगर अमिशा महतो चार सौ सैंतीस.
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रायपुर। पीएम समर्थक हेमलाल साहू ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र अभनपुर क्रमांक 53 के अंतर्गत प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में 2014 से लेकर 2021 तक जिला रायपुर के अंतर्गत हमारे विधानसभा क्षेत्र अभनपुर में जो विकास हुई है। वह विकास केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से विधानसभा क्षेत्र अभनपुर के अंतर्गत कुल मिलाकर कुल मिलाकर 15. 100 करोड़ राशि का क्षेत्र में विकास हुई है।
जैसे कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना प्रधानमंत्री आवास योजना राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना आयुष्मान योजना इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वपूर्ण योजना के तहत गठान निर्माण के कार्य यह राशि भी केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले निर्माण किया जा रहा है।
मेरे मूल निवास ग्राम डोमा में वर्तमान में वर्ष 2019-20 21 में 2019-20-21 में 30 से 35 करोड़ राशि का विकास हुई है। यह केंद्र सरकार की योजनाओं एवं केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से मेरे मूल निवास ग्राम डोमा में यह महत्वपूर्ण राशि का विकास कार्य हो रहे। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले राशि से प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से विकास कार्य हो रहा है।
वर्ष 2020 में सातवां महा एक करोड़ 5000000 राशि का वन्य प्राणी की सुरक्षा के लिए मेरी ही प्रयास से नेचुरल जंगल को हमने हमने 30 वर्ष से बचाए रखे हुए हैं वर्तमान में वहां पर वन्य प्राणी की सुरक्षा वृक्ष की सुरक्षा वृक्ष की सुरक्षा किए जाने के लिए चारों तरफ से बाउंड्री वॉल किया जा रहा है।
जिसके लिए हमने काफी मेहनत कर राशि आवंटन हमारी ही प्रयास से किया गया है जिन का श्रेय प्रधानमंत्री आपके रिश्ते नाते आपके रिश्ते समर्थक होने के नाते संपूर्ण आपको जाता है।
प्रधानमंत्री जी भारत सरकार नई दिल्ली आपके विशेष सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य में 28 जिलों में जो भी विकास कार्य हो रहे है। वह विकास कार्य केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंतर्गत 28 जिलों में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं।
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रायपुर। पीएम समर्थक हेमलाल साहू ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र अभनपुर क्रमांक तिरेपन के अंतर्गत प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में दो हज़ार चौदह से लेकर दो हज़ार इक्कीस तक जिला रायपुर के अंतर्गत हमारे विधानसभा क्षेत्र अभनपुर में जो विकास हुई है। वह विकास केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से विधानसभा क्षेत्र अभनपुर के अंतर्गत कुल मिलाकर कुल मिलाकर पंद्रह. एक सौ करोड़ राशि का क्षेत्र में विकास हुई है। जैसे कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना प्रधानमंत्री आवास योजना राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना आयुष्मान योजना इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वपूर्ण योजना के तहत गठान निर्माण के कार्य यह राशि भी केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले निर्माण किया जा रहा है। मेरे मूल निवास ग्राम डोमा में वर्तमान में वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस इक्कीस में इक्कीस बीस दो हज़ार उन्नीस में तीस से पैंतीस करोड़ राशि का विकास हुई है। यह केंद्र सरकार की योजनाओं एवं केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से मेरे मूल निवास ग्राम डोमा में यह महत्वपूर्ण राशि का विकास कार्य हो रहे। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले राशि से प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से विकास कार्य हो रहा है। वर्ष दो हज़ार बीस में सातवां महा एक करोड़ पचास लाख राशि का वन्य प्राणी की सुरक्षा के लिए मेरी ही प्रयास से नेचुरल जंगल को हमने हमने तीस वर्ष से बचाए रखे हुए हैं वर्तमान में वहां पर वन्य प्राणी की सुरक्षा वृक्ष की सुरक्षा वृक्ष की सुरक्षा किए जाने के लिए चारों तरफ से बाउंड्री वॉल किया जा रहा है। जिसके लिए हमने काफी मेहनत कर राशि आवंटन हमारी ही प्रयास से किया गया है जिन का श्रेय प्रधानमंत्री आपके रिश्ते नाते आपके रिश्ते समर्थक होने के नाते संपूर्ण आपको जाता है। प्रधानमंत्री जी भारत सरकार नई दिल्ली आपके विशेष सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य में अट्ठाईस जिलों में जो भी विकास कार्य हो रहे है। वह विकास कार्य केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाले राशि से छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंतर्गत अट्ठाईस जिलों में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं।
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लखनऊ। कोरोनावायरस की दूसरी लहर लोगों के लापरवाह रवैये के कारण बढ़ी है। यह लहर चिंताजनक है। इसी पर लोगो के ध्यान आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश के माननीय कैबिनेट औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश में कोविड बेड्स की संख्या को बढ़ाने और दवाओं की सप्लाई में तेजी लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। मंत्री महाना ने इंटिग्रेटेड हेल्थ एंड वेलबीइंग (आईएचडब्लू) काउंसिल द्वारा आयोजित किये गए कोरोनावायरस वैक्सीनेशन समिट में ये बाते कहीं।
उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कहा, "इस साल मार्च में कोई भी इस महामारी के लिए तैयार नहीं था लेकिन इसे तेजी से फैलने का मौका मिल गया। अब केसेस फिर से बढ़ रहे है क्योंकि लोग लापरवाह हो गए है। जब मै लोगो को मास्क पहनने के लिए कहता था तो वे लोग मुझे घूरने लगते थे। टेस्ट रिपोर्ट को आने में 48 घंटे लग रहे है। सरकार उत्तर प्रदेश में कोविड बेड्स की संख्या को बढ़ाने और दवाओं की सप्लाई में तेजी लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। "
प्रदेश फिर से बढ़ते केसेस के तले दबा हुआ है और 15 अप्रैल 2021 तक पिछले 24 घंटे में 22,439 नए केसेस मिले।
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लखनऊ। कोरोनावायरस की दूसरी लहर लोगों के लापरवाह रवैये के कारण बढ़ी है। यह लहर चिंताजनक है। इसी पर लोगो के ध्यान आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश के माननीय कैबिनेट औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश में कोविड बेड्स की संख्या को बढ़ाने और दवाओं की सप्लाई में तेजी लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। मंत्री महाना ने इंटिग्रेटेड हेल्थ एंड वेलबीइंग काउंसिल द्वारा आयोजित किये गए कोरोनावायरस वैक्सीनेशन समिट में ये बाते कहीं। उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कहा, "इस साल मार्च में कोई भी इस महामारी के लिए तैयार नहीं था लेकिन इसे तेजी से फैलने का मौका मिल गया। अब केसेस फिर से बढ़ रहे है क्योंकि लोग लापरवाह हो गए है। जब मै लोगो को मास्क पहनने के लिए कहता था तो वे लोग मुझे घूरने लगते थे। टेस्ट रिपोर्ट को आने में अड़तालीस घंटाटे लग रहे है। सरकार उत्तर प्रदेश में कोविड बेड्स की संख्या को बढ़ाने और दवाओं की सप्लाई में तेजी लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। " प्रदेश फिर से बढ़ते केसेस के तले दबा हुआ है और पंद्रह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस तक पिछले चौबीस घंटाटे में बाईस,चार सौ उनतालीस नए केसेस मिले।
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हमारे देश में धर्म-कर्म ,संस्कृति ,सभ्यता आदि की बहुत अधिक महत्वता हैं इन सब चीजों में हमारा देश अग्रणीय रहा हैं, धर्म कर्म के चलते हिन्दू धर्म में माता रानी की उपासन के लिए नौ दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं और इन्हीं दिनों में माता के अलग,अलग रूपों की उपासना की जाती हैं .
नवरात्र के नौ दिन दुर्गा मां के भक्तों के लिए अपने नौ ग्रहों को शांत कराने का अहम मौका होता है. नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है. नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कन्दमाता कहा जाता है.
स्कंदमाता का स्वरूप :
शक्ति के इस स्वरूप की उपासना पांचवें दिन की जाती है. देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कन्द यानी भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. ये शक्ति व सुख का एहसास कराती हैं. ये सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसी कारण इनके चेहरे पर तेज विद्यमान . इनका वर्ण शुभ्र है.
माता चार भुजाधारी कमल के पुष्प पर बैठती हैं। इसलिए इनको पद्मासना देवी भी कहा जाता है। जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो या जिनको संतान संबंधी समस्या हो रही हो ऐसे लोगों के लिए इनकी पूजा विशेष शुभ होती है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो ऐसे लोग स्कंदमाता की पूजा जरूर करें।
स्कंदमाता की पूजा विधि :
नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है.
स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें. चने की दाल, मौसमी फल और केले का भोग लगाएं.
अगर पीले वस्त्र धारण किए जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे.
इनकी पूजा का सामान्य मंत्र है - "ॐ स्कंदमाता देव्यै नमः"
स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है.
संतान सम्बन्धी सारी समस्याओं का अंत हो सकता है.
अगर बृहस्पति कमजोर हो तो मजबूत हो जाता है. शिक्षा और ज्ञान में भी लाभ होता है.
"ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः"
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हमारे देश में धर्म-कर्म ,संस्कृति ,सभ्यता आदि की बहुत अधिक महत्वता हैं इन सब चीजों में हमारा देश अग्रणीय रहा हैं, धर्म कर्म के चलते हिन्दू धर्म में माता रानी की उपासन के लिए नौ दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं और इन्हीं दिनों में माता के अलग,अलग रूपों की उपासना की जाती हैं . नवरात्र के नौ दिन दुर्गा मां के भक्तों के लिए अपने नौ ग्रहों को शांत कराने का अहम मौका होता है. नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है. नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है. कार्तिकेय की माता होने के कारण इनको स्कन्दमाता कहा जाता है. स्कंदमाता का स्वरूप : शक्ति के इस स्वरूप की उपासना पांचवें दिन की जाती है. देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कन्द यानी भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. ये शक्ति व सुख का एहसास कराती हैं. ये सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसी कारण इनके चेहरे पर तेज विद्यमान . इनका वर्ण शुभ्र है. माता चार भुजाधारी कमल के पुष्प पर बैठती हैं। इसलिए इनको पद्मासना देवी भी कहा जाता है। जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो या जिनको संतान संबंधी समस्या हो रही हो ऐसे लोगों के लिए इनकी पूजा विशेष शुभ होती है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो ऐसे लोग स्कंदमाता की पूजा जरूर करें। स्कंदमाता की पूजा विधि : नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है. स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें. चने की दाल, मौसमी फल और केले का भोग लगाएं. अगर पीले वस्त्र धारण किए जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे. इनकी पूजा का सामान्य मंत्र है - "ॐ स्कंदमाता देव्यै नमः" स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है. संतान सम्बन्धी सारी समस्याओं का अंत हो सकता है. अगर बृहस्पति कमजोर हो तो मजबूत हो जाता है. शिक्षा और ज्ञान में भी लाभ होता है. "ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः"
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कटक ,बेपरवाही से जबरदखलकारियों को जुर्माना से दंडित करने वाले काकटपुर तहसीलदार को महंगा पड़ गया है। इसके लिए तहसीलदार को दंड स्वरूप 50 पेड़ लगाने के लिए ओडिशा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है। तहसीलदार कटक सीडीए के किसी भी सेक्टर में पेड़ के पौधे लगाएंगे। इसके लिए सीडीए अधिकारी उनकी मदद करेंगे। यह निर्देश आज ओड़िशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विश्वनाथ रथ ने दिया है।
जानकारी के मुताबि जबरदखल मामले में जबरन कब्जा करने वाले मीता दास को 15 सितम्बर 2021 को काकटपुर के तहसीलदार कोर्ट में हाजिर होने के लिए नोटिस जारी की गई थी। मीता दास नोटिस के मुताबिक तहसीलदार के कोर्ट में हाजिर हुए थे मगर नोटिस का जवाब नहीं दे पाए थे। ऐसे में उन्हें और एक मौका देने के बदले तहसीलदार ने उसी दिन उन्हें जुर्माना से दंडित किया था। उनका पक्ष सुनने के बदले इस तरह का निर्देश देने की बात दर्शाते हुए मीता दास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सभी पक्ष को सुनने के बजाय तहसीलदार ने लापरवाही के साथ कार्य किया, ऐसा हाईकोर्ट ने अनुभव किया है। तहसीलदार के इस तरह के लापरवाही कार्य के कारण एक सामान्य व्यक्ति को न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंचना पड़ा है, जिस पर जस्टिस विश्वनाथ रथ ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि जबरदखल मामले में तहसीलदार के इस तरह की लापरवाही के चलते मुकदमा की संख्या बढ़ रही है। इसके लिए सभी तहसीलदारों को सतर्क रहने के लिए राजस्व एवं कानून सचिव को हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने निर्देश दिया है। इसके साथ ही संपृक्त मामले में पुनः सुनवाई करने के लिए भी हाईकोर्ट ने तहसीदार को निर्देश जारी किया है।
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कटक ,बेपरवाही से जबरदखलकारियों को जुर्माना से दंडित करने वाले काकटपुर तहसीलदार को महंगा पड़ गया है। इसके लिए तहसीलदार को दंड स्वरूप पचास पेड़ लगाने के लिए ओडिशा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है। तहसीलदार कटक सीडीए के किसी भी सेक्टर में पेड़ के पौधे लगाएंगे। इसके लिए सीडीए अधिकारी उनकी मदद करेंगे। यह निर्देश आज ओड़िशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विश्वनाथ रथ ने दिया है। जानकारी के मुताबि जबरदखल मामले में जबरन कब्जा करने वाले मीता दास को पंद्रह सितम्बर दो हज़ार इक्कीस को काकटपुर के तहसीलदार कोर्ट में हाजिर होने के लिए नोटिस जारी की गई थी। मीता दास नोटिस के मुताबिक तहसीलदार के कोर्ट में हाजिर हुए थे मगर नोटिस का जवाब नहीं दे पाए थे। ऐसे में उन्हें और एक मौका देने के बदले तहसीलदार ने उसी दिन उन्हें जुर्माना से दंडित किया था। उनका पक्ष सुनने के बदले इस तरह का निर्देश देने की बात दर्शाते हुए मीता दास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सभी पक्ष को सुनने के बजाय तहसीलदार ने लापरवाही के साथ कार्य किया, ऐसा हाईकोर्ट ने अनुभव किया है। तहसीलदार के इस तरह के लापरवाही कार्य के कारण एक सामान्य व्यक्ति को न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंचना पड़ा है, जिस पर जस्टिस विश्वनाथ रथ ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि जबरदखल मामले में तहसीलदार के इस तरह की लापरवाही के चलते मुकदमा की संख्या बढ़ रही है। इसके लिए सभी तहसीलदारों को सतर्क रहने के लिए राजस्व एवं कानून सचिव को हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने निर्देश दिया है। इसके साथ ही संपृक्त मामले में पुनः सुनवाई करने के लिए भी हाईकोर्ट ने तहसीदार को निर्देश जारी किया है।
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देनेवाला है। इससे मोक्ष मिल नहीं सकता ॥ ३९ ॥ तमोगुण के अनुसार किये हुए कर्मों का फल वड़ा बुरा मिलता है। इससे जन्म-मृत्यु का मूलं नही नाश होता ॥ ४० ॥ जन्म-मरण का चक्र नष्ट होने के लिए तो सत्वगुरु ही चाहिए। अगले समास में उसी का निरूपण किया गया है. ॥ ४१ ॥
सातवाँ समास - सतोगुण-निरूपण ।
पिछले समास में दारुण-दुःखदायक तमोगुण का वर्णन किया; श्र्व परम दुर्लभ सते. गुण का निरूपण सुनिये ॥ १ ॥ यह ( सतोगुण) भजन का प्राधार है, योगियों का सहारा है और यही दुःखदायक संसार से पार करता है ॥ २ ॥ इससे उत्तम गति मिलती है, भगवान से मिलने का मार्ग तूम होता है और इसके द्वारा सायुज्य मुक्ति मिलती है ॥ ३ ॥ सतोगुण क्तों का आधार है, संसारसागर से पार होने में इसोका भरोसा है और सी के द्वारा मोक्षलक्ष्मी मिलती है ॥ ४ ॥ यह परमार्थ का मंडन है, रहन्तों का भूषण है और इसी के द्वारा रजोगुण और तमोगुण का निरास होता है ॥ ५ ॥ यह परम सुखकारों अथवा आनन्द की लहर है । यही जन्म मृत्यु को निवारण करता है ॥ ६ ॥ सतोगुण से अज्ञान का अन्त होता
पुण्य का प्रकाश होता है और परलोक का मार्ग मिलता है ॥ ७ ॥ यह गुण जब किसो मनुष्य में प्रकट होता है तब उसकी क्रिया के लक्षण इस प्रकार होते है :- ॥ ८ ॥
सतोगुण के कारण ईश्वर में प्रेम अधिक रहता है, प्रपंच का सम्पा इन लौकिक समझ पड़ता है और विवेक सदा पास रहता है ॥ ६ ॥ सतो गुण संसार-दुःख भुला देता है, विमल भक्तिमार्ग दिखा देता है और भजनभाव उपजाता है ॥ १० ॥ उसके द्वारा परमार्थ में प्रीति, भक्ति में प्रेम और परोपकार में मन लगता है ॥ ११ ॥ सतोगुण से मनुष्य स्नान, सन्ध्या, आदि कर्म करके पुण्यशील बनता है, और अन्तर्शुद्ध बन कर शरीर और वस्त्र आदि भी सुन्दर उज्वल रखता है ॥ १२ ॥ वह यज्ञ करता है और लोगों से कराता है, वेदशास्त्र, आदि पढता है और पढ़ाता है तथा दान पुण्य स्वयं करता और कराता है ॥ १३ ॥ सतोगुणी पुरुष का अध्यात्मनिरूपण में मन लगता है, हरिकथा अच्छी लगती है और वह सदाचरण
मैं प्रवृत्त होता है ॥ १४ ॥ सतोगुण से मनुज्य श्रभ्वदान, गजदान, गोदान भूमेिदान और नाना रत्नों का दान करता है ॥ १५ ॥ धनदान, वस्त्रदान, अन्नदान, उदकदान और तर्पण करता है ॥ १६ ॥ कार्तिकस्तान, माघस्नान, व्रत, उद्यापन, दान, तोर्थ और उपवास, वह निष्काम-कामनारहित होकर करता है ॥ १७ ॥ सहस्रभोजन, लक्षभोजन, अनेक प्रकार के दान जो निष्काम करता हो वह तो सत्वगुणी है और जो कामना से करता हो वह रजोगुणणे है ।।१८।। तोयों में जो भूमिदान करता हो, बावड़ी और सरोवर ( तालाव ) बांधता हो; मन्दिर ओर शिखर बनाता हो वह सत्वगुणी है ॥ १६ ॥ जो देवस्थान में रहने के लिए स्थान, सोढियां, दोपमाला, तुलसी और पोपल आदि के लिये चबूतरा इनवाता हो वह सत्वगुणो है ॥ २० ॥ वन, उपवन, पुग्पवाटिका, कुएं, तालाब आदि बनवावे और तपस्वियों के मन संतुष्ट कर वह सत्वगुणों है ॥ २१ ॥ जो संध्यामठ, मुँहरे, नदी के तीर में सीढ़ियां और देवस्थानों में भांडारगृह स्थापित करें वह सत्वगुणणे है ।। २२ ॥ अनेक देव-स्थानों में जो नंदादीप लगता हो, अलंकार आभूषण रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ २३ ॥ घड़ेयाल, मृदंग, करताल, ताशे, नगाडे, काहल ( एक चर्मवाद्य ) आदि सुस्वर घाद्य जो मन्दिरों में रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ २४ ॥ इसके सिवाय अनेक प्रकार की अन्य सुन्दर सामग्री जो मनुष्य मान्दरों में रखता हो तथा जो स्वयं हरिभजन में तत्पर रहता हो वह सात्विको है ॥ २५ ॥ छत्र, सुख-ग्रासनं, •हम्बूरा, पताका, निशान, चामर, सूर्यपान आदि वस्तुएं जो पुरुष देवालयों में दान करता हो वह सत्वगुणी है ।।२६।। जा वृन्दावन,#तुलसोधन लगाने, रंगमाला बनाने और सम्माजन आदि करने में बहुत प्रीति रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ २७ ॥ जो भांति भांति का पूजा का सुन्दर सामान और सण्डप, चान्दनी, श्रासन आदि देवालय में समर्पण करता हो वह सतोगुणी पुरुष है ॥ २८ ॥ जो देवता के लिए नाना प्रकार के भोजनों को नैवेद्य लगांव और त. जे पूर्व फल अर्पण करे वह सत्वगुणी है ॥ २६ ॥ जो देवस्थान में भक्तिपूर्वक नीच सेवा भी करता हो जो स्वयं देवद्वार भाड़ता हो वह सत्वगुणी है ॥ ३० ॥ पर्व तिथियों और महोत्सवीं में जो उत्साह दिखलाता हो और जिसने तन, मन, वचन आदि सब परमात्मा को अर्पण कर दिया हो वह सत्वगुणी है ॥३१॥ जो हारेकथा में तत्पर रहकर चन्दन, आला, धूसर, अर्थात् बुक्का या सुगन्धित धूल, लिये हुए सदा खड़ा रहता शे वह सत्वगुणी है ॥ ३२ ॥ .
ऋन्दा वृक्ष विशेष ।
दासर्वाोध ।
[ दसक ९
इस प्रकार नर अथवा नारी यथाशक्ति सामग्री लेकर देवस्थान में खड़ी हीं तो यह सत्वगुण का लक्षण हे ॥ ३३ ॥ जो अपना महत्व का काम छोड़ कर देव के निकट शाघ्र ही श्राव और अन्तःकरण में भक्ति रखता हो वह सत्वगुण है ॥ ३४ ॥ बडप्पन को बंद कर अंर नीच कृत्य अंगोकार करके जो देवता के द्वार पर खड़ा रहत. हो वह सत्वगुणी है ।।३५।। खो देवता के लिए उपवास करता हो, ताम्बूल आदि न सता हो; और जो नित्य नियम, जप, ध्यान आकरता हा वह सत्वगुणां है ॥ ३६ फठोर वचन किसो से न बोलता हो, बहुत नियम से चलता हो और जिसने यागियों को संतुष्ट किया हो वह सत्वगुणो है ॥ ३७ ॥ अभिमान छोड़ कर भगवान् का कोतन निष्कामता से करता हो और कीर्तन करते समय भाक्ते प्रेम के कारण जिसके स्वंद और रोमांच उठ आते हो वह के सत्वगुणो है । ३८ ॥ हृदय में ईश्वर का ध्यान करने से जिसके नेत्र अञ्जसूर्य हो जाते हो और देहसान न रहता हो वह सत्वगुणी है ॥ ३१ ॥ जिसे हरिकता से बहुत प्रीति हो, उससे कभी घबड़ाता न हो और आदि से अन्त तक प्रेम बढ़ता ही जाता हो वह सत्वगुणो है ॥ ४० ॥ सुख स परमात्मा के नाम लेता हुआ और हाथ से करताल बजाता हुआ हो और विरुदावली गाता हो तथा साधुजनों के पैरों को धूल लेकर मस्तक में लगाता हो वह सत्वगुणी ह ।। ४१ ॥ जिसका देहाभिमान टूिट गया हो, विषयों से प्रचल वैराग्य हो गया हो और जिसे माया मिथ्या मान पड़ती हो वह सत्वगुणी है ॥ ४२ ॥ जिसके मन में यह आता हो कि संसार में फँसने से क्या लाभ है उसले गुक्त होने का कुछ उपाय करना चाहिए वह सात्विको है ॥ ४३ ॥ संसार से मन घबढ़ाता हो और मन में ऐसा ज्ञान उठता हो कि कुछ भजन वरें तो इसे सत्वगुण का लक्षख समझो ॥ ४४ ॥ जो अपने आश्रम में रहते हुए आते आदर से नित्य नियम करता हो और सदा राम में प्रोति रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ ४५ ॥ सम्पूर्ण विषयों से घृणा होगई हो और केवल परमार्थ में जिसका मन लगा हो, संकट आने पर जिसे धैर्य माता हो वह सत्वगुणी है ॥ ४६ ॥ सदा उदासीन रहता हा, नाना प्रकार के भागों से जिसका मन हटता
* महाराष्ट्र प्रान्त म, लोगों को मदुपदेश दने के लिए, कीर्तन प्राचीन काल से चली आती है। कीर्तनकार धार्मिक और नै पदां का सुस्वर गान करके टन पर व्याख्यान देते हैं। मृदंग, तम्बूरा, करताल आदि साज भी इन लोगों के साथ रहते हैं। कीर्तनकार को उस प्रान्त में ' हरिदास ' कहत हैं। बहुत से हरिदास व्यवसाय की ह्यष्ट से, और कोई कोई निष्काम होकर, सारे प्रान्त में कीर्तन-द्वारा उपदेश करते रहते है। कीर्तन प्राय देवाव्यों में हाता है ।
भगवद्भजन में जिसका मन लगता हो वह सत्वगुण है ॥ ४७ ॥ सांसारिक पदार्थों में मन न लगता हो और दृढ भक्ति के साथ भगवान की याद करता हो वह सत्वगुणी है ।। ४८ ।। चाहे लोग उसे नाना प्रकार का दोष भी लगात हाँ, तौभो वह उन पर श्र धेक प्रेम करता हो अर जिसके अन्तःकरण में परमार्थ का निश्चय समा गया हो वह सत्वगुणो है ॥४६॥ जिसके अंतःकरण में " में कौन हूं', यह गर्त उठतो हो वार जो अपने सत्स्वरूप का चिंतन करता हो तथा बुर सन्देहों का निवारण करता हो वह सत्वगुणी है ॥ ५० ॥ जिसके अन्तःकरण में यह इच्छा होती हा कि शरीर की कुछ सार्थकता करें वह सत्वगुण है ॥ ५१ ॥ जिसमे शान्ति, क्षमा, दया और निश्चय उपजे; जान लो कि, उसके अन्तःकरण में सत्वगुण श्रा गया ॥ ५२ ॥ श्रुतिथि-अभ्यागत आ जाने पर जो उस भूखा नहीं जाने देता और यथाशक्ति दान देता है वह सत्वगुणी है ॥ ५३ ॥ यादे कोई दोन भिक्षुक श्राश्रय के लिए अपने पास श्रावँ ता उन्हें स्थान देना सत्वगुण का लक्षण है ॥ ३४ ॥ घर में अन्न को कमो होने पर भी जो दोन-दुःतयों को कभी विमुख नहीं जाने देता और शक्ति के अनुसार सदा देता है वह सत्वगुणी है ॥ ५५ ॥ जिसने रसना जोत लो हो जिसकी वासना तृप्त हो और जिसे कामना न हो वह सत्वगुणी है ॥ ५६ ॥ जो कुछ होनेवाला है वह होता जाता है और सांसारिक संकट भो अति जाते ह; तथापि जिसका चित्त ईश्वर की ओर से नहीं हटता वह सत्वगुणो है ॥५७॥ केवल 'भगवान् के लिए जिसने सब सुख छोड़ दिये हो र देह को कुछ न सम कता हो वह सत्वगुणी है ॥ ५८ ॥ विषय को और वासना दौड़ता हो, परन्तु वह कभी न डिगता हो और जिसका धीरज अचल हो वह संत्वगुणी है ॥ ५६ ॥ आपदाओं से देह पोड़ित होगय हा आर भूव प्यास के मारे कुम्हला गया हो, तौभी जिसका निश्चय अटल रहा हो, वह सत्वगुणी है ॥ ६० ॥ श्रवण, मनन और निदिध्यास से जिसे समाधान हुआ हो और शुद्ध आत्मज्ञान जिसे हुआ हो वह सत्वगुण है ॥ ६१ ॥ जिसे अहंकार न हो; जिसमें नैराश्य विलसता हो और जिसमे कृपा असतो हो वहसत्वगुरु है ।। ६२।। सब से नम्रता के साथ बालता हो; मर्यादा के साथ चलता हो और जिसने सब जनों को सतुष्ट किया हो वह सत्वगुणों है ।। ६३।। जो सब लोगों का मित्र हो, जो विरोध किसोसे न रम्खता हो; जिसन परोपकार के लिए जीवन अर्पण कर दिया हो वह सत्वगुणो है ॥६४।। अपने कार्य को अपेक्षा दूसरे का कार्य जो अधिक जो लगा कर सिद्ध करता हो और मरने के पीछे अपनी कीर्ति छोड़ जाता हो वह सत्वगुणी है ॥६५॥ दूसरे क गुणदोष मन में न रम्वता हो, अर्थात् जैसे समुद्र मे कोई वस्तु डालने से वह बाहर फेंक देता है उसी
दासत्रोध ।
प्रकार दूसरे के गुणदोष सुन कर मन में न रखता हो वह सत्वगुणो है ॥ ६६ ॥ नोच वचन सहना, उनका उत्तर न देना और आये हुए ऋाध को सम्हालना सत्वपुर्ण का लक्षण है ॥ ६७ ॥ यादे कोई अपराध के बिना सताता हो और नाना दुःख देता हो तो वह भी मन हो में रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ ६८ ॥ परोपकार के लिए शारीरिक कष्ट सहना, दुर्जनों से भी बुरा बर्ताव न करना और निन्दा करनेवाले का भी उपकार करना सत्वगुण का लक्ष रा है । ६६ ॥ यादे इधर उधर मत जाय तो विवेक से उसे रोक और इन्द्रियों को दमन कर तो यह सत्वगुण का लक्षण है ॥ ७० ॥ उत्तम कमों का आचरण करे, बुरे कर्मों का त्याग कर और भक्ति मार्ग पर चले तो यह सत्वगुण का लक्षण है ॥ ७१ । जिसे प्रात-स्तान ओर पुरण द्रवण रुचता हा श्रार जो नाना मंत्रों से देवता का अचंन करता हा वह सत्वगुणणे है ॥ ७२ ॥ पर्वकाल पर र पूजा के समय जो. उत्सव करता हो तथा जयन्तियों से जिसे बहुत प्रोते हो वह सत्वगुण है ॥ ७३ ॥ विदेश में मरे हुए लोगों का संस्कार करना अथवा स्वयं वहां ज़.कर उपस्थित होना सत्वगुर का लक्षण है ॥ ७४ ॥ कोई किसी को यदि मारता हो तो उसे जाकर वचावे और जो जोव को बन्धन से छुडावे वह सत्वगुण है ॥७५।। जो रिवार्चन करता हो, लाखों वेलपत्तियां चढाता हो, मेक करता हो, नामस्मरण में जिनका विश्वास हो, देवता के दर्शन करने के समय जो सिर- चित्त ( स्वस्थ ) हो वह सत्य है ॥७६॥ संत को देख कर जिसे परम सुख होता हो और वह कर जो उसे सर्वताभाव से नमस्कार करता हो वह सत्वगुणो पुरुष है ॥ ७७ ॥ जिस पर संतकृपा होतो है वह वंश का उद्धार करता है, ऐसा हो सतोगुणो पुरुष ईश्वर का अंश है ॥ ७ ॥ जो लोगों को सम्मार्ग दिखाता हो, जो उन्हें हरि-भजन में लगाता हो और प्रशानियों का ज्ञान सिखाता हो वह सतोगुणी है ॥ ७६ ।। जिस पुण्य-सस्कार, प्रडाक्षे, ओर नमस्कार प्यारी ही रजिसे बहुत सी उत्तम वते याद हाँ वह सत्वगुणो है ॥ ५० ॥ जो भक्ति के विषय में बडा उत्साही दो, जो पुस्तकें, संग्रह करता हो, और धानु-मूर्तियों को नाना प्रकार से जो पूजा करता हो वह सत्वगुणी है ।। ८१ ।। स्वच्छ पूजा को सामग्रो, माला, 'चटन, अ.सन, पावेत्र और उज्वल चसन आदे एकत्र करना सत्वगुण का लक्षण है ॥ ८२ ॥ दूसरे को पीड़ा से दुख होता हो, दूसरे के सन्तोष पर सुख मानता हो और वैराग्य देख कर हर्ष मानता हो वह सत्वगुणी है ॥ ८३ ॥ जो दूसरे को शामा से अपनो शोमा और दूसरे के दूपण से अपना दूषण मानता हो और हमरे के दुख में जिसे दुख होता हो वह सत्वगुणी है ॥ ८४ ।।
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सद्विद्या-निरूपण ।
सारांश, निष्काम होकर परमात्मा का भजन और धर्मकार्य करना सतोगुण का मुख्य लक्षण है ॥ ८५ ॥ सतोगुण हो संसार-सागर से पार करने वाला है और इसोस ज्ञानमार्ग का विवक उपजता है ॥८६॥ सत्वगुण से भगवान् को भक्ति, ज्ञान की प्राप्ति और सायुज्यक्ति होती है ॥ ८७ ॥ यहां तक सतं गुण का संक्षेप वृत्तान्त, अपनी बुद्धि के अनुसार, बतलाया । लोग कृपापूर्वक आगे का घन ध्यान देकर हुनें ॥ ८ ॥
आठवाँ समास- सद्विद्या-निरूपण । ।। श्रीराम ।।
सद्विद्या के लक्षण सुनो । ये लक्षण परम शुद्ध हैं। इनका विचार करने से ही आप मनुष्य स.द्वेद्यावान हो जाता है ॥ १ ॥ सद्वेद्यावाले पुरुष में उत्तम लक्षण विशेष होते हैं। ऐसे पुरुष के गुण हुन कर परम संतोष होता है ॥ २ ॥ वह पुरुष भाविक, सात्विक, प्रमो, शान्तिशील, क्षमाशाल, दयाशील, शालीन, सत्वमों में तत्पर, और अमृतवचनी होता है ॥ ३ ॥ सद्विद्यावान पुरुष परम सुन्दर होते हुए चतुर, बहुत बलवान होकर धीर, परम धनवान होकर उदार होते है ॥ ४ ॥ वे परम ज्ञाता और भक्त, महापंडित और विरक्त, महातपस्वी और शान्त होते हैं ॥ ५ ॥ चे वक्ता और नैराश्ययुक्त होते हैं, सर्वश होवर भो सद्ग्रन्थों का आदरयुक्त श्रवण करते हैं तथा श्रेष्ठ होकर भी सब से नम्रता करते हैं ॥ ६ ॥ वे राजा होकर धार्मिक, शूर होकर विवकी और तरुण होकर भी नियम से चलते हैं ॥ ७ ॥ वे वड़ा के बताये हुए मार्ग पर चलनेवाले, कुलाचार के अनुसार चलनेवाले, युक्त, (ठोक ) भोजन करनेवाले, विकाररहित; वैद्य होकर भी परोकारी और पद्महस्त, अर्थात् यशस्वी होते हैं ॥ ८ ॥ व काम करनेवाले होकर भी निराभमानी होते है, गायक और विष्णुभक्त होते हैं, तथा वैभव होने पर भी भगवद्भजन का बहुत आदर करते हैं ॥ १ ॥ वे तत्ववेत्ता होकर भी उदासीन होते हैं, बहुश्रुत होते हुए भी सजन होते हैं, वे मंत्री होकर भी गुणवान और नीतिवान होते हैं ॥ १० ॥ साद्वेद्यावाले पुरुष साधु, पवित्र और पुण्यवान होते हैं, अन्तशुद्ध, धर्मात्मा और कृपालु होते हैं व कर्म में निष्ठा रखने वाले, स्वधर्माचरण में निर्मल और निर्लोभ होते हैं, तथा भूल से यदि कोई अनिष्ट काम उनके हाथ से हो जाता है तो उस पर पश्चा
हिं.दा. ६
दासबोध ।।
साप करते रहते हैं ॥ ११ ॥ परमार्थ-प्रीति, सन्मार्ग, सन्किया, धारणा, धृति, श्रुति, स्मृति फैला ( Graon ), युक्ति, सुते, माते, परोक्षा, आदि उत्तम बातों में सायावान पुरुष को रुाचे होतो है ॥ १२ ॥ साद्वेद्यावान् पुरुष दक्ष, धर्त, योन् सभ्य ( (Gallant ), योग्य, तार्केिक, सत्यवान्, साहित्यवान, नियम करनेवाल, भेद जान्नेवाले, कुशल, चपल, चमत्कारिक होत ह ॥ १३ ॥ जो श्रादर, सन्मान, तारतम्य, श्रर्थान् मर्यादा या पर म्परा, प्रयोग, समय, प्रसंग और कार्यकारण के चिन्ह जानता हो और विचक्षण व. लनवाला हो वह साद्वेद्यावान् है ॥ १४॥ जो सावधान, उद्योगो, और साधक हो, वह और शास्त्रों पर व्याख्यान करनेवाला ही और निश्च यात्मक ज्ञान-विज्ञान का बोध करानेवाला हो वह सद्विद्यावान है ॥ १५ ॥ जो पुरचरण करनवाला है, तोर्थवासो, दृढ़वतो और काया को केश देनेवाला है और जो उपासना करनेवाला और निग्रही है वह साहेद्यावान् ॥ १६ ॥ जो सदा सत्य, शुभ, कोमल चचन बोलता हो, नित्रय और सुख के वचन बोलत हो तथा एक बार कह कर बदलता न हो वह साद्वेद्यावाला पुरुष है ॥ १७ ॥ जो पुरुष वासना से तृप्त, गंभोर और योगी है; जो भक्त, सुप्रसन्न और वीतरागा है, जो सौम्य, सात्विक, शुद्धमार्गी, निष्कपट, औरं निर्व्यसनी व सायवन हें ॥ १८ ॥ जो चतुर, व्यवस्थित, गुणग्राही, अपेक्षा न रखनेवाला और मनुष्यों का संग्रह करनेवाला ह तथा जो सब प्राणियों से बिनतो और मित्रता करनेवाला है वह सद्वेिगवान है ॥ १६ ॥ जो पुरुष धन्य से, खो से, न्याय से, अन्तःकरण स, प्रवृत्ति सं, निवृत्ति से और सब से, निःसंग और शुचि हो वह पुरुष सद्विद्यावाला है ॥ २० ॥ जो मित्रता के साथ दूसरे का हित करता है, मधुर वचन कह कर दूसरे का शोक हरता है, जो सामर्थ्य के साथ रक्षा करता है और पुरुषार्थ साथ जगत् का मित्र है वह सुवेद्यावन है ॥ २१ ॥ जो संशय मिटानेवाला है, विशाल चक्का है और सब शंकाओं का समाधान करने में चतुर होकर भी श्रोता है, और जो कथा-निरूपण में शब्दार्थ कभी नहीं छोड़ता वह सुविद्यावान है ॥ २२ ॥ जो विवाद न करते हुए संवाद करता है, जो संगराहत, निरुपाधे, हैं, जो दुराशार हेत, अकोध, निर्दोष और मत्सर न करने वाला है वह सुविद्यावान् है ॥ २३ ॥ जो विमल झानी है, निश्चयात्मक है, जो समाधान रखनेवाला है, जो भजन करनेवाला है और जो सिद्ध होकर भी साधक है तथा साधन की रक्षा करता है वह साधावला हे ॥ २४ ॥ जो सुखरूप है; संतोषरूप है; श्रानन्दरूप है; हास्यरूप है, और जो ऐक्यरूप है तथा सबको आत्मरूप समझता है वह सद्विद्यावाला पुरुष है ॥२५॥ जो भाग्यवान है; विजनी है; रूपवान है; गुणवान है; आचारवन ह; किया
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देनेवाला है। इससे मोक्ष मिल नहीं सकता ॥ उनतालीस ॥ तमोगुण के अनुसार किये हुए कर्मों का फल वड़ा बुरा मिलता है। इससे जन्म-मृत्यु का मूलं नही नाश होता ॥ चालीस ॥ जन्म-मरण का चक्र नष्ट होने के लिए तो सत्वगुरु ही चाहिए। अगले समास में उसी का निरूपण किया गया है. ॥ इकतालीस ॥ सातवाँ समास - सतोगुण-निरूपण । पिछले समास में दारुण-दुःखदायक तमोगुण का वर्णन किया; श्र्व परम दुर्लभ सते. गुण का निरूपण सुनिये ॥ एक ॥ यह भजन का प्राधार है, योगियों का सहारा है और यही दुःखदायक संसार से पार करता है ॥ दो ॥ इससे उत्तम गति मिलती है, भगवान से मिलने का मार्ग तूम होता है और इसके द्वारा सायुज्य मुक्ति मिलती है ॥ तीन ॥ सतोगुण क्तों का आधार है, संसारसागर से पार होने में इसोका भरोसा है और सी के द्वारा मोक्षलक्ष्मी मिलती है ॥ चार ॥ यह परमार्थ का मंडन है, रहन्तों का भूषण है और इसी के द्वारा रजोगुण और तमोगुण का निरास होता है ॥ पाँच ॥ यह परम सुखकारों अथवा आनन्द की लहर है । यही जन्म मृत्यु को निवारण करता है ॥ छः ॥ सतोगुण से अज्ञान का अन्त होता पुण्य का प्रकाश होता है और परलोक का मार्ग मिलता है ॥ सात ॥ यह गुण जब किसो मनुष्य में प्रकट होता है तब उसकी क्रिया के लक्षण इस प्रकार होते है :- ॥ आठ ॥ सतोगुण के कारण ईश्वर में प्रेम अधिक रहता है, प्रपंच का सम्पा इन लौकिक समझ पड़ता है और विवेक सदा पास रहता है ॥ छः ॥ सतो गुण संसार-दुःख भुला देता है, विमल भक्तिमार्ग दिखा देता है और भजनभाव उपजाता है ॥ दस ॥ उसके द्वारा परमार्थ में प्रीति, भक्ति में प्रेम और परोपकार में मन लगता है ॥ ग्यारह ॥ सतोगुण से मनुष्य स्नान, सन्ध्या, आदि कर्म करके पुण्यशील बनता है, और अन्तर्शुद्ध बन कर शरीर और वस्त्र आदि भी सुन्दर उज्वल रखता है ॥ बारह ॥ वह यज्ञ करता है और लोगों से कराता है, वेदशास्त्र, आदि पढता है और पढ़ाता है तथा दान पुण्य स्वयं करता और कराता है ॥ तेरह ॥ सतोगुणी पुरुष का अध्यात्मनिरूपण में मन लगता है, हरिकथा अच्छी लगती है और वह सदाचरण मैं प्रवृत्त होता है ॥ चौदह ॥ सतोगुण से मनुज्य श्रभ्वदान, गजदान, गोदान भूमेिदान और नाना रत्नों का दान करता है ॥ पंद्रह ॥ धनदान, वस्त्रदान, अन्नदान, उदकदान और तर्पण करता है ॥ सोलह ॥ कार्तिकस्तान, माघस्नान, व्रत, उद्यापन, दान, तोर्थ और उपवास, वह निष्काम-कामनारहित होकर करता है ॥ सत्रह ॥ सहस्रभोजन, लक्षभोजन, अनेक प्रकार के दान जो निष्काम करता हो वह तो सत्वगुणी है और जो कामना से करता हो वह रजोगुणणे है ।।अट्ठारह।। तोयों में जो भूमिदान करता हो, बावड़ी और सरोवर बांधता हो; मन्दिर ओर शिखर बनाता हो वह सत्वगुणी है ॥ सोलह ॥ जो देवस्थान में रहने के लिए स्थान, सोढियां, दोपमाला, तुलसी और पोपल आदि के लिये चबूतरा इनवाता हो वह सत्वगुणो है ॥ बीस ॥ वन, उपवन, पुग्पवाटिका, कुएं, तालाब आदि बनवावे और तपस्वियों के मन संतुष्ट कर वह सत्वगुणों है ॥ इक्कीस ॥ जो संध्यामठ, मुँहरे, नदी के तीर में सीढ़ियां और देवस्थानों में भांडारगृह स्थापित करें वह सत्वगुणणे है ।। बाईस ॥ अनेक देव-स्थानों में जो नंदादीप लगता हो, अलंकार आभूषण रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ तेईस ॥ घड़ेयाल, मृदंग, करताल, ताशे, नगाडे, काहल आदि सुस्वर घाद्य जो मन्दिरों में रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ चौबीस ॥ इसके सिवाय अनेक प्रकार की अन्य सुन्दर सामग्री जो मनुष्य मान्दरों में रखता हो तथा जो स्वयं हरिभजन में तत्पर रहता हो वह सात्विको है ॥ पच्चीस ॥ छत्र, सुख-ग्रासनं, •हम्बूरा, पताका, निशान, चामर, सूर्यपान आदि वस्तुएं जो पुरुष देवालयों में दान करता हो वह सत्वगुणी है ।।छब्बीस।। जा वृन्दावन,#तुलसोधन लगाने, रंगमाला बनाने और सम्माजन आदि करने में बहुत प्रीति रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ सत्ताईस ॥ जो भांति भांति का पूजा का सुन्दर सामान और सण्डप, चान्दनी, श्रासन आदि देवालय में समर्पण करता हो वह सतोगुणी पुरुष है ॥ अट्ठाईस ॥ जो देवता के लिए नाना प्रकार के भोजनों को नैवेद्य लगांव और त. जे पूर्व फल अर्पण करे वह सत्वगुणी है ॥ छब्बीस ॥ जो देवस्थान में भक्तिपूर्वक नीच सेवा भी करता हो जो स्वयं देवद्वार भाड़ता हो वह सत्वगुणी है ॥ तीस ॥ पर्व तिथियों और महोत्सवीं में जो उत्साह दिखलाता हो और जिसने तन, मन, वचन आदि सब परमात्मा को अर्पण कर दिया हो वह सत्वगुणी है ॥इकतीस॥ जो हारेकथा में तत्पर रहकर चन्दन, आला, धूसर, अर्थात् बुक्का या सुगन्धित धूल, लिये हुए सदा खड़ा रहता शे वह सत्वगुणी है ॥ बत्तीस ॥ . ऋन्दा वृक्ष विशेष । दासर्वाोध । [ दसक नौ इस प्रकार नर अथवा नारी यथाशक्ति सामग्री लेकर देवस्थान में खड़ी हीं तो यह सत्वगुण का लक्षण हे ॥ तैंतीस ॥ जो अपना महत्व का काम छोड़ कर देव के निकट शाघ्र ही श्राव और अन्तःकरण में भक्ति रखता हो वह सत्वगुण है ॥ चौंतीस ॥ बडप्पन को बंद कर अंर नीच कृत्य अंगोकार करके जो देवता के द्वार पर खड़ा रहत. हो वह सत्वगुणी है ।।पैंतीस।। खो देवता के लिए उपवास करता हो, ताम्बूल आदि न सता हो; और जो नित्य नियम, जप, ध्यान आकरता हा वह सत्वगुणां है ॥ छत्तीस फठोर वचन किसो से न बोलता हो, बहुत नियम से चलता हो और जिसने यागियों को संतुष्ट किया हो वह सत्वगुणो है ॥ सैंतीस ॥ अभिमान छोड़ कर भगवान् का कोतन निष्कामता से करता हो और कीर्तन करते समय भाक्ते प्रेम के कारण जिसके स्वंद और रोमांच उठ आते हो वह के सत्वगुणो है । अड़तीस ॥ हृदय में ईश्वर का ध्यान करने से जिसके नेत्र अञ्जसूर्य हो जाते हो और देहसान न रहता हो वह सत्वगुणी है ॥ इकतीस ॥ जिसे हरिकता से बहुत प्रीति हो, उससे कभी घबड़ाता न हो और आदि से अन्त तक प्रेम बढ़ता ही जाता हो वह सत्वगुणो है ॥ चालीस ॥ सुख स परमात्मा के नाम लेता हुआ और हाथ से करताल बजाता हुआ हो और विरुदावली गाता हो तथा साधुजनों के पैरों को धूल लेकर मस्तक में लगाता हो वह सत्वगुणी ह ।। इकतालीस ॥ जिसका देहाभिमान टूिट गया हो, विषयों से प्रचल वैराग्य हो गया हो और जिसे माया मिथ्या मान पड़ती हो वह सत्वगुणी है ॥ बयालीस ॥ जिसके मन में यह आता हो कि संसार में फँसने से क्या लाभ है उसले गुक्त होने का कुछ उपाय करना चाहिए वह सात्विको है ॥ तैंतालीस ॥ संसार से मन घबढ़ाता हो और मन में ऐसा ज्ञान उठता हो कि कुछ भजन वरें तो इसे सत्वगुण का लक्षख समझो ॥ चौंतालीस ॥ जो अपने आश्रम में रहते हुए आते आदर से नित्य नियम करता हो और सदा राम में प्रोति रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ पैंतालीस ॥ सम्पूर्ण विषयों से घृणा होगई हो और केवल परमार्थ में जिसका मन लगा हो, संकट आने पर जिसे धैर्य माता हो वह सत्वगुणी है ॥ छियालीस ॥ सदा उदासीन रहता हा, नाना प्रकार के भागों से जिसका मन हटता * महाराष्ट्र प्रान्त म, लोगों को मदुपदेश दने के लिए, कीर्तन प्राचीन काल से चली आती है। कीर्तनकार धार्मिक और नै पदां का सुस्वर गान करके टन पर व्याख्यान देते हैं। मृदंग, तम्बूरा, करताल आदि साज भी इन लोगों के साथ रहते हैं। कीर्तनकार को उस प्रान्त में ' हरिदास ' कहत हैं। बहुत से हरिदास व्यवसाय की ह्यष्ट से, और कोई कोई निष्काम होकर, सारे प्रान्त में कीर्तन-द्वारा उपदेश करते रहते है। कीर्तन प्राय देवाव्यों में हाता है । भगवद्भजन में जिसका मन लगता हो वह सत्वगुण है ॥ सैंतालीस ॥ सांसारिक पदार्थों में मन न लगता हो और दृढ भक्ति के साथ भगवान की याद करता हो वह सत्वगुणी है ।। अड़तालीस ।। चाहे लोग उसे नाना प्रकार का दोष भी लगात हाँ, तौभो वह उन पर श्र धेक प्रेम करता हो अर जिसके अन्तःकरण में परमार्थ का निश्चय समा गया हो वह सत्वगुणो है ॥छियालीस॥ जिसके अंतःकरण में " में कौन हूं', यह गर्त उठतो हो वार जो अपने सत्स्वरूप का चिंतन करता हो तथा बुर सन्देहों का निवारण करता हो वह सत्वगुणी है ॥ पचास ॥ जिसके अन्तःकरण में यह इच्छा होती हा कि शरीर की कुछ सार्थकता करें वह सत्वगुण है ॥ इक्यावन ॥ जिसमे शान्ति, क्षमा, दया और निश्चय उपजे; जान लो कि, उसके अन्तःकरण में सत्वगुण श्रा गया ॥ बावन ॥ श्रुतिथि-अभ्यागत आ जाने पर जो उस भूखा नहीं जाने देता और यथाशक्ति दान देता है वह सत्वगुणी है ॥ तिरेपन ॥ यादे कोई दोन भिक्षुक श्राश्रय के लिए अपने पास श्रावँ ता उन्हें स्थान देना सत्वगुण का लक्षण है ॥ चौंतीस ॥ घर में अन्न को कमो होने पर भी जो दोन-दुःतयों को कभी विमुख नहीं जाने देता और शक्ति के अनुसार सदा देता है वह सत्वगुणी है ॥ पचपन ॥ जिसने रसना जोत लो हो जिसकी वासना तृप्त हो और जिसे कामना न हो वह सत्वगुणी है ॥ छप्पन ॥ जो कुछ होनेवाला है वह होता जाता है और सांसारिक संकट भो अति जाते ह; तथापि जिसका चित्त ईश्वर की ओर से नहीं हटता वह सत्वगुणो है ॥सत्तावन॥ केवल 'भगवान् के लिए जिसने सब सुख छोड़ दिये हो र देह को कुछ न सम कता हो वह सत्वगुणी है ॥ अट्ठावन ॥ विषय को और वासना दौड़ता हो, परन्तु वह कभी न डिगता हो और जिसका धीरज अचल हो वह संत्वगुणी है ॥ छप्पन ॥ आपदाओं से देह पोड़ित होगय हा आर भूव प्यास के मारे कुम्हला गया हो, तौभी जिसका निश्चय अटल रहा हो, वह सत्वगुणी है ॥ साठ ॥ श्रवण, मनन और निदिध्यास से जिसे समाधान हुआ हो और शुद्ध आत्मज्ञान जिसे हुआ हो वह सत्वगुण है ॥ इकसठ ॥ जिसे अहंकार न हो; जिसमें नैराश्य विलसता हो और जिसमे कृपा असतो हो वहसत्वगुरु है ।। बासठ।। सब से नम्रता के साथ बालता हो; मर्यादा के साथ चलता हो और जिसने सब जनों को सतुष्ट किया हो वह सत्वगुणों है ।। तिरेसठ।। जो सब लोगों का मित्र हो, जो विरोध किसोसे न रम्खता हो; जिसन परोपकार के लिए जीवन अर्पण कर दिया हो वह सत्वगुणो है ॥चौंसठ।। अपने कार्य को अपेक्षा दूसरे का कार्य जो अधिक जो लगा कर सिद्ध करता हो और मरने के पीछे अपनी कीर्ति छोड़ जाता हो वह सत्वगुणी है ॥पैंसठ॥ दूसरे क गुणदोष मन में न रम्वता हो, अर्थात् जैसे समुद्र मे कोई वस्तु डालने से वह बाहर फेंक देता है उसी दासत्रोध । प्रकार दूसरे के गुणदोष सुन कर मन में न रखता हो वह सत्वगुणो है ॥ छयासठ ॥ नोच वचन सहना, उनका उत्तर न देना और आये हुए ऋाध को सम्हालना सत्वपुर्ण का लक्षण है ॥ सरसठ ॥ यादे कोई अपराध के बिना सताता हो और नाना दुःख देता हो तो वह भी मन हो में रखता हो वह सत्वगुणी है ॥ अड़सठ ॥ परोपकार के लिए शारीरिक कष्ट सहना, दुर्जनों से भी बुरा बर्ताव न करना और निन्दा करनेवाले का भी उपकार करना सत्वगुण का लक्ष रा है । छयासठ ॥ यादे इधर उधर मत जाय तो विवेक से उसे रोक और इन्द्रियों को दमन कर तो यह सत्वगुण का लक्षण है ॥ सत्तर ॥ उत्तम कमों का आचरण करे, बुरे कर्मों का त्याग कर और भक्ति मार्ग पर चले तो यह सत्वगुण का लक्षण है ॥ इकहत्तर । जिसे प्रात-स्तान ओर पुरण द्रवण रुचता हा श्रार जो नाना मंत्रों से देवता का अचंन करता हा वह सत्वगुणणे है ॥ बहत्तर ॥ पर्वकाल पर र पूजा के समय जो. उत्सव करता हो तथा जयन्तियों से जिसे बहुत प्रोते हो वह सत्वगुण है ॥ तिहत्तर ॥ विदेश में मरे हुए लोगों का संस्कार करना अथवा स्वयं वहां ज़.कर उपस्थित होना सत्वगुर का लक्षण है ॥ चौहत्तर ॥ कोई किसी को यदि मारता हो तो उसे जाकर वचावे और जो जोव को बन्धन से छुडावे वह सत्वगुण है ॥पचहत्तर।। जो रिवार्चन करता हो, लाखों वेलपत्तियां चढाता हो, मेक करता हो, नामस्मरण में जिनका विश्वास हो, देवता के दर्शन करने के समय जो सिर- चित्त हो वह सत्य है ॥छिहत्तर॥ संत को देख कर जिसे परम सुख होता हो और वह कर जो उसे सर्वताभाव से नमस्कार करता हो वह सत्वगुणो पुरुष है ॥ सतहत्तर ॥ जिस पर संतकृपा होतो है वह वंश का उद्धार करता है, ऐसा हो सतोगुणो पुरुष ईश्वर का अंश है ॥ सात ॥ जो लोगों को सम्मार्ग दिखाता हो, जो उन्हें हरि-भजन में लगाता हो और प्रशानियों का ज्ञान सिखाता हो वह सतोगुणी है ॥ छिहत्तर ।। जिस पुण्य-सस्कार, प्रडाक्षे, ओर नमस्कार प्यारी ही रजिसे बहुत सी उत्तम वते याद हाँ वह सत्वगुणो है ॥ पचास ॥ जो भक्ति के विषय में बडा उत्साही दो, जो पुस्तकें, संग्रह करता हो, और धानु-मूर्तियों को नाना प्रकार से जो पूजा करता हो वह सत्वगुणी है ।। इक्यासी ।। स्वच्छ पूजा को सामग्रो, माला, 'चटन, अ.सन, पावेत्र और उज्वल चसन आदे एकत्र करना सत्वगुण का लक्षण है ॥ बयासी ॥ दूसरे को पीड़ा से दुख होता हो, दूसरे के सन्तोष पर सुख मानता हो और वैराग्य देख कर हर्ष मानता हो वह सत्वगुणी है ॥ तिरासी ॥ जो दूसरे को शामा से अपनो शोमा और दूसरे के दूपण से अपना दूषण मानता हो और हमरे के दुख में जिसे दुख होता हो वह सत्वगुणी है ॥ चौरासी ।। मांस आठ ] सद्विद्या-निरूपण । सारांश, निष्काम होकर परमात्मा का भजन और धर्मकार्य करना सतोगुण का मुख्य लक्षण है ॥ पचासी ॥ सतोगुण हो संसार-सागर से पार करने वाला है और इसोस ज्ञानमार्ग का विवक उपजता है ॥छियासी॥ सत्वगुण से भगवान् को भक्ति, ज्ञान की प्राप्ति और सायुज्यक्ति होती है ॥ सत्तासी ॥ यहां तक सतं गुण का संक्षेप वृत्तान्त, अपनी बुद्धि के अनुसार, बतलाया । लोग कृपापूर्वक आगे का घन ध्यान देकर हुनें ॥ आठ ॥ आठवाँ समास- सद्विद्या-निरूपण । ।। श्रीराम ।। सद्विद्या के लक्षण सुनो । ये लक्षण परम शुद्ध हैं। इनका विचार करने से ही आप मनुष्य स.द्वेद्यावान हो जाता है ॥ एक ॥ सद्वेद्यावाले पुरुष में उत्तम लक्षण विशेष होते हैं। ऐसे पुरुष के गुण हुन कर परम संतोष होता है ॥ दो ॥ वह पुरुष भाविक, सात्विक, प्रमो, शान्तिशील, क्षमाशाल, दयाशील, शालीन, सत्वमों में तत्पर, और अमृतवचनी होता है ॥ तीन ॥ सद्विद्यावान पुरुष परम सुन्दर होते हुए चतुर, बहुत बलवान होकर धीर, परम धनवान होकर उदार होते है ॥ चार ॥ वे परम ज्ञाता और भक्त, महापंडित और विरक्त, महातपस्वी और शान्त होते हैं ॥ पाँच ॥ चे वक्ता और नैराश्ययुक्त होते हैं, सर्वश होवर भो सद्ग्रन्थों का आदरयुक्त श्रवण करते हैं तथा श्रेष्ठ होकर भी सब से नम्रता करते हैं ॥ छः ॥ वे राजा होकर धार्मिक, शूर होकर विवकी और तरुण होकर भी नियम से चलते हैं ॥ सात ॥ वे वड़ा के बताये हुए मार्ग पर चलनेवाले, कुलाचार के अनुसार चलनेवाले, युक्त, भोजन करनेवाले, विकाररहित; वैद्य होकर भी परोकारी और पद्महस्त, अर्थात् यशस्वी होते हैं ॥ आठ ॥ व काम करनेवाले होकर भी निराभमानी होते है, गायक और विष्णुभक्त होते हैं, तथा वैभव होने पर भी भगवद्भजन का बहुत आदर करते हैं ॥ एक ॥ वे तत्ववेत्ता होकर भी उदासीन होते हैं, बहुश्रुत होते हुए भी सजन होते हैं, वे मंत्री होकर भी गुणवान और नीतिवान होते हैं ॥ दस ॥ साद्वेद्यावाले पुरुष साधु, पवित्र और पुण्यवान होते हैं, अन्तशुद्ध, धर्मात्मा और कृपालु होते हैं व कर्म में निष्ठा रखने वाले, स्वधर्माचरण में निर्मल और निर्लोभ होते हैं, तथा भूल से यदि कोई अनिष्ट काम उनके हाथ से हो जाता है तो उस पर पश्चा हिं.दा. छः दासबोध ।। साप करते रहते हैं ॥ ग्यारह ॥ परमार्थ-प्रीति, सन्मार्ग, सन्किया, धारणा, धृति, श्रुति, स्मृति फैला , युक्ति, सुते, माते, परोक्षा, आदि उत्तम बातों में सायावान पुरुष को रुाचे होतो है ॥ बारह ॥ साद्वेद्यावान् पुरुष दक्ष, धर्त, योन् सभ्य , योग्य, तार्केिक, सत्यवान्, साहित्यवान, नियम करनेवाल, भेद जान्नेवाले, कुशल, चपल, चमत्कारिक होत ह ॥ तेरह ॥ जो श्रादर, सन्मान, तारतम्य, श्रर्थान् मर्यादा या पर म्परा, प्रयोग, समय, प्रसंग और कार्यकारण के चिन्ह जानता हो और विचक्षण व. लनवाला हो वह साद्वेद्यावान् है ॥ चौदह॥ जो सावधान, उद्योगो, और साधक हो, वह और शास्त्रों पर व्याख्यान करनेवाला ही और निश्च यात्मक ज्ञान-विज्ञान का बोध करानेवाला हो वह सद्विद्यावान है ॥ पंद्रह ॥ जो पुरचरण करनवाला है, तोर्थवासो, दृढ़वतो और काया को केश देनेवाला है और जो उपासना करनेवाला और निग्रही है वह साहेद्यावान् ॥ सोलह ॥ जो सदा सत्य, शुभ, कोमल चचन बोलता हो, नित्रय और सुख के वचन बोलत हो तथा एक बार कह कर बदलता न हो वह साद्वेद्यावाला पुरुष है ॥ सत्रह ॥ जो पुरुष वासना से तृप्त, गंभोर और योगी है; जो भक्त, सुप्रसन्न और वीतरागा है, जो सौम्य, सात्विक, शुद्धमार्गी, निष्कपट, औरं निर्व्यसनी व सायवन हें ॥ अट्ठारह ॥ जो चतुर, व्यवस्थित, गुणग्राही, अपेक्षा न रखनेवाला और मनुष्यों का संग्रह करनेवाला ह तथा जो सब प्राणियों से बिनतो और मित्रता करनेवाला है वह सद्वेिगवान है ॥ सोलह ॥ जो पुरुष धन्य से, खो से, न्याय से, अन्तःकरण स, प्रवृत्ति सं, निवृत्ति से और सब से, निःसंग और शुचि हो वह पुरुष सद्विद्यावाला है ॥ बीस ॥ जो मित्रता के साथ दूसरे का हित करता है, मधुर वचन कह कर दूसरे का शोक हरता है, जो सामर्थ्य के साथ रक्षा करता है और पुरुषार्थ साथ जगत् का मित्र है वह सुवेद्यावन है ॥ इक्कीस ॥ जो संशय मिटानेवाला है, विशाल चक्का है और सब शंकाओं का समाधान करने में चतुर होकर भी श्रोता है, और जो कथा-निरूपण में शब्दार्थ कभी नहीं छोड़ता वह सुविद्यावान है ॥ बाईस ॥ जो विवाद न करते हुए संवाद करता है, जो संगराहत, निरुपाधे, हैं, जो दुराशार हेत, अकोध, निर्दोष और मत्सर न करने वाला है वह सुविद्यावान् है ॥ तेईस ॥ जो विमल झानी है, निश्चयात्मक है, जो समाधान रखनेवाला है, जो भजन करनेवाला है और जो सिद्ध होकर भी साधक है तथा साधन की रक्षा करता है वह साधावला हे ॥ चौबीस ॥ जो सुखरूप है; संतोषरूप है; श्रानन्दरूप है; हास्यरूप है, और जो ऐक्यरूप है तथा सबको आत्मरूप समझता है वह सद्विद्यावाला पुरुष है ॥पच्चीस॥ जो भाग्यवान है; विजनी है; रूपवान है; गुणवान है; आचारवन ह; किया
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बिहार में कोरोना का आतंक तेजी से बढ़ता जा रहा हैं. राज्य में सोलह दिनों में शहरी इलाकों में कोरोना संक्रमितों के आंकडों में बिस प्रतिशत का इजाफा हुआ है. दस अगस्त को प्रदेश के शहरी क्षेत्र में 19 प्रतिशत कोरोना संक्रमित रोगी थे. जो कि 27 अगस्त को बढ़कर 39 प्रतिशत हो गए हैं.
स्वास्थ्य डिपार्टमेंट के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दस अगस्त को प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 81 प्रतिशत कोरोना संक्रमित रोगी थे. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 27 अगस्त तक कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा कम हो गया और यह 61 प्रतिशत हो गया. विभागीय सूत्रों के मुताबिक दस अगस्त तक प्रदेश में 82 हजार 741 कोरोना मरीजों की पृष्टि की गई थी. जबकि 27 अगस्त तक कोरोना मरीजों के आंकड़े बढ़कर एक लाख 28 हजार 850 हो गई. इस तरह, सोलह दिनों में प्रदेश में कुल 46 हजार 109 नए मरीजों की पृष्टि की गई. इनमें ग्रामीण इलाके से अधिक शहरी इलाके में कोरोना मरीजों की पहचान की गई.
कोरोना के लिए डेडिकेटेड अस्पताल नालन्दा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच ) के नोडल पदाधिकारी डॉ. अजय सिन्हा ने इस बारें में बोला हैं कि शहरी इलाके में फेस मास्क के इस्तेमाल को नजरअंदाज करने और घनी आबादी के बीच शारीरिक दूरी की कमी के वजह से संक्रमण में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि उन्होंने यह भी बोला हैं कि प्रदेश में कोरोना की पहचान व उपचार की सुविधा में बढ़ोतरी होने से कोरोना की दर में गिरावट देखी गई है.
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बिहार में कोरोना का आतंक तेजी से बढ़ता जा रहा हैं. राज्य में सोलह दिनों में शहरी इलाकों में कोरोना संक्रमितों के आंकडों में बिस प्रतिशत का इजाफा हुआ है. दस अगस्त को प्रदेश के शहरी क्षेत्र में उन्नीस प्रतिशत कोरोना संक्रमित रोगी थे. जो कि सत्ताईस अगस्त को बढ़कर उनतालीस प्रतिशत हो गए हैं. स्वास्थ्य डिपार्टमेंट के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दस अगस्त को प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इक्यासी प्रतिशत कोरोना संक्रमित रोगी थे. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सत्ताईस अगस्त तक कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा कम हो गया और यह इकसठ प्रतिशत हो गया. विभागीय सूत्रों के मुताबिक दस अगस्त तक प्रदेश में बयासी हजार सात सौ इकतालीस कोरोना मरीजों की पृष्टि की गई थी. जबकि सत्ताईस अगस्त तक कोरोना मरीजों के आंकड़े बढ़कर एक लाख अट्ठाईस हजार आठ सौ पचास हो गई. इस तरह, सोलह दिनों में प्रदेश में कुल छियालीस हजार एक सौ नौ नए मरीजों की पृष्टि की गई. इनमें ग्रामीण इलाके से अधिक शहरी इलाके में कोरोना मरीजों की पहचान की गई. कोरोना के लिए डेडिकेटेड अस्पताल नालन्दा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नोडल पदाधिकारी डॉ. अजय सिन्हा ने इस बारें में बोला हैं कि शहरी इलाके में फेस मास्क के इस्तेमाल को नजरअंदाज करने और घनी आबादी के बीच शारीरिक दूरी की कमी के वजह से संक्रमण में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि उन्होंने यह भी बोला हैं कि प्रदेश में कोरोना की पहचान व उपचार की सुविधा में बढ़ोतरी होने से कोरोना की दर में गिरावट देखी गई है.
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दुर्ग चढ़ी रानी जब देख्यो, तीछन दृष्टी डारी ।
देव तेज रिपु ' सहि नहिं शाक्यो, शीघ्रहि नरमी धारी ।। मुरति = ।। आइ समिप अपराध खमायो, विनती कीन्हीं भारी । मोपै स्वामि सौम्य हग करिये, विनती यही गुजारी ।। मुरति ॥ छमि अपराध देवि शुभ दृष्टी, रिपु पर तुरतहिं डारी । चरनपूजि देवी के गसनो 3, निज गृह होय सुखारी ।। मुरति १० ॥ गर्भ प्रभाव लख्यो पितु माता, पायो मोद पारी । श्री नमिनाथ नाम शुभ दीन्हो, सुनि सब भये सुखारी ।। मुरति ११॥ धनुः पञ्चदश तनु को माना, आयु सहसदश भारी । कनक वरन छवि शोभत नीकी, नील कमल चिन्ह भारी ।। मुरति १२॥ वंश इछाकू जनम विमाना, प्राण तजन मन हारी । आश्विन शुकला पूनम च्यवना, महिमा अमित अपारी ।। मुरति १३॥ सावन वद आम तिथि जनमा, लखि सब भये सुखारी । वदि नौमी आषाढ़ को दीछा, लीन्ह विवेक विचारी ।। मुरति१४ ।। मिगसिर सुदि ग्यारस भयो ज्ञाना, केवल नाम सुखारी । मास खमण तप प्रभुवर धार्यो', दियो कर्म सब जारी ॥ मुरति १५॥ वदि दशमी वैशाख सुहावन, गिरि सम्मेत विहारी । प्रभुवर वर को पाय मुगतिश्री ५, सत्र विधि भई सुखारी । मुरति१६ ॥ सहस एक मुनि सख्या प्रभु की, सब विधि धर्म विहारी । मुनिवर सत्र प्रभु तुव गुणगावत, महिमा अमित अपारी ।। मुरति १ १७॥ भवनद पार किये तुम स्वामी, बहुतक पातकि भारी । मेरी बारी देर लगाई, मेरी सुरति विसारी ।। मुरति१८ ।।
अब जनि देर लगावहु स्वामी, सुनलो तुरत पुकारी । भव दुख जाल पड़ी हूं स्वामी, लीजै मोहिं उबारी । मुरति१६॥
१ - शत्रु । २ - सुन्दर । ३-गया । ४ किया । ५ - मुत्तिश्री । मत
५ भू० सु०
भूरांसुन्दरि अरज यही है, प्रभु नमिनाथ सुखारी । भवद् डूबत मोहि प्रभूवर, दीजै पार उतारी ।। मुरति२०।।
श्री नेमिनाथ स्तवन ( राम कुमरी )
जिनवर नेमिनाथ गुण गाले मोह नीढ़ क्यो सोता है जो नर तारन तरन नेमि प्रभु, नहि भजता वह रोता है ॥ १ ॥ झूठा है सब जग का नाता, नाहि पुत्र और पोता है । नेमिनाथ जिनवर को भजले, वृथा समय क्यो खोता है ॥ २ ॥ भजन त्यागि विपयन जो सेवत, वह नर खाता गोता है। नेमिनाथ जिनवर को ध्याना अन्त सहायक होता है ॥ ३ ॥ सौरीपुर म जनम लियो पितु, सिन्धुविजय सुख होता है। शिवादेवि माता मन मन्दिर, ह्यो को सोता है ॥ ४ ॥
गर्भ विराजन प्रभुवर सातुहि, दरश अरिष्ट को होता है। उद्दलत चक्र प्रकाश दीस्यो मनमुद अंकुर बोता है ॥ ५ ॥ गर्भ प्रभाव अरिष्टनेमि शुभ, नाम दियो कुल गोता है। धनुदशमान शरीर लसत है, यू दश शन होता है ॥ ६ ॥ श्यामचरन शँख लच्छन मनके, भरमजाल सब खोता है। जग हरि वंश विन्यात विमाना, अपराजित हूं होता है ॥ ७ ॥ कानी कृष्णा वारस कचना, जानि मुद्रित मन होता है 1 आवरण मुद्रि पांचम भवां जन्मा. घर घर मंगल होता है ॥ ८ ॥ आव सुदिपील दीन्छा. उच्छव घर घर होना है 4 आश्विन मास ज्ञाना केवल ही होता है ॥ ६ ॥ गोन्द्र सुवान गिरी गिग्नाग देखे मनमुद्र होता है। माम मनपर्यो भुवर सकत गैल जो धोना है॥६॥ १-मरायनाकामा है ।-या।
दनिवारणा, जानि सुदित मन होता है। छतिस अधिक पञ्चशत साधू यूथ' कर्ममल धोता है ॥ ११ ॥ भूरांसुन्दरि अरज करत है, नाथ समय अवकोता है । निज चरनन को ध्यान बकसिये, सकल कर्मरजें धोता है ॥१२॥
श्रीपाश्र्वनाथ स्तवन ( राग खमाच तिताली ) श्रीपार्श्व प्रभुहिं भज तज काम ॥ टेक ॥
पार्श्व भजन विना जगमाही, किन पायो विश्राम ॥ १ ॥ सुरनर मुनि सव ही प्रभु को यश, गावत आठोस । - त्रिभुवन नायक सुखदायक प्रभु, जनपालक घनश्याम ।। २ ।। पतित उवारन भव भय टारन नाम एक सुखधाम । भूरां सुन्दरि नामहिं निरमल भुक्ति मुक्ति को धाम ॥ ३ ॥ नगरि बनारसि जनम लियो प्रभु, अश्वसेन पितु नाम । - वामारानी माता प्रभु की, सती शिरोमरिण वाम ॥ ४ ॥ गर्भ विराजत प्रभुवरजी के, मातु तमस्विनियाम । जात सर्प सुपने महँ देख्यो, मानस ७ भयो विताम' ॥ ५ ॥ ताही मग नृप करहू दीस्यो, ताहि उच्च किय वाम । वोल्यो जागि नृपति रानी ते, धार्यो कर किहि काम ॥ ६ ॥ बोली रानि भुजग' यह जावै, धार्यो कर यहि काम । नृपति कह्यो मिथ्या तू भाषै, यहां सरप किहि ठाम ॥ ७ ॥ दीप मंगाय देवि दिखलायो, सरप दीठ तिहि ठाम । कियो विचार नृपति नहिं दीम्यो, सर्प मोहि यहि ठाम ॥ ८ ॥
५-समूह । २-थोड़ा । ३-पहर ।।४-त्रिलोकी के स्वामी । ४ - स्थान । ६ -स्त्री । ७-मन । उदास । ६-सर्प ।
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दुर्ग चढ़ी रानी जब देख्यो, तीछन दृष्टी डारी । देव तेज रिपु ' सहि नहिं शाक्यो, शीघ्रहि नरमी धारी ।। मुरति = ।। आइ समिप अपराध खमायो, विनती कीन्हीं भारी । मोपै स्वामि सौम्य हग करिये, विनती यही गुजारी ।। मुरति ॥ छमि अपराध देवि शुभ दृष्टी, रिपु पर तुरतहिं डारी । चरनपूजि देवी के गसनो तीन, निज गृह होय सुखारी ।। मुरति दस ॥ गर्भ प्रभाव लख्यो पितु माता, पायो मोद पारी । श्री नमिनाथ नाम शुभ दीन्हो, सुनि सब भये सुखारी ।। मुरति ग्यारह॥ धनुः पञ्चदश तनु को माना, आयु सहसदश भारी । कनक वरन छवि शोभत नीकी, नील कमल चिन्ह भारी ।। मुरति बारह॥ वंश इछाकू जनम विमाना, प्राण तजन मन हारी । आश्विन शुकला पूनम च्यवना, महिमा अमित अपारी ।। मुरति तेरह॥ सावन वद आम तिथि जनमा, लखि सब भये सुखारी । वदि नौमी आषाढ़ को दीछा, लीन्ह विवेक विचारी ।। मुरतिचौदह ।। मिगसिर सुदि ग्यारस भयो ज्ञाना, केवल नाम सुखारी । मास खमण तप प्रभुवर धार्यो', दियो कर्म सब जारी ॥ मुरति पंद्रह॥ वदि दशमी वैशाख सुहावन, गिरि सम्मेत विहारी । प्रभुवर वर को पाय मुगतिश्री पाँच, सत्र विधि भई सुखारी । मुरतिसोलह ॥ सहस एक मुनि सख्या प्रभु की, सब विधि धर्म विहारी । मुनिवर सत्र प्रभु तुव गुणगावत, महिमा अमित अपारी ।। मुरति एक सत्रह॥ भवनद पार किये तुम स्वामी, बहुतक पातकि भारी । मेरी बारी देर लगाई, मेरी सुरति विसारी ।। मुरतिअट्ठारह ।। अब जनि देर लगावहु स्वामी, सुनलो तुरत पुकारी । भव दुख जाल पड़ी हूं स्वामी, लीजै मोहिं उबारी । मुरतिसोलह॥ एक - शत्रु । दो - सुन्दर । तीन-गया । चार किया । पाँच - मुत्तिश्री । मत पाँच भूशून्य सुशून्य भूरांसुन्दरि अरज यही है, प्रभु नमिनाथ सुखारी । भवद् डूबत मोहि प्रभूवर, दीजै पार उतारी ।। मुरतिबीस।। श्री नेमिनाथ स्तवन जिनवर नेमिनाथ गुण गाले मोह नीढ़ क्यो सोता है जो नर तारन तरन नेमि प्रभु, नहि भजता वह रोता है ॥ एक ॥ झूठा है सब जग का नाता, नाहि पुत्र और पोता है । नेमिनाथ जिनवर को भजले, वृथा समय क्यो खोता है ॥ दो ॥ भजन त्यागि विपयन जो सेवत, वह नर खाता गोता है। नेमिनाथ जिनवर को ध्याना अन्त सहायक होता है ॥ तीन ॥ सौरीपुर म जनम लियो पितु, सिन्धुविजय सुख होता है। शिवादेवि माता मन मन्दिर, ह्यो को सोता है ॥ चार ॥ गर्भ विराजन प्रभुवर सातुहि, दरश अरिष्ट को होता है। उद्दलत चक्र प्रकाश दीस्यो मनमुद अंकुर बोता है ॥ पाँच ॥ गर्भ प्रभाव अरिष्टनेमि शुभ, नाम दियो कुल गोता है। धनुदशमान शरीर लसत है, यू दश शन होता है ॥ छः ॥ श्यामचरन शँख लच्छन मनके, भरमजाल सब खोता है। जग हरि वंश विन्यात विमाना, अपराजित हूं होता है ॥ सात ॥ कानी कृष्णा वारस कचना, जानि मुद्रित मन होता है एक आवरण मुद्रि पांचम भवां जन्मा. घर घर मंगल होता है ॥ आठ ॥ आव सुदिपील दीन्छा. उच्छव घर घर होना है चार आश्विन मास ज्ञाना केवल ही होता है ॥ छः ॥ गोन्द्र सुवान गिरी गिग्नाग देखे मनमुद्र होता है। माम मनपर्यो भुवर सकत गैल जो धोना है॥छः॥ एक-मरायनाकामा है ।-या। दनिवारणा, जानि सुदित मन होता है। छतिस अधिक पञ्चशत साधू यूथ' कर्ममल धोता है ॥ ग्यारह ॥ भूरांसुन्दरि अरज करत है, नाथ समय अवकोता है । निज चरनन को ध्यान बकसिये, सकल कर्मरजें धोता है ॥बारह॥ श्रीपाश्र्वनाथ स्तवन श्रीपार्श्व प्रभुहिं भज तज काम ॥ टेक ॥ पार्श्व भजन विना जगमाही, किन पायो विश्राम ॥ एक ॥ सुरनर मुनि सव ही प्रभु को यश, गावत आठोस । - त्रिभुवन नायक सुखदायक प्रभु, जनपालक घनश्याम ।। दो ।। पतित उवारन भव भय टारन नाम एक सुखधाम । भूरां सुन्दरि नामहिं निरमल भुक्ति मुक्ति को धाम ॥ तीन ॥ नगरि बनारसि जनम लियो प्रभु, अश्वसेन पितु नाम । - वामारानी माता प्रभु की, सती शिरोमरिण वाम ॥ चार ॥ गर्भ विराजत प्रभुवरजी के, मातु तमस्विनियाम । जात सर्प सुपने महँ देख्यो, मानस सात भयो विताम' ॥ पाँच ॥ ताही मग नृप करहू दीस्यो, ताहि उच्च किय वाम । वोल्यो जागि नृपति रानी ते, धार्यो कर किहि काम ॥ छः ॥ बोली रानि भुजग' यह जावै, धार्यो कर यहि काम । नृपति कह्यो मिथ्या तू भाषै, यहां सरप किहि ठाम ॥ सात ॥ दीप मंगाय देवि दिखलायो, सरप दीठ तिहि ठाम । कियो विचार नृपति नहिं दीम्यो, सर्प मोहि यहि ठाम ॥ आठ ॥ पाँच-समूह । दो-थोड़ा । तीन-पहर ।।चार-त्रिलोकी के स्वामी । चार - स्थान । छः -स्त्री । सात-मन । उदास । छः-सर्प ।
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ये ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी समूह संकट में है। समूह की कंपनियों के शेयर लगातार गिर रहे हैं। वहीं, सरकार और सेबी की निगरानी भी बढ़ गई है।
अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद संकट में घिरे गौतम अडानी को उद्योगपति आनंद महिंद्रा का साथ मिला है। आनंद महिंद्रा ने बिना किसी का नाम लिए विदेशी मीडिया को लताड़ लगाई है। इसके साथ ही कभी भी भारत के खिलाफ शर्त नहीं लगाने की नसीहत दी है।
क्या कहा आनंद महिंद्रा नेः अपने ट्विटर अकाउंट पर आनंद महिंद्रा ने लिखा है- ग्लोबल मीडिया अनुमान लगा रहा है कि क्या व्यापार क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियां वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर देंगी। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहूंगा कि भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना।
संकट से घिरे हैं अडानीः आनंद महिंद्रा का ये ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी समूह संकट में है। समूह की कंपनियों के शेयर लगातार गिर रहे हैं। इस वजह से समूह की कंपनियों के 108 बिलियन डॉलर स्वाहा हो चुके हैं।
वहीं, गौतम अडानी भी दुनिया के टॉप 20 रईस अरबपतियों की सूची से बाहर हो गए हैं। इस बीच, अडानी समूह पर सरकार से सेबी तक की निगरानी बढ़ गई है। हालांकि, गौतम अडानी समूह पर कुछ रेटिंग एजेंसियां और समूह में दांव लगाने वाली विदेशी कंपनियों का भरोसा बरकरार है।
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ये ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी समूह संकट में है। समूह की कंपनियों के शेयर लगातार गिर रहे हैं। वहीं, सरकार और सेबी की निगरानी भी बढ़ गई है। अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद संकट में घिरे गौतम अडानी को उद्योगपति आनंद महिंद्रा का साथ मिला है। आनंद महिंद्रा ने बिना किसी का नाम लिए विदेशी मीडिया को लताड़ लगाई है। इसके साथ ही कभी भी भारत के खिलाफ शर्त नहीं लगाने की नसीहत दी है। क्या कहा आनंद महिंद्रा नेः अपने ट्विटर अकाउंट पर आनंद महिंद्रा ने लिखा है- ग्लोबल मीडिया अनुमान लगा रहा है कि क्या व्यापार क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियां वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर देंगी। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहूंगा कि भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना। संकट से घिरे हैं अडानीः आनंद महिंद्रा का ये ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी समूह संकट में है। समूह की कंपनियों के शेयर लगातार गिर रहे हैं। इस वजह से समूह की कंपनियों के एक सौ आठ बिलियन डॉलर स्वाहा हो चुके हैं। वहीं, गौतम अडानी भी दुनिया के टॉप बीस रईस अरबपतियों की सूची से बाहर हो गए हैं। इस बीच, अडानी समूह पर सरकार से सेबी तक की निगरानी बढ़ गई है। हालांकि, गौतम अडानी समूह पर कुछ रेटिंग एजेंसियां और समूह में दांव लगाने वाली विदेशी कंपनियों का भरोसा बरकरार है।
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PATNA: लंबे वक्त से अटकलें लगाई जा रही थीं कि सपना चौधरी बीजेपी में शामिल होने वाली हैं, लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेता मनोज तिवारी के लिए रोड शो में हिस्सा लिया था, हालांकि सपना ने उस वक्त भाजपा में शामिल होने को लेकर कुछ भी नहीं कहा था। आखिरकार आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गई हैं। इस मौके पर कई अन्य बीजेपी नेता भी मौजूद थे।
राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी के सदस्यता अभियान में हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी ने सदस्यता हासिल कर ली है। यह अभियान कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किया गया, जिसमें शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी महासचिव रामलाल और मनोज तिवारी जैसे बीजेपी के बड़े दिग्गज शामिल हुए।
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उनके कांग्रेस में आने की खबरें आई थीं। कुछ तस्वीरों के बाद कहा गया कि वह कांग्रेस में आ गई हैं। लेकिन फिर सपना खुद मीडिया के सामने आईं और उन्हें इस खबर को गलत बताया था। इसके बाद प्रचार के दौरान सपना चौधरी बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ देखी गईं।
गौरतलब है कि बीजेपी ने पूरे देश में सदस्यता अभियान चला रखा है। इसकी शुरुआत 6 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी से की थी। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत वृक्षारोपण कर देश के लोगों से इस अभियान में जुड़ने का आह्वान किया था। बीजेपी का सदस्यता अभियान 10 अगस्त तक जारी रहेगा। छह जुलाई को बीजेपी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती होती है, इसलिए इस दिन से अभियान की शुरुआत की गई है। बीजेपी का दावा है कि वर्तमान में उसके 11 करोड़ सदस्य हैं। सपना चौधरी हरियाणा की पॉप्युलर सिंगर और डांसर हैं, वह बॉलिवुड की फिल्मों में भी आइटम सॉग्स कर चुकी हैं। इसके अलावा वह बिग बॉस में भी नजर आई थीं।
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PATNA: लंबे वक्त से अटकलें लगाई जा रही थीं कि सपना चौधरी बीजेपी में शामिल होने वाली हैं, लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेता मनोज तिवारी के लिए रोड शो में हिस्सा लिया था, हालांकि सपना ने उस वक्त भाजपा में शामिल होने को लेकर कुछ भी नहीं कहा था। आखिरकार आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई हैं। इस मौके पर कई अन्य बीजेपी नेता भी मौजूद थे। राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी के सदस्यता अभियान में हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी ने सदस्यता हासिल कर ली है। यह अभियान कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किया गया, जिसमें शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी महासचिव रामलाल और मनोज तिवारी जैसे बीजेपी के बड़े दिग्गज शामिल हुए। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस से पहले उनके कांग्रेस में आने की खबरें आई थीं। कुछ तस्वीरों के बाद कहा गया कि वह कांग्रेस में आ गई हैं। लेकिन फिर सपना खुद मीडिया के सामने आईं और उन्हें इस खबर को गलत बताया था। इसके बाद प्रचार के दौरान सपना चौधरी बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ देखी गईं। गौरतलब है कि बीजेपी ने पूरे देश में सदस्यता अभियान चला रखा है। इसकी शुरुआत छः जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी से की थी। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत वृक्षारोपण कर देश के लोगों से इस अभियान में जुड़ने का आह्वान किया था। बीजेपी का सदस्यता अभियान दस अगस्त तक जारी रहेगा। छह जुलाई को बीजेपी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती होती है, इसलिए इस दिन से अभियान की शुरुआत की गई है। बीजेपी का दावा है कि वर्तमान में उसके ग्यारह करोड़ सदस्य हैं। सपना चौधरी हरियाणा की पॉप्युलर सिंगर और डांसर हैं, वह बॉलिवुड की फिल्मों में भी आइटम सॉग्स कर चुकी हैं। इसके अलावा वह बिग बॉस में भी नजर आई थीं।
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देवर और छोटी बहन के प्रेम पर लगाम लगा पाने में नाकाम रहने पर भाभी ने बच्चों संग जहर खान कर खुदकुशी की कोशिश की। इस प्रयास में महिला और उसके एक बच्चे की मौत हो गई। जबकि दूसरा इलाजरत है।
इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि पांचवीं पीढ़ी के राहुल गांधी का 'कठोर परिश्रमी और खुद से मुकाम बनाने नरेंद्र मोदी के सामने कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को चुनकर केरल के लोगों ने भयानक गलती की है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा फायदा ये है कि वो राहुल गांधी नहीं हैं।
बिहार में अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब वे जज से भी रंगदारी मांग रहे हैं। मुजफ्फरपुर में पदस्थापित एक जज से बदमाशों ने 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगी है।
मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने प्रेमिका को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया और महिला थाने भेज दिया।
उत्तराखंड में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। जिसमें एक 12 साल की मासूम बच्ची की मौके पर मौत हो गई।
भक्त और कल्पवासी हाथों में दीपक लेकर मां गंगा की स्तुति करते हैं।
राजस्थान में पचांयत चुनाव के लिए अलग-अलग तारीख में मतदान शुरु हो गया है। इन चुनावों में कई प्रत्याशी तो इतनी अमीर हैं कि उनके पास विधायकों से ज्यादा की संपत्ति और कैश है।
जरा-सी लापरवाही कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है, यह मामला इसी का उदाहरण है। बगैर अलर्ट रोड क्रॉस कर रही लड़की को बचाने एक कार अनियंत्रित होकर दूसरी कार से जा टकराई। इससे पहले लड़की के पैरों पर भी जा चढ़ी।
झरखंड में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। जहां दो दोस्तों की एक साथ मौत हो गई। इसमें एक की तो दो महीनों बाद यानी मार्च के महीने में शादी होनी थी।
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देवर और छोटी बहन के प्रेम पर लगाम लगा पाने में नाकाम रहने पर भाभी ने बच्चों संग जहर खान कर खुदकुशी की कोशिश की। इस प्रयास में महिला और उसके एक बच्चे की मौत हो गई। जबकि दूसरा इलाजरत है। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि पांचवीं पीढ़ी के राहुल गांधी का 'कठोर परिश्रमी और खुद से मुकाम बनाने नरेंद्र मोदी के सामने कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को चुनकर केरल के लोगों ने भयानक गलती की है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा फायदा ये है कि वो राहुल गांधी नहीं हैं। बिहार में अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब वे जज से भी रंगदारी मांग रहे हैं। मुजफ्फरपुर में पदस्थापित एक जज से बदमाशों ने दस लाख रुपए की रंगदारी मांगी है। मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने प्रेमिका को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया और महिला थाने भेज दिया। उत्तराखंड में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। जिसमें एक बारह साल की मासूम बच्ची की मौके पर मौत हो गई। भक्त और कल्पवासी हाथों में दीपक लेकर मां गंगा की स्तुति करते हैं। राजस्थान में पचांयत चुनाव के लिए अलग-अलग तारीख में मतदान शुरु हो गया है। इन चुनावों में कई प्रत्याशी तो इतनी अमीर हैं कि उनके पास विधायकों से ज्यादा की संपत्ति और कैश है। जरा-सी लापरवाही कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है, यह मामला इसी का उदाहरण है। बगैर अलर्ट रोड क्रॉस कर रही लड़की को बचाने एक कार अनियंत्रित होकर दूसरी कार से जा टकराई। इससे पहले लड़की के पैरों पर भी जा चढ़ी। झरखंड में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। जहां दो दोस्तों की एक साथ मौत हो गई। इसमें एक की तो दो महीनों बाद यानी मार्च के महीने में शादी होनी थी।
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सुन्नी। प्राकृतिक खेती पर महिलाओं के लिए शिमला ग्रामीण के विकास खंड बसंतपुर आत्मा परियोजना के माध्यम से बुधवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आरंभ हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चयनित 33 कृषि सखियों को पहले दिन प्राकृतिक तौर पर तरल खाद ,सुखी खाद एवं फंफूदनाशक का व्यावहारिक तौर पर प्रशिक्षण दिया गया। आत्मा परियोजना की खंड तकनीकी प्रबंधक श्वेता परमार ,सहायक तकनीकी प्रबन्धक प्रवीण कुमार ने प्रतिभागियों को घनामृत, जीवामृत एवं फंफूद नाशक बनाना सिखाया तथा इसके उपयोग एवँ फायदों पर भी जानकारी दी।
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सुन्नी। प्राकृतिक खेती पर महिलाओं के लिए शिमला ग्रामीण के विकास खंड बसंतपुर आत्मा परियोजना के माध्यम से बुधवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आरंभ हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चयनित तैंतीस कृषि सखियों को पहले दिन प्राकृतिक तौर पर तरल खाद ,सुखी खाद एवं फंफूदनाशक का व्यावहारिक तौर पर प्रशिक्षण दिया गया। आत्मा परियोजना की खंड तकनीकी प्रबंधक श्वेता परमार ,सहायक तकनीकी प्रबन्धक प्रवीण कुमार ने प्रतिभागियों को घनामृत, जीवामृत एवं फंफूद नाशक बनाना सिखाया तथा इसके उपयोग एवँ फायदों पर भी जानकारी दी।
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इसके बाद कुछ वर्षों तक चंद्रगुप्त पूर्व तथा पश्चिम में अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाने में लगा रहा । मकदूनिया के राजा फ़िलिप के एक प्रमुख सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने ३०४ ई. पू. में जब सिकंदर के पद-चिह्नों पर चलने का प्रयत्न किया तो चंद्रगुप्त के शासन के लिए एक संकट उत्पन्न हो गया। उसने सिंधु नदी को पार किया और उसे आशा थी कि वह पूरे भारत को विजय करता हुआ आगे बढ़ता जायेगा। पर वह इस बात को भूल गया था कि उसे चंद्रगुप्त का मुकाबला करना पड़ेगा। मौर्य सनाएँ तेज़ी से उत्तर की ओर बढ़ीं और उनके हाथों आक्रमणकारियों की करारी हार हुई । फलस्वरूप मित्रता की एक संधि हुई जिसमें सेल्यूकस ने लड़ाई में काम आने योग्य पाँच सौ हाथियों के उपहार के बदले अर्कोसिया (कंधार), परोपानिसादे (काबुल), अलिया (हेरात) और गद्रोसिया ( बलूचिस्तान) नामक चार समृद्ध तथा विस्तृत क्षत्रपियों के कुछ भाग चंद्रगुप्त को दे दिये । सेल्यूकस की बेटी के साथ चंद्रगुप्त के विवाह से यह मित्रता और भी पक्की हो गयी। माँयों की राजधानी पाटलिपुत्र के दरबार में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ के आने से इन दो राज्यों के बीच मित्रता के संबंध और भी दृढ़ हो गये ।
इतिहास की दृष्टि से चंद्रगुप्त को भारत का पहला सम्राट् ठीक ही कहा गया है। अपनी समृद्धिशाली और घनी बसी हुई राजधानी से वह एक सुविस्तृत राज्य पर शासन करता था जो उत्तर-पश्चिम में काचुल से लेकर दक्षिण में मैसूर तक और पश्चिम में सौराष्ट्र से लेकर पूर्व में बंगाल और आसाम तक फैला हुआ था; लगभग पूरा भारत उसके राज्य में शामिल था। भारत के इतिहास में पहली बार एक ऐसी सत्ता की स्थापना हुई जिसकी शक्ति पूरे देश में अनुभव की जाती थी और जिसने अनेक छोटे छोटे राज्यों को मिलाकर एक राजतांत्रिक राज्य का रूप दे दिया। विंध्याचल पर्वत अब उत्तर और दक्षिण को एक दूसरे से अलग करनेवाली सीमा रेखा नहीं रह गया बल्कि एक महान यात्रा की राह में केवल एक मंज़िल बन गया ।
इस विस्तृत राज्य के प्रशासन के संबंध में राजनीति की अनेक जटिल समस्याएं उठ खड़ी हुई, पर चंद्रगुप्त ने इन सब समस्याओं का साहस के साथ मुक़ाबला किया और अपने मित्र, परामर्शदाता और मार्गदर्शक चाणक्य की सहायता से इन्हें बड़ी बुद्धिमत्ता से हल किया । संभवतः चाणक्य निरंतर उसका मंत्री रहा। चाणक्य राजनीति की प्रख्यात पुस्तक अर्थशास्त्र का सुप्रसिद्ध लेखक है। समस्या यह थी कि संचार के इतने मंदगामी साधनों के द्वारा इतने विस्तृत राज्य का शासन कैसे चलाया जाये; पर मौर्य प्रशासन में राजसत्ता का संतुलन अत्यंत सुचारू रूप से स्थापित किया गया था, जिसमें एक ओर तो सत्ता का अधिकतम केंद्रीकरण था और इसके साथ ही दूसरी ओर राज्य की शासन व्यवस्था के निचले स्तरों में अधिकारों का अधिकतम विकेंद्रीकरण भी था। राज्य को कई प्रांतों में बाँट दिया गया था जिनका शासन राजा के नियुक्त किये हुए प्रतिनिधियों के हाथ में था; ये लोग अधिकांशतः राज्य परािर केव राजकुमार होते थे। प्रांतों को फिर जिलों में बाँट दिया गया था और प्रशासन की सबसे छोटी इकाई युगों पुराना वह भारतीय गाँव था जिसका सर्वेसर्वा गाँव का मुखिया होता था; वह सम्राट् की तरफ़ से राजस्व वसूल करता था और शांति तथा व्यवस्था कायम रखता था। एक ओर सम्राट् तथा उसके पदाधिकारियों के बीच और दूसरी ओर सम्राट् तथा जनता के बीच
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इसके बाद कुछ वर्षों तक चंद्रगुप्त पूर्व तथा पश्चिम में अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाने में लगा रहा । मकदूनिया के राजा फ़िलिप के एक प्रमुख सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने तीन सौ चार ई. पू. में जब सिकंदर के पद-चिह्नों पर चलने का प्रयत्न किया तो चंद्रगुप्त के शासन के लिए एक संकट उत्पन्न हो गया। उसने सिंधु नदी को पार किया और उसे आशा थी कि वह पूरे भारत को विजय करता हुआ आगे बढ़ता जायेगा। पर वह इस बात को भूल गया था कि उसे चंद्रगुप्त का मुकाबला करना पड़ेगा। मौर्य सनाएँ तेज़ी से उत्तर की ओर बढ़ीं और उनके हाथों आक्रमणकारियों की करारी हार हुई । फलस्वरूप मित्रता की एक संधि हुई जिसमें सेल्यूकस ने लड़ाई में काम आने योग्य पाँच सौ हाथियों के उपहार के बदले अर्कोसिया , परोपानिसादे , अलिया और गद्रोसिया नामक चार समृद्ध तथा विस्तृत क्षत्रपियों के कुछ भाग चंद्रगुप्त को दे दिये । सेल्यूकस की बेटी के साथ चंद्रगुप्त के विवाह से यह मित्रता और भी पक्की हो गयी। माँयों की राजधानी पाटलिपुत्र के दरबार में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ के आने से इन दो राज्यों के बीच मित्रता के संबंध और भी दृढ़ हो गये । इतिहास की दृष्टि से चंद्रगुप्त को भारत का पहला सम्राट् ठीक ही कहा गया है। अपनी समृद्धिशाली और घनी बसी हुई राजधानी से वह एक सुविस्तृत राज्य पर शासन करता था जो उत्तर-पश्चिम में काचुल से लेकर दक्षिण में मैसूर तक और पश्चिम में सौराष्ट्र से लेकर पूर्व में बंगाल और आसाम तक फैला हुआ था; लगभग पूरा भारत उसके राज्य में शामिल था। भारत के इतिहास में पहली बार एक ऐसी सत्ता की स्थापना हुई जिसकी शक्ति पूरे देश में अनुभव की जाती थी और जिसने अनेक छोटे छोटे राज्यों को मिलाकर एक राजतांत्रिक राज्य का रूप दे दिया। विंध्याचल पर्वत अब उत्तर और दक्षिण को एक दूसरे से अलग करनेवाली सीमा रेखा नहीं रह गया बल्कि एक महान यात्रा की राह में केवल एक मंज़िल बन गया । इस विस्तृत राज्य के प्रशासन के संबंध में राजनीति की अनेक जटिल समस्याएं उठ खड़ी हुई, पर चंद्रगुप्त ने इन सब समस्याओं का साहस के साथ मुक़ाबला किया और अपने मित्र, परामर्शदाता और मार्गदर्शक चाणक्य की सहायता से इन्हें बड़ी बुद्धिमत्ता से हल किया । संभवतः चाणक्य निरंतर उसका मंत्री रहा। चाणक्य राजनीति की प्रख्यात पुस्तक अर्थशास्त्र का सुप्रसिद्ध लेखक है। समस्या यह थी कि संचार के इतने मंदगामी साधनों के द्वारा इतने विस्तृत राज्य का शासन कैसे चलाया जाये; पर मौर्य प्रशासन में राजसत्ता का संतुलन अत्यंत सुचारू रूप से स्थापित किया गया था, जिसमें एक ओर तो सत्ता का अधिकतम केंद्रीकरण था और इसके साथ ही दूसरी ओर राज्य की शासन व्यवस्था के निचले स्तरों में अधिकारों का अधिकतम विकेंद्रीकरण भी था। राज्य को कई प्रांतों में बाँट दिया गया था जिनका शासन राजा के नियुक्त किये हुए प्रतिनिधियों के हाथ में था; ये लोग अधिकांशतः राज्य परािर केव राजकुमार होते थे। प्रांतों को फिर जिलों में बाँट दिया गया था और प्रशासन की सबसे छोटी इकाई युगों पुराना वह भारतीय गाँव था जिसका सर्वेसर्वा गाँव का मुखिया होता था; वह सम्राट् की तरफ़ से राजस्व वसूल करता था और शांति तथा व्यवस्था कायम रखता था। एक ओर सम्राट् तथा उसके पदाधिकारियों के बीच और दूसरी ओर सम्राट् तथा जनता के बीच
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होली के त्योहार से पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक मस्जिद को तिरपाल से कवर कर दिया गया है। पिछले तकरीबन 6-7 सालों से होली के दौरान मस्जिद को तिरपाल से ढक दिया जाता है। इस बार भी काले रंग की तिरपाल से मस्जिद के हिस्से को कवर कर दिया गया है।
अब्दुल करीम मस्जिद, अलीगढ़ के अतिसंवेनशील इलाके में मौजूद है, जिस हलवाइयों वाली मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, 8 मार्च यानी बुधवार को होली है और यह इलाका काफी संवेदनशील है। ऐसे में होली खेलने के दौरान रंग मस्जिद में ना चला जाए इसलिए एहतियातन मस्जिद को ढक दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इलाके में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।
एक निवासी अकील पहलवान ने कहा, "जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई है, लगभग 6 से 7 साल से मस्जिद को ढका जा रहा है। प्रशासन की मदद से हम मस्जिद को ढक देते हैं ताकि कोई रंग या गंदगी न फेंके। " होली नजदीक आने के साथ ही त्योहार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लोगों में उत्साह की भावना है क्योंकि वे अपने दोस्तों और परिवार के साथ रंगों के त्योहार में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। होली का त्योहार समग्रता और मानवता की भावना का जश्न मनाता है। होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसे दो दिन मनाया जाता है- होलिका दहन और होली मिलन।
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होली के त्योहार से पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक मस्जिद को तिरपाल से कवर कर दिया गया है। पिछले तकरीबन छः-सात सालों से होली के दौरान मस्जिद को तिरपाल से ढक दिया जाता है। इस बार भी काले रंग की तिरपाल से मस्जिद के हिस्से को कवर कर दिया गया है। अब्दुल करीम मस्जिद, अलीगढ़ के अतिसंवेनशील इलाके में मौजूद है, जिस हलवाइयों वाली मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, आठ मार्च यानी बुधवार को होली है और यह इलाका काफी संवेदनशील है। ऐसे में होली खेलने के दौरान रंग मस्जिद में ना चला जाए इसलिए एहतियातन मस्जिद को ढक दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि इलाके में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है। एक निवासी अकील पहलवान ने कहा, "जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई है, लगभग छः से सात साल से मस्जिद को ढका जा रहा है। प्रशासन की मदद से हम मस्जिद को ढक देते हैं ताकि कोई रंग या गंदगी न फेंके। " होली नजदीक आने के साथ ही त्योहार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लोगों में उत्साह की भावना है क्योंकि वे अपने दोस्तों और परिवार के साथ रंगों के त्योहार में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। होली का त्योहार समग्रता और मानवता की भावना का जश्न मनाता है। होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसे दो दिन मनाया जाता है- होलिका दहन और होली मिलन।
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थाना क्षेत्र के वहिदा नगर के पास शनिवार की सुबह ट्रेन से कटकर एक युवक की मौत हो गई। युवक की मौत से पीड़ित परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पीएम को भेज दिया। परिजनों के मुताबिक मृतक युवक दिमागी रुप से बीमार चल रहा था।
वहिदा नगर निवासी 35 वर्षीय दिनेश कुमार यादव पुत्र रमाशंकर भोर में नींद उसे उठा और रेलवे ट्रैक के पास पहुंच गया। जब तक परिजन कुछ समझ पाते सुबह पांच बजे के करीब आ रही ट्रेन से कटकर उसकी मौत हो गई। तड़के शौच को निकले लोगों की नजर शव पर पड़ी तो सन्नाटा पसर गया। देखते ही देखते ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शव का शिनाख्त होते ही पीड़ित परिजन भी स्थल पर पहुंच गए। घर वाले रोने-बिलखने लगे। इसी बीच किसी ने इसकी सूचना ऊंज पुलिस को दे दी। स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पीएम को भेज दिया। परिजनों ने बताया कि मृतक युवक काफी दिन से दिमागी रुप से बीमार चल रहा था। एक निजी अस्पताल में उसका इलाज भी चल रहा था। उसकी मौत से दो बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का हाथ उठ गया। घर वालों का विलाप सुन लोगों की आंख से आंसू छलक उठे।
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थाना क्षेत्र के वहिदा नगर के पास शनिवार की सुबह ट्रेन से कटकर एक युवक की मौत हो गई। युवक की मौत से पीड़ित परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पीएम को भेज दिया। परिजनों के मुताबिक मृतक युवक दिमागी रुप से बीमार चल रहा था। वहिदा नगर निवासी पैंतीस वर्षीय दिनेश कुमार यादव पुत्र रमाशंकर भोर में नींद उसे उठा और रेलवे ट्रैक के पास पहुंच गया। जब तक परिजन कुछ समझ पाते सुबह पांच बजे के करीब आ रही ट्रेन से कटकर उसकी मौत हो गई। तड़के शौच को निकले लोगों की नजर शव पर पड़ी तो सन्नाटा पसर गया। देखते ही देखते ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शव का शिनाख्त होते ही पीड़ित परिजन भी स्थल पर पहुंच गए। घर वाले रोने-बिलखने लगे। इसी बीच किसी ने इसकी सूचना ऊंज पुलिस को दे दी। स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पीएम को भेज दिया। परिजनों ने बताया कि मृतक युवक काफी दिन से दिमागी रुप से बीमार चल रहा था। एक निजी अस्पताल में उसका इलाज भी चल रहा था। उसकी मौत से दो बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का हाथ उठ गया। घर वालों का विलाप सुन लोगों की आंख से आंसू छलक उठे।
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८३४ । साहब बीबी गुलाम
भगेसा । अचानक छोटी बहू भूतनाथ की गोद में लुढ़क पड़ी । कहा - तेरी ही गोद में मोती हूं भूतनाथ
छोटी बहू को गोद में लिये भूतनाथ पंगु-सा बैठा रहा । बोला - सो जाओ । वरानगर पहुँचने पर जगा दूंगा ।
छोटी बहू ने कहा -वड़ी नींद आ रही है रे भूतनाथ ! भूतनाथ बोला- तो सो जाओ न !
-नींद न खुले तो पुकार लेना तू ।
याद आने पर आज भी भूतनाथ सोचता है, उस रोज़ की वह नींद अन्तिम होगी, कौन जानता था ! कौन जानता था, वह नींद तोड़ने की जिम्मेवारी भूतनाथ की न थी । थी मँझले बाबू के गुंडों की। गाड़ी जब काफ़ी दूर निकल गई, तो बहुतसे लोगों का शोर सुनाई पड़ा । हो-हल्ला । डकैती होने पर जैसा शोर-गुल होता है। गाड़ी अचानक रुक गई। और उसी अन्धकार में दोनों तरफ़ के दरवाज़े खोलकर कौन लोग तो अन्दर घुस आए ! भूतनाथ शायद रोकना चाहता था, लेकिन किधर से आकर किसी अलक्षित हाथ ने जोरों के एक आघात से सुला दियाउसके बाद कुछ भी याद नहीं ।
उसके बाद जाने कितने दिनों पर इस अस्पताल में उसे होश आया धीरे-धीरे सारी बातें याद आ रही हैं। कहाँ गई छोटी बहू ! कैसी है वह् ! समाचार पाकर वंशी लेकिन एक दिन आया था ।
वंशी बोला-साले साहव
वंशी को देखकर भूतनाथ अवाक् रह गया था । कहा - - वंशी, तुम ! जी। कोई खबर थोड़े ही मिलती थी ! रात-भर बैठा रहा। पता नहीं होता । छोटे आपका । गाड़ी भी न लौटी। कैसा डर लगने लगा ! ऐसा तो नहीं बाबु वैसे ही निश्चेष्ट पड़े थे । फिर आँगन में निकला । निकलकर रास्ते पर दूर तक नजर दौड़ाई। गाड़ी का कहीं पता नहीं। रास्ते में सन्नाटा हो गया । ऊपर और रात-भर बैठे रहे। सुबह शायद ज़रा आँख लगी थी। नींद में ऐसा
नीचे मैं । दोनों
लगा, आसपास सव्वल से कुछ लोग मिट्टी कोड़ रहे हैं, ईंट उखाड़ रहे हैं - ढंग - ढंग, वप्प- धुप्प आवाज़ । लग रहा था कोई शायद...
वंशी रुका। अचानक दोनों हाथों से अपनी आँखें छिपा लीं। उनके बाद कोई बात नहीं । रोने लगा ।
भूतनाथ को कैसा तो शक हुआ । बोला -वंशी, वंशी वंशी ने फिर भी गरदन न उठाई।
पूछा-छोटी बहू कैसी है वंशी, बता, बता रोते-रोते वंशी बोला - छोटी मां नहीं रहीं हुजूर ! ---छोटी बहू नहीं रहीं !
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आठ सौ चौंतीस । साहब बीबी गुलाम भगेसा । अचानक छोटी बहू भूतनाथ की गोद में लुढ़क पड़ी । कहा - तेरी ही गोद में मोती हूं भूतनाथ छोटी बहू को गोद में लिये भूतनाथ पंगु-सा बैठा रहा । बोला - सो जाओ । वरानगर पहुँचने पर जगा दूंगा । छोटी बहू ने कहा -वड़ी नींद आ रही है रे भूतनाथ ! भूतनाथ बोला- तो सो जाओ न ! -नींद न खुले तो पुकार लेना तू । याद आने पर आज भी भूतनाथ सोचता है, उस रोज़ की वह नींद अन्तिम होगी, कौन जानता था ! कौन जानता था, वह नींद तोड़ने की जिम्मेवारी भूतनाथ की न थी । थी मँझले बाबू के गुंडों की। गाड़ी जब काफ़ी दूर निकल गई, तो बहुतसे लोगों का शोर सुनाई पड़ा । हो-हल्ला । डकैती होने पर जैसा शोर-गुल होता है। गाड़ी अचानक रुक गई। और उसी अन्धकार में दोनों तरफ़ के दरवाज़े खोलकर कौन लोग तो अन्दर घुस आए ! भूतनाथ शायद रोकना चाहता था, लेकिन किधर से आकर किसी अलक्षित हाथ ने जोरों के एक आघात से सुला दियाउसके बाद कुछ भी याद नहीं । उसके बाद जाने कितने दिनों पर इस अस्पताल में उसे होश आया धीरे-धीरे सारी बातें याद आ रही हैं। कहाँ गई छोटी बहू ! कैसी है वह् ! समाचार पाकर वंशी लेकिन एक दिन आया था । वंशी बोला-साले साहव वंशी को देखकर भूतनाथ अवाक् रह गया था । कहा - - वंशी, तुम ! जी। कोई खबर थोड़े ही मिलती थी ! रात-भर बैठा रहा। पता नहीं होता । छोटे आपका । गाड़ी भी न लौटी। कैसा डर लगने लगा ! ऐसा तो नहीं बाबु वैसे ही निश्चेष्ट पड़े थे । फिर आँगन में निकला । निकलकर रास्ते पर दूर तक नजर दौड़ाई। गाड़ी का कहीं पता नहीं। रास्ते में सन्नाटा हो गया । ऊपर और रात-भर बैठे रहे। सुबह शायद ज़रा आँख लगी थी। नींद में ऐसा नीचे मैं । दोनों लगा, आसपास सव्वल से कुछ लोग मिट्टी कोड़ रहे हैं, ईंट उखाड़ रहे हैं - ढंग - ढंग, वप्प- धुप्प आवाज़ । लग रहा था कोई शायद... वंशी रुका। अचानक दोनों हाथों से अपनी आँखें छिपा लीं। उनके बाद कोई बात नहीं । रोने लगा । भूतनाथ को कैसा तो शक हुआ । बोला -वंशी, वंशी वंशी ने फिर भी गरदन न उठाई। पूछा-छोटी बहू कैसी है वंशी, बता, बता रोते-रोते वंशी बोला - छोटी मां नहीं रहीं हुजूर ! ---छोटी बहू नहीं रहीं !
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जबलपुर :- मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2020 में शामिल करने वाले नियम 2018 सहित राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षक परिषद (NCET) सहित मानव संसाधन विकास मंत्रालय की अधिसूचना की संवैधानिकता को चुनोती दी गई थी उक्त अधिसूचना तथा मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग के नियमो को संविधान के अनुछेद 14,16 तथा 21(A) एवम शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के विरूद्ध बताया गया है । उक्त याचिका की सुनवाई आज दिनांक 7/7/ 22 को जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की । अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की हाल ही में सम्पन्न हुई वर्ग तीन की पात्रता परीक्षा में बीएड डिग्री धरियो को भी शामिल किया गया है जबकि उक्त अभ्यार्थियों को 6 माह का ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य है इसलिए उन अभ्यरतियो को यदि चयनित किया जाता है तो उन्हें 2 साल के अंदर उक्त कोर्स करना अनिवार्य है जबकि आज दिनाक तक देश मे ब्रिज कोर्स कैसे होगा उसका पाठ्यक्रम क्या होगा निर्धारित नही किया गया है अगर ऐसी स्थिति में बीएड डिग्री धरियो को चयनित किया जाता है तो डीएलएड डिप्लोमा धारकों के विधिक अधिकारों का उल्लघन होगा तथा उक्त कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों का शिक्षा के अधिकारों का उल्लघन होगा इसलिए शासन द्वारा अपने गई प्रक्रिया असंवैधानिक है । साथ मे अधिवक्ता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट सहित सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से कोर्ट को अवगत कराया गया । अधिवक्ता के उक्त तर्कों से सहमत होते हुए न्यायलय ने प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा सहित कई जाने वाली भर्ती को याचिका क्रमांक WP/13768/2022 के निर्णयाधीन कर दी गई है । याचिका कार केशरी नंदन साहू एवम रोहित चौधरी की ओर से पैरवी अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक शाह, परमानंद साहू, रामभजन लोधी ने की ।
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जबलपुर :- मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा दो हज़ार बीस में शामिल करने वाले नियम दो हज़ार अट्ठारह सहित राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षक परिषद सहित मानव संसाधन विकास मंत्रालय की अधिसूचना की संवैधानिकता को चुनोती दी गई थी उक्त अधिसूचना तथा मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग के नियमो को संविधान के अनुछेद चौदह,सोलह तथा इक्कीस एवम शिक्षा के अधिकार अधिनियम दो हज़ार नौ के विरूद्ध बताया गया है । उक्त याचिका की सुनवाई आज दिनांक सात/सात/ बाईस को जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की । अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की हाल ही में सम्पन्न हुई वर्ग तीन की पात्रता परीक्षा में बीएड डिग्री धरियो को भी शामिल किया गया है जबकि उक्त अभ्यार्थियों को छः माह का ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य है इसलिए उन अभ्यरतियो को यदि चयनित किया जाता है तो उन्हें दो साल के अंदर उक्त कोर्स करना अनिवार्य है जबकि आज दिनाक तक देश मे ब्रिज कोर्स कैसे होगा उसका पाठ्यक्रम क्या होगा निर्धारित नही किया गया है अगर ऐसी स्थिति में बीएड डिग्री धरियो को चयनित किया जाता है तो डीएलएड डिप्लोमा धारकों के विधिक अधिकारों का उल्लघन होगा तथा उक्त कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों का शिक्षा के अधिकारों का उल्लघन होगा इसलिए शासन द्वारा अपने गई प्रक्रिया असंवैधानिक है । साथ मे अधिवक्ता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट सहित सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से कोर्ट को अवगत कराया गया । अधिवक्ता के उक्त तर्कों से सहमत होते हुए न्यायलय ने प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा सहित कई जाने वाली भर्ती को याचिका क्रमांक WP/तेरह हज़ार सात सौ अड़सठ/दो हज़ार बाईस के निर्णयाधीन कर दी गई है । याचिका कार केशरी नंदन साहू एवम रोहित चौधरी की ओर से पैरवी अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक शाह, परमानंद साहू, रामभजन लोधी ने की ।
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झारखंड के देवघर में त्रिकुट पहाड़ी पर रोपवे हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। बुधवार को इसका असर मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में रोपवे में देखने को मिला। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब यहां रोपवे से 5 नहीं, बल्कि 4 श्रद्धालु ही ले जाए जाएंगे। वहीं, मेंटीनेंस डिपार्टमेंट रोपवे की बराबर चेकिंग कर रहा है। जिससे हादसे की कोई संभावना न रहे।
रोपवे के संचालक रोहित कुमार बिंद ने बताया कि रोपवे की ट्राली में वजन बहुत मायने रखता है। एक ट्रॉली में 320 किलोग्राम वेट ही सेफ होता है। इसको नियंत्रित करने के लिए अब केवल चार लोगों को बैठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सावधानी से ही हादसे को टाला जा सकता है। वजन संतुलित होने से मशीनों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा और हादसे की संभावना भी कम रहेगी।
झारखंड के त्रिकूट पहाड़ी पर रोप वे हादसा में दर्जनों लोगों के ट्राली में हजारों फीट की ऊंचाई पर फंसने के बाद अलर्ट किया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित रोप वे संचालकों को सावधानी के साथ संचालन का निर्देश दिया गया है । उन्हें ट्राली तारों के साथ ही नियमित रूप से मशीनों की जांच और सर्विसिंग की हिदायत दी गई है। लिहाजा संचालक रोहित कुमार बिंद भी किसी को मुसीबत में डालने के बजाय खुद सुकून के साथ कर्तव्य पालन में लगे हैं । इसके लिए दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है ।
रोप वे के संचालन में ट्रॉली में बैठे लोगों का वजन काफी मायने रखता है। एक ट्रॉली में 320 किलो का वजन नियंत्रित करने के लिए अब केवल चार लोगो को ही बैठाया जा रहा है। निर्देशों का पालन करने से हादसे को टाला जा सकता है। वजन संतुलित होने से मशीनों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा । यात्रियों की यात्रा प्रसन्नता के साथ कुशलतापूर्वक हो सके।
विंध्याचल धाम में त्रिकोण पथ पर बने रोप वे की यात्रा कर दर्शनार्थी भी खुश हैं। वाराणसी से आए मधुकर दुबे ने प्रसन्नता जताया। कहा कि तीर्थाटन के साथ ही रोपवे मनोरंजन का भी साधन बन गया है । रोप वे से पहाड़ पर सैर का अपना अलग ही आनन्द हैं।
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झारखंड के देवघर में त्रिकुट पहाड़ी पर रोपवे हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। बुधवार को इसका असर मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में रोपवे में देखने को मिला। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब यहां रोपवे से पाँच नहीं, बल्कि चार श्रद्धालु ही ले जाए जाएंगे। वहीं, मेंटीनेंस डिपार्टमेंट रोपवे की बराबर चेकिंग कर रहा है। जिससे हादसे की कोई संभावना न रहे। रोपवे के संचालक रोहित कुमार बिंद ने बताया कि रोपवे की ट्राली में वजन बहुत मायने रखता है। एक ट्रॉली में तीन सौ बीस किलोग्रामग्राम वेट ही सेफ होता है। इसको नियंत्रित करने के लिए अब केवल चार लोगों को बैठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सावधानी से ही हादसे को टाला जा सकता है। वजन संतुलित होने से मशीनों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा और हादसे की संभावना भी कम रहेगी। झारखंड के त्रिकूट पहाड़ी पर रोप वे हादसा में दर्जनों लोगों के ट्राली में हजारों फीट की ऊंचाई पर फंसने के बाद अलर्ट किया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित रोप वे संचालकों को सावधानी के साथ संचालन का निर्देश दिया गया है । उन्हें ट्राली तारों के साथ ही नियमित रूप से मशीनों की जांच और सर्विसिंग की हिदायत दी गई है। लिहाजा संचालक रोहित कुमार बिंद भी किसी को मुसीबत में डालने के बजाय खुद सुकून के साथ कर्तव्य पालन में लगे हैं । इसके लिए दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है । रोप वे के संचालन में ट्रॉली में बैठे लोगों का वजन काफी मायने रखता है। एक ट्रॉली में तीन सौ बीस किलो का वजन नियंत्रित करने के लिए अब केवल चार लोगो को ही बैठाया जा रहा है। निर्देशों का पालन करने से हादसे को टाला जा सकता है। वजन संतुलित होने से मशीनों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा । यात्रियों की यात्रा प्रसन्नता के साथ कुशलतापूर्वक हो सके। विंध्याचल धाम में त्रिकोण पथ पर बने रोप वे की यात्रा कर दर्शनार्थी भी खुश हैं। वाराणसी से आए मधुकर दुबे ने प्रसन्नता जताया। कहा कि तीर्थाटन के साथ ही रोपवे मनोरंजन का भी साधन बन गया है । रोप वे से पहाड़ पर सैर का अपना अलग ही आनन्द हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है। इसकी नींव डॉ अरुणांगशु गांगुली ने वर्ष 2017 में रखी थी।
यह अस्पताल प्रमुख रूप से प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हीपैटोलॉजी (यकृत पित्त अग्न्याशय चिकित्सा ), गुर्दे की कार्यवाही और रोगों का विज्ञान, ऑपथैल्मोलॉजी, कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान, भौतिक चिकित्सक, ओर्थोपेडिक्स, अनेस्थिसियोलॉजी, डेंटिस्ट्री, डर्माटोलॉजी, मधुमेह चिकित्सक, एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान, सामान्य शल्यचिकित्सा, रक्तशास्त्र, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जन, बाल हृदयरोग चिकित्सा, बच्चों के नसों के डॉक्टर, बाल रोग सर्जन, दर्द, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन, मनोचिकित्सा, रेडियोलोजी और यूरोलॉजी में विशेषज्ञ है।
यहां पर एंबुलेंस सेवा, कैथ लैब, सीटी स्कैन, डायग्नोस्टिक लैब, ईसीजी, ईको, आपातकालीन सेवा, पैथोलॉजी लैब, फार्मेसी और एक्स-रे की सुविधाएं हैं।
अस्पताल में ओपीडी समय सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच है। हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग की सुविधा है। मरीज अस्पताल की वेबसाइट पर जाकर इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर में 300 बेड हैं।
डॉ सिद्धार्थ साहा, डॉ कुलदीप चुल्लीपराम्बिल, डॉ बिसवाजीत बानिक, डॉ देबब्रता बिस्वास, और डॉ मनोज कुमार साहू जैसे डॉक्टर अस्पताल के पैनल में हैं।
इसके पास एनएबीएच की आधिकारिक मान्यता है।
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हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है। इसकी नींव डॉ अरुणांगशु गांगुली ने वर्ष दो हज़ार सत्रह में रखी थी। यह अस्पताल प्रमुख रूप से प्रसूति एवं स्त्री रोग, कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हीपैटोलॉजी , गुर्दे की कार्यवाही और रोगों का विज्ञान, ऑपथैल्मोलॉजी, कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान, भौतिक चिकित्सक, ओर्थोपेडिक्स, अनेस्थिसियोलॉजी, डेंटिस्ट्री, डर्माटोलॉजी, मधुमेह चिकित्सक, एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान, सामान्य शल्यचिकित्सा, रक्तशास्त्र, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जन, बाल हृदयरोग चिकित्सा, बच्चों के नसों के डॉक्टर, बाल रोग सर्जन, दर्द, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन, मनोचिकित्सा, रेडियोलोजी और यूरोलॉजी में विशेषज्ञ है। यहां पर एंबुलेंस सेवा, कैथ लैब, सीटी स्कैन, डायग्नोस्टिक लैब, ईसीजी, ईको, आपातकालीन सेवा, पैथोलॉजी लैब, फार्मेसी और एक्स-रे की सुविधाएं हैं। अस्पताल में ओपीडी समय सोमवार से शनिवार सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे के बीच है। हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग की सुविधा है। मरीज अस्पताल की वेबसाइट पर जाकर इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। हेल्थवर्ल्ड हॉस्पिटल, दुर्गापुर में तीन सौ बेड हैं। डॉ सिद्धार्थ साहा, डॉ कुलदीप चुल्लीपराम्बिल, डॉ बिसवाजीत बानिक, डॉ देबब्रता बिस्वास, और डॉ मनोज कुमार साहू जैसे डॉक्टर अस्पताल के पैनल में हैं। इसके पास एनएबीएच की आधिकारिक मान्यता है।
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शुरुआती उम्र में ठीक मोटर कौशल का विकासबच्चे के पूर्ण विकास में योगदान देता है। स्पर्श संवेदना को उत्तेजित करने के लिए, बच्चों के लिए एक संवेदी बॉक्स आदर्श है। खुशी वाले बच्चे विभिन्न वस्तुओं की जांच करते हैं, उन्हें हैंडल से छूते हैं, मुंह में खींचते हैं। बच्चों के खेलने के लिए स्पर्श-संवेदनशील बक्से पेश करके इस सुविधा का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। अपने हाथों से, आप विभिन्न विकल्पों को बना सकते हैं जो बच्चों के लिए दिलचस्प होंगे और माता-पिता की कल्पना की उड़ान के लिए जगह देंगे।
संवेदी बक्से कहाँ से आए थे?
यह खिलौना संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हुआ। वहां, उनके विभिन्न एनालॉग लंबे समय से उपयोग किए जाते हैं, लेकिन वे अपेक्षाकृत हाल ही में हमारे पास आए। एक विश्व प्रसिद्ध शिक्षाविद मारिया मोंटेसरी, प्रारंभिक विकास तकनीकों के डेवलपर, सलाह देते हैं कि माता-पिता स्वयं अपने शैक्षिक खिलौनों का उत्पादन करते हैं, उनकी उम्र, विकास के स्तर और बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए। बच्चों के लिए एक संवेदी बॉक्स क्या है? इसके मूल में, यह एक घर सैंडबॉक्स है जो विभिन्न सामग्रियों से भरा हुआ है।
इस तरह के एक साधारण उपकरण में योगदान देता है6 महीने से शुरू होने वाले बच्चे का पूर्ण और व्यापक विकास। ऊपरी आयु सीमा स्थापित नहीं की गई है, क्योंकि यह विभिन्न आयु के लोगों के लिए एक रोमांचक गतिविधि है। बच्चे एक पेन से दूसरे में वस्तुओं को स्थानांतरित करते हैं, जो गतिशीलता विकसित करता है, उंगलियों को प्रशिक्षित करता है। इस खिलौने की मदद से वे आकार, रंग, घनत्व और वस्तुओं के अन्य गुणों को निपुण करते हैं। बॉक्स में वस्तुओं को फेंकने से धैर्य के लिए टुकड़ा सिखाता है, दृढ़ता और ध्यान विकसित होता है, समन्वय में सुधार होता है।
अगर बच्चा बस बॉक्स में नहीं फंसता हैविभिन्न विषयों, और जबकि माता-पिता या बड़े बच्चे अपने नाम, रंग, आकार और अन्य गुणों का उच्चारण करते हैं, बच्चे की शब्दावली में सुधार होता है, स्मृति को प्रशिक्षित किया जाता है, विश्लेषणात्मक सोच बनती है। प्रत्येक वस्तु के गुणों का उच्चारण करना महत्वपूर्ण है, इसे एक विशेषता देंः कठिन, ठंडा, ढीला, इत्यादि।
बच्चों के लिए टच बॉक्स स्वयं इसे आसानी से करें। इसके अलावा, वे न केवल बच्चे के विकास में मदद करते हैं, बल्कि माता के रचनात्मक विकास में भी योगदान देते हैं। आखिरकार, बक्से के लिए नए विचार लगातार आते हैं।
आप कितने साल से शुरू करते हैं?
स्पर्श के साथ मज़ा के लिए आयु प्रतिबंधकोई बक्से नहीं जैसे ही वह अपने आप बैठना शुरू कर देता है, उनके साथ खेलने के लिए बच्चे को दिया जा सकता है। एकमात्र शर्त यह है कि 6 महीने से 2 साल के बच्चों के लिए संवेदी बक्से में उन वस्तुओं को शामिल करना चाहिए जो टुकड़ों की आयु से मेल खाते हैं। सभी सामग्री बच्चे के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होनी चाहिए ताकि वह किसी वस्तु को गलती से निगल, चकित या तोड़ न सके। बुढ़ापे में, आप सुरक्षित रूप से छोटे विवरण जोड़ सकते हैं। जब कोई बच्चा स्कूल में होता है, तो आप विभिन्न प्रयोगों के लिए एक बॉक्स में मिनी-प्रयोगशाला बना सकते हैं।
खुद को टच बॉक्स कैसे बनाएं?
टच बॉक्स का आधार किसी भी क्षमता है जो आकार में फिट बैठता है। यह एक प्लास्टिक कंटेनर, एक बेसिन, एक बड़ा कप हो सकता है। यार्ड में आप एक सैंडबॉक्स बना सकते हैं या एक inflatable पूल का उपयोग कर सकते हैं।
सेंसर बॉक्स फिलर्स हो सकते हैंविभिन्नः अनाज, सेम, रेत, पास्ता, मिट्टी, कंकड़, शेविंग फोम, घास, धक्कों, आटा, जेली, पानी। आप विभिन्न आकारों और रंगों के मोती, छोटे खिलौने, बटन, जार और बोतलों से कवर डाल सकते हैं।
इसे खेलने के लिए और अधिक दिलचस्प बनाने के लिए, आप विभिन्न उपकरणों का उपयोग कर सकते हैंः रेक, सोवोचकी, चम्मच, झरनी बच्चों के व्यंजनों के एक सेट से इस आइटम के लिए उपयुक्त है।
एक बच्चे के लिए एक टच बॉक्स बनाने का तरीका जानना,आप कल्पना को चालू कर सकते हैं और बच्चे के लिए एक रोमांचक परी कथा बनाना शुरू कर सकते हैं। प्रत्येक बच्चा अद्वितीय है, और माता-पिता, अपने वंश की विशेषताओं को जानते हुए, शैक्षिक खिलौने बना सकते हैं जो टुकड़ों में विशेष खुशी का कारण बन सकते हैं। स्पर्श बक्से के उपकरण के लिए असफल विचार नहीं हो सकते हैं।
बैठना सीख लिया, ब्याज के साथ मूंगफलीअपने आस-पास की वस्तुओं की जांच करता है, सब कुछ उसके मुंह में खींचता है, उसके चारों ओर की दुनिया की कोशिश कर रहा है। अब से, आप उसे पहले बक्से दे सकते हैं। इस उम्र में, सामग्री पर ध्यान देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है ताकि सभी ऑब्जेक्ट सुरक्षित हों। एक नियमित प्लास्टिक कप या छोटी टोकरी पिरामिड के छल्ले, विभिन्न आकारों की गेंदों, क्यूब्स से भरी जा सकती है। मुख्य बात यह है कि आइटम आकार, रंग और संरचना में भिन्न होते हैं। उन्हें मोड़कर, बच्चे स्पर्शनीय संवेदनाओं को विकसित करता है। मम्मी या बड़े बच्चे इस समय वस्तुओं के नाम, उनके आकार का उच्चारण कर सकते हैं या चुनी हुई वस्तु को एक विशेषता दे सकते हैं। कंटेनर को ब्रिम में न भरें। बच्चा जल्दी थक जाएगा और वह खिलौने में दिलचस्पी खो देगा। बॉक्स की सामग्री को लगातार बदलना बेहतर है।
जब बच्चा क्रॉल करना शुरू करता है, तो आप कर सकते हैंअलग-अलग फिलर्स के साथ अलग-अलग जगह कंटेनर रखें। जब बच्चा उन्हें मिल जाएगा, तो वह सामग्री की जांच करेगा, माँ को घर के काम करने का समय देगा। एक में आप गोल वस्तुओं को रख सकते हैं, दूसरे नरम खिलौनों में, तीसरे झुनझुने में।
एक वर्ष में, एक बच्चा अब इतनी सक्रियता से अपने मुंह में सब कुछ नहीं खींच रहा है,हाथ में क्या आता है। लेकिन बदलाव के लिए तैयार, डालना, बिखेरना और उत्साह में डालना। इस अवधि के दौरान, आप बॉक्स अनाज या रेत भराव में जोड़ सकते हैं। वे बड़ी वस्तुओं को "छिपा" सकते हैं, जिसकी तलाश में, बच्चा उंगलियों की मालिश करेगा और नई संवेदनाएं प्राप्त करेगा। वह अपने पैरों को ढीली फिलिंग पर भी डुबो सकता है, जिसका उसके स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव पड़ेगा।
1 साल के बच्चों के लिए इस तरह के संवेदी बक्सेठीक मोटर कौशल, समन्वय, लोभी आंदोलनों के विकास में योगदान। प्रत्येक आंदोलन की सटीकता का अभ्यास किया। टुकड़ों को रंगों के अनुसार कंटेनरों में विघटित करने या रूपों में विभाजित करने के लिए, बच्चे को सक्रिय रूप से खेलने के लिए उपकरणों का उपयोग करने के लिए सिखाने के लिए टुकड़ों की पेशकश की जा सकती है आप एक स्पैटुला के साथ खुदाई या खुदाई कर सकते हैं। अगर भराव रेत है, तो आप कुल्की बना सकते हैं।
एक बच्चा जो 2 साल की उम्र तक पहुंच चुका है, पहले से ही हैकुछ शब्द बोलो। थीम्ड बक्से बच्चे को प्यार करेंगे। उदाहरण के लिए, आप एक खेत बना सकते हैं। ऐसा करने के लिए, बॉक्स में "भोजन" और "पानी" के लिए पालतू आंकड़े और कंटेनर स्थापित करें। तो बच्चा पालतू जानवरों का अध्ययन करेगा, और साथ ही उन्हें और पानी पिलाएगा। और क्या आनंदित संवेदी बॉक्स जिसमें कारों के लिए ट्रैक रखी गई है, लड़के का कारण होगा। आप सड़क, पहाड़ियों और बाधाओं का लेआउट बना सकते हैं।
किसी भी उम्र का बच्चा पानी से खेलना पसंद करता है,आप घर या अन्य खिलौनों की सभी मशीनों के लिए होम कार वॉश की व्यवस्था कर सकते हैं। बेसिन में डाले गए गर्म पानी में, स्नान के लिए फोम जोड़ें, और खेल ज्वलंत छापों से भरा होगा। मम्मी को पहले से वाटरप्रूफ ऑइलकोट को फैलाने की जरूरत है ताकि नीचे से पड़ोसियों को बाढ़ न आए, और उसके बगल में एक तौलिया डाल दिया जाए, जिसका उपयोग खिलौने और बच्चे के हैंडल को साफ करने के लिए किया जाएगा। पानी के साथ खेलते हुए, बच्चा यह भी सीखता है कि कुछ वस्तुएं डूब रही हैं, जबकि अन्य तैरते हैं। उन्हें पानी से स्किमर पकड़ा जा सकता है। खेलों के लिए, आप स्टोर में मछली और चुंबकीय मछली पकड़ने के पोल, नौकाओं और अन्य पानी के खिलौने का एक सेट खरीद सकते हैं।
सर्दियों में, आप बेसिन को साफ बर्फ से भर सकते हैं। बच्चे को गर्म कपड़े और दस्ताने पहनने की आवश्यकता होगी ताकि वह ठंड को न झेल सके। बर्फ से केक के लिए फावड़ियों और मोल्ड्स का उपयोग करके गढ़ा जा सकता है। स्नो को रंगों से पानी पिलाया जा सकता है और देखो कि वे कैसे फैलते हैं, स्नोड्रिफ्ट को चित्रित करते हैं।
पालतू जानवरों की दुकानों में आप चूरा खरीद सकते हैं यालकड़ी के चिप्स, जो सेंसर बॉक्स के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल आधार बन जाएगा। जिन विभागों में वे फूल और उर्वरक बेचते हैं, आप हाइड्रोजेल खरीद सकते हैं। यह जेली जैसा द्रव्यमान बच्चे को एक अतुलनीय अनुभूति देगा। यह स्पर्श के लिए सुखद है और साथ ही स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। इस भराव के साथ, आप एक दलदल, एक नदी या एक समुद्र तट बना सकते हैं, जिसमें विभिन्न थीम्ड टच बॉक्स होते हैं।
ऐसी गतिविधियों के लिए बच्चों के लिए क्या उपयोगी है? बच्चों को ध्यान की आवश्यकता के बिना, उत्साह के साथ खेलते हैं। इसी समय, वे नई संवेदनाओं का अनुभव करते हैं, अपने लिए एक नई दुनिया की खोज करते हैं।
जब बच्चा बड़ा हो जाता है, तो वह भी भाग ले सकता हैसंवेदी बॉक्स बनाने में। यह एक दिलचस्प परी कथा से एक छोटी सी दुनिया को फिर से बनाने के लिए उसके लिए दिलचस्प होगा। उदाहरण के लिए, नए साल से पहले, आप एक क्रिसमस ट्री, टिनसेल, उपहार और शंकु के साथ एक बॉक्स बना सकते हैं। ईस्टर पर, आप नरम घास के निचले हिस्से को बाहर कर सकते हैं और इसमें अंडे दे सकते हैं, जिन्हें बच्चों के साथ भी चित्रित किया गया था (बच्चों के लिए किंडर या अंडे के लिए लकड़ी के रिक्त स्थान से पैकेज लेना बेहतर है)।
कार्टून के प्रेमी भूखंड को फिर से बना सकते हैं,स्पंज बॉब और उनके दोस्तों के घर का निर्माण किया। पात्रों के आंकड़े खुद खिलौने की दुकानों में खरीदे जा सकते हैं। नाराज पक्षियों के बारे में लोकप्रिय खेल के प्रशंसक बार के बाहर सूअरों के लिए बाधाओं और बैरिकेड्स का निर्माण करके पक्षियों को लॉन्च करने के लिए एक समाशोधन कर सकते हैं। आप एक चिड़ियाघर का निर्माण कर सकते हैं, जबकि बच्चा खुली हवा में पिंजरे बनाने और क्षेत्र को सजाने में मदद कर सकता है। बच्चों के लिए टच बॉक्स संयुक्त रचनात्मकता का परिणाम है, परिवार को एक साथ लाता है और कल्पना को उत्तेजित करता है। निर्माण में, विभिन्न वस्तुओं का उपयोग किया जाता हैः भोजन के लिए माचिस, टहनियाँ, कपास, अंडे की पैकेजिंग, प्लास्टिक की बोतलें और कंटेनर, साथ ही घर में पाया जा सकता है और सड़क से लाया जा सकता है।
4-5 साल बाद, बच्चा पहले से ही सपना देख सकता है, वहपहले से ही बहुत कुछ जानता है और ग्रहों, डायनासोर और अन्य विषयों के अध्ययन में रुचि दिखाता है, और गिनती के कौशल में भी महारत हासिल करता है। विभिन्न उम्र के लिए संवेदी बक्से एक या किसी अन्य विषय पर बच्चे की रुचि को उत्तेजित करने में सक्षम हैं। आप प्रागैतिहासिक दुनिया को फिर से बना सकते हैं जिसमें डायनासोर रहते हैं, एक ढीले भराव पर एक प्राचीन परिदृश्य का निर्माण करते हैं, पेड़ लगाते हैं, एक नदी किनारे बिछाते हैं। डायनासोर एक ज्वालामुखी के ढलान पर चल सकते हैं, जो तात्कालिक साधनों से बनाना आसान है। यह प्लास्टिसिन या नमक के आटे की एक परत के नीचे एक छोटे कंटेनर को छिपाने के लिए पर्याप्त है, इसमें पतला डाई डालें और बेकिंग सोडा डालें। "विस्फोट" से पहले सिरका की एक छोटी राशि डालें और प्रक्रिया का आनंद लें।
टच बॉक्स के लिए फिलर पेंट किए जा सकते हैंअलग-अलग रंगों में। ऐसा करने के लिए, चयनित थोक सामग्री के लिए 30 मिनट के लिए भोजन डाई में भिगोएँ। निर्दिष्ट समय के बाद, पानी निकल जाता है और भराव अखबार पर सूख जाता है। बहु-रंगीन चावल या रेत खेल में विविधता और अतिरिक्त रुचि जोड़ेंगे।
आप रेत मिट्टी खेलने के लिए उपयोग कर सकते हैं,जो अपने आप को बनाना या स्टोर में खरीदना आसान है। विनिर्माण के लिए साफ रेत की जरूरत होती है। एक गिलास रेत पर 1 बड़ा चम्मच लेना चाहिए। आटा, ¼ कला। नमक, एक कॉफी की चक्की में जमीन, एक चम्मच सूरजमुखी तेल और साइट्रिक एसिड। इस सभी द्रव्यमान को उबलते पानी के गिलास के साथ डालें और अच्छी तरह से गूंध लें। इस तरह की रेत हाथों से नहीं चिपकती है और साथ ही यह प्लास्टिक और स्पर्श के लिए सुखद है।
आप शेविंग फोम को सोडा के साथ मिला सकते हैं और आप करेंगेबनावट वजन में अद्भुत। सटीक नुस्खा कहना मुश्किल है, लेकिन द्रव्यमान को गेंदों में अच्छी तरह से रोल करना चाहिए और अपने हाथों को गंदा नहीं करना चाहिए। सुखाने के बाद भी, यह द्रव्यमान उपयोग के लिए उपयुक्त है, लेकिन पहले से ही एक भराव के रूप में।
यदि आप रेत को 4 के अनुपात में स्टार्च के साथ मिलाते हैंः2 और पानी का 1 हिस्सा जोड़ें, आपको मॉडलिंग के लिए एक बड़ा द्रव्यमान मिलता है, जो ईस्टर केक और निर्माण के लिए आदर्श है। इसे पानी के रंगों में पतला किया जा सकता है।
टच बॉक्स इसे स्वयं करेंएक खेल के लिए बनाया, और कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे ढक्कन के साथ कवर किया जा सकता है और अगली बार तक शेल्फ पर रखा जा सकता है। बक्से के लिए भराव और अन्य दिलचस्प विवरण जार में संग्रहीत किए जा सकते हैं, ताकि एक नई कृति बनाते समय सब कुछ हाथ में हो।
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शुरुआती उम्र में ठीक मोटर कौशल का विकासबच्चे के पूर्ण विकास में योगदान देता है। स्पर्श संवेदना को उत्तेजित करने के लिए, बच्चों के लिए एक संवेदी बॉक्स आदर्श है। खुशी वाले बच्चे विभिन्न वस्तुओं की जांच करते हैं, उन्हें हैंडल से छूते हैं, मुंह में खींचते हैं। बच्चों के खेलने के लिए स्पर्श-संवेदनशील बक्से पेश करके इस सुविधा का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। अपने हाथों से, आप विभिन्न विकल्पों को बना सकते हैं जो बच्चों के लिए दिलचस्प होंगे और माता-पिता की कल्पना की उड़ान के लिए जगह देंगे। संवेदी बक्से कहाँ से आए थे? यह खिलौना संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हुआ। वहां, उनके विभिन्न एनालॉग लंबे समय से उपयोग किए जाते हैं, लेकिन वे अपेक्षाकृत हाल ही में हमारे पास आए। एक विश्व प्रसिद्ध शिक्षाविद मारिया मोंटेसरी, प्रारंभिक विकास तकनीकों के डेवलपर, सलाह देते हैं कि माता-पिता स्वयं अपने शैक्षिक खिलौनों का उत्पादन करते हैं, उनकी उम्र, विकास के स्तर और बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए। बच्चों के लिए एक संवेदी बॉक्स क्या है? इसके मूल में, यह एक घर सैंडबॉक्स है जो विभिन्न सामग्रियों से भरा हुआ है। इस तरह के एक साधारण उपकरण में योगदान देता हैछः महीने से शुरू होने वाले बच्चे का पूर्ण और व्यापक विकास। ऊपरी आयु सीमा स्थापित नहीं की गई है, क्योंकि यह विभिन्न आयु के लोगों के लिए एक रोमांचक गतिविधि है। बच्चे एक पेन से दूसरे में वस्तुओं को स्थानांतरित करते हैं, जो गतिशीलता विकसित करता है, उंगलियों को प्रशिक्षित करता है। इस खिलौने की मदद से वे आकार, रंग, घनत्व और वस्तुओं के अन्य गुणों को निपुण करते हैं। बॉक्स में वस्तुओं को फेंकने से धैर्य के लिए टुकड़ा सिखाता है, दृढ़ता और ध्यान विकसित होता है, समन्वय में सुधार होता है। अगर बच्चा बस बॉक्स में नहीं फंसता हैविभिन्न विषयों, और जबकि माता-पिता या बड़े बच्चे अपने नाम, रंग, आकार और अन्य गुणों का उच्चारण करते हैं, बच्चे की शब्दावली में सुधार होता है, स्मृति को प्रशिक्षित किया जाता है, विश्लेषणात्मक सोच बनती है। प्रत्येक वस्तु के गुणों का उच्चारण करना महत्वपूर्ण है, इसे एक विशेषता देंः कठिन, ठंडा, ढीला, इत्यादि। बच्चों के लिए टच बॉक्स स्वयं इसे आसानी से करें। इसके अलावा, वे न केवल बच्चे के विकास में मदद करते हैं, बल्कि माता के रचनात्मक विकास में भी योगदान देते हैं। आखिरकार, बक्से के लिए नए विचार लगातार आते हैं। आप कितने साल से शुरू करते हैं? स्पर्श के साथ मज़ा के लिए आयु प्रतिबंधकोई बक्से नहीं जैसे ही वह अपने आप बैठना शुरू कर देता है, उनके साथ खेलने के लिए बच्चे को दिया जा सकता है। एकमात्र शर्त यह है कि छः महीने से दो साल के बच्चों के लिए संवेदी बक्से में उन वस्तुओं को शामिल करना चाहिए जो टुकड़ों की आयु से मेल खाते हैं। सभी सामग्री बच्चे के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होनी चाहिए ताकि वह किसी वस्तु को गलती से निगल, चकित या तोड़ न सके। बुढ़ापे में, आप सुरक्षित रूप से छोटे विवरण जोड़ सकते हैं। जब कोई बच्चा स्कूल में होता है, तो आप विभिन्न प्रयोगों के लिए एक बॉक्स में मिनी-प्रयोगशाला बना सकते हैं। खुद को टच बॉक्स कैसे बनाएं? टच बॉक्स का आधार किसी भी क्षमता है जो आकार में फिट बैठता है। यह एक प्लास्टिक कंटेनर, एक बेसिन, एक बड़ा कप हो सकता है। यार्ड में आप एक सैंडबॉक्स बना सकते हैं या एक inflatable पूल का उपयोग कर सकते हैं। सेंसर बॉक्स फिलर्स हो सकते हैंविभिन्नः अनाज, सेम, रेत, पास्ता, मिट्टी, कंकड़, शेविंग फोम, घास, धक्कों, आटा, जेली, पानी। आप विभिन्न आकारों और रंगों के मोती, छोटे खिलौने, बटन, जार और बोतलों से कवर डाल सकते हैं। इसे खेलने के लिए और अधिक दिलचस्प बनाने के लिए, आप विभिन्न उपकरणों का उपयोग कर सकते हैंः रेक, सोवोचकी, चम्मच, झरनी बच्चों के व्यंजनों के एक सेट से इस आइटम के लिए उपयुक्त है। एक बच्चे के लिए एक टच बॉक्स बनाने का तरीका जानना,आप कल्पना को चालू कर सकते हैं और बच्चे के लिए एक रोमांचक परी कथा बनाना शुरू कर सकते हैं। प्रत्येक बच्चा अद्वितीय है, और माता-पिता, अपने वंश की विशेषताओं को जानते हुए, शैक्षिक खिलौने बना सकते हैं जो टुकड़ों में विशेष खुशी का कारण बन सकते हैं। स्पर्श बक्से के उपकरण के लिए असफल विचार नहीं हो सकते हैं। बैठना सीख लिया, ब्याज के साथ मूंगफलीअपने आस-पास की वस्तुओं की जांच करता है, सब कुछ उसके मुंह में खींचता है, उसके चारों ओर की दुनिया की कोशिश कर रहा है। अब से, आप उसे पहले बक्से दे सकते हैं। इस उम्र में, सामग्री पर ध्यान देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है ताकि सभी ऑब्जेक्ट सुरक्षित हों। एक नियमित प्लास्टिक कप या छोटी टोकरी पिरामिड के छल्ले, विभिन्न आकारों की गेंदों, क्यूब्स से भरी जा सकती है। मुख्य बात यह है कि आइटम आकार, रंग और संरचना में भिन्न होते हैं। उन्हें मोड़कर, बच्चे स्पर्शनीय संवेदनाओं को विकसित करता है। मम्मी या बड़े बच्चे इस समय वस्तुओं के नाम, उनके आकार का उच्चारण कर सकते हैं या चुनी हुई वस्तु को एक विशेषता दे सकते हैं। कंटेनर को ब्रिम में न भरें। बच्चा जल्दी थक जाएगा और वह खिलौने में दिलचस्पी खो देगा। बॉक्स की सामग्री को लगातार बदलना बेहतर है। जब बच्चा क्रॉल करना शुरू करता है, तो आप कर सकते हैंअलग-अलग फिलर्स के साथ अलग-अलग जगह कंटेनर रखें। जब बच्चा उन्हें मिल जाएगा, तो वह सामग्री की जांच करेगा, माँ को घर के काम करने का समय देगा। एक में आप गोल वस्तुओं को रख सकते हैं, दूसरे नरम खिलौनों में, तीसरे झुनझुने में। एक वर्ष में, एक बच्चा अब इतनी सक्रियता से अपने मुंह में सब कुछ नहीं खींच रहा है,हाथ में क्या आता है। लेकिन बदलाव के लिए तैयार, डालना, बिखेरना और उत्साह में डालना। इस अवधि के दौरान, आप बॉक्स अनाज या रेत भराव में जोड़ सकते हैं। वे बड़ी वस्तुओं को "छिपा" सकते हैं, जिसकी तलाश में, बच्चा उंगलियों की मालिश करेगा और नई संवेदनाएं प्राप्त करेगा। वह अपने पैरों को ढीली फिलिंग पर भी डुबो सकता है, जिसका उसके स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव पड़ेगा। एक साल के बच्चों के लिए इस तरह के संवेदी बक्सेठीक मोटर कौशल, समन्वय, लोभी आंदोलनों के विकास में योगदान। प्रत्येक आंदोलन की सटीकता का अभ्यास किया। टुकड़ों को रंगों के अनुसार कंटेनरों में विघटित करने या रूपों में विभाजित करने के लिए, बच्चे को सक्रिय रूप से खेलने के लिए उपकरणों का उपयोग करने के लिए सिखाने के लिए टुकड़ों की पेशकश की जा सकती है आप एक स्पैटुला के साथ खुदाई या खुदाई कर सकते हैं। अगर भराव रेत है, तो आप कुल्की बना सकते हैं। एक बच्चा जो दो साल की उम्र तक पहुंच चुका है, पहले से ही हैकुछ शब्द बोलो। थीम्ड बक्से बच्चे को प्यार करेंगे। उदाहरण के लिए, आप एक खेत बना सकते हैं। ऐसा करने के लिए, बॉक्स में "भोजन" और "पानी" के लिए पालतू आंकड़े और कंटेनर स्थापित करें। तो बच्चा पालतू जानवरों का अध्ययन करेगा, और साथ ही उन्हें और पानी पिलाएगा। और क्या आनंदित संवेदी बॉक्स जिसमें कारों के लिए ट्रैक रखी गई है, लड़के का कारण होगा। आप सड़क, पहाड़ियों और बाधाओं का लेआउट बना सकते हैं। किसी भी उम्र का बच्चा पानी से खेलना पसंद करता है,आप घर या अन्य खिलौनों की सभी मशीनों के लिए होम कार वॉश की व्यवस्था कर सकते हैं। बेसिन में डाले गए गर्म पानी में, स्नान के लिए फोम जोड़ें, और खेल ज्वलंत छापों से भरा होगा। मम्मी को पहले से वाटरप्रूफ ऑइलकोट को फैलाने की जरूरत है ताकि नीचे से पड़ोसियों को बाढ़ न आए, और उसके बगल में एक तौलिया डाल दिया जाए, जिसका उपयोग खिलौने और बच्चे के हैंडल को साफ करने के लिए किया जाएगा। पानी के साथ खेलते हुए, बच्चा यह भी सीखता है कि कुछ वस्तुएं डूब रही हैं, जबकि अन्य तैरते हैं। उन्हें पानी से स्किमर पकड़ा जा सकता है। खेलों के लिए, आप स्टोर में मछली और चुंबकीय मछली पकड़ने के पोल, नौकाओं और अन्य पानी के खिलौने का एक सेट खरीद सकते हैं। सर्दियों में, आप बेसिन को साफ बर्फ से भर सकते हैं। बच्चे को गर्म कपड़े और दस्ताने पहनने की आवश्यकता होगी ताकि वह ठंड को न झेल सके। बर्फ से केक के लिए फावड़ियों और मोल्ड्स का उपयोग करके गढ़ा जा सकता है। स्नो को रंगों से पानी पिलाया जा सकता है और देखो कि वे कैसे फैलते हैं, स्नोड्रिफ्ट को चित्रित करते हैं। पालतू जानवरों की दुकानों में आप चूरा खरीद सकते हैं यालकड़ी के चिप्स, जो सेंसर बॉक्स के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल आधार बन जाएगा। जिन विभागों में वे फूल और उर्वरक बेचते हैं, आप हाइड्रोजेल खरीद सकते हैं। यह जेली जैसा द्रव्यमान बच्चे को एक अतुलनीय अनुभूति देगा। यह स्पर्श के लिए सुखद है और साथ ही स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। इस भराव के साथ, आप एक दलदल, एक नदी या एक समुद्र तट बना सकते हैं, जिसमें विभिन्न थीम्ड टच बॉक्स होते हैं। ऐसी गतिविधियों के लिए बच्चों के लिए क्या उपयोगी है? बच्चों को ध्यान की आवश्यकता के बिना, उत्साह के साथ खेलते हैं। इसी समय, वे नई संवेदनाओं का अनुभव करते हैं, अपने लिए एक नई दुनिया की खोज करते हैं। जब बच्चा बड़ा हो जाता है, तो वह भी भाग ले सकता हैसंवेदी बॉक्स बनाने में। यह एक दिलचस्प परी कथा से एक छोटी सी दुनिया को फिर से बनाने के लिए उसके लिए दिलचस्प होगा। उदाहरण के लिए, नए साल से पहले, आप एक क्रिसमस ट्री, टिनसेल, उपहार और शंकु के साथ एक बॉक्स बना सकते हैं। ईस्टर पर, आप नरम घास के निचले हिस्से को बाहर कर सकते हैं और इसमें अंडे दे सकते हैं, जिन्हें बच्चों के साथ भी चित्रित किया गया था । कार्टून के प्रेमी भूखंड को फिर से बना सकते हैं,स्पंज बॉब और उनके दोस्तों के घर का निर्माण किया। पात्रों के आंकड़े खुद खिलौने की दुकानों में खरीदे जा सकते हैं। नाराज पक्षियों के बारे में लोकप्रिय खेल के प्रशंसक बार के बाहर सूअरों के लिए बाधाओं और बैरिकेड्स का निर्माण करके पक्षियों को लॉन्च करने के लिए एक समाशोधन कर सकते हैं। आप एक चिड़ियाघर का निर्माण कर सकते हैं, जबकि बच्चा खुली हवा में पिंजरे बनाने और क्षेत्र को सजाने में मदद कर सकता है। बच्चों के लिए टच बॉक्स संयुक्त रचनात्मकता का परिणाम है, परिवार को एक साथ लाता है और कल्पना को उत्तेजित करता है। निर्माण में, विभिन्न वस्तुओं का उपयोग किया जाता हैः भोजन के लिए माचिस, टहनियाँ, कपास, अंडे की पैकेजिंग, प्लास्टिक की बोतलें और कंटेनर, साथ ही घर में पाया जा सकता है और सड़क से लाया जा सकता है। चार-पाँच साल बाद, बच्चा पहले से ही सपना देख सकता है, वहपहले से ही बहुत कुछ जानता है और ग्रहों, डायनासोर और अन्य विषयों के अध्ययन में रुचि दिखाता है, और गिनती के कौशल में भी महारत हासिल करता है। विभिन्न उम्र के लिए संवेदी बक्से एक या किसी अन्य विषय पर बच्चे की रुचि को उत्तेजित करने में सक्षम हैं। आप प्रागैतिहासिक दुनिया को फिर से बना सकते हैं जिसमें डायनासोर रहते हैं, एक ढीले भराव पर एक प्राचीन परिदृश्य का निर्माण करते हैं, पेड़ लगाते हैं, एक नदी किनारे बिछाते हैं। डायनासोर एक ज्वालामुखी के ढलान पर चल सकते हैं, जो तात्कालिक साधनों से बनाना आसान है। यह प्लास्टिसिन या नमक के आटे की एक परत के नीचे एक छोटे कंटेनर को छिपाने के लिए पर्याप्त है, इसमें पतला डाई डालें और बेकिंग सोडा डालें। "विस्फोट" से पहले सिरका की एक छोटी राशि डालें और प्रक्रिया का आनंद लें। टच बॉक्स के लिए फिलर पेंट किए जा सकते हैंअलग-अलग रंगों में। ऐसा करने के लिए, चयनित थोक सामग्री के लिए तीस मिनट के लिए भोजन डाई में भिगोएँ। निर्दिष्ट समय के बाद, पानी निकल जाता है और भराव अखबार पर सूख जाता है। बहु-रंगीन चावल या रेत खेल में विविधता और अतिरिक्त रुचि जोड़ेंगे। आप रेत मिट्टी खेलने के लिए उपयोग कर सकते हैं,जो अपने आप को बनाना या स्टोर में खरीदना आसान है। विनिर्माण के लिए साफ रेत की जरूरत होती है। एक गिलास रेत पर एक बड़ा चम्मच लेना चाहिए। आटा, ¼ कला। नमक, एक कॉफी की चक्की में जमीन, एक चम्मच सूरजमुखी तेल और साइट्रिक एसिड। इस सभी द्रव्यमान को उबलते पानी के गिलास के साथ डालें और अच्छी तरह से गूंध लें। इस तरह की रेत हाथों से नहीं चिपकती है और साथ ही यह प्लास्टिक और स्पर्श के लिए सुखद है। आप शेविंग फोम को सोडा के साथ मिला सकते हैं और आप करेंगेबनावट वजन में अद्भुत। सटीक नुस्खा कहना मुश्किल है, लेकिन द्रव्यमान को गेंदों में अच्छी तरह से रोल करना चाहिए और अपने हाथों को गंदा नहीं करना चाहिए। सुखाने के बाद भी, यह द्रव्यमान उपयोग के लिए उपयुक्त है, लेकिन पहले से ही एक भराव के रूप में। यदि आप रेत को चार के अनुपात में स्टार्च के साथ मिलाते हैंःदो और पानी का एक हिस्सा जोड़ें, आपको मॉडलिंग के लिए एक बड़ा द्रव्यमान मिलता है, जो ईस्टर केक और निर्माण के लिए आदर्श है। इसे पानी के रंगों में पतला किया जा सकता है। टच बॉक्स इसे स्वयं करेंएक खेल के लिए बनाया, और कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे ढक्कन के साथ कवर किया जा सकता है और अगली बार तक शेल्फ पर रखा जा सकता है। बक्से के लिए भराव और अन्य दिलचस्प विवरण जार में संग्रहीत किए जा सकते हैं, ताकि एक नई कृति बनाते समय सब कुछ हाथ में हो।
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मेष- जिन जातकों का जन्म मेष लग्न में हुआ है उन्हें सूर्य, मंगल और गुरु शुभ फल देते हैं। इसलिए मेष लग्न राशि के लोगों को सूर्य की उपासना करना चाहिए।
वृषभ- जिन जातकों का जन्म वृषभ लग्न में हुआ है उन्हें शनि, सूर्य , बुध शुभ फल प्रदान करते हैं। इसलिए अच्छे और सुखद परिणाम के लिए इन देवताओं की उपासना करनी चाहिए।
मिथुन- जिनका जन्म मिथुन लग्न में हुआ होता है। उन्हें शुक्र ग्रह शुभ फल प्रदान करते हैं।
कर्क- ऐसे जातकों का जिनका जन्म कर्क लग्न में हुआ हो उन्हें चंद्र, मंगल, गुरु शुभ फल देते हैं। ऐसे जातकों को भगवान शिव और गणेश जी की उपासना करनी चाहिए।
सिंह- सिंह लग्न में पैदा हुए लोगों को मंगल, सूर्य और गुरु शुभ फल देते हैं। इन्हें अपने कुलदेवता की पूजा करनी चाहिए।
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मेष- जिन जातकों का जन्म मेष लग्न में हुआ है उन्हें सूर्य, मंगल और गुरु शुभ फल देते हैं। इसलिए मेष लग्न राशि के लोगों को सूर्य की उपासना करना चाहिए। वृषभ- जिन जातकों का जन्म वृषभ लग्न में हुआ है उन्हें शनि, सूर्य , बुध शुभ फल प्रदान करते हैं। इसलिए अच्छे और सुखद परिणाम के लिए इन देवताओं की उपासना करनी चाहिए। मिथुन- जिनका जन्म मिथुन लग्न में हुआ होता है। उन्हें शुक्र ग्रह शुभ फल प्रदान करते हैं। कर्क- ऐसे जातकों का जिनका जन्म कर्क लग्न में हुआ हो उन्हें चंद्र, मंगल, गुरु शुभ फल देते हैं। ऐसे जातकों को भगवान शिव और गणेश जी की उपासना करनी चाहिए। सिंह- सिंह लग्न में पैदा हुए लोगों को मंगल, सूर्य और गुरु शुभ फल देते हैं। इन्हें अपने कुलदेवता की पूजा करनी चाहिए।
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जयपुर - - - - उनकी नियति में ईंधन की तलाश में दिनभर जंगल में घूम-घूमकर लकड़ी और उपले बीनना, घर पर आकर चूल्हे में फूंक मार-मार कर परिवार के लिए रोटी बनाना लिखा था परंतु केन्द्र सरकार की एक पहल ने वागड़ वनिताओं की जिंदगी ही संवार दी है।
इन वागड़ वनिताओं को 'स्वच्छ ईंधन, सुरक्षित जीवन' की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने के रूप में जब सोमवार को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस कनेक्शन की सौगात दी गई तो उनके चेहरे पर गजब की चमक छा गई और लगा कि अब उन्हें भोजन बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे से दो-दो हाथ करने की जरूरत नहीं रहेगी।
65 परिवारों में आएगा उजाला ः आगामी तीन वर्षों में देश में बीपीएल वर्ग की पांच करोड़ महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे से मुक्ति दिलाकर जीवन में उजाला लाने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी 'उज्ज्वला योजना' के द्वितीय चरण की गत दिनों वागड़ अंचल के पड़ौसी सीमावर्ती राज्य गुजरात के शहर दाहोद में शुरूआत के बाद सोमवार को बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर जनजाति क्षेत्र की पैंसठ बीपीएल महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन की सौगात मिली।
समारोह में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती अनिता भदेल, सामान्य प्रशासन, मोटर गैराज, लेखन एवं मुद्रण राज्यमंत्री जीतमल खांट ने 65 महिलाओं को निःशुल्क गैस सिलेण्डर, रेग्यूलेटर रबर ट्यूब, चूल्हा एवं गैस कनेक्शन के दस्तावेज वितरित किये गये। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती भदेल ने उज्ज्वला योजना को इस आदिवासी अंचल के लिए अनूठा वरदान बताया और कहा कि इससे क्षेत्र की महिलाओं को रसोईघर के धुंए से निजात मिल सकेंगी।
सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री खांट ने भी योजना को महिलाओं के लिए उज्ज्वल पक्ष बताया और इसके दूरगामी परिणामों की तारीफ की। वितरण के पश्चात सागर गैस सर्विस (भारत गैस सर्विस) के वितरक ने लाभार्थी महिलाओं को गैस के उपयोग एवं सुरक्षा के बारे में उपयोगी जानकारी भी दी।
सपना हुआ साकार ः सोमवार को उज्ज्वला योजना के इस समारोह में निःशुल्क गैस कनेक्शन प्राप्त करने वाली लाभार्थी महिलाओं का कहना था कि आमजनों को गैस के चूल्हे पर खाना बनाते देखकर उन्होंने भी एक सपना देखा था कि जीवन में कभी ना कभी वे भी इसी प्रकार के चूल्हे पर खाना बनाएंगी और उनका यह सपना आज साकार हुआ। इनमेंं से कई लाभार्थी महिलाएं तो ऎसी ही थी जिन्होंने गैस चूल्हे का सिर्फ नाम सुना था प्रत्यक्ष देखा ही नहीं था, वे महिलाएं इस लाल-लाल गैस सिलेण्डर बड़े गौर से देख रही थी और इसे अपने जीवन की मंगल शुरूआत मान रही थी।
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जयपुर - - - - उनकी नियति में ईंधन की तलाश में दिनभर जंगल में घूम-घूमकर लकड़ी और उपले बीनना, घर पर आकर चूल्हे में फूंक मार-मार कर परिवार के लिए रोटी बनाना लिखा था परंतु केन्द्र सरकार की एक पहल ने वागड़ वनिताओं की जिंदगी ही संवार दी है। इन वागड़ वनिताओं को 'स्वच्छ ईंधन, सुरक्षित जीवन' की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने के रूप में जब सोमवार को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस कनेक्शन की सौगात दी गई तो उनके चेहरे पर गजब की चमक छा गई और लगा कि अब उन्हें भोजन बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे से दो-दो हाथ करने की जरूरत नहीं रहेगी। पैंसठ परिवारों में आएगा उजाला ः आगामी तीन वर्षों में देश में बीपीएल वर्ग की पांच करोड़ महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे से मुक्ति दिलाकर जीवन में उजाला लाने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी 'उज्ज्वला योजना' के द्वितीय चरण की गत दिनों वागड़ अंचल के पड़ौसी सीमावर्ती राज्य गुजरात के शहर दाहोद में शुरूआत के बाद सोमवार को बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर जनजाति क्षेत्र की पैंसठ बीपीएल महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन की सौगात मिली। समारोह में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती अनिता भदेल, सामान्य प्रशासन, मोटर गैराज, लेखन एवं मुद्रण राज्यमंत्री जीतमल खांट ने पैंसठ महिलाओं को निःशुल्क गैस सिलेण्डर, रेग्यूलेटर रबर ट्यूब, चूल्हा एवं गैस कनेक्शन के दस्तावेज वितरित किये गये। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती भदेल ने उज्ज्वला योजना को इस आदिवासी अंचल के लिए अनूठा वरदान बताया और कहा कि इससे क्षेत्र की महिलाओं को रसोईघर के धुंए से निजात मिल सकेंगी। सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री खांट ने भी योजना को महिलाओं के लिए उज्ज्वल पक्ष बताया और इसके दूरगामी परिणामों की तारीफ की। वितरण के पश्चात सागर गैस सर्विस के वितरक ने लाभार्थी महिलाओं को गैस के उपयोग एवं सुरक्षा के बारे में उपयोगी जानकारी भी दी। सपना हुआ साकार ः सोमवार को उज्ज्वला योजना के इस समारोह में निःशुल्क गैस कनेक्शन प्राप्त करने वाली लाभार्थी महिलाओं का कहना था कि आमजनों को गैस के चूल्हे पर खाना बनाते देखकर उन्होंने भी एक सपना देखा था कि जीवन में कभी ना कभी वे भी इसी प्रकार के चूल्हे पर खाना बनाएंगी और उनका यह सपना आज साकार हुआ। इनमेंं से कई लाभार्थी महिलाएं तो ऎसी ही थी जिन्होंने गैस चूल्हे का सिर्फ नाम सुना था प्रत्यक्ष देखा ही नहीं था, वे महिलाएं इस लाल-लाल गैस सिलेण्डर बड़े गौर से देख रही थी और इसे अपने जीवन की मंगल शुरूआत मान रही थी।
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गुलकंद (Gulkand) गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बनी एक मिठाई है, जिसका व्यापक रूप से आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसके कई स्वास्थ्य लाभों के लिए उपयोग किया जाता है। यह एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है, जो इसे पारंपरिक भारतीय मिठाइयों और मिठाइयों में एक लोकप्रिय घटक बनाता है। गुलकंद का नियमित रूप से सेवन करने के कुछ प्रमुख लाभ यहां दिए गए हैं।
गुलकंद खाने ये 7 फायदे जानना है जरूरी (7 Benefits Of Having Gulkand)
1. पाचन में मदद करता है (Supports digestion): गुलकंद का पाचन तंत्र पर ठंडा प्रभाव पड़ता है, जो अपच, एसिडिटी और पाचन संबंधी अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन एंजाइमों के उत्पादन को भी उत्तेजित करता है, जो समग्र पाचन प्रक्रिया में सुधार करता है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है (Boosts immunity): गुलकंद में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं। यह इसे प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श भोजन बनाता है, खासकर गर्म गर्मी के महीनों के दौरान।
3. त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है (Promotes skin health): गुलकंद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा की जलन को शांत करने और स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। यह विटामिन और खनिजों से भी भरपूर होता है जो त्वचा को पोषण देता है और इसे युवा और चमकदार बनाए रखता है।
4. तनाव कम करता है (Reduces stress): गुलकंद शरीर और मन पर अपने शांत प्रभाव के लिए जाना जाता है, जिससे यह तनाव और चिंता को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट भोजन बन जाता है। यह नींद में सुधार करने में भी सहायक है, जो अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
5. मासिक धर्म को नियंत्रित करता है (Regulates menstruation): गुलकंद मासिक धर्म चक्र को विनियमित करने के लिए एक प्राकृतिक उपाय है, क्योंकि यह हार्मोन को संतुलित करने और मासिक धर्म की परेशानी को कम करने में मदद करता है। यह पीएमएस के लक्षणों से पीड़ित महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसका शरीर और दिमाग पर शांत प्रभाव पड़ता है।
6. मौखिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा (Good for oral health): गुलकंद अपने जीवाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है, जो इसे अच्छे मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक उत्कृष्ट भोजन बनाता है। यह मसूड़ों की बीमारी को रोकने में मदद करता है और दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखता है।
7. याददाश्त में सुधार (Improves memory): गुलकंद में विटामिन और खनिज होते हैं जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं, जिनमें आयरन, मैग्नीशियम और B-विटामिन शामिल हैं। गुलकंद के नियमित सेवन से स्मृति और संज्ञानात्मक कार्य में सुधार देखा गया है।
अंत में, गुलकंद एक स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन है जो स्वास्थ्य लाभों से भरपूर है। पाचन का समर्थन करने से लेकर प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने तक, गुलकंद किसी भी स्वस्थ आहार के लिए एक बढ़िया अतिरिक्त है। चाहे आप इसे अपनी चाय, डेसर्ट में शामिल करें, या बस चम्मच से इसका सेवन करें, गुलकंद के फायदे निर्विवाद हैं।
अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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गुलकंद गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बनी एक मिठाई है, जिसका व्यापक रूप से आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसके कई स्वास्थ्य लाभों के लिए उपयोग किया जाता है। यह एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है, जो इसे पारंपरिक भारतीय मिठाइयों और मिठाइयों में एक लोकप्रिय घटक बनाता है। गुलकंद का नियमित रूप से सेवन करने के कुछ प्रमुख लाभ यहां दिए गए हैं। गुलकंद खाने ये सात फायदे जानना है जरूरी एक. पाचन में मदद करता है : गुलकंद का पाचन तंत्र पर ठंडा प्रभाव पड़ता है, जो अपच, एसिडिटी और पाचन संबंधी अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन एंजाइमों के उत्पादन को भी उत्तेजित करता है, जो समग्र पाचन प्रक्रिया में सुधार करता है। दो. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : गुलकंद में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं। यह इसे प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श भोजन बनाता है, खासकर गर्म गर्मी के महीनों के दौरान। तीन. त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है : गुलकंद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा की जलन को शांत करने और स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। यह विटामिन और खनिजों से भी भरपूर होता है जो त्वचा को पोषण देता है और इसे युवा और चमकदार बनाए रखता है। चार. तनाव कम करता है : गुलकंद शरीर और मन पर अपने शांत प्रभाव के लिए जाना जाता है, जिससे यह तनाव और चिंता को कम करने के लिए एक उत्कृष्ट भोजन बन जाता है। यह नींद में सुधार करने में भी सहायक है, जो अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पाँच. मासिक धर्म को नियंत्रित करता है : गुलकंद मासिक धर्म चक्र को विनियमित करने के लिए एक प्राकृतिक उपाय है, क्योंकि यह हार्मोन को संतुलित करने और मासिक धर्म की परेशानी को कम करने में मदद करता है। यह पीएमएस के लक्षणों से पीड़ित महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसका शरीर और दिमाग पर शांत प्रभाव पड़ता है। छः. मौखिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा : गुलकंद अपने जीवाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है, जो इसे अच्छे मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक उत्कृष्ट भोजन बनाता है। यह मसूड़ों की बीमारी को रोकने में मदद करता है और दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखता है। सात. याददाश्त में सुधार : गुलकंद में विटामिन और खनिज होते हैं जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं, जिनमें आयरन, मैग्नीशियम और B-विटामिन शामिल हैं। गुलकंद के नियमित सेवन से स्मृति और संज्ञानात्मक कार्य में सुधार देखा गया है। अंत में, गुलकंद एक स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन है जो स्वास्थ्य लाभों से भरपूर है। पाचन का समर्थन करने से लेकर प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने तक, गुलकंद किसी भी स्वस्थ आहार के लिए एक बढ़िया अतिरिक्त है। चाहे आप इसे अपनी चाय, डेसर्ट में शामिल करें, या बस चम्मच से इसका सेवन करें, गुलकंद के फायदे निर्विवाद हैं। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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Sell Old Notes and Coin 2023: यदि आपके पास पुराने नोट है यो उन्हें बेचकर आप मालामाल बन सकते है.
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दरभंगा. बिहार में सड़क हादसा रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आये दिन भीषण सड़क हादसे होते रहते हैं. ताजा मामला दरभंगा जिले का है. यहां हुए भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और 10 लोग से अधिक लोग घायल बताये जा रहे है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. बुधवार को पड़ोसी जिले समस्तीपुर में ऑटो पर ट्रक चढ़ जाने के कारण सात लोगों की मौत हो गयी थी. इस हादसे के अगले दिन ही दरभंगा में यह हादसा हुआ है.
घटना के संबंध में बताया जाता है कि दरभंगा से समस्तीपुर की ओर से जा रही बेकाबू बोलेरो ने ऑटो में सीधा टक्कर मार दिया. दोनों वाहनों में 16 यात्री सफर कर रहे थे. इसमें करीब 10 लोग बुरी तरह घायल हो गये हैं. सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. वहां डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया.
स्थानीय पुलिस के अनुसार दरभंगा से समस्तीपुर की ओर जा रही तेज रफ्तार बोलेरो ने ऑटो में टक्कर मार दी है. इसमें लगभग 8 लोग घायल हो गये हैं. सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे चौकीदार ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिए DMCH भेज दिया. वहां डॉक्टरों ने दो यात्रियों को मृत घोषित कर दिया. वहीं कुछ घायल का इलाज निजी हॉस्पिटल में चल रहा है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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दरभंगा. बिहार में सड़क हादसा रुकने का नाम नहीं ले रहा है. आये दिन भीषण सड़क हादसे होते रहते हैं. ताजा मामला दरभंगा जिले का है. यहां हुए भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और दस लोग से अधिक लोग घायल बताये जा रहे है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. बुधवार को पड़ोसी जिले समस्तीपुर में ऑटो पर ट्रक चढ़ जाने के कारण सात लोगों की मौत हो गयी थी. इस हादसे के अगले दिन ही दरभंगा में यह हादसा हुआ है. घटना के संबंध में बताया जाता है कि दरभंगा से समस्तीपुर की ओर से जा रही बेकाबू बोलेरो ने ऑटो में सीधा टक्कर मार दिया. दोनों वाहनों में सोलह यात्री सफर कर रहे थे. इसमें करीब दस लोग बुरी तरह घायल हो गये हैं. सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. वहां डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया. स्थानीय पुलिस के अनुसार दरभंगा से समस्तीपुर की ओर जा रही तेज रफ्तार बोलेरो ने ऑटो में टक्कर मार दी है. इसमें लगभग आठ लोग घायल हो गये हैं. सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे चौकीदार ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिए DMCH भेज दिया. वहां डॉक्टरों ने दो यात्रियों को मृत घोषित कर दिया. वहीं कुछ घायल का इलाज निजी हॉस्पिटल में चल रहा है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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एक वैकल्पिक चिकित्सा कार्यक्रम किसी ऐसे व्यक्ति के लिए एक बढ़िया विकल्प हो सकता है जो अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाना चाहता/चाहती है। इस कार्यक्रम के पाठ्यक्रम छात्रों को रोगों को ठीक करने के लिए जड़ी-बूटियों या एक्यूपंक्चर का उपयोग करने के लिए तैयार कर सकते हैं।
कई अच्छे फिलीपींस के लोगों और उनकी जीवन शैली से प्यार है. यहां पढ़ाई करना भी आप स्थानीय कॉलेज विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय और कॉलेज या विश्वविद्यालय फिलीपींस में अपने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम शुरू करने के रूप में लोगों की संस्कृति के साथ mingling जानने में मदद कर सकता है. फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए चीजों को आसान कर देगा जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा अंग्रेजी बोलने वाला देश है.
व्यक्तियों, जो एक औपचारिक डिग्री की ओर समय या पैसे का निवेश नहीं करना चाहती बजाय एक डिप्लोमा कमाने के लिए काम कर सकते हैं। यह व्यक्तियों, जो सिर्फ माध्यमिक विद्यालय या बदलने के लिए या करियर तुरत प्रारम्भ करने के लिए देख रहे लोगों से स्नातक की उपाधि के लिए आदर्श है।
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एक वैकल्पिक चिकित्सा कार्यक्रम किसी ऐसे व्यक्ति के लिए एक बढ़िया विकल्प हो सकता है जो अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाना चाहता/चाहती है। इस कार्यक्रम के पाठ्यक्रम छात्रों को रोगों को ठीक करने के लिए जड़ी-बूटियों या एक्यूपंक्चर का उपयोग करने के लिए तैयार कर सकते हैं। कई अच्छे फिलीपींस के लोगों और उनकी जीवन शैली से प्यार है. यहां पढ़ाई करना भी आप स्थानीय कॉलेज विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय और कॉलेज या विश्वविद्यालय फिलीपींस में अपने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम शुरू करने के रूप में लोगों की संस्कृति के साथ mingling जानने में मदद कर सकता है. फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए चीजों को आसान कर देगा जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा अंग्रेजी बोलने वाला देश है. व्यक्तियों, जो एक औपचारिक डिग्री की ओर समय या पैसे का निवेश नहीं करना चाहती बजाय एक डिप्लोमा कमाने के लिए काम कर सकते हैं। यह व्यक्तियों, जो सिर्फ माध्यमिक विद्यालय या बदलने के लिए या करियर तुरत प्रारम्भ करने के लिए देख रहे लोगों से स्नातक की उपाधि के लिए आदर्श है।
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Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�..
अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
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Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल? कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�.. अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
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भाजपा की दिल्ली इकाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर में हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए आम आदमी पार्टी तथा उसके नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। भाजपा ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा आप विधायक अमानतुल्ला खान पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि 'विपक्ष' आगामी विधानसभा चुनाव में हार के डर से राष्ट्रीय राजधानी में हिंसा फैला रहा है। दिल्ली में हिंसा तथा आगजनी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि दंगों के पीछे कौन है और उन्हें इस बार सबक सिखाया जाना चाहिए, जिस तरह 2015 के विधानसभा चुनाव में किया गया।
भाजपा की दिल्ली इकाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर में हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए आम आदमी पार्टी तथा उसके नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। भाजपा ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा आप विधायक अमानतुल्ला खान पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया।
उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की कि वे ऐसी ताकतों को हराएं और शांति बनाए रखें। आगजनी में पुलिस की भूमिका के आरोप वाले सिसोदिया के ट्वीट और शाहीन बाग इलाके में अमानतुल्ला खान के कथित भड़काऊ भाषण पर पूछे गये सवालों का सीधा जवाब नहीं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "आरोप लगा रहा विपक्ष जानता है कि हिंसा और आगजनी कौन फैला रहा है।
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भाजपा की दिल्ली इकाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर में हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए आम आदमी पार्टी तथा उसके नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। भाजपा ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा आप विधायक अमानतुल्ला खान पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि 'विपक्ष' आगामी विधानसभा चुनाव में हार के डर से राष्ट्रीय राजधानी में हिंसा फैला रहा है। दिल्ली में हिंसा तथा आगजनी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि दंगों के पीछे कौन है और उन्हें इस बार सबक सिखाया जाना चाहिए, जिस तरह दो हज़ार पंद्रह के विधानसभा चुनाव में किया गया। भाजपा की दिल्ली इकाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर में हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए आम आदमी पार्टी तथा उसके नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। भाजपा ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा आप विधायक अमानतुल्ला खान पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की कि वे ऐसी ताकतों को हराएं और शांति बनाए रखें। आगजनी में पुलिस की भूमिका के आरोप वाले सिसोदिया के ट्वीट और शाहीन बाग इलाके में अमानतुल्ला खान के कथित भड़काऊ भाषण पर पूछे गये सवालों का सीधा जवाब नहीं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "आरोप लगा रहा विपक्ष जानता है कि हिंसा और आगजनी कौन फैला रहा है।
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बरकट्ठाः बरकट्ठा में ससुरालवालों द्बारा दहेज के लोभ में एक विवाहिता महिला को जहर खिलाकर जान से मार देने का मामला प्रकाश में आया है. ग्राम पुनाई थाना दारू निवासी बिनोद यादव ने बेटी की हत्या का आरोप पति समेत ससुराल के लोगो पर लगाया है.
इस निमित पीड़ित पिता बिनोद यादव ने बरकट्ठा थाना में एक लिखित आवेदन दिया है. आवेदक द्वारा बताया गया है कि एक साल पहले मेरी बेटी नीतू की शादी मुकेश यादव के साथ हुई थी. उन्होंने इस बावत बताया कि अपनी हैसियत के अनुसार दान दहेज देकर हिन्दू रीति रिवाज के साथ बेटी की शादी की थी. कालांतर बाद पति समेत ससुरालवाले एक मोटर साइकिल एवं दो लाख नगद की मांग करने लगे और मेरी बेटी को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देने लगे. यह जानकारी फोन के माध्यम से मेरी बेटी हमेशा हमें देती रहती थी.
इस समस्या को लेकर सामाजिक स्तर पर कई बार पंचायत की गई, पर बेटी के ससुरालवाले मोटरसाइकिल और 2 लाख लिए बिना मानने को तैयार नहीं थे.
आगे जानकारी देते हुए बताया गया कि 29 अक्टूबर की संध्या लगभग 6 बजे पति मुकेश यादव समेत सभी ससुरालवालों ने पानी में सल्फास जहर मिलाकर मेरी बेटी को जान मारने की नियत से जबरदस्ती जहर पिला दिया.
कुछ देर बाद बेटी ने मोबाइल से मुझे सूचना दी. सूचना पाकर किमनिया पहुंचा, जहां बेटी को अचेतावस्था में पाया. इलाज हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरकट्ठा लाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा सदर अस्पताल हजारीबाग भेजा गया. वहीं सदर अस्पताल से रिम्स रांची रेफर किया गया,जहां इलाज के क्रम में मेरी बेटी की मौत हो गई.
मामले को ले पीड़ित पिता ने थाना कांड संख्या 203/19 भादवि0 304(ब) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराते हुए ससुराल पक्ष से पति समेत आधे दर्जन से अधिक लोगो को नामजद अभियुक्त बनाया है. पुलिस द्वारा मामले की तहकीकात की जा रही है.
वहीं स्थानीय विधायक ने थाना पहुंचकर पीड़ित पिता को सांत्वना दिया एवं दोषियों पर कानूनसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया.
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बरकट्ठाः बरकट्ठा में ससुरालवालों द्बारा दहेज के लोभ में एक विवाहिता महिला को जहर खिलाकर जान से मार देने का मामला प्रकाश में आया है. ग्राम पुनाई थाना दारू निवासी बिनोद यादव ने बेटी की हत्या का आरोप पति समेत ससुराल के लोगो पर लगाया है. इस निमित पीड़ित पिता बिनोद यादव ने बरकट्ठा थाना में एक लिखित आवेदन दिया है. आवेदक द्वारा बताया गया है कि एक साल पहले मेरी बेटी नीतू की शादी मुकेश यादव के साथ हुई थी. उन्होंने इस बावत बताया कि अपनी हैसियत के अनुसार दान दहेज देकर हिन्दू रीति रिवाज के साथ बेटी की शादी की थी. कालांतर बाद पति समेत ससुरालवाले एक मोटर साइकिल एवं दो लाख नगद की मांग करने लगे और मेरी बेटी को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देने लगे. यह जानकारी फोन के माध्यम से मेरी बेटी हमेशा हमें देती रहती थी. इस समस्या को लेकर सामाजिक स्तर पर कई बार पंचायत की गई, पर बेटी के ससुरालवाले मोटरसाइकिल और दो लाख लिए बिना मानने को तैयार नहीं थे. आगे जानकारी देते हुए बताया गया कि उनतीस अक्टूबर की संध्या लगभग छः बजे पति मुकेश यादव समेत सभी ससुरालवालों ने पानी में सल्फास जहर मिलाकर मेरी बेटी को जान मारने की नियत से जबरदस्ती जहर पिला दिया. कुछ देर बाद बेटी ने मोबाइल से मुझे सूचना दी. सूचना पाकर किमनिया पहुंचा, जहां बेटी को अचेतावस्था में पाया. इलाज हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरकट्ठा लाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा सदर अस्पताल हजारीबाग भेजा गया. वहीं सदर अस्पताल से रिम्स रांची रेफर किया गया,जहां इलाज के क्रम में मेरी बेटी की मौत हो गई. मामले को ले पीड़ित पिता ने थाना कांड संख्या दो सौ तीन/उन्नीस भादविशून्य तीन सौ चार के तहत प्राथमिकी दर्ज कराते हुए ससुराल पक्ष से पति समेत आधे दर्जन से अधिक लोगो को नामजद अभियुक्त बनाया है. पुलिस द्वारा मामले की तहकीकात की जा रही है. वहीं स्थानीय विधायक ने थाना पहुंचकर पीड़ित पिता को सांत्वना दिया एवं दोषियों पर कानूनसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया.
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ ।
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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देश में कोरोना का प्रकोप एक बार फिर बहुत तेजी से फैल रहा है। रोजाना यहां हजारों की संख्या में लोग पॉज़िटिव पाये जा रहे हैं और सैकड़ों की तादाद में मौतें हो रही हैं। देशभर में श्मशान घाटों से कई डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। श्मशान घाट पर चारों ओर चिताएं जल रही है।
बता दें कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे भारत में तांडव मचा रखा है। हर दिन कोरोना वायरस नया और खौफनाक रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे देश में दहशत का माहौल बन गया है। बीते 24 घंटे में पॉजिटिव केसों की संख्या 2 लाख 16 हजार से अधिक पाई गई है। भारत में कोविड-19 के एक दिन में रिकॉर्ड दो लाख से अधिक मामले सामने आने के बाद इस बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 15 लाख के पार चली गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में गुरुवार रात तक कोरोना वायरस के एक दिन में 216,850 नए केस सामने आए और इसी दौरान 1183 लोगों की मौत हो गई। यह महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक एक दिन में मिलने वाले नए कोरोना संक्रमितों का सर्वाधिक आंकड़ा है। कोरोना की दूसरी लहर अब पहली लहर को काफी पीछे छोड़ चुकी है। अब तक के कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 14287740 हो गई है। कोरोना से पीड़ित लोगों के ठीक होने की दर और गिरकर 89. 51 प्रतिशत रह गई है।
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देश में कोरोना का प्रकोप एक बार फिर बहुत तेजी से फैल रहा है। रोजाना यहां हजारों की संख्या में लोग पॉज़िटिव पाये जा रहे हैं और सैकड़ों की तादाद में मौतें हो रही हैं। देशभर में श्मशान घाटों से कई डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। श्मशान घाट पर चारों ओर चिताएं जल रही है। बता दें कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे भारत में तांडव मचा रखा है। हर दिन कोरोना वायरस नया और खौफनाक रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे देश में दहशत का माहौल बन गया है। बीते चौबीस घंटाटे में पॉजिटिव केसों की संख्या दो लाख सोलह हजार से अधिक पाई गई है। भारत में कोविड-उन्नीस के एक दिन में रिकॉर्ड दो लाख से अधिक मामले सामने आने के बाद इस बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या पंद्रह लाख के पार चली गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में गुरुवार रात तक कोरोना वायरस के एक दिन में दो सौ सोलह,आठ सौ पचास नए केस सामने आए और इसी दौरान एक हज़ार एक सौ तिरासी लोगों की मौत हो गई। यह महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक एक दिन में मिलने वाले नए कोरोना संक्रमितों का सर्वाधिक आंकड़ा है। कोरोना की दूसरी लहर अब पहली लहर को काफी पीछे छोड़ चुकी है। अब तक के कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर एक करोड़ बयालीस लाख सत्तासी हज़ार सात सौ चालीस हो गई है। कोरोना से पीड़ित लोगों के ठीक होने की दर और गिरकर नवासी. इक्यावन प्रतिशत रह गई है।
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Bigg Boss 12: पत्नी और बच्चों का मैसेज पाकर फूट-फूट कर रोने लगे श्रीसंथ, पत्नी ने दी सलाह- 'गेम में इमोशनल होकर नहीं चलेगा काम!'
रविवार को सलमान खान ने घरवालों को बताया कि हर हफ्ते घरवालों को एक सरप्राइज मिलेगा।
'बिग बॉस 12' के घर में श्रीसंथ ने जब से कदम रखा है, तब से अब तक कई बार घर में एक्स क्रिकेटर के अलग-अलग रुप देखने को मिले हैं। कई बार श्रीसंथ को घर में गुस्सा करते या फिर रोते हुए भी देखा गया है, तो कई बार उनका मजाकिया लहजा भी नजर आया है। कुछ ऐसा ही नजारा एक बार फिर से रविवार के 'वीकेंड के वार' में देखने को मिला, जहां अपनी वाइफ का मैसेज मिलने के बाद श्रीसंथ भावुक नजर आए।
दरअसल रविवार को सलमान खान ने घरवालों को बताया कि हर हफ्ते घरवालों को एक सरप्राइज मिलेगा। इसकी शुरुआत श्रीसंथ से हुई। श्रीसंथ के लिए उनकी पत्नी और उनके बच्चों ने मैसेज भेजे थे, जिसको देख कर श्रीसंथ की आंखें भर आई। इस इमोशनल मैसेज में श्रीसंथ की पत्नी ने उनसे कहा- 'आप बहुत स्ट्रांग पर्सन है। आप अच्छा कर रहे हैं। आपकी सच्चाई को लोग पसंद कर रहे हैं, स्पेशली परिवार में हम सब को आप पर गर्व है। आप लोगों की बातों से इतना इमोशनल न हों क्योंकि ये एक गेम शो है। सब लोग गेम का हिस्सा हैं। वो जो बोलते हैं, आप उससे हर्ट न हों और छोटी-छोटी बातों पर घर छोड़ कर जाने की बात न करें। टॉस्क को पूरा करिए। अपने दिल की सुनिए। हम आपसे प्यार करते हैं और आपको बहुत याद करते हैं।' जब श्रीसंथ ने अपनी वाइफ का ये मैसेज सुना तो उनकी आंखें इस दौरान नम हो गई।
श्रीसंथ के बेटे और बेटी ने भी एक संदेश भेजा था। इसमें उनके बच्चों ने कहा कि वो अपने पापा के कितना मिस करते हैं। बच्चों का मैसेज मिलते ही अपने गुस्से के लिए बिग बॉस के घर में मशहूर हो चुके श्रीसंथ रोने लगे। वह काफी भावुक हो गए। खैर हमें तो लगता है कि श्रीसंथ को अपनी वाइफ की सलाह मानकर जी जान से गेम में जुट जाना चाहिए। वैसे भी बिग बॉस का घर ऐसी जगह है जहां पर टिक पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। बहरहाल, श्रीसंथ के इस इमोशनल साइड को देख कर उनके फैंस उनको काफी सपोर्ट कर रहे हैं। श्रीसंथ के फैंस का मानना है कि वह बाकी कंटेस्टेंट की तरह फेक नहीं हैं।
यह कॉपी बॉलीवुड लाइफ हिंदी के लिए बतौर इंटर्न शिवानी शर्मा ने लिखी है।
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Bigg Boss बारह: पत्नी और बच्चों का मैसेज पाकर फूट-फूट कर रोने लगे श्रीसंथ, पत्नी ने दी सलाह- 'गेम में इमोशनल होकर नहीं चलेगा काम!' रविवार को सलमान खान ने घरवालों को बताया कि हर हफ्ते घरवालों को एक सरप्राइज मिलेगा। 'बिग बॉस बारह' के घर में श्रीसंथ ने जब से कदम रखा है, तब से अब तक कई बार घर में एक्स क्रिकेटर के अलग-अलग रुप देखने को मिले हैं। कई बार श्रीसंथ को घर में गुस्सा करते या फिर रोते हुए भी देखा गया है, तो कई बार उनका मजाकिया लहजा भी नजर आया है। कुछ ऐसा ही नजारा एक बार फिर से रविवार के 'वीकेंड के वार' में देखने को मिला, जहां अपनी वाइफ का मैसेज मिलने के बाद श्रीसंथ भावुक नजर आए। दरअसल रविवार को सलमान खान ने घरवालों को बताया कि हर हफ्ते घरवालों को एक सरप्राइज मिलेगा। इसकी शुरुआत श्रीसंथ से हुई। श्रीसंथ के लिए उनकी पत्नी और उनके बच्चों ने मैसेज भेजे थे, जिसको देख कर श्रीसंथ की आंखें भर आई। इस इमोशनल मैसेज में श्रीसंथ की पत्नी ने उनसे कहा- 'आप बहुत स्ट्रांग पर्सन है। आप अच्छा कर रहे हैं। आपकी सच्चाई को लोग पसंद कर रहे हैं, स्पेशली परिवार में हम सब को आप पर गर्व है। आप लोगों की बातों से इतना इमोशनल न हों क्योंकि ये एक गेम शो है। सब लोग गेम का हिस्सा हैं। वो जो बोलते हैं, आप उससे हर्ट न हों और छोटी-छोटी बातों पर घर छोड़ कर जाने की बात न करें। टॉस्क को पूरा करिए। अपने दिल की सुनिए। हम आपसे प्यार करते हैं और आपको बहुत याद करते हैं।' जब श्रीसंथ ने अपनी वाइफ का ये मैसेज सुना तो उनकी आंखें इस दौरान नम हो गई। श्रीसंथ के बेटे और बेटी ने भी एक संदेश भेजा था। इसमें उनके बच्चों ने कहा कि वो अपने पापा के कितना मिस करते हैं। बच्चों का मैसेज मिलते ही अपने गुस्से के लिए बिग बॉस के घर में मशहूर हो चुके श्रीसंथ रोने लगे। वह काफी भावुक हो गए। खैर हमें तो लगता है कि श्रीसंथ को अपनी वाइफ की सलाह मानकर जी जान से गेम में जुट जाना चाहिए। वैसे भी बिग बॉस का घर ऐसी जगह है जहां पर टिक पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। बहरहाल, श्रीसंथ के इस इमोशनल साइड को देख कर उनके फैंस उनको काफी सपोर्ट कर रहे हैं। श्रीसंथ के फैंस का मानना है कि वह बाकी कंटेस्टेंट की तरह फेक नहीं हैं। यह कॉपी बॉलीवुड लाइफ हिंदी के लिए बतौर इंटर्न शिवानी शर्मा ने लिखी है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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नयी दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष और अब कैबिनेट मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरी बार शपथ ग्रहण करने को 'ऐतिहासिक' करार देते हुये भरोसा जताया है कि देश उनके सक्षम नेतृत्व में नयी ऊंचाइयां हासिल करना जारी रखेगा। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण। श्री नरेंद्र मोदी जी को लगातार दूसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने पर बधाई। मैं निश्चिंत हूं कि भारत आपके सक्षम नेतृत्व में नयी ऊंचाइयां हासिल करेगा।
उन्होंने कहा कि बीते पांच सालों में भारत ने प्रत्येक क्षेत्र में बेमिसाल तरक्की देखी है। शाह ने अन्य 57 मंत्रियों के साथ बृहस्पतिवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
Congratulations to Shri @narendramodi ji on being sworn in as the Prime Minister of India for a second consecutive term.
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नयी दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष और अब कैबिनेट मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरी बार शपथ ग्रहण करने को 'ऐतिहासिक' करार देते हुये भरोसा जताया है कि देश उनके सक्षम नेतृत्व में नयी ऊंचाइयां हासिल करना जारी रखेगा। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण। श्री नरेंद्र मोदी जी को लगातार दूसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने पर बधाई। मैं निश्चिंत हूं कि भारत आपके सक्षम नेतृत्व में नयी ऊंचाइयां हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बीते पांच सालों में भारत ने प्रत्येक क्षेत्र में बेमिसाल तरक्की देखी है। शाह ने अन्य सत्तावन मंत्रियों के साथ बृहस्पतिवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। Congratulations to Shri @narendramodi ji on being sworn in as the Prime Minister of India for a second consecutive term.
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RRR फिल्म ने कमाई के मामले में तोड़े कई रिकॉर्ड,हॉलीवुड की फ़िल्में भी फेल।
पंकज त्रिपाठी पहुंचे बेलसंड, मिमी फिल्म रिलीज से पहले लिया माता-पिता का आशीर्वाद।
Neena Gupta ने दी नई एक्ट्रेसेज को कास्टिंग काउच से बचने के टिप्स।
शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की बढ़ी मुश्किलें, पोर्नोग्राफी केस में हुए गिरफ्तार।
क्वालिटी टाइम बिताने उत्तराखंड पहुंचे अमिताभ बच्चन, यहां देखें तस्वीरें।
जूनियर बच्चन की 'दसवीं' OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़,यहाँ देख सकते हैं वो भी फ्री।
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RRR फिल्म ने कमाई के मामले में तोड़े कई रिकॉर्ड,हॉलीवुड की फ़िल्में भी फेल। पंकज त्रिपाठी पहुंचे बेलसंड, मिमी फिल्म रिलीज से पहले लिया माता-पिता का आशीर्वाद। Neena Gupta ने दी नई एक्ट्रेसेज को कास्टिंग काउच से बचने के टिप्स। शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की बढ़ी मुश्किलें, पोर्नोग्राफी केस में हुए गिरफ्तार। क्वालिटी टाइम बिताने उत्तराखंड पहुंचे अमिताभ बच्चन, यहां देखें तस्वीरें। जूनियर बच्चन की 'दसवीं' OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़,यहाँ देख सकते हैं वो भी फ्री।
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बरकट्ठा, प्रतिनिधि। आसमान में बादल उमड़ घुमड़ रहा है। लेकिन बारिश नहीं हो रही है। इस वजह से किसान चिंतित हैं, तो दूसरी ओर उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं। सावन माह के आठ दिन गुजरने के बाद भी झमाझम बारिश नहीं हुई है। खेत सूखे हुए हैं। हालांकि चार दिन पूर्व हुई हल्की बारिश में किसानों ने धान के बीज खेतों में डाल दिया है। लेकिन वर्षा नहीं होने और आसमान में बादल को बरसने की उम्मीद में किसान टकटकी लगाए बैठे हैं। वहीं खेतों के सूखे होने के कारण मकई, मडुआ पर भी इसका असर पड़ रहा है। मकई के पौधे मुरझाने लगे हैं। कई किसानों के मुताबिक बरकट्ठा इलाके में नदीं होने के बावजूद सिंचाई के साधन नहीं होने से वर्षा पर आधारित खेती करने को विवश हैं। कहा सावन महीने के एक सप्ताह गुजरने के बाद भी खेतों में पानी नहीं है। किसान भगवान के भरोसे हैं। किसानों ने बताया कि नदी में लिफ्ट इरिगेशन की सुविधा सरकार करती तो किसान खुशहाल होते और फसल का आच्छादन भी होता।
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बरकट्ठा, प्रतिनिधि। आसमान में बादल उमड़ घुमड़ रहा है। लेकिन बारिश नहीं हो रही है। इस वजह से किसान चिंतित हैं, तो दूसरी ओर उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं। सावन माह के आठ दिन गुजरने के बाद भी झमाझम बारिश नहीं हुई है। खेत सूखे हुए हैं। हालांकि चार दिन पूर्व हुई हल्की बारिश में किसानों ने धान के बीज खेतों में डाल दिया है। लेकिन वर्षा नहीं होने और आसमान में बादल को बरसने की उम्मीद में किसान टकटकी लगाए बैठे हैं। वहीं खेतों के सूखे होने के कारण मकई, मडुआ पर भी इसका असर पड़ रहा है। मकई के पौधे मुरझाने लगे हैं। कई किसानों के मुताबिक बरकट्ठा इलाके में नदीं होने के बावजूद सिंचाई के साधन नहीं होने से वर्षा पर आधारित खेती करने को विवश हैं। कहा सावन महीने के एक सप्ताह गुजरने के बाद भी खेतों में पानी नहीं है। किसान भगवान के भरोसे हैं। किसानों ने बताया कि नदी में लिफ्ट इरिगेशन की सुविधा सरकार करती तो किसान खुशहाल होते और फसल का आच्छादन भी होता।
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लगता है नीना गुप्ता (Neena Gupta) इन दिनों अपनी उम्र को चकमा देने वाला कोई खेल, खेल रही हैं! अभिनेत्री लंबे समय से इंस्टाग्राम पर एक के बाद एक बेहतरीन फोटो शेयर करते जा रही हैं। नीना गुप्ता ने 2019 की फिल्म बधाई हो में अभिनय करने के बाद एक बार फिर प्रसिद्धि हासिल की। अभिनेत्री ने आयुष्मान खुराना के साथ स्क्रीन साझा की, लेकिन गजराज राव के साथ फिल्म में उनकी केम्सिट्री और ताल मील को लोगों ने बहुत पसंद किया। नीना गुप्ता हमेशा से ही सोशल मीडिया यूजर रही हैं। अभिनेत्री को तस्वीरों को क्लिक करने और उन्हें अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट करने का बेहद शौक है।
दूसरी ओर, नीना के फ़िल्मी करियर की बात की जाए तो वो जल्द ही अपने बधाई हो को-स्टार आयुष्मान खुराना और गजराज राव के साथफिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान में नज़र आएंगी, जहाँ आयुष्मान एक समलैंगिक नायक की भूमिका में नज़र आएंगे। फिल्म समलैंगिकता के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्रेलर को पहले से ही लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। नीना गुप्ता ने हाल ही में कंगना रनौत अभिनीत फिल्म पंगा में अभिनय किया, जहाँ उन्होंने कंगना की माँ की भूमिका निभाई। यहाँ भी नीना को बेहद पसंद किया गया था।
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लगता है नीना गुप्ता इन दिनों अपनी उम्र को चकमा देने वाला कोई खेल, खेल रही हैं! अभिनेत्री लंबे समय से इंस्टाग्राम पर एक के बाद एक बेहतरीन फोटो शेयर करते जा रही हैं। नीना गुप्ता ने दो हज़ार उन्नीस की फिल्म बधाई हो में अभिनय करने के बाद एक बार फिर प्रसिद्धि हासिल की। अभिनेत्री ने आयुष्मान खुराना के साथ स्क्रीन साझा की, लेकिन गजराज राव के साथ फिल्म में उनकी केम्सिट्री और ताल मील को लोगों ने बहुत पसंद किया। नीना गुप्ता हमेशा से ही सोशल मीडिया यूजर रही हैं। अभिनेत्री को तस्वीरों को क्लिक करने और उन्हें अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट करने का बेहद शौक है। दूसरी ओर, नीना के फ़िल्मी करियर की बात की जाए तो वो जल्द ही अपने बधाई हो को-स्टार आयुष्मान खुराना और गजराज राव के साथफिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान में नज़र आएंगी, जहाँ आयुष्मान एक समलैंगिक नायक की भूमिका में नज़र आएंगे। फिल्म समलैंगिकता के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्रेलर को पहले से ही लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। नीना गुप्ता ने हाल ही में कंगना रनौत अभिनीत फिल्म पंगा में अभिनय किया, जहाँ उन्होंने कंगना की माँ की भूमिका निभाई। यहाँ भी नीना को बेहद पसंद किया गया था।
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