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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के उत्तर में बोलते हुए हंगामे के बीच पीएम मोदी ने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। इस वाकये के माध्यम से उन्होंने बताया कि यथास्थिति कायम रखने की प्रवृत्ति हमें कहां ले जा सकती है?
पीएम मोदी ने बताया, साल 1970 में वेतन आयोग की बैठक चल रही थी। इस बैठक में आयोग के अध्यक्ष के पास एक लिफाफा आया, जिस पर अति गोपनीय लिखा था। उसमें एक व्यक्ति ने लिखा था कि वह लंबे समय से सीसीए के पद पर कार्य कर रहा है, लेकिन उसकी तनख्वाह ही नहीं बढ़ रही। जब आयोग के सदस्यों ने खंगाला तो पता चला कि ऐसा तो कोई पद रिकॉर्ड पर है ही नहीं।
इस मामले में आयोग के सदस्यों ने उन्हीं सज्जन से पूछा कि आप ही बताओ कि यह क्या पद है, क्या काम करते हो? उन सज्जन ने कहा कि यह तो गोपनीय जानकारी है और वह 1975से पहले नहीं बता सकते। तब आयोग के अध्यक्ष ने कहा, यह तो बड़ी मुश्किल है। फिर आप ऐसा कीजिए कि 1975के बाद जो आयोग बैठेगा, उसे बताइएगा।
बात बिगड़ती देख उस व्यक्ति ने राज खोला। उसने बताया कि सीसीए का कुल मतलब है चर्चिल सिगार असिस्स्टेंट। मामला कुछ यूं था कि 1940में जब विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे, तब उनके लिए तमिलनाडु के त्रिची (तिरुचरापल्ली) से सिगार जाते थे। ये सिगार व्यवस्थित रूप से चर्चिल तक पहुंचते रहें, इसके लिए एक पद सृजित किया गया। मजेदार बात यह है कि 1945के बाद तो विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं रहे। फिर 1947में भारत आजाद हो गया, लेकिन सीसीए का यह पद बना रहा। दरअसल, इस घटना के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने व्यवस्था की उस सड़ांध को उजागर किया, जहां यथास्थिति बनाए रखने के चलते कई इसी तरह के आश्चर्यजनक और हास्यास्पद उदाहरण कायम हैं।
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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के उत्तर में बोलते हुए हंगामे के बीच पीएम मोदी ने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। इस वाकये के माध्यम से उन्होंने बताया कि यथास्थिति कायम रखने की प्रवृत्ति हमें कहां ले जा सकती है? पीएम मोदी ने बताया, साल एक हज़ार नौ सौ सत्तर में वेतन आयोग की बैठक चल रही थी। इस बैठक में आयोग के अध्यक्ष के पास एक लिफाफा आया, जिस पर अति गोपनीय लिखा था। उसमें एक व्यक्ति ने लिखा था कि वह लंबे समय से सीसीए के पद पर कार्य कर रहा है, लेकिन उसकी तनख्वाह ही नहीं बढ़ रही। जब आयोग के सदस्यों ने खंगाला तो पता चला कि ऐसा तो कोई पद रिकॉर्ड पर है ही नहीं। इस मामले में आयोग के सदस्यों ने उन्हीं सज्जन से पूछा कि आप ही बताओ कि यह क्या पद है, क्या काम करते हो? उन सज्जन ने कहा कि यह तो गोपनीय जानकारी है और वह एक हज़ार नौ सौ पचहत्तरसे पहले नहीं बता सकते। तब आयोग के अध्यक्ष ने कहा, यह तो बड़ी मुश्किल है। फिर आप ऐसा कीजिए कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तरके बाद जो आयोग बैठेगा, उसे बताइएगा। बात बिगड़ती देख उस व्यक्ति ने राज खोला। उसने बताया कि सीसीए का कुल मतलब है चर्चिल सिगार असिस्स्टेंट। मामला कुछ यूं था कि एक हज़ार नौ सौ चालीसमें जब विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे, तब उनके लिए तमिलनाडु के त्रिची से सिगार जाते थे। ये सिगार व्यवस्थित रूप से चर्चिल तक पहुंचते रहें, इसके लिए एक पद सृजित किया गया। मजेदार बात यह है कि एक हज़ार नौ सौ पैंतालीसके बाद तो विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं रहे। फिर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीसमें भारत आजाद हो गया, लेकिन सीसीए का यह पद बना रहा। दरअसल, इस घटना के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने व्यवस्था की उस सड़ांध को उजागर किया, जहां यथास्थिति बनाए रखने के चलते कई इसी तरह के आश्चर्यजनक और हास्यास्पद उदाहरण कायम हैं।
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तस्वीरें छत्तीसगढ़ के बस्तर की हैं, जहां इन दिनों भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर है. कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं लेकिन ये तस्वीर सिर्फ बाढ़ की मार की नहीं है. ये सरकार और प्रशासन की नाकामी की तस्वीर है. क्योंकि सालों से इस गांव में यही हाल है. सैलाब के बीच किसी तरह खुद को संभालते ये बच्चे. . . चले हैं स्कूल की तरफ. एक हाथ में किताब, दूसरे हाथ से सहारा. . . इसी तरह एक दूसरे को थामे इन्हें इस दरिया में डूबकर जाना है.
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तस्वीरें छत्तीसगढ़ के बस्तर की हैं, जहां इन दिनों भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर है. कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं लेकिन ये तस्वीर सिर्फ बाढ़ की मार की नहीं है. ये सरकार और प्रशासन की नाकामी की तस्वीर है. क्योंकि सालों से इस गांव में यही हाल है. सैलाब के बीच किसी तरह खुद को संभालते ये बच्चे. . . चले हैं स्कूल की तरफ. एक हाथ में किताब, दूसरे हाथ से सहारा. . . इसी तरह एक दूसरे को थामे इन्हें इस दरिया में डूबकर जाना है.
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Quick links:
बॉलीवुड एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) और तारा सुतारिया (Tara Sutaria) इन दिनों अपनी नई फिल्म 'हीरोपंती 2' (Heropanti 2) को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। इस मोस्ट अवेटेड फिल्म में दर्शकों को टाइगर का एक्शन देखने का लंबे समय से इंजजार था। हालांकि फिल्म रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं कर पा रही है। इस फिल्म में टाइगर और तारा सुतारिया की रोमांटिक जोड़ी देखने को मिली। वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी विलेन की भूमिका में नजर आए।
'हीरोपंती 2' (Heropanti 2) रविवार को फिल्म में काफी गिरावट आई, जो आमतौर पर किसी फिल्म के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला दिन होता है। फिल्म ने अपने शुरुआती सप्ताह में टिकट काउंटर पर केवल 15 करोड़ रुपये कमाए। इसमें कई एक्शन सीन दिखाए गए हैं, जिसके बावजूद इस फिल्म ने अभी तक बॉक्स ऑफिस पर कामयाब नहीं रही। हालांकि एक ही दिन रिलीज हुए फिल्म 'रनवे 34' ने भी शुरुआती दिनों में धीमी चली, लेकिन वीकेंड पर इसने रफ्तार पकड़ ली।
Sacnilk के शुरुआती अनुमानों के अनुसार 'हीरोपंती 2' ने रविवार को बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 3.70 करोड़ रुपये कमाए। वहीं रविवार की छुट्टी में फिल्म के अच्छे अंतर से बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन इस मामले में यह कलेक्शन में और गिरावट ही देखी गई। यह पिछले दिन के 5.20 करोड़ रुपये गिरावट आई है, जो शुक्रवार की 6.70 करोड़ रुपये की ओपनिंग से भी कम है। इस तरह कुल कलेक्शन 15.60 करोड़ रुपये रहा। फिल्म वीकेंड पर भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाई।
'हीरोपंती 2' (Heropanti) में टाइगर श्रॉफ और तारा सुतारिया मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी विलेन लैला की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अहमद खान और नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट ने किया है और एए फिल्म्स ने संयुक्त रूप से इसका निर्माण किया है। फिल्म की कहानी बबलू नाम के एक युवक और लैला की आपराधिक योजनाओं से देश को बचाने की उसकी खोज के इर्द-गिर्द घूमती है।
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Quick links: बॉलीवुड एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ और तारा सुतारिया इन दिनों अपनी नई फिल्म 'हीरोपंती दो' को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। इस मोस्ट अवेटेड फिल्म में दर्शकों को टाइगर का एक्शन देखने का लंबे समय से इंजजार था। हालांकि फिल्म रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं कर पा रही है। इस फिल्म में टाइगर और तारा सुतारिया की रोमांटिक जोड़ी देखने को मिली। वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी विलेन की भूमिका में नजर आए। 'हीरोपंती दो' रविवार को फिल्म में काफी गिरावट आई, जो आमतौर पर किसी फिल्म के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला दिन होता है। फिल्म ने अपने शुरुआती सप्ताह में टिकट काउंटर पर केवल पंद्रह करोड़ रुपये कमाए। इसमें कई एक्शन सीन दिखाए गए हैं, जिसके बावजूद इस फिल्म ने अभी तक बॉक्स ऑफिस पर कामयाब नहीं रही। हालांकि एक ही दिन रिलीज हुए फिल्म 'रनवे चौंतीस' ने भी शुरुआती दिनों में धीमी चली, लेकिन वीकेंड पर इसने रफ्तार पकड़ ली। Sacnilk के शुरुआती अनुमानों के अनुसार 'हीरोपंती दो' ने रविवार को बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ तीन.सत्तर करोड़ रुपये कमाए। वहीं रविवार की छुट्टी में फिल्म के अच्छे अंतर से बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन इस मामले में यह कलेक्शन में और गिरावट ही देखी गई। यह पिछले दिन के पाँच.बीस करोड़ रुपये गिरावट आई है, जो शुक्रवार की छः.सत्तर करोड़ रुपये की ओपनिंग से भी कम है। इस तरह कुल कलेक्शन पंद्रह.साठ करोड़ रुपये रहा। फिल्म वीकेंड पर भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाई। 'हीरोपंती दो' में टाइगर श्रॉफ और तारा सुतारिया मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी विलेन लैला की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अहमद खान और नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट ने किया है और एए फिल्म्स ने संयुक्त रूप से इसका निर्माण किया है। फिल्म की कहानी बबलू नाम के एक युवक और लैला की आपराधिक योजनाओं से देश को बचाने की उसकी खोज के इर्द-गिर्द घूमती है।
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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान न करने पर तंज कसा। चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस महीने की अपनी अंतिम चुनावी रैली में तारीखों की 'घोषणा' करने के लिए 'अधिकृत' किया है।
चिदंबरम ने ट्विटर पर एक व्यंगात्मक नोट में कहा, गुजरात सरकार की सभी रियायतें और मुफ्त घोषणाओं के बाद चुनाव आयोग अपनी विस्तारित छुट्टी से लौटेगा। चुनाव आयोग ने पीएम को अधिकृत किया है कि वह अपनी अंतिम चुनावी रैली में गुजरात चुनाव की तारीखों की घोषणा करें।
चुनाव आयोग ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है लेकिन गुजरात की तारीखों का ऐलान अभी बाकी है। जिसके बाद विपक्ष ने आयोग पर आरोप लगाया है कि उसने भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मुफ्त उपहार बांटने की अनुमति का आदेश दिया है।
प्रधानमंत्री के 16 अक्टूबर को गुजरात दौरे के बाद, 22 अक्टूबर को भी उनके गुजरात दौरे की योजना है।
नई दिल्ली। नई संसद में अमर्यादित भाषा के उपयोग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एक्शन में आ गए हैं। भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी और बसपा सांसद दानिश अली के बीच हुई जुबानी जंग का मामला अब विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया है। ओम बिरला ने दोनों सांसदों की एक दूसरे के खिलाफ की गई शिकायतों की जांच के लिए मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है।
बीते दिनों संसद के विशेष सत्र के दौरान चंद्रयान 3 की सफलता को लेकर हुई चर्चा पर दोनों सांसदों में जुबानी जंग छिड़ गई थी। इस बीच भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी को दानिश अली पर कई गलत टिप्पणियां करते हुए सुना गया। बिधूड़ी ने अली को संसद में आतंकी तक कह दिया था। इस टिप्पणी के बाद पूरा विपक्ष भाजपा पर हमलावर हो गया था।
रमेश बिधूड़ी की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने इसे हेट स्पीच करार दिया था। कांग्रेस समेत कई दलों ने इसके लिए बिधूड़ी को निष्कासित करने की मांग भी की। वहीं, दानिश अली ने भी ओम बिरला को बिधूड़ी पर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था।
भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने भी रमेश बिधूड़ी के बयान को गलत बताया। हालांकि, उन्होंने ये भी आरोप लगाए कि दानिश अली ने पहले पीएम मोदी के बारे में गलत बोला था, इसी कारण बिधूड़ी उत्तेजित हो गए। बता दें कि इससे पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बिधूड़ी के बयान को लेकर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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नई दिल्ली, बीस अक्टूबर । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान न करने पर तंज कसा। चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस महीने की अपनी अंतिम चुनावी रैली में तारीखों की 'घोषणा' करने के लिए 'अधिकृत' किया है। चिदंबरम ने ट्विटर पर एक व्यंगात्मक नोट में कहा, गुजरात सरकार की सभी रियायतें और मुफ्त घोषणाओं के बाद चुनाव आयोग अपनी विस्तारित छुट्टी से लौटेगा। चुनाव आयोग ने पीएम को अधिकृत किया है कि वह अपनी अंतिम चुनावी रैली में गुजरात चुनाव की तारीखों की घोषणा करें। चुनाव आयोग ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है लेकिन गुजरात की तारीखों का ऐलान अभी बाकी है। जिसके बाद विपक्ष ने आयोग पर आरोप लगाया है कि उसने भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मुफ्त उपहार बांटने की अनुमति का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री के सोलह अक्टूबर को गुजरात दौरे के बाद, बाईस अक्टूबर को भी उनके गुजरात दौरे की योजना है। नई दिल्ली। नई संसद में अमर्यादित भाषा के उपयोग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एक्शन में आ गए हैं। भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी और बसपा सांसद दानिश अली के बीच हुई जुबानी जंग का मामला अब विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया है। ओम बिरला ने दोनों सांसदों की एक दूसरे के खिलाफ की गई शिकायतों की जांच के लिए मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। बीते दिनों संसद के विशेष सत्र के दौरान चंद्रयान तीन की सफलता को लेकर हुई चर्चा पर दोनों सांसदों में जुबानी जंग छिड़ गई थी। इस बीच भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी को दानिश अली पर कई गलत टिप्पणियां करते हुए सुना गया। बिधूड़ी ने अली को संसद में आतंकी तक कह दिया था। इस टिप्पणी के बाद पूरा विपक्ष भाजपा पर हमलावर हो गया था। रमेश बिधूड़ी की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने इसे हेट स्पीच करार दिया था। कांग्रेस समेत कई दलों ने इसके लिए बिधूड़ी को निष्कासित करने की मांग भी की। वहीं, दानिश अली ने भी ओम बिरला को बिधूड़ी पर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था। भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने भी रमेश बिधूड़ी के बयान को गलत बताया। हालांकि, उन्होंने ये भी आरोप लगाए कि दानिश अली ने पहले पीएम मोदी के बारे में गलत बोला था, इसी कारण बिधूड़ी उत्तेजित हो गए। बता दें कि इससे पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बिधूड़ी के बयान को लेकर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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बजट न तो लोकलुभावन है और न ही चुनावी है। फोकस किसानों, गांवों, गरीबों और युवाओं पर रखा गया है। शायद मोदी जी इन्हीं तबकों के सहारे 2019 में भी सत्तारूढ़ रहना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी जो भी कहें, लेकिन बजट देश की 130 करोड़ से ज्यादा आबादी की आशाओं, अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं है। किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य बजट में भी दोहराया गया है, लिहाजा तुरंत प्रभाव से तमाम फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की घोषणा की गई है। अब किसान को फसल की लागत के डेढ़ गुना दाम मिल सकेंगे। यह भरमाने वाला बिंदु है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार अभी राज्य सरकारों से विमर्श कर तय करेगी कि इस बजटीय प्रावधान को कैसे लागू किया जाए। सरकारें फसल की लागत के दायरे में किसे शामिल करती हैं, यह एक सवाल होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में टमाटर, प्याज और आलू सरीखी सब्जियों को भी रखा गया है, यह किसानों के लिए सकारात्मक कदम साबित हो सकता है। सब्जियों के लिए प्रस्तावित 'आपरेशन ग्रीन' के लिए 500 करोड़ रुपए आबंटित करने का प्रस्ताव है। 2000 करोड़ की लागत से कृषि बाजार स्थापित किए जाएंगे। 42 मेगा फूड पार्क खोले जाएंगे। कृषि विपणन कमेटियों में 470 कोई-नैम नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। अब किसान कार्ड के दायरे में पशुपालन, मछली पालन, गोबर धन आदि अतिरिक्त कृषि गतिविधियां भी होंगी। किसानों के कर्ज और अन्य गतिविधियों के लिए 11 लाख करोड़ रुपए आबंटित करने का प्रस्ताव रखा गया है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर भी 1400 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। किसान के साथ-साथ ग्रामीण विकास पर भी फोकस रहा है। गांव की सड़कें राजमार्गों तक जुड़ेंगी। एक लाख ग्राम पंचायतों को मजबूत किया जाएगा। 2. 5 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड को बढ़ावा दिया जाएगा। पांच लाख ऐसे वाई-फाई स्थल तय किए जाएंगे, जिनसे पांच करोड़ ग्रामीण नागरिकों को फायदा होगा। यदि शौचालय और गैस कनेक्शन की योजनाओं को भी गांव से जोड़ कर देखें, तो उज्ज्वला गैस कनेक्शन योजना के तहत लक्ष्य अब आठ करोड़ कर दिया गया है और छह करोड़ शौचालय भी बनवाएगी सरकार। इनमें से दो करोड़ शौचालय मौजूदा वित्त वर्ष मेंही बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली मानते हैं कि आज भी गांवों में जीवन-स्तर बेहतर नहीं है। किसानों के संकट राष्ट्रीय सरोकार बने हुए थे। लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि 14. 5 लाख करोड़ रुपए ग्रामीण विकास पर ही खर्च किए जाएंगे। इससे गांवों में चौतरफा विकास के रास्ते खुलेंगे और रोजगार भी पैदा होंगे। 'आपरेशन ग्रीन' एक कारगर कदम साबित होगा। कृषि से लेकर 21वीं सदी के बुनियादी ढांचे तक काम किए जाएंगे। करीब 1. 75 करोड़ घरों में बिजली के कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे। इनमें भी ज्यादातर इलाके ग्रामीण हैं। बजट में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की भी घोषणा की गई है। देश के गरीबों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार, प्रति साल का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। यह खर्च सरकार वहन करेगी। इससे 50 करोड़ लोगों को फायदा होने का अनुमान किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का दावा है कि एक दिन आएगा, जब सभी देशवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी। अमरीका में 'ओबामा केयर' सफल हुई हो या न हुई हो, लेकिन भारत में 'मोदी केयर' को कामयाब करके दिखाएंगे। हर नागरिक के पास 'हैल्थ बीमा कार्ड' होगा। आम आदमी और गरीब को आकर्षित करने वाली सबसे बड़ी घोषणा यह है कि बजट में 2022 तक यानी स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने तक, हर सिर पर 'छत' होगी। गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1. 10 करोड़ घर बनाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है। यह घोषणा चुनावी मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकती है। मुद्रा लोन के तहत तीन लाख करोड़ रुपए तय किए गए हैं, जो 'फुटपाथिया' कारोबारियों की आर्थिक मदद करने को होंगे। मोदी सरकार इसी मद में अभी तक करीब चार लाख करोड़ रुपए के कर्जे बांट चुकी है। लिहाजा मोदी सरकार की निगाह दबे-कुचलों और वंचितों की स्थितियों पर है। वैसे 2018-19 के बजट में हरेक तबके के लिए कुछ न कुछ आबंटन जरूर है, लेकिन प्राथमिकता किसान, गांव, गरीब की है। अगली किस्त में हम मध्यम वर्ग, युवाओं, नौकरियों और व्यापार आदि के क्षेत्रों का विश्लेषण करेंगे। उस दृष्टि से यह एक 'प्रगतिशील बजट' है।
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बजट न तो लोकलुभावन है और न ही चुनावी है। फोकस किसानों, गांवों, गरीबों और युवाओं पर रखा गया है। शायद मोदी जी इन्हीं तबकों के सहारे दो हज़ार उन्नीस में भी सत्तारूढ़ रहना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी जो भी कहें, लेकिन बजट देश की एक सौ तीस करोड़ से ज्यादा आबादी की आशाओं, अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं है। किसानों की आमदनी दो हज़ार बाईस तक दोगुना करने का लक्ष्य बजट में भी दोहराया गया है, लिहाजा तुरंत प्रभाव से तमाम फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की घोषणा की गई है। अब किसान को फसल की लागत के डेढ़ गुना दाम मिल सकेंगे। यह भरमाने वाला बिंदु है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार अभी राज्य सरकारों से विमर्श कर तय करेगी कि इस बजटीय प्रावधान को कैसे लागू किया जाए। सरकारें फसल की लागत के दायरे में किसे शामिल करती हैं, यह एक सवाल होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में टमाटर, प्याज और आलू सरीखी सब्जियों को भी रखा गया है, यह किसानों के लिए सकारात्मक कदम साबित हो सकता है। सब्जियों के लिए प्रस्तावित 'आपरेशन ग्रीन' के लिए पाँच सौ करोड़ रुपए आबंटित करने का प्रस्ताव है। दो हज़ार करोड़ की लागत से कृषि बाजार स्थापित किए जाएंगे। बयालीस मेगा फूड पार्क खोले जाएंगे। कृषि विपणन कमेटियों में चार सौ सत्तर कोई-नैम नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। अब किसान कार्ड के दायरे में पशुपालन, मछली पालन, गोबर धन आदि अतिरिक्त कृषि गतिविधियां भी होंगी। किसानों के कर्ज और अन्य गतिविधियों के लिए ग्यारह लाख करोड़ रुपए आबंटित करने का प्रस्ताव रखा गया है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर भी एक हज़ार चार सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। किसान के साथ-साथ ग्रामीण विकास पर भी फोकस रहा है। गांव की सड़कें राजमार्गों तक जुड़ेंगी। एक लाख ग्राम पंचायतों को मजबूत किया जाएगा। दो. पाँच लाख गांवों में ब्रॉडबैंड को बढ़ावा दिया जाएगा। पांच लाख ऐसे वाई-फाई स्थल तय किए जाएंगे, जिनसे पांच करोड़ ग्रामीण नागरिकों को फायदा होगा। यदि शौचालय और गैस कनेक्शन की योजनाओं को भी गांव से जोड़ कर देखें, तो उज्ज्वला गैस कनेक्शन योजना के तहत लक्ष्य अब आठ करोड़ कर दिया गया है और छह करोड़ शौचालय भी बनवाएगी सरकार। इनमें से दो करोड़ शौचालय मौजूदा वित्त वर्ष मेंही बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली मानते हैं कि आज भी गांवों में जीवन-स्तर बेहतर नहीं है। किसानों के संकट राष्ट्रीय सरोकार बने हुए थे। लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि चौदह. पाँच लाख करोड़ रुपए ग्रामीण विकास पर ही खर्च किए जाएंगे। इससे गांवों में चौतरफा विकास के रास्ते खुलेंगे और रोजगार भी पैदा होंगे। 'आपरेशन ग्रीन' एक कारगर कदम साबित होगा। कृषि से लेकर इक्कीसवीं सदी के बुनियादी ढांचे तक काम किए जाएंगे। करीब एक. पचहत्तर करोड़ घरों में बिजली के कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे। इनमें भी ज्यादातर इलाके ग्रामीण हैं। बजट में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की भी घोषणा की गई है। देश के गरीबों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार, प्रति साल का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। यह खर्च सरकार वहन करेगी। इससे पचास करोड़ लोगों को फायदा होने का अनुमान किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का दावा है कि एक दिन आएगा, जब सभी देशवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी। अमरीका में 'ओबामा केयर' सफल हुई हो या न हुई हो, लेकिन भारत में 'मोदी केयर' को कामयाब करके दिखाएंगे। हर नागरिक के पास 'हैल्थ बीमा कार्ड' होगा। आम आदमी और गरीब को आकर्षित करने वाली सबसे बड़ी घोषणा यह है कि बजट में दो हज़ार बाईस तक यानी स्वतंत्रता के पचहत्तर साल पूरे होने तक, हर सिर पर 'छत' होगी। गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक. दस करोड़ घर बनाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है। यह घोषणा चुनावी मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकती है। मुद्रा लोन के तहत तीन लाख करोड़ रुपए तय किए गए हैं, जो 'फुटपाथिया' कारोबारियों की आर्थिक मदद करने को होंगे। मोदी सरकार इसी मद में अभी तक करीब चार लाख करोड़ रुपए के कर्जे बांट चुकी है। लिहाजा मोदी सरकार की निगाह दबे-कुचलों और वंचितों की स्थितियों पर है। वैसे दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के बजट में हरेक तबके के लिए कुछ न कुछ आबंटन जरूर है, लेकिन प्राथमिकता किसान, गांव, गरीब की है। अगली किस्त में हम मध्यम वर्ग, युवाओं, नौकरियों और व्यापार आदि के क्षेत्रों का विश्लेषण करेंगे। उस दृष्टि से यह एक 'प्रगतिशील बजट' है।
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कोरोना के चलते पांच महीने से सील भारत-नेपाल सीमा अगले माह 17 सितंबर से खुल सकती है। दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास से नोटिफिकेशन जारी होने की चर्चा है। हालांकि सीमा पार के सूत्रों के मुताबिक अभी इस पर सरकार के स्तर पर विचार चल रहा है।
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कोरोना के चलते पांच महीने से सील भारत-नेपाल सीमा अगले माह सत्रह सितंबर से खुल सकती है। दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास से नोटिफिकेशन जारी होने की चर्चा है। हालांकि सीमा पार के सूत्रों के मुताबिक अभी इस पर सरकार के स्तर पर विचार चल रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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रखकर ) ही, शहदसे उसमें हवन करे; इसीप्रकार शराब बेचने वालेके घरसे भाग लेकर उसमें शराबसे हवन करें; तथा लुहारके यहांसे आग लेकर भार्गी (भारंगी नामकी औषधि) तथा घुमसे हवन करे ।॥ ४० ॥ माल्येन चैकपत्न्यथि पुंचल्यत्रं च सपः । दना च सृतिका स्वनिमाहिताशिं च तण्डुः ॥ ४१
पतित्रता स्त्रीके पाससे लाई हुई अग्निको, मारुम हबन करे । व्यभिचारिणी स्त्री के पाससे लाई हुई आग में सूतिकागृह ( जच्चाघर) में विद्यमान अग्निको लाकर उसमें दहीसे हवन करे । अनहोत्रीके बरसे काई हुई आग में चावलोंसे हवन करे ॥ ४१ ॥
चण्डालाग्निं च मांसेन चिताग्निं मानुषेण च । समस्तान्बस्तवसया मानुषेण ध्रुवेण च ॥ ४२ ॥
चंडालके यहांसे लाई हुई आग में मांससे हवन करे ; चिताकी अग्नि में मनुष्यसे हवन करे । फिर इन सब अग्नियोको इकट्ठा करके, इनमें बकमेकी मज्जा (चर्बी), मनुष्य और ध्रुव ( सूखी लकड़ी, या सालवन की लकड़ी । गणपति शास्त्रीने 'ध्रुव' का अर्थ 'वट' अर्थात् बरगद या बड़ किया है) से हवन करे ॥ ४२ ॥ जुहुयादग्निमन्त्रेण राजवृक्षस्य दारुभिः ।
एष निष्प्रतिकारो ऽग्निर्द्विषतां नेत्रमोहनः ॥ ४३ ॥
तथा अमलतासकी लकड़ियोंसे अग्निकी स्तुति करनेवाले मन्त्रों के द्वारा इस अग्निमें हवन करे । इस अग्निका प्रतीकार नहीं होसकता । अर्थात् शत्रुके दुर्ग आदिमें लगाई हुई इस भागका प्रतीकार करने के लिये, शत्रु सर्वथा असमर्थ होता है । यह अग्नि न केवल दुर्ग आदिकोही जलाता है; किन्तु शत्रुओं को उसके देखने मात्रसे, मूढ़ भी बना देता है । अर्थात् उसके देखने पर शत्रुकी विवेकदृष्टि नष्ट होजाती है । ४३ ॥
अदिते नमस्ते ॥ ४४ ॥ अनुमते नमस्ते ॥ ४५ ॥ सरस्वति नमस्ते ॥ ४६ ।। सवितर्नमस्ते ॥ ४७ ॥ अग्नये स्वाहा ।।४८।। सोमाय स्वाहा ।।४९।। भूः स्वाहा ।।५०।। भुवः स्वाहा ॥५१॥ इत्यौपनिषदिके चतुर्दशे ऽधिकरणे परघातप्रयोगः प्रथमो ऽध्यायः ॥ १ ॥ आदितः षट्चरवारिंशदुत्तरशतः ॥ १४६ ॥
हवन करने के लिये इन मन्त्रोंका उपयोग करना चाहिये ॥ ४४-५१ ॥ औपनिषदिक चतुर्दश अधिकरणमें पहिला अध्याय समाप्त ।
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रखकर ) ही, शहदसे उसमें हवन करे; इसीप्रकार शराब बेचने वालेके घरसे भाग लेकर उसमें शराबसे हवन करें; तथा लुहारके यहांसे आग लेकर भार्गी तथा घुमसे हवन करे ।॥ चालीस ॥ माल्येन चैकपत्न्यथि पुंचल्यत्रं च सपः । दना च सृतिका स्वनिमाहिताशिं च तण्डुः ॥ इकतालीस पतित्रता स्त्रीके पाससे लाई हुई अग्निको, मारुम हबन करे । व्यभिचारिणी स्त्री के पाससे लाई हुई आग में सूतिकागृह में विद्यमान अग्निको लाकर उसमें दहीसे हवन करे । अनहोत्रीके बरसे काई हुई आग में चावलोंसे हवन करे ॥ इकतालीस ॥ चण्डालाग्निं च मांसेन चिताग्निं मानुषेण च । समस्तान्बस्तवसया मानुषेण ध्रुवेण च ॥ बयालीस ॥ चंडालके यहांसे लाई हुई आग में मांससे हवन करे ; चिताकी अग्नि में मनुष्यसे हवन करे । फिर इन सब अग्नियोको इकट्ठा करके, इनमें बकमेकी मज्जा , मनुष्य और ध्रुव से हवन करे ॥ बयालीस ॥ जुहुयादग्निमन्त्रेण राजवृक्षस्य दारुभिः । एष निष्प्रतिकारो ऽग्निर्द्विषतां नेत्रमोहनः ॥ तैंतालीस ॥ तथा अमलतासकी लकड़ियोंसे अग्निकी स्तुति करनेवाले मन्त्रों के द्वारा इस अग्निमें हवन करे । इस अग्निका प्रतीकार नहीं होसकता । अर्थात् शत्रुके दुर्ग आदिमें लगाई हुई इस भागका प्रतीकार करने के लिये, शत्रु सर्वथा असमर्थ होता है । यह अग्नि न केवल दुर्ग आदिकोही जलाता है; किन्तु शत्रुओं को उसके देखने मात्रसे, मूढ़ भी बना देता है । अर्थात् उसके देखने पर शत्रुकी विवेकदृष्टि नष्ट होजाती है । तैंतालीस ॥ अदिते नमस्ते ॥ चौंतालीस ॥ अनुमते नमस्ते ॥ पैंतालीस ॥ सरस्वति नमस्ते ॥ छियालीस ।। सवितर्नमस्ते ॥ सैंतालीस ॥ अग्नये स्वाहा ।।अड़तालीस।। सोमाय स्वाहा ।।उनचास।। भूः स्वाहा ।।पचास।। भुवः स्वाहा ॥इक्यावन॥ इत्यौपनिषदिके चतुर्दशे ऽधिकरणे परघातप्रयोगः प्रथमो ऽध्यायः ॥ एक ॥ आदितः षट्चरवारिंशदुत्तरशतः ॥ एक सौ छियालीस ॥ हवन करने के लिये इन मन्त्रोंका उपयोग करना चाहिये ॥ चौंतालीस-इक्यावन ॥ औपनिषदिक चतुर्दश अधिकरणमें पहिला अध्याय समाप्त ।
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मिठनपुरा थाना क्षेत्र के चतुर्भुज स्थान की एक युवती को शातिर ने प्यार में फांसने के बाद शादी का झांसा देकर जिस्मफरोशी की दलदल में डालने का प्रयास किया। युवती ने किसी तरह अपनी सूझबूझ से शातिर युवक और उसकी मां के चंगूल से निकल अपनी जान बचाई। वह लौट कर अपनी मां के पास चली आयी है। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता का अश्लील फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है। मामले में पीड़िता ने मिठनपुरा थाने में शिकायत कर मो. जिन्ना व उसकी मां आशा खातून को आरोपित किया है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपित ने उसे शादी का झांसा दिया। वह उसकी झांसे में आ गयी। इसके बाद आरोपित ने उस पर देह व्यापार करने का दबाव बनाया। इसका पीड़िता ने विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, आरोपित मानने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच मौका निकाल युवती वहां से भाग अपनी मां के घर पहुंच गयी। मामले में पंचायती भी हुई। इसमें दोनों के अलग-अलग रहने का पंचायतनामा बना। इसके बाद आरोपित उसकी अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगा। मोबाइल पर युवती को बेचने और हत्या करने की धमकी दी। पीड़िता जब इसकी शिकायत लेकर आरोपित की मां के पास गयी तो उसने भी कहा कि उसके बेटे की पहुंच बड़े-बड़े लोगों तक है। उसका बेटा जो कहता है वह करो। मामले में थानेदार भागीरथ प्रसाद ने बताया कि एफआईआर दर्ल कर ली गई है। मामले की छानबीन के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मिठनपुरा थाना क्षेत्र के चतुर्भुज स्थान की एक युवती को शातिर ने प्यार में फांसने के बाद शादी का झांसा देकर जिस्मफरोशी की दलदल में डालने का प्रयास किया। युवती ने किसी तरह अपनी सूझबूझ से शातिर युवक और उसकी मां के चंगूल से निकल अपनी जान बचाई। वह लौट कर अपनी मां के पास चली आयी है। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता का अश्लील फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है। मामले में पीड़िता ने मिठनपुरा थाने में शिकायत कर मो. जिन्ना व उसकी मां आशा खातून को आरोपित किया है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपित ने उसे शादी का झांसा दिया। वह उसकी झांसे में आ गयी। इसके बाद आरोपित ने उस पर देह व्यापार करने का दबाव बनाया। इसका पीड़िता ने विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, आरोपित मानने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच मौका निकाल युवती वहां से भाग अपनी मां के घर पहुंच गयी। मामले में पंचायती भी हुई। इसमें दोनों के अलग-अलग रहने का पंचायतनामा बना। इसके बाद आरोपित उसकी अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगा। मोबाइल पर युवती को बेचने और हत्या करने की धमकी दी। पीड़िता जब इसकी शिकायत लेकर आरोपित की मां के पास गयी तो उसने भी कहा कि उसके बेटे की पहुंच बड़े-बड़े लोगों तक है। उसका बेटा जो कहता है वह करो। मामले में थानेदार भागीरथ प्रसाद ने बताया कि एफआईआर दर्ल कर ली गई है। मामले की छानबीन के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सर्वः क्षितिपाल वासरक्रियाकलापः क्रियतां वेच्छया। इति प्रेमो झोक त्वयि स्थिते सचेतनाः के सुझमासते परे ॥३८ पति विद्यामित्यनुविष्य का सभा बिसबिता तेन महानुपाययौ । विवादमुन्युज्य प्रकार महनः क्रियां यथोक्तां सकलाबिनम्बमः ॥३९ बहोमिएस्पेरण मूतनेश्वरो विवेच खेडेन बिना गरीयसा । गुणानुरक्तामकरोडरावधू भयावनग्रामपि शत्रुसंकृतिम् ॥४० तबद्भुतं मो तमुपेत्य नभृतं चापि कक्ष्मीस्त्वचकत्वमाप यत् । इवं तु चित्रं सकले महीतले स्थिरापि कोतिभ्रंमतीति सन्ततम् ॥४१ अनुमसरमेन विमत्सरात्मना गुणेः शरच्चन्द्रमरीचिहारिभिः । न केवलं तेन समाभिमण्डलं प्रसाषितं शत्रुकुलं च लीलया ॥४२ इति स्वशक्तिमयसारसम्पदा कितीहवरे कल्पकतीकृते कितौ । दिने दिने राज्यसुखं वितन्वति म्यषत गर्भ प्रमदाय तरिप्रया ॥४३ असूत कालेन ततः सुतं सती प्रियकुरा प्रीतिकरं महीपतेः । अभिव्यय भन्द इतीह विधुतं मनोहरं इतलतेव पल्लवम् ॥४४ विवर्धयन् शातिकुमुदतीमुवं प्रसारयज्लकान्तिचन्द्रिकाम् । कळाकलापाभिगमाय केवलंबिले दिनेऽवर्धत बालचन्द्रमाः ॥४५
महीपाल ! दिन को समस्त क्रियाओं का समूह पहले के समान इच्छानुसार किया जाय। हे प्रभो ! जब आप ही इस तरह शोक के वशीभूत होकर बैठे हैं तब दूसरे कौन सचेतन-समझदार पुरुष सुख से बैठ सकते हैं ? ।। ३८ । इस प्रकार सभा ने राजा को सम्बोधित किया। सम्बोधन के बाद राजा के द्वारा विसर्जित सभा अपने-अपने घर गई और समस्त याचकों को आनन्दित करनेवाला राजा मन्दम विषाद छोड़ कर समस्त क्रियाओं को यथोक्त रीति से करने लगा ॥ ३९ ॥ तदनन्तर नवीन राजा नम्बन ने थोड़े ही दिनों में किसी भारी खेद के बिना मात्र बुद्धि से ही पृथिवीरूपी स्त्री को अपने गुणों में अनुरक्त कर लिया तथा शत्रुसमूह को भी भय से विनम्र बना दिया ॥ ४० ॥ वह आश्चर्य की बात नहीं थी कि लक्ष्मी चंचल होने पर भी उस राजा को पाकर अचल हो गई थी परन्तु यह आश्चर्य की बात थी कि कीर्ति स्थिर होने पर भी समस्त पृथिवीतल पर निरन्तर घूमती रहती थी ॥ ४१ ॥ विशाल पराक्रमी और ईर्ष्याविहीन हृदयवाले उस राजा ने शरद् ऋतु के चन्द्रमा की किरणों के समान मनोहर गुणों के द्वारा न केवल भाईयों के समूह को वशीभूत किया था किन्तु के शत्रु समूह को भी अनायास वश में कर लिया था ॥ ४२ ॥ इस प्रकार अपना उत्साह, मन्त्र और प्रभुत्व इन तीन शक्ति रूप श्रेष्ठ संपत्ति के द्वारा पृथिवी पर कल्पलता के समान सुशोभित राजा जब प्रतिदिन राज्य सुख को विस्तृत कर रहा था तब उसकी वल्लभा ने हर्ष के लिये गर्भ धारण किया ।। ४३ ॥ तवनन्तर जिस प्रकार आम्रलता मनोहर पल्लव को उत्पन्न करती है उसी प्रकार पतिव्रता रानी प्रियकुरा ने समय होने पर राजा की प्रीति को उत्पन्न करनेवाला वह पुत्र उत्पन्न किया जो कि लोक में अब इस नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥ ४४ ॥ जातिरूपी कुमुदिनियों के हर्ष को बढ़ाता और उज्ज्वल कान्तिरूपी चांदनी को फैलाता हुआ वह बालकरूप चन्द्रमा मात्र कलाओं के समूह की
१. प्रमो म० ।
२. नन्दनाम् ३० ।
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सर्वः क्षितिपाल वासरक्रियाकलापः क्रियतां वेच्छया। इति प्रेमो झोक त्वयि स्थिते सचेतनाः के सुझमासते परे ॥अड़तीस पति विद्यामित्यनुविष्य का सभा बिसबिता तेन महानुपाययौ । विवादमुन्युज्य प्रकार महनः क्रियां यथोक्तां सकलाबिनम्बमः ॥उनतालीस बहोमिएस्पेरण मूतनेश्वरो विवेच खेडेन बिना गरीयसा । गुणानुरक्तामकरोडरावधू भयावनग्रामपि शत्रुसंकृतिम् ॥चालीस तबद्भुतं मो तमुपेत्य नभृतं चापि कक्ष्मीस्त्वचकत्वमाप यत् । इवं तु चित्रं सकले महीतले स्थिरापि कोतिभ्रंमतीति सन्ततम् ॥इकतालीस अनुमसरमेन विमत्सरात्मना गुणेः शरच्चन्द्रमरीचिहारिभिः । न केवलं तेन समाभिमण्डलं प्रसाषितं शत्रुकुलं च लीलया ॥बयालीस इति स्वशक्तिमयसारसम्पदा कितीहवरे कल्पकतीकृते कितौ । दिने दिने राज्यसुखं वितन्वति म्यषत गर्भ प्रमदाय तरिप्रया ॥तैंतालीस असूत कालेन ततः सुतं सती प्रियकुरा प्रीतिकरं महीपतेः । अभिव्यय भन्द इतीह विधुतं मनोहरं इतलतेव पल्लवम् ॥चौंतालीस विवर्धयन् शातिकुमुदतीमुवं प्रसारयज्लकान्तिचन्द्रिकाम् । कळाकलापाभिगमाय केवलंबिले दिनेऽवर्धत बालचन्द्रमाः ॥पैंतालीस महीपाल ! दिन को समस्त क्रियाओं का समूह पहले के समान इच्छानुसार किया जाय। हे प्रभो ! जब आप ही इस तरह शोक के वशीभूत होकर बैठे हैं तब दूसरे कौन सचेतन-समझदार पुरुष सुख से बैठ सकते हैं ? ।। अड़तीस । इस प्रकार सभा ने राजा को सम्बोधित किया। सम्बोधन के बाद राजा के द्वारा विसर्जित सभा अपने-अपने घर गई और समस्त याचकों को आनन्दित करनेवाला राजा मन्दम विषाद छोड़ कर समस्त क्रियाओं को यथोक्त रीति से करने लगा ॥ उनतालीस ॥ तदनन्तर नवीन राजा नम्बन ने थोड़े ही दिनों में किसी भारी खेद के बिना मात्र बुद्धि से ही पृथिवीरूपी स्त्री को अपने गुणों में अनुरक्त कर लिया तथा शत्रुसमूह को भी भय से विनम्र बना दिया ॥ चालीस ॥ वह आश्चर्य की बात नहीं थी कि लक्ष्मी चंचल होने पर भी उस राजा को पाकर अचल हो गई थी परन्तु यह आश्चर्य की बात थी कि कीर्ति स्थिर होने पर भी समस्त पृथिवीतल पर निरन्तर घूमती रहती थी ॥ इकतालीस ॥ विशाल पराक्रमी और ईर्ष्याविहीन हृदयवाले उस राजा ने शरद् ऋतु के चन्द्रमा की किरणों के समान मनोहर गुणों के द्वारा न केवल भाईयों के समूह को वशीभूत किया था किन्तु के शत्रु समूह को भी अनायास वश में कर लिया था ॥ बयालीस ॥ इस प्रकार अपना उत्साह, मन्त्र और प्रभुत्व इन तीन शक्ति रूप श्रेष्ठ संपत्ति के द्वारा पृथिवी पर कल्पलता के समान सुशोभित राजा जब प्रतिदिन राज्य सुख को विस्तृत कर रहा था तब उसकी वल्लभा ने हर्ष के लिये गर्भ धारण किया ।। तैंतालीस ॥ तवनन्तर जिस प्रकार आम्रलता मनोहर पल्लव को उत्पन्न करती है उसी प्रकार पतिव्रता रानी प्रियकुरा ने समय होने पर राजा की प्रीति को उत्पन्न करनेवाला वह पुत्र उत्पन्न किया जो कि लोक में अब इस नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥ चौंतालीस ॥ जातिरूपी कुमुदिनियों के हर्ष को बढ़ाता और उज्ज्वल कान्तिरूपी चांदनी को फैलाता हुआ वह बालकरूप चन्द्रमा मात्र कलाओं के समूह की एक. प्रमो मशून्य । दो. नन्दनाम् तीस ।
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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज वर्चुअल कार्यक्रम में दुर्ग जिले के चिटफंड कंपनी के निवेशकों को राशि लौटाई. 3 हजार 274 निवेशकों को 2 करोड़ 56 लाख रुपए का भुगतान किया गया. भूपेश सरकार ने प्रदेश में अब तक निवेशकों को लगभग 40 करोड़ रुपए की राशि लौटाई है.
सीएम भूपेश बघेल के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ में लगातार चिटफंड कंपनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है. दुर्ग जिले में अब तक चिटफंड कंपनियों के 126 डायरेक्टर और 8 पदाधिकारियों की गिरफ्तार हुई है. ठगी करने वाली चिटफंड कंपनियों की सम्पत्तियों को कुर्क कर निवेशकों को राशि वापस की जा रही. आज दुर्ग जिले के चिटफंड कंपनी के निवेशकों को राशि लौटाई गई.
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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज वर्चुअल कार्यक्रम में दुर्ग जिले के चिटफंड कंपनी के निवेशकों को राशि लौटाई. तीन हजार दो सौ चौहत्तर निवेशकों को दो करोड़ छप्पन लाख रुपए का भुगतान किया गया. भूपेश सरकार ने प्रदेश में अब तक निवेशकों को लगभग चालीस करोड़ रुपए की राशि लौटाई है. सीएम भूपेश बघेल के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ में लगातार चिटफंड कंपनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है. दुर्ग जिले में अब तक चिटफंड कंपनियों के एक सौ छब्बीस डायरेक्टर और आठ पदाधिकारियों की गिरफ्तार हुई है. ठगी करने वाली चिटफंड कंपनियों की सम्पत्तियों को कुर्क कर निवेशकों को राशि वापस की जा रही. आज दुर्ग जिले के चिटफंड कंपनी के निवेशकों को राशि लौटाई गई.
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सचिन तेंदुलकर के कंधे का ऑपरेशन करने वाले लंदन के डॉक्टर ने विश्वास व्यक्त किया है कि मास्टर ब्लास्टर भारतीय टीम के वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए फ़िट होंगे.
कंधे में दर्द के बाद सचिन को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सात वनडे मैचों की घरेलू सिरीज़ से हटना पड़ा था.
बीबीसी से बातचीत करते हुए सचिन का इलाज़ करने वाले डॉक्टर एंड्रयू वैलेस ने कहा, "सर्जरी बिल्कुल ठीक रही. "
डॉ. वैलेस ने कहा, "उन्होंने बड़ी तेज़ी से स्वास्थ्य लाभ किया है. मुझे उम्मीद है कि वह कुछ समय बाद भारत रवाना हो सकेंगे. "
उल्लेखनीय है कि भारती टीम आगामी मई में वेस्टइंडीज़ के दौरे पर जा रही है.
भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच पहला एकदिवसीय मैच 18 मई को होगा, जबकि दौरा जुलाई में संपन्न होगा.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में तेंदुलकर का प्रदर्शन ख़राब रहा था, लेकिन डॉ. वैलेस के अनुसार इसमें कंधे के दर्द की कोई विशेष भूमिका नहीं थी.
उन्होंने कहा, "उनकी बैटिंग पर(कंधे के दर्द का) कोई असर नहीं पड़ा था. इसी तरह गेंदबाज़ी के दौरान भी कंधे पर ही सारा ज़ोर नहीं पड़ता. "
डॉ. वैलेस के अनुसार इस तरह की परेशानी खिलाड़ियों के लिए सामान्य है. ख़ास कर बेसबाल और टेनिस खिलाड़ियों में ऐसी समस्या अक्सर देखने को मिलती है क्योंकि उन्हें सिर के ऊपर उठा कर हाथ चलाना पड़ता है.
उन्होंने बताया कि स्थिति कोई बेकाबू नहीं थी, लेकिन भविष्य में किसी तरह के ख़तरे की आशंका से बचने के लिए ऐहतियातन ऑपरेशन करने का फ़ैसला किया गया.
डॉ. वैलेस ने कहा कि तेंदुलकर की कुहनी की भी पड़ताल की गई और वहाँ एक पुरानी चोट का कोई असर नहीं था.
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सचिन तेंदुलकर के कंधे का ऑपरेशन करने वाले लंदन के डॉक्टर ने विश्वास व्यक्त किया है कि मास्टर ब्लास्टर भारतीय टीम के वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए फ़िट होंगे. कंधे में दर्द के बाद सचिन को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सात वनडे मैचों की घरेलू सिरीज़ से हटना पड़ा था. बीबीसी से बातचीत करते हुए सचिन का इलाज़ करने वाले डॉक्टर एंड्रयू वैलेस ने कहा, "सर्जरी बिल्कुल ठीक रही. " डॉ. वैलेस ने कहा, "उन्होंने बड़ी तेज़ी से स्वास्थ्य लाभ किया है. मुझे उम्मीद है कि वह कुछ समय बाद भारत रवाना हो सकेंगे. " उल्लेखनीय है कि भारती टीम आगामी मई में वेस्टइंडीज़ के दौरे पर जा रही है. भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच पहला एकदिवसीय मैच अट्ठारह मई को होगा, जबकि दौरा जुलाई में संपन्न होगा. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में तेंदुलकर का प्रदर्शन ख़राब रहा था, लेकिन डॉ. वैलेस के अनुसार इसमें कंधे के दर्द की कोई विशेष भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा, "उनकी बैटिंग पर कोई असर नहीं पड़ा था. इसी तरह गेंदबाज़ी के दौरान भी कंधे पर ही सारा ज़ोर नहीं पड़ता. " डॉ. वैलेस के अनुसार इस तरह की परेशानी खिलाड़ियों के लिए सामान्य है. ख़ास कर बेसबाल और टेनिस खिलाड़ियों में ऐसी समस्या अक्सर देखने को मिलती है क्योंकि उन्हें सिर के ऊपर उठा कर हाथ चलाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि स्थिति कोई बेकाबू नहीं थी, लेकिन भविष्य में किसी तरह के ख़तरे की आशंका से बचने के लिए ऐहतियातन ऑपरेशन करने का फ़ैसला किया गया. डॉ. वैलेस ने कहा कि तेंदुलकर की कुहनी की भी पड़ताल की गई और वहाँ एक पुरानी चोट का कोई असर नहीं था.
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मुंबई, आठ अप्रैल भाजपा की महाराष्ट्र ईकाई के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि राज्य के दो और मंत्रियों को 15 दिनों में इस्तीफा देना पड़ेगा और राज्य में"राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति" है।
उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब एक दिन पहले निलंबित पुलिसकर्मी सचिन वाजे ने एक पत्र में दावा किया कि राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस में उनकी सेवा जारी रखने के लिए दो करोड़ रुपये मांगे थे और एक अन्य मंत्री अनिल परब ने उनसे ठेकेदारों से पैसा इकट्ठा करने के लिए कहा था।
राकांपा के वरिष्ठ नेता देशमुख ने सोमवार को गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा उनके खिलाफ लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है।
शिवसेना नेता परब ने आरोपों को खारिज कर दिया है।
पाटिल ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि अनिल देशमुख के खिलाफ आरोपों की जांच में परिवहन मंत्री अनिल परब के खिलाफ लगे आरोप भी शामिल कर लिए जाए।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह मांग नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में जो चल रहा है उससे विशेषज्ञ यह बता सकते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए और क्या चाहिए।
पाटिल ने आरोप लगाया कि अनिल देशमुख एक "पाखंडी" है क्योंकि वह बंबई उच्च न्यायालय की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में गए हैं।
पाटिल ने आरोप लगाया कि एमवीए सरकार "संगठित अपराध" में शामिल है।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि वाजे ने अपने पत्र में जो दावे किए हैं वे गंभीर हैं और इस पर विचार-विमर्श करने की जरूरत है।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "जो चीजें हो रही है वे महाराष्ट्र और राज्य पुलिस की प्रतिष्ठा के लिए अच्छी नहीं है। सीबीआई या अन्य किसी सक्षम प्राधिकरण को पत्र में कही बातों की जांच करनी चाहिए और सच सामने लाना चाहिए।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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मुंबई, आठ अप्रैल भाजपा की महाराष्ट्र ईकाई के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि राज्य के दो और मंत्रियों को पंद्रह दिनों में इस्तीफा देना पड़ेगा और राज्य में"राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति" है। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब एक दिन पहले निलंबित पुलिसकर्मी सचिन वाजे ने एक पत्र में दावा किया कि राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस में उनकी सेवा जारी रखने के लिए दो करोड़ रुपये मांगे थे और एक अन्य मंत्री अनिल परब ने उनसे ठेकेदारों से पैसा इकट्ठा करने के लिए कहा था। राकांपा के वरिष्ठ नेता देशमुख ने सोमवार को गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा उनके खिलाफ लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। शिवसेना नेता परब ने आरोपों को खारिज कर दिया है। पाटिल ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि अनिल देशमुख के खिलाफ आरोपों की जांच में परिवहन मंत्री अनिल परब के खिलाफ लगे आरोप भी शामिल कर लिए जाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह मांग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जो चल रहा है उससे विशेषज्ञ यह बता सकते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए और क्या चाहिए। पाटिल ने आरोप लगाया कि अनिल देशमुख एक "पाखंडी" है क्योंकि वह बंबई उच्च न्यायालय की सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में गए हैं। पाटिल ने आरोप लगाया कि एमवीए सरकार "संगठित अपराध" में शामिल है। नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि वाजे ने अपने पत्र में जो दावे किए हैं वे गंभीर हैं और इस पर विचार-विमर्श करने की जरूरत है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "जो चीजें हो रही है वे महाराष्ट्र और राज्य पुलिस की प्रतिष्ठा के लिए अच्छी नहीं है। सीबीआई या अन्य किसी सक्षम प्राधिकरण को पत्र में कही बातों की जांच करनी चाहिए और सच सामने लाना चाहिए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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मनरेगा में काम करने वाली अनीता निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं.
भदोही. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के भदोही (Bhadohi) जनपद के सुरियावां ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख (Block Head) पद की जिम्मेदारी मनरेगा में मजदूरी करने वाली महिला संभालेगी. बीजेपी (BJP) से ब्लॉक प्रमुख पद की प्रत्याशी अनीता गौतम (Anita Gautam) निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुनी गई है. उनके पति भी मनरेगा मजदूर हैं. शायद इसलिए ही कहते हैं कि लोकतंत्र की यही सबसे बड़ी खूबसूरती है कि यहां सभी को बराबर अवसर मिलता है. गरीब तबके की अनीता अब गरीबों तक विकास का उजाला लेकर पहुंचेंगी.
भदोही जनपद के सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र के चौगुना गांव की रहने वाली अनीता गौतम और उनके पति पेशे से मनरेगा के मजदूर हैं, कड़ी मेहनत कर किसी तरह इनका गुजर-बसर चलता आया है. उन्होंने कभी भी सपने में नहीं सोचा था कि वह कभी ब्लॉक प्रमुख बन सकती हैं. भारतीय जनता पार्टी की एक बहुत छोटी सी कार्यकर्ता अनीता को बीते दिनों पार्टी ने सुरियावा ब्लॉक से अपना प्रत्याशी घोषित किया और वह सुरियावां ब्लॉक से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित की गई.
अनीता का सपना है कि वह अपने क्षेत्र का चौमुखी विकास करें. उनका कहना है कि उन्होंने खुद मजदूरी कर गरीबी का एहसास किया है. गरीबों और जरूरतमंदों का दर्द वह समझती है.
सुरियावां ब्लॉक प्रमुख के लिए अनुसूचित जाति की महिला पद को लेकर आरक्षण किया गया था. ऐसे में पार्टी ने बहुत छोटी सी कार्यकर्ता अनीता गौतम पर भरोसा जताते हुए उनको टिकट दिया था. लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि अनीता मनरेगा की मजदूर हैं, लेकिन अब उन्हें क्षेत्र पंचायत प्रमुख का ताज मिल गया है. धन, बल एवं बाहुबल के दौर में भी सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र से क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जिस अनीता को जनादेश दिया, वह पहली बार बीडीसी सदस्य निर्वाचित हुई हैं. भदोही से बीजेपी विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी ने कहा कि हमारे महापुरुषों का सपना था कि समाज के सबसे निचले व्यक्ति को भी अवसर मिले. उस सपने को आज भारतीय जनता पार्टी पूरा कर रही है. नरेंद्र मोदी और योगी आदित्य नाथ 'सबका साथ सबका विकास' के नारे को साकार कर रहे हैं.
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मनरेगा में काम करने वाली अनीता निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं. भदोही. उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के सुरियावां ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख पद की जिम्मेदारी मनरेगा में मजदूरी करने वाली महिला संभालेगी. बीजेपी से ब्लॉक प्रमुख पद की प्रत्याशी अनीता गौतम निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुनी गई है. उनके पति भी मनरेगा मजदूर हैं. शायद इसलिए ही कहते हैं कि लोकतंत्र की यही सबसे बड़ी खूबसूरती है कि यहां सभी को बराबर अवसर मिलता है. गरीब तबके की अनीता अब गरीबों तक विकास का उजाला लेकर पहुंचेंगी. भदोही जनपद के सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र के चौगुना गांव की रहने वाली अनीता गौतम और उनके पति पेशे से मनरेगा के मजदूर हैं, कड़ी मेहनत कर किसी तरह इनका गुजर-बसर चलता आया है. उन्होंने कभी भी सपने में नहीं सोचा था कि वह कभी ब्लॉक प्रमुख बन सकती हैं. भारतीय जनता पार्टी की एक बहुत छोटी सी कार्यकर्ता अनीता को बीते दिनों पार्टी ने सुरियावा ब्लॉक से अपना प्रत्याशी घोषित किया और वह सुरियावां ब्लॉक से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित की गई. अनीता का सपना है कि वह अपने क्षेत्र का चौमुखी विकास करें. उनका कहना है कि उन्होंने खुद मजदूरी कर गरीबी का एहसास किया है. गरीबों और जरूरतमंदों का दर्द वह समझती है. सुरियावां ब्लॉक प्रमुख के लिए अनुसूचित जाति की महिला पद को लेकर आरक्षण किया गया था. ऐसे में पार्टी ने बहुत छोटी सी कार्यकर्ता अनीता गौतम पर भरोसा जताते हुए उनको टिकट दिया था. लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि अनीता मनरेगा की मजदूर हैं, लेकिन अब उन्हें क्षेत्र पंचायत प्रमुख का ताज मिल गया है. धन, बल एवं बाहुबल के दौर में भी सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र से क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जिस अनीता को जनादेश दिया, वह पहली बार बीडीसी सदस्य निर्वाचित हुई हैं. भदोही से बीजेपी विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी ने कहा कि हमारे महापुरुषों का सपना था कि समाज के सबसे निचले व्यक्ति को भी अवसर मिले. उस सपने को आज भारतीय जनता पार्टी पूरा कर रही है. नरेंद्र मोदी और योगी आदित्य नाथ 'सबका साथ सबका विकास' के नारे को साकार कर रहे हैं. .
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राजकोट (गुजरात), 21 दिसंबर । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्ष वर्धन ने सोमवार को 2020-21 बैच के लिए गुजरात के राजकोट शहर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस छात्रों के पहले शैक्षणिक बैच का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया।
उप निदेशक ने बताया कि संस्थान का पहला शैक्षणिक सत्र 50 छात्रों के लिए होगा।
हर्ष वर्धन के अलावा, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी रैया रोड पर प्रमुखस्वामी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उपस्थित थे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (एमओएस) अश्विनी कुमार चौबे, और राज्य के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी समारोह में शामिल हुए।
एम्स, राजकोट के डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) श्रमदीप सिन्हा ने कहा कि कॉलेज का शैक्षणिक संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीयू) मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल में परिसर के अंदर एक इमारत के एक छोटे से हिस्से से अस्थायी रूप से किया जाएगा।
उद्घाटन में भाग लेने और अपना शैक्षिक सत्र शुरू करने के लिए छात्र सोमवार को प्रमुखस्वामी सभागार में पहुंचे।
करीब 17 फैकल्टी सदस्यों को कॉलेज के लिए नियुक्त किया गया है।
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राजकोट , इक्कीस दिसंबर । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्ष वर्धन ने सोमवार को दो हज़ार बीस-इक्कीस बैच के लिए गुजरात के राजकोट शहर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस छात्रों के पहले शैक्षणिक बैच का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया। उप निदेशक ने बताया कि संस्थान का पहला शैक्षणिक सत्र पचास छात्रों के लिए होगा। हर्ष वर्धन के अलावा, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी रैया रोड पर प्रमुखस्वामी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उपस्थित थे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, और राज्य के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी समारोह में शामिल हुए। एम्स, राजकोट के डिप्टी डायरेक्टर श्रमदीप सिन्हा ने कहा कि कॉलेज का शैक्षणिक संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल में परिसर के अंदर एक इमारत के एक छोटे से हिस्से से अस्थायी रूप से किया जाएगा। उद्घाटन में भाग लेने और अपना शैक्षिक सत्र शुरू करने के लिए छात्र सोमवार को प्रमुखस्वामी सभागार में पहुंचे। करीब सत्रह फैकल्टी सदस्यों को कॉलेज के लिए नियुक्त किया गया है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Haryana News जाखल में बाढ़ का डर अभी भी बना हुआ है। मंडी के अधिकतर बाजार बंद रहे हैं। ऐसे में पूरा जाखल व जाखल मंडी के लोग घबराए हुए है। एक दिन पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे दीवार बनानी शुरू कर दी थी तो शनिवार को बाजार बंद रहे। दुकानदारों को ही पता है कि अगर पानी आ गया तो दुकानों के अंदर ही फंस जाएंगे।
जाखल, गुरमीत सिंहः जाखल खंड के 15 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जाखल गांव के मुख्य द्वारा पानी पहुंच चुका है। ऐसे में पूरा जाखल व जाखल मंडी के लोग घबराए हुए है। एक दिन पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे दीवार बनानी शुरू कर दी थी तो शनिवार को बाजार बंद रहे।
दुकानदारों को ही पता है कि अगर पानी आ गया तो दुकानों के अंदर ही फंस जाएंगे। यहीं कारण है कि अधिकतर दुकानदार अपने स्वजनों के पास ही रहे ताकि मुसीबत आए तो समय पर रोका जा सके।
बाढ़ का खौफ लगातार बढ़ रहा है। बीडीपीओ कार्यालय व स्कूल में पानी पहुंच गया है। एक तरफ जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि सभी सहायता पहुंच रही है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। अब जाखल का टोहाना व फतेहाबाद से भी संपर्क टूट गया है। ऐसे में सहायता कैसी मिलेगी यह किसी को पता नहीं है। हालांकि एनडीआरएफ की टीम किस्ती की सहायता से गश्त कर रही है और ढाणियों में जो लोग फंसे हुए है उन्हें निकाला भी जा रहा है।
उफान पर चल रही घग्गर नदी से तीन जगह पर कटाव भी हो गए, जिससे सैंकड़ो एकड़ में फैली फसल बर्बाद हो गई। देर रात गांव शकरपुरा के पास से रंगोई नाले में भी कटाव आ गया, जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन व ग्रामीणों को मिली तो वह एकत्रित होकर बांध को बांधने के लिए जदोजहद करते रहे, परंतु पानी की गति तेज होने के चलते बांध अधिक से ज्यादा कटाव में आ गया।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए शहर के लोगों में भय का माहौल पैदा हो गया। जिसे लेकर शहरवासियों ने अपने अपने परिवार के साथ शहर छोड़कर दूसरी जगह पर चले गए है। इसे लेकर शहर पूरी तरह से सुनसान नजर आ रहा है। वही शहर बन्द होने के कारण इसके चलते इससे छोटे व्यापारियों पर इसका खूब असर पड़ेगा।
आने वाले दिनों में बिजली संकट भी पैदा हो सकता है। खेतों के माध्यम से ही बिजली सप्लाई आ रही है। खंभे अगर गिर तो मुसीबत होगी। उधर अब जल संकट पैदा हो गया है। अनेक गांवों में पानी की सप्लाई बंद हो गई है। जलघर के अंदर पानी चला गया है।
अधिकतर गांवों में जलघर बाहर की तरफ है ऐसे में अगर पानी की दिक्कत होगी तो बड़ी परेशानी होगी। जिला प्रशासन दावा तो कर रहा है कि अभी तक किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। अनेक लोग अपने घरों में कैद हो गए है।
जाखल पंजाब के बार्डर पर है। ऐसे में पंजाब का आना जाना यहीं से होता है। लेकिन अब पूरी तरह संपर्क टूट चुका है। ऐसे में न तो पंजाब के लोग जाखल आ सकते है और न ही जाखल के लोग पंजाब जा सकते है। ऐसे में रिश्तेदार भी परेशान है। पंजाब के अंतिम छोर के ग्रामीण सामान आदि खरीदने के लिए जाखल आते थे। लेकिन अब रास्ते बंद होने के कारण जरूरत का सामान भी लेकर भी नहीं आ पा रहे है।
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Haryana News जाखल में बाढ़ का डर अभी भी बना हुआ है। मंडी के अधिकतर बाजार बंद रहे हैं। ऐसे में पूरा जाखल व जाखल मंडी के लोग घबराए हुए है। एक दिन पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे दीवार बनानी शुरू कर दी थी तो शनिवार को बाजार बंद रहे। दुकानदारों को ही पता है कि अगर पानी आ गया तो दुकानों के अंदर ही फंस जाएंगे। जाखल, गुरमीत सिंहः जाखल खंड के पंद्रह गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जाखल गांव के मुख्य द्वारा पानी पहुंच चुका है। ऐसे में पूरा जाखल व जाखल मंडी के लोग घबराए हुए है। एक दिन पहले दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे दीवार बनानी शुरू कर दी थी तो शनिवार को बाजार बंद रहे। दुकानदारों को ही पता है कि अगर पानी आ गया तो दुकानों के अंदर ही फंस जाएंगे। यहीं कारण है कि अधिकतर दुकानदार अपने स्वजनों के पास ही रहे ताकि मुसीबत आए तो समय पर रोका जा सके। बाढ़ का खौफ लगातार बढ़ रहा है। बीडीपीओ कार्यालय व स्कूल में पानी पहुंच गया है। एक तरफ जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि सभी सहायता पहुंच रही है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। अब जाखल का टोहाना व फतेहाबाद से भी संपर्क टूट गया है। ऐसे में सहायता कैसी मिलेगी यह किसी को पता नहीं है। हालांकि एनडीआरएफ की टीम किस्ती की सहायता से गश्त कर रही है और ढाणियों में जो लोग फंसे हुए है उन्हें निकाला भी जा रहा है। उफान पर चल रही घग्गर नदी से तीन जगह पर कटाव भी हो गए, जिससे सैंकड़ो एकड़ में फैली फसल बर्बाद हो गई। देर रात गांव शकरपुरा के पास से रंगोई नाले में भी कटाव आ गया, जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन व ग्रामीणों को मिली तो वह एकत्रित होकर बांध को बांधने के लिए जदोजहद करते रहे, परंतु पानी की गति तेज होने के चलते बांध अधिक से ज्यादा कटाव में आ गया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए शहर के लोगों में भय का माहौल पैदा हो गया। जिसे लेकर शहरवासियों ने अपने अपने परिवार के साथ शहर छोड़कर दूसरी जगह पर चले गए है। इसे लेकर शहर पूरी तरह से सुनसान नजर आ रहा है। वही शहर बन्द होने के कारण इसके चलते इससे छोटे व्यापारियों पर इसका खूब असर पड़ेगा। आने वाले दिनों में बिजली संकट भी पैदा हो सकता है। खेतों के माध्यम से ही बिजली सप्लाई आ रही है। खंभे अगर गिर तो मुसीबत होगी। उधर अब जल संकट पैदा हो गया है। अनेक गांवों में पानी की सप्लाई बंद हो गई है। जलघर के अंदर पानी चला गया है। अधिकतर गांवों में जलघर बाहर की तरफ है ऐसे में अगर पानी की दिक्कत होगी तो बड़ी परेशानी होगी। जिला प्रशासन दावा तो कर रहा है कि अभी तक किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। अनेक लोग अपने घरों में कैद हो गए है। जाखल पंजाब के बार्डर पर है। ऐसे में पंजाब का आना जाना यहीं से होता है। लेकिन अब पूरी तरह संपर्क टूट चुका है। ऐसे में न तो पंजाब के लोग जाखल आ सकते है और न ही जाखल के लोग पंजाब जा सकते है। ऐसे में रिश्तेदार भी परेशान है। पंजाब के अंतिम छोर के ग्रामीण सामान आदि खरीदने के लिए जाखल आते थे। लेकिन अब रास्ते बंद होने के कारण जरूरत का सामान भी लेकर भी नहीं आ पा रहे है।
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पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आज पीएम मोदी ने जालंधर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। पीएम मोदी अपने भाषण की शुरुआत पुलवामा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देकर की, आज जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की और हमारे वीर शहीदों की तीसरी बरसी है। मैं पंजाब की धरती से भारत मां के वीर शहीदों के चरणों में श्रद्धापूर्वक सर झुकाता हूं।
उन्होंने कहा, पंजाब को एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर रहकर काम करे। कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि वो कभी पंजाब के लिए काम नहीं कर सकती और जो काम करना भी चाहता है, वो उसके आगे हज़ार रोड़े खड़े कर देती है। हमारे गुरुओं और संतों ने कहा है कि पाप का घड़ा जब भरता है, तो फूटता भी है, कांग्रेस को उसके कर्मों की सज़ा मिल रही है। आप देखिए, आज कांग्रेस पार्टी की क्या गति है! आज उनकी अपनी ही पार्टी बिखर रही है। कांग्रेस के ही लोग अपने नेताओं की सारी पोल-पट्टी खोल रहे हैं।
पीएम ने कहा, पंजाब में NDA गठबंधन की सरकार बनेगी अब ये पक्का है। पंजाब में विकास का एक नया अध्याय शुरू होगा। पंजाब के एक-एक व्यक्ति को, मेरे नौजवानों को मैं विश्वास देने आया हूं कि आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारे प्रयास में कोई कमी नहीं रहने देंगे।
आगे पीएम मोदी ने कहा, अभी पंजाब में व्यापार-कारोबार को जिस तरह माफियाओं के कब्जे में दे दिया गया है, ये खेल भाजपा सरकार में नहीं चलने दिया जाएगा। भाजपा की सरकार में यहां का व्यापारी, बिना किसी अत्याचार के, बिना किसी खौफ के अपना व्यापार करेगा। .
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पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आज पीएम मोदी ने जालंधर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। पीएम मोदी अपने भाषण की शुरुआत पुलवामा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देकर की, आज जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की और हमारे वीर शहीदों की तीसरी बरसी है। मैं पंजाब की धरती से भारत मां के वीर शहीदों के चरणों में श्रद्धापूर्वक सर झुकाता हूं। उन्होंने कहा, पंजाब को एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर रहकर काम करे। कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि वो कभी पंजाब के लिए काम नहीं कर सकती और जो काम करना भी चाहता है, वो उसके आगे हज़ार रोड़े खड़े कर देती है। हमारे गुरुओं और संतों ने कहा है कि पाप का घड़ा जब भरता है, तो फूटता भी है, कांग्रेस को उसके कर्मों की सज़ा मिल रही है। आप देखिए, आज कांग्रेस पार्टी की क्या गति है! आज उनकी अपनी ही पार्टी बिखर रही है। कांग्रेस के ही लोग अपने नेताओं की सारी पोल-पट्टी खोल रहे हैं। पीएम ने कहा, पंजाब में NDA गठबंधन की सरकार बनेगी अब ये पक्का है। पंजाब में विकास का एक नया अध्याय शुरू होगा। पंजाब के एक-एक व्यक्ति को, मेरे नौजवानों को मैं विश्वास देने आया हूं कि आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारे प्रयास में कोई कमी नहीं रहने देंगे। आगे पीएम मोदी ने कहा, अभी पंजाब में व्यापार-कारोबार को जिस तरह माफियाओं के कब्जे में दे दिया गया है, ये खेल भाजपा सरकार में नहीं चलने दिया जाएगा। भाजपा की सरकार में यहां का व्यापारी, बिना किसी अत्याचार के, बिना किसी खौफ के अपना व्यापार करेगा। .
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दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इन किताबों का विमोचन किया।
इस पद पर उनकी नियुक्ति एक जून 2022 से प्रभावी होगी और वह 'एबीपी नेटवर्क' के मुंबई ऑफिस से अपना कामकाज संभालेंगे।
कामाख्या कलापीठ (सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसर्स) के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव पर रविवार को दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ कार्यक्रम।
'गोवाफेस्ट 2022' के पहले दिन 'टाइम्स नेटवर्क' के एमडी और सीईओ एमके आनंद ने पिछले दो वर्षों में नेटवर्क के प्रयासों और इसके संपादकीय रुख के बारे में जानकारी साझा की।
'रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क' से पहले वह 'द क्विंट' (The Quint) में पश्चिमी परिक्षेत्र के लिए डिस्प्ले व ब्रैंडेड कंटेंट की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
टीवी पत्रकार आशीष पांडेय ने 'नेटवर्क18' (Network18) में अपनी करीब साढ़े सात साल लंबी पारी को विराम दे दिया है।
आपदाओं के दौरान मीडिया की भूमिका और चुनौतियों पर मुंबई के वरिष्ठ संपादकों व पत्रकारों ने किया गहन विचार विमर्श। भविष्य के लिए व्यापक सहयोग के महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
'एबीपी नेटवर्क' देश का पहला ऐसा न्यूज नेटवर्क बन गया है, जिसे 'Happyness. me' द्वारा वर्ष 2022 में काम करने के लिए सबसे अच्छी और खुशहाल जगहों में से एक के रूप में नामित किया गया है।
'मुख्यमंत्री' का प्रीमियर 60 मिनट के प्राइमटाइम शो के रूप में रविवार 16 जनवरी को रात नौ बजे किया जाएगा।
'9एक्स मीडिया' में यह जिम्मेदारी संभालने से पहले पुनीत पांडेय वर्ष 2007 में '9एक्सएम' (9XM) की लॉन्चिंग के बाद चैनल की नेशनल सेल्स टीम का दो साल से ज्यादा समय तक नेतृत्व कर चुके हैं।
देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार 'टाइम्स नेटवर्क' (Times Network) ने बुधवार 10 नवंबर को राजधानी दिल्ली में टाइम्स नाउ समिट 2021 (Times Now Summit 2021) का आगाज किया।
भारतीय भाषाओं में अपनी छाप को और मजबूत बनाने के लिए 'टाइम्स नेटवर्क' (Times Network) ने हिंदी बिजनेस जॉनर में भी अपना सफर शुरू कर दिया है।
'ईटी नाउ' में मैनेजिंग एडिटर निकुंज डालमिया वर्तमान भूमिका के अलावा नए चैनल में संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगे और चैनल के समग्र प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इन किताबों का विमोचन किया। इस पद पर उनकी नियुक्ति एक जून दो हज़ार बाईस से प्रभावी होगी और वह 'एबीपी नेटवर्क' के मुंबई ऑफिस से अपना कामकाज संभालेंगे। कामाख्या कलापीठ के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव पर रविवार को दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ कार्यक्रम। 'गोवाफेस्ट दो हज़ार बाईस' के पहले दिन 'टाइम्स नेटवर्क' के एमडी और सीईओ एमके आनंद ने पिछले दो वर्षों में नेटवर्क के प्रयासों और इसके संपादकीय रुख के बारे में जानकारी साझा की। 'रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क' से पहले वह 'द क्विंट' में पश्चिमी परिक्षेत्र के लिए डिस्प्ले व ब्रैंडेड कंटेंट की जिम्मेदारी निभा रहे थे। टीवी पत्रकार आशीष पांडेय ने 'नेटवर्कअट्ठारह' में अपनी करीब साढ़े सात साल लंबी पारी को विराम दे दिया है। आपदाओं के दौरान मीडिया की भूमिका और चुनौतियों पर मुंबई के वरिष्ठ संपादकों व पत्रकारों ने किया गहन विचार विमर्श। भविष्य के लिए व्यापक सहयोग के महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। 'एबीपी नेटवर्क' देश का पहला ऐसा न्यूज नेटवर्क बन गया है, जिसे 'Happyness. me' द्वारा वर्ष दो हज़ार बाईस में काम करने के लिए सबसे अच्छी और खुशहाल जगहों में से एक के रूप में नामित किया गया है। 'मुख्यमंत्री' का प्रीमियर साठ मिनट के प्राइमटाइम शो के रूप में रविवार सोलह जनवरी को रात नौ बजे किया जाएगा। 'नौएक्स मीडिया' में यह जिम्मेदारी संभालने से पहले पुनीत पांडेय वर्ष दो हज़ार सात में 'नौएक्सएम' की लॉन्चिंग के बाद चैनल की नेशनल सेल्स टीम का दो साल से ज्यादा समय तक नेतृत्व कर चुके हैं। देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार 'टाइम्स नेटवर्क' ने बुधवार दस नवंबर को राजधानी दिल्ली में टाइम्स नाउ समिट दो हज़ार इक्कीस का आगाज किया। भारतीय भाषाओं में अपनी छाप को और मजबूत बनाने के लिए 'टाइम्स नेटवर्क' ने हिंदी बिजनेस जॉनर में भी अपना सफर शुरू कर दिया है। 'ईटी नाउ' में मैनेजिंग एडिटर निकुंज डालमिया वर्तमान भूमिका के अलावा नए चैनल में संपादकीय टीम का नेतृत्व करेंगे और चैनल के समग्र प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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अनुष्का शेट्टी और रुबीना दिलैक एयरपोर्ट पर स्पॉट किए गए. इस दौरान दोनों एक्ट्रेस अलग-अलग अवतार में नजर आईं.
व्हाइट कलर के शॉर्ट्स और टॉप में अनुष्का काफी कूल लग रही थीं.
फोटोग्राफर्स को देखकर अनुष्का काफी खुश हुईं और उन्होंने उनके लिए पोज भी दिए.
बता दें कि अनुष्का इन दिनों खतरों के खिलाड़ी में नजर आ रही हैं.
रुबीना फोटोग्राफर्स को एयरपोर्ट पर देखकर चौंक गई थीं.
रुबीना दिलैक इस दौरान ग्रीन कलर के आउटफिट में नजर आईं.
हालांकि उन्होंने फोटोग्राफर्स को देखकर खूब पोज भी दिए.
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अनुष्का शेट्टी और रुबीना दिलैक एयरपोर्ट पर स्पॉट किए गए. इस दौरान दोनों एक्ट्रेस अलग-अलग अवतार में नजर आईं. व्हाइट कलर के शॉर्ट्स और टॉप में अनुष्का काफी कूल लग रही थीं. फोटोग्राफर्स को देखकर अनुष्का काफी खुश हुईं और उन्होंने उनके लिए पोज भी दिए. बता दें कि अनुष्का इन दिनों खतरों के खिलाड़ी में नजर आ रही हैं. रुबीना फोटोग्राफर्स को एयरपोर्ट पर देखकर चौंक गई थीं. रुबीना दिलैक इस दौरान ग्रीन कलर के आउटफिट में नजर आईं. हालांकि उन्होंने फोटोग्राफर्स को देखकर खूब पोज भी दिए.
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जकार्ताः इंडोनेशिया में भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप के झटके पूर्वी इंडोनेशिया में मंगलवार को महसूस किए गए हैं। बताया जा रहा है कि, इस भूकंप की तीव्रता 7. 3 मापी गई है। इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र में भूकंप आया है, मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी का अलर्ट जारी किया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा है कि, मॉनिटर ने खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना की चेतावनी दी है।
भूकंप सुबह फ्लोर्स सागर में 18. 5 किलोमीटर (11 मील) की गहराई पर मौमेरे शहर के उत्तर में लगभग 100 किलोमीटर दूर आया है। भूकंप से तटों पर खतरनाक लहरें संभव है। इस भूकंप में फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुक्सान की खबर नहीं है।
ईस्ट नुसा टेंग्गारा सूबे में मउमेरे दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां की आबादी 85 हजार के करीब है। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण (प्रबंधन) एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने कहा कि इलाके में रहने वाले लोगों ने भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए। टेलीविजन पर प्रसारित वीडियो में लोगों को भूकंप के प्रभाव से हिल रही इमारतों से बाहर भागते हुए दिखाया गया।
मुहारी ने कहा, " भूकंप के कारण फिलहाल किसी प्रकार के जानमाल का नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। तत्काल कार्रवाई बल भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से सूचना एकत्र करने की कोशिश कर रहा है। " इंडोनेशिया 27 करोड़ लोगों की आबादी वाला एक विशाल द्वीपसमूह है, जहां अक्सर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सूनामी का खतरा बना रहता है।
दरअसल, इंडोनेशिया में कई बार इससे पहले भी भूकंप आ चुके हैं। देश लगातार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का अनुभव करता है। इंडोनेशिया के घातक भूकंपों में से एक साल 2004 में महसूस किया गया था। तब देश में 9. 1 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसमें इंडोनेशिया में बड़ा नुक्सान हुआ था।
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जकार्ताः इंडोनेशिया में भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप के झटके पूर्वी इंडोनेशिया में मंगलवार को महसूस किए गए हैं। बताया जा रहा है कि, इस भूकंप की तीव्रता सात. तीन मापी गई है। इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र में भूकंप आया है, मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी का अलर्ट जारी किया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा है कि, मॉनिटर ने खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना की चेतावनी दी है। भूकंप सुबह फ्लोर्स सागर में अट्ठारह. पाँच किलोग्राममीटर की गहराई पर मौमेरे शहर के उत्तर में लगभग एक सौ किलोग्राममीटर दूर आया है। भूकंप से तटों पर खतरनाक लहरें संभव है। इस भूकंप में फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुक्सान की खबर नहीं है। ईस्ट नुसा टेंग्गारा सूबे में मउमेरे दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां की आबादी पचासी हजार के करीब है। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने कहा कि इलाके में रहने वाले लोगों ने भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए। टेलीविजन पर प्रसारित वीडियो में लोगों को भूकंप के प्रभाव से हिल रही इमारतों से बाहर भागते हुए दिखाया गया। मुहारी ने कहा, " भूकंप के कारण फिलहाल किसी प्रकार के जानमाल का नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। तत्काल कार्रवाई बल भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से सूचना एकत्र करने की कोशिश कर रहा है। " इंडोनेशिया सत्ताईस करोड़ लोगों की आबादी वाला एक विशाल द्वीपसमूह है, जहां अक्सर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सूनामी का खतरा बना रहता है। दरअसल, इंडोनेशिया में कई बार इससे पहले भी भूकंप आ चुके हैं। देश लगातार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का अनुभव करता है। इंडोनेशिया के घातक भूकंपों में से एक साल दो हज़ार चार में महसूस किया गया था। तब देश में नौ. एक तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसमें इंडोनेशिया में बड़ा नुक्सान हुआ था।
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वर्तमान में गुजरात सरकार का नया बजट सामने आया है। सरकार ने कई सहायता योजनाएं शुरू की हैं। बेटी की शिक्षा के लिए सहायता, किसानों के लिए सहायता, लोगों के लिए आवास सहायता आदि जिसमें सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें सरकार घर की मरम्मत के लिए सहायता प्रदान करेगी।
वर्तमान में, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए मकान-फ्लैट की खरीद पर आवेदक को 2.67 लाख की सब्सिडी दी जाती है। अब यह उसी तरह पात्र है जो पुराने मकान के नवीनीकरण के लिए या कच्चे घर के परिपक्व होने के लिए आवेदक द्वारा किए गए ऋण पर सरकार से सब्सिडी का लाभ उठाते हैं, जिससे अधिकांश आवेदक अनभिज्ञ हैं।
इस ऋण पर सब्सिडी सहायता हाउसिंग फॉर ऑल मिशन के तहत प्रदान की जाती है, जैसे कि केंद्र सरकार एक नए घर की खरीद पर ब्याज सहायता प्रदान करती है। जमा करना होगा। साथ ही, आवेदक को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह ऋण के लिए आवेदन करते समय क्रेडिट लिक्विड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) का लाभ उठाना चाहता है। वित्तीय संस्थाओं के साथ-साथ बैंक द्वारा सत्यापित आवेदक से वित्तीय सहायता लेने की पात्रता। फिर हर महीने के अंत में, नेशनल हाउसिंग बैक हूडू को किराए के लिए आवेदन भेजेगा।
आवेदक को मंत्री आवास योजना की निर्धारित पद्धति के अनुसार सब्सिडी की राशि उसके खाते में जमा की जाएगी। आवेदक को समिति द्वारा वाउचर या प्रमाण पत्र दिया जाएगा। आवेदक को इस प्रमाणपत्र को पीठ में जमा करना होगा, जिस पर ब्याज की राशि आवेदक के खाते में जमा की जाएगी।
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वर्तमान में गुजरात सरकार का नया बजट सामने आया है। सरकार ने कई सहायता योजनाएं शुरू की हैं। बेटी की शिक्षा के लिए सहायता, किसानों के लिए सहायता, लोगों के लिए आवास सहायता आदि जिसमें सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें सरकार घर की मरम्मत के लिए सहायता प्रदान करेगी। वर्तमान में, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए मकान-फ्लैट की खरीद पर आवेदक को दो.सरसठ लाख की सब्सिडी दी जाती है। अब यह उसी तरह पात्र है जो पुराने मकान के नवीनीकरण के लिए या कच्चे घर के परिपक्व होने के लिए आवेदक द्वारा किए गए ऋण पर सरकार से सब्सिडी का लाभ उठाते हैं, जिससे अधिकांश आवेदक अनभिज्ञ हैं। इस ऋण पर सब्सिडी सहायता हाउसिंग फॉर ऑल मिशन के तहत प्रदान की जाती है, जैसे कि केंद्र सरकार एक नए घर की खरीद पर ब्याज सहायता प्रदान करती है। जमा करना होगा। साथ ही, आवेदक को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह ऋण के लिए आवेदन करते समय क्रेडिट लिक्विड सब्सिडी योजना का लाभ उठाना चाहता है। वित्तीय संस्थाओं के साथ-साथ बैंक द्वारा सत्यापित आवेदक से वित्तीय सहायता लेने की पात्रता। फिर हर महीने के अंत में, नेशनल हाउसिंग बैक हूडू को किराए के लिए आवेदन भेजेगा। आवेदक को मंत्री आवास योजना की निर्धारित पद्धति के अनुसार सब्सिडी की राशि उसके खाते में जमा की जाएगी। आवेदक को समिति द्वारा वाउचर या प्रमाण पत्र दिया जाएगा। आवेदक को इस प्रमाणपत्र को पीठ में जमा करना होगा, जिस पर ब्याज की राशि आवेदक के खाते में जमा की जाएगी। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर करें।
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KANPUR:
छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी के आड सेमेस्टर एग्जाम 14 दिसंबर से शुरू हो जाएंगे। यूनिवर्सिटी कैंपस में 13 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सिटी के 15 कॉलेजों में भी यह अहम परीक्षा कराई जाएगी। यह जानकारी परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर यादव ने दी। इस परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स 9 दिसंबर बुधवार से यूनिवर्सिटी की वेब साइट से एडमिट कार्ड लोड कर सकेंगे। इस अहम परीक्षा में यूनिवर्सिटी के करीब 30 हजार छात्र छात्राएं बैठेंगे। कानपुर देहात के श्री चन्द्रभानू सिंह मेमोरियल महाविद्यालय झींझक को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। फतेहपुर में अभिनव प्रज्ञा महाविद्यालय हरदौपुर चौडगरा, अभय प्रताप सिंह महाविद्यालय कुवंरपुर, मां शारदा महाविद्यालय कुवंरपुर रोड बिंदकी को सेंटर बनाया गया है। इसके अलावा उन्नाव में कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडी पतरी हांडा, दयानंद दीनानाथ इंस्टीट्यट अजगैन, एसेंट कॉलेज चमरौली, जीजीआई गदनखेड़ा में परीक्षाएं कराई जाएंगी।
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KANPUR: छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी के आड सेमेस्टर एग्जाम चौदह दिसंबर से शुरू हो जाएंगे। यूनिवर्सिटी कैंपस में तेरह परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सिटी के पंद्रह कॉलेजों में भी यह अहम परीक्षा कराई जाएगी। यह जानकारी परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर यादव ने दी। इस परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स नौ दिसंबर बुधवार से यूनिवर्सिटी की वेब साइट से एडमिट कार्ड लोड कर सकेंगे। इस अहम परीक्षा में यूनिवर्सिटी के करीब तीस हजार छात्र छात्राएं बैठेंगे। कानपुर देहात के श्री चन्द्रभानू सिंह मेमोरियल महाविद्यालय झींझक को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। फतेहपुर में अभिनव प्रज्ञा महाविद्यालय हरदौपुर चौडगरा, अभय प्रताप सिंह महाविद्यालय कुवंरपुर, मां शारदा महाविद्यालय कुवंरपुर रोड बिंदकी को सेंटर बनाया गया है। इसके अलावा उन्नाव में कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडी पतरी हांडा, दयानंद दीनानाथ इंस्टीट्यट अजगैन, एसेंट कॉलेज चमरौली, जीजीआई गदनखेड़ा में परीक्षाएं कराई जाएंगी।
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उत्तर भारत में हल्की-हल्की ठंड शुरू होने लगी है। दिवाली के बाद से ही मौसम में बदलाव दिखाई दे रहा है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी की वजह से दोहरी मार पड़ रही है। उधर, दक्षिण के राज्यों में बारिश ने आफत मचाई हुई है। मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के मौसम को लेकर अपडेट जारी किया है।
मौसम विभाग ने सिलसिलेवार ट्वीट्स करके बताया है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश में 6 और 7 नवंबर को मध्यम बारिश और बर्फबारी होने वाली है। इससे इलाके में ठंड के भी बढ़ने की संभावना है। उत्तराखंड में छह और सात को बर्फबारी और बारिश होगी। वहीं, पंजाब में पांच और छह नवंबर को बारिश के आसार हैं।
वहीं, एक चक्रवाती सर्कुलेशन केरल तट और उससे सटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर स्थित है और एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा कोमोरिन क्षेत्र से दक्षिण अंडमान सागर तक इस प्रणाली से निचले क्षोभमंडल स्तरों में दक्षिण अंडमान सागर तक जाती है। इसके असर के चलते पांच और छह नवंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, उसके बाद अगले 2-3 दिनों के लिए दक्षिण प्रायद्वीपीय के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधि में कमी आएगी।
एक चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर मध्य क्षोभमंडल स्तरों में बना हुआ है। इसके चलते 06-08 नवंबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में काफी व्यापक/व्यापक हल्की/मध्यम वर्षा के साथ छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है।
वहीं, राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 17. 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सुबह साढ़े नौ बजे 408 दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सापेक्षिक आर्द्रता सुबह साढ़े आठ बजे 98 प्रतिशत दर्ज की गयी। इसने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
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उत्तर भारत में हल्की-हल्की ठंड शुरू होने लगी है। दिवाली के बाद से ही मौसम में बदलाव दिखाई दे रहा है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी की वजह से दोहरी मार पड़ रही है। उधर, दक्षिण के राज्यों में बारिश ने आफत मचाई हुई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के मौसम को लेकर अपडेट जारी किया है। मौसम विभाग ने सिलसिलेवार ट्वीट्स करके बताया है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश में छः और सात नवंबर को मध्यम बारिश और बर्फबारी होने वाली है। इससे इलाके में ठंड के भी बढ़ने की संभावना है। उत्तराखंड में छह और सात को बर्फबारी और बारिश होगी। वहीं, पंजाब में पांच और छह नवंबर को बारिश के आसार हैं। वहीं, एक चक्रवाती सर्कुलेशन केरल तट और उससे सटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर स्थित है और एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा कोमोरिन क्षेत्र से दक्षिण अंडमान सागर तक इस प्रणाली से निचले क्षोभमंडल स्तरों में दक्षिण अंडमान सागर तक जाती है। इसके असर के चलते पांच और छह नवंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, उसके बाद अगले दो-तीन दिनों के लिए दक्षिण प्रायद्वीपीय के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधि में कमी आएगी। एक चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर मध्य क्षोभमंडल स्तरों में बना हुआ है। इसके चलते छः-आठ नवंबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में काफी व्यापक/व्यापक हल्की/मध्यम वर्षा के साथ छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में बनी हुई है जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक सत्रह. चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह साढ़े नौ बजे चार सौ आठ दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सापेक्षिक आर्द्रता सुबह साढ़े आठ बजे अट्ठानवे प्रतिशत दर्ज की गयी। इसने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक इकतीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
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आपका स्वागत है!
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Faridabad/Alive News : यात्रा करते समय वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने, रेड लाइट का ध्यान रखने, तेज गति में वाहन न चलाने, सभी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने तथा शराब पीकर गाड़ी न चलाने के बारे में हिदायतें दी जाती रही हैं परंतु वाहन चालक यातायात नियमों को गंभीरता से नहीं लेते जिसकी वजह से उन्हें गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
इसी प्रकार कल रात एक बहुत बड़ी सड़क दुर्घटना घटित हो गई। देर रात फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर एक भयानक एक्सीडेंट हो गया। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रात करीब 10 बजे एक सियाज गाड़ी गुरुग्राम से फरीदाबाद की तरफ से आ रही थी। जिसे सेक्टर 21 का रहने वाला करण नाम का व्यक्ति चला रहा था। ड्राइवर ने शराब पी रखी थी। गाड़ी ने जैसे ही टोल नाका क्रॉस किया तो चालक ने अपना संतुलन खो दिया और गाड़ी सड़क से नीचे उतर गई और पहाड़ियों से होकर गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई ट्रांसमिशन लाइन के खंभे से टकरा गई और टकराने के बाद खाई की तरफ लटक गई। टक्कर की वजह से तारों सहित खंबा गाड़ी के ऊपर आ गिरा जिसकी वजह से गाड़ी पूरी तरह से तारों के बीच में उलझ गई।
पुलिस चौकी मांगर प्रभारी रामकिशन को जैसे ही इसके बारे में सूचना मिली तो वह हवलदार महावीर और सिपाही रविंद्र को लेकर तुरंत मौके पर पहुंचे और मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग में फोन करके उन्हे सूचित करते हुए लाइन का कनेक्शन कटवा दिया। बिजली बंद करवाने के पश्चात चौकी प्रभारी ने ड्राइवर को गाड़ी से बाहर निकालना चाहा परंतु गाड़ी तारों के बीच में फस चुकी थी। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ी चालक को बाहर निकाला गया। चालक के हाथ पैर में काफी चोट लगी हुई थी। जिसके बाद चालक को उपचार के लिए एशियन अस्पताल भेजा गया।
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Faridabad/Alive News : यात्रा करते समय वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने, रेड लाइट का ध्यान रखने, तेज गति में वाहन न चलाने, सभी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने तथा शराब पीकर गाड़ी न चलाने के बारे में हिदायतें दी जाती रही हैं परंतु वाहन चालक यातायात नियमों को गंभीरता से नहीं लेते जिसकी वजह से उन्हें गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसी प्रकार कल रात एक बहुत बड़ी सड़क दुर्घटना घटित हो गई। देर रात फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर एक भयानक एक्सीडेंट हो गया। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रात करीब दस बजे एक सियाज गाड़ी गुरुग्राम से फरीदाबाद की तरफ से आ रही थी। जिसे सेक्टर इक्कीस का रहने वाला करण नाम का व्यक्ति चला रहा था। ड्राइवर ने शराब पी रखी थी। गाड़ी ने जैसे ही टोल नाका क्रॉस किया तो चालक ने अपना संतुलन खो दिया और गाड़ी सड़क से नीचे उतर गई और पहाड़ियों से होकर गुजर रही ग्यारह हजार वोल्ट की हाई ट्रांसमिशन लाइन के खंभे से टकरा गई और टकराने के बाद खाई की तरफ लटक गई। टक्कर की वजह से तारों सहित खंबा गाड़ी के ऊपर आ गिरा जिसकी वजह से गाड़ी पूरी तरह से तारों के बीच में उलझ गई। पुलिस चौकी मांगर प्रभारी रामकिशन को जैसे ही इसके बारे में सूचना मिली तो वह हवलदार महावीर और सिपाही रविंद्र को लेकर तुरंत मौके पर पहुंचे और मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग में फोन करके उन्हे सूचित करते हुए लाइन का कनेक्शन कटवा दिया। बिजली बंद करवाने के पश्चात चौकी प्रभारी ने ड्राइवर को गाड़ी से बाहर निकालना चाहा परंतु गाड़ी तारों के बीच में फस चुकी थी। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ी चालक को बाहर निकाला गया। चालक के हाथ पैर में काफी चोट लगी हुई थी। जिसके बाद चालक को उपचार के लिए एशियन अस्पताल भेजा गया।
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उर्वशी रौतेला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर फैन्स संग अपने नए लुक्स की फोटोज शेयर करती हैं। आप को बता दें कि हाल ही में उर्वशी रौतेला ने अपनी कुछ ग्लैमरस फोटोज शेयर की हैं। इसमें वह पिंक कलर की फिटेड ड्रेस पहनी हुई नजर आ रही हैं। यह एक ऑफशोल्डर ड्रेस है, जिसमें उर्वशी रौतेला बोल्ड पोज देती हुई दिखाई दे रही हैं। न्यूड मेकअप के साथ उन्होंने बालों को खुला रखा है। फैन्स भी उर्वशी के इस लुक को बेहद पसंद कर रहे हैं। बता दें कि उर्वशी के 34. 9 मिलियन फॉलोअर्स हैं।
फोटोज शेयर करते हुए उर्वशी रौतेला ने लिखा, "क्यों मैंने तमिल फिल्म में डेब्यू करने का प्लान किया, क्योंकि मैं इसमें आईआईटीयन का किरदार निभा रही हूं। मेरे लिए यह बहुत मायने रखता है। आप को बता दें कि उर्वशी रौतेला हाल ही में सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' के कार्तिक उर्फ मोहसिन खान संग एक सॉन्ग में रोमांस करती नजर आई थीं। इससे पहले उर्वशी रौतेला ने विराट कोहली की एक तस्वीर शेयर की थी। उस फोटो में विराट अपनी मां के साथ किचन में खड़े नजर आ रहे थे और बड़े ध्यान से चाय बनाते दिखाई दे रहे हैं।
उर्वशी को ये तस्वीर उनकी मां ने व्हाट्सएप पर भेजी है। जिसे देखकर वो बहुत डर गई हैं। उन्होंने इस फोटो को भेजना का मतलब समझने के लिए फैंस से मदद मांगी है। इस फोटो को शेयर करते हुए उर्वशी ने लिखा- हैलो दोस्तों मुझे आप सबकी मदद की जरूरत है उर्वशी ने आगे लिखा कि मेरी मां मीरा रौतेला ने अभी मुझे ये तस्वीर मैसेज की है। आपको क्या लगता है? ? वो मुझसे क्या करवाना चाहती हैं। उनका छुपा हुआ मकसद क्या है? ? डरी हुई हूं।
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उर्वशी रौतेला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर फैन्स संग अपने नए लुक्स की फोटोज शेयर करती हैं। आप को बता दें कि हाल ही में उर्वशी रौतेला ने अपनी कुछ ग्लैमरस फोटोज शेयर की हैं। इसमें वह पिंक कलर की फिटेड ड्रेस पहनी हुई नजर आ रही हैं। यह एक ऑफशोल्डर ड्रेस है, जिसमें उर्वशी रौतेला बोल्ड पोज देती हुई दिखाई दे रही हैं। न्यूड मेकअप के साथ उन्होंने बालों को खुला रखा है। फैन्स भी उर्वशी के इस लुक को बेहद पसंद कर रहे हैं। बता दें कि उर्वशी के चौंतीस. नौ मिलियन फॉलोअर्स हैं। फोटोज शेयर करते हुए उर्वशी रौतेला ने लिखा, "क्यों मैंने तमिल फिल्म में डेब्यू करने का प्लान किया, क्योंकि मैं इसमें आईआईटीयन का किरदार निभा रही हूं। मेरे लिए यह बहुत मायने रखता है। आप को बता दें कि उर्वशी रौतेला हाल ही में सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' के कार्तिक उर्फ मोहसिन खान संग एक सॉन्ग में रोमांस करती नजर आई थीं। इससे पहले उर्वशी रौतेला ने विराट कोहली की एक तस्वीर शेयर की थी। उस फोटो में विराट अपनी मां के साथ किचन में खड़े नजर आ रहे थे और बड़े ध्यान से चाय बनाते दिखाई दे रहे हैं। उर्वशी को ये तस्वीर उनकी मां ने व्हाट्सएप पर भेजी है। जिसे देखकर वो बहुत डर गई हैं। उन्होंने इस फोटो को भेजना का मतलब समझने के लिए फैंस से मदद मांगी है। इस फोटो को शेयर करते हुए उर्वशी ने लिखा- हैलो दोस्तों मुझे आप सबकी मदद की जरूरत है उर्वशी ने आगे लिखा कि मेरी मां मीरा रौतेला ने अभी मुझे ये तस्वीर मैसेज की है। आपको क्या लगता है? ? वो मुझसे क्या करवाना चाहती हैं। उनका छुपा हुआ मकसद क्या है? ? डरी हुई हूं।
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नई दिल्लीः समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार सुनवाई चौथे दिन भी हुई। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud), न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा कोर्ट रूम में मौजूद रहे जबकि न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एस आर भट ने ऑनलाइन जुड़े। न्यायमूर्ति भट शुक्रवार को कोविड-19 (Covid 19) से संक्रमित पाए गए। इसलिए वे वर्चुअल तरीके से शामिल हुए। सुनवाई के चौथे दिन याचिकाकर्ताओं की ओर से कई दलीलें पेश की गई। इनकी ओर से कहा गया है कि कई दूसरे देशों में मान्यता है। समलैंगिक कपल को मान्यता न होने की वजह से कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील की ओर से इस तरह की कुछ केस स्टडी को सामने रखा गया और यह बताया गया कि ऐसा न होने से कितनी दिक्कत है। केंद्र ने काउंटर एफिडेविट को लेकर भी सवाल उठाए गए जिसमें कहा गया है कि अंग्रेजों के आने से पहले सेम सेक्स रिलेशन नहीं थे। इसे गलत बताया गया और कहा गया कि पहले भी ऐसा होता था और प्राचीन ग्रंथों में भी लिखा है। अंग्रेजों के आने के बाद हमारे भीतर ट्रांसजेंडर्स के प्रति नफरत आ गई। चौथे दिन की सुनवाई में पेश प्रमुख दलीलें- अमेरिका में की शादी लेकिन भारत में हो रही ये दिक्कतसुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 20 अप्रैल को सुनवाई में कहा था कि सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद वह अगले कदम के रूप में शादी की विकसित होती धारणा को फिर से परिभाषित कर सकता है। पीठ इस दलील से सहमत नहीं थी कि विषम लैंगिकों के विपरीत समलैंगिक जोड़े अपने बच्चों की उचित देखभाल नहीं कर सकते। मामले में चौथे दिन सुनवाई बहाल होने पर याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने दलीलें रखीं। सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने एक याचिकाकर्ता के बारे में बताया। दोनों ने अमेरिका में शादी की, उनकी चार महीने की बेटी है। भारत में उनके अधिकारों को मान्यता नहीं मिली है। कोविड के वक्त भारतीय परिवारों को वीजा जारी किए गए थे लेकिन याचिकाकर्ताओं को वीजा भी नहीं दिया गया, वे अपनी शादी फॉरेन मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर कराना चाहते थे। शादी इस वजह से अमान्य नहीं करार दी जा सकती कि यहां मान्यता नहीं हैलूथरा ने कहा कि यदि कपल में से एक भी भारतीय हो तो यह कानून लागू होता है। सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने कहा कि किसी समलैंगिक कपल की शादी इस वजह से अमान्य नहीं करार दी जा सकती कि वे ऐसे देश में आ गए हैं जहां मान्यता नहीं है। यह लिंग के आधार पर भेदभाव है। वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने कहा कि जी20 के 12 देशों ने सेम सेक्स मैरिज की अनुमति दे रखी है। हम पीछे नहीं रह सकते। एक व्यक्ति की ही बात क्यों न हो हम उनसे अधिकार छीन नहीं सकते। इन अधिकारों में वीजा, पासपोर्ट और भारत में रहने का अधिकार शामिल हैं और उत्तराधिकार का अधिकार भी। क्या अंग्रेजों के आने से पहले नहीं थे सेम सेक्स रिलेशनसीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने केंद्र ने काउंटर एफिडेविट पर कहा कि यह गलत है कि अंग्रेजों के आने से पहले सेम सेक्स रिलेशन नहीं थे। पहले भी ऐसा होता था और प्राचीन ग्रंथों में भी लिखा है। अंग्रेजों के आने के बाद हमारे भीतर ट्रांसजेंडर्स के प्रति नफरत आ गई। हम ट्रांसजेंडर्स को दूसरे नामों से बुलाते थे। भगवान राम वनवास पर जा रहे थे तो उनके पीछे अयोध्या की प्रजा भी चलने लगी। उन्होंने पीछे आ रहे लोगों से कहा कि आप वापस लौट जाइए। सब चले गए मगर वो नहीं गए। संसद की शक्तियां असीमित नहींसीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि भारत में संसद पर संविधान से लगाम कसी गई है। यह कहना कि इसे संसद पर छोड़ दो, यह उस अप्रोच के हिसाब से ठीक नहीं है। हमारे मूल अधिकार बेसिक स्ट्रक्चर का हिस्सा हैं और 50 साल पहले का केशवानंद भारती केस इसी के बारे में था। ये 50 साल LGBTQIA लोगों के लिए भी थे। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि सीनयर एडवोकेट 'संसद संप्रभु नहीं, संविधान सुप्रीम है'। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार अदालत में यह नहीं कह सकती कि यह संसद का मामला है। जब हमारे अधिकारों का हनन हो रहा है तो अनुच्छेद 32 के तहत इस अदालत में आने का अधिकार है। भारत की संसद संविधान से पैदा हुई है, उसकी शक्तियां असीमित नहीं हैं। पति और पत्नी की जगह स्पाउस कर देंसीनियर एडवोकेट डॉ मेनका गुरुस्वामी के सबमिशंस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने पूछा कि अगर हम (स्पेशल मैरिज एक्ट में) मैन और वुमन की जगह पर्सन कर दें और पति और पत्नी की जगह स्पाउस कर दें तो क्या हम वहीं पर रुक जाएंगे। यदि दो हिंदू पुरुष या दो हिंदू महिलाएं शादी करें तो इंटरस्टेट सक्सेशन में क्या होगा। जब एक महिला की मौत होती है तो लाइन ऑफ सक्सेशन अलग होता है, तो जहां परिवार की डिग्निटी और अधिकार का सवाल है, मैं समझता हूं। मुश्किल ये है कि क्या हम कह सकते हैं कि ये काफी है और इससे आगे नहीं जाएंगे।
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नई दिल्लीः समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार सुनवाई चौथे दिन भी हुई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ , न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा कोर्ट रूम में मौजूद रहे जबकि न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एस आर भट ने ऑनलाइन जुड़े। न्यायमूर्ति भट शुक्रवार को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाए गए। इसलिए वे वर्चुअल तरीके से शामिल हुए। सुनवाई के चौथे दिन याचिकाकर्ताओं की ओर से कई दलीलें पेश की गई। इनकी ओर से कहा गया है कि कई दूसरे देशों में मान्यता है। समलैंगिक कपल को मान्यता न होने की वजह से कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील की ओर से इस तरह की कुछ केस स्टडी को सामने रखा गया और यह बताया गया कि ऐसा न होने से कितनी दिक्कत है। केंद्र ने काउंटर एफिडेविट को लेकर भी सवाल उठाए गए जिसमें कहा गया है कि अंग्रेजों के आने से पहले सेम सेक्स रिलेशन नहीं थे। इसे गलत बताया गया और कहा गया कि पहले भी ऐसा होता था और प्राचीन ग्रंथों में भी लिखा है। अंग्रेजों के आने के बाद हमारे भीतर ट्रांसजेंडर्स के प्रति नफरत आ गई। चौथे दिन की सुनवाई में पेश प्रमुख दलीलें- अमेरिका में की शादी लेकिन भारत में हो रही ये दिक्कतसुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बीस अप्रैल को सुनवाई में कहा था कि सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद वह अगले कदम के रूप में शादी की विकसित होती धारणा को फिर से परिभाषित कर सकता है। पीठ इस दलील से सहमत नहीं थी कि विषम लैंगिकों के विपरीत समलैंगिक जोड़े अपने बच्चों की उचित देखभाल नहीं कर सकते। मामले में चौथे दिन सुनवाई बहाल होने पर याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने दलीलें रखीं। सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने एक याचिकाकर्ता के बारे में बताया। दोनों ने अमेरिका में शादी की, उनकी चार महीने की बेटी है। भारत में उनके अधिकारों को मान्यता नहीं मिली है। कोविड के वक्त भारतीय परिवारों को वीजा जारी किए गए थे लेकिन याचिकाकर्ताओं को वीजा भी नहीं दिया गया, वे अपनी शादी फॉरेन मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर कराना चाहते थे। शादी इस वजह से अमान्य नहीं करार दी जा सकती कि यहां मान्यता नहीं हैलूथरा ने कहा कि यदि कपल में से एक भी भारतीय हो तो यह कानून लागू होता है। सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने कहा कि किसी समलैंगिक कपल की शादी इस वजह से अमान्य नहीं करार दी जा सकती कि वे ऐसे देश में आ गए हैं जहां मान्यता नहीं है। यह लिंग के आधार पर भेदभाव है। वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने कहा कि जीबीस के बारह देशों ने सेम सेक्स मैरिज की अनुमति दे रखी है। हम पीछे नहीं रह सकते। एक व्यक्ति की ही बात क्यों न हो हम उनसे अधिकार छीन नहीं सकते। इन अधिकारों में वीजा, पासपोर्ट और भारत में रहने का अधिकार शामिल हैं और उत्तराधिकार का अधिकार भी। क्या अंग्रेजों के आने से पहले नहीं थे सेम सेक्स रिलेशनसीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने केंद्र ने काउंटर एफिडेविट पर कहा कि यह गलत है कि अंग्रेजों के आने से पहले सेम सेक्स रिलेशन नहीं थे। पहले भी ऐसा होता था और प्राचीन ग्रंथों में भी लिखा है। अंग्रेजों के आने के बाद हमारे भीतर ट्रांसजेंडर्स के प्रति नफरत आ गई। हम ट्रांसजेंडर्स को दूसरे नामों से बुलाते थे। भगवान राम वनवास पर जा रहे थे तो उनके पीछे अयोध्या की प्रजा भी चलने लगी। उन्होंने पीछे आ रहे लोगों से कहा कि आप वापस लौट जाइए। सब चले गए मगर वो नहीं गए। संसद की शक्तियां असीमित नहींसीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि भारत में संसद पर संविधान से लगाम कसी गई है। यह कहना कि इसे संसद पर छोड़ दो, यह उस अप्रोच के हिसाब से ठीक नहीं है। हमारे मूल अधिकार बेसिक स्ट्रक्चर का हिस्सा हैं और पचास साल पहले का केशवानंद भारती केस इसी के बारे में था। ये पचास साल LGBTQIA लोगों के लिए भी थे। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि सीनयर एडवोकेट 'संसद संप्रभु नहीं, संविधान सुप्रीम है'। मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार अदालत में यह नहीं कह सकती कि यह संसद का मामला है। जब हमारे अधिकारों का हनन हो रहा है तो अनुच्छेद बत्तीस के तहत इस अदालत में आने का अधिकार है। भारत की संसद संविधान से पैदा हुई है, उसकी शक्तियां असीमित नहीं हैं। पति और पत्नी की जगह स्पाउस कर देंसीनियर एडवोकेट डॉ मेनका गुरुस्वामी के सबमिशंस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने पूछा कि अगर हम मैन और वुमन की जगह पर्सन कर दें और पति और पत्नी की जगह स्पाउस कर दें तो क्या हम वहीं पर रुक जाएंगे। यदि दो हिंदू पुरुष या दो हिंदू महिलाएं शादी करें तो इंटरस्टेट सक्सेशन में क्या होगा। जब एक महिला की मौत होती है तो लाइन ऑफ सक्सेशन अलग होता है, तो जहां परिवार की डिग्निटी और अधिकार का सवाल है, मैं समझता हूं। मुश्किल ये है कि क्या हम कह सकते हैं कि ये काफी है और इससे आगे नहीं जाएंगे।
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- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
बीते हफ्ते रिलीज हुई फिल्म जुड़वा 2 ने बॉक्स ऑफिस पर दमाकेदार कमाई की है। जहां एक तरफ इस फिल्म की इस कामयाबी की वजह स्टार पावर और बाकी सब बातें हैं वहीं एक वजह ये भी है कि जुड़वा का किसी बड़ी फिल्म के साथ क्लैश नहीं हुआ। वहीं कुछ ऐसा ही मौका कई फ्लॉप फिल्में दे चुके अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा को मिला है। जिसके चलते 2017 में होने वाला एक और महाक्लैश चल गया है।
बता दें कि इसी साल नवंबर में सिद्धार्थ मल्होत्रा और सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म इत्तेफाक आ रही है। इस फिल्म की रिलीज डेट 3 नवंबर को है। वहीं इसी डेट पर एक और बड़ी फिल्म रिलीज की जा रही था। जिसके चलते महाक्लैश की स्थिति तो बन ही रही थी। वहीं इसके साथ सिद्धार्थ की एक और फिल्म खतरे में थी।
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भारतीय टीम वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में मिली हार के बाद से पहली बार मैदान पर वापसी को तैयार है। वह शनिवार (3 अगस्त) को वेस्टइंडीज के खिलाफ फ्लोरिडा में तीन टी20 मैचों की सीरीज के पहले मैच में उतरेगी।
विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम अपने वेस्टइंडीज दौरे पर 3 अगस्त से 3 सितंबर तक तीन टी20, तीन वनडे और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी।
2020 टी20 वर्ल्ड कप ध्यान में रखते हुए भारत ने इस सीरीज में युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है। स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी ने इस दौरे से आराम लिया है, जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को टी20 और वनडे सीरीज से आराम दिया गया है।
इस सीरीज में रोहित शर्मा और शिखर धवन ओपनिंग की जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। धवन वर्ल्ड कप में दो मैचों के बाद ही चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं नंबर चार पर केएल राहुल को उतारा जा सकता है।
इस दौरे पर ऋषभ पंत को तीनों ही फॉर्मेट में चुना गया है और उनके पूरी सीरीज के दौरान विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाने की संभावना है।
वहीं विंडीज टीम ने इस टी20 सीरीज के लिए अनुभवी खिलाड़ियों सुनील नरेन और कीरोन पोलार्ड को वापस बुलाया है जबकि कप्तानी की जिम्मेदारी कार्लोस ब्रेथवेट को सौंपी गई है। लेकिन टी20 सीरीज में आक्रामक बल्लेबाज क्रिस गेल नहीं होंगे, वह वनडे सीरीज का हिस्सा हैं।
तीन मैचों की टी20 सीरीज के पहले दो मैच (3,4 अगस्त) अमेरिका के फ्लोरिडा में खेले जाएंगे जबकि तीसरा टी20 6 अगस्त को गयाना में होगा।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच अब तक 11 टी20 मैच खेले हैं जिनमें से दोनों ही टीमों ने 5-5 मैच जीते हैं, जबकि एक मैच का कोई परिणाम नहीं निकला है।
वेस्टइंडीज में इन दोनों टीमों के बीच खेले गए 5 टी20 मैचों में से भारत ने एक जबकि वेस्टइंडीज ने 3 मैच जीते हैं जबकि एक मैच कोई परिणाम नहीं निकला है।
भारत ने वेस्टइंडीज में आखिरी जीत 2011 में हासिल की थी। वेस्टइंडीज ने अपने घर में कुल 39 टी20 में से 20 मैच जीते हैं। उसे घर में अपनी आखिरी सीरीज में इंग्लैंड के हाथों 3-0 से जीत मिली थी।
वहीं फ्लोरिडा में इन दोनों के बीच खेले गए दो टी20 मैचों में से एक मैच वेस्टइंडीज ने जीता है जबकि दूसरे मैच का परिणाम नहीं निकला था। ये दोनों ही मैच 2016 में खेले गए थे।
03 अगस्त, रात 8 बजे से (भारतीय समयानुसार)
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भारतीय टीम वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में मिली हार के बाद से पहली बार मैदान पर वापसी को तैयार है। वह शनिवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ फ्लोरिडा में तीन टीबीस मैचों की सीरीज के पहले मैच में उतरेगी। विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम अपने वेस्टइंडीज दौरे पर तीन अगस्त से तीन सितंबर तक तीन टीबीस, तीन वनडे और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। दो हज़ार बीस टीबीस वर्ल्ड कप ध्यान में रखते हुए भारत ने इस सीरीज में युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है। स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी ने इस दौरे से आराम लिया है, जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को टीबीस और वनडे सीरीज से आराम दिया गया है। इस सीरीज में रोहित शर्मा और शिखर धवन ओपनिंग की जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। धवन वर्ल्ड कप में दो मैचों के बाद ही चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं नंबर चार पर केएल राहुल को उतारा जा सकता है। इस दौरे पर ऋषभ पंत को तीनों ही फॉर्मेट में चुना गया है और उनके पूरी सीरीज के दौरान विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी निभाने की संभावना है। वहीं विंडीज टीम ने इस टीबीस सीरीज के लिए अनुभवी खिलाड़ियों सुनील नरेन और कीरोन पोलार्ड को वापस बुलाया है जबकि कप्तानी की जिम्मेदारी कार्लोस ब्रेथवेट को सौंपी गई है। लेकिन टीबीस सीरीज में आक्रामक बल्लेबाज क्रिस गेल नहीं होंगे, वह वनडे सीरीज का हिस्सा हैं। तीन मैचों की टीबीस सीरीज के पहले दो मैच अमेरिका के फ्लोरिडा में खेले जाएंगे जबकि तीसरा टीबीस छः अगस्त को गयाना में होगा। भारत और वेस्टइंडीज के बीच अब तक ग्यारह टीबीस मैच खेले हैं जिनमें से दोनों ही टीमों ने पाँच-पाँच मैच जीते हैं, जबकि एक मैच का कोई परिणाम नहीं निकला है। वेस्टइंडीज में इन दोनों टीमों के बीच खेले गए पाँच टीबीस मैचों में से भारत ने एक जबकि वेस्टइंडीज ने तीन मैच जीते हैं जबकि एक मैच कोई परिणाम नहीं निकला है। भारत ने वेस्टइंडीज में आखिरी जीत दो हज़ार ग्यारह में हासिल की थी। वेस्टइंडीज ने अपने घर में कुल उनतालीस टीबीस में से बीस मैच जीते हैं। उसे घर में अपनी आखिरी सीरीज में इंग्लैंड के हाथों तीन-शून्य से जीत मिली थी। वहीं फ्लोरिडा में इन दोनों के बीच खेले गए दो टीबीस मैचों में से एक मैच वेस्टइंडीज ने जीता है जबकि दूसरे मैच का परिणाम नहीं निकला था। ये दोनों ही मैच दो हज़ार सोलह में खेले गए थे। तीन अगस्त, रात आठ बजे से
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा। तस्वीरों में देखें कि कौन सा द्वीप कहां है और उसे क्या नाम दिया गया है।
पोर्ट ब्लेयर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा। इन द्वीपों का पहली बार नामकरण किया गया। प्रधानमंत्री इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए।
पराक्रम दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर बनने वाले राष्ट्रीय स्मारक के मॉडल का भी अनावरण किया। यह स्मारक नेताजी को समर्पित है। 29 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहली बार अंडमान एंड निकोबार द्वीप के पोर्ट ब्लेयर पहुंचे थे। उन्होंने 30 दिसंबर 1943 को जिमखाना ग्राउंड पर तिरंगा फहराया था।
गौरतलब है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का भारत के लिए काफी सामरिक महत्व है। पहले सबसे बड़े बिना नाम वाले द्वीप का नाम पहले परमवीर चक्र विजेता के नाम पर रखा गया है। इसी प्रकार सभी 21 बिना नाम वाले द्वीपों को नाम दिया गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के इक्कीस द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा। तस्वीरों में देखें कि कौन सा द्वीप कहां है और उसे क्या नाम दिया गया है। पोर्ट ब्लेयर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के इक्कीस द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा। इन द्वीपों का पहली बार नामकरण किया गया। प्रधानमंत्री इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। पराक्रम दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर बनने वाले राष्ट्रीय स्मारक के मॉडल का भी अनावरण किया। यह स्मारक नेताजी को समर्पित है। उनतीस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस को नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहली बार अंडमान एंड निकोबार द्वीप के पोर्ट ब्लेयर पहुंचे थे। उन्होंने तीस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस को जिमखाना ग्राउंड पर तिरंगा फहराया था। गौरतलब है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का भारत के लिए काफी सामरिक महत्व है। पहले सबसे बड़े बिना नाम वाले द्वीप का नाम पहले परमवीर चक्र विजेता के नाम पर रखा गया है। इसी प्रकार सभी इक्कीस बिना नाम वाले द्वीपों को नाम दिया गया है।
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पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शेखावाटी के बाद अब जोधपुर से भी कनेक्शन सामने आ रहा है। मूसेवाला को मारने के लिए हथियार पाकिस्तान के रास्ते हाेते हुए जोधपुर आए थे। यहीं से यह हथियार शूटर को दिए गए। इधर, जोधपुर कनेक्शन सामने आने के बाद यहां की पुलिस भी एक्टिव हो गई है। लॉरेंस के पुराने गुर्गों का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
इधर, मूसेवाला की हत्या के बाद से लॉरेंस पंजाब जाने से डर रहा है। उसे डर है कि वहां उसका एनकाउंटर न हो जाए। वहीं दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम भी लॉरेंस को पंजाब नहीं भेजना चाहती है। बताया जा रहा है कि हथियारों का कनेक्शन सामने आने के बाद अब उसे दोबारा जोधपुर लाया जा सकता है। हालांकि, कमिश्नर नवज्योति गागोई ने बताया कि फिलहाल ऐसी कोई जानकारी पुलिस को नहीं है।
पुलिस की पूछताछ में गैंगस्टर लॉरेंस ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में गैंगस्टर के ठिकानों और हथियार सप्लाई करने वालों के नाम बताए है। इसमें फरीदकोट के रणजीत, हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर स्थित गांव का विजय और राका का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि विजय जोधपुर में था और हथियार जोधपुर से सप्लाई हुए है।
सूत्रों के मुताबिक अप्रैल महीने में दिल्ली पुलिस ने मुकेश उर्फ पुनीत, ओम उर्फ शक्ति और हरविंदर को पकड़ा था। उन्होंने बताया कि उन्हें राका ने अवैध हथियार उपलब्ध कराए हैं। यह जतिंदर गोगी गैंग से जुड़े थे। पुलिस ने गोगी गैंग चला रहे रोहित मोई को पकड़ा था।
उसने बताया था कि उन्हें लॉरेंस के कहने पर राका ने हथियार उपलब्ध कराए थे। तब पुलिस ने लॉरेंस को रिमांड पर लिया। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर रहने वाला विजय जोधपुर राजस्थान से हथियार लेकर आया था।
अंदेशा जताया जा रहा है कि हथियार बाड़मेर से सटे पाकिस्तान बॉर्डर से सप्लाई हुए थे। हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है। इसके अलावा इसी एरिया में लॉरेंस के गुर्गे भी एक्टिव हैं। लॉरेंस के आर्म्स एक्ट के पुराने केस में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने पुलिस रिमांड 5 दिन और बढ़वा लिया है। पटियाला हाउस कोर्ट में गैंगस्टर की पेशी हुई। जिसमें दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह गैंगस्टर को गंगानगर और जोधपुर ले जा सकते हैं।
29 मई को मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी। सामने आया कि मर्डर के लिए 4 हथियार काम में लिए गए थे। इनमें एन-94 सबसे हाईटेक थी।
सामने आ रहा है कि इन चार हथियार में से दो हथियार पाकिस्तान से जोधपुर पहुंचे थे। जोधपुर पुलिस अब लॉरेंस गैंग से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड खंगाल उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है।
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पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शेखावाटी के बाद अब जोधपुर से भी कनेक्शन सामने आ रहा है। मूसेवाला को मारने के लिए हथियार पाकिस्तान के रास्ते हाेते हुए जोधपुर आए थे। यहीं से यह हथियार शूटर को दिए गए। इधर, जोधपुर कनेक्शन सामने आने के बाद यहां की पुलिस भी एक्टिव हो गई है। लॉरेंस के पुराने गुर्गों का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इधर, मूसेवाला की हत्या के बाद से लॉरेंस पंजाब जाने से डर रहा है। उसे डर है कि वहां उसका एनकाउंटर न हो जाए। वहीं दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम भी लॉरेंस को पंजाब नहीं भेजना चाहती है। बताया जा रहा है कि हथियारों का कनेक्शन सामने आने के बाद अब उसे दोबारा जोधपुर लाया जा सकता है। हालांकि, कमिश्नर नवज्योति गागोई ने बताया कि फिलहाल ऐसी कोई जानकारी पुलिस को नहीं है। पुलिस की पूछताछ में गैंगस्टर लॉरेंस ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में गैंगस्टर के ठिकानों और हथियार सप्लाई करने वालों के नाम बताए है। इसमें फरीदकोट के रणजीत, हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर स्थित गांव का विजय और राका का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि विजय जोधपुर में था और हथियार जोधपुर से सप्लाई हुए है। सूत्रों के मुताबिक अप्रैल महीने में दिल्ली पुलिस ने मुकेश उर्फ पुनीत, ओम उर्फ शक्ति और हरविंदर को पकड़ा था। उन्होंने बताया कि उन्हें राका ने अवैध हथियार उपलब्ध कराए हैं। यह जतिंदर गोगी गैंग से जुड़े थे। पुलिस ने गोगी गैंग चला रहे रोहित मोई को पकड़ा था। उसने बताया था कि उन्हें लॉरेंस के कहने पर राका ने हथियार उपलब्ध कराए थे। तब पुलिस ने लॉरेंस को रिमांड पर लिया। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर रहने वाला विजय जोधपुर राजस्थान से हथियार लेकर आया था। अंदेशा जताया जा रहा है कि हथियार बाड़मेर से सटे पाकिस्तान बॉर्डर से सप्लाई हुए थे। हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है। इसके अलावा इसी एरिया में लॉरेंस के गुर्गे भी एक्टिव हैं। लॉरेंस के आर्म्स एक्ट के पुराने केस में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने पुलिस रिमांड पाँच दिन और बढ़वा लिया है। पटियाला हाउस कोर्ट में गैंगस्टर की पेशी हुई। जिसमें दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह गैंगस्टर को गंगानगर और जोधपुर ले जा सकते हैं। उनतीस मई को मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी। सामने आया कि मर्डर के लिए चार हथियार काम में लिए गए थे। इनमें एन-चौरानवे सबसे हाईटेक थी। सामने आ रहा है कि इन चार हथियार में से दो हथियार पाकिस्तान से जोधपुर पहुंचे थे। जोधपुर पुलिस अब लॉरेंस गैंग से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड खंगाल उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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फरीदाबाद : पंजाबी फैडरेशन के बेटी बचाओ अभियान के चेयरमैन व राष्ट्रीय संयोजक हरीश चन्द्र आज़ाद ने बताया कि मशहूर फिल्म अभिनेत्री रीटा राय को बेटी बचाओ अभियान ने ब्रांड अम्बैस्डर नियुक्त किया।
उन्होने बताया कि रीटा राय जिन्होने करीब 13 टीवी सीरीयल में काम किया, करीब 11 टीवी विज्ञापनों में काम किया और 5 हिन्दी फिल्मो व 1 भोजपुरी फिल्म में हीरोइन का रोल किया तथा 7 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड जीते।
उन्होंने बताया कि रीटा को बेटी बचाओ अभियान की ब्रांड अम्बैस्डर बनाकर लोगों को कन्या भू्रण हत्या रोकने में ज्यादा से ज्यादा जागृत किया जा सकेगा।
इस मौके पर रीटा ने कहा कि मैं कोशिश करेगीं और अपना पूरा सहयोग संस्था को दूंगी। आजाद ने कहा कि अभिनेत्री की मदद से देश को इस घोर कंलक से मुक्ति दिलाई जा सकती है।
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फरीदाबाद : पंजाबी फैडरेशन के बेटी बचाओ अभियान के चेयरमैन व राष्ट्रीय संयोजक हरीश चन्द्र आज़ाद ने बताया कि मशहूर फिल्म अभिनेत्री रीटा राय को बेटी बचाओ अभियान ने ब्रांड अम्बैस्डर नियुक्त किया। उन्होने बताया कि रीटा राय जिन्होने करीब तेरह टीवी सीरीयल में काम किया, करीब ग्यारह टीवी विज्ञापनों में काम किया और पाँच हिन्दी फिल्मो व एक भोजपुरी फिल्म में हीरोइन का रोल किया तथा सात से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड जीते। उन्होंने बताया कि रीटा को बेटी बचाओ अभियान की ब्रांड अम्बैस्डर बनाकर लोगों को कन्या भू्रण हत्या रोकने में ज्यादा से ज्यादा जागृत किया जा सकेगा। इस मौके पर रीटा ने कहा कि मैं कोशिश करेगीं और अपना पूरा सहयोग संस्था को दूंगी। आजाद ने कहा कि अभिनेत्री की मदद से देश को इस घोर कंलक से मुक्ति दिलाई जा सकती है।
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- 1 hr ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली!
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उन्होंने आगे कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग में एक्ट्रेस बहुत मेहनत करती हैं। जब उनके दम पर कोई फिल्म चलती है तो उनका सम्मान किया जाना चाहिए। ना कि उनके नाम को कमतर मानना चाहिए।
शाहरूख ने आगे अमिताभ बच्चन, श्रीदेवी, ओम पुरी और जूही चावला के नाम गिनाए और कहा कि इन बेहतरीन पर्सन को देखते हुए वह बड़े हुए हैं और जब उन्होंने इनके साथ फिल्मों में काम किया तो बहुत कुछ सीखने को मिला। मैने बॉलीवुड से काफी कुछ सिखा है।
Bollywood king khan Shahrukh says that bollywood actress are very talented and hard working.
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२१५२ - ईश्वरकी सेवासे शरीर में और श्रद्धासे प्राणोंमें ज्योति प्रकट होती है ।
२१५३ - जो कुछ भी तुम्हारा है उसका त्याग करो और 'वह' जैसी आज्ञा दे उसका पालन करो ।
२१५४ - ईश्वरका भय मनका दीपक है । इस दीपकके प्रकाशसे मनुष्य अपने गुण-दोष भलीभाँति देख सकता है ।
२१५५ - दूसरोंसे लेनेकी अपेक्षा देनेमें जिसे अधिक सुख नहीं मालूम होता वह सच्चा संत नहीं हो सकता ।
२१५६ - दुनिया में घुसना बहुत आसान है, पर उसमें से निकलना उतना ही मुश्किल है ।
२१५७ - ईश्वर के प्रति नम्र होना, उसकी आज्ञाके मुताबिक चलना, उसकी प्रत्येक इच्छाके आगे सिर झुकाना - इसीका नाम, ईश्वरके प्रति विनय दिखाना है ।
२१५८ - प्रभुपर निर्भर और उसके अधीन रहनेवाला वास्तव - में वही है जिसने ईश्वरका दृढ़ आश्रय लिया है और जो किसी भी बातका उसे दोष नहीं देता।
२१५९ - एक ईश्वरकी प्राप्तिके लिये ही जिसके मनमें वैराग्य उपजा हो वही सच्चा वैरागी है, स्वर्गके लोभसे जो वैरागी बना हो वह तो असली वैरागी नहीं ।
२१६० - अपने पास बहुत से नौकर-चाकर और भोगोंके सामान देखकर एक अज्ञानी ही फूला नहीं समाता ।
२१६१ - जिसने अपना अभिमानका बोझ हल्का कर लिया
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दो हज़ार एक सौ बावन - ईश्वरकी सेवासे शरीर में और श्रद्धासे प्राणोंमें ज्योति प्रकट होती है । दो हज़ार एक सौ तिरेपन - जो कुछ भी तुम्हारा है उसका त्याग करो और 'वह' जैसी आज्ञा दे उसका पालन करो । दो हज़ार एक सौ चौवन - ईश्वरका भय मनका दीपक है । इस दीपकके प्रकाशसे मनुष्य अपने गुण-दोष भलीभाँति देख सकता है । दो हज़ार एक सौ पचपन - दूसरोंसे लेनेकी अपेक्षा देनेमें जिसे अधिक सुख नहीं मालूम होता वह सच्चा संत नहीं हो सकता । दो हज़ार एक सौ छप्पन - दुनिया में घुसना बहुत आसान है, पर उसमें से निकलना उतना ही मुश्किल है । दो हज़ार एक सौ सत्तावन - ईश्वर के प्रति नम्र होना, उसकी आज्ञाके मुताबिक चलना, उसकी प्रत्येक इच्छाके आगे सिर झुकाना - इसीका नाम, ईश्वरके प्रति विनय दिखाना है । दो हज़ार एक सौ अट्ठावन - प्रभुपर निर्भर और उसके अधीन रहनेवाला वास्तव - में वही है जिसने ईश्वरका दृढ़ आश्रय लिया है और जो किसी भी बातका उसे दोष नहीं देता। दो हज़ार एक सौ उनसठ - एक ईश्वरकी प्राप्तिके लिये ही जिसके मनमें वैराग्य उपजा हो वही सच्चा वैरागी है, स्वर्गके लोभसे जो वैरागी बना हो वह तो असली वैरागी नहीं । दो हज़ार एक सौ साठ - अपने पास बहुत से नौकर-चाकर और भोगोंके सामान देखकर एक अज्ञानी ही फूला नहीं समाता । दो हज़ार एक सौ इकसठ - जिसने अपना अभिमानका बोझ हल्का कर लिया
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जानकारी के मुताबिक तसीमो गांव में कुशवाह समाज के लोग मोहल्ले में ट्रांसफार्मर की मरम्मत कराकर उसे फाउंडेशन पर रखवा रहे थे कि मोहल्ले के एक गुट ने सहयोग करने से मना कर दिया। इससे दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद दोनों पक्ष गाली-गलौज पर उतर आए। उसके बाद नौबत लाठी भाटा जंग तक पहुंच गई। आधा घंटे तक दोनों तरफ से चले खूनी संघर्ष में एक पक्ष के राकेश पुत्र चेतसिंह और मनोज पुत्र ज्ञानसिंह घायल हो गए। वहीं दूसरे पक्ष के मनोज पुत्र मंगल, नरेंद्र पुत्र मंगल और नबाब पुत्र रामजीलाल घायल हो गए।
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जानकारी के मुताबिक तसीमो गांव में कुशवाह समाज के लोग मोहल्ले में ट्रांसफार्मर की मरम्मत कराकर उसे फाउंडेशन पर रखवा रहे थे कि मोहल्ले के एक गुट ने सहयोग करने से मना कर दिया। इससे दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद दोनों पक्ष गाली-गलौज पर उतर आए। उसके बाद नौबत लाठी भाटा जंग तक पहुंच गई। आधा घंटे तक दोनों तरफ से चले खूनी संघर्ष में एक पक्ष के राकेश पुत्र चेतसिंह और मनोज पुत्र ज्ञानसिंह घायल हो गए। वहीं दूसरे पक्ष के मनोज पुत्र मंगल, नरेंद्र पुत्र मंगल और नबाब पुत्र रामजीलाल घायल हो गए।
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साईप्रिया और श्रीनिवास सोमवार को अपनी शादी की सालगिराह मनाने के लिए विशाखा आरके बीच पर पहुंचे थे। समुद्र तट पर कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने शाम 7. 30 बजे वापस जाने का फैसला किया।
विशाखापट्टनम के आरके बीच से लापता हुई शादीशुदा महिला, जिसे खोजने में सरकार के एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गए वह दो दिन बाद प्रेमी के साथ नेल्लोर में घूमती हुई मिल गई। वह समुद्र तट से वहां कैसे पहुंची, यह जानने के लिए कि पहले यह जानना होगा कि आखिर हुआ क्या था। साईप्रिया और श्रीनिवास सोमवार को अपनी शादी की सालगिराह मनाने के लिए विशाखापट्टनम के आरके बीच पर पहुंचे थे। समुद्र तट पर कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने शाम 7. 30 बजे वापस जाने का फैसला किया।
पति को पैर धोने के लिए कह कर साईप्रिया बीच पर चली गई। वहीं, पति श्रीनिवास फोन में व्यस्त हो गए। कुछ देर बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो उनकी पत्नी कहीं नहीं मिली। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। चारों ओर खोजा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आपको बता दें कि गायब होने की यह घटना चंद सेकेंड के भीतर हुई। श्रीनिवास को लगा कि उनकी पत्नी समुद्र में डूब गई है।
इसके बाद साईप्रिया के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। अंधेरा होने के बाद अगले दिन भी तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। तलाशी अभियान में हेलीकॉप्टर तक को उतारा गया। आशंका जताई गई साईप्रिया समुद्र में बह गई।
इस मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ आया। पता चला कि साईप्रिया अपने प्रेमी के साथ नेल्लोर भाग गई थी। पुलिस ने उसे एक युवक के साथ पाया। श्रीनिवास और साई प्रिया के कथित तौर पर पिछले कुछ समय से खराब संबंध थे। श्रीनिवास भी यह सोचकर चौंक गए कि उनकी पत्नी तो समुद्र में बह गई थी।
विशाखापट्टनम के उप महापौर ने बताया कि सरकार ने साईप्रिया की खोज के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की एक बड़ी राशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि वे अब महिला को नेल्लोर से विजाग वापस लाने के प्रयास कर रहे हैं।
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साईप्रिया और श्रीनिवास सोमवार को अपनी शादी की सालगिराह मनाने के लिए विशाखा आरके बीच पर पहुंचे थे। समुद्र तट पर कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने शाम सात. तीस बजे वापस जाने का फैसला किया। विशाखापट्टनम के आरके बीच से लापता हुई शादीशुदा महिला, जिसे खोजने में सरकार के एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गए वह दो दिन बाद प्रेमी के साथ नेल्लोर में घूमती हुई मिल गई। वह समुद्र तट से वहां कैसे पहुंची, यह जानने के लिए कि पहले यह जानना होगा कि आखिर हुआ क्या था। साईप्रिया और श्रीनिवास सोमवार को अपनी शादी की सालगिराह मनाने के लिए विशाखापट्टनम के आरके बीच पर पहुंचे थे। समुद्र तट पर कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने शाम सात. तीस बजे वापस जाने का फैसला किया। पति को पैर धोने के लिए कह कर साईप्रिया बीच पर चली गई। वहीं, पति श्रीनिवास फोन में व्यस्त हो गए। कुछ देर बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो उनकी पत्नी कहीं नहीं मिली। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। चारों ओर खोजा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आपको बता दें कि गायब होने की यह घटना चंद सेकेंड के भीतर हुई। श्रीनिवास को लगा कि उनकी पत्नी समुद्र में डूब गई है। इसके बाद साईप्रिया के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। अंधेरा होने के बाद अगले दिन भी तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। तलाशी अभियान में हेलीकॉप्टर तक को उतारा गया। आशंका जताई गई साईप्रिया समुद्र में बह गई। इस मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ आया। पता चला कि साईप्रिया अपने प्रेमी के साथ नेल्लोर भाग गई थी। पुलिस ने उसे एक युवक के साथ पाया। श्रीनिवास और साई प्रिया के कथित तौर पर पिछले कुछ समय से खराब संबंध थे। श्रीनिवास भी यह सोचकर चौंक गए कि उनकी पत्नी तो समुद्र में बह गई थी। विशाखापट्टनम के उप महापौर ने बताया कि सरकार ने साईप्रिया की खोज के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की एक बड़ी राशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि वे अब महिला को नेल्लोर से विजाग वापस लाने के प्रयास कर रहे हैं।
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अंको का असर जीवन में अच्छा या बुरा दोनों तरीकों से सामने आता है। अंको के असर से हमारे जीवन में आशाओं, उम्मीदों और वादों से परिपूर्ण होता है। यह हमारी जीवन शैली, हमारे नज़रिये, हमारी सोच यहां तक कि हमारी कार्यशैली में भी एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर संकेत देते है। जिसको ध्यान में रखते हुए अंक ज्योतिष (संख्या शास्त्र) को बेहद सटीक बताया गया है।
अंक हमारे जीवन में सफलता पाने के राज हो या करियर, व्यवसाय, नौकरी, प्रेम और जीवन की हर छोटी व बड़ी बात को अंक ज्योतिष के आधार पर बताते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी अंक ज्योतिष हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।
बता दें कि अंक ज्योतिष को अंक विद्या या अंक शास्त्र के नाम से भी जाना जाता है।
तो आइए जानते हैं कि वर्ष भर में हर महीने की 30 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति के जीवन पर इस अंक का क्या प्रभाव पड़ता है।
इस अंक का स्वामी ग्रह बृहस्पति है और इसी ग्रह की वजह से इन्हें भाग्य का पूरा साथ मिलता है। सामान्यतः इन लोगों को किसी के नेतृत्व में काम करना अधिक पसंद नहीं होता है, लेकिन परिस्थितिवश ये किसी संगठन में भी अच्छे ढंग से कार्य पूर्ण कर सकते हैं।
इनका लक्ष्य उन्नति करते जाना होता है, अधिक समय एक जगह रुककर यह कार्य नहीं कर सकते। इन्हें बुरी परिस्थितियों से लडऩा बहुत अच्छे से आता है।
- इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं।
- हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारिखें इनके लिए विशेष रूप से लाभदायक हैं।
- इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।
- रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते है।
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अंको का असर जीवन में अच्छा या बुरा दोनों तरीकों से सामने आता है। अंको के असर से हमारे जीवन में आशाओं, उम्मीदों और वादों से परिपूर्ण होता है। यह हमारी जीवन शैली, हमारे नज़रिये, हमारी सोच यहां तक कि हमारी कार्यशैली में भी एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर संकेत देते है। जिसको ध्यान में रखते हुए अंक ज्योतिष को बेहद सटीक बताया गया है। अंक हमारे जीवन में सफलता पाने के राज हो या करियर, व्यवसाय, नौकरी, प्रेम और जीवन की हर छोटी व बड़ी बात को अंक ज्योतिष के आधार पर बताते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी अंक ज्योतिष हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। बता दें कि अंक ज्योतिष को अंक विद्या या अंक शास्त्र के नाम से भी जाना जाता है। तो आइए जानते हैं कि वर्ष भर में हर महीने की तीस तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति के जीवन पर इस अंक का क्या प्रभाव पड़ता है। इस अंक का स्वामी ग्रह बृहस्पति है और इसी ग्रह की वजह से इन्हें भाग्य का पूरा साथ मिलता है। सामान्यतः इन लोगों को किसी के नेतृत्व में काम करना अधिक पसंद नहीं होता है, लेकिन परिस्थितिवश ये किसी संगठन में भी अच्छे ढंग से कार्य पूर्ण कर सकते हैं। इनका लक्ष्य उन्नति करते जाना होता है, अधिक समय एक जगह रुककर यह कार्य नहीं कर सकते। इन्हें बुरी परिस्थितियों से लडऩा बहुत अच्छे से आता है। - इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं। - हर माह की छः, नौ, पंद्रह, अट्ठारह, सत्ताईस तारिखें इनके लिए विशेष रूप से लाभदायक हैं। - इन लोगों की अंक छः और अंक नौ वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है। - रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते है।
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किया होगा। ऐसी स्थिति में वह जथै अनभिगत नहीं होगा और अधिगत अर्थ का ही वाक्य प्रमाण से प्रतिपादन होता है। यदिर से उनको अर्थ का मान हुआ मानें तो अन्य परम्परा का प्रसंग होगा ।
इसके अतिरिक्त बैनाभिमत आत्मज्ञान इसलिये भी मोदा का साथन नहीं हो सकता क्योंकि वह अचेतन है। ज्ञात जात्मा भी मौजद नहीं हो सकता क्योंकि पुद्गल तात्मा स्वतन्त्र और दुःखादि कार्यों वाला है। जो स्वयं बिस अनर्थ से युक्त होता वह उसके निवर्तन में असमर्थ होता है वैसे दरिद्र पुरुष दरिद्रता के निवर्तन में ।
ईश्वरज्ञान का साधनत्व -
आत्मज्ञान के समान ईश्वरज्ञान भी मोदre नहीं है । ईश्वर ज्ञान की मोदा का साधन कहने का अभिप्राय ज्ञान को ही साधन कहला नहीं है । प्रसन्न ईश्वर ही मौदा का साधन होता है। ईश्वर ज्ञान उनको प्रसन्नता का साधन होने के कारण मौदा का साधन कहा जाता है। वह प्रसन्न ईश्वर संकल्प करता है कि अमुक समय में अमुक व्यक्ति को मुक्त करूंगा और उसकी कल्पना के अनुसार वह व्यक्ति उस समय मुक्त हो जाता है। जिस प्रकार ब्राह्मण के विधा वावरणादि से प्रसन्न होकर समर्थ राजादि संकल्प करता है कि अमुक पर्व में इसे गाय दूंगा बार तदनुसार गाय वादि देता है ।
कर्म के मोदासाघनत्व का निराकरण
sit am
कर्म भी जचतन होने के कारण मौदा का साथ नहीं हो
सकता है । मौदा प्राप्ति पर्यन्त होने वाले कर्म के विषय में दो विकल्प हो
दृष्टव्य न्या० सु० पु० ५५१
सकते हैं
( १ ) मोदा की प्राप्ति पर्यन्त क्रियमाण एक हो कर्म होता है या (२) अनेक कर्म । इनमें से प्रथम विकल्प नहीं माना जा सकता है, क्योंकि क्रियाएं अनेक देखो बाती है और प्रत्येक क्रिया से कर्म को उत्पत्ति होती है । यदि एक हो कर्म होता तो एक बार उत्पन्न वस्तु का ही जन्म होता और अग्रिम कियों को व्यता प्राप्त होती । यदि कर्म को एक हो मान लिया तो जिस प्रकार प्रथम किया के उतर काल में उत्पन्न कर्म सम्पूर्ण दुःखों के विलय पूर्वक मोक्ष का कारण नहीं होता उसी प्रकार उत्तरकाल वाला वही कर्म भी उस काल में मौदा का कारण नहीं होगा। द्वितीय विकल्प स्वीकृत करने पर जैसे प्रथम कर्म मौदा का साधन नहीं हुआ उसी प्रकार अन्तिम कर्म भी मोदा का साधन नहीं हो सकता है। तथा अन्तिम कर्म से व्यतिरिक्त कर्मों को मोदा का साधन माना ही नहीं जा सकता, क्योंकि उस दशा में उसके अनन्तर ही मौदा का प्रसंग होगा और उसके बाद कर्म नहीं होगा। पूर्ण कमों से सहकृत अन्तिम कर्म का मोदा- साधनत्व भी नहीं स्वीकृत किया जा सकता है, क्योंकि कर्मों की इयता के भाव में मोदा के अनियतकारणकत्व का प्रसंग होगा। ऐसा भी कोई प्रमाणवान् नियम नहीं है कि ज्ञानोदय के अन्तर इतने काल में ही इतने ही कर्म करके कोई मुक्त हो जाता है।
संसार - बन्च की हानि समर्थ अन्य पुरुष को प्रसन्नता से ही होती है, जैसे मृत्यादि की निगडादि-बन्ध हानि राजद की प्रसन्नता के अधीन होती है। संसारबन्ध से मुक्ति देने वाला समर्थ पुरुष ईश्वर के
बौद्धा भिमत मोपासाधन का निराकरण
शून्य के साधनत्व का निराकरणशून्यवा दिमत के अनुसार शून्य की भावना ही मोक्ष का साधन है। किन्तु, शून्य की भावना या शून्य का ध्यान मोक्ष- साधन है, इस विषय में कोई प्रमाण नहीं है । शून्य के मौदा साधनत्व में दो विकल्प संभव ( १ ) शून्य का परिज्ञानादि स्वयं मोक्ष का साधन है या
(२) शून्य प्रसादन मौदा साधन है। उक्त दोनों हो विकल्प अनुपयुक्त इं 1 शून्य का परिज्ञानादि अचेतन होने के कारण स्वयं मौदा का साधन नहीं हो सकता तथा शून्य में प्रसाद गुण अड़ गीकृत ही नहीं किया जा सकता है। यदि उसमें प्रसाद गुण मानें तो शून्यत्व का व्याघात होगा ।
संवृतिनामक अज्ञानरूप निमित से होने वाला अध्यास ही बन्ध है । और संवृति शून्य के ज्ञान से निवृत्त हो जाती है, क्योंकि शुन्य जान उसका विरोधी है । संवृत्ति के निवृत हो जाने पर तन्मूलक बन्ध भी निवृत हो बायेगा - यह कथन भी उपयुक्त नहीं है, क्योंकि बन्च की अध्यस्तता मान्य है। यदि किसी तरह यह मान भी लिया बाय कि शून्यज्ञान से मौदा-प्राप्ति होती है तो उसे ज्ञानोदय के अनन्तर क्षण में हो होनी चाहिए, उसमें विलम्ब नहीं होना चाहिए । प्रदोष के द्वारा विरोधो अन्धकार के निवर्तन में विलम्ब नहीं होता है। किन्तु शुन्यज्ञान के अनन्तर मी पुरुषों का संसरण बड़· गीकृत किया जाता है।
यदि कहे कि संभावना और विपरीत भावना के होने से विलम्ब होता है, तो प्रश्न होता है कि असंभावना और विपरीत माका संवृत्ति के कार्य है या नहीं ? यदि वे संवृत्ति के कार्य नहीं है, ऐसा माना बाय तो शून्यवाद की ही निवृत्ति हो जायगी क्योंकि उनकी सता शून्य के अतिरिक्त हो। यदि वे संवृत्ति के कार्य है तो संवृत्ति के निष्त होने पर उनकी भी
निवृत्ति अवश्य हो जानी चाहिए, क्योंकि कारण के निवृत हो जाने पर कार्य भो निवृत्त हो जाता है, अन्यथा या तो संवृति की निवृत्ति नहीं हुई या ये दोनों संवृत्ति के कार्य नहीं है; वीर यदि संवृति शून्य ज्ञान के बाद भी निवृत्त नहीं हुई तो उसका ज्ञान विरोधित्व नहीं माना जा सकता है।
ईश्वरज्ञान के अनन्तर मोक्ष प्राप्ति में विलम्ब उपयुक्त है
देत मत में ईश्वरज्ञानादि के अन्तर मौदा प्राप्ति में विलम्ब होना जसंगत नहीं है, क्योंकि प्रसन्न ईश्वर की इच्छा से नियत काल में ही मौदा होता है। ईश्वर - ज्ञानादि तो उसको प्रसन्नता के साधन है। किन्तु केवल शून्यज्ञान ही बन्द विरोधी होने से उसका निवर्तक है, ऐसा मानने पर ज्ञानोदय के अनन्तर मोदा में प्रतिबन्धक कोई नहीं है । जो भी प्रतिबन्धक रूप से कल्पित किया जायेगा वह सब संवृति का कार्य होने से ज्ञान विरोधी होगा । ततः शुन्यज्ञान के अनन्तर मोदा में विलम्ब उपपन्न नहीं है । नागने के अन्तर स्वाप्नबन्ध की निवृत्ति में विलम्ब नहीं होता है ।
मौदा के अतिरिक्त अन्यत्र भी विलम्ब में श्रेनिमित मानना उपयुक्त है। कारण सामग्री के होने पर भी कार्य के विलम्ब में दृष्ट सामग्री में न्यूनता न होने पर ईश्वरेच्छा हो कल्पित करनी चाहिए। यहां धर्मवैकल्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। धर्म-वैकल्य मानने पर उत्तरकाल में कार्य का उदय नहीं होगा, क्योंकि वे तो उस समय भी बना रहेगा । इस बीच किसी धर्म का अनुष्ठान नहीं किया जाता है जिससे पूर्व धर्मवैकल्य दूर हो सके ।
इसी प्रकार विज्ञानवाद, वैभाषिक और सौत्रान्तिक मतों में स्वीकृत मोदासाचन मी अनुपयुक्त है ।
दृष्टव्य न्या० सु० १० ५५३
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किया होगा। ऐसी स्थिति में वह जथै अनभिगत नहीं होगा और अधिगत अर्थ का ही वाक्य प्रमाण से प्रतिपादन होता है। यदिर से उनको अर्थ का मान हुआ मानें तो अन्य परम्परा का प्रसंग होगा । इसके अतिरिक्त बैनाभिमत आत्मज्ञान इसलिये भी मोदा का साथन नहीं हो सकता क्योंकि वह अचेतन है। ज्ञात जात्मा भी मौजद नहीं हो सकता क्योंकि पुद्गल तात्मा स्वतन्त्र और दुःखादि कार्यों वाला है। जो स्वयं बिस अनर्थ से युक्त होता वह उसके निवर्तन में असमर्थ होता है वैसे दरिद्र पुरुष दरिद्रता के निवर्तन में । ईश्वरज्ञान का साधनत्व - आत्मज्ञान के समान ईश्वरज्ञान भी मोदre नहीं है । ईश्वर ज्ञान की मोदा का साधन कहने का अभिप्राय ज्ञान को ही साधन कहला नहीं है । प्रसन्न ईश्वर ही मौदा का साधन होता है। ईश्वर ज्ञान उनको प्रसन्नता का साधन होने के कारण मौदा का साधन कहा जाता है। वह प्रसन्न ईश्वर संकल्प करता है कि अमुक समय में अमुक व्यक्ति को मुक्त करूंगा और उसकी कल्पना के अनुसार वह व्यक्ति उस समय मुक्त हो जाता है। जिस प्रकार ब्राह्मण के विधा वावरणादि से प्रसन्न होकर समर्थ राजादि संकल्प करता है कि अमुक पर्व में इसे गाय दूंगा बार तदनुसार गाय वादि देता है । कर्म के मोदासाघनत्व का निराकरण sit am कर्म भी जचतन होने के कारण मौदा का साथ नहीं हो सकता है । मौदा प्राप्ति पर्यन्त होने वाले कर्म के विषय में दो विकल्प हो दृष्टव्य न्याशून्य सुशून्य पुशून्य पाँच सौ इक्यावन सकते हैं मोदा की प्राप्ति पर्यन्त क्रियमाण एक हो कर्म होता है या अनेक कर्म । इनमें से प्रथम विकल्प नहीं माना जा सकता है, क्योंकि क्रियाएं अनेक देखो बाती है और प्रत्येक क्रिया से कर्म को उत्पत्ति होती है । यदि एक हो कर्म होता तो एक बार उत्पन्न वस्तु का ही जन्म होता और अग्रिम कियों को व्यता प्राप्त होती । यदि कर्म को एक हो मान लिया तो जिस प्रकार प्रथम किया के उतर काल में उत्पन्न कर्म सम्पूर्ण दुःखों के विलय पूर्वक मोक्ष का कारण नहीं होता उसी प्रकार उत्तरकाल वाला वही कर्म भी उस काल में मौदा का कारण नहीं होगा। द्वितीय विकल्प स्वीकृत करने पर जैसे प्रथम कर्म मौदा का साधन नहीं हुआ उसी प्रकार अन्तिम कर्म भी मोदा का साधन नहीं हो सकता है। तथा अन्तिम कर्म से व्यतिरिक्त कर्मों को मोदा का साधन माना ही नहीं जा सकता, क्योंकि उस दशा में उसके अनन्तर ही मौदा का प्रसंग होगा और उसके बाद कर्म नहीं होगा। पूर्ण कमों से सहकृत अन्तिम कर्म का मोदा- साधनत्व भी नहीं स्वीकृत किया जा सकता है, क्योंकि कर्मों की इयता के भाव में मोदा के अनियतकारणकत्व का प्रसंग होगा। ऐसा भी कोई प्रमाणवान् नियम नहीं है कि ज्ञानोदय के अन्तर इतने काल में ही इतने ही कर्म करके कोई मुक्त हो जाता है। संसार - बन्च की हानि समर्थ अन्य पुरुष को प्रसन्नता से ही होती है, जैसे मृत्यादि की निगडादि-बन्ध हानि राजद की प्रसन्नता के अधीन होती है। संसारबन्ध से मुक्ति देने वाला समर्थ पुरुष ईश्वर के बौद्धा भिमत मोपासाधन का निराकरण शून्य के साधनत्व का निराकरणशून्यवा दिमत के अनुसार शून्य की भावना ही मोक्ष का साधन है। किन्तु, शून्य की भावना या शून्य का ध्यान मोक्ष- साधन है, इस विषय में कोई प्रमाण नहीं है । शून्य के मौदा साधनत्व में दो विकल्प संभव शून्य का परिज्ञानादि स्वयं मोक्ष का साधन है या शून्य प्रसादन मौदा साधन है। उक्त दोनों हो विकल्प अनुपयुक्त इं एक शून्य का परिज्ञानादि अचेतन होने के कारण स्वयं मौदा का साधन नहीं हो सकता तथा शून्य में प्रसाद गुण अड़ गीकृत ही नहीं किया जा सकता है। यदि उसमें प्रसाद गुण मानें तो शून्यत्व का व्याघात होगा । संवृतिनामक अज्ञानरूप निमित से होने वाला अध्यास ही बन्ध है । और संवृति शून्य के ज्ञान से निवृत्त हो जाती है, क्योंकि शुन्य जान उसका विरोधी है । संवृत्ति के निवृत हो जाने पर तन्मूलक बन्ध भी निवृत हो बायेगा - यह कथन भी उपयुक्त नहीं है, क्योंकि बन्च की अध्यस्तता मान्य है। यदि किसी तरह यह मान भी लिया बाय कि शून्यज्ञान से मौदा-प्राप्ति होती है तो उसे ज्ञानोदय के अनन्तर क्षण में हो होनी चाहिए, उसमें विलम्ब नहीं होना चाहिए । प्रदोष के द्वारा विरोधो अन्धकार के निवर्तन में विलम्ब नहीं होता है। किन्तु शुन्यज्ञान के अनन्तर मी पुरुषों का संसरण बड़· गीकृत किया जाता है। यदि कहे कि संभावना और विपरीत भावना के होने से विलम्ब होता है, तो प्रश्न होता है कि असंभावना और विपरीत माका संवृत्ति के कार्य है या नहीं ? यदि वे संवृत्ति के कार्य नहीं है, ऐसा माना बाय तो शून्यवाद की ही निवृत्ति हो जायगी क्योंकि उनकी सता शून्य के अतिरिक्त हो। यदि वे संवृत्ति के कार्य है तो संवृत्ति के निष्त होने पर उनकी भी निवृत्ति अवश्य हो जानी चाहिए, क्योंकि कारण के निवृत हो जाने पर कार्य भो निवृत्त हो जाता है, अन्यथा या तो संवृति की निवृत्ति नहीं हुई या ये दोनों संवृत्ति के कार्य नहीं है; वीर यदि संवृति शून्य ज्ञान के बाद भी निवृत्त नहीं हुई तो उसका ज्ञान विरोधित्व नहीं माना जा सकता है। ईश्वरज्ञान के अनन्तर मोक्ष प्राप्ति में विलम्ब उपयुक्त है देत मत में ईश्वरज्ञानादि के अन्तर मौदा प्राप्ति में विलम्ब होना जसंगत नहीं है, क्योंकि प्रसन्न ईश्वर की इच्छा से नियत काल में ही मौदा होता है। ईश्वर - ज्ञानादि तो उसको प्रसन्नता के साधन है। किन्तु केवल शून्यज्ञान ही बन्द विरोधी होने से उसका निवर्तक है, ऐसा मानने पर ज्ञानोदय के अनन्तर मोदा में प्रतिबन्धक कोई नहीं है । जो भी प्रतिबन्धक रूप से कल्पित किया जायेगा वह सब संवृति का कार्य होने से ज्ञान विरोधी होगा । ततः शुन्यज्ञान के अनन्तर मोदा में विलम्ब उपपन्न नहीं है । नागने के अन्तर स्वाप्नबन्ध की निवृत्ति में विलम्ब नहीं होता है । मौदा के अतिरिक्त अन्यत्र भी विलम्ब में श्रेनिमित मानना उपयुक्त है। कारण सामग्री के होने पर भी कार्य के विलम्ब में दृष्ट सामग्री में न्यूनता न होने पर ईश्वरेच्छा हो कल्पित करनी चाहिए। यहां धर्मवैकल्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। धर्म-वैकल्य मानने पर उत्तरकाल में कार्य का उदय नहीं होगा, क्योंकि वे तो उस समय भी बना रहेगा । इस बीच किसी धर्म का अनुष्ठान नहीं किया जाता है जिससे पूर्व धर्मवैकल्य दूर हो सके । इसी प्रकार विज्ञानवाद, वैभाषिक और सौत्रान्तिक मतों में स्वीकृत मोदासाचन मी अनुपयुक्त है । दृष्टव्य न्याशून्य सुशून्य दस पाँच सौ तिरेपन
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"पत्रकारिता एक चेतना है और मैं सिपाही इसकी" जो लिखा गया वो एक संकेत है और जो नहीं लिखा गया उसे समझना और जनहित में सवाल करना पत्रकारिता! हिंदी पत्रकारिता एक आधारभूत स्तर है जो मानव चेन की कड़ी को जोड़ने के साथ ही साथ इसे एक नई दिशा भी देता है। शब्द विश्लेषणों से लेकर भाषा की गरिमा, आंकलन और जानकारी की वृहदता के साथ व्यावहारिक संरचना का सामना इसकी मूलभूत धरोहर है।
लेकिन इन दिनों हिंदी जर्नलिज्म में विज्ञान, खेल, अंतरिक्ष गतिविधियों पर भी खुद को विस्तृत करने की जरूरत है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों के समक्ष खुद को मजबूती प्रदान करें और उन्हें जरूरी, सार्थक और सत्य शैली की जानकारी और कलात्मक सृजन का अनुभव करवा सकें। अनुभव पर क्या कहूं, हर पल, हर क्षण, हर दिन सीखना और स्वयं को ही चुनौती देना, हुनर बस यही है।
8 लाख कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। जल्दी उनके वेतन में बड़ी वृद्धि देखी जाएगी। दरअसल सरकार द्वारा 10 साल के बाद भत्ते को बढ़ाने की तैयारी की गई है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
बड़ी संख्या में प्रशासनिक दृष्टिकोण के मद्देनजर अधिकारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। उन्हें जल्द से जल्द पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सभी तबादले रिक्ति के सापेक्ष में हुए हैं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक बार फिर से अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। तत्काल प्रभाव से उन्हें नवीन स्थान पर पहुंचना अनिवार्य किया गया है।
OROP को लेकर मंत्रालय द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। इसके तहत संशोधित वन रैंक वन पेंशन का लाभ मिलेगा। इसकी सूची जारी की गई है। इसके अलावा LTA को लेकर भी नवीन दिशा-निर्देश जारी किए गए।
राशन कार्ड धारकों को राशन का लाभ मिलेगा। इसके लिए सरकार द्वारा तैयारी की गई है। वहीं कई अन्य तरह की सुविधा भी राशन कार्ड धारकों को उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। प्रशासनिक दृष्टिकोण से उन्हें नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। अस्थाई रूप से उन्हें तत्काल प्रभाव से पदभार ग्रहण करना होगा।
कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द उन्हें वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए राशि आवंटित कर दी गई है। साथ ही वेतन मानदेय भुगतान के लिए निर्देश भी जारी किए गए हैं। कर्मचारियों के खाते में राशि बढ़कर देखी जाएगी।
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"पत्रकारिता एक चेतना है और मैं सिपाही इसकी" जो लिखा गया वो एक संकेत है और जो नहीं लिखा गया उसे समझना और जनहित में सवाल करना पत्रकारिता! हिंदी पत्रकारिता एक आधारभूत स्तर है जो मानव चेन की कड़ी को जोड़ने के साथ ही साथ इसे एक नई दिशा भी देता है। शब्द विश्लेषणों से लेकर भाषा की गरिमा, आंकलन और जानकारी की वृहदता के साथ व्यावहारिक संरचना का सामना इसकी मूलभूत धरोहर है। लेकिन इन दिनों हिंदी जर्नलिज्म में विज्ञान, खेल, अंतरिक्ष गतिविधियों पर भी खुद को विस्तृत करने की जरूरत है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों के समक्ष खुद को मजबूती प्रदान करें और उन्हें जरूरी, सार्थक और सत्य शैली की जानकारी और कलात्मक सृजन का अनुभव करवा सकें। अनुभव पर क्या कहूं, हर पल, हर क्षण, हर दिन सीखना और स्वयं को ही चुनौती देना, हुनर बस यही है। आठ लाख कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। जल्दी उनके वेतन में बड़ी वृद्धि देखी जाएगी। दरअसल सरकार द्वारा दस साल के बाद भत्ते को बढ़ाने की तैयारी की गई है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। बड़ी संख्या में प्रशासनिक दृष्टिकोण के मद्देनजर अधिकारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। उन्हें जल्द से जल्द पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सभी तबादले रिक्ति के सापेक्ष में हुए हैं। प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक बार फिर से अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। तत्काल प्रभाव से उन्हें नवीन स्थान पर पहुंचना अनिवार्य किया गया है। OROP को लेकर मंत्रालय द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। इसके तहत संशोधित वन रैंक वन पेंशन का लाभ मिलेगा। इसकी सूची जारी की गई है। इसके अलावा LTA को लेकर भी नवीन दिशा-निर्देश जारी किए गए। राशन कार्ड धारकों को राशन का लाभ मिलेगा। इसके लिए सरकार द्वारा तैयारी की गई है। वहीं कई अन्य तरह की सुविधा भी राशन कार्ड धारकों को उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। प्रशासनिक दृष्टिकोण से उन्हें नवीन पदस्थापना सौंपी गई है। अस्थाई रूप से उन्हें तत्काल प्रभाव से पदभार ग्रहण करना होगा। कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द उन्हें वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए राशि आवंटित कर दी गई है। साथ ही वेतन मानदेय भुगतान के लिए निर्देश भी जारी किए गए हैं। कर्मचारियों के खाते में राशि बढ़कर देखी जाएगी।
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कांग्रेस ने कर्नाटक में अपने घोषणापत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने का एलान क्या किया, बीजेपी ने राज्य विधानसभा चुनाव को पूरी तरह बजरंगबली मय कर दिया है। हर तरफ बीजेपी बस बजरंगबली का नाम ले रही है। इसका बड़ा फायदा उठाने की ताक में बीजेपी पूरी तरह लग गई है और कांग्रेस को निशाना बना रही है।
Pakistan: पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा साझा किए गए पोस्ट में भगवान हनुमान के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी लिखी हुई थी। पोस्ट में लिखा हुआ था कि "कैप्टन श्री राम पार्क वाले। " जिसे देखकर हिंदू समुदाय के लोगों का रोष अपने चरम पर पहुंच चुका था। वहीं, पुलिस को मामले की शिकायत देने के बाद अब आरोपी पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
Vaisakh Purnima 2022: इस दिन देव वृक्ष यानी पीपल के पेड़ की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ को त्रिदेव का वास माना जाता है इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन अगर पीपल से जुड़े उपाय किए जाते हैं, तो भगवान विष्णु की खास कृपा प्राप्त होती है।
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कांग्रेस ने कर्नाटक में अपने घोषणापत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने का एलान क्या किया, बीजेपी ने राज्य विधानसभा चुनाव को पूरी तरह बजरंगबली मय कर दिया है। हर तरफ बीजेपी बस बजरंगबली का नाम ले रही है। इसका बड़ा फायदा उठाने की ताक में बीजेपी पूरी तरह लग गई है और कांग्रेस को निशाना बना रही है। Pakistan: पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा साझा किए गए पोस्ट में भगवान हनुमान के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी लिखी हुई थी। पोस्ट में लिखा हुआ था कि "कैप्टन श्री राम पार्क वाले। " जिसे देखकर हिंदू समुदाय के लोगों का रोष अपने चरम पर पहुंच चुका था। वहीं, पुलिस को मामले की शिकायत देने के बाद अब आरोपी पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है। Vaisakh Purnima दो हज़ार बाईस: इस दिन देव वृक्ष यानी पीपल के पेड़ की पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ को त्रिदेव का वास माना जाता है इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन अगर पीपल से जुड़े उपाय किए जाते हैं, तो भगवान विष्णु की खास कृपा प्राप्त होती है।
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पारंपरिक धान-गेहूं फसल प्रणाली की जगह फसल विविधीकरण को अपनाकर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अधिक दोहन को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही साथ इससे आमदनी में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में संभावित विकल्प के रूप में मक्का-सरसों-मूंग एवं मक्का-गेहूं-मूंग फसल प्रणाली से उत्पादन की लागत में 15-25 प्रतिशत की कमी एवं 20-35 प्रतिशत कुल आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इस प्रणाली से 65 से 70 प्रतिशत सिंचाई जल की बचत भी कर सकते हैं। फसल विविधीकरण से कार्बन का संचय एवं मृदा की उर्वराशक्ति बनी रहती है। इससे फसल से संबंधित कीटों एवं रोगों के रोगजनक प्रभाव को नियोजित किया जा सकता है।
सिंधु-गंगा के उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में धान-गेहूं फसल प)ति एक प्रमुख फसल प्रणाली है। यह लगभग 10.3 मिलियन हैक्टर में फैली हुई है। भारत के कुल खाद्यान्न का लगभग 30 प्रतिशत अनाज इसी क्षेत्र की धान-गेहूं फसल प्रणाली से आता है। निरंतर घटते कृषि संसाधनों एवं जलवायु परिवर्तन की स्थिति में बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्य मांग के लक्ष्य को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। देश में बढ़ती कृषि लागत, श्रम, ऊर्जा और जल की कमी के साथ ही साथ खाद्य उत्पादों के मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, मौसमी और कम समय के लिए मूल्य वृद्धि और अनियमित मानसून को देखते हुए कृषि क्षेत्र में शामिल सभी हितधारकों के लिए यह एक कठिन चुनौती है। पारंपरिक धान की खेती में ज्यादा संसाधनों (पानी, श्रम तथा ऊर्जा) की आवश्यकता होती है। सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्रों में इन सभी संसाधनों की लगातार हो रही कमी के कारण धान का उत्पादन पहले की तुलना में कम लाभप्रद हो गया है।
पारंपरिक धान-गेहूं प्रणाली की जगह किसान विभिन्न फसल प्रणाली विकल्प अपना सकते हैं, जो इस प्रकार हैंः
लगातार एक ही फसल प्रणाली अपनाने से विभिन्न आदानों जैसे-उर्वरक, पीड़कनाशी आदि की दक्षता में कमी आ रही है। इसके कारण प्रति इकाई उत्पादन के लिए आदानों की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही गेहूं की बुआई के समय पर पंजाब व हरियाणा राज्यों में धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों को खेत में जला दिया जाता है। इससे काफी मात्रा में वायु प्रदूषण के साथ-साथ मृदा से पोषक तत्वों की हानि होती है एवं बहुत सारे लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान होता है। अतः सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में फसल विविधीकरण को अपनाकर इसे अधिक लाभकारी व टिकाऊ बनाने की आवश्यकता है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग समय, स्थिति एवं प्रवृति के अनुरूप किया जा सके।
कृषि के सतत् सघनीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विकल्पों जैसे संरक्षित खेती आधारित फसल प्रबंधन, फसल विविधीकरण, दलहनी फसलों को रिले एवं अंतर्वतीय फसल के रूप में शामिल करने, समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने आदि तकनीकियों पर प्रचार व प्रसार की नितांत आवश्यकता है। मौजूदा कृषि प्रणालियों में उभरती चुनौतियों एवं खाद्यान्नों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कृषि प्रणालियों में विविधीकरण को अहम् भूमिका अदा करनी होगी।
धान गेहूं फसल प्रणाली की टिकाऊ गहनता को मापने के लिए फसल विविधीकरण प्रणाली अपनायी जा रही है। इसमें जुताई, फसल स्थापना के तरीके (परमानेंट बेड, शून्य जुताई), फसल अवशेष प्रबंधन, सिंचाई विधि और फसल प्रबंधन के तरीकों के आधार पर अलग-अलग परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया। चावल-गेहूं फसल प्रणाली की विविधता के उद्देश्य से चार प्रमुख गैर-धान फसल प्रणालियों, नामतः मक्का-गेहूं-मूंग, मक्का-सरसों-मूंग, सोयाबीन-गेहूं-मूंग एवं अरहर-गेहूं-मूंग का मूल्यांकन संरक्षण कृषि विधियों को अपनाते हुए एक प्रयोग में किया गया। इस अध्ययन का परिणाम सारणी-1 में दिया गया है।
संरक्षण कृषि आधारित फसल विविधीकरण अनुसंधान (सारणी-1) के परिणामों से ज्ञात होता है किक्र.सं. 1 की तुलना में क्र.सं. 2, 3, एवं 4 में प्रणाली उत्पादकता (धान समतुल्य) में 6-27 प्रितशत एवं लाभ में 10-35 प्रितशत तक की बढ़ोतरी के साथ-साथ 7-79 प्रतिशत सिंचाई जल में बचत आंकी गयी। क्र.सं. 5 एवं 6 में उपज तो परपंरागत धान-गेहूँ फसल प्रणाली के समानांतर प्राप्त हुई, लेकिन सिंचाई जल में 67-68 प्रतिशत की बचत एवं आय में वृद्धि 3-5 प्रतिशत की आंकी गयी। उपरोक्त क्रमांकों में क्र.सं. 3 में क्र.सं. 1 की तुलना में उत्पादकता (धान समतुल्य) में 28 प्रतिशत एवं शुद्ध लाभ में 35 प्रतिशत तक की वृद्धि के साथ-साथ 79 प्रतिशत सिंचाई जल में बचत पायी गयी। परंपरागत खेती आधारित धान-गेहूं फसल प्रणाली की तलुना में मक्का-सरसों-मूंग फसल प्रणाली से उत्पादन की लागत में 15-25 प्रितशत की कमी एवं 20-35 प्रतिशत की कुल आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।इसके साथ-साथ 65 से 70 प्रतिशत सिंचाई जल की बचत भी कर सकते हैं। इस प्रकार गिरते भू जलस्तर को रोका जा सकता है।
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान के बाद लगभग 95 प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूं की खेती की जाती है। धान और गेहूं की लगातार खेती से बहुत सी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसमें भूमिगत जल प्रतिवर्ष 0.1 से 1 मीटर तक नीचे जा रहा है, जो कि आने वाले समय में एक बड़ा संकट है।
धान व गेहूं दोनों ही अदलहनी फसलें है। इनकी पोषक तत्व मांग भी अधिक है। इस पद्धति के लगातार अपनाने से बहुत सारे प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी मृदा में होती जा रही है। इसके साथ ही कार्बनिक पदार्थ की कमी व मृदा से पोषक तत्वों का निक्षालन होने से मृदा उर्वरता में भी कमी आ रही है।
लगातार एक ही प्रकार की फसल उगाने से विभिन्न आदानों/संसाधनों जैसे-उर्वरक, पीड़कनाशी आदि की दक्षता में कमी आ रही है, जिसके कारण प्रति इकाई उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है।
पंजाब व हरियाणा राज्यों में धान की कटाई के बाद फसल अवशेष को खेत में जला दिया जाता है। इससे काफी मात्रा में वायु प्रदूषण के साथ-साथ मृदा में उपस्थित पोषक तत्वों की हानि होती है। धान के खेत से जलमग्न दशा में मीथेन गैस निकलती है, जिसका वैश्विक तापमान बढ़ाने में प्रमुख योगदान है।
स्त्रोतः खेती पत्रिका(आईसीएआर) मनोज कुमार गोरा, मधु चौधरी, असीम दत्ता, सुरेश कुमार ककरालियां और एच.एस. जाट, भाकृअनुप-केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल (हरियाणा)
( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
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विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। पारंपरिक धान-गेहूं फसल प्रणाली की जगह फसल विविधीकरण को अपनाकर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अधिक दोहन को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही साथ इससे आमदनी में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में संभावित विकल्प के रूप में मक्का-सरसों-मूंग एवं मक्का-गेहूं-मूंग फसल प्रणाली से उत्पादन की लागत में पंद्रह-पच्चीस प्रतिशत की कमी एवं बीस-पैंतीस प्रतिशत कुल आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इस प्रणाली से पैंसठ से सत्तर प्रतिशत सिंचाई जल की बचत भी कर सकते हैं। फसल विविधीकरण से कार्बन का संचय एवं मृदा की उर्वराशक्ति बनी रहती है। इससे फसल से संबंधित कीटों एवं रोगों के रोगजनक प्रभाव को नियोजित किया जा सकता है। सिंधु-गंगा के उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में धान-गेहूं फसल प)ति एक प्रमुख फसल प्रणाली है। यह लगभग दस.तीन मिलियन हैक्टर में फैली हुई है। भारत के कुल खाद्यान्न का लगभग तीस प्रतिशत अनाज इसी क्षेत्र की धान-गेहूं फसल प्रणाली से आता है। निरंतर घटते कृषि संसाधनों एवं जलवायु परिवर्तन की स्थिति में बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्य मांग के लक्ष्य को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। भारत सरकार द्वारा वर्ष दो हज़ार बाईस तक देश के किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। देश में बढ़ती कृषि लागत, श्रम, ऊर्जा और जल की कमी के साथ ही साथ खाद्य उत्पादों के मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, मौसमी और कम समय के लिए मूल्य वृद्धि और अनियमित मानसून को देखते हुए कृषि क्षेत्र में शामिल सभी हितधारकों के लिए यह एक कठिन चुनौती है। पारंपरिक धान की खेती में ज्यादा संसाधनों की आवश्यकता होती है। सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्रों में इन सभी संसाधनों की लगातार हो रही कमी के कारण धान का उत्पादन पहले की तुलना में कम लाभप्रद हो गया है। पारंपरिक धान-गेहूं प्रणाली की जगह किसान विभिन्न फसल प्रणाली विकल्प अपना सकते हैं, जो इस प्रकार हैंः लगातार एक ही फसल प्रणाली अपनाने से विभिन्न आदानों जैसे-उर्वरक, पीड़कनाशी आदि की दक्षता में कमी आ रही है। इसके कारण प्रति इकाई उत्पादन के लिए आदानों की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही गेहूं की बुआई के समय पर पंजाब व हरियाणा राज्यों में धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों को खेत में जला दिया जाता है। इससे काफी मात्रा में वायु प्रदूषण के साथ-साथ मृदा से पोषक तत्वों की हानि होती है एवं बहुत सारे लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान होता है। अतः सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में फसल विविधीकरण को अपनाकर इसे अधिक लाभकारी व टिकाऊ बनाने की आवश्यकता है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग समय, स्थिति एवं प्रवृति के अनुरूप किया जा सके। कृषि के सतत् सघनीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विकल्पों जैसे संरक्षित खेती आधारित फसल प्रबंधन, फसल विविधीकरण, दलहनी फसलों को रिले एवं अंतर्वतीय फसल के रूप में शामिल करने, समन्वित कृषि प्रणाली अपनाने आदि तकनीकियों पर प्रचार व प्रसार की नितांत आवश्यकता है। मौजूदा कृषि प्रणालियों में उभरती चुनौतियों एवं खाद्यान्नों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कृषि प्रणालियों में विविधीकरण को अहम् भूमिका अदा करनी होगी। धान गेहूं फसल प्रणाली की टिकाऊ गहनता को मापने के लिए फसल विविधीकरण प्रणाली अपनायी जा रही है। इसमें जुताई, फसल स्थापना के तरीके , फसल अवशेष प्रबंधन, सिंचाई विधि और फसल प्रबंधन के तरीकों के आधार पर अलग-अलग परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया। चावल-गेहूं फसल प्रणाली की विविधता के उद्देश्य से चार प्रमुख गैर-धान फसल प्रणालियों, नामतः मक्का-गेहूं-मूंग, मक्का-सरसों-मूंग, सोयाबीन-गेहूं-मूंग एवं अरहर-गेहूं-मूंग का मूल्यांकन संरक्षण कृषि विधियों को अपनाते हुए एक प्रयोग में किया गया। इस अध्ययन का परिणाम सारणी-एक में दिया गया है। संरक्षण कृषि आधारित फसल विविधीकरण अनुसंधान के परिणामों से ज्ञात होता है किक्र.सं. एक की तुलना में क्र.सं. दो, तीन, एवं चार में प्रणाली उत्पादकता में छः-सत्ताईस प्रितशत एवं लाभ में दस-पैंतीस प्रितशत तक की बढ़ोतरी के साथ-साथ सात-उन्यासी प्रतिशत सिंचाई जल में बचत आंकी गयी। क्र.सं. पाँच एवं छः में उपज तो परपंरागत धान-गेहूँ फसल प्रणाली के समानांतर प्राप्त हुई, लेकिन सिंचाई जल में सरसठ-अड़सठ प्रतिशत की बचत एवं आय में वृद्धि तीन-पाँच प्रतिशत की आंकी गयी। उपरोक्त क्रमांकों में क्र.सं. तीन में क्र.सं. एक की तुलना में उत्पादकता में अट्ठाईस प्रतिशत एवं शुद्ध लाभ में पैंतीस प्रतिशत तक की वृद्धि के साथ-साथ उन्यासी प्रतिशत सिंचाई जल में बचत पायी गयी। परंपरागत खेती आधारित धान-गेहूं फसल प्रणाली की तलुना में मक्का-सरसों-मूंग फसल प्रणाली से उत्पादन की लागत में पंद्रह-पच्चीस प्रितशत की कमी एवं बीस-पैंतीस प्रतिशत की कुल आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।इसके साथ-साथ पैंसठ से सत्तर प्रतिशत सिंचाई जल की बचत भी कर सकते हैं। इस प्रकार गिरते भू जलस्तर को रोका जा सकता है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान के बाद लगभग पचानवे प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूं की खेती की जाती है। धान और गेहूं की लगातार खेती से बहुत सी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसमें भूमिगत जल प्रतिवर्ष शून्य.एक से एक मीटर तक नीचे जा रहा है, जो कि आने वाले समय में एक बड़ा संकट है। धान व गेहूं दोनों ही अदलहनी फसलें है। इनकी पोषक तत्व मांग भी अधिक है। इस पद्धति के लगातार अपनाने से बहुत सारे प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी मृदा में होती जा रही है। इसके साथ ही कार्बनिक पदार्थ की कमी व मृदा से पोषक तत्वों का निक्षालन होने से मृदा उर्वरता में भी कमी आ रही है। लगातार एक ही प्रकार की फसल उगाने से विभिन्न आदानों/संसाधनों जैसे-उर्वरक, पीड़कनाशी आदि की दक्षता में कमी आ रही है, जिसके कारण प्रति इकाई उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। पंजाब व हरियाणा राज्यों में धान की कटाई के बाद फसल अवशेष को खेत में जला दिया जाता है। इससे काफी मात्रा में वायु प्रदूषण के साथ-साथ मृदा में उपस्थित पोषक तत्वों की हानि होती है। धान के खेत से जलमग्न दशा में मीथेन गैस निकलती है, जिसका वैश्विक तापमान बढ़ाने में प्रमुख योगदान है। स्त्रोतः खेती पत्रिका मनोज कुमार गोरा, मधु चौधरी, असीम दत्ता, सुरेश कुमार ककरालियां और एच.एस. जाट, भाकृअनुप-केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल
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नई दिल्लीः विधि आयोग ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) को "शासन का अंग" बताते हुए बीते 18 अप्रैल को सिफारिश की कि क्रिकेट बोर्ड को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि यह लोक प्राधिकार की परिभाषा में आता है और यह सार्वजनिक जांच से बच नहीं सकता। आयोग ने सिफारिश की है कि बीसीसीआई को "निजी संस्था" माना जाता है, लेकिन इसे जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि इसे "हजारों करोड़ों रुपयों" की कर छूट और भूमि अनुदानों के रूप में सरकारों से "अच्छा खासा वित्तीय लाभ" मिला है। उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2016 में आयोग से इस बारे में सिफारिश करने के लिये कहा था कि क्रिकेट बोर्ड को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जा सकता है या नहीं। पारदर्शिता लाने के लिए मालामाल क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के तहत लाने की लंबे वक्त से मांग होती रही है। विधि मंत्रालय को बुधवार (18 अप्रैल) को सौंपी गई रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा है कि बीसीसीआई को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ' शासन ' की परिभाषा के तहत लाया जाना चाहिए।
आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि बीसीसीआई के कामकाज का विश्लेषण भी दिखाता है कि सरकार का उसके क्रियाकलापों तथा कामकाज पर नियंत्रण है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की विदेश नीति के अनुरूप बीसीसीआई दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी परंपराओं के कारण इस देश के किसी खिलाड़ी को मान्यता नहीं देता और तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों को सरकार की मंजूरी की अनुमति होती है, ये स्थितियां बीसीसीआई को "शासन का अंग" बनाती हैं।
वहीँ बीसीसीआई ने कहा कि विधि आयोग का निष्कर्ष केवल सिफारिशें हैं, उन्होंने कहा कि वह इस मामले में सरकार के फैसले का इंतजार करेंगे। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "बीसीसीआई की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है, यह विधि आयोग की सिफारिश है और हम इस पर सरकार के फैसले का इंतजार करेंगे। जहां तक हमारी जानकारी है, विधि आयोग की सिफारिशें तब तक बाध्यकारी नहीं हैं जब तक संसद इस पर कोई फैसला न करे, इसलिए हमारे लिए यह इंतजार करो और देखो वाली स्थिति है।
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नई दिल्लीः विधि आयोग ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड को "शासन का अंग" बताते हुए बीते अट्ठारह अप्रैल को सिफारिश की कि क्रिकेट बोर्ड को सूचना का अधिकार कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि यह लोक प्राधिकार की परिभाषा में आता है और यह सार्वजनिक जांच से बच नहीं सकता। आयोग ने सिफारिश की है कि बीसीसीआई को "निजी संस्था" माना जाता है, लेकिन इसे जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि इसे "हजारों करोड़ों रुपयों" की कर छूट और भूमि अनुदानों के रूप में सरकारों से "अच्छा खासा वित्तीय लाभ" मिला है। उच्चतम न्यायालय ने जुलाई दो हज़ार सोलह में आयोग से इस बारे में सिफारिश करने के लिये कहा था कि क्रिकेट बोर्ड को सूचना का अधिकार कानून के तहत लाया जा सकता है या नहीं। पारदर्शिता लाने के लिए मालामाल क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के तहत लाने की लंबे वक्त से मांग होती रही है। विधि मंत्रालय को बुधवार को सौंपी गई रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा है कि बीसीसीआई को संविधान के अनुच्छेद बारह के तहत ' शासन ' की परिभाषा के तहत लाया जाना चाहिए। आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि बीसीसीआई के कामकाज का विश्लेषण भी दिखाता है कि सरकार का उसके क्रियाकलापों तथा कामकाज पर नियंत्रण है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की विदेश नीति के अनुरूप बीसीसीआई दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी परंपराओं के कारण इस देश के किसी खिलाड़ी को मान्यता नहीं देता और तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों को सरकार की मंजूरी की अनुमति होती है, ये स्थितियां बीसीसीआई को "शासन का अंग" बनाती हैं। वहीँ बीसीसीआई ने कहा कि विधि आयोग का निष्कर्ष केवल सिफारिशें हैं, उन्होंने कहा कि वह इस मामले में सरकार के फैसले का इंतजार करेंगे। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "बीसीसीआई की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है, यह विधि आयोग की सिफारिश है और हम इस पर सरकार के फैसले का इंतजार करेंगे। जहां तक हमारी जानकारी है, विधि आयोग की सिफारिशें तब तक बाध्यकारी नहीं हैं जब तक संसद इस पर कोई फैसला न करे, इसलिए हमारे लिए यह इंतजार करो और देखो वाली स्थिति है।
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चीन की राजधानी बीजिंग के एक वाल्डलाइफ पार्क में 24 जुलाई को एक दर्दनाक हादसा हुआ है। चीनी मीडिया के अनुसार पार्क में एक कार से बाहर निकली महिला पर एक बाघ ने हमला कर दिया। इस हमले में यह महिला पूरी तरह घायल हो गई। जब इस महिला को बचाने दूसरी महिला कार से बाहर निकली तो उस पर भी एक दूसरे बाघ ने हमला कर दिया जिसमें उसकी मौत हो गई। पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई।
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चीन की राजधानी बीजिंग के एक वाल्डलाइफ पार्क में चौबीस जुलाई को एक दर्दनाक हादसा हुआ है। चीनी मीडिया के अनुसार पार्क में एक कार से बाहर निकली महिला पर एक बाघ ने हमला कर दिया। इस हमले में यह महिला पूरी तरह घायल हो गई। जब इस महिला को बचाने दूसरी महिला कार से बाहर निकली तो उस पर भी एक दूसरे बाघ ने हमला कर दिया जिसमें उसकी मौत हो गई। पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई।
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"सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के समानांतर मजबूती के साथ शांतिपूर्ण स्थिति",कीव योजना का सार समझाया, अधिकृत क्षेत्रों वादिम चेर्निश के लिए मंत्री।
उन्होंने इस तथ्य का हवाला देते हुए विवरण साझा करने से इनकार कर दिया कि योजना अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है।
इससे पहले, मंत्रालय ने "डॉनबास के लिए रणनीतिक योजना" के विकास की घोषणा की। वह कथित तौर पर मानता है, "अन्य, अनियंत्रित प्रदेशों के साथ व्यापार को फिर से शुरू करना", क्योंकि "डोनबास समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है। "
जैसा कि राष्ट्रपति पोरोशेंको ने हाल ही में कहा, "इन मुद्दों को विशेष रूप से कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। "
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"सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के समानांतर मजबूती के साथ शांतिपूर्ण स्थिति",कीव योजना का सार समझाया, अधिकृत क्षेत्रों वादिम चेर्निश के लिए मंत्री। उन्होंने इस तथ्य का हवाला देते हुए विवरण साझा करने से इनकार कर दिया कि योजना अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। इससे पहले, मंत्रालय ने "डॉनबास के लिए रणनीतिक योजना" के विकास की घोषणा की। वह कथित तौर पर मानता है, "अन्य, अनियंत्रित प्रदेशों के साथ व्यापार को फिर से शुरू करना", क्योंकि "डोनबास समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है। " जैसा कि राष्ट्रपति पोरोशेंको ने हाल ही में कहा, "इन मुद्दों को विशेष रूप से कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। "
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[ घयासीवाँ
जनाईन । यथा च सञ्जयो राज्ञा मन्त्रं रद्दति श्रावितः ॥ ५ ॥ युधिष्ठि रस्य दाशार्ह तच्चापि विदितं तव । यथोक्तः सञ्जयश्चैव तच्च सर्व श्रुतं त्वया ६ पञ्च नस्तात दीयन्तां ग्रामा इति महाद्युते । अविस्थलं वृकस्थलं माकन्द वारणावतम् ।।७।। अवसाने महावाही कंचिदेश पंचमम् । इति दुर्य्यावनो वाच्यः सुहृदधस्य केशव ॥ ८ ॥ न चापि ह्यकरोद्वाक्यं श्रुत्वा कृष्ण सुपोधनः । युधिष्ठिरस्य दाशार्ह श्रीमतः सन्धिमिच्छतः ॥ ९ ॥ अप्रदानेन राज्यस्य यदि कृष्ण सुयोधनः संधिमिच्छेन कर्तव्यन्तत्र गत्वा कथञ्चन ॥ १० ॥ शक्ष्यन्ति हि महावादी पांडवाः सृञ्जयैः सह । धार्त्तराष्ट्रवलं घोरं क्र॰ प्रति समासितुम् ।।११।। न हि साम्ना न दानेन शक्यार्थस्तेषु कश्चन । तस्मात्तेषु न कर्तव्या कृपण ते मधुसूदन ॥ १२ ॥ साम्ना दानेन वा कृष्ण येन शाम्यन्ति शत्रवः । योक्लव्यस्तेषु दण्डः स्याज्जीवितं परिरक्षती ।। १३ ।॥ तस्मातंषु महाइण्ड क्षेत्रपः क्षिप्रमच्युत । त्वया चैत्र महाबाहो पाण्डवैः सह सृञ्जयैः ।।१४।। एमत् समर्थ पार्थानां तव चैत्र यशस्करम् । क्रियआप जानते हैं और राजा धृतराष्ट्रने जो सञ्जयको एकांत में अपना गुप्त विचार सुनाया था उसको भी आप जानते ही हैं, तथा सञ्जयने जो २ यातें कही थीं वह भी सब आपने सुनी ही हैं ॥४-६॥ हे परमकांति चोले महाबाहु केशव! राजा युधिष्ठिरने राजा दुर्योधनसे और उसके सम्बन्धियोंसे यह संदेशा कहलाया है, कि - हे तात ! तुम हमें अविस्थल, वृकस्थल, माकन्दी, वारणावत तथा पाँचसँ चाहे जौन सी एक ग्राम, इसप्रकार पाँच ग्राम इमैं देदो ।।७ ।। ८।। हे कृष्ण ! इस संदेशको कहने पर भी संधि करना चाहने वाले तुहृद् राजा युधि. ठिरकी बातको दुर्योधन नहीं मानेगा ।।९।। और यदि राज्यका भाग घिना दिये वहसन्धि करना चाहता हो तो तहाँ जाकर किसीप्रकार भो सन्धि न करना ।। १० ।। क्योंकि हे महाबाहो ! पांडव इन सृञ्जयोंके साथ मिल कर दुर्योधनकी भयंकर और क्रोधर्मे होकर भरी हुई सेना का नाश कर सकते हैं ॥ ११ ॥ हे मधुसूदन ! साम षा दाम किसी प्रकारसे भी दुर्योधनसे राज्य मिलने की आशा नहीं है, इसलिये तुम उसके ऊपर दयौ न करना ।।१२।। हे कृष्ण ! यदि शत्रु सामसे अथवा दामसे शांत नहीं होय तो अपनी आजीविकाको रक्षा करनेवाला पुरुष ऐसे शत्रुओं के ऊपर दंडसे काम ले ॥ १३॥ है महाभुज केशव ! आपको तो पाण्डव और सृञ्जयोंके साथ में रह कर कौरवोंको शीघ्र ही बड़ा भारी दण्ड देना चहिये ।। १४ ।। हे कृष्ण । इस करने योग्य कामको
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[ घयासीवाँ जनाईन । यथा च सञ्जयो राज्ञा मन्त्रं रद्दति श्रावितः ॥ पाँच ॥ युधिष्ठि रस्य दाशार्ह तच्चापि विदितं तव । यथोक्तः सञ्जयश्चैव तच्च सर्व श्रुतं त्वया छः पञ्च नस्तात दीयन्तां ग्रामा इति महाद्युते । अविस्थलं वृकस्थलं माकन्द वारणावतम् ।।सात।। अवसाने महावाही कंचिदेश पंचमम् । इति दुर्य्यावनो वाच्यः सुहृदधस्य केशव ॥ आठ ॥ न चापि ह्यकरोद्वाक्यं श्रुत्वा कृष्ण सुपोधनः । युधिष्ठिरस्य दाशार्ह श्रीमतः सन्धिमिच्छतः ॥ नौ ॥ अप्रदानेन राज्यस्य यदि कृष्ण सुयोधनः संधिमिच्छेन कर्तव्यन्तत्र गत्वा कथञ्चन ॥ दस ॥ शक्ष्यन्ति हि महावादी पांडवाः सृञ्जयैः सह । धार्त्तराष्ट्रवलं घोरं क्र॰ प्रति समासितुम् ।।ग्यारह।। न हि साम्ना न दानेन शक्यार्थस्तेषु कश्चन । तस्मात्तेषु न कर्तव्या कृपण ते मधुसूदन ॥ बारह ॥ साम्ना दानेन वा कृष्ण येन शाम्यन्ति शत्रवः । योक्लव्यस्तेषु दण्डः स्याज्जीवितं परिरक्षती ।। तेरह ।॥ तस्मातंषु महाइण्ड क्षेत्रपः क्षिप्रमच्युत । त्वया चैत्र महाबाहो पाण्डवैः सह सृञ्जयैः ।।चौदह।। एमत् समर्थ पार्थानां तव चैत्र यशस्करम् । क्रियआप जानते हैं और राजा धृतराष्ट्रने जो सञ्जयको एकांत में अपना गुप्त विचार सुनाया था उसको भी आप जानते ही हैं, तथा सञ्जयने जो दो यातें कही थीं वह भी सब आपने सुनी ही हैं ॥चार-छः॥ हे परमकांति चोले महाबाहु केशव! राजा युधिष्ठिरने राजा दुर्योधनसे और उसके सम्बन्धियोंसे यह संदेशा कहलाया है, कि - हे तात ! तुम हमें अविस्थल, वृकस्थल, माकन्दी, वारणावत तथा पाँचसँ चाहे जौन सी एक ग्राम, इसप्रकार पाँच ग्राम इमैं देदो ।।सात ।। आठ।। हे कृष्ण ! इस संदेशको कहने पर भी संधि करना चाहने वाले तुहृद् राजा युधि. ठिरकी बातको दुर्योधन नहीं मानेगा ।।नौ।। और यदि राज्यका भाग घिना दिये वहसन्धि करना चाहता हो तो तहाँ जाकर किसीप्रकार भो सन्धि न करना ।। दस ।। क्योंकि हे महाबाहो ! पांडव इन सृञ्जयोंके साथ मिल कर दुर्योधनकी भयंकर और क्रोधर्मे होकर भरी हुई सेना का नाश कर सकते हैं ॥ ग्यारह ॥ हे मधुसूदन ! साम षा दाम किसी प्रकारसे भी दुर्योधनसे राज्य मिलने की आशा नहीं है, इसलिये तुम उसके ऊपर दयौ न करना ।।बारह।। हे कृष्ण ! यदि शत्रु सामसे अथवा दामसे शांत नहीं होय तो अपनी आजीविकाको रक्षा करनेवाला पुरुष ऐसे शत्रुओं के ऊपर दंडसे काम ले ॥ तेरह॥ है महाभुज केशव ! आपको तो पाण्डव और सृञ्जयोंके साथ में रह कर कौरवोंको शीघ्र ही बड़ा भारी दण्ड देना चहिये ।। चौदह ।। हे कृष्ण । इस करने योग्य कामको
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Kangana Ranaut: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है, हमेशा अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ा कुछ ना कुछ शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कंगना ने चंद्रमुखी 2 की शूटिंग पूरी करने के बाद सह-कलाकार राघव लॉरेंस के लिए एक नोट भी लिखा है, जिनसे वह काफी ज्यादा प्रेरित हैं।
फिल्म की शूटिंग पूरी होने की जानकारी एक्ट्रेस ने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से दी है, जहां पर उन्होंने अपने सह-कलाकार राघव लॉरेंस के लिए एक नोट भी लिखा। राघव इस फिल्म में कंगना रनौत के साथ मुख्य किरदार में नजर आए थे।
कंगना ने इंस्टाग्राम पर अपनी और लॉरेंस की एक तस्वीर साझा की और लिखा, "मैं आज चंद्रमुखी की अपनी शूटिंग पूरी करने वाली हूं। मुझे कई अद्भुत लोगों को अलविदा कहने में काफी मुश्किल हो रही है, जिनसे मैं इस सेट पर मिली थी। इतना प्यारा क्रू। राघव लॉरेंस सर के साथ मेरी कोई भी तस्वीर नहीं थी, क्योंकि हम हमेशा फिल्मी वेशभूषा में होते थे, इसलिए आज सुबह शूटिंग शुरू होने से पहले मैंने एक तस्वीर के लिए उनसे अनुरोध किया था।"
आगे अभिनेत्री ने लिखा,"मैं सर से बहुत प्रेरित हूं जो लॉरेंस मास्टर के रूप में लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्होंने एक कोरियोग्राफर के रूप में अपना करियर शुरू किया था, वास्तव में एक बैक डांसर के रूप में, लेकिन आज वह न केवल एक ब्लॉकबस्टर फिल्म निर्माता / सुपरस्टार हैं बल्कि एक दयालु और अद्भुत इंसान भी हैं। आपकी दयालु स्वभाव और मेरे जन्मदिन के लिए सभी एडवांस उपहारों के लिए धन्यवाद, सर। आपके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा।"
इस प्यारे से नोट को शेयर करने के बाद कंगना रनौत के सोशल मीडिया पर कई सारे फैंस ने अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दी है। आपको बता दे कि, 'चंद्रमुखी' मलयालम फिल्म 'मणिचित्राथझु' की रीमेक थी। हिंदी में भी इसका रीमेक बनाया गया था, जिसमें अक्षय कुमार नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी।
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Don't Miss! Kangana Ranaut: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है, हमेशा अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ा कुछ ना कुछ शेयर करती रहती हैं। हाल ही में कंगना ने चंद्रमुखी दो की शूटिंग पूरी करने के बाद सह-कलाकार राघव लॉरेंस के लिए एक नोट भी लिखा है, जिनसे वह काफी ज्यादा प्रेरित हैं। फिल्म की शूटिंग पूरी होने की जानकारी एक्ट्रेस ने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से दी है, जहां पर उन्होंने अपने सह-कलाकार राघव लॉरेंस के लिए एक नोट भी लिखा। राघव इस फिल्म में कंगना रनौत के साथ मुख्य किरदार में नजर आए थे। कंगना ने इंस्टाग्राम पर अपनी और लॉरेंस की एक तस्वीर साझा की और लिखा, "मैं आज चंद्रमुखी की अपनी शूटिंग पूरी करने वाली हूं। मुझे कई अद्भुत लोगों को अलविदा कहने में काफी मुश्किल हो रही है, जिनसे मैं इस सेट पर मिली थी। इतना प्यारा क्रू। राघव लॉरेंस सर के साथ मेरी कोई भी तस्वीर नहीं थी, क्योंकि हम हमेशा फिल्मी वेशभूषा में होते थे, इसलिए आज सुबह शूटिंग शुरू होने से पहले मैंने एक तस्वीर के लिए उनसे अनुरोध किया था।" आगे अभिनेत्री ने लिखा,"मैं सर से बहुत प्रेरित हूं जो लॉरेंस मास्टर के रूप में लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्होंने एक कोरियोग्राफर के रूप में अपना करियर शुरू किया था, वास्तव में एक बैक डांसर के रूप में, लेकिन आज वह न केवल एक ब्लॉकबस्टर फिल्म निर्माता / सुपरस्टार हैं बल्कि एक दयालु और अद्भुत इंसान भी हैं। आपकी दयालु स्वभाव और मेरे जन्मदिन के लिए सभी एडवांस उपहारों के लिए धन्यवाद, सर। आपके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा।" इस प्यारे से नोट को शेयर करने के बाद कंगना रनौत के सोशल मीडिया पर कई सारे फैंस ने अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दी है। आपको बता दे कि, 'चंद्रमुखी' मलयालम फिल्म 'मणिचित्राथझु' की रीमेक थी। हिंदी में भी इसका रीमेक बनाया गया था, जिसमें अक्षय कुमार नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी।
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माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी सत्य नडेला का मानना है कि न केवल डिजिटल प्रौद्योगिकी की दिशा में, बल्कि नीति के संबंध में भी योगदान देने में यह भारत का क्षण है। तीन साल के अंतराल के बाद भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए नडेला का कहना है कि इस यात्रा पर उन्हें भारत में जो आत्मविश्वास और जोश दिख रहा है, वह काफी अलग है।
इस यात्रा पर मैंने भारत में जो आत्मविश्वास, ऊर्जा और जोश अनुभव किया है, वह बहुत अलग है। विशेष रूप से दुनिया भर में जो हो रहा है, उस संदर्भ में मैंने पहले भी यह कहा है, भारत में डिजिटल रूप से सार्वजनिक वस्तुओं के साथ जो हो रहा है, वह असाधारण है। मैंने दुनिया में कहीं और ऐसा कुछ कभी नहीं देखा है। डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का निर्माण एक हिस्सा है, लेकिन इस संबंध में लगातार गुणवत्ता स्तर बढ़ाना कि जिससे निजी उद्यम अब भी बड़े स्तर पर मूल्य जोड़ सकते हों, अनुकरणीय है।
इसने डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का एक बेहतरीन चक्र निर्मित किया है, निजी उद्यमों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की अनुमति देकर लगातार गुणवत्ता स्तर उठाता है, जिससे फिर नागरिकों की लेनदेन लागत कम हो जाती है और जिसे सरकारी नीतियों द्वारा और अधिक मजबूत किया जाता है।
मुझे लगता है कि यह भारत का क्षण है। भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ-साथ नीतिगत पक्ष में भी योगदान करने की अगुआई कर रहा है। ऐसी गाथा लिखे जाने की जरूरत है ताकि दुनिया में हर कोई इससे लाभान्वित हो सके। इसके अलावा भारत द्वारा जी20 का नेतृत्व एक महान क्षण है। हम, माइक्रोसॉफ्ट में, स्पष्ट रूप से इसका हिस्सा बनना चाहते हैं।
हम भारत में निर्माण कर रहे हैं। भारत में हमारा दूसरा सबसे बड़ा कर्मचारी आधार है। इससे भी खास बात यह है कि हम भारत में अपनी पूंजी का निवेश कर रहे हैं और डेटा केंद्रों का निर्माण कर रहे हैं। हमारे पास तीन 'डेट रिजन' हैं, चौथा आ रहा है और यह बड़े स्तर वाला निवेश है तथा ये तेजी से बढ़ रहे हैं। अब हम केवल एक सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं हैं।
जब हमारे पास कुछ स्फीतिकारी शक्तियां होती हैं, तो हमें एक विश्वस्तरीय तकनीक की आवश्यकता होती है जो अपस्फीतिकारक शक्ति के रूप में काम कर सके। हर कोई हर अर्थव्यवस्था में लेनदेन की कम लागत, नवीनतम नवाचार चाहता है।
स्पष्ट रूप से कृत्रिम मेधा का भविष्य है। यह एक ऐसा चलन है, जिसके बारे में हम आने वाले वर्षों में बात करेंगे। मेरे लिए बड़ी बात सिर्फ तकनीकी सफलताओं को लेकर नहीं बल्कि इसे लेकर है कि इसे वास्तविक तौर पर कैसे इस्तेमाल किया जाए जिसका व्यापक असर हो। तकनीक के लिए तकनीक का इस्तेमाल अब समाप्त हो गया है। अब इसे सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में उपयोगी बनाए जाने की जरूरत है।
भारत मौजूदा समय में हमारे लिए एक आकर्षक बाजार है। हम ग्राहकों, भागीदारों पर ध्यान केंद्रित कर भारत में डिजाइन तैयार करेंगे और निर्माण भी करेंगे। दरअसल, यदि कोई भारतीय डिजाइन कामयाब होता है तो हमें उसके लिए तकनीकी राह पर मजबती से आगे डटे रहने की जरूरत होगी।
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माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी सत्य नडेला का मानना है कि न केवल डिजिटल प्रौद्योगिकी की दिशा में, बल्कि नीति के संबंध में भी योगदान देने में यह भारत का क्षण है। तीन साल के अंतराल के बाद भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए नडेला का कहना है कि इस यात्रा पर उन्हें भारत में जो आत्मविश्वास और जोश दिख रहा है, वह काफी अलग है। इस यात्रा पर मैंने भारत में जो आत्मविश्वास, ऊर्जा और जोश अनुभव किया है, वह बहुत अलग है। विशेष रूप से दुनिया भर में जो हो रहा है, उस संदर्भ में मैंने पहले भी यह कहा है, भारत में डिजिटल रूप से सार्वजनिक वस्तुओं के साथ जो हो रहा है, वह असाधारण है। मैंने दुनिया में कहीं और ऐसा कुछ कभी नहीं देखा है। डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का निर्माण एक हिस्सा है, लेकिन इस संबंध में लगातार गुणवत्ता स्तर बढ़ाना कि जिससे निजी उद्यम अब भी बड़े स्तर पर मूल्य जोड़ सकते हों, अनुकरणीय है। इसने डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का एक बेहतरीन चक्र निर्मित किया है, निजी उद्यमों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की अनुमति देकर लगातार गुणवत्ता स्तर उठाता है, जिससे फिर नागरिकों की लेनदेन लागत कम हो जाती है और जिसे सरकारी नीतियों द्वारा और अधिक मजबूत किया जाता है। मुझे लगता है कि यह भारत का क्षण है। भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ-साथ नीतिगत पक्ष में भी योगदान करने की अगुआई कर रहा है। ऐसी गाथा लिखे जाने की जरूरत है ताकि दुनिया में हर कोई इससे लाभान्वित हो सके। इसके अलावा भारत द्वारा जीबीस का नेतृत्व एक महान क्षण है। हम, माइक्रोसॉफ्ट में, स्पष्ट रूप से इसका हिस्सा बनना चाहते हैं। हम भारत में निर्माण कर रहे हैं। भारत में हमारा दूसरा सबसे बड़ा कर्मचारी आधार है। इससे भी खास बात यह है कि हम भारत में अपनी पूंजी का निवेश कर रहे हैं और डेटा केंद्रों का निर्माण कर रहे हैं। हमारे पास तीन 'डेट रिजन' हैं, चौथा आ रहा है और यह बड़े स्तर वाला निवेश है तथा ये तेजी से बढ़ रहे हैं। अब हम केवल एक सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं हैं। जब हमारे पास कुछ स्फीतिकारी शक्तियां होती हैं, तो हमें एक विश्वस्तरीय तकनीक की आवश्यकता होती है जो अपस्फीतिकारक शक्ति के रूप में काम कर सके। हर कोई हर अर्थव्यवस्था में लेनदेन की कम लागत, नवीनतम नवाचार चाहता है। स्पष्ट रूप से कृत्रिम मेधा का भविष्य है। यह एक ऐसा चलन है, जिसके बारे में हम आने वाले वर्षों में बात करेंगे। मेरे लिए बड़ी बात सिर्फ तकनीकी सफलताओं को लेकर नहीं बल्कि इसे लेकर है कि इसे वास्तविक तौर पर कैसे इस्तेमाल किया जाए जिसका व्यापक असर हो। तकनीक के लिए तकनीक का इस्तेमाल अब समाप्त हो गया है। अब इसे सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में उपयोगी बनाए जाने की जरूरत है। भारत मौजूदा समय में हमारे लिए एक आकर्षक बाजार है। हम ग्राहकों, भागीदारों पर ध्यान केंद्रित कर भारत में डिजाइन तैयार करेंगे और निर्माण भी करेंगे। दरअसल, यदि कोई भारतीय डिजाइन कामयाब होता है तो हमें उसके लिए तकनीकी राह पर मजबती से आगे डटे रहने की जरूरत होगी।
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रायपुर : राजधानी रायपुर में इन दिनों तुंहर सरकार तुंहर द्वार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत नगर सरकार जनता के घर तक पहुंच रहे है और जनता के समस्याओं का समाधान कर रहे है। इसके साथ ही निगम की सरकार साइकिल से जनता और विभिन्न समाधान शिविरों में जाकर जनता का कुशल क्षेम पूछ रहे है।
इसी कड़ी में शनिवार को डॉ विपिन बिहारी सूर वार्ड व डॉ खूबचंद बघेल वार्ड में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इन दोनों शिविरों में प्राप्त 1629 आवेदनों में से 1151 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। इसमें डॉ विपिन बिहारी सूर वार्ड में 563 एवं डॉ खूबचंद बघेल वार्ड में 588 आवेदन शामिल है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस शिविर के माध्यम से लोगों के आवेदनों के आधार पर 80 नया राशन कार्ड जारी किया गया है। इसके साथ ही 163 श्रमिक कार्ड, 50 नया नल कनेक्शन, 16 वेण्डर कार्ड, 35 नया आधार कार्ड सहित अन्य विभागों के आवेदनों को मौके पर ही निराकरण किया गया।
वहीं दूसरी ओर 35 करदाताओं से 1 लाख 8676 रूपये राजस्व वसूली की गई। इसके साथ ही पेंशन के लिए 34 आवेदन, /डाॅ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 445 आवेदन, लोककर्म विभाग में प्राप्त 27 मांगों को पूरा किया गया। इसके साथ ही 2 लोगों को श्रवण यंत्र एवं 2 लोगों को व्हीलचेयर दिया गया।
इस अवसर पर सभापति प्रमोद दुबे, आयुक्त सौरभ कुमार, रायपुर जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरीेश दुबे, एमआईसी ज्ञानेश शर्मा, श्रीकुमार मेनन, सुन्दर जोगी, सहदेव व्यवहार, जितेन्द्र अग्रवाल, सुरेश चन्नावार, रितेश त्रिपाठी, द्रौपती हेमंत पटेल, जोन अध्यक्ष मन्नू यादव , बंटी होरा, घनश्याम छत्री, मनीराम साहू, पार्षद मीनल छगन चौबे, मनोज वर्मा, अमितेष भारद्धाज, बिरेन्द्र देवांगन, नीलम जगत, शीतल कुलदीप बोगा, सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैया अग्रवाल, अनवर हुसैन, अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू , जोन कमिश्नर लोकेश चंद्रवंशी, चंदन शर्मा, निगम सहित विभिन्न शासकीय विभागों, जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
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रायपुर : राजधानी रायपुर में इन दिनों तुंहर सरकार तुंहर द्वार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत नगर सरकार जनता के घर तक पहुंच रहे है और जनता के समस्याओं का समाधान कर रहे है। इसके साथ ही निगम की सरकार साइकिल से जनता और विभिन्न समाधान शिविरों में जाकर जनता का कुशल क्षेम पूछ रहे है। इसी कड़ी में शनिवार को डॉ विपिन बिहारी सूर वार्ड व डॉ खूबचंद बघेल वार्ड में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इन दोनों शिविरों में प्राप्त एक हज़ार छः सौ उनतीस आवेदनों में से एक हज़ार एक सौ इक्यावन आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। इसमें डॉ विपिन बिहारी सूर वार्ड में पाँच सौ तिरेसठ एवं डॉ खूबचंद बघेल वार्ड में पाँच सौ अठासी आवेदन शामिल है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इस शिविर के माध्यम से लोगों के आवेदनों के आधार पर अस्सी नया राशन कार्ड जारी किया गया है। इसके साथ ही एक सौ तिरेसठ श्रमिक कार्ड, पचास नया नल कनेक्शन, सोलह वेण्डर कार्ड, पैंतीस नया आधार कार्ड सहित अन्य विभागों के आवेदनों को मौके पर ही निराकरण किया गया। वहीं दूसरी ओर पैंतीस करदाताओं से एक लाख आठ हज़ार छः सौ छिहत्तर रूपये राजस्व वसूली की गई। इसके साथ ही पेंशन के लिए चौंतीस आवेदन, /डाॅ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चार सौ पैंतालीस आवेदन, लोककर्म विभाग में प्राप्त सत्ताईस मांगों को पूरा किया गया। इसके साथ ही दो लोगों को श्रवण यंत्र एवं दो लोगों को व्हीलचेयर दिया गया। इस अवसर पर सभापति प्रमोद दुबे, आयुक्त सौरभ कुमार, रायपुर जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरीेश दुबे, एमआईसी ज्ञानेश शर्मा, श्रीकुमार मेनन, सुन्दर जोगी, सहदेव व्यवहार, जितेन्द्र अग्रवाल, सुरेश चन्नावार, रितेश त्रिपाठी, द्रौपती हेमंत पटेल, जोन अध्यक्ष मन्नू यादव , बंटी होरा, घनश्याम छत्री, मनीराम साहू, पार्षद मीनल छगन चौबे, मनोज वर्मा, अमितेष भारद्धाज, बिरेन्द्र देवांगन, नीलम जगत, शीतल कुलदीप बोगा, सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैया अग्रवाल, अनवर हुसैन, अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू , जोन कमिश्नर लोकेश चंद्रवंशी, चंदन शर्मा, निगम सहित विभिन्न शासकीय विभागों, जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
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बुलगारिया की 80 साल की महिला सिबास्का इवानोवा ने तुर्की के पश्चिमोत्तरी प्रांत अदरना में इस्लाम स्वीकार कर लिया।
उनका कहना है कि वह पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद के जीवन का अध्ययन करके इतनी प्रभावित हो गईं कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया।
अदरना के मुफ़्ती अलाउद्दीन बूज़क़ोर्त की निगरानी में आयोजित कार्यक्रम में इवानोवा ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने का एलान किया।
इवानोवा ने इसके साथ ही एलान किया कि उन्होंने अपने लिए फ़ातेमा नाम का चयन किया है। इवानोवा कई साल से पैग़म्बर मुहम्मद और इस्लाम के बारे में सघन अध्ययन कर रही थीं।
कार्यक्रम के अंत में मुफ़्ती ने बुलगारिया की इस महिला को एक क़ुरआन उपहार स्वरूप दिया।
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बुलगारिया की अस्सी साल की महिला सिबास्का इवानोवा ने तुर्की के पश्चिमोत्तरी प्रांत अदरना में इस्लाम स्वीकार कर लिया। उनका कहना है कि वह पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद के जीवन का अध्ययन करके इतनी प्रभावित हो गईं कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया। अदरना के मुफ़्ती अलाउद्दीन बूज़क़ोर्त की निगरानी में आयोजित कार्यक्रम में इवानोवा ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने का एलान किया। इवानोवा ने इसके साथ ही एलान किया कि उन्होंने अपने लिए फ़ातेमा नाम का चयन किया है। इवानोवा कई साल से पैग़म्बर मुहम्मद और इस्लाम के बारे में सघन अध्ययन कर रही थीं। कार्यक्रम के अंत में मुफ़्ती ने बुलगारिया की इस महिला को एक क़ुरआन उपहार स्वरूप दिया। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
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Kasmar (Bokaro) : कसमार प्रखंड के सिंहपुर गांव में बुधवार को सड़क निर्माण को लेकर रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण एजेंसी के अधिकारियों ने किया. गोला प्रखंड के बरलंगा से शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा होते हुए कसमार तक निर्माणाधीन सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के एवज में बुधवार को सिंहपुर गांव के रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण किया गया. सिंहपुर के पंचायत सचिवालय में आयोजित समारोह में स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि घनश्याम महतो समेत अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्य एजेंसी के अधिकारियों की उपस्थिति में गांव के 81 रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण किया.
मौके पर कार्य एजेंसी गंगा कंस्ट्रक्शन के अधिकारी शंभु नारायण सिंह व नरेंद्र पांडेय ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की धारा 37(2) के तहत मुआवजा नोटिस वितरण करने का प्रावधान है. इस नोटिस का मतलब है कि संबंधित लाभुक को मुआवजा भुगतान की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. और वह इस नोटिस के आलोक में मुआवजा प्राप्त करने का हकदार बन चुका है. उन्होंने बताया कि प्रखंड के चौड़ा और भूरसाटांड़ से नोटिस वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई है. बाकी गांवों के लाभुकों के बीच भी मुआवजा नोटिस का वितरण जल्द किया जाएगा. मौके पर कार्य एजेंसी के संजय पांडेय, लखीनाथ मिश्रा के अलावा कई वार्ड सदस्य व ग्रामीण मौजूद थे.
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Kasmar : कसमार प्रखंड के सिंहपुर गांव में बुधवार को सड़क निर्माण को लेकर रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण एजेंसी के अधिकारियों ने किया. गोला प्रखंड के बरलंगा से शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा होते हुए कसमार तक निर्माणाधीन सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के एवज में बुधवार को सिंहपुर गांव के रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण किया गया. सिंहपुर के पंचायत सचिवालय में आयोजित समारोह में स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि घनश्याम महतो समेत अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्य एजेंसी के अधिकारियों की उपस्थिति में गांव के इक्यासी रैयतों के बीच मुआवजा नोटिस का वितरण किया. मौके पर कार्य एजेंसी गंगा कंस्ट्रक्शन के अधिकारी शंभु नारायण सिंह व नरेंद्र पांडेय ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की धारा सैंतीस के तहत मुआवजा नोटिस वितरण करने का प्रावधान है. इस नोटिस का मतलब है कि संबंधित लाभुक को मुआवजा भुगतान की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. और वह इस नोटिस के आलोक में मुआवजा प्राप्त करने का हकदार बन चुका है. उन्होंने बताया कि प्रखंड के चौड़ा और भूरसाटांड़ से नोटिस वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई है. बाकी गांवों के लाभुकों के बीच भी मुआवजा नोटिस का वितरण जल्द किया जाएगा. मौके पर कार्य एजेंसी के संजय पांडेय, लखीनाथ मिश्रा के अलावा कई वार्ड सदस्य व ग्रामीण मौजूद थे.
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LUCKNOW: एक सप्ताह तक नॉन ट्रेडिनशनल बैंड और धूम मचाने वाले नाटकों की सीरीज यानी रेपर्टवा सीजन-7 का ट्यूज्डे को आखिरी दिन था। अंतिम दिन संगीत नाटक अकादमी के मंच पर माइकल मोरिटज के कॉमेडी प्ले 'फायर्ड बाई हेमलेट' का मंचन किया गया। इसमें मशहूर लेखक शेक्सपीयर के नाटक हेमलेट की कॉमेडी की झलक दिखी।
नाटक में एक परिवार जो मुफलिसी के दौर से गुजरता है। फिर भी वह रंगमंच की दुनिया में अपना नाम रोशन करने की चाह रखे हुये है। भूख और गरीबी में चिड़चिड़े हो चुके परिवार के सदस्य कई बार आपस में लड़ते हैं। मगर उनका प्रेम बरकरार रहता है। इसी बीच वे अपने रंगमंच पर एक नाटक की परफार्मेस करते हैं लेकिन दिक्कत तब होती है जब पेंटा माइन का किरदार निभाने के लिए डायरेक्टर बार-बार लोगों को चेंज करता है। इस बीच नाटक में कई दृश्य लोगों को हंसाने का काम करते है। यह नाटक पूरी तरह से हेमलेट पर आधारित नहीं है। मगर कहीं न कहीं इसमें शेक्सपीयर के नाटक हेमलेट की झलक दिखती है। रेपर्टवा के आखिरी दिन आयोजित इस प्ले को लोगों ने काफी सराहा। नाटक के दौरान दर्शकों के ठहाकों से हाल गूंजता रहा। इस नाटक में बश्वत भटट, सनमोनी सरमह, अम्बा सुहासनी, मोहित तिवारी, शिवम प्रधान पूर्णिमा आदि ने अपने किरदारों के जरिये लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
फायर्ड बाई हैमलेट का मंचन करने आये कलाकारों में अश्वत भट्ट ने बताया कि अब दौर बदल चुका है। कॉमेडी क्लीन नहीं रही। क्या कूल हैं हम व मस्ती जैसी कई फिल्मों में डबल मीनिंग का इस्तेमाल होने लगा है। लोग पसंद भी कर रहे हैं। ऐसे में कैसे कहें कि कॉमेडी क्लीन रह गई है। उन्होंने बताया कि मेरी नजर में कॉमेडी एक सीरियस बिजनेस है। उसे लोगों तक पहुंचाना चाहिए लेकिन अब कॉमेडी में वह ह्यूमर नहीं रहा जो दर्शकों को गुदगुदाये। आज अच्छी कॉमेडी के लिए लोगों के पास शब्द ही नहीं हैं।
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LUCKNOW: एक सप्ताह तक नॉन ट्रेडिनशनल बैंड और धूम मचाने वाले नाटकों की सीरीज यानी रेपर्टवा सीजन-सात का ट्यूज्डे को आखिरी दिन था। अंतिम दिन संगीत नाटक अकादमी के मंच पर माइकल मोरिटज के कॉमेडी प्ले 'फायर्ड बाई हेमलेट' का मंचन किया गया। इसमें मशहूर लेखक शेक्सपीयर के नाटक हेमलेट की कॉमेडी की झलक दिखी। नाटक में एक परिवार जो मुफलिसी के दौर से गुजरता है। फिर भी वह रंगमंच की दुनिया में अपना नाम रोशन करने की चाह रखे हुये है। भूख और गरीबी में चिड़चिड़े हो चुके परिवार के सदस्य कई बार आपस में लड़ते हैं। मगर उनका प्रेम बरकरार रहता है। इसी बीच वे अपने रंगमंच पर एक नाटक की परफार्मेस करते हैं लेकिन दिक्कत तब होती है जब पेंटा माइन का किरदार निभाने के लिए डायरेक्टर बार-बार लोगों को चेंज करता है। इस बीच नाटक में कई दृश्य लोगों को हंसाने का काम करते है। यह नाटक पूरी तरह से हेमलेट पर आधारित नहीं है। मगर कहीं न कहीं इसमें शेक्सपीयर के नाटक हेमलेट की झलक दिखती है। रेपर्टवा के आखिरी दिन आयोजित इस प्ले को लोगों ने काफी सराहा। नाटक के दौरान दर्शकों के ठहाकों से हाल गूंजता रहा। इस नाटक में बश्वत भटट, सनमोनी सरमह, अम्बा सुहासनी, मोहित तिवारी, शिवम प्रधान पूर्णिमा आदि ने अपने किरदारों के जरिये लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। फायर्ड बाई हैमलेट का मंचन करने आये कलाकारों में अश्वत भट्ट ने बताया कि अब दौर बदल चुका है। कॉमेडी क्लीन नहीं रही। क्या कूल हैं हम व मस्ती जैसी कई फिल्मों में डबल मीनिंग का इस्तेमाल होने लगा है। लोग पसंद भी कर रहे हैं। ऐसे में कैसे कहें कि कॉमेडी क्लीन रह गई है। उन्होंने बताया कि मेरी नजर में कॉमेडी एक सीरियस बिजनेस है। उसे लोगों तक पहुंचाना चाहिए लेकिन अब कॉमेडी में वह ह्यूमर नहीं रहा जो दर्शकों को गुदगुदाये। आज अच्छी कॉमेडी के लिए लोगों के पास शब्द ही नहीं हैं।
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जग संसै हरण सब महा मोद करण यह छंदन को आभरण कविन कोसो सुमग ॥ इति वृत्ति भे - गद्य पद्य रचना सकल कही स्वमति अनुसार । पिंगल को मत देखिकै नामा छंद विचार ।। सज्जन पर कृत श्रवन लौ देखि स्वमति सुधारि ॥ दुर्जन हठि निन्दा करें विहंसे वदन विदारि ।। संवत् ठारह से असो चैत्र शुक्ल छठि बुद्ध । मृग सिर की रजनीस सुभ भयो ग्रन्थ यह सुद्ध । भद्रनाथ दीक्षित प्रगट वासी बलहुर ग्राम । सुलभ ज्ञान प्रद कविम हित कियो ग्रन्थ सुख धाम ॥ छंद सकल दुइसे अधिक तिरसठि जह निरधारि । ॥ कला वरण युत आभरण कीन्हें ग्रन्थ विचारि ॥ इति श्री भद्रनाथ दीक्षित विरचिते छन्द शिरोमणौ वरण वृत वरणनं तृतीयो प्रकासः समाप्तयो यं ग्रन्थः सुभं भूयात संवत् १८९० माघ सुदी ३ श्री कृष्णाय नमः ।
विषय - इस ग्रन्थ में छन्दों का भेदोपभेद वर्णन है ।
टिप्पणी - इस ग्रन्थ के रचयिता पं० भद्रनाथ दीक्षित जाति के ब्राह्मण, बिल्हौर जिला कानपुर निवासी थे। इनके भाई रुद्रनाथ दीक्षित भी अच्छे कवि हो गये हैं। निर्माण काल संवत् १८८० लिपि काल संवत् १८६० वि० है । उपरोक्त लेख को इस प्रकार वर्णन किया है । संवत् ठारह से असी चैत शुक्ल छठि बुद्ध ॥ मृगसिर की रजनीस सुभ भयो ग्रन्थ यह सुद्ध ।। भद्रनाथ दीक्षित प्रगट वासी वलहुर ग्राम । सुलभ ज्ञान प्रद कविन हित कियो ग्रन्थ सुख धाम ॥
संख्या ३३. श्रावकाचार, रचयिता - भागचंद्र, पत्र - ४०२, आकार -- १३ x ६२ इंच, पक्ति ( प्रति पृष्ठ ) - १२, परिमाण ( अनुष्टुप् ) - ७२३६, रूप - नवीन, लिपि - नागरी, रचनाकाल - सं० १९१२= १८५५ ई०, प्राप्तिस्थान - लाला रिषभदास जैन, ग्राम - महोना, डाकघर - इटौंजा, जिला--लखनऊ ।
आदि - श्री वीतरागाय नमो नमः ॥ अथ श्री श्रावकाचार भाग चन्द्र जी कृत वचनिका सहित लिप्यते ॥ दोहा सिद्धारथ प्रिय कारणी। नंदन वीर जिनेश । शिव कर वंदू अमित गीत । कर्त्ता वृष उपदेश ॥ १ ॥ पंच परमेष्ठी की स्तुति ॥ गीता छन्द ॥ मनुज नाग सुरेन्द्र जाके उपरि छत्र त्रय धरे । कल्यान पंचक मोद माला पाय भव भ्रम तम हरे ।। दर्शन अनंत अनंत ज्ञान अनत सुख वीरज भरे । जय वंत ते अर हंत शिव तिय कंत मो उर संचरे ॥ १ ॥ जिन परम ध्यान कृशानु वान सुतान तुरत जला दये । युत मान जन्म जरा मरण भय त्रिपुर फेर नहीं भये ।। अविचल शिवालय धाम पायो स्वगुण तैं न चलें कदा । ते सिद्ध प्रभु अविरुद्ध मेरे शुद्ध ज्ञान करो सदा ॥ २ ॥ जे पंच विध आचार निर्मंल पंच अनि सु साधते । पुनि द्वादशांग समुद्र अवगाहत सकल भ्रम वाधते ॥ वर सूरि संत महंत विधि गण हरण को अति दक्ष हैं। ते मोक्ष लक्ष्मी देहु हमकौं जहाँ नाहिं विपक्ष हैं ॥ ३ ॥
अंत - ॥ काव्य ॥ यावत्तिष्टति शासनं जिन पतेः पापापहारोद्यतं । यावद्धवं सयते हिमेतर रुचिर्विश्वं तमः शार्वरम् ।। यावद्धारयते महीध धर वचितं वात श्री विष्टपं । ता वच्छास्त्रमिदं करोतु विदुषा मभ्यस्य मानं मुदम् ॥ अर्थ - पाप के हरने में उद्यमी जो जिनराज का मत सो जहाँ ताई तिष्ठ है अर जहाँ साईं सूर्य रात्रि संबंधी सकल अंधकार
को हरे है बहुरि जहाँ ताई पर्वत निकरि जड़ित जो लोक ताहि तीनौं वात वताप धारै है तहाँ ताई यह श्रावकाचार शास्त्र अभ्यास किया संता ज्ञानी जीवन कौं आनंद करहु । ऐसे आचार्य ने आशीर्वाद दिया है । x x x भजू देव सर्वज्ञ अज्ञ जन भ्रम तम नाशक । ध्याऊँ सिद्ध समूह ध्यान जिस स्वपर प्रकाशक ॥ आचारज मुनि राज तने पद वारिज वंदूं । उपाध्याय गुण गाय पाप तरु मूल निकंदूं ।। पुनि सर्व साधु यह लोक मैं तह नित प्रति चितवन करूं । यह मंगल उत्तम शरण लखि वार वार जिन चित धरूं ।
इति श्री आचार्य अमितिगति कृत श्रावकाचार की वचनिका समाप्त भई ।
बिपय - ( १ ) पृ० १ से २० तक - प्रथम परिच्छेद । मंगला चरण । देव वंदना तथा ग्रन्थ प्रतिज्ञा । मनुष्य भव की प्रधानता और उसके कर्तव्य कर्म । ( २ ) पृ० २५ से ४० तक - द्वितीय परिच्छेद । मिथ्यात्व तथा उसके सातों भेदों के स्वरूप मिथ्या दर्शन । मिथ्या ज्ञान वा मिथ्या चरित्र के छः प्रकार के अनाय तन । सभ्यक्त होने का विशेष स्वरूप ।
( ३ ) पृ० ४१ से ७५ तक - तृतीय परिष्द । सम्यग्दर्शन के विषय जीवादिक पदार्थों का वर्णन ( सम्यग्दर्शन के विषय सप्त तत्व के अंक का निरूपण ) ( ४ ) पृ० ७६ से १०९ तक - चतुर्थं परिच्छेद- अन्यमतावलंवियों के एकान्त पक्ष का निराकरण । ( ५ ) पृ० ११० से १४० तक पंचम परिच्छेद । व्रतों का वर्णन मदिरा व मांस का त्याग । रात्रि भोजन का निषेध । ( ६ ) पृ० १४० से १५५ तक - १० १० - द्वादस अणु व्रत ( जीव दया की प्रधानता हिंसा का निषेध तथा अन्य अणु व्रतों का वर्णन ) ( ७ ) पृ० १५६ से १७८ तक - ( स० प० ) व्रतों की महिमा । सत्य अणु व्रत अर्ताचार । अन्य दिग्विरति आदि के अती चार । शल्यनि का निषेध निदानादि वर्णन । जीव कर्म का संबंध । एकादश प्रति मान का वर्णन । ( ८ ) पृ० १७९ से २२५ तक - ( अ० प० ) पट आवश्यकों का ) वर्णन ( ९ ) go २२६ से २५० तक - ( न० प० ) दान पूजा शील तथा उपवास इन चार धर्मों का वर्णन । ( १० ) पृ० २५१ से २७० तक - ( द० प० ) पात्र कुपात्र और अपात्र का वर्णन ( ११ ) १० २७१ से ३०५ तक - ( ग्या० १० ) दोनों का फल कथन । ( १२ ) पृ० ३०५ से ३३० तक - ( वा०प० ) पूजा तथा शील का वर्णन । द्यूतादिक व्यसनों का निषेध । चार प्रकार के व्रतों का वर्णन । ( १३ ) पृ० ३३१ से ३५५ तक ( ते० प० ) महावत भाव । तथा आत्मध्याय भावादि का वर्णन । ३८७ तक - ( चौ० प० ) द्वादश अनुप्रेक्षाओं का वर्णन (१५) पृ० ( प० प० ) ध्यान का सामान्य स्वरूप साध्य तथा साधनादि का वर्णन । टीकाकार का संक्षिप्त परिचयः - गोपाचल के निकट सिंधिया नृपति कटक वर । जैनी जन वहु वसै जहाँ जिन भक्ति भार भर ॥ तिनमें तेरह पंथ गोष्ठि राजत विशिष्ट अति । पार्श्व नाथ जिन धाम रथ्यो जिन सुभ उतंग अति ॥ तहाँ देश वचनिका मय भली भाग चंदा रचना करिय । जय वंत होउ सत संग यह जा प्रसाद बुधि विस्तरिय ॥ x x x साधर्मिन की प्रेरणा वा जिन श्रुत अनुराग । उभय हेतु वस मैं लिष्यो कि मापे अर्थहि त्याग ॥
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जग संसै हरण सब महा मोद करण यह छंदन को आभरण कविन कोसो सुमग ॥ इति वृत्ति भे - गद्य पद्य रचना सकल कही स्वमति अनुसार । पिंगल को मत देखिकै नामा छंद विचार ।। सज्जन पर कृत श्रवन लौ देखि स्वमति सुधारि ॥ दुर्जन हठि निन्दा करें विहंसे वदन विदारि ।। संवत् ठारह से असो चैत्र शुक्ल छठि बुद्ध । मृग सिर की रजनीस सुभ भयो ग्रन्थ यह सुद्ध । भद्रनाथ दीक्षित प्रगट वासी बलहुर ग्राम । सुलभ ज्ञान प्रद कविम हित कियो ग्रन्थ सुख धाम ॥ छंद सकल दुइसे अधिक तिरसठि जह निरधारि । ॥ कला वरण युत आभरण कीन्हें ग्रन्थ विचारि ॥ इति श्री भद्रनाथ दीक्षित विरचिते छन्द शिरोमणौ वरण वृत वरणनं तृतीयो प्रकासः समाप्तयो यं ग्रन्थः सुभं भूयात संवत् एक हज़ार आठ सौ नब्बे माघ सुदी तीन श्री कृष्णाय नमः । विषय - इस ग्रन्थ में छन्दों का भेदोपभेद वर्णन है । टिप्पणी - इस ग्रन्थ के रचयिता पंशून्य भद्रनाथ दीक्षित जाति के ब्राह्मण, बिल्हौर जिला कानपुर निवासी थे। इनके भाई रुद्रनाथ दीक्षित भी अच्छे कवि हो गये हैं। निर्माण काल संवत् एक हज़ार आठ सौ अस्सी लिपि काल संवत् एक हज़ार आठ सौ साठ विशून्य है । उपरोक्त लेख को इस प्रकार वर्णन किया है । संवत् ठारह से असी चैत शुक्ल छठि बुद्ध ॥ मृगसिर की रजनीस सुभ भयो ग्रन्थ यह सुद्ध ।। भद्रनाथ दीक्षित प्रगट वासी वलहुर ग्राम । सुलभ ज्ञान प्रद कविन हित कियो ग्रन्थ सुख धाम ॥ संख्या तैंतीस. श्रावकाचार, रचयिता - भागचंद्र, पत्र - चार सौ दो, आकार -- तेरह x बासठ इंच, पक्ति - बारह, परिमाण - सात हज़ार दो सौ छत्तीस, रूप - नवीन, लिपि - नागरी, रचनाकाल - संशून्य एक हज़ार नौ सौ बारह= एक हज़ार आठ सौ पचपन ईशून्य, प्राप्तिस्थान - लाला रिषभदास जैन, ग्राम - महोना, डाकघर - इटौंजा, जिला--लखनऊ । आदि - श्री वीतरागाय नमो नमः ॥ अथ श्री श्रावकाचार भाग चन्द्र जी कृत वचनिका सहित लिप्यते ॥ दोहा सिद्धारथ प्रिय कारणी। नंदन वीर जिनेश । शिव कर वंदू अमित गीत । कर्त्ता वृष उपदेश ॥ एक ॥ पंच परमेष्ठी की स्तुति ॥ गीता छन्द ॥ मनुज नाग सुरेन्द्र जाके उपरि छत्र त्रय धरे । कल्यान पंचक मोद माला पाय भव भ्रम तम हरे ।। दर्शन अनंत अनंत ज्ञान अनत सुख वीरज भरे । जय वंत ते अर हंत शिव तिय कंत मो उर संचरे ॥ एक ॥ जिन परम ध्यान कृशानु वान सुतान तुरत जला दये । युत मान जन्म जरा मरण भय त्रिपुर फेर नहीं भये ।। अविचल शिवालय धाम पायो स्वगुण तैं न चलें कदा । ते सिद्ध प्रभु अविरुद्ध मेरे शुद्ध ज्ञान करो सदा ॥ दो ॥ जे पंच विध आचार निर्मंल पंच अनि सु साधते । पुनि द्वादशांग समुद्र अवगाहत सकल भ्रम वाधते ॥ वर सूरि संत महंत विधि गण हरण को अति दक्ष हैं। ते मोक्ष लक्ष्मी देहु हमकौं जहाँ नाहिं विपक्ष हैं ॥ तीन ॥ अंत - ॥ काव्य ॥ यावत्तिष्टति शासनं जिन पतेः पापापहारोद्यतं । यावद्धवं सयते हिमेतर रुचिर्विश्वं तमः शार्वरम् ।। यावद्धारयते महीध धर वचितं वात श्री विष्टपं । ता वच्छास्त्रमिदं करोतु विदुषा मभ्यस्य मानं मुदम् ॥ अर्थ - पाप के हरने में उद्यमी जो जिनराज का मत सो जहाँ ताई तिष्ठ है अर जहाँ साईं सूर्य रात्रि संबंधी सकल अंधकार को हरे है बहुरि जहाँ ताई पर्वत निकरि जड़ित जो लोक ताहि तीनौं वात वताप धारै है तहाँ ताई यह श्रावकाचार शास्त्र अभ्यास किया संता ज्ञानी जीवन कौं आनंद करहु । ऐसे आचार्य ने आशीर्वाद दिया है । x x x भजू देव सर्वज्ञ अज्ञ जन भ्रम तम नाशक । ध्याऊँ सिद्ध समूह ध्यान जिस स्वपर प्रकाशक ॥ आचारज मुनि राज तने पद वारिज वंदूं । उपाध्याय गुण गाय पाप तरु मूल निकंदूं ।। पुनि सर्व साधु यह लोक मैं तह नित प्रति चितवन करूं । यह मंगल उत्तम शरण लखि वार वार जिन चित धरूं । इति श्री आचार्य अमितिगति कृत श्रावकाचार की वचनिका समाप्त भई । बिपय - पृशून्य एक से बीस तक - प्रथम परिच्छेद । मंगला चरण । देव वंदना तथा ग्रन्थ प्रतिज्ञा । मनुष्य भव की प्रधानता और उसके कर्तव्य कर्म । पृशून्य पच्चीस से चालीस तक - द्वितीय परिच्छेद । मिथ्यात्व तथा उसके सातों भेदों के स्वरूप मिथ्या दर्शन । मिथ्या ज्ञान वा मिथ्या चरित्र के छः प्रकार के अनाय तन । सभ्यक्त होने का विशेष स्वरूप । पृशून्य इकतालीस से पचहत्तर तक - तृतीय परिष्द । सम्यग्दर्शन के विषय जीवादिक पदार्थों का वर्णन पृशून्य छिहत्तर से एक सौ नौ तक - चतुर्थं परिच्छेद- अन्यमतावलंवियों के एकान्त पक्ष का निराकरण । पृशून्य एक सौ दस से एक सौ चालीस तक पंचम परिच्छेद । व्रतों का वर्णन मदिरा व मांस का त्याग । रात्रि भोजन का निषेध । पृशून्य एक सौ चालीस से एक सौ पचपन तक - दस दस - द्वादस अणु व्रत पृशून्य एक सौ छप्पन से एक सौ अठहत्तर तक - व्रतों की महिमा । सत्य अणु व्रत अर्ताचार । अन्य दिग्विरति आदि के अती चार । शल्यनि का निषेध निदानादि वर्णन । जीव कर्म का संबंध । एकादश प्रति मान का वर्णन । पृशून्य एक सौ उन्यासी से दो सौ पच्चीस तक - पट आवश्यकों का ) वर्णन go दो सौ छब्बीस से दो सौ पचास तक - दान पूजा शील तथा उपवास इन चार धर्मों का वर्णन । पृशून्य दो सौ इक्यावन से दो सौ सत्तर तक - पात्र कुपात्र और अपात्र का वर्णन दस दो सौ इकहत्तर से तीन सौ पाँच तक - दोनों का फल कथन । पृशून्य तीन सौ पाँच से तीन सौ तीस तक - पूजा तथा शील का वर्णन । द्यूतादिक व्यसनों का निषेध । चार प्रकार के व्रतों का वर्णन । पृशून्य तीन सौ इकतीस से तीन सौ पचपन तक महावत भाव । तथा आत्मध्याय भावादि का वर्णन । तीन सौ सत्तासी तक - द्वादश अनुप्रेक्षाओं का वर्णन पृशून्य ध्यान का सामान्य स्वरूप साध्य तथा साधनादि का वर्णन । टीकाकार का संक्षिप्त परिचयः - गोपाचल के निकट सिंधिया नृपति कटक वर । जैनी जन वहु वसै जहाँ जिन भक्ति भार भर ॥ तिनमें तेरह पंथ गोष्ठि राजत विशिष्ट अति । पार्श्व नाथ जिन धाम रथ्यो जिन सुभ उतंग अति ॥ तहाँ देश वचनिका मय भली भाग चंदा रचना करिय । जय वंत होउ सत संग यह जा प्रसाद बुधि विस्तरिय ॥ x x x साधर्मिन की प्रेरणा वा जिन श्रुत अनुराग । उभय हेतु वस मैं लिष्यो कि मापे अर्थहि त्याग ॥
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गोलगप्पे हैं ही ऐसी चीज की इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लॉकडाउन के कारण सभी बाजार बंद हैं, ऐसे में अगर गोलगप्पे खाने का मन है तो इसके लिए आप आराम से घर बैठे गोलगप्पों का आनंद ले सकती हैं। इसके लिए ज्यादा सामान की भी आवश्यकता नहीं। सूजी, पानी, तेल और पुदीना धनिया से आप आसानी से चटपटे पानीपूरी का मजा ले सकते हैं। इसके अलावा आपको जानकर खुशी होगी कि आप इसे बहुत ही कम समय में बना सकते हैं।
पानी पूरी बनाने के लिए सबसे पहले आपको सबसे पहले एक बर्तन में सूजी और तेल को मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। इसके बाद इसमें गुनगुना पानी डालते हुए नरम आटा गूंद लें। अब इसे 20 मिनट तक ढंक कर रख लें। इसके बाद आटा जब फूल जाए तो अपने हाथों में हल्का पानी लगाकर इसे फिर एक बार हल्के हाथों से चकले पर मसलें। अब तेल लगाकर इस आटे को चिकना कर इसकी लोइयां बनाएं। अब इसकी छोटी-छोटी लोईयां बनाकर हल्की आंच में इन्हें तलें। हल्का सुनहरा होने तक इन्हें तले। आप देखेंगे कि ये करारे होंगे। अब इनके लिए पानी बनाने की तैयारी करें।
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गोलगप्पे हैं ही ऐसी चीज की इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। लॉकडाउन के कारण सभी बाजार बंद हैं, ऐसे में अगर गोलगप्पे खाने का मन है तो इसके लिए आप आराम से घर बैठे गोलगप्पों का आनंद ले सकती हैं। इसके लिए ज्यादा सामान की भी आवश्यकता नहीं। सूजी, पानी, तेल और पुदीना धनिया से आप आसानी से चटपटे पानीपूरी का मजा ले सकते हैं। इसके अलावा आपको जानकर खुशी होगी कि आप इसे बहुत ही कम समय में बना सकते हैं। पानी पूरी बनाने के लिए सबसे पहले आपको सबसे पहले एक बर्तन में सूजी और तेल को मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। इसके बाद इसमें गुनगुना पानी डालते हुए नरम आटा गूंद लें। अब इसे बीस मिनट तक ढंक कर रख लें। इसके बाद आटा जब फूल जाए तो अपने हाथों में हल्का पानी लगाकर इसे फिर एक बार हल्के हाथों से चकले पर मसलें। अब तेल लगाकर इस आटे को चिकना कर इसकी लोइयां बनाएं। अब इसकी छोटी-छोटी लोईयां बनाकर हल्की आंच में इन्हें तलें। हल्का सुनहरा होने तक इन्हें तले। आप देखेंगे कि ये करारे होंगे। अब इनके लिए पानी बनाने की तैयारी करें।
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क्लाउस को पिछले साल लिबर्टेरियन ओरिएंटेशन के इस शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान में मानद वरिष्ठ शोधकर्ता का मानद खिताब मिला। वह अक्सर मुख्य वक्ता के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों में बोलते थे।
डेली बीस्ट ने नोट किया कि यूक्रेन में रूसी राजनीति के समर्थन में बड़े हिस्से के कारण क्लॉस को अब सम्मेलनों में आमंत्रित नहीं किया गया था। पूर्व चेक राष्ट्रपति ने पूरे साल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए अपनी सहानुभूति दिखाई है। उदाहरण के लिए, फरवरी में, उन्होंने घोषणा की कि यूक्रेन एक "कृत्रिम शिक्षा" था, और अप्रैल में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें कहा गया था कि क्रीमिया का विनाश एक आवश्यक उपाय था, क्योंकि Yanukovych सरकार ने अशांति के लिए कोई विरोध प्रदान नहीं किया था।
"रूस के खिलाफ अमरीका और यूरोपीय संघ का प्रचार बिल्कुल अपमानजनक है, और मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। अचानक, मुझे पता चलता है, 20 वर्षों में पहली बार, कि मुझे सम्मेलन में मुख्य वक्ता द्वारा आमंत्रित किया गया है, और आयोजकों ने यूरोपीय संघ की मेरी अस्वीकृति के बारे में जाना, समान-लिंग विवाह, यूक्रेनी संकट पर मेरे विचार, और उन्होंने मुझे बतायाः "हमें बहुत खेद है, लेकिन हमें पहले से ही एक और मुख्य वक्ता मिल गया है बहुत बहुत धन्यवाद। " कम्युनिस्ट काल में मेरे साथ ऐसा हुआ था, लेकिन तथाकथित मुक्त यूरोप में नहीं, "क्लॉस ने कम्युनिज्म के पतन की 25 वर्षगांठ पर सम्मेलन में अपना भाषण रद्द करने के बाद उद्धरण दिया। "रूसी में आरटी".
संस्थान का प्रबंधन इस जानकारी पर टिप्पणी नहीं करता है, लेकिन संगठन के एक सूत्र ने कहा कि यह यूक्रेनी घटनाओं पर सटीक रूप से देखने का बिंदु था जिसने क्लॉस का अब वाशिंगटन में स्वागत नहीं किया।
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क्लाउस को पिछले साल लिबर्टेरियन ओरिएंटेशन के इस शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान में मानद वरिष्ठ शोधकर्ता का मानद खिताब मिला। वह अक्सर मुख्य वक्ता के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों में बोलते थे। डेली बीस्ट ने नोट किया कि यूक्रेन में रूसी राजनीति के समर्थन में बड़े हिस्से के कारण क्लॉस को अब सम्मेलनों में आमंत्रित नहीं किया गया था। पूर्व चेक राष्ट्रपति ने पूरे साल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए अपनी सहानुभूति दिखाई है। उदाहरण के लिए, फरवरी में, उन्होंने घोषणा की कि यूक्रेन एक "कृत्रिम शिक्षा" था, और अप्रैल में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें कहा गया था कि क्रीमिया का विनाश एक आवश्यक उपाय था, क्योंकि Yanukovych सरकार ने अशांति के लिए कोई विरोध प्रदान नहीं किया था। "रूस के खिलाफ अमरीका और यूरोपीय संघ का प्रचार बिल्कुल अपमानजनक है, और मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। अचानक, मुझे पता चलता है, बीस वर्षों में पहली बार, कि मुझे सम्मेलन में मुख्य वक्ता द्वारा आमंत्रित किया गया है, और आयोजकों ने यूरोपीय संघ की मेरी अस्वीकृति के बारे में जाना, समान-लिंग विवाह, यूक्रेनी संकट पर मेरे विचार, और उन्होंने मुझे बतायाः "हमें बहुत खेद है, लेकिन हमें पहले से ही एक और मुख्य वक्ता मिल गया है बहुत बहुत धन्यवाद। " कम्युनिस्ट काल में मेरे साथ ऐसा हुआ था, लेकिन तथाकथित मुक्त यूरोप में नहीं, "क्लॉस ने कम्युनिज्म के पतन की पच्चीस वर्षगांठ पर सम्मेलन में अपना भाषण रद्द करने के बाद उद्धरण दिया। "रूसी में आरटी". संस्थान का प्रबंधन इस जानकारी पर टिप्पणी नहीं करता है, लेकिन संगठन के एक सूत्र ने कहा कि यह यूक्रेनी घटनाओं पर सटीक रूप से देखने का बिंदु था जिसने क्लॉस का अब वाशिंगटन में स्वागत नहीं किया।
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इंदौर। तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के लिंबोदी में सोमवार को पिता ने अपने सात साल के बेटे की गला घोटकर हत्या कर दी है। पुलिस के अनुसार शशिकांत ने अपने सात साल के बेटे प्रतीक की गला घोटकर हत्या कर दी है। फिलहाल इसका कारण सामने नहीं आया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। फिलहाल बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार घरेलू विवाद के चलते घटना घटित हुई है। मामले में पुलिस जांच कर रही है।
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इंदौर। तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के लिंबोदी में सोमवार को पिता ने अपने सात साल के बेटे की गला घोटकर हत्या कर दी है। पुलिस के अनुसार शशिकांत ने अपने सात साल के बेटे प्रतीक की गला घोटकर हत्या कर दी है। फिलहाल इसका कारण सामने नहीं आया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। फिलहाल बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार घरेलू विवाद के चलते घटना घटित हुई है। मामले में पुलिस जांच कर रही है।
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भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त पूर्व कमांडर अभिलाष टामी ने समुद्र के रास्ते पुरी दुनिया 236 दिनों में नाप ली। वे इतने दिनों तक लगातार अपनी नाव चलाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय 'गोल्डन ग्लोब रेस' (जीजीआर) शुरू होने के बाद उन्हें चोट भी लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गोल्डन ग्लोब रेस को न सिर्फ दुनिया की सबसे खतरनाक प्रतियोगिता माना जाता है, बल्कि इसकी गिनती सबसे कठिन दौड़ में से एक में भी होती है।
जीजीआर दुनिया भर में नावों की इकलौती नान-स्टाप दौड़ है। 44 वर्षीय कमांडर टामी ने 29 अप्रैल को फ्रांस के लेस सेबल्स डी ओलोंने में दोपहर 1:30 बजे अपनी दौड़ पूरी की। दक्षिण अफ्रीका के नाविक कर्स्टन न्यूसचफर के बाद दौड़ पूरी करने वाले वे दूसरे नंबर के प्रतिभागी रहे। इस दौड़ में 11 देशों के 16 नाविकों हिस्सा लिया था। समुद्र की लहरों से जीत हासिल करने का कारनामा सिर्फ दो नाविकों को ही मिला। बाकी के नाविक किसी न किसी कारण से बीच रास्ते में ही प्रतियोगिता से अलग हो गए थे।
कमांडर अभिलाष को जीजीआर में पांच साल पहले पीठ में गंभीर चोट आई थी। तब उन्होंने स्वस्थ्य होने के बाद खूब मेहनत की और चोट से उबर कर शानदार वापसी की। अभिलाष टामी गोल्डन ग्लोब रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई बन गए हैं। कमांडर टामी की इस उपलब्धि पर नौसेना के प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों ने उनकी सराहना की है और बधाई दी है। नौसेना ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर उनकी उपलब्धि का ब्योरा और तस्वीरें जारी की हैं।
कमांडर अभिलाष 'तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड' के विजेता भी रहे हैं। अभिलाष टामी ने 22 मार्च 2022 को गोल्डन ग्लोब रेस 2022 में हिस्सा लेने की घोषणा की थी। इससे पहले 18 सितंबर 2018 को वह दक्षिणी हिंद महासागर में तूफान में फंस गए थे। तीन नावों में से दो नावें उस तूफान का सामना नहीं कर सकी। जिस नाव में अभिलाष थे, वह नाव बच गई।
अभिलाष इस तूफान में बच तो गए थे लेकिन उन्हें तब कई गंभीर चोटें आई थीं। तब वह आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच आधे रास्ते में फंस गए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए अभियान में उन्हें बचा लिया गया था। उन्हें भारतीय नौसेना एक पोत से लाया गया और भारत में उनकी रीढ़ में टाइटेनियम की छड़ें डाली गईं।
कमांडर अभिलाष टामी की नाव का नाम बायनट है, जो 236 दिनों की यात्रा के बाद शनिवार को फ्रांस के तट पर पहुंची। इस दौड़ के नियमों के मुताबिक, इसमें हिस्सा लेते वक्त प्रतिभागी को सिर्फ 1968 में मौजूद रहे औजारों और तकनीक के इस्तेमाल करने की इजाजत होती है। ऐसे में पुराने उपकरणों के साथ दुनिया का चक्कर लगाना कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त पूर्व कमांडर अभिलाष टामी ने समुद्र के रास्ते पुरी दुनिया दो सौ छत्तीस दिनों में नाप ली। वे इतने दिनों तक लगातार अपनी नाव चलाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय 'गोल्डन ग्लोब रेस' शुरू होने के बाद उन्हें चोट भी लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गोल्डन ग्लोब रेस को न सिर्फ दुनिया की सबसे खतरनाक प्रतियोगिता माना जाता है, बल्कि इसकी गिनती सबसे कठिन दौड़ में से एक में भी होती है। जीजीआर दुनिया भर में नावों की इकलौती नान-स्टाप दौड़ है। चौंतालीस वर्षीय कमांडर टामी ने उनतीस अप्रैल को फ्रांस के लेस सेबल्स डी ओलोंने में दोपहर एक:तीस बजे अपनी दौड़ पूरी की। दक्षिण अफ्रीका के नाविक कर्स्टन न्यूसचफर के बाद दौड़ पूरी करने वाले वे दूसरे नंबर के प्रतिभागी रहे। इस दौड़ में ग्यारह देशों के सोलह नाविकों हिस्सा लिया था। समुद्र की लहरों से जीत हासिल करने का कारनामा सिर्फ दो नाविकों को ही मिला। बाकी के नाविक किसी न किसी कारण से बीच रास्ते में ही प्रतियोगिता से अलग हो गए थे। कमांडर अभिलाष को जीजीआर में पांच साल पहले पीठ में गंभीर चोट आई थी। तब उन्होंने स्वस्थ्य होने के बाद खूब मेहनत की और चोट से उबर कर शानदार वापसी की। अभिलाष टामी गोल्डन ग्लोब रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई बन गए हैं। कमांडर टामी की इस उपलब्धि पर नौसेना के प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों ने उनकी सराहना की है और बधाई दी है। नौसेना ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर उनकी उपलब्धि का ब्योरा और तस्वीरें जारी की हैं। कमांडर अभिलाष 'तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड' के विजेता भी रहे हैं। अभिलाष टामी ने बाईस मार्च दो हज़ार बाईस को गोल्डन ग्लोब रेस दो हज़ार बाईस में हिस्सा लेने की घोषणा की थी। इससे पहले अट्ठारह सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को वह दक्षिणी हिंद महासागर में तूफान में फंस गए थे। तीन नावों में से दो नावें उस तूफान का सामना नहीं कर सकी। जिस नाव में अभिलाष थे, वह नाव बच गई। अभिलाष इस तूफान में बच तो गए थे लेकिन उन्हें तब कई गंभीर चोटें आई थीं। तब वह आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच आधे रास्ते में फंस गए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए गए अभियान में उन्हें बचा लिया गया था। उन्हें भारतीय नौसेना एक पोत से लाया गया और भारत में उनकी रीढ़ में टाइटेनियम की छड़ें डाली गईं। कमांडर अभिलाष टामी की नाव का नाम बायनट है, जो दो सौ छत्तीस दिनों की यात्रा के बाद शनिवार को फ्रांस के तट पर पहुंची। इस दौड़ के नियमों के मुताबिक, इसमें हिस्सा लेते वक्त प्रतिभागी को सिर्फ एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में मौजूद रहे औजारों और तकनीक के इस्तेमाल करने की इजाजत होती है। ऐसे में पुराने उपकरणों के साथ दुनिया का चक्कर लगाना कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जीएसटी की एक दर के विचार को दरकिनार करते हुए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि यह व्यवस्था उन देशों में लागू हो सकती है जहां पूरी आबादी की व्यय क्षमता एक जैसी और बेहतर हो. जीएसटी के एक वर्ष पूरा होने पर जेटली ने 'जीएसटी का अनुभव'नाम से एक लेख में लिखा है कि जब इससे प्राप्त होने वाला राजस्व स्थिर हो जाएगा तो जीएसटी परिषद इसकी दरों को तर्कसंगत बनाने के विकल्पों पर गौर करेगी.
उन्होंने कहा कि जीएसटी में गरीबों को एक उचित राहत दी गई है. इसमें अधिकतर खाद्य वस्तुओं, कृषि उत्पादों और आम आदमी के उपयोग की वस्तुओं पर कर की दर शून्य रखी गई है जबकि अन्य पर कर की दर सामान्य है. जेटली ने कहा, 'अन्य पर अधिक कर लगाया जा सकता है. जैसे-जैसे कर संग्रहण बढ़ेगा, 28% कर दर वाली सूची की वस्तुओं को कम किया जा सकता है. केवल अहितकर उत्पाद और लक्जरी वस्तुओं को ही इसमें रखा जा सकता है. वहीं संग्रहण ठीक रहने के आधार पर बीच की कर दरों की सूची में भी सामान को कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि हर व्यवस्था में हमेशा बेहतरी की उम्मीद रहती है. भविष्य में कर दरों के ढांचे को तर्कसंगत और सरल बनाया जा सकता है और अधिक उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है.
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जीएसटी की एक दर के विचार को दरकिनार करते हुए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि यह व्यवस्था उन देशों में लागू हो सकती है जहां पूरी आबादी की व्यय क्षमता एक जैसी और बेहतर हो. जीएसटी के एक वर्ष पूरा होने पर जेटली ने 'जीएसटी का अनुभव'नाम से एक लेख में लिखा है कि जब इससे प्राप्त होने वाला राजस्व स्थिर हो जाएगा तो जीएसटी परिषद इसकी दरों को तर्कसंगत बनाने के विकल्पों पर गौर करेगी. उन्होंने कहा कि जीएसटी में गरीबों को एक उचित राहत दी गई है. इसमें अधिकतर खाद्य वस्तुओं, कृषि उत्पादों और आम आदमी के उपयोग की वस्तुओं पर कर की दर शून्य रखी गई है जबकि अन्य पर कर की दर सामान्य है. जेटली ने कहा, 'अन्य पर अधिक कर लगाया जा सकता है. जैसे-जैसे कर संग्रहण बढ़ेगा, अट्ठाईस% कर दर वाली सूची की वस्तुओं को कम किया जा सकता है. केवल अहितकर उत्पाद और लक्जरी वस्तुओं को ही इसमें रखा जा सकता है. वहीं संग्रहण ठीक रहने के आधार पर बीच की कर दरों की सूची में भी सामान को कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि हर व्यवस्था में हमेशा बेहतरी की उम्मीद रहती है. भविष्य में कर दरों के ढांचे को तर्कसंगत और सरल बनाया जा सकता है और अधिक उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है. .
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चाय की दुकान पर भीड बहुत थी। एक छोटा सा लड़का, जिसकी उम्र 7-8 साल रही होगी, बड़ी तत्परता से अपने काम में लगा हुआ था।
उसे वहीं दुकान पर बैठा व्यक्ति बड़े ध्यान से देख रहा था। दुकान पर इतनी भीड़ थी, लेकिन उसके मुख पर जरा भी उदासी नहीं थी, बड़े ही व्यवस्थित ढंग से वह अपने काम को निबटा रहा था। थोड़ी देर में जब भीड़ कुछ कम हुई तो उस व्यक्ति ने उस लड़के को बुलाया, लडका तुरंत ही हाजिर था।
ग्राहक :तुम्हारा नाम क्या है?
लडका :सोनू (लडके ने तपाक से उत्तर दिया)
ग्राहक :मैने देखा, बड़ी फुर्ती से काम करते हो।
लडका :जी! (कुछ इतराते हुए)
ग्राहक :क्या रही करते हो पैसौ का?
लडका : पैसे नहीं लेता, दादा (दुकानदार) खर्चा चलाते है।
ग्राहक :(मजाक से) फिर तुम्हारे पास तो पैसे ही नहीं है।
लडका :अरे! नहीं, है ना ये देखों (अपनी जेब को हिलाकर, सिक्कों की आवाज़ करते हुए वह बोला।
(उसकी आँखों में खुशी सी तैर गयी।)
ग्राहक :अच्छा बताओ तो, कितने है?
यह सिलसिला चलता रहा, उन दोनों में दोस्ती सी हो गयी थी।
फिर अचानक से कुछ दिनों तक वह व्यक्ति नहीं आया।सोनू की भी दिनचर्या यूँ ही चलती रही।
सोनू :साहब! आज नहीं पूछोगे, कितने पैसे है?
उस व्यक्ति ने उसकी ओर देखा लेकिन बोला कुछ नहीं।
सोनू :चलो आज बताता हूँ कितने है।
ग्राहक :(प्यार से) पता है, आज मेरे पास भी पैसै नही हैं।
(पिछले दिनों, उस व्यक्ति को व्यापार में भारी घाटा हुआ था, जिसमें उसकी सारी संपत्ति चली गयी थी।)
सोनू :बस इतनी सी बात ये लो तुम्हारे पैसे।
(अपनी जेब से सिक्के निकालकर उसके हाथ में रखते हुए वह बोला फिर अपने अपने काम में लग गया।
व्यक्ति ने जब सिक्कों पर नजर डाली, तो पता चला, सिक्के खोटे थे, लेकिन इससे अंजान सोनू को अब तक बादशाह बनाए रखने हुए थे।
और क्या मनोबल है इस बालक का, जो अपनी इस संपत्ति को सौप कर भी चहरे पर सिकंद नही।
मैं यहाँ हार कर बैठा हूँएक कोशिश तो दोबारा मुझे भी करनी चाहिए निश्चित ही।
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चाय की दुकान पर भीड बहुत थी। एक छोटा सा लड़का, जिसकी उम्र सात-आठ साल रही होगी, बड़ी तत्परता से अपने काम में लगा हुआ था। उसे वहीं दुकान पर बैठा व्यक्ति बड़े ध्यान से देख रहा था। दुकान पर इतनी भीड़ थी, लेकिन उसके मुख पर जरा भी उदासी नहीं थी, बड़े ही व्यवस्थित ढंग से वह अपने काम को निबटा रहा था। थोड़ी देर में जब भीड़ कुछ कम हुई तो उस व्यक्ति ने उस लड़के को बुलाया, लडका तुरंत ही हाजिर था। ग्राहक :तुम्हारा नाम क्या है? लडका :सोनू ग्राहक :मैने देखा, बड़ी फुर्ती से काम करते हो। लडका :जी! ग्राहक :क्या रही करते हो पैसौ का? लडका : पैसे नहीं लेता, दादा खर्चा चलाते है। ग्राहक : फिर तुम्हारे पास तो पैसे ही नहीं है। लडका :अरे! नहीं, है ना ये देखों ग्राहक :अच्छा बताओ तो, कितने है? यह सिलसिला चलता रहा, उन दोनों में दोस्ती सी हो गयी थी। फिर अचानक से कुछ दिनों तक वह व्यक्ति नहीं आया।सोनू की भी दिनचर्या यूँ ही चलती रही। सोनू :साहब! आज नहीं पूछोगे, कितने पैसे है? उस व्यक्ति ने उसकी ओर देखा लेकिन बोला कुछ नहीं। सोनू :चलो आज बताता हूँ कितने है। ग्राहक : पता है, आज मेरे पास भी पैसै नही हैं। सोनू :बस इतनी सी बात ये लो तुम्हारे पैसे। (अपनी जेब से सिक्के निकालकर उसके हाथ में रखते हुए वह बोला फिर अपने अपने काम में लग गया। व्यक्ति ने जब सिक्कों पर नजर डाली, तो पता चला, सिक्के खोटे थे, लेकिन इससे अंजान सोनू को अब तक बादशाह बनाए रखने हुए थे। और क्या मनोबल है इस बालक का, जो अपनी इस संपत्ति को सौप कर भी चहरे पर सिकंद नही। मैं यहाँ हार कर बैठा हूँएक कोशिश तो दोबारा मुझे भी करनी चाहिए निश्चित ही।
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भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल इन दिनों लंदन में अपनी छुट्टिया बिता रहे है शुभमन गिल को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज में शामिल तो किया गया है लेकिन उनको प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया है। इसी बीच शुभमन गिल वैलेंटाइन डे के मौके पर शुभमन गिल लंदन पहुंचे और उन्होंने वहां एक रेस्टोरेंट में बैठकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की।
भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल इन दिनों लंदन में अपनी छुट्टिया बिता रहे है शुभमन गिल को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज में शामिल तो किया गया है लेकिन उनको प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया है। इसी बीच शुभमन गिल वैलेंटाइन डे के मौके पर शुभमन गिल लंदन पहुंचे और उन्होंने वहां एक रेस्टोरेंट में बैठकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की।
इंस्टाग्राम पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए शुभमन गिल ने कैप्शन में लिखा कि, "आज फिर कौन-सा दिन है? " गिल की यह तस्वीर देखते ही देखते तेजी वायरल होने लगी और फैंस कमेंट करके गिल को याद दिला रहे है कि यह जगह तो जानी-पहचानी है। इसके अलावा फैंस लिख रहे है कि, "भाई की चोरी पकड़ी गई। "
गिल की तस्वीर से पहले सारा तेंदुलकर ने 5 जुलाई 2021 को यहा तस्वीर ली थी। अब फैंस सारा की इस फोटो पर भी कमेंट करके लिख रहे है कि, "सैम फोटो। " जिसके बाद काफी समय से उड़ रही अफवाहों को एक बार फिर से जोर मिल गया है दरअसल जिस रेस्टोरेंट में बैठकर शुभमन गिल ने तस्वीर ली है साल 2021 में उसी रेस्टोरेंट में सारा तेंदुलकर ने भी तस्वीर क्लिक की थी।
दोनों की तस्वीर में पोज और बैकग्राउंड भी सैम दिखाई दे रहे है। जिसके बाद फैंस ने सारा और शुभमन की फोटो को एक साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया। जिसके बाद फैंस अब कह रहे है कि लगता है दोनों की जोड़ी बन गई है। दरअसल पिछले काफी समय से शुभमन गिल का नाम सारा तेंदुलकर के साथ जोड़ा जा रहा था।
लेकिन फिर बीच गिल का नाम अभिनेत्री सारा खान के साथ जोड़ा गया क्योंकि गिल और सारा अली खान को कई बार एक साथ स्पॉट किया जा चुका है। लेकिन गिल और सारा की तरफ से इन अफवाहों पर कुछ भी नहीं कहा गया था। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार सारा को लेकर गिल के मजे लेते रहते है कई बार तो क्रिकेट मैदान में भी दर्शकों के द्वारा सारा भाभी-सारा भाभी के नारे लग चुके है।
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भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल इन दिनों लंदन में अपनी छुट्टिया बिता रहे है शुभमन गिल को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज में शामिल तो किया गया है लेकिन उनको प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया है। इसी बीच शुभमन गिल वैलेंटाइन डे के मौके पर शुभमन गिल लंदन पहुंचे और उन्होंने वहां एक रेस्टोरेंट में बैठकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल इन दिनों लंदन में अपनी छुट्टिया बिता रहे है शुभमन गिल को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज में शामिल तो किया गया है लेकिन उनको प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया है। इसी बीच शुभमन गिल वैलेंटाइन डे के मौके पर शुभमन गिल लंदन पहुंचे और उन्होंने वहां एक रेस्टोरेंट में बैठकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। इंस्टाग्राम पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए शुभमन गिल ने कैप्शन में लिखा कि, "आज फिर कौन-सा दिन है? " गिल की यह तस्वीर देखते ही देखते तेजी वायरल होने लगी और फैंस कमेंट करके गिल को याद दिला रहे है कि यह जगह तो जानी-पहचानी है। इसके अलावा फैंस लिख रहे है कि, "भाई की चोरी पकड़ी गई। " गिल की तस्वीर से पहले सारा तेंदुलकर ने पाँच जुलाई दो हज़ार इक्कीस को यहा तस्वीर ली थी। अब फैंस सारा की इस फोटो पर भी कमेंट करके लिख रहे है कि, "सैम फोटो। " जिसके बाद काफी समय से उड़ रही अफवाहों को एक बार फिर से जोर मिल गया है दरअसल जिस रेस्टोरेंट में बैठकर शुभमन गिल ने तस्वीर ली है साल दो हज़ार इक्कीस में उसी रेस्टोरेंट में सारा तेंदुलकर ने भी तस्वीर क्लिक की थी। दोनों की तस्वीर में पोज और बैकग्राउंड भी सैम दिखाई दे रहे है। जिसके बाद फैंस ने सारा और शुभमन की फोटो को एक साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया। जिसके बाद फैंस अब कह रहे है कि लगता है दोनों की जोड़ी बन गई है। दरअसल पिछले काफी समय से शुभमन गिल का नाम सारा तेंदुलकर के साथ जोड़ा जा रहा था। लेकिन फिर बीच गिल का नाम अभिनेत्री सारा खान के साथ जोड़ा गया क्योंकि गिल और सारा अली खान को कई बार एक साथ स्पॉट किया जा चुका है। लेकिन गिल और सारा की तरफ से इन अफवाहों पर कुछ भी नहीं कहा गया था। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार सारा को लेकर गिल के मजे लेते रहते है कई बार तो क्रिकेट मैदान में भी दर्शकों के द्वारा सारा भाभी-सारा भाभी के नारे लग चुके है।
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भारत में शुक्रवार को 24 घंटे की अवधि में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के 122 मामलों का पता चला, जो अब तक एक दिन में इस वेरिएंट के सर्वाधिक मामले हैं.
भारत में कोविड-19 (Covid-19) महामारी की तीसरी लहर अगले साल तीन फरवरी तक चरम पर हो सकती है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) कानपुर के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में ये दावा किया. हालांकि ये पूर्वानुमान इस धारणा पर आधारित है कि भारत में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) से प्रभावित अनेक देशों में मामलों में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति देखने को मिलेगी.
21 दिसंबर को मेडआरएक्सआईवी पर डाले गए अध्ययन की अभी समीक्षा नहीं की गई है. इसमें तीसरी लहर का पूर्वानुमान लगाने के लिए गौसियन मिक्चर मॉडल का इस्तेमाल किया गया. शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और रूस जैसे देशों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जो पहले ही महामारी की तीसरी लहर का सामना कर रहे हैं.
वैज्ञानिकों ने इन देशों में मामलों के दैनिक आंकड़ों का इस्तेमाल कर भारत में तीसरी लहर के असर और समय-सीमा का अनुमान व्यक्त किया. अध्ययन में भारत में पहली और दूसरी लहर के आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया गया है. शोधकर्ताओं ने लिखा कि मामले 15 दिसंबर के करीब बढ़ने शुरू हुए और तीसरी लहर का चरम तीन फरवरी को होगा.
भारत में शुक्रवार को 24 घंटे की अवधि में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के 122 मामलों का पता चला, जो अब तक एक दिन में इस वेरिएंट के सर्वाधिक मामले हैं. देश में ओमिक्रॉन के अब तक 358 मामले सामने आए हैं. देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के लिए महाराष्ट्र और दिल्ली हॉट स्पॉट बना हुआ है. इन दोनों ही राज्यों से सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली की तुलना में महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन तेजी से फैल रहा है.
22 दिसंबर बुधवार तक महाराष्ट्र में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीजों की कुल संख्या 54 थी. जो दिल्ली से कम थे, लेकिन दो दिन बाद ही यानी 24 दिसंबर को ही महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन वेरिएंट के कुल 88 मामले दर्ज किए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं. महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर आज रात 12 बजे से नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. ये नाइट कर्फ्यू कल से रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक होगा. इनडोर शादी समारोह में 100 लोगों के शामिल होने की अनुमति होगी. आउटडोर शादी समारोह में 250 लोग शामिल हो सकते हैं. इंडोर में बैठक करने के लिए 50 फीसदी क्षमता की अनुमति दी गई है.
(इनपुट- भाषा के साथ)
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भारत में शुक्रवार को चौबीस घंटाटे की अवधि में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के एक सौ बाईस मामलों का पता चला, जो अब तक एक दिन में इस वेरिएंट के सर्वाधिक मामले हैं. भारत में कोविड-उन्नीस महामारी की तीसरी लहर अगले साल तीन फरवरी तक चरम पर हो सकती है. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में ये दावा किया. हालांकि ये पूर्वानुमान इस धारणा पर आधारित है कि भारत में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित अनेक देशों में मामलों में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति देखने को मिलेगी. इक्कीस दिसंबर को मेडआरएक्सआईवी पर डाले गए अध्ययन की अभी समीक्षा नहीं की गई है. इसमें तीसरी लहर का पूर्वानुमान लगाने के लिए गौसियन मिक्चर मॉडल का इस्तेमाल किया गया. शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और रूस जैसे देशों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जो पहले ही महामारी की तीसरी लहर का सामना कर रहे हैं. वैज्ञानिकों ने इन देशों में मामलों के दैनिक आंकड़ों का इस्तेमाल कर भारत में तीसरी लहर के असर और समय-सीमा का अनुमान व्यक्त किया. अध्ययन में भारत में पहली और दूसरी लहर के आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया गया है. शोधकर्ताओं ने लिखा कि मामले पंद्रह दिसंबर के करीब बढ़ने शुरू हुए और तीसरी लहर का चरम तीन फरवरी को होगा. भारत में शुक्रवार को चौबीस घंटाटे की अवधि में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के एक सौ बाईस मामलों का पता चला, जो अब तक एक दिन में इस वेरिएंट के सर्वाधिक मामले हैं. देश में ओमिक्रॉन के अब तक तीन सौ अट्ठावन मामले सामने आए हैं. देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के लिए महाराष्ट्र और दिल्ली हॉट स्पॉट बना हुआ है. इन दोनों ही राज्यों से सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली की तुलना में महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन तेजी से फैल रहा है. बाईस दिसंबर बुधवार तक महाराष्ट्र में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीजों की कुल संख्या चौवन थी. जो दिल्ली से कम थे, लेकिन दो दिन बाद ही यानी चौबीस दिसंबर को ही महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन वेरिएंट के कुल अठासी मामले दर्ज किए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं. महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर आज रात बारह बजे से नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. ये नाइट कर्फ्यू कल से रात नौ बजे से सुबह छः बजे तक होगा. इनडोर शादी समारोह में एक सौ लोगों के शामिल होने की अनुमति होगी. आउटडोर शादी समारोह में दो सौ पचास लोग शामिल हो सकते हैं. इंडोर में बैठक करने के लिए पचास फीसदी क्षमता की अनुमति दी गई है.
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कर दी जाये। मीमांसा पद्वति निश्चित रूप से पौराणिक योगापन्थी को पुर्नजीवित करेगी। मैं चातुर्वर्ण्य व्यवस्था के विरुद्ध हूँ।
भारतीय समाज में अस्पृश्यता अत्यधिक प्राचीन है। महावीर, बुद्ध, नानक, कबीर आदि मध्यकालीन सन्तों एवं 19 वीं शती के सामाजिक सुधारकों ने एक जुट होकर इस अमानवीय प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक नेतृत्व दिया महात्मा गान्धी ने। महात्मा गान्धी अस्पृश्यता को हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा कलंक मानते थे। उनके लिये अस्पृश्यता निवारण का अर्थ मनुष्य मनुष्य के बीच कृत्रिम दीवारों को ढहाना था। कोई धर्म प्रेम और तर्क से बड़ा नही होता। . उन्होंने इस बुराई के विरूद्ध अहिंसक संघर्ष किया।
गान्धी जी :
गान्धी जी ने जब राजकोट भयंकर महामारी की चपेट में आया तब अछूतों की इ पड़ियों में जाकर उनकी सेवा की और सफाई का ध्यान रखा। उन्होने अहमदाबाद में एक आश्रम की स्थापना की और उसके संविधान में अस्पृश्यता निवारण की शपथ रखी। उसी आश्रम में उन्होने अछूत दूदाभाई और उसके परिवार को आश्रम में रखा जिसके फलस्वरूप रूढ़िवादी तत्वों ने न केवल आश्रम की सहायता बन्द कर दी बल्कि सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी। आर्थिक सहायता के अभाव में आश्रम की कठिनाइयां बढ़ गयी । आश्रमवासियों के लिये कुंओं का प्रयोग वर्जित कर दिया गया। इसी समय गान्धी जी ने श्री निवास शास्त्री को लिखा कि मैने अपनी पुत्री से कहा कि हम अच्छे मित्रों की भाँति एक दूसरे से अलग हो सकते है। परन्तु दादूभाई को नही छोड़ सकते । मेरे लिये यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। क्योकि यह मुझे दलित उत्थान के मिशन से जोड़ता है। दलित उत्थान में ही स्वराज्य निहित है। गान्धी जी ने कहा कि हम अछूतों के मोहल्ले में जा बसेंगे और मजदूरी कर के निर्वाह कर लेंगे । ( 17 )
काँग्रेस का नेतृत्व संभालने के बाद 1920 में नागपुर कांग्रेस के मंच से अस्पृश्यता को 17. एस० के० मित्तल (लेख) महात्मा गान्धी एवं हरिजन, अमर उजाला 2 अक्टूबर 1995
समाप्त करने की अपील की। असहयोग आन्दोलन के दौरान अपने देशव्यापी दौरे में छुआछूत पर आक्रमण किया। दक्षिण भारत के मंदिरों के कपाट अछूतो के लिये खोलने के लिये बाइकोम सत्याग्रह को निर्देशित किया । परिणाम स्वरूप दलितो के लिये मंदिरों के द्वार खोल दिये गये । बेलगांव कांग्रेस ने छूआछूत के विरूद्ध एक विशेष प्रस्ताव पारित किया। 1924 से 1929 के मध्य अस्पृश्यता निव रण गान्धी के कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण अंग था । दलितों को अल्प समुदाय मान इन्हे पृथक प्रतिनिधित्व देने की बात को गान्धी जी ने भारतीय जनता की एकता को तोड़ने का एक कुटिल प्रयास माना। वो इसे दलितो के लिये एक खतरनाक कदम मानते थे क्योकि यदि दलितो को पृथक समुदाय मान लिया जाये तो अस्पृश्यता निवारण आन्दोलन का क्या होगा ? क्या अछूत सदैव अछूत रहेगे। बाद में इस समस्या का हल "पूना पैक्ट" रूप में सामने आया।
गान्धी जी ने 'हरिजन सेवक संघ की स्थापना कर के 20000 कि०मी० की यात्रा कार, गाड़ी, बैलगाड़ी और पैदल की तथा हरिजन उत्थान का बीड़ा उठाया । अपनी 9 माह की यात्रा में गान्धी जी ने हरिजन सेवकों से गाँव में जाकर दलितों के सर्वागीण उत्थान के लिये कार्य करने को कहा । 8 मई एवं 16 अगस्त 1933 को दलितों की समस्या को गम्भीरता से लेने के लिये 21 दिनों के दो लम्बे उपवास किये। सामाजिक कार्यकर्त्ताओं से गान्धी ने कहा, उन्हें या तो अस्पृश्यता को समाप्त करना होगा या अपने मध्य से मुझे हटाना होगा। अपनी यात्राओं के दौरान गान्धी जी को रूढ़िवादियों एवं सामाजिक प्रतिक्रियावादियों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होने गान्धी की सभाओं में गड़बड़ी फैलाई, काले झंडे दिखाये, उत्तेजनात्मक पर्चे बांटे और उनका पुतला जलाया।
गान्धी जी का दलित उत्थान मिशन मानववाद और तर्क पर आधारित था। उनके अनुसार हिन्दू शास्त्रों में अस्पृश्यता का कोई स्थान नही है। उनकी मान्यता थी कि यदि अछूत पन जीवित रहा तो हिन्दू धर्म नष्ट हो जायेगा। वो कहते थे कि यदि अछूतपन हिन्दू धर्म का जरूरी भाग है तो मैं अछूत नही हूँ। हालांकि वो वर्ण व्यवस्था के समर्थक थे। वो वर्णव्यवस्था और अस्पृश्यता की समाप्ति को एक नहीं अलग-अलग मानते थे।
उनका कहना था कि 'वर्णाश्रम, धर्म और अस्पृश्यता में कोई सम्बन्ध नही'। उन्होने अस्पृश्यों के लिये सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकारों का संघर्ष छेड़ने के बजाय स्वर्णो में पापबोध जगाने और उसके प्रायश्चित पर जोर दिया। 1931 में नासिक के कालाराम मंदिर में अस्पृश्यों के प्रवेश के लिये सत्याग्रह के बारे में भी गान्धी जी का यह मत था कि यह सत्याग्रह अछूतों को नही, स्पृश्यों को करना चाहिये । (18)
गान्धी चूँकिः जनै- वैष्णव संस्कारों में पले-बढ़े थे, इसीलिये उनके जीवन पर धर्म की गहरी छाप थी । 'वैष्णव जन तो तेने कहिये, जो पीर परायी जागे रे, की भावना से ओत-प्रोत गान्धी के लिये अस्पृश्यता परायी पीर हो कर भी परायी नहीं थी। सिर्फ इसलिये नहीं कि वे अत्यन्त संवेदनशील थे और उन्होने भारतीय समाज के अंतिम आदमी से तादात्म स्थापित कर लिया था। बल्कि इसलिये भी कि दक्षिण अफ्रीका में मारित्सबर्ग स्टेशन पर हुई घटना से उनको भी प्रकारांतर से अस्पृश्यता का प्रत्यक्ष अनुभव हो गया था। इसी घटना के बाद ही गान्धी जी में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया। हाँ ये बात जरूर है कि अम्बेडकर जाति-पाँति तोड़ने को सर्वोच्य प्राथमिकता देते थे, और गान्धी जी की प्राथमिकता उस वक्त अंग्रेजों को भारत से निकालने की थी। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम का नेतृत्व करते हुये रणनीतिक दृष्टि से गान्धी ने जो भी किया हो किन्तु वे सतत् अस्पृश्यता विरोधी रहे । ऐतिहासिक सच तो यह है कि वे धीरे-धीरे किन्तु दृढ़ता के साथ छुआ-छूत ही नही, जाति प्रथा के भी विरोधी होते गये। जीवन के अंतिम दौर में तो उन्होने यह तक कहा था कि वे सवर्ण और अस्पृश्य में होने वाले विवाह को भी आर्शीवाद देगे। गान्धी दलित मुक्ति को एक सामाजिक-नैतिक सुधार के आन्दोलन के रूप में देखते है। उन्होने बार-बार कहा कि कोई काम न तो छोटा है और न बड़ा । वे बार-बार श्रम की प्रतिष्ठा पर जोर देते थे। उन्होने स्वयं मलमूत्र साफ करने का कार्य किया। उनके अनुयायियों ने भी मलिच्छ काम कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया ।
18. य० दि० फडके, आंबेडकरी चलबल, श्री विद्या प्रकाशन, पुणे, पृष्ठ 391.
डा० अम्बेडकर -
अम्बेडकर यदि दलितों को जगाने का प्रयत्न कर रहे थे, तभी गान्धी अस्पृश्यता के विरूद्ध सवर्णो की पथरायी हुयी अंतरात्मा को झकझोरने की, उनको अपनी गलती महसूस कराने की, उनमे अपने पूर्वजों और खुद अपनी अमानुषिकता के लिये पाप बोध जाग्रत करने का कार्य कर रहे थे। संत साहित्य को अपना हथियार बनाकर वे छुआछूत के समर्थकों से लड़े। सवर्णो में पाश्चाताप भाव और न्याय बुद्धि जगाने का गान्धी जी का यह प्रयत्न देश में दलितों की स्थिति को देखते हुये भी सही था । आर्थिक दृष्टि से वे नितान्त दीन-हीन थे। सदियों से अन्याय के विरूद्ध लड़ने की कोई आदत उनमें नही थी। इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में दलितों का कोई आन्दोलन, तभी सफल हो सकता था जब सवर्णो का खुले दिलो दिमाग वाला और आगे देखने वाला हिस् इसमें सक्रिय सहयोग दे। गान्धी जी ने इसके लिये जमीन तैयार की थी ।
सामाजिक नेतृत्व में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अम्बेडकर ने महात्मा फुले के सिद्धान्तों
को आत्म सात कर लिया था। वे एक ऐसे समाज के स्वप्न दृष्टा से जिसमें समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृत्व का साम्राज्य हो। इंग्लेंड और अमेरिका में ज्ञार्नाजन कर के व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण के
साथ उन्होने वह मार्ग खोज निकाला जिस पर चलने से वह अपने समाज को सवर्ण हिन्दुओं के चंगुल से छुटकारा दिला सकते थे। उन्हे ब्राहम्णवाद से लोहा लेना था और उसके लिये उन्हे सवर्ण हिन्दुओं के विरूद्ध सामाजिक लड़ाई लड़नी थी।
अम्बेडकर जानते थे कि भारत एक विशाल देश है और अपनी-अपनी परम्पराओं एवं रूढ़ियों में लोग इस तरह जकड़े हुये है कि व्यापक आन्दोलन ही उन्हें इससे मुक्त कर सकता था। परलोकवादी भारतीय दर्शन एवं धर्म ऐसा करने में सक्षम सिद्ध नही हुये। यही कारण है कि अम्बेडकर के सामाजिक नेतृत्व का आधार वेद और वेदान्त नही था ये नई जीवन दृष्टि की ओर प्रेरित नही कर पा रहे है । इनसे प्रभावित हिन्दू विद्वान आदमी तथा समाज को वही सम्बद्ध कर देते है जहा असमानता, अन्याय और अत्याचार की जड़ें व्याप्त हैं। अम्बेडकर जैसे विद्धान व्यक्ति ने वेदो के भ्रान्तपूर्ण जीवन दर्शन को पहचाना और निर्भीक होकर भारतीय स्थिति में उसे अवैज्ञानिक और
अमानुषिक व्यवस्था की संज्ञा दी। उन्होंने देश के नागरिकों के मानस की नये चिंतन की मशाल से अलौकिक करने में दायित्व को भली-भाँति निभाया। हालांकि उनकी इस समाजवादी चिन्तन धारा को कट्टर पंथी और वेदान्ती विद्धान भारतीय परम्परा एवं संस्कृति के विरूद्ध समझते थे, जो पूर्णतः दोष युक्त है। मानववाद की परम्परा एवं संस्कृति हमारे यहाँ प्राचीन युग से चली आ रही है। भगवान बुद्ध इस धारा के उद्गाता थे। उन्होने समाजवाद एवं नैतिक मानववाद की चिन्तन धारा को जन्म दिया। अम्बेडकर ने इसी मानववादी चिन्तन को नये आयाम दिये और उन्हें बहुत सफलता भी मिली। वस्तुतः उन्होने अपने दर्शन को ईश्वर, ब्रहा, दिव्यता, वर्ण, जाति, वेद, वेदान्त, गीता आदि से अलग रख कर सीधे आदमी और उसकी सामाजिक स्थिति से जोड़ा है। जो नई सभ्यता और संस्कृति की ओर स्पष्ट संकेत है I..
अम्बेडकर विचार और व्यवहार में सन्तुलन बना कर चलने वालों में से थे। उनकी गतिशीलता के सिद्धान्तों का आधार यही था कि संसार में कुछ भी जड़ नही है, कुछ भी शाश्वत नहीं है और कुछ भी सनातन नही है, हर चीज परिवर्तनशील है। परिवर्तन मानव और समाज का धर्म है। (19) उनका कथन था कि मानव की पीड़ाओं में सामाजिक परिस्थितियों का बहुत हाथ होता है। उनका आदर्श ऐसे समाज की रचना करना था जो समता, स्वतन्त्रता और भ्रातभाव पर निर्भर हो। एक आदर्श समाज में अनेक वर्ग विद्यमान रहे और वे एक दूसरे के हितों को समझे और सहयोग करे। समाज की समस्याये उलझानी नही सुलझानी चाहिये। इसके लिये वे सामाजिक चेतना पर जोर देते थे जिसको वे सभी अधिकारों की चाहे वे मौलिक हो या सामाजिक, संरक्षक मानते थे। (20) उनका कहना था कि सामाजिक प्रगति तथा सामाजिक स्थायित्व विभिन्न वर्गो के बीच लचीलेपन और बराबरी के अधिकार पर आधारित होता है। वे स्थायित्व के महत्व को मानते थे किन्तु परिवर्तन की बलि चढ़ा कर नही जबकि परिवर्तन आवश्यक हो, समन्वय जरूर हो मगर इसके लिये सामाजिक न्याय का गला नही घोट दिया जाना चाहिये । (21) सामाजिक स्थायित्व से उनका आशय भारतीय
19. आम्बेडकर अनिहिलेशन ऑफ कॉस्ट 20. अम्बेडकर, राना डे, गान्धी और जिन्ना 21. अम्बेडकर, राना डे, गान्धी और जिन्ना
समाज में पनपी जाति -प्रथा के निषेध से है ।
डा० अम्बेडकर ने जो सामाजिक संघर्ष छेड़े उनका उद्देश्य हिन्दू समाज में सवर्ण हिन्दुओं द्वारा अछूतों के साथ किये जाने वाले अन्यायपूर्ण दुर्व्यवहार का मुँह तोड़ना था। अम्बेडकर चाहते थे कि समाज के सभी वर्गों का धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक सभी क्षेत्रों में समान स्थान हो तथा उन्हे जीवन में ऊपर उठने के समान अवसर दिये जाये और उनकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जाये। प्रत्येक सामाजिक संघर्ष के पीछे यही मौलिक भावनायें थी जो कि अछूतों ने अम्बेडकर के नेतृत्व में जातीय साम्प्रदायिक अत्याचारों के विरोध में छेड़े अम्बेडकर ने दलितों के मानवीय सम्मान के लिये निम्न सामाजिक संघर्ष छेड़े ।
राहुल सांस्कृत्यायन
बौद्ध चेतना के अग्रदूत महापण्डित राहुल सास्कृत्यायन ने दलितों को क्रान्तिकारी सामाजिक नेतृत्व दिया उनका कहना था कि जाति-पाँति व्यवस्था हमारे ऋषि-मुनियों के उन बड़े अविष्कारों में से है जिन पर हमे बड़ा अभिमान है। राष्ट्रीय भावनाओं की जागृति के साथ-साथ है यद्यपि कुछ गिने चुने नेता लोग जाति-पाँति के खिलाफ बोलने लगे है पर अब भी उच्च कोटि के नेताओं का अधिकांश भाग अपने ऋषियों की इस अद्भुत विशेषता की कद्र करने को तैयार है। राहुल जी कहते है कि मुझे आश्चर्य होता है कि कैसे राष्ट्रीयता और जाति-पाँति दोनो साथ दाहिने - बांये कन्धे पर वहन किये जा सकते है। शुद्ध राष्ट्रीयता तब तक नही आ सकती जब तक आप जाति--पाँति तोड़ने को तैयार नही है। जब आप किसी भी पद पर पहुंचेगे तो ईमानदारी रहने पर आपकी राय को प्रभावित करने में सफलता सबसे अधिक आपके जाति भाइयों की होगी।
19 वीं शताब्दी के प्रारम्भ से हमारे कुछ नेताओं ने दलितों पर होने वाले अत्याचारों पर विचार करना प्रारम्भ किया और सच पूछिये तो महात्मा गान्धी के उत्थान के पूर्व हमारे इन भाइयों के अभ्युदयः के प्रश्न पर गम्भीरता से विचार ही नही किया गया था। परन्तु राहुल सास्कृत्यायन के विचार से अभी भी इस विषय पर जितना ध्यान दिया जा रहा है वह काफी नही है । यदि भारतवर्ष
में सारे मंदिर अछूतों के लिये खोल दिये जाये तो भी यह समस्या हल नही हो सकती क्योकि भारत की सीमा के भीतर दलितों में जो दरिद्रता है, वह अचिन्त्य है अछूत जो खेत मजदूर है वह गुलामों से अच्छी परिस्थिति में नही है। इसलिये हमे उनके लिये मन्दिर द्वार खोलने के प्रचार में बेकार समय नष्ट नही करना चाहिये । यह काम केवल व्यर्थ ही नही बल्कि खुद दलितों के लिये भी खतरनाक भी है। यह पुरोहितों की चालाकी और धर्मान्धता ही है जो कि उनकी वर्तमान अयोगति का कारण है। इन सरल मनुष्यों को ऐसी सरल सस्ती औषधि न दीजिए। पुजारी, धर्म और मंदिर को जहन्नुम में जाने दीजिये। अगर आपके सामने अपने देश और अपने लिये सच्चा आदर्श है तो उनकी आर्थिक विषमताओं का अध्ययन कीजिये । राहुल जी कहते है कि हमारे प्रान्त में 65 लाख से अधिक दलित हैं उनमें 5 लाख से अधिक किसान के रूप में भी नहीं रह सकते है। अब प्रश्न यह है कि बाकी 60 लाख की दशा कैसे सुधारी जाये ? हमारे बहुत से जिलो में अधिकांश जमीन खेत हो चुकी । उदाहरण के लिये, सारन जिले का क्षेत्रफल 2683 वर्गमील है जिसमें 2058 वर्ग मील अर्थात 13117120 एकड़ में पहले से ही खेती होती है। 202 वर्ग मील अर्थात 129230 एकड़ खेती के लायक नहीं है केवल 165 वर्ग मील अर्थात 105600 एकड़ जमीन ऐसी है जो खेती करने के लायक है। किन्तु फिर मवेशियों के लिये चारागाह का प्रबन्ध करना होगा। अगर समूची जमीन उनकी 2486468 जनसंख्या में बाँट दी जाये तो आधा एकड़ प्रति मनुष्य पड़ती है तो इतने से तो केवल जीवन यात्रा भी नही चल सकती अब इस जनसंख्या में 271000 अछूत है। इससे स्पष्ट है कि जब जमीन की बचत नही पायी जा सकती तो इन दो लाख से भी अधिक दलित मजदूरों में बांटी जा
राहुल जी के अनुसार सरकार को दलितो की स्थिति सुधारने हेतु निम्न सुविधायें जुटानी
(A) कृषि हेतु भूमि का प्रबन्ध -
सरकार को ऐसी जमीन का अंदाज करे जो खेती के लायक है उसे ले कर दलितों में
.22. राहुल सांस्कृतायनः दिमाग गुलामी 1994 पेज 39
बाँट देनी चाहिये। यदि हम शीघ्रता से दलितों की दशा सुधारना चाहते है तो यह आवश्यक है कि हम उनके साथ उक्त प्रकार का नया बन्दोबस्त करे यदि सरकार इस मामले को गम्भीरता से अपने हाथ में ले ले तो खेती के लिये अछूत बहुत परिश्रमी मजदूर है और यदि सहयोग समितियों की सहायता से उनके परिश्रम का सच्चा और ठीक उपयोग किया जाये तो ऐसे प्रबन्ध के लिये जितन धन की आवश्यकता होगी, उसकी पूर्ति में देर लगेगी क्योकि परिश्रम ही तो धन है।
(B) गृह शिल्प
शहरों और कस्बों में उनके लिये बस्तियाँ बसानी चाहिये। उन लोगो को गृह शिल्पों के उपयोगी तरीके सिखाये जाने चाहिये। शहरों और कस्बों में आने पर वे गाँवों की संकीर्णता से मुक्त हो जाते है । और यहाँ जीवन के नये तौर से आरम्भ कर सकते है। अगर वे आर्थिक दृष्टि से उन्नत बन जाये, शिक्षा प्राप्त करे और स्वास्थ्य एवं सफाई का ख्याल रखे तो छूत छात का अस्तित्व बहुत दिनों तक नही रह सकता हैं। इन आदर्श बस्तियों में यदि कोई उच्च वर्ण का कुटुम्ब रहना चाहे तो उसको इस शर्त पर रहने देना चाहिये कि वह दलितों के साथ बराबरी का व्यवहार रखे और उनके परिश्रम का अनुचित उपयोग न करे । ( 23 )
सरकारी कल-कारखाने -
हम लोगों को आबादी का नया तरीका सोचना चाहिये और यदि कुछ विलासिता की चीजों के निर्माण को, उदाहरणार्थ सिगेरट को सरकार के हाँथ में लिया जाये तो सरकार की आय बढ़ सकती है। यूरोप के बहुत से देश सिगरेट पर विशेष कर लगाये हुये है, लेकिन हम लोगो के लिये जापान का आदर्श सामने रखना चाहिये। जहाँ कि सिगरेट बनाने का समूचा व्यापार सरकार के हाथ में है। हमारा प्रान्त भी वो काम कर सकता है। हमारे प्रान्त में तम्बाकू काफी उत्पन्न होती है। सरकार को यह व्यापार अपने हाथ में ले लेना चाहिये। वह पिछड़ी जातियों को ऐसे कारखानों में काम देकर सहायता पहुँचा सकती है। सारांश यह है कि भविष्य की औद्योगिक योजना में सरकार
23. पूर्वोक्ति
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कर दी जाये। मीमांसा पद्वति निश्चित रूप से पौराणिक योगापन्थी को पुर्नजीवित करेगी। मैं चातुर्वर्ण्य व्यवस्था के विरुद्ध हूँ। भारतीय समाज में अस्पृश्यता अत्यधिक प्राचीन है। महावीर, बुद्ध, नानक, कबीर आदि मध्यकालीन सन्तों एवं उन्नीस वीं शती के सामाजिक सुधारकों ने एक जुट होकर इस अमानवीय प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक नेतृत्व दिया महात्मा गान्धी ने। महात्मा गान्धी अस्पृश्यता को हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा कलंक मानते थे। उनके लिये अस्पृश्यता निवारण का अर्थ मनुष्य मनुष्य के बीच कृत्रिम दीवारों को ढहाना था। कोई धर्म प्रेम और तर्क से बड़ा नही होता। . उन्होंने इस बुराई के विरूद्ध अहिंसक संघर्ष किया। गान्धी जी : गान्धी जी ने जब राजकोट भयंकर महामारी की चपेट में आया तब अछूतों की इ पड़ियों में जाकर उनकी सेवा की और सफाई का ध्यान रखा। उन्होने अहमदाबाद में एक आश्रम की स्थापना की और उसके संविधान में अस्पृश्यता निवारण की शपथ रखी। उसी आश्रम में उन्होने अछूत दूदाभाई और उसके परिवार को आश्रम में रखा जिसके फलस्वरूप रूढ़िवादी तत्वों ने न केवल आश्रम की सहायता बन्द कर दी बल्कि सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी। आर्थिक सहायता के अभाव में आश्रम की कठिनाइयां बढ़ गयी । आश्रमवासियों के लिये कुंओं का प्रयोग वर्जित कर दिया गया। इसी समय गान्धी जी ने श्री निवास शास्त्री को लिखा कि मैने अपनी पुत्री से कहा कि हम अच्छे मित्रों की भाँति एक दूसरे से अलग हो सकते है। परन्तु दादूभाई को नही छोड़ सकते । मेरे लिये यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। क्योकि यह मुझे दलित उत्थान के मिशन से जोड़ता है। दलित उत्थान में ही स्वराज्य निहित है। गान्धी जी ने कहा कि हम अछूतों के मोहल्ले में जा बसेंगे और मजदूरी कर के निर्वाह कर लेंगे । काँग्रेस का नेतृत्व संभालने के बाद एक हज़ार नौ सौ बीस में नागपुर कांग्रेस के मंच से अस्पृश्यता को सत्रह. एसशून्य केशून्य मित्तल महात्मा गान्धी एवं हरिजन, अमर उजाला दो अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे समाप्त करने की अपील की। असहयोग आन्दोलन के दौरान अपने देशव्यापी दौरे में छुआछूत पर आक्रमण किया। दक्षिण भारत के मंदिरों के कपाट अछूतो के लिये खोलने के लिये बाइकोम सत्याग्रह को निर्देशित किया । परिणाम स्वरूप दलितो के लिये मंदिरों के द्वार खोल दिये गये । बेलगांव कांग्रेस ने छूआछूत के विरूद्ध एक विशेष प्रस्ताव पारित किया। एक हज़ार नौ सौ चौबीस से एक हज़ार नौ सौ उनतीस के मध्य अस्पृश्यता निव रण गान्धी के कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण अंग था । दलितों को अल्प समुदाय मान इन्हे पृथक प्रतिनिधित्व देने की बात को गान्धी जी ने भारतीय जनता की एकता को तोड़ने का एक कुटिल प्रयास माना। वो इसे दलितो के लिये एक खतरनाक कदम मानते थे क्योकि यदि दलितो को पृथक समुदाय मान लिया जाये तो अस्पृश्यता निवारण आन्दोलन का क्या होगा ? क्या अछूत सदैव अछूत रहेगे। बाद में इस समस्या का हल "पूना पैक्ट" रूप में सामने आया। गान्धी जी ने 'हरिजन सेवक संघ की स्थापना कर के बीस हज़ार किशून्यमीशून्य की यात्रा कार, गाड़ी, बैलगाड़ी और पैदल की तथा हरिजन उत्थान का बीड़ा उठाया । अपनी नौ माह की यात्रा में गान्धी जी ने हरिजन सेवकों से गाँव में जाकर दलितों के सर्वागीण उत्थान के लिये कार्य करने को कहा । आठ मई एवं सोलह अगस्त एक हज़ार नौ सौ तैंतीस को दलितों की समस्या को गम्भीरता से लेने के लिये इक्कीस दिनों के दो लम्बे उपवास किये। सामाजिक कार्यकर्त्ताओं से गान्धी ने कहा, उन्हें या तो अस्पृश्यता को समाप्त करना होगा या अपने मध्य से मुझे हटाना होगा। अपनी यात्राओं के दौरान गान्धी जी को रूढ़िवादियों एवं सामाजिक प्रतिक्रियावादियों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होने गान्धी की सभाओं में गड़बड़ी फैलाई, काले झंडे दिखाये, उत्तेजनात्मक पर्चे बांटे और उनका पुतला जलाया। गान्धी जी का दलित उत्थान मिशन मानववाद और तर्क पर आधारित था। उनके अनुसार हिन्दू शास्त्रों में अस्पृश्यता का कोई स्थान नही है। उनकी मान्यता थी कि यदि अछूत पन जीवित रहा तो हिन्दू धर्म नष्ट हो जायेगा। वो कहते थे कि यदि अछूतपन हिन्दू धर्म का जरूरी भाग है तो मैं अछूत नही हूँ। हालांकि वो वर्ण व्यवस्था के समर्थक थे। वो वर्णव्यवस्था और अस्पृश्यता की समाप्ति को एक नहीं अलग-अलग मानते थे। उनका कहना था कि 'वर्णाश्रम, धर्म और अस्पृश्यता में कोई सम्बन्ध नही'। उन्होने अस्पृश्यों के लिये सामाजिक तथा राजनीतिक अधिकारों का संघर्ष छेड़ने के बजाय स्वर्णो में पापबोध जगाने और उसके प्रायश्चित पर जोर दिया। एक हज़ार नौ सौ इकतीस में नासिक के कालाराम मंदिर में अस्पृश्यों के प्रवेश के लिये सत्याग्रह के बारे में भी गान्धी जी का यह मत था कि यह सत्याग्रह अछूतों को नही, स्पृश्यों को करना चाहिये । गान्धी चूँकिः जनै- वैष्णव संस्कारों में पले-बढ़े थे, इसीलिये उनके जीवन पर धर्म की गहरी छाप थी । 'वैष्णव जन तो तेने कहिये, जो पीर परायी जागे रे, की भावना से ओत-प्रोत गान्धी के लिये अस्पृश्यता परायी पीर हो कर भी परायी नहीं थी। सिर्फ इसलिये नहीं कि वे अत्यन्त संवेदनशील थे और उन्होने भारतीय समाज के अंतिम आदमी से तादात्म स्थापित कर लिया था। बल्कि इसलिये भी कि दक्षिण अफ्रीका में मारित्सबर्ग स्टेशन पर हुई घटना से उनको भी प्रकारांतर से अस्पृश्यता का प्रत्यक्ष अनुभव हो गया था। इसी घटना के बाद ही गान्धी जी में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया। हाँ ये बात जरूर है कि अम्बेडकर जाति-पाँति तोड़ने को सर्वोच्य प्राथमिकता देते थे, और गान्धी जी की प्राथमिकता उस वक्त अंग्रेजों को भारत से निकालने की थी। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम का नेतृत्व करते हुये रणनीतिक दृष्टि से गान्धी ने जो भी किया हो किन्तु वे सतत् अस्पृश्यता विरोधी रहे । ऐतिहासिक सच तो यह है कि वे धीरे-धीरे किन्तु दृढ़ता के साथ छुआ-छूत ही नही, जाति प्रथा के भी विरोधी होते गये। जीवन के अंतिम दौर में तो उन्होने यह तक कहा था कि वे सवर्ण और अस्पृश्य में होने वाले विवाह को भी आर्शीवाद देगे। गान्धी दलित मुक्ति को एक सामाजिक-नैतिक सुधार के आन्दोलन के रूप में देखते है। उन्होने बार-बार कहा कि कोई काम न तो छोटा है और न बड़ा । वे बार-बार श्रम की प्रतिष्ठा पर जोर देते थे। उन्होने स्वयं मलमूत्र साफ करने का कार्य किया। उनके अनुयायियों ने भी मलिच्छ काम कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया । अट्ठारह. यशून्य दिशून्य फडके, आंबेडकरी चलबल, श्री विद्या प्रकाशन, पुणे, पृष्ठ तीन सौ इक्यानवे. डाशून्य अम्बेडकर - अम्बेडकर यदि दलितों को जगाने का प्रयत्न कर रहे थे, तभी गान्धी अस्पृश्यता के विरूद्ध सवर्णो की पथरायी हुयी अंतरात्मा को झकझोरने की, उनको अपनी गलती महसूस कराने की, उनमे अपने पूर्वजों और खुद अपनी अमानुषिकता के लिये पाप बोध जाग्रत करने का कार्य कर रहे थे। संत साहित्य को अपना हथियार बनाकर वे छुआछूत के समर्थकों से लड़े। सवर्णो में पाश्चाताप भाव और न्याय बुद्धि जगाने का गान्धी जी का यह प्रयत्न देश में दलितों की स्थिति को देखते हुये भी सही था । आर्थिक दृष्टि से वे नितान्त दीन-हीन थे। सदियों से अन्याय के विरूद्ध लड़ने की कोई आदत उनमें नही थी। इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में दलितों का कोई आन्दोलन, तभी सफल हो सकता था जब सवर्णो का खुले दिलो दिमाग वाला और आगे देखने वाला हिस् इसमें सक्रिय सहयोग दे। गान्धी जी ने इसके लिये जमीन तैयार की थी । सामाजिक नेतृत्व में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अम्बेडकर ने महात्मा फुले के सिद्धान्तों को आत्म सात कर लिया था। वे एक ऐसे समाज के स्वप्न दृष्टा से जिसमें समानता, स्वतन्त्रता, भ्रातृत्व का साम्राज्य हो। इंग्लेंड और अमेरिका में ज्ञार्नाजन कर के व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण के साथ उन्होने वह मार्ग खोज निकाला जिस पर चलने से वह अपने समाज को सवर्ण हिन्दुओं के चंगुल से छुटकारा दिला सकते थे। उन्हे ब्राहम्णवाद से लोहा लेना था और उसके लिये उन्हे सवर्ण हिन्दुओं के विरूद्ध सामाजिक लड़ाई लड़नी थी। अम्बेडकर जानते थे कि भारत एक विशाल देश है और अपनी-अपनी परम्पराओं एवं रूढ़ियों में लोग इस तरह जकड़े हुये है कि व्यापक आन्दोलन ही उन्हें इससे मुक्त कर सकता था। परलोकवादी भारतीय दर्शन एवं धर्म ऐसा करने में सक्षम सिद्ध नही हुये। यही कारण है कि अम्बेडकर के सामाजिक नेतृत्व का आधार वेद और वेदान्त नही था ये नई जीवन दृष्टि की ओर प्रेरित नही कर पा रहे है । इनसे प्रभावित हिन्दू विद्वान आदमी तथा समाज को वही सम्बद्ध कर देते है जहा असमानता, अन्याय और अत्याचार की जड़ें व्याप्त हैं। अम्बेडकर जैसे विद्धान व्यक्ति ने वेदो के भ्रान्तपूर्ण जीवन दर्शन को पहचाना और निर्भीक होकर भारतीय स्थिति में उसे अवैज्ञानिक और अमानुषिक व्यवस्था की संज्ञा दी। उन्होंने देश के नागरिकों के मानस की नये चिंतन की मशाल से अलौकिक करने में दायित्व को भली-भाँति निभाया। हालांकि उनकी इस समाजवादी चिन्तन धारा को कट्टर पंथी और वेदान्ती विद्धान भारतीय परम्परा एवं संस्कृति के विरूद्ध समझते थे, जो पूर्णतः दोष युक्त है। मानववाद की परम्परा एवं संस्कृति हमारे यहाँ प्राचीन युग से चली आ रही है। भगवान बुद्ध इस धारा के उद्गाता थे। उन्होने समाजवाद एवं नैतिक मानववाद की चिन्तन धारा को जन्म दिया। अम्बेडकर ने इसी मानववादी चिन्तन को नये आयाम दिये और उन्हें बहुत सफलता भी मिली। वस्तुतः उन्होने अपने दर्शन को ईश्वर, ब्रहा, दिव्यता, वर्ण, जाति, वेद, वेदान्त, गीता आदि से अलग रख कर सीधे आदमी और उसकी सामाजिक स्थिति से जोड़ा है। जो नई सभ्यता और संस्कृति की ओर स्पष्ट संकेत है I.. अम्बेडकर विचार और व्यवहार में सन्तुलन बना कर चलने वालों में से थे। उनकी गतिशीलता के सिद्धान्तों का आधार यही था कि संसार में कुछ भी जड़ नही है, कुछ भी शाश्वत नहीं है और कुछ भी सनातन नही है, हर चीज परिवर्तनशील है। परिवर्तन मानव और समाज का धर्म है। उनका कथन था कि मानव की पीड़ाओं में सामाजिक परिस्थितियों का बहुत हाथ होता है। उनका आदर्श ऐसे समाज की रचना करना था जो समता, स्वतन्त्रता और भ्रातभाव पर निर्भर हो। एक आदर्श समाज में अनेक वर्ग विद्यमान रहे और वे एक दूसरे के हितों को समझे और सहयोग करे। समाज की समस्याये उलझानी नही सुलझानी चाहिये। इसके लिये वे सामाजिक चेतना पर जोर देते थे जिसको वे सभी अधिकारों की चाहे वे मौलिक हो या सामाजिक, संरक्षक मानते थे। उनका कहना था कि सामाजिक प्रगति तथा सामाजिक स्थायित्व विभिन्न वर्गो के बीच लचीलेपन और बराबरी के अधिकार पर आधारित होता है। वे स्थायित्व के महत्व को मानते थे किन्तु परिवर्तन की बलि चढ़ा कर नही जबकि परिवर्तन आवश्यक हो, समन्वय जरूर हो मगर इसके लिये सामाजिक न्याय का गला नही घोट दिया जाना चाहिये । सामाजिक स्थायित्व से उनका आशय भारतीय उन्नीस. आम्बेडकर अनिहिलेशन ऑफ कॉस्ट बीस. अम्बेडकर, राना डे, गान्धी और जिन्ना इक्कीस. अम्बेडकर, राना डे, गान्धी और जिन्ना समाज में पनपी जाति -प्रथा के निषेध से है । डाशून्य अम्बेडकर ने जो सामाजिक संघर्ष छेड़े उनका उद्देश्य हिन्दू समाज में सवर्ण हिन्दुओं द्वारा अछूतों के साथ किये जाने वाले अन्यायपूर्ण दुर्व्यवहार का मुँह तोड़ना था। अम्बेडकर चाहते थे कि समाज के सभी वर्गों का धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक सभी क्षेत्रों में समान स्थान हो तथा उन्हे जीवन में ऊपर उठने के समान अवसर दिये जाये और उनकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया जाये। प्रत्येक सामाजिक संघर्ष के पीछे यही मौलिक भावनायें थी जो कि अछूतों ने अम्बेडकर के नेतृत्व में जातीय साम्प्रदायिक अत्याचारों के विरोध में छेड़े अम्बेडकर ने दलितों के मानवीय सम्मान के लिये निम्न सामाजिक संघर्ष छेड़े । राहुल सांस्कृत्यायन बौद्ध चेतना के अग्रदूत महापण्डित राहुल सास्कृत्यायन ने दलितों को क्रान्तिकारी सामाजिक नेतृत्व दिया उनका कहना था कि जाति-पाँति व्यवस्था हमारे ऋषि-मुनियों के उन बड़े अविष्कारों में से है जिन पर हमे बड़ा अभिमान है। राष्ट्रीय भावनाओं की जागृति के साथ-साथ है यद्यपि कुछ गिने चुने नेता लोग जाति-पाँति के खिलाफ बोलने लगे है पर अब भी उच्च कोटि के नेताओं का अधिकांश भाग अपने ऋषियों की इस अद्भुत विशेषता की कद्र करने को तैयार है। राहुल जी कहते है कि मुझे आश्चर्य होता है कि कैसे राष्ट्रीयता और जाति-पाँति दोनो साथ दाहिने - बांये कन्धे पर वहन किये जा सकते है। शुद्ध राष्ट्रीयता तब तक नही आ सकती जब तक आप जाति--पाँति तोड़ने को तैयार नही है। जब आप किसी भी पद पर पहुंचेगे तो ईमानदारी रहने पर आपकी राय को प्रभावित करने में सफलता सबसे अधिक आपके जाति भाइयों की होगी। उन्नीस वीं शताब्दी के प्रारम्भ से हमारे कुछ नेताओं ने दलितों पर होने वाले अत्याचारों पर विचार करना प्रारम्भ किया और सच पूछिये तो महात्मा गान्धी के उत्थान के पूर्व हमारे इन भाइयों के अभ्युदयः के प्रश्न पर गम्भीरता से विचार ही नही किया गया था। परन्तु राहुल सास्कृत्यायन के विचार से अभी भी इस विषय पर जितना ध्यान दिया जा रहा है वह काफी नही है । यदि भारतवर्ष में सारे मंदिर अछूतों के लिये खोल दिये जाये तो भी यह समस्या हल नही हो सकती क्योकि भारत की सीमा के भीतर दलितों में जो दरिद्रता है, वह अचिन्त्य है अछूत जो खेत मजदूर है वह गुलामों से अच्छी परिस्थिति में नही है। इसलिये हमे उनके लिये मन्दिर द्वार खोलने के प्रचार में बेकार समय नष्ट नही करना चाहिये । यह काम केवल व्यर्थ ही नही बल्कि खुद दलितों के लिये भी खतरनाक भी है। यह पुरोहितों की चालाकी और धर्मान्धता ही है जो कि उनकी वर्तमान अयोगति का कारण है। इन सरल मनुष्यों को ऐसी सरल सस्ती औषधि न दीजिए। पुजारी, धर्म और मंदिर को जहन्नुम में जाने दीजिये। अगर आपके सामने अपने देश और अपने लिये सच्चा आदर्श है तो उनकी आर्थिक विषमताओं का अध्ययन कीजिये । राहुल जी कहते है कि हमारे प्रान्त में पैंसठ लाख से अधिक दलित हैं उनमें पाँच लाख से अधिक किसान के रूप में भी नहीं रह सकते है। अब प्रश्न यह है कि बाकी साठ लाख की दशा कैसे सुधारी जाये ? हमारे बहुत से जिलो में अधिकांश जमीन खेत हो चुकी । उदाहरण के लिये, सारन जिले का क्षेत्रफल दो हज़ार छः सौ तिरासी वर्गमील है जिसमें दो हज़ार अट्ठावन वर्ग मील अर्थात एक करोड़ इकतीस लाख सत्रह हज़ार एक सौ बीस एकड़ में पहले से ही खेती होती है। दो सौ दो वर्ग मील अर्थात एक लाख उनतीस हज़ार दो सौ तीस एकड़ खेती के लायक नहीं है केवल एक सौ पैंसठ वर्ग मील अर्थात एक लाख पाँच हज़ार छः सौ एकड़ जमीन ऐसी है जो खेती करने के लायक है। किन्तु फिर मवेशियों के लिये चारागाह का प्रबन्ध करना होगा। अगर समूची जमीन उनकी चौबीस लाख छियासी हज़ार चार सौ अड़सठ जनसंख्या में बाँट दी जाये तो आधा एकड़ प्रति मनुष्य पड़ती है तो इतने से तो केवल जीवन यात्रा भी नही चल सकती अब इस जनसंख्या में दो लाख इकहत्तर हज़ार अछूत है। इससे स्पष्ट है कि जब जमीन की बचत नही पायी जा सकती तो इन दो लाख से भी अधिक दलित मजदूरों में बांटी जा राहुल जी के अनुसार सरकार को दलितो की स्थिति सुधारने हेतु निम्न सुविधायें जुटानी कृषि हेतु भूमि का प्रबन्ध - सरकार को ऐसी जमीन का अंदाज करे जो खेती के लायक है उसे ले कर दलितों में .बाईस. राहुल सांस्कृतायनः दिमाग गुलामी एक हज़ार नौ सौ चौरानवे पेज उनतालीस बाँट देनी चाहिये। यदि हम शीघ्रता से दलितों की दशा सुधारना चाहते है तो यह आवश्यक है कि हम उनके साथ उक्त प्रकार का नया बन्दोबस्त करे यदि सरकार इस मामले को गम्भीरता से अपने हाथ में ले ले तो खेती के लिये अछूत बहुत परिश्रमी मजदूर है और यदि सहयोग समितियों की सहायता से उनके परिश्रम का सच्चा और ठीक उपयोग किया जाये तो ऐसे प्रबन्ध के लिये जितन धन की आवश्यकता होगी, उसकी पूर्ति में देर लगेगी क्योकि परिश्रम ही तो धन है। गृह शिल्प शहरों और कस्बों में उनके लिये बस्तियाँ बसानी चाहिये। उन लोगो को गृह शिल्पों के उपयोगी तरीके सिखाये जाने चाहिये। शहरों और कस्बों में आने पर वे गाँवों की संकीर्णता से मुक्त हो जाते है । और यहाँ जीवन के नये तौर से आरम्भ कर सकते है। अगर वे आर्थिक दृष्टि से उन्नत बन जाये, शिक्षा प्राप्त करे और स्वास्थ्य एवं सफाई का ख्याल रखे तो छूत छात का अस्तित्व बहुत दिनों तक नही रह सकता हैं। इन आदर्श बस्तियों में यदि कोई उच्च वर्ण का कुटुम्ब रहना चाहे तो उसको इस शर्त पर रहने देना चाहिये कि वह दलितों के साथ बराबरी का व्यवहार रखे और उनके परिश्रम का अनुचित उपयोग न करे । सरकारी कल-कारखाने - हम लोगों को आबादी का नया तरीका सोचना चाहिये और यदि कुछ विलासिता की चीजों के निर्माण को, उदाहरणार्थ सिगेरट को सरकार के हाँथ में लिया जाये तो सरकार की आय बढ़ सकती है। यूरोप के बहुत से देश सिगरेट पर विशेष कर लगाये हुये है, लेकिन हम लोगो के लिये जापान का आदर्श सामने रखना चाहिये। जहाँ कि सिगरेट बनाने का समूचा व्यापार सरकार के हाथ में है। हमारा प्रान्त भी वो काम कर सकता है। हमारे प्रान्त में तम्बाकू काफी उत्पन्न होती है। सरकार को यह व्यापार अपने हाथ में ले लेना चाहिये। वह पिछड़ी जातियों को ऐसे कारखानों में काम देकर सहायता पहुँचा सकती है। सारांश यह है कि भविष्य की औद्योगिक योजना में सरकार तेईस. पूर्वोक्ति
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नागरिकता (संशोधन) बिल को लेकर असम में विरोध तेज होता जा रहा है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) की स्टूडेंट विंग छात्र मुक्ति संग्राम समिति की लालुक यूनिट ने असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा के खिलाफ केस दर्ज कराया है। गुवाहाटी में मीडिया के समक्ष कथित भड़काऊ भाषण को लेकर केस दर्ज कराया गया है। यह केस लखीमपुर पुलिस ने दर्ज किया है।
शिकायत के मुताबिक सरमा ने अपने भाषण में कहा था कि नागरिकता धर्म के आधार पर दी जाएगी। यह भड़काऊ था और इससे दंगे भड़क सकते हैं। उन्होंने आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दर्ज करने की मांग की। कुछ दिन पहले सरमा ने कहा था कि नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 असम के मूल लोगों की रक्षा करेगा और मुस्लिमों के नेतृत्व वाली एआईयूडीफ को असम के बड़े हिस्से को नियंत्रित करने रोकेगा। लखीमपुर के पुलिस अधीक्षक ने कहा, हमें लालुक में छात्र मुक्ति संग्राम समिति की ओर से शिकायत मिली है। हम मामले को देखेंगे।
गुवाहाटी में पूर्व प्रोफेसरों, वकीलों और डॉक्टरों ने हिमंता बिस्व सरमा के मुस्लिमों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर उनकी निंदा की और उन्हें कैबिनेट से हटाने की मांग की। वरिष्ठ वकील हाफिज रशीद अहमद चौधरी ने कहा, सरमा का राज्य के मुस्लिम समुदाय पर सीधा हमला संविधान के खिलाफ है। उन्हें तुरंत कैबिनेट से हटाना चाहिए।
एक और बुद्धिजीवी टी. रहमान बोरबोरा ने कहा, उनका बयान संविधान विरोधी है, इसलिए असम की सरकार को उन्हें तुरंत कैबिनेट से हटाना चाहिए। गुवाहाटी में एक रैली को दौरान सरमा की आलोचना की गई। वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंता ने कहा, असम के मुख्यमंत्री और सरमा जैसे नेताओं और बिल का समर्थन करने वाले सभी उन लोगों से ज्यादा अयोग्य हैं जो यहां एकत्रित हुए हैं।
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नागरिकता बिल को लेकर असम में विरोध तेज होता जा रहा है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति की स्टूडेंट विंग छात्र मुक्ति संग्राम समिति की लालुक यूनिट ने असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा के खिलाफ केस दर्ज कराया है। गुवाहाटी में मीडिया के समक्ष कथित भड़काऊ भाषण को लेकर केस दर्ज कराया गया है। यह केस लखीमपुर पुलिस ने दर्ज किया है। शिकायत के मुताबिक सरमा ने अपने भाषण में कहा था कि नागरिकता धर्म के आधार पर दी जाएगी। यह भड़काऊ था और इससे दंगे भड़क सकते हैं। उन्होंने आईपीसी की धारा एक सौ तिरेपन ए के तहत केस दर्ज करने की मांग की। कुछ दिन पहले सरमा ने कहा था कि नागरिकता बिल दो हज़ार उन्नीस असम के मूल लोगों की रक्षा करेगा और मुस्लिमों के नेतृत्व वाली एआईयूडीफ को असम के बड़े हिस्से को नियंत्रित करने रोकेगा। लखीमपुर के पुलिस अधीक्षक ने कहा, हमें लालुक में छात्र मुक्ति संग्राम समिति की ओर से शिकायत मिली है। हम मामले को देखेंगे। गुवाहाटी में पूर्व प्रोफेसरों, वकीलों और डॉक्टरों ने हिमंता बिस्व सरमा के मुस्लिमों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर उनकी निंदा की और उन्हें कैबिनेट से हटाने की मांग की। वरिष्ठ वकील हाफिज रशीद अहमद चौधरी ने कहा, सरमा का राज्य के मुस्लिम समुदाय पर सीधा हमला संविधान के खिलाफ है। उन्हें तुरंत कैबिनेट से हटाना चाहिए। एक और बुद्धिजीवी टी. रहमान बोरबोरा ने कहा, उनका बयान संविधान विरोधी है, इसलिए असम की सरकार को उन्हें तुरंत कैबिनेट से हटाना चाहिए। गुवाहाटी में एक रैली को दौरान सरमा की आलोचना की गई। वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंता ने कहा, असम के मुख्यमंत्री और सरमा जैसे नेताओं और बिल का समर्थन करने वाले सभी उन लोगों से ज्यादा अयोग्य हैं जो यहां एकत्रित हुए हैं।
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11:04 PM (IST)
पाकिस्तान की पारी !
दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन पाकिस्तान की टीम ने 9 विकेट के नुकसान पर 223 रन बना लिए हैं। पाकिस्तान के लिए मोहम्मद रिजवान 60 और नसीम शाह 1 रन बनाकर नाबाद हैं।
11:03 PM (IST)
स्टंप्स !
इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच का दूसरे दिन का खेल मौसम कारण प्रभावित रहा और खराब रोशनी के कारण तीसरे सेशन का खेल पूरा नहीं हो सका।
9:22 PM (IST)
खराब रोशनी के कारण खेल रुका !
खराब रोशनी के कारण टी-ब्रेक के एक ओवर बाद ही खेल को रोक दिया गया है।
9:13 PM (IST)
विकेट !
मोहम्मद अब्बास दो रन बनाकर ब्रॉड की गेंद पर हुए एलबीडबल्यू ।
9:08 PM (IST)
तीसरे सेशन का खेल शुरू हुआ !
टी ब्रेक के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर उतरे।
8:47 PM (IST)
टी टाइम!
खराब रोशनी की वजह से अंपायरों ने 15 मिनट पहले ही टी टाइम का ऐलान कर दिया है। टी के समय तक पाकिस्तान ने मोहम्मद रिजवान के अर्धशतक की मदद से 8 विकेट के नुकसान पर 215 रन बना लिए हैं। रिजवान 53 रन बनाकर अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं।
8:41 PM (IST)
8:40 PM (IST)
छूटा कैच!
8:38 PM (IST)
अर्धशतक!
पाकिस्तान के विकेट कीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 104 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। यह पाकिस्तान की पारी का पहला अर्धशतक है।
8:21 PM (IST)
चौका!
81वें ओवर की दूसरी गेंद पर पाकिस्तान को बाय के रूप में मिला एक और चौका। इसी के साथ पाकिस्तान का स्कोर पहुंचा 200 के पार।
8:20 PM (IST)
दूसरी नई गेंद!
80 ओवर का खेल हो चुका है और इंग्लैंड ने दूसरी नई गेंद ले ली है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक इंग्लैंड ने डोम बेस का इस्तेमाल नहीं किया है।
8:17 PM (IST)
चौका!
80वें ओवर की चौथी गेंद पर पाकिस्तान को बाय के रूप में मिले चार रन। ब्रॉड ने गेंद ज्यादा ही लेग साइड में डाल दी जिसे बटलर नहीं पकड़ पाए।
8:11 PM (IST)
चौका!
79वें ओवर की दूसीर गेंद पर रिजवान ने शानदार कवर ड्राइव लगाते हुए क्रिस वोक्स को लगाया चौका। रिजवान अब 44 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं और यह उनकी पारी का चौथा चौका है।
8:07 PM (IST)
चौका!
ओवर की चौथी गेंद पर इस बार रिजवान ने अपर कट लगाते हुए बटौरे चार रन। इसी के साथ पाकिस्तान का स्कोर 8 विकेट के नुकसान पर 191 रन हो गया है।
8:06 PM (IST)
चौका!
78वें ओवर की दूसरी गेंद पर रिजवान ने बैकवर्ड प्वॉइंट की दिशा में सैम कुर्रन को लगाया शानदार चौका। पाकिस्तान के लिए यह काफी महत्वपूर्ण रन है। रिजवान अब 35 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं।
8:04 PM (IST)
दूसरे सेशन में अभी तक 16 ओवर का खेल हुआ है जिसमें पाकिस्तान ने तीन विकेट के नुकसान पर 28 रन बनाए हैं। टी टाइम से पहले इंग्लैंड पाकिस्तान को समेटना चाहेगा।
8:00 PM (IST)
इंग्लैंड ने गंवाया रिव्यू!
76वें ओवर की आखिरी गेंद पर इंग्लैंड ने मोहम्मद अब्बास को एलबीडब्लू आउट के लिए रिव्यू लिया, लेकिन गेंद पर उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लगा था। इस वजह से इंग्लैंड ने गंवाया अपना रिव्यू।
7:58 PM (IST)
7:54 PM (IST)
चौका!
75वें ओवर की आखिरी गेंद पर रिजवान ने कदमों का इस्तेमाल करते हुए मिड विकेट की दिशा में लगाया शानदार चौका। रिजवान ने मनशा साफ कर दी है कि वह अब बड़े शॉट खेलने वाले हैं। इसी शॉट के साथ वह 28 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं।
7:51 PM (IST)
8वां विकेट!
176 के स्कोर पर पाकिस्तान को शाहीन अफरीदी के रूप में 8वां झटका लगा है। एक रन लेने के प्रयास में सिबली के हाथों वह बिना खाता खोले रन आउट हो गए हैं। अफरीदी ने इस दौरान कुल 19 गेंदों का सामना किया था।
7:45 PM (IST)
नॉट आउट!
74वें ओवर की आखिरी गेंद पर बाल-बाल बचे शाहीन अफरीदी। स्लिप में जो रूट गेंद को नहीं पकड़ पाए जिसके बाद उन्हें जीवनदान मिला।
7:35 PM (IST)
गेंदबाजी में बदलाव!
जेम्स एंडरसन की जगह अटैक पर आए क्रिस वोक्स। इससे पहले सैम कुर्रन ने ब्रॉड को रिप्लेस किया था।
7:29 PM (IST)
एंडरसन ने कुछ ऐसे यासिर शाह को किया आउट!
7:19 PM (IST)
7वां विकेट!
जेम्स एंडरसन ने पाकिस्तान को यासिर शाह के रूप में 7वां झटका दिया है। स्विंग करती हुई गेंद को छेड़ने के प्रयास में विकेट के पीछे 5 के निजी स्कोर पर कैच आउट हुए शाह। एंडरसन को मिली मैच की तीसरी सफलता।
7:13 PM (IST)
चौका!
68वें ओवर की तीसरी गेंद पर शानदार शॉट लगाते हुए यासिर शाह ने बटौरे चार रन। काफी देर के बाद उनके बल्ले से कोई गेंद टकराई है।
7:07 PM (IST)
छूटा कैच!
66वें ओवर की तीसरी गेंद पर बटलर ने विकेट के पीछे मोहम्मद रिजवान का छोड़ा कैच। ये कैच थोड़ा मुश्किल था। बटलर के लिए विकेट के पीछे समय काफी खराब चल रहा है। वह अभी तक कई मौके अपने हाथ से गंवा चुके हैं।
7:02 PM (IST)
कुछ इस अंदाज में बाबर लौटे पवेलियन!
6:55 PM (IST)
6ठां विकेट!
स्टुअर्ट ब्रॉड ने बाबर आजम को विकेट के बीच जोस बटलर के हाथों कैच आउट कर पाकिस्तान को दिया 6ठां झटका। ब्रॉड की इस मैच की यह दूसरी सफलता है। बाबर आजम ने बनाए 47 रन। क्रीज पर अब बल्लेबाजी करने आए हैं यासिर शाह।
6:42 PM (IST)
लंच खत्म!
लंच के बाद मैदान पर खिलाड़ी लौट चुके हैं। गेंदबाजी की शुरुआत स्टुअर्ट ब्रॉड करेंगे वहीं पहली गेंद का सामना बाबर आजम करेंगे।
6:10 PM (IST)
6:05 PM (IST)
लंच!
पाकिस्तान के नाम रहा पहला सेशन। दूसरे दिन पाकिस्तान ने लंच तक एक भी विकेट नहीं खोया है। बाबर आजम 45* और रिजवान 12* रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। पाकिस्तान का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर 155 रन है।
6:00 PM (IST)
150 के पार पाकिस्तान!
61वें ओवर की पहली गेंद पर रिजवान ने एक रन लेकर पाकिस्तान के 150 रन पूरे किए। पाकिस्तान के लिए पहला सेशन काफी अच्छा गुजरता हुआ। बाबर 42 और रिजवान 12 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।
5:38 PM (IST)
आखिरी 10 ओवर में 21 रन!
पाकिस्तान ने अपने आखिरी 10 ओवर में बिना विकेट खोए 21 रन बनाए हैं। ओवर कास्ट कंडीशन में पाकिस्तान के लिए ये शुरुआत अच्छी मानी जा रही है।
5:18 PM (IST)
50 ओवर का खेल हुआ पूरा!
पाकिस्तान की पहली पारी के 50 ओवर पूरे हो चुके हैं और उन्होंने 5 विकेट के नुकसान पर 138 रन बना लिए हैं। पाकिस्तान की नजरें बड़े स्कोर पर है, वहीं इंग्लैंड जल्द से जल्द उन्हें समेटना चाहेगी।
5:07 PM (IST)
चौका!
48वें ओवर की दूसरी गेंद पर बाबर आजम ने मिड विकेट की दिशा में लगाया शानदार चौका। बाबर आजम इसी के साथ 30 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं।
5:02 PM (IST)
दूसरे दिन का खेल शुरू!
दूसरे दिन का खेल शुरू हो गया है। वोक्स ने अपनी दो गेंदें पूरी कर 46वां ओवर खत्म किया। बाबर 25 और रिजवान 4 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। अगला ओवर डालेंगे जेम्स एंडरसन।
4:42 PM (IST)
भारतीय समयानुसार 5 बजे शुरू होगा मुकाबला।
4:09 PM (IST)
अच्छी खबर!
बारिश रुक चुकी है और कवर्स मैदान से हटा दिए गए हैं। अब कुछ ही देर में अंपायर इंस्पेक्शन के लिए मैदान पर उतरेंगे और बताएंगे कि मैच कितनी देर में शुरू होगा।
3:37 PM (IST)
3:32 PM (IST)
दूसरे दिन भी बारिश की खलल जारी।
2:42 PM (IST)
126 रन पर पाकिस्तान के पांच विकेट गिराने के बाद इंग्लैंड के गेंदबाज मैच के दूसरे दिन (आज) भी उन पर दबाव बनाए रखना चाहेंगे और जल्द से जल्द आउट करना चाहेंगे। पाकिस्तान की तरफ से मैदान में बाबर आजम (25) और विकेटकीपर बल्ल्लेबाज मोहम्मद रिजवान (4) रन बनाकर नाबद खेल रहे हैं। जबकि इंग्लैंड की तरफ से अभी तक सबसे ज्यादा इस पारी में 2 विकेट जेम्स एंडरसन ले चुके हैं। .
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ग्यारह:चार PM पाकिस्तान की पारी ! दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन पाकिस्तान की टीम ने नौ विकेट के नुकसान पर दो सौ तेईस रन बना लिए हैं। पाकिस्तान के लिए मोहम्मद रिजवान साठ और नसीम शाह एक रन बनाकर नाबाद हैं। ग्यारह:तीन PM स्टंप्स ! इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच का दूसरे दिन का खेल मौसम कारण प्रभावित रहा और खराब रोशनी के कारण तीसरे सेशन का खेल पूरा नहीं हो सका। नौ:बाईस PM खराब रोशनी के कारण खेल रुका ! खराब रोशनी के कारण टी-ब्रेक के एक ओवर बाद ही खेल को रोक दिया गया है। नौ:तेरह PM विकेट ! मोहम्मद अब्बास दो रन बनाकर ब्रॉड की गेंद पर हुए एलबीडबल्यू । नौ:आठ PM तीसरे सेशन का खेल शुरू हुआ ! टी ब्रेक के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर उतरे। आठ:सैंतालीस PM टी टाइम! खराब रोशनी की वजह से अंपायरों ने पंद्रह मिनट पहले ही टी टाइम का ऐलान कर दिया है। टी के समय तक पाकिस्तान ने मोहम्मद रिजवान के अर्धशतक की मदद से आठ विकेट के नुकसान पर दो सौ पंद्रह रन बना लिए हैं। रिजवान तिरेपन रन बनाकर अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं। आठ:इकतालीस PM आठ:चालीस PM छूटा कैच! आठ:अड़तीस PM अर्धशतक! पाकिस्तान के विकेट कीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने एक सौ चार गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। यह पाकिस्तान की पारी का पहला अर्धशतक है। आठ:इक्कीस PM चौका! इक्यासीवें ओवर की दूसरी गेंद पर पाकिस्तान को बाय के रूप में मिला एक और चौका। इसी के साथ पाकिस्तान का स्कोर पहुंचा दो सौ के पार। आठ:बीस PM दूसरी नई गेंद! अस्सी ओवर का खेल हो चुका है और इंग्लैंड ने दूसरी नई गेंद ले ली है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक इंग्लैंड ने डोम बेस का इस्तेमाल नहीं किया है। आठ:सत्रह PM चौका! अस्सीवें ओवर की चौथी गेंद पर पाकिस्तान को बाय के रूप में मिले चार रन। ब्रॉड ने गेंद ज्यादा ही लेग साइड में डाल दी जिसे बटलर नहीं पकड़ पाए। आठ:ग्यारह PM चौका! उन्यासीवें ओवर की दूसीर गेंद पर रिजवान ने शानदार कवर ड्राइव लगाते हुए क्रिस वोक्स को लगाया चौका। रिजवान अब चौंतालीस के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं और यह उनकी पारी का चौथा चौका है। आठ:सात PM चौका! ओवर की चौथी गेंद पर इस बार रिजवान ने अपर कट लगाते हुए बटौरे चार रन। इसी के साथ पाकिस्तान का स्कोर आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ इक्यानवे रन हो गया है। आठ:छः PM चौका! अठहत्तरवें ओवर की दूसरी गेंद पर रिजवान ने बैकवर्ड प्वॉइंट की दिशा में सैम कुर्रन को लगाया शानदार चौका। पाकिस्तान के लिए यह काफी महत्वपूर्ण रन है। रिजवान अब पैंतीस के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। आठ:चार PM दूसरे सेशन में अभी तक सोलह ओवर का खेल हुआ है जिसमें पाकिस्तान ने तीन विकेट के नुकसान पर अट्ठाईस रन बनाए हैं। टी टाइम से पहले इंग्लैंड पाकिस्तान को समेटना चाहेगा। आठ:शून्य PM इंग्लैंड ने गंवाया रिव्यू! छिहत्तरवें ओवर की आखिरी गेंद पर इंग्लैंड ने मोहम्मद अब्बास को एलबीडब्लू आउट के लिए रिव्यू लिया, लेकिन गेंद पर उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लगा था। इस वजह से इंग्लैंड ने गंवाया अपना रिव्यू। सात:अट्ठावन PM सात:चौवन PM चौका! पचहत्तरवें ओवर की आखिरी गेंद पर रिजवान ने कदमों का इस्तेमाल करते हुए मिड विकेट की दिशा में लगाया शानदार चौका। रिजवान ने मनशा साफ कर दी है कि वह अब बड़े शॉट खेलने वाले हैं। इसी शॉट के साथ वह अट्ठाईस के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। सात:इक्यावन PM आठवां विकेट! एक सौ छिहत्तर के स्कोर पर पाकिस्तान को शाहीन अफरीदी के रूप में आठवां झटका लगा है। एक रन लेने के प्रयास में सिबली के हाथों वह बिना खाता खोले रन आउट हो गए हैं। अफरीदी ने इस दौरान कुल उन्नीस गेंदों का सामना किया था। सात:पैंतालीस PM नॉट आउट! चौहत्तरवें ओवर की आखिरी गेंद पर बाल-बाल बचे शाहीन अफरीदी। स्लिप में जो रूट गेंद को नहीं पकड़ पाए जिसके बाद उन्हें जीवनदान मिला। सात:पैंतीस PM गेंदबाजी में बदलाव! जेम्स एंडरसन की जगह अटैक पर आए क्रिस वोक्स। इससे पहले सैम कुर्रन ने ब्रॉड को रिप्लेस किया था। सात:उनतीस PM एंडरसन ने कुछ ऐसे यासिर शाह को किया आउट! सात:उन्नीस PM सातवां विकेट! जेम्स एंडरसन ने पाकिस्तान को यासिर शाह के रूप में सातवां झटका दिया है। स्विंग करती हुई गेंद को छेड़ने के प्रयास में विकेट के पीछे पाँच के निजी स्कोर पर कैच आउट हुए शाह। एंडरसन को मिली मैच की तीसरी सफलता। सात:तेरह PM चौका! अड़सठवें ओवर की तीसरी गेंद पर शानदार शॉट लगाते हुए यासिर शाह ने बटौरे चार रन। काफी देर के बाद उनके बल्ले से कोई गेंद टकराई है। सात:सात PM छूटा कैच! छयासठवें ओवर की तीसरी गेंद पर बटलर ने विकेट के पीछे मोहम्मद रिजवान का छोड़ा कैच। ये कैच थोड़ा मुश्किल था। बटलर के लिए विकेट के पीछे समय काफी खराब चल रहा है। वह अभी तक कई मौके अपने हाथ से गंवा चुके हैं। सात:दो PM कुछ इस अंदाज में बाबर लौटे पवेलियन! छः:पचपन PM छःठां विकेट! स्टुअर्ट ब्रॉड ने बाबर आजम को विकेट के बीच जोस बटलर के हाथों कैच आउट कर पाकिस्तान को दिया छःठां झटका। ब्रॉड की इस मैच की यह दूसरी सफलता है। बाबर आजम ने बनाए सैंतालीस रन। क्रीज पर अब बल्लेबाजी करने आए हैं यासिर शाह। छः:बयालीस PM लंच खत्म! लंच के बाद मैदान पर खिलाड़ी लौट चुके हैं। गेंदबाजी की शुरुआत स्टुअर्ट ब्रॉड करेंगे वहीं पहली गेंद का सामना बाबर आजम करेंगे। छः:दस PM छः:पाँच PM लंच! पाकिस्तान के नाम रहा पहला सेशन। दूसरे दिन पाकिस्तान ने लंच तक एक भी विकेट नहीं खोया है। बाबर आजम पैंतालीस* और रिजवान बारह* रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। पाकिस्तान का स्कोर पाँच विकेट के नुकसान पर एक सौ पचपन रन है। छः:शून्य PM एक सौ पचास के पार पाकिस्तान! इकसठवें ओवर की पहली गेंद पर रिजवान ने एक रन लेकर पाकिस्तान के एक सौ पचास रन पूरे किए। पाकिस्तान के लिए पहला सेशन काफी अच्छा गुजरता हुआ। बाबर बयालीस और रिजवान बारह रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। पाँच:अड़तीस PM आखिरी दस ओवर में इक्कीस रन! पाकिस्तान ने अपने आखिरी दस ओवर में बिना विकेट खोए इक्कीस रन बनाए हैं। ओवर कास्ट कंडीशन में पाकिस्तान के लिए ये शुरुआत अच्छी मानी जा रही है। पाँच:अट्ठारह PM पचास ओवर का खेल हुआ पूरा! पाकिस्तान की पहली पारी के पचास ओवर पूरे हो चुके हैं और उन्होंने पाँच विकेट के नुकसान पर एक सौ अड़तीस रन बना लिए हैं। पाकिस्तान की नजरें बड़े स्कोर पर है, वहीं इंग्लैंड जल्द से जल्द उन्हें समेटना चाहेगी। पाँच:सात PM चौका! अड़तालीसवें ओवर की दूसरी गेंद पर बाबर आजम ने मिड विकेट की दिशा में लगाया शानदार चौका। बाबर आजम इसी के साथ तीस के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। पाँच:दो PM दूसरे दिन का खेल शुरू! दूसरे दिन का खेल शुरू हो गया है। वोक्स ने अपनी दो गेंदें पूरी कर छियालीसवां ओवर खत्म किया। बाबर पच्चीस और रिजवान चार रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। अगला ओवर डालेंगे जेम्स एंडरसन। चार:बयालीस PM भारतीय समयानुसार पाँच बजे शुरू होगा मुकाबला। चार:नौ PM अच्छी खबर! बारिश रुक चुकी है और कवर्स मैदान से हटा दिए गए हैं। अब कुछ ही देर में अंपायर इंस्पेक्शन के लिए मैदान पर उतरेंगे और बताएंगे कि मैच कितनी देर में शुरू होगा। तीन:सैंतीस PM तीन:बत्तीस PM दूसरे दिन भी बारिश की खलल जारी। दो:बयालीस PM एक सौ छब्बीस रन पर पाकिस्तान के पांच विकेट गिराने के बाद इंग्लैंड के गेंदबाज मैच के दूसरे दिन भी उन पर दबाव बनाए रखना चाहेंगे और जल्द से जल्द आउट करना चाहेंगे। पाकिस्तान की तरफ से मैदान में बाबर आजम और विकेटकीपर बल्ल्लेबाज मोहम्मद रिजवान रन बनाकर नाबद खेल रहे हैं। जबकि इंग्लैंड की तरफ से अभी तक सबसे ज्यादा इस पारी में दो विकेट जेम्स एंडरसन ले चुके हैं। .
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पाकर कर्नल लॉंग ने उनके पिता को सलाह दी कि वे लड़के को फौज में भर्ती करवा दें । इसी के अनुसार सन् 1912 में मित्रसेन पिता तथा दादा की सेना 1/1 गोरखा राइफल्स में सिग्नल में भर्ती हो गए । सन् 1815 में मलाऊन किला (हिमाचल प्रदेश) में अंग्रेजों के साथ भयानक युद्ध हुआ था । युद्ध में गौरखाली सैनिकों की बहादुरी को देखकर अंग्रेजों ने युद्ध के बाद उसी वर्ष (1815 में) सपाटू (शिमला हिल्स) में पहला गोरखा रेजिमेन्ट खड़ा किया । सन् 1861 में इस सेना ने भागसू धर्मशाला में स्थायी जगह पाई । आजादी के बाद सन् 1955 में यानी 94 वर्षों के बाद इसे चौथे गोरखा (रजिमेन्ट) के साथ मिलाकर यहाँ से स्थानान्तरण कर दिया गया और आजकल 14 गोरखा ट्रेनिंग सेन्टर के नाम से इसका स्थायी पता सपाटू (हिमाचल प्रदेश) हो गया है ।
मित्रसेन की गीत-संगीत सम्बन्धी प्रतिभा को देखकर सभी सरदार और जवान बहुत प्रभावित थे । सेना के उत्सव से लेकर होली- दशहरा तक में मित्रसेन की कला सभी को मंत्रमुग्ध कर देती थी । वे सगीत साधना की ओर ज्यादा समय दे सकें, यह सोचकर उन्हें कवायद और परेड आदि से प्रायः मुक्त रखा जाता था । फौज में रहते हुए उन्होने झ्याउरे, रोदी, सोरठी, भजन, चुडका आदि विभिन्न प्रकार के लोकलयों में तरह-तरह के गीत हार्मोनियम बजा कर गाना सीखा । मारूनी ( मगर जाति द्वारा मृदंग के साथ स्त्री - वेश में नाचना) फुर्संगे, होली के फाग-नाच जैसे तरह-तरह के लोक नृत्यों में उन्हें खूब मजा आता था । मालश्री गाने के साथ भानुभक्त की रामायण को लय के साथ गाने में वे बहुत प्रवीण थे जिससे उन्हें और भी लोकप्रियता प्राप्त हुई ।
कुशाग्र बुद्धि का होने के कारण उन्हें अपना सिग्नलिंग का काम सीखने में कोई परेशानी नहीं हुई । इसी बीच प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया । सन् 1914 में अपनी पल्टन के साथ फ्रांस के कई मोर्चों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके बाद, मित्रसेन की पल्टन को मेसोपोटामिया (मिड्लइस्ट) जाने का आदेश हुआ । वहाँ टर्की की फौज के साथ लगभग तीन वर्ष (1916-18) तक निरन्तर
युद्ध जारी रहा । अन्ततः 1918 में शान्ति सन्धि की घोषणा के बाद प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ । इस भयंकर युद्ध में अपार जन-धन की हानि हुई । लाखों मनुष्य मारे गए, लाखों घायल हुए । मित्रसेन की पल्टन के सैकड़ों जवान उस चार वर्ष के युद्ध में हताहत हुए । इससे भावुक हृदय मित्रसेन के मन पर गहरी चोट पहुँची । सन् 1920 में विजय पताका फहराती हुई मित्रसेन की पल्टन भारत वापस आई । लेकिन, इससे मित्रसेन खुश नहीं था । अन्य देश में जाकर लड़ने के बदले अपने देश और समाज की ही कोई ठोस सेवा करना बेहतर जानकर मित्रसेन ने भागसू आते ही मुक्ति (रिलोज) का आदेश ले लिया । उस समय उनकी उम्र पच्चीस वर्ष थी ।
सेना से सेवानिवृत्त होकर घर आने के पहले ही पिता स्वर्गवासी हो गये थे । माँ ने घर में ही आटा-चावल की छोटी दूकान खोल ली थी । पत्नी घर गृहस्थी का काम काज और बच्चों के साथ गाय-गोशाले की देखभाल करती थी । पिता ठीकेदारी से बहुत धन-सम्पत्ति अर्जित करके गए थे तो भी मित्रसेन ने सन् 1921 में अपने एक मित्र श्रीरंग की सलाह और सहयोग से अपनी पल्टन में भागीदार बनकर कैन्टीन चलाने का काम प्रारंभ किया। मित्रसेन के इस निश्चय को जानकर पल्टन के सभी साहब, सरदार या जवान । बहुत प्रसन्न हुए।
कैन्टीन के लिए सामान खरीदने हेतु मित्रसेन समय-समय पर अमृतसर जाते थे और वहाँ सप्ताह-दस दिन तक रुक जाते थे । इस अवधि में वे शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करते थे तथा कभी लाहौर में जाकर अथियेट्रिकल कम्पनी जैसे प्रसिद्ध नाटक संस्थान द्वारा प्रस्तुत नाटकों को देखा करते थे । घर वापस आकर वे आधी-आधी रात तक स्थानीय गीत-संगीत की महफ़िल में भाग लेकर आनन्द लेते थे । सबेरे उठकर बाकायदा अभ्यास करते थे और दिनभर कैन्टीन का काम देखते थे। उस समय यही उनकी दिनचर्या थी ।
जिस समय मित्रसेन फ्राँस गये थे उस समय उन्हें मात्र दो
सन्तान - एक पुत्र और एक पुत्री थी । सन् 1921 और 1923 में दो पुत्रियाँ और पैदा हुई । सन् 1923-24 में हैजा के कारण कुछ दिन और महीने के अन्तराल पर पत्नी समेत इन सभी सन्तानों की मृत्यु हो गई जिससे मित्रसेन के ऊपर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा । 1905 के भूकम्प में ढेर सारे लोगों के मरने तथा घायल होने के दृश्य ने भी मित्रसेन के मन पर गहरा आघात किया था, विश्वयुद्ध के दौरान हज़ारों लाखों मनुष्यों के मरने तथा घायल होने के प्रत्यक्ष अनुभव ने मित्रसेन के मन के अन्दर गहरा घाव पैदा किया था, और ऐसे में पत्नी और सन्तान के इस असामायिक निधन ने भावुक मित्रसेन के हृदय की कैसी हालत कर दी होगी, मात्र कल्पना की जा सकती है ।
बूढ़ी माँ तथा इष्ट मित्र, भाई-बन्धु - सभी ने मित्रसेन को यथासंभव समझाया, सान्त्वना दी । स्वयं मित्रसेन ने भी खुद को संभालने की शक्तिभर चेष्टा की, लेकिन सांसारिक कार्यों से उनका मन फिर गया । इसके बाद, कैन्टीन का कारोबार उसके हिस्सेदार को अकेले चलाना पड़ा । अब मित्रसेन के हाथ में या तो कोई धार्मिक पुस्तक होती थी या हार्मोनियम बाजा । बातचीत या हँसी-मजाक करना उन्होंने एकदम बन्द कर दिया था । वे रामायण, गीता, महाभारत, चण्डीपाठ आदि ग्रन्थों का अध्ययन-मनन करते या रोज़ कई घंटे तक लगातार ध्यान प्राणायाम क्रिया किया करते । साथ ही, वाद्ययंत्र लेकर गाने की साधना भी उसी प्रकार चलती रहती । अब वे एकदम एकसूरहा ( एक ही तरफ ध्यान देनेवाला) हो गए थे । उस समय तक अपने गीत-संगीत के अभ्यास में उन्होंने शान्त रस, करुण रस एवं भक्ति रस का बाहुल्य ही लाया । गीता के "निर्ममो निरहंकारस्य स शान्तिमधिगच्छति" मंत्र से प्रेरणा पाकर वे शान्ति साधना का सतत प्रयास करने लगे। वे तो प्रारंभ से ही विनम्र और अभिमानरहित थे लेकिन मोह-ममता का परित्याग करने में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके अन्दर वैराग्य के लक्षण को देखकर माँ परेशान हो गई, साथ ही अन्य सम्बन्धी और हितैषी भी चिन्तित हो गए । सभी को आशंका हुई कि कहीं
वै योगी बनकर भाग ना जाँय । इसलिए, सभी उन्हें दिन-रात घेरकर समझाने-बुझाने का प्रयास करने लगे । लेकिन, मित्रसेन ने उस समय तक अपने भावी जीवन की रूपरेखा तैयार कर ली थी। सभी इष्ट मित्रों की सलाह से और खासकर माँ के बार-बार आग्रह करने के कारण वे दूसरा विवाह करने को राजी हो गए । तत्पश्चात् सन् 1925 में सल्लाधारी गाँव की कन्या लाजवन्ती थापा के साथ उनका विवाह हुआ जो आज ठीक अस्सी वर्ष की हो गई हैं ।
विवाह के कुछ महीने बाद मित्रसेन ने अपनी भावी योजना के अनुसार सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया । भागसू के इतिहास में सबसे पहले सन् 1926 में हिमालयन थियेट्रिकल कम्पनी की स्थापना करके मित्रसेन ने बहुत ख्याति अर्जित की और 'दुनिया झुकती है, झुकानेवाला चाहिए' जैसी प्रिय उक्ति को उन्होंने चरितार्थ कर दिखाया ।
उस समय पंजाब में उर्दू और हिन्दुस्तानी भाषा का ही विशेष प्रचलन या । अतएव मित्रसेन ने भी अपना पहला नाटक 'बिल्वमंगल' (सूरदास) हिन्दी उर्दू मिश्रित भाषा में तैयार किया । माँ के श्रीकृष्ण के प्रति आस्था से प्रेरित होकर उन्होंने कृष्णभक्त के जीवन चरित्र से ही रंगमंच कला प्रदर्शन का शुभारंभ किया । "यह ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहि नाच नचायो, सूरदास तब विहँसि यसोदा ले उर कठ लगायो । मैया मोरी मै नहीं माखन खायो।" सूरदास के साहित्य में भगवान कृष्ण की बाललीला का अनूठा वर्णन पढ़कर मित्रसेन बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने बहुत मन लगाकर इस नाटक को तैयार किया। लगभग तीन घंटे तक चलने वाले इस नाटक के निर्माता, संवाद-लेखक, धुन रचयिता, निर्देशक, संगीत और नृत्य निर्देशक, प्रमुख अभिनेता और गायक, सभी अकेले वे स्वयं थे । नाटक हर जगह 'हिट' हुआ । तभी से मित्रसेन 'मास्टर मित्रसेन' के नाम से विख्यात हो गए ।
उक्त नाटक की सफलता के बाद मित्रसेन ने पंजाब में प्रचलित लोक कथा के आधार पर हीर-रांझा तथा सोहनी महिवाल जैसे दुखान्त नाटकों को रंगमंच पर प्रस्तुत किया । यद्यपि इन नाटकों
में प्रायः उर्दू भाषा का प्रयोग किया गया था लेकिन बीच-बीच में उनके द्वारा पंजाबी लोकगीत या लोकनृत्य के दृश्यों का समावेश कर देने से दर्शको को बहुत अच्छा लगता था । उनकी नाटक कम्पनी में गोरखाली, पहाड़ी या पंजाबी लगभग पच्चीस कलाकार तथा सात आठ कर्मचारी थे। मास्टर जी के व्यवहार ने सभी सदस्यों को संगठित कर दिया था । दो-तीन वर्ष की अवधि में उन्होंने उक्त नाटकों के अतिरिक्त दर्दे जिगर, नूर की पुतली, मशरकी हूर तथा बादशाह टावर आदि नाटकों को उर्दू भाषा में प्रदर्शित किया । यद्यपि उनके द्वारा खेले गए सभी नाटकों में हास्य दृश्य प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे लेकिन 'बादशाह टावर' प्रारंभ से अन्त तक हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण था । भागसू छावनी के साथ-साथ धर्मशाला, पालमपुर, कांगड़ा, शाहपुर, कोटला, नूरपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, बटाला आदि शहरों में हर जगह उक्त नाटकों का खेल प्रदर्शन कई सप्ताह तक लगातार चलता था । इस अवधि में मास्टर मित्रसेन की प्रसिद्धि पूरे पंजाब मे सर्वत्र फैल गई । तब तक भारत में सिनेमा प्रारंभ नहीं हुआ था । मात्र ख्यातिलब्ध नाटक कम्पनी बड़े-बड़े शहरों में खेल दिखाया करती थी । इसलिए, छोटे-छोटे शहर-कस्बे में मित्रसेन की नाटक प्रदर्शन सेवा यहाँ उल्लेखनीय है ।
अनेकानेक कहानी पुस्तकों के सहारे उर्दू-हिन्दुस्तानी भाषा में संवाद लिखने, गीत रचने तथा धुन बनाने का अभ्यास मित्रसेन ने इसी बीच किया । रंगमंच पर गाते समय उनकी मधुर तेज़ भराई आवाज श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर देती थी । उस समय तक पंजाब में बहुत बड़ी जन जागृति आ गई थी । राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक संस्थायें सभी सक्रिय थीं । इसलिए, मित्रसेन जैसे प्रतिभावान कलाकार की सेवा प्राप्त करने की हर संस्था की लालसा स्वाभाविक ही थी । इसलिए, सन् 1928 में सनातनधर्म प्रतिनिधि सभा के पंजाब के संचालक ने मित्रसेन को लाहौर से आदरपूर्वक आमंत्रित किया । उन्होंने बहुत गंभीरतापूर्वक इस प्रस्ताव पर विचार किया और उसके बाद धर्म प्रचारक के रूप में कुछ समय तक कार्य
करने की सहमति व्यक्त की । लगभग चार वर्षों तक उन्होंने पूरे पंजाब में घूम-घूमकर गीत संगीत तथा कथा-व्याख्यान के माध्यम से धर्म प्रचार के कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। इस बीच उन्होंने उर्दू हिन्दी या संस्कृत भाषा में लिखी अनेकानेक पुस्तकों या धर्मग्रन्थों को पढ़ा, साथ ही देश-विदेश के प्रख्यात साहित्यकारों की अनुवादित कृतियों का भी गहराई से अध्ययन किया। देश के कतिपय विख्यात धार्मिक या सामाजिक विद्वान् कार्यकर्ताओं के साथ नजदीकी सम्पर्क के कारण उनके व्यक्तित्व में और भी निखार आ गया । दैनिक या सामाजिक पत्र-पत्रिकाओं के द्वारा उन्हें देश की राजनीतिक गतिविधि के साथ-साथ राजनीतिक नेताओं के विचार सुनने का अवसर प्राप्त हुआ।
शास्त्रीय संगीत की वास्तविक जानकारी होने के कारण मित्रसेन का भजन-संकीर्त्तन कार्यक्रम मनभावन होता था । कथा-व्याख्यान में वे महाभारत के प्रसंगों के साथ-साथ गीता के उपदेशों को भी बोलकर या गाकर सुनाया करते थे । उस समय, स्वतंत्रता के संघर्ष-मय परिवेश में जनजागृति के सन्दर्भ में यही विषय उपयुक्त था । महाभारत में मित्रसेन राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक सामग्रियों को प्रचुर मात्रा में मिला सके थे । इन सामग्रियों का उपयोग बाद में उन्होंने नेपाली भाषा संस्कृति को सजाने सँवारने में किया । सन् 1928 से 1931 तक लगातार घुम घुमकर धर्म प्रचार का कार्य करते रहने से मित्रसेन अस्वस्थ हो गए और दिन-व- दिन उनका शरीर सूखता चला गया ।
इस समय लाला लाजपतराय के ऊपर अंग्रेज द्वारा लाठी प्रहार, महात्मा गाँधी का नमक सत्याग्रह आन्दोलन तथा सरदार भगतसिंह को फाँसी पर लटकाने की घटना ने भावुक मित्रसेन को बहुत विचलित कर दिया । उधर ठाकुर चन्दनसिंह की पत्रिका ने भी उनके मन में बहुत हलचल पैदा कर दी थी । फिर, भ्रमण काल में उन्हें कुछ अबोध निर्धन गोरखाली युवतियों को पंजाब में लाकर बेच देने की जानकारी मिली । इसके बाद आमरण अपने समाज की सेवा करने का निश्चय करके उन्होंने सन् 1932 में सनातन
धर्मसभा के समक्ष अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर दिया ।
भागसू में वापस आने पर मित्रसेन शीघ्र रोगमुक्त हो गए । लेकिन स्थानीय कलाकार और नाटक प्रेमी दर्शकों के स्नेहपूर्ण आग्रह की उपेक्षा न कर सकने का कारण, उन्होंने एक वर्ष के अन्दर ही हिन्दुस्तानी भाषा मे तीन नाटको को तैयार कर दिखाया । पहला नाटक "वीर अभिमन्यु" मे बहादुर युवा अभिमन्यु के पराक्रम और बलिदान की तथा अंग्रेज जैसे शक्तिशाली कौरव दल के छल कपट एवं अत्याचार की कथा थी । इस कथा को रंगमच पर दिखाने का मित्रसेन का उद्देश्य यह था कि इससे विशेषतया देश के युवा वर्ग की छाती में अन्याय या अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष कर सकने की भावना का संचार होगा। दूसरा नाटक "परिवर्त्तन" में भी देश और समाज के लिए तन-मन-धन अर्पण कर देने का निश्चय अथवा हृदय-परिवर्त्तन की अभिव्यक्ति थी । तीसरा नाटक "यहूदी की बेटी" में एक युवती की सूझबूझ और साहस का अनूठा दृश्य दिखाया गया
1926-32 की अवधि में मित्रसेन की एकमात्र सन्तान दिग्विजय सेन थापा का जन्म सन् 1926 में हुआ । अन्य घटनाओं में सन् 1926 मे ही देहरादून के युवा खड्गबहादुर सिंह बिष्ट की अद्वितीय पराक्रम के बाद जेल से मुक्ति, साबरमती आश्रम में गाँधी जी द्वारा उनका प्रशिक्षण, दंडीयात्रा में शामिल होना, देहरादून छावनी में अपने युवा सहयोगियों के साथ देशप्रेम या आजादी के संदेश को फैलाने हेतु साहसिक प्रचार कार्य करना तथा लापता होना, साथ ही ठाकुर चन्दन सिंह द्वारा सम्पादित और देहरादून से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका अर्थात् नेपाली भाषा में "गोरखा संसार" और "तरुण गोरखा" तथा अंग्रेजी भाषा में "दि हिमालयन टाईम्स" यहाँ उल्लेखनीय हैं । मित्रसेन ने जहाँ युवा खड्गबहादुर बिष्ट के साहस, पराक्रम तथा देशभक्ति की भावना से बहुत प्रेरणा पाई, वहाँ ठाकुर चन्दन सिंह की उक्त पत्रिकाओं से नेपाली भाषा तथा भारतीय संस्कृति के प्रति प्रगाढ़ प्रेम प्राप्त किया ।
जीवन के अन्तिम भाग (1933-46) में मित्रसेन तेरह वर्षों तक
निरन्तर साहित्य सृजन के साथ-साथ धर्म प्रचार, समाजसेवा और देशसेवा के कार्यों में रत रहे । भारत में उस समय अंग्रेज अधिकारी देश के अधिकांश धनी और स्वार्थी तत्वों को साथ लेकर यहाँ की निर्धन, अशिक्षित एवं कमजोर जनता पर घोर अन्याय और अत्याचार कर रहे थे, मित्रसेन के सामने यह बात स्पष्ट थी । नेपाल में भी अंग्रेजों के संरक्षण में वहाँ के निरंकुश राणा परिवार का आदेशात्मक शासन गरीब प्रजा पर जोर जुल्म करते हुए किस प्रकार निर्दयतापूर्वक शोषण कर रहा था, यह दृश्य उन्होंने अपने भ्रमण काल (1933-35) में प्रत्यक्ष देखा था । शिक्षा के नितान्त अभाव के कारण और निर्धनता की चक्की में लगातार पीसे जाने के कारण वहाँ मित्रसेन ने जनजागरण की नितान्त आवश्यकता महसूस की । लेकिन, नेपाल के अन्दर उस समय अत्यन्त कड़ा शासन-प्रबन्ध होने के कारण उन्हें वहाँ किसी प्रकार के प्रचार कार्य को प्रारंभ करना मुश्किल लगा । तानसिंग, रिड़ि, पाल्पा, गुलमी, पोखरा, बागलुंग, लमजुंग, गोरखा, नवाकोट इत्यादि स्थानों में लगभग डेढ वर्षों तक भ्रमण कर मित्रसेन वहाँ के जनजीवन तथा राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक अवस्था के बारे में अच्छा ज्ञान प्राप्त कर सके । विशेषतः पहाखण्ड में प्रचलित अनेकानेक, लोकगीत, लोकनृत्य, पर्व-त्योहार, रीति-रिवाज आदि सांस्कृतिक तथ्य और सामग्रियों को वे प्रचुर मात्रा में एकत्रित कर सके और अपने रसीले भजन तथा गीत-संगीत से वहाँ के लोगों को मोहित किया । नेपाली भाषा में गीत भजन आदि रचने की प्रेरणा भी उन्हें इसी भ्रमण के दौरान मिली ।
उक्त लम्बे भ्रमण काल (1933-35) में मित्रसेन ने केवल नेपाल के अन्दर ही नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न स्थानों में बिखर कर बसे गोरखाली समुदाय के साथ सम्पर्क स्थापित करने के उद्देश्य से शिलांग, देहरादून, कुइटा, एबोटाबाद, बकलोह धारीवाल, बनारस, कलकत्ता, दार्जिलिंग, गोरखपुर, नौतुहा आदि स्थानों का भ्रमण किया । नेपाली भाषा में सरल और मजेदार गीत भजन आदि सुना पाने के कारण खासकर गोरखाली सेना के सैनिकों में और सेना के आसपास बसे गोरखाली सेवानिवृत व्यक्तियों के परिवारों में मित्रसेन
की कला प्रतिभा की काफी धाक जम गई । बार-बार आने के आग्रह को सुनकर मित्रसेन के मन में अनूठे प्रकार के स्नेह, आनन्द, आत्मविश्वास और आत्मस्फूर्ति का संचार होना स्वाभाविक ही
ढाई वर्ष का भ्रमण समाप्त करके जुलाई सन् 1935 में घर वापस आने पर मित्रसेन अपने दीन-हीन समाज की सोचनीय अवस्था एवं गोरखाली सन्तान के भविष्य की चिन्ता में बहुत दिनों तक सोच में पड़कर बैठे रहे । समाज में किसी प्रकार की सामाजिक-राजनीतिक चेतना नहीं है - शराब- दारू, जुवा आदि की आदत में पड़कर समाज का दिन-ब-दिन खोखला होना उन्होंने अनुभव किया। अशिक्षा और अज्ञान के कारण समाज में अन्धविश्वास बढ़ रहा है, बाल विवाह, बहुविवाह एवं बेमेल विवाह ने नारी वर्ग के हित को बहुत धक्का पहुँचाया है । उस पर वेश्यावृत्ति तक का लांछन लग गया है, अधिकांश बालक विद्यालय से भागकर, कहीं छिपकर गुलेल खेलते, मछली मारते और ताश आदि खेलते हैं । केवल भजन- गीत सुनाने से तो समाज में जागृति आयेगी नहीं । जब मित्रसेन इसी सोच विचार में पड़े थे, उसी समय अगस्त 1935 में उनके मित्र सूबेदार मेजर बहादुर सिंह बराल गोरखा रायफल्स से रिटायर होकर घर (दाढ़ी गाँव - भागसू) वापस आए । इसके बाद दोनों ने मिलकर समाज-सुधार का काम करने का विचार किया । बराल जी भी सेना में रहते हुए नेपाली भाषा में कुछ भजन-गीत आदि-रचने में रुचि रखते थे । उन्होंने अपनी रचनाओं के साथ-साथ मास्टर मित्रसेन, दुर्गामल्ल आदि तथा कुछ स्थानीय कवियों की कृतियों को "बराल के आँसू" नामक पुस्तिका में छापा था । मित्रसेन द्वारा बराल के आँसू में संग्रहित रचनाओं को सुर-ताल प्रदान कर हार्मोनियम बजाकर गा देने से सोने में सुगन्ध डाल देने की बात सर्वविदित है ।
लेकिन, मित्रसेन को मात्र छोटे-छोटे भजन गीत आदि सुनाने में संतोष नहीं था । वे चाहते थे कि वे कुछ ऐसा सन्देश समाज को सुना सके जैसा सौ वर्ष पहले आचार्य भानुभक्त ने सरल-मीठी भाषा में रामायण लिखकर जन-जन को सुनाया था । अतः मित्रसेन
ने भारत और नेपाल की तत्कालीन राजनीतिक अवस्था और सामाजिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए गीता के संदेश और महाभारत के रोचक प्रसंगों को सरल नेपाली भाषा में खण्डकाव्य के रूप में सन् 1935 से लिखना प्रारंभ किया । काव्य लिखते समय उन्होने गेय भाषा-शैली का प्रयोग किया । मात्र इतना ही नहीं, मित्रसेन द्वारा ही लोकप्रिय झ्याउरे लय मे हास्य रस की व्यग्यात्मक कृतियो का प्रारंभ भी इसी समय हुआ । फिर उनके द्वारा उक्त काल में नेपाली भाषा में 'कृष्ण जन्म' नाटक लिखकर प्रदर्शित करना भी उल्लेखनीय है ।
उक्त लम्बे भ्रमण काल मे मित्रसेन ने दार्जिलिंग के विख्यात साहित्यकारों में सूर्य विक्रम ज्ञवाली, धरणीधर शर्मा तथा पारसमणि प्रधान से अत्यधिक उत्साह और प्रेरणा प्राप्त की । इस भ्रमण काल में उन्हें नेपाली भाषा के अन्य तीन व्यक्ति दिग्गज कवि शिरोमणि लेखनाथ पौड्याल, महाकवि लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा और प्रख्यात नाटककार बालकृष्ण सम की साहित्यिक गतिविधि के विषय में पता चला । इन साहित्यिक बन्धुओं के साथ भेंटवार्ता करने की आकांक्षा मित्रसेन के मन में थी । अतः सन् 1936 मे महाशिव रात्रि के पर्व के अवसर पर पशुपतिनाथ का दर्शन करने के साथ-साथ उक्त बन्धुओं से मिलने की अभिलाषा में वे काठमांडू गये। भागसू तरफ के रायसाहब सेनवीर गुरूंग, सूबेदार नारायणसिंह थापा और हवलदार हरिश्चन्द्र साही उस समय वहाँ थे । उन लोगों ने मास्टर मित्रसेन का खूब सेवा-सत्कार किया तथा उनके रहने-खाने की समुचित व्यवस्था कर दी । पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद मित्रसेन ने तुरंत उक्त साहित्यिक बन्धुओं से भेंटवार्ता की । प्रत्येक से यथेष्ट रूप में प्यार और प्रोत्साहन पाकर मित्रसेन ने उन लोगों के परामर्श और सहायता से वहाँ भजन-गीत आदि का कार्यक्रम प्रस्तुत किया । संगीत प्रेमी श्रोताओं की खुशी का ठिकाना न रहा । माँग बढ़ती गई । जगह-जगह से उन लोगों ने बुलवा भेजा । काठमाण्डू, भक्तपुर और ललितपुर में लगभग तीन महीने तक निरन्तर गीत-संगीत का कार्यक्रम चला- यहाँ तक कि बड़े-बड़े घरों से भी उन्हें आमंत्रित
किया गया । प्रशस्त मात्रा में मान प्रतिष्ठा के साथ-साथ धन और पदक हासिल करके जून महीने में मित्रसेन घर वापस आए । विदाई की मुलाकात में महाकवि देवकोटा ने विशेषतया उनके झ्याउरे लय वाले गीतों की अधिक प्रशंसा की, कवि शिरोमणि लेखनाथ ने उनके भजन के साथ-साथ गीता या महाभारत जैसे खण्डकाव्य की खूब प्रशंसा की तथा नाटककार बालकृष्ण ने उनकी नाट्यकला प्रतिभा के प्रति बहुत सन्तोष और खुशी जाहिर की। इन साहित्यिक बन्धुओ के हार्दिक स्नेह, सहयोग या परामर्श को मित्रसेन ने आखिरी साँस तक सँजोकर रखा ।
भागसू वापस आते ही मित्रसेन उक्त कवियो की सलाह के अनुसार ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के लिए सामग्री एकत्र करने तथा चयन करने के काम में लग गए और इसी उद्देश्य से सगीत-गीत का अभ्यास करने लगे । दशहरा - दीपावली बीत जाने पर उसी वर्ष (1936 में) बनारस जाकर मित्रसेन ने सर्वप्रथम दो गीतों की रिकर्डिग करवाई - 'अब त जाऊँ कान्छी घर, बौटा छ उकाली ओह्राली तथा दूसरा 'कृष्णा- गोपी जस्तो होरी, आईजाऊ खेल्नुलाई गोरी ।' (हे लड़की, अब घर जाओ, रास्ता चढ़ाव - उतार का है । तथा हे गोरी कृष्ण और गोपी की तरह होली खेलने आया जाया करो )
इसके बाद 1945 तक उन्होंने भजन-गीत या नाटक के अनेकानेक ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड बनारस, कलकत्ता, दिल्ली और लाहौर से तैयार कराये । इस कार्य से मित्रसेन का नाम गोरखाली जगत में सभी जगह फैल गया । यहाँ तक कि कलकत्ता की फिल्म कम्पनियों ने भी उन्हें फिल्मी काम में आकर्षित करने की कोशिश की । लाहौर से भी उन्हें सनातन धर्म सभा वाले ने फिर से मनाने का प्रत्यन किया था। लेकिन, मित्रसेन के मन में स्वतंत्रतापूर्वक काम करते हुए अपने समाज में जागृति फैलाने की बड़ी लालसा थी । अतः, वे बिना दाँया बाँया कहीं देखे, सीधे जनजागरण के मार्ग पर बढ़ते रहे ।
ग्रामोफोन रिकॉर्ड बन जाने पर मित्रसेन को जगह-जगह से आमंत्रित किया जाने लगा । साल में लगभग चार महीना घर पर
बैठकर वे प्रचार सामग्री को लिखकर तैयार करते, लय सुर और ताल डालकर अभ्यास करते और आठ महीना के लगभग सेना सेना में या सेना की छावनी के बगल में बसे गोरखाली समाज में घूम-घूमकर गीत संगीत तथा व्याख्यान या नाटक प्रदर्शन के माध्यम से धर्म प्रचार या जन जागृति का कार्य करते । उस समय तक सरकार की ओर से धर्म प्रचार और समाज सेवा के कार्यों में किसी प्रकार की रोक नहीं थी । तो भी मित्रसेन के द्वारा अत्यन्त सावधानीपूर्वक काम करना उचित ही था ।
नाटक का पर्दा आदि तैयार करने के काम में मित्रसेन को प्रसिद्ध चित्रकार सेनावीर ठाकुरी का बहुत सहयोग मिला । सेनावीर हास्य दृश्य के एक लोकप्रिय कलाकार भी थे । तबला- मादल (एक बाजा) बजाने में और नाटक की प्रमुख भूमिका पूर्ण करने में दिलीप सिंह गुरूंग उनकी सहायता करते थे । कभी उक्त कलाकार को फुरसत न रहने पर स्वयं मित्रसेन पर्दा बनाते थे और स्थानीय कलाकारों को उचित मार्ग-निर्देश देकर अन्य सभी काम सुचारू रूप से सम्पन्न करा लेते थे । मित्रसेन जिस तरह नाटक प्रदर्शन कला में निपुण थे उसी तरह धर्म-उपदेशक के रूप में भी एकदम प्रवीण और सफल थे । लगातार एक-एक महीना तक रोज चलनेवाले महाभारत और पुराण आदि के व्याख्यान कथा-कार्यक्रम में मित्रसेन इस प्रकार मोहिनी पैदा कर देते थे कि श्रोताओं की उपस्थिति दिन-ब-दिन बढ़ती जाती थी । कथा के बीच बीच में वे हमारे पूर्वजों के अनुपम साहस और बलिदान से ओतप्रोत अनेकानेक ऐतिहासिक घटनाओं की झाँकी भी अनूठे ढंग से प्रस्तुत करते थे । प्रतिदिन दो-ढाई घंटे तक चलनेवाले कथा-व्याख्यान के बाद मित्रसेन द्वारा गाये गए एक-दो भजन और झ्याउरे गीत श्रोताओं को भरपूर आनन्द और सन्तुष्टि देते थे । सन् 1935 से 1939 तक, चार वर्ष की अवधि में मित्रसेन ने भाषा-साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में प्रशस्त सेवा की ।
भारतीय सेना के गोरखाली पल्टनों में पूर्व-पश्चिम दोनों तरफ के भारतवासी तथा नेपालवासी गोरखाली सैनिक होते थे और आज भी ऐसी ही व्यवस्था है । इन सैनिकों में देश की आज़ादी के लिए
जागृति पैदा करने के जिस प्रयास का प्रारंभ सन् 1932-33 तक छावनी में वीर युवा खड्बहादुर सिंह विष्ट ने किया, उसी कार्य को सावधानी के साथ मित्रसेन करते रहे । युवा वर्ग को गीता का सन्देश सुनाकर, अभिमन्यु नाटक खेलकर, लक्ष्मण परशुराम संवाद लिखकर मित्रसेन ने उनके समक्ष अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सत्याग्रह का एवं साहस, वीरता और बलिदान का उदाहरण प्रस्तुत किया । शासक कैसा होना चाहिए - इस बात को उन्होंने राजा हरिश्चन्द्र और श्रीकृष्ण के चरित्र चित्रण के द्वारा उपस्थित किया । नारी-वर्ग को जाग्रत करने के लिए मित्रसेन ने सती सावित्री, सती पार्वती, सती द्रौपदी, सन्त सुखुबाई आदि के दृष्टान्त लिखे । मलाऊन और खलंगा के युद्ध में अंग्रेजों की शक्तिशाली फौज के साथ मुट्ठी कसकर लड़नेवाले अमर सिंह थापा, भक्ति थापा, बलभद्र कुंवर या उनके हजारों गोरखाली वीर सैनिकों के साथ-साथ सैकड़ों बहादुर नारी और बालकों की वीरता की गाथा सुनकर जन-जन के मन के अन्दर जोश और उत्साह उत्पन्न कर देने का मित्रसेन का प्रयास व्यर्थ नहीं गया । इस बात का साक्षी शहीद दुर्गामल्ल और शहीद दलबहादुर थापा का बलिदान है तथा अन्य अनेकानेक देशभक्त साथी लोगों की साहस, वीरता, त्याग भावना है ।
दुर्भाग्यवश, द्वितीय विश्वयुद्ध सन् 1939 में आरंभ हुआ । मित्रसेन देश की आजादी के लिए संघर्ष को उचित समझते थे लेकिन विश्वयुद्ध के बदले वे विश्वशान्ति के पक्षधर थे । प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्हें लड़ाई के भयंकर विनाशकारी परिणाम का प्रत्यक्ष अनुभव था । 1939 तक, निरन्तर छः वर्षों तक प्रचार कार्य में लगे रहने से मित्रसेन का शरीर जर्जर हो गया था । इसलिए, 1940 से वे ज्वर-ग्रस्त हो गए । लगभग चार वर्षों तक घर में बैठकर वे अपना उपचार कराते रहे । बीच-बीच में ज्वर के हट जाने पर वे साहित्य-सृजन करते थे या महात्मा बुद्ध और टाल्सटाय की रचना का अध्ययन करते थे । इसी समय उन्होंने बुद्धवाणी का अनुवाद नेपाली भाषा में किया, साथ ही टाल्सटाय की चार-पाँच कहानियों को गद्य-पद्य दोनों विधाओं में तैयार किया ।
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पाकर कर्नल लॉंग ने उनके पिता को सलाह दी कि वे लड़के को फौज में भर्ती करवा दें । इसी के अनुसार सन् एक हज़ार नौ सौ बारह में मित्रसेन पिता तथा दादा की सेना एक/एक गोरखा राइफल्स में सिग्नल में भर्ती हो गए । सन् एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में मलाऊन किला में अंग्रेजों के साथ भयानक युद्ध हुआ था । युद्ध में गौरखाली सैनिकों की बहादुरी को देखकर अंग्रेजों ने युद्ध के बाद उसी वर्ष सपाटू में पहला गोरखा रेजिमेन्ट खड़ा किया । सन् एक हज़ार आठ सौ इकसठ में इस सेना ने भागसू धर्मशाला में स्थायी जगह पाई । आजादी के बाद सन् एक हज़ार नौ सौ पचपन में यानी चौरानवे वर्षों के बाद इसे चौथे गोरखा के साथ मिलाकर यहाँ से स्थानान्तरण कर दिया गया और आजकल चौदह गोरखा ट्रेनिंग सेन्टर के नाम से इसका स्थायी पता सपाटू हो गया है । मित्रसेन की गीत-संगीत सम्बन्धी प्रतिभा को देखकर सभी सरदार और जवान बहुत प्रभावित थे । सेना के उत्सव से लेकर होली- दशहरा तक में मित्रसेन की कला सभी को मंत्रमुग्ध कर देती थी । वे सगीत साधना की ओर ज्यादा समय दे सकें, यह सोचकर उन्हें कवायद और परेड आदि से प्रायः मुक्त रखा जाता था । फौज में रहते हुए उन्होने झ्याउरे, रोदी, सोरठी, भजन, चुडका आदि विभिन्न प्रकार के लोकलयों में तरह-तरह के गीत हार्मोनियम बजा कर गाना सीखा । मारूनी फुर्संगे, होली के फाग-नाच जैसे तरह-तरह के लोक नृत्यों में उन्हें खूब मजा आता था । मालश्री गाने के साथ भानुभक्त की रामायण को लय के साथ गाने में वे बहुत प्रवीण थे जिससे उन्हें और भी लोकप्रियता प्राप्त हुई । कुशाग्र बुद्धि का होने के कारण उन्हें अपना सिग्नलिंग का काम सीखने में कोई परेशानी नहीं हुई । इसी बीच प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया । सन् एक हज़ार नौ सौ चौदह में अपनी पल्टन के साथ फ्रांस के कई मोर्चों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके बाद, मित्रसेन की पल्टन को मेसोपोटामिया जाने का आदेश हुआ । वहाँ टर्की की फौज के साथ लगभग तीन वर्ष तक निरन्तर युद्ध जारी रहा । अन्ततः एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में शान्ति सन्धि की घोषणा के बाद प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ । इस भयंकर युद्ध में अपार जन-धन की हानि हुई । लाखों मनुष्य मारे गए, लाखों घायल हुए । मित्रसेन की पल्टन के सैकड़ों जवान उस चार वर्ष के युद्ध में हताहत हुए । इससे भावुक हृदय मित्रसेन के मन पर गहरी चोट पहुँची । सन् एक हज़ार नौ सौ बीस में विजय पताका फहराती हुई मित्रसेन की पल्टन भारत वापस आई । लेकिन, इससे मित्रसेन खुश नहीं था । अन्य देश में जाकर लड़ने के बदले अपने देश और समाज की ही कोई ठोस सेवा करना बेहतर जानकर मित्रसेन ने भागसू आते ही मुक्ति का आदेश ले लिया । उस समय उनकी उम्र पच्चीस वर्ष थी । सेना से सेवानिवृत्त होकर घर आने के पहले ही पिता स्वर्गवासी हो गये थे । माँ ने घर में ही आटा-चावल की छोटी दूकान खोल ली थी । पत्नी घर गृहस्थी का काम काज और बच्चों के साथ गाय-गोशाले की देखभाल करती थी । पिता ठीकेदारी से बहुत धन-सम्पत्ति अर्जित करके गए थे तो भी मित्रसेन ने सन् एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में अपने एक मित्र श्रीरंग की सलाह और सहयोग से अपनी पल्टन में भागीदार बनकर कैन्टीन चलाने का काम प्रारंभ किया। मित्रसेन के इस निश्चय को जानकर पल्टन के सभी साहब, सरदार या जवान । बहुत प्रसन्न हुए। कैन्टीन के लिए सामान खरीदने हेतु मित्रसेन समय-समय पर अमृतसर जाते थे और वहाँ सप्ताह-दस दिन तक रुक जाते थे । इस अवधि में वे शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करते थे तथा कभी लाहौर में जाकर अथियेट्रिकल कम्पनी जैसे प्रसिद्ध नाटक संस्थान द्वारा प्रस्तुत नाटकों को देखा करते थे । घर वापस आकर वे आधी-आधी रात तक स्थानीय गीत-संगीत की महफ़िल में भाग लेकर आनन्द लेते थे । सबेरे उठकर बाकायदा अभ्यास करते थे और दिनभर कैन्टीन का काम देखते थे। उस समय यही उनकी दिनचर्या थी । जिस समय मित्रसेन फ्राँस गये थे उस समय उन्हें मात्र दो सन्तान - एक पुत्र और एक पुत्री थी । सन् एक हज़ार नौ सौ इक्कीस और एक हज़ार नौ सौ तेईस में दो पुत्रियाँ और पैदा हुई । सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस-चौबीस में हैजा के कारण कुछ दिन और महीने के अन्तराल पर पत्नी समेत इन सभी सन्तानों की मृत्यु हो गई जिससे मित्रसेन के ऊपर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा । एक हज़ार नौ सौ पाँच के भूकम्प में ढेर सारे लोगों के मरने तथा घायल होने के दृश्य ने भी मित्रसेन के मन पर गहरा आघात किया था, विश्वयुद्ध के दौरान हज़ारों लाखों मनुष्यों के मरने तथा घायल होने के प्रत्यक्ष अनुभव ने मित्रसेन के मन के अन्दर गहरा घाव पैदा किया था, और ऐसे में पत्नी और सन्तान के इस असामायिक निधन ने भावुक मित्रसेन के हृदय की कैसी हालत कर दी होगी, मात्र कल्पना की जा सकती है । बूढ़ी माँ तथा इष्ट मित्र, भाई-बन्धु - सभी ने मित्रसेन को यथासंभव समझाया, सान्त्वना दी । स्वयं मित्रसेन ने भी खुद को संभालने की शक्तिभर चेष्टा की, लेकिन सांसारिक कार्यों से उनका मन फिर गया । इसके बाद, कैन्टीन का कारोबार उसके हिस्सेदार को अकेले चलाना पड़ा । अब मित्रसेन के हाथ में या तो कोई धार्मिक पुस्तक होती थी या हार्मोनियम बाजा । बातचीत या हँसी-मजाक करना उन्होंने एकदम बन्द कर दिया था । वे रामायण, गीता, महाभारत, चण्डीपाठ आदि ग्रन्थों का अध्ययन-मनन करते या रोज़ कई घंटे तक लगातार ध्यान प्राणायाम क्रिया किया करते । साथ ही, वाद्ययंत्र लेकर गाने की साधना भी उसी प्रकार चलती रहती । अब वे एकदम एकसूरहा हो गए थे । उस समय तक अपने गीत-संगीत के अभ्यास में उन्होंने शान्त रस, करुण रस एवं भक्ति रस का बाहुल्य ही लाया । गीता के "निर्ममो निरहंकारस्य स शान्तिमधिगच्छति" मंत्र से प्रेरणा पाकर वे शान्ति साधना का सतत प्रयास करने लगे। वे तो प्रारंभ से ही विनम्र और अभिमानरहित थे लेकिन मोह-ममता का परित्याग करने में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके अन्दर वैराग्य के लक्षण को देखकर माँ परेशान हो गई, साथ ही अन्य सम्बन्धी और हितैषी भी चिन्तित हो गए । सभी को आशंका हुई कि कहीं वै योगी बनकर भाग ना जाँय । इसलिए, सभी उन्हें दिन-रात घेरकर समझाने-बुझाने का प्रयास करने लगे । लेकिन, मित्रसेन ने उस समय तक अपने भावी जीवन की रूपरेखा तैयार कर ली थी। सभी इष्ट मित्रों की सलाह से और खासकर माँ के बार-बार आग्रह करने के कारण वे दूसरा विवाह करने को राजी हो गए । तत्पश्चात् सन् एक हज़ार नौ सौ पच्चीस में सल्लाधारी गाँव की कन्या लाजवन्ती थापा के साथ उनका विवाह हुआ जो आज ठीक अस्सी वर्ष की हो गई हैं । विवाह के कुछ महीने बाद मित्रसेन ने अपनी भावी योजना के अनुसार सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया । भागसू के इतिहास में सबसे पहले सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में हिमालयन थियेट्रिकल कम्पनी की स्थापना करके मित्रसेन ने बहुत ख्याति अर्जित की और 'दुनिया झुकती है, झुकानेवाला चाहिए' जैसी प्रिय उक्ति को उन्होंने चरितार्थ कर दिखाया । उस समय पंजाब में उर्दू और हिन्दुस्तानी भाषा का ही विशेष प्रचलन या । अतएव मित्रसेन ने भी अपना पहला नाटक 'बिल्वमंगल' हिन्दी उर्दू मिश्रित भाषा में तैयार किया । माँ के श्रीकृष्ण के प्रति आस्था से प्रेरित होकर उन्होंने कृष्णभक्त के जीवन चरित्र से ही रंगमंच कला प्रदर्शन का शुभारंभ किया । "यह ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहि नाच नचायो, सूरदास तब विहँसि यसोदा ले उर कठ लगायो । मैया मोरी मै नहीं माखन खायो।" सूरदास के साहित्य में भगवान कृष्ण की बाललीला का अनूठा वर्णन पढ़कर मित्रसेन बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने बहुत मन लगाकर इस नाटक को तैयार किया। लगभग तीन घंटे तक चलने वाले इस नाटक के निर्माता, संवाद-लेखक, धुन रचयिता, निर्देशक, संगीत और नृत्य निर्देशक, प्रमुख अभिनेता और गायक, सभी अकेले वे स्वयं थे । नाटक हर जगह 'हिट' हुआ । तभी से मित्रसेन 'मास्टर मित्रसेन' के नाम से विख्यात हो गए । उक्त नाटक की सफलता के बाद मित्रसेन ने पंजाब में प्रचलित लोक कथा के आधार पर हीर-रांझा तथा सोहनी महिवाल जैसे दुखान्त नाटकों को रंगमंच पर प्रस्तुत किया । यद्यपि इन नाटकों में प्रायः उर्दू भाषा का प्रयोग किया गया था लेकिन बीच-बीच में उनके द्वारा पंजाबी लोकगीत या लोकनृत्य के दृश्यों का समावेश कर देने से दर्शको को बहुत अच्छा लगता था । उनकी नाटक कम्पनी में गोरखाली, पहाड़ी या पंजाबी लगभग पच्चीस कलाकार तथा सात आठ कर्मचारी थे। मास्टर जी के व्यवहार ने सभी सदस्यों को संगठित कर दिया था । दो-तीन वर्ष की अवधि में उन्होंने उक्त नाटकों के अतिरिक्त दर्दे जिगर, नूर की पुतली, मशरकी हूर तथा बादशाह टावर आदि नाटकों को उर्दू भाषा में प्रदर्शित किया । यद्यपि उनके द्वारा खेले गए सभी नाटकों में हास्य दृश्य प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे लेकिन 'बादशाह टावर' प्रारंभ से अन्त तक हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण था । भागसू छावनी के साथ-साथ धर्मशाला, पालमपुर, कांगड़ा, शाहपुर, कोटला, नूरपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, बटाला आदि शहरों में हर जगह उक्त नाटकों का खेल प्रदर्शन कई सप्ताह तक लगातार चलता था । इस अवधि में मास्टर मित्रसेन की प्रसिद्धि पूरे पंजाब मे सर्वत्र फैल गई । तब तक भारत में सिनेमा प्रारंभ नहीं हुआ था । मात्र ख्यातिलब्ध नाटक कम्पनी बड़े-बड़े शहरों में खेल दिखाया करती थी । इसलिए, छोटे-छोटे शहर-कस्बे में मित्रसेन की नाटक प्रदर्शन सेवा यहाँ उल्लेखनीय है । अनेकानेक कहानी पुस्तकों के सहारे उर्दू-हिन्दुस्तानी भाषा में संवाद लिखने, गीत रचने तथा धुन बनाने का अभ्यास मित्रसेन ने इसी बीच किया । रंगमंच पर गाते समय उनकी मधुर तेज़ भराई आवाज श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर देती थी । उस समय तक पंजाब में बहुत बड़ी जन जागृति आ गई थी । राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक संस्थायें सभी सक्रिय थीं । इसलिए, मित्रसेन जैसे प्रतिभावान कलाकार की सेवा प्राप्त करने की हर संस्था की लालसा स्वाभाविक ही थी । इसलिए, सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में सनातनधर्म प्रतिनिधि सभा के पंजाब के संचालक ने मित्रसेन को लाहौर से आदरपूर्वक आमंत्रित किया । उन्होंने बहुत गंभीरतापूर्वक इस प्रस्ताव पर विचार किया और उसके बाद धर्म प्रचारक के रूप में कुछ समय तक कार्य करने की सहमति व्यक्त की । लगभग चार वर्षों तक उन्होंने पूरे पंजाब में घूम-घूमकर गीत संगीत तथा कथा-व्याख्यान के माध्यम से धर्म प्रचार के कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। इस बीच उन्होंने उर्दू हिन्दी या संस्कृत भाषा में लिखी अनेकानेक पुस्तकों या धर्मग्रन्थों को पढ़ा, साथ ही देश-विदेश के प्रख्यात साहित्यकारों की अनुवादित कृतियों का भी गहराई से अध्ययन किया। देश के कतिपय विख्यात धार्मिक या सामाजिक विद्वान् कार्यकर्ताओं के साथ नजदीकी सम्पर्क के कारण उनके व्यक्तित्व में और भी निखार आ गया । दैनिक या सामाजिक पत्र-पत्रिकाओं के द्वारा उन्हें देश की राजनीतिक गतिविधि के साथ-साथ राजनीतिक नेताओं के विचार सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। शास्त्रीय संगीत की वास्तविक जानकारी होने के कारण मित्रसेन का भजन-संकीर्त्तन कार्यक्रम मनभावन होता था । कथा-व्याख्यान में वे महाभारत के प्रसंगों के साथ-साथ गीता के उपदेशों को भी बोलकर या गाकर सुनाया करते थे । उस समय, स्वतंत्रता के संघर्ष-मय परिवेश में जनजागृति के सन्दर्भ में यही विषय उपयुक्त था । महाभारत में मित्रसेन राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक सामग्रियों को प्रचुर मात्रा में मिला सके थे । इन सामग्रियों का उपयोग बाद में उन्होंने नेपाली भाषा संस्कृति को सजाने सँवारने में किया । सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस से एक हज़ार नौ सौ इकतीस तक लगातार घुम घुमकर धर्म प्रचार का कार्य करते रहने से मित्रसेन अस्वस्थ हो गए और दिन-व- दिन उनका शरीर सूखता चला गया । इस समय लाला लाजपतराय के ऊपर अंग्रेज द्वारा लाठी प्रहार, महात्मा गाँधी का नमक सत्याग्रह आन्दोलन तथा सरदार भगतसिंह को फाँसी पर लटकाने की घटना ने भावुक मित्रसेन को बहुत विचलित कर दिया । उधर ठाकुर चन्दनसिंह की पत्रिका ने भी उनके मन में बहुत हलचल पैदा कर दी थी । फिर, भ्रमण काल में उन्हें कुछ अबोध निर्धन गोरखाली युवतियों को पंजाब में लाकर बेच देने की जानकारी मिली । इसके बाद आमरण अपने समाज की सेवा करने का निश्चय करके उन्होंने सन् एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में सनातन धर्मसभा के समक्ष अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर दिया । भागसू में वापस आने पर मित्रसेन शीघ्र रोगमुक्त हो गए । लेकिन स्थानीय कलाकार और नाटक प्रेमी दर्शकों के स्नेहपूर्ण आग्रह की उपेक्षा न कर सकने का कारण, उन्होंने एक वर्ष के अन्दर ही हिन्दुस्तानी भाषा मे तीन नाटको को तैयार कर दिखाया । पहला नाटक "वीर अभिमन्यु" मे बहादुर युवा अभिमन्यु के पराक्रम और बलिदान की तथा अंग्रेज जैसे शक्तिशाली कौरव दल के छल कपट एवं अत्याचार की कथा थी । इस कथा को रंगमच पर दिखाने का मित्रसेन का उद्देश्य यह था कि इससे विशेषतया देश के युवा वर्ग की छाती में अन्याय या अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष कर सकने की भावना का संचार होगा। दूसरा नाटक "परिवर्त्तन" में भी देश और समाज के लिए तन-मन-धन अर्पण कर देने का निश्चय अथवा हृदय-परिवर्त्तन की अभिव्यक्ति थी । तीसरा नाटक "यहूदी की बेटी" में एक युवती की सूझबूझ और साहस का अनूठा दृश्य दिखाया गया एक हज़ार नौ सौ छब्बीस-बत्तीस की अवधि में मित्रसेन की एकमात्र सन्तान दिग्विजय सेन थापा का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में हुआ । अन्य घटनाओं में सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस मे ही देहरादून के युवा खड्गबहादुर सिंह बिष्ट की अद्वितीय पराक्रम के बाद जेल से मुक्ति, साबरमती आश्रम में गाँधी जी द्वारा उनका प्रशिक्षण, दंडीयात्रा में शामिल होना, देहरादून छावनी में अपने युवा सहयोगियों के साथ देशप्रेम या आजादी के संदेश को फैलाने हेतु साहसिक प्रचार कार्य करना तथा लापता होना, साथ ही ठाकुर चन्दन सिंह द्वारा सम्पादित और देहरादून से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका अर्थात् नेपाली भाषा में "गोरखा संसार" और "तरुण गोरखा" तथा अंग्रेजी भाषा में "दि हिमालयन टाईम्स" यहाँ उल्लेखनीय हैं । मित्रसेन ने जहाँ युवा खड्गबहादुर बिष्ट के साहस, पराक्रम तथा देशभक्ति की भावना से बहुत प्रेरणा पाई, वहाँ ठाकुर चन्दन सिंह की उक्त पत्रिकाओं से नेपाली भाषा तथा भारतीय संस्कृति के प्रति प्रगाढ़ प्रेम प्राप्त किया । जीवन के अन्तिम भाग में मित्रसेन तेरह वर्षों तक निरन्तर साहित्य सृजन के साथ-साथ धर्म प्रचार, समाजसेवा और देशसेवा के कार्यों में रत रहे । भारत में उस समय अंग्रेज अधिकारी देश के अधिकांश धनी और स्वार्थी तत्वों को साथ लेकर यहाँ की निर्धन, अशिक्षित एवं कमजोर जनता पर घोर अन्याय और अत्याचार कर रहे थे, मित्रसेन के सामने यह बात स्पष्ट थी । नेपाल में भी अंग्रेजों के संरक्षण में वहाँ के निरंकुश राणा परिवार का आदेशात्मक शासन गरीब प्रजा पर जोर जुल्म करते हुए किस प्रकार निर्दयतापूर्वक शोषण कर रहा था, यह दृश्य उन्होंने अपने भ्रमण काल में प्रत्यक्ष देखा था । शिक्षा के नितान्त अभाव के कारण और निर्धनता की चक्की में लगातार पीसे जाने के कारण वहाँ मित्रसेन ने जनजागरण की नितान्त आवश्यकता महसूस की । लेकिन, नेपाल के अन्दर उस समय अत्यन्त कड़ा शासन-प्रबन्ध होने के कारण उन्हें वहाँ किसी प्रकार के प्रचार कार्य को प्रारंभ करना मुश्किल लगा । तानसिंग, रिड़ि, पाल्पा, गुलमी, पोखरा, बागलुंग, लमजुंग, गोरखा, नवाकोट इत्यादि स्थानों में लगभग डेढ वर्षों तक भ्रमण कर मित्रसेन वहाँ के जनजीवन तथा राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक अवस्था के बारे में अच्छा ज्ञान प्राप्त कर सके । विशेषतः पहाखण्ड में प्रचलित अनेकानेक, लोकगीत, लोकनृत्य, पर्व-त्योहार, रीति-रिवाज आदि सांस्कृतिक तथ्य और सामग्रियों को वे प्रचुर मात्रा में एकत्रित कर सके और अपने रसीले भजन तथा गीत-संगीत से वहाँ के लोगों को मोहित किया । नेपाली भाषा में गीत भजन आदि रचने की प्रेरणा भी उन्हें इसी भ्रमण के दौरान मिली । उक्त लम्बे भ्रमण काल में मित्रसेन ने केवल नेपाल के अन्दर ही नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न स्थानों में बिखर कर बसे गोरखाली समुदाय के साथ सम्पर्क स्थापित करने के उद्देश्य से शिलांग, देहरादून, कुइटा, एबोटाबाद, बकलोह धारीवाल, बनारस, कलकत्ता, दार्जिलिंग, गोरखपुर, नौतुहा आदि स्थानों का भ्रमण किया । नेपाली भाषा में सरल और मजेदार गीत भजन आदि सुना पाने के कारण खासकर गोरखाली सेना के सैनिकों में और सेना के आसपास बसे गोरखाली सेवानिवृत व्यक्तियों के परिवारों में मित्रसेन की कला प्रतिभा की काफी धाक जम गई । बार-बार आने के आग्रह को सुनकर मित्रसेन के मन में अनूठे प्रकार के स्नेह, आनन्द, आत्मविश्वास और आत्मस्फूर्ति का संचार होना स्वाभाविक ही ढाई वर्ष का भ्रमण समाप्त करके जुलाई सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में घर वापस आने पर मित्रसेन अपने दीन-हीन समाज की सोचनीय अवस्था एवं गोरखाली सन्तान के भविष्य की चिन्ता में बहुत दिनों तक सोच में पड़कर बैठे रहे । समाज में किसी प्रकार की सामाजिक-राजनीतिक चेतना नहीं है - शराब- दारू, जुवा आदि की आदत में पड़कर समाज का दिन-ब-दिन खोखला होना उन्होंने अनुभव किया। अशिक्षा और अज्ञान के कारण समाज में अन्धविश्वास बढ़ रहा है, बाल विवाह, बहुविवाह एवं बेमेल विवाह ने नारी वर्ग के हित को बहुत धक्का पहुँचाया है । उस पर वेश्यावृत्ति तक का लांछन लग गया है, अधिकांश बालक विद्यालय से भागकर, कहीं छिपकर गुलेल खेलते, मछली मारते और ताश आदि खेलते हैं । केवल भजन- गीत सुनाने से तो समाज में जागृति आयेगी नहीं । जब मित्रसेन इसी सोच विचार में पड़े थे, उसी समय अगस्त एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में उनके मित्र सूबेदार मेजर बहादुर सिंह बराल गोरखा रायफल्स से रिटायर होकर घर वापस आए । इसके बाद दोनों ने मिलकर समाज-सुधार का काम करने का विचार किया । बराल जी भी सेना में रहते हुए नेपाली भाषा में कुछ भजन-गीत आदि-रचने में रुचि रखते थे । उन्होंने अपनी रचनाओं के साथ-साथ मास्टर मित्रसेन, दुर्गामल्ल आदि तथा कुछ स्थानीय कवियों की कृतियों को "बराल के आँसू" नामक पुस्तिका में छापा था । मित्रसेन द्वारा बराल के आँसू में संग्रहित रचनाओं को सुर-ताल प्रदान कर हार्मोनियम बजाकर गा देने से सोने में सुगन्ध डाल देने की बात सर्वविदित है । लेकिन, मित्रसेन को मात्र छोटे-छोटे भजन गीत आदि सुनाने में संतोष नहीं था । वे चाहते थे कि वे कुछ ऐसा सन्देश समाज को सुना सके जैसा सौ वर्ष पहले आचार्य भानुभक्त ने सरल-मीठी भाषा में रामायण लिखकर जन-जन को सुनाया था । अतः मित्रसेन ने भारत और नेपाल की तत्कालीन राजनीतिक अवस्था और सामाजिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए गीता के संदेश और महाभारत के रोचक प्रसंगों को सरल नेपाली भाषा में खण्डकाव्य के रूप में सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस से लिखना प्रारंभ किया । काव्य लिखते समय उन्होने गेय भाषा-शैली का प्रयोग किया । मात्र इतना ही नहीं, मित्रसेन द्वारा ही लोकप्रिय झ्याउरे लय मे हास्य रस की व्यग्यात्मक कृतियो का प्रारंभ भी इसी समय हुआ । फिर उनके द्वारा उक्त काल में नेपाली भाषा में 'कृष्ण जन्म' नाटक लिखकर प्रदर्शित करना भी उल्लेखनीय है । उक्त लम्बे भ्रमण काल मे मित्रसेन ने दार्जिलिंग के विख्यात साहित्यकारों में सूर्य विक्रम ज्ञवाली, धरणीधर शर्मा तथा पारसमणि प्रधान से अत्यधिक उत्साह और प्रेरणा प्राप्त की । इस भ्रमण काल में उन्हें नेपाली भाषा के अन्य तीन व्यक्ति दिग्गज कवि शिरोमणि लेखनाथ पौड्याल, महाकवि लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा और प्रख्यात नाटककार बालकृष्ण सम की साहित्यिक गतिविधि के विषय में पता चला । इन साहित्यिक बन्धुओं के साथ भेंटवार्ता करने की आकांक्षा मित्रसेन के मन में थी । अतः सन् एक हज़ार नौ सौ छत्तीस मे महाशिव रात्रि के पर्व के अवसर पर पशुपतिनाथ का दर्शन करने के साथ-साथ उक्त बन्धुओं से मिलने की अभिलाषा में वे काठमांडू गये। भागसू तरफ के रायसाहब सेनवीर गुरूंग, सूबेदार नारायणसिंह थापा और हवलदार हरिश्चन्द्र साही उस समय वहाँ थे । उन लोगों ने मास्टर मित्रसेन का खूब सेवा-सत्कार किया तथा उनके रहने-खाने की समुचित व्यवस्था कर दी । पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद मित्रसेन ने तुरंत उक्त साहित्यिक बन्धुओं से भेंटवार्ता की । प्रत्येक से यथेष्ट रूप में प्यार और प्रोत्साहन पाकर मित्रसेन ने उन लोगों के परामर्श और सहायता से वहाँ भजन-गीत आदि का कार्यक्रम प्रस्तुत किया । संगीत प्रेमी श्रोताओं की खुशी का ठिकाना न रहा । माँग बढ़ती गई । जगह-जगह से उन लोगों ने बुलवा भेजा । काठमाण्डू, भक्तपुर और ललितपुर में लगभग तीन महीने तक निरन्तर गीत-संगीत का कार्यक्रम चला- यहाँ तक कि बड़े-बड़े घरों से भी उन्हें आमंत्रित किया गया । प्रशस्त मात्रा में मान प्रतिष्ठा के साथ-साथ धन और पदक हासिल करके जून महीने में मित्रसेन घर वापस आए । विदाई की मुलाकात में महाकवि देवकोटा ने विशेषतया उनके झ्याउरे लय वाले गीतों की अधिक प्रशंसा की, कवि शिरोमणि लेखनाथ ने उनके भजन के साथ-साथ गीता या महाभारत जैसे खण्डकाव्य की खूब प्रशंसा की तथा नाटककार बालकृष्ण ने उनकी नाट्यकला प्रतिभा के प्रति बहुत सन्तोष और खुशी जाहिर की। इन साहित्यिक बन्धुओ के हार्दिक स्नेह, सहयोग या परामर्श को मित्रसेन ने आखिरी साँस तक सँजोकर रखा । भागसू वापस आते ही मित्रसेन उक्त कवियो की सलाह के अनुसार ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के लिए सामग्री एकत्र करने तथा चयन करने के काम में लग गए और इसी उद्देश्य से सगीत-गीत का अभ्यास करने लगे । दशहरा - दीपावली बीत जाने पर उसी वर्ष बनारस जाकर मित्रसेन ने सर्वप्रथम दो गीतों की रिकर्डिग करवाई - 'अब त जाऊँ कान्छी घर, बौटा छ उकाली ओह्राली तथा दूसरा 'कृष्णा- गोपी जस्तो होरी, आईजाऊ खेल्नुलाई गोरी ।' इसके बाद एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस तक उन्होंने भजन-गीत या नाटक के अनेकानेक ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड बनारस, कलकत्ता, दिल्ली और लाहौर से तैयार कराये । इस कार्य से मित्रसेन का नाम गोरखाली जगत में सभी जगह फैल गया । यहाँ तक कि कलकत्ता की फिल्म कम्पनियों ने भी उन्हें फिल्मी काम में आकर्षित करने की कोशिश की । लाहौर से भी उन्हें सनातन धर्म सभा वाले ने फिर से मनाने का प्रत्यन किया था। लेकिन, मित्रसेन के मन में स्वतंत्रतापूर्वक काम करते हुए अपने समाज में जागृति फैलाने की बड़ी लालसा थी । अतः, वे बिना दाँया बाँया कहीं देखे, सीधे जनजागरण के मार्ग पर बढ़ते रहे । ग्रामोफोन रिकॉर्ड बन जाने पर मित्रसेन को जगह-जगह से आमंत्रित किया जाने लगा । साल में लगभग चार महीना घर पर बैठकर वे प्रचार सामग्री को लिखकर तैयार करते, लय सुर और ताल डालकर अभ्यास करते और आठ महीना के लगभग सेना सेना में या सेना की छावनी के बगल में बसे गोरखाली समाज में घूम-घूमकर गीत संगीत तथा व्याख्यान या नाटक प्रदर्शन के माध्यम से धर्म प्रचार या जन जागृति का कार्य करते । उस समय तक सरकार की ओर से धर्म प्रचार और समाज सेवा के कार्यों में किसी प्रकार की रोक नहीं थी । तो भी मित्रसेन के द्वारा अत्यन्त सावधानीपूर्वक काम करना उचित ही था । नाटक का पर्दा आदि तैयार करने के काम में मित्रसेन को प्रसिद्ध चित्रकार सेनावीर ठाकुरी का बहुत सहयोग मिला । सेनावीर हास्य दृश्य के एक लोकप्रिय कलाकार भी थे । तबला- मादल बजाने में और नाटक की प्रमुख भूमिका पूर्ण करने में दिलीप सिंह गुरूंग उनकी सहायता करते थे । कभी उक्त कलाकार को फुरसत न रहने पर स्वयं मित्रसेन पर्दा बनाते थे और स्थानीय कलाकारों को उचित मार्ग-निर्देश देकर अन्य सभी काम सुचारू रूप से सम्पन्न करा लेते थे । मित्रसेन जिस तरह नाटक प्रदर्शन कला में निपुण थे उसी तरह धर्म-उपदेशक के रूप में भी एकदम प्रवीण और सफल थे । लगातार एक-एक महीना तक रोज चलनेवाले महाभारत और पुराण आदि के व्याख्यान कथा-कार्यक्रम में मित्रसेन इस प्रकार मोहिनी पैदा कर देते थे कि श्रोताओं की उपस्थिति दिन-ब-दिन बढ़ती जाती थी । कथा के बीच बीच में वे हमारे पूर्वजों के अनुपम साहस और बलिदान से ओतप्रोत अनेकानेक ऐतिहासिक घटनाओं की झाँकी भी अनूठे ढंग से प्रस्तुत करते थे । प्रतिदिन दो-ढाई घंटे तक चलनेवाले कथा-व्याख्यान के बाद मित्रसेन द्वारा गाये गए एक-दो भजन और झ्याउरे गीत श्रोताओं को भरपूर आनन्द और सन्तुष्टि देते थे । सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस से एक हज़ार नौ सौ उनतालीस तक, चार वर्ष की अवधि में मित्रसेन ने भाषा-साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में प्रशस्त सेवा की । भारतीय सेना के गोरखाली पल्टनों में पूर्व-पश्चिम दोनों तरफ के भारतवासी तथा नेपालवासी गोरखाली सैनिक होते थे और आज भी ऐसी ही व्यवस्था है । इन सैनिकों में देश की आज़ादी के लिए जागृति पैदा करने के जिस प्रयास का प्रारंभ सन् एक हज़ार नौ सौ बत्तीस-तैंतीस तक छावनी में वीर युवा खड्बहादुर सिंह विष्ट ने किया, उसी कार्य को सावधानी के साथ मित्रसेन करते रहे । युवा वर्ग को गीता का सन्देश सुनाकर, अभिमन्यु नाटक खेलकर, लक्ष्मण परशुराम संवाद लिखकर मित्रसेन ने उनके समक्ष अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सत्याग्रह का एवं साहस, वीरता और बलिदान का उदाहरण प्रस्तुत किया । शासक कैसा होना चाहिए - इस बात को उन्होंने राजा हरिश्चन्द्र और श्रीकृष्ण के चरित्र चित्रण के द्वारा उपस्थित किया । नारी-वर्ग को जाग्रत करने के लिए मित्रसेन ने सती सावित्री, सती पार्वती, सती द्रौपदी, सन्त सुखुबाई आदि के दृष्टान्त लिखे । मलाऊन और खलंगा के युद्ध में अंग्रेजों की शक्तिशाली फौज के साथ मुट्ठी कसकर लड़नेवाले अमर सिंह थापा, भक्ति थापा, बलभद्र कुंवर या उनके हजारों गोरखाली वीर सैनिकों के साथ-साथ सैकड़ों बहादुर नारी और बालकों की वीरता की गाथा सुनकर जन-जन के मन के अन्दर जोश और उत्साह उत्पन्न कर देने का मित्रसेन का प्रयास व्यर्थ नहीं गया । इस बात का साक्षी शहीद दुर्गामल्ल और शहीद दलबहादुर थापा का बलिदान है तथा अन्य अनेकानेक देशभक्त साथी लोगों की साहस, वीरता, त्याग भावना है । दुर्भाग्यवश, द्वितीय विश्वयुद्ध सन् एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में आरंभ हुआ । मित्रसेन देश की आजादी के लिए संघर्ष को उचित समझते थे लेकिन विश्वयुद्ध के बदले वे विश्वशान्ति के पक्षधर थे । प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्हें लड़ाई के भयंकर विनाशकारी परिणाम का प्रत्यक्ष अनुभव था । एक हज़ार नौ सौ उनतालीस तक, निरन्तर छः वर्षों तक प्रचार कार्य में लगे रहने से मित्रसेन का शरीर जर्जर हो गया था । इसलिए, एक हज़ार नौ सौ चालीस से वे ज्वर-ग्रस्त हो गए । लगभग चार वर्षों तक घर में बैठकर वे अपना उपचार कराते रहे । बीच-बीच में ज्वर के हट जाने पर वे साहित्य-सृजन करते थे या महात्मा बुद्ध और टाल्सटाय की रचना का अध्ययन करते थे । इसी समय उन्होंने बुद्धवाणी का अनुवाद नेपाली भाषा में किया, साथ ही टाल्सटाय की चार-पाँच कहानियों को गद्य-पद्य दोनों विधाओं में तैयार किया ।
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- 'गोडसे को नेहरू को मारना चाहिए था'
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'केसरी' में जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा गया है. आरएसएस की केरल इकाई ने 'केसरी' में एक लेख में लिखा है कि देश के बंटवारे के लिए नेहरू जिम्मेदार थे. नाथूराम गोडसे को महात्मा गांधी को नहीं बल्कि जवाहरलाल नेहरू को मारना चाहिए था. एक अंग्रजी अखबार में छपि रिपोर्ट के मुताबिक केसरी के 17 अक्टूबर के अंक में ये लेख वी गोपालकृष्णन ने लिखा है. गोपालकृष्णन केरल की चालाकुडी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. गोपालकृष्णन ने लिखा है कि भारत-पाक विभाजन और महात्मा गांधी की हत्या सहित देश की सभी त्रासदियों का कारण नेहरू का स्वार्थ था. उन्होंने लिखा है कि गोडसे ने तो गांधी के सीने पर गोलियां मारी थी लेकिन नेहरू ने तो गांधी पर पीछे से खंजर घोंपा. आगे लिखा गया है कि गोडसे को गांधी को नहीं बल्कि जवाहरलाल नेहरू को मारना चाहिए था क्योंकि नेहरू विभाजन के लिए जिम्मेदार थे. उनका राष्ट्रपिता (गांधी) से कोई लगाव नहीं था.
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- 'गोडसे को नेहरू को मारना चाहिए था' राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'केसरी' में जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा गया है. आरएसएस की केरल इकाई ने 'केसरी' में एक लेख में लिखा है कि देश के बंटवारे के लिए नेहरू जिम्मेदार थे. नाथूराम गोडसे को महात्मा गांधी को नहीं बल्कि जवाहरलाल नेहरू को मारना चाहिए था. एक अंग्रजी अखबार में छपि रिपोर्ट के मुताबिक केसरी के सत्रह अक्टूबर के अंक में ये लेख वी गोपालकृष्णन ने लिखा है. गोपालकृष्णन केरल की चालाकुडी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. गोपालकृष्णन ने लिखा है कि भारत-पाक विभाजन और महात्मा गांधी की हत्या सहित देश की सभी त्रासदियों का कारण नेहरू का स्वार्थ था. उन्होंने लिखा है कि गोडसे ने तो गांधी के सीने पर गोलियां मारी थी लेकिन नेहरू ने तो गांधी पर पीछे से खंजर घोंपा. आगे लिखा गया है कि गोडसे को गांधी को नहीं बल्कि जवाहरलाल नेहरू को मारना चाहिए था क्योंकि नेहरू विभाजन के लिए जिम्मेदार थे. उनका राष्ट्रपिता से कोई लगाव नहीं था.
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Rajasthan Weather News दिल्ली यूपी बिहार के अलावा राजस्थान में भी लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में कहर बरपाती ठंड से राहत मिल सकती है।
जयपुर, ऑनलाइन डेस्क। राजस्थान के कई इलाकों में अभी भी सर्दी का सितम जारी है। कई दिनों से जारी शीतलहर से पारा गिरा हुआ है। घने कोहरे ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने बताया कि अगले कुछ दिनों में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान में मामूली इजाफा हुआ है। जयपुर और बीकानेर के अलावा कई जिलों में तापमान में मामूली वृद्धि हुई है। साथ ही कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है आने वाले दिनों में ठंड से राहत मिल सकती है।
राजस्थान के कुछ जिले अभी भी ठंड की चपेट में हैं। चुरू में सोमवार को न्यूनतम तापमान 3. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं, श्रीगंगानगर में 5. 3, चित्तौड़गढ़ में 6. 9 डिग्री, नागौर में 7. 6 और भीलवाड़ा में पारा 7. 8 डिग्री सेल्सियस था।
डॉक्टरों का कहना है कि घने कोहरे की वजह से अस्थमा के रोगियों को तकलीफ हो सकती है। उन्हें घरघराहट, खांसी और सांस की दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा कोहरे के कारण आंखों में जलन या संक्रमण भी हो सकता है।
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Rajasthan Weather News दिल्ली यूपी बिहार के अलावा राजस्थान में भी लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में कहर बरपाती ठंड से राहत मिल सकती है। जयपुर, ऑनलाइन डेस्क। राजस्थान के कई इलाकों में अभी भी सर्दी का सितम जारी है। कई दिनों से जारी शीतलहर से पारा गिरा हुआ है। घने कोहरे ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने बताया कि अगले कुछ दिनों में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान में मामूली इजाफा हुआ है। जयपुर और बीकानेर के अलावा कई जिलों में तापमान में मामूली वृद्धि हुई है। साथ ही कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है आने वाले दिनों में ठंड से राहत मिल सकती है। राजस्थान के कुछ जिले अभी भी ठंड की चपेट में हैं। चुरू में सोमवार को न्यूनतम तापमान तीन. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं, श्रीगंगानगर में पाँच. तीन, चित्तौड़गढ़ में छः. नौ डिग्री, नागौर में सात. छः और भीलवाड़ा में पारा सात. आठ डिग्री सेल्सियस था। डॉक्टरों का कहना है कि घने कोहरे की वजह से अस्थमा के रोगियों को तकलीफ हो सकती है। उन्हें घरघराहट, खांसी और सांस की दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा कोहरे के कारण आंखों में जलन या संक्रमण भी हो सकता है। ये भी पढ़ेंः
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HAZIPUR/PATNA: हाजीपुर जेल में कैदी मनीष तेलिया की हाजीपुर जेल में विचाराधीन कैदी मनीष कुमार उर्फ मनीष तेलिया की हत्या विभिन्न राज्य से लूटे गए सोने का कुछ हिस्सा हड़पने के बाद शुरू गैंगवार का नतीजा है। हालांकि, पुलिस अभी खुलकर नहीं बोल रही। गिरोह के आठ लोगों की जान जा चुकी है। इस अंतरराज्यीय गिरोह ने अगल-अगल राज्यों में सोना लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। गिरोह का मास्टर माइंड फिलहाल बेउर जेल में बंद है, लेकिन उसके गुर्गे सक्रिय हैं। यह गिरोह एके-47 और बरेटा पिस्टल जैसे घातक हथियारों से लैस रहा है।
पिछले वर्ष 16 मार्च को भिरतघात की वजह से सोना लूटकांड का आरोपित राघोपुर का मनीष सिंह के अपने दो अन्य साथियों के साथ महनार थाने के बहलोलपुर दियारा में छिपने की सूचना एसटीएफ को लग गई थी। एसटीएफ ने मनीष सिंह सहित तीन को ढेर किया था। दो एके-47 और एक बरेटा पिस्टल बरामद की गई थी। उसके बाद हत्या का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मनीष तेलिया की हत्या निश्चित रूप से लूट के सोने के एक हिस्से को हड़प गया था। इसी वजह से गिरोह के सदस्य बौखला गए और शुक्रवार को हाजीपुर जेल में इस वारदात को अंजाम दिया।
हाजीपुर जेल में शनिवार सुबह से शाम तक जांच होती रही। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच रिपोर्ट तलब की है। एक ओर बिहार के जेल आइजी मिथिलेश मिश्र खुद जांच कर रहे हैं, वहीं जिलास्तर पर भी प्रशासनिक अधिकारी जांच में जुटे हैं। दो बिदुओं पर जांच हो रही है। पहला जेल में पिस्टल कैसे पहुंची और दूसरा मनीष को मारने के पीछे अपराधियों की मंशा क्या थी?
हाजीपुर सदर अस्पताल में शुक्रवार की रात मनीष के शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड ने किया। पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की उपस्थित में तीन डॉक्टरों की टीम ने किया। मनीष को सिर से सटाकर तीन गोली मारी गई। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वैशाली की डीएम उदिता सिंह के निर्देश पर हाजीपुर सदर के एसडीएम संदीप शेखर प्रियदर्शी व एसडीपीओ राघव दयाल ने शनिवार को प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपी।
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HAZIPUR/PATNA: हाजीपुर जेल में कैदी मनीष तेलिया की हाजीपुर जेल में विचाराधीन कैदी मनीष कुमार उर्फ मनीष तेलिया की हत्या विभिन्न राज्य से लूटे गए सोने का कुछ हिस्सा हड़पने के बाद शुरू गैंगवार का नतीजा है। हालांकि, पुलिस अभी खुलकर नहीं बोल रही। गिरोह के आठ लोगों की जान जा चुकी है। इस अंतरराज्यीय गिरोह ने अगल-अगल राज्यों में सोना लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। गिरोह का मास्टर माइंड फिलहाल बेउर जेल में बंद है, लेकिन उसके गुर्गे सक्रिय हैं। यह गिरोह एके-सैंतालीस और बरेटा पिस्टल जैसे घातक हथियारों से लैस रहा है। पिछले वर्ष सोलह मार्च को भिरतघात की वजह से सोना लूटकांड का आरोपित राघोपुर का मनीष सिंह के अपने दो अन्य साथियों के साथ महनार थाने के बहलोलपुर दियारा में छिपने की सूचना एसटीएफ को लग गई थी। एसटीएफ ने मनीष सिंह सहित तीन को ढेर किया था। दो एके-सैंतालीस और एक बरेटा पिस्टल बरामद की गई थी। उसके बाद हत्या का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मनीष तेलिया की हत्या निश्चित रूप से लूट के सोने के एक हिस्से को हड़प गया था। इसी वजह से गिरोह के सदस्य बौखला गए और शुक्रवार को हाजीपुर जेल में इस वारदात को अंजाम दिया। हाजीपुर जेल में शनिवार सुबह से शाम तक जांच होती रही। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच रिपोर्ट तलब की है। एक ओर बिहार के जेल आइजी मिथिलेश मिश्र खुद जांच कर रहे हैं, वहीं जिलास्तर पर भी प्रशासनिक अधिकारी जांच में जुटे हैं। दो बिदुओं पर जांच हो रही है। पहला जेल में पिस्टल कैसे पहुंची और दूसरा मनीष को मारने के पीछे अपराधियों की मंशा क्या थी? हाजीपुर सदर अस्पताल में शुक्रवार की रात मनीष के शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड ने किया। पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की उपस्थित में तीन डॉक्टरों की टीम ने किया। मनीष को सिर से सटाकर तीन गोली मारी गई। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वैशाली की डीएम उदिता सिंह के निर्देश पर हाजीपुर सदर के एसडीएम संदीप शेखर प्रियदर्शी व एसडीपीओ राघव दयाल ने शनिवार को प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपी।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टियों ने "मिन्स्क समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए एक दृढ़ प्रतिबद्धता और" ईस्टर ट्रूस "दोहराया, जो कि संपर्क समूह द्वारा यूक्रेन के पूर्व में संघर्ष को हल करने के लिए पहुंचा था," रिपोर्ट में कहा गया है।
"नॉर्मन प्रारूप" देशों (फ्रांस, जर्मनी, रूस और यूक्रेन) के नेता इस समझौते का स्वागत करते हैं और इसके सख्त पालन के महत्व को रेखांकित करते हैं और "OSCE स्पेशल मॉनिटरिंग मिशन (SMM) द्वारा प्रभावी निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित करते हैं"।
मिन्स्क, बोरिस ग्रिजलोव में वार्ता में रूस की बहुपत्नी, ने पहले बताया कि डोनबास में "ईस्टर ट्रूस" एक पूर्ण संघर्ष विराम और किसी भी आक्रामक कार्रवाई पर प्रतिबंध लगाने की परिकल्पना करता है।
बयान में किसी भी आक्रामक कार्रवाई और टोही कार्यों के निषेध की पुष्टि की गई, दोनों दिशाओं में और बस्तियों से, बस्तियों में और उसके पास भारी हथियारों की तैनाती और उपयोग से गोलीबारी की गई। संपर्क समूह ने संघर्ष विराम के आदेशों का पालन करने और इसके उल्लंघनकर्ताओं को अनुशासनात्मक उपाय लागू करने के महत्व पर बल दिया,उसने कहा।
कीव में, "ईस्टर" ट्रूस पर समझौते की पुष्टि की।
यूक्रेनी पक्ष की पहल पर, टीकेजी (त्रिपक्षीय संपर्क समूह) ने मार्च एक्सएनयूएमएक्स के साथ डोनबास में ईस्टर ट्रूस पर सहमति व्यक्त की। यह पहली बार नहीं है जब पार्टियों ने आग को रोकने के लिए सहमति व्यक्त की है, युद्ध के दौरान एक बार एक ट्रंक एक्सएनयूएमएक्स घोषित किया गया था . . . दुर्भाग्य से, एक बार सम्मान नहीं किया गया था। लेकिन ट्रूस के समय, हमलों की तीव्रता में काफी कमी आई, जिसका अर्थ है कि कई बार कम मृत और घायल थे,Verkhovna Rada इरीना Gerashchenko के उपाध्यक्ष पर फेसबुक में लिखा है।
डोनेट्स्क में, उन्होंने आशा व्यक्त की कि नए ट्रूक का सम्मान यूक्रेनी सुरक्षा बलों द्वारा किया जाएगा।
आशा हमेशा मरती है। आशा है (कि "ईस्टर" ट्रूस का सम्मान किया जाएगा), लेकिन सामने की रेखा पर क्या हो रहा है . . . कल दक्षिण में एक मजबूत वृद्धि हुई थी। यूक्रेन किसी तरह के उन्माद में है। सम्मान की उम्मीद है,डीपीआर के प्रमुख ने कहा, अलेक्जेंडर ज़खरचेंको।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टियों ने "मिन्स्क समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए एक दृढ़ प्रतिबद्धता और" ईस्टर ट्रूस "दोहराया, जो कि संपर्क समूह द्वारा यूक्रेन के पूर्व में संघर्ष को हल करने के लिए पहुंचा था," रिपोर्ट में कहा गया है। "नॉर्मन प्रारूप" देशों के नेता इस समझौते का स्वागत करते हैं और इसके सख्त पालन के महत्व को रेखांकित करते हैं और "OSCE स्पेशल मॉनिटरिंग मिशन द्वारा प्रभावी निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित करते हैं"। मिन्स्क, बोरिस ग्रिजलोव में वार्ता में रूस की बहुपत्नी, ने पहले बताया कि डोनबास में "ईस्टर ट्रूस" एक पूर्ण संघर्ष विराम और किसी भी आक्रामक कार्रवाई पर प्रतिबंध लगाने की परिकल्पना करता है। बयान में किसी भी आक्रामक कार्रवाई और टोही कार्यों के निषेध की पुष्टि की गई, दोनों दिशाओं में और बस्तियों से, बस्तियों में और उसके पास भारी हथियारों की तैनाती और उपयोग से गोलीबारी की गई। संपर्क समूह ने संघर्ष विराम के आदेशों का पालन करने और इसके उल्लंघनकर्ताओं को अनुशासनात्मक उपाय लागू करने के महत्व पर बल दिया,उसने कहा। कीव में, "ईस्टर" ट्रूस पर समझौते की पुष्टि की। यूक्रेनी पक्ष की पहल पर, टीकेजी ने मार्च एक्सएनयूएमएक्स के साथ डोनबास में ईस्टर ट्रूस पर सहमति व्यक्त की। यह पहली बार नहीं है जब पार्टियों ने आग को रोकने के लिए सहमति व्यक्त की है, युद्ध के दौरान एक बार एक ट्रंक एक्सएनयूएमएक्स घोषित किया गया था . . . दुर्भाग्य से, एक बार सम्मान नहीं किया गया था। लेकिन ट्रूस के समय, हमलों की तीव्रता में काफी कमी आई, जिसका अर्थ है कि कई बार कम मृत और घायल थे,Verkhovna Rada इरीना Gerashchenko के उपाध्यक्ष पर फेसबुक में लिखा है। डोनेट्स्क में, उन्होंने आशा व्यक्त की कि नए ट्रूक का सम्मान यूक्रेनी सुरक्षा बलों द्वारा किया जाएगा। आशा हमेशा मरती है। आशा है , लेकिन सामने की रेखा पर क्या हो रहा है . . . कल दक्षिण में एक मजबूत वृद्धि हुई थी। यूक्रेन किसी तरह के उन्माद में है। सम्मान की उम्मीद है,डीपीआर के प्रमुख ने कहा, अलेक्जेंडर ज़खरचेंको।
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बिलासपुर (निप्र)। किसी भी क्रिकेटर को प्रतिभावान क्रिकेटर बनाने के लिए उसे तकनीकी कोचिंग देना अधिक आवश्यक होता है। जब तक किसी भी खिलाड़ी के तकनीकी पक्ष को मजबूत नहीं बनाया जाएगा तब तक उससे बेहतर प्रदर्शन की आस बेमानी होगी. . . chhattisgarhSat, 08 Mar 2014 10:11 PM (IST)
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बिलासपुर । किसी भी क्रिकेटर को प्रतिभावान क्रिकेटर बनाने के लिए उसे तकनीकी कोचिंग देना अधिक आवश्यक होता है। जब तक किसी भी खिलाड़ी के तकनीकी पक्ष को मजबूत नहीं बनाया जाएगा तब तक उससे बेहतर प्रदर्शन की आस बेमानी होगी. . . chhattisgarhSat, आठ मार्च दो हज़ार चौदह दस:ग्यारह PM
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सलमान खान भले ही अभी तक हीरो के रोल में नजर आ रहे हों लेकिन उनकी कई हीरोइनें शादी करके सेटल हो चुकी हैं । इनमें से एक शीबा भी हैं । शीबा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर अमेरिका की यादों को शेयर किया ।
शीबा ने फोटो शेयर करते हुए कहा, 'यूएस का ट्रिप बेहद यादगार और सुंदर रहा । मुझे वहां पर खुला आसमान और प्रदूषण मुक्त सड़कें दिखीं । वहां पर आस-पास शांति का माहौल दिखने की वजह से मुझे सबसे पसंदीदा स्थान यूएस लगता है । हर साल मैं अपने परिवार के साथ जाती हूं । '
शीबा ही नहीं वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर और भी कई एक्ट्रेस ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया । एक्ट्रेस अदा खान ने बताया, 'हाल ही में मैं कनाडा गई थी और वहां पर नियाग्रा फॉल्स घूमकर काफी शानदार अनुभव मिला । ' टीवी के एक और एक्टर शिविन नारंग ने अपने ट्रिप के बारे में शेयर किया ।
उन्होंने बताया, 'पिछले दिनों मैं अपने पैरेंट्स के साथ नासिक गया था । मेरा मानना है कि एक एक्टर को एक नए प्रोजेक्ट से पहले खुद को तरोताजा कर लेना चाहिए । मानसून के दौरान मैं नासिक गया और बेहद शानदार वीकेंड रहा। हम वहां पर कुछ मंदिरों में गए और हमारी यात्रा बेहद खूबसूरत रही ।
टीवी स्टार एक्टर शरद मल्होत्रा ने बताया, 'मैं आइफिल टॉवर गया था, जो मेरे सभी सपनों में से एक था । जिन्हें आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं उनके साथ यहां जरूर जाना चाहिए । हालांकि मैं यहां अकेले गया था । जब भी आप अकेले यात्रा करते हैं तो आप अपने आपको ज्यादा एक्सप्लोर कर पाते हैं और यात्रा पर जाने के लिए साथी मिल जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता । '
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सलमान खान भले ही अभी तक हीरो के रोल में नजर आ रहे हों लेकिन उनकी कई हीरोइनें शादी करके सेटल हो चुकी हैं । इनमें से एक शीबा भी हैं । शीबा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर अमेरिका की यादों को शेयर किया । शीबा ने फोटो शेयर करते हुए कहा, 'यूएस का ट्रिप बेहद यादगार और सुंदर रहा । मुझे वहां पर खुला आसमान और प्रदूषण मुक्त सड़कें दिखीं । वहां पर आस-पास शांति का माहौल दिखने की वजह से मुझे सबसे पसंदीदा स्थान यूएस लगता है । हर साल मैं अपने परिवार के साथ जाती हूं । ' शीबा ही नहीं वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर और भी कई एक्ट्रेस ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया । एक्ट्रेस अदा खान ने बताया, 'हाल ही में मैं कनाडा गई थी और वहां पर नियाग्रा फॉल्स घूमकर काफी शानदार अनुभव मिला । ' टीवी के एक और एक्टर शिविन नारंग ने अपने ट्रिप के बारे में शेयर किया । उन्होंने बताया, 'पिछले दिनों मैं अपने पैरेंट्स के साथ नासिक गया था । मेरा मानना है कि एक एक्टर को एक नए प्रोजेक्ट से पहले खुद को तरोताजा कर लेना चाहिए । मानसून के दौरान मैं नासिक गया और बेहद शानदार वीकेंड रहा। हम वहां पर कुछ मंदिरों में गए और हमारी यात्रा बेहद खूबसूरत रही । टीवी स्टार एक्टर शरद मल्होत्रा ने बताया, 'मैं आइफिल टॉवर गया था, जो मेरे सभी सपनों में से एक था । जिन्हें आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं उनके साथ यहां जरूर जाना चाहिए । हालांकि मैं यहां अकेले गया था । जब भी आप अकेले यात्रा करते हैं तो आप अपने आपको ज्यादा एक्सप्लोर कर पाते हैं और यात्रा पर जाने के लिए साथी मिल जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता । '
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शनि आपकी राशि के 12वें स्थान में आ जायेंगे। जिससे आपके खर्चों में बढ़ोतरी होगी। शारीरिक कष्टों का सामना भी करना पड़ सकता है। सिर दर्द पूरे साल परेशान करता रहेगा। कुंभ राशि वालों के लिए 30 मार्च को गुरु का राशि परिवर्तन काफी पॉजिटिव दिखाई दे रहा है। लेकिन जल्दबाजी में निर्णय लेने से आपको लाभ कम नुकसान ज्यादा देखने को मिल सकता है। निवेश करने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।
कुंडली में 11 मई को शनि वक्र हो जायेंगे। जो आपकी परेशानियों में बढ़ोतरी के संकेत दे रहे हैं। हालांकि आप इस दौरान अपनी समझदारी से परेशानियों का हल निकाल पाने में सफल हो सकते हैं। शनि को मजबूत करने के लिए आप शनि की पूजा जरूर करें। इसके साथ काले घोड़े की नाल से बना छल्ला अपनी हाथ की बीच वाली उंगली में धारण करें।
14 मई को गुरु के वक्री होने से आपकी लाभ की स्थिति फिर बनने लगेंगी। रूके हुए कार्य पूरे करने के लिए अच्छा समय रहेगा। 30 जून को गुरु के फिर से धनु राशि में जाते ही आपको धन वृद्धि के अवसर प्राप्त होने लगेंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के आसार रहेंगे। गुरु केतु के योग से संपत्ति से संबंधित विवाद उत्पन्न हो सकता है। 13 सितंबर को गुरु के मार्गी होते ही फिर से काम बनने लगेंगे।
23 सितंबर को राहु का परिवर्तन होगा जो आपके सुख सुविधाओं में वृद्धि के संकेत दे रहा है। नये वाहन की खरीदारी कर सकते हैं। इसके साथ ही केतु भी लाभ स्थान पर विराजमान होने से आपको व्यापार में तरक्की मिलेगी। 29 सितंबर को शनि मार्गी हो जायेंगे। जिसके पश्चात आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। कुल मिलाकर ये नया साल आपके लिए कभी खुशी तो कभी मुश्किल समय के आने के संकेत दे रहा है।
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शनि आपकी राशि के बारहवें स्थान में आ जायेंगे। जिससे आपके खर्चों में बढ़ोतरी होगी। शारीरिक कष्टों का सामना भी करना पड़ सकता है। सिर दर्द पूरे साल परेशान करता रहेगा। कुंभ राशि वालों के लिए तीस मार्च को गुरु का राशि परिवर्तन काफी पॉजिटिव दिखाई दे रहा है। लेकिन जल्दबाजी में निर्णय लेने से आपको लाभ कम नुकसान ज्यादा देखने को मिल सकता है। निवेश करने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। कुंडली में ग्यारह मई को शनि वक्र हो जायेंगे। जो आपकी परेशानियों में बढ़ोतरी के संकेत दे रहे हैं। हालांकि आप इस दौरान अपनी समझदारी से परेशानियों का हल निकाल पाने में सफल हो सकते हैं। शनि को मजबूत करने के लिए आप शनि की पूजा जरूर करें। इसके साथ काले घोड़े की नाल से बना छल्ला अपनी हाथ की बीच वाली उंगली में धारण करें। चौदह मई को गुरु के वक्री होने से आपकी लाभ की स्थिति फिर बनने लगेंगी। रूके हुए कार्य पूरे करने के लिए अच्छा समय रहेगा। तीस जून को गुरु के फिर से धनु राशि में जाते ही आपको धन वृद्धि के अवसर प्राप्त होने लगेंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के आसार रहेंगे। गुरु केतु के योग से संपत्ति से संबंधित विवाद उत्पन्न हो सकता है। तेरह सितंबर को गुरु के मार्गी होते ही फिर से काम बनने लगेंगे। तेईस सितंबर को राहु का परिवर्तन होगा जो आपके सुख सुविधाओं में वृद्धि के संकेत दे रहा है। नये वाहन की खरीदारी कर सकते हैं। इसके साथ ही केतु भी लाभ स्थान पर विराजमान होने से आपको व्यापार में तरक्की मिलेगी। उनतीस सितंबर को शनि मार्गी हो जायेंगे। जिसके पश्चात आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। कुल मिलाकर ये नया साल आपके लिए कभी खुशी तो कभी मुश्किल समय के आने के संकेत दे रहा है।
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नई दिल्लीः रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. चेन्नई के एक समूह 'इंडिक कलेक्टिव' ने रोहिंग्या मुसलमान को इस्लामिक आतंक का चेहरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया है.
याचिका में कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमान को भारत में रहने की इजाजत देना अशांति, हंगामा और दुर्दशा को आमंत्रित करने के समान है. इंडिक कलेक्टिव ने अपनी याचिका में कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट को यह बताना चाहता है कि रोहिंग्या मुसलमान को भारत में रहने की इजाजत देने से क्या खतरा है. इसलिए रोहिंग्या मुसलमानों से संबंधित मामले में उन्हें भी सुना जाए.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिका में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के उल्लंघन सहित कई आधार बताते हुए सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है.
दरअसल म्यांमार ने रोहिंग्या मुसलमान को नागरिकता देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद म्यांमार में हिंसा करने के बाद कुछ रोहिंग्या मुसलमान भारत भागकर आए गए हैं और जम्मू, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर आदि जगहों पर अवैध रूप से रह रहे हैं. भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं.
अवैध प्रवासी रोहिंग्या मुसलमानों को म्यामांर में वापस भेजने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 11 सितंबर को अब इस मामले की सुनवाई करेंगे.
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नई दिल्लीः रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. चेन्नई के एक समूह 'इंडिक कलेक्टिव' ने रोहिंग्या मुसलमान को इस्लामिक आतंक का चेहरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया है. याचिका में कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमान को भारत में रहने की इजाजत देना अशांति, हंगामा और दुर्दशा को आमंत्रित करने के समान है. इंडिक कलेक्टिव ने अपनी याचिका में कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट को यह बताना चाहता है कि रोहिंग्या मुसलमान को भारत में रहने की इजाजत देने से क्या खतरा है. इसलिए रोहिंग्या मुसलमानों से संबंधित मामले में उन्हें भी सुना जाए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिका में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के उल्लंघन सहित कई आधार बताते हुए सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है. दरअसल म्यांमार ने रोहिंग्या मुसलमान को नागरिकता देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद म्यांमार में हिंसा करने के बाद कुछ रोहिंग्या मुसलमान भारत भागकर आए गए हैं और जम्मू, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर आदि जगहों पर अवैध रूप से रह रहे हैं. भारत में करीब चालीस हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं. अवैध प्रवासी रोहिंग्या मुसलमानों को म्यामांर में वापस भेजने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ग्यारह सितंबर को अब इस मामले की सुनवाई करेंगे.
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यूसुफ पठान को भारत बनाम श्रीलंका पहले T20I के दौरान भाई इरफान पठान से मिली डेब्यू कैप!
भारत बनाम श्रीलंका T20I सीरीज का दूसरा मैच पुणे में 5 जनवरी को खेला जाएगा।
क्रिकेट जगत के मशहूर भाइयों की जोड़ी, यूसुफ पठान और इरफान पठान, एक बार फिर एक मैच के दौरान एक-साथ नजर आई। हालांकि, पूर्व भारतीय क्रिकेटर मैदानी एक्शन में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि स्टार स्पोर्ट्स के ब्राडकास्टिंग पैनल के रूप में एक-साथ नजर आए थे।
दरअसल, 3 जनवरी को भारत और श्रीलंका के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए पहले T20I मैच के दौरान यूसुफ पठान ने स्टार स्पोर्ट्स के अतिथि पैनल ने रूप में स्टूडियो में एंट्री की और उन्हें अपने भाई इरफान पठान से ग्रैंड वेलकम मिला।
आपको बता दें, पठान भाइयों ने साल 2009 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ भारत को 3 विकेट की यादगार जीत दिलाई थी, जिसके बाद युसूफ पठान को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। अब 14 साल बाद, दोनों भाइयों ने भारत बनाम श्रीलंका मैच का क्रिकेट एक्सपर्ट के रूप में लुफ्त उठाया।
इरफान पठान पहले से ही स्टार स्पोर्ट्स से ब्रॉडकास्टर के रूप में जुड़ें हुए हैं, और अब यानी 3 जनवरी को यूसुफ पठान ने भी क्रिकेट एक्सपर्ट के रूप में डेब्यू किया है। पठान भाइयों द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में इरफान को अपने भाई यूसुफ को डेब्यू कैप देते हुए स्टार स्पोर्ट्स के ब्राडकास्टिंग पैनल में स्वागत करते हुए देखा जा सकता है। जिसके बाद दोनों के बीच खास मिलाप भी देखा गया, वहीं जतिन सप्रू ने तालियां बजाकर पूर्व ऑलराउंडर का स्टूडियो में स्वागत किया।
अगर मैच की बात करे, तो टीम इंडिया ने दीपक हुड्डा (41*) और शिवम मावी (4 विकेट) के शानदार प्रदर्शन के बदौलत अंतिम ओवर में श्रीलंका को दो रनों से मात देकर जारी तीन मैचों की T20I सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर ली है। इस T20I सीरीज का दूसरा मैच पुणे में 5 जनवरी को खेला जाएगा।
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यूसुफ पठान को भारत बनाम श्रीलंका पहले TबीसI के दौरान भाई इरफान पठान से मिली डेब्यू कैप! भारत बनाम श्रीलंका TबीसI सीरीज का दूसरा मैच पुणे में पाँच जनवरी को खेला जाएगा। क्रिकेट जगत के मशहूर भाइयों की जोड़ी, यूसुफ पठान और इरफान पठान, एक बार फिर एक मैच के दौरान एक-साथ नजर आई। हालांकि, पूर्व भारतीय क्रिकेटर मैदानी एक्शन में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि स्टार स्पोर्ट्स के ब्राडकास्टिंग पैनल के रूप में एक-साथ नजर आए थे। दरअसल, तीन जनवरी को भारत और श्रीलंका के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए पहले TबीसI मैच के दौरान यूसुफ पठान ने स्टार स्पोर्ट्स के अतिथि पैनल ने रूप में स्टूडियो में एंट्री की और उन्हें अपने भाई इरफान पठान से ग्रैंड वेलकम मिला। आपको बता दें, पठान भाइयों ने साल दो हज़ार नौ में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ भारत को तीन विकेट की यादगार जीत दिलाई थी, जिसके बाद युसूफ पठान को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। अब चौदह साल बाद, दोनों भाइयों ने भारत बनाम श्रीलंका मैच का क्रिकेट एक्सपर्ट के रूप में लुफ्त उठाया। इरफान पठान पहले से ही स्टार स्पोर्ट्स से ब्रॉडकास्टर के रूप में जुड़ें हुए हैं, और अब यानी तीन जनवरी को यूसुफ पठान ने भी क्रिकेट एक्सपर्ट के रूप में डेब्यू किया है। पठान भाइयों द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में इरफान को अपने भाई यूसुफ को डेब्यू कैप देते हुए स्टार स्पोर्ट्स के ब्राडकास्टिंग पैनल में स्वागत करते हुए देखा जा सकता है। जिसके बाद दोनों के बीच खास मिलाप भी देखा गया, वहीं जतिन सप्रू ने तालियां बजाकर पूर्व ऑलराउंडर का स्टूडियो में स्वागत किया। अगर मैच की बात करे, तो टीम इंडिया ने दीपक हुड्डा और शिवम मावी के शानदार प्रदर्शन के बदौलत अंतिम ओवर में श्रीलंका को दो रनों से मात देकर जारी तीन मैचों की TबीसI सीरीज में एक-शून्य से बढ़त हासिल कर ली है। इस TबीसI सीरीज का दूसरा मैच पुणे में पाँच जनवरी को खेला जाएगा।
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संत क्यों रोए?
एक खबरिया चैनल पर देश के महान संत तोता राम को अपने भक्तों के सामने सुबकते देख, हमारे मुंह से बरबस निकल पड़ा, "किसी संत को इस तरह पब्लिक के सामने रोना शोभा नहीं देता। इससे उनके उन शिष्यों पर क्या गुजरेगी, जिनके तारण का ठेका परम पूज्य तोता राम ने ले रखा है। ये शिष्य तो बेचारे अपना तन-मन-धन सब कुछ संत श्री तोता राम 1009 के श्री चरणों में अर्पित कर चुके हैं। " हमारी इकलौती धर्मपत्नी ने हमें झिड़कते हुए कहा, "क्यों इस तरह पूज्य संत का मजाक बना रहे हो? वह मुसीबत में है और आपको शिष्यों की पड़ी है। " हमें एकाएक ध्यान आया कि हमारी पत्नी भी विश्व संत तोता राम की प्रिय चेली है और हमारे बरामदे, ड्राइंग रूम तथा बैड रूम से लेकर किचन तथा स्टोर में भी उनके परम पूज्य गुरु जी के एलबम साइज से लेकर आदमकद मुस्कराते चित्र लगे हुए हैं। संत तोता राम का आभामंडल इतना प्रभावशाली था कि उनके चेहरे पर नजर ही नहीं टिकती थी। पता नहीं यह उनके तप का कमाल था या फोटोग्राफर की करामात थी। उनके प्रवचन रोजाना अंधकार सरीखे भक्ति चैनलों पर प्रसारित होते हैं और उनके धारा प्रवाह प्रवचनों के सभी दीवाने हैं। पंजू मोची से लेकर सूरदास मंत्री तक सभी उनके चरणों में लोटने के लिए तैयार बैठे रहते हैं। हमने पत्नी को गीता मैहता की पुस्तक 'कर्मा कोला' में वर्णित एक भुक्तभोगी अमरीकी महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह मोक्ष के चक्कर में उस अबला को कुछ धर्मगुरुओं ने ऐसा दीक्षित किया कि उस बेचारी को कई साल पागलखाने में गुजारने पड़े और महिलाओं को ऐसे संतों से बचकर रहना चाहिए। परंतु हमारी हाजिर-जवाबी पत्नी के पास हमारे हर प्रश्न का तोड़ मौजूद रहता है, उन्होंने तुरंत उत्तर दिया, "किसी प्रौढ़ महिला को संत तोता राम से डरने की आवश्यकता नहीं। गुरु जी केवल षोडशी कन्याओं के पूजन में विश्वास रखते हैं। जब तक कोई 20 वर्ष से अधिक उम्र की कोई महिला स्वयं गुरु जी से पुत्रवती होने का आशीर्वाद नहीं लेती, गुरु जी उस पर कृपा नहीं करते। " पत्नी के रहस्योद्घाटन से हमारी नजर में संत की छवि और उज्ज्वल हो गई। हमने पत्नी से पूछा कि उनके गुरु जी सरकार और कानून पर इस तरह क्यों बरस रहे हैं और कभी-कभी रोते हुए भगवान से इन दोनों का बेड़ा गर्क करने की गुहार क्यों लगा रहे हैं। अपने आंसू पौंछते हुए वह बोली, "इस वक्त उनके सारे शिष्य ध्यान में डूबे होंगे और गुरु जी को इस मुसीबत से उबारने के लिए प्रार्थना कर रहे होंगे और आप मुझसे फिजूल सवाल किए जा रहे हैं। फिर भी सुनिए और अपनी शंका का निवारण कीजिए। अगर कोई नेता, भू-माफिया, अफसर या रसूख वाला आदमी भूमि पर अवैध कब्जा करता है तो उसे किसी न किसी तरह लीगलाइज कर दिया जाता है। कोई बांझ महिला पुत्र की चाह में अगर किसी बच्चे का कत्ल कर देती है तो सालों उसकी तफतीश होती रहती है, पर अगर हमारे पूज्य गुरु जी की संस्था द्वारा ऐसा किए जाने पर सबको आपत्ति है। एकाएक हमारी पत्नी को ध्यान आया कि हमने संत तोता राम के नाम के साथ 1008 के स्थान पर 1009 का प्रयोग किया है। उसके पूछने पर जब हमने संदर्भ सहित व्याख्या करते हुए बताया कि सिद्ध पुरुषों के लिए पूर्णांक 9 है और मुस्टडों के लिए 10, तो पत्नी ने अपनी गुरु भक्ति का सुबूत देते हुए अपने पास पड़ा जो शीशे का गिलास हमारे चेहरे की तरफ उछाला, उसके साक्ष्य आज भी हमारे चेहरे पर चांद के धब्बों की तरह मौजूद हैं।
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संत क्यों रोए? एक खबरिया चैनल पर देश के महान संत तोता राम को अपने भक्तों के सामने सुबकते देख, हमारे मुंह से बरबस निकल पड़ा, "किसी संत को इस तरह पब्लिक के सामने रोना शोभा नहीं देता। इससे उनके उन शिष्यों पर क्या गुजरेगी, जिनके तारण का ठेका परम पूज्य तोता राम ने ले रखा है। ये शिष्य तो बेचारे अपना तन-मन-धन सब कुछ संत श्री तोता राम एक हज़ार नौ के श्री चरणों में अर्पित कर चुके हैं। " हमारी इकलौती धर्मपत्नी ने हमें झिड़कते हुए कहा, "क्यों इस तरह पूज्य संत का मजाक बना रहे हो? वह मुसीबत में है और आपको शिष्यों की पड़ी है। " हमें एकाएक ध्यान आया कि हमारी पत्नी भी विश्व संत तोता राम की प्रिय चेली है और हमारे बरामदे, ड्राइंग रूम तथा बैड रूम से लेकर किचन तथा स्टोर में भी उनके परम पूज्य गुरु जी के एलबम साइज से लेकर आदमकद मुस्कराते चित्र लगे हुए हैं। संत तोता राम का आभामंडल इतना प्रभावशाली था कि उनके चेहरे पर नजर ही नहीं टिकती थी। पता नहीं यह उनके तप का कमाल था या फोटोग्राफर की करामात थी। उनके प्रवचन रोजाना अंधकार सरीखे भक्ति चैनलों पर प्रसारित होते हैं और उनके धारा प्रवाह प्रवचनों के सभी दीवाने हैं। पंजू मोची से लेकर सूरदास मंत्री तक सभी उनके चरणों में लोटने के लिए तैयार बैठे रहते हैं। हमने पत्नी को गीता मैहता की पुस्तक 'कर्मा कोला' में वर्णित एक भुक्तभोगी अमरीकी महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह मोक्ष के चक्कर में उस अबला को कुछ धर्मगुरुओं ने ऐसा दीक्षित किया कि उस बेचारी को कई साल पागलखाने में गुजारने पड़े और महिलाओं को ऐसे संतों से बचकर रहना चाहिए। परंतु हमारी हाजिर-जवाबी पत्नी के पास हमारे हर प्रश्न का तोड़ मौजूद रहता है, उन्होंने तुरंत उत्तर दिया, "किसी प्रौढ़ महिला को संत तोता राम से डरने की आवश्यकता नहीं। गुरु जी केवल षोडशी कन्याओं के पूजन में विश्वास रखते हैं। जब तक कोई बीस वर्ष से अधिक उम्र की कोई महिला स्वयं गुरु जी से पुत्रवती होने का आशीर्वाद नहीं लेती, गुरु जी उस पर कृपा नहीं करते। " पत्नी के रहस्योद्घाटन से हमारी नजर में संत की छवि और उज्ज्वल हो गई। हमने पत्नी से पूछा कि उनके गुरु जी सरकार और कानून पर इस तरह क्यों बरस रहे हैं और कभी-कभी रोते हुए भगवान से इन दोनों का बेड़ा गर्क करने की गुहार क्यों लगा रहे हैं। अपने आंसू पौंछते हुए वह बोली, "इस वक्त उनके सारे शिष्य ध्यान में डूबे होंगे और गुरु जी को इस मुसीबत से उबारने के लिए प्रार्थना कर रहे होंगे और आप मुझसे फिजूल सवाल किए जा रहे हैं। फिर भी सुनिए और अपनी शंका का निवारण कीजिए। अगर कोई नेता, भू-माफिया, अफसर या रसूख वाला आदमी भूमि पर अवैध कब्जा करता है तो उसे किसी न किसी तरह लीगलाइज कर दिया जाता है। कोई बांझ महिला पुत्र की चाह में अगर किसी बच्चे का कत्ल कर देती है तो सालों उसकी तफतीश होती रहती है, पर अगर हमारे पूज्य गुरु जी की संस्था द्वारा ऐसा किए जाने पर सबको आपत्ति है। एकाएक हमारी पत्नी को ध्यान आया कि हमने संत तोता राम के नाम के साथ एक हज़ार आठ के स्थान पर एक हज़ार नौ का प्रयोग किया है। उसके पूछने पर जब हमने संदर्भ सहित व्याख्या करते हुए बताया कि सिद्ध पुरुषों के लिए पूर्णांक नौ है और मुस्टडों के लिए दस, तो पत्नी ने अपनी गुरु भक्ति का सुबूत देते हुए अपने पास पड़ा जो शीशे का गिलास हमारे चेहरे की तरफ उछाला, उसके साक्ष्य आज भी हमारे चेहरे पर चांद के धब्बों की तरह मौजूद हैं।
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शुजालपुर। आजादी की लड़ाई में भाग लेकर तथा गांव-गांव जाकर लोगों को स्वतंत्रता के लिए जागरूक करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नंदराम सोनानिया की 9वीं पुण्यतिथि उनके ग्राम अरन्याकलां में कनाड़िया रोड स्थित उनके समाधि स्थल पर मनाई गई।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग समाधि स्थल पहुंचे और पुष्प अर्पित कर सोनानिया को श्रद्घांजलि दी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित लक्ष्मीनारायण नेरावाले ने स्व. सोनानिया को गांव की अनमोल धरोहर बताया वहीं शुजालपुर नगर पालिका के पूर्व पार्षद काजी एस रहमान ने सोनानिया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा क्षेत्र में कार्यों को रखा और जीवन संघर्ष के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में रहते गांवों की आवाज को बुलंद करने वाला निर्भीक इंसान बताया। इसके अलावा श्रद्घांजलि सभा को सरपंच दुर्गा प्रसाद सोनानिया, पूर्व मंडी अध्यक्ष कालूराम वर्मा,पूर्व सरपंच रामप्रसाद सोनानिया, कय्यूम खान, देवीप्रसाद सोनानिया, डा. मुकेश सोनानिया,हजारीलाल हवालदार आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कालापीपल विधायक कुणाल चौधरी, पूर्व विधायक बाबूलाल वर्मा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रचना जैन, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष केदार मेवाडा, पूर्व पार्षद महेंद्र नाहर,विवेंकानंद नागरिक सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष किशोर खन्नाा, सेवादल जिलाध्यक्ष कैलाश उप्लावदिया आदि ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गान से किया वही समापन अवसर पर राष्ट्रीय गीत से किया। संचालन रामचंद सोनानिया ने किया तथा आभार बालमुकुद सोंनानिया ने माना। इस मौके पर सोनानिया परिवार के मदनलाल सोनानिया, कैलाश सोनानिया, रामप्रसाद मरेठिया, धर्मेन्द्र सोनानिया, अशोक सोनानिया, जगदीश सोनानिया, रवि सोनानिया, धीरज सोनानिया, रोहित सोनानिया, रजत सोनानिया, यश सोनानिया, प्रणय सोनानिया ने सभी आंगतुक लोगों का स्वागत किया।
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शुजालपुर। आजादी की लड़ाई में भाग लेकर तथा गांव-गांव जाकर लोगों को स्वतंत्रता के लिए जागरूक करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नंदराम सोनानिया की नौवीं पुण्यतिथि उनके ग्राम अरन्याकलां में कनाड़िया रोड स्थित उनके समाधि स्थल पर मनाई गई। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग समाधि स्थल पहुंचे और पुष्प अर्पित कर सोनानिया को श्रद्घांजलि दी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित लक्ष्मीनारायण नेरावाले ने स्व. सोनानिया को गांव की अनमोल धरोहर बताया वहीं शुजालपुर नगर पालिका के पूर्व पार्षद काजी एस रहमान ने सोनानिया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा क्षेत्र में कार्यों को रखा और जीवन संघर्ष के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में रहते गांवों की आवाज को बुलंद करने वाला निर्भीक इंसान बताया। इसके अलावा श्रद्घांजलि सभा को सरपंच दुर्गा प्रसाद सोनानिया, पूर्व मंडी अध्यक्ष कालूराम वर्मा,पूर्व सरपंच रामप्रसाद सोनानिया, कय्यूम खान, देवीप्रसाद सोनानिया, डा. मुकेश सोनानिया,हजारीलाल हवालदार आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कालापीपल विधायक कुणाल चौधरी, पूर्व विधायक बाबूलाल वर्मा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रचना जैन, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष केदार मेवाडा, पूर्व पार्षद महेंद्र नाहर,विवेंकानंद नागरिक सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष किशोर खन्नाा, सेवादल जिलाध्यक्ष कैलाश उप्लावदिया आदि ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गान से किया वही समापन अवसर पर राष्ट्रीय गीत से किया। संचालन रामचंद सोनानिया ने किया तथा आभार बालमुकुद सोंनानिया ने माना। इस मौके पर सोनानिया परिवार के मदनलाल सोनानिया, कैलाश सोनानिया, रामप्रसाद मरेठिया, धर्मेन्द्र सोनानिया, अशोक सोनानिया, जगदीश सोनानिया, रवि सोनानिया, धीरज सोनानिया, रोहित सोनानिया, रजत सोनानिया, यश सोनानिया, प्रणय सोनानिया ने सभी आंगतुक लोगों का स्वागत किया।
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'आत्मवरीक्षण की प्रवृत्ति ने इमारा ध्यान उस लोकसाहित्य की ओर आकृष्ट किया जिसमें मौखिक परंपरा का प्रत्येक रूपमा जाता है। लोककथाएँ, लोकगीत, लोकोक्कियाँ, बुझौवल, टोने टोटके, मंत्रोचार, लोकवार्ता, लोकोत्सव आदि अलग अलग तो विशेष अध्ययन का विषय बने ही, साथ ही इन तमाम लोकोपकरणों का प्रयोग लोकजीवन की समग्रता की अभिव्यक्ति के लिये आंांवलिक उपन्यासों में किया गया । स्वतंत्रताप्राप्ति के अनंतर समाजवादी चेतना ने भी जब जब निम्न वर्ग के उत्थान का प्रश्न उठाया तब तब राष्ट्र के विभिन्न प्रांतों के विभिन्न अंचलों में बिखरी हुई संस्कृति को सँजीने की दिशा में आंचलिक उपन्यासों ने पर्याप्त योग दिया है। देश की वास्तविक स्वतंत्रता वस्तुतः अंचलों की जाग्रति पर निर्भर है। यह जनपदीय भाषाओं के आंदोलन से भागे की स्थिति है। स्थानीय भपा का प्रयोग यद्यपि ऐतिहासिक उपन्यासों में आज से बहुत पहले ही हो चुका था, तथापि अव लोकजीवन के प्रत्येक पार्श्व का चित्रण प्रमुख हो गया। इस दृष्टि से आंचलिक उपन्यास हमारे सांस्कृतिक उपादान सिद्ध होते है। श्री रामरतन भटनागर की दृष्टि में प्रेमवंद के बाद उपन्यास अपने स्वस्थ और संतुलित क्लासिकल दृष्टिकोण को पीछे छोड़कर जिन रोमांस की भूमियों को अपना चुका है। आंचलिकता भी उनमें से एक है। यह मानत्र की उस दृष्टि का विकास है जो अनेकरूपता में मानव जीवन का आभास पाना चाहती है।
आंचलिक उपन्य सों के विषय और उद्देश्य के विवेचन के उपरांत उसके स्वरूप का प्रश्न उठता है। उपन्यास होने के नाते भांचलिक उपन्यासों के मानदव भी उपन्यास के ही मनदंड होते है। अंतर केवल इन उपन्यासों की अंचलकेंद्रित दृष्टि का है जो मंचल को ही उपन्यास के सभी तत्वों का दृष्टिकेंद्र बना
आंचलिक उपन्यास में कथा के संगठन का आभार कथानक, पात्र मथवा उद्देश्य विशेष न होकर एक विशिष्ट भूमाग होता है, अतः
कथानक मंचलके द्रित होता है प्रारंभ और अंत भी जनपद विशेष के चित्रण से ही किया जाता है। श्री जैनेंद्र के शब्दों में भांवलिक प्रवृत्ति वह दृष्टि है जिसके केंद्र में कोई पात्र या चरित्र उतना नहीं जितना बह भूभाग स्वयं है । अतः अंचल की रूपरेखा को उभारने के लिये वर्णनात्मकता का विशेष महत्व होता है और कथाबिकास की दृष्टि से अनुपयोगी दृश्य का भी समावेश कर दिया जाता है। वर्णनात्मकता की स्थिरता कथा की गतिशीलता को मंथर कर देती है। इसमें अंचल विशेष का व्यवस्थित और गहन अध्ययन प्रस्तुत किया जाना है, फलस्वरूप उपन्यासकार को अपने कथाक्षेत्र की एक एक इंच भूमि से अनिशता का विश्वास दिलाना पड़ता है। अमे अपनी आँखों देखे परखे तथा अनुभून जीवन का चित्रण करना पड़ता है तभी वह अपने निर्दिष्ट अंचल के व्यावहारिक जीवन की वस्तविकता का विश्वास दिला सकता है।
वर्णनात्मकता का यही अग्रह आंलिक उपन्यास में नायक की भरत रथा नहीं होने देना । नायकन्यता आंचलिक उपन्यासों की एक विशेषना कही जा सकती है, यद्यपि कुछ भांचलिक उपन्यासों में उसे ( नायक को ) खोजा जा सकता है। अत्रलकेंद्रित कथानक के आस पास पात्रों की एक भीड़ उपस्थित कर दी जाती है। क्योंकि कथा व्यक्ति विशेष की न होकर संपूर्ण अंचल की होती हैं, अतः इन बहुसंख्यक पात्रों की अपनी अपनी कहानी होती है। विभिन्न पात्रों की अलग अलग विशेषताएँ मिलकर अंचल के सामूहिक चरित्र को प्रदर्शित करती है। इनमें से अनेक पात्र वर्गगत होते हैं और उनके चरित्र की स्थानीय विशेषताओं पर प्रकाश डाला जाता है। इनके व्यक्तिगत चरित्र का अध्ययन भी मं क्लीय परिस्थितियों से उनके योगदान को प्रधानता देते हुए किया जाता है। यदि किसी एक पात्र को प्रधानता मिलती भी है तो मंचल से उसका सादाम्य दिखाने के निमित्त ही। वस्तुतः इन उपन्यासों में मंचल स्वयं एक वैशिष्ट्यमान् नायक बन बाता है और इस
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'आत्मवरीक्षण की प्रवृत्ति ने इमारा ध्यान उस लोकसाहित्य की ओर आकृष्ट किया जिसमें मौखिक परंपरा का प्रत्येक रूपमा जाता है। लोककथाएँ, लोकगीत, लोकोक्कियाँ, बुझौवल, टोने टोटके, मंत्रोचार, लोकवार्ता, लोकोत्सव आदि अलग अलग तो विशेष अध्ययन का विषय बने ही, साथ ही इन तमाम लोकोपकरणों का प्रयोग लोकजीवन की समग्रता की अभिव्यक्ति के लिये आंांवलिक उपन्यासों में किया गया । स्वतंत्रताप्राप्ति के अनंतर समाजवादी चेतना ने भी जब जब निम्न वर्ग के उत्थान का प्रश्न उठाया तब तब राष्ट्र के विभिन्न प्रांतों के विभिन्न अंचलों में बिखरी हुई संस्कृति को सँजीने की दिशा में आंचलिक उपन्यासों ने पर्याप्त योग दिया है। देश की वास्तविक स्वतंत्रता वस्तुतः अंचलों की जाग्रति पर निर्भर है। यह जनपदीय भाषाओं के आंदोलन से भागे की स्थिति है। स्थानीय भपा का प्रयोग यद्यपि ऐतिहासिक उपन्यासों में आज से बहुत पहले ही हो चुका था, तथापि अव लोकजीवन के प्रत्येक पार्श्व का चित्रण प्रमुख हो गया। इस दृष्टि से आंचलिक उपन्यास हमारे सांस्कृतिक उपादान सिद्ध होते है। श्री रामरतन भटनागर की दृष्टि में प्रेमवंद के बाद उपन्यास अपने स्वस्थ और संतुलित क्लासिकल दृष्टिकोण को पीछे छोड़कर जिन रोमांस की भूमियों को अपना चुका है। आंचलिकता भी उनमें से एक है। यह मानत्र की उस दृष्टि का विकास है जो अनेकरूपता में मानव जीवन का आभास पाना चाहती है। आंचलिक उपन्य सों के विषय और उद्देश्य के विवेचन के उपरांत उसके स्वरूप का प्रश्न उठता है। उपन्यास होने के नाते भांचलिक उपन्यासों के मानदव भी उपन्यास के ही मनदंड होते है। अंतर केवल इन उपन्यासों की अंचलकेंद्रित दृष्टि का है जो मंचल को ही उपन्यास के सभी तत्वों का दृष्टिकेंद्र बना आंचलिक उपन्यास में कथा के संगठन का आभार कथानक, पात्र मथवा उद्देश्य विशेष न होकर एक विशिष्ट भूमाग होता है, अतः कथानक मंचलके द्रित होता है प्रारंभ और अंत भी जनपद विशेष के चित्रण से ही किया जाता है। श्री जैनेंद्र के शब्दों में भांवलिक प्रवृत्ति वह दृष्टि है जिसके केंद्र में कोई पात्र या चरित्र उतना नहीं जितना बह भूभाग स्वयं है । अतः अंचल की रूपरेखा को उभारने के लिये वर्णनात्मकता का विशेष महत्व होता है और कथाबिकास की दृष्टि से अनुपयोगी दृश्य का भी समावेश कर दिया जाता है। वर्णनात्मकता की स्थिरता कथा की गतिशीलता को मंथर कर देती है। इसमें अंचल विशेष का व्यवस्थित और गहन अध्ययन प्रस्तुत किया जाना है, फलस्वरूप उपन्यासकार को अपने कथाक्षेत्र की एक एक इंच भूमि से अनिशता का विश्वास दिलाना पड़ता है। अमे अपनी आँखों देखे परखे तथा अनुभून जीवन का चित्रण करना पड़ता है तभी वह अपने निर्दिष्ट अंचल के व्यावहारिक जीवन की वस्तविकता का विश्वास दिला सकता है। वर्णनात्मकता का यही अग्रह आंलिक उपन्यास में नायक की भरत रथा नहीं होने देना । नायकन्यता आंचलिक उपन्यासों की एक विशेषना कही जा सकती है, यद्यपि कुछ भांचलिक उपन्यासों में उसे खोजा जा सकता है। अत्रलकेंद्रित कथानक के आस पास पात्रों की एक भीड़ उपस्थित कर दी जाती है। क्योंकि कथा व्यक्ति विशेष की न होकर संपूर्ण अंचल की होती हैं, अतः इन बहुसंख्यक पात्रों की अपनी अपनी कहानी होती है। विभिन्न पात्रों की अलग अलग विशेषताएँ मिलकर अंचल के सामूहिक चरित्र को प्रदर्शित करती है। इनमें से अनेक पात्र वर्गगत होते हैं और उनके चरित्र की स्थानीय विशेषताओं पर प्रकाश डाला जाता है। इनके व्यक्तिगत चरित्र का अध्ययन भी मं क्लीय परिस्थितियों से उनके योगदान को प्रधानता देते हुए किया जाता है। यदि किसी एक पात्र को प्रधानता मिलती भी है तो मंचल से उसका सादाम्य दिखाने के निमित्त ही। वस्तुतः इन उपन्यासों में मंचल स्वयं एक वैशिष्ट्यमान् नायक बन बाता है और इस
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कृषि सम्बन्धी आवश्यक्ताओं की पूर्ति करें । उसर मिट्टी (भूमि) लोगो की रोजी के अन्य साधनो जैसे मत्स्थ-पालन ( Fishing), व्यापार या निर्मिति को अपनाने के लिए बाध्य करती हूँ । तप्तीकरण ( Heating ) व वायु नियन्त्रण ( Air conditioning ) की आधुनिक विधिया के विकास ने प्राकृतिक तापमान तथा आर्द्रता की महत्ता का औद्यागि प्लाट के स्थान निधारक घटक की दृष्टि से कम वर दिया है । फिर भी किसी क्षन या भाग के औद्योगिक कार्यालया पर जलवायु का बहुत वडा प्रभाव
। इसका श्रमिको पर प्रभाव पटता है । शीत स्फूर्तिदायक जलवायु सर्वोकृष्ट वोटि वे औद्यागिक श्रमिक का विकास करता है । उस मकान, भाजन तथा बस्त्र प्राप्त करने वे लिए काम करना ही होगा, लेकिन अति उष्ण जलवायु के निवासी, यथा उष्णकटिबन्ध व निवामी, औद्योगिक श्रम के लिहाज से अपेत कम दक्ष होते हैं। उनमें मवान, भाजन तथा वस्त्र की प्राप्ति व लिए काम करने की प्ररणा नहीं रहती, दयाकि ये आमानी स प्राप्य हाने है । आदतन वे ठउ जलवायु में रहनवा मिनावी नाई स्फूर्तिपूर्ण (Energetic) नहीं हात और स्वभावत वे अपने वो घरेलू धन्धा के लायक शीघ्र नहीं बना सक्त । भूमि रचना ( Topography ) भी स्थापन पर महत्त्वपूर्ण अमर डालती है । पहाडी, उबड-खाबड तथा पयरीय स्थान सुगमता से कृषीय धन्धा के अनुकूल नहीं होता और न वहा कोई औद्यागिक कार्य ही होते है -मिवाय इसके कि किमी स्थान विशप को खनिज पदार्थों का वरदान मिला हा, जिससे किसी एक किस्म का ज्योग उनत हो सके । पत्रनीय जवराध, उपत्यकायें तथा वडी-वडी नदिया औद्योगिक विकास के लिए प्राय वाचा सिद्ध होती है। इनमें से किसी भी एक या कई वे सयाग से यातायात तथा सचार सम्बधी कठिनाइया पैदा हो जाती है और व्यय भी बढ जाता है जिसके कारण उन क्षत्रा स प्रतियोगिता म उतरना जो अपेक्षत सहज गम्य है असम्भव हा जाता है। हो सकता है कि इही घटना के कारण जनसंख्या वृद्धि पर विपरीत असर पड़ और परिणामस्वरूप सम्भावित स्थानीय उद्यागा का बाजार अति सीमित हा जाय ।
अन्य उद्योगों-परिपूरक (Complimentary ) तथा प्रतिद्वन्दी (Competitive ) वा साहचर्य- कुछ निमिनिक्र्ता परिपूरक या सहायव उद्योगा के निकट स्थान चुनते है वे सहायक या परिपूरक उद्याग दे है जा उन सामग्रिया व पूर्तिया का उत्पादन करते है जिनका उपयोग उन्ही की निमिति प्रक्रियाओं में होता है। प्लाट स्थापन की दृष्टि से इसमें उद्योग के केन्द्रीकरण वा प्रासाहन मिलता है। इसके विपरीत उद्याना के वीच प्रतिद्विता अक्सर उद्यागा के विकेन्द्रीकरणका प्रामाहित करती है। यह सम्भव है कि वे प्रतिद्वन्द्वी उद्योगा के साथ जो एक दूसरे के निकट स्थित है परम्परा के कारण वध हा जिसस नयी निर्मितिविधिया के प्रारम्भ करन में कठिनाई हा, और कम्पनिया वा आपस म श्रम के लिए प्रतिया हाना पड। इसके अतिरिक्त, हा सकता है कि प्लाटा के बीच श्रम जान की सहज ही प्रवृत्ति हा । फिर भी, जैसा कि जोन्स महोदय' न व्याख्या की है, निम्नलिखित कारणो की वजह से उद्योग समूह म ही सर्वां1 D Jones Administration of Industrial Enterprises pp 49-51.
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कृषि सम्बन्धी आवश्यक्ताओं की पूर्ति करें । उसर मिट्टी लोगो की रोजी के अन्य साधनो जैसे मत्स्थ-पालन , व्यापार या निर्मिति को अपनाने के लिए बाध्य करती हूँ । तप्तीकरण व वायु नियन्त्रण की आधुनिक विधिया के विकास ने प्राकृतिक तापमान तथा आर्द्रता की महत्ता का औद्यागि प्लाट के स्थान निधारक घटक की दृष्टि से कम वर दिया है । फिर भी किसी क्षन या भाग के औद्योगिक कार्यालया पर जलवायु का बहुत वडा प्रभाव । इसका श्रमिको पर प्रभाव पटता है । शीत स्फूर्तिदायक जलवायु सर्वोकृष्ट वोटि वे औद्यागिक श्रमिक का विकास करता है । उस मकान, भाजन तथा बस्त्र प्राप्त करने वे लिए काम करना ही होगा, लेकिन अति उष्ण जलवायु के निवासी, यथा उष्णकटिबन्ध व निवामी, औद्योगिक श्रम के लिहाज से अपेत कम दक्ष होते हैं। उनमें मवान, भाजन तथा वस्त्र की प्राप्ति व लिए काम करने की प्ररणा नहीं रहती, दयाकि ये आमानी स प्राप्य हाने है । आदतन वे ठउ जलवायु में रहनवा मिनावी नाई स्फूर्तिपूर्ण नहीं हात और स्वभावत वे अपने वो घरेलू धन्धा के लायक शीघ्र नहीं बना सक्त । भूमि रचना भी स्थापन पर महत्त्वपूर्ण अमर डालती है । पहाडी, उबड-खाबड तथा पयरीय स्थान सुगमता से कृषीय धन्धा के अनुकूल नहीं होता और न वहा कोई औद्यागिक कार्य ही होते है -मिवाय इसके कि किमी स्थान विशप को खनिज पदार्थों का वरदान मिला हा, जिससे किसी एक किस्म का ज्योग उनत हो सके । पत्रनीय जवराध, उपत्यकायें तथा वडी-वडी नदिया औद्योगिक विकास के लिए प्राय वाचा सिद्ध होती है। इनमें से किसी भी एक या कई वे सयाग से यातायात तथा सचार सम्बधी कठिनाइया पैदा हो जाती है और व्यय भी बढ जाता है जिसके कारण उन क्षत्रा स प्रतियोगिता म उतरना जो अपेक्षत सहज गम्य है असम्भव हा जाता है। हो सकता है कि इही घटना के कारण जनसंख्या वृद्धि पर विपरीत असर पड़ और परिणामस्वरूप सम्भावित स्थानीय उद्यागा का बाजार अति सीमित हा जाय । अन्य उद्योगों-परिपूरक तथा प्रतिद्वन्दी वा साहचर्य- कुछ निमिनिक्र्ता परिपूरक या सहायव उद्योगा के निकट स्थान चुनते है वे सहायक या परिपूरक उद्याग दे है जा उन सामग्रिया व पूर्तिया का उत्पादन करते है जिनका उपयोग उन्ही की निमिति प्रक्रियाओं में होता है। प्लाट स्थापन की दृष्टि से इसमें उद्योग के केन्द्रीकरण वा प्रासाहन मिलता है। इसके विपरीत उद्याना के वीच प्रतिद्विता अक्सर उद्यागा के विकेन्द्रीकरणका प्रामाहित करती है। यह सम्भव है कि वे प्रतिद्वन्द्वी उद्योगा के साथ जो एक दूसरे के निकट स्थित है परम्परा के कारण वध हा जिसस नयी निर्मितिविधिया के प्रारम्भ करन में कठिनाई हा, और कम्पनिया वा आपस म श्रम के लिए प्रतिया हाना पड। इसके अतिरिक्त, हा सकता है कि प्लाटा के बीच श्रम जान की सहज ही प्रवृत्ति हा । फिर भी, जैसा कि जोन्स महोदय' न व्याख्या की है, निम्नलिखित कारणो की वजह से उद्योग समूह म ही सर्वांएक D Jones Administration of Industrial Enterprises pp उनचास-इक्यावन.
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"कीव मोर्टार समूहों के ढेर रणनीति का उपयोग करता है। उन्होंने 10-20 खानों को शूट किया और छोड़ दिया। शहर बड़ा है, वे आगे बढ़ते हैं, उनके पास छुपाने के लिए है, "आरआईए ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया। "समाचार".
मंत्री ने बताया कि डोनेट्स्क की मोर्टार गोलाबारी के दौरान, जिसे यूक्रेनी सेना ने रोकने की असफल कोशिश की थी, नागरिकों को मार डाला गया था, जिसमें 9-वर्षीय लड़की भी शामिल थी।
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"कीव मोर्टार समूहों के ढेर रणनीति का उपयोग करता है। उन्होंने दस-बीस खानों को शूट किया और छोड़ दिया। शहर बड़ा है, वे आगे बढ़ते हैं, उनके पास छुपाने के लिए है, "आरआईए ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया। "समाचार". मंत्री ने बताया कि डोनेट्स्क की मोर्टार गोलाबारी के दौरान, जिसे यूक्रेनी सेना ने रोकने की असफल कोशिश की थी, नागरिकों को मार डाला गया था, जिसमें नौ-वर्षीय लड़की भी शामिल थी।
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मिश्रवन्धुविनोद । दालति कुबेर पैनी मेग मरजाद को ६, मुकुट मद्दीपन की आदि हरवर है। राजन की राजा महाराजा थी टिकैत राय आदिर जहान में गरीबएग्घर है ।
(टिकेनरायप्रकाश) ।
अलि दुसे अधर सुगन्ध पाय आनन को, कानन में ऐसे चाद चरन चलाये हैं । फाटि गई कंचुकी लगे ते कंट कुजन के, येनी बरहीन पोली घार छवि छाये हैं । येग ते गवन कीनो धक धक होत सोनो,
ऊरध उसासे तन स्वेद सरसाये हैं। भली प्रीति पाली बनमाली के चुलाइने को मेरे घेत आली बहुतेरे दुरुपाये हूँ ।
अतन प्रकास तन सलन सरम तास ।
घर घर घाट घाट बाट बाट ठाट टटे, घेला मा कुबेला फिरै चेला लिये आस पास । कविन से बाद करें, भेद विन नाद करें,
महा उनमाद करें धरम करम नास ॥ चेनी कवि कहै विभिचारिन को बादशाह
ललना ललक, नैन मैन की झलक, हॅसि
हेरत अलक रद खलक ललक दास ॥
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मिश्रवन्धुविनोद । दालति कुबेर पैनी मेग मरजाद को छः, मुकुट मद्दीपन की आदि हरवर है। राजन की राजा महाराजा थी टिकैत राय आदिर जहान में गरीबएग्घर है । । अलि दुसे अधर सुगन्ध पाय आनन को, कानन में ऐसे चाद चरन चलाये हैं । फाटि गई कंचुकी लगे ते कंट कुजन के, येनी बरहीन पोली घार छवि छाये हैं । येग ते गवन कीनो धक धक होत सोनो, ऊरध उसासे तन स्वेद सरसाये हैं। भली प्रीति पाली बनमाली के चुलाइने को मेरे घेत आली बहुतेरे दुरुपाये हूँ । अतन प्रकास तन सलन सरम तास । घर घर घाट घाट बाट बाट ठाट टटे, घेला मा कुबेला फिरै चेला लिये आस पास । कविन से बाद करें, भेद विन नाद करें, महा उनमाद करें धरम करम नास ॥ चेनी कवि कहै विभिचारिन को बादशाह ललना ललक, नैन मैन की झलक, हॅसि हेरत अलक रद खलक ललक दास ॥
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Chandwa : चंदवा थाना क्षेत्र के चकला स्थित अभिजीत ग्रुप पावर प्लांट गेट के समीप सोमवार की दोपहर एक हाइड्रा ने बाइक सवार बाप-बेटे को रौंद दिया. हादसे में पिता आदित्य मांझी व बेटे रौशन मांझी (12 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय ग्रामीण नौशाद खान, फरजान खान, लडन खान, तौहीद खान,अमित रजक, राजेश पासवान आदि लोगों की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर तरुण जोश लकड़ा ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रिम्स रेफर कर दिया.
हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल बाप-बेटे की बेहतर इलाज और उचित मुआवजा को लेकर मैन पावर कर्मचारी संघ ने अभिजीत ग्रुप के प्लांट का मुख्य गेट जाम कर दिया. लोगों ने कहा कि हादसे का शिकार हुआ व्यक्ति गरीब है. कंपनी बाप-बेटे का बेहतर इलाज कराये और उसे उचित मुआवजा दे.
मिली जानकारी के अनुसार चकला निवासी आदित्य मांझी अपनी पत्नी और बेटे रौशन को लेकर मोटरसाइकिल से चंदवा की ओर आ रहे थे. इसी दौरान अभिजीत ग्रुप पावर प्लांट के मुख्य गेट चकला रोड के समीप एक हाइड्रा वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. दुर्घटना में 12 वर्षीय रौशन मांझी और पिता आदित्य मांझी का एक-एक पैर बुरी तरह से कुचल गया. दुर्घटना में बाइक भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी है. सूचना मिलने के बाद चंदवा पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है.
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Chandwa : चंदवा थाना क्षेत्र के चकला स्थित अभिजीत ग्रुप पावर प्लांट गेट के समीप सोमवार की दोपहर एक हाइड्रा ने बाइक सवार बाप-बेटे को रौंद दिया. हादसे में पिता आदित्य मांझी व बेटे रौशन मांझी गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय ग्रामीण नौशाद खान, फरजान खान, लडन खान, तौहीद खान,अमित रजक, राजेश पासवान आदि लोगों की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर तरुण जोश लकड़ा ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रिम्स रेफर कर दिया. हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल बाप-बेटे की बेहतर इलाज और उचित मुआवजा को लेकर मैन पावर कर्मचारी संघ ने अभिजीत ग्रुप के प्लांट का मुख्य गेट जाम कर दिया. लोगों ने कहा कि हादसे का शिकार हुआ व्यक्ति गरीब है. कंपनी बाप-बेटे का बेहतर इलाज कराये और उसे उचित मुआवजा दे. मिली जानकारी के अनुसार चकला निवासी आदित्य मांझी अपनी पत्नी और बेटे रौशन को लेकर मोटरसाइकिल से चंदवा की ओर आ रहे थे. इसी दौरान अभिजीत ग्रुप पावर प्लांट के मुख्य गेट चकला रोड के समीप एक हाइड्रा वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. दुर्घटना में बारह वर्षीय रौशन मांझी और पिता आदित्य मांझी का एक-एक पैर बुरी तरह से कुचल गया. दुर्घटना में बाइक भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी है. सूचना मिलने के बाद चंदवा पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है.
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अपने पति को मारने के लिए मां ने बेटे के साथ मिलकर कांट्रैक्ट किलर से संपर्क किया। शख्स अपनी पत्नी के चरित्र पर अक्सर आपत्तिजनक कमेंट करता था और बेटियों के प्रति उसका व्यवहार भी संदिग्ध था।
बेंगलुरुः एक शख्स की हत्या के पीछे के मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में बेनागुलु पुलिस को एक गुमनाम पत्र से मदद मिली है। पुलिस ने कहा कि 52 वर्षीय मृतक मोहम्मद हंजला को तीन कांट्रैक्ट किलर ने मिलकर मारा था।
पुलिस ने बताया कि शख्स को मारने के लिए इन कांट्रैक्ट किलर को किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी और बेटे ने ही ये काम दिया था।
टाइम्स नाऊ के मुताबिक, पत्नी और बेटे ने शहर में एक फुटवियर निर्माण इकाई के मालिक हंजला को मारने के लिए तीन लोगों को 'सुपारी' दी थी। पुलिस ने तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर्स से तीन मोबाइल फोन और 98,000 रुपये बरामद किए हैं।
रिपोर्टों से पता चलता है कि मां और बेटे ने मिलकर शख्स की हत्या करवा दी क्योंकि शख्स ने पत्नी पर उसके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक कमेंट किया था और बेटियों के प्रति शख्स का संदिग्ध व्यवहार था।
पत्नी, सरवरी बेगम और बेटे रहमान ने पुलिस को बताया कि घरेलू विवाद भी इस घटना को अंजाम देने के पीछे का एक मुख्य कारण था। शख्स की पत्नी बेगम ने ही बेटे रहमान को हत्यारों से संपर्क करने के लिए कहा था। हालांकि, पति की मौत के बाद महिला ने 10 फरवरी को अपने पड़ोसियों को बताया कि उनकी मृत्यु हृदयगति रुकने से हुई थी। शख्स के मौत के कुछ समय बाद ही उसका अंतिम संस्कार कब्रिस्तान में किया गया था।
इस घटना के लगभग एक महीने बाद पुलिस को एक गुमनाम पत्र मिला, जिसमें कहा गया था कि हंजला की मौत हृदयगति रुकने से नहीं हुई थी बल्कि उसे मारा गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें यह पता चला कि मां-बेटे ने मिलकर हंजला को मारने के लिए कांट्रैक्ट किलर से संपर्क किया था। यह कहा गया कि 'गिरोह' ने हालांकि यह तय किया था कि वे हिंसा का सहारा लिए बिना उसे मार देंगे। इसलिए, 9 फरवरी की रात को हंजला को छह नींद की गोलियों के साथ रात का खाना परोसा गया।
10 फरवरी को तड़के 3:30 बजे सुबह बदमाशों ने तकिये की मदद से उसकी हत्या कर दी थी। रिपोर्टों से पता चलता है कि तीन संदिग्धों को रविवार को गिरफ्तार किया गया था जबकि दो और को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। सभी 5 लोगों ने अब अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
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अपने पति को मारने के लिए मां ने बेटे के साथ मिलकर कांट्रैक्ट किलर से संपर्क किया। शख्स अपनी पत्नी के चरित्र पर अक्सर आपत्तिजनक कमेंट करता था और बेटियों के प्रति उसका व्यवहार भी संदिग्ध था। बेंगलुरुः एक शख्स की हत्या के पीछे के मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में बेनागुलु पुलिस को एक गुमनाम पत्र से मदद मिली है। पुलिस ने कहा कि बावन वर्षीय मृतक मोहम्मद हंजला को तीन कांट्रैक्ट किलर ने मिलकर मारा था। पुलिस ने बताया कि शख्स को मारने के लिए इन कांट्रैक्ट किलर को किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी और बेटे ने ही ये काम दिया था। टाइम्स नाऊ के मुताबिक, पत्नी और बेटे ने शहर में एक फुटवियर निर्माण इकाई के मालिक हंजला को मारने के लिए तीन लोगों को 'सुपारी' दी थी। पुलिस ने तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर्स से तीन मोबाइल फोन और अट्ठानवे,शून्य रुपयापये बरामद किए हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि मां और बेटे ने मिलकर शख्स की हत्या करवा दी क्योंकि शख्स ने पत्नी पर उसके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक कमेंट किया था और बेटियों के प्रति शख्स का संदिग्ध व्यवहार था। पत्नी, सरवरी बेगम और बेटे रहमान ने पुलिस को बताया कि घरेलू विवाद भी इस घटना को अंजाम देने के पीछे का एक मुख्य कारण था। शख्स की पत्नी बेगम ने ही बेटे रहमान को हत्यारों से संपर्क करने के लिए कहा था। हालांकि, पति की मौत के बाद महिला ने दस फरवरी को अपने पड़ोसियों को बताया कि उनकी मृत्यु हृदयगति रुकने से हुई थी। शख्स के मौत के कुछ समय बाद ही उसका अंतिम संस्कार कब्रिस्तान में किया गया था। इस घटना के लगभग एक महीने बाद पुलिस को एक गुमनाम पत्र मिला, जिसमें कहा गया था कि हंजला की मौत हृदयगति रुकने से नहीं हुई थी बल्कि उसे मारा गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें यह पता चला कि मां-बेटे ने मिलकर हंजला को मारने के लिए कांट्रैक्ट किलर से संपर्क किया था। यह कहा गया कि 'गिरोह' ने हालांकि यह तय किया था कि वे हिंसा का सहारा लिए बिना उसे मार देंगे। इसलिए, नौ फरवरी की रात को हंजला को छह नींद की गोलियों के साथ रात का खाना परोसा गया। दस फरवरी को तड़के तीन:तीस बजे सुबह बदमाशों ने तकिये की मदद से उसकी हत्या कर दी थी। रिपोर्टों से पता चलता है कि तीन संदिग्धों को रविवार को गिरफ्तार किया गया था जबकि दो और को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। सभी पाँच लोगों ने अब अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
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झारखंड के पलामू में पंचायत के अत्याचार की शिकार हुई महिला। शादीशुदा महिला से मिलने उसके ससुराल पहुंचे दूर के रिश्तेदार युवक को गांव वालों ने प्रेमी समझ दोनेां को बंधक बना पिटाई की, वीडियो वायरल किया, तनाव में महिला ने दे दी जान।
पलामू (झारखंड). झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ में एक युवती समाज के ठेकेदारों की भेट चढ़ गई। एक सप्ताह पहले युवती पर गलत आचरण का आरोप लगा पंचायत के सामने पीटाई की गई थी। इसका वीडियो बनाकर वायरन भी कर दिया गया था। सभी के सामने पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद से युवती आहत थी। तनाव में आकर युवती ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बता दें कि तीन माह पहले किरण की शादी रामगढ़ के बाघी गांव निवासी शिव भुइयां के पुत्र जितेंद्र भुइयां के साथ हुई थी। 17 अगस्त को किरण व किरण के गांव के ही रहने वाले एक युवक को बाघी गांव के ग्रामीणों ने बंधक बना लिया और पिटाई की।
महिला के ससुराल में एक युवक मिलने आया था जिसके बारे में ग्रामीणों को शक था कि वह उसका प्रेमी है, जबकि महिला बार-बार कह रही थी कि वह उसका दूर का रिश्तेदार है। महिला का पति चेन्नई में मजदूरी करने गया हुआ था। महिला और उसके साथ के युवक की पिटाई की घटना एक सप्ताह पहले हुई थी।
महिला किरण देवी के साथ एक युवक को भी बाघी गांव में पंचायत बैठाकर पीटा गया था। दोनों की पिटाई से संबंधित वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद से महिला मानसिक तौर पर परेशान थी। घटना के बाद वह अपने मायके गढ़वा ज़िला के रमकंडा चली गई थी।
इधर महिला किरण ने घटना के छह दिन बाद अपने मायके से आकर रामगढ़ थाना में बाघी गांव निवासी मुन्ना बैठा, राजमुनि सिंह, सकेन्द्र भुइयां व प्रेम भुइयां समेत एक दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज कराया था। महिला के मुताबिक रिश्तेदार महेश कुमार 17 अगस्त को उसके ससुराल आए थे। घर परिवार की बातें कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने प्रेमी-प्रेमिका कहते हुए बंधक बना लिया और पिटाई की। वीडियो भी बनाया गया। इस घटना से वह मानसिक रूप से परेशान है। रामगढ़ पुलिस एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती उससे पहले ही महिला ने फांसी लगा ली। महिला के मौत की पुष्टि रामगढ़ थाना प्रभारी प्रभात रंजन राय ने की है। उन्होंने कहा कि महिला की पिटाई करने वाले सभी की पहचान की जा रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
महिला के मायके वालों को बुलाया गया और युवक के माता-पिता भी पंचायत में आए तब उन्हें छोड़ा गया था। महिला को मायके वालों के साथ भेज दिया गया। युवक पर पंचायत ने एक लाख रुपए का दंड लगाया था, जिसमें से 10 हज़ार रुपए लेने के बाद पंचायत ने युवक को छोड़ा था। बाघी के ग्रामीणों के मुताबिक पकड़े गए युवक के साथ महिला का प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक एक रात पहले महिला से मिलने आया था। दोनों को साथ में छत पर देखा गया था। शोर मचाने पर युवक रात में भाग निकला। जब अगली सुबह अपना मोटरसाइकिल लेने आया तो पकड़ा गया। जिसके बाद दोनों को बांध कर पीटा गया था।
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झारखंड के पलामू में पंचायत के अत्याचार की शिकार हुई महिला। शादीशुदा महिला से मिलने उसके ससुराल पहुंचे दूर के रिश्तेदार युवक को गांव वालों ने प्रेमी समझ दोनेां को बंधक बना पिटाई की, वीडियो वायरल किया, तनाव में महिला ने दे दी जान। पलामू . झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ में एक युवती समाज के ठेकेदारों की भेट चढ़ गई। एक सप्ताह पहले युवती पर गलत आचरण का आरोप लगा पंचायत के सामने पीटाई की गई थी। इसका वीडियो बनाकर वायरन भी कर दिया गया था। सभी के सामने पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद से युवती आहत थी। तनाव में आकर युवती ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बता दें कि तीन माह पहले किरण की शादी रामगढ़ के बाघी गांव निवासी शिव भुइयां के पुत्र जितेंद्र भुइयां के साथ हुई थी। सत्रह अगस्त को किरण व किरण के गांव के ही रहने वाले एक युवक को बाघी गांव के ग्रामीणों ने बंधक बना लिया और पिटाई की। महिला के ससुराल में एक युवक मिलने आया था जिसके बारे में ग्रामीणों को शक था कि वह उसका प्रेमी है, जबकि महिला बार-बार कह रही थी कि वह उसका दूर का रिश्तेदार है। महिला का पति चेन्नई में मजदूरी करने गया हुआ था। महिला और उसके साथ के युवक की पिटाई की घटना एक सप्ताह पहले हुई थी। महिला किरण देवी के साथ एक युवक को भी बाघी गांव में पंचायत बैठाकर पीटा गया था। दोनों की पिटाई से संबंधित वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद से महिला मानसिक तौर पर परेशान थी। घटना के बाद वह अपने मायके गढ़वा ज़िला के रमकंडा चली गई थी। इधर महिला किरण ने घटना के छह दिन बाद अपने मायके से आकर रामगढ़ थाना में बाघी गांव निवासी मुन्ना बैठा, राजमुनि सिंह, सकेन्द्र भुइयां व प्रेम भुइयां समेत एक दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज कराया था। महिला के मुताबिक रिश्तेदार महेश कुमार सत्रह अगस्त को उसके ससुराल आए थे। घर परिवार की बातें कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने प्रेमी-प्रेमिका कहते हुए बंधक बना लिया और पिटाई की। वीडियो भी बनाया गया। इस घटना से वह मानसिक रूप से परेशान है। रामगढ़ पुलिस एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करती उससे पहले ही महिला ने फांसी लगा ली। महिला के मौत की पुष्टि रामगढ़ थाना प्रभारी प्रभात रंजन राय ने की है। उन्होंने कहा कि महिला की पिटाई करने वाले सभी की पहचान की जा रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। महिला के मायके वालों को बुलाया गया और युवक के माता-पिता भी पंचायत में आए तब उन्हें छोड़ा गया था। महिला को मायके वालों के साथ भेज दिया गया। युवक पर पंचायत ने एक लाख रुपए का दंड लगाया था, जिसमें से दस हज़ार रुपए लेने के बाद पंचायत ने युवक को छोड़ा था। बाघी के ग्रामीणों के मुताबिक पकड़े गए युवक के साथ महिला का प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक एक रात पहले महिला से मिलने आया था। दोनों को साथ में छत पर देखा गया था। शोर मचाने पर युवक रात में भाग निकला। जब अगली सुबह अपना मोटरसाइकिल लेने आया तो पकड़ा गया। जिसके बाद दोनों को बांध कर पीटा गया था।
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टीम इंडिया की टेस्ट टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को भरोसा है कि दक्षिण अफ्रीका के आगामी दौरे पर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी की सफलता करेगी। लेकिन रहाणे ने इस स्टार स्पिन जोड़ी को एक खास सलाह दी है। रहाणे ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका दौरे पर सफल होने के लिए अश्विन-जडेजा की जोड़ी को अपने स्टाइल में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है।
5 जनवरी से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज को लेकर रहाणे ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि अश्विन और जडेजा दोनों में ही भारत ही नहीं बल्कि विदेशी धरती पर बेहतरीन प्रदर्शन करने की क्षमता है। जब आप भारत में खेलते हैं तो आपको एक निश्चित तरीके से गेंदबाजी करनी पड़की है और अगर आप मोईन अली, नाथन ल्योन जैसे गेंदबाजों को देखें अगर वे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में खेलते हैं तो उन्हें अलग स्टाइल में गेंदबाजी करनी पड़ती है। '
रहाणे ने कहा, 'अश्विन और जडेजा इस समय काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि उनमें विदेशी धरती पर भी अच्छा प्रदर्शन करने की काबिलियत है। हां, उन्हें अपनी स्टाइल थोड़ी बदलनी पड़ेगी और अलग गति से गेंदबाजी करनी पड़ेगी लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि उनमें से जो भी खेलेगा या अगर दोनों ही खेलेंगे, तो वे विदेशी धरती पर अच्छा प्रदर्शन करेगा। '
कप्तान विराट कोहली की तारीफ करते हुए रहाणे ने कहा, विराट के बारे में मैं पहले ही कह चुका हूं। विराट एक ऐसे इंसान हैं जो टीम के हर खिलाड़ी का समर्थन करते हैं। उनकी तरफ से ये संदेश स्पष्ट होता है, जाओ और परफॉर्म करो, अपनी स्टाइल में बैटिंग करो, अपने प्रदर्शन और परिणाम की चिंता मत करो, मैं आप सबका समर्थन करने के लिए हूं, बाकी चीजें मैं देख लूंगा। '
विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया 5 जनवरी से 28 फरवरी तक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 3 टेस्ट, 6 वनडे और 3 टी20 मैचों की सीरीज खेलेगी।
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टीम इंडिया की टेस्ट टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को भरोसा है कि दक्षिण अफ्रीका के आगामी दौरे पर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी की सफलता करेगी। लेकिन रहाणे ने इस स्टार स्पिन जोड़ी को एक खास सलाह दी है। रहाणे ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका दौरे पर सफल होने के लिए अश्विन-जडेजा की जोड़ी को अपने स्टाइल में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है। पाँच जनवरी से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज को लेकर रहाणे ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि अश्विन और जडेजा दोनों में ही भारत ही नहीं बल्कि विदेशी धरती पर बेहतरीन प्रदर्शन करने की क्षमता है। जब आप भारत में खेलते हैं तो आपको एक निश्चित तरीके से गेंदबाजी करनी पड़की है और अगर आप मोईन अली, नाथन ल्योन जैसे गेंदबाजों को देखें अगर वे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में खेलते हैं तो उन्हें अलग स्टाइल में गेंदबाजी करनी पड़ती है। ' रहाणे ने कहा, 'अश्विन और जडेजा इस समय काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि उनमें विदेशी धरती पर भी अच्छा प्रदर्शन करने की काबिलियत है। हां, उन्हें अपनी स्टाइल थोड़ी बदलनी पड़ेगी और अलग गति से गेंदबाजी करनी पड़ेगी लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि उनमें से जो भी खेलेगा या अगर दोनों ही खेलेंगे, तो वे विदेशी धरती पर अच्छा प्रदर्शन करेगा। ' कप्तान विराट कोहली की तारीफ करते हुए रहाणे ने कहा, विराट के बारे में मैं पहले ही कह चुका हूं। विराट एक ऐसे इंसान हैं जो टीम के हर खिलाड़ी का समर्थन करते हैं। उनकी तरफ से ये संदेश स्पष्ट होता है, जाओ और परफॉर्म करो, अपनी स्टाइल में बैटिंग करो, अपने प्रदर्शन और परिणाम की चिंता मत करो, मैं आप सबका समर्थन करने के लिए हूं, बाकी चीजें मैं देख लूंगा। ' विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया पाँच जनवरी से अट्ठाईस फरवरी तक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट, छः वनडे और तीन टीबीस मैचों की सीरीज खेलेगी।
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TV Jodies Who became popular As A Couple: मनोरंजन की दुनिया में जोड़ियां बनना आम बात है। कई बार देखने के लिए मिला है कि सीरियल के सेट पर ही सेलेब्स के अपने को-स्टार से प्यार हो जाता है, जिस वजह से स्टार कपल अपने अफेयर के लिए लाइमलाइट बटोरते हैं। लेकिन कई बार इंडस्ट्री की ऑनस्क्रीन जोड़ियां या फिर खास दोस्त भी अफेयर की फेक न्यूज की वजह से चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं। अब तक टीवी इंडस्ट्री में कई ऐसी जोड़ियां बनी हैं, जो रियल लाइफ में अच्छे दोस्त रहे हैं लेकिन फैंस उन्हें कपल मान बैठे थे। इस वजह से सोशल मीडिया तक पर बवाल तक खड़ा हुआ। आइए आपको ऐसी ही जोड़ियों के बारे में बताते हैं।
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TV Jodies Who became popular As A Couple: मनोरंजन की दुनिया में जोड़ियां बनना आम बात है। कई बार देखने के लिए मिला है कि सीरियल के सेट पर ही सेलेब्स के अपने को-स्टार से प्यार हो जाता है, जिस वजह से स्टार कपल अपने अफेयर के लिए लाइमलाइट बटोरते हैं। लेकिन कई बार इंडस्ट्री की ऑनस्क्रीन जोड़ियां या फिर खास दोस्त भी अफेयर की फेक न्यूज की वजह से चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं। अब तक टीवी इंडस्ट्री में कई ऐसी जोड़ियां बनी हैं, जो रियल लाइफ में अच्छे दोस्त रहे हैं लेकिन फैंस उन्हें कपल मान बैठे थे। इस वजह से सोशल मीडिया तक पर बवाल तक खड़ा हुआ। आइए आपको ऐसी ही जोड़ियों के बारे में बताते हैं।
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भी जायज़ है। (दुर्रे मुख्तार )
२५. औरत इस हालत में शौहर के साथ खा पी सकती है। बल्कि दोनों एक पलंग पर सो भी सकते हैं। बल्कि उस वजह से साथ न सोना मकरूह है। (दुर्रे मुख्तार, रददुलमुहतार ) हां हमराह सोने में शहवत का ग़लबा हो और अपने को काबू में न रखने का एहतमाल हो तो साथ न सोये और उसका गालिब गुमान हो तो साथ सोना गुनाह है ( बहारे शरीअत )
२६. पूरे दस दिन पर हैज़ खत्म हुआ तो पाक होते ही उससे जिमाअ (सोहबत) जायज़ है। अगरचे अब तक गुस्ल न किया हो मगर मुस्तहब यह है के नहाने के बाद जिमाअ करे और दस दिन से कम में पाक हुई तो जब तक गुस्ल न करे या नमाज़ का वक़्त जिस में पाक हुई वह गुज़र न जाए, जिमाअ जायज़ नहीं और अगर इतना वक़्त नहीं था कि उस में नहा कर कपड़े पहन कर अल्लाहु अक्बर कह सके तो उसके बाद का वक़्त गुज़र जाये या गुस्ल कर ले तो जिमाअ जायज़ है वरना नहीं । ( दुर्रे मुख्तार, वग़ैरह )
२७. आदत के दिन पूरे होने से पहले ही खत्म हो गया तो अगरचे गुस्ल करले, जिमाअ नाजायज़ है। जब तक कि आदत के दिन पूरे न हो जायें। मसलन किसी की आदत छः दिन की थी और इस मर्तबा पांच ही रोज़ आया तो उसे हुक्म है कि नहाकर नमाज़ शुरू कर दे मगर जिमाअ के लिए एक दिन और इंतजार करना वाजिब है। (आलमगीरी वगैरह )
२८. औरत हैज़ से पाक हुई और पानी पर कुदरत नहीं कि गुस्ल करे और गुस्ल का तयम्मुम किया तो उससे सोहबत जायज़ नहीं। जबतक कि उस तयम्मुम से नमाज़ न पढ़ ले। नमाज़
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भी जायज़ है। पच्चीस. औरत इस हालत में शौहर के साथ खा पी सकती है। बल्कि दोनों एक पलंग पर सो भी सकते हैं। बल्कि उस वजह से साथ न सोना मकरूह है। हां हमराह सोने में शहवत का ग़लबा हो और अपने को काबू में न रखने का एहतमाल हो तो साथ न सोये और उसका गालिब गुमान हो तो साथ सोना गुनाह है छब्बीस. पूरे दस दिन पर हैज़ खत्म हुआ तो पाक होते ही उससे जिमाअ जायज़ है। अगरचे अब तक गुस्ल न किया हो मगर मुस्तहब यह है के नहाने के बाद जिमाअ करे और दस दिन से कम में पाक हुई तो जब तक गुस्ल न करे या नमाज़ का वक़्त जिस में पाक हुई वह गुज़र न जाए, जिमाअ जायज़ नहीं और अगर इतना वक़्त नहीं था कि उस में नहा कर कपड़े पहन कर अल्लाहु अक्बर कह सके तो उसके बाद का वक़्त गुज़र जाये या गुस्ल कर ले तो जिमाअ जायज़ है वरना नहीं । सत्ताईस. आदत के दिन पूरे होने से पहले ही खत्म हो गया तो अगरचे गुस्ल करले, जिमाअ नाजायज़ है। जब तक कि आदत के दिन पूरे न हो जायें। मसलन किसी की आदत छः दिन की थी और इस मर्तबा पांच ही रोज़ आया तो उसे हुक्म है कि नहाकर नमाज़ शुरू कर दे मगर जिमाअ के लिए एक दिन और इंतजार करना वाजिब है। अट्ठाईस. औरत हैज़ से पाक हुई और पानी पर कुदरत नहीं कि गुस्ल करे और गुस्ल का तयम्मुम किया तो उससे सोहबत जायज़ नहीं। जबतक कि उस तयम्मुम से नमाज़ न पढ़ ले। नमाज़
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मायके से पत्नी घर से नहीं लौटी तो पति ने आग लगाकर अपनी जान दे दी। घटना शुक्रवार देर रात तंबौर थाना क्षेत्र के सुरसी गांव में घटित हुई। शनिवार सुबह इलाज के दौरान हुई मौत के बाद पुलिस ने पीड़ित पक्ष के बयान लेकर विधिक कार्रवाई शुरू की है।
25 वर्षीय सहजराम बचपन में पिता की मृत्यु के बाद से अपनी मां जयदेवी के साथ तंबौर थाना क्षेत्र में सुरसा गांव स्थित अपनी ननिहाल में रह रहा था। बताते हैं कि सहजराम की पत्नी पूजा पड़ोस स्थित गांव अपने मायके चली गई थी। दो दिनों से मायके में रह रही पत्नी पूजा को लेने सहजराम शुक्रवार शाम ससुराल पहुंचा। यहां किसी बात को लेकर दंपति के बीच विवाद हुआ। युवक की मां जयदेवी की माने तो उसन पत्नी को साथ चलने के लिए कहा। जिसको लेकर पूजा ने इंकार कर दिया। देर रात घर लौटने के बाद सहजराम पुत्र मदनलाल ने केरोसिन छिड़ककर खुद को आग के हवाले कर दिया।
वृद्ध मां का कहना है कि चीख पुकार सुनकर उसकी आंख खुल गई। आसपास के लोग आए। किसी तरह से आग को बुझाया गया। तब तक सहजराम गंभीर रूप से झुलस चुका था। इलाज के लिए परिवार के लोग उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। शनिवार सुबह सहजराम ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल से मिली सूचना के बाद कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। जांच पड़ताल के बीच परिवार के लोगों ने बताया है कि कुछ दिनों से दंपति के बीच विवाद चल रहा था। इसी कारण पूजा अपने 9 माह के बच्चे को लेकर मायके चली गई थी। सहजराम उसे लेने के लिए ससुराल गया हुआ था। दोनों के बीच विवाद हुआ। जिसके बाद ही उसने आग लगा ली फिलहाल पुलिस ने बयानों को दर्ज करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कुल मामले में जांच पड़ताल की जा रही है।
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मायके से पत्नी घर से नहीं लौटी तो पति ने आग लगाकर अपनी जान दे दी। घटना शुक्रवार देर रात तंबौर थाना क्षेत्र के सुरसी गांव में घटित हुई। शनिवार सुबह इलाज के दौरान हुई मौत के बाद पुलिस ने पीड़ित पक्ष के बयान लेकर विधिक कार्रवाई शुरू की है। पच्चीस वर्षीय सहजराम बचपन में पिता की मृत्यु के बाद से अपनी मां जयदेवी के साथ तंबौर थाना क्षेत्र में सुरसा गांव स्थित अपनी ननिहाल में रह रहा था। बताते हैं कि सहजराम की पत्नी पूजा पड़ोस स्थित गांव अपने मायके चली गई थी। दो दिनों से मायके में रह रही पत्नी पूजा को लेने सहजराम शुक्रवार शाम ससुराल पहुंचा। यहां किसी बात को लेकर दंपति के बीच विवाद हुआ। युवक की मां जयदेवी की माने तो उसन पत्नी को साथ चलने के लिए कहा। जिसको लेकर पूजा ने इंकार कर दिया। देर रात घर लौटने के बाद सहजराम पुत्र मदनलाल ने केरोसिन छिड़ककर खुद को आग के हवाले कर दिया। वृद्ध मां का कहना है कि चीख पुकार सुनकर उसकी आंख खुल गई। आसपास के लोग आए। किसी तरह से आग को बुझाया गया। तब तक सहजराम गंभीर रूप से झुलस चुका था। इलाज के लिए परिवार के लोग उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। शनिवार सुबह सहजराम ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल से मिली सूचना के बाद कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। जांच पड़ताल के बीच परिवार के लोगों ने बताया है कि कुछ दिनों से दंपति के बीच विवाद चल रहा था। इसी कारण पूजा अपने नौ माह के बच्चे को लेकर मायके चली गई थी। सहजराम उसे लेने के लिए ससुराल गया हुआ था। दोनों के बीच विवाद हुआ। जिसके बाद ही उसने आग लगा ली फिलहाल पुलिस ने बयानों को दर्ज करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कुल मामले में जांच पड़ताल की जा रही है।
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क्या करिश्मा कपूर होंगी शो 'सुपर डांसर चैप्टर 4' की अगली मेहमान?
लोकप्रिय डांस रियलिटी शो 'सुपर डांसर चैप्टर 4' दर्शकों की पसंद बना हुआ है। जब से इसकी शुरुआत हुई है, यह लगातार सुर्खियों में है। ना सिर्फ शो के प्रतियोगी दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि इसमें शामिल होने वाले खास मेहमान भी दर्शकों को मनोरंजित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में मशहूर अभिनेत्री तनुजा शो में नजर आई थीं और अब करिश्मा कपूर इसका हिस्सा बनने वाली हैं। आइए पूरी खबर जानते हैं।
'सुपर डांसर चैप्टर 4' में हर हफ्ते नए-नए खास मेहमान नजर आ रहे हैं। टेली चक्कर के मुताबिक 90 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री करिश्मा कपूर शो में बतौर गेस्ट नजर आएंगी। करिश्मा भले ही काफी लंबे समय से बॉलीवुड में सक्रिय ना हों, लेकिन वह लाइमलाइट का हिस्सा बनी रहती हैं। दर्शक भी करिश्मा को शो में देखने के लिए बेताब हैं। शो में उनके आने की खबर से बेशक अब उनके प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं होगा।
बीते हफ्ते अपने जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री और काजोल की मां तनुजा शो में स्पेशल गेस्ट बनकर आई थीं, जहां वह बच्चों का डांस देख दंग रह गई थीं। तनुजा ने शो में अपने कई पुराने किस्से भी दर्शकों को सुनाए। इस एपिसोड में तनुजा को शो की जज शिल्पा शेट्टी के साथ मंच पर थिरकते हुए भी देखा गया। इस एपिसोड में दामाद अजय देवगन और बेटी काजोल का संदेश सुन तनुजा की आंखें नम हो गई थीं।
दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है 'सुपर डांसर चैप्टर 4'
'सुपर डांसर चैप्टर 4' की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। शो में कई ऐसे प्रतियोगी हैं, जिनका डांस देश दर्शकों के होश उड़ जाते हैं। इस शो को शिल्पा शेट्टी, कोरियोग्राफर गीता कपूर और मशहूर निर्देशक अनुराग बासु जज कर रहे हैं। जजों की यह तिकड़ी दर्शकों को खूब भाती है। इस शो में अब तक किसी का भी एलिमिनेशन नहीं हुआ है। रित्विक धनजनी और परितोष त्रिपाठी उर्फ 'मामाजी' शो की मेजबानी कर रहे हैं।
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क्या करिश्मा कपूर होंगी शो 'सुपर डांसर चैप्टर चार' की अगली मेहमान? लोकप्रिय डांस रियलिटी शो 'सुपर डांसर चैप्टर चार' दर्शकों की पसंद बना हुआ है। जब से इसकी शुरुआत हुई है, यह लगातार सुर्खियों में है। ना सिर्फ शो के प्रतियोगी दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि इसमें शामिल होने वाले खास मेहमान भी दर्शकों को मनोरंजित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में मशहूर अभिनेत्री तनुजा शो में नजर आई थीं और अब करिश्मा कपूर इसका हिस्सा बनने वाली हैं। आइए पूरी खबर जानते हैं। 'सुपर डांसर चैप्टर चार' में हर हफ्ते नए-नए खास मेहमान नजर आ रहे हैं। टेली चक्कर के मुताबिक नब्बे के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री करिश्मा कपूर शो में बतौर गेस्ट नजर आएंगी। करिश्मा भले ही काफी लंबे समय से बॉलीवुड में सक्रिय ना हों, लेकिन वह लाइमलाइट का हिस्सा बनी रहती हैं। दर्शक भी करिश्मा को शो में देखने के लिए बेताब हैं। शो में उनके आने की खबर से बेशक अब उनके प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं होगा। बीते हफ्ते अपने जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री और काजोल की मां तनुजा शो में स्पेशल गेस्ट बनकर आई थीं, जहां वह बच्चों का डांस देख दंग रह गई थीं। तनुजा ने शो में अपने कई पुराने किस्से भी दर्शकों को सुनाए। इस एपिसोड में तनुजा को शो की जज शिल्पा शेट्टी के साथ मंच पर थिरकते हुए भी देखा गया। इस एपिसोड में दामाद अजय देवगन और बेटी काजोल का संदेश सुन तनुजा की आंखें नम हो गई थीं। दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है 'सुपर डांसर चैप्टर चार' 'सुपर डांसर चैप्टर चार' की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। शो में कई ऐसे प्रतियोगी हैं, जिनका डांस देश दर्शकों के होश उड़ जाते हैं। इस शो को शिल्पा शेट्टी, कोरियोग्राफर गीता कपूर और मशहूर निर्देशक अनुराग बासु जज कर रहे हैं। जजों की यह तिकड़ी दर्शकों को खूब भाती है। इस शो में अब तक किसी का भी एलिमिनेशन नहीं हुआ है। रित्विक धनजनी और परितोष त्रिपाठी उर्फ 'मामाजी' शो की मेजबानी कर रहे हैं।
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शिमला डेवलपमेंट प्लान पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित इस मामले की फाइल तलब की है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को आदेश दिए हैं कि हिमाचल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल सरकार के लंबित मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। शिमला डेवलपमेंट प्लान को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने अवैध करार दिया है। इस निर्णय को हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के माध्यम से चुनौती दी है।
एनजीटी ने साल 2017 में शिमला शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर रोक लगा दी थी। शहर और प्लानिंग एरिया में सिर्फ ढाई मंजिल भवन निर्माण की छूट थी। सरकार ने इन पाबंदियों से राहत देने के लिए टीसीपी विभाग से नया डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाया था। इसमें शहर के कोर और ग्रीन एरिया में पाबंदी हटाने का प्रावधान था। प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन निर्माण की शर्त भी हटाने का फैसला लिया था। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी थी। विधि विभाग इसकी अधिसूचना जारी करने वाला था कि इससे पहले ही एनजीटी ने प्लान पर रोक लगा दी थी। बाद में एनजीटी ने इस प्लान को अवैध करार दिया था।
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शिमला डेवलपमेंट प्लान पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित इस मामले की फाइल तलब की है। सुप्रीम कोर्ट ने चौदह नवंबर को आदेश दिए हैं कि हिमाचल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल सरकार के लंबित मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। शिमला डेवलपमेंट प्लान को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने अवैध करार दिया है। इस निर्णय को हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के माध्यम से चुनौती दी है। एनजीटी ने साल दो हज़ार सत्रह में शिमला शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर रोक लगा दी थी। शहर और प्लानिंग एरिया में सिर्फ ढाई मंजिल भवन निर्माण की छूट थी। सरकार ने इन पाबंदियों से राहत देने के लिए टीसीपी विभाग से नया डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाया था। इसमें शहर के कोर और ग्रीन एरिया में पाबंदी हटाने का प्रावधान था। प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन निर्माण की शर्त भी हटाने का फैसला लिया था। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी थी। विधि विभाग इसकी अधिसूचना जारी करने वाला था कि इससे पहले ही एनजीटी ने प्लान पर रोक लगा दी थी। बाद में एनजीटी ने इस प्लान को अवैध करार दिया था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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किधौं अद्भुत सिसु तडितजु एह । किधों रूप घन अवनि सदेह । अस वानिक सौ गवनी लली । जो देखियति तीज मुख फली ॥ २७६ प्रेम सरोवर तट अति कमनी । मनमथ को मन मोहनि अवनी।। तहाँ हिंडोरौ निर्मित कियौ । मनो अवनि चेतन्नि जुयो ।।२८० बनीं ललित कदम्वनि की पांति । लता लपट रहीं अद्भुत भांति। सरवर मणिनु खचित चहुँ ओर। कोकिल कीर नदित जहां मोर ॥ २८१ पट पद गुंजत सौरभ लोभ । तरु बेलीनु वढावत सोभ । निर्मल नीर भरथौ गंभीर । ठाढी भई कुँवरि तिर्हि तीर ।।२८२ पावस रितु जु हरति भई मही। ताकी सोभा पड़त न कही ।। सजल घननि की उमड़ी सैंनी। देखि मुदित बाला मृग नैनी ॥२८३ फूलै फूलै तरवर तट में । दमकत गात रंगीले पट में ।। कौंधि दामिनी घन दुरि जाति । देखि कुँवरि छवि मनहू लजाति ॥२८४ रमर्के के विसों भूलें। परसि परसिद्रुम डारिनु फूलें ॥ कोऊ झुलवति हैं निकटजु रहिक। कोऊ रिभवति हैं बातें कह ॥२८५ सब मिलि करे रँगीलो गान । मदन मरम मनु बेधति बान ॥ ललित वदन पर श्रम कन दिपें। ससि मंडल मनु उडुगन छ ।।२८६ तन फहरात कुसुभि चीर । अँग २ उमलति सोभा भीर ॥ दुति घर वारों बदन विलोकि। सखिनु दृष्टि राखी जिनि रोकि॥२८७ फू अप अपने सरें । उतरि भट्ट योँ कहिं हंसि परें ।। इक पुनि कूलन कोअरवरें। श्री राधा सौं विनती करें ।।२८८ अरी बहिनी तू राज कुँवारि । रंचक हम हूं ओर निहारि ।। मुहि भूतन अभिलाषा बढी । तुहि बूके विनु अजहूं न बढी।।२८६ ललिता तुम जु सम्हारें रहौ । नहिं भूलै सु मोहि किन कहौ । तुम संग फूलन को जु उमाह । पुनि २ दिख्यित्ति सब मन चाह २६०
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किधौं अद्भुत सिसु तडितजु एह । किधों रूप घन अवनि सदेह । अस वानिक सौ गवनी लली । जो देखियति तीज मुख फली ॥ दो सौ छिहत्तर प्रेम सरोवर तट अति कमनी । मनमथ को मन मोहनि अवनी।। तहाँ हिंडोरौ निर्मित कियौ । मनो अवनि चेतन्नि जुयो ।।दो सौ अस्सी बनीं ललित कदम्वनि की पांति । लता लपट रहीं अद्भुत भांति। सरवर मणिनु खचित चहुँ ओर। कोकिल कीर नदित जहां मोर ॥ दो सौ इक्यासी पट पद गुंजत सौरभ लोभ । तरु बेलीनु वढावत सोभ । निर्मल नीर भरथौ गंभीर । ठाढी भई कुँवरि तिर्हि तीर ।।दो सौ बयासी पावस रितु जु हरति भई मही। ताकी सोभा पड़त न कही ।। सजल घननि की उमड़ी सैंनी। देखि मुदित बाला मृग नैनी ॥दो सौ तिरासी फूलै फूलै तरवर तट में । दमकत गात रंगीले पट में ।। कौंधि दामिनी घन दुरि जाति । देखि कुँवरि छवि मनहू लजाति ॥दो सौ चौरासी रमर्के के विसों भूलें। परसि परसिद्रुम डारिनु फूलें ॥ कोऊ झुलवति हैं निकटजु रहिक। कोऊ रिभवति हैं बातें कह ॥दो सौ पचासी सब मिलि करे रँगीलो गान । मदन मरम मनु बेधति बान ॥ ललित वदन पर श्रम कन दिपें। ससि मंडल मनु उडुगन छ ।।दो सौ छियासी तन फहरात कुसुभि चीर । अँग दो उमलति सोभा भीर ॥ दुति घर वारों बदन विलोकि। सखिनु दृष्टि राखी जिनि रोकि॥दो सौ सत्तासी फू अप अपने सरें । उतरि भट्ट योँ कहिं हंसि परें ।। इक पुनि कूलन कोअरवरें। श्री राधा सौं विनती करें ।।दो सौ अठासी अरी बहिनी तू राज कुँवारि । रंचक हम हूं ओर निहारि ।। मुहि भूतन अभिलाषा बढी । तुहि बूके विनु अजहूं न बढी।।दो सौ छियासी ललिता तुम जु सम्हारें रहौ । नहिं भूलै सु मोहि किन कहौ । तुम संग फूलन को जु उमाह । पुनि दो दिख्यित्ति सब मन चाह दो सौ साठ
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घुमारवीं - वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल मिनर्वा में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की धूम रही। बच्चों ने जागरूकता रैली निकाली। हाथों में बैनर लेकर लोगों को पर्यावरण का पाठ पढ़ाया। पाठशाला प्रधानाचार्य परवेश चंदेल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बच्चों में पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिता भी करवाई गई। परवेश चंदेल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तो हम भी स्वस्थ्य रहेंगे। उन्होंने सभी बच्चों से अपने घरों के आस पास पौधे लगाने का आहवान किया। इस मौके पर स्कूल का अन्य स्टाफ भी मौजूद रहा।
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घुमारवीं - वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल मिनर्वा में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की धूम रही। बच्चों ने जागरूकता रैली निकाली। हाथों में बैनर लेकर लोगों को पर्यावरण का पाठ पढ़ाया। पाठशाला प्रधानाचार्य परवेश चंदेल की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बच्चों में पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिता भी करवाई गई। परवेश चंदेल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तो हम भी स्वस्थ्य रहेंगे। उन्होंने सभी बच्चों से अपने घरों के आस पास पौधे लगाने का आहवान किया। इस मौके पर स्कूल का अन्य स्टाफ भी मौजूद रहा।
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असम के सोनितपुर में बुधवार सुबह करीब 7. 51 बजे भूंकप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6. 4 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी पुष्टि की। भूकंप का असर 10 किमी दूर तक बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और चीन तक देखा गया। भूकंप का दूसरा झटका 7. 55 बजे महसूस किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने असम के मुख्यमंत्री से फोन पर बात करके स्थिति के बारे में जानकारी ली।
गुवाहाटी. असम के सोनितपुर में बुधवार सुबह करीब 7. 51 बजे भूंकप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6. 4 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी पुष्टि की। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा-असम में तेज़ भूकंप आया। मैं सभी से सतर्क रहने का आग्रह करता हूं। मैं सभी ज़िलों से अपडेट ले रहा हूं। भूकंप का केंद्र बिंदु सोनितपुर था। लोगों ने कई मिनट तक झटके महसूस किए। इसके बाद लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का असर असम के अलावा उत्तर बंगाल तक महसूस किया गया। भूकंप के बाद गुवाहाटी में बिजली सप्लाई ठप्प पड़ गई। भूकंप से कई घरों में दरारें आ गईं।
भूकंप की जानकारी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बात की। मोदी ने ट्वीट किया- राज्य के कुछ हिस्सों में भूकंप को लेकर असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल से बात की। केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मैं असम के लोगों की भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने असम में सुबह आए भूकंप को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। वो भूकंप से हुई क्षति का विवरण जानना चाहते थे, मैंने उन्हें असम की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने संकट की इस घड़ी में पूरी मदद का आश्वासन दिया है।
भूकंप का असर 10 किमी दूर बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और चीन तक देखा गया। आकाशवाणी के अनुसार, भूकंप के झटके अरुणाचल, गुजरात और बिहार में भी महसूस किए गए। भूकंप का पहला झटका सुबह 7. 51 बजे आया। इसके बाद दूसरा झटका 7. 55 बजे महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र तेजपुर से 43 किलोमीटर पश्चिम में जमीन से 17 किलोमीटर नीचे था। बिहार के मुंगेर, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर, पूर्णिया, खगड़िया आदि शहरों तक झटके लगे।
पूर्वोत्तर के सिक्किम में 10 साल पहले 18 सितंबर, 2011 को 6. 9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसका असर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, तिब्बत सहित हिमालय के क्षेत्र में दिखाई दिया था। इस भूकंप में हजारों लोग बेघर हो गए थे।
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घरों की दीवारें दरक गईं। ये तस्वीरें गुवाहाटी के 5 स्टार होटल ताज विवांता की है। भूकंप से सीलिंग और दीवारों का एक हिस्सा टूटकर गिर पड़ा।
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असम के सोनितपुर में बुधवार सुबह करीब सात. इक्यावन बजे भूंकप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता छः. चार मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी पुष्टि की। भूकंप का असर दस किमी दूर तक बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और चीन तक देखा गया। भूकंप का दूसरा झटका सात. पचपन बजे महसूस किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने असम के मुख्यमंत्री से फोन पर बात करके स्थिति के बारे में जानकारी ली। गुवाहाटी. असम के सोनितपुर में बुधवार सुबह करीब सात. इक्यावन बजे भूंकप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता छः. चार मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी पुष्टि की। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा-असम में तेज़ भूकंप आया। मैं सभी से सतर्क रहने का आग्रह करता हूं। मैं सभी ज़िलों से अपडेट ले रहा हूं। भूकंप का केंद्र बिंदु सोनितपुर था। लोगों ने कई मिनट तक झटके महसूस किए। इसके बाद लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का असर असम के अलावा उत्तर बंगाल तक महसूस किया गया। भूकंप के बाद गुवाहाटी में बिजली सप्लाई ठप्प पड़ गई। भूकंप से कई घरों में दरारें आ गईं। भूकंप की जानकारी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बात की। मोदी ने ट्वीट किया- राज्य के कुछ हिस्सों में भूकंप को लेकर असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल से बात की। केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मैं असम के लोगों की भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने असम में सुबह आए भूकंप को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। वो भूकंप से हुई क्षति का विवरण जानना चाहते थे, मैंने उन्हें असम की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने संकट की इस घड़ी में पूरी मदद का आश्वासन दिया है। भूकंप का असर दस किमी दूर बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और चीन तक देखा गया। आकाशवाणी के अनुसार, भूकंप के झटके अरुणाचल, गुजरात और बिहार में भी महसूस किए गए। भूकंप का पहला झटका सुबह सात. इक्यावन बजे आया। इसके बाद दूसरा झटका सात. पचपन बजे महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र तेजपुर से तैंतालीस किलोग्राममीटर पश्चिम में जमीन से सत्रह किलोग्राममीटर नीचे था। बिहार के मुंगेर, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर, पूर्णिया, खगड़िया आदि शहरों तक झटके लगे। पूर्वोत्तर के सिक्किम में दस साल पहले अट्ठारह सितंबर, दो हज़ार ग्यारह को छः. नौ तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें एक सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसका असर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, तिब्बत सहित हिमालय के क्षेत्र में दिखाई दिया था। इस भूकंप में हजारों लोग बेघर हो गए थे। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घरों की दीवारें दरक गईं। ये तस्वीरें गुवाहाटी के पाँच स्टार होटल ताज विवांता की है। भूकंप से सीलिंग और दीवारों का एक हिस्सा टूटकर गिर पड़ा।
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यूनिक आईडैटीफेशन अथारिटी (यूआईडीएआई) के डिप्टी डायरैक्टर भावना गर्ग ने मंगलवार को जिले में आधार रजिस्ट्रेशन की प्रगति का जायजा लेने के साथ-साथ 0-5 वर्ष और 5-18 वर्ष के आयु वर्ग सहित रजिस्ट्रेशन में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया।
डिप्टी डायरैक्टर जनरल, जिनके साथ डिप्टी कमिशनर घनश्याम थोरी भी मौजूद थे ने अधिकारियों से जिले में आधार पंजीकरण में तेजी लाने को कहा।
उन्होंने कहा कि जिले में कुल 177 आधार नामांकन केंद्र चल रहे हैं, उन्होंने कहा कि आंगनबाडी केंद्रों और स्कूलों में और अधिक आधार नामांकन किटों को कार्यशील बनाया जाए ताकि 18 साल से कम उम्र की आबादी को जल्द ही कवर किया जा सके। भावना गर्ग ने 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक्स फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन को अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधार नाम, जन्मतिथि, लिंग और पता अपडेट/सुधार करने के लिए 50 रुपये और फोटो या आईरिस या फिंगरप्रिंट अपडेट करने के लिए 100 रुपये चार्ज करता है। उन्होंने कहा कि अधिक शुल्क लेने की स्थिति में लोग टोल फ्री नंबर 1947 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
डिप्टी डायरैक्टर ने कहा कि लोगों को आधार नामांकन/अपडेट करते समय अपने विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए क्योंकि आधार में नाम, जन्म तिथि और लिंग जैसे विवरणों को अपडेट करने की एक सीमा होती है। उन्होंने कहा कि आधार में नाम को दो बार अपडेट किया जा सकता है और जन्म तिथि को एक बार अपडेट किया जा सकता है जबकि लिंग विवरण में एक बार सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधार उन निवासियों की जानकारी को मैन्युअल रूप से अपडेट करने की सुविधा भी प्रदान करता है जो आधार में नाम, लिंग, जन्म तिथि और पता सहित जनसंख्या विवरण ऑनलाइन अपडेट करना चाहते है। उन्होंने कहा कि इन विवरणों को ऑनलाइन अपडेट करने के लिए निवासी के मोबाइल नंबर को आधार में पंजीकृत करना होगा।
उन्होंने कहा कि 50 रूपये की फीस अदा कर यूडीआईएआई की वेबसाइट से आधार पीवीसी कार्ड मंगवाए जा सकते हैं। निवासी अपने मोबाइल फोन पर एम आधार डाउनलोड कर सकते हैं, जो न केवल उन्हें अपने मोबाइल फोन पर आधार रखने की अनुमति देता है बल्कि उन्हें कई ऑनलाइन आधार सेवाओं तक पहुंचने में भी मदद करता है।
इस दौरान घनश्याम थोरी ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को सौंपे गए कार्यों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीआईओ, एनआईसी रंजीत सिंह, डी. एफ. एससी. हरवीन कौर, डिप्टी सीईओ राजीव जोशी, डीएम सेवा केन्द्र हरप्रीत सिंह आदि उपस्थित थे।
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यूनिक आईडैटीफेशन अथारिटी के डिप्टी डायरैक्टर भावना गर्ग ने मंगलवार को जिले में आधार रजिस्ट्रेशन की प्रगति का जायजा लेने के साथ-साथ शून्य-पाँच वर्ष और पाँच-अट्ठारह वर्ष के आयु वर्ग सहित रजिस्ट्रेशन में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया। डिप्टी डायरैक्टर जनरल, जिनके साथ डिप्टी कमिशनर घनश्याम थोरी भी मौजूद थे ने अधिकारियों से जिले में आधार पंजीकरण में तेजी लाने को कहा। उन्होंने कहा कि जिले में कुल एक सौ सतहत्तर आधार नामांकन केंद्र चल रहे हैं, उन्होंने कहा कि आंगनबाडी केंद्रों और स्कूलों में और अधिक आधार नामांकन किटों को कार्यशील बनाया जाए ताकि अट्ठारह साल से कम उम्र की आबादी को जल्द ही कवर किया जा सके। भावना गर्ग ने पाँच से पंद्रह वर्ष की आयु के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक्स फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन को अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधार नाम, जन्मतिथि, लिंग और पता अपडेट/सुधार करने के लिए पचास रुपयापये और फोटो या आईरिस या फिंगरप्रिंट अपडेट करने के लिए एक सौ रुपयापये चार्ज करता है। उन्होंने कहा कि अधिक शुल्क लेने की स्थिति में लोग टोल फ्री नंबर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. डिप्टी डायरैक्टर ने कहा कि लोगों को आधार नामांकन/अपडेट करते समय अपने विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए क्योंकि आधार में नाम, जन्म तिथि और लिंग जैसे विवरणों को अपडेट करने की एक सीमा होती है। उन्होंने कहा कि आधार में नाम को दो बार अपडेट किया जा सकता है और जन्म तिथि को एक बार अपडेट किया जा सकता है जबकि लिंग विवरण में एक बार सुधार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधार उन निवासियों की जानकारी को मैन्युअल रूप से अपडेट करने की सुविधा भी प्रदान करता है जो आधार में नाम, लिंग, जन्म तिथि और पता सहित जनसंख्या विवरण ऑनलाइन अपडेट करना चाहते है। उन्होंने कहा कि इन विवरणों को ऑनलाइन अपडेट करने के लिए निवासी के मोबाइल नंबर को आधार में पंजीकृत करना होगा। उन्होंने कहा कि पचास रूपये की फीस अदा कर यूडीआईएआई की वेबसाइट से आधार पीवीसी कार्ड मंगवाए जा सकते हैं। निवासी अपने मोबाइल फोन पर एम आधार डाउनलोड कर सकते हैं, जो न केवल उन्हें अपने मोबाइल फोन पर आधार रखने की अनुमति देता है बल्कि उन्हें कई ऑनलाइन आधार सेवाओं तक पहुंचने में भी मदद करता है। इस दौरान घनश्याम थोरी ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को सौंपे गए कार्यों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीआईओ, एनआईसी रंजीत सिंह, डी. एफ. एससी. हरवीन कौर, डिप्टी सीईओ राजीव जोशी, डीएम सेवा केन्द्र हरप्रीत सिंह आदि उपस्थित थे।
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इन जातियों ने और भी उन्नति कर ली है। इनके रंग ढंग, चाल ढाल में बहुत कुछ सभ्यता दिखाई देती है। खास कर भारतीय मुसलमानों का रक्त सम्बन्ध सैकड़ों वर्ष से भारत के आर्यों से है; और इनमे बहुत कुछ आर्यत्व है । भारतीय ईसाई जातियां तो अभी बहुत थोड़े दिन से आर्यच्युत हुई हैं। अतएव उनमें कुछ और भी विशेष सभ्यता दिखाई देती है। यदि भारतवर्ष के तपस्वी विद्वान् ब्राह्मण लोग इन लोगों को बार बार अपने दर्शन दिया करें, इनसे घृणा न करें, इनमें हिलमिल कर अथवा जिस तरह से हो सके, इनको आया हिन्दू धर्म में फिर ले आवें, तो यह कुछ अनुचित न होगा । जो अपना है, उसको में लेने से संकोच क्यों करना चाहिये ?
यह हमारा अंग जो हमसे अलग हो गया है, हमारी लापरवाही के कारण हुआ है । हमने इनको घृणित समझा इनको दूर दूर किया - ये हमसे इतनी दूर हो गये कि जिसका कुछ ठिकाना नहीं । अब यदि हम फिर इनको गले से लगाने को तैयार हों, तो ये फिर, हमारा प्रेम पाकर, हमसे मिल सकते हैं। आठ-नौ करोड़ ईसाई- मुसलमान में से अधिकांश लोग ऐसे ही हैं कि जिनसे हमने घृणा की; और वे हमसे अलग हो गये । कुछ दुष्काल आदि में भूखों मरने के कारण हम से अलग हुए । हमने उनके टुकड़े का वन्दोबस्त नहीं किया। अपने ही इन्द्रियराम में मस्त रहे । कुछ बलात्कार अथवा बहकाने में आकर, अज्ञानता के कारण, हमसे अलग हुए, क्योंकि हमने उनकी रक्षा नहीं की। उनको लापरवाही से छोड़ दिया । यदि
हम फिर अपनी उपयुक्त लापरवाहियो को सुधार लें; और जो आठ नौ करोड़ हमसे अलग हो गये हैं, उनसे घृणा छोड़कर प्रेम सम्बन्ध स्थापित करें, तो यह कुल्हाड़ी का दण्डा, जो.
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इन जातियों ने और भी उन्नति कर ली है। इनके रंग ढंग, चाल ढाल में बहुत कुछ सभ्यता दिखाई देती है। खास कर भारतीय मुसलमानों का रक्त सम्बन्ध सैकड़ों वर्ष से भारत के आर्यों से है; और इनमे बहुत कुछ आर्यत्व है । भारतीय ईसाई जातियां तो अभी बहुत थोड़े दिन से आर्यच्युत हुई हैं। अतएव उनमें कुछ और भी विशेष सभ्यता दिखाई देती है। यदि भारतवर्ष के तपस्वी विद्वान् ब्राह्मण लोग इन लोगों को बार बार अपने दर्शन दिया करें, इनसे घृणा न करें, इनमें हिलमिल कर अथवा जिस तरह से हो सके, इनको आया हिन्दू धर्म में फिर ले आवें, तो यह कुछ अनुचित न होगा । जो अपना है, उसको में लेने से संकोच क्यों करना चाहिये ? यह हमारा अंग जो हमसे अलग हो गया है, हमारी लापरवाही के कारण हुआ है । हमने इनको घृणित समझा इनको दूर दूर किया - ये हमसे इतनी दूर हो गये कि जिसका कुछ ठिकाना नहीं । अब यदि हम फिर इनको गले से लगाने को तैयार हों, तो ये फिर, हमारा प्रेम पाकर, हमसे मिल सकते हैं। आठ-नौ करोड़ ईसाई- मुसलमान में से अधिकांश लोग ऐसे ही हैं कि जिनसे हमने घृणा की; और वे हमसे अलग हो गये । कुछ दुष्काल आदि में भूखों मरने के कारण हम से अलग हुए । हमने उनके टुकड़े का वन्दोबस्त नहीं किया। अपने ही इन्द्रियराम में मस्त रहे । कुछ बलात्कार अथवा बहकाने में आकर, अज्ञानता के कारण, हमसे अलग हुए, क्योंकि हमने उनकी रक्षा नहीं की। उनको लापरवाही से छोड़ दिया । यदि हम फिर अपनी उपयुक्त लापरवाहियो को सुधार लें; और जो आठ नौ करोड़ हमसे अलग हो गये हैं, उनसे घृणा छोड़कर प्रेम सम्बन्ध स्थापित करें, तो यह कुल्हाड़ी का दण्डा, जो.
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वाशिंगटनः एलन मस्क (Elon Musk) ने शुक्रवार को ट्विटर की नई नीति का ऐलान (Twitter's New Policy) किया। उन्होंने कहा कि नई ट्विटर नीति अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता देती है, लेकिन रीच की नहीं।
उन्होंने कहा कि ट्विटर अभद्र भाषा और नकारात्मक सामग्री वाले Tweets को बढ़ावा नहीं देगा और न ही उनका प्रचार करेगा।
इसके साथ ही ट्विटर ने अमेरिकी कामेडियन कैथी ग्रिफिन और प्रोफेसर जार्डन पीटरसन के खातों को फिर बहाल कर दिया।
एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के खाते को अभी बहाल नहीं किया गया है।
एलन मस्क ने ट्वीट करके खुद इस बात की जानकारी दी। उनके अनुसार, व्यंग्यात्मक वेबसाइट बेबीलोन बी का अकाउंट जरूर बहाल कर दिया गया है।
एलन मस्क ने कहा कि मई में वह ट्रंप के ट्विटर अकाउंट (Twitter Account) पर लगे प्रतिबंध को उलट देंगे। गौरतलब है ट्रंप का ट्विटर अकाउंट पिछले साल यूएस कैपिटल पर हुए हमले के बाद निलंबित कर दिया गया था।
मस्क ने ट्विटर का नियंत्रण संभालने के बाद से ही प्लेटफार्म को नया रूप देने की कोशिश की है।
टेस्ला के CEO Musk ने यह आरोप लगाया कि ट्विटर ने अपने प्लेटफार्म पर स्पैम और नकली बाट खातों की संख्या को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और ऐसा करके आपसी खरीद समझौते का उल्लंघन किया है।
उल्लेखनीय है कि ट्विटर को खरीदने के बाद मस्क ने Blue Tick के लिए शुल्क निर्धारित किया था, लेकिन इस कारण नकली खातों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई। इसके बाद मस्क ने उस फैसले को रद्द करते हुए कहा था जल्द ही ट्विटर की नई पालिसी की घोषणा करेंगे।
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वाशिंगटनः एलन मस्क ने शुक्रवार को ट्विटर की नई नीति का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नई ट्विटर नीति अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता देती है, लेकिन रीच की नहीं। उन्होंने कहा कि ट्विटर अभद्र भाषा और नकारात्मक सामग्री वाले Tweets को बढ़ावा नहीं देगा और न ही उनका प्रचार करेगा। इसके साथ ही ट्विटर ने अमेरिकी कामेडियन कैथी ग्रिफिन और प्रोफेसर जार्डन पीटरसन के खातों को फिर बहाल कर दिया। एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खाते को अभी बहाल नहीं किया गया है। एलन मस्क ने ट्वीट करके खुद इस बात की जानकारी दी। उनके अनुसार, व्यंग्यात्मक वेबसाइट बेबीलोन बी का अकाउंट जरूर बहाल कर दिया गया है। एलन मस्क ने कहा कि मई में वह ट्रंप के ट्विटर अकाउंट पर लगे प्रतिबंध को उलट देंगे। गौरतलब है ट्रंप का ट्विटर अकाउंट पिछले साल यूएस कैपिटल पर हुए हमले के बाद निलंबित कर दिया गया था। मस्क ने ट्विटर का नियंत्रण संभालने के बाद से ही प्लेटफार्म को नया रूप देने की कोशिश की है। टेस्ला के CEO Musk ने यह आरोप लगाया कि ट्विटर ने अपने प्लेटफार्म पर स्पैम और नकली बाट खातों की संख्या को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और ऐसा करके आपसी खरीद समझौते का उल्लंघन किया है। उल्लेखनीय है कि ट्विटर को खरीदने के बाद मस्क ने Blue Tick के लिए शुल्क निर्धारित किया था, लेकिन इस कारण नकली खातों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई। इसके बाद मस्क ने उस फैसले को रद्द करते हुए कहा था जल्द ही ट्विटर की नई पालिसी की घोषणा करेंगे।
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'बाहुबली' फेम एक्टर राणा दग्गुबाती आज यानी 8 अगस्त को मिहिका बजाज के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इस बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट शेयर की है, जिसे बहुत बहुत पसंद किया जा रहा है। उन्होंने यह फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की है। तस्वीर में राणा के साथ उनके पिता सुरेश और अंकल वेंकटेश नजर आ रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा रेडी।
फोटो में राणा दग्गुबाती ट्रेडिशनल कुर्ता और साउथ इंडियन स्टाइल धोती में नजर आ रहे हैं। वहीं, उनके पिता और अंकल भी ट्रेडिशनल अटायर में तैयार होकर पोज देते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ मिहिका की मां ने बेटी की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की है, जिसमें वह काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, मेरी बेबी का दिन आखिर आ ही गया।
बता दें कि 6 अगस्त को हल्दी और मेहंदी का फंक्शन हुआ था। इसकी फोटोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। हल्दी सेरेमनी मिहिका के घर जुबली हिल्स में आयोजित की गई। इस दौरान मिहिका ने गोल्डन कलर का लहंगा पहना था। वहीं, राणा व्हाइट शर्ट और ट्रडिशनल धोती पहने नजर आए। इसके बाद मेहंदी सेरेमनी में मिहिका ने पिंक लहंगा पहना था।
गौरतलब है कि राणा के पिता सुरेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया था कि शादी में सिर्फ परिवार के लोगों को ही बुलाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री और बाहर अपने करीबी दोस्तों को न्योता नहीं भेजा है। सच्चाई यह है कि कोविड-19 के केस लगातार बढ़ रहे हैं और हम अपने जश्न की वजह से किसी की जान खतरे में नहीं डालना चाहते। शादी में जो भी आएगा, उसका कोविड-19 टेस्ट किया जाएगा। शादी स्थल पर हर जगह सैनिटाइजर रखे होंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। यह खुशी का मौका है और हम इसे सुरक्षित भी बनाना चाहते हैं। "
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'बाहुबली' फेम एक्टर राणा दग्गुबाती आज यानी आठ अगस्त को मिहिका बजाज के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इस बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट शेयर की है, जिसे बहुत बहुत पसंद किया जा रहा है। उन्होंने यह फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की है। तस्वीर में राणा के साथ उनके पिता सुरेश और अंकल वेंकटेश नजर आ रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा रेडी। फोटो में राणा दग्गुबाती ट्रेडिशनल कुर्ता और साउथ इंडियन स्टाइल धोती में नजर आ रहे हैं। वहीं, उनके पिता और अंकल भी ट्रेडिशनल अटायर में तैयार होकर पोज देते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ मिहिका की मां ने बेटी की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की है, जिसमें वह काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, मेरी बेबी का दिन आखिर आ ही गया। बता दें कि छः अगस्त को हल्दी और मेहंदी का फंक्शन हुआ था। इसकी फोटोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। हल्दी सेरेमनी मिहिका के घर जुबली हिल्स में आयोजित की गई। इस दौरान मिहिका ने गोल्डन कलर का लहंगा पहना था। वहीं, राणा व्हाइट शर्ट और ट्रडिशनल धोती पहने नजर आए। इसके बाद मेहंदी सेरेमनी में मिहिका ने पिंक लहंगा पहना था। गौरतलब है कि राणा के पिता सुरेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया था कि शादी में सिर्फ परिवार के लोगों को ही बुलाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री और बाहर अपने करीबी दोस्तों को न्योता नहीं भेजा है। सच्चाई यह है कि कोविड-उन्नीस के केस लगातार बढ़ रहे हैं और हम अपने जश्न की वजह से किसी की जान खतरे में नहीं डालना चाहते। शादी में जो भी आएगा, उसका कोविड-उन्नीस टेस्ट किया जाएगा। शादी स्थल पर हर जगह सैनिटाइजर रखे होंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। यह खुशी का मौका है और हम इसे सुरक्षित भी बनाना चाहते हैं। "
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रामभक्ति साहित्य में मधुर उपासनां
'यस्य पूर्वोक्तरागविशेषे रुचिरेव जातास्ति न तु रागविशेष एव स्वयं तस्य तादृश रागसुधाकरकराभाससमुल्ल सितहृदयस्फटिकमणेः शास्त्रादिषु तासु तादृश्या रागात्मिकाया भक्तेः
परिपाटीष्वपि रुचिर्जायते।'
श्री गोविन्द भाष्य में श्री बलदेव विद्याभूषण इसी को 'रुचि भक्ति' कहते हैं-'रुचिभक्तिर्माधुर्यज्ञानप्रवृत्ता, विधिभक्तिरैश्वर्यज्ञानप्रवृत्ता । रुचिरत्र रागः । तदनुगता भक्तिः रुचिभक्तिः । अथवा रुचिपूर्णा भक्तिः रुचिभक्तिः इयमेव 'रागानुगा' इति गदिता ।' रागानुगा पुष्टि - मार्ग में
इसी रागानुगा भक्ति को पुष्टि मार्ग में पुष्टि भक्ति या 'अविहिता भक्ति' कहते हैं--- 'माहात्म्यज्ञानयुते वरत्वेन प्रभोर्भक्तिविहिता, अन्यतः प्राप्तत्वात् कामाद्यपाधिजा त्वविहिता ।' अणुभाष्य
श्री निम्बार्क सम्प्रदायमें श्री हरिव्यास जी ने अपनी सिद्धान्त - रत्नांजलि' टीका में अविहिता भक्ति का उल्लेख किया है । 'महावाणी' में उन्होंने सखी-भाव से नित्य वृन्दावन में श्री राधा गोविन्द की युगल सेवा प्राप्ति की साधना बताई है । उक्त साधना में दास्य, सख्य अथवा वात्सल्य के लिए स्थान नहीं है । इस प्रकार गौडीय वैष्णवों की रागानुगा भक्ति के साथ श्री हरिव्यासजी की साधना का भेद सुस्पष्ट है। क्योंकि महाप्रभु के सम्प्रदाय में सभी भावों का समावेश हो जाता है - 'कुत्रापि तद्रहिता न कल्पनीया ।' श्री हरिव्यासजी में श्रीकृष्ण की देवलीलापरायणता है, परन्तु गौडीय वैष्णव केवल भगवान् की नरलीला में माधुर्योपासना का पथ अपनाते हैं ।
रागानुगा भक्ति में स्मरण की प्रधानता' है । श्री सनातन गोस्वामी ने बृहद्-भागवतामृत
में इसका विस्तार से वर्णन किया है । इस साधन में मानसिक सेवा और तदनुकूल संकल्प ही मुख्य हैं । रघुनाथदास गोस्वामी के 'विलाप - कुसुमांजलि' और श्री जीव गोस्वामी के 'संकल्पकल्पद्रुम' में रागानुगा भक्ति अनुकूल संकल्प और मानसी सेवा के क्रम का बहुत सुन्दर वर्णन मिलता है। '
सेवा साधक रूपेण सिद्धरूपेण चात्र हि । तद्भावलिप्सुना कार्या व्रजलोकानुसारतः ।।
१ गौडीय आचार्य श्री जीव गोस्वामी 'अविहिता' का निर्णय यो करते हैं -- 'अविहिता रुचिमात्रप्रवृत्या विधिप्रयुक्तत्वेनाप्रवृत्तत्वात्' रुचिमात्र से प्रवृत्ति होने के कारण ही इस प्रकार की भक्ति को 'अविहिता' कहते हैं ।
२ रागानुगायां स्मरणस्य मुख्यता
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रामभक्ति साहित्य में मधुर उपासनां 'यस्य पूर्वोक्तरागविशेषे रुचिरेव जातास्ति न तु रागविशेष एव स्वयं तस्य तादृश रागसुधाकरकराभाससमुल्ल सितहृदयस्फटिकमणेः शास्त्रादिषु तासु तादृश्या रागात्मिकाया भक्तेः परिपाटीष्वपि रुचिर्जायते।' श्री गोविन्द भाष्य में श्री बलदेव विद्याभूषण इसी को 'रुचि भक्ति' कहते हैं-'रुचिभक्तिर्माधुर्यज्ञानप्रवृत्ता, विधिभक्तिरैश्वर्यज्ञानप्रवृत्ता । रुचिरत्र रागः । तदनुगता भक्तिः रुचिभक्तिः । अथवा रुचिपूर्णा भक्तिः रुचिभक्तिः इयमेव 'रागानुगा' इति गदिता ।' रागानुगा पुष्टि - मार्ग में इसी रागानुगा भक्ति को पुष्टि मार्ग में पुष्टि भक्ति या 'अविहिता भक्ति' कहते हैं--- 'माहात्म्यज्ञानयुते वरत्वेन प्रभोर्भक्तिविहिता, अन्यतः प्राप्तत्वात् कामाद्यपाधिजा त्वविहिता ।' अणुभाष्य श्री निम्बार्क सम्प्रदायमें श्री हरिव्यास जी ने अपनी सिद्धान्त - रत्नांजलि' टीका में अविहिता भक्ति का उल्लेख किया है । 'महावाणी' में उन्होंने सखी-भाव से नित्य वृन्दावन में श्री राधा गोविन्द की युगल सेवा प्राप्ति की साधना बताई है । उक्त साधना में दास्य, सख्य अथवा वात्सल्य के लिए स्थान नहीं है । इस प्रकार गौडीय वैष्णवों की रागानुगा भक्ति के साथ श्री हरिव्यासजी की साधना का भेद सुस्पष्ट है। क्योंकि महाप्रभु के सम्प्रदाय में सभी भावों का समावेश हो जाता है - 'कुत्रापि तद्रहिता न कल्पनीया ।' श्री हरिव्यासजी में श्रीकृष्ण की देवलीलापरायणता है, परन्तु गौडीय वैष्णव केवल भगवान् की नरलीला में माधुर्योपासना का पथ अपनाते हैं । रागानुगा भक्ति में स्मरण की प्रधानता' है । श्री सनातन गोस्वामी ने बृहद्-भागवतामृत में इसका विस्तार से वर्णन किया है । इस साधन में मानसिक सेवा और तदनुकूल संकल्प ही मुख्य हैं । रघुनाथदास गोस्वामी के 'विलाप - कुसुमांजलि' और श्री जीव गोस्वामी के 'संकल्पकल्पद्रुम' में रागानुगा भक्ति अनुकूल संकल्प और मानसी सेवा के क्रम का बहुत सुन्दर वर्णन मिलता है। ' सेवा साधक रूपेण सिद्धरूपेण चात्र हि । तद्भावलिप्सुना कार्या व्रजलोकानुसारतः ।। एक गौडीय आचार्य श्री जीव गोस्वामी 'अविहिता' का निर्णय यो करते हैं -- 'अविहिता रुचिमात्रप्रवृत्या विधिप्रयुक्तत्वेनाप्रवृत्तत्वात्' रुचिमात्र से प्रवृत्ति होने के कारण ही इस प्रकार की भक्ति को 'अविहिता' कहते हैं । दो रागानुगायां स्मरणस्य मुख्यता
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दो दिवसीय 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन' (बिम्सटेक) सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे। वहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना समेत बिम्सटेक नेताओं ने नेपाल की राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से मुलाकात की।
मोदी ने बुधवार को कहा था कि काठमांडू में हो रहा बिमस्टेक सम्मेलन भारत के लिए उसके पड़ोसियों के महत्व को दर्शाता है और दिखाता है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े पड़ोस के प्रति भी भारत प्रतिबद्ध है।
दो दिवसीय सम्मेलन के लिए नेपाल रवाना होने से पहले मोदी ने कहा था कि सम्मेलन से इतर वह बांग्लादेश, भूटान, म्यामां, श्रीलंका और थाईलैंड के नेताओं से मुलाकात करेंगे। चौथे बिमस्टेक सम्मेलन की थीम है "शांतिपूर्ण, समृद्ध और सतत बंगाल की खाड़ी की ओर।
उन्होंने कहा था, "मैं नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से मिलने और मई 2018 में मेरी नेपाल यात्रा से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने को लेकर उत्सुक हूं। मोदी ने कहा कि वह और ओली पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में नेपाल भारत मैत्री धर्मशाला का उद्घाटन करेंगे। बिमस्टेक क्षेत्रीय देशों का एक समूह है। भारत, बांग्लादेश, म्यामां, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल इसके सदस्य देश हैं। मजे की बात यह है कि इन देशों में वैश्विक जनसंख्या का 22 प्रतिशत निवास करता है।
माना जा रहा है कि नेपाल में प्रस्तावित सम्मेलन दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के अलावा बिम्सटेक में शामिल दक्षिण एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से काफी बेहत होंगे। भारत ने सार्क को लेकर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद नई सरकार के रुख से ही दोनों देशों के आपसी रिश्ते और सार्क के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
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दो दिवसीय 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन' सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे। वहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना समेत बिम्सटेक नेताओं ने नेपाल की राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से मुलाकात की। मोदी ने बुधवार को कहा था कि काठमांडू में हो रहा बिमस्टेक सम्मेलन भारत के लिए उसके पड़ोसियों के महत्व को दर्शाता है और दिखाता है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े पड़ोस के प्रति भी भारत प्रतिबद्ध है। दो दिवसीय सम्मेलन के लिए नेपाल रवाना होने से पहले मोदी ने कहा था कि सम्मेलन से इतर वह बांग्लादेश, भूटान, म्यामां, श्रीलंका और थाईलैंड के नेताओं से मुलाकात करेंगे। चौथे बिमस्टेक सम्मेलन की थीम है "शांतिपूर्ण, समृद्ध और सतत बंगाल की खाड़ी की ओर। उन्होंने कहा था, "मैं नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से मिलने और मई दो हज़ार अट्ठारह में मेरी नेपाल यात्रा से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने को लेकर उत्सुक हूं। मोदी ने कहा कि वह और ओली पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में नेपाल भारत मैत्री धर्मशाला का उद्घाटन करेंगे। बिमस्टेक क्षेत्रीय देशों का एक समूह है। भारत, बांग्लादेश, म्यामां, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल इसके सदस्य देश हैं। मजे की बात यह है कि इन देशों में वैश्विक जनसंख्या का बाईस प्रतिशत निवास करता है। माना जा रहा है कि नेपाल में प्रस्तावित सम्मेलन दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के अलावा बिम्सटेक में शामिल दक्षिण एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से काफी बेहत होंगे। भारत ने सार्क को लेकर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद नई सरकार के रुख से ही दोनों देशों के आपसी रिश्ते और सार्क के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
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जानें आखिर क्यों इस जगह पर पैदा होने के कुछ दिन बाद अंधे हो जाते हैं इंसान और जानवर. .
क्या वाकई में 370 को लेकर दो हिस्सों में बट रही है कांग्रेस सरकार? पढ़े पूरी खबर....
शराबी के साथ जिराफ ने की ये हरकत, विडियो देख हैरान हो जायेंगे आप. .
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जानें आखिर क्यों इस जगह पर पैदा होने के कुछ दिन बाद अंधे हो जाते हैं इंसान और जानवर. . क्या वाकई में तीन सौ सत्तर को लेकर दो हिस्सों में बट रही है कांग्रेस सरकार? पढ़े पूरी खबर.... शराबी के साथ जिराफ ने की ये हरकत, विडियो देख हैरान हो जायेंगे आप. .
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नई दिल्ली। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर जुनैद-नासिर हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है, उनका दावा है कि इन दोनों को अगवा करने में जिस गाड़ी का इस्तेमाल हुआ था, वो गाड़ी हरियाणा सरकार के नाम पर रजिस्टर है, साथ ही उन्होंने सरकार पर मुसलमानों को हिंसा का शिकार बनाने का आरोप लगाया है।
ओवैसी का कहना है कि कई दूसरे गौ-अपराध में भी इस गाड़ी का इस्तेमाल हुआ है, न सिर्फ सरकार की सहमति से बल्कि सरपरस्ती में मुसलमानों को हिंसा का निशाना बनाया जा रहा है, गौ रक्षा, धर्मांतरण कानून ये सब बहाने हैं, गौ-माफिया और दूसरे अपराधियों को इन कानूनों के जरिए लेटरल एंट्री मिल गई है। इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी पर बनी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री विवाद को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि बीबीसी की 2002 नरसंहार की फिल्म पर बैन लग जाता है, लेकिन लेटरल वाले अपने कारनामे आराम से यूट्यूब फेसबुक पर डाल देते हैं, क्योंकि वो बीजेपी के जा-नशीं हैं।
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नई दिल्ली। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर जुनैद-नासिर हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है, उनका दावा है कि इन दोनों को अगवा करने में जिस गाड़ी का इस्तेमाल हुआ था, वो गाड़ी हरियाणा सरकार के नाम पर रजिस्टर है, साथ ही उन्होंने सरकार पर मुसलमानों को हिंसा का शिकार बनाने का आरोप लगाया है। ओवैसी का कहना है कि कई दूसरे गौ-अपराध में भी इस गाड़ी का इस्तेमाल हुआ है, न सिर्फ सरकार की सहमति से बल्कि सरपरस्ती में मुसलमानों को हिंसा का निशाना बनाया जा रहा है, गौ रक्षा, धर्मांतरण कानून ये सब बहाने हैं, गौ-माफिया और दूसरे अपराधियों को इन कानूनों के जरिए लेटरल एंट्री मिल गई है। इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी पर बनी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री विवाद को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि बीबीसी की दो हज़ार दो नरसंहार की फिल्म पर बैन लग जाता है, लेकिन लेटरल वाले अपने कारनामे आराम से यूट्यूब फेसबुक पर डाल देते हैं, क्योंकि वो बीजेपी के जा-नशीं हैं।
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