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Sindri: सिंदरी (Sindri) हर्ल के एच आर विक्रांत कुमार के आवास पर सोमवार 9 जनवरी की शाम चार राउंड फायरिंग के बाद उन्होंने मंगलवार 10 जनवरी को सिंदरी थाना में आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल कर डराने की लिखित शिकायत दर्ज कराई है. केस दर्ज कर प्रशासन रेस हो गया है और माली रोहिणी महतो सहित अन्य गार्डों से पूछताछ की जा रही है. हर्ल प्रबंधन ने भी आवास के आसपास लाइट व गार्डों की संख्या बढ़ा दी है. सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने घटना को औद्योगिक माहौल अशांत करने का प्रयास बताया है.
हर्ल सिन्दरी एच आर सुरक्षा अधिकारी कैप्टन होशियार सिंह के साथ सिंदरी थाना पहुंचे. उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी अनुपस्थिति में आवास डी 21 पर हमलावरों ने सोमवार की शाम छः बजकर 45 मिनट पर चार राउंड फायरिंग की है. उस वक्त उनका बेटा और पत्नी बाहर बरामदे में बैठकर आग ताप रहे थे. तभी रोहड़ाबांध की ओर से आए दो बाइक सवारों ने गेट खोलने का प्रयास किया और गाली गलौज कर तीन राउंड गोलियां चलाईं. आवास से कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद पुनः वापस रोहड़ाबांध की ओर बढ़ते हुए एक राउंड और फायरिंग की. इसके बाद पत्नी बच्चे को लेकर घर के अंदर गई व फोन पर पूरी घटना की जानकारी दी. सचेत भी किया कि अभी घर नहीं आइए.
उनके अनुसार बरामदे की बगल वाली दीवार में गोलियों लगने के दो निशान पाए गए हैं. उन्होंने बताया कि पत्नी के अनुसार हमलावर बिना हेलमेट व बगैर मुंह ढके आए थे और विक्रांत बाहर निकलो की आवाज लगातार लगा थे. हालांकि इस गोलीकांड में कोई हताहत नहीं हुआ है. सूचना के आधार पर एसडीपीओ सिंदरी अभिषेक कुमार व थाना प्रभारी सुरेश प्रसाद घटनास्थल पहुंचे व विस्तृत जानकारी ली. सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला.
हर्ल एच आर के आवास पर घटना के वक्त काम कर रहे माली रोहिणी महतो ने बताया कि हमलावर आक्रोशित थे और गेट खोलने की कोशिश कर रहे थे. विक्रांत सर का नाम लेकर गाली गलौज करते हुए हमलावरों ने गोलियां चलाई. आवास से कुछ दूर पर तैनात गार्ड के आवाज देने पर हमलावर वापस रोहड़ाबांध की ओर भाग निकले.
सिंदरी थाना प्रभारी सुरेश प्रसाद ने बताया कि हर्ल एच आर की लिखित शिकायत पर दो अज्ञात लोगों पर आर्म्स एक्ट, गाली गलौज, जान से मारने की नीयत से आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल की धाराओं के तहत केस संख्या 5/23 दर्ज कर लिया गया है. घटनास्थल से 7. 1 एम एम के तीन खोखा व एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया है. हर बिंदु पर जांच की जा रही है.
धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह, सिंदरी सांसद प्रतिनिधि शैलेश सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता सह पूर्व पार्षद दिनेश सिंह, कांग्रेस नगर अध्यक्ष अजय कुमार, भाजपा नगर अध्यक्ष अरविंद पाठक, भारतीय मजदूर संघ जिलाध्यक्ष बलदेव महतो, जनाधिकार मंच अध्यक्ष रंजीत कुमार सहित अन्य कई संगठनों ने इसे शर्मनाक करतूत बताया है. कहा है कि यह औद्योगिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश है.
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Sindri: सिंदरी हर्ल के एच आर विक्रांत कुमार के आवास पर सोमवार नौ जनवरी की शाम चार राउंड फायरिंग के बाद उन्होंने मंगलवार दस जनवरी को सिंदरी थाना में आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल कर डराने की लिखित शिकायत दर्ज कराई है. केस दर्ज कर प्रशासन रेस हो गया है और माली रोहिणी महतो सहित अन्य गार्डों से पूछताछ की जा रही है. हर्ल प्रबंधन ने भी आवास के आसपास लाइट व गार्डों की संख्या बढ़ा दी है. सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने घटना को औद्योगिक माहौल अशांत करने का प्रयास बताया है. हर्ल सिन्दरी एच आर सुरक्षा अधिकारी कैप्टन होशियार सिंह के साथ सिंदरी थाना पहुंचे. उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी अनुपस्थिति में आवास डी इक्कीस पर हमलावरों ने सोमवार की शाम छः बजकर पैंतालीस मिनट पर चार राउंड फायरिंग की है. उस वक्त उनका बेटा और पत्नी बाहर बरामदे में बैठकर आग ताप रहे थे. तभी रोहड़ाबांध की ओर से आए दो बाइक सवारों ने गेट खोलने का प्रयास किया और गाली गलौज कर तीन राउंड गोलियां चलाईं. आवास से कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद पुनः वापस रोहड़ाबांध की ओर बढ़ते हुए एक राउंड और फायरिंग की. इसके बाद पत्नी बच्चे को लेकर घर के अंदर गई व फोन पर पूरी घटना की जानकारी दी. सचेत भी किया कि अभी घर नहीं आइए. उनके अनुसार बरामदे की बगल वाली दीवार में गोलियों लगने के दो निशान पाए गए हैं. उन्होंने बताया कि पत्नी के अनुसार हमलावर बिना हेलमेट व बगैर मुंह ढके आए थे और विक्रांत बाहर निकलो की आवाज लगातार लगा थे. हालांकि इस गोलीकांड में कोई हताहत नहीं हुआ है. सूचना के आधार पर एसडीपीओ सिंदरी अभिषेक कुमार व थाना प्रभारी सुरेश प्रसाद घटनास्थल पहुंचे व विस्तृत जानकारी ली. सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला. हर्ल एच आर के आवास पर घटना के वक्त काम कर रहे माली रोहिणी महतो ने बताया कि हमलावर आक्रोशित थे और गेट खोलने की कोशिश कर रहे थे. विक्रांत सर का नाम लेकर गाली गलौज करते हुए हमलावरों ने गोलियां चलाई. आवास से कुछ दूर पर तैनात गार्ड के आवाज देने पर हमलावर वापस रोहड़ाबांध की ओर भाग निकले. सिंदरी थाना प्रभारी सुरेश प्रसाद ने बताया कि हर्ल एच आर की लिखित शिकायत पर दो अज्ञात लोगों पर आर्म्स एक्ट, गाली गलौज, जान से मारने की नीयत से आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल की धाराओं के तहत केस संख्या पाँच/तेईस दर्ज कर लिया गया है. घटनास्थल से सात. एक एम एम के तीन खोखा व एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया है. हर बिंदु पर जांच की जा रही है. धनबाद सांसद पशुपतिनाथ सिंह, सिंदरी सांसद प्रतिनिधि शैलेश सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता सह पूर्व पार्षद दिनेश सिंह, कांग्रेस नगर अध्यक्ष अजय कुमार, भाजपा नगर अध्यक्ष अरविंद पाठक, भारतीय मजदूर संघ जिलाध्यक्ष बलदेव महतो, जनाधिकार मंच अध्यक्ष रंजीत कुमार सहित अन्य कई संगठनों ने इसे शर्मनाक करतूत बताया है. कहा है कि यह औद्योगिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश है.
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India China Border: बागची ने कहा, इनसे स्थानीय आबादी के साथ-साथ सशस्त्र बलों को बहुत आवश्यक कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। सरकार इस उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है। यह पाया गया है कि चीन पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कार्य कम से कम दो महीने से कर रहा है। पुल चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दोनों साइड त्वरित पहुंच प्राप्त करने में सहायक होगा।
Bihar: दिलचस्प ये है कि ब्रह्मदेव मंडल ने 11 बार कोरोना टीका लगवाने का तारीख के हिसाब से पूरा रिकॉर्ड रखा है। स्थानीय स्वास्थ्य का कहना है कि ऑफलाइन टीकाकरण कैंप में ज्यादा बार कोरोना टीका लगाए जाने का मामला हो सकता है, क्योंकि वहां आधार नंबर और मोबाइल नंबर की एंट्री बाद में की जाती है।
PM Security Breach: पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई सेंधमारी को लेकर सोनिया गांधी ने पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की है। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में सोनिया गांधी ने मामले की पूरी जानकारी ली है। सोनिया गांधी ने सीएम चन्नी से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के है। साथ ही उन्होंने मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बात भी कही है।
PM Modi Security Breach: यह भी पता चला है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा भंग पर चिंता व्यक्त की है। पीएम ने सुरक्षा चूक के कारण पंजाब के फिरोजपुर की अपनी निर्धारित यात्रा रद्द कर दी थी। वह 42,750 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने के लिए फिरोजपुर के दौरे पर निकले थे।
PM Modi Security Breach: दरअसल राकेश टिकैत ने इस घटनाक्रम को स्टंट करारा दिया। राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जनता की सहानुभूति हासिल करने का सस्ता जरिया खोजने की कोशिश की गई है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि पीएम मोदी की जान को पूरी तरह से खतरा था लेकिन किसान नेता को इसमें स्टंट दिखाई दे रहा है।
Bulli Bai: मुंबई पुलिस पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक 18 वर्षीय लड़की श्वेता सिंह, एक 21 वर्षीय मयंक रावत, एक डीयू छात्र और एक इंजीनियरिंग छात्र विशाल कुमार झा शामिल हैं। मुंबई पुलिस ने गिरफ्तारियां बेंगलुरु और उत्तराखंड से की हैं। विशाल झा और मयंक पुलिस रिमांड पर हैं, जबकि श्वेता की पुलिस हिरासत पांच जनवरी को खत्म हो गई थी।
Jawed Habib Spit on Women hair during hair styling: उधर जावेद हबीब के इस वीडियो के वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों का गुस्सा फूटा है। साथ ही हिंदू संगठनों ने जावेद हबीब पर कार्रवाई करने की मांग भी की। जावेद हबीब के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। साथ ही लोगों ने जावेद हबीब को बॉयकॉट करने की मांग की है।
PM Modi Security Breach: पीएम मोदी बुधवार को कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण के अलावा रैली करने पंजाब के फिरोजपुर जा रहे थे। फिरोजपुर में बारिश हो रही थी। इससे वो रोड से जा रहे थे। फिरोजपुर से करीब 30 किलोमीटर पहले कुछ प्रदर्शनकारियों ने एक फ्लाईओवर पर उनका रास्ता रोक लिया।
PM Security Breach: देवगौड़ा ने आगे अपने ट्वीट में लिखा, जब भारत के सर्वोच्च कार्यकारी कार्यालय की रक्षा करने की बात आती है, तो हमें किसी भी समय आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। हमें अतीत से सीखना चाहिए। आपको बता दें कि , संयुक्त मोर्चा के नेता के तौर पर कांग्रेस के बाहरी समर्थन से एच डी देवगौड़ा 1996 में देश के प्रधानमंत्री बने थे।
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India China Border: बागची ने कहा, इनसे स्थानीय आबादी के साथ-साथ सशस्त्र बलों को बहुत आवश्यक कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। सरकार इस उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है। यह पाया गया है कि चीन पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ने वाले पुल का निर्माण कार्य कम से कम दो महीने से कर रहा है। पुल चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दोनों साइड त्वरित पहुंच प्राप्त करने में सहायक होगा। Bihar: दिलचस्प ये है कि ब्रह्मदेव मंडल ने ग्यारह बार कोरोना टीका लगवाने का तारीख के हिसाब से पूरा रिकॉर्ड रखा है। स्थानीय स्वास्थ्य का कहना है कि ऑफलाइन टीकाकरण कैंप में ज्यादा बार कोरोना टीका लगाए जाने का मामला हो सकता है, क्योंकि वहां आधार नंबर और मोबाइल नंबर की एंट्री बाद में की जाती है। PM Security Breach: पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई सेंधमारी को लेकर सोनिया गांधी ने पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की है। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में सोनिया गांधी ने मामले की पूरी जानकारी ली है। सोनिया गांधी ने सीएम चन्नी से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के है। साथ ही उन्होंने मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बात भी कही है। PM Modi Security Breach: यह भी पता चला है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा भंग पर चिंता व्यक्त की है। पीएम ने सुरक्षा चूक के कारण पंजाब के फिरोजपुर की अपनी निर्धारित यात्रा रद्द कर दी थी। वह बयालीस,सात सौ पचास करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने के लिए फिरोजपुर के दौरे पर निकले थे। PM Modi Security Breach: दरअसल राकेश टिकैत ने इस घटनाक्रम को स्टंट करारा दिया। राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जनता की सहानुभूति हासिल करने का सस्ता जरिया खोजने की कोशिश की गई है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि पीएम मोदी की जान को पूरी तरह से खतरा था लेकिन किसान नेता को इसमें स्टंट दिखाई दे रहा है। Bulli Bai: मुंबई पुलिस पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक अट्ठारह वर्षीय लड़की श्वेता सिंह, एक इक्कीस वर्षीय मयंक रावत, एक डीयू छात्र और एक इंजीनियरिंग छात्र विशाल कुमार झा शामिल हैं। मुंबई पुलिस ने गिरफ्तारियां बेंगलुरु और उत्तराखंड से की हैं। विशाल झा और मयंक पुलिस रिमांड पर हैं, जबकि श्वेता की पुलिस हिरासत पांच जनवरी को खत्म हो गई थी। Jawed Habib Spit on Women hair during hair styling: उधर जावेद हबीब के इस वीडियो के वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों का गुस्सा फूटा है। साथ ही हिंदू संगठनों ने जावेद हबीब पर कार्रवाई करने की मांग भी की। जावेद हबीब के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। साथ ही लोगों ने जावेद हबीब को बॉयकॉट करने की मांग की है। PM Modi Security Breach: पीएम मोदी बुधवार को कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण के अलावा रैली करने पंजाब के फिरोजपुर जा रहे थे। फिरोजपुर में बारिश हो रही थी। इससे वो रोड से जा रहे थे। फिरोजपुर से करीब तीस किलोग्राममीटर पहले कुछ प्रदर्शनकारियों ने एक फ्लाईओवर पर उनका रास्ता रोक लिया। PM Security Breach: देवगौड़ा ने आगे अपने ट्वीट में लिखा, जब भारत के सर्वोच्च कार्यकारी कार्यालय की रक्षा करने की बात आती है, तो हमें किसी भी समय आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। हमें अतीत से सीखना चाहिए। आपको बता दें कि , संयुक्त मोर्चा के नेता के तौर पर कांग्रेस के बाहरी समर्थन से एच डी देवगौड़ा एक हज़ार नौ सौ छियानवे में देश के प्रधानमंत्री बने थे।
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Vastu Tips : वास्तु के अनुसार ईशान कोण या उत्तर पूर्व दिशा को बहुत ही पवित्र माना जाता है. इसलिए इस दिशा में कुछ चीजों का होना बहुत ही अशुभ होता है. ऐसा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है. आइए जानें कौन सी हैं ये चीजें.
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Vastu Tips : वास्तु के अनुसार ईशान कोण या उत्तर पूर्व दिशा को बहुत ही पवित्र माना जाता है. इसलिए इस दिशा में कुछ चीजों का होना बहुत ही अशुभ होता है. ऐसा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है. आइए जानें कौन सी हैं ये चीजें.
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कि मुक्त जीव सदा ऊपर को गमन करता ही रहता है कभी ठहरता ही नही है उसके निराकरण करने के लिये "लोक के अग्रभाग में स्थित है" ऐसा विशेषरण दिया गया है।
इस प्रकार से सिद्ध परमेष्ठी तीन लोक के मस्तक पर विराजमान अनन्तानन्त काल तक अनन्त सुख का अनुभव करते रहते है उन सिद्धों को हमारा मन, वचन, काय पूर्वक नमस्कार होवे । * रामो प्रतीतारणागदवट्टमारणकालत्तय सिद्धारणं
[ लेखक - श्री प० बशीधरजी न्यायालकार, इन्दौर ]
मोक्ष शब्द का अर्थ छूटना है, अत. मोक्ष शब्द ही बद्धदशा का संकेत है। पहले बद्धदशा होगी तभी तो उससे छूटने रूप मुक्तदशा हो सकेगी। जीव की बद्धदशा अनादिकालीन है, इसका यह मतलब नहीं लगाना चाहिये कि वह कभी नष्ट नहीं होगी । भव्य जीव की बद्धदशा अनादि सान्त है । आचार्यों ने कहा है -
'कश्चिज्जीवः कृत्स्नकर्मतिविप्रमुच्यते, बन्धहेत्वभावनिर्जरावत्त्वात्'
अर्थात् कोई जीव समस्त कर्म प्रदेशो से विप्रमुक्त होता है क्योंकि वह बन्ध कारणों के अभाव और निर्जरा से युक्त होता है। तत्त्वार्थ सूत्रकार ने भी मोक्ष का यही लक्षण कहा है- 'बन्धहेत्वभावनिर्जराभ्यां कृत्स्नकर्मविप्रमोक्षो मोक्षः' बन्धहेत्वभाव अर्थात् संवर और निर्जरा के द्वारा समस्त कर्मों का विशेषेगा प्रकर्पेगा- विशेष और प्रकर्पता के साथ छूट जाना मोक्ष है । यह मोक्ष मोहक्षय पूर्वक होता है। पहले मोह का क्षय होने से केवलज्ञान प्राप्त होता है और उसके बाद मोक्ष प्राप्त होता है। नाम के आदि अक्षर से सम्पूर्ण नामका बोध होता है अतः 'मो' से मोक्ष और 'क्ष' से क्षय का बोध होता है । इस प्रकार मो० क्ष० शब्द ही मोह क्षय को सूचित करता है। मोह, बन्ध का कारण है तो उसका क्षय मोक्ष का कारण अवश्य होगा ।
'मलादेवेंकल्प हि मण्यादेमंल्य' मल आदि का अभाव होना ही मरिण आदि की निर्मलता है। इसी प्रकार भावकर्म और द्रव्यकर्म रूप मल का अभाव होना ही आत्मा की निर्मलता है । आत्मा की निर्मलना कहो या मोक्ष, एक ही बात है। पहले भावमोक्ष होता है पीछे द्रव्य मोक्ष । भावो की मलिनता ही इस जीव को परेशान करती है। परः ईशानो यस्य स परेशान : ' इस व्युत्पत्ति के अनुसार परेशान का अर्थ परतन्त्र होना है । लोक मे परेशान का अर्थ कष्टदशापन्न होता है। आत्मा यद्यपि अनन्त शक्ति सम्पन्न है
तथापि मोहजनित मलिनता उसकी उस अनन्त शक्ति को प्रकट नहीं होने देती। सब जानते है कि पानी आग को बुझा देता है। आग पर पानी पडा और आग बुझी । परन्तु जब पानी और आग के बीच एक सूत मोटी ताबा, पीतल आदि की चद्दर होती है तब वह आग पानी को भाप बनाकर समाप्त कर देती है । इसी प्रकार आत्मा और कर्म के बीच यदि मोहजन्य मलिनतारूपी चद्दर विद्यमान है तो कर्म आत्मा को अत्यन्त दुखी कर देते हैं। जो आत्मा कर्मों को नष्ट करने का सामर्थ्य रखती है वह मोहजन्य मलिनता के सद्भाव मे समय प्रबद्ध प्रमाण कर्मों के द्वारा बद्ध हो जाती है ।
सांख्य कारिका में कहा है ----
धर्मेण गमनमूर्ध्व गमनमधस्ताद्भवत्यधर्मेण । ज्ञानेन चापवर्गो विपर्ययादिष्यते बन्धः ।।
धर्म से ऊर्ध्वगमन होता है अर्थात् स्वर्ग की प्राप्ति होती है, अधर्म से नीचे गमन होता है अर्थात् नरक की प्राप्ति होती है, ज्ञान से अपवर्गमोक्ष प्राप्त होता है और अज्ञान से बन्ध होता है ।
यदि कर्मबन्ध से बचना है तो अज्ञान से बचो । यहाँ अज्ञान का अर्थ मोहोदय से दूषित मिथ्याज्ञान है। मोक्षाभिलाषी जीव को उससे दूर रहना चाहिये । यह जीव मोक्ष प्राप्ति के लिये प्रयत्न तो करता है परन्तु स्वरूप की और लक्ष्य न होने से उसका वह प्रयत्न सफल नहीं हो पाता। एक ओर पत्थरो का ढेर लगा था और एक ओर जलाशय था। पत्थरों के ढेर मे 'पारसमरिण' है यह सुनकर उसे प्रयत्न करने के लिये कोई तैयार हुआ । 'पारसमणि के घिसने से लोहा सुवर्णमय हो जाता है यह सुनकर पत्थरो के ढेर से एक पत्थर उठाता और लोहे पर घिसकर जलाशय मे फक देता। यह करते करते एक बार उसके हाथ मे पारसमणि आगया परन्तु मस्कारवश उसने उसे लोहे पर घिमा और पानी में फेंक दिया। पानी में फेंक देने के बाद जब लोहे को देखता है तब वह सुवर्णमय दिखता है। अब क्या होता, पारसमरिण को तो वह संस्कार वश पानी में फेंक चुका था। अब उसकी पुन प्राप्ति दूभर हो गई । इसी प्रकार यह जीव शरीराश्रित क्रियाएं तो बहुत करता है परन्तु स्वभाव की ओर लक्ष्य नहीं देना । क्रियाओ के करने का निषेध नहीं है। अपने पद के अनुरूप क्रियाओं का करना आवश्यक है परन्तु उन क्रियाओ को करते हुए अपने वीतराग स्वभाव की ओर लक्ष्य भी तो रक्खो । उसके बिना खाली क्रियाओ से क्या होने जाने वाला है। अमृतचन्द्रसूरि ने कहा हैसिद्धान्तोऽयमुदात्तचित्तचरितंर्मोक्षाथिभिः सेव्यतां
शुद्ध चिन्मयमेकमेव परम ज्योतिः सदैवास्म्यहम् । एते ये तु समुल्लसन्ति विविधा भावाः पृथग्लक्षणास्तेऽहं नास्मि यतोऽत्र ते मम परद्रव्य समग्रा अपि ।।
मोक्ष )
मोक्षाभिलाषी जीवों को अपने चित्त की प्रवृत्ति को उदात्त बनाकर निरन्तर इस सिद्धान्त की उपासना करना चाहिये कि मैं तो एक शुद्ध चैतन्य ज्योतिःस्त्ररूप ही हूँ । ये जो नाना प्रकार के विकारीभाव समुल्लसित हो रहे है वे सबके सब पर द्रव्य है, मेरे नही ।
इतना पुरुषार्थ तो प्रत्येक जीव को करना चाहिये कि वह स्वभाव और विभाव को समझ सके । गोताखोर मनुष्य अपने मुँह मे तेल भर कर गोता लगाता है । तलहटी मे पहुँचने पर वह तेल को बुलक देता है जिससे वहाँ की सब वस्तुएँ उसे स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं - यह मगर है, यह मच्छ है, यह प्रवाल है, यह मोती है। इसी प्रकार मोक्षार्थी पुरुष भेदविज्ञान के प्रकाश में स्व और परको अच्छी तरह समझने लगता है। परको पर समझ कर जो उसका परित्याग करता है और अपने स्वरूप में संवृत रहता है वही बन्ध से बचता है। कहा हैपरद्रव्यग्रहं कुर्वन् बध्येतापराधवान् ।
बध्येतानपराधो ना स्वद्रव्ये सवृतो मुनिः ।।
परद्रव्य को ग्रहण करने वाला मनुष्य अपराधी कहलाता है और अपराधी होने से बन्ध को प्राप्त होता है परन्तु जो मुनि स्त्रकीय द्रव्य में अपने ज्ञाता द्रष्टा स्वरूप में सबूत रहता है वह अपराधी नहीं कहलाता और इसीलिये बन्ध को प्राप्त नहीं होता ।
यह जीव शेखचिल्ली के समान अपने आप नाना संकल्पो को करता है और उनमे निमग्न हो दुःख उठाता है । एक गाँव मे शेखचिल्ली नामका एक आदमी रहता था। गरीब होने से मजदूरी करता था। एक बार एक तेलिन ने उससे कहा - भैया, शेखचिल्ली हमारी यह तेल की मटकी हमारे घर पहुँचा दो, दो पैसे तुम्हे दूगी। दो पैसे मिलने की आशा से शेख चिल्ली ने तेल की मटकी अपने शिर पर रख ली । चलते चलते यह सोचता है कि दो पैसो से अमुक चीज लाकर बाजार में बेचू गा तो दो आने हो जायेंगे और दो आने की अमुक चीज लाकर बेचू गा तो दो रुपये आ जायेंगे। धीरे धीरे मैं बड़ा आदमी हो जाऊँगा, एक मकान बनवा लू गा, घर मे स्त्री आ जायगी, बाल बच्चे हो जायेंगे, दोपहर के समय बच्चे आकर कहेंगे- 'दद्दा, रोटी हो गई, भोजन करलो' । तब मैं अकड कर कहूँगा, अभी क्या जल्दी है ? इसी धुन में उसने शिर हिलाया, जिससे तेल की मटकी नीचे गिर कर फूट गई, तेल बह गया । तेलिन कहती है यह तूने क्या किया ? हमारी मटकी फोड़ दी, तेल बेकार कर दिया। शेख चिल्ली ने कहा कि तेरी तो मटकी ही फूटी है पर मेरी तो गृहस्थी चौपट हो गई । वास्तव में यही हाल समार के प्राणियों का हो रहा है ।
करिष्यामि करिष्यामि करिष्यामीति चिन्तया । मरिष्यामि मरिष्यामि मरिष्यामीति विस्मृतम् ।।
करने की चिन्ता मे यह जीव मरने की बात भूल जाता है। अपनी इच्छाओ को निरन्तर बढ़ाता ही रहता है पर उनकी पूर्ति नहीं कर पाता। एक कवि ने कहा है४६२ ]
निःस्वो निष्कशतं शती दशशतं लक्षं सहस्राधियो
लक्षेक्षः क्षितिपालतां क्षितिपतिश्चक्रेशतां वाञ्छति । चक्रेशः पुनरिन्द्रतां सुरपतिब्रह्म पदं वाञ्छति
ब्रह्मा विष्णुपदं हरिहर पदं हयाशावधि को गतः ।।
जिसके पास कुछ नही है वह सौ मुहरें चाहता है, सो मुहरो वाला हजार चाहता है, हजार वाला लाख चाहता है, लाख वाला राजा बनना चाहता है, राजा चक्रवर्ती होना चाहता है, चक्रवर्ती इन्द्रपद चाहता है, इन्द्र ब्रह्मा बनना चाहता है, ब्रह्मा विष्णु पद की इच्छा रखता है और विष्णु शंकर बनना चाहता है। वास्तव मे आशा की सीमा को कौन प्राप्त हुआ है ? अर्थात् कोई नही ।
विस्तार बहुत हो गया, नही तो बताता कि यौग, बौद्ध, वैशेषिक, साख्य, वेदान्ती आदि मोक्ष का कैसा स्वरूप मानते है, उस स्वरूप मे कहा क्या खामी है ? इसकी चर्चा करता। यह भी बताता कि किसगुरण स्थान में किन किन कर्म प्रकतियो का क्षय होकर अन्त मे मोक्ष प्राप्त होता है परन्तु इसकी आवश्यकता नहीं देखता ।
शुद्धनय से आत्मा का जो स्वभाव कहा है उसी को प्राप्त करने का प्रयत्न होना चाहिये ।
जो पस्सदि प्रप्पाणं अबद्ध पुट्ठ अणण्णयं णियदं । प्रविसेस मसंजुत्तं तं सुद्धणयं विजाणाहि ।।
जो आत्मा को अबद्धस्पष्ट, अनन्य, नियत अविशेष, और पर के सयोग मे रद्दित देखता है उसे शुद्ध नय जानो ।
यही भाव अमृतचन्द्र स्वामी ने 'आत्मस्वभाव पर भाव भिन्न' तथा 'एकत्वे नियतस्य शुद्धनयतो व्याप्लुयं दस्यात्मनः' आदि कलश काव्यों में कहा है ।
आजकल वक्ता लोग श्रोताओं को खुश करने का भाव रखते है। इसलिये इधर उधर की चर्चा कर आत्मतत्त्व को अछूता छोड़ देते है। परन्तु यह निश्चित है कि उसको छोड देने से न श्रोताओं को लाभ होगा और न वक्ताओ का वक्तापन सफल होगा। कहा हैविद्वन्मन्यतया सदस्यतितरा मुद्दण्ड वाग्डम्बराः
शृङ्गारादिरसैः प्रमोद जनकं व्याख्यान मातन्वते । एते च प्रति सद्म सन्ति बहवो व्यामोह विस्तारिणो
येभ्यस्तत्परमात्मतत्त्व विषयं ज्ञानं तु ते दुर्लभाः ॥
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कि मुक्त जीव सदा ऊपर को गमन करता ही रहता है कभी ठहरता ही नही है उसके निराकरण करने के लिये "लोक के अग्रभाग में स्थित है" ऐसा विशेषरण दिया गया है। इस प्रकार से सिद्ध परमेष्ठी तीन लोक के मस्तक पर विराजमान अनन्तानन्त काल तक अनन्त सुख का अनुभव करते रहते है उन सिद्धों को हमारा मन, वचन, काय पूर्वक नमस्कार होवे । * रामो प्रतीतारणागदवट्टमारणकालत्तय सिद्धारणं [ लेखक - श्री पशून्य बशीधरजी न्यायालकार, इन्दौर ] मोक्ष शब्द का अर्थ छूटना है, अत. मोक्ष शब्द ही बद्धदशा का संकेत है। पहले बद्धदशा होगी तभी तो उससे छूटने रूप मुक्तदशा हो सकेगी। जीव की बद्धदशा अनादिकालीन है, इसका यह मतलब नहीं लगाना चाहिये कि वह कभी नष्ट नहीं होगी । भव्य जीव की बद्धदशा अनादि सान्त है । आचार्यों ने कहा है - 'कश्चिज्जीवः कृत्स्नकर्मतिविप्रमुच्यते, बन्धहेत्वभावनिर्जरावत्त्वात्' अर्थात् कोई जीव समस्त कर्म प्रदेशो से विप्रमुक्त होता है क्योंकि वह बन्ध कारणों के अभाव और निर्जरा से युक्त होता है। तत्त्वार्थ सूत्रकार ने भी मोक्ष का यही लक्षण कहा है- 'बन्धहेत्वभावनिर्जराभ्यां कृत्स्नकर्मविप्रमोक्षो मोक्षः' बन्धहेत्वभाव अर्थात् संवर और निर्जरा के द्वारा समस्त कर्मों का विशेषेगा प्रकर्पेगा- विशेष और प्रकर्पता के साथ छूट जाना मोक्ष है । यह मोक्ष मोहक्षय पूर्वक होता है। पहले मोह का क्षय होने से केवलज्ञान प्राप्त होता है और उसके बाद मोक्ष प्राप्त होता है। नाम के आदि अक्षर से सम्पूर्ण नामका बोध होता है अतः 'मो' से मोक्ष और 'क्ष' से क्षय का बोध होता है । इस प्रकार मोशून्य क्षशून्य शब्द ही मोह क्षय को सूचित करता है। मोह, बन्ध का कारण है तो उसका क्षय मोक्ष का कारण अवश्य होगा । 'मलादेवेंकल्प हि मण्यादेमंल्य' मल आदि का अभाव होना ही मरिण आदि की निर्मलता है। इसी प्रकार भावकर्म और द्रव्यकर्म रूप मल का अभाव होना ही आत्मा की निर्मलता है । आत्मा की निर्मलना कहो या मोक्ष, एक ही बात है। पहले भावमोक्ष होता है पीछे द्रव्य मोक्ष । भावो की मलिनता ही इस जीव को परेशान करती है। परः ईशानो यस्य स परेशान : ' इस व्युत्पत्ति के अनुसार परेशान का अर्थ परतन्त्र होना है । लोक मे परेशान का अर्थ कष्टदशापन्न होता है। आत्मा यद्यपि अनन्त शक्ति सम्पन्न है तथापि मोहजनित मलिनता उसकी उस अनन्त शक्ति को प्रकट नहीं होने देती। सब जानते है कि पानी आग को बुझा देता है। आग पर पानी पडा और आग बुझी । परन्तु जब पानी और आग के बीच एक सूत मोटी ताबा, पीतल आदि की चद्दर होती है तब वह आग पानी को भाप बनाकर समाप्त कर देती है । इसी प्रकार आत्मा और कर्म के बीच यदि मोहजन्य मलिनतारूपी चद्दर विद्यमान है तो कर्म आत्मा को अत्यन्त दुखी कर देते हैं। जो आत्मा कर्मों को नष्ट करने का सामर्थ्य रखती है वह मोहजन्य मलिनता के सद्भाव मे समय प्रबद्ध प्रमाण कर्मों के द्वारा बद्ध हो जाती है । सांख्य कारिका में कहा है ---- धर्मेण गमनमूर्ध्व गमनमधस्ताद्भवत्यधर्मेण । ज्ञानेन चापवर्गो विपर्ययादिष्यते बन्धः ।। धर्म से ऊर्ध्वगमन होता है अर्थात् स्वर्ग की प्राप्ति होती है, अधर्म से नीचे गमन होता है अर्थात् नरक की प्राप्ति होती है, ज्ञान से अपवर्गमोक्ष प्राप्त होता है और अज्ञान से बन्ध होता है । यदि कर्मबन्ध से बचना है तो अज्ञान से बचो । यहाँ अज्ञान का अर्थ मोहोदय से दूषित मिथ्याज्ञान है। मोक्षाभिलाषी जीव को उससे दूर रहना चाहिये । यह जीव मोक्ष प्राप्ति के लिये प्रयत्न तो करता है परन्तु स्वरूप की और लक्ष्य न होने से उसका वह प्रयत्न सफल नहीं हो पाता। एक ओर पत्थरो का ढेर लगा था और एक ओर जलाशय था। पत्थरों के ढेर मे 'पारसमरिण' है यह सुनकर उसे प्रयत्न करने के लिये कोई तैयार हुआ । 'पारसमणि के घिसने से लोहा सुवर्णमय हो जाता है यह सुनकर पत्थरो के ढेर से एक पत्थर उठाता और लोहे पर घिसकर जलाशय मे फक देता। यह करते करते एक बार उसके हाथ मे पारसमणि आगया परन्तु मस्कारवश उसने उसे लोहे पर घिमा और पानी में फेंक दिया। पानी में फेंक देने के बाद जब लोहे को देखता है तब वह सुवर्णमय दिखता है। अब क्या होता, पारसमरिण को तो वह संस्कार वश पानी में फेंक चुका था। अब उसकी पुन प्राप्ति दूभर हो गई । इसी प्रकार यह जीव शरीराश्रित क्रियाएं तो बहुत करता है परन्तु स्वभाव की ओर लक्ष्य नहीं देना । क्रियाओ के करने का निषेध नहीं है। अपने पद के अनुरूप क्रियाओं का करना आवश्यक है परन्तु उन क्रियाओ को करते हुए अपने वीतराग स्वभाव की ओर लक्ष्य भी तो रक्खो । उसके बिना खाली क्रियाओ से क्या होने जाने वाला है। अमृतचन्द्रसूरि ने कहा हैसिद्धान्तोऽयमुदात्तचित्तचरितंर्मोक्षाथिभिः सेव्यतां शुद्ध चिन्मयमेकमेव परम ज्योतिः सदैवास्म्यहम् । एते ये तु समुल्लसन्ति विविधा भावाः पृथग्लक्षणास्तेऽहं नास्मि यतोऽत्र ते मम परद्रव्य समग्रा अपि ।। मोक्ष ) मोक्षाभिलाषी जीवों को अपने चित्त की प्रवृत्ति को उदात्त बनाकर निरन्तर इस सिद्धान्त की उपासना करना चाहिये कि मैं तो एक शुद्ध चैतन्य ज्योतिःस्त्ररूप ही हूँ । ये जो नाना प्रकार के विकारीभाव समुल्लसित हो रहे है वे सबके सब पर द्रव्य है, मेरे नही । इतना पुरुषार्थ तो प्रत्येक जीव को करना चाहिये कि वह स्वभाव और विभाव को समझ सके । गोताखोर मनुष्य अपने मुँह मे तेल भर कर गोता लगाता है । तलहटी मे पहुँचने पर वह तेल को बुलक देता है जिससे वहाँ की सब वस्तुएँ उसे स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं - यह मगर है, यह मच्छ है, यह प्रवाल है, यह मोती है। इसी प्रकार मोक्षार्थी पुरुष भेदविज्ञान के प्रकाश में स्व और परको अच्छी तरह समझने लगता है। परको पर समझ कर जो उसका परित्याग करता है और अपने स्वरूप में संवृत रहता है वही बन्ध से बचता है। कहा हैपरद्रव्यग्रहं कुर्वन् बध्येतापराधवान् । बध्येतानपराधो ना स्वद्रव्ये सवृतो मुनिः ।। परद्रव्य को ग्रहण करने वाला मनुष्य अपराधी कहलाता है और अपराधी होने से बन्ध को प्राप्त होता है परन्तु जो मुनि स्त्रकीय द्रव्य में अपने ज्ञाता द्रष्टा स्वरूप में सबूत रहता है वह अपराधी नहीं कहलाता और इसीलिये बन्ध को प्राप्त नहीं होता । यह जीव शेखचिल्ली के समान अपने आप नाना संकल्पो को करता है और उनमे निमग्न हो दुःख उठाता है । एक गाँव मे शेखचिल्ली नामका एक आदमी रहता था। गरीब होने से मजदूरी करता था। एक बार एक तेलिन ने उससे कहा - भैया, शेखचिल्ली हमारी यह तेल की मटकी हमारे घर पहुँचा दो, दो पैसे तुम्हे दूगी। दो पैसे मिलने की आशा से शेख चिल्ली ने तेल की मटकी अपने शिर पर रख ली । चलते चलते यह सोचता है कि दो पैसो से अमुक चीज लाकर बाजार में बेचू गा तो दो आने हो जायेंगे और दो आने की अमुक चीज लाकर बेचू गा तो दो रुपये आ जायेंगे। धीरे धीरे मैं बड़ा आदमी हो जाऊँगा, एक मकान बनवा लू गा, घर मे स्त्री आ जायगी, बाल बच्चे हो जायेंगे, दोपहर के समय बच्चे आकर कहेंगे- 'दद्दा, रोटी हो गई, भोजन करलो' । तब मैं अकड कर कहूँगा, अभी क्या जल्दी है ? इसी धुन में उसने शिर हिलाया, जिससे तेल की मटकी नीचे गिर कर फूट गई, तेल बह गया । तेलिन कहती है यह तूने क्या किया ? हमारी मटकी फोड़ दी, तेल बेकार कर दिया। शेख चिल्ली ने कहा कि तेरी तो मटकी ही फूटी है पर मेरी तो गृहस्थी चौपट हो गई । वास्तव में यही हाल समार के प्राणियों का हो रहा है । करिष्यामि करिष्यामि करिष्यामीति चिन्तया । मरिष्यामि मरिष्यामि मरिष्यामीति विस्मृतम् ।। करने की चिन्ता मे यह जीव मरने की बात भूल जाता है। अपनी इच्छाओ को निरन्तर बढ़ाता ही रहता है पर उनकी पूर्ति नहीं कर पाता। एक कवि ने कहा हैचार सौ बासठ ] निःस्वो निष्कशतं शती दशशतं लक्षं सहस्राधियो लक्षेक्षः क्षितिपालतां क्षितिपतिश्चक्रेशतां वाञ्छति । चक्रेशः पुनरिन्द्रतां सुरपतिब्रह्म पदं वाञ्छति ब्रह्मा विष्णुपदं हरिहर पदं हयाशावधि को गतः ।। जिसके पास कुछ नही है वह सौ मुहरें चाहता है, सो मुहरो वाला हजार चाहता है, हजार वाला लाख चाहता है, लाख वाला राजा बनना चाहता है, राजा चक्रवर्ती होना चाहता है, चक्रवर्ती इन्द्रपद चाहता है, इन्द्र ब्रह्मा बनना चाहता है, ब्रह्मा विष्णु पद की इच्छा रखता है और विष्णु शंकर बनना चाहता है। वास्तव मे आशा की सीमा को कौन प्राप्त हुआ है ? अर्थात् कोई नही । विस्तार बहुत हो गया, नही तो बताता कि यौग, बौद्ध, वैशेषिक, साख्य, वेदान्ती आदि मोक्ष का कैसा स्वरूप मानते है, उस स्वरूप मे कहा क्या खामी है ? इसकी चर्चा करता। यह भी बताता कि किसगुरण स्थान में किन किन कर्म प्रकतियो का क्षय होकर अन्त मे मोक्ष प्राप्त होता है परन्तु इसकी आवश्यकता नहीं देखता । शुद्धनय से आत्मा का जो स्वभाव कहा है उसी को प्राप्त करने का प्रयत्न होना चाहिये । जो पस्सदि प्रप्पाणं अबद्ध पुट्ठ अणण्णयं णियदं । प्रविसेस मसंजुत्तं तं सुद्धणयं विजाणाहि ।। जो आत्मा को अबद्धस्पष्ट, अनन्य, नियत अविशेष, और पर के सयोग मे रद्दित देखता है उसे शुद्ध नय जानो । यही भाव अमृतचन्द्र स्वामी ने 'आत्मस्वभाव पर भाव भिन्न' तथा 'एकत्वे नियतस्य शुद्धनयतो व्याप्लुयं दस्यात्मनः' आदि कलश काव्यों में कहा है । आजकल वक्ता लोग श्रोताओं को खुश करने का भाव रखते है। इसलिये इधर उधर की चर्चा कर आत्मतत्त्व को अछूता छोड़ देते है। परन्तु यह निश्चित है कि उसको छोड देने से न श्रोताओं को लाभ होगा और न वक्ताओ का वक्तापन सफल होगा। कहा हैविद्वन्मन्यतया सदस्यतितरा मुद्दण्ड वाग्डम्बराः शृङ्गारादिरसैः प्रमोद जनकं व्याख्यान मातन्वते । एते च प्रति सद्म सन्ति बहवो व्यामोह विस्तारिणो येभ्यस्तत्परमात्मतत्त्व विषयं ज्ञानं तु ते दुर्लभाः ॥
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कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव कराए गए थे। इस बार नाहन की श्रुति पार्षद बनी हैं। श्रुति महज 23 वर्ष की हैं। वह पहली बार राजनीति में उतरीं हैं। उन्होंने पहली बार में ही विजय हासिल की है। नगर निकाय चुनाव में वह प्रदेश में सबसे कम उम्र की पार्षद हो सकती हैं। 25 अगस्त 1997 को जन्मी श्रुति चौहान ने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के तौर पर राजनीति में कदम रखा और 28 मतों से जीत दर्ज की है। श्रुति चौहान ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी तुलसा कश्यप को चुनावी मैदान में पटखनी दी है।
बता दें कि श्रुति नगर परिषद नाहन के वार्ड नंबर चार शमशेर गंज से चुनाव लड़ीं थी। उन्हें कुल 327 मत हासिल हुए। जबकि, भाजपा समर्थित तुलसा कश्यप को 229 वोट मिले। खबरों के अनुसार श्रुति चौहान अभी स्नातक अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। श्रुति कॉलेज में एनएसयूआई की समर्थक रहीं थी लेकिन उन्होंने एनएसयूआई में कभी भी सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर हिस्सा नहीं लिया। श्रुति चौहान ने बताया कि वह अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं और अंतिम वर्ष के नतीजों का इंतजार है। श्रुति ने कहा कि वह राजनीति में आने का शौक रखती थीं और आज इसी का परिणाम है कि वह विजयी हुई हैं।
पंचायतीराज चुनाव में प्रदेश में सबसे कम उम्र की प्रधान मंडी जिले के सराज क्षेत्र के तहत आने वाली थरजून पंचायत के केलोधार गांव की रहने वाली जबना चौहान रह चुकी हैं। 2016 में जबना चौहान थरजून पंचायत से बतौर पंचायत प्रधान चुनकर आईं थीं। उस वक्त जबना की उम्र 22 साल थी। अब नगर निकाय चुनाव में महज श्रुति 23 साल की उम्र में पार्षद बनी हैं, जो प्रदेश में सबसे कम उम्र की पार्षद हो सकती हैं।
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कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव कराए गए थे। इस बार नाहन की श्रुति पार्षद बनी हैं। श्रुति महज तेईस वर्ष की हैं। वह पहली बार राजनीति में उतरीं हैं। उन्होंने पहली बार में ही विजय हासिल की है। नगर निकाय चुनाव में वह प्रदेश में सबसे कम उम्र की पार्षद हो सकती हैं। पच्चीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे को जन्मी श्रुति चौहान ने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के तौर पर राजनीति में कदम रखा और अट्ठाईस मतों से जीत दर्ज की है। श्रुति चौहान ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी तुलसा कश्यप को चुनावी मैदान में पटखनी दी है। बता दें कि श्रुति नगर परिषद नाहन के वार्ड नंबर चार शमशेर गंज से चुनाव लड़ीं थी। उन्हें कुल तीन सौ सत्ताईस मत हासिल हुए। जबकि, भाजपा समर्थित तुलसा कश्यप को दो सौ उनतीस वोट मिले। खबरों के अनुसार श्रुति चौहान अभी स्नातक अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। श्रुति कॉलेज में एनएसयूआई की समर्थक रहीं थी लेकिन उन्होंने एनएसयूआई में कभी भी सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर हिस्सा नहीं लिया। श्रुति चौहान ने बताया कि वह अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं और अंतिम वर्ष के नतीजों का इंतजार है। श्रुति ने कहा कि वह राजनीति में आने का शौक रखती थीं और आज इसी का परिणाम है कि वह विजयी हुई हैं। पंचायतीराज चुनाव में प्रदेश में सबसे कम उम्र की प्रधान मंडी जिले के सराज क्षेत्र के तहत आने वाली थरजून पंचायत के केलोधार गांव की रहने वाली जबना चौहान रह चुकी हैं। दो हज़ार सोलह में जबना चौहान थरजून पंचायत से बतौर पंचायत प्रधान चुनकर आईं थीं। उस वक्त जबना की उम्र बाईस साल थी। अब नगर निकाय चुनाव में महज श्रुति तेईस साल की उम्र में पार्षद बनी हैं, जो प्रदेश में सबसे कम उम्र की पार्षद हो सकती हैं।
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लखनऊ, 10 सितंबरः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मथुरा-वृंदावन के 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित किया कर दिया है। इसी के साथ क्षेत्र में शराब और मांस की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। तीर्थ स्थल घोषित किए गए इलाके में 22 नगर निगम वार्ड क्षेत्र आते हैं। योगी सरकार ने यह फैसला भगवान कृष्ण (गोपाल) से जुड़े ब्रज क्षेत्र में यहां हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आस्था के सम्मान में लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई। ट्वीट के मुताबिक, भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे में आने वाले नगर निगम के 22 वार्डों को तीर्थस्थल घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद इस क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री प्रतिबंधित होगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर इस बार मथुरा पहुंचे थे, जहां उन्होंने जन्माष्टमी मनाई थी। जन्माष्टमी के कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी ने कृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचकर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन किए थे। मथुरा में सीएम योगी ने कहा था कि पहले त्योहार में बधाई देने के लिए विधायक, मुख्यमंत्री यहां नहीं आते थे और जो पहले मंदिरों में जाने से डरते थे, वे अब कह रहे हैं कि राम मेरे हैं, कृष्ण भी मेरे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा के सातों तीर्थ स्थल क्षेत्रों में शराब और मांस की बिक्री पर रोक लगाए जाने को कहा था। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिए थे। धर्मार्थ कार्य विभाग के मुताबिक, मथुरा के 7 इलाकों को हाल ही में तीर्थ क्षेत्र का दर्जा दिया गया है।
बता दें, मथुरा कान्हा के शहर होने के नाते पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां देश-विदेश के श्रद्धालू आते हैं। अब मथुरा में राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे छटीकरा कस्बे में भारत की सबसे ऊंची शिवमूर्ति का निर्माण होने जा रहा है। जेके ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री वैष्णों देवी मंदिर परिसर में चार धाम स्थापित किए जा रहे हैं। इसमें महादेव के साथ श्री राधाकृष्ण व न्याय देव शनि महाराज के मन्दिर स्थापित होंगे।
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लखनऊ, दस सितंबरः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मथुरा-वृंदावन के दस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तीर्थ स्थल घोषित किया कर दिया है। इसी के साथ क्षेत्र में शराब और मांस की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। तीर्थ स्थल घोषित किए गए इलाके में बाईस नगर निगम वार्ड क्षेत्र आते हैं। योगी सरकार ने यह फैसला भगवान कृष्ण से जुड़े ब्रज क्षेत्र में यहां हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के आस्था के सम्मान में लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई। ट्वीट के मुताबिक, भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के दस वर्ग किलोमीटर के दायरे में आने वाले नगर निगम के बाईस वार्डों को तीर्थस्थल घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद इस क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री प्रतिबंधित होगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर इस बार मथुरा पहुंचे थे, जहां उन्होंने जन्माष्टमी मनाई थी। जन्माष्टमी के कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी ने कृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचकर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन किए थे। मथुरा में सीएम योगी ने कहा था कि पहले त्योहार में बधाई देने के लिए विधायक, मुख्यमंत्री यहां नहीं आते थे और जो पहले मंदिरों में जाने से डरते थे, वे अब कह रहे हैं कि राम मेरे हैं, कृष्ण भी मेरे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा के सातों तीर्थ स्थल क्षेत्रों में शराब और मांस की बिक्री पर रोक लगाए जाने को कहा था। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिए थे। धर्मार्थ कार्य विभाग के मुताबिक, मथुरा के सात इलाकों को हाल ही में तीर्थ क्षेत्र का दर्जा दिया गया है। बता दें, मथुरा कान्हा के शहर होने के नाते पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां देश-विदेश के श्रद्धालू आते हैं। अब मथुरा में राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे छटीकरा कस्बे में भारत की सबसे ऊंची शिवमूर्ति का निर्माण होने जा रहा है। जेके ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री वैष्णों देवी मंदिर परिसर में चार धाम स्थापित किए जा रहे हैं। इसमें महादेव के साथ श्री राधाकृष्ण व न्याय देव शनि महाराज के मन्दिर स्थापित होंगे।
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Jamtara : जामताड़ा (Jamtara)- जिप अध्यक्ष (जिला परिषद्) अध्यक्ष पद का चुनाव राधारानी सोरेन ने जीती है. अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व जिप अध्यक्ष दीपिका बास्की को दो वोटों से शिकस्त दी. राधारानी को कुल 8 मत मिले. वहीं दीपिका बास्की को 6 वोटों से संतोष करना पड़ा. जिले में जिप सदस्यों की कुल संख्या 14 है. सभी 14 सदस्यों ने मतदान किए.
वोटिंग के बाद डीसी फैज अक अहमद मुमताज ने राधारानी को विजयी घोषित किया. राधारानी बीजेपी समर्थक और दीपिका बेसरा कांग्रेस समर्थक है. चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद बीजेपी खेमे में खुशी की लहर और कांग्रेसी खेमे में मायूसी छा गई. बीजेपी कार्यकर्ता एक दूसरे को शुभकामनाएं दी.
दीपिका बास्की की हार से स्थानीय कांग्रेस विधायक डॉ. इरफान अंसारी को राजनीतिक रुप से गहरा झटका लगा है. मतदान शुरू होने से पूर्व वे समाहरणालय के बाहर जमे दिखे. चुनाव परिणाम घोषित होते ही वे वहां से खिसक गए. जामताड़ा की बदली राजनीतिक फिजां का असर कांग्रेसियों के मनोबल पर पड़ा है.
हालांकि जिप अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव दलगत आधार पर नहीं लड़े जाते. फिर भी उम्मीदवार पार्टी समर्थक होते हैं. डॉ. इरफान अंसारी ने दीपिका बेसरा के नाम की घोषणा की थी.
जिप उपाध्यक्ष का चुनाव फूलकुमारी देवी ने जीतीं है. अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सुरेंद्र मंडल को उन्होंने 1 वोट से शिकस्त दी. फूलकुमारी को कुल 7 वोट मिले. सुरेंद्र मंडल को 6 वोट प्राप्त हुए. एक वोट को अमान्य करार दिया गया. फूलकुमारी बीजेपी समर्थक है. यहां भी कांग्रेस को झटका लगा. बीजेपी का जलवा बरकरार है.
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Jamtara : जामताड़ा - जिप अध्यक्ष अध्यक्ष पद का चुनाव राधारानी सोरेन ने जीती है. अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व जिप अध्यक्ष दीपिका बास्की को दो वोटों से शिकस्त दी. राधारानी को कुल आठ मत मिले. वहीं दीपिका बास्की को छः वोटों से संतोष करना पड़ा. जिले में जिप सदस्यों की कुल संख्या चौदह है. सभी चौदह सदस्यों ने मतदान किए. वोटिंग के बाद डीसी फैज अक अहमद मुमताज ने राधारानी को विजयी घोषित किया. राधारानी बीजेपी समर्थक और दीपिका बेसरा कांग्रेस समर्थक है. चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद बीजेपी खेमे में खुशी की लहर और कांग्रेसी खेमे में मायूसी छा गई. बीजेपी कार्यकर्ता एक दूसरे को शुभकामनाएं दी. दीपिका बास्की की हार से स्थानीय कांग्रेस विधायक डॉ. इरफान अंसारी को राजनीतिक रुप से गहरा झटका लगा है. मतदान शुरू होने से पूर्व वे समाहरणालय के बाहर जमे दिखे. चुनाव परिणाम घोषित होते ही वे वहां से खिसक गए. जामताड़ा की बदली राजनीतिक फिजां का असर कांग्रेसियों के मनोबल पर पड़ा है. हालांकि जिप अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव दलगत आधार पर नहीं लड़े जाते. फिर भी उम्मीदवार पार्टी समर्थक होते हैं. डॉ. इरफान अंसारी ने दीपिका बेसरा के नाम की घोषणा की थी. जिप उपाध्यक्ष का चुनाव फूलकुमारी देवी ने जीतीं है. अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सुरेंद्र मंडल को उन्होंने एक वोट से शिकस्त दी. फूलकुमारी को कुल सात वोट मिले. सुरेंद्र मंडल को छः वोट प्राप्त हुए. एक वोट को अमान्य करार दिया गया. फूलकुमारी बीजेपी समर्थक है. यहां भी कांग्रेस को झटका लगा. बीजेपी का जलवा बरकरार है.
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PATNA : केंद्र और राज्यों में ऊँचे पदों पर कार्यरत अधिकारी अपनी वेश भूषा और सादगी से आम लोगों का दिल जीत लेते हैं। ऐसे अधिकारियों की लम्बी फेहरिस्त है। बिहार के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ का नाम भी ऐसे ही अधिकारीयों में शामिल हैं। वे कभी ठेले पर जलेबी खाते दिख जाते हैं तो कभी रिक्शे पर बैठकर मौर्यालोक की सैर करते दिख जाते हैं।
एक बार फिर एस सिद्धार्थ की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। जिसमें वे सब्जी खरीदते देखे जा रहे हैं। तस्वीर पटना के राजेंद्र नगर स्थित सब्जी मंडी की बताई जा रही है। जिसमें आईएएस अधिकारी हाथों में सब्जी लेकर जा रहे हैं।
किसी तस्वीर में वे निम्बू और करेले का मोल मोलाई करते भी देखे जा रहे हैं। हालाँकि उन्हें किसी ने पहचान नहीं पाया। आईएएस अधिकारी निफिक्र होकर आम आदमी की तरह सब्जी की खरीदारी कर रहे हैं।
बताते चलें की डॉक्टर एस सिद्धार्थ बिहार कैडर के 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। एस सिद्धार्थ बिहार सीएम नीतीश कुमार के प्रधान सचिव हैं। एस सिद्धार्थ के पास इस वक्त गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव का भी जिम्मा है। एस सिद्धार्थ उद्योग और सामान्य प्रशासन समेत दूसरों विभागों का भी जिम्मा संभाल चुके हैं। इसके अलावे औरंगाबाद, भोजपुर और मुजफ्फरपुर के डीएम भी रह चुके हैं।
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PATNA : केंद्र और राज्यों में ऊँचे पदों पर कार्यरत अधिकारी अपनी वेश भूषा और सादगी से आम लोगों का दिल जीत लेते हैं। ऐसे अधिकारियों की लम्बी फेहरिस्त है। बिहार के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ का नाम भी ऐसे ही अधिकारीयों में शामिल हैं। वे कभी ठेले पर जलेबी खाते दिख जाते हैं तो कभी रिक्शे पर बैठकर मौर्यालोक की सैर करते दिख जाते हैं। एक बार फिर एस सिद्धार्थ की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। जिसमें वे सब्जी खरीदते देखे जा रहे हैं। तस्वीर पटना के राजेंद्र नगर स्थित सब्जी मंडी की बताई जा रही है। जिसमें आईएएस अधिकारी हाथों में सब्जी लेकर जा रहे हैं। किसी तस्वीर में वे निम्बू और करेले का मोल मोलाई करते भी देखे जा रहे हैं। हालाँकि उन्हें किसी ने पहचान नहीं पाया। आईएएस अधिकारी निफिक्र होकर आम आदमी की तरह सब्जी की खरीदारी कर रहे हैं। बताते चलें की डॉक्टर एस सिद्धार्थ बिहार कैडर के एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे बैच के आईएएस अधिकारी हैं। एस सिद्धार्थ बिहार सीएम नीतीश कुमार के प्रधान सचिव हैं। एस सिद्धार्थ के पास इस वक्त गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव का भी जिम्मा है। एस सिद्धार्थ उद्योग और सामान्य प्रशासन समेत दूसरों विभागों का भी जिम्मा संभाल चुके हैं। इसके अलावे औरंगाबाद, भोजपुर और मुजफ्फरपुर के डीएम भी रह चुके हैं।
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निर्मला, मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी उपन्यास है। इसका प्रकाशन सन १९२७ में हुआ था। सन १९२६ में दहेज प्रथा और अनमेल विवाह को आधार बना कर इस उपन्यास का लेखन प्रारम्भ हुआ। इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली महिलाओं की पत्रिका 'चाँद' में नवम्बर १९२५ से दिसम्बर १९२६ तक यह उपन्यास विभिन्न किस्तों में प्रकाशित हुआ। महिला-केन्द्रित साहित्य के इतिहास में इस उपन्यास का विशेष स्थान है। इस उपन्यास की कथा का केन्द्र और मुख्य पात्र 'निर्मला' नाम की १५ वर्षीय सुन्दर और सुशील लड़की है। निर्मला का विवाह एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से कर दिया जाता है। जिसके पूर्व पत्नी से तीन बेटे हैं। निर्मला का चरित्र निर्मल है, परन्तु फिर भी समाज में उसे अनादर एवं अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। उसकी पति परायणता काम नहीं आती। उस पर सन्देह किया जाता है, उसे परिस्थितियाँ उसे दोषी बना देती है। इस प्रकार निर्मला विपरीत परिस्थितियों से जूझती हुई मृत्यु को प्राप्त करती है। निर्मला में अनमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास का लक्ष्य अनमेल-विवाह तथा दहेज़ प्रथा के बुरे प्रभाव को अंकित करता है। निर्मला के माध्यम से भारत की मध्यवर्गीय युवतियों की दयनीय हालत का चित्रण हुआ है। उपन्यास के अन्त में निर्मला की मृत्यृ इस कुत्सित सामाजिक प्रथा को मिटा डालने के लिए एक भारी चुनौती है। प्रेमचन्द ने भालचन्द और मोटेराम शास्त्री के प्रसंग द्वारा उपन्यास में हास्य की सृष्टि की है। निर्मला के चारों ओर कथा-भवन का निर्माण करते हुए असम्बद्ध प्रसंगों का पूर्णतः बहिष्कार किया गया है। इससे यह उपन्यास सेवासदन से भी अधिक सुग्रंथित एवं सुसंगठित बन गया है। इसे प्रेमचन्द का प्रथम 'यथार्थवादी' तथा हिन्दी का प्रथम 'मनोवैज्ञानिक उपन्यास' कहा जा सकता है। निर्मला का एक वैशिष्ट्य यह भी है कि इसमें 'प्रचारक प्रेमचन्द' के लोप ने इसे ने केवल कलात्मक बना दिया है, बल्कि प्रेमचन्द के शिल्प का एक विकास-चिन्ह भी बन गया है। .
8 संबंधोंः दुर्गादास (उपन्यास), प्रेमचंद, प्रेमचंद की रचनाएँ, साहित्य अकादमी पुरस्कार संस्कृत, साहित्य अकादमी पुरस्कार कन्नड़, हिन्दी पुस्तकों की सूची/त, ग़बन (उपन्यास), गज गामिनी।
दुर्गादास (उपन्यास)
दुर्गादास एक उपन्यास है जो एक वीर व्यक्ति दुर्गादास राठौड़ के जीवन पर मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इसे एक वीर गाथा भी कह सकते हैं जिससे हमें कई सीख मिलती है। यह बाल साहित्य के अंतर्गत आता है तथा इसके मुख्य प्रकाशक भारतीय ज्ञानपीठ है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार राजा यशवन्तसिंह के सेवक दुर्गादास नें उसके मृत्यु के बाद राजा के पुत्र अजीतसिंह को औरंगज़ेब तथा उसके मुगल सेना से सुरक्षित किया तथा औरंगज़ेब को मारवाड़ से भगाकर अजीतसिंह को राज सौंपा। तथा किस प्रकार उसे दुष्ट अजीतसिंह से दूर भागना पड़ा। .
प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० - ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं। .
मुंशी प्रेमचंद की रचना-दृष्टि विभिन्न साहित्य रूपों में प्रवृत्त हुई। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न प्रेमचंद ने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की। प्रमुखतया उनकी ख्याति कथाकार के तौर पर हुई और अपने जीवन काल में ही वे 'उपन्यास सम्राट' की उपाधि से सम्मानित हुए। उन्होंने कुल १५ उपन्यास, ३०० से कुछ अधिक कहानियाँ, ३ नाटक, १० अनुवाद, ७ बाल-पुस्तकें तथा हजारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की। .
साहित्य अकादमी पुरस्कार एक साहित्यिक सम्मान है जो कुल २४ भाषाओं में प्रदान किया जाता हैं और संस्कृत भाषा इन में से एक भाषा हैं। .
साहित्य अकादमी पुरस्कार एक साहित्यिक सम्मान है जो कुल २४ भाषाओं में प्रदान किया जाता हैं और कन्नड़ भाषा इन में से एक भाषा हैं। .
* तकीषी की कहानियां - बी.डी. कृष्णन.
ग़बन (उपन्यास)
---- गबन प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है। 'निर्मला' के बाद 'गबन' प्रेमचंद का दूसरा यथार्थवादी उपन्यास है। कहना चाहिए कि यह उसके विकास की अगली कड़ी है। ग़बन का मूल विषय है - 'महिलाओं का पति के जीवन पर प्रभाव'। ग़बन प्रेमचन्द के एक विशेष चिन्ताकुल विषय से सम्बन्धित उपन्यास है। यह विषय है, गहनों के प्रति पत्नी के लगाव का पति के जीवन पर प्रभाव। गबन में टूटते मूल्यों के अंधेरे में भटकते मध्यवर्ग का वास्तविक चित्रण किया गया। इन्होंने समझौतापरस्त और महत्वाकांक्षा से पूर्ण मनोवृत्ति तथा पुलिस के चरित्र को बेबाकी से प्रस्तुत करते हुए कहानी को जीवंत बना दिया गया है। इस उपन्यास में प्रेमचंद ने पहली नारी समस्या को व्यापक भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखकर देखा है और उसे तत्कालीन भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से जोड़कर देखा है। सामाजिक जीवन और कथा-साहित्य के लिए यह एक नई दिशा की ओर संकेत करता है। यह उपन्यास जीवन की असलियत की छानबीन अधिक गहराई से करता है, भ्रम को तोड़ता है। नए रास्ते तलाशने के लिए पाठक को नई प्रेरणा देता है। .
गज गामिनी 2000 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। एम एफ़ हुसैन द्वारा लिखित और निर्देशित यह भारतीय फिल्म स्त्रीत्व और उस समय की उनकी कवित्व-शक्ति (muse) माधुरी दीक्षित पर कसीदा है। शाहरुख खान और नसीरुद्दीन शाह भी फिल्म में हैं। यह फिल्म टिकट खिड़की पर बहुत असफल रही थी। .
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निर्मला, मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी उपन्यास है। इसका प्रकाशन सन एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में हुआ था। सन एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में दहेज प्रथा और अनमेल विवाह को आधार बना कर इस उपन्यास का लेखन प्रारम्भ हुआ। इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली महिलाओं की पत्रिका 'चाँद' में नवम्बर एक हज़ार नौ सौ पच्चीस से दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ छब्बीस तक यह उपन्यास विभिन्न किस्तों में प्रकाशित हुआ। महिला-केन्द्रित साहित्य के इतिहास में इस उपन्यास का विशेष स्थान है। इस उपन्यास की कथा का केन्द्र और मुख्य पात्र 'निर्मला' नाम की पंद्रह वर्षीय सुन्दर और सुशील लड़की है। निर्मला का विवाह एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से कर दिया जाता है। जिसके पूर्व पत्नी से तीन बेटे हैं। निर्मला का चरित्र निर्मल है, परन्तु फिर भी समाज में उसे अनादर एवं अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। उसकी पति परायणता काम नहीं आती। उस पर सन्देह किया जाता है, उसे परिस्थितियाँ उसे दोषी बना देती है। इस प्रकार निर्मला विपरीत परिस्थितियों से जूझती हुई मृत्यु को प्राप्त करती है। निर्मला में अनमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त कहानी है। उपन्यास का लक्ष्य अनमेल-विवाह तथा दहेज़ प्रथा के बुरे प्रभाव को अंकित करता है। निर्मला के माध्यम से भारत की मध्यवर्गीय युवतियों की दयनीय हालत का चित्रण हुआ है। उपन्यास के अन्त में निर्मला की मृत्यृ इस कुत्सित सामाजिक प्रथा को मिटा डालने के लिए एक भारी चुनौती है। प्रेमचन्द ने भालचन्द और मोटेराम शास्त्री के प्रसंग द्वारा उपन्यास में हास्य की सृष्टि की है। निर्मला के चारों ओर कथा-भवन का निर्माण करते हुए असम्बद्ध प्रसंगों का पूर्णतः बहिष्कार किया गया है। इससे यह उपन्यास सेवासदन से भी अधिक सुग्रंथित एवं सुसंगठित बन गया है। इसे प्रेमचन्द का प्रथम 'यथार्थवादी' तथा हिन्दी का प्रथम 'मनोवैज्ञानिक उपन्यास' कहा जा सकता है। निर्मला का एक वैशिष्ट्य यह भी है कि इसमें 'प्रचारक प्रेमचन्द' के लोप ने इसे ने केवल कलात्मक बना दिया है, बल्कि प्रेमचन्द के शिल्प का एक विकास-चिन्ह भी बन गया है। . आठ संबंधोंः दुर्गादास , प्रेमचंद, प्रेमचंद की रचनाएँ, साहित्य अकादमी पुरस्कार संस्कृत, साहित्य अकादमी पुरस्कार कन्नड़, हिन्दी पुस्तकों की सूची/त, ग़बन , गज गामिनी। दुर्गादास दुर्गादास एक उपन्यास है जो एक वीर व्यक्ति दुर्गादास राठौड़ के जीवन पर मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इसे एक वीर गाथा भी कह सकते हैं जिससे हमें कई सीख मिलती है। यह बाल साहित्य के अंतर्गत आता है तथा इसके मुख्य प्रकाशक भारतीय ज्ञानपीठ है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार राजा यशवन्तसिंह के सेवक दुर्गादास नें उसके मृत्यु के बाद राजा के पुत्र अजीतसिंह को औरंगज़ेब तथा उसके मुगल सेना से सुरक्षित किया तथा औरंगज़ेब को मारवाड़ से भगाकर अजीतसिंह को राज सौंपा। तथा किस प्रकार उसे दुष्ट अजीतसिंह से दूर भागना पड़ा। . प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं। . मुंशी प्रेमचंद की रचना-दृष्टि विभिन्न साहित्य रूपों में प्रवृत्त हुई। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न प्रेमचंद ने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की। प्रमुखतया उनकी ख्याति कथाकार के तौर पर हुई और अपने जीवन काल में ही वे 'उपन्यास सम्राट' की उपाधि से सम्मानित हुए। उन्होंने कुल पंद्रह उपन्यास, तीन सौ से कुछ अधिक कहानियाँ, तीन नाटक, दस अनुवाद, सात बाल-पुस्तकें तथा हजारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की। . साहित्य अकादमी पुरस्कार एक साहित्यिक सम्मान है जो कुल चौबीस भाषाओं में प्रदान किया जाता हैं और संस्कृत भाषा इन में से एक भाषा हैं। . साहित्य अकादमी पुरस्कार एक साहित्यिक सम्मान है जो कुल चौबीस भाषाओं में प्रदान किया जाता हैं और कन्नड़ भाषा इन में से एक भाषा हैं। . * तकीषी की कहानियां - बी.डी. कृष्णन. ग़बन ---- गबन प्रेमचंद द्वारा रचित उपन्यास है। 'निर्मला' के बाद 'गबन' प्रेमचंद का दूसरा यथार्थवादी उपन्यास है। कहना चाहिए कि यह उसके विकास की अगली कड़ी है। ग़बन का मूल विषय है - 'महिलाओं का पति के जीवन पर प्रभाव'। ग़बन प्रेमचन्द के एक विशेष चिन्ताकुल विषय से सम्बन्धित उपन्यास है। यह विषय है, गहनों के प्रति पत्नी के लगाव का पति के जीवन पर प्रभाव। गबन में टूटते मूल्यों के अंधेरे में भटकते मध्यवर्ग का वास्तविक चित्रण किया गया। इन्होंने समझौतापरस्त और महत्वाकांक्षा से पूर्ण मनोवृत्ति तथा पुलिस के चरित्र को बेबाकी से प्रस्तुत करते हुए कहानी को जीवंत बना दिया गया है। इस उपन्यास में प्रेमचंद ने पहली नारी समस्या को व्यापक भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखकर देखा है और उसे तत्कालीन भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से जोड़कर देखा है। सामाजिक जीवन और कथा-साहित्य के लिए यह एक नई दिशा की ओर संकेत करता है। यह उपन्यास जीवन की असलियत की छानबीन अधिक गहराई से करता है, भ्रम को तोड़ता है। नए रास्ते तलाशने के लिए पाठक को नई प्रेरणा देता है। . गज गामिनी दो हज़ार में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। एम एफ़ हुसैन द्वारा लिखित और निर्देशित यह भारतीय फिल्म स्त्रीत्व और उस समय की उनकी कवित्व-शक्ति माधुरी दीक्षित पर कसीदा है। शाहरुख खान और नसीरुद्दीन शाह भी फिल्म में हैं। यह फिल्म टिकट खिड़की पर बहुत असफल रही थी। .
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MESSAGES FROM RAJYA SABHA
SECRETARY- GENERAL: Sir, I have to report the following messages received from the Secretary General of Rajya Sabha:(i)"In accordance with the provisions of rule 111 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in the Rajya Sabha, I am directed to enclose a copy of the Jammu and Kashmir Reservation (Second Amendment) Bill, 2019 which has been passed by the Rajya Sabha at its sitting held on the 5th August,
(ii) In accordance with the provisions of rule 111 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in the Rajya Sabha, I am directed to enclose a copy of the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019 which has been passed by the Rajya Sabha at its sitting held on the 5th August, 2019."
Sir, I lay on the Table the Jammu and Kashmir Reservation (Second Amendment) Bill, 2019 and the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019, as passed by Rajya Sabha on the 5th August, 2019.
SUPREME COURT (NUMBER OF JUDGES) AMENDMENT BILL, 2019... Contd.
श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर): सभापति महोदया जी, मैं उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2019 का समर्थन करने के लिए खड़ा हूं । हमारा देश न्यायालय को देवालय और न्यायाधीश को न्याय देवता मानने वाला देश है, लेकिन धीरे-धीरे जनमानस में न्याय प्रणाली पर विश्वास कम होता जा रहा है, लेकिन आज भी न्यायधीशों के बारे में आदर और सम्मान का भाव बना हुआ है । मैं चाहता हूं कि आने वाले दिनों में यह बना रहे तथा इसमें और वृद्धि हो । मैं सम्मानीय न्याय मंत्री, रवि शंकर प्रसाद जी का अभिनंदन करना चाहता हूं कि उनके नेतृत्व में, उनके कार्यकाल में ज्यूडिशियरी सिस्टम में बहुत बड़ा बदलावा आता हुआ दिखाई देता है। हम ने कॉमर्शियल कोर्स की व्यवस्था की है। हमने आर्बिट्रेशन बिल में संशोधन करके उसमें भी बहुत बड़ा बदलाव करते हुए, न्यायालय में जो प्रलंबित मामलों का निपटारा जल्दी से जल्दी कैसे किया जाए, इसके बारे में सरकार चिंतित होते हुए बहुत अग्रसर है। यह समाधान का बहुत अच्छा कदम है।
सभापति महोदया, जब देश में अंग्रेज राज कर रहे थे, उनकी मातृभाषा अंग्रेजी थी, तो उन दिनों पूरे देश में अंग्रेजी भाषा में न्याय प्रणाली चलने लगी थी और आजादी के पश्चात् भी हमने उस परम्परा को कायम रखा है। मैं न्याय मंत्री जी से यह निवेदन करूंगा कि सभी राज्यों की राजभाषा
में न्याय प्रणाली प्रारंभ करनी चाहिए। इससे बहुत बड़ा बदलाव आएगा । मैं वकीलों का आदर हुए इस बात को कहना चाहूंगा कि वकील सीखने के बाद केस खुद नहीं लड़ते हैं, वे अपने से बड़े वकीलों की नियुक्ति करते हैं। इसलिए न्याय प्रणाली महंगी होती जा रही है । हम अपनी मातृभाषा में बातचीत करेंगे तो न्याय प्रणाली स्पीडी और सस्ती होगी। इसके बारे में हमें बहुत जल्दी सोचना चाहिए । देश के प्रधान मंत्री वर्ष 2022 तक देश में बहुत बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि यह बदलाव भी वर्ष 2022 तक आए और देश के सभी राज्यों की राजभाषा में न्याय प्रणाली चले ।
सभापति महोदया, न्याय प्रणाली बहुत महंगी होती जा रही है और सुप्रीम कोर्ट में यह है ज्यादा महंगी होती जा रही है। मैं इस विषय में बहुत डिटेल में नहीं जाना चाहूंगा । हमारे देश में आधे केसेज लोगों को परेशान करने के लिए किए जाते हैं। जो पैसे वाले लोग हैं, वे न्याय पाने के लिए वहां नहीं जाते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर में जिसको ठेका मिल गया, कॉन्ट्रैक्ट मिल गया, काम मिल गया, उसको परेशान करके काम को और कैसे विलंब करें, इसके लिए भी प्रयास हो रहा है । इसके बारे में सरकार को गंभीरता से अध्ययन करते हुए, इसमें बदलाव लाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
मैं सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा इसलिए भी करना चाहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट में केसेज का निपटारा फटाफट होता है। सुप्रीम कोर्ट में यह महंगी है, यह बात अपनी जगह पर है, लेकिन वहां पर केसेज का निपटारा बहुत जल्दी होता है, इसके लिए मैं सुप्रीम कोर्ट के जजेज को धन्यवाद भी देना चाहता हूं।
सभापति महोदया, मैं तब हैरान हुआ था जब डॉ. जायसवाल जी मेडिकल काउंसिल बिल पर भाषण दे रहे थे। सरकार ने जब नीट की एक परीक्षा की व्यवस्था की तो देश के कई लोग कोर्ट में गए और कोर्ट के माध्यम से जजमेंट लाए। सुप्रीम कोर्ट के जो जज रिटायर होने वाले थे, उसके पहले उन्होंने इतना बड़ा लैंडमार्क जजमेंट दे दिया। मेडिकल काउंसिल के माध्यम से भ्रष्टाचार के बारे में सभागृह में कितनी चर्चा हुई है, उसके बारे में हमें पता है।
सरकार ने बिल के माध्यम से एमसीआई को बर्खास्त किया और एनएमसी को लाई, यह बहुत अच्छी पहल थी। कितने लोग हैरान और परेशान हुए। जो हमारे मैरिट में आने वाले बच्चे थे, वे एडमिशन प्राप्त करने से वंचित रह गए और जिन्हें एडमिशन नहीं मिलना चाहिए था, वे पैसे के प्रभाव से सिस्टम से आ गए और इस वजह से बहुत परेशानी हुई।
(Hon. Speaker in the Chair)
अध्यक्ष जी, नेशनल ज्यूडिशियरी एपॉइंटमेंट कमीशन के बारे में भी बहुत लोगों ने अपनीअपनी बात कही है। हमारी सरकार का बहुत ही प्रामाणिक प्रयास है कि ज्यूडिशियरी सिस्टम को हम ठीक करें । यह पहली सरकार है जिसने सुप्रीम कोर्ट के जज की प्रक्रिया के लिए देश के राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, देश के विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के जो रिटायर होने वाले जज हैं, ऐसे चार मुख्य लोग रखे हैं। यह बहुत अच्छी प्रक्रिया है, लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस भेजा है। मैं चाहूंगा कि देश के प्रधान मंत्री और कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट के जजेज की नियुक्ति के लिए आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव कैसे लाएं, उसके बारे में प्रयास करेंगे।
अध्यक्ष जी, हम नए भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2022 तक देश में जितने भी पुराने केसेज हैं, वे सारे खत्म हों, इसके लिए कानून मंत्री को प्रयास करना चाहिए। देश के प्रधान मंत्री जी ने बहुत जवाबदारी ली है कि वर्ष 2022 तक हमें बहुत कुछ पूरा करना है। मैं चाहूंगा कि हमारे कानून मंत्री वर्ष 2022 तक जितने भी लम्बित केसेज हैं, उन पर सुनवाई पूरा करें, क्योंकि जब केसेज बहुत लम्बे चलते हैं, तो जो व्यवसाय करने वाले लोग हैं, उन्हें बहुत परेशानी होती है। हमारे प्रधान मंत्री जी का सपना है कि हम बहुत जल्दी 5 ट्रिलियन इकोनोमी की तरफ बढ़ें। यदि कोर्ट केसेज का निपटारा हम समय से नहीं करेंगे, तो व्यवसाय करने वाले लोगों का आधा समय कोर्ट में चला जाता है और बहुत पैसा लगता है। समय की बर्बादी भी होती है, तो वे व्यवसाय कब करेंगे?इसके लिए वर्ष 2002 तक सारे जुने केसेज खत्म कैसे हों, उसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। आप संसद को इतने लम्बे समय तक चलाते हैं और हम उतनी ही पगार में काम करने को तैयार हैं। आप इससे भी लम्बे समय तक संसद को चलाएं, लेकिन जजेज को ज्यादा पगार दीजिए, उनकी ज्यादा नियुक्ति कीजिए और जितने भी केसेज हैं, वे डबल शिफ्ट चलाकर सारे केसेज का निपटारा वर्ष 2022 तक कीजिए, इस प्रकार का प्रयास हमें करना चाहिए ।
अध्यक्ष जी, आपने मुझे इस बिल पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं ।
DR. THOL THIRUMAAVALAVAN (CHIDAMBARAM): Hon'ble Speaker Sir, This is a very important bill. There are so many cases pending in the country, not only in the Supreme Court of India, but also in High Courts and lower courts. Therefore, it is essential to increase the number of judges. I would like to reiterate only one point. In the appointment of judges, social justice should be followed. Candidates belonging to marginalised communities, backward castes, and women candidates, all of them have to be given reservation on proportionate basis. I request the Minister to amend the law accordingly. In the Supreme Court of India, very few persons belonging to the community of Scheduled Castes or Scheduled Tribes have become a Judge. A division bench of Supreme Court of India has to be established in southern states, either in Chennai or in Hyderabad to facilitate the easy movement of people from the southern States. I request the Union Minister of Law to ensure reservation in the appointment of judges. There are so many States in India. As per the present ratio, only one judge from every State is appointed in the Supreme Court of India. Each State should have contributed at least three judges to the Supreme Court. Therefore, there is a necessity of appointing Ninety Judges in the Supreme Court of India. On the basis of reservation to States, many judges have to be appointed. Particularly, women candidates and candidates belonging to marginalised sections and Scheduled Castes should also be given reservation in the appointment of Judges. I request the
* English translation of the speech originally delivered in Tamil.
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MESSAGES FROM RAJYA SABHA SECRETARY- GENERAL: Sir, I have to report the following messages received from the Secretary General of Rajya Sabha:"In accordance with the provisions of rule एक सौ ग्यारह of the Rules of Procedure and Conduct of Business in the Rajya Sabha, I am directed to enclose a copy of the Jammu and Kashmir Reservation Bill, दो हज़ार उन्नीस which has been passed by the Rajya Sabha at its sitting held on the पाँच अगस्तust, In accordance with the provisions of rule एक सौ ग्यारह of the Rules of Procedure and Conduct of Business in the Rajya Sabha, I am directed to enclose a copy of the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, दो हज़ार उन्नीस which has been passed by the Rajya Sabha at its sitting held on the पाँच अगस्तust, दो हज़ार उन्नीस." Sir, I lay on the Table the Jammu and Kashmir Reservation Bill, दो हज़ार उन्नीस and the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, दो हज़ार उन्नीस, as passed by Rajya Sabha on the पाँच अगस्तust, दो हज़ार उन्नीस. SUPREME COURT AMENDMENT BILL, दो हज़ार उन्नीस... Contd. श्री गोपाल शेट्टी : सभापति महोदया जी, मैं उच्चतम न्यायालय संशोधन विधेयक, दो हज़ार उन्नीस का समर्थन करने के लिए खड़ा हूं । हमारा देश न्यायालय को देवालय और न्यायाधीश को न्याय देवता मानने वाला देश है, लेकिन धीरे-धीरे जनमानस में न्याय प्रणाली पर विश्वास कम होता जा रहा है, लेकिन आज भी न्यायधीशों के बारे में आदर और सम्मान का भाव बना हुआ है । मैं चाहता हूं कि आने वाले दिनों में यह बना रहे तथा इसमें और वृद्धि हो । मैं सम्मानीय न्याय मंत्री, रवि शंकर प्रसाद जी का अभिनंदन करना चाहता हूं कि उनके नेतृत्व में, उनके कार्यकाल में ज्यूडिशियरी सिस्टम में बहुत बड़ा बदलावा आता हुआ दिखाई देता है। हम ने कॉमर्शियल कोर्स की व्यवस्था की है। हमने आर्बिट्रेशन बिल में संशोधन करके उसमें भी बहुत बड़ा बदलाव करते हुए, न्यायालय में जो प्रलंबित मामलों का निपटारा जल्दी से जल्दी कैसे किया जाए, इसके बारे में सरकार चिंतित होते हुए बहुत अग्रसर है। यह समाधान का बहुत अच्छा कदम है। सभापति महोदया, जब देश में अंग्रेज राज कर रहे थे, उनकी मातृभाषा अंग्रेजी थी, तो उन दिनों पूरे देश में अंग्रेजी भाषा में न्याय प्रणाली चलने लगी थी और आजादी के पश्चात् भी हमने उस परम्परा को कायम रखा है। मैं न्याय मंत्री जी से यह निवेदन करूंगा कि सभी राज्यों की राजभाषा में न्याय प्रणाली प्रारंभ करनी चाहिए। इससे बहुत बड़ा बदलाव आएगा । मैं वकीलों का आदर हुए इस बात को कहना चाहूंगा कि वकील सीखने के बाद केस खुद नहीं लड़ते हैं, वे अपने से बड़े वकीलों की नियुक्ति करते हैं। इसलिए न्याय प्रणाली महंगी होती जा रही है । हम अपनी मातृभाषा में बातचीत करेंगे तो न्याय प्रणाली स्पीडी और सस्ती होगी। इसके बारे में हमें बहुत जल्दी सोचना चाहिए । देश के प्रधान मंत्री वर्ष दो हज़ार बाईस तक देश में बहुत बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि यह बदलाव भी वर्ष दो हज़ार बाईस तक आए और देश के सभी राज्यों की राजभाषा में न्याय प्रणाली चले । सभापति महोदया, न्याय प्रणाली बहुत महंगी होती जा रही है और सुप्रीम कोर्ट में यह है ज्यादा महंगी होती जा रही है। मैं इस विषय में बहुत डिटेल में नहीं जाना चाहूंगा । हमारे देश में आधे केसेज लोगों को परेशान करने के लिए किए जाते हैं। जो पैसे वाले लोग हैं, वे न्याय पाने के लिए वहां नहीं जाते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर में जिसको ठेका मिल गया, कॉन्ट्रैक्ट मिल गया, काम मिल गया, उसको परेशान करके काम को और कैसे विलंब करें, इसके लिए भी प्रयास हो रहा है । इसके बारे में सरकार को गंभीरता से अध्ययन करते हुए, इसमें बदलाव लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। मैं सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा इसलिए भी करना चाहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट में केसेज का निपटारा फटाफट होता है। सुप्रीम कोर्ट में यह महंगी है, यह बात अपनी जगह पर है, लेकिन वहां पर केसेज का निपटारा बहुत जल्दी होता है, इसके लिए मैं सुप्रीम कोर्ट के जजेज को धन्यवाद भी देना चाहता हूं। सभापति महोदया, मैं तब हैरान हुआ था जब डॉ. जायसवाल जी मेडिकल काउंसिल बिल पर भाषण दे रहे थे। सरकार ने जब नीट की एक परीक्षा की व्यवस्था की तो देश के कई लोग कोर्ट में गए और कोर्ट के माध्यम से जजमेंट लाए। सुप्रीम कोर्ट के जो जज रिटायर होने वाले थे, उसके पहले उन्होंने इतना बड़ा लैंडमार्क जजमेंट दे दिया। मेडिकल काउंसिल के माध्यम से भ्रष्टाचार के बारे में सभागृह में कितनी चर्चा हुई है, उसके बारे में हमें पता है। सरकार ने बिल के माध्यम से एमसीआई को बर्खास्त किया और एनएमसी को लाई, यह बहुत अच्छी पहल थी। कितने लोग हैरान और परेशान हुए। जो हमारे मैरिट में आने वाले बच्चे थे, वे एडमिशन प्राप्त करने से वंचित रह गए और जिन्हें एडमिशन नहीं मिलना चाहिए था, वे पैसे के प्रभाव से सिस्टम से आ गए और इस वजह से बहुत परेशानी हुई। अध्यक्ष जी, नेशनल ज्यूडिशियरी एपॉइंटमेंट कमीशन के बारे में भी बहुत लोगों ने अपनीअपनी बात कही है। हमारी सरकार का बहुत ही प्रामाणिक प्रयास है कि ज्यूडिशियरी सिस्टम को हम ठीक करें । यह पहली सरकार है जिसने सुप्रीम कोर्ट के जज की प्रक्रिया के लिए देश के राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, देश के विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के जो रिटायर होने वाले जज हैं, ऐसे चार मुख्य लोग रखे हैं। यह बहुत अच्छी प्रक्रिया है, लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस भेजा है। मैं चाहूंगा कि देश के प्रधान मंत्री और कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट के जजेज की नियुक्ति के लिए आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव कैसे लाएं, उसके बारे में प्रयास करेंगे। अध्यक्ष जी, हम नए भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष दो हज़ार बाईस तक देश में जितने भी पुराने केसेज हैं, वे सारे खत्म हों, इसके लिए कानून मंत्री को प्रयास करना चाहिए। देश के प्रधान मंत्री जी ने बहुत जवाबदारी ली है कि वर्ष दो हज़ार बाईस तक हमें बहुत कुछ पूरा करना है। मैं चाहूंगा कि हमारे कानून मंत्री वर्ष दो हज़ार बाईस तक जितने भी लम्बित केसेज हैं, उन पर सुनवाई पूरा करें, क्योंकि जब केसेज बहुत लम्बे चलते हैं, तो जो व्यवसाय करने वाले लोग हैं, उन्हें बहुत परेशानी होती है। हमारे प्रधान मंत्री जी का सपना है कि हम बहुत जल्दी पाँच ट्रिलियन इकोनोमी की तरफ बढ़ें। यदि कोर्ट केसेज का निपटारा हम समय से नहीं करेंगे, तो व्यवसाय करने वाले लोगों का आधा समय कोर्ट में चला जाता है और बहुत पैसा लगता है। समय की बर्बादी भी होती है, तो वे व्यवसाय कब करेंगे?इसके लिए वर्ष दो हज़ार दो तक सारे जुने केसेज खत्म कैसे हों, उसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। आप संसद को इतने लम्बे समय तक चलाते हैं और हम उतनी ही पगार में काम करने को तैयार हैं। आप इससे भी लम्बे समय तक संसद को चलाएं, लेकिन जजेज को ज्यादा पगार दीजिए, उनकी ज्यादा नियुक्ति कीजिए और जितने भी केसेज हैं, वे डबल शिफ्ट चलाकर सारे केसेज का निपटारा वर्ष दो हज़ार बाईस तक कीजिए, इस प्रकार का प्रयास हमें करना चाहिए । अध्यक्ष जी, आपने मुझे इस बिल पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं । DR. THOL THIRUMAAVALAVAN : Hon'ble Speaker Sir, This is a very important bill. There are so many cases pending in the country, not only in the Supreme Court of India, but also in High Courts and lower courts. Therefore, it is essential to increase the number of judges. I would like to reiterate only one point. In the appointment of judges, social justice should be followed. Candidates belonging to marginalised communities, backward castes, and women candidates, all of them have to be given reservation on proportionate basis. I request the Minister to amend the law accordingly. In the Supreme Court of India, very few persons belonging to the community of Scheduled Castes or Scheduled Tribes have become a Judge. A division bench of Supreme Court of India has to be established in southern states, either in Chennai or in Hyderabad to facilitate the easy movement of people from the southern States. I request the Union Minister of Law to ensure reservation in the appointment of judges. There are so many States in India. As per the present ratio, only one judge from every State is appointed in the Supreme Court of India. Each State should have contributed at least three judges to the Supreme Court. Therefore, there is a necessity of appointing Ninety Judges in the Supreme Court of India. On the basis of reservation to States, many judges have to be appointed. Particularly, women candidates and candidates belonging to marginalised sections and Scheduled Castes should also be given reservation in the appointment of Judges. I request the * English translation of the speech originally delivered in Tamil.
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रजोनिवृत्ति अवधि के करीब आने वाली महिलाएं अक्सर हाथों के आर्थ्रोसिस से पीड़ित होती हैं। शुरुआती चरणों में, इस बीमारी का उपचार चिकित्सा के साथ सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें दुर्लभ दर्द दर्द, मामूली फुफ्फुस, मांसपेशी तनाव के रूप में हल्के संकेत होते हैं। इसलिए, शुरुआती चरण के हाथों के आर्थ्रोसिस का इलाज करने का सवाल बहुत प्रासंगिक है। आखिरकार, समय पर सहायता जोड़ों के विकृति को रोकने में मदद करती है, उंगलियों की खराब गतिशीलता।
दर्द, जलन या नुकीले दर्द के रूप में ऐसे अप्रिय लक्षणों को खत्म करने के लिए, गैर-स्टेरॉयड समूह से एंटी-भड़काऊ दवाओं का उपयोग किया जाता हैः
- इबुप्रोफेन;
- piroxicam;
- Diclofenac ।
इसके अलावा, आर्थ्रोसिस के प्रारंभिक चरण के साथ, कार्टिलाजिनस ऊतक के विनाश को काफी धीमा करना और जोड़ों में स्नेहक सिनोविअल तरल पदार्थ के उत्पादन को सामान्य बनाना अभी भी संभव है। Chondroprotectors इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं। चोंड्रोइटिन और ग्लूकोसामाइन के आधार पर पसंदीदा दवाएं।
हार्डवेयर और फिजियोथेरेपी प्रक्रियाओं से निम्नलिखित गतिविधियां नियुक्त की जाती हैंः
- पर्क्यूशन मालिश;
- ozokerite के साथ electrophoresis;
- पैराफिन अनुप्रयोग;
- चुंबकीय थेरेपी;
- लेजर और सदमे-लहर कार्रवाई।
इसके अलावा, रोगी को विटामिन और कैल्शियम-समृद्ध आहार का पालन करने की अनुशंसा की जाती है, जो आहार में नमक के प्रतिबंध को निर्धारित करता है, आर्थ्रोसिस के लिए व्यायाम चिकित्सा के परिसर से अभ्यास करने के लिए।
हाथों के आर्थ्रोसिस के साथ लोक व्यंजनों का क्या इलाज किया जा सकता है?
वैकल्पिक चिकित्सा से दवाएं प्रभावी रूप से दर्द और सूजन से छुटकारा पा सकती हैं।
उदाहरण के लिए, यह शहद संपीड़न के प्रारंभिक चरण में आर्थ्रोसिस के लक्षणों को कम करने में पूरी तरह से मदद करता है।
सामग्रीः
- नमक - 1 टेबल। चम्मच;
- प्राकृतिक तरल शहद - 1 टेबल। चम्मच।
सामग्री मिलाएं। द्रव्यमान को एक साफ लिनन कपड़े पर रखें और प्रभावित जोड़ों को दोबारा जोड़ दें। ऊनी शॉल के साथ संपीड़ित गर्म करें, इसे पूरी रात के लिए अपने हाथों पर छोड़ दें।
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रजोनिवृत्ति अवधि के करीब आने वाली महिलाएं अक्सर हाथों के आर्थ्रोसिस से पीड़ित होती हैं। शुरुआती चरणों में, इस बीमारी का उपचार चिकित्सा के साथ सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें दुर्लभ दर्द दर्द, मामूली फुफ्फुस, मांसपेशी तनाव के रूप में हल्के संकेत होते हैं। इसलिए, शुरुआती चरण के हाथों के आर्थ्रोसिस का इलाज करने का सवाल बहुत प्रासंगिक है। आखिरकार, समय पर सहायता जोड़ों के विकृति को रोकने में मदद करती है, उंगलियों की खराब गतिशीलता। दर्द, जलन या नुकीले दर्द के रूप में ऐसे अप्रिय लक्षणों को खत्म करने के लिए, गैर-स्टेरॉयड समूह से एंटी-भड़काऊ दवाओं का उपयोग किया जाता हैः - इबुप्रोफेन; - piroxicam; - Diclofenac । इसके अलावा, आर्थ्रोसिस के प्रारंभिक चरण के साथ, कार्टिलाजिनस ऊतक के विनाश को काफी धीमा करना और जोड़ों में स्नेहक सिनोविअल तरल पदार्थ के उत्पादन को सामान्य बनाना अभी भी संभव है। Chondroprotectors इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं। चोंड्रोइटिन और ग्लूकोसामाइन के आधार पर पसंदीदा दवाएं। हार्डवेयर और फिजियोथेरेपी प्रक्रियाओं से निम्नलिखित गतिविधियां नियुक्त की जाती हैंः - पर्क्यूशन मालिश; - ozokerite के साथ electrophoresis; - पैराफिन अनुप्रयोग; - चुंबकीय थेरेपी; - लेजर और सदमे-लहर कार्रवाई। इसके अलावा, रोगी को विटामिन और कैल्शियम-समृद्ध आहार का पालन करने की अनुशंसा की जाती है, जो आहार में नमक के प्रतिबंध को निर्धारित करता है, आर्थ्रोसिस के लिए व्यायाम चिकित्सा के परिसर से अभ्यास करने के लिए। हाथों के आर्थ्रोसिस के साथ लोक व्यंजनों का क्या इलाज किया जा सकता है? वैकल्पिक चिकित्सा से दवाएं प्रभावी रूप से दर्द और सूजन से छुटकारा पा सकती हैं। उदाहरण के लिए, यह शहद संपीड़न के प्रारंभिक चरण में आर्थ्रोसिस के लक्षणों को कम करने में पूरी तरह से मदद करता है। सामग्रीः - नमक - एक टेबल। चम्मच; - प्राकृतिक तरल शहद - एक टेबल। चम्मच। सामग्री मिलाएं। द्रव्यमान को एक साफ लिनन कपड़े पर रखें और प्रभावित जोड़ों को दोबारा जोड़ दें। ऊनी शॉल के साथ संपीड़ित गर्म करें, इसे पूरी रात के लिए अपने हाथों पर छोड़ दें।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (AMIT SHAH) आज दो दिवसीय दौरे पर असम की राजधानी गुवाहाटी (GUWAHATI) पहुंचे। जहां उन्होंने पूर्वोत्तर परिषद के 68वें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार पूर्वोत्तर को विशेष प्रावधान (special provision) प्रदान करने वाले अनुच्छेद 371 (Article 371) को खत्म नहीं करेगा।
अमित शाह (AMIT SHAH) ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 (Article 370) अस्थायी प्रावधानों के संदर्भ में था जबकि अनुच्छेद 371 (Article 371) विशेष प्रावधानों (special provision) के संदर्भ में है, दोनों के बीच काफी अंतर है। उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाये जाने के बाद पूर्वोत्तर के लोगों को गलत जानकारी देने और गुमराह करने के प्रयास किये जा रहे है कि केन्द्र अनुच्छेद 371 को भी हटायेगा।
बता दे गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट रूप से कहा, "मैंने संसद में पहले ही स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर राज्यों में ऐसा नहीं होने जा रहा है और मैं आज पूर्वोत्तर के आठ मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में फिर से यह कह रहा हूं कि केन्द्र अनुच्छेद 371 को नहीं छूएगा। मालूम हों कि पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों को अनुच्छेद 371 के तहत विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। अनुच्छेद 371 ए नगालैण्ड, 371 बी असम, 371 सी, 371 जी और 371 एच मणिपुर, मिजोरम तथा अरुणाचल प्रदेश को विशेष दर्जा (special provision) प्रदान करता है।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दो दिवसीय दौरे पर असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे। जहां उन्होंने पूर्वोत्तर परिषद के अड़सठवें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार पूर्वोत्तर को विशेष प्रावधान प्रदान करने वाले अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर को खत्म नहीं करेगा। अमित शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर अस्थायी प्रावधानों के संदर्भ में था जबकि अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर विशेष प्रावधानों के संदर्भ में है, दोनों के बीच काफी अंतर है। उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के ज्यादातर प्रावधानों को हटाये जाने के बाद पूर्वोत्तर के लोगों को गलत जानकारी देने और गुमराह करने के प्रयास किये जा रहे है कि केन्द्र अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर को भी हटायेगा। बता दे गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट रूप से कहा, "मैंने संसद में पहले ही स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर राज्यों में ऐसा नहीं होने जा रहा है और मैं आज पूर्वोत्तर के आठ मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में फिर से यह कह रहा हूं कि केन्द्र अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर को नहीं छूएगा। मालूम हों कि पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों को अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर के तहत विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर ए नगालैण्ड, तीन सौ इकहत्तर बी असम, तीन सौ इकहत्तर सी, तीन सौ इकहत्तर जी और तीन सौ इकहत्तर एच मणिपुर, मिजोरम तथा अरुणाचल प्रदेश को विशेष दर्जा प्रदान करता है।
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अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च एजेंसी द्वारा फेमस बिजनेसमैन गौतम अदाणी पर स्टॉक में गड़बड़ी और लेखा हेराफेरी के आरोप लगाने के बाद अब इसपर राजनीति भी तेज हो गई है। TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने अदाणी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अदाणी समूह और सेबी अफसरों के बीच सांठगांठ हैं इसलिए मनमाने ढंग से सबकुछ किया गया। उन्होंने कहा कि सेबी की कमेटी में अदाणी के रिश्तेदार भी कार्यरत हैं जिससे इस तरह की गड़बड़ी को अंजाम दिया गया।
सांसद ने कहा कि अदाणी के समधी प्रसिद्ध अधिवक्ता सिरिल श्रॉफ सेबी की कमेटी में काम करते हैं। महुआ ने आगे कहा कि सिरिल श्रॉफ की बेटी की शादी बिजनेसमैन गौतम अदाणी के बेटे से हुई है। TMC सांसद महुआ ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दिग्गज एडवोकेट सिरिल श्रॉफ के लिए सबसे बड़ा सम्मान लेकिन उनकी बेटी की शादी गौतम अदाणी के बेटे से हुई है। श्रॉफ कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड इनसाइडर ट्रेडिंग पर सेबी की कमेटी में कार्य करते हैं। अगर सेबी इंडिया अदाणी के मामले की जांच कर रहा है, तो श्रॉफ को खुद को इससे पृथक कर लेना चाहिए। धारणाएं वास्तविकता हैं।
इसके अतिरिक्त डॉव जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडिस द्वारा 7 फरवरी 2023 से प्रभावी अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों को हटाने के ऐलान के बाद, TMC सांसद ने सवाल किया कि NSE अडानी शेयरों की इंडेक्स सदस्यता का पुनर्मूल्यांकन क्यों नहीं कर रहा है? उन्होंने ट्वीट कर कहा कि स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड के आरोपों के चलते S&P डाउ जोंस ने अदाणी एंटरप्राइजेज को डॉव जोंस सूचकांकों से हटा दिया। NSE India अडानी शेयरों की इंडेक्स सदस्यता का पुनर्मूल्यांकन क्यों नहीं कर रहा है जबकि अंतरराष्ट्रीय हैं?
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अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च एजेंसी द्वारा फेमस बिजनेसमैन गौतम अदाणी पर स्टॉक में गड़बड़ी और लेखा हेराफेरी के आरोप लगाने के बाद अब इसपर राजनीति भी तेज हो गई है। TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने अदाणी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अदाणी समूह और सेबी अफसरों के बीच सांठगांठ हैं इसलिए मनमाने ढंग से सबकुछ किया गया। उन्होंने कहा कि सेबी की कमेटी में अदाणी के रिश्तेदार भी कार्यरत हैं जिससे इस तरह की गड़बड़ी को अंजाम दिया गया। सांसद ने कहा कि अदाणी के समधी प्रसिद्ध अधिवक्ता सिरिल श्रॉफ सेबी की कमेटी में काम करते हैं। महुआ ने आगे कहा कि सिरिल श्रॉफ की बेटी की शादी बिजनेसमैन गौतम अदाणी के बेटे से हुई है। TMC सांसद महुआ ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दिग्गज एडवोकेट सिरिल श्रॉफ के लिए सबसे बड़ा सम्मान लेकिन उनकी बेटी की शादी गौतम अदाणी के बेटे से हुई है। श्रॉफ कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड इनसाइडर ट्रेडिंग पर सेबी की कमेटी में कार्य करते हैं। अगर सेबी इंडिया अदाणी के मामले की जांच कर रहा है, तो श्रॉफ को खुद को इससे पृथक कर लेना चाहिए। धारणाएं वास्तविकता हैं। इसके अतिरिक्त डॉव जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडिस द्वारा सात फरवरी दो हज़ार तेईस से प्रभावी अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों को हटाने के ऐलान के बाद, TMC सांसद ने सवाल किया कि NSE अडानी शेयरों की इंडेक्स सदस्यता का पुनर्मूल्यांकन क्यों नहीं कर रहा है? उन्होंने ट्वीट कर कहा कि स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड के आरोपों के चलते S&P डाउ जोंस ने अदाणी एंटरप्राइजेज को डॉव जोंस सूचकांकों से हटा दिया। NSE India अडानी शेयरों की इंडेक्स सदस्यता का पुनर्मूल्यांकन क्यों नहीं कर रहा है जबकि अंतरराष्ट्रीय हैं?
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Health Tips: प्रतिदिन सुबह के भोजन में घर में जमा हुआ ताजा दही शामिल करें ऐर यदि दही नहीं खाना है तो छाछ जरूर पिएं। ग्रीन टी सेहत के लिए बहुत हितकारी होती है। इसे पीने से शरीर हल्का होता है और शरीर के विशैले तत्व भी बाहर. . . madhya pradeshFri, 28 Oct 2022 01:05 PM (IST)
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Health Tips: प्रतिदिन सुबह के भोजन में घर में जमा हुआ ताजा दही शामिल करें ऐर यदि दही नहीं खाना है तो छाछ जरूर पिएं। ग्रीन टी सेहत के लिए बहुत हितकारी होती है। इसे पीने से शरीर हल्का होता है और शरीर के विशैले तत्व भी बाहर. . . madhya pradeshFri, अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार बाईस एक:पाँच PM
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युजवेंद्र चहल ने 10 मैचों में 19 विकेट झटके हैं और जारी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। पोलक ने चहल को विश्व कप के लिए 'पसंदीदा' के रूप में चुना।
आईपीएल 2021 के पहले हाफ में शानदार प्रदर्शन करके राहुल चाहर ने युजवेंद्र चहल को पीछे छोड़ते हुए वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाई थी। वर्ल्ड कप से पहले चहल का फॉर्म आश्चर्यजनक तरीके से नीचे गिरा था और जब तक वह अपने गेंदबाजी में सुधार करके फॉर्म में वापस आने की कोशिश करते उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में होने टी20 वर्ल्ड कप 2022 के लिए युजवेंद्र चहल फिट लग रहे हैं। हालांकि उन्हें टीम में जगह मिलेगी या नहीं ये आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान शॉन पोलक ने इस मामले पर अपनी बात रखी है।
युजवेंद्र चहल ने 10 मैचों में 19 विकेट झटके हैं और जारी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। उन्होंने इस सीजन हैट्रिक के साथ पांच विकेट हॉल भी लिया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब किंग्स के लिए खेल रहे राहुल चाहर ने 10 मैचों में 12 विकेट लिए हैं। दोनों की तुलना करते हुए और गेंदबाजी में सुधार कर चुके चहल की तारीफ करते हुए पोलाक ने राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाज को विश्व कप के लिए 'पसंदीदा' के रूप में चुना।
शॉन पोलाक ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि युजी को अपनी फॉर्म वापस मिल गई है। वह वास्तव में फिर से अच्छा कर रहा है। आप उसके कदम में वह छोटी सी उछाल देख सकते हैं। वह अच्छी तरह से डिलीवरी कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वह अब टी20 विश्व कप में जाने के लिए प्रबल दावेदार होंगे। "
उन्होंने कहा, "मैं उसे वापस देखना पसंद करता हूं। वह इतना अच्छा कैरेक्टर है। मुंबई में उनके साथ कुछ समय बिताया। वह बहुत मजेदार है। जब मैदान पर चीजें अच्छी चल रही होती हैं, तो उन्हें टीम के माहौल में रखना बहुत अच्छा पैकेज होता है। "
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युजवेंद्र चहल ने दस मैचों में उन्नीस विकेट झटके हैं और जारी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। पोलक ने चहल को विश्व कप के लिए 'पसंदीदा' के रूप में चुना। आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के पहले हाफ में शानदार प्रदर्शन करके राहुल चाहर ने युजवेंद्र चहल को पीछे छोड़ते हुए वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाई थी। वर्ल्ड कप से पहले चहल का फॉर्म आश्चर्यजनक तरीके से नीचे गिरा था और जब तक वह अपने गेंदबाजी में सुधार करके फॉर्म में वापस आने की कोशिश करते उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में होने टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के लिए युजवेंद्र चहल फिट लग रहे हैं। हालांकि उन्हें टीम में जगह मिलेगी या नहीं ये आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान शॉन पोलक ने इस मामले पर अपनी बात रखी है। युजवेंद्र चहल ने दस मैचों में उन्नीस विकेट झटके हैं और जारी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। उन्होंने इस सीजन हैट्रिक के साथ पांच विकेट हॉल भी लिया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब किंग्स के लिए खेल रहे राहुल चाहर ने दस मैचों में बारह विकेट लिए हैं। दोनों की तुलना करते हुए और गेंदबाजी में सुधार कर चुके चहल की तारीफ करते हुए पोलाक ने राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाज को विश्व कप के लिए 'पसंदीदा' के रूप में चुना। शॉन पोलाक ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि युजी को अपनी फॉर्म वापस मिल गई है। वह वास्तव में फिर से अच्छा कर रहा है। आप उसके कदम में वह छोटी सी उछाल देख सकते हैं। वह अच्छी तरह से डिलीवरी कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वह अब टीबीस विश्व कप में जाने के लिए प्रबल दावेदार होंगे। " उन्होंने कहा, "मैं उसे वापस देखना पसंद करता हूं। वह इतना अच्छा कैरेक्टर है। मुंबई में उनके साथ कुछ समय बिताया। वह बहुत मजेदार है। जब मैदान पर चीजें अच्छी चल रही होती हैं, तो उन्हें टीम के माहौल में रखना बहुत अच्छा पैकेज होता है। "
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कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो बिजनस क्लास में ट्रैवल करने की बजाय इकोनॉमी क्लास में सफर करते दिखाई दे रहे हैं। एक्टर के इस वीडियो को देखकर फैंस काफी हैरान हो गए है।
उर्फी जावेद अपने अजीबो-गरीब ड्रेसिंस के लिए जानी जाती है। उनकी एक्टिंग से ज्यादा चर्चे तो उनके अंतरगी लिबास के होते है। हालांकि ईद पर उर्फी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिल रहा है। एक्ट्रेस ने अपने इस नए अवतार में वीडियो शेयर कर अपने फैंस को ईदी दे दी है, उनका यह वीडियो इंटरनेट पर बड़ी तेजी से फैल रहा है।
अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी एक बच्चे के साथ नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी के इस वीडियो को अक्षय कुमार ने अपने इंस्टाग्राम से शेयर किया है और पीएम मोदी की खूब तारीफ की है।
मलाइका अरोड़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मलाइका ने नियोन कलर के ट्रैकसूट में स्पॉट किया गया। अपने इस लुक में भी वह काफी स्टनिंग लग रही थी लेकिन इस दौरान वह 'ऊप्स मोमेंट' का शिकार हो गईं।
कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो बिजनस क्लास में ट्रैवल करने की बजाय इकोनॉमी क्लास में सफर करते दिखाई दे रहे हैं। एक्टर के इस वीडियो को देखकर फैंस काफी हैरान हो गए है।
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कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो बिजनस क्लास में ट्रैवल करने की बजाय इकोनॉमी क्लास में सफर करते दिखाई दे रहे हैं। एक्टर के इस वीडियो को देखकर फैंस काफी हैरान हो गए है। उर्फी जावेद अपने अजीबो-गरीब ड्रेसिंस के लिए जानी जाती है। उनकी एक्टिंग से ज्यादा चर्चे तो उनके अंतरगी लिबास के होते है। हालांकि ईद पर उर्फी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिल रहा है। एक्ट्रेस ने अपने इस नए अवतार में वीडियो शेयर कर अपने फैंस को ईदी दे दी है, उनका यह वीडियो इंटरनेट पर बड़ी तेजी से फैल रहा है। अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी एक बच्चे के साथ नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी के इस वीडियो को अक्षय कुमार ने अपने इंस्टाग्राम से शेयर किया है और पीएम मोदी की खूब तारीफ की है। मलाइका अरोड़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मलाइका ने नियोन कलर के ट्रैकसूट में स्पॉट किया गया। अपने इस लुक में भी वह काफी स्टनिंग लग रही थी लेकिन इस दौरान वह 'ऊप्स मोमेंट' का शिकार हो गईं। कार्तिक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो बिजनस क्लास में ट्रैवल करने की बजाय इकोनॉमी क्लास में सफर करते दिखाई दे रहे हैं। एक्टर के इस वीडियो को देखकर फैंस काफी हैरान हो गए है।
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नई दिल्ली : भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह को एशियाई हाकी महासंघ ने वर्ष 2018 का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार से सम्मानित किया है जबकि महिला टीम की स्ट्राइकर लालरेमसियामी को वर्ष की उदीयमान खिलाड़ी का पुरस्कार मिला. मनप्रीत की अगुवाई में भारतीय टीम मस्कट में एशियाई चैंपियंस ट्राफी में अजेय रही थी, भारत को उस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता घोषित किया गया था.
जानकारी के लिए बता दें उन्होंने टीम को ब्रेडा में एफआईएच चैंपियंस ट्राफी में रजत पदक दिलाने में योगदान दिया था. वही18 वर्षीय लालरेमसियामी ने महिला टीम की तरफ से विश्व कप 2018 और एशियाई खेलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था. भारत ने एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था. वह ब्यूनसआयर्स में युवा ओलिंपिक खेलों में भी खेली थी जिसमें भारतीय टीम रजत पदक जीतने में सफल रही थी. वही पुरूष टीम को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला. भारतीय टीम भुवनेश्वर में विश्व कप में शीर्ष आठ में पहुंचने वाली एकमात्र एशियाई टीम थी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार इससे पहले भारत की स्टार निशानेबाज अपूर्वी चंदेला ने डॉ कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आईएसएसएफ विश्व कप में शनिवार को महिला 10 मीटर एयर राइफल मुकाबले में विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीत लिया। प्रतियोगिता के पहले दिन यह एकमात्र फाइनल था और भारत इस स्पर्धा में पहले ही दो अधिकतम ओलंपिक कोटा हासिल कर चुका था। भारतीय निशानेबाजों की नजरें इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हुई थी लेकिन अपूर्वी ने तो स्वर्ण पदक के साथ -साथ विश्व रिकॉर्ड ही बना दिया।
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नई दिल्ली : भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह को एशियाई हाकी महासंघ ने वर्ष दो हज़ार अट्ठारह का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार से सम्मानित किया है जबकि महिला टीम की स्ट्राइकर लालरेमसियामी को वर्ष की उदीयमान खिलाड़ी का पुरस्कार मिला. मनप्रीत की अगुवाई में भारतीय टीम मस्कट में एशियाई चैंपियंस ट्राफी में अजेय रही थी, भारत को उस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता घोषित किया गया था. जानकारी के लिए बता दें उन्होंने टीम को ब्रेडा में एफआईएच चैंपियंस ट्राफी में रजत पदक दिलाने में योगदान दिया था. वहीअट्ठारह वर्षीय लालरेमसियामी ने महिला टीम की तरफ से विश्व कप दो हज़ार अट्ठारह और एशियाई खेलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था. भारत ने एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था. वह ब्यूनसआयर्स में युवा ओलिंपिक खेलों में भी खेली थी जिसमें भारतीय टीम रजत पदक जीतने में सफल रही थी. वही पुरूष टीम को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला. भारतीय टीम भुवनेश्वर में विश्व कप में शीर्ष आठ में पहुंचने वाली एकमात्र एशियाई टीम थी. प्राप्त जानकारी के अनुसार इससे पहले भारत की स्टार निशानेबाज अपूर्वी चंदेला ने डॉ कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में आईएसएसएफ विश्व कप में शनिवार को महिला दस मीटर एयर राइफल मुकाबले में विश्व रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक जीत लिया। प्रतियोगिता के पहले दिन यह एकमात्र फाइनल था और भारत इस स्पर्धा में पहले ही दो अधिकतम ओलंपिक कोटा हासिल कर चुका था। भारतीय निशानेबाजों की नजरें इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हुई थी लेकिन अपूर्वी ने तो स्वर्ण पदक के साथ -साथ विश्व रिकॉर्ड ही बना दिया।
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भरतपुरः राजस्थान के भरतपुर संभाग मुख्यालय के एसीबी कोर्ट ने रिश्वत के मामले में शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। सवाई माधोपुर में तैनात इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व निजी लेखाकार को रिश्वत लेने के मामले में चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद दोनों आरोपियों को केंद्रीय कारागार सेवर भेज दिया गया।
दरअसल मामला सवाई माधोपुर का है जहां एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए 20 मार्च 2009 को इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व एक निजी लेखाकार को ₹35000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। मामले में शुक्रवार को एसीबी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सवाई माधोपुर में पेट्रोल पंप चलाने वाले परिवादी भरत लाल मीणा ने अपने पेट्रोल पंप पर मनोज जैन नामक व्यक्ति को लेखाकार नियुक्त कर रखा था। परिवादी भरत लाल मीणा कुछ दिनों के लिए बाहर चला गया था जिसकी वजह से लेखाकार ने समय पर इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा था। जिसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने पेट्रोल पंप संचालक भरत लाल मीणा को नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले को रफा-दफा करने के लिए इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा रिश्वत की मांग कर रहा था, लेकिन परिवादी ने इसकी शिकायत एसीबी में दर्ज की थी।
शिकायत दर्ज होने के बाद एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया था। सत्यापन होने के बाद एसीबी टीम ने ₹35000 की रिश्वत लेते हुए इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व एक निजी लेखाकार को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में शुक्रवार को एसीबी कोर्ट की न्यायाधीश रूपा गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई है।
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भरतपुरः राजस्थान के भरतपुर संभाग मुख्यालय के एसीबी कोर्ट ने रिश्वत के मामले में शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। सवाई माधोपुर में तैनात इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व निजी लेखाकार को रिश्वत लेने के मामले में चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद दोनों आरोपियों को केंद्रीय कारागार सेवर भेज दिया गया। दरअसल मामला सवाई माधोपुर का है जहां एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए बीस मार्च दो हज़ार नौ को इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व एक निजी लेखाकार को पैंतीस हज़ार रुपया की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। मामले में शुक्रवार को एसीबी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सवाई माधोपुर में पेट्रोल पंप चलाने वाले परिवादी भरत लाल मीणा ने अपने पेट्रोल पंप पर मनोज जैन नामक व्यक्ति को लेखाकार नियुक्त कर रखा था। परिवादी भरत लाल मीणा कुछ दिनों के लिए बाहर चला गया था जिसकी वजह से लेखाकार ने समय पर इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा था। जिसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने पेट्रोल पंप संचालक भरत लाल मीणा को नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले को रफा-दफा करने के लिए इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा रिश्वत की मांग कर रहा था, लेकिन परिवादी ने इसकी शिकायत एसीबी में दर्ज की थी। शिकायत दर्ज होने के बाद एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया था। सत्यापन होने के बाद एसीबी टीम ने पैंतीस हज़ार रुपया की रिश्वत लेते हुए इनकम टैक्स ऑफिसर किरोड़ी लाल मीणा व एक निजी लेखाकार को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में शुक्रवार को एसीबी कोर्ट की न्यायाधीश रूपा गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई है।
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राशनकार्ड धारको की हुई बल्ले बल्ले, सरकार के नये नियम में झोला भर भर के मिलेगा राशन, जाने पुरे नियम । देश में करोड़ों परिवार सरकारी राशन की दुकान से अनाज लेते हैं और इन सभी लाभार्थी परिवारों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कुछ जरूरी नियम बनाए हैं. इन नियमों का सख्ती से पालन भी कराया जा रहा है. इसी कड़ी में सरकार राशन की दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस को अनिवार्य कर चुकी है. जिससे की राशन में जो गड़बड़ी होती है उससे राहत मिलेंगी। जिससे सरकार और जनता दोनों का ही फायदा है। सरकार ने इस मशीन से राशन वितरण अनिवार्य कर दिया है।
सरकार ने राशन वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए इसे सभी जगह लागू कर दिया है। अब देश में उचित दर वाली सभी दुकानों को आनलाइन इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल यानी पीओएस डिवाइस से जोड़ दिया गया है. यानी अब राशन तौल में गड़बड़ी की गुंजाइश ही नहीं बची है. पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (PDS) के लाभार्थी को किसी भी सूरत में कम राशन न मिले, इसके लिए राशन डीलरों को हाइब्रिड माडल की प्वाइंट आफ सेल मशीनें दी गई हैं. ये मशीनें आनलाइन मोड के साथ ही नेटवर्क न रहने पर ऑफलाइन भी काम करेंगी. अब कार्ड धारकों अपने डिजिटल राशन कार्ड के इस्तेमाल से देश में किसी भी उचित दर की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सामान मिल सकेगा.
सरकार का कहना है कि यह संशोधन एनएफएसए के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के संचालन की पारदर्शिता में सुधार के माध्यम से अधिनियम की धारा 12 के तहत खाद्यान्न तौल में सुधार प्रक्रिया को और आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। दरअसल, लगातार ये शिकायत आती रहती थी कि कई जगहों पर कोटेदार कम राशन तौलते हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत सरकार देश के करीब 80 करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति, प्रति माह पांच किलो गेहूं और चावल (खाद्यान्न) क्रमशः 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर दे रही है।
जैसा की आपको बता दे की इस मशीन से राशन वितरण से सरकार और आम जनता का बहुत फायदा है। इसमें सभी को अपने हक़ का बराबर राशन मिलेंगा। आज के समय में राशन वितरण में बहुत ज्यादा गड़बड़ी देखने मिल रही थी जिससे आम जनता और सरकार का काफी ज्यादा नुकसान था।
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राशनकार्ड धारको की हुई बल्ले बल्ले, सरकार के नये नियम में झोला भर भर के मिलेगा राशन, जाने पुरे नियम । देश में करोड़ों परिवार सरकारी राशन की दुकान से अनाज लेते हैं और इन सभी लाभार्थी परिवारों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कुछ जरूरी नियम बनाए हैं. इन नियमों का सख्ती से पालन भी कराया जा रहा है. इसी कड़ी में सरकार राशन की दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल डिवाइस को अनिवार्य कर चुकी है. जिससे की राशन में जो गड़बड़ी होती है उससे राहत मिलेंगी। जिससे सरकार और जनता दोनों का ही फायदा है। सरकार ने इस मशीन से राशन वितरण अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने राशन वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए इसे सभी जगह लागू कर दिया है। अब देश में उचित दर वाली सभी दुकानों को आनलाइन इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल यानी पीओएस डिवाइस से जोड़ दिया गया है. यानी अब राशन तौल में गड़बड़ी की गुंजाइश ही नहीं बची है. पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के लाभार्थी को किसी भी सूरत में कम राशन न मिले, इसके लिए राशन डीलरों को हाइब्रिड माडल की प्वाइंट आफ सेल मशीनें दी गई हैं. ये मशीनें आनलाइन मोड के साथ ही नेटवर्क न रहने पर ऑफलाइन भी काम करेंगी. अब कार्ड धारकों अपने डिजिटल राशन कार्ड के इस्तेमाल से देश में किसी भी उचित दर की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सामान मिल सकेगा. सरकार का कहना है कि यह संशोधन एनएफएसए के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन की पारदर्शिता में सुधार के माध्यम से अधिनियम की धारा बारह के तहत खाद्यान्न तौल में सुधार प्रक्रिया को और आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। दरअसल, लगातार ये शिकायत आती रहती थी कि कई जगहों पर कोटेदार कम राशन तौलते हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार देश के करीब अस्सी करोड़ लोगों को प्रति व्यक्ति, प्रति माह पांच किलो गेहूं और चावल क्रमशः दो-तीन रुपयापये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर दे रही है। जैसा की आपको बता दे की इस मशीन से राशन वितरण से सरकार और आम जनता का बहुत फायदा है। इसमें सभी को अपने हक़ का बराबर राशन मिलेंगा। आज के समय में राशन वितरण में बहुत ज्यादा गड़बड़ी देखने मिल रही थी जिससे आम जनता और सरकार का काफी ज्यादा नुकसान था।
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बॉलीवुड के किंग कहे जाने वाले सुपरस्टार शाहरुख खान अपनी फिल्म 'जीरो' की फ्लॉप के बाद से किसी भी फिल्म में नजर नहीं आए हैं। ऐसे में उनके फैंस उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच हाल ही में खबर आई थी कि किंग खान को जल्द ही राजकुमार हीरानी की फिल्म में करीना कपूर खान के साथ देखा जाने वाला है। हालांकि, अब करीना ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
बीते दिनों मुंबई मिरर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान करीना ने शाहरुख के साथ काम करने की खबर को लेकर चर्चा की। उनसे जब इस फिल्म में काम करने के बारे में सवाल किए गए तो इस पर करीना ने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना है कि यह सब केवल अफवाह है। उनके पास फिलहाल इस फिल्म में काम करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
करीना ने बातचीत के दौरान कहा, "मैं राजकुमार हिरानी की इस फिल्म का हिस्सा नहीं हूं। मैं शाहरुख की बहुत इज्जत करती हूं और उनसे बेहद प्यार भी करती हूं। अगर मुझे आगे कभी भी उनके साथ काम करने का मौका मिलेगा तो मैं बेशक करना चाहूंगी। " उन्होंने आगे कहा, "फिलहाल तो मुझे ऐसी किसी भी फिल्म के लिए अब तक अप्रोच नहीं किया गया है और यह सभी खबरें केवल अफवाहें ही हैं। "
शाहरुख और करीना को पिछली बार 2011 में फिल्म 'रा वन' में साथ काम करते देखा गया था। फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया गया था। इसके अलावा ये दोनों 'अशोका' और 'कभी खुशी कभी गम' जैसी फिल्मों में भी साथ दिख चुके हैं।
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बॉलीवुड के किंग कहे जाने वाले सुपरस्टार शाहरुख खान अपनी फिल्म 'जीरो' की फ्लॉप के बाद से किसी भी फिल्म में नजर नहीं आए हैं। ऐसे में उनके फैंस उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच हाल ही में खबर आई थी कि किंग खान को जल्द ही राजकुमार हीरानी की फिल्म में करीना कपूर खान के साथ देखा जाने वाला है। हालांकि, अब करीना ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। बीते दिनों मुंबई मिरर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान करीना ने शाहरुख के साथ काम करने की खबर को लेकर चर्चा की। उनसे जब इस फिल्म में काम करने के बारे में सवाल किए गए तो इस पर करीना ने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना है कि यह सब केवल अफवाह है। उनके पास फिलहाल इस फिल्म में काम करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं आया है। करीना ने बातचीत के दौरान कहा, "मैं राजकुमार हिरानी की इस फिल्म का हिस्सा नहीं हूं। मैं शाहरुख की बहुत इज्जत करती हूं और उनसे बेहद प्यार भी करती हूं। अगर मुझे आगे कभी भी उनके साथ काम करने का मौका मिलेगा तो मैं बेशक करना चाहूंगी। " उन्होंने आगे कहा, "फिलहाल तो मुझे ऐसी किसी भी फिल्म के लिए अब तक अप्रोच नहीं किया गया है और यह सभी खबरें केवल अफवाहें ही हैं। " शाहरुख और करीना को पिछली बार दो हज़ार ग्यारह में फिल्म 'रा वन' में साथ काम करते देखा गया था। फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया गया था। इसके अलावा ये दोनों 'अशोका' और 'कभी खुशी कभी गम' जैसी फिल्मों में भी साथ दिख चुके हैं।
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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के तीन दिवसीय दौरे पर आठ अप्रैल को पहुंच चुके है। वहां पहुंचकर उन्होंने महायोग गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय निरीक्षण पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पीडब्ल्यूडी आधिकारियों और ठेकेदार से कंस्ट्रक्शन की जानकारी ली। साथ ही काम के धीरे चलने पर उन्होंने जिम्मेदारों को फटकार भी लगाई।
लखनऊः उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ तीन दिवसीय के दौरे पर गोरखपुर गए हैं। जहां वो एमएलसी को वोटिंग के साथ-साथ रामनवमी में गोरखनाथ मंदिर में उपसना भी करेंगे। इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया। राज्य के मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार यानी आठ अप्रैल को गोरखपुर के पिपरी में बन रहे प्रदेश के पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिट्टी भराई का कार्य पूरा नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। सीएम ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि दो महीने में मिट्टी भराई का कार्य पूर्ण न होने और निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार का अपेक्षित प्रगति न दिखने पर कॉन्ट्रैक्टर व अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। कार्यों में देरी, माफियागिरी और अराजकता का रूप ले या फिर ऐसे लोग कोर्ट जाकर दबाव बनाने लगें, उसके पहले सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
राज्य में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर है। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय पहुंचते ही सीएम योगी ने पूरे परिसर पर निगाह दौड़ाई तो उन्हें मिट्टी भराई का कार्य अधूरा दिखा। जिसके बाद अधिकारियों के साथ उनका लहजा तल्ख हो गया। उन्होंने निर्माण विभाग के अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि मिट्टी भराई का जो काम अब तक पूरा हो जाना चाहिए था वह अब तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ महीनों के बाद बरसात का सीजन आ जाएगा तब तो यह काम और नहीं होगा। 15 जून के बाद बरसात शुरू होते ही यहां पानी भर जाएगा। ऐसे में समय पर यह परियोजना कैसी पूरी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर देख पीडब्ल्यूडी के अधिकारी व कॉन्ट्रैक्टर तेजी में आ गए। उन्होंने सीएम योगी से कहा कि मई अंत तक हरहाल में मिट्टी भराई का काम पूरा हो जाएगा और अगले साल अगस्त तक निर्माण कार्य भी पूरा कर देंगे।
आयुष विश्विद्यालय के निरीक्षण के दौरान ही सीएम योगी ने कुलपति से पूछा कि वह कहां बैठते हैं। तो कुलपति प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि प्रेमचंद पार्क के पास आईएएस-पीसीएस कोचिंग वाली बिल्डिंग में बैठते हैं। इसको सुनकर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पीडब्ल्यूडी से बात कर अपने आवास की व्यवस्था कराएं ताकि आईएएस-पीसीएस कोचिंग के छात्रों को कोई असुविधा न हो। कुलपति ने मुख्यमंत्री योगी को बताया कि अधिकारियों ने चार माह में आवास बनाकर देने को कहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वह कार्य प्रगति की जवाबदेही तय करें। शहर में सभी निर्माण कार्य में बिना रियायत के सख्त कार्रवाई करें। कार्य में देरी और अराजकता पैदा करने के लिए अक्सर लोग मिल जाते है इसलिए ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत हैं।
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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के तीन दिवसीय दौरे पर आठ अप्रैल को पहुंच चुके है। वहां पहुंचकर उन्होंने महायोग गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय निरीक्षण पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पीडब्ल्यूडी आधिकारियों और ठेकेदार से कंस्ट्रक्शन की जानकारी ली। साथ ही काम के धीरे चलने पर उन्होंने जिम्मेदारों को फटकार भी लगाई। लखनऊः उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ तीन दिवसीय के दौरे पर गोरखपुर गए हैं। जहां वो एमएलसी को वोटिंग के साथ-साथ रामनवमी में गोरखनाथ मंदिर में उपसना भी करेंगे। इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया। राज्य के मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार यानी आठ अप्रैल को गोरखपुर के पिपरी में बन रहे प्रदेश के पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिट्टी भराई का कार्य पूरा नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। सीएम ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि दो महीने में मिट्टी भराई का कार्य पूर्ण न होने और निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार का अपेक्षित प्रगति न दिखने पर कॉन्ट्रैक्टर व अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। कार्यों में देरी, माफियागिरी और अराजकता का रूप ले या फिर ऐसे लोग कोर्ट जाकर दबाव बनाने लगें, उसके पहले सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। राज्य में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर है। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय पहुंचते ही सीएम योगी ने पूरे परिसर पर निगाह दौड़ाई तो उन्हें मिट्टी भराई का कार्य अधूरा दिखा। जिसके बाद अधिकारियों के साथ उनका लहजा तल्ख हो गया। उन्होंने निर्माण विभाग के अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि मिट्टी भराई का जो काम अब तक पूरा हो जाना चाहिए था वह अब तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ महीनों के बाद बरसात का सीजन आ जाएगा तब तो यह काम और नहीं होगा। पंद्रह जून के बाद बरसात शुरू होते ही यहां पानी भर जाएगा। ऐसे में समय पर यह परियोजना कैसी पूरी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर देख पीडब्ल्यूडी के अधिकारी व कॉन्ट्रैक्टर तेजी में आ गए। उन्होंने सीएम योगी से कहा कि मई अंत तक हरहाल में मिट्टी भराई का काम पूरा हो जाएगा और अगले साल अगस्त तक निर्माण कार्य भी पूरा कर देंगे। आयुष विश्विद्यालय के निरीक्षण के दौरान ही सीएम योगी ने कुलपति से पूछा कि वह कहां बैठते हैं। तो कुलपति प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि प्रेमचंद पार्क के पास आईएएस-पीसीएस कोचिंग वाली बिल्डिंग में बैठते हैं। इसको सुनकर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पीडब्ल्यूडी से बात कर अपने आवास की व्यवस्था कराएं ताकि आईएएस-पीसीएस कोचिंग के छात्रों को कोई असुविधा न हो। कुलपति ने मुख्यमंत्री योगी को बताया कि अधिकारियों ने चार माह में आवास बनाकर देने को कहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वह कार्य प्रगति की जवाबदेही तय करें। शहर में सभी निर्माण कार्य में बिना रियायत के सख्त कार्रवाई करें। कार्य में देरी और अराजकता पैदा करने के लिए अक्सर लोग मिल जाते है इसलिए ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत हैं।
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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन के नतीजे सोमवार को घोषित कर दिए, जिसमें 14 अभ्यर्थियों ने 100 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त किए हैं। NTA के मुताबिक, जेईई-मेन 2022 के प्रथम संस्करण में शीर्ष स्कोर प्राप्त करने वाले छात्रों में तेलंगाना से चार और आंध्र प्रदेश के तीन विद्यार्थी सम्मिलित हैं। तेलंगाना से शीर्ष स्कोर हासिल करने वाले विद्यार्थियों में जस्ती यश्वनाथ वीवीएस, रूपेश बियानी, अनिकेत चट्टोपाध्याय एवं धीरज कुरुकुंदा सम्मिलित हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश से कोयायाना सुहास, पी रवि किशोर एवं पोलीशेट्टी कार्तिकेय ने शीर्ष स्कोर हासिल किया। जेईई-मेन में जिन अन्य विद्यार्थियों ने 100 स्कोर प्राप्त किया है, उनमें सार्थक माहेश्वरी (हरियाणा), कुशाग्र श्रीवास्तव (झारखंड), मृणाल गर्ग (पंजाब), स्नेहा पारीक (असम), नव्या (राजस्थान), बोया हरसेन सात्विक (कर्नाटक) एवं सौमित्र गर्ग (उत्तर प्रदेश) सम्मिलित हैं।
NTA के एक वरिष्ठ अफसर ने कहा, 'परीक्षा में 8. 7 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया, जबकि 7. 69 लाख उम्मीदवार परीक्षा में सम्मिलित हुए। ' उन्होंने बताया कि परीक्षा 407 शहरों में 588 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई, जिसमें देश से बाहर के 17 शहर सम्मिलित हैं। अफसर के मुताबिक, देश से बाहर जिन शहरों पर परीक्षा आयोजित की गई, उनमें मनामा, दोहा, दुबई, काठमांडो, मस्कट, रियाद, शारजाह, कुवैत सिटी, कुआलालंपुर, लाओस/अबुजा, जकार्ता, कोलंबो, विएना, मास्को, पोर्ट लुई, बैंकाक सम्मिलित हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के सुचारु एवं निष्पक्ष संचालन के लिए परीक्षा केंद्रों पर कुल 558 पर्यवेक्षक, 424 शहर समन्वयक, 18 क्षेत्रीय समन्वयक, 369 उप/स्वतंत्र पर्यवेक्षक एवं दो राष्ट्रीय समन्वयक तैनात किए गए थे। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी, जिसमें असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु एवं उर्दू सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि NTA स्कोर दरअसल प्राप्त अंकों के फीसद के समान नहीं है।
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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन के नतीजे सोमवार को घोषित कर दिए, जिसमें चौदह अभ्यर्थियों ने एक सौ पर्सेंटाइल अंक प्राप्त किए हैं। NTA के मुताबिक, जेईई-मेन दो हज़ार बाईस के प्रथम संस्करण में शीर्ष स्कोर प्राप्त करने वाले छात्रों में तेलंगाना से चार और आंध्र प्रदेश के तीन विद्यार्थी सम्मिलित हैं। तेलंगाना से शीर्ष स्कोर हासिल करने वाले विद्यार्थियों में जस्ती यश्वनाथ वीवीएस, रूपेश बियानी, अनिकेत चट्टोपाध्याय एवं धीरज कुरुकुंदा सम्मिलित हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश से कोयायाना सुहास, पी रवि किशोर एवं पोलीशेट्टी कार्तिकेय ने शीर्ष स्कोर हासिल किया। जेईई-मेन में जिन अन्य विद्यार्थियों ने एक सौ स्कोर प्राप्त किया है, उनमें सार्थक माहेश्वरी , कुशाग्र श्रीवास्तव , मृणाल गर्ग , स्नेहा पारीक , नव्या , बोया हरसेन सात्विक एवं सौमित्र गर्ग सम्मिलित हैं। NTA के एक वरिष्ठ अफसर ने कहा, 'परीक्षा में आठ. सात लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया, जबकि सात. उनहत्तर लाख उम्मीदवार परीक्षा में सम्मिलित हुए। ' उन्होंने बताया कि परीक्षा चार सौ सात शहरों में पाँच सौ अठासी परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई, जिसमें देश से बाहर के सत्रह शहर सम्मिलित हैं। अफसर के मुताबिक, देश से बाहर जिन शहरों पर परीक्षा आयोजित की गई, उनमें मनामा, दोहा, दुबई, काठमांडो, मस्कट, रियाद, शारजाह, कुवैत सिटी, कुआलालंपुर, लाओस/अबुजा, जकार्ता, कोलंबो, विएना, मास्को, पोर्ट लुई, बैंकाक सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा के सुचारु एवं निष्पक्ष संचालन के लिए परीक्षा केंद्रों पर कुल पाँच सौ अट्ठावन पर्यवेक्षक, चार सौ चौबीस शहर समन्वयक, अट्ठारह क्षेत्रीय समन्वयक, तीन सौ उनहत्तर उप/स्वतंत्र पर्यवेक्षक एवं दो राष्ट्रीय समन्वयक तैनात किए गए थे। परीक्षा तेरह भाषाओं में आयोजित की गई थी, जिसमें असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु एवं उर्दू सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि NTA स्कोर दरअसल प्राप्त अंकों के फीसद के समान नहीं है।
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फिल्म आशिकी(1990) एक म्यूजिकल हिट साबित हुई थी, उस जमाने में इस फिल्म के हर गाने ने धूम मचाई थी। अब डायरेक्टर मोहित सूरी की अपकमिंग फिल्म आशिकी-2 का सॉन्ग 'तुम ही हो...' यू ट्यूब पर छाया हुआ है। पिछले दस दिनों में इस सॉन्ग को 18 लाख 52 हजार 947 हिट्स मिल चुके हैं। आशिकी में राहुल राय और अनु कपूर लीड रोल में थे, वहीं आशिकी-2 में आदित्य रॉय कपूर और श्रद्ध कपूर लीड रोल में दिखाई देंगे। फिल्म के रोमांटिक सॉन्ग 'तुम ही हो...' को भी आदित्य और श्रद्धा पर ही शूट किया गया है। यू ट्यूब के अलावा भी इस सॉन्ग दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर खूब एक्सचेंज किया जा रहा है। बता दें कि इस सॉन्ग को अपनी आवाज अर्जित सिंह ने दी है और मिथुन ने इसे कंपोज किया है। इस सॉन्ग के बोल के साथ-साथ म्यूजिक भी बहुत प्यार है, इसलिए इसकी लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इस सॉन्ग को 23 मार्च को रिलीज किया गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म आशिकी के ज्यादातर गानों को अपनी आवाज कुमार सानू और अनुराधा पोडवाल ने दी थी। फिल्म आशिरी-2 साल 1990 में रिलीज हुई महेश भट्ट की म्यूजिकल हिट फिल्म आशिकी का रीमेक है। सूत्रों की मानें तो आशिकी-2 भी एक म्यूजिक फिल्म है, जिसे मोहित सूरी डायरेक्ट कर रहे हैं।
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फिल्म आशिकी एक म्यूजिकल हिट साबित हुई थी, उस जमाने में इस फिल्म के हर गाने ने धूम मचाई थी। अब डायरेक्टर मोहित सूरी की अपकमिंग फिल्म आशिकी-दो का सॉन्ग 'तुम ही हो...' यू ट्यूब पर छाया हुआ है। पिछले दस दिनों में इस सॉन्ग को अट्ठारह लाख बावन हजार नौ सौ सैंतालीस हिट्स मिल चुके हैं। आशिकी में राहुल राय और अनु कपूर लीड रोल में थे, वहीं आशिकी-दो में आदित्य रॉय कपूर और श्रद्ध कपूर लीड रोल में दिखाई देंगे। फिल्म के रोमांटिक सॉन्ग 'तुम ही हो...' को भी आदित्य और श्रद्धा पर ही शूट किया गया है। यू ट्यूब के अलावा भी इस सॉन्ग दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर खूब एक्सचेंज किया जा रहा है। बता दें कि इस सॉन्ग को अपनी आवाज अर्जित सिंह ने दी है और मिथुन ने इसे कंपोज किया है। इस सॉन्ग के बोल के साथ-साथ म्यूजिक भी बहुत प्यार है, इसलिए इसकी लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इस सॉन्ग को तेईस मार्च को रिलीज किया गया था। ब्लॉकबस्टर फिल्म आशिकी के ज्यादातर गानों को अपनी आवाज कुमार सानू और अनुराधा पोडवाल ने दी थी। फिल्म आशिरी-दो साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में रिलीज हुई महेश भट्ट की म्यूजिकल हिट फिल्म आशिकी का रीमेक है। सूत्रों की मानें तो आशिकी-दो भी एक म्यूजिक फिल्म है, जिसे मोहित सूरी डायरेक्ट कर रहे हैं।
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New Delhi, 3 April: कॉमेडियन एक्टर सुनील ग्रोवर एक बार फिर टीवी पर नजर आने वाले हैं लेकिन इस बार कपिल शर्मा के शो पर नहीं बल्कि सोनी के सिंगिंग रिएलिटी शो 'इंडियन आइडल 9' के ग्रैंड फिनाले में दर्शकों को हंसाते हुए नजर आएंगे.
हाल ही में कपिल शर्मा से फ्लाइट पर हुए झगड़े के बाद सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा के शो की शूटिंग करने से मना कर दिया था, खबर है कि सुनील ग्रोवर 'इंडियन आइडल 9' के ग्रैंड फिनाले में वे डॉ. मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी दोनों अवतार में नजर आने वाले हैं.
सुनील ग्रोवर के अलावे उनकी सह कलाकार सुगंधा मिश्रा भी अपने 'विद्यावती' के अंदाज में ही इस शो में भी नजर आने वाली हैं.
इसी बीच इसी चैनल पर शुरू होने वाले शो 'सबसे बड़ा कलाकार' के जज अरशद वारसी और रवीना टंडन इंडियन आइडियल 9 के जज फराह खान, सोनू निगम अनु मालिक के साथ नजर आएंगे.
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New Delhi, तीन अप्रैलil: कॉमेडियन एक्टर सुनील ग्रोवर एक बार फिर टीवी पर नजर आने वाले हैं लेकिन इस बार कपिल शर्मा के शो पर नहीं बल्कि सोनी के सिंगिंग रिएलिटी शो 'इंडियन आइडल नौ' के ग्रैंड फिनाले में दर्शकों को हंसाते हुए नजर आएंगे. हाल ही में कपिल शर्मा से फ्लाइट पर हुए झगड़े के बाद सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा के शो की शूटिंग करने से मना कर दिया था, खबर है कि सुनील ग्रोवर 'इंडियन आइडल नौ' के ग्रैंड फिनाले में वे डॉ. मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी दोनों अवतार में नजर आने वाले हैं. सुनील ग्रोवर के अलावे उनकी सह कलाकार सुगंधा मिश्रा भी अपने 'विद्यावती' के अंदाज में ही इस शो में भी नजर आने वाली हैं. इसी बीच इसी चैनल पर शुरू होने वाले शो 'सबसे बड़ा कलाकार' के जज अरशद वारसी और रवीना टंडन इंडियन आइडियल नौ के जज फराह खान, सोनू निगम अनु मालिक के साथ नजर आएंगे.
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दो सूत्री मांग को लेकर मनरेगा कर्मचारी ब्लाक इकाई मैनपुर ने सोमवार से जनपद पंचायत मैनपुर के सामने धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का शुभारंभ करते हुए जमकर नारेबाजी की। chhattisgarhTue, 05 Apr 2022 12:22 AM (IST)
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले जिले के मनरेगा कर्मचारियों ने सोमवार को दो सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल में मनरेगा के तहत कार्य कर रहे सभी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं, जिनकी. . . chhattisgarhMon, 04 Apr 2022 11:23 PM (IST)
12 सूत्री मांगों को लेकर वन कर्मचारी पिछले कई दिनों से हड़ताल पर है। सुरक्षा कम होने से कई लोग जंगलों के अंदर पेड़ काटकर लकड़ी की चोरी कर रहे हैं। chhattisgarhSat, 02 Apr 2022 11:53 PM (IST)
वन विभाग के अफसर वन समिति और फायर विभाग की टीम के जरिए आग को काबू में करने का प्रयास किया जा रहा है। chhattisgarhFri, 01 Apr 2022 08:38 PM (IST)
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल 21 मार्च से पूरे प्रदेश में जारी है। इसी कड़ी में ब्लाक मुख्यालय चारामा में भी बीआरसी भवन के पास वन कर्मचारी संघ की हड़ताल अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर दसवें दिन भी लगातार . . . chhattisgarhThu, 31 Mar 2022 12:54 AM (IST)
निजीकरण के विरोध में बैंकों के कर्मचारी सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। जिले के 13 बैंकों की सौ से ज्यादा शाखाओं में सोमवार को ताला लटका रहा। madhya pradeshTue, 29 Mar 2022 01:28 AM (IST)
केंद्रीय मान्यता प्राप्त 10 श्रमिक संघ के संयुक्त मोर्चे के दो दिवसीय देशव्यापी कामबंद हड़ताल के पहले दिन साउथ इस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड (एसईसीएल) की खदानों में आंशिक असर देखा गया। chhattisgarhMon, 28 Mar 2022 10:53 PM (IST)
केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध बीएसएनएल विभाग के समस्त यूनियन ने हड़ताल शुरु कर दी है। हड़ताल के दौरान केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर आक्रोश व्यक्त किया गया। हड़ताल में समस्त विकासखंड के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शाम. . . madhya pradeshMon, 28 Mar 2022 09:36 PM (IST)
जंगल में आग लगने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। बड़गांव, कापसी, पखांजूर समेत क्षेत्रीय इलाकों में शायद ही ऐसा कोई पहाड़ी इलाके हो जहां पर जंगल की आग ने रफ्तार न पकड़ी हो। chhattisgarhSat, 26 Mar 2022 12:14 AM (IST)
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ भानुप्रतापपुर एवं दुर्गूकोंदल के समस्त वन कर्मचारियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। चौथे दिन संघ के संभागीय अध्यक्ष हरीश कोड़ोपी, जिलाध्यक्ष विजय सिन्हा, प्रांतीय महामंत्री अखंड प्रताप तिवारी विश. . . chhattisgarhFri, 25 Mar 2022 12:58 AM (IST)
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दो सूत्री मांग को लेकर मनरेगा कर्मचारी ब्लाक इकाई मैनपुर ने सोमवार से जनपद पंचायत मैनपुर के सामने धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का शुभारंभ करते हुए जमकर नारेबाजी की। chhattisgarhTue, पाँच अप्रैल दो हज़ार बाईस बारह:बाईस AM छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले जिले के मनरेगा कर्मचारियों ने सोमवार को दो सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल में मनरेगा के तहत कार्य कर रहे सभी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं, जिनकी. . . chhattisgarhMon, चार अप्रैल दो हज़ार बाईस ग्यारह:तेईस PM बारह सूत्री मांगों को लेकर वन कर्मचारी पिछले कई दिनों से हड़ताल पर है। सुरक्षा कम होने से कई लोग जंगलों के अंदर पेड़ काटकर लकड़ी की चोरी कर रहे हैं। chhattisgarhSat, दो अप्रैल दो हज़ार बाईस ग्यारह:तिरेपन PM वन विभाग के अफसर वन समिति और फायर विभाग की टीम के जरिए आग को काबू में करने का प्रयास किया जा रहा है। chhattisgarhFri, एक अप्रैल दो हज़ार बाईस आठ:अड़तीस PM छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल इक्कीस मार्च से पूरे प्रदेश में जारी है। इसी कड़ी में ब्लाक मुख्यालय चारामा में भी बीआरसी भवन के पास वन कर्मचारी संघ की हड़ताल अपनी बारह सूत्रीय मांगों को लेकर दसवें दिन भी लगातार . . . chhattisgarhThu, इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस बारह:चौवन AM निजीकरण के विरोध में बैंकों के कर्मचारी सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। जिले के तेरह बैंकों की सौ से ज्यादा शाखाओं में सोमवार को ताला लटका रहा। madhya pradeshTue, उनतीस मार्च दो हज़ार बाईस एक:अट्ठाईस AM केंद्रीय मान्यता प्राप्त दस श्रमिक संघ के संयुक्त मोर्चे के दो दिवसीय देशव्यापी कामबंद हड़ताल के पहले दिन साउथ इस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की खदानों में आंशिक असर देखा गया। chhattisgarhMon, अट्ठाईस मार्च दो हज़ार बाईस दस:तिरेपन PM केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध बीएसएनएल विभाग के समस्त यूनियन ने हड़ताल शुरु कर दी है। हड़ताल के दौरान केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर आक्रोश व्यक्त किया गया। हड़ताल में समस्त विकासखंड के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शाम. . . madhya pradeshMon, अट्ठाईस मार्च दो हज़ार बाईस नौ:छत्तीस PM जंगल में आग लगने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। बड़गांव, कापसी, पखांजूर समेत क्षेत्रीय इलाकों में शायद ही ऐसा कोई पहाड़ी इलाके हो जहां पर जंगल की आग ने रफ्तार न पकड़ी हो। chhattisgarhSat, छब्बीस मार्च दो हज़ार बाईस बारह:चौदह AM छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ भानुप्रतापपुर एवं दुर्गूकोंदल के समस्त वन कर्मचारियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। चौथे दिन संघ के संभागीय अध्यक्ष हरीश कोड़ोपी, जिलाध्यक्ष विजय सिन्हा, प्रांतीय महामंत्री अखंड प्रताप तिवारी विश. . . chhattisgarhFri, पच्चीस मार्च दो हज़ार बाईस बारह:अट्ठावन AM
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वेस्टर्न आउटफिट्स पहनकर रैंप पर उतरी खूबसूरत बालाओं ने कैट वॉक की और खूब वाहवाही लूटी। गर्ल्स का वेस्टर्न स्टाइल व ब्राइडल लुक सबको पसंद आया। मौका था श्री गुरु नानक महिला महाविद्यालय द्वारा गुजराती मंडल भवन में आयोजित फ्रेशर पार्टी का। जूनियर स्टूडेंट्स ने स्टेज पर अपना इंटोडक्शन दिया। रैंप वॉक के पहले राउंड में 70 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 30 स्टूडेंट्स को सेकंड राउंड के लिए सिलेक्ट किया गया। तीसरे राउंड में 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निर्णायकों ने मिस फ्रेशर पूर्णिमा जैन, मिस पर्सनालिटी शैली केशरवानी व मिस ईव सोनिया चौधरी को चुना। निर्णायक की भूमिका प्राचार्य डॉ. विमल कांत सैनी व डॉ. सविता तिवारी ने निभाई।
फ्रेशर पार्टी में बीकॉम तृतीय सेमेस्टर की छात्रा शिवानी सिंह ने एकल नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। रोशनी व ग्रुप ने महिषासुर मर्दनी नृत्यनाटिका की आकर्षक प्रस्तुति दी। सुहासनी कायेंदे, मनीषा चौरसिया, वैजंती बंजारा, तौरन, पूनम, प्रियांशु ने एकल नृत्य प्रस्तुत किया। ज्योति व आरती ने युगल नृत्य प्रस्तुत किया। मंच संचालन व आभार डॉ. प्रवेश पाण्डेय व डॉ. विधि जैन ने किया।
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वेस्टर्न आउटफिट्स पहनकर रैंप पर उतरी खूबसूरत बालाओं ने कैट वॉक की और खूब वाहवाही लूटी। गर्ल्स का वेस्टर्न स्टाइल व ब्राइडल लुक सबको पसंद आया। मौका था श्री गुरु नानक महिला महाविद्यालय द्वारा गुजराती मंडल भवन में आयोजित फ्रेशर पार्टी का। जूनियर स्टूडेंट्स ने स्टेज पर अपना इंटोडक्शन दिया। रैंप वॉक के पहले राउंड में सत्तर स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग तीस स्टूडेंट्स को सेकंड राउंड के लिए सिलेक्ट किया गया। तीसरे राउंड में पंद्रह प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निर्णायकों ने मिस फ्रेशर पूर्णिमा जैन, मिस पर्सनालिटी शैली केशरवानी व मिस ईव सोनिया चौधरी को चुना। निर्णायक की भूमिका प्राचार्य डॉ. विमल कांत सैनी व डॉ. सविता तिवारी ने निभाई। फ्रेशर पार्टी में बीकॉम तृतीय सेमेस्टर की छात्रा शिवानी सिंह ने एकल नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। रोशनी व ग्रुप ने महिषासुर मर्दनी नृत्यनाटिका की आकर्षक प्रस्तुति दी। सुहासनी कायेंदे, मनीषा चौरसिया, वैजंती बंजारा, तौरन, पूनम, प्रियांशु ने एकल नृत्य प्रस्तुत किया। ज्योति व आरती ने युगल नृत्य प्रस्तुत किया। मंच संचालन व आभार डॉ. प्रवेश पाण्डेय व डॉ. विधि जैन ने किया।
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पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को पटरी पर लाने के लिए जापान ने अब सीधे भारतीय किसानों से बात करने का फैसला किया है. इसी सिलसिले में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को फंड देने वाली संस्था जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधि शुक्रवार को सूरत में प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात करेंगे.
बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का किसान जोरदार विरोध कर रहे हैं. शुक्रवार को JICA के अधिकारी जमीन मालिक किसानों से मिलेंगे और उनका पक्ष जानने के बाद विवाद का समाधान करने की कोशिश करेंगे.
बता दें कि इसी साल 18 सितंबर को किसानों और जमीन मालिकों ने JICA को पत्र लिखकर कहा था कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण JICA के निर्देशों के विपरीत की जा रही है. किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र जमीन अधिग्रहण कानून 2013 के नियमों का भी सरासर उल्लंघन किया जा रहा है.
पीड़ित किसानों के पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील आनंद याज्ञनिक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि किसानों की अपील पर JICA के मुख्य प्रतिनिधि कैटुओ मैटसुमोटो और दूसरे सदस्य सूरत में किसानों से मिलने को तैयार हो गए हैं.
बता दें कि पीएम मोदी ने बहुचर्चित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को भारत-जापान की दोस्ती के दौर पर प्रचारित किया गया है. जापान इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समय यानी की 2022 तक हर हाल में पूरा करना चाहता है. इस लिहाज से प्रोजेक्ट की हर बाधा को दूर करने के लिए जापानी अधिकारी बढ़-चढ़ कर पहल कर रहे हैं.
बता दें कि 500 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन के इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण गुजरात और महाराष्ट्र में किया जाना है. रिपोर्ट के मुताबिक 1400 हेक्टेयर में 1120 हेक्टेयर जमीन निजी है.
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पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को पटरी पर लाने के लिए जापान ने अब सीधे भारतीय किसानों से बात करने का फैसला किया है. इसी सिलसिले में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को फंड देने वाली संस्था जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी के प्रतिनिधि शुक्रवार को सूरत में प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात करेंगे. बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का किसान जोरदार विरोध कर रहे हैं. शुक्रवार को JICA के अधिकारी जमीन मालिक किसानों से मिलेंगे और उनका पक्ष जानने के बाद विवाद का समाधान करने की कोशिश करेंगे. बता दें कि इसी साल अट्ठारह सितंबर को किसानों और जमीन मालिकों ने JICA को पत्र लिखकर कहा था कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण JICA के निर्देशों के विपरीत की जा रही है. किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र जमीन अधिग्रहण कानून दो हज़ार तेरह के नियमों का भी सरासर उल्लंघन किया जा रहा है. पीड़ित किसानों के पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील आनंद याज्ञनिक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि किसानों की अपील पर JICA के मुख्य प्रतिनिधि कैटुओ मैटसुमोटो और दूसरे सदस्य सूरत में किसानों से मिलने को तैयार हो गए हैं. बता दें कि पीएम मोदी ने बहुचर्चित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को भारत-जापान की दोस्ती के दौर पर प्रचारित किया गया है. जापान इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समय यानी की दो हज़ार बाईस तक हर हाल में पूरा करना चाहता है. इस लिहाज से प्रोजेक्ट की हर बाधा को दूर करने के लिए जापानी अधिकारी बढ़-चढ़ कर पहल कर रहे हैं. बता दें कि पाँच सौ किलोग्राममीटर लंबे बुलेट ट्रेन के इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग एक हज़ार चार सौ हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण गुजरात और महाराष्ट्र में किया जाना है. रिपोर्ट के मुताबिक एक हज़ार चार सौ हेक्टेयर में एक हज़ार एक सौ बीस हेक्टेयर जमीन निजी है.
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नगर निकायों में लगातार भ्रष्टाचार की आ रही शिकायतों को लेकर महकमे ने बड़ा फैसला लिया है। बेईमान कर्मियों की अवैध गतिविधियों व भ्रष्टाचार को रोकने को सभी जिलों में एक-एक फ्लाइंग स्क्वाॅयड टीम बनाई गई है।
पक्षपात को रोकने के लिए इन टीम का हेड दूसरे जिलों के अफसरों को बनाया गया है। ये कभी भी नगर निकायों में रेड कर सकेंगे। फिर इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे, जिसके बाद कार्रवाई होगी।
विभाग ने माना है कि विकास कार्यों में अनियमितता, अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, स्वामित्व योजना के तहत नगर निकाय की दुकानों की बिक्री, संपत्ति कर संबंधी जैसे मुद्दों की शिकायतें मिल रही हैं।
एडिशनल कमिश्नरः करनाल को कैथल, गुरुग्राम को फरीदाबाद, फरीदाबाद को रोहतक, पंचकूला को यमुनानगर। ज्वाइंट कमिश्नर : रोहतक को झज्जर, करनाल को कुरुक्षेत्र, सोनीपत को पानीपत, गुरुग्राम को जींद, भिवानी, रेवाड़ी व पलवल। मानेसर को गुरुग्राम, फरीदाबाद को नूंह, मानेसर को महेंद्रगढ़-नारनौल व हिसार को फतेहाबाद का जिम्मा दिया है। प्रशासक : अम्बाला सदर नगर परिषद प्रशासक को करनाल, अंबाला कैंट के एस्टेट अफसर को पंचकूला, गुरुग्राम एमसी के एडिशनल कमिश्नर को अम्बाला, हिसार एमसी के एडिशनल कमिश्नर को सिरसा, यमुनानगर के एडिशनल कमिश्नर को चरखी दादरी की फ्लाइंग स्क्वायड का हेड बनाया गया है।
किसी नगर निकाय की शिकायत मिलने पर विभाग इन स्क्वाॅयड से जांच कराएगा। टीम हेड जांच करेंगे। अधिकारी दौरे के वक्त जिले के नगर निकायों की सीमाओं में हो रहे अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध विज्ञापन की जांच करेंगे। निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार चल रहे विकास कार्यों की जांच करेंगे। जरूरत हुई तो पूरे दिन का दौरा रहेगा।
नगरपालिका कर्मचारियों की कार्यालय में उपस्थिति की जांच करेंगे। फ्लाइंग स्क्वॉयड को संबंधित जिला नगर आयुक्त और नगर निगमों के आयुक्त पूरा सहयोग करेंगे। जब भी टीम हेड दौरे पर आएंगे तो आयुक्त उन्हें सहयोग के लिए कर्मचारी भी देंगे।
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नगर निकायों में लगातार भ्रष्टाचार की आ रही शिकायतों को लेकर महकमे ने बड़ा फैसला लिया है। बेईमान कर्मियों की अवैध गतिविधियों व भ्रष्टाचार को रोकने को सभी जिलों में एक-एक फ्लाइंग स्क्वाॅयड टीम बनाई गई है। पक्षपात को रोकने के लिए इन टीम का हेड दूसरे जिलों के अफसरों को बनाया गया है। ये कभी भी नगर निकायों में रेड कर सकेंगे। फिर इसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे, जिसके बाद कार्रवाई होगी। विभाग ने माना है कि विकास कार्यों में अनियमितता, अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, स्वामित्व योजना के तहत नगर निकाय की दुकानों की बिक्री, संपत्ति कर संबंधी जैसे मुद्दों की शिकायतें मिल रही हैं। एडिशनल कमिश्नरः करनाल को कैथल, गुरुग्राम को फरीदाबाद, फरीदाबाद को रोहतक, पंचकूला को यमुनानगर। ज्वाइंट कमिश्नर : रोहतक को झज्जर, करनाल को कुरुक्षेत्र, सोनीपत को पानीपत, गुरुग्राम को जींद, भिवानी, रेवाड़ी व पलवल। मानेसर को गुरुग्राम, फरीदाबाद को नूंह, मानेसर को महेंद्रगढ़-नारनौल व हिसार को फतेहाबाद का जिम्मा दिया है। प्रशासक : अम्बाला सदर नगर परिषद प्रशासक को करनाल, अंबाला कैंट के एस्टेट अफसर को पंचकूला, गुरुग्राम एमसी के एडिशनल कमिश्नर को अम्बाला, हिसार एमसी के एडिशनल कमिश्नर को सिरसा, यमुनानगर के एडिशनल कमिश्नर को चरखी दादरी की फ्लाइंग स्क्वायड का हेड बनाया गया है। किसी नगर निकाय की शिकायत मिलने पर विभाग इन स्क्वाॅयड से जांच कराएगा। टीम हेड जांच करेंगे। अधिकारी दौरे के वक्त जिले के नगर निकायों की सीमाओं में हो रहे अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध विज्ञापन की जांच करेंगे। निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार चल रहे विकास कार्यों की जांच करेंगे। जरूरत हुई तो पूरे दिन का दौरा रहेगा। नगरपालिका कर्मचारियों की कार्यालय में उपस्थिति की जांच करेंगे। फ्लाइंग स्क्वॉयड को संबंधित जिला नगर आयुक्त और नगर निगमों के आयुक्त पूरा सहयोग करेंगे। जब भी टीम हेड दौरे पर आएंगे तो आयुक्त उन्हें सहयोग के लिए कर्मचारी भी देंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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समूची दुनिया रहस्य ,रोमांच और अजूबों से भरी है। इन्हीं रहस्यों से भरा भगवान जगन्नाथ जी का विश्व प्रसिद्ध पुरातन मंदिर भारत की पवित्र नगरी पुरी में है। पुरी उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी दूरी पर स्थित है। जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक माना गया है। यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु पूरी दुनिया से भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। 1100 साल से भी ज्यादा पुराने इस पवित्र मंदिर से जुड़ी ऐसी कई रहस्यमय और चमत्कारी बातें हैं, जो आश्चर्यचकित कर देती हैं। जगन्नाथपुरी मंदिर के उस रहस्य को जिसमें हनुमान जी को सागर तट पर बांध दिया गया था। आइए जानें आखिर ऐसा क्यों हुआ था ?
पौराणिक कथा के अनुसार, जगन्नाथपुरी मंदिर में जब भगवान जगन्नाथ की मूर्ति स्थापित हुई तो उनके दर्शन की अभिलाषा समुद्र को भी हुई। प्रभु दर्शन के लिए समुद्र ने कई बार मंदिर में प्रवेश किया। जब समुद्र मंदिर में प्रवेश करते तो मंदिर को बहुत क्षति होती। समुद्र ने यह धृष्टता तीन बार की। मंदिर की क्षति को देखते हुए भक्तों ने भगवान से मदद के लिए गुहार लगाई। तब भगवान जगन्नाथ जी ने समुद्र को नियंत्रित करने के लिए हनुमान जी को भेजा। पवनसुत हनुमान जी ने समुद्र को बांध दिया।
यही कारण है कि पुरी का समुद्र हमेशा शांत रहता है। लेकिन समुद्र ने एक चतुराई लगाई। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि तुम कैसे प्रभु भक्त हो, कि जो कभी दर्शन के लिए ही नहीं जाते। तब हनुमान जी ने सोचा कि बहुत दिन हो गए चलो भगवान के दर्शन कर आएं। जब हनुमान जी भगवान के दर्शन के लिए चले, तो उन्हीं के पीछे-पीछे समुद्र भी चल पड़े। इस तरह जब भी पवनसुत मंदिर जाते तो सागर भी उनके पीछे चल पड़ता। इस तरह मंदिर में फिर से क्षति होनी शुरू हो गई। तब भगवान ने हनुमान जी के इस आदत से परेशान होकर उन्हें स्वर्ण बेड़ी से बांध दिया।
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समूची दुनिया रहस्य ,रोमांच और अजूबों से भरी है। इन्हीं रहस्यों से भरा भगवान जगन्नाथ जी का विश्व प्रसिद्ध पुरातन मंदिर भारत की पवित्र नगरी पुरी में है। पुरी उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी दूरी पर स्थित है। जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक माना गया है। यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु पूरी दुनिया से भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। एक हज़ार एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने इस पवित्र मंदिर से जुड़ी ऐसी कई रहस्यमय और चमत्कारी बातें हैं, जो आश्चर्यचकित कर देती हैं। जगन्नाथपुरी मंदिर के उस रहस्य को जिसमें हनुमान जी को सागर तट पर बांध दिया गया था। आइए जानें आखिर ऐसा क्यों हुआ था ? पौराणिक कथा के अनुसार, जगन्नाथपुरी मंदिर में जब भगवान जगन्नाथ की मूर्ति स्थापित हुई तो उनके दर्शन की अभिलाषा समुद्र को भी हुई। प्रभु दर्शन के लिए समुद्र ने कई बार मंदिर में प्रवेश किया। जब समुद्र मंदिर में प्रवेश करते तो मंदिर को बहुत क्षति होती। समुद्र ने यह धृष्टता तीन बार की। मंदिर की क्षति को देखते हुए भक्तों ने भगवान से मदद के लिए गुहार लगाई। तब भगवान जगन्नाथ जी ने समुद्र को नियंत्रित करने के लिए हनुमान जी को भेजा। पवनसुत हनुमान जी ने समुद्र को बांध दिया। यही कारण है कि पुरी का समुद्र हमेशा शांत रहता है। लेकिन समुद्र ने एक चतुराई लगाई। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि तुम कैसे प्रभु भक्त हो, कि जो कभी दर्शन के लिए ही नहीं जाते। तब हनुमान जी ने सोचा कि बहुत दिन हो गए चलो भगवान के दर्शन कर आएं। जब हनुमान जी भगवान के दर्शन के लिए चले, तो उन्हीं के पीछे-पीछे समुद्र भी चल पड़े। इस तरह जब भी पवनसुत मंदिर जाते तो सागर भी उनके पीछे चल पड़ता। इस तरह मंदिर में फिर से क्षति होनी शुरू हो गई। तब भगवान ने हनुमान जी के इस आदत से परेशान होकर उन्हें स्वर्ण बेड़ी से बांध दिया।
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(www. arya-tv. com) ईद के मौके पर रिलीज हुई सलमान खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' को ऑडियंस का प्यार मिल रहा है. फिल्म की ओपनिंग धीमी रही थी लेकिन वीकेंड पर सलमान की कंपील फैमिली एंटरटेनर ने कमाल कर दिया और बॉक्स ऑफिस पर शानदार कलेक्शन किया. हालांकि वीकडेज में 'किसी का भाई किसी की जान' की कमाई में गिरावट देखी जा रही है. चलिए यहां जानते हैं रिलीज के पांचवें दिन यानी मंगलवार को फिल्म ने कितनी कमाई की है?
KKBKKJ का पांचवें दिन का कलेक्शन कितना रहा?
'किसी का भाई किसी की जान' फुल ऑफ एक्शन, रोमांस और कॉमेडी से भरपूर फिल्म है. सलमान के स्टाइल वाली इस फिल्म का जादू फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फिल्म ने रिलीज के चार दिनों के भीतर 78. 34 करोड़ रुपयों का कलेक्शन कर लिया. वहीं वर्ल्ड वाइड 'किसी का भाई किसी की जान' 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है.
इसी के साथ फिल्म के रिलीज के पाचंवे दिन यानी फर्स्ट मंगलवार के कमाई के शुरुआती आंकड़े भी आ गए हैं. हालांकिं पांचवें दिन फिल्म की कमाई में भारी गिरावट देखी जा रही है. सैकनिल्क की अर्ली ट्रेड रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को 'किसी का भाई किसी की जान' की ने महज 7. 50 करोड़ का कारोबार किया. जिसके बाद फिल्म का कुल कलेक्शन अब 85. 34 करोड़ रुपये हो गया है. हालांकि ऑफिशियल आंकड़े आने के बाद फिल्म के कलेक्शन में कुछ अंतर मिल सकता है.
. सलमान खान के फैंस को उनकी फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहता है. बॉलीवुड के इस सुपरस्टार की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती हैं. भले ही क्रिटिक्स से पॉजिटिव रिस्पॉन्स ना मिला हो लेकिन सलमान भाई की फिल्म को उनके फैंस खूब पसंद करते हैं. 'किसी का भाई किसी की जान' को भी क्रिटिक्स से मिला-जुला रिव्यू मिला था लेकिन इस फिल्म को फैंस काफी पंसद कर रहे हैं. अब 'किसी का भाई किसी की जान' 100 करोड़ के कल्ब में शामिल होने से कुछ ही कदम दूर है. उम्मीद है कि इस वीकेंड पर फिल्म ये मैजिकल आंकड़ा भी पार कर लेगी.
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ईद के मौके पर रिलीज हुई सलमान खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' को ऑडियंस का प्यार मिल रहा है. फिल्म की ओपनिंग धीमी रही थी लेकिन वीकेंड पर सलमान की कंपील फैमिली एंटरटेनर ने कमाल कर दिया और बॉक्स ऑफिस पर शानदार कलेक्शन किया. हालांकि वीकडेज में 'किसी का भाई किसी की जान' की कमाई में गिरावट देखी जा रही है. चलिए यहां जानते हैं रिलीज के पांचवें दिन यानी मंगलवार को फिल्म ने कितनी कमाई की है? KKBKKJ का पांचवें दिन का कलेक्शन कितना रहा? 'किसी का भाई किसी की जान' फुल ऑफ एक्शन, रोमांस और कॉमेडी से भरपूर फिल्म है. सलमान के स्टाइल वाली इस फिल्म का जादू फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फिल्म ने रिलीज के चार दिनों के भीतर अठहत्तर. चौंतीस करोड़ रुपयों का कलेक्शन कर लिया. वहीं वर्ल्ड वाइड 'किसी का भाई किसी की जान' एक सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है. इसी के साथ फिल्म के रिलीज के पाचंवे दिन यानी फर्स्ट मंगलवार के कमाई के शुरुआती आंकड़े भी आ गए हैं. हालांकिं पांचवें दिन फिल्म की कमाई में भारी गिरावट देखी जा रही है. सैकनिल्क की अर्ली ट्रेड रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को 'किसी का भाई किसी की जान' की ने महज सात. पचास करोड़ का कारोबार किया. जिसके बाद फिल्म का कुल कलेक्शन अब पचासी. चौंतीस करोड़ रुपये हो गया है. हालांकि ऑफिशियल आंकड़े आने के बाद फिल्म के कलेक्शन में कुछ अंतर मिल सकता है. . सलमान खान के फैंस को उनकी फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहता है. बॉलीवुड के इस सुपरस्टार की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती हैं. भले ही क्रिटिक्स से पॉजिटिव रिस्पॉन्स ना मिला हो लेकिन सलमान भाई की फिल्म को उनके फैंस खूब पसंद करते हैं. 'किसी का भाई किसी की जान' को भी क्रिटिक्स से मिला-जुला रिव्यू मिला था लेकिन इस फिल्म को फैंस काफी पंसद कर रहे हैं. अब 'किसी का भाई किसी की जान' एक सौ करोड़ के कल्ब में शामिल होने से कुछ ही कदम दूर है. उम्मीद है कि इस वीकेंड पर फिल्म ये मैजिकल आंकड़ा भी पार कर लेगी.
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देहरादून में अपनी मांगों को लेकर नर्सेज बेरोजगारों ने सचिवालय कूच किया, लेकिन सुभाष रोड पर मौजूद पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को सचिवालय से पहले बेरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान बेरोजगारों ने नर्सिंग भर्ती में दूसरे राज्यों के युवाओं को मौका दिए जाने का जमकर विरोध किया।
संविदा एवं बेरोजगार स्टाफ नर्सेज महासंघ के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिजलवान का कहना है कि 12 वर्षों बाद उत्तराखंड राज्य में सामान्य नर्सिंग अधिकारी के पदों के लिए 2 वर्ष पूर्व दिसंबर 2020 में भर्ती की विज्ञप्ति जारी की गई थी, लेकिन 2 वर्ष बाद उत्तराखंड सरकार के प्रयासों से प्रति वर्ष वार करने का निर्णय लिया गया।
3 जनवरी 2023 को 1564 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की गई जो कि उत्तराखंड के रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए है, उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारी का पद समूह श्रेणी में आता है।
जो कि हमारे प्रदेश के स्थाई निवासियों के लिए आरक्षित है किंतु दूसरे राज्यों के युवाओं को भी नर्सिंग भर्ती में मौका दिया जा रहा है जिसका संविदा एवं बेरोजगार स्टाफ नर्सेज महासंघ घोर विरोध करता है।
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देहरादून में अपनी मांगों को लेकर नर्सेज बेरोजगारों ने सचिवालय कूच किया, लेकिन सुभाष रोड पर मौजूद पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को सचिवालय से पहले बेरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान बेरोजगारों ने नर्सिंग भर्ती में दूसरे राज्यों के युवाओं को मौका दिए जाने का जमकर विरोध किया। संविदा एवं बेरोजगार स्टाफ नर्सेज महासंघ के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिजलवान का कहना है कि बारह वर्षों बाद उत्तराखंड राज्य में सामान्य नर्सिंग अधिकारी के पदों के लिए दो वर्ष पूर्व दिसंबर दो हज़ार बीस में भर्ती की विज्ञप्ति जारी की गई थी, लेकिन दो वर्ष बाद उत्तराखंड सरकार के प्रयासों से प्रति वर्ष वार करने का निर्णय लिया गया। तीन जनवरी दो हज़ार तेईस को एक हज़ार पाँच सौ चौंसठ पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की गई जो कि उत्तराखंड के रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए है, उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारी का पद समूह श्रेणी में आता है। जो कि हमारे प्रदेश के स्थाई निवासियों के लिए आरक्षित है किंतु दूसरे राज्यों के युवाओं को भी नर्सिंग भर्ती में मौका दिया जा रहा है जिसका संविदा एवं बेरोजगार स्टाफ नर्सेज महासंघ घोर विरोध करता है। This website uses cookies.
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नई दिल्ली. 9 जनवरी से प्रो रेसलिंग लीग के तीसरे सीजन की शुरुआत होगी. लीग के लिए सभी टीमें अपने अपने पहलावन तैयार कर चुकी है. और इनकी नीलामी भी पहले हो चुकी है. इस लीग में कुछ 6 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिनमें से एक हरियाणा हैमर्स टीम भी शामिल है. बाकी टीमों की तरह हरियाणा की टीम के पास भी 9 पहलवान हैं जिसमें की महिला रेसलर भी शामिल हैं. ऐसे आईये जानते हैं हरियाणा टीम के पहलवानों और उनकी उपलब्धि के बारे में. टीम में कुछ चर्चित चेहरे भी हैं. जो देश के साथ विदेश में भी अपना लोहा मनवा चुकी है. कौन सा पहलवान किस किलोग्राम वजन में कुश्ती लड़ेगा और उसकी रेसलिंग में क्या उपलब्धि में ये सब कुछ हम आपको हम आपको बताएंगे.
हसन रहीमी ( 57 किलोग्राम)
ईरान के हसन रहीमी इस लीग में हरियाणा की तरफ से 57 किलोग्राम में लड़ते हुए दिखाई देंगे. 2017 वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने वाले हसन 2016 रियो ओलपिंक में कांस्य पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा हसन ने 2015 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था.
रजनीश ( 65 किलोग्राम)
भारतीय पहलवान रजनीश इस लीग में हरियाणा की तरफ से 65 किलोग्राम लड़ते हुए दिखाई देंगे. साल 2016 में वह वर्ल्डकप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. साल 2016 में ही उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया था. इसके अलावा इसी साल उन्होंने वर्ल्ड मिलिट्री चैंपियनशिप में कांस्य अपने नाम किया था.
खेटिक साबोलोव ( 74 किलोग्राम)
रूस के पहलवान खेटिक साबोलोव हरियाणा की तरफ से 74 किलोग्राम भार में लड़ते दिखाई देंगे. 2017 में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीत चुके खेटिक ने इसी साल एलने टूर्नामेंट में भी रजत पदक जीता था. इसके अलावा इस रूसी पहलवान ने अखमात काडयोर्व कप में गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुका है.
रोबलजीत सिंह रंगी ( 92 किलोग्राम)
2017 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुके रोबलजीत इस साल हरियाणा की तरफ से 92 किलोग्राम भार में खेलते दिखाई देंगे. रोबलजीत ने 2016 और 2017 की नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता था. इसके अलावा 2016 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर पदक जीता था. रंगी 2015 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी सिल्वर पदक जीत चुके हैं.
सुमित ( 125 किलोग्राम)
हरियाणा का ये पहलवान 125 किलोग्राम में अपना जलवा बिखेरता दिखाई देगा. सुमित 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग ले चुके हैं. वहीं 2017 की नेशनल चैंपियनशिप में वह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. साल 2014 की वर्ल्ड मिलिट्री चैंपियनशिप में वह सिल्वर पदक जीत चुके हैं.
सन यान ( 50 किलोग्राम)
चीन की महिला पहलवान सन यान 50 किलोग्राम में हरियाणा की तरफ से लड़ेंगी. 2017 वर्ल्डकप में सिल्वर पदक जीत चुकी यान ने इसी साल एशियन इंडोर गेम्स में भी गोल्ड मेडल पर कब्जा किया था. वहीं सन यान 2016 में हुए रियो ओलपिंक में कांस्य पदक जीत चुकी है.
हेलेन मार्रोलिस ( 57 किलोग्राम)
अमेरिका की हेलेन 57 किलोग्राम में हरियाणा की तरफ से प्रतिनिधित्व करेंगी. 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली हेलेन ने 2017 में ही पौलेंड ओपन में भी स्वर्ण पदक जीता था. इसके साथ ही उन्होंने रियो ओलपिंक में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.
सरिता ( 62 किलोग्राम)
2017 में नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी सरिता हरियाणा की तरफ से 62 किलोग्राम में लड़ेंगी. सरिता ने 2017 में एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीत चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने लगातार 3 साल 2014,15 और 16 की नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था.
पूजा ( 76 किलोग्राम)
2017 की नेशनल चैंपियन में गोल्ड मेडल जीत चुकी पूजा 79 किलोग्राम में लड़ती दिखाई देंगी. पूजा ने साल 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इसके अलावा उन्होंने 2016 में उन्होंने एशियन चैंपियन में रजत पदक जीता था.
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नई दिल्ली. नौ जनवरी से प्रो रेसलिंग लीग के तीसरे सीजन की शुरुआत होगी. लीग के लिए सभी टीमें अपने अपने पहलावन तैयार कर चुकी है. और इनकी नीलामी भी पहले हो चुकी है. इस लीग में कुछ छः टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिनमें से एक हरियाणा हैमर्स टीम भी शामिल है. बाकी टीमों की तरह हरियाणा की टीम के पास भी नौ पहलवान हैं जिसमें की महिला रेसलर भी शामिल हैं. ऐसे आईये जानते हैं हरियाणा टीम के पहलवानों और उनकी उपलब्धि के बारे में. टीम में कुछ चर्चित चेहरे भी हैं. जो देश के साथ विदेश में भी अपना लोहा मनवा चुकी है. कौन सा पहलवान किस किलोग्राम वजन में कुश्ती लड़ेगा और उसकी रेसलिंग में क्या उपलब्धि में ये सब कुछ हम आपको हम आपको बताएंगे. हसन रहीमी ईरान के हसन रहीमी इस लीग में हरियाणा की तरफ से सत्तावन किलोग्रामग्राम में लड़ते हुए दिखाई देंगे. दो हज़ार सत्रह वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने वाले हसन दो हज़ार सोलह रियो ओलपिंक में कांस्य पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा हसन ने दो हज़ार पंद्रह की वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था. रजनीश भारतीय पहलवान रजनीश इस लीग में हरियाणा की तरफ से पैंसठ किलोग्रामग्राम लड़ते हुए दिखाई देंगे. साल दो हज़ार सोलह में वह वर्ल्डकप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. साल दो हज़ार सोलह में ही उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया था. इसके अलावा इसी साल उन्होंने वर्ल्ड मिलिट्री चैंपियनशिप में कांस्य अपने नाम किया था. खेटिक साबोलोव रूस के पहलवान खेटिक साबोलोव हरियाणा की तरफ से चौहत्तर किलोग्रामग्राम भार में लड़ते दिखाई देंगे. दो हज़ार सत्रह में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीत चुके खेटिक ने इसी साल एलने टूर्नामेंट में भी रजत पदक जीता था. इसके अलावा इस रूसी पहलवान ने अखमात काडयोर्व कप में गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुका है. रोबलजीत सिंह रंगी दो हज़ार सत्रह की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुके रोबलजीत इस साल हरियाणा की तरफ से बानवे किलोग्रामग्राम भार में खेलते दिखाई देंगे. रोबलजीत ने दो हज़ार सोलह और दो हज़ार सत्रह की नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता था. इसके अलावा दो हज़ार सोलह की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर पदक जीता था. रंगी दो हज़ार पंद्रह में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी सिल्वर पदक जीत चुके हैं. सुमित हरियाणा का ये पहलवान एक सौ पच्चीस किलोग्रामग्राम में अपना जलवा बिखेरता दिखाई देगा. सुमित दो हज़ार सत्रह में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग ले चुके हैं. वहीं दो हज़ार सत्रह की नेशनल चैंपियनशिप में वह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. साल दो हज़ार चौदह की वर्ल्ड मिलिट्री चैंपियनशिप में वह सिल्वर पदक जीत चुके हैं. सन यान चीन की महिला पहलवान सन यान पचास किलोग्रामग्राम में हरियाणा की तरफ से लड़ेंगी. दो हज़ार सत्रह वर्ल्डकप में सिल्वर पदक जीत चुकी यान ने इसी साल एशियन इंडोर गेम्स में भी गोल्ड मेडल पर कब्जा किया था. वहीं सन यान दो हज़ार सोलह में हुए रियो ओलपिंक में कांस्य पदक जीत चुकी है. हेलेन मार्रोलिस अमेरिका की हेलेन सत्तावन किलोग्रामग्राम में हरियाणा की तरफ से प्रतिनिधित्व करेंगी. दो हज़ार सत्रह में वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली हेलेन ने दो हज़ार सत्रह में ही पौलेंड ओपन में भी स्वर्ण पदक जीता था. इसके साथ ही उन्होंने रियो ओलपिंक में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था. सरिता दो हज़ार सत्रह में नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी सरिता हरियाणा की तरफ से बासठ किलोग्रामग्राम में लड़ेंगी. सरिता ने दो हज़ार सत्रह में एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीत चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने लगातार तीन साल दो हज़ार चौदह,पंद्रह और सोलह की नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था. पूजा दो हज़ार सत्रह की नेशनल चैंपियन में गोल्ड मेडल जीत चुकी पूजा उन्यासी किलोग्रामग्राम में लड़ती दिखाई देंगी. पूजा ने साल दो हज़ार सत्रह की वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इसके अलावा उन्होंने दो हज़ार सोलह में उन्होंने एशियन चैंपियन में रजत पदक जीता था.
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ऋतिक रोशन के 'सुपर 30' का 1st SHOW- शानदार रही बॉक्स ऑफिस ओपनिंग!
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Chakradharpur (Shambhu Kumar) : चक्रधरपुर प्रखंड की रोलडीह गांव में आगामी 23 मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा. यह निर्णय जन रक्षा संघर्ष समिति के बैनर तले ली गयी. मंगलवार को समिति के अध्यक्ष अशोक तांती की अध्यक्षता में बैठक रोलाडीह गांव के बाल श्रमिक स्कूल में आयोजित की गयी. इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्रामीण क्षेत्र में भव्य तरीके से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य व दंत शिविर निःशुल्क लगायी जायेगी. ग्रामीणों के बीच निःशुल्क सेवा समिति की ओर से दिया जायेगा. साथ ही रक्तदान के महत्व के बारे में ग्रामीणों को समिति के पदाधिकारी बतायेंगे और जागरूक करेंगे. समिति के संयोजक पंडित महतो ने कहा कि यह संगठन गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज को बुलंद तो करती ही है. अब ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या को भी दूर करने का काम किया जायेगा. जब मरीज को रक्त की जरूरत होती है तो परेशान हो जाता है. रक्त का निर्णाम नहीं होता है यह दान से ही आता है. इसलिये ग्रामीण क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा.
वहीं अशोक तांती ने कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि 100 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह कर दिया जाये. मौके पर समिति के कोषाध्यक्ष प्रधान बांकिरा ने भी जागरूक कर अधिक से अधिक लोगों तक रक्तदान के महत्व को पहुंचाने की बात कहीं. उन्होंने कहा कि भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव को 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी थी. महज 23 साल की उम्र में भगत सिंह अपने साथियों के साथ हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए थे. इसी शहादत दिवस को हम सब बलिदान दिवस के रूप में मनायेंगे. साथ ही ग्रामीणों को समिति के उद्देश्य के बारे विस्तृत रूप से बताया जाएगा. ताकि ग्रामीण भी अपने अधिकार के लिये आगे आयेंगे. बैठक में मुख्य रूप से सचिव भगीरथी महतो, सह सचिव लीलाराम महतो, नंदलाल हांसदा, लगेन प्रधान, जितेंद्र महतो के अलावा अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.
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Chakradharpur : चक्रधरपुर प्रखंड की रोलडीह गांव में आगामी तेईस मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा. यह निर्णय जन रक्षा संघर्ष समिति के बैनर तले ली गयी. मंगलवार को समिति के अध्यक्ष अशोक तांती की अध्यक्षता में बैठक रोलाडीह गांव के बाल श्रमिक स्कूल में आयोजित की गयी. इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्रामीण क्षेत्र में भव्य तरीके से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य व दंत शिविर निःशुल्क लगायी जायेगी. ग्रामीणों के बीच निःशुल्क सेवा समिति की ओर से दिया जायेगा. साथ ही रक्तदान के महत्व के बारे में ग्रामीणों को समिति के पदाधिकारी बतायेंगे और जागरूक करेंगे. समिति के संयोजक पंडित महतो ने कहा कि यह संगठन गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज को बुलंद तो करती ही है. अब ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या को भी दूर करने का काम किया जायेगा. जब मरीज को रक्त की जरूरत होती है तो परेशान हो जाता है. रक्त का निर्णाम नहीं होता है यह दान से ही आता है. इसलिये ग्रामीण क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा. वहीं अशोक तांती ने कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि एक सौ से अधिक यूनिट रक्त संग्रह कर दिया जाये. मौके पर समिति के कोषाध्यक्ष प्रधान बांकिरा ने भी जागरूक कर अधिक से अधिक लोगों तक रक्तदान के महत्व को पहुंचाने की बात कहीं. उन्होंने कहा कि भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव को तेईस मार्च एक हज़ार नौ सौ इकतीस को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी थी. महज तेईस साल की उम्र में भगत सिंह अपने साथियों के साथ हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए थे. इसी शहादत दिवस को हम सब बलिदान दिवस के रूप में मनायेंगे. साथ ही ग्रामीणों को समिति के उद्देश्य के बारे विस्तृत रूप से बताया जाएगा. ताकि ग्रामीण भी अपने अधिकार के लिये आगे आयेंगे. बैठक में मुख्य रूप से सचिव भगीरथी महतो, सह सचिव लीलाराम महतो, नंदलाल हांसदा, लगेन प्रधान, जितेंद्र महतो के अलावा अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.
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उत्तर प्रदेश के अवैध रेत खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। निदेशालय की लखनऊ यूनिट ने अवैध खनन मामले में आईएएस बी. चंद्रकला व एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा सहित 11 के खिलाफ केस दर्ज किया है।
लखनऊः उत्तर प्रदेश के अवैध रेत खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। निदेशालय की लखनऊ यूनिट ने अवैध खनन मामले में आईएएस बी. चंद्रकला व एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा सहित 11 के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह केस सीबीआई की उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें राज्य के खनन मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 2012-2016 कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका की जांच की बात कही गई है।
गौततलब है कि अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। 2012 से 13 तक खनन मंत्रालय भी उन्हीं के पास था। सूत्रों के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2012-13 में 14 खनन टेंडर को मंजूरी दी थी, जिनकी जांच हो रही है। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव से इस मामले में पूछताछ हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक यूपी सरकार द्वारा 2012 से 2016 के दौरान कुल 22 टेंडर पास किए गए, जिनमें 14 टेंडर अखिलेश के खनन मंत्री रहते पास किए गए।
यह भी पढ़ें. . . . . UP में अवैध खनन रोकने के लिए सरकार ने बनाया ये प्लान, जानिए क्या?
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इस मामले में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को भी नोटिस भेज सकती है। यह कार्रवाई सपा के शासन के दौरान बुंदेलखंड में हुए खनन घोटाले के सिलसिले में की गई। सीबीआई टीम इस सिलसिले में 2008 बैच की आईएएस अधिकारी चंद्रकला के साथ-साथ सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा और हमीरपुर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजीव दीक्षित के आवासों पर भी छापे मार चुकी है। सीबीआई ने लखनऊ, नोएडा, हमीरपुर और कानपुर में कुल 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई ने आईएएस अधिकारी के आवास से कुछ अहम दस्तावेज भी बरामद किए थे।
सीबीआई ने जिन 11 लोगों को आरोपी बनाया था, ईडी ने भी उन्हें आरोपी बनाया है। जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें आईएएस बी. चंद्रकला, हमीरपुर के खनन अफसर मोइनुद्दीन, खनन क्लर्क राम आसरे प्रजापति, रमेश कुमार मिश्रा, (लीज होल्डर), दिनेश कुमार मिश्रा, (लीज होल्डर), अम्बिका तिवारी, (लीज होल्डर), संजय दीक्षित (लीज होल्डर), सत्यदेव दीक्षित, (लीज होल्डर), रामअवतार सिंह (लीज होल्डर), करन सिंह (लीज होल्डर) व आदिल खान शामिल हैं। ईडी जल्द ही आरोपियों से पूछताछ करेगी। अखिलेश यादव की सरकार में चंद्रकला को हमीरपुर का जिलाधिकारी बनाया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने जुलाई 2012 के बाद सपा के कुछ नेताओं को हमीरपुर में मौरंग के खनन के 60 पट्टे अवैध रूप से आवंटित किए। उन पर ई-टेंडर के जरिये पट्टा स्वीकृत करने के नियमों की अनदेखी का आरोप है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को हमीरपुर में जारी मौरंग खनन के सभी 60 पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिए। कोर्ट ने 28 जुलाई 2016 को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया था।
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उत्तर प्रदेश के अवैध रेत खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। निदेशालय की लखनऊ यूनिट ने अवैध खनन मामले में आईएएस बी. चंद्रकला व एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा सहित ग्यारह के खिलाफ केस दर्ज किया है। लखनऊः उत्तर प्रदेश के अवैध रेत खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। निदेशालय की लखनऊ यूनिट ने अवैध खनन मामले में आईएएस बी. चंद्रकला व एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा सहित ग्यारह के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह केस सीबीआई की उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें राज्य के खनन मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दो हज़ार बारह-दो हज़ार सोलह कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका की जांच की बात कही गई है। गौततलब है कि अखिलेश यादव दो हज़ार बारह से दो हज़ार सत्रह तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। दो हज़ार बारह से तेरह तक खनन मंत्रालय भी उन्हीं के पास था। सूत्रों के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो हज़ार बारह-तेरह में चौदह खनन टेंडर को मंजूरी दी थी, जिनकी जांच हो रही है। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव से इस मामले में पूछताछ हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक यूपी सरकार द्वारा दो हज़ार बारह से दो हज़ार सोलह के दौरान कुल बाईस टेंडर पास किए गए, जिनमें चौदह टेंडर अखिलेश के खनन मंत्री रहते पास किए गए। यह भी पढ़ें. . . . . UP में अवैध खनन रोकने के लिए सरकार ने बनाया ये प्लान, जानिए क्या? सूत्रों के मुताबिक सीबीआई इस मामले में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को भी नोटिस भेज सकती है। यह कार्रवाई सपा के शासन के दौरान बुंदेलखंड में हुए खनन घोटाले के सिलसिले में की गई। सीबीआई टीम इस सिलसिले में दो हज़ार आठ बैच की आईएएस अधिकारी चंद्रकला के साथ-साथ सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा और हमीरपुर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजीव दीक्षित के आवासों पर भी छापे मार चुकी है। सीबीआई ने लखनऊ, नोएडा, हमीरपुर और कानपुर में कुल बारह ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई ने आईएएस अधिकारी के आवास से कुछ अहम दस्तावेज भी बरामद किए थे। सीबीआई ने जिन ग्यारह लोगों को आरोपी बनाया था, ईडी ने भी उन्हें आरोपी बनाया है। जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें आईएएस बी. चंद्रकला, हमीरपुर के खनन अफसर मोइनुद्दीन, खनन क्लर्क राम आसरे प्रजापति, रमेश कुमार मिश्रा, , दिनेश कुमार मिश्रा, , अम्बिका तिवारी, , संजय दीक्षित , सत्यदेव दीक्षित, , रामअवतार सिंह , करन सिंह व आदिल खान शामिल हैं। ईडी जल्द ही आरोपियों से पूछताछ करेगी। अखिलेश यादव की सरकार में चंद्रकला को हमीरपुर का जिलाधिकारी बनाया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने जुलाई दो हज़ार बारह के बाद सपा के कुछ नेताओं को हमीरपुर में मौरंग के खनन के साठ पट्टे अवैध रूप से आवंटित किए। उन पर ई-टेंडर के जरिये पट्टा स्वीकृत करने के नियमों की अनदेखी का आरोप है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो हज़ार पंद्रह में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने सोलह अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह को हमीरपुर में जारी मौरंग खनन के सभी साठ पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिए। कोर्ट ने अट्ठाईस जुलाई दो हज़ार सोलह को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया था।
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हरिद्वार में मंगलवार को हर की पौड़ी पर अलग नज़ारा था.
जहाँ आमतौर पर सैकड़ों की संख्या में लोग गंगा आरती में शामिल होने के लिए इकट्ठा होते हैं, वहाँ वे उन पहलवानों को देखने पहुँचे थे, जो अपने वर्षों की मेहनत को गंगा में बहाने आए थे.
अपने मेडल गंगा में बहाने के लिए साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया समेत कई बड़े खिलाड़ी शाम में हरिद्वार पहुँचे.
हाथों में मेडल लिए पहलवान भावुक थे वहीं सैकड़ों की भीड़ से घिरे इन पहलवानों को नरेश टिकैत मनाने की कोशिश कर रहे थे.
भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत की पहल के बाद इन पहलवानों ने अपना फ़ैसला टाल दिया.
बीबीसी से बातचीत में बीकेयू के नेता राकेश टिकैत ने बताया कि उन्हें पहलवानों के ट्वीट के ज़रिए जानकारी मिली कि वे गंगा में अपने मेडल प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार जा रहे हैं.
विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन हो रहा था.
इन पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण और 'तानाशाही रवैेए' जैसे गंभीर आरोप लगाए थे जिन्हें सांसद ने बेबुनियाद बताया और पहलवानों को नार्को टेस्ट की चुनौती दी.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफ़आईआर दर्ज हो चुकी है.
कैसे टला फ़ैसला?
राकेश टिकैत बताते हैं कि पहलवानों का गंगा में मेडल बहाने का निर्णय उनका अपना था और इस बारे में उनसे कोई बात नहीं हुई थी.
लेकिन जैसे ही उन्हें इसके बारे में पता चला, उन्होंने यूनियन की टीम को आगाह किया और टीम को देरहादून से लेकर हर की पौड़ी पर काम के लिए लगा दिया.
उनके अनुसार," इसके बाद टिकैत साहब (नरेश टिकैत) गाँव से गए और खिलाड़ियों को समझाया कि ये देश की संपत्ति है और आप भी देश की धरोहर हो ऐसा न करो. और आगे क्या करना है इस बारे में पाँच दिनों में फ़ैसला लिया जाएगा. "
भारतीय खेल के इतिहास में शायद ये पहली बार हुआ है जब खिलाड़ियों ने ऐसा क़दम उठाया है.
लेकिन इसको लेकर अलग-अलग राय है.
जानकारों के अनुसार खिलाड़ियों के पक्ष से देखा जाए, तो ये सही लगता है कि उन्हें न्याय नहीं मिला इसलिए उन्होंने अपने मेडल गंगा में बहाने का फ़ैसला लिया.
वहीं दूसरा नज़रिया ये है कि खिलाड़ियों ने जब इतनी मेहनत से वो मेडल भारत के लिए जीते, तो वो ऐसा क़दम उठाकर उसका निरादर कैसे कर सकते हैं?
'द हिंदू' अख़बार में डिप्टी एडिटर राकेश राव का कहना है कि खिलाड़ियों के मुद्दों से मेडल का कोई लेना-देना नहीं है.
वे कहते हैं, "मुझे उनकी सोच पर रहम आता है. उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से देश के लिए मेडल जीता. ऐसा करके वो कहीं न कहीं अपनी मेहनत, उस देश का जिसने खिलाड़ियों के लिए इतना कुछ किया है, मेडल जिससे उन्हें एक पहचान मिली है, उन सबका अपमान करते. "
वो कहते हैं कि एक खिलाड़ी का सपना होता है कि वो पोडियम पर खड़ा हो चाहे उसे मेडल कोई भी मिले.
ऐसे में मेडल को फेंकने, जंतर मंतर पर धरना देने आदि से समस्या का हल नहीं हो सकता है.
दूसरी ओर राकेश टिकैत कहते हैं , "40 दिनों से ज़्यादा से धरने पर बैठे इन पहलवानों ने लोगों का प्यार देखा था, पुलिस का प्यार देखा लेकिन जैसे उनके टेंट तोड़े गए, उन्हें पकड़ा गया वे उससे काफ़ी आहत थे इसलिए मेडल को गंगा में डालने का फ़ैसला लिया. "
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम कहते हैं कि उनकी खिलाड़ियों के साथ पूरी संवेदना है और ये सरकार को समझना होगा कि ये सभी खिलाड़ी ब्रैंड एंबेसडर हैं और इन्होंने देश के लिए मेडल जीते हैं.
वे कहते हैं, "आप सोचिए 40 दिन से ज़्यादा समय से ये खिलाड़ी अपने घर की सुविधाओं को छोड़कर टेंट में रह रहे हैं. जहाँ मच्छर हैं, शौच की सुविधा नहीं है. तो क्या इन्हें झुंझलाहट नहीं हो रही होगी. क्या इनका सब्र का बाँध नहीं टूटेगा. "
नौरिस प्रीतम कहते हैं- मैं खिलाड़ियों के मेडल गंगा में बहाने की बात से सहमत नहीं हूँ, लेकिन सरकार को ये सोचना होगा कि ये नौबत क्यों आई.
वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली का कहना है कि इन खिलाड़ियों का ये क़दम उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है.
वे कहते हैं, "एक ज़माने में जब खिलाड़ियों के पास पैसे नहीं होते थे तो वे कहते थे कि मेडल बेच देंगे लेकिन इन पहलवानों के गंगा में मेडल बहाने की कोशश करना इससे युवा खिलाड़ियों को ग़लत संदेश जाएगा कि इतने नामी गिरामी ये क़दम उठा रहे हैं, तो उनका भविष्य क्या होगा. लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने ये फ़ैसला लिया. "
वहीं चर्चा इस बात की भी हो रही है एक महीने से ज़्यादा समय से जंतर मंतर पर बैठ कर न्याय की गुहार लगा रहे इन मेडल विजेता पहलवानों पर ना महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी कुछ बोलीं और ना ही देश के प्रधानमंत्री की तरफ़ से कोई आश्वासन आया.
मंगलवार को स्मृति ईरानी ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि वो अब से दो तीन घंटे पहले बबीता फोगाट के साथ बैठी हुई थीं.
उनके अनुसार, "क्या बबीता जैसी विश्व विख़्यात पहलवान ऐसे किसी के साथ बैठी होगी, जिन्होंने किसी का शोषण किया होगा. वो भी उन लोगों के साथ जिन्होंने उन्हीं के परिवार का शोषण किया होगा. "
वे कहती हैं कि किसी को शाम छह बजे मेडल बहाना था, लेकिन आठ बजे तक नहीं बहाया ये विषय नहीं है.
स्मृति ईरानी इस बातचीत में कहती हैं, "जो लोग क़ानून जानते हैं वो इस बात को समझते हैं कि जब जाँच चल रही होती है, उसमें हस्तक्षेप करके महिला के ख़िलाफ़ ही जाना एक पद्धति बन गया है. जो मैं नहीं करना चाहती. न्याय प्रक्रिया और जाँच निष्पक्ष रूप से चले इसी से महिला की मदद हो सकती है. वो महिला को निष्पक्ष जाँच से क्यों वंचित करना चाहते हैं. "
लेकिन वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि इस मामले में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे जिसमें एक नाबालिग़ का बयान भी था लेकिन सोचिए सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एफ़आईआर दर्ज हुई, तो ऐसे में निराश हताश खिलाड़ी कितना जाँच का इंता़ार करें.
उनके अनुसार, "अब आप ये सोचिए एफ़आईआर दर्ज हो गई है लेकिन अभी तक इस मामले में बृजभूषण सिंह से पूछताछ तक नहीं हुई है. और खिलाड़ियों को प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है और मामले दर्ज कर दिए गए हैं. "
"ये साफ़ दिखाई देता है कि एक आदमी को बचाने की कोशिश हो रही है. तो क्या ये कहा जा सकता है कि क़ानूनी कार्रवाई सही हो रही है? "
विजयलोकपल्ली कहते हैं कि भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा नाराज़ पहलवानों से मिलने गईं थीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ वो पूरे देश ने देखा.
वे आगे कहते हैं, "सानिया मिर्ज़ा के अलावा किस महिला खिलाड़ी को आपने इन पहलवानों के पक्ष में बोलते हुए देखा है. हम पुरुष क्रिकेट टीम की बात करते हैं , महिला क्रिकेट टीम क्यों इनके समर्थन में अब तक नहीं आई ये बताइए. "
उनके अनुसार, "अगर 15 महिला क्रिकेटर या खिलाड़ी इनके पक्ष में खड़ी हो जाएँगी, तो इनके आंदोलन को सोचिए कितना बल मिलेगा. क्योंकि अभी क़ानूनी कार्रवाई चल रही है तो सरकार की अपनी मजबूरी हो सकती हैं लेकिन अन्य खिलाड़ी तो समर्थन दे सकती हैं. "
क्या राजनीतिक हो रहा है आंदोलन?
विभिन्न राजनीतिक दल जैसे आप, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय किसान यूनियन इन पहलवानों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए.
वहीं जंतर मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी सुनाई दी.
इसके बाद इस बात पर भी बहस तेज़ होने लगी कि पहलवानों का ये प्रदर्शन राजनीतिक रूप ले रहा है.
हालाँकि टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पुनिया ने बग़ैर किसी का नाम लिए स्पष्ट कहा कि कुछ लोग उनके आंदोलन को अलग दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
राकेश टिकैत सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ये आंदोलन कैसे राजनीतिक हो सकता है?
उनका कहना था कि जब सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर कुछ नहीं कर रही है तो विपक्ष का काम होता है कि जब कोई मामला है तो वो उस मुद्दे को उठाए. लेकिन ये बताइए कि कौन सी राजनीतिक पार्टी इन पहलवानों की मदद कर रही है?
बीबीसी से बातचीत में पहलवान वरुण कुमार कहते हैं कि नाराज़ पहलवानों को मेडल बहाने की सोचने की बजाए जाँच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था.
वरूण कुमार मेलबर्न में हुई कॉमेनवेल्थ रेसलिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक जीत कर आए हैं.
साल 2007 से कुश्ती से जुड़े रहे वरुण कुमार बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "इन खिलाड़ियों का कहना है कि इन्हें सरकार पर विश्वास नहीं है लेकिन देश और कोर्ट पर है, ऐसे में जब न्यायालय का फ़ैसला नहीं आ जाता तब तक इन्हें न्यायप्रणाली पर विश्वास रखना चाहिए था. "
साथ ही वे खिलाड़ियों के साथ 28 मई को हुई कार्रवाई को सही ठहराते हैं.
उनके मुताबिक़ 28 मई को पहलवानों को शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन जारी रखना चाहिए था क्योंकि उस दिन नए संसद भवन का उदघाटन भी था. ऐसे में पुलिस ने क़ानून व्यवस्था को क़ाबू में करने के लिए जो कार्रवाई की, वो सही थी.
दरअसल 28 मई को जहाँ नई संसद भवन का उद्घाटन होना था, वहीं इसी दिन खिलाड़ियों ने महिला महापंचायत का आयोजन करने और संसद तक मार्च करने का फ़ैसला किया था.
लेकिन पुलिस का कहना था कि 28 मई को महत्वपूर्ण दिन था क्योंकि इस दिन नई संसद का उद्घाटन था. इसलिए उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी गई थी.
दिल्ली पुलिस की डीसीपी सुमन नलवा का कहना था, "पहलवान हमसे जो मांगते थे , हम उन्हें देते थे. हमने शुरू से उनका सहयोग किया. इंडिया गेट जैसी संवेदनशील जगह पर कैंडल मार्च निकालने की अनुमति दी. "
"लेकिन 28 मई अहम दिन था. उन्हें अनुमति नहीं थी इसके बावजूद वे नई संसद की तरफ उल्लंघन करते हुए गए, बैरिकेड तोड़े, तमाशे किए इसलिए हमने उन्हें हिरासत में ले लिया था. "
हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.
जानकारों के अनुसार खिलाड़ियों का मुद्दा काफ़ी अहम था, जिस पर जाँच के लिए ओवरसाइट कमेटी बनाई गई.
खेल पत्रकार राकेश राव का कहना है कि पूरे देश की संवेदना खिलाड़ियों के साथ है लेकिन ये अपने मुद्दे से भटक रहे हैं.
उन्होंने कहा- खिलाड़ियों को ये समझना होगा कि देश में क़ानून व्यवस्था है और उन्हें न्याय प्रणाली के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए.
खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति , खिलाड़ी न्यायप्रणाली में अपना भरोसा तभी दिखाएगा जब उसे प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे. लेकिन क्या ऐसा हो रहा है. ऐसे में इन खिलाड़ियों का ग़ुस्सा जायज़ है.
इधर खिलाड़ियों का समर्थन कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि पाँच दिनों में अगले क़दम पर फ़ैसला लिया जाएगा.
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हरिद्वार में मंगलवार को हर की पौड़ी पर अलग नज़ारा था. जहाँ आमतौर पर सैकड़ों की संख्या में लोग गंगा आरती में शामिल होने के लिए इकट्ठा होते हैं, वहाँ वे उन पहलवानों को देखने पहुँचे थे, जो अपने वर्षों की मेहनत को गंगा में बहाने आए थे. अपने मेडल गंगा में बहाने के लिए साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया समेत कई बड़े खिलाड़ी शाम में हरिद्वार पहुँचे. हाथों में मेडल लिए पहलवान भावुक थे वहीं सैकड़ों की भीड़ से घिरे इन पहलवानों को नरेश टिकैत मनाने की कोशिश कर रहे थे. भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत की पहल के बाद इन पहलवानों ने अपना फ़ैसला टाल दिया. बीबीसी से बातचीत में बीकेयू के नेता राकेश टिकैत ने बताया कि उन्हें पहलवानों के ट्वीट के ज़रिए जानकारी मिली कि वे गंगा में अपने मेडल प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार जा रहे हैं. विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन हो रहा था. इन पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण और 'तानाशाही रवैेए' जैसे गंभीर आरोप लगाए थे जिन्हें सांसद ने बेबुनियाद बताया और पहलवानों को नार्को टेस्ट की चुनौती दी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफ़आईआर दर्ज हो चुकी है. कैसे टला फ़ैसला? राकेश टिकैत बताते हैं कि पहलवानों का गंगा में मेडल बहाने का निर्णय उनका अपना था और इस बारे में उनसे कोई बात नहीं हुई थी. लेकिन जैसे ही उन्हें इसके बारे में पता चला, उन्होंने यूनियन की टीम को आगाह किया और टीम को देरहादून से लेकर हर की पौड़ी पर काम के लिए लगा दिया. उनके अनुसार," इसके बाद टिकैत साहब गाँव से गए और खिलाड़ियों को समझाया कि ये देश की संपत्ति है और आप भी देश की धरोहर हो ऐसा न करो. और आगे क्या करना है इस बारे में पाँच दिनों में फ़ैसला लिया जाएगा. " भारतीय खेल के इतिहास में शायद ये पहली बार हुआ है जब खिलाड़ियों ने ऐसा क़दम उठाया है. लेकिन इसको लेकर अलग-अलग राय है. जानकारों के अनुसार खिलाड़ियों के पक्ष से देखा जाए, तो ये सही लगता है कि उन्हें न्याय नहीं मिला इसलिए उन्होंने अपने मेडल गंगा में बहाने का फ़ैसला लिया. वहीं दूसरा नज़रिया ये है कि खिलाड़ियों ने जब इतनी मेहनत से वो मेडल भारत के लिए जीते, तो वो ऐसा क़दम उठाकर उसका निरादर कैसे कर सकते हैं? 'द हिंदू' अख़बार में डिप्टी एडिटर राकेश राव का कहना है कि खिलाड़ियों के मुद्दों से मेडल का कोई लेना-देना नहीं है. वे कहते हैं, "मुझे उनकी सोच पर रहम आता है. उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से देश के लिए मेडल जीता. ऐसा करके वो कहीं न कहीं अपनी मेहनत, उस देश का जिसने खिलाड़ियों के लिए इतना कुछ किया है, मेडल जिससे उन्हें एक पहचान मिली है, उन सबका अपमान करते. " वो कहते हैं कि एक खिलाड़ी का सपना होता है कि वो पोडियम पर खड़ा हो चाहे उसे मेडल कोई भी मिले. ऐसे में मेडल को फेंकने, जंतर मंतर पर धरना देने आदि से समस्या का हल नहीं हो सकता है. दूसरी ओर राकेश टिकैत कहते हैं , "चालीस दिनों से ज़्यादा से धरने पर बैठे इन पहलवानों ने लोगों का प्यार देखा था, पुलिस का प्यार देखा लेकिन जैसे उनके टेंट तोड़े गए, उन्हें पकड़ा गया वे उससे काफ़ी आहत थे इसलिए मेडल को गंगा में डालने का फ़ैसला लिया. " इसी बात को आगे बढ़ाते हुए खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम कहते हैं कि उनकी खिलाड़ियों के साथ पूरी संवेदना है और ये सरकार को समझना होगा कि ये सभी खिलाड़ी ब्रैंड एंबेसडर हैं और इन्होंने देश के लिए मेडल जीते हैं. वे कहते हैं, "आप सोचिए चालीस दिन से ज़्यादा समय से ये खिलाड़ी अपने घर की सुविधाओं को छोड़कर टेंट में रह रहे हैं. जहाँ मच्छर हैं, शौच की सुविधा नहीं है. तो क्या इन्हें झुंझलाहट नहीं हो रही होगी. क्या इनका सब्र का बाँध नहीं टूटेगा. " नौरिस प्रीतम कहते हैं- मैं खिलाड़ियों के मेडल गंगा में बहाने की बात से सहमत नहीं हूँ, लेकिन सरकार को ये सोचना होगा कि ये नौबत क्यों आई. वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली का कहना है कि इन खिलाड़ियों का ये क़दम उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. वे कहते हैं, "एक ज़माने में जब खिलाड़ियों के पास पैसे नहीं होते थे तो वे कहते थे कि मेडल बेच देंगे लेकिन इन पहलवानों के गंगा में मेडल बहाने की कोशश करना इससे युवा खिलाड़ियों को ग़लत संदेश जाएगा कि इतने नामी गिरामी ये क़दम उठा रहे हैं, तो उनका भविष्य क्या होगा. लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने ये फ़ैसला लिया. " वहीं चर्चा इस बात की भी हो रही है एक महीने से ज़्यादा समय से जंतर मंतर पर बैठ कर न्याय की गुहार लगा रहे इन मेडल विजेता पहलवानों पर ना महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी कुछ बोलीं और ना ही देश के प्रधानमंत्री की तरफ़ से कोई आश्वासन आया. मंगलवार को स्मृति ईरानी ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि वो अब से दो तीन घंटे पहले बबीता फोगाट के साथ बैठी हुई थीं. उनके अनुसार, "क्या बबीता जैसी विश्व विख़्यात पहलवान ऐसे किसी के साथ बैठी होगी, जिन्होंने किसी का शोषण किया होगा. वो भी उन लोगों के साथ जिन्होंने उन्हीं के परिवार का शोषण किया होगा. " वे कहती हैं कि किसी को शाम छह बजे मेडल बहाना था, लेकिन आठ बजे तक नहीं बहाया ये विषय नहीं है. स्मृति ईरानी इस बातचीत में कहती हैं, "जो लोग क़ानून जानते हैं वो इस बात को समझते हैं कि जब जाँच चल रही होती है, उसमें हस्तक्षेप करके महिला के ख़िलाफ़ ही जाना एक पद्धति बन गया है. जो मैं नहीं करना चाहती. न्याय प्रक्रिया और जाँच निष्पक्ष रूप से चले इसी से महिला की मदद हो सकती है. वो महिला को निष्पक्ष जाँच से क्यों वंचित करना चाहते हैं. " लेकिन वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि इस मामले में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे जिसमें एक नाबालिग़ का बयान भी था लेकिन सोचिए सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एफ़आईआर दर्ज हुई, तो ऐसे में निराश हताश खिलाड़ी कितना जाँच का इंता़ार करें. उनके अनुसार, "अब आप ये सोचिए एफ़आईआर दर्ज हो गई है लेकिन अभी तक इस मामले में बृजभूषण सिंह से पूछताछ तक नहीं हुई है. और खिलाड़ियों को प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है और मामले दर्ज कर दिए गए हैं. " "ये साफ़ दिखाई देता है कि एक आदमी को बचाने की कोशिश हो रही है. तो क्या ये कहा जा सकता है कि क़ानूनी कार्रवाई सही हो रही है? " विजयलोकपल्ली कहते हैं कि भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा नाराज़ पहलवानों से मिलने गईं थीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ वो पूरे देश ने देखा. वे आगे कहते हैं, "सानिया मिर्ज़ा के अलावा किस महिला खिलाड़ी को आपने इन पहलवानों के पक्ष में बोलते हुए देखा है. हम पुरुष क्रिकेट टीम की बात करते हैं , महिला क्रिकेट टीम क्यों इनके समर्थन में अब तक नहीं आई ये बताइए. " उनके अनुसार, "अगर पंद्रह महिला क्रिकेटर या खिलाड़ी इनके पक्ष में खड़ी हो जाएँगी, तो इनके आंदोलन को सोचिए कितना बल मिलेगा. क्योंकि अभी क़ानूनी कार्रवाई चल रही है तो सरकार की अपनी मजबूरी हो सकती हैं लेकिन अन्य खिलाड़ी तो समर्थन दे सकती हैं. " क्या राजनीतिक हो रहा है आंदोलन? विभिन्न राजनीतिक दल जैसे आप, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय किसान यूनियन इन पहलवानों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए. वहीं जंतर मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी सुनाई दी. इसके बाद इस बात पर भी बहस तेज़ होने लगी कि पहलवानों का ये प्रदर्शन राजनीतिक रूप ले रहा है. हालाँकि टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पुनिया ने बग़ैर किसी का नाम लिए स्पष्ट कहा कि कुछ लोग उनके आंदोलन को अलग दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. राकेश टिकैत सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ये आंदोलन कैसे राजनीतिक हो सकता है? उनका कहना था कि जब सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर कुछ नहीं कर रही है तो विपक्ष का काम होता है कि जब कोई मामला है तो वो उस मुद्दे को उठाए. लेकिन ये बताइए कि कौन सी राजनीतिक पार्टी इन पहलवानों की मदद कर रही है? बीबीसी से बातचीत में पहलवान वरुण कुमार कहते हैं कि नाराज़ पहलवानों को मेडल बहाने की सोचने की बजाए जाँच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था. वरूण कुमार मेलबर्न में हुई कॉमेनवेल्थ रेसलिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक जीत कर आए हैं. साल दो हज़ार सात से कुश्ती से जुड़े रहे वरुण कुमार बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "इन खिलाड़ियों का कहना है कि इन्हें सरकार पर विश्वास नहीं है लेकिन देश और कोर्ट पर है, ऐसे में जब न्यायालय का फ़ैसला नहीं आ जाता तब तक इन्हें न्यायप्रणाली पर विश्वास रखना चाहिए था. " साथ ही वे खिलाड़ियों के साथ अट्ठाईस मई को हुई कार्रवाई को सही ठहराते हैं. उनके मुताबिक़ अट्ठाईस मई को पहलवानों को शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन जारी रखना चाहिए था क्योंकि उस दिन नए संसद भवन का उदघाटन भी था. ऐसे में पुलिस ने क़ानून व्यवस्था को क़ाबू में करने के लिए जो कार्रवाई की, वो सही थी. दरअसल अट्ठाईस मई को जहाँ नई संसद भवन का उद्घाटन होना था, वहीं इसी दिन खिलाड़ियों ने महिला महापंचायत का आयोजन करने और संसद तक मार्च करने का फ़ैसला किया था. लेकिन पुलिस का कहना था कि अट्ठाईस मई को महत्वपूर्ण दिन था क्योंकि इस दिन नई संसद का उद्घाटन था. इसलिए उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी गई थी. दिल्ली पुलिस की डीसीपी सुमन नलवा का कहना था, "पहलवान हमसे जो मांगते थे , हम उन्हें देते थे. हमने शुरू से उनका सहयोग किया. इंडिया गेट जैसी संवेदनशील जगह पर कैंडल मार्च निकालने की अनुमति दी. " "लेकिन अट्ठाईस मई अहम दिन था. उन्हें अनुमति नहीं थी इसके बावजूद वे नई संसद की तरफ उल्लंघन करते हुए गए, बैरिकेड तोड़े, तमाशे किए इसलिए हमने उन्हें हिरासत में ले लिया था. " हालाँकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था. जानकारों के अनुसार खिलाड़ियों का मुद्दा काफ़ी अहम था, जिस पर जाँच के लिए ओवरसाइट कमेटी बनाई गई. खेल पत्रकार राकेश राव का कहना है कि पूरे देश की संवेदना खिलाड़ियों के साथ है लेकिन ये अपने मुद्दे से भटक रहे हैं. उन्होंने कहा- खिलाड़ियों को ये समझना होगा कि देश में क़ानून व्यवस्था है और उन्हें न्याय प्रणाली के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए. खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति , खिलाड़ी न्यायप्रणाली में अपना भरोसा तभी दिखाएगा जब उसे प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे. लेकिन क्या ऐसा हो रहा है. ऐसे में इन खिलाड़ियों का ग़ुस्सा जायज़ है. इधर खिलाड़ियों का समर्थन कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि पाँच दिनों में अगले क़दम पर फ़ैसला लिया जाएगा.
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पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्ष की साझा मुहिम तेज होने के संकेत हैं। अब विपक्षी दलों ने एलान किया है कि सरकार की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अगले छह दिसंबर को आयोजित बैठक का वे बहिष्कार करेंगे। विपक्षी दलों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है और उसने संसद को 'रबर स्टांप' बना दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बैठक नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने बुलाई है। उनके दफ्तर की तरफ से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि इस बैठक में पाकिस्तान सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ सांसदों को जानकारी देंगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्षी दलों के बहिष्कार का एलान कर देने से ये बैठक अब महत्वहीन हो गई है। इस बीच सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने एक बयान में विपक्षी दलों से बहिष्कार के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्षी दलों को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जानकारी देने की पहल की है, जिस पर विपक्ष को 'जिम्मेदार नजरिया' अपनाना चाहिए।
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक छह दिसंबर को होने वाली बैठक में भारतीय कश्मीर से संबंधित घटनाओं की खास चर्चा होगी। इसके अलावा दूसरे मुद्दों पर भी सरकार जानकारी देगी। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री इमरान खान को लोकतांत्रिक भावना की कोई समझ नहीं है। इन दलों ने अपने बयान में कहा कि पूरे देश की सामूहिक बुद्धि का इस्तेमाल करने की खान में क्षमता ही नहीं है।
उधर स्पीकर के कार्यालय ने कहा है कि विपक्षी दलों के बायकॉट के फैसले के बावजूद बैठक अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक होगी। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने भी कहा है कि बैठक रद्द नहीं हुई है। उसमें ऐसे विषयों की चर्चा होगी, जिनका राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा संबंध है। उन्होंने विपक्षी दलों से इस बात पर ध्यान देने को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बैठक कोई 'राजनीतिक आयोजन' नहीं है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर विपक्ष की गैर हाजिरी में बैठक हुई, तो सुरक्षा संबंधी मामलों पर राष्ट्रीय सहमति तैयार करने की सरकार की मंशा खटाई में पड़ जाएगी। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि विपक्षी दल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ को महज दिखावटी अधिकारी मानते हैँ। उनकी शिकायत है कि एनएसए के पास सूचनाएं तो होंगी, लेकिन कोई फैसला लेने का अधिकार उन्हें नहीं है। ऐसे में उनके साथ बैठक से कोई राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने में मदद नहीं मिलेगी।
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पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्ष की साझा मुहिम तेज होने के संकेत हैं। अब विपक्षी दलों ने एलान किया है कि सरकार की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अगले छह दिसंबर को आयोजित बैठक का वे बहिष्कार करेंगे। विपक्षी दलों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है और उसने संसद को 'रबर स्टांप' बना दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बैठक नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने बुलाई है। उनके दफ्तर की तरफ से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि इस बैठक में पाकिस्तान सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ सांसदों को जानकारी देंगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्षी दलों के बहिष्कार का एलान कर देने से ये बैठक अब महत्वहीन हो गई है। इस बीच सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने एक बयान में विपक्षी दलों से बहिष्कार के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्षी दलों को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जानकारी देने की पहल की है, जिस पर विपक्ष को 'जिम्मेदार नजरिया' अपनाना चाहिए। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक छह दिसंबर को होने वाली बैठक में भारतीय कश्मीर से संबंधित घटनाओं की खास चर्चा होगी। इसके अलावा दूसरे मुद्दों पर भी सरकार जानकारी देगी। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री इमरान खान को लोकतांत्रिक भावना की कोई समझ नहीं है। इन दलों ने अपने बयान में कहा कि पूरे देश की सामूहिक बुद्धि का इस्तेमाल करने की खान में क्षमता ही नहीं है। उधर स्पीकर के कार्यालय ने कहा है कि विपक्षी दलों के बायकॉट के फैसले के बावजूद बैठक अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक होगी। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने भी कहा है कि बैठक रद्द नहीं हुई है। उसमें ऐसे विषयों की चर्चा होगी, जिनका राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा संबंध है। उन्होंने विपक्षी दलों से इस बात पर ध्यान देने को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बैठक कोई 'राजनीतिक आयोजन' नहीं है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर विपक्ष की गैर हाजिरी में बैठक हुई, तो सुरक्षा संबंधी मामलों पर राष्ट्रीय सहमति तैयार करने की सरकार की मंशा खटाई में पड़ जाएगी। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि विपक्षी दल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ को महज दिखावटी अधिकारी मानते हैँ। उनकी शिकायत है कि एनएसए के पास सूचनाएं तो होंगी, लेकिन कोई फैसला लेने का अधिकार उन्हें नहीं है। ऐसे में उनके साथ बैठक से कोई राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने में मदद नहीं मिलेगी। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
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फतेहाबाद, 8 जुलाई। संयुक्त किसान मोर्चा फतेहाबाद के द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली के राष्ट्रीय आह्वान पर लघु सचिवालय से लाल बत्ती चौक तक विशाल जुलूस मार्च और आक्रोश प्रदर्शन किया गया। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि और कमरतोड़ महंगाई के विरोध में फतेहाबाद में प्रदर्शन के लिए समाज के तमाम तबकों के लोग सुबह 10 बजे अपनी बैलगाड़ी, साइकिल, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, गाडिय़ों और दूसरे वाहनों को लेकर पहुंचे और लघु सचिवालय के मुख्य गेट के आगे से गाड़ी के आगे रस्सियों से बैलों को बांधकर और संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने उस गाड़ी को खींचते हुए पुराना बस स्टैंड, बीघड़ मोड़ से होते हुए लाल बत्ती चौक से होकर वापिस लघु सचिवालय पहुंचे और वहां 8 मिनट हॉर्न बजाकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। शहर में मुख्य सडक़ से रोष मार्च के दौरान शहर के लोगों, दुकानदारों, व्यापारियों, रिक्शा चालकों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं समेत तमाम तबकों ने आसमान छूती महंगाई के खिलाफ इस प्रदर्शन को जोरदार समर्थन किया और इसमें शामिल हुए। लोगों ने अपनी गाडिय़ों पर खाली सिलेंडर रखकर जोरदार नारों के साथ इस रोष प्रदर्शन में भागीदारी की।
प्रदर्शन का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों संदीप काजला, रामकुमार बहबलपुरिया, मलकीत फौजी, योगेंद्र भूथन, करमजीत सालमखेड़ा, बंसी सिहाग, रविंद्र हिजरावां, मनफूल ढाका, सुरेश गढ़वाल, कल्याण सिंह, बेगराज, रामेश्वर भोडिया, गुरनाम, कृष्ण भोडिया, इकबाल अजीतसर, सुशील गोदारा, मोहनलाल नारंग, जगबीर तूर, बलराज बिघड़, पूनम चंद रत्ती ने किया। किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 7 साल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। पेट्रोल और डीजल 100 का आंकड़ा पार कर गए हैं जबकि रसोई गैस के दाम 1000 प्रति सिलेंडर के बेहद करीब हैं और यह सब तब है जबकि देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है। लाखों मौतें इस महामारी में स्वास्थ्य ढांचे के फेल होने के कारण कारण हो चुकी हैं और गरीबी और महंगाई अपने शिखर पर है। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह लोगों को जरूरत की सभी चीजें बहुत सस्ते दामों पर राशन की दुकानों पर उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करती परंतु इसके उल्ट सरसों का तेल के भाव पिछले कुछ समय में ही 80 से बढक़र 180-200 तक पहुंच गए हैं और दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। यही वह कारण हैं जिनको लेकर किसान दिल्ली के बॉर्डर से लेकर हर शहर, कस्बे और गांव तक तीनों काले कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन और धरना कर रहे हैं। अगर यह तीनों काले कानून लागू होते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कुछेक कॉरपोरेट्स और पूंजी पतियों के हाथ में चली जाएगी जिससे मध्यमवर्ग और गरीब जनता के लिए दो जून की रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे। यह आंदोलन समाज के सभी मेहनतकश तबकों, किसानों, मजदूरों, दुकानदारों, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों और नौजवानों और महिलाओं सबका है। वास्तव में यह आर्थिक आजादी की लड़ाई है। इसका नेतृत्व किसान कर रहा है।
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फतेहाबाद, आठ जुलाई। संयुक्त किसान मोर्चा फतेहाबाद के द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली के राष्ट्रीय आह्वान पर लघु सचिवालय से लाल बत्ती चौक तक विशाल जुलूस मार्च और आक्रोश प्रदर्शन किया गया। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि और कमरतोड़ महंगाई के विरोध में फतेहाबाद में प्रदर्शन के लिए समाज के तमाम तबकों के लोग सुबह दस बजे अपनी बैलगाड़ी, साइकिल, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, गाडिय़ों और दूसरे वाहनों को लेकर पहुंचे और लघु सचिवालय के मुख्य गेट के आगे से गाड़ी के आगे रस्सियों से बैलों को बांधकर और संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने उस गाड़ी को खींचते हुए पुराना बस स्टैंड, बीघड़ मोड़ से होते हुए लाल बत्ती चौक से होकर वापिस लघु सचिवालय पहुंचे और वहां आठ मिनट हॉर्न बजाकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। शहर में मुख्य सडक़ से रोष मार्च के दौरान शहर के लोगों, दुकानदारों, व्यापारियों, रिक्शा चालकों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं समेत तमाम तबकों ने आसमान छूती महंगाई के खिलाफ इस प्रदर्शन को जोरदार समर्थन किया और इसमें शामिल हुए। लोगों ने अपनी गाडिय़ों पर खाली सिलेंडर रखकर जोरदार नारों के साथ इस रोष प्रदर्शन में भागीदारी की। प्रदर्शन का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों संदीप काजला, रामकुमार बहबलपुरिया, मलकीत फौजी, योगेंद्र भूथन, करमजीत सालमखेड़ा, बंसी सिहाग, रविंद्र हिजरावां, मनफूल ढाका, सुरेश गढ़वाल, कल्याण सिंह, बेगराज, रामेश्वर भोडिया, गुरनाम, कृष्ण भोडिया, इकबाल अजीतसर, सुशील गोदारा, मोहनलाल नारंग, जगबीर तूर, बलराज बिघड़, पूनम चंद रत्ती ने किया। किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले सात साल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। पेट्रोल और डीजल एक सौ का आंकड़ा पार कर गए हैं जबकि रसोई गैस के दाम एक हज़ार प्रति सिलेंडर के बेहद करीब हैं और यह सब तब है जबकि देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है। लाखों मौतें इस महामारी में स्वास्थ्य ढांचे के फेल होने के कारण कारण हो चुकी हैं और गरीबी और महंगाई अपने शिखर पर है। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह लोगों को जरूरत की सभी चीजें बहुत सस्ते दामों पर राशन की दुकानों पर उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करती परंतु इसके उल्ट सरसों का तेल के भाव पिछले कुछ समय में ही अस्सी से बढक़र एक सौ अस्सी-दो सौ तक पहुंच गए हैं और दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। यही वह कारण हैं जिनको लेकर किसान दिल्ली के बॉर्डर से लेकर हर शहर, कस्बे और गांव तक तीनों काले कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन और धरना कर रहे हैं। अगर यह तीनों काले कानून लागू होते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कुछेक कॉरपोरेट्स और पूंजी पतियों के हाथ में चली जाएगी जिससे मध्यमवर्ग और गरीब जनता के लिए दो जून की रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे। यह आंदोलन समाज के सभी मेहनतकश तबकों, किसानों, मजदूरों, दुकानदारों, कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों और नौजवानों और महिलाओं सबका है। वास्तव में यह आर्थिक आजादी की लड़ाई है। इसका नेतृत्व किसान कर रहा है।
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नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर आर्थिक और विदेश समेत तमाम मोर्चो पर फेल रहने का आरोप लगाते हुए हमला बोला है.
चिदंबरम ने कहा है कि मोदी सरकार जहां महंगाई, अपराध जैसे मुद्दों पर काबू पाने में असफल रही है, वहीं विदेश नें नेपाल के साथ रिश्ते सुधारने में भी नाकाम रही है.
चिदंबरम ने कहा कि खाने-पीने की चीजों, बिजली, पानी के दामों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि असहिष्णुता और करप्शन के मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार ने विपक्ष के साथ विचार विमर्श करने की कोई इच्छा जाहिर नहीं की है.
जीएसटी विधेयक पर मोदी सरकार को घेरते हुए चिंदबरम ने कहा कि सरकार अभी तक विपक्ष के विचारों को विधेयक में समाहित करने और जीएसटी विधेयक को पारित करने में सक्षम नहीं हो पाई है. दुर्भाग्य से इस अड़ियल रवैये के लिए सरकार खुद जिम्मेदार है.
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नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर आर्थिक और विदेश समेत तमाम मोर्चो पर फेल रहने का आरोप लगाते हुए हमला बोला है. चिदंबरम ने कहा है कि मोदी सरकार जहां महंगाई, अपराध जैसे मुद्दों पर काबू पाने में असफल रही है, वहीं विदेश नें नेपाल के साथ रिश्ते सुधारने में भी नाकाम रही है. चिदंबरम ने कहा कि खाने-पीने की चीजों, बिजली, पानी के दामों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि असहिष्णुता और करप्शन के मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार ने विपक्ष के साथ विचार विमर्श करने की कोई इच्छा जाहिर नहीं की है. जीएसटी विधेयक पर मोदी सरकार को घेरते हुए चिंदबरम ने कहा कि सरकार अभी तक विपक्ष के विचारों को विधेयक में समाहित करने और जीएसटी विधेयक को पारित करने में सक्षम नहीं हो पाई है. दुर्भाग्य से इस अड़ियल रवैये के लिए सरकार खुद जिम्मेदार है.
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देश का सबसे अमीर और चर्चित परिवार लगातार किसी ना किसी कारण से चर्चा में बना रहता है। कभी इवेंट को लेकर तो कभी सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में टॉप करने को लेकर। यहां बात हो रही है अंबानी परिवार की। अंबानी परिवार का हर सदस्य भी आए दिन सुर्खियों में रहता है। खासतौर से सोशल इवेंट्स में परिवार के सदस्यों खासतौर से ईशा अंबानी, नीता अंबानी और उनकी बहु श्लोक अंबानी के लुक्स को लेकर कई चर्चाएं होती है।
ऐसी ही चर्चा इन दिनो फिर होने लगी है जब अंबानी परिवार की बड़ी बहू श्लोका अंबानी की एक ड्रेस सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उनकी ड्रेसिंग सें के फैंस दीवाने है। फंक्शंस से लेकर आउटिंग के मौके पर श्लोका अपने खास स्टाइल सेंस के जरिए फैंस का खास ध्यान आकर्षित करने में हमेशा सफल होती है। इन दिनों भी श्लोका का एक सिंपल मगर एलिगेंट लुक सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है।
दरअसल हाल ही में श्लोका मेहता अपने परिवार के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने पहुंची थी। इस दौरान श्लोका ने काफी सादगी भरा लुक कैरी किया था। फैंस उनकी सादगी को देखकर काफी खुश हुए है। बता दें कि इस दौरान श्लोका मेहता अपने ससुर मुकेश अंबानी पति अनंत अंबानी और बेटे पृथ्वी के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेते हुए देखा गया था।
गौरतलब है कि श्लोका मेहता अंबानी अब दूसरी बार मां बनने वाली है। इस दौरान वो गणपति बप्पा से आशीर्वाद लेने पूरे परिवार के साथ पहुंची थी। इस मंदिर पहुंचने के दौरान श्लोका मेहता ने जो ड्रेस पहनी हुई थी वो काफी वायरल हो रही है। उनके जबरदस्त आउटफिट को देखकर फैंस काफी खुश हो रहे है। इस बार श्लोका मेहता ने ब्रीजी फ्लोरल प्रिंटेड को-ऑर्ड सेट पहना था। उनके आउटफिट में ढीली आस्तीन के साथ खुला कॉलर थी, जिस पर कश्मीरी फूलों के प्रिंट बने हुए थे। फोटोज के अनुसार फ्लोरल कुर्ते को श्लोका ने मैचिंग और प्रिंटेड पैंट के साथ मैच करके पहना था। उनका ये लुक काफी स्टनिंग लग रहा था।
श्लोका ने अपने इस लुक को काफी सिंपल ही रखा था। एंकल लेंथ पैंट्स के साथ उन्होंने स्ट्रैपी फ्लैट्स कैरी किए थे जिससे उनका लुक कंप्लीट हो रहा था। जानकारी के मुताबिक ये ड्रेस यावी ब्रांड की है। ब्रांड केी ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक इस कुर्ते की कीमत 23,900 रुपये है जबकि मैचिंग लूज फिटिंग पैंट की कीमत 16,500 रुपये है। यानी अगर किसी व्यक्ति को इस लुक को पूरा कैरी करना है तो उसे 40,400 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। गौरतलब है कि आमतौर पर बड़े बड़े इवेंट्स के लाखों करोड़ों रुपये के ड्रेस, ज्वैलरी और एक्सेसरीज़ फ्लॉन्ट करने वाली श्लोका का ये लुक काफी सस्ता है, जिसे कई लोग कैरी कर सकते है।
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देश का सबसे अमीर और चर्चित परिवार लगातार किसी ना किसी कारण से चर्चा में बना रहता है। कभी इवेंट को लेकर तो कभी सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में टॉप करने को लेकर। यहां बात हो रही है अंबानी परिवार की। अंबानी परिवार का हर सदस्य भी आए दिन सुर्खियों में रहता है। खासतौर से सोशल इवेंट्स में परिवार के सदस्यों खासतौर से ईशा अंबानी, नीता अंबानी और उनकी बहु श्लोक अंबानी के लुक्स को लेकर कई चर्चाएं होती है। ऐसी ही चर्चा इन दिनो फिर होने लगी है जब अंबानी परिवार की बड़ी बहू श्लोका अंबानी की एक ड्रेस सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उनकी ड्रेसिंग सें के फैंस दीवाने है। फंक्शंस से लेकर आउटिंग के मौके पर श्लोका अपने खास स्टाइल सेंस के जरिए फैंस का खास ध्यान आकर्षित करने में हमेशा सफल होती है। इन दिनों भी श्लोका का एक सिंपल मगर एलिगेंट लुक सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल हाल ही में श्लोका मेहता अपने परिवार के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने पहुंची थी। इस दौरान श्लोका ने काफी सादगी भरा लुक कैरी किया था। फैंस उनकी सादगी को देखकर काफी खुश हुए है। बता दें कि इस दौरान श्लोका मेहता अपने ससुर मुकेश अंबानी पति अनंत अंबानी और बेटे पृथ्वी के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेते हुए देखा गया था। गौरतलब है कि श्लोका मेहता अंबानी अब दूसरी बार मां बनने वाली है। इस दौरान वो गणपति बप्पा से आशीर्वाद लेने पूरे परिवार के साथ पहुंची थी। इस मंदिर पहुंचने के दौरान श्लोका मेहता ने जो ड्रेस पहनी हुई थी वो काफी वायरल हो रही है। उनके जबरदस्त आउटफिट को देखकर फैंस काफी खुश हो रहे है। इस बार श्लोका मेहता ने ब्रीजी फ्लोरल प्रिंटेड को-ऑर्ड सेट पहना था। उनके आउटफिट में ढीली आस्तीन के साथ खुला कॉलर थी, जिस पर कश्मीरी फूलों के प्रिंट बने हुए थे। फोटोज के अनुसार फ्लोरल कुर्ते को श्लोका ने मैचिंग और प्रिंटेड पैंट के साथ मैच करके पहना था। उनका ये लुक काफी स्टनिंग लग रहा था। श्लोका ने अपने इस लुक को काफी सिंपल ही रखा था। एंकल लेंथ पैंट्स के साथ उन्होंने स्ट्रैपी फ्लैट्स कैरी किए थे जिससे उनका लुक कंप्लीट हो रहा था। जानकारी के मुताबिक ये ड्रेस यावी ब्रांड की है। ब्रांड केी ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक इस कुर्ते की कीमत तेईस,नौ सौ रुपयापये है जबकि मैचिंग लूज फिटिंग पैंट की कीमत सोलह,पाँच सौ रुपयापये है। यानी अगर किसी व्यक्ति को इस लुक को पूरा कैरी करना है तो उसे चालीस,चार सौ रुपयापये खर्च करने पड़ेंगे। गौरतलब है कि आमतौर पर बड़े बड़े इवेंट्स के लाखों करोड़ों रुपये के ड्रेस, ज्वैलरी और एक्सेसरीज़ फ्लॉन्ट करने वाली श्लोका का ये लुक काफी सस्ता है, जिसे कई लोग कैरी कर सकते है।
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इससे पहले कि आप एक ऋण करें, इनमें से अधिकतरआबादी का बैंकों के बारे में सोचता है जिसमें ऋण लेने के लिए लाभदायक होता है। लेकिन एक सपने की तलाश में, जिसके लिए वे इस पैसे लेते हैं, लोग कभी-कभी अपनी शोधनक्षमता और संभव बल के हालात पर ध्यान देने के लिए भूल जाते हैं।
कितनी सही तरीके से गणना करने के लिए, क्या आप ऋण सूट?
किसी भी एक क्रेडिट प्रस्ताव को रोकने से पहले, सबसे अच्छा विकल्प होगाः
- अनुबंध के तहत प्रति माह संभावित साख और भुगतान राशि की गणना करें। उधारकर्ता, भुगतानजो महीने में ऋण पर कुल आय का 50% से अधिक नहीं होगा सबसे अच्छा विकल्प यह है कि यह राशि आपकी कमाई का 10 या 15% है। विशेषज्ञों के अनुसार, भुगतान की यह राशि व्यावहारिक रूप से रहने वाले के उधारकर्ता के मानक को प्रभावित नहीं करती है।
- अतिरिक्त पैसे कमाने का अवसर है आपके पास एक शानदार विकल्प होगाआपकी मूल आय के अतिरिक्त अतिरिक्त पैसे भले ही आपकी वार्षिकी भुगतान राशि आपके बजट के लिए अदृश्य हो, तो यह धन अप्रत्याशित परिस्थितियों के मामले में आवश्यक हो सकता है।
- ऋण रद्दीकरण की अनुमानित अवधि निर्धारित करें मत भूलोः लंबी अवधि के लिए आप ऋण लेते हैं, ऋण पर दर कम चरम से चरम तक मत जाओ, "सोने का मतलब" खोजें आंकड़ों के मुताबिक, आबादी एक या दो साल के लिए ऋण लेने को पसंद करती है, और अगर वह बंधक की बात आती है, तो 5-10 साल के लिए।
ऋण एक लक्ष्य नहीं है, और उधारकर्ता फैसला करता है,जहां वह बैंक के ज्ञान के बिना पैसा खर्च कर सकता है व्यावहारिक रूप से सभी बैंकों के पास एक ऋण के लिए आवेदन करने के लिए दस्तावेजों की एक सूची हैः
किस बैंक में ऋण लेने के लिए लाभदायक है?
जैसा कि आंकड़े दिखते हैं, 2015 की शुरुआत में2014 की अवधि के मुकाबले ऋण पर ब्याज दरों में काफी वृद्धि हुई है देश में अस्थिर आर्थिक स्थिति और रूबल विनिमय दर में गिरावट के साथ इसे संबद्ध करने का अधिकार होगा।
पहली जगह Sberbank द्वारा आयोजित किया जाता है विश्लेषणात्मक आंकड़ों के अनुसार, इस बैंक की सबसे कम ब्याज दर है लंबे समय से यह संगठन राज्य के समर्थन का उपयोग करके, उधार देने वाले नेताओं में अपनी स्थिति रखता है।
औसतन, इस बैंक में उपभोक्ता ऋण की दर प्रति वर्ष 1 9% से है।
"वीटीबी 24" - दूसरे स्थान पर। सबसे बड़े वाणिज्यिक ऋण संगठनों में से एक, जो प्रत्येक शहर में Sberbank के बराबर मौजूद है।
प्रति वर्ष 21% की दर से ऋण प्राप्त करना संभव है।
तीसरी सबसे लोकप्रिय क्रेडिट संस्था, बैंक ऑफ़ मॉस्को है। यह एक गैर-राज्य संरचना भी है और आबादी के साथ निकट सहयोग करती है। प्रतिवर्ष 23% से एक वर्ष के लिए अधिक भुगतान करना संभव है।
वरिष्ठ और सेवानिवृत्ति की आयु की आबादी के लिए ऋण जारी करने में सोवोंबंबैंक अग्रणी है। लेकिन ऋण पर ब्याज दरें वांछित होने के लिए बहुत ज्यादा छूट देती हैं और ऋण के प्रति वर्ष 30% तक पहुंच सकती हैं।
कोई भी विशेषज्ञ आपको सटीक उत्तर देने में सक्षम नहीं होगाश्रेय लेने की लाभदायक सार्वजनिक बैंकों के सवाल पर। जब एक ऋण के लिए आवेदन ध्यान देना चाहिए वहाँ हर बैंक में बारीकियों रहे हैं। इससे पहले कि आप ब्याज दर की गणना के लिए, आप निम्नलिखित कारकों पर विचार करना चाहिएः ऋण राशि, अनुबंध के तहत बीमा के ऋण की अवधि, अनुमानित दर, जमानत या गारंटी, बीसीआई और अन्य में अपने डेटा की उपलब्धता। केवल इन आंकड़ों के आधार पर ऋणदाता राशि और ऋण की दर की गणना करने में सक्षम हो, लेकिन केवल बैंक के लिए एक व्यक्तिगत अपील करता है, तो।
व्यावहारिक रूप से सभी बैंकों को ऋण लेने वाले के लिए एक आवश्यकता हैः
1. रूसी संघ के नागरिक के पासपोर्ट कुछ बैंक रियायतें बनाते हैं और आपको अस्थायी निवास परमिट वाले लोगों के लिए ऋण लेने की अनुमति देते हैं, कानून इसे प्रतिबंधित नहीं करता है, लेकिन व्यवहार में यह बहुत दुर्लभ है।
2. 21 से 65 वर्ष की आयु। इस खंड में एक अपवाद Sovcombank है, जो 75 वर्ष से कम उम्र के पेंशनरों को ऋण प्रदान करता है, बशर्ते कि ऋण समझौते के अंत में आपको निर्दिष्ट आयु से अधिक नहीं होना चाहिए। आवेदन के समय, आपके पास 5 साल के लिए ऋण लेने की अपेक्षा अधिकतम 70 होनी चाहिए, और यदि आप तीन साल तक ऋण लेते हैं तो आपको 72 साल का होना चाहिए।
3. आधिकारिक काम कोई बैंक एक ऋण एक गैर काम कर रहे व्यक्ति दे देंगे। अपने रोजगार का प्रमाण एक संदर्भ 2-गड्ढे, एक व्यक्तिगत उद्यमी या कंपनी, जेएससी के रूप में आपकी कंपनी फिक्सिंग के रूप में आप की स्थिति पंजीकरण का प्रमाण पत्र के रूप में काम कर सकते हैं।
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इससे पहले कि आप एक ऋण करें, इनमें से अधिकतरआबादी का बैंकों के बारे में सोचता है जिसमें ऋण लेने के लिए लाभदायक होता है। लेकिन एक सपने की तलाश में, जिसके लिए वे इस पैसे लेते हैं, लोग कभी-कभी अपनी शोधनक्षमता और संभव बल के हालात पर ध्यान देने के लिए भूल जाते हैं। कितनी सही तरीके से गणना करने के लिए, क्या आप ऋण सूट? किसी भी एक क्रेडिट प्रस्ताव को रोकने से पहले, सबसे अच्छा विकल्प होगाः - अनुबंध के तहत प्रति माह संभावित साख और भुगतान राशि की गणना करें। उधारकर्ता, भुगतानजो महीने में ऋण पर कुल आय का पचास% से अधिक नहीं होगा सबसे अच्छा विकल्प यह है कि यह राशि आपकी कमाई का दस या पंद्रह% है। विशेषज्ञों के अनुसार, भुगतान की यह राशि व्यावहारिक रूप से रहने वाले के उधारकर्ता के मानक को प्रभावित नहीं करती है। - अतिरिक्त पैसे कमाने का अवसर है आपके पास एक शानदार विकल्प होगाआपकी मूल आय के अतिरिक्त अतिरिक्त पैसे भले ही आपकी वार्षिकी भुगतान राशि आपके बजट के लिए अदृश्य हो, तो यह धन अप्रत्याशित परिस्थितियों के मामले में आवश्यक हो सकता है। - ऋण रद्दीकरण की अनुमानित अवधि निर्धारित करें मत भूलोः लंबी अवधि के लिए आप ऋण लेते हैं, ऋण पर दर कम चरम से चरम तक मत जाओ, "सोने का मतलब" खोजें आंकड़ों के मुताबिक, आबादी एक या दो साल के लिए ऋण लेने को पसंद करती है, और अगर वह बंधक की बात आती है, तो पाँच-दस साल के लिए। ऋण एक लक्ष्य नहीं है, और उधारकर्ता फैसला करता है,जहां वह बैंक के ज्ञान के बिना पैसा खर्च कर सकता है व्यावहारिक रूप से सभी बैंकों के पास एक ऋण के लिए आवेदन करने के लिए दस्तावेजों की एक सूची हैः किस बैंक में ऋण लेने के लिए लाभदायक है? जैसा कि आंकड़े दिखते हैं, दो हज़ार पंद्रह की शुरुआत मेंदो हज़ार चौदह की अवधि के मुकाबले ऋण पर ब्याज दरों में काफी वृद्धि हुई है देश में अस्थिर आर्थिक स्थिति और रूबल विनिमय दर में गिरावट के साथ इसे संबद्ध करने का अधिकार होगा। पहली जगह Sberbank द्वारा आयोजित किया जाता है विश्लेषणात्मक आंकड़ों के अनुसार, इस बैंक की सबसे कम ब्याज दर है लंबे समय से यह संगठन राज्य के समर्थन का उपयोग करके, उधार देने वाले नेताओं में अपनी स्थिति रखता है। औसतन, इस बैंक में उपभोक्ता ऋण की दर प्रति वर्ष एक नौ% से है। "वीटीबी चौबीस" - दूसरे स्थान पर। सबसे बड़े वाणिज्यिक ऋण संगठनों में से एक, जो प्रत्येक शहर में Sberbank के बराबर मौजूद है। प्रति वर्ष इक्कीस% की दर से ऋण प्राप्त करना संभव है। तीसरी सबसे लोकप्रिय क्रेडिट संस्था, बैंक ऑफ़ मॉस्को है। यह एक गैर-राज्य संरचना भी है और आबादी के साथ निकट सहयोग करती है। प्रतिवर्ष तेईस% से एक वर्ष के लिए अधिक भुगतान करना संभव है। वरिष्ठ और सेवानिवृत्ति की आयु की आबादी के लिए ऋण जारी करने में सोवोंबंबैंक अग्रणी है। लेकिन ऋण पर ब्याज दरें वांछित होने के लिए बहुत ज्यादा छूट देती हैं और ऋण के प्रति वर्ष तीस% तक पहुंच सकती हैं। कोई भी विशेषज्ञ आपको सटीक उत्तर देने में सक्षम नहीं होगाश्रेय लेने की लाभदायक सार्वजनिक बैंकों के सवाल पर। जब एक ऋण के लिए आवेदन ध्यान देना चाहिए वहाँ हर बैंक में बारीकियों रहे हैं। इससे पहले कि आप ब्याज दर की गणना के लिए, आप निम्नलिखित कारकों पर विचार करना चाहिएः ऋण राशि, अनुबंध के तहत बीमा के ऋण की अवधि, अनुमानित दर, जमानत या गारंटी, बीसीआई और अन्य में अपने डेटा की उपलब्धता। केवल इन आंकड़ों के आधार पर ऋणदाता राशि और ऋण की दर की गणना करने में सक्षम हो, लेकिन केवल बैंक के लिए एक व्यक्तिगत अपील करता है, तो। व्यावहारिक रूप से सभी बैंकों को ऋण लेने वाले के लिए एक आवश्यकता हैः एक. रूसी संघ के नागरिक के पासपोर्ट कुछ बैंक रियायतें बनाते हैं और आपको अस्थायी निवास परमिट वाले लोगों के लिए ऋण लेने की अनुमति देते हैं, कानून इसे प्रतिबंधित नहीं करता है, लेकिन व्यवहार में यह बहुत दुर्लभ है। दो. इक्कीस से पैंसठ वर्ष की आयु। इस खंड में एक अपवाद Sovcombank है, जो पचहत्तर वर्ष से कम उम्र के पेंशनरों को ऋण प्रदान करता है, बशर्ते कि ऋण समझौते के अंत में आपको निर्दिष्ट आयु से अधिक नहीं होना चाहिए। आवेदन के समय, आपके पास पाँच साल के लिए ऋण लेने की अपेक्षा अधिकतम सत्तर होनी चाहिए, और यदि आप तीन साल तक ऋण लेते हैं तो आपको बहत्तर साल का होना चाहिए। तीन. आधिकारिक काम कोई बैंक एक ऋण एक गैर काम कर रहे व्यक्ति दे देंगे। अपने रोजगार का प्रमाण एक संदर्भ दो-गड्ढे, एक व्यक्तिगत उद्यमी या कंपनी, जेएससी के रूप में आपकी कंपनी फिक्सिंग के रूप में आप की स्थिति पंजीकरण का प्रमाण पत्र के रूप में काम कर सकते हैं।
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रूसी मिसाइल-तोप प्रणालियों की खरीद पर बातचीत वर्ष के 2013 के बाद से चल रही है, हालांकि, देश में मुश्किल स्थिति के कारण, सौदा बार-बार स्थगित कर दिया गया था।
सालगाड़ो के अनुसार, ब्राजील अच्छी तरह से जाना जाता है और अत्यधिक मूल्यवान रूसी रक्षा उपकरण है।
तकनीकी क्षमताओं के संदर्भ में, वे (सैन्य) रूसी पैंटिर-एसएक्सएनयूएमएक्स परिसरों का बहुत अच्छा जवाब देते हैं। दुर्भाग्य से, कई बजटीय प्रतिबंध हमें इस लेनदेन को करने की अनुमति नहीं देते हैं,राजनयिक ने कहा।
लेकिन सामान्य तौर पर, सैन्य-औद्योगिक परिसर में सहयोग हमारे संबंधों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बातचीत चल रही है, और एक लंबे समय के लिए, लेकिन मुझे किसी भी क्रेडिट योजनाओं या क्रेडिट लाइनों के बारे में जानकारी नहीं है,सालगाड़ो को जोड़ा।
पैंटिर-एसएक्सएनयूएमएक्स एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स सभी हवाई हमलों से किसी भी मौसम में मुश्किल रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक परिस्थितियों में बंद कवर के लिए अभिप्रेत है। आधुनिक मिसाइल-तोप हथियार सभी प्रकार के मानवयुक्त और मानव रहित लक्ष्यों की हार के लिए प्रदान करते हैं।
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रूसी मिसाइल-तोप प्रणालियों की खरीद पर बातचीत वर्ष के दो हज़ार तेरह के बाद से चल रही है, हालांकि, देश में मुश्किल स्थिति के कारण, सौदा बार-बार स्थगित कर दिया गया था। सालगाड़ो के अनुसार, ब्राजील अच्छी तरह से जाना जाता है और अत्यधिक मूल्यवान रूसी रक्षा उपकरण है। तकनीकी क्षमताओं के संदर्भ में, वे रूसी पैंटिर-एसएक्सएनयूएमएक्स परिसरों का बहुत अच्छा जवाब देते हैं। दुर्भाग्य से, कई बजटीय प्रतिबंध हमें इस लेनदेन को करने की अनुमति नहीं देते हैं,राजनयिक ने कहा। लेकिन सामान्य तौर पर, सैन्य-औद्योगिक परिसर में सहयोग हमारे संबंधों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बातचीत चल रही है, और एक लंबे समय के लिए, लेकिन मुझे किसी भी क्रेडिट योजनाओं या क्रेडिट लाइनों के बारे में जानकारी नहीं है,सालगाड़ो को जोड़ा। पैंटिर-एसएक्सएनयूएमएक्स एंटी-एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स सभी हवाई हमलों से किसी भी मौसम में मुश्किल रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक परिस्थितियों में बंद कवर के लिए अभिप्रेत है। आधुनिक मिसाइल-तोप हथियार सभी प्रकार के मानवयुक्त और मानव रहित लक्ष्यों की हार के लिए प्रदान करते हैं।
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आज के बच्चे का क्या जाने बारिश का मज़ा जब हम छोटे थे घर पर कभी भी बिना भीगे नहीं जाते थे। डांट भी पड़ती थी, मार भी पड़ती थी लेकिन उन बारिश के मौसम में भीगने का अनुभव आज तक कही नहीं मिला और न ही मिल सकेगा। पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के बाद प्रकृति को भी तो अपना बदला लेना है। जो मनुष्य ने किया उसका फल भी तो मिलना चाहिए।
जब हम छोटे थे तब बारिश का मौसम समय पर आता था। वर्षा ऋतु में भीगते हुए अपने विद्यालय जाने और भीगते हुए ही वापिस आना। कौन भूल सकता है अपने बचपन को। मुझे याद है जब मैं कक्षा दूसरी में था उस साल बहुत बारिश हुई थी। देश में कई जगह बाढ़ तक आ गयी थी। बहुत से लोगो को अपने घर से बेघर होना पड़ा था। बारिश हो रही थी मैं बार बार अपनी कक्षा की खिड़की से बहार देख रहा था। बहार जाने का मन हो रहा था। बारिश में भीगने का मन हो रहा था। कक्षा में जो शिक्षक पढ़ा रहे थे उसमे मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं था। मेरा ध्यान था बहार कैसे जाना है। कैसे बारिश के मज़े लेने हैं।
बारिश के खुशबू ऐसी खुश्बू है जो बारिश में ही मिल सकती है दुनिया में और कही नहीं मिल सकती। किसी को भी कैसा भी दुःख हो न वो भी उस खुश्बू से दूर हो जाता है। शिक्षक ने मुझे टोका और बोले बाहर कहाँ देख रहे हो। यहाँ पढ़ाई पर ध्यान दो। मैं डर गया। कैसे भी करके मैने विद्यालय के वो ५ घंटे कटे। ख़ुशी की बात ये थी की बारिश अभी हो रही थी और मेरा घर भी थोड़ा दूर था। जैसे ही विद्यालय से निकला वैसे ही मुझे आत्म संतुष्टि। अब मैं बारिश में भीग सकता। कूद कूदकर नहा सकता हूँ। मतलब कुछ भी कर सकता हूँ कोई रोकने वाला नहीं। घर दूर था बारिश भी हो रही थी रिश्ते में अनजान दोस्त भी मिल गए उनके साथ बारे हुए पानी में कुदना। थोड़े से पानी में तैरने की कोशिश करना। मुर्गी जैसे नाचना। बेफिक्र हो कर रहना। घर पहुंचा बहुत डांट पड़ी।
उस के बहुत कारण थे पहला बारिश में भीगना, दूसरा किताबों का ख्याल न रखना, तीसरा जब माँ मुझे लेने गयी थी लेकिन उनके विद्यालय पहुंचने से पहले मैं घर की तरफ निकल गया था। डांट भी पड़ी और दो थप्पड़ भी पड़े। मैं बहुत रोया उस दिन लेकिन जो मुझे भीगने में ख़ुशी मिली थी उसने मुझे रोने से रोक लिया। माँ ने फिर मुझे खाने के लिए बुलाया। मैं गया खाने में प्याज़ के पकौड़े थे। प्याज़ के पकौड़े बारिश में मिल जाये चाय के साथ तो उसका आनंद तो वही जनता है जिसने इसका अनुभव लिया हो। तब से अब तक सिर्फ तीन बार बहुत तेज़ बारिश हुयी है वैसे तो सिर्फ नाम के लिए होती थी।आज वो बारिश कहाँ होती है जिसका अनुभव मैने कक्षा पहली में लिया था। और न ही आज के बच्चे जान पाएंगे पहली की बारिश में क्या मज़ा आता था।
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आज के बच्चे का क्या जाने बारिश का मज़ा जब हम छोटे थे घर पर कभी भी बिना भीगे नहीं जाते थे। डांट भी पड़ती थी, मार भी पड़ती थी लेकिन उन बारिश के मौसम में भीगने का अनुभव आज तक कही नहीं मिला और न ही मिल सकेगा। पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के बाद प्रकृति को भी तो अपना बदला लेना है। जो मनुष्य ने किया उसका फल भी तो मिलना चाहिए। जब हम छोटे थे तब बारिश का मौसम समय पर आता था। वर्षा ऋतु में भीगते हुए अपने विद्यालय जाने और भीगते हुए ही वापिस आना। कौन भूल सकता है अपने बचपन को। मुझे याद है जब मैं कक्षा दूसरी में था उस साल बहुत बारिश हुई थी। देश में कई जगह बाढ़ तक आ गयी थी। बहुत से लोगो को अपने घर से बेघर होना पड़ा था। बारिश हो रही थी मैं बार बार अपनी कक्षा की खिड़की से बहार देख रहा था। बहार जाने का मन हो रहा था। बारिश में भीगने का मन हो रहा था। कक्षा में जो शिक्षक पढ़ा रहे थे उसमे मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं था। मेरा ध्यान था बहार कैसे जाना है। कैसे बारिश के मज़े लेने हैं। बारिश के खुशबू ऐसी खुश्बू है जो बारिश में ही मिल सकती है दुनिया में और कही नहीं मिल सकती। किसी को भी कैसा भी दुःख हो न वो भी उस खुश्बू से दूर हो जाता है। शिक्षक ने मुझे टोका और बोले बाहर कहाँ देख रहे हो। यहाँ पढ़ाई पर ध्यान दो। मैं डर गया। कैसे भी करके मैने विद्यालय के वो पाँच घंटाटे कटे। ख़ुशी की बात ये थी की बारिश अभी हो रही थी और मेरा घर भी थोड़ा दूर था। जैसे ही विद्यालय से निकला वैसे ही मुझे आत्म संतुष्टि। अब मैं बारिश में भीग सकता। कूद कूदकर नहा सकता हूँ। मतलब कुछ भी कर सकता हूँ कोई रोकने वाला नहीं। घर दूर था बारिश भी हो रही थी रिश्ते में अनजान दोस्त भी मिल गए उनके साथ बारे हुए पानी में कुदना। थोड़े से पानी में तैरने की कोशिश करना। मुर्गी जैसे नाचना। बेफिक्र हो कर रहना। घर पहुंचा बहुत डांट पड़ी। उस के बहुत कारण थे पहला बारिश में भीगना, दूसरा किताबों का ख्याल न रखना, तीसरा जब माँ मुझे लेने गयी थी लेकिन उनके विद्यालय पहुंचने से पहले मैं घर की तरफ निकल गया था। डांट भी पड़ी और दो थप्पड़ भी पड़े। मैं बहुत रोया उस दिन लेकिन जो मुझे भीगने में ख़ुशी मिली थी उसने मुझे रोने से रोक लिया। माँ ने फिर मुझे खाने के लिए बुलाया। मैं गया खाने में प्याज़ के पकौड़े थे। प्याज़ के पकौड़े बारिश में मिल जाये चाय के साथ तो उसका आनंद तो वही जनता है जिसने इसका अनुभव लिया हो। तब से अब तक सिर्फ तीन बार बहुत तेज़ बारिश हुयी है वैसे तो सिर्फ नाम के लिए होती थी।आज वो बारिश कहाँ होती है जिसका अनुभव मैने कक्षा पहली में लिया था। और न ही आज के बच्चे जान पाएंगे पहली की बारिश में क्या मज़ा आता था।
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मिला-जुला रहा है सप्ताह ( Image Source : PTI Photo )
Share Market Opening on 26 May: वैश्विक बाजारों से मिल रहे सपोर्ट के दम पर आज शुक्रवार को घरेलू बाजार ने कारोबार की मजबूती के साथ शुरुआत की है. दोनों प्रमुख घरेलू सूचकांक बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) लगातार दूसरे दिन तेजी की राह पर हैं. सप्ताह के अंतिम दिन के शुरुआत कारोबार में दोनों सूचकांक फीसदी तक की बढ़त में हैं.
घरेलू शेयर बाजार आज का कारोबार शुरू होने के पहले से ही ग्रीन जोन में ओपन होने के संकेत दिखा रहा था. सिंगापुर में एनएसई निफ्टी का वायदा एसजीक्स निफ्टी (SGX Nifty) सुबह 0. 55 फीसदी की अच्छी तेजी में कारोबार कर रहा था. इससे संकेत मिल रहा था कि घरेलू बाजार आज मजबूत शुरुआत कर सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रो-ओपन सेशन (Pre-Open Session) में चढ़े हुए थे. सेशन शुरू होने से पहले सेंसेक्स करीब 115 अंक के फायदे में था, जबकि निफ्टी करीब 50 अंक चढ़ा हुआ था.
सुबह 09:15 बजे जब बाजार में कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स बढ़त में रहा. शुरुआती कारोबार में यह करीब 120 अंक के फायदे के साथ 62,000 अंक के पास कारोबार कर रहा था. निफ्टी करीब 30 अंक मजबूत होकर 18,350 अंक के पार कारोबार कर रहा था. सप्ताह के अंतिम दिन के कारोबार में घरेलू बाजार के मजबूत बने रहने की उम्मीद है.
वैश्विक बाजारों में ओवरऑल तेजी का रुख देखने को मिल रहा है. गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर रहा. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0. 11 फीसदी की गिरावट आई थी, तो एसएंडपी 500 में 0. 88 फीसदी की तेजी देखी गई थी, वहीं टेक फोकस्ड नासडैक कंपोजिट इंडेक्स 1. 71 फीसदी के फायदे में रहा था. आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में तेजी दिख रही है. जापान का निक्की 0. 49 फीसदी की तेजी में है, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स 0. 24 फीसदी के फायदे में है. हांगकांग का हैंगसेंग आज सार्वजनिक अवकाश के चलते बंद है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0. 22 फीसदी की तेजी में कारोबार कर रहा है.
शुरुआती कारोबार की बात करें तो ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती दिख रही है. सुबह 09:20 बजे सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ 8 कंपनियों के शेयर ही नुकसान में थे. 22 कंपनियों के शेयरों ने फायदे के साथ कारोबार की शुरुआत की है. वैश्विक बाजारों से मिल रहे समर्थन के बीच आईटी शेयरों में तेजी लौटती दिख रही है. आज सारे बड़े आईटी शेयर ग्रीन जोन में हैं.
इससे पहले गुरुवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 100 अंक के फायदे में रहा था. निफ्टी भी बढ़त में बंद हुआ था. बुधवार को बाजार की लगातार 3 दिनों की तेजी पर ब्रेक लगया था, जबकि सप्ताह के शुरुआती दोनों दिनों यानी सोमवार और मंगलवार के कारोबार में बाजार मजबूत रहे थे. इस तरह घरेलू बाजार साप्ताहिक आधार पर फायदे में रहने की ओर अग्रसर हैं.
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मिला-जुला रहा है सप्ताह Share Market Opening on छब्बीस मई: वैश्विक बाजारों से मिल रहे सपोर्ट के दम पर आज शुक्रवार को घरेलू बाजार ने कारोबार की मजबूती के साथ शुरुआत की है. दोनों प्रमुख घरेलू सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी लगातार दूसरे दिन तेजी की राह पर हैं. सप्ताह के अंतिम दिन के शुरुआत कारोबार में दोनों सूचकांक फीसदी तक की बढ़त में हैं. घरेलू शेयर बाजार आज का कारोबार शुरू होने के पहले से ही ग्रीन जोन में ओपन होने के संकेत दिखा रहा था. सिंगापुर में एनएसई निफ्टी का वायदा एसजीक्स निफ्टी सुबह शून्य. पचपन फीसदी की अच्छी तेजी में कारोबार कर रहा था. इससे संकेत मिल रहा था कि घरेलू बाजार आज मजबूत शुरुआत कर सकता है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रो-ओपन सेशन में चढ़े हुए थे. सेशन शुरू होने से पहले सेंसेक्स करीब एक सौ पंद्रह अंक के फायदे में था, जबकि निफ्टी करीब पचास अंक चढ़ा हुआ था. सुबह नौ:पंद्रह बजे जब बाजार में कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीएसई का तीस शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स बढ़त में रहा. शुरुआती कारोबार में यह करीब एक सौ बीस अंक के फायदे के साथ बासठ,शून्य अंक के पास कारोबार कर रहा था. निफ्टी करीब तीस अंक मजबूत होकर अट्ठारह,तीन सौ पचास अंक के पार कारोबार कर रहा था. सप्ताह के अंतिम दिन के कारोबार में घरेलू बाजार के मजबूत बने रहने की उम्मीद है. वैश्विक बाजारों में ओवरऑल तेजी का रुख देखने को मिल रहा है. गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर रहा. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में शून्य. ग्यारह फीसदी की गिरावट आई थी, तो एसएंडपी पाँच सौ में शून्य. अठासी फीसदी की तेजी देखी गई थी, वहीं टेक फोकस्ड नासडैक कंपोजिट इंडेक्स एक. इकहत्तर फीसदी के फायदे में रहा था. आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में तेजी दिख रही है. जापान का निक्की शून्य. उनचास फीसदी की तेजी में है, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स शून्य. चौबीस फीसदी के फायदे में है. हांगकांग का हैंगसेंग आज सार्वजनिक अवकाश के चलते बंद है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी शून्य. बाईस फीसदी की तेजी में कारोबार कर रहा है. शुरुआती कारोबार की बात करें तो ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती दिख रही है. सुबह नौ:बीस बजे सेंसेक्स की तीस में से सिर्फ आठ कंपनियों के शेयर ही नुकसान में थे. बाईस कंपनियों के शेयरों ने फायदे के साथ कारोबार की शुरुआत की है. वैश्विक बाजारों से मिल रहे समर्थन के बीच आईटी शेयरों में तेजी लौटती दिख रही है. आज सारे बड़े आईटी शेयर ग्रीन जोन में हैं. इससे पहले गुरुवार को बीएसई का तीस शेयरों वाला सेंसेक्स करीब एक सौ अंक के फायदे में रहा था. निफ्टी भी बढ़त में बंद हुआ था. बुधवार को बाजार की लगातार तीन दिनों की तेजी पर ब्रेक लगया था, जबकि सप्ताह के शुरुआती दोनों दिनों यानी सोमवार और मंगलवार के कारोबार में बाजार मजबूत रहे थे. इस तरह घरेलू बाजार साप्ताहिक आधार पर फायदे में रहने की ओर अग्रसर हैं.
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नई दिल्लीः घरेलू धरती पर 2011 वनडे विश्व कप जीतने के लगभग 12 साल बाद टीम इंडिया इस साल के अंत में एक बार फिर मेजबान के रूप में उतरेगी। भारत के वर्ल्ड कप जीतने के समय विराट कोहली 23 साल के थे। अब 34 साल के कोहली फाइनल में श्रीलंका को हराने वाली टीम के एकमात्र सक्रिय सदस्य के रूप में टूर्नामेंट में उतर रहे हैं। जहां उनके फॉर्म को लेकर काफी चर्चा हो रही है, वहीं वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर क्रिस गेल को लगता है कि ये कोहली का आखिरी विश्व कप नहीं होगा।
कोहली अपना चौथा विश्व कप खेलेंगे और गेल को लगता है कि ये स्टार बल्लेबाज एक और वर्ल्ड कप खेल सकता है। गेल ने कहा- विराट कोहली के पास अभी भी एक और विश्व कप है। मुझे नहीं लगता कि यह उनका आखिरी विश्व कप होगा। विश्व कप में मेजबान टीम की संभावनाओं पर बोलते हुए गेल ने कहा कि भारत हमेशा जीत का प्रबल दावेदार है, खासकर जब वे घर पर खेल रहे हों।
उन्होंने कहा- भारत फेवरेट है, वे घर पर भी खेल रहे हैं। इसलिए यह बहुत दिलचस्प होने वाला है। मैं चुने जानी वाली टीम को देखने के लिए उत्साहित हूं क्योंकि बहुत से लोग दरवाजा खटखटा रहे हैं। भारत घरेलू मैदान पर भी हमेशा पसंदीदा रहेगा। इसलिए, यह कुछ ऐसा है जो भारतीय टीम पर भी दबाव डालता है। भारत अपने अभियान की शुरुआत 8 अक्टूबर को चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगा।
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नई दिल्लीः घरेलू धरती पर दो हज़ार ग्यारह वनडे विश्व कप जीतने के लगभग बारह साल बाद टीम इंडिया इस साल के अंत में एक बार फिर मेजबान के रूप में उतरेगी। भारत के वर्ल्ड कप जीतने के समय विराट कोहली तेईस साल के थे। अब चौंतीस साल के कोहली फाइनल में श्रीलंका को हराने वाली टीम के एकमात्र सक्रिय सदस्य के रूप में टूर्नामेंट में उतर रहे हैं। जहां उनके फॉर्म को लेकर काफी चर्चा हो रही है, वहीं वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर क्रिस गेल को लगता है कि ये कोहली का आखिरी विश्व कप नहीं होगा। कोहली अपना चौथा विश्व कप खेलेंगे और गेल को लगता है कि ये स्टार बल्लेबाज एक और वर्ल्ड कप खेल सकता है। गेल ने कहा- विराट कोहली के पास अभी भी एक और विश्व कप है। मुझे नहीं लगता कि यह उनका आखिरी विश्व कप होगा। विश्व कप में मेजबान टीम की संभावनाओं पर बोलते हुए गेल ने कहा कि भारत हमेशा जीत का प्रबल दावेदार है, खासकर जब वे घर पर खेल रहे हों। उन्होंने कहा- भारत फेवरेट है, वे घर पर भी खेल रहे हैं। इसलिए यह बहुत दिलचस्प होने वाला है। मैं चुने जानी वाली टीम को देखने के लिए उत्साहित हूं क्योंकि बहुत से लोग दरवाजा खटखटा रहे हैं। भारत घरेलू मैदान पर भी हमेशा पसंदीदा रहेगा। इसलिए, यह कुछ ऐसा है जो भारतीय टीम पर भी दबाव डालता है। भारत अपने अभियान की शुरुआत आठ अक्टूबर को चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगा।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
आर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की दृष्टि से दक्षिणी अमरीका का ब्राजील देश के बाद द्वितीय विशालतम देश है (क्षेत्रफलः २७,७६,६५६ वर्ग कि.मी.)। इसके उतत्र में ब्राजील पश्चिम में चिली तथा उत्तरपश्चिम में पराग्वे है। देश २२° द.अ. तथा ५५° द.अ. के मध्य ३७,७०० कि॰मी॰ की लंबाई में उत्तर दक्षिण फैला हुआ है। इसकी आकृति एक अधोमुखी त्रिभुज के समान है जो लगभग २,६०० कि॰मी॰ चौड़े आधार से दक्षिण की ओर संकरा होता चला गया है। उत्तर में यह बोलिविया एवं परागुए, उत्तर, पूर्व में युरुगए तथा ब्राजील और पश्चिम में चिली देश से घिरा है। अर्जेन्टीना का नाम अर्जेन्टम से पड़ा जिसाक अर्थ चाँदी होता है। चांदी के लिए प्रयुक्त लैटिन तथा स्पैनिश पर्यायवाची शब्दों से ही, जो क्रमशः 'अर्जेटम' एवं 'प्लाटा' हैं, अर्जेटीना और 'रायो डी ला प्लाटा' (देश की महान एस्चुअरी) का नामकरण हुआ है। आरंभ में यह उपनिवेश था जिसकी स्थापना स्पेन के चार्ल्स तृतीय ने पुर्तगाली दबाव को रोकने के लिए की थी। सन् १८१० ई. में देश की जनता ने स्पेन की सत्ता के विरुद्ध आंदोलन आरंभ किया जिसके परिणाम स्वरूप १८१६ ई. में यह स्वतंत्र हुआ। परंतु स्थायी सरकार की स्थापना १८५३ ई से ही संभव हुई। आर्जेटीना गणतंत्र के अतंर्गत २२ राज्यों के अतिरिक्त एक फेडरल जिला तथा टेरा डेल फ्यूगो, अंटार्कटिका महाद्वीप के कुछ भाग और दक्षिणी अतलांतक सागर के कुछ द्वीप हैं। . नई अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थापना के लिए विकसित और विकासशील देशों में उत्तर-दक्षिण संवाद की शुरुआत हुई। परन्तु विकसित राष्ट्रों के अपेक्षापूर्ण व अड़ियल व्यवहार के कारण उत्तर-दक्षिण सहयोग की बार सिरे नहीं चढ़ सकी। विकाशशील देशों पर ऋणों का भार लगातार बढ़ने लगा। उन्हें प्राप्त होने वाली अधिकतर विदेशी सहायता का हिस्सा ब्याज के भुगतान में ही खर्च होने लगा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सम्बन्ध अधिक भेदभावपूर्ण व जटिल होते गए। विकासशील देश यह महसूस करने लगे कि उत्तर दक्षिण सहयोग की बात करना उनके हितों को कोई फायदा नहीं पहुंचा सकता। इसलिए उन्हें दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Co-operation) की ही बात करनी चाहिए। इसलिए विकासशील देशों ने दक्षिण के गरीब व अल्प-विकसित देशों में ही सहयोग के आधार तलाशने शुरू कर दिए। इसी से दक्षिण-दक्षिण संवाद या सहयोग का नारा बुलन्द हुआ। .
अर्जेण्टीना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
अर्जेण्टीना 36 संबंध है और दक्षिण-दक्षिण सहयोग 5 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (36 + 5)।
यह लेख अर्जेण्टीना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की दृष्टि से दक्षिणी अमरीका का ब्राजील देश के बाद द्वितीय विशालतम देश है । इसके उतत्र में ब्राजील पश्चिम में चिली तथा उत्तरपश्चिम में पराग्वे है। देश बाईस° द.अ. तथा पचपन° द.अ. के मध्य सैंतीस,सात सौ कि॰मी॰ की लंबाई में उत्तर दक्षिण फैला हुआ है। इसकी आकृति एक अधोमुखी त्रिभुज के समान है जो लगभग दो,छः सौ कि॰मी॰ चौड़े आधार से दक्षिण की ओर संकरा होता चला गया है। उत्तर में यह बोलिविया एवं परागुए, उत्तर, पूर्व में युरुगए तथा ब्राजील और पश्चिम में चिली देश से घिरा है। अर्जेन्टीना का नाम अर्जेन्टम से पड़ा जिसाक अर्थ चाँदी होता है। चांदी के लिए प्रयुक्त लैटिन तथा स्पैनिश पर्यायवाची शब्दों से ही, जो क्रमशः 'अर्जेटम' एवं 'प्लाटा' हैं, अर्जेटीना और 'रायो डी ला प्लाटा' का नामकरण हुआ है। आरंभ में यह उपनिवेश था जिसकी स्थापना स्पेन के चार्ल्स तृतीय ने पुर्तगाली दबाव को रोकने के लिए की थी। सन् एक हज़ार आठ सौ दस ई. में देश की जनता ने स्पेन की सत्ता के विरुद्ध आंदोलन आरंभ किया जिसके परिणाम स्वरूप एक हज़ार आठ सौ सोलह ई. में यह स्वतंत्र हुआ। परंतु स्थायी सरकार की स्थापना एक हज़ार आठ सौ तिरेपन ई से ही संभव हुई। आर्जेटीना गणतंत्र के अतंर्गत बाईस राज्यों के अतिरिक्त एक फेडरल जिला तथा टेरा डेल फ्यूगो, अंटार्कटिका महाद्वीप के कुछ भाग और दक्षिणी अतलांतक सागर के कुछ द्वीप हैं। . नई अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थापना के लिए विकसित और विकासशील देशों में उत्तर-दक्षिण संवाद की शुरुआत हुई। परन्तु विकसित राष्ट्रों के अपेक्षापूर्ण व अड़ियल व्यवहार के कारण उत्तर-दक्षिण सहयोग की बार सिरे नहीं चढ़ सकी। विकाशशील देशों पर ऋणों का भार लगातार बढ़ने लगा। उन्हें प्राप्त होने वाली अधिकतर विदेशी सहायता का हिस्सा ब्याज के भुगतान में ही खर्च होने लगा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सम्बन्ध अधिक भेदभावपूर्ण व जटिल होते गए। विकासशील देश यह महसूस करने लगे कि उत्तर दक्षिण सहयोग की बात करना उनके हितों को कोई फायदा नहीं पहुंचा सकता। इसलिए उन्हें दक्षिण-दक्षिण सहयोग की ही बात करनी चाहिए। इसलिए विकासशील देशों ने दक्षिण के गरीब व अल्प-विकसित देशों में ही सहयोग के आधार तलाशने शुरू कर दिए। इसी से दक्षिण-दक्षिण संवाद या सहयोग का नारा बुलन्द हुआ। . अर्जेण्टीना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग आम में शून्य बातें हैं । अर्जेण्टीना छत्तीस संबंध है और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पाँच है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख अर्जेण्टीना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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Maruti Suzuki Jimny: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki इस बार के ऑटो एक्सपो में अपने वाहनों के विस्तृत रेंज को पेश करने की तैयारी कर रही है। इस Auto Expo में कंपनी अपनी नई इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट Futuro-E के साथ ही Jimny एसयूवी को भी पेश करने जा रही है। इस एसयूवी को भारत में लाने की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। जापानी मार्केट में ये पहले से ही उपलब्ध है और इस बार इसका नया अवतार भारत में देखने को मिलेगा।
खबर है कि, कंपनी Jimny के इम्पोर्टेड वर्जन को यहां पर पेश करेगी। इस एसयूवी को इस ऑटो एक्सपो में पेश करने के मकसद कंपनी का ये है कि वो इस बात की तस्दीक कर सके कि, ग्राहक इस SUV के बारे में क्या सोचते हैं। ग्लोबल मार्केट में ये एसयूवी कुल दो वैरिएंट में उपलब्ध है। इस सब 4 मीटर एसयूवी में कंपनी ने 1. 5 लीटर की क्षमता का इंजन प्रयोग किया है, जो कि 100 PS की पावर और 130 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। इसमें 5 स्पीड गियरबॉक्स को शामिल किया गया है।
नई Maruti Suzuki Jimny की सबसे खास बात ये है कि ये एसयूवी फोर व्हील ड्राइव सिस्टम से लैस है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी इसके जरिए भारत में अपनी Gypsy की जगह को रिप्लेस करना चाहती है। बता दें, पिछले साल कंपनी ने Gypsy को बंद कर दिया था। अब Gypsy के शौकीन इस नई एसयूवी के ड्राइविंग का लुत्फ उठा सकते हैं। ऐसी उम्मीद है कि कंपनी इस एसयूवी को प्रीमियम रेंज में पेश करेगी, इस वजह से इसकी कीमत तकरीबन 10 लाख रुपये के आस पास हो सकती है।
कंपनी Jimny को आगामी 8 फरवरी को देश के सामने पेश करेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा और ग्राहकों की तरफ से इस एसयूवी को बेहतर प्रतिक्रिया मिली तो कंपनी इसे इस साल के अंत तक या अगले वर्ष की शुरुआत में बाजार में बिक्री के लिए पेश कर सकती है। हालांकि अभी इस बारे में कंपनी की तरफ से कोई भी जानकारी साझा नहीं की गई है।
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Maruti Suzuki Jimny: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki इस बार के ऑटो एक्सपो में अपने वाहनों के विस्तृत रेंज को पेश करने की तैयारी कर रही है। इस Auto Expo में कंपनी अपनी नई इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट Futuro-E के साथ ही Jimny एसयूवी को भी पेश करने जा रही है। इस एसयूवी को भारत में लाने की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। जापानी मार्केट में ये पहले से ही उपलब्ध है और इस बार इसका नया अवतार भारत में देखने को मिलेगा। खबर है कि, कंपनी Jimny के इम्पोर्टेड वर्जन को यहां पर पेश करेगी। इस एसयूवी को इस ऑटो एक्सपो में पेश करने के मकसद कंपनी का ये है कि वो इस बात की तस्दीक कर सके कि, ग्राहक इस SUV के बारे में क्या सोचते हैं। ग्लोबल मार्केट में ये एसयूवी कुल दो वैरिएंट में उपलब्ध है। इस सब चार मीटर एसयूवी में कंपनी ने एक. पाँच लीटरटर की क्षमता का इंजन प्रयोग किया है, जो कि एक सौ PS की पावर और एक सौ तीस Nm का टॉर्क जेनरेट करता है। इसमें पाँच स्पीड गियरबॉक्स को शामिल किया गया है। नई Maruti Suzuki Jimny की सबसे खास बात ये है कि ये एसयूवी फोर व्हील ड्राइव सिस्टम से लैस है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी इसके जरिए भारत में अपनी Gypsy की जगह को रिप्लेस करना चाहती है। बता दें, पिछले साल कंपनी ने Gypsy को बंद कर दिया था। अब Gypsy के शौकीन इस नई एसयूवी के ड्राइविंग का लुत्फ उठा सकते हैं। ऐसी उम्मीद है कि कंपनी इस एसयूवी को प्रीमियम रेंज में पेश करेगी, इस वजह से इसकी कीमत तकरीबन दस लाख रुपये के आस पास हो सकती है। कंपनी Jimny को आगामी आठ फरवरी को देश के सामने पेश करेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा और ग्राहकों की तरफ से इस एसयूवी को बेहतर प्रतिक्रिया मिली तो कंपनी इसे इस साल के अंत तक या अगले वर्ष की शुरुआत में बाजार में बिक्री के लिए पेश कर सकती है। हालांकि अभी इस बारे में कंपनी की तरफ से कोई भी जानकारी साझा नहीं की गई है।
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पटना : जिले के पटना सिटी इलाके में मूर्ति विसर्जन को लेकर हुई विवाद के बाद तनाव के हालत बन गए थे. लेकिन पटना पुलिस की चुस्ती और लोगों की पहल से हालात सामान्य हो गए हैं.
पटना की एसएसपीऔर सिटी एसपी ने मंगलवार की सुबह भारी पुलिस बल के साथ पटना सिटी के आलमगंज इलाके में फ्लैग मार्च किया. इस दौरान पटना की एसएसपगी गरिमा मालिक ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की साथ ही अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को भी कहा.
आपको बता दें कि सोमवार की रात मूर्ति विसर्जन को लेकर पटना सिटी के आलमगंज में दो पक्षों के बीच भिड़ंत हो गए थी. जिसके बाद पुलिस के काफी मशक्कत के बाद हालात को काबू में किया गया था.
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पटना : जिले के पटना सिटी इलाके में मूर्ति विसर्जन को लेकर हुई विवाद के बाद तनाव के हालत बन गए थे. लेकिन पटना पुलिस की चुस्ती और लोगों की पहल से हालात सामान्य हो गए हैं. पटना की एसएसपीऔर सिटी एसपी ने मंगलवार की सुबह भारी पुलिस बल के साथ पटना सिटी के आलमगंज इलाके में फ्लैग मार्च किया. इस दौरान पटना की एसएसपगी गरिमा मालिक ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की साथ ही अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को भी कहा. आपको बता दें कि सोमवार की रात मूर्ति विसर्जन को लेकर पटना सिटी के आलमगंज में दो पक्षों के बीच भिड़ंत हो गए थी. जिसके बाद पुलिस के काफी मशक्कत के बाद हालात को काबू में किया गया था.
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Perseids जब सरकना होगा?
ऐसा मत सोचो कि स्टारफॉल किसी प्रकार का हैकिसी भी चेतावनी के बिना हमारे ग्रह के तत्काल आसपास के क्षेत्र में होने वाली सहज घटना। वास्तव में, किसी भी उल्कात्मक धारा, वर्ष की एक ही समय में, एक कक्षा पर पृथ्वी की कक्षा के बगल में गुजरती हैं।
परंपरागत रूप से सबसे यादगार घटना,आकाश में क्या हो रहा है Perseid का स्टार बारिश प्रायः इस प्रवाह का सबसे सक्रिय चरण जुलाई के सत्रहवें और अगस्त के चौबीसवें दिन के बीच होता है। यह माना जाता है कि Perseids सबसे गतिशील और शानदार starfall हैं, इसलिए यह कोई आश्चर्य नहीं है कि लगभग हर साल बहुत से लोग इस सवाल के बारे में चिंतित हैं कि जब एक तेज गति हो जाएगी।
पहला धूमकेतु, जो पूर्वज बन गयाप्रवाह, एक धूमकेतु स्विफ्ट-टटल, 1862 के दूर के इन दो वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया। इसके अलावा, यह खोज उनके द्वारा एक-दूसरे से लगभग एक दिन में अलग से किया गया था। ऐसा इस कारण था कि धूमकेतु को दोहरे नाम देने का निर्णय लिया गया।
सूर्य के चारों ओर धूमकेतु की क्रांति की कुल अवधिएक सौ तीस वर्ष है। पिछली बार जब इस धूमकेतु ने पृथ्वी के पास 1992 में पास किया धरती के निकट निकटता के कारण, धूमकेतु Perseids की उच्च गतिविधि का कारण बन गया। नतीजतन, अगले वर्ष में, सामान्य तबाही के दौरान, वैज्ञानिकों ने उल्काएं की एक संख्या में उल्कापात देखा, कई बार खगोलीय पिंडों की संख्या प्रति घंटे पांच सौ टुकड़े के निशान से अधिक हो गई थी।
सूर्य से दूरी के साथ, साथ Perseids की संख्याहर साल छोटी हो रही है नब्बे के दशक के अंत के बाद से इस तमाशा के कारण ज्यादा भावना पैदा नहीं होती क्योंकि यह पहले की वजह थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगली बार धूमकेतु पृथ्वी पर करीब क्रमशः 2126 में ही पास हो जाएंगे, फिर गिरने वाले उल्कापिंडों की संख्या में वृद्धि होगी।
उल्कापिंडों का पहला उल्लेख (Perseids)चीनी इतिहास में तीसरे छठे वर्ष ईसा पूर्व की तारीखें। आम तौर पर, उन्नीसवीं शताब्दी तक, विभिन्न चीनी, जापानी और कोरियाई इतिहास में इस स्टारफॉल का अक्सर उल्लेख किया जाता है। तो, उस दूरदराज के समय भी, निवासियों को इस सवाल में भी दिलचस्पी थी कि अगस्त में कब चल रहा होगा। दुर्भाग्यवश, पिछली प्रौद्योगिकियों के साथ उन्हें इस प्रश्न का सटीक उत्तर पाने का अवसर नहीं मिला। जबकि हम पहले से जानते हैं कि सबसे शानदार स्टार-पतन देखना कितना संभव होगा।
यूरोप में, लंबे समय तक पर्सिड्स को "सेंट लॉरेंस के आँसू" कहा जाता था, क्योंकि इस संत के सम्मान में त्यौहार उल्का बारिश की चोटी पर था।
स्टारफॉल कब होगा?
अधिकतम सितारे आमतौर पर एक और होते हैंहर साल एक ही तारीखें। स्टारफॉल का समर्थन अगस्त के बारहवें और तेरहवें हो सकता है। उल्काओं की कुल संख्या एक सौ से एक सौ दस तक पहुंच जाती है, ताकि अंत में आप एक अविस्मरणीय प्रदर्शन का आनंद लेंगे।
विशेष रूप से आकर्षक तथ्य यह है किअगस्त में स्टारफॉल देखने के लिए, आपको किसी विशेष ज्योतिषीय उपकरणों को हासिल करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर कोई इस शानदार का आनंद ले सकता है। घर से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह है और एक ऐसी जगह खोजें जहां आकाश के दृश्य को विभिन्न इमारतों या पेड़ों से अवरुद्ध न किया जाए।
अक्सर, पर्सिड गिरावट का मुख्य चोटी हैबारह से चौदह तीस तक की अवधि के लिए। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस घटना की तीव्रता साल-दर-साल महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हो सकती है, क्योंकि सब कुछ सीधे हमारे ग्रह को पार करने वाले धूमकेतु के क्षेत्र में मौजूद कणों के बादल की घनत्व पर निर्भर करता है।
देखने के लिए बेहतर कहां है?
सावधानी बरतने के अलावा, यह मूल्यवान होगाख्याल रखना और इसे कैसे देखना है। सबसे अच्छा विकल्प शहर की रोशनी से दूरदराज के स्थान को ढूंढना है। यह महत्वपूर्ण है कि जिस रात आपने चुना है वह बहुत चंद्र नहीं है, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में आपको बहुत उज्ज्वल उल्का नहीं दिखने का मौका मिलेगा।
Stargazing के दौरान, हर समय जरूरी नहीं है।आकाश में एक ही बिंदु को देखने की कोशिश करें। समुद्र तट के लिए एक पीछे की ओर या साधारण चाइज़ लाउंज के साथ एक आरामदायक कुर्सी के साथ लाने के लिए सबसे अच्छा है। यह पूरे आकाश का सर्वेक्षण करने के लिए, आपकी खुशी के लिए, तनाव के बिना, आपको अनुमति देगा।
हम स्टारफॉल क्यों देखते हैं?
सवाल "किस समय क्या होगा?""सही नहीं है, क्योंकि अक्सर आपके पास इन उल्कापिंडों को पूरी रात देखने का एक वास्तविक अवसर होता है, उस पल से शुरू होता है जब वे पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देते हैं, और अंत में वे पूरे आकाश को कैसे बाढ़ते हैं।
पर्सिड्स सफेद उल्कापिंड हैं। इस घटना के लिए अन्य रंगों के सितारों की विशेषता नहीं है, इसलिए उन्हें एक और धारा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जो इतना ध्यान देने योग्य नहीं है।
अगस्त में स्टारफॉल इस तथ्य के कारण है किपृथ्वी धूमकेतु की पूंछ में बने धूल के कणों के ढेर में है। जब यह वस्तु सूर्य के पास पहुंचती है, तो कण गर्म होने लगते हैं और फिर बर्फ के छोटे टुकड़ों में बिखर जाते हैं। बदले में, एक विघटित उल्कापिंड का मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है और उसमें जलता है। उनके फ्लैश के दौरान, ये मलबे सितारों के समान होते हैं जो हम स्टारगिंग के दौरान देखते हैं।
इसी तरह की घटना को देखा जा सकता है, हमारे ग्रह के किसी भी हिस्से में।
अगस्त में स्टारफॉल। अगला कौन सा समय होगा?
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Perseids जब सरकना होगा? ऐसा मत सोचो कि स्टारफॉल किसी प्रकार का हैकिसी भी चेतावनी के बिना हमारे ग्रह के तत्काल आसपास के क्षेत्र में होने वाली सहज घटना। वास्तव में, किसी भी उल्कात्मक धारा, वर्ष की एक ही समय में, एक कक्षा पर पृथ्वी की कक्षा के बगल में गुजरती हैं। परंपरागत रूप से सबसे यादगार घटना,आकाश में क्या हो रहा है Perseid का स्टार बारिश प्रायः इस प्रवाह का सबसे सक्रिय चरण जुलाई के सत्रहवें और अगस्त के चौबीसवें दिन के बीच होता है। यह माना जाता है कि Perseids सबसे गतिशील और शानदार starfall हैं, इसलिए यह कोई आश्चर्य नहीं है कि लगभग हर साल बहुत से लोग इस सवाल के बारे में चिंतित हैं कि जब एक तेज गति हो जाएगी। पहला धूमकेतु, जो पूर्वज बन गयाप्रवाह, एक धूमकेतु स्विफ्ट-टटल, एक हज़ार आठ सौ बासठ के दूर के इन दो वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया। इसके अलावा, यह खोज उनके द्वारा एक-दूसरे से लगभग एक दिन में अलग से किया गया था। ऐसा इस कारण था कि धूमकेतु को दोहरे नाम देने का निर्णय लिया गया। सूर्य के चारों ओर धूमकेतु की क्रांति की कुल अवधिएक सौ तीस वर्ष है। पिछली बार जब इस धूमकेतु ने पृथ्वी के पास एक हज़ार नौ सौ बानवे में पास किया धरती के निकट निकटता के कारण, धूमकेतु Perseids की उच्च गतिविधि का कारण बन गया। नतीजतन, अगले वर्ष में, सामान्य तबाही के दौरान, वैज्ञानिकों ने उल्काएं की एक संख्या में उल्कापात देखा, कई बार खगोलीय पिंडों की संख्या प्रति घंटे पांच सौ टुकड़े के निशान से अधिक हो गई थी। सूर्य से दूरी के साथ, साथ Perseids की संख्याहर साल छोटी हो रही है नब्बे के दशक के अंत के बाद से इस तमाशा के कारण ज्यादा भावना पैदा नहीं होती क्योंकि यह पहले की वजह थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगली बार धूमकेतु पृथ्वी पर करीब क्रमशः दो हज़ार एक सौ छब्बीस में ही पास हो जाएंगे, फिर गिरने वाले उल्कापिंडों की संख्या में वृद्धि होगी। उल्कापिंडों का पहला उल्लेख चीनी इतिहास में तीसरे छठे वर्ष ईसा पूर्व की तारीखें। आम तौर पर, उन्नीसवीं शताब्दी तक, विभिन्न चीनी, जापानी और कोरियाई इतिहास में इस स्टारफॉल का अक्सर उल्लेख किया जाता है। तो, उस दूरदराज के समय भी, निवासियों को इस सवाल में भी दिलचस्पी थी कि अगस्त में कब चल रहा होगा। दुर्भाग्यवश, पिछली प्रौद्योगिकियों के साथ उन्हें इस प्रश्न का सटीक उत्तर पाने का अवसर नहीं मिला। जबकि हम पहले से जानते हैं कि सबसे शानदार स्टार-पतन देखना कितना संभव होगा। यूरोप में, लंबे समय तक पर्सिड्स को "सेंट लॉरेंस के आँसू" कहा जाता था, क्योंकि इस संत के सम्मान में त्यौहार उल्का बारिश की चोटी पर था। स्टारफॉल कब होगा? अधिकतम सितारे आमतौर पर एक और होते हैंहर साल एक ही तारीखें। स्टारफॉल का समर्थन अगस्त के बारहवें और तेरहवें हो सकता है। उल्काओं की कुल संख्या एक सौ से एक सौ दस तक पहुंच जाती है, ताकि अंत में आप एक अविस्मरणीय प्रदर्शन का आनंद लेंगे। विशेष रूप से आकर्षक तथ्य यह है किअगस्त में स्टारफॉल देखने के लिए, आपको किसी विशेष ज्योतिषीय उपकरणों को हासिल करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर कोई इस शानदार का आनंद ले सकता है। घर से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह है और एक ऐसी जगह खोजें जहां आकाश के दृश्य को विभिन्न इमारतों या पेड़ों से अवरुद्ध न किया जाए। अक्सर, पर्सिड गिरावट का मुख्य चोटी हैबारह से चौदह तीस तक की अवधि के लिए। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस घटना की तीव्रता साल-दर-साल महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हो सकती है, क्योंकि सब कुछ सीधे हमारे ग्रह को पार करने वाले धूमकेतु के क्षेत्र में मौजूद कणों के बादल की घनत्व पर निर्भर करता है। देखने के लिए बेहतर कहां है? सावधानी बरतने के अलावा, यह मूल्यवान होगाख्याल रखना और इसे कैसे देखना है। सबसे अच्छा विकल्प शहर की रोशनी से दूरदराज के स्थान को ढूंढना है। यह महत्वपूर्ण है कि जिस रात आपने चुना है वह बहुत चंद्र नहीं है, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में आपको बहुत उज्ज्वल उल्का नहीं दिखने का मौका मिलेगा। Stargazing के दौरान, हर समय जरूरी नहीं है।आकाश में एक ही बिंदु को देखने की कोशिश करें। समुद्र तट के लिए एक पीछे की ओर या साधारण चाइज़ लाउंज के साथ एक आरामदायक कुर्सी के साथ लाने के लिए सबसे अच्छा है। यह पूरे आकाश का सर्वेक्षण करने के लिए, आपकी खुशी के लिए, तनाव के बिना, आपको अनुमति देगा। हम स्टारफॉल क्यों देखते हैं? सवाल "किस समय क्या होगा?""सही नहीं है, क्योंकि अक्सर आपके पास इन उल्कापिंडों को पूरी रात देखने का एक वास्तविक अवसर होता है, उस पल से शुरू होता है जब वे पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देते हैं, और अंत में वे पूरे आकाश को कैसे बाढ़ते हैं। पर्सिड्स सफेद उल्कापिंड हैं। इस घटना के लिए अन्य रंगों के सितारों की विशेषता नहीं है, इसलिए उन्हें एक और धारा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जो इतना ध्यान देने योग्य नहीं है। अगस्त में स्टारफॉल इस तथ्य के कारण है किपृथ्वी धूमकेतु की पूंछ में बने धूल के कणों के ढेर में है। जब यह वस्तु सूर्य के पास पहुंचती है, तो कण गर्म होने लगते हैं और फिर बर्फ के छोटे टुकड़ों में बिखर जाते हैं। बदले में, एक विघटित उल्कापिंड का मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है और उसमें जलता है। उनके फ्लैश के दौरान, ये मलबे सितारों के समान होते हैं जो हम स्टारगिंग के दौरान देखते हैं। इसी तरह की घटना को देखा जा सकता है, हमारे ग्रह के किसी भी हिस्से में। अगस्त में स्टारफॉल। अगला कौन सा समय होगा?
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उत्तराखंड चुनाव में बीजेपी को दोबारा सत्ता में लाने के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट खटीमा नहीं बचा पाए थे. अब वे चंपावत सीट से उपचुनाव लड़ने जा रहे हैं. 31 मई को वोटिंग होने जा रही है और चार जून को नतीजे आएंगे.
इस चुनाव में पुष्कर सिंह धामी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने निर्मला गहतोड़ी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वे भी जमीन से जुड़ी नेता मानी जाती हैं और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. लेकिन बीजेपी के पास इस समय मजबूत उम्मीदवार के अलावा एक ताकतवर स्टार प्रचारक भी मौजूद है. ऐलान किया गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस उपचुनाव में सीएम धामी के लिए प्रचार करने वाले हैं. उनका एक उपचुनाव में प्रचार के लिए उतरना निर्णायक माना जाता है.
स्थानीय लोगों की माने तो योगी के यहां रैली करने से समीकरण भाजपा के पक्ष में जा सकते हैं. आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी टिहरी,और कोटद्वार सीट पर योगी की रैलियों में उमड़े जन सैलाब से भाजपा प्रत्याशी फंसी हुई सीट को भी निकालने में कामयाब रहे थे, एक बार फिर उनकी एंट्री से धामी की जीत पर मोहर लग सकती है.
वहीं दूसरी तरफ चंपावत सीट खटीमा से करीब है, ऐसे में पुष्कर धामी के लिए यहां भी एक मजबूत जनाधार माना जा रहा है. विधायक रहते हुए भी मुख्यमंत्री का इस सीट के आसपास कार्यक्षेत्र रहा है जिसका प्रभाव यहां भी दिखाई दे रहा है. दूसरी महत्वपूर्ण बात जो धामी के लिए फायदेमंद हो सकती है वो है उपचुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं का भाजपा में शामिल होना. तीसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि मुख्यमंत्री खुद राजपूत वर्ग से हैं औऱ कांग्रेस उम्मीदवार ब्राह्मण वर्ग से, ऐसे में राजपूत वोटों का ज्यादा होना मुख्यमंत्री के पक्ष में जा सकता है.
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राजपूत वोटरों की संख्या यहां पर अधिक है. इस सीट पर कुल वोटर 96016 हैं जिनमें पुरुष वोटरों की संख्या 50057 जबकि 45959 महिलायें हैं. आंकड़े भी बताते हैं कि इस सीट पर जातिगत समीकरण से ज्यादा क्षेत्रवाद की हवा बहती रही है. अल्मोड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली 14 विधानसभा सीटों में सिर्फ चंपावत सीट ऐसी है, जिसमें पहाड़ के अलावा 15 प्रतिशत हिस्सा मैदान का भी है.
कांग्रेस उम्मीदवार निर्मला गहतोड़ी की बात करें तो वे पूर्व जिला अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री (राज्य महिला सशक्तिकरण परिषद उपाध्यक्ष) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं. हालांकि वे हर बार यहां से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी से टिकट मांगती रही हैं ,पर कांग्रेस ने उनकी अनदेखी हर चुनाव में की. लेकिन इस बार उपचुनाव में पार्टी ने उनके ऊपर दावं खेला है. विरोधी कमजोर प्रत्याशी कह रहे हैं तो कांग्रेस जमीन से जुड़ी नेता बता रहे हैं.
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उत्तराखंड चुनाव में बीजेपी को दोबारा सत्ता में लाने के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट खटीमा नहीं बचा पाए थे. अब वे चंपावत सीट से उपचुनाव लड़ने जा रहे हैं. इकतीस मई को वोटिंग होने जा रही है और चार जून को नतीजे आएंगे. इस चुनाव में पुष्कर सिंह धामी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने निर्मला गहतोड़ी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वे भी जमीन से जुड़ी नेता मानी जाती हैं और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. लेकिन बीजेपी के पास इस समय मजबूत उम्मीदवार के अलावा एक ताकतवर स्टार प्रचारक भी मौजूद है. ऐलान किया गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस उपचुनाव में सीएम धामी के लिए प्रचार करने वाले हैं. उनका एक उपचुनाव में प्रचार के लिए उतरना निर्णायक माना जाता है. स्थानीय लोगों की माने तो योगी के यहां रैली करने से समीकरण भाजपा के पक्ष में जा सकते हैं. आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी टिहरी,और कोटद्वार सीट पर योगी की रैलियों में उमड़े जन सैलाब से भाजपा प्रत्याशी फंसी हुई सीट को भी निकालने में कामयाब रहे थे, एक बार फिर उनकी एंट्री से धामी की जीत पर मोहर लग सकती है. वहीं दूसरी तरफ चंपावत सीट खटीमा से करीब है, ऐसे में पुष्कर धामी के लिए यहां भी एक मजबूत जनाधार माना जा रहा है. विधायक रहते हुए भी मुख्यमंत्री का इस सीट के आसपास कार्यक्षेत्र रहा है जिसका प्रभाव यहां भी दिखाई दे रहा है. दूसरी महत्वपूर्ण बात जो धामी के लिए फायदेमंद हो सकती है वो है उपचुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं का भाजपा में शामिल होना. तीसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि मुख्यमंत्री खुद राजपूत वर्ग से हैं औऱ कांग्रेस उम्मीदवार ब्राह्मण वर्ग से, ऐसे में राजपूत वोटों का ज्यादा होना मुख्यमंत्री के पक्ष में जा सकता है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राजपूत वोटरों की संख्या यहां पर अधिक है. इस सीट पर कुल वोटर छियानवे हज़ार सोलह हैं जिनमें पुरुष वोटरों की संख्या पचास हज़ार सत्तावन जबकि पैंतालीस हज़ार नौ सौ उनसठ महिलायें हैं. आंकड़े भी बताते हैं कि इस सीट पर जातिगत समीकरण से ज्यादा क्षेत्रवाद की हवा बहती रही है. अल्मोड़ा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली चौदह विधानसभा सीटों में सिर्फ चंपावत सीट ऐसी है, जिसमें पहाड़ के अलावा पंद्रह प्रतिशत हिस्सा मैदान का भी है. कांग्रेस उम्मीदवार निर्मला गहतोड़ी की बात करें तो वे पूर्व जिला अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं. हालांकि वे हर बार यहां से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी से टिकट मांगती रही हैं ,पर कांग्रेस ने उनकी अनदेखी हर चुनाव में की. लेकिन इस बार उपचुनाव में पार्टी ने उनके ऊपर दावं खेला है. विरोधी कमजोर प्रत्याशी कह रहे हैं तो कांग्रेस जमीन से जुड़ी नेता बता रहे हैं.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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आज स्थापना के लम्बे अंतराल के बाद गणतंत्र पर उठा हुआ सवाल कि वह- कितना वास्तविक है और कितना खोखला- हमारे गर्व से उठे सिर को शर्म से झुका देता है ,पर गणतंत्र दिवस का समारोह तो होना ही चाहिए। यह हमारा राष्ट्रीय गौरव है ,यह सच है आज देश में हर ओर भ्रष्टाचार ,भुखमरी ,अनैतिकता दिख रही है, पर अगर हमारे या किसी आत्मीय के जीवन का पिछला वर्ष कितना ही दुःखद रहा हो तो भी उसका जन्मदिन मना कर उसके सुखद भविष्य की कामना करते हैं तो अपने संविधान के प्रति कर्तव्य निभाने में सोचना कैसा ? हमने आजादी के बाद कुछ पाया नहीं है यह कहना गलत होगा। गिलास आधा ही भर पाया है,यह हम पर निर्भर करता है कि उसे आधा खाली समझते हैं या आधा भरा। गिलास के आधे भाग को भरना हमारी ही जिम्मेदारी है। किसी सरकार या प्रधानमंत्री को परीकथा का जादू की छड़ी वाला राजकुमार समझना छोड़ कर यदि हम सब अपने कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाएं तो स्थिति सम्हलने में देर नहीं लगेगी क्योंकि भूख से तड़पने वाले हम हैं तो ,अनैतिक और भ्रष्ट भी हम ही हैं। एक ऐसा समय जब सब लिए रोटी होगी ,सब का जीवन सुरक्षित होगा ,हर व्यक्ति का आत्म- सम्मान होगा , के शीघ्र आने की कामना करते हुए गणतंत्र दिवस की परम्परा निभाने का सब से अनुरोध करती हूँ।
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आज स्थापना के लम्बे अंतराल के बाद गणतंत्र पर उठा हुआ सवाल कि वह- कितना वास्तविक है और कितना खोखला- हमारे गर्व से उठे सिर को शर्म से झुका देता है ,पर गणतंत्र दिवस का समारोह तो होना ही चाहिए। यह हमारा राष्ट्रीय गौरव है ,यह सच है आज देश में हर ओर भ्रष्टाचार ,भुखमरी ,अनैतिकता दिख रही है, पर अगर हमारे या किसी आत्मीय के जीवन का पिछला वर्ष कितना ही दुःखद रहा हो तो भी उसका जन्मदिन मना कर उसके सुखद भविष्य की कामना करते हैं तो अपने संविधान के प्रति कर्तव्य निभाने में सोचना कैसा ? हमने आजादी के बाद कुछ पाया नहीं है यह कहना गलत होगा। गिलास आधा ही भर पाया है,यह हम पर निर्भर करता है कि उसे आधा खाली समझते हैं या आधा भरा। गिलास के आधे भाग को भरना हमारी ही जिम्मेदारी है। किसी सरकार या प्रधानमंत्री को परीकथा का जादू की छड़ी वाला राजकुमार समझना छोड़ कर यदि हम सब अपने कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाएं तो स्थिति सम्हलने में देर नहीं लगेगी क्योंकि भूख से तड़पने वाले हम हैं तो ,अनैतिक और भ्रष्ट भी हम ही हैं। एक ऐसा समय जब सब लिए रोटी होगी ,सब का जीवन सुरक्षित होगा ,हर व्यक्ति का आत्म- सम्मान होगा , के शीघ्र आने की कामना करते हुए गणतंत्र दिवस की परम्परा निभाने का सब से अनुरोध करती हूँ।
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हरिद्वार. 74वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हरिद्वार स्थित पतंजलि पीठ में ध्वजारोहण के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि देश-विदेश में बहुत कुछ हो रहा है, अब युग बदल गया है. जल्द ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का भारत में विलय होगा. इतना ही नहीं पाकिस्तान के चार टुकड़े होंगे, जिनमें से तीन हिस्सा भारत में मिल जाएगा और पाकिस्तान अदना सा देश रह जाएगा. बाबा रामदेव ने कहा कि आने वाले वक्त में भारत एक महाशक्ति के रूप में उभरेगा.
बाबा रामदेव ने कहा कि दुनिया की राजनीति में बहुत कुछ चल रहा है. यूक्रेन और रूस युद्ध अभी चल रहा है. चीन और पाकिस्तान की तरफ से नापाक हरकतें हो रही हैं. पाक अधिकृत कश्मीर का भारत में विलय होगा। बलूचिस्तान एक अलग देश बनेगा. पंजाब और सिंध प्रान्त में भी भारत के साथ मिलने की होड़ मची है. चार टुकड़ों के साथ ही पाकिस्तान एक अदना सा देश रह जाएगा. तालिबानियों से भी अब अफगानिस्तान संभलने वाला नहीं है. पाकिस्तान के तीन हिस्से भारत में मिलने के साथ ही अखंड भारत का सपना पूरा होगा.
रामचरितमानस और बागेश्वर धाम के महाराज धीरेंद्र शास्त्री को लेकर भी रामदेव ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को नीचा दिखाने के लिए देश में धार्मिक आतंकवाद चल रहा है. कभी सनातन धर्म तो कभी हमारे महापुरुषों के चरित्र पर तरह-तरह के लांछन लगाया जा रहा है. ये लोग भारत व राष्ट्र विरोधी है. यह सब कुछ अंतराष्ट्रीय शक्ति के इशारे पर षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पाखंड का जो बोल बाला है, उसको कभी हमने धर्म-संस्कृति नहीं माना.
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हरिद्वार. चौहत्तरवें गणतंत्र दिवस के मौके पर हरिद्वार स्थित पतंजलि पीठ में ध्वजारोहण के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि देश-विदेश में बहुत कुछ हो रहा है, अब युग बदल गया है. जल्द ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का भारत में विलय होगा. इतना ही नहीं पाकिस्तान के चार टुकड़े होंगे, जिनमें से तीन हिस्सा भारत में मिल जाएगा और पाकिस्तान अदना सा देश रह जाएगा. बाबा रामदेव ने कहा कि आने वाले वक्त में भारत एक महाशक्ति के रूप में उभरेगा. बाबा रामदेव ने कहा कि दुनिया की राजनीति में बहुत कुछ चल रहा है. यूक्रेन और रूस युद्ध अभी चल रहा है. चीन और पाकिस्तान की तरफ से नापाक हरकतें हो रही हैं. पाक अधिकृत कश्मीर का भारत में विलय होगा। बलूचिस्तान एक अलग देश बनेगा. पंजाब और सिंध प्रान्त में भी भारत के साथ मिलने की होड़ मची है. चार टुकड़ों के साथ ही पाकिस्तान एक अदना सा देश रह जाएगा. तालिबानियों से भी अब अफगानिस्तान संभलने वाला नहीं है. पाकिस्तान के तीन हिस्से भारत में मिलने के साथ ही अखंड भारत का सपना पूरा होगा. रामचरितमानस और बागेश्वर धाम के महाराज धीरेंद्र शास्त्री को लेकर भी रामदेव ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को नीचा दिखाने के लिए देश में धार्मिक आतंकवाद चल रहा है. कभी सनातन धर्म तो कभी हमारे महापुरुषों के चरित्र पर तरह-तरह के लांछन लगाया जा रहा है. ये लोग भारत व राष्ट्र विरोधी है. यह सब कुछ अंतराष्ट्रीय शक्ति के इशारे पर षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पाखंड का जो बोल बाला है, उसको कभी हमने धर्म-संस्कृति नहीं माना. .
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बरेली,14 जनवरी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बरेली के लोगों को जल्द ही कूड़े से निजात मिलेगी। बरेली,शाहजहांपुर बॉर्डर पर सथरापुर में 24. 18 करोड़ की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बन रहा है। उसका 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो गया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अप्रैल से चलाने की तैयारी चल रही है। नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने अधिकारियों के साथ प्लांट का जायजा लेकर उसे जल्द चलाने के निर्देश दिए हैं। लखनऊ ट्रिब्यून से वार्ता में नगर आयुक्त ने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की शासन से तीन किस्त जारी हो चुकी हैं। आखिरी किस्त रह गई है। काम करने वाली टीमों को लगाया गया है। जल्दी प्लांट को चलाया जाएगा। पांच लाख टन प्रतिदिन कूड़ा निस्तारण की नगर निगम के आधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता है।
नगर आयुक्त ने बताया कि प्लांट सथरापुर में बनाया जा रहा है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता पांच लाख टन प्रतिदिन की है। जबकि शहर से करीब 4. 45 लाख टन कूड़ा हर रोज निकलता है। नगर निगम की टीमें डोर टू डोर कालोनियों में जाकर कूड़े को इकट्ठा करती हैं। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग स्टोर किया जाता है। इसके बाद उन्हें गाड़ियों में लोड कर बाकरगंज निस्तारण के लिए ले जाया जाता है। शहर में निकलने वाले कूड़े से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कूड़े की क्षमता ज्यादा है। प्लांट चलने के बाद कूड़े को शहर से सथरापुर में ले जाया जाएगा।
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बरेली,चौदह जनवरी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बरेली के लोगों को जल्द ही कूड़े से निजात मिलेगी। बरेली,शाहजहांपुर बॉर्डर पर सथरापुर में चौबीस. अट्ठारह करोड़ की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बन रहा है। उसका अस्सी फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो गया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अप्रैल से चलाने की तैयारी चल रही है। नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने अधिकारियों के साथ प्लांट का जायजा लेकर उसे जल्द चलाने के निर्देश दिए हैं। लखनऊ ट्रिब्यून से वार्ता में नगर आयुक्त ने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की शासन से तीन किस्त जारी हो चुकी हैं। आखिरी किस्त रह गई है। काम करने वाली टीमों को लगाया गया है। जल्दी प्लांट को चलाया जाएगा। पांच लाख टन प्रतिदिन कूड़ा निस्तारण की नगर निगम के आधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता है। नगर आयुक्त ने बताया कि प्लांट सथरापुर में बनाया जा रहा है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता पांच लाख टन प्रतिदिन की है। जबकि शहर से करीब चार. पैंतालीस लाख टन कूड़ा हर रोज निकलता है। नगर निगम की टीमें डोर टू डोर कालोनियों में जाकर कूड़े को इकट्ठा करती हैं। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग स्टोर किया जाता है। इसके बाद उन्हें गाड़ियों में लोड कर बाकरगंज निस्तारण के लिए ले जाया जाता है। शहर में निकलने वाले कूड़े से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कूड़े की क्षमता ज्यादा है। प्लांट चलने के बाद कूड़े को शहर से सथरापुर में ले जाया जाएगा।
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दस्तक टाइम्स एजेंसी/ठाणेः महाराष्ट्र में मुंबई से सटे ठाणे के कासारवडवाली इलाके में रविवार सुबह एक दिल दहला देनी वाली खबर सामने आई। यहां देर रात 7 बच्चों सहित 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। वारदात को अंजाम देने के बाद उस शख्स ने खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
हत्या का आरोप 32 साल के हसनैन वरेकर पर लगा, जिसने अपनी बीवी और दो बेटियों सहित अपने परिवार के 14 लोगों का गला रेत दिया। इसके बाद वह खुद भी फांसी के फंदे पर झूल गया। इलाके के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आशुतोष डुमरे ने कहा मौके पर मिले सबूतों को फौरी तौर पर देखने से लगता है कि आरोपी ने घर के दरवाजे बंद कर दिए और सोते वक्त उस चाकू से सबका गला रेत दिया। चाकू आरोपी के शव के करीब मिला। घर में तीन कमरे हैं। वह पहले माले पर अपने बीवी-बच्चों के साथ था। उसके मां-बाप और बहनें निचली मंजिल के कमरों में सो रहे थे।
पुलिस को आशंका है कि हसनैन ने खाने में कोई नशीला पदार्थ मिलाकर सब को बेहोश किया और फिर एक बड़े चाक़ू से गला रेत कर सबकी हत्या कर दी। हादसे में हसनैन की 22 साल की बहन सुबिया किसी तरह बच गई। उसकी गर्दन पर गहरी चोट आई, लेकिन किसी तरह उसने दरवाजा बंद कर शोर मचाया और पड़ोसियों को बुलाया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद सुबिया ने पुलिस को बताया कि किस तरह उसके भाई ने सारी बहनों को दावत पर बुलाया और फिर वारदात को अंजाम दिया। सुबिया का बयान दर्ज करने वाले कॉन्स्टेबल मीरा मधुकर ने एनडीटीवी को बताया कि उसको 25 टांके आए हैं। सुबिया ने बताया कि 3 बजे के करीब हसनैन ने उन लोगों पर हमला किया। वह किसी तरह भागी और दरवाजा बंद कर चिल्लाने लगी, तब जाकर सारे लोग वहां भागकर आए।
हसनैन ने पूरे परिवार को क्यों मारा?
पहले सवाल प्रॉपर्टी विवाद के उठे, लेकिन उसकी खुदकुशी से इस सवाल पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पड़ोसियों का कहना है कि हसनैन की ना तो किसी से कोई दुश्मनी थी और ना ही परिवार की माली हालत खराब थी। उसके पड़ोसी शौक़त ने कहा वो तुर्भे में नौकरी करता था, बहुत मिलनसार था। ऐसी किसी दिक्कत की बात उसने हमसे कभी नहीं की। रात को सुबिया के चिल्लाने की आवाज़ सुनकर हमलोग यहां आए और पुलिस को ख़बर दी। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में कई सवालों के जवाब शायद हसनैन की बहन सुबिया दे सके, जो फिलहाल खतरे से बाहर है।
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दस्तक टाइम्स एजेंसी/ठाणेः महाराष्ट्र में मुंबई से सटे ठाणे के कासारवडवाली इलाके में रविवार सुबह एक दिल दहला देनी वाली खबर सामने आई। यहां देर रात सात बच्चों सहित चौदह लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। वारदात को अंजाम देने के बाद उस शख्स ने खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हत्या का आरोप बत्तीस साल के हसनैन वरेकर पर लगा, जिसने अपनी बीवी और दो बेटियों सहित अपने परिवार के चौदह लोगों का गला रेत दिया। इसके बाद वह खुद भी फांसी के फंदे पर झूल गया। इलाके के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आशुतोष डुमरे ने कहा मौके पर मिले सबूतों को फौरी तौर पर देखने से लगता है कि आरोपी ने घर के दरवाजे बंद कर दिए और सोते वक्त उस चाकू से सबका गला रेत दिया। चाकू आरोपी के शव के करीब मिला। घर में तीन कमरे हैं। वह पहले माले पर अपने बीवी-बच्चों के साथ था। उसके मां-बाप और बहनें निचली मंजिल के कमरों में सो रहे थे। पुलिस को आशंका है कि हसनैन ने खाने में कोई नशीला पदार्थ मिलाकर सब को बेहोश किया और फिर एक बड़े चाक़ू से गला रेत कर सबकी हत्या कर दी। हादसे में हसनैन की बाईस साल की बहन सुबिया किसी तरह बच गई। उसकी गर्दन पर गहरी चोट आई, लेकिन किसी तरह उसने दरवाजा बंद कर शोर मचाया और पड़ोसियों को बुलाया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद सुबिया ने पुलिस को बताया कि किस तरह उसके भाई ने सारी बहनों को दावत पर बुलाया और फिर वारदात को अंजाम दिया। सुबिया का बयान दर्ज करने वाले कॉन्स्टेबल मीरा मधुकर ने एनडीटीवी को बताया कि उसको पच्चीस टांके आए हैं। सुबिया ने बताया कि तीन बजे के करीब हसनैन ने उन लोगों पर हमला किया। वह किसी तरह भागी और दरवाजा बंद कर चिल्लाने लगी, तब जाकर सारे लोग वहां भागकर आए। हसनैन ने पूरे परिवार को क्यों मारा? पहले सवाल प्रॉपर्टी विवाद के उठे, लेकिन उसकी खुदकुशी से इस सवाल पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पड़ोसियों का कहना है कि हसनैन की ना तो किसी से कोई दुश्मनी थी और ना ही परिवार की माली हालत खराब थी। उसके पड़ोसी शौक़त ने कहा वो तुर्भे में नौकरी करता था, बहुत मिलनसार था। ऐसी किसी दिक्कत की बात उसने हमसे कभी नहीं की। रात को सुबिया के चिल्लाने की आवाज़ सुनकर हमलोग यहां आए और पुलिस को ख़बर दी। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में कई सवालों के जवाब शायद हसनैन की बहन सुबिया दे सके, जो फिलहाल खतरे से बाहर है।
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सुरों की 'बारिश'
इंदौर। पॉप, रॉक म्यूजिक व इंडीपॉप धुनों पर मशहूर 'यूफोरिया बैंड' ने जब अपने रॉक कंसर्ट की शुरुआत की, तो हर कोई उनकी धुनों पर थिरक रहा था। श्री सत्यसांई स्कूल में आयोजित एल्युमिनाई मीट में शनिवार रात कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दुबई से लेकर देश के अलग-अलग शहरों से एल्युमिनाई लाइव कंसर्ट में शामिल होने इंदौर पहुंचे। यूफोरिया के फेंस को पलाश के केवल कुछ गीत ही सुनने का मौका मिला, क्योंकि बारिश के कारण शो जल्द खत्म हो गया।
अपनी जुदा गायिकी व मस्ती भरे संगीत के लिए प्रसिद्ध गायक पलाश सेन ने जब बेहतरीन धुनों पर गाना शुरू किया, तो यंगस्टर्स के साथ एल्युमिनाई भी झूम उठे। 'धूम पिचक धूम. . . ' जैसे गीतों से श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने वाले पलाश ने 'रोक सको तो रोक लो. . . भूला सब. . . ' और 'धूम पिचक धूम, जिया जाए ना. . . ' जैसे गीतों पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। बारिश के कारण पलाश के सुपरहिट गीत 'माई री. . . ' गीत सुनने का मौका श्रोताओं को नहीं मिल पाया।
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सुरों की 'बारिश' इंदौर। पॉप, रॉक म्यूजिक व इंडीपॉप धुनों पर मशहूर 'यूफोरिया बैंड' ने जब अपने रॉक कंसर्ट की शुरुआत की, तो हर कोई उनकी धुनों पर थिरक रहा था। श्री सत्यसांई स्कूल में आयोजित एल्युमिनाई मीट में शनिवार रात कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दुबई से लेकर देश के अलग-अलग शहरों से एल्युमिनाई लाइव कंसर्ट में शामिल होने इंदौर पहुंचे। यूफोरिया के फेंस को पलाश के केवल कुछ गीत ही सुनने का मौका मिला, क्योंकि बारिश के कारण शो जल्द खत्म हो गया। अपनी जुदा गायिकी व मस्ती भरे संगीत के लिए प्रसिद्ध गायक पलाश सेन ने जब बेहतरीन धुनों पर गाना शुरू किया, तो यंगस्टर्स के साथ एल्युमिनाई भी झूम उठे। 'धूम पिचक धूम. . . ' जैसे गीतों से श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने वाले पलाश ने 'रोक सको तो रोक लो. . . भूला सब. . . ' और 'धूम पिचक धूम, जिया जाए ना. . . ' जैसे गीतों पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। बारिश के कारण पलाश के सुपरहिट गीत 'माई री. . . ' गीत सुनने का मौका श्रोताओं को नहीं मिल पाया।
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हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ?
रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ?
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,
हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ?
खलक सब नाम अनपे को, बहुत कर सिर पटकता है,
हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ?
न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से,
उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ?
कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से,
जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?
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हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ? रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ? जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ? खलक सब नाम अनपे को, बहुत कर सिर पटकता है, हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ? न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से, उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ? कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से, जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?
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लखनऊ। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने भोपाल दौरे पर हैं, वो रवीन्द्र भवन पहुंच कर यहां आयोजित दत्तोपंत ठेंगड़ी स्मृति व्याख्यान में '21वीं सदी परिदृश्य में भारत का आर्थिक सामर्थ्य' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण के दौरे को लेकर भोपाल के CM शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन पहले ही राजस्व संग्रहण से संबंधित विभागों के अफसरों की बैठक की। आपको बता दें आम बजट 2023-24 की तैयारियों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्यों से सुझाव व प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। बता दें अगले साल के बजट में महंगाई, मांग में वृद्धि, रोजगार, अर्थव्यवस्था को निरंतर 8 प्रतिशत से अधिक विकास पथ पर लाने के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक ज़ोर दिया जायेगा।
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लखनऊ। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने भोपाल दौरे पर हैं, वो रवीन्द्र भवन पहुंच कर यहां आयोजित दत्तोपंत ठेंगड़ी स्मृति व्याख्यान में 'इक्कीसवीं सदी परिदृश्य में भारत का आर्थिक सामर्थ्य' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण के दौरे को लेकर भोपाल के CM शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन पहले ही राजस्व संग्रहण से संबंधित विभागों के अफसरों की बैठक की। आपको बता दें आम बजट दो हज़ार तेईस-चौबीस की तैयारियों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्यों से सुझाव व प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। बता दें अगले साल के बजट में महंगाई, मांग में वृद्धि, रोजगार, अर्थव्यवस्था को निरंतर आठ प्रतिशत से अधिक विकास पथ पर लाने के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक ज़ोर दिया जायेगा।
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चंडीगढ़/पंचकूला, 28 अक्तूबर (नस)
नयी दिल्ली से चंडीगढ़ आए एक नाइजीरियर युवक को यूटी पुलिस ने गुप्त सूचना मिलते ही हेरोइन की खेप के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान इन दिनों नयी दिल्ली के तिलक नगर में रह रहे और मूल रूप से नाइजीरिया के रहने वाले 31 साल के चुक्स के तौर पर हुई। पुलिस आरोपी से हेरोइन के बारे में पता लगा रही है कि वह किस शख्स को यह खेप सौंपने वाला था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूटी पुलिस के आपरेशन सैल की टीम ने सूचना मिलने के बाद ट्रिब्यून चौक के नजदीक ट्रैप लगाया।
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चंडीगढ़/पंचकूला, अट्ठाईस अक्तूबर नयी दिल्ली से चंडीगढ़ आए एक नाइजीरियर युवक को यूटी पुलिस ने गुप्त सूचना मिलते ही हेरोइन की खेप के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान इन दिनों नयी दिल्ली के तिलक नगर में रह रहे और मूल रूप से नाइजीरिया के रहने वाले इकतीस साल के चुक्स के तौर पर हुई। पुलिस आरोपी से हेरोइन के बारे में पता लगा रही है कि वह किस शख्स को यह खेप सौंपने वाला था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूटी पुलिस के आपरेशन सैल की टीम ने सूचना मिलने के बाद ट्रिब्यून चौक के नजदीक ट्रैप लगाया।
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गौतम गंभीर और शाहिद अफरीदी की दुश्मनी किसी से भी छिपी नहीं है। इंटरनेशनल क्रिकेट में जब ये दोनों खेला करते थे तब भी इनके बीच के मतभेद पूरी दुनिया के सामने थी और उसके बाद ये दोनों सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ कुछ भी कहने से पीछे नहीं हटते। फिलहाल ये दोनों खिलाड़ी लीजेंड्स क्रिकेट लीग मास्टर्स में खेल रहे हैं। गौतम गंभीर जहां इंडिया महाराजा टीम की कप्तानी कर रहे हैं तो वहीं शाहिद अफरीदी के हाथों में एशिया लायंस टीम की कप्तानी है। इन दोनों टीमों के बीच शुक्रवार को इस लीग का पहला मैच खेला गया जिसमें एशिया लायंस को 9 विकेट से जीत मिली थी।
इस मैच के दौरान एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया। दरअसल इस मैच की दूसरी पारी के 12वें ओवर में जब गौतम गंभीर बल्लेबाजी कर रहे थे तब अब्दुल रज्जाक की एक गेंद गौतम गंभीर के हेलमेट से जाकर टकरा गई। इसके बाद एशिया लायंस के कप्तान शाहिद अफरीदी तुरंत गौतम गंभीर के पास पहुंचे और उनका हाल जाना। गंभीर ने कहा कि उन्हें कोई चोट नहीं आई है और फिर अफरीदी अपनी फील्डिंग पोजिशन पर वापस हो गए।
इस मैच में एशिया लायंस ने 48 साल के मिस्बाह-उल-हक की 50 गेंदों पर 4 छक्के और 2 चौकों की मदद से बनाए गए 73 रन की पारी के दम पर 20 ओवर में 6 विकेट पर 165 रन का स्कोर खड़ा किया। इंडिया महाराजा को जीत के लिए 166 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन ये टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 156 रन के स्कोर तक ही पहुंच पाई और उसे 9 रन से करीबी हार मिली। इस मैच में इंडिया महाराज के कप्तान गौतम गंभीर ने बेहतरीन पारी खेली और 39 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 54 रन बनाए। भारत के लिए मुरली विजय ने 25 जबकि मो. कैफ ने 22 रन की पारी खेली। सुरेश रैना ने इस मैच में सिर्फ 3 रन बनाए जबकि इरफान पठान ने 10 गेंदों पर 19 रन की तेज पारी खेली।
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गौतम गंभीर और शाहिद अफरीदी की दुश्मनी किसी से भी छिपी नहीं है। इंटरनेशनल क्रिकेट में जब ये दोनों खेला करते थे तब भी इनके बीच के मतभेद पूरी दुनिया के सामने थी और उसके बाद ये दोनों सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ कुछ भी कहने से पीछे नहीं हटते। फिलहाल ये दोनों खिलाड़ी लीजेंड्स क्रिकेट लीग मास्टर्स में खेल रहे हैं। गौतम गंभीर जहां इंडिया महाराजा टीम की कप्तानी कर रहे हैं तो वहीं शाहिद अफरीदी के हाथों में एशिया लायंस टीम की कप्तानी है। इन दोनों टीमों के बीच शुक्रवार को इस लीग का पहला मैच खेला गया जिसमें एशिया लायंस को नौ विकेट से जीत मिली थी। इस मैच के दौरान एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया। दरअसल इस मैच की दूसरी पारी के बारहवें ओवर में जब गौतम गंभीर बल्लेबाजी कर रहे थे तब अब्दुल रज्जाक की एक गेंद गौतम गंभीर के हेलमेट से जाकर टकरा गई। इसके बाद एशिया लायंस के कप्तान शाहिद अफरीदी तुरंत गौतम गंभीर के पास पहुंचे और उनका हाल जाना। गंभीर ने कहा कि उन्हें कोई चोट नहीं आई है और फिर अफरीदी अपनी फील्डिंग पोजिशन पर वापस हो गए। इस मैच में एशिया लायंस ने अड़तालीस साल के मिस्बाह-उल-हक की पचास गेंदों पर चार छक्के और दो चौकों की मदद से बनाए गए तिहत्तर रन की पारी के दम पर बीस ओवर में छः विकेट पर एक सौ पैंसठ रन का स्कोर खड़ा किया। इंडिया महाराजा को जीत के लिए एक सौ छयासठ रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन ये टीम बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ छप्पन रन के स्कोर तक ही पहुंच पाई और उसे नौ रन से करीबी हार मिली। इस मैच में इंडिया महाराज के कप्तान गौतम गंभीर ने बेहतरीन पारी खेली और उनतालीस गेंदों पर सात चौकों की मदद से चौवन रन बनाए। भारत के लिए मुरली विजय ने पच्चीस जबकि मो. कैफ ने बाईस रन की पारी खेली। सुरेश रैना ने इस मैच में सिर्फ तीन रन बनाए जबकि इरफान पठान ने दस गेंदों पर उन्नीस रन की तेज पारी खेली।
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अपने पहले कार्यकाल में विदेश यात्राओं के लिए खबरों में रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूसरा कार्यकाल भी काफी व्यस्त रहने वाला है. पहले 7 महीनों में प्रधाममंत्री कम से कम 7 विदेश यात्राएं करेंगे. शुरुआत एक बार फिर दक्षिण एशियाई देश मालदीव से होगी. अपने पहले कार्यकाल के पहले दौरे में प्रधानमंत्री भूटान गए थे. (ये भी पढ़ेंः WhatsApp कराएगा कमाई, मिलेगा FD से ज्यादा रिटर्न)
>> मालदीव की यात्रा पर प्रधानमंत्री 7-8 जून को रहेंगे.
>>इसके बाद 13 जून को किर्गिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक पर सबकी नजर इसलिए है क्योंकि यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी रहेंगे और सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों नेता मुलाकात करते हैं.
>> 28 जून को जापान के ओसाका में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे. दुनिया के अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ नरेंद्र मोदी इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात करेंगे.
>> 4-6 सितंबर के बीच ईस्टर्न ईकोनॉमिक फोरम की बैठकमें हिस्सा लेने मोदी रूस में होंगे. इस दौरान रूसी राष्टपति पुतिन से मोदी की मुलाकात होगी.
>> सितंबर में ही संयुक्त राष्ट्र का महासम्मेलन न्यूयॉर्क में होगा. हालांकि अब तक प्रधानमंत्री के जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
>> इसके बाद नवंबर में ईस्ट एशिया समिट बैंकॉक में और ब्रिक्स समिट में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाएंगे.
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अपने पहले कार्यकाल में विदेश यात्राओं के लिए खबरों में रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूसरा कार्यकाल भी काफी व्यस्त रहने वाला है. पहले सात महीनों में प्रधाममंत्री कम से कम सात विदेश यात्राएं करेंगे. शुरुआत एक बार फिर दक्षिण एशियाई देश मालदीव से होगी. अपने पहले कार्यकाल के पहले दौरे में प्रधानमंत्री भूटान गए थे. >> मालदीव की यात्रा पर प्रधानमंत्री सात-आठ जून को रहेंगे. >>इसके बाद तेरह जून को किर्गिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक पर सबकी नजर इसलिए है क्योंकि यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी रहेंगे और सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों नेता मुलाकात करते हैं. >> अट्ठाईस जून को जापान के ओसाका में होने वाले जी-बीस शिखर सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे. दुनिया के अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ नरेंद्र मोदी इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात करेंगे. >> चार-छः सितंबर के बीच ईस्टर्न ईकोनॉमिक फोरम की बैठकमें हिस्सा लेने मोदी रूस में होंगे. इस दौरान रूसी राष्टपति पुतिन से मोदी की मुलाकात होगी. >> सितंबर में ही संयुक्त राष्ट्र का महासम्मेलन न्यूयॉर्क में होगा. हालांकि अब तक प्रधानमंत्री के जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. >> इसके बाद नवंबर में ईस्ट एशिया समिट बैंकॉक में और ब्रिक्स समिट में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाएंगे. .
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विश्व हिंदू परिषद के 52 साल के इतिहास में पहली बार अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए हुए चुनाव में विष्णु सदाशिव कोकजे ने जीत हासिल कर ली है. हिंदुत्व का बड़ा चेहरा रहे प्रवीण तोगड़िया के नजदीकी राघव रेड्डी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए कोकजे ने बड़ी जीत हासिल की है. चुनाव में 192 वोट डाले गए, जिसमें से 131वोट विष्णु सदाशिव कोकजे और 60 वोट राघव रेड्डी को मिले. इस जीत के बाद अब कुछ देर में ही पता चलेगा कि प्रवीण तोगड़िया अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष रहेंंगे या नहीं.
विष्णु सदाशिव कोकजे हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर एवं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं. चुनाव से पहले तोगड़िया कैंप की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि कोकजे का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है. कोकजे का जन्म 6 सितंबर 1939 को मध्य प्रदेश में हुआ था. इंदौर से LLB करने के बाद 1964 में उन्होंने लॉ की प्रैक्टिस शुरू की. यह संयोग ही है कि इसी साल विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई.
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विश्व हिंदू परिषद के बावन साल के इतिहास में पहली बार अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए हुए चुनाव में विष्णु सदाशिव कोकजे ने जीत हासिल कर ली है. हिंदुत्व का बड़ा चेहरा रहे प्रवीण तोगड़िया के नजदीकी राघव रेड्डी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए कोकजे ने बड़ी जीत हासिल की है. चुनाव में एक सौ बानवे वोट डाले गए, जिसमें से एक सौ इकतीसवोट विष्णु सदाशिव कोकजे और साठ वोट राघव रेड्डी को मिले. इस जीत के बाद अब कुछ देर में ही पता चलेगा कि प्रवीण तोगड़िया अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष रहेंंगे या नहीं. विष्णु सदाशिव कोकजे हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर एवं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं. चुनाव से पहले तोगड़िया कैंप की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि कोकजे का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है. कोकजे का जन्म छः सितंबर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस को मध्य प्रदेश में हुआ था. इंदौर से LLB करने के बाद एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में उन्होंने लॉ की प्रैक्टिस शुरू की. यह संयोग ही है कि इसी साल विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई. .
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नेचुरोपैथ कौशल :
Benefits Of Date Palm : खजूर में 60 से 70℅ तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी वस्तु है। खाने में तो खजूर बहुत स्वादिष्ट होती ही है, सेहत की दृष्टि से भी यह बहुत गुणकारी है। इसके अलावा विभिन्न बीमारियों में भी खजूर का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है।
खजूर के गुणों पर एक नजर (Benefits Of Date Palm)
खजूर 200 ग्राम,
चिलगोजा गिरी 60 ग्राम,
बादाम गिरी 60 ग्राम,
काले चनों का चूर्ण 240 ग्राम,
गाय का घी 500 ग्राम,
दूध दो लीटर और चीनी या गुड़ 500 ग्राम।
इन सबका पाक बनाकर 50 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है।
बिस्तर पर पेशाब (Benefits Of Date Palm)
छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है।
बुढ़ापे में पेशाब बार बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा।
छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है।
यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं।
मासिक धर्म (Benefits Of Date Palm)
छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।
दांतों का गलना (Benefits Of Date Palm)
छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।
रक्तचाप (Benefits Of Date Palm)
कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें।
इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें।
उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं।
कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगी।
कब्ज (Benefits Of Date Palm)
सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है।
खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है।
खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।
मधुमेह (Benefits Of Date Palm)
मधुनेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।
पुराने घाव (Benefits Of Date Palm)
पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें।
घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।
आंखों के रोग (Benefits Of Date Palm)
खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।
खांसी (Benefits Of Date Palm)
छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है।
जुएं (Benefits Of Date Palm)
खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
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नेचुरोपैथ कौशल : Benefits Of Date Palm : खजूर में साठ से सत्तर℅ तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी वस्तु है। खाने में तो खजूर बहुत स्वादिष्ट होती ही है, सेहत की दृष्टि से भी यह बहुत गुणकारी है। इसके अलावा विभिन्न बीमारियों में भी खजूर का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है। खजूर के गुणों पर एक नजर खजूर दो सौ ग्राम, चिलगोजा गिरी साठ ग्राम, बादाम गिरी साठ ग्राम, काले चनों का चूर्ण दो सौ चालीस ग्राम, गाय का घी पाँच सौ ग्राम, दूध दो लीटर और चीनी या गुड़ पाँच सौ ग्राम। इन सबका पाक बनाकर पचास ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है। बिस्तर पर पेशाब छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं। मासिक धर्म छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है। दांतों का गलना छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं। रक्तचाप कम रक्तचाप वाले रोगी तीन-चार खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगी। कब्ज सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए। मधुमेह मधुनेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं। पुराने घाव पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं। आंखों के रोग खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं। खांसी छुहारे को घी में भूनकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है। जुएं खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
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रूस ने दस महीने की भीषण लड़ाई के बाद यूक्रेन के बाखमुट पर कब्जा कर लिया है। सशस्त्र संगठन वैगनर ग्रुप ने लड़ाई की अगुआई की है। वहीं यूक्रेन का कहना है कि बाखमुट में स्थिति गंभीर है।
मास्को, रायटर। दस महीने से ज्यादा की भीषण लड़ाई और जान-माल के भारी नुकसान के बाद रूस ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पूर्वी यूक्रेन के बाखमुट शहर पर कब्जा कर लिया है। यह दावा पूर्वी यूक्रेन में रूसी सेना के साथ लड़ रहे सशस्त्र संगठन वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोजिन ने किया है। प्रिगोजिन को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का खास माना जाता है। वैगनर प्रमुख के दावे पर यूक्रेन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सैन्य पोशाक पहने प्रिगोजिन ने दावे का वीडियो बाखमुट के युद्ध मोर्चे से जारी किया है, जहां पर उनके लड़ाके रूसी झंडे और वैगनर ग्रुप के बैनर लिए दिख रहे थे। इस वीडियो में प्रिगोजिन कह रहे हैं- शनिवार दोपहर 12 बजे बाखमुट पूरी तरह से हमारा हुआ।
रूसी सेना और लड़ाके कई दिन पहले ही बाखमुट में घुस गए थे। शुक्रवार को शहर के भीतर और बाहर भीषण लड़ाई की पुष्टि यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने की थी। उन्होंने वहां की स्थिति को बहुत खराब बताया था। इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि वह अपने सैनिकों को नहीं गंवा सकते हैं। बाखमुट में स्थिति लगातार कमजोर होने पर वहां का कब्जा छोड़ दिया जाएगा।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाखमुट पर कब्जे के लिए सबसे ज्यादा समय तक लड़ाई चली है। युद्ध से पूर्व करीब 70 हजार की आबादी वाले खनिज संपदा संपन्न इस शहर में अब दो हजार लोग भी नहीं बचे हैं। रूसी हमलों के बीच ज्यादातर लोग जान बचाने के लिए भाग गए या फिर मारे गए। यूक्रेनी सेना और लड़ाके शहर के नीचे विशाल भूमिगत क्षेत्र से रूसी बलों का मुकाबला करते रहे जबकि ऊपर बसा शहर महीनों पहले नष्ट हो चुका था।
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रूस ने दस महीने की भीषण लड़ाई के बाद यूक्रेन के बाखमुट पर कब्जा कर लिया है। सशस्त्र संगठन वैगनर ग्रुप ने लड़ाई की अगुआई की है। वहीं यूक्रेन का कहना है कि बाखमुट में स्थिति गंभीर है। मास्को, रायटर। दस महीने से ज्यादा की भीषण लड़ाई और जान-माल के भारी नुकसान के बाद रूस ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पूर्वी यूक्रेन के बाखमुट शहर पर कब्जा कर लिया है। यह दावा पूर्वी यूक्रेन में रूसी सेना के साथ लड़ रहे सशस्त्र संगठन वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोजिन ने किया है। प्रिगोजिन को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का खास माना जाता है। वैगनर प्रमुख के दावे पर यूक्रेन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सैन्य पोशाक पहने प्रिगोजिन ने दावे का वीडियो बाखमुट के युद्ध मोर्चे से जारी किया है, जहां पर उनके लड़ाके रूसी झंडे और वैगनर ग्रुप के बैनर लिए दिख रहे थे। इस वीडियो में प्रिगोजिन कह रहे हैं- शनिवार दोपहर बारह बजे बाखमुट पूरी तरह से हमारा हुआ। रूसी सेना और लड़ाके कई दिन पहले ही बाखमुट में घुस गए थे। शुक्रवार को शहर के भीतर और बाहर भीषण लड़ाई की पुष्टि यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने की थी। उन्होंने वहां की स्थिति को बहुत खराब बताया था। इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि वह अपने सैनिकों को नहीं गंवा सकते हैं। बाखमुट में स्थिति लगातार कमजोर होने पर वहां का कब्जा छोड़ दिया जाएगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाखमुट पर कब्जे के लिए सबसे ज्यादा समय तक लड़ाई चली है। युद्ध से पूर्व करीब सत्तर हजार की आबादी वाले खनिज संपदा संपन्न इस शहर में अब दो हजार लोग भी नहीं बचे हैं। रूसी हमलों के बीच ज्यादातर लोग जान बचाने के लिए भाग गए या फिर मारे गए। यूक्रेनी सेना और लड़ाके शहर के नीचे विशाल भूमिगत क्षेत्र से रूसी बलों का मुकाबला करते रहे जबकि ऊपर बसा शहर महीनों पहले नष्ट हो चुका था।
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काबुल और मजार - ए - शरीफ में सैकड़ों लोग अपने घर से बाहर निकल आए और पाकिस्तान व आईएसआई चीफ के खिलाफ नारे लगाए।
नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान का लोकतांत्रिक विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। सोमवार रात में काबुल और मजार - ए - शरीफ में सैकड़ों लोग अपने घर से बाहर निकल आए और पाकिस्तान व आईएसआई चीफ के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि काबुल को पाकिस्तान का शहर नहीं बनने देंगे। लोगों को इस बात पर सख्त एतराज है कि आईएसआई चीफ जनरल हमीद फैज काबुल में क्यों डेरा डाले हुए हैं। दूसरी ओर नेशनल फ्रंट के समर्थन में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुए हैं। काबुल में बीती रात हुए प्रदर्शन में अहमद मसूद जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए हैं।
तालिबान ने भले ही पंजशीर पर कब्जे का दावा कर दिया है लेकिन अब तक वह अफगानियों का दिल जीतने में नाकाम है। सोमवार की देर रात काबुल में लोगों ने सड़क पर उतरकर जिस तरह पाकिस्तान विरोध और अहमद मसूद के समर्थन में नारे लगाए हैं उससे साफ जाहिर है कि तालिबान को पूरे अफगानिस्तान का समर्थन हासिल नहीं है। अहमद मसूद की पंजशीर में लड़ाई केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक व तालिबान विरोधी ताकतें अहमद मसूद का साथ दे रही हैं।
अफगानिस्तान मीडिया से मिल रही जानकारी के अनुसार काबुल में बीती रात कई स्थानों पर लोगों ने घरों से बाहर निकल कर प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। लोग इस बात से खासे आक्रोशित हैं कि उनके देश में पाकिस्तान दखलंदाजी कर रहा है। लोगों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ जनरल हमीद फैज की काबुल में मौजूदगी का विरोध किया है। सड़कों पर उतरकर आए लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और अहमद मसूद जिंदाबाद के नारे देर तक लगाए। एक वीडियो मस्जिद के बाहर का वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक अपने मोबाइल पर नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद का संदेश सुन रहा है।
अफगानिस्तान के प्रमुख शहर मजार - ए - शरीफ में भी बीती रात लोगों ने सड़क पर उतरकर तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया है। यहां सड़क पर हजारों लोग उतर आए हैं। अल्लाह ओ अकबर के नारे लगा रहे लोगों में बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। लोग कह रहे हैं कि तालिबान की क्रूरता और आतंक से अब और नहीं डरेंगे।
अमेरिका में अफगान मूल की पत्रकार फरहांज फोरूतन की अगुवाई में अहमद मसूद के समर्थन और पाकिस्तान विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया है। वाशिंगटन में भी अफगान मूल के लोगों ने प्रदर्शन किया है। इन लोगों ने भी अहमद मसूद की एनआरएफ का समर्थन किया और पाकिस्तान के विरोध में नारे लगाए हैं।
अमेरिका में यूनाइटेड नेशंस कार्यालय के बाहर भी लोगों ने प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अफगानिस्तान में सीधे पाकिस्तान दखल कर रहा है। एक गुट को सैन्य मदद कर रहा है। आईएसआई का चीफ काबुल में बैठा है इसके बावजूद यूएनओ खामोश है।
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काबुल और मजार - ए - शरीफ में सैकड़ों लोग अपने घर से बाहर निकल आए और पाकिस्तान व आईएसआई चीफ के खिलाफ नारे लगाए। नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान और पाकिस्तान का लोकतांत्रिक विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। सोमवार रात में काबुल और मजार - ए - शरीफ में सैकड़ों लोग अपने घर से बाहर निकल आए और पाकिस्तान व आईएसआई चीफ के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि काबुल को पाकिस्तान का शहर नहीं बनने देंगे। लोगों को इस बात पर सख्त एतराज है कि आईएसआई चीफ जनरल हमीद फैज काबुल में क्यों डेरा डाले हुए हैं। दूसरी ओर नेशनल फ्रंट के समर्थन में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुए हैं। काबुल में बीती रात हुए प्रदर्शन में अहमद मसूद जिंदाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए हैं। तालिबान ने भले ही पंजशीर पर कब्जे का दावा कर दिया है लेकिन अब तक वह अफगानियों का दिल जीतने में नाकाम है। सोमवार की देर रात काबुल में लोगों ने सड़क पर उतरकर जिस तरह पाकिस्तान विरोध और अहमद मसूद के समर्थन में नारे लगाए हैं उससे साफ जाहिर है कि तालिबान को पूरे अफगानिस्तान का समर्थन हासिल नहीं है। अहमद मसूद की पंजशीर में लड़ाई केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक व तालिबान विरोधी ताकतें अहमद मसूद का साथ दे रही हैं। अफगानिस्तान मीडिया से मिल रही जानकारी के अनुसार काबुल में बीती रात कई स्थानों पर लोगों ने घरों से बाहर निकल कर प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। लोग इस बात से खासे आक्रोशित हैं कि उनके देश में पाकिस्तान दखलंदाजी कर रहा है। लोगों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ जनरल हमीद फैज की काबुल में मौजूदगी का विरोध किया है। सड़कों पर उतरकर आए लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और अहमद मसूद जिंदाबाद के नारे देर तक लगाए। एक वीडियो मस्जिद के बाहर का वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक अपने मोबाइल पर नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद का संदेश सुन रहा है। अफगानिस्तान के प्रमुख शहर मजार - ए - शरीफ में भी बीती रात लोगों ने सड़क पर उतरकर तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया है। यहां सड़क पर हजारों लोग उतर आए हैं। अल्लाह ओ अकबर के नारे लगा रहे लोगों में बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। लोग कह रहे हैं कि तालिबान की क्रूरता और आतंक से अब और नहीं डरेंगे। अमेरिका में अफगान मूल की पत्रकार फरहांज फोरूतन की अगुवाई में अहमद मसूद के समर्थन और पाकिस्तान विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया है। वाशिंगटन में भी अफगान मूल के लोगों ने प्रदर्शन किया है। इन लोगों ने भी अहमद मसूद की एनआरएफ का समर्थन किया और पाकिस्तान के विरोध में नारे लगाए हैं। अमेरिका में यूनाइटेड नेशंस कार्यालय के बाहर भी लोगों ने प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अफगानिस्तान में सीधे पाकिस्तान दखल कर रहा है। एक गुट को सैन्य मदद कर रहा है। आईएसआई का चीफ काबुल में बैठा है इसके बावजूद यूएनओ खामोश है।
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गाजियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका ने मास्क के उपयोग और सामाजिक दूरी के नियमों पर एक अभिनव अध्ययन किया है, जो नए प्रकार के कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के खिलाफ सबसे बड़े उपायों में से एक है। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका की टीमें ड्रोन स्पीकर से भीड़ को चेतावनी देती हैं और बिना मास्क के घूमने वालों को मास्क लेने की चेतावनी देती हैं।
गाजियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका दुनिया और तुर्की को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में बिना रुके अपना काम जारी रखे हुए है। इस संदर्भ में, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका बैंकों, एटीएम, पीटीटी, बेकरी और शॉपिंग मॉल के सामने बनी कतारों में ड्रोन के साथ हवा से घोषणा करके नागरिकों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने और मास्क के उपयोग के बारे में चेतावनी देगी। जो अक्सर सड़कों पर भीड़ में भूल जाते हैं। ड्रोन टीमें सड़कों और गलियों में ड्रोन से भ्रमण कर निरीक्षण करेंगी।
इस विषय पर एक बयान देते हुए, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका मेयर फातमा साहिन ने कहा कि तुर्की के लिए एक अच्छी प्रथा शुरू हो गई है और कहा, "यदि संभव हो तो घर पर रहें, दूरी बनाए रखें और अगर आपको बाहर जाना है तो अपना मास्क पहनें। इसलिए, हम पूरे शहर में, उन जगहों पर जहां सामाजिक जीवन मजबूत है, ड्रोन के जरिए यह संदेश दे रहे हैं।' आपके लिए, आपके बच्चों के लिए, आपके परिवारों के लिए, शहर के लिए, दुनिया के लिए, हम कहते हैं कि अपना मास्क पहनें और अपनी दूरी बनाए रखें। यही कारण है कि यह एक ऐसा कार्य था जिसे हमने स्वयं इस ड्रोन प्रणाली के साथ बनाया था। हमने अपने द्वारा गाज़ियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के रूप में विकसित किए गए सॉफ़्टवेयर को हमारे द्वारा खरीदे गए ड्रोन के साथ जोड़ दिया, और अब हम पूरे शहर में हवा में नागरिकों को चेतावनी दे रहे हैं। ड्रोन पर एक थर्मल कैमरा है, हम सीधे किसी ऐसे व्यक्ति को देख सकते हैं और चेतावनी दे सकते हैं जिसने मास्क नहीं पहना है। ये वॉयस मैसेज सभी सड़कों पर जारी रहेंगे. तुर्किये के लिए एक अच्छा आवेदन। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य दोहरी छुट्टी है, हम अपने लोगों के लिए काम करना जारी रखेंगे।"
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गाजियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका ने मास्क के उपयोग और सामाजिक दूरी के नियमों पर एक अभिनव अध्ययन किया है, जो नए प्रकार के कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ सबसे बड़े उपायों में से एक है। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका की टीमें ड्रोन स्पीकर से भीड़ को चेतावनी देती हैं और बिना मास्क के घूमने वालों को मास्क लेने की चेतावनी देती हैं। गाजियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका दुनिया और तुर्की को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में बिना रुके अपना काम जारी रखे हुए है। इस संदर्भ में, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका बैंकों, एटीएम, पीटीटी, बेकरी और शॉपिंग मॉल के सामने बनी कतारों में ड्रोन के साथ हवा से घोषणा करके नागरिकों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने और मास्क के उपयोग के बारे में चेतावनी देगी। जो अक्सर सड़कों पर भीड़ में भूल जाते हैं। ड्रोन टीमें सड़कों और गलियों में ड्रोन से भ्रमण कर निरीक्षण करेंगी। इस विषय पर एक बयान देते हुए, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका मेयर फातमा साहिन ने कहा कि तुर्की के लिए एक अच्छी प्रथा शुरू हो गई है और कहा, "यदि संभव हो तो घर पर रहें, दूरी बनाए रखें और अगर आपको बाहर जाना है तो अपना मास्क पहनें। इसलिए, हम पूरे शहर में, उन जगहों पर जहां सामाजिक जीवन मजबूत है, ड्रोन के जरिए यह संदेश दे रहे हैं।' आपके लिए, आपके बच्चों के लिए, आपके परिवारों के लिए, शहर के लिए, दुनिया के लिए, हम कहते हैं कि अपना मास्क पहनें और अपनी दूरी बनाए रखें। यही कारण है कि यह एक ऐसा कार्य था जिसे हमने स्वयं इस ड्रोन प्रणाली के साथ बनाया था। हमने अपने द्वारा गाज़ियांटेप मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के रूप में विकसित किए गए सॉफ़्टवेयर को हमारे द्वारा खरीदे गए ड्रोन के साथ जोड़ दिया, और अब हम पूरे शहर में हवा में नागरिकों को चेतावनी दे रहे हैं। ड्रोन पर एक थर्मल कैमरा है, हम सीधे किसी ऐसे व्यक्ति को देख सकते हैं और चेतावनी दे सकते हैं जिसने मास्क नहीं पहना है। ये वॉयस मैसेज सभी सड़कों पर जारी रहेंगे. तुर्किये के लिए एक अच्छा आवेदन। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य दोहरी छुट्टी है, हम अपने लोगों के लिए काम करना जारी रखेंगे।"
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क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के मैदान पर खेल के दौरान गेंद लगने से घायल होकर अपनी जान गवाने वाले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिलीप ह्यूज की मौत की स्वतंत्र जांच करायेगा. इसके पीछे उसका उद्देश्य यह है कि आगे से कभी मैदान पर इस तरह के हादसे न हो.
क्रिकेट आस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड ने कहा कि, "मेने फिलीप ह्यूज की मौत के समय ही कहा था कि यह अजीब हादसा है. हम नहीं चाहते है कि भविष्य में फिर ऐसा हादसा हो. इसलिए हम मामले की स्वतंत्र से जाँच कराएंगे. "
बता दे कि इस मामले की जाँच मेलबर्न के वकील डेविड कर्टेन करेंगे. सदरलैंड ने मामले को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मामले में किसी को दोषी नहीं ठहराया जाएगा, हम जाँच इसलिए करवा रहे है ताकि इस तरह के हादसे फिर नहीं हों.
गौरतलब है कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर न्यू साउथ वेल्स के लिए खेलते हुए गेंदबाज सीन एबट की एक गेंद फिलीप ह्यूज के सर के पीछे लग गई थी, जिसके बाद 27 नवंबर को ह्यूज ने दुनिया को अलविदा कह दिया था.
NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable.
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क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के मैदान पर खेल के दौरान गेंद लगने से घायल होकर अपनी जान गवाने वाले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिलीप ह्यूज की मौत की स्वतंत्र जांच करायेगा. इसके पीछे उसका उद्देश्य यह है कि आगे से कभी मैदान पर इस तरह के हादसे न हो. क्रिकेट आस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड ने कहा कि, "मेने फिलीप ह्यूज की मौत के समय ही कहा था कि यह अजीब हादसा है. हम नहीं चाहते है कि भविष्य में फिर ऐसा हादसा हो. इसलिए हम मामले की स्वतंत्र से जाँच कराएंगे. " बता दे कि इस मामले की जाँच मेलबर्न के वकील डेविड कर्टेन करेंगे. सदरलैंड ने मामले को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मामले में किसी को दोषी नहीं ठहराया जाएगा, हम जाँच इसलिए करवा रहे है ताकि इस तरह के हादसे फिर नहीं हों. गौरतलब है कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर न्यू साउथ वेल्स के लिए खेलते हुए गेंदबाज सीन एबट की एक गेंद फिलीप ह्यूज के सर के पीछे लग गई थी, जिसके बाद सत्ताईस नवंबर को ह्यूज ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable.
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लखनऊ, योगी सरकार मे राज्यमंत्री और अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने आरक्षण को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होने आरक्षण व्यवस्था संविधान के अनुरूप न लागू होने देने के लिये विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया।
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने आज आयोजित प्रेसवार्ता मे कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दलितों का आरक्षण न होना राष्ट्रीय आरक्षण नीति का खुला मजाक है। यदि यहां पर मनमानी नहीं की गई होती, तो अब तक लाखों दलित छात्रों का भला हो गया होता। सबसे बड़ी बात ये है कि इस देश में सबसे अधिक समय तक हुकूमत कर रही कांग्रेस ने इस पर पर्दा डालने का काम किया। कांग्रेस को वोट बैंक की राजनीति करनी थी। इस लिए दलितों के हितों की इस आवाज को दबा दिया गया, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं है। इसके बाद भी देश की आजादी के बाद कभी भी दलितों के आरक्षण को लेकर इस दिशा में काम करने की जरूरत नहीं समझी गई।
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर तथा संविधान सभा के सदस्यों ने देश की भावना के अनुरूप अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए एक अनिवार्य आरक्षण नीति की व्यवस्था संविधान के लागू होते ही 1950 के बाद कर दी थी। इसके बाद भी सरकारों ने दलितों के हितों को नजर अंदाज किया। केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए अधिनियम 2006 (एक्ट-2006) के द्वारा 3 जनवरी 2007 को आरक्षण लागू करने की घोषणा कर दी गई थी। इसके बाद भी प्रदेश की मायावती सरकार और अखिलेश यादव की सरकार ने इसे दरकिनार किया, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति और जनजाति के अध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए यहां पर 22. 5 फीसदी आरक्षण देने का प्राविधान है।
उन्होने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय 1920 से ही केंद्रीय विश्वविद्यालय है और इसे अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त नहीं है। भारत की संविधान सभा ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय दोनों को सातवी अनुसूची की संघीय अनुसूची-1 में रखा है। और इस संघीय सूची में कोई भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं रखे जा सकते।
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि वर्ष 1951 में भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने संसद में कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय है, तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। वर्ष 1968 में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने मुख्य न्यायधीश के एन वांचू के नेतृत्व में सर्वसम्मति से घोषणा की कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।
उन्होने बताया कि वर्ष 1981 में कांग्रेस की सरकार ने राजनैतिक फायदे के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की परिभाषा को बदलकर विश्वविद्यालय अर्थात भारत के मुसलमानों द्वारा स्थापित अपनी पसंद का शिक्षा संस्थान "जो मोहम्डन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज से प्रारंभ हुआ है और अलीगढ़ विश्वविद्यालय के रूप में समाविष्टित हुआ" कांग्रेस द्वारा यह प्रयास देश को भ्रमित करने और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने का प्रयास था। इतना ही नहीं, 1981 में कांग्रेस ने इस एक्ट में एक और संशोधन किया और धारा 5 (2) (सी) के तहत यह जोड़ा कि " भारत के मुस्लमानों के सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक विकास के लिए प्रयास किए जाएं। जबकि विश्वविद्यालय के एक्ट की धारा 8 के अनुसार प्रारंभ से ही यह व्यवस्था की गई थी कि विश्वविद्यालय लिंग, जाति, भाषा, धर्म आदि के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करेगा।
डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि कांग्रेस का प्रयास पूरी तरह से मुस्लमानों को खुश रखना तथा पिछले दरवाजे से एएमयू को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय बनाना था। इसके विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका भी खारिज कर दी गई और कहा गया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट वर्ष 2005-2006 के निर्णय के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया।
उन्होने बताया कि वर्तमान स्थिति में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याय बीएचयू की भांति केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसमें आरक्षण लागू करना बांध्यकारी है। किन्तु एएमयू प्रशासन दलितों को आरक्षण न देकर आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर रहा है, जो अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत दंडनीय अपराध है।
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लखनऊ, योगी सरकार मे राज्यमंत्री और अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने आरक्षण को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होने आरक्षण व्यवस्था संविधान के अनुरूप न लागू होने देने के लिये विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने आज आयोजित प्रेसवार्ता मे कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दलितों का आरक्षण न होना राष्ट्रीय आरक्षण नीति का खुला मजाक है। यदि यहां पर मनमानी नहीं की गई होती, तो अब तक लाखों दलित छात्रों का भला हो गया होता। सबसे बड़ी बात ये है कि इस देश में सबसे अधिक समय तक हुकूमत कर रही कांग्रेस ने इस पर पर्दा डालने का काम किया। कांग्रेस को वोट बैंक की राजनीति करनी थी। इस लिए दलितों के हितों की इस आवाज को दबा दिया गया, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं है। इसके बाद भी देश की आजादी के बाद कभी भी दलितों के आरक्षण को लेकर इस दिशा में काम करने की जरूरत नहीं समझी गई। डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर तथा संविधान सभा के सदस्यों ने देश की भावना के अनुरूप अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए एक अनिवार्य आरक्षण नीति की व्यवस्था संविधान के लागू होते ही एक हज़ार नौ सौ पचास के बाद कर दी थी। इसके बाद भी सरकारों ने दलितों के हितों को नजर अंदाज किया। केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए अधिनियम दो हज़ार छः के द्वारा तीन जनवरी दो हज़ार सात को आरक्षण लागू करने की घोषणा कर दी गई थी। इसके बाद भी प्रदेश की मायावती सरकार और अखिलेश यादव की सरकार ने इसे दरकिनार किया, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति और जनजाति के अध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए यहां पर बाईस. पाँच फीसदी आरक्षण देने का प्राविधान है। उन्होने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय एक हज़ार नौ सौ बीस से ही केंद्रीय विश्वविद्यालय है और इसे अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त नहीं है। भारत की संविधान सभा ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय दोनों को सातवी अनुसूची की संघीय अनुसूची-एक में रखा है। और इस संघीय सूची में कोई भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं रखे जा सकते। डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने संसद में कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय है, तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने मुख्य न्यायधीश के एन वांचू के नेतृत्व में सर्वसम्मति से घोषणा की कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। उन्होने बताया कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में कांग्रेस की सरकार ने राजनैतिक फायदे के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की परिभाषा को बदलकर विश्वविद्यालय अर्थात भारत के मुसलमानों द्वारा स्थापित अपनी पसंद का शिक्षा संस्थान "जो मोहम्डन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज से प्रारंभ हुआ है और अलीगढ़ विश्वविद्यालय के रूप में समाविष्टित हुआ" कांग्रेस द्वारा यह प्रयास देश को भ्रमित करने और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने का प्रयास था। इतना ही नहीं, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में कांग्रेस ने इस एक्ट में एक और संशोधन किया और धारा पाँच के तहत यह जोड़ा कि " भारत के मुस्लमानों के सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक विकास के लिए प्रयास किए जाएं। जबकि विश्वविद्यालय के एक्ट की धारा आठ के अनुसार प्रारंभ से ही यह व्यवस्था की गई थी कि विश्वविद्यालय लिंग, जाति, भाषा, धर्म आदि के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करेगा। डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि कांग्रेस का प्रयास पूरी तरह से मुस्लमानों को खुश रखना तथा पिछले दरवाजे से एएमयू को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय बनाना था। इसके विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका भी खारिज कर दी गई और कहा गया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट वर्ष दो हज़ार पाँच-दो हज़ार छः के निर्णय के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया। उन्होने बताया कि वर्तमान स्थिति में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याय बीएचयू की भांति केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसमें आरक्षण लागू करना बांध्यकारी है। किन्तु एएमयू प्रशासन दलितों को आरक्षण न देकर आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर रहा है, जो अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ नवासी के तहत दंडनीय अपराध है।
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इच्छा शक्ति की चर्चा आज से ही नहीं वर्षों से चली आ रही है। बड़े से बड़े अध्यन कर्ताओं ने इसे सही ठहराया है। अगर इस इच्छा शक्ति का परोग हम अपने अन्दर एक प्रेरणा जो जगाने के लिए करें तो कुछ बुरा नहीं है। हर किसी का एक सपना होता है कि वो अपने ख्वाबों की मंजिल तक पहुंचे लेकिन उनमें से कुछ ही लोग ऐसा करने में सफल हो पाते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि वो खुद में इस इच्छा शक्ति को जगाने में नाकामयाब हो जाते हैं। अगर आप कुछ भी चाहे और उस पर अटल रहें और अपने उस काम को करने का प्रयास लगातार जारी रखें तो एक न एक दिन आप भी अपनी मंजिल के पास होंगे। इसी इच्छा शक्ति पर आधारित एक विडियो ....
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इच्छा शक्ति की चर्चा आज से ही नहीं वर्षों से चली आ रही है। बड़े से बड़े अध्यन कर्ताओं ने इसे सही ठहराया है। अगर इस इच्छा शक्ति का परोग हम अपने अन्दर एक प्रेरणा जो जगाने के लिए करें तो कुछ बुरा नहीं है। हर किसी का एक सपना होता है कि वो अपने ख्वाबों की मंजिल तक पहुंचे लेकिन उनमें से कुछ ही लोग ऐसा करने में सफल हो पाते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि वो खुद में इस इच्छा शक्ति को जगाने में नाकामयाब हो जाते हैं। अगर आप कुछ भी चाहे और उस पर अटल रहें और अपने उस काम को करने का प्रयास लगातार जारी रखें तो एक न एक दिन आप भी अपनी मंजिल के पास होंगे। इसी इच्छा शक्ति पर आधारित एक विडियो .... Share this:
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शिमला - शिमला में यूएस क्लब गेट के समीप एक पुरानी इमारत में सोमवार शाम के समय आग सुलग गई। हालांकि इस आगजनी की घटना में इमारत की निचली मंजिल में रखी कुछ लकडि़यां और पुराना सोफा आग की भेंट चढ़ गया। मगर गनीमत यह रही कि अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने समय रहते मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। नहीं तो आगजनी की घटना में बड़ा नुक्सान हो सकता था। यूएस क्लब गेट के समीप एक पुरानी इमारत है। अग्निशमन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस इमारत में कोई नहीं रहता। इमारत की निचली मंजिल में रखी लकडि़यों में आग सुलगने से अग्निकांड पेश आया जिसमें एक पुराना सोफा भी जला है। मगर आगजनी की घटना कैसे पेश आई इसके कारणों का पता नहीं चल पाया है। अग्निशमन विभाग को इस घटना की सूचना पांच बजकर पांच मिनट पर मिली। सूचना मिलते ही विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत आग पर काबू पाया। अगर थोड़ी देर होती तो बड़ा हादसा पेश आ सकता था। चूंकि इस पुरानी इमारत के समीप कई अन्य भवन भी थे जो देरी से आग की जद में आ सकते थे।
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शिमला - शिमला में यूएस क्लब गेट के समीप एक पुरानी इमारत में सोमवार शाम के समय आग सुलग गई। हालांकि इस आगजनी की घटना में इमारत की निचली मंजिल में रखी कुछ लकडि़यां और पुराना सोफा आग की भेंट चढ़ गया। मगर गनीमत यह रही कि अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने समय रहते मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। नहीं तो आगजनी की घटना में बड़ा नुक्सान हो सकता था। यूएस क्लब गेट के समीप एक पुरानी इमारत है। अग्निशमन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस इमारत में कोई नहीं रहता। इमारत की निचली मंजिल में रखी लकडि़यों में आग सुलगने से अग्निकांड पेश आया जिसमें एक पुराना सोफा भी जला है। मगर आगजनी की घटना कैसे पेश आई इसके कारणों का पता नहीं चल पाया है। अग्निशमन विभाग को इस घटना की सूचना पांच बजकर पांच मिनट पर मिली। सूचना मिलते ही विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत आग पर काबू पाया। अगर थोड़ी देर होती तो बड़ा हादसा पेश आ सकता था। चूंकि इस पुरानी इमारत के समीप कई अन्य भवन भी थे जो देरी से आग की जद में आ सकते थे।
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नई दिल्ली; भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी-20 इंटरनेशनल सीरीज का तीसरा मुकाबला कल बुधवार 29 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे हेमिल्टन के सेडॉन पार्क में खेला जाएगा । अगर भारत तीसरा टी-20 इंटरनेशनल मैच जीत लेता है, तो वह न्यूजीलैंड की धरती पर इतिहास रच देगा । इस मैच में जीत के साथ भारत पहली बार न्यूजीलैंड की धरती पर कीवियों के खिलाफ द्विपक्षीय टी-20 इंटरनेशनल सीरीज फतह कर लेगा ।
बता दें कि न्यूजीलैंड की धरती पर ये इतिहास रहा है कि भारत की टीम वहां एक भी द्विपक्षीय टी-20 अंतर्राष्ट्रीय सीरीज नहीं जीत पाई है। इससे पहले भी भारत दो टी-20 द्विपक्षीय सीरीज खेल चुका है, इन दोनों ही सीरीज में भारत को न्यूजीलैंड से हारना पड़ा था।
जानकारी के मुताबिक मौजूदा टी-20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 6 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद दूसरे टी-20 मैच में भी 7 विकेट से जीतकर भारत ने न्यूजीलैंड को पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 2-0 से बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय टीम अभी बेहतरीन फॉर्म में है और 2019 वनडे वर्ल्ड कप के बाद उसने जो पांच टी-20 सीरीज खेली हैं उनमें उसने शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें मौजूदा सीरीज भी शामिल है। भारतीय टीम केवल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज नहीं जीत पाई।
हो सकती है कुलदीप यादव की वापसी?
टीम मैनेजमेंट अभी उन खिलाड़ियों के साथ काम कर रहा है जिन्हें सीरीज में अभी तक मैच खेलने का मौका नहीं मिला है। रवि शास्त्री ने वॉशिंगटन सुंदर पर ध्यान दिया जबकि बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ व्यस्त थे। हालांकि बुधवार को होने वाले मैच मे मौका मिलने की संभावना नहीं है।
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नई दिल्ली; भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी-बीस इंटरनेशनल सीरीज का तीसरा मुकाबला कल बुधवार उनतीस जनवरी को दोपहर बारह:तीस बजे हेमिल्टन के सेडॉन पार्क में खेला जाएगा । अगर भारत तीसरा टी-बीस इंटरनेशनल मैच जीत लेता है, तो वह न्यूजीलैंड की धरती पर इतिहास रच देगा । इस मैच में जीत के साथ भारत पहली बार न्यूजीलैंड की धरती पर कीवियों के खिलाफ द्विपक्षीय टी-बीस इंटरनेशनल सीरीज फतह कर लेगा । बता दें कि न्यूजीलैंड की धरती पर ये इतिहास रहा है कि भारत की टीम वहां एक भी द्विपक्षीय टी-बीस अंतर्राष्ट्रीय सीरीज नहीं जीत पाई है। इससे पहले भी भारत दो टी-बीस द्विपक्षीय सीरीज खेल चुका है, इन दोनों ही सीरीज में भारत को न्यूजीलैंड से हारना पड़ा था। जानकारी के मुताबिक मौजूदा टी-बीस सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को छः विकेट से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद दूसरे टी-बीस मैच में भी सात विकेट से जीतकर भारत ने न्यूजीलैंड को पांच मैचों की टी-बीस सीरीज में दो-शून्य से बढ़त हासिल कर ली है। भारतीय टीम अभी बेहतरीन फॉर्म में है और दो हज़ार उन्नीस वनडे वर्ल्ड कप के बाद उसने जो पांच टी-बीस सीरीज खेली हैं उनमें उसने शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें मौजूदा सीरीज भी शामिल है। भारतीय टीम केवल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज नहीं जीत पाई। हो सकती है कुलदीप यादव की वापसी? टीम मैनेजमेंट अभी उन खिलाड़ियों के साथ काम कर रहा है जिन्हें सीरीज में अभी तक मैच खेलने का मौका नहीं मिला है। रवि शास्त्री ने वॉशिंगटन सुंदर पर ध्यान दिया जबकि बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ व्यस्त थे। हालांकि बुधवार को होने वाले मैच मे मौका मिलने की संभावना नहीं है।
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बिहार के दशरथ मांझी का नाम तो आपने सुना ही होगा, ऐसा ही एक जुनूनी व्यक्ति हरदोई में भी है. इसने टीले के अंदर खुरपी से छेद कर तीन मंजिल की हवेली बना दी है.
शाहाबाद निवासी इरफान ने यह काम 10 साल पहले शुरू किया था और अब तक लगातार काम जारी है. इस अनोखी भूल भुलैया को तैयार करने के लिए वह जमीन के अंदर 30 फुट तक खुदाई कर चुके हैं.
इरफान उर्फ पप्पू बाबा खेत के बीच सैकड़ों वर्ष पुराने टीले को खुरपी से खोदकर कई मंजिल महल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.अब तक वह दो मजिल बना चुके हैं और तीसरी पर काम शुरू किया है.
हरदोई के शाहाबाद में बन रहे इरफान के महल में एक मस्जिद भी बनाई गई है. इसमें 12 कमरे हैं और सीढ़ियां तथा गैलरी के साथ पिलर और तिरंगा झंडा मिट्टी भी है.
इरफान ने अपने महल में महीन कारीगरी किया है. अब वह इबादत से लेकर रहना, सोना और खाना पीना भी इसके अंदर ही करते हैं. उन्हें बाहरी दुनिया से ज्यादा वास्ता नहीं है.
इरफान को नई दुनिया का दशरथ मांझी कहा जा रहा है. उसने जीवन भर कुंवारे रहने का प्रण लिया है. उन्हें बस एक ही जुनून है वह यह कि इस हवेली को तैयार किया जाए.
इसी प्रकार का जुनून बिहार के दशरथ ने दिखाया था. अस्पताल जाने के लिए रास्ता नहीं था तो उन्होंने अकेले दम पर पहाड़ काट कर सड़क बना दिया था.
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बिहार के दशरथ मांझी का नाम तो आपने सुना ही होगा, ऐसा ही एक जुनूनी व्यक्ति हरदोई में भी है. इसने टीले के अंदर खुरपी से छेद कर तीन मंजिल की हवेली बना दी है. शाहाबाद निवासी इरफान ने यह काम दस साल पहले शुरू किया था और अब तक लगातार काम जारी है. इस अनोखी भूल भुलैया को तैयार करने के लिए वह जमीन के अंदर तीस फुट तक खुदाई कर चुके हैं. इरफान उर्फ पप्पू बाबा खेत के बीच सैकड़ों वर्ष पुराने टीले को खुरपी से खोदकर कई मंजिल महल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.अब तक वह दो मजिल बना चुके हैं और तीसरी पर काम शुरू किया है. हरदोई के शाहाबाद में बन रहे इरफान के महल में एक मस्जिद भी बनाई गई है. इसमें बारह कमरे हैं और सीढ़ियां तथा गैलरी के साथ पिलर और तिरंगा झंडा मिट्टी भी है. इरफान ने अपने महल में महीन कारीगरी किया है. अब वह इबादत से लेकर रहना, सोना और खाना पीना भी इसके अंदर ही करते हैं. उन्हें बाहरी दुनिया से ज्यादा वास्ता नहीं है. इरफान को नई दुनिया का दशरथ मांझी कहा जा रहा है. उसने जीवन भर कुंवारे रहने का प्रण लिया है. उन्हें बस एक ही जुनून है वह यह कि इस हवेली को तैयार किया जाए. इसी प्रकार का जुनून बिहार के दशरथ ने दिखाया था. अस्पताल जाने के लिए रास्ता नहीं था तो उन्होंने अकेले दम पर पहाड़ काट कर सड़क बना दिया था.
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Unique Christmas Card: 25 दिसंबर को क्रिसमस डे मनाने के लिए लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है।
UP News: लोग अक्सर जानवरों को घरों में पाल लेते हैं। जानवरों के प्रति कई लोगों को लगाव कुछ अलग ही होता है।
World's Longest Food Delivery: वर्तमान समय में ऑनलाइन फूट सर्विस सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
Dog Wedding: हरियाणा के गुरुग्राम में रविवार 13 नवंबर यानी आज होने वाली एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है।
Shocking News: इस साल पूरे देश में 24 अक्टूबर को दीपोत्सव का त्योहार दीवाली मनायी जाएगी।
Chinese Vase: जब भी कभी किसी ऐतिहासिक सामान की निलामी होती है तो उसकी कीमत काफी ज्यादा होती है।
Dahmer: सिनेमा जगत में कई बार रियल लाइफ स्टोरी के आधार पर फिल्में बनती है। ऐसी ही एक सीरीज नेटफ्लिक्स पर खूब चर्चा में है।
Unique Marriage: दो लोग जब एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में रहते हैं तो अक्सर वो शादी का सपना सजाते हैं।
Shocking News: ऑस्ट्रेलिया से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
Girl Kiss Snake: दुनियाभर में केवल पालतू जानवर ही ऐसे हैं, जिन्हें लोग पालते हैं।
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Unique Christmas Card: पच्चीस दिसंबर को क्रिसमस डे मनाने के लिए लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है। UP News: लोग अक्सर जानवरों को घरों में पाल लेते हैं। जानवरों के प्रति कई लोगों को लगाव कुछ अलग ही होता है। World's Longest Food Delivery: वर्तमान समय में ऑनलाइन फूट सर्विस सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। Dog Wedding: हरियाणा के गुरुग्राम में रविवार तेरह नवंबर यानी आज होने वाली एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। Shocking News: इस साल पूरे देश में चौबीस अक्टूबर को दीपोत्सव का त्योहार दीवाली मनायी जाएगी। Chinese Vase: जब भी कभी किसी ऐतिहासिक सामान की निलामी होती है तो उसकी कीमत काफी ज्यादा होती है। Dahmer: सिनेमा जगत में कई बार रियल लाइफ स्टोरी के आधार पर फिल्में बनती है। ऐसी ही एक सीरीज नेटफ्लिक्स पर खूब चर्चा में है। Unique Marriage: दो लोग जब एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में रहते हैं तो अक्सर वो शादी का सपना सजाते हैं। Shocking News: ऑस्ट्रेलिया से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Girl Kiss Snake: दुनियाभर में केवल पालतू जानवर ही ऐसे हैं, जिन्हें लोग पालते हैं।
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वीर अर्जुन संवाददाता चिड़ावा । राजस्थान के सबसे पुराने स्कूलों में से एक चिड़ावा सीनियर सैकेंडरी स्कूल ने षिक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। और इस अवसर पर विद्यालय ने अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री, श्री अषोक गहलोत, मुख्य अतिथि श्रीमती राजश्री बिरला, राज्य सरकार के पतिष्ठित सदस्यों, सोमानी एजुकेषन ट्रस्ट के सदस्यों और इस पतिष्ठित संस्थान के विद्यार्थियों के साथ मनाया। उत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री श्री अषोक गहलोत द्वारा उस सड़क के उद्घाटन से हुई जिसका पुनःनामकरण संस्थान के वास्तुकार सेट मुरलीधर जी सोमानी के नाम पर किया गया। पुनःनामकरण की गई यह सड़क विद्यालय के एक पवेषद्वार की तरप जाती है। उत्सव में उन छात्रों को सम्मानित किया गया जिन्होने शैक्षणिक श्रेष्ठता पाप्त की है और संस्थान का नाम ऊंचा किया है। संस्थान के अतीत और वर्तमान का रिकार्ड ऐसे विद्याार्थियों के शानदार नामों से भरा हुआ है जिन्होने विभिन्न बोर्डों और विष्वविद्यालय परीक्षाओं की मेरिट सूचियों में उत्कृष्ट स्थान पाप्त किए हैं। अरविंद कुमार एक ऐसा ही उदाहरण है, जो राजस्थान विष्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित बी. एससी. की परीक्षा में पथम रहे हैं। इस दिन उपस्थित पूर्व छात्र अपने पुराने संस्थान के इस उत्सव का एक हिस्सा बन कर कापी उत्साहित थे। इस अवसर पर मौजूद, आई. ए. एस. डा. पी. एल. अग्रवाल (बैच 1971), सचिव चतुर्थ वित्त आयोग, राजस्थान सरकार ने कहा, ``अपने पुराने षिक्षा संस्थान (अल्मामेटर) में वापिस आना हमेषा बहुत अच्छा होता है। मुझे संस्थान से बहुत कुछ मिला है क्योंकि इसने मेरा सर्वांगीण विकास करने में मदद की है और सिखाया है कि भीड़ से अलग कैसे दिखा जा सकता है। मैं विद्यार्थियों के सपने पूरे करने में मदद करने के शानदार कार्य के लिए विद्यालय के पबंधन को बधाई देता हूं। "
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वीर अर्जुन संवाददाता चिड़ावा । राजस्थान के सबसे पुराने स्कूलों में से एक चिड़ावा सीनियर सैकेंडरी स्कूल ने षिक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। और इस अवसर पर विद्यालय ने अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री, श्री अषोक गहलोत, मुख्य अतिथि श्रीमती राजश्री बिरला, राज्य सरकार के पतिष्ठित सदस्यों, सोमानी एजुकेषन ट्रस्ट के सदस्यों और इस पतिष्ठित संस्थान के विद्यार्थियों के साथ मनाया। उत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री श्री अषोक गहलोत द्वारा उस सड़क के उद्घाटन से हुई जिसका पुनःनामकरण संस्थान के वास्तुकार सेट मुरलीधर जी सोमानी के नाम पर किया गया। पुनःनामकरण की गई यह सड़क विद्यालय के एक पवेषद्वार की तरप जाती है। उत्सव में उन छात्रों को सम्मानित किया गया जिन्होने शैक्षणिक श्रेष्ठता पाप्त की है और संस्थान का नाम ऊंचा किया है। संस्थान के अतीत और वर्तमान का रिकार्ड ऐसे विद्याार्थियों के शानदार नामों से भरा हुआ है जिन्होने विभिन्न बोर्डों और विष्वविद्यालय परीक्षाओं की मेरिट सूचियों में उत्कृष्ट स्थान पाप्त किए हैं। अरविंद कुमार एक ऐसा ही उदाहरण है, जो राजस्थान विष्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित बी. एससी. की परीक्षा में पथम रहे हैं। इस दिन उपस्थित पूर्व छात्र अपने पुराने संस्थान के इस उत्सव का एक हिस्सा बन कर कापी उत्साहित थे। इस अवसर पर मौजूद, आई. ए. एस. डा. पी. एल. अग्रवाल , सचिव चतुर्थ वित्त आयोग, राजस्थान सरकार ने कहा, ``अपने पुराने षिक्षा संस्थान में वापिस आना हमेषा बहुत अच्छा होता है। मुझे संस्थान से बहुत कुछ मिला है क्योंकि इसने मेरा सर्वांगीण विकास करने में मदद की है और सिखाया है कि भीड़ से अलग कैसे दिखा जा सकता है। मैं विद्यार्थियों के सपने पूरे करने में मदद करने के शानदार कार्य के लिए विद्यालय के पबंधन को बधाई देता हूं। "
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मंगलवार को प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में वापस लौटे अरविंद केजरीवाल ने जीत के बाद हनुमानजी को धन्यवाद दिया। जिसके बाद उनके इस बयान पर राजनीति भी शुरू हो गई।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर अरविंद केजरीवाल से मांग करते हुए कहा कि अब दिल्ली में मदरसों सहित सभी स्कूलों में हनुमान चालीसा का पाठ जरूरी होना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि अरविंद केजरीवाल को जीत की बधाई! निश्चित ही जो हनुमानजी की शरण में आता है उसे आशीर्वाद मिलता है। अब समय आ गया है कि हनुमान चालीसा का पाठ दिल्ली के सभी विद्यालयों, मदरसो सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों में भी जरूरी हो।
विजयवर्गीय ने सवाल किया कि बजरंगबली की कृपा से अब 'दिल्लीवासी' बच्चे क्यों वंचित रहे?
बता दें कि चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद केजरीवाल ने कहा कि आज भगवान हनुमान का दिन है जिन्होंने दिल्ली के लोगों को आशीर्वाद दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि हनुमान जी हमें सही रास्ता दिखाते रहें ताकि हम अगले पांच वर्षों तक लोगों की सेवा करते रहें।
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मंगलवार को प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में वापस लौटे अरविंद केजरीवाल ने जीत के बाद हनुमानजी को धन्यवाद दिया। जिसके बाद उनके इस बयान पर राजनीति भी शुरू हो गई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर अरविंद केजरीवाल से मांग करते हुए कहा कि अब दिल्ली में मदरसों सहित सभी स्कूलों में हनुमान चालीसा का पाठ जरूरी होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अरविंद केजरीवाल को जीत की बधाई! निश्चित ही जो हनुमानजी की शरण में आता है उसे आशीर्वाद मिलता है। अब समय आ गया है कि हनुमान चालीसा का पाठ दिल्ली के सभी विद्यालयों, मदरसो सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों में भी जरूरी हो। विजयवर्गीय ने सवाल किया कि बजरंगबली की कृपा से अब 'दिल्लीवासी' बच्चे क्यों वंचित रहे? बता दें कि चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद केजरीवाल ने कहा कि आज भगवान हनुमान का दिन है जिन्होंने दिल्ली के लोगों को आशीर्वाद दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि हनुमान जी हमें सही रास्ता दिखाते रहें ताकि हम अगले पांच वर्षों तक लोगों की सेवा करते रहें।
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मोदी सरकार पिछले कुछ सालों से बजट बनाने और उसके प्रस्तुतिकरण के तरीके में लगातार परिवर्तन करती हुए उसे बहुत फोकस्ड बनाने की दिशा में काम करती आ रही है. दो तीन सालों से इस बात का भी प्रयास हुआ है कि मंत्रालयों/विभागों का अलग-अलग बजट ब्योरा देने के बजाय बजट को इस तरह तैयार किया जाए कि विभिन्न मंत्रालयों में आपस में भी एक तरह का तालमेल दिखे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया गया वर्ष 2022-23 का बजट इसी दिशा में कई कदम और आगे बढ़ा है. सरकार एक तरफ वित्तीय प्रबंधन की दिशा में नए प्रयोग कर रही है तो दूसरी तरफ एक दूसरे के कामकाज से जुड़े मंत्रालयों को एक ही छतरी के नीचे लाकर एक समन्वित बजट कार्य योजना प्रस्तुत करने का काम भी उसने किया है.
उदाहरण के लिए हम कृषि क्षेत्र को ही ले लें. खेती किसानी का मामला पिछले एक साल देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को मथता रहा है. एक लंबे किसान आंदोलन के बाद सरकार को कृषि क्षेत्र में सुधार के अपने कदम पीछे भी खींचने पड़े थे, लेकिन अगले वित्त वर्ष के बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया को दूसरी तरह से अंजाम देने की कोशिश की है. और ये सुधार एक तरफ जहां प्रक्रियागत हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तौर तरीकों और तकनीक से जुड़े हुए हैं.
हालांकि इस बार कृषि के बजट में कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई है. वर्ष 2021-22 में कृषि का कुल बजट 131475. 19 करोड़ था और इस बार यह कुल 132474. 37 करोड़ रुपए है. यानी बढ़ोतरी सिर्फ 999. 18 करोड़ रुपए की ही हुई है. हां, 2021-22 के संशोधित अनुमान के हिसाब से इसे जरूर ज्यादा कहा जा सकता है, क्योंकि पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान वाला कृषि का बजट 118257. 69 करोड़ रुपए का ही रहा है. इस वर्ष के 132474. 37 करोड़ रुपए के बजट में कृषि और किसान कल्याण के लिए 123960. 75 करोड़ रुपए की राशि रखी गई है, जबकि कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए 8513. 62 करोड़ रुपए का बजट है. सरकार ने हालांकि खेती में शोध और अनुसंधान को नई दिशा देने की कोशिश जरूर की है लेकिन इसके लिए बजट में राशि उतनी ही है जितनी पिछले बजट में थी.
ऐसा लगता है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र में बजट की राशि बढ़ाने के बजाय वहां व्यवस्थागत सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने का मन बनाया है. जैसे सरकार का यह ऐलान करना कि वह फसल की जानकारी लेने, खेतों के मापन और उनमें कीटनाशक आदि के छिड़काव तक के लिए ड्रोन की मदद लेगी. अभी देश के कई राज्यों में ड्रोन की मदद से जमीन का डिजिटल रिकार्ड तैयार करने का काम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है. लेकिन नए बजट में निर्मला सीतारमण ने इसका दायरा और बढ़ाते हुए किसान ड्रोन नाम से नई सेवा किसानों को देने की बात कही है.
इसके साथ ही, सरकार ने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नई तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी और निजी क्षेत्र के कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थओं के बीच तालमेल की दिशा में भी कदम आगे बढ़ाया है. राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वे अपने यहां खेती से संबंधित विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य संस्थाओं में आधुनिक तकनीक और खेती के नए तौर तरीकों पर शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें. सूचना तकनीक का भी कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल कुछ सालों में बहुत बढ़ा है और सरकार शायद चाहती है कि किसानों को इसके जरिये इतना जाग्रत और सक्षम बना दिया जाए कि वो मौसम की मार से बचने से लेकर अपनी फसल को ठीक दामों पर बेचने तक के लिए दलालों और बिचौलियों के भरोसे न रहे.
जैविक खेती पर मोदी सरकार का जोर काफी लंबे समय से रहा है. अब इसमें भी जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है. ऐसा लगता है कि किसानों की आय बढ़ाने के और कोई उपाय कारगर होते न देख सरकार खेती की लागत कम करके परोक्ष रूप से किसानों की आर्थिक हालत को सुधारना चाहती है. इसीलिए मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाने और मोटे अनाज की खपत बढ़ाने के साथ साथ उसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग करने की भी बात कही गई है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दुनिया भर में वर्ष 2023 को मोटे अनाज वर्ष (मिलेट ईयर) के रूप में मनाया जा रहा है.
इन योजनाओं से किसानों को परोक्ष रूप से सुविधा और फायदा दोनों मिल रहा है. यदि सड़कों का और रेल सुविधाओं का खेती के लिहाज से विस्तार होता है तो यह उन किसानों को बहुत बड़ी राहत देगा, जिनकी फसलें और अन्य उत्पाद समय पर परिवहन न हो पाने के कारण पड़े पड़े ही सड़ जाते हैं. इससे एक तरफ जहां जनधन का नुकसान होता है, वहीं किसानों को निजी तौर पर भी बहुत घाटा उठाना पड़ता है. खराब हो जाने वाले उत्पाद की सही समय पर परिवहन की सुविधा और स्थितियां न मिलने के कारण किसान अपनी फसल बिचौलियों को औने पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
कृषि क्षेत्र की एक और बड़ी समस्या उत्पादों के प्रसंस्करण की है. सरकार ने इस दिशा मे ध्यान देते हुए नाबार्ड के जरिये एक ऐसा निवेश कोष बनाने की भी बात कही है जो कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देगा. इस तरह के स्टार्टअप्स किसान उत्पादक संगठनों के साथ मिलकर काम करने के अलावा किसानों को किराए पर आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने और उनकी जरूरत के हिसाब से उन्हें तकनीकी सहयोग प्रदान करने का भी काम करेंगे.
एक और मामला कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का भी है. मौसम की बेरुखी और भूजल स्तर बहुत नीचे चले जाने के कारण पानी की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है. ऐसे में नदी जोड़ योजनाएं काम आ सकती हैं. इस लिहाज से सरकार ने सबसे पहले 44605 करोड़ रुपए लागत की केन-बेतवा परियोजना को मंजूरी दी है. इसके लिए पिछली बार 4300 करोड़ रुपए रखे गए थे और इस बार 1400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इस परियोजना से 9. 08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही 62 लाख लोगों के लिए पेयजल भी मुहैया हो सकेगा. इसके अलावा 103 मेगावाट की हाइड्रो और 27 मेगावाट की सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होगा.
दरअसल, कृषि क्षेत्र में सुधार का दायरा बहुत बड़ा है. ऐसा नहीं है कि देश के किसान समय के साथ नहीं बदले हैं, लेकिन बदलाव की यह प्रक्रिया बहुत धीमी है. इसमें शोध और अनुसंधान के साथ ही तकनीक का बहुत महत्व है. आज भी हमारे अधिकांश कृषि संस्थान परंपरागत रूप से ही कृषि की शिक्षा दे रहे हैं. निजी क्षेत्र की भागीदारी से यदि इन संस्थानों के सिलेबस में बदलाव करके उन्हें आधुनिक तकनीक और सोच से जोड़ा जाता है तो अंततः इसका फायदा समूचे कृषि क्षेत्र को होगा. निर्मला सीतारमण का ताजा बजट इसी दिशा में कदम बढाता प्रतीत होता है.
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मोदी सरकार पिछले कुछ सालों से बजट बनाने और उसके प्रस्तुतिकरण के तरीके में लगातार परिवर्तन करती हुए उसे बहुत फोकस्ड बनाने की दिशा में काम करती आ रही है. दो तीन सालों से इस बात का भी प्रयास हुआ है कि मंत्रालयों/विभागों का अलग-अलग बजट ब्योरा देने के बजाय बजट को इस तरह तैयार किया जाए कि विभिन्न मंत्रालयों में आपस में भी एक तरह का तालमेल दिखे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया गया वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस का बजट इसी दिशा में कई कदम और आगे बढ़ा है. सरकार एक तरफ वित्तीय प्रबंधन की दिशा में नए प्रयोग कर रही है तो दूसरी तरफ एक दूसरे के कामकाज से जुड़े मंत्रालयों को एक ही छतरी के नीचे लाकर एक समन्वित बजट कार्य योजना प्रस्तुत करने का काम भी उसने किया है. उदाहरण के लिए हम कृषि क्षेत्र को ही ले लें. खेती किसानी का मामला पिछले एक साल देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को मथता रहा है. एक लंबे किसान आंदोलन के बाद सरकार को कृषि क्षेत्र में सुधार के अपने कदम पीछे भी खींचने पड़े थे, लेकिन अगले वित्त वर्ष के बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया को दूसरी तरह से अंजाम देने की कोशिश की है. और ये सुधार एक तरफ जहां प्रक्रियागत हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तौर तरीकों और तकनीक से जुड़े हुए हैं. हालांकि इस बार कृषि के बजट में कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई है. वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में कृषि का कुल बजट एक लाख इकतीस हज़ार चार सौ पचहत्तर. उन्नीस करोड़ था और इस बार यह कुल एक लाख बत्तीस हज़ार चार सौ चौहत्तर. सैंतीस करोड़ रुपए है. यानी बढ़ोतरी सिर्फ नौ सौ निन्यानवे. अट्ठारह करोड़ रुपए की ही हुई है. हां, दो हज़ार इक्कीस-बाईस के संशोधित अनुमान के हिसाब से इसे जरूर ज्यादा कहा जा सकता है, क्योंकि पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान वाला कृषि का बजट एक लाख अट्ठारह हज़ार दो सौ सत्तावन. उनहत्तर करोड़ रुपए का ही रहा है. इस वर्ष के एक लाख बत्तीस हज़ार चार सौ चौहत्तर. सैंतीस करोड़ रुपए के बजट में कृषि और किसान कल्याण के लिए एक लाख तेईस हज़ार नौ सौ साठ. पचहत्तर करोड़ रुपए की राशि रखी गई है, जबकि कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए आठ हज़ार पाँच सौ तेरह. बासठ करोड़ रुपए का बजट है. सरकार ने हालांकि खेती में शोध और अनुसंधान को नई दिशा देने की कोशिश जरूर की है लेकिन इसके लिए बजट में राशि उतनी ही है जितनी पिछले बजट में थी. ऐसा लगता है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र में बजट की राशि बढ़ाने के बजाय वहां व्यवस्थागत सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने का मन बनाया है. जैसे सरकार का यह ऐलान करना कि वह फसल की जानकारी लेने, खेतों के मापन और उनमें कीटनाशक आदि के छिड़काव तक के लिए ड्रोन की मदद लेगी. अभी देश के कई राज्यों में ड्रोन की मदद से जमीन का डिजिटल रिकार्ड तैयार करने का काम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है. लेकिन नए बजट में निर्मला सीतारमण ने इसका दायरा और बढ़ाते हुए किसान ड्रोन नाम से नई सेवा किसानों को देने की बात कही है. इसके साथ ही, सरकार ने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नई तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी और निजी क्षेत्र के कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थओं के बीच तालमेल की दिशा में भी कदम आगे बढ़ाया है. राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वे अपने यहां खेती से संबंधित विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य संस्थाओं में आधुनिक तकनीक और खेती के नए तौर तरीकों पर शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें. सूचना तकनीक का भी कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल कुछ सालों में बहुत बढ़ा है और सरकार शायद चाहती है कि किसानों को इसके जरिये इतना जाग्रत और सक्षम बना दिया जाए कि वो मौसम की मार से बचने से लेकर अपनी फसल को ठीक दामों पर बेचने तक के लिए दलालों और बिचौलियों के भरोसे न रहे. जैविक खेती पर मोदी सरकार का जोर काफी लंबे समय से रहा है. अब इसमें भी जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है. ऐसा लगता है कि किसानों की आय बढ़ाने के और कोई उपाय कारगर होते न देख सरकार खेती की लागत कम करके परोक्ष रूप से किसानों की आर्थिक हालत को सुधारना चाहती है. इसीलिए मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाने और मोटे अनाज की खपत बढ़ाने के साथ साथ उसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग करने की भी बात कही गई है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दुनिया भर में वर्ष दो हज़ार तेईस को मोटे अनाज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. इन योजनाओं से किसानों को परोक्ष रूप से सुविधा और फायदा दोनों मिल रहा है. यदि सड़कों का और रेल सुविधाओं का खेती के लिहाज से विस्तार होता है तो यह उन किसानों को बहुत बड़ी राहत देगा, जिनकी फसलें और अन्य उत्पाद समय पर परिवहन न हो पाने के कारण पड़े पड़े ही सड़ जाते हैं. इससे एक तरफ जहां जनधन का नुकसान होता है, वहीं किसानों को निजी तौर पर भी बहुत घाटा उठाना पड़ता है. खराब हो जाने वाले उत्पाद की सही समय पर परिवहन की सुविधा और स्थितियां न मिलने के कारण किसान अपनी फसल बिचौलियों को औने पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं. कृषि क्षेत्र की एक और बड़ी समस्या उत्पादों के प्रसंस्करण की है. सरकार ने इस दिशा मे ध्यान देते हुए नाबार्ड के जरिये एक ऐसा निवेश कोष बनाने की भी बात कही है जो कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देगा. इस तरह के स्टार्टअप्स किसान उत्पादक संगठनों के साथ मिलकर काम करने के अलावा किसानों को किराए पर आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने और उनकी जरूरत के हिसाब से उन्हें तकनीकी सहयोग प्रदान करने का भी काम करेंगे. एक और मामला कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का भी है. मौसम की बेरुखी और भूजल स्तर बहुत नीचे चले जाने के कारण पानी की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है. ऐसे में नदी जोड़ योजनाएं काम आ सकती हैं. इस लिहाज से सरकार ने सबसे पहले चौंतालीस हज़ार छः सौ पाँच करोड़ रुपए लागत की केन-बेतवा परियोजना को मंजूरी दी है. इसके लिए पिछली बार चार हज़ार तीन सौ करोड़ रुपए रखे गए थे और इस बार एक हज़ार चार सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इस परियोजना से नौ. आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही बासठ लाख लोगों के लिए पेयजल भी मुहैया हो सकेगा. इसके अलावा एक सौ तीन मेगावाट की हाइड्रो और सत्ताईस मेगावाट की सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होगा. दरअसल, कृषि क्षेत्र में सुधार का दायरा बहुत बड़ा है. ऐसा नहीं है कि देश के किसान समय के साथ नहीं बदले हैं, लेकिन बदलाव की यह प्रक्रिया बहुत धीमी है. इसमें शोध और अनुसंधान के साथ ही तकनीक का बहुत महत्व है. आज भी हमारे अधिकांश कृषि संस्थान परंपरागत रूप से ही कृषि की शिक्षा दे रहे हैं. निजी क्षेत्र की भागीदारी से यदि इन संस्थानों के सिलेबस में बदलाव करके उन्हें आधुनिक तकनीक और सोच से जोड़ा जाता है तो अंततः इसका फायदा समूचे कृषि क्षेत्र को होगा. निर्मला सीतारमण का ताजा बजट इसी दिशा में कदम बढाता प्रतीत होता है.
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अभिनेत्री मल्लिका शेरावत ने अमेरिका के पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनसे मुलाकात करना सम्मान और सौभाग्य की बात है. 41 वर्षीया अभिनेत्री ने ओबामा के साथ अपनी एक सेल्फी ट्वीट की. इसमें दोनों मुस्कुराते नजर आ रहे हैं. ओबामा 4 अगस्त को 57 वर्ष के हो गए.
तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, "बराक ओबामा को जन्मदिन की बधाई. आपसे मिलना सौभाग्य और सम्मान की बात है. "
इससे पहले मल्लिका ने वर्ष 2011 में लॉस एंजेलिस में टी पार्टी के दौरान ओबामा से मुलाकात की थी. 'ख्वाहिश' और 'मर्डर' जैसी फिल्मों में बोल्ड अंदाज में नजर आ चुकीं अभिनेत्री को इससे पहले वर्ष 2015 की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' में देखा गया था.
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अभिनेत्री मल्लिका शेरावत ने अमेरिका के पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनसे मुलाकात करना सम्मान और सौभाग्य की बात है. इकतालीस वर्षीया अभिनेत्री ने ओबामा के साथ अपनी एक सेल्फी ट्वीट की. इसमें दोनों मुस्कुराते नजर आ रहे हैं. ओबामा चार अगस्त को सत्तावन वर्ष के हो गए. तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, "बराक ओबामा को जन्मदिन की बधाई. आपसे मिलना सौभाग्य और सम्मान की बात है. " इससे पहले मल्लिका ने वर्ष दो हज़ार ग्यारह में लॉस एंजेलिस में टी पार्टी के दौरान ओबामा से मुलाकात की थी. 'ख्वाहिश' और 'मर्डर' जैसी फिल्मों में बोल्ड अंदाज में नजर आ चुकीं अभिनेत्री को इससे पहले वर्ष दो हज़ार पंद्रह की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' में देखा गया था.
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खाते खाते वह बोला, "पोआना पड़ा । "
सुभद्रा ने हाथ रोक लिया और उठ कर बाहर चली गयी। मन में चाता, यह क्यों झगड़े का प्रश्न उठाता है। हार-जीत का सवाल बीच में रखना इतना ज़रूरी क्यों हो ?
साँझ को स्वामी जब लौटे तो वह बोली, "वह कब तक यहाँ
रहेंगे ?"
"कब तक ?"
"सुभद्रा, उसका कुछ निश्चित नहीं। अगले महीने तक उसके यहाँ 'एँगेजमेन्ट्स' हैं । इसके बाद ......... * "
सुभद्रा चुप रह गयी । आगे कुछ दिनों तक मीटिंग और सभा का ऐसा ताँता बँधा रहा कि सुभद्रा और उसके बीच काग़ज, स्कीमें और सभाएँ रहीं। पन्द्रह दिन बाद, एक दिन सुबह, उसकी नींद टूटी तो देखा, वह पलंग के पास खड़ा था। सुभद्रा अचकचाती उठी । 'धोती का पल्ला सिर पर रख, उठती-संवाँरती बोली, "बैठो।"
वह चुपचाप खड़ा ही रहा। फिर, एकाएक बोला, "आप नाराज़ हैं, भाभी ? १५
"नाराज़ ? " वह मन-ही-मन गुनगुनायी और चुप रही । "भाभी !"
"क्यों मुझे लाचार कर रहे हैं.
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खाते खाते वह बोला, "पोआना पड़ा । " सुभद्रा ने हाथ रोक लिया और उठ कर बाहर चली गयी। मन में चाता, यह क्यों झगड़े का प्रश्न उठाता है। हार-जीत का सवाल बीच में रखना इतना ज़रूरी क्यों हो ? साँझ को स्वामी जब लौटे तो वह बोली, "वह कब तक यहाँ रहेंगे ?" "कब तक ?" "सुभद्रा, उसका कुछ निश्चित नहीं। अगले महीने तक उसके यहाँ 'एँगेजमेन्ट्स' हैं । इसके बाद ......... * " सुभद्रा चुप रह गयी । आगे कुछ दिनों तक मीटिंग और सभा का ऐसा ताँता बँधा रहा कि सुभद्रा और उसके बीच काग़ज, स्कीमें और सभाएँ रहीं। पन्द्रह दिन बाद, एक दिन सुबह, उसकी नींद टूटी तो देखा, वह पलंग के पास खड़ा था। सुभद्रा अचकचाती उठी । 'धोती का पल्ला सिर पर रख, उठती-संवाँरती बोली, "बैठो।" वह चुपचाप खड़ा ही रहा। फिर, एकाएक बोला, "आप नाराज़ हैं, भाभी ? पंद्रह "नाराज़ ? " वह मन-ही-मन गुनगुनायी और चुप रही । "भाभी !" "क्यों मुझे लाचार कर रहे हैं.
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मिर्जापुर 3 समेत इन सीरीज के लिए करना होगा कितना इंतजार?
अमेजन प्राइम वीडियो का सीरीज मिर्जापुर 3 का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
रिपोर्ट्स की मानें तो मिर्जापुर 3 इसी साल रिलीज होने वाली है।
द फैमिली मैन 3 की शूटिंग इस साल तक खत्म हो जाएगी।
बताया जा रहा है कि यह सीरीज साल 2024 में रिलीज होगी।
पंचायत 3 की रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है।
बताया जा रहा है कि यह सीरीज भी अगले साल अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।
सुष्मिता सेन की सीरीज आर्या 3 की शूटिंग पूरी हो गई है।
रिपोर्ट्स की मानें तो यह सीरीज इसी साल रिलीज होगी।
अगली वेब स्टोरी देखें.
Thanks For Reading!
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मिर्जापुर तीन समेत इन सीरीज के लिए करना होगा कितना इंतजार? अमेजन प्राइम वीडियो का सीरीज मिर्जापुर तीन का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे है। रिपोर्ट्स की मानें तो मिर्जापुर तीन इसी साल रिलीज होने वाली है। द फैमिली मैन तीन की शूटिंग इस साल तक खत्म हो जाएगी। बताया जा रहा है कि यह सीरीज साल दो हज़ार चौबीस में रिलीज होगी। पंचायत तीन की रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि यह सीरीज भी अगले साल अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। सुष्मिता सेन की सीरीज आर्या तीन की शूटिंग पूरी हो गई है। रिपोर्ट्स की मानें तो यह सीरीज इसी साल रिलीज होगी। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
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ZIM vs USA: विश्व कप 2023 के क्वालीफायर मुकाबले ज़िम्बाब्वे में खेले जा रहे हैं. जिसमें कुल 10 टीमों ने हिस्सा लिया है. 26 जून को ज़िम्बाब्वे बनाम यूएसए (ZIM vs USA) के बीच मैच खेला गया. जिसमें यूएसए की ओर से खेलते हुए भारतीय मूल के गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने धमाकेदार गेंदबाज़ी की. उन्होंने इस मैच में पहला विकेट लेने के बाद बेहतरीन अंदाज़ में जश्न मनाया जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. क्रिकेट के गलियारों में उनका सेलिब्रेशन चर्चा का विषय बना हुआ है.
दरअसल इस मैच में यूएसए (ZIM vs USA) की टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाज़ी करने का फैसला किया था. जसदीप सिंह ने इस मैच में अपना पहला शिकार ज़िम्बाब्वे के सलामी बल्लेबाज़ मासूम कैया को बनाया. जिसके बाद उन्होंने बेहतरीन अंदाज़ में जश्न मनाया. अब उनका ये वीडियो आईसीसी ने अपने आधिकारिक हैंडल से साझा किया है जिसमें वह भारतीय मूल के इस गेंदबाज़ ने हाथों को घुमाकर अलग अंदाज़ में जश्न मनाते हुए दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि मासूम कैया को उन्होंने 32 रन के स्कोर पर पवेलियन की राह दिखाई.
दरअसल क्वालीफायर मुकाबले में ज़िम्बाब्वे की टीम शानदार खेल दिखा रही है. ऐसे में यूएसए के तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने सलामी जोड़ी को तोड़ने का काम किया था. उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी के दौरान सलामी बल्लेबाज़ मासूम कैया को शॉट खेलने का लालच दिया और वह फाइन लेग की दिशा में कैच आउट हो गए. जिसके बाद अमेरिकी तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने अपना दाएं हाथ को तेज़ी के साथ कई बार घुमाकर भरतीय अंदाज में जश्न मानाया. अब उनका सेलिब्रेशन वीडियो वायरल हो रहा है. लेकिन ज़िम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने जसदीप सिंह काफी महेंगे साबित हुए हैं। इस मुकाबले में उन्होनें 10 ओवर में 97 रन लुटाएं। ओर इसे में गेंदबाज द्वारा भरतीय अंदाज में जश्न मनाने से भरतीय फैंस काफी नाराज हैं.
भारतीय मूल के तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह का जन्म अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ था. 30 साल के इस गेंदबाज़ ने यूएसए की ओर से अब तक 23 वनडे मुकाबले में 24 विकेट को अपने नाम किया है. इस दौरान उन्होंने 33. 50 की औसत और 4. 87 की बेहतरीन इकॉनमी के साथ 804 रन खर्च किए हैं. हालांकि टी-20 क्रिकेट में उनके पास ज्यादा अनुभव नहीं है. उन्होंने 2 टी-20 मैच में 10. 17 की इकॉनमी रेट के साथ 3 विकेट हासिल किए हैं.
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ZIM vs USA: विश्व कप दो हज़ार तेईस के क्वालीफायर मुकाबले ज़िम्बाब्वे में खेले जा रहे हैं. जिसमें कुल दस टीमों ने हिस्सा लिया है. छब्बीस जून को ज़िम्बाब्वे बनाम यूएसए के बीच मैच खेला गया. जिसमें यूएसए की ओर से खेलते हुए भारतीय मूल के गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने धमाकेदार गेंदबाज़ी की. उन्होंने इस मैच में पहला विकेट लेने के बाद बेहतरीन अंदाज़ में जश्न मनाया जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. क्रिकेट के गलियारों में उनका सेलिब्रेशन चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल इस मैच में यूएसए की टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाज़ी करने का फैसला किया था. जसदीप सिंह ने इस मैच में अपना पहला शिकार ज़िम्बाब्वे के सलामी बल्लेबाज़ मासूम कैया को बनाया. जिसके बाद उन्होंने बेहतरीन अंदाज़ में जश्न मनाया. अब उनका ये वीडियो आईसीसी ने अपने आधिकारिक हैंडल से साझा किया है जिसमें वह भारतीय मूल के इस गेंदबाज़ ने हाथों को घुमाकर अलग अंदाज़ में जश्न मनाते हुए दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि मासूम कैया को उन्होंने बत्तीस रन के स्कोर पर पवेलियन की राह दिखाई. दरअसल क्वालीफायर मुकाबले में ज़िम्बाब्वे की टीम शानदार खेल दिखा रही है. ऐसे में यूएसए के तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने सलामी जोड़ी को तोड़ने का काम किया था. उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी के दौरान सलामी बल्लेबाज़ मासूम कैया को शॉट खेलने का लालच दिया और वह फाइन लेग की दिशा में कैच आउट हो गए. जिसके बाद अमेरिकी तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह ने अपना दाएं हाथ को तेज़ी के साथ कई बार घुमाकर भरतीय अंदाज में जश्न मानाया. अब उनका सेलिब्रेशन वीडियो वायरल हो रहा है. लेकिन ज़िम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने जसदीप सिंह काफी महेंगे साबित हुए हैं। इस मुकाबले में उन्होनें दस ओवर में सत्तानवे रन लुटाएं। ओर इसे में गेंदबाज द्वारा भरतीय अंदाज में जश्न मनाने से भरतीय फैंस काफी नाराज हैं. भारतीय मूल के तेज़ गेंदबाज़ जसदीप सिंह का जन्म अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ था. तीस साल के इस गेंदबाज़ ने यूएसए की ओर से अब तक तेईस वनडे मुकाबले में चौबीस विकेट को अपने नाम किया है. इस दौरान उन्होंने तैंतीस. पचास की औसत और चार. सत्तासी की बेहतरीन इकॉनमी के साथ आठ सौ चार रन खर्च किए हैं. हालांकि टी-बीस क्रिकेट में उनके पास ज्यादा अनुभव नहीं है. उन्होंने दो टी-बीस मैच में दस. सत्रह की इकॉनमी रेट के साथ तीन विकेट हासिल किए हैं.
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Don't Miss!
हिमेश कोई जादू टोना जानते हैं क्या? अरे नही बात कुछ और ही है । उनकी सफलता के पीछे उनके 11 साल के बेटे स्वयम का हाथ है जिसे वे बेटे से ज्यादा अपना दोस्त समझते है।
हिमेश मानते हैं कि उनका बेटा उनके लिये बहुत भाग्यशाली है और उसकी वजह से ही उसकी फिल्म हिट होती है। हिमेश ने फिल्म कर्ज्ज्ज को देखने के लिये आमंत्रित मेहमानो की लंबी सूची तैयार की।
इसमें उन्होंने मूल कर्ज के कलाकार और निर्माता जैसे सुभाष घई, ऋषि कपूर, टीना अंबानी, सिमी ग्रेवाल और राज किरण आदि को भी आमंत्रित किया लेकिन जिस व्यक्ति को उसने अपनी सूची में सबसे आगे रखा, वह उनका अपना बेटा स्वयम है।
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Don't Miss! हिमेश कोई जादू टोना जानते हैं क्या? अरे नही बात कुछ और ही है । उनकी सफलता के पीछे उनके ग्यारह साल के बेटे स्वयम का हाथ है जिसे वे बेटे से ज्यादा अपना दोस्त समझते है। हिमेश मानते हैं कि उनका बेटा उनके लिये बहुत भाग्यशाली है और उसकी वजह से ही उसकी फिल्म हिट होती है। हिमेश ने फिल्म कर्ज्ज्ज को देखने के लिये आमंत्रित मेहमानो की लंबी सूची तैयार की। इसमें उन्होंने मूल कर्ज के कलाकार और निर्माता जैसे सुभाष घई, ऋषि कपूर, टीना अंबानी, सिमी ग्रेवाल और राज किरण आदि को भी आमंत्रित किया लेकिन जिस व्यक्ति को उसने अपनी सूची में सबसे आगे रखा, वह उनका अपना बेटा स्वयम है।
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अमेरिका और ईरान के मध्य साल 2015 में हुई परमाणु संधि टूटने के बाद दोनों राष्ट्रों की तल्खियाँ बढ़ गयी है। ईरान ने कहा कि रक्षा क्षेत्रों में मजबूती के लिए वह मिसाइल परिक्षण जारी रखेंगे और अमेरिका के यूएन के कानून का उल्लंघन करने के आरोपों को खारिज किया है। अमेरिका ने तहरान पर आरोप लगाया था कि युद्ध के लिए कई स्तरों पर मिसाइल परिक्षण किया जा रहा है।
अमेरिकी राज्य सचिव ने शनिवार को कहा था कि ईरान मीडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल का परिक्षण कर रहा है जो साल 2015 में हुई अंतर्राष्ट्रीय संधि का उल्लंघन हैं, जिससे अमेरिका बाहर निकल चुका है। ईरान के सैन्य बल के प्रवक्ते ने कहा कि मिसाइल परिक्षण देश की रक्षा और निवारण के लिए किया जा रहा है और हम इसे जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि हम मिसाइल परिक्षण और विकास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा यह बातचीत के स्तर से बहार है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुदा मुद्दा है, जिसके लिए हमें किसी देश की अनुमति की जरुरत नहीं है।
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ट्वीट कर कहा था कि इसरान ने अभी बैलिस्टिक मिसाइल का परिक्षण किया है जो यूरोप और इजराइल तक निशाना मारने क क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह भड़काऊ रवैया बिलकुल भी बर्दास्त नहीं किया जायेगा।
ईरानी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि यह हमेर रक्षा के लिए हैं और कोई भी सुरक्षा परिषद् हमें मिसाइल कार्यक्रम और मिसाइल परिक्षण करने पर रोक नहीं लगा सकता है। विदेश मंत्री बहराम कासमी ने कहा कि अमेरिका प्रस्ताव की बात करता है, बल्कि उसने ही एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से इस संधि के अलग होकर उल्लंघन किया है बल्कि दूसरों को भी इसका उल्लंघन करने लिए उकसाया है।
मई में डोनाल्ड ट्रम्प ने साल 2015 में हुई परमाणु संधि को तोड़ दिया था और ईरान पर वापस सभी प्रतिबन्ध थोप दिए थे। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है और सीरिया, यमन, इराक व लेबनान में हथियारबन्दों का समर्थन कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि ईरान समर्थित सीरिया सरकार के खिलाफ जंग के लिए वह चरमपंथी समूहों को हथियार मुहैया कर रहा है। जावेद ज़रीफ़ ने ट्वीटर पर कहा कि अमेरिका अल कायदा और आईएसआईएस आतंकी समूहों को भी हथियार मुहैया करता है। ब्रिटेन के विदेश सचिव ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल के परिक्षण से उनकी सरकार काफी चिंतित हैं।
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अमेरिका और ईरान के मध्य साल दो हज़ार पंद्रह में हुई परमाणु संधि टूटने के बाद दोनों राष्ट्रों की तल्खियाँ बढ़ गयी है। ईरान ने कहा कि रक्षा क्षेत्रों में मजबूती के लिए वह मिसाइल परिक्षण जारी रखेंगे और अमेरिका के यूएन के कानून का उल्लंघन करने के आरोपों को खारिज किया है। अमेरिका ने तहरान पर आरोप लगाया था कि युद्ध के लिए कई स्तरों पर मिसाइल परिक्षण किया जा रहा है। अमेरिकी राज्य सचिव ने शनिवार को कहा था कि ईरान मीडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल का परिक्षण कर रहा है जो साल दो हज़ार पंद्रह में हुई अंतर्राष्ट्रीय संधि का उल्लंघन हैं, जिससे अमेरिका बाहर निकल चुका है। ईरान के सैन्य बल के प्रवक्ते ने कहा कि मिसाइल परिक्षण देश की रक्षा और निवारण के लिए किया जा रहा है और हम इसे जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि हम मिसाइल परिक्षण और विकास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा यह बातचीत के स्तर से बहार है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुदा मुद्दा है, जिसके लिए हमें किसी देश की अनुमति की जरुरत नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ट्वीट कर कहा था कि इसरान ने अभी बैलिस्टिक मिसाइल का परिक्षण किया है जो यूरोप और इजराइल तक निशाना मारने क क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह भड़काऊ रवैया बिलकुल भी बर्दास्त नहीं किया जायेगा। ईरानी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि यह हमेर रक्षा के लिए हैं और कोई भी सुरक्षा परिषद् हमें मिसाइल कार्यक्रम और मिसाइल परिक्षण करने पर रोक नहीं लगा सकता है। विदेश मंत्री बहराम कासमी ने कहा कि अमेरिका प्रस्ताव की बात करता है, बल्कि उसने ही एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से इस संधि के अलग होकर उल्लंघन किया है बल्कि दूसरों को भी इसका उल्लंघन करने लिए उकसाया है। मई में डोनाल्ड ट्रम्प ने साल दो हज़ार पंद्रह में हुई परमाणु संधि को तोड़ दिया था और ईरान पर वापस सभी प्रतिबन्ध थोप दिए थे। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है और सीरिया, यमन, इराक व लेबनान में हथियारबन्दों का समर्थन कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि ईरान समर्थित सीरिया सरकार के खिलाफ जंग के लिए वह चरमपंथी समूहों को हथियार मुहैया कर रहा है। जावेद ज़रीफ़ ने ट्वीटर पर कहा कि अमेरिका अल कायदा और आईएसआईएस आतंकी समूहों को भी हथियार मुहैया करता है। ब्रिटेन के विदेश सचिव ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल के परिक्षण से उनकी सरकार काफी चिंतित हैं।
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जरा सोचिए, क्या होगा कि अगर आप बस अपनी site पे काम करते जाएँ और आपको यह बताने वाला कोई न हो कि आप जो कर रहे हैं उससे आपकी साइट पर अच्छा असर पड रहा है या फिर उससे आपकी साइट नीचे जा रही है?
शायद इस situation में हममें से ज्यादातर लोग confused रहेंगे और हो सकता है कि शायद कई लोग तो blogging छोड़ ही दें.
इसी काम में हमारी मदद करने के लिए यानि हमें यह बताने के लिए कि हम अपनी साइट पर कितना काम कर रहे हैं और हमें अभी कितना और काम करने की जरूरत है, कई SEO कंपनियों ने अपने parameters बनाएँ हैं जिनमें से DA, PA, Alexa Rank, Page Rank और Moz Rank सबसे ज्यादा popular हैं।
इस आर्टिकल में जिस SEO Metric के बारे में हम बात करने वाले हैं वो है- मोज़ रैंक (Moz Rank). तो चलिए जानते हैं कि मोज़ रैंक क्या है और यह आपकी साइट के क्यों मायने रखती है।
वही पढ़ें जो आप पढ़ना चाहते हैं..
1. मोज़ रैंक क्या है? (What is MozRank of a website):
मोज़ रैंक बताती है कि आपकी साइट (या पेज) को जो backlink मिले हैं वे कितने शानदार हैं और इन लिंकों के आधार पर बनी आपकी linking profile के हिसाब से मोज़ आपकी साइट की popularity decide करता है और आपको moz rank देता है।
मोज रैंक कुछ-कुछ गूगल की Page Rank (PR) के जैसे ही काम करती है। जब से गूगल ने पेज रैंक को publicly बंद करने का फैसला किया है तब से Moz Rank की लोकप्रियता में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है।
2. मोज़ रैंक के फ़ैक्टर्स (Moz Rank Determining Factors):
- मोज़ रैंक mainly आपकी साइट की linking profile पर निर्भर करती हैं। जितनी balanced और अच्छी आपकी linking (backlink) profile होती है उतनी ही अच्छी आपकी मोज़ रैंक मानी जाती है।
- लिंकों की संख्या उतनी ज्यादा मायने नहीं रखती है जितनी कि लिंकों की quality. और मोज़ रैंक निर्धारित करते वक्त भी links की गुणवत्ता मायने रखती है।
- आपको जिस साइट से लिंक मिला है उसकी link प्रोफ़ाइल क्या है यह भी मोज़ रैंक में बहुत अधिक मायने रखता है।
3. अच्छी मोज़ रैंक कितनी होती है (What is good Moz Rank):
4. मोज़ रैंक कैसे चेक करें? (How to check Moz Rank):
5. मोज़ रैंक के जैसी ही अन्य रैंकिंग स्केल (Similar to Moz Rank):
6. साइट की मोज़ रैंक कैसे बढ़ाएँ (How to increase Moz Rank):
- अपनी link profile को balance करें यानि no follow और do follow दोनों तरह के लिंकों पर बराबर ध्यान दें।
- लिंकों की संख्या से ज्यादा लिंकों की quality पर दें। क्वालिटी ज्यादा matter करती है।
- अपनी साइट पर बने हानिकारक (toxic/bad) लिंक्स को हटाने का कोशिश कीजिए।
- आपको जिस साइट से backlink मिल रहा है उसकी quality क्या है इससे भी moz rank पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए अच्छी साइटों से link बनाएँ।
मोज़ रैंक, डोमेन अथॉरिटी से ज्यादा मायने रखने वाली metric नहीं है इसलिए इसपे ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। डोमेन अथॉरिटी आपकी साइट के बारे में ज्यादा अच्छी जानकारी देती है इसलिए उसपे अधिक ध्यान दीजिए और उसके हिसाब से अपनी साइट को optimize कीजिए। हालांकि अपनी साइट के backlinks के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए Moz Rank, डोमेन अथॉरिटी से ज्यादा अच्छी है।
तो दोस्तों यही था "मोज़ रैंक के बारे में जानकारी /Information About Moz Rank Hindi" पर हमारी आज की पोस्ट। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें comment के माध्यम से जरूर बताएं और आपका कोई सवाल हो तो उसे भी जरूर पूछें। हमसे facebook पर जुड़ें ताकि आपको नई post की update मिलती रहे।
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• ब्लॉगिंग पुस्तकालय- ब्लॉगिंग के बारे में सारी बातें!
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जरा सोचिए, क्या होगा कि अगर आप बस अपनी site पे काम करते जाएँ और आपको यह बताने वाला कोई न हो कि आप जो कर रहे हैं उससे आपकी साइट पर अच्छा असर पड रहा है या फिर उससे आपकी साइट नीचे जा रही है? शायद इस situation में हममें से ज्यादातर लोग confused रहेंगे और हो सकता है कि शायद कई लोग तो blogging छोड़ ही दें. इसी काम में हमारी मदद करने के लिए यानि हमें यह बताने के लिए कि हम अपनी साइट पर कितना काम कर रहे हैं और हमें अभी कितना और काम करने की जरूरत है, कई SEO कंपनियों ने अपने parameters बनाएँ हैं जिनमें से DA, PA, Alexa Rank, Page Rank और Moz Rank सबसे ज्यादा popular हैं। इस आर्टिकल में जिस SEO Metric के बारे में हम बात करने वाले हैं वो है- मोज़ रैंक . तो चलिए जानते हैं कि मोज़ रैंक क्या है और यह आपकी साइट के क्यों मायने रखती है। वही पढ़ें जो आप पढ़ना चाहते हैं.. एक. मोज़ रैंक क्या है? : मोज़ रैंक बताती है कि आपकी साइट को जो backlink मिले हैं वे कितने शानदार हैं और इन लिंकों के आधार पर बनी आपकी linking profile के हिसाब से मोज़ आपकी साइट की popularity decide करता है और आपको moz rank देता है। मोज रैंक कुछ-कुछ गूगल की Page Rank के जैसे ही काम करती है। जब से गूगल ने पेज रैंक को publicly बंद करने का फैसला किया है तब से Moz Rank की लोकप्रियता में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है। दो. मोज़ रैंक के फ़ैक्टर्स : - मोज़ रैंक mainly आपकी साइट की linking profile पर निर्भर करती हैं। जितनी balanced और अच्छी आपकी linking profile होती है उतनी ही अच्छी आपकी मोज़ रैंक मानी जाती है। - लिंकों की संख्या उतनी ज्यादा मायने नहीं रखती है जितनी कि लिंकों की quality. और मोज़ रैंक निर्धारित करते वक्त भी links की गुणवत्ता मायने रखती है। - आपको जिस साइट से लिंक मिला है उसकी link प्रोफ़ाइल क्या है यह भी मोज़ रैंक में बहुत अधिक मायने रखता है। तीन. अच्छी मोज़ रैंक कितनी होती है : चार. मोज़ रैंक कैसे चेक करें? : पाँच. मोज़ रैंक के जैसी ही अन्य रैंकिंग स्केल : छः. साइट की मोज़ रैंक कैसे बढ़ाएँ : - अपनी link profile को balance करें यानि no follow और do follow दोनों तरह के लिंकों पर बराबर ध्यान दें। - लिंकों की संख्या से ज्यादा लिंकों की quality पर दें। क्वालिटी ज्यादा matter करती है। - अपनी साइट पर बने हानिकारक लिंक्स को हटाने का कोशिश कीजिए। - आपको जिस साइट से backlink मिल रहा है उसकी quality क्या है इससे भी moz rank पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए अच्छी साइटों से link बनाएँ। मोज़ रैंक, डोमेन अथॉरिटी से ज्यादा मायने रखने वाली metric नहीं है इसलिए इसपे ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। डोमेन अथॉरिटी आपकी साइट के बारे में ज्यादा अच्छी जानकारी देती है इसलिए उसपे अधिक ध्यान दीजिए और उसके हिसाब से अपनी साइट को optimize कीजिए। हालांकि अपनी साइट के backlinks के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए Moz Rank, डोमेन अथॉरिटी से ज्यादा अच्छी है। तो दोस्तों यही था "मोज़ रैंक के बारे में जानकारी /Information About Moz Rank Hindi" पर हमारी आज की पोस्ट। यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें comment के माध्यम से जरूर बताएं और आपका कोई सवाल हो तो उसे भी जरूर पूछें। हमसे facebook पर जुड़ें ताकि आपको नई post की update मिलती रहे। 📚 READ MORE POSTS: • ब्लॉगिंग पुस्तकालय- ब्लॉगिंग के बारे में सारी बातें!
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शरीर पर मुंहासों का उठ जाना एक आम बात होती है लेकिन महिला इन मुहासों के कारण चिंतित हो जाती हैं। खासतौर पर अगर यह पूरे शरीर में फैलने लगे। लेकिन यहंा हम आपको बताने वाले हैं कि इन मुहासे या एक्ने से खबराइये नहीं इन्हे अपने शरीर से दूर भगाइये।
एक्ने या मुंहासे की परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए यहां हम आपको कुछ घुरेलु उपाय से अवगत करा रहे हैं। सबसे पहले तो आपको टाइट फिटिंग वाले कपड़े नहीं पहनने चाहिए कयोंकि ऐसे कपड़े आपकी त्वचा को सांस नहीं लेने देते और फिर बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं, जिससे एक्ने होते हैं।
एप्पल साइडर वेनिगर सिरका एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकने में मददगार है। साथ ही यह एक्ने से पैदा होने वाले शरीर पर लाल चकत्तों को कम करता है और त्वचा को साफ रखने में मदद करता है।
ऑइली स्किन की वजह से एक्ने होते हैं। तो अगर शरीर पर ऐसी चीज़ लगाएं जो ऑइल को सोख ले और पोर्स को साफ करे। ओटमील से त्वचा को स्क्रब करें और शरीर को गंदगी तथा तेल से राहत दिलाएं।
टी ट्री ऑइल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो एक्ने का खात्मा कर देते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं, तो संक्रमण से भी छुटकारा मिल जाता है।
चुटकीभर बेकिंग सोडा आपकी स्किन से एक्ने हटा सकता है। बस बेकिंग सोडा को थोड़े से पानी में घोल कर पेस्ट बनाएं और पीठ पर लगाएं। इससे एक्नें भी साफ होंगे और दाग धब्बे भी साफ हो जाएंगे।
दालचीनी एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया का खात्मा करती है। शहद स्किन को नम कर के उस पर से गंदगी, तेल और पोर्स को साफ करती है।
एक्ने से त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजलाहट, संक्रमण और सूजन हो जाती है, जिसे इप्सोम सॉल्ट दूर करता है। आपको इस नमक से नहाना चाहिये क्योंकि यह शरीर के कुछ एंजाइम्स को एक्टिवेट कर के विटामिन डी, पोटैशियम और जिंक को शरीर में सोखने में मदद करता है, जिससे त्वचा पर चमक आती है और त्वचा की हालत सुधरती है।
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शरीर पर मुंहासों का उठ जाना एक आम बात होती है लेकिन महिला इन मुहासों के कारण चिंतित हो जाती हैं। खासतौर पर अगर यह पूरे शरीर में फैलने लगे। लेकिन यहंा हम आपको बताने वाले हैं कि इन मुहासे या एक्ने से खबराइये नहीं इन्हे अपने शरीर से दूर भगाइये। एक्ने या मुंहासे की परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए यहां हम आपको कुछ घुरेलु उपाय से अवगत करा रहे हैं। सबसे पहले तो आपको टाइट फिटिंग वाले कपड़े नहीं पहनने चाहिए कयोंकि ऐसे कपड़े आपकी त्वचा को सांस नहीं लेने देते और फिर बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं, जिससे एक्ने होते हैं। एप्पल साइडर वेनिगर सिरका एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकने में मददगार है। साथ ही यह एक्ने से पैदा होने वाले शरीर पर लाल चकत्तों को कम करता है और त्वचा को साफ रखने में मदद करता है। ऑइली स्किन की वजह से एक्ने होते हैं। तो अगर शरीर पर ऐसी चीज़ लगाएं जो ऑइल को सोख ले और पोर्स को साफ करे। ओटमील से त्वचा को स्क्रब करें और शरीर को गंदगी तथा तेल से राहत दिलाएं। टी ट्री ऑइल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो एक्ने का खात्मा कर देते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं, तो संक्रमण से भी छुटकारा मिल जाता है। चुटकीभर बेकिंग सोडा आपकी स्किन से एक्ने हटा सकता है। बस बेकिंग सोडा को थोड़े से पानी में घोल कर पेस्ट बनाएं और पीठ पर लगाएं। इससे एक्नें भी साफ होंगे और दाग धब्बे भी साफ हो जाएंगे। दालचीनी एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया का खात्मा करती है। शहद स्किन को नम कर के उस पर से गंदगी, तेल और पोर्स को साफ करती है। एक्ने से त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजलाहट, संक्रमण और सूजन हो जाती है, जिसे इप्सोम सॉल्ट दूर करता है। आपको इस नमक से नहाना चाहिये क्योंकि यह शरीर के कुछ एंजाइम्स को एक्टिवेट कर के विटामिन डी, पोटैशियम और जिंक को शरीर में सोखने में मदद करता है, जिससे त्वचा पर चमक आती है और त्वचा की हालत सुधरती है।
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उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मुरादाबाद में एक निर्दलीय उम्मीदवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. प्रवेश चावला तीन फुट लंबे हैं, जो उनकी लोकप्रियता का प्रमुख कारण है. चावला का कहना है कि उनका कद उनका प्लस पॉइंट है और इससे उन्हें चुनाव में फायदा होगा. कहा कि "मैंने नामांकन दाखिल कर दिया है और मेरा परिवार और दोस्त मेरा समर्थन कर रहे हैं. स्थानीय लोगों ने मुझसे नामांकन दाखिल करने की अपील की थी.
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उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मुरादाबाद में एक निर्दलीय उम्मीदवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. प्रवेश चावला तीन फुट लंबे हैं, जो उनकी लोकप्रियता का प्रमुख कारण है. चावला का कहना है कि उनका कद उनका प्लस पॉइंट है और इससे उन्हें चुनाव में फायदा होगा. कहा कि "मैंने नामांकन दाखिल कर दिया है और मेरा परिवार और दोस्त मेरा समर्थन कर रहे हैं. स्थानीय लोगों ने मुझसे नामांकन दाखिल करने की अपील की थी.
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मैदानी इलाकों में जैसे जैसे तापमान बढ़ रहा है वैसे वैसे लोग इस से निजात पाने के लिए पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। दूसरे मैदानी इलाकों में स्कूल की छुट्टियां भी शुरू हो रही है जिस कारण पहाड़ी इलाकों में आय दिन पर्यटकों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। पर्यटक नगरी कसौली में भी इन दिनों पर्यटकों की खूब चहल पहल देखने को मिल रही है। सप्ताह के अंतिम दो दिनों में तो भारी भीड़ देखने को मिल रही है सभी होटल गेस्ट हाउस और होम स्टे लगभग बुक चल रहे हैं । बहुत से पर्यटक ठहरने को स्थान न मिल पाने के कारण रात में भटकते हुए भी दिखाई देते हैं। (एचडीएम)
पर्यटकों का इस तरह भारी संख्या में कसौली पहुंचना जहां एक ओर सभी व्यवसायियों के लिए शुभ संकेत हैं वहीं दूसरी ओर कसौली घूमने आने वाले पर्यटकों पर किसी प्रकार का अंकुश न होने के कारण आम जन मानस के लिए परेशानी का भी सबब है। क्योंकि पर्यटक खुले आम रात को जहां कसौली के प्रतिबंधित क्षेत्र में अपनी गाडिय़ां खड़ी कर देते हैं वहीं सरेआम खुले में ध्यान चंद चौक और पाइन माल रोड पर शराब का सेवन करते देखे जा सकते हैं। जिस पुलिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी ही वो न जाने कौन सी निद्रा में सोई बैठी है। हां कभी कभार एकाध बार भूले भटके की तरह गाड़ी में सवार होकर एक चक्कर जरूर काट जाती है। स्थानीय लोग राजीव, मनोहर,राजपाल का कहना है कि पुलिस को हर दिन यहां गश्त करना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि पर्यटकों के आने से आम जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।
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मैदानी इलाकों में जैसे जैसे तापमान बढ़ रहा है वैसे वैसे लोग इस से निजात पाने के लिए पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। दूसरे मैदानी इलाकों में स्कूल की छुट्टियां भी शुरू हो रही है जिस कारण पहाड़ी इलाकों में आय दिन पर्यटकों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। पर्यटक नगरी कसौली में भी इन दिनों पर्यटकों की खूब चहल पहल देखने को मिल रही है। सप्ताह के अंतिम दो दिनों में तो भारी भीड़ देखने को मिल रही है सभी होटल गेस्ट हाउस और होम स्टे लगभग बुक चल रहे हैं । बहुत से पर्यटक ठहरने को स्थान न मिल पाने के कारण रात में भटकते हुए भी दिखाई देते हैं। पर्यटकों का इस तरह भारी संख्या में कसौली पहुंचना जहां एक ओर सभी व्यवसायियों के लिए शुभ संकेत हैं वहीं दूसरी ओर कसौली घूमने आने वाले पर्यटकों पर किसी प्रकार का अंकुश न होने के कारण आम जन मानस के लिए परेशानी का भी सबब है। क्योंकि पर्यटक खुले आम रात को जहां कसौली के प्रतिबंधित क्षेत्र में अपनी गाडिय़ां खड़ी कर देते हैं वहीं सरेआम खुले में ध्यान चंद चौक और पाइन माल रोड पर शराब का सेवन करते देखे जा सकते हैं। जिस पुलिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी ही वो न जाने कौन सी निद्रा में सोई बैठी है। हां कभी कभार एकाध बार भूले भटके की तरह गाड़ी में सवार होकर एक चक्कर जरूर काट जाती है। स्थानीय लोग राजीव, मनोहर,राजपाल का कहना है कि पुलिस को हर दिन यहां गश्त करना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि पर्यटकों के आने से आम जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।
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कंगना रनौत ने अपने सोलो डायरेक्शन में बनी फिल्म इमरजेंसी के टीजर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।
दिल्ली से बागडोगरा जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के विमान में उड़ान के बाद उसके हाइड्रोलिक में खराबी की जानकारी मिलने के बाद विमान का दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है।
राष्ट्रीय राजधानी से दोहा जा रहे इंडिगो के एक विमान को चिकित्सकीय आपात स्थिति के कारण उसका मार्ग परिवर्तन कर कराची की ओर मोड़ दिया गया। एयरलाइन ने सोमवार को यह जानकारी दी।
इस फिल्म में आखिरी बार नजर आएंगे सतीश कौशिक।
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कंगना रनौत ने अपने सोलो डायरेक्शन में बनी फिल्म इमरजेंसी के टीजर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। दिल्ली से बागडोगरा जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के विमान में उड़ान के बाद उसके हाइड्रोलिक में खराबी की जानकारी मिलने के बाद विमान का दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। राष्ट्रीय राजधानी से दोहा जा रहे इंडिगो के एक विमान को चिकित्सकीय आपात स्थिति के कारण उसका मार्ग परिवर्तन कर कराची की ओर मोड़ दिया गया। एयरलाइन ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस फिल्म में आखिरी बार नजर आएंगे सतीश कौशिक।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बुधवार को कहा कि मेरी चुनौती पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को झड़ौदा नहीं पहुंचे। गुप्ता ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल को किसने कितने काम किए हैं, उसपर बहस और काम गिनवाने की चुनौती दी थी। झडौदा पहुंचने पर आदेश गुप्ता ने वहां आधा घंटा इंतज़ार करने के बाद कहा कि आम आदमी पार्टी और उनके मुखिया अरविंद केजरीवाल की आदत है कि वो किसी पर कोई भी इल्जाम लगा देते हैं, वो भी बिना कुछ जाने। इसके लिए कई बार उन्हें कई लोगों से माफी भी मांगनी पड़ती है।
वो कह रहे हैं कि निगम में भाजपा अपने काम गिनवाएं, हम यहां काम गिनवाने के लिए पहुंच गए हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल यहां से गायब है, क्योंकि उनकी झूठ बोलने की आदत है। गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल से अगर दो काम पूछ लिए जाएं तो वो कहने लगते हैं कि उन्हें गाली दी जा रही है। असली बात ये है कि उन्होंने काम की बजाए सिर्फ भ्रष्टाचार करना है। उन्होंने हर काम में सिर्फ जनता को लूटने का काम किया है।
उन्होंने लूट का एक बढ़िया मॉडल तैयार किया, जिसमें वो बिजली के आधे दाम करने के नाम पर लोगों को 600 रुपये महीने की छूट देते हैं और बिजली कंपनियों से मिलकर खुद ढाई हज़ार करोड़ रुपये कमा लेते हैं। इसी तरह पानी के बिल को कम करने का वादा करते हैं और जो दिल्ली जल बोर्ड 500 करोड़ रुपये के फायदे में था, उसमें से 40 हज़ार करोड़ रुपये की लूट लेते हैं। ख़ास बात ये है कि जब इसके ऑडिट की मांग भाजपा करती है तो वो इसे गाली बताने लगते हैं। जब हम उनसे पूछते हैं कि दिल्ली की गलियों में शराब के ठेके क्यों खोल रहे हो, तो वो कहने लगते हैं कि भाजपा गाली दे रही है।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बुधवार को कहा कि मेरी चुनौती पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को झड़ौदा नहीं पहुंचे। गुप्ता ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल को किसने कितने काम किए हैं, उसपर बहस और काम गिनवाने की चुनौती दी थी। झडौदा पहुंचने पर आदेश गुप्ता ने वहां आधा घंटा इंतज़ार करने के बाद कहा कि आम आदमी पार्टी और उनके मुखिया अरविंद केजरीवाल की आदत है कि वो किसी पर कोई भी इल्जाम लगा देते हैं, वो भी बिना कुछ जाने। इसके लिए कई बार उन्हें कई लोगों से माफी भी मांगनी पड़ती है। वो कह रहे हैं कि निगम में भाजपा अपने काम गिनवाएं, हम यहां काम गिनवाने के लिए पहुंच गए हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल यहां से गायब है, क्योंकि उनकी झूठ बोलने की आदत है। गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल से अगर दो काम पूछ लिए जाएं तो वो कहने लगते हैं कि उन्हें गाली दी जा रही है। असली बात ये है कि उन्होंने काम की बजाए सिर्फ भ्रष्टाचार करना है। उन्होंने हर काम में सिर्फ जनता को लूटने का काम किया है। उन्होंने लूट का एक बढ़िया मॉडल तैयार किया, जिसमें वो बिजली के आधे दाम करने के नाम पर लोगों को छः सौ रुपयापये महीने की छूट देते हैं और बिजली कंपनियों से मिलकर खुद ढाई हज़ार करोड़ रुपये कमा लेते हैं। इसी तरह पानी के बिल को कम करने का वादा करते हैं और जो दिल्ली जल बोर्ड पाँच सौ करोड़ रुपये के फायदे में था, उसमें से चालीस हज़ार करोड़ रुपये की लूट लेते हैं। ख़ास बात ये है कि जब इसके ऑडिट की मांग भाजपा करती है तो वो इसे गाली बताने लगते हैं। जब हम उनसे पूछते हैं कि दिल्ली की गलियों में शराब के ठेके क्यों खोल रहे हो, तो वो कहने लगते हैं कि भाजपा गाली दे रही है।
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रामनवमी के मौके पर सीकर में निकाले जाने वाली शोभायात्रा रघुनाथ मंदिर से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंच चुकी है। पिछले 2 सालों में रैली का आयोजन नहीं हो पाया। ऐसे में इस बार शोभा यात्रा को लेकर आमजन में खासा उत्साह रहा। शोभायात्रा में करीब 1. 50 लाख शहरवासी शामिल हुए। चार घंटे तक पूरा शहर भगवान श्री राम के नारों से गूंजता। शोभा यात्रा पर शाम 5:00 से 5:30 के बीच हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई । वही शोभायात्रा का समापन रामलीला मैदान में शाम 8 बजे बाद हुआ।
ट्रैफिक इंचार्ज राजकुमार मीणा ने बताया कि पार्किंग के लिए एसके स्कूल ग्राउंड, राय जी का कुआं के आगे सालासर स्टैंड के पास,नेहरू पार्क, माधव सागर रानी सती रोड पर पार्किंग की व्यवस्था रही। इसके अलावा जाट बाजार, बजाज रोड़ और बजाज रोड से जाट बाजार की तरफ जाने वाले वाहन डॉक्टर सतीश कपूर हॉस्पिटल, अजमेरा हॉस्पिटल होते हुए तहसील के पास से बालाजी मंदिर सालासर रोड होते हुए सालासर स्टैंड की तरफ पहुंचे। सालासर स्टैंड से ईदगाह की तरफ जाने वाले वाहन बालाजी मंदिर, सालासर रोड होते हुए तहसील के पास से होकर अजमेरा हॉस्पिटल वाली गली से निकले।
चांदपोल गेट से घंटाघर व दूजोद गेट की तरफ जाने वाले वाहन कारीगरान मोहल्ला, अजमेर स्टैंड दो नंबर डिस्पेंसरी होते हुए बजरंग कांटा की तरफ निकाले गए। अंबेडकर सर्किल, बहड़ सर्किल रामलीला मैदान की तरफ जाने वाले वाहन रामपुरा रोड बाईपास पहुंचे। डिपो तिराहे से सालासर रोड जाने वाले वाहन रानी सती होते हुए बाईपास या डाक बंगले होते हुए निकले। जिन वाहनों को डिपो तिराहे की तरफ आना रहा। वह भी इसी रास्ते से होकर गुजरे।
हाल ही में करौली हिंसा के बाद पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर काफी एक्टिव नजर आया। सीकर में आज निकाली जा रही है इस रैली में करीब 1. 50 लाख शहरवासी शामिल हुए। ऐसे में एक हजार के करीब पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे। जो शोभायात्रा मार्ग पर तैनात रहे। इसके साथ ही दो दर्जन से ज्यादा बिल्डिंग पर भी कमांडो तैनात रहे। जो रैली पर नजर बनाए रखे। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई। इसके साथ ही कुछ ही संवेदनशील इलाकों में शनिवार रात ही बेरिकेडिंग कर दी गई थी।
गौरतलब है कि पिछले 2 सालों में कोरोना के चलते रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा का आयोजन नहीं हो पाया। ऐसे में शहर वासियों और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों में इसका खासा उत्साह रहा। आयोजकों ने इस बार रैली में दो बड़े डीजे और नासिक का बैंड भी मंगवाया। जिनपर रैली में शामिल लोग जमकर थिरके ।
शोभा यात्रा पर इस बार हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। आयोजन समिति के रामसिंह पिपराली ने बताया कि 4 बजे रघुनाथ मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा 8 बजे रामलीला मैदान पहुंचे। जहां जिले के अलग - अलग हिस्से से पहुंचे साधु संतो ने शोभायात्रा की महाआरती की। रामसिंह ने बताया कि आज की यह रैली ऐतिहासिक रही। जिसमें करीब 1. 50 लाख लोग शामिल हुए ।
सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि आज की रैली में लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। जिसे देखकर लगता है कि समाज में जागृति पैदा हुई है।
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रामनवमी के मौके पर सीकर में निकाले जाने वाली शोभायात्रा रघुनाथ मंदिर से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंच चुकी है। पिछले दो सालों में रैली का आयोजन नहीं हो पाया। ऐसे में इस बार शोभा यात्रा को लेकर आमजन में खासा उत्साह रहा। शोभायात्रा में करीब एक. पचास लाख शहरवासी शामिल हुए। चार घंटे तक पूरा शहर भगवान श्री राम के नारों से गूंजता। शोभा यात्रा पर शाम पाँच:शून्य से पाँच:तीस के बीच हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई । वही शोभायात्रा का समापन रामलीला मैदान में शाम आठ बजे बाद हुआ। ट्रैफिक इंचार्ज राजकुमार मीणा ने बताया कि पार्किंग के लिए एसके स्कूल ग्राउंड, राय जी का कुआं के आगे सालासर स्टैंड के पास,नेहरू पार्क, माधव सागर रानी सती रोड पर पार्किंग की व्यवस्था रही। इसके अलावा जाट बाजार, बजाज रोड़ और बजाज रोड से जाट बाजार की तरफ जाने वाले वाहन डॉक्टर सतीश कपूर हॉस्पिटल, अजमेरा हॉस्पिटल होते हुए तहसील के पास से बालाजी मंदिर सालासर रोड होते हुए सालासर स्टैंड की तरफ पहुंचे। सालासर स्टैंड से ईदगाह की तरफ जाने वाले वाहन बालाजी मंदिर, सालासर रोड होते हुए तहसील के पास से होकर अजमेरा हॉस्पिटल वाली गली से निकले। चांदपोल गेट से घंटाघर व दूजोद गेट की तरफ जाने वाले वाहन कारीगरान मोहल्ला, अजमेर स्टैंड दो नंबर डिस्पेंसरी होते हुए बजरंग कांटा की तरफ निकाले गए। अंबेडकर सर्किल, बहड़ सर्किल रामलीला मैदान की तरफ जाने वाले वाहन रामपुरा रोड बाईपास पहुंचे। डिपो तिराहे से सालासर रोड जाने वाले वाहन रानी सती होते हुए बाईपास या डाक बंगले होते हुए निकले। जिन वाहनों को डिपो तिराहे की तरफ आना रहा। वह भी इसी रास्ते से होकर गुजरे। हाल ही में करौली हिंसा के बाद पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर काफी एक्टिव नजर आया। सीकर में आज निकाली जा रही है इस रैली में करीब एक. पचास लाख शहरवासी शामिल हुए। ऐसे में एक हजार के करीब पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे। जो शोभायात्रा मार्ग पर तैनात रहे। इसके साथ ही दो दर्जन से ज्यादा बिल्डिंग पर भी कमांडो तैनात रहे। जो रैली पर नजर बनाए रखे। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई। इसके साथ ही कुछ ही संवेदनशील इलाकों में शनिवार रात ही बेरिकेडिंग कर दी गई थी। गौरतलब है कि पिछले दो सालों में कोरोना के चलते रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा का आयोजन नहीं हो पाया। ऐसे में शहर वासियों और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों में इसका खासा उत्साह रहा। आयोजकों ने इस बार रैली में दो बड़े डीजे और नासिक का बैंड भी मंगवाया। जिनपर रैली में शामिल लोग जमकर थिरके । शोभा यात्रा पर इस बार हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। आयोजन समिति के रामसिंह पिपराली ने बताया कि चार बजे रघुनाथ मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा आठ बजे रामलीला मैदान पहुंचे। जहां जिले के अलग - अलग हिस्से से पहुंचे साधु संतो ने शोभायात्रा की महाआरती की। रामसिंह ने बताया कि आज की यह रैली ऐतिहासिक रही। जिसमें करीब एक. पचास लाख लोग शामिल हुए । सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि आज की रैली में लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। जिसे देखकर लगता है कि समाज में जागृति पैदा हुई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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ALLAHABAD: सैम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस (शियाट्स) के वॉग स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा क्रिएशन एंड इस्टैब्लिशमेंट ऑफ वर्चुअल क्लासरूम एंड ई-लर्निंग विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया। जिसका एनागरेशन मुख्य अतिथि प्रो. केके भूटानी निदेशक यूपीटेक ने किया।
इस अवसर पर प्रो। भूटानी ने कहा कि आज का दौर इ-लर्निग का है जिससे रोजमर्रा के कार्य कम समय में आसानी से किये जा सकते हैं। शियाट्स के प्रति कुलपति शैक्षिक प्रो। एकेए लॉरेन्स ने कहा कि कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण ज्ञान दिया जाएगा। जिससे वे अपने कैरियर में प्रयोग कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डीन प्रो। डीएम डेनिस ने इ-लर्निंग के महत्वपूर्ण कारकों को बताते हुए कहा कि वर्चुअल क्लासरुम एवं इ-लर्निग वर्तमान परिदृश्य में अत्यन्त आवश्यक है। इसलिए छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं, फैकल्टी एवं शैक्षणिक कर्मचारियों को इसके प्रति जागरुक होना आवश्यक है।
वहीं आईबीएस हैदराबाद से आए डॉ। इंदिरा कोनेरु ने इ-लर्निंग की आधुनिकता के बारे में बताया तथा प्रायोगिक ज्ञान भी दिया। एमएनएनआईटी के डॉ। मयंक पांडेय ने प्रतिभागियों को इ-लर्निंग परियोजना के कार्यवृत्त की जानकारी दी और इससे जुड़े मॉडल के बारे में बताया। इंजीनियर अवनीश कुमार ने कहा कि कम्प्यूटर के साथ-साथ इ-लर्निंग के प्रति जागरुकता से प्रतिभागियों को कौशल विकास में सहायता मिल सकेगी। राष्ट्रीय कार्यशाला में केरल, कश्मीर सहित कई राज्यों के विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
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ALLAHABAD: सैम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस के वॉग स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा क्रिएशन एंड इस्टैब्लिशमेंट ऑफ वर्चुअल क्लासरूम एंड ई-लर्निंग विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया। जिसका एनागरेशन मुख्य अतिथि प्रो. केके भूटानी निदेशक यूपीटेक ने किया। इस अवसर पर प्रो। भूटानी ने कहा कि आज का दौर इ-लर्निग का है जिससे रोजमर्रा के कार्य कम समय में आसानी से किये जा सकते हैं। शियाट्स के प्रति कुलपति शैक्षिक प्रो। एकेए लॉरेन्स ने कहा कि कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण ज्ञान दिया जाएगा। जिससे वे अपने कैरियर में प्रयोग कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डीन प्रो। डीएम डेनिस ने इ-लर्निंग के महत्वपूर्ण कारकों को बताते हुए कहा कि वर्चुअल क्लासरुम एवं इ-लर्निग वर्तमान परिदृश्य में अत्यन्त आवश्यक है। इसलिए छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं, फैकल्टी एवं शैक्षणिक कर्मचारियों को इसके प्रति जागरुक होना आवश्यक है। वहीं आईबीएस हैदराबाद से आए डॉ। इंदिरा कोनेरु ने इ-लर्निंग की आधुनिकता के बारे में बताया तथा प्रायोगिक ज्ञान भी दिया। एमएनएनआईटी के डॉ। मयंक पांडेय ने प्रतिभागियों को इ-लर्निंग परियोजना के कार्यवृत्त की जानकारी दी और इससे जुड़े मॉडल के बारे में बताया। इंजीनियर अवनीश कुमार ने कहा कि कम्प्यूटर के साथ-साथ इ-लर्निंग के प्रति जागरुकता से प्रतिभागियों को कौशल विकास में सहायता मिल सकेगी। राष्ट्रीय कार्यशाला में केरल, कश्मीर सहित कई राज्यों के विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
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राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में कहा था कि पार्टी को दलितों और पिछड़ों को अपने पाले में करने की जरूरत है, राष्ट्रवादी पहले से ही उनके साथ हैं। राहुल गांधी ने आश्चर्य जताया कि क्या प्रधानमंत्री दलितों और पिछड़ों को राष्ट्रवादी नहीं मानते। राहुल गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस की खबर का लिंक शेयर करते हुए ट्वीट किया, "मोदीजी, तो अब दलित और पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं हैं? " मंगलवार को बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि बीजेपी की 'राष्ट्रवादी' पहचान को कमजोर किए बिना पार्टी को दलितों और पिछड़ों को अपने पक्ष में करने की जरूरत है। रिपोर्ट थी कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि राष्ट्रवादी भाजपा के साथ हैं और पार्टी को अब दलितों और पिछड़ी जातियों को साथ लाना है।
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राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में कहा था कि पार्टी को दलितों और पिछड़ों को अपने पाले में करने की जरूरत है, राष्ट्रवादी पहले से ही उनके साथ हैं। राहुल गांधी ने आश्चर्य जताया कि क्या प्रधानमंत्री दलितों और पिछड़ों को राष्ट्रवादी नहीं मानते। राहुल गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस की खबर का लिंक शेयर करते हुए ट्वीट किया, "मोदीजी, तो अब दलित और पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं हैं? " मंगलवार को बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि बीजेपी की 'राष्ट्रवादी' पहचान को कमजोर किए बिना पार्टी को दलितों और पिछड़ों को अपने पक्ष में करने की जरूरत है। रिपोर्ट थी कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि राष्ट्रवादी भाजपा के साथ हैं और पार्टी को अब दलितों और पिछड़ी जातियों को साथ लाना है।
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नामरा कादिर सोशल मीडिया पर काफी फेमस नाम है. उसके Youtube पर 6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वहीं, इंस्टाग्राम पर भी 2 लाख से ज्यादा यूजर्स उसे फॉलो करते हैं. वह काफी खूबसूरत दिखती है. लेकिन उसकी असलियत उस समय सामने आई जब 24 नवंबर को एक बिजनेसमैन ने गुरुग्राम के सेक्टर-50 थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई.
फिलहाल पुलिस ने नामरा कादिर को गिरफ्तार कर लिया है. उसे 4 दिन की रिमांड पर लेकर मामले की जांच शुरू की गई है. वहीं, फरार विराट बैनीवाल की तलाश जारी है.
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नामरा कादिर सोशल मीडिया पर काफी फेमस नाम है. उसके Youtube पर छः लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वहीं, इंस्टाग्राम पर भी दो लाख से ज्यादा यूजर्स उसे फॉलो करते हैं. वह काफी खूबसूरत दिखती है. लेकिन उसकी असलियत उस समय सामने आई जब चौबीस नवंबर को एक बिजनेसमैन ने गुरुग्राम के सेक्टर-पचास थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई. फिलहाल पुलिस ने नामरा कादिर को गिरफ्तार कर लिया है. उसे चार दिन की रिमांड पर लेकर मामले की जांच शुरू की गई है. वहीं, फरार विराट बैनीवाल की तलाश जारी है.
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भारत सरकार के सचिव (विद्युत) ने 1,320 मेगावॉट की मैत्री विद्युत परियोजना से संबंधित मुद्दों पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बांग्लादेश सरकार के सचिव (विद्युत) से मुलाकात की। यह बैठक 17.06.2021 को आयोजित8वीं उच्चस्तरीय निगरानी समिति की बैठक के तुरंत बाद बुलाई गई। उस बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान की गई थी जिन्हें दिसंबर 2021 में यूनिट 1 को समय पर चालू करने के लिए निपटाने की आवश्यकता है।
बैठक में विद्युत मंत्रालय (एमओपी), विदेश मंत्रालय (एमईए), बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त, भारी उद्योग विभाग (डीएचआई), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), एनटीपीसी लिमिटेड, बीएचईएल और बीआईएफपीसीएल के अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
मार्च 2020 से कोविड की स्थिति ने दोनों देशों के लोगों के लिए पर्याप्त चुनौतियां पेश की हैं और मैत्री परियोजना के कार्यान्वयन को प्रभावित किया है। हालांकि दोनों पक्ष इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं। बांग्लादेश पक्ष को आश्वासन दिया गया था कि भारत से अत्यधिक कुशल कर्मियों के लिए बांग्लादेश में प्रवेश अनुमति एवं वीजा अनुमोदन के मामले में बांग्लादेश सरकार के समर्थन, ताजा एसआरओ 126 के बाद सीमा शुल्क से संबंधित मुद्दे/अग्रिम आयकर (एआईटी), मैत्री साइट एवं भारत के कार्यालयों में तैनात बीएचईएल के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा और कार्य बल के टीकाकरण में सहयोग के साथ बीएचईएल और बीआईएफपीसीएल समय सीमा को पूरा करने के लिए आश्वस्त हैं।
यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल सुपरक्रिटिकल प्रौद्योगिकी पर आधारित एक ताप विद्युत संयंत्र है। इस परियोजना की पहली यूनिट दिसंबर 2021 में चालू होगी यानी बांग्लादेश के विजय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह के तालमेल के साथ। यूनिट 2 संबद्ध पारेषण प्रणाली के कार्यान्वयन के साथ तालमेल के तहत चालू होने की उम्मीद है।
बांग्लादेश सरकार के सचिव (विद्युत) ने परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने पिछले साल से कोविड संबंधी व्यवधानों के बावजूद इस परियोजना की अब तक की गई प्रगति की सराहना की।
दोनों पक्षों ने विद्युत क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सहयोग के लिए जेडब्ल्यूजी/जेएससी की अगली बैठक की तिथि के बारे में भी चर्चा की। सितंबर 2021 के तीसरे सप्ताह में जेडब्ल्यूजी/जेएससी की अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
भारत सरकार के सचिव (विद्युत) ने बांग्लादेश पक्ष को धन्यवाद दिया और बांग्लादेश सरकार के सचिव (विद्युत) द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
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Posted On: भारत सरकार के सचिव ने एक,तीन सौ बीस मेगावॉट की मैत्री विद्युत परियोजना से संबंधित मुद्दों पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बांग्लादेश सरकार के सचिव से मुलाकात की। यह बैठक सत्रह.छः.दो हज़ार इक्कीस को आयोजितआठवीं उच्चस्तरीय निगरानी समिति की बैठक के तुरंत बाद बुलाई गई। उस बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान की गई थी जिन्हें दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में यूनिट एक को समय पर चालू करने के लिए निपटाने की आवश्यकता है। बैठक में विद्युत मंत्रालय , विदेश मंत्रालय , बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त, भारी उद्योग विभाग , केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण , एनटीपीसी लिमिटेड, बीएचईएल और बीआईएफपीसीएल के अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मार्च दो हज़ार बीस से कोविड की स्थिति ने दोनों देशों के लोगों के लिए पर्याप्त चुनौतियां पेश की हैं और मैत्री परियोजना के कार्यान्वयन को प्रभावित किया है। हालांकि दोनों पक्ष इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं। बांग्लादेश पक्ष को आश्वासन दिया गया था कि भारत से अत्यधिक कुशल कर्मियों के लिए बांग्लादेश में प्रवेश अनुमति एवं वीजा अनुमोदन के मामले में बांग्लादेश सरकार के समर्थन, ताजा एसआरओ एक सौ छब्बीस के बाद सीमा शुल्क से संबंधित मुद्दे/अग्रिम आयकर , मैत्री साइट एवं भारत के कार्यालयों में तैनात बीएचईएल के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा और कार्य बल के टीकाकरण में सहयोग के साथ बीएचईएल और बीआईएफपीसीएल समय सीमा को पूरा करने के लिए आश्वस्त हैं। यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल सुपरक्रिटिकल प्रौद्योगिकी पर आधारित एक ताप विद्युत संयंत्र है। इस परियोजना की पहली यूनिट दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में चालू होगी यानी बांग्लादेश के विजय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह के तालमेल के साथ। यूनिट दो संबद्ध पारेषण प्रणाली के कार्यान्वयन के साथ तालमेल के तहत चालू होने की उम्मीद है। बांग्लादेश सरकार के सचिव ने परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने पिछले साल से कोविड संबंधी व्यवधानों के बावजूद इस परियोजना की अब तक की गई प्रगति की सराहना की। दोनों पक्षों ने विद्युत क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सहयोग के लिए जेडब्ल्यूजी/जेएससी की अगली बैठक की तिथि के बारे में भी चर्चा की। सितंबर दो हज़ार इक्कीस के तीसरे सप्ताह में जेडब्ल्यूजी/जेएससी की अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। भारत सरकार के सचिव ने बांग्लादेश पक्ष को धन्यवाद दिया और बांग्लादेश सरकार के सचिव द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
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औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में शादी समारोंहों में निर्धारित 50 लोगों की शर्त की अवहेलना करने वालों पर पुलिस प्रशासन ढिलाई बरतने के मूड में नही है। इसी कड़ी में बुधवार रात भी बीबीएन में पुलिस प्रशासन ने दो दर्जन से ज्यादा शादी समारोहों का औचक निरिक्षण किया और छह शादी समारोहों में प्रशासन के दिशा निर्देंशों की अवहेलना पाई। जिस पर बद्दी में दो , बरोटीवाला व नालागढ़ में एक एक केस दर्ज किया गया जबकि दो समोरोंहों में कोताही पाए जाने पर पुलिस एक्ट के तहत पांच पांच हजार के चालान काटे गए। बता दें कि बीबीएन में अब तक सात मुकदमें दर्ज किए जा चुके है। दरअसल प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद आलम यह है कि लोग कोविड-19 से संबंधित तमाम नियमों को धत्ता बता जमकर लापरवाही बरत रहे है। यही वजह है कि पुलिस जिला प्रशासन ने आदेशों की अनुपालना न करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक बुधवार रात पुलिस ने बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ स्थित मैरिज पैलस में आयोजित शादी समारोहों का निरीक्षण किया तो पाया कि वहां निर्धारित 50 की शर्त को धत्ता बताते हुए दुगने से ज्यादाद लोग शादी की दावत खाने उमड़े थे। आलम यह था कि शादी समारोह में जहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही थी वहीं बिना मास्क पहुंचे लोगों की तादाद भी काफी थी। पुलिस ने बुधवार रात अमरावती अपार्टमेंट के सामने पैलेस में दबिश दी तो पाया कि वहां हरिपुर संडोली के एक शख्स की बेटी की शादी चल रही थी जिसमे करीब 100-150 व्यक्ति इकठ्ठे थे और बिना मास्क आ जा रहे थे ।
बद्दी में गशत के दौरान पुलिस ने हरीपुर संड़ोली में आयोजित एक शादी समारोह में दबिश दी तो वहां पाया कि 80-90 लोग इकठ्ठे हुए थे ओर किसी भी व्यक्ति द्वारा न तो सामाजिक दुरी का पालन किया जा रहा था न ही मास्क पहने हुए थे। नालागढ़ के दतोवाल में तहसीलदार रिश्व शर्मा ने चैकिंग दौरान पैलेस का औचक निरीक्षण किया तो पाया कि वहां शादी समारोह चल रहा है और उसमें करीब 200/250 पुरुष व महिलाएं मौजूद थीं, पूछताछ पर पता चला कि इस पैलेस में गांव शाहपुर तहसील बद्दी निवासी के बेटे की शादी चल रही थी। इस समारोह में न सोशल डिस्टेंसिंग की अनुपालना हो रही थी न ही लोग मास्क पहने हुए थे। बरोटीवाला में दून पब्लिक स्कूल के पास भी पुलिस ने एक शादी समारोह का औचक निरीक्षण किया और पाया कि वहां करीब 120/130 लोग इकट्ठा हुए थे और सामाजिक दूरी के नियम की पालना भी नहीं की जा रही थी। इसके अलावा दो शादी समारोहों में मास्क न पहनने पर पुलिस ने पुलिस एक्ट के तहत पांच-पांच हजार के चालान काट कर जुर्माना वसुला। पुलिस व उपमड़ंल प्रशासन कि इस कार्रवाई से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
एसपी बद्दी रोहित मालपानी ने बताया कि शादी समारोहों में 50 से अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने की सख्त मनाही है। इसके अतिरिक्त आयोजकों को आयोजन स्थल पर आए व्यक्तियों द्वारा मास्क का प्रयोग तथा व्यक्तिगत दूरी सहित कोरोना वायरस से बचाव तथा इसकी रोकथाम के लिए सरकार व प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों की अनुपालना भी सुनिश्चित करनी होगी। इन निर्देशों की अनुपालना करवाने के मद्देनजर पुलिस व प्रशासन शादी समारोहों का औचक निरीक्षण कर रहा है , बीते बुधवार को बीबीएन में ऐसे छह मामले पाए गए जिनमें से चार शादी समारोहों में आयोजको के खिलाफ 188,269,270,271 के तहत केस दर्ज किए गए जबकि दो समारोहों में पुलिस एक्ट के तहत चालान कर पांच पांच हजार रुपए जुर्माना वसूला गया।
नालागढ़ । कोरोना महामारी के दौर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को नालागढ़ उपमंडल से 146 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें आरटीपीसीआर के एक, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के 137 व ट्रू नॉट के आठ सैंपल शामिल हैं। नालागढ़ उपमंडल से अब तक 32,932 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें आरटीपीसीआर के 28,745 रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के 3862 व ट्रू नॉट के 325 सैंपल शामिल हैं। आरटीपीसीआर के ईएसआई काठा से एक, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के नालागढ़ अस्पताल से 50, सीएचसी बद्दी से 77, ईएसआई काठा से दस व ट्रू नॉट के नालागढ़ अस्पताल से आठ सैंपल शामिल हैं। एसडीएम नालागढ़ महेंद्र पाल गुर्जर ने कहा कि नालागढ़ उपमंडल से बुधवार को 146 सैंपल लिए गए है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से अब तक 32,932 लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में शादी समारोंहों में निर्धारित पचास लोगों की शर्त की अवहेलना करने वालों पर पुलिस प्रशासन ढिलाई बरतने के मूड में नही है। इसी कड़ी में बुधवार रात भी बीबीएन में पुलिस प्रशासन ने दो दर्जन से ज्यादा शादी समारोहों का औचक निरिक्षण किया और छह शादी समारोहों में प्रशासन के दिशा निर्देंशों की अवहेलना पाई। जिस पर बद्दी में दो , बरोटीवाला व नालागढ़ में एक एक केस दर्ज किया गया जबकि दो समोरोंहों में कोताही पाए जाने पर पुलिस एक्ट के तहत पांच पांच हजार के चालान काटे गए। बता दें कि बीबीएन में अब तक सात मुकदमें दर्ज किए जा चुके है। दरअसल प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद आलम यह है कि लोग कोविड-उन्नीस से संबंधित तमाम नियमों को धत्ता बता जमकर लापरवाही बरत रहे है। यही वजह है कि पुलिस जिला प्रशासन ने आदेशों की अनुपालना न करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक बुधवार रात पुलिस ने बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ स्थित मैरिज पैलस में आयोजित शादी समारोहों का निरीक्षण किया तो पाया कि वहां निर्धारित पचास की शर्त को धत्ता बताते हुए दुगने से ज्यादाद लोग शादी की दावत खाने उमड़े थे। आलम यह था कि शादी समारोह में जहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही थी वहीं बिना मास्क पहुंचे लोगों की तादाद भी काफी थी। पुलिस ने बुधवार रात अमरावती अपार्टमेंट के सामने पैलेस में दबिश दी तो पाया कि वहां हरिपुर संडोली के एक शख्स की बेटी की शादी चल रही थी जिसमे करीब एक सौ-एक सौ पचास व्यक्ति इकठ्ठे थे और बिना मास्क आ जा रहे थे । बद्दी में गशत के दौरान पुलिस ने हरीपुर संड़ोली में आयोजित एक शादी समारोह में दबिश दी तो वहां पाया कि अस्सी-नब्बे लोग इकठ्ठे हुए थे ओर किसी भी व्यक्ति द्वारा न तो सामाजिक दुरी का पालन किया जा रहा था न ही मास्क पहने हुए थे। नालागढ़ के दतोवाल में तहसीलदार रिश्व शर्मा ने चैकिंग दौरान पैलेस का औचक निरीक्षण किया तो पाया कि वहां शादी समारोह चल रहा है और उसमें करीब दो सौ/दो सौ पचास पुरुष व महिलाएं मौजूद थीं, पूछताछ पर पता चला कि इस पैलेस में गांव शाहपुर तहसील बद्दी निवासी के बेटे की शादी चल रही थी। इस समारोह में न सोशल डिस्टेंसिंग की अनुपालना हो रही थी न ही लोग मास्क पहने हुए थे। बरोटीवाला में दून पब्लिक स्कूल के पास भी पुलिस ने एक शादी समारोह का औचक निरीक्षण किया और पाया कि वहां करीब एक सौ बीस/एक सौ तीस लोग इकट्ठा हुए थे और सामाजिक दूरी के नियम की पालना भी नहीं की जा रही थी। इसके अलावा दो शादी समारोहों में मास्क न पहनने पर पुलिस ने पुलिस एक्ट के तहत पांच-पांच हजार के चालान काट कर जुर्माना वसुला। पुलिस व उपमड़ंल प्रशासन कि इस कार्रवाई से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी बद्दी रोहित मालपानी ने बताया कि शादी समारोहों में पचास से अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने की सख्त मनाही है। इसके अतिरिक्त आयोजकों को आयोजन स्थल पर आए व्यक्तियों द्वारा मास्क का प्रयोग तथा व्यक्तिगत दूरी सहित कोरोना वायरस से बचाव तथा इसकी रोकथाम के लिए सरकार व प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों की अनुपालना भी सुनिश्चित करनी होगी। इन निर्देशों की अनुपालना करवाने के मद्देनजर पुलिस व प्रशासन शादी समारोहों का औचक निरीक्षण कर रहा है , बीते बुधवार को बीबीएन में ऐसे छह मामले पाए गए जिनमें से चार शादी समारोहों में आयोजको के खिलाफ एक सौ अठासी,दो सौ उनहत्तर,दो सौ सत्तर,दो सौ इकहत्तर के तहत केस दर्ज किए गए जबकि दो समारोहों में पुलिस एक्ट के तहत चालान कर पांच पांच हजार रुपए जुर्माना वसूला गया। नालागढ़ । कोरोना महामारी के दौर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को नालागढ़ उपमंडल से एक सौ छियालीस लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें आरटीपीसीआर के एक, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के एक सौ सैंतीस व ट्रू नॉट के आठ सैंपल शामिल हैं। नालागढ़ उपमंडल से अब तक बत्तीस,नौ सौ बत्तीस सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें आरटीपीसीआर के अट्ठाईस,सात सौ पैंतालीस रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के तीन हज़ार आठ सौ बासठ व ट्रू नॉट के तीन सौ पच्चीस सैंपल शामिल हैं। आरटीपीसीआर के ईएसआई काठा से एक, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग के नालागढ़ अस्पताल से पचास, सीएचसी बद्दी से सतहत्तर, ईएसआई काठा से दस व ट्रू नॉट के नालागढ़ अस्पताल से आठ सैंपल शामिल हैं। एसडीएम नालागढ़ महेंद्र पाल गुर्जर ने कहा कि नालागढ़ उपमंडल से बुधवार को एक सौ छियालीस सैंपल लिए गए है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से अब तक बत्तीस,नौ सौ बत्तीस लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं।
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IPL 2023, KKR vs MI: आईपीएल 2023 का 22वां मैच में आज 16 अप्रैल, रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच खेला जा रहा है। बता दें कि मैच में केकेआर टाॅस हारकर पहले बल्लेबाजी कर रही है।
तो वहीं पहले बल्लेबाजी करने वाली केकेआर की शुरूआत कुछ ठीक नहीं रही है। बता दें कि पारी के दूसरे ही ओवर में केकेआर को झटका लग गया है। कैमरन ग्रीन के ओवर में केकेआर के ओपनर बल्लेबाज नारायण जगदीशन बिना कोई रन बनाए कैच आउट हो गए हैं।
आपको बता दें कि ओवर की पहली चार गेंदों को डाॅट खेलने के बाद जगदीशन कवर की ओर शाॅट खेलना चाहते थे, लेकिन कवर में मौजूद मुस्तैद ऋतिक शौकीन ने एक शानदार कैच पकड़, नारायण जगदीशन को पलेलियन का रास्ता दिखाया है।
तो वहीं खबर लिखे जाने तक कोलकाता नाइट राइडर्स ने पांच ओवर बाद 1 विकेट के नुकसान पर 55 रन बना लिए हैं। क्रीज पर इस समय वेंकटेश अय्यर 38 और रहमनउल्लाह गुरबाज 7 रन पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। तो वहीं अभी तक मुंबई की ओर से कैमरन ग्रीन ही एक विकेट निकाल पाए हैं।
मुंबई इंडियंस (MI):
इशान किशन (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), टिम डेविड, नेहाल वढेरा, अर्जुन तेंदुलकर, ऋतिक शौकीन, पीयूष चावला, डुआन जानसन और रिले मेरेडिथ।
कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR):
रहमनउल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), वेंकटेश अय्यर, एन जगदीशन, नितीश राणा (कप्तान), रिंकू सिंह, आंद्रे रसेल, सुनील नारायण, शार्दुल ठाकुर, उमेश यादव, लॉकी फर्ग्यूसन और वरुण चक्रवर्ती।
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IPL दो हज़ार तेईस, KKR vs MI: आईपीएल दो हज़ार तेईस का बाईसवां मैच में आज सोलह अप्रैल, रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेला जा रहा है। बता दें कि मैच में केकेआर टाॅस हारकर पहले बल्लेबाजी कर रही है। तो वहीं पहले बल्लेबाजी करने वाली केकेआर की शुरूआत कुछ ठीक नहीं रही है। बता दें कि पारी के दूसरे ही ओवर में केकेआर को झटका लग गया है। कैमरन ग्रीन के ओवर में केकेआर के ओपनर बल्लेबाज नारायण जगदीशन बिना कोई रन बनाए कैच आउट हो गए हैं। आपको बता दें कि ओवर की पहली चार गेंदों को डाॅट खेलने के बाद जगदीशन कवर की ओर शाॅट खेलना चाहते थे, लेकिन कवर में मौजूद मुस्तैद ऋतिक शौकीन ने एक शानदार कैच पकड़, नारायण जगदीशन को पलेलियन का रास्ता दिखाया है। तो वहीं खबर लिखे जाने तक कोलकाता नाइट राइडर्स ने पांच ओवर बाद एक विकेट के नुकसान पर पचपन रन बना लिए हैं। क्रीज पर इस समय वेंकटेश अय्यर अड़तीस और रहमनउल्लाह गुरबाज सात रन पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। तो वहीं अभी तक मुंबई की ओर से कैमरन ग्रीन ही एक विकेट निकाल पाए हैं। मुंबई इंडियंस : इशान किशन , कैमरन ग्रीन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव , टिम डेविड, नेहाल वढेरा, अर्जुन तेंदुलकर, ऋतिक शौकीन, पीयूष चावला, डुआन जानसन और रिले मेरेडिथ। कोलकाता नाइट राइडर्स : रहमनउल्लाह गुरबाज , वेंकटेश अय्यर, एन जगदीशन, नितीश राणा , रिंकू सिंह, आंद्रे रसेल, सुनील नारायण, शार्दुल ठाकुर, उमेश यादव, लॉकी फर्ग्यूसन और वरुण चक्रवर्ती।
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चंडीगढ़ः डेरा सच्चा सौदा प्रमुख (Dera Sacha Sauda Chief)गुरमीत राम रहीम सिंह (Ram Rahim Singh) को हरियाणा की एक(एक प्रकार की छुट्टी) पर 21 दिनों की रिहाई के दौरान जेड प्लस सुरक्षा दी गयी है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सिंह को सात फरवरी को रिहा होने के बाद उच्च श्रेणी (Z-Plus)की सुरक्षा दी गयी थी, क्योंकि सिंह की जान को "खालिस्तान समर्थक" तत्वों से खतरा है. हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से रोहतक रेंज के आयुक्त को हाल ही में भेजे एक संदेश में कहा गया है, "यदि कैदी को पैरोल पर रिहा किया जाता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार जेड-प्लस सुरक्षा या समतुल्य सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, क्योंकि कैदी को भारत और विदेशों में कट्टरपंथी सिख चरमपंथियों से उच्च स्तरीय खतरा है.
सिंह को 21 दिनों की छुट्टी पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले मिली थी. पंजाब में इस पंथ के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं, खासकर बठिंडा, संगरूर, पटियाला और मुक्तसर में. सात फरवरी को, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सिंह की रिहाई और 20 फरवरी को पंजाब विधानसभा चुनाव के बीच कोई संबंध होने से इनकार किया था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक संयोग है और इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है.
डेरा प्रमुख सिरसा में अपने आश्रम में दो महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार के आरोप में 20 साल की जेल की सजा काट रहा है. सिंह को अगस्त 2017 में पंचकूला में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था. पिछले साल सिंह को 2002 में डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के लिए भी चार अन्य लोगों के साथ दोषी ठहराया गया था। डेरा प्रमुख और तीन अन्य को 2019 में 16 साल पहले एक पत्रकार की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था.
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
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चंडीगढ़ः डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा की एक पर इक्कीस दिनों की रिहाई के दौरान जेड प्लस सुरक्षा दी गयी है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सिंह को सात फरवरी को रिहा होने के बाद उच्च श्रेणी की सुरक्षा दी गयी थी, क्योंकि सिंह की जान को "खालिस्तान समर्थक" तत्वों से खतरा है. हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से रोहतक रेंज के आयुक्त को हाल ही में भेजे एक संदेश में कहा गया है, "यदि कैदी को पैरोल पर रिहा किया जाता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार जेड-प्लस सुरक्षा या समतुल्य सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, क्योंकि कैदी को भारत और विदेशों में कट्टरपंथी सिख चरमपंथियों से उच्च स्तरीय खतरा है. सिंह को इक्कीस दिनों की छुट्टी पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले मिली थी. पंजाब में इस पंथ के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं, खासकर बठिंडा, संगरूर, पटियाला और मुक्तसर में. सात फरवरी को, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सिंह की रिहाई और बीस फरवरी को पंजाब विधानसभा चुनाव के बीच कोई संबंध होने से इनकार किया था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक संयोग है और इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है. डेरा प्रमुख सिरसा में अपने आश्रम में दो महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार के आरोप में बीस साल की जेल की सजा काट रहा है. सिंह को अगस्त दो हज़ार सत्रह में पंचकूला में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था. पिछले साल सिंह को दो हज़ार दो में डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के लिए भी चार अन्य लोगों के साथ दोषी ठहराया गया था। डेरा प्रमुख और तीन अन्य को दो हज़ार उन्नीस में सोलह साल पहले एक पत्रकार की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था.
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पर्सनल हो या फिर प्रोफेशनल लाइफ...हमेशा प्रियंका चोपड़ा किसी ना किसी वजह से लगातार सुर्खियों का हिस्सा बनी ही रहती है। बीते साल ही प्रियंका ने अपने बॉयफ्रेंड निक जोनस के साथ सात फेरे लिए थे और अपनी शादी के बाद अब पीसी अपनी हॉलीवुड फिल्म इजइंट रोमांटिक को प्रमोट करने में लगी हुई हैं।
अपने हालिया इंटरव्यू के दौरान ही प्रियंका ने खुलासा किया है कि वह जल्द ही पर्दे पर मां आनंद शीला का किरदार अदा करती हुईं दिखाई देंगी। इसी के साथ प्रियंका ने खुलासा किया है कि इस फिल्म को हॉलीवुड के जाने माने निर्देशक बैरी लेविनसन निर्देशित करने वाले है। प्रियंका ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा कि, 'मैं बैरी लेविनसन के साथ एक फिल्म पर काम कर रही हूं। वह शानदार अमेरिकन डायरेक्टर है। इस फिल्म के जरिए हम भारत में जन्म लेने वाली मां आनंद शीला के किरदार को पर्दे पर उकेरेंगे।'
अपनी शादी से चंद दिन पहले ही प्रियंका ने सलमान खान की नई फिल्म भारत से किनारा कर लिया था। प्रियंका ने रातों रात ये फैसला करके हर किसी को चौंका दिया था। फिलहाल तो आप प्रियंका को मां आनंद शीला के किरदार में देखने के लिए कितने उत्सुक है? कमेंटबॉक्स में जरुर बताइएगा।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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पर्सनल हो या फिर प्रोफेशनल लाइफ...हमेशा प्रियंका चोपड़ा किसी ना किसी वजह से लगातार सुर्खियों का हिस्सा बनी ही रहती है। बीते साल ही प्रियंका ने अपने बॉयफ्रेंड निक जोनस के साथ सात फेरे लिए थे और अपनी शादी के बाद अब पीसी अपनी हॉलीवुड फिल्म इजइंट रोमांटिक को प्रमोट करने में लगी हुई हैं। अपने हालिया इंटरव्यू के दौरान ही प्रियंका ने खुलासा किया है कि वह जल्द ही पर्दे पर मां आनंद शीला का किरदार अदा करती हुईं दिखाई देंगी। इसी के साथ प्रियंका ने खुलासा किया है कि इस फिल्म को हॉलीवुड के जाने माने निर्देशक बैरी लेविनसन निर्देशित करने वाले है। प्रियंका ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा कि, 'मैं बैरी लेविनसन के साथ एक फिल्म पर काम कर रही हूं। वह शानदार अमेरिकन डायरेक्टर है। इस फिल्म के जरिए हम भारत में जन्म लेने वाली मां आनंद शीला के किरदार को पर्दे पर उकेरेंगे।' अपनी शादी से चंद दिन पहले ही प्रियंका ने सलमान खान की नई फिल्म भारत से किनारा कर लिया था। प्रियंका ने रातों रात ये फैसला करके हर किसी को चौंका दिया था। फिलहाल तो आप प्रियंका को मां आनंद शीला के किरदार में देखने के लिए कितने उत्सुक है? कमेंटबॉक्स में जरुर बताइएगा। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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गंगा के गर्भ से देयप्रत, जिन का नाम पीछेभीष्म प्रसिद्ध हुआ, से जन्म लिया । इन्होंने सांगोपांग वेदों का अध्ययन करते हुए शस्त्रविद्या में पूर्ण अभ्यास किया था। उस समय इन के समान राकुशल और पराक्रमी योहा एक भी न था । सय विद्याथों में जैसे पारंगत थे वैसे ही सत्यशील और चरित्रवान् भी थे। राजा ने युवराज पद के योग्य देख कर युवावस्था में इनका यौवराज्याभिषेक किया। युवराज प्रद प्राप्त होने पर देवव्रत प्रजा पालन में राजा को बहुत कुछ सहायता देने लगे ।
माता का पुत्री को उपदेश 19
येटी । कल तुम मुझ से विदा होगी। तुम्हें अलग करते मुझे दुःख तो होता है परन्तु येटी संसार की यही चाल है। हमारे घर से तुम्हारा इतना ही सम्बन्ध था। विवाह होते ही तुम दूसरे घर की हो गई। अब तुम मेरी जगह अपनी सास को और अपने पिता को जगह अपने सुसर को समझना 1 मुशोला लड़की वही है जो अपने सासरे में पहुंच कर वहां के सब लोगों का मन अपने गुणों से मोहित कर ले । जो चतुर होती हैं उन को माताओं को भी प्रशंसा वे हो जाती है और जो गुणहीना और दुश्शीला लड़की होती हैं सुसराल में भर कर अपने पीहर वालों का नाम धराती हैं। मैं ने तुम्हें सब आवश्यक बातों की शिक्षा दी है और अगवान की कृपा से तुम पढ़ लिख भी गई हो परन्तु फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि तुम्हें अब किसी शिक्षा को आवश्यकता नहीं
* बिना स्त्रियों के विचारों के सुधरे कभी किसी जाति का सामाजिक सुधार हो नहीं सकता इसजिये ऐसे स्त्री-शिक्षा सम्बन्धी लेख जिनसे कम व्यवस्था
लियों व लड़कियों के विचार सुध हम छापना आरम्भ करते है । प्रत्येक अंक में एक लेख विशेषतः खियों के लिये छापा जाया करेगा ।
सम्बन्धी यात का कुछ प्रमुभव न होने से तुम अभी मेरे लिये दोष घालिका के शुरू हो ही इस से आज तुम्हें विदा करने से हले ये सथ घातें फिर दुहराना चाहती हूं जिन फी में ने समय समय पर तुम्हें शिक्षा दी है ।
मधुर भाषण में कुछ सर्च तो नहीं होता परन्तु उस के बदले में चे २ बोजें मिल जाती हैं जो रुपयों के सूर्य से भी बहुधा नहीं मिलतीं । किसी विद्वान् का कथन है कि जो मधुरभायी है उसके लिये देश परदेश सय एकसा ही है । ऐसा आदमी कहीं भी घला जावे सदैव सुख से रहता है । जो मीठे वचन नहीं घोल सकता, घह विद्वान् हो चाहे धनवान् सो घड़ाई को प्राप्त नहीं होता । मधुर वचन घोलने से गर अपने हो जाते हैं घोर कटु घपनों से अपने गैर होजाते हैं । जो भारमीय जनों से मधुर वचन बोलते हैं घे सुख शान्ति का धोज घोसे है। घेटो । फल जय तुम यहां से घिदा होगी तो तुम्हें यह जान पड़ेगा कि में धन्य लोगों में धन्य स्थान को जा रही हूं । यद्यपि यह क्यान इस समय प्रदेश जैसा है परन्तु तुम्हारे जीवन सर्वस्व उसी स्थान में घास करते हैं इसलिये सय तुम्हारा मिय स्थान वही है । तुमको समकमा चाहिये कि तुम्हारे माता पिता ने तुम्हारे सुख समृद्धि के लिये वह स्थान लोजा है । पेटी घब तुम समझदार हो इससे हम दोनों तुम को मुसी देखने के लिये तुम्हे विदा करते हैं। बेटी का पीहर तो एक पाठशाला के समान है और वगुर-गृह ही असलो घर है। जो पीहर में अच्छी शिक्षा नहीं पातीं यह सायरे में आमन्द से नहीं रद्द सकर्ती हैं। प्रत्येक माता का यह धर्म है कि अपनी पुत्री को यथाशकि मुखवती धनावे और प्रत्येक पुत्री का धर्म है कि पीदर में रह कर ऐसी अब्दी २ पातें सोसे जिससे पति-गृह में पथ प्रसन्न हों ।
अब पेटो पति-गृह को ही अपना सञ्चार समझना । मुसराल के सव मनुष्यों से प्रात्मीयजनों के तुल्य प्रेम व्यवहार करना। वहां पहुंचने के पर तुम्हें सास भुमर के दर्शन होने, पति-परिवार के दो पुरुष मिलेंगे तथा पति देव के चरण कमलों में शाश्रय मिलेगा। सास तुम्हारी केशण
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गंगा के गर्भ से देयप्रत, जिन का नाम पीछेभीष्म प्रसिद्ध हुआ, से जन्म लिया । इन्होंने सांगोपांग वेदों का अध्ययन करते हुए शस्त्रविद्या में पूर्ण अभ्यास किया था। उस समय इन के समान राकुशल और पराक्रमी योहा एक भी न था । सय विद्याथों में जैसे पारंगत थे वैसे ही सत्यशील और चरित्रवान् भी थे। राजा ने युवराज पद के योग्य देख कर युवावस्था में इनका यौवराज्याभिषेक किया। युवराज प्रद प्राप्त होने पर देवव्रत प्रजा पालन में राजा को बहुत कुछ सहायता देने लगे । माता का पुत्री को उपदेश उन्नीस येटी । कल तुम मुझ से विदा होगी। तुम्हें अलग करते मुझे दुःख तो होता है परन्तु येटी संसार की यही चाल है। हमारे घर से तुम्हारा इतना ही सम्बन्ध था। विवाह होते ही तुम दूसरे घर की हो गई। अब तुम मेरी जगह अपनी सास को और अपने पिता को जगह अपने सुसर को समझना एक मुशोला लड़की वही है जो अपने सासरे में पहुंच कर वहां के सब लोगों का मन अपने गुणों से मोहित कर ले । जो चतुर होती हैं उन को माताओं को भी प्रशंसा वे हो जाती है और जो गुणहीना और दुश्शीला लड़की होती हैं सुसराल में भर कर अपने पीहर वालों का नाम धराती हैं। मैं ने तुम्हें सब आवश्यक बातों की शिक्षा दी है और अगवान की कृपा से तुम पढ़ लिख भी गई हो परन्तु फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि तुम्हें अब किसी शिक्षा को आवश्यकता नहीं * बिना स्त्रियों के विचारों के सुधरे कभी किसी जाति का सामाजिक सुधार हो नहीं सकता इसजिये ऐसे स्त्री-शिक्षा सम्बन्धी लेख जिनसे कम व्यवस्था लियों व लड़कियों के विचार सुध हम छापना आरम्भ करते है । प्रत्येक अंक में एक लेख विशेषतः खियों के लिये छापा जाया करेगा । सम्बन्धी यात का कुछ प्रमुभव न होने से तुम अभी मेरे लिये दोष घालिका के शुरू हो ही इस से आज तुम्हें विदा करने से हले ये सथ घातें फिर दुहराना चाहती हूं जिन फी में ने समय समय पर तुम्हें शिक्षा दी है । मधुर भाषण में कुछ सर्च तो नहीं होता परन्तु उस के बदले में चे दो बोजें मिल जाती हैं जो रुपयों के सूर्य से भी बहुधा नहीं मिलतीं । किसी विद्वान् का कथन है कि जो मधुरभायी है उसके लिये देश परदेश सय एकसा ही है । ऐसा आदमी कहीं भी घला जावे सदैव सुख से रहता है । जो मीठे वचन नहीं घोल सकता, घह विद्वान् हो चाहे धनवान् सो घड़ाई को प्राप्त नहीं होता । मधुर वचन घोलने से गर अपने हो जाते हैं घोर कटु घपनों से अपने गैर होजाते हैं । जो भारमीय जनों से मधुर वचन बोलते हैं घे सुख शान्ति का धोज घोसे है। घेटो । फल जय तुम यहां से घिदा होगी तो तुम्हें यह जान पड़ेगा कि में धन्य लोगों में धन्य स्थान को जा रही हूं । यद्यपि यह क्यान इस समय प्रदेश जैसा है परन्तु तुम्हारे जीवन सर्वस्व उसी स्थान में घास करते हैं इसलिये सय तुम्हारा मिय स्थान वही है । तुमको समकमा चाहिये कि तुम्हारे माता पिता ने तुम्हारे सुख समृद्धि के लिये वह स्थान लोजा है । पेटी घब तुम समझदार हो इससे हम दोनों तुम को मुसी देखने के लिये तुम्हे विदा करते हैं। बेटी का पीहर तो एक पाठशाला के समान है और वगुर-गृह ही असलो घर है। जो पीहर में अच्छी शिक्षा नहीं पातीं यह सायरे में आमन्द से नहीं रद्द सकर्ती हैं। प्रत्येक माता का यह धर्म है कि अपनी पुत्री को यथाशकि मुखवती धनावे और प्रत्येक पुत्री का धर्म है कि पीदर में रह कर ऐसी अब्दी दो पातें सोसे जिससे पति-गृह में पथ प्रसन्न हों । अब पेटो पति-गृह को ही अपना सञ्चार समझना । मुसराल के सव मनुष्यों से प्रात्मीयजनों के तुल्य प्रेम व्यवहार करना। वहां पहुंचने के पर तुम्हें सास भुमर के दर्शन होने, पति-परिवार के दो पुरुष मिलेंगे तथा पति देव के चरण कमलों में शाश्रय मिलेगा। सास तुम्हारी केशण
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रंगों के पावन त्यौहार होली पूरे भारत के साथ साथ विदेशों में भी धूमधाम से मनायी गयी, भारत में तो लोगों ने कोरोना वाइरस के डर को दरकिनार कर जमकर होली के रंग खेले। बाॅलीवुड से लेकर क्रिकेट जगत के सितारों ने भी होली का पूरा मजा लिया। बिग बाॅस फेम नताशा स्तांकोविक (Nataša Stanković) ने अपने मंगेतर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandiya) संग होली सेलिब्रेट की। कुछ समय पहले नताशा और हार्दिक की सगाई हुई थी सगाई के बाद नताशा और हार्दिक का ये पहला होली सेलिब्रेशन है।
नताशा ने हार्दिक के परिवार वालों के साथ होली का त्यौहार मनाया। इस मौके पर नताशा व्हाइट सलवार पिंक पायजामा और पिंक दुपट्टे में नजर आई। कपल नताशा और हार्दिक ने होली फेस्टिवल पर हल्के रंग लगाए, कह सकते हैं कि उन्होंने डीसेंट होली खेली।
नताशा की हार्दिक पांडया की फैमली से भी अच्छी पटती है। नताशा मंगेतर हार्दिक के भाई भाभी संग अच्छा बाॅन्ड शेयर करती है। नताशा और हार्दिक की ये तस्वीरें काफी पंसद की जा रही है। बता दें कि नताशा और हार्दिक ने इस साल 1 जनवरी को सगाई की थी उनकी सगाई की तस्वीरें जैसे ही सामने आई फैंस सरप्राइज्ड हो थे। हार्दिक पाड्या ने नताशा के साथ सगाई की फोटो शेयर करते हुए रोमांटिक अंदाज में लिखा था कि 'मैं तेरा, तू मेरी जान, सारा हिन्दुस्तान 01. 01. 2020 #England दोनों ने सगाई सेरेमनी दुबई में क्रूज पर की थी।
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रंगों के पावन त्यौहार होली पूरे भारत के साथ साथ विदेशों में भी धूमधाम से मनायी गयी, भारत में तो लोगों ने कोरोना वाइरस के डर को दरकिनार कर जमकर होली के रंग खेले। बाॅलीवुड से लेकर क्रिकेट जगत के सितारों ने भी होली का पूरा मजा लिया। बिग बाॅस फेम नताशा स्तांकोविक ने अपने मंगेतर हार्दिक पांड्या संग होली सेलिब्रेट की। कुछ समय पहले नताशा और हार्दिक की सगाई हुई थी सगाई के बाद नताशा और हार्दिक का ये पहला होली सेलिब्रेशन है। नताशा ने हार्दिक के परिवार वालों के साथ होली का त्यौहार मनाया। इस मौके पर नताशा व्हाइट सलवार पिंक पायजामा और पिंक दुपट्टे में नजर आई। कपल नताशा और हार्दिक ने होली फेस्टिवल पर हल्के रंग लगाए, कह सकते हैं कि उन्होंने डीसेंट होली खेली। नताशा की हार्दिक पांडया की फैमली से भी अच्छी पटती है। नताशा मंगेतर हार्दिक के भाई भाभी संग अच्छा बाॅन्ड शेयर करती है। नताशा और हार्दिक की ये तस्वीरें काफी पंसद की जा रही है। बता दें कि नताशा और हार्दिक ने इस साल एक जनवरी को सगाई की थी उनकी सगाई की तस्वीरें जैसे ही सामने आई फैंस सरप्राइज्ड हो थे। हार्दिक पाड्या ने नताशा के साथ सगाई की फोटो शेयर करते हुए रोमांटिक अंदाज में लिखा था कि 'मैं तेरा, तू मेरी जान, सारा हिन्दुस्तान एक. एक. दो हज़ार बीस #England दोनों ने सगाई सेरेमनी दुबई में क्रूज पर की थी।
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सच ये है कि लुटियंस इलाके की लगभग सारी कोठियां सरकार के शीर्ष मंत्रियों और बड़े बाबुओं को आवंटित होती हैं। सो सरकार के ही लोग सही मायने में आज के लुटियंस गैंग ठहरते हैं। किसी भी वक्त जाएं वहां इन्हीं के भीमकाय कमांडो और बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियां दिख जाएंगी।
अपने लंबे इतिहास में राजधानी दिल्ली बार-बार बसी और उजड़ी है। मुहम्मद तुगलक से लेकर अकबर और ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजधानी यहां से हटाकर अन्य जगह ले जाने के प्रयोग किए। पर कुछेक समय तक उलट-पलट के बाद दिल्ली ही दोबारा राजधानी बन गई। ऐसी नगरी में राजनीति के बदलाव का दौर सिर्फ कुछ सत्तारूढ़ या सत्ता से दर बदर हुए घरानों या दलों तक सीमित नहीं रहता। वह कई तरह की अनकही उलझनों से भरा और कहीं न कहीं बहत गहरे सामूहिक मानवीय अनुभवों और दर्शन से भी जुड़ा साबित हुआ होता है।
सत्ता के बदलाव के इन पहलुओं को अक्सर राजनेता नहीं, साहित्यकार का मन ही पकड़ पाता है। वजह यह, कि वह निजी राग-द्वेष या लालच की तहत फौरी डायग्नोसिस नहीं देता। बदलाव को वह तटस्थ मन से देश की सनातन विचार परंपरा की रौशनी में परखता है। आज जबकि 2019 के चुनाव खत्म हो चुके हैं और यह क्षण इसी तरह के सही शोध-बोध का है। पर यह काम दलीय प्रवक्ताओं और तथाकथित विशेषज्ञों की चें-चें, पें-पें से भरी टीवी बहसों की या राजनेताओं की फब्तियों, उक्तियों की तरफ से कान बंद करके ही किया जा सकता है।
सो चलिए इस बार के जनादेश को बाहर खड़े होकर देखा जाए। विजय गर्व से दमकते सत्ता पक्ष की जयकार बुलवा रहे पक्ष का सवाल चौखट पर रोकता है। राजनीतिक बदलाव में जो दौर पीछे छूट गया, जो दल वनवास भेज दिया गया, उसके इतिहास पर इतना क्या सोचना? क्या मतदाता ने इस बार यह साफ नहीं जता दिया है कि उसे राजनीति के शीर्ष पर पुराना संभ्रांत वर्ग (जाने क्यों अच्छी भली हिंदी बोलने वाले भी इसके लिए अंग्रेजी के 'इलीट' या 'खान मार्केट गैंग' सरीखे विशेषण इस्तेमाल कर रहे हैं) कुबूल नहीं है।
नए को समझो, उसका स्वागत करो। इलीट वर्ग और उसकी विचारधारा और जीवन शैली पर खाक डालो। जीत के बाद हारे हुओं की खिल्ली उड़ाना हर विजयी दल का प्रिय शगल होता है। मौजूदा पार्टी ही इसका अपवाद क्यों हो? पर इस बार खिल्ली का विषय चयन कठिन है। वाम दल की समाप्तप्राय धारा के मद्देनजर पुराने आरोप, शंकाएं या उपहास बेमानी पड़ चुके हैं। केंद्र द्वारा तेजी से अपनी विचारधारा में रंगे जा रहे जेएनयू के लिए 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का विशेषण या कि बड़ी तादाद में पिछले पांच सालों में बड़े सरकारी पुरस्कारों के कृतज्ञ लाभार्थियों के द्वारा की जा रही हर मंच से वंदना के बाद 'अवार्ड वापसी गैंग' को कोसना भी अब पहले की तरह सरकारी मीडिया प्रकोष्ठ के दिल की कली नहीं खिला सकता है।
'भारतमाता ग्रामवासिनी, खेतों में फैला है अंचल धूल धूसरित'. . . किस्म का 'हम गरीब बनाम वे शहरी थैलीशाह' वाला रुदन भी अब संभव नहीं। वजह यह कि इस बार की नवनिर्वाचित लोकसभा खुद भी करोड़पतियों से भरी पूरी है, जिनकी निजी संपत्ति का औसत लगभग 20. 9 करोड़ बताया जा रहा है। तो सत्तारूढ़ दल के लोग देश की कुल आबादी के 0. 1 फीसदी संपन्नतम वर्ग के सदस्य साबित होने के बाद अब तर्क दे रहे हैं कि मां भारती तरक्की कर गरीबी से उबर चुकी है, देखा नहीं कि इन चुनावों में धर्म और जाति के रसायनों से वोट बैंकों की कितनी सफल लामबंदी की गई?
'नामदार बनाम कामदार' की तुकबंदी भी सुनने में नहीं आ रही। ऊपर वाले की कृपा से सत्तारूढ़ सरकार में कितने नामदार आ गए हैं। 40 करोड़ की घोषित संपत्ति वाली बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर, मेनका गांधी, वरुण गांधी, धौलपर के राजकुंवर और जयपुर की राजकुमारी जैसे नामदार खानदानी रईस लोग भारी बहुमत से चुनाव जीत कर सांसद बन गए हैं तो नामदार कामदार छोड़ो।
फिर वे सोचते हैं चलो खान मार्केट पर ही चर्चा करें। सुनें कि पुराने रईस क्या खा-पहन या पढ़ रहे हैं! युवा वर्ग भी अब इस 'चलो जरा खान मार्केट तक टहल आते हैं,' वाली कामना से सहमत है। उसकी अपनी इच्छा पहले की पीढ़ी के झोलाधारियों की तरह किसी गांव में जाकर एनजीओ खोलकर धूल-पानी के बीच रहते हुए जनसेवा करने की नहीं है। वह पुराने अमीरों की नए अमीरों द्वारा टीवी पर खिंचाई सुन हंसता है। पर उस हंसी में कुंठा अधिक है, देश प्रेम या समाज सुधार के लिए लगाव बहुत कम।
फेसबुक गवाह है कि आज का औसत मिलेनियल सोशल मीडिया पर सेल्फी युग का अमरत्व हासिल करने, विदेश जाकर पढ़ने, अपने दोस्तों के साथ मॉल जाकर कीमती सामान मोलाने, रेस्तरां-पब गुलजार करने और अंततः खुद भी एक सेलेब्रिटी नामदार बनने के ही सपने दिन-रात देखता है। भारत, चीन या जल संकट से अधिक चिंता उसे अपनी पोस्ट पर आने वाली लाइक्स की रहती है। रही बात भ्रष्टाचार की, सो उनके लिए इतना ही काफी है कि भगोड़े माल्या और नीरव मोदी पर सात समुंदर पार अदालती कार्रवाई चालू है। बैंकिंग के कई बड़े सितारों को भी अस्ताचलगामी बना दिया गया है।
चीन के देंग श्याओ फिंग के व्यावहारिक मुहावरे में यह भारतीय मतदाता भी सोचता है कि बिल्ली काली हो या सफेद, इससे क्या फर्क पड़ना है? इतना ही जरूरी है कि वह उसकी खातिर चूहे पकड़ सकती हो। तो इस तरह कुल मिलाकर हमको तो भविष्य के लिए जो आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक सपने जगाए, गढ़े और मीडिया की मार्फत प्रचारित किए जा रहे हैं, बारीकी से देखने पर क्रांतिकारी नहीं यथास्थितिवादी ही दिख रहे हैं।
एक गुलाबी अखबार ने यह भी भली याद दिलाई है कि 'खान मार्केट गैंग' का विशेषण दरअसल मीडियावालों के बीच सभी दलों के खाते-पीते सांसदों के समूह के लिए मजाक-मजाक में बना था। यह वे गुट थे, जिनको संसद के सेंट्रल हॉल में मिलने वाला रेलवई का खाना रास नहीं आता था और अच्छा कुछ खाने-पीने के लिए यह मंडली संसदीय सत्र के दौरान अक्सर दोपहर में खान मार्केट के किसी दामी रेस्तरां का रुख करती दिखती थी। बहरहाल, इन दिनों खान मार्केट गैंग विशेषण को पुरानी इलीट का समानार्थक बनाकर धड़ल्ले से टीवी और सोशल मीडिया पर फेंका जा रहा है।
दूसरी गुप्त सच्चाई यह है कि लुटियंस इलाके की लगभग सारी कोठियां सरकार के शीर्ष मंत्रियों और बड़े बाबुओं को आवंटित होती रही हैं। सो आज की सरकार के ही लोग सही मायने में आज का लुटियंस गैंग ठहरते हैं। हाथ कंगन को आरसी क्या? आप किसी भी समय खान मार्केट चले जाइए आपको वहां इन्हीं के भीमकाय काले कैट कमांडो और बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियां मार्केट में उनके बीबी-बच्चों को शॉपिंग कराते या मालिकान के किसी रेस्तरां से खा-पीकर लौटने के इंतज़ार में चहलकदमी करते दिख जाएंगे।
तब 'मीर' की तरह उजड़ी दिल्ली के दयार के गरीब बाशिंदों, खासकर मीडिया के वरिष्ठ जनों को, अचानक खान मार्केट गैंग के खास उल खास नाम से काहे नवाजा जा रहा है? दरअसल, पत्रकारों और पढ़ने-पढ़ाने वालों के आकर्षण का विषय उस इलाके की 'बाहरी संस' या 'फकीरचंद' सरीखी पीढ़ियों पुरानी किताबों की दुकानें ही बची हैं, जो कमर्शियल आग्रह कम पुस्तक प्रेम के कारण ही अधिक चल रही हैं, और कब तक चलेंगी कहना कठिन है। उनमें घंटों नई किताबें पलटना वहां के जानकार पुराने कर्मचारियों से लेखकों की बाबत गप लड़ाने का अपना ही सुख है।
और पुराने किताबी कीड़ों के लिए ऐसी रसमय जगहें अब शेष दिल्ली में बहुत कम बची हैं। पब्लिक लायब्रेरियां तो और भी कम। पार्कों, कहवाखानों की न पूछिए, जिनकी जगह छोटे-बड़े पब हर जगह उपज रहे हैं। वहां बाहर पहलवानी व्यायमशालाओं से निकले मुच्छड़ दरबान पहरा देते हैं और भीतर अनवरत नाच-गाना और शराबनोशी चलती रहती है।
सो खान मार्केट में बची-खुची लुप्तप्राय सरस्वती धाराओं से ज्ञान रस ग्रहण करने, घर खर्च में कटौती करके भी किताबें खरीदने, और उजड्डता भरे अराजक कैंपसों में पढ़ने-पढ़ाने वालों का सीमित विद्याव्यसनी वर्ग बस किताबें खरीदता है। यह वही समुदाय है जो भारत की असली परंपराओं, 1950 के संविधान निर्माताओं के द्वारा एक समन्वयवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक भारत के सपनों का चश्मदीद गवाह और जानकार बचा है। कई बार अपनी नौकरी या सर गंवाने की कीमत पर भी दिल्ली के इसी वर्ग ने पीढ़ी दर पीढ़ी बर्बर जत्थों द्वारा उजाड़ी-जलाई जा रही ज्ञान की परंपराओं को वेदव्यास की तरह किसी सुदूर जंगल में छुपा कर बचाया भी है।
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सच ये है कि लुटियंस इलाके की लगभग सारी कोठियां सरकार के शीर्ष मंत्रियों और बड़े बाबुओं को आवंटित होती हैं। सो सरकार के ही लोग सही मायने में आज के लुटियंस गैंग ठहरते हैं। किसी भी वक्त जाएं वहां इन्हीं के भीमकाय कमांडो और बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियां दिख जाएंगी। अपने लंबे इतिहास में राजधानी दिल्ली बार-बार बसी और उजड़ी है। मुहम्मद तुगलक से लेकर अकबर और ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजधानी यहां से हटाकर अन्य जगह ले जाने के प्रयोग किए। पर कुछेक समय तक उलट-पलट के बाद दिल्ली ही दोबारा राजधानी बन गई। ऐसी नगरी में राजनीति के बदलाव का दौर सिर्फ कुछ सत्तारूढ़ या सत्ता से दर बदर हुए घरानों या दलों तक सीमित नहीं रहता। वह कई तरह की अनकही उलझनों से भरा और कहीं न कहीं बहत गहरे सामूहिक मानवीय अनुभवों और दर्शन से भी जुड़ा साबित हुआ होता है। सत्ता के बदलाव के इन पहलुओं को अक्सर राजनेता नहीं, साहित्यकार का मन ही पकड़ पाता है। वजह यह, कि वह निजी राग-द्वेष या लालच की तहत फौरी डायग्नोसिस नहीं देता। बदलाव को वह तटस्थ मन से देश की सनातन विचार परंपरा की रौशनी में परखता है। आज जबकि दो हज़ार उन्नीस के चुनाव खत्म हो चुके हैं और यह क्षण इसी तरह के सही शोध-बोध का है। पर यह काम दलीय प्रवक्ताओं और तथाकथित विशेषज्ञों की चें-चें, पें-पें से भरी टीवी बहसों की या राजनेताओं की फब्तियों, उक्तियों की तरफ से कान बंद करके ही किया जा सकता है। सो चलिए इस बार के जनादेश को बाहर खड़े होकर देखा जाए। विजय गर्व से दमकते सत्ता पक्ष की जयकार बुलवा रहे पक्ष का सवाल चौखट पर रोकता है। राजनीतिक बदलाव में जो दौर पीछे छूट गया, जो दल वनवास भेज दिया गया, उसके इतिहास पर इतना क्या सोचना? क्या मतदाता ने इस बार यह साफ नहीं जता दिया है कि उसे राजनीति के शीर्ष पर पुराना संभ्रांत वर्ग कुबूल नहीं है। नए को समझो, उसका स्वागत करो। इलीट वर्ग और उसकी विचारधारा और जीवन शैली पर खाक डालो। जीत के बाद हारे हुओं की खिल्ली उड़ाना हर विजयी दल का प्रिय शगल होता है। मौजूदा पार्टी ही इसका अपवाद क्यों हो? पर इस बार खिल्ली का विषय चयन कठिन है। वाम दल की समाप्तप्राय धारा के मद्देनजर पुराने आरोप, शंकाएं या उपहास बेमानी पड़ चुके हैं। केंद्र द्वारा तेजी से अपनी विचारधारा में रंगे जा रहे जेएनयू के लिए 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का विशेषण या कि बड़ी तादाद में पिछले पांच सालों में बड़े सरकारी पुरस्कारों के कृतज्ञ लाभार्थियों के द्वारा की जा रही हर मंच से वंदना के बाद 'अवार्ड वापसी गैंग' को कोसना भी अब पहले की तरह सरकारी मीडिया प्रकोष्ठ के दिल की कली नहीं खिला सकता है। 'भारतमाता ग्रामवासिनी, खेतों में फैला है अंचल धूल धूसरित'. . . किस्म का 'हम गरीब बनाम वे शहरी थैलीशाह' वाला रुदन भी अब संभव नहीं। वजह यह कि इस बार की नवनिर्वाचित लोकसभा खुद भी करोड़पतियों से भरी पूरी है, जिनकी निजी संपत्ति का औसत लगभग बीस. नौ करोड़ बताया जा रहा है। तो सत्तारूढ़ दल के लोग देश की कुल आबादी के शून्य. एक फीसदी संपन्नतम वर्ग के सदस्य साबित होने के बाद अब तर्क दे रहे हैं कि मां भारती तरक्की कर गरीबी से उबर चुकी है, देखा नहीं कि इन चुनावों में धर्म और जाति के रसायनों से वोट बैंकों की कितनी सफल लामबंदी की गई? 'नामदार बनाम कामदार' की तुकबंदी भी सुनने में नहीं आ रही। ऊपर वाले की कृपा से सत्तारूढ़ सरकार में कितने नामदार आ गए हैं। चालीस करोड़ की घोषित संपत्ति वाली बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर, मेनका गांधी, वरुण गांधी, धौलपर के राजकुंवर और जयपुर की राजकुमारी जैसे नामदार खानदानी रईस लोग भारी बहुमत से चुनाव जीत कर सांसद बन गए हैं तो नामदार कामदार छोड़ो। फिर वे सोचते हैं चलो खान मार्केट पर ही चर्चा करें। सुनें कि पुराने रईस क्या खा-पहन या पढ़ रहे हैं! युवा वर्ग भी अब इस 'चलो जरा खान मार्केट तक टहल आते हैं,' वाली कामना से सहमत है। उसकी अपनी इच्छा पहले की पीढ़ी के झोलाधारियों की तरह किसी गांव में जाकर एनजीओ खोलकर धूल-पानी के बीच रहते हुए जनसेवा करने की नहीं है। वह पुराने अमीरों की नए अमीरों द्वारा टीवी पर खिंचाई सुन हंसता है। पर उस हंसी में कुंठा अधिक है, देश प्रेम या समाज सुधार के लिए लगाव बहुत कम। फेसबुक गवाह है कि आज का औसत मिलेनियल सोशल मीडिया पर सेल्फी युग का अमरत्व हासिल करने, विदेश जाकर पढ़ने, अपने दोस्तों के साथ मॉल जाकर कीमती सामान मोलाने, रेस्तरां-पब गुलजार करने और अंततः खुद भी एक सेलेब्रिटी नामदार बनने के ही सपने दिन-रात देखता है। भारत, चीन या जल संकट से अधिक चिंता उसे अपनी पोस्ट पर आने वाली लाइक्स की रहती है। रही बात भ्रष्टाचार की, सो उनके लिए इतना ही काफी है कि भगोड़े माल्या और नीरव मोदी पर सात समुंदर पार अदालती कार्रवाई चालू है। बैंकिंग के कई बड़े सितारों को भी अस्ताचलगामी बना दिया गया है। चीन के देंग श्याओ फिंग के व्यावहारिक मुहावरे में यह भारतीय मतदाता भी सोचता है कि बिल्ली काली हो या सफेद, इससे क्या फर्क पड़ना है? इतना ही जरूरी है कि वह उसकी खातिर चूहे पकड़ सकती हो। तो इस तरह कुल मिलाकर हमको तो भविष्य के लिए जो आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक सपने जगाए, गढ़े और मीडिया की मार्फत प्रचारित किए जा रहे हैं, बारीकी से देखने पर क्रांतिकारी नहीं यथास्थितिवादी ही दिख रहे हैं। एक गुलाबी अखबार ने यह भी भली याद दिलाई है कि 'खान मार्केट गैंग' का विशेषण दरअसल मीडियावालों के बीच सभी दलों के खाते-पीते सांसदों के समूह के लिए मजाक-मजाक में बना था। यह वे गुट थे, जिनको संसद के सेंट्रल हॉल में मिलने वाला रेलवई का खाना रास नहीं आता था और अच्छा कुछ खाने-पीने के लिए यह मंडली संसदीय सत्र के दौरान अक्सर दोपहर में खान मार्केट के किसी दामी रेस्तरां का रुख करती दिखती थी। बहरहाल, इन दिनों खान मार्केट गैंग विशेषण को पुरानी इलीट का समानार्थक बनाकर धड़ल्ले से टीवी और सोशल मीडिया पर फेंका जा रहा है। दूसरी गुप्त सच्चाई यह है कि लुटियंस इलाके की लगभग सारी कोठियां सरकार के शीर्ष मंत्रियों और बड़े बाबुओं को आवंटित होती रही हैं। सो आज की सरकार के ही लोग सही मायने में आज का लुटियंस गैंग ठहरते हैं। हाथ कंगन को आरसी क्या? आप किसी भी समय खान मार्केट चले जाइए आपको वहां इन्हीं के भीमकाय काले कैट कमांडो और बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियां मार्केट में उनके बीबी-बच्चों को शॉपिंग कराते या मालिकान के किसी रेस्तरां से खा-पीकर लौटने के इंतज़ार में चहलकदमी करते दिख जाएंगे। तब 'मीर' की तरह उजड़ी दिल्ली के दयार के गरीब बाशिंदों, खासकर मीडिया के वरिष्ठ जनों को, अचानक खान मार्केट गैंग के खास उल खास नाम से काहे नवाजा जा रहा है? दरअसल, पत्रकारों और पढ़ने-पढ़ाने वालों के आकर्षण का विषय उस इलाके की 'बाहरी संस' या 'फकीरचंद' सरीखी पीढ़ियों पुरानी किताबों की दुकानें ही बची हैं, जो कमर्शियल आग्रह कम पुस्तक प्रेम के कारण ही अधिक चल रही हैं, और कब तक चलेंगी कहना कठिन है। उनमें घंटों नई किताबें पलटना वहां के जानकार पुराने कर्मचारियों से लेखकों की बाबत गप लड़ाने का अपना ही सुख है। और पुराने किताबी कीड़ों के लिए ऐसी रसमय जगहें अब शेष दिल्ली में बहुत कम बची हैं। पब्लिक लायब्रेरियां तो और भी कम। पार्कों, कहवाखानों की न पूछिए, जिनकी जगह छोटे-बड़े पब हर जगह उपज रहे हैं। वहां बाहर पहलवानी व्यायमशालाओं से निकले मुच्छड़ दरबान पहरा देते हैं और भीतर अनवरत नाच-गाना और शराबनोशी चलती रहती है। सो खान मार्केट में बची-खुची लुप्तप्राय सरस्वती धाराओं से ज्ञान रस ग्रहण करने, घर खर्च में कटौती करके भी किताबें खरीदने, और उजड्डता भरे अराजक कैंपसों में पढ़ने-पढ़ाने वालों का सीमित विद्याव्यसनी वर्ग बस किताबें खरीदता है। यह वही समुदाय है जो भारत की असली परंपराओं, एक हज़ार नौ सौ पचास के संविधान निर्माताओं के द्वारा एक समन्वयवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक भारत के सपनों का चश्मदीद गवाह और जानकार बचा है। कई बार अपनी नौकरी या सर गंवाने की कीमत पर भी दिल्ली के इसी वर्ग ने पीढ़ी दर पीढ़ी बर्बर जत्थों द्वारा उजाड़ी-जलाई जा रही ज्ञान की परंपराओं को वेदव्यास की तरह किसी सुदूर जंगल में छुपा कर बचाया भी है।
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