raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
जयपुर। राजस्थान के कई इलाकों में मानसूनी बारिश का दौर इस सप्ताहांत तक जारी रहने का अनुमान है और इस दौरान कुछ जगहों पर भारी व बेहद भारी बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, फिलहाल उत्तरी ओडिशा और झारखंड के ऊपर एक कम दबाव वाला क्षेत्र बना हुआ है, जिसके असर से अगले कुछ दिनों तक राज्य के दक्षिणी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश और एक-दो जगहों पर बेहद भारी बारिश होने के आसार हैं।
मौसम केंद्र ने पांच जुलाई को राजस्थान के भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही जिले में कुछ जगहों पर भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, छह जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश के अनुमान को देखते हुए यलो अलर्ट, जबकि राजसमंद, नागौर और पाली में कहीं-कहीं भारी से अति भारी बारिश होने की आशंका के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यह चेतावनी सात और आठ जुलाई को कई और जिलों के लिए भी जारी की गई है। उल्लेखनीय है कि राजधानी जयपुर सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में बीते सप्ताह मानसून की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई थी।
|
जयपुर। राजस्थान के कई इलाकों में मानसूनी बारिश का दौर इस सप्ताहांत तक जारी रहने का अनुमान है और इस दौरान कुछ जगहों पर भारी व बेहद भारी बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, फिलहाल उत्तरी ओडिशा और झारखंड के ऊपर एक कम दबाव वाला क्षेत्र बना हुआ है, जिसके असर से अगले कुछ दिनों तक राज्य के दक्षिणी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश और एक-दो जगहों पर बेहद भारी बारिश होने के आसार हैं। मौसम केंद्र ने पांच जुलाई को राजस्थान के भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही जिले में कुछ जगहों पर भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, छह जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश के अनुमान को देखते हुए यलो अलर्ट, जबकि राजसमंद, नागौर और पाली में कहीं-कहीं भारी से अति भारी बारिश होने की आशंका के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यह चेतावनी सात और आठ जुलाई को कई और जिलों के लिए भी जारी की गई है। उल्लेखनीय है कि राजधानी जयपुर सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में बीते सप्ताह मानसून की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई थी।
|
न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पांचवें दिन का खेल खत्म होने तक भारतीय टीम ने 2 विकेट नुकसान पर 64 रन बना लिए हैं। इसके साथ ही दूसरी पारी में भारत की कुल बढ़त 32 रनों की हो गई है। चेतेश्वर पुजारा (12) औऱ कप्तान विराट कोहली (8) नाबाद पवेलियन लौटे। दूसरी पारी में भारत को ओपनर रोहित शर्मा (30) औऱ शुभमन गिल (8) के रूप में दो झटके लगे। दोनों को टिम साउदी ने अपना शिकार बनाया।
इससे पहले न्यूजीलैंड पहली पारी में 249 रनों पर सिमट गई थी और भारत पर 32 रनों ही अहम बढ़च हासिल की थी। भारतीय टीम पहली पारी में 217 रन पर ही ढेर हो गई थी।
रॉस टेलर ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 18000 रन पूरे कर लिए हैं, न्यूजीलैंड के लिए यह कारनामा करने वाले वह पहले खिलाड़ी बन गए हैं। अपनी पारी का चौथा रन बनाते ही उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। मौजूदा क्रिकेटर्स में से विराट कोहली और क्रिस गेल ने ही यह कारनामा किया है।
न्यूजीलैंड के ओपनिंग बल्लेबाज डेवोन कॉनवे का शानदार फॉर्म आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी जारी है। कॉनवे इस टूर्नामेंट के फाइनल में अर्धशतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। अपना तीसरा टेस्ट मैच खेल रहे कॉनवे ने इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मैच में 200 रन की पारी खेली थी, इसके बाद दूसरे टेस्ट में अर्धशतक जड़ा। अब उन्होंने तीसरे टेस्ट में एक और 50 प्लस स्कोर बनाया है।
काइल जैमीसन लंच के बाद इशांत शर्मा (4) और जसप्रीत बुमराह (0) के रूप में लगातार दो गेंदों में दो झटके दे दिए। इसके साथ ही उनके पारी में 5 विकेट भी पूरे हो गए। जैमीसन वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में 5 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। पहली पारी में भारत का स्कोर 9 विकेट पर 217 रन।
FIVE WICKET HAUL FOR KYLE JAMIESON IN THE WTC FINAL!!
भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे दिन लंच के समय तक पहली पारी में 7 विकेट के नुकसान पर 211 रन बना लिए। रविंद्र जडेजा (15) औऱ इशांत शर्मा (2) नाबाद पवेलियन लौटे। भारतीय टीम तीसरे दिन 3 विकेट के नुकसान पर 146 रन से आगे खेलने उतरी थी।
पहले सत्र में भारत ने 4 विकेट गंवाकर कुल 65 रन बनाए। भारत को विराट कोहली (44) ,अंजिक्य रहाणे (49), ऋषभ पंत (4) और रविचंद्रन अश्विन (22) के रूप चार झटके लगे। काइल जैमीसन ने कोहली और पंत, वहीं नील वैग्नर ने रहाणे और टिम साउदी ने अश्विन को पवेलियन भेजा।
भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे दिन लंच के समय तक पहली पारी में 7 विकेट के नुकसान पर 211 रन बना लिए। रविंद्र जडेजा (15) औऱ इशांत शर्मा (2) नाबाद पवेलियन लौटे। भारतीय टीम तीसरे दिन 3 विकेट के नुकसान पर 146 रन से आगे खेलने उतरी थी।
पहले सत्र में भारत ने 4 विकेट गंवाकर कुल 65 रन बनाए। भारत को विराट कोहली (44) ,अंजिक्य रहाणे (49), ऋषभ पंत (4) और रविचंद्रन अश्विन (22) के रूप चार झटके लगे। काइल जैमीसन ने कोहली और पंत, वहीं नील वैग्नर ने रहाणे और टिम साउदी ने अश्विन को पवेलियन भेजा।
कप्तान विराट कोहली के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम को चौथा झटका लग गया है। काइल जैमीसन ने उन्हें एलबीडबल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। कोहली ने 132 गेंदों में 1 चौके की मदद से 44 रनों की पारी खेली। तीसरे दिन भारतीय टीम 2 विकेट पर 146 रन के स्कोर से आगे खेलने उतरी थी।
कप्तान विराट कोहली के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम को चौथा झटका लग गया है। काइल जैमीसन ने उन्हें एलबीडबल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। कोहली ने 132 गेंदों में 1 चौके की मदद से 44 रनों की पारी खेली। तीसरे दिन भारतीय टीम 2 विकेट पर 146 रन के स्कोर से आगे खेलने उतरी थी।
भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे दिन चायकाल तक 3 विकेट के नुकसान पर 120 रन बना लिए हैं। कप्तान विराट कोहली 35 रन और अंजिक्य रहाणे 13 रन बनाकर नाबाद हैं। दूसरे सत्र में भारत ने चेतेश्वर पुजारा (8) के रूप में एक विकेट गवाया, उन्हें ट्रेंट बोल्ट ने एलबीडबल्यू आउट किया।
भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिफ में दूसरे दिन लंच तक 2 विकेट के नुकसान पर 69 रन बना लिए हैं। रोहित शर्मा (34) ने शुभमन गिल (28) ने मिलकर पहले विकेट के लिए 62 रन जोड़े। लेकिन इसके बाद काइल जैमिसन ने रोहित और नील वैग्नर ने गिल को पवेलियन का रास्ता दिखाया। कप्तान विराट कोहली 6 रन बनाकर और चेतेश्वर पुजारा 0 पर नाबाद हैं।
He dismisses Shubman Gill for 28.
भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिफ में दूसरे दिन लंच तक 2 विकेट के नुकसान पर 69 रन बना लिए हैं। रोहित शर्मा (34) ने शुभमन गिल (28) ने मिलकर पहले विकेट के लिए 62 रन जोड़े। लेकिन इसके बाद काइल जैमिसन ने रोहित और नील वैग्नर ने गिल को पवेलियन का रास्ता दिखाया। कप्तान विराट कोहली 6 रन बनाकर और चेतेश्वर पुजारा 0 पर नाबाद हैं।
He dismisses Shubman Gill for 28.
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में अच्छी शुरूआत के बाद भारतीय टीम को पहला झटका लग गया है। काइल जैमिसन ने हिटमैन को स्लिप में टिम साउदी के हाथों कैच आउट कराया। रोहित ने 68 गेंदों में 6 चौकों की मदद से 34 रनों की पारी खेली और शुभमन गिल के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 62 रनों की साझेदारी की।
न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने भारत के खिलाफ साउथैमप्टन के एजेब बाउल स्टेडियम में खेले जा रहे आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। मैच का पहला दिन बारिश की भेंट चढ़ गया था। जिसके बाद माना जा रहा था कि भारत की प्लेइंग इलेवन में बदलाव होंगे। लेकिन टीम उन 11 खिलाड़ियों के साथ उतरी हैं, जिन्हें गुरुवार (17 जून) को चुना था।
भारत औऱ न्यूजीलैंड के बीच आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल शुरू होने से पहले बुरी खबर आई है। इस मुकाबले के पहले दिन का पहले सत्र का खेल बारिश की भेंट चढ़ गया है। बारिश के कारण टॉस तय समय तक नहीं हो पाएगा और पहले सत्र का खेल नहीं होगा। बता दें कि साउथैम्पटन में सुबह से ही लगातार धीरे-धीरे बारिश हो रही है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने ट्वीट कर जानकारी दी कि पहले दिन का खेल नहीं होगा।
दो साल में 9 टीमों के बीच हुए शानदार क्रिकेट के बाद शुक्रवार (18 जून) को साउथैम्पटन के मैदान पर आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेला जाएगा। जिसमें टेस्ट क्रिकेट की दो टॉप टीम भारत और न्यूजीलैंड की टक्कर होगी।
मार्च 1877 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में पहला मैच खेला गया था। उसके 144 साल बाद अब इस फॉर्मेट में पहली बार वैश्विक टूर्नामेंट का फाइनल खेला जा रहा है।
न्यूजीलैंड की टीम सबसे पहले फाइनल में पहुंची,जबकि भारत पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रही।
भारतीय टीम ने फाइनल से पहले तैयारी के तौर पर सिर्फ इन्ट्रा स्कॉवड मुकाबले खेले औऱ नेट प्रैक्टिस की। वहीं न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच की सीरीज जीतकर आई है।
भारत की प्लेइगं XI:
रोहित शर्मा, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे (उप-कप्तान), ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा।
|
न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पांचवें दिन का खेल खत्म होने तक भारतीय टीम ने दो विकेट नुकसान पर चौंसठ रन बना लिए हैं। इसके साथ ही दूसरी पारी में भारत की कुल बढ़त बत्तीस रनों की हो गई है। चेतेश्वर पुजारा औऱ कप्तान विराट कोहली नाबाद पवेलियन लौटे। दूसरी पारी में भारत को ओपनर रोहित शर्मा औऱ शुभमन गिल के रूप में दो झटके लगे। दोनों को टिम साउदी ने अपना शिकार बनाया। इससे पहले न्यूजीलैंड पहली पारी में दो सौ उनचास रनों पर सिमट गई थी और भारत पर बत्तीस रनों ही अहम बढ़च हासिल की थी। भारतीय टीम पहली पारी में दो सौ सत्रह रन पर ही ढेर हो गई थी। रॉस टेलर ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने अट्ठारह हज़ार रन पूरे कर लिए हैं, न्यूजीलैंड के लिए यह कारनामा करने वाले वह पहले खिलाड़ी बन गए हैं। अपनी पारी का चौथा रन बनाते ही उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। मौजूदा क्रिकेटर्स में से विराट कोहली और क्रिस गेल ने ही यह कारनामा किया है। न्यूजीलैंड के ओपनिंग बल्लेबाज डेवोन कॉनवे का शानदार फॉर्म आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी जारी है। कॉनवे इस टूर्नामेंट के फाइनल में अर्धशतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। अपना तीसरा टेस्ट मैच खेल रहे कॉनवे ने इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मैच में दो सौ रन की पारी खेली थी, इसके बाद दूसरे टेस्ट में अर्धशतक जड़ा। अब उन्होंने तीसरे टेस्ट में एक और पचास प्लस स्कोर बनाया है। काइल जैमीसन लंच के बाद इशांत शर्मा और जसप्रीत बुमराह के रूप में लगातार दो गेंदों में दो झटके दे दिए। इसके साथ ही उनके पारी में पाँच विकेट भी पूरे हो गए। जैमीसन वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में पाँच विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। पहली पारी में भारत का स्कोर नौ विकेट पर दो सौ सत्रह रन। FIVE WICKET HAUL FOR KYLE JAMIESON IN THE WTC FINAL!! भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे दिन लंच के समय तक पहली पारी में सात विकेट के नुकसान पर दो सौ ग्यारह रन बना लिए। रविंद्र जडेजा औऱ इशांत शर्मा नाबाद पवेलियन लौटे। भारतीय टीम तीसरे दिन तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ छियालीस रन से आगे खेलने उतरी थी। पहले सत्र में भारत ने चार विकेट गंवाकर कुल पैंसठ रन बनाए। भारत को विराट कोहली ,अंजिक्य रहाणे , ऋषभ पंत और रविचंद्रन अश्विन के रूप चार झटके लगे। काइल जैमीसन ने कोहली और पंत, वहीं नील वैग्नर ने रहाणे और टिम साउदी ने अश्विन को पवेलियन भेजा। भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे दिन लंच के समय तक पहली पारी में सात विकेट के नुकसान पर दो सौ ग्यारह रन बना लिए। रविंद्र जडेजा औऱ इशांत शर्मा नाबाद पवेलियन लौटे। भारतीय टीम तीसरे दिन तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ छियालीस रन से आगे खेलने उतरी थी। पहले सत्र में भारत ने चार विकेट गंवाकर कुल पैंसठ रन बनाए। भारत को विराट कोहली ,अंजिक्य रहाणे , ऋषभ पंत और रविचंद्रन अश्विन के रूप चार झटके लगे। काइल जैमीसन ने कोहली और पंत, वहीं नील वैग्नर ने रहाणे और टिम साउदी ने अश्विन को पवेलियन भेजा। कप्तान विराट कोहली के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम को चौथा झटका लग गया है। काइल जैमीसन ने उन्हें एलबीडबल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। कोहली ने एक सौ बत्तीस गेंदों में एक चौके की मदद से चौंतालीस रनों की पारी खेली। तीसरे दिन भारतीय टीम दो विकेट पर एक सौ छियालीस रन के स्कोर से आगे खेलने उतरी थी। कप्तान विराट कोहली के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम को चौथा झटका लग गया है। काइल जैमीसन ने उन्हें एलबीडबल्यू आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। कोहली ने एक सौ बत्तीस गेंदों में एक चौके की मदद से चौंतालीस रनों की पारी खेली। तीसरे दिन भारतीय टीम दो विकेट पर एक सौ छियालीस रन के स्कोर से आगे खेलने उतरी थी। भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे दिन चायकाल तक तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ बीस रन बना लिए हैं। कप्तान विराट कोहली पैंतीस रन और अंजिक्य रहाणे तेरह रन बनाकर नाबाद हैं। दूसरे सत्र में भारत ने चेतेश्वर पुजारा के रूप में एक विकेट गवाया, उन्हें ट्रेंट बोल्ट ने एलबीडबल्यू आउट किया। भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिफ में दूसरे दिन लंच तक दो विकेट के नुकसान पर उनहत्तर रन बना लिए हैं। रोहित शर्मा ने शुभमन गिल ने मिलकर पहले विकेट के लिए बासठ रन जोड़े। लेकिन इसके बाद काइल जैमिसन ने रोहित और नील वैग्नर ने गिल को पवेलियन का रास्ता दिखाया। कप्तान विराट कोहली छः रन बनाकर और चेतेश्वर पुजारा शून्य पर नाबाद हैं। He dismisses Shubman Gill for अट्ठाईस. भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिफ में दूसरे दिन लंच तक दो विकेट के नुकसान पर उनहत्तर रन बना लिए हैं। रोहित शर्मा ने शुभमन गिल ने मिलकर पहले विकेट के लिए बासठ रन जोड़े। लेकिन इसके बाद काइल जैमिसन ने रोहित और नील वैग्नर ने गिल को पवेलियन का रास्ता दिखाया। कप्तान विराट कोहली छः रन बनाकर और चेतेश्वर पुजारा शून्य पर नाबाद हैं। He dismisses Shubman Gill for अट्ठाईस. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में अच्छी शुरूआत के बाद भारतीय टीम को पहला झटका लग गया है। काइल जैमिसन ने हिटमैन को स्लिप में टिम साउदी के हाथों कैच आउट कराया। रोहित ने अड़सठ गेंदों में छः चौकों की मदद से चौंतीस रनों की पारी खेली और शुभमन गिल के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए बासठ रनों की साझेदारी की। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने भारत के खिलाफ साउथैमप्टन के एजेब बाउल स्टेडियम में खेले जा रहे आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। मैच का पहला दिन बारिश की भेंट चढ़ गया था। जिसके बाद माना जा रहा था कि भारत की प्लेइंग इलेवन में बदलाव होंगे। लेकिन टीम उन ग्यारह खिलाड़ियों के साथ उतरी हैं, जिन्हें गुरुवार को चुना था। भारत औऱ न्यूजीलैंड के बीच आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल शुरू होने से पहले बुरी खबर आई है। इस मुकाबले के पहले दिन का पहले सत्र का खेल बारिश की भेंट चढ़ गया है। बारिश के कारण टॉस तय समय तक नहीं हो पाएगा और पहले सत्र का खेल नहीं होगा। बता दें कि साउथैम्पटन में सुबह से ही लगातार धीरे-धीरे बारिश हो रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने ट्वीट कर जानकारी दी कि पहले दिन का खेल नहीं होगा। दो साल में नौ टीमों के बीच हुए शानदार क्रिकेट के बाद शुक्रवार को साउथैम्पटन के मैदान पर आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेला जाएगा। जिसमें टेस्ट क्रिकेट की दो टॉप टीम भारत और न्यूजीलैंड की टक्कर होगी। मार्च एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में पहला मैच खेला गया था। उसके एक सौ चौंतालीस साल बाद अब इस फॉर्मेट में पहली बार वैश्विक टूर्नामेंट का फाइनल खेला जा रहा है। न्यूजीलैंड की टीम सबसे पहले फाइनल में पहुंची,जबकि भारत पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रही। भारतीय टीम ने फाइनल से पहले तैयारी के तौर पर सिर्फ इन्ट्रा स्कॉवड मुकाबले खेले औऱ नेट प्रैक्टिस की। वहीं न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच की सीरीज जीतकर आई है। भारत की प्लेइगं XI: रोहित शर्मा, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली , अजिंक्य रहाणे , ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा।
|
Cefolac DT 100 Tablet डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवा है, जो टैबलेट के रूप में उपलब्ध है। कान में संक्रमण, टॉन्सिल, ब्रोंकाइटिस के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Cefolac DT 100 Tablet को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
Cefolac DT 100 Tablet की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है।
इन दुष्परिणामों के अलावा Cefolac DT 100 Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Cefolac DT 100 Tablet के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं।
गर्भवती महिलाओं पर Cefolac DT 100 Tablet का प्रभाव सुरक्षित होता है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर इस दवा का प्रभाव सुरक्षित है। Cefolac DT 100 Tablet से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है।
ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Cefolac DT 100 Tablet न लें।
Cefolac DT 100 Tablet के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है।
ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Cefolac DT 100 Tablet लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Cefolac DT 100 Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Cefolac DT 100 Tablet की खुराक अलग हो सकती है।
।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष)
।बच्चे(2 से 12 वर्ष)
क्या Cefolac DT 100 Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
Cefolac किसी भी प्रेंग्नेंट महिला के लिए सुरक्षित होती है।
क्या Cefolac DT 100 Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए Cefolac सही और सुरक्षित है।
Cefolac DT 100 Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Cefolac का बुरा प्रभाव किडनी पर कम होता है, क्योंकि ये नुकसानदायक नहीं है।
Cefolac DT 100 Tablet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
लीवर के लिए Cefolac हानिकारक नहीं होती। आप इसे डॉक्टर की सलाह के बिना भी ले सकते हैं।
क्या ह्रदय पर Cefolac DT 100 Tablet का प्रभाव पड़ता है?
Cefolac हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।
क्या Cefolac DT 100 Tablet आदत या लत बन सकती है?
नहीं, Cefolac DT 100 Tablet को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है।
क्या Cefolac DT 100 Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Cefolac DT 100 Tablet लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी।
क्या Cefolac DT 100 Tablet को लेना सुरखित है?
हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Cefolac DT 100 Tablet इस्तेमाल की जा सकती है?
मस्तिष्क विकारों के लिए Cefolac DT 100 Tablet को लेने से कोई फायदा नहीं हो पाता।
क्या Cefolac DT 100 Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
खाने के साथ Cefolac DT 100 Tablet को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
जब Cefolac DT 100 Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
Cefolac DT 100 Tablet का शरीर पर क्या असर होता है इस बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। इस पर कोई रिसर्च नहीं हो पाई है।
जी हां, Cefolac से दांत में संक्रमण का इलाज हो सकता है। हालांकि, उचित इलाज के लिए आपको एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
Cefolac के साथ एज़िथ्रोमाइसिन लेने से बचें। इन दो दवाओं को एक साथ लेने पर ह्रदय संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, अगर Cefolac के साथ एज़िथ्रोमाइसिन लेने के बाद असहजता महसूस हो रही है तो तुरंत डॉक्टर को बताएं और उनके निर्देशों का पालन करें।
जी हां, Cefolac से टाइफाइड बुखार का इलाज हो सकता है। टाइफाइड बुखार के इलाज में दूसरी दवा के तौर पर Cefolac दी जाती है। अन्य एंटी-बायोटिक दवाओं के साल्मोनेला टाइफी पर बेअसर होने पर टाइफाइड के लक्षणों से राहत दिलाने में Cefolac बहुत असरकारी पाई गई है।
डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब किए गए समय तक Cefolac का इस्तेमाल सुरक्षित है।
Cefolac को खा सकते हैं और इसे इंजेक्शन द्वारा भी लिया जा सकता है। Cefolac हल्के भोजन के साथ लेनी चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई निर्दिष्ट मात्रा और निर्धारित समय तक ही Cefolac खाएं।
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Suprax® (cefixime)
|
Cefolac DT एक सौ Tablet डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवा है, जो टैबलेट के रूप में उपलब्ध है। कान में संक्रमण, टॉन्सिल, ब्रोंकाइटिस के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Cefolac DT एक सौ Tablet को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Cefolac DT एक सौ Tablet की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। इन दुष्परिणामों के अलावा Cefolac DT एक सौ Tablet के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Cefolac DT एक सौ Tablet के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। गर्भवती महिलाओं पर Cefolac DT एक सौ Tablet का प्रभाव सुरक्षित होता है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर इस दवा का प्रभाव सुरक्षित है। Cefolac DT एक सौ Tablet से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Cefolac DT एक सौ Tablet न लें। Cefolac DT एक सौ Tablet के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Cefolac DT एक सौ Tablet लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Cefolac DT एक सौ Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Cefolac DT एक सौ Tablet की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था ।बच्चे क्या Cefolac DT एक सौ Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Cefolac किसी भी प्रेंग्नेंट महिला के लिए सुरक्षित होती है। क्या Cefolac DT एक सौ Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए Cefolac सही और सुरक्षित है। Cefolac DT एक सौ Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Cefolac का बुरा प्रभाव किडनी पर कम होता है, क्योंकि ये नुकसानदायक नहीं है। Cefolac DT एक सौ Tablet का जिगर पर क्या असर होता है? लीवर के लिए Cefolac हानिकारक नहीं होती। आप इसे डॉक्टर की सलाह के बिना भी ले सकते हैं। क्या ह्रदय पर Cefolac DT एक सौ Tablet का प्रभाव पड़ता है? Cefolac हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। क्या Cefolac DT एक सौ Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, Cefolac DT एक सौ Tablet को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है। क्या Cefolac DT एक सौ Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Cefolac DT एक सौ Tablet लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी। क्या Cefolac DT एक सौ Tablet को लेना सुरखित है? हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Cefolac DT एक सौ Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों के लिए Cefolac DT एक सौ Tablet को लेने से कोई फायदा नहीं हो पाता। क्या Cefolac DT एक सौ Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने के साथ Cefolac DT एक सौ Tablet को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है। जब Cefolac DT एक सौ Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Cefolac DT एक सौ Tablet का शरीर पर क्या असर होता है इस बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। इस पर कोई रिसर्च नहीं हो पाई है। जी हां, Cefolac से दांत में संक्रमण का इलाज हो सकता है। हालांकि, उचित इलाज के लिए आपको एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। Cefolac के साथ एज़िथ्रोमाइसिन लेने से बचें। इन दो दवाओं को एक साथ लेने पर ह्रदय संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, अगर Cefolac के साथ एज़िथ्रोमाइसिन लेने के बाद असहजता महसूस हो रही है तो तुरंत डॉक्टर को बताएं और उनके निर्देशों का पालन करें। जी हां, Cefolac से टाइफाइड बुखार का इलाज हो सकता है। टाइफाइड बुखार के इलाज में दूसरी दवा के तौर पर Cefolac दी जाती है। अन्य एंटी-बायोटिक दवाओं के साल्मोनेला टाइफी पर बेअसर होने पर टाइफाइड के लक्षणों से राहत दिलाने में Cefolac बहुत असरकारी पाई गई है। डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब किए गए समय तक Cefolac का इस्तेमाल सुरक्षित है। Cefolac को खा सकते हैं और इसे इंजेक्शन द्वारा भी लिया जा सकता है। Cefolac हल्के भोजन के साथ लेनी चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई निर्दिष्ट मात्रा और निर्धारित समय तक ही Cefolac खाएं। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Suprax®
|
रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने कहा कि राज्य के किस क्षेत्र में कौन से वनोपज तथा कृषि उपज पाए जाते हैं, इसका Data Base तैयार करें।
फिर डेटाबेस (Data Base) के अनुसार इन उपजों का वैल्यू एडिशन और Marketing के लिए मैकेनिज्म तैयार करें।
वनोपज तथा कृषि उपज से संबंधित संस्थानों से समन्वय स्थापित कर कार्य योजना बनाएं। यह निर्देश CM ने बुधवार को झारखंड विधान सभा स्थित मुख्यमंत्री (CM) कक्ष में आयोजित सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी (State Cooperative) संघ लि. रांची के निदेशक पर्षद की प्रथम बैठक में पदाधिकारियों को दिया।
बैठक में CM ने सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के पदाधिकारियों को वनोपज तथा कृषि उपज के क्षमता विकास के लिए एक कौशल विकास केंद्र (Skill Development Center) स्थापित करने का निर्देश भी दिया है।
CM ने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के विभिन्न कार्यों तथा गतिविधियों के समय पर निपटारे के लिए जल्द मानव बल नियुक्त करें।
सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. राज्य के वन क्षेत्रों में उत्पादित वनोपज का संग्रहण, Marketing तथा प्रोसेसिंग बेहतर तरीके हो सके यह सुनिश्चित कराएं।
मुख्यमंत्री ने स्टेट प्रोक्यूरमेंट एवं मार्केटिंग पॉलिसी (Marketing Policy) निर्धारण के लिए कमेटी एवं स्टेट क्रेडिट लिंकेज पॉलिसी (State Credit Linkage Policy) निर्धारण के लिए भी कमेटी का गठन करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया।
बैठक में सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के निबंधित उपविधि को अंगीकार किया गया। बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में कृषि मंत्री बादल, अपर मुख्य सचिव एल. ख्यानग्ते, CM के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, CM के सचिव विनय चौबे, सचिव K K सोन, सचिव अबू बकर सिद्दीकी, सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के CEO संजीव कुमार, सचिव जयप्रकाश शर्मा तथा झास्कोलैम्प, झामकोफेड एवं वेजफेड के प्रबंध निदेशक एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
|
रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के किस क्षेत्र में कौन से वनोपज तथा कृषि उपज पाए जाते हैं, इसका Data Base तैयार करें। फिर डेटाबेस के अनुसार इन उपजों का वैल्यू एडिशन और Marketing के लिए मैकेनिज्म तैयार करें। वनोपज तथा कृषि उपज से संबंधित संस्थानों से समन्वय स्थापित कर कार्य योजना बनाएं। यह निर्देश CM ने बुधवार को झारखंड विधान सभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में आयोजित सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. रांची के निदेशक पर्षद की प्रथम बैठक में पदाधिकारियों को दिया। बैठक में CM ने सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के पदाधिकारियों को वनोपज तथा कृषि उपज के क्षमता विकास के लिए एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने का निर्देश भी दिया है। CM ने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के विभिन्न कार्यों तथा गतिविधियों के समय पर निपटारे के लिए जल्द मानव बल नियुक्त करें। सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. राज्य के वन क्षेत्रों में उत्पादित वनोपज का संग्रहण, Marketing तथा प्रोसेसिंग बेहतर तरीके हो सके यह सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री ने स्टेट प्रोक्यूरमेंट एवं मार्केटिंग पॉलिसी निर्धारण के लिए कमेटी एवं स्टेट क्रेडिट लिंकेज पॉलिसी निर्धारण के लिए भी कमेटी का गठन करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया। बैठक में सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के निबंधित उपविधि को अंगीकार किया गया। बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कृषि मंत्री बादल, अपर मुख्य सचिव एल. ख्यानग्ते, CM के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, CM के सचिव विनय चौबे, सचिव K K सोन, सचिव अबू बकर सिद्दीकी, सिद्धो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि. के CEO संजीव कुमार, सचिव जयप्रकाश शर्मा तथा झास्कोलैम्प, झामकोफेड एवं वेजफेड के प्रबंध निदेशक एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
|
Sidhi Urination Incident: मध्य प्रदेश के सीधी पेशाब कांड की घटना के पीड़ित ने राज्य सरकार से आरोपी प्रवेश शुक्ला को रिहा करने की मांग की है। पीड़ित आदिवासी शख्स ने कहा कि आरोपी को अपनी गलती को एहसास हो गया है। पुलिस ने आदिवासी समुदाय से आने वाले पीड़ित दशमत रावत पर पेशाब करने के आरोपी प्रवेश शुक्ला को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। घटना का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया था।
आईपीसी और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अलावा, शुक्ला के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई है। शुक्ला वर्तमान में जेल में बंद है। सीधी में शुक्ला के घर का कथित अवैध हिस्सा बुलडोजर से गिरा दिया गया था।
आरोपी के अपमानजनक कृत्य के बावजूद यह मांग किए जाने के बारे में पूछे जाने पर पीड़ित ने कहा, 'हां, मैं सहमत हूं...वह हमारे गांव का पंडित है, हम सरकार से उसे रिहा करने की मांग करते हैं। ' रावत ने यह भी कहा कि गांव में एक सड़क के निर्माण के अलावा वह सरकार से और कुछ नहीं मांगते हैं।
बता दें, मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव है। यहां सीधी पेशाब कांड ने एक नया विवाद पैदा कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक स्थानीय विधायक से जुड़ा हुआ है। वहीं बीजेपी उससे किसी भी तरह के संबंध को इनकार कर रही है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर पेशाब कांड के पीड़ित के पैर धोए और इस अपमानजनक घटना पर उससे माफी भी मांगी, लेकिन विपक्षी दल ने चौहान के इस कदम को महज नाटक करार दिया। राज्य सरकार ने पीड़ित को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मंजूर की है। उसे उसके घर के निर्माण के लिए 1. 5 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की गई है।
वहीं एक ब्राह्मण संगठन ने शुक्रवार को शुक्ला के घर का एक हिस्सा गिराए जाने का विरोध करते हुए कहा कि उनका कृत्य निंदनीय है, लेकिन उनके परिवार के सदस्यों को उनके व्यवहार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता है।
|
Sidhi Urination Incident: मध्य प्रदेश के सीधी पेशाब कांड की घटना के पीड़ित ने राज्य सरकार से आरोपी प्रवेश शुक्ला को रिहा करने की मांग की है। पीड़ित आदिवासी शख्स ने कहा कि आरोपी को अपनी गलती को एहसास हो गया है। पुलिस ने आदिवासी समुदाय से आने वाले पीड़ित दशमत रावत पर पेशाब करने के आरोपी प्रवेश शुक्ला को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। घटना का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया था। आईपीसी और एससी/एसटी अधिनियम के अलावा, शुक्ला के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई है। शुक्ला वर्तमान में जेल में बंद है। सीधी में शुक्ला के घर का कथित अवैध हिस्सा बुलडोजर से गिरा दिया गया था। आरोपी के अपमानजनक कृत्य के बावजूद यह मांग किए जाने के बारे में पूछे जाने पर पीड़ित ने कहा, 'हां, मैं सहमत हूं...वह हमारे गांव का पंडित है, हम सरकार से उसे रिहा करने की मांग करते हैं। ' रावत ने यह भी कहा कि गांव में एक सड़क के निर्माण के अलावा वह सरकार से और कुछ नहीं मांगते हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव है। यहां सीधी पेशाब कांड ने एक नया विवाद पैदा कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आरोपी एक स्थानीय विधायक से जुड़ा हुआ है। वहीं बीजेपी उससे किसी भी तरह के संबंध को इनकार कर रही है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर पेशाब कांड के पीड़ित के पैर धोए और इस अपमानजनक घटना पर उससे माफी भी मांगी, लेकिन विपक्षी दल ने चौहान के इस कदम को महज नाटक करार दिया। राज्य सरकार ने पीड़ित को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मंजूर की है। उसे उसके घर के निर्माण के लिए एक. पाँच लाख रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की गई है। वहीं एक ब्राह्मण संगठन ने शुक्रवार को शुक्ला के घर का एक हिस्सा गिराए जाने का विरोध करते हुए कहा कि उनका कृत्य निंदनीय है, लेकिन उनके परिवार के सदस्यों को उनके व्यवहार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता है।
|
- गुप्त वंश के किस शासक ने हूणों को परास्त किया?
- किसको भारत का उद्धारक व स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है?
किस संप्रदाय के संस्थापक हैं?
चरणों में कितनी मात्राएं होती हैं?
- भारतीय सेना का निर्माण कब हुआ था?
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने आखिरकार भारत में अपने बहुप्रतिक्षित और प्रीमियम सेग्मेंट के फोन गैलेक्सी फोल्ड की तारीख का ऐलान कर दिया है। स्मार्टफोन-कम-टैबलेट गैलेक्सी फोल्ड स्मार्टफोन की कीमत भारत में 1. 5 लाख से लेकर 1. 75 लाख रुपए के बीच रह सकती है। इस फोन को केवल चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स और प्री-बुक मोड के माध्यम से ही खरीदा जा सकेगा। यह फोन स्पेशल कस्टमर केयर सर्विस के साथ आएगा। इस फोन को पहले 26 अप्रैल को लांच किया जाना था, लेकिन उसके डिस्प्ले में खराबी आने के कारण कंपनी को इसे टालना पड़ा था। कंपनी ने इसके स्पेशिफिकेशन की जानकारी फरवरी में दी थी। यह फोन 7. 3 इंच इनफिनिटी फ्लेक्स डिस्प्ले और छह कैमरों के साथ लांच होगा, जबकि इसमें सेकेंडरी डिस्प्ले 4. 6 इंच का है, जो फोन के कवर पर मौजूद है। यह फोन खोलने के बाद 7. 3 इंच के डिस्प्ले में तबदील हो जाता है। इस फोन में कंपनी क्वालकॉम के लेटेस्ट प्रोसेसर स्नैपड्रैगन 855 ऑक्टाकोर का इस्तेमाल करेगी। साथ ही यह फोन 12 जीबी रैम और 512 जीबी इंटरनल मेमोरी के साथ दस्तक देगा। इस गैलेक्सी फोल्ड में 4380 एमएएच बैटरी है। एंड्रॉयड वर्जन की बात करें तो यह एंड्रॉयड 9 पाई पर काम करेगा। हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं है। भारत में लांच होने वाले फोन में सभी स्पेशिफिकेशन पुराने वाले ही होंगे या फिर उनमें कुछ बदलाव किए जाएंगे। कैमरे की बात करें तो इसमें दस मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा कवर पर मिलेगा। वहीं, ट्रिपल कैमरा सेटअप 16 मेगापिक्सल, 12 मेगापिक्सल और 12 मेगापिक्सल का दिया गया है। वहीं, 10 मेगापिक्सल और आठ मेगापिक्सल के दो फ्रंट कैमरे दिए गए हैं। यह फोन एलटीई और 5जी वेरिएंट में लांच हुआ है। इस फोन की कीमत 1980 डालर (तकरीबन एक लाख 40 हजार रुपए) है। इसकी बिक्री कुछ सिलेक्टेड मार्केट में 26 अप्रैल से शुरू होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चुनाव के लिए वाइस चांसलर ने बॉटनी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर रूपम कपूर को इलेक्शन ऑफिसर नियुक्त किया है। चुनाव की डेट जल्द जारी होगी। डूसू के संविधान के हिसाब से यूनियन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में 11 मेंबर्स चुनने के लिए चुनाव होगा। फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रो. एस मुरुगवल रिटर्निंग ऑफिसर और लॉ डिपार्टमेंट की डा. पिंकी शर्मा अडिशनल रिटर्निंग ऑफिसर होंगी।
|
- गुप्त वंश के किस शासक ने हूणों को परास्त किया? - किसको भारत का उद्धारक व स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है? किस संप्रदाय के संस्थापक हैं? चरणों में कितनी मात्राएं होती हैं? - भारतीय सेना का निर्माण कब हुआ था? दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने आखिरकार भारत में अपने बहुप्रतिक्षित और प्रीमियम सेग्मेंट के फोन गैलेक्सी फोल्ड की तारीख का ऐलान कर दिया है। स्मार्टफोन-कम-टैबलेट गैलेक्सी फोल्ड स्मार्टफोन की कीमत भारत में एक. पाँच लाख से लेकर एक. पचहत्तर लाख रुपए के बीच रह सकती है। इस फोन को केवल चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स और प्री-बुक मोड के माध्यम से ही खरीदा जा सकेगा। यह फोन स्पेशल कस्टमर केयर सर्विस के साथ आएगा। इस फोन को पहले छब्बीस अप्रैल को लांच किया जाना था, लेकिन उसके डिस्प्ले में खराबी आने के कारण कंपनी को इसे टालना पड़ा था। कंपनी ने इसके स्पेशिफिकेशन की जानकारी फरवरी में दी थी। यह फोन सात. तीन इंच इनफिनिटी फ्लेक्स डिस्प्ले और छह कैमरों के साथ लांच होगा, जबकि इसमें सेकेंडरी डिस्प्ले चार. छः इंच का है, जो फोन के कवर पर मौजूद है। यह फोन खोलने के बाद सात. तीन इंच के डिस्प्ले में तबदील हो जाता है। इस फोन में कंपनी क्वालकॉम के लेटेस्ट प्रोसेसर स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन ऑक्टाकोर का इस्तेमाल करेगी। साथ ही यह फोन बारह जीबी रैम और पाँच सौ बारह जीबी इंटरनल मेमोरी के साथ दस्तक देगा। इस गैलेक्सी फोल्ड में चार हज़ार तीन सौ अस्सी एमएएच बैटरी है। एंड्रॉयड वर्जन की बात करें तो यह एंड्रॉयड नौ पाई पर काम करेगा। हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं है। भारत में लांच होने वाले फोन में सभी स्पेशिफिकेशन पुराने वाले ही होंगे या फिर उनमें कुछ बदलाव किए जाएंगे। कैमरे की बात करें तो इसमें दस मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा कवर पर मिलेगा। वहीं, ट्रिपल कैमरा सेटअप सोलह मेगापिक्सल, बारह मेगापिक्सल और बारह मेगापिक्सल का दिया गया है। वहीं, दस मेगापिक्सल और आठ मेगापिक्सल के दो फ्रंट कैमरे दिए गए हैं। यह फोन एलटीई और पाँचजी वेरिएंट में लांच हुआ है। इस फोन की कीमत एक हज़ार नौ सौ अस्सी डालर है। इसकी बिक्री कुछ सिलेक्टेड मार्केट में छब्बीस अप्रैल से शुरू होगी। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चुनाव के लिए वाइस चांसलर ने बॉटनी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर रूपम कपूर को इलेक्शन ऑफिसर नियुक्त किया है। चुनाव की डेट जल्द जारी होगी। डूसू के संविधान के हिसाब से यूनियन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में ग्यारह मेंबर्स चुनने के लिए चुनाव होगा। फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रो. एस मुरुगवल रिटर्निंग ऑफिसर और लॉ डिपार्टमेंट की डा. पिंकी शर्मा अडिशनल रिटर्निंग ऑफिसर होंगी।
|
हृदय (heart) को दोवालों में पाई जाती है । यह विशेष प्रकार की पट्टीदार पेशी होती है, जिसके रेशे शाखायुक्त होते तथा इनको प्रशायाएँ समीपवर्ती रेशों की शाखाओं से जुड़ी रहती है ।
किया जाता है और बहुत दृढ होता है। योजक उतक की कोशिकाएँ संगठित न होकर विखरा रहती है। इस तक की विशेषता यह है कि इसकी कोशिकाएँ तो सजीव, किंतु मैट्रिक्स निर्जीव होता है । यहां निर्जीव पदार्थ अन्य ऊतकों को परस्पर बाँधे रहता है। इन कोशिकाओं को उत्पत्ति भ्रूण को मेसेन्कारमो (me.erchyme) कोशिकामों से होती है, जिनमें वारोक जीवद्रव्यीय प्रवर्ध (prot.hasnic proce-ses ) उगे रहते है । संयोजोऊतक भी कई प्रकार के होते हैं । चित्र २, ३ र ४ में विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतक दिखाए गए हैं ।
पेशीय ऊतक-- पेशियों का निर्माण ऐसी कोशिकाओं द्वारा हुआ होता है, जो श्रावश्यकता पड़ते ही तत्काल सिकुड़ जाती हैं । ये कोशिकाएँ लंबो लंबो, रेशों को प्राकृति को, होती है। उत्तेजना प्राप्त होने पर ये किसी भी दिशा में मुड़ सकती हैं। पेशी की कोशिकाएँ सवरण कार्य नही करती और वे संयोजी ऊतक द्वारा परस्पर जुड़ी रहती है । पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते है : स्तरित, अनस्तरित तथा हार्दिक । स्तरित ऊतक (striated ti sue) को स्वैच्छिक (voluntarv ) , पट्टीदार ( striped ) या कंकालीय (skeletal) पेशी ऊतक भी कहते हैं । स्तरित पेशीय रेशे बहुत लंबे, बेलनाकार होते और सार्कलिमा ( sarcolemma )
चित्र ४. जालक उत्त-क
नामक एक प्रति पतली भिल्ली द्वारा के रहते हैं। स्तरित पेशी के संकुचनशील रेशों में दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं, जिनके कारण ये रेशे गहरो और हल्की पट्टियों से युक्त दिखलाई देते है । मनस्तरित पेशी ऊतक को चिकना पेशी रेशा भी कहते हैं । इन रेशो को कोशिकाएँ तकुने (spindle ) की आकृति की होती है। अतस्तरित पेशी अधिक यादिम (primitive) प्रकार की मानी जाती है । कजेको जनुयों में यह मुख्यतया मूत्राशय, पाचन नाल, श्वातली को दीवानों यादि में पाई जाती है। उन्हें पक (involuntary) पेशो भी कहते हैं । स्तरित पेशो उन स्थानों पर पाई जाती है जहां तोत्र गति की ग्रावश्यकता होती है। जैसे तेजी से उड़नेवाने फोड़ों के पंधी में ऐसी पेशियों अत्यधिक विकसित होती है। हार्दिक पेजो (cardiac muscle) केवल
तंत्रिकोय ऊतक तंत्रिकीय ऊतक की कोशिकाएँ प्रति उत्तेजनगील (irri;able) होती हैं। उच्चतर जंतुओं में तंत्रिका तंत्र अतिविकसित अवस्था में होता है । तविकातंत्र (nervous system) तंत्रिका उनक द्वारा बना होता है । इस ऊतक को कोशिकाएं तंत्रिका कोशिकाएँ (cells) कहलाती हैं। इन कोशिकायों में रेशे होते हैं । तत्रिकाएँ समस्त शरीर में फैली रहती है और इनमें न्यूरानो (neurons ) की शृंखलाएँ (chains ) पाई जाती हैं । तंत्रिका रंशे कोशिकाद्रव्य (crtoplasm ) द्वारा बने तथा एक कोशिका भिल्ली ( cell membrane ) द्वारा ढके रहते हैं। कुछ रेशों की लंबाई तीन फुट तक होती है, जैसे स्पाइनल कार्ड से निकलकर हाथ या पैर तक फैला रेशा तीन फुट से भी अधिक लंबा होता है । तंत्रिका रेशे दो प्रकार के होते हैं : ऐक्सन और डेंड्राइट । ऐक्सन कोशिका संवेदनाओं को दूर ले जाती और डेंड्राइट बाहरी संवेदनाओं को कोशिका तक लेती है
(रा० सिं० ) ऊतक परीक्षा निदान के लिये जीवित प्राणियों के शरीर से ऊतक
(टिशू ) कोलकर जो परीक्षण किया जाता है उसे उनक परीक्षा (स) कहते हैं । द के निदान की ग्रन्य विधियां उपलब्ध न होने पर, संभावित ऊतक के अपेक्षाकृत एक बड़े टुवाड़े का सूक्ष्म अध्ययन ही निदान को सर्वोत्तम रीति है । शल्य चिकित्सा मे उसको महत्ता अधिक है, क्योंकि इसके द्वारा ही निदान निश्चित होता है तथा शल्य चिकित्सक को आंख बंदकर इलाज करने के बदले उचित इलाज करने का मार्ग मिल जाता है ।
ऊतक परीक्षा विधि रोग के प्रकार और शरीर में उसकी स्थिति पर निर्भर रहती है । जव अर्बुद सतह पर स्थित रहता है तब यह परीक्षा अर्बुद को काटकर की जाती है। किंतु जब वह गहराई में स्थित रहता है तब ऊतक का एक छोटा टुकड़ा पोली मुई द्वारा चूसकर अलग किया जा सकता है । यह 'सुई-उतक-परीक्षण (नाडिल-वाइप्सी) कहलाता है । ऊतक के इस तरह अलग करने के बाद विकृति-विज्ञान परीक्षक ( पैथालॉजिस्ट ) उसे हिम के समान जमाकर और उसके सूक्ष्मातिसूक्ष्म अनुप्रस्थ काट लेयर, कुछ मिनटों में ही निदान कर लेता है। स्तवग्रथि प्रर्बुद जैसे गंगी में, निदान की तुरंत आवश्यकता होने के कारण, यही विधि उपयोग में लाई जाती है, अन्यथा साधारणतः ऊतक का स्थिरीकरण करके और उसे सुखाकर मीम में जमा दिया जाता है । इसके बाद उससे एक इष्टिका (क) काटन जाती है । इस इष्टिका के सूक्ष्म अनुप्रस्थ काट (सेक्शन ) लेकर उन्हें उपयुक्त रंगों से रंजित किया जाता है। इस विधि मे साधारणतः एक से लेकर तीन दिन तक लगते हैं ।
कुछ चिकित्सक उतक परीक्षण के विपक्ष में हैं, क्योंकि उनकी यह शंका है कि ग्रंथियों के काटने से रोग गिरायों तथा नसीका तंत्री द्वारा फैल जाता है, किंतु यह सिद्ध हो चुका है कि ऊतक परीक्षा द्वारा रोग बढ्ने की संभावना प्रायः नही रहती । ( श्री० प्र०) ऊतक विज्ञान या ऊतिकी (Histology ) की परिभाषा देते हुए स्टोरर ने लिखा है : "ऊतक विज्ञान या सुक्ष्म शारीर (microscopic anatomy ) अंगों के भीतर ऊनकों को संरचना तथा उनके विद्वान ( arrang ment ) के अध्ययन को कहते है ।" अँगरेज का हिस्टोनॉजी यूनानी भाषा के शब्द हिस्टोस् (histos) तथा लॉजिया ( logia) से मिलकर बना है, जिनका अर्थ होता है उसको ( tissues ) का अध्ययन ।" अतः ऊतक विज्ञान व विज्ञान है, जिसके अंतर्गत ऊनको को सूक्ष्म संरचना तथा उनकी व्यवस्था अथवा विभागका प्रध्ययन किया जाता है । 'तर शब्द भाषा के शब्द टिशू (tissu) से निकला है, जिनका होता है या बनावट (texture ) 1 हम शब्द का प्रयोग सारी वैज्ञानिक (anatonist ) विट (Bichat) ने १८ शताब्दी के मं
में शारीर या शरीर रचना विज्ञान के प्रसंग में किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक में लगभग बीस प्रकार के ऊतकों का उल्लेख किया है । किंतु, आजकल केवल चार प्रकार के मुख्य ऊतकों ( ३० ऊतक ) को मान्यता प्राप्त है, जिनके नाम हैं : इपोथिलियमी (epithelial), संयोजक (connective ) , पेशीय ( muscular) और तंत्रिकीय ऊतक ( nervous tissues ) ।
( qualitative) ही होती हैं, संख्यात्मक (quantitative) नहीं । इसका कारगा यह है कि इन विधियों से रासायनिक पदार्थों के विस्तार (di tribution ) का ही पता चलता है, उनकी सांद्रता (concentration) कितनी है, इसका ज्ञान नहीं हो पाता । (२) लिंगरस्ट्रोम तथा लैग द्वारा विकसित अस्थायीकृत ( unfixed) तथा मालग्न विच्छेदों ( froen sections ) को जैवरासायनिक क्रियाओं (biolgical activities) की माप इस विधि की दूसरी विशेषता है । (३) अंत में, इस विधि द्वारा यह पता लगाया जाता है कि कोशिकाओं के एकल घटकों (isolat d constituents ) की क्या प्रतिक्रियाएँ होती हैं । इस विधि को वेन्स्ले ने विकसित किया था । इसके अंतर्गत कोशिकाओं के केंद्रकों (nuclei), माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria ) कणिकाओं (sccretory granules ) आदि को पृथक् करके उनकी रामायनिक तथा एंजाइनी ( enzymatically) परीक्षाएं की जाती हैं ।
आदिकाल से ही मनुष्य पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को उनकी आकृति तथा आकार के द्वारा पहचानता रहा है । विज्ञान के विकास के साथ वनस्पतियों तथा जंतुनो के शरीर के भीतर की संरचना जानने की भी जिज्ञासा उत्पन्न होती गई । इसी जिज्ञासा के फलस्वरूप शल्यक्रिया ( surgery ) का विकास हुआ । चिकित्मा तथा जीववैज्ञानिकों ने पशु और वनस्पतियों की चीरफाड़ करके उनके अंग की संरचनाओं-- अंग प्रत्यंगों का अध्ययन प्रारंभ किया। इसी अध्ययन के फलस्वरूप संपूर्ण शारीर (gross anatomy ) की उत्पत्ति हुई । इसी के साथ जब सूक्ष्मदर्शी यंत्रों (micro-copes ) का विकास हुआ तो जटिल आंतरिक संरचनाएँ भी स्पष्ट होती गई । इस सूक्ष्मदर्शीय यांत्रिक अध्ययन को भौतिकी की संज्ञा प्रदान की गई । अतः ब्लूम तथा फॉसेट के शब्दों में "ऊतिकी या सूक्ष्मदर्शी शारीर के अंतर्गत शरीर की वह प्रांतरिक संरचना आती है जो नंगी आँखों से नहीं दिखलाई देती" ।
समस्त सजीव प्राणियों की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक (functional) इकाई कोशिका ( cell) होती है। इसी कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान ( cytology ) कहा जाता है । कोशि काओं के पुंजों (groups) से ऊतकों और ऊतकों से अंगों को रचना होती है । ऊतकों की संरचना का अध्ययन करनेवाले विज्ञान को प्रतिको तथा अंगों की संरचना का अध्ययन करनेवाले विज्ञान को शारीर कहते हैं । ऊतिकी तथा कोशिका विज्ञान के अध्ययनों के कारण शरीर के दुर्भेद्य रहस्यों का भेदन होता गया। इन दोनों के संमिलित अध्ययन से ऊतिकी-रोग-विज्ञान ( histopathology ) का विकास हुआ ।
तन् १९३२ में नॉल एवं रस्का ने इलेक्ट्रान माइक्रॉस्कोप का श्राविप्कार किया, जिससे कोशिकाओं तथा ऊतकों की जटिलतम संरचनाओं का स्पष्टीकरण हुआ। इसी के साथ साथ शरीरक्रियाविज्ञान (physiology ) का भी विकास होता गया और नए नए रहस्यों का निरा वरण संभव हुआ । इस प्रकार इन तीनों विज्ञानों के संमिलित प्रयास से जीववैज्ञानिक क्षेत्र में पूर्व है । ऊतिकी और कोशिकाविज्ञान मुख्य रूप से सूक्ष्म संरचनाओं के आकारकीय स्वरूप को स्पष्ट करते हैं । किंतु जब से एनिलीन रंजकों (aniline dyes ) का अन्वेपण हुआ तब से कोशिकाओं की जटिल संरचनाओं का भी ज्ञान प्राप्त होने लगा है। आज सैकड़ों प्रकार के रंजकों का प्रयोग करके सूक्ष्म से सूक्ष्म संरचनाओं पर प्रकाश डाला जा रहा है । इस प्रकार, ऊतिकी के क्षेत्र में अव रसायनविज्ञान का भी प्रवेश हो गया है । भाँति भाँति के स्थायीकरों ( fixatives ) के प्रयोग से रंजकों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं का समुचित ज्ञान प्राप्त हो रहा है । जीवद्रव्य (protoplasm ) , कोशिका द्रव्य ( cytoplasm ) तथा उनमे और कोशिकाओं के अनेक अंगों ( organelles ) की रासायनिक संरचनाओं का ज्ञान व सर्वसाधारण के लिये सुलभ है । ये अंगक किस प्रकार विशेषीकृत कार्य संपादित करते हैं, यह अब अज्ञात नहीं रह गया है । सूक्ष्म संरचनाओं (microscopic structure ) की रासायनिक प्रकृति के अध्ययन को ऊतिकीरसायन (histochemistry ) या कोशिकारसायन ( cytochemistry ) कहा जाता है और अब ऊतिकी तथा ऊतिकीरसायन का एक साथ अध्ययन किया जाता है ।
हेलेन डोन के मतानुसार इस प्रकार की अध्ययनविधियों की तीन प्रमुख कोटियाँ हैं : (१) ऊतकों के आंतरिक रासायनिक पदार्थों को, उनके वर्ग को परीक्ष ( colour test ) को प्रतिक्रिया और उनको प्रकाशिक विशेषताओं ( optic characters ) की पृष्ठभूमि में पहचान ( identification) । ये विधियाँ सामान्यतया गुरणात्मक
वेली को ऊतिकी विषय पर लिखी पुस्तक में ऊतक विज्ञान के साथ ही कोशिका वैज्ञानिक अध्ययन पर भी वन दिया गया है । बेली के मतानुसार, "चूकि ऊतक विज्ञान संरचना संबंधी अध्ययन ( structural science) है और विच्छेदन ( dis-ection ) द्वारा प्राप्त शरीररचना संबंधी ज्ञान की पूर्ति करता है, अतः इसके शरीर क्रिया - विज्ञान (physiology ) तथा रोगविज्ञान ( pathologv ) से घनिष्ठ संबंध पर भी बल देना आवश्यक है ।" (वेलोज टेक्स्ट ग्रॉव हिस्टोलॉजी, संशोधक विल्फ़ेड एन० कोपेनहावर एवं डोरोथी डी० जॉनसन, विलियम्स ऐंड विल्किन्स कं०, वाल्टीमोर, १४वी आवृत्ति, १९५८) 1 इनके मतानुसार भी ऊनक विज्ञान का आधार कोशिकाशारीर (cell anatomy) अथवा कोशिकाविज्ञान ( cytology ) ही है ।
उपर्युक्त विवरण से यह प्रकट होता है कि कोशिकाविज्ञान तथा ऊतकविज्ञान का एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए । चूंकि कोशिकाएँ अतिसूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं, अतः हम ऊतक विज्ञान को सूक्ष्मशारीर (microscopic anatomy ) का ही पर्याय मानकर ऊतिकी का अध्ययन करेंगे । चूँकि ऊतक कोशिकाओं द्वारा ही बने होते हैं, अतः ऊतिकी का अध्ययन हम कोशिकाओं के ही नाव्यन से करेंगे ।
ऊतिकीय विधियाँ - ऊतकों के सम्यक् अध्ययन के लिये यह प्राव - श्यक है कि सूक्ष्मदर्शक यंत्र तक उन्हें लाने के पूर्व उनको विशेष पद्धतियों द्वारा अभिकर्मित ( treatemnt ) किया जाये। उतक का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिये यह अनिवार्य है कि वह अति पतला हो । जीवित ऊतक के विभिन्न भागों में बहुत समानताएँ पाई जाती है अतः उसका ठीक ठीक अध्ययन संभव नहीं होता । इन कठिनाइयों को दूर करने के लिये सर्वप्रथम ऊतक को ४ से ८ माइक्रॉन तक विच्छेदित कर लिया जाता है । इस कार्य के लिये 'माइक्रोटोम' यंत्र का प्रयोग किया जाता है । जीवित ऊतक का इतना सूक्ष्म विच्छेद तब तक संभव नहीं होता, जब तक वह कड़ा न हो । अतः ऊतक को कड़ा करने के लिये उसे विशेष प्रकार के रसायनों के घोल में स्थायीकृत ( fix ) किया जाता है। स्थायीकरण के उपरांत इस ऊतक को अलकोहलों के विभिन्न बोलो. अभिरंजकों ( stains ) तथा अन्य रसायनों में अभिकर्मित ( treat) करके निर्जल कर लिया जाता है । अंत में इसे विशेष गलनांक (melting point ) के पैराफीन मोम में, जो एक विशेष ताप पर पहले से ही गलाकर तैयार रखा जाता है, डाल दिया जाता है । कुछ समय बाद मोम के साथी के टुकड़ों को चतुर्भुजाकार (rectangular) साँचे
में डाल दिया जाता है । जब मोम जमकर कड़ा हो जाता है, तो उसके छोटे छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं। इन टुकड़ों को माइक्रोटोम के विशेष भाग में जमाकर उसमें एक अति धारदार चाकू (razor ) से विशेष मोटाई के अनेक सेक्शन काट लिए जाते हैं । इन सेक्शनों को काँच की पट्टियों पर रखकर अध्ययन के लिये रख लिया जाता है । काँच की पट्टियों को होटिंग प्लेट पर रखकर उनका मोम गला लिया जाता है और ऊतक का सेक्शन काँच की पट्टी पर जम जाता है । इन सेक्शनों से लदी काँच की पट्टियों को विशेष रसायनों तथा अल्कोहल के घोलों में निर्जल
|
हृदय को दोवालों में पाई जाती है । यह विशेष प्रकार की पट्टीदार पेशी होती है, जिसके रेशे शाखायुक्त होते तथा इनको प्रशायाएँ समीपवर्ती रेशों की शाखाओं से जुड़ी रहती है । किया जाता है और बहुत दृढ होता है। योजक उतक की कोशिकाएँ संगठित न होकर विखरा रहती है। इस तक की विशेषता यह है कि इसकी कोशिकाएँ तो सजीव, किंतु मैट्रिक्स निर्जीव होता है । यहां निर्जीव पदार्थ अन्य ऊतकों को परस्पर बाँधे रहता है। इन कोशिकाओं को उत्पत्ति भ्रूण को मेसेन्कारमो कोशिकामों से होती है, जिनमें वारोक जीवद्रव्यीय प्रवर्ध उगे रहते है । संयोजोऊतक भी कई प्रकार के होते हैं । चित्र दो, तीन र चार में विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतक दिखाए गए हैं । पेशीय ऊतक-- पेशियों का निर्माण ऐसी कोशिकाओं द्वारा हुआ होता है, जो श्रावश्यकता पड़ते ही तत्काल सिकुड़ जाती हैं । ये कोशिकाएँ लंबो लंबो, रेशों को प्राकृति को, होती है। उत्तेजना प्राप्त होने पर ये किसी भी दिशा में मुड़ सकती हैं। पेशी की कोशिकाएँ सवरण कार्य नही करती और वे संयोजी ऊतक द्वारा परस्पर जुड़ी रहती है । पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते है : स्तरित, अनस्तरित तथा हार्दिक । स्तरित ऊतक को स्वैच्छिक , पट्टीदार या कंकालीय पेशी ऊतक भी कहते हैं । स्तरित पेशीय रेशे बहुत लंबे, बेलनाकार होते और सार्कलिमा चित्र चार. जालक उत्त-क नामक एक प्रति पतली भिल्ली द्वारा के रहते हैं। स्तरित पेशी के संकुचनशील रेशों में दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं, जिनके कारण ये रेशे गहरो और हल्की पट्टियों से युक्त दिखलाई देते है । मनस्तरित पेशी ऊतक को चिकना पेशी रेशा भी कहते हैं । इन रेशो को कोशिकाएँ तकुने की आकृति की होती है। अतस्तरित पेशी अधिक यादिम प्रकार की मानी जाती है । कजेको जनुयों में यह मुख्यतया मूत्राशय, पाचन नाल, श्वातली को दीवानों यादि में पाई जाती है। उन्हें पक पेशो भी कहते हैं । स्तरित पेशो उन स्थानों पर पाई जाती है जहां तोत्र गति की ग्रावश्यकता होती है। जैसे तेजी से उड़नेवाने फोड़ों के पंधी में ऐसी पेशियों अत्यधिक विकसित होती है। हार्दिक पेजो केवल तंत्रिकोय ऊतक तंत्रिकीय ऊतक की कोशिकाएँ प्रति उत्तेजनगील होती हैं। उच्चतर जंतुओं में तंत्रिका तंत्र अतिविकसित अवस्था में होता है । तविकातंत्र तंत्रिका उनक द्वारा बना होता है । इस ऊतक को कोशिकाएं तंत्रिका कोशिकाएँ कहलाती हैं। इन कोशिकायों में रेशे होते हैं । तत्रिकाएँ समस्त शरीर में फैली रहती है और इनमें न्यूरानो की शृंखलाएँ पाई जाती हैं । तंत्रिका रंशे कोशिकाद्रव्य द्वारा बने तथा एक कोशिका भिल्ली द्वारा ढके रहते हैं। कुछ रेशों की लंबाई तीन फुट तक होती है, जैसे स्पाइनल कार्ड से निकलकर हाथ या पैर तक फैला रेशा तीन फुट से भी अधिक लंबा होता है । तंत्रिका रेशे दो प्रकार के होते हैं : ऐक्सन और डेंड्राइट । ऐक्सन कोशिका संवेदनाओं को दूर ले जाती और डेंड्राइट बाहरी संवेदनाओं को कोशिका तक लेती है ऊतक परीक्षा निदान के लिये जीवित प्राणियों के शरीर से ऊतक कोलकर जो परीक्षण किया जाता है उसे उनक परीक्षा कहते हैं । द के निदान की ग्रन्य विधियां उपलब्ध न होने पर, संभावित ऊतक के अपेक्षाकृत एक बड़े टुवाड़े का सूक्ष्म अध्ययन ही निदान को सर्वोत्तम रीति है । शल्य चिकित्सा मे उसको महत्ता अधिक है, क्योंकि इसके द्वारा ही निदान निश्चित होता है तथा शल्य चिकित्सक को आंख बंदकर इलाज करने के बदले उचित इलाज करने का मार्ग मिल जाता है । ऊतक परीक्षा विधि रोग के प्रकार और शरीर में उसकी स्थिति पर निर्भर रहती है । जव अर्बुद सतह पर स्थित रहता है तब यह परीक्षा अर्बुद को काटकर की जाती है। किंतु जब वह गहराई में स्थित रहता है तब ऊतक का एक छोटा टुकड़ा पोली मुई द्वारा चूसकर अलग किया जा सकता है । यह 'सुई-उतक-परीक्षण कहलाता है । ऊतक के इस तरह अलग करने के बाद विकृति-विज्ञान परीक्षक उसे हिम के समान जमाकर और उसके सूक्ष्मातिसूक्ष्म अनुप्रस्थ काट लेयर, कुछ मिनटों में ही निदान कर लेता है। स्तवग्रथि प्रर्बुद जैसे गंगी में, निदान की तुरंत आवश्यकता होने के कारण, यही विधि उपयोग में लाई जाती है, अन्यथा साधारणतः ऊतक का स्थिरीकरण करके और उसे सुखाकर मीम में जमा दिया जाता है । इसके बाद उससे एक इष्टिका काटन जाती है । इस इष्टिका के सूक्ष्म अनुप्रस्थ काट लेकर उन्हें उपयुक्त रंगों से रंजित किया जाता है। इस विधि मे साधारणतः एक से लेकर तीन दिन तक लगते हैं । कुछ चिकित्सक उतक परीक्षण के विपक्ष में हैं, क्योंकि उनकी यह शंका है कि ग्रंथियों के काटने से रोग गिरायों तथा नसीका तंत्री द्वारा फैल जाता है, किंतु यह सिद्ध हो चुका है कि ऊतक परीक्षा द्वारा रोग बढ्ने की संभावना प्रायः नही रहती । ऊतक विज्ञान या ऊतिकी की परिभाषा देते हुए स्टोरर ने लिखा है : "ऊतक विज्ञान या सुक्ष्म शारीर अंगों के भीतर ऊनकों को संरचना तथा उनके विद्वान के अध्ययन को कहते है ।" अँगरेज का हिस्टोनॉजी यूनानी भाषा के शब्द हिस्टोस् तथा लॉजिया से मिलकर बना है, जिनका अर्थ होता है उसको का अध्ययन ।" अतः ऊतक विज्ञान व विज्ञान है, जिसके अंतर्गत ऊनको को सूक्ष्म संरचना तथा उनकी व्यवस्था अथवा विभागका प्रध्ययन किया जाता है । 'तर शब्द भाषा के शब्द टिशू से निकला है, जिनका होता है या बनावट एक हम शब्द का प्रयोग सारी वैज्ञानिक विट ने अट्ठारह शताब्दी के मं में शारीर या शरीर रचना विज्ञान के प्रसंग में किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक में लगभग बीस प्रकार के ऊतकों का उल्लेख किया है । किंतु, आजकल केवल चार प्रकार के मुख्य ऊतकों को मान्यता प्राप्त है, जिनके नाम हैं : इपोथिलियमी , संयोजक , पेशीय और तंत्रिकीय ऊतक । ही होती हैं, संख्यात्मक नहीं । इसका कारगा यह है कि इन विधियों से रासायनिक पदार्थों के विस्तार का ही पता चलता है, उनकी सांद्रता कितनी है, इसका ज्ञान नहीं हो पाता । लिंगरस्ट्रोम तथा लैग द्वारा विकसित अस्थायीकृत तथा मालग्न विच्छेदों को जैवरासायनिक क्रियाओं की माप इस विधि की दूसरी विशेषता है । अंत में, इस विधि द्वारा यह पता लगाया जाता है कि कोशिकाओं के एकल घटकों की क्या प्रतिक्रियाएँ होती हैं । इस विधि को वेन्स्ले ने विकसित किया था । इसके अंतर्गत कोशिकाओं के केंद्रकों , माइटोकॉन्ड्रिया कणिकाओं आदि को पृथक् करके उनकी रामायनिक तथा एंजाइनी परीक्षाएं की जाती हैं । आदिकाल से ही मनुष्य पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को उनकी आकृति तथा आकार के द्वारा पहचानता रहा है । विज्ञान के विकास के साथ वनस्पतियों तथा जंतुनो के शरीर के भीतर की संरचना जानने की भी जिज्ञासा उत्पन्न होती गई । इसी जिज्ञासा के फलस्वरूप शल्यक्रिया का विकास हुआ । चिकित्मा तथा जीववैज्ञानिकों ने पशु और वनस्पतियों की चीरफाड़ करके उनके अंग की संरचनाओं-- अंग प्रत्यंगों का अध्ययन प्रारंभ किया। इसी अध्ययन के फलस्वरूप संपूर्ण शारीर की उत्पत्ति हुई । इसी के साथ जब सूक्ष्मदर्शी यंत्रों का विकास हुआ तो जटिल आंतरिक संरचनाएँ भी स्पष्ट होती गई । इस सूक्ष्मदर्शीय यांत्रिक अध्ययन को भौतिकी की संज्ञा प्रदान की गई । अतः ब्लूम तथा फॉसेट के शब्दों में "ऊतिकी या सूक्ष्मदर्शी शारीर के अंतर्गत शरीर की वह प्रांतरिक संरचना आती है जो नंगी आँखों से नहीं दिखलाई देती" । समस्त सजीव प्राणियों की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई कोशिका होती है। इसी कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान कहा जाता है । कोशि काओं के पुंजों से ऊतकों और ऊतकों से अंगों को रचना होती है । ऊतकों की संरचना का अध्ययन करनेवाले विज्ञान को प्रतिको तथा अंगों की संरचना का अध्ययन करनेवाले विज्ञान को शारीर कहते हैं । ऊतिकी तथा कोशिका विज्ञान के अध्ययनों के कारण शरीर के दुर्भेद्य रहस्यों का भेदन होता गया। इन दोनों के संमिलित अध्ययन से ऊतिकी-रोग-विज्ञान का विकास हुआ । तन् एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में नॉल एवं रस्का ने इलेक्ट्रान माइक्रॉस्कोप का श्राविप्कार किया, जिससे कोशिकाओं तथा ऊतकों की जटिलतम संरचनाओं का स्पष्टीकरण हुआ। इसी के साथ साथ शरीरक्रियाविज्ञान का भी विकास होता गया और नए नए रहस्यों का निरा वरण संभव हुआ । इस प्रकार इन तीनों विज्ञानों के संमिलित प्रयास से जीववैज्ञानिक क्षेत्र में पूर्व है । ऊतिकी और कोशिकाविज्ञान मुख्य रूप से सूक्ष्म संरचनाओं के आकारकीय स्वरूप को स्पष्ट करते हैं । किंतु जब से एनिलीन रंजकों का अन्वेपण हुआ तब से कोशिकाओं की जटिल संरचनाओं का भी ज्ञान प्राप्त होने लगा है। आज सैकड़ों प्रकार के रंजकों का प्रयोग करके सूक्ष्म से सूक्ष्म संरचनाओं पर प्रकाश डाला जा रहा है । इस प्रकार, ऊतिकी के क्षेत्र में अव रसायनविज्ञान का भी प्रवेश हो गया है । भाँति भाँति के स्थायीकरों के प्रयोग से रंजकों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं का समुचित ज्ञान प्राप्त हो रहा है । जीवद्रव्य , कोशिका द्रव्य तथा उनमे और कोशिकाओं के अनेक अंगों की रासायनिक संरचनाओं का ज्ञान व सर्वसाधारण के लिये सुलभ है । ये अंगक किस प्रकार विशेषीकृत कार्य संपादित करते हैं, यह अब अज्ञात नहीं रह गया है । सूक्ष्म संरचनाओं की रासायनिक प्रकृति के अध्ययन को ऊतिकीरसायन या कोशिकारसायन कहा जाता है और अब ऊतिकी तथा ऊतिकीरसायन का एक साथ अध्ययन किया जाता है । हेलेन डोन के मतानुसार इस प्रकार की अध्ययनविधियों की तीन प्रमुख कोटियाँ हैं : ऊतकों के आंतरिक रासायनिक पदार्थों को, उनके वर्ग को परीक्ष को प्रतिक्रिया और उनको प्रकाशिक विशेषताओं की पृष्ठभूमि में पहचान । ये विधियाँ सामान्यतया गुरणात्मक वेली को ऊतिकी विषय पर लिखी पुस्तक में ऊतक विज्ञान के साथ ही कोशिका वैज्ञानिक अध्ययन पर भी वन दिया गया है । बेली के मतानुसार, "चूकि ऊतक विज्ञान संरचना संबंधी अध्ययन है और विच्छेदन द्वारा प्राप्त शरीररचना संबंधी ज्ञान की पूर्ति करता है, अतः इसके शरीर क्रिया - विज्ञान तथा रोगविज्ञान से घनिष्ठ संबंध पर भी बल देना आवश्यक है ।" एक इनके मतानुसार भी ऊनक विज्ञान का आधार कोशिकाशारीर अथवा कोशिकाविज्ञान ही है । उपर्युक्त विवरण से यह प्रकट होता है कि कोशिकाविज्ञान तथा ऊतकविज्ञान का एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए । चूंकि कोशिकाएँ अतिसूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं, अतः हम ऊतक विज्ञान को सूक्ष्मशारीर का ही पर्याय मानकर ऊतिकी का अध्ययन करेंगे । चूँकि ऊतक कोशिकाओं द्वारा ही बने होते हैं, अतः ऊतिकी का अध्ययन हम कोशिकाओं के ही नाव्यन से करेंगे । ऊतिकीय विधियाँ - ऊतकों के सम्यक् अध्ययन के लिये यह प्राव - श्यक है कि सूक्ष्मदर्शक यंत्र तक उन्हें लाने के पूर्व उनको विशेष पद्धतियों द्वारा अभिकर्मित किया जाये। उतक का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिये यह अनिवार्य है कि वह अति पतला हो । जीवित ऊतक के विभिन्न भागों में बहुत समानताएँ पाई जाती है अतः उसका ठीक ठीक अध्ययन संभव नहीं होता । इन कठिनाइयों को दूर करने के लिये सर्वप्रथम ऊतक को चार से आठ माइक्रॉन तक विच्छेदित कर लिया जाता है । इस कार्य के लिये 'माइक्रोटोम' यंत्र का प्रयोग किया जाता है । जीवित ऊतक का इतना सूक्ष्म विच्छेद तब तक संभव नहीं होता, जब तक वह कड़ा न हो । अतः ऊतक को कड़ा करने के लिये उसे विशेष प्रकार के रसायनों के घोल में स्थायीकृत किया जाता है। स्थायीकरण के उपरांत इस ऊतक को अलकोहलों के विभिन्न बोलो. अभिरंजकों तथा अन्य रसायनों में अभिकर्मित करके निर्जल कर लिया जाता है । अंत में इसे विशेष गलनांक के पैराफीन मोम में, जो एक विशेष ताप पर पहले से ही गलाकर तैयार रखा जाता है, डाल दिया जाता है । कुछ समय बाद मोम के साथी के टुकड़ों को चतुर्भुजाकार साँचे में डाल दिया जाता है । जब मोम जमकर कड़ा हो जाता है, तो उसके छोटे छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं। इन टुकड़ों को माइक्रोटोम के विशेष भाग में जमाकर उसमें एक अति धारदार चाकू से विशेष मोटाई के अनेक सेक्शन काट लिए जाते हैं । इन सेक्शनों को काँच की पट्टियों पर रखकर अध्ययन के लिये रख लिया जाता है । काँच की पट्टियों को होटिंग प्लेट पर रखकर उनका मोम गला लिया जाता है और ऊतक का सेक्शन काँच की पट्टी पर जम जाता है । इन सेक्शनों से लदी काँच की पट्टियों को विशेष रसायनों तथा अल्कोहल के घोलों में निर्जल
|
वाराणसी। गंगा का पानी अचानक से हरा हो जाने से वैज्ञानिक हैरान हैं। खबरों के अनुसार गंगा के एक बड़े हिस्से का पानी हरा हो रहा है। बनारस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक इसके कारन का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दिए हैं। पानी का सैंपल लिया गया है। वैज्ञानिकों इसके कई कारण बता रहे हैं। हालांकि जांच के बाद ही पता चल पाएगा की किस वजह से गंगा का पानी हरा हुआ है।
वहीं CPCB की स्थानीय टीम मामले की जांच (CPCB Examine Water Sample) कर रही है और ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर गंगा का पानी हरा कैसे हुआ। एक दिन गंगा किनारे टहलते हुए प्रोफेसर विजय मिश्रा की नजर अचानक हरे पानी पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने इसका सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजा है।
वहीं, बीएचयू के ही एक वैज्ञानिक डॉ. कृपा राम का कहना है कि पानी में सल्फेट या फास्फेट की मात्रा बढ़ने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ये जल में रहने वाले जीवों के लिए सही नहीं है। वहीं केंद्रीय नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी कालिका सिंह ने बुधवार को कहा कि उनकी टीम गंगा के पानी का सैंपल लेकर जांच कर रही है की आखिर क्या कारन है की गंगा पानी हरा हो रहा है।
उन्होंने कहना है कि गंगा के पानी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा जरूरत से ज्यादा है। लेकिन जांच बाद ही कहा जा सकता है कि सही वजह क्या है। हालांकि अभी किसी तरह की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन वैज्ञानिक अपना-अपना तर्क दे रहे हैं। इधर,वाराणसी में नमामि गंगे के कन्वीनर राजेश शुक्ला ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि गंगा के पानी के बहाव में काफी कमी आई है। पानी लगातार बहता रहेगा तो पानी का रंग फिर से सामान्य हो जाएगा।
बता दें कि पिछले कुछ समय से नदियों और झीलों के पानी में कोरोना वायरस पाए गए हैं। कुछ दिन पहले हैदराबाद के हुसैन सागर और शहर के दो अन्य झीलों में कोरोना वायरस पाए गए हैं। वहीं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से निकलने वाली गोमती नदी में गिरने वाले एक नाले पानी में कोरोना वायरस पाए गए हैं।
|
वाराणसी। गंगा का पानी अचानक से हरा हो जाने से वैज्ञानिक हैरान हैं। खबरों के अनुसार गंगा के एक बड़े हिस्से का पानी हरा हो रहा है। बनारस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक इसके कारन का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दिए हैं। पानी का सैंपल लिया गया है। वैज्ञानिकों इसके कई कारण बता रहे हैं। हालांकि जांच के बाद ही पता चल पाएगा की किस वजह से गंगा का पानी हरा हुआ है। वहीं CPCB की स्थानीय टीम मामले की जांच कर रही है और ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर गंगा का पानी हरा कैसे हुआ। एक दिन गंगा किनारे टहलते हुए प्रोफेसर विजय मिश्रा की नजर अचानक हरे पानी पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने इसका सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजा है। वहीं, बीएचयू के ही एक वैज्ञानिक डॉ. कृपा राम का कहना है कि पानी में सल्फेट या फास्फेट की मात्रा बढ़ने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ये जल में रहने वाले जीवों के लिए सही नहीं है। वहीं केंद्रीय नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी कालिका सिंह ने बुधवार को कहा कि उनकी टीम गंगा के पानी का सैंपल लेकर जांच कर रही है की आखिर क्या कारन है की गंगा पानी हरा हो रहा है। उन्होंने कहना है कि गंगा के पानी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा जरूरत से ज्यादा है। लेकिन जांच बाद ही कहा जा सकता है कि सही वजह क्या है। हालांकि अभी किसी तरह की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन वैज्ञानिक अपना-अपना तर्क दे रहे हैं। इधर,वाराणसी में नमामि गंगे के कन्वीनर राजेश शुक्ला ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि गंगा के पानी के बहाव में काफी कमी आई है। पानी लगातार बहता रहेगा तो पानी का रंग फिर से सामान्य हो जाएगा। बता दें कि पिछले कुछ समय से नदियों और झीलों के पानी में कोरोना वायरस पाए गए हैं। कुछ दिन पहले हैदराबाद के हुसैन सागर और शहर के दो अन्य झीलों में कोरोना वायरस पाए गए हैं। वहीं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से निकलने वाली गोमती नदी में गिरने वाले एक नाले पानी में कोरोना वायरस पाए गए हैं।
|
Bihar Board Result 2019: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड 12वीं के आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए आज दोपहर 1 बजे घोषित करेगा। आपको बता दें कि बिहार बोर्ड 12 वीं का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। उम्मीदवार अपना परिणाम देखने के लिए यहां यहां दी साइ्ट्स पर क्लिक करे सकते हैं । संबंधित जानकारी के लिए अगली स्लाइड देखें।
|
Bihar Board Result दो हज़ार उन्नीस: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड बारहवीं के आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए आज दोपहर एक बजे घोषित करेगा। आपको बता दें कि बिहार बोर्ड बारह वीं का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। उम्मीदवार अपना परिणाम देखने के लिए यहां यहां दी साइ्ट्स पर क्लिक करे सकते हैं । संबंधित जानकारी के लिए अगली स्लाइड देखें।
|
इन पंच जगत नचावा, इन पंच सवनि को पावा। ए पंच प्रबळ अति भारी, कोठ सके न पंच महारी ॥ ६ ॥ ए पर्धी धोवै लाजा, ए पंच करहिं अकाजा । ए पंच पंध दिशि दोरै, ए पच नरक में बोरें ॥ ७ ॥ दोहा छद । पचौं किनहु न फेरिया, बहुते करहिं उपाइ । सर्प सिंह गज बसि करै, इंद्रिय गही न जाइ ॥११॥
[ इन पाच इंद्रियों के वशीभूत होकर मनुष्य पाखंडो साधुआ का भेष बनाकर कोई तो पचाग्नि से कोई चौड़े बैठकर वर्षा, शीत, और घामे से कोई निश्तर खड़े रहने स, कोई मौनादि मत धारण करने से देह को वृपा कष्ट देते हैं, और कोई हिमालय में गळ कर, और काशी करोतादि से देह को नाश करते है। वास्तव में तो पाची इंद्रियों को मारना यही सच्चा तर है। जिसने इनको जाँत लिया है उसने सबको जीत लिया है। जिसने इनको दमन किया है वही सच्चा साधु है, यती है, पर है और वही भगवान का मिय है। इंद्रियों को दमन करने की विधि भी कर दी गई है। ] चंपक छंद ।
साधू यह गति जानै इद्रिय उलटी सब आने । इनि श्रवना सुने हरिगाथा, तब श्रवना होंहि सनाथा ॥३७।। हरि दर्शन कौं दृग जोवें, ए नैन सफल रुप होवें । हरि चरण कमल रुचि घ्राणं, यह नासा सफल बषाण ॥३८।।
१ दमन करे । २ अतमुखी करे, विपयों से खींच कर अंतगामी करें। भगवत् सवधी विषय को इनका भवलय बना दे ।
इहिं जिद्दा हरि गुन गावै, तब रसना सफल कहावै । इहि अंग संत को भेटै, तब देइ सफळ दुप मेटे ॥३९॥ कछु और न आनै चीते, ऐसी विधि इंद्रिय जीते। यह इंद्रिन को उपदेशा, कोन समुझे साधु संदेशा ।।४०।। यह पंच इंद्रिनि को ज्ञाना, कोठ समुझे संत सुजाना। जो सीधै सुनैरु गावै, सो राम भक्ति फल पावै ॥४१॥ यह संवत सोलह सैका, नवका पर करिये एको । सावन यदि दशमी भाई, कविवार कह्या समुझाई ।।१२।।
( ३ ) सुखसमाधि ग्रंथ ।
[ महात्मा सुदरदास जी बत्तीस अर्द्ध सवैया वृत्चों में सुख समाधि का निज अनुभव वर्णन करते हैं। जैसा कि सत्याचार्य स्वामी श्री शकराचार्य आदि वेदात- प्रवर्तकों ने इस ज्ञान को, सुख समाधि को, अनिर्वचनीय आनंद और अलौकिक सुख बताया है वैसे ही यह महात्मा जी भी उसके वर्णन की नेष्टा करते हैं । वस्तुतः "सुख का सोना" समाधिनिष्ट होना ही है, जैसा कि कहा है "शेते सुख कस्तु समाधि निष्ठुः "सुख से फोन सोता है ? जो समाधिनिष्ट होता है। इस सुख का स्वाद 'गूंगे के गुद्ध के समान है, घृत के स्वाद को कोई नहीं बता सकता, यद्यपि सब कोई खाते हैं । परम तत्व की प्राति और स्वात्मानुभव का आनंद जब प्राप्त होता है तो स्वयमेव कर्म उसी तरह छूट जाते हैं जैसे साप की केचुली । वह अतरवृत्ति और मस्ती कुछ अलवेळी ही होती है । यही सबसे ऊंची वस्तु
चित्त में । २ उपदेश की सैन । ३ संवत् १६९१ । श्रावण बदि ● । शुक्रवार ।। ४ शकराचार्यकृत प्रश्नोत्तरमालिका ।
है, और घने मोल को वस्तु है, कि जिसके मिल जाने पर वा जिसकी प्राप्ति के अर्थ संसार तुच्छ समझा जाकर छोड़ दिया जाता है। नमूने के तौर पर स्वामी सुदरदास जो इस सुल को कैसा वर्णन करते हैं सो दिखाते हैं - ]
अर्द्ध सवइया छंद ।
आत्म तत्व विचार निरंतर, कियौ सकल फर्म को नाश । घीसौं घटिरह्यौ घट भीतरि सुख सौं सोवै सुंदरदास ॥ ५ ॥ कौण करे जप तप तीरथ व्रत कोण करै यमनेम उपास । घी सौं घटिरह्यो घट भीतर सुख सौ सोवै सुंदरदास ॥ ७ ॥ अर्थ धर्म अरु काम जहां लों मोक्ष आदि सब छाड़ी आस । घोसौं घटिरह्यौ घट भीतरि सुख सौं सोवै सुंदरदास ।।१२।। बार बार अब कार्यों कहिये हवौ हृदय फॅवळ विगास । घी सौं घाँटि रह्यो घट भीवारे सुख सौं सोवै सुंदरदास ।।२०।। अधकार मिटि गयौ सहज ही बारि भीवरि भयो उजास । घी मौं घौंटि रह्यौ घट भीतरि सुख सौ सोवै सुंदरदास ।।२१।। जाक अनुभव होइ सुजाण पायौ परमानंद निवास । घोसौं घटि ह्यौ घट भीतर सुख सौं सोवै सुंदरदास ॥२४॥
( ४ ) स्वप्नप्रपोध ग्रंथ ।
[ इस स्वप्नप्रबोध ग्रंथ में स्वामी सुंदरदासजी ने यह दिखलाया १ घृत का जैसा भनिर्वचनीय भास्वादन होता है और इसके खाने से जो आनंद की वृत्ति होती है। घृत का धोरा जुख, गढ़ और पेट में बहुत काळ तक रहता है। वैसाही समाधि का सुद्ध होता है।
|
इन पंच जगत नचावा, इन पंच सवनि को पावा। ए पंच प्रबळ अति भारी, कोठ सके न पंच महारी ॥ छः ॥ ए पर्धी धोवै लाजा, ए पंच करहिं अकाजा । ए पंच पंध दिशि दोरै, ए पच नरक में बोरें ॥ सात ॥ दोहा छद । पचौं किनहु न फेरिया, बहुते करहिं उपाइ । सर्प सिंह गज बसि करै, इंद्रिय गही न जाइ ॥ग्यारह॥ [ इन पाच इंद्रियों के वशीभूत होकर मनुष्य पाखंडो साधुआ का भेष बनाकर कोई तो पचाग्नि से कोई चौड़े बैठकर वर्षा, शीत, और घामे से कोई निश्तर खड़े रहने स, कोई मौनादि मत धारण करने से देह को वृपा कष्ट देते हैं, और कोई हिमालय में गळ कर, और काशी करोतादि से देह को नाश करते है। वास्तव में तो पाची इंद्रियों को मारना यही सच्चा तर है। जिसने इनको जाँत लिया है उसने सबको जीत लिया है। जिसने इनको दमन किया है वही सच्चा साधु है, यती है, पर है और वही भगवान का मिय है। इंद्रियों को दमन करने की विधि भी कर दी गई है। ] चंपक छंद । साधू यह गति जानै इद्रिय उलटी सब आने । इनि श्रवना सुने हरिगाथा, तब श्रवना होंहि सनाथा ॥सैंतीस।। हरि दर्शन कौं दृग जोवें, ए नैन सफल रुप होवें । हरि चरण कमल रुचि घ्राणं, यह नासा सफल बषाण ॥अड़तीस।। एक दमन करे । दो अतमुखी करे, विपयों से खींच कर अंतगामी करें। भगवत् सवधी विषय को इनका भवलय बना दे । इहिं जिद्दा हरि गुन गावै, तब रसना सफल कहावै । इहि अंग संत को भेटै, तब देइ सफळ दुप मेटे ॥उनतालीस॥ कछु और न आनै चीते, ऐसी विधि इंद्रिय जीते। यह इंद्रिन को उपदेशा, कोन समुझे साधु संदेशा ।।चालीस।। यह पंच इंद्रिनि को ज्ञाना, कोठ समुझे संत सुजाना। जो सीधै सुनैरु गावै, सो राम भक्ति फल पावै ॥इकतालीस॥ यह संवत सोलह सैका, नवका पर करिये एको । सावन यदि दशमी भाई, कविवार कह्या समुझाई ।।बारह।। सुखसमाधि ग्रंथ । [ महात्मा सुदरदास जी बत्तीस अर्द्ध सवैया वृत्चों में सुख समाधि का निज अनुभव वर्णन करते हैं। जैसा कि सत्याचार्य स्वामी श्री शकराचार्य आदि वेदात- प्रवर्तकों ने इस ज्ञान को, सुख समाधि को, अनिर्वचनीय आनंद और अलौकिक सुख बताया है वैसे ही यह महात्मा जी भी उसके वर्णन की नेष्टा करते हैं । वस्तुतः "सुख का सोना" समाधिनिष्ट होना ही है, जैसा कि कहा है "शेते सुख कस्तु समाधि निष्ठुः "सुख से फोन सोता है ? जो समाधिनिष्ट होता है। इस सुख का स्वाद 'गूंगे के गुद्ध के समान है, घृत के स्वाद को कोई नहीं बता सकता, यद्यपि सब कोई खाते हैं । परम तत्व की प्राति और स्वात्मानुभव का आनंद जब प्राप्त होता है तो स्वयमेव कर्म उसी तरह छूट जाते हैं जैसे साप की केचुली । वह अतरवृत्ति और मस्ती कुछ अलवेळी ही होती है । यही सबसे ऊंची वस्तु चित्त में । दो उपदेश की सैन । तीन संवत् एक हज़ार छः सौ इक्यानवे । श्रावण बदि ● । शुक्रवार ।। चार शकराचार्यकृत प्रश्नोत्तरमालिका । है, और घने मोल को वस्तु है, कि जिसके मिल जाने पर वा जिसकी प्राप्ति के अर्थ संसार तुच्छ समझा जाकर छोड़ दिया जाता है। नमूने के तौर पर स्वामी सुदरदास जो इस सुल को कैसा वर्णन करते हैं सो दिखाते हैं - ] अर्द्ध सवइया छंद । आत्म तत्व विचार निरंतर, कियौ सकल फर्म को नाश । घीसौं घटिरह्यौ घट भीतरि सुख सौं सोवै सुंदरदास ॥ पाँच ॥ कौण करे जप तप तीरथ व्रत कोण करै यमनेम उपास । घी सौं घटिरह्यो घट भीतर सुख सौ सोवै सुंदरदास ॥ सात ॥ अर्थ धर्म अरु काम जहां लों मोक्ष आदि सब छाड़ी आस । घोसौं घटिरह्यौ घट भीतरि सुख सौं सोवै सुंदरदास ।।बारह।। बार बार अब कार्यों कहिये हवौ हृदय फॅवळ विगास । घी सौं घाँटि रह्यो घट भीवारे सुख सौं सोवै सुंदरदास ।।बीस।। अधकार मिटि गयौ सहज ही बारि भीवरि भयो उजास । घी मौं घौंटि रह्यौ घट भीतरि सुख सौ सोवै सुंदरदास ।।इक्कीस।। जाक अनुभव होइ सुजाण पायौ परमानंद निवास । घोसौं घटि ह्यौ घट भीतर सुख सौं सोवै सुंदरदास ॥चौबीस॥ स्वप्नप्रपोध ग्रंथ । [ इस स्वप्नप्रबोध ग्रंथ में स्वामी सुंदरदासजी ने यह दिखलाया एक घृत का जैसा भनिर्वचनीय भास्वादन होता है और इसके खाने से जो आनंद की वृत्ति होती है। घृत का धोरा जुख, गढ़ और पेट में बहुत काळ तक रहता है। वैसाही समाधि का सुद्ध होता है।
|
शिवपुरी। बदरवास थाना क्षेत्र के तहत आने वाले ग्राम बारई में शुक्रवार की रात पेट्रोल की चोरी कर रहे कर्मचारियों को मालिक ने देख लिया। मामले में पुलिस ने पेट्रोल पंप संचालक की शिकायत पर केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
राजेश पुत्र नरेन्द्रसिंह आर्य निवासी बदरवास ने पुलिस को शिकायत में बताया कि उन्हें सूचना मिली उनके पेट्रोल पंप जो ग्राम बारइ में है वहां पदस्थ कर्मचारी पेट्रोल की चोरी करते हैं। सूचना पर पेट्रोल पंप संचालक पेट्रोल पंप पर शुक्रवार की रात पहुंचे तो उन्होंने देखा उनके पंप पर पदस्थ कर्मचारी विजय जाटव व राहुल जाटव निवासी बारई पेट्रोल की चोरी कर एक केन में भर रहे थे।
जिस पर आर्य ने दोनों को पकडऩे की कोशिश की लेकिन वह भाग गए। इसके बाद आर्य थाने आए और उन्होंने दोनों कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज करवाया।
|
शिवपुरी। बदरवास थाना क्षेत्र के तहत आने वाले ग्राम बारई में शुक्रवार की रात पेट्रोल की चोरी कर रहे कर्मचारियों को मालिक ने देख लिया। मामले में पुलिस ने पेट्रोल पंप संचालक की शिकायत पर केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। राजेश पुत्र नरेन्द्रसिंह आर्य निवासी बदरवास ने पुलिस को शिकायत में बताया कि उन्हें सूचना मिली उनके पेट्रोल पंप जो ग्राम बारइ में है वहां पदस्थ कर्मचारी पेट्रोल की चोरी करते हैं। सूचना पर पेट्रोल पंप संचालक पेट्रोल पंप पर शुक्रवार की रात पहुंचे तो उन्होंने देखा उनके पंप पर पदस्थ कर्मचारी विजय जाटव व राहुल जाटव निवासी बारई पेट्रोल की चोरी कर एक केन में भर रहे थे। जिस पर आर्य ने दोनों को पकडऩे की कोशिश की लेकिन वह भाग गए। इसके बाद आर्य थाने आए और उन्होंने दोनों कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज करवाया।
|
नोसोलॉजी बीमारियों का विज्ञान है, धन्यवादजो मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करना संभव हो जाता है, जो रोग में कार्यात्मक और संरचनात्मक संबंधों को स्पष्ट करने के लिए स्वयं को नैदानिक दवा निर्धारित करता है। विशेष रूप से, नोसोलॉजी में ईटियोलॉजी और रोगजन्य जैसे वर्ग शामिल हैं। उन पर विचार करें।
ईटीओलॉजी स्थितियों और कारणों का विज्ञान हैपैथोलॉजीज का विकास वैज्ञानिक कारणवाद, बीमारियों के विकास के बारे में विचार, जो अब व्यापक हो गया है, भौतिकवादी बोलीभाषाओं पर आधारित है। यह स्पष्ट है कि प्रकृति में प्रत्येक घटना का अपना कारण होता है, उनके बीच एक संबंध होता है, घटनाओं के प्रत्येक क्रम में निर्णायक, मुख्य कारक निर्धारित करने में सक्षम होना आवश्यक है। इसके साथ बहस करना असंभव है। हालांकि, रोग नोजोलॉजी एक जटिल विज्ञान है, और इसमें सबकुछ उतना स्पष्ट नहीं है जितना कि यह पहली नज़र में दिख सकता है। उपर्युक्त के आधार पर, यह तर्क दिया जा सकता है कि सभी ईटियोलॉजिकल कारकों को पूर्ववर्ती, योगदान, साथ ही साथ उत्पन्न करने में विभाजित किया गया है। उन पर विचार करें।
एक नियम के रूप में, कारण कारक, प्रदान करते हैंपैथोलॉजी की विशिष्टता; वे आमतौर पर विभिन्न बीमारियों के रोगजनकों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है। योगदान की स्थितियों में रखरखाव, उपयोग, भोजन और देखभाल की स्थितियां शामिल हैं। और predisposing मानव स्थिति, इसकी संवैधानिक विशेषताओं, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के प्रकार, वंशानुगत predisposition हैं।
वैज्ञानिक कारणवाद सभी में सिखाता हैकुछ मामलों में, हर बीमारी अपने विकास की मुख्य, मुख्य कारण खोज करने के लिए, और यह पता लगाने के लिए, न केवल रोग के साथ, बल्कि इसके घटित होने की संभावना से निपटने के लिए तरीके खोजने के लिए आवश्यक है।
पैथोलॉजी की प्रकृति निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैइसके कारणों से अवगत रहें, यह जानना भी आवश्यक है कि मानव शरीर में रोगजनक कारक कैसे कार्य करता है, दूसरे शब्दों में, असामान्य प्रक्रिया की उपस्थिति और प्रगति की तंत्र को समझना आवश्यक है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह जानने के लिए कि क्या नोलोलॉजी है, रोगजनकता को समझना आसान है। ये अवधारणाएं एक दूसरे से संबंधित हैं। रोगजन्य रोग की उपस्थिति और प्रगति के तंत्र के साथ-साथ जिस तरीके से पैथोलॉजिकल कारक मानव शरीर के माध्यम से फैलता है, उसका तंत्र है। यह शिक्षण दवा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
तंत्र अगर रिफ्लेक्सिव हैएक निश्चित अंग के रोगजनक कारक रिसेप्टर्स (दूसरे शब्दों में, तंत्रिका समाप्ति) के प्रभाव के लिए संवेदनशील होते हैं। प्रत्येक दवा को यह पता होना चाहिए। सेंट्रिप्टल के माध्यम से उभरती उत्तेजना (दूसरे शब्दों में, उदासीन) तरीके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में प्रवेश करती है। डेटा का विश्लेषण है। और फिर केन्द्रापसारक पथ (जिसे अपरिवर्तनीय भी कहा जाता है) के साथ, यह कुछ अंगों तक चलता है, जिसका काम टूट जाता है। पहले चरण में उभरते परिवर्तन सुरक्षात्मक हैं, और यदि वे पर्याप्त नहीं हैं, तो असामान्य प्रक्रिया विकसित होने लगती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नोसोलॉजी एक सिद्धांत है जिसमें प्रत्येक चिकित्सक को समझना चाहिए।
तंत्र न्यूरो-हास्य है (अन्यथाबोलने, सेंट्रोजेनिक) अगर रोगजनक कारक रक्त में था जो इसे तंत्रिका केंद्रों में ले जाता था। इसके अलावा, वह उन पर एक निश्चित प्रभाव डालना शुरू कर देता है, और वे अंगों को आवेग भेजते हैं जिनके काम का उल्लंघन किया जाता है। स्वाभाविक रूप से, इससे कुछ भी अच्छा नहीं होता है। यह समझा जाना चाहिए कि कई बीमार लोगों के लिए नोसोलॉजी एक मोक्ष है। आखिरकार, उसके लिए धन्यवाद, आप आज कुछ बीमारियों को रोक सकते हैं।
तंत्र तत्काल है अगरबीमारी के कारण कारक की साइट पर उल्लंघन होता है। यह फ्रोस्टबाइट, जला, क्षार, और एसिड भी। मानव शरीर में प्रवेश करने वाले रोग पैदा करने वाले कारक स्पर्श और शारीरिक निरंतरता से फैले हुए हैं, साथ ही स्राव, लिम्फ और रक्त, एक प्रतिकृति विधि, और तंत्रिका ट्रंक के साथ भी।
छह साल पहले हमारे देश में, "सात नोसोलॉजीज" नामक एक कार्यक्रम लॉन्च किया गया था।
इसका सार इस तथ्य में निहित है कि चिकित्साकई दुर्लभ रोगों वाले लोगों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं को महंगा चिकित्सा की आवश्यकता होती है जो अब संघीय बजट से पैसे के लिए खरीदे जाते हैं। इस प्रकार, रोगियों को मुफ्त में दवाएं मिलती हैं।
आज तक, कार्यक्रम में सात दुर्लभ रोग शामिल हैंः
सिस्टिक फाइब्रोसिस;
- ग्लूकोसाइलेरामाइड लिपिडोसिस;
- एकाधिक स्क्लेरोसिस;
- हेमोफिलिया;
- मायलोइड ल्यूकेमिया;
- साथ ही मरीज़ जो अंग प्रत्यारोपण से बच गए और जिन्हें इम्यूनोसप्रेसर्स की आवश्यकता है।
|
नोसोलॉजी बीमारियों का विज्ञान है, धन्यवादजो मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करना संभव हो जाता है, जो रोग में कार्यात्मक और संरचनात्मक संबंधों को स्पष्ट करने के लिए स्वयं को नैदानिक दवा निर्धारित करता है। विशेष रूप से, नोसोलॉजी में ईटियोलॉजी और रोगजन्य जैसे वर्ग शामिल हैं। उन पर विचार करें। ईटीओलॉजी स्थितियों और कारणों का विज्ञान हैपैथोलॉजीज का विकास वैज्ञानिक कारणवाद, बीमारियों के विकास के बारे में विचार, जो अब व्यापक हो गया है, भौतिकवादी बोलीभाषाओं पर आधारित है। यह स्पष्ट है कि प्रकृति में प्रत्येक घटना का अपना कारण होता है, उनके बीच एक संबंध होता है, घटनाओं के प्रत्येक क्रम में निर्णायक, मुख्य कारक निर्धारित करने में सक्षम होना आवश्यक है। इसके साथ बहस करना असंभव है। हालांकि, रोग नोजोलॉजी एक जटिल विज्ञान है, और इसमें सबकुछ उतना स्पष्ट नहीं है जितना कि यह पहली नज़र में दिख सकता है। उपर्युक्त के आधार पर, यह तर्क दिया जा सकता है कि सभी ईटियोलॉजिकल कारकों को पूर्ववर्ती, योगदान, साथ ही साथ उत्पन्न करने में विभाजित किया गया है। उन पर विचार करें। एक नियम के रूप में, कारण कारक, प्रदान करते हैंपैथोलॉजी की विशिष्टता; वे आमतौर पर विभिन्न बीमारियों के रोगजनकों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है। योगदान की स्थितियों में रखरखाव, उपयोग, भोजन और देखभाल की स्थितियां शामिल हैं। और predisposing मानव स्थिति, इसकी संवैधानिक विशेषताओं, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के प्रकार, वंशानुगत predisposition हैं। वैज्ञानिक कारणवाद सभी में सिखाता हैकुछ मामलों में, हर बीमारी अपने विकास की मुख्य, मुख्य कारण खोज करने के लिए, और यह पता लगाने के लिए, न केवल रोग के साथ, बल्कि इसके घटित होने की संभावना से निपटने के लिए तरीके खोजने के लिए आवश्यक है। पैथोलॉजी की प्रकृति निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैइसके कारणों से अवगत रहें, यह जानना भी आवश्यक है कि मानव शरीर में रोगजनक कारक कैसे कार्य करता है, दूसरे शब्दों में, असामान्य प्रक्रिया की उपस्थिति और प्रगति की तंत्र को समझना आवश्यक है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह जानने के लिए कि क्या नोलोलॉजी है, रोगजनकता को समझना आसान है। ये अवधारणाएं एक दूसरे से संबंधित हैं। रोगजन्य रोग की उपस्थिति और प्रगति के तंत्र के साथ-साथ जिस तरीके से पैथोलॉजिकल कारक मानव शरीर के माध्यम से फैलता है, उसका तंत्र है। यह शिक्षण दवा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। तंत्र अगर रिफ्लेक्सिव हैएक निश्चित अंग के रोगजनक कारक रिसेप्टर्स के प्रभाव के लिए संवेदनशील होते हैं। प्रत्येक दवा को यह पता होना चाहिए। सेंट्रिप्टल के माध्यम से उभरती उत्तेजना तरीके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में प्रवेश करती है। डेटा का विश्लेषण है। और फिर केन्द्रापसारक पथ के साथ, यह कुछ अंगों तक चलता है, जिसका काम टूट जाता है। पहले चरण में उभरते परिवर्तन सुरक्षात्मक हैं, और यदि वे पर्याप्त नहीं हैं, तो असामान्य प्रक्रिया विकसित होने लगती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नोसोलॉजी एक सिद्धांत है जिसमें प्रत्येक चिकित्सक को समझना चाहिए। तंत्र न्यूरो-हास्य है अगर रोगजनक कारक रक्त में था जो इसे तंत्रिका केंद्रों में ले जाता था। इसके अलावा, वह उन पर एक निश्चित प्रभाव डालना शुरू कर देता है, और वे अंगों को आवेग भेजते हैं जिनके काम का उल्लंघन किया जाता है। स्वाभाविक रूप से, इससे कुछ भी अच्छा नहीं होता है। यह समझा जाना चाहिए कि कई बीमार लोगों के लिए नोसोलॉजी एक मोक्ष है। आखिरकार, उसके लिए धन्यवाद, आप आज कुछ बीमारियों को रोक सकते हैं। तंत्र तत्काल है अगरबीमारी के कारण कारक की साइट पर उल्लंघन होता है। यह फ्रोस्टबाइट, जला, क्षार, और एसिड भी। मानव शरीर में प्रवेश करने वाले रोग पैदा करने वाले कारक स्पर्श और शारीरिक निरंतरता से फैले हुए हैं, साथ ही स्राव, लिम्फ और रक्त, एक प्रतिकृति विधि, और तंत्रिका ट्रंक के साथ भी। छह साल पहले हमारे देश में, "सात नोसोलॉजीज" नामक एक कार्यक्रम लॉन्च किया गया था। इसका सार इस तथ्य में निहित है कि चिकित्साकई दुर्लभ रोगों वाले लोगों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं को महंगा चिकित्सा की आवश्यकता होती है जो अब संघीय बजट से पैसे के लिए खरीदे जाते हैं। इस प्रकार, रोगियों को मुफ्त में दवाएं मिलती हैं। आज तक, कार्यक्रम में सात दुर्लभ रोग शामिल हैंः सिस्टिक फाइब्रोसिस; - ग्लूकोसाइलेरामाइड लिपिडोसिस; - एकाधिक स्क्लेरोसिस; - हेमोफिलिया; - मायलोइड ल्यूकेमिया; - साथ ही मरीज़ जो अंग प्रत्यारोपण से बच गए और जिन्हें इम्यूनोसप्रेसर्स की आवश्यकता है।
|
14 फरवरी का दिन पूरा देश सदमे में आ गया. जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. इस बर्बल हमले में भारतीय सेना के 40 जवान शहीद हो गए. इस जघन्य घटना के बाद देश के साथ ही पूरा बॉलीवुड भी सन्न रह गया था. घटने की निंदा करते हुए सबसे पहले अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा, विक्की कौशल, अनुपम खेर, अभिषेक बच्चन, आर माधवन, रितेश देशमुख और मधुर भंडारकर समेत कई सेलेब्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी.
लेकिन अब सिने ब्लिट्स ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्पलॉइज यानी कि सभी सिने कर्मियों की एक संस्था ने तय किया है कि रविवार 17 फरवरी को बॉलीवुड शहीदों की याद में और इस आतंकी घटना के निंदा करते हुए ब्लैक डे मनाएगा. इस योजना के तहत दोपहर 2-4 के बीच काम नहीं किया जाएगा और एक प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी.
|
चौदह फरवरी का दिन पूरा देश सदमे में आ गया. जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. इस बर्बल हमले में भारतीय सेना के चालीस जवान शहीद हो गए. इस जघन्य घटना के बाद देश के साथ ही पूरा बॉलीवुड भी सन्न रह गया था. घटने की निंदा करते हुए सबसे पहले अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा, विक्की कौशल, अनुपम खेर, अभिषेक बच्चन, आर माधवन, रितेश देशमुख और मधुर भंडारकर समेत कई सेलेब्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी. लेकिन अब सिने ब्लिट्स ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्पलॉइज यानी कि सभी सिने कर्मियों की एक संस्था ने तय किया है कि रविवार सत्रह फरवरी को बॉलीवुड शहीदों की याद में और इस आतंकी घटना के निंदा करते हुए ब्लैक डे मनाएगा. इस योजना के तहत दोपहर दो-चार के बीच काम नहीं किया जाएगा और एक प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी.
|
आप लोग जाकर इस नई व्यवस्था में भागीदार बने। आप लोग अपने अपने वर्ग में जायें और अपनी बात का उनसे निवेदन करें। यदि वे नहीं माने तो बुद्धि-वल पूर्वक अपना काम बनायें। यदि हम यह पंक्ति तोड़ने में सफल नहीं हुये तो यह आने वाले समय के लिए नासूर बन जायेगा। सेवक वर्ग पतित हो जायेगा। वह अपना अस्तित्व भूल जायेगा। मुझे दिख रहा है हमें पीछे धकेला जा रहा है। वे लोग अपने ही खास भाइयों को साथ बैठाने में हीनता अनुभव करने लगे हैं।
बन्धुओं! हमारे इस देश में कहीं भी जातियाँ नहीं थीं। जातियाँ तो आज भी नहीं हैं। भाई- भाई अलग- अलग रहने लगें तो जाति बन गईं। यहाँ शब्द ब्रह्म की प्रमुखता रही है। सारा खेल उसी का चल रहा है। जो दीप हमारे अन्दर जल रहा है वही सभी के अन्दर समाहित है। समझ नहीं आता ये वर्गों की दीबारें क्यों पनप रही हैं। इनमें दिन- प्रतिदिन कट्टरता आती जा रही है। हर पिता अपने बच्चे को अपने ही वर्ग में रखना चाहता है। मेरा सोच है ये दीबारें ठीक नहीं है। अब सभी अपने- अपने गंतव्य को प्रस्थान करें।
श्रीराम हमारे महाराजा हैं। वे बहुत सोच विचार कर चलने वाले है। उनका हर कदम सोच समझकर पड़ता है। यदि आपके साथ न्याय न हो तो आप अपने महाराजा की शरण ले सकते हैं। वे निश्चय ही न्याय करेंगे।
किसी का स्वर गुँजा-यदि उन्होंने न्याय नहीं किया तो?
'यह सम्भव नहीं है। वे न्याय के लिये प्रसिद्ध हैं। मुझे ज्ञात र्है वे विश्वामित्र और बसिष्ठ जी के मध्य नहीं आये। वे दोनों में श्रद्धा रखते हैं, इनमें से कोई किसी सें कम नहीं हैं। श्री राम अपनी मर्यादाओं में बंधे हैं। इसे हम अपने स्वार्थ के लिये उनके कार्यों को अन्याय से परिभाषित कर सकते हैं।
'इधर विश्वामित्र चिन्तन में डूवे हैं। उन्होंने जब से यह झूठी कहानी सुनी है कि राम ने एक तपस्वी को मारा है। यह कहानी बनाकर कुछ लोग महाऋषि की हमदर्दी बटोर ने का प्रयास कर रहे हैं। समझ नहीं आता इतना ज्ञानी-ध्यानी ऋषि कैसे इनकी बातों पर विश्वास कर सकता है। उन्होंने मुझे ब्रह्म ऋषि स्वीकार कर लिया है, मुझे उनके विवके पर सन्देह नहीं रह गया है। वे ऐसे झूठे किस्से-कहानियों पर विश्वास नहीं कर सकते।
मैं यह जान रहा हूँ कि हमारे राम ऐसा कोई आचरण नहीं कर सकते जिससे आम जन-जीवन प्रभावित हो। कर्मणा संस्कृति में इतने दोष आ चुके हैं कि उसमें बदलाव आवश्यक हो गया है। व्यवस्था में जो बदलाव आया है वह धीरे-धीरे आया है। लोग अपने बच्चों को अपना काम- धन्धा सिखलाना चाहते हैं। उनके बच्चे उस कार्य को सहजता से सीखते भी हैं। इस कारण जन्मना संस्कृति नयी है। स्थिर भी हुई है। मैं आज भी अनेक वार क्षत्री बन जाता हूँ। पैतृक परम्परा को त्यागा तो नहीं जा सकता। जब जब मुझे क्रोध आता है मैं ब्रह्म ऋषि का पद पाकर भी पूरा क्षत्री बना रहता हूँ।
मैं क्षत्री वर्ग से था तव मेरी यह हालत है। शम्बूक शूद्र बर्ग से है। वह भी ब्रह्म ऋषि बनकर तप के बल पर सब कुछ पा लेना चाहता है। देखना उसे अणिमा, लधुमा जैसी सभी सिद्धियाँ मिल कर रहेंगीं। कोई परम्परा से हटकर जीना चाहता है तो लोगों को यह स्वीकार नहीं है। लोगों को तो परम्परा में ही जीना रुचिकर लगता है। इसके बाहर निकलने का प्रयास किया तो लोग उसका विरोध करने लगते हैं।
किन्तु यह नियम जनक जी पर लागू नहीं हुआ। आज भी उनके पास बड़े- बड़े तपस्वी और ब्राह्मण ज्ञान प्राप्त करने के लिये आते रहते हैं। वे भी क्ष्त्रिय हैं। उन पर कोई नियम लागू नहीं है। सभी उनके ज्ञान के आगे नतमस्तक है। वे विदेह के रूप में प्रसिद्ध हो चुके हैं। अष्टावक्र जैसे परम ज्ञानी संतों का उनके यहाँ आना-जाना लगा रहता है।
विदेह-इसका अर्थ होता है विना देह के, जिसे देह का भान न रहे। देहातीत सारे कार्य होते चले जायें। मैं देह नहीं हूँ जब यह सिद्धि मिल जाये। मैं आत्मा हूँ। सर्व व्यापक परमात्मा का हर पल का इससे सम्पर्क रहने लगे। इस शरीर में उसी का वास है। इससे मैं शरीर नहीं हो जाता। हम ध्यान में बैठते समय आत्मा को उस परमात्मा में विलीन करने का प्रयास करें। दोनों के एकाकार होते ही तुम झूमने लगोगे। सारे संकल्प-विकल्प तिरोहित हो जायेंगे।
उस समय, समय थम जाता है। कोई चिन्तन पास नहीं फटकता। यही दृष्टा भाव हमें उस स्थिति में लम्वे समय तक ध्यान में बैठाये रखता है। उस समय देह से सम्बन्ध नहीं रहता। ऐसी स्थिति हर पल हर समय बनी रहे, तुम विदेह के रूप में अपने में वास करने लगे हो। यह पथ गुरु ही प्रदत्त कर सकता है। इसे कोई शब्द प्रदान करना चाहे, यह गूंगे का गुड है। जिसका स्वाद बतलाना सम्भव नहीं है। ऐसी विद्याओं के आचार्य उन दिनों महाराज जनक जी ही थे।
शम्बूक को इन सब बातों का अपने जनों से पता चल गया था। वे सोच में डूवे थे। समाज में विश्वामित्र को उतना न्याय क्यों नहीं मिल पाया। इसके लिये क्या समाज दोषी है? अथवा वे उतना तप नहीं कर पाये जितनी आवश्यकता थी। इसका अर्थ है मैं जिस तरह तप करता रहा कहीं न कहीं उसमें कमी रही। विश्वामित्र ने जितना किया उन्हें उतना मिला भी किन्तु महाराज जनक की तरह किसी और को कुछ नहीं मिल पाया। वे राजकाज भी सँभालते रहे, अपने परिवार के साथ जीवन यापन भी करते रहे। उन्हें उनके तप का पूरा सम्मान मिला है।
विश्वामित्र मेनका के चक्रव्यूह में फस ही गये। इसका अर्थ है मेरा तप इसी कारण सार्थक फल प्रदान नहीं कर पाया। लोग हैं कि इस व्यवस्था को ही दोषी मान कर चल रहे हैं। जनक और विश्वामित्र क्षत्री वर्ग से हैं। दोनों के स्वभाव एवं आचरण में जमीन-आसमान का अन्तर है। विश्वामित्र ने तप से जो प्राप्त करना चाहा वे अनेक वार उसमें अनुर्तीण भी हुये है, उन्हें जो मिला है वह उन्हें कठिनता से प्राप्त हुआ है। महाराज जनक के तप पर किसी ने प्रश्न ही खड़ा नहीं किया। उनके सहज तप से सब कुछ अपने आप प्राप्त होता चला गया।
मैं सोचता था रावण की तरह उग्र तप से फल षीघ्र मिल जाता है, यही सोचकर मैंने पेड़ से उलटा लटककर उग्र से उग्र तप करने का प्रयास किया। जिसका इतना प्रचार हो गया कि जिसे देखकर लोग त्राहि-त्राहि करने लगे। मुझे उसका कोई फल भी नहीं मिला। सारा समाज मुझ से डरकर दूर भागने लगा है। यह बात मेरी देर से समझ में आई है। तभी मैंने उस उग्र हठ योग का त्याग किया है।
शम्बूक सोच में है कि राम की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये ये ऋषि लोग उनके गुणगान करने में लगे हैं, किन्तु मुझे तो कुछ और ही दृष्टि गोचर हो रहा है। मुझे तो रावण के चरित्र ने अधिक प्रभावित किया है। वह जैसा कहा जा रहा है वैसा नहीं है। कुछ भूलें होना मानवीय स्वभाव में हैं। सीता का हरण करके वह तो ले गया लेकिन उसने उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। उसने उन्हें अपने सुन्दरतम बगीचे अशोक वन में ससम्मान रखा। श्रीराम की यह बात मुझे अच्छी नहीं लगी। रावण को मारने के बाद उन्होंने सीता जी की अग्नि परीक्षा ली तभी उन्हें स्वीकार किया। उसके वाद लोक अपवाद का उनके पास कोई उत्तर नहीं था। लोक अपवाद के उत्तर में वे स्वयम् अपनी अग्नि परीक्षा देकर लोगों को सन्तुष्ट करते। सीता जी को पुनः जंगल में भेजने का कोई औचित्य नहीं था।
|
आप लोग जाकर इस नई व्यवस्था में भागीदार बने। आप लोग अपने अपने वर्ग में जायें और अपनी बात का उनसे निवेदन करें। यदि वे नहीं माने तो बुद्धि-वल पूर्वक अपना काम बनायें। यदि हम यह पंक्ति तोड़ने में सफल नहीं हुये तो यह आने वाले समय के लिए नासूर बन जायेगा। सेवक वर्ग पतित हो जायेगा। वह अपना अस्तित्व भूल जायेगा। मुझे दिख रहा है हमें पीछे धकेला जा रहा है। वे लोग अपने ही खास भाइयों को साथ बैठाने में हीनता अनुभव करने लगे हैं। बन्धुओं! हमारे इस देश में कहीं भी जातियाँ नहीं थीं। जातियाँ तो आज भी नहीं हैं। भाई- भाई अलग- अलग रहने लगें तो जाति बन गईं। यहाँ शब्द ब्रह्म की प्रमुखता रही है। सारा खेल उसी का चल रहा है। जो दीप हमारे अन्दर जल रहा है वही सभी के अन्दर समाहित है। समझ नहीं आता ये वर्गों की दीबारें क्यों पनप रही हैं। इनमें दिन- प्रतिदिन कट्टरता आती जा रही है। हर पिता अपने बच्चे को अपने ही वर्ग में रखना चाहता है। मेरा सोच है ये दीबारें ठीक नहीं है। अब सभी अपने- अपने गंतव्य को प्रस्थान करें। श्रीराम हमारे महाराजा हैं। वे बहुत सोच विचार कर चलने वाले है। उनका हर कदम सोच समझकर पड़ता है। यदि आपके साथ न्याय न हो तो आप अपने महाराजा की शरण ले सकते हैं। वे निश्चय ही न्याय करेंगे। किसी का स्वर गुँजा-यदि उन्होंने न्याय नहीं किया तो? 'यह सम्भव नहीं है। वे न्याय के लिये प्रसिद्ध हैं। मुझे ज्ञात र्है वे विश्वामित्र और बसिष्ठ जी के मध्य नहीं आये। वे दोनों में श्रद्धा रखते हैं, इनमें से कोई किसी सें कम नहीं हैं। श्री राम अपनी मर्यादाओं में बंधे हैं। इसे हम अपने स्वार्थ के लिये उनके कार्यों को अन्याय से परिभाषित कर सकते हैं। 'इधर विश्वामित्र चिन्तन में डूवे हैं। उन्होंने जब से यह झूठी कहानी सुनी है कि राम ने एक तपस्वी को मारा है। यह कहानी बनाकर कुछ लोग महाऋषि की हमदर्दी बटोर ने का प्रयास कर रहे हैं। समझ नहीं आता इतना ज्ञानी-ध्यानी ऋषि कैसे इनकी बातों पर विश्वास कर सकता है। उन्होंने मुझे ब्रह्म ऋषि स्वीकार कर लिया है, मुझे उनके विवके पर सन्देह नहीं रह गया है। वे ऐसे झूठे किस्से-कहानियों पर विश्वास नहीं कर सकते। मैं यह जान रहा हूँ कि हमारे राम ऐसा कोई आचरण नहीं कर सकते जिससे आम जन-जीवन प्रभावित हो। कर्मणा संस्कृति में इतने दोष आ चुके हैं कि उसमें बदलाव आवश्यक हो गया है। व्यवस्था में जो बदलाव आया है वह धीरे-धीरे आया है। लोग अपने बच्चों को अपना काम- धन्धा सिखलाना चाहते हैं। उनके बच्चे उस कार्य को सहजता से सीखते भी हैं। इस कारण जन्मना संस्कृति नयी है। स्थिर भी हुई है। मैं आज भी अनेक वार क्षत्री बन जाता हूँ। पैतृक परम्परा को त्यागा तो नहीं जा सकता। जब जब मुझे क्रोध आता है मैं ब्रह्म ऋषि का पद पाकर भी पूरा क्षत्री बना रहता हूँ। मैं क्षत्री वर्ग से था तव मेरी यह हालत है। शम्बूक शूद्र बर्ग से है। वह भी ब्रह्म ऋषि बनकर तप के बल पर सब कुछ पा लेना चाहता है। देखना उसे अणिमा, लधुमा जैसी सभी सिद्धियाँ मिल कर रहेंगीं। कोई परम्परा से हटकर जीना चाहता है तो लोगों को यह स्वीकार नहीं है। लोगों को तो परम्परा में ही जीना रुचिकर लगता है। इसके बाहर निकलने का प्रयास किया तो लोग उसका विरोध करने लगते हैं। किन्तु यह नियम जनक जी पर लागू नहीं हुआ। आज भी उनके पास बड़े- बड़े तपस्वी और ब्राह्मण ज्ञान प्राप्त करने के लिये आते रहते हैं। वे भी क्ष्त्रिय हैं। उन पर कोई नियम लागू नहीं है। सभी उनके ज्ञान के आगे नतमस्तक है। वे विदेह के रूप में प्रसिद्ध हो चुके हैं। अष्टावक्र जैसे परम ज्ञानी संतों का उनके यहाँ आना-जाना लगा रहता है। विदेह-इसका अर्थ होता है विना देह के, जिसे देह का भान न रहे। देहातीत सारे कार्य होते चले जायें। मैं देह नहीं हूँ जब यह सिद्धि मिल जाये। मैं आत्मा हूँ। सर्व व्यापक परमात्मा का हर पल का इससे सम्पर्क रहने लगे। इस शरीर में उसी का वास है। इससे मैं शरीर नहीं हो जाता। हम ध्यान में बैठते समय आत्मा को उस परमात्मा में विलीन करने का प्रयास करें। दोनों के एकाकार होते ही तुम झूमने लगोगे। सारे संकल्प-विकल्प तिरोहित हो जायेंगे। उस समय, समय थम जाता है। कोई चिन्तन पास नहीं फटकता। यही दृष्टा भाव हमें उस स्थिति में लम्वे समय तक ध्यान में बैठाये रखता है। उस समय देह से सम्बन्ध नहीं रहता। ऐसी स्थिति हर पल हर समय बनी रहे, तुम विदेह के रूप में अपने में वास करने लगे हो। यह पथ गुरु ही प्रदत्त कर सकता है। इसे कोई शब्द प्रदान करना चाहे, यह गूंगे का गुड है। जिसका स्वाद बतलाना सम्भव नहीं है। ऐसी विद्याओं के आचार्य उन दिनों महाराज जनक जी ही थे। शम्बूक को इन सब बातों का अपने जनों से पता चल गया था। वे सोच में डूवे थे। समाज में विश्वामित्र को उतना न्याय क्यों नहीं मिल पाया। इसके लिये क्या समाज दोषी है? अथवा वे उतना तप नहीं कर पाये जितनी आवश्यकता थी। इसका अर्थ है मैं जिस तरह तप करता रहा कहीं न कहीं उसमें कमी रही। विश्वामित्र ने जितना किया उन्हें उतना मिला भी किन्तु महाराज जनक की तरह किसी और को कुछ नहीं मिल पाया। वे राजकाज भी सँभालते रहे, अपने परिवार के साथ जीवन यापन भी करते रहे। उन्हें उनके तप का पूरा सम्मान मिला है। विश्वामित्र मेनका के चक्रव्यूह में फस ही गये। इसका अर्थ है मेरा तप इसी कारण सार्थक फल प्रदान नहीं कर पाया। लोग हैं कि इस व्यवस्था को ही दोषी मान कर चल रहे हैं। जनक और विश्वामित्र क्षत्री वर्ग से हैं। दोनों के स्वभाव एवं आचरण में जमीन-आसमान का अन्तर है। विश्वामित्र ने तप से जो प्राप्त करना चाहा वे अनेक वार उसमें अनुर्तीण भी हुये है, उन्हें जो मिला है वह उन्हें कठिनता से प्राप्त हुआ है। महाराज जनक के तप पर किसी ने प्रश्न ही खड़ा नहीं किया। उनके सहज तप से सब कुछ अपने आप प्राप्त होता चला गया। मैं सोचता था रावण की तरह उग्र तप से फल षीघ्र मिल जाता है, यही सोचकर मैंने पेड़ से उलटा लटककर उग्र से उग्र तप करने का प्रयास किया। जिसका इतना प्रचार हो गया कि जिसे देखकर लोग त्राहि-त्राहि करने लगे। मुझे उसका कोई फल भी नहीं मिला। सारा समाज मुझ से डरकर दूर भागने लगा है। यह बात मेरी देर से समझ में आई है। तभी मैंने उस उग्र हठ योग का त्याग किया है। शम्बूक सोच में है कि राम की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये ये ऋषि लोग उनके गुणगान करने में लगे हैं, किन्तु मुझे तो कुछ और ही दृष्टि गोचर हो रहा है। मुझे तो रावण के चरित्र ने अधिक प्रभावित किया है। वह जैसा कहा जा रहा है वैसा नहीं है। कुछ भूलें होना मानवीय स्वभाव में हैं। सीता का हरण करके वह तो ले गया लेकिन उसने उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। उसने उन्हें अपने सुन्दरतम बगीचे अशोक वन में ससम्मान रखा। श्रीराम की यह बात मुझे अच्छी नहीं लगी। रावण को मारने के बाद उन्होंने सीता जी की अग्नि परीक्षा ली तभी उन्हें स्वीकार किया। उसके वाद लोक अपवाद का उनके पास कोई उत्तर नहीं था। लोक अपवाद के उत्तर में वे स्वयम् अपनी अग्नि परीक्षा देकर लोगों को सन्तुष्ट करते। सीता जी को पुनः जंगल में भेजने का कोई औचित्य नहीं था।
|
गाजियाबाद में 24 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा सड़क हादसा रविवार देर रात हुआ। तेज रफ्तार अनियंत्रित एंबुलेंस ने तीन बाइकों को कुचल दिया। इस हादसे में एक महिला और दो युवकों की मौत हो गई। एक बच्चा समेत दो लोग घायल हैं।
CM योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत की आत्मा शांति की कामना करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। CM ने घायलों का पर्याप्त इलाज कराने और डीएम-एसएसपी को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया है।
यह हादसा विजयनगर थाना क्षेत्र में सिद्धार्थ विहार चौराहा स्थित डीपीएस के पास हुआ। इंस्पेक्टर योगेंद्र मलिक ने बताया, मृतकों की पहचान मनमोहन निवासी गांव मई, ऋषिपाल निवासी बिहारीपुरा और राजकुमारी निवासी पतवाड़ी बिसरख के रूप में हुई है। मनमोहन और ऋषिपाल एक बाइक पर थे। जबकि दूसरी बाइक पर राजकुमारी अपने बच्चे और पति संग दूसरी बाइक पर कहीं जा रही थी।
इंस्पेक्टर ने बताया, प्रथम दृष्टया एंबुलेंस ड्राइवर नशे में लग रहा था। उसको कस्टडी में ले लिया गया है। अभी ड्राइवर से पूछताछ नहीं की गई है। हादसे के वक्त एंबुलेंस खाली थी। हादसा कैसे हुआ, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि फौरी तौर पर यह माना जा रहा है कि ड्राइवर के नशे में होने की वजह से ये हादसा हो सकता है। इंस्पेक्टर ने बताया कि इस हादसे में एक बच्चा और युवक घायल हुए हैं। अस्पताल में उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी है।
हादसे के बाद मौके पर इकट्ठा हुए लोगों ने बताया कि ये एबुलेंस हाईवे पर अनियंत्रित ढंग से चल रही थी। स्पीड भी काफी तेज थी। रास्ते में कई लोग इससे टकराने से बाल-बाल बचे। यह भी पता चला है कि इस हादसे से पहले एंबुलेंस ड्राइवर ने रास्ते में कई लोगों को टक्कर मारी थी। फिलहाल पुलिस ने क्षतिग्रस्त हुई तीनों बाइकों और एंबुलेंस को सड़क से हटवा दिया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
गाजियाबाद में चौबीस घंटाटे के भीतर दूसरा बड़ा सड़क हादसा रविवार देर रात हुआ। तेज रफ्तार अनियंत्रित एंबुलेंस ने तीन बाइकों को कुचल दिया। इस हादसे में एक महिला और दो युवकों की मौत हो गई। एक बच्चा समेत दो लोग घायल हैं। CM योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत की आत्मा शांति की कामना करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। CM ने घायलों का पर्याप्त इलाज कराने और डीएम-एसएसपी को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया है। यह हादसा विजयनगर थाना क्षेत्र में सिद्धार्थ विहार चौराहा स्थित डीपीएस के पास हुआ। इंस्पेक्टर योगेंद्र मलिक ने बताया, मृतकों की पहचान मनमोहन निवासी गांव मई, ऋषिपाल निवासी बिहारीपुरा और राजकुमारी निवासी पतवाड़ी बिसरख के रूप में हुई है। मनमोहन और ऋषिपाल एक बाइक पर थे। जबकि दूसरी बाइक पर राजकुमारी अपने बच्चे और पति संग दूसरी बाइक पर कहीं जा रही थी। इंस्पेक्टर ने बताया, प्रथम दृष्टया एंबुलेंस ड्राइवर नशे में लग रहा था। उसको कस्टडी में ले लिया गया है। अभी ड्राइवर से पूछताछ नहीं की गई है। हादसे के वक्त एंबुलेंस खाली थी। हादसा कैसे हुआ, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि फौरी तौर पर यह माना जा रहा है कि ड्राइवर के नशे में होने की वजह से ये हादसा हो सकता है। इंस्पेक्टर ने बताया कि इस हादसे में एक बच्चा और युवक घायल हुए हैं। अस्पताल में उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी है। हादसे के बाद मौके पर इकट्ठा हुए लोगों ने बताया कि ये एबुलेंस हाईवे पर अनियंत्रित ढंग से चल रही थी। स्पीड भी काफी तेज थी। रास्ते में कई लोग इससे टकराने से बाल-बाल बचे। यह भी पता चला है कि इस हादसे से पहले एंबुलेंस ड्राइवर ने रास्ते में कई लोगों को टक्कर मारी थी। फिलहाल पुलिस ने क्षतिग्रस्त हुई तीनों बाइकों और एंबुलेंस को सड़क से हटवा दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
वेडिंग सीजन और शादी के शुभ मुहूर्त के बीच चांदी के कीमतों में आसमानी उछाल आया है। 10 दिसम्बर को अचानक चांदी 1200 रुपये प्रति किलो महंगा हुई है। वहीं बात सोने की मूल्य की करें तो सोना भी धीमी रफ्तार से बढ़ रहा है। शनिवार को सोना 250 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हुआ। बता दें कि सोने चांदी का रेट प्रत्येक दिन उत्पाद शुल्क, मेकिंग चार्ज के कारण घटता बढ़ता रहता है।
22 कैरेट के अतिरिक्त बात यदि 24 कैरेट शुद्ध सोने की करें तो 10 दिसम्बर को 10 ग्राम सोने की 55,565 रुपये रही। वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि वेडिंग सीजन में सोने चांदी की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है लेकिन कीमतों में तेजी के बाद भी बाजार में खरीदारों की भीड़ है।
|
वेडिंग सीजन और शादी के शुभ मुहूर्त के बीच चांदी के कीमतों में आसमानी उछाल आया है। दस दिसम्बर को अचानक चांदी एक हज़ार दो सौ रुपयापये प्रति किलो महंगा हुई है। वहीं बात सोने की मूल्य की करें तो सोना भी धीमी रफ्तार से बढ़ रहा है। शनिवार को सोना दो सौ पचास रुपयापये प्रति दस ग्राम तक महंगा हुआ। बता दें कि सोने चांदी का रेट प्रत्येक दिन उत्पाद शुल्क, मेकिंग चार्ज के कारण घटता बढ़ता रहता है। बाईस कैरेट के अतिरिक्त बात यदि चौबीस कैरेट शुद्ध सोने की करें तो दस दिसम्बर को दस ग्राम सोने की पचपन,पाँच सौ पैंसठ रुपयापये रही। वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि वेडिंग सीजन में सोने चांदी की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है लेकिन कीमतों में तेजी के बाद भी बाजार में खरीदारों की भीड़ है।
|
आस्रव पदार्थ (ढाल : २) : टिप्पणी १७
उदय, क्षयोपशम, अगम और क्षय में उत्पन्न जीवम्पन्दन भाव लेश्या है ।" दिगम्बर आचार्यों ने भी छः लेश्याओं को उदयभाव कहा है । इस सम्बन्ध में सर्वार्थसिद्धि में निम्न समाधान मिलता है :
"उशान्तकपाय, जीणकपाय और सयोगोकेवली गुणस्थान में शुक्ललेश्या है। वहा पर पाय का उदय नहीं फिर लेश्याएँ श्रदयिक कं ठहरती है ?"
"जो योगनमुनि कपाय के उदय से अनुरंजित है वही नंश्या है। इस प्रकार पूर्वभाजन की अपेक्षा से जानकाय और गुणस्थानों में भी लेश्या को आंदयिक कहा है । अयोगीकेवली के योगप्रवृत्ति नहीं होती इसलिए वे लेश्यारहित हैं ऐसा विश्वय होता है।"
गोम्बटवार में भी कहा है - "अयोगिस्थानमनु" (जी० का०ः५३२) - प्रयोगी स्थान नहीं होती। जिन गुणस्थानों में कपाय नष्ट हो चुकी हैं उनमें लेश्या होने का कथन भुतपूर्वगति न्याय से है। अथवा योगप्रवृत्ति मुख्य होने से वहाँ लंक्या भी हो गयी है ।
अव्यवसाय के सम्बन्ध में निम्न बातें जानने जैगी है :
श्रीकुन्दकुन्दाचार्य ने बुद्धि, व्यवसाय, श्रव्यवसान, मति, विज्ञान, चित्त, भाव और परिणाम सबको हार्थक कहा है। इनकी व्याख्या क्रमशः इस प्रकार हैबोधनं त्रुद्धिः व्यवसानं व्यवसायः अव्यवसानं अध्ययनायः मतनं पयांलोचनं मतिश्च, विज्ञायते अनदेति विज्ञानं, चितनं चित्तं, भवनं भावः, परिणमनं परिणामः ६ ।
१-- गोम्मटसार : जीवकाण्ड : ५०६ः
वगणोदयसंपादिदसरीरवण्णो दु दव्वदो लेस्सा । मोहुदखओवस मोवसमखयजजीवफंदणंभावो ॥
(ख) गोम्मटसारः जीवकाण्ड ५५५
भावादी उल्लेस्सा ओइयिया होति अप्पबहुगं तु ।
३ - तत्त्वा० २.६ सर्वार्थसिद्धि
४ - गोम्मटसार : जीवकागड : ५३३
ढकसाये लेस्सा उच्चदि सा भृदपुव्वर्गादिणाया । अहवा जोगपउत्ती मुक्खोत्ति तहि हमे लेस्सा । ५- समयसारः बंध अधिकार : २७१
बुद्धी चवसाओविं य अवार्ण मई य विज्ञणाणं । एकट्टमेव सध्वं चित्तं भावो य परिणामी ॥ ई - वही : २७१ की जयसेनवृत्ति
|
आस्रव पदार्थ : टिप्पणी सत्रह उदय, क्षयोपशम, अगम और क्षय में उत्पन्न जीवम्पन्दन भाव लेश्या है ।" दिगम्बर आचार्यों ने भी छः लेश्याओं को उदयभाव कहा है । इस सम्बन्ध में सर्वार्थसिद्धि में निम्न समाधान मिलता है : "उशान्तकपाय, जीणकपाय और सयोगोकेवली गुणस्थान में शुक्ललेश्या है। वहा पर पाय का उदय नहीं फिर लेश्याएँ श्रदयिक कं ठहरती है ?" "जो योगनमुनि कपाय के उदय से अनुरंजित है वही नंश्या है। इस प्रकार पूर्वभाजन की अपेक्षा से जानकाय और गुणस्थानों में भी लेश्या को आंदयिक कहा है । अयोगीकेवली के योगप्रवृत्ति नहीं होती इसलिए वे लेश्यारहित हैं ऐसा विश्वय होता है।" गोम्बटवार में भी कहा है - "अयोगिस्थानमनु" - प्रयोगी स्थान नहीं होती। जिन गुणस्थानों में कपाय नष्ट हो चुकी हैं उनमें लेश्या होने का कथन भुतपूर्वगति न्याय से है। अथवा योगप्रवृत्ति मुख्य होने से वहाँ लंक्या भी हो गयी है । अव्यवसाय के सम्बन्ध में निम्न बातें जानने जैगी है : श्रीकुन्दकुन्दाचार्य ने बुद्धि, व्यवसाय, श्रव्यवसान, मति, विज्ञान, चित्त, भाव और परिणाम सबको हार्थक कहा है। इनकी व्याख्या क्रमशः इस प्रकार हैबोधनं त्रुद्धिः व्यवसानं व्यवसायः अव्यवसानं अध्ययनायः मतनं पयांलोचनं मतिश्च, विज्ञायते अनदेति विज्ञानं, चितनं चित्तं, भवनं भावः, परिणमनं परिणामः छः । एक-- गोम्मटसार : जीवकाण्ड : पाँच सौ छःः वगणोदयसंपादिदसरीरवण्णो दु दव्वदो लेस्सा । मोहुदखओवस मोवसमखयजजीवफंदणंभावो ॥ गोम्मटसारः जीवकाण्ड पाँच सौ पचपन भावादी उल्लेस्सा ओइयिया होति अप्पबहुगं तु । तीन - तत्त्वाशून्य दो.छः सर्वार्थसिद्धि चार - गोम्मटसार : जीवकागड : पाँच सौ तैंतीस ढकसाये लेस्सा उच्चदि सा भृदपुव्वर्गादिणाया । अहवा जोगपउत्ती मुक्खोत्ति तहि हमे लेस्सा । पाँच- समयसारः बंध अधिकार : दो सौ इकहत्तर बुद्धी चवसाओविं य अवार्ण मई य विज्ञणाणं । एकट्टमेव सध्वं चित्तं भावो य परिणामी ॥ ई - वही : दो सौ इकहत्तर की जयसेनवृत्ति
|
Haridwar Crime गुरुग्राम हरियाणा से तमंचे की नोक पर लूटी गई बाइक पर सवार होकर कांवड़ मेले में पहुंचे एक बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की सूचना पर हरियाणा पुलिस की एक टीम हरिद्वार के लिए रवाना हो गई है। बाइक पर नम्बर प्लेट नहीं थी इसलिए चेसिस नम्बर और मालिक के बारे में जानकारी ली।
जागरण संवाददाता, हरिद्वारः Haridwar: गुरुग्राम हरियाणा से तमंचे की नोक पर लूटी गई बाइक पर सवार होकर कांवड़ मेले में पहुंचे एक बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से एक चाकू भी बरामद हुआ है। आरोपित को कोर्ट में पेश किया जा रहा है, गिरफ्तारी की सूचना पर हरियाणा पुलिस की एक टीम हरिद्वार के लिए रवाना हो गई है।
कांवड़ मेले में पैदल यात्रियों के साथ-साथ दुपहिया और चौपहिया वाहनों में सवार कांवड़ यात्रियों की संख्या भी हर दिन बढ़ रही है। पुलिस ने बिना साइलेंसर वाली बाइक लेकर आने वालों पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया हुआ है। एक टीम ने अल सुबह ऋषिकुल पुल के समीप चेकिंग करते हुए एक युवक को रोककर पूछताछ की।
बाइक पर नम्बर प्लेट नहीं थी, इसलिए चेसिस नम्बर और मालिक के बारे में जानकारी ली। युवक कोई जवाब नहीं दे पाया। तलाशी लेने पर उससे चाकू भी बरामद हुआ। तब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। तब लूट की कहानी सामने आई।
आरोपित ने अपना नाम आयुष निवासी गली नंबर सी-3 थाना सेक्टर-9 गुरूग्राम हरियाणा बताया। उसका कहना था कि वह गंगा जल लेने हरिद्वार आया है। हालांकि पुलिस ये मान रही है कि वह कांवड़ यात्रियों की भीड़ में भी किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने वाला था। सीओ सिटी जूही मनराल ने बताया कि बीते 26 जून की रात दो बदमाशों ने द्वारिका एक्सप्रेस रोड गुरूग्राम में फ्लाई ओवर से गन प्वाइट पर ये बाइक लूटी थी।
इस सम्बन्ध में थाना राजेन्द्र पार्क गुरूग्राम हरियाणा में मुकदमा भी पंजीकृत है। बिना साइलेंसर मोटरसाइकिल चला रहे व्यक्ति की फोटो पीड़ित को भेजकर तस्दीक भी कराई गई है। आरोपित के खिलाफ आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया जा रहा है।
|
Haridwar Crime गुरुग्राम हरियाणा से तमंचे की नोक पर लूटी गई बाइक पर सवार होकर कांवड़ मेले में पहुंचे एक बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की सूचना पर हरियाणा पुलिस की एक टीम हरिद्वार के लिए रवाना हो गई है। बाइक पर नम्बर प्लेट नहीं थी इसलिए चेसिस नम्बर और मालिक के बारे में जानकारी ली। जागरण संवाददाता, हरिद्वारः Haridwar: गुरुग्राम हरियाणा से तमंचे की नोक पर लूटी गई बाइक पर सवार होकर कांवड़ मेले में पहुंचे एक बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से एक चाकू भी बरामद हुआ है। आरोपित को कोर्ट में पेश किया जा रहा है, गिरफ्तारी की सूचना पर हरियाणा पुलिस की एक टीम हरिद्वार के लिए रवाना हो गई है। कांवड़ मेले में पैदल यात्रियों के साथ-साथ दुपहिया और चौपहिया वाहनों में सवार कांवड़ यात्रियों की संख्या भी हर दिन बढ़ रही है। पुलिस ने बिना साइलेंसर वाली बाइक लेकर आने वालों पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया हुआ है। एक टीम ने अल सुबह ऋषिकुल पुल के समीप चेकिंग करते हुए एक युवक को रोककर पूछताछ की। बाइक पर नम्बर प्लेट नहीं थी, इसलिए चेसिस नम्बर और मालिक के बारे में जानकारी ली। युवक कोई जवाब नहीं दे पाया। तलाशी लेने पर उससे चाकू भी बरामद हुआ। तब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। तब लूट की कहानी सामने आई। आरोपित ने अपना नाम आयुष निवासी गली नंबर सी-तीन थाना सेक्टर-नौ गुरूग्राम हरियाणा बताया। उसका कहना था कि वह गंगा जल लेने हरिद्वार आया है। हालांकि पुलिस ये मान रही है कि वह कांवड़ यात्रियों की भीड़ में भी किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने वाला था। सीओ सिटी जूही मनराल ने बताया कि बीते छब्बीस जून की रात दो बदमाशों ने द्वारिका एक्सप्रेस रोड गुरूग्राम में फ्लाई ओवर से गन प्वाइट पर ये बाइक लूटी थी। इस सम्बन्ध में थाना राजेन्द्र पार्क गुरूग्राम हरियाणा में मुकदमा भी पंजीकृत है। बिना साइलेंसर मोटरसाइकिल चला रहे व्यक्ति की फोटो पीड़ित को भेजकर तस्दीक भी कराई गई है। आरोपित के खिलाफ आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया जा रहा है।
|
यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के विमान में आई अचानक खराबी से हड़कंप मच गया। हालांकि, पाइलट की सूझबूझ से विमान को सुरक्षित उतार लिया गया।
डिप्टी सीएम केशव आजमगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। उनके विमान से उड़ान भरी ही थी कि कुछ तकनीकी दिक्कतें आने लगी। जिस पर पाइलेट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित उतार लिया।
घटना से अफसरों में हड़कंप मच गया। हालांकि, सुरक्षित लैंडिंग की जानकारी मिलने पर उन्होंने राहत की सांस ली।
|
यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के विमान में आई अचानक खराबी से हड़कंप मच गया। हालांकि, पाइलट की सूझबूझ से विमान को सुरक्षित उतार लिया गया। डिप्टी सीएम केशव आजमगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। उनके विमान से उड़ान भरी ही थी कि कुछ तकनीकी दिक्कतें आने लगी। जिस पर पाइलेट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित उतार लिया। घटना से अफसरों में हड़कंप मच गया। हालांकि, सुरक्षित लैंडिंग की जानकारी मिलने पर उन्होंने राहत की सांस ली।
|
हावड़ा-पुरी धौली एक्सप्रेस का एक डिब्बा मंगलवार सुबह पश्चिम बंगाल के पांशकुड़ा स्टेशन के पास पटरी से उतर गया। दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता संजय घोष ने बताया कि दुर्घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। यह हादसा दक्षिण पूर्वी रेलवे के हावड़ा-खड़गपुर खंड पर पड़ने वाले भोगपुर एवं पांशकुड़ा स्टेशनों के बीच हुआ।
उन्होंने बताया कि हावड़ा से पुरी जाने के दौरान धौली एक्सप्रेस का इंजन से छठा डिब्बा चेयर कार (बी-3) का पहिया पटरी से उतर गया। दुर्घटना राहत ट्रेन और दक्षिण पूर्व रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। घटनास्थल हावड़ा से 67 किलोमीटर दूर है।
|
हावड़ा-पुरी धौली एक्सप्रेस का एक डिब्बा मंगलवार सुबह पश्चिम बंगाल के पांशकुड़ा स्टेशन के पास पटरी से उतर गया। दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता संजय घोष ने बताया कि दुर्घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है। यह हादसा दक्षिण पूर्वी रेलवे के हावड़ा-खड़गपुर खंड पर पड़ने वाले भोगपुर एवं पांशकुड़ा स्टेशनों के बीच हुआ। उन्होंने बताया कि हावड़ा से पुरी जाने के दौरान धौली एक्सप्रेस का इंजन से छठा डिब्बा चेयर कार का पहिया पटरी से उतर गया। दुर्घटना राहत ट्रेन और दक्षिण पूर्व रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। घटनास्थल हावड़ा से सरसठ किलोग्राममीटर दूर है।
|
उस लाश की हालत बहुत खराब थी। पूरा शरीर फूला हुआ और चेहरा डरावना। अगर शरीर पर कपड़े और गहने ना होते, तो पहचानना मुश्किल हो जाता कि यह रानी मां हैं। रात में अंतिम संस्कार का रिवाज नहीं है। इसलिए तुरंत ही लाश को सुबह तक ठीक रखने का इंतजाम किया गया। अरुंधती एक कोने में बैठी कांपती रही। एक शब्द भी नहीं बोली।
"हमें तो आज सुबह ही एक्सीडेंट का पता चला। कल पूरी शाम मैं रानी मां और बंगले का नंबर ट्राई करता रहा, पर फोन लगा ही नहीं," मनोहर ने कहा, तो शांतनु ने उसे थम्स अप का इशारा दिया। उनके बीच हुए इशारों को मृणाल के अलावा कोई और नहीं देख पाया।
"ये नानी मां नहीं हैं!" अब तक चुप बैठी अरुंधती चिल्ला पड़ी। स्वर्णा ने उसे संभालने की कोशिश की, तो अरुंधती ने उसे भी झटक दिया।
"लाश के डीएनए टेस्ट का रिजल्ट थोड़ी देर पहले ही आया है। रिजल्ट पॉजिटिव है। ये रानी मां ही हैं," पास ही खड़े पुलिस इंस्पेक्टर ने जवाब दिया।
अरुंधती का चेहरा सफेद पड़ गया, जैसे किसी ने उसके शरीर से पूरा खून निचोड़ लिया हो। शांतनु उसकी पीठ सहलाने लगा। स्वर्णा को आंखें पोंछता देख, यह समझना कठिन लगा कि वह रो रही है या रोने का अभिनय कर रही है। रवि और मनोहर शांत खड़े थे। थोड़ी देर बाद वकील साहब से बात करके पुलिसवाले चले गए। मृणाल कमरे के एक कोने में बैठा यह सब कुछ देखता रहा। वह चाह कर भी अरुंधती को अपनी बांहों का सहारा नहीं दे पाएगा, यह बात उसे कचोटती रही। जब उसके लिए वहां बैठना कठिन हो गया, तो वह कमरे से बाहर आ गया। अभी बाहर आए हुए उसे थोड़ा ही समय हुआ कि अंदर से लड़ने की तेज आवाजें आने लगीं। अरुंधती का ध्यान आते ही वह अंदर भागा।
मृणाल को अंदर का नजारा बदला हुआ लगा। इतना तो वह समझ गया कि वकील साहब की किसी बात पर झगड़ा हुआ है। स्वर्णा लगातार चीखती जा रही थी।
"क्या बात हो गयी?" मृणाल ने पूछा। उसकी नजरें अरुंधती से पलभर को मिलीं।
"रानी मां ने अपनी पूरी प्रॉपर्टी अपनी दोनों नातिनों के नाम कर दी है। एक बहन की मृत्यु हो जाने पर दूसरी बहन पूरी प्रॉपर्टी की मालकिन हो जाएगी। और अगर दोनों बहनों की मौत हो जाए, तो प्रॉपर्टी ट्रस्ट में चली जाएगी। किसी भी हालत में प्रॉपर्टी स्वर्णा को नहीं मिलेगी। लेकिन उसे हमेशा की तरह हर महीने जेबखर्च मिलता रहेगा। लेकिन लगता है यह बात स्वर्णा को पसंद नहीं आयी," वकील साहब की आवाज में तल्खी लगी।
"तुम कौन सी उनकी बेटी बन पायी?" रवि सक्सेना ने तंज कसा।
"स्वर्णा!" रवि के चीखने का स्वर्णा पर कोई असर नहीं हुआ।
"वकील साहब, ये आप क्या कह रहे हैं?" रवि चौंका।
"जी-जी-जी," रवि का मिमियाना सुन कर मृणाल को उससे घृणा हो आयी।
"आप सब चुप हो जाइए! अरुंधती का तो सोचिए! घर में रानी मां की लाश पड़ी है और आप लोग पैसों को ले कर लड़ने लगे। कम से कम अंतिम संस्कार तक तो रुक जाते। छी-छी-छी!" अरुंधती को अपनी बांहों में बांधता हुआ शांतनु बोला, तो वकील साहब का ध्यान उसकी तरफ गया। बोले, "तुम ठीक कह रहे हो! आई अपोलोजाइस। मुझे बात आज नहीं उठानी चाहिए थी। अरुंधती, माइ चाइल्ड, यू आर लकी, जो तुम्हें शांतनु जैसा साथी मिला। इन फैक्ट रानी मां भी तुम दोनों की शादी जल्द से जल्द कर देना चाहती थीं। इसे तुम दोनों उनकी आखिरी ख्वाहिश समझ लो!" इतना कह कर वकील साहब ने शांतनु को कुछ इशारा किया।
"नानी मां वाकई ऐसा चाहती थीं?" अरुंधती ने धीमी आवाज में पूछा, तो वकील साहब ने हां में सिर हिला दिया। इसके बाद अरुंधती ने उनसे कुछ नहीं पूछा। बस एक बार आंखें उठा कर मृणाल की तरफ देखा। मृणाल के मन में आया कि उसी समय अरुंधती को अपनी बांहों की डोली में उठा कर वहां से ले कर चला जाए। अरुंधती की छलछलायी आंखों में मृणाल को अपना चेहरा नजर आया।
बड़ी मुश्किल से मृणाल ने अपनी नजर अरुंधती पर से हटायी और बोला, "अगर यहां चाहतों का हिसाब-किताब चल रहा है, तो कोई शांतनु बाबू से भी तो उनकी चाहत के बारे में पूछे!" फिर बड़े अधिकार से सोफे पर अधलेटा हो कर सिगरेट जलाने लगा।
"मैं और स्वर्णा मां का क्या, तुम..." इससे पहले कि शांतनु अपनी बात पूरी करता, उसके गाल पर स्वर्णा ने झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया। मृणाल को छोड़ कर सभी लोग अपनी जगह पर खड़े हो गए। लेकिन मृणाल अभी भी अधलेटा सिगरेट फूंकता रहा, जैसे सामने कोई फिल्म चल रही हो। सब कुछ नाटकीय अंदाज में घटने लगा।
"स्वर्णा चुप हो जाओ!" शांतनु बोला।
"लेकिन अरुणिमा को सब पता चल गया!" अरुंधती ने धीरे से कहा।
"वह एक एक्सीडेंट था! सुन लिया आप सबने, वह एक एक्सीडेंट था!" शांतनु बोल उठा।
"वह एक्सीडेंट नहीं था!" स्वर्णा चीखी।
"स्वर्णा, प्लीज चुप हो जाओ!" शांतनु गिड़गिड़ाया।
"तो सच बोलो स्वर्णा!" मृणाल ने कहा।
"लेकिन आपने अरुणिमा और शांतनु की अफेअर की बात क्यों उड़ायी?" मृणाल ने ही पूछा।
अचानक से कमरे में अंधेरा हो गया। पर कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला। तभी खिड़की का शीशा टूटने की तीखी आवाज हुई। सभी ने चांद की रोशनी में एक साए को अपनी तरफ बढ़ते देखा। दूधिया सफेद। अंधेरे में तो वह आकृति पहले हल्की परछाईं की तरह दिखी थी, पर अचानक बिजली चमकी, तो सभी ने देखा सफेद लबादा जैसा पहने सवा 5 फीट लंबी और थोड़ी चौड़ी सी इंसानी आकृति दरवाजे के ठीक सामने खड़ी थी।
"वह कौन है?"शांतनु ने कांपती आवाज में पूछा।
"देखो, देखो वह आ गयी। अब वह हम दोनों को नहीं छोड़ेगी!" इस खामोशी में स्वर्णा की हंसी डरावनी लगी।
"उसके पैर नहीं हैं!" रवि फुसफुसाया। यकायक जंगल में सियार रोने लगे, तो वहां मौजूद सभी लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। अचानक साया पास आता रहा और वे सभी पीछे हटते गए। अचानक वह गायब हो गया।
"आपने उसके पैर देखे थे?" मृणाल ने रवि से पूछा।
"और चुड़ैलों के!?
"उनके होते हैं, पर पीछे की ओर मुड़े होते हैं!" शांतनु ने जवाब दिया।
"नहीं! अब ऐसा नहीं है। अब तो चुड़ैलों ने सीधे पैर से चल कर लात मारना सीख लिया है!" मृणाल अगर अरुंधती को रोकता नहीं, तो शांतनु को दूसरा थप्पड़ पड़ना तय था। ठक-ठक-ठक। ऐसा लगा जैसे किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी हो। सब एक दूसरे को यों देखने लगे जैसे दरवाजा खोलने को कह रहे हो। एक-दो लोगों ने घर के नौकरों को आवाज भी लगायी। पर कोई नहीं आया। दरवाजे पर दस्तक तेज, और तेज, और तेज होती गई। मृणाल ने खिड़की से झांका तो, सामने वही सफेद साया खड़ा पाया। एकदम दरवाजे के पास। मृणाल ने सबको शांत रहने का इशारा किया और धीरे-धीरे दरवाजा खोला। चर्र-चर्र-चर्र। वह साया हवा के साथ चल कर अंदर आ गया। किसी के मुंह से एक बोल नहीं फूटा। मृणाल भरसक कोशिश कर देखने लगा कि इस साए के पैर हैं भी की नहीं। और अगर हैं, तो सीधे हैं या उल्टे। अचानक से जिस कमरे में रानी मां की लाश थी, वहां से अजीब-अजीब आवाजें आने लगीं। सभी का ध्यान थोड़ी देर के लिए उधर गया। और फिर जब वे पलटे, तो साया गायब था।
पैरों की आहटें शांतनु के पास आ कर रुक गयीं। तभी कोई बोला, "पिक अ बू!" और कमरे में रोशनी फैल गयी।
अरुणिमा की मौत का सच इस तरह से सामने आएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। शांतनु और स्वर्णा के गुनाह कबूल करने के बावजूद कौन था वह साया, जो सबको डराने आया था। किसने शांतनु के कान में आकर कहा, पिक अ बू।
|
उस लाश की हालत बहुत खराब थी। पूरा शरीर फूला हुआ और चेहरा डरावना। अगर शरीर पर कपड़े और गहने ना होते, तो पहचानना मुश्किल हो जाता कि यह रानी मां हैं। रात में अंतिम संस्कार का रिवाज नहीं है। इसलिए तुरंत ही लाश को सुबह तक ठीक रखने का इंतजाम किया गया। अरुंधती एक कोने में बैठी कांपती रही। एक शब्द भी नहीं बोली। "हमें तो आज सुबह ही एक्सीडेंट का पता चला। कल पूरी शाम मैं रानी मां और बंगले का नंबर ट्राई करता रहा, पर फोन लगा ही नहीं," मनोहर ने कहा, तो शांतनु ने उसे थम्स अप का इशारा दिया। उनके बीच हुए इशारों को मृणाल के अलावा कोई और नहीं देख पाया। "ये नानी मां नहीं हैं!" अब तक चुप बैठी अरुंधती चिल्ला पड़ी। स्वर्णा ने उसे संभालने की कोशिश की, तो अरुंधती ने उसे भी झटक दिया। "लाश के डीएनए टेस्ट का रिजल्ट थोड़ी देर पहले ही आया है। रिजल्ट पॉजिटिव है। ये रानी मां ही हैं," पास ही खड़े पुलिस इंस्पेक्टर ने जवाब दिया। अरुंधती का चेहरा सफेद पड़ गया, जैसे किसी ने उसके शरीर से पूरा खून निचोड़ लिया हो। शांतनु उसकी पीठ सहलाने लगा। स्वर्णा को आंखें पोंछता देख, यह समझना कठिन लगा कि वह रो रही है या रोने का अभिनय कर रही है। रवि और मनोहर शांत खड़े थे। थोड़ी देर बाद वकील साहब से बात करके पुलिसवाले चले गए। मृणाल कमरे के एक कोने में बैठा यह सब कुछ देखता रहा। वह चाह कर भी अरुंधती को अपनी बांहों का सहारा नहीं दे पाएगा, यह बात उसे कचोटती रही। जब उसके लिए वहां बैठना कठिन हो गया, तो वह कमरे से बाहर आ गया। अभी बाहर आए हुए उसे थोड़ा ही समय हुआ कि अंदर से लड़ने की तेज आवाजें आने लगीं। अरुंधती का ध्यान आते ही वह अंदर भागा। मृणाल को अंदर का नजारा बदला हुआ लगा। इतना तो वह समझ गया कि वकील साहब की किसी बात पर झगड़ा हुआ है। स्वर्णा लगातार चीखती जा रही थी। "क्या बात हो गयी?" मृणाल ने पूछा। उसकी नजरें अरुंधती से पलभर को मिलीं। "रानी मां ने अपनी पूरी प्रॉपर्टी अपनी दोनों नातिनों के नाम कर दी है। एक बहन की मृत्यु हो जाने पर दूसरी बहन पूरी प्रॉपर्टी की मालकिन हो जाएगी। और अगर दोनों बहनों की मौत हो जाए, तो प्रॉपर्टी ट्रस्ट में चली जाएगी। किसी भी हालत में प्रॉपर्टी स्वर्णा को नहीं मिलेगी। लेकिन उसे हमेशा की तरह हर महीने जेबखर्च मिलता रहेगा। लेकिन लगता है यह बात स्वर्णा को पसंद नहीं आयी," वकील साहब की आवाज में तल्खी लगी। "तुम कौन सी उनकी बेटी बन पायी?" रवि सक्सेना ने तंज कसा। "स्वर्णा!" रवि के चीखने का स्वर्णा पर कोई असर नहीं हुआ। "वकील साहब, ये आप क्या कह रहे हैं?" रवि चौंका। "जी-जी-जी," रवि का मिमियाना सुन कर मृणाल को उससे घृणा हो आयी। "आप सब चुप हो जाइए! अरुंधती का तो सोचिए! घर में रानी मां की लाश पड़ी है और आप लोग पैसों को ले कर लड़ने लगे। कम से कम अंतिम संस्कार तक तो रुक जाते। छी-छी-छी!" अरुंधती को अपनी बांहों में बांधता हुआ शांतनु बोला, तो वकील साहब का ध्यान उसकी तरफ गया। बोले, "तुम ठीक कह रहे हो! आई अपोलोजाइस। मुझे बात आज नहीं उठानी चाहिए थी। अरुंधती, माइ चाइल्ड, यू आर लकी, जो तुम्हें शांतनु जैसा साथी मिला। इन फैक्ट रानी मां भी तुम दोनों की शादी जल्द से जल्द कर देना चाहती थीं। इसे तुम दोनों उनकी आखिरी ख्वाहिश समझ लो!" इतना कह कर वकील साहब ने शांतनु को कुछ इशारा किया। "नानी मां वाकई ऐसा चाहती थीं?" अरुंधती ने धीमी आवाज में पूछा, तो वकील साहब ने हां में सिर हिला दिया। इसके बाद अरुंधती ने उनसे कुछ नहीं पूछा। बस एक बार आंखें उठा कर मृणाल की तरफ देखा। मृणाल के मन में आया कि उसी समय अरुंधती को अपनी बांहों की डोली में उठा कर वहां से ले कर चला जाए। अरुंधती की छलछलायी आंखों में मृणाल को अपना चेहरा नजर आया। बड़ी मुश्किल से मृणाल ने अपनी नजर अरुंधती पर से हटायी और बोला, "अगर यहां चाहतों का हिसाब-किताब चल रहा है, तो कोई शांतनु बाबू से भी तो उनकी चाहत के बारे में पूछे!" फिर बड़े अधिकार से सोफे पर अधलेटा हो कर सिगरेट जलाने लगा। "मैं और स्वर्णा मां का क्या, तुम..." इससे पहले कि शांतनु अपनी बात पूरी करता, उसके गाल पर स्वर्णा ने झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया। मृणाल को छोड़ कर सभी लोग अपनी जगह पर खड़े हो गए। लेकिन मृणाल अभी भी अधलेटा सिगरेट फूंकता रहा, जैसे सामने कोई फिल्म चल रही हो। सब कुछ नाटकीय अंदाज में घटने लगा। "स्वर्णा चुप हो जाओ!" शांतनु बोला। "लेकिन अरुणिमा को सब पता चल गया!" अरुंधती ने धीरे से कहा। "वह एक एक्सीडेंट था! सुन लिया आप सबने, वह एक एक्सीडेंट था!" शांतनु बोल उठा। "वह एक्सीडेंट नहीं था!" स्वर्णा चीखी। "स्वर्णा, प्लीज चुप हो जाओ!" शांतनु गिड़गिड़ाया। "तो सच बोलो स्वर्णा!" मृणाल ने कहा। "लेकिन आपने अरुणिमा और शांतनु की अफेअर की बात क्यों उड़ायी?" मृणाल ने ही पूछा। अचानक से कमरे में अंधेरा हो गया। पर कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला। तभी खिड़की का शीशा टूटने की तीखी आवाज हुई। सभी ने चांद की रोशनी में एक साए को अपनी तरफ बढ़ते देखा। दूधिया सफेद। अंधेरे में तो वह आकृति पहले हल्की परछाईं की तरह दिखी थी, पर अचानक बिजली चमकी, तो सभी ने देखा सफेद लबादा जैसा पहने सवा पाँच फीट लंबी और थोड़ी चौड़ी सी इंसानी आकृति दरवाजे के ठीक सामने खड़ी थी। "वह कौन है?"शांतनु ने कांपती आवाज में पूछा। "देखो, देखो वह आ गयी। अब वह हम दोनों को नहीं छोड़ेगी!" इस खामोशी में स्वर्णा की हंसी डरावनी लगी। "उसके पैर नहीं हैं!" रवि फुसफुसाया। यकायक जंगल में सियार रोने लगे, तो वहां मौजूद सभी लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। अचानक साया पास आता रहा और वे सभी पीछे हटते गए। अचानक वह गायब हो गया। "आपने उसके पैर देखे थे?" मृणाल ने रवि से पूछा। "और चुड़ैलों के!? "उनके होते हैं, पर पीछे की ओर मुड़े होते हैं!" शांतनु ने जवाब दिया। "नहीं! अब ऐसा नहीं है। अब तो चुड़ैलों ने सीधे पैर से चल कर लात मारना सीख लिया है!" मृणाल अगर अरुंधती को रोकता नहीं, तो शांतनु को दूसरा थप्पड़ पड़ना तय था। ठक-ठक-ठक। ऐसा लगा जैसे किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी हो। सब एक दूसरे को यों देखने लगे जैसे दरवाजा खोलने को कह रहे हो। एक-दो लोगों ने घर के नौकरों को आवाज भी लगायी। पर कोई नहीं आया। दरवाजे पर दस्तक तेज, और तेज, और तेज होती गई। मृणाल ने खिड़की से झांका तो, सामने वही सफेद साया खड़ा पाया। एकदम दरवाजे के पास। मृणाल ने सबको शांत रहने का इशारा किया और धीरे-धीरे दरवाजा खोला। चर्र-चर्र-चर्र। वह साया हवा के साथ चल कर अंदर आ गया। किसी के मुंह से एक बोल नहीं फूटा। मृणाल भरसक कोशिश कर देखने लगा कि इस साए के पैर हैं भी की नहीं। और अगर हैं, तो सीधे हैं या उल्टे। अचानक से जिस कमरे में रानी मां की लाश थी, वहां से अजीब-अजीब आवाजें आने लगीं। सभी का ध्यान थोड़ी देर के लिए उधर गया। और फिर जब वे पलटे, तो साया गायब था। पैरों की आहटें शांतनु के पास आ कर रुक गयीं। तभी कोई बोला, "पिक अ बू!" और कमरे में रोशनी फैल गयी। अरुणिमा की मौत का सच इस तरह से सामने आएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। शांतनु और स्वर्णा के गुनाह कबूल करने के बावजूद कौन था वह साया, जो सबको डराने आया था। किसने शांतनु के कान में आकर कहा, पिक अ बू।
|
Platelets Booster: इन दिनों हर तरफ डेंगू (Dengue Treatment) का भयंकर कहर देखने को मिल रहा है. अस्पतालों में भीषण मारामारी देखने को मिल रही है. एक मरीज ठीक नहीं हो पा रहा है और दूसरा मरीज रेडी है उसकी जगह लेने के लिए. आपको बता दें कि डेंगू से संक्रमित मरीजों की प्लेटलेट्स (Dengue Platelets Recovering Home Remedies) लगातार घटना शुरू हो जाती है और समय पर इनकी रिकवरी न की जाए, तो मरीज की जान जा सकती है. बता दें कि ऐसे में सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी है. पपीते के पत्ते प्लेटलेट्स बढ़ाने में काफी कारगर होते हैं, इसीलिए डेंगू से बचाव के लिए इसके सेवन की सलाह दी जाती है. ऐसे में इसका जूस बनाकर पीना मरीज के लिए काफी अच्छा माना जाता है.
डेंगू फैलाने में मुख्य भूमिका मच्छरों की होती है. मादा मच्छर के काटने से ही व्यक्ति डेंगू का शिकार हो जाता है. खास बात यह है कि डेंगू वाले मच्छर ज्यादातर साफ-सुथरी जगह पर पाए जाते हैं. डेंगू टाइप-1, टाइप-2, टाइप-3, टाइप-4 के होते हैं. इसे आम भाषा में हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं. इसके सबसे ज्यादा मामले अक्टूबर-नवंबर महीने में ही सामने आते हैं. ऐसे में सावधानियां बरतना और खान-पान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. पपीते के पत्तों का जूस, डेंगू के केस में रामबाण माना जाता है. तो चलिए जानते हैं कि पपीते के पत्तों का जूस कैसे तैयार किया जाता है.
1- सबसे पहले पपीते के पत्ते को अच्छे से धोकर साफ सुथरी प्लेट में रख लें.
2- इन पत्तों को छोटे छोटे टुकड़ों में डिवाइड कर लें और डंठल फेंक दें.
3- इसके बाद इन सभी पत्तों को काली मिर्च, तुलसी पत्ते, पानी के साथ अच्छे से ग्राइंड कर लें.
4- ये बिल्कुल चटनी की तरह बन जाएगा.
5- फिर इस मसाले को निकालकर, कॉटन के रूमाल में रख कर निचोड़ लें इस तरह से आपका जूस तैयार हो जाएगा.
6- अब आप इसका सेवन करें, डेंगू से बचाव या फिर रिकवरी में काफी मदद मिलेगी.
(नोटः ये जानकारी एक सामान्य सुझाव है. इसे किसी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें. आप इसके लिए अपने डॉक्टरों से सलाह जरूर लें. )
|
Platelets Booster: इन दिनों हर तरफ डेंगू का भयंकर कहर देखने को मिल रहा है. अस्पतालों में भीषण मारामारी देखने को मिल रही है. एक मरीज ठीक नहीं हो पा रहा है और दूसरा मरीज रेडी है उसकी जगह लेने के लिए. आपको बता दें कि डेंगू से संक्रमित मरीजों की प्लेटलेट्स लगातार घटना शुरू हो जाती है और समय पर इनकी रिकवरी न की जाए, तो मरीज की जान जा सकती है. बता दें कि ऐसे में सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी है. पपीते के पत्ते प्लेटलेट्स बढ़ाने में काफी कारगर होते हैं, इसीलिए डेंगू से बचाव के लिए इसके सेवन की सलाह दी जाती है. ऐसे में इसका जूस बनाकर पीना मरीज के लिए काफी अच्छा माना जाता है. डेंगू फैलाने में मुख्य भूमिका मच्छरों की होती है. मादा मच्छर के काटने से ही व्यक्ति डेंगू का शिकार हो जाता है. खास बात यह है कि डेंगू वाले मच्छर ज्यादातर साफ-सुथरी जगह पर पाए जाते हैं. डेंगू टाइप-एक, टाइप-दो, टाइप-तीन, टाइप-चार के होते हैं. इसे आम भाषा में हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं. इसके सबसे ज्यादा मामले अक्टूबर-नवंबर महीने में ही सामने आते हैं. ऐसे में सावधानियां बरतना और खान-पान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. पपीते के पत्तों का जूस, डेंगू के केस में रामबाण माना जाता है. तो चलिए जानते हैं कि पपीते के पत्तों का जूस कैसे तैयार किया जाता है. एक- सबसे पहले पपीते के पत्ते को अच्छे से धोकर साफ सुथरी प्लेट में रख लें. दो- इन पत्तों को छोटे छोटे टुकड़ों में डिवाइड कर लें और डंठल फेंक दें. तीन- इसके बाद इन सभी पत्तों को काली मिर्च, तुलसी पत्ते, पानी के साथ अच्छे से ग्राइंड कर लें. चार- ये बिल्कुल चटनी की तरह बन जाएगा. पाँच- फिर इस मसाले को निकालकर, कॉटन के रूमाल में रख कर निचोड़ लें इस तरह से आपका जूस तैयार हो जाएगा. छः- अब आप इसका सेवन करें, डेंगू से बचाव या फिर रिकवरी में काफी मदद मिलेगी.
|
ये टोटके हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करते हैं।
नई दिल्ली. हनुमान जी का एक नाम बजरंगबली भी है। बजरंगबली को चमत्कारिक सफलता देने वाला देवता माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों को हर परेशानी से बजरंगबली बचाते हैं। इन्हें खुश करने के लिए कठिन साधना की जरूरत होती है। लेकिन इनकी कृपा पाने के लिए कई टोटके भी हैं। कहा जाता है कि इन टोटके से विशेष रूप से धन प्राप्ति के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं ये टोटके हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करते हैं। हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही टोटकों के बारे में जो आप पर बरसाएंगे बजरंगबली की कृपा।
|
ये टोटके हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करते हैं। नई दिल्ली. हनुमान जी का एक नाम बजरंगबली भी है। बजरंगबली को चमत्कारिक सफलता देने वाला देवता माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों को हर परेशानी से बजरंगबली बचाते हैं। इन्हें खुश करने के लिए कठिन साधना की जरूरत होती है। लेकिन इनकी कृपा पाने के लिए कई टोटके भी हैं। कहा जाता है कि इन टोटके से विशेष रूप से धन प्राप्ति के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं ये टोटके हर प्रकार का अनिष्ट भी दूर करते हैं। हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही टोटकों के बारे में जो आप पर बरसाएंगे बजरंगबली की कृपा।
|
धर्मकाण्ड - प्रेतकल्प]
आशौचमें विहित कृत्य, आशौचकी अवधि तथा दशगात्रविधि *
आशौचमें विहित कृत्य, आशौचकी अवधि, दशगात्रविधि, प्रथमषोडशी, मध्यमषोडशी तथा
उत्तमषोडशीका विधान, नौ श्राद्धोंका स्वरूप, वार्षिक कृत्य, जीवका
यममार्गनिदान, मार्गमें पड़नेवाले षोडश नगरोंमें जीवकी यातनाका
स्वरूप, यमपुरीमें पापात्माओं और पुण्यात्माओंको घोर तथा सौम्यरूपमें यमराजके दर्शन
श्रीकृष्णने कहा - हे गरुड ! इस प्रकार मृत पुरुषका दाह-संस्कार करके स्नान और तिलोदक कर्म कर स्त्रियाँ आगे-आगे तथा पुरुष उनके पीछे-पीछे घर आयें। द्वारपर पहुँचकर वे सभी मृत व्यक्तिका नाम लेकर रोते हुए नीमकी पत्तियोंका प्राशन कर पत्थरके ऊपर खड़े होकर आचमन करें । तदनन्तर सभी पुत्र-पौत्र आदि तथा सगोत्री परिजन घरमें जाकर जो दस रात्रियोंका अशौच कर्म है, उसको पूरा करें। इस कालमें उन सभीको बाहरसे खरीदकर भोजन करना चाहिये । रात्रिमें वे अलग-अलग आसनपर सोयें। क्षार तथा नमकसे रहित भोजन किया जाय। वे सभी तीन दिनतक शोकमें डूबे रहें। ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करके अमांसभोजी होकर पृथ्वीपर ही सोयें। उन सभोके बीच परस्पर शरीरका स्पर्श न हो। वे इस अशौचकालके अन्तरालमें दान एवं अध्ययन-कर्मसे दूर रहें। दुःखसे मलिन, उत्साहहीन, अधोमुख-कातर एवं भोग-विलाससे दूर होकर वे अङ्गमर्दन और सिर धोना भी छोड़ दें। इस अशौचकी अवधिमें मिट्टीके बने पात्र या पत्तलों में भोजन करना चाहिये । एक
या तीन दिनतक उपवास करे ।
गरुडने कहा - हे प्रभो ! अशाँचियोंके अशौचके विषय में आपने कह दिया, पर वह अशीच कितने समयतक रहेगा ? उसके लक्षण क्या हैं? उससे संलिप्त लोगोंको उस कालमें कैसा जीवन व्यतीत करना चाहिये? इन सभी वातोंको भी आप बतानेकी कृपा करें।
रखते हैं, उनके लिये पुत्रादिके जन्म लेनेपर भी इसी प्रकार अशौच होता है। समानोदकोंके जननाशौचमें तीन रात्रिमें शुद्धि होती है। जो मृतकको जल देनेवाले हैं, वे मरणाशौचमें भी तीन दिनोंके पश्चात् शुद्ध हो जाते हैं। दाँत निकलनेतक मरणाशौच होनेपर वह सद्यः समाप्त हो जाता है। यदि चूडाकरण- संस्कार हो जानेके बाद बालककी मृत्यु हो जाती है तो एक रात्रिका अशौच होता है। उपनयन (जनेऊ) संस्कार होनेके पूर्वतक तीन दिन और उसके बाद दस दिनका अशौच होता हैआ दन्तजननात्सद्य आ चौलान्नैशिकी त्रिरात्रमाव्रतादेशाद्दशरात्रमतः
स्मृता । परम् ॥
हे पक्षिन् ! तुम्हें मैंने अशौच बता दिया। अब मैं संक्षेपमें प्रसंगप्राप्त अशौचके विषयमें तुम्हें बताता हूँ । हे काश्यप ! सूत्रसे बँधे हुए तीन काप्ठोंकी तिगोड़ियाको रात्रिमें आकाशके नीचे स्थापित करके चौराहेपर खड़ा कर दे और 'अत्र स्नाहि ० ' एवं 'पिवात्र० ' ' इस मन्त्रोच्चारके साथ उसके ऊपर मिट्टीके पात्रमें जल और दूध रख दे। संस्कर्ता अपने सगोत्रियोंके साथ पहले, तीसरे, सातवें अथवा नवें दिन अस्थि-संचयन करे। जो सगोत्री हैं, वे मृतकके ऊर्ध्वभागकी अस्थियोंका ही स्पर्श कर सकते हैं। समानांदकी भी सभी क्रियाओंके योग्य हैं। प्रेतको पिण्डदान बाहर ही करें। इस क्रियाको करने के लिये सबसे पहले स्नान
|
धर्मकाण्ड - प्रेतकल्प] आशौचमें विहित कृत्य, आशौचकी अवधि तथा दशगात्रविधि * आशौचमें विहित कृत्य, आशौचकी अवधि, दशगात्रविधि, प्रथमषोडशी, मध्यमषोडशी तथा उत्तमषोडशीका विधान, नौ श्राद्धोंका स्वरूप, वार्षिक कृत्य, जीवका यममार्गनिदान, मार्गमें पड़नेवाले षोडश नगरोंमें जीवकी यातनाका स्वरूप, यमपुरीमें पापात्माओं और पुण्यात्माओंको घोर तथा सौम्यरूपमें यमराजके दर्शन श्रीकृष्णने कहा - हे गरुड ! इस प्रकार मृत पुरुषका दाह-संस्कार करके स्नान और तिलोदक कर्म कर स्त्रियाँ आगे-आगे तथा पुरुष उनके पीछे-पीछे घर आयें। द्वारपर पहुँचकर वे सभी मृत व्यक्तिका नाम लेकर रोते हुए नीमकी पत्तियोंका प्राशन कर पत्थरके ऊपर खड़े होकर आचमन करें । तदनन्तर सभी पुत्र-पौत्र आदि तथा सगोत्री परिजन घरमें जाकर जो दस रात्रियोंका अशौच कर्म है, उसको पूरा करें। इस कालमें उन सभीको बाहरसे खरीदकर भोजन करना चाहिये । रात्रिमें वे अलग-अलग आसनपर सोयें। क्षार तथा नमकसे रहित भोजन किया जाय। वे सभी तीन दिनतक शोकमें डूबे रहें। ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करके अमांसभोजी होकर पृथ्वीपर ही सोयें। उन सभोके बीच परस्पर शरीरका स्पर्श न हो। वे इस अशौचकालके अन्तरालमें दान एवं अध्ययन-कर्मसे दूर रहें। दुःखसे मलिन, उत्साहहीन, अधोमुख-कातर एवं भोग-विलाससे दूर होकर वे अङ्गमर्दन और सिर धोना भी छोड़ दें। इस अशौचकी अवधिमें मिट्टीके बने पात्र या पत्तलों में भोजन करना चाहिये । एक या तीन दिनतक उपवास करे । गरुडने कहा - हे प्रभो ! अशाँचियोंके अशौचके विषय में आपने कह दिया, पर वह अशीच कितने समयतक रहेगा ? उसके लक्षण क्या हैं? उससे संलिप्त लोगोंको उस कालमें कैसा जीवन व्यतीत करना चाहिये? इन सभी वातोंको भी आप बतानेकी कृपा करें। रखते हैं, उनके लिये पुत्रादिके जन्म लेनेपर भी इसी प्रकार अशौच होता है। समानोदकोंके जननाशौचमें तीन रात्रिमें शुद्धि होती है। जो मृतकको जल देनेवाले हैं, वे मरणाशौचमें भी तीन दिनोंके पश्चात् शुद्ध हो जाते हैं। दाँत निकलनेतक मरणाशौच होनेपर वह सद्यः समाप्त हो जाता है। यदि चूडाकरण- संस्कार हो जानेके बाद बालककी मृत्यु हो जाती है तो एक रात्रिका अशौच होता है। उपनयन संस्कार होनेके पूर्वतक तीन दिन और उसके बाद दस दिनका अशौच होता हैआ दन्तजननात्सद्य आ चौलान्नैशिकी त्रिरात्रमाव्रतादेशाद्दशरात्रमतः स्मृता । परम् ॥ हे पक्षिन् ! तुम्हें मैंने अशौच बता दिया। अब मैं संक्षेपमें प्रसंगप्राप्त अशौचके विषयमें तुम्हें बताता हूँ । हे काश्यप ! सूत्रसे बँधे हुए तीन काप्ठोंकी तिगोड़ियाको रात्रिमें आकाशके नीचे स्थापित करके चौराहेपर खड़ा कर दे और 'अत्र स्नाहि शून्य ' एवं 'पिवात्रशून्य ' ' इस मन्त्रोच्चारके साथ उसके ऊपर मिट्टीके पात्रमें जल और दूध रख दे। संस्कर्ता अपने सगोत्रियोंके साथ पहले, तीसरे, सातवें अथवा नवें दिन अस्थि-संचयन करे। जो सगोत्री हैं, वे मृतकके ऊर्ध्वभागकी अस्थियोंका ही स्पर्श कर सकते हैं। समानांदकी भी सभी क्रियाओंके योग्य हैं। प्रेतको पिण्डदान बाहर ही करें। इस क्रियाको करने के लिये सबसे पहले स्नान
|
PATNA : पटना जिले के मसौढ़ी थाना में एक अजीबोगरीब स्थिति तब उत्पन्न हो गई जब एक ही लड़की पर दो लड़कों ने दावा ठोक दिया कि यह मेरी पत्नी है। दावा तो दावा दोनों लड़के मेरी पत्नी मेरी पत्नी कह कर बवाल भी करने लगे।
पटना से सटे मसौड़ी अनुमंडल के तारे गाना डीह में उस समय बवाल मच गया जब एक 20 वर्षीय लड़की पर दो लड़कों ने दावा ठोक दिया यह मेरी पत्नी है। बवाल की जानकारी मिलते ही पुलिस तारेगना डीह पहुंची। और दोनों पक्षों को लेकर थाने पहुंच गई उसके बाद दोनों पक्ष से सबूत की मांग की गई।
फिर क्या था दोनों पक्षों के द्वारा युवती का जो फोटो दिया गया उससे पुलिस के भी होश उड़ गए।
गौरतलब है बता दें की दोनों फोटो में युवती एक ही मालूम पड़ रही थी । अब पुलिस करे भी तो क्या करे? वह तय नहीं कर पा रही थी कि यह पत्नी है किसकी। फिर बाद में तय हुआ की दोनों से पूछा जाए की कि अगर यह आपकी पत्नी है तो शरीर के अंगों पर कुछ चिन्ह बताएं। फिर एक ने शरीर के अंदरूनी अंगों पर चिन्ह को बताया तो पुलिस ने तय कर लिया किया यह युवती इसी की पत्नी है। लिखित आवेदन लेने के बाद युवती को एक लड़के को सौंप दिया गया।
बता दें की छत्तीसगढ़ के बलरामपुर थाना के रामानिसगंज निवासी सौरभ गुप्ता कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र की एक युवती महिमा कुमारी से प्रेम विवाह कर मसौढ़ी अपने ननिहाल आया था। वह वहीं रह रहा था।
वहीं दूसरी तरफ जहानाबाद के भरत हुआ निवासी प्रिंस कुमार चेन्नई की पूजा कुमारी से प्रेम विवाह कर बीते एक पखवाड़े पहले जहानाबाद आया था। इसी बीच जहानाबाद से 6 दिन पूर्व बिना बताए पूजा भाग निकली। इधर प्रिंस अपनी भागी हुई पत्नी के तलाश में लगा हुआ था। तभी कुछ लोगों ने बताया कि जहानाबाद से भागी लड़की तारेगना डीह में रह रही है। आनन-फानन में प्रिंस के रिश्तेदार तारेगना पहुंचकर हंगामा करने लगे।
सबसे मजेदार बात यह की दोनों लड़कियों की तस्वीर बिल्कुल एक जैसी थी। जिसे देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए थे। सौरभ की पत्नी का नाम महिमा था वही प्रिंस की पत्नी का नाम पूजा। अंत में यह तय किया गया कि दोनों से लड़की के शरीर के अंगों पर चिन्ह के बारे में पूछा जाए।
|
PATNA : पटना जिले के मसौढ़ी थाना में एक अजीबोगरीब स्थिति तब उत्पन्न हो गई जब एक ही लड़की पर दो लड़कों ने दावा ठोक दिया कि यह मेरी पत्नी है। दावा तो दावा दोनों लड़के मेरी पत्नी मेरी पत्नी कह कर बवाल भी करने लगे। पटना से सटे मसौड़ी अनुमंडल के तारे गाना डीह में उस समय बवाल मच गया जब एक बीस वर्षीय लड़की पर दो लड़कों ने दावा ठोक दिया यह मेरी पत्नी है। बवाल की जानकारी मिलते ही पुलिस तारेगना डीह पहुंची। और दोनों पक्षों को लेकर थाने पहुंच गई उसके बाद दोनों पक्ष से सबूत की मांग की गई। फिर क्या था दोनों पक्षों के द्वारा युवती का जो फोटो दिया गया उससे पुलिस के भी होश उड़ गए। गौरतलब है बता दें की दोनों फोटो में युवती एक ही मालूम पड़ रही थी । अब पुलिस करे भी तो क्या करे? वह तय नहीं कर पा रही थी कि यह पत्नी है किसकी। फिर बाद में तय हुआ की दोनों से पूछा जाए की कि अगर यह आपकी पत्नी है तो शरीर के अंगों पर कुछ चिन्ह बताएं। फिर एक ने शरीर के अंदरूनी अंगों पर चिन्ह को बताया तो पुलिस ने तय कर लिया किया यह युवती इसी की पत्नी है। लिखित आवेदन लेने के बाद युवती को एक लड़के को सौंप दिया गया। बता दें की छत्तीसगढ़ के बलरामपुर थाना के रामानिसगंज निवासी सौरभ गुप्ता कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र की एक युवती महिमा कुमारी से प्रेम विवाह कर मसौढ़ी अपने ननिहाल आया था। वह वहीं रह रहा था। वहीं दूसरी तरफ जहानाबाद के भरत हुआ निवासी प्रिंस कुमार चेन्नई की पूजा कुमारी से प्रेम विवाह कर बीते एक पखवाड़े पहले जहानाबाद आया था। इसी बीच जहानाबाद से छः दिन पूर्व बिना बताए पूजा भाग निकली। इधर प्रिंस अपनी भागी हुई पत्नी के तलाश में लगा हुआ था। तभी कुछ लोगों ने बताया कि जहानाबाद से भागी लड़की तारेगना डीह में रह रही है। आनन-फानन में प्रिंस के रिश्तेदार तारेगना पहुंचकर हंगामा करने लगे। सबसे मजेदार बात यह की दोनों लड़कियों की तस्वीर बिल्कुल एक जैसी थी। जिसे देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए थे। सौरभ की पत्नी का नाम महिमा था वही प्रिंस की पत्नी का नाम पूजा। अंत में यह तय किया गया कि दोनों से लड़की के शरीर के अंगों पर चिन्ह के बारे में पूछा जाए।
|
आईपीएल 2023 से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स द्वारा सात खिलाड़ियों को रिलीज किया गया था। उनमें से एक खिलाड़ी थी वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर (Jason Holder)। उन्हें एलएसजी ने पिछले साल मेगा ऑक्शन में 8. 75 करोड़ की रकम देकर अपने साथ टीम में शामिल किया था। लेकिन आईपीएल के 16वें सीजन से पहले टीम ने उनका साथ छोड़ दिया। जिसके बाद उन्हें आईपीएल 2023 मिनी ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपने साथ टीम का हिस्सा बनाया।
लखनऊ सुपर जायंट्स ने होल्डर के अलावा, फ्रेंचाइजी ने एंड्रयू टाय, अंकित राजपूत, दुशमंथा चमीरा, एविन लुईस, मनीष पांडे और शाहबाज़ नदीम को रिलीज़ किया। अपने पहले सीज़न में, एलएसजी नौ जीत और पांच हार के साथ अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रही। वहीं, जेसन टीम के लिए गेंद से कुछ खास नहीं रहा था। उन्होंने 8 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 38 रन बनाए थे, जबकि गेंदबाजी करते हुए उन्होंने 14 विकेट अपने नाम दर्ज की है।
जेसन होल्डर मे इंडियन प्रीमियर लीग के मंच पर कदम कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से रखा था। इसके बाद से वह अब तक कई टीमों के लिए खेल चुके हैं। वह IPL 2021 में SRH का हिस्सा रहे थे, लेकिन IPL 2022 की मेगा नीलामी से पहले उन्हें रिलीज़ कर दिया गया। जेसन ने आईपीएल के 38 मुकाबले खेलते हुए 49 विकेट अपने नाम दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर 24 पारियों में उनके बल्ले से 247 रन निकले हैं।
|
आईपीएल दो हज़ार तेईस से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स द्वारा सात खिलाड़ियों को रिलीज किया गया था। उनमें से एक खिलाड़ी थी वेस्टइंडीज के जेसन होल्डर । उन्हें एलएसजी ने पिछले साल मेगा ऑक्शन में आठ. पचहत्तर करोड़ की रकम देकर अपने साथ टीम में शामिल किया था। लेकिन आईपीएल के सोलहवें सीजन से पहले टीम ने उनका साथ छोड़ दिया। जिसके बाद उन्हें आईपीएल दो हज़ार तेईस मिनी ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपने साथ टीम का हिस्सा बनाया। लखनऊ सुपर जायंट्स ने होल्डर के अलावा, फ्रेंचाइजी ने एंड्रयू टाय, अंकित राजपूत, दुशमंथा चमीरा, एविन लुईस, मनीष पांडे और शाहबाज़ नदीम को रिलीज़ किया। अपने पहले सीज़न में, एलएसजी नौ जीत और पांच हार के साथ अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रही। वहीं, जेसन टीम के लिए गेंद से कुछ खास नहीं रहा था। उन्होंने आठ पारियों में बल्लेबाजी करते हुए अड़तीस रन बनाए थे, जबकि गेंदबाजी करते हुए उन्होंने चौदह विकेट अपने नाम दर्ज की है। जेसन होल्डर मे इंडियन प्रीमियर लीग के मंच पर कदम कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से रखा था। इसके बाद से वह अब तक कई टीमों के लिए खेल चुके हैं। वह IPL दो हज़ार इक्कीस में SRH का हिस्सा रहे थे, लेकिन IPL दो हज़ार बाईस की मेगा नीलामी से पहले उन्हें रिलीज़ कर दिया गया। जेसन ने आईपीएल के अड़तीस मुकाबले खेलते हुए उनचास विकेट अपने नाम दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर चौबीस पारियों में उनके बल्ले से दो सौ सैंतालीस रन निकले हैं।
|
-कर्मचारी रैली पर रोक लगने से अभी लग रहा है बुरा लेकिन इसके आएंगे दूरगामी परिणाम विनोद झा जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सूझबूझ से पदेश एक बार फिर जातीय वैमनस्यता की आग में आने से बच गया। कर्मचारी रैली पर रोक लगाने से पदेश का वाकई भला हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कभी भी पदेश को जाति, धर्म या सम्पदाय के लिहाज से नहीं बंटने देंगे। राज्य में सरकार की कमान संभालने के बाद उन्होंने दो बार इसका उदाहरण पेश कर दिया है। पिछली सरकार के समय गुर्जर आंदोलन के बाद पदेश के गुर्जर-मीणाओं में जातीय वैमनस्यता फैल गई थी। गहलोत ने सत्ता में आते ही इस पर नियंत्रण किया और अब दो दिन पहले उनके लिए एक कडेक्व निर्णय ने राज्य के छह लाख कर्मचारियों को वर्गों में बंटने से रोक दिया, अन्यथा हालात बहुत बिगडक्व सकते थे। पदोन्नति में आरक्षण के मामले में राज्य सरकार की सूझबूझ और मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता ने कर्मचारियों के बीच बढक्वने वाले वैमनस्य के जहर को रोक दिया। इस मामले में सरकार का स्पष्ट रुख सामने आया कि किसी भी वर्ग को पदेश में जातीय वैमनस्य फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकार द्वारा रैली और पदर्शनों पर लगाई गई रोक के बाद कर्मचारियों और राज्य सरकार में सीधा टकराव भी टल गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक बुला ली थी तथा इस मामले में अपने जातीय मंचों पर अनर्गल बात कहने वाले दो मंत्रियों को लताडक्व भी पिलाई थी। बैठक में मुख्यमंत्री का यह मानना था कि यदि रैलियों को नहीं रोका गया तो बरसों से भाईचारे और पेम के साथ सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच जातीय दरार पैदा हो जाएगी तथा स्थितियां बेहद गंभीर हो जाएंगी। इतना ही नहीं सरकार ने 90 दिनों तक पदेश में किसी भी पकार की रैली या पदर्शन पर रोक लगा दी, जिससे जातीय आधार पर होने वाले कर्मचारियों के पदर्शन को कहीं आधार नहीं मिले। तब तक संभवतः भटनागर कमेटी की सिफारिशें आ जाएंगी और उसके बाद यह मामला निपटा दिया जाएगा। इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह चुके हैं कि भाजपा कुछ कर्मचारी नेताओं को भडक्वका कर आंदोलन करने के लिए आगे कर रही है और इन कर्मचारी नेताओं को चुनाव में टिकट देने का वादा किया गया है, लेकिन हम किसी भी कीमत पर कर्मचारी वर्ग को जातीय आधार पर खण्डित नहीं होने देंगे। गहलोत के इस कदम के राज्यहित में दूरगामी परिणाम पाप्त होंगे। अभी तो यह स्थिति कर्मचारियों को कडक्ववी लग रही होगी, लेकिन ये अनुमान उन्हें लगाना पडेक्वगा कि जिस छत के नीचे वे बरसों से काम कर रहे हैं, ऐसी रैलियों के बाद क्या एक दूसरे वर्ग के कर्मचारी पेम, भाईचारा और मित्रता को कायम रख पाएंगे। ऐसा संभव नहीं होगा। कटुता बढेक्वगी और इससे पशासनिक व्यवस्थाएं भी बाधित होंगी। छोटी-छोटी बातों पर वर्गों में बंटे कर्मचारी विवादों में पडेक्वंगे, इसलिए गहलोत का यह कदम वाकई बिल्कुल उचित है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब पदेश की सत्ता संभाली थी तो यहां हमेशा से भाईचारे के साथ रहे गुर्जर और मीणा दो गुटों में बंटे थे और उनमें जातीय जहर इतना घुल चुका था कि दोनों जातियां एक दूसरे के खून की प्यासी थीं, लेकिन गहलोत ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ के चलते इस मामले में पहल की, अपने लोगों को लगाकर दोनों समाजों में वापिस पेम पैदा करने की कोशिश की और वे उसमें सफल भी रहे। आज पदेश में कहीं भी जातीय आधार पर झगडेक्व फसाद की स्थिति नहीं है।
|
-कर्मचारी रैली पर रोक लगने से अभी लग रहा है बुरा लेकिन इसके आएंगे दूरगामी परिणाम विनोद झा जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सूझबूझ से पदेश एक बार फिर जातीय वैमनस्यता की आग में आने से बच गया। कर्मचारी रैली पर रोक लगाने से पदेश का वाकई भला हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कभी भी पदेश को जाति, धर्म या सम्पदाय के लिहाज से नहीं बंटने देंगे। राज्य में सरकार की कमान संभालने के बाद उन्होंने दो बार इसका उदाहरण पेश कर दिया है। पिछली सरकार के समय गुर्जर आंदोलन के बाद पदेश के गुर्जर-मीणाओं में जातीय वैमनस्यता फैल गई थी। गहलोत ने सत्ता में आते ही इस पर नियंत्रण किया और अब दो दिन पहले उनके लिए एक कडेक्व निर्णय ने राज्य के छह लाख कर्मचारियों को वर्गों में बंटने से रोक दिया, अन्यथा हालात बहुत बिगडक्व सकते थे। पदोन्नति में आरक्षण के मामले में राज्य सरकार की सूझबूझ और मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता ने कर्मचारियों के बीच बढक्वने वाले वैमनस्य के जहर को रोक दिया। इस मामले में सरकार का स्पष्ट रुख सामने आया कि किसी भी वर्ग को पदेश में जातीय वैमनस्य फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकार द्वारा रैली और पदर्शनों पर लगाई गई रोक के बाद कर्मचारियों और राज्य सरकार में सीधा टकराव भी टल गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक बुला ली थी तथा इस मामले में अपने जातीय मंचों पर अनर्गल बात कहने वाले दो मंत्रियों को लताडक्व भी पिलाई थी। बैठक में मुख्यमंत्री का यह मानना था कि यदि रैलियों को नहीं रोका गया तो बरसों से भाईचारे और पेम के साथ सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच जातीय दरार पैदा हो जाएगी तथा स्थितियां बेहद गंभीर हो जाएंगी। इतना ही नहीं सरकार ने नब्बे दिनों तक पदेश में किसी भी पकार की रैली या पदर्शन पर रोक लगा दी, जिससे जातीय आधार पर होने वाले कर्मचारियों के पदर्शन को कहीं आधार नहीं मिले। तब तक संभवतः भटनागर कमेटी की सिफारिशें आ जाएंगी और उसके बाद यह मामला निपटा दिया जाएगा। इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह चुके हैं कि भाजपा कुछ कर्मचारी नेताओं को भडक्वका कर आंदोलन करने के लिए आगे कर रही है और इन कर्मचारी नेताओं को चुनाव में टिकट देने का वादा किया गया है, लेकिन हम किसी भी कीमत पर कर्मचारी वर्ग को जातीय आधार पर खण्डित नहीं होने देंगे। गहलोत के इस कदम के राज्यहित में दूरगामी परिणाम पाप्त होंगे। अभी तो यह स्थिति कर्मचारियों को कडक्ववी लग रही होगी, लेकिन ये अनुमान उन्हें लगाना पडेक्वगा कि जिस छत के नीचे वे बरसों से काम कर रहे हैं, ऐसी रैलियों के बाद क्या एक दूसरे वर्ग के कर्मचारी पेम, भाईचारा और मित्रता को कायम रख पाएंगे। ऐसा संभव नहीं होगा। कटुता बढेक्वगी और इससे पशासनिक व्यवस्थाएं भी बाधित होंगी। छोटी-छोटी बातों पर वर्गों में बंटे कर्मचारी विवादों में पडेक्वंगे, इसलिए गहलोत का यह कदम वाकई बिल्कुल उचित है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब पदेश की सत्ता संभाली थी तो यहां हमेशा से भाईचारे के साथ रहे गुर्जर और मीणा दो गुटों में बंटे थे और उनमें जातीय जहर इतना घुल चुका था कि दोनों जातियां एक दूसरे के खून की प्यासी थीं, लेकिन गहलोत ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ के चलते इस मामले में पहल की, अपने लोगों को लगाकर दोनों समाजों में वापिस पेम पैदा करने की कोशिश की और वे उसमें सफल भी रहे। आज पदेश में कहीं भी जातीय आधार पर झगडेक्व फसाद की स्थिति नहीं है।
|
मरकच्चो : प्रखंड के तेलोडीह पंचायत स्थित पंचायत भवन में 25 फरवरी को सर्वे को लेकर बैठक की तिथि तय की गई है।
जिसमें पंचायत के सभी गणमान्य लोगों से वार्ता की जायगी। वार्ता करने के बाद वार्ता सफल होने पर अमीन के द्वारा सर्वे का कार्य शुरू कर दिया जायगा। यह जानकारी सर्वे इंस्पेक्टर विजय कुमार यादव ने दी।
|
मरकच्चो : प्रखंड के तेलोडीह पंचायत स्थित पंचायत भवन में पच्चीस फरवरी को सर्वे को लेकर बैठक की तिथि तय की गई है। जिसमें पंचायत के सभी गणमान्य लोगों से वार्ता की जायगी। वार्ता करने के बाद वार्ता सफल होने पर अमीन के द्वारा सर्वे का कार्य शुरू कर दिया जायगा। यह जानकारी सर्वे इंस्पेक्टर विजय कुमार यादव ने दी।
|
प्रासुरी सुरी र नारी नागी विनरी, लोवाल नारि न रिफाई गई देवन की दरगाह । सोता दयी मानीष मरूधति उतारया लोन,
उरसा लगाइ अनसूया क्ह्यो वाह वाह !
बलवविलास मे सूयमलन न पद्य व साथ साथ प्रारंभ में गद्य का भी प्रयोग किया परन्तु वा भास्कर ने गद्य को तुलना में यलवद्विलाम वे गद्य म मपक्षाकृत प्रोज और लालित्य का प्रभाव है । उगहरण के लिए बलवविलास ने गद्य की बुछ पक्तिया उद्यत हैं-- जोईयो तो जीव साटे समाधि जिगडी घोडी देर पूरी ही प्रत्युपकार करिश्राप से लीपो उद्धार दे धाया तथापि वोरमदेव श्रावना वडी तरह बधागो करि भाप रा प्राधा ग्राम दे र पाणि तू उपरा तबोल से पालो वरि प्रस्वेद रै ठाम रुहिर लता समस्ती से स्वामि करि रावण दूरा जठ ही वीरमदव र पुत्र चूडो हुप्रो जिरणारा उच्छन म स्वामी से अनुमन पाइ साथ रा रजपूत उणा रा पीरा ग फराम बढाई बाराहा से पल महजता र माये रालि दला रा जामाता तू मारि उण रा बाटा रा दो दुगावा भाई प्रमुख दुर्गा रा मालिका तू भाजि महा अधम रो पत्र चावग ठुका ।
यद्यपि महाववि सूयमल्ल ने इस काव्य म उदारमना क्षत्रियोषित गुणनिधि राजा बलवन्त सिंह की सुकीति का बहुविध गान किया है तथापि वह अपने प्राश्रयदाता वू टीनरेश रामसिंह हाडा की कृपा एव स्नेह का स्मरण घर कृतज्ञता प्रकाश करना नहीं भूला है। राजा बलव तसिंह द्वारा देवालया तथा मंदिरों के निर्माण और हाथी, घोडे, ऊँट गायें भूमि और पान का वर्णन कर रामसिंह के प्रति निवेदन किया है -
हदुवतिय पति हड्डुवीर दुदिय बसुधावर । रामसिंह अधिराज राव राजेद्र धमघर ॥ सब गुन स्वभति समेटि हो रक्खिय मेमन श्रम बदन मस्तक वाक्य सोधि जो हुव प्रगहि सब ।।
जनु बण जुधिष्टर नल जनक इक बनि बु दिय अवसरन । रविमल नाथ घरव गहिर सोहु मुदित बलवत सन ।।
बलवद्विलास का मजन जसा कि पहले सक्त किया गया है वश भास्कर महाचाव्य की रचना के मध्य भवमर निकाल कर किया गया है। मत बलवद्विलास को भाषा मौर दशैली भी वशभास्कर का प्रक्षरश अनुसरण करती हुई प्रकट होती है । महाकवि सूर्यमरल सस्कृत, प्राकृत, थपभ्रंश, पाली, ग्रज और डिंगल भाषा के विदग्ध कवि, विद्वान एव इतिहासवेत्ता थे। बलवविलास में व्रज, डिंगल, संस्कृत, अपभ्रश मौर प्राकृत
|
प्रासुरी सुरी र नारी नागी विनरी, लोवाल नारि न रिफाई गई देवन की दरगाह । सोता दयी मानीष मरूधति उतारया लोन, उरसा लगाइ अनसूया क्ह्यो वाह वाह ! बलवविलास मे सूयमलन न पद्य व साथ साथ प्रारंभ में गद्य का भी प्रयोग किया परन्तु वा भास्कर ने गद्य को तुलना में यलवद्विलाम वे गद्य म मपक्षाकृत प्रोज और लालित्य का प्रभाव है । उगहरण के लिए बलवविलास ने गद्य की बुछ पक्तिया उद्यत हैं-- जोईयो तो जीव साटे समाधि जिगडी घोडी देर पूरी ही प्रत्युपकार करिश्राप से लीपो उद्धार दे धाया तथापि वोरमदेव श्रावना वडी तरह बधागो करि भाप रा प्राधा ग्राम दे र पाणि तू उपरा तबोल से पालो वरि प्रस्वेद रै ठाम रुहिर लता समस्ती से स्वामि करि रावण दूरा जठ ही वीरमदव र पुत्र चूडो हुप्रो जिरणारा उच्छन म स्वामी से अनुमन पाइ साथ रा रजपूत उणा रा पीरा ग फराम बढाई बाराहा से पल महजता र माये रालि दला रा जामाता तू मारि उण रा बाटा रा दो दुगावा भाई प्रमुख दुर्गा रा मालिका तू भाजि महा अधम रो पत्र चावग ठुका । यद्यपि महाववि सूयमल्ल ने इस काव्य म उदारमना क्षत्रियोषित गुणनिधि राजा बलवन्त सिंह की सुकीति का बहुविध गान किया है तथापि वह अपने प्राश्रयदाता वू टीनरेश रामसिंह हाडा की कृपा एव स्नेह का स्मरण घर कृतज्ञता प्रकाश करना नहीं भूला है। राजा बलव तसिंह द्वारा देवालया तथा मंदिरों के निर्माण और हाथी, घोडे, ऊँट गायें भूमि और पान का वर्णन कर रामसिंह के प्रति निवेदन किया है - हदुवतिय पति हड्डुवीर दुदिय बसुधावर । रामसिंह अधिराज राव राजेद्र धमघर ॥ सब गुन स्वभति समेटि हो रक्खिय मेमन श्रम बदन मस्तक वाक्य सोधि जो हुव प्रगहि सब ।। जनु बण जुधिष्टर नल जनक इक बनि बु दिय अवसरन । रविमल नाथ घरव गहिर सोहु मुदित बलवत सन ।। बलवद्विलास का मजन जसा कि पहले सक्त किया गया है वश भास्कर महाचाव्य की रचना के मध्य भवमर निकाल कर किया गया है। मत बलवद्विलास को भाषा मौर दशैली भी वशभास्कर का प्रक्षरश अनुसरण करती हुई प्रकट होती है । महाकवि सूर्यमरल सस्कृत, प्राकृत, थपभ्रंश, पाली, ग्रज और डिंगल भाषा के विदग्ध कवि, विद्वान एव इतिहासवेत्ता थे। बलवविलास में व्रज, डिंगल, संस्कृत, अपभ्रश मौर प्राकृत
|
वीर अर्जुन संवाददाता इटावा। सरकार की पूंजीवादी नीतियों से बढ़ रही बेतहाषा महंगाई की मार से आम आदमी की जान हलकान हैं। असंग"ित क्षेत्र के मजदूर जिसमें सिलाई-कढ़ाई कारीगर भी षामिल हैं। भयंकर समस्याओं, गरीबी अषिक्षा व भुखमरी का षिकार हैं। उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दिलवाना, रहन-सहन षिक्षा स्वास्थ्य आदि जैसी सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। किंतु सरकार उससे हाथ खींच रही हैं। तब जरूरी हो जाता है कि मजदूर एकजुट होकर साझा संघर्शों में उतरें उनकी पाणलेवा समस्याओं का हल इसी से होगा। इसी मे उनकी भलाई और मुक्ति का रास्ता है। उक्त आहवान सिलाई-कढ़ाई मजदूरों की पुरानी इमरजेंसी भवन में आयोजित आम सभा में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए माकपा राज्यमंत्री परिशद सदस्य एवं किसान सभा के पांतीय कोशाध्यक्ष का0 मुकुट सिंह ने किया। उन्होंने इटावा में तमाम सिलाई कढ़ाई मजदूरों को एकता और संग"न बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि सरकार द्वारा घोशित न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, षिक्षा स्वास्थ्य, पावीडेंट फण्ड, बीमा, पेंषन आदि को पाप्त करने के लिए संघर्श को आगे बढ़ाया जायेगा। सीटू के पांतीय नेता नवल ंिसह ने संग"न बनाने, उसे चलाने आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए राज्य सीट की तरफ से पूरी मदद का भरोसा दिलाते हुए सभी को संग"ित होने के लिए बधाई दी। सीटू जिला संयोजक एवं पेस श्रमिक संघ (रजिस्टर्ड) के अध्यक्ष पेमषंकर यादव तथा जिलामंत्री जयनारायण सविता ने पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए साथ देने का वचन दिया। यूनियन अध्यक्ष इकबाल भाई ने कहा कि संग"न बनाना हमारी मजबूरी हो गयी हैं हमें मेहनत का उचित फल नहीं मिल रहा हैं और न ही अन्य षासकीय सुविधायें हासिल है। हम सब गरीबी व भुखमरी, अषिक्षा, व नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। हम हमारे हकों की लड़ाई लड़ेंगेचाहे कितनी बड़ी कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े। सभा की अध्यक्षता बाबूराम षंखवार ने की और संचालन महामंत्री गोपाल सोनी ने किया तथा इलयास खां, मो. जमाल, मो. षकील, इनाम अली, रिजवान, मुस्ताक, अंसार भाई, पो. तारिक, मो. षहजाद उर्फ लोकू, मो. अनीस, मो. कासिम, मो. षकील उर्फ चीफ साहब ने भी संकल्प व्यक्त करते हुए एक जुट होकर हकों की लड़ाई लड़ने और अन्याय के सामने न झुकने की इरादा व्यक्त किया।
|
वीर अर्जुन संवाददाता इटावा। सरकार की पूंजीवादी नीतियों से बढ़ रही बेतहाषा महंगाई की मार से आम आदमी की जान हलकान हैं। असंग"ित क्षेत्र के मजदूर जिसमें सिलाई-कढ़ाई कारीगर भी षामिल हैं। भयंकर समस्याओं, गरीबी अषिक्षा व भुखमरी का षिकार हैं। उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दिलवाना, रहन-सहन षिक्षा स्वास्थ्य आदि जैसी सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। किंतु सरकार उससे हाथ खींच रही हैं। तब जरूरी हो जाता है कि मजदूर एकजुट होकर साझा संघर्शों में उतरें उनकी पाणलेवा समस्याओं का हल इसी से होगा। इसी मे उनकी भलाई और मुक्ति का रास्ता है। उक्त आहवान सिलाई-कढ़ाई मजदूरों की पुरानी इमरजेंसी भवन में आयोजित आम सभा में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए माकपा राज्यमंत्री परिशद सदस्य एवं किसान सभा के पांतीय कोशाध्यक्ष काशून्य मुकुट सिंह ने किया। उन्होंने इटावा में तमाम सिलाई कढ़ाई मजदूरों को एकता और संग"न बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि सरकार द्वारा घोशित न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, षिक्षा स्वास्थ्य, पावीडेंट फण्ड, बीमा, पेंषन आदि को पाप्त करने के लिए संघर्श को आगे बढ़ाया जायेगा। सीटू के पांतीय नेता नवल ंिसह ने संग"न बनाने, उसे चलाने आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए राज्य सीट की तरफ से पूरी मदद का भरोसा दिलाते हुए सभी को संग"ित होने के लिए बधाई दी। सीटू जिला संयोजक एवं पेस श्रमिक संघ के अध्यक्ष पेमषंकर यादव तथा जिलामंत्री जयनारायण सविता ने पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए साथ देने का वचन दिया। यूनियन अध्यक्ष इकबाल भाई ने कहा कि संग"न बनाना हमारी मजबूरी हो गयी हैं हमें मेहनत का उचित फल नहीं मिल रहा हैं और न ही अन्य षासकीय सुविधायें हासिल है। हम सब गरीबी व भुखमरी, अषिक्षा, व नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। हम हमारे हकों की लड़ाई लड़ेंगेचाहे कितनी बड़ी कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े। सभा की अध्यक्षता बाबूराम षंखवार ने की और संचालन महामंत्री गोपाल सोनी ने किया तथा इलयास खां, मो. जमाल, मो. षकील, इनाम अली, रिजवान, मुस्ताक, अंसार भाई, पो. तारिक, मो. षहजाद उर्फ लोकू, मो. अनीस, मो. कासिम, मो. षकील उर्फ चीफ साहब ने भी संकल्प व्यक्त करते हुए एक जुट होकर हकों की लड़ाई लड़ने और अन्याय के सामने न झुकने की इरादा व्यक्त किया।
|
लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है। इसकी शुरुआत वर्ष 1965 में डॉ जोसेफ कलाथिपरम्बिली ने की थी।
यह अस्पताल प्रमुख रूप से कार्डियोलॉजी, ओर्थोपेडिक्स, हीपैटोलॉजी (यकृत पित्त अग्न्याशय चिकित्सा ), न्यूरोसर्जन, ऑन्कोलॉजी, कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान, ऑपथैल्मोलॉजी, डर्माटोलॉजी, अनेस्थिसियोलॉजी, डेंटिस्ट्री, आकस्मिक चिकित्सा, एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य शल्यचिकित्सा, गुर्दे की कार्यवाही और रोगों का विज्ञान, न्यूरोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, पैथोलोजी, पीडियाट्रिक, फार्मेसी, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन, श्वास रोग विज्ञान और यूरोलॉजी में विशेषज्ञ है।
मरीजों के लिए अस्पताल में विभिन्न तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे कि एंबुलेंस सेवा, कैथ लैब, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, आईसीयू, फार्मेसी और रेडियोलोजी।
यहां पर ओपीडी सुविधा सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच है। लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग की सुविधा है। अस्पताल की वेबसाइट पर जाकर मरीज इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
यह अस्पताल एनएबीएच से प्राप्त मान्यता रखता है।
लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि का एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, स्टार यूनियन दाई-इची लाइफ इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के साथ कैशलेस क्लेम का अनुबंध है।
|
लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है। इसकी शुरुआत वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में डॉ जोसेफ कलाथिपरम्बिली ने की थी। यह अस्पताल प्रमुख रूप से कार्डियोलॉजी, ओर्थोपेडिक्स, हीपैटोलॉजी , न्यूरोसर्जन, ऑन्कोलॉजी, कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान, ऑपथैल्मोलॉजी, डर्माटोलॉजी, अनेस्थिसियोलॉजी, डेंटिस्ट्री, आकस्मिक चिकित्सा, एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सामान्य शल्यचिकित्सा, गुर्दे की कार्यवाही और रोगों का विज्ञान, न्यूरोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, पैथोलोजी, पीडियाट्रिक, फार्मेसी, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जन, श्वास रोग विज्ञान और यूरोलॉजी में विशेषज्ञ है। मरीजों के लिए अस्पताल में विभिन्न तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे कि एंबुलेंस सेवा, कैथ लैब, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, आईसीयू, फार्मेसी और रेडियोलोजी। यहां पर ओपीडी सुविधा सोमवार से शनिवार सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे के बीच है। लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग की सुविधा है। अस्पताल की वेबसाइट पर जाकर मरीज इन सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। यह अस्पताल एनएबीएच से प्राप्त मान्यता रखता है। लूर्डेस अस्पताल, पचलम पीओ, कोच्चि का एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, स्टार यूनियन दाई-इची लाइफ इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के साथ कैशलेस क्लेम का अनुबंध है।
|
एक ऐसा पौधा है जो आपको शनि के प्रकोप से बचा सकता है।
शनिवार के दिन लोग शनि के प्रकोप से बचने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपके द्वारा किए गए सारे उपाय विफल हो जाते हैं।
लेकिन कुछेक उपाय ऐसे भी होते हैं जिन्हें करने से आपकी किस्मत चमक सकती है और शनि का प्रकोप कम हो सकता है।
यहां हम बात कर रहे हैं एक वृक्ष की जिसका नाम है 'शमी'। दरअसल पीपल और शमी दो ऐसे वृक्ष हैं, जिन पर शनि का प्रभाव होता है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, नियमित रूप से शमी की पूजा करने और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और उसके कुप्रभावों से बचा जा सकता है।
जरूरी नहीं कि आप इसके पेड़ को घर में लगाएं। अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने घर में शमी के पौधे को लगाएं।
इसकी निमित रूप से विशेषकर करने से आपके कामों में आने वाली रुकावटें दूर होंगी। शमी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है।
शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है। इतना ही नहीं भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग की जाने वाली इस पेड़ की पत्तियों का आयुर्वेद में भी महत्व है।
|
एक ऐसा पौधा है जो आपको शनि के प्रकोप से बचा सकता है। शनिवार के दिन लोग शनि के प्रकोप से बचने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपके द्वारा किए गए सारे उपाय विफल हो जाते हैं। लेकिन कुछेक उपाय ऐसे भी होते हैं जिन्हें करने से आपकी किस्मत चमक सकती है और शनि का प्रकोप कम हो सकता है। यहां हम बात कर रहे हैं एक वृक्ष की जिसका नाम है 'शमी'। दरअसल पीपल और शमी दो ऐसे वृक्ष हैं, जिन पर शनि का प्रभाव होता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, नियमित रूप से शमी की पूजा करने और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और उसके कुप्रभावों से बचा जा सकता है। जरूरी नहीं कि आप इसके पेड़ को घर में लगाएं। अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने घर में शमी के पौधे को लगाएं। इसकी निमित रूप से विशेषकर करने से आपके कामों में आने वाली रुकावटें दूर होंगी। शमी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है। शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है। इतना ही नहीं भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग की जाने वाली इस पेड़ की पत्तियों का आयुर्वेद में भी महत्व है।
|
उत्तर-पूर्व के राज्य जहां खुद को क्षेत्रीय दलों के मकड़जाल से घिरा पाते रहे और केंद्र से टकराव करके राज्यों में राजनीति करते थे वह स्थिति अब लगभग समाप्त हो गई है। पूर्वोत्तर के राज्य अब भारत संघ से जुड़ा महसूस कर रहे हैं। त्रिपुरा से बड़ी जीत नगालैंड में हुई है जहां भाजपा की प्रभावी उपस्थिति इसीलिए महत्वपूर्ण है कि नगा विद्रोहियों ने भारतीय एकता के लिए हमेशा चुनौती पेश की उसी राज्य में राष्ट्रीय पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इस दृष्टि से पूर्वोत्तर चुनावों के परिणाम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
त्रिपुरा का चुनाव ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा। अनुमान तो पहले से ही था कि इस वामपंथी गढ़ में भाजपा को इस बार सफलता मिल सकती है किन्तु ऐसी उम्मीद किसी को भी नहीं थी कि भाजपा को इतना प्रचंड बहुमत मिलेगा और वामपंथ की दीवार इतनी जर्जर हो चुकी थी इस राज्य में। त्रिपुरा चुनाव परिणाम वामपंथियों के राजनीतिक ढोंग की पोल खोलता है। जिस माणिक सरकार को एक ईमानदारी की मूर्ति के रूप में इतने दिनों तक पेश करके यह साबित करने की कोशिश की जाती रही कि त्रिपुरा में सब कुछ ठीक-ठाक है, असल में ऐसा नहीं था। इस राज्य के लोग वामपंथी शासन व्यवस्था से इस हद तक परेशान थे कि उन्होंने विकल्प के तौर पर दूसरी पार्टियों को भी आजमाने की कोशिश की थी। तभी तो 2013 में कांग्रेस को 36. 05 प्रतिशत वोटों के साथ 10 सीटें मिली थीं। किन्तु उन्हें लगा कि कांग्रेस वामपंथियों का सही विकल्प नहीं बन सकती। यही कारण है कि इस चुनाव में कांग्रेस कुल 1. 08 प्रतिशत वोटों पर सिमट गई और उसे एक भी सीट नहीं मिली। त्रिपुरा में जिस भाजपा को 2013 में मात्र 1. 05 प्रतिशत वोट मिला था और वह एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, इस बार 43 प्रतिशत वोट लेकर 35 सीटें हासिल कर लीं। यह सही है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को चुनावी रणनीति में महारथ हासिल है वहीं उसके पास समर्पित युवा कार्यकर्ता भी हैं जो हर मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में कामयाबी हासिल करते हैं किन्तु उसकी इस चुनावी शैली से बिल्कुल विपरीत है वामपंथियों की शैली। इस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में जबरदस्त उठापटक चलती है। एक धड़ा कांग्रेस के साथ गठबंधन का पक्षधर है तो उससे बड़ा धड़ा कांग्रेस से किसी तरह के गठबंधन के खिलाफ है। वहीं राज्यों में नेतृत्व सत्तर साला बुजुर्गों के हाथ में है जो युवा भावनाओं को समझ पाने में पूरी तरह असमर्थ रहते हैं। इसके अलावा वामपंथियों की एक और पोल खुली है, वह यह है कि यह लोग राज्य का नेतृत्व किसी ईमानदार छवि वाले नेता को तो सौंप देते हैं किन्तु उसके पीछे पार्टी का कैडर दीमक की तरह जनता का शोषण करने पर लग जाता है। यही हालत पश्चिम बंगाल में भी थी। ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य को यह अच्छी तरह मालूम था कि उनकी ईमानदार छवि के कारण ही पार्टी एक ईमानदार पार्टी की छवि हासिल कर पाई है किन्तु ठेके देने में भ्रष्टाचार, आम कारोबारियों से अवैध वसूली तथा अपने कैडर को ही रोजगार दिलाने की हरकतों से आम आदमी दुखी हो चुका था। जैसे ही उन्हें ममता बनर्जी के रूप में एक विकल्प मिला उन्होंने वामपंथियों को सबक सिखा दिया। यही हालत त्रिपुरा में भी थी। त्रिपुरा में माणिक सरकार की छवि अत्यंत ईमानदार राजनेता की है किन्तु लूट-खसोट वामपंथी ही करते थे। नई कार खरीदने पर निश्चित राशि वामपंथी नेताओं को देनी पड़ती थी। तमाम सार्वजनिक कार्यों के लिए ठेका किसी कामरेड को ही मिलता था और वह भुगतान लेकर पार्टी को कुछ राशि चन्दा देकर बाकी डकार जाता था। सड़कें पहले जैसी ही टूटी रहतीं, स्कूल, अस्पताल यहां तक कि पुलिस स्टेशनों के भवन नहीं बन पाए। आज का युवा ऐसी सरकारों को पसंद नहीं करता और न तो वामपंथी सिद्धांत के लिए आंख मूंद कर वामपंथी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के लिए तैयार है।
अब आते हैं मेघालय पर क्योंकि इस राज्य के चुनाव परिणाम से कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा सकेगी। 2013 के चुनाव में इस राज्य में कांग्रेस को 34. 08 प्रतिशत वोट के साथ 29 सीटें मिली थीं। उसे राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत मिला हुआ था किन्तु 2018 में उसके वोटों में छह प्रतिशत की कमी आई और इस बार के चुनाव में वह सिर्फ 28. 05 प्रतिशत वोट हासिल करके 21 सीटें ही हासिल कर पाई। राज्य में भाजपा को 1. 25 प्रतिशत वोट मिला था किन्तु सीट एक भी नहीं मिली थी किन्तु 2018 के चुनाव में इस पार्टी को 9. 06 प्रतिशत के साथ दो सीटें हासिल हुईं। मेघालय कांग्रेस के हाथ से खिसकता हुआ नजर आ रहा है। राज्य में एनपीपी और यूडीपी ने क्रमश 20. 06 और 17. 01 प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस को बहुमत के 31 के आंकड़े से काफी दूर कर दिया है वे ही कांग्रेस के लिए घातक साबित होने वाली हैं। रही बात भाजपा की तो उसने इस राज्य में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज कराई है कि सभी की नजर उसी पर है। कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कैडर और नीतियां हैं। मौजूदा नेतृत्व समझता है कि कब मोदी सरकार ऐसी गलती करे कि कांग्रेस मजबूत हो। कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत सारे मुद्दे उठाए भी किन्तु वह किसी भी मुद्दे में सरकार के खिलाफ एक भी आरोप को तर्कसंगत तरीके से सही साबित नहीं कर पाई। यही नहीं, जिन मुद्दों को कांग्रेस उछालती है उन्हीं का जब विश्लेषण होता है तो आरोप के छींटें उन्हीं पर पड़ने लग जाते हैं। फिर कांग्रेस चुप्पी साध लेती है। कांग्रेस कभी भी आम आदमी से जुड़े मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि को प्रभावी तरीके से नहीं उठाती। इसी से लोग उसके साथ जुड़ना तो दूर कटते ही चले जा रहे हैं।
बहरहाल पूर्वोत्तर के चुनाव परिणाम होने वाले कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनावों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का काम करेगा। पार्टी आगामी आम चुनाव को लेकर भी बम-बम है। सवाल यह है कि यदि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ नीति और रणनीति नहीं है तो वह आम चुनाव में भाजपा को चुनौती कैसे दे पाएगा? और यदि 2019 में विपक्ष का तंबू फिर उखड़ा तो उसका संभल पाना बहुत मुश्किल होगा।
भाजपा और केंद्र सरकार के लिए जरूरी है कि वह अपनी बढ़ती ताकत से सबक ले कि लोकतंत्र में ताकत का मतलब सहजशीलता होती है। अब देश के लगभग 68 प्रतिशत आबादी पर भाजपा और उनके साथी दलों का शासन है। ऐsसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह जनोपयोगी नीतियों के प्रति व्यावहारिक नीति अपनाए तथा अल्पसंख्यक, दलितों एवं आदिवासी समाज को ऐसा भावनात्मक संदेश दे कि उन्हें इस बात का अहसास हो कि भाजपा उनके हितों के संरक्षण के लिए संवेदनशील है।
|
उत्तर-पूर्व के राज्य जहां खुद को क्षेत्रीय दलों के मकड़जाल से घिरा पाते रहे और केंद्र से टकराव करके राज्यों में राजनीति करते थे वह स्थिति अब लगभग समाप्त हो गई है। पूर्वोत्तर के राज्य अब भारत संघ से जुड़ा महसूस कर रहे हैं। त्रिपुरा से बड़ी जीत नगालैंड में हुई है जहां भाजपा की प्रभावी उपस्थिति इसीलिए महत्वपूर्ण है कि नगा विद्रोहियों ने भारतीय एकता के लिए हमेशा चुनौती पेश की उसी राज्य में राष्ट्रीय पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इस दृष्टि से पूर्वोत्तर चुनावों के परिणाम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। त्रिपुरा का चुनाव ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा। अनुमान तो पहले से ही था कि इस वामपंथी गढ़ में भाजपा को इस बार सफलता मिल सकती है किन्तु ऐसी उम्मीद किसी को भी नहीं थी कि भाजपा को इतना प्रचंड बहुमत मिलेगा और वामपंथ की दीवार इतनी जर्जर हो चुकी थी इस राज्य में। त्रिपुरा चुनाव परिणाम वामपंथियों के राजनीतिक ढोंग की पोल खोलता है। जिस माणिक सरकार को एक ईमानदारी की मूर्ति के रूप में इतने दिनों तक पेश करके यह साबित करने की कोशिश की जाती रही कि त्रिपुरा में सब कुछ ठीक-ठाक है, असल में ऐसा नहीं था। इस राज्य के लोग वामपंथी शासन व्यवस्था से इस हद तक परेशान थे कि उन्होंने विकल्प के तौर पर दूसरी पार्टियों को भी आजमाने की कोशिश की थी। तभी तो दो हज़ार तेरह में कांग्रेस को छत्तीस. पाँच प्रतिशत वोटों के साथ दस सीटें मिली थीं। किन्तु उन्हें लगा कि कांग्रेस वामपंथियों का सही विकल्प नहीं बन सकती। यही कारण है कि इस चुनाव में कांग्रेस कुल एक. आठ प्रतिशत वोटों पर सिमट गई और उसे एक भी सीट नहीं मिली। त्रिपुरा में जिस भाजपा को दो हज़ार तेरह में मात्र एक. पाँच प्रतिशत वोट मिला था और वह एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, इस बार तैंतालीस प्रतिशत वोट लेकर पैंतीस सीटें हासिल कर लीं। यह सही है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को चुनावी रणनीति में महारथ हासिल है वहीं उसके पास समर्पित युवा कार्यकर्ता भी हैं जो हर मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में कामयाबी हासिल करते हैं किन्तु उसकी इस चुनावी शैली से बिल्कुल विपरीत है वामपंथियों की शैली। इस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में जबरदस्त उठापटक चलती है। एक धड़ा कांग्रेस के साथ गठबंधन का पक्षधर है तो उससे बड़ा धड़ा कांग्रेस से किसी तरह के गठबंधन के खिलाफ है। वहीं राज्यों में नेतृत्व सत्तर साला बुजुर्गों के हाथ में है जो युवा भावनाओं को समझ पाने में पूरी तरह असमर्थ रहते हैं। इसके अलावा वामपंथियों की एक और पोल खुली है, वह यह है कि यह लोग राज्य का नेतृत्व किसी ईमानदार छवि वाले नेता को तो सौंप देते हैं किन्तु उसके पीछे पार्टी का कैडर दीमक की तरह जनता का शोषण करने पर लग जाता है। यही हालत पश्चिम बंगाल में भी थी। ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य को यह अच्छी तरह मालूम था कि उनकी ईमानदार छवि के कारण ही पार्टी एक ईमानदार पार्टी की छवि हासिल कर पाई है किन्तु ठेके देने में भ्रष्टाचार, आम कारोबारियों से अवैध वसूली तथा अपने कैडर को ही रोजगार दिलाने की हरकतों से आम आदमी दुखी हो चुका था। जैसे ही उन्हें ममता बनर्जी के रूप में एक विकल्प मिला उन्होंने वामपंथियों को सबक सिखा दिया। यही हालत त्रिपुरा में भी थी। त्रिपुरा में माणिक सरकार की छवि अत्यंत ईमानदार राजनेता की है किन्तु लूट-खसोट वामपंथी ही करते थे। नई कार खरीदने पर निश्चित राशि वामपंथी नेताओं को देनी पड़ती थी। तमाम सार्वजनिक कार्यों के लिए ठेका किसी कामरेड को ही मिलता था और वह भुगतान लेकर पार्टी को कुछ राशि चन्दा देकर बाकी डकार जाता था। सड़कें पहले जैसी ही टूटी रहतीं, स्कूल, अस्पताल यहां तक कि पुलिस स्टेशनों के भवन नहीं बन पाए। आज का युवा ऐसी सरकारों को पसंद नहीं करता और न तो वामपंथी सिद्धांत के लिए आंख मूंद कर वामपंथी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के लिए तैयार है। अब आते हैं मेघालय पर क्योंकि इस राज्य के चुनाव परिणाम से कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा सकेगी। दो हज़ार तेरह के चुनाव में इस राज्य में कांग्रेस को चौंतीस. आठ प्रतिशत वोट के साथ उनतीस सीटें मिली थीं। उसे राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत मिला हुआ था किन्तु दो हज़ार अट्ठारह में उसके वोटों में छह प्रतिशत की कमी आई और इस बार के चुनाव में वह सिर्फ अट्ठाईस. पाँच प्रतिशत वोट हासिल करके इक्कीस सीटें ही हासिल कर पाई। राज्य में भाजपा को एक. पच्चीस प्रतिशत वोट मिला था किन्तु सीट एक भी नहीं मिली थी किन्तु दो हज़ार अट्ठारह के चुनाव में इस पार्टी को नौ. छः प्रतिशत के साथ दो सीटें हासिल हुईं। मेघालय कांग्रेस के हाथ से खिसकता हुआ नजर आ रहा है। राज्य में एनपीपी और यूडीपी ने क्रमश बीस. छः और सत्रह. एक प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस को बहुमत के इकतीस के आंकड़े से काफी दूर कर दिया है वे ही कांग्रेस के लिए घातक साबित होने वाली हैं। रही बात भाजपा की तो उसने इस राज्य में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज कराई है कि सभी की नजर उसी पर है। कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कैडर और नीतियां हैं। मौजूदा नेतृत्व समझता है कि कब मोदी सरकार ऐसी गलती करे कि कांग्रेस मजबूत हो। कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत सारे मुद्दे उठाए भी किन्तु वह किसी भी मुद्दे में सरकार के खिलाफ एक भी आरोप को तर्कसंगत तरीके से सही साबित नहीं कर पाई। यही नहीं, जिन मुद्दों को कांग्रेस उछालती है उन्हीं का जब विश्लेषण होता है तो आरोप के छींटें उन्हीं पर पड़ने लग जाते हैं। फिर कांग्रेस चुप्पी साध लेती है। कांग्रेस कभी भी आम आदमी से जुड़े मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि को प्रभावी तरीके से नहीं उठाती। इसी से लोग उसके साथ जुड़ना तो दूर कटते ही चले जा रहे हैं। बहरहाल पूर्वोत्तर के चुनाव परिणाम होने वाले कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनावों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का काम करेगा। पार्टी आगामी आम चुनाव को लेकर भी बम-बम है। सवाल यह है कि यदि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ नीति और रणनीति नहीं है तो वह आम चुनाव में भाजपा को चुनौती कैसे दे पाएगा? और यदि दो हज़ार उन्नीस में विपक्ष का तंबू फिर उखड़ा तो उसका संभल पाना बहुत मुश्किल होगा। भाजपा और केंद्र सरकार के लिए जरूरी है कि वह अपनी बढ़ती ताकत से सबक ले कि लोकतंत्र में ताकत का मतलब सहजशीलता होती है। अब देश के लगभग अड़सठ प्रतिशत आबादी पर भाजपा और उनके साथी दलों का शासन है। ऐsसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह जनोपयोगी नीतियों के प्रति व्यावहारिक नीति अपनाए तथा अल्पसंख्यक, दलितों एवं आदिवासी समाज को ऐसा भावनात्मक संदेश दे कि उन्हें इस बात का अहसास हो कि भाजपा उनके हितों के संरक्षण के लिए संवेदनशील है।
|
5 जून को होने वाली बृजभूषण शरण सिंह की महारैली को प्रशासनिक निर्देश बताते हुए रद्द कर दिया गया है। रैली अयोध्या में होने वाली थी जिसमे संत सम्मेलन के माध्यम से दिल्ली में चल रहे धरने के विरोध में मत तैयार करने का उद्देश्य था।
5 जून को होने वाली बृजभूषण शरण सिंह की महारैली को प्रशासनिक निर्देश बताते हुए रद्द कर दिया गया है। रैली अयोध्या में होने वाली थी जिसमे संत सम्मेलन के माध्यम से दिल्ली में चल रहे धरने के विरोध में मत तैयार करने का उद्देश्य था। कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की। दरअसल 5 जून को जन चेतना महारैली, अयोध्या चलो का आयोजन किया जाना था परन्तु बृजभूषण ने इस रैली के स्थगित होने की सूचना यह कहते हुए दी की पुलिस अभी आरोपियों की जांच कर रही है और सुप्रीम कोर्ट के गंभीर निर्देश भी हैं अतः दोनों का सम्मान करते हुए इस रैली को स्थगित किया जाता है।
बृजभूषण शरण सिंह के विरोध में दिल्ली के जंतरमंतर पर एथलीट्स लगातार धरने पर बैठे हुए हैं जिसको लेकर बृजभूषण कई बार इसे राजनैतिक साजिश बताते आए हैं। उन्होंने इस आंदोलन के पीछे किसी बड़े उद्योगपति के होने का भी दावा किया है। पहलवानों द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बृजभूषण अब तक लगातार नकारते आ रहे हैं। उनका कहना है आंदोलन प्रांतवाद, क्षेत्रवाद और जातिवाद पर आधारित है। इसी बात को लेकर उन्होंने 5 जून को अयोध्या में एक संत सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया था।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय जनता पार्टी ने बृजभूषण शरण सिंह को अयोध्या में होने वाली रैली को रद्द करने के लिए कहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें दिल्ली में हो रहे पहलवानों के आंदोलन के मामले में अनावश्यक बयानबाजी ना करने की हिदायत दी है और इसके बाद रैली रद्द करने का फैसला ले लिया गया। बृजभूषण ने दावा किया था कि इस रैली में 11 लाख लोग इकट्ठे हो सकते हैं।
बृजभूषण शरण सिंह पर एथलीट्स ने उत्पीड़न के आरोप लगाए थे जिसमे एक मामला नाबालिग से यौन उत्पीड़न का भी है। पहलवानों ने आरोप लगाए हैं कि बृजभूषण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से कई बार परेशान किया है। इस मामले को लेकर पहलवानों ने 21 अप्रैल को शिकायत की जिसपर 28 अप्रैल को एफआईआर दर्ज हुई थी। तब से पुलिस लगातार इन आरोपों की जांच पड़ताल करने में लगी हुई है।
हालांकि पुलिस को अभी तक बृजभूषण के खिलाफ़ कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे ये साबित हो कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप सही है। पुलिस के अनुसार इन आरोपों की जांच करने में अभी दो सप्ताहों का समय और लग सकता है जिसके बाद वह अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसी बीच पहलवानों ने अपने मेडल्स हरिद्वार में गंगा में फेंकने का ऐलान किया था। जिसे किसान नेता नरेश टिकैत ने उनसे लेकर उन्हें न्याय दिलाने की बात कही है।
|
पाँच जून को होने वाली बृजभूषण शरण सिंह की महारैली को प्रशासनिक निर्देश बताते हुए रद्द कर दिया गया है। रैली अयोध्या में होने वाली थी जिसमे संत सम्मेलन के माध्यम से दिल्ली में चल रहे धरने के विरोध में मत तैयार करने का उद्देश्य था। पाँच जून को होने वाली बृजभूषण शरण सिंह की महारैली को प्रशासनिक निर्देश बताते हुए रद्द कर दिया गया है। रैली अयोध्या में होने वाली थी जिसमे संत सम्मेलन के माध्यम से दिल्ली में चल रहे धरने के विरोध में मत तैयार करने का उद्देश्य था। कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की। दरअसल पाँच जून को जन चेतना महारैली, अयोध्या चलो का आयोजन किया जाना था परन्तु बृजभूषण ने इस रैली के स्थगित होने की सूचना यह कहते हुए दी की पुलिस अभी आरोपियों की जांच कर रही है और सुप्रीम कोर्ट के गंभीर निर्देश भी हैं अतः दोनों का सम्मान करते हुए इस रैली को स्थगित किया जाता है। बृजभूषण शरण सिंह के विरोध में दिल्ली के जंतरमंतर पर एथलीट्स लगातार धरने पर बैठे हुए हैं जिसको लेकर बृजभूषण कई बार इसे राजनैतिक साजिश बताते आए हैं। उन्होंने इस आंदोलन के पीछे किसी बड़े उद्योगपति के होने का भी दावा किया है। पहलवानों द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बृजभूषण अब तक लगातार नकारते आ रहे हैं। उनका कहना है आंदोलन प्रांतवाद, क्षेत्रवाद और जातिवाद पर आधारित है। इसी बात को लेकर उन्होंने पाँच जून को अयोध्या में एक संत सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया था। सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय जनता पार्टी ने बृजभूषण शरण सिंह को अयोध्या में होने वाली रैली को रद्द करने के लिए कहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें दिल्ली में हो रहे पहलवानों के आंदोलन के मामले में अनावश्यक बयानबाजी ना करने की हिदायत दी है और इसके बाद रैली रद्द करने का फैसला ले लिया गया। बृजभूषण ने दावा किया था कि इस रैली में ग्यारह लाख लोग इकट्ठे हो सकते हैं। बृजभूषण शरण सिंह पर एथलीट्स ने उत्पीड़न के आरोप लगाए थे जिसमे एक मामला नाबालिग से यौन उत्पीड़न का भी है। पहलवानों ने आरोप लगाए हैं कि बृजभूषण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से कई बार परेशान किया है। इस मामले को लेकर पहलवानों ने इक्कीस अप्रैल को शिकायत की जिसपर अट्ठाईस अप्रैल को एफआईआर दर्ज हुई थी। तब से पुलिस लगातार इन आरोपों की जांच पड़ताल करने में लगी हुई है। हालांकि पुलिस को अभी तक बृजभूषण के खिलाफ़ कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे ये साबित हो कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप सही है। पुलिस के अनुसार इन आरोपों की जांच करने में अभी दो सप्ताहों का समय और लग सकता है जिसके बाद वह अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसी बीच पहलवानों ने अपने मेडल्स हरिद्वार में गंगा में फेंकने का ऐलान किया था। जिसे किसान नेता नरेश टिकैत ने उनसे लेकर उन्हें न्याय दिलाने की बात कही है।
|
आज के समय में सोशल मीडिया पर कब क्या दिख जाए कुछ नहीं कहा जा सकता है। अब हाल ही में भी एक तस्वीर वायरल हो रही है जो लोगों को हैरान कर रही है। जी दरअसल यह तस्वीर एक कछुए की है। मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना बीच पर कुछ स्वयंसेवकों को एक दुर्लभ समुद्री सफेद कछुआ नजर आया है। बताया जा रहा है कियावा आइलैंड टर्टल पोर्टल से जुड़े लोगों ने सबसे पहले इस नन्हें कछुए को देखा। वह रेत में रेंग रहा था और उनका कहना है शायद वह अपने रहने के ठिकाने को खोज रहा था।
आप सभी को हम यह भी बता दें कि विश्व में कुल कछुओं की 260 प्रजातियां पाई जाती हैं और विश्व में पाई जाने वाली 260 प्रजातियों में से 85 प्रजातियां एशिया में मिलते हैं। वैसे इनमें से 28 प्रजातियां भारत में मिलती हैं। आपको हम यह भी बता दें कि यूपी में 14 प्रजातियां पानी में पाई जाती हैं और एक प्रजाति जमीन पर मिलती है। इस समय तेजी से खत्म हो रहे कछुओं की कई प्रजातियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं संरक्षण समितियों ने रेड लिस्ट व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की सूची में शामिल किया है। आप जानते ही होंगे भारत में भी एक बड़ी संख्या में कछुए मिलते हैं।
वैसे आपको याद हो तो बीते रविवार को बालासोर में भी एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का कछुआ मिला था। उस कछुए का रंग सामान्य कछुए से बिलकुल अलग था और उसे पीले रंग का बताया जा रहा था। वैसे अब तक कई ऐसे कछुए मिल चुके हैं जो सामन्य से बिलकुल अलग दिखाई पड़ते हैं। फिलहाल जो सफ़ेद कछुआ मिला उस कछुए को लोगों ने आनुवंशिक समस्या का शिकार बताया है, जिसे ल्यूसिज्म कहते है। इस आनुवंशिक समस्या की वजह से किसी जानवर की त्वचा का रंग हल्का या चित्तीदार हो जाता है। फिलहाल इस कछुए के फोटोज तेजी से वायरल हो रहे हैं।
|
आज के समय में सोशल मीडिया पर कब क्या दिख जाए कुछ नहीं कहा जा सकता है। अब हाल ही में भी एक तस्वीर वायरल हो रही है जो लोगों को हैरान कर रही है। जी दरअसल यह तस्वीर एक कछुए की है। मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना बीच पर कुछ स्वयंसेवकों को एक दुर्लभ समुद्री सफेद कछुआ नजर आया है। बताया जा रहा है कियावा आइलैंड टर्टल पोर्टल से जुड़े लोगों ने सबसे पहले इस नन्हें कछुए को देखा। वह रेत में रेंग रहा था और उनका कहना है शायद वह अपने रहने के ठिकाने को खोज रहा था। आप सभी को हम यह भी बता दें कि विश्व में कुल कछुओं की दो सौ साठ प्रजातियां पाई जाती हैं और विश्व में पाई जाने वाली दो सौ साठ प्रजातियों में से पचासी प्रजातियां एशिया में मिलते हैं। वैसे इनमें से अट्ठाईस प्रजातियां भारत में मिलती हैं। आपको हम यह भी बता दें कि यूपी में चौदह प्रजातियां पानी में पाई जाती हैं और एक प्रजाति जमीन पर मिलती है। इस समय तेजी से खत्म हो रहे कछुओं की कई प्रजातियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं संरक्षण समितियों ने रेड लिस्ट व वन्य जीव अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बहत्तर की सूची में शामिल किया है। आप जानते ही होंगे भारत में भी एक बड़ी संख्या में कछुए मिलते हैं। वैसे आपको याद हो तो बीते रविवार को बालासोर में भी एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का कछुआ मिला था। उस कछुए का रंग सामान्य कछुए से बिलकुल अलग था और उसे पीले रंग का बताया जा रहा था। वैसे अब तक कई ऐसे कछुए मिल चुके हैं जो सामन्य से बिलकुल अलग दिखाई पड़ते हैं। फिलहाल जो सफ़ेद कछुआ मिला उस कछुए को लोगों ने आनुवंशिक समस्या का शिकार बताया है, जिसे ल्यूसिज्म कहते है। इस आनुवंशिक समस्या की वजह से किसी जानवर की त्वचा का रंग हल्का या चित्तीदार हो जाता है। फिलहाल इस कछुए के फोटोज तेजी से वायरल हो रहे हैं।
|
लापता हुए एएन-32 विमान को खोजने के लिए तलाश एवं बचाव अभियान पांचवें दिन, मंगलवार, भी जारी रहा। विमान में सवार 29 रक्षाकर्मियों के जीवित मिल पाने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है और अभी तक मिले सभी सबूत किसी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं।
सागर निधि में 'डायनैमिक पोजिशनिंग प्रणाली' है जो उसकी स्थिति को स्थिर रखती है और समुद्र विज्ञान संबंधी अनुसंधान के लिए यह आवश्यक होता है। इसमें आरओवी(मानवयुक्त पनडुब्बियों) सुनामी निगरानी प्रणाली की तैनाती के लिए बड़ा डेक क्षेत्र होता है।
पर्रीकर ने एक वरिष्ठ तटरक्षक अधिकारी के दावों को भी खारिज किया जिसने कहा था कि डोर्नियर दुर्घटना के दौरान भी 'इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर' (ईएलटी) ने काम नहीं किया था।
इस बीच पर्रीकर से जब जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आफ्सपा हटाने की प्रक्रिया प्रायोगिक आधार पर शुरू होनी चाहिए, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में गृह मंत्रालय को निर्णय लेना है।
|
लापता हुए एएन-बत्तीस विमान को खोजने के लिए तलाश एवं बचाव अभियान पांचवें दिन, मंगलवार, भी जारी रहा। विमान में सवार उनतीस रक्षाकर्मियों के जीवित मिल पाने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है और अभी तक मिले सभी सबूत किसी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं। सागर निधि में 'डायनैमिक पोजिशनिंग प्रणाली' है जो उसकी स्थिति को स्थिर रखती है और समुद्र विज्ञान संबंधी अनुसंधान के लिए यह आवश्यक होता है। इसमें आरओवी सुनामी निगरानी प्रणाली की तैनाती के लिए बड़ा डेक क्षेत्र होता है। पर्रीकर ने एक वरिष्ठ तटरक्षक अधिकारी के दावों को भी खारिज किया जिसने कहा था कि डोर्नियर दुर्घटना के दौरान भी 'इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर' ने काम नहीं किया था। इस बीच पर्रीकर से जब जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आफ्सपा हटाने की प्रक्रिया प्रायोगिक आधार पर शुरू होनी चाहिए, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में गृह मंत्रालय को निर्णय लेना है।
|
चिकित्सा अभ्यास, लक्षण विंसेंट के आम धारणा मौखिक विकृतियों की विवरण के साथ में। क्या यह शर्त है जो सूजन होती है विंसेंट लक्षण है और कहा कि इस तरह के एक विकृति के उद्भव के लिए उर्वर भूमि है - इन सवालों आज इस लेख में सौदा होगा।
क्या लक्षण की तरह?
अधिक सटीक, निचले होंठ के क्षेत्र में - विन्सेंट लक्षण एक शर्त है जिसमें एक व्यक्ति ठोड़ी क्षेत्र में संवेदनशीलता खो देता है। लक्षण जैसे एक जीव की विभिन्न रोग राज्यों का परिणाम है जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह और तेज शिखर periodontitis। इस विकृति भी जाना जाता है जब कृत्रिम एनजाइना, जिनमें से दूसरे खिताब - एनजाइना Simanovskiy - विंसेंट (रोग के लक्षण काफी विविध हैं)।
हमारे ऊपर वर्णित लक्षण की अभिव्यक्ति के लिए अग्रणी विकृतियों से प्रत्येक पर विचार करें।
कृत्रिम एनजाइना - एक रोग है कि टॉन्सिल की सूजन हो जाती है। spirochaete विंसेंट के साथ एक साथ विन्सेंट - विकृति का कारण धुरी छड़ प्लाट के शरीर में सक्रिय है। एनजाइना एक विशेषता ऑफ हरी कोटिंग के साथ अल्सर का गठन है। रोगी की सांस एक सड़ा हुआ गंध के साथ है। यह कहा जाना चाहिए कि इस तरह के बैक्टीरिया हमेशा एक स्वस्थ व्यक्ति के मुंह की गुहा में मौजूद हैं, हालांकि, इस तरह के क्षय दाढ़, मौखिक गुहा परिगलन में उपस्थिति, के रूप में और साथ ही प्रतिरक्षा सूक्ष्मजीवों के सामान्य कमजोर में विभिन्न कारकों सक्रिय हो जाते हैं और रोग के विकास में उनकी गतिविधियों के परिणाम राज्यों।
Fusospirochetal एनजाइना लक्षण की एक विशेषता सेट द्वारा प्रकट। इनमें शामिल हैंः
- वृद्धि tonsil को प्रभावित किया। फ़ायदेमंद, रोग एक भी पक्ष को प्रभावित करता।
- बढ़ी हुई रुग्णता और मध्यम क्षेत्रीय लिम्फ नोड्स।
- श्लेष्मा टॉन्सिल भूरा पीला पट्टिका है, जो ग्रे नीचे के साथ सतह maloboleznennyh अल्सर के गठन पैदा कर सकता है पर शिक्षा। विकृति की प्रगति, तो अल्सर ग्रसनी के अन्य भागों, साथ ही गाल या गम में होते हैं। कभी कभी अल्सर, जबकि कोई दोष के गठन के बिना चंगा कर सकते हैं।
- प्रयोग में, भोजन (निगलने के लिए) कारण दर्द, उल्लेखनीय वृद्धि लार, मुंह से दुर्गंध के साथ रोगियों।
- विकृति विज्ञान के शरीर का तापमान शायद ही कभी, सामान्य सीमा से अधिक है, हालांकि कभी-कभी रोग एक उच्च तापमान राज्य और ठंड लगना के साथ शुरू कर सकते हैं।
- स्तब्ध हो जाना और ठोड़ी के क्षेत्र में संवेदना में कमी।
विकृति गले श्लेष्मा झिल्ली सूजन को नष्ट करने के उद्देश्य से उपचार। अक्सर, कर्ण व स्वरतंत्र विशेषज्ञ, डॉक्टर rinses या स्नेहन प्रभावित क्षेत्र लिख। रोग के एक लंबे समय तक पाठ्यक्रम की स्थिति में एंटीबायोटिक चिकित्सा का सहारा लिया। कृत्रिम एनजाइना के साथ रोगियों हमेशा अलग-थलग, रोग के गंभीर रूपों में - अस्पताल में भर्ती कर रहे हैं। बीमारी की रोकथाम के मुख्य सिद्धांत शरीर की सुरक्षात्मक कार्यों को मजबूत बनाने और प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए है।
Periodontitis - विकृति है कि जड़ की नोक के माध्यम से अस्थि ऊतक में गुहा में प्रवेश करने से संक्रमण के कारण होता। रोग दांत की जड़ खोल की सूजन का कारण बनता है। के अभाव में उपचार periodontitis लक्षण और विन्सेन्ट सहित विभिन्न लक्षण, प्रकट हुआ। रोग के उलटने कई कारकों पर निर्भर करता है। चिकित्सा देखभाल के लिए समय पर उपयोग, मानव शरीर, आदि की सामान्य स्थिति विकृति की व्यवस्था पर विचार करें।
दीप गुहाओं pulpitis की ओर जाता है - लुगदी, जिससे सूक्ष्मजीवों रूट कैनाल के माध्यम से periodontium में मिल की सूजन। वहाँ भी पूति में चोट की वजह से अस्थि ऊतक में बैक्टीरिया के प्रवेश की अन्य तरीकों से, उदाहरण के लिए, लेकिन मंच - हड्डी में सूजन का सबसे आम कारण। ऊतक अमीर रिसेप्टर्स - - सूजन propotevanie तरल पदार्थ, और periodontal तब होता है जब दबाव वृद्धि करने के लिए प्रतिक्रिया करता है। जब यह सूजन दर्द होता है।
periodontitis की एक विशेषता धड़कते दर्द है, जो सख्ती से स्थानीय है बढ़ रही है। कभी कभी, पर दांत के समापन दर्द सहना मुश्किल है, रोगियों खाने के लिए नहीं कर सकते हैं। एक बीमार आदमी सिर्फ दांत है, जो भी मोबाइल, दांत के आसपास मसूड़ों, साथ ही होंठ और गाल प्रफुल्लित हो जाता है के किनारे स्पर्श करते हैं, शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। periodontitis के सहवर्ती लक्षण विंसेंट का एक लक्षण हो सकता है। उसके के लक्षण पहले उल्लेखः स्तब्ध हो जाना तथा संवेदना में कमी ठोड़ी के ऊतकों में।
वहाँ तीव्र और जीर्ण periodontitis हैं। तरल सूजन के दौरान गठन दांत की रूट कैनाल के माध्यम से फैली हुई है, तो periodontitis जीर्ण हो जाता है। दर्द सिंड्रोम दृढ़ता से स्पष्ट नहीं है और दांत के शीर्ष में रोग प्रक्रियाओं धीरे-धीरे प्रवाह। प्रभावित हड्डी में गुणा बैक्टीरिया, विषाक्त पदार्थों है कि "जहर" मानव शरीर का स्राव करते हैं और विभिन्न अंग प्रणालियों (जोड़ों, दिल, गुर्दे) के रोगों के विकास के लिए नेतृत्व।
अन्यथा विकास periodontitis जो उचित उपचार के अभाव में समय के साथ पीप चरण में आगे बढ़ सकते हैं के गंभीर रूप प्राप्त करता है।
periodontitis की उपर्युक्त रूपों एक लंबी और उच्च कुशल उपचार की आवश्यकता है। चिकित्सा का मुख्य लक्ष्य - मवाद सूजन स्थानीयकरण की जल निकासी प्रदान करते हैं। में भड़काऊ प्रक्रिया के उपचार के पहले डॉक किया गया है, आगे की प्रक्रिया किया जाता है एंटीसेप्टिक लुगदी तो अस्थायी भरने के लिए निर्धारित है। के दौरान चिकित्सकीय हस्तक्षेप रेडियोग्राफी से अस्थि स्वास्थ्य के लिए नजर रखी जा रही।
पुरानी periodontitis दवा दवाओं कि periodontal बहाली को प्रोत्साहित का उपयोग कर के उपचार में। सहवर्ती उपचारों भौतिक चिकित्सा बन सकते हैंः वैद्युतकणसंचलन, यूएचएफ, माइक्रोवेव, लेजर, चुंबकीय चिकित्सा। कुछ मामलों में, एक विरोधी बैक्टीरियल उपचार।
एंटीबायोटिक्स गहरी periodontal जेब के गठन के मामले में स्थानिक इस्तेमाल किया जा सकता। रूट कैनाल की सील सामग्री, जो प्रत्येक मामले में व्यक्तिगत रूप से चुना जाता है किया जाता है।
सूजन ऊतक, या रूढ़िवादी चिकित्सा एक उचित परिणाम के लिए नेतृत्व नहीं करता है के व्यापक क्षेत्रों को प्रभावित करता है, तो शल्य चिकित्सा की। जोड़-तोड़ के प्रयोजन के दांत की जड़ के शीर्ष की लकीर है। गम आदेश हड्डी तक पहुंच हासिल करने में छोटा सा चीरा किया जाता है। अगला प्रभावित संरचना निकालने के लिए, चैनल की नोक बंद है। अस्थि पुनर्जनन - एक लंबी प्रक्रिया। उपचार सकारात्मक परिवर्तन करने के लिए नेतृत्व नहीं करता है, दांत से निकाले जा सकते हैं।
आदेश में इस रोग के विकास से बचने के लिए, ध्यान से मौखिक स्वच्छता के लिए निगरानी की जानी चाहिए। यह अनिवार्य दो बार दैनिक दांत ब्रश करने में शामिल है। इस मामले में, टूथब्रश टूथपेस्ट चुनने में समय-समय पर बदला जाना चाहिए, ईमानदार। कम से कम एक बार एक वर्ष एक पेशेवर प्रक्रिया को दूर करने के लिए पट्टिका दंत चिकित्सक करने के लिए लागू करने के लिए।
तथ्य यह है कि मुंह में शेष दांत एक बढ़े हुए लोड सहन करने के लिए शून्य दांत निकलना नेतृत्व। दाढ़ कमजोर, मौखिक भड़काऊ प्रक्रिया हो सकती है, जो भविष्य में periodontitis के लिए नेतृत्व करेंगे है।
Periodontitis - एक नहीं बल्कि घातक रोग है क्योंकि यह जटिलताओं, उन के बीच का एक बहुत का कारण बनता है - गंभीर पूति, चेहरे की सूजन कोमल ऊतक प्रक्रियाओं, जबड़े अस्थिमज्जा का प्रदाह।
अस्थिमज्जा का प्रदाह क्या है?
लक्षण होता है विंसेंट के लिए एक अन्य कारण अस्थिमज्जा का प्रदाह है। इस विकृति विज्ञान, कोई फर्क नहीं पड़ता है, जिसमें मानव कंकाल अनुभाग दिखाया गया है, भड़काऊ प्रकृति के संक्रामक रोगों के एक समूह के अंतर्गत आता है।
periosteum, हड्डी पदार्थ, अस्थि मज्जाः जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह सभी ऊतकों को प्रभावित करता है। विकृति लोग कोई चालीस साल से अधिक उम्र में मुख्य रूप से होता है। हालांकि, वहाँ बच्चों में और बुजुर्गों में बीमारी के मामलों रहे हैं। यह सब कितना व्यक्ति क्षय दांत से प्रभावित पर निर्भर करता है। समान रूप से अस्थिमज्जा का प्रदाह दोनों पुरुषों और महिलाओं परेशान। लक्षण विन्सेंट अस्थिमज्जा का प्रदाह ठोड़ी क्षेत्र को प्रभावित करता है, और इस तथ्य यह है कि मुख्य रूप से विकृति ऊपरी से निचले जबड़े में आम है के कारण है।
इससे पहले, जब मौखिक स्वच्छता उपेक्षा की गई, अस्थिमज्जा का प्रदाह जबड़े विकृति के बारे में 40% की अन्य हड्डियों के बीच में कब्जा कर लिया। कुछ ही समय पहले, स्थिति बेहतर करने के लिए बदल गया है।
आज, मौखिक गुहा के व्यापक योजना बनाई पुनर्वास के लिए और बच्चों में और वयस्कों में धन्यवाद, जबड़े गिरा दिया, और एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की अस्थिमज्जा का प्रदाह के साथ रोगियों का प्रतिशत रोग कम गंभीर बनाने के लिए अनुमति दी गई है।
ज्यादातर मामलों में, जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह क्षय और periodontal रोग जटिलता का एक परिणाम है। इस समूह में कॉल स्वीकार किए जाते हैं अस्थिमज्जा का प्रदाह odontogenic (stomatogennymi)। संक्रमण सड़ा हुआ दाढ़ के माध्यम से हड्डियों के ढांचे में हो जाता है। सूजन के फोकी विविध माइक्रोफ्लोरा प्रस्तुत करते हैं। यह स्ट्रेप्टोकोकस और Staphylococcus (सफेद और सोना), pneumococcus और अन्य जीवाणुओं।
संपर्क अस्थिमज्जा का प्रदाह - विकृति है जो त्वचा या म्यूकोसा (जैसे, फुंसी चेहरा) के संक्रमण से उत्पन्न होती है। यहाँ विशिष्ट अस्थिमज्जा का प्रदाह का आवंटनः
- तपेदिक,
- actinomycotic।
कभी कभी अस्थि मज्जा जबड़े रक्त में प्रवेश बैक्टीरिया से होता है। इस हालत hematogenous अस्थिमज्जा का प्रदाह इन्फ्लूएंजा, टाइफाइड बुखार, स्कार्लेट ज्वर, खसरा के रूप में संक्रमण, इसके बाद होने वाली के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
अलग समूह अस्थिमज्जा का प्रदाह, चोट से उत्पन्न (अस्थिभंग, भारी चोट)। भंग पर लक्षण विन्सेन्ट, जब मानसिक तंत्रिका संवेदनशीलता में और परेशान रोगियों ध्यान दें निचले होंठ अकड़ना कम दंतउलूखल तंत्रिका, सूजन रिसाव में गठन के संपीड़न के कारण होता है।
रोग के दौरान अलग हो सकता है, और अक्सर यह, एक पूरे के रूप जीव की स्थिति पर निर्भर करता है प्रभावित क्षेत्र में रक्त परिसंचरण की भयावहता। कुछ मामलों में, छोटे पैमाने पर, की हड्डी परिगलन कारण एक प्राथमिक साइट पर। ऐसे मामलों में, हम एक सीमित अस्थिमज्जा का प्रदाह के बारे में बात कर रहे हैं। इस रोग की प्रगति, तो सूजन जबड़े के आसपास के कोमल ऊतक को हस्तांतरित किया गया। इस तरह की एक शर्त periostitis, या कोशिका के रूप में प्रकट हो सकता है। कोशिका - एक तीव्र की पीप सूजन रिक्त स्थान (अक्सर कोमल ऊतक) है, जो बोतलबंद है और इस तरह के एक फोड़ा के रूप में कोई स्पष्ट सीमाओं, है। वैसे, विन्सेन्ट अक्सर एक लक्षण कोशिका के साथ हो सकता है, रोगियों प्रभावित क्षेत्र में सनसनी का नुकसान नोटिस।
सूजन के बिंदु पर अस्थि मज्जा का रोग प्रक्रिया की शुरुआत में भूरे, काले लाल रंग हो जाता है। बाद में घावों कि पूरे गुहा में विलय मवाद वाले का गठन किया। मवाद periosteum में हो जाता है, मसूड़ों और जबड़े वर्गों के परिगलन का कारण बनता है। का गठन sequesters। छोटे रक्त वाहिकाओं में थ्रोम्बी पाए जाते हैं कि पिघलने गुज़रना पड़ता है। हड्डी हड्डी परिगलन के क्षेत्र में दिखाई देते हैं, रक्त की आपूर्ति धीरे-धीरे कम हो जाता है, हड्डियों के ढांचे की परिगलन के पैमाने में वृद्धि करने के लिए अग्रणी। आयाम बरामदगी thrombosed जहाजों की वजह से आकार। गंभीर मामलों में पूरे जबड़े की नेक्रोसिस हो सकती है। साथ फैलाना (फैलाना) अस्थिमज्जा का प्रदाह जुड़े इस तरह की स्थितियों।
वहाँ विकृति के कई रूप हैं। अर्धजीर्ण अस्थिमज्जा का प्रदाह के दौरान स्वस्थ हड्डियों और मृत के बीच एक तथाकथित शाफ्ट होता है। कुछ मामलों में, वहाँ अवशोषण पृथक है। पुनर्जनन प्रक्रियाओं हो सकता है - चारों ओर प्रभावित क्षेत्र नई हड्डियों के ढांचे का गठन किया। अन्यथा, वहाँ बरामदगी की अस्वीकृति है। अर्धजीर्ण रूप तीव्र अस्थिमज्जा का प्रदाह और जीर्ण के बीच की सीमा है।
अस्थिमज्जा का प्रदाह के गंभीर रूप के दौरान भड़काऊ प्रक्रिया के एक सक्रिय विकास है। मरीजों को जबड़े (बोरिंग शूटिंग) कि एक उच्च बुखार, ठंड लगना, तेजी से सांस लेने और दिल की दर की पृष्ठभूमि पर विकसित में तेज दर्द की सूचना दें। इसलिए लक्षण विन्सेंट अस्थिमज्जा का प्रदाह - जबड़े में दर्द के अलावा निचले होंठ की संवेदनशीलता को छोड़ सकता है। रोग दांत एक बीमार दांत के निकट के शुरू होने के कुछ दिनों के बाद, गतिशीलता मिलता है।
टटोलने का कार्य जबड़े सूजन और दर्दनाक उत्तेजना के साथ पता चलता है। वहाँ सूजन और मसूड़ों, गाल या चेहरे के अन्य भागों की सूजन है। रोग की अवधि लिम्फ नोड्स में वृद्धि हुई है। मिश्रण जबड़े की मांसपेशियों, स्तब्ध हो जाना (विन्सेन्ट लक्षण) - बाद में, इन सभी लक्षण बांध के साथ हो सकता। रोग के उलटने समय पर निदान और आगे के इलाज पर निर्भर करता है।
रोगी की सामान्य हालत पारंपरिक हल्का, मध्यम और गंभीर में वर्गीकृत किया। दुर्भाग्य से, कभी कभी घातक रोग रोग प्रक्रिया की शुरुआत से कई दिनों की अवधि में खत्म।
यह ज्ञात है कि रोगियों को शुरू में हंसमुख लग सकता है, लेकिन जल्द ही रक्तचाप में तेजी से गिरावट और वृद्धि की दिल की दर के साथ उत्साह साष्टांग प्रणाम के एक राज्य के लिए रास्ता देती है। एक व्यक्ति की उपस्थिति में नाटकीय रूप से बदल जाता है।
फैलाना अस्थिमज्जा का प्रदाह में, वहाँ नई साइटों की हड्डी में सूजन के एक क्रमिक नुकसान है। मरीज की हालत अस्थायी सुधार और स्वास्थ्य की गिरावट है, जिसके दौरान शरीर का तापमान पहले वापस सामान्य करने के लिए आ सकता है, और उसके बाद फिर से वृद्धि और ठंड लगना आवर्ती के साथ किया साथ, अस्थिर रूप में लक्षण वर्णन किया जा सकता है। तीव्र फैलाना अस्थिमज्जा का प्रदाह की स्टेज चार सप्ताह तक चल सकती है। इस प्रकार रक्त लिम्फोसाइट में भारी गिरावट आई है (15% -18% तक), प्रोटीन मूत्र में मौजूद है।
उपचारात्मक उपायों के अभाव में इस रोग के जीर्ण प्रपत्र महीने और कभी कभी साल लग और विभिन्न जटिलताओं की उपस्थिति के लिए नेतृत्व कर सकते हैंः फेफड़ों के फोड़े, एक पीप आना कपाल साइनस के गठन, तीव्र और जीर्ण गुर्दे घावों।
रेडियोग्राफी अस्थिमज्जा का प्रदाह के निदान में तरीकों में से एक है और हड्डी संरचनाओं के विनाश की सीमा निर्धारित करने में मदद करता है। हालांकि, हड्डियों में प्रारंभिक परिवर्तन रोग के प्रकोप के बाद से केवल 7-10 दिन विचार कर सकते हैं। सबसे पहले, के रूप में चित्र के द्वारा निर्धारित किया, - हड्डी संरचनाओं के क्षेत्र में एक निर्वात। इसके अलावा, बीमारी को रोकने के लिए विफल रहता है, एक्स-रे रूपों स्वस्थ और मृत ऊतकों के बीच सीमा का पता चलता है। सीमा के आकार से आकार और दौरे के स्थान के बारे में निष्कर्ष निकालना। एक्सरे विवर्तन के अलावा रोग की पहचान करने के लिए मानव शरीर के राज्य के समग्र चित्र और विन्सेन्ट लक्षण सहित संबंधित लक्षण, के विश्लेषण में मदद करता है।
अस्थिमज्जा का प्रदाह उपचार एंटीबायोटिक दवाओं और सर्जरी के एकीकृत उपयोग शामिल है। अक्सर रूढ़िवादी उपचार निर्धारित इंजेक्शन पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन या स्वागत biomitsin के रूप में। जब एंटीबायोटिक चिकित्सा, तथापि, यह महत्वपूर्ण ध्यान में दवाओं के लिए की लत के जीवाणुओं की क्षमता रखने के लिए है।
औषध उपचार 7-10 दिनों के लिए जारी रखने के लिए, सामान्य मूल्यों के लिए तापमान को कम करने के बाद भी महत्वपूर्ण है। अन्यथा, रोग छिपा हो जाएगा। अक्सर, दांत है, जो बीमारी सूजन की वजह से उत्पन्न हो गई है, के भाग्य का एक अनूठा समाधान है - वह हटाया जा रहा है। हालांकि नियम के अपवाद नहीं है।
आसन्न दांत, को बनाए रखने के उनके कार्यक्षमता को पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बस तार है, जो पूरे दांत निकलना पर रखा जाता है लागू करने के लिए। इसके अलावा, दांतों में लुगदी की सूजन और जहाँ तक संभव हो खत्म करने। जंगम सर्जिकल हटाने, जो बीमारी के शुरू होने के बाद नहीं 4-6 से पहले सप्ताह में किया जाता है के अधीन sequesters। यह मुख्य रूप से तथ्य यह है कि केवल ज़ब्ती सीमाओं की एक निर्दिष्ट अवधि के बाद स्पष्ट रूप से पहचाने हैं के कारण है।
इस प्रकार, विन्सेन्ट लक्षण अस्थिमज्जा का प्रदाह, periodontitis, तोंसिल्लितिस Simanovsky-Vincent (रोग के इस रूप के लक्षण एनजाइना कारण लक्षण विंसेंट के सामान्य लक्षण से अलग पहचाना गया) सहित गंभीर भड़काऊ रोगों, की मानव में विकास की मुख्य लक्षणों में से एक है।
|
चिकित्सा अभ्यास, लक्षण विंसेंट के आम धारणा मौखिक विकृतियों की विवरण के साथ में। क्या यह शर्त है जो सूजन होती है विंसेंट लक्षण है और कहा कि इस तरह के एक विकृति के उद्भव के लिए उर्वर भूमि है - इन सवालों आज इस लेख में सौदा होगा। क्या लक्षण की तरह? अधिक सटीक, निचले होंठ के क्षेत्र में - विन्सेंट लक्षण एक शर्त है जिसमें एक व्यक्ति ठोड़ी क्षेत्र में संवेदनशीलता खो देता है। लक्षण जैसे एक जीव की विभिन्न रोग राज्यों का परिणाम है जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह और तेज शिखर periodontitis। इस विकृति भी जाना जाता है जब कृत्रिम एनजाइना, जिनमें से दूसरे खिताब - एनजाइना Simanovskiy - विंसेंट । हमारे ऊपर वर्णित लक्षण की अभिव्यक्ति के लिए अग्रणी विकृतियों से प्रत्येक पर विचार करें। कृत्रिम एनजाइना - एक रोग है कि टॉन्सिल की सूजन हो जाती है। spirochaete विंसेंट के साथ एक साथ विन्सेंट - विकृति का कारण धुरी छड़ प्लाट के शरीर में सक्रिय है। एनजाइना एक विशेषता ऑफ हरी कोटिंग के साथ अल्सर का गठन है। रोगी की सांस एक सड़ा हुआ गंध के साथ है। यह कहा जाना चाहिए कि इस तरह के बैक्टीरिया हमेशा एक स्वस्थ व्यक्ति के मुंह की गुहा में मौजूद हैं, हालांकि, इस तरह के क्षय दाढ़, मौखिक गुहा परिगलन में उपस्थिति, के रूप में और साथ ही प्रतिरक्षा सूक्ष्मजीवों के सामान्य कमजोर में विभिन्न कारकों सक्रिय हो जाते हैं और रोग के विकास में उनकी गतिविधियों के परिणाम राज्यों। Fusospirochetal एनजाइना लक्षण की एक विशेषता सेट द्वारा प्रकट। इनमें शामिल हैंः - वृद्धि tonsil को प्रभावित किया। फ़ायदेमंद, रोग एक भी पक्ष को प्रभावित करता। - बढ़ी हुई रुग्णता और मध्यम क्षेत्रीय लिम्फ नोड्स। - श्लेष्मा टॉन्सिल भूरा पीला पट्टिका है, जो ग्रे नीचे के साथ सतह maloboleznennyh अल्सर के गठन पैदा कर सकता है पर शिक्षा। विकृति की प्रगति, तो अल्सर ग्रसनी के अन्य भागों, साथ ही गाल या गम में होते हैं। कभी कभी अल्सर, जबकि कोई दोष के गठन के बिना चंगा कर सकते हैं। - प्रयोग में, भोजन कारण दर्द, उल्लेखनीय वृद्धि लार, मुंह से दुर्गंध के साथ रोगियों। - विकृति विज्ञान के शरीर का तापमान शायद ही कभी, सामान्य सीमा से अधिक है, हालांकि कभी-कभी रोग एक उच्च तापमान राज्य और ठंड लगना के साथ शुरू कर सकते हैं। - स्तब्ध हो जाना और ठोड़ी के क्षेत्र में संवेदना में कमी। विकृति गले श्लेष्मा झिल्ली सूजन को नष्ट करने के उद्देश्य से उपचार। अक्सर, कर्ण व स्वरतंत्र विशेषज्ञ, डॉक्टर rinses या स्नेहन प्रभावित क्षेत्र लिख। रोग के एक लंबे समय तक पाठ्यक्रम की स्थिति में एंटीबायोटिक चिकित्सा का सहारा लिया। कृत्रिम एनजाइना के साथ रोगियों हमेशा अलग-थलग, रोग के गंभीर रूपों में - अस्पताल में भर्ती कर रहे हैं। बीमारी की रोकथाम के मुख्य सिद्धांत शरीर की सुरक्षात्मक कार्यों को मजबूत बनाने और प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए है। Periodontitis - विकृति है कि जड़ की नोक के माध्यम से अस्थि ऊतक में गुहा में प्रवेश करने से संक्रमण के कारण होता। रोग दांत की जड़ खोल की सूजन का कारण बनता है। के अभाव में उपचार periodontitis लक्षण और विन्सेन्ट सहित विभिन्न लक्षण, प्रकट हुआ। रोग के उलटने कई कारकों पर निर्भर करता है। चिकित्सा देखभाल के लिए समय पर उपयोग, मानव शरीर, आदि की सामान्य स्थिति विकृति की व्यवस्था पर विचार करें। दीप गुहाओं pulpitis की ओर जाता है - लुगदी, जिससे सूक्ष्मजीवों रूट कैनाल के माध्यम से periodontium में मिल की सूजन। वहाँ भी पूति में चोट की वजह से अस्थि ऊतक में बैक्टीरिया के प्रवेश की अन्य तरीकों से, उदाहरण के लिए, लेकिन मंच - हड्डी में सूजन का सबसे आम कारण। ऊतक अमीर रिसेप्टर्स - - सूजन propotevanie तरल पदार्थ, और periodontal तब होता है जब दबाव वृद्धि करने के लिए प्रतिक्रिया करता है। जब यह सूजन दर्द होता है। periodontitis की एक विशेषता धड़कते दर्द है, जो सख्ती से स्थानीय है बढ़ रही है। कभी कभी, पर दांत के समापन दर्द सहना मुश्किल है, रोगियों खाने के लिए नहीं कर सकते हैं। एक बीमार आदमी सिर्फ दांत है, जो भी मोबाइल, दांत के आसपास मसूड़ों, साथ ही होंठ और गाल प्रफुल्लित हो जाता है के किनारे स्पर्श करते हैं, शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। periodontitis के सहवर्ती लक्षण विंसेंट का एक लक्षण हो सकता है। उसके के लक्षण पहले उल्लेखः स्तब्ध हो जाना तथा संवेदना में कमी ठोड़ी के ऊतकों में। वहाँ तीव्र और जीर्ण periodontitis हैं। तरल सूजन के दौरान गठन दांत की रूट कैनाल के माध्यम से फैली हुई है, तो periodontitis जीर्ण हो जाता है। दर्द सिंड्रोम दृढ़ता से स्पष्ट नहीं है और दांत के शीर्ष में रोग प्रक्रियाओं धीरे-धीरे प्रवाह। प्रभावित हड्डी में गुणा बैक्टीरिया, विषाक्त पदार्थों है कि "जहर" मानव शरीर का स्राव करते हैं और विभिन्न अंग प्रणालियों के रोगों के विकास के लिए नेतृत्व। अन्यथा विकास periodontitis जो उचित उपचार के अभाव में समय के साथ पीप चरण में आगे बढ़ सकते हैं के गंभीर रूप प्राप्त करता है। periodontitis की उपर्युक्त रूपों एक लंबी और उच्च कुशल उपचार की आवश्यकता है। चिकित्सा का मुख्य लक्ष्य - मवाद सूजन स्थानीयकरण की जल निकासी प्रदान करते हैं। में भड़काऊ प्रक्रिया के उपचार के पहले डॉक किया गया है, आगे की प्रक्रिया किया जाता है एंटीसेप्टिक लुगदी तो अस्थायी भरने के लिए निर्धारित है। के दौरान चिकित्सकीय हस्तक्षेप रेडियोग्राफी से अस्थि स्वास्थ्य के लिए नजर रखी जा रही। पुरानी periodontitis दवा दवाओं कि periodontal बहाली को प्रोत्साहित का उपयोग कर के उपचार में। सहवर्ती उपचारों भौतिक चिकित्सा बन सकते हैंः वैद्युतकणसंचलन, यूएचएफ, माइक्रोवेव, लेजर, चुंबकीय चिकित्सा। कुछ मामलों में, एक विरोधी बैक्टीरियल उपचार। एंटीबायोटिक्स गहरी periodontal जेब के गठन के मामले में स्थानिक इस्तेमाल किया जा सकता। रूट कैनाल की सील सामग्री, जो प्रत्येक मामले में व्यक्तिगत रूप से चुना जाता है किया जाता है। सूजन ऊतक, या रूढ़िवादी चिकित्सा एक उचित परिणाम के लिए नेतृत्व नहीं करता है के व्यापक क्षेत्रों को प्रभावित करता है, तो शल्य चिकित्सा की। जोड़-तोड़ के प्रयोजन के दांत की जड़ के शीर्ष की लकीर है। गम आदेश हड्डी तक पहुंच हासिल करने में छोटा सा चीरा किया जाता है। अगला प्रभावित संरचना निकालने के लिए, चैनल की नोक बंद है। अस्थि पुनर्जनन - एक लंबी प्रक्रिया। उपचार सकारात्मक परिवर्तन करने के लिए नेतृत्व नहीं करता है, दांत से निकाले जा सकते हैं। आदेश में इस रोग के विकास से बचने के लिए, ध्यान से मौखिक स्वच्छता के लिए निगरानी की जानी चाहिए। यह अनिवार्य दो बार दैनिक दांत ब्रश करने में शामिल है। इस मामले में, टूथब्रश टूथपेस्ट चुनने में समय-समय पर बदला जाना चाहिए, ईमानदार। कम से कम एक बार एक वर्ष एक पेशेवर प्रक्रिया को दूर करने के लिए पट्टिका दंत चिकित्सक करने के लिए लागू करने के लिए। तथ्य यह है कि मुंह में शेष दांत एक बढ़े हुए लोड सहन करने के लिए शून्य दांत निकलना नेतृत्व। दाढ़ कमजोर, मौखिक भड़काऊ प्रक्रिया हो सकती है, जो भविष्य में periodontitis के लिए नेतृत्व करेंगे है। Periodontitis - एक नहीं बल्कि घातक रोग है क्योंकि यह जटिलताओं, उन के बीच का एक बहुत का कारण बनता है - गंभीर पूति, चेहरे की सूजन कोमल ऊतक प्रक्रियाओं, जबड़े अस्थिमज्जा का प्रदाह। अस्थिमज्जा का प्रदाह क्या है? लक्षण होता है विंसेंट के लिए एक अन्य कारण अस्थिमज्जा का प्रदाह है। इस विकृति विज्ञान, कोई फर्क नहीं पड़ता है, जिसमें मानव कंकाल अनुभाग दिखाया गया है, भड़काऊ प्रकृति के संक्रामक रोगों के एक समूह के अंतर्गत आता है। periosteum, हड्डी पदार्थ, अस्थि मज्जाः जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह सभी ऊतकों को प्रभावित करता है। विकृति लोग कोई चालीस साल से अधिक उम्र में मुख्य रूप से होता है। हालांकि, वहाँ बच्चों में और बुजुर्गों में बीमारी के मामलों रहे हैं। यह सब कितना व्यक्ति क्षय दांत से प्रभावित पर निर्भर करता है। समान रूप से अस्थिमज्जा का प्रदाह दोनों पुरुषों और महिलाओं परेशान। लक्षण विन्सेंट अस्थिमज्जा का प्रदाह ठोड़ी क्षेत्र को प्रभावित करता है, और इस तथ्य यह है कि मुख्य रूप से विकृति ऊपरी से निचले जबड़े में आम है के कारण है। इससे पहले, जब मौखिक स्वच्छता उपेक्षा की गई, अस्थिमज्जा का प्रदाह जबड़े विकृति के बारे में चालीस% की अन्य हड्डियों के बीच में कब्जा कर लिया। कुछ ही समय पहले, स्थिति बेहतर करने के लिए बदल गया है। आज, मौखिक गुहा के व्यापक योजना बनाई पुनर्वास के लिए और बच्चों में और वयस्कों में धन्यवाद, जबड़े गिरा दिया, और एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की अस्थिमज्जा का प्रदाह के साथ रोगियों का प्रतिशत रोग कम गंभीर बनाने के लिए अनुमति दी गई है। ज्यादातर मामलों में, जबड़े की अस्थिमज्जा का प्रदाह क्षय और periodontal रोग जटिलता का एक परिणाम है। इस समूह में कॉल स्वीकार किए जाते हैं अस्थिमज्जा का प्रदाह odontogenic । संक्रमण सड़ा हुआ दाढ़ के माध्यम से हड्डियों के ढांचे में हो जाता है। सूजन के फोकी विविध माइक्रोफ्लोरा प्रस्तुत करते हैं। यह स्ट्रेप्टोकोकस और Staphylococcus , pneumococcus और अन्य जीवाणुओं। संपर्क अस्थिमज्जा का प्रदाह - विकृति है जो त्वचा या म्यूकोसा के संक्रमण से उत्पन्न होती है। यहाँ विशिष्ट अस्थिमज्जा का प्रदाह का आवंटनः - तपेदिक, - actinomycotic। कभी कभी अस्थि मज्जा जबड़े रक्त में प्रवेश बैक्टीरिया से होता है। इस हालत hematogenous अस्थिमज्जा का प्रदाह इन्फ्लूएंजा, टाइफाइड बुखार, स्कार्लेट ज्वर, खसरा के रूप में संक्रमण, इसके बाद होने वाली के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। अलग समूह अस्थिमज्जा का प्रदाह, चोट से उत्पन्न । भंग पर लक्षण विन्सेन्ट, जब मानसिक तंत्रिका संवेदनशीलता में और परेशान रोगियों ध्यान दें निचले होंठ अकड़ना कम दंतउलूखल तंत्रिका, सूजन रिसाव में गठन के संपीड़न के कारण होता है। रोग के दौरान अलग हो सकता है, और अक्सर यह, एक पूरे के रूप जीव की स्थिति पर निर्भर करता है प्रभावित क्षेत्र में रक्त परिसंचरण की भयावहता। कुछ मामलों में, छोटे पैमाने पर, की हड्डी परिगलन कारण एक प्राथमिक साइट पर। ऐसे मामलों में, हम एक सीमित अस्थिमज्जा का प्रदाह के बारे में बात कर रहे हैं। इस रोग की प्रगति, तो सूजन जबड़े के आसपास के कोमल ऊतक को हस्तांतरित किया गया। इस तरह की एक शर्त periostitis, या कोशिका के रूप में प्रकट हो सकता है। कोशिका - एक तीव्र की पीप सूजन रिक्त स्थान है, जो बोतलबंद है और इस तरह के एक फोड़ा के रूप में कोई स्पष्ट सीमाओं, है। वैसे, विन्सेन्ट अक्सर एक लक्षण कोशिका के साथ हो सकता है, रोगियों प्रभावित क्षेत्र में सनसनी का नुकसान नोटिस। सूजन के बिंदु पर अस्थि मज्जा का रोग प्रक्रिया की शुरुआत में भूरे, काले लाल रंग हो जाता है। बाद में घावों कि पूरे गुहा में विलय मवाद वाले का गठन किया। मवाद periosteum में हो जाता है, मसूड़ों और जबड़े वर्गों के परिगलन का कारण बनता है। का गठन sequesters। छोटे रक्त वाहिकाओं में थ्रोम्बी पाए जाते हैं कि पिघलने गुज़रना पड़ता है। हड्डी हड्डी परिगलन के क्षेत्र में दिखाई देते हैं, रक्त की आपूर्ति धीरे-धीरे कम हो जाता है, हड्डियों के ढांचे की परिगलन के पैमाने में वृद्धि करने के लिए अग्रणी। आयाम बरामदगी thrombosed जहाजों की वजह से आकार। गंभीर मामलों में पूरे जबड़े की नेक्रोसिस हो सकती है। साथ फैलाना अस्थिमज्जा का प्रदाह जुड़े इस तरह की स्थितियों। वहाँ विकृति के कई रूप हैं। अर्धजीर्ण अस्थिमज्जा का प्रदाह के दौरान स्वस्थ हड्डियों और मृत के बीच एक तथाकथित शाफ्ट होता है। कुछ मामलों में, वहाँ अवशोषण पृथक है। पुनर्जनन प्रक्रियाओं हो सकता है - चारों ओर प्रभावित क्षेत्र नई हड्डियों के ढांचे का गठन किया। अन्यथा, वहाँ बरामदगी की अस्वीकृति है। अर्धजीर्ण रूप तीव्र अस्थिमज्जा का प्रदाह और जीर्ण के बीच की सीमा है। अस्थिमज्जा का प्रदाह के गंभीर रूप के दौरान भड़काऊ प्रक्रिया के एक सक्रिय विकास है। मरीजों को जबड़े कि एक उच्च बुखार, ठंड लगना, तेजी से सांस लेने और दिल की दर की पृष्ठभूमि पर विकसित में तेज दर्द की सूचना दें। इसलिए लक्षण विन्सेंट अस्थिमज्जा का प्रदाह - जबड़े में दर्द के अलावा निचले होंठ की संवेदनशीलता को छोड़ सकता है। रोग दांत एक बीमार दांत के निकट के शुरू होने के कुछ दिनों के बाद, गतिशीलता मिलता है। टटोलने का कार्य जबड़े सूजन और दर्दनाक उत्तेजना के साथ पता चलता है। वहाँ सूजन और मसूड़ों, गाल या चेहरे के अन्य भागों की सूजन है। रोग की अवधि लिम्फ नोड्स में वृद्धि हुई है। मिश्रण जबड़े की मांसपेशियों, स्तब्ध हो जाना - बाद में, इन सभी लक्षण बांध के साथ हो सकता। रोग के उलटने समय पर निदान और आगे के इलाज पर निर्भर करता है। रोगी की सामान्य हालत पारंपरिक हल्का, मध्यम और गंभीर में वर्गीकृत किया। दुर्भाग्य से, कभी कभी घातक रोग रोग प्रक्रिया की शुरुआत से कई दिनों की अवधि में खत्म। यह ज्ञात है कि रोगियों को शुरू में हंसमुख लग सकता है, लेकिन जल्द ही रक्तचाप में तेजी से गिरावट और वृद्धि की दिल की दर के साथ उत्साह साष्टांग प्रणाम के एक राज्य के लिए रास्ता देती है। एक व्यक्ति की उपस्थिति में नाटकीय रूप से बदल जाता है। फैलाना अस्थिमज्जा का प्रदाह में, वहाँ नई साइटों की हड्डी में सूजन के एक क्रमिक नुकसान है। मरीज की हालत अस्थायी सुधार और स्वास्थ्य की गिरावट है, जिसके दौरान शरीर का तापमान पहले वापस सामान्य करने के लिए आ सकता है, और उसके बाद फिर से वृद्धि और ठंड लगना आवर्ती के साथ किया साथ, अस्थिर रूप में लक्षण वर्णन किया जा सकता है। तीव्र फैलाना अस्थिमज्जा का प्रदाह की स्टेज चार सप्ताह तक चल सकती है। इस प्रकार रक्त लिम्फोसाइट में भारी गिरावट आई है , प्रोटीन मूत्र में मौजूद है। उपचारात्मक उपायों के अभाव में इस रोग के जीर्ण प्रपत्र महीने और कभी कभी साल लग और विभिन्न जटिलताओं की उपस्थिति के लिए नेतृत्व कर सकते हैंः फेफड़ों के फोड़े, एक पीप आना कपाल साइनस के गठन, तीव्र और जीर्ण गुर्दे घावों। रेडियोग्राफी अस्थिमज्जा का प्रदाह के निदान में तरीकों में से एक है और हड्डी संरचनाओं के विनाश की सीमा निर्धारित करने में मदद करता है। हालांकि, हड्डियों में प्रारंभिक परिवर्तन रोग के प्रकोप के बाद से केवल सात-दस दिन विचार कर सकते हैं। सबसे पहले, के रूप में चित्र के द्वारा निर्धारित किया, - हड्डी संरचनाओं के क्षेत्र में एक निर्वात। इसके अलावा, बीमारी को रोकने के लिए विफल रहता है, एक्स-रे रूपों स्वस्थ और मृत ऊतकों के बीच सीमा का पता चलता है। सीमा के आकार से आकार और दौरे के स्थान के बारे में निष्कर्ष निकालना। एक्सरे विवर्तन के अलावा रोग की पहचान करने के लिए मानव शरीर के राज्य के समग्र चित्र और विन्सेन्ट लक्षण सहित संबंधित लक्षण, के विश्लेषण में मदद करता है। अस्थिमज्जा का प्रदाह उपचार एंटीबायोटिक दवाओं और सर्जरी के एकीकृत उपयोग शामिल है। अक्सर रूढ़िवादी उपचार निर्धारित इंजेक्शन पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन या स्वागत biomitsin के रूप में। जब एंटीबायोटिक चिकित्सा, तथापि, यह महत्वपूर्ण ध्यान में दवाओं के लिए की लत के जीवाणुओं की क्षमता रखने के लिए है। औषध उपचार सात-दस दिनों के लिए जारी रखने के लिए, सामान्य मूल्यों के लिए तापमान को कम करने के बाद भी महत्वपूर्ण है। अन्यथा, रोग छिपा हो जाएगा। अक्सर, दांत है, जो बीमारी सूजन की वजह से उत्पन्न हो गई है, के भाग्य का एक अनूठा समाधान है - वह हटाया जा रहा है। हालांकि नियम के अपवाद नहीं है। आसन्न दांत, को बनाए रखने के उनके कार्यक्षमता को पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बस तार है, जो पूरे दांत निकलना पर रखा जाता है लागू करने के लिए। इसके अलावा, दांतों में लुगदी की सूजन और जहाँ तक संभव हो खत्म करने। जंगम सर्जिकल हटाने, जो बीमारी के शुरू होने के बाद नहीं चार-छः से पहले सप्ताह में किया जाता है के अधीन sequesters। यह मुख्य रूप से तथ्य यह है कि केवल ज़ब्ती सीमाओं की एक निर्दिष्ट अवधि के बाद स्पष्ट रूप से पहचाने हैं के कारण है। इस प्रकार, विन्सेन्ट लक्षण अस्थिमज्जा का प्रदाह, periodontitis, तोंसिल्लितिस Simanovsky-Vincent सहित गंभीर भड़काऊ रोगों, की मानव में विकास की मुख्य लक्षणों में से एक है।
|
फिल्म 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' से दर्शकों को इम्प्रेस कर चुकीं एक्ट्रेस कंगना रनौत एक बार फिर अपना एक्टिंग टैलंट दिखाने के लिए तैयार हैं. आने वाली फिल्म 'पंगा' में अपने रोल के लिए उन्होंने तैयारियां शुरू कर दी हैं. कंगना किस तरह रोल के लिए मेहनत कर रही हैं यह जानना दिलचस्प होगा.
कंगना की फिल्म के लेटेस्ट फोटो को मेकर ने शेयर किया है. अश्विनी ने अपने ट्विटर हैंडल पर कंगना की एक मोनोक्रोम तस्वीर शेयर की जिसमें वह कबड्डी खेलते हुए नजर आ रही हैं. आपको बता दें, 'पंगा' एक कबड्डी प्लेयर की जिंदगी के इर्द-गिर्द है.
इस फिल्म में उनके साथ कई और किरदार शामिल हैं. फ़िलहाल यहां देखें इसकी तस्वीर. बता दें, फिल्म में जस्सी गिल, रिचा चड्ढा, पंकज त्रिपाठी और नीना त्रिपाठी जैसे ऐक्टर्स भी अहम किरदारों में हैं. फिल्म 24 जनवरी 2020 को रिलीज होगी. यह रेमो डिसूजा की 'स्ट्रीट डांसर 3D' से क्लैश हो सकती है जिसें वरुण धवन और श्रद्धा कपूर लीड रोल में हैं. अब देखना होगा कि किसकी फिल्म से कंगना की फिल्म क्लैश होती है.
|
फिल्म 'मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी' से दर्शकों को इम्प्रेस कर चुकीं एक्ट्रेस कंगना रनौत एक बार फिर अपना एक्टिंग टैलंट दिखाने के लिए तैयार हैं. आने वाली फिल्म 'पंगा' में अपने रोल के लिए उन्होंने तैयारियां शुरू कर दी हैं. कंगना किस तरह रोल के लिए मेहनत कर रही हैं यह जानना दिलचस्प होगा. कंगना की फिल्म के लेटेस्ट फोटो को मेकर ने शेयर किया है. अश्विनी ने अपने ट्विटर हैंडल पर कंगना की एक मोनोक्रोम तस्वीर शेयर की जिसमें वह कबड्डी खेलते हुए नजर आ रही हैं. आपको बता दें, 'पंगा' एक कबड्डी प्लेयर की जिंदगी के इर्द-गिर्द है. इस फिल्म में उनके साथ कई और किरदार शामिल हैं. फ़िलहाल यहां देखें इसकी तस्वीर. बता दें, फिल्म में जस्सी गिल, रिचा चड्ढा, पंकज त्रिपाठी और नीना त्रिपाठी जैसे ऐक्टर्स भी अहम किरदारों में हैं. फिल्म चौबीस जनवरी दो हज़ार बीस को रिलीज होगी. यह रेमो डिसूजा की 'स्ट्रीट डांसर तीनD' से क्लैश हो सकती है जिसें वरुण धवन और श्रद्धा कपूर लीड रोल में हैं. अब देखना होगा कि किसकी फिल्म से कंगना की फिल्म क्लैश होती है.
|
बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म में काम करने से मना कर दिया है. श्रीराम राघव ने वरुण धवन को लेकर 'बदलापुर' फिल्म बनाई थी. यह फिल्म वरुण के करियर का अहम मोड़ साबित हुई. 'बदलापुर' के बाद यह स्वीकारा गया कि वरुण अभिनय भी कर सकते हैं और लीक से हट कर रोल निभाने में उनकी दिलचस्पी भी है. श्रीराम राघवन ने अपनी अगली फिल्म का ऑफर भी वरुण को दिया, लेकिन स्क्रिप्ट सुनने के बाद वरुण ने काम करने से मना कर दिया. वरुण को स्क्रिप्ट पसंद आयी थी लेकिन वह एक दृष्टिहीन युवक की भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं हुए.
|
बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म में काम करने से मना कर दिया है. श्रीराम राघव ने वरुण धवन को लेकर 'बदलापुर' फिल्म बनाई थी. यह फिल्म वरुण के करियर का अहम मोड़ साबित हुई. 'बदलापुर' के बाद यह स्वीकारा गया कि वरुण अभिनय भी कर सकते हैं और लीक से हट कर रोल निभाने में उनकी दिलचस्पी भी है. श्रीराम राघवन ने अपनी अगली फिल्म का ऑफर भी वरुण को दिया, लेकिन स्क्रिप्ट सुनने के बाद वरुण ने काम करने से मना कर दिया. वरुण को स्क्रिप्ट पसंद आयी थी लेकिन वह एक दृष्टिहीन युवक की भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं हुए.
|
नई दिल्लीः उत्तर भारत के कई इलाकों में घने कोहरे के बीच बुधवार को 52 रेलगाड़ियां अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं जबकि 10 के समय में फेरबदल किया गया है। उत्तर रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 24 घंटे से भी ज्यादा देरी से चल रही है, जबकि सियालदह राजधानी एक्सप्रेस 23 घंटे और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 20 घंटे की देरी से चल रही हैं।
अधिकारी ने साथ ही बताया कि 10 ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया गया है।
दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के मुताबिक, कोहरे की वजह से बुधवार को उड़ानें मामूली रूप से प्रभावित हुई हैं जबकि किसी भी उड़ान को रोका नहीं गया है।
|
नई दिल्लीः उत्तर भारत के कई इलाकों में घने कोहरे के बीच बुधवार को बावन रेलगाड़ियां अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं जबकि दस के समय में फेरबदल किया गया है। उत्तर रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चौबीस घंटाटे से भी ज्यादा देरी से चल रही है, जबकि सियालदह राजधानी एक्सप्रेस तेईस घंटाटे और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस बीस घंटाटे की देरी से चल रही हैं। अधिकारी ने साथ ही बताया कि दस ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया गया है। दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के मुताबिक, कोहरे की वजह से बुधवार को उड़ानें मामूली रूप से प्रभावित हुई हैं जबकि किसी भी उड़ान को रोका नहीं गया है।
|
ब्राइडल फैशन में बहुत तरह की ज्वेलरी आती है। मगर मांगटीका लगाने पर किसी का भी लुक कंप्लीट नजर आता है। अगर आप केवल मांगटीका भी पहनेंगी तो भी आपका लुक काफी ग्रेसफुल नजर आएगा। लहंगा हो या साड़ी दोनों पर ही मांगटीका बहुत खूबसूरत लगता है। तो आइए आपको लेटेस्ट मांगटीका की एक खास झलक दिखातें है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मांगटीका लगाने से लुक अपने आप रॉयल यानी शाही लगने लगता है।
|
ब्राइडल फैशन में बहुत तरह की ज्वेलरी आती है। मगर मांगटीका लगाने पर किसी का भी लुक कंप्लीट नजर आता है। अगर आप केवल मांगटीका भी पहनेंगी तो भी आपका लुक काफी ग्रेसफुल नजर आएगा। लहंगा हो या साड़ी दोनों पर ही मांगटीका बहुत खूबसूरत लगता है। तो आइए आपको लेटेस्ट मांगटीका की एक खास झलक दिखातें है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मांगटीका लगाने से लुक अपने आप रॉयल यानी शाही लगने लगता है।
|
ऊबर (Uber) अपने विकलांग राइडर्स को 2 मिलियन डॉलर (करीब 15. 98 करोड़ रुपये) से अधिक का भुगतान करेगी। कैब एग्रीगेटर कथित तौर पर न्याय विभाग के साथ समझौता कर चुका है, और विकलांग राइडर्स से वेटिंग फीस वसूलने के बदले अब उन्हें इस रकम को वापस चुकाएगा। बता दें, ऊबर अपने राइडर्स से वेटिंग टाइम फीस पॉलिसी के तहत एक प्रतिक्षा का एक शुल्क लेता है, जो तब वसूला जाता है, जब राइडर द्वारा सेट लोकेशन पर कैब पहुंचने के बाद, राइडर अपनी यात्रा शुरू करने में 2 मिनट से ज्यादा का समय लेता है।
, अपनी वेटिंग टाइम पॉलिसी के तहत विकलांग राइडर्स से वेटिंग फीस वसूलने की वजह से Uber को अब उन सभी राइडर्स को कुल 2 मिलियन डॉलर चुकाने होंगे। राइडर द्वारा सेट लोकेशन पर कैब के पहुंचने के बाद भी यदि राइडर अपनी यात्रा को शुरू नहीं करता है और कैब ड्राइवर को 2 मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, तब Uber राइडर पर प्रति मिनट के हिसाब से वेटिंग फीस वसूलती है। वेटिंग फीस की दर देश या रीजन के हिसाब से भिन्न होती हैं।
रिपोर्ट बताती है कि न्याय विभाग ने नवंबर 2021 में नीति को लेकर Uber पर मुकदमा दायर करते हुए कहा था कि कंपनी की पॉलिसी विकलांग लोगों के साथ भेदभाव करती है, जिन्हें कार में बैठने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है।
इसके बाद, बीते सोमवार DOJ (न्याय विभाग) ने एक प्रेस बयान में कहा कि ऊबर उन 1,000 से अधिक सवारियों को 1. 7 मिलियन डॉलर के सैटलमेंट पॉट से भुगतान करेगा, जिन्होंने वेटिंग फीस वसूलने की शिकायत करने के लिए कंपनी को संपर्क किया था।
सैटलमेंट समझौते से जुड़े एक शिकायत नोटिस में कहा गया है कि शिकायत करने वाले इन 1,000 लोगों को Uber से कम से कम $600 (करीब 48,000) मिलेंगे। लगभग 1,000 के बीच विभाजित पॉट का मतलब होगा कि प्रत्येक व्यक्ति लगभग $1,700 (करीब 1,35,000 रुपये) तक प्राप्त कर सकता है।
|
ऊबर अपने विकलांग राइडर्स को दो मिलियन डॉलर से अधिक का भुगतान करेगी। कैब एग्रीगेटर कथित तौर पर न्याय विभाग के साथ समझौता कर चुका है, और विकलांग राइडर्स से वेटिंग फीस वसूलने के बदले अब उन्हें इस रकम को वापस चुकाएगा। बता दें, ऊबर अपने राइडर्स से वेटिंग टाइम फीस पॉलिसी के तहत एक प्रतिक्षा का एक शुल्क लेता है, जो तब वसूला जाता है, जब राइडर द्वारा सेट लोकेशन पर कैब पहुंचने के बाद, राइडर अपनी यात्रा शुरू करने में दो मिनट से ज्यादा का समय लेता है। , अपनी वेटिंग टाइम पॉलिसी के तहत विकलांग राइडर्स से वेटिंग फीस वसूलने की वजह से Uber को अब उन सभी राइडर्स को कुल दो मिलियन डॉलर चुकाने होंगे। राइडर द्वारा सेट लोकेशन पर कैब के पहुंचने के बाद भी यदि राइडर अपनी यात्रा को शुरू नहीं करता है और कैब ड्राइवर को दो मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, तब Uber राइडर पर प्रति मिनट के हिसाब से वेटिंग फीस वसूलती है। वेटिंग फीस की दर देश या रीजन के हिसाब से भिन्न होती हैं। रिपोर्ट बताती है कि न्याय विभाग ने नवंबर दो हज़ार इक्कीस में नीति को लेकर Uber पर मुकदमा दायर करते हुए कहा था कि कंपनी की पॉलिसी विकलांग लोगों के साथ भेदभाव करती है, जिन्हें कार में बैठने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है। इसके बाद, बीते सोमवार DOJ ने एक प्रेस बयान में कहा कि ऊबर उन एक,शून्य से अधिक सवारियों को एक. सात मिलियन डॉलर के सैटलमेंट पॉट से भुगतान करेगा, जिन्होंने वेटिंग फीस वसूलने की शिकायत करने के लिए कंपनी को संपर्क किया था। सैटलमेंट समझौते से जुड़े एक शिकायत नोटिस में कहा गया है कि शिकायत करने वाले इन एक,शून्य लोगों को Uber से कम से कम छः सौ डॉलर मिलेंगे। लगभग एक,शून्य के बीच विभाजित पॉट का मतलब होगा कि प्रत्येक व्यक्ति लगभग एक डॉलर,सात सौ तक प्राप्त कर सकता है।
|
इंफोसिस की कमान नारायणमूर्ति के हाथों में फिर से आखिरकार आ ही गई है। मूर्ति कंपनी बोर्ड के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन और एडिशनल डायरेक्टर के रूप में कंपनी में शामिल होंगे। मूर्ति के दोबारा कंपनी में शामिल होने से इंफोसिस को मजबूती मिलने की बात की जा रही है।
इंफोसिस की कमान नारायणमूर्ति के हाथों में फिर से आखिरकार आ ही गई है। मूर्ति कंपनी बोर्ड के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन और एडिशनल डायरेक्टर के रूप में कंपनी में शामिल होंगे। मूर्ति के दोबारा कंपनी में शामिल होने से इंफोसिस को मजबूती मिलने की बात की जा रही है।
नारायणमूर्ति का यह कार्यकाल 5 साल का होगा। ख़बर है कि बतौर सैलरी मूर्ति को 1 रुपये सालाना मिलेगा। दिलचस्प बात है कि नारायण मूर्ति ने 2011 में चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था।
नारायणमूर्ति ने कहा, ये जो भी हुआ बहुत ही अचानक हुआ, लेकिन इंफोसिस मेरे बच्चे की तरह है इसलिए मैंने इसे स्वीकार किया और अपनी भविष्य की योजनाओं को फिलहाल विराम देते हुए ये जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है।
बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को दी गई सूचना में वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनी ने कहा है कि बोर्ड के निवर्तमान चेयरमैन के. वी कामथ शनिवार को पद से इस्तीफा देंगे और वह एक स्वतंत्र निदेशक होंगे।
|
इंफोसिस की कमान नारायणमूर्ति के हाथों में फिर से आखिरकार आ ही गई है। मूर्ति कंपनी बोर्ड के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन और एडिशनल डायरेक्टर के रूप में कंपनी में शामिल होंगे। मूर्ति के दोबारा कंपनी में शामिल होने से इंफोसिस को मजबूती मिलने की बात की जा रही है। इंफोसिस की कमान नारायणमूर्ति के हाथों में फिर से आखिरकार आ ही गई है। मूर्ति कंपनी बोर्ड के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन और एडिशनल डायरेक्टर के रूप में कंपनी में शामिल होंगे। मूर्ति के दोबारा कंपनी में शामिल होने से इंफोसिस को मजबूती मिलने की बात की जा रही है। नारायणमूर्ति का यह कार्यकाल पाँच साल का होगा। ख़बर है कि बतौर सैलरी मूर्ति को एक रुपयापये सालाना मिलेगा। दिलचस्प बात है कि नारायण मूर्ति ने दो हज़ार ग्यारह में चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। नारायणमूर्ति ने कहा, ये जो भी हुआ बहुत ही अचानक हुआ, लेकिन इंफोसिस मेरे बच्चे की तरह है इसलिए मैंने इसे स्वीकार किया और अपनी भविष्य की योजनाओं को फिलहाल विराम देते हुए ये जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनी ने कहा है कि बोर्ड के निवर्तमान चेयरमैन के. वी कामथ शनिवार को पद से इस्तीफा देंगे और वह एक स्वतंत्र निदेशक होंगे।
|
नई दिल्ली। डीएलएफ घोटाले में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ पर चार सौ अस्सी करोड़ रुपए का जुर्माना भरने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायमूर्ति एच. एल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि डीएलएफ 15 जनवरी से जुर्माना पूरा होने तक 75 करोड़ रुपए की किश्तों में जुर्माना भर सकता है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 630 करोड़ रुपए जुर्माने में से चार सौ अस्सी करोड़ रुपए जमा करने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से डीएलएफ पर 12 अगस्त 2011 को 630 करोड़ रुपए अर्थदंड लगाने के फैसले को चुनौति देने वाली डीएलएफ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
जानकारी के मुताबिक कथित तौर पर डीएलएफ द्वारा गुड़गांव की तीन परियोजनाओं में अपने ग्राहकों को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी प्रभावी स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए यह जुर्माना लगया गया है। वर्ष 2013 प्रतिस्पर्धा अपीली न्यायाधिकरण ने भी सीसीआई के अर्थदंड लगाने के फैसले को बरकरार रखा था।
Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.
Supreme court imposed penalty of 400 crores on DLF.
|
नई दिल्ली। डीएलएफ घोटाले में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ पर चार सौ अस्सी करोड़ रुपए का जुर्माना भरने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायमूर्ति एच. एल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि डीएलएफ पंद्रह जनवरी से जुर्माना पूरा होने तक पचहत्तर करोड़ रुपए की किश्तों में जुर्माना भर सकता है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने छः सौ तीस करोड़ रुपए जुर्माने में से चार सौ अस्सी करोड़ रुपए जमा करने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से डीएलएफ पर बारह अगस्त दो हज़ार ग्यारह को छः सौ तीस करोड़ रुपए अर्थदंड लगाने के फैसले को चुनौति देने वाली डीएलएफ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जानकारी के मुताबिक कथित तौर पर डीएलएफ द्वारा गुड़गांव की तीन परियोजनाओं में अपने ग्राहकों को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी प्रभावी स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए यह जुर्माना लगया गया है। वर्ष दो हज़ार तेरह प्रतिस्पर्धा अपीली न्यायाधिकरण ने भी सीसीआई के अर्थदंड लगाने के फैसले को बरकरार रखा था। Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन. Supreme court imposed penalty of चार सौ crores on DLF.
|
उज्जवल तिवारी, बलरामपुर रामानुजगंजः जिला बलरामपुर-रामानुजगंज अंतर्गत अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों पर माओवादी संगठन एवं अन्य नक्सल गतिविधियों तथा उनके समर्थक सहयोगियों के विरुद्ध प्रभावी रणनीति बनाने एवं नक्सल विरोधी अभियान के साथ जिले में नक्सली गतिविधियों को समाप्त करने आदि पर परिचर्चा हेतु दिनांक 12 जून 2021 को रक्षित केंद्र बलरामपुर में कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की उपस्थिति एवं SP रामकृष्ण साहू की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।
उक्त बैठक में नक्सल क्षेत्रों में गश्त, सर्चिंग आदि पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सीआरपीएफ सीएएफ एवं पुलिस बल के मध्य आपसी समन्वय की दिशा पर चर्चा की गई। सीआरपीएफ, सीएएफ की दिक्कतों/परेशानियों के बारे में अवगत होकर उसके निराकरण जल्द से जल्द कराने का आश्वासन दिया गया। साथ ही नक्सल क्षेत्र के गांवों में क्या-क्या समस्याएं जन सामान्य को होती है एवं उसका निराकरण किये जाने हेतु क्या-क्या कार्यवाही की जा सकती है? चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित जिले के नव पदस्थ कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि, नक्सल क्षेत्र के ग्रामों में किसी विभाग से संबंधित यदि कोई समस्या हो तो तत्काल उन्हें अवगत कराएं, जिसका अविलंब निराकरण का प्रयास किया जावेगा।
इस आवश्यक बैठक में बी वीर राजू, कमांडेंट 62 वीं बटालियन सीआरपीएफ, श्री संजीव कुमार कमांडेंट 81 वीं बटालियन सीआरपीएफ, श्री रवि प्रकाश द्वितीय कमान अधिकारी 81वीं बटालियन सीआरपीएफ, प्रशांत कतलम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बलरामपुर, अजय कुमार द्वितीय कमान अधिकारी 62 वीं वाहिनी सीआरपीएफ, मनोज तिर्की, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कुसमी, डी के सिंह पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन), रक्षित निरीक्षक सनत ठाकुर एवं सीआरपीएफ एवं सीएएफ तथा जिला पुलिस बल के अन्य पुलिस अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।
|
उज्जवल तिवारी, बलरामपुर रामानुजगंजः जिला बलरामपुर-रामानुजगंज अंतर्गत अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों पर माओवादी संगठन एवं अन्य नक्सल गतिविधियों तथा उनके समर्थक सहयोगियों के विरुद्ध प्रभावी रणनीति बनाने एवं नक्सल विरोधी अभियान के साथ जिले में नक्सली गतिविधियों को समाप्त करने आदि पर परिचर्चा हेतु दिनांक बारह जून दो हज़ार इक्कीस को रक्षित केंद्र बलरामपुर में कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की उपस्थिति एवं SP रामकृष्ण साहू की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। उक्त बैठक में नक्सल क्षेत्रों में गश्त, सर्चिंग आदि पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सीआरपीएफ सीएएफ एवं पुलिस बल के मध्य आपसी समन्वय की दिशा पर चर्चा की गई। सीआरपीएफ, सीएएफ की दिक्कतों/परेशानियों के बारे में अवगत होकर उसके निराकरण जल्द से जल्द कराने का आश्वासन दिया गया। साथ ही नक्सल क्षेत्र के गांवों में क्या-क्या समस्याएं जन सामान्य को होती है एवं उसका निराकरण किये जाने हेतु क्या-क्या कार्यवाही की जा सकती है? चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित जिले के नव पदस्थ कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि, नक्सल क्षेत्र के ग्रामों में किसी विभाग से संबंधित यदि कोई समस्या हो तो तत्काल उन्हें अवगत कराएं, जिसका अविलंब निराकरण का प्रयास किया जावेगा। इस आवश्यक बैठक में बी वीर राजू, कमांडेंट बासठ वीं बटालियन सीआरपीएफ, श्री संजीव कुमार कमांडेंट इक्यासी वीं बटालियन सीआरपीएफ, श्री रवि प्रकाश द्वितीय कमान अधिकारी इक्यासीवीं बटालियन सीआरपीएफ, प्रशांत कतलम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बलरामपुर, अजय कुमार द्वितीय कमान अधिकारी बासठ वीं वाहिनी सीआरपीएफ, मनोज तिर्की, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कुसमी, डी के सिंह पुलिस अधीक्षक , रक्षित निरीक्षक सनत ठाकुर एवं सीआरपीएफ एवं सीएएफ तथा जिला पुलिस बल के अन्य पुलिस अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।
|
पंचायत चुनाव को लेकर सोमवार को नारायणपुर पंचायत के मुखिया पद के प्रत्याशी रेशमी देवी के साथ पति सह देवनंदन बिगहा विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान को नामांकन काउंटर पर पहुंचना पड़ा महंगा। बताते चलें कि चुनाव आयोग के नियमानुसार किसी भी सरकारी कर्मी एवं अनुबंध कर्मी को चुनाव नहीं लड़ने एवं प्रत्याशियों के साथ नामांकन केंद्र पर पहुंचने एवं जनसंपर्क नहीं करने का निर्देश जारी किया गया है।
परंतु नियम कानून को ताक पर रखते हुए देवनंदन बिगहा विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान सोमवार को रतनी प्रखंड में अपनी पहली पत्नी रेशमी देवी का नामांकन दाखिल कराने पहुंचे थे। उक्त बातों की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से एडीएम मनोज कुमार को मिली थी।
बुधवार को रतनी पहुंचे एसडीएम मनोज कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि देवनंदन विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान का बिना प्रतिनियुक्ति के नामांकन काउंटर पर पहुंचने की सूचना मिली है । उनके विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखा जाएगा।
|
पंचायत चुनाव को लेकर सोमवार को नारायणपुर पंचायत के मुखिया पद के प्रत्याशी रेशमी देवी के साथ पति सह देवनंदन बिगहा विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान को नामांकन काउंटर पर पहुंचना पड़ा महंगा। बताते चलें कि चुनाव आयोग के नियमानुसार किसी भी सरकारी कर्मी एवं अनुबंध कर्मी को चुनाव नहीं लड़ने एवं प्रत्याशियों के साथ नामांकन केंद्र पर पहुंचने एवं जनसंपर्क नहीं करने का निर्देश जारी किया गया है। परंतु नियम कानून को ताक पर रखते हुए देवनंदन बिगहा विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान सोमवार को रतनी प्रखंड में अपनी पहली पत्नी रेशमी देवी का नामांकन दाखिल कराने पहुंचे थे। उक्त बातों की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से एडीएम मनोज कुमार को मिली थी। बुधवार को रतनी पहुंचे एसडीएम मनोज कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि देवनंदन विद्यालय के शिक्षक अमलेश पासवान का बिना प्रतिनियुक्ति के नामांकन काउंटर पर पहुंचने की सूचना मिली है । उनके विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखा जाएगा।
|
दर्भासन के अभावमे कंवलासन बिछाना चाहिये । दर्भासनके ऊपर कंवलासन विछाकर उसपर पद्मासनसे मन पसंद आसन लगा कर तथा स्थिर होकर पूर्व या उत्तरमे मुख करके बैठना चाहिये । सूत्रोमें पद्मासन लगाकर पूर्वमे मुख करना बताया है ।
"पुरत्थाभिमुहे' सपलियंकनिसण्णे" पर्य्यकासन या पद्मासनसे वैठकर पूर्वमे मुख रक्खे । पद्मासन लगाकर चाये हाथकी हथेलीपर दाहिना हाथ सीधा रखकर, कमर, गर्दन, मस्तकको एक पंक्ति मे रखकर बैठना चाहिये, और दाढ़ीको हंसलीसे चार तसुके अन्तरपर रहने दे । इस आसनसे सवेरे, सांझ या मध्याहमे तथा रात्रिके पहले और पिछले पहरमे सतत अभ्यास करना चाहिये । एक पहर यदि आराम से स्थिर होकर बैठ सके तब समझो कि आसनपर विजय प्राप्तकर ली गई है। आसन पर विजय पानेके बाद प्राण और शरीर तथा दृष्टिपर विजय पाना चाहिये । परन्तु आसनपर विजय पाये विना योग सिद्ध नहीं हो सकता । इसके विना आत्म साक्षात्कार अर्थात् सम्यक्त्वकी प्राप्ति नहीं हो सकती । अतः सतत प्रयास द्वारा गुरुगमसे पाई हुई युक्तिके अनुसार आसनपर जय पा लेना चाहिये । आसनके जयमे यम और नियमपर जीत प्राप्त करनी चाहिये ।
आसनको जीतनेके पश्चात् सावकजन अनेक प्रकारकी क्रियाएँ सीख सकता है । परन्तु आसनको जीतकर दृष्टिको जीतनेकी पूर्ण आवश्यकता है । दृष्टि जयका पहला लक्षण आखका न मींचना है। उससे मेषोन्मेष दृष्टि हो जाती है। योग परिभाषामे इसे त्राटक कहा जाता है। सूत्रोंमें भी मेपोन्मेष रहित होनेके कई जगह प्रमाण मिलते हैं ।
दृष्टिको जीतनेकेलिये या त्राटकमुद्राको सिद्धकरनेकेलिये सवेरे और साझमे साधकको यथेष्ट आसनपर बैठकर अपनेसे सवा हाथके अन्तर पर किसी ईकी गोलीको बनाकर रख देना चाहिये और उस चने जितनी गोलीपर दृष्टि जमाये रहो । अमुक समयके अनन्तर आखमे पानी आयगा । आरभमे आसू आनेपर त्राटक रोक देना चाहिये । चार या आठ दिन तक आसुओको पोंछते रहना चाहिये, और त्राटक आरंभ रखना चाहिये । प्रयास ऐसा करना चाहिये जिससे पलक बन्द न हो सके, और इस प्रयासमे शान्तिपूर्वक प्रति दिन वृद्धि रखना चाहिये । जब एक घडीसे अधिक पलकको जीत लोगे तब
कई नवीन वार्तोके अचरज साधकपुरुष स्वयं देखने लगेगा, और ज्यो ज्यों इससे भी अगाडी वढेगा त्यों त्यों उस साधकको अलौकिक आनन्दकी अंश अशमें प्राप्ति होगी। ज्यों ज्यों दृष्टिको जीतता जायगा त्यों त्यों उसका मन शात होता जायगा और दृष्टिके जयमे मनका भी जय होता है। अधिकतर आखकी भवोंपर दृष्टि रखना इसीलिये सूत्रोंमें भी बताया है ।
"एग पोगलनिविठ्ठदिठ्ठि ।" 'एक पुद्गलपर दृष्टिकी स्थापना करे। " इस प्रकार ध्यानकी प्रक्रियाऍ महात्मा पुरुषोंके पास सीखनी चाहिये । जब एक घंटा तक दृष्टिविजयका अभ्यास हो जाय तदनन्तर साधकको चाहिये कि दिनके पहले भागमें किसी सुन्दर पहाडके शिखरपर या वृक्षकी चोटीपरे दृष्टि जमाना चाहिये । रात्रिमें चान्द या शुक्र तथा मंगल तारेपर नजरको जमाना चाहिये । यह प्रयास ज्यों ज्यों बढेगा यों त्यों प्रकृतिके प्रत्येक पदार्थकी ओर पवित्र प्रेम उत्पन्न होगा, और सृष्टिके प्रत्येक अंशमें वीतरागताका प्रकटीकरण होगा। परन्तु यह प्रयास भी एक घंटा तक रखना चाहिये इसके अनन्तर सृष्टिके चाहे जिस भागपर दृष्टि डालोगे तब एकदम वह वहीं स्थिर हो जायगी, और शरीरके कोथलेमेंसे दुख निकल कर भागेगा, इस कक्षापर पहुंचने पर साधकको तुरन्त प्रभु नामका भावना नामक जाप परम प्रेम पूर्वक शुरू करें देना चाहिये । जापर्मे इच्छानुसार शब्दोच्चार या 'नमो अरिहताणं' जपना चाहिये । परन्तु कुछ समयके पश्चात् नमो पद आपसे आप उड जायगा, और आत्मा अर्हन् प्रभुमें एकाकार हो जायगा । प्रति समय यथावसर पाकर हिलते, चलते, उठते, वैठते, सोते, जागते वह ध्यान दिमागसे न निकल सकेगा । साझ, सवेरे, मध्यान्ह और रात्रिमें योगकी क्रियाका आरम्भ रखकर जाप जपते रहना आवश्यक है । एक ओरसे योग किया द्वारा सद्भावनाकी दृढता और दूसरी ओरसे जाप, इन दो साधनोंके मिलनेसे मन एकदम शान्त हो जायगा। क्योंकि - "मणो साहसिओ भीमो, दुठ्ठस्सो ।" मनरूपी घोडा साहसिक और भयंकर दुष्ट है । " इन्दिय चवल तुरंगो" इन्द्रियोंके घोडे अधिक बलवान् होते हैं, परन्तु इस प्रयाससे उनकी मस्ती निकल जाती है, और वे शान्तिमय हो जाते हैं । इस प्रकारके संयोगोंमें साधककी विवेक दृष्टि में अत्यन्त सूक्ष्मदृष्टि हो जायगी तथा साथ-साथ आनन्दकी वृद्धि भी । यह साधना सन्तोष जनक होनेपर साधकको अपने योगकी
दिशा बदल देनी चाहिये । अर्थात् जो त्राटक वहिर्दृष्टिका किया जाता था उसके स्थानपर अन्तर्दृष्टिका त्राटक करना चाहिये । प्रथम श्वासोच्वासमें दृष्टि रखनी चाहिये । और जो श्वाम बाहर आता है तब 'सो' और अन्दर जाते समय 'हं' का क़ुदरती ही उच्चार होता है । तब दोनों मिलकर "सोऽह" अजपाजाप विना ही जपे होता रहता है उसपर ध्यान देना चाहिये । अर्थात् श्वास जहासे उठता है और जहा जाकर समा जाता है वहा तक उसके अन्दर वृत्ति रखनी चाहिये । इस प्रयाससे एकदम शान्ति होने लगेगी, और अन्तरके आनन्दमे उत्तरोत्तर वृद्धि होगी। दिनरातमे सामान्य रीतिसे २१६०० श्वासोच्छ्वास चलते है । उनमेसे उपयोग विनाका एक श्वास भी न जाने देना चाहिये । "सोऽहं" के जापका सतत प्रयास होनेके पश्चात् सहजवृत्ति श्वासमे रहने लगती है । आत्मामे इस प्रकार श्वासका ध्यान सिद्ध होनेपर साधकको हृदयके मध्य भागकी वृत्ति स्थिर करनेका प्रयास करना चाहिये । जब हृदयकी वृत्ति स्थिर होगी तव हृदयमेसे अलौकिकशान्तिका स्रोत प्रकट हो जायगा । जिस शान्तिका साधकको अब तक इससे पहले किसी के पास अनुभव नही हुआ था । जब हृदयका ध्यान सिद्ध होता है तब नाभीके एक देशमे वृत्तिको स्थापन करे । वहाकी तिद्धि होनेपर उसे पुनः हृदयमें ले आना चाहिये, और वहासे कंठके मध्यमे ला छोडे । नाभि, हृदय और कंठमे शान्तिका अनुभव होनेपर मनोवृत्तिको त्रिकुटी भवनमे स्थापन करे । त्रिकुटी ध्यानका प्रयास होनेपर और वहाकी स्थिरवृत्ति होनेपर मसूरकी दाल जितने एक बिन्दुका साक्षात्कार होता है, और वह बिन्दु अतिशय चमकदार होता है । बिन्दुके दर्शन होनेपर साधकको अपार आनन्द मिलता है । उस नादविन्दुके दर्शन होनेपर सिद्धिया भी साधककी सेवामे उपस्थित हो जाती हैं । कपालमे अखिल विश्वकी झाकी हो जाती है । इसका कारण यह है कि उस स्थलपर त्रिकुटीमे गोल बिन्दुके दर्शन ही है, और वह चांदकी निशानी द्वारा विन्दु दर्शनके रूपमें समझाया गया है । विन्दु दर्शन होनेपर साधकको अलौकिक ज्ञानकी प्राप्ति होती है, और जन्म जरा मृत्युके विनाशकी तैयारी हो जाती है । विन्दु दर्शन ही शंकरका ( आत्मानंदका ) तीसरा नेत्र है । प्रत्येक आत्मा शंकर ही है, और उसके समानतया दो नेत्र तो हैं ही, और तीसरा बिन्दु दर्शन रूप ज्ञानलोचन प्रयास द्वारा उघडता है, बिन्दु दर्शनके पश्चात् योगीको
मृत्युका भय नही हो सकता, और साधकके सशय शल्योंका नाश हो जाता है । इसीको समझनेके लिये कहा जाता है कि शंकरका तीसरा नेत्र उघड आता है । तव सशय शल्यरूप विश्वका प्रलय हो जाता है ।
त्रिकुटीमें विन्दु दर्शन होनेपर साधक ज्यों-ज्यों विशेष प्रयास करता है त्यों-त्यों वह विन्दु विशेष प्रकाशित होने लगता है, और अन्तमें साधक उस विन्दुमें इतना विलीन हो जाता है कि उस शान्ति में उसे नादका अनुभव होने लगता है । तव विन्दुकी अपेक्षा नादमें विशेष आनन्द आनेसे बिन्दु गौण होने लगजाता है, और नाद विशेषातिविशेष श्रवणगोचर होता है । नाद भी अनेक तरहका सुनाई पडने लगता है, और वह चक्की, सितार, सरंगी और नौवतखाने से भी अधिक और उत्कृष्ट होता है । मेघकी गर्जनासे भी अधिक गर्जना सुनाई देने लगती है । अन्त में दिव्य नादका अनुभव होनेपर साधक उस नादमें अत्यधिक लीन हो जाता है । इस ध्वनिका अनुभव इतना अधिक बढ़ जाता है कि साधककी हिलने, चलने, उठने, बैठने आदिकी क्रियाओंमें भी नादका अनुसन्धान रहा करता है । नाके अनुभवसे ही जगतूमें संगीतका प्रचार योगी लोकोंने किया है । जिस प्रकार द साधकको प्रिय है उसी भाति जगत्कोभी संगीत प्रिय है । अतः संगीत ( गुणगान ) द्वारा मनको एकाग्र बनाकर साधकजन आगे बढ सकते हैं । वास्तव में संगीत वाह्य नाद हो गया है, और इस वाह्य नाद द्वारा अभ्यन्तर नादको मिलाकर पाया जा सकता है। साधक जब नादमे और भी आगे चढता है, तब उसको नादका अनुभव जहा होता है वह भ्रमर गुफाके ऊपर शंकुके आकारकी एक पोली प्रतीत होगी, और उस पोलके शिखर पर एक महान् प्रकाशवाले पदार्थका अनुभव होगा। यह प्रकाशमान पदार्थ गोलाकार और उलटे छत्रके आकारकी तरहका जान पडेगा । यह छत्राकार सहस्र दल कमल सिद्धशिला रूप अजरामर चक्र शिरके अग्रभागमें लोकके अग्रभागपर है । इस अजरामर चक्रर्मे वृत्तिके विलीन होनेपर साधकको अखण्ड अलौकिकमय आनन्दका अनुभव वर्धमान रूप होता है । वह आनन्द वढता भी इतना अधिक है कि साधक योगी उसमें एकदम लीन हो जाता है, और अलौकिक आनन्दका अनुभव अपने उस समस्त शरीरमें प्राप्त करता है अर्थात् स्वयं जो आनन्दरूप है उस अलौकिक आनन्द स्वरूपको स्वयं सर्वाङ्ग अनुभव करने
लगता है । इस अवस्थामं वह साधक रूपसे मिटकर सिद्ध, योगी, विदेही, महात्मा जीवन्मुक्त कहलाता है । उस योगीकी दृष्टि देहसे अन्य स्थलपर जहां जहां जाती है वहा वहा वह अलौकिक दिव्य आनन्दका अनुभव करता है । जलस्थान, स्थलस्थान, राजस्थान, धनिकस्थान, पशुस्थान, आकाश स्थान आदि जिन जिन स्थानोंपर उस महात्माकी दृष्टि होती है वहा वहां यह आनन्दका ही अनुभव करता है । सब जगह अमेद रूपसे अलौकिक अनुभव करनेसे द्वैत भावकी भ्राति न रहनेसे वह वीतराग कहलाता है । ऐसा योगी पुरुष ही कृतकृत्य और सिद्ध है । ऐसे योगीके दर्शन भी जगत्को पावन करते हैं ।
जिस प्रकार अभ्यन्तरवृत्ति द्वारा हम योगके सम्बन्धमे समझ सके हैं। उसी दृष्टिसे बाहरके भागमे नाभिके ऊपर स्थापन करनेमे आता है, और जब उस प्रयासमें नामि और चक्षुके वीचमे एक चमकनेवाली तेजस्वी लकीर अखंडरूपसे दीखने लगे तव नाभिसे दृष्टि हटाकर छातीके मध्य भागमे स्थापन करनी चाहिये, और वहां भी जब इसी भावि तेजखी लकीर भासने लगे तब नासिकाके अग्रमें स्थापन करे । नासाग्रसे त्रिकुटीमें, वहासे भ्रमर गुफाम होते हुए अजरामर चक्ररूप सिद्धशिलामे और वहासे खात्म-अनुभवमे पहुँचा जाता है।
इस अनुभव मार्गमे भक्ति है, वह एक महान साधन है, भक्तिसे प्रेम प्रकट होता है, और प्रेमके द्वारा भी आत्माका साक्षात्कार हो सकता है । किसी शास्त्रके श्लोकपर विचार करते-करते गंभीर तहमे उतर जाता है, और उसके द्वारा भी आगे बढ़ सकता है ।
एक ऐसी भी रीति है कि जिसमे पद्मासनसे बैठकर जो विचार आवें उनको तटस्थ वैठकर देखा करे, परन्तु विचारोंको अटकने न दे । अभ्यासके प्रवल प्रयत्नसे विचारघारा स्वयं ठंढी पडने लग जाती हैं, और अन्तमें एकदम शान्त हो जाती है । विचारोंके शान्त होनेपर साधकको अलौकिक आनन्द होने लगता है । तव अखिल विश्वपर विशाल और उत्कृष्ट प्रेमकी दृष्टि हो जाती है । समान भाव तो सबमें रखने लगता है। अपने आपमें ईश्वर भावका उदय होने लगता है। ज्यों-ज्यो यह प्रयास बढ़ता है, त्यों-त्यों अन्तरमें आनन्दकी विशेष जागृति हो जायगी। इतना ही नहीं, बल्कि बाहर भी सव जगह आनन्दका ही अनुभव होने लगेगा । और अन्तमे वह पूर्ण आनन्दमय
वन जायगा । सव जगह ईश्वरभावको स्थापन करता हुआ अति प्रेममय वनकर, प्रेमकी दृष्टिसे विश्वका दिन रात अवलोकन करनेसे सहजानन्द प्रगट होता है, और वह वीतराग हो जाता है ।
पहले कहे गये प्रमाणानुसार साधकोंके लिये थोडी सी प्रक्रियाएँ संक्षेपमें बताई गई हैं। इन्हें विचारकर तथा उसी प्रकार मनन करनेसे अवश्य अलभ्य लाभ होगा । तथा अपरिमित सामर्थ्य पा सकेगा । योगका विषय अत्यन्त विशाल और गहन है, और इसे गुरुगमकी साक्षी विना सीख भी नहीं सकता। हठयोग, मंत्रयोग, लययोग और राजयोग इस भाति योग चार प्रकारोंमें विभक्त है । यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि ये योगके आठ अग है, और इनमें प्रत्येकको उत्तरोत्तर एकको एककी अपेक्षा है। प्राणायाम कई प्रकारोंसे हो सकता है, परन्तु उनमें पूरक, कुंभक और रेचक मुख्य हैं, भस्त्रिका आदि प्राणायाम भी उपयोगी हैं। प्राणायामको सहायता देनेके लिये नेति अर्थात् नाकमेसे डोरा पिरोकर मुखद्वारसे निकालना; तथा धोती अर्थात् कपडेको पेटमें उतारकर मलका निकालना; नौली अर्थात् नलोंको घुमाकर फिराना, वस्ति यानी गुदासे मल साफ करना, तथा कपालभाति गजकरणी आदि हठयोगकी अनेक क्रियाएँ होती हैं। इसी प्रकार खेचरीमुद्रा, महावन्धमुद्रा, वज्रमुद्रा इत्यादि मुद्राएँ गुरुगमके विना न कर सकनेके कारण प्राणायाम आदि की बातें फिर बताई जायँगी, क्योंकि वे वस्तुएँ भी विशेष ज्ञेयरूप हैं । अत उनको महात्मा पुरुषोंकी सगतिमें रहकर सीखना चाहिये । योगसे बढकर ससारमे कोई अन्य विद्या उत्तम नहीं है । जो पुरुष योगकी साधना करेंगे अन्तमें वे परमपदको पायेंगे, और कर्मोंसे मुक्त होंगे । अत उनको कर्मबंधके चार प्रकार समझना चाहिये जिनके ये प्रमेद हैं । कर्मवन्धके ४ प्रकार और दुःख सुख
इस समय अनेक मनुष्य नाना पाप करते देखे जाते हैं तथापि वे सुखी क्यों हैं ?
उन्होंने पुण्यरूपी बीज बोये थे, इसीलिये आज वे उनके सुखरूप फलोंको खा रहे हैं, परन्तु इस समय अन्य जीवोंको दुख देकर पापके बीज बोते हैं, इससे भविष्य में इसके अनन्तर उनके फल उन्हें दु.खरुप होंगे । इस प्रकार जो मनुष्य सुखी होकर भी पापिष्ट होता है वह मनुष्य
|
दर्भासन के अभावमे कंवलासन बिछाना चाहिये । दर्भासनके ऊपर कंवलासन विछाकर उसपर पद्मासनसे मन पसंद आसन लगा कर तथा स्थिर होकर पूर्व या उत्तरमे मुख करके बैठना चाहिये । सूत्रोमें पद्मासन लगाकर पूर्वमे मुख करना बताया है । "पुरत्थाभिमुहे' सपलियंकनिसण्णे" पर्य्यकासन या पद्मासनसे वैठकर पूर्वमे मुख रक्खे । पद्मासन लगाकर चाये हाथकी हथेलीपर दाहिना हाथ सीधा रखकर, कमर, गर्दन, मस्तकको एक पंक्ति मे रखकर बैठना चाहिये, और दाढ़ीको हंसलीसे चार तसुके अन्तरपर रहने दे । इस आसनसे सवेरे, सांझ या मध्याहमे तथा रात्रिके पहले और पिछले पहरमे सतत अभ्यास करना चाहिये । एक पहर यदि आराम से स्थिर होकर बैठ सके तब समझो कि आसनपर विजय प्राप्तकर ली गई है। आसन पर विजय पानेके बाद प्राण और शरीर तथा दृष्टिपर विजय पाना चाहिये । परन्तु आसनपर विजय पाये विना योग सिद्ध नहीं हो सकता । इसके विना आत्म साक्षात्कार अर्थात् सम्यक्त्वकी प्राप्ति नहीं हो सकती । अतः सतत प्रयास द्वारा गुरुगमसे पाई हुई युक्तिके अनुसार आसनपर जय पा लेना चाहिये । आसनके जयमे यम और नियमपर जीत प्राप्त करनी चाहिये । आसनको जीतनेके पश्चात् सावकजन अनेक प्रकारकी क्रियाएँ सीख सकता है । परन्तु आसनको जीतकर दृष्टिको जीतनेकी पूर्ण आवश्यकता है । दृष्टि जयका पहला लक्षण आखका न मींचना है। उससे मेषोन्मेष दृष्टि हो जाती है। योग परिभाषामे इसे त्राटक कहा जाता है। सूत्रोंमें भी मेपोन्मेष रहित होनेके कई जगह प्रमाण मिलते हैं । दृष्टिको जीतनेकेलिये या त्राटकमुद्राको सिद्धकरनेकेलिये सवेरे और साझमे साधकको यथेष्ट आसनपर बैठकर अपनेसे सवा हाथके अन्तर पर किसी ईकी गोलीको बनाकर रख देना चाहिये और उस चने जितनी गोलीपर दृष्टि जमाये रहो । अमुक समयके अनन्तर आखमे पानी आयगा । आरभमे आसू आनेपर त्राटक रोक देना चाहिये । चार या आठ दिन तक आसुओको पोंछते रहना चाहिये, और त्राटक आरंभ रखना चाहिये । प्रयास ऐसा करना चाहिये जिससे पलक बन्द न हो सके, और इस प्रयासमे शान्तिपूर्वक प्रति दिन वृद्धि रखना चाहिये । जब एक घडीसे अधिक पलकको जीत लोगे तब कई नवीन वार्तोके अचरज साधकपुरुष स्वयं देखने लगेगा, और ज्यो ज्यों इससे भी अगाडी वढेगा त्यों त्यों उस साधकको अलौकिक आनन्दकी अंश अशमें प्राप्ति होगी। ज्यों ज्यों दृष्टिको जीतता जायगा त्यों त्यों उसका मन शात होता जायगा और दृष्टिके जयमे मनका भी जय होता है। अधिकतर आखकी भवोंपर दृष्टि रखना इसीलिये सूत्रोंमें भी बताया है । "एग पोगलनिविठ्ठदिठ्ठि ।" 'एक पुद्गलपर दृष्टिकी स्थापना करे। " इस प्रकार ध्यानकी प्रक्रियाऍ महात्मा पुरुषोंके पास सीखनी चाहिये । जब एक घंटा तक दृष्टिविजयका अभ्यास हो जाय तदनन्तर साधकको चाहिये कि दिनके पहले भागमें किसी सुन्दर पहाडके शिखरपर या वृक्षकी चोटीपरे दृष्टि जमाना चाहिये । रात्रिमें चान्द या शुक्र तथा मंगल तारेपर नजरको जमाना चाहिये । यह प्रयास ज्यों ज्यों बढेगा यों त्यों प्रकृतिके प्रत्येक पदार्थकी ओर पवित्र प्रेम उत्पन्न होगा, और सृष्टिके प्रत्येक अंशमें वीतरागताका प्रकटीकरण होगा। परन्तु यह प्रयास भी एक घंटा तक रखना चाहिये इसके अनन्तर सृष्टिके चाहे जिस भागपर दृष्टि डालोगे तब एकदम वह वहीं स्थिर हो जायगी, और शरीरके कोथलेमेंसे दुख निकल कर भागेगा, इस कक्षापर पहुंचने पर साधकको तुरन्त प्रभु नामका भावना नामक जाप परम प्रेम पूर्वक शुरू करें देना चाहिये । जापर्मे इच्छानुसार शब्दोच्चार या 'नमो अरिहताणं' जपना चाहिये । परन्तु कुछ समयके पश्चात् नमो पद आपसे आप उड जायगा, और आत्मा अर्हन् प्रभुमें एकाकार हो जायगा । प्रति समय यथावसर पाकर हिलते, चलते, उठते, वैठते, सोते, जागते वह ध्यान दिमागसे न निकल सकेगा । साझ, सवेरे, मध्यान्ह और रात्रिमें योगकी क्रियाका आरम्भ रखकर जाप जपते रहना आवश्यक है । एक ओरसे योग किया द्वारा सद्भावनाकी दृढता और दूसरी ओरसे जाप, इन दो साधनोंके मिलनेसे मन एकदम शान्त हो जायगा। क्योंकि - "मणो साहसिओ भीमो, दुठ्ठस्सो ।" मनरूपी घोडा साहसिक और भयंकर दुष्ट है । " इन्दिय चवल तुरंगो" इन्द्रियोंके घोडे अधिक बलवान् होते हैं, परन्तु इस प्रयाससे उनकी मस्ती निकल जाती है, और वे शान्तिमय हो जाते हैं । इस प्रकारके संयोगोंमें साधककी विवेक दृष्टि में अत्यन्त सूक्ष्मदृष्टि हो जायगी तथा साथ-साथ आनन्दकी वृद्धि भी । यह साधना सन्तोष जनक होनेपर साधकको अपने योगकी दिशा बदल देनी चाहिये । अर्थात् जो त्राटक वहिर्दृष्टिका किया जाता था उसके स्थानपर अन्तर्दृष्टिका त्राटक करना चाहिये । प्रथम श्वासोच्वासमें दृष्टि रखनी चाहिये । और जो श्वाम बाहर आता है तब 'सो' और अन्दर जाते समय 'हं' का क़ुदरती ही उच्चार होता है । तब दोनों मिलकर "सोऽह" अजपाजाप विना ही जपे होता रहता है उसपर ध्यान देना चाहिये । अर्थात् श्वास जहासे उठता है और जहा जाकर समा जाता है वहा तक उसके अन्दर वृत्ति रखनी चाहिये । इस प्रयाससे एकदम शान्ति होने लगेगी, और अन्तरके आनन्दमे उत्तरोत्तर वृद्धि होगी। दिनरातमे सामान्य रीतिसे इक्कीस हज़ार छः सौ श्वासोच्छ्वास चलते है । उनमेसे उपयोग विनाका एक श्वास भी न जाने देना चाहिये । "सोऽहं" के जापका सतत प्रयास होनेके पश्चात् सहजवृत्ति श्वासमे रहने लगती है । आत्मामे इस प्रकार श्वासका ध्यान सिद्ध होनेपर साधकको हृदयके मध्य भागकी वृत्ति स्थिर करनेका प्रयास करना चाहिये । जब हृदयकी वृत्ति स्थिर होगी तव हृदयमेसे अलौकिकशान्तिका स्रोत प्रकट हो जायगा । जिस शान्तिका साधकको अब तक इससे पहले किसी के पास अनुभव नही हुआ था । जब हृदयका ध्यान सिद्ध होता है तब नाभीके एक देशमे वृत्तिको स्थापन करे । वहाकी तिद्धि होनेपर उसे पुनः हृदयमें ले आना चाहिये, और वहासे कंठके मध्यमे ला छोडे । नाभि, हृदय और कंठमे शान्तिका अनुभव होनेपर मनोवृत्तिको त्रिकुटी भवनमे स्थापन करे । त्रिकुटी ध्यानका प्रयास होनेपर और वहाकी स्थिरवृत्ति होनेपर मसूरकी दाल जितने एक बिन्दुका साक्षात्कार होता है, और वह बिन्दु अतिशय चमकदार होता है । बिन्दुके दर्शन होनेपर साधकको अपार आनन्द मिलता है । उस नादविन्दुके दर्शन होनेपर सिद्धिया भी साधककी सेवामे उपस्थित हो जाती हैं । कपालमे अखिल विश्वकी झाकी हो जाती है । इसका कारण यह है कि उस स्थलपर त्रिकुटीमे गोल बिन्दुके दर्शन ही है, और वह चांदकी निशानी द्वारा विन्दु दर्शनके रूपमें समझाया गया है । विन्दु दर्शन होनेपर साधकको अलौकिक ज्ञानकी प्राप्ति होती है, और जन्म जरा मृत्युके विनाशकी तैयारी हो जाती है । विन्दु दर्शन ही शंकरका तीसरा नेत्र है । प्रत्येक आत्मा शंकर ही है, और उसके समानतया दो नेत्र तो हैं ही, और तीसरा बिन्दु दर्शन रूप ज्ञानलोचन प्रयास द्वारा उघडता है, बिन्दु दर्शनके पश्चात् योगीको मृत्युका भय नही हो सकता, और साधकके सशय शल्योंका नाश हो जाता है । इसीको समझनेके लिये कहा जाता है कि शंकरका तीसरा नेत्र उघड आता है । तव सशय शल्यरूप विश्वका प्रलय हो जाता है । त्रिकुटीमें विन्दु दर्शन होनेपर साधक ज्यों-ज्यों विशेष प्रयास करता है त्यों-त्यों वह विन्दु विशेष प्रकाशित होने लगता है, और अन्तमें साधक उस विन्दुमें इतना विलीन हो जाता है कि उस शान्ति में उसे नादका अनुभव होने लगता है । तव विन्दुकी अपेक्षा नादमें विशेष आनन्द आनेसे बिन्दु गौण होने लगजाता है, और नाद विशेषातिविशेष श्रवणगोचर होता है । नाद भी अनेक तरहका सुनाई पडने लगता है, और वह चक्की, सितार, सरंगी और नौवतखाने से भी अधिक और उत्कृष्ट होता है । मेघकी गर्जनासे भी अधिक गर्जना सुनाई देने लगती है । अन्त में दिव्य नादका अनुभव होनेपर साधक उस नादमें अत्यधिक लीन हो जाता है । इस ध्वनिका अनुभव इतना अधिक बढ़ जाता है कि साधककी हिलने, चलने, उठने, बैठने आदिकी क्रियाओंमें भी नादका अनुसन्धान रहा करता है । नाके अनुभवसे ही जगतूमें संगीतका प्रचार योगी लोकोंने किया है । जिस प्रकार द साधकको प्रिय है उसी भाति जगत्कोभी संगीत प्रिय है । अतः संगीत द्वारा मनको एकाग्र बनाकर साधकजन आगे बढ सकते हैं । वास्तव में संगीत वाह्य नाद हो गया है, और इस वाह्य नाद द्वारा अभ्यन्तर नादको मिलाकर पाया जा सकता है। साधक जब नादमे और भी आगे चढता है, तब उसको नादका अनुभव जहा होता है वह भ्रमर गुफाके ऊपर शंकुके आकारकी एक पोली प्रतीत होगी, और उस पोलके शिखर पर एक महान् प्रकाशवाले पदार्थका अनुभव होगा। यह प्रकाशमान पदार्थ गोलाकार और उलटे छत्रके आकारकी तरहका जान पडेगा । यह छत्राकार सहस्र दल कमल सिद्धशिला रूप अजरामर चक्र शिरके अग्रभागमें लोकके अग्रभागपर है । इस अजरामर चक्रर्मे वृत्तिके विलीन होनेपर साधकको अखण्ड अलौकिकमय आनन्दका अनुभव वर्धमान रूप होता है । वह आनन्द वढता भी इतना अधिक है कि साधक योगी उसमें एकदम लीन हो जाता है, और अलौकिक आनन्दका अनुभव अपने उस समस्त शरीरमें प्राप्त करता है अर्थात् स्वयं जो आनन्दरूप है उस अलौकिक आनन्द स्वरूपको स्वयं सर्वाङ्ग अनुभव करने लगता है । इस अवस्थामं वह साधक रूपसे मिटकर सिद्ध, योगी, विदेही, महात्मा जीवन्मुक्त कहलाता है । उस योगीकी दृष्टि देहसे अन्य स्थलपर जहां जहां जाती है वहा वहा वह अलौकिक दिव्य आनन्दका अनुभव करता है । जलस्थान, स्थलस्थान, राजस्थान, धनिकस्थान, पशुस्थान, आकाश स्थान आदि जिन जिन स्थानोंपर उस महात्माकी दृष्टि होती है वहा वहां यह आनन्दका ही अनुभव करता है । सब जगह अमेद रूपसे अलौकिक अनुभव करनेसे द्वैत भावकी भ्राति न रहनेसे वह वीतराग कहलाता है । ऐसा योगी पुरुष ही कृतकृत्य और सिद्ध है । ऐसे योगीके दर्शन भी जगत्को पावन करते हैं । जिस प्रकार अभ्यन्तरवृत्ति द्वारा हम योगके सम्बन्धमे समझ सके हैं। उसी दृष्टिसे बाहरके भागमे नाभिके ऊपर स्थापन करनेमे आता है, और जब उस प्रयासमें नामि और चक्षुके वीचमे एक चमकनेवाली तेजस्वी लकीर अखंडरूपसे दीखने लगे तव नाभिसे दृष्टि हटाकर छातीके मध्य भागमे स्थापन करनी चाहिये, और वहां भी जब इसी भावि तेजखी लकीर भासने लगे तब नासिकाके अग्रमें स्थापन करे । नासाग्रसे त्रिकुटीमें, वहासे भ्रमर गुफाम होते हुए अजरामर चक्ररूप सिद्धशिलामे और वहासे खात्म-अनुभवमे पहुँचा जाता है। इस अनुभव मार्गमे भक्ति है, वह एक महान साधन है, भक्तिसे प्रेम प्रकट होता है, और प्रेमके द्वारा भी आत्माका साक्षात्कार हो सकता है । किसी शास्त्रके श्लोकपर विचार करते-करते गंभीर तहमे उतर जाता है, और उसके द्वारा भी आगे बढ़ सकता है । एक ऐसी भी रीति है कि जिसमे पद्मासनसे बैठकर जो विचार आवें उनको तटस्थ वैठकर देखा करे, परन्तु विचारोंको अटकने न दे । अभ्यासके प्रवल प्रयत्नसे विचारघारा स्वयं ठंढी पडने लग जाती हैं, और अन्तमें एकदम शान्त हो जाती है । विचारोंके शान्त होनेपर साधकको अलौकिक आनन्द होने लगता है । तव अखिल विश्वपर विशाल और उत्कृष्ट प्रेमकी दृष्टि हो जाती है । समान भाव तो सबमें रखने लगता है। अपने आपमें ईश्वर भावका उदय होने लगता है। ज्यों-ज्यो यह प्रयास बढ़ता है, त्यों-त्यों अन्तरमें आनन्दकी विशेष जागृति हो जायगी। इतना ही नहीं, बल्कि बाहर भी सव जगह आनन्दका ही अनुभव होने लगेगा । और अन्तमे वह पूर्ण आनन्दमय वन जायगा । सव जगह ईश्वरभावको स्थापन करता हुआ अति प्रेममय वनकर, प्रेमकी दृष्टिसे विश्वका दिन रात अवलोकन करनेसे सहजानन्द प्रगट होता है, और वह वीतराग हो जाता है । पहले कहे गये प्रमाणानुसार साधकोंके लिये थोडी सी प्रक्रियाएँ संक्षेपमें बताई गई हैं। इन्हें विचारकर तथा उसी प्रकार मनन करनेसे अवश्य अलभ्य लाभ होगा । तथा अपरिमित सामर्थ्य पा सकेगा । योगका विषय अत्यन्त विशाल और गहन है, और इसे गुरुगमकी साक्षी विना सीख भी नहीं सकता। हठयोग, मंत्रयोग, लययोग और राजयोग इस भाति योग चार प्रकारोंमें विभक्त है । यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि ये योगके आठ अग है, और इनमें प्रत्येकको उत्तरोत्तर एकको एककी अपेक्षा है। प्राणायाम कई प्रकारोंसे हो सकता है, परन्तु उनमें पूरक, कुंभक और रेचक मुख्य हैं, भस्त्रिका आदि प्राणायाम भी उपयोगी हैं। प्राणायामको सहायता देनेके लिये नेति अर्थात् नाकमेसे डोरा पिरोकर मुखद्वारसे निकालना; तथा धोती अर्थात् कपडेको पेटमें उतारकर मलका निकालना; नौली अर्थात् नलोंको घुमाकर फिराना, वस्ति यानी गुदासे मल साफ करना, तथा कपालभाति गजकरणी आदि हठयोगकी अनेक क्रियाएँ होती हैं। इसी प्रकार खेचरीमुद्रा, महावन्धमुद्रा, वज्रमुद्रा इत्यादि मुद्राएँ गुरुगमके विना न कर सकनेके कारण प्राणायाम आदि की बातें फिर बताई जायँगी, क्योंकि वे वस्तुएँ भी विशेष ज्ञेयरूप हैं । अत उनको महात्मा पुरुषोंकी सगतिमें रहकर सीखना चाहिये । योगसे बढकर ससारमे कोई अन्य विद्या उत्तम नहीं है । जो पुरुष योगकी साधना करेंगे अन्तमें वे परमपदको पायेंगे, और कर्मोंसे मुक्त होंगे । अत उनको कर्मबंधके चार प्रकार समझना चाहिये जिनके ये प्रमेद हैं । कर्मवन्धके चार प्रकार और दुःख सुख इस समय अनेक मनुष्य नाना पाप करते देखे जाते हैं तथापि वे सुखी क्यों हैं ? उन्होंने पुण्यरूपी बीज बोये थे, इसीलिये आज वे उनके सुखरूप फलोंको खा रहे हैं, परन्तु इस समय अन्य जीवोंको दुख देकर पापके बीज बोते हैं, इससे भविष्य में इसके अनन्तर उनके फल उन्हें दु.खरुप होंगे । इस प्रकार जो मनुष्य सुखी होकर भी पापिष्ट होता है वह मनुष्य
|
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कथित हमले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घायल होने और राज्य की कुछ अन्य घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को यहां चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बीते 10 मार्च को नंदीग्राम में सड़क मार्ग से चुनावी कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी को चोट लगी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे हमला बता दिया। जबकि तमाम साक्ष्य और चश्मदीद हमले की घटना से इनकार करते हैं।
भाजपा ने चुनाव आयोग से 10 मार्च की रैली के दौरान ममता बनर्जी के घायल होने की पूरी घटना की स्वतंत्र व निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए रैली का पूरा वीडियो जारी करने की जरूरत बताई है। ताकि लोगों को सही तथ्य पता चल सके। भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव नेनंदीग्राम को एक संवेदनशील विधानसभा सीट मानते हुए चुनाव आयोग को यहां स्पेशल ऑब्जर्वर नियुक्त करनने की मांग की। पार्टी ने चुनाव आयोग से यह मांग भी रखी है गलत सूचना फैलाने वाले तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि बंगाल में फ्री और फेयर चुनाव हो इसके लिए चुनाव आयोग को प्रबंध करना चाहिए।
|
नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कथित हमले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घायल होने और राज्य की कुछ अन्य घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को यहां चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बीते दस मार्च को नंदीग्राम में सड़क मार्ग से चुनावी कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी को चोट लगी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे हमला बता दिया। जबकि तमाम साक्ष्य और चश्मदीद हमले की घटना से इनकार करते हैं। भाजपा ने चुनाव आयोग से दस मार्च की रैली के दौरान ममता बनर्जी के घायल होने की पूरी घटना की स्वतंत्र व निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए रैली का पूरा वीडियो जारी करने की जरूरत बताई है। ताकि लोगों को सही तथ्य पता चल सके। भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव नेनंदीग्राम को एक संवेदनशील विधानसभा सीट मानते हुए चुनाव आयोग को यहां स्पेशल ऑब्जर्वर नियुक्त करनने की मांग की। पार्टी ने चुनाव आयोग से यह मांग भी रखी है गलत सूचना फैलाने वाले तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। भूपेंद्र यादव ने कहा कि बंगाल में फ्री और फेयर चुनाव हो इसके लिए चुनाव आयोग को प्रबंध करना चाहिए।
|
अपने सुरीले गीतों से पूरी दुनिया को मोहित कर देने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने कहा है कि वे चाहती हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें.
पुणे में एक कार्यक्रम में लता मंगेशकर ने मोदी की मौजूदगी में यह इच्छा जताई. लता दीदी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि वे भगवान से प्रार्थना करती हैं कि मोदी देश के अगले पीएम बनें.
कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर देश के 125 करोड़ लोग एकजुट होकर प्रयास करें, तो भारत दुनिया का सिरमौर हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर तरह की क्षमता है, सिर्फ उसके उचित इस्तेमाल की जरूरत है.
मोदी ने देश की नदियों को आपस में जोड़ने की जरूरत पर बल देते हुए पीने के पानी के अभाव की समस्या की ओर लोगों का ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि अगर लोगों को पीने का साफ पानी मिले, तो सेहत से संबंधित कई समस्याएं अपने आप हल हो सकती हैं.
धनतेरस के मौके पर मोदी ने देश की गौरवशाली संस्कृति और मान्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी प्लास्टिक सर्जरी थी, जो अब से ज्यादा उन्नत थी. इस बारे में उन्होंने भगवान गणेश का जिक्र करते हुए कहा कि उनका शरीर मनुष्य का था, जबकि सिर हाथी का. उन्होंने कई अन्य उदाहरण भी लोगों के सामने रखे.
खास बात यह रही कि इस प्रोग्राम में मोदी ने सियासी विरोधियों पर ज्यादा हमला बोलने से परहेज किया.
|
अपने सुरीले गीतों से पूरी दुनिया को मोहित कर देने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने कहा है कि वे चाहती हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें. पुणे में एक कार्यक्रम में लता मंगेशकर ने मोदी की मौजूदगी में यह इच्छा जताई. लता दीदी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि वे भगवान से प्रार्थना करती हैं कि मोदी देश के अगले पीएम बनें. कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर देश के एक सौ पच्चीस करोड़ लोग एकजुट होकर प्रयास करें, तो भारत दुनिया का सिरमौर हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर तरह की क्षमता है, सिर्फ उसके उचित इस्तेमाल की जरूरत है. मोदी ने देश की नदियों को आपस में जोड़ने की जरूरत पर बल देते हुए पीने के पानी के अभाव की समस्या की ओर लोगों का ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि अगर लोगों को पीने का साफ पानी मिले, तो सेहत से संबंधित कई समस्याएं अपने आप हल हो सकती हैं. धनतेरस के मौके पर मोदी ने देश की गौरवशाली संस्कृति और मान्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी प्लास्टिक सर्जरी थी, जो अब से ज्यादा उन्नत थी. इस बारे में उन्होंने भगवान गणेश का जिक्र करते हुए कहा कि उनका शरीर मनुष्य का था, जबकि सिर हाथी का. उन्होंने कई अन्य उदाहरण भी लोगों के सामने रखे. खास बात यह रही कि इस प्रोग्राम में मोदी ने सियासी विरोधियों पर ज्यादा हमला बोलने से परहेज किया.
|
झारखंड के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निपटान का सही तरीका ढूंढा जाना चाहिए और इसके पुनर्चक्रण और पुनःइस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
वह वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर)- राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमल), जमशेदपुर द्वारा आयोजित 'वन वीक, वन लैब' (ओडब्ल्यूओएल) कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि एनएमएल सीएसआईआर द्वारा स्थापित शुरुआती पांच प्रयोगशालाओं में से एक है और इसने आर्सेनिक को अलग करने की प्रौद्योगिकी पर काम किया है।
राज्यपाल ने कहा कि एनएमएल ने कोयले खदान में खतरनाक जीवाणुओं से युक्त पानी को साफ करके इंसानों के इस्तेमाल लायक बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित की है।
झारखंड के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निपटान का सही तरीका ढूंढा जाना चाहिए और इसके पुनर्चक्रण और पुनःइस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
|
झारखंड के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निपटान का सही तरीका ढूंढा जाना चाहिए और इसके पुनर्चक्रण और पुनःइस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। वह वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् - राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला , जमशेदपुर द्वारा आयोजित 'वन वीक, वन लैब' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने रेखांकित किया कि एनएमएल सीएसआईआर द्वारा स्थापित शुरुआती पांच प्रयोगशालाओं में से एक है और इसने आर्सेनिक को अलग करने की प्रौद्योगिकी पर काम किया है। राज्यपाल ने कहा कि एनएमएल ने कोयले खदान में खतरनाक जीवाणुओं से युक्त पानी को साफ करके इंसानों के इस्तेमाल लायक बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित की है। झारखंड के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निपटान का सही तरीका ढूंढा जाना चाहिए और इसके पुनर्चक्रण और पुनःइस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
|
Car Offers: इन CNG और इलेक्ट्रिक कारों पर मिल रहा 1 लाख रुपये का डिस्काउंट, खरीदने का गोल्डन मौका!
Hyundai Cars: इस महीने हुंडई अपनी कुछ कारों पर ऑफर दे रही है. इन कारों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक मॉडल भी शामिल हैं. नवंबर 2022 में कंपनी की ओर से 1 लाख रुपये तक के डिस्काउंट ऑफर मिल रहे हैं.
Offer On Hyundai Cars: इस महीने हुंडई अपनी कुछ कारों पर ऑफर दे रही है. इन कारों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक मॉडल भी शामिल हैं. नवंबर 2022 में कंपनी की ओर से 1 लाख रुपये तक के डिस्काउंट ऑफर मिल रहे हैं. दक्षिण कोरियाई निर्माता कंपनी अपनी ग्रैंड i10 Nios, Aura, i20 और Kona Electric SUV पर ऑफर दे रही है. कंपनी के चुनिंदा मॉडलों पर इच्छुक ग्राहक कैश छूट, एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट छूट का लाभ उठा सकते हैं.
हुंडई कोना इलेक्ट्रिक पर 1 लाख रुपये तक की नकद छूट दी जा रही है. इस पर कॉर्पोरेट छूट या एक्सचेंज बोनस नहीं दिया जा रहा है. बता दें कि भारत में Hyundai की यह पहली EV है, जिसे 2019 में लॉन्च किया गया था. हुंडई कोना का मुकाबला MG ZS EV से रहता है. यह सिंगल चार्ज पर 452km तक की रेंज ऑफर कर सकती है.
हुंडई ग्रैंड i10 Nios 1.0-लीटर टर्बो वेरिएंट पर 35,000 रुपये, सीएनजी वेरिएंट पर 25,000 रुपये और 1.2 लीटर पेट्रोल वेरिएंट पर 15,000 रुपये का कैश डिस्काउंट मिल रहा है. इसके साथ ही, 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 3,000 रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है.
हुंडई ऑरा पेट्रोल वेरिएंट पर 5,000 रुपये का कैश डिस्काउंट दिया जा रहा है. वहीं, इसके सीएनजी वेरिएंट पर 25,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है. इस पर 3,000 रुपये की कॉर्पोरेट छूट और 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है.
Hyundai i20 पर 10,000 रुपये का कैश डिस्काउंट और 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस दिया जा रहा है. हालांकि, ये छूट सिर्फ मिड-स्पेक मैग्ना और स्पोर्टज वेरिएंट पर मिल रहा है.
नोटः यह डिस्काउंट ऑफर राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. इसीलिए, अपने नजदीकी रेनो शोरूम पर इनके बारे में जरूर जानकारी ले लें.
|
Car Offers: इन CNG और इलेक्ट्रिक कारों पर मिल रहा एक लाख रुपये का डिस्काउंट, खरीदने का गोल्डन मौका! Hyundai Cars: इस महीने हुंडई अपनी कुछ कारों पर ऑफर दे रही है. इन कारों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक मॉडल भी शामिल हैं. नवंबर दो हज़ार बाईस में कंपनी की ओर से एक लाख रुपये तक के डिस्काउंट ऑफर मिल रहे हैं. Offer On Hyundai Cars: इस महीने हुंडई अपनी कुछ कारों पर ऑफर दे रही है. इन कारों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक मॉडल भी शामिल हैं. नवंबर दो हज़ार बाईस में कंपनी की ओर से एक लाख रुपये तक के डिस्काउंट ऑफर मिल रहे हैं. दक्षिण कोरियाई निर्माता कंपनी अपनी ग्रैंड iदस Nios, Aura, iबीस और Kona Electric SUV पर ऑफर दे रही है. कंपनी के चुनिंदा मॉडलों पर इच्छुक ग्राहक कैश छूट, एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट छूट का लाभ उठा सकते हैं. हुंडई कोना इलेक्ट्रिक पर एक लाख रुपये तक की नकद छूट दी जा रही है. इस पर कॉर्पोरेट छूट या एक्सचेंज बोनस नहीं दिया जा रहा है. बता दें कि भारत में Hyundai की यह पहली EV है, जिसे दो हज़ार उन्नीस में लॉन्च किया गया था. हुंडई कोना का मुकाबला MG ZS EV से रहता है. यह सिंगल चार्ज पर चार सौ बावन किलोमीटर तक की रेंज ऑफर कर सकती है. हुंडई ग्रैंड iदस Nios एक.शून्य-लीटर टर्बो वेरिएंट पर पैंतीस,शून्य रुपयापये, सीएनजी वेरिएंट पर पच्चीस,शून्य रुपयापये और एक दशमलव दो लीटरटर पेट्रोल वेरिएंट पर पंद्रह,शून्य रुपयापये का कैश डिस्काउंट मिल रहा है. इसके साथ ही, दस,शून्य रुपयापये का एक्सचेंज बोनस और तीन,शून्य रुपयापये का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है. हुंडई ऑरा पेट्रोल वेरिएंट पर पाँच,शून्य रुपयापये का कैश डिस्काउंट दिया जा रहा है. वहीं, इसके सीएनजी वेरिएंट पर पच्चीस,शून्य रुपयापये का डिस्काउंट मिल रहा है. इस पर तीन,शून्य रुपयापये की कॉर्पोरेट छूट और दस,शून्य रुपयापये का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है. Hyundai iबीस पर दस,शून्य रुपयापये का कैश डिस्काउंट और दस,शून्य रुपयापये का एक्सचेंज बोनस दिया जा रहा है. हालांकि, ये छूट सिर्फ मिड-स्पेक मैग्ना और स्पोर्टज वेरिएंट पर मिल रहा है. नोटः यह डिस्काउंट ऑफर राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. इसीलिए, अपने नजदीकी रेनो शोरूम पर इनके बारे में जरूर जानकारी ले लें.
|
दाऊद इब्राहिम के करीबी गैंगस्टर इकबाल मिर्ची के उपर लगे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में चल रही जांच में ईडी ने 600 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल की है। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया कि जांच में छह सौ करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को शामिल किया गया है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
दाऊद इब्राहिम के करीबी गैंगस्टर इकबाल मिर्ची के उपर लगे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में चल रही जांच में ईडी ने छः सौ करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल की है। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया कि जांच में छह सौ करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को शामिल किया गया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िया, सहरसा, पटना, वैशाली, मुंगेर, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और समस्तीपुर के 96 प्रखंडों की कुल 670 पंचायत आंशिक और पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. पटना जिले में धीरी-धीरे गंगा का उफान कम होने लगा है. हर जगह बाढ़ का पानी लगातार घटना शुरू हो गया है. अगर इसी तरह जलस्तर कम होता रहा, तो एक सप्ताह में स्थिति सामान्य हो जाने की उम्मीद है.
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने कहा कि बिहार में दो स्टेशन 'अत्यधिक बाढ़ की स्थिति' में हैं. बिहार में 20 को बाढ़ का खतरा है. भारी बारिश और रेल पटरियों पर जलभराव के कारण पूर्वी रेलवे (ईआर) के मालदा डिवीजन के तहत जमालपुर-साहिबगंज और जमालपुर-भागलपुर मार्गों पर कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया या डायवर्ट कर दिया गया है.
|
जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगड़िया, सहरसा, पटना, वैशाली, मुंगेर, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और समस्तीपुर के छियानवे प्रखंडों की कुल छः सौ सत्तर पंचायत आंशिक और पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं. पटना जिले में धीरी-धीरे गंगा का उफान कम होने लगा है. हर जगह बाढ़ का पानी लगातार घटना शुरू हो गया है. अगर इसी तरह जलस्तर कम होता रहा, तो एक सप्ताह में स्थिति सामान्य हो जाने की उम्मीद है. केंद्रीय जल आयोग ने कहा कि बिहार में दो स्टेशन 'अत्यधिक बाढ़ की स्थिति' में हैं. बिहार में बीस को बाढ़ का खतरा है. भारी बारिश और रेल पटरियों पर जलभराव के कारण पूर्वी रेलवे के मालदा डिवीजन के तहत जमालपुर-साहिबगंज और जमालपुर-भागलपुर मार्गों पर कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया या डायवर्ट कर दिया गया है.
|
में भी तुम से एक बात पूछता हूं; यदि वह मुझे बतायोगे, तो में भी तुम्हें बताऊंगा; कि ये काम किस अधिकार से करता हूं। २५ यूहन्ना का बपतिस्मा कहां से था ? स्वर्ग की ओर से या मनुष्यों की ओर से था ? तब वे भापस में विवाद करने लगे, कि यदि वे हम कहें स्वर्ग की ओर से, तो वह हम से कहेगा, फिर तुम ने उस की प्रतीति क्यों न की ? २६ और यदि कहें मनुष्यों की भोर से तो हमें भीड़ का डर है; क्योंकि वे वे सब यूहन्ना को भविष्यद्वक्ता जानते हैं। २७ सो उन्हों ने यीशु को उत्तर दिया, कि हम नहीं जानते; उस ने भी उन से कहा, तो में भी तुम्हें नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूं। २८ तुम क्या समझते हो ? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे; उस ने पहिले के पास जाकर कहा; हे पुत्र, प्राज दाख की बारी में काम कर २६ उस ने उत्तर दिया, में नहीं जाऊंगा, परन्तु पीछे पछता कर गया। ३० फिर दूसरे के पास जाकर ऐसा ही कहा, उस ने उत्तर दिया, जी हां जाता हूं, परन्तु नहीं गया। ३१ इन दोनों में से किस ने पिता की इच्छा पूरी की ? उन्हों ने कहा, पहिले ने यीशु ने उन से कहा, में तुम से सच कहता हूं, कि महसूल लेनेवाले और वेश्या तुम से पहिले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। ३२ क्योंकि यूहन्ना धर्म के मार्ग से तुम्हारे पास पाया, भौर तुम ने उस की प्रतीति न की पर महसूल लेनेवालों और वेश्याओं ने उस की प्रतीति की और तुम यह देखकर पीछे भी न पछताए कि उस की प्रतीति कर लेते ॥
[ २१ः२५४४ उस में रस का कुंड खोदा; धीर गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठीका देकर परदेश पला गया ३४ जब फल का समय निकट भाया, तो उस ने अपने दासों को उसका फल लेने के लिये किसानों के पास भेजा ३५ पर किसानों ने उसके दासों को पकड़ के, किसी को पीटा, और किसी को मार डाला; और किसी को पत्थरवाह किया ३६ फिर उस ने और दासों को भेजा, जो पहिलों से अधिक थे, भीर उन्हों ने उन से भी वैसा ही किया। ३७ अन्त में उस ने अपने पुत्र को उन के पास यह कहकर भेजा, कि वे मेरे पुत्र का प्रादर करेंगे। ३८ परन्तु किसानों ने पुत्र को देखकर आपस में कहा, यह तो वारिस है, प्राओो, उसे मार डालें और उस की मीरास ले लें। ३६ और उन्हों ने उसे पकड़ा और दास की बारी से और दास की बारी से बाहर निकालकर मार डाला । ४० इसलिये जब दास की बारी का स्वामी आएगा, तो उन किसानों के साथ क्या करेगा ? ४१ उन्होंने उस से कहा, वह उन बुरे लोगों को बुरी रीति से नाश करेगा; पीर दाख की बारी का ठीका और किसानों को देगा, जो समय पर उसे फल दिया करेंगे। ४२ यीशु ने उन से कहा, क्या तुम ने कभी पवित्र शास्त्र में यह नहीं पड़ा, कि जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने के सिरे का पत्थर हो गया ? ४३ यह प्रभु की भोर से हुआ, और हमारे देखने में अद्भुत है, इसलिये में तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर का राज्य तुम से ले लिया जाएगा; भौर ऐसी जाति को जो उसका फल लाए, दिया जाएगा। ४४ जो इस पत्थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा और जिस पर वह गिरेगा, उस को पीस डालेगा।
३३ एक और दृष्टान्त सुनो एक : गृहस्थ था, जिस ने दाख की बारी लगाई; और उसके चारों भोर वाड़ा बान्धा; और
|
में भी तुम से एक बात पूछता हूं; यदि वह मुझे बतायोगे, तो में भी तुम्हें बताऊंगा; कि ये काम किस अधिकार से करता हूं। पच्चीस यूहन्ना का बपतिस्मा कहां से था ? स्वर्ग की ओर से या मनुष्यों की ओर से था ? तब वे भापस में विवाद करने लगे, कि यदि वे हम कहें स्वर्ग की ओर से, तो वह हम से कहेगा, फिर तुम ने उस की प्रतीति क्यों न की ? छब्बीस और यदि कहें मनुष्यों की भोर से तो हमें भीड़ का डर है; क्योंकि वे वे सब यूहन्ना को भविष्यद्वक्ता जानते हैं। सत्ताईस सो उन्हों ने यीशु को उत्तर दिया, कि हम नहीं जानते; उस ने भी उन से कहा, तो में भी तुम्हें नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूं। अट्ठाईस तुम क्या समझते हो ? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे; उस ने पहिले के पास जाकर कहा; हे पुत्र, प्राज दाख की बारी में काम कर छब्बीस उस ने उत्तर दिया, में नहीं जाऊंगा, परन्तु पीछे पछता कर गया। तीस फिर दूसरे के पास जाकर ऐसा ही कहा, उस ने उत्तर दिया, जी हां जाता हूं, परन्तु नहीं गया। इकतीस इन दोनों में से किस ने पिता की इच्छा पूरी की ? उन्हों ने कहा, पहिले ने यीशु ने उन से कहा, में तुम से सच कहता हूं, कि महसूल लेनेवाले और वेश्या तुम से पहिले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। बत्तीस क्योंकि यूहन्ना धर्म के मार्ग से तुम्हारे पास पाया, भौर तुम ने उस की प्रतीति न की पर महसूल लेनेवालों और वेश्याओं ने उस की प्रतीति की और तुम यह देखकर पीछे भी न पछताए कि उस की प्रतीति कर लेते ॥ [ इक्कीसःदो हज़ार पाँच सौ चौंतालीस उस में रस का कुंड खोदा; धीर गुम्मट बनाया; और किसानों को उसका ठीका देकर परदेश पला गया चौंतीस जब फल का समय निकट भाया, तो उस ने अपने दासों को उसका फल लेने के लिये किसानों के पास भेजा पैंतीस पर किसानों ने उसके दासों को पकड़ के, किसी को पीटा, और किसी को मार डाला; और किसी को पत्थरवाह किया छत्तीस फिर उस ने और दासों को भेजा, जो पहिलों से अधिक थे, भीर उन्हों ने उन से भी वैसा ही किया। सैंतीस अन्त में उस ने अपने पुत्र को उन के पास यह कहकर भेजा, कि वे मेरे पुत्र का प्रादर करेंगे। अड़तीस परन्तु किसानों ने पुत्र को देखकर आपस में कहा, यह तो वारिस है, प्राओो, उसे मार डालें और उस की मीरास ले लें। छत्तीस और उन्हों ने उसे पकड़ा और दास की बारी से और दास की बारी से बाहर निकालकर मार डाला । चालीस इसलिये जब दास की बारी का स्वामी आएगा, तो उन किसानों के साथ क्या करेगा ? इकतालीस उन्होंने उस से कहा, वह उन बुरे लोगों को बुरी रीति से नाश करेगा; पीर दाख की बारी का ठीका और किसानों को देगा, जो समय पर उसे फल दिया करेंगे। बयालीस यीशु ने उन से कहा, क्या तुम ने कभी पवित्र शास्त्र में यह नहीं पड़ा, कि जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने के सिरे का पत्थर हो गया ? तैंतालीस यह प्रभु की भोर से हुआ, और हमारे देखने में अद्भुत है, इसलिये में तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर का राज्य तुम से ले लिया जाएगा; भौर ऐसी जाति को जो उसका फल लाए, दिया जाएगा। चौंतालीस जो इस पत्थर पर गिरेगा, वह चकनाचूर हो जाएगा और जिस पर वह गिरेगा, उस को पीस डालेगा। तैंतीस एक और दृष्टान्त सुनो एक : गृहस्थ था, जिस ने दाख की बारी लगाई; और उसके चारों भोर वाड़ा बान्धा; और
|
हमे कोई आकुलता नहीं है। महज ही दर्शन हो जायगा, इस विचार म हमाग यहाँ आना हो गया ओर कोई बात नहीं है।'
मूर्ति-दर्शन मे अपार आनंद
"वर्धमान महागज के वचनों को सुनकर स्टेशन मास्टर की आत्मा द्रवित हो गई। उसने अपने अधिकार में पर्याप्त समय तक गाडी गंक ली। लगभग तीम फुट लम्बी सफेद सनमरमर की मूर्ति को देखकर वर्धमान स्वामी का वडा आनन्द प्राप्त हुआ।'
वाहुवली की वडी मूर्ति को रेलवे स्टेशन में बाहुवली क्षेत्र तक ले जाना वडा कठिन कार्य था । भगवान जिनेन्द्रदेव की भक्ति कल्पनातीत फलदायिनी है। इस श्रद्धा मे प्रेरित हो कुछ लोगो ने एक सूचना छपा दी - वर्धमानमागर महागज की आज्ञा है कि मूर्तिस्थापना के कार्य मे विघ्न-निवारणार्थ प्रत्येक जैन को णमोकार का म्मरण क्ग्ना चाहिए। सवालाख णमोकार के जाप की योजना भी की गई है। यह छपी मूचना वर्धमान महाराज को दिखाई गई। उस समय महागज ने कहा - "ऐसा आदेश हमने कत्र दिया था। आदेश छपाने के पश्चात् तुम हमारी स्वीकृति माँगते हो।" लोगों ने कहा 'सद्भावनावश तथा सत्कार्य की मिद्धि को लक्ष्य में रखकर हमने ऐसा किया है। आपके नाम का प्रभाव रहेगा इसमे हमने आपका नाम छाप दिया। आप की आज्ञा के बिना हमने जो कार्य किया उसके लिए हम क्षमा प्रार्थना करते हैं।" इस पर महागज ने कहा "हमारा सव पर मटा क्षमा भाव है। क्रोध का भाव नहीं है। क्षमा माँगने का क्या प्रयोजन ? तुम पर सर्वदा क्षमा भाव है।" ऐमा मधुर स्वभाव तथा पवित्र मनोवृत्ति उनकी थी।"
"यथार्थ में अपनी प्रवृत्ति, वाणी, सरल व्यवहार आदि के कारण वर्धमान म्वामी अजातशत्रु रहे । उनका कोई भी विरोधी नहीं। वे भी किसी के विरोधी नहीं रहे। उनका विरोध कर्मों के प्रति अवश्य रहा है। उसी कर्म-शत्रु को नष्ट करने के लिए उन्होंने रत्नत्रय रूपी तलवार हाथ मे ली है । निश्चय से वे शीघ्र ही कर्मों का क्षय कर अपने सच्चे घर मुक्ति मदिर मे पहुँच जायेगे ।"
"एक दिन उनकी प्रकृति बहुत विगड गई । उष्णता का जोर था । कठ सूख गया । श्वास लेना भी कठिन हो चला। उस समय एक वैयावृत्त्य करने वाले भक्त ने पानी मे कपडा भिगोकर गले पर रख दिया। महाराज विचारमग्न थे । उनको पता नहीं चला।
|
हमे कोई आकुलता नहीं है। महज ही दर्शन हो जायगा, इस विचार म हमाग यहाँ आना हो गया ओर कोई बात नहीं है।' मूर्ति-दर्शन मे अपार आनंद "वर्धमान महागज के वचनों को सुनकर स्टेशन मास्टर की आत्मा द्रवित हो गई। उसने अपने अधिकार में पर्याप्त समय तक गाडी गंक ली। लगभग तीम फुट लम्बी सफेद सनमरमर की मूर्ति को देखकर वर्धमान स्वामी का वडा आनन्द प्राप्त हुआ।' वाहुवली की वडी मूर्ति को रेलवे स्टेशन में बाहुवली क्षेत्र तक ले जाना वडा कठिन कार्य था । भगवान जिनेन्द्रदेव की भक्ति कल्पनातीत फलदायिनी है। इस श्रद्धा मे प्रेरित हो कुछ लोगो ने एक सूचना छपा दी - वर्धमानमागर महागज की आज्ञा है कि मूर्तिस्थापना के कार्य मे विघ्न-निवारणार्थ प्रत्येक जैन को णमोकार का म्मरण क्ग्ना चाहिए। सवालाख णमोकार के जाप की योजना भी की गई है। यह छपी मूचना वर्धमान महाराज को दिखाई गई। उस समय महागज ने कहा - "ऐसा आदेश हमने कत्र दिया था। आदेश छपाने के पश्चात् तुम हमारी स्वीकृति माँगते हो।" लोगों ने कहा 'सद्भावनावश तथा सत्कार्य की मिद्धि को लक्ष्य में रखकर हमने ऐसा किया है। आपके नाम का प्रभाव रहेगा इसमे हमने आपका नाम छाप दिया। आप की आज्ञा के बिना हमने जो कार्य किया उसके लिए हम क्षमा प्रार्थना करते हैं।" इस पर महागज ने कहा "हमारा सव पर मटा क्षमा भाव है। क्रोध का भाव नहीं है। क्षमा माँगने का क्या प्रयोजन ? तुम पर सर्वदा क्षमा भाव है।" ऐमा मधुर स्वभाव तथा पवित्र मनोवृत्ति उनकी थी।" "यथार्थ में अपनी प्रवृत्ति, वाणी, सरल व्यवहार आदि के कारण वर्धमान म्वामी अजातशत्रु रहे । उनका कोई भी विरोधी नहीं। वे भी किसी के विरोधी नहीं रहे। उनका विरोध कर्मों के प्रति अवश्य रहा है। उसी कर्म-शत्रु को नष्ट करने के लिए उन्होंने रत्नत्रय रूपी तलवार हाथ मे ली है । निश्चय से वे शीघ्र ही कर्मों का क्षय कर अपने सच्चे घर मुक्ति मदिर मे पहुँच जायेगे ।" "एक दिन उनकी प्रकृति बहुत विगड गई । उष्णता का जोर था । कठ सूख गया । श्वास लेना भी कठिन हो चला। उस समय एक वैयावृत्त्य करने वाले भक्त ने पानी मे कपडा भिगोकर गले पर रख दिया। महाराज विचारमग्न थे । उनको पता नहीं चला।
|
अब राज्य के सार्वजनिक और निजी कार्यस्थलों (काम करने की जगहों) में भी कोविड के टीकाकरण की अनुमति दे दी है। केंद्र सरकार ने 11 अप्रैल से राज्यों में ऐसे कार्यस्थलों पर जहां 100 योग्य लाभार्थी हैं, यह सुविधा लागू करने का निर्देश दिया है। जिसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को 11 अप्रैल से कार्यस्थलों पर टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
अभियान निदेशक ने कहा है कि टीके की पहुंच बढ़ाने के लिए काम करने की वैसी जगहों (सरकारी और निजी) में टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा सकते हैं, जहां करीब 100 योग्य और इच्छुक लाभार्थी मौजूद होंगे। मौजूदा कोविड टीकाकरण केंद्र के साथ इन्हें टैग करके किया जा सकता है।
शुक्ला ने बताया कि गाइडलाइंस के मुताबिक, केवल 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के कर्मचारी ही काम करने की जगह पर टीकाकरण के लिए योग्य होंगे। किसी बाहरी व्यक्ति, चाहे वह परिवार के सदस्य ही क्यों न हों, को टीकाकरण की इजाजत नहीं होगी। संगठन (वर्कप्लेस) का एक वरिष्ठ कर्मचारी नोडल अफसर के तौर पर काम करेगा, जो जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण/ निजी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर्स के साथ समन्वय करेगा और टीकाकरण के काम में सहयोग करेगा।
|
अब राज्य के सार्वजनिक और निजी कार्यस्थलों में भी कोविड के टीकाकरण की अनुमति दे दी है। केंद्र सरकार ने ग्यारह अप्रैल से राज्यों में ऐसे कार्यस्थलों पर जहां एक सौ योग्य लाभार्थी हैं, यह सुविधा लागू करने का निर्देश दिया है। जिसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को ग्यारह अप्रैल से कार्यस्थलों पर टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अभियान निदेशक ने कहा है कि टीके की पहुंच बढ़ाने के लिए काम करने की वैसी जगहों में टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा सकते हैं, जहां करीब एक सौ योग्य और इच्छुक लाभार्थी मौजूद होंगे। मौजूदा कोविड टीकाकरण केंद्र के साथ इन्हें टैग करके किया जा सकता है। शुक्ला ने बताया कि गाइडलाइंस के मुताबिक, केवल पैंतालीस साल या उससे ज्यादा उम्र के कर्मचारी ही काम करने की जगह पर टीकाकरण के लिए योग्य होंगे। किसी बाहरी व्यक्ति, चाहे वह परिवार के सदस्य ही क्यों न हों, को टीकाकरण की इजाजत नहीं होगी। संगठन का एक वरिष्ठ कर्मचारी नोडल अफसर के तौर पर काम करेगा, जो जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण/ निजी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर्स के साथ समन्वय करेगा और टीकाकरण के काम में सहयोग करेगा।
|
तिल्दा-नेवरा। समिपस्थ अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स के द्वारा 11 दिसंबर, दिन शनिवार को श् छत्तीसगढ़ एड्स नियंत्रण सोसाइटी एवं अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स श् के संयुक्त तत्वावधान में, नि रूशुल्क एच आई वी /एड्स जागरूकता शिविर एवं निरूशुल्क एच आई वी रक्त परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह भर पहले से ही सेंचुरी हास्पिटल के डा. संजीव कुमार के द्वारा समस्त कार्यरत कर्मचारियों, स्कूली बच्चों , आदि के बीच एड्स के बारे में जागरूकता अभियान चलाया। वही आस पास के गांवो मे स्वास्थ्य विभाग केश् लिंक वर्कर योजना श् अर्थात जन संपर्क कार्यकर्ता के द्वारा घर घर जाकर सभी वर्ग के लोगों को एड्स के बारे में बताते हुए। एच. आई. वी. रक्त जांच कराने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया। जिसका प्रभाव इस शिविर में लोगो मे बडी जागरूकता दिखाई दिया।
इस एड्स जांच शिविर में कुल 167 लोगो का एच. आई. वी रक्त परीक्षण किया गया। इस आयोजन के बारे में डां संजीव कुमार ने बताया कि हम हर संभव कोशिश करते हैं। अपने कर्मचारियों को, आस पास के लोगो को, वाहन चालकों को, पर बहुत कम लोग ही समझ पाते हैं। एड्स के प्रति जागरूक रहना उतना ही जरूरी, जैसे बाकी बडी व लाइलाज बिमारीयो मे रहना पडता है। एड्स के बारे में सबसे बड़ा परेशानी आता है। वो अधिकतर लोग संकोच करते, शर्माते है, छिपाते है। जबकी सबको बेझिझक जागरूक हो जांच कराते रहना चाहिए।
क्योंकि एड्स सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने से ही नही फैलता। बल्कि और कई वजह होती है मसलन रू पुराने व एक ही सिरिंज से इंजेक्शन लगवाना, रक्त के अदान प्रदान से, कटने छिलने या किसी प्रकार के घाव पर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त छीटा पढना आदि, हो सकता है। अत रू सभी को बिना संकोच के समय समय पर जांच कराते रहना चाहिए।
इस शिविर में जिनका योगदान रहा। उनमे सेंचुरी हास्पिटल के डा. संजीव कुमार, महिला डा. गौरी अधौलिया, छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तरफ से रक्त जांच सेपल संग्रहणकर्ता ओमप्रकाश साहू दुर्ग, गणेश राम निर्मलकर दुर्ग, लिंक वर्कर योजना के जोनल सुपरवाइजर ईश्वर प्रसाद वर्मा, गायत्री सेन, पुष्पा वर्मा, बुधेश्वरी देवांगन, सरिता बर्मन, इसके अलावा कांती लाल चंद्रवंशी, बुद्धन कुमार बसंत, राकेश निर्मलकर, सतपाल कोशले, गोपाल मिश्रा, दीपेन्द्र मिश्रा, मुन्ना लाल बर्मन आदि।
|
तिल्दा-नेवरा। समिपस्थ अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स के द्वारा ग्यारह दिसंबर, दिन शनिवार को श् छत्तीसगढ़ एड्स नियंत्रण सोसाइटी एवं अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स श् के संयुक्त तत्वावधान में, नि रूशुल्क एच आई वी /एड्स जागरूकता शिविर एवं निरूशुल्क एच आई वी रक्त परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह भर पहले से ही सेंचुरी हास्पिटल के डा. संजीव कुमार के द्वारा समस्त कार्यरत कर्मचारियों, स्कूली बच्चों , आदि के बीच एड्स के बारे में जागरूकता अभियान चलाया। वही आस पास के गांवो मे स्वास्थ्य विभाग केश् लिंक वर्कर योजना श् अर्थात जन संपर्क कार्यकर्ता के द्वारा घर घर जाकर सभी वर्ग के लोगों को एड्स के बारे में बताते हुए। एच. आई. वी. रक्त जांच कराने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया। जिसका प्रभाव इस शिविर में लोगो मे बडी जागरूकता दिखाई दिया। इस एड्स जांच शिविर में कुल एक सौ सरसठ लोगो का एच. आई. वी रक्त परीक्षण किया गया। इस आयोजन के बारे में डां संजीव कुमार ने बताया कि हम हर संभव कोशिश करते हैं। अपने कर्मचारियों को, आस पास के लोगो को, वाहन चालकों को, पर बहुत कम लोग ही समझ पाते हैं। एड्स के प्रति जागरूक रहना उतना ही जरूरी, जैसे बाकी बडी व लाइलाज बिमारीयो मे रहना पडता है। एड्स के बारे में सबसे बड़ा परेशानी आता है। वो अधिकतर लोग संकोच करते, शर्माते है, छिपाते है। जबकी सबको बेझिझक जागरूक हो जांच कराते रहना चाहिए। क्योंकि एड्स सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने से ही नही फैलता। बल्कि और कई वजह होती है मसलन रू पुराने व एक ही सिरिंज से इंजेक्शन लगवाना, रक्त के अदान प्रदान से, कटने छिलने या किसी प्रकार के घाव पर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त छीटा पढना आदि, हो सकता है। अत रू सभी को बिना संकोच के समय समय पर जांच कराते रहना चाहिए। इस शिविर में जिनका योगदान रहा। उनमे सेंचुरी हास्पिटल के डा. संजीव कुमार, महिला डा. गौरी अधौलिया, छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तरफ से रक्त जांच सेपल संग्रहणकर्ता ओमप्रकाश साहू दुर्ग, गणेश राम निर्मलकर दुर्ग, लिंक वर्कर योजना के जोनल सुपरवाइजर ईश्वर प्रसाद वर्मा, गायत्री सेन, पुष्पा वर्मा, बुधेश्वरी देवांगन, सरिता बर्मन, इसके अलावा कांती लाल चंद्रवंशी, बुद्धन कुमार बसंत, राकेश निर्मलकर, सतपाल कोशले, गोपाल मिश्रा, दीपेन्द्र मिश्रा, मुन्ना लाल बर्मन आदि।
|
भारत की विदेश नीति 381
पाकिस्तान इस आग्रह पर डटा रहा कि हवाई मार्गों की सुविधा के सम्बन्ध मे दोनो देशों के बीच व्यापक समझोता होने के बाद ही पाकिस्तान अन्तर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था से भारत के विरुद्ध दायर किए गए अभियोग को वापस लेगा । भारतीय प्रतिनिधि मण्डल को यह समझाने की कोशिश व्यर्थ हुई कि अन्तर्राष्ट्रीय संस्था मे अभियोग के चलते हुए दोनों देशों के बीच स्वस्थ और मित्रतापूर्ण वातावरण पैदा नहीं हो सकता। इसके लिए आवश्यक है कि पाकिस्तान अभियोग
वापस ले ।
4. भारत की पहल पर विदेश सचिवों की बैठक में एक अन्य विषय पर भी वार्ता हुई जिसका सम्बन्ध सन् 1960 की सिन्धु जल सन्धि के अनुसार सलाल में चिनाब नदी पर पन बिजली विद्युत परियोजना के निर्माण से था। भारत ने यह सुझाव दिया था कि पाकिस्तान में इस परियोजना के डिजाइन के सम्बन्ध मे जो शकायें उठायी गयी हैं उन्हें दूर करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता हो । मई, 1975 मे विदेश सचिवों की बैठक मे कुछ बातों पर सहमति हो गई, तथापि अन्त में पाकिस्तान सरकार ने निश्चय किया कि यह मामला किसी तटस्थ विशेषज्ञ के सामने रखा जाए !
5. जहाँ तक व्यापार का मामला है दोनों देशों के बीच व्यापार पुनः शुरू करने के बारे में जनवरी, 1975 में समझौता हो जाने के बाद भारत ने विदेशी मुद्रा में लगभग 25 करोड़ रु. मूल्य की 2 लाख सुत की गांठे क्रय करने का अपना वचन पूरा किया । पाकिस्तान 1975 के वर्ष में भारत से सामान खरीदने के लिए कोई समझौता करने में असफल रहा ।
6. वर्ष 1975 के पाकिस्तान जम्मू तथा कश्मीर के उम प्रदेश की स्थिति एकतरफा सरीके से बदलने के प्रयत्न करता रहा जिस पर उसका अवैध कब्जा है। भारत सरकार के विरोधों के बावजूद पाकिस्तान इस दिशा में आगे बढ़ता रहा और अगस्त, 1975 में उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए एक परिषद् की स्थापना की जिसके अन्तर्गत पाकिस्तान सरकार ने पाक अधिकृत कश्मोर पर अपने नियन्त्रण को पहली वार संस्थागत व्यवस्थित रूप दिया। भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कहा कि इस परिषद् की स्थापना करने को उसकी कार्यवाही शिमला समझौते का उल्लघन है क्योकि यह जम्मू तथा कश्मीर के पाकिस्तान अधिकृत प्रदेशो की स्थिति मे एकपक्षीय परिवर्तन है। दोनों ओर से पत्रो के आदान प्रदान में भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया कि इन अधिकृत प्रदेशों में लागू अन्तरिम संविधान में निहिन तत्वो की दृष्टि से इम परिषद् को स्थापना एक बहुत बडा सांविधानिक परिवर्तन है जिसे मात्र प्रशासनिक प्रबन्ध नहीं माना जा सकता ।
7. कश्मीर की समस्या को शान्तिपूर्वक द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने के लिए शिमला समझौते की शर्तों के अनुसार बचनबद्ध होने के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के निर्जीव प्रस्तावो में पुनः मन्तरर्राष्ट्रीय रुचि जगाने
|
भारत की विदेश नीति तीन सौ इक्यासी पाकिस्तान इस आग्रह पर डटा रहा कि हवाई मार्गों की सुविधा के सम्बन्ध मे दोनो देशों के बीच व्यापक समझोता होने के बाद ही पाकिस्तान अन्तर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था से भारत के विरुद्ध दायर किए गए अभियोग को वापस लेगा । भारतीय प्रतिनिधि मण्डल को यह समझाने की कोशिश व्यर्थ हुई कि अन्तर्राष्ट्रीय संस्था मे अभियोग के चलते हुए दोनों देशों के बीच स्वस्थ और मित्रतापूर्ण वातावरण पैदा नहीं हो सकता। इसके लिए आवश्यक है कि पाकिस्तान अभियोग वापस ले । चार. भारत की पहल पर विदेश सचिवों की बैठक में एक अन्य विषय पर भी वार्ता हुई जिसका सम्बन्ध सन् एक हज़ार नौ सौ साठ की सिन्धु जल सन्धि के अनुसार सलाल में चिनाब नदी पर पन बिजली विद्युत परियोजना के निर्माण से था। भारत ने यह सुझाव दिया था कि पाकिस्तान में इस परियोजना के डिजाइन के सम्बन्ध मे जो शकायें उठायी गयी हैं उन्हें दूर करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता हो । मई, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर मे विदेश सचिवों की बैठक मे कुछ बातों पर सहमति हो गई, तथापि अन्त में पाकिस्तान सरकार ने निश्चय किया कि यह मामला किसी तटस्थ विशेषज्ञ के सामने रखा जाए ! पाँच. जहाँ तक व्यापार का मामला है दोनों देशों के बीच व्यापार पुनः शुरू करने के बारे में जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में समझौता हो जाने के बाद भारत ने विदेशी मुद्रा में लगभग पच्चीस करोड़ रु. मूल्य की दो लाख सुत की गांठे क्रय करने का अपना वचन पूरा किया । पाकिस्तान एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के वर्ष में भारत से सामान खरीदने के लिए कोई समझौता करने में असफल रहा । छः. वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के पाकिस्तान जम्मू तथा कश्मीर के उम प्रदेश की स्थिति एकतरफा सरीके से बदलने के प्रयत्न करता रहा जिस पर उसका अवैध कब्जा है। भारत सरकार के विरोधों के बावजूद पाकिस्तान इस दिशा में आगे बढ़ता रहा और अगस्त, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लिए एक परिषद् की स्थापना की जिसके अन्तर्गत पाकिस्तान सरकार ने पाक अधिकृत कश्मोर पर अपने नियन्त्रण को पहली वार संस्थागत व्यवस्थित रूप दिया। भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कहा कि इस परिषद् की स्थापना करने को उसकी कार्यवाही शिमला समझौते का उल्लघन है क्योकि यह जम्मू तथा कश्मीर के पाकिस्तान अधिकृत प्रदेशो की स्थिति मे एकपक्षीय परिवर्तन है। दोनों ओर से पत्रो के आदान प्रदान में भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया कि इन अधिकृत प्रदेशों में लागू अन्तरिम संविधान में निहिन तत्वो की दृष्टि से इम परिषद् को स्थापना एक बहुत बडा सांविधानिक परिवर्तन है जिसे मात्र प्रशासनिक प्रबन्ध नहीं माना जा सकता । सात. कश्मीर की समस्या को शान्तिपूर्वक द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने के लिए शिमला समझौते की शर्तों के अनुसार बचनबद्ध होने के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के निर्जीव प्रस्तावो में पुनः मन्तरर्राष्ट्रीय रुचि जगाने
|
हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में रविवार को सनराईजर्स हैदराबाद और जीत के रथ पर सवार कोलकाता नाइट राईडर्स के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में सनराईजर्स हैदराबाद ने टॉस हारकर पहले खेलते हुए अपने 20 ओवर में तीन विकेट पर 209 रनों का स्कोर खड़ा किया।
कोलकाता की टीम को रॉबिन उथप्पा पर बड़ी उम्मीदें थी और वो केकेआर की टीम को शानदार अंदाज में आगे ले जा रहे थे। एक तरफ मनीष पांडे के आउट होने से केकेआर की उम्मीदों को झटका लगा था, लेकिन दूसरे सिरे पर रॉबिन उथप्पा जमकर बल्लेबाजी कर रहे थे। और उथप्पा ने देखते ही देखते 25 गेंदो में अपने 50 रन पूरे कर लिए।
|
हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में रविवार को सनराईजर्स हैदराबाद और जीत के रथ पर सवार कोलकाता नाइट राईडर्स के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में सनराईजर्स हैदराबाद ने टॉस हारकर पहले खेलते हुए अपने बीस ओवर में तीन विकेट पर दो सौ नौ रनों का स्कोर खड़ा किया। कोलकाता की टीम को रॉबिन उथप्पा पर बड़ी उम्मीदें थी और वो केकेआर की टीम को शानदार अंदाज में आगे ले जा रहे थे। एक तरफ मनीष पांडे के आउट होने से केकेआर की उम्मीदों को झटका लगा था, लेकिन दूसरे सिरे पर रॉबिन उथप्पा जमकर बल्लेबाजी कर रहे थे। और उथप्पा ने देखते ही देखते पच्चीस गेंदो में अपने पचास रन पूरे कर लिए।
|
नागपुर से मुंबई जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में एक यात्री ने लैंडिंग से पहले इमरजेंसी गेट (emergency gate) खोल दिया। इसके बाद पुलिस ने यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां नागपुर से मुंबई जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में एक यात्री ने लैंडिंग से पहले इमरजेंसी गेट (emergency gate) खोल दिया। यात्री को ऐसा करते देख फ्लाइट में बैठे अन्य यात्री और क्रू मेंबर्स के होश उड़ गए। क्रू मेंबर ने आनन-फानन में यात्री को गेट के पास से हटाया और गेट बंद कर दिया।
इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद मुंबई एयरपोर्ट (Mumbai Airport) पर पुलिस ने यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एयरपोर्ट पुलिस (Airport Police) ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार 24 जनवरी को प्रणव राउत नाम का शख्स इंडिगो की फ्लाइट 6E-5274 से नागपुर से मुंबई आ रहा था। इस दौरान प्रणव राउत ने मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले एग्जिट गेट का कवर खोल दिया। आनन-फानन में फ्लाइट में मौजूद क्रू मेंबर ने गेट बंद कर दिया।
एयरलाइंस के कर्मचारियों ने मामले की जानकारी मुंबई एयरपोर्ट (Mumbai Airport) पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को दी। सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने यात्री के खिलाफ अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए आईपीसी की धारा 336 के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही उसे गिरफ्तार कर लिया है। और उससे पूछताछ जारी है। और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।
वहीं, इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि नागपुर से मुंबई जा रही फ्लाइट 6E 5274 में एक यात्री ने इमरजेंसी गेट का कवर हटाने की कोशिश की। जिस समय यात्री ने ऐसा किया, फ्लाइट हवा में थी और लैंडिंग के लिए आ रही थी। फ्लाइट में मौजूद क्रू मेंबर्स ने कैप्टन को घटना की जानकारी दी और यात्री को चेतावनी दी गई है।
बता दें इससे पहले भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने 10 दिसंबर को इंडिगो की फ्लाइट का इमरजेंसी गेट खोल दिया था। डीजीसीए ने अपने बयान में जानकारी देते हुए कहा था कि इंडिगो 6ई फ्लाइट 6ई-7339 में एक यात्री ने इमरजेंसी दरवाजा खोलकर दहशत फैला दी। इसके बाद डीजीसीए ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। वहीं, मामले में उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि गलती से तेजस्वी सूर्या ने दरवाजा खोल दिया था और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी है।
सिंधिया ने कहा, "यह घटना तब हुई जब विमान जमीन पर था। तेजस्वी सूर्या ने गलती से आपातकालीन निकास द्वार खोल दिया था। उन्होंने खुद घटना की सूचना दी थी और तुरंत इसके लिए माफी मांगी थी।
|
नागपुर से मुंबई जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में एक यात्री ने लैंडिंग से पहले इमरजेंसी गेट खोल दिया। इसके बाद पुलिस ने यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहां नागपुर से मुंबई जा रहे इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में एक यात्री ने लैंडिंग से पहले इमरजेंसी गेट खोल दिया। यात्री को ऐसा करते देख फ्लाइट में बैठे अन्य यात्री और क्रू मेंबर्स के होश उड़ गए। क्रू मेंबर ने आनन-फानन में यात्री को गेट के पास से हटाया और गेट बंद कर दिया। इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद मुंबई एयरपोर्ट पर पुलिस ने यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एयरपोर्ट पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार चौबीस जनवरी को प्रणव राउत नाम का शख्स इंडिगो की फ्लाइट छःE-पाँच हज़ार दो सौ चौहत्तर से नागपुर से मुंबई आ रहा था। इस दौरान प्रणव राउत ने मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले एग्जिट गेट का कवर खोल दिया। आनन-फानन में फ्लाइट में मौजूद क्रू मेंबर ने गेट बंद कर दिया। एयरलाइंस के कर्मचारियों ने मामले की जानकारी मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को दी। सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने यात्री के खिलाफ अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए आईपीसी की धारा तीन सौ छत्तीस के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही उसे गिरफ्तार कर लिया है। और उससे पूछताछ जारी है। और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है। वहीं, इंडिगो एयरलाइंस ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि नागपुर से मुंबई जा रही फ्लाइट छःE पाँच हज़ार दो सौ चौहत्तर में एक यात्री ने इमरजेंसी गेट का कवर हटाने की कोशिश की। जिस समय यात्री ने ऐसा किया, फ्लाइट हवा में थी और लैंडिंग के लिए आ रही थी। फ्लाइट में मौजूद क्रू मेंबर्स ने कैप्टन को घटना की जानकारी दी और यात्री को चेतावनी दी गई है। बता दें इससे पहले भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने दस दिसंबर को इंडिगो की फ्लाइट का इमरजेंसी गेट खोल दिया था। डीजीसीए ने अपने बयान में जानकारी देते हुए कहा था कि इंडिगो छःई फ्लाइट छःई-सात हज़ार तीन सौ उनतालीस में एक यात्री ने इमरजेंसी दरवाजा खोलकर दहशत फैला दी। इसके बाद डीजीसीए ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। वहीं, मामले में उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि गलती से तेजस्वी सूर्या ने दरवाजा खोल दिया था और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी है। सिंधिया ने कहा, "यह घटना तब हुई जब विमान जमीन पर था। तेजस्वी सूर्या ने गलती से आपातकालीन निकास द्वार खोल दिया था। उन्होंने खुद घटना की सूचना दी थी और तुरंत इसके लिए माफी मांगी थी।
|
जबकि खेल के अकादमिक अध्ययन में लगे हुए हैं, छात्रों को आम तौर पर प्रबंधन करने की तैयारी कर या कोच खेल संगठनों या पेशेवर एथलीट, छात्रों या मनोरंजन के कार्यक्रमों के लिए शारीरिक प्रशिक्षण मार्गदर्शन प्रदान करने के बीच चुनें। पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों शिक्षण या कोचिंग करियर के लिए विद्वानों तैयार कर सकते हैं।
फ्रांस वर्तमान में अर्थव्यवस्था के संदर्भ में 20 सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है जो अपने शानदार परिणाम-उन्मुख उच्च शिक्षा लर्निंग के कारण है। विश्वविद्यालयों में अधिकांश पाठ्यक्रम फ्रांसीसी भाषा में प्रस्तुत किए जाते हैं। फ्रांस में 60 सार्वजनिक और 100 निजी विश्वविद्यालय हैं।
छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि 12 से 18 कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
|
जबकि खेल के अकादमिक अध्ययन में लगे हुए हैं, छात्रों को आम तौर पर प्रबंधन करने की तैयारी कर या कोच खेल संगठनों या पेशेवर एथलीट, छात्रों या मनोरंजन के कार्यक्रमों के लिए शारीरिक प्रशिक्षण मार्गदर्शन प्रदान करने के बीच चुनें। पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों शिक्षण या कोचिंग करियर के लिए विद्वानों तैयार कर सकते हैं। फ्रांस वर्तमान में अर्थव्यवस्था के संदर्भ में बीस सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है जो अपने शानदार परिणाम-उन्मुख उच्च शिक्षा लर्निंग के कारण है। विश्वविद्यालयों में अधिकांश पाठ्यक्रम फ्रांसीसी भाषा में प्रस्तुत किए जाते हैं। फ्रांस में साठ सार्वजनिक और एक सौ निजी विश्वविद्यालय हैं। छात्रों के एक स्नातक की डिग्री कार्यक्रम पूरा करने के बाद स्नातकोत्तर किया है। एक परास्नातक प्राप्त करने के लिए, आप आमतौर पर अक्सर व्यापक परीक्षण और / या एक शोध पूरा शामिल है कि बारह से अट्ठारह कॉलेज के पाठ्यक्रम को पूरा करने की जरूरत है।
|
HMD Global जल्द ही अपने बेहद खास फोन Nokia 6600 को नए अवतार और फीचर्स के साथ लॉन्च कर सकती है। जी हां, खबर आ रही है कि 2000 से लेकर 2010 तक के दशक में लगभग सभी के फेवरेट माने जा रहे Nokia 6600 को दोबारा लॉन्च किया जा सकता है, जो कि प्रोपर स्मार्टफोन के रूप में होगा। इसके साथ ही नोकिया के एक और बेहद स्टाइलिश मोबाइल Nokia 3660 को भी नए अवतार में पेश किया जा सकता है, जो कि नोकिया के इन दोनों खास फोन के दीवानों के लिए बहुत खुशी की बात है।
दरअसल, नोकिया के इन दोनों मोबाइल का लुक इतना शानदार है कि 2010 से पहले लोग इनके दीवाने थे। अब एचएमडी ग्लोबल शायद लोगों को विंटेज फोन फील देने की कोशिश में नोकिया 6600 और नोकिया 3660 को नए रंग-रूप और फीचर्स के साथ दोबारा लॉन्च कर सकती है। हाल ही में SIRIM समेत कई सर्टिफिकेशन साइट पर नोकिया के इन दोनों स्मार्टफोन्स के बारे में पता चला है, जिसके बाद कयास लगने लगे हैं कि नोकिया 6600 और नोकिया 3660 की वापसी हो सकती है।
पॉपुलर टिप्स्टर मुकुल शर्मा ने भी सिरीम सर्टिफिकेशन साइट पर नोकिया के इन दोनों फोन्स की मौजूदगी के बारे में बताया है। नोकिया के ये दोनों फोन रग्ड कैटिगरी के थे, जो कि मोटे और भारी होते थे। स्मार्टफोन्स आने के बाद इन प्रीमियम फीचर फोन को डिसकंटिन्यू कर दिया गया था। अब इस फोन को स्मार्टफोन के रूप में लॉन्च किया जा सकता है, जिसका लुक भले ही पहले जैसा हो, लेकिन फीचर्स लेटेस्ट हो सकते हैं।
इन स्मार्टफोन्स में क्या कुछ खास था?
Nokia 6600 की खूबियों की बात करें तो इस फोन में 2. 1 इंच का डिस्प्ले और कीपैड दिया गया था। इस फोन का लुक बेहद शानदार था और इसमें 0. 3 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया था। साल 2003 में लॉन्च इस फोन में महज 6 एमबी का स्टोरेज दिया गया था। हालांकि, उस समय 6 एमबी में भी सैकड़ों फोटो आ जाते थे। इस फोन में 850 एमएएच की रिमूवेबल बैटरी दी गई है। वहीं Nokia 3660 की खूबियों की बात करें तो इसमें 2. 1 इंच का डिस्प्ले दिया गया था, जिसमें 0. 3 एमपी का रियर कैमरा दिया गया था। इस फोन को भी साल 2003 में ही लॉन्च किया गया था और इसमें 3. 4 एमबी स्टोरेज दिया गया था।
|
HMD Global जल्द ही अपने बेहद खास फोन Nokia छः हज़ार छः सौ को नए अवतार और फीचर्स के साथ लॉन्च कर सकती है। जी हां, खबर आ रही है कि दो हज़ार से लेकर दो हज़ार दस तक के दशक में लगभग सभी के फेवरेट माने जा रहे Nokia छः हज़ार छः सौ को दोबारा लॉन्च किया जा सकता है, जो कि प्रोपर स्मार्टफोन के रूप में होगा। इसके साथ ही नोकिया के एक और बेहद स्टाइलिश मोबाइल Nokia तीन हज़ार छः सौ साठ को भी नए अवतार में पेश किया जा सकता है, जो कि नोकिया के इन दोनों खास फोन के दीवानों के लिए बहुत खुशी की बात है। दरअसल, नोकिया के इन दोनों मोबाइल का लुक इतना शानदार है कि दो हज़ार दस से पहले लोग इनके दीवाने थे। अब एचएमडी ग्लोबल शायद लोगों को विंटेज फोन फील देने की कोशिश में नोकिया छः हज़ार छः सौ और नोकिया तीन हज़ार छः सौ साठ को नए रंग-रूप और फीचर्स के साथ दोबारा लॉन्च कर सकती है। हाल ही में SIRIM समेत कई सर्टिफिकेशन साइट पर नोकिया के इन दोनों स्मार्टफोन्स के बारे में पता चला है, जिसके बाद कयास लगने लगे हैं कि नोकिया छः हज़ार छः सौ और नोकिया तीन हज़ार छः सौ साठ की वापसी हो सकती है। पॉपुलर टिप्स्टर मुकुल शर्मा ने भी सिरीम सर्टिफिकेशन साइट पर नोकिया के इन दोनों फोन्स की मौजूदगी के बारे में बताया है। नोकिया के ये दोनों फोन रग्ड कैटिगरी के थे, जो कि मोटे और भारी होते थे। स्मार्टफोन्स आने के बाद इन प्रीमियम फीचर फोन को डिसकंटिन्यू कर दिया गया था। अब इस फोन को स्मार्टफोन के रूप में लॉन्च किया जा सकता है, जिसका लुक भले ही पहले जैसा हो, लेकिन फीचर्स लेटेस्ट हो सकते हैं। इन स्मार्टफोन्स में क्या कुछ खास था? Nokia छः हज़ार छः सौ की खूबियों की बात करें तो इस फोन में दो. एक इंच का डिस्प्ले और कीपैड दिया गया था। इस फोन का लुक बेहद शानदार था और इसमें शून्य. तीन मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया था। साल दो हज़ार तीन में लॉन्च इस फोन में महज छः एमबी का स्टोरेज दिया गया था। हालांकि, उस समय छः एमबी में भी सैकड़ों फोटो आ जाते थे। इस फोन में आठ सौ पचास एमएएच की रिमूवेबल बैटरी दी गई है। वहीं Nokia तीन हज़ार छः सौ साठ की खूबियों की बात करें तो इसमें दो. एक इंच का डिस्प्ले दिया गया था, जिसमें शून्य. तीन एमपी का रियर कैमरा दिया गया था। इस फोन को भी साल दो हज़ार तीन में ही लॉन्च किया गया था और इसमें तीन. चार एमबी स्टोरेज दिया गया था।
|
How to know personality traits through nails: नाखून यदि खूबसूरत हो, तो हाथों की खूबसूरती दुगनी बढ़ जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते है, नाखून हमारे हाथों की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ हमारे व्यक्तित्व के बारे में भी कई राज खोलते हैं। नाखून के कुछ आकार ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर व्यक्ति के व्यक्तित्व का अंदाजा लग जाता है। जानते हैं कि नेल्स कैसे पर्सनैलिटी के राज खोलते हैं।
चौकोर अंडाकार नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वह प्रयोग करने से हिचकते हैं।
नुकीले नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही अनोखे और रचनात्मक व्यक्तित्व के होते हैं।
इस आकार वाले व्यक्ति बहुत ही साहसी व्यक्तित्व के हेते है। उन्हें किसी भी चुनौती को स्वीकार करना बेहद पसंद होता है।
इस आकार के नाखून वाले व्यक्ति की कल्पना बहुत व्यापक होती है। वह लोगों के प्रति बहुत ही ईमानदार होते हैं। ऐसे लोग बहुत ही क्रोधित स्वभाव के होते है। जब चीजें उनके अनुकूल नहीं होती है, तो वह बहुत ही जल्द उग्र हो जाते हैं।
राउंड नाखून वाले व्यक्ति जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति खुले विचार के होते है। वह स्वतंत्र रहना पसंद करते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति बहुत जल्द किसी चीजों को सीखने की कोशिश करते हैं।
ऐसे आकार वाले नाखून मेहनती व्यक्ति होने का संकेत देता है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति को चुनौतियों से लड़ने की आदत होती है। यह किसी काम को बहुत ध्यान पूर्वक करते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही निडर स्वभाव के होते है।
चौड़े या चौकोर आकार वाले नाखून व्यक्ति के गंभीर स्वभाव को दर्शाता है। ऐसे लोग कम जिद्दी होते है।
ऐसे नाखून जिस व्यक्ति का होता है, वह बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वह अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
|
How to know personality traits through nails: नाखून यदि खूबसूरत हो, तो हाथों की खूबसूरती दुगनी बढ़ जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते है, नाखून हमारे हाथों की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ हमारे व्यक्तित्व के बारे में भी कई राज खोलते हैं। नाखून के कुछ आकार ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर व्यक्ति के व्यक्तित्व का अंदाजा लग जाता है। जानते हैं कि नेल्स कैसे पर्सनैलिटी के राज खोलते हैं। चौकोर अंडाकार नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वह प्रयोग करने से हिचकते हैं। नुकीले नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही अनोखे और रचनात्मक व्यक्तित्व के होते हैं। इस आकार वाले व्यक्ति बहुत ही साहसी व्यक्तित्व के हेते है। उन्हें किसी भी चुनौती को स्वीकार करना बेहद पसंद होता है। इस आकार के नाखून वाले व्यक्ति की कल्पना बहुत व्यापक होती है। वह लोगों के प्रति बहुत ही ईमानदार होते हैं। ऐसे लोग बहुत ही क्रोधित स्वभाव के होते है। जब चीजें उनके अनुकूल नहीं होती है, तो वह बहुत ही जल्द उग्र हो जाते हैं। राउंड नाखून वाले व्यक्ति जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति खुले विचार के होते है। वह स्वतंत्र रहना पसंद करते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति बहुत जल्द किसी चीजों को सीखने की कोशिश करते हैं। ऐसे आकार वाले नाखून मेहनती व्यक्ति होने का संकेत देता है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति को चुनौतियों से लड़ने की आदत होती है। यह किसी काम को बहुत ध्यान पूर्वक करते है। ऐसे नाखून वाले व्यक्ति बहुत ही निडर स्वभाव के होते है। चौड़े या चौकोर आकार वाले नाखून व्यक्ति के गंभीर स्वभाव को दर्शाता है। ऐसे लोग कम जिद्दी होते है। ऐसे नाखून जिस व्यक्ति का होता है, वह बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वह अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
|
शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के शहर तवांग से दूर इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) का एक हेलीकॉप्टर एमआई-17 वी5 क्रैश हो गया। एयरफोर्स एक के बाद एक होने वाले क्रैश के सदमे से बाहर ही नहीं आ पा रही है।
उन्होंने बताया कि हर हादसे में कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के जरिए हादसे की वजहों का पता लगाया जा रहा है। जैसे ही कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी पूरी होगी, नए प्रस्तावों को लागू किया जाएगा। भामरे ने अपनी रिपोर्ट में साल 2012-2013 से लेकर 2016-2017 तक के आंकड़े प्रस्तुत किए थे। इन 29 जेट्स में से पांच सुखोई-30 और तीन ट्रेनर जेट्स भी शामिल थे।
सरकार के आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो पिछले पांच वर्षों में आईएएफ ने अपने 29 एयरक्राफ्ट और कुछ बहादुर पायलट्स और जवानों को क्रैश में गंवा दिया है। रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने जुलाई में सदन को जानकारी दी थी कि पिछले वर्षों में कभी मानवीय गलती तो कभी तकनीकी वजहों से आईएएफ के 29 एयरक्राफ्ट्स क्रैश हो चुके हैं।
उस समय घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें एयरफोर्स ऑफिसर समेत, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान भी शामिल थे। रूस में बने एमआई-17 हेलीकॉप्टर इस समय वायुसेना की रीढ़ हैं और फिलहाल 48 एयरक्राफ्ट की मांग रूस से की गई है।
हाल ही में हैदराबाद में आईएएफ का एक ट्रेनर जेट किरन क्रैश हो गया था। इस क्रैश में पायलट सुरक्षित था लेकिन हादसे ने कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिए थे। शुक्रवार को क्रैश हुआ आईएएफ का हेलीकॉप्टर वह एयरक्राफ्ट है जो साल 2013 में केदारनाथ में आई भयंकर बाढ़ के समय बचाव कार्य को पूरा करते समय क्रैश हो गया था।
इसी वर्ष मई में असम के तेजपुर बेस से फाइटर जेट सुखोई ने टेक ऑफ किया था। कुछ ही मिनटों बाद जेट रडार से गायब हो गया और फिर इसके क्रैश होने की खबरें आई थीं। इसी वर्ष 15 मार्च को सुखोई लड़ाकू विमान राजस्थान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए।
इससे पहले 19 मई 2015 को असम के ही नागौन जिले में स्थित लाओखोवा में एक सुखोई क्रैश हुआ था। इस घटना में भी दोनों पायलट्स सुरक्षित निकल गए थे। 14 अक्टूबर 2014 को पुणे के निकट गांव में एक सुखोई क्रैश हुआ और दोनों पायलट्स बच गए थे। 13 दिसंबर 2011 को पुणे में सुखोई-30 उड़ान भरने के बाद क्रैश हो गया।
|
शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के शहर तवांग से दूर इंडियन एयरफोर्स का एक हेलीकॉप्टर एमआई-सत्रह वीपाँच क्रैश हो गया। एयरफोर्स एक के बाद एक होने वाले क्रैश के सदमे से बाहर ही नहीं आ पा रही है। उन्होंने बताया कि हर हादसे में कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के जरिए हादसे की वजहों का पता लगाया जा रहा है। जैसे ही कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी पूरी होगी, नए प्रस्तावों को लागू किया जाएगा। भामरे ने अपनी रिपोर्ट में साल दो हज़ार बारह-दो हज़ार तेरह से लेकर दो हज़ार सोलह-दो हज़ार सत्रह तक के आंकड़े प्रस्तुत किए थे। इन उनतीस जेट्स में से पांच सुखोई-तीस और तीन ट्रेनर जेट्स भी शामिल थे। सरकार के आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो पिछले पांच वर्षों में आईएएफ ने अपने उनतीस एयरक्राफ्ट और कुछ बहादुर पायलट्स और जवानों को क्रैश में गंवा दिया है। रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने जुलाई में सदन को जानकारी दी थी कि पिछले वर्षों में कभी मानवीय गलती तो कभी तकनीकी वजहों से आईएएफ के उनतीस एयरक्राफ्ट्स क्रैश हो चुके हैं। उस समय घटना में बीस लोगों की मौत हो गई थी जिसमें एयरफोर्स ऑफिसर समेत, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान भी शामिल थे। रूस में बने एमआई-सत्रह हेलीकॉप्टर इस समय वायुसेना की रीढ़ हैं और फिलहाल अड़तालीस एयरक्राफ्ट की मांग रूस से की गई है। हाल ही में हैदराबाद में आईएएफ का एक ट्रेनर जेट किरन क्रैश हो गया था। इस क्रैश में पायलट सुरक्षित था लेकिन हादसे ने कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिए थे। शुक्रवार को क्रैश हुआ आईएएफ का हेलीकॉप्टर वह एयरक्राफ्ट है जो साल दो हज़ार तेरह में केदारनाथ में आई भयंकर बाढ़ के समय बचाव कार्य को पूरा करते समय क्रैश हो गया था। इसी वर्ष मई में असम के तेजपुर बेस से फाइटर जेट सुखोई ने टेक ऑफ किया था। कुछ ही मिनटों बाद जेट रडार से गायब हो गया और फिर इसके क्रैश होने की खबरें आई थीं। इसी वर्ष पंद्रह मार्च को सुखोई लड़ाकू विमान राजस्थान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। इससे पहले उन्नीस मई दो हज़ार पंद्रह को असम के ही नागौन जिले में स्थित लाओखोवा में एक सुखोई क्रैश हुआ था। इस घटना में भी दोनों पायलट्स सुरक्षित निकल गए थे। चौदह अक्टूबर दो हज़ार चौदह को पुणे के निकट गांव में एक सुखोई क्रैश हुआ और दोनों पायलट्स बच गए थे। तेरह दिसंबर दो हज़ार ग्यारह को पुणे में सुखोई-तीस उड़ान भरने के बाद क्रैश हो गया।
|
टीवी इंडस्ट्री का पावर कपल शोएब इब्राहिम और दीपिका कक्कड़ इन दिनों होमटाउन मौदहा में हैं। जहां शोएब अपनी बहन सबा की शादी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार वेडिंग फंक्शन की वीडियो और तस्वीरे वायरल हो रही है।
नई दिल्ली, जेएनएन। Dipika Shoaib Dance Video: टीवी का फेमस कपल शोएब इब्राहिम (Shoaib Ibrahim) दीपिका कक्कड़ (Dipika Kakar) सेलेब्स के साथ-साथ अब यूट्यूब भी बन चुके हैं। फैंस के साथ यह कपल अपनी लाइफ से जुड़ी छोटी से छोटी चीज साझा करते हैं। इसी बीच दीपिका ने इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियो शेयर की है जिसमे वह जमकर डांस करती नजर आ रही हैं। दरअसल, एक्ट्रेस ने घर इन दिनों शादी का महौल है। शोएब की बहन सबा इब्राहिम (Saba Ibrahim) की शादी होने वाली है। ऐसे में पूरा इब्राहिम परिवार होमटाउन मौदहा जा पहुंचा है। जहां प्री-वेडिंग की शुरुआत हो चुकी है।
सबा इब्राहिम की संगीत सेरेमनी आयोजित की गई। सबा का संगीत फंक्शन ज्यादा ग्रैंड नहीं था, लेकिन एक छोटी सी पार्टी रखी गई। इस दौरान शोएब और दीपिका कक्कड़ ने संगीत फंक्शन में खूब रंग जमाया। दीपिका ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें शोएब और दीपिका को दिल खोलकर डांस करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में शोएब को अपनी लेडीलव दीपिका, प्यारी बहन सबा और मां के साथ ठुमके लगाते हुए देखा जा सकता है।
शोएब इब्राहिम की बहन सबा इब्राहिम 6 नवंबर को शादी के बंधन में बंध जाएंगी। खबरों की माने तो आज यानी 4 नवंबर से हल्दी सेरेमनी होगी। वहीं 5 नवंबर को मेहंदी और संगीत समारोह होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शोएब और दीपिका दुल्हन के लिए संगीत समारोह के दौरान एक स्पेशल परफॉर्मेंस देंगे। बता दें सबा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं। वह ट्रेवल, ब्यूटी और फैशन से जुड़े वीडियोज यूट्यूब चैनल पर शेयर करती रहती हैं।
|
टीवी इंडस्ट्री का पावर कपल शोएब इब्राहिम और दीपिका कक्कड़ इन दिनों होमटाउन मौदहा में हैं। जहां शोएब अपनी बहन सबा की शादी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार वेडिंग फंक्शन की वीडियो और तस्वीरे वायरल हो रही है। नई दिल्ली, जेएनएन। Dipika Shoaib Dance Video: टीवी का फेमस कपल शोएब इब्राहिम दीपिका कक्कड़ सेलेब्स के साथ-साथ अब यूट्यूब भी बन चुके हैं। फैंस के साथ यह कपल अपनी लाइफ से जुड़ी छोटी से छोटी चीज साझा करते हैं। इसी बीच दीपिका ने इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियो शेयर की है जिसमे वह जमकर डांस करती नजर आ रही हैं। दरअसल, एक्ट्रेस ने घर इन दिनों शादी का महौल है। शोएब की बहन सबा इब्राहिम की शादी होने वाली है। ऐसे में पूरा इब्राहिम परिवार होमटाउन मौदहा जा पहुंचा है। जहां प्री-वेडिंग की शुरुआत हो चुकी है। सबा इब्राहिम की संगीत सेरेमनी आयोजित की गई। सबा का संगीत फंक्शन ज्यादा ग्रैंड नहीं था, लेकिन एक छोटी सी पार्टी रखी गई। इस दौरान शोएब और दीपिका कक्कड़ ने संगीत फंक्शन में खूब रंग जमाया। दीपिका ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें शोएब और दीपिका को दिल खोलकर डांस करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में शोएब को अपनी लेडीलव दीपिका, प्यारी बहन सबा और मां के साथ ठुमके लगाते हुए देखा जा सकता है। शोएब इब्राहिम की बहन सबा इब्राहिम छः नवंबर को शादी के बंधन में बंध जाएंगी। खबरों की माने तो आज यानी चार नवंबर से हल्दी सेरेमनी होगी। वहीं पाँच नवंबर को मेहंदी और संगीत समारोह होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शोएब और दीपिका दुल्हन के लिए संगीत समारोह के दौरान एक स्पेशल परफॉर्मेंस देंगे। बता दें सबा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं। वह ट्रेवल, ब्यूटी और फैशन से जुड़े वीडियोज यूट्यूब चैनल पर शेयर करती रहती हैं।
|
एक ही होता है।
अब, जीव मात्र सुख को ढूंढता है, दुःख से दूर भागता है । दुःख - पसंद नहीं है किसीको । अब फिर ये सुख तो टेम्परेरी हैं, वे उसे पसंद नहीं है सुख आने के बाद दुःख आता है। लोगों को कौन-सा सुख पसंद है? सनातन सुख, कि जिसके आने के बाद कभी भी दुःख नहीं आए। सनातन सुख किसे कहेंगे? मोक्ष को, मुक्ति को ! मोक्ष हो तभी सनातन सुख उत्पन्न होता है । बंधन से दुःख है ।
संसारी दुःख का अभाव, वह मुक्ति का प्रथम अनुभव कहलाता है । वह हम आपको 'ज्ञान' देते हैं, तब वैसा आपको दूसरे ही दिन से हो जाता । फिर यह शरीर का बोझ, कर्मों का बोझ वे सब टूट जाते हैं, वह दूसरा अनुभव । फिर आनंद ही इतना अधिक होता है कि जिसका वर्णन ही नहीं हो सकता ।
सिद्धगति, स्थिति कैसी ?
प्रश्नकर्ता : मोक्ष मिलने के बाद हमारी स्थिति क्या रहती होगी? दादाश्री : परमात्म स्वरूप ।
प्रश्नकर्ता : फिर उसे कुछ कार्य करना रहता है क्या ?
दादाश्री : कोई कार्य होता ही नहीं वहाँ पर । अभी भी आपका आत्मा कुछ भी कार्य नहीं कर रहा है । यह जो कार्य कर रहा है, वह अज्ञान भाव है, मिकेनिकल भाव है। आत्मा क्रियाकारी है ही नहीं, स्वयं ज्ञायक स्वभाव का है। वहाँ सिद्धगति में सिर्फ ज्ञाता- दृष्टा और परमानंद होता है । वहाँ सिद्धगति में इतना अधिक सुख है कि वहाँ के निरंतर सुख में से एक मिनिट का सुख यदि यहाँ पृथ्वी पर पड़े तो इस दुनिया में एक वर्ष तक तो आनंद-आनंद की सीमा न रहे !
मोक्ष का स्वरूप
प्रश्नकर्ता : मोक्ष प्राप्त करने के बाद फिर कभी भी जन्म नहीं लेते?
दादाश्री : इस बखेड़े में कौन आए? यह तो बहुत त्रासदायक वस्तु है। इस संसार में तो कितनी अधिक परवशता है? यह तो शराब पीकर खुद अपने आप को सुखी मानना, उसके जैसा है। यह संसार तो भूत चिपट गया हो, वैसा है। ये मन-वचन-काया के तीन भूत चिपटे हुए हैं ! वह तो दाढ़ दुःखे तब पता चलेगा । राजा को भी दाढ़ दुःखे तब राज्य प्यारा लगता है या रानियाँ प्यारी लगती हैं?
प्रश्नकर्ता : कोई प्यारा नहीं लगता ।
दादाश्री : यह तो भयंकर आफत है ! और मोक्ष तो स्वाभाविक
सुख है
प्रश्नकर्ताः संसार के व्यवहार में रहने के बावजूद मनुष्य को मोक्ष का अनुभव हो सकता है?
दादाश्री : अँधे मनुष्य को एक खंभे से कसकर खूब लपेटकर बाँध दिया हो, फिर उसे छुए बिना पीछे से धीरे से एक डोरी ब्लेड से काट लें तो उसे पता चलेगा या नहीं चलेगा?
प्रश्नकर्ता : चलेगा।
दादाश्री : इस भाग में से बंधन टूट गया है ऐसा उसे पता चल जाता है। उसी प्रकार मोक्ष का अनुभव होता है !
मोक्ष अर्थात् मुक्तभाव, बंधन नहीं लगता । पुलिसवाला पकड़े तब भी बंधन नहीं लगता।
स्वर्ग, फिर भी बंधन
प्रश्नकर्ताः ऐसा कहते हैं न, मोक्ष अर्थात् स्वर्ग मिलता है, वैकुंठ मिलता है या भगवान में मिल जाना, वह क्या है ?
दादाश्री : स्वर्ग-वर्ग कुछ भी नहीं होता वहाँ तो । स्वर्ग यानी कि भौतिक सुख भोगने का स्थान और नर्क में भौतिक दुःख भोगने पड़ते हैं । और इस मध्यलोक में सुख और दुःख दोनों का मिक्सचर होता है । स्वर्ग
में भी बंधन है, वहाँ भी पसंद नहीं हो तो भी रहना पड़ता है। वहाँ पर पत्नी के साथ में अच्छा नहीं लगता हो फिर भी जीना पड़ता है। क्योंकि उनका आयुष्य कम नहीं हो सकता ।
लाखों जन्मों से इसमें से छूटने की कामना हर एक के बुद्धि के आशय में होती ही है पर छूटा नहीं जा सकता । धक्के बहुत खाता है, छटपटाता है, फिर भी नहीं मिलता । पत्नी और बच्चों के बिना रहकर देखता है, वहाँ भी कुछ नहीं होता, इसलिए वापिस दूसरे जन्म में संसारी बनता है। सभी प्रकार के विकल्प करके देख लिए । निर्विकल्प प्राप्त करने के लिए जो कुछ करते हैं, वे सभी विकल्प के विकल्प हैं । ये जंजाल छूट सके वैसा नहीं है। गृहस्थी का जंजाल छूटे तो त्यागी का जंजाल चिपटता है, वहाँ भी संसार तो है ही न !
विनाशी चीज़ नहीं चाहिए
मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए?
'ज्ञानी' के अलावा हमें दूसरा कुछ भी नहीं चाहिए, वह भाव रखना । 'इस जगत् की कोई भी विनाशी चीज़ मुझे नहीं चाहिए ।' ऐसा पाँच बार सुबह में बोलकर उठे और उसे सिन्सियर रहे उसे कोई कर्म नहीं बंधता । परन्तु 'मुझे' अर्थात् कौन? वह निश्चित करके बोलना चाहिए । 'मैं शुद्धात्मा हूँ' और जो चाहिए वह इस देह को चाहिए, 'चंदूलाल' को चाहिए। और वह तो अधिक होता ही नहीं न? 'व्यवस्थित' में जो हो वह ठीक और नहीं हो तो वह नहीं, परन्तु 'मुझे कुछ भी नहीं चाहिए', वह भाव पक्का होना चाहिए। और उसके प्रति सिन्सियर रहें तो कुछ भी दख़ल हो वैसा नहीं है। 'व्यवस्थित' में जो मिलनेवाला हो उतना ही मिलनेवाला है, उसमें कुछ बदलाव नहीं होता। बल्कि लाभ यह है कि चिंता और बेचैनी कम हो जाती है। ये दोनों द्रव्य अलग हैं। उनका अलग अनुभव ही करना है। दूसरा कुछ भी करना नहीं है। भीतर बुद्धि दख़ल करे या विचार में एकाकार होकर उलझे तो भी वह 'हम' नहीं करते हैं । 'आप' 'आपका' भाग अलग रखो।'आप' और 'चंदूलाल' पड़ोसी की तरह रहो तो कुछ भी असर नहीं
करेगा! यानी 'आप' यदि 'अपने आप' के प्रति सिन्सियर रहो तो यह ऐसा विज्ञान है कि आपको निर्लेप ही रखे !
आप कारखाने में नौकरी करते हो, वहाँ सिन्सियर रहते हो या नहीं
दादाश्री : उसमें सिन्सियर रहना सिरदर्दी है । और इसमें इतनी अधिक सिरदर्दी नहीं है । और किसीको ऐसा रहता हो कि किसी रुचि में उसे स्वाद नहीं जाता हो, उसे सिन्सियारीटी नहीं रहती हो तो उस अनुसार मुझे कह देना, तो हम उसका रास्ता निकाल देंगे । परन्तु अंदर गड़बड़ करे और मन में उलझता रहे कि 'कर्म बंधेगा या क्या', तो उस तरह से हल नहीं आएगा। कर्म बंधन की थियरी अलग ही है । वह हमारे पास से समझ लेना है।
जगत् की सत्ता कहाँ पर झुके ?
इस जगत् में जिसकी सर्वस्व प्रकार की भीख चली गई हो, उसे इस जगत् में तमाम सूत्र हाथ में दे दिए जाते हैं ।
भीख कितने प्रकार की होती होगी? मान की भीख, लक्ष्मी की भीख, विषयों की भीख, शिष्यों की भीख, मंदिर बनवाने की भीख, अपमान की भीख । सभी प्रकार की भीख, भीख और भीख ! वहाँ अपना दारिद्र्य कैसे जाए?
जिसकी तमाम प्रकार की भीख छूट जाए, उसके हाथ में इस जगत् की सत्ता आ जाती है। अभी मेरे हाथ में आ चुकी है, क्योंकि मेरी सर्वस्व भीख छूट गई है। जब तक निर्वासनिक पुरुष नहीं मिलेंगे, तब तक सच्चा धर्म प्राप्त नहीं होगा। निर्वासनिक पुरुष तो जगत् में कभी ही मिलते हैं । तब अपना मोक्ष का काम हो जाता है । वे नहीं मिलें तो कब तक चला सकते हैं? मान के भूखे हों तो चला सकते हैं, परन्तु लक्ष्मी की भीखवाले, कीर्ति की, विषय की भीखवाले को नहीं चला सकते ।
|
एक ही होता है। अब, जीव मात्र सुख को ढूंढता है, दुःख से दूर भागता है । दुःख - पसंद नहीं है किसीको । अब फिर ये सुख तो टेम्परेरी हैं, वे उसे पसंद नहीं है सुख आने के बाद दुःख आता है। लोगों को कौन-सा सुख पसंद है? सनातन सुख, कि जिसके आने के बाद कभी भी दुःख नहीं आए। सनातन सुख किसे कहेंगे? मोक्ष को, मुक्ति को ! मोक्ष हो तभी सनातन सुख उत्पन्न होता है । बंधन से दुःख है । संसारी दुःख का अभाव, वह मुक्ति का प्रथम अनुभव कहलाता है । वह हम आपको 'ज्ञान' देते हैं, तब वैसा आपको दूसरे ही दिन से हो जाता । फिर यह शरीर का बोझ, कर्मों का बोझ वे सब टूट जाते हैं, वह दूसरा अनुभव । फिर आनंद ही इतना अधिक होता है कि जिसका वर्णन ही नहीं हो सकता । सिद्धगति, स्थिति कैसी ? प्रश्नकर्ता : मोक्ष मिलने के बाद हमारी स्थिति क्या रहती होगी? दादाश्री : परमात्म स्वरूप । प्रश्नकर्ता : फिर उसे कुछ कार्य करना रहता है क्या ? दादाश्री : कोई कार्य होता ही नहीं वहाँ पर । अभी भी आपका आत्मा कुछ भी कार्य नहीं कर रहा है । यह जो कार्य कर रहा है, वह अज्ञान भाव है, मिकेनिकल भाव है। आत्मा क्रियाकारी है ही नहीं, स्वयं ज्ञायक स्वभाव का है। वहाँ सिद्धगति में सिर्फ ज्ञाता- दृष्टा और परमानंद होता है । वहाँ सिद्धगति में इतना अधिक सुख है कि वहाँ के निरंतर सुख में से एक मिनिट का सुख यदि यहाँ पृथ्वी पर पड़े तो इस दुनिया में एक वर्ष तक तो आनंद-आनंद की सीमा न रहे ! मोक्ष का स्वरूप प्रश्नकर्ता : मोक्ष प्राप्त करने के बाद फिर कभी भी जन्म नहीं लेते? दादाश्री : इस बखेड़े में कौन आए? यह तो बहुत त्रासदायक वस्तु है। इस संसार में तो कितनी अधिक परवशता है? यह तो शराब पीकर खुद अपने आप को सुखी मानना, उसके जैसा है। यह संसार तो भूत चिपट गया हो, वैसा है। ये मन-वचन-काया के तीन भूत चिपटे हुए हैं ! वह तो दाढ़ दुःखे तब पता चलेगा । राजा को भी दाढ़ दुःखे तब राज्य प्यारा लगता है या रानियाँ प्यारी लगती हैं? प्रश्नकर्ता : कोई प्यारा नहीं लगता । दादाश्री : यह तो भयंकर आफत है ! और मोक्ष तो स्वाभाविक सुख है प्रश्नकर्ताः संसार के व्यवहार में रहने के बावजूद मनुष्य को मोक्ष का अनुभव हो सकता है? दादाश्री : अँधे मनुष्य को एक खंभे से कसकर खूब लपेटकर बाँध दिया हो, फिर उसे छुए बिना पीछे से धीरे से एक डोरी ब्लेड से काट लें तो उसे पता चलेगा या नहीं चलेगा? प्रश्नकर्ता : चलेगा। दादाश्री : इस भाग में से बंधन टूट गया है ऐसा उसे पता चल जाता है। उसी प्रकार मोक्ष का अनुभव होता है ! मोक्ष अर्थात् मुक्तभाव, बंधन नहीं लगता । पुलिसवाला पकड़े तब भी बंधन नहीं लगता। स्वर्ग, फिर भी बंधन प्रश्नकर्ताः ऐसा कहते हैं न, मोक्ष अर्थात् स्वर्ग मिलता है, वैकुंठ मिलता है या भगवान में मिल जाना, वह क्या है ? दादाश्री : स्वर्ग-वर्ग कुछ भी नहीं होता वहाँ तो । स्वर्ग यानी कि भौतिक सुख भोगने का स्थान और नर्क में भौतिक दुःख भोगने पड़ते हैं । और इस मध्यलोक में सुख और दुःख दोनों का मिक्सचर होता है । स्वर्ग में भी बंधन है, वहाँ भी पसंद नहीं हो तो भी रहना पड़ता है। वहाँ पर पत्नी के साथ में अच्छा नहीं लगता हो फिर भी जीना पड़ता है। क्योंकि उनका आयुष्य कम नहीं हो सकता । लाखों जन्मों से इसमें से छूटने की कामना हर एक के बुद्धि के आशय में होती ही है पर छूटा नहीं जा सकता । धक्के बहुत खाता है, छटपटाता है, फिर भी नहीं मिलता । पत्नी और बच्चों के बिना रहकर देखता है, वहाँ भी कुछ नहीं होता, इसलिए वापिस दूसरे जन्म में संसारी बनता है। सभी प्रकार के विकल्प करके देख लिए । निर्विकल्प प्राप्त करने के लिए जो कुछ करते हैं, वे सभी विकल्प के विकल्प हैं । ये जंजाल छूट सके वैसा नहीं है। गृहस्थी का जंजाल छूटे तो त्यागी का जंजाल चिपटता है, वहाँ भी संसार तो है ही न ! विनाशी चीज़ नहीं चाहिए मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए? 'ज्ञानी' के अलावा हमें दूसरा कुछ भी नहीं चाहिए, वह भाव रखना । 'इस जगत् की कोई भी विनाशी चीज़ मुझे नहीं चाहिए ।' ऐसा पाँच बार सुबह में बोलकर उठे और उसे सिन्सियर रहे उसे कोई कर्म नहीं बंधता । परन्तु 'मुझे' अर्थात् कौन? वह निश्चित करके बोलना चाहिए । 'मैं शुद्धात्मा हूँ' और जो चाहिए वह इस देह को चाहिए, 'चंदूलाल' को चाहिए। और वह तो अधिक होता ही नहीं न? 'व्यवस्थित' में जो हो वह ठीक और नहीं हो तो वह नहीं, परन्तु 'मुझे कुछ भी नहीं चाहिए', वह भाव पक्का होना चाहिए। और उसके प्रति सिन्सियर रहें तो कुछ भी दख़ल हो वैसा नहीं है। 'व्यवस्थित' में जो मिलनेवाला हो उतना ही मिलनेवाला है, उसमें कुछ बदलाव नहीं होता। बल्कि लाभ यह है कि चिंता और बेचैनी कम हो जाती है। ये दोनों द्रव्य अलग हैं। उनका अलग अनुभव ही करना है। दूसरा कुछ भी करना नहीं है। भीतर बुद्धि दख़ल करे या विचार में एकाकार होकर उलझे तो भी वह 'हम' नहीं करते हैं । 'आप' 'आपका' भाग अलग रखो।'आप' और 'चंदूलाल' पड़ोसी की तरह रहो तो कुछ भी असर नहीं करेगा! यानी 'आप' यदि 'अपने आप' के प्रति सिन्सियर रहो तो यह ऐसा विज्ञान है कि आपको निर्लेप ही रखे ! आप कारखाने में नौकरी करते हो, वहाँ सिन्सियर रहते हो या नहीं दादाश्री : उसमें सिन्सियर रहना सिरदर्दी है । और इसमें इतनी अधिक सिरदर्दी नहीं है । और किसीको ऐसा रहता हो कि किसी रुचि में उसे स्वाद नहीं जाता हो, उसे सिन्सियारीटी नहीं रहती हो तो उस अनुसार मुझे कह देना, तो हम उसका रास्ता निकाल देंगे । परन्तु अंदर गड़बड़ करे और मन में उलझता रहे कि 'कर्म बंधेगा या क्या', तो उस तरह से हल नहीं आएगा। कर्म बंधन की थियरी अलग ही है । वह हमारे पास से समझ लेना है। जगत् की सत्ता कहाँ पर झुके ? इस जगत् में जिसकी सर्वस्व प्रकार की भीख चली गई हो, उसे इस जगत् में तमाम सूत्र हाथ में दे दिए जाते हैं । भीख कितने प्रकार की होती होगी? मान की भीख, लक्ष्मी की भीख, विषयों की भीख, शिष्यों की भीख, मंदिर बनवाने की भीख, अपमान की भीख । सभी प्रकार की भीख, भीख और भीख ! वहाँ अपना दारिद्र्य कैसे जाए? जिसकी तमाम प्रकार की भीख छूट जाए, उसके हाथ में इस जगत् की सत्ता आ जाती है। अभी मेरे हाथ में आ चुकी है, क्योंकि मेरी सर्वस्व भीख छूट गई है। जब तक निर्वासनिक पुरुष नहीं मिलेंगे, तब तक सच्चा धर्म प्राप्त नहीं होगा। निर्वासनिक पुरुष तो जगत् में कभी ही मिलते हैं । तब अपना मोक्ष का काम हो जाता है । वे नहीं मिलें तो कब तक चला सकते हैं? मान के भूखे हों तो चला सकते हैं, परन्तु लक्ष्मी की भीखवाले, कीर्ति की, विषय की भीखवाले को नहीं चला सकते ।
|
दर्यापुर/ दि. ९- दर्यापुर तहसील के दर्यापुर से अकोट महामार्ग ४७ में रास्ते का चौडाईकरण करने के कारण विगत ६ से ७ महिने से येवदा में लेंडी नाला पुल के नजीक निर्माण कार्य शुरू रहनेवाले नाले में पानी घुस गया है. यह पानी गांव परिसर में दूर दूर तक फैल गया है. यह पानी लोगों की बस्तियों वाले नाले में से बहता है. जिसके कारण परिसर में बदबू आ रही है और जिससे नागरिको के स्वास्थ्य को भी खतरा हो सकता है. परंतु लेंडी नाला पुल के समीप निर्माण कार्य शुरू रहनेवाले नाले का पानी उस जगह पर अड जाने से वहां पर बडे प्रमाण में पानी जमा हो गया है. इसके लिए सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग कार्यालय दर्यापुर कार्यकारी अभियंता प्रतिक गिरी, उप अभियंता संदीप देशमुख को प्रहार जनशक्ति पार्टी की ओर से प्रदीप वडतकर, विलास केसर, चेतन बोरेकर, अमीन शहा, मुकेश वडतकर, युनूस शह, बंठी मोहोड, मनोहर मोहोड ने निवेदन प्रस्तुत कर तत्काल लेंडी नाला पुल के नजीक निर्माण कार्य शुरू नाले में इकट्ठा पानी एक साइड में लगाकर नाले का पानी बह जाने के लिए व्यवस्था करे. इस संबंध में निर्माण कार्य विभाग को प्रहार के व ग्रामवासियों को १० अप्रैल तक अल्टीमेटम दिया. अन्यथा ११ अप्रैल को सुबह ४ बजे सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग दर्यापुर को नाले का पानी भेट देकर आंदोलन करने की चेतावनी भी प्रहार के प्रदीप वडतकर ने दी है.
|
दर्यापुर/ दि. नौ- दर्यापुर तहसील के दर्यापुर से अकोट महामार्ग सैंतालीस में रास्ते का चौडाईकरण करने के कारण विगत छः से सात महिने से येवदा में लेंडी नाला पुल के नजीक निर्माण कार्य शुरू रहनेवाले नाले में पानी घुस गया है. यह पानी गांव परिसर में दूर दूर तक फैल गया है. यह पानी लोगों की बस्तियों वाले नाले में से बहता है. जिसके कारण परिसर में बदबू आ रही है और जिससे नागरिको के स्वास्थ्य को भी खतरा हो सकता है. परंतु लेंडी नाला पुल के समीप निर्माण कार्य शुरू रहनेवाले नाले का पानी उस जगह पर अड जाने से वहां पर बडे प्रमाण में पानी जमा हो गया है. इसके लिए सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग कार्यालय दर्यापुर कार्यकारी अभियंता प्रतिक गिरी, उप अभियंता संदीप देशमुख को प्रहार जनशक्ति पार्टी की ओर से प्रदीप वडतकर, विलास केसर, चेतन बोरेकर, अमीन शहा, मुकेश वडतकर, युनूस शह, बंठी मोहोड, मनोहर मोहोड ने निवेदन प्रस्तुत कर तत्काल लेंडी नाला पुल के नजीक निर्माण कार्य शुरू नाले में इकट्ठा पानी एक साइड में लगाकर नाले का पानी बह जाने के लिए व्यवस्था करे. इस संबंध में निर्माण कार्य विभाग को प्रहार के व ग्रामवासियों को दस अप्रैल तक अल्टीमेटम दिया. अन्यथा ग्यारह अप्रैल को सुबह चार बजे सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग दर्यापुर को नाले का पानी भेट देकर आंदोलन करने की चेतावनी भी प्रहार के प्रदीप वडतकर ने दी है.
|
स्टडी में पता चला है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं।
Data Story: कोरोना वायरस ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इस महामारी से लड़ने के लिए वैज्ञानिक और डॉक्टरों की टीम दिन-रात मेहनत कर रिसर्च कर रहे हैं। कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए अब लोगों को वैक्सीन लगाना शुरू हो गई। हालांकि टीका में भी वायरस से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं है। कोरोना वायरस का पर्यटन उद्योग पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन के कारण जनता पिछले साल घरों में थी। वहीं इसे जुड़े लाखों कर्मचारियों को नौकरियों से हाथ भी धोना पड़ा है। हालांकि अब पाबंदियों पर छूट मिलना और ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। अब लोग बाहर घूमने जा रहे हैं। कोरोना वायरस के कारण पर्यटन उद्योग को क्या प्रभाव पड़ा है। केंद्र सरकार का इसपर क्या कहना है। आइए जानते हैं डाटा स्टोरी के माध्यम से।
सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में राज्य के पर्यटन मंत्रियों, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक टास्क फोर्स का गठन किया है।
पर्यटन मंत्रालय ने जनवरी 2021 को नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च को भारत और कोविड-19 पर्यटन में लगे परिवारों के लिए आर्थिक नुकसान और पुनर्वास के लिए नीतियों पर अध्ययन करने को कहा था। स्टडी में पता चला है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं। 2019-20 की महामारी के पहले अनुमानित 34. 8 मिलियन जॉब्स की तुलना में, पहली तिमाही के दौरान 5. 2 मिलियन, दूसरी तिमाही के दौरान 14. 5 मिलियन और तीसरी तिमाही के दौरान 1. 8 मिलियन लोगों के बेरोजगार होने का अनुमान है।
जनवरी 2020 में देश में 11,19, 250 विदेशी पर्यटक आए थे। जबकि जनवरी 2021 में 83 हजार 822 ही पर्यटक भारत घूमने आए। इन दो सालों में वर्ष 2020 के अप्रैल में सबसे कम सिर्फ 2,820 और मई में 3,764 विदेशी पर्यटकों का देश में आगमन हुआ। वहीं जनवरी से दिसंबर 2020 में विदेशी मुद्रा आय में प्रतिशत परिवर्तन 76. 3% है। मंत्रालय ने पर्यटन उद्योग पर कोरोना महामारी के राज्य और संघ शासित क्षेत्र-वार प्रभाव का आकलन करने के लिए कोई औपचारिक अध्ययन नहीं किया है।
|
स्टडी में पता चला है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं। Data Story: कोरोना वायरस ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इस महामारी से लड़ने के लिए वैज्ञानिक और डॉक्टरों की टीम दिन-रात मेहनत कर रिसर्च कर रहे हैं। कोविड-उन्नीस संक्रमण से बचाव के लिए अब लोगों को वैक्सीन लगाना शुरू हो गई। हालांकि टीका में भी वायरस से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं है। कोरोना वायरस का पर्यटन उद्योग पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन के कारण जनता पिछले साल घरों में थी। वहीं इसे जुड़े लाखों कर्मचारियों को नौकरियों से हाथ भी धोना पड़ा है। हालांकि अब पाबंदियों पर छूट मिलना और ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। अब लोग बाहर घूमने जा रहे हैं। कोरोना वायरस के कारण पर्यटन उद्योग को क्या प्रभाव पड़ा है। केंद्र सरकार का इसपर क्या कहना है। आइए जानते हैं डाटा स्टोरी के माध्यम से। सरकार ने कोविड-उन्नीस से निपटने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में राज्य के पर्यटन मंत्रियों, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक टास्क फोर्स का गठन किया है। पर्यटन मंत्रालय ने जनवरी दो हज़ार इक्कीस को नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च को भारत और कोविड-उन्नीस पर्यटन में लगे परिवारों के लिए आर्थिक नुकसान और पुनर्वास के लिए नीतियों पर अध्ययन करने को कहा था। स्टडी में पता चला है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां गई हैं। दो हज़ार उन्नीस-बीस की महामारी के पहले अनुमानित चौंतीस. आठ मिलियन जॉब्स की तुलना में, पहली तिमाही के दौरान पाँच. दो मिलियन, दूसरी तिमाही के दौरान चौदह. पाँच मिलियन और तीसरी तिमाही के दौरान एक. आठ मिलियन लोगों के बेरोजगार होने का अनुमान है। जनवरी दो हज़ार बीस में देश में ग्यारह,उन्नीस, दो सौ पचास विदेशी पर्यटक आए थे। जबकि जनवरी दो हज़ार इक्कीस में तिरासी हजार आठ सौ बाईस ही पर्यटक भारत घूमने आए। इन दो सालों में वर्ष दो हज़ार बीस के अप्रैल में सबसे कम सिर्फ दो,आठ सौ बीस और मई में तीन,सात सौ चौंसठ विदेशी पर्यटकों का देश में आगमन हुआ। वहीं जनवरी से दिसंबर दो हज़ार बीस में विदेशी मुद्रा आय में प्रतिशत परिवर्तन छिहत्तर. तीन% है। मंत्रालय ने पर्यटन उद्योग पर कोरोना महामारी के राज्य और संघ शासित क्षेत्र-वार प्रभाव का आकलन करने के लिए कोई औपचारिक अध्ययन नहीं किया है।
|
शमसाबाद मार्ग पर गांव ठीपुरी स्थिति सती मंदिर पर लग रहे दो दिवसीय मेले का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे विधायक छोटेलाल वर्मा। जूते चोरी होने के बाद विधायक को नंगे पैर ही वापिस घर लौटना पड़ा।
आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा में विधायक छोटे लाल वर्मा के जूते ही चोरी हो गए। जिले के फतेहाबाद शमसाबाद मार्ग पर गांव ठीपुरी स्थिति सती मंदिर पर लग रहे दो दिवसीय मेले का उद्घाटन करने के लिए विधायक पहुंचे थे। यहां मंदिर के बाहर जूते उतार कर वे पूजा अर्चना करने मंदिर के गर्भगृह में गए हुए थे। मंदिर से बाहर आकर जब वापिस जाने के लिए उन्होंने जूते पहनने चाहे तो जूते वहां से गायब थे। कार्यकर्ता और आयोजकों ने जूतों को काफी देर तक इधर उधर देखा लेकिन जूते नहीं मिले। मजबूरन विधायक को नंगे पैर ही वापिस लौटना पड़ा। जूते चोरी होने के बाद विधायक एक ही बात बोले, चलो किसी गरीब का भला होगा।
दरअसल गुरुवार को गांव के सती मंदिर पर लगने वाले दो दिवसीय मेले का उदघाटन करने के लिए विधायक छोटेलाल वर्मा और पूर्व विधायक डा. राजेन्द्र सिंह लगभग तीन बजे मेले में पहुंचे थे। सबसे पहले वे मां सती यशोदा देवी के दर्शन के लिए मंदिर में जूते उतार कर गये थे। जब वे वापिस लौटकर आये तो उनके जूते गुम हो गये थे। नंगे पैर ही गाड़ी मे बैठकर फतेहाबाद के लिए वे रवाना हो गए। विधायक छोटेलाल वर्मा ने इस संबंध में बताया कि किसी गरीब के पास जूते न होने के कारण परेशान होगा। इसलिए मेरे जूते पहनकर चला गया है।
|
शमसाबाद मार्ग पर गांव ठीपुरी स्थिति सती मंदिर पर लग रहे दो दिवसीय मेले का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे विधायक छोटेलाल वर्मा। जूते चोरी होने के बाद विधायक को नंगे पैर ही वापिस घर लौटना पड़ा। आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा में विधायक छोटे लाल वर्मा के जूते ही चोरी हो गए। जिले के फतेहाबाद शमसाबाद मार्ग पर गांव ठीपुरी स्थिति सती मंदिर पर लग रहे दो दिवसीय मेले का उद्घाटन करने के लिए विधायक पहुंचे थे। यहां मंदिर के बाहर जूते उतार कर वे पूजा अर्चना करने मंदिर के गर्भगृह में गए हुए थे। मंदिर से बाहर आकर जब वापिस जाने के लिए उन्होंने जूते पहनने चाहे तो जूते वहां से गायब थे। कार्यकर्ता और आयोजकों ने जूतों को काफी देर तक इधर उधर देखा लेकिन जूते नहीं मिले। मजबूरन विधायक को नंगे पैर ही वापिस लौटना पड़ा। जूते चोरी होने के बाद विधायक एक ही बात बोले, चलो किसी गरीब का भला होगा। दरअसल गुरुवार को गांव के सती मंदिर पर लगने वाले दो दिवसीय मेले का उदघाटन करने के लिए विधायक छोटेलाल वर्मा और पूर्व विधायक डा. राजेन्द्र सिंह लगभग तीन बजे मेले में पहुंचे थे। सबसे पहले वे मां सती यशोदा देवी के दर्शन के लिए मंदिर में जूते उतार कर गये थे। जब वे वापिस लौटकर आये तो उनके जूते गुम हो गये थे। नंगे पैर ही गाड़ी मे बैठकर फतेहाबाद के लिए वे रवाना हो गए। विधायक छोटेलाल वर्मा ने इस संबंध में बताया कि किसी गरीब के पास जूते न होने के कारण परेशान होगा। इसलिए मेरे जूते पहनकर चला गया है।
|
5 मई 2022 : कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पास अनुमोदन के लिए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अयाज अहमद को विभागाध्यक्ष बनाने का ऑनलाइन प्रस्ताव आया। उनके अनुमोदन के पश्चात् यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा जाना था। परंतु महाराज के विदेश दौरे के चलते प्रस्ताव पर अनुमोदन नहीं लिया जा सका।
14 मई 2022 : सतपाल महाराज विदेश दौरे से लौटे और अपने निजी आवास पर चले गए। अगले दिन रविवार होने के चलते महाराज अपने निजी आवास में ही रहे। जिसका फायदा उठाते हुए उनके निजी सचिव आईपी सिंह ने सरकारी आवास में जा कर फाइल में महाराज के डिजिटल हस्ताक्षर करके फाइल में अनुमोदन भी लिख दिया। जिसके बाद फाइल लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को भेज दी गई। जहां से मुख्यमंत्री को फाइल भेजी गई और अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग का विभागीय अध्यक्ष बना दिया गया। जबकि, इस काम के लिए आईपी सिंह अधिकृत नहीं थे।
लोक निर्माण विभाग की यह पूरी कहानी बेहद दिलचस्प और हैरतनाक है। जिसमें विभागीय मंत्री के डिजिटल हस्ताक्षर करके प्रमोशन का खेल रचा गया। अफसरशाही किस कदर बेलगाम है यह इस प्रकरण से समझा जा सकता है। मंत्री के डिजिटल हस्ताक्षर करने का यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। पहला यह कि इस मामले का खुलासा मई 2022 में ही हो चुका था तो उसी दौरान मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया, जबकि उसी समय महाराज के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण मोहन द्वारा देहरादून के थाना डालनवाला में धोखधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत तहरीर दी गई थी।
आखिर 7 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया तो गया लेकिन इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इस मामले में जांच की गई थी और एक जांच अभी लंबित चल रही है। पूर्व में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के आदेश पर अपर सचिव प्रताप शाह के द्वारा जांच की गई थी। जिसमें शाह द्वारा जांच में आरोपों को सही नहीं पाया गया था और जांच खत्म कर दी गई। मुख्यमंत्री धामी के हस्तक्षेप से अपर सचिव ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में एक नई जांच कमेटी बनाई गई। जिसमें लोक निर्माण के संयुक्त सचिव और सचिवालय प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं। जांच कमेटी द्वारा सचिवालय प्रशासन ने इस मामले से जुड़े प्रपत्र और अन्य अभिलेख मांगे, लेकिन सचिवालय प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कोई भी आरोप पत्र होने से मना कर दिया। इस तरह से दूसरी जांच कमेटी की जांच शुरू भी नहीं हो पाई।
सवाल यह है कि छ माह पूर्व जब सतपाल महाराज के जनसंपर्क अधिकारी ने इस मामले में थाने में तहरीर दी तो मामले को बेहद हल्के में क्यों लिया गया और जांच-जांच का खेल क्यों खेला गया? सवाल यह भी है कि जब जांच में कुछ साफ नही निकला तो छह माह बाद मुकदमा क्यों दर्ज किया गया? क्या कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को अपनी ही सरकार के अधिकारियों की जांच पर विश्वास नहीं है? सवाल यह भी है कि क्या इस प्रकरण के आरोपी अधिकारियों को बचाया जा रहा है? फिलहाल यह मामला सतपाल महाराज की प्रतिष्ठा से जुड़ी होने के चलते बेहद चर्चित हो गया है। सचिवालय कर्मचारी संघ भी खासा नाराज बताया जा रहा है। संघ का कहना है कि जब मामले की जांच चल रही है तो मुकदमा दर्ज क्यों करवाया गया है?
बता दें कि जिस अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग का विभागीय अध्यक्ष बनाया गया। यह वही है जिन पर इसी विभाग के देहरादून कार्यालय में अगस्त 2020 में संविदा के तहत कार्यरत एक महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं। जिस पर विशाखा गाइड लाइन के तहत एक विभागीय जांच कमेटी का गठन किया गया। लेकिन तब पीड़िता इस जांच से संतुष्ट नहीं हुई। साथ ही उसने जांच में भेदभाव के आरोप भी लगाए थे। उस दौरान लोक निर्माण विभाग मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास ही था। 2021 में धामी राज्य के मुख्यमंत्री बने और सतपाल महाराज को लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया तो पीड़िता ने एक बार फिर महाराज के सम्मुख अपनी फरियाद रखी। इस पर महाराज ने जनवरी 2022 को इंजीनियर अयाज अहमद के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच करवाए जाने के आदेश दे दिए। इस मामले में जांच किस दिशा में पहुंची यह तो अभी साफ नहीं है लेकिन चर्चा है कि अयाज अहमद के शासन में बड़ी पकड़ के चलते जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
बहरहाल, डिजिटल हस्ताक्षर प्रकरण से इतना तो साफ हो गया है कि मंत्री सतपाल महाराज की अपने ही विभागीय अधिकारियों के ऊपर कोई पकड़ नहीं है और न ही उनका अपने विभाग में कोई भय है। वैसे भी सतपाल महाराज वर्तमान सरकार के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ और त्रिवेंद्र के कार्यकाल में हमेशा अपने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज दिखाई देते रहे हैं। चाहे वह लोक निर्माण विभाग हो या पर्यटन या सिंचाई विभाग के अधिकारी रहे हों। महाराज भाजपा सरकार के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि धामी पार्ट टू में भी उन्हें पिछली सरकार के सभी बड़े अहम मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया। कई अन्य मंत्रियो के विभागों को बदला गया लेकिन महाराज के विभागों को बदलने की हिम्मत धाकड़ धामी भी नहीं दिखा पाए। आज भी सतपाल महाराज प्रदेश सरकार में दूसरे नंबर के कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। जबकि विभागों के हालातों को देखें तो सबसे ज्यादा सवाल महाराज के विभागों पर ही उठते रहे हैं।
|
पाँच मई दो हज़ार बाईस : कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के पास अनुमोदन के लिए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अयाज अहमद को विभागाध्यक्ष बनाने का ऑनलाइन प्रस्ताव आया। उनके अनुमोदन के पश्चात् यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा जाना था। परंतु महाराज के विदेश दौरे के चलते प्रस्ताव पर अनुमोदन नहीं लिया जा सका। चौदह मई दो हज़ार बाईस : सतपाल महाराज विदेश दौरे से लौटे और अपने निजी आवास पर चले गए। अगले दिन रविवार होने के चलते महाराज अपने निजी आवास में ही रहे। जिसका फायदा उठाते हुए उनके निजी सचिव आईपी सिंह ने सरकारी आवास में जा कर फाइल में महाराज के डिजिटल हस्ताक्षर करके फाइल में अनुमोदन भी लिख दिया। जिसके बाद फाइल लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को भेज दी गई। जहां से मुख्यमंत्री को फाइल भेजी गई और अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग का विभागीय अध्यक्ष बना दिया गया। जबकि, इस काम के लिए आईपी सिंह अधिकृत नहीं थे। लोक निर्माण विभाग की यह पूरी कहानी बेहद दिलचस्प और हैरतनाक है। जिसमें विभागीय मंत्री के डिजिटल हस्ताक्षर करके प्रमोशन का खेल रचा गया। अफसरशाही किस कदर बेलगाम है यह इस प्रकरण से समझा जा सकता है। मंत्री के डिजिटल हस्ताक्षर करने का यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। पहला यह कि इस मामले का खुलासा मई दो हज़ार बाईस में ही हो चुका था तो उसी दौरान मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया, जबकि उसी समय महाराज के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण मोहन द्वारा देहरादून के थाना डालनवाला में धोखधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत तहरीर दी गई थी। आखिर सात दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया तो गया लेकिन इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इस मामले में जांच की गई थी और एक जांच अभी लंबित चल रही है। पूर्व में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के आदेश पर अपर सचिव प्रताप शाह के द्वारा जांच की गई थी। जिसमें शाह द्वारा जांच में आरोपों को सही नहीं पाया गया था और जांच खत्म कर दी गई। मुख्यमंत्री धामी के हस्तक्षेप से अपर सचिव ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में एक नई जांच कमेटी बनाई गई। जिसमें लोक निर्माण के संयुक्त सचिव और सचिवालय प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं। जांच कमेटी द्वारा सचिवालय प्रशासन ने इस मामले से जुड़े प्रपत्र और अन्य अभिलेख मांगे, लेकिन सचिवालय प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कोई भी आरोप पत्र होने से मना कर दिया। इस तरह से दूसरी जांच कमेटी की जांच शुरू भी नहीं हो पाई। सवाल यह है कि छ माह पूर्व जब सतपाल महाराज के जनसंपर्क अधिकारी ने इस मामले में थाने में तहरीर दी तो मामले को बेहद हल्के में क्यों लिया गया और जांच-जांच का खेल क्यों खेला गया? सवाल यह भी है कि जब जांच में कुछ साफ नही निकला तो छह माह बाद मुकदमा क्यों दर्ज किया गया? क्या कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को अपनी ही सरकार के अधिकारियों की जांच पर विश्वास नहीं है? सवाल यह भी है कि क्या इस प्रकरण के आरोपी अधिकारियों को बचाया जा रहा है? फिलहाल यह मामला सतपाल महाराज की प्रतिष्ठा से जुड़ी होने के चलते बेहद चर्चित हो गया है। सचिवालय कर्मचारी संघ भी खासा नाराज बताया जा रहा है। संघ का कहना है कि जब मामले की जांच चल रही है तो मुकदमा दर्ज क्यों करवाया गया है? बता दें कि जिस अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग का विभागीय अध्यक्ष बनाया गया। यह वही है जिन पर इसी विभाग के देहरादून कार्यालय में अगस्त दो हज़ार बीस में संविदा के तहत कार्यरत एक महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं। जिस पर विशाखा गाइड लाइन के तहत एक विभागीय जांच कमेटी का गठन किया गया। लेकिन तब पीड़िता इस जांच से संतुष्ट नहीं हुई। साथ ही उसने जांच में भेदभाव के आरोप भी लगाए थे। उस दौरान लोक निर्माण विभाग मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास ही था। दो हज़ार इक्कीस में धामी राज्य के मुख्यमंत्री बने और सतपाल महाराज को लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया तो पीड़िता ने एक बार फिर महाराज के सम्मुख अपनी फरियाद रखी। इस पर महाराज ने जनवरी दो हज़ार बाईस को इंजीनियर अयाज अहमद के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच करवाए जाने के आदेश दे दिए। इस मामले में जांच किस दिशा में पहुंची यह तो अभी साफ नहीं है लेकिन चर्चा है कि अयाज अहमद के शासन में बड़ी पकड़ के चलते जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। बहरहाल, डिजिटल हस्ताक्षर प्रकरण से इतना तो साफ हो गया है कि मंत्री सतपाल महाराज की अपने ही विभागीय अधिकारियों के ऊपर कोई पकड़ नहीं है और न ही उनका अपने विभाग में कोई भय है। वैसे भी सतपाल महाराज वर्तमान सरकार के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ और त्रिवेंद्र के कार्यकाल में हमेशा अपने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज दिखाई देते रहे हैं। चाहे वह लोक निर्माण विभाग हो या पर्यटन या सिंचाई विभाग के अधिकारी रहे हों। महाराज भाजपा सरकार के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि धामी पार्ट टू में भी उन्हें पिछली सरकार के सभी बड़े अहम मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया। कई अन्य मंत्रियो के विभागों को बदला गया लेकिन महाराज के विभागों को बदलने की हिम्मत धाकड़ धामी भी नहीं दिखा पाए। आज भी सतपाल महाराज प्रदेश सरकार में दूसरे नंबर के कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। जबकि विभागों के हालातों को देखें तो सबसे ज्यादा सवाल महाराज के विभागों पर ही उठते रहे हैं।
|
अपने आवास पर तोड़फोड़ और हिंसा के एक दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि देश के लिए मेरी जान भी हाजिर है। आम आदमी पार्टी ने कल कहा था कि भाजपा केजरीवाल को मारने की कोशिश कर रही है, क्योंकि वह उन्हें चुनाव में हराने में असमर्थ हैं। उन्होंने दिल्ली में ई-ऑटो के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा, केजरीवाल महत्वपूर्ण नहीं हैं, यह देश महत्वपूर्ण है। मैं देश के लिए मर सकता हूं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी (भाजपा) को इस तरह की गुंडागर्दी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे देश के युवाओं में गलत संदेश जाता है।
देश के लिए मेरी जान भी हाज़िर है। पर मैं important नहीं हूँ। देश important है।
हाल ही में रिलीज हुई विवादित फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' पर केजरीवाल की टिप्पणी के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं की बुधवार को उनके आवास के बाहर पुलिस से झड़प हो गई थी। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया और अपराधियों के खिलाफ एक विशेष जांच दल के गठन के निर्देश की मांग की।
हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए केजरीवाल ने कहा, हमें देश को एक साथ आगे ले जाना है, हमने लड़ाई में 75 साल बर्बाद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि देश इस गुंडागर्दी से समृद्ध नहीं होगा और 21 वीं सदी के भारत के लिए सभी को मिलकर शांति से काम करना होगा। वहीं बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल पर फिल्म में दिखाए गए कश्मीरी हिंदुओं के "नरसंहार" का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य कल दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पुलिस से भिड़ंत के बाद गेट पर लाल पेंट फेंका और सीसीटीवी कैमरे को नुकसान पहुंचाया।
|
अपने आवास पर तोड़फोड़ और हिंसा के एक दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि देश के लिए मेरी जान भी हाजिर है। आम आदमी पार्टी ने कल कहा था कि भाजपा केजरीवाल को मारने की कोशिश कर रही है, क्योंकि वह उन्हें चुनाव में हराने में असमर्थ हैं। उन्होंने दिल्ली में ई-ऑटो के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा, केजरीवाल महत्वपूर्ण नहीं हैं, यह देश महत्वपूर्ण है। मैं देश के लिए मर सकता हूं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी को इस तरह की गुंडागर्दी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे देश के युवाओं में गलत संदेश जाता है। देश के लिए मेरी जान भी हाज़िर है। पर मैं important नहीं हूँ। देश important है। हाल ही में रिलीज हुई विवादित फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' पर केजरीवाल की टिप्पणी के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं की बुधवार को उनके आवास के बाहर पुलिस से झड़प हो गई थी। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया और अपराधियों के खिलाफ एक विशेष जांच दल के गठन के निर्देश की मांग की। हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए केजरीवाल ने कहा, हमें देश को एक साथ आगे ले जाना है, हमने लड़ाई में पचहत्तर साल बर्बाद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि देश इस गुंडागर्दी से समृद्ध नहीं होगा और इक्कीस वीं सदी के भारत के लिए सभी को मिलकर शांति से काम करना होगा। वहीं बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल पर फिल्म में दिखाए गए कश्मीरी हिंदुओं के "नरसंहार" का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य कल दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पुलिस से भिड़ंत के बाद गेट पर लाल पेंट फेंका और सीसीटीवी कैमरे को नुकसान पहुंचाया।
|
Flavanoid हमें हृदय, कैंसर और कई मानसिक बीमारियों से बचाते है .
Symptoms of Anaemia/Anemia and how to cure it naturally?
मौसमी एलर्जी, बारहमासी नाक की एलर्जी : कैसे बचें ?
अस्पताल पहुचे इस से पहले ही बंद कर दे इस का इस्तेमाल Only Ayurved की सच्ची सलाह !!
|
Flavanoid हमें हृदय, कैंसर और कई मानसिक बीमारियों से बचाते है . Symptoms of Anaemia/Anemia and how to cure it naturally? मौसमी एलर्जी, बारहमासी नाक की एलर्जी : कैसे बचें ? अस्पताल पहुचे इस से पहले ही बंद कर दे इस का इस्तेमाल Only Ayurved की सच्ची सलाह !!
|
धरती पर मौजूद सभी महाद्वीप कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। खबर है कि कोविड-19 महामारी की वजह बना यह वायरस अंटार्कटिका पहुंच गया है, जो अब तक इससे अछूता एकमात्र महाद्वीप था। दि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंटार्कटिका में शोधकार्य से जुड़े चिली के एक रिसर्च बेस में रुके 36 लोगों के कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। बताया गया है कि इनमें से 26 लोग चिली की सेना के सदस्य हैं और दस इस बेस के मेंटिनेंस वर्कर हैं। अखबार ने बताया है कि सभी संक्रमित उन 60 लोगों के समूह का हिस्सा हैं, जिन्हें कोरोना के मामले सामने आने के बाद बेस से बचाव अभियान के तहत निकाल कर आइसोलेट कर दिया गया है। इसके बाद संक्रमितों से जुड़ी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है। अखबार ने यह भी बताया है कि अंटार्कटिका स्थित चिली के एक नेवी शिप से लौटे तीन क्रू सदस्यों में भी कोरोना वायरस पाया गया है।
(और पढ़ें - कोविड-19 से जुड़े म्यूकरमाइकोसिस पर गुजरात स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी- इसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत, सावधान रहें)
इसके साथ ही अंटार्कटिका में बीते नौ महीनों से कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आने का सिलसिला खत्म हो गया है। बताया जाता है कि इस महाद्वीप पर करीब 1,000 लोग हैं, जो 40 अलग-अलग बेसों पर मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एसोसिएटिड प्रेस के मुताबिक, कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद अब इस महाद्वीप पर आने वाले नए लोगों को क्वारंटीन में जाना होगा और तेजी से अपना टेस्ट कराना होगा। एजेंसी ने बताया कि कोविड-19 संकट के चलते अंटार्कटिका का पर्यटन और यहां होने वाला शोधकार्य पहले ही बुरी तरह प्रभावित था। अब कोरोना के केस सामने आने के बाद अंटार्कटिका में प्रशासन और पर्यटन पर लंबे समय तक बुरा प्रभाव बना रहेगा।
(और पढ़ें - कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन की संक्रामक क्षमता अन्य वैरिएंट से ज्यादा, लेकिन जानलेवा होने के सबूत नहींः डब्ल्यूएचओ)
इससे पहले दुनिया के बाकी छह महाद्वीप पहले ही कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के चलते अब तक सात करोड़ 84 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 17 लाख 22 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। सबसे ज्यादा मामले और मौतें यूरोप में देखने को मिले हैं। यहां कोरोना वायरस ने दो करोड़ 17 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया है और पांच लाख से ज्यादा की जान ली है। दूसरे नंबर उत्तरी अमेरिका है, जहां दो करोड़ 14 लाख से ज्यादा लोग वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से चार लाख 82 हजार की मौत हो गई है। इसके बाद एशिया का नंबर आता है। यहां कोरोना वायरस लगभग दो करोड़ लोगों को बीमार कर चुका है और सवा तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत की वजह बना है।
(और पढ़ें - भारत में नए कोरोना वायरस स्ट्रेन का एक भी मामला नहीं, 24 घंटों में 333 मौतें, महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या 19 लाख के पार)
वहीं, दक्षिण अमेरिका की बात करें तो इस महाद्वीप पर एक करोड़ 26 लाख से ज्यादा लोग सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से साढ़े तीन लाख से ज्यादा की मौत हो गई है। इसके बाद अफ्रीका महाद्वीप के सभी देशों में कुल 25 लाख 60 हजार से ज्यादा लोग कोविड-19 से ग्रस्त हो चुके हैं। इनमें से 60 हजार 155 मारे गए हैं। अंत में ऑस्ट्रेलिया (जिसे अंग्रेजी में ओशियानिया कहते हैं) का नंबर आता है, जो अंटार्कटिका से पहले कोविड-19 से सबसे कम प्रभावित महाद्वीप था। यहां अब तक केवल 47 हजार लोग ही वायरस की चपेट में आए हैं और मरने वालों का आंकड़ा केवल 1,050 है।
|
धरती पर मौजूद सभी महाद्वीप कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। खबर है कि कोविड-उन्नीस महामारी की वजह बना यह वायरस अंटार्कटिका पहुंच गया है, जो अब तक इससे अछूता एकमात्र महाद्वीप था। दि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंटार्कटिका में शोधकार्य से जुड़े चिली के एक रिसर्च बेस में रुके छत्तीस लोगों के कोविड-उन्नीस टेस्ट पॉजिटिव आए हैं। बताया गया है कि इनमें से छब्बीस लोग चिली की सेना के सदस्य हैं और दस इस बेस के मेंटिनेंस वर्कर हैं। अखबार ने बताया है कि सभी संक्रमित उन साठ लोगों के समूह का हिस्सा हैं, जिन्हें कोरोना के मामले सामने आने के बाद बेस से बचाव अभियान के तहत निकाल कर आइसोलेट कर दिया गया है। इसके बाद संक्रमितों से जुड़ी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है। अखबार ने यह भी बताया है कि अंटार्कटिका स्थित चिली के एक नेवी शिप से लौटे तीन क्रू सदस्यों में भी कोरोना वायरस पाया गया है। इसके साथ ही अंटार्कटिका में बीते नौ महीनों से कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आने का सिलसिला खत्म हो गया है। बताया जाता है कि इस महाद्वीप पर करीब एक,शून्य लोग हैं, जो चालीस अलग-अलग बेसों पर मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एसोसिएटिड प्रेस के मुताबिक, कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद अब इस महाद्वीप पर आने वाले नए लोगों को क्वारंटीन में जाना होगा और तेजी से अपना टेस्ट कराना होगा। एजेंसी ने बताया कि कोविड-उन्नीस संकट के चलते अंटार्कटिका का पर्यटन और यहां होने वाला शोधकार्य पहले ही बुरी तरह प्रभावित था। अब कोरोना के केस सामने आने के बाद अंटार्कटिका में प्रशासन और पर्यटन पर लंबे समय तक बुरा प्रभाव बना रहेगा। इससे पहले दुनिया के बाकी छह महाद्वीप पहले ही कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि कोविड-उन्नीस महामारी के चलते अब तक सात करोड़ चौरासी लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से सत्रह लाख बाईस हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। सबसे ज्यादा मामले और मौतें यूरोप में देखने को मिले हैं। यहां कोरोना वायरस ने दो करोड़ सत्रह लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया है और पांच लाख से ज्यादा की जान ली है। दूसरे नंबर उत्तरी अमेरिका है, जहां दो करोड़ चौदह लाख से ज्यादा लोग वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से चार लाख बयासी हजार की मौत हो गई है। इसके बाद एशिया का नंबर आता है। यहां कोरोना वायरस लगभग दो करोड़ लोगों को बीमार कर चुका है और सवा तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत की वजह बना है। वहीं, दक्षिण अमेरिका की बात करें तो इस महाद्वीप पर एक करोड़ छब्बीस लाख से ज्यादा लोग सार्स-सीओवी-दो से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से साढ़े तीन लाख से ज्यादा की मौत हो गई है। इसके बाद अफ्रीका महाद्वीप के सभी देशों में कुल पच्चीस लाख साठ हजार से ज्यादा लोग कोविड-उन्नीस से ग्रस्त हो चुके हैं। इनमें से साठ हजार एक सौ पचपन मारे गए हैं। अंत में ऑस्ट्रेलिया का नंबर आता है, जो अंटार्कटिका से पहले कोविड-उन्नीस से सबसे कम प्रभावित महाद्वीप था। यहां अब तक केवल सैंतालीस हजार लोग ही वायरस की चपेट में आए हैं और मरने वालों का आंकड़ा केवल एक,पचास है।
|
मेडिकल साइंस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि डॉक्टर्स ने गर्भ में पल रहे भ्रूण की ब्रेन सर्जरी की हो. यह सर्जरी पूरी तरह से सफल रही. ऐसा करके डॉक्टर्स ने बच्चे के विकसित हो रहे मस्तिष्क में पनपने वाले एक घातक डिसऑर्डर को दूर कर दिया है.
स्ट्रोक (Stroke) में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक, इस सर्जरी के लिए अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया गया . भ्रूण का ऑपरेशन गर्भावस्था के 34वें सप्ताह में किया गया. भ्रूण में गैलेन मैलफॉर्मेशन (Galen malformation) का पता लगा था, जो अक्सर घातक और आक्रामक होता है.
इसमें मस्तिष्क के अंदर धमनियां (Arteries) शामिल होती हैं जो पहले कैपिलरी (Capillaries) से गुजरने के बजाय सीधे नसों से जुड़ती हैं. कैपिलरी को खास तौर पर ब्लड प्रोशर को धीमा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए इस विकृति का नतीजा होता बहुत ज़्यादा ब्लड प्रोशर क्योंकि यह सीधे नसों में जाता है. इससे जन्म के दौरान और जन्म के बाद, मस्तिष्क और हृदय को बहुत ज़्यादा तनाव होता और इससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर और अन्य जानलेवा परिस्थितियां पैदा हो सकती थीं.
गर्भावस्था के दौरान इसका इलाज किया जाता है और आमतौर पर एंडोवस्कुलर एम्बोलाइज़ेशन नाम की प्रक्रिया द्वारा इलाज किया जाता है. सर्जनों ने इसी तरह की सर्जरी पहले भी की थी, लेकिन ये पहली बार था कि इसे पूरी तरह से गर्भाशय में किया गया था. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की देखरेख में, वे भ्रूण के मस्तिष्क में उच्च दबाव वाली ब्लड वेसल्स को ब्लॉक करने में कामयाब रहे, जिससे जन्म के दौरान दबाव बढ़ने से रोका जा सके.
सर्जरी के बाद, बच्चे का जन्म हुआ और उसे कोई समस्या नहीं है. बॉस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में सेरेब्रोवास्कुलर सर्जरी एंड इंटरवेंशन सेंटर के सह-निदेशक और शोध के मुख्य लेखक डैरेन बी. ओरबैक (Darren B. Orbach) का कहना है कि हमारे क्लिनिकल ट्रायल में, हम जन्म से पहले गैलेन विकृति के लिए अल्ट्रासाउंड से जुड़ा ट्रांस्यूटेराइन एम्बोलिज़ेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम यह देखकर उत्साहित थे कि आमतौर पर जन्म के बाद देखी जाने वाली चीज़ें अब दिखाई नहीं दे रही हैं.
उन्होंने कहा कि हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि छह सप्ताह में, शिशु बिना किसी दवा के बहुत अच्छी प्रोग्रेस कर रहा है. वह सामान्य रूप से खा रहा है, उसका वजन बढ़ रहा है और अब वह घर वापस आ गया है. उसके मस्तिष्क पर किसी नकारात्मक प्रभाव का कोई प्रभाव नहीं हैं.
जन्म के बाद, बच्चे को किसी कार्डियोवस्कुलर सपोर्ट की जरूरत नहीं थी और सभी न्यूरोलॉजिकल स्कैन सामान्य थे. अब उम्मीद है कि और भी बच्चों को इस प्रक्रिया से इलाज मिल सकेगा. जो शिशुओं में लॉन्ग टर्म ब्रेन डैमेज, विकलांगता या मृत्यु के खतरे को साफ तौर पर कम कर सकता है.
|
मेडिकल साइंस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि डॉक्टर्स ने गर्भ में पल रहे भ्रूण की ब्रेन सर्जरी की हो. यह सर्जरी पूरी तरह से सफल रही. ऐसा करके डॉक्टर्स ने बच्चे के विकसित हो रहे मस्तिष्क में पनपने वाले एक घातक डिसऑर्डर को दूर कर दिया है. स्ट्रोक में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक, इस सर्जरी के लिए अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया गया . भ्रूण का ऑपरेशन गर्भावस्था के चौंतीसवें सप्ताह में किया गया. भ्रूण में गैलेन मैलफॉर्मेशन का पता लगा था, जो अक्सर घातक और आक्रामक होता है. इसमें मस्तिष्क के अंदर धमनियां शामिल होती हैं जो पहले कैपिलरी से गुजरने के बजाय सीधे नसों से जुड़ती हैं. कैपिलरी को खास तौर पर ब्लड प्रोशर को धीमा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए इस विकृति का नतीजा होता बहुत ज़्यादा ब्लड प्रोशर क्योंकि यह सीधे नसों में जाता है. इससे जन्म के दौरान और जन्म के बाद, मस्तिष्क और हृदय को बहुत ज़्यादा तनाव होता और इससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर और अन्य जानलेवा परिस्थितियां पैदा हो सकती थीं. गर्भावस्था के दौरान इसका इलाज किया जाता है और आमतौर पर एंडोवस्कुलर एम्बोलाइज़ेशन नाम की प्रक्रिया द्वारा इलाज किया जाता है. सर्जनों ने इसी तरह की सर्जरी पहले भी की थी, लेकिन ये पहली बार था कि इसे पूरी तरह से गर्भाशय में किया गया था. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की देखरेख में, वे भ्रूण के मस्तिष्क में उच्च दबाव वाली ब्लड वेसल्स को ब्लॉक करने में कामयाब रहे, जिससे जन्म के दौरान दबाव बढ़ने से रोका जा सके. सर्जरी के बाद, बच्चे का जन्म हुआ और उसे कोई समस्या नहीं है. बॉस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में सेरेब्रोवास्कुलर सर्जरी एंड इंटरवेंशन सेंटर के सह-निदेशक और शोध के मुख्य लेखक डैरेन बी. ओरबैक का कहना है कि हमारे क्लिनिकल ट्रायल में, हम जन्म से पहले गैलेन विकृति के लिए अल्ट्रासाउंड से जुड़ा ट्रांस्यूटेराइन एम्बोलिज़ेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम यह देखकर उत्साहित थे कि आमतौर पर जन्म के बाद देखी जाने वाली चीज़ें अब दिखाई नहीं दे रही हैं. उन्होंने कहा कि हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि छह सप्ताह में, शिशु बिना किसी दवा के बहुत अच्छी प्रोग्रेस कर रहा है. वह सामान्य रूप से खा रहा है, उसका वजन बढ़ रहा है और अब वह घर वापस आ गया है. उसके मस्तिष्क पर किसी नकारात्मक प्रभाव का कोई प्रभाव नहीं हैं. जन्म के बाद, बच्चे को किसी कार्डियोवस्कुलर सपोर्ट की जरूरत नहीं थी और सभी न्यूरोलॉजिकल स्कैन सामान्य थे. अब उम्मीद है कि और भी बच्चों को इस प्रक्रिया से इलाज मिल सकेगा. जो शिशुओं में लॉन्ग टर्म ब्रेन डैमेज, विकलांगता या मृत्यु के खतरे को साफ तौर पर कम कर सकता है.
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
आन्ध्र प्रदेश ఆంధ్ర ప్రదేశ్(अनुवादः आन्ध्र का प्रांत), संक्षिप्त आं.प्र., भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित राज्य है। क्षेत्र के अनुसार यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से आठवां सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैदराबाद है। भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबा समुद्र तट गुजरात में (1600 कि॰मी॰) होते हुए, दूसरे स्थान पर इस राज्य का समुद्र तट (972 कि॰मी॰) है। हैदराबाद केवल दस साल के लिये राजधानी रहेगी, तब तक अमरावती शहर को राजधानी का रूप दे दिया जायेगा। आन्ध्र प्रदेश 12°41' तथा 22°उ॰ अक्षांश और 77° तथा 84°40'पू॰ देशांतर रेखांश के बीच है और उत्तर में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में तमिल नाडु और पश्चिम में कर्नाटक से घिरा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से आन्ध्र प्रदेश को "भारत का धान का कटोरा" कहा जाता है। यहाँ की फसल का 77% से ज़्यादा हिस्सा चावल है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियाँ, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। पुदु्चेरी (पांडीचेरी) राज्य के यानम जिले का छोटा अंतःक्षेत्र (12 वर्ग मील (30 वर्ग कि॰मी॰)) इस राज्य के उत्तरी-पूर्व में स्थित गोदावरी डेल्टा में है। ऐतिहासिक दृष्टि से राज्य में शामिल क्षेत्र आन्ध्रपथ, आन्ध्रदेस, आन्ध्रवाणी और आन्ध्र विषय के रूप में जाना जाता था। आन्ध्र राज्य से आन्ध्र प्रदेश का गठन 1 नवम्बर 1956 को किया गया। फरवरी 2014 को भारतीय संसद ने अलग तेलंगाना राज्य को मंजूरी दे दी। तेलंगाना राज्य में दस जिले तथा शेष आन्ध्र प्रदेश (सीमांन्ध्र) में 13 जिले होंगे। दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी होगी। नया राज्य सीमांन्ध्र दो-तीन महीने में अस्तित्व में आजाएगा अब लोकसभा/राज्यसभा का 25/12सिट आन्ध्र में और लोकसभा/राज्यसभा17/8 सिट तेलंगाना में होगा। इसी माह आन्ध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन भी लागू हो गया जो कि राज्य के बटवारे तक लागू रहेगा। . भारत का इतिहास कई हजार साल पुराना माना जाता है। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ नवपाषाण युग (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरंभ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। १९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा। वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से ४००० साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी। ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व २६५-२४१) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्वपूर्ण गणराज्यों में कपिलवस्तु के शाक्य और वैशाली के लिच्छवी गणराज्य थे। गणराज्यों के अलावा राजतंत्रीय राज्य भी थे, जिनमें से कौशाम्बी (वत्स), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्वपूर्ण थे। इन राज्यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्यक्तियों के पास था, जिन्होंने राज्य विस्तार और पड़ोसी राज्यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्यात्मक राज्यों के तब भी स्पष्ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्यों का विस्तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया। आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। १५५६ में विजय नगर का पतन हो गया। सन् १५२६ में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। १६५९ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और १८५७ के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी १९४७ में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। १९४७ के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। .
आन्ध्र प्रदेश और भारत का इतिहास आम में 13 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): चालुक्य, दिल्ली सल्तनत, दक्षिण भारत, पल्लव, फ़्रान्स, भारत, भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन, मौर्य राजवंश, संस्कृत भाषा, हिन्दू, विजयनगर साम्राज्य, आर्य, कर्नाटक।
कोई विवरण नहीं।
सन् 1210 से 1526 तक भारत पर शासन करने वाले पाँच वंश के सुल्तानों के शासनकाल को दिल्ली सल्तनत (دلی سلطنت) या सल्तनत-ए-हिन्द/सल्तनत-ए-दिल्ली कहा जाता है। ये पाँच वंश ये थे- गुलाम वंश (1206 - 1290), ख़िलजी वंश (1290- 1320), तुग़लक़ वंश (1320 - 1414), सैयद वंश (1414 - 1451), तथा लोधी वंश (1451 - 1526)। इनमें से चार वंश मूलतः तुर्क थे जबकि अंतिम वंश अफगान था। मोहम्मद ग़ौरी का गुलाम कुतुब-उद-दीन ऐबक, गुलाम वंश का पहला सुल्तान था। ऐबक का साम्राज्य पूरे उत्तर भारत तक फैला था। इसके बाद ख़िलजी वंश ने मध्य भारत पर कब्ज़ा किया परन्तु भारतीय उपमहाद्वीप को संगठित करने में असफल रहा। इस सल्तनत ने न केवल बहुत से दक्षिण एशिया के मंदिरों का विनाश किया साथ ही अपवित्र भी किया,रिचर्ड ईटन (2000),, Journal of Islamic Studies, 11(3), pp 283-319 पर इसने भारतीय-इस्लामिक वास्तुकला के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली सल्तनत मुस्लिम इतिहास के कुछ कालखंडों में है जहां किसी महिला ने सत्ता संभाली। १५२६ में मुगल सल्तनत द्वारा इस इस साम्राज्य का अंत हुआ। .
भारत के दक्षिणी भाग को दक्षिण भारत भी कहते हैं। अपनी संस्कृति, इतिहास तथा प्रजातीय मूल की भिन्नता के कारण यह शेष भारत से अलग पहचान बना चुका है। हलांकि इतना भिन्न होकर भी यह भारत की विविधता का एक अंगमात्र है। दक्षिण भारतीय लोग मुख्यतः द्रविड़ भाषा जैसे तेलुगू,तमिल, कन्नड़ और मलयालम बोलते हैं और मुख्यतः द्रविड़ मूल के हैं। .
पल्लव नाम से निम्न लेख हैः-.
फ़्रान्स,या फ्रांस (आधिकारिक तौर पर फ़्रान्स गणराज्य; फ़्रान्सीसीः République française) पश्चिम यूरोप में स्थित एक देश है किन्तु इसका कुछ भूभाग संसार के अन्य भागों में भी हैं। पेरिस इसकी राजधानी है। यह यूरोपीय संघ का सदस्य है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह यूरोप महाद्वीप का सबसे बड़ा देश है, जो उत्तर में बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, पूर्व में जर्मनी, स्विट्ज़रलैण्ड, इटली, दक्षिण-पश्चिम में स्पेन, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्यसागर तथा उत्तर पश्चिम में इंग्लिश चैनल द्वारा घिरा है। इस प्रकार यह तीन ओर सागरों से घिरा है। सुरक्षा की दृष्टि से इसकी स्थिति उत्तम नहीं है। लौह युग के दौरान, अभी के महानगरीय फ्रांस को कैटलिक से आये गॉल्स ने अपना निवास स्थान बनाया। रोम ने 51 ईसा पूर्व में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया। फ्रांस, गत मध्य युग में सौ वर्ष के युद्ध (1337 से 1453) में अपनी जीत के साथ राज्य निर्माण और राजनीतिक केंद्रीकरण को मजबूत करने के बाद एक प्रमुख यूरोपीय शक्ति के रूप में उभरा। पुनर्जागरण के दौरान, फ्रांसीसी संस्कृति विकसित हुई और एक वैश्विक औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित हुआ, जो 20 वीं सदी तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थी। 16 वीं शताब्दी में यहाँ कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट (ह्यूजेनॉट्स) के बीच धार्मिक नागरिक युद्धों का वर्चस्व रहा। फ्रांस, लुई चौदहवें के शासन में यूरोप की प्रमुख सांस्कृतिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन कर उभरा। 18 वीं शताब्दी के अंत में, फ्रेंच क्रांति ने पूर्ण राजशाही को उखाड़ दिया, और आधुनिक इतिहास के सबसे पुराने गणराज्यों में से एक को स्थापित किया, साथ ही मानव और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा के प्रारूप का मसौदा तैयार किया, जोकि आज तक राष्ट्र के आदर्शों को व्यक्त करता है। 19वीं शताब्दी में नेपोलियन ने वहाँ की सत्ता हथियाँ कर पहले फ्रांसीसी साम्राज्य की स्थापना की, इसके बाद के नेपोलियन युद्धों ने ही वर्तमान यूरोप महाद्वीपीय के स्वरुप को आकार दिया। साम्राज्य के पतन के बाद, फ्रांस में 1870 में तृतीय फ्रांसीसी गणतंत्र की स्थापना हुई, हलाकि आने वाली सभी सरकार लचर अवस्था में ही रही। फ्रांस प्रथम विश्व युद्ध में एक प्रमुख भागीदार था, जहां वह विजयी हुआ, और द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्र में से एक था, लेकिन 1940 में धुरी शक्तियों के कब्जे में आ गया। 1944 में अपनी मुक्ति के बाद, चौथे फ्रांसीसी गणतंत्र की स्थापना हुई जिसे बाद में अल्जीरिया युद्ध के दौरान पुनः भंग कर दिया गया। पांचवां फ्रांसीसी गणतंत्र, चार्ल्स डी गॉल के नेतृत्व में, 1958 में बनाई गई और आज भी यह कार्यरत है। अल्जीरिया और लगभग सभी अन्य उपनिवेश 1960 के दशक में स्वतंत्र हो गए पर फ्रांस के साथ इसके घनिष्ठ आर्थिक और सैन्य संबंध आज भी कायम हैं। फ्रांस लंबे समय से कला, विज्ञान और दर्शन का एक वैश्विक केंद्र रहा है। यहाँ पर यूरोप की चौथी सबसे ज्यादा सांस्कृतिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद है, और दुनिया में सबसे अधिक, सालाना लगभग 83 मिलियन विदेशी पर्यटकों की मेजबानी करता है। फ्रांस एक विकसित देश है जोकि जीडीपी में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा क्रय शक्ति समता में नौवीं सबसे बड़ा है। कुल घरेलू संपदा के संदर्भ में, यह दुनिया में चौथे स्थान पर है। फ्रांस का शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, जीवन प्रत्याशा और मानव विकास की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अच्छा प्रदर्शन है। फ्रांस, विश्व की महाशक्तियों में से एक है, वीटो का अधिकार और एक आधिकारिक परमाणु हथियार संपन्न देश के साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से एक है। यह यूरोपीय संघ और यूरोजोन का एक प्रमुख सदस्यीय राज्य है। यह समूह-8, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो), आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी), विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और ला फ्रैंकोफ़ोनी का भी सदस्य है। .
भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .
* भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय आह्वानों, उत्तेजनाओं एवं प्रयत्नों से प्रेरित, भारतीय राजनैतिक संगठनों द्वारा संचालित अहिंसावादी और सैन्यवादी आन्दोलन था, जिनका एक समान उद्देश्य, अंग्रेजी शासन को भारतीय उपमहाद्वीप से जड़ से उखाड़ फेंकना था। इस आन्दोलन की शुरुआत १८५७ में हुए सिपाही विद्रोह को माना जाता है। स्वाधीनता के लिए हजारों लोगों ने अपने प्राणों की बलि दी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने १९३० कांग्रेस अधिवेशन में अंग्रेजो से पूर्ण स्वराज की मांग की थी। .
मौर्य राजवंश (३२२-१८५ ईसापूर्व) प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं महान राजवंश था। इसने १३७ वर्ष भारत में राज्य किया। इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मन्त्री कौटिल्य को दिया जाता है, जिन्होंने नन्द वंश के सम्राट घनानन्द को पराजित किया। मौर्य साम्राज्य के विस्तार एवं उसे शक्तिशाली बनाने का श्रेय सम्राट अशोक को जाता है। यह साम्राज्य पूर्व में मगध राज्य में गंगा नदी के मैदानों (आज का बिहार एवं बंगाल) से शुरु हुआ। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र (आज के पटना शहर के पास) थी। चन्द्रगुप्त मौर्य ने ३२२ ईसा पूर्व में इस साम्राज्य की स्थापना की और तेजी से पश्चिम की तरफ़ अपना साम्राज्य का विकास किया। उसने कई छोटे छोटे क्षेत्रीय राज्यों के आपसी मतभेदों का फायदा उठाया जो सिकन्दर के आक्रमण के बाद पैदा हो गये थे। ३१६ ईसा पूर्व तक मौर्य वंश ने पूरे उत्तरी पश्चिमी भारत पर अधिकार कर लिया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक के राज्य में मौर्य वंश का बेहद विस्तार हुआ। सम्राट अशोक के कारण ही मौर्य साम्राज्य सबसे महान एवं शक्तिशाली बनकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ। .
संस्कृत (संस्कृतम्) भारतीय उपमहाद्वीप की एक शास्त्रीय भाषा है। इसे देववाणी अथवा सुरभारती भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत एक हिंद-आर्य भाषा हैं जो हिंद-यूरोपीय भाषा परिवार का एक शाखा हैं। आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, हिंदी, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की रोमानी भाषा भी शामिल है। संस्कृत में वैदिक धर्म से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गये हैं। बौद्ध धर्म (विशेषकर महायान) तथा जैन मत के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर यज्ञ और पूजा संस्कृत में ही होती हैं। .
शब्द हिन्दू किसी भी ऐसे व्यक्ति का उल्लेख करता है जो खुद को सांस्कृतिक रूप से, मानव-जाति के अनुसार या नृवंशतया (एक विशिष्ट संस्कृति का अनुकरण करने वाले एक ही प्रजाति के लोग), या धार्मिक रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ मानते हैं।Jeffery D. Long (2007), A Vision for Hinduism, IB Tauris,, pages 35-37 यह शब्द ऐतिहासिक रूप से दक्षिण एशिया में स्वदेशी या स्थानीय लोगों के लिए एक भौगोलिक, सांस्कृतिक, और बाद में धार्मिक पहचानकर्ता के रूप में प्रयुक्त किया गया है। हिन्दू शब्द का ऐतिहासिक अर्थ समय के साथ विकसित हुआ है। प्रथम सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व में सिंधु की भूमि के लिए फारसी और ग्रीक संदर्भों के साथ, मध्ययुगीन युग के ग्रंथों के माध्यम से, हिंदू शब्द सिंधु (इंडस) नदी के चारों ओर या उसके पार भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगों के लिए भौगोलिक रूप में, मानव-जाति के अनुसार (नृवंशतया), या सांस्कृतिक पहचानकर्ता के रूप में प्रयुक्त होने लगा था।John Stratton Hawley and Vasudha Narayanan (2006), The Life of Hinduism, University of California Press,, pages 10-11 16 वीं शताब्दी तक, इस शब्द ने उपमहाद्वीप के उन निवासियों का उल्लेख करना शुरू कर दिया, जो कि तुर्किक या मुस्लिम नहीं थे। .
विजयनगर साम्राज्य - १५वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य (1336-1646) मध्यकालीन दक्षिण भारत का एक साम्राज्य था। इसके राजाओं ने ३१० वर्ष राज किया। इसका वास्तविक नाम कर्णाटक साम्राज्य था। इसकी स्थापना हरिहर और बुक्का राय नामक दो भाइयों ने की थी। पुर्तगाली इसे बिसनागा राज्य के नाम से जानते थे। इस राज्य की १५६५ में भारी पराजय हुई और राजधानी विजयनगर को जला दिया गया। उसके पश्चात क्षीण रूप में यह और ८० वर्ष चला। राजधानी विजयनगर के अवशेष आधुनिक कर्नाटक राज्य में हम्पी शहर के निकट पाये गये हैं और यह एक विश्व विरासत स्थल है। पुरातात्त्विक खोज से इस साम्राज्य की शक्ति तथा धन-सम्पदा का पता चलता है। .
आर्य समस्त हिन्दुओं तथा उनके मनुकुलीय पूर्वजों का वैदिक सम्बोधन है। इसका सरलार्थ है श्रेष्ठ अथवा कुलीन। .
कर्नाटक, जिसे कर्णाटक भी कहते हैं, दक्षिण भारत का एक राज्य है। इस राज्य का गठन १ नवंबर, १९५६ को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अधीन किया गया था। पहले यह मैसूर राज्य कहलाता था। १९७३ में पुनर्नामकरण कर इसका नाम कर्नाटक कर दिया गया। इसकी सीमाएं पश्चिम में अरब सागर, उत्तर पश्चिम में गोआ, उत्तर में महाराष्ट्र, पूर्व में आंध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में तमिल नाडु एवं दक्षिण में केरल से लगती हैं। इसका कुल क्षेत्रफल ७४,१२२ वर्ग मील (१,९१,९७६ कि॰मी॰²) है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का ५.८३% है। २९ जिलों के साथ यह राज्य आठवां सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की आधिकारिक और सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है कन्नड़। कर्नाटक शब्द के उद्गम के कई व्याख्याओं में से सर्वाधिक स्वीकृत व्याख्या यह है कि कर्नाटक शब्द का उद्गम कन्नड़ शब्द करु, अर्थात काली या ऊंची और नाडु अर्थात भूमि या प्रदेश या क्षेत्र से आया है, जिसके संयोजन करुनाडु का पूरा अर्थ हुआ काली भूमि या ऊंचा प्रदेश। काला शब्द यहां के बयालुसीम क्षेत्र की काली मिट्टी से आया है और ऊंचा यानि दक्कन के पठारी भूमि से आया है। ब्रिटिश राज में यहां के लिये कार्नेटिक शब्द का प्रयोग किया जाता था, जो कृष्णा नदी के दक्षिणी ओर की प्रायद्वीपीय भूमि के लिये प्रयुक्त है और मूलतः कर्नाटक शब्द का अपभ्रंश है। प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास देखें तो कर्नाटक क्षेत्र कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का क्षेत्र रहा है। इन साम्राज्यों के दरबारों के विचारक, दार्शनिक और भाट व कवियों के सामाजिक, साहित्यिक व धार्मिक संरक्षण में आज का कर्नाटक उपजा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दोनों ही रूपों, कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी संगीत को इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। आधुनिक युग के कन्नड़ लेखकों को सर्वाधिक ज्ञानपीठ सम्मान मिले हैं। राज्य की राजधानी बंगलुरु शहर है, जो भारत में हो रही त्वरित आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी का अग्रणी योगदानकर्त्ता है। .
आन्ध्र प्रदेश 210 संबंध है और भारत का इतिहास 90 है। वे आम 13 में है, समानता सूचकांक 4.33% है = 13 / (210 + 90)।
यह लेख आन्ध्र प्रदेश और भारत का इतिहास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आन्ध्र प्रदेश ఆంధ్ర ప్రదేశ్, संक्षिप्त आं.प्र., भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित राज्य है। क्षेत्र के अनुसार यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से आठवां सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर हैदराबाद है। भारत के सभी राज्यों में सबसे लंबा समुद्र तट गुजरात में होते हुए, दूसरे स्थान पर इस राज्य का समुद्र तट है। हैदराबाद केवल दस साल के लिये राजधानी रहेगी, तब तक अमरावती शहर को राजधानी का रूप दे दिया जायेगा। आन्ध्र प्रदेश बारह°इकतालीस' तथा बाईस°उ॰ अक्षांश और सतहत्तर° तथा चौरासी°चालीस'पू॰ देशांतर रेखांश के बीच है और उत्तर में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में तमिल नाडु और पश्चिम में कर्नाटक से घिरा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से आन्ध्र प्रदेश को "भारत का धान का कटोरा" कहा जाता है। यहाँ की फसल का सतहत्तर% से ज़्यादा हिस्सा चावल है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियाँ, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। पुदु्चेरी राज्य के यानम जिले का छोटा अंतःक्षेत्र ) इस राज्य के उत्तरी-पूर्व में स्थित गोदावरी डेल्टा में है। ऐतिहासिक दृष्टि से राज्य में शामिल क्षेत्र आन्ध्रपथ, आन्ध्रदेस, आन्ध्रवाणी और आन्ध्र विषय के रूप में जाना जाता था। आन्ध्र राज्य से आन्ध्र प्रदेश का गठन एक नवम्बर एक हज़ार नौ सौ छप्पन को किया गया। फरवरी दो हज़ार चौदह को भारतीय संसद ने अलग तेलंगाना राज्य को मंजूरी दे दी। तेलंगाना राज्य में दस जिले तथा शेष आन्ध्र प्रदेश में तेरह जिले होंगे। दस साल तक हैदराबाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी होगी। नया राज्य सीमांन्ध्र दो-तीन महीने में अस्तित्व में आजाएगा अब लोकसभा/राज्यसभा का पच्चीस/बारहसिट आन्ध्र में और लोकसभा/राज्यसभासत्रह/आठ सिट तेलंगाना में होगा। इसी माह आन्ध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन भी लागू हो गया जो कि राज्य के बटवारे तक लागू रहेगा। . भारत का इतिहास कई हजार साल पुराना माना जाता है। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ नवपाषाण युग के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरंभ काल लगभग तीन हज़ार तीन सौ ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर एक हज़ार नौ सौ ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। उन्नीसवी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर दो हज़ार ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा। वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल दो हज़ार ईसा पूर्व से छः सौ ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल तीन हज़ार ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की दो हज़ार छः सौ बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र दो सौ पैंसठ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से चार हज़ार साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी। ईसा पूर्व सात वीं और शुरूआती छः वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व सात वीं और शुरूआती छः वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां विद्यमान थे। अति महत्वपूर्ण गणराज्यों में कपिलवस्तु के शाक्य और वैशाली के लिच्छवी गणराज्य थे। गणराज्यों के अलावा राजतंत्रीय राज्य भी थे, जिनमें से कौशाम्बी , मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्वपूर्ण थे। इन राज्यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्यक्तियों के पास था, जिन्होंने राज्य विस्तार और पड़ोसी राज्यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्यात्मक राज्यों के तब भी स्पष्ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्यों का विस्तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया। आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। एक हज़ार पाँच सौ छप्पन में विजय नगर का पतन हो गया। सन् एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले तीन सौ सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। एक हज़ार छः सौ उनसठ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। . आन्ध्र प्रदेश और भारत का इतिहास आम में तेरह बातें हैं : चालुक्य, दिल्ली सल्तनत, दक्षिण भारत, पल्लव, फ़्रान्स, भारत, भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन, मौर्य राजवंश, संस्कृत भाषा, हिन्दू, विजयनगर साम्राज्य, आर्य, कर्नाटक। कोई विवरण नहीं। सन् एक हज़ार दो सौ दस से एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस तक भारत पर शासन करने वाले पाँच वंश के सुल्तानों के शासनकाल को दिल्ली सल्तनत या सल्तनत-ए-हिन्द/सल्तनत-ए-दिल्ली कहा जाता है। ये पाँच वंश ये थे- गुलाम वंश , ख़िलजी वंश , तुग़लक़ वंश , सैयद वंश , तथा लोधी वंश । इनमें से चार वंश मूलतः तुर्क थे जबकि अंतिम वंश अफगान था। मोहम्मद ग़ौरी का गुलाम कुतुब-उद-दीन ऐबक, गुलाम वंश का पहला सुल्तान था। ऐबक का साम्राज्य पूरे उत्तर भारत तक फैला था। इसके बाद ख़िलजी वंश ने मध्य भारत पर कब्ज़ा किया परन्तु भारतीय उपमहाद्वीप को संगठित करने में असफल रहा। इस सल्तनत ने न केवल बहुत से दक्षिण एशिया के मंदिरों का विनाश किया साथ ही अपवित्र भी किया,रिचर्ड ईटन ,, Journal of Islamic Studies, ग्यारह, pp दो सौ तिरासी-तीन सौ उन्नीस पर इसने भारतीय-इस्लामिक वास्तुकला के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली सल्तनत मुस्लिम इतिहास के कुछ कालखंडों में है जहां किसी महिला ने सत्ता संभाली। एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में मुगल सल्तनत द्वारा इस इस साम्राज्य का अंत हुआ। . भारत के दक्षिणी भाग को दक्षिण भारत भी कहते हैं। अपनी संस्कृति, इतिहास तथा प्रजातीय मूल की भिन्नता के कारण यह शेष भारत से अलग पहचान बना चुका है। हलांकि इतना भिन्न होकर भी यह भारत की विविधता का एक अंगमात्र है। दक्षिण भारतीय लोग मुख्यतः द्रविड़ भाषा जैसे तेलुगू,तमिल, कन्नड़ और मलयालम बोलते हैं और मुख्यतः द्रविड़ मूल के हैं। . पल्लव नाम से निम्न लेख हैः-. फ़्रान्स,या फ्रांस पश्चिम यूरोप में स्थित एक देश है किन्तु इसका कुछ भूभाग संसार के अन्य भागों में भी हैं। पेरिस इसकी राजधानी है। यह यूरोपीय संघ का सदस्य है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह यूरोप महाद्वीप का सबसे बड़ा देश है, जो उत्तर में बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, पूर्व में जर्मनी, स्विट्ज़रलैण्ड, इटली, दक्षिण-पश्चिम में स्पेन, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्यसागर तथा उत्तर पश्चिम में इंग्लिश चैनल द्वारा घिरा है। इस प्रकार यह तीन ओर सागरों से घिरा है। सुरक्षा की दृष्टि से इसकी स्थिति उत्तम नहीं है। लौह युग के दौरान, अभी के महानगरीय फ्रांस को कैटलिक से आये गॉल्स ने अपना निवास स्थान बनाया। रोम ने इक्यावन ईसा पूर्व में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया। फ्रांस, गत मध्य युग में सौ वर्ष के युद्ध में अपनी जीत के साथ राज्य निर्माण और राजनीतिक केंद्रीकरण को मजबूत करने के बाद एक प्रमुख यूरोपीय शक्ति के रूप में उभरा। पुनर्जागरण के दौरान, फ्रांसीसी संस्कृति विकसित हुई और एक वैश्विक औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित हुआ, जो बीस वीं सदी तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थी। सोलह वीं शताब्दी में यहाँ कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट के बीच धार्मिक नागरिक युद्धों का वर्चस्व रहा। फ्रांस, लुई चौदहवें के शासन में यूरोप की प्रमुख सांस्कृतिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन कर उभरा। अट्ठारह वीं शताब्दी के अंत में, फ्रेंच क्रांति ने पूर्ण राजशाही को उखाड़ दिया, और आधुनिक इतिहास के सबसे पुराने गणराज्यों में से एक को स्थापित किया, साथ ही मानव और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा के प्रारूप का मसौदा तैयार किया, जोकि आज तक राष्ट्र के आदर्शों को व्यक्त करता है। उन्नीसवीं शताब्दी में नेपोलियन ने वहाँ की सत्ता हथियाँ कर पहले फ्रांसीसी साम्राज्य की स्थापना की, इसके बाद के नेपोलियन युद्धों ने ही वर्तमान यूरोप महाद्वीपीय के स्वरुप को आकार दिया। साम्राज्य के पतन के बाद, फ्रांस में एक हज़ार आठ सौ सत्तर में तृतीय फ्रांसीसी गणतंत्र की स्थापना हुई, हलाकि आने वाली सभी सरकार लचर अवस्था में ही रही। फ्रांस प्रथम विश्व युद्ध में एक प्रमुख भागीदार था, जहां वह विजयी हुआ, और द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्र में से एक था, लेकिन एक हज़ार नौ सौ चालीस में धुरी शक्तियों के कब्जे में आ गया। एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में अपनी मुक्ति के बाद, चौथे फ्रांसीसी गणतंत्र की स्थापना हुई जिसे बाद में अल्जीरिया युद्ध के दौरान पुनः भंग कर दिया गया। पांचवां फ्रांसीसी गणतंत्र, चार्ल्स डी गॉल के नेतृत्व में, एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में बनाई गई और आज भी यह कार्यरत है। अल्जीरिया और लगभग सभी अन्य उपनिवेश एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में स्वतंत्र हो गए पर फ्रांस के साथ इसके घनिष्ठ आर्थिक और सैन्य संबंध आज भी कायम हैं। फ्रांस लंबे समय से कला, विज्ञान और दर्शन का एक वैश्विक केंद्र रहा है। यहाँ पर यूरोप की चौथी सबसे ज्यादा सांस्कृतिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद है, और दुनिया में सबसे अधिक, सालाना लगभग तिरासी मिलियन विदेशी पर्यटकों की मेजबानी करता है। फ्रांस एक विकसित देश है जोकि जीडीपी में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा क्रय शक्ति समता में नौवीं सबसे बड़ा है। कुल घरेलू संपदा के संदर्भ में, यह दुनिया में चौथे स्थान पर है। फ्रांस का शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, जीवन प्रत्याशा और मानव विकास की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अच्छा प्रदर्शन है। फ्रांस, विश्व की महाशक्तियों में से एक है, वीटो का अधिकार और एक आधिकारिक परमाणु हथियार संपन्न देश के साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से एक है। यह यूरोपीय संघ और यूरोजोन का एक प्रमुख सदस्यीय राज्य है। यह समूह-आठ, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन , आर्थिक सहयोग और विकास संगठन , विश्व व्यापार संगठन और ला फ्रैंकोफ़ोनी का भी सदस्य है। . भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . * भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय आह्वानों, उत्तेजनाओं एवं प्रयत्नों से प्रेरित, भारतीय राजनैतिक संगठनों द्वारा संचालित अहिंसावादी और सैन्यवादी आन्दोलन था, जिनका एक समान उद्देश्य, अंग्रेजी शासन को भारतीय उपमहाद्वीप से जड़ से उखाड़ फेंकना था। इस आन्दोलन की शुरुआत एक हज़ार आठ सौ सत्तावन में हुए सिपाही विद्रोह को माना जाता है। स्वाधीनता के लिए हजारों लोगों ने अपने प्राणों की बलि दी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक हज़ार नौ सौ तीस कांग्रेस अधिवेशन में अंग्रेजो से पूर्ण स्वराज की मांग की थी। . मौर्य राजवंश प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं महान राजवंश था। इसने एक सौ सैंतीस वर्ष भारत में राज्य किया। इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मन्त्री कौटिल्य को दिया जाता है, जिन्होंने नन्द वंश के सम्राट घनानन्द को पराजित किया। मौर्य साम्राज्य के विस्तार एवं उसे शक्तिशाली बनाने का श्रेय सम्राट अशोक को जाता है। यह साम्राज्य पूर्व में मगध राज्य में गंगा नदी के मैदानों से शुरु हुआ। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। चन्द्रगुप्त मौर्य ने तीन सौ बाईस ईसा पूर्व में इस साम्राज्य की स्थापना की और तेजी से पश्चिम की तरफ़ अपना साम्राज्य का विकास किया। उसने कई छोटे छोटे क्षेत्रीय राज्यों के आपसी मतभेदों का फायदा उठाया जो सिकन्दर के आक्रमण के बाद पैदा हो गये थे। तीन सौ सोलह ईसा पूर्व तक मौर्य वंश ने पूरे उत्तरी पश्चिमी भारत पर अधिकार कर लिया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक के राज्य में मौर्य वंश का बेहद विस्तार हुआ। सम्राट अशोक के कारण ही मौर्य साम्राज्य सबसे महान एवं शक्तिशाली बनकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ। . संस्कृत भारतीय उपमहाद्वीप की एक शास्त्रीय भाषा है। इसे देववाणी अथवा सुरभारती भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत एक हिंद-आर्य भाषा हैं जो हिंद-यूरोपीय भाषा परिवार का एक शाखा हैं। आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, हिंदी, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की रोमानी भाषा भी शामिल है। संस्कृत में वैदिक धर्म से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गये हैं। बौद्ध धर्म तथा जैन मत के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर यज्ञ और पूजा संस्कृत में ही होती हैं। . शब्द हिन्दू किसी भी ऐसे व्यक्ति का उल्लेख करता है जो खुद को सांस्कृतिक रूप से, मानव-जाति के अनुसार या नृवंशतया , या धार्मिक रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ मानते हैं।Jeffery D. Long , A Vision for Hinduism, IB Tauris,, pages पैंतीस-सैंतीस यह शब्द ऐतिहासिक रूप से दक्षिण एशिया में स्वदेशी या स्थानीय लोगों के लिए एक भौगोलिक, सांस्कृतिक, और बाद में धार्मिक पहचानकर्ता के रूप में प्रयुक्त किया गया है। हिन्दू शब्द का ऐतिहासिक अर्थ समय के साथ विकसित हुआ है। प्रथम सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व में सिंधु की भूमि के लिए फारसी और ग्रीक संदर्भों के साथ, मध्ययुगीन युग के ग्रंथों के माध्यम से, हिंदू शब्द सिंधु नदी के चारों ओर या उसके पार भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगों के लिए भौगोलिक रूप में, मानव-जाति के अनुसार , या सांस्कृतिक पहचानकर्ता के रूप में प्रयुक्त होने लगा था।John Stratton Hawley and Vasudha Narayanan , The Life of Hinduism, University of California Press,, pages दस-ग्यारह सोलह वीं शताब्दी तक, इस शब्द ने उपमहाद्वीप के उन निवासियों का उल्लेख करना शुरू कर दिया, जो कि तुर्किक या मुस्लिम नहीं थे। . विजयनगर साम्राज्य - पंद्रहवीं सदी में विजयनगर साम्राज्य मध्यकालीन दक्षिण भारत का एक साम्राज्य था। इसके राजाओं ने तीन सौ दस वर्ष राज किया। इसका वास्तविक नाम कर्णाटक साम्राज्य था। इसकी स्थापना हरिहर और बुक्का राय नामक दो भाइयों ने की थी। पुर्तगाली इसे बिसनागा राज्य के नाम से जानते थे। इस राज्य की एक हज़ार पाँच सौ पैंसठ में भारी पराजय हुई और राजधानी विजयनगर को जला दिया गया। उसके पश्चात क्षीण रूप में यह और अस्सी वर्ष चला। राजधानी विजयनगर के अवशेष आधुनिक कर्नाटक राज्य में हम्पी शहर के निकट पाये गये हैं और यह एक विश्व विरासत स्थल है। पुरातात्त्विक खोज से इस साम्राज्य की शक्ति तथा धन-सम्पदा का पता चलता है। . आर्य समस्त हिन्दुओं तथा उनके मनुकुलीय पूर्वजों का वैदिक सम्बोधन है। इसका सरलार्थ है श्रेष्ठ अथवा कुलीन। . कर्नाटक, जिसे कर्णाटक भी कहते हैं, दक्षिण भारत का एक राज्य है। इस राज्य का गठन एक नवंबर, एक हज़ार नौ सौ छप्पन को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अधीन किया गया था। पहले यह मैसूर राज्य कहलाता था। एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में पुनर्नामकरण कर इसका नाम कर्नाटक कर दिया गया। इसकी सीमाएं पश्चिम में अरब सागर, उत्तर पश्चिम में गोआ, उत्तर में महाराष्ट्र, पूर्व में आंध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में तमिल नाडु एवं दक्षिण में केरल से लगती हैं। इसका कुल क्षेत्रफल चौहत्तर,एक सौ बाईस वर्ग मील है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का पाँच.तिरासी% है। उनतीस जिलों के साथ यह राज्य आठवां सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की आधिकारिक और सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है कन्नड़। कर्नाटक शब्द के उद्गम के कई व्याख्याओं में से सर्वाधिक स्वीकृत व्याख्या यह है कि कर्नाटक शब्द का उद्गम कन्नड़ शब्द करु, अर्थात काली या ऊंची और नाडु अर्थात भूमि या प्रदेश या क्षेत्र से आया है, जिसके संयोजन करुनाडु का पूरा अर्थ हुआ काली भूमि या ऊंचा प्रदेश। काला शब्द यहां के बयालुसीम क्षेत्र की काली मिट्टी से आया है और ऊंचा यानि दक्कन के पठारी भूमि से आया है। ब्रिटिश राज में यहां के लिये कार्नेटिक शब्द का प्रयोग किया जाता था, जो कृष्णा नदी के दक्षिणी ओर की प्रायद्वीपीय भूमि के लिये प्रयुक्त है और मूलतः कर्नाटक शब्द का अपभ्रंश है। प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास देखें तो कर्नाटक क्षेत्र कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का क्षेत्र रहा है। इन साम्राज्यों के दरबारों के विचारक, दार्शनिक और भाट व कवियों के सामाजिक, साहित्यिक व धार्मिक संरक्षण में आज का कर्नाटक उपजा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दोनों ही रूपों, कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी संगीत को इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। आधुनिक युग के कन्नड़ लेखकों को सर्वाधिक ज्ञानपीठ सम्मान मिले हैं। राज्य की राजधानी बंगलुरु शहर है, जो भारत में हो रही त्वरित आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी का अग्रणी योगदानकर्त्ता है। . आन्ध्र प्रदेश दो सौ दस संबंध है और भारत का इतिहास नब्बे है। वे आम तेरह में है, समानता सूचकांक चार.तैंतीस% है = तेरह / । यह लेख आन्ध्र प्रदेश और भारत का इतिहास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
मैड्रिड : रीयाल मैड्रिड ने मैनचेस्टर सिटी को सेमीफाइनल के दूसरे चरण में 1 . 0 से हराकर चैम्पियंस लीग फाइनल में जगह बना ली जहां उसका सामना एटलेटिको मैड्रिड से होगा.
ब्राजीली मिडफील्डर फर्नांडो ने जेरेथ बेल के क्रास पर 20वें मिनट में यह गोल किया. दो साल पहले रीयाल मैड्रिड ने अतिरिक्त समय में एटलेटिको को 4 - 1 से हराकर 10वीं बार खिताब जीता था. अब 28 मई को दोनों टीमें मिलान में भिडेंगी तो उसकी नजरें फिर खिताब पर होगी.
|
मैड्रिड : रीयाल मैड्रिड ने मैनचेस्टर सिटी को सेमीफाइनल के दूसरे चरण में एक . शून्य से हराकर चैम्पियंस लीग फाइनल में जगह बना ली जहां उसका सामना एटलेटिको मैड्रिड से होगा. ब्राजीली मिडफील्डर फर्नांडो ने जेरेथ बेल के क्रास पर बीसवें मिनट में यह गोल किया. दो साल पहले रीयाल मैड्रिड ने अतिरिक्त समय में एटलेटिको को चार - एक से हराकर दसवीं बार खिताब जीता था. अब अट्ठाईस मई को दोनों टीमें मिलान में भिडेंगी तो उसकी नजरें फिर खिताब पर होगी.
|
Bermo: बेरमो अनुमंडल के आईईएल थाना के गवर्नमेंट कॉलोनी में लाल फ्लैट के आवास में राजू करमाली अपने परिवार के साथ रहता था. बुधवार को उसका शव पुलिस ने बरामद किया. पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया. इस संबंध में थाना प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि मृतक की पत्नी बंसती देवी की लिखित शिकायत के पर आईईएल थाना में कांड संख्या 08/22, भादवि 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
थाने में दिए गए लिखित शिकायत के अनुसार बसंती देवी ने कहा है कि वह अपने पति राजू करमाली के द्वारा सहारा इंडिया के एजेंट हीरालाल शर्मा के माध्यम से पैसा जमा करती थी. कल शाम जब उसका पति काम कर लौट रहा था, उसी समय हीरालाल से मिला. वह मेच्योर राशि की निकासी की बात करने लगा. इसी बात को लेकर उसके साथ मारपीट की गयी. बसंती के अनुसार मृतक जब घर आया तो इस बात की जानकारी उसे दिया. कहा कि हीरालाल ने उसके साथ मारपीट की है. वह नहीं बचेगा. इतना कहने के बाद वह सो गया.
सुबह लगभग तीन बजे पत्नी ने उसे नींद से जगाया तो वह जोर-जोर से सांस ले रहा था. कुछ ही देर में उसकी मृत्यु हो गई. सुबह इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी गयी. पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट भेज दिया. थाना प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि इस संबंध में मृतक से मारपीट करने वाले हीरालाल के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. मृतक रामगढ़ जिला के गोला थाना अंतर्गत हेसापोड़ा ग्राम का निवासी है. गोमिया में पत्नी के साथ रहकर वह दैनिक मजदूरी का करता था.
|
Bermo: बेरमो अनुमंडल के आईईएल थाना के गवर्नमेंट कॉलोनी में लाल फ्लैट के आवास में राजू करमाली अपने परिवार के साथ रहता था. बुधवार को उसका शव पुलिस ने बरामद किया. पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया. इस संबंध में थाना प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि मृतक की पत्नी बंसती देवी की लिखित शिकायत के पर आईईएल थाना में कांड संख्या आठ/बाईस, भादवि तीन सौ दो के तहत मामला दर्ज किया गया है. थाने में दिए गए लिखित शिकायत के अनुसार बसंती देवी ने कहा है कि वह अपने पति राजू करमाली के द्वारा सहारा इंडिया के एजेंट हीरालाल शर्मा के माध्यम से पैसा जमा करती थी. कल शाम जब उसका पति काम कर लौट रहा था, उसी समय हीरालाल से मिला. वह मेच्योर राशि की निकासी की बात करने लगा. इसी बात को लेकर उसके साथ मारपीट की गयी. बसंती के अनुसार मृतक जब घर आया तो इस बात की जानकारी उसे दिया. कहा कि हीरालाल ने उसके साथ मारपीट की है. वह नहीं बचेगा. इतना कहने के बाद वह सो गया. सुबह लगभग तीन बजे पत्नी ने उसे नींद से जगाया तो वह जोर-जोर से सांस ले रहा था. कुछ ही देर में उसकी मृत्यु हो गई. सुबह इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी गयी. पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट भेज दिया. थाना प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि इस संबंध में मृतक से मारपीट करने वाले हीरालाल के खिलाफ धारा तीन सौ दो के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. मृतक रामगढ़ जिला के गोला थाना अंतर्गत हेसापोड़ा ग्राम का निवासी है. गोमिया में पत्नी के साथ रहकर वह दैनिक मजदूरी का करता था.
|
- इस साल फादर्स डे 19 जून 2022 को मनाया जाएगा।
- इस दिन को मनाने की शुरुआत 19 जून 1910 से हुई थी।
Father's Day 2022: कहते है कि दुनिया में मां और बच्चे का रिश्ता हर रिश्ते से बड़ा होता है। मां बच्चे को जन्म देती है, उसे बड़ा करती है। लेकिन मां और बच्चे का रिश्ता जितना अनमोल होता है उतनी ही अनमोल पिता और बच्चे का भी होता है। एक पिता बच्चे को सभ्य बनाने के साथ-साथ उसके भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाता है।
एक पिता ही है वो जो बच्चे को हर बुराई से बचाता है। उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद संघर्ष करते हैं। उनके भविष्य को सवारने के लिए पिता को कठोर बनना पड़ता है। अक्सर ऐसा होता है कि पिता बच्चे के प्रति उस तरह का प्यार जता नहीं पाते, जैसे मां जताती हैं। लेकिन आपको बता दें कि बिना दिखाए या जताए जीवन भर की खुशियां बच्चे को देने का काम एक पिता ही कर सकता है। पिता के निस्वार्थ प्रेम को सम्मान देने के लिए पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जाता है।
जानिए कब है फादर्स डे?
हर साल दुनिया भर में सभी पिता को सम्मान देने के लिए जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल फादर्स डे 19 जून 2022 को मनाया जाएगा। इस दिन को मनाने की शुरुआत 19 जून 1910 से हुई थी।
जानिए कैसे हुई फादर्स डे मनाने की शुरुआत?
वाशिंगटन शहर की रहने वाली 16 साल की सोनोरा लुईस की मां का निधन हो गया था। उनके पांच छोटे भाई बहन थे। पिता ने अकेले ही इन सभी की परवरिश की। पिता ने जहां एक मां की तरह अपनी बेटी को प्यार दिया तो वहीं एक पिता की तरह उसकी सुरक्षा और फिक्र की। सोनोरा को अपने पिता से बहुत प्यार था, जिनके वजह से उन्हें मां की कमी महसूस नहीं हुई।
सोनोरा के मन में ख्याल आया कि जब मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे मनाया जा सकता है तो फिर पिता के प्रेम और स्नेह के सम्मान में फादर्स डे क्यों नहीं मनाया जा सकता है? बस फिर क्या था अपने पिता को सम्मान देने के लिए सोनोरा ने 19 जून 1910 को पहली बार फादर्स डे मनाया।
|
- इस साल फादर्स डे उन्नीस जून दो हज़ार बाईस को मनाया जाएगा। - इस दिन को मनाने की शुरुआत उन्नीस जून एक हज़ार नौ सौ दस से हुई थी। Father's Day दो हज़ार बाईस: कहते है कि दुनिया में मां और बच्चे का रिश्ता हर रिश्ते से बड़ा होता है। मां बच्चे को जन्म देती है, उसे बड़ा करती है। लेकिन मां और बच्चे का रिश्ता जितना अनमोल होता है उतनी ही अनमोल पिता और बच्चे का भी होता है। एक पिता बच्चे को सभ्य बनाने के साथ-साथ उसके भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाता है। एक पिता ही है वो जो बच्चे को हर बुराई से बचाता है। उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद संघर्ष करते हैं। उनके भविष्य को सवारने के लिए पिता को कठोर बनना पड़ता है। अक्सर ऐसा होता है कि पिता बच्चे के प्रति उस तरह का प्यार जता नहीं पाते, जैसे मां जताती हैं। लेकिन आपको बता दें कि बिना दिखाए या जताए जीवन भर की खुशियां बच्चे को देने का काम एक पिता ही कर सकता है। पिता के निस्वार्थ प्रेम को सम्मान देने के लिए पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जाता है। जानिए कब है फादर्स डे? हर साल दुनिया भर में सभी पिता को सम्मान देने के लिए जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल फादर्स डे उन्नीस जून दो हज़ार बाईस को मनाया जाएगा। इस दिन को मनाने की शुरुआत उन्नीस जून एक हज़ार नौ सौ दस से हुई थी। जानिए कैसे हुई फादर्स डे मनाने की शुरुआत? वाशिंगटन शहर की रहने वाली सोलह साल की सोनोरा लुईस की मां का निधन हो गया था। उनके पांच छोटे भाई बहन थे। पिता ने अकेले ही इन सभी की परवरिश की। पिता ने जहां एक मां की तरह अपनी बेटी को प्यार दिया तो वहीं एक पिता की तरह उसकी सुरक्षा और फिक्र की। सोनोरा को अपने पिता से बहुत प्यार था, जिनके वजह से उन्हें मां की कमी महसूस नहीं हुई। सोनोरा के मन में ख्याल आया कि जब मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे मनाया जा सकता है तो फिर पिता के प्रेम और स्नेह के सम्मान में फादर्स डे क्यों नहीं मनाया जा सकता है? बस फिर क्या था अपने पिता को सम्मान देने के लिए सोनोरा ने उन्नीस जून एक हज़ार नौ सौ दस को पहली बार फादर्स डे मनाया।
|
ए बी डिबिलियर्स के तूफानी शतक और फॉफ डुप्लेसिस के 66 रनों की बदौलत साउथ अफ्रीका ने पहले वनडे में भारत के सामने 304 रनों का लक्ष्य रखा।
जवाब में उतरी भारतीय टीम को पहला झटका शिखर धवन के रूप में लगा। धवन 23 रन बनाकर आउट हो गए। रोहित शतक बनाकर नाबाद खेल रहे हैं, जबकि अजिंक्य रहाणे पचासा मारने के बाद आउट हो गए। नए बल्लेबाज़ विराट कोहली क्रीज़ पर आ गए हैं। 35 ओवर तक भारत ने 200 रन बना लिए थे।
|
ए बी डिबिलियर्स के तूफानी शतक और फॉफ डुप्लेसिस के छयासठ रनों की बदौलत साउथ अफ्रीका ने पहले वनडे में भारत के सामने तीन सौ चार रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में उतरी भारतीय टीम को पहला झटका शिखर धवन के रूप में लगा। धवन तेईस रन बनाकर आउट हो गए। रोहित शतक बनाकर नाबाद खेल रहे हैं, जबकि अजिंक्य रहाणे पचासा मारने के बाद आउट हो गए। नए बल्लेबाज़ विराट कोहली क्रीज़ पर आ गए हैं। पैंतीस ओवर तक भारत ने दो सौ रन बना लिए थे।
|
आज के वक्त में जहां इंसान एक-दूसरे की मदद करने से कतराता है लेकिन इन्हीं इंसानों के बीच एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एक कबूतर की मदद की है। दर्द से छटपटाते एक पक्षी की जान बचाई है। शहर के बड़ी मठिया के पास नुकीले तार में फंसकर कबूतर जख्मी होकर सड़क किनारे गिर गया था। जिसके बाद वह आधे घंटे तक तड़पता रहा।
वहां से गुजरने वाले कई लोगों ने रुक कर घायल कबूतर को देखा, लेकिन किसी को कबूतर पर दया नहीं आई। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक युवक की कबूतर पर नजर पड़ी। जिसके बाद युवक ने गंभीर रूप से घायल कबूतर को हाथों में उठाया और इधर-उधर इलाज के लिए दौड़ने लगा। लेकिन आस-पास कोई वेटरनरी चिकित्सक नहीं मिले।
जानकारी के अभाव में इलाज के लिए उक्त युवक ने आरा सदर अस्पताल लाया और कबूतर को बचाने की गुहार लगाई। युवक के हाथों में कबूतर को जख्मी हालत में देख इमरजेंसी में लोगों की भीड़ लग गई। जिसके बाद इमरजेंसी में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ कुछ देर तक सोचते रहे। फिर कबूतर का प्राथिमक इलाज किया। कबूतर की दाहिने डैने से लगातार खून का रिसाव हो रहा था। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने युवक और नर्सिंग स्टाफ की सराहना की।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
आज के वक्त में जहां इंसान एक-दूसरे की मदद करने से कतराता है लेकिन इन्हीं इंसानों के बीच एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एक कबूतर की मदद की है। दर्द से छटपटाते एक पक्षी की जान बचाई है। शहर के बड़ी मठिया के पास नुकीले तार में फंसकर कबूतर जख्मी होकर सड़क किनारे गिर गया था। जिसके बाद वह आधे घंटे तक तड़पता रहा। वहां से गुजरने वाले कई लोगों ने रुक कर घायल कबूतर को देखा, लेकिन किसी को कबूतर पर दया नहीं आई। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक युवक की कबूतर पर नजर पड़ी। जिसके बाद युवक ने गंभीर रूप से घायल कबूतर को हाथों में उठाया और इधर-उधर इलाज के लिए दौड़ने लगा। लेकिन आस-पास कोई वेटरनरी चिकित्सक नहीं मिले। जानकारी के अभाव में इलाज के लिए उक्त युवक ने आरा सदर अस्पताल लाया और कबूतर को बचाने की गुहार लगाई। युवक के हाथों में कबूतर को जख्मी हालत में देख इमरजेंसी में लोगों की भीड़ लग गई। जिसके बाद इमरजेंसी में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ कुछ देर तक सोचते रहे। फिर कबूतर का प्राथिमक इलाज किया। कबूतर की दाहिने डैने से लगातार खून का रिसाव हो रहा था। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने युवक और नर्सिंग स्टाफ की सराहना की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
बस में बैठे किसी छात्र ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और इसे वायरल कर दिया। इसमें लड़कियों और लड़कों का एक पूरा ग्रुप दिख रहा है। सभी छात्र चेंगलपट्टू के एक सरकारी स्कूल के बताए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दिख रहा है कि कुछ स्कूली बच्चे चलती बस में शराब पी रहे हैं। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह वीडियो तमिलनाडु का है। वीडियो में दिख रहा है की स्कूल के लड़के और लड़कियां दोनों इसमें नजर आ रहे हैं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, यह घटना तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले की है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद सच्चाई का पता चला जिसमें बताया गया कि घटना बीते मंगलवार की है। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ स्टूडेंट्स अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में तिरुकाझुकुंद्रम से ठाचूर जा रही बस में सवार थे। इसी दौरान कुछ छात्रों ने शराब का सेवन किया है।
यह भी बताया गया कि बस में बैठे किसी छात्र ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और इसे वायरल कर दिया। इसमें लड़कियों और लड़कों का एक पूरा ग्रुप दिख रहा है। सभी छात्र चेंगलपट्टू के एक सरकारी स्कूल के बताए जा रहे हैं।
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ लोग चौंक गए। रिपोर्ट के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि अधिकारियों ने घटना को संज्ञान में लिया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
|
बस में बैठे किसी छात्र ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और इसे वायरल कर दिया। इसमें लड़कियों और लड़कों का एक पूरा ग्रुप दिख रहा है। सभी छात्र चेंगलपट्टू के एक सरकारी स्कूल के बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दिख रहा है कि कुछ स्कूली बच्चे चलती बस में शराब पी रहे हैं। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह वीडियो तमिलनाडु का है। वीडियो में दिख रहा है की स्कूल के लड़के और लड़कियां दोनों इसमें नजर आ रहे हैं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दरअसल, यह घटना तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले की है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद सच्चाई का पता चला जिसमें बताया गया कि घटना बीते मंगलवार की है। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ स्टूडेंट्स अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में तिरुकाझुकुंद्रम से ठाचूर जा रही बस में सवार थे। इसी दौरान कुछ छात्रों ने शराब का सेवन किया है। यह भी बताया गया कि बस में बैठे किसी छात्र ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और इसे वायरल कर दिया। इसमें लड़कियों और लड़कों का एक पूरा ग्रुप दिख रहा है। सभी छात्र चेंगलपट्टू के एक सरकारी स्कूल के बताए जा रहे हैं। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ लोग चौंक गए। रिपोर्ट के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि अधिकारियों ने घटना को संज्ञान में लिया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
|
भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोरोना-रोधी वैक्सीन कोवैक्सीन. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin) को कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की अहम बैठक में अप्रूवल मिलने के पूरे आसार हैं. कोवैक्सीन को ICMR और भारत-बायोटेक ने मिलकर बनाया है. दरअसल WHO के टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप की तरफ से मांगा गया अतिरिक्त डेटा भी भारत-बायोटेक ने मुहैया करवा दिया है. इस वजह से उम्मीद की जा रही है कि कोवैक्सीन को अब अप्रूवल मिल सकता है.
टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप पास किसी भी वैक्सीन को इमरजेंसी यूज लाइसेंस देने का अधिकार होता है. ग्रुप ने 26 अक्टूबर की बैठक में भारत-बायोटेक से अतिरिक्त डेटा मांगे थे जिससे अंतिम विश्लेषण किया जा सके. जिस अतरिक्त डेटा की मांग की गई थी उसमें 60 वर्ष से अधिक के लोगों का इम्युनोजेनिसीटी डेटा भी शामिल था. इसके अलावा जेंडर के मुताबिक भी डेटा की मांग की गई थी. न्यूज़18 ने रिपोर्ट की है कि बीते सप्ताह टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप की मांग पर भारत बायोटेक ने ये डेटा सौंप दिया है.
इससे पहले डब्ल्यूएचओ में सहायक महानिदेशक डॉ मरीयंगेला सिमाओ ने जिनेवा में संवाददाता सम्मेलन में कहा था, 'भारत बायोटेक नियमित रूप से और बहुत तेजी से आंकड़े सौंप रहा है. सिमाओ ने कहा कि जब तकनीकी सलाहकार समूह ने 26 अक्टूबर को ईयूएल पर चर्चा के लिए बैठक की थी तब उन्होंने भारत बायोटेक से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे थे.
WHO ने अब तक दुनिया की सात कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया है. संगठन के स्ट्रेटजिक एडवायजरी ग्रुप ने पहले ही कोवैक्सीन का विश्लेषण कर लिया है. बीते सप्ताह देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कहा था - WHO का एक सिस्टम है जिसमें टेक्निकल कमेटी है जिसे कोवैक्सीन को अप्रूव करना है.
.
237 से ज्यादा फिल्में, 93 रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर?
|
भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोरोना-रोधी वैक्सीन कोवैक्सीन. नई दिल्ली. भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की अहम बैठक में अप्रूवल मिलने के पूरे आसार हैं. कोवैक्सीन को ICMR और भारत-बायोटेक ने मिलकर बनाया है. दरअसल WHO के टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप की तरफ से मांगा गया अतिरिक्त डेटा भी भारत-बायोटेक ने मुहैया करवा दिया है. इस वजह से उम्मीद की जा रही है कि कोवैक्सीन को अब अप्रूवल मिल सकता है. टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप पास किसी भी वैक्सीन को इमरजेंसी यूज लाइसेंस देने का अधिकार होता है. ग्रुप ने छब्बीस अक्टूबर की बैठक में भारत-बायोटेक से अतिरिक्त डेटा मांगे थे जिससे अंतिम विश्लेषण किया जा सके. जिस अतरिक्त डेटा की मांग की गई थी उसमें साठ वर्ष से अधिक के लोगों का इम्युनोजेनिसीटी डेटा भी शामिल था. इसके अलावा जेंडर के मुताबिक भी डेटा की मांग की गई थी. न्यूज़अट्ठारह ने रिपोर्ट की है कि बीते सप्ताह टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप की मांग पर भारत बायोटेक ने ये डेटा सौंप दिया है. इससे पहले डब्ल्यूएचओ में सहायक महानिदेशक डॉ मरीयंगेला सिमाओ ने जिनेवा में संवाददाता सम्मेलन में कहा था, 'भारत बायोटेक नियमित रूप से और बहुत तेजी से आंकड़े सौंप रहा है. सिमाओ ने कहा कि जब तकनीकी सलाहकार समूह ने छब्बीस अक्टूबर को ईयूएल पर चर्चा के लिए बैठक की थी तब उन्होंने भारत बायोटेक से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे थे. WHO ने अब तक दुनिया की सात कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया है. संगठन के स्ट्रेटजिक एडवायजरी ग्रुप ने पहले ही कोवैक्सीन का विश्लेषण कर लिया है. बीते सप्ताह देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कहा था - WHO का एक सिस्टम है जिसमें टेक्निकल कमेटी है जिसे कोवैक्सीन को अप्रूव करना है. . दो सौ सैंतीस से ज्यादा फिल्में, तिरानवे रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर?
|
ये सभी Room Blowers बढ़िया क्वालिटी के हैं और लंबे समय तक चलने वाले हैं। इनकी गर्माहट से आपको कड़ाके की ठंड में भी बड़ी राहत मिलेगी।
कड़ाके की ठंड से बचने के लिए घर के अंदर हम Room Blower का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी गर्माहट से हमें ठंड में भी राहत मिलती है। ये इतने हल्के होते हैं कि हम इन्हें आसानी से एक कमरे से दूसरे कमरे तक कैरी कर सकते हैं। अगर आप को Room Blower खरीदना है तो आप Amazon से अपने लिए Room Blower सस्ते में ऑर्डर कर सकते हैं। यहां आपको बढ़िया क्वालिटी के Room Blowers काफी कम प्राइस में मिलेंगे। आपकी सुरक्षा के लिए इसमें कई सेफ्टी सिस्टम भी दिए हुए हैं। आइए आपको इससे जुड़ी जानकारी विस्तार से देते हैं।
Note: Amazonपर अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिककरें।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
|
ये सभी Room Blowers बढ़िया क्वालिटी के हैं और लंबे समय तक चलने वाले हैं। इनकी गर्माहट से आपको कड़ाके की ठंड में भी बड़ी राहत मिलेगी। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए घर के अंदर हम Room Blower का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी गर्माहट से हमें ठंड में भी राहत मिलती है। ये इतने हल्के होते हैं कि हम इन्हें आसानी से एक कमरे से दूसरे कमरे तक कैरी कर सकते हैं। अगर आप को Room Blower खरीदना है तो आप Amazon से अपने लिए Room Blower सस्ते में ऑर्डर कर सकते हैं। यहां आपको बढ़िया क्वालिटी के Room Blowers काफी कम प्राइस में मिलेंगे। आपकी सुरक्षा के लिए इसमें कई सेफ्टी सिस्टम भी दिए हुए हैं। आइए आपको इससे जुड़ी जानकारी विस्तार से देते हैं। Note: Amazonपर अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिककरें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
|
बिहारः क्यों आज के युग में मासूम बच्ची, लड़की और एक औरत को ही हमेशा लोग अपनी हैवानियत का शिकार बनाते है. जहां एक तरफ सभी लोग टीचर्स को अपना आदर्श मानते है और स्कूल को विद्या का मंदिर कहते है, वहीं एक ऐसी घटना हुई है जिसने स्थानीय लोगों समेत सभी को हैरान कर दिया है. जी हां, एक बार फिर से बिहार शहर के छपरा जिले में प्रिंसिपल, टीचर्स और छात्राओं ने एक किशोरी के साथ कथित तौर पर मासूम के साथ सात महीने तक दुष्कर्म जैसी वारदात को अंजाम दिया है.
बता दें कि बिहार के छपरा जिले में एक छात्रा के साथ गैंगरेप व ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज किया गया है. इस पर विद्यालय के प्रिंसिपल समेत 2 और शिक्षक और 15 छात्र पर गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा है. किशोरी की शिकायत के बाद शुक्रवार को प्रिंसिपल, एक टीचर और दो छात्रों को हिरासत में ले लिया गया. उपरोक्त जानकारी के बारे में सारण एसपी ने दी है.
किशोरी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक तथा छात्रों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग की गई है. अपनी शिकायत में नाबालिग ने 18 आरोपियों के नाम भी दर्ज कराए है. छात्रा के साथ पहली बार रेप दिसंबर 2017 में किया गया था. क्लास के छात्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया. उसके बाद उसी के ब्लैकमेलिंग के दौरान चार-पांच युवकों के अलावा दो शिक्षकों और प्रिंसिपल ने भी छात्रा का यौन शोषण किया.
पीड़िता ने आगे बताया कि यह सिलसिला पिछले सात महीनों से चल रही है. इसके बाद उसने अपने पिता के जेल से रिहा होने के बाद शुक्रवार को छपरा के परसागढ़ के एकमा पुलिस स्टेशन जाकर इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. आनन-फानन में महिला पुलिस को अपना बयान दर्ज करवाया. बहरहाल, इसके बाद उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच कराई है.
गौरतलब है कि पुलिस ने फिलहाल कुछ आरोपियों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है. अभी अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्कूल प्रशासन को लेकर काफी गुस्सा है. वहीं लोग स्कूल बंद करने की मांग भी करने में अड़े हुए है. पुलिस का कहना है कि दोष साबित होने के बाद आरोपियों पर सख्त तरीके से कार्यवाही भी की जाएगी.
|
बिहारः क्यों आज के युग में मासूम बच्ची, लड़की और एक औरत को ही हमेशा लोग अपनी हैवानियत का शिकार बनाते है. जहां एक तरफ सभी लोग टीचर्स को अपना आदर्श मानते है और स्कूल को विद्या का मंदिर कहते है, वहीं एक ऐसी घटना हुई है जिसने स्थानीय लोगों समेत सभी को हैरान कर दिया है. जी हां, एक बार फिर से बिहार शहर के छपरा जिले में प्रिंसिपल, टीचर्स और छात्राओं ने एक किशोरी के साथ कथित तौर पर मासूम के साथ सात महीने तक दुष्कर्म जैसी वारदात को अंजाम दिया है. बता दें कि बिहार के छपरा जिले में एक छात्रा के साथ गैंगरेप व ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज किया गया है. इस पर विद्यालय के प्रिंसिपल समेत दो और शिक्षक और पंद्रह छात्र पर गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा है. किशोरी की शिकायत के बाद शुक्रवार को प्रिंसिपल, एक टीचर और दो छात्रों को हिरासत में ले लिया गया. उपरोक्त जानकारी के बारे में सारण एसपी ने दी है. किशोरी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक तथा छात्रों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग की गई है. अपनी शिकायत में नाबालिग ने अट्ठारह आरोपियों के नाम भी दर्ज कराए है. छात्रा के साथ पहली बार रेप दिसंबर दो हज़ार सत्रह में किया गया था. क्लास के छात्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया. उसके बाद उसी के ब्लैकमेलिंग के दौरान चार-पांच युवकों के अलावा दो शिक्षकों और प्रिंसिपल ने भी छात्रा का यौन शोषण किया. पीड़िता ने आगे बताया कि यह सिलसिला पिछले सात महीनों से चल रही है. इसके बाद उसने अपने पिता के जेल से रिहा होने के बाद शुक्रवार को छपरा के परसागढ़ के एकमा पुलिस स्टेशन जाकर इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. आनन-फानन में महिला पुलिस को अपना बयान दर्ज करवाया. बहरहाल, इसके बाद उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच कराई है. गौरतलब है कि पुलिस ने फिलहाल कुछ आरोपियों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है. अभी अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्कूल प्रशासन को लेकर काफी गुस्सा है. वहीं लोग स्कूल बंद करने की मांग भी करने में अड़े हुए है. पुलिस का कहना है कि दोष साबित होने के बाद आरोपियों पर सख्त तरीके से कार्यवाही भी की जाएगी.
|
चकराता वन प्रभाग के देवघार रेंज में गुलदार के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गुलदार ने कूणा गांव के खेड़ा डौराधार में बीते बृहस्पितवार की देर रात बछड़े पर हमला कर दिया। बछड़े की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुल गई। उन्होंने किसी तरह बछड़े को गुलदार के जबड़े से छुड़ाया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
चकराता वन प्रभाग के देवघार रेंज में गुलदार के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गुलदार ने कूणा गांव के खेड़ा डौराधार में बीते बृहस्पितवार की देर रात बछड़े पर हमला कर दिया। बछड़े की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुल गई। उन्होंने किसी तरह बछड़े को गुलदार के जबड़े से छुड़ाया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
बहिनश्रीके वचनामृते
दृष्टि एवं ज्ञान यथार्थ कर । तू अपनेको भूल गया है । यदि बतलानेवाले (गुरु) मिलें तो तुझे उनकी दरकार नहीं है । जीवको रुचि हो तो गुरुवचनोंका विचार करे, स्वीकार करे और चैतन्यको पहिचाने ॥९८ ॥
यह तो पंखीका मेला जैसा है । इकट्ठे हुए वे सत्र अलग हो जायेंगे । आत्मा एक शाश्वत है, अन्य सब अध्रुव है; बिखर जायगा। मनुष्य जीवनमें आत्मकल्याण कर लेना योग्य है ॥ ९९ ॥
'मैं अनादि अनंत मुक्त हूँ' - इस प्रकार शुद्ध - आत्मद्रव्य पर दृष्टि देनेसे शुद्ध पर्याय प्रगट होती है। 'द्रव्य तो मुक्त है, मुक्तिकी पर्यायको आना हो तो आये' इस प्रकार इव्यके प्रति आलम्बन और पर्यायके प्रति उपेक्षावृत्ति होने पर स्वाभाविक शुद्ध पर्याय प्रगट होती ही है ॥ १०० ॥
सम्यग्दृष्टिको ऐसा निःशंक गुण होता है कि चौदह ब्रह्माण्ड उलट जायँ तथापि अनुभवमें शंका नहीं होती ॥ १०१ ॥
सर्वोत्कृष्ट है, आश्चर्यकारी है। जगतमें उससे ऊँची वस्तु नहीं है । उसे कोई ले जा नहीं । सकता । जो छूट जाती है वह तो तुच्छ वस्तु है; उसे छोड़ते हुए तुझे डर क्यों लगता है ?१०२ ॥
यदि वर्तमानमें ही चैतन्यमें सम्पूर्णरूपसे स्थिर हुआ जा सकता हो तो दूसरा कुछ नहीं चाहिये ऐसी भावना सम्यग्दृष्टिके होती है ॥ १०३ ॥
'मैं शुद्ध रचना शुद्ध ही होती सृष्टि ॥ १०४ ॥
स्वीकार करनेसे पर्यायकी है । जैसी दृष्टि वैसी है
|
बहिनश्रीके वचनामृते दृष्टि एवं ज्ञान यथार्थ कर । तू अपनेको भूल गया है । यदि बतलानेवाले मिलें तो तुझे उनकी दरकार नहीं है । जीवको रुचि हो तो गुरुवचनोंका विचार करे, स्वीकार करे और चैतन्यको पहिचाने ॥अट्ठानवे ॥ यह तो पंखीका मेला जैसा है । इकट्ठे हुए वे सत्र अलग हो जायेंगे । आत्मा एक शाश्वत है, अन्य सब अध्रुव है; बिखर जायगा। मनुष्य जीवनमें आत्मकल्याण कर लेना योग्य है ॥ निन्यानवे ॥ 'मैं अनादि अनंत मुक्त हूँ' - इस प्रकार शुद्ध - आत्मद्रव्य पर दृष्टि देनेसे शुद्ध पर्याय प्रगट होती है। 'द्रव्य तो मुक्त है, मुक्तिकी पर्यायको आना हो तो आये' इस प्रकार इव्यके प्रति आलम्बन और पर्यायके प्रति उपेक्षावृत्ति होने पर स्वाभाविक शुद्ध पर्याय प्रगट होती ही है ॥ एक सौ ॥ सम्यग्दृष्टिको ऐसा निःशंक गुण होता है कि चौदह ब्रह्माण्ड उलट जायँ तथापि अनुभवमें शंका नहीं होती ॥ एक सौ एक ॥ सर्वोत्कृष्ट है, आश्चर्यकारी है। जगतमें उससे ऊँची वस्तु नहीं है । उसे कोई ले जा नहीं । सकता । जो छूट जाती है वह तो तुच्छ वस्तु है; उसे छोड़ते हुए तुझे डर क्यों लगता है ?एक सौ दो ॥ यदि वर्तमानमें ही चैतन्यमें सम्पूर्णरूपसे स्थिर हुआ जा सकता हो तो दूसरा कुछ नहीं चाहिये ऐसी भावना सम्यग्दृष्टिके होती है ॥ एक सौ तीन ॥ 'मैं शुद्ध रचना शुद्ध ही होती सृष्टि ॥ एक सौ चार ॥ स्वीकार करनेसे पर्यायकी है । जैसी दृष्टि वैसी है
|
World Cup 2023 Schedule: भारत में अक्टूबर-नवंबर में वनडे विश्वकप 2023 (World Cup 2023) खेला जाना है. आईसीसी ने विश्वकप (World Cup 2023 Schedule) का शेड्यूल जारी कर दिया है. जारी शेड्यूल के अनुसार, विश्वकप का पहला मुकाबला 5 अक्टूबर को खेला जाएगा. वहीं भारत का पहला मैच 8 अक्टूबर को खेला जाएगा. डेट सामने आने के बाद फैंस मैच की टिकट की बुकिंग करने में भी जुट जाएंगे. हालांकि, फैंस को इस अभी टिकट के रेट पता नहीं हैं. तो आइए जानते हैं टिकट के लिए आपको कितने पैसे चुकाने पड़ सकते हैं.
टिकटों की कीमत की बात की जाए तो 500 रुपये से 10,000 रुपये प्रति टिकट के बीच हो सकती है. हालांकि, टिकटो की कीमतें मैच पर और कहां खेला जा रहा है इस पर भी निर्भर करेगा. वहीं 15 अक्टूबर को पाकिस्तान और भारत के मैच की टिकट को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मचने वाली है. ऐसे में हाईवोल्टेज मुकाबला होने की वजह उस मुकाबले में टिकट के रेट हाई रह सकते हैं.
विश्वकप की टिकट का हर क्रिकेट को प्रेमी को बेसब्री से इंतजार है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि, टिकट कहां से बुक करवा सकते हैं. ऐसे में मैचों की टिकट को फैन्स BookMyShow या PayTM/Insider पर जा कर बुक कर सकते हैं.
|
World Cup दो हज़ार तेईस Schedule: भारत में अक्टूबर-नवंबर में वनडे विश्वकप दो हज़ार तेईस खेला जाना है. आईसीसी ने विश्वकप का शेड्यूल जारी कर दिया है. जारी शेड्यूल के अनुसार, विश्वकप का पहला मुकाबला पाँच अक्टूबर को खेला जाएगा. वहीं भारत का पहला मैच आठ अक्टूबर को खेला जाएगा. डेट सामने आने के बाद फैंस मैच की टिकट की बुकिंग करने में भी जुट जाएंगे. हालांकि, फैंस को इस अभी टिकट के रेट पता नहीं हैं. तो आइए जानते हैं टिकट के लिए आपको कितने पैसे चुकाने पड़ सकते हैं. टिकटों की कीमत की बात की जाए तो पाँच सौ रुपयापये से दस,शून्य रुपयापये प्रति टिकट के बीच हो सकती है. हालांकि, टिकटो की कीमतें मैच पर और कहां खेला जा रहा है इस पर भी निर्भर करेगा. वहीं पंद्रह अक्टूबर को पाकिस्तान और भारत के मैच की टिकट को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मचने वाली है. ऐसे में हाईवोल्टेज मुकाबला होने की वजह उस मुकाबले में टिकट के रेट हाई रह सकते हैं. विश्वकप की टिकट का हर क्रिकेट को प्रेमी को बेसब्री से इंतजार है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि, टिकट कहां से बुक करवा सकते हैं. ऐसे में मैचों की टिकट को फैन्स BookMyShow या PayTM/Insider पर जा कर बुक कर सकते हैं.
|
जोधपुर, 9 अगस्त (एजेंसी)
राजस्थान के जोधपुर जिले में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी परिवार के 11 सदस्य रविवार सुबह एक खेत में मृत पाए गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने कहा कि परिवार का एक सदस्य देचु इलाके के लोडता गांव में उस झोपड़ी के बाहर जिंदा मिला, जहां यह लोग रहते थे। यह इलाका जोधपुर शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर है।
बरहाट ने कहा, 'लेकिन ऐसा लग रहा है कि परिवार के सभी सदस्यों ने रात में कोई रसायन खाकर आत्महत्या की है।' पाकिस्तान के सिंध प्रांत के रहने वाले ये लोग दीर्घकालिक वीजा पर 2015 में यहां आए थे और बीते 6 साल से यहां रह रहे थे। प्रारंभिक सूचना से पता चला है कि किसी मुद्दे को लेकर परिवार में विवाद था।
|
जोधपुर, नौ अगस्त राजस्थान के जोधपुर जिले में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी परिवार के ग्यारह सदस्य रविवार सुबह एक खेत में मृत पाए गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने कहा कि परिवार का एक सदस्य देचु इलाके के लोडता गांव में उस झोपड़ी के बाहर जिंदा मिला, जहां यह लोग रहते थे। यह इलाका जोधपुर शहर से करीब एक सौ किलोग्राममीटर दूर है। बरहाट ने कहा, 'लेकिन ऐसा लग रहा है कि परिवार के सभी सदस्यों ने रात में कोई रसायन खाकर आत्महत्या की है।' पाकिस्तान के सिंध प्रांत के रहने वाले ये लोग दीर्घकालिक वीजा पर दो हज़ार पंद्रह में यहां आए थे और बीते छः साल से यहां रह रहे थे। प्रारंभिक सूचना से पता चला है कि किसी मुद्दे को लेकर परिवार में विवाद था।
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
कनिष्क प्रथम (Κανηϸκι, Kaneshki; मध्य चीनी भाषाः 迦腻色伽 (Ka-ni-sak-ka > नवीन चीनी भाषाः Jianisejia)), या कनिष्क महान, द्वितीय शताब्दी (१२७ - १५० ई.) में कुषाण राजवंश का भारत का एक महान् सम्राट था। वह अपने सैन्य, राजनैतिक एवं आध्यात्मिक उपलब्धियों तथा कौशल हेतु प्रख्यात था। इस सम्राट को भारतीय इतिहास एवं मध्य एशिया के इतिहास में अपनी विजय, धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्य तथा कला का प्रेमी होने के नाते विशेष स्थान मिलता है। कुषाण वंश के संस्थापक कुजुल कडफिसेस का ही एक वंशज, कनिष्क बख्त्रिया से इस साम्राज्य पर सत्तारूढ हुआ, जिसकी गणना एशिया के महानतम शासकों में की जाती है, क्योंकि इसका साम्राज्य तरीम बेसिन में तुर्फन से लेकर गांगेय मैदान में पाटलिपुत्र तक रहा था जिसमें मध्य एशिया के आधुनिक उजबेकिस्तान तजाकिस्तान, चीन के आधुनिक सिक्यांग एवं कांसू प्रान्त से लेकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और समस्त उत्तर भारत में बिहार एवं उड़ीसा तक आते हैं। पर कुषाण।अभिगमन तिथिः १५ फ़रवरी, २०१७ इस साम्राज्य की मुख्य राजधानी पेशावर (वर्तमान में पाकिस्तान, तत्कालीन भारत के) गाँधार प्रान्त के नगर पुरुषपुर में थी। इसके अलावा दो अन्य बड़ी राजधानियां प्राचीन कपिशा में भी थीं। उसकी विजय यात्राओं तथा बौद्ध धर्म के प्रति आस्था ने रेशम मार्ग के विकास तथा उस रास्ते गांधार से काराकोरम पर्वतमाला के पार होते हुए चीन तक महायान बौद्ध धर्म के विस्तार में विशेष भूमिका निभायी। पहले के इतिहासवेत्ताओं के अनुसार कनिष्क ने राजगद्दी ७८ ई० में प्राप्त की, एवं तभी इस वर्ष को शक संवत् के आरम्भ की तिथि माना जाता है। हालांकि बाद के इतिहासकारों के मतानुसार अब इस तिथि को कनिष्क के सत्तारूढ़ होने की तिथि नहीं माना जाता है। इनके अनुमानानुसार कनिष्क ने सत्ता १२७ ई० में प्राप्त की थी। . बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का ७वाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल 18 देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। .
कनिष्क और बौद्ध धर्म आम में 4 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): बिहार, बौद्ध धर्म, महायान, गौतम बुद्ध।
बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। .
बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का ७वाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल 18 देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। .
गौतम बुद्ध (जन्म 563 ईसा पूर्व - निर्वाण 483 ईसा पूर्व) एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। उनका जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। उनकी माँ का नाम महामाया था जो कोलीय वंश से थी जिनका इनके जन्म के सात दिन बाद निधन हुआ, उनका पालन महारानी की छोटी सगी बहन महाप्रजापती गौतमी ने किया। सिद्धार्थ विवाहोपरांत एक मात्र प्रथम नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण, दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश एवं सत्य दिव्य ज्ञान खोज में रात में राजपाठ छोड़कर जंगल चले गए। वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए। .
कनिष्क 48 संबंध है और बौद्ध धर्म 100 है। वे आम 4 में है, समानता सूचकांक 2.70% है = 4 / (48 + 100)।
यह लेख कनिष्क और बौद्ध धर्म के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। कनिष्क प्रथम ), या कनिष्क महान, द्वितीय शताब्दी में कुषाण राजवंश का भारत का एक महान् सम्राट था। वह अपने सैन्य, राजनैतिक एवं आध्यात्मिक उपलब्धियों तथा कौशल हेतु प्रख्यात था। इस सम्राट को भारतीय इतिहास एवं मध्य एशिया के इतिहास में अपनी विजय, धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्य तथा कला का प्रेमी होने के नाते विशेष स्थान मिलता है। कुषाण वंश के संस्थापक कुजुल कडफिसेस का ही एक वंशज, कनिष्क बख्त्रिया से इस साम्राज्य पर सत्तारूढ हुआ, जिसकी गणना एशिया के महानतम शासकों में की जाती है, क्योंकि इसका साम्राज्य तरीम बेसिन में तुर्फन से लेकर गांगेय मैदान में पाटलिपुत्र तक रहा था जिसमें मध्य एशिया के आधुनिक उजबेकिस्तान तजाकिस्तान, चीन के आधुनिक सिक्यांग एवं कांसू प्रान्त से लेकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और समस्त उत्तर भारत में बिहार एवं उड़ीसा तक आते हैं। पर कुषाण।अभिगमन तिथिः पंद्रह फ़रवरी, दो हज़ार सत्रह इस साम्राज्य की मुख्य राजधानी पेशावर गाँधार प्रान्त के नगर पुरुषपुर में थी। इसके अलावा दो अन्य बड़ी राजधानियां प्राचीन कपिशा में भी थीं। उसकी विजय यात्राओं तथा बौद्ध धर्म के प्रति आस्था ने रेशम मार्ग के विकास तथा उस रास्ते गांधार से काराकोरम पर्वतमाला के पार होते हुए चीन तक महायान बौद्ध धर्म के विस्तार में विशेष भूमिका निभायी। पहले के इतिहासवेत्ताओं के अनुसार कनिष्क ने राजगद्दी अठहत्तर ईशून्य में प्राप्त की, एवं तभी इस वर्ष को शक संवत् के आरम्भ की तिथि माना जाता है। हालांकि बाद के इतिहासकारों के मतानुसार अब इस तिथि को कनिष्क के सत्तारूढ़ होने की तिथि नहीं माना जाता है। इनके अनुमानानुसार कनिष्क ने सत्ता एक सौ सत्ताईस ईशून्य में प्राप्त की थी। . बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व छः वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म पाँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण चार सौ तिरासी ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग चौवन करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का सातवाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल अट्ठारह देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। . कनिष्क और बौद्ध धर्म आम में चार बातें हैं : बिहार, बौद्ध धर्म, महायान, गौतम बुद्ध। बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। . बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व छः वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म पाँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण चार सौ तिरासी ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग चौवन करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का सातवाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल अट्ठारह देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। . गौतम बुद्ध एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। उनका जन्म लुंबिनी में पाँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। उनकी माँ का नाम महामाया था जो कोलीय वंश से थी जिनका इनके जन्म के सात दिन बाद निधन हुआ, उनका पालन महारानी की छोटी सगी बहन महाप्रजापती गौतमी ने किया। सिद्धार्थ विवाहोपरांत एक मात्र प्रथम नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण, दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश एवं सत्य दिव्य ज्ञान खोज में रात में राजपाठ छोड़कर जंगल चले गए। वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोध गया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए। . कनिष्क अड़तालीस संबंध है और बौद्ध धर्म एक सौ है। वे आम चार में है, समानता सूचकांक दो.सत्तर% है = चार / । यह लेख कनिष्क और बौद्ध धर्म के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने मैच के अंत के दौरान एमएस धोनी की बैटिंग की तारीफ करते हुए कहा कि ये विकेटकीपर बल्लेबाज उस दौरान अक्सर ऐसे खेला जैसे परिणाम उसके लिए मायने नहीं रखता। द्रविड़ ने ये भी कहा कि प्रशेर-कूकर स्थिति में परिणाम की चिंता नहीं करने से खिलाड़ी को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।
द्रविड़ ने ईएसपीएनक्रिकइंफों के लिए संजय मांजरेकर द्वारा होस्ट वीडियोकास्ट में कहा, 'आप धोनी को मैच के अंत के दौरान खेलते देखिए, जब वह अपने शबाब पर थे, आपको हमेशा ऐसा लगेगा कि वह अपने लिए कुछ बहुत खास कर रहे हैं लेकिन वह ऐसे खेल रहे हैं जैसे परिणाम उनके लिए नहीं मायने नहीं रखता। '
द्रविड़ ने कहा, 'धोनी से पूछना होगा कि दबाव में न घबराने की आदत नैसर्गिक है क्या? '
द्रविड़ ने कहा, 'मेरे ख्याल से आपके अंदर वैसा होने के लिए आपको ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। ये एक ऐसा कौशल है जो मेरे पास कभी नहीं था। किसी भी फैसले का परिणाम मेरे लिए मायने रखता था। एमएस धोनी से ये पूछना रोचक होगा कि ये उनमें नैसर्गिक तौर पर आया या उन्होंने इस पर अपने करियर के दौरान काम किया। '
द्रविड़ ने कहा कि दबाव के क्षणों में धोनी जैसी कूल रहने का कौशल उनमें नहीं था (File Photo)
धोनी ने अपना वनडे डेब्यू बांग्लादेश के खिलाफ 2004 में किया था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी असली पहचान 2005 में छह वनडे मैचों की सीरीज के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापत्तनम में खेले गए दूसरे वनडे के दौरान 148 रन की जोरदार पारी खेलते हुए बनाई थी।
वह आईसीसी के सभी बड़े टूर्नामेंट (50 ओवर वर्ल्ड कप, टी20 वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी) जीतने वाले दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं, उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट रैंकिंग में नंबर पर पहुंचा।
उन्होंने सबसे पहले भारत की कम अनुभवी टीम को अपनी कप्तानी में 2007 का टी20 वर्ल्ड कप जिताया था। इसके बाद उन्होंने वनडे की कमान संभाली और फिर अनिल कुंबले के रिटायरमेंट के बाद टेस्ट टीम के कप्तान बने। दिसंबर 2014 में धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था, उसके बाद जनवरी 2017 में उन्होंने सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ी थी, जो विराट कोहली को मिली थी।
अपने करियर के दौरान धोनी लक्ष्य का पीछा करते हुए मैचों को जिताने के लिए चर्चित रहे हैं और इसीलिए उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर में से गिना जाता है।
धोनी भारत के लिए आखिरी बार 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में खेले थे। उन्हें आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की कप्तानी करते हुए वापसी करनी थी, लेकिन ये टी20 लीग कोरोना वायरस की वजह से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
|
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने मैच के अंत के दौरान एमएस धोनी की बैटिंग की तारीफ करते हुए कहा कि ये विकेटकीपर बल्लेबाज उस दौरान अक्सर ऐसे खेला जैसे परिणाम उसके लिए मायने नहीं रखता। द्रविड़ ने ये भी कहा कि प्रशेर-कूकर स्थिति में परिणाम की चिंता नहीं करने से खिलाड़ी को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद मिलती है। द्रविड़ ने ईएसपीएनक्रिकइंफों के लिए संजय मांजरेकर द्वारा होस्ट वीडियोकास्ट में कहा, 'आप धोनी को मैच के अंत के दौरान खेलते देखिए, जब वह अपने शबाब पर थे, आपको हमेशा ऐसा लगेगा कि वह अपने लिए कुछ बहुत खास कर रहे हैं लेकिन वह ऐसे खेल रहे हैं जैसे परिणाम उनके लिए नहीं मायने नहीं रखता। ' द्रविड़ ने कहा, 'धोनी से पूछना होगा कि दबाव में न घबराने की आदत नैसर्गिक है क्या? ' द्रविड़ ने कहा, 'मेरे ख्याल से आपके अंदर वैसा होने के लिए आपको ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। ये एक ऐसा कौशल है जो मेरे पास कभी नहीं था। किसी भी फैसले का परिणाम मेरे लिए मायने रखता था। एमएस धोनी से ये पूछना रोचक होगा कि ये उनमें नैसर्गिक तौर पर आया या उन्होंने इस पर अपने करियर के दौरान काम किया। ' द्रविड़ ने कहा कि दबाव के क्षणों में धोनी जैसी कूल रहने का कौशल उनमें नहीं था धोनी ने अपना वनडे डेब्यू बांग्लादेश के खिलाफ दो हज़ार चार में किया था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी असली पहचान दो हज़ार पाँच में छह वनडे मैचों की सीरीज के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापत्तनम में खेले गए दूसरे वनडे के दौरान एक सौ अड़तालीस रन की जोरदार पारी खेलते हुए बनाई थी। वह आईसीसी के सभी बड़े टूर्नामेंट जीतने वाले दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं, उनकी कप्तानी में भारत टेस्ट रैंकिंग में नंबर पर पहुंचा। उन्होंने सबसे पहले भारत की कम अनुभवी टीम को अपनी कप्तानी में दो हज़ार सात का टीबीस वर्ल्ड कप जिताया था। इसके बाद उन्होंने वनडे की कमान संभाली और फिर अनिल कुंबले के रिटायरमेंट के बाद टेस्ट टीम के कप्तान बने। दिसंबर दो हज़ार चौदह में धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था, उसके बाद जनवरी दो हज़ार सत्रह में उन्होंने सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ी थी, जो विराट कोहली को मिली थी। अपने करियर के दौरान धोनी लक्ष्य का पीछा करते हुए मैचों को जिताने के लिए चर्चित रहे हैं और इसीलिए उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर में से गिना जाता है। धोनी भारत के लिए आखिरी बार दो हज़ार उन्नीस वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में खेले थे। उन्हें आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की कप्तानी करते हुए वापसी करनी थी, लेकिन ये टीबीस लीटरग कोरोना वायरस की वजह से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
|
Res. and Notic
सभापतिबी, तस्करी एक तरफ के पहाड़ की तरह से है जिसका एक हिस्सा जितना दिखाई देता है. उससे अधिक हिस्सा दिखाई नहीं देवा । यह समझना गलत होगा कि केवल 500 या 600 व्यक्ति इस देश में तस्करी का सारा जाल बुनने में समर्थ हैं। सरकार ने कुछ तस्करों को गिरफतार करने के लिये सुरक्षा अधिनियम में संशोधन किया है। यह संशोधन एक अध्या देश द्वारा किया गया है। जब संसद को बैठक नहीं चल रही थी तब सरकार ने अध्यादेश जारी करने के अधिकार का उपयोग किया और उस के द्वारा सुरक्षा अधिनियम में परि वर्तन किया। लेकिन, सभापति महोदय वह परिवर्तन ही काफी नहीं हुआ। जो तस्कर सुरक्षा अधिनियम के मतंगत गिरफतार किये गये उनमें से कुछ अदालतों द्वारा छोड़े जाने लगे। सरकार ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रचालते तस्करों को क्यों छोड़ रही हैं। उस ने सारा दोत्र मदालतों के मध्ये मड़ने को कोशिश की और संविधान के अनुच्छेद 359 के अन्तंगत एक प्रादेश जारी कर के जो तस्कर नजरबन्द थे, उनके लिये प्रदालती का दरवाजा -खळखटाने का रास्ता बन्द कर दिया।
सभापति महोदय 3 दिसम्बर, 1971 को देश में संकट कालीन स्थित को घोषणा हुई थी। पाकिस्तान ने भारत पर माक्रमण किया था। आज 2 दिसम्बर, 1974 है। तीन वर्ष हो गये हमने पाकिस्तान की जीती हुई जमीन वापस दे दी, कंदी लौटा दिये, शिमूला और दिल्ली में बैठकर सामान्य स्थिति लाने के लिये समझौते किये। अब दोनों देशों के बीच व्यापार भी आरम्भ हो गया है। घाज संकटकालिक स्थिति बनाये रखने का क्या मोचित्य है? लेकिन संकटकालिक स्थिति बनाये रखी जा रही है। उस स्थिति के संगत पहले तो तस्करों को एम० भाई० एस० ए० में बन्द किया जा रहा है मौर उसमें पो जब अदालतें न्याय की कसौटी पर कस कर कुछ
मामलों में उनकी व्यक्तिगत स्वाधीनता वापस लौटा देती है तो सरकार ने राष्ट्रपति का प्रादेश जारी कर के तस्करों को मूलभूत अधिकारी से वंचित कर दिया। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम तस्करों के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही करने के पक्ष में हैं। तस्करी एक राष्ट्र विरोधी कृत्य है, जो भी तस्करी करता है वह देश के प्रति गद्दारी का दोषी है। लेकिन गद्दारों के खिलाफ़ भी कानून के अन्तंगत कार्यवाही होगी। अभी देश में कानून का राज्य है जंगल का राज्य नहीं है। मेरा आरोप है कि यह सरकार तस्करों के विरूद्ध सामान्य कानून के अन्तंगत कार्यावाही नहीं करना चाहती। सारा देश मांग कर रहा है कि तस्करों को खुली अदालत में पेश किया जाय उन पर मुकदमा चलाया जाय उनने विरूद्ध जो भी प्रमाण सरकार के पास हैं उन्हें पेश किया जाय। वे तस्कर किस के संरक्षण में तस्करी करते थे उन राजनैतिक नेताओं को कस्टम और पुलिस के अफ़सरों को भी बेनकाब किया जाय और तस्कर कड़ी से कड़ी सजा के भागीदार बनायें जायें। लेकिन सरकार उन्हें खुले प्रदालत में पेश करने के लिये तैयार नहीं है, उन पर मुकदमा चलाने के लिये प्रस्तुत नहीं है। उन्हें आराम से नजरबन्द करने के पक्ष में है। सभापति महोदय आप तो वकील हैं, प्रभा अभी यू० एन० मो० से वापस पाये हैं। ताजा दिल और दिमाग ले कर आये हैं जरा इस मामले में भी अपना ताजा दिमाग काम में लाइये । नजरबन्दी की जाती है किसी व्यक्ति को भविष्य
में कोई काम करने से रोकने के लिये नज़रबन्दी इस के लिये काम में नहीं लायी जाती कि जो पुराने पाप हैं उस के लिये सजा देने के लिये। क्या केवल जो तस्कर पकड़े गये हैं उन्हें भविष्य में तस्करी करने से रोकना इतना ही उद्देश्य है ? क्या 600 लोगों को पकड़ने से तस्करी बन्द हो जायेगी ? उन्होंने जो पुरानी तस्करी की थी जिस के लिये वह दोषी हैं क्या उन्हें उस के लिये दंड नहीं मिलता
321 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1898 (SAKA) re. MISA
चाहिये ? उन्हें नजरबन्द करने से उनके पुराने अपराध के लिये उन्हें दोष कैसे दिया जायगा ? लेकिन सरकार उन्हें सजा देना नहीं चाहती।
सभापति महोदय तस्करी के विरूद्ध एम० आई० १० एस० ए० का प्रयोग सरकार की कानूनी कार्यवाही का देश के सामान्य कानून के अन्तंगत होने वालो कार्यवाही का एक मखौल है। तस्करी एक अपराध है। सामान्य कानून के अन्तर्गत उन से निपटने की शक्ति सरकार में होनी चाहिये। अगर सामान्य कानून अपर्याप्त हैं तो उन कानूनों को मजबूत किया जा सकता है। इसके लिये सरकार सदन में आ सकती है। यह सदन सरकार को तस्करी को समाप्त करने के लिये आवश्यक अधिकार देने में संकोच न करेगा। लेकिन राष्ट्रपति का आदेश निकाला गया है 359 के अर्न्तगत । 359 तब तक चलेगी जब तक देश में आपत्तिकालीन स्थिति रहेगी। आखिर आपत्तिकालीन स्थिति तक रहेगो ? क्या तस्करी भी अब विदेशी प्रकमण है जिस का सामना विना मरजेंसो को घोषणा के नहीं हो सकता ? अभी तो इमरजेंसी ल रही है. मुझे शक हे या तो सरकार अनि चतकाल के लिये इनरजेंसा बनाये रखना चाहती है या फिर कुछ दिन के लिये तस्करों को जेल में रख कर बाद में छोड़ देना चाहती है। अन्यथा इमरजेंसी के अन्तर्गत तस्करों को मदालत में जाने से रोकने का आदेश निकालने का कारण क्या है ? जब इमरजेंसी खत्म होगी आदेश रद्द हो जायगा तस्कर अदालत में जा सकेंगें तब सरकार क्या करेगी ?
सभापति महोदय ला कमोशन ने इस मामले में कई साल पहले विचार किया था और उसने 47 वीं रिपोर्ट में यह कहा थाः
"We have carefully considered this question and have given due consideration to the general tenor of the majority decision in Dhition's oase and the obiter observations made by Chief Justice Sikrt who spoke for the majority in the said else. Our considered opinion is 2760LS-11.
that, on the whole, it would be ad visable for the Government to secure constitutional amendment enlarging the contents of Item 9 in List I of the Seventh Schedule. We accordingly suggest that Item 9 of List I may be amended so as to read as follows:--
'Preventive Detention for reasons connected with Defence, Foreign Affairs, the security of India, the effective realisation of duties of Customs and Excise, or the conservation of Foreign Exchange; persons subjected to such detention."
यह विधि आयोग का सुझाब था । सरकार इस सुझाव पर सोती रही, तस्करी चलती रही, देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करती रही । 1,000 करोड़ रु० से लेकर 1,200 करोड़ रु० की तस्करी प्रतिवर्ष देश में होती थी। पहले चोरी छिपे सोना लाया जाता था । स्वर्ण नियंत्रण कानून ला कर सर ने छोटे छोटे स्वर्णदारों को रोजी रोटी से वंचित करने का काम तो किया मगर जो सोने की तस्करी में लिप्त तस्कर थे उनके विरूद्ध उसने बठोर कार्यवाही नहीं की। यह ठीक है कि सोने की तस्करी कम हो गई है क्योंकि अन्तराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव बढ़ गया है। लेकिन सोने के अतिरिक्त अब कपड़ा आ रहा है, हीरे जवाहारात श्रा रहे हैं, घड़ियां भा रही हैं, ट्रांजिस्टर्स भा रहे हैं। सरकारी प्रांकड़ों के अनुसार जो माल सरकार बरामद करती है, तस्करों के हाथ से पकड़ा जाता है उसकी मात्रा बढ़ रही है । कीमत बढ़ रही है। इसका अर्थ यह है किः तस्करी पिछले सालों में निरंतर बढ़ रही है। 1971 में 8.50 करोड़ का सामान पकड़ा गया, 1972 में 11.50 करोड़ का, 1973 में 14.50 करोड़ का मौर 1974 के प्रथम भाठ महीनों में 17.00 करोड़ रु० का सामान पकड़ा गया । जो सामान पकड़ा गया है उससे बह ज्यादा सामान है जो पकड़
गया ।
Rea. and Motion
रुभापति जी, यह जो 17 करोड़ की बात कही गयी है इसमें 11.50 करोड़ रु० का कपड़ा भाया है, एक करोड़ रू० की घड़ियां हैं भीर कुल ढ़ाई लाख रू०६. सोना। यह तस्करी का या पैटर्न है, नया ढंग है।
रुभापति महोदय, तस्वर अपना रिजर्व वः चलाते हैं ।
श्री मूलचन्ब डागा (पाली) : यह बात आप को कैसे मालूम है ?
श्री घटल बिहारी वाजपेयी : डागा जी, कुछ मामलों में हम अन्तर्यामी हैं। ये बातें छिपी हुई नहीं हैं। एन्टी-स्मगलिंग आपरेशन के लिए नियुक्त आफिसर श्री बाघ, ने समाचारपत्नों को दी गई एकः भेंट में यह बात स्वीकार की है कि तस्कर अपना रिजर्व बैंकः चलाते हैं । बम्बई के एक समाचार पत्र में उस रिज़र्व बैंकः वा पता भी छपा है, लेकिन पुलिस ने अभी तवः उस पर छापा नहीं मारा है ।
तस्करों का मामला इस सदन में इस साल बड़े विस्फोटक ढंग से तब उठा जब वित्त मंत्रालय के पुराने राज्य मंत्री श्री गणेश, ने समाचारपत्नों को एक भेट में बताया कि तस्कर एवः समानान्तर सरकार चला रहे हैं, उनकी अपनी टेलीफोन व्यवस्था है, वे कस्टम अधि कारियों के टेलीफोन सुनते हैं, समाज में उन्हें ऊंचा दर्जा मिला है और उनके राजनैतिक सम्बन्ध हैं। बाद में कांग्रेस के डा० वी० के० आर० बी राव ने एक ध्यान दिलाओ सूचना के अन्तर्गत इस विषय में एक वक्तव्य की मांग की थी। श्री गणेश ने यह भी कहा था कि वह तस्करों के खिलाफ़ सत्याग्रह करेंगे। लेकिन जब सदन में यह मामला उठा, तो श्री गणेश का स्वर कुछ मंद हो गया। उन्होंने तीन तस्करों के नाम भी बतायें। मैं श्री गणेश को
बधाई देना चाहता हूं। अफसोस है कि भाज जब इस मामले पर चर्चा हो रही है, तब वह इस रुदन में नहीं हैं इस सदन में ही नहीं है, वह वित्त मंत्रालय में भी नहीं हैं। उनका पत्ता बट गया है। उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए था, मगर उन्हें दंडित किया गया। क्या इस का कारण यह है कि श्री गणेश ने जो कुछ कहा, उसने सरकार को मुसीबत में डाल दिया क्या इस का कारण यह है कि श्री गणेश के रहस्योदघाटन से सरकार जनता के सामने कटघरे में खड़ी हो गई ? उन्हें वित्त मंत्रालय से हटाया क्यों गया ?
गृह मंत्रालय, कामिक और प्रशासनिक सुधार विभाग तथा संसदीय कार्य विभाग में राज्य मंत्री (श्री भोम मेहता) उन्होंने श्रीगणेश किया था ।
श्री भटलबिहारी वाजपेयीः मगर प्राप ने गणेश का चूहा बना दिया। "विनायक प्रकुर्वाणी रचयामास वादरम्" : श्राप ने गंगेश को चूहा बनावार दूसरे मंत्रालय में भेज दिया।
श्री भोम मेहता : वह तो चूहे पर सवारी करता है ।
श्री अटल बिहारी बाजपेयी और वही चूहा उनको दूसरे मंत्रालय में ले गया। वह चूहा उनकी राय से नहीं, बल्कि प्रधान मंत्री की राय से चलता है ।
प्रश्न केवल कुछ तस्करों का नहीं है । प्रश्न व्यवस्था का है, व्यक्तियों का नहीं : हाजी मस्तान कुली था, वह करोड़पति कैसे बना ? यूसफ को रंक से राजा किसने बनाया? मालिश वाला बखिया महाराज बखिया में कैसे बदला ? छोटा सा नोकर, 1950 तक फेरी वाला के रूप में काम करने वाला नारंग जो टूटे-फूटे बर्तन ले कर बदले में जर्मन सिल्वर के वर्तन दे कर अपनी रोटी चलाता था, भाज
Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 ( SAKA)
लक्ष्मी पुत्र कैसे हो गया ? ख़ाली पेट ललित महासेठ ललित में कैसे परिवर्तित हो गया ? यह अनहोनी कैसे हुई ? इस जादू के लिए जिम्मेदार कौन है ?
प्रश्न यह है कि तस्करी कैसे जनमी, इसे किस ने पाला, इसे किस ने बढ़ाया, यह देशव्यापी कै से बनी, इस की मुट्ठी में सारी व्यवस्था किस ने दी, इस के सिर पर समानान्तर सरकार का सेहरा किस ने बांधा, इस के चरणों पर राजनेताओं को लोटने के लिए किस ने विवश किया।
श्री एम० रामगोपाल रेड्डी (निजामाबाद) : माननीय सदस्य को ऐसा नहीं कहना चाहिए ।
श्री अटल बिहारी बाजपेयी : क्या बिना सरकारी सहयोग के, क्या बिना सरकारी अधि कारियों की सांठ-गांठ के तस्करी हो सकती है ? नहीं हो सकती है। कस्टम्ज, एक्साइज़, विदेशी मुद्रा नियंत्रण, प्रायकर अधिकारी बिक्री कर अधिकारी, पुलिस, गुप्तचर विभाग आदि सब इस सड़ांध में सने, और सब से बड़ी बात यह कि तस्करों को राजनेताओं का प्रश्रय प्राप्त हुआ। संक्षेप में तस्करी बिना सरकारी अनुमति के चलने वाला विदेशी व्यापार है । इस व्यापार के अनेक ढंग हैं। एक अंडरइनवायसिंग है, दूसरा प्रोवर इनवायसिंग है और तीसरा ढंग यह है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने घरों को जो धन भेजते हैं, वह धन तस्करों के दलाल विदेशी मुद्रा के रूप में वहीं ले लेते हैं, और यहां रूपये के रूप में वह धन उनके घर वालों को पहुंचा दिया जाता है, रिर्जव बैंक उतनी विदेशी मुद्रा से वंचित होता है और ये तस्कर अपनी राष्ट्रविरोधी कार्यवाहियों के लिए विदेशी मुद्रा प्राप्त कर लेते हैं। जो विदेशी पर्यटक यहां आते हैं, उनसे विदेशी मुद्रा अधिक रुपया देकर ख़रीदी जाती है और उस से यह तस्करी का काम चलता है। भारत से चोरी-छिपे प्राचीन मूर्तिया, शिलालेख, ऐतिहासिक महत्व की वस्तुयें बाहर भेजी जाती हैं, और इस प्रकार
जो विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, वह तस्करी के काम में प्रयुक्त की जाती है। तस्करी करने वाले झूठी और जाली फ़र्मों के नाम पर, जो अस्तित्व में नहीं हैं, जो केवल काग्रज पर हैं, लाइसेंस स्कैंडल की तरह से किसी संसद् सदस्य का साथ ले कर, किसी मंत्री का धनुग्रह प्राप्त कर के, लाइसेंस लेने में सफल हो जातें है। वे विदेशों में जाली फ़र्मों को माल भेजते हैं, वहां भी रुपया कमाते हैं और वहां भी विदेशी मुद्रा प्रजित करते हैं।
सवाल यह है कि इस तस्करी को किस तरह से रोका जाय । अगर तस्करी के ख़िलाफ़ सरकार का अभियान एक वास्तविक अभियान होता, अगर सरकार ईमानदारी से तस्करी के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के लिए कमर कसती, तो हम उस का साथ देते। मगर हम इस अभियान पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं। जैसा कि मैंने कहा है, क्या केवल छः सौ व्यक्ति तस्करी के काम में लगे हुए थे औौर क्या उन्हें नजरबन्द करने मात्र से तस्करी बन्द हो गई।
अभी मैं मोटर से मंगलौर से कन्नानोर तक गया था। रास्ते में कासरगोड़ पड़ता है। वह सारा इलाका समद्री किनारे से लगा हुआ है। कासरगोड़ तस्करी का बड़ा केन्द्र था जब वहां के प्रमुख तस्कर, कलावा अब्दुल कादिर हाजी-हाजी अब्दुल्ला पकड़े गये -
श्री श्रोम मेहता : कौन अब्दुल्ला ?
श्री अटल बिहारी वाजपेयी : श्री श्रोम मेहता चिन्तित न हों। शेख अब्दल्ला नहीं । ये दोनों काश्मीर से घाते हैं और एक दूसरे की चिन्ता करते हैं। जब वह पकड़े गये थे तो कासरगोड़ में थोड़े दिन सुनसान रहा, मगर फिर गतिविधियां शुरू हो गई। वहां उनके प्लाटिनम सिनेमा और सेफायर सिनेमा बने हुए हैं। उनके पेट्रोल के पम्प ह । साहित्यकारों के संघ का जब सम्मेलन हुआ तो वह उस में रिसेप्शन कमेटी के चैयरमैन
1 Shri Atal Bihari Vajpayee] थे। जब उन्हें पकड़ा गया, तो उन्हें प्रेस वालों से मुलाकात करने का मौका भी दिया गया और तब उन्होंने कहा :
"The President of India who has honoured me as one of the exporters last year has served me with an arrest warrant. It is an irony. I am an honest man and my earnings are all through honest means." ग्राज केरल की सरकार उनकी बदौलत टिकी हुई है। केरल के गठबंधन में शामिल....
MR. CHAIRMAN: You may continue tomorrow. Now, we will take up Half-an-Hour discussion.
HALF-AN-HOUR DISCUSSION MEDALS WON BY SPORTSMEN IN GAMES AT TEHERAN
श्री मूल चन्व डागा (पाली) : सभापति महोदय, तेहरान में एशिया के खेलों में जिन खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक और कांस्य पदक प्राप्त किया उन को मैं मुबारकबाद देता हूं घोर उनका स्वागत करता हूं । लेकिन ये जो खेल संगठन हैं इन के जो व्यवस्थापक और प्रबन्धक हैं उनकी व्यवस्था देख कर मेरे मन में उन के प्रति ख़िलाफ ख्यालात पैदा होते हैं.. ( उपवमान) शंका ही नहीं मैं उनके ऊपर लांछन देता हूं कि उन के कारण ही हमारी स्थिति इतनी बिगड़ी है और भाज भारत की खेलों के अन्दर यह हालत हुई है। भारत की तस्वीर आज धुषंली हो चुकी है। एक समय 4 मार्च 1951 को जब हिन्दुस्तान के खेल शरू हुए उस दिन उसकी पोजीशन दूसरी थी और उसे 15 स्वर्ण पदक, 16 रजत पदक और 21 कांस्य पदक मिले थे। लेकिन आज कितने सालों के बाद मैं यह देख रहा हूं कि भाज उस की पोजीशन छोटे-छोटे राज्यों ईरान, साउथ कोरिया, नार्थ कोरिया, इस्रायल इन से भी गई गुजरी हैं। इस को सातवां और पाठवां स्थान केवल मिला है। इस बात
के लिए मुझे दुखः है। आप इस रिजल्ट को देखें कि जापान को जहां 15 गोल्ड मैडल मिले हैं, ईरान को 36 मिले हैं, वाइन्स को 33 मिले हैं, साउथ कोरिया को 16 मिले हैं, नार्थ कोरिया को 15 मिले हैं वहां हिन्दुस्तान को केवल चार मिले हैं। आप मेहरबानी करके अपनी गर्दन नीचे झुकाइए। ये जो प्रबन्धक और व्यवस्थापक हैं इन के कारण हिन्दुस्तान की नाक नीची हो जाती है, गर्दन नीची होती है। हमने चार दिन खबर सुनी, चार दिन में हमारी सात टीमें आउट हो गई। पहले तो हम जिम्नास्टिक और बास्केटबाल में अपनी टीम ले नहीं गए। जिमनास्टिक, बास्केटबाल और तैराकी में अपनी टीम ली नहीं गई वहां । (व्यवधान).
आप खुद गए वहां, आप की क्या हालत बिगड़ी वह भी मैं अभी बता रहा हूं। वहां पर चार दिन में फुटबाल, वालीबाल, वाटर पोलो, टेनिस साइक्लिंग आदि की सात टीमें हमारी गायब हो गई। जब फुटबाल का खेल हुआ तो फुटबाल के खेल में चीन ने हमारी इतनी पिटाई की कि हावी हो गया। बास्केटबाल में कितनी पिटाई हुई होगी और जो वहां आबजरवर के रूपमें गए थे उनका चेहरा कैसा उतरा होगा? उनकी हालत क्या हुई होगी जब पिटाई पर पिटाई हो रही होगी? 43 मिनिट में कितने खेल हार गए ? चीन जो नया आया था खेल के मैदान में उसने भी आप को इस तरह सं हराया। हाकी के अन्दर हम विश्व विजेता थे। प्राज कहां हैं ? नाम ही नहीं है। पाकिस्तान को वह श्रेय मिला है। न हाकी में रहें है और खेलों में रहे। फुटबाल में चले गए, वालीबाल में चले गए।
अब मैं खिलाड़ियों की हालत कितनी खराब होती है. यह बताना चाहता हूं। आप इतनी जो टीम ले कर गए, मुझे दुख है विः झाप ने खिलाड़ियों को इसिला भी ठीक तरह से नहीं दी। मोहन सिंह जी अमेरिका से प्राया
329 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 (SAKA)
उस ने कहा कि मुझे पता नहीं कि मेरा चयन हो गया है और मुझे खेल में जान है, मुझे खेल में भाग लेना है। फिर आप के पन्द्रह खिलाडी थे, 12 बीमार पड़ गए वहां तो उन्होंने कहा कि हम क्या करें । हमारा तो इलाज ही ठीक नहीं होता है। एक साइवि. लिस्ट था, उस का दिल बैठ गया। आप देखें पाकिस्तान में खिलाड़ियों की का बग होती है तो वहां उसको 25 रूपये रोज मिलते हैं, ईरान में सौ रूपये रोज दिये जाते हैं, और हिस्दुस्तान में खिलाड़ियों को 8 रूपये रोज दिए जाते हैं। यह 8 रूपये आज के दिन प्राप हिन्दुस्तान के अन्दर अपने खिलाड़ियों को क्यों दे रहे हैं ? कोई खिलाड़ी घाठ रुपये में अपनी जिन्दगी और अपनी सोशल सिक्योरिटी क्यों आपके हाथ देने को तैयार होगा ? जहां सौ रुपये और 25 रुपये रोज और जगहों में मिलते हैं वहां ग्राप हिन्दुस्तान के खिलाड़ी को 8 रुपये रोज दे कर कोचिग करवाना चाहते हैं ?
अब में भाबजर्वसं की बात बताता हूं । बहुत बड़े-बड़े भाबजबर गये थे। ये कौन हैं जो एजूकेशन डिपार्टमेंट में बैठे हुए हैं। इनकी बाबत यह कहा गया हैः
"In the Education Ministry, a handful of officers in the sports cell who have the capacity to twist the pen and the notings on files to their advantage have begun to feel that they are the almighty people of sports, experts of the highest degree."
ऐसे लोग वहां प्राप ने रख छोडे हैं। जो लोग गये उनमें एक तो कौल साहब है। वहां पर जाने के बाद उनकी क्या हालत हुई ? विजय सिंह मल्होत्रा कहते है कि हम को इसिला नहीं थी कि भाप कब प्रायेंग और कौन-कौन आने वाले हैं। नतीजा क्या हुआा कि इनको बाहर खड़े रहना पड़ा। प्राधे घंटे तक इनको अन्दर माने नहीं दिया गया। जाने वालों में एक तो थे मिस्टर एस० के० कौल, दूसरे भार० एल० मानन्द और मेरा ख्याल है कि
प्राप भी पधारेहोंगे, आपके पास भी वी० भाई ० पी० कार्ड नहीं था क्योंकि विजय सिंह मल्होत्रा का कहना है कि मुझे मालूम ही नहीं कि भाप कब आाने वाले हैं। वहां पापको भी गेट के बाहर खड़ा रहना पड़ा। तो यह तो जो आबजर्वर बन कर गये थे उनका हाल रहा। मानी हुई बात है और कितने सालों से हम इस बात को कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान की हालत कितनी खराब हो रही है और हमारे खिलाड़ियों की क्या हालत होती है ? भाप देखें एक विश्वनाथ सिंह खिलाड़ी गये, वहां पर टार एंड ट्रेक पर खेलने का इंतजा था, वह यहां पर है ही नहीं। वहां पर खोलने के लिए गद्दे होते हैं वह यहां नहीं। यहां तो बेचारे कपड़े पर खेलते हैं । तो भाप अपना कोन सा काम ठोक कर रहे है ? भाप के यहां कोई बोल का सामान नहीं, कोई खेलने का तरीका नहीं, कोई कोचिंग नहीं। इस पर भी जो खिलाड़ी, जीत कर भाये है वे अपनी ताकत और हिम्मत से जीत कर पाये हैं। उन्होंने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, अपनी हिम्मत का प्रदर्शन किया और भाप ने अपने खिलाड़ियों के साथ कैसा बर्ताव किया ? आपको मालूम होना चाहिए कि हिन्दुस्तान के अन्दर कुछ साइकिल वालों ने कुछ साइकिलों की मांग की, दस साल हो गये, इम्पोर्ट नहीं कर सके। डा० कर्णी सिंह ने कहा कि हमें बन्दूक दीजिये। 6 महीने पहले उन्होंने प्रप्लाई किया, उनको बन्दूक नहीं मिली। लेकिन फिर भी वह अच्छा इनाम लेकर प्राये। भाप ने कौन सी चीज अपने खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध की ? एक गद्द की मांग की, वह भाज तक नहीं दे सके। आप सामान नहीं दे सकते, भापकी कोचिंग नहीं हो सकती, खेलने का तरीका नहीं जानते। अब वहां जाने के बाद बेचारे माश्चर्य में पड़ते हैं कि ये क्या खेल रहे हैं ? आपके खिलाड़ियों की हालत वहां कैसी बिगड़ती हैं ? अपने यहां आप अपने खिलाड़ियों को वह सामान नहीं दे सकते हैं। हिन्दुस्तान की सरकार ने जहां 66 हजार करोड़ की योजना बनाई है वहां
[ Shri Mool Chand Daga]
उसमें 18 करोड़ रुपये इसके ऊपर खर्च करने के लिये रखे हैं। 18 करोड़ रुपये में आप हिन्दुस्तान को दूसरे देशों के साथ खड़ा करना चाहते हैं ? हमारी गर्दन नीची करवाना चाहते हैं कि ये हिन्दुस्तान के खिलाड़ी ? हैं; मैं बताना चाहता हूं कि 66 करोड़ की जनता में अच्छे से अच्छे खिलाड़ी है। लेकिन आप .66 हजार करोड़ रुपये की योजना में 18 करोड़ इसके लिये रख कर यह चीज चाहते हैं तो कैसे हो सकता है ?
पहले जो इसके मिनिस्टर थे नूरुल हसन साहब से बहुत साल पहले की बात है उन्होंने कहा था कि खेलों से जीवन चरित्र बनता है। चरित्र का विकास होता है, देश की इमारत खड़ी होती है इस लिये खेलों को प्रमुखता दी जानी चाहिए। लेकिन आपके ये आबजवं र वहां क्यों जाते हैं ? मोज करने के लिये, सैर करने के लिये, घूमने फिरने के लिये ।
आपके खेल संगठनों के अन्दर राजनीति घुस गई है। अभी हाल की घटना को लीजियेपुरुषोत्तम रंगूटा ने क्या किया ? बेदी को हटा दिया, निकाल दिया, उसके खिलाफ डिस्प्लिनरी एक्शन लिया। जब शोर मचा तो आपको मिनिस्ट्री ने चुपके-चुपके एक्शन लिया में आपको बतलाना चाहता हूंबहुत पहले डा० के० एल० श्रीमाली ने क्या कहा था-"....Dr. K. L. Shrimali, referred to the criticism in the Press and amon gthe Public of the poor performance of Indian teams in international competitions and the general decline of sports in the country."
इसका जो इम्पोर्टेन्ट पैरा है अब मैं उस पर जोर दे रहा हूं
"He stressed that it was necessary to ensure that full use was made of our human and material resources in the field of sports so
that better results may follow in international competitions."
यह कहीं बाहर से नहीं पढ़ रहा हूं - यह जनाब ज्वाइन्ट कमेटी की रिपोर्ट है।
श्री एम० रामगोपाल रेडी (निज.माबाद) : वह तो ऐसा बोल कर चले गये हालत वैसी की वंसी चल रही है।
श्री मूल चन्द डागा पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है. क्योंकि उसमें राजनीति घुस गई है।
भालिन्द्र सिंह को लीजिये--प्राप कुछ आर्डर देते हैं लेकिन आपके आर्डर की तामील नहीं होती है। इसमें कहा गया है-"The Minister pointed out that there had been a continuous deterioration in standards and performance. Indian athletes had not yet been able to secure even the seventh or eighth position in the Olympic competitions and, so far as the Asian Games were concerned, India's position was second in the Asian Games held in Delhi in 1951, fourth in Manila in 1954 and seventh in Teheran in 1958."
अब एक नौजवान डिप्टी मिनिस्टर आये हैं मैं चाहता हूं कि यह पूरा महकमा अलग होना चाहिए। यह मंत्रालय अलग होना चाहिए। एक नेशनल पालिसी बननी चाहिये खेलो को मुखता दी जानी चाहिए । कोचिंग होनी चाहिए, खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिये बाहर भेजना चाहिए। गांव-गांव और डिस्ट्रिक्टस में स्पोर्टस कौन्सिल होनी चाहिए स्टेट लेवल पर म्पोर्ट स कौन्सिल होनी चाहिए । लेकिन इस प्रकार के जो गन्दे चेहरे आप के खेल संगठन में भरे हुए हैं उनको वहां से निकाल दीजिये, नूरुल हसन साहब अपनी तलवार से उनको काट दें, गन्दगी फैलाने वालो को वहां नहीं रखना चाहिए।
333 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 (SAKA) re. MISA.
सभापति महोदय, इस वक्त बहुत जरूरी सवाल पर बहस हो रही है मैं चाहता हूं में कि आप मुझे दो-चार मिनट ज्यादा दें ।
सभापति महोदय : आाप ने पहले ही 15 मिनट ले लिये हैं।
श्री मूल चन्द डागा मैं चाहता हूं कि आप स्पोर्टस को स्पोर्टस को तरह से देखें-इसमें टाइम का सवाल नहीं होना चाहिए ।
SHRI S. M. BANERJEE (Kanpur): Sir, it is fortunate that a discussion has come up on this matter. We had tabled numerous questions on this matter. I would request you to kindly allow at least 15 minutes or 20 minutes more. I would make that request to you, since you are there as a cricketeer and not as Chairman:
श्री मूल चम्ब डागाः मैं अर्ज कर रहा था कि आपके आर्डर्ज की तामील नहीं होती है - मैं उसके बारे में भी बतलाता हूं"The other decision which would have been really occured Indian sports of this major ailment was taken by the Education Ministry in the year 1968. It directed the national federations and the IOA that no person should hold a key position in a federation for more than two terms of three years each. The move was initiated by AICS in 1964 and it took the Government nearly four years to issue a directive."
अगर 15 सालों में भी गवर्नमेन्ट का टारगेट पूरा नहीं होता है तो ये लोग वहां किस लिये बटे हैं- राजनीति के सहारे ये लोग वहां पर कायम हैं बोर्ड को कैप्चर करते हैं और हिन्दुस्तान के खिलाडियों की तरफ़ उनका कोई ध्यान नहीं है। वहां आपके आब्जर्वर किस लिये जाते हैं ? घूमने के लिये सैर करने के लिये। एक हाकी का खिलाड़ी है, उसका नाम मिनिस्टर साहब बतलायेंगे वह बीमार है चल नहीं सकता है. लेकिन उसका नाम दे दिया। मैं क-एक नाम बतला सकता हूं.
लेकिन यह कोई नई बात नहीं है-- सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है। मैं भाज भाप से कहना चाहता हूं--खेल के नाम पर या तो पाप मजबूती से कदम उठायें भगर नहीं उठायेंगे तो हमें आपके खिलाफ़ बगावत करनी पड़ेगी।
"Such managers treat the tours as nothing more than an all-paid holiday abroad."
घूमने के लिये तक़रीह करने के लिये जाते हैं। एम्पायर कभी नहीं बने, लेकिन वहां बन गये क्योंकि तेहरान में घूमने में मजा आता है हमारे पैसे पर तेहरान की ठण्डी हवा खाम्रो । हिन्दुस्तान इसको कैसे बरदाश्त कर सकता है। इस सब के लिये आपकी नेशनल पालिसी बननी चाहिए। आज का हिन्दुस्तान खेलों के मैदानों में बनेगा। अच्छे ईमानदार चरित्रवान श्रादमियों को लायें। क अलग मिनिस्ट्री कायम की जाय, उनको पूरी कोचिंग दी जाय । उनको श्राठ रुपया मत दीजिये उनको वहीं खेल खिलाइये। मैं इस बात को फिर से कहना चाहता हूं - आज दुनिया में हिन्दुस्तान की तस्वीर बडी धुंधली है। 56 करोड का हिन्दुस्तान, जो कभी दूसरी श्रेणी में थी हाको में विश्व विजयी था आज उसकी हालत धरातल पर ले आये हैं। अपने आपको छुपाने की चेष्टा न कीजिये - जो सच्चाई है उसको स्वीकार कीजिये और कहिये कि गल्ती हुई है उसको सुधारेंगे। अगर आप ने छुपाने की कोशिश की सच्चाई को मानने से इन्कार किया तो इसका मतलब यह है कि आपका इरादा खेल संगठनों को सुधारने का नहीं है। एजूकेशन विभाग के जो सेक्रेटरी वहां जाते हैं उनको रोकिये उनको कभी मत जाने दीजिये उनको क्या पता है कि स्पोर्टस क्या चीज है। चन्दूलाल चन्द्राकर को लाइये क्योंकि वे खिलाडी हैं. लेकिन मेरे जैसे को ले प्रायेंगे तो कुछ काम नहीं होगा ।
SHRI P. G. MAVALANKAR (Ahmedabad): I am glad that my good friend Daga has sought to raise a half
Res. and Mation
[Shri P. G. Mavalapkar]
an hour discussion which, thanks to Shri Banerjee, you were good enough to accept could be extended beyond half an hour. This House gets very rarely opportunities of discussing some of the important issues. Games and sports are important because they put India on the world map and unless we have discussions at least occasionally on the floor of the House on what we can do to put our country which has so much potential, on the world map we cannot achieve much. Again my good friend Banerjee was the first to come with a congratulatory reference to one of our esteemed colleagues, Dr. Karni Singh when he brought us a medal. Originally, the Minister's reply was: The overall tally in Teheran is better than in the preceding two Asian games. Should we compare ourselves with those who are behind us or ahead of us? Take a country like Japan: 75 gold medals, 50 silver and 51 bronze whereas India got four gold, 12 silver and 12 bronze. Instead of talking about preceding years, should we not keep pace with changed times? What are we doing in terms of having a sound policy in regard to national sports? The minister has said, "There is considerable scope for improvement in certain games and sports." Is it his contention that in some other games there is no scope for improvement and all is fine? Or, do we believe that every single sport in our country needs much more improvement? In Teheran, out of 16 disciplines of games in which various countries were asked to participate, India participated only in 12. Which are the four games in which we were unable to participate and why? Then, the minister has said, "The performance at Teheran would be placed before the next meeting of the All India Council of Sports with a view to making further scrutiny and advice for remedial steps.' Has that meeting taken place? If not, how soon will it take place? In the meanwhile, what are the remedial measures already being considered by
Government to make our games better?
Although our potential is very good in terms of talents, our performance in Teheran is something about which there is nothing to enthuse. It is poor not because our players are poor but because they were not well planned, sufficiently in advance. Is it true? Then, is it not a fact that sports and politics have been mixed up and sports have become hotbeds of polities? There are a number of games in which there are dual associations. There is a national federation of 8 particular game and there is another national federation of the same game! What are you doing to arrest this tendency? I believe one reason for this is vote-catching. The tragedy is, we should play our politics sportingly. We cannot do that. But we are injecting politics into our sports. What is the ministry doing to stop this?
What action is the ministry taking to maintain and enforce discipline among our players, officials and coaches? Is there any code of conduct for our contingents which go abroad to take part in sports meets. for the players as well as the officials? Then, why is it that various national sports organisations are not asked to select the best? And, once having asked them to select the best players, why is it that the Ministry are not able to force the selected players to play? Sometimes those who are selected refuse to go saying, "this is below my prestige; I will go only to the more important ones". That is not good. They are playing not only for themselves but for the country. So, the best players who are selected must be forced to go and play.
There are two revealing letters that have appeared in the weekly Sports Week of September 22 and October 20. In the 22nd September issue, Mr. M. P. Varma says:
"Indian sport is at its lowest ebb and we are the laughing stock of
337 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 (SAKA) re. MISA
the world. ....National sports federations have become hot-beds of politics. A lot of malpractices are going on undetected, like dual associations for vote-catching etc."
The second letter is more revealing. It is by one Mr. Michael R. de Souza of Goa. Incidentally, he got the first prize for the best letter for that particular week of Sportsweek. He says:
The happenings at Teheran proved that our forwards were found wanting-in stamina, in guts and in strength (because they had heavier hockey sticks to strengthen their shooting power). The basic trouble of this is politics."
He further says:
"My advice would be......stop the free rides to athletes, coaches, managers and officials. Start from scratch and pick them young. Offer them facilities to improve at the school level. Encourage interschool, inter-collegiate and interstate competitions. Cost of sports equipment should be within reach of the masses. Government should lift taxes on sports goods. Government grants and other funds used for getting our old stalwarts into shape should be used for this purpose.
If this can be done, then there is hope, otherwise let us play gooli dunda, tops and marbles."
This is his advice.
I want to conclude by asking the Minister a question. Is it a fact that all these are so much corroded by politics? Today there is a report in the papers that our junior basket ball team competitors were not able to go to participate in a particular tournament. They held a training camp for as many as three months but the clearance from the Ministry did not come.. Ultimately, the officials in charge gave up the hope and the players could not leave for the competition. I feel very unhappy to read such news items. As I said in the
beginning, there is talent but there is no policy, no planning and no funds are kept at their disposal. I hope the Minister will reply to all these points.
SARDAR SWARAN SINGH SOKHI (Jamshedpur): Sir, I have some questions to ask and some suggestions to give. Firstly, what is the criterion for the selection of sportsmen? Is it based on merit or pairvi? Is the Government satisfied with the performance of the sportsmen who participated in the Asian Games at Teheran? Thirdly, the Punjab Government have a proposal for training and coaching sportsmen and to send only such teams in future. Are the Government considering that? Then, the selection should be made much earlier than the games and proper coaching should be done beforehand. Here I am happy to say that three sportsmen from Jamshedpur have won gold medal for India. Otherwise India would have won only one Gold Medal. We must remember that India has lost its reputation in hockey and was beaten twice by Pakistan.
I shall like to know whether the attention of the Minister has been drawn to a statement made by Shri J. S. Saini, Coach of Indian Athletic Contingent to the recent Teheran Asian Games and the reply of the Minister was as follows:
"Government have seen a press report of a statement having been made by Shri J. S. Saini, a Senior Athletic Coach at the Netaji Subhas National Institute of Sports, Patiala, to the effect 'that Coaches should be given a free hand in selecting and meets without any "outside interference"."
Shri J. S. Saini has now clarified that in answer to a question put to him by a Correspondent at a Press Conference convened by the President, Amateur Athletic Federation
[Sardar Swaran Singh Sokhi]
of India, at Chandigarh on 24th September, 1974, he had stated that as per pattern followed in other countries, the coach training a team should be given a free hand in the selections without any outside interference, in particular from those who do not have the requisite technical knowledge of the game.
The views expressed by Shri Saini are in conformity with the commendations of the All India Council of Sports in the matter of selection and training of teams for participation in International sports meets."
Now I come to the last point. I think, selections of the sportsmen are being made under political pressure. Some politicians are also involved in getting persons selected. This should be eliminated.
Lastly, I praise the sportsmen who I have got us four Gold Medals, 12 Silver Medals and 12 Bronze Medals.
SHRI S. M. BANERJEE (Kanpur): Before I put my questions, I would remind this House of the hon. Member who is not with us any more, who is dead, Mr. Jaipal Singh. When he was alive, he used to raise discussions on sports and I still remember the vigour which he used to carry even during his last days in the matter of sports.
It is a fact that we had a debacle in Teheran. But I am not pessimistic; I have a sense of optimism and I know our players would be better. But what was the cause of debacle? Is it that the Indian players did not play the game well? Is it that we are lacking in forwards in Hockey? Is it that we are not well fed? The difficulty is about the proper selection of the team. I do not, for a moment, say that the team which went there was not good; those players who had gone were not good. My popularity
in my constituency is not due to politics but it is due to sports. In Hockey, apart from skill, vigour is also required. I have seen the rightout scooping the ball to the left out. It calls for enough vigour. Unfortunately, our players, though they have the skill, cannot translate that into action because they do not have the proper health. We have to make them healthy, we have to give them proper training and also proper nourishment. I was surprised when a friend of mine, who is a coach in Patiala, recently told me that some of these young boys who were going for training in cricket could not afford to have even pullovers. Still they have to practice at 6.00 in the morning! Is it not a sad commentary on our sports? Is it not a sad commentary that our players do not wear even pullovers or jersies? And, yet, we expect them to practise! Of course, in Teheran cricket was not there. But in India we do not have fast bowlers in cricket. What has happened to fast bowling in India? Why do we depend only on googly or spin bowling? We lack in fast bowlers. The other countries win because they have good fast-bowlers. We have not yet developed fast bowling.
In hockey also, I would request the hon. Minister, to let us know how the boys are selected for proper training. With the exception of Michael Kundu, those Adivasis have not been selected from Chhota Nagpur. I have represented many places there; I have played with them; and I know how good and tenacious players they are in Hockey.
Then, politics should be eliminated from the field of sports. Of course, it is in our blood; it is impossible to eliminate politics. But I would request that, when we form the Council, we try to put these gentlemen who are the least involved in politics. As I said, we cannot completely eliminate it because it has become a part and parcel of our life. But something should be done to keep politics
341 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 (SAKA)
away. Recently we have seen how, because of politics, Bedi had been excluded from our cricket team. I do not want to say anything bad about anybody. But it is a fact that such omissions are there.
Last but not the least, I would raise this point. Prof. Nurul Hasan is a lover of cricket because he was in Aligarh throughout. I am also a lover of cricket. The greatest injustice has been done to the people of U.P. by denying a test match in U.P. Why should Kanpur, which has the maximum capacity, has been ignored? What was our fault? Was it because the Chairman fought with the Secretary or the Secretary fought with the Chairman? Unfortunately, Mr. Bashir is no more. It was he who had brought cricket to U.P. He was not here. One Mr. Kunzru gave a report that Kanpur could not manage a Test match because of the students trouble. I would only request the hon. Minister through you that the greatest injustice has been done to the people of Kanpur and more so, to the people of U.P. to deny test match for Kanpur. I can accept this Government denying jobs to young men. But why deny a test match? Bangalore has got, Madras has got another. I am not raising this question out of any parochial feelings. But the greatest injustice has been done to the people of UP. I would request Prof. Nurul Hasan to assure this House that at least one match will be given to Kanpur.
Joint Secretaries and the Under Secretaries and so on. It is surprising that I cannot go and see this match. I am prepared to pay for it but you cannot have it. If myself and my family members want to go and see the match I have to ask somebody else to get it. After all, who go to these cricket matches? Those people who go there with their family members, eating every time, do not know which is a 'no-ball' and which is a 'yes-ball'. They say 'Gol hogaya' It is these people who wangle the tickets and go there. But your son and my son cannot go because the tickets are beyond our reach. I would request you to kindly see that at least a row is reserved for Members of Parliament as was done at earlier times. Ghee is available, butter is available, everything is available for Members of Parliament. Why not test match tickets? It is said that it is a luxury. It is not a luxury. It is our need. I would, therefore, request that the Minister should see that we get the tickets that we require.
My last point is that even to-day we are all interested in games. Many people are interested in Cricket. Our House had a good cricket team. Sardar Surjit Singh Majithia was there. Shri M. R. Krishna was there. Even Pandit Nehru played cricket in 1962. He used to run himself and there was never a runner employed for him. We, cricket-lovers, are trying to get tickets for the cricket match here but we cannot get. Every thing is sold to big business-houses. What they do is that they get hold of the tickets and oblige the Deputy Secretaries and
F श्री चन्दूलाल चन्द्राकर (दुर्ग) : सभापति महोदय, मेरे नाम का उल्लेख किया गया है। उससे ग़लतफ़हमी हो गई है। मुझे दो मिनट का समय दे दीजिये।
MR. CHAIRMAN: Unfortunately, in an half-an-hour discussion there are certain rules. Therefore, I cannot permit you.
The hon. Minister.
श्री चन्दूलाल चन्द्राकर मुझे पर्सनल एक्सप्लेनेशन के लिए दो मिनट दे दीजिये । उन्होंने कहा है कि मैं तेहगना गया था। मैं दूसरे लिम्पिक्स में गया था, लेकिन मैं तेहरान नहीं गया था ।
MR. CHAIRMAN: We know that you are a very good sportsman. I have corrected it. He has said something which is wrong. I am denying you because all members who wanted to put questions their names were ballotted and if I now give you a chance, I will be doing an injustice to those members.
श्री चन्दूलाल चन्द्राकर सभापति महोदय, मेरा नाम लेकर कुछ कहा गया है । उससे कुछ ग़लतफ़हमी हो गई है। इस लिए कृपया मुझे पर्सनल एक्सप्लेनेशन के लिए दो मिनट का समय दे दीजिये ।
उन्होंने कहा है कि मैं तेहरान गया था । मैं तेहरान तो नहीं गया था, लेकिन स्पोर्टस में मेरी दिलचस्पी है और मैं दूसरे पिक्स में जाता रहा हूं । मेरे तोन चार स्पष्ट सजेस्शन्ज
जब तक केन्द्र में एक अलग स्पोर्टस मिनिस्टर और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट नहीं होगा, तब तकः हमारे देश में स्पोर्टस की तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दिया जा सकेगा। इस लिए यह आवश्यक है कि स्पोर्ट्स के लिए एक सैपेरेट-मिनिस्टर नियुक्त किया जाये जिस, को इस क्षेत्र का अनुभव हो ।
6 - 6 घंटे, 8-8 घंटे फील्डिंग करते रहते हैं, 8-8 घंटे बालिंग करते रहते हैं। इसी तरह हाकी में भी जर्मनी में वाई-कई गोल रोज मारने की प्रेक्टिस करते हैं । लेकिन हमारे यहां इन्टेन्सिव ट्रेनिंग की बहुत जबर्दस्त कमी है। यह इंटेंसिव ट्रेनिग अपने यहां होनी चाहिए ।
हमारे यहां हाकी, फुटबाल, बालीबाल श्री आदि जो रपयेनाइज़ेशन्ज हैं, उनको इस तरह से रीमार्गनाइज़ किया जाना चाहिए कि हर एक को फ्रीडम हो और कुछ व्यक्ति दरु, पंद्रह, बीस, पच्चीस साल तकः उन पर अपनी मानोपली बना कर न बैठ सकें। मैं ने देखा है कि शिक्षा मंत्रालय भी इस सम्बन्ध में अपने आप को असहाय अनुभव करता है और उन लोगों को हटा नहीं सकता है । मैं चाहता हूं किः स्पोर्टस के सम्बन्ध में एक विधेयक लाया जाये, जिससे कोई व्यक्ति किसी स्पोर्टस आर्गनाइजेशन पर दस-पंद्रह साल तक अपनी मानोपली बना कर न बैठा रहे । तीसरा मेरा सुझाव है कि ट्रेनिंग दुनिया में सबसे बड़ी चीज है । आज चाहे वह मेडल में हो चाहे हाकी में हो चाहे और किसी चीज में हो, हर साल हम दिनों दिन गिरते जा रहे हैं। उसका मुख्य कारण एक है कि हमारी प्रैक्टिस नहीं है। आप आस्ट्रेलिया में या दूसरे देशों में क्रिकेट की या किसी भी चीज की प्रैक्टिस देखें तो एक-एक दिन में
दूसरी बात यह है कि जिस किसी भी चीज को सीखना है उसके लिए किसी भी स्टूडेंट की लर्निंग एज 12 से 18 वर्ष की होती है। 18 से 25-26 साल तक वे स्पोर्टस मैन बन सकते हैं। लेकिन जब तक इनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था नहीं होगी तब तक अच्छे स्पोर्ट समैन कैसे बन सकते हैं ? इसलिए उनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए ।
इसके अलावा जितने भी स्पोर्टस आर्गेनाइजेशन हैं और जितने हमारे स्टेडियम बन रहे हैं सब स्टेडियम एक किस्म के बन रहे हैं, लेकिन आवश्यकता इस बात की है वि जैसे हमारे यहां जो क्षेत्र बाक्सिंग के लिए अच्छा है वहां पर बाक्सिंग की ट्रेनिंग का इंतजाम हो, जो क्षेत्र लांग रेसिंग के लिए अच्छे हैं वहां पर लांग रेसिंग की ट्रेनिंग की व्यवस्था हो । जैसे रशिया में होता है या चाइना में जैसे है । आज हर चीज में वह गोल्ड मेडल ले जाते हैं और स्पीड में अमेरिका वाले ले जाते हैं । हमारे यहां लांग डिस्टेंस और शार्ट डिस्टेंस दोनों में अच्छे स्टेमिना वाले भी हैं और स्पीड वाले भी हैं लेकिन हमारे यहां स्टेडियम इस तरह के नहीं हैं जिनमें कि सब तरह की व्यवस्था हो और जब तक उसकी व्यवस्था नहीं होती तब तक जैसे इन्होंने बताया कि बाक्सिंग में जाते हैं तो वहां वाक्सिंग वे दूसरी तरह का करते हैं और यहां ये प्रैक्टिस दूसरी तरह का करते हैं, तो मेहनत सारी बेकार जाती है । अन्त में मैं यह कहना चाहता हूं कि जितने भी स्कूल और कालेजेज़ हैं उनमें हमें खास तौर से इसकी व्यवस्था करनी पड़ेगी ।
245 Res. and Motion AGRAHAYANA 11, 1896 (SAKA) re. MISA
शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय तथा संस्कृति विभाग में उपमंत्री श्री प्रेरविन्द नेताम): सभापति महोदय, माननीय सदस्यों ने इस प्राधे घन्टे की चर्चा को लेकर खेल कूद के संबंध में काफी जो रूचि दिखाई है उस के लिए मैं बहुत आभारी हूं
श्री एस० ० एम० बनर्जीः आपकी तो अभी खेलने कूदने की उमर है, आप यहां क्यों चले आए ?
श्री अरविन्द नेताम : बैनर्जी जी को मालूम होना चाहिए कि अभी भी मैं खेलता हूँ ।
डागा साहब ने बहुत से सवाल किए । सब से पहले तो जो शासकीय प्रतिनिधि मंडल गया था उस के संबंध में उन्होंने जो कहा है उस के ऊपर मैं थोड़ा सा कहना चाहूंगा कि हालांकि उस प्रतिनिधि मंडल का मैं भी सदस्य था और श्री मिर्धा जी उस के अध्यक्ष थे, लेकिन जो उन्होंने कहा कि आप लोग बिनासूचना के गए यह बिल्कुल सही नहीं है । इंडियन ओलिम्पिक एसोसिएशन को यह बात मालूम थी ।
श्री मलचन्द डागा : मारे अखबारों में यह चीज निकली है ।
श्री अरविन्द नेताम : अखबारों के समाचार के आधार पर हम ने इंडियन ओलि म्पिक एसोसिएशन को लिखा भी था और उन्होंने लिखित में दिया है कि हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं है और न हमें कोई असुविधा हुई । जो भी शासकीय प्रतिनिधि मंडल जाता है उस की जानकारी उस कंट्री के दूतावास को भी मौर यहां के इंडियन प्रोलिम्पिक एसोसिएशन को रहती है और यह जानकारी सरकार की तरफ से भेजी जाती है। जो एंट्रीबसे ज के बजेज दिए जाते हैं उस में हम जैसे ही तेहरान पहुंचे हम मे उन्हें कांटेक्ट किया और उसी दिन हमें वह मिल गया।
श्री मूलचन्द डागा : गेट पर कितनी देर तक प्राप खड़े रहे ?
श्री भरविन्द नेतामः प्राप को मालूम होगा कि इस बार तेहरान में सुरक्षा की व्यवस्था काफी कड़ी थी, इसलिए थोड़ी सी दैर जरूर हुई क्योंकि अंदर से बुलाने में ग्राई० मो० के मेम्बर्स को जिन के पास बजेज थे, कुछ देर लगी और यह सही है कि हम खड़े रहे, हम को थोड़ीदे रघुसने नहीं दिया, लेकिन वहां तो सब के घुसने की मनाही थी जिन के पास कि बैंजेज नहीं सुरक्षा की व्यवस्था इतनी थी, तो यह कहना कि हम बिना सूचना के गए थे इसलिए यह हुआ ऐसी बात नहीं है। अखबारों की जो खबर है उस के संबंध में हम ने आई० प्रो० से स्पष्टीकरण मांगा था और उन्होंने कहा कि हमें कोई ऐसी असुविधा नहीं हुई।
माननीय सदस्य ने बहुत से खेलों के बारे में कहा है। उसमें मैडल्स जो हमने जीते हैं, यह बात सही है कि हमारे मंडल्स की संख्या दूसरे देशों के मुकाबले में खास कर जापान, ईरान और चाइना के मुकाबले में कम रहीं, परन्तु अगर हम पिछले दो एशियन गेम्स के रिकार्डम देखें तो....
श्री मूलचन्द डागा : आप को उस से संतोष नहीं कर लेना चाहिये ।
श्री अरविन्द नेतामः मुझे तोऐ से ही संतोष नहीं है, लेकिन फिर भी पिछले जो दो एशियन गेम्स हुये 1966 में बैंकाक में जो एशियन गेम्स हुये उस में टोटल हमारा 21 रहा भोर 1970 में जो बैंकाक में हुआ। उसमें 25 मंडल हमारे रहे। इस बार हमारे टोटल मेडल करीब 28 हैं। हालांकि इस में गोल्ड मेडल कम जरूर हुए है लेकिन भोवर झाल जो मेडल है वह ज्यादा हैं । तो इस संबंध में मैं कहना चाहूंगा कि जो भी परफार्मेंस रही है खास कर के एथलीट्स की वह बहुत ही अच्छा रही है। टोटल जरे 28 मेम्बर थे एथलीट्स के उन में से 15 ने मेडल जीते हैं जो कि एक महत्वपूर्ण योगदान है एथलीट्स के क्षेत्र में ।
|
Res. and Notic सभापतिबी, तस्करी एक तरफ के पहाड़ की तरह से है जिसका एक हिस्सा जितना दिखाई देता है. उससे अधिक हिस्सा दिखाई नहीं देवा । यह समझना गलत होगा कि केवल पाँच सौ या छः सौ व्यक्ति इस देश में तस्करी का सारा जाल बुनने में समर्थ हैं। सरकार ने कुछ तस्करों को गिरफतार करने के लिये सुरक्षा अधिनियम में संशोधन किया है। यह संशोधन एक अध्या देश द्वारा किया गया है। जब संसद को बैठक नहीं चल रही थी तब सरकार ने अध्यादेश जारी करने के अधिकार का उपयोग किया और उस के द्वारा सुरक्षा अधिनियम में परि वर्तन किया। लेकिन, सभापति महोदय वह परिवर्तन ही काफी नहीं हुआ। जो तस्कर सुरक्षा अधिनियम के मतंगत गिरफतार किये गये उनमें से कुछ अदालतों द्वारा छोड़े जाने लगे। सरकार ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रचालते तस्करों को क्यों छोड़ रही हैं। उस ने सारा दोत्र मदालतों के मध्ये मड़ने को कोशिश की और संविधान के अनुच्छेद तीन सौ उनसठ के अन्तंगत एक प्रादेश जारी कर के जो तस्कर नजरबन्द थे, उनके लिये प्रदालती का दरवाजा -खळखटाने का रास्ता बन्द कर दिया। सभापति महोदय तीन दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर को देश में संकट कालीन स्थित को घोषणा हुई थी। पाकिस्तान ने भारत पर माक्रमण किया था। आज दो दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर है। तीन वर्ष हो गये हमने पाकिस्तान की जीती हुई जमीन वापस दे दी, कंदी लौटा दिये, शिमूला और दिल्ली में बैठकर सामान्य स्थिति लाने के लिये समझौते किये। अब दोनों देशों के बीच व्यापार भी आरम्भ हो गया है। घाज संकटकालिक स्थिति बनाये रखने का क्या मोचित्य है? लेकिन संकटकालिक स्थिति बनाये रखी जा रही है। उस स्थिति के संगत पहले तो तस्करों को एमशून्य भाईशून्य एसशून्य एशून्य में बन्द किया जा रहा है मौर उसमें पो जब अदालतें न्याय की कसौटी पर कस कर कुछ मामलों में उनकी व्यक्तिगत स्वाधीनता वापस लौटा देती है तो सरकार ने राष्ट्रपति का प्रादेश जारी कर के तस्करों को मूलभूत अधिकारी से वंचित कर दिया। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम तस्करों के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही करने के पक्ष में हैं। तस्करी एक राष्ट्र विरोधी कृत्य है, जो भी तस्करी करता है वह देश के प्रति गद्दारी का दोषी है। लेकिन गद्दारों के खिलाफ़ भी कानून के अन्तंगत कार्यवाही होगी। अभी देश में कानून का राज्य है जंगल का राज्य नहीं है। मेरा आरोप है कि यह सरकार तस्करों के विरूद्ध सामान्य कानून के अन्तंगत कार्यावाही नहीं करना चाहती। सारा देश मांग कर रहा है कि तस्करों को खुली अदालत में पेश किया जाय उन पर मुकदमा चलाया जाय उनने विरूद्ध जो भी प्रमाण सरकार के पास हैं उन्हें पेश किया जाय। वे तस्कर किस के संरक्षण में तस्करी करते थे उन राजनैतिक नेताओं को कस्टम और पुलिस के अफ़सरों को भी बेनकाब किया जाय और तस्कर कड़ी से कड़ी सजा के भागीदार बनायें जायें। लेकिन सरकार उन्हें खुले प्रदालत में पेश करने के लिये तैयार नहीं है, उन पर मुकदमा चलाने के लिये प्रस्तुत नहीं है। उन्हें आराम से नजरबन्द करने के पक्ष में है। सभापति महोदय आप तो वकील हैं, प्रभा अभी यूशून्य एनशून्य मोशून्य से वापस पाये हैं। ताजा दिल और दिमाग ले कर आये हैं जरा इस मामले में भी अपना ताजा दिमाग काम में लाइये । नजरबन्दी की जाती है किसी व्यक्ति को भविष्य में कोई काम करने से रोकने के लिये नज़रबन्दी इस के लिये काम में नहीं लायी जाती कि जो पुराने पाप हैं उस के लिये सजा देने के लिये। क्या केवल जो तस्कर पकड़े गये हैं उन्हें भविष्य में तस्करी करने से रोकना इतना ही उद्देश्य है ? क्या छः सौ लोगों को पकड़ने से तस्करी बन्द हो जायेगी ? उन्होंने जो पुरानी तस्करी की थी जिस के लिये वह दोषी हैं क्या उन्हें उस के लिये दंड नहीं मिलता तीन सौ इक्कीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ अट्ठानवे re. MISA चाहिये ? उन्हें नजरबन्द करने से उनके पुराने अपराध के लिये उन्हें दोष कैसे दिया जायगा ? लेकिन सरकार उन्हें सजा देना नहीं चाहती। सभापति महोदय तस्करी के विरूद्ध एमशून्य आईशून्य दस एसशून्य एशून्य का प्रयोग सरकार की कानूनी कार्यवाही का देश के सामान्य कानून के अन्तंगत होने वालो कार्यवाही का एक मखौल है। तस्करी एक अपराध है। सामान्य कानून के अन्तर्गत उन से निपटने की शक्ति सरकार में होनी चाहिये। अगर सामान्य कानून अपर्याप्त हैं तो उन कानूनों को मजबूत किया जा सकता है। इसके लिये सरकार सदन में आ सकती है। यह सदन सरकार को तस्करी को समाप्त करने के लिये आवश्यक अधिकार देने में संकोच न करेगा। लेकिन राष्ट्रपति का आदेश निकाला गया है तीन सौ उनसठ के अर्न्तगत । तीन सौ उनसठ तब तक चलेगी जब तक देश में आपत्तिकालीन स्थिति रहेगी। आखिर आपत्तिकालीन स्थिति तक रहेगो ? क्या तस्करी भी अब विदेशी प्रकमण है जिस का सामना विना मरजेंसो को घोषणा के नहीं हो सकता ? अभी तो इमरजेंसी ल रही है. मुझे शक हे या तो सरकार अनि चतकाल के लिये इनरजेंसा बनाये रखना चाहती है या फिर कुछ दिन के लिये तस्करों को जेल में रख कर बाद में छोड़ देना चाहती है। अन्यथा इमरजेंसी के अन्तर्गत तस्करों को मदालत में जाने से रोकने का आदेश निकालने का कारण क्या है ? जब इमरजेंसी खत्म होगी आदेश रद्द हो जायगा तस्कर अदालत में जा सकेंगें तब सरकार क्या करेगी ? सभापति महोदय ला कमोशन ने इस मामले में कई साल पहले विचार किया था और उसने सैंतालीस वीं रिपोर्ट में यह कहा थाः "We have carefully considered this question and have given due consideration to the general tenor of the majority decision in Dhition's oase and the obiter observations made by Chief Justice Sikrt who spoke for the majority in the said else. Our considered opinion is दो हज़ार सात सौ साठLS-ग्यारह. that, on the whole, it would be ad visable for the Government to secure constitutional amendment enlarging the contents of Item नौ in List I of the Seventh Schedule. We accordingly suggest that Item नौ of List I may be amended so as to read as follows:-- 'Preventive Detention for reasons connected with Defence, Foreign Affairs, the security of India, the effective realisation of duties of Customs and Excise, or the conservation of Foreign Exchange; persons subjected to such detention." यह विधि आयोग का सुझाब था । सरकार इस सुझाव पर सोती रही, तस्करी चलती रही, देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करती रही । एक,शून्य करोड़ शून्य रुपया से लेकर एक,दो सौ करोड़ शून्य रुपया की तस्करी प्रतिवर्ष देश में होती थी। पहले चोरी छिपे सोना लाया जाता था । स्वर्ण नियंत्रण कानून ला कर सर ने छोटे छोटे स्वर्णदारों को रोजी रोटी से वंचित करने का काम तो किया मगर जो सोने की तस्करी में लिप्त तस्कर थे उनके विरूद्ध उसने बठोर कार्यवाही नहीं की। यह ठीक है कि सोने की तस्करी कम हो गई है क्योंकि अन्तराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव बढ़ गया है। लेकिन सोने के अतिरिक्त अब कपड़ा आ रहा है, हीरे जवाहारात श्रा रहे हैं, घड़ियां भा रही हैं, ट्रांजिस्टर्स भा रहे हैं। सरकारी प्रांकड़ों के अनुसार जो माल सरकार बरामद करती है, तस्करों के हाथ से पकड़ा जाता है उसकी मात्रा बढ़ रही है । कीमत बढ़ रही है। इसका अर्थ यह है किः तस्करी पिछले सालों में निरंतर बढ़ रही है। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में आठ.पचास करोड़ का सामान पकड़ा गया, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में ग्यारह.पचास करोड़ का, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में चौदह.पचास करोड़ का मौर एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर के प्रथम भाठ महीनों में सत्रह.शून्य करोड़ शून्य रुपया का सामान पकड़ा गया । जो सामान पकड़ा गया है उससे बह ज्यादा सामान है जो पकड़ गया । Rea. and Motion रुभापति जी, यह जो सत्रह करोड़ की बात कही गयी है इसमें ग्यारह.पचास करोड़ शून्य रुपया का कपड़ा भाया है, एक करोड़ रूशून्य की घड़ियां हैं भीर कुल ढ़ाई लाख रूछः. सोना। यह तस्करी का या पैटर्न है, नया ढंग है। रुभापति महोदय, तस्वर अपना रिजर्व वः चलाते हैं । श्री मूलचन्ब डागा : यह बात आप को कैसे मालूम है ? श्री घटल बिहारी वाजपेयी : डागा जी, कुछ मामलों में हम अन्तर्यामी हैं। ये बातें छिपी हुई नहीं हैं। एन्टी-स्मगलिंग आपरेशन के लिए नियुक्त आफिसर श्री बाघ, ने समाचारपत्नों को दी गई एकः भेंट में यह बात स्वीकार की है कि तस्कर अपना रिजर्व बैंकः चलाते हैं । बम्बई के एक समाचार पत्र में उस रिज़र्व बैंकः वा पता भी छपा है, लेकिन पुलिस ने अभी तवः उस पर छापा नहीं मारा है । तस्करों का मामला इस सदन में इस साल बड़े विस्फोटक ढंग से तब उठा जब वित्त मंत्रालय के पुराने राज्य मंत्री श्री गणेश, ने समाचारपत्नों को एक भेट में बताया कि तस्कर एवः समानान्तर सरकार चला रहे हैं, उनकी अपनी टेलीफोन व्यवस्था है, वे कस्टम अधि कारियों के टेलीफोन सुनते हैं, समाज में उन्हें ऊंचा दर्जा मिला है और उनके राजनैतिक सम्बन्ध हैं। बाद में कांग्रेस के डाशून्य वीशून्य केशून्य आरशून्य बी राव ने एक ध्यान दिलाओ सूचना के अन्तर्गत इस विषय में एक वक्तव्य की मांग की थी। श्री गणेश ने यह भी कहा था कि वह तस्करों के खिलाफ़ सत्याग्रह करेंगे। लेकिन जब सदन में यह मामला उठा, तो श्री गणेश का स्वर कुछ मंद हो गया। उन्होंने तीन तस्करों के नाम भी बतायें। मैं श्री गणेश को बधाई देना चाहता हूं। अफसोस है कि भाज जब इस मामले पर चर्चा हो रही है, तब वह इस रुदन में नहीं हैं इस सदन में ही नहीं है, वह वित्त मंत्रालय में भी नहीं हैं। उनका पत्ता बट गया है। उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए था, मगर उन्हें दंडित किया गया। क्या इस का कारण यह है कि श्री गणेश ने जो कुछ कहा, उसने सरकार को मुसीबत में डाल दिया क्या इस का कारण यह है कि श्री गणेश के रहस्योदघाटन से सरकार जनता के सामने कटघरे में खड़ी हो गई ? उन्हें वित्त मंत्रालय से हटाया क्यों गया ? गृह मंत्रालय, कामिक और प्रशासनिक सुधार विभाग तथा संसदीय कार्य विभाग में राज्य मंत्री उन्होंने श्रीगणेश किया था । श्री भटलबिहारी वाजपेयीः मगर प्राप ने गणेश का चूहा बना दिया। "विनायक प्रकुर्वाणी रचयामास वादरम्" : श्राप ने गंगेश को चूहा बनावार दूसरे मंत्रालय में भेज दिया। श्री भोम मेहता : वह तो चूहे पर सवारी करता है । श्री अटल बिहारी बाजपेयी और वही चूहा उनको दूसरे मंत्रालय में ले गया। वह चूहा उनकी राय से नहीं, बल्कि प्रधान मंत्री की राय से चलता है । प्रश्न केवल कुछ तस्करों का नहीं है । प्रश्न व्यवस्था का है, व्यक्तियों का नहीं : हाजी मस्तान कुली था, वह करोड़पति कैसे बना ? यूसफ को रंक से राजा किसने बनाया? मालिश वाला बखिया महाराज बखिया में कैसे बदला ? छोटा सा नोकर, एक हज़ार नौ सौ पचास तक फेरी वाला के रूप में काम करने वाला नारंग जो टूटे-फूटे बर्तन ले कर बदले में जर्मन सिल्वर के वर्तन दे कर अपनी रोटी चलाता था, भाज Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे लक्ष्मी पुत्र कैसे हो गया ? ख़ाली पेट ललित महासेठ ललित में कैसे परिवर्तित हो गया ? यह अनहोनी कैसे हुई ? इस जादू के लिए जिम्मेदार कौन है ? प्रश्न यह है कि तस्करी कैसे जनमी, इसे किस ने पाला, इसे किस ने बढ़ाया, यह देशव्यापी कै से बनी, इस की मुट्ठी में सारी व्यवस्था किस ने दी, इस के सिर पर समानान्तर सरकार का सेहरा किस ने बांधा, इस के चरणों पर राजनेताओं को लोटने के लिए किस ने विवश किया। श्री एमशून्य रामगोपाल रेड्डी : माननीय सदस्य को ऐसा नहीं कहना चाहिए । श्री अटल बिहारी बाजपेयी : क्या बिना सरकारी सहयोग के, क्या बिना सरकारी अधि कारियों की सांठ-गांठ के तस्करी हो सकती है ? नहीं हो सकती है। कस्टम्ज, एक्साइज़, विदेशी मुद्रा नियंत्रण, प्रायकर अधिकारी बिक्री कर अधिकारी, पुलिस, गुप्तचर विभाग आदि सब इस सड़ांध में सने, और सब से बड़ी बात यह कि तस्करों को राजनेताओं का प्रश्रय प्राप्त हुआ। संक्षेप में तस्करी बिना सरकारी अनुमति के चलने वाला विदेशी व्यापार है । इस व्यापार के अनेक ढंग हैं। एक अंडरइनवायसिंग है, दूसरा प्रोवर इनवायसिंग है और तीसरा ढंग यह है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने घरों को जो धन भेजते हैं, वह धन तस्करों के दलाल विदेशी मुद्रा के रूप में वहीं ले लेते हैं, और यहां रूपये के रूप में वह धन उनके घर वालों को पहुंचा दिया जाता है, रिर्जव बैंक उतनी विदेशी मुद्रा से वंचित होता है और ये तस्कर अपनी राष्ट्रविरोधी कार्यवाहियों के लिए विदेशी मुद्रा प्राप्त कर लेते हैं। जो विदेशी पर्यटक यहां आते हैं, उनसे विदेशी मुद्रा अधिक रुपया देकर ख़रीदी जाती है और उस से यह तस्करी का काम चलता है। भारत से चोरी-छिपे प्राचीन मूर्तिया, शिलालेख, ऐतिहासिक महत्व की वस्तुयें बाहर भेजी जाती हैं, और इस प्रकार जो विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, वह तस्करी के काम में प्रयुक्त की जाती है। तस्करी करने वाले झूठी और जाली फ़र्मों के नाम पर, जो अस्तित्व में नहीं हैं, जो केवल काग्रज पर हैं, लाइसेंस स्कैंडल की तरह से किसी संसद् सदस्य का साथ ले कर, किसी मंत्री का धनुग्रह प्राप्त कर के, लाइसेंस लेने में सफल हो जातें है। वे विदेशों में जाली फ़र्मों को माल भेजते हैं, वहां भी रुपया कमाते हैं और वहां भी विदेशी मुद्रा प्रजित करते हैं। सवाल यह है कि इस तस्करी को किस तरह से रोका जाय । अगर तस्करी के ख़िलाफ़ सरकार का अभियान एक वास्तविक अभियान होता, अगर सरकार ईमानदारी से तस्करी के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के लिए कमर कसती, तो हम उस का साथ देते। मगर हम इस अभियान पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं। जैसा कि मैंने कहा है, क्या केवल छः सौ व्यक्ति तस्करी के काम में लगे हुए थे औौर क्या उन्हें नजरबन्द करने मात्र से तस्करी बन्द हो गई। अभी मैं मोटर से मंगलौर से कन्नानोर तक गया था। रास्ते में कासरगोड़ पड़ता है। वह सारा इलाका समद्री किनारे से लगा हुआ है। कासरगोड़ तस्करी का बड़ा केन्द्र था जब वहां के प्रमुख तस्कर, कलावा अब्दुल कादिर हाजी-हाजी अब्दुल्ला पकड़े गये - श्री श्रोम मेहता : कौन अब्दुल्ला ? श्री अटल बिहारी वाजपेयी : श्री श्रोम मेहता चिन्तित न हों। शेख अब्दल्ला नहीं । ये दोनों काश्मीर से घाते हैं और एक दूसरे की चिन्ता करते हैं। जब वह पकड़े गये थे तो कासरगोड़ में थोड़े दिन सुनसान रहा, मगर फिर गतिविधियां शुरू हो गई। वहां उनके प्लाटिनम सिनेमा और सेफायर सिनेमा बने हुए हैं। उनके पेट्रोल के पम्प ह । साहित्यकारों के संघ का जब सम्मेलन हुआ तो वह उस में रिसेप्शन कमेटी के चैयरमैन एक Shri Atal Bihari Vajpayee] थे। जब उन्हें पकड़ा गया, तो उन्हें प्रेस वालों से मुलाकात करने का मौका भी दिया गया और तब उन्होंने कहा : "The President of India who has honoured me as one of the exporters last year has served me with an arrest warrant. It is an irony. I am an honest man and my earnings are all through honest means." ग्राज केरल की सरकार उनकी बदौलत टिकी हुई है। केरल के गठबंधन में शामिल.... MR. CHAIRMAN: You may continue tomorrow. Now, we will take up Half-an-Hour discussion. HALF-AN-HOUR DISCUSSION MEDALS WON BY SPORTSMEN IN GAMES AT TEHERAN श्री मूल चन्व डागा : सभापति महोदय, तेहरान में एशिया के खेलों में जिन खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक और कांस्य पदक प्राप्त किया उन को मैं मुबारकबाद देता हूं घोर उनका स्वागत करता हूं । लेकिन ये जो खेल संगठन हैं इन के जो व्यवस्थापक और प्रबन्धक हैं उनकी व्यवस्था देख कर मेरे मन में उन के प्रति ख़िलाफ ख्यालात पैदा होते हैं.. शंका ही नहीं मैं उनके ऊपर लांछन देता हूं कि उन के कारण ही हमारी स्थिति इतनी बिगड़ी है और भाज भारत की खेलों के अन्दर यह हालत हुई है। भारत की तस्वीर आज धुषंली हो चुकी है। एक समय चार मार्च एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को जब हिन्दुस्तान के खेल शरू हुए उस दिन उसकी पोजीशन दूसरी थी और उसे पंद्रह स्वर्ण पदक, सोलह रजत पदक और इक्कीस कांस्य पदक मिले थे। लेकिन आज कितने सालों के बाद मैं यह देख रहा हूं कि भाज उस की पोजीशन छोटे-छोटे राज्यों ईरान, साउथ कोरिया, नार्थ कोरिया, इस्रायल इन से भी गई गुजरी हैं। इस को सातवां और पाठवां स्थान केवल मिला है। इस बात के लिए मुझे दुखः है। आप इस रिजल्ट को देखें कि जापान को जहां पंद्रह गोल्ड मैडल मिले हैं, ईरान को छत्तीस मिले हैं, वाइन्स को तैंतीस मिले हैं, साउथ कोरिया को सोलह मिले हैं, नार्थ कोरिया को पंद्रह मिले हैं वहां हिन्दुस्तान को केवल चार मिले हैं। आप मेहरबानी करके अपनी गर्दन नीचे झुकाइए। ये जो प्रबन्धक और व्यवस्थापक हैं इन के कारण हिन्दुस्तान की नाक नीची हो जाती है, गर्दन नीची होती है। हमने चार दिन खबर सुनी, चार दिन में हमारी सात टीमें आउट हो गई। पहले तो हम जिम्नास्टिक और बास्केटबाल में अपनी टीम ले नहीं गए। जिमनास्टिक, बास्केटबाल और तैराकी में अपनी टीम ली नहीं गई वहां । . आप खुद गए वहां, आप की क्या हालत बिगड़ी वह भी मैं अभी बता रहा हूं। वहां पर चार दिन में फुटबाल, वालीबाल, वाटर पोलो, टेनिस साइक्लिंग आदि की सात टीमें हमारी गायब हो गई। जब फुटबाल का खेल हुआ तो फुटबाल के खेल में चीन ने हमारी इतनी पिटाई की कि हावी हो गया। बास्केटबाल में कितनी पिटाई हुई होगी और जो वहां आबजरवर के रूपमें गए थे उनका चेहरा कैसा उतरा होगा? उनकी हालत क्या हुई होगी जब पिटाई पर पिटाई हो रही होगी? तैंतालीस मिनिट में कितने खेल हार गए ? चीन जो नया आया था खेल के मैदान में उसने भी आप को इस तरह सं हराया। हाकी के अन्दर हम विश्व विजेता थे। प्राज कहां हैं ? नाम ही नहीं है। पाकिस्तान को वह श्रेय मिला है। न हाकी में रहें है और खेलों में रहे। फुटबाल में चले गए, वालीबाल में चले गए। अब मैं खिलाड़ियों की हालत कितनी खराब होती है. यह बताना चाहता हूं। आप इतनी जो टीम ले कर गए, मुझे दुख है विः झाप ने खिलाड़ियों को इसिला भी ठीक तरह से नहीं दी। मोहन सिंह जी अमेरिका से प्राया तीन सौ उनतीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे उस ने कहा कि मुझे पता नहीं कि मेरा चयन हो गया है और मुझे खेल में जान है, मुझे खेल में भाग लेना है। फिर आप के पन्द्रह खिलाडी थे, बारह बीमार पड़ गए वहां तो उन्होंने कहा कि हम क्या करें । हमारा तो इलाज ही ठीक नहीं होता है। एक साइवि. लिस्ट था, उस का दिल बैठ गया। आप देखें पाकिस्तान में खिलाड़ियों की का बग होती है तो वहां उसको पच्चीस रूपये रोज मिलते हैं, ईरान में सौ रूपये रोज दिये जाते हैं, और हिस्दुस्तान में खिलाड़ियों को आठ रूपये रोज दिए जाते हैं। यह आठ रूपये आज के दिन प्राप हिन्दुस्तान के अन्दर अपने खिलाड़ियों को क्यों दे रहे हैं ? कोई खिलाड़ी घाठ रुपये में अपनी जिन्दगी और अपनी सोशल सिक्योरिटी क्यों आपके हाथ देने को तैयार होगा ? जहां सौ रुपये और पच्चीस रुपयापये रोज और जगहों में मिलते हैं वहां ग्राप हिन्दुस्तान के खिलाड़ी को आठ रुपयापये रोज दे कर कोचिग करवाना चाहते हैं ? अब में भाबजर्वसं की बात बताता हूं । बहुत बड़े-बड़े भाबजबर गये थे। ये कौन हैं जो एजूकेशन डिपार्टमेंट में बैठे हुए हैं। इनकी बाबत यह कहा गया हैः "In the Education Ministry, a handful of officers in the sports cell who have the capacity to twist the pen and the notings on files to their advantage have begun to feel that they are the almighty people of sports, experts of the highest degree." ऐसे लोग वहां प्राप ने रख छोडे हैं। जो लोग गये उनमें एक तो कौल साहब है। वहां पर जाने के बाद उनकी क्या हालत हुई ? विजय सिंह मल्होत्रा कहते है कि हम को इसिला नहीं थी कि भाप कब प्रायेंग और कौन-कौन आने वाले हैं। नतीजा क्या हुआा कि इनको बाहर खड़े रहना पड़ा। प्राधे घंटे तक इनको अन्दर माने नहीं दिया गया। जाने वालों में एक तो थे मिस्टर एसशून्य केशून्य कौल, दूसरे भारशून्य एलशून्य मानन्द और मेरा ख्याल है कि प्राप भी पधारेहोंगे, आपके पास भी वीशून्य भाई शून्य पीशून्य कार्ड नहीं था क्योंकि विजय सिंह मल्होत्रा का कहना है कि मुझे मालूम ही नहीं कि भाप कब आाने वाले हैं। वहां पापको भी गेट के बाहर खड़ा रहना पड़ा। तो यह तो जो आबजर्वर बन कर गये थे उनका हाल रहा। मानी हुई बात है और कितने सालों से हम इस बात को कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान की हालत कितनी खराब हो रही है और हमारे खिलाड़ियों की क्या हालत होती है ? भाप देखें एक विश्वनाथ सिंह खिलाड़ी गये, वहां पर टार एंड ट्रेक पर खेलने का इंतजा था, वह यहां पर है ही नहीं। वहां पर खोलने के लिए गद्दे होते हैं वह यहां नहीं। यहां तो बेचारे कपड़े पर खेलते हैं । तो भाप अपना कोन सा काम ठोक कर रहे है ? भाप के यहां कोई बोल का सामान नहीं, कोई खेलने का तरीका नहीं, कोई कोचिंग नहीं। इस पर भी जो खिलाड़ी, जीत कर भाये है वे अपनी ताकत और हिम्मत से जीत कर पाये हैं। उन्होंने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, अपनी हिम्मत का प्रदर्शन किया और भाप ने अपने खिलाड़ियों के साथ कैसा बर्ताव किया ? आपको मालूम होना चाहिए कि हिन्दुस्तान के अन्दर कुछ साइकिल वालों ने कुछ साइकिलों की मांग की, दस साल हो गये, इम्पोर्ट नहीं कर सके। डाशून्य कर्णी सिंह ने कहा कि हमें बन्दूक दीजिये। छः महीने पहले उन्होंने प्रप्लाई किया, उनको बन्दूक नहीं मिली। लेकिन फिर भी वह अच्छा इनाम लेकर प्राये। भाप ने कौन सी चीज अपने खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध की ? एक गद्द की मांग की, वह भाज तक नहीं दे सके। आप सामान नहीं दे सकते, भापकी कोचिंग नहीं हो सकती, खेलने का तरीका नहीं जानते। अब वहां जाने के बाद बेचारे माश्चर्य में पड़ते हैं कि ये क्या खेल रहे हैं ? आपके खिलाड़ियों की हालत वहां कैसी बिगड़ती हैं ? अपने यहां आप अपने खिलाड़ियों को वह सामान नहीं दे सकते हैं। हिन्दुस्तान की सरकार ने जहां छयासठ हजार करोड़ की योजना बनाई है वहां [ Shri Mool Chand Daga] उसमें अट्ठारह करोड़ रुपये इसके ऊपर खर्च करने के लिये रखे हैं। अट्ठारह करोड़ रुपये में आप हिन्दुस्तान को दूसरे देशों के साथ खड़ा करना चाहते हैं ? हमारी गर्दन नीची करवाना चाहते हैं कि ये हिन्दुस्तान के खिलाड़ी ? हैं; मैं बताना चाहता हूं कि छयासठ करोड़ की जनता में अच्छे से अच्छे खिलाड़ी है। लेकिन आप .छयासठ हजार करोड़ रुपये की योजना में अट्ठारह करोड़ इसके लिये रख कर यह चीज चाहते हैं तो कैसे हो सकता है ? पहले जो इसके मिनिस्टर थे नूरुल हसन साहब से बहुत साल पहले की बात है उन्होंने कहा था कि खेलों से जीवन चरित्र बनता है। चरित्र का विकास होता है, देश की इमारत खड़ी होती है इस लिये खेलों को प्रमुखता दी जानी चाहिए। लेकिन आपके ये आबजवं र वहां क्यों जाते हैं ? मोज करने के लिये, सैर करने के लिये, घूमने फिरने के लिये । आपके खेल संगठनों के अन्दर राजनीति घुस गई है। अभी हाल की घटना को लीजियेपुरुषोत्तम रंगूटा ने क्या किया ? बेदी को हटा दिया, निकाल दिया, उसके खिलाफ डिस्प्लिनरी एक्शन लिया। जब शोर मचा तो आपको मिनिस्ट्री ने चुपके-चुपके एक्शन लिया में आपको बतलाना चाहता हूंबहुत पहले डाशून्य केशून्य एलशून्य श्रीमाली ने क्या कहा था-"....Dr. K. L. Shrimali, referred to the criticism in the Press and amon gthe Public of the poor performance of Indian teams in international competitions and the general decline of sports in the country." इसका जो इम्पोर्टेन्ट पैरा है अब मैं उस पर जोर दे रहा हूं "He stressed that it was necessary to ensure that full use was made of our human and material resources in the field of sports so that better results may follow in international competitions." यह कहीं बाहर से नहीं पढ़ रहा हूं - यह जनाब ज्वाइन्ट कमेटी की रिपोर्ट है। श्री एमशून्य रामगोपाल रेडी : वह तो ऐसा बोल कर चले गये हालत वैसी की वंसी चल रही है। श्री मूल चन्द डागा पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है. क्योंकि उसमें राजनीति घुस गई है। भालिन्द्र सिंह को लीजिये--प्राप कुछ आर्डर देते हैं लेकिन आपके आर्डर की तामील नहीं होती है। इसमें कहा गया है-"The Minister pointed out that there had been a continuous deterioration in standards and performance. Indian athletes had not yet been able to secure even the seventh or eighth position in the Olympic competitions and, so far as the Asian Games were concerned, India's position was second in the Asian Games held in Delhi in एक हज़ार नौ सौ इक्यावन, fourth in Manila in एक हज़ार नौ सौ चौवन and seventh in Teheran in एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन." अब एक नौजवान डिप्टी मिनिस्टर आये हैं मैं चाहता हूं कि यह पूरा महकमा अलग होना चाहिए। यह मंत्रालय अलग होना चाहिए। एक नेशनल पालिसी बननी चाहिये खेलो को मुखता दी जानी चाहिए । कोचिंग होनी चाहिए, खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिये बाहर भेजना चाहिए। गांव-गांव और डिस्ट्रिक्टस में स्पोर्टस कौन्सिल होनी चाहिए स्टेट लेवल पर म्पोर्ट स कौन्सिल होनी चाहिए । लेकिन इस प्रकार के जो गन्दे चेहरे आप के खेल संगठन में भरे हुए हैं उनको वहां से निकाल दीजिये, नूरुल हसन साहब अपनी तलवार से उनको काट दें, गन्दगी फैलाने वालो को वहां नहीं रखना चाहिए। तीन सौ तैंतीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे re. MISA. सभापति महोदय, इस वक्त बहुत जरूरी सवाल पर बहस हो रही है मैं चाहता हूं में कि आप मुझे दो-चार मिनट ज्यादा दें । सभापति महोदय : आाप ने पहले ही पंद्रह मिनट ले लिये हैं। श्री मूल चन्द डागा मैं चाहता हूं कि आप स्पोर्टस को स्पोर्टस को तरह से देखें-इसमें टाइम का सवाल नहीं होना चाहिए । SHRI S. M. BANERJEE : Sir, it is fortunate that a discussion has come up on this matter. We had tabled numerous questions on this matter. I would request you to kindly allow at least पंद्रह minutes or बीस minutes more. I would make that request to you, since you are there as a cricketeer and not as Chairman: श्री मूल चम्ब डागाः मैं अर्ज कर रहा था कि आपके आर्डर्ज की तामील नहीं होती है - मैं उसके बारे में भी बतलाता हूं"The other decision which would have been really occured Indian sports of this major ailment was taken by the Education Ministry in the year एक हज़ार नौ सौ अड़सठ. It directed the national federations and the IOA that no person should hold a key position in a federation for more than two terms of three years each. The move was initiated by AICS in एक हज़ार नौ सौ चौंसठ and it took the Government nearly four years to issue a directive." अगर पंद्रह सालों में भी गवर्नमेन्ट का टारगेट पूरा नहीं होता है तो ये लोग वहां किस लिये बटे हैं- राजनीति के सहारे ये लोग वहां पर कायम हैं बोर्ड को कैप्चर करते हैं और हिन्दुस्तान के खिलाडियों की तरफ़ उनका कोई ध्यान नहीं है। वहां आपके आब्जर्वर किस लिये जाते हैं ? घूमने के लिये सैर करने के लिये। एक हाकी का खिलाड़ी है, उसका नाम मिनिस्टर साहब बतलायेंगे वह बीमार है चल नहीं सकता है. लेकिन उसका नाम दे दिया। मैं क-एक नाम बतला सकता हूं. लेकिन यह कोई नई बात नहीं है-- सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है। मैं भाज भाप से कहना चाहता हूं--खेल के नाम पर या तो पाप मजबूती से कदम उठायें भगर नहीं उठायेंगे तो हमें आपके खिलाफ़ बगावत करनी पड़ेगी। "Such managers treat the tours as nothing more than an all-paid holiday abroad." घूमने के लिये तक़रीह करने के लिये जाते हैं। एम्पायर कभी नहीं बने, लेकिन वहां बन गये क्योंकि तेहरान में घूमने में मजा आता है हमारे पैसे पर तेहरान की ठण्डी हवा खाम्रो । हिन्दुस्तान इसको कैसे बरदाश्त कर सकता है। इस सब के लिये आपकी नेशनल पालिसी बननी चाहिए। आज का हिन्दुस्तान खेलों के मैदानों में बनेगा। अच्छे ईमानदार चरित्रवान श्रादमियों को लायें। क अलग मिनिस्ट्री कायम की जाय, उनको पूरी कोचिंग दी जाय । उनको श्राठ रुपया मत दीजिये उनको वहीं खेल खिलाइये। मैं इस बात को फिर से कहना चाहता हूं - आज दुनिया में हिन्दुस्तान की तस्वीर बडी धुंधली है। छप्पन करोड का हिन्दुस्तान, जो कभी दूसरी श्रेणी में थी हाको में विश्व विजयी था आज उसकी हालत धरातल पर ले आये हैं। अपने आपको छुपाने की चेष्टा न कीजिये - जो सच्चाई है उसको स्वीकार कीजिये और कहिये कि गल्ती हुई है उसको सुधारेंगे। अगर आप ने छुपाने की कोशिश की सच्चाई को मानने से इन्कार किया तो इसका मतलब यह है कि आपका इरादा खेल संगठनों को सुधारने का नहीं है। एजूकेशन विभाग के जो सेक्रेटरी वहां जाते हैं उनको रोकिये उनको कभी मत जाने दीजिये उनको क्या पता है कि स्पोर्टस क्या चीज है। चन्दूलाल चन्द्राकर को लाइये क्योंकि वे खिलाडी हैं. लेकिन मेरे जैसे को ले प्रायेंगे तो कुछ काम नहीं होगा । SHRI P. G. MAVALANKAR : I am glad that my good friend Daga has sought to raise a half Res. and Mation [Shri P. G. Mavalapkar] an hour discussion which, thanks to Shri Banerjee, you were good enough to accept could be extended beyond half an hour. This House gets very rarely opportunities of discussing some of the important issues. Games and sports are important because they put India on the world map and unless we have discussions at least occasionally on the floor of the House on what we can do to put our country which has so much potential, on the world map we cannot achieve much. Again my good friend Banerjee was the first to come with a congratulatory reference to one of our esteemed colleagues, Dr. Karni Singh when he brought us a medal. Originally, the Minister's reply was: The overall tally in Teheran is better than in the preceding two Asian games. Should we compare ourselves with those who are behind us or ahead of us? Take a country like Japan: पचहत्तर gold medals, पचास silver and इक्यावन bronze whereas India got four gold, बारह silver and बारह bronze. Instead of talking about preceding years, should we not keep pace with changed times? What are we doing in terms of having a sound policy in regard to national sports? The minister has said, "There is considerable scope for improvement in certain games and sports." Is it his contention that in some other games there is no scope for improvement and all is fine? Or, do we believe that every single sport in our country needs much more improvement? In Teheran, out of सोलह disciplines of games in which various countries were asked to participate, India participated only in बारह. Which are the four games in which we were unable to participate and why? Then, the minister has said, "The performance at Teheran would be placed before the next meeting of the All India Council of Sports with a view to making further scrutiny and advice for remedial steps.' Has that meeting taken place? If not, how soon will it take place? In the meanwhile, what are the remedial measures already being considered by Government to make our games better? Although our potential is very good in terms of talents, our performance in Teheran is something about which there is nothing to enthuse. It is poor not because our players are poor but because they were not well planned, sufficiently in advance. Is it true? Then, is it not a fact that sports and politics have been mixed up and sports have become hotbeds of polities? There are a number of games in which there are dual associations. There is a national federation of आठ particular game and there is another national federation of the same game! What are you doing to arrest this tendency? I believe one reason for this is vote-catching. The tragedy is, we should play our politics sportingly. We cannot do that. But we are injecting politics into our sports. What is the ministry doing to stop this? What action is the ministry taking to maintain and enforce discipline among our players, officials and coaches? Is there any code of conduct for our contingents which go abroad to take part in sports meets. for the players as well as the officials? Then, why is it that various national sports organisations are not asked to select the best? And, once having asked them to select the best players, why is it that the Ministry are not able to force the selected players to play? Sometimes those who are selected refuse to go saying, "this is below my prestige; I will go only to the more important ones". That is not good. They are playing not only for themselves but for the country. So, the best players who are selected must be forced to go and play. There are two revealing letters that have appeared in the weekly Sports Week of September बाईस and October बीस. In the बाईस सितंबरtember issue, Mr. M. P. Varma says: "Indian sport is at its lowest ebb and we are the laughing stock of तीन सौ सैंतीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे re. MISA the world. ....National sports federations have become hot-beds of politics. A lot of malpractices are going on undetected, like dual associations for vote-catching etc." The second letter is more revealing. It is by one Mr. Michael R. de Souza of Goa. Incidentally, he got the first prize for the best letter for that particular week of Sportsweek. He says: The happenings at Teheran proved that our forwards were found wanting-in stamina, in guts and in strength . The basic trouble of this is politics." He further says: "My advice would be......stop the free rides to athletes, coaches, managers and officials. Start from scratch and pick them young. Offer them facilities to improve at the school level. Encourage interschool, inter-collegiate and interstate competitions. Cost of sports equipment should be within reach of the masses. Government should lift taxes on sports goods. Government grants and other funds used for getting our old stalwarts into shape should be used for this purpose. If this can be done, then there is hope, otherwise let us play gooli dunda, tops and marbles." This is his advice. I want to conclude by asking the Minister a question. Is it a fact that all these are so much corroded by politics? Today there is a report in the papers that our junior basket ball team competitors were not able to go to participate in a particular tournament. They held a training camp for as many as three months but the clearance from the Ministry did not come.. Ultimately, the officials in charge gave up the hope and the players could not leave for the competition. I feel very unhappy to read such news items. As I said in the beginning, there is talent but there is no policy, no planning and no funds are kept at their disposal. I hope the Minister will reply to all these points. SARDAR SWARAN SINGH SOKHI : Sir, I have some questions to ask and some suggestions to give. Firstly, what is the criterion for the selection of sportsmen? Is it based on merit or pairvi? Is the Government satisfied with the performance of the sportsmen who participated in the Asian Games at Teheran? Thirdly, the Punjab Government have a proposal for training and coaching sportsmen and to send only such teams in future. Are the Government considering that? Then, the selection should be made much earlier than the games and proper coaching should be done beforehand. Here I am happy to say that three sportsmen from Jamshedpur have won gold medal for India. Otherwise India would have won only one Gold Medal. We must remember that India has lost its reputation in hockey and was beaten twice by Pakistan. I shall like to know whether the attention of the Minister has been drawn to a statement made by Shri J. S. Saini, Coach of Indian Athletic Contingent to the recent Teheran Asian Games and the reply of the Minister was as follows: "Government have seen a press report of a statement having been made by Shri J. S. Saini, a Senior Athletic Coach at the Netaji Subhas National Institute of Sports, Patiala, to the effect 'that Coaches should be given a free hand in selecting and meets without any "outside interference"." Shri J. S. Saini has now clarified that in answer to a question put to him by a Correspondent at a Press Conference convened by the President, Amateur Athletic Federation [Sardar Swaran Singh Sokhi] of India, at Chandigarh on चौबीस सितंबरtember, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर, he had stated that as per pattern followed in other countries, the coach training a team should be given a free hand in the selections without any outside interference, in particular from those who do not have the requisite technical knowledge of the game. The views expressed by Shri Saini are in conformity with the commendations of the All India Council of Sports in the matter of selection and training of teams for participation in International sports meets." Now I come to the last point. I think, selections of the sportsmen are being made under political pressure. Some politicians are also involved in getting persons selected. This should be eliminated. Lastly, I praise the sportsmen who I have got us four Gold Medals, बारह Silver Medals and बारह Bronze Medals. SHRI S. M. BANERJEE : Before I put my questions, I would remind this House of the hon. Member who is not with us any more, who is dead, Mr. Jaipal Singh. When he was alive, he used to raise discussions on sports and I still remember the vigour which he used to carry even during his last days in the matter of sports. It is a fact that we had a debacle in Teheran. But I am not pessimistic; I have a sense of optimism and I know our players would be better. But what was the cause of debacle? Is it that the Indian players did not play the game well? Is it that we are lacking in forwards in Hockey? Is it that we are not well fed? The difficulty is about the proper selection of the team. I do not, for a moment, say that the team which went there was not good; those players who had gone were not good. My popularity in my constituency is not due to politics but it is due to sports. In Hockey, apart from skill, vigour is also required. I have seen the rightout scooping the ball to the left out. It calls for enough vigour. Unfortunately, our players, though they have the skill, cannot translate that into action because they do not have the proper health. We have to make them healthy, we have to give them proper training and also proper nourishment. I was surprised when a friend of mine, who is a coach in Patiala, recently told me that some of these young boys who were going for training in cricket could not afford to have even pullovers. Still they have to practice at छः.शून्य in the morning! Is it not a sad commentary on our sports? Is it not a sad commentary that our players do not wear even pullovers or jersies? And, yet, we expect them to practise! Of course, in Teheran cricket was not there. But in India we do not have fast bowlers in cricket. What has happened to fast bowling in India? Why do we depend only on googly or spin bowling? We lack in fast bowlers. The other countries win because they have good fast-bowlers. We have not yet developed fast bowling. In hockey also, I would request the hon. Minister, to let us know how the boys are selected for proper training. With the exception of Michael Kundu, those Adivasis have not been selected from Chhota Nagpur. I have represented many places there; I have played with them; and I know how good and tenacious players they are in Hockey. Then, politics should be eliminated from the field of sports. Of course, it is in our blood; it is impossible to eliminate politics. But I would request that, when we form the Council, we try to put these gentlemen who are the least involved in politics. As I said, we cannot completely eliminate it because it has become a part and parcel of our life. But something should be done to keep politics तीन सौ इकतालीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे away. Recently we have seen how, because of politics, Bedi had been excluded from our cricket team. I do not want to say anything bad about anybody. But it is a fact that such omissions are there. Last but not the least, I would raise this point. Prof. Nurul Hasan is a lover of cricket because he was in Aligarh throughout. I am also a lover of cricket. The greatest injustice has been done to the people of U.P. by denying a test match in U.P. Why should Kanpur, which has the maximum capacity, has been ignored? What was our fault? Was it because the Chairman fought with the Secretary or the Secretary fought with the Chairman? Unfortunately, Mr. Bashir is no more. It was he who had brought cricket to U.P. He was not here. One Mr. Kunzru gave a report that Kanpur could not manage a Test match because of the students trouble. I would only request the hon. Minister through you that the greatest injustice has been done to the people of Kanpur and more so, to the people of U.P. to deny test match for Kanpur. I can accept this Government denying jobs to young men. But why deny a test match? Bangalore has got, Madras has got another. I am not raising this question out of any parochial feelings. But the greatest injustice has been done to the people of UP. I would request Prof. Nurul Hasan to assure this House that at least one match will be given to Kanpur. Joint Secretaries and the Under Secretaries and so on. It is surprising that I cannot go and see this match. I am prepared to pay for it but you cannot have it. If myself and my family members want to go and see the match I have to ask somebody else to get it. After all, who go to these cricket matches? Those people who go there with their family members, eating every time, do not know which is a 'no-ball' and which is a 'yes-ball'. They say 'Gol hogaya' It is these people who wangle the tickets and go there. But your son and my son cannot go because the tickets are beyond our reach. I would request you to kindly see that at least a row is reserved for Members of Parliament as was done at earlier times. Ghee is available, butter is available, everything is available for Members of Parliament. Why not test match tickets? It is said that it is a luxury. It is not a luxury. It is our need. I would, therefore, request that the Minister should see that we get the tickets that we require. My last point is that even to-day we are all interested in games. Many people are interested in Cricket. Our House had a good cricket team. Sardar Surjit Singh Majithia was there. Shri M. R. Krishna was there. Even Pandit Nehru played cricket in एक हज़ार नौ सौ बासठ. He used to run himself and there was never a runner employed for him. We, cricket-lovers, are trying to get tickets for the cricket match here but we cannot get. Every thing is sold to big business-houses. What they do is that they get hold of the tickets and oblige the Deputy Secretaries and F श्री चन्दूलाल चन्द्राकर : सभापति महोदय, मेरे नाम का उल्लेख किया गया है। उससे ग़लतफ़हमी हो गई है। मुझे दो मिनट का समय दे दीजिये। MR. CHAIRMAN: Unfortunately, in an half-an-hour discussion there are certain rules. Therefore, I cannot permit you. The hon. Minister. श्री चन्दूलाल चन्द्राकर मुझे पर्सनल एक्सप्लेनेशन के लिए दो मिनट दे दीजिये । उन्होंने कहा है कि मैं तेहगना गया था। मैं दूसरे लिम्पिक्स में गया था, लेकिन मैं तेहरान नहीं गया था । MR. CHAIRMAN: We know that you are a very good sportsman. I have corrected it. He has said something which is wrong. I am denying you because all members who wanted to put questions their names were ballotted and if I now give you a chance, I will be doing an injustice to those members. श्री चन्दूलाल चन्द्राकर सभापति महोदय, मेरा नाम लेकर कुछ कहा गया है । उससे कुछ ग़लतफ़हमी हो गई है। इस लिए कृपया मुझे पर्सनल एक्सप्लेनेशन के लिए दो मिनट का समय दे दीजिये । उन्होंने कहा है कि मैं तेहरान गया था । मैं तेहरान तो नहीं गया था, लेकिन स्पोर्टस में मेरी दिलचस्पी है और मैं दूसरे पिक्स में जाता रहा हूं । मेरे तोन चार स्पष्ट सजेस्शन्ज जब तक केन्द्र में एक अलग स्पोर्टस मिनिस्टर और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट नहीं होगा, तब तकः हमारे देश में स्पोर्टस की तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दिया जा सकेगा। इस लिए यह आवश्यक है कि स्पोर्ट्स के लिए एक सैपेरेट-मिनिस्टर नियुक्त किया जाये जिस, को इस क्षेत्र का अनुभव हो । छः - छः घंटाटे, आठ-आठ घंटाटे फील्डिंग करते रहते हैं, आठ-आठ घंटाटे बालिंग करते रहते हैं। इसी तरह हाकी में भी जर्मनी में वाई-कई गोल रोज मारने की प्रेक्टिस करते हैं । लेकिन हमारे यहां इन्टेन्सिव ट्रेनिंग की बहुत जबर्दस्त कमी है। यह इंटेंसिव ट्रेनिग अपने यहां होनी चाहिए । हमारे यहां हाकी, फुटबाल, बालीबाल श्री आदि जो रपयेनाइज़ेशन्ज हैं, उनको इस तरह से रीमार्गनाइज़ किया जाना चाहिए कि हर एक को फ्रीडम हो और कुछ व्यक्ति दरु, पंद्रह, बीस, पच्चीस साल तकः उन पर अपनी मानोपली बना कर न बैठ सकें। मैं ने देखा है कि शिक्षा मंत्रालय भी इस सम्बन्ध में अपने आप को असहाय अनुभव करता है और उन लोगों को हटा नहीं सकता है । मैं चाहता हूं किः स्पोर्टस के सम्बन्ध में एक विधेयक लाया जाये, जिससे कोई व्यक्ति किसी स्पोर्टस आर्गनाइजेशन पर दस-पंद्रह साल तक अपनी मानोपली बना कर न बैठा रहे । तीसरा मेरा सुझाव है कि ट्रेनिंग दुनिया में सबसे बड़ी चीज है । आज चाहे वह मेडल में हो चाहे हाकी में हो चाहे और किसी चीज में हो, हर साल हम दिनों दिन गिरते जा रहे हैं। उसका मुख्य कारण एक है कि हमारी प्रैक्टिस नहीं है। आप आस्ट्रेलिया में या दूसरे देशों में क्रिकेट की या किसी भी चीज की प्रैक्टिस देखें तो एक-एक दिन में दूसरी बात यह है कि जिस किसी भी चीज को सीखना है उसके लिए किसी भी स्टूडेंट की लर्निंग एज बारह से अट्ठारह वर्ष की होती है। अट्ठारह से पच्चीस-छब्बीस साल तक वे स्पोर्टस मैन बन सकते हैं। लेकिन जब तक इनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था नहीं होगी तब तक अच्छे स्पोर्ट समैन कैसे बन सकते हैं ? इसलिए उनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए । इसके अलावा जितने भी स्पोर्टस आर्गेनाइजेशन हैं और जितने हमारे स्टेडियम बन रहे हैं सब स्टेडियम एक किस्म के बन रहे हैं, लेकिन आवश्यकता इस बात की है वि जैसे हमारे यहां जो क्षेत्र बाक्सिंग के लिए अच्छा है वहां पर बाक्सिंग की ट्रेनिंग का इंतजाम हो, जो क्षेत्र लांग रेसिंग के लिए अच्छे हैं वहां पर लांग रेसिंग की ट्रेनिंग की व्यवस्था हो । जैसे रशिया में होता है या चाइना में जैसे है । आज हर चीज में वह गोल्ड मेडल ले जाते हैं और स्पीड में अमेरिका वाले ले जाते हैं । हमारे यहां लांग डिस्टेंस और शार्ट डिस्टेंस दोनों में अच्छे स्टेमिना वाले भी हैं और स्पीड वाले भी हैं लेकिन हमारे यहां स्टेडियम इस तरह के नहीं हैं जिनमें कि सब तरह की व्यवस्था हो और जब तक उसकी व्यवस्था नहीं होती तब तक जैसे इन्होंने बताया कि बाक्सिंग में जाते हैं तो वहां वाक्सिंग वे दूसरी तरह का करते हैं और यहां ये प्रैक्टिस दूसरी तरह का करते हैं, तो मेहनत सारी बेकार जाती है । अन्त में मैं यह कहना चाहता हूं कि जितने भी स्कूल और कालेजेज़ हैं उनमें हमें खास तौर से इसकी व्यवस्था करनी पड़ेगी । दो सौ पैंतालीस Res. and Motion AGRAHAYANA ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे re. MISA शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय तथा संस्कृति विभाग में उपमंत्री श्री प्रेरविन्द नेताम): सभापति महोदय, माननीय सदस्यों ने इस प्राधे घन्टे की चर्चा को लेकर खेल कूद के संबंध में काफी जो रूचि दिखाई है उस के लिए मैं बहुत आभारी हूं श्री एसशून्य शून्य एमशून्य बनर्जीः आपकी तो अभी खेलने कूदने की उमर है, आप यहां क्यों चले आए ? श्री अरविन्द नेताम : बैनर्जी जी को मालूम होना चाहिए कि अभी भी मैं खेलता हूँ । डागा साहब ने बहुत से सवाल किए । सब से पहले तो जो शासकीय प्रतिनिधि मंडल गया था उस के संबंध में उन्होंने जो कहा है उस के ऊपर मैं थोड़ा सा कहना चाहूंगा कि हालांकि उस प्रतिनिधि मंडल का मैं भी सदस्य था और श्री मिर्धा जी उस के अध्यक्ष थे, लेकिन जो उन्होंने कहा कि आप लोग बिनासूचना के गए यह बिल्कुल सही नहीं है । इंडियन ओलिम्पिक एसोसिएशन को यह बात मालूम थी । श्री मलचन्द डागा : मारे अखबारों में यह चीज निकली है । श्री अरविन्द नेताम : अखबारों के समाचार के आधार पर हम ने इंडियन ओलि म्पिक एसोसिएशन को लिखा भी था और उन्होंने लिखित में दिया है कि हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं है और न हमें कोई असुविधा हुई । जो भी शासकीय प्रतिनिधि मंडल जाता है उस की जानकारी उस कंट्री के दूतावास को भी मौर यहां के इंडियन प्रोलिम्पिक एसोसिएशन को रहती है और यह जानकारी सरकार की तरफ से भेजी जाती है। जो एंट्रीबसे ज के बजेज दिए जाते हैं उस में हम जैसे ही तेहरान पहुंचे हम मे उन्हें कांटेक्ट किया और उसी दिन हमें वह मिल गया। श्री मूलचन्द डागा : गेट पर कितनी देर तक प्राप खड़े रहे ? श्री भरविन्द नेतामः प्राप को मालूम होगा कि इस बार तेहरान में सुरक्षा की व्यवस्था काफी कड़ी थी, इसलिए थोड़ी सी दैर जरूर हुई क्योंकि अंदर से बुलाने में ग्राईशून्य मोशून्य के मेम्बर्स को जिन के पास बजेज थे, कुछ देर लगी और यह सही है कि हम खड़े रहे, हम को थोड़ीदे रघुसने नहीं दिया, लेकिन वहां तो सब के घुसने की मनाही थी जिन के पास कि बैंजेज नहीं सुरक्षा की व्यवस्था इतनी थी, तो यह कहना कि हम बिना सूचना के गए थे इसलिए यह हुआ ऐसी बात नहीं है। अखबारों की जो खबर है उस के संबंध में हम ने आईशून्य प्रोशून्य से स्पष्टीकरण मांगा था और उन्होंने कहा कि हमें कोई ऐसी असुविधा नहीं हुई। माननीय सदस्य ने बहुत से खेलों के बारे में कहा है। उसमें मैडल्स जो हमने जीते हैं, यह बात सही है कि हमारे मंडल्स की संख्या दूसरे देशों के मुकाबले में खास कर जापान, ईरान और चाइना के मुकाबले में कम रहीं, परन्तु अगर हम पिछले दो एशियन गेम्स के रिकार्डम देखें तो.... श्री मूलचन्द डागा : आप को उस से संतोष नहीं कर लेना चाहिये । श्री अरविन्द नेतामः मुझे तोऐ से ही संतोष नहीं है, लेकिन फिर भी पिछले जो दो एशियन गेम्स हुये एक हज़ार नौ सौ छयासठ में बैंकाक में जो एशियन गेम्स हुये उस में टोटल हमारा इक्कीस रहा भोर एक हज़ार नौ सौ सत्तर में जो बैंकाक में हुआ। उसमें पच्चीस मंडल हमारे रहे। इस बार हमारे टोटल मेडल करीब अट्ठाईस हैं। हालांकि इस में गोल्ड मेडल कम जरूर हुए है लेकिन भोवर झाल जो मेडल है वह ज्यादा हैं । तो इस संबंध में मैं कहना चाहूंगा कि जो भी परफार्मेंस रही है खास कर के एथलीट्स की वह बहुत ही अच्छा रही है। टोटल जरे अट्ठाईस मेम्बर थे एथलीट्स के उन में से पंद्रह ने मेडल जीते हैं जो कि एक महत्वपूर्ण योगदान है एथलीट्स के क्षेत्र में ।
|
GATE 2022 रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 24 सितंबर को यानी आज समाप्त हो रही है. जिन छात्रों ने अभी तक अप्लाई नहीं किया है उनके पास बस आज भर का मौका है फौरन आधिकारिक वेबसाइट gate. iitkgp. ac. in पर जाकर आवेदन करें. हालांकि लेट फीस का भुगतान कर 1 अक्टूबर तक आवेदन किया जा सकता है. सामान्य उम्मीदवारों के लिए GATE 2022 परीक्षा शुल्क 1500 रुपये है और विलंब शुल्क के साथ यह 2000 रुपये है और आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए नियमित अवधि में आवेदन शुल्क 750 रुपये और लेट फीस के साथ यह 1250 रुपये है.
गौरतलब है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर (IIT खड़गपुर) 5, 6, 12 और 13 फरवरी 2022 को GATE 2022 परीक्षा आयोजित करेगा और परिणाम 17 मार्च को घोषित किए जाएंगे.
जो छात्र GATE 2022 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें वर्तमान में किसी भी अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम के थर्ड ईयर या उच्चतर वर्षों में अध्ययनरत होना चाहिए. जिन छात्रों ने पहले ही इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में सरकार द्वारा अप्रूव्ड कोई डिग्री कोर्स पूरा कर लिया है, वे भी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं.
GATE 2022 परीक्षा तीन घंटे की अवधि के लिए आयोजित की जाएगी और इसमें मल्टीपल चॉइस प्रश्न (MCQ) बेस्ड प्रश्न और मल्टीपल सिलेक्ट प्रश्न (MSQ) या न्यूमेरिकल आंसर टाइप (NAT) प्रश्न शामिल होंगे. पेपर कुल 100 मार्क्स का होगा.
IIT खड़गपुर 3 जनवरी को GATE 2022 के एडमिट कार्ड जारी करेगा, छात्र एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और उस पर सभी रेलिवेंट डिटेल्स चेक कर सकते हैं. उम्मीदवार इस बात का ध्यान रखें कि GATE 2022 से संबंधित सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएगी. प्रवेश पत्र डाक द्वारा नहीं भेजे जाएंगे और कोई भी आवेदन पत्र ऑनलाइन आवेदन के बजाय किसी अन्य माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा.
Education Loan Information:
|
GATE दो हज़ार बाईस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चौबीस सितंबर को यानी आज समाप्त हो रही है. जिन छात्रों ने अभी तक अप्लाई नहीं किया है उनके पास बस आज भर का मौका है फौरन आधिकारिक वेबसाइट gate. iitkgp. ac. in पर जाकर आवेदन करें. हालांकि लेट फीस का भुगतान कर एक अक्टूबर तक आवेदन किया जा सकता है. सामान्य उम्मीदवारों के लिए GATE दो हज़ार बाईस परीक्षा शुल्क एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये है और विलंब शुल्क के साथ यह दो हज़ार रुपयापये है और आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए नियमित अवधि में आवेदन शुल्क सात सौ पचास रुपयापये और लेट फीस के साथ यह एक हज़ार दो सौ पचास रुपयापये है. गौरतलब है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर पाँच, छः, बारह और तेरह फरवरी दो हज़ार बाईस को GATE दो हज़ार बाईस परीक्षा आयोजित करेगा और परिणाम सत्रह मार्च को घोषित किए जाएंगे. जो छात्र GATE दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें वर्तमान में किसी भी अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम के थर्ड ईयर या उच्चतर वर्षों में अध्ययनरत होना चाहिए. जिन छात्रों ने पहले ही इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में सरकार द्वारा अप्रूव्ड कोई डिग्री कोर्स पूरा कर लिया है, वे भी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं. GATE दो हज़ार बाईस परीक्षा तीन घंटे की अवधि के लिए आयोजित की जाएगी और इसमें मल्टीपल चॉइस प्रश्न बेस्ड प्रश्न और मल्टीपल सिलेक्ट प्रश्न या न्यूमेरिकल आंसर टाइप प्रश्न शामिल होंगे. पेपर कुल एक सौ मार्क्स का होगा. IIT खड़गपुर तीन जनवरी को GATE दो हज़ार बाईस के एडमिट कार्ड जारी करेगा, छात्र एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और उस पर सभी रेलिवेंट डिटेल्स चेक कर सकते हैं. उम्मीदवार इस बात का ध्यान रखें कि GATE दो हज़ार बाईस से संबंधित सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएगी. प्रवेश पत्र डाक द्वारा नहीं भेजे जाएंगे और कोई भी आवेदन पत्र ऑनलाइन आवेदन के बजाय किसी अन्य माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा. Education Loan Information:
|
ग्वालियर। शहर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मण तलैया पर एक 17 वर्षीय किशोरी ने अज्ञात कारणों के चलते घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह उसका शव घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार लक्ष्मण तलैया पर निवासी ठाकुरदास की पुत्री प्रियंका ने घर में स्थित कमरे में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन मंगलवार सुबह कमरे में गए तो घटना का पता चला। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव फंदे से उतारा। पंचनामा बनाकर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया। पुलिस को कमरे से सुसाइड नोट नहीं मिला। मृतका के परिजनों से पुलिस पूछताछ कर रही है।
|
ग्वालियर। शहर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मण तलैया पर एक सत्रह वर्षीय किशोरी ने अज्ञात कारणों के चलते घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह उसका शव घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार लक्ष्मण तलैया पर निवासी ठाकुरदास की पुत्री प्रियंका ने घर में स्थित कमरे में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन मंगलवार सुबह कमरे में गए तो घटना का पता चला। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव फंदे से उतारा। पंचनामा बनाकर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया। पुलिस को कमरे से सुसाइड नोट नहीं मिला। मृतका के परिजनों से पुलिस पूछताछ कर रही है।
|
यह तो वैज्ञानिक भी मान ही चुके हैं कि भारतीय वेद दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथ हैं। इन्हीं ग्रंथों में एक नाम है आयुर्वेद। आयुर्वेद की एक संहिता का नाम है सुश्रुत संहिता। सुश्रुत, धनवंतरी के शिष्य थे। धनवंतरी मतलब स्वास्थ्य के देवता। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को लिपिबद्ध किया। यानी उसके डिसिप्लिन तैयार किए। जिसे सुश्रुत संहिता कहा गया। सुश्रुत संहिता में आंख-नाक-कान और गले के ऑप्रेशन, हड्डियों के ऑप्रेशन, अंग प्रत्यारोपण (ट्रांस्पलांट), गर्भाश्य के ऑप्रेशन जैसे तमाम सर्जरीज के बारे में विस्तार से बताया गया है। भारत की इस ज्ञान परंपरा को मिथ (Myth) बताकर झुठलाया जाता रहा है। लेकिन अब इंडोनेशिया में रेडियो कॉर्बन डेटिंग एक कंकाल की पड़ताल की गई तो पता चला कि 31 हजार साल पहले से इंसान सर्जरी करना जानता था।
इंडोनेशिया के बारे में किसी को ज्यादा बताने की जरूरत नहीं कि वहां राम और रामायण आज भी पूजे जाते हैं। बौद्ध धर्म तो सम्राट अशोक के बाद वहां पनपा। कहने का मतलब यह कि इंडोनेशिया भारत का ही अंग था। अब इंडोनेशिया की एक गुफा में पुरातत्वविदों को एक कंकाल मिला है जो मेडिकल हिस्ट्री को बदल सकता है। रेडियो कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 31,000 हजार साल पहले पूर्वी कालीमंतन प्रांत में लियांग तेबो गुफा में ये कंकाल दफन किया गया था।
खैर, जब किसी का हाथ या पैर खराब हो जाता है या एक्सीडेंट या बीमारी से बेकार होता है, इस दौरान डॉक्टर क्या करते हैं? उसे काटकर शरीर से अलग कर देते हैं। मगर ये काम सबसे पहले कब हुआ था इस बारे में जानकर आपको इसपर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल होगा कि 31 हजार साल पहले एक बच्चे का पैर काटकर अलग किया गया था। जी हां, सही सुना इसे उस समय के एक्सपर्ट सर्जन ने बॉर्नियो (Borneo) में किया था। यह घटना पाषाण युग (Stone Age) की है।
किसका का है ये कंकाल?
ये कंकाल एक महिला का है या पुरुष का इसके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन शोधकर्ताओं को इस कंकाल की खोज के दौरान एक हैरान करने वाली चीज मिली है। जर्नल नेचर में छपे शोध में उन्होंने पाया कि इस कंकाल में बायां पैर नहीं है। शोध से पता चला है कि किशोर अवस्था से पहले ही इसका पैर बेहद सावधानी और सफाई के साथ काट दिया गया था। 19 से 21 साल की उम्र में अज्ञात कारणों से इसकी मौत हो गई।
साल 2020 में भी ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पुरातत्वविदों को एक पूरा कंकाल मिला था, जिसमें सर्जिकल कौशल का पता चला था। ये शुरुआती रेकॉर्ड हैं जो पाषाण काल के लोगों के प्रति हमारी समझ को एक दम बदल देते हैं। विशेषज्ञों का मानना था कि पिछले 10 हजार साल में खेती शुरु करने और स्थायी बस्तियों में रहने से पहले इंसानों के पास चिकित्सा या कठिन ऑपरेशन से जुड़ा ज्ञान नहीं था। अध्ययन में कहा गया कि इस खोज से पहले अंग काटने से जुड़ा सबसे पुराना कंकाल सात हजार साल पुराना था। ये फ्रांस में है, जिसके हाथ को कोहनी के ऊपर से काटा गया था।
ये भी पढ़ेः Area 51 में दिखा रहस्यमयी एयरक्राफ्ट, एलियन के आने का संकेत?
ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय के शोधकर्ता टिम मैलोनी ने बताया कि महज 100 साल पहले ही सर्जिकल तरीके से अंगों को काटना पश्चिम में आदर्श बना। इससे पहले अंगों को काटने के दौरान ज्यादा खून बहने, इनफेक्शन या शॉक से ही लोगों की मौत जाती थी। शोध ने आगे बताया कहा कि इंडोनेशिया में मिले कंकाल का पैर हजारों साल पहले बचपन में काटा गया था। इसके बावजूद वह छह से 9 वर्ष तक जिंदा रहा और उसे कोई इन्फेक्शन नहीं हुआ।
|
यह तो वैज्ञानिक भी मान ही चुके हैं कि भारतीय वेद दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथ हैं। इन्हीं ग्रंथों में एक नाम है आयुर्वेद। आयुर्वेद की एक संहिता का नाम है सुश्रुत संहिता। सुश्रुत, धनवंतरी के शिष्य थे। धनवंतरी मतलब स्वास्थ्य के देवता। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को लिपिबद्ध किया। यानी उसके डिसिप्लिन तैयार किए। जिसे सुश्रुत संहिता कहा गया। सुश्रुत संहिता में आंख-नाक-कान और गले के ऑप्रेशन, हड्डियों के ऑप्रेशन, अंग प्रत्यारोपण , गर्भाश्य के ऑप्रेशन जैसे तमाम सर्जरीज के बारे में विस्तार से बताया गया है। भारत की इस ज्ञान परंपरा को मिथ बताकर झुठलाया जाता रहा है। लेकिन अब इंडोनेशिया में रेडियो कॉर्बन डेटिंग एक कंकाल की पड़ताल की गई तो पता चला कि इकतीस हजार साल पहले से इंसान सर्जरी करना जानता था। इंडोनेशिया के बारे में किसी को ज्यादा बताने की जरूरत नहीं कि वहां राम और रामायण आज भी पूजे जाते हैं। बौद्ध धर्म तो सम्राट अशोक के बाद वहां पनपा। कहने का मतलब यह कि इंडोनेशिया भारत का ही अंग था। अब इंडोनेशिया की एक गुफा में पुरातत्वविदों को एक कंकाल मिला है जो मेडिकल हिस्ट्री को बदल सकता है। रेडियो कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इकतीस,शून्य हजार साल पहले पूर्वी कालीमंतन प्रांत में लियांग तेबो गुफा में ये कंकाल दफन किया गया था। खैर, जब किसी का हाथ या पैर खराब हो जाता है या एक्सीडेंट या बीमारी से बेकार होता है, इस दौरान डॉक्टर क्या करते हैं? उसे काटकर शरीर से अलग कर देते हैं। मगर ये काम सबसे पहले कब हुआ था इस बारे में जानकर आपको इसपर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल होगा कि इकतीस हजार साल पहले एक बच्चे का पैर काटकर अलग किया गया था। जी हां, सही सुना इसे उस समय के एक्सपर्ट सर्जन ने बॉर्नियो में किया था। यह घटना पाषाण युग की है। किसका का है ये कंकाल? ये कंकाल एक महिला का है या पुरुष का इसके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन शोधकर्ताओं को इस कंकाल की खोज के दौरान एक हैरान करने वाली चीज मिली है। जर्नल नेचर में छपे शोध में उन्होंने पाया कि इस कंकाल में बायां पैर नहीं है। शोध से पता चला है कि किशोर अवस्था से पहले ही इसका पैर बेहद सावधानी और सफाई के साथ काट दिया गया था। उन्नीस से इक्कीस साल की उम्र में अज्ञात कारणों से इसकी मौत हो गई। साल दो हज़ार बीस में भी ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पुरातत्वविदों को एक पूरा कंकाल मिला था, जिसमें सर्जिकल कौशल का पता चला था। ये शुरुआती रेकॉर्ड हैं जो पाषाण काल के लोगों के प्रति हमारी समझ को एक दम बदल देते हैं। विशेषज्ञों का मानना था कि पिछले दस हजार साल में खेती शुरु करने और स्थायी बस्तियों में रहने से पहले इंसानों के पास चिकित्सा या कठिन ऑपरेशन से जुड़ा ज्ञान नहीं था। अध्ययन में कहा गया कि इस खोज से पहले अंग काटने से जुड़ा सबसे पुराना कंकाल सात हजार साल पुराना था। ये फ्रांस में है, जिसके हाथ को कोहनी के ऊपर से काटा गया था। ये भी पढ़ेः Area इक्यावन में दिखा रहस्यमयी एयरक्राफ्ट, एलियन के आने का संकेत? ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय के शोधकर्ता टिम मैलोनी ने बताया कि महज एक सौ साल पहले ही सर्जिकल तरीके से अंगों को काटना पश्चिम में आदर्श बना। इससे पहले अंगों को काटने के दौरान ज्यादा खून बहने, इनफेक्शन या शॉक से ही लोगों की मौत जाती थी। शोध ने आगे बताया कहा कि इंडोनेशिया में मिले कंकाल का पैर हजारों साल पहले बचपन में काटा गया था। इसके बावजूद वह छह से नौ वर्ष तक जिंदा रहा और उसे कोई इन्फेक्शन नहीं हुआ।
|
"मैंने देखा कि रोग सारी दुनियापर छा गया है, और चरम (आत्मक पारलौकिक) सदाचारके रास्ते बंद हो गए हैं। जो विद्वान् मार्ग समझानेवाले थे, उनसे दुनिया खाली होती जा रही है । जो रह गए हैं वह नामके विद्वान् हैं; निजी स्वार्थों में फँसे हुए हैं; और उन्होंने सारी दुनियाको यह विश्वास दिला रखा है, कि विद्या सिर्फ तीन चीजोंका नाम है, शास्त्रार्थ, कथा - उपदेश और फ़तवा ( " व्यवस्था " ) । रही आखिरत ( = परलोक ) की विद्या वह तो संसारसे उठ गई है, और लोग उसको भूल-भुला चुके हैं । "
इसी रोगको दूर करने या "भूल-भुलाई" (मृत) विद्या संजीवन देनेके लिए ग़ज़ालीने "विद्यासंजीवनी" लिखनेके लिए लेखनी उठाई ।
(घ) ग्रन्थकी विशेषता --शिब्लीने "विद्यासंजीवनी" की कई विशेषतायें विस्तारपूर्वक लिखी हैं; उनके बारेमें संक्षेपमें कहा जा सकता है( १ ) ग्रंथकारने विद्वानों और साधारण पाठकों दोनोंकी समझ में आनेके ख्यालसे बहुत सीधी-सादी भाषा ( अरबी ) का प्रयोग किया है; साथ ही उसके दार्शनिक महत्त्वको कम नहीं होने दिया है। मस्कवियाकी किताब "अत्-तहारत् " को पढ़नेके लिए पहिले भाषाकी दुरारोह दीवारको फाँदना पड़ेगा, तब पर पहुँचने के लिए मग़ज़- पच्ची करनी होगी - वह नारियलके भीतर बंद सूखी गरी हैं; किन्तु ग़जालीकी पुस्तक पतले छिलकोंका लँगड़ा आम है । ( २ ) इसमें अधिकारिभेद -- गृहस्थ और गृहत्यागी ( = अविवाहित रहनेवाले सूफी) आदि--का पूरा ख्याल रखकर उनके योग्य आचार-नियमोंकी शिक्षा दी गई है । ( ३ ) उठनेबैठने, खाने-पीने जैसे साधारण आचारोंपर भी व्यापक दृष्टिसे लिखा गया है । (४) क्रोध, आकांक्षा आदिको सर्वथा त्यागके उपदेशसे मनुष्यकी उपयोगी शक्तियोंको कमजोर कर जो निराशावाद, अकर्मण्यता फैलाई जाती है, उसके खिलाफ काफी युक्तियुक्त बहस की गई है। यहाँ हम पिछली दो बातोंके कुछ नमूने पेश करते हैंZŠ Mk
९. (साधारण सदाचार ) - मेजपर खाना खाना, छलनी ( से आटा छानना ), अश्नान ( = साबुनका काम देनेवाली घास) और पेट भर
|
"मैंने देखा कि रोग सारी दुनियापर छा गया है, और चरम सदाचारके रास्ते बंद हो गए हैं। जो विद्वान् मार्ग समझानेवाले थे, उनसे दुनिया खाली होती जा रही है । जो रह गए हैं वह नामके विद्वान् हैं; निजी स्वार्थों में फँसे हुए हैं; और उन्होंने सारी दुनियाको यह विश्वास दिला रखा है, कि विद्या सिर्फ तीन चीजोंका नाम है, शास्त्रार्थ, कथा - उपदेश और फ़तवा । रही आखिरत की विद्या वह तो संसारसे उठ गई है, और लोग उसको भूल-भुला चुके हैं । " इसी रोगको दूर करने या "भूल-भुलाई" विद्या संजीवन देनेके लिए ग़ज़ालीने "विद्यासंजीवनी" लिखनेके लिए लेखनी उठाई । ग्रन्थकी विशेषता --शिब्लीने "विद्यासंजीवनी" की कई विशेषतायें विस्तारपूर्वक लिखी हैं; उनके बारेमें संक्षेपमें कहा जा सकता है ग्रंथकारने विद्वानों और साधारण पाठकों दोनोंकी समझ में आनेके ख्यालसे बहुत सीधी-सादी भाषा का प्रयोग किया है; साथ ही उसके दार्शनिक महत्त्वको कम नहीं होने दिया है। मस्कवियाकी किताब "अत्-तहारत् " को पढ़नेके लिए पहिले भाषाकी दुरारोह दीवारको फाँदना पड़ेगा, तब पर पहुँचने के लिए मग़ज़- पच्ची करनी होगी - वह नारियलके भीतर बंद सूखी गरी हैं; किन्तु ग़जालीकी पुस्तक पतले छिलकोंका लँगड़ा आम है । इसमें अधिकारिभेद -- गृहस्थ और गृहत्यागी आदि--का पूरा ख्याल रखकर उनके योग्य आचार-नियमोंकी शिक्षा दी गई है । उठनेबैठने, खाने-पीने जैसे साधारण आचारोंपर भी व्यापक दृष्टिसे लिखा गया है । क्रोध, आकांक्षा आदिको सर्वथा त्यागके उपदेशसे मनुष्यकी उपयोगी शक्तियोंको कमजोर कर जो निराशावाद, अकर्मण्यता फैलाई जाती है, उसके खिलाफ काफी युक्तियुक्त बहस की गई है। यहाँ हम पिछली दो बातोंके कुछ नमूने पेश करते हैंZŠ Mk नौ. - मेजपर खाना खाना, छलनी , अश्नान और पेट भर
|
पुष्पा 2 अपडेटः अल्लू अर्जुन के प्रशंसक फिल्म 'पुष्पाः द रूल' का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब फिल्म का पहला भाग रिलीज हुआ तो 'पुष्पा' का बुखार पूरे देश के सिर चढ़कर बोल रहा था। लोगों को फिल्म के गाने, डायलॉग्स और हर सीन याद आ गए। इस फिल्म से फिल्म के हीरो अल्लू अर्जुन की फैन फॉलोइंग कई गुना बढ़ गई है. वहीं अब खबर है कि बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह अपने अगले पार्ट में एंट्री करने वाले हैं.
बता दें कि इन दिनों फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है. निर्माताओं ने पिछले दिनों फिल्म से एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें देखा गया था कि पुष्पा भाग गई है और देश भर की पुलिस उसकी तलाश कर रही है। मेकर्स ने इस वीडियो के जरिए फैंस को यह भी जानकारी दी कि फिल्म इस साल के अंत तक रिलीज हो सकती है। वहीं, अब एक अपडेट है कि फिल्म में बॉलीवुड और साउथ का शानदार कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा। ताकि ये सिर्फ साउथ ही नहीं बल्कि पूरे देश की फिल्म लगे।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बॉलीवुड के एनर्जी किंग रणवीर सिंह 'पुष्पा 2' में कैमियो करने वाले हैं. फिल्म में उनका किरदार छोटा लेकिन बेहद दमदार होगा। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि रणवीर लंबे समय से फ्लॉप फिल्में दे रहे हैं तो इस फिल्म से वो अपने करियर में एक नया मोड़ भी लेते दिख रहे हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में शूटिंग के दौरान फिल्म के विलेन 'भंवर सिंह शेखावत' का एक लुक सामने आया था. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। तस्वीर में अभिनेता फिल्म के सेट पर नजर आ रहे हैं।
|
पुष्पा दो अपडेटः अल्लू अर्जुन के प्रशंसक फिल्म 'पुष्पाः द रूल' का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब फिल्म का पहला भाग रिलीज हुआ तो 'पुष्पा' का बुखार पूरे देश के सिर चढ़कर बोल रहा था। लोगों को फिल्म के गाने, डायलॉग्स और हर सीन याद आ गए। इस फिल्म से फिल्म के हीरो अल्लू अर्जुन की फैन फॉलोइंग कई गुना बढ़ गई है. वहीं अब खबर है कि बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह अपने अगले पार्ट में एंट्री करने वाले हैं. बता दें कि इन दिनों फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है. निर्माताओं ने पिछले दिनों फिल्म से एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें देखा गया था कि पुष्पा भाग गई है और देश भर की पुलिस उसकी तलाश कर रही है। मेकर्स ने इस वीडियो के जरिए फैंस को यह भी जानकारी दी कि फिल्म इस साल के अंत तक रिलीज हो सकती है। वहीं, अब एक अपडेट है कि फिल्म में बॉलीवुड और साउथ का शानदार कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा। ताकि ये सिर्फ साउथ ही नहीं बल्कि पूरे देश की फिल्म लगे। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बॉलीवुड के एनर्जी किंग रणवीर सिंह 'पुष्पा दो' में कैमियो करने वाले हैं. फिल्म में उनका किरदार छोटा लेकिन बेहद दमदार होगा। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि रणवीर लंबे समय से फ्लॉप फिल्में दे रहे हैं तो इस फिल्म से वो अपने करियर में एक नया मोड़ भी लेते दिख रहे हैं. गौरतलब है कि हाल ही में शूटिंग के दौरान फिल्म के विलेन 'भंवर सिंह शेखावत' का एक लुक सामने आया था. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। तस्वीर में अभिनेता फिल्म के सेट पर नजर आ रहे हैं।
|
गंगापुर-वजीरपुर सड़क मार्ग पर सेवा गांव के पास रविवार दोपहर ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची वजीरपुर थाना पुलिस मृतक का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गंगापुर सिटी पुलिस चौकी के पास वार्ड नंबर 24 निवासी उमर खां (42) पुत्र मन्नू खां दोपहर करीब 12 बजे गंगापुर सिटी से वजीरपुर में एक शादी समारोह में बाइक से जा रहा था। इस दौरान सेवा गांव के पास तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उमर खां की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। वहीं सूचना मिलने पर वजीरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया है। वजीरपुर थाने के हेड कॉन्स्टेवल जितेन्द्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
गंगापुर-वजीरपुर सड़क मार्ग पर सेवा गांव के पास रविवार दोपहर ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची वजीरपुर थाना पुलिस मृतक का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गंगापुर सिटी पुलिस चौकी के पास वार्ड नंबर चौबीस निवासी उमर खां पुत्र मन्नू खां दोपहर करीब बारह बजे गंगापुर सिटी से वजीरपुर में एक शादी समारोह में बाइक से जा रहा था। इस दौरान सेवा गांव के पास तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उमर खां की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। वहीं सूचना मिलने पर वजीरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया है। वजीरपुर थाने के हेड कॉन्स्टेवल जितेन्द्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के जिला सलाहकार दीपक कुमार रविवार को स्थानीय चौसा पंचायत में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद गंगा घाटों का निरीक्षण कर वहां का जायजा लिया। उन्होंने चौसा में स्थित महादेवा घाट और श्मशान घाट पर पहुंच कर मृत शरीर के दाह संस्कार के बारे में लोगों की राय जानी। सर्वे के दौरान श्मशान घाट पर अपने परिजनों के शवों को यहां जलानें के लिए पहुंचे दूरदराज के लोगों ने बताया कि हिन्दू धर्म में मृत शरीर को जलाने की मान्यता है। प्रवाहित करने का कोई रिवाज नहीं है। इस दौरान कैमूर जिले के नुआंव प्रखण्ड और राजपुर प्रखण्ड के देवढ़िया गांव से आए लोगों ने श्मशान घाट और महादेवा घाट पर बताया कि गंगा में शवों का प्रवाह तो कदापि करना ही नहीं चाहिए। इससे पवित्र गंगा अपवित्र हो जाती है। इसका असर नदी में रहने वाले जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित होता है। इस सर्वे के दौरान मुखिया पति बृजबिहारी सिंह और पंचायत सचिव नारायण दत्त प्रसाद भी मौजूद थे।
|
ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के जिला सलाहकार दीपक कुमार रविवार को स्थानीय चौसा पंचायत में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद गंगा घाटों का निरीक्षण कर वहां का जायजा लिया। उन्होंने चौसा में स्थित महादेवा घाट और श्मशान घाट पर पहुंच कर मृत शरीर के दाह संस्कार के बारे में लोगों की राय जानी। सर्वे के दौरान श्मशान घाट पर अपने परिजनों के शवों को यहां जलानें के लिए पहुंचे दूरदराज के लोगों ने बताया कि हिन्दू धर्म में मृत शरीर को जलाने की मान्यता है। प्रवाहित करने का कोई रिवाज नहीं है। इस दौरान कैमूर जिले के नुआंव प्रखण्ड और राजपुर प्रखण्ड के देवढ़िया गांव से आए लोगों ने श्मशान घाट और महादेवा घाट पर बताया कि गंगा में शवों का प्रवाह तो कदापि करना ही नहीं चाहिए। इससे पवित्र गंगा अपवित्र हो जाती है। इसका असर नदी में रहने वाले जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित होता है। इस सर्वे के दौरान मुखिया पति बृजबिहारी सिंह और पंचायत सचिव नारायण दत्त प्रसाद भी मौजूद थे।
|
Event : Free Fire Max में गरेना भारतीय सर्वर पर न्यू इवेंट में भारी डिस्काउंट दे रहा है जिसमें प्लेयर्स एक्सक्लूसिव ऑउटफिट को खरीद सकते हैं। ये बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं और इन सभी को खरीदने के लिए अनेक डायमंड्स खर्च करने पड़ते हैं।
हालांकि, Free Fire Max में कम कीमत पर आइटम प्राप्त करना हर कोई पसंद करता है। इस वजह से प्लेयर्स इस तरह के इवेंट में भाग लेकर स्टाइलिश ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैं। ये ऑफर सिर्फ एक दिन के लिए मौजदू रहता है। प्लेयर्स 16 दिसंबर 2022 को ही इस इवेंट का यूज कर सकते हैं।
Free Fire Max में कम कीमत पर फैशन बंडल्स कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
Free Fire Max में इस सेक्शन के अंदर 50% डिस्काउंट पर ऑउटफिट मिल रहे हैं। इसके अलावा प्लेयर्स कूपन का उपयोग करके अच्छा डिस्काउंट प्राप्त कर सकते हैं।
इस इवेंट के अंदर मिलने वाले सभी डिस्काउंट ऑउटफिट की लिस्ट दी गई हैः
Free Fire Max में डिस्काउंट पर ऑउटफिट कैसे खरीदें?
गेमर्स नीचे दी गई स्टेप्स को फॉलो करके डिस्काउंट में ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैंः
स्टेप 1: Free Fire Max गेम को ओपन करें। उसके बाद में खिलाड़ियों को लेफ्ट साइड स्टोर वाली बटन पर टच करें।
स्टेप 2: उसके बाद राइट साइड बंडल वाले बटन पर क्लिक करें।
स्टेप 3: खिलाड़ियों को पसंद के तौर पर बंडल पर टच करना होगा। परचेस बटन पर क्लिक करें।
स्टेप 4: स्क्रीन पर कीमत दिख जाएगी। उस कीमत के आधार पर पेमेंट करें।
|
Event : Free Fire Max में गरेना भारतीय सर्वर पर न्यू इवेंट में भारी डिस्काउंट दे रहा है जिसमें प्लेयर्स एक्सक्लूसिव ऑउटफिट को खरीद सकते हैं। ये बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं और इन सभी को खरीदने के लिए अनेक डायमंड्स खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि, Free Fire Max में कम कीमत पर आइटम प्राप्त करना हर कोई पसंद करता है। इस वजह से प्लेयर्स इस तरह के इवेंट में भाग लेकर स्टाइलिश ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैं। ये ऑफर सिर्फ एक दिन के लिए मौजदू रहता है। प्लेयर्स सोलह दिसंबर दो हज़ार बाईस को ही इस इवेंट का यूज कर सकते हैं। Free Fire Max में कम कीमत पर फैशन बंडल्स कैसे प्राप्त कर सकते हैं? Free Fire Max में इस सेक्शन के अंदर पचास% डिस्काउंट पर ऑउटफिट मिल रहे हैं। इसके अलावा प्लेयर्स कूपन का उपयोग करके अच्छा डिस्काउंट प्राप्त कर सकते हैं। इस इवेंट के अंदर मिलने वाले सभी डिस्काउंट ऑउटफिट की लिस्ट दी गई हैः Free Fire Max में डिस्काउंट पर ऑउटफिट कैसे खरीदें? गेमर्स नीचे दी गई स्टेप्स को फॉलो करके डिस्काउंट में ऑउटफिट को प्राप्त कर सकते हैंः स्टेप एक: Free Fire Max गेम को ओपन करें। उसके बाद में खिलाड़ियों को लेफ्ट साइड स्टोर वाली बटन पर टच करें। स्टेप दो: उसके बाद राइट साइड बंडल वाले बटन पर क्लिक करें। स्टेप तीन: खिलाड़ियों को पसंद के तौर पर बंडल पर टच करना होगा। परचेस बटन पर क्लिक करें। स्टेप चार: स्क्रीन पर कीमत दिख जाएगी। उस कीमत के आधार पर पेमेंट करें।
|
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद अब सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर विधानपरिषद चुनावों पर है। लेकिन इस बार रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल, फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में एमएलसी अक्षय प्रताप को न्यायिक कस्टडी में लिया गया है। अब इस मामले में अदालत ने सजा के लिए 23 मार्च की तारीख मुकर्रर की है।
अक्षय प्रताप को रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का करीबी माना जाता है। वहीं, एमएलसी चुनाव में अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी को राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि, एमएलसी चुनाव के ऐन वक्त पर कोर्ट ने फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में एमएलसी अक्षय प्रताप को दोषी करार दिया था। जिसके चलते उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा था।
इसी मामले में सजा के एलान के लिए अक्षय प्रताप सिंह, मंगलवार यानी 22 मार्च को एमपी एमएलए कोर्ट में हाजिर हुए थे। अब इस मामले में अदालत ने सजा के लिए 23 मार्च की तारीख मुकर्रर की है। ऐसे में गोपाल जी को एक दिन की न्यायिक हिरासत में लिया गया है। माना जा रहा है कि यदि मामले में अक्षय प्रताप को सजा होती है तो उनके विधानपरिषद का चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग सकता है।
बता दें कि, एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी पर सितंबर 1997 में फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में केस दर्ज हुआ था। तब तत्कालीन कोतवाल ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप था कि गोपालजी ने प्रतापगढ़ के फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस हासिल किया था। जबकि अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल अमेठी के जामो के रहने वाले हैं। फिर इसी मामले में उन्हें कोर्ट ने दोषी करार भी दिया था।
अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी की अपने क्षेत्र में अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है। ज्ञात हो कि गोपालजी प्रतापगढ़ में तीन बार से एमएलसी और एक बार सांसद (2004 से 2009 तक) रह चुके हैं। पिछली बार अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी समाजवादी पार्टी के टिकट पर निर्विरोध एमएलसी निर्वाचित हुए थे।
|
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद अब सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर विधानपरिषद चुनावों पर है। लेकिन इस बार रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के करीबी एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल, फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में एमएलसी अक्षय प्रताप को न्यायिक कस्टडी में लिया गया है। अब इस मामले में अदालत ने सजा के लिए तेईस मार्च की तारीख मुकर्रर की है। अक्षय प्रताप को रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का करीबी माना जाता है। वहीं, एमएलसी चुनाव में अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी को राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि, एमएलसी चुनाव के ऐन वक्त पर कोर्ट ने फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में एमएलसी अक्षय प्रताप को दोषी करार दिया था। जिसके चलते उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा था। इसी मामले में सजा के एलान के लिए अक्षय प्रताप सिंह, मंगलवार यानी बाईस मार्च को एमपी एमएलए कोर्ट में हाजिर हुए थे। अब इस मामले में अदालत ने सजा के लिए तेईस मार्च की तारीख मुकर्रर की है। ऐसे में गोपाल जी को एक दिन की न्यायिक हिरासत में लिया गया है। माना जा रहा है कि यदि मामले में अक्षय प्रताप को सजा होती है तो उनके विधानपरिषद का चुनाव लड़ने पर ग्रहण लग सकता है। बता दें कि, एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी पर सितंबर एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में केस दर्ज हुआ था। तब तत्कालीन कोतवाल ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप था कि गोपालजी ने प्रतापगढ़ के फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस हासिल किया था। जबकि अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल अमेठी के जामो के रहने वाले हैं। फिर इसी मामले में उन्हें कोर्ट ने दोषी करार भी दिया था। अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी की अपने क्षेत्र में अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है। ज्ञात हो कि गोपालजी प्रतापगढ़ में तीन बार से एमएलसी और एक बार सांसद रह चुके हैं। पिछली बार अक्षय प्रताप उर्फ गोपालजी समाजवादी पार्टी के टिकट पर निर्विरोध एमएलसी निर्वाचित हुए थे।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.