raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
दौसा :राजस्थान पुलिस ने दौसा गैंग रेप और मर्डर के मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, राष्ट्रीय महिला आयोग और अनेक सामाजिक संगठनों ने यह सवाल उठाए हैं कि आखिर इतने बड़े घटनाक्रम को केवल दो ही आरोपी कैसे अंजाम दे सकते हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने दौसा पुलिस पर तथ्य छुपाने के भी आरोप लगाए थे। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दौसा के एसपी राजकुमार गुप्ता और जांच अधिकारी डीएसपी सत्यनारायण को दिल्ली तलब किया। आयोग की टीम ने एसपी व जांच अधिकारी से अनेक सवाल-जवाब किए।
आपको बता दें कि 23 अप्रैल को जयपुर के जगतपुरा से अपने पीहर जा रही एक महिला बस्सी से बस में चढ़ी और सोनड बस स्टैंड पर उतरी थी। महिला का पीहर करीब 7 किलोमीटर दूर था इसलिए महिला ने एक कार चालक से लिफ्ट ले ली। कार में मौजूद एक बच्चा अपने गांव सिसोदिया में उतर गया। इसके बाद दोनों आरोपियों की नीयत खराब हो गई और वो महिला को सिसोदिया की नदी ले गए, जहां उसके साथ दरिंदगी की गई। महिला ने दरिंदों को घर जाकर सबको बताने की धमकी दी तो आरोपियों ने महिला के दुपट्टे से ही उसका गला दबाकर हत्या कर दी।
आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल लिया। इसके बाद आरोपी महिला के शव बस्सी क्षेत्र में नईनाथ इलाके में ले गए और करीब 50 किलोमीटर तक शव लेकर घूमते रहे। इसी दौरान आरोपियों को बस्सी इलाके के एक गांव में सुनसान जगह पर कुआँ दिखाई दिया तो आरोपियों ने पीड़िता के शव को कुएं में फेंक दिया। इधर, मृतका के परिजनों ने 24 अप्रैल को रामगढ़ पचवारा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस को पहले सबूत के रूप में रामगढ़ पचवारा सोनड बस स्टैंड से एक सीसीटीवी फुटेज मिला। इस फुटेज में महिला और एक बच्चा कार में बैठता हुआ नजर आया। पुलिस ने उस बच्चे की तलाशकर कालू मीणा को हिरासत में लिया और उसके बाद संजू मीणा भी गिरफ्तार हो गया।
भाजपा नेता सतीश पूनिया व राजेंद्र सिंह राठौड़ आदि ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को कानून व्यवस्था के मामले में फेल बताया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी 28 अप्रैल को दौसा का दौरा किया और पुलिस पर गम्भीर आरोप लगाए। आयोग ने 4 मई को एसपी व जांच अधिकारी को दिल्ली तलब किया और अनेक निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि गैंगरेप व मर्डर के मामले में अब तक दो ही आरोपी सामने आए हैं, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया है। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी।
|
दौसा :राजस्थान पुलिस ने दौसा गैंग रेप और मर्डर के मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, राष्ट्रीय महिला आयोग और अनेक सामाजिक संगठनों ने यह सवाल उठाए हैं कि आखिर इतने बड़े घटनाक्रम को केवल दो ही आरोपी कैसे अंजाम दे सकते हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने दौसा पुलिस पर तथ्य छुपाने के भी आरोप लगाए थे। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दौसा के एसपी राजकुमार गुप्ता और जांच अधिकारी डीएसपी सत्यनारायण को दिल्ली तलब किया। आयोग की टीम ने एसपी व जांच अधिकारी से अनेक सवाल-जवाब किए। आपको बता दें कि तेईस अप्रैल को जयपुर के जगतपुरा से अपने पीहर जा रही एक महिला बस्सी से बस में चढ़ी और सोनड बस स्टैंड पर उतरी थी। महिला का पीहर करीब सात किलोग्राममीटर दूर था इसलिए महिला ने एक कार चालक से लिफ्ट ले ली। कार में मौजूद एक बच्चा अपने गांव सिसोदिया में उतर गया। इसके बाद दोनों आरोपियों की नीयत खराब हो गई और वो महिला को सिसोदिया की नदी ले गए, जहां उसके साथ दरिंदगी की गई। महिला ने दरिंदों को घर जाकर सबको बताने की धमकी दी तो आरोपियों ने महिला के दुपट्टे से ही उसका गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल लिया। इसके बाद आरोपी महिला के शव बस्सी क्षेत्र में नईनाथ इलाके में ले गए और करीब पचास किलोग्राममीटर तक शव लेकर घूमते रहे। इसी दौरान आरोपियों को बस्सी इलाके के एक गांव में सुनसान जगह पर कुआँ दिखाई दिया तो आरोपियों ने पीड़िता के शव को कुएं में फेंक दिया। इधर, मृतका के परिजनों ने चौबीस अप्रैल को रामगढ़ पचवारा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस को पहले सबूत के रूप में रामगढ़ पचवारा सोनड बस स्टैंड से एक सीसीटीवी फुटेज मिला। इस फुटेज में महिला और एक बच्चा कार में बैठता हुआ नजर आया। पुलिस ने उस बच्चे की तलाशकर कालू मीणा को हिरासत में लिया और उसके बाद संजू मीणा भी गिरफ्तार हो गया। भाजपा नेता सतीश पूनिया व राजेंद्र सिंह राठौड़ आदि ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को कानून व्यवस्था के मामले में फेल बताया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी अट्ठाईस अप्रैल को दौसा का दौरा किया और पुलिस पर गम्भीर आरोप लगाए। आयोग ने चार मई को एसपी व जांच अधिकारी को दिल्ली तलब किया और अनेक निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि गैंगरेप व मर्डर के मामले में अब तक दो ही आरोपी सामने आए हैं, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया है। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी।
|
नई दिल्ली : कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के चौकीदार वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने नवजोत सिंह सिद्धू पर हमला बोला है. विजयवर्गीय ने कहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू बीजेपी के गंगा से निकलकर कांग्रेस के गटर में गिर गए है.
यह भी पढ़ें :
आपको बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री राफेल डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि चौकीदार का कुत्ता भी चोर निकला है. बताते चले की कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार राफेल डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार पर हमलावर है.
सिद्धू के इस बयान के बाद बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई. विजयवर्गीय के अलावा उन्हीं के पार्टी प्रवक्ता जफर इस्लाम ने सिद्धू को आड़े हाथों लिया और कहा कि कांग्रेस नेता ने जो शब्द प्रयोग किए हैं, वे काफी अपमानजनक हैं.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
|
नई दिल्ली : कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के चौकीदार वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने नवजोत सिंह सिद्धू पर हमला बोला है. विजयवर्गीय ने कहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू बीजेपी के गंगा से निकलकर कांग्रेस के गटर में गिर गए है. यह भी पढ़ें : आपको बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री राफेल डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि चौकीदार का कुत्ता भी चोर निकला है. बताते चले की कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार राफेल डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार पर हमलावर है. सिद्धू के इस बयान के बाद बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई. विजयवर्गीय के अलावा उन्हीं के पार्टी प्रवक्ता जफर इस्लाम ने सिद्धू को आड़े हाथों लिया और कहा कि कांग्रेस नेता ने जो शब्द प्रयोग किए हैं, वे काफी अपमानजनक हैं. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
|
अरविंद केजरीवाल ने ऑटो वालों के साथ बैठक में कहा कि ऑटो चालक अपनी गाड़ी के पीछे उनकी पार्टी के पोस्टर लगाएँ और हर जगह उनका प्रचार करें।
26/11 के बाद एक्शन नहीं लेना, कमजोरी की निशानीः कॉन्ग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने मनमोहन-सोनिया दोनों पर साधा निशाना?
कॉन्ग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने एक किताब लिखी है। खबर यह है कि लेखक ने अपनी ही पार्टी की इस किताब में खबर ले ली है।
प्रोफेसर कामरान छात्राओं को अपना निशाना बनाता था। वह पहले उन्हें अपने कमरे में ले जाता था और फिर वहाँ उन्हें नशीला पदार्थ देकर उनके साथ अश्लील हरकत करता था।
भारतीय रेलवे ने ट्वीट कर कहा, "रामायण एक्सप्रेस सर्किट स्पेशल ट्रेन के सर्विस स्टाफ की पेशेवर पोशाक को पूरी तरह से बदल दिया गया है। असुविधा के लिए खेद है। "
गोरखनाथ मंदिर 47 शैक्षिक और स्वास्थ्य संस्थान चलाता है, जहाँ सभी जाति-मजहबों के ज़रूरतमंदों की मदद होती है। जानिए पूर्वांचल की राजनीति और योगी आदित्यनाथ सहित यहाँ के अन्य महंतों के चुनावी इतिहास के बारे में।
विवादित शायर मुनव्वर राना ने कहा कि ये काम तो जिन्ना का था कि उसने देश के दो टुकड़े करवा दिए। आपका काम जोड़ना है न कि तोड़ना।
मलिक ने कहा, "जनरल वैद्य को सिखों ने पुणे में मारा, जनरल डायर को लंदन में मारा। मैंने इनसे कहा था कि आप इनके धैर्य की परीक्षा मत लो। "
क्या 'लाल सिंह चड्ढा' के अभिनेता आमिर खान फातिमा सना शेख के साथ अपनी तीसरी शादी की योजना बना रहे हैं? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यही कहना है।
मुस्लिम समाज औरों से धर्म निरपेक्षता की उम्मीद करता है पर खुद धर्मनिरपेक्ष होने के लिए तैयार नहीं है। बोर्ड के प्रस्ताव में केवल मुस्लिम समाज के ईशों की निंदा की बात की गई है।
दिलीप सिंह जूदेव की मौत के बाद से आदिवासियों की घर वापसी के अभियान को प्रबल प्रताप आगे बढ़ा रहे हैं। वे कहते हैं- न कन्वर्ट होंगे, न किसी को करने देंगे।
|
अरविंद केजरीवाल ने ऑटो वालों के साथ बैठक में कहा कि ऑटो चालक अपनी गाड़ी के पीछे उनकी पार्टी के पोस्टर लगाएँ और हर जगह उनका प्रचार करें। छब्बीस/ग्यारह के बाद एक्शन नहीं लेना, कमजोरी की निशानीः कॉन्ग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने मनमोहन-सोनिया दोनों पर साधा निशाना? कॉन्ग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने एक किताब लिखी है। खबर यह है कि लेखक ने अपनी ही पार्टी की इस किताब में खबर ले ली है। प्रोफेसर कामरान छात्राओं को अपना निशाना बनाता था। वह पहले उन्हें अपने कमरे में ले जाता था और फिर वहाँ उन्हें नशीला पदार्थ देकर उनके साथ अश्लील हरकत करता था। भारतीय रेलवे ने ट्वीट कर कहा, "रामायण एक्सप्रेस सर्किट स्पेशल ट्रेन के सर्विस स्टाफ की पेशेवर पोशाक को पूरी तरह से बदल दिया गया है। असुविधा के लिए खेद है। " गोरखनाथ मंदिर सैंतालीस शैक्षिक और स्वास्थ्य संस्थान चलाता है, जहाँ सभी जाति-मजहबों के ज़रूरतमंदों की मदद होती है। जानिए पूर्वांचल की राजनीति और योगी आदित्यनाथ सहित यहाँ के अन्य महंतों के चुनावी इतिहास के बारे में। विवादित शायर मुनव्वर राना ने कहा कि ये काम तो जिन्ना का था कि उसने देश के दो टुकड़े करवा दिए। आपका काम जोड़ना है न कि तोड़ना। मलिक ने कहा, "जनरल वैद्य को सिखों ने पुणे में मारा, जनरल डायर को लंदन में मारा। मैंने इनसे कहा था कि आप इनके धैर्य की परीक्षा मत लो। " क्या 'लाल सिंह चड्ढा' के अभिनेता आमिर खान फातिमा सना शेख के साथ अपनी तीसरी शादी की योजना बना रहे हैं? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यही कहना है। मुस्लिम समाज औरों से धर्म निरपेक्षता की उम्मीद करता है पर खुद धर्मनिरपेक्ष होने के लिए तैयार नहीं है। बोर्ड के प्रस्ताव में केवल मुस्लिम समाज के ईशों की निंदा की बात की गई है। दिलीप सिंह जूदेव की मौत के बाद से आदिवासियों की घर वापसी के अभियान को प्रबल प्रताप आगे बढ़ा रहे हैं। वे कहते हैं- न कन्वर्ट होंगे, न किसी को करने देंगे।
|
जौनपुर। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता से सम्बंधित विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत पंचायत भवनों में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालित हो जाये। आईजीआरएस के प्रकरणों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि मौके का निरीक्षण अवश्य करें, शिकायकर्ता से अवश्य बात करें। किसी भी दशा में डिफॉल्टर न जाने पाएं। केराकत बीडीओ के द्वारा आईजीआरएस के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर नाराजगी व्यक्त करते मुख्य विकास अधिकारी साई तेजा सीलम को कार्यवाही हेतु निर्देशित किया। आयुष्मान कार्ड के प्रगति की समीक्षा करते हुए सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह को निर्देश दिया कि रोस्टर के हिसाब गाँव मे जा जाकर आयुष्मान कार्ड बनवायें। मुख्यमंत्री सामूहिक योजना के तहत शादियां कराये जाने का निर्देश जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिया। सभी नोडल अधिकारियों को अमृत सरोवर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए और एसडीएम की सहायता से अवैध अतिक्रमण हटवाये जाने का भी निर्देश दिया। पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि गोवंश सड़को पर घूमते न दिखे। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिदिन जनसुनवाई करे और चौपाल एवं समाधान दिवस पर आने वाली जन शिकायतो का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराये। इस दौरान जिलाधिकारी के द्वारा मेडिकल कालेज सहित जनपद में 50 लाख से अधिक लागत की परियोजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया समय से गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कराये जाए। बैठक में पीडी जयकेश त्रिपाठी, डीएफओ प्रवीण खरे, जिला विकास अधिकारी बीबी सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.गोरख नाथ पटेल, जिला सूचना अधिकारी मनोकामना राय सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
|
जौनपुर। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता से सम्बंधित विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत पंचायत भवनों में सीएससी संचालित हो जाये। आईजीआरएस के प्रकरणों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि मौके का निरीक्षण अवश्य करें, शिकायकर्ता से अवश्य बात करें। किसी भी दशा में डिफॉल्टर न जाने पाएं। केराकत बीडीओ के द्वारा आईजीआरएस के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर नाराजगी व्यक्त करते मुख्य विकास अधिकारी साई तेजा सीलम को कार्यवाही हेतु निर्देशित किया। आयुष्मान कार्ड के प्रगति की समीक्षा करते हुए सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह को निर्देश दिया कि रोस्टर के हिसाब गाँव मे जा जाकर आयुष्मान कार्ड बनवायें। मुख्यमंत्री सामूहिक योजना के तहत शादियां कराये जाने का निर्देश जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिया। सभी नोडल अधिकारियों को अमृत सरोवर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए और एसडीएम की सहायता से अवैध अतिक्रमण हटवाये जाने का भी निर्देश दिया। पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि गोवंश सड़को पर घूमते न दिखे। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिदिन जनसुनवाई करे और चौपाल एवं समाधान दिवस पर आने वाली जन शिकायतो का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराये। इस दौरान जिलाधिकारी के द्वारा मेडिकल कालेज सहित जनपद में पचास लाख से अधिक लागत की परियोजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया समय से गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कराये जाए। बैठक में पीडी जयकेश त्रिपाठी, डीएफओ प्रवीण खरे, जिला विकास अधिकारी बीबी सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.गोरख नाथ पटेल, जिला सूचना अधिकारी मनोकामना राय सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
|
चंडीगढ़, 23 जनवरीः
सरबत सेहत बीमा योजना (एस.एस.बी.वाई.) को सुचारू ढंग से लागू करने के लिए कार्यवाही करते हुए स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट(एस.ए.एफ.यू) ने धोखाधड़ी करने वाले 15 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किये हैं। एस.एस.बी.वाई. के अंतर्गत पाई गई धोखाधड़ी /अनियमितताओं सम्बन्धी किसी भी घटना की सक्रियता के साथ निगरानी करने और नियमों का पालन करवाने और स्कीम संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करने सम्बन्धी एस.ए.एफ.यू को निर्देश दिए गए हैं। यह प्रगटावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने आज एक प्रैस बयान में किया।
मंत्री ने बताया कि एस.ए.एफ.यू टीम द्वारा पंजाब के अस्पतालों में अनियमितताओं /धोखाधडिय़ों से जुड़े सभी मामलों का उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि एस.ए.एफ.यू की टीम के मुताबिक राज्य के कई अस्पतालों को अब तक 15 कारण बताओ नोटिस जारी किये गए हैं, जुर्माना लगाया गया है और कुछ अस्पतालों को चेतावनी पत्र भी जारी किये गए हैं जो कथित तौर पर एस.एस.बी.वाई. की शर्तों का उल्लंघन करने में शामिल थे।
श्री बलबीर सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि एस.ए.एफ.यू की टीम द्वारा जिन कोताहियों और अनियमितताओं के सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस /चेतावनी पत्र जारी किये और जुर्माने किये गए हैं उनमें गलत रैफरल मामले, अयोग्य लाभपात्रियों द्वारा दवाएँ और अस्पतालों से इलाज के लिए पैसे लेना, जनरल वॉर्ड में दाखि़ल मरीज़ों द्वारा आई.सी.यू. वॉर्डों के पैसे का दावा करना, सूचीबद्ध अस्पताल द्वारा लाभपात्रियों को नकद रहित इलाज सुविधाएं प्रदान करने से इन्कार करने और एक बार अस्पताल में भर्ती होकर एक से अधिक सर्जीकल पैकेज का दावा करने जैसे मामले शामिल हैं।
मंत्री ने आगे बताया कि एस.एस.बी.वाई के अधीन सेकेंड्री और ट्रशरी स्वास्थ्य सेवाओं की आसान पहुँच को यकीनी बनाने के लिए पंजाब सरकार ने ऐसी जालसाजिय़ांं को रोकने के लिए सभी जि़लों में डी.ए.एफ.यू (जि़ला एंटी फ्रॉड यूनिट) स्थापित किये गए हैं। डीएएफयू को हिदायत की गई थी कि अगर कोई स्वास्थ्य संस्था किसी धोखाधड़ी या अनियमितताओं के मामले से सम्बन्धित हो तो उसके विरुद्ध तुरंत कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि पूरी जांच के बाद सम्बन्धित डीएएफयू मामले को अगली कार्यवाही के लिए स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट के पास भेजता है।
श्री बलबीर सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों के सीमित 124 स्वास्थ्य पैकजों के अलावा लाभपात्री दिल की सजऱ्री, जोड़ों की तबदीली, कैंसर के इलाज और अन्य इस स्कीम अधीन आने वाली इलाज की सेवाओं के लिए सीधे तौर पर सूचीबद्ध प्राईवेट अस्पतालों में भी जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई जिला हस्पताल 124 सीमित स्वास्थ्य पैकेज मुहैया करवाने के योग्य नहीं है तो केस बिना किसी देरी के तुरंत निजी हस्पताल के पास भेजे जाएंं।
एस.एस.बी.वाई. अधीन दी जातीं सेवाओं बारे रौशनी डालते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक 1,22,798 मरीज़ों को 132.45 करोड़ रुपए की इलाज सेवाएं मुहैया करवाई जा चुकी हैं और लाभपात्रियों को 40,35,910 ई -कार्ड जारी किये जा चुके हैं। इनमें से लगभग 2010 दिल की सजऱ्री के इलाज में सहायता प्राप्त कर चुके हैं, 1981 कैंसर का इलाज करवा चुके हैं, 18,050 को डायिलसिस की सुविधा मिली है और 2630 बुज़ुर्गों के कंधे / घुटने बदले गए हैं।
लोगों के वित्तीय बोझ को घटाने के लिए पंजाब सरकार सभी मरीज़ों और पूरे राज्य में लगभग 662 सूचीबद्ध अस्पतालों को सेवाएं मुहैया करवाने के लिए ज़ोरदार ढंग से यत्न कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने लाभपात्रियों की सुविधा के लिए जिला शिकायत निवारण समितियाँ भी स्थापित की हैं।
|
चंडीगढ़, तेईस जनवरीः सरबत सेहत बीमा योजना को सुचारू ढंग से लागू करने के लिए कार्यवाही करते हुए स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट ने धोखाधड़ी करने वाले पंद्रह अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किये हैं। एस.एस.बी.वाई. के अंतर्गत पाई गई धोखाधड़ी /अनियमितताओं सम्बन्धी किसी भी घटना की सक्रियता के साथ निगरानी करने और नियमों का पालन करवाने और स्कीम संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करने सम्बन्धी एस.ए.एफ.यू को निर्देश दिए गए हैं। यह प्रगटावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने आज एक प्रैस बयान में किया। मंत्री ने बताया कि एस.ए.एफ.यू टीम द्वारा पंजाब के अस्पतालों में अनियमितताओं /धोखाधडिय़ों से जुड़े सभी मामलों का उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया है। उन्होंने बताया कि एस.ए.एफ.यू की टीम के मुताबिक राज्य के कई अस्पतालों को अब तक पंद्रह कारण बताओ नोटिस जारी किये गए हैं, जुर्माना लगाया गया है और कुछ अस्पतालों को चेतावनी पत्र भी जारी किये गए हैं जो कथित तौर पर एस.एस.बी.वाई. की शर्तों का उल्लंघन करने में शामिल थे। श्री बलबीर सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि एस.ए.एफ.यू की टीम द्वारा जिन कोताहियों और अनियमितताओं के सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस /चेतावनी पत्र जारी किये और जुर्माने किये गए हैं उनमें गलत रैफरल मामले, अयोग्य लाभपात्रियों द्वारा दवाएँ और अस्पतालों से इलाज के लिए पैसे लेना, जनरल वॉर्ड में दाखि़ल मरीज़ों द्वारा आई.सी.यू. वॉर्डों के पैसे का दावा करना, सूचीबद्ध अस्पताल द्वारा लाभपात्रियों को नकद रहित इलाज सुविधाएं प्रदान करने से इन्कार करने और एक बार अस्पताल में भर्ती होकर एक से अधिक सर्जीकल पैकेज का दावा करने जैसे मामले शामिल हैं। मंत्री ने आगे बताया कि एस.एस.बी.वाई के अधीन सेकेंड्री और ट्रशरी स्वास्थ्य सेवाओं की आसान पहुँच को यकीनी बनाने के लिए पंजाब सरकार ने ऐसी जालसाजिय़ांं को रोकने के लिए सभी जि़लों में डी.ए.एफ.यू स्थापित किये गए हैं। डीएएफयू को हिदायत की गई थी कि अगर कोई स्वास्थ्य संस्था किसी धोखाधड़ी या अनियमितताओं के मामले से सम्बन्धित हो तो उसके विरुद्ध तुरंत कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि पूरी जांच के बाद सम्बन्धित डीएएफयू मामले को अगली कार्यवाही के लिए स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट के पास भेजता है। श्री बलबीर सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों के सीमित एक सौ चौबीस स्वास्थ्य पैकजों के अलावा लाभपात्री दिल की सजऱ्री, जोड़ों की तबदीली, कैंसर के इलाज और अन्य इस स्कीम अधीन आने वाली इलाज की सेवाओं के लिए सीधे तौर पर सूचीबद्ध प्राईवेट अस्पतालों में भी जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई जिला हस्पताल एक सौ चौबीस सीमित स्वास्थ्य पैकेज मुहैया करवाने के योग्य नहीं है तो केस बिना किसी देरी के तुरंत निजी हस्पताल के पास भेजे जाएंं। एस.एस.बी.वाई. अधीन दी जातीं सेवाओं बारे रौशनी डालते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक एक,बाईस,सात सौ अट्ठानवे मरीज़ों को एक सौ बत्तीस.पैंतालीस करोड़ रुपए की इलाज सेवाएं मुहैया करवाई जा चुकी हैं और लाभपात्रियों को चालीस,पैंतीस,नौ सौ दस ई -कार्ड जारी किये जा चुके हैं। इनमें से लगभग दो हज़ार दस दिल की सजऱ्री के इलाज में सहायता प्राप्त कर चुके हैं, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी कैंसर का इलाज करवा चुके हैं, अट्ठारह,पचास को डायिलसिस की सुविधा मिली है और दो हज़ार छः सौ तीस बुज़ुर्गों के कंधे / घुटने बदले गए हैं। लोगों के वित्तीय बोझ को घटाने के लिए पंजाब सरकार सभी मरीज़ों और पूरे राज्य में लगभग छः सौ बासठ सूचीबद्ध अस्पतालों को सेवाएं मुहैया करवाने के लिए ज़ोरदार ढंग से यत्न कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने लाभपात्रियों की सुविधा के लिए जिला शिकायत निवारण समितियाँ भी स्थापित की हैं।
|
Free Fire में रिपब्लिक डे इवेंट की शुरुआत हो गई हैं। इस इवेंट में कई इनाम मिलेंगे। ये इवेंट काफी कम समय के लिए चलने वाला है। इस दौरान खिलाडी हर दिन चेक-इन करके इनाम पा सकते हैं।
चेक-इन रिवार्ड्स से खिलाडी कैरेक्टर्स और गन स्किन्स समेत कई सारे इनाम पा सकते हैं। रिवार्ड सेक्शन दो अलग-अलग हिस्सों में बटा हुआ है 'डेली पार्टी रिवार्ड्स 1-5' और 'डेली पार्टी रिवार्ड्स 6-9'
ये रही डेली पार्टी रिवार्ड्स की पूरी लिस्टः
डेली पार्टी रिवार्ड्स 1-5 (25 जनवरी सुबह 4 से 6 फरवरी सुबह 3:59 बजे तक)
डेली पार्टी रिवार्ड्स 6-9 (25 जनवरी सुबह 4 से 6 फरवरी सुबह 3:59 बजे तक)
ध्यान रखने वाली बात ये है कि सारे ही इनाम हमेशा के लिए नहीं है बल्कि ये थोड़े समय तक आपके पास रहेंगे। दरअसल, ये सिर्फ 7 दिनों तक आपके पास रहेंगे।
इन स्टेप्स का पालन करके आप इनाम पा सकते हैंः
स्टेप 1: Free Fire खोलें और इवेंट के विकल्प पर जाएं। साथ ही यहां '26/1 Republic Day' को चुनें।
स्टेप 2: इसके बाद डेली पार्टी रिवार्ड्स सेक्शन में जाएं।
स्टेप 3: इनामों के पास मौजूद क्लेम के बटन पर क्लिक करें।
ये भी पढ़ें;- Free Fire में रिब्लिक डे इवेंट के दौरान मुफ्त में कैरेक्टर्स कैसे पाएं?
|
Free Fire में रिपब्लिक डे इवेंट की शुरुआत हो गई हैं। इस इवेंट में कई इनाम मिलेंगे। ये इवेंट काफी कम समय के लिए चलने वाला है। इस दौरान खिलाडी हर दिन चेक-इन करके इनाम पा सकते हैं। चेक-इन रिवार्ड्स से खिलाडी कैरेक्टर्स और गन स्किन्स समेत कई सारे इनाम पा सकते हैं। रिवार्ड सेक्शन दो अलग-अलग हिस्सों में बटा हुआ है 'डेली पार्टी रिवार्ड्स एक-पाँच' और 'डेली पार्टी रिवार्ड्स छः-नौ' ये रही डेली पार्टी रिवार्ड्स की पूरी लिस्टः डेली पार्टी रिवार्ड्स एक-पाँच डेली पार्टी रिवार्ड्स छः-नौ ध्यान रखने वाली बात ये है कि सारे ही इनाम हमेशा के लिए नहीं है बल्कि ये थोड़े समय तक आपके पास रहेंगे। दरअसल, ये सिर्फ सात दिनों तक आपके पास रहेंगे। इन स्टेप्स का पालन करके आप इनाम पा सकते हैंः स्टेप एक: Free Fire खोलें और इवेंट के विकल्प पर जाएं। साथ ही यहां 'छब्बीस/एक Republic Day' को चुनें। स्टेप दो: इसके बाद डेली पार्टी रिवार्ड्स सेक्शन में जाएं। स्टेप तीन: इनामों के पास मौजूद क्लेम के बटन पर क्लिक करें। ये भी पढ़ें;- Free Fire में रिब्लिक डे इवेंट के दौरान मुफ्त में कैरेक्टर्स कैसे पाएं?
|
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इमरान खान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने तोशाखाना मामले में इमरान खान के खिलाफ सुनवाई को रोक दिया है।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना मामले में बड़ी राहत मिली है। इमरान को यह राहत इस्लामाबाद हाईकोर्ट से मिली है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने तोशाखाना मामले में इमरान खान के खिलाफ सुनवाई को रोक दिया है। इमरान खान के खिलाफ अब क्रिमिनल ट्रायल नहीं चलेगा। इस मामले में पाकिस्तान चुनाव आयोग ने क्रिमिनल ट्रायल की अर्जी दी थी।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान अल-कादिर ट्रस्ट मामले में कड़ी सुरक्षा के बीच आज इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचे, जहां उनकी जमानत पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान इमरान ने फिर से अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा जताया। इस बीच इमरान के समर्थकों ने नारेबाजी की और पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ उनकी धक्का-मुक्की हो गई। इस बीच सुनवाई रोक दी गई। अभी इस मामले में फैसला आना है। इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर से इमरान खान की गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार और सेना दोनों बैकफुट पर आ गई थी।
तोशखाना मामला क्या है?
तोशखाना, पाकिस्तान कैबिनेट का एक विभाग है, जहां अन्य देशों की सरकारों, राष्ट्रप्रमुखों और विदेशी मेहमानों द्वारा दिए गए कीमती उपहारों को रखा जाता है। नियमों के मुताबिक, दूसरे देशों के प्रमुखों या गणमान्य लोगों से मिले उपहारों को तोशखाना में रखा जाना जरूरी है।
इमरान खान 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। उन्हें अरब देशों की यात्राओं के दौरान महंगे उपहार मिले थे, जिन्हें इमरान ने तोशखाना में जमा करा दिया था। कहा जाता है कि बाद में इमरान खान ने तोशखाना से इन्हें सस्ते दामों पर खरीदा और बड़े मुनाफे में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया को उनकी सरकार ने कानूनी इजाजत दी थी। इसी मामले में इमरान खान फंस गए हैं।
|
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इमरान खान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने तोशाखाना मामले में इमरान खान के खिलाफ सुनवाई को रोक दिया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना मामले में बड़ी राहत मिली है। इमरान को यह राहत इस्लामाबाद हाईकोर्ट से मिली है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने तोशाखाना मामले में इमरान खान के खिलाफ सुनवाई को रोक दिया है। इमरान खान के खिलाफ अब क्रिमिनल ट्रायल नहीं चलेगा। इस मामले में पाकिस्तान चुनाव आयोग ने क्रिमिनल ट्रायल की अर्जी दी थी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान अल-कादिर ट्रस्ट मामले में कड़ी सुरक्षा के बीच आज इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचे, जहां उनकी जमानत पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान इमरान ने फिर से अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा जताया। इस बीच इमरान के समर्थकों ने नारेबाजी की और पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ उनकी धक्का-मुक्की हो गई। इस बीच सुनवाई रोक दी गई। अभी इस मामले में फैसला आना है। इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर से इमरान खान की गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार और सेना दोनों बैकफुट पर आ गई थी। तोशखाना मामला क्या है? तोशखाना, पाकिस्तान कैबिनेट का एक विभाग है, जहां अन्य देशों की सरकारों, राष्ट्रप्रमुखों और विदेशी मेहमानों द्वारा दिए गए कीमती उपहारों को रखा जाता है। नियमों के मुताबिक, दूसरे देशों के प्रमुखों या गणमान्य लोगों से मिले उपहारों को तोशखाना में रखा जाना जरूरी है। इमरान खान दो हज़ार अट्ठारह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। उन्हें अरब देशों की यात्राओं के दौरान महंगे उपहार मिले थे, जिन्हें इमरान ने तोशखाना में जमा करा दिया था। कहा जाता है कि बाद में इमरान खान ने तोशखाना से इन्हें सस्ते दामों पर खरीदा और बड़े मुनाफे में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया को उनकी सरकार ने कानूनी इजाजत दी थी। इसी मामले में इमरान खान फंस गए हैं।
|
नई दिल्ली. ऐपल आज 'Far out' इवेंट को आयोजित करने के लिए तैयार है. इवेंट की शुरुआत आज (7 सितंबर) रात 10:30 बजे से होगी. उम्मीद की जा रही है कि कंपनी इवेंट में आईफोन 14 सीरीज और ऐपल वॉच को पेश करेगा. साथ ही इवेंट में नए आईपैड को भी लॉन्च किया जा सकता है.
इस बीच ब्राजील ने ऐपल के लेटेस्ट आईफोन, iPhone 12 और उस के बाद के सभी मॉडल्स को बैन कर दिया है. यह बैन कंपनी द्वारा फोन के साथ चार्जर नहीं देने के चलते लगाया गया है. ऐपल का कहना है कि वह ब्राजील सरकार के बिना बैटरी चार्जर के आईफोन बेचने पर प्रतिबंध लगाने के लिए आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी.
बता दें कि ब्राजील के न्याय मंत्रालय ने ऐपल पर 12. 275 मिलियन रीस (2. 38 मिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाया है और कंपनी को आईफोन 12 और नए मॉडल की बिक्री रद्द करने का आदेश दिया है. इसके अलावा आईफोन के उन सभी मॉडल्स की बिक्री पर भी रोक लगा दी है जिनके साथ चार्जर नहीं आता है.
देश के ऑफिशियल गैजेट में मंगलवार को प्रकाशित आदेश में मंत्रालय ने कहा है कि ऐपल ग्राहकों को चार्जर न देकर उनकी जेब पर बोझ डाल रहा है और यह ग्राहकों के प्रति भेदभाव वाला कृत्य है. सरकार ने ऐपल के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि प्रोडक्ट के साथ चार्जर न देने का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना था. सरकार ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि बिना चार्जर के स्मार्टफोन बेचने से पर्यावरण को सुरक्षा मिलती है.
ऐपल ने कहा कि वह उनकी चिंताओं को हल करने के लिए ब्राजील की कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंसी सेनाकॉन के साथ काम करता रहेगी. साथ ही वह इस आदेश के खिलाफ अपील भी करेगी. ऐपल ने कहा कि उसने पहले ही इस मामले में ब्राजील में कई अदालतों में चल रहे केस को जीत लिया है और हमें विश्वास है कि हमारे ग्राहक अपने डिवाइस को चार्ज करने और कनेक्ट करने के विभिन्न विकल्पों से अवगत हैं.
.
1 सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, 49 साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया'
220 करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये 32 साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस!
|
नई दिल्ली. ऐपल आज 'Far out' इवेंट को आयोजित करने के लिए तैयार है. इवेंट की शुरुआत आज रात दस:तीस बजे से होगी. उम्मीद की जा रही है कि कंपनी इवेंट में आईफोन चौदह सीरीज और ऐपल वॉच को पेश करेगा. साथ ही इवेंट में नए आईपैड को भी लॉन्च किया जा सकता है. इस बीच ब्राजील ने ऐपल के लेटेस्ट आईफोन, iPhone बारह और उस के बाद के सभी मॉडल्स को बैन कर दिया है. यह बैन कंपनी द्वारा फोन के साथ चार्जर नहीं देने के चलते लगाया गया है. ऐपल का कहना है कि वह ब्राजील सरकार के बिना बैटरी चार्जर के आईफोन बेचने पर प्रतिबंध लगाने के लिए आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी. बता दें कि ब्राजील के न्याय मंत्रालय ने ऐपल पर बारह. दो सौ पचहत्तर मिलियन रीस का जुर्माना लगाया है और कंपनी को आईफोन बारह और नए मॉडल की बिक्री रद्द करने का आदेश दिया है. इसके अलावा आईफोन के उन सभी मॉडल्स की बिक्री पर भी रोक लगा दी है जिनके साथ चार्जर नहीं आता है. देश के ऑफिशियल गैजेट में मंगलवार को प्रकाशित आदेश में मंत्रालय ने कहा है कि ऐपल ग्राहकों को चार्जर न देकर उनकी जेब पर बोझ डाल रहा है और यह ग्राहकों के प्रति भेदभाव वाला कृत्य है. सरकार ने ऐपल के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि प्रोडक्ट के साथ चार्जर न देने का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना था. सरकार ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि बिना चार्जर के स्मार्टफोन बेचने से पर्यावरण को सुरक्षा मिलती है. ऐपल ने कहा कि वह उनकी चिंताओं को हल करने के लिए ब्राजील की कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंसी सेनाकॉन के साथ काम करता रहेगी. साथ ही वह इस आदेश के खिलाफ अपील भी करेगी. ऐपल ने कहा कि उसने पहले ही इस मामले में ब्राजील में कई अदालतों में चल रहे केस को जीत लिया है और हमें विश्वास है कि हमारे ग्राहक अपने डिवाइस को चार्ज करने और कनेक्ट करने के विभिन्न विकल्पों से अवगत हैं. . एक सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, उनचास साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया' दो सौ बीस करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये बत्तीस साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस!
|
पालमपुर - श्री साई यूनिवर्सिटी पालमपुर मेें आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल कंपनी की और से मिस चंद्रिका और उनकी टीम द्वारा प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया । इसमें यूनिवर्सिटी के बीकॉम, एमकॉम, बीबीए, एमबीए और एमएससी के छात्रों ने भाग लिया । प्लेसमेंट ड्राइव का संचालन यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट आफिसर ओसी राणा ने किया जबकि इसका शुभारंभ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. एसके कौशल ने किया । यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशन आफिसर केके अवस्थी के अनुसार इस प्लेसमेंट ड्राइव में 60 छात्रों ने भाग लिया और प्रेजेंटेशन, ग्रुप डिसकशन और फाइनल इंटरव्यू के बाद 11 छात्रों को कंपनी द्वारा चयनित किया गया । इसके अलावा यूनिवर्सिटी में एकटैसी फीस्टा का भी आयोजन किया गया । इस प्रोग्राम में मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने भाग लिया इसका शुभारंभ श्री साई ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूट्स के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर तुषार पंुज ने किया जबकि इसका संचालन मैनेजमेंट के एचओडी डा. केके परमार ने किया । एकटैसी फीस्टा में मूल रूप से व्यापार संबंधी जानकारी और गतिविधियों में भाग लिया जाता है और क्रय-विक्रय व लाभांश करके इनाम दिया जाता है। एमबीए कोर्स के साहिल, संयम, सलोनी, कर्ण शर्मा, शिवानी और मीनाक्षी ने अपने-अपने ग्रुप में प्रथम स्थान प्राप्त किया और अधिक से अधिक लाभ कमाया । इस मौके पर यूनिवर्सिटी के पीवीसी प्रो. केसी कपूर, रजिस्ट्रार डा. एसके मलिक व कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशनस डा. जाहिद अली भी उपस्थित थे। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के चांसलर इंजीनियर एसके पुंज, प्रो. चांसलर तृप्ता पुंज, चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर तुषार पुंज और वाइस चांसलर प्रो. एसके कौशल व अन्य स्टाफ में बरस ने छात्रों को बधाई दी। छात्रों ने इसका सारा श्रेय अभिभावकों व अध्यापिकों को दिया है, जिनके मार्गदर्शन से यह सब कुछ संभव हो पाया है ।
|
पालमपुर - श्री साई यूनिवर्सिटी पालमपुर मेें आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल कंपनी की और से मिस चंद्रिका और उनकी टीम द्वारा प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया । इसमें यूनिवर्सिटी के बीकॉम, एमकॉम, बीबीए, एमबीए और एमएससी के छात्रों ने भाग लिया । प्लेसमेंट ड्राइव का संचालन यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट आफिसर ओसी राणा ने किया जबकि इसका शुभारंभ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. एसके कौशल ने किया । यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशन आफिसर केके अवस्थी के अनुसार इस प्लेसमेंट ड्राइव में साठ छात्रों ने भाग लिया और प्रेजेंटेशन, ग्रुप डिसकशन और फाइनल इंटरव्यू के बाद ग्यारह छात्रों को कंपनी द्वारा चयनित किया गया । इसके अलावा यूनिवर्सिटी में एकटैसी फीस्टा का भी आयोजन किया गया । इस प्रोग्राम में मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने भाग लिया इसका शुभारंभ श्री साई ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूट्स के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर तुषार पंुज ने किया जबकि इसका संचालन मैनेजमेंट के एचओडी डा. केके परमार ने किया । एकटैसी फीस्टा में मूल रूप से व्यापार संबंधी जानकारी और गतिविधियों में भाग लिया जाता है और क्रय-विक्रय व लाभांश करके इनाम दिया जाता है। एमबीए कोर्स के साहिल, संयम, सलोनी, कर्ण शर्मा, शिवानी और मीनाक्षी ने अपने-अपने ग्रुप में प्रथम स्थान प्राप्त किया और अधिक से अधिक लाभ कमाया । इस मौके पर यूनिवर्सिटी के पीवीसी प्रो. केसी कपूर, रजिस्ट्रार डा. एसके मलिक व कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशनस डा. जाहिद अली भी उपस्थित थे। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के चांसलर इंजीनियर एसके पुंज, प्रो. चांसलर तृप्ता पुंज, चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर तुषार पुंज और वाइस चांसलर प्रो. एसके कौशल व अन्य स्टाफ में बरस ने छात्रों को बधाई दी। छात्रों ने इसका सारा श्रेय अभिभावकों व अध्यापिकों को दिया है, जिनके मार्गदर्शन से यह सब कुछ संभव हो पाया है ।
|
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। करण जौहर इन दिनों अपने चैट शो 'कॉफी विद करण सीजन 7' की वजह से चर्चा में बनें रहते हैं। फिलहाल करण किसी और वजह से सुर्खियों में आएं है। करण जौहर ने हाल ही में अपने दोनों बच्चों यश और रूही को लेकर बात की।
दरअसल उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड एक्टर्स में यश और रूही का पसंदीदा कौन है। इस पर करण ने कहा कि उनके बच्चे कई सितारों को जानते हैं लेकिन सिर्फ चाची, चाचू और दीदी के रूप में एक्टर्स के रूप में नहीं। वहीं करण ने ये भी बताया कि आलिया का यश और रूही के साथ एक स्पेशल बॉन्ड शेयर करती हैं क्योंकि वह यश को राखी बांधती है और वह उनकी फेवरेट भी है।
करण ने कहा, "जिन अभिनेताओं के साथ मैं काम करता हूं, वे सभी घर आते हैं, और बच्चे उनके साथ बहुत अच्छे से रहते हैं। इसलिए उनका कोई पसंदीदा नहीं है, मुझे लगता है कि आलिया दीदी को वो खासकर पसंद करते हैं।
इसी दौरान करण ने यह भी बताया कि उनके बच्चे उनके लोकप्रिय शो कॉफी विद करण को क्यों नहीं देखते। करण ने कहा कि उनके बच्चे शो में आने वाले लोगों को नहीं जानते इस वजह से वो नहीं देखते।
जल्द ही करण के निर्देशन में बनीं रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' भी रिलीज होने वाली है। फिल्म में धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी भी हैं। इसके अलावा करण सारा अली खान के साथ भी 2 फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं।
|
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। करण जौहर इन दिनों अपने चैट शो 'कॉफी विद करण सीजन सात' की वजह से चर्चा में बनें रहते हैं। फिलहाल करण किसी और वजह से सुर्खियों में आएं है। करण जौहर ने हाल ही में अपने दोनों बच्चों यश और रूही को लेकर बात की। दरअसल उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड एक्टर्स में यश और रूही का पसंदीदा कौन है। इस पर करण ने कहा कि उनके बच्चे कई सितारों को जानते हैं लेकिन सिर्फ चाची, चाचू और दीदी के रूप में एक्टर्स के रूप में नहीं। वहीं करण ने ये भी बताया कि आलिया का यश और रूही के साथ एक स्पेशल बॉन्ड शेयर करती हैं क्योंकि वह यश को राखी बांधती है और वह उनकी फेवरेट भी है। करण ने कहा, "जिन अभिनेताओं के साथ मैं काम करता हूं, वे सभी घर आते हैं, और बच्चे उनके साथ बहुत अच्छे से रहते हैं। इसलिए उनका कोई पसंदीदा नहीं है, मुझे लगता है कि आलिया दीदी को वो खासकर पसंद करते हैं। इसी दौरान करण ने यह भी बताया कि उनके बच्चे उनके लोकप्रिय शो कॉफी विद करण को क्यों नहीं देखते। करण ने कहा कि उनके बच्चे शो में आने वाले लोगों को नहीं जानते इस वजह से वो नहीं देखते। जल्द ही करण के निर्देशन में बनीं रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' भी रिलीज होने वाली है। फिल्म में धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी भी हैं। इसके अलावा करण सारा अली खान के साथ भी दो फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं।
|
कोविड-19 के कारण दो साल के अंतराल के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया बुधवार को फिर से खुल गया। सभी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू हो गईं। जामिया ने कोविड प्रोटोकाल का ध्यान रखते हुए छात्रों को प्रवेश दिया।
जामिया के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अजीम ने बताया कि कक्षाएं फिर से शुरू होने का पहला दिन सफल रहा। 70 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्षों में छात्रों के लिए कक्षाएं फिर से शुरू हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया कि परिसर के अंदर सामाजिक दूरी बनी रहे। जामिया ने कैंपस में छात्रों का स्वागत करने के लिए बैनर भी लगा रखे थे।
|
कोविड-उन्नीस के कारण दो साल के अंतराल के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया बुधवार को फिर से खुल गया। सभी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू हो गईं। जामिया ने कोविड प्रोटोकाल का ध्यान रखते हुए छात्रों को प्रवेश दिया। जामिया के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अजीम ने बताया कि कक्षाएं फिर से शुरू होने का पहला दिन सफल रहा। सत्तर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्षों में छात्रों के लिए कक्षाएं फिर से शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया कि परिसर के अंदर सामाजिक दूरी बनी रहे। जामिया ने कैंपस में छात्रों का स्वागत करने के लिए बैनर भी लगा रखे थे।
|
भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के इस सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब की कप्तानी करते हुए दिखाई देंगे. राहुल जबसे पंजाब की टीम में आये हैं तबसे उन्होंने किंग्स इलेवन पंजाब तथा भारत दोनों के लिए शानदार प्रदर्शन किया है.
आईपीएल के पिछले संस्करण में भी राहुल ने पंजाब की तरफ से खूब रन बनाए थे. राहुल ने इस सीजन के 14 मैचों में 53. 9 की औसत से 593 रन बनाए थे. इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और 6 अर्धशतक निकले थे.
वहीं अभी तक उनके आईपीएल करियर की बात करें तो, राहुल ने अभी तक आईपीएल के 67 मैचों में 42. 1 की औसत से 1977 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 1 शतक तथा 16 अर्धशतक जड़े हैं.
|
भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब की कप्तानी करते हुए दिखाई देंगे. राहुल जबसे पंजाब की टीम में आये हैं तबसे उन्होंने किंग्स इलेवन पंजाब तथा भारत दोनों के लिए शानदार प्रदर्शन किया है. आईपीएल के पिछले संस्करण में भी राहुल ने पंजाब की तरफ से खूब रन बनाए थे. राहुल ने इस सीजन के चौदह मैचों में तिरेपन. नौ की औसत से पाँच सौ तिरानवे रन बनाए थे. इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और छः अर्धशतक निकले थे. वहीं अभी तक उनके आईपीएल करियर की बात करें तो, राहुल ने अभी तक आईपीएल के सरसठ मैचों में बयालीस. एक की औसत से एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने एक शतक तथा सोलह अर्धशतक जड़े हैं.
|
Sant Ravidas Mahakumbh: भोपाल(राज्य ब्यूरो)। राज्य सरकार बुधवार को सागर में संत शिरोमणि रविदास महाकुंभ का आयोजन कर रही है। सोमवार को मंत्रालय में महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता, समानता, समदर्शिता के साथ अनुसूचितजाति, समाज के सभी वंचित वर्गों का सर्वांगीण विकास है। महाकुंभ में अजा वर्ग की प्रतिभाओं का सम्मान करें और उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया जाए। महाकुंभ से प्रदेश के सभी जिलों को भी जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचितजाति वर्ग के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए गतिविधियां चलाएं। बैठक में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस उपस्थित थे। संभागायुक्त सागर और कलेक्टर वर्चुअल शामिल हुए।
कजली वन सदर सागर में आयोजित महाकुंभ में अजा वर्ग के हितग्राहियों को हितलाभ बांटा जाएगा। रविदासी संप्रदाय से संबंधित साधु-संतों का सम्मान होगा और अजा वर्ग कल्याण पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी और उद्यमियों द्वारा बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगेगी। यहां संत रविदास के दर्शन पर केंद्रित भजन होंगे और चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
महाकुंभ में सागर के साथ दमोह, टीकमगढ़, विदिशा, रायसेन, गुना, नरसिंहपुर, जबलपुर, भोपाल, अशोकनगर, छतरपुर, पन्ना, निवाड़ी सहित अन्य जिलों के अनुयायी शामिल होंगे।
|
Sant Ravidas Mahakumbh: भोपाल। राज्य सरकार बुधवार को सागर में संत शिरोमणि रविदास महाकुंभ का आयोजन कर रही है। सोमवार को मंत्रालय में महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता, समानता, समदर्शिता के साथ अनुसूचितजाति, समाज के सभी वंचित वर्गों का सर्वांगीण विकास है। महाकुंभ में अजा वर्ग की प्रतिभाओं का सम्मान करें और उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया जाए। महाकुंभ से प्रदेश के सभी जिलों को भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचितजाति वर्ग के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए गतिविधियां चलाएं। बैठक में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस उपस्थित थे। संभागायुक्त सागर और कलेक्टर वर्चुअल शामिल हुए। कजली वन सदर सागर में आयोजित महाकुंभ में अजा वर्ग के हितग्राहियों को हितलाभ बांटा जाएगा। रविदासी संप्रदाय से संबंधित साधु-संतों का सम्मान होगा और अजा वर्ग कल्याण पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी और उद्यमियों द्वारा बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगेगी। यहां संत रविदास के दर्शन पर केंद्रित भजन होंगे और चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। महाकुंभ में सागर के साथ दमोह, टीकमगढ़, विदिशा, रायसेन, गुना, नरसिंहपुर, जबलपुर, भोपाल, अशोकनगर, छतरपुर, पन्ना, निवाड़ी सहित अन्य जिलों के अनुयायी शामिल होंगे।
|
भोपाल के जहांगीराबाद चौराहे पर सोमवार को नगर निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। यहां नाले के ऊपर रेस्टोरेंट चल रहा था। जिसे सख्ती से हटाया गया। कई 20 साल से यहां पर अवैध कब्जा था।
जहांगीराबाद चौराहे पर नाला गुजरा है। उसके ऊपरी पक्का निर्माण का बड़ा रेस्टोरेंट बना लिया गया था। इसकी शिकायत भी नगर निगम को की गई। इसके चलते सोमवार को निगम की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
जहांगीराबाद स्थित एक्ट्रोल कॉलेज के पास भी अवैध अतिक्रमण हटाया गया। इस मौके पर अतिक्रमण प्रभारी नासिर खान, प्रितेश गर्ग, आकाश मिश्रा, एएचओ बलवीर मलिक समेत थाने का स्टॉफ मौजूद था।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
भोपाल के जहांगीराबाद चौराहे पर सोमवार को नगर निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। यहां नाले के ऊपर रेस्टोरेंट चल रहा था। जिसे सख्ती से हटाया गया। कई बीस साल से यहां पर अवैध कब्जा था। जहांगीराबाद चौराहे पर नाला गुजरा है। उसके ऊपरी पक्का निर्माण का बड़ा रेस्टोरेंट बना लिया गया था। इसकी शिकायत भी नगर निगम को की गई। इसके चलते सोमवार को निगम की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। जहांगीराबाद स्थित एक्ट्रोल कॉलेज के पास भी अवैध अतिक्रमण हटाया गया। इस मौके पर अतिक्रमण प्रभारी नासिर खान, प्रितेश गर्ग, आकाश मिश्रा, एएचओ बलवीर मलिक समेत थाने का स्टॉफ मौजूद था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
संचालित हों वह सर्वमान्य है। एक का सुख-दुःख दूसरे का सुख-दुःख है, एक की अनुभूति दूसरे की अनुभूति है, वे दोनों भले ही दूर हों फिर भी पास ही हैं; एक व्यक्ति दूसरे को उसी भाँति "पहिचानता" है, जैसे स्वयं अपने कोः"कागढ़ पर लिखत न बनत, कहत सँदेस लजात । अपने जिय सों जानिए, मेरे जिय की बात ॥"
( विहारी )
यहाँ बाइरलेस सेट (Wireless Set ) की भी आवश्यकता नहीं । ऐसी प्रीति में दुराव-छिपाव तो छू तक न जाना चाहिए । किंतु सोचने से जान पड़ता है कि यह प्रीति वास्तव में आदर्श ही है, यह संभव नहीं; कल्पना की वस्तु है, प्रत्यक्ष जीवन का काम नहीं । जो संसार में रहता है उस के प्रतिदिन के जीवन का भी कुछ रहस्य होता है जिसे वह अपने " अभिन" को भी नहीं बतला सकता और यदि बतलाता है तोउस संबंध में कभी न कभी खटाई पड़ जावेगी, न प्रीति ही रहेगी न उसका आदर्श । यह निश्चित है कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को न केवल कुछ बातें अपने मित्र से छिपानी चाहिए प्रत्युत वह छिपाना भी है और यदि वह ऐसा नहीं करता तो बुद्धिमानी का काम नहीं करता, भविष्य में धोखा खायगाः
सबको अपना समझा था, मैं कुछ भी छिपा न पाया । मत सरल बनो, पहिचानो, यह जग ने मुझे सिखाया ।।"
हाँ, "एक प्राण दो देह" वाले इस आदर्श की यदि थोड़ी-बहुत
संभावना हो भी सकती है तो गृहस्थ
जीवन में ही । भारतीय
आदर्श पति और पत्नी को अच्छे मानता है। उनके ऐहिक तथा पारलौकिक दोनों ही आदर्श एक ही हैं। पत्नी तो मरने पर भी उसी पति की ही होती है ( प्रेत्यभागृहस्थ जीवनमें वेऽपि तस्य सा ) । अस्तु की अधिक संभावना भिन्नता की अपेक्षा प्रेम में है, किंतु वह भी तुलनात्मक रूप से ही । कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो अपने जोड़े में भी छिपाई जातीं हैं । वस्तुतः, कुछ वातें मित्र से छिपाकर स्त्री को बतलाई जाती हैं। और कुछ स्त्री से छिपाकर मित्र को, किंतु किसी के भी सामने हम अपना हृदय खोलकर नहीं रख सकते । नारियों के हृदय में तो इतना स्थान होता ही है कि वे अपनी कुछ बातें पति तथा सहेलियों दोनों ही से छिपातीं रहें, पुरुष को भी अपनी भूल किसी पर प्रकट नहीं करनी चाहिए :"रहिमन निज मन की व्यथा, मन हीं राखौ गोय! सुनि इटहै लोग सब, वांटि न हैं कोय ।।"
लोगों की इसी प्रवृत्ति के कारण ही तो हम कहते हैंः"मेरा था ही कौन, जिसे मैं नाज, दिखाता" ( मुक्ति ) । संसार की समस्याएँ इतनी विचित्र हैं कि न तो हम यहाँ पर किसी से प्रीति ही जोड़ सकते हैं और न किसी को अपना ही समझ सकते हैं । माया जाल में पड़े हुए तुच्छ प्राणियों की परवशता और उनके छोटे-छोटे स्वार्थ, इन्हीं की उलट-फेर में सारा जीवन बीत जाता है । क्या हुआ कि किसी ने इसी देह से स्वर्ग प्राप्त करने का प्रयत्न
|
संचालित हों वह सर्वमान्य है। एक का सुख-दुःख दूसरे का सुख-दुःख है, एक की अनुभूति दूसरे की अनुभूति है, वे दोनों भले ही दूर हों फिर भी पास ही हैं; एक व्यक्ति दूसरे को उसी भाँति "पहिचानता" है, जैसे स्वयं अपने कोः"कागढ़ पर लिखत न बनत, कहत सँदेस लजात । अपने जिय सों जानिए, मेरे जिय की बात ॥" यहाँ बाइरलेस सेट की भी आवश्यकता नहीं । ऐसी प्रीति में दुराव-छिपाव तो छू तक न जाना चाहिए । किंतु सोचने से जान पड़ता है कि यह प्रीति वास्तव में आदर्श ही है, यह संभव नहीं; कल्पना की वस्तु है, प्रत्यक्ष जीवन का काम नहीं । जो संसार में रहता है उस के प्रतिदिन के जीवन का भी कुछ रहस्य होता है जिसे वह अपने " अभिन" को भी नहीं बतला सकता और यदि बतलाता है तोउस संबंध में कभी न कभी खटाई पड़ जावेगी, न प्रीति ही रहेगी न उसका आदर्श । यह निश्चित है कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को न केवल कुछ बातें अपने मित्र से छिपानी चाहिए प्रत्युत वह छिपाना भी है और यदि वह ऐसा नहीं करता तो बुद्धिमानी का काम नहीं करता, भविष्य में धोखा खायगाः सबको अपना समझा था, मैं कुछ भी छिपा न पाया । मत सरल बनो, पहिचानो, यह जग ने मुझे सिखाया ।।" हाँ, "एक प्राण दो देह" वाले इस आदर्श की यदि थोड़ी-बहुत संभावना हो भी सकती है तो गृहस्थ जीवन में ही । भारतीय आदर्श पति और पत्नी को अच्छे मानता है। उनके ऐहिक तथा पारलौकिक दोनों ही आदर्श एक ही हैं। पत्नी तो मरने पर भी उसी पति की ही होती है । अस्तु की अधिक संभावना भिन्नता की अपेक्षा प्रेम में है, किंतु वह भी तुलनात्मक रूप से ही । कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो अपने जोड़े में भी छिपाई जातीं हैं । वस्तुतः, कुछ वातें मित्र से छिपाकर स्त्री को बतलाई जाती हैं। और कुछ स्त्री से छिपाकर मित्र को, किंतु किसी के भी सामने हम अपना हृदय खोलकर नहीं रख सकते । नारियों के हृदय में तो इतना स्थान होता ही है कि वे अपनी कुछ बातें पति तथा सहेलियों दोनों ही से छिपातीं रहें, पुरुष को भी अपनी भूल किसी पर प्रकट नहीं करनी चाहिए :"रहिमन निज मन की व्यथा, मन हीं राखौ गोय! सुनि इटहै लोग सब, वांटि न हैं कोय ।।" लोगों की इसी प्रवृत्ति के कारण ही तो हम कहते हैंः"मेरा था ही कौन, जिसे मैं नाज, दिखाता" । संसार की समस्याएँ इतनी विचित्र हैं कि न तो हम यहाँ पर किसी से प्रीति ही जोड़ सकते हैं और न किसी को अपना ही समझ सकते हैं । माया जाल में पड़े हुए तुच्छ प्राणियों की परवशता और उनके छोटे-छोटे स्वार्थ, इन्हीं की उलट-फेर में सारा जीवन बीत जाता है । क्या हुआ कि किसी ने इसी देह से स्वर्ग प्राप्त करने का प्रयत्न
|
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कहा है कि अगर किसी को घरवाली उधार दे दी तो उसके वापस मिलने की संभावना नहीं रहती। इस बयान को लेकर वह ट्रोल हो गईं हैं।
महाराष्ट्र में काफी दिनों तक चले सियासी ड्रामे का अंत एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद हो गया। बीजेपी की मदद से मुख्यमंत्री बने शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे ने पदभार संभालने के करीब नौ दिन बाद पीएम मोदी समेत बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर आवश्यक चर्चा की है।
एलएसी पर चीन की हरकतें आए दिन कोई न कोई विवाद पैदा कर रही हैं। एलएसी के पास सैन्य अभ्यास कर रहे ड्रैगन ने भारतीय क्षेत्र के काफी नजदीक से विमानों को उड़ाकर उकसाया है।
चीनी वीजा मामले (Chinese Visa Case) में सीबीआई ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) के घर की तलाशी ली है। कार्ति पर चीनी कामगारों को प्रोजेक्ट वीजा फिर से जारी कराने के बदले 50 लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है।
कोविड की वजह से उजाड़ हो चुका मीना बाजार इस बार बकरीद पर गुलजार है। यहां एक से बढ़कर एक बेशकीमती बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। 15 लाख रुपये से लेकर 35 लाख वाले बकरों को तो देखने के लिए भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को 35 लाख रुपये के एक बकरे का सौदा भी हो गया।
सीबीआई ने प्राइवेट कंपनी को टेंडर देने के मामले में केस दर्ज करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड किया। केंद्रीय एजेंसी को काफी अधिक नकदी, ज्वेलरी और फिक्स डिपॉजिट के कागजात मिले हैं।
फिल्म RRR के सांग-एथरा जांदा(Ethara Janda song) में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की इमेज को शामिल क्यों नहीं? इसका अब खुलासा हो गया है। फिल्म के लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने एक इंटरव्यू में इसके पीछे की कहानी बयां की है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में हैं। दोनों नेताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। इस दौरान कैबिनेट विस्तार पर बात हुई है।
|
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर किसी को घरवाली उधार दे दी तो उसके वापस मिलने की संभावना नहीं रहती। इस बयान को लेकर वह ट्रोल हो गईं हैं। महाराष्ट्र में काफी दिनों तक चले सियासी ड्रामे का अंत एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद हो गया। बीजेपी की मदद से मुख्यमंत्री बने शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे ने पदभार संभालने के करीब नौ दिन बाद पीएम मोदी समेत बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर आवश्यक चर्चा की है। एलएसी पर चीन की हरकतें आए दिन कोई न कोई विवाद पैदा कर रही हैं। एलएसी के पास सैन्य अभ्यास कर रहे ड्रैगन ने भारतीय क्षेत्र के काफी नजदीक से विमानों को उड़ाकर उकसाया है। चीनी वीजा मामले में सीबीआई ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के घर की तलाशी ली है। कार्ति पर चीनी कामगारों को प्रोजेक्ट वीजा फिर से जारी कराने के बदले पचास लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। कोविड की वजह से उजाड़ हो चुका मीना बाजार इस बार बकरीद पर गुलजार है। यहां एक से बढ़कर एक बेशकीमती बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। पंद्रह लाख रुपये से लेकर पैंतीस लाख वाले बकरों को तो देखने के लिए भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को पैंतीस लाख रुपये के एक बकरे का सौदा भी हो गया। सीबीआई ने प्राइवेट कंपनी को टेंडर देने के मामले में केस दर्ज करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों के ठिकानों पर रेड किया। केंद्रीय एजेंसी को काफी अधिक नकदी, ज्वेलरी और फिक्स डिपॉजिट के कागजात मिले हैं। फिल्म RRR के सांग-एथरा जांदा में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की इमेज को शामिल क्यों नहीं? इसका अब खुलासा हो गया है। फिल्म के लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने एक इंटरव्यू में इसके पीछे की कहानी बयां की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में हैं। दोनों नेताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। इस दौरान कैबिनेट विस्तार पर बात हुई है।
|
बिहार में कोरोना का कहर जारी है. वायरस आम से लेकर खास लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. इसी बीच बड़ी खबर आ रही है कि बिहार सरकार के मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह का निधन हो गया है. वे कोरोना सें संक्रमित थे और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. उनके निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है. आपको बता दें कि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का भी कोरोना से निधन हुआ था.
आपको बता दें कि अरुण कुमार सिंह मुख्य सचिव से पहले बिहार के विकास आयुक्त का पदभार संभाल रहे थे. उन्हें इसी साल मुख्य सचिव बनाया गया था. जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहीं शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.
कैबिनेट की बैठक के दौरान जैसे ही मुख्य सचिव की मृत्यु खबर सामने आई नीतीश कुमार सहित सभी कैबिनेट सहयोगियों ने शोक व्यक्त किया. आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का निधन हो गया था.
|
बिहार में कोरोना का कहर जारी है. वायरस आम से लेकर खास लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. इसी बीच बड़ी खबर आ रही है कि बिहार सरकार के मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह का निधन हो गया है. वे कोरोना सें संक्रमित थे और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. उनके निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है. आपको बता दें कि इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का भी कोरोना से निधन हुआ था. आपको बता दें कि अरुण कुमार सिंह मुख्य सचिव से पहले बिहार के विकास आयुक्त का पदभार संभाल रहे थे. उन्हें इसी साल मुख्य सचिव बनाया गया था. जानकारी के अनुसार, पंद्रह अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहीं शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. कैबिनेट की बैठक के दौरान जैसे ही मुख्य सचिव की मृत्यु खबर सामने आई नीतीश कुमार सहित सभी कैबिनेट सहयोगियों ने शोक व्यक्त किया. आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव रवि शंकर चौधरी का निधन हो गया था.
|
जवाहर और मनको बसमें कर लेनेका सामान चलता था । किशोरियोंने तुरन्त स्नानकर पोशाक पहनी । उन्होंने ईरानी अरुणोदयके रंगकी, गुलावी रंगकी और हल्के बैगनी रंगकी पोशाकें पहनीं। उन्होंने अपने सपनोंको फूलोंके समान धीरे-धीरे सँजोकर रखा था और वह इस पथमें उसे थोड़ाथोड़ा बाँटनेको तैयार भी थी । वे भी इसी रास्तेपर जायँगी । सबसे बड़ी किशोरी तो मानो प्रेम में पड़नेके लिए तैयार ही बैठी थी । घण्टी-ध्वनि सुनते ही उसका मन प्रेमको पुकारने लगा। उस पुकारपर उसने अन्य दो किशोरियोंको सिखाया ।
श्रो साथी, मेरे साथी
मैं संग तुम्हारे चलती हूँ ।
किन्तु वह विवाहके लिए वाग्दत्ता हो चुकी थी । ग्राम ही का एक युवक था । उसने आकर हाथ पकड़ लिया और बाधा दी और जानना चाहा कि वह क्यों चली जाना चाहती है ? कहाँ जाना चाहती है ?
किन्तु वह क्या उत्तर दे ? दिगन्तकें उस पार जो विश्व है, घण्टीकी टुन-टुनमें जो वाणी है, उसका मर्म उसके साथ विवाह के लिए उत्कण्ठित क्रोधसे भरे तरुणको वह कैसे समझाये ? अन्तमें उसने नृत्य करते-करते उसका क्रोध पानी कर दिया ।" नृत्यसे सम्मोहित होकर वह सो गया । जव वह जागकर उठा तब तक वह जा चुकी थी । और अब वहाँसे लौटना सम्भव न था । इस मरुपारके गाँवमें फिर लौटकर वह न आई । ईरानी मरु प्रान्तरकी प्रेम-विह्वला किशोरियाँ अपने हास्य और नृत्यकी लहरोंमें मिलकर कहाँ चली गईं । फिर उनकी व्याकुल कर देनेवाली रंग-विरंगी पोशाकें नहीं दिखाई दीं ।
कवि सादीने ठीक ही लिखा है. अरे धीरे चलो धीरे चलो कारवाँ, मैं प्रशान्त हूँ, मेरे हृदयको मन चोर लेकर चला गया है।
|
जवाहर और मनको बसमें कर लेनेका सामान चलता था । किशोरियोंने तुरन्त स्नानकर पोशाक पहनी । उन्होंने ईरानी अरुणोदयके रंगकी, गुलावी रंगकी और हल्के बैगनी रंगकी पोशाकें पहनीं। उन्होंने अपने सपनोंको फूलोंके समान धीरे-धीरे सँजोकर रखा था और वह इस पथमें उसे थोड़ाथोड़ा बाँटनेको तैयार भी थी । वे भी इसी रास्तेपर जायँगी । सबसे बड़ी किशोरी तो मानो प्रेम में पड़नेके लिए तैयार ही बैठी थी । घण्टी-ध्वनि सुनते ही उसका मन प्रेमको पुकारने लगा। उस पुकारपर उसने अन्य दो किशोरियोंको सिखाया । श्रो साथी, मेरे साथी मैं संग तुम्हारे चलती हूँ । किन्तु वह विवाहके लिए वाग्दत्ता हो चुकी थी । ग्राम ही का एक युवक था । उसने आकर हाथ पकड़ लिया और बाधा दी और जानना चाहा कि वह क्यों चली जाना चाहती है ? कहाँ जाना चाहती है ? किन्तु वह क्या उत्तर दे ? दिगन्तकें उस पार जो विश्व है, घण्टीकी टुन-टुनमें जो वाणी है, उसका मर्म उसके साथ विवाह के लिए उत्कण्ठित क्रोधसे भरे तरुणको वह कैसे समझाये ? अन्तमें उसने नृत्य करते-करते उसका क्रोध पानी कर दिया ।" नृत्यसे सम्मोहित होकर वह सो गया । जव वह जागकर उठा तब तक वह जा चुकी थी । और अब वहाँसे लौटना सम्भव न था । इस मरुपारके गाँवमें फिर लौटकर वह न आई । ईरानी मरु प्रान्तरकी प्रेम-विह्वला किशोरियाँ अपने हास्य और नृत्यकी लहरोंमें मिलकर कहाँ चली गईं । फिर उनकी व्याकुल कर देनेवाली रंग-विरंगी पोशाकें नहीं दिखाई दीं । कवि सादीने ठीक ही लिखा है. अरे धीरे चलो धीरे चलो कारवाँ, मैं प्रशान्त हूँ, मेरे हृदयको मन चोर लेकर चला गया है।
|
इस सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक पिता अपनी नवजात बेटी को खुद अपने सीने से लगाकर ब्रेस्टफीड करा रहा है। यह वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है जो 8 सेकंड का है। इस वीडियो को देखकर किसी की भी आंखें भर आ सकती है। यह वीडियो ट्विटर पर 17 नवंबर को अपलोड किया गया था जिसको अब तक कम से कम 47 लाख लोग देख चुके हैं और सभी लोगों ने वीडियो देखने के बाद पिता की काफी तारीफ की।
यह वीडियो ट्विटर यूजर @_SJPeace_ (StanceGrounded) ने पोस्ट किया है जो 8 सेकंड का है। इस वीडियो पर कैप्शन दिया गया है कि बच्ची की मां नहीं थी और वह बोतल से दूध पीना नहीं चाह रही थी। इसलिए मुझे इसे धोखा देना पड़ा। यह इतना फनी है कि मैं रो रहा हूं। डैड ऑफ द ईयर।
इस वीडियो में आप खुद देख सकते हैं कि पिता अपनी बच्ची को सीने से लगाए हुए हैं और शर्ट के भीतर से बोतल के जरिए वे बच्ची को दूध पिला रहे हैं। क्योंकि बच्ची सीधे बोतल से दूध नहीं पी रही थी।
"Her mama gone and she wouldn't take the bottle, so I had to trick her" ? ? ?
This is so funny, i'm crying ? .
|
इस सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक पिता अपनी नवजात बेटी को खुद अपने सीने से लगाकर ब्रेस्टफीड करा रहा है। यह वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है जो आठ सेकंड का है। इस वीडियो को देखकर किसी की भी आंखें भर आ सकती है। यह वीडियो ट्विटर पर सत्रह नवंबर को अपलोड किया गया था जिसको अब तक कम से कम सैंतालीस लाख लोग देख चुके हैं और सभी लोगों ने वीडियो देखने के बाद पिता की काफी तारीफ की। यह वीडियो ट्विटर यूजर @_SJPeace_ ने पोस्ट किया है जो आठ सेकंड का है। इस वीडियो पर कैप्शन दिया गया है कि बच्ची की मां नहीं थी और वह बोतल से दूध पीना नहीं चाह रही थी। इसलिए मुझे इसे धोखा देना पड़ा। यह इतना फनी है कि मैं रो रहा हूं। डैड ऑफ द ईयर। इस वीडियो में आप खुद देख सकते हैं कि पिता अपनी बच्ची को सीने से लगाए हुए हैं और शर्ट के भीतर से बोतल के जरिए वे बच्ची को दूध पिला रहे हैं। क्योंकि बच्ची सीधे बोतल से दूध नहीं पी रही थी। "Her mama gone and she wouldn't take the bottle, so I had to trick her" ? ? ? This is so funny, i'm crying ? .
|
राजीव गांधी के हत्यारों को छोड़ने की तैयारी?
पूर्व पधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को सरकार फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचा पाई। मंगलवार को सुपीम कोर्ट ने कांग्रेस की अगुवाई वाली संपग सरकार को बड़ा झटका देते हुए राजीव गांधी के तीन हत्यारों को फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी। कोर्ट ने दया याचिका निपटाने में हुई 11 साल की देरी को पताड़ना और अनुचित बताते हुए यह फैसला दिया। यह पहला मौका है जब आतंकवादियों को फांसी की दया याचिका निपटाने में देरी के आधार पर माफ किया गया है। इससे पहले गत 21 जनवरी को सुपीम कोर्ट ने 15 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया था। राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 में श्रीपेरम्बदूर में लिट्टे के आत्मघाती दस्ते ने बम विस्फोट से की थी। टाडा कोर्ट ने चार हत्यारों श्री हरन उर्फ मुरुगन, टी सुथेन्द्र राजा उर्फ सान्तन, एजी पेरारिवलन उर्फ अरिव तथा एक मात्र दोषी नलिनी को फांसी दी थी। सुपीम कोर्ट ने 11 मई 1999 में चारों की फांसी पर मुहर लगा दी थी। सुपीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली बैंच ने सरकार की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि याचिका के निपटाने में अनुचित विलंब नहीं हुआ है और इससे दोषियों को मानसिक पीड़ा नहीं झेलनी पड़ी है। पिछले माह भी अपने ऐसे ही फैसले में सुपीम कोर्ट ने दया याचिका में हुई देरी के आधार पर मौत की सजा पाए 15 दोषियों को राहत दी थी। अदालत के इस तर्क से असहमत नहीं हुआ जा सकता कि मौत की सजा के मामले में सालों साल टलते रहना गलत है। सरकार अब लाख तर्क दे लेकिन उसके पास इस बात का कोई समुचित जवाब नहीं हो सकता कि किसी दया याचिका के निपटारे में दशक भर वक्त क्यों लगता है? अदालत का यह कहना भी वाजिब है कि सरकार दया याचिकाओं के संदर्भ में राष्ट्रपति को उचित समय के भीतर सलाह दे। फैसला आते ही तमिलनाडु की जयललिता सरकार ने राजीव हत्याकांड के सातों मुजरिमों की समय से पहले ही रिहाई का फैसला किया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस फैसले पर बेहद दुखी और भावुक नजर आए लेकिन डीएमके पमुख करुणानिधि ने अपनी धुर विरोधी जयललिता के फैसले की तारीफ की। जयललिता ने कहा कि सभी दोषी 27 साल जेल में बिता चुके हैं, ऐसे में सरकार ने उन्हें रिहा करने का फैसला किया है। राज्य सरकार इस फैसले को मंजूरी के लिए केन्द्र के पास भेजेगी। क्येंकि यह मामला सीबीआई ने दर्ज किया था। उधर इस फैसले के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी के पास चुनावी रैली में कहा, मैं दुखी हूं कि हत्यारे रिहा किए जा रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पधानमंत्री को मारा और रिहा किया जा रहा है तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा? इस देश में पधानमंत्री को भी इंसाफ नहीं मिलता, यह मेरे दिल की आवाज है। मैं मौत की सजा पर विश्वास नहीं करता, क्योंकि इससे मेरे पिता वापस नहीं आएंगे लेकिन यह मेरे पिता या परिवार का नहीं, देश का मुद्दा है। हम राहुल गांधी के दुख को समझ सकते हैं और उनसे हमददी भी रखते हैं पर मूल सवाल यह है कि दया याचिकाओं में 11 साल की देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार क्यों इसके लिए जिम्मेदार नहीं? राष्ट्रपति और गृहमंत्रालय अगर चाहते तो दया याचिका का निपटारा जल्द हो सकता था। रही बात सुपीम कोर्ट के फैसले की तो पिछले महीने दया याचिका में देरी के आधार पर फांसी की सजा पाए 15 दोषियों की सजा उम्रकैद में तब्दील की गई थी। इनमें कुख्यात वीरप्पन के सहयोगी भी हैं जिन्होंने एक बहादुर पुलिस अधिकारी समेत कई पुलिस कर्मियों की हत्या की थी। तथाकथित देरी के आधार पर फांसी की सजा पाए लोगों को राहत देने से भारतीय विधि व्यवस्था पर जहां पश्न चिन्ह लगता है वहीं उन लोगों के बलिदान की अनदेखी भी है जो अपनी फर्ज अदायगी के दौरान खूंखार आरोपियों का शिकार बन गए। इस स्थिति के लिए वह तंत्र तो जिम्मेदार है ही जो दया याचिकाओं का निपटारा शीघ्रता से करने की बजाय संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति का लाभ लेने में देरी करता है पर साथ-साथ हम क्षमा चाहेंगे कहीं न कहीं सुपीम कोर्ट की भी जवाबदेही बनती है कि जिन लोगें के फांसी की सजा की पुष्टि खुद सुपीम कोर्ट ने की थी वह अब इस नतीजे पर पहुंच रहा है कि फांसी की सजा पाए दोषियों की दया याचिका के निपटारे में वर्षें की देरी वस्तुत उनके साथ अत्याचार है?
|
राजीव गांधी के हत्यारों को छोड़ने की तैयारी? पूर्व पधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को सरकार फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचा पाई। मंगलवार को सुपीम कोर्ट ने कांग्रेस की अगुवाई वाली संपग सरकार को बड़ा झटका देते हुए राजीव गांधी के तीन हत्यारों को फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी। कोर्ट ने दया याचिका निपटाने में हुई ग्यारह साल की देरी को पताड़ना और अनुचित बताते हुए यह फैसला दिया। यह पहला मौका है जब आतंकवादियों को फांसी की दया याचिका निपटाने में देरी के आधार पर माफ किया गया है। इससे पहले गत इक्कीस जनवरी को सुपीम कोर्ट ने पंद्रह दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया था। राजीव गांधी की हत्या इक्कीस मई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में श्रीपेरम्बदूर में लिट्टे के आत्मघाती दस्ते ने बम विस्फोट से की थी। टाडा कोर्ट ने चार हत्यारों श्री हरन उर्फ मुरुगन, टी सुथेन्द्र राजा उर्फ सान्तन, एजी पेरारिवलन उर्फ अरिव तथा एक मात्र दोषी नलिनी को फांसी दी थी। सुपीम कोर्ट ने ग्यारह मई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में चारों की फांसी पर मुहर लगा दी थी। सुपीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली बैंच ने सरकार की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि याचिका के निपटाने में अनुचित विलंब नहीं हुआ है और इससे दोषियों को मानसिक पीड़ा नहीं झेलनी पड़ी है। पिछले माह भी अपने ऐसे ही फैसले में सुपीम कोर्ट ने दया याचिका में हुई देरी के आधार पर मौत की सजा पाए पंद्रह दोषियों को राहत दी थी। अदालत के इस तर्क से असहमत नहीं हुआ जा सकता कि मौत की सजा के मामले में सालों साल टलते रहना गलत है। सरकार अब लाख तर्क दे लेकिन उसके पास इस बात का कोई समुचित जवाब नहीं हो सकता कि किसी दया याचिका के निपटारे में दशक भर वक्त क्यों लगता है? अदालत का यह कहना भी वाजिब है कि सरकार दया याचिकाओं के संदर्भ में राष्ट्रपति को उचित समय के भीतर सलाह दे। फैसला आते ही तमिलनाडु की जयललिता सरकार ने राजीव हत्याकांड के सातों मुजरिमों की समय से पहले ही रिहाई का फैसला किया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस फैसले पर बेहद दुखी और भावुक नजर आए लेकिन डीएमके पमुख करुणानिधि ने अपनी धुर विरोधी जयललिता के फैसले की तारीफ की। जयललिता ने कहा कि सभी दोषी सत्ताईस साल जेल में बिता चुके हैं, ऐसे में सरकार ने उन्हें रिहा करने का फैसला किया है। राज्य सरकार इस फैसले को मंजूरी के लिए केन्द्र के पास भेजेगी। क्येंकि यह मामला सीबीआई ने दर्ज किया था। उधर इस फैसले के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी के पास चुनावी रैली में कहा, मैं दुखी हूं कि हत्यारे रिहा किए जा रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पधानमंत्री को मारा और रिहा किया जा रहा है तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा? इस देश में पधानमंत्री को भी इंसाफ नहीं मिलता, यह मेरे दिल की आवाज है। मैं मौत की सजा पर विश्वास नहीं करता, क्योंकि इससे मेरे पिता वापस नहीं आएंगे लेकिन यह मेरे पिता या परिवार का नहीं, देश का मुद्दा है। हम राहुल गांधी के दुख को समझ सकते हैं और उनसे हमददी भी रखते हैं पर मूल सवाल यह है कि दया याचिकाओं में ग्यारह साल की देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार क्यों इसके लिए जिम्मेदार नहीं? राष्ट्रपति और गृहमंत्रालय अगर चाहते तो दया याचिका का निपटारा जल्द हो सकता था। रही बात सुपीम कोर्ट के फैसले की तो पिछले महीने दया याचिका में देरी के आधार पर फांसी की सजा पाए पंद्रह दोषियों की सजा उम्रकैद में तब्दील की गई थी। इनमें कुख्यात वीरप्पन के सहयोगी भी हैं जिन्होंने एक बहादुर पुलिस अधिकारी समेत कई पुलिस कर्मियों की हत्या की थी। तथाकथित देरी के आधार पर फांसी की सजा पाए लोगों को राहत देने से भारतीय विधि व्यवस्था पर जहां पश्न चिन्ह लगता है वहीं उन लोगों के बलिदान की अनदेखी भी है जो अपनी फर्ज अदायगी के दौरान खूंखार आरोपियों का शिकार बन गए। इस स्थिति के लिए वह तंत्र तो जिम्मेदार है ही जो दया याचिकाओं का निपटारा शीघ्रता से करने की बजाय संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति का लाभ लेने में देरी करता है पर साथ-साथ हम क्षमा चाहेंगे कहीं न कहीं सुपीम कोर्ट की भी जवाबदेही बनती है कि जिन लोगें के फांसी की सजा की पुष्टि खुद सुपीम कोर्ट ने की थी वह अब इस नतीजे पर पहुंच रहा है कि फांसी की सजा पाए दोषियों की दया याचिका के निपटारे में वर्षें की देरी वस्तुत उनके साथ अत्याचार है?
|
Don't Miss!
बीच में ऐसा खबरें आ रही थी रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी फिल्म रॉकस्टार के बाद एक दूसरे से बात तक करना पसंद नहीं कर रहे। सब यही सोच रहे थे कि दोनों की राहें जुदा हो गई है। अगर आप भी ऐसा सोच रहे तो आप गलत हैं। रणबीर नरगिस आज भी दोस्ती के धागे में बंधे हुए है। आज यह डोर और भी मजबूत हो चुकी है।
आज कल नरगिस न्यूयॉर्क में रह रही हैं, और रणबीर लंदन में रह रहे हैं जब रणबीर को मन किया नरगिस से मिलने का तो वो तुरंत ही न्यूयॉर्क को रवाना हो गये बहाना बना डिनर।
सूत्रों की माने तो रणबीर लंदन में आराम फरमा रहे थे जब नरगिस ने उन्हें न्यूयॉर्क आने के लिए कहा था। नरगिस के बोलने बस की देर थी और रणबीर ने सीधे ही न्यूयॉर्क की उड़ान पकड़ ली।
रणबीर और नरगिस ने हमेशा ही अपने रिश्तों को लेकर इंकार किया है लेकिन उन्हें देखने वालों का हमेशा ही ये कहना रहा है कि फिल्म रॉकस्टार में काम करते हुए दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ चुके हैं।
समय के साथ साथ रणबीर नरगिस को लेकर काफी सेंसेटिव हो गए हैं और वह उनसे मिलने का कोई ना कोई बहाना ढ़ूंढ़ते ही रहते हैं। रणबीर कई बार नरगिस के साथ रोमांटिक डेट पर जा चुके हैं। अब तो ऐसा लगता है कि रॉकस्टार में लव करते करते रणबीर सचमुच नरगिस से प्यार करने लगे हैं।
|
Don't Miss! बीच में ऐसा खबरें आ रही थी रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी फिल्म रॉकस्टार के बाद एक दूसरे से बात तक करना पसंद नहीं कर रहे। सब यही सोच रहे थे कि दोनों की राहें जुदा हो गई है। अगर आप भी ऐसा सोच रहे तो आप गलत हैं। रणबीर नरगिस आज भी दोस्ती के धागे में बंधे हुए है। आज यह डोर और भी मजबूत हो चुकी है। आज कल नरगिस न्यूयॉर्क में रह रही हैं, और रणबीर लंदन में रह रहे हैं जब रणबीर को मन किया नरगिस से मिलने का तो वो तुरंत ही न्यूयॉर्क को रवाना हो गये बहाना बना डिनर। सूत्रों की माने तो रणबीर लंदन में आराम फरमा रहे थे जब नरगिस ने उन्हें न्यूयॉर्क आने के लिए कहा था। नरगिस के बोलने बस की देर थी और रणबीर ने सीधे ही न्यूयॉर्क की उड़ान पकड़ ली। रणबीर और नरगिस ने हमेशा ही अपने रिश्तों को लेकर इंकार किया है लेकिन उन्हें देखने वालों का हमेशा ही ये कहना रहा है कि फिल्म रॉकस्टार में काम करते हुए दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ चुके हैं। समय के साथ साथ रणबीर नरगिस को लेकर काफी सेंसेटिव हो गए हैं और वह उनसे मिलने का कोई ना कोई बहाना ढ़ूंढ़ते ही रहते हैं। रणबीर कई बार नरगिस के साथ रोमांटिक डेट पर जा चुके हैं। अब तो ऐसा लगता है कि रॉकस्टार में लव करते करते रणबीर सचमुच नरगिस से प्यार करने लगे हैं।
|
देहरादून - ईवीएम से कथित तौर पर छेड़खानी की जांच की मांग को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मशीनों को सीज करने का आदेश दिया है। सूबे की विकासनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नवप्रभात की याचिका पर हाई कोर्ट ने फरवरी में मतदान के लिए इस्तेमाल की गई ईवीएम को सीज करने का आदेश दिया। यही नहीं उच्च न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य चुनाव आयोग, चीफ सेक्रेटरी और चुनाव जीतने वाले भाजपा कैंडीडेट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। विकासनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस से लड़े नवप्रभात दूसरे नंबर पर थे। उन्हें भाजपा के एमएस चौहान के मुकाबले शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
|
देहरादून - ईवीएम से कथित तौर पर छेड़खानी की जांच की मांग को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मशीनों को सीज करने का आदेश दिया है। सूबे की विकासनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नवप्रभात की याचिका पर हाई कोर्ट ने फरवरी में मतदान के लिए इस्तेमाल की गई ईवीएम को सीज करने का आदेश दिया। यही नहीं उच्च न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य चुनाव आयोग, चीफ सेक्रेटरी और चुनाव जीतने वाले भाजपा कैंडीडेट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। विकासनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस से लड़े नवप्रभात दूसरे नंबर पर थे। उन्हें भाजपा के एमएस चौहान के मुकाबले शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
|
Mahatma Gandhi: सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि लता रामगोबिन ने 'न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवेयर डिस्ट्रीब्यूटर्स'के निदेशक महाराज से 2015 के अगस्त में मुलाकात की थी।
नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पड़पोती को दक्षिण अफ्रीका में डरबन की एक कोर्ट ने 60 लाख रैंड की धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में दोषी करार देते हुए सात साल कैद की सजा सुनायी है। बता दें महात्मा गांधी की पड़पोती आशीष लता रामगोबिन (56) को सोमवार को अदालत ने यह सजा सुनाई है। आशीष लता रामगोबिन पर उद्योगपति एसआर महाराज के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगा था। महाराज ने उन्हें कथित रूप से भारत से एक ऐसी खेप के आयात और सीमाशुल्क कर के समाशोधन के लिए 62 लाख रैंड दिये थे जिसका कोई अस्तित्व नहीं था। इस मामले में उन्हें मिलने वाले लाभ का एक हिस्सा देने का वादा किया गया था। गौरतलब है कि लता रामगोबिन जानी मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता इला गांधी और दिवंगत मेवा रामगोबिंद की संतान हैं। साल 2015 में इस मामले में लता रामगोबिन के खिलाफ अदालत में सुनवाई शुरू हुई थी।
उस दौरान राष्ट्रीय अभियोजन प्राधिकरण (NPA) के ब्रिगेडियर हंगवानी मूलौदजी ने कहा था कि उन्होंने संभावित निवेशकों को यकीन दिलाने के लिए कथित रूप से फर्जी चालान और दस्तावेज दिये थे। उस दौरान बताया गया था कि भारत से लिनेन के तीन कंटेनर आ रहे हैं। उस वक्त लता रामगोबिन को 50,000 रैंड की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि लता रामगोबिन ने 'न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवेयर डिस्ट्रीब्यूटर्स'के निदेशक महाराज से 2015 के अगस्त में मुलाकात की थी। कंपनी कपड़ों, लिनेन और जूते-चप्पलों का आयात, निर्माण और बिक्री करती है। महाराज की कंपनी को मिलने वाले लाभ के आधार पर ही बाकी दूसरी कंपनियों को आर्थिक मदद भी मुहैया होती है। महाराज से लता रामगोबिन ने कहा था कि उन्होंने 'साउथ अफ्रीकन हॉस्पिटल ग्रुप नेट केयर' के लिए लिनेन के तीन कंटेनर मंगाये हैं।
|
Mahatma Gandhi: सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि लता रामगोबिन ने 'न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवेयर डिस्ट्रीब्यूटर्स'के निदेशक महाराज से दो हज़ार पंद्रह के अगस्त में मुलाकात की थी। नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पड़पोती को दक्षिण अफ्रीका में डरबन की एक कोर्ट ने साठ लाख रैंड की धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में दोषी करार देते हुए सात साल कैद की सजा सुनायी है। बता दें महात्मा गांधी की पड़पोती आशीष लता रामगोबिन को सोमवार को अदालत ने यह सजा सुनाई है। आशीष लता रामगोबिन पर उद्योगपति एसआर महाराज के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगा था। महाराज ने उन्हें कथित रूप से भारत से एक ऐसी खेप के आयात और सीमाशुल्क कर के समाशोधन के लिए बासठ लाख रैंड दिये थे जिसका कोई अस्तित्व नहीं था। इस मामले में उन्हें मिलने वाले लाभ का एक हिस्सा देने का वादा किया गया था। गौरतलब है कि लता रामगोबिन जानी मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता इला गांधी और दिवंगत मेवा रामगोबिंद की संतान हैं। साल दो हज़ार पंद्रह में इस मामले में लता रामगोबिन के खिलाफ अदालत में सुनवाई शुरू हुई थी। उस दौरान राष्ट्रीय अभियोजन प्राधिकरण के ब्रिगेडियर हंगवानी मूलौदजी ने कहा था कि उन्होंने संभावित निवेशकों को यकीन दिलाने के लिए कथित रूप से फर्जी चालान और दस्तावेज दिये थे। उस दौरान बताया गया था कि भारत से लिनेन के तीन कंटेनर आ रहे हैं। उस वक्त लता रामगोबिन को पचास,शून्य रैंड की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि लता रामगोबिन ने 'न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवेयर डिस्ट्रीब्यूटर्स'के निदेशक महाराज से दो हज़ार पंद्रह के अगस्त में मुलाकात की थी। कंपनी कपड़ों, लिनेन और जूते-चप्पलों का आयात, निर्माण और बिक्री करती है। महाराज की कंपनी को मिलने वाले लाभ के आधार पर ही बाकी दूसरी कंपनियों को आर्थिक मदद भी मुहैया होती है। महाराज से लता रामगोबिन ने कहा था कि उन्होंने 'साउथ अफ्रीकन हॉस्पिटल ग्रुप नेट केयर' के लिए लिनेन के तीन कंटेनर मंगाये हैं।
|
ICC ने BCCI को टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिये टैक्स छूट के मुद्दे को निपटाने के लिये समय सीमा इस साल दिसंबर तक बढ़ा दी है जो आईसीसी टूर्नामेंट जैसे विश्व टी20 और वनडे विश्व कप के आयोजन के लिये अनिवार्य है। इसी के साथ आईसीसी ने इस साल के T20 विश्व कप के भाग्य पर फैसले को और एक महीने टालने का फैसला किया है। T20 विश्व कप का आयोजन आस्ट्रेलिया में अक्टूबर-नवंबर में होना है।
ICC और BCCI के बीच भारत में 2016 में खेले गये विश्व टी20 से लेकर ही टैक्स में छूट को लेकर मतभेद चल रहे हैं। बता दें, ICC ने BCCI से विश्व कप के आयोजन के लिए भारत सरकार से टैक्स में छूट लेने की बात कही थी, लेकिन बोर्ड इसमें सफल नहीं हो सका। इसके बाद से ही ICC वर्ल्ड कप की मेजबानी छीनने का दवाब डाल रहा है।
भारत को 2021 में T20 विश्व कप और 2023 में 50 ओवरों के विश्व कप का आयोजन करना है। BCCI को 2016 विश्व टी20 से पहले वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिये कर छूट मिलती थी। ICC आमतौर पर टीवी उपकरणों के आयात में उत्पाद शुल्क में छूट की मांग करती है। लेकिन इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स का भारत में सेट अप है क्योंकि बीसीसीआई के घरेलू मैचों के अधिकार भी उसके पास हैं। यही बात 2016 विश्व टी20 के दौरान विवाद का कारण बनी थी और मामला आईसीसी पंचाट तक पहुंच गया था।
|
ICC ने BCCI को टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिये टैक्स छूट के मुद्दे को निपटाने के लिये समय सीमा इस साल दिसंबर तक बढ़ा दी है जो आईसीसी टूर्नामेंट जैसे विश्व टीबीस और वनडे विश्व कप के आयोजन के लिये अनिवार्य है। इसी के साथ आईसीसी ने इस साल के Tबीस विश्व कप के भाग्य पर फैसले को और एक महीने टालने का फैसला किया है। Tबीस विश्व कप का आयोजन आस्ट्रेलिया में अक्टूबर-नवंबर में होना है। ICC और BCCI के बीच भारत में दो हज़ार सोलह में खेले गये विश्व टीबीस से लेकर ही टैक्स में छूट को लेकर मतभेद चल रहे हैं। बता दें, ICC ने BCCI से विश्व कप के आयोजन के लिए भारत सरकार से टैक्स में छूट लेने की बात कही थी, लेकिन बोर्ड इसमें सफल नहीं हो सका। इसके बाद से ही ICC वर्ल्ड कप की मेजबानी छीनने का दवाब डाल रहा है। भारत को दो हज़ार इक्कीस में Tबीस विश्व कप और दो हज़ार तेईस में पचास ओवरों के विश्व कप का आयोजन करना है। BCCI को दो हज़ार सोलह विश्व टीबीस से पहले वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिये कर छूट मिलती थी। ICC आमतौर पर टीवी उपकरणों के आयात में उत्पाद शुल्क में छूट की मांग करती है। लेकिन इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स का भारत में सेट अप है क्योंकि बीसीसीआई के घरेलू मैचों के अधिकार भी उसके पास हैं। यही बात दो हज़ार सोलह विश्व टीबीस के दौरान विवाद का कारण बनी थी और मामला आईसीसी पंचाट तक पहुंच गया था।
|
बिश्वजीत शर्मा,
साहेबगंजः कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनर जिला प्रशासन कुछ सख्त फैसले ले रहा है. ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए जिले में लॉकडाउन किया गया है, तथा सोशल डिस्टेनसिंग के अनुपालन का सख्त निर्देश दिया गया है.
इसी क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी साहेबगंज पंकज साव जानकारी देते हुए बताया है, कि जिरवाबड़ी में 3 पूजा सामग्री दुकान को लॉकडाउन का उल्लंघन किये जाने के कारण सील कर दिया गया है.
अनुमंडल पदाधिकारी ने जानकारी दी है कि इन दुकानदारों को बार- बार चेतावनी दी गयी थी. बावजूद इसके, इनके द्वारा दुकान खोला जाता था,अतः उन्हें सील कर दिया गया.
अनुमंडल पदाधिकारी साव ने बताया कि सोशल डिस्टेनसिंग वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में बेहद अहम है तथा यह सभी दुकानदारों, बैंकों को निश्चित ही सुनिश्चित करना चाहिए कि सामाजिक दूरी दुकानदारों या बैंकों की जिम्मेदारी है. तथा वह आवश्यक सामग्रियों की बिक्री सरकार तथा प्रशासन के निर्गत किये गये निर्देश के अनुसार ही करें.
अगर वह इन निर्देशों की अवहेलना करते पाए जाते हैं तो प्रशासन उनपर कोई नरमी नहीं बरतेगी तथा आवश्यक कार्रवाई भी करेगी.
|
बिश्वजीत शर्मा, साहेबगंजः कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनर जिला प्रशासन कुछ सख्त फैसले ले रहा है. ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए जिले में लॉकडाउन किया गया है, तथा सोशल डिस्टेनसिंग के अनुपालन का सख्त निर्देश दिया गया है. इसी क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी साहेबगंज पंकज साव जानकारी देते हुए बताया है, कि जिरवाबड़ी में तीन पूजा सामग्री दुकान को लॉकडाउन का उल्लंघन किये जाने के कारण सील कर दिया गया है. अनुमंडल पदाधिकारी ने जानकारी दी है कि इन दुकानदारों को बार- बार चेतावनी दी गयी थी. बावजूद इसके, इनके द्वारा दुकान खोला जाता था,अतः उन्हें सील कर दिया गया. अनुमंडल पदाधिकारी साव ने बताया कि सोशल डिस्टेनसिंग वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में बेहद अहम है तथा यह सभी दुकानदारों, बैंकों को निश्चित ही सुनिश्चित करना चाहिए कि सामाजिक दूरी दुकानदारों या बैंकों की जिम्मेदारी है. तथा वह आवश्यक सामग्रियों की बिक्री सरकार तथा प्रशासन के निर्गत किये गये निर्देश के अनुसार ही करें. अगर वह इन निर्देशों की अवहेलना करते पाए जाते हैं तो प्रशासन उनपर कोई नरमी नहीं बरतेगी तथा आवश्यक कार्रवाई भी करेगी.
|
दिल्ली पुलिस ने जब नबाब से पूछताछ की जिसमें वो अपना आईडी कार्ड नहीं दिखा पाया. ऐसे में पुलिस को जब उस पर शक हुआ तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की. वहीं, पूछताछ करने पर उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का मामला दर्ज कर लिया है.
दिल्लीः राजधानी दिल्ली के नेब सराय में OYO होटल में एक शख्स के आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. जहां 12-13 मार्च की दरम्यानी रात में थाना नेब सराय में फांसी लगाने के संबंध में पुलिस को एक पीसीआर कॉल मिली थी. जिसमें सूचना मिली थी कि OYO होटल में एक शख्स ने फांसी लगा ली है. बताया जा रहा है कि इस oyo होटल में कुल 16 कमरे हैं. हर 2 मंजिलों पर 8 कमरे हैं. वहीं, इस होटल में कमरा नंबर-101 में एक युवक पंखे से लटका शव बरामद हुआ है.
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस के अनुसार, OYO होटल के कर्मचारियों से पूछताछ करने पर मृतक की पहचान राहुल (23) के रूप में हुई है. जोकि दक्षिणपुरी एक्सटेंशन दिल्ली के तौर पर हुई. होटल के स्टाफ ने बताया कि बीते 11 मार्च को मृतक भी रुका था.
क्या है मामला?
इस होटल में और एक सौरव के साथ 12 मार्च की सुबह होटल से चेक-आउट किया था. हालांकि, 12 मार्च को, उन्होंने फिर से शाम 5 बजे होटल में चेक इन किया था और अकेले रह रहे थे. हालांकि, इस मामले में थाना पुलिस ने मृतक के रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दे दी है. वहीं, क्राइम टीम ने घटनास्थल पर निरीक्षण किया है. इसके साथ ही शव को सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्यवाही करने के लिए एम्स अस्पताल के मोर्चरी में रखवा दिया है.
इस दौरान पुलिस को होटल के सीसीटीवी की जांच के दौरान पता चला कि पुलिस की वर्दी में एक शख्स इस oyo होटल में दाखिल हुआ था. ओयो के स्टाफ से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि ये पुलिस कर्मी एक महिला के साथ कमरा नं. 206. में आया था. जांच करने पर एक महिला और एक पुरुष नबाब सिंह बताया गया है. वह व्यक्ति दिल्ली पुलिस की वर्दी में था. जहां उसने अपना परिचय कांस्टेबल नवाब सिंह के रूप में दिया और खुद को थाना-ज्योति नगर, में तैनात बताया.
इस दौरान पुलिस ने जब नबाब से पूछताछ की जिसमें वो अपना आईडी कार्ड नहीं दिखा पाया. ऐसे में पुलिस को जब उस पर शक हुआ तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की. वहीं, पूछताछ करने पर उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल, पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है.
ये भी पढ़ेंः Satish Kaushik Death: जांच अफसर बदलवाने पर अड़ी दोस्त की पत्नी, अब तक खामोश क्यों रहीं?
|
दिल्ली पुलिस ने जब नबाब से पूछताछ की जिसमें वो अपना आईडी कार्ड नहीं दिखा पाया. ऐसे में पुलिस को जब उस पर शक हुआ तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की. वहीं, पूछताछ करने पर उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का मामला दर्ज कर लिया है. दिल्लीः राजधानी दिल्ली के नेब सराय में OYO होटल में एक शख्स के आत्महत्या करने का मामला सामने आया है. जहां बारह-तेरह मार्च की दरम्यानी रात में थाना नेब सराय में फांसी लगाने के संबंध में पुलिस को एक पीसीआर कॉल मिली थी. जिसमें सूचना मिली थी कि OYO होटल में एक शख्स ने फांसी लगा ली है. बताया जा रहा है कि इस oyo होटल में कुल सोलह कमरे हैं. हर दो मंजिलों पर आठ कमरे हैं. वहीं, इस होटल में कमरा नंबर-एक सौ एक में एक युवक पंखे से लटका शव बरामद हुआ है. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस के अनुसार, OYO होटल के कर्मचारियों से पूछताछ करने पर मृतक की पहचान राहुल के रूप में हुई है. जोकि दक्षिणपुरी एक्सटेंशन दिल्ली के तौर पर हुई. होटल के स्टाफ ने बताया कि बीते ग्यारह मार्च को मृतक भी रुका था. क्या है मामला? इस होटल में और एक सौरव के साथ बारह मार्च की सुबह होटल से चेक-आउट किया था. हालांकि, बारह मार्च को, उन्होंने फिर से शाम पाँच बजे होटल में चेक इन किया था और अकेले रह रहे थे. हालांकि, इस मामले में थाना पुलिस ने मृतक के रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दे दी है. वहीं, क्राइम टीम ने घटनास्थल पर निरीक्षण किया है. इसके साथ ही शव को सीआरपीसी की धारा एक सौ चौहत्तर के तहत कार्यवाही करने के लिए एम्स अस्पताल के मोर्चरी में रखवा दिया है. इस दौरान पुलिस को होटल के सीसीटीवी की जांच के दौरान पता चला कि पुलिस की वर्दी में एक शख्स इस oyo होटल में दाखिल हुआ था. ओयो के स्टाफ से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि ये पुलिस कर्मी एक महिला के साथ कमरा नं. दो सौ छः. में आया था. जांच करने पर एक महिला और एक पुरुष नबाब सिंह बताया गया है. वह व्यक्ति दिल्ली पुलिस की वर्दी में था. जहां उसने अपना परिचय कांस्टेबल नवाब सिंह के रूप में दिया और खुद को थाना-ज्योति नगर, में तैनात बताया. इस दौरान पुलिस ने जब नबाब से पूछताछ की जिसमें वो अपना आईडी कार्ड नहीं दिखा पाया. ऐसे में पुलिस को जब उस पर शक हुआ तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की. वहीं, पूछताछ करने पर उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल, पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है. ये भी पढ़ेंः Satish Kaushik Death: जांच अफसर बदलवाने पर अड़ी दोस्त की पत्नी, अब तक खामोश क्यों रहीं?
|
ढाकाः बांग्लादेश में कोरोना महामारी की स्थिति में सुधार और टीकाकरण कार्यक्रम तेज होने के साथ ही 543 दिन बाद स्कूल खोले गए और हजारों बच्चे स्कूल में अपनी कक्षाओं में लौटे। समाचार चैनलों ने भी दिखाया कि बच्चे स्कूली पोशाक पहने विद्यालय में प्रवेश कर रहे हैं। मास्क लगाए होने के बावजूद बच्चों की मुस्कान नजर आ रही थी। स्कूल के दरवाजे पर शिक्षकों ने बच्चों को चॉकलेट देकर उनका स्वागत किया। भीड़भाड़ से बचने के लिए अभिभावकों को स्कूल के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया।
शिक्षा मंत्री दीपू मोनी ने सुरक्षा उपायों को लागू करने में किसी भी तरह की लापरवाही के प्रति चेतावनी दी है। ढाका के अजीमपुर क्षेत्र में एक स्कूल का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा कि अगर ऐसा लगेगा कि संक्रमण फिर से फैल रहा है तो सरकार ऑनलाइन कक्षाओं को दोबोरा शुरू करने का निर्णय ले सकती है। बांग्लादेश में कोरोना फैलने के बाद 17 मार्च, 2020 को स्कूल बंद कर दिए थे।
|
ढाकाः बांग्लादेश में कोरोना महामारी की स्थिति में सुधार और टीकाकरण कार्यक्रम तेज होने के साथ ही पाँच सौ तैंतालीस दिन बाद स्कूल खोले गए और हजारों बच्चे स्कूल में अपनी कक्षाओं में लौटे। समाचार चैनलों ने भी दिखाया कि बच्चे स्कूली पोशाक पहने विद्यालय में प्रवेश कर रहे हैं। मास्क लगाए होने के बावजूद बच्चों की मुस्कान नजर आ रही थी। स्कूल के दरवाजे पर शिक्षकों ने बच्चों को चॉकलेट देकर उनका स्वागत किया। भीड़भाड़ से बचने के लिए अभिभावकों को स्कूल के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया। शिक्षा मंत्री दीपू मोनी ने सुरक्षा उपायों को लागू करने में किसी भी तरह की लापरवाही के प्रति चेतावनी दी है। ढाका के अजीमपुर क्षेत्र में एक स्कूल का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा कि अगर ऐसा लगेगा कि संक्रमण फिर से फैल रहा है तो सरकार ऑनलाइन कक्षाओं को दोबोरा शुरू करने का निर्णय ले सकती है। बांग्लादेश में कोरोना फैलने के बाद सत्रह मार्च, दो हज़ार बीस को स्कूल बंद कर दिए थे।
|
शिवपुरी। जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ककरई में चुनाबी रंजिश के चलते दो पक्षों में विबाद हो गया। यह बिवाद इतना बड़ गया कि वर्तमान सरंपच के गुर्गो ने जमकर तोडफ़ोड करते हुए ग्रामीणों के साथ मारपीट कर दी। इतना ही नहीं इस घटना के बाद ग्रामीणों ने सरंपच पति पर फायरिंग करने के आरोप भी लगाए। हांलाकि पुलिस इस मामले में मामले में आपस में सुलह की बात कह रही है। इस घटना में घायल 4 ग्रामीणों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया है।
जानकारी के अनुसार सरपंच पद के चुनाव में श्रीमती शांति यादव विजयी हुई थी। इससे उनके विरोधी उनसे रंजिश रखते थे। बताया जाता है कि आज सुबह सरपंच और उनके पति की शिकायत करने दो बुलेरो और पांच मोटरसाइकिल पर सवार होकर कुछ लोग शिवपुरी आ रहे थे। इनमें कुछ ग्राम के पंच भी थे।
इसकी जानकारी जब सरपंच के समर्थकों को लगी तो उन्होंने सडक़ पर पत्थर डालकर वाहनों को रोकने की कोशिश की। जैसे ही गाडिय़ां रूकी वैसे ही घात लगाए बैठे हमला बरों ने हमला बोल दिया तथा गाडिय़ों की तोड़ फोड और मारपीट करना शुरू कर दिया। दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई।
शिकायत करने जा रहे ग्रामीणों और सरपंच के बीच विवाद तो हुआ है जो कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आपस में सुलझ गया। यह मामला सिर्फ और सिर्फ पुलिस की छवि को धूलित करने का प्रयास है। गोली चलने और इतना ज्यादा बबाल होने का तो सबाल ही नहीं है।
|
शिवपुरी। जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ककरई में चुनाबी रंजिश के चलते दो पक्षों में विबाद हो गया। यह बिवाद इतना बड़ गया कि वर्तमान सरंपच के गुर्गो ने जमकर तोडफ़ोड करते हुए ग्रामीणों के साथ मारपीट कर दी। इतना ही नहीं इस घटना के बाद ग्रामीणों ने सरंपच पति पर फायरिंग करने के आरोप भी लगाए। हांलाकि पुलिस इस मामले में मामले में आपस में सुलह की बात कह रही है। इस घटना में घायल चार ग्रामीणों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया है। जानकारी के अनुसार सरपंच पद के चुनाव में श्रीमती शांति यादव विजयी हुई थी। इससे उनके विरोधी उनसे रंजिश रखते थे। बताया जाता है कि आज सुबह सरपंच और उनके पति की शिकायत करने दो बुलेरो और पांच मोटरसाइकिल पर सवार होकर कुछ लोग शिवपुरी आ रहे थे। इनमें कुछ ग्राम के पंच भी थे। इसकी जानकारी जब सरपंच के समर्थकों को लगी तो उन्होंने सडक़ पर पत्थर डालकर वाहनों को रोकने की कोशिश की। जैसे ही गाडिय़ां रूकी वैसे ही घात लगाए बैठे हमला बरों ने हमला बोल दिया तथा गाडिय़ों की तोड़ फोड और मारपीट करना शुरू कर दिया। दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई। शिकायत करने जा रहे ग्रामीणों और सरपंच के बीच विवाद तो हुआ है जो कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आपस में सुलझ गया। यह मामला सिर्फ और सिर्फ पुलिस की छवि को धूलित करने का प्रयास है। गोली चलने और इतना ज्यादा बबाल होने का तो सबाल ही नहीं है।
|
बिहार में पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले दशरथ माँझी को पूरी दुनिया जानती है। उन्हीं के रास्ते पर चलते हुए जहानाबाद के शिव भक्त गनौरी पासवान ने 1500 फीट ऊँचे पहाड़ को काटकर शिव मंदिर तक सीढ़ियाँ बना दीं।
बिहार के जहानाबाद से 30 किलोमीटर दूर हुलासगंज थाना क्षेत्र के जारु बनवरिया गाँव के पास ऊँची पहाड़ी पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर है। जहाँ गनौरी भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने के लिए पहाड़ी की दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती थी। घंटों की मशक्कत के बाद भक्त यहाँ पहुँच पाते थे। कांटे और नुकीले पत्थरों से शिव भक्त घायल भी हो जाते थे। मंदिर तक पहुँचने में महिलाओं को तो और भी कठिनाई होती थी।
यह देख शिव भक्त गनौरी पासवान ने बाबा योगेश्वर नाथ धाम तक सीढियाँ बनाने की ठान ली। माउंटेन मैन दशरथ माँझी को अपना आदर्श समझने वाले गनौरी ने पत्थरों को काटकर सीढ़ी बनाने का काम शुरू कर दिया। लोगों के सहयोग और अपने पूरे परिवार के श्रमदान से लगभग 8 साल में काम पूरा हुआ। अब मंदिर तक पहुँचने के लिए एक नहीं बल्कि दो रास्ते बना दिए गए हैं। एक रास्ता जारू गाँव की ओर से और दूसरा बनवरिया गाँव की ओर से बनाया गया है। अब इस मंदिर तक पहुँचने में समय भी कम लगता है और ज्यादा परेशानी भी नहीं होती।
गाँव वालों की मानों तो गनौरी पासवान पहाड़ की तलहटियों में जाकर पुरानी मूर्तियों की भी खोज करते हैं। फिर उन मूर्तियों को योगेश्वर नाथ मंदिर के रास्ते पर स्थापित कर देते हैं। उन्होंने काले पत्थर की भगवान बुद्ध की छह फीट की ऐतिहासिक प्रतिमा भी खोज निकाली थी। गनौरी पासवान अब योगेश्वर नाथ मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।
गनौरी पासवान पहले ट्रक ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने राज मिस्त्री का काम शुरू किया। काम के बाद उनका ध्यान भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। गाँव की गायन मंडली के साथ गनौरी पहाड़ पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर में भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने में होने वाली कठिनाई ने उन्हें मंदिर का रास्ता सुगम बनाने के लिए प्रेरित किया।
|
बिहार में पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले दशरथ माँझी को पूरी दुनिया जानती है। उन्हीं के रास्ते पर चलते हुए जहानाबाद के शिव भक्त गनौरी पासवान ने एक हज़ार पाँच सौ फीट ऊँचे पहाड़ को काटकर शिव मंदिर तक सीढ़ियाँ बना दीं। बिहार के जहानाबाद से तीस किलोग्राममीटर दूर हुलासगंज थाना क्षेत्र के जारु बनवरिया गाँव के पास ऊँची पहाड़ी पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर है। जहाँ गनौरी भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने के लिए पहाड़ी की दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती थी। घंटों की मशक्कत के बाद भक्त यहाँ पहुँच पाते थे। कांटे और नुकीले पत्थरों से शिव भक्त घायल भी हो जाते थे। मंदिर तक पहुँचने में महिलाओं को तो और भी कठिनाई होती थी। यह देख शिव भक्त गनौरी पासवान ने बाबा योगेश्वर नाथ धाम तक सीढियाँ बनाने की ठान ली। माउंटेन मैन दशरथ माँझी को अपना आदर्श समझने वाले गनौरी ने पत्थरों को काटकर सीढ़ी बनाने का काम शुरू कर दिया। लोगों के सहयोग और अपने पूरे परिवार के श्रमदान से लगभग आठ साल में काम पूरा हुआ। अब मंदिर तक पहुँचने के लिए एक नहीं बल्कि दो रास्ते बना दिए गए हैं। एक रास्ता जारू गाँव की ओर से और दूसरा बनवरिया गाँव की ओर से बनाया गया है। अब इस मंदिर तक पहुँचने में समय भी कम लगता है और ज्यादा परेशानी भी नहीं होती। गाँव वालों की मानों तो गनौरी पासवान पहाड़ की तलहटियों में जाकर पुरानी मूर्तियों की भी खोज करते हैं। फिर उन मूर्तियों को योगेश्वर नाथ मंदिर के रास्ते पर स्थापित कर देते हैं। उन्होंने काले पत्थर की भगवान बुद्ध की छह फीट की ऐतिहासिक प्रतिमा भी खोज निकाली थी। गनौरी पासवान अब योगेश्वर नाथ मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं। गनौरी पासवान पहले ट्रक ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने राज मिस्त्री का काम शुरू किया। काम के बाद उनका ध्यान भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। गाँव की गायन मंडली के साथ गनौरी पहाड़ पर बाबा योगेश्वर नाथ मंदिर में भजन कीर्तन के लिए जाते थे। मंदिर जाने में होने वाली कठिनाई ने उन्हें मंदिर का रास्ता सुगम बनाने के लिए प्रेरित किया।
|
Lucknow : लखनऊ में बड़ा विमान हादसा टल गया. एयर एशिया की फ्लाइट लखनऊ से कोलकाता जा रही थी. उड़ान भरने के दौरान ही फ्लाइट से पक्षी टकरा गया. इसके बाद आनन-फानन में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी. फिलहाल, यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से कोलकाता भेजा गया. विमान में 180 पैसेंजर थे, जो बाल बाल बच गए. लैंडिंग के बाद टेक्नीकल टीम विमान की जांच कर रही है.
दरअसल चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हाल ही में एयर एशिया की ओर से विमान सेवा शुरू की गई है. एयर एशिया एयरलाइन लखनऊ से कोलकाता के लिए सुबह 10:55 बजे विमान रवाना करती है. रविवार सुबह फ्लाइट में पैसेंजरों की बोर्डिंग हो जाने के बाद जब विमान रनवे पर पहुंचा और रफ्तार बनने लगा तो इसी बीच एक पक्षी विमान के इंजन से आकर टकरा गया.
|
Lucknow : लखनऊ में बड़ा विमान हादसा टल गया. एयर एशिया की फ्लाइट लखनऊ से कोलकाता जा रही थी. उड़ान भरने के दौरान ही फ्लाइट से पक्षी टकरा गया. इसके बाद आनन-फानन में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी. फिलहाल, यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से कोलकाता भेजा गया. विमान में एक सौ अस्सी पैसेंजर थे, जो बाल बाल बच गए. लैंडिंग के बाद टेक्नीकल टीम विमान की जांच कर रही है. दरअसल चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हाल ही में एयर एशिया की ओर से विमान सेवा शुरू की गई है. एयर एशिया एयरलाइन लखनऊ से कोलकाता के लिए सुबह दस:पचपन बजे विमान रवाना करती है. रविवार सुबह फ्लाइट में पैसेंजरों की बोर्डिंग हो जाने के बाद जब विमान रनवे पर पहुंचा और रफ्तार बनने लगा तो इसी बीच एक पक्षी विमान के इंजन से आकर टकरा गया.
|
युवाओं के लिए यह अच्छी खबर है। उत्तराखंड विधानसभा में 10वीं 12वीं पास और ग्रेजुएट युवाओं के लिए वैकेंसी निकली है। युवा उत्तराखंड विधानसभा की वेबसाइट पर जाकर इसके लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं। आवेदन भरने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2021 है।
By Sunil Negi Publish Date: Mon, 04 Oct 2021 12:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 04 Oct 2021 09:03 PM (IST)
जागरण संवाददाता, देहरादून। नौकरी के लिए तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड विधानसभा में समूह 'ख' एवं 'ग' के अंतर्गत विभिन्न रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आनलाइन आवेनद मांगे गए हैं। जो उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं वे 30 अक्टूबर 2021 तक विधानसभा की वेवसाइट ukvidhansabha. uk. gov. in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एक अक्टूबर को इन भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है।
- अपर निजी सचिवः स्नातक। हिंदी आशुलिपि में 80 शब्द प्रति मिनट की गति होनी चाहिए।
- समीक्षा अधिकारीः स्नातक। विधि स्नातक वाले को वरीयता।
- समीक्षा अधिकारी (लेखा): वाणिज्य में स्नातक।
- सहायक समीक्षा अधिकारी (शोध एवं संदर्भ): स्नातकोत्तर।
- व्यस्थापकः होटल मैनेजमेंट में त्रिवर्षीय डिप्लोमा।
- लेखाकारः वाणिज्य में स्नातक।
- सहायक लेखाकारः वाणिज्य में स्नातक।
- सहायक फोरमैन : हाईस्कूल। आइटीआइ का डिप्लोमा।
- सूचीकारः स्नातक। पुस्तकालय विज्ञान में डिप्लोमा अथवा किसी पुस्तकालय में तीन वर्ष का व्यवहारिक अनुभव।
- कंप्यूटर आपरेटर : इंटरमीडिएट। कंप्यूटर में हिंदी टंकण में न्यूनम 4000 की डिप्रेशन प्रति घंटा की गति एवं एमएस आफिस का ज्ञान अनिवार्य।
- कंप्यूटर सहायकः इंटरमीडिएट। कंप्यूटर में हिंदी टंकण में न्यूनम 4000 की डिप्रेशन प्रति घंटा की गति एवं एमएस आफिस का ज्ञान अनिवार्य।
- वाहन चालकः हाईस्कूल। हल्के भारी वाहन चालने का पांच वर्ष का अन्यून अवधि का वैध ड्राइविंग लाइसेंस।
- रक्षक ( पुरुष)/ रक्षक (महिला): हाईस्कूल।
Edited By:
|
युवाओं के लिए यह अच्छी खबर है। उत्तराखंड विधानसभा में दसवीं बारहवीं पास और ग्रेजुएट युवाओं के लिए वैकेंसी निकली है। युवा उत्तराखंड विधानसभा की वेबसाइट पर जाकर इसके लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं। आवेदन भरने की अंतिम तिथि तीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस है। By Sunil Negi Publish Date: Mon, चार अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस बारह:तैंतालीस PM Updated Date: Mon, चार अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस नौ:तीन PM जागरण संवाददाता, देहरादून। नौकरी के लिए तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड विधानसभा में समूह 'ख' एवं 'ग' के अंतर्गत विभिन्न रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आनलाइन आवेनद मांगे गए हैं। जो उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं वे तीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस तक विधानसभा की वेवसाइट ukvidhansabha. uk. gov. in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एक अक्टूबर को इन भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। - अपर निजी सचिवः स्नातक। हिंदी आशुलिपि में अस्सी शब्द प्रति मिनट की गति होनी चाहिए। - समीक्षा अधिकारीः स्नातक। विधि स्नातक वाले को वरीयता। - समीक्षा अधिकारी : वाणिज्य में स्नातक। - सहायक समीक्षा अधिकारी : स्नातकोत्तर। - व्यस्थापकः होटल मैनेजमेंट में त्रिवर्षीय डिप्लोमा। - लेखाकारः वाणिज्य में स्नातक। - सहायक लेखाकारः वाणिज्य में स्नातक। - सहायक फोरमैन : हाईस्कूल। आइटीआइ का डिप्लोमा। - सूचीकारः स्नातक। पुस्तकालय विज्ञान में डिप्लोमा अथवा किसी पुस्तकालय में तीन वर्ष का व्यवहारिक अनुभव। - कंप्यूटर आपरेटर : इंटरमीडिएट। कंप्यूटर में हिंदी टंकण में न्यूनम चार हज़ार की डिप्रेशन प्रति घंटा की गति एवं एमएस आफिस का ज्ञान अनिवार्य। - कंप्यूटर सहायकः इंटरमीडिएट। कंप्यूटर में हिंदी टंकण में न्यूनम चार हज़ार की डिप्रेशन प्रति घंटा की गति एवं एमएस आफिस का ज्ञान अनिवार्य। - वाहन चालकः हाईस्कूल। हल्के भारी वाहन चालने का पांच वर्ष का अन्यून अवधि का वैध ड्राइविंग लाइसेंस। - रक्षक / रक्षक : हाईस्कूल। Edited By:
|
किडनी हमारी बॉडी का अहम हिस्सा है जो बॉडी से टॉक्सिन को यूरिन के जरिए बॉडी से बाहर निकालती है। बॉडी की अच्छी हेल्थ के लिए किडनी का सेहतमंद रहना जरूरी है। खराब डाइट और बिगड़ता लाइफस्टाइल कम उम्र में भी लोगों को किडनी की बीमारी का शिकार बना रहा है। किडनी की बीमारी को साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। हर 7 में से 1 इंसान क्रॉनिक किडनी डिसीज से जूझ रहा है।
क्रॉनिक किडनी डिसीज वो स्थिति है जब इंसान की दोनों किडनी काम करना बंद कर देती हैं। किडनी फेल होने पर डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट का सहारा लेना पड़ता है। ब्लड प्रेशर और शुगर का बढ़ना इस बीमारी की मुख्य वजह हैं। किडनी की बीमारी बॉडी में खतरनाक बैक्टीरिया के पनपने से, दवाईयों का अधिक सेवन करने से,हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की बीमारी किडनी खराब होने के प्रमुख कारण हैं।
किडनी को शारीरिक चोट, बीमारियों या अन्य विकारों से भी नुकसान पहुंच सकता है। किडनी फेल होने से बचाना चाहते हैं तो डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव काीजिए। किडनी की सेहत का ध्यान नहीं रखा जाए तो किडनी फेल होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि किडनी फेल होने का कारण क्या है? इस परेशानी से बचाव करने के लिए कुछ खास उपायों को अपनाएं।
किडनी फेल होने का मुख्य कारणः किडनी फेल होने का मुख्य कारण खराब खान-पान है और बिगड़ती आदतें हैं। किडनी बॉडी का जरूरी अंग है जो हमारी बॉडी से एक्स्ट्रा फ्लूड और टॉक्सिन को बाहर निकालती है। किडनी हमारी बॉडी में पानी, नमक, मिनिरल्स की मात्रा को संतुलित करने में मदद करती है।
अगर किडनी की हेल्थ खराब हो जाए तो बॉडी की नसे, कोशिकाएं और मसल्स भी सही तरीके से काम करना बंद कर देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक किडनी को हेल्दी रखने के लिए डाइट में सुधार करना जरूरी है और कुछ आदतों में भी सुधार करना जरूरी है। आप भी किडनी को फेल होने से बचाना चाहते हैं तो कुछ उपायों को अपनाएं। आइए जानते हैं किडनी को फेल होने से बचाने के लिए किन उपायों को अपनाएं।
- बॉडी को एक्टिव रखें। बॉडी को एक्टिव रखने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें।
- बॉडी को हाइड्रेट रखें। पानी की कमी से किडनी की परेशानियों के बढ़ने की संभावना बढ़ती है।
- नशीले पदार्थों और शराब का सेवन बंद करें। नशीले पदार्थों का सेवन किडनी की परेशानियों को बढ़ा सकता है।
- छोटी-छोटी बीमारी में पेन किलर का सेवन नहीं करें। दवाईयों का अधिक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
- वजन को कंट्रोल रखे और रेगुलर एक्सरसाइज करें।
- डाइट में नमक और मसालों का सेवन कम करें।
|
किडनी हमारी बॉडी का अहम हिस्सा है जो बॉडी से टॉक्सिन को यूरिन के जरिए बॉडी से बाहर निकालती है। बॉडी की अच्छी हेल्थ के लिए किडनी का सेहतमंद रहना जरूरी है। खराब डाइट और बिगड़ता लाइफस्टाइल कम उम्र में भी लोगों को किडनी की बीमारी का शिकार बना रहा है। किडनी की बीमारी को साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। हर सात में से एक इंसान क्रॉनिक किडनी डिसीज से जूझ रहा है। क्रॉनिक किडनी डिसीज वो स्थिति है जब इंसान की दोनों किडनी काम करना बंद कर देती हैं। किडनी फेल होने पर डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट का सहारा लेना पड़ता है। ब्लड प्रेशर और शुगर का बढ़ना इस बीमारी की मुख्य वजह हैं। किडनी की बीमारी बॉडी में खतरनाक बैक्टीरिया के पनपने से, दवाईयों का अधिक सेवन करने से,हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की बीमारी किडनी खराब होने के प्रमुख कारण हैं। किडनी को शारीरिक चोट, बीमारियों या अन्य विकारों से भी नुकसान पहुंच सकता है। किडनी फेल होने से बचाना चाहते हैं तो डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव काीजिए। किडनी की सेहत का ध्यान नहीं रखा जाए तो किडनी फेल होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि किडनी फेल होने का कारण क्या है? इस परेशानी से बचाव करने के लिए कुछ खास उपायों को अपनाएं। किडनी फेल होने का मुख्य कारणः किडनी फेल होने का मुख्य कारण खराब खान-पान है और बिगड़ती आदतें हैं। किडनी बॉडी का जरूरी अंग है जो हमारी बॉडी से एक्स्ट्रा फ्लूड और टॉक्सिन को बाहर निकालती है। किडनी हमारी बॉडी में पानी, नमक, मिनिरल्स की मात्रा को संतुलित करने में मदद करती है। अगर किडनी की हेल्थ खराब हो जाए तो बॉडी की नसे, कोशिकाएं और मसल्स भी सही तरीके से काम करना बंद कर देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक किडनी को हेल्दी रखने के लिए डाइट में सुधार करना जरूरी है और कुछ आदतों में भी सुधार करना जरूरी है। आप भी किडनी को फेल होने से बचाना चाहते हैं तो कुछ उपायों को अपनाएं। आइए जानते हैं किडनी को फेल होने से बचाने के लिए किन उपायों को अपनाएं। - बॉडी को एक्टिव रखें। बॉडी को एक्टिव रखने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें। - बॉडी को हाइड्रेट रखें। पानी की कमी से किडनी की परेशानियों के बढ़ने की संभावना बढ़ती है। - नशीले पदार्थों और शराब का सेवन बंद करें। नशीले पदार्थों का सेवन किडनी की परेशानियों को बढ़ा सकता है। - छोटी-छोटी बीमारी में पेन किलर का सेवन नहीं करें। दवाईयों का अधिक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। - वजन को कंट्रोल रखे और रेगुलर एक्सरसाइज करें। - डाइट में नमक और मसालों का सेवन कम करें।
|
बिसाऊ (झुंझुनूं)। दीपोत्सव की शाम पालिकाध्यक्ष हारुन खत्री को बधाई देने बिसाऊ पहुंचे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने राज्य सरकार की तरफ से कस्बे के विकास में हरसंभव आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन दिया। मंत्री राठौड़ ने पालिका की आय बढ़ाने के लिए पालिका क्षेत्र की जमीनों के विक्रय का सुझाव दिया। पालिकाध्यक्ष खत्री की मांग पर मंत्री राठौड़ ने ड्रेनेज योजना के लिए प्रस्ताव बनाकर देने के निर्देश दिए। खत्री ने एपीओ चल रहे ईओ राकेश रांगेरा को फिर से बिसाऊ लगाए जाने की मांग की। इस मौके पर भाजपा का दामन थामने वाले पार्षद सलीम सैयद का मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने माला पहना कर स्वागत किया। इस दौरान चूरू जिला प्रमुख हरलाल सहारण, पदमसिंह राठौड़, पार्षद श्रीकिशन पारीक, जयप्रकाश अजाड़ीवाल, शिवकुमार क्याल, हाकम अली सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
यह भी पढ़े :इलाहाबाद में हो आना तो इस प्रतिबंध पर ध्यान दें. . . . . . . !
|
बिसाऊ । दीपोत्सव की शाम पालिकाध्यक्ष हारुन खत्री को बधाई देने बिसाऊ पहुंचे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने राज्य सरकार की तरफ से कस्बे के विकास में हरसंभव आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन दिया। मंत्री राठौड़ ने पालिका की आय बढ़ाने के लिए पालिका क्षेत्र की जमीनों के विक्रय का सुझाव दिया। पालिकाध्यक्ष खत्री की मांग पर मंत्री राठौड़ ने ड्रेनेज योजना के लिए प्रस्ताव बनाकर देने के निर्देश दिए। खत्री ने एपीओ चल रहे ईओ राकेश रांगेरा को फिर से बिसाऊ लगाए जाने की मांग की। इस मौके पर भाजपा का दामन थामने वाले पार्षद सलीम सैयद का मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने माला पहना कर स्वागत किया। इस दौरान चूरू जिला प्रमुख हरलाल सहारण, पदमसिंह राठौड़, पार्षद श्रीकिशन पारीक, जयप्रकाश अजाड़ीवाल, शिवकुमार क्याल, हाकम अली सहित अन्य लोग उपस्थित थे। यह भी पढ़े :इलाहाबाद में हो आना तो इस प्रतिबंध पर ध्यान दें. . . . . . . !
|
LUCKNOW : लोक भवन की पुख्ता सुरक्षा के लिए अंदर और बाहर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने की कवायद तेज कर दी गयी है। पहली मंजिल पर बने कंट्रोल रूम के कील-कांटे भी दुरुस्त किए जा रहे हैं और जल्द ही पुलिस रेडियो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इसे पूरी तरह क्रियाशील करने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि एनेक्सी के मुकाबले लोक भवन में प्रवेश कर पाना आसान नहीं होगा। लोक भवन जाने के अधिकृत लेाग पहले तल पर पास बनवाने के बाद ही पंचम तल की ओर रुख कर पाएंगे।
लोक भवन की सुरक्षा का काम देख रहे अधिकारियों की मानें तो इस इमारत के हर महत्वपूर्ण प्वाइंट को सीसीटीवी से लैस किया गया है। हर तरह के सिग्नल और मैसेजिंग को ट्रैक करने के लिए कंट्रोल रूम में हाईटेक उपकरण लगाए जा रहे हैं। लोक भवन के भीतर सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गये वॉच टावर्स पर पीएसी के जवानों को तैनात किया जाना है। वहीं बाहर सड़क पर भी खासी तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। लोक भवन के भीतर सुरक्षा का जिम्मा सचिवालय सुरक्षा के जिम्मे रहेगा जिसके लिए पूर्व में ही 98 पद स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसके अलावा पंचम तल पर मुख्यमंत्री सुरक्षा के अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे जिनमें एनएसजी और एटीएस के कमांडो शामिल हैं। इसके अलावा लोक भवन का जल्द ही एक और सिक्योरिटी ऑडिट भी करने की तैयारी है। यह करीब डेढ़ साल पहले भी हुआ था पर बदले हालात में सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए यह कवायद की जा रही है।
|
LUCKNOW : लोक भवन की पुख्ता सुरक्षा के लिए अंदर और बाहर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने की कवायद तेज कर दी गयी है। पहली मंजिल पर बने कंट्रोल रूम के कील-कांटे भी दुरुस्त किए जा रहे हैं और जल्द ही पुलिस रेडियो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इसे पूरी तरह क्रियाशील करने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि एनेक्सी के मुकाबले लोक भवन में प्रवेश कर पाना आसान नहीं होगा। लोक भवन जाने के अधिकृत लेाग पहले तल पर पास बनवाने के बाद ही पंचम तल की ओर रुख कर पाएंगे। लोक भवन की सुरक्षा का काम देख रहे अधिकारियों की मानें तो इस इमारत के हर महत्वपूर्ण प्वाइंट को सीसीटीवी से लैस किया गया है। हर तरह के सिग्नल और मैसेजिंग को ट्रैक करने के लिए कंट्रोल रूम में हाईटेक उपकरण लगाए जा रहे हैं। लोक भवन के भीतर सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गये वॉच टावर्स पर पीएसी के जवानों को तैनात किया जाना है। वहीं बाहर सड़क पर भी खासी तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। लोक भवन के भीतर सुरक्षा का जिम्मा सचिवालय सुरक्षा के जिम्मे रहेगा जिसके लिए पूर्व में ही अट्ठानवे पद स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसके अलावा पंचम तल पर मुख्यमंत्री सुरक्षा के अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे जिनमें एनएसजी और एटीएस के कमांडो शामिल हैं। इसके अलावा लोक भवन का जल्द ही एक और सिक्योरिटी ऑडिट भी करने की तैयारी है। यह करीब डेढ़ साल पहले भी हुआ था पर बदले हालात में सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए यह कवायद की जा रही है।
|
टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफ अकाउंट में अपने रुपए का यूज कर सकता है। बशर्ते उसके पास एलआईसी पॉलिसी प्रीमियम के कम से कम दो साल का ईपीएफ बैलेंस (EPF Balance) हो।
बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ मेंबर्स (EPFO Members), जिनके नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम या एलआईसी पॉलिसी (LIC Premium) है, वे अपने जीवन बीमा पॉलिसी प्रीमियम का भुगतान करने के लिए अपने ईपीएफ अमाउंट (EPF Amount) का यूज कर सकते हैं। टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफ अकाउंट में अपने रुपए का यूज कर सकता है। बशर्ते उसके पास एलआईसी पॉलिसी प्रीमियम के कम से कम दो साल का ईपीएफ बैलेंस (EPF Balance) हो। जानकारों के अनुसार जिन ईपीएफओ कस्टमर की नौकरी छूट गई है या किसी दूसरी वजहों से फानेंशियल स्ट्रेस में हैं, वो ईपीएफ अकाउंट से पॉलिसी रिन्युअल पेमेंट के साथ अपनी एलआईसी पॉलिसी जारी रखने के लिए इस ईपीएफओ सुविधा का का लाभ उठा सकते हैं।
एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफओ मेंबर अपने ईपीएफ अमाउंट का यूज कैसे कर सकता है। इस बारे में ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर और एमडी पंकज मथपाल के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए अपने ईपीएफ अमाउंट का यूज कर सकता है। ईपीएफ अकाउंट से एलआईसी प्रीमियम का पेमेंट करने के लिए, उन्हें ईपीएफओ में फॉर्म 14 सब्मिट करना होगा। हालांकि, इसे डिपॉजिट करते समय ईपीएफओ ऑफिस में फॉर्म 14, ईपीएफ अकाउंट होल्डर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फॉर्म 14 जमा करते समय ईपीएफ बैलेंस एलआईसी प्रीमियम राशि का कम से कम दो साल के बराबर होना चाहिए।
ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मथपाल ने कहा कि ईपीएफओ कस्टमर एलआईसी पॉलिसी खरीदते समय या एलआईसी प्रीमियम भुगतान के बाद के फेज में इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसलिए, यदि कोई ईपीएफ अकाउंट होल्डर कोविड -19 महामारी या किसी दूसरी वजह से फाइनेंशियल स्ट्रेस में है, तो वह अभी भी अपने ईपीएफ अकाउंट्स से एलआईसी प्रीमियम का भुगतान करके अपनी एलआईसी पॉलिसी को रिनुअल कर सकता है। उसे अपने नजदीकी ईपीएफओ ऑफिस में फॉर्म 14 डिपॉजिट करना होगा।
टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट जितेंद्र सोलंकी के अनुसार एलआईसी अपने पॉलिसीहोल्डर को प्रीमियम के देर से भुगतान पर भी अपनी पॉलिसी को रिनुअल की परमीशन देता है। एलआईसी प्रीमियम रिनुअल रूल के अनुसार पॉलिसी रिनुअल डेट के 6 महीने के बाद पॉलिसी रिनुअल पर कोई लेट फाइन नहीं लगाया जाता है। पॉलिसी रिनुअल डेट के 6 महीने से 3 साल बाद एलआईसी पॉलिसी के रिनुअल पर, पॉलिसी प्रीमियम के अतिरिक्त कुछ लेट फाइन देना होगा। यदि कोई व्यक्ति पॉलिसी रिनुअल डेट के 3 साल बाद अपनी पॉलिसी को रिनुअल करने में फेल होता है तो एलआईसी एलआईसी पॉलिसी निष्क्रिय हो जाती है। वो कहते ळैं कि किसी को अपने ईपीएफ अमाउंट का उपयोग एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए केवल अंतिम सॉल्युशन रूप में देखना चाहिए। यदि किसी मेंबर की एलआईसी पॉलिसी निष्क्रिय होने वाली है, उस स्थिति में वो ऐसा कर सकते हैं।
|
टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफ अकाउंट में अपने रुपए का यूज कर सकता है। बशर्ते उसके पास एलआईसी पॉलिसी प्रीमियम के कम से कम दो साल का ईपीएफ बैलेंस हो। बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ मेंबर्स , जिनके नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम या एलआईसी पॉलिसी है, वे अपने जीवन बीमा पॉलिसी प्रीमियम का भुगतान करने के लिए अपने ईपीएफ अमाउंट का यूज कर सकते हैं। टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफ अकाउंट में अपने रुपए का यूज कर सकता है। बशर्ते उसके पास एलआईसी पॉलिसी प्रीमियम के कम से कम दो साल का ईपीएफ बैलेंस हो। जानकारों के अनुसार जिन ईपीएफओ कस्टमर की नौकरी छूट गई है या किसी दूसरी वजहों से फानेंशियल स्ट्रेस में हैं, वो ईपीएफ अकाउंट से पॉलिसी रिन्युअल पेमेंट के साथ अपनी एलआईसी पॉलिसी जारी रखने के लिए इस ईपीएफओ सुविधा का का लाभ उठा सकते हैं। एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए ईपीएफओ मेंबर अपने ईपीएफ अमाउंट का यूज कैसे कर सकता है। इस बारे में ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर और एमडी पंकज मथपाल के अनुसार ईपीएफओ मेंबर एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए अपने ईपीएफ अमाउंट का यूज कर सकता है। ईपीएफ अकाउंट से एलआईसी प्रीमियम का पेमेंट करने के लिए, उन्हें ईपीएफओ में फॉर्म चौदह सब्मिट करना होगा। हालांकि, इसे डिपॉजिट करते समय ईपीएफओ ऑफिस में फॉर्म चौदह, ईपीएफ अकाउंट होल्डर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फॉर्म चौदह जमा करते समय ईपीएफ बैलेंस एलआईसी प्रीमियम राशि का कम से कम दो साल के बराबर होना चाहिए। ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मथपाल ने कहा कि ईपीएफओ कस्टमर एलआईसी पॉलिसी खरीदते समय या एलआईसी प्रीमियम भुगतान के बाद के फेज में इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसलिए, यदि कोई ईपीएफ अकाउंट होल्डर कोविड -उन्नीस महामारी या किसी दूसरी वजह से फाइनेंशियल स्ट्रेस में है, तो वह अभी भी अपने ईपीएफ अकाउंट्स से एलआईसी प्रीमियम का भुगतान करके अपनी एलआईसी पॉलिसी को रिनुअल कर सकता है। उसे अपने नजदीकी ईपीएफओ ऑफिस में फॉर्म चौदह डिपॉजिट करना होगा। टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट जितेंद्र सोलंकी के अनुसार एलआईसी अपने पॉलिसीहोल्डर को प्रीमियम के देर से भुगतान पर भी अपनी पॉलिसी को रिनुअल की परमीशन देता है। एलआईसी प्रीमियम रिनुअल रूल के अनुसार पॉलिसी रिनुअल डेट के छः महीने के बाद पॉलिसी रिनुअल पर कोई लेट फाइन नहीं लगाया जाता है। पॉलिसी रिनुअल डेट के छः महीने से तीन साल बाद एलआईसी पॉलिसी के रिनुअल पर, पॉलिसी प्रीमियम के अतिरिक्त कुछ लेट फाइन देना होगा। यदि कोई व्यक्ति पॉलिसी रिनुअल डेट के तीन साल बाद अपनी पॉलिसी को रिनुअल करने में फेल होता है तो एलआईसी एलआईसी पॉलिसी निष्क्रिय हो जाती है। वो कहते ळैं कि किसी को अपने ईपीएफ अमाउंट का उपयोग एलआईसी प्रीमियम भुगतान के लिए केवल अंतिम सॉल्युशन रूप में देखना चाहिए। यदि किसी मेंबर की एलआईसी पॉलिसी निष्क्रिय होने वाली है, उस स्थिति में वो ऐसा कर सकते हैं।
|
लखनऊ : उत्तरप्रदेश चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में अलगाव की बात सामने आई है। दरअसल बसपा के प्रमुख नेताओं में से एक स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा छोड़ दी है। उन्होंने बसपा से किनारा कर लिया है। उनके बसपा छोड़ने पर उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बेटे - बेटी के लिए टिकट की मांग की थी।
स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं उनका बाबा साहेब डाॅ. आंबेडकर से कोइ लेना देना नहीं है। उन्होंने किया कि मौर्य ने पार्टी छोड़ी तो पार्टी पर अहसान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वार्थी और गद्दार नेता हैं। मौर्य समाज का साथ स्वामी प्रसाद मौर्य को नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य का हमारी पार्टी से कोई संबंध नहीं है।
या नहीं यह भविष्य में ही तय होगा। स्वामी प्रसाद मोर्य ने कहा कि बसपा टिकटों की निलामी का बाजार बन गया है। ये गोरखधंधा चला रहे हैं। दूसरी ओर इस मामले के बाद लखनऊ में बसपा की बैठक का आयोजन हो रहा है।
|
लखनऊ : उत्तरप्रदेश चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में अलगाव की बात सामने आई है। दरअसल बसपा के प्रमुख नेताओं में से एक स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा छोड़ दी है। उन्होंने बसपा से किनारा कर लिया है। उनके बसपा छोड़ने पर उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बेटे - बेटी के लिए टिकट की मांग की थी। स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं उनका बाबा साहेब डाॅ. आंबेडकर से कोइ लेना देना नहीं है। उन्होंने किया कि मौर्य ने पार्टी छोड़ी तो पार्टी पर अहसान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे स्वार्थी और गद्दार नेता हैं। मौर्य समाज का साथ स्वामी प्रसाद मौर्य को नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य का हमारी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। या नहीं यह भविष्य में ही तय होगा। स्वामी प्रसाद मोर्य ने कहा कि बसपा टिकटों की निलामी का बाजार बन गया है। ये गोरखधंधा चला रहे हैं। दूसरी ओर इस मामले के बाद लखनऊ में बसपा की बैठक का आयोजन हो रहा है।
|
शिवपुरी। अमोला थाना क्षेत्र के दिदावली गांव में शुक्रवार की शाम खेत पर थ्रेशर के दौरान महिला किसान गंभीर रूप से घायल हो गई है। गेहूं की फसल निकलवाते समय महिला के हाथ थ्रेशर में चले गए। जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए हैं। महिला को इलाज के लिए झांसी भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार रामकली (32) पत्नी मनोहर कुशवाह शुक्रवार की शाम 5.30 बजे अपने खेत में थ्रेशर चला रही थी। मजदूर गेहूं ला रहे थे और महिला थ्रेशर में डाल रही थी। इसी दौरान अनियंत्रित हो जाने से हाथ थ्रेशर में चले गए। जिससे दोनों हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए। महिला को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिरसौद लाया, जहां से परिजन झांसी लेकर रवाना हो गए।
|
शिवपुरी। अमोला थाना क्षेत्र के दिदावली गांव में शुक्रवार की शाम खेत पर थ्रेशर के दौरान महिला किसान गंभीर रूप से घायल हो गई है। गेहूं की फसल निकलवाते समय महिला के हाथ थ्रेशर में चले गए। जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए हैं। महिला को इलाज के लिए झांसी भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार रामकली पत्नी मनोहर कुशवाह शुक्रवार की शाम पाँच.तीस बजे अपने खेत में थ्रेशर चला रही थी। मजदूर गेहूं ला रहे थे और महिला थ्रेशर में डाल रही थी। इसी दौरान अनियंत्रित हो जाने से हाथ थ्रेशर में चले गए। जिससे दोनों हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए। महिला को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिरसौद लाया, जहां से परिजन झांसी लेकर रवाना हो गए।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश वासियों को नए साल में महंगाई का झटका लगा है। पावर कार्पोरेशन ने बिजली दरों में बढ़ोतरी करते हुए प्रति यूनिट 66 पैसे तक बिजली के रेट बढ़ा दिए हैं। बता दें कि योगी सरकार में साल भर में दूसरी बार बिजली की दर में इजाफा किया गया है। हालांकि अचानक रेट बढऩे पर विद्युत उपभोक्ता परिषद यूपी विद्युत नियामक आयोग पहुंच गया है। मामले में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एक जनहित याचिका दाखिल की है।
इससे पहले सितंबर 2019 में यूपी में बिजली की दरों मे बढ़ोतरी की गई थी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के आदेशानुसार अनुसार शहरी व कॉमर्शियल क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली के दामों में इजाफा किया गया था। शहरी क्षेत्र में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी की गई, जबकि औद्योगिक क्षेत्र में करीब 10 फीसदी का इजाफा किया गया है। साथ ही योगी सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज (400 रुपए) से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया है। प्रदेश में तक़रीबन 10 से 15 प्रतिशत बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस बार बिजली के रेट बढ़ाने में विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी नहीं ली गई है। यूपीपीसीएल ने खुद से ही इस बार रेट बढ़ाया है। प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को पहली जनवरी से 12 पैसे से 43 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी होगी।
अचानक बिजली के दाम बढऩे पर विद्युत उपभोक्ता परिषद यूपी विद्युत नियामक आयोग पहुंच गया है। मामले में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एक जनहित याचिका भी दाखिल की। वहीं यूपीपीसीएल ने 4 से 66 पैसा प्रति यूनिट तक की बिजली की दर में अचानक इजाफा करने के पीछे कोयला और तेल के रेट में बढ़ोतरी होना बताया है।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश वासियों को नए साल में महंगाई का झटका लगा है। पावर कार्पोरेशन ने बिजली दरों में बढ़ोतरी करते हुए प्रति यूनिट छयासठ पैसे तक बिजली के रेट बढ़ा दिए हैं। बता दें कि योगी सरकार में साल भर में दूसरी बार बिजली की दर में इजाफा किया गया है। हालांकि अचानक रेट बढऩे पर विद्युत उपभोक्ता परिषद यूपी विद्युत नियामक आयोग पहुंच गया है। मामले में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एक जनहित याचिका दाखिल की है। इससे पहले सितंबर दो हज़ार उन्नीस में यूपी में बिजली की दरों मे बढ़ोतरी की गई थी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेशानुसार अनुसार शहरी व कॉमर्शियल क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली के दामों में इजाफा किया गया था। शहरी क्षेत्र में करीब बारह फीसदी की बढ़ोतरी की गई, जबकि औद्योगिक क्षेत्र में करीब दस फीसदी का इजाफा किया गया है। साथ ही योगी सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज से बढ़ाकर पाँच सौ रुपयापए कर दिया है। प्रदेश में तक़रीबन दस से पंद्रह प्रतिशत बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस बार बिजली के रेट बढ़ाने में विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी नहीं ली गई है। यूपीपीसीएल ने खुद से ही इस बार रेट बढ़ाया है। प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को पहली जनवरी से बारह पैसे से तैंतालीस पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी होगी। अचानक बिजली के दाम बढऩे पर विद्युत उपभोक्ता परिषद यूपी विद्युत नियामक आयोग पहुंच गया है। मामले में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एक जनहित याचिका भी दाखिल की। वहीं यूपीपीसीएल ने चार से छयासठ पैसा प्रति यूनिट तक की बिजली की दर में अचानक इजाफा करने के पीछे कोयला और तेल के रेट में बढ़ोतरी होना बताया है।
|
West Bengal Rape Case: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हंसखाली में नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले की सीबीआई जांच कर रही है और पीड़ित परिजनों को 1 करोड़ मुआवजा देने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है.
हंसखाली कांड में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ( Hanshkhali Rape Case ) के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) में नई याचिका दायर की गई है. गुरुवार को यह याचिका मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दायर की गई है. वादी के वकील अनिंद्य सुंदर दास ने याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता ने शीघ्र सुनवाई की मांग की है. मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने याचिका पर विचार करने का आश्वासन दिया है. आरोप है कि नाबालिग लड़की (West Bengal Minor Rape Case) के साथ बलात्कार किया गया था और फिर उसकी मृत्यु होने पर उसके पार्थिव शरीर को जला दिया गया था. इस मामले को लेकर काफी बवाल मचा था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है.
हाल में हंसखाली सामूहिक दुष्कर्म मामले में मूल आरोपी सोहेल गोयाली के पिता और टीएमसी नेता समरेंदु गोयाली और उसका करीबी पीयूष भक्त को गिरफ्तार किया गया था. पहले तृणमूल कांग्रेस के पंचायत नेता समरेंदु गोयाली के बेटे ब्रजगोपाल और उसके दोस्त को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था. 4 अप्रैल को तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है.
सीएम ममता बनर्जी के हंसखाली रेप पीड़िता को लेकर दिए बयान से काफी विवाद पैदा हुआ था. उन्होंने रेप पीड़िता को गर्भवती बताया था और कहा था कि उसका लव अफेयर चल रहा था.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि उनके स्रोत उन्हें बीरभूम जिले के बोगटुई और नदिया जिले के हंसखाली में ऐसी घटनाओं के लिए इनपुट प्रदान करने में विफल रहे हैं. सीएम ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई थी.
बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने 13 अप्रैल को मामला दर्ज किया था और हंसखाली पुलिस स्टेशन में पहले दर्ज मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी. जांच के दौरान कथित रूप से उक्त आरोपी की भूमिका का पता चला जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. बाद में, उनके कुछ दोस्तों को भी उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया है. बाद में टीएमसी नेता को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.
|
West Bengal Rape Case: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हंसखाली में नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले की सीबीआई जांच कर रही है और पीड़ित परिजनों को एक करोड़ मुआवजा देने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है. हंसखाली कांड में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में नई याचिका दायर की गई है. गुरुवार को यह याचिका मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दायर की गई है. वादी के वकील अनिंद्य सुंदर दास ने याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता ने शीघ्र सुनवाई की मांग की है. मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने याचिका पर विचार करने का आश्वासन दिया है. आरोप है कि नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था और फिर उसकी मृत्यु होने पर उसके पार्थिव शरीर को जला दिया गया था. इस मामले को लेकर काफी बवाल मचा था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. हाल में हंसखाली सामूहिक दुष्कर्म मामले में मूल आरोपी सोहेल गोयाली के पिता और टीएमसी नेता समरेंदु गोयाली और उसका करीबी पीयूष भक्त को गिरफ्तार किया गया था. पहले तृणमूल कांग्रेस के पंचायत नेता समरेंदु गोयाली के बेटे ब्रजगोपाल और उसके दोस्त को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था. चार अप्रैल को तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. सीएम ममता बनर्जी के हंसखाली रेप पीड़िता को लेकर दिए बयान से काफी विवाद पैदा हुआ था. उन्होंने रेप पीड़िता को गर्भवती बताया था और कहा था कि उसका लव अफेयर चल रहा था.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि उनके स्रोत उन्हें बीरभूम जिले के बोगटुई और नदिया जिले के हंसखाली में ऐसी घटनाओं के लिए इनपुट प्रदान करने में विफल रहे हैं. सीएम ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई थी. बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने तेरह अप्रैल को मामला दर्ज किया था और हंसखाली पुलिस स्टेशन में पहले दर्ज मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी. जांच के दौरान कथित रूप से उक्त आरोपी की भूमिका का पता चला जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. बाद में, उनके कुछ दोस्तों को भी उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया है. बाद में टीएमसी नेता को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.
|
जितना महत्वपूर्ण है पढ़ाई उतना ही महत्वपू्र्ण है जो पढ़ा उसे दोहराना। रिविजन करने से आप जो पढ़ते हैं उसे आप याद भी रख पाते हैं। इतना ही नहीं इससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
जिस टॉपिक्स को समझने में आपको कठिनाई हो रही है, उसपर थोड़ा ज्यादा ध्यान दें। इससे आप अन्य चीजों को और भी सरलता से समझ पाएंगे।
आज के डिजिटल समय में आपके पास हजार ऑप्शन होता है ऐसे में टाइम वेस्ट करने से बेहतर है अपने नोट्स और सिलेबस के अनुसार ही पढ़ें।
किसी भी परीक्षा में MCQs बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसे सबसे पहले हल करना चाहिए।
पिछले वर्ष के प्रश्न- पत्र से आपको परीक्षा का पैटर्न समझ में आएगा तथा आप समझ पाएंगे कि पेपर का क्या पैटर्न है।
किसी भी परीक्षा में केवल प्रश्नों को हल करना ही जरूरी नहीं है। उत्तर लिखने का तरीका भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। सबसे सरल एवं स्पष्ट तरीके से ही प्रश्नों का उत्तर दें।
किसी भी प्रश्न का उत्तर लिखने से पहले उस प्रश्न को पढ़े और यह समझने की कोशिश करें कि प्रश्न में पूछा क्या जा रहा है।
तनाव में रहकर कोई भी काम सही तरीके से नहीं किया जा सकता है। इसलिए तनाव से दूर रहें, परीक्षा से घबराए नहीं और खुद पर विश्वास करें. आपने जो पढ़ा है उस पर भरोसा करें। कभी भी इस उम्मीद पर ना बैठे कि परीक्षा से दो दिन पहले आपकी तैयारी पूरी हो जाएगी।
|
जितना महत्वपूर्ण है पढ़ाई उतना ही महत्वपू्र्ण है जो पढ़ा उसे दोहराना। रिविजन करने से आप जो पढ़ते हैं उसे आप याद भी रख पाते हैं। इतना ही नहीं इससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। जिस टॉपिक्स को समझने में आपको कठिनाई हो रही है, उसपर थोड़ा ज्यादा ध्यान दें। इससे आप अन्य चीजों को और भी सरलता से समझ पाएंगे। आज के डिजिटल समय में आपके पास हजार ऑप्शन होता है ऐसे में टाइम वेस्ट करने से बेहतर है अपने नोट्स और सिलेबस के अनुसार ही पढ़ें। किसी भी परीक्षा में MCQs बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसे सबसे पहले हल करना चाहिए। पिछले वर्ष के प्रश्न- पत्र से आपको परीक्षा का पैटर्न समझ में आएगा तथा आप समझ पाएंगे कि पेपर का क्या पैटर्न है। किसी भी परीक्षा में केवल प्रश्नों को हल करना ही जरूरी नहीं है। उत्तर लिखने का तरीका भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। सबसे सरल एवं स्पष्ट तरीके से ही प्रश्नों का उत्तर दें। किसी भी प्रश्न का उत्तर लिखने से पहले उस प्रश्न को पढ़े और यह समझने की कोशिश करें कि प्रश्न में पूछा क्या जा रहा है। तनाव में रहकर कोई भी काम सही तरीके से नहीं किया जा सकता है। इसलिए तनाव से दूर रहें, परीक्षा से घबराए नहीं और खुद पर विश्वास करें. आपने जो पढ़ा है उस पर भरोसा करें। कभी भी इस उम्मीद पर ना बैठे कि परीक्षा से दो दिन पहले आपकी तैयारी पूरी हो जाएगी।
|
और ज्ञप्ति के विषय मे अनेक सिद्धान्त प्रतिपादित हुए। दर्शनयुग का प्रारम्भ उनकी परीक्षा से होता है। वर्शन युग को परीक्षा या प्रमाण मोमासा का युग कहा जा सकता है। वास्तव से दर्शन का अर्थ प्रत्यक्ष या साक्षात्कार है। किन्तु विगत दो हजार वर्षों में जिस दर्शन का विकास हुआ है, वह प्रमाणबादी दर्शन है। इस आधार पर दर्शन को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है१ आगम युग का दर्शन
२ प्रमाण युग का दर्शन ।
प्रमाणयुगीन दर्शन के विकास मे बौद्ध दार्शनिकों और नैयायिक दार्शनिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। न्यायसूत्र का रचनाकाल ईसापूर्व दूसरी शती माना जाता है । ईसा की चौथी शती में वात्स्यायन ने न्यायसूत्र पर भाष्य लिखा । बौद्ध विद्वान दिगनाग (५०० ई ) ने न्यायभाष्य की तर्कपूर्ण समीक्षा की। नैयायिक विद्वान् उद्योतकर (६३५ ई ) ने वास्स्यायन भाष्य पर न्यायवार्तिक लिखा, उसमे दिगनाग द्वारा किए गए आक्षेपों का परिहार किया। बौद्ध विद्वान् धर्मकीर्ति ( ६५० ई ) ने न्यायबिन्दु की रचना की और न्यायवार्तिक के तक का खण्डन किया। नैयायिक विद्वान् वाचस्पति मिश्र (८४० ई) ने न्यायवार्तिक तात्पर्य टीका लिखी। उसमे उन्होने बौद्ध तर्कों का निरसन किया ।
भीमासा दर्शन के विद्वान कुमारिल भट्ट ( ७००-८०० ई) ने भी दर्शन के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण कार्य किया । वैशेषिक सूत्र की रचना का समय ईसा की प्रथम शती माना जाता है। इस पर प्रशस्तपाद ( ५-६ शती ई) ने प्रशस्तपाद नाम का भाष्य लिखा ।
जैन विद्वान सिद्धसेन (ईसा की चौथी शती) और समतभद्र (ईसा की तीसरी-चौथी शती) ने अनेकान्त वाद को नया आयाम देकर जैन दर्शन को प्रमाणवादी दर्शन की भूमिका पर प्रतिष्ठित किया। हरिभद्र, विद्यानद, प्रभाकर, वादिदेव, हेमचन्द्र आदि जैन आचार्यों ने अन्य दर्शनो के अभिमत की तर्कपूर्ण समीक्षा की और स्यावाद के आधार पर समन्वय का प्रयत्न किया। सब दर्शनो के समन्वय दृष्टि से हरिभद्र सूरी का शास्त्रवार्ता समुच्य भारतीय दशन के साहित्य मे एक अनूठा ग्रथ है । जैन दर्शन पर अन्य दार्शनिको ने बहुत कम आक्षेप किए । धमकीति, शकर, कुमारिल आदि ने सक्षिप्त समीक्षा की। पर समीक्षा की दृष्टि से वह बहुत गंभीर नहीं है। जैन विद्वान् तर्क-प्रतितर्क के मच पर गए पर अनेकान्त के कवच के कारण वे असुरक्षित नहीं बने । भारतीय चिन्तन को सहस्ररश्मि की रश्मियो मे उनका चिन्तन समन्वित हो गया ।
भारतीय चिन्तन मे ज्ञप्ति मीमासा या मोक्ष के आधार पर अहिंसा, सत्य, नैतिकता, अपरिग्रह, अनासक्ति, मैत्री आदि आध्यात्मिक तत्व विकसित हुए। उनके द्वारा काम और अर्थ पर अकुश रखने की क्षमता जागृत हुई। वर्तमान की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय चिन्तन के अवरुद्ध द्वार खुले, इसकी अपेक्षा अनुभव हो रही है ।
अहिंसा सार्वभौम जैनेन्द्रकुमार
आपके सवाल पर मैं क्या कहू ? अहिंसा को मैं सार्वभौम मूल्य मानता हू यानी वह परम धर्म है। हर परिस्थिति मे वह उपादेय और उपयुक्त है।
उस सम्बन्ध मे योजना मेरे पास कोई बनी बनाई नहीं है। आज हर कोई व्यक्तिम्या देश, अपने को असुरक्षित अनुभव करता है। सुरक्षा के लिए शस्त्र वगैरा की शरण खोजता है। ऐसे क्या अन्दर सुरक्षा का आश्वासन पहुच जाता है ? ऐसा होता तो शस्त्रों को निरन्तर बढ़वारी की जरूरत न होतो। शस्त्र निर्माण की होड मे उत्तरोतर महा सघातक अणु शस्त्रो का अम्बार सभ्य और विकसित समझे जाने वाले देशों में बढ़ता ही न जाता। मैं मानता हू कि हिंसा के उपकरणों के जमाव की इस प्रवृत्ति मे से भय मुक्ति कभी मिलने वाली नहीं है। भय तो श्रोत है हिस्र भाव का, अर्थात् अहिंसा का आरम्भ निर्भयता से है । 'निर्भय हम हो कैसे ? जान पर आ बने तो भय कैसे न लगे ? अहिंसा का आरम्भ उसी मृत्यु के प्रति अभय के बिन्दु से है। मृत्यु तो अवश्यभावी है। शरीर का नाश तो एक दिन होना ही है। उसकी चिन्ता मे परिग्रह बटोरने मे क्या सार है। मरता उतना ही जितना मर्त्य है। आत्मा तो मरती नहीं, अर्थात् इस अमर तत्व में विश्वास रखने और सब भय से मुक्त होने से अहिंसा का आरम्भ मानना चाहिए। तभी सम्भव है कि हमे मारने आने वाले मे भय न हो, प्रीति हो, करुणा हो। उसमे हमे एक भूले और डरे प्राणी के दर्शन हो, यानी उसके हाथो मिला कष्ट प्रेम पूर्वक सहने की हम तैयारी रखें।
यह कष्ट सहन की तैयारी बुद्धि पूर्वक तो किसी मे हो नहीं सकती। इसके लिए आस्था चाहिए । ऐसे स्वेच्छापूर्वक तप कर यहां तक कि मर कर ही व्यक्ति अमर होता है । जिन्दगी से चिपकता है, जो पूरे तौर पर जीना नहीं जानता।
बुद्धि समझायेगी कि ऐसे सह लेने से आखिर होता क्या है ? लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे ही जो होता है, होता है। शहीद के नाम पर क्यो माया झुकता है फिर अहिंसक शहीद को तो बात ही क्या ईसा अपने क्रास को खुद कधे पर ढोकर उस पर सूली पा गये, और रोमन साम्राज्य खतम हो गया, यानी स्वेच्छा से आदमी अमर मृत्यु को भेंटता है तो मानो साबित करता है कि जीने से कोई बडी चीज है, जिस पर जीवन निछावर हो तो जीवन धन्य हो जाता है। शहीद की मृत्यु उस तरह ससार को जीवन को प्रेरणा देती है। मैं समझता हू कि इस जीवन दर्शन को, जिसमे अपने सक्षिप्त से सत्तर-अस्सी वर्ष के जीवन को ही, सब कुछ नही समझ लिया जाता, प्रत्युत जीवन की अनन्तता में विश्वास रक्खा जाता है, मनुष्य को क्षुद्रता से उबारना है। स्वार्थ-समय और स्वत्व-विस्तार की तृष्णा से बचाता है। इसमे उपार्जन से अधिक विसर्जन को महत्व मिलता है। यह जीवन दर्शन अव्यवहार्य नहीं है। मानव-मन मे गहरे में उसकी जड़े हैं। मनोविज्ञान उस 'यक्षधर्म की खोज तक पहुंचा ही चाहता है।
अभी तो सभ्यता जिस ओर बढ़ रही है, उसमे अपने लिए बीजो को पाने और बटोरने की होड-सी लगी है। इसमें एक को दूसरे का ख्याल नहीं रहता। इतना ही नहीं, लगता है कि दूसरा ही अपने स्वार्थ के मार्ग में बाधा है। ऐसे परस्पर संबध जिनसे समाज का निर्माण होता है, स्निग्ध नहीं हो पाते। उनमे ताप
और तनाव उभरता है, चिनगारियां फूटती हैं और हर दो को, एक-दूसरे से, अपने लिए खतरा होता है। यह इसीलिए कि हम उस अदृश्य और अन्तन्त को पहचान नही पाते, जिसमे कि हर वो एक है। यह अन्तर व्याप्त एकदम बुद्धि की पकड मे इसलिए नही आ पाता कि बुद्धि का व्यापार सम्भव ही द्वैत के आधार पर होता है।
इस त के आधार पर चलने वाली वैज्ञानिक बुद्धि ने बहुत कुछ चमत्कार कर दिखाया है। आज की तमाम उन्नति उसी की बदौलत है। उसकी करामात अचम्भा होता है। उसने मनुष्य को सीमा से उठाकर बसीम के तट तक पहुचा दिया है। हम छोटी-छोटी इकाइयो मे रहने के आदी थे। विज्ञान ने दुनिया को छोटा और एक कर दिया है। सचरण और आवागमन इतना द्रुत हो गया है कि कोई अपने को अलग-थलग नहीं मान सकता । दुनिया सिमट गयी है और अब मानव सौर मडल ही नहीं, बल्कि तमाम नक्षत्र-मडल का अपने को अतिथि सदस्य मान सकता है।
विज्ञान की इस अपूर्व उपलब्धि के प्रति कृतश होना होगा। लेकिन यह क्यों है कि अन्तरिक्ष में पहुचकर भी मनुष्य को अन्तरिक्ष युद्ध से बचने की भाषा मे सोचना पडता है, क्यों हैं कि विज्ञान संहार के अन्यतम शस्त्र तो युद्ध के लिए प्रस्तुत करते रहने मे योग दे सकता है, पर उस आसन्न युद्ध से बचने का कोई उपाय नहीं सुझा सकता ?
कहीं-न-कही कोई त्रुटि है। नही, विज्ञान अपने आप में पर्याप्त सिद्ध नहीं हो सका है। है तो वह अर्ध सत्य है। मनुष्य को समस्याए कटी नही हैं उससे, बल्कि देखा जाय तो बढ़ती गयी है। पदार्थ का उत्पादन प्रभूत, परिमाण मे होता गया है, मशीनो के उपयोग से, लेकिन दैन्य और दारिद्रय उससे मिटे नहीं हैं, उल्टे हैं। इस परिणाम मे यदि कोई तक-सगति नही दीखती है तो यही चिन्तक के लिए सोचने की चुनौती उपस्थित होती है ।
में मानता हू कि ब्रह्माण्ड अखण्ड नीरन्ध्र है। कही बीच मे रन्ध नहीं है। इसी अखण्ड मे अनन्तता समायी हैं। अगर अनन्तता अखण्ड भाव से सदस्थित है तो कैसे ? जिस तत्व से यह सम्भव हुआ है उसी का नाम है अहिंसा । अखण्ड परब्रह्म है। अखण्ड माना जाता था कि परम अणु भी है किन्तु विज्ञान ने परमाणु का विच्छेद कर डाला और देखा गया कि उस विच्छेद मे से प्रलय का विच्चुरण हुआ है, अर्थात् अन्तिम ऐक्य पर जब प्रहार होता है, अभिन्न को भिन्न किया जाता है तो जो योजक तत्व था, वह लुप्त हो जाता है और वहा से घोर सघातकता का उदय होता है। विज्ञान से यही हो चला है। एक को उसने दूसरे की प्रतियोगिता मे डाल दिया है।
इसलिए आवाज उठी है, विज्ञान और अध्यात्म के योग की। बात काफी सस्ती बन गयी है। अध्यात्म पुरुष कम नही है। भारतवर्ष तो बडी संख्या में उनका निर्यात कर रहा है। लेकिन सभ्यता की गति में उनके कारण किसी प्रकार का मोड नही आया है, आयेगा भी नही। कारण अध्यात्म की कोई अलग विद्या नहीं है। एक हुनर के रूप में उसका प्रदर्शन होता है तो चमत्कार जैसा उससे भले दिखाई दे जाय, मानव हित सिद्ध नहीं होता। मानव-सबधो की भूमिका में कोई अन्तर नहीं आता। ऐसा नहीं लगता कि शशक्ति के किसी नये रूप का प्रादुर्भाव हुआ है कि जो विश्व व्यवस्थाओं में मौलिक परिवर्तन ला सके। बौद्धिक विज्ञान के सम्मुख भक्ति की भाव विभोरता से काम नहीं चलता दीखता। विज्ञान जगत को शेय बना देती है। अध्यात्म अगर जगत को अज्ञेय बनाकर रह जाय तो मनुष्य की विशेष सहायता नहीं होती। आवश्यक है कि बारम (सबजेक्ट) और वस्तु (ऑबजैक्ट) के बीच का पार्थक्य टूटे। दूसरे शब्दो मे 'हू' और 'है' का भेद मिटे। इस समय उन्नति जिस रूप मे उत्कर्ष पाती जा रही है, उसमे 'हू' और 'है' का भेद गहरा किया जाता है। प्रकृति के प्रति पुरुष का सम्बन्ध जैसे जय-विजय का हो । विज्ञान का गब है कि उसने प्रकृति पर जय साधी है। मनुष्य बुद्धि के
मद मे अपने को जेता अनुभव करता है। मान लेता है कि प्रकृति को उसने परास्त किया है। ऐसे इकालांजिकल इसकी सृष्टि होती है। प्रकृति और पुरुष में आपस में ठन आती है। प्रकर्ष के साथ प्रदूषण उत्पन्न होता जाता है। संक्षेप में, प्रकृति के साथ मनुष्य के सम्बन्धों में निरंतर वैषम्य बढ़ रहा है। इसी को अपने नित्य नैमितिक वैन दिन जीवन के निकट लाकर समझें तो कह सकते हैं कि घर टूट रहा है, बाजार फैल रहा है। सम्बन्धों में प्यार अब अव्यावहारिक हुबा जा रहा है। व्यवहार का माध्यम बस पैसा रह गया है। प्यार वह जो घर-परिवार को बनाये और पैसा कि जो बाजार को फैलाए, जहा सबको अपने नफे की फिक्र है ।
केवल वैज्ञानिक बुद्धि और वैज्ञानिक सभ्यता मे मनुष्य-जाति के साथ विडम्बना का ही खेल खेला जा रहा है, यानी कि पुरुष और स्त्री के बीच व्यवधान डालने को पैसा आ गया है। सब कुछ नीलाम पर चढ़ा है। विज्ञापन सबसे लाभ की सबसे ऊची कला है।
मैं मानता हू कि अहिंसा को सबसे बड़ी चुनौती मुद्रा की संस्था के इस उत्तरोत्तर विकास ने उपस्थित की है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आज प्रमुखता से शस्त्रास्त्र का व्यापार है। युद्ध उद्योग से बढ़कर आज कोई उद्योग नहीं । कहना चाहिए कि आज की सभ्यता का महायंत्र हिंसोपकरणो की सृष्टि मे निरन्तर क्रियाशील है। समझा जाने वाला अध्यात्म इस उत्पादन की प्रक्रिया को छूने तक को उद्यत नही है, प्रत्युत वह उसमे से अपने लिए सुविधा और सरक्षण पाने की चेष्टा में दीखता है। मैं जिसको अहिंसा के रूप में देख पाता हू, उसमें इस प्रक्रिया का निषेध है, अर्थात् अहिंसा मे मशीन मनुष्य के लिए होगी, मनुष्य मशीन के लिए नहीं । स्त्री-पुरुष एक दूसरे के लिए होंगे, पैसे के लिए नही । अर्थशास्त्र नीतिशास्त्र से अलग न हो पायेगा और न नीतिशास्त्र धर्मशास्त्र से और धर्म होगा अखण्ड चैतन्य के प्रति अमन और प्रणमन ।
याद रखना होगा कि हम हैं तो द्वैत में हैं। द्वैस के पार जाना अनहुआ हो जाना है। वहां की बात की नही जा सकती। अखण्ड उपास्य ही रहेगा और वह है तमाम सत् का भाव, अर्थात् सत्य । वहा से हमको जो व्यवहार्य और प्रत्यक्ष धर्म प्राप्त होता है, वह अहिंसा है। जैसा पहले कहा है, इस अहिंसा में अपने को उत्तरोत्तर समस्त सृष्टि के साथ एकात्म अनुभव करने की क्षमता पाने जाना होगा। इसमे व्यक्तित्व का फैलना-फूलना नहीं आता, ह्रस्व और लुप्त होते जाना होता है। स्वत्य और सत्ता 'अहं' को बढ़ाते हैं। अहिंसा मे अकिंचन बनना पड़ता है। जो हम रखते हैं, यह हमारी सीमा बन जाता है, बधन हो जाता है। इमलिए रखने, बटोरने, अहिंसा में अपरिग्रह को और बढ़ना है। ऐसे ही बीच का वह समन्तराय कटेगा और टूटेगा, जो हमको दूसरे से अलग, उदासीन और विमुख बनाता है।
हमारे भारत देश मे परस्पर विलगाव और अलगाव की समस्या बडी विकट बनी दीखती है। विकट से विकटतर ही होगी वह, बगर निगाह हमारी सत्ता और स्वत्व पर रहेगी। एकता उस जगह है ही नहीं। वहां तो द्वन्द्र हैं और अपने-अपने स्वत्व का आग्रह और अधिकार को चेतना है। स्वत्व-विसर्जन में धन्यता दिखाई दे, वही दृष्टि इस अलगाव की समस्या से निबट सकती है और अपरिग्रह और अचिन्य का निर्वाह समाज में सम्भव यदि हो सकता है तो केवल अहिंसा के सहारे ।
मैं मानता हू कि वैज्ञानिक और औद्योगिक दृष्टि से परम विकसित पश्चिम अनुभव कर रहा है कि उन्नति के जो बाधार दो-ढाई शताब्दी पूर्व उसने अंगीकार किये थे, वे अब बोदे पड़ रहे हैं। मानव जाति का भविष्य में संभाल नहीं सकते। बुनियादें नयी और गहरी देनी होंगी, यदि सभ्यता के सौध को टिकाना और सभलाता है। जब भी युद्ध की आसन्न विभीषिका के उत्तर में वहां शान्ति आन्दोलन उदय मे आकर बल पकड़ते जा रहे है। किन्तु उनमें निषेध प्रधान है। निषेध से तो चलेगा नहीं। रिक्त प्रकृति को स्वीकार्य नही ।
|
और ज्ञप्ति के विषय मे अनेक सिद्धान्त प्रतिपादित हुए। दर्शनयुग का प्रारम्भ उनकी परीक्षा से होता है। वर्शन युग को परीक्षा या प्रमाण मोमासा का युग कहा जा सकता है। वास्तव से दर्शन का अर्थ प्रत्यक्ष या साक्षात्कार है। किन्तु विगत दो हजार वर्षों में जिस दर्शन का विकास हुआ है, वह प्रमाणबादी दर्शन है। इस आधार पर दर्शन को दो भागों में विभक्त किया जा सकता हैएक आगम युग का दर्शन दो प्रमाण युग का दर्शन । प्रमाणयुगीन दर्शन के विकास मे बौद्ध दार्शनिकों और नैयायिक दार्शनिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। न्यायसूत्र का रचनाकाल ईसापूर्व दूसरी शती माना जाता है । ईसा की चौथी शती में वात्स्यायन ने न्यायसूत्र पर भाष्य लिखा । बौद्ध विद्वान दिगनाग ने न्यायभाष्य की तर्कपूर्ण समीक्षा की। नैयायिक विद्वान् उद्योतकर ने वास्स्यायन भाष्य पर न्यायवार्तिक लिखा, उसमे दिगनाग द्वारा किए गए आक्षेपों का परिहार किया। बौद्ध विद्वान् धर्मकीर्ति ने न्यायबिन्दु की रचना की और न्यायवार्तिक के तक का खण्डन किया। नैयायिक विद्वान् वाचस्पति मिश्र ने न्यायवार्तिक तात्पर्य टीका लिखी। उसमे उन्होने बौद्ध तर्कों का निरसन किया । भीमासा दर्शन के विद्वान कुमारिल भट्ट ने भी दर्शन के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण कार्य किया । वैशेषिक सूत्र की रचना का समय ईसा की प्रथम शती माना जाता है। इस पर प्रशस्तपाद ने प्रशस्तपाद नाम का भाष्य लिखा । जैन विद्वान सिद्धसेन और समतभद्र ने अनेकान्त वाद को नया आयाम देकर जैन दर्शन को प्रमाणवादी दर्शन की भूमिका पर प्रतिष्ठित किया। हरिभद्र, विद्यानद, प्रभाकर, वादिदेव, हेमचन्द्र आदि जैन आचार्यों ने अन्य दर्शनो के अभिमत की तर्कपूर्ण समीक्षा की और स्यावाद के आधार पर समन्वय का प्रयत्न किया। सब दर्शनो के समन्वय दृष्टि से हरिभद्र सूरी का शास्त्रवार्ता समुच्य भारतीय दशन के साहित्य मे एक अनूठा ग्रथ है । जैन दर्शन पर अन्य दार्शनिको ने बहुत कम आक्षेप किए । धमकीति, शकर, कुमारिल आदि ने सक्षिप्त समीक्षा की। पर समीक्षा की दृष्टि से वह बहुत गंभीर नहीं है। जैन विद्वान् तर्क-प्रतितर्क के मच पर गए पर अनेकान्त के कवच के कारण वे असुरक्षित नहीं बने । भारतीय चिन्तन को सहस्ररश्मि की रश्मियो मे उनका चिन्तन समन्वित हो गया । भारतीय चिन्तन मे ज्ञप्ति मीमासा या मोक्ष के आधार पर अहिंसा, सत्य, नैतिकता, अपरिग्रह, अनासक्ति, मैत्री आदि आध्यात्मिक तत्व विकसित हुए। उनके द्वारा काम और अर्थ पर अकुश रखने की क्षमता जागृत हुई। वर्तमान की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय चिन्तन के अवरुद्ध द्वार खुले, इसकी अपेक्षा अनुभव हो रही है । अहिंसा सार्वभौम जैनेन्द्रकुमार आपके सवाल पर मैं क्या कहू ? अहिंसा को मैं सार्वभौम मूल्य मानता हू यानी वह परम धर्म है। हर परिस्थिति मे वह उपादेय और उपयुक्त है। उस सम्बन्ध मे योजना मेरे पास कोई बनी बनाई नहीं है। आज हर कोई व्यक्तिम्या देश, अपने को असुरक्षित अनुभव करता है। सुरक्षा के लिए शस्त्र वगैरा की शरण खोजता है। ऐसे क्या अन्दर सुरक्षा का आश्वासन पहुच जाता है ? ऐसा होता तो शस्त्रों को निरन्तर बढ़वारी की जरूरत न होतो। शस्त्र निर्माण की होड मे उत्तरोतर महा सघातक अणु शस्त्रो का अम्बार सभ्य और विकसित समझे जाने वाले देशों में बढ़ता ही न जाता। मैं मानता हू कि हिंसा के उपकरणों के जमाव की इस प्रवृत्ति मे से भय मुक्ति कभी मिलने वाली नहीं है। भय तो श्रोत है हिस्र भाव का, अर्थात् अहिंसा का आरम्भ निर्भयता से है । 'निर्भय हम हो कैसे ? जान पर आ बने तो भय कैसे न लगे ? अहिंसा का आरम्भ उसी मृत्यु के प्रति अभय के बिन्दु से है। मृत्यु तो अवश्यभावी है। शरीर का नाश तो एक दिन होना ही है। उसकी चिन्ता मे परिग्रह बटोरने मे क्या सार है। मरता उतना ही जितना मर्त्य है। आत्मा तो मरती नहीं, अर्थात् इस अमर तत्व में विश्वास रखने और सब भय से मुक्त होने से अहिंसा का आरम्भ मानना चाहिए। तभी सम्भव है कि हमे मारने आने वाले मे भय न हो, प्रीति हो, करुणा हो। उसमे हमे एक भूले और डरे प्राणी के दर्शन हो, यानी उसके हाथो मिला कष्ट प्रेम पूर्वक सहने की हम तैयारी रखें। यह कष्ट सहन की तैयारी बुद्धि पूर्वक तो किसी मे हो नहीं सकती। इसके लिए आस्था चाहिए । ऐसे स्वेच्छापूर्वक तप कर यहां तक कि मर कर ही व्यक्ति अमर होता है । जिन्दगी से चिपकता है, जो पूरे तौर पर जीना नहीं जानता। बुद्धि समझायेगी कि ऐसे सह लेने से आखिर होता क्या है ? लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे ही जो होता है, होता है। शहीद के नाम पर क्यो माया झुकता है फिर अहिंसक शहीद को तो बात ही क्या ईसा अपने क्रास को खुद कधे पर ढोकर उस पर सूली पा गये, और रोमन साम्राज्य खतम हो गया, यानी स्वेच्छा से आदमी अमर मृत्यु को भेंटता है तो मानो साबित करता है कि जीने से कोई बडी चीज है, जिस पर जीवन निछावर हो तो जीवन धन्य हो जाता है। शहीद की मृत्यु उस तरह ससार को जीवन को प्रेरणा देती है। मैं समझता हू कि इस जीवन दर्शन को, जिसमे अपने सक्षिप्त से सत्तर-अस्सी वर्ष के जीवन को ही, सब कुछ नही समझ लिया जाता, प्रत्युत जीवन की अनन्तता में विश्वास रक्खा जाता है, मनुष्य को क्षुद्रता से उबारना है। स्वार्थ-समय और स्वत्व-विस्तार की तृष्णा से बचाता है। इसमे उपार्जन से अधिक विसर्जन को महत्व मिलता है। यह जीवन दर्शन अव्यवहार्य नहीं है। मानव-मन मे गहरे में उसकी जड़े हैं। मनोविज्ञान उस 'यक्षधर्म की खोज तक पहुंचा ही चाहता है। अभी तो सभ्यता जिस ओर बढ़ रही है, उसमे अपने लिए बीजो को पाने और बटोरने की होड-सी लगी है। इसमें एक को दूसरे का ख्याल नहीं रहता। इतना ही नहीं, लगता है कि दूसरा ही अपने स्वार्थ के मार्ग में बाधा है। ऐसे परस्पर संबध जिनसे समाज का निर्माण होता है, स्निग्ध नहीं हो पाते। उनमे ताप और तनाव उभरता है, चिनगारियां फूटती हैं और हर दो को, एक-दूसरे से, अपने लिए खतरा होता है। यह इसीलिए कि हम उस अदृश्य और अन्तन्त को पहचान नही पाते, जिसमे कि हर वो एक है। यह अन्तर व्याप्त एकदम बुद्धि की पकड मे इसलिए नही आ पाता कि बुद्धि का व्यापार सम्भव ही द्वैत के आधार पर होता है। इस त के आधार पर चलने वाली वैज्ञानिक बुद्धि ने बहुत कुछ चमत्कार कर दिखाया है। आज की तमाम उन्नति उसी की बदौलत है। उसकी करामात अचम्भा होता है। उसने मनुष्य को सीमा से उठाकर बसीम के तट तक पहुचा दिया है। हम छोटी-छोटी इकाइयो मे रहने के आदी थे। विज्ञान ने दुनिया को छोटा और एक कर दिया है। सचरण और आवागमन इतना द्रुत हो गया है कि कोई अपने को अलग-थलग नहीं मान सकता । दुनिया सिमट गयी है और अब मानव सौर मडल ही नहीं, बल्कि तमाम नक्षत्र-मडल का अपने को अतिथि सदस्य मान सकता है। विज्ञान की इस अपूर्व उपलब्धि के प्रति कृतश होना होगा। लेकिन यह क्यों है कि अन्तरिक्ष में पहुचकर भी मनुष्य को अन्तरिक्ष युद्ध से बचने की भाषा मे सोचना पडता है, क्यों हैं कि विज्ञान संहार के अन्यतम शस्त्र तो युद्ध के लिए प्रस्तुत करते रहने मे योग दे सकता है, पर उस आसन्न युद्ध से बचने का कोई उपाय नहीं सुझा सकता ? कहीं-न-कही कोई त्रुटि है। नही, विज्ञान अपने आप में पर्याप्त सिद्ध नहीं हो सका है। है तो वह अर्ध सत्य है। मनुष्य को समस्याए कटी नही हैं उससे, बल्कि देखा जाय तो बढ़ती गयी है। पदार्थ का उत्पादन प्रभूत, परिमाण मे होता गया है, मशीनो के उपयोग से, लेकिन दैन्य और दारिद्रय उससे मिटे नहीं हैं, उल्टे हैं। इस परिणाम मे यदि कोई तक-सगति नही दीखती है तो यही चिन्तक के लिए सोचने की चुनौती उपस्थित होती है । में मानता हू कि ब्रह्माण्ड अखण्ड नीरन्ध्र है। कही बीच मे रन्ध नहीं है। इसी अखण्ड मे अनन्तता समायी हैं। अगर अनन्तता अखण्ड भाव से सदस्थित है तो कैसे ? जिस तत्व से यह सम्भव हुआ है उसी का नाम है अहिंसा । अखण्ड परब्रह्म है। अखण्ड माना जाता था कि परम अणु भी है किन्तु विज्ञान ने परमाणु का विच्छेद कर डाला और देखा गया कि उस विच्छेद मे से प्रलय का विच्चुरण हुआ है, अर्थात् अन्तिम ऐक्य पर जब प्रहार होता है, अभिन्न को भिन्न किया जाता है तो जो योजक तत्व था, वह लुप्त हो जाता है और वहा से घोर सघातकता का उदय होता है। विज्ञान से यही हो चला है। एक को उसने दूसरे की प्रतियोगिता मे डाल दिया है। इसलिए आवाज उठी है, विज्ञान और अध्यात्म के योग की। बात काफी सस्ती बन गयी है। अध्यात्म पुरुष कम नही है। भारतवर्ष तो बडी संख्या में उनका निर्यात कर रहा है। लेकिन सभ्यता की गति में उनके कारण किसी प्रकार का मोड नही आया है, आयेगा भी नही। कारण अध्यात्म की कोई अलग विद्या नहीं है। एक हुनर के रूप में उसका प्रदर्शन होता है तो चमत्कार जैसा उससे भले दिखाई दे जाय, मानव हित सिद्ध नहीं होता। मानव-सबधो की भूमिका में कोई अन्तर नहीं आता। ऐसा नहीं लगता कि शशक्ति के किसी नये रूप का प्रादुर्भाव हुआ है कि जो विश्व व्यवस्थाओं में मौलिक परिवर्तन ला सके। बौद्धिक विज्ञान के सम्मुख भक्ति की भाव विभोरता से काम नहीं चलता दीखता। विज्ञान जगत को शेय बना देती है। अध्यात्म अगर जगत को अज्ञेय बनाकर रह जाय तो मनुष्य की विशेष सहायता नहीं होती। आवश्यक है कि बारम और वस्तु के बीच का पार्थक्य टूटे। दूसरे शब्दो मे 'हू' और 'है' का भेद मिटे। इस समय उन्नति जिस रूप मे उत्कर्ष पाती जा रही है, उसमे 'हू' और 'है' का भेद गहरा किया जाता है। प्रकृति के प्रति पुरुष का सम्बन्ध जैसे जय-विजय का हो । विज्ञान का गब है कि उसने प्रकृति पर जय साधी है। मनुष्य बुद्धि के मद मे अपने को जेता अनुभव करता है। मान लेता है कि प्रकृति को उसने परास्त किया है। ऐसे इकालांजिकल इसकी सृष्टि होती है। प्रकृति और पुरुष में आपस में ठन आती है। प्रकर्ष के साथ प्रदूषण उत्पन्न होता जाता है। संक्षेप में, प्रकृति के साथ मनुष्य के सम्बन्धों में निरंतर वैषम्य बढ़ रहा है। इसी को अपने नित्य नैमितिक वैन दिन जीवन के निकट लाकर समझें तो कह सकते हैं कि घर टूट रहा है, बाजार फैल रहा है। सम्बन्धों में प्यार अब अव्यावहारिक हुबा जा रहा है। व्यवहार का माध्यम बस पैसा रह गया है। प्यार वह जो घर-परिवार को बनाये और पैसा कि जो बाजार को फैलाए, जहा सबको अपने नफे की फिक्र है । केवल वैज्ञानिक बुद्धि और वैज्ञानिक सभ्यता मे मनुष्य-जाति के साथ विडम्बना का ही खेल खेला जा रहा है, यानी कि पुरुष और स्त्री के बीच व्यवधान डालने को पैसा आ गया है। सब कुछ नीलाम पर चढ़ा है। विज्ञापन सबसे लाभ की सबसे ऊची कला है। मैं मानता हू कि अहिंसा को सबसे बड़ी चुनौती मुद्रा की संस्था के इस उत्तरोत्तर विकास ने उपस्थित की है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आज प्रमुखता से शस्त्रास्त्र का व्यापार है। युद्ध उद्योग से बढ़कर आज कोई उद्योग नहीं । कहना चाहिए कि आज की सभ्यता का महायंत्र हिंसोपकरणो की सृष्टि मे निरन्तर क्रियाशील है। समझा जाने वाला अध्यात्म इस उत्पादन की प्रक्रिया को छूने तक को उद्यत नही है, प्रत्युत वह उसमे से अपने लिए सुविधा और सरक्षण पाने की चेष्टा में दीखता है। मैं जिसको अहिंसा के रूप में देख पाता हू, उसमें इस प्रक्रिया का निषेध है, अर्थात् अहिंसा मे मशीन मनुष्य के लिए होगी, मनुष्य मशीन के लिए नहीं । स्त्री-पुरुष एक दूसरे के लिए होंगे, पैसे के लिए नही । अर्थशास्त्र नीतिशास्त्र से अलग न हो पायेगा और न नीतिशास्त्र धर्मशास्त्र से और धर्म होगा अखण्ड चैतन्य के प्रति अमन और प्रणमन । याद रखना होगा कि हम हैं तो द्वैत में हैं। द्वैस के पार जाना अनहुआ हो जाना है। वहां की बात की नही जा सकती। अखण्ड उपास्य ही रहेगा और वह है तमाम सत् का भाव, अर्थात् सत्य । वहा से हमको जो व्यवहार्य और प्रत्यक्ष धर्म प्राप्त होता है, वह अहिंसा है। जैसा पहले कहा है, इस अहिंसा में अपने को उत्तरोत्तर समस्त सृष्टि के साथ एकात्म अनुभव करने की क्षमता पाने जाना होगा। इसमे व्यक्तित्व का फैलना-फूलना नहीं आता, ह्रस्व और लुप्त होते जाना होता है। स्वत्य और सत्ता 'अहं' को बढ़ाते हैं। अहिंसा मे अकिंचन बनना पड़ता है। जो हम रखते हैं, यह हमारी सीमा बन जाता है, बधन हो जाता है। इमलिए रखने, बटोरने, अहिंसा में अपरिग्रह को और बढ़ना है। ऐसे ही बीच का वह समन्तराय कटेगा और टूटेगा, जो हमको दूसरे से अलग, उदासीन और विमुख बनाता है। हमारे भारत देश मे परस्पर विलगाव और अलगाव की समस्या बडी विकट बनी दीखती है। विकट से विकटतर ही होगी वह, बगर निगाह हमारी सत्ता और स्वत्व पर रहेगी। एकता उस जगह है ही नहीं। वहां तो द्वन्द्र हैं और अपने-अपने स्वत्व का आग्रह और अधिकार को चेतना है। स्वत्व-विसर्जन में धन्यता दिखाई दे, वही दृष्टि इस अलगाव की समस्या से निबट सकती है और अपरिग्रह और अचिन्य का निर्वाह समाज में सम्भव यदि हो सकता है तो केवल अहिंसा के सहारे । मैं मानता हू कि वैज्ञानिक और औद्योगिक दृष्टि से परम विकसित पश्चिम अनुभव कर रहा है कि उन्नति के जो बाधार दो-ढाई शताब्दी पूर्व उसने अंगीकार किये थे, वे अब बोदे पड़ रहे हैं। मानव जाति का भविष्य में संभाल नहीं सकते। बुनियादें नयी और गहरी देनी होंगी, यदि सभ्यता के सौध को टिकाना और सभलाता है। जब भी युद्ध की आसन्न विभीषिका के उत्तर में वहां शान्ति आन्दोलन उदय मे आकर बल पकड़ते जा रहे है। किन्तु उनमें निषेध प्रधान है। निषेध से तो चलेगा नहीं। रिक्त प्रकृति को स्वीकार्य नही ।
|
DUMKA: झारखंड के दुमका में एक महिला को निर्वस्त्र कर पिटाई करने का मामला सामने आया है. यहां अवैध संबंध के मामले में मां-बेटी के साथ भरी पंचायत में मारपीट की गई. फिर मां को सैंकड़ों लोगों के सामने निर्वस्त्र कर दिया गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है.
मामला दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र के जमुनिया गांव का है. जहां इस घटना को लेकर आदिवासी महिला ने थाना में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि मेरी बेटी भोराटांड़ गांव के ओमप्रकाश मुर्मू के घर गई थी. जहां उसकी पत्नी ने उसे पकड़ लिया और मारपीट की. जिसके बाद पंचायत के बीच लोगों ने मेरे साथ मारपीट की. पंचायत ने प्रेमिका पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था.
पुलिस ने पीड़ित महिला की शिकायत पर 15 नामजद और 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. फिलहाल पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है. इस मामले में सरैयाहाट थाना प्रभारी विनय कुमार का कहना है कि मां-बेटी के साथ गलत व्यवहार किए जाने की जानकारी मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों के लोगों के चंगुल से बचाकर हॉस्पिटल पहुंचाया था.
|
DUMKA: झारखंड के दुमका में एक महिला को निर्वस्त्र कर पिटाई करने का मामला सामने आया है. यहां अवैध संबंध के मामले में मां-बेटी के साथ भरी पंचायत में मारपीट की गई. फिर मां को सैंकड़ों लोगों के सामने निर्वस्त्र कर दिया गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है. मामला दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र के जमुनिया गांव का है. जहां इस घटना को लेकर आदिवासी महिला ने थाना में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि मेरी बेटी भोराटांड़ गांव के ओमप्रकाश मुर्मू के घर गई थी. जहां उसकी पत्नी ने उसे पकड़ लिया और मारपीट की. जिसके बाद पंचायत के बीच लोगों ने मेरे साथ मारपीट की. पंचायत ने प्रेमिका पर पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. पुलिस ने पीड़ित महिला की शिकायत पर पंद्रह नामजद और एक सौ से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. फिलहाल पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है. इस मामले में सरैयाहाट थाना प्रभारी विनय कुमार का कहना है कि मां-बेटी के साथ गलत व्यवहार किए जाने की जानकारी मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों के लोगों के चंगुल से बचाकर हॉस्पिटल पहुंचाया था.
|
बस खाना है दूध जलेबी (Photo Credit: sanjanafeast)
New Delhi:
जलेबी एक ऐसी स्वीट डिश है जिसे किसी ख़ास मौके पर या नाश्ते में खाया जाता है. गर्मागर्म जलेबी (Jalebi Recipe) को कई लोग दूध, दही और रबड़ी के साथ खाना पसंद करते हैं. तो हम आपको बता दें कि दूध जलेबी (Health Benefits Of Doodh Jalebi) न केवल स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. दूध जलेबी (Doodh Jalebi Khane Ke Fayde) खाने से पाचन को बेहतर रखा जा सकता है. ख़ास कर दूध जलेबी वजन बढ़ने के लिए भी बहुत कारागार है.
दूध जलेबी खाने के फायदेः (Doodh Jalebi Khane Ke Fayde)
1. वजन बढ़ाने में मददगारः जलेबी को स्वाद ही नहीं वजन बढ़ाने के लिए भी खा सकते हैं. जलेबी में कैलोरी की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है, जो वजन को बढ़ाने में मदद कर सकती है.
2. स्ट्रेस में मददगारः दूध जलेबी को साथ में खाने से स्ट्रेस भी कम होता है. कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध जलेबी खाने से मेमोरी पावर बूस्ट किया जा सकता है.
3. माइग्रेन में मददगारः माइग्रेन की समस्या लगभग आजकल हर किसी युवा को है. ये समस्या ज्यादातर युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है. जब भी आपको माइग्रेन की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इसके अलावा माइग्रेन वालों को दूध जलेबी भी खाना चाहिए. ये दिमाग को शांत करता है.
|
बस खाना है दूध जलेबी New Delhi: जलेबी एक ऐसी स्वीट डिश है जिसे किसी ख़ास मौके पर या नाश्ते में खाया जाता है. गर्मागर्म जलेबी को कई लोग दूध, दही और रबड़ी के साथ खाना पसंद करते हैं. तो हम आपको बता दें कि दूध जलेबी न केवल स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. दूध जलेबी खाने से पाचन को बेहतर रखा जा सकता है. ख़ास कर दूध जलेबी वजन बढ़ने के लिए भी बहुत कारागार है. दूध जलेबी खाने के फायदेः एक. वजन बढ़ाने में मददगारः जलेबी को स्वाद ही नहीं वजन बढ़ाने के लिए भी खा सकते हैं. जलेबी में कैलोरी की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है, जो वजन को बढ़ाने में मदद कर सकती है. दो. स्ट्रेस में मददगारः दूध जलेबी को साथ में खाने से स्ट्रेस भी कम होता है. कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध जलेबी खाने से मेमोरी पावर बूस्ट किया जा सकता है. तीन. माइग्रेन में मददगारः माइग्रेन की समस्या लगभग आजकल हर किसी युवा को है. ये समस्या ज्यादातर युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है. जब भी आपको माइग्रेन की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इसके अलावा माइग्रेन वालों को दूध जलेबी भी खाना चाहिए. ये दिमाग को शांत करता है.
|
भारत के सबसे कुशल और विचारशील अभिनेताओं में से एक नसीरुद्दीन शाह ने नफ़रती भाषण या हेट स्पीच के बारे में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस संबंध में चुप्पी, उनकी मौन सहमति प्रतीत होती है।
नफरती भाषण को लेकर नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि बोलना प्रधानमंत्री कर्तव्य है, हम सभी की रक्षा करना उनका काम है, सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली है।
द वायर से बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और भारतीयों को पीढ़ियों से नहीं, बल्कि दशकों से इस तरह की ग़ैर-जिम्मेदार बातों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह हमेशा से था, हमेशा से हमारे समाज में व्याप्त रहते हुए सही परिस्थितियों की ताक में रहता है, और वर्तमान शासन ने नफरती भाषण को वैध बना दिया है।
शाह ने कहा कि इससे मुझे ग़ुस्सा आता है, लेकिन मुझे यह हास्यास्पद भी लगता है जब लोग मुझे पाकिस्तान जाने के लिए कहते हैं।
आलोचनात्मक रूप से बोलते हैं उन्होंने कहा कि कैसे सरकार सभी आलोचकों को 'राष्ट्र-विरोधी' कहती है।
उन्होंने कहा कि देश-विरोधियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की पूरी बात बेतुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार थी जो भारत को 'टुकड़ों' में विभाजित कर रही थी।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दावा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, नसीरुद्दीन शाह ने भारत में स्थितियों को 'एक अघोषित आपातकाल' कहा। वह कहते हैं कि हम एक लोकतंत्र होने का दावा तब तक नहीं कर सकते जब तक कि हम सभी नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास न करें और ज़हर फैलाना और नफरत और हिंसा को बढ़ावा देना बंद न कर दें। (AK)
हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
|
भारत के सबसे कुशल और विचारशील अभिनेताओं में से एक नसीरुद्दीन शाह ने नफ़रती भाषण या हेट स्पीच के बारे में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस संबंध में चुप्पी, उनकी मौन सहमति प्रतीत होती है। नफरती भाषण को लेकर नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि बोलना प्रधानमंत्री कर्तव्य है, हम सभी की रक्षा करना उनका काम है, सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली है। द वायर से बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और भारतीयों को पीढ़ियों से नहीं, बल्कि दशकों से इस तरह की ग़ैर-जिम्मेदार बातों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमेशा से था, हमेशा से हमारे समाज में व्याप्त रहते हुए सही परिस्थितियों की ताक में रहता है, और वर्तमान शासन ने नफरती भाषण को वैध बना दिया है। शाह ने कहा कि इससे मुझे ग़ुस्सा आता है, लेकिन मुझे यह हास्यास्पद भी लगता है जब लोग मुझे पाकिस्तान जाने के लिए कहते हैं। आलोचनात्मक रूप से बोलते हैं उन्होंने कहा कि कैसे सरकार सभी आलोचकों को 'राष्ट्र-विरोधी' कहती है। उन्होंने कहा कि देश-विरोधियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की पूरी बात बेतुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार थी जो भारत को 'टुकड़ों' में विभाजित कर रही थी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दावा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, नसीरुद्दीन शाह ने भारत में स्थितियों को 'एक अघोषित आपातकाल' कहा। वह कहते हैं कि हम एक लोकतंत्र होने का दावा तब तक नहीं कर सकते जब तक कि हम सभी नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास न करें और ज़हर फैलाना और नफरत और हिंसा को बढ़ावा देना बंद न कर दें। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
|
बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने शनिवार (3 जुलाई) को ऐलान किया कि वे अपनी पत्नी किरण राव के साथ तलाक लेने जा रहें हैं. ये उन दोनों का आपसी फैसला है. उनके इस ऐलान के बाद हर कोई चौंक गया. लोगों के मन में सवाल था कि आखिर शादी के 15 साल बाद ऐसा क्या हो की दोनो कपल होने जा रहे है. अब दोनों ने एक वीडियो में बताया कि उन्होंने अलग होने का फैसला क्यों लिया?
दरअसल, दोनों एक साथ फेसबुक लाइव पर आए थे. दोनों ने पानी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और दोनों ने महाराष्ट्र के किसानों को सोयाबीन की खेती के नुस्खे बताए. अपने संयुक्त बयान में, दोनों ने घोषणा की है कि तलाक के बाद भी, वे फिल्मों, पानी फाउंडेशन और अन्य परियोजनाओं में एक साथ काम करना जारी रखेंगे.
बता दें, आमिर खान और किरण राव ने बीते दिन ही तलाक की बात लोगों के बीच शेयर की है. दोनों ने यह भी बताया है कि वे प्रोफेशनली साथ में काम करेंगे और साथ ही अपने बेटे का को-पेरेंटिंग करेंगे. दोनों का कहना है कि इसे एक अंत के तौर पर नहीं बल्कि एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए.
|
बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने शनिवार को ऐलान किया कि वे अपनी पत्नी किरण राव के साथ तलाक लेने जा रहें हैं. ये उन दोनों का आपसी फैसला है. उनके इस ऐलान के बाद हर कोई चौंक गया. लोगों के मन में सवाल था कि आखिर शादी के पंद्रह साल बाद ऐसा क्या हो की दोनो कपल होने जा रहे है. अब दोनों ने एक वीडियो में बताया कि उन्होंने अलग होने का फैसला क्यों लिया? दरअसल, दोनों एक साथ फेसबुक लाइव पर आए थे. दोनों ने पानी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और दोनों ने महाराष्ट्र के किसानों को सोयाबीन की खेती के नुस्खे बताए. अपने संयुक्त बयान में, दोनों ने घोषणा की है कि तलाक के बाद भी, वे फिल्मों, पानी फाउंडेशन और अन्य परियोजनाओं में एक साथ काम करना जारी रखेंगे. बता दें, आमिर खान और किरण राव ने बीते दिन ही तलाक की बात लोगों के बीच शेयर की है. दोनों ने यह भी बताया है कि वे प्रोफेशनली साथ में काम करेंगे और साथ ही अपने बेटे का को-पेरेंटिंग करेंगे. दोनों का कहना है कि इसे एक अंत के तौर पर नहीं बल्कि एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए.
|
फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की एक्सेल एंटरटेनमेंट ने आज कैटरीना कैफ, सिद्धांत चतुर्वेदी और ईशान खट्टर स्टारर 'फ़ोन भूत' की अनाउंसमेंट की है साथ ही फिल्म का फर्स्ट लुक साझा किया है. यह एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है. ये तीनों सितारें पहली बार किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे.
एक्सेल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर फर्स्ट लुक साझा करते हुए लिखा, जब तक आप रास्ते में हंस रहे हैं तब तक डरना अलाउड है. 2021 में फ़ोन भूत नजदीकी सिनेमाघरों में होगी रिलीज.
कुछ समय पहले एक लीडिंग वेबसाइट के साथ इंस्टाग्राम लाइव चैट में ईशान ने सिद्धांत चतुर्वेदी और कैटरीना कैफ के साथ करने की पुष्टि की थी. ईशान ने कहा था, 'मैंने फिल्म की कहानी सुनी है और ये बहुत ही इंट्रेस्टिंग है. स्क्रिप्ट की जितनी तारीफ करूं वो कम है. उम्मीद है, एक बार जब चीजें आगे बढ़ेंगी तो उस पर अधिक जानकारी होगी. ' इसी के साथ उन्होंने आगे कहा था, 'मुझे नहीं लगता कि सिद्धांत ने पुष्टि की और न ही उन्होंने फिल्म पर उठ रहे किसी भी अफवाहों का खंडन किया और मैं भी ऐसा ही करने जा रहा हूं, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि ये फिल्म ऐसी है जिसकी मुझे तलाश थी. '
आखिरी बार कैटरीना सलमान के साथ 'भारत' में दिखाई दी थीं. वह और सूर्यवंशी की पूरी टीम थिएटर खुलने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे वह अपनी फिल्म 'सूर्यवंशी' रिलीज कर सके.
|
फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की एक्सेल एंटरटेनमेंट ने आज कैटरीना कैफ, सिद्धांत चतुर्वेदी और ईशान खट्टर स्टारर 'फ़ोन भूत' की अनाउंसमेंट की है साथ ही फिल्म का फर्स्ट लुक साझा किया है. यह एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है. ये तीनों सितारें पहली बार किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे. एक्सेल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर फर्स्ट लुक साझा करते हुए लिखा, जब तक आप रास्ते में हंस रहे हैं तब तक डरना अलाउड है. दो हज़ार इक्कीस में फ़ोन भूत नजदीकी सिनेमाघरों में होगी रिलीज. कुछ समय पहले एक लीडिंग वेबसाइट के साथ इंस्टाग्राम लाइव चैट में ईशान ने सिद्धांत चतुर्वेदी और कैटरीना कैफ के साथ करने की पुष्टि की थी. ईशान ने कहा था, 'मैंने फिल्म की कहानी सुनी है और ये बहुत ही इंट्रेस्टिंग है. स्क्रिप्ट की जितनी तारीफ करूं वो कम है. उम्मीद है, एक बार जब चीजें आगे बढ़ेंगी तो उस पर अधिक जानकारी होगी. ' इसी के साथ उन्होंने आगे कहा था, 'मुझे नहीं लगता कि सिद्धांत ने पुष्टि की और न ही उन्होंने फिल्म पर उठ रहे किसी भी अफवाहों का खंडन किया और मैं भी ऐसा ही करने जा रहा हूं, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि ये फिल्म ऐसी है जिसकी मुझे तलाश थी. ' आखिरी बार कैटरीना सलमान के साथ 'भारत' में दिखाई दी थीं. वह और सूर्यवंशी की पूरी टीम थिएटर खुलने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे वह अपनी फिल्म 'सूर्यवंशी' रिलीज कर सके.
|
बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियसी सरगर्मी तेज है। बीजेपी ने बंगाल को फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी के शिर्ष नेता लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। सत्तारुढ़ दल टीएमस के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हो चके हैं। शनिवार को फिर से अमित शाह से मुलाकात के बाद कई नेता टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। राजीब बनर्जी के साथ विधायक प्रबीर घोषाल और बैशाली डालमिया तथा हावड़ा के पूर्व मेयर रतिन चक्रवर्ती एक विशेष विमान से दिल्ली पहुंचे और भाजपा के केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की।
राजीब बनर्जी ने 22 जनवरी को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उन्हें ममता ने राज्य के वन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी। दोमजूर विधानसभा सीट से विधायक एवं पूर्व वन मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपा था। हाल ही में विधायक बैशाली डालमिया को टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधि के चलते बाहर कर दिया था। बल्ली सीट से विधायक वैशाली डालमिया ने भ्रष्टाचार समेत तमाम मुद्दों को लेकर टीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बैशाली डालमिया भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के कद्दावर अध्यक्ष रहे जगमोहन डालमिया की बेटी हैं।
वहीं, हावड़ा के पूर्व मेयर रतिन चक्रवर्ती और एक्टर रुद्रनील घोष ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं, नदिया जिले के राणाघाट पश्चिम विधानसभा से विधायक रहे टीएमसी के बागी नेता पार्थसारथी चट्टोपाध्याय के भी बीजेपी में शामिल होने की संभावना है।
इसके पहले भी टीएमसी के कई बड़े-बड़े नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी रणनीति को लेकर शुक्रवार को एक बैठक की थी, जिसमें पार्टी से पलायन करने वालों पर ध्यान देने की बजाय प्रचार पर फोकस करने पर जोर दिया गया। टीएमसी नेतृत्व की ओर से यह भी कहा गया है कि पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ गलत बयानबाजी न की जाए क्योंकि इससे मतदाताओं में नकारात्मक संदेश जाता है।
|
बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियसी सरगर्मी तेज है। बीजेपी ने बंगाल को फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी के शिर्ष नेता लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। सत्तारुढ़ दल टीएमस के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हो चके हैं। शनिवार को फिर से अमित शाह से मुलाकात के बाद कई नेता टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। राजीब बनर्जी के साथ विधायक प्रबीर घोषाल और बैशाली डालमिया तथा हावड़ा के पूर्व मेयर रतिन चक्रवर्ती एक विशेष विमान से दिल्ली पहुंचे और भाजपा के केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की। राजीब बनर्जी ने बाईस जनवरी को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उन्हें ममता ने राज्य के वन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी। दोमजूर विधानसभा सीट से विधायक एवं पूर्व वन मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपा था। हाल ही में विधायक बैशाली डालमिया को टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधि के चलते बाहर कर दिया था। बल्ली सीट से विधायक वैशाली डालमिया ने भ्रष्टाचार समेत तमाम मुद्दों को लेकर टीएमसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बैशाली डालमिया भारतीय क्रिकेट बोर्ड के कद्दावर अध्यक्ष रहे जगमोहन डालमिया की बेटी हैं। वहीं, हावड़ा के पूर्व मेयर रतिन चक्रवर्ती और एक्टर रुद्रनील घोष ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं, नदिया जिले के राणाघाट पश्चिम विधानसभा से विधायक रहे टीएमसी के बागी नेता पार्थसारथी चट्टोपाध्याय के भी बीजेपी में शामिल होने की संभावना है। इसके पहले भी टीएमसी के कई बड़े-बड़े नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी रणनीति को लेकर शुक्रवार को एक बैठक की थी, जिसमें पार्टी से पलायन करने वालों पर ध्यान देने की बजाय प्रचार पर फोकस करने पर जोर दिया गया। टीएमसी नेतृत्व की ओर से यह भी कहा गया है कि पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ गलत बयानबाजी न की जाए क्योंकि इससे मतदाताओं में नकारात्मक संदेश जाता है।
|
झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर-फरवरी- 2009-2010
विषयों के बारे में साधारणतः न पूछा जायेगा, किन्तु जाँच की प्रक्रिया, विषय के विचार पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना न हों,
उल्लेखनीय है कि मा० सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय मा० अन्य अधीनस्त न्यायालयों में लंबित सभी मामलों पर प्रश्न पूछने से मा० सदस्यों को वंचित नहीं किया जा सकता । उदाहणार्थः यदि राज्य के किसी भाग में अकाल, सूखाड़ पड़ा हो अथवा बाढ़, तूफान आदि से भयानक क्षति हुई हो। कोई व्यक्ति किसी सक्षम न्यायालय में एक याचिका दायर कर इसके लिए क्षतिपूर्ति अथवा निदान की मांग करे, तो सिर्फ इस आधार पर विधायक को प्रश्न पूछने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि मामला सब-ज्यूडिस है।
ऐसे अनुपूरक प्रश्नों को जो किसी न्यायालय में चल रहे मुकदमें के ब्योरे से संबंधित हो, नियम विरूद्ध ठहराया गया है । जिस विषय की जाँच पुलिस द्वारा की जा रही हो, उसके संबंध में प्रश्नों की अनुमति देने से इस आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है तथापि लोकसभा में भी अध्यक्ष ऐसे प्रश्नों के लिए सांसदों को निरूत्साहित किया है और सदस्यों को यह राय दी है कि यदि उनके पास किसी ऐसे विषय के संबंध में कोई विशेष और विश्वसनीय जानकारी हो, जिसके संबंध में पुलिस जाँच कर रही है, तो उन्हें चाहिए कि वे वह जानकारी अधिकारियों को दे दें। उसी प्रकार जिस विषय के संबंध में विभागीय जाँच की जा रही हो, उसको भी निरूत्साहित किया गया है । यद्यपि उसे न्यायालय में विचारधीन होने के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता । विचाराधीन कैदियों से संबंधित प्रश्न को भी निम्न-विरूद्ध ठहराया गया है । तथापि, किसी विशेष मामले में ऐसे
प्रश्न स्वीकार किए जा सकते हैं। जिनमें मात्र आँकड़ो अथवा तथ्यों के संबंध में और न कि मामले के गुणावगुणों को बारे में जानकारी मांगी गई है, यद्यपि वह न्यायालय के विचाराधीन किसी मामले से संबंधित हो तथा इस जानकारी के प्रकट होने का मामले की जाँच पर कोई प्रभाव न पड़ता हो ।
किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रश्न यदि अल्पसूचित / तारांकित रूप में स्वीकृत नहीं किया गया हो तो विवरणात्मक उत्तर की संभावना के आधार पर अथवा वृहद आंकड़ा होने के आधार पर अतारांकित रूप में स्वीकृत किया जा सकता है। अर्थात किसी सदस्य द्वारा अ०सू० या तारांकित रूप में दिए गए प्रश्न को अतारांकित रूप में परिवर्तित करने की शक्ति अध्यक्ष में निहित है। साथ ही जिन अल्पसूचित अथवा तारांकित प्रश्नों के मौखिक प्रश्नों के मौखिक उत्तर सदन में नहीं दिए जाते, वे अनागत प्रश्न अतारांकित माने जाते हैं सप्रारंभ की अधिसूचना के पूर्व तथा सत्रावसान की अधिसूचना के पश्चात कोई सदस्य सप्ताह में अधिकतम दो अतारांकित प्रश्नों की सूचना दे सकते हैं। ऐसे प्रश्नों का लिखित उत्तर विभाग द्वारा सामान्यतः एक माह की अवधि में उलबब्ध कराया जाता है, जिसे संबंधित प्रश्नकर्त्ता सदस्य को उपलब्ध करा दिया जाता है और सभा सचिवालय द्वारा उसे मुद्रित भी कराया जाता है लोकसभा में सूचीबद्ध अतारांकित प्रश्नों का लिखित उत्तर निर्धारित तिथि को ही सांसदों को उपलब्ध करा दिया जाता है । झारखण्ड विधान सभा में ऐसी व्यवस्था नहीं है ।
प्रश्नकाल के अलावे झारखण्ड विधान सभा में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री प्रश्नकाल प्रत्येक सोमवार को आधे घण्टे का होता है तथा सामान्य प्रश्नकाल के तुरन्त पश्चात प्रारंभ होता है मुख्य
झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर- फरवरी 2009-2010
पर उस सत्र में चर्चा की जा चुकी है।
झारखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन के नियम-54 के तहत अध्यक्ष की सम्मति प्राप्त हो तथा आसन से यह निर्णय दिया जाए कि प्रस्तावित विषय नियमानुकूल है, तो अध्यक्ष द्वारा नाम पुकारे जाने के उपरांत सूचना देनेवाले सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर सभा के स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति की माँग करेंगे। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा वाद-विवाद हेतु डेढ़ घंटे का समय निर्धारित है। यदि अध्यक्ष प्रथम दृष्टया प्रस्ताव को स्वीकार करने योग्य नहीं पाते, तो विहित प्रावधान के आलोक में नियमानुसार उसे अमान्य करने की सूचना सदन को देते हैं। अस्वीकृति का निर्णय हो जाने के उपरांत उस प्रस्ताव पर किसी प्रकार का वाद-विवाद अनुमान्य नहीं है और न ही अस्वीकृति के कारण का उल्लेख ही आवश्यक है।
मंत्री प्रश्नकाल में नीतिविषयक प्रश्न अध्यक्ष की अनुमति से मौखिक रूप से सीधे मुख्यमंत्री से पूछे जाते हैं । इसमें अधिकतम एक ही पूरक प्रश्न पूछने की व्यवस्था है । मुख्यमंत्री प्रश्नकाल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि पूछे जाने वाले प्रश्न उन विषयों से संबंधित होंगे, जिनके संबंध में पूर्व में भी संबंधित विभाग के मंत्री द्वारा सभा में किसी प्रक्रम में उत्तर दिए जा चुके हों। सोमवार को 12. 00 बजे मध्या० से 12.3 बजे अप० तक की आधे घण्टे की अवधि के लिए निर्धारित समय पर यदि किसी अपरिहार्य कारणों से मुख्यमंत्री सदन-सभा में उपस्थित न हों तो अध्यक्ष को यह अधिकार है कि इस प्रश्नकाल को स्थगित कर उसी सप्ताह किसी अन्य दिन इसे लिया जाए।
विदित हो कि मुख्यमंत्री प्रश्नकाल का प्रभाव अत्यन्त ही व्यापक होता है क्योंकि जन सरोकार से जुड़े किसी भी सवाल का प्रत्यक्ष तौर पर सरकार के मुखिया द्वारा सदन में उत्तर दिया जाता है । अतएवं यह अति महत्वपूर्ण संसदीय व्यवस्था है।
सामान्यतः लोक महत्व के विषय पर प्राप्त स्थगन प्रस्ताव पर अध्यक्ष अपना निर्णय प्रश्नकाल के बाद सुनाते हैं । इसके अंतर्गत सदस्य नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अविलम्बनीय लोक महत्व के किसी निश्चित विषय की चर्चा के प्रयोजन से सभा के कार्य को स्थगित करने का प्रस्ताव अध्यक्ष की सहमति से किया जाता है । इसके अन्तर्गत एक ही बैठक में एक से अधिक प्रस्ताव नहीं लिए जाते हैं, एक प्रस्ताव द्वारा एक से अधिक विषय पर चर्चा नहीं की जा सकती, प्रस्ताव हाल ही में घटित किसी विशिष्ट विषय तक ही सीमित होना चाहिए, प्रस्ताव में पुनः विषय पर चर्चा नहीं होगी, जिस
उल्लेखनीय है कि कार्यस्थगन प्रस्ताव का प्राथमिक उद्देश्य किसी तात्कालिक लोक महत्व के विषय की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट कराना है। इसमें ऐसे प्रस्ताव दिए जाते हैं, जो राज्यव्यापी हों और विधिवत प्रक्रिया के तहत Motion या Resolution लाने में विलम्ब के कारण मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाने की संभावना हो । इसमें सदन के सामान्य कार्य व्यापार (Business) को रोककर कार्यस्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर उसपर वाद-विवाद कराने की माँग की जाती है।
अतएवं कार्यस्थगन प्रस्ताव एक असाधारण तरीका है, जो यदि स्वीकृत हो जाए, तो सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित कर त्वरित लोक महत्व के निश्चित
|
झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर-फरवरी- दो हज़ार नौ-दो हज़ार दस विषयों के बारे में साधारणतः न पूछा जायेगा, किन्तु जाँच की प्रक्रिया, विषय के विचार पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना न हों, उल्लेखनीय है कि माशून्य सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय माशून्य अन्य अधीनस्त न्यायालयों में लंबित सभी मामलों पर प्रश्न पूछने से माशून्य सदस्यों को वंचित नहीं किया जा सकता । उदाहणार्थः यदि राज्य के किसी भाग में अकाल, सूखाड़ पड़ा हो अथवा बाढ़, तूफान आदि से भयानक क्षति हुई हो। कोई व्यक्ति किसी सक्षम न्यायालय में एक याचिका दायर कर इसके लिए क्षतिपूर्ति अथवा निदान की मांग करे, तो सिर्फ इस आधार पर विधायक को प्रश्न पूछने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि मामला सब-ज्यूडिस है। ऐसे अनुपूरक प्रश्नों को जो किसी न्यायालय में चल रहे मुकदमें के ब्योरे से संबंधित हो, नियम विरूद्ध ठहराया गया है । जिस विषय की जाँच पुलिस द्वारा की जा रही हो, उसके संबंध में प्रश्नों की अनुमति देने से इस आधार पर इंकार नहीं किया जा सकता कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है तथापि लोकसभा में भी अध्यक्ष ऐसे प्रश्नों के लिए सांसदों को निरूत्साहित किया है और सदस्यों को यह राय दी है कि यदि उनके पास किसी ऐसे विषय के संबंध में कोई विशेष और विश्वसनीय जानकारी हो, जिसके संबंध में पुलिस जाँच कर रही है, तो उन्हें चाहिए कि वे वह जानकारी अधिकारियों को दे दें। उसी प्रकार जिस विषय के संबंध में विभागीय जाँच की जा रही हो, उसको भी निरूत्साहित किया गया है । यद्यपि उसे न्यायालय में विचारधीन होने के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता । विचाराधीन कैदियों से संबंधित प्रश्न को भी निम्न-विरूद्ध ठहराया गया है । तथापि, किसी विशेष मामले में ऐसे प्रश्न स्वीकार किए जा सकते हैं। जिनमें मात्र आँकड़ो अथवा तथ्यों के संबंध में और न कि मामले के गुणावगुणों को बारे में जानकारी मांगी गई है, यद्यपि वह न्यायालय के विचाराधीन किसी मामले से संबंधित हो तथा इस जानकारी के प्रकट होने का मामले की जाँच पर कोई प्रभाव न पड़ता हो । किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रश्न यदि अल्पसूचित / तारांकित रूप में स्वीकृत नहीं किया गया हो तो विवरणात्मक उत्तर की संभावना के आधार पर अथवा वृहद आंकड़ा होने के आधार पर अतारांकित रूप में स्वीकृत किया जा सकता है। अर्थात किसी सदस्य द्वारा अशून्यसूशून्य या तारांकित रूप में दिए गए प्रश्न को अतारांकित रूप में परिवर्तित करने की शक्ति अध्यक्ष में निहित है। साथ ही जिन अल्पसूचित अथवा तारांकित प्रश्नों के मौखिक प्रश्नों के मौखिक उत्तर सदन में नहीं दिए जाते, वे अनागत प्रश्न अतारांकित माने जाते हैं सप्रारंभ की अधिसूचना के पूर्व तथा सत्रावसान की अधिसूचना के पश्चात कोई सदस्य सप्ताह में अधिकतम दो अतारांकित प्रश्नों की सूचना दे सकते हैं। ऐसे प्रश्नों का लिखित उत्तर विभाग द्वारा सामान्यतः एक माह की अवधि में उलबब्ध कराया जाता है, जिसे संबंधित प्रश्नकर्त्ता सदस्य को उपलब्ध करा दिया जाता है और सभा सचिवालय द्वारा उसे मुद्रित भी कराया जाता है लोकसभा में सूचीबद्ध अतारांकित प्रश्नों का लिखित उत्तर निर्धारित तिथि को ही सांसदों को उपलब्ध करा दिया जाता है । झारखण्ड विधान सभा में ऐसी व्यवस्था नहीं है । प्रश्नकाल के अलावे झारखण्ड विधान सभा में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री प्रश्नकाल प्रत्येक सोमवार को आधे घण्टे का होता है तथा सामान्य प्रश्नकाल के तुरन्त पश्चात प्रारंभ होता है मुख्य झारखण्ड विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका, दिसम्बर- फरवरी दो हज़ार नौ-दो हज़ार दस पर उस सत्र में चर्चा की जा चुकी है। झारखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन के नियम-चौवन के तहत अध्यक्ष की सम्मति प्राप्त हो तथा आसन से यह निर्णय दिया जाए कि प्रस्तावित विषय नियमानुकूल है, तो अध्यक्ष द्वारा नाम पुकारे जाने के उपरांत सूचना देनेवाले सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर सभा के स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति की माँग करेंगे। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा वाद-विवाद हेतु डेढ़ घंटे का समय निर्धारित है। यदि अध्यक्ष प्रथम दृष्टया प्रस्ताव को स्वीकार करने योग्य नहीं पाते, तो विहित प्रावधान के आलोक में नियमानुसार उसे अमान्य करने की सूचना सदन को देते हैं। अस्वीकृति का निर्णय हो जाने के उपरांत उस प्रस्ताव पर किसी प्रकार का वाद-विवाद अनुमान्य नहीं है और न ही अस्वीकृति के कारण का उल्लेख ही आवश्यक है। मंत्री प्रश्नकाल में नीतिविषयक प्रश्न अध्यक्ष की अनुमति से मौखिक रूप से सीधे मुख्यमंत्री से पूछे जाते हैं । इसमें अधिकतम एक ही पूरक प्रश्न पूछने की व्यवस्था है । मुख्यमंत्री प्रश्नकाल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि पूछे जाने वाले प्रश्न उन विषयों से संबंधित होंगे, जिनके संबंध में पूर्व में भी संबंधित विभाग के मंत्री द्वारा सभा में किसी प्रक्रम में उत्तर दिए जा चुके हों। सोमवार को बारह. शून्य बजे मध्याशून्य से बारह.तीन बजे अपशून्य तक की आधे घण्टे की अवधि के लिए निर्धारित समय पर यदि किसी अपरिहार्य कारणों से मुख्यमंत्री सदन-सभा में उपस्थित न हों तो अध्यक्ष को यह अधिकार है कि इस प्रश्नकाल को स्थगित कर उसी सप्ताह किसी अन्य दिन इसे लिया जाए। विदित हो कि मुख्यमंत्री प्रश्नकाल का प्रभाव अत्यन्त ही व्यापक होता है क्योंकि जन सरोकार से जुड़े किसी भी सवाल का प्रत्यक्ष तौर पर सरकार के मुखिया द्वारा सदन में उत्तर दिया जाता है । अतएवं यह अति महत्वपूर्ण संसदीय व्यवस्था है। सामान्यतः लोक महत्व के विषय पर प्राप्त स्थगन प्रस्ताव पर अध्यक्ष अपना निर्णय प्रश्नकाल के बाद सुनाते हैं । इसके अंतर्गत सदस्य नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अविलम्बनीय लोक महत्व के किसी निश्चित विषय की चर्चा के प्रयोजन से सभा के कार्य को स्थगित करने का प्रस्ताव अध्यक्ष की सहमति से किया जाता है । इसके अन्तर्गत एक ही बैठक में एक से अधिक प्रस्ताव नहीं लिए जाते हैं, एक प्रस्ताव द्वारा एक से अधिक विषय पर चर्चा नहीं की जा सकती, प्रस्ताव हाल ही में घटित किसी विशिष्ट विषय तक ही सीमित होना चाहिए, प्रस्ताव में पुनः विषय पर चर्चा नहीं होगी, जिस उल्लेखनीय है कि कार्यस्थगन प्रस्ताव का प्राथमिक उद्देश्य किसी तात्कालिक लोक महत्व के विषय की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट कराना है। इसमें ऐसे प्रस्ताव दिए जाते हैं, जो राज्यव्यापी हों और विधिवत प्रक्रिया के तहत Motion या Resolution लाने में विलम्ब के कारण मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाने की संभावना हो । इसमें सदन के सामान्य कार्य व्यापार को रोककर कार्यस्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर उसपर वाद-विवाद कराने की माँग की जाती है। अतएवं कार्यस्थगन प्रस्ताव एक असाधारण तरीका है, जो यदि स्वीकृत हो जाए, तो सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित कर त्वरित लोक महत्व के निश्चित
|
प्रसादोत्तर पौराणिक नाटक और संघर्ष तत्व । ११७
"अरी, भरत को राज्य गद्दी के लिए राम को चौदह वर्ष का वनवास कुलकल विनि या क्यो नही कह देती कि पहले वर में भरत का मुंह काला और दूसरे मे उसे अगणित क्ल्पो तक नरक निवास।" परन्तु भरत द्वारा किया गया विरोध समय का रूप धारण नहीं कर पाता। क्योंकि कोयी भी भरत के विरोध का विरोध नहीं करती और गुरु वसिष्ठ के सममाने पर भरत भी ज्ञात हो जाते हैं। परिणामत प्रस्तुत नाटक म भरत और कैकेयी मे सघय नही छिड जाता ।
जिनमें बाह्य मघप को विशेष स्थान प्राप्त हुआ है ऐसे नाटको मे "राम रावग युद्ध सम्बधी नाटोमा अतर्भाव किया जा सकता है। इस दष्टि से देवराज दिनेश कृत 'रावण", अबिकाप्रसाद दिय" कृत लकश्वर चन्द्रप्रकाश शर्माकृत ' "त्रता मेघनाद' और चतरसेन शास्त्री कृत 'मेघनाद' उल्लेखनीय
नाटक हैं ।
देवराज दिनेश ने 'रावण' नाटक में एक सुट पात्र के रूप में रावण का चरित्राकन हुआ है। राम-लष्मण द्वारा किया गया शूपणखा का घार अपमान भाई रावग को साल रहा है। इससे उसम प्रतिशाध की आग भडकती है -- मेरे रहते हुए उसका अपमान मेरी यह कितनी दुबलता मानी जायगी । यह प्रतिरोध की आग रावण को सघप के लिए उत्तेजित करती है । वह सोता का हरण करता है । बह इस बात पर गव करता है -- 'मुझ गव हो रहा है भविष्य में कोई भाई अपनी वह पर किये गये अत्याचारों को देखकर शाति से नही बटगा चाहे उस इसम । क्षति क्यों न उठानी पड़े । ३ इस प्रकार इधर रावण का प्रतिशोध भाव घोरे धीरे घी ओर बढ़ रहा है तो उधर भी सीता मुक्ति के लिए राम सघप को तयारियाँ कर रहे हैं । विभीषण और मदोदरी सभाय मघप को टालने के लिए रावण को समझाने की भरसक काशित करत हैं परन्तु उ हें सफलता नहीं मिलती। रावण मदोदरी से स्पष्ट वह देता है- मैं उनसे जीवन में कभी भी सधि नही कर सकता। अत प्रस्तुत नाटक में रावण राम से जो सघप छेडता है उसका प्रधाम कारण है वहन के अपमान का प्रतिशोध लेने की इच्छा रावण के मन मे सीता अथवा राम के प्रति कोई दुष्ट भाव नहीं है ।
त्रेता' नाटक में राम रावण संघप को दो विचार धाराओं के संघप के रूप में उपस्थित किया है। इस सघप के सन्दर्भ में रावण मदोदरी से कहता है- सीताहरण तो एक उपलब्य मात्र है प्रिये । यह दो विचार
१ तुलसादास शर्मा दिनेन' -वघुभरत पृ० ८ ( प्र० स० सन १९३८) २ देवराज दिनेश रावण १०४ (प्र० स० सन १९४८ ई०)
वही पु० ११ ।
|
प्रसादोत्तर पौराणिक नाटक और संघर्ष तत्व । एक सौ सत्रह "अरी, भरत को राज्य गद्दी के लिए राम को चौदह वर्ष का वनवास कुलकल विनि या क्यो नही कह देती कि पहले वर में भरत का मुंह काला और दूसरे मे उसे अगणित क्ल्पो तक नरक निवास।" परन्तु भरत द्वारा किया गया विरोध समय का रूप धारण नहीं कर पाता। क्योंकि कोयी भी भरत के विरोध का विरोध नहीं करती और गुरु वसिष्ठ के सममाने पर भरत भी ज्ञात हो जाते हैं। परिणामत प्रस्तुत नाटक म भरत और कैकेयी मे सघय नही छिड जाता । जिनमें बाह्य मघप को विशेष स्थान प्राप्त हुआ है ऐसे नाटको मे "राम रावग युद्ध सम्बधी नाटोमा अतर्भाव किया जा सकता है। इस दष्टि से देवराज दिनेश कृत 'रावण", अबिकाप्रसाद दिय" कृत लकश्वर चन्द्रप्रकाश शर्माकृत ' "त्रता मेघनाद' और चतरसेन शास्त्री कृत 'मेघनाद' उल्लेखनीय नाटक हैं । देवराज दिनेश ने 'रावण' नाटक में एक सुट पात्र के रूप में रावण का चरित्राकन हुआ है। राम-लष्मण द्वारा किया गया शूपणखा का घार अपमान भाई रावग को साल रहा है। इससे उसम प्रतिशाध की आग भडकती है -- मेरे रहते हुए उसका अपमान मेरी यह कितनी दुबलता मानी जायगी । यह प्रतिरोध की आग रावण को सघप के लिए उत्तेजित करती है । वह सोता का हरण करता है । बह इस बात पर गव करता है -- 'मुझ गव हो रहा है भविष्य में कोई भाई अपनी वह पर किये गये अत्याचारों को देखकर शाति से नही बटगा चाहे उस इसम । क्षति क्यों न उठानी पड़े । तीन इस प्रकार इधर रावण का प्रतिशोध भाव घोरे धीरे घी ओर बढ़ रहा है तो उधर भी सीता मुक्ति के लिए राम सघप को तयारियाँ कर रहे हैं । विभीषण और मदोदरी सभाय मघप को टालने के लिए रावण को समझाने की भरसक काशित करत हैं परन्तु उ हें सफलता नहीं मिलती। रावण मदोदरी से स्पष्ट वह देता है- मैं उनसे जीवन में कभी भी सधि नही कर सकता। अत प्रस्तुत नाटक में रावण राम से जो सघप छेडता है उसका प्रधाम कारण है वहन के अपमान का प्रतिशोध लेने की इच्छा रावण के मन मे सीता अथवा राम के प्रति कोई दुष्ट भाव नहीं है । त्रेता' नाटक में राम रावण संघप को दो विचार धाराओं के संघप के रूप में उपस्थित किया है। इस सघप के सन्दर्भ में रावण मदोदरी से कहता है- सीताहरण तो एक उपलब्य मात्र है प्रिये । यह दो विचार एक तुलसादास शर्मा दिनेन' -वघुभरत पृशून्य आठ दो देवराज दिनेश रावण एक सौ चार वही पुशून्य ग्यारह ।
|
नैस्डैक-सूचीबद्ध सेमीकंडक्टर दिग्गज क्वालकॉम ने सोमवार को मेटावर्स-संबंधित कंपनियों पर केंद्रित एक नए फंड के लिए $ 100 मिलियन का पर्याप्त आवंटन करने की अपनी योजना की घोषणा की।
'द स्नैपड्रैगन मेटावर्स फंड' शीर्षक से, फंड डेवलपर्स और कंपनियों के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में कार्य करेगा जो विस्तारित वास्तविकता (एक्सआर), संबद्ध कोर संवर्धित वास्तविकता (एआर), और संबंधित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकियों में अपना व्यवसाय विकसित कर रहे हैं।
एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर) ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर), मिक्स्ड रियलिटी (एमआर), और अन्य सहित सभी इमर्सिव तकनीकों के लिए एक व्यापक शब्द है। मार्केट रिसर्च फ्यूचर (एमआरएफआर) के नवीनतम अध्ययन से उम्मीद है कि एक्सआर बाजार 69.4% के सीएजीआर के साथ 2025 तक 393 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
फंड गेमिंग, स्वास्थ्य और कल्याण, मीडिया, मनोरंजन, शिक्षा और उद्यम के क्षेत्रों में अपनी एक्सआर प्रौद्योगिकियों को बढ़ाने वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। क्वालकॉम इनकॉर्पोरेटेड के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टियानो आमोन ने कहा मुनादी करनाः
फंडिंग के साथ, क्वालकॉम एक्सआर प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी, हार्डवेयर किट, निवेशकों का एक वैश्विक नेटवर्क, सह-विपणन और प्रचार के अवसर और कई अन्य लाभ भी प्रदान करेगा।
|
नैस्डैक-सूचीबद्ध सेमीकंडक्टर दिग्गज क्वालकॉम ने सोमवार को मेटावर्स-संबंधित कंपनियों पर केंद्रित एक नए फंड के लिए एक सौ डॉलर मिलियन का पर्याप्त आवंटन करने की अपनी योजना की घोषणा की। 'द स्नैपड्रैगन मेटावर्स फंड' शीर्षक से, फंड डेवलपर्स और कंपनियों के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में कार्य करेगा जो विस्तारित वास्तविकता , संबद्ध कोर संवर्धित वास्तविकता , और संबंधित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों में अपना व्यवसाय विकसित कर रहे हैं। एक्सटेंडेड रियलिटी ऑगमेंटेड रियलिटी , वर्चुअल रियलिटी , मिक्स्ड रियलिटी , और अन्य सहित सभी इमर्सिव तकनीकों के लिए एक व्यापक शब्द है। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के नवीनतम अध्ययन से उम्मीद है कि एक्सआर बाजार उनहत्तर.चार% के सीएजीआर के साथ दो हज़ार पच्चीस तक तीन सौ तिरानवे बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। फंड गेमिंग, स्वास्थ्य और कल्याण, मीडिया, मनोरंजन, शिक्षा और उद्यम के क्षेत्रों में अपनी एक्सआर प्रौद्योगिकियों को बढ़ाने वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। क्वालकॉम इनकॉर्पोरेटेड के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टियानो आमोन ने कहा मुनादी करनाः फंडिंग के साथ, क्वालकॉम एक्सआर प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी, हार्डवेयर किट, निवेशकों का एक वैश्विक नेटवर्क, सह-विपणन और प्रचार के अवसर और कई अन्य लाभ भी प्रदान करेगा।
|
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
जनज्वार ब्यूरो/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बस्ती फोरलेन पर छावनी थाना क्षेत्र में आलू व्यापारी समेत तीन की गला रेत कर हत्या करके बेखौफ हत्यारे आसानी फरार हो गये। मरने वालों में ट्रक का ड्राइवर और खलासी भी शामिल हैं। हत्या का कारण लूट की संभावना बताई जा रही है। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक, सीओ हरैया व छावनी पुलिस पहुंच गई है। यह तीनों शव पांच किलोमीटर के दायरे में दो जगहों पर मिले हैं।
अयोध्या से गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 28 ट्रैफिक की दृष्टि से बेहद व्यस्त सड़क है। यहां पुलिस और राजमार्ग की पैट्रोलिंग गाड़ियां लगातार निगरानी रखती हैं। ऐसे में हत्यारों ने ट्रक चालक, खलासी और व्यापारी की हत्या के बाद सकुशल फरार होकर कानून व्यवस्था को आईना दिखाने का काम किया है। बताया जा रहा है कि कानपुर का एक आलू व्यापारी ट्रक लेकर बिहार गया था। वहां से आलू बेच कर लौटते समय लूट होने की घटना का अंदेशा जताया जा रहा है।
3 मृतकों में पहला शव हाईवे किनारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इंटर कालेज पचवस के पास झाड़ियों में मिला। यह शव ट्रक चालक का बताया जा रहा है, जिसकी पहचान 35 वर्षीय सोनू मौर्या पुत्र रामकिशोर मौर्या मीरपुर भरोचा थाना असीबन जनपद उन्नाव के रूप में हुई है। दो अन्य शव पांच किमी आगे शंकरपुर गांव के पास हाईवे किनारे खड़े ट्रक के केबिन में मिले। शुरुआती जांच के बाद पुलिस इसे लूट का मामला मान रही है।
ट्रक मालिक मनोज कुमार ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर पुलिस को बताया कि उनका ट्रक शंकरपुर के पास खड़ा है। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक रवीन्द्र सिंह टीम के साथ पहुंचे हैं और जांच-पड़ताल जारी है। शनिवार सुबह 10 बजे तक पुलिस ने शव को केबिन से नहीं निकाला था। घटना को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं। असली खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
|
जनज्वार ब्यूरो/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बस्ती फोरलेन पर छावनी थाना क्षेत्र में आलू व्यापारी समेत तीन की गला रेत कर हत्या करके बेखौफ हत्यारे आसानी फरार हो गये। मरने वालों में ट्रक का ड्राइवर और खलासी भी शामिल हैं। हत्या का कारण लूट की संभावना बताई जा रही है। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक, सीओ हरैया व छावनी पुलिस पहुंच गई है। यह तीनों शव पांच किलोमीटर के दायरे में दो जगहों पर मिले हैं। अयोध्या से गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच अट्ठाईस ट्रैफिक की दृष्टि से बेहद व्यस्त सड़क है। यहां पुलिस और राजमार्ग की पैट्रोलिंग गाड़ियां लगातार निगरानी रखती हैं। ऐसे में हत्यारों ने ट्रक चालक, खलासी और व्यापारी की हत्या के बाद सकुशल फरार होकर कानून व्यवस्था को आईना दिखाने का काम किया है। बताया जा रहा है कि कानपुर का एक आलू व्यापारी ट्रक लेकर बिहार गया था। वहां से आलू बेच कर लौटते समय लूट होने की घटना का अंदेशा जताया जा रहा है। तीन मृतकों में पहला शव हाईवे किनारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इंटर कालेज पचवस के पास झाड़ियों में मिला। यह शव ट्रक चालक का बताया जा रहा है, जिसकी पहचान पैंतीस वर्षीय सोनू मौर्या पुत्र रामकिशोर मौर्या मीरपुर भरोचा थाना असीबन जनपद उन्नाव के रूप में हुई है। दो अन्य शव पांच किमी आगे शंकरपुर गांव के पास हाईवे किनारे खड़े ट्रक के केबिन में मिले। शुरुआती जांच के बाद पुलिस इसे लूट का मामला मान रही है। ट्रक मालिक मनोज कुमार ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर पुलिस को बताया कि उनका ट्रक शंकरपुर के पास खड़ा है। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक रवीन्द्र सिंह टीम के साथ पहुंचे हैं और जांच-पड़ताल जारी है। शनिवार सुबह दस बजे तक पुलिस ने शव को केबिन से नहीं निकाला था। घटना को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं। असली खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
|
भूतकाल से सम्बन्ध रखने के कारण कहानी और उपन्यास इतिहास के समानधर्मी हैं। कहानी और इतिहास शब्द भी समान अर्थ वाले हैं । इतिहास का भी अर्थ हैउसने कहा था, किन्तु इतिहास और कहानी या उपन्यास के दृष्टिकोण में अन्तर है, इस बात को हम उपन्यास के सम्बन्ध में स्पष्ट कर चुके हैं।
कहानी अपने पुराने रूप में उपन्यास की है और नये रूप में उसकी अनुजा । वृत्त या कथा - साहित्य की वंशजा होने के कारण कहानी और उपन्यास दोनों में
ही कई बातों की समानता है। दोनों ही विधाएँ कलात्मक रूप से मानव-जीवन पर प्रकाश डालती हैं, इतना होते हुए भी दोनों की अपनी विशेषताएँ हैं जो कि एक-दूसरे से पृथक् करती हैं। दोनों में केवल आकार का ही भेद नहीं । हम यह नहीं कह सकते कि कहानी छोटा उपन्यास है अथवा उपन्यास बड़ी कहानी है । यह कहना ऐसा ही प्रसंगत होगा जैसे चौपाए होने की समानता के आधार पर मैंढक को छोटा बैल और बैल को बड़ा मेंढक कहना। दोनों के शारीरिक संस्कार और संगठन में अन्तर है। बैल चारों पैरों पर समान बल देकर चलता है, तो मेंढक उछल-उछलकर रास्ता तय करता है । इस प्रकार कहानीकार भी बहुत-सी जमीन छोड़ता हुआ छलाङ्ग मारकर चलता है । दोनों के गति क्रम में भेद है ।
कहानो को हमने जीवन की एक झलक या झाँकी कहा है। झाँकी प्रायः क्षणिक परन्तु प्रभाव- पूर्ण होती है । कहानीकार केवल एक ही दृश्य पर सारा श्रालोक केन्द्रस्थ कर उसके भाव को तीव्रतम बना देता है । उपन्यासकार पूर्ण चिड़िया ही नहीं वरन् ओर-पास बैठी हुई दूसरी चिड़ियों को तथा जहाँ तक उसकी निगाह ढौड़ सके, पूरे दृश्य का सावधानी के साथ अवलोकन करता है किन्तु कहानीकार धनुर्विद्या-विशारद वीर अर्जुन की भाँ त अपने निशाने को अचूक बनाने के लिए केवल आँख को और ज्यादह्-से-ज्यादइ सिर को जिसवस्थ है, लक्ष्य कर तीर छोड़ता है।
कहानीकार अपने पाठक को अन्तिम संवेदना तक शीघ्रातिशीघ्र ले जाता है और एक साथ पर्दा उठाकर सजी-सजाई झाँकी की मोहक एवं आकर्षक छटा से मनोमुग्ध कर देता है । वह बीच-बीच में रहस्योद्घाटन नहीं करता, एक-दो संकेत चाहे करदे किन्तु अन्तिम क्षण तक बात को पेट में पचाये रखता है । अन्तिम संवेदना से ही बीच के संकेत भी सार्थक हो जाते हैं । उपन्यास के पाठक को जहाँ ग्रन्थकार के विश्वास पात्र होने का गौरव प्राप्त है वहाँ कहानी के पाठक को अधिक प्रभावपूर्ण दृश्य देखने और केन्द्रीभूत आनन्द के प्राप्त करने का संतोष है। कहानी की एकतथ्यता ही उसका जीवन-रस है और वही उसे उपन्यास से पृथक् करता है ।
इसी मौलिक भेड़ के कारण दोनों प्रकार की रचनाओं के शिल्प-विधान ( Technique ) में भी अन्तर पड़ जाता है । वातावरण का विस्तार, जीवन की करूपता, प्रासङ्गिक कथाओं के तारतम्य के कारण कथाप्रवाह का बहुशाखा होकर की ओर अग्रसर होना, पात्रों का बाहुल्य आदि बातें जो उपन्यास में श्लाध्य या कम-से-कम क्षम्य समझी जाती हैं, कहानी में ग्राह्य हो जाती है। कहानी में चरित्र के विकास के लिए अधिक गुन्जाइश नहीं रहती । उसमें गढ़ेगढ़ाये चरित्र की एक केन्द्रित लोक में झलक दिखाई जाती है, जिससे पूरे चरित्र का भी कुछ आभास मिल जाता है । वास्तव में वह चित्रण नहीं होता वरन् क्षणिक प्रकाश होता है । कहानी के किसी पात्र में यदि चरित्र परिवर्तन भी होता है तो प्रायः एक ही प्रभाव पूर्ण घटना से ही हो जाता है। उनमें सुनगर की सौ चोटों की जरूरत नहीं वरन् लुहार की एक गहरी चोट ही काम कर जाती है । मुन्शी प्रेमचन्द की 'राम', 'शंखनाद' (जिसमे बेफिक्र, मन-मौजी गुमान पैसे के प्रभावश अपने बच्चे को खिलौना खरीदने की असमर्थता और निराशा से प्रभावित हो रवैया बदल देता है और बच्चे का रोना ही उसके लिए कर्त्तव्य का शंखनाद बन जाता है) कौशिक जी की 'ताई' और श्री चन्द्रगुप्त विद्यालंकार लिखित 'डाकू' शीर्षक कहानियाँ हिन्दी कहानी साहित्य म चरित्र परिवर्तन के अच्छे हैं किन्तु ये सब हैं एक ही चोट के प्रभाव । कहानी में कथानक चरित्र-चित्रण और वातावरण ( वह चाहे वाह्य हो या आन्तरिक) होते सब हैं किन्तु मुख्यता एक को ही मिल सकती है। शेष दो बहुत गौण हो जाते हैं उपन्यास में मुख्यता चाहे एक की ही रहे किन्तु तोनों को उचित विस्तार मिल जाता है । उपन्यास की सफलता सभी तत्वों के यथोचित समावेश में है ।
कहानी की शैली अपनी संक्षिप्तता के कारण अधिक व्यञ्जनाधान होती है । उसमें 'गागर में सागर' भरने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। व्यञ्जना, जो काव्य का प्राण है, उपन्यास की अपेक्षा कहानी में अधिक मात्रा मे वर्तमान रहती है इसलिए वह काव्य के निकट आ जाती है । इसके अतिरिक्त उपन्यास का काव्यत्व बिखरा-सा रहता है, किन्तु कहानी का गुण उसकी एक ध्येयता के कारण अंतिम बिन्दु में स्थित रहता है।
कहानी में व्यञ्जना की मात्रा पाठकों के मानसिक धरातल के अनुकूल घटतीबढ़ती रहती है। जो कहानियाँ निम्न श्रेणी के लोगों के लिए अथवा पढ़कर सुनाये जाने के उद्देश्य से लिखी जाती हैं उसमें घटना की प्रधानता रहती है किन्तु जो अपेक्षाकृत सुपठित समाज के लिए शांतिपूर्वक अध्ययन कक्ष के या शयनागार के भीतर पढ़े जाने के लिए लिखी जाती हैं उनमें व्यञ्जना और विचार की मात्रा अधिक रहती है ।
कहानी में प्रगीत-काव्य का संगीत तो नहीं होता किन्तु वह अपनी एक ध्येयता वैयक्तिक दृष्टिकोण की प्रधानता के कारण उसके जाती है। कहानी
का अन्तिम बिन्दु या तथ्य कहानीकार के मन में पहले से झलक जाता है। वह प्रायः किसी घटना विशेष को देखकर स्फुरत होता है और कभी-कभी वैसे भी बिजली की भाँति चमक जाता है। यदि उसका स्फुरण आन्तरिक हुआ तो वह उसको मूर्त रूप देने के लिए घटना का कल्पना से कर लेता है। कहानीकार का लक्ष्य तो उस तथ्य को ही प्रकाश में लाना रहता है फिर भी वह भाव को निरालम्ब नहीं रखता है वरन् उसकी पुष्टि में घटना चक्र का आवश्यक मात्रा में समावेश कर देता है ।
संगीत के अभाव के कारण कहानी गद्य-काव्य के निकट है किन्तु गद्यकाव्य के साथ भी उसका वही भेद है जो प्रगीत काव्य के साथ । गद्य की एक विधा होने के कारण तो कहानी भी गद्य-काव्य है किन्तु काव्य के विशेष अर्थ में (जैसे राय कृष्णदास या वियोगी हरि के गद्यकाव्य) वह गद्य-काव्य के निकट होता हुआ भी उससे भिन्न है। उसमें घटना की अपेक्षा रहती है, गद्य-काव्य में नहीं । गद्य-काव्य में घटनाओं का प्रभाव-सा रहता है और यदि घटनाएँ रहती हैं तो उनको महत्त्व न देखर उनसे जाग्रत हृदयोद्गारों को ही मुख्यता दी जाती है। कहानी में उद्गारों के साथ घटनाओं को भी समान महत्व का अधिकार रहता है ।
रेखा-चित्र या स्कैच कहानी के बहुत निकट होते हुए भी उससे भिन्न हैं । रेखाचित्र में एक ही वस्तु या पात्र का चित्रांकन रहता है और वह एक प्रकार से स्थायी होता है। कहानी में गत्यात्मकता रहती है। स्कैच में वर्णन (Description ) का प्राधान्य रहता है । कहानी में वर्णन के साथ कुछ प्रकथन अर्थात् प्रबन्धात्मक कथन (Narration) भी रहता है । हिन्दी में श्री प्रकाशचन्द्र गुप्त ने बहुत सुन्दर रेखा-चित्र लिखे हैं। उनमें जिन वस्तुओं या व्यक्तियों (जैसे 'लैटर बक्स', 'पेट्रोल टेंक' या 'लालाजी') का चित्र खींचा जाता है, उनमें उस वस्तु के स्थायी सम्बन्ध को ही उपस्थित किया जाता है । कहानी में एक विशेष गति रहती है । उसमें काल-क्रम का विकास रहता है अर्थात् वह चलता हुआ दिखाई देता है। रेखाचित्र में इस बात का भाव-सा रहता है। कहानी में जितना काल-क्रम घटता जाता है उतनी ही वह रेखा-चित्र के निकट श्रा जाती है ।
कथा-साहित्य के अन्तर्गत होने के कारण वस्तु (Plot), चरित्र-चित्रण,
कथोपकथन, वातावरण, उद्देश्य और शैली ये छः तत्व तो उपन्यास की भाँति ही होते
कहानी के तत्व
हैं किन्तु रचना के रूप विशेष के कारण उनके प्रयोग में थोड़ा अन्तर होता है। शरीर के अवयवों की भाँति ये तत्व भी अन्योन्याश्रित हैं ।
कहानी की कथावस्तु अत्यन्त संक्षिप्त होती है। उसमें शहर के रहने वाले अल्पसंख्यक परिवार के कक्ष की भाँति प्रसंगागत मेहमानों के लिए समाई नहीं । कहानीकार अपने पाठकको अन्त तक पहुँचाने में इधर उधर घूमने या 'चिलम तमाकू पीने' का अवकाश नहीं देता। घटनाओं के सम्बन्ध में 'बिना प्रयोजन अन्दर प्राने की इजाजत नहीं बहानीकार का मूल मन्त्र कहा गया है (No admittance except on business must be the short story writer's motto) । इसी के साथ घटनाओं को परस्पर-सम्बद्ध होना भी आवश्यक है। उनका तारतम्य ऐसा हो कि वे एक कौतूहल की शृङ्खला में बँधी हुई आगे बढ़ती चली जायँ और ऐसी भी न मालूम हों कि वे जबरदस्ती ढकेल दी गई हैं ।
कहानी का कथानक आरम्भ होकर प्रायः किसी न किसी प्रकार के संघर्ष द्वारा क्रमशः उत्थान को प्राप्त होता हुआ 'चरम' या तीव्रतम स्थिति (climax) को पहुँचता है, वहाँ पर कौतूहल क्रमशः अपनी चरम सीमा को पहुँच जाता है और कौतूहल का चमत्कारिक और कुछ-कुछ प्रत्याशित ढंग से अन्त हो जाता है। वहाँ पर कर ऊँट एक निश्चित करवट से बैठ जाता है । इसके पश्चात् कहानी का परिणाम आता है, जिसमें पूरे तथ्य का उद्घाटन हो जाता है । चरम या तीव्रतम स्थिति परिणाम को अधिक महत्त्वपूर्ण बना देती है। यह कहानी के लिए अनिवार्य नहीं किन्तु इसके द्वारा कहानी को अधिक उत्कर्ष प्राप्त होता है। किन्हीं किन्ही कहानियों में यह चरम बिन्दु बड़ा स्पष्ट और नुकीला होता है और किन्हीं में कुछ फैला-सा रहता है । प्रसाद जी की 'मधुश्रा' नाम की कहानी में यह कुछ फैला-सा दिखाई देता है ।
कहानी के प्रारम्भ में अन्त का थोड़ा-सा सकेत रहना वांछनीय रहता है, जिससे प्रत्याशित होते हुए भी नितांत आकस्मिक न लगे । यद्यपि कहानी की गति उपन्यास-की-सी वक्र नहीं होती तथापि एक-दो घुमाव उसकी रोचकता को बढ़ा देते हैं । जीवन का प्रवाह भी संघर्षमय है । वह भी भुजगम गति से चलता है। कहानी उससे भिन्न नहीं हो सकती। कहानी में कई घटनाएँ हो सकती हैं और होती हैं किन्तु उनमें एकतावित आवश्यक होना चाहिए । चरम सीमा का सम्बन्ध प्रायः मूल घटना से होता है ।
यद्यपि आज का मानव पुरुषार्थ को महत्त्व देता है फिर भी जीवन में ऐसे अवसर
पड़ता है कि 'मेरे मन कछु और है कर्ता के कछु और ( Man Proposes God Disposes ) कहानीकार को भी ऐसा अवसर उपस्थित ) करना पड़ता है, इसी को विधि का विधान कहते हैं । केवल करुणोत्पादन के लिए विध के विधान का आश्रय लेना है किन्तु यदि पुरुषार्थ की सीमा बतलाने के लिए ऐसा किया जाय तो कोई हानि नहीं । इस प्रकार कहानी का कथानक बहुत अंश में कलाकार के उद्देश्यों और जीवन-मीमांसा पर निर्भर रहता है ।
जकल कथानक को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता, जितना कि चरित्र चित्रण और भावाभिव्यक्ति को । चरित्र चित्रण का सम्बन्ध पात्रों से है। कहानी में पात्रों की संख्या न्यूनातिन्यून होती है । कहानी में पात्रों के चरित्र का पूर्ण विकास क्रम नहीं दिखाया जाता वरन् प्रायः बने-बनाये चरित्र के ऐसे अंश पर प्रकाश डाला जाता है जिसमें व्यक्ति
का व्यक्तित्व झलक उठे ।
कहानी के पात्र चाहे कल्पना- लोक के हों और चाहे वास्तविक संसार के किन्दु व्यक्तित्वपूर्ण होने चाहिएँ । जो पात्र मिट्टी के थूमे की भाँति अपना कोई व्यक्तित्व न रखते हों, वे पाठकों में रुचि नही उत्पन्न कर सकते । पात्र होते तो हैं लेखक के मानस-सन्तान किन्तु वे लेखक हाथ की कटपुतली नहीं बन जाते । लेखक पात्र को जो व्यक्तित्व प्रदान करता है, बिना पर्याप्त कारणो के उसे बदलता नही है और पात्र एक बार कल्पना-लोक में जन्म लेकर अपने व्यक्तित्व के अनुकूल ही कार्य कलाप करते हैं। वे कथानककी की पूर्ति मात्र नहीं करते । सिवाय इस बात के कि कहानी में चरित्र के विकास की कम गुंजाइश रहती है उसमें बने-बनाये चरित्र पर प्रकाश पड़ता है और यदि परिवर्तन होता है तो एक साथ, क्रमशः नहीं और सब बातें प्रायः उपन्यास-की-सी है ।
चरित्र-चित्रण कई प्रकार से होता है । उसके दो मुख्य प्रकार हैं--- एक तो प्रत्यक्ष या विश्लेषणात्मक (Direct or Analytical) जिसमें कि लेखक स्वय पात्र के चरित्र पर प्रकाश डालता है और दूसरा है परोक्ष या नाटकीय (Indirect or Dramatic) ढंग, जिसमें चरित्र या तो पात्रों के वार्तालाप या कार्य-कलाप से अनुमेय रहता है । इसमें भी कभी-कभी लेखक किसी पात्र द्वारा सीधे या संकेतात्मक रूप से टीका-टिप्पणी करा देता है। सांकेतिक चित्रण वह होता है जिसमें गुणों की अपेक्षा उनके द्योतन करने वाले कार्यों का वर्णन रहता है। प्रत्यक्ष चरित्र-चित्रण में भी प्रायः सांकेतिक ढंग ही अधिक पसन्द किया जाता है। सांकेतिक रूप से प्रत्यक्ष या विश्लेषणात्मक चरित्र चित्रण का मुंशी प्रेमचन्द जी की 'लाञ्छन' शीर्षक कहानी से
कहानी - चरित्र चित्ररण
एक उदाहरण नीचे दिया जाता है -
"वह पढ़ी-लिखी गरीब बूढ़ी औरत थी; देखने में सरल, बड़ी हँसमख; लेकिन जैसे किमी चतुर प्रूफ रीडर की निगाह गलतियों पर ही जा पड़ती है, उसकी आँखें बुराइयों पर ही जा पड़ती थीं। शहर में ऐसी कोई महिला न थी, जिसके विषय में दो-चार लुकी-छुपी बाते न मालूम हों । उसकी चाल में बिल्लियों-का-सा सयम था । दबे पैर धीरे-धीरे चलतो; पर शिकार को श्राहट पाते ही, जान से मारने को तैयार हो जाती थी । उसका काम था महिलाओं की सेवा-टहल करना; पर महिलाये उसकी सूरत से काँपती थीं।"
परोक्ष चित्रण में आजकल वार्तालाप द्वारा चरित्र चित्रण को मुख्यता दी जाती । इसमें लेखक अपनी ओर से कुछ नहीं कहता । पात्रों का चरित्र उनके वर्तालाप द्वारा अनुमे रहता है और कभी-कभी पात्र स्वयं अपने चरित्र का विश्लेप कर देता है या दूसरा पात्र उसके विषय में कुछ शब्द या वाक्य साया मांतिक रूप से कह देता है। देखिये" हां - हाँ, मै जानता हूँ। तुम मुझे दरिद्र युवक समझकर मेरे ऊपर कृपा रखते थे; किन्तु उसमें कितना तीक्षण अपमान था, इसका मुझे अब अनुभव हुआ ।"
न अभीन फिर कभी । मै दरिद्रता को दिखला दूंगा कि मक्या हूँ । इस पाखण्ड-ससार में रहूँगा, परन्तु किसी के आगे सिर न झुकाऊँगा । हो सकंगा, तो संसार को बाध्य करूंगा झुकने के लिए "
- प्रसाद जी की 'व्रतभङ्ग' नाम की कहानी से दूसरे पात्र के मुग्ल से किसी चरित्र के सम्बन्ध में कुछ कहाने का एक छाटा-मा उदाहरण उसी कहानी से दिया जाता है । नन्दन के क्षमा मांगने पर राधा कहता है"स्वामी यह अपराध मुझ से न हो सकेगा । उठिए, आज आपकी कर्मण्यता से, मेरा ललाट उज्ज्वल हो रहा है । इतना साहस कहाँ छिपा था नाथ !"
मुन्शी प्रेमचन्द जी की 'गिना' नाम की कहानी में एक स्त्री अपने पति का चरित्र-चित्रण करती है। उसमें केवल एक ही पत्र है और उसके चित्रण में स्वयं उसके चरित्र पर भी प्रकाश पड़ता है । वरणन कद्दी तो बिलकुल सधा है और कही मांशतक । सीधे वणन का उदाहरण देखिये - 'महाशय अपने दिल में समझते होंगे, 'मै कितना परोपकारी हूँ ।' शायद उन्हें इन बातों का गर्व है। मै इन्हें परोपकारी नहीं समझती, न विनीत हो समझती हूँ यह जड़ता है, सीधी-साधी निरीहता; इसलिए मै तो इन्हें कृपरण कहूँगी, अरसिक कहूँगी, हृदय-शून्य कहूँगी, उदार नहीं कह सकती।"
फिजूलखर्ची का सांकातक उदाहरण नाचे दिया जाता है। यह भी उसी स्त्री द्वारा किया हुआ पतिदेव का चित्रण है।
"सच कहती हूँ, कभी-कभी तो एक-एक पैसे की तंगी हो जाती है और इन भले प्रादमी को रुपये जैसे घर में काटते हैं जब तक रुपये के वारे-न्यारे न कर लें, इन्हें चैन नहीं। इनकी करतूत कहाँ तक गाऊँ । मेरी तो नाक में दम प्रा गया है । एक-न-ए५ पेहमान रोज यमराज की भाँति सिर पर सवार रहते हैं। न जाने कहाँ के बेफिक्रे इनके मित्र हैं। कोई कहीं से प्राकर मरता है, कोई कहीं से । घर क्या है, अपाहिजों का अड्डा बना हुआ है ?"
वार्तालाप के अतिरिक्त पात्रों का कार्य-कलाप भी उनके चरित्र चित्रण का एक साधन होता है ।
जैसा कि पहले कहा जा चुका है, कहानी में गढ़े- गढ़ाये चरित्र पर प्रकाश डाला जाता है, उसमें विकास की कम गुंजाइश रहती है । यढि परिवर्तन होता है, तो प्रायः एक साथ ही होता है, जैसा कि कौशिकजी की 'ताई' अथवा प्रेमचन्द जी की 'शङ्खनाद' आदि कहानियों में हुआ है ।
कथोपकथन या वार्तालाप द्वारा ही पात्रों के हृदयङ्गत भावों को जान सकते हैं । यदि बार्तालाप पात्रों के चरित्र के अनुकूल न हो तो हम पात्र के चरित्र का मूल्याङ्कन करने में
भूल कर जायँगे । कहानीकार 'घर के मौतबिर नाई' की भाँति विश्वास पात्र अवश्य है किन्तु मार्मिक स्थलों पर पात्रों के वार्तालाप को ज्यों-का-त्यों उपस्थित कर देने में हमको दूसरे द्वारा बताई हुई बात की अपेक्षा परिस्थिति का ठीक अन्दाज लग जाता है; कहानी में कथोपकथन का तिहरा काम रहता है। उसके द्वारा पात्रों के चरित्र का परिचय ही नहीं मिलता वरन् उसके सहारे कथानक भी अग्रसर होता है और एक जी उबाने वाले प्रकथन के भीतर आवश्यक सजीवता उत्पन्न हो जाती है। कथोपकथन को संगत, सजोव, चमत्कार - पूर्ण और परिस्थिति के अनुकूल होना चाहिए। हम साधारण जीवन में बहुतसा निरर्थक वार्तालाप भी करते हैं किन्तु कहानी में इसकी गुंजाइश नहीं। हाँ, वार्तालाप में यथार्थता सजीवता लाने के लिए ढो-चार इधर-उधर की भी बात खप सकती है किन्तु कुशल कलाकार उनको भी सप्रयोजन और चरित्र का परिचायक बना देता है ।
कहानी में उपन्यास की भाँति वातावरण के चित्रण के लिए अधिक गुंजाइश नहीं होती है फिर भी कहानी में देश-काल की स्पष्टता लाने के लिए तथा कार्य से परिस्थिति की अनुकूलता व्यंजित करने के अर्थ इसका चित्रण आवश्यक हो जाता है । वातावरण भौतिक और मानसिक दोनों ही प्रकार का हो सकता है और भौतिक वातावरण भी प्रायः ऐसा होता
है कि जो पात्रों की स्थिति की व्याख्या में सहायक हो । वातावरण के चित्रण में प्रसाद जी ने विशेषता प्राप्त की है । ' पुरस्कार' कहानी के प्रारम्भिक दृश्य में प्रकृति और जनता की
कहानी - कथोपकथन
मानसिक स्थिति में बहुत सुन्दर साम्य है। देखिए -
"आर्द्रा नक्षत्र, प्रकाश में काले-काले बादलों को घुमड़, जिसमें देवदुन्दुभी का गम्भीर घोष, प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण पुरुष झाँकने लगा- देखने लगा महाराज की सवारी । शैल-माला के अंचल में समतल उर्वरा भूमि से सोंधी वास उठ रही थी । नगर- तोरण से जयघोष हुआ, भीड़ में गजराज का चमरधारी शुण्ड उन्नत दिखाई पड़ा, वह हर्ष और उत्साह का समुद्र हिलोरे लेने लगा ।"
एक और उदाहरण कौशिक जी की 'विद्रोही' शीर्षक कहानी से दिया जाता है" एक महत्त्वपूर्ण अभियान के विध्वंस करने की तैयारी थी । प्रकृति काँप उठी । घोड़ों और हाथियों के चीत्कार से प्रकाश थरथरा उठा। बरसाती हवा के थपेड़ों से जंगल के वृक्ष रणनाद करते हुए भूम रहे थे । पशु-पक्षी त्रस्त होकर श्राश्रय ढूँढ़ने लगे, बड़ा विकट समय था ।"
"उस भयानक मैदान में राजपूत सेना मोरचाबन्दी कर रही थी । हल्दीघाटी की ऊँची चोटियों पर भील लोग धनुष चढ़ाये उन्मत्त गज समान खड़े थे ।"
ऐसे स्थलों में वातावरण का वर्णन रसशास्त्र की दृष्टि से उद्दीपन कहलाएगा । इस प्रकृति-चित्रण ने युद्ध की भयानकता को और भी गहरा कर दिया है ।
प्रत्येक कहानी में कोई उद्देश्य या लक्ष्य अवश्य रहता है कहानी का ध्येय केवल मनोरंजन या लम्बी रातों को काट कर छोटा करना नहीं है वरन् जोवन-सम्बन्धी कुछ तथ्य देना या मानव-मन का निकट परिचय कराना है किन्तु वह उद्देश्य या तथ्य हितोपदेश या ईसप (Aesop) की कहानियों की भाँति व्यक्त नहीं किया जाता है। वहां व्यंजित ही रहता है। कहानी के अध्ययन में उसका उद्देश्य समझना एक आवश्यक बात होती है । कहीं पर यह उद्देश्य स्पष्ट रूप से व्यंजित होता है; जैसा - सुदर्शन की 'एलबम' - शीर्षक कहानी में । उसका उद्देश्य बहुत ऊँचा है ? वह है यान्चक का स्वाभिमान नष्ट किये बिना उसकी सहायता करना । प्रसादजी की 'मधुश्रा' नाम की कहानी का उद्देश्य यही कि जब मनुष्य पर चिन्ता करने का भार पड़ जाता है तब उसका सुधार हो जाता है। शराबी के जीवन में 'मधु' के आ जाने से परिवर्तन हो गया । उसको खिलाने की चिन्ता हो गई। वह शराब न खरीदकर लड़के के लिए मिठाई खरीद लाता है और सान चलाने का अपना छोड़ा हुआ रोजगार करने लगता है। कहीं-कहीं यह कुछ गूढ़ हो जाता है । यह उद्देश्य कभी-कभी अन्तिम वाक्य में भी सूक्ति रूप से रख दिया जाता है और उसकी उक्ति का चमत्कार ही उसमें काव्यत्व ले आता है, जैसे - अज्ञेयजी की 'शत्रु' शीर्षक कहानी का अन्तिम वाक्य - "जीवन की सबसे बड़ी कठिनाई यही है कि हम निरन्तर प्रासानी की ओर आकृष्ट होते हैं।"
|
भूतकाल से सम्बन्ध रखने के कारण कहानी और उपन्यास इतिहास के समानधर्मी हैं। कहानी और इतिहास शब्द भी समान अर्थ वाले हैं । इतिहास का भी अर्थ हैउसने कहा था, किन्तु इतिहास और कहानी या उपन्यास के दृष्टिकोण में अन्तर है, इस बात को हम उपन्यास के सम्बन्ध में स्पष्ट कर चुके हैं। कहानी अपने पुराने रूप में उपन्यास की है और नये रूप में उसकी अनुजा । वृत्त या कथा - साहित्य की वंशजा होने के कारण कहानी और उपन्यास दोनों में ही कई बातों की समानता है। दोनों ही विधाएँ कलात्मक रूप से मानव-जीवन पर प्रकाश डालती हैं, इतना होते हुए भी दोनों की अपनी विशेषताएँ हैं जो कि एक-दूसरे से पृथक् करती हैं। दोनों में केवल आकार का ही भेद नहीं । हम यह नहीं कह सकते कि कहानी छोटा उपन्यास है अथवा उपन्यास बड़ी कहानी है । यह कहना ऐसा ही प्रसंगत होगा जैसे चौपाए होने की समानता के आधार पर मैंढक को छोटा बैल और बैल को बड़ा मेंढक कहना। दोनों के शारीरिक संस्कार और संगठन में अन्तर है। बैल चारों पैरों पर समान बल देकर चलता है, तो मेंढक उछल-उछलकर रास्ता तय करता है । इस प्रकार कहानीकार भी बहुत-सी जमीन छोड़ता हुआ छलाङ्ग मारकर चलता है । दोनों के गति क्रम में भेद है । कहानो को हमने जीवन की एक झलक या झाँकी कहा है। झाँकी प्रायः क्षणिक परन्तु प्रभाव- पूर्ण होती है । कहानीकार केवल एक ही दृश्य पर सारा श्रालोक केन्द्रस्थ कर उसके भाव को तीव्रतम बना देता है । उपन्यासकार पूर्ण चिड़िया ही नहीं वरन् ओर-पास बैठी हुई दूसरी चिड़ियों को तथा जहाँ तक उसकी निगाह ढौड़ सके, पूरे दृश्य का सावधानी के साथ अवलोकन करता है किन्तु कहानीकार धनुर्विद्या-विशारद वीर अर्जुन की भाँ त अपने निशाने को अचूक बनाने के लिए केवल आँख को और ज्यादह्-से-ज्यादइ सिर को जिसवस्थ है, लक्ष्य कर तीर छोड़ता है। कहानीकार अपने पाठक को अन्तिम संवेदना तक शीघ्रातिशीघ्र ले जाता है और एक साथ पर्दा उठाकर सजी-सजाई झाँकी की मोहक एवं आकर्षक छटा से मनोमुग्ध कर देता है । वह बीच-बीच में रहस्योद्घाटन नहीं करता, एक-दो संकेत चाहे करदे किन्तु अन्तिम क्षण तक बात को पेट में पचाये रखता है । अन्तिम संवेदना से ही बीच के संकेत भी सार्थक हो जाते हैं । उपन्यास के पाठक को जहाँ ग्रन्थकार के विश्वास पात्र होने का गौरव प्राप्त है वहाँ कहानी के पाठक को अधिक प्रभावपूर्ण दृश्य देखने और केन्द्रीभूत आनन्द के प्राप्त करने का संतोष है। कहानी की एकतथ्यता ही उसका जीवन-रस है और वही उसे उपन्यास से पृथक् करता है । इसी मौलिक भेड़ के कारण दोनों प्रकार की रचनाओं के शिल्प-विधान में भी अन्तर पड़ जाता है । वातावरण का विस्तार, जीवन की करूपता, प्रासङ्गिक कथाओं के तारतम्य के कारण कथाप्रवाह का बहुशाखा होकर की ओर अग्रसर होना, पात्रों का बाहुल्य आदि बातें जो उपन्यास में श्लाध्य या कम-से-कम क्षम्य समझी जाती हैं, कहानी में ग्राह्य हो जाती है। कहानी में चरित्र के विकास के लिए अधिक गुन्जाइश नहीं रहती । उसमें गढ़ेगढ़ाये चरित्र की एक केन्द्रित लोक में झलक दिखाई जाती है, जिससे पूरे चरित्र का भी कुछ आभास मिल जाता है । वास्तव में वह चित्रण नहीं होता वरन् क्षणिक प्रकाश होता है । कहानी के किसी पात्र में यदि चरित्र परिवर्तन भी होता है तो प्रायः एक ही प्रभाव पूर्ण घटना से ही हो जाता है। उनमें सुनगर की सौ चोटों की जरूरत नहीं वरन् लुहार की एक गहरी चोट ही काम कर जाती है । मुन्शी प्रेमचन्द की 'राम', 'शंखनाद' कौशिक जी की 'ताई' और श्री चन्द्रगुप्त विद्यालंकार लिखित 'डाकू' शीर्षक कहानियाँ हिन्दी कहानी साहित्य म चरित्र परिवर्तन के अच्छे हैं किन्तु ये सब हैं एक ही चोट के प्रभाव । कहानी में कथानक चरित्र-चित्रण और वातावरण होते सब हैं किन्तु मुख्यता एक को ही मिल सकती है। शेष दो बहुत गौण हो जाते हैं उपन्यास में मुख्यता चाहे एक की ही रहे किन्तु तोनों को उचित विस्तार मिल जाता है । उपन्यास की सफलता सभी तत्वों के यथोचित समावेश में है । कहानी की शैली अपनी संक्षिप्तता के कारण अधिक व्यञ्जनाधान होती है । उसमें 'गागर में सागर' भरने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। व्यञ्जना, जो काव्य का प्राण है, उपन्यास की अपेक्षा कहानी में अधिक मात्रा मे वर्तमान रहती है इसलिए वह काव्य के निकट आ जाती है । इसके अतिरिक्त उपन्यास का काव्यत्व बिखरा-सा रहता है, किन्तु कहानी का गुण उसकी एक ध्येयता के कारण अंतिम बिन्दु में स्थित रहता है। कहानी में व्यञ्जना की मात्रा पाठकों के मानसिक धरातल के अनुकूल घटतीबढ़ती रहती है। जो कहानियाँ निम्न श्रेणी के लोगों के लिए अथवा पढ़कर सुनाये जाने के उद्देश्य से लिखी जाती हैं उसमें घटना की प्रधानता रहती है किन्तु जो अपेक्षाकृत सुपठित समाज के लिए शांतिपूर्वक अध्ययन कक्ष के या शयनागार के भीतर पढ़े जाने के लिए लिखी जाती हैं उनमें व्यञ्जना और विचार की मात्रा अधिक रहती है । कहानी में प्रगीत-काव्य का संगीत तो नहीं होता किन्तु वह अपनी एक ध्येयता वैयक्तिक दृष्टिकोण की प्रधानता के कारण उसके जाती है। कहानी का अन्तिम बिन्दु या तथ्य कहानीकार के मन में पहले से झलक जाता है। वह प्रायः किसी घटना विशेष को देखकर स्फुरत होता है और कभी-कभी वैसे भी बिजली की भाँति चमक जाता है। यदि उसका स्फुरण आन्तरिक हुआ तो वह उसको मूर्त रूप देने के लिए घटना का कल्पना से कर लेता है। कहानीकार का लक्ष्य तो उस तथ्य को ही प्रकाश में लाना रहता है फिर भी वह भाव को निरालम्ब नहीं रखता है वरन् उसकी पुष्टि में घटना चक्र का आवश्यक मात्रा में समावेश कर देता है । संगीत के अभाव के कारण कहानी गद्य-काव्य के निकट है किन्तु गद्यकाव्य के साथ भी उसका वही भेद है जो प्रगीत काव्य के साथ । गद्य की एक विधा होने के कारण तो कहानी भी गद्य-काव्य है किन्तु काव्य के विशेष अर्थ में वह गद्य-काव्य के निकट होता हुआ भी उससे भिन्न है। उसमें घटना की अपेक्षा रहती है, गद्य-काव्य में नहीं । गद्य-काव्य में घटनाओं का प्रभाव-सा रहता है और यदि घटनाएँ रहती हैं तो उनको महत्त्व न देखर उनसे जाग्रत हृदयोद्गारों को ही मुख्यता दी जाती है। कहानी में उद्गारों के साथ घटनाओं को भी समान महत्व का अधिकार रहता है । रेखा-चित्र या स्कैच कहानी के बहुत निकट होते हुए भी उससे भिन्न हैं । रेखाचित्र में एक ही वस्तु या पात्र का चित्रांकन रहता है और वह एक प्रकार से स्थायी होता है। कहानी में गत्यात्मकता रहती है। स्कैच में वर्णन का प्राधान्य रहता है । कहानी में वर्णन के साथ कुछ प्रकथन अर्थात् प्रबन्धात्मक कथन भी रहता है । हिन्दी में श्री प्रकाशचन्द्र गुप्त ने बहुत सुन्दर रेखा-चित्र लिखे हैं। उनमें जिन वस्तुओं या व्यक्तियों का चित्र खींचा जाता है, उनमें उस वस्तु के स्थायी सम्बन्ध को ही उपस्थित किया जाता है । कहानी में एक विशेष गति रहती है । उसमें काल-क्रम का विकास रहता है अर्थात् वह चलता हुआ दिखाई देता है। रेखाचित्र में इस बात का भाव-सा रहता है। कहानी में जितना काल-क्रम घटता जाता है उतनी ही वह रेखा-चित्र के निकट श्रा जाती है । कथा-साहित्य के अन्तर्गत होने के कारण वस्तु , चरित्र-चित्रण, कथोपकथन, वातावरण, उद्देश्य और शैली ये छः तत्व तो उपन्यास की भाँति ही होते कहानी के तत्व हैं किन्तु रचना के रूप विशेष के कारण उनके प्रयोग में थोड़ा अन्तर होता है। शरीर के अवयवों की भाँति ये तत्व भी अन्योन्याश्रित हैं । कहानी की कथावस्तु अत्यन्त संक्षिप्त होती है। उसमें शहर के रहने वाले अल्पसंख्यक परिवार के कक्ष की भाँति प्रसंगागत मेहमानों के लिए समाई नहीं । कहानीकार अपने पाठकको अन्त तक पहुँचाने में इधर उधर घूमने या 'चिलम तमाकू पीने' का अवकाश नहीं देता। घटनाओं के सम्बन्ध में 'बिना प्रयोजन अन्दर प्राने की इजाजत नहीं बहानीकार का मूल मन्त्र कहा गया है । इसी के साथ घटनाओं को परस्पर-सम्बद्ध होना भी आवश्यक है। उनका तारतम्य ऐसा हो कि वे एक कौतूहल की शृङ्खला में बँधी हुई आगे बढ़ती चली जायँ और ऐसी भी न मालूम हों कि वे जबरदस्ती ढकेल दी गई हैं । कहानी का कथानक आरम्भ होकर प्रायः किसी न किसी प्रकार के संघर्ष द्वारा क्रमशः उत्थान को प्राप्त होता हुआ 'चरम' या तीव्रतम स्थिति को पहुँचता है, वहाँ पर कौतूहल क्रमशः अपनी चरम सीमा को पहुँच जाता है और कौतूहल का चमत्कारिक और कुछ-कुछ प्रत्याशित ढंग से अन्त हो जाता है। वहाँ पर कर ऊँट एक निश्चित करवट से बैठ जाता है । इसके पश्चात् कहानी का परिणाम आता है, जिसमें पूरे तथ्य का उद्घाटन हो जाता है । चरम या तीव्रतम स्थिति परिणाम को अधिक महत्त्वपूर्ण बना देती है। यह कहानी के लिए अनिवार्य नहीं किन्तु इसके द्वारा कहानी को अधिक उत्कर्ष प्राप्त होता है। किन्हीं किन्ही कहानियों में यह चरम बिन्दु बड़ा स्पष्ट और नुकीला होता है और किन्हीं में कुछ फैला-सा रहता है । प्रसाद जी की 'मधुश्रा' नाम की कहानी में यह कुछ फैला-सा दिखाई देता है । कहानी के प्रारम्भ में अन्त का थोड़ा-सा सकेत रहना वांछनीय रहता है, जिससे प्रत्याशित होते हुए भी नितांत आकस्मिक न लगे । यद्यपि कहानी की गति उपन्यास-की-सी वक्र नहीं होती तथापि एक-दो घुमाव उसकी रोचकता को बढ़ा देते हैं । जीवन का प्रवाह भी संघर्षमय है । वह भी भुजगम गति से चलता है। कहानी उससे भिन्न नहीं हो सकती। कहानी में कई घटनाएँ हो सकती हैं और होती हैं किन्तु उनमें एकतावित आवश्यक होना चाहिए । चरम सीमा का सम्बन्ध प्रायः मूल घटना से होता है । यद्यपि आज का मानव पुरुषार्थ को महत्त्व देता है फिर भी जीवन में ऐसे अवसर पड़ता है कि 'मेरे मन कछु और है कर्ता के कछु और कहानीकार को भी ऐसा अवसर उपस्थित ) करना पड़ता है, इसी को विधि का विधान कहते हैं । केवल करुणोत्पादन के लिए विध के विधान का आश्रय लेना है किन्तु यदि पुरुषार्थ की सीमा बतलाने के लिए ऐसा किया जाय तो कोई हानि नहीं । इस प्रकार कहानी का कथानक बहुत अंश में कलाकार के उद्देश्यों और जीवन-मीमांसा पर निर्भर रहता है । जकल कथानक को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता, जितना कि चरित्र चित्रण और भावाभिव्यक्ति को । चरित्र चित्रण का सम्बन्ध पात्रों से है। कहानी में पात्रों की संख्या न्यूनातिन्यून होती है । कहानी में पात्रों के चरित्र का पूर्ण विकास क्रम नहीं दिखाया जाता वरन् प्रायः बने-बनाये चरित्र के ऐसे अंश पर प्रकाश डाला जाता है जिसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व झलक उठे । कहानी के पात्र चाहे कल्पना- लोक के हों और चाहे वास्तविक संसार के किन्दु व्यक्तित्वपूर्ण होने चाहिएँ । जो पात्र मिट्टी के थूमे की भाँति अपना कोई व्यक्तित्व न रखते हों, वे पाठकों में रुचि नही उत्पन्न कर सकते । पात्र होते तो हैं लेखक के मानस-सन्तान किन्तु वे लेखक हाथ की कटपुतली नहीं बन जाते । लेखक पात्र को जो व्यक्तित्व प्रदान करता है, बिना पर्याप्त कारणो के उसे बदलता नही है और पात्र एक बार कल्पना-लोक में जन्म लेकर अपने व्यक्तित्व के अनुकूल ही कार्य कलाप करते हैं। वे कथानककी की पूर्ति मात्र नहीं करते । सिवाय इस बात के कि कहानी में चरित्र के विकास की कम गुंजाइश रहती है उसमें बने-बनाये चरित्र पर प्रकाश पड़ता है और यदि परिवर्तन होता है तो एक साथ, क्रमशः नहीं और सब बातें प्रायः उपन्यास-की-सी है । चरित्र-चित्रण कई प्रकार से होता है । उसके दो मुख्य प्रकार हैं--- एक तो प्रत्यक्ष या विश्लेषणात्मक जिसमें कि लेखक स्वय पात्र के चरित्र पर प्रकाश डालता है और दूसरा है परोक्ष या नाटकीय ढंग, जिसमें चरित्र या तो पात्रों के वार्तालाप या कार्य-कलाप से अनुमेय रहता है । इसमें भी कभी-कभी लेखक किसी पात्र द्वारा सीधे या संकेतात्मक रूप से टीका-टिप्पणी करा देता है। सांकेतिक चित्रण वह होता है जिसमें गुणों की अपेक्षा उनके द्योतन करने वाले कार्यों का वर्णन रहता है। प्रत्यक्ष चरित्र-चित्रण में भी प्रायः सांकेतिक ढंग ही अधिक पसन्द किया जाता है। सांकेतिक रूप से प्रत्यक्ष या विश्लेषणात्मक चरित्र चित्रण का मुंशी प्रेमचन्द जी की 'लाञ्छन' शीर्षक कहानी से कहानी - चरित्र चित्ररण एक उदाहरण नीचे दिया जाता है - "वह पढ़ी-लिखी गरीब बूढ़ी औरत थी; देखने में सरल, बड़ी हँसमख; लेकिन जैसे किमी चतुर प्रूफ रीडर की निगाह गलतियों पर ही जा पड़ती है, उसकी आँखें बुराइयों पर ही जा पड़ती थीं। शहर में ऐसी कोई महिला न थी, जिसके विषय में दो-चार लुकी-छुपी बाते न मालूम हों । उसकी चाल में बिल्लियों-का-सा सयम था । दबे पैर धीरे-धीरे चलतो; पर शिकार को श्राहट पाते ही, जान से मारने को तैयार हो जाती थी । उसका काम था महिलाओं की सेवा-टहल करना; पर महिलाये उसकी सूरत से काँपती थीं।" परोक्ष चित्रण में आजकल वार्तालाप द्वारा चरित्र चित्रण को मुख्यता दी जाती । इसमें लेखक अपनी ओर से कुछ नहीं कहता । पात्रों का चरित्र उनके वर्तालाप द्वारा अनुमे रहता है और कभी-कभी पात्र स्वयं अपने चरित्र का विश्लेप कर देता है या दूसरा पात्र उसके विषय में कुछ शब्द या वाक्य साया मांतिक रूप से कह देता है। देखिये" हां - हाँ, मै जानता हूँ। तुम मुझे दरिद्र युवक समझकर मेरे ऊपर कृपा रखते थे; किन्तु उसमें कितना तीक्षण अपमान था, इसका मुझे अब अनुभव हुआ ।" न अभीन फिर कभी । मै दरिद्रता को दिखला दूंगा कि मक्या हूँ । इस पाखण्ड-ससार में रहूँगा, परन्तु किसी के आगे सिर न झुकाऊँगा । हो सकंगा, तो संसार को बाध्य करूंगा झुकने के लिए " - प्रसाद जी की 'व्रतभङ्ग' नाम की कहानी से दूसरे पात्र के मुग्ल से किसी चरित्र के सम्बन्ध में कुछ कहाने का एक छाटा-मा उदाहरण उसी कहानी से दिया जाता है । नन्दन के क्षमा मांगने पर राधा कहता है"स्वामी यह अपराध मुझ से न हो सकेगा । उठिए, आज आपकी कर्मण्यता से, मेरा ललाट उज्ज्वल हो रहा है । इतना साहस कहाँ छिपा था नाथ !" मुन्शी प्रेमचन्द जी की 'गिना' नाम की कहानी में एक स्त्री अपने पति का चरित्र-चित्रण करती है। उसमें केवल एक ही पत्र है और उसके चित्रण में स्वयं उसके चरित्र पर भी प्रकाश पड़ता है । वरणन कद्दी तो बिलकुल सधा है और कही मांशतक । सीधे वणन का उदाहरण देखिये - 'महाशय अपने दिल में समझते होंगे, 'मै कितना परोपकारी हूँ ।' शायद उन्हें इन बातों का गर्व है। मै इन्हें परोपकारी नहीं समझती, न विनीत हो समझती हूँ यह जड़ता है, सीधी-साधी निरीहता; इसलिए मै तो इन्हें कृपरण कहूँगी, अरसिक कहूँगी, हृदय-शून्य कहूँगी, उदार नहीं कह सकती।" फिजूलखर्ची का सांकातक उदाहरण नाचे दिया जाता है। यह भी उसी स्त्री द्वारा किया हुआ पतिदेव का चित्रण है। "सच कहती हूँ, कभी-कभी तो एक-एक पैसे की तंगी हो जाती है और इन भले प्रादमी को रुपये जैसे घर में काटते हैं जब तक रुपये के वारे-न्यारे न कर लें, इन्हें चैन नहीं। इनकी करतूत कहाँ तक गाऊँ । मेरी तो नाक में दम प्रा गया है । एक-न-एपाँच पेहमान रोज यमराज की भाँति सिर पर सवार रहते हैं। न जाने कहाँ के बेफिक्रे इनके मित्र हैं। कोई कहीं से प्राकर मरता है, कोई कहीं से । घर क्या है, अपाहिजों का अड्डा बना हुआ है ?" वार्तालाप के अतिरिक्त पात्रों का कार्य-कलाप भी उनके चरित्र चित्रण का एक साधन होता है । जैसा कि पहले कहा जा चुका है, कहानी में गढ़े- गढ़ाये चरित्र पर प्रकाश डाला जाता है, उसमें विकास की कम गुंजाइश रहती है । यढि परिवर्तन होता है, तो प्रायः एक साथ ही होता है, जैसा कि कौशिकजी की 'ताई' अथवा प्रेमचन्द जी की 'शङ्खनाद' आदि कहानियों में हुआ है । कथोपकथन या वार्तालाप द्वारा ही पात्रों के हृदयङ्गत भावों को जान सकते हैं । यदि बार्तालाप पात्रों के चरित्र के अनुकूल न हो तो हम पात्र के चरित्र का मूल्याङ्कन करने में भूल कर जायँगे । कहानीकार 'घर के मौतबिर नाई' की भाँति विश्वास पात्र अवश्य है किन्तु मार्मिक स्थलों पर पात्रों के वार्तालाप को ज्यों-का-त्यों उपस्थित कर देने में हमको दूसरे द्वारा बताई हुई बात की अपेक्षा परिस्थिति का ठीक अन्दाज लग जाता है; कहानी में कथोपकथन का तिहरा काम रहता है। उसके द्वारा पात्रों के चरित्र का परिचय ही नहीं मिलता वरन् उसके सहारे कथानक भी अग्रसर होता है और एक जी उबाने वाले प्रकथन के भीतर आवश्यक सजीवता उत्पन्न हो जाती है। कथोपकथन को संगत, सजोव, चमत्कार - पूर्ण और परिस्थिति के अनुकूल होना चाहिए। हम साधारण जीवन में बहुतसा निरर्थक वार्तालाप भी करते हैं किन्तु कहानी में इसकी गुंजाइश नहीं। हाँ, वार्तालाप में यथार्थता सजीवता लाने के लिए ढो-चार इधर-उधर की भी बात खप सकती है किन्तु कुशल कलाकार उनको भी सप्रयोजन और चरित्र का परिचायक बना देता है । कहानी में उपन्यास की भाँति वातावरण के चित्रण के लिए अधिक गुंजाइश नहीं होती है फिर भी कहानी में देश-काल की स्पष्टता लाने के लिए तथा कार्य से परिस्थिति की अनुकूलता व्यंजित करने के अर्थ इसका चित्रण आवश्यक हो जाता है । वातावरण भौतिक और मानसिक दोनों ही प्रकार का हो सकता है और भौतिक वातावरण भी प्रायः ऐसा होता है कि जो पात्रों की स्थिति की व्याख्या में सहायक हो । वातावरण के चित्रण में प्रसाद जी ने विशेषता प्राप्त की है । ' पुरस्कार' कहानी के प्रारम्भिक दृश्य में प्रकृति और जनता की कहानी - कथोपकथन मानसिक स्थिति में बहुत सुन्दर साम्य है। देखिए - "आर्द्रा नक्षत्र, प्रकाश में काले-काले बादलों को घुमड़, जिसमें देवदुन्दुभी का गम्भीर घोष, प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण पुरुष झाँकने लगा- देखने लगा महाराज की सवारी । शैल-माला के अंचल में समतल उर्वरा भूमि से सोंधी वास उठ रही थी । नगर- तोरण से जयघोष हुआ, भीड़ में गजराज का चमरधारी शुण्ड उन्नत दिखाई पड़ा, वह हर्ष और उत्साह का समुद्र हिलोरे लेने लगा ।" एक और उदाहरण कौशिक जी की 'विद्रोही' शीर्षक कहानी से दिया जाता है" एक महत्त्वपूर्ण अभियान के विध्वंस करने की तैयारी थी । प्रकृति काँप उठी । घोड़ों और हाथियों के चीत्कार से प्रकाश थरथरा उठा। बरसाती हवा के थपेड़ों से जंगल के वृक्ष रणनाद करते हुए भूम रहे थे । पशु-पक्षी त्रस्त होकर श्राश्रय ढूँढ़ने लगे, बड़ा विकट समय था ।" "उस भयानक मैदान में राजपूत सेना मोरचाबन्दी कर रही थी । हल्दीघाटी की ऊँची चोटियों पर भील लोग धनुष चढ़ाये उन्मत्त गज समान खड़े थे ।" ऐसे स्थलों में वातावरण का वर्णन रसशास्त्र की दृष्टि से उद्दीपन कहलाएगा । इस प्रकृति-चित्रण ने युद्ध की भयानकता को और भी गहरा कर दिया है । प्रत्येक कहानी में कोई उद्देश्य या लक्ष्य अवश्य रहता है कहानी का ध्येय केवल मनोरंजन या लम्बी रातों को काट कर छोटा करना नहीं है वरन् जोवन-सम्बन्धी कुछ तथ्य देना या मानव-मन का निकट परिचय कराना है किन्तु वह उद्देश्य या तथ्य हितोपदेश या ईसप की कहानियों की भाँति व्यक्त नहीं किया जाता है। वहां व्यंजित ही रहता है। कहानी के अध्ययन में उसका उद्देश्य समझना एक आवश्यक बात होती है । कहीं पर यह उद्देश्य स्पष्ट रूप से व्यंजित होता है; जैसा - सुदर्शन की 'एलबम' - शीर्षक कहानी में । उसका उद्देश्य बहुत ऊँचा है ? वह है यान्चक का स्वाभिमान नष्ट किये बिना उसकी सहायता करना । प्रसादजी की 'मधुश्रा' नाम की कहानी का उद्देश्य यही कि जब मनुष्य पर चिन्ता करने का भार पड़ जाता है तब उसका सुधार हो जाता है। शराबी के जीवन में 'मधु' के आ जाने से परिवर्तन हो गया । उसको खिलाने की चिन्ता हो गई। वह शराब न खरीदकर लड़के के लिए मिठाई खरीद लाता है और सान चलाने का अपना छोड़ा हुआ रोजगार करने लगता है। कहीं-कहीं यह कुछ गूढ़ हो जाता है । यह उद्देश्य कभी-कभी अन्तिम वाक्य में भी सूक्ति रूप से रख दिया जाता है और उसकी उक्ति का चमत्कार ही उसमें काव्यत्व ले आता है, जैसे - अज्ञेयजी की 'शत्रु' शीर्षक कहानी का अन्तिम वाक्य - "जीवन की सबसे बड़ी कठिनाई यही है कि हम निरन्तर प्रासानी की ओर आकृष्ट होते हैं।"
|
मैट्रिक परीक्षा में सोमवार को दोनो पालियों में 9 स्टूडेंट्स को दूसरे की जगह एग्जाम देते हुए पकड़ा गया है। एग्जाम के दौरान 34 स्टूडेंट्स को नकल करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। बोर्ड का दावा है कि मंगलवार को होने वाली परीक्षा में कदाचार को लेकर विशेष चौकसी बरतने का निर्देश दिया गया है। मंगलवार को दोनो पालियों में हिन्दी, उर्दू, बांग्ला और मैथिली विषयों की परीक्षा होगी।
सोमवार को मैट्रिक परीक्षा का चौथा दिन था। दोनों पालियाें में अंगेजी का पेपर था। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2022 में चौथे दिन दोनों पालियों में अंग्रेजी (सामान्य) विषय की परीक्षा राज्य के 1525 सेंटर पर हुई है। बिहार बोर्ड का दावा है कि सेंटर पर कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण स्वच्छ और कदाचाररहित परीक्षा कराई गई है। सोमवार को प्रथम पाली में 8,27,288 परीक्षार्थियों (4,04,207 छात्राएं और 4,23,081 छात्र) के लिए अंग्रेजी (सामान्य) विषय की परीक्षा सुबह साढ़े 9 बजे से 12. 45 बजे तक हुई। द्वितीय पाली में 8,21,606 परीक्षार्थियों (4,02,498 छात्राएं और 4,19,108 छात्र) के लिए अंग्रेजी (सामान्य) विषय की परीक्षा दोपहर 1ः45 बजे से शम 5 बजे तक हुई। पटना में मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2022 का आयोजन सभी 74 परीक्षा केन्द्रों पर स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण माहौल में कराया गया है।
मंगलवार को मैट्रिक परीक्षा का पांचवा दिन है। मंगलवार 22 फरवरी को प्रथम पाली में मातृभाषा के तहत हिन्दी, उर्दू, बांग्ला तथा मैथिली विषयों की परीक्षा सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर 12ः45 बजे तक होगी जबकि दूसरी पाली में भी मातृभाषा के तहत हिन्दी, उर्दू, बांग्ला तथा मैथिली विषयों की परीक्षा दोपहर 1ः45 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का कहना है कि एग्जाम में नकल रोकने को लेकर सभी सेंटर को अलर्ट पर रखा गया है। गेट से लेकर सेंटर तक चौकसी है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
मैट्रिक परीक्षा में सोमवार को दोनो पालियों में नौ स्टूडेंट्स को दूसरे की जगह एग्जाम देते हुए पकड़ा गया है। एग्जाम के दौरान चौंतीस स्टूडेंट्स को नकल करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। बोर्ड का दावा है कि मंगलवार को होने वाली परीक्षा में कदाचार को लेकर विशेष चौकसी बरतने का निर्देश दिया गया है। मंगलवार को दोनो पालियों में हिन्दी, उर्दू, बांग्ला और मैथिली विषयों की परीक्षा होगी। सोमवार को मैट्रिक परीक्षा का चौथा दिन था। दोनों पालियाें में अंगेजी का पेपर था। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक वार्षिक परीक्षा दो हज़ार बाईस में चौथे दिन दोनों पालियों में अंग्रेजी विषय की परीक्षा राज्य के एक हज़ार पाँच सौ पच्चीस सेंटर पर हुई है। बिहार बोर्ड का दावा है कि सेंटर पर कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण स्वच्छ और कदाचाररहित परीक्षा कराई गई है। सोमवार को प्रथम पाली में आठ,सत्ताईस,दो सौ अठासी परीक्षार्थियों के लिए अंग्रेजी विषय की परीक्षा सुबह साढ़े नौ बजे से बारह. पैंतालीस बजे तक हुई। द्वितीय पाली में आठ,इक्कीस,छः सौ छः परीक्षार्थियों के लिए अंग्रेजी विषय की परीक्षा दोपहर एकःपैंतालीस बजे से शम पाँच बजे तक हुई। पटना में मैट्रिक वार्षिक परीक्षा दो हज़ार बाईस का आयोजन सभी चौहत्तर परीक्षा केन्द्रों पर स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण माहौल में कराया गया है। मंगलवार को मैट्रिक परीक्षा का पांचवा दिन है। मंगलवार बाईस फरवरी को प्रथम पाली में मातृभाषा के तहत हिन्दी, उर्दू, बांग्ला तथा मैथिली विषयों की परीक्षा सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर बारहःपैंतालीस बजे तक होगी जबकि दूसरी पाली में भी मातृभाषा के तहत हिन्दी, उर्दू, बांग्ला तथा मैथिली विषयों की परीक्षा दोपहर एकःपैंतालीस बजे से शाम पाँच बजे तक आयोजित होगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का कहना है कि एग्जाम में नकल रोकने को लेकर सभी सेंटर को अलर्ट पर रखा गया है। गेट से लेकर सेंटर तक चौकसी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
नई दिल्ली : भारतीय न्यायिक सेवा के इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया है, जब देश के चार बड़े उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के रूप में महिलाएं पद संभाल रही हैं. मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के तौर पर इंदिरा बनर्जी की नियुक्ति के साथ ही यह इतिहास दर्ज हो गया. इसके बाद अब देश के चारों बड़े और सबसे पुराने उच्च न्यायालयों- बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और दिल्ली की कमान महिला मुख्य न्यायाधीशों के हाथ में आ चुकी है.
चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाले मद्रास हाई कोर्ट में खुद उन्हें मिलाकर छह महिला जज हैं, जबकि 53 पुरुष जज हैं. कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस निशिता निर्मल म्हात्रे हैं, जो एक दिसंबर 2016 से इस पद पर हैं. हालांकि इस हाई कोर्ट में महिला जज सिर्फ चार ही हैं.
जबकि पुरुष जजों की संख्या 35 है. वैसे, देशभर के 24 उच्च न्यायालयों के 632 जजों में भी सिर्फ 68 महिलाएं ही हैं. इसी तरह 28 जजों वाले सुप्रीम कोर्ट में भी सिर्फ एक महिला जज जस्टिस आर. भानुमति हैं. फिर भी चार बड़े उच्च न्यायालयों की कमान महिला जजों के हाथ में आने के मौके को इस दिशा में मील का पत्थर तो माना ही जा सकता है.
इन चारों उच्च न्यायालयों की स्थापना अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी. इनमें से दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जी रोहिणी हैं. जो इस पद पर अप्रैल-2014 से काम कर रही हैं. इस हाई कोर्ट में नौ महिला जज हैं. जबकि पुरुष जजों की संख्या 35 है. लेकिन वरिष्ठता के हिसाब से नंबर दो की स्थिति में महिला जज ही हैं- जस्टिस गीता मित्तल. बॉम्बे हाई कोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर के बाद नंबर दो की स्थिति पर एक महिला जस्टिस वीएम ताहिलरामनी हैं. इस उच्च न्यायालय में 61 पुरुष जज और 11 महिला जज हैं.
|
नई दिल्ली : भारतीय न्यायिक सेवा के इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया है, जब देश के चार बड़े उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के रूप में महिलाएं पद संभाल रही हैं. मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के तौर पर इंदिरा बनर्जी की नियुक्ति के साथ ही यह इतिहास दर्ज हो गया. इसके बाद अब देश के चारों बड़े और सबसे पुराने उच्च न्यायालयों- बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और दिल्ली की कमान महिला मुख्य न्यायाधीशों के हाथ में आ चुकी है. चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाले मद्रास हाई कोर्ट में खुद उन्हें मिलाकर छह महिला जज हैं, जबकि तिरेपन पुरुष जज हैं. कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस निशिता निर्मल म्हात्रे हैं, जो एक दिसंबर दो हज़ार सोलह से इस पद पर हैं. हालांकि इस हाई कोर्ट में महिला जज सिर्फ चार ही हैं. जबकि पुरुष जजों की संख्या पैंतीस है. वैसे, देशभर के चौबीस उच्च न्यायालयों के छः सौ बत्तीस जजों में भी सिर्फ अड़सठ महिलाएं ही हैं. इसी तरह अट्ठाईस जजों वाले सुप्रीम कोर्ट में भी सिर्फ एक महिला जज जस्टिस आर. भानुमति हैं. फिर भी चार बड़े उच्च न्यायालयों की कमान महिला जजों के हाथ में आने के मौके को इस दिशा में मील का पत्थर तो माना ही जा सकता है. इन चारों उच्च न्यायालयों की स्थापना अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी. इनमें से दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जी रोहिणी हैं. जो इस पद पर अप्रैल-दो हज़ार चौदह से काम कर रही हैं. इस हाई कोर्ट में नौ महिला जज हैं. जबकि पुरुष जजों की संख्या पैंतीस है. लेकिन वरिष्ठता के हिसाब से नंबर दो की स्थिति में महिला जज ही हैं- जस्टिस गीता मित्तल. बॉम्बे हाई कोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर के बाद नंबर दो की स्थिति पर एक महिला जस्टिस वीएम ताहिलरामनी हैं. इस उच्च न्यायालय में इकसठ पुरुष जज और ग्यारह महिला जज हैं.
|
प्रयागराज, जागरण संवाददाता। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संदिग्ध वाहनों की जांच के दौरान मंगलवार की सुबह फतेहपुर के कारोबारी कैलाश प्रताप सिंह की कार से दो लाख रुपये मिले। पूछताछ के दौरान पैसे के संबंध में संतोषजनक जवाब और हिसाब न देने पर उसे जब्त करते हुए थाने के मालखाने में रखवा दिया गया। इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भी भेजी गई है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले फूलपुर इलाके में भी फ्लाइंग स्कवायड ने एक कार रोककर उसमें 14 लाख रुपये बरामद किए थे। फिर आयकर विभाग ने जांच की थी।
बताया जाता है कि मंगलवार को भोर में चुनाव आयोग के निर्देश पर गठित उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट पूरामुफ्ती में जीटी रोड पर दारोगा वीरेंद्र यादव टीम के साथ संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान फतेहपुर की ओर से एक कार आती दिखाई दी। टीम ने उसे रोककर जांच की तो सीट के नीचे पांच-पांच सौ रुपये की नोट के दो लाख रुपये मिले। पूछताछ में पता चला कि कार में कैलाश प्रताप सिंह और उनका भाई शिवेंद्र प्रताप हैं। वह फतेहपुर जिले के विधायक रोड जयराम नगर के रहने वाले हैं। वह कारोबार करते हैं, लेकिन कौन सा व्यापार है, इस बार में नहीं बताया। पैसे के बारे में जब पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। थानाध्यक्ष पूरामुफ्ती उपेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि पैसा मालखाने में जमा करके रिपोर्ट भेजी गई है। अब आय़कर विभाग की टीम इस बारे में छानबीन करेगी।
यूपी चुनाव के दौरान वोटरों को रिझाने और अपने समर्थन में करने के लिए नकदी का प्रयोग किया जाता रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए ही हर चुनाव में मतदान से पहले टीमें गठित कर नकदी के लेनदेन पर रोक के लिए इसी तरह से वाहनों की चेकिंग की जाती है।
|
प्रयागराज, जागरण संवाददाता। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संदिग्ध वाहनों की जांच के दौरान मंगलवार की सुबह फतेहपुर के कारोबारी कैलाश प्रताप सिंह की कार से दो लाख रुपये मिले। पूछताछ के दौरान पैसे के संबंध में संतोषजनक जवाब और हिसाब न देने पर उसे जब्त करते हुए थाने के मालखाने में रखवा दिया गया। इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भी भेजी गई है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले फूलपुर इलाके में भी फ्लाइंग स्कवायड ने एक कार रोककर उसमें चौदह लाख रुपये बरामद किए थे। फिर आयकर विभाग ने जांच की थी। बताया जाता है कि मंगलवार को भोर में चुनाव आयोग के निर्देश पर गठित उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट पूरामुफ्ती में जीटी रोड पर दारोगा वीरेंद्र यादव टीम के साथ संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान फतेहपुर की ओर से एक कार आती दिखाई दी। टीम ने उसे रोककर जांच की तो सीट के नीचे पांच-पांच सौ रुपये की नोट के दो लाख रुपये मिले। पूछताछ में पता चला कि कार में कैलाश प्रताप सिंह और उनका भाई शिवेंद्र प्रताप हैं। वह फतेहपुर जिले के विधायक रोड जयराम नगर के रहने वाले हैं। वह कारोबार करते हैं, लेकिन कौन सा व्यापार है, इस बार में नहीं बताया। पैसे के बारे में जब पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। थानाध्यक्ष पूरामुफ्ती उपेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि पैसा मालखाने में जमा करके रिपोर्ट भेजी गई है। अब आय़कर विभाग की टीम इस बारे में छानबीन करेगी। यूपी चुनाव के दौरान वोटरों को रिझाने और अपने समर्थन में करने के लिए नकदी का प्रयोग किया जाता रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए ही हर चुनाव में मतदान से पहले टीमें गठित कर नकदी के लेनदेन पर रोक के लिए इसी तरह से वाहनों की चेकिंग की जाती है।
|
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में एक सवाल के जबाव में देश के बैंकों द्वारा बट्टे खाते में डाले गए कर्ज का आंकड़ा पेश किया. उन्होंने बताया कि बीते पांच वित्त वर्षों में कुल 10,09,511 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज (NPA) बट्टे खाते में डाले गए हैं और बैंक के बही खाते से हटा दिए गए हैं.
बीते पांच वित्तीय वर्षों में बट्टे खाते में डाले गए फंसे हुए लोन (NPA) का आंकड़ा पेश करते हुए Nirmala Sitharaman ने बताया कि RBI के दिशा-निर्देशों और अपने निदेशक मंडल की मंजूरी के तहत बैंक अपने बही-खाते को दुरुस्त करते हैं. इसी क्रम में फंसे हुए कर्ज को भी बट्टे खाते में डाला जाता है. उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के हवाले से कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान 10,09,511 करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डाला है.
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि Written Off किए गए लोन से कर्जदार को कोई लाभ नहीं होता है, वे पुनर्भुगतान के लिए उत्तरदायी बने रहेंगे और बकाये की वसूली की प्रक्रिया जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि बैंक मौजूदा उपायों के जरिए बट्टे खाते में डाली राशि की वसूली का काम जारी रखते हैं. इन उपायों में कोर्ट या कर्ज वसूली न्यायाधिकरणों में मुकदमा दायर करना, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत मामले दर्ज करना शामिल हैं.
सवाल के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान कुल 6,59,596 करोड़ रुपये की वसूली की है. इसमें बट्टे खाते में डाले गए लोन में से 1,32,036 करोड़ रुपये की वसूली भी शामिल है. इस संबंध में वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड (Bhagwat Karad) ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 SCB द्वारा 1,74,966 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टे खाते में डाले. उन्होंने कहा कि RBI के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में बट्टे खाते में डाले गए लोन में से 33,534 करोड़ रुपये की वसूली की गई है.
'बट्टे खाते में कर्ज डालना, माफ करना नहीं'
पीटीआई के मुताबिक, कंपनियों द्वारा लिए गए बड़े कर्ज को लेकर पूछे गए सवाल के उत्तर में निर्मला सीतारमण ने कहा कि उन्होंने कहा, यह कहना गलत है कि बट्टे खाते में डालकर हम उस राशि को अपना नुकसान मान रहे हैं. सरकार ने बड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज को माफ नहीं किया है. सीतारमण ने कहा कि बट्टे खाते में डालना माफ करने से अलग है.
|
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक सवाल के जबाव में देश के बैंकों द्वारा बट्टे खाते में डाले गए कर्ज का आंकड़ा पेश किया. उन्होंने बताया कि बीते पांच वित्त वर्षों में कुल दस,नौ,पाँच सौ ग्यारह करोड़ रुपये के फंसे कर्ज बट्टे खाते में डाले गए हैं और बैंक के बही खाते से हटा दिए गए हैं. बीते पांच वित्तीय वर्षों में बट्टे खाते में डाले गए फंसे हुए लोन का आंकड़ा पेश करते हुए Nirmala Sitharaman ने बताया कि RBI के दिशा-निर्देशों और अपने निदेशक मंडल की मंजूरी के तहत बैंक अपने बही-खाते को दुरुस्त करते हैं. इसी क्रम में फंसे हुए कर्ज को भी बट्टे खाते में डाला जाता है. उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के हवाले से कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान दस,नौ,पाँच सौ ग्यारह करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डाला है. वित्त मंत्री ने आगे कहा कि Written Off किए गए लोन से कर्जदार को कोई लाभ नहीं होता है, वे पुनर्भुगतान के लिए उत्तरदायी बने रहेंगे और बकाये की वसूली की प्रक्रिया जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि बैंक मौजूदा उपायों के जरिए बट्टे खाते में डाली राशि की वसूली का काम जारी रखते हैं. इन उपायों में कोर्ट या कर्ज वसूली न्यायाधिकरणों में मुकदमा दायर करना, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता, दो हज़ार सोलह के तहत मामले दर्ज करना शामिल हैं. सवाल के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान कुल छः,उनसठ,पाँच सौ छियानवे करोड़ रुपये की वसूली की है. इसमें बट्टे खाते में डाले गए लोन में से एक,बत्तीस,छत्तीस करोड़ रुपये की वसूली भी शामिल है. इस संबंध में वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने बताया कि वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस SCB द्वारा एक,चौहत्तर,नौ सौ छयासठ करोड़ रुपये के कर्ज बट्टे खाते में डाले. उन्होंने कहा कि RBI के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में बट्टे खाते में डाले गए लोन में से तैंतीस,पाँच सौ चौंतीस करोड़ रुपये की वसूली की गई है. 'बट्टे खाते में कर्ज डालना, माफ करना नहीं' पीटीआई के मुताबिक, कंपनियों द्वारा लिए गए बड़े कर्ज को लेकर पूछे गए सवाल के उत्तर में निर्मला सीतारमण ने कहा कि उन्होंने कहा, यह कहना गलत है कि बट्टे खाते में डालकर हम उस राशि को अपना नुकसान मान रहे हैं. सरकार ने बड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज को माफ नहीं किया है. सीतारमण ने कहा कि बट्टे खाते में डालना माफ करने से अलग है.
|
एक ट्रेलर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलटी खा गया। हादसे में ड्राइवर घायल हो गया। घायल को पहले चित्तौड़गढ़ उसके बाद उदयपुर रेफर किया गया। ट्रेलर में बड़े-बड़े पाइप भरे हुए थे, जो सड़क पर बिखर गए। मामला चित्तौड़ के भादसोड़ा क्षेत्र का है।
एएसआई नारायण लाल ने बताया कि कच्छ भुज, गुजरात की एक कंपनी से दो ट्रैक्टर में बड़े-बड़े पाइप भरकर यूपी ले जाया जा रहा था। इस दौरान भादसोड़ा के पास जीएसएस के समीप ट्रेलर अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया और पलटी खा गया। पुलिस का मानना है कि संभवत बड़े पाइप होने के कारण अनियंत्रित हो गया। ट्रेलर का ड्राइवर भरतपुर निवासी समंदर (28) पुत्र हरलाल सिंह गुर्जर घायल हो गया। उसके पीछे एक अन्य ट्रेलर भी आ रहा था, जिसके चालक ने ड्राइवर को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को चित्तौड़गढ़ रेफर किया। गंभीर हालत होने पर चित्तौड़ से उदयपुर रेफर किया गया। रोड पर ट्रेलर में भरे सभी पाइप बिखर गए। जाम न लगे इसके लिए पुलिस ने ट्रैफिक को सर्विस रोड पर डायवर्ट कर दिया।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
एक ट्रेलर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलटी खा गया। हादसे में ड्राइवर घायल हो गया। घायल को पहले चित्तौड़गढ़ उसके बाद उदयपुर रेफर किया गया। ट्रेलर में बड़े-बड़े पाइप भरे हुए थे, जो सड़क पर बिखर गए। मामला चित्तौड़ के भादसोड़ा क्षेत्र का है। एएसआई नारायण लाल ने बताया कि कच्छ भुज, गुजरात की एक कंपनी से दो ट्रैक्टर में बड़े-बड़े पाइप भरकर यूपी ले जाया जा रहा था। इस दौरान भादसोड़ा के पास जीएसएस के समीप ट्रेलर अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गया और पलटी खा गया। पुलिस का मानना है कि संभवत बड़े पाइप होने के कारण अनियंत्रित हो गया। ट्रेलर का ड्राइवर भरतपुर निवासी समंदर पुत्र हरलाल सिंह गुर्जर घायल हो गया। उसके पीछे एक अन्य ट्रेलर भी आ रहा था, जिसके चालक ने ड्राइवर को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को चित्तौड़गढ़ रेफर किया। गंभीर हालत होने पर चित्तौड़ से उदयपुर रेफर किया गया। रोड पर ट्रेलर में भरे सभी पाइप बिखर गए। जाम न लगे इसके लिए पुलिस ने ट्रैफिक को सर्विस रोड पर डायवर्ट कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के नवद्वीप में पार्टी की 'परिवर्तन रैली' को झंडा दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवर्तन रैली की शुरूआत सभी ने देख ली है। लोगों ने जो समर्थन दिया है, जिस तरह का जनसैलाब दिख रहा है। बंगाल में परिवर्तन की एक नई बहार देखने को मिल रही है। इसके अलावा नड्डा ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। बंगाल में विकास के नाम पर केवल तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को ही फायदा हुआ है।
उन्होंने बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की जनता के स्वास्थ्य की चिंता मोदी जी ने की थी। अब ममता जाएंगी, रास्ते का रोड़ा खत्म होगा और मोदी जी का आयुष्मान भारत बंगाल की जनता को मिलेगा।
साथ ही उन्होंने सरकार पर तनाशाह होने का आरोप भी लगाया और कहा, "ये मां, माटी, मानुष के नाम पर आई सरकार ने बंगाल की जनता के साथ धोखा किया। यहां आया क्या? तानाशाही, प्रशासन का राजनीतिकरण, पुलिस का क्रिमिनलाइजेशन और भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनाइजेशन। "
उन्होंने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा, "आज जब बंगाल के करीब 25 लाख किसानों ने केंद्र सरकार को पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए अर्जी भेजी, तो ममता जी कहती हैं कि मैं भी योजना लागू करूंगी। ममता जी अब चुनाव आ गए हैं। अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। "
इससे पहले भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने श्री श्री गौरांग जन्मस्थान आश्रम पहुंचकर पूजा की और मालदा में रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि भी दी। आपको बता दें कि जेपी नड्डा ने आज बंगाल में एक रोड शो भी किया। इसके साथ ही उन्होंने साहपुर गांव में कृषक सुरक्षा सहभोज कार्यक्रम में किसानों के साथ खाना भी खाया।
मालदा के रोड शो के दौरान नड्डा ने कहा, "मैं देख रहा हूं कि बंगाल की जनता ने टोलाबाजी की सरकार, कटमनी वाली सरकार, भ्रष्टाचार की सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंकने का मन बना लिया है। "
जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना से वंचित करने का आरोप लगाया। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार को किसान यूनियनों के राष्ट्रव्यापी चक्का जाम के दिन नड्डा ने एक बार फिर दोहराया कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसान समुदाय के कल्याण को लेकर प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इस दौरान यह भी पूछा कि 'जय श्रीराम' के नारों को लेकर बनर्जी आपा क्यों खो देती हैं? नड्डा ने दावा किया कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी राज्य के किसानों के बीच तेजी से अपनी पहचान खो रही है और इस बात का एहसास होने के बाद ही बनर्जी ने सूबे में पीएम किसान सम्मान निधि योजना लागू करने का फैसला किया है।
नड्डा ने आरोप लगाया, "ममता दी ने बंगाल के किसानों को पीएम किसान योजना के लाभों से वंचित करके अन्याय किया। उन्होंने अपने अहं को संतुष्ट करने के लिये यह कल्याणकारी योजना लागू नहीं होने दी। अब जब बंगाल के किसानों को खुद यह महसूस हुआ कि योजना लागू होनी चाहिये, तब जाकर उन्होंने कहा कि इसे लागू करेंगी। 70 लाख किसान दो साल से सालाना छह हजार रुपये की मदद से वंचित हैं। "
नड्डा ने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में 23 जनवरी को हुई घटना की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं जब यहां आया तो जय श्रीराम के नारे के साथ मेरा अभिवादन किया गया। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि ममता बनर्जी इसे सुनने के बाद गुस्सा क्यों हो जाती हैं। "
आपको बता दें कि विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में जय श्रीराम के नारे लगने के बाद ममता बनर्जी ने भाषण देने से इनकार कर दिया था। नड्डा ने आज 'जय श्री राम' के नारों के बीच मालदा में रोड शो भी किया।
|
भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के नवद्वीप में पार्टी की 'परिवर्तन रैली' को झंडा दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवर्तन रैली की शुरूआत सभी ने देख ली है। लोगों ने जो समर्थन दिया है, जिस तरह का जनसैलाब दिख रहा है। बंगाल में परिवर्तन की एक नई बहार देखने को मिल रही है। इसके अलावा नड्डा ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। बंगाल में विकास के नाम पर केवल तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को ही फायदा हुआ है। उन्होंने बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल की जनता के स्वास्थ्य की चिंता मोदी जी ने की थी। अब ममता जाएंगी, रास्ते का रोड़ा खत्म होगा और मोदी जी का आयुष्मान भारत बंगाल की जनता को मिलेगा। साथ ही उन्होंने सरकार पर तनाशाह होने का आरोप भी लगाया और कहा, "ये मां, माटी, मानुष के नाम पर आई सरकार ने बंगाल की जनता के साथ धोखा किया। यहां आया क्या? तानाशाही, प्रशासन का राजनीतिकरण, पुलिस का क्रिमिनलाइजेशन और भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनाइजेशन। " उन्होंने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा, "आज जब बंगाल के करीब पच्चीस लाख किसानों ने केंद्र सरकार को पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए अर्जी भेजी, तो ममता जी कहती हैं कि मैं भी योजना लागू करूंगी। ममता जी अब चुनाव आ गए हैं। अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। " इससे पहले भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने श्री श्री गौरांग जन्मस्थान आश्रम पहुंचकर पूजा की और मालदा में रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि भी दी। आपको बता दें कि जेपी नड्डा ने आज बंगाल में एक रोड शो भी किया। इसके साथ ही उन्होंने साहपुर गांव में कृषक सुरक्षा सहभोज कार्यक्रम में किसानों के साथ खाना भी खाया। मालदा के रोड शो के दौरान नड्डा ने कहा, "मैं देख रहा हूं कि बंगाल की जनता ने टोलाबाजी की सरकार, कटमनी वाली सरकार, भ्रष्टाचार की सरकार को जड़ से उखाड़ कर फेंकने का मन बना लिया है। " जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए राज्य के किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना से वंचित करने का आरोप लगाया। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार को किसान यूनियनों के राष्ट्रव्यापी चक्का जाम के दिन नड्डा ने एक बार फिर दोहराया कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसान समुदाय के कल्याण को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस दौरान यह भी पूछा कि 'जय श्रीराम' के नारों को लेकर बनर्जी आपा क्यों खो देती हैं? नड्डा ने दावा किया कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी राज्य के किसानों के बीच तेजी से अपनी पहचान खो रही है और इस बात का एहसास होने के बाद ही बनर्जी ने सूबे में पीएम किसान सम्मान निधि योजना लागू करने का फैसला किया है। नड्डा ने आरोप लगाया, "ममता दी ने बंगाल के किसानों को पीएम किसान योजना के लाभों से वंचित करके अन्याय किया। उन्होंने अपने अहं को संतुष्ट करने के लिये यह कल्याणकारी योजना लागू नहीं होने दी। अब जब बंगाल के किसानों को खुद यह महसूस हुआ कि योजना लागू होनी चाहिये, तब जाकर उन्होंने कहा कि इसे लागू करेंगी। सत्तर लाख किसान दो साल से सालाना छह हजार रुपये की मदद से वंचित हैं। " नड्डा ने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में तेईस जनवरी को हुई घटना की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं जब यहां आया तो जय श्रीराम के नारे के साथ मेरा अभिवादन किया गया। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि ममता बनर्जी इसे सुनने के बाद गुस्सा क्यों हो जाती हैं। " आपको बता दें कि विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में तेईस जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में जय श्रीराम के नारे लगने के बाद ममता बनर्जी ने भाषण देने से इनकार कर दिया था। नड्डा ने आज 'जय श्री राम' के नारों के बीच मालदा में रोड शो भी किया।
|
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बारिश से बाधित पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के दूसरे दिन न्यूजीलैंड की पहली पारी लड़खड़ा गई।
डरबन। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बारिश से बाधित पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के दूसरे दिन न्यूजीलैंड की पहली पारी लड़खड़ा गई। उसने दक्षिण अफ्रीका के पहली पारी में 263 रनों के जवाब में 15 रनों पर 2 विकेट खो दिए। मेहमान टीम अब भी 248 रन पीछे है जबकि उसके 8 विकेट शेष है।
मार्टिन गुप्टिल (7) व टॉम लाथम (4) को तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने आउट किया। बारिश के कारण खेल रोके जाने के समय केन विलियम्सन (2*) व रॉस टेलर (2*) क्रीज पर मौजूद थे। इससे पहले सुबह दक्षिण अफ्रीका ने 236/8 से आगे खेलना शुरू किया और शेष दोनों बल्लेबाज स्टेन (2) और डेन पीदत (9) जल्द आउट हो गए। कागिसो रबादा 32 रन बनाकर नाबाद रहे। ट्रेंट बोल्ट व नील वागनेर को 3-3 विकेट मिले।
|
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बारिश से बाधित पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के दूसरे दिन न्यूजीलैंड की पहली पारी लड़खड़ा गई। डरबन। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बारिश से बाधित पहले क्रिकेट टेस्ट मैच के दूसरे दिन न्यूजीलैंड की पहली पारी लड़खड़ा गई। उसने दक्षिण अफ्रीका के पहली पारी में दो सौ तिरेसठ रनों के जवाब में पंद्रह रनों पर दो विकेट खो दिए। मेहमान टीम अब भी दो सौ अड़तालीस रन पीछे है जबकि उसके आठ विकेट शेष है। मार्टिन गुप्टिल व टॉम लाथम को तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने आउट किया। बारिश के कारण खेल रोके जाने के समय केन विलियम्सन व रॉस टेलर क्रीज पर मौजूद थे। इससे पहले सुबह दक्षिण अफ्रीका ने दो सौ छत्तीस/आठ से आगे खेलना शुरू किया और शेष दोनों बल्लेबाज स्टेन और डेन पीदत जल्द आउट हो गए। कागिसो रबादा बत्तीस रन बनाकर नाबाद रहे। ट्रेंट बोल्ट व नील वागनेर को तीन-तीन विकेट मिले।
|
बॉलीवुड के एक्टर अक्षय कुमार ने सोमवार को साइबर क्राइम के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई है। अक्षय कुमार का आरोप है कि उनका किसी ने वीडियो एडिट करके यूट्यूब पर अपलोड किया है। इस तरह की हरकत उनकी इमेज खराब करने के लिए की गई है।
अपनी शिकायत पर अक्षय कुमार से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझसे किसी इंवेट में किसी दूसरी एक्ट्रेस को लेकर सवाल किया गया है। लेकिन जो वीडियो यूट्यूब पर शेयर किया है। उसमें किसी ने उस एक्ट्रेस के नाम की जगह तनुश्री दत्ता का नाम एडिट करके डाल दिया है। अक्षय कुमार ने इसकी शिकायत साइबर सेल के साथ यूट्यूब पर भी की है। हालाकि इस मामले की जांच चल रही है।
वहीं अक्षय कुमार ने अब साउथ सिनेमा में अपना कदम रख दिया है। उनकी फिल्म 2. 0 का टीजर लॉन्च हो गया है। बता दें 2. 0 देश की पहली ऐसी फिल्म है जिसका टीजर 3D फॉर्मेट में रिलीज किया गया है। ये फिल्म रजनीकांत की फिल्म एंथिरन यानी रोबोट का सीक्वल है। इस फिल्म में रजनीकांत और ऐश्वर्या राय ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
इस फिल्म का टीज़र एक मिनट 31 सेकेंड का है। टीजर में दिखाया गया है कि अचानक शहर के लोगों के फोन हवा में उड़ने लगते हैं, यही नहीं बल्कि दुकान में रखें सभी मोबाइल फोन भी गायब होने लगते हैं। इस घटना से पूरा शहर हैरान है. वहीँ अक्षय कुमार विलेन के तौर पर भयानक नज़र आते हैं। इस घटना के बाद इसे रोकने के लिए शहर के बड़े नेता साइंटिस्ट वसीकरण (रजनीकांत) के साथ मीटिंग करते हैं ताकि इसका कोई उपाय निकाला जाए। वहीं प्रोफेसर वसी उन्हें सलाह देते हैं कि इस समस्या से उन्हें रोबोट चिट्टी ही बचा सकता है।
गौरतलब है की इस फिल्म की खासियत ना सिर्फ इसकी कहानी बल्कि इसका वीऍफएक्स भी हैं। अक्षय कुमार ने एक बार ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी थी कि फिल्म के लिए 3000 से ज्यादा टेक्नीशियंस ने काम किया है। ऐसा माना जा रहा है की ये फिल्म बड़े बॉक्स ऑफिस नम्बर्स जुटाएगी।
|
बॉलीवुड के एक्टर अक्षय कुमार ने सोमवार को साइबर क्राइम के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई है। अक्षय कुमार का आरोप है कि उनका किसी ने वीडियो एडिट करके यूट्यूब पर अपलोड किया है। इस तरह की हरकत उनकी इमेज खराब करने के लिए की गई है। अपनी शिकायत पर अक्षय कुमार से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझसे किसी इंवेट में किसी दूसरी एक्ट्रेस को लेकर सवाल किया गया है। लेकिन जो वीडियो यूट्यूब पर शेयर किया है। उसमें किसी ने उस एक्ट्रेस के नाम की जगह तनुश्री दत्ता का नाम एडिट करके डाल दिया है। अक्षय कुमार ने इसकी शिकायत साइबर सेल के साथ यूट्यूब पर भी की है। हालाकि इस मामले की जांच चल रही है। वहीं अक्षय कुमार ने अब साउथ सिनेमा में अपना कदम रख दिया है। उनकी फिल्म दो. शून्य का टीजर लॉन्च हो गया है। बता दें दो. शून्य देश की पहली ऐसी फिल्म है जिसका टीजर तीनD फॉर्मेट में रिलीज किया गया है। ये फिल्म रजनीकांत की फिल्म एंथिरन यानी रोबोट का सीक्वल है। इस फिल्म में रजनीकांत और ऐश्वर्या राय ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म का टीज़र एक मिनट इकतीस सेकेंड का है। टीजर में दिखाया गया है कि अचानक शहर के लोगों के फोन हवा में उड़ने लगते हैं, यही नहीं बल्कि दुकान में रखें सभी मोबाइल फोन भी गायब होने लगते हैं। इस घटना से पूरा शहर हैरान है. वहीँ अक्षय कुमार विलेन के तौर पर भयानक नज़र आते हैं। इस घटना के बाद इसे रोकने के लिए शहर के बड़े नेता साइंटिस्ट वसीकरण के साथ मीटिंग करते हैं ताकि इसका कोई उपाय निकाला जाए। वहीं प्रोफेसर वसी उन्हें सलाह देते हैं कि इस समस्या से उन्हें रोबोट चिट्टी ही बचा सकता है। गौरतलब है की इस फिल्म की खासियत ना सिर्फ इसकी कहानी बल्कि इसका वीऍफएक्स भी हैं। अक्षय कुमार ने एक बार ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी थी कि फिल्म के लिए तीन हज़ार से ज्यादा टेक्नीशियंस ने काम किया है। ऐसा माना जा रहा है की ये फिल्म बड़े बॉक्स ऑफिस नम्बर्स जुटाएगी।
|
बड़गांव। कांग्रेस की ओर से प्रदेश भर में शुरू की गई महंगाई पर चर्चा को लेकर पखांजुर में सोमवार को एक दिवसीय चर्चा सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां कांग्रेसी नेताओं ने लोगों से चर्चा कर महंगाई पर केंद्र सरकार की कथित नाकामियों पर तैयार किए गए पर्चे को भी दुकानदारों को बांटते नजर आए। इस दौरान कांग्रेस ने महंगाई का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले का शवयात्रा निकालकर नया बाजार चौक के पास पुतले का दहन किया। साथ ही केंध सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंकज साहा की अध्यक्षता में सम्मेलन एवं रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान पंकज साहा ने कहा कि कांग्रेस की ओर से देश में बढ़ती महंगाई पर चर्चा करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लोगों की राय ली जा रही है। देश में लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस की तरफ से चार सितंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी है, तभी से देश में महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ रसोई गैस, खाद्य पदार्थों की कीमतें लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। देश का हर वर्ग केंद्र सरकार की गलत नीतियों से परेशान है। कांग्रेस आम लोगों की पार्टी है । लोगों की आवाज बन महंगाई, बेरोजगारी जैसे मामले के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
कार्यक्रम में अमल बड़ाई, संतोष कीर्तनिया, विकास मंडल, हर्षित मृधा, निरंजन ढाली, सुधीन बैरागी, जगदीश साहा, सुशीला मंडल, भगीरथ हालदार, हरिदास सरकार, अमूल्य माझी, इंद्रजीत परामणिक, अभिराज ढाली, निर्मल विस्वास, विकास हालदार, पंकज घोष, रंजीत बैरागी, अमल बैनर्जी, मोतीलाल शील, रंगलाल विस्वास, स्वपन विस्वास, साधन विस्वास, छोटू बर्मन, अवनी विस्वास समेत सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे ।
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी आकाश महंत ने कहा कि वर्तमान में आम आदमी बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार की गलत नीतियों से करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया है, दूसरी तरफ महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 2014 में एक गैस सिलिंडर की कीमत 400 रुपये थी, आज यह 1100 रुपये हो गई है, जिससे लोगों के घर का बजट बिगड़ गया है। लोग मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का खामियाजा भुगत रहे हैं। वहीं भूपेश बघेल की सरकार अपने राज्य की जनता को महंगाई से राहत देने के लिए मूल्यों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस के उपाध्यक्ष विकास मंडल ने कहा कि देश में महंगाई बेकाबू हो गई है। केंद्र सरकार आवश्यक वस्तुओं के दाम में हो रही बढ़ोतरी पर लगाम लगाने में सफल नहीं हो रही है। बच्चों के लिए दूध के मूल्य में चार रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। पहले कांग्रेस सरकार में वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन टिकट में छूट मिलती थी, ग्यारह साल तक के बच्चों को आधा टिकट मिलता था, लेकिन मोदी सरकार में यह छूट पहले ही खत्म कर दी गई। रेलवे अब आम लोगों की सवारी नहीं रही।
|
बड़गांव। कांग्रेस की ओर से प्रदेश भर में शुरू की गई महंगाई पर चर्चा को लेकर पखांजुर में सोमवार को एक दिवसीय चर्चा सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां कांग्रेसी नेताओं ने लोगों से चर्चा कर महंगाई पर केंद्र सरकार की कथित नाकामियों पर तैयार किए गए पर्चे को भी दुकानदारों को बांटते नजर आए। इस दौरान कांग्रेस ने महंगाई का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले का शवयात्रा निकालकर नया बाजार चौक के पास पुतले का दहन किया। साथ ही केंध सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंकज साहा की अध्यक्षता में सम्मेलन एवं रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान पंकज साहा ने कहा कि कांग्रेस की ओर से देश में बढ़ती महंगाई पर चर्चा करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लोगों की राय ली जा रही है। देश में लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस की तरफ से चार सितंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी है, तभी से देश में महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है। पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ रसोई गैस, खाद्य पदार्थों की कीमतें लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। देश का हर वर्ग केंद्र सरकार की गलत नीतियों से परेशान है। कांग्रेस आम लोगों की पार्टी है । लोगों की आवाज बन महंगाई, बेरोजगारी जैसे मामले के लिए संघर्ष जारी रखेगी। कार्यक्रम में अमल बड़ाई, संतोष कीर्तनिया, विकास मंडल, हर्षित मृधा, निरंजन ढाली, सुधीन बैरागी, जगदीश साहा, सुशीला मंडल, भगीरथ हालदार, हरिदास सरकार, अमूल्य माझी, इंद्रजीत परामणिक, अभिराज ढाली, निर्मल विस्वास, विकास हालदार, पंकज घोष, रंजीत बैरागी, अमल बैनर्जी, मोतीलाल शील, रंगलाल विस्वास, स्वपन विस्वास, साधन विस्वास, छोटू बर्मन, अवनी विस्वास समेत सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे । कांग्रेस के मीडिया प्रभारी आकाश महंत ने कहा कि वर्तमान में आम आदमी बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार की गलत नीतियों से करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया है, दूसरी तरफ महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दो हज़ार चौदह में एक गैस सिलिंडर की कीमत चार सौ रुपयापये थी, आज यह एक हज़ार एक सौ रुपयापये हो गई है, जिससे लोगों के घर का बजट बिगड़ गया है। लोग मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का खामियाजा भुगत रहे हैं। वहीं भूपेश बघेल की सरकार अपने राज्य की जनता को महंगाई से राहत देने के लिए मूल्यों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष विकास मंडल ने कहा कि देश में महंगाई बेकाबू हो गई है। केंद्र सरकार आवश्यक वस्तुओं के दाम में हो रही बढ़ोतरी पर लगाम लगाने में सफल नहीं हो रही है। बच्चों के लिए दूध के मूल्य में चार रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। पहले कांग्रेस सरकार में वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन टिकट में छूट मिलती थी, ग्यारह साल तक के बच्चों को आधा टिकट मिलता था, लेकिन मोदी सरकार में यह छूट पहले ही खत्म कर दी गई। रेलवे अब आम लोगों की सवारी नहीं रही।
|
Lenovo IdeaPad स्लिम 3i क्रोमबुक की कीमत 25000 रुपये से थोड़ी अधिक है, लेकिन यदि आप थोड़ा अतिरिक्त खर्च करने को तैयार हैं तो आपको एक लैपटॉप मिलता है जो अच्छे प्रदर्शन के साथ अच्छी बिल्ड क्वालिटी के साथ आता है। लैपटॉप लुक्स विभाग में सुस्त नहीं पड़ता है, जिसमें आकर्षक ब्रश्ड मेटल फिनिश है। समग्र डिजाइन मजबूत और मजबूत है। लैपटॉप में 64GB eMMC स्टोरेज के साथ Intel Celeron N4020 है। हालाँकि जब IO पोर्ट की पेशकश की बात आती है तो आपके पास बहुत सारे कनेक्टिविटी विकल्प होते हैं। जैसा कि यह एक क्रोमबुक है, यह क्रोम ओएस पर चलता है, जो तेज और कुशल है, खासकर छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए। आपको 14-इंच का FHD IPS टच डिस्प्ले भी मिला है, जो ज़रूरत पड़ने पर स्टाइलस को भी सपोर्ट करता है।
Infinix X1 Neo लैपटॉप 25000 रुपये से कम कीमत के सर्वश्रेष्ठ लैपटॉप की इस सूची में है क्योंकि यह छात्रों या कामकाजी पेशेवरों के लिए बजट ऑल-पर्पस लैपटॉप के रूप में सभी आधारों को कवर करने का प्रबंधन करता है। यह क्वाड कोर इंटेल सेलेरॉन प्रोसेसर के साथ आता है, जिसे 8 जीबी एलपीडीडीआर4एक्स रैम के साथ जोड़ा गया है, जो लगभग 25000 रुपये की कीमत वाले लैपटॉप के लिए अच्छा है। स्टोरेज के मोर्चे पर, आपके पास 256 जीबी एसएसडी स्टोरेज है, जहां गति स्वाभाविक रूप से एचडीडी की तुलना में बहुत तेज होगी। . यह इस मूल्य वर्ग के लिए एक प्रभावशाली 14-इंच FHD IPS डिस्प्ले का दावा करता है, जो कि अच्छी बिल्ड क्वालिटी के साथ है, जो कि इस प्राइस रेंज में बहुत सारे लैपटॉप की पेशकश नहीं कर सकता है। 1.24 किग्रा वजन वाला लैपटॉप भी इस सूची में सबसे हल्के लैपटॉप में से एक है। लैपटॉप को छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के कार्यों को संभालने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
25000 रुपये से कम के सर्वश्रेष्ठ लैपटॉप की तलाश करते समय, एसर का एस्पायर लैपटॉप एक ऐसा है जो पॉप अप करता रहेगा। यहां तक कि एक बजट पर, आपको अच्छे स्पेक्स मिलते हैं, जैसे कि AMD 3020e डुअल कोर प्रोसेसर 8GB DDR4 रैम के साथ जोड़ा गया है। आपको एक प्रभावशाली 2TB स्टोरेज भी मिलता है, जो कि लैपटॉप से भी बहुत अधिक है, इसकी कीमत की पेशकश को भी दोगुना कर देता है। यह 256GB M.2 PCIe SSD के अतिरिक्त है। आपके पास IO पोर्ट के साथ-साथ 14-इंच HD डिस्प्ले के साथ अच्छी पेशकश है। इन सभी विशिष्टताओं के साथ आपके पास यहां काम या छात्रों के लिए एक अच्छा सर्व-उद्देश्यीय लैपटॉप है। एसर अस्पायर 3 के विभिन्न विन्यास भी हैं, यदि आप अधिक शक्तिशाली एएमडी और इंटेल प्रोसेसर सहित 25000 रुपये के बजट में जाने के इच्छुक हैं।
एक और बेहतरीन क्रोमबुक जिसे आप 25000 रुपये से कम कीमत में खरीद सकते हैं वह एचपी का है। एचपी क्रोमबुक 14ए 14 इंच के एचडी डिस्प्ले के साथ आता है और लैपटॉप का पूरा वजन सिर्फ 1 किलोग्राम से अधिक है। एचपी क्रोमबुक में भी एक भव्य डिजाइन है क्योंकि पूरा लैपटॉप स्नो व्हाइट रंग में कवर किया गया है। अच्छा दिखने के अलावा, यह ARM-आधारित MediaTek Kompanio 500 CPU, 4GB LPDDR4X RAM और 64GB स्टोरेज के कारण एक परफ़ॉर्मर भी है।
इस सूची के लिए लगभग 27,000 रुपये में एसर एक्स्टेंसा 15 बजट से थोड़ा अधिक है, लेकिन आपको 2000 से अधिक के लिए क्या मिलता है? वैसे आपको Intel Pentium Silver N5030 प्रोसेसर मिला है, जो एक क्वाड-कोर प्रोसेसर है। निश्चित रूप से यह इस मूल्य वर्ग में आमतौर पर पाए जाने वाले डुअल-कोर प्रोसेसर पर एक पैर रखता है। इसके बाद, आपको 1 टीबी तक का एचडीडी स्टोरेज मिलता है जो कि बहुत अच्छा है। इस मूल्य खंड में भी 4 जीबी रैम आदर्श है, और छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के उपयोग के मामले के लिए पर्याप्त से अधिक होना चाहिए, यहां तक कि एकीकृत इंटेल यूएचडी 605 जीपीयू के लिए कुछ बहुत ही हल्के गेमिंग के लिए धन्यवाद। मीडिया सामग्री को आसानी से उपभोग करने के लिए आपको 15.6 इंच, 1366×768 रिज़ॉल्यूशन वाली स्क्रीन भी मिलती है।
|
Lenovo IdeaPad स्लिम तीनi क्रोमबुक की कीमत पच्चीस हज़ार रुपयापये से थोड़ी अधिक है, लेकिन यदि आप थोड़ा अतिरिक्त खर्च करने को तैयार हैं तो आपको एक लैपटॉप मिलता है जो अच्छे प्रदर्शन के साथ अच्छी बिल्ड क्वालिटी के साथ आता है। लैपटॉप लुक्स विभाग में सुस्त नहीं पड़ता है, जिसमें आकर्षक ब्रश्ड मेटल फिनिश है। समग्र डिजाइन मजबूत और मजबूत है। लैपटॉप में चौंसठGB eMMC स्टोरेज के साथ Intel Celeron Nचार हज़ार बीस है। हालाँकि जब IO पोर्ट की पेशकश की बात आती है तो आपके पास बहुत सारे कनेक्टिविटी विकल्प होते हैं। जैसा कि यह एक क्रोमबुक है, यह क्रोम ओएस पर चलता है, जो तेज और कुशल है, खासकर छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए। आपको चौदह-इंच का FHD IPS टच डिस्प्ले भी मिला है, जो ज़रूरत पड़ने पर स्टाइलस को भी सपोर्ट करता है। Infinix Xएक Neo लैपटॉप पच्चीस हज़ार रुपयापये से कम कीमत के सर्वश्रेष्ठ लैपटॉप की इस सूची में है क्योंकि यह छात्रों या कामकाजी पेशेवरों के लिए बजट ऑल-पर्पस लैपटॉप के रूप में सभी आधारों को कवर करने का प्रबंधन करता है। यह क्वाड कोर इंटेल सेलेरॉन प्रोसेसर के साथ आता है, जिसे आठ जीबी एलपीडीडीआरचारएक्स रैम के साथ जोड़ा गया है, जो लगभग पच्चीस हज़ार रुपयापये की कीमत वाले लैपटॉप के लिए अच्छा है। स्टोरेज के मोर्चे पर, आपके पास दो सौ छप्पन जीबी एसएसडी स्टोरेज है, जहां गति स्वाभाविक रूप से एचडीडी की तुलना में बहुत तेज होगी। . यह इस मूल्य वर्ग के लिए एक प्रभावशाली चौदह-इंच FHD IPS डिस्प्ले का दावा करता है, जो कि अच्छी बिल्ड क्वालिटी के साथ है, जो कि इस प्राइस रेंज में बहुत सारे लैपटॉप की पेशकश नहीं कर सकता है। एक.चौबीस किग्रा वजन वाला लैपटॉप भी इस सूची में सबसे हल्के लैपटॉप में से एक है। लैपटॉप को छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के कार्यों को संभालने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। पच्चीस हज़ार रुपयापये से कम के सर्वश्रेष्ठ लैपटॉप की तलाश करते समय, एसर का एस्पायर लैपटॉप एक ऐसा है जो पॉप अप करता रहेगा। यहां तक कि एक बजट पर, आपको अच्छे स्पेक्स मिलते हैं, जैसे कि AMD तीन हज़ार बीसe डुअल कोर प्रोसेसर आठGB DDRचार रैम के साथ जोड़ा गया है। आपको एक प्रभावशाली दोTB स्टोरेज भी मिलता है, जो कि लैपटॉप से भी बहुत अधिक है, इसकी कीमत की पेशकश को भी दोगुना कर देता है। यह दो सौ छप्पनGB M.दो PCIe SSD के अतिरिक्त है। आपके पास IO पोर्ट के साथ-साथ चौदह-इंच HD डिस्प्ले के साथ अच्छी पेशकश है। इन सभी विशिष्टताओं के साथ आपके पास यहां काम या छात्रों के लिए एक अच्छा सर्व-उद्देश्यीय लैपटॉप है। एसर अस्पायर तीन के विभिन्न विन्यास भी हैं, यदि आप अधिक शक्तिशाली एएमडी और इंटेल प्रोसेसर सहित पच्चीस हज़ार रुपयापये के बजट में जाने के इच्छुक हैं। एक और बेहतरीन क्रोमबुक जिसे आप पच्चीस हज़ार रुपयापये से कम कीमत में खरीद सकते हैं वह एचपी का है। एचपी क्रोमबुक चौदहए चौदह इंच के एचडी डिस्प्ले के साथ आता है और लैपटॉप का पूरा वजन सिर्फ एक किलोग्रामग्राम से अधिक है। एचपी क्रोमबुक में भी एक भव्य डिजाइन है क्योंकि पूरा लैपटॉप स्नो व्हाइट रंग में कवर किया गया है। अच्छा दिखने के अलावा, यह ARM-आधारित MediaTek Kompanio पाँच सौ CPU, चारGB LPDDRचारX RAM और चौंसठGB स्टोरेज के कारण एक परफ़ॉर्मर भी है। इस सूची के लिए लगभग सत्ताईस,शून्य रुपयापये में एसर एक्स्टेंसा पंद्रह बजट से थोड़ा अधिक है, लेकिन आपको दो हज़ार से अधिक के लिए क्या मिलता है? वैसे आपको Intel Pentium Silver Nपाँच हज़ार तीस प्रोसेसर मिला है, जो एक क्वाड-कोर प्रोसेसर है। निश्चित रूप से यह इस मूल्य वर्ग में आमतौर पर पाए जाने वाले डुअल-कोर प्रोसेसर पर एक पैर रखता है। इसके बाद, आपको एक टीबी तक का एचडीडी स्टोरेज मिलता है जो कि बहुत अच्छा है। इस मूल्य खंड में भी चार जीबी रैम आदर्श है, और छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के उपयोग के मामले के लिए पर्याप्त से अधिक होना चाहिए, यहां तक कि एकीकृत इंटेल यूएचडी छः सौ पाँच जीपीयू के लिए कुछ बहुत ही हल्के गेमिंग के लिए धन्यवाद। मीडिया सामग्री को आसानी से उपभोग करने के लिए आपको पंद्रह.छः इंच, एक हज़ार तीन सौ छयासठ×सात सौ अड़सठ रिज़ॉल्यूशन वाली स्क्रीन भी मिलती है।
|
आज से नए महीने की शुरुआत हो चुकी है. अप्रैल के महीने से हिंदू नव वर्ष शुरू होता है. ऐसे में अन्य सभी महीनों की तुलना में इस महीने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस महीने रामनवमी, उत्तरायण, चैत्र अमावस्या, चैत्र पूर्णिमा, जैसे ढेरों व्रत और उत्सव भी मनाये जाते हैं. इस महीने कई गोचर पड़ेंगे और ग्रह नक्षत्रों की चाल भी बदलेगी. इन सबका असर सभी राशियों पर भी पड़ने वाला है. मासिक राशिफल (Masik Rashifal April 2022) से जानते हैं कि अप्रैल का महीना किनके लिए नए अवसर लेकर आया है और किन राशियों को सावधानी बरतनी होगी.
मेष- मेष राशि के जातकों के लिए यह माह कई क्षेत्रों में सफलता लेकर आएगा. हालांकि कुछ क्षेत्रों में परेशानी होगी. करियर के क्षेत्र में खूब मेहनत करेंगे. यह समय नौकरीपेशा लोगों के लिए चुनौती भरा रहेगा. घर परिवार में तनाव बढ़ेगा और विवाद हो सकता है. इस दौरान आपकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. आपका आर्थिक पक्ष भी मजबूत रहने वाला है क्योंकि एकादश भाव में बृहस्पति और दूसरे भाव में राहु की उपस्थिति रहेगी. कारोबार करने वाले जातकों के लिए यह समय अच्छा होगा. स्वास्थ्य के मामले में भी यह माह बेहतर रहने वाला है. इस दौरान आपको छोटी-मोटी बीमारियों से निजात मिलेगी.
वृषभ- वृषभ राशि के जातकों के लिए यह माह हर क्षेत्र में अच्छा रहने वाला है. आपको भाग्य का पूर्ण साथ मिलेगा और इसका असर आपकी नौकरी और कारोबार पर नजर आएगा. आपकी दफ्तर में तरक्की हो सकती है. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय बढ़िया रहेगा हालांकि परिवार में तनातनी हो सकती है. माह के मध्य में बुध का राहु के साथ द्वादश भाव में होना घर परिवार में मुश्किलें बढ़ा सकता है. आपकी लव लाइफ इस दौरान सामान्य रहेगी और साथी के साथ मनमुटाव दूर हो जाएगा. इस माह आपके लिए धन लाभ का योग बनेगा. आपकी आमदनी बढ़े सकती है. स्वास्थ्य को लेकर आपको सावधान रहने की जरूरत होगी, छोटी-मोटी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं.
मिथुन- मिथुन राशि के जातकों के लिए यह माह कई क्षेत्रों में कामयाबी लेकर आएगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा वहीं कारोबार से जुड़े लोगों की भी जबरदस्त तरक्की होगी. विद्यार्थियों के लिए यह माह अच्छा होगा और वो पढ़ाई में गंभीरता से जुटेंगे. इस दौरान परिवार में अशांति हो सकती है क्योंकि महीने की शुरुआत में दूसरे भाव पर शनि की दृष्टि रहेगी. इस माह आपके प्रेम की डोर मजबूत होगी और विवाह का भी फैसला कर सकते हैं. रोग भाव के स्वामी मंगल के नवम भाव में होने से आपकी सेहत में सुधार दिखेगा. अगर पहले से किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो इस वक्त इलाज से फायदा होगा.
कर्क- इस राशि के जातकों के लिए अप्रैल का महीना सफलता का द्वार खोलेगा. विदेशी संस्थान में काम कर रहे लोगों को सफलता मिलने वाली है. इस दौरान नई नौकरी का भी योग है. विदेशी संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा. घर का माहौल सुखमय रहेगा और आपसी तनातनी खत्म हो जाएगी. हालांकि इस दौरान लव लाइफ में कठिनाई आएगी और लवमेट के साथ दूरियां बढ़ सकती हैं. नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के साथ उनकी आमदनी का रास्ता खुलेगा. स्वास्थ्य के मामले में भी बृहस्पति के भाग्य स्थान पर होने से आपको फायदा होगा.
सिंह- सिंह राशि के जातकों के लिए यह माह सफलता और खुशियां लेकर आया है. नौकरी पेशा लोगों की तरक्की होगी. कारोबारियों और व्यापारियों के लिए भी यह समय अच्छा रहने वाला है. विद्यार्थियों को भी उनकी मेहनत के अनुकूल परिणाम मिलेगा. इस माह आपकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. लवमेट के साथ आपका रिश्ता मजबूत होगा और प्रेम बढ़ेगा. इस दौरान मानसिक और शारीरिक दूरियां खत्म होंगी. आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आपको बुध के भाग्य स्थान पर स्थित होने का फायदा मिलेगा. स्वास्थ्य के मामले में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
कन्या- इस राशि के जातकों के लिए यह माह सामान्य रहने वाला है. हालांकि कई मामलों में आपको परेशानी का सामना करना होगा. करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. नौकरीपेशा लोगों को दफ्तर में तनाव झेलना पड़ सकता. विद्यार्थियों को शनि के साथ मंगल का योग होने से फायदा मिलेगा. छात्र पढ़ाई-लिखाई में मेहनत करेंगे. पारिवारिक जीवन इस दौरान कठिनाई से भरा रहेगा. पारिवारिक संपत्ति को लेकर भाइयों से मनमुटाव हो सकता है. दांपत्य जीवन में भी परेशानियां आ सकती हैं. इस दौरान आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और आपको धन लाभ होगा. कारोबार में लंबे समय से रुका हुआ धन भी आपको मिल जाएगा. स्वास्थ्य के मामले में राहत मिलेगी.
तुला- आपके लिए यह माह कई क्षेत्रों में कामयाबी लेकर आएगा. आपको कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी. रोजगार के साथ कारोबार में भी आप नई दिशा तलाश करेंगे. लव लाइफ अच्छी होगी और रिश्तों में मजबूती आएगी. कई जातकों के लिए विवाह का भी योग है. इस दौरान आपका आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. सरकारी नौकरी वालों के लिए यह समय अनुकूल रहेगा और उनका प्रमोशन भी हो सकता है. स्वास्थ्य के मामले में भी यह समय आपके लिए अच्छा रहने वाला है. सूर्य छठे भाव में रहेंगे और आपकी सेहत में सुधार होगा.
वृश्चिक- इस राशि के जातकों को इस माह कार्यक्षेत्र में कामयाबी मिलेगी. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय अच्छा रहेगा. घर परिवार की स्थिति अच्छी रहेगी. इस माह आपकी लव लाइफ में परेशानी आ सकती है. दांपत्य जीवन में भी तनातनी रहने की संभावना है. हालांकि इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी. आपकी आमदनी बढ़ेगी और फायदा होगा. कई जातकों को गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है. इस दौरान स्वास्थ्य को लेकर चल रही परेशानी दूर होगी. मंगल के शुक्र और बृहस्पति के साथ चतुर्थ भाव में युक्त होने से आपको बीमारियों से छुटकारा मिलेगा.
धनु- आपके लिए यह माह सामान्य रहेगा. जिन्दगी के कुछ क्षेत्रों में सफलता मिलेगी तो कुछ में परेशानी उठानी पड़ सकती है. इस दौरान रोजगार के नए मौके मिलेंगे और सरकारी क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को फायदा होगा. विद्यार्थियों के आमतौर पर मेहनत करनी होगी हालांकि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कामयाबी मिल सकती है. इस दौरान आपका पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा. घर के सदस्यों के साथ आपका तालमेल अच्छा होगा. शनि की वजह से इस माह आपको मेहनत तो करनी पड़ेगी लेकिन उसका फल भी मिलेगा. कारोबार में आप अच्छा पैसा कमाएंगे. नौकरी पेशा लोगों के लिए आमदनी का जरिया खुलेगा.
मकर- मकर राशि के जातकों के लिए यह माह तरक्की और सफलता लेकर आएगा. घर परिवार के मामले में आपको सुकून मिलेगा, आपसी प्रेम बना रहेगा. परिवार में आपका कद भी ऊंचा होगा. इसी तरह प्रेम और दोस्ती के मामले में भी आप खुद को खुशनसीब समझेंगे. दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ भी अच्छे पल बिताने का मौका मिलेगा. तनाव के भी कुछ पल आ सकते हैं लेकिन आपकी वाकपटुता काम आएगी. इस दौरान आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. कारोबार में धन लाभ होगा. स्वास्थ्य संबंधी छोटी-छोटी परेशानियां हो सकती हैं.
कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए यह माह करियर और आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहेगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा. कारोबार में भी आपको तरक्की मिलेगी. परिवार में पुरानी बातों पर तनाव हो सकता है. कुंभ राशि के जातक इस दौरान परिवार में केंद्रीय भूमिका में आ जाएंगे. इस दौरान जातकों की लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. साथी के साथ यादगार वक्त गुजारने का मौका मिलेगा. कई जातकों की प्रेम कहानी भी शुरू हो सकती है. इस माह आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहेगी. शनि की पूर्ण दृष्टि होने से किसी बड़े रोग से छुटकारा मिलेगा.
मीन- इन राशि के जातकों के लिए यह माह मिला-जुला रहने वाला है. करियर के मामले में मीन राशि के जातकों को कठिनाई होगी. नौकरी में बाधा उत्पन्न हो सकती है और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ सकता है. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय आसान नहीं रहेगा. पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा. हालांकि छोटी बात को लेकर घर के सदस्यों के बीच कहासुनी हो सकती है. शनि की पूर्ण दृष्टि होने से लव लाइफ में भी परेशानी आएगी. आर्थिक दृष्टिकोण से यह समय फलदायक रहेगा. आमदनी का योग बनेगा और कई जातकों को गुप्त धन की भी प्राप्ति होगी.
|
आज से नए महीने की शुरुआत हो चुकी है. अप्रैल के महीने से हिंदू नव वर्ष शुरू होता है. ऐसे में अन्य सभी महीनों की तुलना में इस महीने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस महीने रामनवमी, उत्तरायण, चैत्र अमावस्या, चैत्र पूर्णिमा, जैसे ढेरों व्रत और उत्सव भी मनाये जाते हैं. इस महीने कई गोचर पड़ेंगे और ग्रह नक्षत्रों की चाल भी बदलेगी. इन सबका असर सभी राशियों पर भी पड़ने वाला है. मासिक राशिफल से जानते हैं कि अप्रैल का महीना किनके लिए नए अवसर लेकर आया है और किन राशियों को सावधानी बरतनी होगी. मेष- मेष राशि के जातकों के लिए यह माह कई क्षेत्रों में सफलता लेकर आएगा. हालांकि कुछ क्षेत्रों में परेशानी होगी. करियर के क्षेत्र में खूब मेहनत करेंगे. यह समय नौकरीपेशा लोगों के लिए चुनौती भरा रहेगा. घर परिवार में तनाव बढ़ेगा और विवाद हो सकता है. इस दौरान आपकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. आपका आर्थिक पक्ष भी मजबूत रहने वाला है क्योंकि एकादश भाव में बृहस्पति और दूसरे भाव में राहु की उपस्थिति रहेगी. कारोबार करने वाले जातकों के लिए यह समय अच्छा होगा. स्वास्थ्य के मामले में भी यह माह बेहतर रहने वाला है. इस दौरान आपको छोटी-मोटी बीमारियों से निजात मिलेगी. वृषभ- वृषभ राशि के जातकों के लिए यह माह हर क्षेत्र में अच्छा रहने वाला है. आपको भाग्य का पूर्ण साथ मिलेगा और इसका असर आपकी नौकरी और कारोबार पर नजर आएगा. आपकी दफ्तर में तरक्की हो सकती है. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय बढ़िया रहेगा हालांकि परिवार में तनातनी हो सकती है. माह के मध्य में बुध का राहु के साथ द्वादश भाव में होना घर परिवार में मुश्किलें बढ़ा सकता है. आपकी लव लाइफ इस दौरान सामान्य रहेगी और साथी के साथ मनमुटाव दूर हो जाएगा. इस माह आपके लिए धन लाभ का योग बनेगा. आपकी आमदनी बढ़े सकती है. स्वास्थ्य को लेकर आपको सावधान रहने की जरूरत होगी, छोटी-मोटी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. मिथुन- मिथुन राशि के जातकों के लिए यह माह कई क्षेत्रों में कामयाबी लेकर आएगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा वहीं कारोबार से जुड़े लोगों की भी जबरदस्त तरक्की होगी. विद्यार्थियों के लिए यह माह अच्छा होगा और वो पढ़ाई में गंभीरता से जुटेंगे. इस दौरान परिवार में अशांति हो सकती है क्योंकि महीने की शुरुआत में दूसरे भाव पर शनि की दृष्टि रहेगी. इस माह आपके प्रेम की डोर मजबूत होगी और विवाह का भी फैसला कर सकते हैं. रोग भाव के स्वामी मंगल के नवम भाव में होने से आपकी सेहत में सुधार दिखेगा. अगर पहले से किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो इस वक्त इलाज से फायदा होगा. कर्क- इस राशि के जातकों के लिए अप्रैल का महीना सफलता का द्वार खोलेगा. विदेशी संस्थान में काम कर रहे लोगों को सफलता मिलने वाली है. इस दौरान नई नौकरी का भी योग है. विदेशी संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा. घर का माहौल सुखमय रहेगा और आपसी तनातनी खत्म हो जाएगी. हालांकि इस दौरान लव लाइफ में कठिनाई आएगी और लवमेट के साथ दूरियां बढ़ सकती हैं. नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के साथ उनकी आमदनी का रास्ता खुलेगा. स्वास्थ्य के मामले में भी बृहस्पति के भाग्य स्थान पर होने से आपको फायदा होगा. सिंह- सिंह राशि के जातकों के लिए यह माह सफलता और खुशियां लेकर आया है. नौकरी पेशा लोगों की तरक्की होगी. कारोबारियों और व्यापारियों के लिए भी यह समय अच्छा रहने वाला है. विद्यार्थियों को भी उनकी मेहनत के अनुकूल परिणाम मिलेगा. इस माह आपकी लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. लवमेट के साथ आपका रिश्ता मजबूत होगा और प्रेम बढ़ेगा. इस दौरान मानसिक और शारीरिक दूरियां खत्म होंगी. आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आपको बुध के भाग्य स्थान पर स्थित होने का फायदा मिलेगा. स्वास्थ्य के मामले में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. कन्या- इस राशि के जातकों के लिए यह माह सामान्य रहने वाला है. हालांकि कई मामलों में आपको परेशानी का सामना करना होगा. करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. नौकरीपेशा लोगों को दफ्तर में तनाव झेलना पड़ सकता. विद्यार्थियों को शनि के साथ मंगल का योग होने से फायदा मिलेगा. छात्र पढ़ाई-लिखाई में मेहनत करेंगे. पारिवारिक जीवन इस दौरान कठिनाई से भरा रहेगा. पारिवारिक संपत्ति को लेकर भाइयों से मनमुटाव हो सकता है. दांपत्य जीवन में भी परेशानियां आ सकती हैं. इस दौरान आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और आपको धन लाभ होगा. कारोबार में लंबे समय से रुका हुआ धन भी आपको मिल जाएगा. स्वास्थ्य के मामले में राहत मिलेगी. तुला- आपके लिए यह माह कई क्षेत्रों में कामयाबी लेकर आएगा. आपको कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी. रोजगार के साथ कारोबार में भी आप नई दिशा तलाश करेंगे. लव लाइफ अच्छी होगी और रिश्तों में मजबूती आएगी. कई जातकों के लिए विवाह का भी योग है. इस दौरान आपका आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. सरकारी नौकरी वालों के लिए यह समय अनुकूल रहेगा और उनका प्रमोशन भी हो सकता है. स्वास्थ्य के मामले में भी यह समय आपके लिए अच्छा रहने वाला है. सूर्य छठे भाव में रहेंगे और आपकी सेहत में सुधार होगा. वृश्चिक- इस राशि के जातकों को इस माह कार्यक्षेत्र में कामयाबी मिलेगी. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय अच्छा रहेगा. घर परिवार की स्थिति अच्छी रहेगी. इस माह आपकी लव लाइफ में परेशानी आ सकती है. दांपत्य जीवन में भी तनातनी रहने की संभावना है. हालांकि इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी. आपकी आमदनी बढ़ेगी और फायदा होगा. कई जातकों को गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है. इस दौरान स्वास्थ्य को लेकर चल रही परेशानी दूर होगी. मंगल के शुक्र और बृहस्पति के साथ चतुर्थ भाव में युक्त होने से आपको बीमारियों से छुटकारा मिलेगा. धनु- आपके लिए यह माह सामान्य रहेगा. जिन्दगी के कुछ क्षेत्रों में सफलता मिलेगी तो कुछ में परेशानी उठानी पड़ सकती है. इस दौरान रोजगार के नए मौके मिलेंगे और सरकारी क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को फायदा होगा. विद्यार्थियों के आमतौर पर मेहनत करनी होगी हालांकि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कामयाबी मिल सकती है. इस दौरान आपका पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा. घर के सदस्यों के साथ आपका तालमेल अच्छा होगा. शनि की वजह से इस माह आपको मेहनत तो करनी पड़ेगी लेकिन उसका फल भी मिलेगा. कारोबार में आप अच्छा पैसा कमाएंगे. नौकरी पेशा लोगों के लिए आमदनी का जरिया खुलेगा. मकर- मकर राशि के जातकों के लिए यह माह तरक्की और सफलता लेकर आएगा. घर परिवार के मामले में आपको सुकून मिलेगा, आपसी प्रेम बना रहेगा. परिवार में आपका कद भी ऊंचा होगा. इसी तरह प्रेम और दोस्ती के मामले में भी आप खुद को खुशनसीब समझेंगे. दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ भी अच्छे पल बिताने का मौका मिलेगा. तनाव के भी कुछ पल आ सकते हैं लेकिन आपकी वाकपटुता काम आएगी. इस दौरान आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा. कारोबार में धन लाभ होगा. स्वास्थ्य संबंधी छोटी-छोटी परेशानियां हो सकती हैं. कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए यह माह करियर और आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहेगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा. कारोबार में भी आपको तरक्की मिलेगी. परिवार में पुरानी बातों पर तनाव हो सकता है. कुंभ राशि के जातक इस दौरान परिवार में केंद्रीय भूमिका में आ जाएंगे. इस दौरान जातकों की लव लाइफ अच्छी रहने वाली है. साथी के साथ यादगार वक्त गुजारने का मौका मिलेगा. कई जातकों की प्रेम कहानी भी शुरू हो सकती है. इस माह आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहेगी. शनि की पूर्ण दृष्टि होने से किसी बड़े रोग से छुटकारा मिलेगा. मीन- इन राशि के जातकों के लिए यह माह मिला-जुला रहने वाला है. करियर के मामले में मीन राशि के जातकों को कठिनाई होगी. नौकरी में बाधा उत्पन्न हो सकती है और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ सकता है. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय आसान नहीं रहेगा. पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा. हालांकि छोटी बात को लेकर घर के सदस्यों के बीच कहासुनी हो सकती है. शनि की पूर्ण दृष्टि होने से लव लाइफ में भी परेशानी आएगी. आर्थिक दृष्टिकोण से यह समय फलदायक रहेगा. आमदनी का योग बनेगा और कई जातकों को गुप्त धन की भी प्राप्ति होगी.
|
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की कि कोविड-19 संकट के दौरान योजना के लाभार्थियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 14 करोड़ से अधिक मुफ्त सिलेंडर प्रदान किए गए।
गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमत प्रति सिलेंडर 694 रुपये है। वाणिज्यिक ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 17 रुपये अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। साथ ही, दिल्ली में 19 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1332 रुपये के पिछले मूल्य की तुलना में बढ़कर 1349 रुपये हो गई है। कोलकाता में इस कीमत में 23 रुपये और चेन्नई में 17 रुपये की वृद्धि हुई है।
तेल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने के पहले दिन गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं। यह मूल्य संशोधन अंतर्राष्ट्रीय बाजार दरों पर आधारित है। हालिया मूल्य वृद्धि अंतरराष्ट्रीय मूल्य परिवर्तनों में बदलाव के कारण हुई है।
भारत में एलपीजी की कीमतें कैसे तय की जाती हैं?
भारत में एलपीजी मूल्य निर्धारण समता मूल्य (Import Parity Price) के आधार पर किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों के आधार पर आयात समानता मूल्य निर्धारित किया जाता है। यह सऊदी अरब के अरामको की एलपीजी कीमतों पर आधारित है। इसमें मुफ्त ऑन-बोर्ड मूल्य, कस्टम ड्यूटी, परिवहन शुल्क, बीमा, पोर्ट बकाया आदि शामिल हैं। गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की खुदरा बिक्री मूल्य में अंतर्देशीय अधिकार, जीएसटी, बॉटलिंग शुल्क, विपणन लागत और मार्जिन की लागत शामिल है।
इसलिए, रुपये के कमजोर प्रदर्शन से भारत में एलपीजी की कीमतें भी बढ़ेंगी। हाल के कुछ महीनों में मौजूदा मूल्य वृद्धि इसी कारण से है।
|
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की कि कोविड-उन्नीस संकट के दौरान योजना के लाभार्थियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत चौदह करोड़ से अधिक मुफ्त सिलेंडर प्रदान किए गए। गैर-सब्सिडी वाले चौदह दशमलव दो किलोग्रामग्राम एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमत प्रति सिलेंडर छः सौ चौरानवे रुपयापये है। वाणिज्यिक ग्राहकों को प्रति सिलेंडर सत्रह रुपयापये अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। साथ ही, दिल्ली में उन्नीस किलोग्रामग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत एक हज़ार तीन सौ बत्तीस रुपयापये के पिछले मूल्य की तुलना में बढ़कर एक हज़ार तीन सौ उनचास रुपयापये हो गई है। कोलकाता में इस कीमत में तेईस रुपयापये और चेन्नई में सत्रह रुपयापये की वृद्धि हुई है। तेल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने के पहले दिन गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं। यह मूल्य संशोधन अंतर्राष्ट्रीय बाजार दरों पर आधारित है। हालिया मूल्य वृद्धि अंतरराष्ट्रीय मूल्य परिवर्तनों में बदलाव के कारण हुई है। भारत में एलपीजी की कीमतें कैसे तय की जाती हैं? भारत में एलपीजी मूल्य निर्धारण समता मूल्य के आधार पर किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों के आधार पर आयात समानता मूल्य निर्धारित किया जाता है। यह सऊदी अरब के अरामको की एलपीजी कीमतों पर आधारित है। इसमें मुफ्त ऑन-बोर्ड मूल्य, कस्टम ड्यूटी, परिवहन शुल्क, बीमा, पोर्ट बकाया आदि शामिल हैं। गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की खुदरा बिक्री मूल्य में अंतर्देशीय अधिकार, जीएसटी, बॉटलिंग शुल्क, विपणन लागत और मार्जिन की लागत शामिल है। इसलिए, रुपये के कमजोर प्रदर्शन से भारत में एलपीजी की कीमतें भी बढ़ेंगी। हाल के कुछ महीनों में मौजूदा मूल्य वृद्धि इसी कारण से है।
|
Share Market News: बुधवार को शुरुआती एक घंटे के कारोबार में घरेलू शेयर बाजार लाल निशान पर कारोबार किया. सुबह 10:08 बजे बीएसई सेंसेक्स 48. 86 अंक यानी 0. 08 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार किया।
वहीं एनएसई निफ्टी सुबह 10:07 बजे 20. 60 अंक या 0. 12 फीसदी की गिरावट के साथ 17,690. 85 अंक के स्तर पर रहा, जबकि निफ्टी पर हिंडाल्को के शेयरों में सबसे ज्यादा दो फीसदी का ब्रेक देखने को मिला। वहीं अदानी एंटरप्राइजेज में दो फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा जा रहा है।
बीएसई सेंसेक्स पर बजाज फाइनेंस के शेयर में 1. 78 फीसदी की गिरावट देखी गई। इसी तरह टेक महिंद्रा में 1. 51 फीसदी, इंफोसिस में 1. 08 फीसदी, इंडसइंड बैंक में 1. 03 फीसदी, एशियन पेंट्स में 0. 93 फीसदी, एचसीएल टेक में 0. 85 फीसदी और बजाज फिनसर्व में 0. 85 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।
इनके अलावा सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, विप्रो, टाटा मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और नेस्ले इंडिया लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे।
सेंसेक्स पर लार्सन एंड टुब्रो, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, एचडीएफसी, मारुति, भारती एयरटेल और टीसीएस तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि इस साल अमेरिकी बाजार से मिले आर्थिक आंकड़ों के कारण वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में रुपये में 37 पैसे की गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे गिरकर 82. 29 पर आ गया।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें,
|
Share Market News: बुधवार को शुरुआती एक घंटे के कारोबार में घरेलू शेयर बाजार लाल निशान पर कारोबार किया. सुबह दस:आठ बजे बीएसई सेंसेक्स अड़तालीस. छियासी अंक यानी शून्य. आठ फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार किया। वहीं एनएसई निफ्टी सुबह दस:सात बजे बीस. साठ अंक या शून्य. बारह फीसदी की गिरावट के साथ सत्रह,छः सौ नब्बे. पचासी अंक के स्तर पर रहा, जबकि निफ्टी पर हिंडाल्को के शेयरों में सबसे ज्यादा दो फीसदी का ब्रेक देखने को मिला। वहीं अदानी एंटरप्राइजेज में दो फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा जा रहा है। बीएसई सेंसेक्स पर बजाज फाइनेंस के शेयर में एक. अठहत्तर फीसदी की गिरावट देखी गई। इसी तरह टेक महिंद्रा में एक. इक्यावन फीसदी, इंफोसिस में एक. आठ फीसदी, इंडसइंड बैंक में एक. तीन फीसदी, एशियन पेंट्स में शून्य. तिरानवे फीसदी, एचसीएल टेक में शून्य. पचासी फीसदी और बजाज फिनसर्व में शून्य. पचासी फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इनके अलावा सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, विप्रो, टाटा मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और नेस्ले इंडिया लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। सेंसेक्स पर लार्सन एंड टुब्रो, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, एचडीएफसी, मारुति, भारती एयरटेल और टीसीएस तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि इस साल अमेरिकी बाजार से मिले आर्थिक आंकड़ों के कारण वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में रुपये में सैंतीस पैसे की गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रुपया सैंतीस पैसे गिरकर बयासी. उनतीस पर आ गया। - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें,
|
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने लखीमपुर कांड का नया वीडियो ट्वीट किया है. आपको वो वीडियो दिखाते हैं जो संजय सिंह ने जारी किया है. आजतक इसकी सच्चाई की पुष्टि नहीं करता. वीडियो में एक लग्जरी गाड़ी किसानों को कुचलते हुए नजर आ रही है. इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे एक गाड़ी झंडे बैनर लेकर आगे बढ़ रहे किसानों को पीछे से आकर टक्कर मारती है. एक किसान कार के बोनट पर जा गिरता है. इसके बाद मौके पर भगदड़ मच जाती है. कुछ लोग इस काले रंग की एसयूवी से कुचले जाते हैं तो कुछ लोग छिटककर दूर जा गिरते हैं. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद से विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है. देखिए.
Aam Admi Party MP Sanjay Singh tweeted a video claiming that the visuals are of the Lakhimpur Kehri incident. In the video, a group of protesting farmers can be seen walking along a road as a Jeep runs them over. Now the opposition parties are in attacking mode against the Yogi Government. Watch.
|
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने लखीमपुर कांड का नया वीडियो ट्वीट किया है. आपको वो वीडियो दिखाते हैं जो संजय सिंह ने जारी किया है. आजतक इसकी सच्चाई की पुष्टि नहीं करता. वीडियो में एक लग्जरी गाड़ी किसानों को कुचलते हुए नजर आ रही है. इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे एक गाड़ी झंडे बैनर लेकर आगे बढ़ रहे किसानों को पीछे से आकर टक्कर मारती है. एक किसान कार के बोनट पर जा गिरता है. इसके बाद मौके पर भगदड़ मच जाती है. कुछ लोग इस काले रंग की एसयूवी से कुचले जाते हैं तो कुछ लोग छिटककर दूर जा गिरते हैं. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद से विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है. देखिए. Aam Admi Party MP Sanjay Singh tweeted a video claiming that the visuals are of the Lakhimpur Kehri incident. In the video, a group of protesting farmers can be seen walking along a road as a Jeep runs them over. Now the opposition parties are in attacking mode against the Yogi Government. Watch.
|
जयशंकर मध्य यूरोप के दो देशों स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के साथ संबंधों को और गति देने के लिए अपने दौरे के अंतिम चरण में प्राग पहुंचे।
जयशंकर ने ट्वीट किया, "चेक गणराज्य के विदेश मंत्री जान लिपावस्की के साथ सार्थक वार्ता हुई। चेक गणराज्य यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ की भागीदारी को आगे ले जाने पर चर्चा की। " चेक गणराज्य एक जुलाई से यूरोपीय संघ (ईयू) की अध्यक्षता संभालेगा।
जयशंकर ने भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर एक चौराहे पर बने स्मारक में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके प्रति चेक गणराज्य के लोग बेहद सम्मान की भावना रखते हैं।
इससे पहले, यूरोपीय संसद के चेक गणराज्य के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जयशंकर ने बैठक की। विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ तथा चेक गणराज्य के साथ भारत के संबंधों, हिंद-प्रशांत, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा डिजिटल सहयोग पर चर्चा की।
जयशंकर शनिवार को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा से प्राग पहुंचे। प्राग में, उन्होंने यूरोपीय संसद के चेक सदस्यों (एमईपी) जन जहरादिल, टॉमस ज्देचोवस्की, मिकुलस पेक्सा और वेरोनिका व्रेसीओनोवा के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
|
जयशंकर मध्य यूरोप के दो देशों स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के साथ संबंधों को और गति देने के लिए अपने दौरे के अंतिम चरण में प्राग पहुंचे। जयशंकर ने ट्वीट किया, "चेक गणराज्य के विदेश मंत्री जान लिपावस्की के साथ सार्थक वार्ता हुई। चेक गणराज्य यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ की भागीदारी को आगे ले जाने पर चर्चा की। " चेक गणराज्य एक जुलाई से यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालेगा। जयशंकर ने भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर एक चौराहे पर बने स्मारक में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके प्रति चेक गणराज्य के लोग बेहद सम्मान की भावना रखते हैं। इससे पहले, यूरोपीय संसद के चेक गणराज्य के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जयशंकर ने बैठक की। विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ तथा चेक गणराज्य के साथ भारत के संबंधों, हिंद-प्रशांत, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा डिजिटल सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर शनिवार को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा से प्राग पहुंचे। प्राग में, उन्होंने यूरोपीय संसद के चेक सदस्यों जन जहरादिल, टॉमस ज्देचोवस्की, मिकुलस पेक्सा और वेरोनिका व्रेसीओनोवा के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
|
ऊनी, रेशमी हो या खाल का । यह वस्त्र भी मनुष्य के लिये बनस्पतियों और उन पर निर्भर रहने वाले जीवों से प्राप्त होता है । इस अध्याय में कपास का ही वर्ण किया जायगा जिससे सूती कपड़े बनते हैं।
कपास - कपड़ा बनाने के लिये कपास ही मुख्य वस्तु है। इसकी उपज वड़ी आवश्यक है। हमारे देश के सारे कच्चे माल में कपास ही बहुमूल्य वस्तु है । इसकी उपज के लिये उष्ण वायु और मिट्टी की आवश्यकता है। उन प्रदेशों में जहाँ सदा पानी बरसता है या मेघ छादित रहता है कपास नहीं हो सकती । अतः इसके लिये उष्ण रेतीले हिस्सों में जिनमें सिचाई का अच्छा प्रबन्ध होता है हो सकती है । दक्षिणी हिन्दुस्तान की काली मिट्टी वाला प्रदेश इसके लिये बड़ा उपयोगी है क्योंकि इसमें नमी बहुत दिनों तक बनी रहती है जिससे पौधों को पानी की कमी नहीं रहती । इस मिट्टी की तह ज्यादा गहरी होनी चाहिये जिससे की नमी ज्यादा दिनों तक बनी रहे। पौधों में फल श्रा जाने के पश्चात् वर्षा की जरूरत नहीं रहती बल्कि ज्यादा धूप चाहिये जिससे कि फल अच्छी तरह फट जाय और कपास आसानी से निकल आये । यह भारतवर्ष के उन प्रान्तों में होती है जिनमें ४०" से कम वर्षा होती है । काली मिट्टी वाले प्रदेश के अतरिक्त इसकी पैदावार पंजाब में होती है। थोड़ी बहुत कपास तो सारे भारतवर्ष में ही हो जाती है जहाँ वर्षा कम है ।
हमारे देश की कपास छोटे और मोटे रेशे की होती हैं । बारीक और लम्बे रेशे की कपास संयुक्त राज्य में अधिक होती है। इसकी फसल के तैयार होने में पाँच छः महीने लगते हैं। यह बरसात के शुरू में बोई जाती है जिससे इसके पौधों के चढ़ने के के लिये काफी पानी मिले । परन्तु फल आ जाने पर सूखी जलवायु
|
ऊनी, रेशमी हो या खाल का । यह वस्त्र भी मनुष्य के लिये बनस्पतियों और उन पर निर्भर रहने वाले जीवों से प्राप्त होता है । इस अध्याय में कपास का ही वर्ण किया जायगा जिससे सूती कपड़े बनते हैं। कपास - कपड़ा बनाने के लिये कपास ही मुख्य वस्तु है। इसकी उपज वड़ी आवश्यक है। हमारे देश के सारे कच्चे माल में कपास ही बहुमूल्य वस्तु है । इसकी उपज के लिये उष्ण वायु और मिट्टी की आवश्यकता है। उन प्रदेशों में जहाँ सदा पानी बरसता है या मेघ छादित रहता है कपास नहीं हो सकती । अतः इसके लिये उष्ण रेतीले हिस्सों में जिनमें सिचाई का अच्छा प्रबन्ध होता है हो सकती है । दक्षिणी हिन्दुस्तान की काली मिट्टी वाला प्रदेश इसके लिये बड़ा उपयोगी है क्योंकि इसमें नमी बहुत दिनों तक बनी रहती है जिससे पौधों को पानी की कमी नहीं रहती । इस मिट्टी की तह ज्यादा गहरी होनी चाहिये जिससे की नमी ज्यादा दिनों तक बनी रहे। पौधों में फल श्रा जाने के पश्चात् वर्षा की जरूरत नहीं रहती बल्कि ज्यादा धूप चाहिये जिससे कि फल अच्छी तरह फट जाय और कपास आसानी से निकल आये । यह भारतवर्ष के उन प्रान्तों में होती है जिनमें चालीस" से कम वर्षा होती है । काली मिट्टी वाले प्रदेश के अतरिक्त इसकी पैदावार पंजाब में होती है। थोड़ी बहुत कपास तो सारे भारतवर्ष में ही हो जाती है जहाँ वर्षा कम है । हमारे देश की कपास छोटे और मोटे रेशे की होती हैं । बारीक और लम्बे रेशे की कपास संयुक्त राज्य में अधिक होती है। इसकी फसल के तैयार होने में पाँच छः महीने लगते हैं। यह बरसात के शुरू में बोई जाती है जिससे इसके पौधों के चढ़ने के के लिये काफी पानी मिले । परन्तु फल आ जाने पर सूखी जलवायु
|
Ranbir Kapoor On Urfi Javed Fashion: टीवी एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने फैशन सेंस को लेकर काफी पॉपुलर हैं. हाल ही में रणबीर कपूर ने एक्ट्रेस के फैशन को लेकर बात की है. चलिए बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.
Ranbir Kapoor On Urfi Javed Fashion: फैशन सेंस को लेकर सोशल मीडिया पर एक नाम हमेशा ही सुर्खियों में बना रहता है. वो नाम है टीवी एक्ट्रेस उर्फी जावेद का, जो अक्सर ही अतरंगी आउटफिट में नजर आती रहती हैं. वहीं आज वो सोशल मीडिया की एक बड़ी सेंसेशन हैं. वहीं हाल ही में बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर ने उर्फी के फैशन को लेकर बात की हैं.
रणबीर कपूर इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म तू झूठी मैं मक्कार को लेकर चर्चा में चल रहे हैं. इसी बीच वो करीना कपूर के साथ एक बातचीत के लिए जुड़े, जहां करीना ने उन्हें प्लाकार्ड्स दिखाया, जिसमें कई एक्टर्स की अलग-अलग लुक्स में तस्वीरें थीं. हालांकि इसमें ट्विस्ट ये था कि उन एक्टर्स का चेहरा छिपाया हुआ था और रणबीर को उन्हें उनके कपड़ों को देखकर पहचानना था. साथ ही गुड टेस्ट और बैड टेस्ट में रेटिंग भी देनी थी.
उर्फी पर क्या बोले रणबीर कपूर?
ये भी पढ़ें- दो बेटियों के पिता संग जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रही हैं दलजीत, कौन हैं निखिल पटेल?
बहरहाल, अगर बात तू झूठी मैं मक्कार की करें तो इस फिल्म में रणबीर कपूर के अपोजिट श्रद्धा कपूर नजर आई हैं. वहीं दोनों की ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म तू झूठी मैं मक्कार बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने 10 दिनों में 96 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. जल्द ही फिल्म 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो जाएगी.
|
Ranbir Kapoor On Urfi Javed Fashion: टीवी एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने फैशन सेंस को लेकर काफी पॉपुलर हैं. हाल ही में रणबीर कपूर ने एक्ट्रेस के फैशन को लेकर बात की है. चलिए बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा. Ranbir Kapoor On Urfi Javed Fashion: फैशन सेंस को लेकर सोशल मीडिया पर एक नाम हमेशा ही सुर्खियों में बना रहता है. वो नाम है टीवी एक्ट्रेस उर्फी जावेद का, जो अक्सर ही अतरंगी आउटफिट में नजर आती रहती हैं. वहीं आज वो सोशल मीडिया की एक बड़ी सेंसेशन हैं. वहीं हाल ही में बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर ने उर्फी के फैशन को लेकर बात की हैं. रणबीर कपूर इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म तू झूठी मैं मक्कार को लेकर चर्चा में चल रहे हैं. इसी बीच वो करीना कपूर के साथ एक बातचीत के लिए जुड़े, जहां करीना ने उन्हें प्लाकार्ड्स दिखाया, जिसमें कई एक्टर्स की अलग-अलग लुक्स में तस्वीरें थीं. हालांकि इसमें ट्विस्ट ये था कि उन एक्टर्स का चेहरा छिपाया हुआ था और रणबीर को उन्हें उनके कपड़ों को देखकर पहचानना था. साथ ही गुड टेस्ट और बैड टेस्ट में रेटिंग भी देनी थी. उर्फी पर क्या बोले रणबीर कपूर? ये भी पढ़ें- दो बेटियों के पिता संग जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रही हैं दलजीत, कौन हैं निखिल पटेल? बहरहाल, अगर बात तू झूठी मैं मक्कार की करें तो इस फिल्म में रणबीर कपूर के अपोजिट श्रद्धा कपूर नजर आई हैं. वहीं दोनों की ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म तू झूठी मैं मक्कार बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने दस दिनों में छियानवे करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. जल्द ही फिल्म एक सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो जाएगी.
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
कुनैन संज्ञा पुं॰ [अं॰ क्विनिन] एक ओषधि जो अंग्रेजी चिकित्सा में ज्वर के लिये अत्यंत उपकारी मानी जाती है । कुनाइन । विशेष - यह एक पेड़ की छाल का सत है, जिसे सिकोना कहते हैं । यह पेड़ पहले दक्षिण अमेरिका में ही होता था पर अब यह भारतवर्ष के नीलगिर, मैसूर, सिकिम आदी ऊँचे पहाडी स्थानों में भी लगाया जाता हैं । यह दो ढंग से लगाया जाता है । कहीं तो बीज बोकर पौधे उगाते हैं और कहीं डालियाँ काटकर कलम लगाते हैं । इसके बीजों को घना बोते हैं और खूब सिंचाई करते हैं । ऊपर से फूस आदि की छाया भी करते हैं । ४०-४१ दिनों में अँखुए निकल आते हैं । जब दो या तीन जोडी पत्तियाँ निकल आती हैं तब पौधों को दूसरी जगह लगाते हैं । इसी प्रकार पौधों की कई बार उखाड़ उखाड़कर अन्यत्र लगाना पड़ता है । ये पौधे चार या छह छह फूट के अंतर पर लगाए जाते हैं । सिंकना कई प्रकार का होता है - भूरी छाल का लाल, छाल का और पोली छाल का । लाल छाल का पेड़ बड़ा होता है, भूरी छाल का मध्यम आकार का होता है और पीली छाल का झाड़ी के आकार का छोटा होता है । जब पौधा चार वर्ष का होता है तब उसकी छाल में सच्छी तरह क्षार आ जाता है और वह काम लायक हो जाती है । सातवें वर्ष से क्षार कुछ घटने लगता है, इससे १२-१४ वर्ष के भीतर ही सारे पेड़ छाल के लिये उखाड़ लिए जोते हैं । जड़ में क्षार का अंश विशेष होता है, इससे यह और भागों की अपेक्षा बहुमूल्य समझी जाती है ।
Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या।
|
कुनैन संज्ञा पुं॰ [अं॰ क्विनिन] एक ओषधि जो अंग्रेजी चिकित्सा में ज्वर के लिये अत्यंत उपकारी मानी जाती है । कुनाइन । विशेष - यह एक पेड़ की छाल का सत है, जिसे सिकोना कहते हैं । यह पेड़ पहले दक्षिण अमेरिका में ही होता था पर अब यह भारतवर्ष के नीलगिर, मैसूर, सिकिम आदी ऊँचे पहाडी स्थानों में भी लगाया जाता हैं । यह दो ढंग से लगाया जाता है । कहीं तो बीज बोकर पौधे उगाते हैं और कहीं डालियाँ काटकर कलम लगाते हैं । इसके बीजों को घना बोते हैं और खूब सिंचाई करते हैं । ऊपर से फूस आदि की छाया भी करते हैं । चालीस-इकतालीस दिनों में अँखुए निकल आते हैं । जब दो या तीन जोडी पत्तियाँ निकल आती हैं तब पौधों को दूसरी जगह लगाते हैं । इसी प्रकार पौधों की कई बार उखाड़ उखाड़कर अन्यत्र लगाना पड़ता है । ये पौधे चार या छह छह फूट के अंतर पर लगाए जाते हैं । सिंकना कई प्रकार का होता है - भूरी छाल का लाल, छाल का और पोली छाल का । लाल छाल का पेड़ बड़ा होता है, भूरी छाल का मध्यम आकार का होता है और पीली छाल का झाड़ी के आकार का छोटा होता है । जब पौधा चार वर्ष का होता है तब उसकी छाल में सच्छी तरह क्षार आ जाता है और वह काम लायक हो जाती है । सातवें वर्ष से क्षार कुछ घटने लगता है, इससे बारह-चौदह वर्ष के भीतर ही सारे पेड़ छाल के लिये उखाड़ लिए जोते हैं । जड़ में क्षार का अंश विशेष होता है, इससे यह और भागों की अपेक्षा बहुमूल्य समझी जाती है । Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या।
|
2005 में घरेलू महीला के रूप में पहचान रखने वाली भानमती ने वनग्राम आंदोलन से अपनी शुरुआत की थी। यह आंदोलन समाजिक कार्यकर्ता डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने वनग्रामों के निवासियों के हक के लिए किया था। इसके बाद भानमती ने बहराइच में पहली बार क्षेत्रीय कोटेदार के भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसमें उन्होंने एक के बाद एक 54 आवेदन डाले थे, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन को झुकना पड़ा था और कोटा निरस्त करना पड़ा था। इस बीच देहात संस्था ने महिला अधिकारों के मुद्दे पर ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर अधिकार मंच की स्थापना की थी, जिसकी अगुवाई भानमती ने की। उन्होंने इस संगठन के जरिए नरेगा में महिला हिस्सेदारी, भ्रष्टाचार, ग्रामसभा में महिलाओं का हक, शराबखोरी आदि मुद्दों पर हल्ला बोलना शुरू किया। संगठन वनग्राम अधिकार मंच के साथ जुड़कर वन ग्रामवासियों के अधिकारों के लिए पद यात्राएं, धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन भी करने लगा था।
मिहींपुरवा विकास खंड के वनग्राम टेड़िया की रहने भानमती फल एंव सब्जीयां बेचकर और ट्रेन में पल्लेदारी करके परिवार का भरण पोषण करती थीं। आम सी जिदंगी जीने वाली भानमती में सीखने और बोलने की ललक बहुत थी। उनकी इसी ललक ने उनको डेवलपमेंट एसोसिएशन फॉर हुमन एडवॉसंमेंट (देहात) संस्था के साथ जोड़ दिया था। इस संस्था के साथ मिलकर उन्होंने कई अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके परिणाम स्वरूप वह एक सशक्त महिला अगुवाकर के रूप में सामने आई।
|
दो हज़ार पाँच में घरेलू महीला के रूप में पहचान रखने वाली भानमती ने वनग्राम आंदोलन से अपनी शुरुआत की थी। यह आंदोलन समाजिक कार्यकर्ता डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने वनग्रामों के निवासियों के हक के लिए किया था। इसके बाद भानमती ने बहराइच में पहली बार क्षेत्रीय कोटेदार के भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसमें उन्होंने एक के बाद एक चौवन आवेदन डाले थे, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन को झुकना पड़ा था और कोटा निरस्त करना पड़ा था। इस बीच देहात संस्था ने महिला अधिकारों के मुद्दे पर ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर अधिकार मंच की स्थापना की थी, जिसकी अगुवाई भानमती ने की। उन्होंने इस संगठन के जरिए नरेगा में महिला हिस्सेदारी, भ्रष्टाचार, ग्रामसभा में महिलाओं का हक, शराबखोरी आदि मुद्दों पर हल्ला बोलना शुरू किया। संगठन वनग्राम अधिकार मंच के साथ जुड़कर वन ग्रामवासियों के अधिकारों के लिए पद यात्राएं, धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन भी करने लगा था। मिहींपुरवा विकास खंड के वनग्राम टेड़िया की रहने भानमती फल एंव सब्जीयां बेचकर और ट्रेन में पल्लेदारी करके परिवार का भरण पोषण करती थीं। आम सी जिदंगी जीने वाली भानमती में सीखने और बोलने की ललक बहुत थी। उनकी इसी ललक ने उनको डेवलपमेंट एसोसिएशन फॉर हुमन एडवॉसंमेंट संस्था के साथ जोड़ दिया था। इस संस्था के साथ मिलकर उन्होंने कई अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके परिणाम स्वरूप वह एक सशक्त महिला अगुवाकर के रूप में सामने आई।
|
बिहार चुनाव में दूसरे फेज के तहत मंगलवार को 17 जिले की 94 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. राजधानी पटना में राज्यपाल फागू चौहान ने पहला मतदान किया. डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने भी पटना के राजेंद्रनगर में वोट डाला और पहले मतदान फिर जलपान का संदेश दिया. खगड़िया के बेलाही में चिराग पासवान ने लाइन में लगकर मतदान किया और सभी से मतदान की अपील की. चिराग पासवान ने सीएम नीतीश को नसीहत देते हुए कहा कि नीतियों का विरोध करें ना करें निजी टिप्पणी. ऐसी ही अहम और ताजा खबरों के लिए देखें तेज का 100.
|
बिहार चुनाव में दूसरे फेज के तहत मंगलवार को सत्रह जिले की चौरानवे सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. राजधानी पटना में राज्यपाल फागू चौहान ने पहला मतदान किया. डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने भी पटना के राजेंद्रनगर में वोट डाला और पहले मतदान फिर जलपान का संदेश दिया. खगड़िया के बेलाही में चिराग पासवान ने लाइन में लगकर मतदान किया और सभी से मतदान की अपील की. चिराग पासवान ने सीएम नीतीश को नसीहत देते हुए कहा कि नीतियों का विरोध करें ना करें निजी टिप्पणी. ऐसी ही अहम और ताजा खबरों के लिए देखें तेज का एक सौ.
|
Your login session has expired. Please logout and login again.
बैकी लिंच (Becky Lynch)
बैकी लिंच (Becky Lynch)
WWE Raw के लिए बहुत बड़े टाइटल मुकाबले का हुआ ऐलान, दिग्गजों के चैंपियनशिप रन का होगा अंत?
R U Next?
🏃🏻♀️ Sports (30+)
बैकी लिंच (Becky Lynch)
जॉन सीना (John Cena)
ट्रिपल एच (Triple H)
Edition:
|
Your login session has expired. Please logout and login again. बैकी लिंच बैकी लिंच WWE Raw के लिए बहुत बड़े टाइटल मुकाबले का हुआ ऐलान, दिग्गजों के चैंपियनशिप रन का होगा अंत? R U Next? 🏃🏻♀️ Sports बैकी लिंच जॉन सीना ट्रिपल एच Edition:
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार 17 सितंबर को 71वां जन्मदिन है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें 'भगवान का दूसरा रूप' बताया है।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर पशुपति पारस ने प्रधानमंत्री को बताया- 'भगवान का दूसरा रूप'
नई दिल्ली/पटना केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता पशुपति कुमार पारस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर 'भगवान का दूसरा रूप' बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद वह सरकार के सबसे सफल मुखिया हैं। पारस ने कहा, "वह भगवान के दूसरे रूप हैं। किसी ने भगवान को नहीं देखा है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी हमारे बीच हैं, जिन्हें भगवान माना जाता है और वह देश का भाग्य भी तय करते हैं। "
'हमारे बीच भगवान के दूसरे रूप में मौजूद हैं पीएम मोदी' पशुपति कुमार पारस ने कहा कि आज संयोग से विश्वकर्मा पूजा भी है। उन्होंने कहा, "आज काफी पवित्र दिन है। हमारे प्रधानमंत्री का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था। मेरा मानना है कि वह हमारे बीच भगवान के दूसरे रूप में मौजूद हैं। " मोदी के 71वें जन्मदिन पर पारस की पार्टी की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे।
स्वतंत्रता के बाद सबसे मजबूत और सबसे सफल PM हैं मोदीः पारस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए पारस ने कहा कि मोदी को स्वतंत्रता के बाद सबसे मजबूत और सबसे सफल प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाता है। उन्होंने अपनी छवि दुनिया भर में बनाई है। सामाजिक न्याय के लिए मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए पशुपति पारस ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीबों एवं समाज के वंचित तबके के लिए काम करते रहे हैं।
पारस ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट में जिन विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है उनकी उन्हें जानकारी होती है। उन्होंने मोदी को 'भगवान का उपहार' बताया।
सीएम नीतीश ने दी पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई पीएम मोदी के जन्मदिन को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सिलिब्रेट किया। पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन पर सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बधाई दी। इस मौके पर बिहार में मेगा कोरोना वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन किया गया है।
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार सत्रह सितंबर को इकहत्तरवां जन्मदिन है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें 'भगवान का दूसरा रूप' बताया है। पीएम मोदी के जन्मदिन पर पशुपति पारस ने प्रधानमंत्री को बताया- 'भगवान का दूसरा रूप' नई दिल्ली/पटना केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता पशुपति कुमार पारस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर 'भगवान का दूसरा रूप' बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद वह सरकार के सबसे सफल मुखिया हैं। पारस ने कहा, "वह भगवान के दूसरे रूप हैं। किसी ने भगवान को नहीं देखा है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी हमारे बीच हैं, जिन्हें भगवान माना जाता है और वह देश का भाग्य भी तय करते हैं। " 'हमारे बीच भगवान के दूसरे रूप में मौजूद हैं पीएम मोदी' पशुपति कुमार पारस ने कहा कि आज संयोग से विश्वकर्मा पूजा भी है। उन्होंने कहा, "आज काफी पवित्र दिन है। हमारे प्रधानमंत्री का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था। मेरा मानना है कि वह हमारे बीच भगवान के दूसरे रूप में मौजूद हैं। " मोदी के इकहत्तरवें जन्मदिन पर पारस की पार्टी की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे। स्वतंत्रता के बाद सबसे मजबूत और सबसे सफल PM हैं मोदीः पारस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए पारस ने कहा कि मोदी को स्वतंत्रता के बाद सबसे मजबूत और सबसे सफल प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाता है। उन्होंने अपनी छवि दुनिया भर में बनाई है। सामाजिक न्याय के लिए मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए पशुपति पारस ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीबों एवं समाज के वंचित तबके के लिए काम करते रहे हैं। पारस ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट में जिन विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है उनकी उन्हें जानकारी होती है। उन्होंने मोदी को 'भगवान का उपहार' बताया। सीएम नीतीश ने दी पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई पीएम मोदी के जन्मदिन को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सिलिब्रेट किया। पीएम मोदी के इकहत्तरवें जन्मदिन पर सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बधाई दी। इस मौके पर बिहार में मेगा कोरोना वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन किया गया है।
|
नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली कैबिनेट से स्वीकृत होने के बाद अब बिहार लोक सेवा आयोग की तरफ से शिक्षक बहाली का विज्ञापन आने वाला है। दूसरी तरफ शिक्षकों का आंदोलन लगातार जारी है। तीसरी तरफ इससे जुड़ा मामला हाईकोर्ट चला गया है। इसके साथ ही बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संरक्षक संदीप सौरभ ने बताया कि शिक्षक जनता के जनप्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। 80 विधायकों ने अपने लेटर पैड पर इस बात पर सहमति जताई है कि शिक्षकों को बिना शर्त राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाए, नियमावली में संशोधन की जाए।
भास्कर से बात करते हुए संदीप सौरभ ने बताया कि बहुत अतार्किक तरीके की शिक्षक नियमावली सरकार लाई है। जो नियोजित शिक्षक काम कर रहे हैं उन्हें राज्य कर्मी का दर्जा पाने के लिए बीपीएससी की परीक्षा देनी होगी। यह अन्यायपूर्ण फैसला है। वे कहते हैं कि हमने बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा में तीन तरह की रणनीति बनाई है। पहली, राजनीतिक पार्टियों से बात करके सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना। महागठबंधन की सात में से पांच पार्टियां इस पर एकमत हैं कि नई शिक्षक नियमावली में संशोधन जरूरी है। दूसरा रणनीति के तहत आंदोलन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने इस बीच एक पत्र भी जारी कर कहा कि शिक्षक आंदोलन नहीं कर सकते। हमने इस पत्र पर अपना विरोध दर्ज किया है। तीसरा यह कि बिहार के ज्यादातर विधायकों का मानना है कि शिक्षकों का अपमान किया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है। क्वालिटी बढ़ाने पर काम करने के बजाय सरकार शिक्षकों को कई खानों में बांट रही है। एक ही स्कूल में पांच तरह की नियमावली चलाना चाह रही सरकार। इसको लेकर हम लोग लगे हैं कि ज्यादा से ज्यादा विधायक हमारे साथ खड़े हों।
विधायकों से पत्र लिखवाने के बाद हम सरकार को कह सकें कि महागठबंधन की ज्यादातर पार्टियां इस नियमावली को नहीं चाहती हैं। बिहार के चार लाख शिक्षक नई नियमावली को नहीं चाहते हैं और ज्यादातर विधायक भी नहीं चाहते हैं। अब तक 80 विधायकों ने शिक्षकों के पक्ष में लिखा है। कई एमएलए ऐसे हैं कि बता रहें कि हमारी मजबूरी है कि हम सरकार में हैं इसलिए नहीं लिख सकते। जबकि हम शिक्षकों के पक्ष में हैं। हम लोगों ने महागठबंधन के विधायकों से ही पत्र लिखवाया है। इसमें बीजेपी के विधायक नहीं हैं। महागठबंधन के विधायकों का सहमति पत्र सरकार को दिया जाएगा। सरकार से हम कहेंगे कि सरकार न्याय करे।
गौरतलब है कि, नीतीश कुमार हस्ताक्षर अभियान के हिमायती रहे हैं। बिहार को विशेष राज्य के दर्जा के सवाल पर बिहार में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। अब उनकी ही तरह की रणनीति पर शिक्षक काम कर रहे हैं और महागठबंधन के विधायकों से समर्थन में सदन के बाहर पत्र लिखकर जैसे वोटिंग करवा रहे हैं। अन्य राजनीतिक पार्टियां भी विभिन्न मुद्दों पर हस्ताक्षर अभियान या पत्र लिखो अभियान चलाती रही हैं। बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा को उम्मीद है कि 80 विधायकों के पत्र का असर सरकार पर जरूर होगा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली कैबिनेट से स्वीकृत होने के बाद अब बिहार लोक सेवा आयोग की तरफ से शिक्षक बहाली का विज्ञापन आने वाला है। दूसरी तरफ शिक्षकों का आंदोलन लगातार जारी है। तीसरी तरफ इससे जुड़ा मामला हाईकोर्ट चला गया है। इसके साथ ही बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संरक्षक संदीप सौरभ ने बताया कि शिक्षक जनता के जनप्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। अस्सी विधायकों ने अपने लेटर पैड पर इस बात पर सहमति जताई है कि शिक्षकों को बिना शर्त राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाए, नियमावली में संशोधन की जाए। भास्कर से बात करते हुए संदीप सौरभ ने बताया कि बहुत अतार्किक तरीके की शिक्षक नियमावली सरकार लाई है। जो नियोजित शिक्षक काम कर रहे हैं उन्हें राज्य कर्मी का दर्जा पाने के लिए बीपीएससी की परीक्षा देनी होगी। यह अन्यायपूर्ण फैसला है। वे कहते हैं कि हमने बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा में तीन तरह की रणनीति बनाई है। पहली, राजनीतिक पार्टियों से बात करके सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना। महागठबंधन की सात में से पांच पार्टियां इस पर एकमत हैं कि नई शिक्षक नियमावली में संशोधन जरूरी है। दूसरा रणनीति के तहत आंदोलन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने इस बीच एक पत्र भी जारी कर कहा कि शिक्षक आंदोलन नहीं कर सकते। हमने इस पत्र पर अपना विरोध दर्ज किया है। तीसरा यह कि बिहार के ज्यादातर विधायकों का मानना है कि शिक्षकों का अपमान किया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है। क्वालिटी बढ़ाने पर काम करने के बजाय सरकार शिक्षकों को कई खानों में बांट रही है। एक ही स्कूल में पांच तरह की नियमावली चलाना चाह रही सरकार। इसको लेकर हम लोग लगे हैं कि ज्यादा से ज्यादा विधायक हमारे साथ खड़े हों। विधायकों से पत्र लिखवाने के बाद हम सरकार को कह सकें कि महागठबंधन की ज्यादातर पार्टियां इस नियमावली को नहीं चाहती हैं। बिहार के चार लाख शिक्षक नई नियमावली को नहीं चाहते हैं और ज्यादातर विधायक भी नहीं चाहते हैं। अब तक अस्सी विधायकों ने शिक्षकों के पक्ष में लिखा है। कई एमएलए ऐसे हैं कि बता रहें कि हमारी मजबूरी है कि हम सरकार में हैं इसलिए नहीं लिख सकते। जबकि हम शिक्षकों के पक्ष में हैं। हम लोगों ने महागठबंधन के विधायकों से ही पत्र लिखवाया है। इसमें बीजेपी के विधायक नहीं हैं। महागठबंधन के विधायकों का सहमति पत्र सरकार को दिया जाएगा। सरकार से हम कहेंगे कि सरकार न्याय करे। गौरतलब है कि, नीतीश कुमार हस्ताक्षर अभियान के हिमायती रहे हैं। बिहार को विशेष राज्य के दर्जा के सवाल पर बिहार में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। अब उनकी ही तरह की रणनीति पर शिक्षक काम कर रहे हैं और महागठबंधन के विधायकों से समर्थन में सदन के बाहर पत्र लिखकर जैसे वोटिंग करवा रहे हैं। अन्य राजनीतिक पार्टियां भी विभिन्न मुद्दों पर हस्ताक्षर अभियान या पत्र लिखो अभियान चलाती रही हैं। बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा को उम्मीद है कि अस्सी विधायकों के पत्र का असर सरकार पर जरूर होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
उन्मत्त का नर्त्तन ताडव
नारायण संहिता में भी कह दिया,
सृष्ट्यादिकं हरिः, नैव प्रयोजनं अपेक्ष्य तु, कुरुते केवलानंदाद, यथा मत्तस्य नर्त्तनम् । पूर्णानंदस्य तस्य इह प्रयोजनमतिः कुतः ?
मुक्ताः अपि भाप्तकामाः स्युः, किमु तस्यऽखिलात्मनः १
'जैसे उन्मत्त का, पागल का, मदिरामत्त का, नाचना गाना, वैसे अखिलात्मा की यह सब चक्कर खाती, भ्रमती, प्रत्यक्ष नाचती, हुई सृष्टि, जब साधारण जीवन्मुक्त जीव आसकाम कृत-कृत्य निष्काम हो जाते है, तब खिलात्मा परमात्मा का क्या कहना है ?' पर यदि यही कह के सतोष करना था, तो दर्शनो और वादों और तर्क वितकों की छानबीन करने का महा प्रयास प्रयास क्यों किया ? वही बात, 'मदिरा और सितार' की, 'खा, पीओ, चैन करो' की, अच्छी थी ? शंकराचार्य के शारीरक भाष्य में, उक्त लीला विषयक सूत्र के भाष्य में, इस उन्मादवाद का प्रत्याख्यान भी किया है ।
अनुगीता (०३४-३५ ) मे भी ऐसी शका उठा कर, गोल ही उत्तर दे दिया है ।
प्रश्न - अतःपरन्तु यद् गुह्यं तद् भवान् वक्तुमर्हसि ; सत्वक्षेत्रज्ञयोः चापि संबंधः केन हेतुना ?
उत्तर - विषयो विषयित्वं च संबंधोऽयं इह उच्यते । विषयी पुरुषः नित्यंः सत्वं च विषयः स्मृतः ; अनित्यं द्वद्वसंयुक्त सत्त्वं आहुर्मनीषिणः ; निद्वः निष्कलः नित्यः क्षेत्रज्ञः निर्गुणात्मकः सर्वैरपि गुणैर्विद्वान् व्यतिषक्तः न लिप्यते ; जलविदुः यथा लोलः पद्मिनीपत्र संस्थितः ।
'क्षेत्रज्ञ, पुरुष, निष्क्रिय का, ( क्षेत्र रूपी ) सत्त्व, प्रकृति, सक्रिय से संबन्ध क्यों ? विषय विषयी का यह संबंध है; विषय के गुणो से व्यतिषक्त हो कर भी विषयी लित नहीं होता ; जैसे कमल का पत्ता पानी से । पर इस से तो कुछ
बौद्ध-सम्प्रदाय का ग्रन्थ
सतोष नहीं होता । विषय यही कहा से ? क्या विषयी से स्वतन्त्र अन्य पदार्थ है ? तो परिणाम-वाद के झगड़े उठते है । और यदि पृथक् स्वाधीन पदार्थ हो भी, तो विषयी को क्या ग़रज पड़ी थी कि उस से व्यतिपक्त हो ?
बौद्ध ग्रन्थों से भी सक्रिय-निष्क्रिय के संबंध की चर्चा उठाई है। यह भी उन ग्रन्थों से जान पड़ता है कि बुद्धदेव कभी तो, "गुरोस्तु मौनं व्याख्यान" न्याय से, उत्तर ही नहीं देते थे, चुप रह जाते थे, कभी यह कह देते थे कि यह प्रश्न अनुपयोगी है, इस विषय की छान बीन से कोई उपयोग नहीं, हमारे काम का नहीं । स्यात् प्रष्टा को अपरिपक्व कशाय, मृदु जिज्ञासु, केवल कुतूहली, अनधिकारी - समझ कर ऐसा करते हों, नहीं तो, उन्होंने स्वय जो वह वृहत् प्रतिज्ञा की, कि जनन-मरण का पार देखेगे ही, संसार के अंतिम मर्म रहस्य को जानेगे ही, वह क्यों की, वह कौन 'काम की जात' थी ? शातिदेव कृत बोधिचर्यावतार नामक ग्रन्थ के, सक्रिय - निष्क्रिय की शंका के विषय के, कुछ श्लोक ये हैं ।
नित्या हि अचेतनः चडात्मा व्योमवत् स्फुटं अक्रियः प्रत्ययांतरसंगै ऽपि निर्विकारस्य का क्रिया ? यः पूर्ववत् क्रियाकाले, क्रियायाः तेन कि कृतम् ? तस्य क्रिया इति सम्बन्धे कतरत् तन्निबंधनम् ? करोति अनिच्छन् ईशश्चेत्, परायत्तः प्रसज्यत; इच्छन् अपि, इच्छाडायत्तः स्यात् कुर्वतः कुतः ईशता ?
'व्योम, आकाश, शून्य, पोल, के ऐसा निर्मल, निराकार, निर्विकार, नित्य ( चेतन हो भी तो ) अचेतन ( के ऐसा ) अवश्य स्पष्ट ही प्रक्रिय, क्रियाहोन है । यदि उस से भिन्न कोई प्रत्यय, हेतु, कारण, उस का प्रेरक हो भी तो निर्विकार की क्या क्रिया हो सकती है ? जो क्रिया के काल मे भी, क्रिया करते समय भी, जैसा पहिले था ठीक वैसा ही 'निर्विकार' बना रहता है, तो उस ने किया का कौन अश किया, किया ही क्या ? 'उस की क्रिया', यह जो ( षष्ठी से ) कर्त्ता और कर्म का संबंध दिखाया जाता है; उस संबंध का क्या स्वरूप है ? दोनो का परस्पर बंधन, सबधन, निर्बंधन, क्या है ? यदि अपनी इच्छा से कुछ करता है, तो निर्विकार नहीं; इच्छा रूपी विकार उस मे आया, और
|
उन्मत्त का नर्त्तन ताडव नारायण संहिता में भी कह दिया, सृष्ट्यादिकं हरिः, नैव प्रयोजनं अपेक्ष्य तु, कुरुते केवलानंदाद, यथा मत्तस्य नर्त्तनम् । पूर्णानंदस्य तस्य इह प्रयोजनमतिः कुतः ? मुक्ताः अपि भाप्तकामाः स्युः, किमु तस्यऽखिलात्मनः एक 'जैसे उन्मत्त का, पागल का, मदिरामत्त का, नाचना गाना, वैसे अखिलात्मा की यह सब चक्कर खाती, भ्रमती, प्रत्यक्ष नाचती, हुई सृष्टि, जब साधारण जीवन्मुक्त जीव आसकाम कृत-कृत्य निष्काम हो जाते है, तब खिलात्मा परमात्मा का क्या कहना है ?' पर यदि यही कह के सतोष करना था, तो दर्शनो और वादों और तर्क वितकों की छानबीन करने का महा प्रयास प्रयास क्यों किया ? वही बात, 'मदिरा और सितार' की, 'खा, पीओ, चैन करो' की, अच्छी थी ? शंकराचार्य के शारीरक भाष्य में, उक्त लीला विषयक सूत्र के भाष्य में, इस उन्मादवाद का प्रत्याख्यान भी किया है । अनुगीता मे भी ऐसी शका उठा कर, गोल ही उत्तर दे दिया है । प्रश्न - अतःपरन्तु यद् गुह्यं तद् भवान् वक्तुमर्हसि ; सत्वक्षेत्रज्ञयोः चापि संबंधः केन हेतुना ? उत्तर - विषयो विषयित्वं च संबंधोऽयं इह उच्यते । विषयी पुरुषः नित्यंः सत्वं च विषयः स्मृतः ; अनित्यं द्वद्वसंयुक्त सत्त्वं आहुर्मनीषिणः ; निद्वः निष्कलः नित्यः क्षेत्रज्ञः निर्गुणात्मकः सर्वैरपि गुणैर्विद्वान् व्यतिषक्तः न लिप्यते ; जलविदुः यथा लोलः पद्मिनीपत्र संस्थितः । 'क्षेत्रज्ञ, पुरुष, निष्क्रिय का, सत्त्व, प्रकृति, सक्रिय से संबन्ध क्यों ? विषय विषयी का यह संबंध है; विषय के गुणो से व्यतिषक्त हो कर भी विषयी लित नहीं होता ; जैसे कमल का पत्ता पानी से । पर इस से तो कुछ बौद्ध-सम्प्रदाय का ग्रन्थ सतोष नहीं होता । विषय यही कहा से ? क्या विषयी से स्वतन्त्र अन्य पदार्थ है ? तो परिणाम-वाद के झगड़े उठते है । और यदि पृथक् स्वाधीन पदार्थ हो भी, तो विषयी को क्या ग़रज पड़ी थी कि उस से व्यतिपक्त हो ? बौद्ध ग्रन्थों से भी सक्रिय-निष्क्रिय के संबंध की चर्चा उठाई है। यह भी उन ग्रन्थों से जान पड़ता है कि बुद्धदेव कभी तो, "गुरोस्तु मौनं व्याख्यान" न्याय से, उत्तर ही नहीं देते थे, चुप रह जाते थे, कभी यह कह देते थे कि यह प्रश्न अनुपयोगी है, इस विषय की छान बीन से कोई उपयोग नहीं, हमारे काम का नहीं । स्यात् प्रष्टा को अपरिपक्व कशाय, मृदु जिज्ञासु, केवल कुतूहली, अनधिकारी - समझ कर ऐसा करते हों, नहीं तो, उन्होंने स्वय जो वह वृहत् प्रतिज्ञा की, कि जनन-मरण का पार देखेगे ही, संसार के अंतिम मर्म रहस्य को जानेगे ही, वह क्यों की, वह कौन 'काम की जात' थी ? शातिदेव कृत बोधिचर्यावतार नामक ग्रन्थ के, सक्रिय - निष्क्रिय की शंका के विषय के, कुछ श्लोक ये हैं । नित्या हि अचेतनः चडात्मा व्योमवत् स्फुटं अक्रियः प्रत्ययांतरसंगै ऽपि निर्विकारस्य का क्रिया ? यः पूर्ववत् क्रियाकाले, क्रियायाः तेन कि कृतम् ? तस्य क्रिया इति सम्बन्धे कतरत् तन्निबंधनम् ? करोति अनिच्छन् ईशश्चेत्, परायत्तः प्रसज्यत; इच्छन् अपि, इच्छाडायत्तः स्यात् कुर्वतः कुतः ईशता ? 'व्योम, आकाश, शून्य, पोल, के ऐसा निर्मल, निराकार, निर्विकार, नित्य अचेतन अवश्य स्पष्ट ही प्रक्रिय, क्रियाहोन है । यदि उस से भिन्न कोई प्रत्यय, हेतु, कारण, उस का प्रेरक हो भी तो निर्विकार की क्या क्रिया हो सकती है ? जो क्रिया के काल मे भी, क्रिया करते समय भी, जैसा पहिले था ठीक वैसा ही 'निर्विकार' बना रहता है, तो उस ने किया का कौन अश किया, किया ही क्या ? 'उस की क्रिया', यह जो कर्त्ता और कर्म का संबंध दिखाया जाता है; उस संबंध का क्या स्वरूप है ? दोनो का परस्पर बंधन, सबधन, निर्बंधन, क्या है ? यदि अपनी इच्छा से कुछ करता है, तो निर्विकार नहीं; इच्छा रूपी विकार उस मे आया, और
|
गुजरात के सूरत में हत्या के बाद शव को घर की दीवार में चुनवा देने का मामला सामने आया है। माता-पिता समझते रहे कि उनका बेटा जेल में सजा काट रहा है। लेकिन उसीक तो पांच साल पहले हत्या कर घर की दीवार में ही शव को चुनवा दिया।
सूरत. गुजरात में सूरत जिले में 5 साल पहले हुई एक हत्या की गुत्थी पुलिस ने अब सुलझा ली है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने आशापुरी सोसाइटी विभाग-3 के एक घर की दीवार तोड़कर कंकाल बाहर निकाला। यह कंकाल एक युवक का था, जिसे उसी के दोस्त ने मारकर दीवार में चुन दिया था। उधर, मृतक बेटे के माता-पिता यह समझते रहे कि उनका बेटा अभी जेल में सजा काट रहा है।
फिलहाल पुलिस ने कंकाल को जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिया गया। वहीं इस मामले में हत्या के आरोपी और 30 से ज्यादा मामलों में शामिल रहे राजू बिहारी को हिरासत में ले लिया गया है। बता दें कि मृतक की पहचान किशन के रुप में हुई, जो खुशीनगर इलाके का रहने वाला था। मृतक कई गैर-कानूनी काम करता था। इसलिए घरवालों को लगता था कि वह किसी जेल में सजा काट रहा होगा। इसलिए परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत नहीं करवाई थी। लेकिन जब उसका कंकाल मिला तब कहीं जाकर पता चला कि उनके बेटे की तो हत्या हो चकी है।
(कंकाल बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा)
पुलिस ने जिस राजू बिहारी को पकड़ा है उसने किशन की हत्या करने की बात कबूल कर ली है। पूछताछ में उसने बताया कि किशन को मारकर शव को घर में बनी सीढ़ी के नीचे वाली दीवार में चुनवा दिया था। दरअसल, मृतक किशन मुखबिरी करते पकड़ा गया था। वह जब पांच साल पहले जेल से पैरोल से बाहर आया तो राजू ने उसको शराब पीने के बहाने घर पर बुला लिया। इसके बाद उसने अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और फिर शव को चुनवा दिया।
(किशन की हत्या करने वाला आरोपी राजू बिहारी)
|
गुजरात के सूरत में हत्या के बाद शव को घर की दीवार में चुनवा देने का मामला सामने आया है। माता-पिता समझते रहे कि उनका बेटा जेल में सजा काट रहा है। लेकिन उसीक तो पांच साल पहले हत्या कर घर की दीवार में ही शव को चुनवा दिया। सूरत. गुजरात में सूरत जिले में पाँच साल पहले हुई एक हत्या की गुत्थी पुलिस ने अब सुलझा ली है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने आशापुरी सोसाइटी विभाग-तीन के एक घर की दीवार तोड़कर कंकाल बाहर निकाला। यह कंकाल एक युवक का था, जिसे उसी के दोस्त ने मारकर दीवार में चुन दिया था। उधर, मृतक बेटे के माता-पिता यह समझते रहे कि उनका बेटा अभी जेल में सजा काट रहा है। फिलहाल पुलिस ने कंकाल को जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेज दिया गया। वहीं इस मामले में हत्या के आरोपी और तीस से ज्यादा मामलों में शामिल रहे राजू बिहारी को हिरासत में ले लिया गया है। बता दें कि मृतक की पहचान किशन के रुप में हुई, जो खुशीनगर इलाके का रहने वाला था। मृतक कई गैर-कानूनी काम करता था। इसलिए घरवालों को लगता था कि वह किसी जेल में सजा काट रहा होगा। इसलिए परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत नहीं करवाई थी। लेकिन जब उसका कंकाल मिला तब कहीं जाकर पता चला कि उनके बेटे की तो हत्या हो चकी है। पुलिस ने जिस राजू बिहारी को पकड़ा है उसने किशन की हत्या करने की बात कबूल कर ली है। पूछताछ में उसने बताया कि किशन को मारकर शव को घर में बनी सीढ़ी के नीचे वाली दीवार में चुनवा दिया था। दरअसल, मृतक किशन मुखबिरी करते पकड़ा गया था। वह जब पांच साल पहले जेल से पैरोल से बाहर आया तो राजू ने उसको शराब पीने के बहाने घर पर बुला लिया। इसके बाद उसने अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी और फिर शव को चुनवा दिया।
|
सन्धि ८
(१) छह माहका कठोर अनशन । ( २ ) दीक्षा लेनेवालोका दीक्षासे विचलित होना । (३) उनकी प्रतिक्रियाओका वर्णन । (४) दिव्यध्वनि द्वारा चेतावनी । (५) जिन दीक्षाका त्याग व अन्य मतोका ग्रहण; कुछ घर वापस लौट आये। कच्छ और महाकच्छके पुत्रोका आगमन; ध्यानमें लीन ऋषम जिनसे घरतीकी माँग । (६) धरणेन्द्र के आसनका कम्पायमान होना । (७) घरणेन्द्रका आकर ऋषभ जिनके दर्शन करना; नागराज द्वारा स्तुति । (८) नागराज द्वारा ऋषभ जिनका मानव जातिके लिए महत्त्व प्रतिपादित करना; नागराजकी चित्तशुद्धि । ( ९ ) नागराजकी नमि-विनमिसे बातचीत । (१०) नागराज उन्हें विजयार्घ पर्वतपर ले गया । (११) विजयार्ध पर्वतका वर्णन । (१२) नमि-विनमिको विद्यामोकी सिद्धि । (१३) नागराजने विजयाधं पर्वतकी एक श्रेणी नमिको प्रदान की। (१४) दूसरी श्रेणी विनमिको प्रदान की। (१५) पुण्यकी महत्ताका वर्णन ।
सन्धि ९
( १ ) ऋषभ द्वारा कायोत्सर्गकी समाति । (२) विहार । ( ३ ) श्रेयासका स्वप्न देखना । ( ४ ) अपने भाई राजा सोमप्रभसे स्वप्नका फल पूछना । ( ५ ) ऋषभ जिनके आनेकी द्वारपाल द्वारा सूचना; दोनो भाइयोका ऋषभ जिनके पास जाना । (६) श्रेयासको पूर्वजन्मका स्मरण और आहारदानकी घटनाका याद आना । ( ७ ) विभिन्न प्रकारके दानोका उल्लेख, (८) उत्तम पात्रके दानकी प्रशसा । ( १ ) राजा द्वारा ऋषम जिनको पड़गाहना । (१०) इक्षुरसका आहार दान, (११) पाँच प्रकारके रत्नोंकी दृष्टि । ( १२ ) भरत द्वारा प्रशंसा; आदि जिनका विहार; ज्ञानको प्राप्ति (१३) पुरिमतालपुरमे ऋषभ जिनका प्रवेश । (१४) पुरिमतालपुर उद्यानका वर्णन । (१५) ऋऋषभ जिनका आत्मचिन्तन । (१६) केवलज्ञानकी प्राप्ति । (१७-१८) इन्द्रका आगमन; ऐरावतका वर्णन । (१९) विविध सवारियोंके द्वारा देवोका आगमन । (२०) देवागनाओका आगमन । (२१-२२) समवसरणका वर्णन । (२३) समवसरण में जानेवाले विभिन्न देवोंका चित्रण । (२४) धूम्ररेखामोसे शोभित आकाशका वर्णन । (२५) व्वजोका वर्णन । (२६) परकोटाओ और स्तूपोका चित्रण; नाट्यशालाका वर्णन । (२७) सिंहासन और वन्दना करते हुए देवोका वर्णन । (२८) आकाशसे हो रही कुसुमवृष्टिका चित्रण । ( २९ ) देवो द्वारा जिनवरकी स्तुति ।
( १ ) इन्द्र द्वारा जिनवरकी स्तुति । (२) सिंहासनपर स्थित ऋषभ जिनवरका वर्णन; दिव्यध्वनि और गमनका वर्णन । ( ३ ) केवलज्ञान प्राप्त होनेके बाद ऋषभ जिनके बिहारके प्रभावका वर्णन; मानस्तम्भका वर्णन । (४) विविध देवागनाओंका जमघट । (५-८) ऋषभ जिनकी स्तुति । ( ९ ) ऋषभ जिनवर द्वारा तत्त्वकथन; जीवोका विभाजन । (१०) जीवोके भेद-प्रभेद; पृथ्वीकायादिका वर्णन । (११) वनस्पतिकाय और जलकाय जीवोका वर्णन । (१२) दोइन्द्रिय सीमइन्द्रिय आदि जीवोंका कथन । (१३) द्वीप समुद्रोका वर्णन । (१४) जलचर प्राणियोका वर्णन ।
|
सन्धि आठ छह माहका कठोर अनशन । दीक्षा लेनेवालोका दीक्षासे विचलित होना । उनकी प्रतिक्रियाओका वर्णन । दिव्यध्वनि द्वारा चेतावनी । जिन दीक्षाका त्याग व अन्य मतोका ग्रहण; कुछ घर वापस लौट आये। कच्छ और महाकच्छके पुत्रोका आगमन; ध्यानमें लीन ऋषम जिनसे घरतीकी माँग । धरणेन्द्र के आसनका कम्पायमान होना । घरणेन्द्रका आकर ऋषभ जिनके दर्शन करना; नागराज द्वारा स्तुति । नागराज द्वारा ऋषभ जिनका मानव जातिके लिए महत्त्व प्रतिपादित करना; नागराजकी चित्तशुद्धि । नागराजकी नमि-विनमिसे बातचीत । नागराज उन्हें विजयार्घ पर्वतपर ले गया । विजयार्ध पर्वतका वर्णन । नमि-विनमिको विद्यामोकी सिद्धि । नागराजने विजयाधं पर्वतकी एक श्रेणी नमिको प्रदान की। दूसरी श्रेणी विनमिको प्रदान की। पुण्यकी महत्ताका वर्णन । सन्धि नौ ऋषभ द्वारा कायोत्सर्गकी समाति । विहार । श्रेयासका स्वप्न देखना । अपने भाई राजा सोमप्रभसे स्वप्नका फल पूछना । ऋषभ जिनके आनेकी द्वारपाल द्वारा सूचना; दोनो भाइयोका ऋषभ जिनके पास जाना । श्रेयासको पूर्वजन्मका स्मरण और आहारदानकी घटनाका याद आना । विभिन्न प्रकारके दानोका उल्लेख, उत्तम पात्रके दानकी प्रशसा । राजा द्वारा ऋषम जिनको पड़गाहना । इक्षुरसका आहार दान, पाँच प्रकारके रत्नोंकी दृष्टि । भरत द्वारा प्रशंसा; आदि जिनका विहार; ज्ञानको प्राप्ति पुरिमतालपुरमे ऋषभ जिनका प्रवेश । पुरिमतालपुर उद्यानका वर्णन । ऋऋषभ जिनका आत्मचिन्तन । केवलज्ञानकी प्राप्ति । इन्द्रका आगमन; ऐरावतका वर्णन । विविध सवारियोंके द्वारा देवोका आगमन । देवागनाओका आगमन । समवसरणका वर्णन । समवसरण में जानेवाले विभिन्न देवोंका चित्रण । धूम्ररेखामोसे शोभित आकाशका वर्णन । व्वजोका वर्णन । परकोटाओ और स्तूपोका चित्रण; नाट्यशालाका वर्णन । सिंहासन और वन्दना करते हुए देवोका वर्णन । आकाशसे हो रही कुसुमवृष्टिका चित्रण । देवो द्वारा जिनवरकी स्तुति । इन्द्र द्वारा जिनवरकी स्तुति । सिंहासनपर स्थित ऋषभ जिनवरका वर्णन; दिव्यध्वनि और गमनका वर्णन । केवलज्ञान प्राप्त होनेके बाद ऋषभ जिनके बिहारके प्रभावका वर्णन; मानस्तम्भका वर्णन । विविध देवागनाओंका जमघट । ऋषभ जिनकी स्तुति । ऋषभ जिनवर द्वारा तत्त्वकथन; जीवोका विभाजन । जीवोके भेद-प्रभेद; पृथ्वीकायादिका वर्णन । वनस्पतिकाय और जलकाय जीवोका वर्णन । दोइन्द्रिय सीमइन्द्रिय आदि जीवोंका कथन । द्वीप समुद्रोका वर्णन । जलचर प्राणियोका वर्णन ।
|
प्रमुख संक्रामक ब्याभियाँ
चर्मपत्र ( Parchment ) सरश विकार
विकृति का रोपण होने पर त्वचा चर्म पत्र के समान पतली, चमकदार तथा चिकनी हो जाती है ।
वात नाडियों की विकृतिविकृत वात नाडियों रज्जु के समान मोटी तथा वेदनायुक्त हो जाती हैं, दबाने से सुनभुनाहट (Tingling ) के साथ चमक-सी पैदा होती है। कभी-कभी बात नाडियों में कुष्ठज विद्रधि भी उत्पन्न होती है। परिसरीय वात नाडियों का कुछ समय बाद अपजनन हो जाता है, जिससे सम्बद्ध पेशी समूह का शोष या क्षय हो जाता है। बहिःप्रकोष्टिका ( Radial ) वात नाडी मणिबन्ध के समीप, अन्तःप्रकोष्ठिका ( Ulner ) बात नाडी कूर्पर संधि के ऊपर बाहु के भीतरी पार्श्व में तथा उत्तानपादा ( Superficial peroneal) वात नाडी गुल्फ संधि के समीप विकृत रूप में स्पर्शलभ्य होती है।
नेत्र विकृति -
स्वच्छमण्डल व्रण ( Corneal uloer ), तारामण्डल शोध एवं नेत्र की मांसपेशियों का अंगघात आदि अनेक विकार नेत्र में कुष्ठ दण्डाणुओं का अधिष्ठान होने पर उत्पन्न होते हैं ।
नासा विकृतिप्रारम्भ में नासा की श्लेष्मल कला में विकृति होती है । निरन्तर जीर्ण प्रतिश्याय के समान नासा स्राव होता रहता है। कुछ काल बाद नाक से काफी दुर्गन्ध आने लगती है। जीर्ण स्वरूप में नासापुट की मध्यमिति ( Septum ) तथा तालु की अस्थि गल जाती है। स्वर तंत्रिकाओं (Vocal chords ) की विकृति के कारण ध्वनि सानुनासिक हो जाती है । नख तथा रोमनख मोटे, चिपटे तथा नौका के समान हो जाते हैं। नखों पर चौड़ाई में विदार उत्पन्न होने से स्वाभाविकता का नाश होता है। बाल हल्के रंग के, कुछ पतले और कम बढ़ने वाले तथा संख्या में भी कम हो जाते हैं।
विकृति की अधिष्ठानगत प्रधानता के आधार पर कुछ के तीन मुख्य वर्ग किए जाते हैं --
१. यथम प्रकार ( Tuberouloid ) -
त्वचागत विशिष्ट लक्षणों के आधार पर इसके २ उपविभाग किए जाते हैं ।
क-वर्णिक ( Macular ) विकृति - त्वचा पर एक या अनेक गोल अण्डाकृतिक या अस्पष्ट आकृतिबाले धब्बे उत्पन्न होते हैं। इनमें रंजकता की न्यूनता से हीनवर्णता,
स्पर्श की मन्दता, विकृत त्वचा से सम्बद्ध बात नाडी की स्थूलता या मोटाई में वृद्धि, त्वचा की - विशेष कर धब्बे के किनारों की त्वचा की- स्थूलता तथा रक्तवर्णता और - स्वेद न होने के कारण त्वचा की रक्षता या पर्तदार स्थिति, रोमनाश या रोमों की विवर्णता या भूरापन तथा उनमें वृद्धि का अभाव तथा कभी-कभी धब् के स्थानों पर व्रणों की उत्पत्ति आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं ।
इस वर्ग में विकृति बहुत चिरकालीन स्वरूप की होती है। तीनों भागों में विभक्त-सा ज्ञात होता है। धब्बे के केन्द्रीय भाग की त्वचा वर्मत्र ( Parchment ) के समान पतली, चमकदार, चिकनी तथा पाण्डु वर्ण की हो जाती है। स्वेद के अभाव से रूक्षता तथा स्पर्श ज्ञान न होने से शून्यता प्रतीत होती है। मध्यवर्ती भाग में अनेक छोटी-छोटी आलपीन के समान प्रन्थियों ( Tuberoles ) के सम्मिलित रूप में रहने के कारण त्वचा कुछ उमड़ी हुई सी तथा कुछ रक्काम या गहरे रंग की होती है। बाह्य भाग में क्षुद्र प्रन्थियों कम संख्या में तथा कुछ दूरी पर एक दूसरे से पृथक् रहती ख-स्पर्शनाश या शून्यता का प्रकार ( Anaesthetic form ) -
इस वर्ग में त्वचीय स्पर्शज्ञान की विकृति होती है। सबसे प्रारम्भ में उष्णता की संवेदना का नाश होता है और उसके बाद स्पर्शज्ञान नष्ट हो जाता है और अन्त में वेदनाशून्यता उत्पन्न होती है। कभी-कभी वेदना-ज्ञान आशिक रूप में बना रहता है। शाखाओं के धब्बे पूर्ण रूप से संवेदना-रहित होते हैं, किन्तु मध्य शरीर के विकृतस्थलों पर मुख्य रूप से लाप-ज्ञान का नाश होता है तथा आकृति पर उत्पन्न हुए धब्बों में संवेदना की मन्दता हो सकती है, पूर्ण नाश नहीं होता। स्वेद का पूर्ण रूप से प्रभाव हो जाता है। विकृति के कारण नाडियों का अपजनन होने से सम्बद्ध मांसपेशिय सिकुड़ कर क्षीण हो जाती हैं। आक्रान्त बात नाडियाँ मोटी तथा वेदनायुक्त होती हैं। स्थानीय कोषाओं में जीवनी शक्ति का ह्रास होने के कारण व्रण ( Trophic aloers ) उत्पन्न होते हैं। शाखाओं की अस्थियों विशेष कर अङ्गुलियों में कैलसियम की कमी के कारण विकृति उत्पन्न होती है तथा विकृत स्थलों पर व्रण भी उत्पन्न होते हैं।
इस वर्ग में त्वचा तथा बात नाडियों में उपसर्ग की तीव्रता कम होती है, किन्तु वातनाडियों की विकृति के लक्षण अधिक मिलते हैं। व्याधि के प्रकोप के पूर्व मानसिक अवसाद, हल्की सर्दी एवं थकान का अनुभव तथा बात नाडियों में शूल के लक्षण उत्पन्न होते हैं। कभी-कभी बात नाडियों के ऊपर की त्वचा में दनु के समान विस्फोट उत्पन्न होते हैं। बात नाडियों धीरे-धीरे स्थूल हो जाती हैं तथा अंगुष्ठमूल के इस्ततलीय भाग को पेशियों का क्षय हो जाता है और अनामिका एवं कनिष्ठिका अंगुलि में संकोच उत्पन्न होता है। छोटी अस्थियों का शोषण होने के कारण अंगूठा तथा अँगुलियाँ नष्ट हो जाती है। नाखून में विकृति होती है तथा त्वचा पर निच्छिद्रित व्रण ( Perforated nloers ) उत्पन्न होते हैं।
कुष्ठीय प्रकार ( Lepromatous ) -
रोगी की दुर्बलता तथा उपसंर्ग की उम्रता के कारण कुष्ठ का प्रकोप व्यापक रूप का होता है । इस प्रकार में वर्णिक, कर्णिक तथा ग्रन्थिक प्रकार के विस्फोट, निच्छिद्रित व्रण ( Perforated ulcer ) तथा कोषाओं का व्यापक अन्तराभरण (Infiltration) आदि त्वचा के विकार एवं अनेक व्रात नाडियों को विकृति उत्पन्न होती है। प्रन्थियों भी यत्र-तत्र उत्पन्न होती हैं तथा उनमें व्रण हो जाते हैं। आक्रमण के प्रारंभ में कुष्ठीय ज्वर, कम्प, प्रस्वेद, वर्द्धमानस्वरूप की दुर्बलता, अतिसार, नासालाव या नासा श्लेष्मलकला को शुष्कता तथा नासा से रक्तस्राव आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। प्रायः इन्हीं लक्षणों के साथ आकृति, नितम्ब, जंघा तथा अग्रबाहु पर हल्के रुधिर वर्ण के विस्फोट निकलते हैं । शीघ्र ही इनमें संवेदना की न्यूनता तथा स्वेदाभाव के लक्षण उत्पन्न होते हैं। ज्वरादि लक्षणों का शमन होने पर विस्फोटों का रंग कुछ श्यावारुण सा होता है, किन्तु शीघ्र ही ज्वर का पुनरावर्त्तन होता है और विस्फोट-स्थल पर पूर्ववत् उत्कर्णिक रूप उत्पन्न हो जाता है। दो-तीन बार इस प्रकार की प्रतिक्रिया होने के बाद इन्हीं स्थलों पर छोटो-छोटी ग्रन्थियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। व्यापक प्रसार की स्थिति में हाथ तथा पैर के बाहरी भाग पर इस प्रकार की प्रन्थियाँ अधिक उत्पन्न होती हैं। भ्रू के बाहरी भाग के रोम नष्ट हो जाते हैं, स्तन चूचुक बड़ा तथा मोटा हो जाता है, स्त्रियों के स्तन भी बढ़ जाते हैं। नासा, प्रसनिका, स्वरयंत्र, नेत्र आदि अवयवों पर भी व्याधि का प्रसार हो सकता है तथा इन पर व्रण उत्पन्न हो जाते हैं । नासिका बढ़ी हुई, कर्णपालो मोटी तथा लटकी हुई और कपोल फूले हुए से होने के कारण आकृति सिंह के समान हो जाती है। प्रन्थियों में व्रणोत्पत्ति तथा द्वितीय उपसर्गों के कारण पूयस्राव होता रहता है ।
अविशिष्ट प्रकार ( Atypical leproma ) -
धब्बों के किनारे अस्पष्ट तथा उनमें उभाड़ का अभाव तथा स्वल्प संख्या में विस्फोटों की उत्पत्ति और कुष्ठ के दूसरे लक्षण होते हैं ।
इन वर्गों के अतिरिक्त केवल वात नाडी में विकृति वाले रोगी भी मिलते हैं। इनमें शरीर पर कहीं धब्बे या विस्फोट नहीं रहते, केवल परिसरीय वात नाडियों में विशेषकर बड़ी वात नाडियों में - तन्तूत्कर्ष के लक्षण उत्पन्न होते हैं । वात नाडियों काफी कड़ी तथा मोटी हो जाती हैं। जोर्ण स्वरूप के परिसरीय वात नाडी शोथ के लक्षण प्रतीत होते हैं। मांस पेशियों का अत्यधिक क्षय होता है तथा स्थानिक अंगघात के लक्षण उत्पन्न होते हैं। बाहु के आन्तरिक भाग या जंघा के बहिर्भाग में शून्यता उत्पन्न होती है ।
कुष्ठ के कई वर्गों के मिले-जुले लक्षण उत्पन्न होकर मिश्र स्वरूप ( Mixed type ) का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसलिए निदान करते समय वर्गों की सीमा में ही निर्णय की चेष्टा न करनी चाहिए ।
लक्षणविशेष प्रकार के विस्फोट त्वचा की विवर्णता, संज्ञा नाश - विशेष करताप एवं स्पर्शज्ञान का अभाव, भ्रू-प्रान्त के रोमों का नाश, विकृति-स्थल में रोमों का नाश, हीनवर्णता या पतले और स्वल्प संख्या में रोमों की उपस्थिति, कर्णपाली का मोटापन एवं सिंहवत् आकृति, स्वेद का अभाव, बात नाडियों की स्थूलता तथा स्पर्श में रज्जु के समान कठोर प्रतीति, दुगंधित नासास्राव, नासा की मिति एवं तल का निच्छद्रण तथा सानु - नासिक ध्वनि, परिसरीय बात नाडी शोध या बात नाडियों का आयात और उससे उत्पन्न मांस-पेशियों का अपचय, आकुचन, निच्छिद्रित व्रण एवं अस्थियों का विनाश आदि कुष्ठ के महत्त्वपूर्ण लक्षण माने जाते हैं। कुष्ठ दरडाणुओं का वृषण प्रन्थियों पर प्रसार हो जाने पर पौरुष शक्ति का नाश हो जाता है।
प्रायोगिक परीक्षानासाखाव या नासा की श्लेष्मलकला के रण्ड की परीक्षा, विस्फोट स्थलों की त्वचा के ऊपरी पर्त को खुरच कर परीक्षा एवं कुष्ठ व्रणों के तल से प्राप्त कोषाओं की विशेष पद्धति से परीक्षा करने पर कुष्ठ दण्डाणुओं की उपलब्धि हो सकती है। अभी तक कुष्ठ दण्डाणुओं का प्राणिरोरण या प्रयोगशालीय सम्बर्द्धन संभव नहीं हो सका। व्याधि की सक्रिय अवस्था में प्रायः रक्ताबसादनगति बढ़ी हुई मिलती है।
सापेक्ष्यनिदानफिर, यक्ष्मजत्वक् पिडिका (Lupus vulgaris ), परङ्गी (Xaws), प्राज्यव्रण ( Oriental sore ), त्वक् लिशमन्यता ( Dermal leismsniesis ), परिसरीय बातनाडी शोथ (Peripheral neuritis ), बर्द्धमान मांसक्षय ( Progressive musoular atrophy ), सिरिंगोमायलिया ( Syringomyelia ), सोरिएसिस (Psoriesis ) तथा श्वेत कुष्ठ (Leukoderma ) आदि से इसका पार्थक्य करना चाहिए । त्वचा में रंजक तत्व की न्यूनता के कारण वर्णपरिवर्तन, स्वेद तथा रोमों की कमी, संज्ञानाश या कचित् परम स्पर्शज्ञता ( Hyperaesthesis ), वातनाडियों का रज्जुबत मोटापन, मांसपेशियों का स्थानिक रूप में क्षय तथा मुख्य रूप से कुष्ठ दण्डाणु की उपलब्धि से रोग का सापेक्ष निदान होता है ।
रोग विनिश्चियसामान्य विकृत स्थलों के स्राव से दण्डाणुओं के न मिलने पर कुष्ठमंथि के भीतर से साब या उरःफलकवेष (Sternal puncture ) के द्वारा प्राप्त स्राव की विशेष परीक्षा की जाती है। कुष्टि कसौटी ( Lepromin test ) यदमप्रकार ( Tuberouloid ) कुष्ठ में अस्त्यात्मक, किन्तु कुष्ठीय प्रकार (Lepromatous) में नास्त्यात्मक रहती है। कुष्ठाकान्त व्यक्ति के साथ दीर्घकाल तक सम्पर्क का इतिहास भी कभी-कभी निदान में सहायक होता है।
उपद्रव तथा अनुगामी विकारवृषण प्रन्थियों का अपंजनन तथा नपुंसकता, नेत्रव्रण तथा दृष्टिनाश, अपोषणजव्रण ( Trophic ulcers ), अस्थिनाश तथा हस्त - पादागुलियों का पूर्ण विनाश, मांसक्षय एवं शाखाओं की विकलांगता आदि कुष्ठ में उपद्रव एवं अनुगामी विकार उत्पन्न होते हैं। कुष्ठीय प्रकार हीन प्रतिक्रिया के कारण उत्पन्न होता है तथा उसमें उपद्रव अधिक होते हैं ।
जीर्ण रोगियों में, विशेषकर कुष्ठीय प्रकार में पूर्ण लाभ नहीं हो पाता। यदिम प्रकार में क्षय, फुफ्फुसपाक तथा वृक्क विकारों का उपद्रव होने पर असाध्यता बढ़ती है । कुष्ठ की साध्यता रोगी की विशिष्ट ओषधियों की सात्म्यता, रक्तावसादन गति की स्वाभाविक मर्यादा तथा शारीरिक पुष्टि पर निर्भर करती है ।
चिकित्सासामान्यक्षय के समान कुष्ठ की चिकित्सा की सफलता भी रोगी की शारीरिक क्षमता एव बल-पुष्टि पर निर्भर करती है । पोषक आहार, शुद्ध जलवायु एवं स्वास्थ्यकर स्थानों में निवास तथा नियमित व्यायाम से शारीरिक क्षमता की वृद्धि होकर रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है। कुष्ठपीडित जनपदों में अंकुशमुखकृमिविकार, विषमञ्चर, कालञ्चर, आमप्रवाहिका, श्लीपद, फिरङ्ग एवं हीन पोषण के रोग - बेरी-बेरी, स्कर्वी आदि - प्रायः मिलते हैं। कुष्ठप्रस्त रोगियों में इन व्याधियों का अनुसंधान करके उनकी समुचित चिकित्सा व्यवस्था करनी चाहिए ।
इस रोग की विशिष्ट ओषधियों का प्रयोग शारीरिक पुष्टि एवं क्षमता की वृद्धि होने पर ही लाभकर होता है। रक्तावसादन गति की वृद्धि व्याधि की सक्रियता का परिचय देती है। जब तक कुष्ठी प्रतिक्रिया ( Lepra reation ) होगी, ओषधियों सात्म्य न होंगी तथा व्याधि का प्रसार होता जायगा। रोगी की मानसिक प्रसनता, रोगमुक्ति का विश्वास तथा चिकित्सा के प्रति पूर्ण आस्था रहने से शीघ्र लाभ होता है। 'रोग पूर्व जन्म के पापों का फल है यह भावना निर्मूल कराना आवश्यक है - अन्यथा रोगी में हीनतामूलक विचार उत्पन्न होंगे तथा पर्याप्त समय तक चिकित्सा व्यवस्था चला पाना संभव न होगा। रोगी सामाजिक अवमानना के भय से रोग की प्रारम्भिक अवस्था में चिकित्सक से परामर्श लेना नहीं चाहता तथा कुटुम्बियों से छिपाकर थोड़ी बहुत उपचार को व्यवस्था करता है। इससे पूर्ण लाभ नहीं होता तथा रोग का प्रसार भी बढ़ जाता है। इस विषय में प्रचारात्मक शिक्षण की व्यवस्थां लाभप्रद सिद्ध होगी ।
|
प्रमुख संक्रामक ब्याभियाँ चर्मपत्र सरश विकार विकृति का रोपण होने पर त्वचा चर्म पत्र के समान पतली, चमकदार तथा चिकनी हो जाती है । वात नाडियों की विकृतिविकृत वात नाडियों रज्जु के समान मोटी तथा वेदनायुक्त हो जाती हैं, दबाने से सुनभुनाहट के साथ चमक-सी पैदा होती है। कभी-कभी बात नाडियों में कुष्ठज विद्रधि भी उत्पन्न होती है। परिसरीय वात नाडियों का कुछ समय बाद अपजनन हो जाता है, जिससे सम्बद्ध पेशी समूह का शोष या क्षय हो जाता है। बहिःप्रकोष्टिका वात नाडी मणिबन्ध के समीप, अन्तःप्रकोष्ठिका बात नाडी कूर्पर संधि के ऊपर बाहु के भीतरी पार्श्व में तथा उत्तानपादा वात नाडी गुल्फ संधि के समीप विकृत रूप में स्पर्शलभ्य होती है। नेत्र विकृति - स्वच्छमण्डल व्रण , तारामण्डल शोध एवं नेत्र की मांसपेशियों का अंगघात आदि अनेक विकार नेत्र में कुष्ठ दण्डाणुओं का अधिष्ठान होने पर उत्पन्न होते हैं । नासा विकृतिप्रारम्भ में नासा की श्लेष्मल कला में विकृति होती है । निरन्तर जीर्ण प्रतिश्याय के समान नासा स्राव होता रहता है। कुछ काल बाद नाक से काफी दुर्गन्ध आने लगती है। जीर्ण स्वरूप में नासापुट की मध्यमिति तथा तालु की अस्थि गल जाती है। स्वर तंत्रिकाओं की विकृति के कारण ध्वनि सानुनासिक हो जाती है । नख तथा रोमनख मोटे, चिपटे तथा नौका के समान हो जाते हैं। नखों पर चौड़ाई में विदार उत्पन्न होने से स्वाभाविकता का नाश होता है। बाल हल्के रंग के, कुछ पतले और कम बढ़ने वाले तथा संख्या में भी कम हो जाते हैं। विकृति की अधिष्ठानगत प्रधानता के आधार पर कुछ के तीन मुख्य वर्ग किए जाते हैं -- एक. यथम प्रकार - त्वचागत विशिष्ट लक्षणों के आधार पर इसके दो उपविभाग किए जाते हैं । क-वर्णिक विकृति - त्वचा पर एक या अनेक गोल अण्डाकृतिक या अस्पष्ट आकृतिबाले धब्बे उत्पन्न होते हैं। इनमें रंजकता की न्यूनता से हीनवर्णता, स्पर्श की मन्दता, विकृत त्वचा से सम्बद्ध बात नाडी की स्थूलता या मोटाई में वृद्धि, त्वचा की - विशेष कर धब्बे के किनारों की त्वचा की- स्थूलता तथा रक्तवर्णता और - स्वेद न होने के कारण त्वचा की रक्षता या पर्तदार स्थिति, रोमनाश या रोमों की विवर्णता या भूरापन तथा उनमें वृद्धि का अभाव तथा कभी-कभी धब् के स्थानों पर व्रणों की उत्पत्ति आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं । इस वर्ग में विकृति बहुत चिरकालीन स्वरूप की होती है। तीनों भागों में विभक्त-सा ज्ञात होता है। धब्बे के केन्द्रीय भाग की त्वचा वर्मत्र के समान पतली, चमकदार, चिकनी तथा पाण्डु वर्ण की हो जाती है। स्वेद के अभाव से रूक्षता तथा स्पर्श ज्ञान न होने से शून्यता प्रतीत होती है। मध्यवर्ती भाग में अनेक छोटी-छोटी आलपीन के समान प्रन्थियों के सम्मिलित रूप में रहने के कारण त्वचा कुछ उमड़ी हुई सी तथा कुछ रक्काम या गहरे रंग की होती है। बाह्य भाग में क्षुद्र प्रन्थियों कम संख्या में तथा कुछ दूरी पर एक दूसरे से पृथक् रहती ख-स्पर्शनाश या शून्यता का प्रकार - इस वर्ग में त्वचीय स्पर्शज्ञान की विकृति होती है। सबसे प्रारम्भ में उष्णता की संवेदना का नाश होता है और उसके बाद स्पर्शज्ञान नष्ट हो जाता है और अन्त में वेदनाशून्यता उत्पन्न होती है। कभी-कभी वेदना-ज्ञान आशिक रूप में बना रहता है। शाखाओं के धब्बे पूर्ण रूप से संवेदना-रहित होते हैं, किन्तु मध्य शरीर के विकृतस्थलों पर मुख्य रूप से लाप-ज्ञान का नाश होता है तथा आकृति पर उत्पन्न हुए धब्बों में संवेदना की मन्दता हो सकती है, पूर्ण नाश नहीं होता। स्वेद का पूर्ण रूप से प्रभाव हो जाता है। विकृति के कारण नाडियों का अपजनन होने से सम्बद्ध मांसपेशिय सिकुड़ कर क्षीण हो जाती हैं। आक्रान्त बात नाडियाँ मोटी तथा वेदनायुक्त होती हैं। स्थानीय कोषाओं में जीवनी शक्ति का ह्रास होने के कारण व्रण उत्पन्न होते हैं। शाखाओं की अस्थियों विशेष कर अङ्गुलियों में कैलसियम की कमी के कारण विकृति उत्पन्न होती है तथा विकृत स्थलों पर व्रण भी उत्पन्न होते हैं। इस वर्ग में त्वचा तथा बात नाडियों में उपसर्ग की तीव्रता कम होती है, किन्तु वातनाडियों की विकृति के लक्षण अधिक मिलते हैं। व्याधि के प्रकोप के पूर्व मानसिक अवसाद, हल्की सर्दी एवं थकान का अनुभव तथा बात नाडियों में शूल के लक्षण उत्पन्न होते हैं। कभी-कभी बात नाडियों के ऊपर की त्वचा में दनु के समान विस्फोट उत्पन्न होते हैं। बात नाडियों धीरे-धीरे स्थूल हो जाती हैं तथा अंगुष्ठमूल के इस्ततलीय भाग को पेशियों का क्षय हो जाता है और अनामिका एवं कनिष्ठिका अंगुलि में संकोच उत्पन्न होता है। छोटी अस्थियों का शोषण होने के कारण अंगूठा तथा अँगुलियाँ नष्ट हो जाती है। नाखून में विकृति होती है तथा त्वचा पर निच्छिद्रित व्रण उत्पन्न होते हैं। कुष्ठीय प्रकार - रोगी की दुर्बलता तथा उपसंर्ग की उम्रता के कारण कुष्ठ का प्रकोप व्यापक रूप का होता है । इस प्रकार में वर्णिक, कर्णिक तथा ग्रन्थिक प्रकार के विस्फोट, निच्छिद्रित व्रण तथा कोषाओं का व्यापक अन्तराभरण आदि त्वचा के विकार एवं अनेक व्रात नाडियों को विकृति उत्पन्न होती है। प्रन्थियों भी यत्र-तत्र उत्पन्न होती हैं तथा उनमें व्रण हो जाते हैं। आक्रमण के प्रारंभ में कुष्ठीय ज्वर, कम्प, प्रस्वेद, वर्द्धमानस्वरूप की दुर्बलता, अतिसार, नासालाव या नासा श्लेष्मलकला को शुष्कता तथा नासा से रक्तस्राव आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। प्रायः इन्हीं लक्षणों के साथ आकृति, नितम्ब, जंघा तथा अग्रबाहु पर हल्के रुधिर वर्ण के विस्फोट निकलते हैं । शीघ्र ही इनमें संवेदना की न्यूनता तथा स्वेदाभाव के लक्षण उत्पन्न होते हैं। ज्वरादि लक्षणों का शमन होने पर विस्फोटों का रंग कुछ श्यावारुण सा होता है, किन्तु शीघ्र ही ज्वर का पुनरावर्त्तन होता है और विस्फोट-स्थल पर पूर्ववत् उत्कर्णिक रूप उत्पन्न हो जाता है। दो-तीन बार इस प्रकार की प्रतिक्रिया होने के बाद इन्हीं स्थलों पर छोटो-छोटी ग्रन्थियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। व्यापक प्रसार की स्थिति में हाथ तथा पैर के बाहरी भाग पर इस प्रकार की प्रन्थियाँ अधिक उत्पन्न होती हैं। भ्रू के बाहरी भाग के रोम नष्ट हो जाते हैं, स्तन चूचुक बड़ा तथा मोटा हो जाता है, स्त्रियों के स्तन भी बढ़ जाते हैं। नासा, प्रसनिका, स्वरयंत्र, नेत्र आदि अवयवों पर भी व्याधि का प्रसार हो सकता है तथा इन पर व्रण उत्पन्न हो जाते हैं । नासिका बढ़ी हुई, कर्णपालो मोटी तथा लटकी हुई और कपोल फूले हुए से होने के कारण आकृति सिंह के समान हो जाती है। प्रन्थियों में व्रणोत्पत्ति तथा द्वितीय उपसर्गों के कारण पूयस्राव होता रहता है । अविशिष्ट प्रकार - धब्बों के किनारे अस्पष्ट तथा उनमें उभाड़ का अभाव तथा स्वल्प संख्या में विस्फोटों की उत्पत्ति और कुष्ठ के दूसरे लक्षण होते हैं । इन वर्गों के अतिरिक्त केवल वात नाडी में विकृति वाले रोगी भी मिलते हैं। इनमें शरीर पर कहीं धब्बे या विस्फोट नहीं रहते, केवल परिसरीय वात नाडियों में विशेषकर बड़ी वात नाडियों में - तन्तूत्कर्ष के लक्षण उत्पन्न होते हैं । वात नाडियों काफी कड़ी तथा मोटी हो जाती हैं। जोर्ण स्वरूप के परिसरीय वात नाडी शोथ के लक्षण प्रतीत होते हैं। मांस पेशियों का अत्यधिक क्षय होता है तथा स्थानिक अंगघात के लक्षण उत्पन्न होते हैं। बाहु के आन्तरिक भाग या जंघा के बहिर्भाग में शून्यता उत्पन्न होती है । कुष्ठ के कई वर्गों के मिले-जुले लक्षण उत्पन्न होकर मिश्र स्वरूप का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसलिए निदान करते समय वर्गों की सीमा में ही निर्णय की चेष्टा न करनी चाहिए । लक्षणविशेष प्रकार के विस्फोट त्वचा की विवर्णता, संज्ञा नाश - विशेष करताप एवं स्पर्शज्ञान का अभाव, भ्रू-प्रान्त के रोमों का नाश, विकृति-स्थल में रोमों का नाश, हीनवर्णता या पतले और स्वल्प संख्या में रोमों की उपस्थिति, कर्णपाली का मोटापन एवं सिंहवत् आकृति, स्वेद का अभाव, बात नाडियों की स्थूलता तथा स्पर्श में रज्जु के समान कठोर प्रतीति, दुगंधित नासास्राव, नासा की मिति एवं तल का निच्छद्रण तथा सानु - नासिक ध्वनि, परिसरीय बात नाडी शोध या बात नाडियों का आयात और उससे उत्पन्न मांस-पेशियों का अपचय, आकुचन, निच्छिद्रित व्रण एवं अस्थियों का विनाश आदि कुष्ठ के महत्त्वपूर्ण लक्षण माने जाते हैं। कुष्ठ दरडाणुओं का वृषण प्रन्थियों पर प्रसार हो जाने पर पौरुष शक्ति का नाश हो जाता है। प्रायोगिक परीक्षानासाखाव या नासा की श्लेष्मलकला के रण्ड की परीक्षा, विस्फोट स्थलों की त्वचा के ऊपरी पर्त को खुरच कर परीक्षा एवं कुष्ठ व्रणों के तल से प्राप्त कोषाओं की विशेष पद्धति से परीक्षा करने पर कुष्ठ दण्डाणुओं की उपलब्धि हो सकती है। अभी तक कुष्ठ दण्डाणुओं का प्राणिरोरण या प्रयोगशालीय सम्बर्द्धन संभव नहीं हो सका। व्याधि की सक्रिय अवस्था में प्रायः रक्ताबसादनगति बढ़ी हुई मिलती है। सापेक्ष्यनिदानफिर, यक्ष्मजत्वक् पिडिका , परङ्गी , प्राज्यव्रण , त्वक् लिशमन्यता , परिसरीय बातनाडी शोथ , बर्द्धमान मांसक्षय , सिरिंगोमायलिया , सोरिएसिस तथा श्वेत कुष्ठ आदि से इसका पार्थक्य करना चाहिए । त्वचा में रंजक तत्व की न्यूनता के कारण वर्णपरिवर्तन, स्वेद तथा रोमों की कमी, संज्ञानाश या कचित् परम स्पर्शज्ञता , वातनाडियों का रज्जुबत मोटापन, मांसपेशियों का स्थानिक रूप में क्षय तथा मुख्य रूप से कुष्ठ दण्डाणु की उपलब्धि से रोग का सापेक्ष निदान होता है । रोग विनिश्चियसामान्य विकृत स्थलों के स्राव से दण्डाणुओं के न मिलने पर कुष्ठमंथि के भीतर से साब या उरःफलकवेष के द्वारा प्राप्त स्राव की विशेष परीक्षा की जाती है। कुष्टि कसौटी यदमप्रकार कुष्ठ में अस्त्यात्मक, किन्तु कुष्ठीय प्रकार में नास्त्यात्मक रहती है। कुष्ठाकान्त व्यक्ति के साथ दीर्घकाल तक सम्पर्क का इतिहास भी कभी-कभी निदान में सहायक होता है। उपद्रव तथा अनुगामी विकारवृषण प्रन्थियों का अपंजनन तथा नपुंसकता, नेत्रव्रण तथा दृष्टिनाश, अपोषणजव्रण , अस्थिनाश तथा हस्त - पादागुलियों का पूर्ण विनाश, मांसक्षय एवं शाखाओं की विकलांगता आदि कुष्ठ में उपद्रव एवं अनुगामी विकार उत्पन्न होते हैं। कुष्ठीय प्रकार हीन प्रतिक्रिया के कारण उत्पन्न होता है तथा उसमें उपद्रव अधिक होते हैं । जीर्ण रोगियों में, विशेषकर कुष्ठीय प्रकार में पूर्ण लाभ नहीं हो पाता। यदिम प्रकार में क्षय, फुफ्फुसपाक तथा वृक्क विकारों का उपद्रव होने पर असाध्यता बढ़ती है । कुष्ठ की साध्यता रोगी की विशिष्ट ओषधियों की सात्म्यता, रक्तावसादन गति की स्वाभाविक मर्यादा तथा शारीरिक पुष्टि पर निर्भर करती है । चिकित्सासामान्यक्षय के समान कुष्ठ की चिकित्सा की सफलता भी रोगी की शारीरिक क्षमता एव बल-पुष्टि पर निर्भर करती है । पोषक आहार, शुद्ध जलवायु एवं स्वास्थ्यकर स्थानों में निवास तथा नियमित व्यायाम से शारीरिक क्षमता की वृद्धि होकर रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है। कुष्ठपीडित जनपदों में अंकुशमुखकृमिविकार, विषमञ्चर, कालञ्चर, आमप्रवाहिका, श्लीपद, फिरङ्ग एवं हीन पोषण के रोग - बेरी-बेरी, स्कर्वी आदि - प्रायः मिलते हैं। कुष्ठप्रस्त रोगियों में इन व्याधियों का अनुसंधान करके उनकी समुचित चिकित्सा व्यवस्था करनी चाहिए । इस रोग की विशिष्ट ओषधियों का प्रयोग शारीरिक पुष्टि एवं क्षमता की वृद्धि होने पर ही लाभकर होता है। रक्तावसादन गति की वृद्धि व्याधि की सक्रियता का परिचय देती है। जब तक कुष्ठी प्रतिक्रिया होगी, ओषधियों सात्म्य न होंगी तथा व्याधि का प्रसार होता जायगा। रोगी की मानसिक प्रसनता, रोगमुक्ति का विश्वास तथा चिकित्सा के प्रति पूर्ण आस्था रहने से शीघ्र लाभ होता है। 'रोग पूर्व जन्म के पापों का फल है यह भावना निर्मूल कराना आवश्यक है - अन्यथा रोगी में हीनतामूलक विचार उत्पन्न होंगे तथा पर्याप्त समय तक चिकित्सा व्यवस्था चला पाना संभव न होगा। रोगी सामाजिक अवमानना के भय से रोग की प्रारम्भिक अवस्था में चिकित्सक से परामर्श लेना नहीं चाहता तथा कुटुम्बियों से छिपाकर थोड़ी बहुत उपचार को व्यवस्था करता है। इससे पूर्ण लाभ नहीं होता तथा रोग का प्रसार भी बढ़ जाता है। इस विषय में प्रचारात्मक शिक्षण की व्यवस्थां लाभप्रद सिद्ध होगी ।
|
इसका उल्लेख किया जा चुका है। कम्बोज के धोड़े बहुत उत्तम होते थे। इनकी चाल बहुत तेज होती और किसी भी तरह की आवाज से ये डरते नहीं थे ।' उत्तरापथ अपने जातिअंत घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था । घोड़ों के व्यापारियों का द्वारका जाने का उल्लेख है । अन्य कुमारों ने उनसे मोटे और बड़े घोड़े खरीदे जब कि कृष्ण वासुदेव ने कमजोर लेकिन लक्षणसम्पन्न घोड़े मोल लिये। दीलवालिया ( ? ) के खचर अच्छे समझे जाते थे। पुण्डू ( महास्थान, जिला योगरा, चंगाल ) अपनी काली गायों के लिए प्रसिद्ध था; गायों को खाने के लिए गन्ने दिये जाते थे ।" भेरण्ड ( ? ) में गन्ना बहुत होता था । महाहिमवन्त' गोशोर्प चन्दन के लिए विख्यात था। पारसउल (ईरान) से शंख, पूर्गीफल ( सुपारी), चन्दन, अगुरु, मंजीठ, चांदी, सोना, मणि, मुक्ता, प्रवाल आदि बहुमूल्य वस्तुएँ आयात होती थीं ।
विदेशों से माल लाने वाले व्यापारी राजकर से बचने के लिए छल-कपट करने से नहीं चूकते थे । राजप्रश्नीय में उल्लेख है कि अंकरत्न, शंख और हाथोदाँत के व्यापारी टैक्स से बचने के लिए सीवे मार्गों से यात्रा न कर दुर्गम मार्ग से घूम-घूमकर, इष्ट स्थान पर पहुँचते थे । वेन्यातट के व्यापारी अचल का उल्लेख किया जा चुका है। पारसकूल से धन कमाकर जब वह स्वदेश लौटकर आया तो वह विक्रमराजा के पास सोने, चाँदी और मोतियों के थाल लेकर उपस्थित हुआ। राजा ने पंचकुल के साथ उसके माल का स्वयं निरीक्षण किया। अचल ने शंख, सुपारी, चंदन आदि माल दिखा दिया, लेकिन राजा के कर्मचारियों ने जब पादप्रहार और बांस को लकड़ियों को चोरियों (चोल्ल) में खूँचकर देखा तो मजीठ आदि के अन्दर छिपाकर रक्खे
१. उत्तराध्ययनसूत्र ११.१६ ।
२. उत्तराध्ययनटीका ६, पृ० १४१ । ३. श्रावश्यकचूर्ण पृ० ५५३ । ४. दशवैकालिकचूर्ण ६, पृ० २१३ । ५. तन्दुलवेयालियटीका १० २६-८ । ६. जीवाभिगम ३, पृ० ३५५ । ७. उत्तराध्ययनटीका १८, पृ० २५२ । ८. वही, ३, पृ० ६४ प्र
|
इसका उल्लेख किया जा चुका है। कम्बोज के धोड़े बहुत उत्तम होते थे। इनकी चाल बहुत तेज होती और किसी भी तरह की आवाज से ये डरते नहीं थे ।' उत्तरापथ अपने जातिअंत घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था । घोड़ों के व्यापारियों का द्वारका जाने का उल्लेख है । अन्य कुमारों ने उनसे मोटे और बड़े घोड़े खरीदे जब कि कृष्ण वासुदेव ने कमजोर लेकिन लक्षणसम्पन्न घोड़े मोल लिये। दीलवालिया के खचर अच्छे समझे जाते थे। पुण्डू अपनी काली गायों के लिए प्रसिद्ध था; गायों को खाने के लिए गन्ने दिये जाते थे ।" भेरण्ड में गन्ना बहुत होता था । महाहिमवन्त' गोशोर्प चन्दन के लिए विख्यात था। पारसउल से शंख, पूर्गीफल , चन्दन, अगुरु, मंजीठ, चांदी, सोना, मणि, मुक्ता, प्रवाल आदि बहुमूल्य वस्तुएँ आयात होती थीं । विदेशों से माल लाने वाले व्यापारी राजकर से बचने के लिए छल-कपट करने से नहीं चूकते थे । राजप्रश्नीय में उल्लेख है कि अंकरत्न, शंख और हाथोदाँत के व्यापारी टैक्स से बचने के लिए सीवे मार्गों से यात्रा न कर दुर्गम मार्ग से घूम-घूमकर, इष्ट स्थान पर पहुँचते थे । वेन्यातट के व्यापारी अचल का उल्लेख किया जा चुका है। पारसकूल से धन कमाकर जब वह स्वदेश लौटकर आया तो वह विक्रमराजा के पास सोने, चाँदी और मोतियों के थाल लेकर उपस्थित हुआ। राजा ने पंचकुल के साथ उसके माल का स्वयं निरीक्षण किया। अचल ने शंख, सुपारी, चंदन आदि माल दिखा दिया, लेकिन राजा के कर्मचारियों ने जब पादप्रहार और बांस को लकड़ियों को चोरियों में खूँचकर देखा तो मजीठ आदि के अन्दर छिपाकर रक्खे एक. उत्तराध्ययनसूत्र ग्यारह.सोलह । दो. उत्तराध्ययनटीका छः, पृशून्य एक सौ इकतालीस । तीन. श्रावश्यकचूर्ण पृशून्य पाँच सौ तिरेपन । चार. दशवैकालिकचूर्ण छः, पृशून्य दो सौ तेरह । पाँच. तन्दुलवेयालियटीका दस छब्बीस-आठ । छः. जीवाभिगम तीन, पृशून्य तीन सौ पचपन । सात. उत्तराध्ययनटीका अट्ठारह, पृशून्य दो सौ बावन । आठ. वही, तीन, पृशून्य चौंसठ प्र
|
"तुम क्या करोगी --जो भी करेगा तुम्हारा लॉयर करेगा । तुम्हें बस तैयार रहना होगा उस बात के लिए जो तुम चाहती हो ।"
"डोंट यू वॉन्ट टू गैट रिड ऑफ़ दिस रिलेशन ?"
फिर वही ---क्या जानता नहीं है रिचार्ड ? उसे उस पर भी खीज आई जबकि उसका क्या अपराध था ? यही कि वह हर पल उसकी सहायता करता रहा था ?
"पुनीत बोल सकता है, कोर्ट उससे ही पूछेगा कि वह क्या चाहता है ? तुम बिलकुल चिंता मत करो ---"
"जैनी ! प्लीज़ बी रेडी एंड चेंज हिज़ क्लोथ्स ----"
"ओह ! गेट रेडी माय हाइनेस ----" वह भानु के करीब आ गया । जानता था, उसका मन नहीं था लेकिन वह उसको चेंज के लिए ले जाना चाहता था । ऐसे तो कब तक ?
इस बीच पुनीत कई बार भानु से पूछ चुका था;
"हू वाज़ दैट पर्सन ?"
बच्चे को मनोवैज्ञानिक रूप से समझना, समझाना बहुत ज़रूरी होता है लेकिन ----!!
|
"तुम क्या करोगी --जो भी करेगा तुम्हारा लॉयर करेगा । तुम्हें बस तैयार रहना होगा उस बात के लिए जो तुम चाहती हो ।" "डोंट यू वॉन्ट टू गैट रिड ऑफ़ दिस रिलेशन ?" फिर वही ---क्या जानता नहीं है रिचार्ड ? उसे उस पर भी खीज आई जबकि उसका क्या अपराध था ? यही कि वह हर पल उसकी सहायता करता रहा था ? "पुनीत बोल सकता है, कोर्ट उससे ही पूछेगा कि वह क्या चाहता है ? तुम बिलकुल चिंता मत करो ---" "जैनी ! प्लीज़ बी रेडी एंड चेंज हिज़ क्लोथ्स ----" "ओह ! गेट रेडी माय हाइनेस ----" वह भानु के करीब आ गया । जानता था, उसका मन नहीं था लेकिन वह उसको चेंज के लिए ले जाना चाहता था । ऐसे तो कब तक ? इस बीच पुनीत कई बार भानु से पूछ चुका था; "हू वाज़ दैट पर्सन ?" बच्चे को मनोवैज्ञानिक रूप से समझना, समझाना बहुत ज़रूरी होता है लेकिन ----!!
|
सोनाक्षी सिन्हा की हमशक्ल को देखकर पापा शत्रुघ्न सिन्हा भी खामोश हो जाएंगे , बॉलीवुड सितारों में कई ऐसे सितारे हैं जिनके हमशक्ल हैं। इनमें शाहरुख, सलमान, ऋतिक और आमिर समेत कई सुपरस्टार शामिल हैं, जिनके हमशक्ल को एक बार कोई भी देख ले तो धोखा खा जाए।
सोना की इस हमशक्ल का नाम साहेबा कोहली है और यह देखने में हू-ब-हू सोनाक्षी की तरह लगती है। साहेबा ने सोशल मीडिया पर कई फोटोज शेयर किए हैं। साहेबा का न सिर्फ चेहरा बल्कि उनकी पर्सनलिटी भी सोना से मैच करती है। साहेबा फिलहाल दुबई में रहती हैं।
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की हमशक्ल भी छाई रही थी। अब हाल ही में प्रिंयका के अलावा अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा की हमशक्ल की तस्वीर सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही है।
सोशल मीडिया पर उन्होंने दिवाली पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा- 'हैप्पी दीवाली लव एंड लाइट। नकली सोना।' खास बात यह है कि साहेबा के इंस्टाग्राम हैंडल का नाम नकली सोना है, जबकि सोनाक्षी सिन्हा के इंस्टाग्राम हैंडल का नाम असली सोना है। साहेबा कोहली ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर के साथ नकली सोना लिखा है।
मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
|
सोनाक्षी सिन्हा की हमशक्ल को देखकर पापा शत्रुघ्न सिन्हा भी खामोश हो जाएंगे , बॉलीवुड सितारों में कई ऐसे सितारे हैं जिनके हमशक्ल हैं। इनमें शाहरुख, सलमान, ऋतिक और आमिर समेत कई सुपरस्टार शामिल हैं, जिनके हमशक्ल को एक बार कोई भी देख ले तो धोखा खा जाए। सोना की इस हमशक्ल का नाम साहेबा कोहली है और यह देखने में हू-ब-हू सोनाक्षी की तरह लगती है। साहेबा ने सोशल मीडिया पर कई फोटोज शेयर किए हैं। साहेबा का न सिर्फ चेहरा बल्कि उनकी पर्सनलिटी भी सोना से मैच करती है। साहेबा फिलहाल दुबई में रहती हैं। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की हमशक्ल भी छाई रही थी। अब हाल ही में प्रिंयका के अलावा अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा की हमशक्ल की तस्वीर सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही है। सोशल मीडिया पर उन्होंने दिवाली पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा- 'हैप्पी दीवाली लव एंड लाइट। नकली सोना।' खास बात यह है कि साहेबा के इंस्टाग्राम हैंडल का नाम नकली सोना है, जबकि सोनाक्षी सिन्हा के इंस्टाग्राम हैंडल का नाम असली सोना है। साहेबा कोहली ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर के साथ नकली सोना लिखा है। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
|
कृषि के लिए चीन में निर्मित इस मशीनरी पर सरकार ने बंद की सब्सिडी. .
बागवानी एवं कृषि के लिए चीन निर्मित पावर टिल्लर पर हिमाचल सरकार ने सब्सिडी बंद कर दी है। प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग को पावर टिल्लर सब्सिडी बजट के साथ यह आदेश जारी किया है। सरकार ने किस मॉडल के पावर टिल्लर को खरीदना है, इसकी भी एक सूची भेजी है। बताया जा रहा है कि सूची में करीब 200 से अधिक पावर टिल्लर के मॉडल हैं।
अभी अभीः बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ पर बड़े हमले होने की मिली धमकी. .
सरकार का यह आदेश उन डीलरों के लिए बड़ा झटका है, जो चीनी कंपनियों के पावर टिल्लरों का कारोबार कर रहे हैं। बता दें कि कुल्लू जिला को पावर टिल्लर खरीदने के लिए 15 लाख रुपये जारी किए गए हैं। कृषि विभाग ने सरकार के आदेश के तहत किसानों से पावर टिल्लर खरीदने से पहले विभाग से संपर्क करने को कहा है।
कृषि विभाग कुल्लू ने राशि कम और मांग अधिक होने की वजह से 150 पावर टिल्लरों के लिए और सब्सिडी की मांग की है। विभाग ने एक पत्र भी सरकार को भेज दिया है।
कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. राजेंद्र वर्मा और जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनोज गौतम ने कहा कि सरकार के आदेशों के तहत चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित पावर टिल्लर पर सब्सिडी किसानों को नहीं मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग को इस वित्त वर्ष के लिए किसानों को दी जाने वाली विभिन्न स्कीमों की सब्सिडी जारी कर दी है। विभाग की ओर से पावर टिल्लर पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।
खेत-खलियानों को जोतने के काम में आने वाले पावर टिल्लर की कीमत 1. 50 से 1. 65 लाख रुपये तक है। ऐसे में इस पर आधी रकम कृषि विभाग देगा और आधी राशि किसान को देनी होगी।
|
कृषि के लिए चीन में निर्मित इस मशीनरी पर सरकार ने बंद की सब्सिडी. . बागवानी एवं कृषि के लिए चीन निर्मित पावर टिल्लर पर हिमाचल सरकार ने सब्सिडी बंद कर दी है। प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग को पावर टिल्लर सब्सिडी बजट के साथ यह आदेश जारी किया है। सरकार ने किस मॉडल के पावर टिल्लर को खरीदना है, इसकी भी एक सूची भेजी है। बताया जा रहा है कि सूची में करीब दो सौ से अधिक पावर टिल्लर के मॉडल हैं। अभी अभीः बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ पर बड़े हमले होने की मिली धमकी. . सरकार का यह आदेश उन डीलरों के लिए बड़ा झटका है, जो चीनी कंपनियों के पावर टिल्लरों का कारोबार कर रहे हैं। बता दें कि कुल्लू जिला को पावर टिल्लर खरीदने के लिए पंद्रह लाख रुपये जारी किए गए हैं। कृषि विभाग ने सरकार के आदेश के तहत किसानों से पावर टिल्लर खरीदने से पहले विभाग से संपर्क करने को कहा है। कृषि विभाग कुल्लू ने राशि कम और मांग अधिक होने की वजह से एक सौ पचास पावर टिल्लरों के लिए और सब्सिडी की मांग की है। विभाग ने एक पत्र भी सरकार को भेज दिया है। कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. राजेंद्र वर्मा और जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनोज गौतम ने कहा कि सरकार के आदेशों के तहत चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित पावर टिल्लर पर सब्सिडी किसानों को नहीं मिलेगी। प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग को इस वित्त वर्ष के लिए किसानों को दी जाने वाली विभिन्न स्कीमों की सब्सिडी जारी कर दी है। विभाग की ओर से पावर टिल्लर पर पचास फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। खेत-खलियानों को जोतने के काम में आने वाले पावर टिल्लर की कीमत एक. पचास से एक. पैंसठ लाख रुपये तक है। ऐसे में इस पर आधी रकम कृषि विभाग देगा और आधी राशि किसान को देनी होगी।
|
झारखंड के चाईबासा जिले में दक्षिण-पूर्व रेल के चक्रधरपुर रेल मंडल के महादेवशाल स्टेशन के निकट बोगदा सुरंग में शुक्रवार देर शाम एक मालगाड़ी के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए जिससे अप लाइन पर यातायात बाधित हो गया।
चक्रधरपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडलीय वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) मनीष पाठक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर शाम अप लाइन पर एक मालगाड़ी के कुछ डिब्बे बेपटरी हो गए जिससे उक्त मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है।
उन्होंने बताया कि डिब्बों को पटरी पर लाने के लिए चक्रधरपुर से रिलीफ ट्रेन को रवाना कर दिया गया है। विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।
|
झारखंड के चाईबासा जिले में दक्षिण-पूर्व रेल के चक्रधरपुर रेल मंडल के महादेवशाल स्टेशन के निकट बोगदा सुरंग में शुक्रवार देर शाम एक मालगाड़ी के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए जिससे अप लाइन पर यातायात बाधित हो गया। चक्रधरपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडलीय वाणिज्य प्रबंधक मनीष पाठक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर शाम अप लाइन पर एक मालगाड़ी के कुछ डिब्बे बेपटरी हो गए जिससे उक्त मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है। उन्होंने बताया कि डिब्बों को पटरी पर लाने के लिए चक्रधरपुर से रिलीफ ट्रेन को रवाना कर दिया गया है। विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।
|
नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में एक स्पा सेंटर की आड़ में जिस्मफरोशी और क्लब में अश्लील डांस कराने का मामला प्रकाश में आया है। मध्य जिला की स्पेशल स्टाफ टीम ने दोनों जगहों पर छापा मारा। स्पा सेंटर से दो महिलाओं सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों घटनाओं को लेकर पहाड़गंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
स्पेशल स्टाफ को जानकारी मिली थी कि पहाड़गंज इलाके में संचालित एक स्पा में जिस्मफरोशी का धंधा किया जा रहा है। इस पर दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल को 2 हजार रुपये देकर नकली ग्राहक बनाकर स्पा सेंटर में भेजा गया। वहां उसे मोहम्मद तस्लीम नामक व्यक्ति मिला। उसने बताया कि मसाज और शारीरिक संबंध बनाने के 2000 रुपये लगेंगे। इस पर कांस्टेबल ने पुलिस टीम को इशारा कर दिया। पुलिस टीम ने वहां रेड मारकर तस्लीम की जेब से 2000 रुपये के नोट बरामद कर उसे अरेस्ट कर लिया।
वहीं, दूसरे मामले में टीम को इनपुट मिला था कि पहाड़गंज के एक क्लब में महिलाओं द्वारा अश्लील डांस किया जाता है। इस पर पुलिस ने क्लब पर रेड मारी, जहां तीन लड़कियां अश्लील डांस कर रही थीं। वहीं 17 ग्राहक बैठकर शराब पी रहे थे। घटना को लेकर क्लब के मालिक से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि, पहाड़गंज इलाके में विभिन्न क्लबों में चल रहे अश्लील डांस करने को लेकर दो माह के भीतर तीसरी बार छापा मारा गया है।
|
नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में एक स्पा सेंटर की आड़ में जिस्मफरोशी और क्लब में अश्लील डांस कराने का मामला प्रकाश में आया है। मध्य जिला की स्पेशल स्टाफ टीम ने दोनों जगहों पर छापा मारा। स्पा सेंटर से दो महिलाओं सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों घटनाओं को लेकर पहाड़गंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। स्पेशल स्टाफ को जानकारी मिली थी कि पहाड़गंज इलाके में संचालित एक स्पा में जिस्मफरोशी का धंधा किया जा रहा है। इस पर दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल को दो हजार रुपये देकर नकली ग्राहक बनाकर स्पा सेंटर में भेजा गया। वहां उसे मोहम्मद तस्लीम नामक व्यक्ति मिला। उसने बताया कि मसाज और शारीरिक संबंध बनाने के दो हज़ार रुपयापये लगेंगे। इस पर कांस्टेबल ने पुलिस टीम को इशारा कर दिया। पुलिस टीम ने वहां रेड मारकर तस्लीम की जेब से दो हज़ार रुपयापये के नोट बरामद कर उसे अरेस्ट कर लिया। वहीं, दूसरे मामले में टीम को इनपुट मिला था कि पहाड़गंज के एक क्लब में महिलाओं द्वारा अश्लील डांस किया जाता है। इस पर पुलिस ने क्लब पर रेड मारी, जहां तीन लड़कियां अश्लील डांस कर रही थीं। वहीं सत्रह ग्राहक बैठकर शराब पी रहे थे। घटना को लेकर क्लब के मालिक से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि, पहाड़गंज इलाके में विभिन्न क्लबों में चल रहे अश्लील डांस करने को लेकर दो माह के भीतर तीसरी बार छापा मारा गया है।
|
किसी भी महिला की कमजोरियों में से एक बैग है। किसी भी "सुमो" अलमारी की अवश्य विशेषता होना चाहिए-क्योंकि यह आधुनिक धनुष का एक अभिन्न अंग है। यह कॉम्पैक्ट, अभी तक कमरेदार, व्यावहारिक और सुविधाजनक है। सभी अवसरों के लिए उपयुक्त दिलचस्प डिजाइन समाधानों के लिए धन्यवाद, और आप किसी भी वॉलेट के लिए एक विकल्प चुन सकते हैं।
इन बैगों ने इस तथ्य से सामान्य प्यार जीता है कि इस तरह के एक उत्कृष्ट सहायक कॉप को सौंपा गया कई कार्यात्मक कर्तव्यों के साथ। इसमें सभी आवश्यक वस्तुएं हैं, और भी बहुत कुछ। यह "उत्कृष्ट छात्र" सुविधा और उपस्थिति दोनों को प्रसन्न करता है। लंबी पट्टा इसकी विशिष्ट विशेषता है। इस तरह की सहायक सहायक शीत सर्दियों में गर्मियों और गर्म गर्मी में सामंजस्यपूर्ण रूप से पूरक होती है। बाजार में विभिन्न आकारों के पार-शरीर के कपड़ा और चमड़े की महिलाओं के बैग हैं। उनमें से कुछ सबसे लोकप्रिय हैं, उदाहरण के लिएः
- छोटा बैग;
- थैली;
- क्लच ;
- बैग-काठी।
विभिन्न डिजाइनर बैग का लाभ एक विकल्प प्रदान करता है। रोजमर्रा की जिंदगी और उत्सवों के लिए दोनों मॉडल पहनने के लिए उपयुक्त मॉडल हैं। सिफारिशें साफ़ करें कि पहनने के लिए और क्या गठबंधन करना है। हैंडबैग के नए संग्रह के साथ फैशन डिजाइनरों ने पूरी आजादी दी, इसलिए आप चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्य सलाहः कि यह बुद्धि और स्वाद के साथ बनाया गया था। अपने प्रकार को समझना, यह करना आसान होगा।
कुछ हद तक नास्टोलनुली "दूत" के लिए इस तरह के हैंडबैग के निर्माण पर - यह पोस्टमेन और सेना की एक आवश्यक विशेषता थी। समय के साथ, यह एक और अधिक स्त्री संस्करण में बनाया गया था, और यह दुनिया भर में फैशन की लाखों महिलाओं के साथ प्यार में गिर गई। मुश्किल से आप क्रॉस बॉडी के बैग के बिना महिला प्रतिनिधियों की कल्पना कर सकते हैं। यह पूरी तरह से किसी भी छवि को पूरा करता है। व्यावहारिकता और सुविधा ने इस सहायक को सबसे लोकप्रिय बना दिया। आधुनिक व्याख्याओं ने जनसंख्या के पुरुष भाग को नहीं छोड़ा है, जिससे उनके लिए क्रॉस-बॉडी का संग्रह बनाया गया है। यह इसकी सार्वभौमिकता के बारे में बात करना है।
एक बार बुना हुआ सामान बाजार पर दिखाई देने के बाद, वे तुरंत पागल लोकप्रियता का उपयोग करना शुरू कर दिया। धागे से बंधे होने पर बैग क्रॉस-बॉडी को एक अद्वितीय उपस्थिति मिलती है। आप एक तैयार किए गए हैंडबैग खरीद सकते हैं, या आप ऑर्डर करने के लिए टाई कर सकते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में, ऐसा उत्पाद लड़कियों और महिलाओं के हाथों में होता है, और छोटी महिलाओं के कंधे पर लटकता है। यह परिष्कृत उत्पाद रंगों, फास्टनरों और बुनाई पैटर्न की विविधता से भरा है। बुने हुए कपड़े से बने एक क्रॉस-बॉडी बैग गर्मियों के मौसम से जुड़े होते हैं। एक फ्लैट एकमात्र पर फर्श और जूते में एक हल्की धूप के साथ अच्छा लग रहा है।
वास्तविक चमड़े से बना क्रॉस-बॉडी - सबसे आम विकल्प। इस सामग्री को हमेशा इस तरह के उत्पादों में मूल्यवान माना जाता है, क्योंकि इसमें उच्च पहनने का प्रतिरोध, ताकत और गैर-लचीलापन होता है। इस तरह की सहायक आपकी अच्छी समृद्धि के बारे में कहती है, क्योंकि वे महंगी हैं, लेकिन लंबे समय तक मूल रूप से संरक्षित रखने की उनकी क्षमता पूरी तरह से खुद को चुकानी देती है। चमड़े के हैंडबैग छवि लालित्य और कुलीनता देते हैं। उन लोगों के लिए जो चमड़े के उत्पादों के मूल्य पर विचार साझा नहीं करते हैं, लेथेरेट का क्रॉस-बोडी एक योग्य विकल्प होगा।
कोई भी आत्म-सम्मानित "बैग" व्यवसाय मास्टर अपने संग्रह में ऐसी सहायक होनी चाहिए। और प्रसिद्ध डिजाइनर कार्य करते हैं। प्रत्येक हैंडबैग की उपस्थिति में अपनी उत्तेजना पेश करता है, जो फैशन की सबसे पिक महिलाओं की स्वाद वरीयताओं को संतुष्ट करने में योगदान देता है। रेबेका मिंकॉफ से ब्रांडेड बैग क्रॉस-बॉडी को कार्बाइन के रूप में एक झुकाव के साथ विभिन्न रंगों में प्रस्तुत किया जाता है। और गहने के रूप में एक कठोर कंकाल और विचित्र तीरों के साथ हैंडबैग में, आप करेन वाकर द्वारा बनाई गई ब्रांड सहायक को ढूंढ सकते हैं। लोकप्रियता के बावजूद, उत्पादों के लिए कीमतें काफी लोकतांत्रिक हैं।
बैग शैनल क्रॉस-बॉडी - फैशन की दुनिया की किंवदंती। कोको चैनल इस तरह के हैंडबैग के संस्थापक बन गए, प्रसिद्ध 2. 55 मॉडल को जारी किया, जो एक सुपर हिट बन गया। उन्होंने असहज रेटिक्यूल के बजाय उन्हें आविष्कार किया, जो महिलाएं अक्सर हार जाती थीं। मॉडल को दोबारा प्रकाशित किया गया था, लेकिन यह हमेशा पहचानने योग्य था - पसंदीदा कोको रजाई वाले अंगूठे हैं, जो एबी के दाग़े हुए ग्लास खिड़कियों से प्रेरित हैं, और एक श्रृंखला के साथ एक पट्टा पूरी तरह से उस पर दोहराता है जिस पर नन पहने हुए थे। ऐसे बैग पहनने के लिए कई लड़कियों का सपना है। किसी भी शब्द का उच्चारण करें, यह सहायक मालिक के अच्छे स्वाद की बात करती है।
इस मशहूर डिजाइनर द्वारा बनाई गई दुनिया भर में स्टाइलिश एक्सेसरीज़, एक से अधिक सत्रों के लिए लोकप्रिय है। क्रॉस-बॉडी माइकल कोर आधुनिक और स्टाइलिश महिला के लिए आदर्श है। संग्रह से उत्पाद को उनके प्रारंभिक "एमके" के ब्रांड नाम के साथ चिह्नित किया जाता है। अलमारी में ऐसे ब्रांडेड उत्पाद की उपस्थिति समाज में उच्च स्थिति और आदर्श स्वाद की पुष्टि करती है। इस तरह के हैंडबैग के साथ कंधे पर दिखाई देने के बाद, आप निश्चित रूप से फैशन को समझने और समझने वाले लोगों की सराहना करते हुए खुद को आकर्षित करते हैं। फैशन डिजाइनर द्वारा "शानदार सादगी" के रूप में हैंडबैग की फैशन अवधारणा का वर्णन किया गया था।
चमड़े और वस्त्रों में प्रस्तुत, उनके छोटे आकार की विशेषता है। ब्रांड डिजाइन सार्वभौमिक है। संग्रह में हर रोज पहनने के लिए मॉडल होते हैं, साथ ही पक्षियों के लिए हैंडबैग या व्यवसाय ड्रेस कोड के साथ राउट्स हैं। यह आपके व्यक्तित्व पर जोर देगा और किसी भी शैली की छवि को सजाने देगा। साहसी, साहसी, आत्मविश्वास और स्वतंत्र व्यक्तित्व के लिए बनाया गया। युवा ब्रांडों द्वारा हैंडबैग के इस ब्रांड को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके स्वाद और विशेषता प्रसिद्ध फैशन हाउस है। क्रॉस-बॉडी अनुमान का थैला, कई वर्षों तक एक सेक्सी और स्टाइलिश छवि बनाने के लिए खुश होगा।
किसी भी उचित लिंग का सपना, अलमारी में क्रॉस-बॉडी गुइची प्रत्येक फैशन कलाकार को खुशी और संतुष्टि लाता है। इस ब्रांड की शैली क्लासिक के करीब है, लेकिन एक कुशल संयोजन के साथ यह शहरी ठाठ, आरामदायक या oversize-look की शैली में कपड़े के साथ सामंजस्यपूर्ण लगेगा। फ्रेम और मुलायम हैंडबैग एक पहचानने योग्य लोगो के साथ तैयार किए जाते हैं या एक विश्व प्रसिद्ध रंग योजना में बनाए जाते हैं जो दूसरों को बताएंगे कि फैशन में आप ज्ञान को जानते हैं और जीवन में अपनी सफलता और आत्म-प्राप्ति की घोषणा करते हैं। रोमांटिक तिथियों के लिए आदर्श और हर दिन के लिए महान।
कम से कम शैली में, एक नियम के रूप में बनाया गया बहुत स्टाइलिश हैंडबैग। संग्रह में एक-रंग वाले उत्पाद होते हैं, जो जानवरों के उज्ज्वल पहेलियों से सजाए जाते हैं, और विभिन्न प्रकार की सामग्री का मिश्रण - एक ज्वलंत छाप छोड़ देता है। इसमें सब कुछ सही है, उपस्थिति से इसके अंदर अस्तर पर सुरुचिपूर्ण रेखाओं से। नए डिजाइन की आश्चर्यजनक गुणवत्ता और दिमागी उछाल वाली उपस्थिति इसे एक मास्ट हेवी को सहायक बनाती है। क्रॉस-बॉडी फुरला उन लोगों के लिए एक उत्कृष्ट अधिग्रहण होगा जो लक्जरी और अनोखी चीजों की सराहना करते हैं। एक बार जब आप इसे हाथ में ले लेंगे, तो आप अब जाने नहीं देना चाहेंगे।
इतालवी ठाठ और गुणवत्ता का एक क्लासिक प्रतिनिधि। इसकी सादगी, लालित्य और विविधता से, दुनिया ने दुनिया पर विजय प्राप्त की है। अगर आपके "सौम परिवार" में इस ब्रांड का कोई प्रतिनिधि नहीं है, तो इस तरह के दोष को भरना चाहिए। क्रॉस-बॉडी पालीओ का थैला - यह वह मामला है जब लक्जरी उपलब्ध हो जाता है। उत्तम हैंडबैग न केवल उनकी गुणवत्ता और आधुनिक दिखने, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्य भी देखेंगे। क्रॉस-बॉडी पालीओ का एक स्टाइलिश बैग सड़क या यात्रा पर उपयोगी हो जाएगा। इसमें सब कुछ उपयोग की सुविधा के लिए सोचा जाता है - यह बहुत ergonomic है।
क्रॉस बॉडी कैसे पहनें?
हाल के वर्षों के एक आधुनिक बैग के मालिक बनने के लिए, आप निश्चित रूप से इसकी सुविधा की सराहना करेंगे। इन सामानों में सब कुछ आखिरी विस्तार से सोचा जाता है। फैब्रिक कार्यालय आपको फोन से अलग चाबियाँ रखने की अनुमति देता है, जो बाद में यांत्रिक क्षति को समाप्त करता है। यदि आवश्यक हो तो बटुआ और दस्तावेज हमेशा हाथ में रहते हैं। इसे अलग-अलग पहनें - एक लंबे पट्टा के लिए धन्यवाद, एक ही क्रॉस-बॉडी बैग, "स्थिति" को बदलकर, छवि को पूरक या दृष्टि से बदल सकता हैः
- कंधे पर शास्त्रीय रूप से । अंग्रेजी "क्रॉस" से एक शाब्दिक अनुवाद - के माध्यम से, "शरीर" - शरीर। तो हाथ हमेशा मुक्त रहते हैं, पट्टा कंधे से पर्ची नहीं करता है। यह व्यवस्था बैग से सामग्री को प्राप्त करना आसान बनाता है, उदाहरण के लिए, एक कॉलिंग फोन। इसके अलावा, पहनने का यह तरीका असमान चित्र से आंख को परेशान करता है और पोम्फस सुंदरियों के लिए अच्छा होता है - एक बार फिर स्त्री वक्रों पर जोर देता है।
- एक कंधे पर । बहुत सुविधाजनक विकल्प नहीं, बल्कि मांग में। इस पहनने को प्रसिद्ध डिजाइनर अलेक्जेंडर वांग द्वारा प्रचारित किया जाता है, इस प्रकार कुछ मॉडलों पर हैंडबैग लगाते हैं जो उनके संग्रह का प्रदर्शन करते हैं। औसत ऊंचाई से ऊपर लड़कियों के लिए उपयुक्त है, लेकिन समय-समय पर बैग को अपने हाथ से पकड़ने के लिए मजबूर करता है ताकि यह पर्ची न हो।
- उसके हाथ में, या उसके कलाई के चारों ओर लपेटा । यह पता चला है कि क्रॉस शरीर के माध्यम से नहीं है, लेकिन इस बैग से ऐसा नहीं होता है। एक कॉम्पैक्ट उत्पाद पहनने के लिए एक लोकप्रिय समाधान। बाहर से स्टाइलिश और कहीं भी क्रूर दिखता है। सर्दियों में, अक्सर ऐसी लड़कियां होती हैं जो इस तरह से एक पर्स धारण करती हैं, क्योंकि जब आप इसे पहनते हैं तो बाहरी कपड़े , हुड और टोपी असुविधा करते हैं। इसलिए, जब इसे खरीदना पट्टा पर ध्यान देने योग्य है - एक बड़ा प्लस लंबाई समायोजन की उपस्थिति है।
|
किसी भी महिला की कमजोरियों में से एक बैग है। किसी भी "सुमो" अलमारी की अवश्य विशेषता होना चाहिए-क्योंकि यह आधुनिक धनुष का एक अभिन्न अंग है। यह कॉम्पैक्ट, अभी तक कमरेदार, व्यावहारिक और सुविधाजनक है। सभी अवसरों के लिए उपयुक्त दिलचस्प डिजाइन समाधानों के लिए धन्यवाद, और आप किसी भी वॉलेट के लिए एक विकल्प चुन सकते हैं। इन बैगों ने इस तथ्य से सामान्य प्यार जीता है कि इस तरह के एक उत्कृष्ट सहायक कॉप को सौंपा गया कई कार्यात्मक कर्तव्यों के साथ। इसमें सभी आवश्यक वस्तुएं हैं, और भी बहुत कुछ। यह "उत्कृष्ट छात्र" सुविधा और उपस्थिति दोनों को प्रसन्न करता है। लंबी पट्टा इसकी विशिष्ट विशेषता है। इस तरह की सहायक सहायक शीत सर्दियों में गर्मियों और गर्म गर्मी में सामंजस्यपूर्ण रूप से पूरक होती है। बाजार में विभिन्न आकारों के पार-शरीर के कपड़ा और चमड़े की महिलाओं के बैग हैं। उनमें से कुछ सबसे लोकप्रिय हैं, उदाहरण के लिएः - छोटा बैग; - थैली; - क्लच ; - बैग-काठी। विभिन्न डिजाइनर बैग का लाभ एक विकल्प प्रदान करता है। रोजमर्रा की जिंदगी और उत्सवों के लिए दोनों मॉडल पहनने के लिए उपयुक्त मॉडल हैं। सिफारिशें साफ़ करें कि पहनने के लिए और क्या गठबंधन करना है। हैंडबैग के नए संग्रह के साथ फैशन डिजाइनरों ने पूरी आजादी दी, इसलिए आप चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्य सलाहः कि यह बुद्धि और स्वाद के साथ बनाया गया था। अपने प्रकार को समझना, यह करना आसान होगा। कुछ हद तक नास्टोलनुली "दूत" के लिए इस तरह के हैंडबैग के निर्माण पर - यह पोस्टमेन और सेना की एक आवश्यक विशेषता थी। समय के साथ, यह एक और अधिक स्त्री संस्करण में बनाया गया था, और यह दुनिया भर में फैशन की लाखों महिलाओं के साथ प्यार में गिर गई। मुश्किल से आप क्रॉस बॉडी के बैग के बिना महिला प्रतिनिधियों की कल्पना कर सकते हैं। यह पूरी तरह से किसी भी छवि को पूरा करता है। व्यावहारिकता और सुविधा ने इस सहायक को सबसे लोकप्रिय बना दिया। आधुनिक व्याख्याओं ने जनसंख्या के पुरुष भाग को नहीं छोड़ा है, जिससे उनके लिए क्रॉस-बॉडी का संग्रह बनाया गया है। यह इसकी सार्वभौमिकता के बारे में बात करना है। एक बार बुना हुआ सामान बाजार पर दिखाई देने के बाद, वे तुरंत पागल लोकप्रियता का उपयोग करना शुरू कर दिया। धागे से बंधे होने पर बैग क्रॉस-बॉडी को एक अद्वितीय उपस्थिति मिलती है। आप एक तैयार किए गए हैंडबैग खरीद सकते हैं, या आप ऑर्डर करने के लिए टाई कर सकते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में, ऐसा उत्पाद लड़कियों और महिलाओं के हाथों में होता है, और छोटी महिलाओं के कंधे पर लटकता है। यह परिष्कृत उत्पाद रंगों, फास्टनरों और बुनाई पैटर्न की विविधता से भरा है। बुने हुए कपड़े से बने एक क्रॉस-बॉडी बैग गर्मियों के मौसम से जुड़े होते हैं। एक फ्लैट एकमात्र पर फर्श और जूते में एक हल्की धूप के साथ अच्छा लग रहा है। वास्तविक चमड़े से बना क्रॉस-बॉडी - सबसे आम विकल्प। इस सामग्री को हमेशा इस तरह के उत्पादों में मूल्यवान माना जाता है, क्योंकि इसमें उच्च पहनने का प्रतिरोध, ताकत और गैर-लचीलापन होता है। इस तरह की सहायक आपकी अच्छी समृद्धि के बारे में कहती है, क्योंकि वे महंगी हैं, लेकिन लंबे समय तक मूल रूप से संरक्षित रखने की उनकी क्षमता पूरी तरह से खुद को चुकानी देती है। चमड़े के हैंडबैग छवि लालित्य और कुलीनता देते हैं। उन लोगों के लिए जो चमड़े के उत्पादों के मूल्य पर विचार साझा नहीं करते हैं, लेथेरेट का क्रॉस-बोडी एक योग्य विकल्प होगा। कोई भी आत्म-सम्मानित "बैग" व्यवसाय मास्टर अपने संग्रह में ऐसी सहायक होनी चाहिए। और प्रसिद्ध डिजाइनर कार्य करते हैं। प्रत्येक हैंडबैग की उपस्थिति में अपनी उत्तेजना पेश करता है, जो फैशन की सबसे पिक महिलाओं की स्वाद वरीयताओं को संतुष्ट करने में योगदान देता है। रेबेका मिंकॉफ से ब्रांडेड बैग क्रॉस-बॉडी को कार्बाइन के रूप में एक झुकाव के साथ विभिन्न रंगों में प्रस्तुत किया जाता है। और गहने के रूप में एक कठोर कंकाल और विचित्र तीरों के साथ हैंडबैग में, आप करेन वाकर द्वारा बनाई गई ब्रांड सहायक को ढूंढ सकते हैं। लोकप्रियता के बावजूद, उत्पादों के लिए कीमतें काफी लोकतांत्रिक हैं। बैग शैनल क्रॉस-बॉडी - फैशन की दुनिया की किंवदंती। कोको चैनल इस तरह के हैंडबैग के संस्थापक बन गए, प्रसिद्ध दो. पचपन मॉडल को जारी किया, जो एक सुपर हिट बन गया। उन्होंने असहज रेटिक्यूल के बजाय उन्हें आविष्कार किया, जो महिलाएं अक्सर हार जाती थीं। मॉडल को दोबारा प्रकाशित किया गया था, लेकिन यह हमेशा पहचानने योग्य था - पसंदीदा कोको रजाई वाले अंगूठे हैं, जो एबी के दाग़े हुए ग्लास खिड़कियों से प्रेरित हैं, और एक श्रृंखला के साथ एक पट्टा पूरी तरह से उस पर दोहराता है जिस पर नन पहने हुए थे। ऐसे बैग पहनने के लिए कई लड़कियों का सपना है। किसी भी शब्द का उच्चारण करें, यह सहायक मालिक के अच्छे स्वाद की बात करती है। इस मशहूर डिजाइनर द्वारा बनाई गई दुनिया भर में स्टाइलिश एक्सेसरीज़, एक से अधिक सत्रों के लिए लोकप्रिय है। क्रॉस-बॉडी माइकल कोर आधुनिक और स्टाइलिश महिला के लिए आदर्श है। संग्रह से उत्पाद को उनके प्रारंभिक "एमके" के ब्रांड नाम के साथ चिह्नित किया जाता है। अलमारी में ऐसे ब्रांडेड उत्पाद की उपस्थिति समाज में उच्च स्थिति और आदर्श स्वाद की पुष्टि करती है। इस तरह के हैंडबैग के साथ कंधे पर दिखाई देने के बाद, आप निश्चित रूप से फैशन को समझने और समझने वाले लोगों की सराहना करते हुए खुद को आकर्षित करते हैं। फैशन डिजाइनर द्वारा "शानदार सादगी" के रूप में हैंडबैग की फैशन अवधारणा का वर्णन किया गया था। चमड़े और वस्त्रों में प्रस्तुत, उनके छोटे आकार की विशेषता है। ब्रांड डिजाइन सार्वभौमिक है। संग्रह में हर रोज पहनने के लिए मॉडल होते हैं, साथ ही पक्षियों के लिए हैंडबैग या व्यवसाय ड्रेस कोड के साथ राउट्स हैं। यह आपके व्यक्तित्व पर जोर देगा और किसी भी शैली की छवि को सजाने देगा। साहसी, साहसी, आत्मविश्वास और स्वतंत्र व्यक्तित्व के लिए बनाया गया। युवा ब्रांडों द्वारा हैंडबैग के इस ब्रांड को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके स्वाद और विशेषता प्रसिद्ध फैशन हाउस है। क्रॉस-बॉडी अनुमान का थैला, कई वर्षों तक एक सेक्सी और स्टाइलिश छवि बनाने के लिए खुश होगा। किसी भी उचित लिंग का सपना, अलमारी में क्रॉस-बॉडी गुइची प्रत्येक फैशन कलाकार को खुशी और संतुष्टि लाता है। इस ब्रांड की शैली क्लासिक के करीब है, लेकिन एक कुशल संयोजन के साथ यह शहरी ठाठ, आरामदायक या oversize-look की शैली में कपड़े के साथ सामंजस्यपूर्ण लगेगा। फ्रेम और मुलायम हैंडबैग एक पहचानने योग्य लोगो के साथ तैयार किए जाते हैं या एक विश्व प्रसिद्ध रंग योजना में बनाए जाते हैं जो दूसरों को बताएंगे कि फैशन में आप ज्ञान को जानते हैं और जीवन में अपनी सफलता और आत्म-प्राप्ति की घोषणा करते हैं। रोमांटिक तिथियों के लिए आदर्श और हर दिन के लिए महान। कम से कम शैली में, एक नियम के रूप में बनाया गया बहुत स्टाइलिश हैंडबैग। संग्रह में एक-रंग वाले उत्पाद होते हैं, जो जानवरों के उज्ज्वल पहेलियों से सजाए जाते हैं, और विभिन्न प्रकार की सामग्री का मिश्रण - एक ज्वलंत छाप छोड़ देता है। इसमें सब कुछ सही है, उपस्थिति से इसके अंदर अस्तर पर सुरुचिपूर्ण रेखाओं से। नए डिजाइन की आश्चर्यजनक गुणवत्ता और दिमागी उछाल वाली उपस्थिति इसे एक मास्ट हेवी को सहायक बनाती है। क्रॉस-बॉडी फुरला उन लोगों के लिए एक उत्कृष्ट अधिग्रहण होगा जो लक्जरी और अनोखी चीजों की सराहना करते हैं। एक बार जब आप इसे हाथ में ले लेंगे, तो आप अब जाने नहीं देना चाहेंगे। इतालवी ठाठ और गुणवत्ता का एक क्लासिक प्रतिनिधि। इसकी सादगी, लालित्य और विविधता से, दुनिया ने दुनिया पर विजय प्राप्त की है। अगर आपके "सौम परिवार" में इस ब्रांड का कोई प्रतिनिधि नहीं है, तो इस तरह के दोष को भरना चाहिए। क्रॉस-बॉडी पालीओ का थैला - यह वह मामला है जब लक्जरी उपलब्ध हो जाता है। उत्तम हैंडबैग न केवल उनकी गुणवत्ता और आधुनिक दिखने, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्य भी देखेंगे। क्रॉस-बॉडी पालीओ का एक स्टाइलिश बैग सड़क या यात्रा पर उपयोगी हो जाएगा। इसमें सब कुछ उपयोग की सुविधा के लिए सोचा जाता है - यह बहुत ergonomic है। क्रॉस बॉडी कैसे पहनें? हाल के वर्षों के एक आधुनिक बैग के मालिक बनने के लिए, आप निश्चित रूप से इसकी सुविधा की सराहना करेंगे। इन सामानों में सब कुछ आखिरी विस्तार से सोचा जाता है। फैब्रिक कार्यालय आपको फोन से अलग चाबियाँ रखने की अनुमति देता है, जो बाद में यांत्रिक क्षति को समाप्त करता है। यदि आवश्यक हो तो बटुआ और दस्तावेज हमेशा हाथ में रहते हैं। इसे अलग-अलग पहनें - एक लंबे पट्टा के लिए धन्यवाद, एक ही क्रॉस-बॉडी बैग, "स्थिति" को बदलकर, छवि को पूरक या दृष्टि से बदल सकता हैः - कंधे पर शास्त्रीय रूप से । अंग्रेजी "क्रॉस" से एक शाब्दिक अनुवाद - के माध्यम से, "शरीर" - शरीर। तो हाथ हमेशा मुक्त रहते हैं, पट्टा कंधे से पर्ची नहीं करता है। यह व्यवस्था बैग से सामग्री को प्राप्त करना आसान बनाता है, उदाहरण के लिए, एक कॉलिंग फोन। इसके अलावा, पहनने का यह तरीका असमान चित्र से आंख को परेशान करता है और पोम्फस सुंदरियों के लिए अच्छा होता है - एक बार फिर स्त्री वक्रों पर जोर देता है। - एक कंधे पर । बहुत सुविधाजनक विकल्प नहीं, बल्कि मांग में। इस पहनने को प्रसिद्ध डिजाइनर अलेक्जेंडर वांग द्वारा प्रचारित किया जाता है, इस प्रकार कुछ मॉडलों पर हैंडबैग लगाते हैं जो उनके संग्रह का प्रदर्शन करते हैं। औसत ऊंचाई से ऊपर लड़कियों के लिए उपयुक्त है, लेकिन समय-समय पर बैग को अपने हाथ से पकड़ने के लिए मजबूर करता है ताकि यह पर्ची न हो। - उसके हाथ में, या उसके कलाई के चारों ओर लपेटा । यह पता चला है कि क्रॉस शरीर के माध्यम से नहीं है, लेकिन इस बैग से ऐसा नहीं होता है। एक कॉम्पैक्ट उत्पाद पहनने के लिए एक लोकप्रिय समाधान। बाहर से स्टाइलिश और कहीं भी क्रूर दिखता है। सर्दियों में, अक्सर ऐसी लड़कियां होती हैं जो इस तरह से एक पर्स धारण करती हैं, क्योंकि जब आप इसे पहनते हैं तो बाहरी कपड़े , हुड और टोपी असुविधा करते हैं। इसलिए, जब इसे खरीदना पट्टा पर ध्यान देने योग्य है - एक बड़ा प्लस लंबाई समायोजन की उपस्थिति है।
|
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहमदाबाद में खेले जा रहे चौथे टेस्ट में अर्धशतक लगाया है। कोहली ने अपना अर्धशतक 107 गेंदों में पूरा किया जिसमें 5 चौके शामिल रहे। यह कोहली का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ छठा अर्धशतक है। कुल मिलाकर उन्होंने अपने करियर का 29वां अर्धशतक लगाया है। वर्तमान सीरीज की बात करें तो यह कोहली का पहला अर्धशतक है।
|
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहमदाबाद में खेले जा रहे चौथे टेस्ट में अर्धशतक लगाया है। कोहली ने अपना अर्धशतक एक सौ सात गेंदों में पूरा किया जिसमें पाँच चौके शामिल रहे। यह कोहली का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ छठा अर्धशतक है। कुल मिलाकर उन्होंने अपने करियर का उनतीसवां अर्धशतक लगाया है। वर्तमान सीरीज की बात करें तो यह कोहली का पहला अर्धशतक है।
|
Dumka : दुमका (Dumka)- जिले के तीन दुमका, मसलिया और राणेश्वर प्रखंडों में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण का मतदान 24 मई को होगा. 2 लाख 90 हजार से ज्यादा मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 44 हजार से ज्यादा है. पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 45 हजार से ज्यादा है. तृतीय चरण में करीब 3423 मतदान कर्मी काम करेंगे. विभिन्न पदों के 1318 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. कुल 778 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. 400 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके हैं. शेष बचे सीटों पर प्रत्याशी अपना किस्मत आजमाएंगे. इस चरण में मुखिया पद के 63 सीटों पर चुनाव होना है. मुखिया पद के उम्मीदवारों की संख्या 316 है. यह जानकारी डीडीसी कर्ण सत्यार्थी ने दी.
उन्होंने कहा कि पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 78 सीटों पर चुनाव होना है. पंचायत समिति सदस्य पद के कुल 195 प्रत्याशियों में से 13 निर्विरोध चुने जा चुके हैं. रिक्त पदों की संख्या 2 है. जिला परिषद् सदस्य पद के 8 सीटों पर चुनाव होना है. इस पद के लिए कुल 32 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. मतदान सुबह 8 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में शुरू होगी. 23 मई की सुबह 8 बजे से मतदान कर्मियों की डिस्पैच प्रक्रिया शुरू हुई. राणेश्वर प्रखंड के लिए पोलटेक्निक कॉलेज, मसलिया प्रखंड के लिए एसपी कॉलेज ओर दुमका प्रखंड के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज से मतदान कर्मी रवाना हुए.
|
Dumka : दुमका - जिले के तीन दुमका, मसलिया और राणेश्वर प्रखंडों में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण का मतदान चौबीस मई को होगा. दो लाख नब्बे हजार से ज्यादा मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. महिला मतदाताओं की संख्या एक लाख चौंतालीस हजार से ज्यादा है. पुरुष मतदाताओं की संख्या एक लाख पैंतालीस हजार से ज्यादा है. तृतीय चरण में करीब तीन हज़ार चार सौ तेईस मतदान कर्मी काम करेंगे. विभिन्न पदों के एक हज़ार तीन सौ अट्ठारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. कुल सात सौ अठहत्तर मतदान केंद्र बनाए गए हैं. चार सौ प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके हैं. शेष बचे सीटों पर प्रत्याशी अपना किस्मत आजमाएंगे. इस चरण में मुखिया पद के तिरेसठ सीटों पर चुनाव होना है. मुखिया पद के उम्मीदवारों की संख्या तीन सौ सोलह है. यह जानकारी डीडीसी कर्ण सत्यार्थी ने दी. उन्होंने कहा कि पंचायत समिति सदस्य पद के लिए अठहत्तर सीटों पर चुनाव होना है. पंचायत समिति सदस्य पद के कुल एक सौ पचानवे प्रत्याशियों में से तेरह निर्विरोध चुने जा चुके हैं. रिक्त पदों की संख्या दो है. जिला परिषद् सदस्य पद के आठ सीटों पर चुनाव होना है. इस पद के लिए कुल बत्तीस प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. मतदान सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में शुरू होगी. तेईस मई की सुबह आठ बजे से मतदान कर्मियों की डिस्पैच प्रक्रिया शुरू हुई. राणेश्वर प्रखंड के लिए पोलटेक्निक कॉलेज, मसलिया प्रखंड के लिए एसपी कॉलेज ओर दुमका प्रखंड के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज से मतदान कर्मी रवाना हुए.
|
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 24 अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार को चुनावी घोषणा पत्र जारी करेंगे। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, एमपी के सीएम कमलनाथ सहित पार्टी के सभी शीर्ष नेता मौजूद होंगे।
पत्रिका पर छपी खबर के अनुसार, पार्टी मुख्यालय पर सुबह साढ़े 11 बजे एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा पत्र जारी होगा। इस बार कांग्रेस ने घोषणा पत्र की थीम 'अन्याय से न्याय' की ओर रखी है।
पार्टी घोषणा पत्र में न्यूनतम आय योजना (न्याय) लागू किए जाने की बात कही जाएगी। इसके तहत देश के 5 करोड़ परिवार या 25 करोड़ लोगों को सालाना 72 हजार रुपए दिए जाएंगे।
यह रकम 12 हजार रुपए महीने तक की आय वाले गरीब परिवारों को मिलेगी। कांग्रेस इसे न्यूनतम आय गारंटी और गरीबी हटाने वाली योजना कह रही है।
|
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चौबीस अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय पर मंगलवार को चुनावी घोषणा पत्र जारी करेंगे। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, एमपी के सीएम कमलनाथ सहित पार्टी के सभी शीर्ष नेता मौजूद होंगे। पत्रिका पर छपी खबर के अनुसार, पार्टी मुख्यालय पर सुबह साढ़े ग्यारह बजे एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा पत्र जारी होगा। इस बार कांग्रेस ने घोषणा पत्र की थीम 'अन्याय से न्याय' की ओर रखी है। पार्टी घोषणा पत्र में न्यूनतम आय योजना लागू किए जाने की बात कही जाएगी। इसके तहत देश के पाँच करोड़ परिवार या पच्चीस करोड़ लोगों को सालाना बहत्तर हजार रुपए दिए जाएंगे। यह रकम बारह हजार रुपए महीने तक की आय वाले गरीब परिवारों को मिलेगी। कांग्रेस इसे न्यूनतम आय गारंटी और गरीबी हटाने वाली योजना कह रही है।
|
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले के हसनपोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। जिसमें 2 अज्ञात आतंकवादी मारे गए है। आतंकियों से पास से हथियार और गोला-बारूद सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। वहीं, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये इस साल की आठवीं मुठभेड़ है। नए साल के पहले सप्ताह में अब तक 13 आतंकी मारे जा चुके हैं। जिसमें ज्यादातर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा के टॉप कमांडर शामिल हैं।
मीडिया और पुलिस के मुताबिक, रविवार को सुरक्षाबलों को हसनपोरा गांव में आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान छिपे दहशतगर्दों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग करनी शुरू कर दी।
सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। वहीं, मौसम खराब होने और अंधेरा होने के कारण गांव से आने-जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे। इस बीच रात लगभग एक बजे सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़कर भागने के प्रयास में दो आतंकी मारे गए। आशंका है कि घटनास्थल पर कुछ और आतंकी मौजूद हो सकते हैं।
|
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम ज़िले के हसनपोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। जिसमें दो अज्ञात आतंकवादी मारे गए है। आतंकियों से पास से हथियार और गोला-बारूद सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। वहीं, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये इस साल की आठवीं मुठभेड़ है। नए साल के पहले सप्ताह में अब तक तेरह आतंकी मारे जा चुके हैं। जिसमें ज्यादातर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा के टॉप कमांडर शामिल हैं। मीडिया और पुलिस के मुताबिक, रविवार को सुरक्षाबलों को हसनपोरा गांव में आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान छिपे दहशतगर्दों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। वहीं, मौसम खराब होने और अंधेरा होने के कारण गांव से आने-जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे। इस बीच रात लगभग एक बजे सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़कर भागने के प्रयास में दो आतंकी मारे गए। आशंका है कि घटनास्थल पर कुछ और आतंकी मौजूद हो सकते हैं।
|
रूस और अमेरिका में YouTube पर 1,000,000 के विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं?
यूट्यूब लगभग हर उपयोगकर्ता से परिचित है,जिसमें इंटरनेट का उपयोग है। दुनिया भर के लाखों लोग विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस वीडियो होस्टिंग का उपयोग करते हैं। हालांकि, एक लक्ष्य लगभग हर किसी को जोड़ता है - पैसा बनाना। जो लोग इस तरह से पैसे कमाने की कोशिश करना चाहते हैं, वे जानना चाहते हैं कि वे YouTube पर 1,000,000 विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैं। आइए इसे समझने की कोशिश करें।
यूट्यूब के लिए क्या भुगतान करता है?
होस्टिंग "यूट्यूब" सक्रिय रूप से और भी अधिक विकसित हो रहा हैतेजी से अपनी विज्ञापन प्रौद्योगिकियों का विकास। इसलिए, यह मानना गलत है कि "यूट्यूब" वीडियो देखने के लिए पैसे देता है। सामान्य रूप से इस लोकप्रिय वीडियो होस्टिंग के लिए कोई भी पैसा नहीं देता है। भुगतान केवल विज्ञापन के प्रदर्शन के लिए किए जाते हैं, जिसे वीडियो पर प्रदर्शित किया जा सकता है। यही है, काम की योजना निम्नानुसार हैः विभिन्न विज्ञापनदाता यूट्यूब पर विज्ञापन का ऑर्डर करते हैं, फिर यूट्यूब इन विज्ञापनों को चैनल के मालिकों के वीडियो पर रखता है, और बदले में मालिक को इसके लिए पैसे मिलते हैं। यह मानना तार्किक है कि जितना अधिक वीडियो दृश्य और तदनुसार, विज्ञापन विचार, जितना अधिक पैसा कमा सकता है।
लेकिन वे 1,000,000 विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैंयूट्यूब? गिनने के लिए यह लगभग असंभव है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाते हैंः दर्शकों के दर्शकों, सामग्री विषय इत्यादि। लेकिन यह ज्ञात है कि विज्ञापन प्रदर्शन से चैनल के मालिक का हिस्सा 68% है। यही है, अर्जित हर डॉलर के साथ, मालिक 68 सेंट प्राप्त करेगा, और "Yutoub" 32 सेंट मिलेगा। लेकिन यह बहुत सामान्यीकृत है।
जैसा कि पहले से ही उल्लेख किया गया है, YouTube पर 1,000,000 विचारों के लिए आप कितना भुगतान करते हैं, इस पर कई कारक प्रभावित होते हैं। आइए एक ठोस उदाहरण का विश्लेषण करें।
यूएस में यूट्यूब पर 1,000,000 विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं?
ध्यान दें कि अमेरिका में, एक वीडियो ब्लॉगर की औसत कमाईरूस से अधिक यह तार्किक है, लेकिन अब नहीं। 28 दिनों की अवधि के लिए वीडियो ब्लॉगर की कमाई के आंकड़ों का एक स्क्रीनशॉट नीचे दिया गया है। यह स्क्रीनशॉट एक यूट्यूब कमीशन की कटौती के साथ एक ब्लॉगर की कमाई दिखाता है। वास्तव में वास्तव में कितने लोग अर्जित हुए हैं।
स्क्रीनशॉट से आप देख सकते हैं कि 28 दिनों के भीतर यह था1 9 57 के विचार, और इस अवधि के लिए ब्लॉगर $ 30 कमाने में सक्षम था। इसका मतलब है कि प्रति 1000 विचारों की कमाई के लगभग 1.5 डॉलर हैं। इसलिए, एक लाख विचारों के लिए $ 1500 का लाभ संभव है।
हालांकि, यह सिर्फ एक उदाहरण है। कुछ ब्लॉगर्स के लिए, कमाई का स्तर बहुत अलग है, और 1000 वीडियो विचारों के लिए, 3 या अधिक डॉलर का राजस्व संभव है। इसके अलावा, कमाई कम हो सकती है। ऐसे कई कारक हैं जो वीडियो ब्लॉगर के संभावित लाभ को प्रभावित करते हैं, और नीचे हम उनका विश्लेषण करेंगे।
सबसे पहले, यह मात्रा और गुणवत्ताविज़िट। उदाहरण के लिए, यदि उपयोगकर्ता वाणिज्यिक देखते समय "छोड़ें" बटन पर क्लिक करता है, तो ऐसे विज्ञापन का भुगतान नहीं किया जाता है। वीडियो, जो वीडियो के निचले हिस्से में आयत के रूप में प्रदर्शित होता है, पर भी इंप्रेशन के लिए शुल्क नहीं लिया जाता है। पारिश्रमिक केवल तब अर्जित किया जाता है जब उपयोगकर्ता विज्ञापन पर क्लिक करता है।
लाभ को प्रभावित करने वाला दूसरा कारक हैएक क्लिक की लागत या एक विज्ञापन देखने। कारों को समर्पित चैनलों पर एक क्लिक की लागत सामान्य चैनलों पर प्रति क्लिक लागत से कहीं अधिक होगी, जहां मालिक शिश कबाब को ठीक तरह से पकाने के तरीके के बारे में बात करता है। और यह तार्किक है, क्योंकि YouTube स्वचालित रूप से चैनल की सामग्री और दर्शकों के हितों के अनुसार विज्ञापन चुनता है। यह तर्कसंगत है कि एक कार के विज्ञापन को एक चमकदार कबाब के लिए एक समुद्री डाकू विज्ञापन देने से अधिक खर्च होंगे। यही कारण है कि सामान्य बनाना और यह कहना असंभव है कि आप YouTube पर 1,000,000 विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैं। प्रति लाख विचार कमाई $ 100 हो सकती है, और शायद कई हजार।
चैनल विषय एक अतिरिक्त कारक हैं, सेजो लाभप्रदता पर निर्भर करता है। ऑटोमोटिव विषयों, दवा, निर्माण, व्यवसाय वीडियो चैनलों के लिए सभी लाभदायक विषय हैं, और विज्ञापन सामग्री का भी उच्च भुगतान किया जाता है। चैनलों पर विज्ञापन, जो हास्य और जीवन के तरीके के लिए समर्पित हैं, कम भुगतान किया जाता है। हालांकि, उपयोगकर्ताओं को ऐसे चैनल में आकर्षित करना आसान है।
चैनल के दर्शक भी भूमिका निभाते हैं। बच्चों के वीडियो का विषय स्कूली बच्चों और छोटे बच्चों को आकर्षित करता है। यदि वे अपने विज्ञापन पर स्कूली बच्चों का विज्ञापन करते हैं तो विज्ञापनदाता पैसे कमाने में सक्षम नहीं होंगे, इसलिए आपको विज्ञापन से बड़ी आय की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, जो बच्चों की सामग्री के साथ चैनलों पर घूमती है। विज्ञापनदाता व्यवसायियों और उच्च क्रय शक्ति वाले लोगों द्वारा देखे जाने वाले अपने विज्ञापनों को देखने में रुचि रखते हैं। और इसके लिए वे पैसे का भुगतान करने के इच्छुक हैं।
देश, जिनके नागरिक वीडियो देख रहे हैं,एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आप तुलना करते हैं कि रूस में कमाई के साथ अमेरिका में YouTube पर 1,000,000 विचारों के लिए आप कितना भुगतान करते हैं, तो अंतर आपको आश्चर्यचकित करेगा। समान विषयों वाले चैनलों पर समान संख्या में विचारों के साथ राजस्व में अंतर बहुत बड़ा हो सकता है। लेकिन यह तार्किक है, क्योंकि अमेरिका में विज्ञापन अधिक खर्च किया जाता है, और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अधिक है। इस कारण से, कई रूसी नागरिक अंग्रेजी में अपने वीडियोब्लॉग का संचालन करने और संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रासंगिक विषयों को छूने की कोशिश करते हैं।
ग्राहकों की संख्या एक अप्रत्यक्ष कारक है,"यूट्यूब" की आय को प्रभावित करना। बेशक, यूट्यूब ग्राहकों की संख्या के विकास के लिए कुछ भी भुगतान नहीं करता है, लेकिन जितना अधिक वे उपलब्ध हैं, चैनल रेटिंग जितना अधिक होगा, और अधिक विचार प्रत्येक वीडियो टाइप किए जाएंगे। इससे आय में वृद्धि हुई है।
और सामान्य रूप से, इस समय, "Yutoub" का प्रतिनिधित्व करता हैअरबों दर्शकों के साथ एक विशाल मनोरंजन और व्यापार क्षेत्र। इसका सक्रिय रूप से विज्ञापनदाताओं (बड़े और छोटे) द्वारा उपयोग किया जाता है, जो इस वीडियो होस्टिंग में विज्ञापन के माध्यम से अपने उत्पादों को बेचने में बहुत सफल होते हैं। इसलिए, इस साइट पर पैसा कमाने की संभावना है, और काफी कुछ है। लेकिन रूबल्स में यूट्यूब पर 1,000,000 विचारों के लिए कितना भुगतान किया जाता है - यह सामग्री और दर्शकों पर निर्भर करता है जिन पर वीडियो डिज़ाइन किए गए हैं।
क्या संभावित आय की सटीक गणना करना संभव है?
दुर्भाग्य से, हम वास्तव में कितने गणना नहीं कर सकते हैंरूस और दुनिया में यूट्यूब पर देखने के लिए भुगतान करें। आप केवल अपने पिछले संकेतकों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और भावी कमाई की भविष्यवाणी कर सकते हैं। आखिरकार, किसी विज्ञापन पर क्लिक करके या इसे देखने का अनुमान केवल एक प्रतिशत, या शायद कई डॉलर हो सकता है। सब कुछ चैनल के विषय पर निर्भर करता है, सामग्री देखने वाले लोगों की क्रय शक्ति। यदि वीडियो आपको खरीदने के लिए संपत्ति चुनने की बारीकियों के बारे में बताएगा, तो यह स्पष्ट है कि जो लोग एक अपार्टमेंट खरीदने जा रहे हैं, वे इस वीडियो को देखेंगे, उदाहरण के लिए। और अचल संपत्ति में विज्ञापन धब्बे के लिए संघर्ष गंभीर है, इसलिए सैकड़ों नहीं होने पर, एक अपार्टमेंट खरीदने के लिए विज्ञापन पर क्लिक करने की लागत दस डॉलर में अनुमानित की जा सकती है। यह ऑटोमोटिव विषयों पर भी लागू होता है, क्योंकि बहुत सारे विक्रेता हैं, और कार काफी महंगा सामान हैं। इसलिए, कारों के बारे में एक वीडियो ब्लॉग पर विज्ञापन भी महंगा होगा।
दुर्भाग्यवश, भविष्य के लिए गणना करना असंभव है"यूट्यूब" पर हजारों वीडियो दृश्यों की लागत, और यदि कोई गणना एल्गोरिदम है, तो यूट्यूब इसका खुलासा नहीं करेगा। हालांकि, हमेशा वीडियो एम्बेड विज्ञापन में, जिसे विज़िटर की वरीयताओं के आधार पर चुना जाता है। इससे संभावना बढ़ जाती है कि वह उस विज्ञापन को देखता है जिसे वह चाहता है और उस पर क्लिक करता है।
नतीजतन, यह निश्चित रूप से निर्धारित करना असंभव है,रूस में यूट्यूब पर 1,000,000 विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं। आप केवल ब्लॉगर्स के बीच एक सर्वेक्षण कर सकते हैं और औसत मूल्य की पहचान कर सकते हैं। हालांकि, शायद ही कोई ऐसा डेटा साझा करेगा। यदि आप दृढ़ता से सामान्यीकृत करते हैं, तो दस लाख विचारों के लिए कमाई $ 1000 है। कुछ 1500 डॉलर कमाने में कामयाब होते हैं। उच्च प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन लागतों के कारण विदेशी ब्लॉगर्स एक लाख विचारों के लिए लगभग 2-4 हजार डॉलर कमाते हैं।
एक सोशलब्लैड सेवा है, जो सिद्धांत रूप में हैआपको यह निर्धारित करने की अनुमति देता है कि यूट्यूब पर अपने मालिक को कितना पैसा लाता है। यदि आप इस सेवा पर विश्वास करते हैं, तो दुनिया के सबसे मशहूर ब्लॉगर PewDiePie, जिसमें 57 मिलियन ग्राहक हैं, एक महीने में 54 से 868 हजार डॉलर कमाते हैं। यहां तक कि संख्याओं में एक विशाल तितर बितर है। इससे यह समझना संभव हो जाता है कि कोई निश्चित सूत्र नहीं है जो वीडियो दृश्यों की संख्या के आधार पर कमाई की मात्रा की गणना करने की अनुमति देगा।
|
रूस और अमेरिका में YouTube पर एक,शून्य,शून्य के विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं? यूट्यूब लगभग हर उपयोगकर्ता से परिचित है,जिसमें इंटरनेट का उपयोग है। दुनिया भर के लाखों लोग विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस वीडियो होस्टिंग का उपयोग करते हैं। हालांकि, एक लक्ष्य लगभग हर किसी को जोड़ता है - पैसा बनाना। जो लोग इस तरह से पैसे कमाने की कोशिश करना चाहते हैं, वे जानना चाहते हैं कि वे YouTube पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैं। आइए इसे समझने की कोशिश करें। यूट्यूब के लिए क्या भुगतान करता है? होस्टिंग "यूट्यूब" सक्रिय रूप से और भी अधिक विकसित हो रहा हैतेजी से अपनी विज्ञापन प्रौद्योगिकियों का विकास। इसलिए, यह मानना गलत है कि "यूट्यूब" वीडियो देखने के लिए पैसे देता है। सामान्य रूप से इस लोकप्रिय वीडियो होस्टिंग के लिए कोई भी पैसा नहीं देता है। भुगतान केवल विज्ञापन के प्रदर्शन के लिए किए जाते हैं, जिसे वीडियो पर प्रदर्शित किया जा सकता है। यही है, काम की योजना निम्नानुसार हैः विभिन्न विज्ञापनदाता यूट्यूब पर विज्ञापन का ऑर्डर करते हैं, फिर यूट्यूब इन विज्ञापनों को चैनल के मालिकों के वीडियो पर रखता है, और बदले में मालिक को इसके लिए पैसे मिलते हैं। यह मानना तार्किक है कि जितना अधिक वीडियो दृश्य और तदनुसार, विज्ञापन विचार, जितना अधिक पैसा कमा सकता है। लेकिन वे एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैंयूट्यूब? गिनने के लिए यह लगभग असंभव है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाते हैंः दर्शकों के दर्शकों, सामग्री विषय इत्यादि। लेकिन यह ज्ञात है कि विज्ञापन प्रदर्शन से चैनल के मालिक का हिस्सा अड़सठ% है। यही है, अर्जित हर डॉलर के साथ, मालिक अड़सठ सेंट प्राप्त करेगा, और "Yutoub" बत्तीस सेंट मिलेगा। लेकिन यह बहुत सामान्यीकृत है। जैसा कि पहले से ही उल्लेख किया गया है, YouTube पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए आप कितना भुगतान करते हैं, इस पर कई कारक प्रभावित होते हैं। आइए एक ठोस उदाहरण का विश्लेषण करें। यूएस में यूट्यूब पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं? ध्यान दें कि अमेरिका में, एक वीडियो ब्लॉगर की औसत कमाईरूस से अधिक यह तार्किक है, लेकिन अब नहीं। अट्ठाईस दिनों की अवधि के लिए वीडियो ब्लॉगर की कमाई के आंकड़ों का एक स्क्रीनशॉट नीचे दिया गया है। यह स्क्रीनशॉट एक यूट्यूब कमीशन की कटौती के साथ एक ब्लॉगर की कमाई दिखाता है। वास्तव में वास्तव में कितने लोग अर्जित हुए हैं। स्क्रीनशॉट से आप देख सकते हैं कि अट्ठाईस दिनों के भीतर यह थाएक नौ सत्तावन के विचार, और इस अवधि के लिए ब्लॉगर तीस डॉलर कमाने में सक्षम था। इसका मतलब है कि प्रति एक हज़ार विचारों की कमाई के लगभग एक.पाँच डॉलर हैं। इसलिए, एक लाख विचारों के लिए एक हज़ार पाँच सौ डॉलर का लाभ संभव है। हालांकि, यह सिर्फ एक उदाहरण है। कुछ ब्लॉगर्स के लिए, कमाई का स्तर बहुत अलग है, और एक हज़ार वीडियो विचारों के लिए, तीन या अधिक डॉलर का राजस्व संभव है। इसके अलावा, कमाई कम हो सकती है। ऐसे कई कारक हैं जो वीडियो ब्लॉगर के संभावित लाभ को प्रभावित करते हैं, और नीचे हम उनका विश्लेषण करेंगे। सबसे पहले, यह मात्रा और गुणवत्ताविज़िट। उदाहरण के लिए, यदि उपयोगकर्ता वाणिज्यिक देखते समय "छोड़ें" बटन पर क्लिक करता है, तो ऐसे विज्ञापन का भुगतान नहीं किया जाता है। वीडियो, जो वीडियो के निचले हिस्से में आयत के रूप में प्रदर्शित होता है, पर भी इंप्रेशन के लिए शुल्क नहीं लिया जाता है। पारिश्रमिक केवल तब अर्जित किया जाता है जब उपयोगकर्ता विज्ञापन पर क्लिक करता है। लाभ को प्रभावित करने वाला दूसरा कारक हैएक क्लिक की लागत या एक विज्ञापन देखने। कारों को समर्पित चैनलों पर एक क्लिक की लागत सामान्य चैनलों पर प्रति क्लिक लागत से कहीं अधिक होगी, जहां मालिक शिश कबाब को ठीक तरह से पकाने के तरीके के बारे में बात करता है। और यह तार्किक है, क्योंकि YouTube स्वचालित रूप से चैनल की सामग्री और दर्शकों के हितों के अनुसार विज्ञापन चुनता है। यह तर्कसंगत है कि एक कार के विज्ञापन को एक चमकदार कबाब के लिए एक समुद्री डाकू विज्ञापन देने से अधिक खर्च होंगे। यही कारण है कि सामान्य बनाना और यह कहना असंभव है कि आप YouTube पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए कितना भुगतान करते हैं। प्रति लाख विचार कमाई एक सौ डॉलर हो सकती है, और शायद कई हजार। चैनल विषय एक अतिरिक्त कारक हैं, सेजो लाभप्रदता पर निर्भर करता है। ऑटोमोटिव विषयों, दवा, निर्माण, व्यवसाय वीडियो चैनलों के लिए सभी लाभदायक विषय हैं, और विज्ञापन सामग्री का भी उच्च भुगतान किया जाता है। चैनलों पर विज्ञापन, जो हास्य और जीवन के तरीके के लिए समर्पित हैं, कम भुगतान किया जाता है। हालांकि, उपयोगकर्ताओं को ऐसे चैनल में आकर्षित करना आसान है। चैनल के दर्शक भी भूमिका निभाते हैं। बच्चों के वीडियो का विषय स्कूली बच्चों और छोटे बच्चों को आकर्षित करता है। यदि वे अपने विज्ञापन पर स्कूली बच्चों का विज्ञापन करते हैं तो विज्ञापनदाता पैसे कमाने में सक्षम नहीं होंगे, इसलिए आपको विज्ञापन से बड़ी आय की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, जो बच्चों की सामग्री के साथ चैनलों पर घूमती है। विज्ञापनदाता व्यवसायियों और उच्च क्रय शक्ति वाले लोगों द्वारा देखे जाने वाले अपने विज्ञापनों को देखने में रुचि रखते हैं। और इसके लिए वे पैसे का भुगतान करने के इच्छुक हैं। देश, जिनके नागरिक वीडियो देख रहे हैं,एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आप तुलना करते हैं कि रूस में कमाई के साथ अमेरिका में YouTube पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए आप कितना भुगतान करते हैं, तो अंतर आपको आश्चर्यचकित करेगा। समान विषयों वाले चैनलों पर समान संख्या में विचारों के साथ राजस्व में अंतर बहुत बड़ा हो सकता है। लेकिन यह तार्किक है, क्योंकि अमेरिका में विज्ञापन अधिक खर्च किया जाता है, और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अधिक है। इस कारण से, कई रूसी नागरिक अंग्रेजी में अपने वीडियोब्लॉग का संचालन करने और संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रासंगिक विषयों को छूने की कोशिश करते हैं। ग्राहकों की संख्या एक अप्रत्यक्ष कारक है,"यूट्यूब" की आय को प्रभावित करना। बेशक, यूट्यूब ग्राहकों की संख्या के विकास के लिए कुछ भी भुगतान नहीं करता है, लेकिन जितना अधिक वे उपलब्ध हैं, चैनल रेटिंग जितना अधिक होगा, और अधिक विचार प्रत्येक वीडियो टाइप किए जाएंगे। इससे आय में वृद्धि हुई है। और सामान्य रूप से, इस समय, "Yutoub" का प्रतिनिधित्व करता हैअरबों दर्शकों के साथ एक विशाल मनोरंजन और व्यापार क्षेत्र। इसका सक्रिय रूप से विज्ञापनदाताओं द्वारा उपयोग किया जाता है, जो इस वीडियो होस्टिंग में विज्ञापन के माध्यम से अपने उत्पादों को बेचने में बहुत सफल होते हैं। इसलिए, इस साइट पर पैसा कमाने की संभावना है, और काफी कुछ है। लेकिन रूबल्स में यूट्यूब पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए कितना भुगतान किया जाता है - यह सामग्री और दर्शकों पर निर्भर करता है जिन पर वीडियो डिज़ाइन किए गए हैं। क्या संभावित आय की सटीक गणना करना संभव है? दुर्भाग्य से, हम वास्तव में कितने गणना नहीं कर सकते हैंरूस और दुनिया में यूट्यूब पर देखने के लिए भुगतान करें। आप केवल अपने पिछले संकेतकों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और भावी कमाई की भविष्यवाणी कर सकते हैं। आखिरकार, किसी विज्ञापन पर क्लिक करके या इसे देखने का अनुमान केवल एक प्रतिशत, या शायद कई डॉलर हो सकता है। सब कुछ चैनल के विषय पर निर्भर करता है, सामग्री देखने वाले लोगों की क्रय शक्ति। यदि वीडियो आपको खरीदने के लिए संपत्ति चुनने की बारीकियों के बारे में बताएगा, तो यह स्पष्ट है कि जो लोग एक अपार्टमेंट खरीदने जा रहे हैं, वे इस वीडियो को देखेंगे, उदाहरण के लिए। और अचल संपत्ति में विज्ञापन धब्बे के लिए संघर्ष गंभीर है, इसलिए सैकड़ों नहीं होने पर, एक अपार्टमेंट खरीदने के लिए विज्ञापन पर क्लिक करने की लागत दस डॉलर में अनुमानित की जा सकती है। यह ऑटोमोटिव विषयों पर भी लागू होता है, क्योंकि बहुत सारे विक्रेता हैं, और कार काफी महंगा सामान हैं। इसलिए, कारों के बारे में एक वीडियो ब्लॉग पर विज्ञापन भी महंगा होगा। दुर्भाग्यवश, भविष्य के लिए गणना करना असंभव है"यूट्यूब" पर हजारों वीडियो दृश्यों की लागत, और यदि कोई गणना एल्गोरिदम है, तो यूट्यूब इसका खुलासा नहीं करेगा। हालांकि, हमेशा वीडियो एम्बेड विज्ञापन में, जिसे विज़िटर की वरीयताओं के आधार पर चुना जाता है। इससे संभावना बढ़ जाती है कि वह उस विज्ञापन को देखता है जिसे वह चाहता है और उस पर क्लिक करता है। नतीजतन, यह निश्चित रूप से निर्धारित करना असंभव है,रूस में यूट्यूब पर एक,शून्य,शून्य विचारों के लिए वे कितना भुगतान करते हैं। आप केवल ब्लॉगर्स के बीच एक सर्वेक्षण कर सकते हैं और औसत मूल्य की पहचान कर सकते हैं। हालांकि, शायद ही कोई ऐसा डेटा साझा करेगा। यदि आप दृढ़ता से सामान्यीकृत करते हैं, तो दस लाख विचारों के लिए कमाई एक हज़ार डॉलर है। कुछ एक हज़ार पाँच सौ डॉलर कमाने में कामयाब होते हैं। उच्च प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन लागतों के कारण विदेशी ब्लॉगर्स एक लाख विचारों के लिए लगभग दो-चार हजार डॉलर कमाते हैं। एक सोशलब्लैड सेवा है, जो सिद्धांत रूप में हैआपको यह निर्धारित करने की अनुमति देता है कि यूट्यूब पर अपने मालिक को कितना पैसा लाता है। यदि आप इस सेवा पर विश्वास करते हैं, तो दुनिया के सबसे मशहूर ब्लॉगर PewDiePie, जिसमें सत्तावन मिलियन ग्राहक हैं, एक महीने में चौवन से आठ सौ अड़सठ हजार डॉलर कमाते हैं। यहां तक कि संख्याओं में एक विशाल तितर बितर है। इससे यह समझना संभव हो जाता है कि कोई निश्चित सूत्र नहीं है जो वीडियो दृश्यों की संख्या के आधार पर कमाई की मात्रा की गणना करने की अनुमति देगा।
|
नई दिल्ली. देशभर में पिछले 24 घंटे में 3. 3 लाख नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 1. 9 लाख हैं। लगातार तीसरे दिन कोरोना महामारी से 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है। इसी बीच बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एम्स ने नई गाइडलाइन्स जारी की है। आपको उन्हीं गाइडलाइन्स के बारे में बता रहे हैं कि किस हालत में कैसे इलाज होना चाहिए।
सबसे पहले कोविड-19 की पहचान करना जरूरी है। इसका एक छोटा सा लक्षण बुखार और सांस फूलना है। अगर ये लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे व्यक्ति को सेल्फ आइसोलेट हो जाना चाहिए।
1 - कोविड मरीज से दूरी बनाएं, घर में भी मास्क का उपयोग करें और हाथ को अच्छे से धोएं।
2 - डॉक्टर से लगातार संपर्क बनाएं रखें।
3 - अपने ऑक्सीजन और टैंपरेचर पर नजर बनाए रखें।
कब होगी मेडिकल की जरूरत?
हल्का सर्दी बुखार में भी लोग घबरा जा रहे हैं। ऐसे में नई गाइडलाइन में कहा गया है कि जब सांस लेने में दिक्कत हो या फिर पांच दिन से ज्यादा बुखार और कफ हो तो तुरंत चेकअप करवाएं।
2. ज्यादा लक्षण दिखने पर क्या करें?
कोरोना के ज्यादा लक्षण होने की पहचान सांस लेने की दर का अचानक से घट जाना है। ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत एडमिट करवा देना चाहिए। सांस के ज्यादा फूलने पर मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाना चाहिए।
कोरोना के ज्यादा लक्षण दिखने पर आपको Methylprednisolone 0. 5 to 1 mg/kg का इजेक्शन दो अलग-अलग डोज में लेना चाहिए। इसके अलावा खुद को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर के संपर्क में रहें।
कोरोना में जब तबीयत ज्यादा खराब होने लगती है तब आपकी धड़कन की रेट 30/min हो जाती है। ऐसे में मरीज को ICU में भर्ती करवा देना चाहिए।
कोरोना की वजह से जब मरीज की हालत बेकाबू हो जाए तो ऐसे में Methylprednisolone 1 to 2mg/kg IV इंजेक्शन लें। इसकी दो अलग-अलग डोज 5-10 दिन के अंदर ही लें।
|
नई दिल्ली. देशभर में पिछले चौबीस घंटाटे में तीन. तीन लाख नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या एक. नौ लाख हैं। लगातार तीसरे दिन कोरोना महामारी से दो हजार से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी है। इसी बीच बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एम्स ने नई गाइडलाइन्स जारी की है। आपको उन्हीं गाइडलाइन्स के बारे में बता रहे हैं कि किस हालत में कैसे इलाज होना चाहिए। सबसे पहले कोविड-उन्नीस की पहचान करना जरूरी है। इसका एक छोटा सा लक्षण बुखार और सांस फूलना है। अगर ये लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे व्यक्ति को सेल्फ आइसोलेट हो जाना चाहिए। एक - कोविड मरीज से दूरी बनाएं, घर में भी मास्क का उपयोग करें और हाथ को अच्छे से धोएं। दो - डॉक्टर से लगातार संपर्क बनाएं रखें। तीन - अपने ऑक्सीजन और टैंपरेचर पर नजर बनाए रखें। कब होगी मेडिकल की जरूरत? हल्का सर्दी बुखार में भी लोग घबरा जा रहे हैं। ऐसे में नई गाइडलाइन में कहा गया है कि जब सांस लेने में दिक्कत हो या फिर पांच दिन से ज्यादा बुखार और कफ हो तो तुरंत चेकअप करवाएं। दो. ज्यादा लक्षण दिखने पर क्या करें? कोरोना के ज्यादा लक्षण होने की पहचान सांस लेने की दर का अचानक से घट जाना है। ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत एडमिट करवा देना चाहिए। सांस के ज्यादा फूलने पर मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाना चाहिए। कोरोना के ज्यादा लक्षण दिखने पर आपको Methylprednisolone शून्य. पाँच to एक मिलीग्राम/kg का इजेक्शन दो अलग-अलग डोज में लेना चाहिए। इसके अलावा खुद को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर के संपर्क में रहें। कोरोना में जब तबीयत ज्यादा खराब होने लगती है तब आपकी धड़कन की रेट तीस/min हो जाती है। ऐसे में मरीज को ICU में भर्ती करवा देना चाहिए। कोरोना की वजह से जब मरीज की हालत बेकाबू हो जाए तो ऐसे में Methylprednisolone एक to दो मिलीग्राम/kg IV इंजेक्शन लें। इसकी दो अलग-अलग डोज पाँच-दस दिन के अंदर ही लें।
|
लखनऊ : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और इस्कॉन के बीच जुबानी जंग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है इस्कॉन अब शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में हैं. इस्कॉन का कहना है कि स्वरूपानंद इस्कॉन की बढ़ती लोकप्रियता से बौखला गए है नौर झूठे बयान दे रहे हैं.
ज्ञात हो है कि हाल में शंकराचार्य ने इस्कॉन मंदिरों को पैसा कमाने का अड्डा बताते हुए कहा था कि भारतीयों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा हर साल अमरीका जा रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने इस्कॉन पर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्मांतरण कराए जाने का भी आरोप लगाया था.
|
लखनऊ : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और इस्कॉन के बीच जुबानी जंग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है इस्कॉन अब शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में हैं. इस्कॉन का कहना है कि स्वरूपानंद इस्कॉन की बढ़ती लोकप्रियता से बौखला गए है नौर झूठे बयान दे रहे हैं. ज्ञात हो है कि हाल में शंकराचार्य ने इस्कॉन मंदिरों को पैसा कमाने का अड्डा बताते हुए कहा था कि भारतीयों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा हर साल अमरीका जा रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने इस्कॉन पर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्मांतरण कराए जाने का भी आरोप लगाया था.
|
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि अगर आरएसएस को लगता है कि अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए किसी आंदोलन की जरूरत है तो उसे नरेंद्र मोदी सरकार गिरा देना चाहिए।
मुंबई शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि अगर आरएसएस को लगता है कि अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए किसी आंदोलन की जरूरत है तो उसे नरेंद्र मोदी सरकार गिरा देना चाहिए। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने इससे पहले शुक्रवार को कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए वह इस मुद्दे पर कोई आंदोलन छेड़ने में नहीं हिचकिचाएगा।
सेना मुख्यालय में मीडिया के साथ बात करते हुए ठाकरे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने आरएसएस के समूचे अजेंडे को नजरअंदाज किया है। शिवसेना के प्रमुख ने कहा, 'मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद राम मंदिर का मुद्दा दरकिनार कर दिया गया। जब शिवसेना ने मुद्दा उठाया और मंदिर निर्माण पर जोर देने का फैसला किया तो आरएसएस अब इस मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन की जरूरत महसूस कर रहा है। '
ठाकरे ने कहा, 'एक मजबूत सरकार होने के बावजूद अगर आप (आरएसएस) किसी आंदोलन की जरूरत महसूस करते हैं तो इस सरकार को गिरा क्यों नहीं देते। ' इससे पहले आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समापन पर संघ महासचिव भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को कहा कि संघ 'अगर जरूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए आंदोलन छेड़ने से नहीं हिचकिचाएगा' लेकिन इस मामले में 'रोक लगी है' क्योंकि मामला उच्चतम न्यायालय में है।
|
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि अगर आरएसएस को लगता है कि अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए किसी आंदोलन की जरूरत है तो उसे नरेंद्र मोदी सरकार गिरा देना चाहिए। मुंबई शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि अगर आरएसएस को लगता है कि अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए किसी आंदोलन की जरूरत है तो उसे नरेंद्र मोदी सरकार गिरा देना चाहिए। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने इससे पहले शुक्रवार को कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए वह इस मुद्दे पर कोई आंदोलन छेड़ने में नहीं हिचकिचाएगा। सेना मुख्यालय में मीडिया के साथ बात करते हुए ठाकरे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने आरएसएस के समूचे अजेंडे को नजरअंदाज किया है। शिवसेना के प्रमुख ने कहा, 'मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद राम मंदिर का मुद्दा दरकिनार कर दिया गया। जब शिवसेना ने मुद्दा उठाया और मंदिर निर्माण पर जोर देने का फैसला किया तो आरएसएस अब इस मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन की जरूरत महसूस कर रहा है। ' ठाकरे ने कहा, 'एक मजबूत सरकार होने के बावजूद अगर आप किसी आंदोलन की जरूरत महसूस करते हैं तो इस सरकार को गिरा क्यों नहीं देते। ' इससे पहले आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समापन पर संघ महासचिव भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को कहा कि संघ 'अगर जरूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए आंदोलन छेड़ने से नहीं हिचकिचाएगा' लेकिन इस मामले में 'रोक लगी है' क्योंकि मामला उच्चतम न्यायालय में है।
|
कुआलालंपुर, (भाषा)। मलेशिया पुलिस ने आज कहा कि वह इस बात की जांच करेगी कि 166 यात्रियों को लेकर बेंगलूर जा रहे विमान को आपात स्थिति में उतारे जाने का कारण कहीं जानबूझकर की गई छेड़छाड़ तो नहीं थी। मलेशिया एयरलाइन्स का विमान एमएच192 आज टायर फटने तथा लैंडिंग गीयर में खराबी के बाद तड़के वापस लौट आया। पुलिस महानिरीक्षक खालिद अबूबकर ने बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या विमान में ऐसे लोग थे जिन्होंने जानबूझकर कोई छेड़छाड़ की थी जिसकी वजह से विमान में समस्या हुई और उसे आपात स्थिति में उतारना पड़ा। कार्यकारी परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन पुलिस से जांच कराने की बात कही है। बोइंग 737. . . 800 159 यात्रियों और चालक दल के 7 सदस्यों को लेकर बेंगलूर के लिए रवाना हुआ लेकिन समस्या के कारण उसे आपात स्थिति में उतरना पड़ा। मलेशिया एयरलाइन्स ने एक बयान में बताया कि विमान के उड़ान भरने के दौरान दाहिनी ओर के मुख्य लैंडिंग गीयर का एक टायर फट गया। कैप्टन को कुआलालंपुर हवाई यातायात नियंत्रक ने सतर्क किया कि हवाईपट्टी पर टायर का मलबा मिला है। मलेशिया एयरलाइन्स ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर ःओसीसीः को तत्काल रात 10 बज कर 25 मिनट पर सूचना दी गई। बयान में कहा गया है मलेशिया एयरलाइन्स की सर्वोच्च प्राथमिकता सुरक्षा है इसलिए विमान को कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर लौटाना जरूरी था। `ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर' ःओसीसीः ने पायलट को जैसे ही हवाईअड्डा लौटने का आदेश दिया वैसे ही `एयरपोर्ट फायर रेस्क्यू सर्विसेज' ःएएफआरएसः को सूचित किया गया। बयान में कहा गया है विमान में सवार सभी 159 यात्रियों और चालक दल के 7 सदस्यों को उतार लिया गया। 21 अप्रैल को कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से एमएच192 नए समय के अनुसार दोपहर 3 बज कर 30 मिनट पर रवाना किया जाएगा तथा यह उसी दिन शाम 5 बजे बेंगलूर पहुंच जाएगा। विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं क्योंकि विमान स्थानीय समयानुसार एक बज कर 56 मिनट पर कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुरक्षित उतर गया। मलेशिया एयरलाइन्स ने ट्वीट किया कि विमान बीती रात स्थानीय समयानुसार, 10 बज कर करीब 9 मिनट पर रवाना हुआ था। इस विमान को कल भारतीय समयानुसार रात 11 बज कर 35 मिनट पर बेंगलूर पहुंचना था। इस बीच, हिशामुद्दीन ने विमान को आपात स्थिति में सुरक्षित उतारने के लिए उसके पायलट की सराहना की है। हिशामुद्दीन हुसैन ने कहा थके होने के बावजूद यात्रियों ने, आपात स्थिति में ःकुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे परः बिना कोई नुकसान पहुंचाए, विमान उतारने के लिए पायलट के कौशल की सराहना की है। संवाददाता सम्मेलन में विमान के पायलट नूर आदम आजमी मौजूद थे और उनकी तारीफ करते हुए हिशामुद्दीन ने पायलट कैप उनके सर पर रख दी। मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने एमएच192 के सुरक्षित लौटने पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने बताया कि हवाईपट्टी पर टायर का मलबा मिलने के बारे में मलेशिया एयरलाइन्स ओसीसी को कुआलालंपुर हवाई यातायात नियंत्रक ने तत्काल सूचित किया और उसकी यह कार्रवाई सराहनीय है। रजाक ने फेसबुक पर डाले गए एक पोस्ट में कहा सभी ने प्रशंसनीय कार्य किया। आपात स्थिति में विमान को सफलतापूर्वक उतार कर कैप्टन नूर आदम आजमी और उनके सह पायलट प्रकाश कुमार ने बहुत अच्छा काम किया।
|
कुआलालंपुर, । मलेशिया पुलिस ने आज कहा कि वह इस बात की जांच करेगी कि एक सौ छयासठ यात्रियों को लेकर बेंगलूर जा रहे विमान को आपात स्थिति में उतारे जाने का कारण कहीं जानबूझकर की गई छेड़छाड़ तो नहीं थी। मलेशिया एयरलाइन्स का विमान एमएचएक सौ बानवे आज टायर फटने तथा लैंडिंग गीयर में खराबी के बाद तड़के वापस लौट आया। पुलिस महानिरीक्षक खालिद अबूबकर ने बताया कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या विमान में ऐसे लोग थे जिन्होंने जानबूझकर कोई छेड़छाड़ की थी जिसकी वजह से विमान में समस्या हुई और उसे आपात स्थिति में उतारना पड़ा। कार्यकारी परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन पुलिस से जांच कराने की बात कही है। बोइंग सात सौ सैंतीस. . . आठ सौ एक सौ उनसठ यात्रियों और चालक दल के सात सदस्यों को लेकर बेंगलूर के लिए रवाना हुआ लेकिन समस्या के कारण उसे आपात स्थिति में उतरना पड़ा। मलेशिया एयरलाइन्स ने एक बयान में बताया कि विमान के उड़ान भरने के दौरान दाहिनी ओर के मुख्य लैंडिंग गीयर का एक टायर फट गया। कैप्टन को कुआलालंपुर हवाई यातायात नियंत्रक ने सतर्क किया कि हवाईपट्टी पर टायर का मलबा मिला है। मलेशिया एयरलाइन्स ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर ःओसीसीः को तत्काल रात दस बज कर पच्चीस मिनट पर सूचना दी गई। बयान में कहा गया है मलेशिया एयरलाइन्स की सर्वोच्च प्राथमिकता सुरक्षा है इसलिए विमान को कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर लौटाना जरूरी था। `ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर' ःओसीसीः ने पायलट को जैसे ही हवाईअड्डा लौटने का आदेश दिया वैसे ही `एयरपोर्ट फायर रेस्क्यू सर्विसेज' ःएएफआरएसः को सूचित किया गया। बयान में कहा गया है विमान में सवार सभी एक सौ उनसठ यात्रियों और चालक दल के सात सदस्यों को उतार लिया गया। इक्कीस अप्रैल को कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से एमएचएक सौ बानवे नए समय के अनुसार दोपहर तीन बज कर तीस मिनट पर रवाना किया जाएगा तथा यह उसी दिन शाम पाँच बजे बेंगलूर पहुंच जाएगा। विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं क्योंकि विमान स्थानीय समयानुसार एक बज कर छप्पन मिनट पर कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुरक्षित उतर गया। मलेशिया एयरलाइन्स ने ट्वीट किया कि विमान बीती रात स्थानीय समयानुसार, दस बज कर करीब नौ मिनट पर रवाना हुआ था। इस विमान को कल भारतीय समयानुसार रात ग्यारह बज कर पैंतीस मिनट पर बेंगलूर पहुंचना था। इस बीच, हिशामुद्दीन ने विमान को आपात स्थिति में सुरक्षित उतारने के लिए उसके पायलट की सराहना की है। हिशामुद्दीन हुसैन ने कहा थके होने के बावजूद यात्रियों ने, आपात स्थिति में ःकुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे परः बिना कोई नुकसान पहुंचाए, विमान उतारने के लिए पायलट के कौशल की सराहना की है। संवाददाता सम्मेलन में विमान के पायलट नूर आदम आजमी मौजूद थे और उनकी तारीफ करते हुए हिशामुद्दीन ने पायलट कैप उनके सर पर रख दी। मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने एमएचएक सौ बानवे के सुरक्षित लौटने पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने बताया कि हवाईपट्टी पर टायर का मलबा मिलने के बारे में मलेशिया एयरलाइन्स ओसीसी को कुआलालंपुर हवाई यातायात नियंत्रक ने तत्काल सूचित किया और उसकी यह कार्रवाई सराहनीय है। रजाक ने फेसबुक पर डाले गए एक पोस्ट में कहा सभी ने प्रशंसनीय कार्य किया। आपात स्थिति में विमान को सफलतापूर्वक उतार कर कैप्टन नूर आदम आजमी और उनके सह पायलट प्रकाश कुमार ने बहुत अच्छा काम किया।
|
Modi Cabinet Expansion 2021: मंत्रियों के साथ घर पर पीएम मोदी की अहम बैठक आज, कैबिनेट विस्तार इस हफ्ते होने की उम्मीद!
सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है. साथ ही कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बीजेपी सांसदों को भी मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया जा सकता है.
सूत्रों ने सोमवार को बताया कि मंत्रिमंडल का विस्तार इसी हफ्ते होने की संभावना है. सूत्रों ने कहा कि कैबिनेट विस्तार को लेकर पीएम मोदी ने अमित शाह, जेपी नड्डा सहित अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और बीजेपी नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं. सूत्रों ने कहा कि जेडीयू और एलजेपी के पारस गुट जैसे प्रमुख सहयोगियों को इस विस्तार में शामिल किए जाने की संभावना है.
साथ ही सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बीजेपी सांसदों को भी मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया जा सकता है. पिछले महीने 30 जून को पीएम मोदी ने अपने मंत्रिपरिषद को संबोधित किया और विपक्ष की तरफ से लगाए गए आरोपों का मुकाबला करने के लिए तथ्य और आंकड़े तैयार करने को कहा.
सूत्र ने कहा कि टिप्पणी इस बात का संकेत हो सकती है कि पीएम सत्र के बाद फेरबदल कर सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि जब भी कैबिनेट में फेरबदल होता है, तो उम्मीद की जाती है कि ये न केवल पीएम मोदी के बाकी बचे तीन सालों के कार्यकाल के लिए प्रशासनिक शासन को आकार देने की कवायद होगी, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को सही करके एक राजनीतिक संकेत भेजने के लिए भी होगी. आने वाले चुनावों पर नजर एक मंत्री ने कह कि पीएम मोदी की तरफ से मध्यावधि सुधार होगा. सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी परिषद में 20 से अधिक बदलाव कर सकते हैं.
|
Modi Cabinet Expansion दो हज़ार इक्कीस: मंत्रियों के साथ घर पर पीएम मोदी की अहम बैठक आज, कैबिनेट विस्तार इस हफ्ते होने की उम्मीद! सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है. साथ ही कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बीजेपी सांसदों को भी मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया जा सकता है. सूत्रों ने सोमवार को बताया कि मंत्रिमंडल का विस्तार इसी हफ्ते होने की संभावना है. सूत्रों ने कहा कि कैबिनेट विस्तार को लेकर पीएम मोदी ने अमित शाह, जेपी नड्डा सहित अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और बीजेपी नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं. सूत्रों ने कहा कि जेडीयू और एलजेपी के पारस गुट जैसे प्रमुख सहयोगियों को इस विस्तार में शामिल किए जाने की संभावना है. साथ ही सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ बीजेपी सांसदों को भी मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया जा सकता है. पिछले महीने तीस जून को पीएम मोदी ने अपने मंत्रिपरिषद को संबोधित किया और विपक्ष की तरफ से लगाए गए आरोपों का मुकाबला करने के लिए तथ्य और आंकड़े तैयार करने को कहा. सूत्र ने कहा कि टिप्पणी इस बात का संकेत हो सकती है कि पीएम सत्र के बाद फेरबदल कर सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि जब भी कैबिनेट में फेरबदल होता है, तो उम्मीद की जाती है कि ये न केवल पीएम मोदी के बाकी बचे तीन सालों के कार्यकाल के लिए प्रशासनिक शासन को आकार देने की कवायद होगी, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को सही करके एक राजनीतिक संकेत भेजने के लिए भी होगी. आने वाले चुनावों पर नजर एक मंत्री ने कह कि पीएम मोदी की तरफ से मध्यावधि सुधार होगा. सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी परिषद में बीस से अधिक बदलाव कर सकते हैं.
|
Don't Miss!
देव-फ्रीडा की सगाई?
फिल्मी पार्टियों से लेकर सार्वजनिक जगहों पर दोनों को अकसर साथ-साथ देखा जाता है और इसी के कारण किसी ने इन दोनों की सगाई की झूठी खबर इंटरनेट पर डाल दी। बस फिर क्या था, देव की मां ने जब अपने बेटे की सगाई की ऑनलाइन खबरें पढ़ीं तो वह बहुत परेशान हो गईं।
फिर देव पटेल को अपनी मां को समझाना पड़ा ये कि ये खबरें गलत हैं और इसे लेकर उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक वेबसाइट 'पीपुल डॉट कॉम" के मुताबिक देव का कहना है, "मां की ही तरह मुझे भी अपनी ही सगाई की खबर पर विश्वास नहीं हुआ जबकि कुछ हुआ ही नहीं था। मेरे और फ्रीडा के बीच में सब कुछ बहुत अच्छा चल है और फिलहाल मैं एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हूं।"
20 साल के देव कहते हैं कि कभी-कभी उनके संबंधों की अफवाहें इतनी बढ़ जाती हैं कि उनकी मां के सामने उन्हें सफाई देनी पड़ती है। खैर देव कहते हैं कि उनकी मां के परेशान होने का कारण है कि जब वो अपने काम पर जाती हैं तो वहां उनसे सब इसी तरह के सवाल करते हैं और वो परेशान हो जाती हैं।
|
Don't Miss! देव-फ्रीडा की सगाई? फिल्मी पार्टियों से लेकर सार्वजनिक जगहों पर दोनों को अकसर साथ-साथ देखा जाता है और इसी के कारण किसी ने इन दोनों की सगाई की झूठी खबर इंटरनेट पर डाल दी। बस फिर क्या था, देव की मां ने जब अपने बेटे की सगाई की ऑनलाइन खबरें पढ़ीं तो वह बहुत परेशान हो गईं। फिर देव पटेल को अपनी मां को समझाना पड़ा ये कि ये खबरें गलत हैं और इसे लेकर उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक वेबसाइट 'पीपुल डॉट कॉम" के मुताबिक देव का कहना है, "मां की ही तरह मुझे भी अपनी ही सगाई की खबर पर विश्वास नहीं हुआ जबकि कुछ हुआ ही नहीं था। मेरे और फ्रीडा के बीच में सब कुछ बहुत अच्छा चल है और फिलहाल मैं एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हूं।" बीस साल के देव कहते हैं कि कभी-कभी उनके संबंधों की अफवाहें इतनी बढ़ जाती हैं कि उनकी मां के सामने उन्हें सफाई देनी पड़ती है। खैर देव कहते हैं कि उनकी मां के परेशान होने का कारण है कि जब वो अपने काम पर जाती हैं तो वहां उनसे सब इसी तरह के सवाल करते हैं और वो परेशान हो जाती हैं।
|
दल्लीराजहरा, 7 जून। कुत्ते को पत्थर मारनें को लेकर एक युवक नें दुसरे युवक की जमकर पिटाई कर दी, जिससे उसकी पसली टूट गई वहीं शरीर के अन्य जगहों पर काफी चोटें पहुंची। राजहरा पुलिस नें इस घटना पर आरोपी युवक के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर जिला न्यायालय में पेश किया गया जहां उसे जेल भेज दिया गया है।
विदित हो कि 31 मई की दोपहर को नगर के वार्ड क्रमांक 02 पंडर दल्ली क्षेत्र निवासी नेमी जायसवाल ने उसी वार्ड के रवि साहू को कुत्ते को पत्थर क्यों मारा ऐसा बोलते हुए उसकी जमकर पिटाई कर दी। इस कदर पिटाई कर दी की रवि साहू की पसली टूट गई, जबड़े में 6 टांके लग, एक कान सून हो गया सहित शरीर के विभिन्न जगहों पर काफी चोटें पहुंची।
रवि साहू घटना स्थल पर ही बेहोश हो गया था जिसे आसपास के लोगों ने 108 में फोन कर एमबूलेंस में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिखलाकसा ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल बालोद भेजा गया था, वहीं 2 जून को उसे बालोद से जिला अस्पताल राजनांदगांव रिफर कर दिया गया है वर्तमान में राजनांदगांव जिला अस्पताल में से उपचार जारी है।
|
दल्लीराजहरा, सात जून। कुत्ते को पत्थर मारनें को लेकर एक युवक नें दुसरे युवक की जमकर पिटाई कर दी, जिससे उसकी पसली टूट गई वहीं शरीर के अन्य जगहों पर काफी चोटें पहुंची। राजहरा पुलिस नें इस घटना पर आरोपी युवक के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर जिला न्यायालय में पेश किया गया जहां उसे जेल भेज दिया गया है। विदित हो कि इकतीस मई की दोपहर को नगर के वार्ड क्रमांक दो पंडर दल्ली क्षेत्र निवासी नेमी जायसवाल ने उसी वार्ड के रवि साहू को कुत्ते को पत्थर क्यों मारा ऐसा बोलते हुए उसकी जमकर पिटाई कर दी। इस कदर पिटाई कर दी की रवि साहू की पसली टूट गई, जबड़े में छः टांके लग, एक कान सून हो गया सहित शरीर के विभिन्न जगहों पर काफी चोटें पहुंची। रवि साहू घटना स्थल पर ही बेहोश हो गया था जिसे आसपास के लोगों ने एक सौ आठ में फोन कर एमबूलेंस में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिखलाकसा ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल बालोद भेजा गया था, वहीं दो जून को उसे बालोद से जिला अस्पताल राजनांदगांव रिफर कर दिया गया है वर्तमान में राजनांदगांव जिला अस्पताल में से उपचार जारी है।
|
मचा हड़कंप।
चटगांवः बांग्लादेश के चटगांव में शनिवार की रात बड़ा हादसा हो गया. यहां के सीताकुंडा उपजिला में एक निजी इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) में विस्फोट के कारण लगी आग में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 450 से अधिक घायल हो गए.
चटगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीएमसीएच) पुलिस चौकी के सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) अलाउद्दीन तालुकदार ने बताया कि सुबह 10:15 बजे तक इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई है. शवों को मुर्दाघर में रख दिया गया है.
रेड क्रिसेंट यूथ चटगांव में स्वास्थ्य और सेवा विभाग के प्रमुख इस्ताकुल इस्लाम ने बताया, "इस घटना में 450 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कम से कम 350 सीएमसीएच में हैं. अन्य अस्पतालों में मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है. "
|
मचा हड़कंप। चटगांवः बांग्लादेश के चटगांव में शनिवार की रात बड़ा हादसा हो गया. यहां के सीताकुंडा उपजिला में एक निजी इनलैंड कंटेनर डिपो में विस्फोट के कारण लगी आग में कम से कम बीस लोगों की मौत हो गई और चार सौ पचास से अधिक घायल हो गए. चटगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस चौकी के सहायक उप-निरीक्षक अलाउद्दीन तालुकदार ने बताया कि सुबह दस:पंद्रह बजे तक इस घटना में बीस लोगों की मौत हो गई है. शवों को मुर्दाघर में रख दिया गया है. रेड क्रिसेंट यूथ चटगांव में स्वास्थ्य और सेवा विभाग के प्रमुख इस्ताकुल इस्लाम ने बताया, "इस घटना में चार सौ पचास से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कम से कम तीन सौ पचास सीएमसीएच में हैं. अन्य अस्पतालों में मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है. "
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.