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एक युवा लड़का एक दृष्टिबाधित बूढ़े व्यक्ति, जो रास्ता भटक चुके हैं और उनकी याद्दाश्त भी लगभग चली गई है, के प्रति निःस्वार्थ देखभाल और उनकी पूरी शिद्दत से चिंता करता दिखाई देता है। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 52वें संस्करण में फिल्म प्रेमियों को इस प्राचीन प्रेम की बेदाग सुंदरता में सराबोर होने का दिल को छू लेने वाला अवसर मिला,जिसका श्रेय प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक जयराज की मलयालम फिल्म 'निराय थाथकलुल्ला मरम' को जाता है। भारतीय पैनोरमा फीचर फिल्म श्रेणी में इस फिल्म को आईएफएफआई 52 के प्रतिनिधियों को दिखाया गया। मानव अस्तित्व के सामान्य रोजमर्रा के पहलुओं में भ्रामक रूप से छिपी असाधारण सुंदरता को प्रकट करने की क्षमता हमेशा से निर्देशक जयराज की विशेषता और पहचान रही है। कल25 नवंबर,2021 को फिल्म समारोह से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध निर्देशक जयराज ने बताया कि फिल्म असल में दिखाना क्या चाहती है। "निराय थाथकलुल्ला मरम करुणा जैसी भावनाओं पर एक मार्मिक प्रदर्शन है,जो धीरे-धीरे हमारे समाज से गायब हो रहा है। यह फिल्म प्रेम,आशा,निराशा,विचार और देखभाल की विभिन्न मानवीय उद्गारों के सहारे एक चलती-फिरती यात्रा है।" विशेष रूप से, 'ट्री फुल ऑफ पैरट्स' प्रतिष्ठित आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही है। यह फिल्म आईएफएफआई में आई है जो महात्मा गांधी के शांति,सहिष्णुता और अहिंसा के आदर्शों को सबसे अच्छी तरह से दर्शाती है। निर्देशक जयराज ने फिल्म प्रेमियों को बताया कि कैसे चेरुपुझा के साथ काम करने से उन्हें एक उज्ज्वल आंतरिक दृष्टि का उपहार मिला। उन्होंने कहा, "नारायणन एक दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति हैं। वह एक शिक्षक हैं जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के लिए राष्ट्रपति पदक जीता है। वह केरल के कन्नूर में दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक स्कूल चलाते हैं। फिल्म बनाने के दौरान,मैंने महसूस किया कि वह उन चीजों को देखने में सक्षम है जो दृष्टि से संपन्न होने के बावजूद हमें दिखाई नहीं देती हैं। उन्होंने मुझे प्रबुद्ध किया है और मेरी दृष्टि को और अधिक उज्ज्वल किया है।" निर्देशक जयराज ने यह बताने के लिए एक वाकया सुनाया कि कैसे चेरुपुझा ने उन्हें इस तरह का अहसास कराया। "नारायणन जैसे लोग प्रकृति और अपने आस-पास की दुनिया को हमसे बेहतर समझते हैं। एक दिन शूटिंग के दौरान नारायण ने मुझसे कहा कि वह एक कमल के पत्ते को छूना चाहते हैं। उस अद्भूत पल ने मुझे उस मूल्य का एहसास कराया,जो उसके जैसे लोग उन चीजों में पाते हैं जो हमारे लिए कोई मायने नहीं रखते हैं।" जयराज ने कहा कि वह उनके लिए एक ज्ञानवर्धक क्षण था,यह एक अनूठा रहस्योद्घाटन था जिसने उनकी कई धारणाओं और दृष्टिकोणों को बदल दिया। प्रकृति ने वास्तविकता को दिखाने और भावनाओं को जीवंत करके कहानी बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। "हमने इस फिल्म के माध्यम से कुछ भी बताने की कोशिश नहीं की है। उस यात्रा में प्रकृति ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका एक ऐसा स्वर है,जहां यह मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक विभिन्न भावनाओं को छूता है।" न केवल एक बच्चे का पिता समान एक इंसान के प्रति प्यार और करुणा,बल्कि केरल के बेदाग स्थिर जल की निर्मल सुंदरता में खुद को डूबोने के लिएफिल्म 'निराय थाथकलुल्ला मरम' देखें। जयराज (उर्फ जयराज राजशेखरन नायर) एक पुरस्कार विजेता निर्देशक,पटकथा लेखक और निर्माता हैं जिन्हें 'जॉनी वॉकर' (1992), 'थिलक्कम' (2003) जैसी फिल्मों और महत्वाकांक्षी 'नवरस' श्रृंखला के लिए जाना जाता है।
एक युवा लड़का एक दृष्टिबाधित बूढ़े व्यक्ति, जो रास्ता भटक चुके हैं और उनकी याद्दाश्त भी लगभग चली गई है, के प्रति निःस्वार्थ देखभाल और उनकी पूरी शिद्दत से चिंता करता दिखाई देता है। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के बावनवें संस्करण में फिल्म प्रेमियों को इस प्राचीन प्रेम की बेदाग सुंदरता में सराबोर होने का दिल को छू लेने वाला अवसर मिला,जिसका श्रेय प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक जयराज की मलयालम फिल्म 'निराय थाथकलुल्ला मरम' को जाता है। भारतीय पैनोरमा फीचर फिल्म श्रेणी में इस फिल्म को आईएफएफआई बावन के प्रतिनिधियों को दिखाया गया। मानव अस्तित्व के सामान्य रोजमर्रा के पहलुओं में भ्रामक रूप से छिपी असाधारण सुंदरता को प्रकट करने की क्षमता हमेशा से निर्देशक जयराज की विशेषता और पहचान रही है। कलपच्चीस नवंबर,दो हज़ार इक्कीस को फिल्म समारोह से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध निर्देशक जयराज ने बताया कि फिल्म असल में दिखाना क्या चाहती है। "निराय थाथकलुल्ला मरम करुणा जैसी भावनाओं पर एक मार्मिक प्रदर्शन है,जो धीरे-धीरे हमारे समाज से गायब हो रहा है। यह फिल्म प्रेम,आशा,निराशा,विचार और देखभाल की विभिन्न मानवीय उद्गारों के सहारे एक चलती-फिरती यात्रा है।" विशेष रूप से, 'ट्री फुल ऑफ पैरट्स' प्रतिष्ठित आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही है। यह फिल्म आईएफएफआई में आई है जो महात्मा गांधी के शांति,सहिष्णुता और अहिंसा के आदर्शों को सबसे अच्छी तरह से दर्शाती है। निर्देशक जयराज ने फिल्म प्रेमियों को बताया कि कैसे चेरुपुझा के साथ काम करने से उन्हें एक उज्ज्वल आंतरिक दृष्टि का उपहार मिला। उन्होंने कहा, "नारायणन एक दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति हैं। वह एक शिक्षक हैं जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के लिए राष्ट्रपति पदक जीता है। वह केरल के कन्नूर में दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक स्कूल चलाते हैं। फिल्म बनाने के दौरान,मैंने महसूस किया कि वह उन चीजों को देखने में सक्षम है जो दृष्टि से संपन्न होने के बावजूद हमें दिखाई नहीं देती हैं। उन्होंने मुझे प्रबुद्ध किया है और मेरी दृष्टि को और अधिक उज्ज्वल किया है।" निर्देशक जयराज ने यह बताने के लिए एक वाकया सुनाया कि कैसे चेरुपुझा ने उन्हें इस तरह का अहसास कराया। "नारायणन जैसे लोग प्रकृति और अपने आस-पास की दुनिया को हमसे बेहतर समझते हैं। एक दिन शूटिंग के दौरान नारायण ने मुझसे कहा कि वह एक कमल के पत्ते को छूना चाहते हैं। उस अद्भूत पल ने मुझे उस मूल्य का एहसास कराया,जो उसके जैसे लोग उन चीजों में पाते हैं जो हमारे लिए कोई मायने नहीं रखते हैं।" जयराज ने कहा कि वह उनके लिए एक ज्ञानवर्धक क्षण था,यह एक अनूठा रहस्योद्घाटन था जिसने उनकी कई धारणाओं और दृष्टिकोणों को बदल दिया। प्रकृति ने वास्तविकता को दिखाने और भावनाओं को जीवंत करके कहानी बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। "हमने इस फिल्म के माध्यम से कुछ भी बताने की कोशिश नहीं की है। उस यात्रा में प्रकृति ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका एक ऐसा स्वर है,जहां यह मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक विभिन्न भावनाओं को छूता है।" न केवल एक बच्चे का पिता समान एक इंसान के प्रति प्यार और करुणा,बल्कि केरल के बेदाग स्थिर जल की निर्मल सुंदरता में खुद को डूबोने के लिएफिल्म 'निराय थाथकलुल्ला मरम' देखें। जयराज एक पुरस्कार विजेता निर्देशक,पटकथा लेखक और निर्माता हैं जिन्हें 'जॉनी वॉकर' , 'थिलक्कम' जैसी फिल्मों और महत्वाकांक्षी 'नवरस' श्रृंखला के लिए जाना जाता है।
को अखाड़े के प्रधान केन्द्र के तथा अन्य शाखाओं के अधि कारियों की नियुक्त तथा पदस्थ करने का अधिकार है । अखाड़े की सम्पत्ति का प्रवन्ध करने आदि के लिए उसके केन्द्र तथा शाखाओं में थानापती तथा सेक्रेटरी होते हैं । अखाड़े का प्रधान केन्द्र प्रयाग में है। उसकी शाखाएँ ओंकारेश्वर, नासिक, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, उदयपुर, ज्वालामुखी, काशो व भर ( अकोला ) में हैं। इस के उपास्यदेव श्री कपिल महामुनि जी हैं । १. इसे अखाड़े के महन्त श्री तोता पुरी जी ने इस अखाड़े में ६ वर्ष महन्ती की। फिर अपने गुरुस्थान करनाल जिले में कैथल तहसील के अन्तर्गत गाँजा लदाना में बाबा राज पुरी के मठ में महन्त हो गए । ३ वर्ष पश्चात् तीर्थयात्रा करने को निकले । तीर्थाटन करते-करते जगन्नाथ जाते हुए गंगासागर से कलकत्ता में आये। वहाँ दक्षिणेश्वर स्थित काली के मन्दिर में एक मनुष्य ध्यानावस्थित ताली बजाते हुए उनको मिला । उसके सर्वलक्षण देख कर परम योगी ब्रह्मनिष्ठ महन्त तोता पुरी जी ने विचार किया कि यह व्यक्ति सामान्य नहीं है । यह जगत् का उद्धार करनेवाला महान् पुरुष होगा । यह विचार करके उसको कहा - माकार उपास
को अखाड़े के प्रधान केन्द्र के तथा अन्य शाखाओं के अधि कारियों की नियुक्त तथा पदस्थ करने का अधिकार है । अखाड़े की सम्पत्ति का प्रवन्ध करने आदि के लिए उसके केन्द्र तथा शाखाओं में थानापती तथा सेक्रेटरी होते हैं । अखाड़े का प्रधान केन्द्र प्रयाग में है। उसकी शाखाएँ ओंकारेश्वर, नासिक, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, उदयपुर, ज्वालामुखी, काशो व भर में हैं। इस के उपास्यदेव श्री कपिल महामुनि जी हैं । एक. इसे अखाड़े के महन्त श्री तोता पुरी जी ने इस अखाड़े में छः वर्ष महन्ती की। फिर अपने गुरुस्थान करनाल जिले में कैथल तहसील के अन्तर्गत गाँजा लदाना में बाबा राज पुरी के मठ में महन्त हो गए । तीन वर्ष पश्चात् तीर्थयात्रा करने को निकले । तीर्थाटन करते-करते जगन्नाथ जाते हुए गंगासागर से कलकत्ता में आये। वहाँ दक्षिणेश्वर स्थित काली के मन्दिर में एक मनुष्य ध्यानावस्थित ताली बजाते हुए उनको मिला । उसके सर्वलक्षण देख कर परम योगी ब्रह्मनिष्ठ महन्त तोता पुरी जी ने विचार किया कि यह व्यक्ति सामान्य नहीं है । यह जगत् का उद्धार करनेवाला महान् पुरुष होगा । यह विचार करके उसको कहा - माकार उपास
भोपाल। कलेक्टर भोपाल अविनाश लवानिया के निर्देशन व सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे की टीम द्वारा नदी-नालों जंगल में की गई छापामार कार्रवाई जारी है। प्रिवेंटिव प्रभारी विवेक त्रिपाठी के साथ वृत्त उप निरीक्षक बबीता भट्ट एवं स्वाति बघेल के नेतृत्व में जिला आबकारी बल द्वारा अयोध्यानगर थाना टीआई विजय त्रिपाठी के सहयोग से झगरिया, कोकता, बंजारा वस्ती, 4 नम्बर डेरा व आस पास के जंगल और नदी नालों में दबिश दी गई। कार्रवाई में झागरिया में मानसिंह आत्मज छीतर, नागु आत्मज नानू राम, सुनीता पत्नि मुकेश, मोनू बाई पत्नि जितेंद्र बंजारा, सुंदर बाई पत्नि रामसिंह गुड्डा बंजारा के कब्जे से एवं कोकता 4 नम्बर डेरी बंजारा वस्ती में अनिता पत्नि लक्ष्मण रामदेव, राजू आत्मज विश्वनाथ चौरे के कब्जे से कुल 15 लीटर हाथ भट्टी कच्ची मदिरा एवं 150 किलोग्राम महुआ लाहन बरामद किया गया। इसी तरह सांची विधानसभा क्षेत्र से सटे बिलखिरिया के जंगलों एवं नदी नालों में अवैध रूप से जमीन में गड्ढो में दबाकर रखी गई करीब 460 किलो ग्राम महुआ लाहन मौके से बरामद होने पर विधिवत नष्ट कराई गई। आरोपियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) क एवं (च) के तहत 6 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए।
भोपाल। कलेक्टर भोपाल अविनाश लवानिया के निर्देशन व सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे की टीम द्वारा नदी-नालों जंगल में की गई छापामार कार्रवाई जारी है। प्रिवेंटिव प्रभारी विवेक त्रिपाठी के साथ वृत्त उप निरीक्षक बबीता भट्ट एवं स्वाति बघेल के नेतृत्व में जिला आबकारी बल द्वारा अयोध्यानगर थाना टीआई विजय त्रिपाठी के सहयोग से झगरिया, कोकता, बंजारा वस्ती, चार नम्बर डेरा व आस पास के जंगल और नदी नालों में दबिश दी गई। कार्रवाई में झागरिया में मानसिंह आत्मज छीतर, नागु आत्मज नानू राम, सुनीता पत्नि मुकेश, मोनू बाई पत्नि जितेंद्र बंजारा, सुंदर बाई पत्नि रामसिंह गुड्डा बंजारा के कब्जे से एवं कोकता चार नम्बर डेरी बंजारा वस्ती में अनिता पत्नि लक्ष्मण रामदेव, राजू आत्मज विश्वनाथ चौरे के कब्जे से कुल पंद्रह लीटरटर हाथ भट्टी कच्ची मदिरा एवं एक सौ पचास किलोग्रामग्राम महुआ लाहन बरामद किया गया। इसी तरह सांची विधानसभा क्षेत्र से सटे बिलखिरिया के जंगलों एवं नदी नालों में अवैध रूप से जमीन में गड्ढो में दबाकर रखी गई करीब चार सौ साठ किलो ग्राम महुआ लाहन मौके से बरामद होने पर विधिवत नष्ट कराई गई। आरोपियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा चौंतीस क एवं के तहत छः प्रकरण पंजीबद्ध किए गए।
होंडा ने नई ग्रजिया 125 सीएस 6 को नया लुक दिया है। कंपनी ने इस स्कूटर में स्प्लिटेड हेडलाइट को री-पोजिशन किया है, जिसके चलते न्यू ग्राजिया 125 पहले से ज्यादा एग्रेसिव लगता है। इसके अलावा कंपनी ने इसमें नए टेललैंप का इस्तेमाल किया है। भोजपुरी एक्टर को कार चोरी के लिए पकड़ाः भोजपुरी फिल्म एक्टर ने चुराई 50 से अधिक कारें, पुलिस ने धरा इसके साथ ही पिछले हिस्से में जेट विमान से इंड रियर विंकर और स्प्लिट ग्रैब रेल लगाए गए हैं. जो कि इसे और भी बेहतर लुक देते हैं। स्कूटर के साइट में इसके 3 डी लोगो को लगाया गया है, वहीं होंडा की बैजिंग को इसके फ्लोर पैनल पर दिया गया है, जो इसे प्रीमियम लुक देता है। होंडा मोटरसाइकिल और स्कूटर ने हाल ही में अपनी नई बीएम 6 होंडा ग्रजिया 125 का टीजर वीडियो जारी किया था। अब कंपनी ने अपनी इस स्कूटर को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस स्कूटर को 73,336 रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है। आपको बता दें कि होंडा ग्रजिया 125 होंडा की 125 सीसी प्रीमियम गियरलेस स्कूटर है और अब कंपनी ने इस स्कूटर को पहले ज्यादा से बेहतर और नए अपडेट के साथ लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे एक नया डिजाइन देने के साथ ही इसे स्पेसिफिकेशन को भी अपडेट किया है।
होंडा ने नई ग्रजिया एक सौ पच्चीस सीएस छः को नया लुक दिया है। कंपनी ने इस स्कूटर में स्प्लिटेड हेडलाइट को री-पोजिशन किया है, जिसके चलते न्यू ग्राजिया एक सौ पच्चीस पहले से ज्यादा एग्रेसिव लगता है। इसके अलावा कंपनी ने इसमें नए टेललैंप का इस्तेमाल किया है। भोजपुरी एक्टर को कार चोरी के लिए पकड़ाः भोजपुरी फिल्म एक्टर ने चुराई पचास से अधिक कारें, पुलिस ने धरा इसके साथ ही पिछले हिस्से में जेट विमान से इंड रियर विंकर और स्प्लिट ग्रैब रेल लगाए गए हैं. जो कि इसे और भी बेहतर लुक देते हैं। स्कूटर के साइट में इसके तीन डी लोगो को लगाया गया है, वहीं होंडा की बैजिंग को इसके फ्लोर पैनल पर दिया गया है, जो इसे प्रीमियम लुक देता है। होंडा मोटरसाइकिल और स्कूटर ने हाल ही में अपनी नई बीएम छः होंडा ग्रजिया एक सौ पच्चीस का टीजर वीडियो जारी किया था। अब कंपनी ने अपनी इस स्कूटर को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस स्कूटर को तिहत्तर,तीन सौ छत्तीस रुपयापये की कीमत पर उतारा है। आपको बता दें कि होंडा ग्रजिया एक सौ पच्चीस होंडा की एक सौ पच्चीस सीसी प्रीमियम गियरलेस स्कूटर है और अब कंपनी ने इस स्कूटर को पहले ज्यादा से बेहतर और नए अपडेट के साथ लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे एक नया डिजाइन देने के साथ ही इसे स्पेसिफिकेशन को भी अपडेट किया है।
जेईई मेन पेपर-2 रिजल्ट का रिजल्ट जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। इस एग्जाम को पास करने वाले छात्र देश की एनआईटी, ट्रिपल आईटी, केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थान, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त इंजीनियर कॉलेज में एडमिशन पाते हैं। साल 2020 में केंद्र सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत गर्वनमेंट हायर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 5 छात्र सेलेक्ट हुए थे लेकिन फिर कोरोना महामारी आ गई और यह प्रतियोगिता रोक दिया गया। जब दोबारा इसको शुरू किया गया तब भरत की मशीन नेशनल लेवल के लिए चुनी गई। एमबीए के टॉप कॉलेजों और इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए तीन लेवल पर एंट्रेंस एग्जाम आयोजित होते हैं। पहला नेशनल लेवल, दूसरा स्टेट लेवल और तीसरा इंस्टीट्यूट लेवल पर। इन एग्जाम को पास करने के बाद देश के मैनेजमेंट कॉलेज में एडमिशन मिलता है। 12वीं क्लास के बाद बहुत से स्टूडेंट्स हायर एजुकेशन के लिए विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखते हैं। आजकल युवाओं में इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। वे दुनिया की बेस्ट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहते हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्र यूरोप और दूसरे देशों में एडमिशन लेते हैं। इस वक्त करीब-करीब सभी बोर्ड के रिजल्ट जारी कर दिए गए हैं। ओडिशा बोर्ड ने भी 10वीं और 12वीं साइंस-कॉमर्स का रिजल्ट जारी कर दिया है लेकिन 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम के नतीजे अब तक घोषित नहीं हुए हैं। रिजल्ट में देरी से छात्र काफी परेशान हैं। जेएसएससी ने कहा स्थगित नियुक्ति परीक्षा की तिथि जल्द आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। जूनियर इंजीनियर नियुक्ति परीक्षा का आयोजन जिस एजेंसी के माध्यम हुई थी, उसी एजेंसी को स्नातक लेवल नियुक्ति परीक्षा के आयोजन का दायित्व मिला था। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहीं फीमेल कैंडिडेट्स के लिए बिहार में शानदार मौका आया है। जो भी उम्मीदवारों इन पदों के लिए इच्छुक हैं और योग्यता रखती हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि आखिरी तारीख तक अपना आवेदन कर सकते हैं। देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू हुए दो साल हो गया है। ऐसे में ग्रामीण अंचल तक उच्च शिक्षा को पहुंचाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने डिजिटल सेलेबल यानी ई-कंटेंट का एक पोर्टल तैयार किया है। इसमें स्थानीय भाषा में भी कोर्स उपलब्ध होंगे। अब तक यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य था लेकिन अब कई कोर्स ऐसे शुरू किए गए हैं, जो 8वीं और 10वीं पास छात्रों के लिए हैं। ये कोर्स स्किल बेस्ड होंगे। इन कोर्स से स्टूडेंट्स कैंपस में काफी कुछ नया सीख सकेंगे। इस वक्त करीब-करीब सभी बोर्ड्स ने अपना रिजल्ट जारी कर दिया गया है। अगस्त से नए सत्र की शुरुआत भी हो जाएगी। कोरोना के चलते इस साल कई बोर्ड्स ने दो टर्म में परीक्षाएं आयोजित की। अब इनमें एक बार फिर बदलाव का फैसला किया है।
जेईई मेन पेपर-दो रिजल्ट का रिजल्ट जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। इस एग्जाम को पास करने वाले छात्र देश की एनआईटी, ट्रिपल आईटी, केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थान, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त इंजीनियर कॉलेज में एडमिशन पाते हैं। साल दो हज़ार बीस में केंद्र सरकार की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत गर्वनमेंट हायर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पाँच छात्र सेलेक्ट हुए थे लेकिन फिर कोरोना महामारी आ गई और यह प्रतियोगिता रोक दिया गया। जब दोबारा इसको शुरू किया गया तब भरत की मशीन नेशनल लेवल के लिए चुनी गई। एमबीए के टॉप कॉलेजों और इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए तीन लेवल पर एंट्रेंस एग्जाम आयोजित होते हैं। पहला नेशनल लेवल, दूसरा स्टेट लेवल और तीसरा इंस्टीट्यूट लेवल पर। इन एग्जाम को पास करने के बाद देश के मैनेजमेंट कॉलेज में एडमिशन मिलता है। बारहवीं क्लास के बाद बहुत से स्टूडेंट्स हायर एजुकेशन के लिए विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखते हैं। आजकल युवाओं में इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। वे दुनिया की बेस्ट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहते हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्र यूरोप और दूसरे देशों में एडमिशन लेते हैं। इस वक्त करीब-करीब सभी बोर्ड के रिजल्ट जारी कर दिए गए हैं। ओडिशा बोर्ड ने भी दसवीं और बारहवीं साइंस-कॉमर्स का रिजल्ट जारी कर दिया है लेकिन बारहवीं आर्ट्स स्ट्रीम के नतीजे अब तक घोषित नहीं हुए हैं। रिजल्ट में देरी से छात्र काफी परेशान हैं। जेएसएससी ने कहा स्थगित नियुक्ति परीक्षा की तिथि जल्द आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। जूनियर इंजीनियर नियुक्ति परीक्षा का आयोजन जिस एजेंसी के माध्यम हुई थी, उसी एजेंसी को स्नातक लेवल नियुक्ति परीक्षा के आयोजन का दायित्व मिला था। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहीं फीमेल कैंडिडेट्स के लिए बिहार में शानदार मौका आया है। जो भी उम्मीदवारों इन पदों के लिए इच्छुक हैं और योग्यता रखती हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि आखिरी तारीख तक अपना आवेदन कर सकते हैं। देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-दो हज़ार बीस लागू हुए दो साल हो गया है। ऐसे में ग्रामीण अंचल तक उच्च शिक्षा को पहुंचाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने डिजिटल सेलेबल यानी ई-कंटेंट का एक पोर्टल तैयार किया है। इसमें स्थानीय भाषा में भी कोर्स उपलब्ध होंगे। अब तक यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए बारहवीं पास होना अनिवार्य था लेकिन अब कई कोर्स ऐसे शुरू किए गए हैं, जो आठवीं और दसवीं पास छात्रों के लिए हैं। ये कोर्स स्किल बेस्ड होंगे। इन कोर्स से स्टूडेंट्स कैंपस में काफी कुछ नया सीख सकेंगे। इस वक्त करीब-करीब सभी बोर्ड्स ने अपना रिजल्ट जारी कर दिया गया है। अगस्त से नए सत्र की शुरुआत भी हो जाएगी। कोरोना के चलते इस साल कई बोर्ड्स ने दो टर्म में परीक्षाएं आयोजित की। अब इनमें एक बार फिर बदलाव का फैसला किया है।
कोरोना के दौर में शादी का जश्न फीका ना पड़े इसके लिए लोगों ने वीडियो कॉल पर शादी अटेंड करने से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए भी शादी करने के कई नए तरीके निकाले. इस ट्रेंड को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. शादियों का सीजन शुरू हो चुका है. कोई शादी की शॉपिंग में बिजी है तो कोई फोटो अपडेट करने में. मार्केट से लेकर सोशल मीडिया पर हर तरफ शादियों के ही जलवे हैं. कोरोना काल में बिग फैट इंडियन पर तो ब्रेक लग गया है. ऐसे में लोग शादी एन्जॉय करने के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं. इंटरनेट पर इन दिनों कोरोना स्पेशल शदियों की धूम है. पर इन सबके बीच लोग सबसे ज्यादा जो मिस कर रहे हैं वो है शादियों का लजीज खाना. ऐसे में एक फैमिली ने इसका ऐसा तोड़ निकाला है जो सबको काफी पसंद आ रहा है. कोरोना काल में ट्विटर पर एक यूजर ने दावत का खाना लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जो सब तरफ चर्चा में है. ट्विटर पर एक यूजर ने एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, "शादी का इनविटेशन देने का नया ट्रेंड. शादी का खाना भी आपके घर तक पहुंचाया जाएगा." शादी के कार्ड में बाकी डिटेल्स के साथ-साथ जो टिफिन भेजा गया है, उसकी डिटेल्स भी लिखी हैं. यह कार्ड किसी तमिल परिवार की तरफ से था. खाने की चीजों को किस हिसाब से खाना है उस पर भी काफी बारीकी से बताया गया था. किस डब्बे को पहले खोलना है, किस को अंत में खाना है. साथ में दिए गये केले के पत्ते में कौन सी जगह पर क्या चीज आएगी, उसकी जानकारी भी दी गई थी. जिस डिटेलिंग के साथ यह इनवाइट भेजा गया, वो लोगों को काफी जम रहा है. कोरोना के दौर में शादी का जश्न फीका ना पड़े इसके लिए लोगों ने वीडियो कॉल पर शादी अटेंड करने से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए भी शादी करने के कई नए तरीके निकाले. इस ट्रेंड को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. लोगों ने कपल के इस काम की खूब तारीफ की. ऐसे समय में जब लोग शादियों में जाने से कतरा रहे हैं लोगों को ये तरीका काफी पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया पर भी लोगों का कहना है कि ये वाकई में बढ़िया आइडिया है. इससे खाने की बचत भी होगी और जब तक दवा नहीं आ जाती, तब तक शादी का खाना एन्जॉय करने का इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता. Also these days some relatives, since the limit of guests is 50 are keeping different functions and inviting different sets of relatives for each so that no is left out ? Love the detailing, they also told the places in the banana leaf where each item needs to be served !
कोरोना के दौर में शादी का जश्न फीका ना पड़े इसके लिए लोगों ने वीडियो कॉल पर शादी अटेंड करने से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए भी शादी करने के कई नए तरीके निकाले. इस ट्रेंड को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. शादियों का सीजन शुरू हो चुका है. कोई शादी की शॉपिंग में बिजी है तो कोई फोटो अपडेट करने में. मार्केट से लेकर सोशल मीडिया पर हर तरफ शादियों के ही जलवे हैं. कोरोना काल में बिग फैट इंडियन पर तो ब्रेक लग गया है. ऐसे में लोग शादी एन्जॉय करने के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं. इंटरनेट पर इन दिनों कोरोना स्पेशल शदियों की धूम है. पर इन सबके बीच लोग सबसे ज्यादा जो मिस कर रहे हैं वो है शादियों का लजीज खाना. ऐसे में एक फैमिली ने इसका ऐसा तोड़ निकाला है जो सबको काफी पसंद आ रहा है. कोरोना काल में ट्विटर पर एक यूजर ने दावत का खाना लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जो सब तरफ चर्चा में है. ट्विटर पर एक यूजर ने एक फोटो शेयर करते हुए लिखा, "शादी का इनविटेशन देने का नया ट्रेंड. शादी का खाना भी आपके घर तक पहुंचाया जाएगा." शादी के कार्ड में बाकी डिटेल्स के साथ-साथ जो टिफिन भेजा गया है, उसकी डिटेल्स भी लिखी हैं. यह कार्ड किसी तमिल परिवार की तरफ से था. खाने की चीजों को किस हिसाब से खाना है उस पर भी काफी बारीकी से बताया गया था. किस डब्बे को पहले खोलना है, किस को अंत में खाना है. साथ में दिए गये केले के पत्ते में कौन सी जगह पर क्या चीज आएगी, उसकी जानकारी भी दी गई थी. जिस डिटेलिंग के साथ यह इनवाइट भेजा गया, वो लोगों को काफी जम रहा है. कोरोना के दौर में शादी का जश्न फीका ना पड़े इसके लिए लोगों ने वीडियो कॉल पर शादी अटेंड करने से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए भी शादी करने के कई नए तरीके निकाले. इस ट्रेंड को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. लोगों ने कपल के इस काम की खूब तारीफ की. ऐसे समय में जब लोग शादियों में जाने से कतरा रहे हैं लोगों को ये तरीका काफी पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया पर भी लोगों का कहना है कि ये वाकई में बढ़िया आइडिया है. इससे खाने की बचत भी होगी और जब तक दवा नहीं आ जाती, तब तक शादी का खाना एन्जॉय करने का इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता. Also these days some relatives, since the limit of guests is पचास are keeping different functions and inviting different sets of relatives for each so that no is left out ? Love the detailing, they also told the places in the banana leaf where each item needs to be served !
एक कहावत है धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का। वह बेचारा न इधर का होता है न उधर का। उसे बीच वाला कहा जा सकता है। उसकी हालत बीच वाले ही समझ सकते हैं। इन बीच वालों की कई कि़स्में होती हैं। जि़न्दगी के हर शोबे में ये धोबी के कुत्ते की तरह घूमते मिल जाते हैं। भले ही भारत स्वयम् को कल्याणकारी राज्य घोषित करता रहे पर सच तो यह है कि बीच वालों की एक कि़स्म का हाल जानने में सरकार को भी बहुत वक्त लगा। सरकार ने अभी कुछ अरसा पहले ही इन बीच वालों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा एवं कल्याण के कई क़दम उठाए हैं। सदियों तक बेचारे ये बीच वाले घर वालों के सामने भी अपनी बात कहने से कतराते रहे। लेकिन ऐसा भी नहीं कि सिर्फ इन्हीं बीच वालों की हालत दयनीय हो। बीच वाले कहीं भी हो सकते हैं। मिसाल के लिए अफसरशाही में भी धोबी के कुत्ते, मेरा मतलब है कि बीच वाले अफसर ही पिसते हैं। ऊपर वालों के ऊपर किसी का बस नहीं चलता। नीचे वालों को कोई पूछता नहीं। सिर्फ बीच वालों की जवाबदेही बनती है। अगर विश्वास नहीं तो भारत सरकार के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों से पूछ कर देख लें। यही हाल घर में बीच वाले बच्चों का होता है। एक पहाड़ी कहावत है, जिसका हिन्दी तर्जुमा कुछ इस तरह हो सकता है 'बड़ा बाप को प्यारा, छोटा मां को प्यारा, बीच वाले तेरा भगवान सहारा'। इन बेचारों को अपने मन की बात कहने के लिए ऑल इण्डिया रेडियो वालों का सहारा ढूँढऩा पड़ता है। लेकिन वह सहारा भी किसी युगपुरुष को ही नसीब होता है। नहीं तो मन की बात मन के बीच में ही अटक कर रह जाती है। युगपुरूष होने पर आपको प्रायोजित सवाल करने वाले भी मिल जाते हैं और श्रोता भी। यूँ तो आदमी का व्यक्तित्व कई प्रकार का हो सकता है। कुछ व्यक्ति गंभीर होते हैं तो कुछ हँसमुख। पर इन दोनों के बीच वाली शख्सियतों की कोई ख़ास पूछगछ नहीं होती। गंभीर चेहरा दर्शाने के कई फायदे हैं। ऐसे व्यक्तित्व वाले अपनी मूर्खता को सहजता से पोशीदा बना सकते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान केवल कैमरा देख कर ही आती है और कैमरा हटते ही वे फिर गंभीरता का लबादा ओढ़ लेते हैं। मूर्खतापूर्ण बात कहने या कृत्य के बाद जब ऐसे आदमी पुनः गंभीर हो जाते हैं तो आप उन पर हँस भी नहीं पाते। वहीं दूसरी ओर हँसमुख आदमी कई बातों को यूँ ही हवा में उड़ा देता है। पर उससे भी आदमी असहज नहीं होता। लेकिन बीच वाला आदमी न इस ओर का होता है न उस छोर का। मिसाल के लिए काँग्रेस के चिर युवराज को देख लें। देश चाहे भी तो उन्हें अपनी बागडोर नहीं सौंप सकता। लेकिन आदमी गांभीर्यता का नक़ाब ओढ़े हो तो दिखे तो मूर्खतापूर्ण बात कहने के बाद भी सहज गंभीर दिख कर अपनी विद्वता को क़ायम रख सकता है। उनसे न कोई नोटबंदी पर प्रश्न पूछता है और न एंटायर पॉलिटिकस साईंस की डिग्री के बारे में बात करता है। यही हाल मध्यमवर्गीय तबके का है। मध्यम वर्ग के संघर्षों, उम्मीदों, ख़ुशियों और सामाजिक दबावों को झेलता यह तबका सारी उम्र अपने मूल्यों और इच्छाओं के बीच झूलता रहता है। उसका सपना एक बड़ा घर, फैंसी कार खरीदने और विदेश घूमने का होता है, लेकिन सीमित आय और ज़रूरी खर्चों की वजह से एक के बाद उसके सपने पीछे छूटते चले जाते हैं। रही-सही कसर सरकार निकाल देती है। सरकार को पता होता होता है कि यही एक वर्ग है जिसकी बालू से पाँच साल में कभी भी तेल निकाला जा सकता है। यह मध्यम वर्ग ही है, जो सरकार के करों का बोझ भी ढोता है और अपनी उम्मीदों और उमंगों का भी। लेकिन सरकार है कि इस बीच वाले वर्ग को पीसने के लिए इनकम टैक्स में राहत देने के नाम पर नई और पुरानी रिजीम के नए-नए जाल बिछाती रहती है।
एक कहावत है धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का। वह बेचारा न इधर का होता है न उधर का। उसे बीच वाला कहा जा सकता है। उसकी हालत बीच वाले ही समझ सकते हैं। इन बीच वालों की कई कि़स्में होती हैं। जि़न्दगी के हर शोबे में ये धोबी के कुत्ते की तरह घूमते मिल जाते हैं। भले ही भारत स्वयम् को कल्याणकारी राज्य घोषित करता रहे पर सच तो यह है कि बीच वालों की एक कि़स्म का हाल जानने में सरकार को भी बहुत वक्त लगा। सरकार ने अभी कुछ अरसा पहले ही इन बीच वालों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा एवं कल्याण के कई क़दम उठाए हैं। सदियों तक बेचारे ये बीच वाले घर वालों के सामने भी अपनी बात कहने से कतराते रहे। लेकिन ऐसा भी नहीं कि सिर्फ इन्हीं बीच वालों की हालत दयनीय हो। बीच वाले कहीं भी हो सकते हैं। मिसाल के लिए अफसरशाही में भी धोबी के कुत्ते, मेरा मतलब है कि बीच वाले अफसर ही पिसते हैं। ऊपर वालों के ऊपर किसी का बस नहीं चलता। नीचे वालों को कोई पूछता नहीं। सिर्फ बीच वालों की जवाबदेही बनती है। अगर विश्वास नहीं तो भारत सरकार के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों से पूछ कर देख लें। यही हाल घर में बीच वाले बच्चों का होता है। एक पहाड़ी कहावत है, जिसका हिन्दी तर्जुमा कुछ इस तरह हो सकता है 'बड़ा बाप को प्यारा, छोटा मां को प्यारा, बीच वाले तेरा भगवान सहारा'। इन बेचारों को अपने मन की बात कहने के लिए ऑल इण्डिया रेडियो वालों का सहारा ढूँढऩा पड़ता है। लेकिन वह सहारा भी किसी युगपुरुष को ही नसीब होता है। नहीं तो मन की बात मन के बीच में ही अटक कर रह जाती है। युगपुरूष होने पर आपको प्रायोजित सवाल करने वाले भी मिल जाते हैं और श्रोता भी। यूँ तो आदमी का व्यक्तित्व कई प्रकार का हो सकता है। कुछ व्यक्ति गंभीर होते हैं तो कुछ हँसमुख। पर इन दोनों के बीच वाली शख्सियतों की कोई ख़ास पूछगछ नहीं होती। गंभीर चेहरा दर्शाने के कई फायदे हैं। ऐसे व्यक्तित्व वाले अपनी मूर्खता को सहजता से पोशीदा बना सकते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान केवल कैमरा देख कर ही आती है और कैमरा हटते ही वे फिर गंभीरता का लबादा ओढ़ लेते हैं। मूर्खतापूर्ण बात कहने या कृत्य के बाद जब ऐसे आदमी पुनः गंभीर हो जाते हैं तो आप उन पर हँस भी नहीं पाते। वहीं दूसरी ओर हँसमुख आदमी कई बातों को यूँ ही हवा में उड़ा देता है। पर उससे भी आदमी असहज नहीं होता। लेकिन बीच वाला आदमी न इस ओर का होता है न उस छोर का। मिसाल के लिए काँग्रेस के चिर युवराज को देख लें। देश चाहे भी तो उन्हें अपनी बागडोर नहीं सौंप सकता। लेकिन आदमी गांभीर्यता का नक़ाब ओढ़े हो तो दिखे तो मूर्खतापूर्ण बात कहने के बाद भी सहज गंभीर दिख कर अपनी विद्वता को क़ायम रख सकता है। उनसे न कोई नोटबंदी पर प्रश्न पूछता है और न एंटायर पॉलिटिकस साईंस की डिग्री के बारे में बात करता है। यही हाल मध्यमवर्गीय तबके का है। मध्यम वर्ग के संघर्षों, उम्मीदों, ख़ुशियों और सामाजिक दबावों को झेलता यह तबका सारी उम्र अपने मूल्यों और इच्छाओं के बीच झूलता रहता है। उसका सपना एक बड़ा घर, फैंसी कार खरीदने और विदेश घूमने का होता है, लेकिन सीमित आय और ज़रूरी खर्चों की वजह से एक के बाद उसके सपने पीछे छूटते चले जाते हैं। रही-सही कसर सरकार निकाल देती है। सरकार को पता होता होता है कि यही एक वर्ग है जिसकी बालू से पाँच साल में कभी भी तेल निकाला जा सकता है। यह मध्यम वर्ग ही है, जो सरकार के करों का बोझ भी ढोता है और अपनी उम्मीदों और उमंगों का भी। लेकिन सरकार है कि इस बीच वाले वर्ग को पीसने के लिए इनकम टैक्स में राहत देने के नाम पर नई और पुरानी रिजीम के नए-नए जाल बिछाती रहती है।
कनीना (निस) : कनीना-दादरी मार्ग पर गांव बागोत के समीप घटित सडक़ हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी क्रूजर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस बारे में नरेश कुमार वासी मकड़ाना, जिला चरखी दादरी ने कनीना थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका पिता रामफल बाइक पर कनीना गया था। बागोत अड्डे पर पीछे से आ रही क्रूजर गाड़ी ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। गाड़ी चालक मौके से फरार हो गया लेकिन गाड़ी का नम्बर नोट कर लिया गया। रामफल को ट्रामा सेंटर रोहतक में दाखिल कराया गया जहां उनकी मौत हो गई।
कनीना : कनीना-दादरी मार्ग पर गांव बागोत के समीप घटित सडक़ हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी क्रूजर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस बारे में नरेश कुमार वासी मकड़ाना, जिला चरखी दादरी ने कनीना थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका पिता रामफल बाइक पर कनीना गया था। बागोत अड्डे पर पीछे से आ रही क्रूजर गाड़ी ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। गाड़ी चालक मौके से फरार हो गया लेकिन गाड़ी का नम्बर नोट कर लिया गया। रामफल को ट्रामा सेंटर रोहतक में दाखिल कराया गया जहां उनकी मौत हो गई।
चंडीगढ़, 15 फरवरी (ट्रिन्यू) चंडीगढ़ नगर निगम ने आज सेक्टर 19 में सदर बाज़ार में अवैध रूप से बैठे 14 वेंडर्स को हटाने के लिए भारी पुलिस बल के साथ अपनी टीम तो भेजी पर महापौर रविकांत के हस्तक्षेप के बाद निगम ने उन्हें नहीं हटाया। महापौर ने बताया कि निगम ने उन्हें कुछ माह के लिए राहत दी है। इस बीच उक्त वेंडर्स का प्रशासन में जो मामला चल रहा है उसकी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। उसके अध्ययन के बाद ही इस विषय में कोई निर्णय लिया जायेगा। महापौर के हस्तक्षेप के बाद इन दुकानदारों को कुछ माह का समय दिया गया है व जब तक इस पर कोई निर्णय नहीं होता निगम इन्हें इनके स्थानों से नहीं हटायेगा।
चंडीगढ़, पंद्रह फरवरी चंडीगढ़ नगर निगम ने आज सेक्टर उन्नीस में सदर बाज़ार में अवैध रूप से बैठे चौदह वेंडर्स को हटाने के लिए भारी पुलिस बल के साथ अपनी टीम तो भेजी पर महापौर रविकांत के हस्तक्षेप के बाद निगम ने उन्हें नहीं हटाया। महापौर ने बताया कि निगम ने उन्हें कुछ माह के लिए राहत दी है। इस बीच उक्त वेंडर्स का प्रशासन में जो मामला चल रहा है उसकी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। उसके अध्ययन के बाद ही इस विषय में कोई निर्णय लिया जायेगा। महापौर के हस्तक्षेप के बाद इन दुकानदारों को कुछ माह का समय दिया गया है व जब तक इस पर कोई निर्णय नहीं होता निगम इन्हें इनके स्थानों से नहीं हटायेगा।
बीसीसीआई महिला चयन समिति ने बांग्लादेश के खिलाफ 9 जुलाई से शुरू होने वाली वनडे और टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित कर दी है। इस घोषणा के बाद ताज नगरी आगरा के नामनेर इलाके में जश्न का माहौल है। इस इलाके की रहने वाले सेना से रिटायर अशोक कुमार की बेटी राशि कन्नौजिया का चयन बांग्लादेश दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम में तीन मैचों की टी20ई और वनडे सीरीज के लिए हुआ है। महिला क्रिकेट में लगातार दबदबा रखने वाले आगरा ने एक बार फिर भारतीय टीम को शानदर आर्थोडोक्स स्पिनर दिया है। दीप्ती शर्मा अभी भारतीय टीम की सबसे सफल स्पिनर है। उन्होंने प्रथम श्रेणी मैच में पिछले साल सर्वाधिक विकेट भी हासिल किए थे साथ ही बीसीसीआइ द्वारा कराए गए मिनी आइपीएल में वह विजेता सुपरनोवा टीम की सदस्य रही थीं। उनके चयन के बाद उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है। राशि के पिता अशोक कुमार सेना से रिटायर हैं और वर्तमान में नामनेर में ड्राई क्लीनर की दुकान चलाते हैं। मां राधा कन्नौजिया आर्मी स्कूल में बतौर टीचर काम करती है। राशि ने बताया कि वह इस चयन से काफी खुश है और ये मेरे माता-पिता की मेहनत और सपोर्ट का असर है कि आज मुझे भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला है। राशि ने बताया की आज इस सफलता पर वो दिन याद आ रहा है जब मोहल्ले के लोग मेरे माता पिता को ताने मारते थे और मेरी सहेलियों के माता-पिता ने सभी सहेलियों को दूर कर दिया था मुझसे, पर मेरे घर वालों ने हार नहीं मानी और 13 साल की उम्र में जब स्टेडियम गयी तो फिर वापस पलट कर नहीं देखा और आज उसी का तोहफा मिला है। उन्हें क्रिकेट की दुनिया में लाने का श्रेय इंटरनेशनल खिलाड़ी हेमलता काला और उनके भाई को दिया है। बीसीसीआई महिला चयन समिति ने बांग्लादेश के खिलाफ 9 जुलाई से शुरू होने सीरीज के लिए विकेटकीपर उमा छेत्री, बाएं हाथ की स्पिनर राशि कनौजिया, हरफनमौला अनुषा बारेरेड्डी और मिन्नू मणि (केवल टी20ई) जैसे नए खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।भारत और बांग्लादेश के बीच सभी छह मैच मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम (एसबीएनसीएस) में खेले जाएंगे। ♦️भारत की टी20 टीम : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उपकप्तान), दीप्ति शर्मा, शैफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, यास्तिका भाटिया (विकेटकीपर), हरलीन देयोल, देविका वैद्य, उमा छेत्री (विकेटकीपर), अमनजोत कौर, एस मेघना, पूजा वस्त्राकर, मेघना सिंह, अंजलि सरवानी, मोनिका पटेल, राशि कनौजिया, अनुषा बारेड्डी, मिन्नू मणि।
बीसीसीआई महिला चयन समिति ने बांग्लादेश के खिलाफ नौ जुलाई से शुरू होने वाली वनडे और टी-बीस सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित कर दी है। इस घोषणा के बाद ताज नगरी आगरा के नामनेर इलाके में जश्न का माहौल है। इस इलाके की रहने वाले सेना से रिटायर अशोक कुमार की बेटी राशि कन्नौजिया का चयन बांग्लादेश दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम में तीन मैचों की टीबीसई और वनडे सीरीज के लिए हुआ है। महिला क्रिकेट में लगातार दबदबा रखने वाले आगरा ने एक बार फिर भारतीय टीम को शानदर आर्थोडोक्स स्पिनर दिया है। दीप्ती शर्मा अभी भारतीय टीम की सबसे सफल स्पिनर है। उन्होंने प्रथम श्रेणी मैच में पिछले साल सर्वाधिक विकेट भी हासिल किए थे साथ ही बीसीसीआइ द्वारा कराए गए मिनी आइपीएल में वह विजेता सुपरनोवा टीम की सदस्य रही थीं। उनके चयन के बाद उनके परिवार में ख़ुशी का माहौल है। राशि के पिता अशोक कुमार सेना से रिटायर हैं और वर्तमान में नामनेर में ड्राई क्लीनर की दुकान चलाते हैं। मां राधा कन्नौजिया आर्मी स्कूल में बतौर टीचर काम करती है। राशि ने बताया कि वह इस चयन से काफी खुश है और ये मेरे माता-पिता की मेहनत और सपोर्ट का असर है कि आज मुझे भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला है। राशि ने बताया की आज इस सफलता पर वो दिन याद आ रहा है जब मोहल्ले के लोग मेरे माता पिता को ताने मारते थे और मेरी सहेलियों के माता-पिता ने सभी सहेलियों को दूर कर दिया था मुझसे, पर मेरे घर वालों ने हार नहीं मानी और तेरह साल की उम्र में जब स्टेडियम गयी तो फिर वापस पलट कर नहीं देखा और आज उसी का तोहफा मिला है। उन्हें क्रिकेट की दुनिया में लाने का श्रेय इंटरनेशनल खिलाड़ी हेमलता काला और उनके भाई को दिया है। बीसीसीआई महिला चयन समिति ने बांग्लादेश के खिलाफ नौ जुलाई से शुरू होने सीरीज के लिए विकेटकीपर उमा छेत्री, बाएं हाथ की स्पिनर राशि कनौजिया, हरफनमौला अनुषा बारेरेड्डी और मिन्नू मणि जैसे नए खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।भारत और बांग्लादेश के बीच सभी छह मैच मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। ♦️भारत की टीबीस टीम : हरमनप्रीत कौर , स्मृति मंधाना , दीप्ति शर्मा, शैफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, यास्तिका भाटिया , हरलीन देयोल, देविका वैद्य, उमा छेत्री , अमनजोत कौर, एस मेघना, पूजा वस्त्राकर, मेघना सिंह, अंजलि सरवानी, मोनिका पटेल, राशि कनौजिया, अनुषा बारेड्डी, मिन्नू मणि।
रांची। रांची में अंडर-15 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान एक वायरल वीडियो में उत्तरप्रदेश के बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को युवा पहलवान को बार-बार थप्पड़ मारते देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस युवक को थप्पड़ मारा गया, उसकी उम्र 15 साल से ज्यादा थी। उनकी उम्र जानने पर उन्हें प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद वो मंच पर पहुंचा और मुख्य अतिथियों और न्यायाधीशों से अनुरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद बीजेपी सांसद आपा खोते हुए युवक को पीटने लगे। रांची में राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान का ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बीजेपी सांसद किस तरह से युवा पहलवान को पीट रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। 64 वर्षीय बृजभूषण शरण सिंह यूपी के कैसरगंज से लोकसभा से बीजेपी के सांसद हैं। इसके अलावा उन्होंने गोंडा लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया है।
रांची। रांची में अंडर-पंद्रह राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान एक वायरल वीडियो में उत्तरप्रदेश के बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को युवा पहलवान को बार-बार थप्पड़ मारते देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस युवक को थप्पड़ मारा गया, उसकी उम्र पंद्रह साल से ज्यादा थी। उनकी उम्र जानने पर उन्हें प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद वो मंच पर पहुंचा और मुख्य अतिथियों और न्यायाधीशों से अनुरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद बीजेपी सांसद आपा खोते हुए युवक को पीटने लगे। रांची में राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान का ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बीजेपी सांसद किस तरह से युवा पहलवान को पीट रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। चौंसठ वर्षीय बृजभूषण शरण सिंह यूपी के कैसरगंज से लोकसभा से बीजेपी के सांसद हैं। इसके अलावा उन्होंने गोंडा लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया है।
बेंगलुरू, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार के नोटबंदी के कदम से किसी एक क्षेत्र को अन्य की तुलना में ज्यादा फायदा हुआ है- तो वह बैंकिंग क्षेत्र है। फंसे हुए कर्जो से जूझ रहे बैंकिंग क्षेत्र को नोटबंदी से बड़ी राहत मिली, लेकिन ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के वरिष्ठ प्रबंधक एस. श्रीनिवास राव ने यहां आईएएनएस को बताया, नोटबंदी हमारे लिए फायदेमंद रहा, नए खातों की संख्या में इस दौरान 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और 40 फीसदी ग्राहक इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने लगे, जिससे उनका नकदी निकालने या अन्य लेनदेन करने के लिए बैंक की शाखाओं में आना कम हो गया। बैंकों ने इस दौरान क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की मांग और आनलाइन लेनदेन में काफी तेजी दर्ज की। नोटबंदी के दौरान बैंकों के सामने नकदी की बाढ़ आ गई और कई संदिग्ध कर्जो का भुगतान भी इस दौरान आसानी से मिल गया। हालांकि बैंकों को नोटबंदी से जो फायदा मिला था, वह 1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर लागू होने से गायब हो गया। क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था में मंदी आ गई, बैंक के ग्राहकों का कारोबार घट गया, जिससे कर्जो की मांग भी घट गई। हालांकि नोटबंदी से बैंकों को भी कम परेशानी नहीं झेलनी पड़ी थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद बैंक के आगे नोट जमा करने/बदलने के लिए हजारों ग्राहकों की लाइन लग गई थी, और बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच युद्ध के मैदान जैसे हालत बन गए थे। राव कहते हैं, उन 50 दिनों के दौरान के दुखद समय को भूलना ही बेहतर है। नोट बदलने के लिए हमारे पास नए नोटों की आपूर्ति बहुत सीमित हो रही थी और ग्राहकों की लाइन लगी थी। कर्नाटक बैंक की औद्योगिक वित्त शाखा के प्रबंधक सदानंद कुमार ने आईएएनएस को बताया, हम दोहरे दबाव में थे, ग्राहकों की तरफ से भारी दबाव था, तो प्रबंधन की तरफ से सीमित संसाधनों में ग्राहकों को सेवा मुहैया कराने का दबाव था। नोटबंदी से बैंक खातों में जमा रकम में बढ़ोतरी हुई, जिससे बैंकों को बढ़ते जा रहे फंसे हुए कर्जो (एनपीए) के लिए प्रावधान (छूट आदि देने) करने में सहूलियत हुई। लेकिन नोटबंदी से बैंक कर्मचारियों खासतौर से महिलाओं और अधिकारियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। उन्हें बिना किसी साप्ताहिक छुट्टी के इस दौरान 12 से 18 घंटों तक काम करना पड़ा। नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 154वीं जयंती से एक दिन पूर आज देशभर में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत श्रमदान किया जा रहा है। मंत्री, नेता सहित आम लोग सुबह से ही स्वच्छता अभियान में भाग लेने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत देश के लिए महत्वपूर्ण है। एक मन की बात कहूंगा कि देश जागता है, जगाने वाला चाहिए। आज पीएम मोदी ने एक आह्वान किया पूरा देश झाड़ू लेकर निकल गया, जो अच्छी बात है। इसी तरह देश को आगे बढ़ाना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में 'स्वच्छता अभियान' में भाग लिया। मुंबई में BMC द्वारा आयोजित 'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बच्चों से बातचीत की। गौरतलब है, इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया था कि अभियान में भाग लेकर एक घंटे श्रमदान करें। उन्होंने कहा था कि स्वच्छ भारत साझी जिम्मेदारी है। इसलिए स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। उन्होंने अभियान के संबंध में 'एक तारीख, एक घंटा, एक साथ' का नारा दिया था। यह पहल स्वच्छता पखवाड़ा-स्वच्छता ही सेवा अभियान 2023 की एक कड़ी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि एक अक्तूबर को सुबह 10 बजे हम एक महत्वपूर्ण स्वच्छता पहल के लिए एक साथ आगे आएंगे। स्वच्छ भारत एक साझा जिम्मेदारी है और हर प्रयास अहमियत रखता है। स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए इस उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। इससे पहले मन की बात के 105वें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोगों से अपनी गली, मोहल्ले या किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, स्वच्छता अभियान के लिए देश भर में 6.4 लाख से अधिक स्थलों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य कचरा संवेदनशील बिंदुओं, रेलवे ट्रैक और स्टेशनों, हवाई अड्डों एवं उसके आसपास के क्षेत्रों, जल निकायों, घाटों, झुग्गियों, बाजार स्थानों, पूजा स्थलों और पर्यटन स्थलों को साफ करना है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकायों, कस्बों, ग्राम पंचायतों, विभिन्न मंत्रालयों ने 'स्वच्छता ही सेवा' नागरिक पोर्टल पर 'स्वच्छता श्रमदान' के लिए कार्यक्रम जोड़े हैं। इस पोर्टल पर सफाई वाले स्थल की पहचान कर सकते हैं और स्वच्छता में श्रमदान करने के दौरान अपनी तस्वीर खींच कर अपलोड कर सकते हैं। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
बेंगलुरू, छब्बीस अक्टूबर । केंद्र सरकार के नोटबंदी के कदम से किसी एक क्षेत्र को अन्य की तुलना में ज्यादा फायदा हुआ है- तो वह बैंकिंग क्षेत्र है। फंसे हुए कर्जो से जूझ रहे बैंकिंग क्षेत्र को नोटबंदी से बड़ी राहत मिली, लेकिन ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक एस. श्रीनिवास राव ने यहां आईएएनएस को बताया, नोटबंदी हमारे लिए फायदेमंद रहा, नए खातों की संख्या में इस दौरान पच्चीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई और चालीस फीसदी ग्राहक इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने लगे, जिससे उनका नकदी निकालने या अन्य लेनदेन करने के लिए बैंक की शाखाओं में आना कम हो गया। बैंकों ने इस दौरान क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की मांग और आनलाइन लेनदेन में काफी तेजी दर्ज की। नोटबंदी के दौरान बैंकों के सामने नकदी की बाढ़ आ गई और कई संदिग्ध कर्जो का भुगतान भी इस दौरान आसानी से मिल गया। हालांकि बैंकों को नोटबंदी से जो फायदा मिला था, वह एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर लागू होने से गायब हो गया। क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था में मंदी आ गई, बैंक के ग्राहकों का कारोबार घट गया, जिससे कर्जो की मांग भी घट गई। हालांकि नोटबंदी से बैंकों को भी कम परेशानी नहीं झेलनी पड़ी थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद बैंक के आगे नोट जमा करने/बदलने के लिए हजारों ग्राहकों की लाइन लग गई थी, और बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच युद्ध के मैदान जैसे हालत बन गए थे। राव कहते हैं, उन पचास दिनों के दौरान के दुखद समय को भूलना ही बेहतर है। नोट बदलने के लिए हमारे पास नए नोटों की आपूर्ति बहुत सीमित हो रही थी और ग्राहकों की लाइन लगी थी। कर्नाटक बैंक की औद्योगिक वित्त शाखा के प्रबंधक सदानंद कुमार ने आईएएनएस को बताया, हम दोहरे दबाव में थे, ग्राहकों की तरफ से भारी दबाव था, तो प्रबंधन की तरफ से सीमित संसाधनों में ग्राहकों को सेवा मुहैया कराने का दबाव था। नोटबंदी से बैंक खातों में जमा रकम में बढ़ोतरी हुई, जिससे बैंकों को बढ़ते जा रहे फंसे हुए कर्जो के लिए प्रावधान करने में सहूलियत हुई। लेकिन नोटबंदी से बैंक कर्मचारियों खासतौर से महिलाओं और अधिकारियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। उन्हें बिना किसी साप्ताहिक छुट्टी के इस दौरान बारह से अट्ठारह घंटाटों तक काम करना पड़ा। नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ चौवनवीं जयंती से एक दिन पूर आज देशभर में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत श्रमदान किया जा रहा है। मंत्री, नेता सहित आम लोग सुबह से ही स्वच्छता अभियान में भाग लेने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत देश के लिए महत्वपूर्ण है। एक मन की बात कहूंगा कि देश जागता है, जगाने वाला चाहिए। आज पीएम मोदी ने एक आह्वान किया पूरा देश झाड़ू लेकर निकल गया, जो अच्छी बात है। इसी तरह देश को आगे बढ़ाना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में 'स्वच्छता अभियान' में भाग लिया। मुंबई में BMC द्वारा आयोजित 'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बच्चों से बातचीत की। गौरतलब है, इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया था कि अभियान में भाग लेकर एक घंटे श्रमदान करें। उन्होंने कहा था कि स्वच्छ भारत साझी जिम्मेदारी है। इसलिए स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। उन्होंने अभियान के संबंध में 'एक तारीख, एक घंटा, एक साथ' का नारा दिया था। यह पहल स्वच्छता पखवाड़ा-स्वच्छता ही सेवा अभियान दो हज़ार तेईस की एक कड़ी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि एक अक्तूबर को सुबह दस बजे हम एक महत्वपूर्ण स्वच्छता पहल के लिए एक साथ आगे आएंगे। स्वच्छ भारत एक साझा जिम्मेदारी है और हर प्रयास अहमियत रखता है। स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए इस उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। इससे पहले मन की बात के एक सौ पाँचवें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोगों से अपनी गली, मोहल्ले या किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, स्वच्छता अभियान के लिए देश भर में छः.चार लाख से अधिक स्थलों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य कचरा संवेदनशील बिंदुओं, रेलवे ट्रैक और स्टेशनों, हवाई अड्डों एवं उसके आसपास के क्षेत्रों, जल निकायों, घाटों, झुग्गियों, बाजार स्थानों, पूजा स्थलों और पर्यटन स्थलों को साफ करना है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकायों, कस्बों, ग्राम पंचायतों, विभिन्न मंत्रालयों ने 'स्वच्छता ही सेवा' नागरिक पोर्टल पर 'स्वच्छता श्रमदान' के लिए कार्यक्रम जोड़े हैं। इस पोर्टल पर सफाई वाले स्थल की पहचान कर सकते हैं और स्वच्छता में श्रमदान करने के दौरान अपनी तस्वीर खींच कर अपलोड कर सकते हैं। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
चर्चा में क्यों? 13 दिसंबर, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रदेश के ऑपरेशनल होटलों और रिसॉर्ट्स के स्टार वर्गीकरण की मंज़ूरी के लिये 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' शुरू की है। - नई वर्गीकरण प्रणाली का उद्देश्य प्रदेश में अधिक होटल कमरों की उपलब्धता, बेहतर सुविधाओं के साथ हॉस्पिटैलिटी उद्योग में सुधार, होटल और रिसॉर्ट्स को उद्योग के बराबर सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करना है। - 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' होटलों को उनकी गुणवत्ता, सेवाओं और समग्र सुविधाओं और अतिथि अनुभव के आधार पर वर्गीकृत करेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। - नई संशोधित वर्गीकरण प्रणाली में पाँच अलग-अलग श्रेणियाँ शामिल हैं- प्लैटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज। ये श्रेणियाँ पर्यटन मंत्रालय द्वारा निर्धारित होटल उद्योग की पारंपरिक स्टार रेटिंग क्रमशः 5-स्टार, 4-स्टार, 3-स्टार, 2-स्टार और वन स्टार वर्गीकरण के अनुरूप हैं। - यह संशोधित प्रणाली पर्यटकों के लिये चयन प्रक्रिया को सरल बनाएगी और होटलों के बीच उच्च सेवा मानकों को प्रोत्साहित करेगी। - इस प्रणाली के अंतर्गत मान्यता प्राप्त होटल कई प्रकार के प्रोत्साहनों के पात्र होंगे और उन्हें उद्योग मानक के तहत सब्सिडी और कर लाभ मिलेगा। - उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) राज्य में न्यू स्टार होटल वर्गीकरण प्रणाली के कार्यान्वयन के लिये नोडल एजेंसी होगी।
चर्चा में क्यों? तेरह दिसंबर, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने प्रदेश के ऑपरेशनल होटलों और रिसॉर्ट्स के स्टार वर्गीकरण की मंज़ूरी के लिये 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' शुरू की है। - नई वर्गीकरण प्रणाली का उद्देश्य प्रदेश में अधिक होटल कमरों की उपलब्धता, बेहतर सुविधाओं के साथ हॉस्पिटैलिटी उद्योग में सुधार, होटल और रिसॉर्ट्स को उद्योग के बराबर सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करना है। - 'नई स्टार वर्गीकरण प्रणाली' होटलों को उनकी गुणवत्ता, सेवाओं और समग्र सुविधाओं और अतिथि अनुभव के आधार पर वर्गीकृत करेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। - नई संशोधित वर्गीकरण प्रणाली में पाँच अलग-अलग श्रेणियाँ शामिल हैं- प्लैटिनम, डायमंड, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज। ये श्रेणियाँ पर्यटन मंत्रालय द्वारा निर्धारित होटल उद्योग की पारंपरिक स्टार रेटिंग क्रमशः पाँच-स्टार, चार-स्टार, तीन-स्टार, दो-स्टार और वन स्टार वर्गीकरण के अनुरूप हैं। - यह संशोधित प्रणाली पर्यटकों के लिये चयन प्रक्रिया को सरल बनाएगी और होटलों के बीच उच्च सेवा मानकों को प्रोत्साहित करेगी। - इस प्रणाली के अंतर्गत मान्यता प्राप्त होटल कई प्रकार के प्रोत्साहनों के पात्र होंगे और उन्हें उद्योग मानक के तहत सब्सिडी और कर लाभ मिलेगा। - उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम राज्य में न्यू स्टार होटल वर्गीकरण प्रणाली के कार्यान्वयन के लिये नोडल एजेंसी होगी।
नई दिल्ली। इस्लामाबाद और कांग्रेस के बाद अब BJP सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने PM मोदी की गुजरात चुनाव को प्रभावित करने में पाकिस्तान की भूमिका के आरोपों के लिए आलोचना की है। सिन्हा ने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर उनसे फिजा में सांप्रदायिकता घोलने को बंद करने को कहा है। सिन्हा ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाया कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए हर दिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अपुष्ट और अविश्वसनीय कहानियां लेकर क्यों आ रहे हैं। सिन्हा ने ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी का कहीं नाम नहीं लिखा है बस 'सर' लिखकर सवाल उठाए हैं। सिन्हा ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि माहौल को सांप्रदायिक बनाना बंद कीजिए और स्वस्थ राजनीति व स्वस्थ चुनाव की तरफ लौटिए। घर, विकास, युवाओं को रोजगार, स्वास्थ्य, 'विकास मॉडल' की बात कीजिए।
नई दिल्ली। इस्लामाबाद और कांग्रेस के बाद अब BJP सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने PM मोदी की गुजरात चुनाव को प्रभावित करने में पाकिस्तान की भूमिका के आरोपों के लिए आलोचना की है। सिन्हा ने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर उनसे फिजा में सांप्रदायिकता घोलने को बंद करने को कहा है। सिन्हा ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाया कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए हर दिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अपुष्ट और अविश्वसनीय कहानियां लेकर क्यों आ रहे हैं। सिन्हा ने ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी का कहीं नाम नहीं लिखा है बस 'सर' लिखकर सवाल उठाए हैं। सिन्हा ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि माहौल को सांप्रदायिक बनाना बंद कीजिए और स्वस्थ राजनीति व स्वस्थ चुनाव की तरफ लौटिए। घर, विकास, युवाओं को रोजगार, स्वास्थ्य, 'विकास मॉडल' की बात कीजिए।
एक स्नाइपर की स्टीरियोटाइपिकल छवि, चुपके से फायरिंग की स्थिति के करीब पहुंचती है और अपने लक्ष्य के लिए घंटों इंतजार करती है, "गिल्ली" छलावरण सूट के बिना समझ से बाहर है। उपकरणों की यह वस्तु अलग-अलग दृष्टिकोणों से बहुत रुचि रखती है - से इतिहास मूल और विकास विशिष्ट अनुप्रयोग के लिए। शांतिपूर्ण जीवन की कई विशेषताएं सेना के लिए बनाई गई थीं और उसके बाद ही अपनी सीमाओं से आगे बढ़ीं। गिल्ली पोशाक एक अपवाद है। ऐसा माना जाता है कि पहला गिल्ली सूट XIX सदी के अंत में स्कॉटलैंड में बनाया गया था। और शिकारियों की मदद करने का इरादा है। उस समय की परंपराओं के अनुसार, शिकारी सहायक सहायकों के साथ थे जो खेल को ट्रैक करने वाले थे, इसे ड्राइव करना आदि। इन सहायकों को "गिल्ली" कहा जाता था; इस तरह के एक उपनाम "गिले डु" पर संकेत दिया - स्कॉटिश लोककथाओं से वन आत्माओं, पत्तियों और काई के कपड़े पहने। लंबे समय तक, गिल के शिकारियों ने विभिन्न छलावरण उपकरणों का उत्पादन करना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें जमीन पर चुपचाप काम करने की अनुमति मिली। समय के साथ, XNUMX वीं शताब्दी के अंत तक, कुछ छलावरण साधनों को पूर्ण वेशभूषा में बदल दिया गया। आम तौर पर हुड के साथ बर्लेप के लंबे लबादे या लबादे इस्तेमाल किए जाते थे, किनारों के साथ असमान रूप से कटे हुए और / या हेमपेड फ्लैप के साथ। इसके अलावा, पोशाक के लिए आधार एक ग्रिड हो सकता है जिस पर कपड़े के टुकड़े, घास या धागे के गुच्छे, आदि तय किए गए थे। सामान्य तौर पर, यह तब था कि गिल्ली सूट की मुख्य विशेषताएं बनाई गई थीं, जो आज तक बदलाव से नहीं गुजरी हैं। पोशाक को शिकारी के आंकड़े को जितना संभव हो सके छुपाना चाहिए, इसके सिल्हूट को धुंधला करना चाहिए और आसपास के क्षेत्र के साथ विलय करना चाहिए। जनवरी 1900 में, विशेष रूप से द्वितीय बोअर युद्ध में भाग लेने के लिए, लवेट स्काउट्स रेजिमेंट का गठन किया गया था, जो मुख्य रूप से योमेन और हाइलैंड के शिकारियों द्वारा किया गया था। ब्रिटिश सेना में शार्पशूटर स्निपर्स की यह पहली इकाई थी। रेजिमेंट के सैनिक अच्छे निशानेबाज थे, और घात शिकार में भी व्यापक अनुभव रखते थे - यह सब सामने की ओर उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, वे अपने साथ युद्ध के दौरान असैन्य शिकार उपकरणों के कुछ तत्वों को युद्ध में ले गए छलावरण सूट। इस प्रकार, Lovat स्काउट्स वास्तविक संघर्ष में गिल्ली का उपयोग करने वाली पहली प्रसिद्ध सेना इकाई बन गई। हालांकि दक्षिण अफ्रीका की स्थिति स्कॉटलैंड के परिदृश्य से काफी भिन्न थी, छलावरण सूट सेनानियों के लिए उपयोगी थे। स्थानीय परिस्थितियों में मामूली बदलाव के बाद, गिल्ली फिर से तीर को छिपा सकती थी और इलाके के साथ विलय कर सकती थी। लड़ाइयों के परिणामों के अनुसार, लोवाटा स्काउट्स ने उच्चतम अंक प्राप्त किए - और छलावरण सूटों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश सेना ने अपना स्वयं का स्कूल ऑफ स्निपिंग बनाना शुरू किया, जो अन्य चीजों के अलावा, छलावरण के निर्माण और आधुनिकीकरण के लिए प्रदान किया गया था। स्काउट सूट में सुधार किया गया था और सभी संरचनाओं में सक्रिय रूप से उपयोग किया गया था। कारखाने का उत्पादन स्थापित किया गया था, लेकिन अक्सर स्निपर्स को अपने दम पर वेशभूषा बनानी पड़ती थी - साथ ही उन्हें एक विशिष्ट क्षेत्र के लिए संशोधित करना पड़ता था। ब्रिटिश अनुभव पर किसी का ध्यान नहीं गया। दूसरे देशों के स्नाइपर्स ने गिल्ली के लिए अपना विकल्प बनाना शुरू किया, पहले एक अस्थायी स्तर पर, और फिर सिलाई संगठनों की मदद से। जल्दी से पर्याप्त, सभी ने महसूस किया कि एक सक्षम स्थिति में छलावरण सूट में एक स्नाइपर व्यावहारिक रूप से अदृश्य था - और साथ ही दुश्मन पर सबसे गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम था। प्रथम विश्व युद्ध के अनुभव का उपयोग अंतरा अवधि और अगले वैश्विक संघर्ष में सक्रिय रूप से किया गया था। सभी देशों के स्नाइपर्स ने विभिन्न प्रकार के गिले को स्वतंत्र रूप से प्राप्त किया या बनाया। इसलिए, ब्रिटेन और राष्ट्रमंडल देशों ने लटके हुए चीथड़ों के साथ परिष्कृत बहु-तत्व टोपी या लबादों का उपयोग करना जारी रखा। लाल सेना के स्नाइपरों को छलावरण की वर्दी मिली - नीरस या छलावरण टोपी और जैकेट, जो स्वतंत्र रूप से पत्तियों, घास के गुच्छा, आदि द्वारा पूरक थे। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, स्नाइपर काम ने अपने उच्च मूल्य को बरकरार रखा, और विशेष उपकरण सेवा में बने रहे। छलावरण सूट विकसित करना जारी रखा - मुख्य रूप से नई सामग्री और कॉन्फ़िगरेशन के उपयोग के माध्यम से। बर्खास्त, कैनवास और कपास ने अन्य वस्त्रों को रास्ता दिया। घने वस्त्रों को महीन जाली से बदल दिया गया। बुने हुए माल की स्ट्रिप्स ने नकली घास का रास्ता दिखाया। छलावरण के लिए नई रंग योजनाएं भी विकसित कीं, जो युद्ध के विभिन्न संभावित सिनेमाघरों की स्थितियों के अनुकूल हैं। मानक सेना छलावरण के विपरीत, स्नाइपर उपकरण को इलाके से अधिक सटीक रूप से मेल खाना चाहिए - काम की सफलता और शूटर के अस्तित्व दोनों इस पर निर्भर करते हैं। अंधेरे में उपयोग के लिए उपयुक्त नए निगरानी उपकरणों का उद्भव, गिल्ली के लिए नई आवश्यकताओं को प्रस्तुत किया। कपड़े के लिए सामग्री और / या संसेचन आवश्यक थे जो न्यूनतम प्रकाश व्यवस्था के साथ भी इलाके की पृष्ठभूमि के खिलाफ बाहर खड़े नहीं थे। इसके अलावा, थर्मल इन्सुलेशन की समस्या थी ताकि स्नाइपर उत्पन्न गर्मी के कारण "चमक" न हो। पुरानी गिल्ली वेशभूषा आग से डरती थी। बर्लेप, सूखी घास, आदि के कई फ्लैप और शराबी तत्व। आसानी से आग पकड़ ली और शूटर की जान को खतरा हो गया। XX सदी के अंत तक। आग प्रतिरोधी सामग्री और विशेष संसेचन दोनों दिखाई दिए। इस तरह की आधुनिक गिलियां प्रज्वलित नहीं करती हैं और दहन का समर्थन नहीं करती हैं। समय के साथ गिल्ली "क्लासिक" देखो हमारे देश में दिखाई दिया। उनकी विशिष्ट उपस्थिति के लिए, उन्हें "शौक" और "किकिमोर" उपनाम दिया गया था। इन उपनामों के लेखक स्कॉटिश लोककथाओं को नहीं जानते थे, लेकिन उसी तरह से संघों का निर्माण किया जैसे कि XIX सदी के अंत के शिकारी थे। वर्तमान में, विभिन्न क्षेत्रों में एक विशिष्ट रूप के छलावरण सूट का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। गिली अभी भी स्कॉटिश रेंजर्स की एक विशेषता है और सभी विकसित और विकासशील देशों की सेनाओं और बिजली संरचनाओं में अपनी जगह बनाए रखते हैं। वेशभूषा अच्छी तरह से स्थापित है और भविष्य के भविष्य में परित्यक्त होने की संभावना नहीं है। सेनाओं में गिल्ली का उपयोग एक वास्तविक विज्ञापन बन गया है। सेना के स्नाइपर्स के लिए धन्यवाद, इस तरह के उपकरण विभिन्न देशों में शिकारियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए रुचि रखते थे। नतीजतन, काफी समय पहले गिली सुइट एक विशेष रूप से स्कॉटिश शिकार उपकरण बन गया था। विशेष बलों के स्नाइपर्स और अन्य शांत लोगों के बारे में कई फिल्म आतंकवादियों ने सेनाओं के बाहर गिल्ली की लोकप्रियता में योगदान दिया। इस मामले में, यह एक असामान्य शानदार उपस्थिति के रूप में बहुत अधिक मास्किंग कार्रवाई के रूप में उपयोगी नहीं निकला, जो मानक उच्च वर्दी से तेजी से भिन्न होता है। सैन्य खेल खेलों के उद्भव और विकास से सेना के उपकरणों की अतिरिक्त मांग और विशेष रूप से छलावरण सूट के लिए नेतृत्व किया गया। तो, एयरसॉफ्ट और हार्डबॉल में स्निपर्स हैं। उन्हें खुद को प्रच्छन्न करना होगा, कम से कम दल के लिए या विशिष्ट इकाइयों के सेनानियों की नकल करने के लिए। पहला छलावरण सूट, जो आधुनिक "गिल्ली-सूट" और "भूत" के पूर्वज हैं, XIX सदी के अंत में दिखाई दिए। और केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इरादा है। भविष्य में, इस तरह की वेशभूषा सेना में गिर गई - और इसे एक सदी से अधिक समय तक नहीं छोड़ा, लेकिन साथ ही वे अन्य करीबी क्षेत्रों में फैल रहे हैं। पिछली सदी में, एक विशेषता प्यारे पोशाक व्यापक और सक्रिय रूप से विकसित हुई है। जाहिर है, भविष्य के भविष्य में वह अपनी जगह बनाए रखेगा और कहीं भी नहीं जाएगा। इसका मतलब यह है कि दुश्मन और खेल को अभी भी सावधान रहना होगा, क्योंकि किसी भी तरह के पत्ते, घास या काई आग के लिए तैयार एक स्नाइपर हो सकते हैं। - लेखकः
एक स्नाइपर की स्टीरियोटाइपिकल छवि, चुपके से फायरिंग की स्थिति के करीब पहुंचती है और अपने लक्ष्य के लिए घंटों इंतजार करती है, "गिल्ली" छलावरण सूट के बिना समझ से बाहर है। उपकरणों की यह वस्तु अलग-अलग दृष्टिकोणों से बहुत रुचि रखती है - से इतिहास मूल और विकास विशिष्ट अनुप्रयोग के लिए। शांतिपूर्ण जीवन की कई विशेषताएं सेना के लिए बनाई गई थीं और उसके बाद ही अपनी सीमाओं से आगे बढ़ीं। गिल्ली पोशाक एक अपवाद है। ऐसा माना जाता है कि पहला गिल्ली सूट XIX सदी के अंत में स्कॉटलैंड में बनाया गया था। और शिकारियों की मदद करने का इरादा है। उस समय की परंपराओं के अनुसार, शिकारी सहायक सहायकों के साथ थे जो खेल को ट्रैक करने वाले थे, इसे ड्राइव करना आदि। इन सहायकों को "गिल्ली" कहा जाता था; इस तरह के एक उपनाम "गिले डु" पर संकेत दिया - स्कॉटिश लोककथाओं से वन आत्माओं, पत्तियों और काई के कपड़े पहने। लंबे समय तक, गिल के शिकारियों ने विभिन्न छलावरण उपकरणों का उत्पादन करना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें जमीन पर चुपचाप काम करने की अनुमति मिली। समय के साथ, XNUMX वीं शताब्दी के अंत तक, कुछ छलावरण साधनों को पूर्ण वेशभूषा में बदल दिया गया। आम तौर पर हुड के साथ बर्लेप के लंबे लबादे या लबादे इस्तेमाल किए जाते थे, किनारों के साथ असमान रूप से कटे हुए और / या हेमपेड फ्लैप के साथ। इसके अलावा, पोशाक के लिए आधार एक ग्रिड हो सकता है जिस पर कपड़े के टुकड़े, घास या धागे के गुच्छे, आदि तय किए गए थे। सामान्य तौर पर, यह तब था कि गिल्ली सूट की मुख्य विशेषताएं बनाई गई थीं, जो आज तक बदलाव से नहीं गुजरी हैं। पोशाक को शिकारी के आंकड़े को जितना संभव हो सके छुपाना चाहिए, इसके सिल्हूट को धुंधला करना चाहिए और आसपास के क्षेत्र के साथ विलय करना चाहिए। जनवरी एक हज़ार नौ सौ में, विशेष रूप से द्वितीय बोअर युद्ध में भाग लेने के लिए, लवेट स्काउट्स रेजिमेंट का गठन किया गया था, जो मुख्य रूप से योमेन और हाइलैंड के शिकारियों द्वारा किया गया था। ब्रिटिश सेना में शार्पशूटर स्निपर्स की यह पहली इकाई थी। रेजिमेंट के सैनिक अच्छे निशानेबाज थे, और घात शिकार में भी व्यापक अनुभव रखते थे - यह सब सामने की ओर उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, वे अपने साथ युद्ध के दौरान असैन्य शिकार उपकरणों के कुछ तत्वों को युद्ध में ले गए छलावरण सूट। इस प्रकार, Lovat स्काउट्स वास्तविक संघर्ष में गिल्ली का उपयोग करने वाली पहली प्रसिद्ध सेना इकाई बन गई। हालांकि दक्षिण अफ्रीका की स्थिति स्कॉटलैंड के परिदृश्य से काफी भिन्न थी, छलावरण सूट सेनानियों के लिए उपयोगी थे। स्थानीय परिस्थितियों में मामूली बदलाव के बाद, गिल्ली फिर से तीर को छिपा सकती थी और इलाके के साथ विलय कर सकती थी। लड़ाइयों के परिणामों के अनुसार, लोवाटा स्काउट्स ने उच्चतम अंक प्राप्त किए - और छलावरण सूटों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश सेना ने अपना स्वयं का स्कूल ऑफ स्निपिंग बनाना शुरू किया, जो अन्य चीजों के अलावा, छलावरण के निर्माण और आधुनिकीकरण के लिए प्रदान किया गया था। स्काउट सूट में सुधार किया गया था और सभी संरचनाओं में सक्रिय रूप से उपयोग किया गया था। कारखाने का उत्पादन स्थापित किया गया था, लेकिन अक्सर स्निपर्स को अपने दम पर वेशभूषा बनानी पड़ती थी - साथ ही उन्हें एक विशिष्ट क्षेत्र के लिए संशोधित करना पड़ता था। ब्रिटिश अनुभव पर किसी का ध्यान नहीं गया। दूसरे देशों के स्नाइपर्स ने गिल्ली के लिए अपना विकल्प बनाना शुरू किया, पहले एक अस्थायी स्तर पर, और फिर सिलाई संगठनों की मदद से। जल्दी से पर्याप्त, सभी ने महसूस किया कि एक सक्षम स्थिति में छलावरण सूट में एक स्नाइपर व्यावहारिक रूप से अदृश्य था - और साथ ही दुश्मन पर सबसे गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम था। प्रथम विश्व युद्ध के अनुभव का उपयोग अंतरा अवधि और अगले वैश्विक संघर्ष में सक्रिय रूप से किया गया था। सभी देशों के स्नाइपर्स ने विभिन्न प्रकार के गिले को स्वतंत्र रूप से प्राप्त किया या बनाया। इसलिए, ब्रिटेन और राष्ट्रमंडल देशों ने लटके हुए चीथड़ों के साथ परिष्कृत बहु-तत्व टोपी या लबादों का उपयोग करना जारी रखा। लाल सेना के स्नाइपरों को छलावरण की वर्दी मिली - नीरस या छलावरण टोपी और जैकेट, जो स्वतंत्र रूप से पत्तियों, घास के गुच्छा, आदि द्वारा पूरक थे। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, स्नाइपर काम ने अपने उच्च मूल्य को बरकरार रखा, और विशेष उपकरण सेवा में बने रहे। छलावरण सूट विकसित करना जारी रखा - मुख्य रूप से नई सामग्री और कॉन्फ़िगरेशन के उपयोग के माध्यम से। बर्खास्त, कैनवास और कपास ने अन्य वस्त्रों को रास्ता दिया। घने वस्त्रों को महीन जाली से बदल दिया गया। बुने हुए माल की स्ट्रिप्स ने नकली घास का रास्ता दिखाया। छलावरण के लिए नई रंग योजनाएं भी विकसित कीं, जो युद्ध के विभिन्न संभावित सिनेमाघरों की स्थितियों के अनुकूल हैं। मानक सेना छलावरण के विपरीत, स्नाइपर उपकरण को इलाके से अधिक सटीक रूप से मेल खाना चाहिए - काम की सफलता और शूटर के अस्तित्व दोनों इस पर निर्भर करते हैं। अंधेरे में उपयोग के लिए उपयुक्त नए निगरानी उपकरणों का उद्भव, गिल्ली के लिए नई आवश्यकताओं को प्रस्तुत किया। कपड़े के लिए सामग्री और / या संसेचन आवश्यक थे जो न्यूनतम प्रकाश व्यवस्था के साथ भी इलाके की पृष्ठभूमि के खिलाफ बाहर खड़े नहीं थे। इसके अलावा, थर्मल इन्सुलेशन की समस्या थी ताकि स्नाइपर उत्पन्न गर्मी के कारण "चमक" न हो। पुरानी गिल्ली वेशभूषा आग से डरती थी। बर्लेप, सूखी घास, आदि के कई फ्लैप और शराबी तत्व। आसानी से आग पकड़ ली और शूटर की जान को खतरा हो गया। XX सदी के अंत तक। आग प्रतिरोधी सामग्री और विशेष संसेचन दोनों दिखाई दिए। इस तरह की आधुनिक गिलियां प्रज्वलित नहीं करती हैं और दहन का समर्थन नहीं करती हैं। समय के साथ गिल्ली "क्लासिक" देखो हमारे देश में दिखाई दिया। उनकी विशिष्ट उपस्थिति के लिए, उन्हें "शौक" और "किकिमोर" उपनाम दिया गया था। इन उपनामों के लेखक स्कॉटिश लोककथाओं को नहीं जानते थे, लेकिन उसी तरह से संघों का निर्माण किया जैसे कि XIX सदी के अंत के शिकारी थे। वर्तमान में, विभिन्न क्षेत्रों में एक विशिष्ट रूप के छलावरण सूट का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। गिली अभी भी स्कॉटिश रेंजर्स की एक विशेषता है और सभी विकसित और विकासशील देशों की सेनाओं और बिजली संरचनाओं में अपनी जगह बनाए रखते हैं। वेशभूषा अच्छी तरह से स्थापित है और भविष्य के भविष्य में परित्यक्त होने की संभावना नहीं है। सेनाओं में गिल्ली का उपयोग एक वास्तविक विज्ञापन बन गया है। सेना के स्नाइपर्स के लिए धन्यवाद, इस तरह के उपकरण विभिन्न देशों में शिकारियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए रुचि रखते थे। नतीजतन, काफी समय पहले गिली सुइट एक विशेष रूप से स्कॉटिश शिकार उपकरण बन गया था। विशेष बलों के स्नाइपर्स और अन्य शांत लोगों के बारे में कई फिल्म आतंकवादियों ने सेनाओं के बाहर गिल्ली की लोकप्रियता में योगदान दिया। इस मामले में, यह एक असामान्य शानदार उपस्थिति के रूप में बहुत अधिक मास्किंग कार्रवाई के रूप में उपयोगी नहीं निकला, जो मानक उच्च वर्दी से तेजी से भिन्न होता है। सैन्य खेल खेलों के उद्भव और विकास से सेना के उपकरणों की अतिरिक्त मांग और विशेष रूप से छलावरण सूट के लिए नेतृत्व किया गया। तो, एयरसॉफ्ट और हार्डबॉल में स्निपर्स हैं। उन्हें खुद को प्रच्छन्न करना होगा, कम से कम दल के लिए या विशिष्ट इकाइयों के सेनानियों की नकल करने के लिए। पहला छलावरण सूट, जो आधुनिक "गिल्ली-सूट" और "भूत" के पूर्वज हैं, XIX सदी के अंत में दिखाई दिए। और केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इरादा है। भविष्य में, इस तरह की वेशभूषा सेना में गिर गई - और इसे एक सदी से अधिक समय तक नहीं छोड़ा, लेकिन साथ ही वे अन्य करीबी क्षेत्रों में फैल रहे हैं। पिछली सदी में, एक विशेषता प्यारे पोशाक व्यापक और सक्रिय रूप से विकसित हुई है। जाहिर है, भविष्य के भविष्य में वह अपनी जगह बनाए रखेगा और कहीं भी नहीं जाएगा। इसका मतलब यह है कि दुश्मन और खेल को अभी भी सावधान रहना होगा, क्योंकि किसी भी तरह के पत्ते, घास या काई आग के लिए तैयार एक स्नाइपर हो सकते हैं। - लेखकः
पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण की 30 सीटों पर वोटिंग जारी है. दूसरे दौर में 30 सीटों पर 345 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है. ऐसे में कई दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी इसी चरण में होना है. वहीं, गुरुवार को हाल ही में बीजेपी में शामिल होने वाले अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती चुनाव प्रचार के लिए हावड़ा पहुंचे. मिथुन यहां सांकराइल विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रभाकर पंडित के समर्थन में प्रचार के लिए पहुंचे. मिथुन ने यहां कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव प्रचार किया. मिथुन, दोपहर करीब 12:33 बजे सांकराइल स्टेशन के पास किशोर संघ मैदान में बने अस्थाई हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर से उतरे. यहां बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया और फिर वे रैली के लिए रवाना हुए. मिथुन के पहुंचने पर उन्हें देखने के लिए जनसैलाब भी देखने को मिला. इस क्रम में मिथुन चक्रवर्ती ने हावड़ा में रघुदेवबाटी में चुनाव प्रचार किया. इतना ही नहीं, रैली में मिथुन ने डिस्को डांसर गाने पर नाचते हुए रैली को आगे बढ़ाया. बता दें कि बंगाल की सबसे हाई प्रोफाइल सीट, नंदीग्राम मानी जा रही है, जहां टीएमसी प्रमुख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी से शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं. लेफ्ट से मीनाक्षी मुखर्जी मैदान में है. यही नहीं दूसरे चरण में शुभेंदु अधिकारी की साख भी दांव पर है, क्योंकि उनके गढ़ में चुनाव हो रहे हैं. सीट जीतने के लिए ममता और शुभेंदु ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. दोनों ही प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है. यह सीट लंबे समय तक लेफ्ट के पास रही है, लेकिन नंदीग्राम भूमि आंदोलन के बाद से टीएमसी अपना वर्चस्व बरकरार रखे हुए है.
पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण की तीस सीटों पर वोटिंग जारी है. दूसरे दौर में तीस सीटों पर तीन सौ पैंतालीस उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है. ऐसे में कई दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी इसी चरण में होना है. वहीं, गुरुवार को हाल ही में बीजेपी में शामिल होने वाले अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती चुनाव प्रचार के लिए हावड़ा पहुंचे. मिथुन यहां सांकराइल विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रभाकर पंडित के समर्थन में प्रचार के लिए पहुंचे. मिथुन ने यहां कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव प्रचार किया. मिथुन, दोपहर करीब बारह:तैंतीस बजे सांकराइल स्टेशन के पास किशोर संघ मैदान में बने अस्थाई हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर से उतरे. यहां बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया और फिर वे रैली के लिए रवाना हुए. मिथुन के पहुंचने पर उन्हें देखने के लिए जनसैलाब भी देखने को मिला. इस क्रम में मिथुन चक्रवर्ती ने हावड़ा में रघुदेवबाटी में चुनाव प्रचार किया. इतना ही नहीं, रैली में मिथुन ने डिस्को डांसर गाने पर नाचते हुए रैली को आगे बढ़ाया. बता दें कि बंगाल की सबसे हाई प्रोफाइल सीट, नंदीग्राम मानी जा रही है, जहां टीएमसी प्रमुख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी से शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं. लेफ्ट से मीनाक्षी मुखर्जी मैदान में है. यही नहीं दूसरे चरण में शुभेंदु अधिकारी की साख भी दांव पर है, क्योंकि उनके गढ़ में चुनाव हो रहे हैं. सीट जीतने के लिए ममता और शुभेंदु ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. दोनों ही प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है. यह सीट लंबे समय तक लेफ्ट के पास रही है, लेकिन नंदीग्राम भूमि आंदोलन के बाद से टीएमसी अपना वर्चस्व बरकरार रखे हुए है.
है। मैं नहीं कह सकता कि अच्छा हुआ या बुरा हुआ ।' जब पूरा चित्र सामने होता है तब कहा जा सकता है कि अच्छा हुआ या बुरा हुआ । अधूरे चित्र के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता । आदमी जब अधूरे विचारों, अधूरे विकल्पो और अधूरी भावनाओं के आधार पर निर्णय लेता है तब संघर्ष और युद्ध पैदा होते हैं। आवश्यकता है कि आदमी में समग्रता के दृष्टिकोण का विकास हो । विधायक दृष्टिकोण की लम्बी समीक्षा है। उसका पहला सूत्र है- समग्रता की दृष्टि का विकास । जब यह पहला सूत्र जीवन मे क्रियान्वित होता है तब विधायक दृष्टिकोण का विकास होने लग जाता है। गर्मी का मौसम। जेठ की दुपहरी । चिलचिलाती धूप । इस गर्मी मे आदमी का दिमाग भी गर्मा जाता है। दिमाग ठंडा होता है तो चिन्तन मे सुविधा होती है। दिमाग गर्म होता है तो चिन्तन मे असुविधा होती है। असुविधा ही नहीं, अनेक कठिनाइयां पैदा हो जाती है, आदमी न जाने क्या-क्या कर बैठता है। स्वास्थ्य का एक लक्षण है-पैर गर्म रहे और दिमाग ठंडा रहे। पर उल्टा हो जाता है। पैर ठडे हो जाते है और दिमाग गर्म हो जाता है। यह विचित्र स्थिति है । यदि दिमाग ठडा रहता है तो आदमी लम्बे समय तक जी सकता है, शाति और आनन्द के साथ जी सकता है। दीर्घ श्वास का एक सूत्र है - दिमाग को ठंडा रखना । आज के वैज्ञानिक एक नई विधि का विकास कर रहे है, जिससे आदमी पांच सौ वर्षों तक या हजार वर्षों तक जी सके । यह विधि है - शीतलीकरण की । · आदमी को ठंड मे जमा दिया जाय । दस वर्ष तक वह ठड मे जमा रहा। दस वर्ष बाद उसे गरमाया और वह जी उठा । यदि बार-बार इस शीतलीकरण की प्रक्रिया हो दोहराया जाये तो वह पाच सौ वर्ष भी जी सकता है और हजार वर्ष भी जी सकता है । वैज्ञानिकों ने चींटियो को ठड मे जमा दिया । सब चींटियां मृतवत् हो गईं । दस मिनट बाद उन्हे गरमाया गया । वे पुन. जी उठीं। उनमे हलन-चलन प्रारम्भ हो गया। हम बहुत बार देखते है, मक्खिया और चींटिया जब बहुत ठंडे पानी में गिर जाती है, तब वे मृत जैसी हो जाती है, फिर जब उन्हें भाप से गरमाया जाता है या धूप में रखा जाता है तो वे पुन. जीवित हो उठती हैं । मनुष्य का कायाकल्प किया जा सकता है - शीतलीकरण के द्वारा, पूरे शरीर को ठंडा करके । यदि बीमार को ठंडा किया जा सके तो वह बहुत लम्बा जी सकता है। एक बात और है। पूरे शरीर को ठडा न भी किया जा सके पर यदि दिमाग ठंडा रह सके तो आदमी लम्बा जी सकता है । जितनी आकाल मृत्यु होती है, छोटी आयु मे मौत होती है, उसका एक कारण यह है कि व्यक्ति का दिमाग बार-बार गर्म हो जाता है, आग बार-बार जल उठती है, आच इतनी गहरी हो जाती है कि कोशिकाए जल्दी नष्ट होने लग जाती है । हमारे जीवन का आधार है- मस्तिष्क की कोशिकाएं । जब तक कोशिकाए जीवित रहती हैं, सक्रिय रहती हैं तो हृदय गति बन्द हो जाने पर भी आदमी मरता नहीं। हृदय की गति बंद है, श्वास की गति बन्द है किन्तु यदि मस्तिष्क कैसे सोचे ? (२) की कोशिकाए जीवित हैं तो आदमी मरेगा नहीं, फिर जी जाएगा। कई बार ऐसा देखा गया है कि डाक्टर जिस व्यक्ति को मृत घोषित कर देता है, वह व्यक्ति कुछ समय बाद जी उठता है। कभी-कभी वे व्यक्ति भी जी जाते हैं, जिनकी अर्थी निकल चुकी है, जो श्मशानघाट पहुंच चुके हैं, जिनको चिता पर लेटा दिया गया है, चारों ओर लकडियां चिन दी गई हैं, पर अचानक हलचल होती है, लकडियां इधर-उधर बिखर जाती हैं और वह व्यक्ति अंगडाई लेते हुए उठ-बैठता है। लोग उसे भूत समझ लेते है, पर यथार्थ में वह मरा ही नहीं था । वह जीवित था । डाक्टर ने घोषित कर दिया और हमने मान लिया । पर वास्तव मे उसका मस्तिष्क सक्रिय था, मस्तिष्क मरा नहीं था और जब तक मस्तिष्क नहीं मरता, आदमी नहीं मरता, फिर चाहे हार्ट बद हो जाए, नाडी बन्द हो जाए । हमारे जीवन का मूल आधार है- मस्तिष्क । वह मस्तिष्क जितना ठडा रहता है उतना ही जीवन अच्छा रहता है और उतना ही चिंतन स्वस्थ होता है। स्वस्थ चितन के लिए, विधायक और सतुलित चिन्तन के लिए मस्तिष्क का ठडा होना बहुत जरूरी है। इस दृष्टि से चितन का दूसरा मानदंड होगा कि चिंतन आवेश की स्थिति में किया जा रहा है या अनावेश की स्थिति में किया जा रहा है ? आवेश चितन का दोष है। आवेश आया, चिंतन शुरू किया, चितन तो हो सकता है पर चिंतन स्वस्थ नहीं होगा, सही नहीं होगा, संतुलित और विधायक नहीं होगा। विधायक चिन्तन तभी हो सकता है जब आवेश की स्थिति न हो । चिंतन का आधार तथ्य होना चाहिए। तथ्यो के आध पर जो चिंतन होता है, वह चिंतन उपयोगी तथा जहां तथ्य गौण और आवेश मुख्य हो जाता है वहां चिन्तन कार्यकारी नहीं होता है। जो व्यक्ति ध यान का अभ्यासी नहीं होता, जिसका मन पर अधिकार नहीं होता, जिसका मन शात और संतुलित नहीं होता, वह व्यक्ति तात्कालिक चितन करता है, आवेशपूर्ण चिंतन करता है। उसका चिंतन कभी सही नहीं होता । एक राजनेता के पास मित्र ने आकर कहा- 'अमुक अमुक व्यक्ति आपको गालियां बक रहा था ।' राजनेता ने सुना, आगबबूला हो गया, बोला- पहले मुझे चुनाव जीत लेने दो, मंत्री बन जाने दो, फिर मैं बता दूगा कि गाली देने का परिणाम क्या होता है ? यह आवेशपूर्ण चितन का परिणाम है। उसे जानना चाहिए था कि अमुक आदमी ने गालिया दीं या नहीं। एक बात हुई, आवेश जागा और आवेश ही चितन बन गया । यह भयंकर अवस्था है। क्रोध का आवेश और अहंकार का आवेश कितना भयकर होता है, यह अज्ञात नहीं है। इसके दुष्परिणामो से हम अवगत हैं। नौकर बात नहीं मानता, तत्काल अहकार का आवेश आ जाता है और उस आवेश मे क्या-क्या नहीं कर दिया जाता ? गालियां बोली जाती हैं, नौकर को पीट दिया जाता है, उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है । यह सारा अहंकार के आवेश के कारण होता है। क्या यह जरूरी है, हर आदमी हर आदमी का आदेश माने ? कोई जरूरी नहीं है। मानना अच्छा होता है, पर कभी-कभी न मानना उससे भी अच्छा होता है । मालिक सोचता है तो नौकर नहीं सोचता ? मालिक ने नौकर से कहा- जाओ, बगीचे मे पानी सींच आओ ।' नौकर बोला-'मालिक' बाहर मूसलाधार वर्षा बरस रही है। पानी सींचने से क्या ?' मालिक बोला- मूर्ख हो तुम । वर्षा बरस रही है तो छाता ले जाओ और पानी सींच आओ ।' नौकर अब क्या करे ? कहने वाला मालिक इतना भी नहीं सोचता कि मूसलाधार वर्षा हो रही है, पौधो को पानी सींचने का अर्थ ही क्या हो सकता है ? नौकर इस आदेश को माने तो क्यों ? आदेश देने वाले सभी बहुत समझदार होते हैं और बहुत विवेकपूर्ण आदेश देते हैं, ऐसा तो नहीं है। बहुत बार ऐसे आदेश दे दिये जाते हैं कि उन्हे मान लेने पर अनर्थ हो सकता है। किन्तु न मानने पर मालिक का क्रोध और आवेश तैयार रहता है। उसके परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। आवेश के कारण चिन्तन की दिशाए विकृत बन जाती हैं। आदमी एक दूसरे को समझ नहीं पाता। पति-पत्नी, भाई-भाई, नौकर - स्वामी के संबंधों मे जो दूरी आती है, उसमे आवेश का मुख्य हाथ रहता है। जब आवेश का परदा बीच में होता है तब आदमी दूसरे आदमी को समझ नहीं पाता, देख नहीं पाता। आवेश ही दिखेगा। सामने वाला व्यक्ति वैसा ही दिखेगा जैसा प्रतिबिम्ब आवेश के साथ जुडा हुआ है। आवेश चितन को कभी सम्यक् नहीं होने देता। इसलिए संतुलित चिन्तन का मानदण्ड बनता है - अनावेश अवस्था का अभ्यास। यह कैसे हो सकता है ? क्या क्रोध और अहकार को कम किया जा सकता है ? लोग इस भाषा मे नहीं सोचते कि अहंकार को मिटाया जा सकता है या कम किया जा सकता है ? वे इस भाषा मे सोचते हैं कि क्रोध तो स्वभाव है, वह मिटने वाला नहीं है। अहकार मनुष्य का स्वभाव है, वह मिटने वाला नहीं है। आदमी बदलता नहीं । ये मिटते नहीं। आदमी नहीं बदलता, इसको मान लेने पर बदलने का प्रश्न ही नहीं उठता । ध्यान का अभ्यासी व्यक्ति सबसे पहले इस मिथ्या धारणा को तोड़ता है । जो इस धरणा को नहीं तोडता, वह ध्यान का अच्छा अभ्यासी नहीं हो सकता। ध्यान का अभ्यास करने वाले को पहला पाठ पढना होगा कि आदमी बदल सकता है, उसका स्वभाव बदल सकता है। यदि आदमी न बदले, स्वभाव न बदले तो ध्यान को ही बदल देना चाहिए, छोड देना चाहिए । फिर ध्यान का कोई प्रयोजन नहीं, कोई सार्थकता नहीं । ध्यान की सार्थकता तो यही है कि चित्त इतना एकाग्र और निर्मल बन जाए कि उसमें जो बुरे स्वभाव के परमाणु जमे हुए हैं, वे सारे के सारे धुलकर बह जाए । चित्त निर्मल हो जाए। जब चित्त साफ हो जाता है फिर आदते कहा टिकती हैं ? सारी आदते चित्त की कलुषता मे टिकती हैं। कलुषता की इतनी चिकनाहट चित्त पर जमी हुई है कि जो भी आता है वह वहा चिपक जाता है। सारी आदतो, और स्वभावो को आधार देने वाला है चित्त, चेतना । एक प्रश्न आता है, आत्मा निर्मल होती है, चेतना निर्मल होती है फिर कर्म उस पर कैसे चिपक जाते हैं । लोग आरोपण की भाषा बहुत जानते हैं । जो नहीं है, उसे आरोपित कर लेते हैं। चेतना निर्मल हो सकती है, होगी, पर वर्तमान में वह निर्मल नहीं है। जो वर्तमान मे नहीं है, उसको उसी पर्याय मे देखा जाए । भविष्य के पर्याय का वर्तमान मे आरोपण न हो और अतीत के पर्याय का भविष्य मे आरोपण न हो। आरोपण से अनेक कठिनाइया उत्पन्न हो जाती हैं। सोना जो आच मे तपा, वह निर्मल हो गया, पीला हो गया, चमकदार बन गया । पर खदान से निकलते सोने को देखकर यह कल्पना नहीं की जा सकती कि सोना इतना चमकदार होता है । उस समय वह केवल मिट्टी का ढेला होता है। कच्चे सोने मे और पक्के सोने में बहुत अन्तर होता है। आग मे निकलने वाले सोने की चमक और मिट्टी के साथ मिले हुए सोने की चमक की तुलना ही क्या ? सारे मलो के दूर हो जाने के पश्चात् जो चमक आती है, वह निराली होती है। इसी प्रकार साधना की भट्टी मे पक जाने के बाद चेतना मे जो निर्मलता आती है उस निर्मलता की कल्पना कृषाय- मलिन, विषय और वासना से लिप्त चेतना मे नहीं की जा सकती । वर्तमान मे हमारी चेतना कषायों से लिप्त है । क्रोध, अहंकार, कपट, छलना, प्रवचना, लालच, घृणा, भय, ईर्ष्या, राग और द्वेष, प्रियता और अप्रियता के सवेदन- इन सबसे जुडी हुई चेतना निर्मल कैसे हो सकती है ? इन सबको टिकाए हुए कौन है ? अचेतन मे कभी क्रोध नहीं होता । क्या दीवार कभी गुस्सा करती है? यदि ये दीवारें गुस्सा करने लग जाए तो आदमी की ऐसी स्थिति होगी कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकेगी। पट्ट, जिस पर हम बैठते हैं, वह कभी गुस्सा नहीं करता। उस पर हम पैर रखते हैं, पर वह कुछ नहीं कहता । किसी के सिर पर पैर रख कर देखे । छूते ही आदमी बडबडाने लग जाता है, उसका पारा चढ जाता है, पर बेचारा पट्ट न कभी क्रोध करता है और न कभी अहकार करता है। किसी आदमी के सिर पर पैर रखे, अहंकार का सर्प फुफकार उठेगा । अचेतन में न क्रोध होता है, न अहंकार होता है और न छलना / प्रवंचना होती है। आदमी आदमी को ठग लेता है, चेतन चेतन को ठग लेता है। पर कभी जड ने किसी चेतन को ठगा हो, ऐसा देखने-सुनने में नहीं आया। ये सारी प्रवंचनाएं, सारी ठगाइयां आदमी ने ही पैदा की हैं और आदमी ही इन्हें करता चला जा रहा है। दूसरे शब्दो में, चेतन ने पैदा की है और चेतन ही करता चला जा रहा है। इसका निष्कर्ष है कि सारी बुराइयों को चेतन ही टिकाए हुए है। अचेतन में कोई बुराई नहीं होती। अचेतन मे तो जो होता है वह होता है। न अच्छाई होती है और न बुराई होती है । चेतन ही सव टिकाए हुए है, पर कब तक यह प्रश्न है। जब तक चेतन अपने चेतनस्वरूप का अनुभव नहीं करता, तव तक ये दोष टिके हुए रहते हैं । ध्यान चेतन स्वरूप के अनुभव की प्रक्रिया है। ध्यान अपने स्वरूप के जागरण की प्रक्रिया है। जब तक स्वरूप की विस्मृति बनी रहती है तब तक ये सारे दोष चेतन मे टिके रहते हैं । उनको आधार और सहारा मिलता रहता है। इतना वातानुकूलित स्थान मिल गया है उनको कि वहां न सर्दी का भय है और न गर्मी का भय है। जितने पाप हैं, दोष हैं, बुराइया हैं- ये सारे चेतन के आधार को पाकर मजे से जी रहे हैं, पनप रहे हैं। जिनको आधार प्राप्त है, वे आराम से जी रहे हैं और जो आधार देने वाला है, वह बुरे हाल मे जी रहा है। वडी विचित्र स्थिति है। ऐसा होता है। मकान मालिक दु.ख पाता है और किरायेदार सुख से जीता है। किरायेदार से मकान खाली करा पाना सहज नहीं है। इन दोषों से चेतना को मुक्त कर पाना सहज-सरल नहीं है। इस अर्थ में लोगो की धारणा एकदम गलत नहीं है कि स्वभाव को बदला नहीं जा सकता। असंख्य काल से जो संस्कार चेतन पर अधिकार किए बैठे हैं, उन्हें सरलता से उखाडा नहीं जा सकता। किन्तु ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे चेतना पर आई हुई चिकनाहट को धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। और जव चिकनाहट धुलती है तब उस पर चिपके रहने वाले तत्त्व भी धुलते जाते हैं। किरायेदार को कानून की ओर से कुछेक अधिकार प्राप्त है। उससे मकान खाली नहीं कराया जा सकता। पर जब मकान जर्जर हो जाता है, मूसलाधार वर्षा होती है, तुफान आता है तो वह मकान ढह जाता है। उस स्थिति में सारे किरायेदार बोरिया-विस्तर समेट कर अन्यत्र चले जाते हैं । मकान अपने आप खाली हो जाता है। ध्यान एक ऐसी मूलसाधार वर्षा है, ऐसा तूफान है कि मकान को खंडहर बना देता है और तब सारे किरायेदार-दोष निकल भागते हैं। यह है बदलने की प्रक्रिया । सव कुछ बदल जाता है। इस दुनिया मे कुछ परिवर्तनीय है और कुछ अपरिवर्तनीय । जो अपरिवर्तनीय है, जो ध्रौव्याश है उसे नहीं बदला जा सकता। किन्तु जो पर्याय हैं, उन्हे बदला जा सकता है। कोई भी पर्याप अपरिवर्तनीय नहीं होता। क्रोध की अवस्था एक पर्याय है, मान और अहकार की अवस्था एक पर्याय है, लोभ की अवस्था एक पर्याय है, प्रियता और अप्रियता की अवस्था एक पर्याय है। ऐसे हजारो पर्याय हैं । वे कभी अपरिवर्तनीय नहीं होते। उन्हे बदला जा सकता है। सारे संबंध और सभी कर्म पर्याय हैं। उन्हे बदला जा सकता है। मूल तत्त्व को नहीं बदला जा सकता। मूल तत्त्व दो ही हैं- चेतन और अचेतन । ये नहीं बदले जा सकते । चेतन अचेतन में या अचेतन चेतन में नहीं बदला जा सकता । पर्याय बदले जा सकते हैं। जब यह तथ्य जान लिया जाता है तब सारे सबंध-विजातीय भाव टूटने लग जाते हैं। उस स्थिति मे यह स्पष्ट अनुभव होने लगता है कि ध्यान विसंबंध की प्रक्रिया है। ध्यान करने वाले व्यक्ति की चेतना संबंधातीत होने लग जाती है। यह व्यवहार मे कुछ अटपटी-सी बात लगती है। पर यह होता है । उस व्यक्ति का सारा रस बदल जाता है, मर जाता है । जब वह परम रस मे मग्न हो जाता है, तब ये नीचे के रस तुच्छ हो जाते हैं, रसहीन हो जाते हैं। पदार्थ मे रसानुभूति तब तक ही होती है जब तक रसातीत अवस्था का अनुभव नहीं हो जाता। ध्यान से सबंधातीत अवस्था का उदय होता है और तब सब कुछ विसबधित हो जाता है। पदार्थ पदार्थ मात्र रह जाता है और चेतना चेतना मात्र रह जाती है । पदार्थ को चेतना के साथ जोडने वाला सूत्र है - आसक्ति । वह ध्यान की प्रक्रिया से कट जाता है, तब पदार्थ उपयोगिता मात्र रह जाता है । जीना है तो श्वास लेना ही होगा, भोजन और पानी का उपयोग करना ही होगा। जीना है तो कपडे और मकान का उपयोग करना ही होगा। इन सब मे उपयोगिता की दृष्टि बनी रहती है, मूर्च्छा या आसक्ति टूट जाती है, यह एक नई स्थिति का निर्माण है। ध्यान के द्वारा चिन्तन मे सृजनात्मक शक्ति का विकास होता है। उसका साधन बनता है-अनावेश । यह है आवेश का अभाव । चिन्तन का एक दोष है - सदेह । आदमी सदेह बहुत करता है। वह खतरा उठाता है, इसलिए सदेह करता है। एक कहावत है - दूध से जला छाछ को भी फूक - फूक कर पीता है। इसमे सचाई है। आदमी जब ठगा जाता है तब हर बात मे सदेह करने लग जाता है। यदि प्रवंचना के तत्त्व समाज मे नहीं होते तो आदमी मे
है। मैं नहीं कह सकता कि अच्छा हुआ या बुरा हुआ ।' जब पूरा चित्र सामने होता है तब कहा जा सकता है कि अच्छा हुआ या बुरा हुआ । अधूरे चित्र के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता । आदमी जब अधूरे विचारों, अधूरे विकल्पो और अधूरी भावनाओं के आधार पर निर्णय लेता है तब संघर्ष और युद्ध पैदा होते हैं। आवश्यकता है कि आदमी में समग्रता के दृष्टिकोण का विकास हो । विधायक दृष्टिकोण की लम्बी समीक्षा है। उसका पहला सूत्र है- समग्रता की दृष्टि का विकास । जब यह पहला सूत्र जीवन मे क्रियान्वित होता है तब विधायक दृष्टिकोण का विकास होने लग जाता है। गर्मी का मौसम। जेठ की दुपहरी । चिलचिलाती धूप । इस गर्मी मे आदमी का दिमाग भी गर्मा जाता है। दिमाग ठंडा होता है तो चिन्तन मे सुविधा होती है। दिमाग गर्म होता है तो चिन्तन मे असुविधा होती है। असुविधा ही नहीं, अनेक कठिनाइयां पैदा हो जाती है, आदमी न जाने क्या-क्या कर बैठता है। स्वास्थ्य का एक लक्षण है-पैर गर्म रहे और दिमाग ठंडा रहे। पर उल्टा हो जाता है। पैर ठडे हो जाते है और दिमाग गर्म हो जाता है। यह विचित्र स्थिति है । यदि दिमाग ठडा रहता है तो आदमी लम्बे समय तक जी सकता है, शाति और आनन्द के साथ जी सकता है। दीर्घ श्वास का एक सूत्र है - दिमाग को ठंडा रखना । आज के वैज्ञानिक एक नई विधि का विकास कर रहे है, जिससे आदमी पांच सौ वर्षों तक या हजार वर्षों तक जी सके । यह विधि है - शीतलीकरण की । · आदमी को ठंड मे जमा दिया जाय । दस वर्ष तक वह ठड मे जमा रहा। दस वर्ष बाद उसे गरमाया और वह जी उठा । यदि बार-बार इस शीतलीकरण की प्रक्रिया हो दोहराया जाये तो वह पाच सौ वर्ष भी जी सकता है और हजार वर्ष भी जी सकता है । वैज्ञानिकों ने चींटियो को ठड मे जमा दिया । सब चींटियां मृतवत् हो गईं । दस मिनट बाद उन्हे गरमाया गया । वे पुन. जी उठीं। उनमे हलन-चलन प्रारम्भ हो गया। हम बहुत बार देखते है, मक्खिया और चींटिया जब बहुत ठंडे पानी में गिर जाती है, तब वे मृत जैसी हो जाती है, फिर जब उन्हें भाप से गरमाया जाता है या धूप में रखा जाता है तो वे पुन. जीवित हो उठती हैं । मनुष्य का कायाकल्प किया जा सकता है - शीतलीकरण के द्वारा, पूरे शरीर को ठंडा करके । यदि बीमार को ठंडा किया जा सके तो वह बहुत लम्बा जी सकता है। एक बात और है। पूरे शरीर को ठडा न भी किया जा सके पर यदि दिमाग ठंडा रह सके तो आदमी लम्बा जी सकता है । जितनी आकाल मृत्यु होती है, छोटी आयु मे मौत होती है, उसका एक कारण यह है कि व्यक्ति का दिमाग बार-बार गर्म हो जाता है, आग बार-बार जल उठती है, आच इतनी गहरी हो जाती है कि कोशिकाए जल्दी नष्ट होने लग जाती है । हमारे जीवन का आधार है- मस्तिष्क की कोशिकाएं । जब तक कोशिकाए जीवित रहती हैं, सक्रिय रहती हैं तो हृदय गति बन्द हो जाने पर भी आदमी मरता नहीं। हृदय की गति बंद है, श्वास की गति बन्द है किन्तु यदि मस्तिष्क कैसे सोचे ? की कोशिकाए जीवित हैं तो आदमी मरेगा नहीं, फिर जी जाएगा। कई बार ऐसा देखा गया है कि डाक्टर जिस व्यक्ति को मृत घोषित कर देता है, वह व्यक्ति कुछ समय बाद जी उठता है। कभी-कभी वे व्यक्ति भी जी जाते हैं, जिनकी अर्थी निकल चुकी है, जो श्मशानघाट पहुंच चुके हैं, जिनको चिता पर लेटा दिया गया है, चारों ओर लकडियां चिन दी गई हैं, पर अचानक हलचल होती है, लकडियां इधर-उधर बिखर जाती हैं और वह व्यक्ति अंगडाई लेते हुए उठ-बैठता है। लोग उसे भूत समझ लेते है, पर यथार्थ में वह मरा ही नहीं था । वह जीवित था । डाक्टर ने घोषित कर दिया और हमने मान लिया । पर वास्तव मे उसका मस्तिष्क सक्रिय था, मस्तिष्क मरा नहीं था और जब तक मस्तिष्क नहीं मरता, आदमी नहीं मरता, फिर चाहे हार्ट बद हो जाए, नाडी बन्द हो जाए । हमारे जीवन का मूल आधार है- मस्तिष्क । वह मस्तिष्क जितना ठडा रहता है उतना ही जीवन अच्छा रहता है और उतना ही चिंतन स्वस्थ होता है। स्वस्थ चितन के लिए, विधायक और सतुलित चिन्तन के लिए मस्तिष्क का ठडा होना बहुत जरूरी है। इस दृष्टि से चितन का दूसरा मानदंड होगा कि चिंतन आवेश की स्थिति में किया जा रहा है या अनावेश की स्थिति में किया जा रहा है ? आवेश चितन का दोष है। आवेश आया, चिंतन शुरू किया, चितन तो हो सकता है पर चिंतन स्वस्थ नहीं होगा, सही नहीं होगा, संतुलित और विधायक नहीं होगा। विधायक चिन्तन तभी हो सकता है जब आवेश की स्थिति न हो । चिंतन का आधार तथ्य होना चाहिए। तथ्यो के आध पर जो चिंतन होता है, वह चिंतन उपयोगी तथा जहां तथ्य गौण और आवेश मुख्य हो जाता है वहां चिन्तन कार्यकारी नहीं होता है। जो व्यक्ति ध यान का अभ्यासी नहीं होता, जिसका मन पर अधिकार नहीं होता, जिसका मन शात और संतुलित नहीं होता, वह व्यक्ति तात्कालिक चितन करता है, आवेशपूर्ण चिंतन करता है। उसका चिंतन कभी सही नहीं होता । एक राजनेता के पास मित्र ने आकर कहा- 'अमुक अमुक व्यक्ति आपको गालियां बक रहा था ।' राजनेता ने सुना, आगबबूला हो गया, बोला- पहले मुझे चुनाव जीत लेने दो, मंत्री बन जाने दो, फिर मैं बता दूगा कि गाली देने का परिणाम क्या होता है ? यह आवेशपूर्ण चितन का परिणाम है। उसे जानना चाहिए था कि अमुक आदमी ने गालिया दीं या नहीं। एक बात हुई, आवेश जागा और आवेश ही चितन बन गया । यह भयंकर अवस्था है। क्रोध का आवेश और अहंकार का आवेश कितना भयकर होता है, यह अज्ञात नहीं है। इसके दुष्परिणामो से हम अवगत हैं। नौकर बात नहीं मानता, तत्काल अहकार का आवेश आ जाता है और उस आवेश मे क्या-क्या नहीं कर दिया जाता ? गालियां बोली जाती हैं, नौकर को पीट दिया जाता है, उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है । यह सारा अहंकार के आवेश के कारण होता है। क्या यह जरूरी है, हर आदमी हर आदमी का आदेश माने ? कोई जरूरी नहीं है। मानना अच्छा होता है, पर कभी-कभी न मानना उससे भी अच्छा होता है । मालिक सोचता है तो नौकर नहीं सोचता ? मालिक ने नौकर से कहा- जाओ, बगीचे मे पानी सींच आओ ।' नौकर बोला-'मालिक' बाहर मूसलाधार वर्षा बरस रही है। पानी सींचने से क्या ?' मालिक बोला- मूर्ख हो तुम । वर्षा बरस रही है तो छाता ले जाओ और पानी सींच आओ ।' नौकर अब क्या करे ? कहने वाला मालिक इतना भी नहीं सोचता कि मूसलाधार वर्षा हो रही है, पौधो को पानी सींचने का अर्थ ही क्या हो सकता है ? नौकर इस आदेश को माने तो क्यों ? आदेश देने वाले सभी बहुत समझदार होते हैं और बहुत विवेकपूर्ण आदेश देते हैं, ऐसा तो नहीं है। बहुत बार ऐसे आदेश दे दिये जाते हैं कि उन्हे मान लेने पर अनर्थ हो सकता है। किन्तु न मानने पर मालिक का क्रोध और आवेश तैयार रहता है। उसके परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। आवेश के कारण चिन्तन की दिशाए विकृत बन जाती हैं। आदमी एक दूसरे को समझ नहीं पाता। पति-पत्नी, भाई-भाई, नौकर - स्वामी के संबंधों मे जो दूरी आती है, उसमे आवेश का मुख्य हाथ रहता है। जब आवेश का परदा बीच में होता है तब आदमी दूसरे आदमी को समझ नहीं पाता, देख नहीं पाता। आवेश ही दिखेगा। सामने वाला व्यक्ति वैसा ही दिखेगा जैसा प्रतिबिम्ब आवेश के साथ जुडा हुआ है। आवेश चितन को कभी सम्यक् नहीं होने देता। इसलिए संतुलित चिन्तन का मानदण्ड बनता है - अनावेश अवस्था का अभ्यास। यह कैसे हो सकता है ? क्या क्रोध और अहकार को कम किया जा सकता है ? लोग इस भाषा मे नहीं सोचते कि अहंकार को मिटाया जा सकता है या कम किया जा सकता है ? वे इस भाषा मे सोचते हैं कि क्रोध तो स्वभाव है, वह मिटने वाला नहीं है। अहकार मनुष्य का स्वभाव है, वह मिटने वाला नहीं है। आदमी बदलता नहीं । ये मिटते नहीं। आदमी नहीं बदलता, इसको मान लेने पर बदलने का प्रश्न ही नहीं उठता । ध्यान का अभ्यासी व्यक्ति सबसे पहले इस मिथ्या धारणा को तोड़ता है । जो इस धरणा को नहीं तोडता, वह ध्यान का अच्छा अभ्यासी नहीं हो सकता। ध्यान का अभ्यास करने वाले को पहला पाठ पढना होगा कि आदमी बदल सकता है, उसका स्वभाव बदल सकता है। यदि आदमी न बदले, स्वभाव न बदले तो ध्यान को ही बदल देना चाहिए, छोड देना चाहिए । फिर ध्यान का कोई प्रयोजन नहीं, कोई सार्थकता नहीं । ध्यान की सार्थकता तो यही है कि चित्त इतना एकाग्र और निर्मल बन जाए कि उसमें जो बुरे स्वभाव के परमाणु जमे हुए हैं, वे सारे के सारे धुलकर बह जाए । चित्त निर्मल हो जाए। जब चित्त साफ हो जाता है फिर आदते कहा टिकती हैं ? सारी आदते चित्त की कलुषता मे टिकती हैं। कलुषता की इतनी चिकनाहट चित्त पर जमी हुई है कि जो भी आता है वह वहा चिपक जाता है। सारी आदतो, और स्वभावो को आधार देने वाला है चित्त, चेतना । एक प्रश्न आता है, आत्मा निर्मल होती है, चेतना निर्मल होती है फिर कर्म उस पर कैसे चिपक जाते हैं । लोग आरोपण की भाषा बहुत जानते हैं । जो नहीं है, उसे आरोपित कर लेते हैं। चेतना निर्मल हो सकती है, होगी, पर वर्तमान में वह निर्मल नहीं है। जो वर्तमान मे नहीं है, उसको उसी पर्याय मे देखा जाए । भविष्य के पर्याय का वर्तमान मे आरोपण न हो और अतीत के पर्याय का भविष्य मे आरोपण न हो। आरोपण से अनेक कठिनाइया उत्पन्न हो जाती हैं। सोना जो आच मे तपा, वह निर्मल हो गया, पीला हो गया, चमकदार बन गया । पर खदान से निकलते सोने को देखकर यह कल्पना नहीं की जा सकती कि सोना इतना चमकदार होता है । उस समय वह केवल मिट्टी का ढेला होता है। कच्चे सोने मे और पक्के सोने में बहुत अन्तर होता है। आग मे निकलने वाले सोने की चमक और मिट्टी के साथ मिले हुए सोने की चमक की तुलना ही क्या ? सारे मलो के दूर हो जाने के पश्चात् जो चमक आती है, वह निराली होती है। इसी प्रकार साधना की भट्टी मे पक जाने के बाद चेतना मे जो निर्मलता आती है उस निर्मलता की कल्पना कृषाय- मलिन, विषय और वासना से लिप्त चेतना मे नहीं की जा सकती । वर्तमान मे हमारी चेतना कषायों से लिप्त है । क्रोध, अहंकार, कपट, छलना, प्रवचना, लालच, घृणा, भय, ईर्ष्या, राग और द्वेष, प्रियता और अप्रियता के सवेदन- इन सबसे जुडी हुई चेतना निर्मल कैसे हो सकती है ? इन सबको टिकाए हुए कौन है ? अचेतन मे कभी क्रोध नहीं होता । क्या दीवार कभी गुस्सा करती है? यदि ये दीवारें गुस्सा करने लग जाए तो आदमी की ऐसी स्थिति होगी कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकेगी। पट्ट, जिस पर हम बैठते हैं, वह कभी गुस्सा नहीं करता। उस पर हम पैर रखते हैं, पर वह कुछ नहीं कहता । किसी के सिर पर पैर रख कर देखे । छूते ही आदमी बडबडाने लग जाता है, उसका पारा चढ जाता है, पर बेचारा पट्ट न कभी क्रोध करता है और न कभी अहकार करता है। किसी आदमी के सिर पर पैर रखे, अहंकार का सर्प फुफकार उठेगा । अचेतन में न क्रोध होता है, न अहंकार होता है और न छलना / प्रवंचना होती है। आदमी आदमी को ठग लेता है, चेतन चेतन को ठग लेता है। पर कभी जड ने किसी चेतन को ठगा हो, ऐसा देखने-सुनने में नहीं आया। ये सारी प्रवंचनाएं, सारी ठगाइयां आदमी ने ही पैदा की हैं और आदमी ही इन्हें करता चला जा रहा है। दूसरे शब्दो में, चेतन ने पैदा की है और चेतन ही करता चला जा रहा है। इसका निष्कर्ष है कि सारी बुराइयों को चेतन ही टिकाए हुए है। अचेतन में कोई बुराई नहीं होती। अचेतन मे तो जो होता है वह होता है। न अच्छाई होती है और न बुराई होती है । चेतन ही सव टिकाए हुए है, पर कब तक यह प्रश्न है। जब तक चेतन अपने चेतनस्वरूप का अनुभव नहीं करता, तव तक ये दोष टिके हुए रहते हैं । ध्यान चेतन स्वरूप के अनुभव की प्रक्रिया है। ध्यान अपने स्वरूप के जागरण की प्रक्रिया है। जब तक स्वरूप की विस्मृति बनी रहती है तब तक ये सारे दोष चेतन मे टिके रहते हैं । उनको आधार और सहारा मिलता रहता है। इतना वातानुकूलित स्थान मिल गया है उनको कि वहां न सर्दी का भय है और न गर्मी का भय है। जितने पाप हैं, दोष हैं, बुराइया हैं- ये सारे चेतन के आधार को पाकर मजे से जी रहे हैं, पनप रहे हैं। जिनको आधार प्राप्त है, वे आराम से जी रहे हैं और जो आधार देने वाला है, वह बुरे हाल मे जी रहा है। वडी विचित्र स्थिति है। ऐसा होता है। मकान मालिक दु.ख पाता है और किरायेदार सुख से जीता है। किरायेदार से मकान खाली करा पाना सहज नहीं है। इन दोषों से चेतना को मुक्त कर पाना सहज-सरल नहीं है। इस अर्थ में लोगो की धारणा एकदम गलत नहीं है कि स्वभाव को बदला नहीं जा सकता। असंख्य काल से जो संस्कार चेतन पर अधिकार किए बैठे हैं, उन्हें सरलता से उखाडा नहीं जा सकता। किन्तु ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे चेतना पर आई हुई चिकनाहट को धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। और जव चिकनाहट धुलती है तब उस पर चिपके रहने वाले तत्त्व भी धुलते जाते हैं। किरायेदार को कानून की ओर से कुछेक अधिकार प्राप्त है। उससे मकान खाली नहीं कराया जा सकता। पर जब मकान जर्जर हो जाता है, मूसलाधार वर्षा होती है, तुफान आता है तो वह मकान ढह जाता है। उस स्थिति में सारे किरायेदार बोरिया-विस्तर समेट कर अन्यत्र चले जाते हैं । मकान अपने आप खाली हो जाता है। ध्यान एक ऐसी मूलसाधार वर्षा है, ऐसा तूफान है कि मकान को खंडहर बना देता है और तब सारे किरायेदार-दोष निकल भागते हैं। यह है बदलने की प्रक्रिया । सव कुछ बदल जाता है। इस दुनिया मे कुछ परिवर्तनीय है और कुछ अपरिवर्तनीय । जो अपरिवर्तनीय है, जो ध्रौव्याश है उसे नहीं बदला जा सकता। किन्तु जो पर्याय हैं, उन्हे बदला जा सकता है। कोई भी पर्याप अपरिवर्तनीय नहीं होता। क्रोध की अवस्था एक पर्याय है, मान और अहकार की अवस्था एक पर्याय है, लोभ की अवस्था एक पर्याय है, प्रियता और अप्रियता की अवस्था एक पर्याय है। ऐसे हजारो पर्याय हैं । वे कभी अपरिवर्तनीय नहीं होते। उन्हे बदला जा सकता है। सारे संबंध और सभी कर्म पर्याय हैं। उन्हे बदला जा सकता है। मूल तत्त्व को नहीं बदला जा सकता। मूल तत्त्व दो ही हैं- चेतन और अचेतन । ये नहीं बदले जा सकते । चेतन अचेतन में या अचेतन चेतन में नहीं बदला जा सकता । पर्याय बदले जा सकते हैं। जब यह तथ्य जान लिया जाता है तब सारे सबंध-विजातीय भाव टूटने लग जाते हैं। उस स्थिति मे यह स्पष्ट अनुभव होने लगता है कि ध्यान विसंबंध की प्रक्रिया है। ध्यान करने वाले व्यक्ति की चेतना संबंधातीत होने लग जाती है। यह व्यवहार मे कुछ अटपटी-सी बात लगती है। पर यह होता है । उस व्यक्ति का सारा रस बदल जाता है, मर जाता है । जब वह परम रस मे मग्न हो जाता है, तब ये नीचे के रस तुच्छ हो जाते हैं, रसहीन हो जाते हैं। पदार्थ मे रसानुभूति तब तक ही होती है जब तक रसातीत अवस्था का अनुभव नहीं हो जाता। ध्यान से सबंधातीत अवस्था का उदय होता है और तब सब कुछ विसबधित हो जाता है। पदार्थ पदार्थ मात्र रह जाता है और चेतना चेतना मात्र रह जाती है । पदार्थ को चेतना के साथ जोडने वाला सूत्र है - आसक्ति । वह ध्यान की प्रक्रिया से कट जाता है, तब पदार्थ उपयोगिता मात्र रह जाता है । जीना है तो श्वास लेना ही होगा, भोजन और पानी का उपयोग करना ही होगा। जीना है तो कपडे और मकान का उपयोग करना ही होगा। इन सब मे उपयोगिता की दृष्टि बनी रहती है, मूर्च्छा या आसक्ति टूट जाती है, यह एक नई स्थिति का निर्माण है। ध्यान के द्वारा चिन्तन मे सृजनात्मक शक्ति का विकास होता है। उसका साधन बनता है-अनावेश । यह है आवेश का अभाव । चिन्तन का एक दोष है - सदेह । आदमी सदेह बहुत करता है। वह खतरा उठाता है, इसलिए सदेह करता है। एक कहावत है - दूध से जला छाछ को भी फूक - फूक कर पीता है। इसमे सचाई है। आदमी जब ठगा जाता है तब हर बात मे सदेह करने लग जाता है। यदि प्रवंचना के तत्त्व समाज मे नहीं होते तो आदमी मे
छोटे पर्दे का हिट शो 'चक्रवर्ती अशोक सम्राट' में अब एक नया रंग ले चुका है और इसी के साथ शो ने लीप भी ले लिया है. नए अशोक का किरदार अब मोहित रैना निभा रहे हैं. हाल में आ रही खबरों के मुताबिक एक बार फिर से इस शो में सिद्धार्थ निगम की एंट्री होने वाली है. इस बार वह अशोका नहीं बल्कि उनके बेटे का किरदार अदा करते नजर आएंगे. कलर्स पर के इस सीरियल में अशोका की भूमिका पहले सिद्धार्थ निगम ही अदा कर रहे थे. चैनल में 'चक्रवर्ती अशोक सम्राट' टॉप रेटेड सीरियल में से एक है. गौरतलब है कि मोहित छोटे पर्दे के मशहूर कलाकार हैं. मोहित सीरियल महादेव में भगवान शिव का किरदार निभा चुके हैं. लोगों ने उनको काफी पसंद भी किया था. अशोका की भूमिका में सिद्धार्थ निगम को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था.
छोटे पर्दे का हिट शो 'चक्रवर्ती अशोक सम्राट' में अब एक नया रंग ले चुका है और इसी के साथ शो ने लीप भी ले लिया है. नए अशोक का किरदार अब मोहित रैना निभा रहे हैं. हाल में आ रही खबरों के मुताबिक एक बार फिर से इस शो में सिद्धार्थ निगम की एंट्री होने वाली है. इस बार वह अशोका नहीं बल्कि उनके बेटे का किरदार अदा करते नजर आएंगे. कलर्स पर के इस सीरियल में अशोका की भूमिका पहले सिद्धार्थ निगम ही अदा कर रहे थे. चैनल में 'चक्रवर्ती अशोक सम्राट' टॉप रेटेड सीरियल में से एक है. गौरतलब है कि मोहित छोटे पर्दे के मशहूर कलाकार हैं. मोहित सीरियल महादेव में भगवान शिव का किरदार निभा चुके हैं. लोगों ने उनको काफी पसंद भी किया था. अशोका की भूमिका में सिद्धार्थ निगम को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था.
आरबीआई में गवर्नर की नियुक्ति हो चुकी है। उर्जित पटेल की जगह अब शक्तिकांत दास आरबीआई के नए गवर्नर होंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, शक्तिकांत दास आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव हैं। नोटबंदी के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद उन्हें अब ये पदभार दिया गया है।
आरबीआई में गवर्नर की नियुक्ति हो चुकी है। उर्जित पटेल की जगह अब शक्तिकांत दास आरबीआई के नए गवर्नर होंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, शक्तिकांत दास आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव हैं। नोटबंदी के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद उन्हें अब ये पदभार दिया गया है।
भेलम नदी में इस भँवर के पड़ने का पता जो यूनानी लेखकों ने दिया है वह भंग के कहीं आस पास अनुमान किया जाता है। सिकन्दर ने भँवर से निकल कर उसी किनारे पर जहां कि इस समय भंग नगर आवाद अपने जहाजों के लंगर डलवा दिए। वहीं पर उसे सूचना मिली कि आगे बढ़कर नदी की तराई में रहनेवाली मलाया या मालवा जाति के लोग उसका मुकाबला करने पर उतारू होकर बड़ी बड़ी तयारियां कर रहे हैं और यह साहस केवल इन्हीं का नहीं है वरन आस पास के लोग भी उनकी सहायता करने को प्रस्तुत हैं । विशेष करके (झंग के) पूर्वोत्तर दिशा में बसने वाले सिवाई ( Siboi ) और एग्लेसाई ( Agalassoi ) * जाति के लोग शीघ्र ही उनकी सहायता के लिये जाने वाले हैं । यह सुनते ही सिकन्दर ने पहिले प्रबल शत्रु के सहायक सिवोई और एग्लेसेोई जाति को ही तो उस अवस्था में यद्यपि वे ऐतिहासिक लेख कल्पित मालूम होंगे, पर वास्तव में उनको कल्पित कहानी विचार करना हमारी भूल है । जो नदी श्राज से १००० वर्ष पहिले छोटा चश्मा घी वह इस समय बढ़ कर बड़ा नद बन गई तब उसके किनारे पर के गांवों का चिन्ह क्यों कर पाया जा सकता है । * सिवोई एग्लेसेाई ये दोनों शब्द यूनानी भाषा में यूनानियों के लिखे हुए हैं इनको शुद्ध संस्कृत या उस समय देश की भांषा में क्या उच्चारण था इसका पता नहीं । अंग्रेज वेत्ताओं ने निश्चय किया है कि वर्तमान जाट जति के सिवाई वंश की संतति है वे उस समय निपट असभ्य जाति की तरह रहते थे । मन करके शत्रु का पक्ष हीन करना चाहा इसलिये वह कुछ सेना जहाशी बेड़े की रक्षा पर छोड़ कर फंग हे तीस मील उत्तर पूर्व आगे बढ़ गया और पहिले उसने मिवोई जाति पर आक्रमण किया। उसने इस जाति के प्रहुत से लोगों को कत्ल करवा हाला और बहुतों को कैद करके अपनी सेना का तथा बिक्री का गुलाम बनाया । इसके बाद उसने एग्लेई जाति को घेरा । उन लोगों ने पूनामी सेना का अच्छा मुकाबला किया। इस घेरे में बहुत यूनानी सेना हताहत हुई । बीस हजार ग्राम घासी मारे गए । परन्तु तब भी जय सिकन्दर ने देखा कि इनसे लगातार युद्ध करके पार पाना कठिन है तब उसने किले पर घेरा हलवा कर किले में बाहरी खान पान की सहायता न पहुंचने देने का प्रयन्ध किया । परन्तु इससे भी उन्होंने विदेशी विजेता की शरण में सिर देना स्योकार न किया और ये बहादुर लोग स्त्री और यथों सहित आग में जल कर झापही अपने प्राण आहुति करने लगे। बहुत कुछ रोक टोक करने पर केवल तीन हजार आदमी वच सके। सिकन्दर मे उन्हें प्रसन्नता पूर्वक क्षमा करके अपना मित्र यना लिया । जय तक सिकन्दर इस भंझट से निपटा तब तक उसके गुप्त घर मालवा जाति के समाचार लेकर आगए। उन्होंने सिकन्दर से कहा कि माझ्या जाति के लोग घड़े कड़े हैं, अपनी इज्जत के पीछे जान दे देना कोई बड़ी बात नहीं समझते । छेटे घड़े से लेकर तम जाति के साथ लोगों ने यह पक्का प्रण कर लिया है कि मरते मरणामा परन्तु विदेशो विजेता के शासनाधीन होकर अपनी स्वतंत्रा सोकर ससे सिर नहीं भुकाना और विशेष आश्चर्य्यं की बात तो यह है कि मलाया जाति के पाश्र्ववर्ती अक्षयद्रय (Oxydrkai ) जाति के लोग जो कि रावी नदी के घाटी में दोनों किनारों पर निवास करते हैं और मलाया जाति के सनातन शत्रु हैं वे भी उनकी सहायता में सिर देने को प्रस्तुत हैं। उन दोनों जाति के लोगों ने अपने पूर्व वैर को बिलकुल विस्मरण कर दिया है और यह बातों की बातों में नहीं वरन एक जाति ने दूसरी जाति से परस्पर विवाह सम्बन्धी व्यवहार का सूत्र डाल कर घनिष्ट मित्रता उपार्जन करली है। उन सब लोगों का विचार है कि नहीं पर फेलम और चिनाव राव को धारा में प्रवेश करती है वहीं पर युद्ध छेड़ा जाकर अब तक अजेय विजेता पर विजय प्राप्त की जावे । उनके साथ अस्सी हजार पैदल, दस हजार सवार और नौ सौ रथी हैं । यह सुनते ही सिकन्दर के छक्को छूट गए । उसने निश्चय कर लिया कि जल यात्रा करके ऐसे प्रवल शत्रु पर जय पाना कठिन ही नहीं वरन असम्भव है । यद्यपि यूनानी सेना अत्यन्त रण थी कुशल परन्तु एक तो थल के जीव जल में, दबा दो होते हैं । अस्तु सिकन्दर ने जहाजी बेड़े को तो खाली चलने की आज्ञा दी और आप रण कुशल मैसीडोनियन सैनिकों की दर अनी लेकर थैल मार्ग से चिनाव और शव की घाटियों कों बीचों बीच होकर आगे बढ़ा और मलाया जाति की जन्मभूमि में ऐसी शीघ्रता से पहुंच गया कि वे अपना विचार बाँधते ही रह गए । उनके सहायक अक्षयद्रक्य लोग उनकी साहयता के लिये आते हुए रास्ते में ही रह गए । सिकन्दर ने वहां पहुंचते ही विजन बोल दी । मिफन्दरशाद । खेतों में किसान, जंगलों में चरवाहे, रास्ता चलते राहगीर, जो वहां मिला घरायर काटा जाने लगा। इसी तरह मार काट करते हुए सिफन्दर ने भलाया जाति के मुख्य मुख्य स्थानों पर आक्रमण करना शुरू किया । जिम फसवे पर सिकन्दर का पहिला हमला हुआ उममें दे। हजार आदमी मारे गए । पास के ही एक दूसरे गांव को परदिकश (Pendikkos) ने जा पेरा और छूट मार करके उसे तयाह कर दिया। इस अचानक आपत्ति में समस्त मलाया जाति र वजपात मा हुआ, जो जहां थे मय अपने अपने प्राण बचाने के लिये भागने लगे, कोई पहाड़ों में, कोई घाटियां में, कोई कोई दूसरे देशों को भी जाने लगे, परन्तु यूनानी ऐना ने उनका पीछा न छोड़ा । यूनानी सिपाही मालवा माति को खोज खोज कर फाटने लगे। इसी प्रकार मालवा लोग क्यों उयों पूरब की तरफ भागते जाते थे यूनानी सिपाही उनका पीछा किए जाते थे, और उन्होंने मालवा शाति का यहां तक पीछा किया जहां कि इस समय माँटगुमरी के जिले के गांव से हुए हैं। यहां पर बालवा जाति की राजधानी थी। इस गांव में प्रायः ब्राह्मण अधिक बसते पे इसी गांव में उनका राजा रहता था । इम आपत्ति प्रोत का प्रवाह सुनते ही राजा ने गढ़ के फाटक चन्द करवा दिए। इसी जाति के राजा को किले में होकर लड़ने का यह पहिला हो समय था । परन्तु यूनानी सिपाहियों ने सस दुर्ग को पढ़ी सवारी ध्वंम कर डाला । पांच हजार सिपाही मारे गए, परन्तु यूनानी सेना के हाथ जोते जागते लाग यहुत कम मिले क्योंकि ये लेग विजेता जाति का गुलाम यन कर रहने से मरना ही अच्छा समझते थे इसलिये व वहुधा परस्पर ही कट मरे । बचे सुचे मालवा लोगों ने एक दूसरे किले की शरण ली जिसका कि नाम नहीं मालूम है । परन्तु यूनानी लेखकों से इसकी स्थिति मुलतान ( मूलस्थानपूर ) से अस्सी यां नब्बे मील पूर्वोत्तर मुलतान या झंग जिले की भूमि पर अनुमान की जाती है । इस किले में सालवा जाति के पचास हजार योद्धा एकत्रित हुए, परन्तु यूनानी सिपाहियों को किले का खेद बहाना क्या बड़ी बात थी, वे तो इस कार्य कौशल में अच्छे अभ्यस्त हो रहे थे, अस्तु जिस समय लड़ाई शुरू हुई दोनों ओर से सेल, सोंग, शक्ति, भाले, बरछे आदि नाना प्रकार के हिंसक हथियार घलने लगे । तब सिकन्दर, प्यूकटस, लियोनाटस और अवरिस इन तीन साथियों सहित किले की दीवार पर चढ़ गया और वहां से खड़ा मैदान के मारके मार्क करने लगा । ज्योंही उसे क मिला वह तुरन्त ही किले के अन्दर कूद पड़ा । उसके तीनों साथियों ने भी उसका साथ न छोड़ा । इन लोगों के किले में दाखिल होते ही अवरिस तो उसी दम मारा गया । परन्तु सिकन्दर एक पेड़ की आड़ में दीवार से दबक कर खड़ा होगया । उसके अभाग्य वश उस पर मालवा सेनापति की नजर पड़ गई और उसने इसके मारने की यथासाध्य चेष्टा की । उस ओर से चलाए हुए शस्त्रों में से एक सांग सिकन्दर की छाती में ऐसी लगी कि जिससे वह उसी दम वेहेाश होकर गिर गया । परन्तु ईमान्दार साथियों ने अपनी जान हथेली पर रख कर उसे बचा लिया। इस दुर्घटना का किले
भेलम नदी में इस भँवर के पड़ने का पता जो यूनानी लेखकों ने दिया है वह भंग के कहीं आस पास अनुमान किया जाता है। सिकन्दर ने भँवर से निकल कर उसी किनारे पर जहां कि इस समय भंग नगर आवाद अपने जहाजों के लंगर डलवा दिए। वहीं पर उसे सूचना मिली कि आगे बढ़कर नदी की तराई में रहनेवाली मलाया या मालवा जाति के लोग उसका मुकाबला करने पर उतारू होकर बड़ी बड़ी तयारियां कर रहे हैं और यह साहस केवल इन्हीं का नहीं है वरन आस पास के लोग भी उनकी सहायता करने को प्रस्तुत हैं । विशेष करके पूर्वोत्तर दिशा में बसने वाले सिवाई और एग्लेसाई * जाति के लोग शीघ्र ही उनकी सहायता के लिये जाने वाले हैं । यह सुनते ही सिकन्दर ने पहिले प्रबल शत्रु के सहायक सिवोई और एग्लेसेोई जाति को ही तो उस अवस्था में यद्यपि वे ऐतिहासिक लेख कल्पित मालूम होंगे, पर वास्तव में उनको कल्पित कहानी विचार करना हमारी भूल है । जो नदी श्राज से एक हज़ार वर्ष पहिले छोटा चश्मा घी वह इस समय बढ़ कर बड़ा नद बन गई तब उसके किनारे पर के गांवों का चिन्ह क्यों कर पाया जा सकता है । * सिवोई एग्लेसेाई ये दोनों शब्द यूनानी भाषा में यूनानियों के लिखे हुए हैं इनको शुद्ध संस्कृत या उस समय देश की भांषा में क्या उच्चारण था इसका पता नहीं । अंग्रेज वेत्ताओं ने निश्चय किया है कि वर्तमान जाट जति के सिवाई वंश की संतति है वे उस समय निपट असभ्य जाति की तरह रहते थे । मन करके शत्रु का पक्ष हीन करना चाहा इसलिये वह कुछ सेना जहाशी बेड़े की रक्षा पर छोड़ कर फंग हे तीस मील उत्तर पूर्व आगे बढ़ गया और पहिले उसने मिवोई जाति पर आक्रमण किया। उसने इस जाति के प्रहुत से लोगों को कत्ल करवा हाला और बहुतों को कैद करके अपनी सेना का तथा बिक्री का गुलाम बनाया । इसके बाद उसने एग्लेई जाति को घेरा । उन लोगों ने पूनामी सेना का अच्छा मुकाबला किया। इस घेरे में बहुत यूनानी सेना हताहत हुई । बीस हजार ग्राम घासी मारे गए । परन्तु तब भी जय सिकन्दर ने देखा कि इनसे लगातार युद्ध करके पार पाना कठिन है तब उसने किले पर घेरा हलवा कर किले में बाहरी खान पान की सहायता न पहुंचने देने का प्रयन्ध किया । परन्तु इससे भी उन्होंने विदेशी विजेता की शरण में सिर देना स्योकार न किया और ये बहादुर लोग स्त्री और यथों सहित आग में जल कर झापही अपने प्राण आहुति करने लगे। बहुत कुछ रोक टोक करने पर केवल तीन हजार आदमी वच सके। सिकन्दर मे उन्हें प्रसन्नता पूर्वक क्षमा करके अपना मित्र यना लिया । जय तक सिकन्दर इस भंझट से निपटा तब तक उसके गुप्त घर मालवा जाति के समाचार लेकर आगए। उन्होंने सिकन्दर से कहा कि माझ्या जाति के लोग घड़े कड़े हैं, अपनी इज्जत के पीछे जान दे देना कोई बड़ी बात नहीं समझते । छेटे घड़े से लेकर तम जाति के साथ लोगों ने यह पक्का प्रण कर लिया है कि मरते मरणामा परन्तु विदेशो विजेता के शासनाधीन होकर अपनी स्वतंत्रा सोकर ससे सिर नहीं भुकाना और विशेष आश्चर्य्यं की बात तो यह है कि मलाया जाति के पाश्र्ववर्ती अक्षयद्रय जाति के लोग जो कि रावी नदी के घाटी में दोनों किनारों पर निवास करते हैं और मलाया जाति के सनातन शत्रु हैं वे भी उनकी सहायता में सिर देने को प्रस्तुत हैं। उन दोनों जाति के लोगों ने अपने पूर्व वैर को बिलकुल विस्मरण कर दिया है और यह बातों की बातों में नहीं वरन एक जाति ने दूसरी जाति से परस्पर विवाह सम्बन्धी व्यवहार का सूत्र डाल कर घनिष्ट मित्रता उपार्जन करली है। उन सब लोगों का विचार है कि नहीं पर फेलम और चिनाव राव को धारा में प्रवेश करती है वहीं पर युद्ध छेड़ा जाकर अब तक अजेय विजेता पर विजय प्राप्त की जावे । उनके साथ अस्सी हजार पैदल, दस हजार सवार और नौ सौ रथी हैं । यह सुनते ही सिकन्दर के छक्को छूट गए । उसने निश्चय कर लिया कि जल यात्रा करके ऐसे प्रवल शत्रु पर जय पाना कठिन ही नहीं वरन असम्भव है । यद्यपि यूनानी सेना अत्यन्त रण थी कुशल परन्तु एक तो थल के जीव जल में, दबा दो होते हैं । अस्तु सिकन्दर ने जहाजी बेड़े को तो खाली चलने की आज्ञा दी और आप रण कुशल मैसीडोनियन सैनिकों की दर अनी लेकर थैल मार्ग से चिनाव और शव की घाटियों कों बीचों बीच होकर आगे बढ़ा और मलाया जाति की जन्मभूमि में ऐसी शीघ्रता से पहुंच गया कि वे अपना विचार बाँधते ही रह गए । उनके सहायक अक्षयद्रक्य लोग उनकी साहयता के लिये आते हुए रास्ते में ही रह गए । सिकन्दर ने वहां पहुंचते ही विजन बोल दी । मिफन्दरशाद । खेतों में किसान, जंगलों में चरवाहे, रास्ता चलते राहगीर, जो वहां मिला घरायर काटा जाने लगा। इसी तरह मार काट करते हुए सिफन्दर ने भलाया जाति के मुख्य मुख्य स्थानों पर आक्रमण करना शुरू किया । जिम फसवे पर सिकन्दर का पहिला हमला हुआ उममें दे। हजार आदमी मारे गए । पास के ही एक दूसरे गांव को परदिकश ने जा पेरा और छूट मार करके उसे तयाह कर दिया। इस अचानक आपत्ति में समस्त मलाया जाति र वजपात मा हुआ, जो जहां थे मय अपने अपने प्राण बचाने के लिये भागने लगे, कोई पहाड़ों में, कोई घाटियां में, कोई कोई दूसरे देशों को भी जाने लगे, परन्तु यूनानी ऐना ने उनका पीछा न छोड़ा । यूनानी सिपाही मालवा माति को खोज खोज कर फाटने लगे। इसी प्रकार मालवा लोग क्यों उयों पूरब की तरफ भागते जाते थे यूनानी सिपाही उनका पीछा किए जाते थे, और उन्होंने मालवा शाति का यहां तक पीछा किया जहां कि इस समय माँटगुमरी के जिले के गांव से हुए हैं। यहां पर बालवा जाति की राजधानी थी। इस गांव में प्रायः ब्राह्मण अधिक बसते पे इसी गांव में उनका राजा रहता था । इम आपत्ति प्रोत का प्रवाह सुनते ही राजा ने गढ़ के फाटक चन्द करवा दिए। इसी जाति के राजा को किले में होकर लड़ने का यह पहिला हो समय था । परन्तु यूनानी सिपाहियों ने सस दुर्ग को पढ़ी सवारी ध्वंम कर डाला । पांच हजार सिपाही मारे गए, परन्तु यूनानी सेना के हाथ जोते जागते लाग यहुत कम मिले क्योंकि ये लेग विजेता जाति का गुलाम यन कर रहने से मरना ही अच्छा समझते थे इसलिये व वहुधा परस्पर ही कट मरे । बचे सुचे मालवा लोगों ने एक दूसरे किले की शरण ली जिसका कि नाम नहीं मालूम है । परन्तु यूनानी लेखकों से इसकी स्थिति मुलतान से अस्सी यां नब्बे मील पूर्वोत्तर मुलतान या झंग जिले की भूमि पर अनुमान की जाती है । इस किले में सालवा जाति के पचास हजार योद्धा एकत्रित हुए, परन्तु यूनानी सिपाहियों को किले का खेद बहाना क्या बड़ी बात थी, वे तो इस कार्य कौशल में अच्छे अभ्यस्त हो रहे थे, अस्तु जिस समय लड़ाई शुरू हुई दोनों ओर से सेल, सोंग, शक्ति, भाले, बरछे आदि नाना प्रकार के हिंसक हथियार घलने लगे । तब सिकन्दर, प्यूकटस, लियोनाटस और अवरिस इन तीन साथियों सहित किले की दीवार पर चढ़ गया और वहां से खड़ा मैदान के मारके मार्क करने लगा । ज्योंही उसे क मिला वह तुरन्त ही किले के अन्दर कूद पड़ा । उसके तीनों साथियों ने भी उसका साथ न छोड़ा । इन लोगों के किले में दाखिल होते ही अवरिस तो उसी दम मारा गया । परन्तु सिकन्दर एक पेड़ की आड़ में दीवार से दबक कर खड़ा होगया । उसके अभाग्य वश उस पर मालवा सेनापति की नजर पड़ गई और उसने इसके मारने की यथासाध्य चेष्टा की । उस ओर से चलाए हुए शस्त्रों में से एक सांग सिकन्दर की छाती में ऐसी लगी कि जिससे वह उसी दम वेहेाश होकर गिर गया । परन्तु ईमान्दार साथियों ने अपनी जान हथेली पर रख कर उसे बचा लिया। इस दुर्घटना का किले
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की क्षेत्र के खेल मैदान भदौरा में आयोजित जनसभा में भारी भीड़ एकत्र हुई। संबोधन के उपरान्त मायावती के मंच से नीचे उतरते ही बसपा के युवा कार्यकर्ताओं ने कुर्सियों को पैरों से कुचल कर तोड़ दीं। इतना ही नहीं कोविड गाइडलाइन का जमकर उल्लंघन किया गया। बहुजन समाज पार्टी की चुनावी जनसभा में भाग लेने के लिए बसपा के कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ सुबह से जुटने लगी थी। जिसमें महिलाओं की भीड़ पुरूषों से कहीं कम नजर आयी। सभा स्थल पर बसपा सुप्रीमो 13:57 पर पहुंची, स्वागत के बाद उनका करीब 30 मिनट का भाषण हुआ। इस दौरान उन्होंने सपा, भाजपा व कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए उन्हें दलित विरोधी मानसिकता वाला करार देते हुए विकास और सुशासन के मुद्दे पर बसपा की सरकार बनाने की अपील की। जैसे ही वह मंच से नीचे उतरी और साउंड पर बसपा के प्रचार वाले गाना बजने शुरू हुए वैसे ही महिलाएं व युवा उत्साह में आकर जमकर डांस करने लगे। बसपा सुप्रीमो के भाषण के दौरान जहां महिलाएं व युवा कुर्सियां पर खड़े हो जमकर नारेबाजी करते रहे, जिस दौरान हुई धक्का मुक्की में हुई भगदड़ से सैकड़ों कुर्सियां टूट गयीं। इसके बाद रही सही कसर कुर्सियों के ऊपर डांस कर उन्हें तोड़ पूरी कर दी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की क्षेत्र के खेल मैदान भदौरा में आयोजित जनसभा में भारी भीड़ एकत्र हुई। संबोधन के उपरान्त मायावती के मंच से नीचे उतरते ही बसपा के युवा कार्यकर्ताओं ने कुर्सियों को पैरों से कुचल कर तोड़ दीं। इतना ही नहीं कोविड गाइडलाइन का जमकर उल्लंघन किया गया। बहुजन समाज पार्टी की चुनावी जनसभा में भाग लेने के लिए बसपा के कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ सुबह से जुटने लगी थी। जिसमें महिलाओं की भीड़ पुरूषों से कहीं कम नजर आयी। सभा स्थल पर बसपा सुप्रीमो तेरह:सत्तावन पर पहुंची, स्वागत के बाद उनका करीब तीस मिनट का भाषण हुआ। इस दौरान उन्होंने सपा, भाजपा व कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए उन्हें दलित विरोधी मानसिकता वाला करार देते हुए विकास और सुशासन के मुद्दे पर बसपा की सरकार बनाने की अपील की। जैसे ही वह मंच से नीचे उतरी और साउंड पर बसपा के प्रचार वाले गाना बजने शुरू हुए वैसे ही महिलाएं व युवा उत्साह में आकर जमकर डांस करने लगे। बसपा सुप्रीमो के भाषण के दौरान जहां महिलाएं व युवा कुर्सियां पर खड़े हो जमकर नारेबाजी करते रहे, जिस दौरान हुई धक्का मुक्की में हुई भगदड़ से सैकड़ों कुर्सियां टूट गयीं। इसके बाद रही सही कसर कुर्सियों के ऊपर डांस कर उन्हें तोड़ पूरी कर दी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Posted On: उपराष्ट्रपति श्री एम वैंकेया नायडू ने कहा है कि देश में धर्मनिरपेक्षता की जड़ो को ओर सशक्त करना होगा और स्वार्थी तत्वो और धार्मिक चरमपंथियों द्वारा धर्म के नाम पर भेदभाव पैदा करने के प्रयासों को कुचलना होगा। श्री नायडू आज गुजरात के पवित्र उदवाड़ा गांव में ईरानशाह उदवाड़ा उत्सव-2017 के अवसर पर पारसी समुदाय के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने कहा कि भारत की मिलीजुली संस्कृति और सदाचार भारत की धर्मनिरपेक्षता का आधार है। संविधान में सम्मिलित होने से पूर्व ही धर्मनिरपेक्षता प्रत्येक भारतीय के डीएनए में है। " सर्व धर्म समभाव" भारत के धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। श्री नायडू ने कहा कि नगर में पर्यटन की संभावना को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने गन्तव्य विकास परियोजना की शुरूआत की है और ईरानशाह अग्नि मंदिर में और निकट कुछ आधारभूत सुविधाओ का निर्माण किया है।उन्होंने कहा इस विरासत नगर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया किया गया है।
Posted On: उपराष्ट्रपति श्री एम वैंकेया नायडू ने कहा है कि देश में धर्मनिरपेक्षता की जड़ो को ओर सशक्त करना होगा और स्वार्थी तत्वो और धार्मिक चरमपंथियों द्वारा धर्म के नाम पर भेदभाव पैदा करने के प्रयासों को कुचलना होगा। श्री नायडू आज गुजरात के पवित्र उदवाड़ा गांव में ईरानशाह उदवाड़ा उत्सव-दो हज़ार सत्रह के अवसर पर पारसी समुदाय के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने कहा कि भारत की मिलीजुली संस्कृति और सदाचार भारत की धर्मनिरपेक्षता का आधार है। संविधान में सम्मिलित होने से पूर्व ही धर्मनिरपेक्षता प्रत्येक भारतीय के डीएनए में है। " सर्व धर्म समभाव" भारत के धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। श्री नायडू ने कहा कि नगर में पर्यटन की संभावना को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने गन्तव्य विकास परियोजना की शुरूआत की है और ईरानशाह अग्नि मंदिर में और निकट कुछ आधारभूत सुविधाओ का निर्माण किया है।उन्होंने कहा इस विरासत नगर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया किया गया है।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। पुलिस ने फुटेज के जरिये आरोपी की पहचान कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फरार एक आरोपी की तलाश कर रही है। आदर्श नगर इलाके में शुक्रवार दोपहर पैसे की लेन-देन के विवाद में एक घोषित बदमाश ने अपने साथी के साथ मिलकर एक युवक की चाकू से गला रेत दिया। इतने पर आरोपियों का दिल नहीं भरा तो उन लोगों ने युवक के सिर पर तब तक पत्थर से हमला करते रहे जब तक वह मर नहीं गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को पास के अस्पताल में ले गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने फुटेज के जरिये आरोपी की पहचान कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फरार एक आरोपी की तलाश कर रही है। मृतक की शिनाख्त नरेंद्र उर्फ बंटी के रूप में हुई है। वह आजादपुर गांव में अपनी दिव्यांग मां के साथ रहता था। उसकी एक बहन की शादी हो चुकी है। वह ढोल बजाने का काम करता था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कृष्णा नगर इलाके में दूध कारोबारी जितेंद्र की हत्या करने वाले आरोपी प्रिंस वाधवा को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। हत्या करने के बाद आरोपी आरोपी पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार हो गया था। आरोपी के हाथ में गोली लगी है। उसे लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रिंस के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत 6 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। ढस्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद कुशवाह के अनुसार वर्ष 2021 में दिवाली की पूर्व संध्या पर प्रिंस और विकास का जितेंद्र के चचेरे भाई सन्नी से विवाद हो गया था। इसके बाद विकास व प्रिंस पंजाब भाग गए थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। पुलिस ने फुटेज के जरिये आरोपी की पहचान कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फरार एक आरोपी की तलाश कर रही है। आदर्श नगर इलाके में शुक्रवार दोपहर पैसे की लेन-देन के विवाद में एक घोषित बदमाश ने अपने साथी के साथ मिलकर एक युवक की चाकू से गला रेत दिया। इतने पर आरोपियों का दिल नहीं भरा तो उन लोगों ने युवक के सिर पर तब तक पत्थर से हमला करते रहे जब तक वह मर नहीं गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को पास के अस्पताल में ले गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने फुटेज के जरिये आरोपी की पहचान कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फरार एक आरोपी की तलाश कर रही है। मृतक की शिनाख्त नरेंद्र उर्फ बंटी के रूप में हुई है। वह आजादपुर गांव में अपनी दिव्यांग मां के साथ रहता था। उसकी एक बहन की शादी हो चुकी है। वह ढोल बजाने का काम करता था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कृष्णा नगर इलाके में दूध कारोबारी जितेंद्र की हत्या करने वाले आरोपी प्रिंस वाधवा को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। हत्या करने के बाद आरोपी आरोपी पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार हो गया था। आरोपी के हाथ में गोली लगी है। उसे लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रिंस के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत छः से ज्यादा मामले दर्ज हैं। ढस्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद कुशवाह के अनुसार वर्ष दो हज़ार इक्कीस में दिवाली की पूर्व संध्या पर प्रिंस और विकास का जितेंद्र के चचेरे भाई सन्नी से विवाद हो गया था। इसके बाद विकास व प्रिंस पंजाब भाग गए थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
महाराष्ट्र के पालघर मॉब लिंचिंग मामले में पुलिस ने तीन प्राथमिकियां दर्ज की हैं. दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के पहले मामले में अदालत ने सात में से छह आरोपियों को 19 मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया, वहीं एक किशोर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा गया. पालघरः पालघर की एक अदालत ने बुधवार को दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में गिरफ्तार 130 से ज्यादा आरोपियों में से 61 को न्यायिक हिरासत में और 51 अन्य को पुलिस हिरासत में भेज दिया. पालघर जिले के दहानू में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) एमपी जवाले की अदालत में एक किशोर समेत कुल 113 आरोपियों को पेश किया गया था. जिले के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल को घटना घटी थी, जिसमें मुंबई से कार में सवार होकर एक अंतिम संस्कार में शामिल होने सूरत जा रहे दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया था, जिसमें एक भीड़ पीड़ितों को पुलिस वैन से बाहर घसीट रही थी और डंडो-पत्थरों से पीट रही थी. इस दौरान वहां मौजूद कुछ पुलिसवाले उन्हें बचाने के बजाय खुद बचते नजर आ रहे थे. मृतकों की पहचान महाराज कल्पवृक्षगिरी (70), सुशीलगिरी महाराज (35) और चालक निलेश तेलगड़े (30) के रूप में की गई थी. पालघर जिला ग्रामीण पुलिस ने लिंचिंग की इस घटना के सिलसिले में तीन प्राथमिकियां दर्ज की हैं. स्थानीय पुलिस और राज्य सीआईडी अब तक 134 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. दो साधुओं समेत तीन लोगों की हत्या किए जाने के पहले मामले में अदालत ने सात में से छह आरोपियों को 19 मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया, वहीं एक किशोर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा गया. पुलिस पर हमला और हत्या के प्रयास में दर्ज दूसरी प्राथमिकी के मामले में 106 लोगों को अदालत में पेश किया गया जिनमें से पांच को 16 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने तीसरी प्राथमिकी के सिलसिले में 101 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से 40 को 18 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया. बाकी 61 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. (समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)
महाराष्ट्र के पालघर मॉब लिंचिंग मामले में पुलिस ने तीन प्राथमिकियां दर्ज की हैं. दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के पहले मामले में अदालत ने सात में से छह आरोपियों को उन्नीस मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया, वहीं एक किशोर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा गया. पालघरः पालघर की एक अदालत ने बुधवार को दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में गिरफ्तार एक सौ तीस से ज्यादा आरोपियों में से इकसठ को न्यायिक हिरासत में और इक्यावन अन्य को पुलिस हिरासत में भेज दिया. पालघर जिले के दहानू में न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी जवाले की अदालत में एक किशोर समेत कुल एक सौ तेरह आरोपियों को पेश किया गया था. जिले के गढ़चिंचले गांव में सोलह अप्रैल को घटना घटी थी, जिसमें मुंबई से कार में सवार होकर एक अंतिम संस्कार में शामिल होने सूरत जा रहे दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया था, जिसमें एक भीड़ पीड़ितों को पुलिस वैन से बाहर घसीट रही थी और डंडो-पत्थरों से पीट रही थी. इस दौरान वहां मौजूद कुछ पुलिसवाले उन्हें बचाने के बजाय खुद बचते नजर आ रहे थे. मृतकों की पहचान महाराज कल्पवृक्षगिरी , सुशीलगिरी महाराज और चालक निलेश तेलगड़े के रूप में की गई थी. पालघर जिला ग्रामीण पुलिस ने लिंचिंग की इस घटना के सिलसिले में तीन प्राथमिकियां दर्ज की हैं. स्थानीय पुलिस और राज्य सीआईडी अब तक एक सौ चौंतीस लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. दो साधुओं समेत तीन लोगों की हत्या किए जाने के पहले मामले में अदालत ने सात में से छह आरोपियों को उन्नीस मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया, वहीं एक किशोर आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा गया. पुलिस पर हमला और हत्या के प्रयास में दर्ज दूसरी प्राथमिकी के मामले में एक सौ छः लोगों को अदालत में पेश किया गया जिनमें से पांच को सोलह मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने तीसरी प्राथमिकी के सिलसिले में एक सौ एक लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से चालीस को अट्ठारह मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया. बाकी इकसठ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
सामासिक प्रातिपदिकों का रूप निर्माण ए.) से घि अपने कतिपय समासों में स्वरपात का वहन करते हैं : यथा इपुधि॑िर्ध, गर्भधिं, पुच्छधिं । १२७७ - वन् प्रयत्य अंतवाले शब्दों से युक्त समास ( उपसर्गों के साथ संयोगों की तरह : ११६९ इ ) उत्तरपद के स्वरपात का वहन करते हैं : अर्थात् धातुमूलक अक्षर पर । अ - अर्थात् सोमपा॑वन् सोम-पीने वाला, बलदावन् वल देनेवाला पापरृत्वन् पाप करने वाला, बहुसूवन् बहुत देने वाला, तल्पशवन् पलंग पर सोनेवाला, रथया॑वन् रथ पर जाने वाला, द्रुर्षदन् वृक्ष पर बैठने वाला, अग्रॅ. खरी स्त्री० आगे जानेवाली । मा॒तरि॑श्व॒ और मा॒तरभ्व॑न् संदिग्ध शब्दों का स्वरपात नियमविरुद्ध हैं। आ - अंत्य मन् से युक्त कुछ समासों में उसी नियम की प्राप्ति मालूम होती है जो वन् से युक्त समासों में : यथा - स्वादुक्ष॑द्मन् मिठाइयों को बाँटता हुआ, आशुहेमन् अश्व प्रोत्साहन । १२७८ --अन्य प्रत्ययान्त शब्दों से युक्त समास, विरल अथवा विकीर्ण प्रयोग वाले, संक्षेप में निर्दिष्ट किये जा सकते हैंः यथा --इ-अंन्तवाले, राष्ट्र दिप्सु॑, देवपो॑यु, गोविन्दु, वनर्गु. ( ? ) : तुलनीय ११७८ उ; - तु या त्नु अंतवाले; लोककृ॒त्नु॑, सुरूपकृत्नु॑ : तुलनीय ११९६; - तू अंन्तवाले, नृपार्ट, मान्धार्ट, हरकर्तृ, (वसुधा॑तरस, अ० वे०, निस्संदेह भ्रामक पाठ है ) । असु प्रत्यय अंतवाले शब्द समास में ( जैसा कि उपसर्गों के साथ संयोग में : ऊपर, ११५१ क ) कम प्रयुक्त हैं, तथा साधारण संज्ञाओं की तरह गृहीत - जैसे मालूम होते हैं : यथा, यज्ञवच॑स् ( किंतु हिरण्यतेजस्, अ० वे० ) । २ - वर्णनात्मक समास १२७९ - निर्धारक वर्ग के इस विभाग में पूर्वपद किसी स्पष्ट विभक्तिरूप के संबंध के बिना उत्तरपद के साथ रहता है, किंतु विशेषण अथवा क्रियाविशेषण के रूप से उसकी विशेषता बतलाता है, जिस प्रकार वह ( उत्तरपद ) संज्ञा अथवा विशेषण है । अ - उदाहरण हैं : नीलोत्पल नीला कमल, सर्वगुण सब सद्गुण, प्रियसख प्रियमित्र, महर्षि महर्षि, रजतपात्रे चाँदी का कटोरा, अंज्ञात अविदित, सुकृत अच्छी तरह से किया हुआ, दुष्कृत वुरा काम, पुरुष्टुत अधिक प्रशंसित, पुनर्णव फिर से नवीन किया गया ।
सामासिक प्रातिपदिकों का रूप निर्माण ए.) से घि अपने कतिपय समासों में स्वरपात का वहन करते हैं : यथा इपुधि॑िर्ध, गर्भधिं, पुच्छधिं । एक हज़ार दो सौ सतहत्तर - वन् प्रयत्य अंतवाले शब्दों से युक्त समास उत्तरपद के स्वरपात का वहन करते हैं : अर्थात् धातुमूलक अक्षर पर । अ - अर्थात् सोमपा॑वन् सोम-पीने वाला, बलदावन् वल देनेवाला पापरृत्वन् पाप करने वाला, बहुसूवन् बहुत देने वाला, तल्पशवन् पलंग पर सोनेवाला, रथया॑वन् रथ पर जाने वाला, द्रुर्षदन् वृक्ष पर बैठने वाला, अग्रॅ. खरी स्त्रीशून्य आगे जानेवाली । मा॒तरि॑श्व॒ और मा॒तरभ्व॑न् संदिग्ध शब्दों का स्वरपात नियमविरुद्ध हैं। आ - अंत्य मन् से युक्त कुछ समासों में उसी नियम की प्राप्ति मालूम होती है जो वन् से युक्त समासों में : यथा - स्वादुक्ष॑द्मन् मिठाइयों को बाँटता हुआ, आशुहेमन् अश्व प्रोत्साहन । एक हज़ार दो सौ अठहत्तर --अन्य प्रत्ययान्त शब्दों से युक्त समास, विरल अथवा विकीर्ण प्रयोग वाले, संक्षेप में निर्दिष्ट किये जा सकते हैंः यथा --इ-अंन्तवाले, राष्ट्र दिप्सु॑, देवपो॑यु, गोविन्दु, वनर्गु. : तुलनीय एक हज़ार एक सौ अठहत्तर उ; - तु या त्नु अंतवाले; लोककृ॒त्नु॑, सुरूपकृत्नु॑ : तुलनीय एक हज़ार एक सौ छियानवे; - तू अंन्तवाले, नृपार्ट, मान्धार्ट, हरकर्तृ, । असु प्रत्यय अंतवाले शब्द समास में कम प्रयुक्त हैं, तथा साधारण संज्ञाओं की तरह गृहीत - जैसे मालूम होते हैं : यथा, यज्ञवच॑स् । दो - वर्णनात्मक समास एक हज़ार दो सौ उन्यासी - निर्धारक वर्ग के इस विभाग में पूर्वपद किसी स्पष्ट विभक्तिरूप के संबंध के बिना उत्तरपद के साथ रहता है, किंतु विशेषण अथवा क्रियाविशेषण के रूप से उसकी विशेषता बतलाता है, जिस प्रकार वह संज्ञा अथवा विशेषण है । अ - उदाहरण हैं : नीलोत्पल नीला कमल, सर्वगुण सब सद्गुण, प्रियसख प्रियमित्र, महर्षि महर्षि, रजतपात्रे चाँदी का कटोरा, अंज्ञात अविदित, सुकृत अच्छी तरह से किया हुआ, दुष्कृत वुरा काम, पुरुष्टुत अधिक प्रशंसित, पुनर्णव फिर से नवीन किया गया ।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। 70 के दशक से ही राजनीति का सफर शुरू करने वाले देशमुख ने 1992 में जिला परिषद का चुनाव जीता था। 1995 में जब उन्होंने निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता था। उस समय महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना की गठबंधन की सरकार थी। उस वक्त देशमुख गठबंधन सरकार के साथ हो लिए थे और गठबंधन की सरकार में पहली बार मंत्री बने थे। महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख। रिश्वत व मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (71) को आखिरकार सोमवार देर रात प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले ईडी ने देशमुख आठ घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। देशमुख सोमवार को दोपहर करीब 12 बजे दक्षिण मुंबई के बेलार्ड एस्टेट स्थित ईडी के दफ्तर पहुंचे। उसके बाद ईडी के सहायक निदेशक तासीन सुल्तान और उनकी टीम देशमुख से लगातार पूछताछ की। रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग मामला उस समय सुर्खियों में आया जब मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख के खिलाफ जबरन वसूली के सनसनीखेज आरोप लगाए थे। आइए, महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाले इस मामले से संबंधित घटनाओं को एक टाइमलाइन के माध्यम से समझते हैं। मार्च 2021: मुंबई के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर एनसीपी नेता अनिल देशमुख के खिलाफ जबरन वसूली का आरोप लगाया, जो उस समय राज्य के गृह मंत्री थे। सिंह ने आरोप लगाया कि राकांपा नेता ने निलंबित एपीआई सचिन वाजे को मुंबई में 1750 बार, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों से प्रति माह 100 करोड़ रुपये निकालने के लिए कहा था। 5 अप्रैल 2021: महाराष्ट्र के गृह मंत्री के रूप में कार्यरत एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ मुंबई के पूर्व सीपी परमबीर सिंह के आरोपों की सीबीआई प्रारंभिक जांच के आदेश दिए जाने के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। 10 मई 2021: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल देशमुख के खिलाफ मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दायर की। 25 जून 2021: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले से संबंधित पूछताछ के लिए अनिल देशमुख को समन जारी किया। हालांकि, देशमुख पेश नहीं हुए। 29 जून 2021: एजेंसी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री को एक बार फिर तलब किया। इस बार भी देशमुख पेश नहीं हुए। 05 जुलाई 2021: अनिल देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की मांग की और इसके जरिए तीसरी बार ईडी के समन को टाला। 16 जुलाई 2021: अनिल देशमुख चौथी बार ईडी का समन मिलने पर भी पेश नहीं हुए। 17 अगस्त 2021: प्रवर्तन निदेशालय ने पांचवीं बार अनिल देशमुख को तलब किया। 02 सितंबर 2021: अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की। 29 अक्तूबर 2021: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख द्वारा ईडी द्वारा उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। 01 नवंबर 2021: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश हुए। करीब आठ घंटे से अधिक समय तक चली इस पूछताछ के बाद देर रात देशमुख को गिरफ्तार कर लिया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। सत्तर के दशक से ही राजनीति का सफर शुरू करने वाले देशमुख ने एक हज़ार नौ सौ बानवे में जिला परिषद का चुनाव जीता था। एक हज़ार नौ सौ पचानवे में जब उन्होंने निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता था। उस समय महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना की गठबंधन की सरकार थी। उस वक्त देशमुख गठबंधन सरकार के साथ हो लिए थे और गठबंधन की सरकार में पहली बार मंत्री बने थे। महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख। रिश्वत व मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को आखिरकार सोमवार देर रात प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले ईडी ने देशमुख आठ घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। देशमुख सोमवार को दोपहर करीब बारह बजे दक्षिण मुंबई के बेलार्ड एस्टेट स्थित ईडी के दफ्तर पहुंचे। उसके बाद ईडी के सहायक निदेशक तासीन सुल्तान और उनकी टीम देशमुख से लगातार पूछताछ की। रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग मामला उस समय सुर्खियों में आया जब मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख के खिलाफ जबरन वसूली के सनसनीखेज आरोप लगाए थे। आइए, महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाले इस मामले से संबंधित घटनाओं को एक टाइमलाइन के माध्यम से समझते हैं। मार्च दो हज़ार इक्कीस: मुंबई के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर एनसीपी नेता अनिल देशमुख के खिलाफ जबरन वसूली का आरोप लगाया, जो उस समय राज्य के गृह मंत्री थे। सिंह ने आरोप लगाया कि राकांपा नेता ने निलंबित एपीआई सचिन वाजे को मुंबई में एक हज़ार सात सौ पचास बार, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों से प्रति माह एक सौ करोड़ रुपये निकालने के लिए कहा था। पाँच अप्रैल दो हज़ार इक्कीस: महाराष्ट्र के गृह मंत्री के रूप में कार्यरत एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ मुंबई के पूर्व सीपी परमबीर सिंह के आरोपों की सीबीआई प्रारंभिक जांच के आदेश दिए जाने के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। दस मई दो हज़ार इक्कीस: प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल देशमुख के खिलाफ मामले की सूचना रिपोर्ट दायर की। पच्चीस जून दो हज़ार इक्कीस: प्रवर्तन निदेशालय ने मामले से संबंधित पूछताछ के लिए अनिल देशमुख को समन जारी किया। हालांकि, देशमुख पेश नहीं हुए। उनतीस जून दो हज़ार इक्कीस: एजेंसी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री को एक बार फिर तलब किया। इस बार भी देशमुख पेश नहीं हुए। पाँच जुलाई दो हज़ार इक्कीस: अनिल देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की मांग की और इसके जरिए तीसरी बार ईडी के समन को टाला। सोलह जुलाई दो हज़ार इक्कीस: अनिल देशमुख चौथी बार ईडी का समन मिलने पर भी पेश नहीं हुए। सत्रह अगस्त दो हज़ार इक्कीस: प्रवर्तन निदेशालय ने पांचवीं बार अनिल देशमुख को तलब किया। दो सितंबर दो हज़ार इक्कीस: अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की। उनतीस अक्तूबर दो हज़ार इक्कीस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख द्वारा ईडी द्वारा उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। एक नवंबर दो हज़ार इक्कीस: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश हुए। करीब आठ घंटे से अधिक समय तक चली इस पूछताछ के बाद देर रात देशमुख को गिरफ्तार कर लिया गया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Tejashwi ने भाजपा के एक प्रचार की हवा निकाल दी। कहा कि उनके विधायक सुधाकर सिंह भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। पार्टी बरदाश्त नहीं करेगी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सोमवार को साफ-साफ कह दिया कि राजद विधायक सुधाकर सिंह दरअसल भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। हमारी पार्टी इसे बरदाश्त नहीं करेगी। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद बीमार है, फिर भी उनके संज्ञान में है। इसी के साथ तेजस्वी यादव ने भाजपा के उस प्रचार की हवा निकाल दी, जिसमें कहा जा रहा था कि सुधाकर सिंह खद नहीं बोल रहे हैं, बल्कि तेजस्वी यादव ही बोलवा रहे हैं। तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ समाधान यात्रा मेें सारण में थे। वहां से पटना के लिए रवाना होने से पूर्व पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सुधाकर सिंह लगातार महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। क्या उन पर कोई कार्रवाई होगी। इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने कहा कि सुधाकर सिंह जो बोल रहे हैं, साफ है कि वे भाजपा की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं। पार्टी इसे बरदाश्त नहीं करेगी। तेजस्वी यादव के इस बयान को यह भी माना जा सकता है कि वे सुधाकर सिंह को विद्रोही करार दे चुके हैं। भाजपा लगातार इस बात का दावा कर रही है कि सुधाकर सिंह से खुद लालू परिवार बोलवा रहा है। सोमवार को भी भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राजद के लिए नीतीश कुमार बोझ बन चुके हैं। वैसे महागठबंधन सरकार बनने के तुरत बाद से ही भाजपा कहती रही है कि यह सरकार नहीं चलेगी। तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से यह भी कहा कि उनका पूरा फोकस 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देना है, जो देश में नफरत की राजनीति कर रही है। इधर, राजद औक जदयू दोनों ने जाति जनगणना पर भाजपा को घेरा है। राजद ने कहा कि जाति जनगणना पर भाजपा भ्रम फैला रही है। उसके एक नेता जाति जनगणना पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरे नेता कह रहे हैं कि यह फैसला पूर्व की एनडीए सरकार का है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राजद विधायक सुधाकर सिंह पर राजद कब कार्रवाई करती है।
Tejashwi ने भाजपा के एक प्रचार की हवा निकाल दी। कहा कि उनके विधायक सुधाकर सिंह भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। पार्टी बरदाश्त नहीं करेगी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सोमवार को साफ-साफ कह दिया कि राजद विधायक सुधाकर सिंह दरअसल भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। हमारी पार्टी इसे बरदाश्त नहीं करेगी। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद बीमार है, फिर भी उनके संज्ञान में है। इसी के साथ तेजस्वी यादव ने भाजपा के उस प्रचार की हवा निकाल दी, जिसमें कहा जा रहा था कि सुधाकर सिंह खद नहीं बोल रहे हैं, बल्कि तेजस्वी यादव ही बोलवा रहे हैं। तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ समाधान यात्रा मेें सारण में थे। वहां से पटना के लिए रवाना होने से पूर्व पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सुधाकर सिंह लगातार महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। क्या उन पर कोई कार्रवाई होगी। इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने कहा कि सुधाकर सिंह जो बोल रहे हैं, साफ है कि वे भाजपा की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं। पार्टी इसे बरदाश्त नहीं करेगी। तेजस्वी यादव के इस बयान को यह भी माना जा सकता है कि वे सुधाकर सिंह को विद्रोही करार दे चुके हैं। भाजपा लगातार इस बात का दावा कर रही है कि सुधाकर सिंह से खुद लालू परिवार बोलवा रहा है। सोमवार को भी भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राजद के लिए नीतीश कुमार बोझ बन चुके हैं। वैसे महागठबंधन सरकार बनने के तुरत बाद से ही भाजपा कहती रही है कि यह सरकार नहीं चलेगी। तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से यह भी कहा कि उनका पूरा फोकस दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देना है, जो देश में नफरत की राजनीति कर रही है। इधर, राजद औक जदयू दोनों ने जाति जनगणना पर भाजपा को घेरा है। राजद ने कहा कि जाति जनगणना पर भाजपा भ्रम फैला रही है। उसके एक नेता जाति जनगणना पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरे नेता कह रहे हैं कि यह फैसला पूर्व की एनडीए सरकार का है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राजद विधायक सुधाकर सिंह पर राजद कब कार्रवाई करती है।
प्रेमी के साथ फरार हुई नाबालिक प्रेमिका अब हुआ यह.. उत्तर प्रदेश के बरेली में भमोरा थाना क्षेत्र के निवासी एक युवक को पुलिस ने एक नाबालिग लड़की को परिवार वालों की अनुमति के बिना घर से भगा ले जाकर शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने ही दोस्त की नाबालिग बहन को परिजनों की अनुमति के बिना घर से ले जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि भमोरा निवासी बृजपाल बीते 09 सितंबर को मौका पाकर अपने दोस्त की 17 वर्षीय बहिन को उसके घर से अपने साथ भगा कर ले गया। वारदात के वक्त युवती अपने घर पर अकेली थी। लड़की के परिजनों ने उसकी काफी तलाश की। जब वह नहीं मिली तो 13 सितंबर को गांव के ही 20 वर्षीय बृजपाल के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। शनिवार देर शाम पुलिस ने युवक व लड़की को हिरासत में लिया है। सोमवार को मेडिकल के बाद युवक और किशोरी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। और उप निरीक्षक मदन पाल के नेतृत्व में भमोरा पुलिस ने चांड़पुर चौराहे से किशोरी और ब्रजपाल को पकड़ लिया। भमोरा थाना प्रभारी प्रयागराज सिंह ने बताया कि रविवार दोपहर दोनों को मेडिकल हेतु भेजा गया है तथा कार्यवाही जारी है।
प्रेमी के साथ फरार हुई नाबालिक प्रेमिका अब हुआ यह.. उत्तर प्रदेश के बरेली में भमोरा थाना क्षेत्र के निवासी एक युवक को पुलिस ने एक नाबालिग लड़की को परिवार वालों की अनुमति के बिना घर से भगा ले जाकर शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने ही दोस्त की नाबालिग बहन को परिजनों की अनुमति के बिना घर से ले जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि भमोरा निवासी बृजपाल बीते नौ सितंबर को मौका पाकर अपने दोस्त की सत्रह वर्षीय बहिन को उसके घर से अपने साथ भगा कर ले गया। वारदात के वक्त युवती अपने घर पर अकेली थी। लड़की के परिजनों ने उसकी काफी तलाश की। जब वह नहीं मिली तो तेरह सितंबर को गांव के ही बीस वर्षीय बृजपाल के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। शनिवार देर शाम पुलिस ने युवक व लड़की को हिरासत में लिया है। सोमवार को मेडिकल के बाद युवक और किशोरी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। और उप निरीक्षक मदन पाल के नेतृत्व में भमोरा पुलिस ने चांड़पुर चौराहे से किशोरी और ब्रजपाल को पकड़ लिया। भमोरा थाना प्रभारी प्रयागराज सिंह ने बताया कि रविवार दोपहर दोनों को मेडिकल हेतु भेजा गया है तथा कार्यवाही जारी है।
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बिहार में हो रही जातिगत जनगणना को लेकर कोड जारी कर दिये गए हैं (फाइल फोटो) पटना. भले ही आपके लिए यह चौंकाने वाली बात हो पर ये हकीकत है कि बिहार में अब जातियों की पहचान कोड के जरिए होगी. बिहार में जातीय जनगणना जारी है और पहले चरण का गणना खत्म हो चुकी है. 15 अप्रैल से दूसरे चरण की गणना शुरू होने वाली है. जाति आधारित जनगणना के दूसरे चरण में जातियों की पहचान दिए गए अलग-अलग कोड के जरिए होगी. दूसरे चरण में प्रपत्र के अलावा पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए जाति के अंकों के आाधार पर बनाए गए कोड भरे जाएंगे जिससे जातियों की पहचान हो जाएगी. 15 अप्रैल से होने वाली दूसरे चरण की गणना में 215 और एक अन्य मिलाकर कुल 216 जातियों की आबादी की गिनती होगी. 11 अप्रैल तक अधिकारियों से लेकर गणनाकर्मियों तक को प्रशिक्षण दिया जाएगा. कोड या अंक का उपयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करने के लिए किया जा सकेगा. जातीय आधारित जनगणना में विभिन्न जातियों के लिए अलग-अलग कोड का इस्तेमाल किया गया है. कुल 216 जातियों के कोड पर नजर डालें तो एक नंबर पर अगरिया जाति है. अन्य का कोड 216 है वहीं केवानी जाति के लिए 215 वां कोड इस्तेमाल किया गया है. सवर्ण जातियों की बात करें तो भूमिहार के लिए 144, कायस्थ के लिये 22, ब्राह्मण के लिए 128, राजपूत के लिए 171 है. कुर्मी जाति का अंक 25 और कुशवाहा कोइरी का 27 है. यादव जाति में ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप, लक्ष्मीनारायण गोला के लिए 167 है. बनिया जाति में सूढ़ी, गोदक, मायरा, रोनियार, पंसारी, मोदी, कसेरा, केसरवानी, ठठेरा, कलवार, कमलापुरी वैश्य, माहुरी वैश्य, बंगी वैश्य, वैश्य पोद्दार, बर्नवाल, अग्रहरी वैश्य, कसौधन, गंधबनिक, बाथम वैश्य, गोलदार आदि शामिल हैं. 15 अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित जनगणना में मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे जातियों के दुबारा गणना होने से बचा जा सकेगा. अगर एक ही परिवार के जातियों की गणना दो जगहों से दुबारा कराई जाएगी तो एप के जरिए पकड़ में आ सकता है. .
बिहार में हो रही जातिगत जनगणना को लेकर कोड जारी कर दिये गए हैं पटना. भले ही आपके लिए यह चौंकाने वाली बात हो पर ये हकीकत है कि बिहार में अब जातियों की पहचान कोड के जरिए होगी. बिहार में जातीय जनगणना जारी है और पहले चरण का गणना खत्म हो चुकी है. पंद्रह अप्रैल से दूसरे चरण की गणना शुरू होने वाली है. जाति आधारित जनगणना के दूसरे चरण में जातियों की पहचान दिए गए अलग-अलग कोड के जरिए होगी. दूसरे चरण में प्रपत्र के अलावा पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए जाति के अंकों के आाधार पर बनाए गए कोड भरे जाएंगे जिससे जातियों की पहचान हो जाएगी. पंद्रह अप्रैल से होने वाली दूसरे चरण की गणना में दो सौ पंद्रह और एक अन्य मिलाकर कुल दो सौ सोलह जातियों की आबादी की गिनती होगी. ग्यारह अप्रैल तक अधिकारियों से लेकर गणनाकर्मियों तक को प्रशिक्षण दिया जाएगा. कोड या अंक का उपयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करने के लिए किया जा सकेगा. जातीय आधारित जनगणना में विभिन्न जातियों के लिए अलग-अलग कोड का इस्तेमाल किया गया है. कुल दो सौ सोलह जातियों के कोड पर नजर डालें तो एक नंबर पर अगरिया जाति है. अन्य का कोड दो सौ सोलह है वहीं केवानी जाति के लिए दो सौ पंद्रह वां कोड इस्तेमाल किया गया है. सवर्ण जातियों की बात करें तो भूमिहार के लिए एक सौ चौंतालीस, कायस्थ के लिये बाईस, ब्राह्मण के लिए एक सौ अट्ठाईस, राजपूत के लिए एक सौ इकहत्तर है. कुर्मी जाति का अंक पच्चीस और कुशवाहा कोइरी का सत्ताईस है. यादव जाति में ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप, लक्ष्मीनारायण गोला के लिए एक सौ सरसठ है. बनिया जाति में सूढ़ी, गोदक, मायरा, रोनियार, पंसारी, मोदी, कसेरा, केसरवानी, ठठेरा, कलवार, कमलापुरी वैश्य, माहुरी वैश्य, बंगी वैश्य, वैश्य पोद्दार, बर्नवाल, अग्रहरी वैश्य, कसौधन, गंधबनिक, बाथम वैश्य, गोलदार आदि शामिल हैं. पंद्रह अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित जनगणना में मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे जातियों के दुबारा गणना होने से बचा जा सकेगा. अगर एक ही परिवार के जातियों की गणना दो जगहों से दुबारा कराई जाएगी तो एप के जरिए पकड़ में आ सकता है. .
अरास कार्गो के लिए प्रबंध न्यासी बोर्ड की नियुक्ति की गई हैः ग्रुप ए के शेयरधारकों द्वारा इस्तांबुल अनातोलियन चतुर्थ वाणिज्यिक न्यायालय में प्रथम दृष्टया आवेदन के परिणामस्वरूप, जिनके पास अरास कार्गो ज्वाइंट स्टॉक कंपनी के 48,13% शेयर हैं, अरास होल्डिंग के अध्यक्ष निदेशक मंडल बैरिस बरन अरास और मेराल अरास। 4 मई, 5 को अदालत द्वारा अरास कार्गो में न्यासी बोर्ड नियुक्त किया गया था। न्यासी मंडल में मेहमत योरुलमेज़र, यासीन दोआन, उगुर गुरसोय, एरकन गुर और युरदाकुल ट्यूनर शामिल हैं। चूंकि इलेरी AKINCI, जिन्हें पहले इस्तांबुल अनातोलियन 9वें वाणिज्यिक न्यायालय के प्रथम दृष्टया द्वारा कंपनी के प्रतिनिधि ट्रस्टी के रूप में नियुक्त किया गया था, के पास सीमित शक्तियां थीं, अदालत द्वारा प्रतिनिधि ट्रस्टी को दी गई अस्थायी प्रबंधन शक्तियां समाप्त कर दी गई थीं, और कंपनी ने वर्तमान में ऐसा नहीं किया था। निदेशक मंडल, कंपनी के ग्रुप ए शेयरधारक, मेराल एआरएएस और बारिस, इस्तांबुल अनातोलियन चतुर्थ वाणिज्यिक न्यायालय के प्रथम दृष्टया न्यायालय में बारान अरास के आवेदन के परिणामस्वरूप; यह निर्णय लिया गया कि कंपनी अव्यवस्थित थी और एक "प्रबंधन ट्रस्टी" को तत्काल नियुक्त किया जाना चाहिए और कंपनी में 4-व्यक्ति प्रबंध ट्रस्टी नियुक्त किए जाएंगे और उन्हें कम से कम संयुक्त हस्ताक्षर के साथ कंपनी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया जाएगा। दो ट्रस्टी. इस प्रकार, कंपनी के प्रभावी संचालन में आने वाली बाधाएँ समाप्त हो गईं। जब पोस्ट 5 जीएमबीएच (ऑस्ट्रियन पोस्ट) के प्रतिनिधि, कंपनी के 2017% शेयरों के साथ एक ग्रुप बी शेयरधारक, जो 25 मई, 206 को एक सहायक हस्तक्षेपकर्ता के रूप में आयोजित सुनवाई में शामिल हुए, ने भी नियुक्ति के अनुरोध का समर्थन किया। ट्रस्टी, कंपनी के कुल 73,13% लोगों के समर्थन से प्रक्रिया तेज हो गई और अदालत ने एक प्रबंध ट्रस्टी नियुक्त किया। अपने आवेदन के परिणामस्वरूप नियुक्त ट्रस्टी के बारे में एक बयान देते हुए, बारिस बरन अरास ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि नया ट्रस्टी बोर्ड लंबे समय से चली आ रही अंतर-शेयरधारक प्रक्रिया को स्वस्थ और कुशल तरीके से प्रबंधित करने में सकारात्मक कदम उठाएगा। इस बात पर जोर देते हुए कि अरास कार्गो को जल्द से जल्द सुलह के आधार पर तेजी से विकास और नए निवेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, बरन अरास ने कहा कि कार्गो उद्योग का सबसे मूल्यवान ब्रांड अरास कार्गो सकारात्मक माहौल में अपने सभी लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकता है। अरास कार्गो ए.Ş अपने 19 क्षेत्रीय निदेशालयों, 28 स्थानांतरण केंद्रों, 825 शाखाओं, 3 वाहनों के बेड़े और 320 हजार कर्मचारियों के साथ हर महीने 12 मिलियन ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। ऑस्ट्रियन पोस्ट, जो 12 में 2013 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अरास कार्गो में भागीदार बना, ने 25 में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को 75 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए एक प्रक्रिया शुरू की और इस प्रक्रिया को जिनेवा अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता में लाया गया। जैसा कि ज्ञात है, पिछले फरवरी में एक वाणिज्यिक ट्रस्टी नियुक्त किया गया था, लेकिन प्रशासनिक और अंतर-शेयरधारक प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं दिया गया था।
अरास कार्गो के लिए प्रबंध न्यासी बोर्ड की नियुक्ति की गई हैः ग्रुप ए के शेयरधारकों द्वारा इस्तांबुल अनातोलियन चतुर्थ वाणिज्यिक न्यायालय में प्रथम दृष्टया आवेदन के परिणामस्वरूप, जिनके पास अरास कार्गो ज्वाइंट स्टॉक कंपनी के अड़तालीस,तेरह% शेयर हैं, अरास होल्डिंग के अध्यक्ष निदेशक मंडल बैरिस बरन अरास और मेराल अरास। चार मई, पाँच को अदालत द्वारा अरास कार्गो में न्यासी बोर्ड नियुक्त किया गया था। न्यासी मंडल में मेहमत योरुलमेज़र, यासीन दोआन, उगुर गुरसोय, एरकन गुर और युरदाकुल ट्यूनर शामिल हैं। चूंकि इलेरी AKINCI, जिन्हें पहले इस्तांबुल अनातोलियन नौवें वाणिज्यिक न्यायालय के प्रथम दृष्टया द्वारा कंपनी के प्रतिनिधि ट्रस्टी के रूप में नियुक्त किया गया था, के पास सीमित शक्तियां थीं, अदालत द्वारा प्रतिनिधि ट्रस्टी को दी गई अस्थायी प्रबंधन शक्तियां समाप्त कर दी गई थीं, और कंपनी ने वर्तमान में ऐसा नहीं किया था। निदेशक मंडल, कंपनी के ग्रुप ए शेयरधारक, मेराल एआरएएस और बारिस, इस्तांबुल अनातोलियन चतुर्थ वाणिज्यिक न्यायालय के प्रथम दृष्टया न्यायालय में बारान अरास के आवेदन के परिणामस्वरूप; यह निर्णय लिया गया कि कंपनी अव्यवस्थित थी और एक "प्रबंधन ट्रस्टी" को तत्काल नियुक्त किया जाना चाहिए और कंपनी में चार-व्यक्ति प्रबंध ट्रस्टी नियुक्त किए जाएंगे और उन्हें कम से कम संयुक्त हस्ताक्षर के साथ कंपनी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया जाएगा। दो ट्रस्टी. इस प्रकार, कंपनी के प्रभावी संचालन में आने वाली बाधाएँ समाप्त हो गईं। जब पोस्ट पाँच जीएमबीएच के प्रतिनिधि, कंपनी के दो हज़ार सत्रह% शेयरों के साथ एक ग्रुप बी शेयरधारक, जो पच्चीस मई, दो सौ छः को एक सहायक हस्तक्षेपकर्ता के रूप में आयोजित सुनवाई में शामिल हुए, ने भी नियुक्ति के अनुरोध का समर्थन किया। ट्रस्टी, कंपनी के कुल तिहत्तर,तेरह% लोगों के समर्थन से प्रक्रिया तेज हो गई और अदालत ने एक प्रबंध ट्रस्टी नियुक्त किया। अपने आवेदन के परिणामस्वरूप नियुक्त ट्रस्टी के बारे में एक बयान देते हुए, बारिस बरन अरास ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि नया ट्रस्टी बोर्ड लंबे समय से चली आ रही अंतर-शेयरधारक प्रक्रिया को स्वस्थ और कुशल तरीके से प्रबंधित करने में सकारात्मक कदम उठाएगा। इस बात पर जोर देते हुए कि अरास कार्गो को जल्द से जल्द सुलह के आधार पर तेजी से विकास और नए निवेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, बरन अरास ने कहा कि कार्गो उद्योग का सबसे मूल्यवान ब्रांड अरास कार्गो सकारात्मक माहौल में अपने सभी लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकता है। अरास कार्गो ए.Ş अपने उन्नीस क्षेत्रीय निदेशालयों, अट्ठाईस स्थानांतरण केंद्रों, आठ सौ पच्चीस शाखाओं, तीन वाहनों के बेड़े और तीन सौ बीस हजार कर्मचारियों के साथ हर महीने बारह मिलियन ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। ऑस्ट्रियन पोस्ट, जो बारह में दो हज़ार तेरह प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अरास कार्गो में भागीदार बना, ने पच्चीस में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को पचहत्तर प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए एक प्रक्रिया शुरू की और इस प्रक्रिया को जिनेवा अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता में लाया गया। जैसा कि ज्ञात है, पिछले फरवरी में एक वाणिज्यिक ट्रस्टी नियुक्त किया गया था, लेकिन प्रशासनिक और अंतर-शेयरधारक प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं दिया गया था।
बेंगलुरु - कर्नाटक में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. राज्य में मरीजों की संख्या 90 हज़ार को पार कर गई है. इस बीच एक खबर आई की राजधानी बेंगलुरु में कोरोना के 3338 मरीज़ गायब हो गए हैं. आखिर वे कहां गए इनका कोई अता पता नहीं है. फिलहाल प्रशासन इनकी तलाश में जुटा है. अगर हिसाब लगाया जाए तो ये शहर में कुल कोरोना वायरस पॉजिटिव लोगों की संख्या का 7 प्रतिशत हिस्सा है. अब मरीजों का सैंपल लेने से पहले सरकार इन सबका पहचान पत्र देख रही है. इसके अलावा इनके मोबाइल नंबर को भी वेरिफाई किया जाएगा. उप मुख्यमंत्री डॉ. अश्वत नारायण ने कहा, 'हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि सारे संक्रमित लोगों का पता लगाया जाए और उन्हें क्वारंटीन किया जाए. हमने इसे प्राथमिकता दी है ताकि उनका पता लगाया जा सके और उन्हें अलग किया जा सके. कर्नाटक में राजधानी बेंगलुरु कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है. पिछले दो हफ्ते में यहां कोरोना के केस 16 हज़ार से बढ़कर 27 हजार तक पहुंच गए हैं. कर्नाटक में पिछले 24 घंटे में 5,072 नए मामले आने के साथ ही राज्य में अभी तक 90,942 लोग के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. राज्य में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से 1,796 लोग की मौत हुई है.
बेंगलुरु - कर्नाटक में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. राज्य में मरीजों की संख्या नब्बे हज़ार को पार कर गई है. इस बीच एक खबर आई की राजधानी बेंगलुरु में कोरोना के तीन हज़ार तीन सौ अड़तीस मरीज़ गायब हो गए हैं. आखिर वे कहां गए इनका कोई अता पता नहीं है. फिलहाल प्रशासन इनकी तलाश में जुटा है. अगर हिसाब लगाया जाए तो ये शहर में कुल कोरोना वायरस पॉजिटिव लोगों की संख्या का सात प्रतिशत हिस्सा है. अब मरीजों का सैंपल लेने से पहले सरकार इन सबका पहचान पत्र देख रही है. इसके अलावा इनके मोबाइल नंबर को भी वेरिफाई किया जाएगा. उप मुख्यमंत्री डॉ. अश्वत नारायण ने कहा, 'हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि सारे संक्रमित लोगों का पता लगाया जाए और उन्हें क्वारंटीन किया जाए. हमने इसे प्राथमिकता दी है ताकि उनका पता लगाया जा सके और उन्हें अलग किया जा सके. कर्नाटक में राजधानी बेंगलुरु कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है. पिछले दो हफ्ते में यहां कोरोना के केस सोलह हज़ार से बढ़कर सत्ताईस हजार तक पहुंच गए हैं. कर्नाटक में पिछले चौबीस घंटाटे में पाँच,बहत्तर नए मामले आने के साथ ही राज्य में अभी तक नब्बे,नौ सौ बयालीस लोग के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. राज्य में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से एक,सात सौ छियानवे लोग की मौत हुई है.
रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत इंद्रप्रस्थ रायपुरा फेज 2 में ईडब्लूएस एवं एलआईजी फ्लैट आवंटितियों को नियम अनुसार 10 किस्त भुगतान होेने पर केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। यह राशि उन्हीं आवेदकों के खाते में केन्द्र द्वारा डाली जाएगी जिनके नाम से फ्लैट का आवंटन हुआ है। रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत इंद्रप्रस्थ रायपुरा फेज 2 में ईडब्लूएस एवं एलआईजी फ्लैट आवंटितियों को नियम अनुसार 10 किस्त भुगतान होेने पर केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। यह राशि उन्हीं आवेदकों के खाते में केन्द्र द्वारा डाली जाएगी जिनके नाम से फ्लैट का आवंटन हुआ है। बिना अंतिम किस्त भुगतान के केन्द्र से मिलने वाली राशि हितग्राहियों को नहीं मिलेगी। प्राधिकरण ने आवंटितियों को हो रही असुविधा के बाद जीएसटी पर लगाए गए सरचार्ज को भी हटा दिया है। अधिकारियों का कहना है जीएसटी पर सरचार्ज हटाने से हितग्राही को 20 से 25 हजार की राहत मिलेगी। प्राधिकरण की इंद्रप्रस्थ योजना फेस 2 में 5 साल बाद ईडब्लूएस और एलआईजी फ्लैट्स के आवंटितियों को 10 वें और अंतिम किस्त का भुगतान करने के बाद रजिस्ट्री के समय केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। ईडब्लूएस में डेढ़ लाख और एलआईजी फ फ्लैट्स के लिए 2 लाख रुपए तक केन्द्रीय ब्याज का लाभ नियम अनुसार केन्द्र से सीधे मूल आवंटिति के खाते में राशि के रूप में ट्रांसफर होगा। प्राधिकरण के प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल गुप्ता ने बताया है कि सब्सिडी की राशि केवल मूल आवंटिती को दी जाएगी। यदि आवंटिति ने किसी कारण से उसे दूसरे के नाम ट्रांसफर किया उस स्थिति में इसका लाभ मूल आवंटिति को ही मिलेगा। फ्लैट बेचने या अन्य स्थिति में बाकी के किस्त जमा करने वालों को शासन से मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिल पाएगा। इंद्रप्रस्थ रायपुरा योजना के फेस 2 में 5 साल पहले जिन आवंटतियों ने लाटरी पद्धति से फ्लैट बुक कराए। उनके द्वारा प्राधिकरण के साथ किए गए अनुबंध पत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि आवंटिति यदि निर्धारित समय पर फ्लैट की किस्त जमा नहीं करता तो उसे 15 फीसद वार्षिक दर से सरचार्ज देय होगा। यही नहीं 2 लगातार किस्त भुगतान नहीं करने पर आवंटन निरस्त कर पंजीयन की राशि में 10 फीसदी कटौती कर शेष राशि वापस कर दी जाएगी। आवंटन निरस्त होने की स्थिति में प्राधिकरण को संबंधित फ्लैट को फिर से विक्रय करने का पूर्ण अधिकार होगा। जीएसटी पर सरचार्ज नहीं : सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में हितग्राहियों को फ्लैट का आवंटन 2017 में किया गया। जबकि जीएसटी का नियम 2016 में लागू हुआ। ऐसे में कई आवंटतियों को शुरूआत के किस्त भुगतान करने के दौरान जीएसटी की राशि नहीं देनी पड़ी। बाद में जीएसटी पर सरचार्ज लगाकर आवंटितियों के किस्त वसूली के लिए नियम लाया गया। इसे लेकर आवंटितियों ने एतराज जताते हुए जीएसटी से सरचार्ज हटाने प्राधिकरण के अध्यक्ष और रायपुर पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय के समक्ष परेशानी बताई। प्राधिकरण अध्यक्ष ने संस्था के अधिकारियों से सलाह मश्विरा कर क्षेत्र के विधायक के साथ मिलकर जीएसटी पर लगाए गए सरचार्ज को हटाने का आदेश दिया । इससे सैकड़ों आवंटतियों को राहत मिली है। इंद्रप्रस्थ रायपुरा में प्रस्तावित 19 दुकानों को आवंटन के लिए निकाले गए टेंडर को बेहतर प्रतिसाद मिला है। 100 लोगों ने इन दुकानों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है। गुप ए व ग्रुप बी में दो शापिंग कांप्लेक्स के अंतर्गत 19 दुकानें उपलब्ध रहेगी। पंजीयन के आवेदन आरडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत इंद्रप्रस्थ रायपुरा फेज दो में ईडब्लूएस एवं एलआईजी फ्लैट आवंटितियों को नियम अनुसार दस किस्त भुगतान होेने पर केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। यह राशि उन्हीं आवेदकों के खाते में केन्द्र द्वारा डाली जाएगी जिनके नाम से फ्लैट का आवंटन हुआ है। रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत इंद्रप्रस्थ रायपुरा फेज दो में ईडब्लूएस एवं एलआईजी फ्लैट आवंटितियों को नियम अनुसार दस किस्त भुगतान होेने पर केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। यह राशि उन्हीं आवेदकों के खाते में केन्द्र द्वारा डाली जाएगी जिनके नाम से फ्लैट का आवंटन हुआ है। बिना अंतिम किस्त भुगतान के केन्द्र से मिलने वाली राशि हितग्राहियों को नहीं मिलेगी। प्राधिकरण ने आवंटितियों को हो रही असुविधा के बाद जीएसटी पर लगाए गए सरचार्ज को भी हटा दिया है। अधिकारियों का कहना है जीएसटी पर सरचार्ज हटाने से हितग्राही को बीस से पच्चीस हजार की राहत मिलेगी। प्राधिकरण की इंद्रप्रस्थ योजना फेस दो में पाँच साल बाद ईडब्लूएस और एलआईजी फ्लैट्स के आवंटितियों को दस वें और अंतिम किस्त का भुगतान करने के बाद रजिस्ट्री के समय केन्द्र से मिलने वाली सब्सिडी की राशि मिलेगी। ईडब्लूएस में डेढ़ लाख और एलआईजी फ फ्लैट्स के लिए दो लाख रुपए तक केन्द्रीय ब्याज का लाभ नियम अनुसार केन्द्र से सीधे मूल आवंटिति के खाते में राशि के रूप में ट्रांसफर होगा। प्राधिकरण के प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल गुप्ता ने बताया है कि सब्सिडी की राशि केवल मूल आवंटिती को दी जाएगी। यदि आवंटिति ने किसी कारण से उसे दूसरे के नाम ट्रांसफर किया उस स्थिति में इसका लाभ मूल आवंटिति को ही मिलेगा। फ्लैट बेचने या अन्य स्थिति में बाकी के किस्त जमा करने वालों को शासन से मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिल पाएगा। इंद्रप्रस्थ रायपुरा योजना के फेस दो में पाँच साल पहले जिन आवंटतियों ने लाटरी पद्धति से फ्लैट बुक कराए। उनके द्वारा प्राधिकरण के साथ किए गए अनुबंध पत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि आवंटिति यदि निर्धारित समय पर फ्लैट की किस्त जमा नहीं करता तो उसे पंद्रह फीसद वार्षिक दर से सरचार्ज देय होगा। यही नहीं दो लगातार किस्त भुगतान नहीं करने पर आवंटन निरस्त कर पंजीयन की राशि में दस फीसदी कटौती कर शेष राशि वापस कर दी जाएगी। आवंटन निरस्त होने की स्थिति में प्राधिकरण को संबंधित फ्लैट को फिर से विक्रय करने का पूर्ण अधिकार होगा। जीएसटी पर सरचार्ज नहीं : सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में हितग्राहियों को फ्लैट का आवंटन दो हज़ार सत्रह में किया गया। जबकि जीएसटी का नियम दो हज़ार सोलह में लागू हुआ। ऐसे में कई आवंटतियों को शुरूआत के किस्त भुगतान करने के दौरान जीएसटी की राशि नहीं देनी पड़ी। बाद में जीएसटी पर सरचार्ज लगाकर आवंटितियों के किस्त वसूली के लिए नियम लाया गया। इसे लेकर आवंटितियों ने एतराज जताते हुए जीएसटी से सरचार्ज हटाने प्राधिकरण के अध्यक्ष और रायपुर पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय के समक्ष परेशानी बताई। प्राधिकरण अध्यक्ष ने संस्था के अधिकारियों से सलाह मश्विरा कर क्षेत्र के विधायक के साथ मिलकर जीएसटी पर लगाए गए सरचार्ज को हटाने का आदेश दिया । इससे सैकड़ों आवंटतियों को राहत मिली है। इंद्रप्रस्थ रायपुरा में प्रस्तावित उन्नीस दुकानों को आवंटन के लिए निकाले गए टेंडर को बेहतर प्रतिसाद मिला है। एक सौ लोगों ने इन दुकानों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है। गुप ए व ग्रुप बी में दो शापिंग कांप्लेक्स के अंतर्गत उन्नीस दुकानें उपलब्ध रहेगी। पंजीयन के आवेदन आरडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
मृतकों की सूची : घायलों की सूची : सभी मृतक एवं घायल गोरियाकोठी थानाक्षेत्र के हरपुर टोला निवासी है। जानकारी के अनुसार उनलोगों में कुछ बैंड पार्टी में भी काम करते थे और ज्यादातर मृतक गरीब परिवार से थे. बता दें कि वे रिश्ते में पट्टीदार थे। सूचना के मुताबिक़ मृतक में शामिल 4 मैट्रिक के परीक्षार्थी थे। सभी अगल-बगल के ही रहने वाले थे। प्रति मृतक को चार चार लाख का चेक दिया जाएगा।
मृतकों की सूची : घायलों की सूची : सभी मृतक एवं घायल गोरियाकोठी थानाक्षेत्र के हरपुर टोला निवासी है। जानकारी के अनुसार उनलोगों में कुछ बैंड पार्टी में भी काम करते थे और ज्यादातर मृतक गरीब परिवार से थे. बता दें कि वे रिश्ते में पट्टीदार थे। सूचना के मुताबिक़ मृतक में शामिल चार मैट्रिक के परीक्षार्थी थे। सभी अगल-बगल के ही रहने वाले थे। प्रति मृतक को चार चार लाख का चेक दिया जाएगा।
चर्चा में क्यों? 22 अक्तूबर, 2021 को मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने शिवाजी नगर भोपाल में महिला हाट-बाज़ार में राज्यस्तरीय 'सोन चिरैया आजीविका उत्सव, 2021' का शुभारंभ किया। यह आजीविका उत्सव 31 अक्तूबर, 2021 तक चलेगा। - नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि 'दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन' के अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को अब सोन चिरैया ब्रांड के नाम से जाना जाएगा। स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को सोन चिरैया ब्रांड के नाम से प्रदेश और देश में नई पहचान मिलेगी। - इस राज्यस्तरीय उत्सव में प्रदेश के 24 नगरीय निकायों के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों, जैसे- सज़ावटी सामान, जरदोजी की वस्तुएँ, ऑर्गेनिक उत्पाद, जूट के उत्पाद, ज्वैलरी, गिफ्ट आइटम, अगरबत्ती, अचार, बड़ी-पापड़, मसाले और खिलौने आदि का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। - इसके साथ ही उत्सव में महिलाओं द्वारा रंगोली, चित्रकला, मेहंदी, गायन आदि कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उत्सव में स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा तैयार किये गए स्वच्छ एवं स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ विक्रय के लिये उपलब्ध हैं। - नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय के लिये स्थान उपलब्ध कराने हेतु सभी शहरों में हाट-बाज़ार बनाए जाएंगे। - उल्लेखनीय है कि अभी मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 35 हज़ार स्व-सहायता समूह हैं, जिनमें 3 लाख 50 हज़ार महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। चर्चा में क्यों? 22 अक्तूबर, 2021 को विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सुधारों से जुड़े परिणाम आधारित वितरण क्षेत्र योजना के लिये मध्य प्रदेश राज्य शासन ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स कमिटी का गठन किया है। - प्रबंध संचालक एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति में अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव वित्त, वन, ऊर्जा, राजस्व, पंचायत तथा नगरीय विकास एवं आवास सदस्य बनाए गए हैं। - यह समिति राज्य स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिये कार्ययोजना संबंधी अनुशंसा करेगी। - भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी के अनुमोदन के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर अनुशंसा प्रस्तुत करेगी। समिति परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही गुणवत्ता की समीक्षा भी करेगी। चर्चा में क्यों? 22 अक्तूबर, 2021 को मध्य प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों तथा स्थाईकर्मी को देय महँगाई भत्ते की दर में अक्तूबर 2021 से 8 प्रतिशत वृद्धि के आदेश जारी कर दिये हैं। - उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों को जनवरी 2019 से सातवें वेतनमान में 12% की दर से महँगाई भत्ता दिया जा रहा था। 21 अक्तूबर, 2021 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महँगाई भत्ता दर में 8% की वृद्धि की घोषणा की थी। इस प्रकार सातवें वेतनमान के अनुसार, अब 20 प्रतिशत महँगाई भत्ता देय होगा। - महँगाई भत्ते में वृद्धि करते हुए वित्त विभाग ने महँगाई भत्ते के भुगतान के संबंध में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि महँगाई भत्ते का कोई भी भाग किसी भी प्रयोजन हेतु वेतन के रूप में नहीं माना जाएगा। - इसके अतिरिक्त ऐसे सभी शासकीय सेवक, जो जुलाई 2020 या जनवरी 2021 की वार्षिक वेतन वृद्धि का काल्पनिक रूप से पात्रता है, उन्हें जुलाई 2020 से 1 जनवरी, 2021 को देय वार्षिक वेतन वृद्धि के परिणामस्वरूप देय एरियर्स का भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जाएगा। पहली किश्त (50%) का भुगतान नवंबर 2021 में और दूसरी किश्त (50%) का भुगतान मार्च 2022 में होगा। - 1 मार्च, 2022 के पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके या होने जा रहे शासकीय सेवकों को एरियर्स की देय राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा। चर्चा में क्यों? 22 अक्तूबर, 2021 को मध्य प्रदेश में पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स की स्थापना हेतु देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर और भारत सरकार की स्वायत्त संस्था लॉजिस्टिक्स सेंटर काउंसिल के मध्य दो 'मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर हुए हैं। - यह सेंटर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में स्थापित किया जाएगा। 'लॉजिस्टिक सेक्टर स्किल काउंसिल' की हर राज्य में एक सेंटर देने की योजना है। - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में लॉजिस्टिक के कोर्स शुरू होने से प्रदेश के युवाओं के लिये रोज़गार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। - भौगोलिक दृष्टि से मध्य प्रदेश केंद्र में स्थित होने के कारण औद्योगिक दृष्टिकोण से भी यह प्रयास उद्योगों को जोड़ने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि यह सेंटर देश में पहली बार खुलने जा रहा है। - इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाले पहले 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक' में बी.ई. एवं बी.टेक. के अंतिम वर्ष में लॉजिस्टिक्स में स्पेशलाइजेशन (60 सीट) एवं इंडस्ट्री अप्रेंटीशिप प्रोग्राम तथा लॉजिस्टिक एवं डाटा साइंस में दो वर्षीय एम.एस. प्रोग्राम (30 सीट) लॉजिस्टिक सेक्टर काउंसिल की सहभागिता से प्रारंभ होगा। - विश्वविद्यालय में लगभग में पाँच हज़ार युवाओं को 'लॉजिस्टिक्स स्किल डेवलपमेंट' की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिये औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा।
चर्चा में क्यों? बाईस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस को मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने शिवाजी नगर भोपाल में महिला हाट-बाज़ार में राज्यस्तरीय 'सोन चिरैया आजीविका उत्सव, दो हज़ार इक्कीस' का शुभारंभ किया। यह आजीविका उत्सव इकतीस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस तक चलेगा। - नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि 'दीन दयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन' के अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को अब सोन चिरैया ब्रांड के नाम से जाना जाएगा। स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को सोन चिरैया ब्रांड के नाम से प्रदेश और देश में नई पहचान मिलेगी। - इस राज्यस्तरीय उत्सव में प्रदेश के चौबीस नगरीय निकायों के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों, जैसे- सज़ावटी सामान, जरदोजी की वस्तुएँ, ऑर्गेनिक उत्पाद, जूट के उत्पाद, ज्वैलरी, गिफ्ट आइटम, अगरबत्ती, अचार, बड़ी-पापड़, मसाले और खिलौने आदि का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। - इसके साथ ही उत्सव में महिलाओं द्वारा रंगोली, चित्रकला, मेहंदी, गायन आदि कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। उत्सव में स्ट्रीट वेंडर्स द्वारा तैयार किये गए स्वच्छ एवं स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ विक्रय के लिये उपलब्ध हैं। - नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय के लिये स्थान उपलब्ध कराने हेतु सभी शहरों में हाट-बाज़ार बनाए जाएंगे। - उल्लेखनीय है कि अभी मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में पैंतीस हज़ार स्व-सहायता समूह हैं, जिनमें तीन लाख पचास हज़ार महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। चर्चा में क्यों? बाईस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस को विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सुधारों से जुड़े परिणाम आधारित वितरण क्षेत्र योजना के लिये मध्य प्रदेश राज्य शासन ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स कमिटी का गठन किया है। - प्रबंध संचालक एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति में अपर मुख्य सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव वित्त, वन, ऊर्जा, राजस्व, पंचायत तथा नगरीय विकास एवं आवास सदस्य बनाए गए हैं। - यह समिति राज्य स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिये कार्ययोजना संबंधी अनुशंसा करेगी। - भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी के अनुमोदन के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर अनुशंसा प्रस्तुत करेगी। समिति परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही गुणवत्ता की समीक्षा भी करेगी। चर्चा में क्यों? बाईस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस को मध्य प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों तथा स्थाईकर्मी को देय महँगाई भत्ते की दर में अक्तूबर दो हज़ार इक्कीस से आठ प्रतिशत वृद्धि के आदेश जारी कर दिये हैं। - उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों को जनवरी दो हज़ार उन्नीस से सातवें वेतनमान में बारह% की दर से महँगाई भत्ता दिया जा रहा था। इक्कीस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महँगाई भत्ता दर में आठ% की वृद्धि की घोषणा की थी। इस प्रकार सातवें वेतनमान के अनुसार, अब बीस प्रतिशत महँगाई भत्ता देय होगा। - महँगाई भत्ते में वृद्धि करते हुए वित्त विभाग ने महँगाई भत्ते के भुगतान के संबंध में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि महँगाई भत्ते का कोई भी भाग किसी भी प्रयोजन हेतु वेतन के रूप में नहीं माना जाएगा। - इसके अतिरिक्त ऐसे सभी शासकीय सेवक, जो जुलाई दो हज़ार बीस या जनवरी दो हज़ार इक्कीस की वार्षिक वेतन वृद्धि का काल्पनिक रूप से पात्रता है, उन्हें जुलाई दो हज़ार बीस से एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को देय वार्षिक वेतन वृद्धि के परिणामस्वरूप देय एरियर्स का भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जाएगा। पहली किश्त का भुगतान नवंबर दो हज़ार इक्कीस में और दूसरी किश्त का भुगतान मार्च दो हज़ार बाईस में होगा। - एक मार्च, दो हज़ार बाईस के पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके या होने जा रहे शासकीय सेवकों को एरियर्स की देय राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा। चर्चा में क्यों? बाईस अक्तूबर, दो हज़ार इक्कीस को मध्य प्रदेश में पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स की स्थापना हेतु देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर और भारत सरकार की स्वायत्त संस्था लॉजिस्टिक्स सेंटर काउंसिल के मध्य दो 'मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर हुए हैं। - यह सेंटर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में स्थापित किया जाएगा। 'लॉजिस्टिक सेक्टर स्किल काउंसिल' की हर राज्य में एक सेंटर देने की योजना है। - उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में लॉजिस्टिक के कोर्स शुरू होने से प्रदेश के युवाओं के लिये रोज़गार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। - भौगोलिक दृष्टि से मध्य प्रदेश केंद्र में स्थित होने के कारण औद्योगिक दृष्टिकोण से भी यह प्रयास उद्योगों को जोड़ने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि यह सेंटर देश में पहली बार खुलने जा रहा है। - इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाले पहले 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक' में बी.ई. एवं बी.टेक. के अंतिम वर्ष में लॉजिस्टिक्स में स्पेशलाइजेशन एवं इंडस्ट्री अप्रेंटीशिप प्रोग्राम तथा लॉजिस्टिक एवं डाटा साइंस में दो वर्षीय एम.एस. प्रोग्राम लॉजिस्टिक सेक्टर काउंसिल की सहभागिता से प्रारंभ होगा। - विश्वविद्यालय में लगभग में पाँच हज़ार युवाओं को 'लॉजिस्टिक्स स्किल डेवलपमेंट' की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिये औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा।
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की पूर्व नेता वीके शशिकला के समर्थक शुक्रवार को अपना समर्थन दिखाने के लिए उनके वाहन के आसपास जमा हो गए क्योंकि वह स्वतंत्रता सेनानी पसुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मदुरै से रवाना हुई थीं। इस महीने की शुरुआत में, शशिकला ने एक कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा कि तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक शासन को सत्ता में बहाल किया जाना चाहिए। पूर्व नेता ने कहा अन्नाद्रमुक जानती है कि मैं चुनाव से क्यों दूर रहा, सर्वोच्चता बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है, लोगों के लिए एकजुट होने का समय आ गया है; हमें केवल एकता की आवश्यकता है, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) शासन को बहाल किया जाना चाहिए। हालांकि, इस साल की शुरुआत में, शशिकला ने घोषणा की कि वह अन्नाद्रमुक के विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव हारने के बाद राजनीति और सार्वजनिक जीवन से दूर रहेंगी। शशिकला ने एक बयान में कहा "मैं खुद को राजनीति से अलग करती हूं और अपनी देवी अक्का (जयललिता) के सुनहरे शासन के लिए प्रार्थना करती हूं। " "मैं हमेशा उनकी दृष्टि के लिए प्रार्थना करना जारी रखूंगा। "
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की पूर्व नेता वीके शशिकला के समर्थक शुक्रवार को अपना समर्थन दिखाने के लिए उनके वाहन के आसपास जमा हो गए क्योंकि वह स्वतंत्रता सेनानी पसुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मदुरै से रवाना हुई थीं। इस महीने की शुरुआत में, शशिकला ने एक कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा कि तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक शासन को सत्ता में बहाल किया जाना चाहिए। पूर्व नेता ने कहा अन्नाद्रमुक जानती है कि मैं चुनाव से क्यों दूर रहा, सर्वोच्चता बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है, लोगों के लिए एकजुट होने का समय आ गया है; हमें केवल एकता की आवश्यकता है, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम शासन को बहाल किया जाना चाहिए। हालांकि, इस साल की शुरुआत में, शशिकला ने घोषणा की कि वह अन्नाद्रमुक के विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव हारने के बाद राजनीति और सार्वजनिक जीवन से दूर रहेंगी। शशिकला ने एक बयान में कहा "मैं खुद को राजनीति से अलग करती हूं और अपनी देवी अक्का के सुनहरे शासन के लिए प्रार्थना करती हूं। " "मैं हमेशा उनकी दृष्टि के लिए प्रार्थना करना जारी रखूंगा। "
मॉस्को। रुस और तुर्की के बीच संबंध और बिगड़ते जा रहे है। दोनो एक दूसरे पर बेबुनियाद इल्जाम लगा रहे है। रुस के राष्ट्रपकति ब्लादिमीर पुतिन ने तुर्की पर यह आरोप लगाया है कि तुर्की आईएसआईएस की मदद कर रहा है। साथ ही पिछले दिनों तुर्की द्वारा रुसी प्लेन को गिराए जाने के मामले पर पुतिन ने कहा कि आईएसआईएस तुर्की को तेल की आपूर्ति कर रहा है, इसी कारण तुर्की ने रुस के उस विमान को बेवजह मार गिराया, जो इस्लामिक स्टेट पर हमले करने जा रहा था। बता दें कि पिछले दिनों तुर्की के प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमले में मारे गए पायलट का शव रुस को सौंच दिया जाएगा और इसी के तहत मारे गए सैनिक का शव उसके घर पहुँचा दिया गया। लेकिन रुस ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एरदोगन के साथ पेरिस में बताचीत रद्द कर दी है। पेरिस में चल रहे जलवायु शिखर सम्मेलन में बातचीत के लिए प्रस्ताव तुर्की ने दिया था। शुरुआत में रुस ने इस पर सकारात्मक जवाब दिया था। दूसरी ओर ब्रसेल्स में नाटो अधिकारियों के साथ तुर्की प्रधानमंत्री अहमत दावुतोग्लू ने कहा कि अपनी सीमा की सुरक्षा हमारा दायित्व है और इस दौरान की गई किसी भी कार्रवाई के लिए तर्की माफी नही मांगेगा। दावुतोग्लू ने कहा कि इस घटना को लेकर रूस यदि ज्यादा सूचनाएं चाहता है, बातचीत करना चाहता है, संबंध सामान्य करना चाहता हैं तो हम तैयार हैं। तुर्की ने यह बयान पुतिन के 26 नवंबर को यह कहे जाने पर दिया है कि वे तुर्की की माफी का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि तुर्की के दो एफ-16 विमानों ने रशियन प्लेन को मार गिराया था। दो पायलट पैराशूट की मदद से बच निकले थे जब कि इनमें से एक गोली का शिकार हो गया था। बच निकले दो पायलटों में से एक का इलाज सीरिया में चल रहा है। उधर रुस का कहना है कि रशियन प्लेन ने तुर्की की सीमा नही लांघी है। रुस का कहना है कि विमान को तोप से उड़ाया गया है। दूसरी ओर तुर्की का कहना है कि बार-बार की चेतावनी के बाद भी सीमा का उल्लंघन किया गया। विमान गिरने की पूरी घटना कैमरे में भी कैद की गई है।
मॉस्को। रुस और तुर्की के बीच संबंध और बिगड़ते जा रहे है। दोनो एक दूसरे पर बेबुनियाद इल्जाम लगा रहे है। रुस के राष्ट्रपकति ब्लादिमीर पुतिन ने तुर्की पर यह आरोप लगाया है कि तुर्की आईएसआईएस की मदद कर रहा है। साथ ही पिछले दिनों तुर्की द्वारा रुसी प्लेन को गिराए जाने के मामले पर पुतिन ने कहा कि आईएसआईएस तुर्की को तेल की आपूर्ति कर रहा है, इसी कारण तुर्की ने रुस के उस विमान को बेवजह मार गिराया, जो इस्लामिक स्टेट पर हमले करने जा रहा था। बता दें कि पिछले दिनों तुर्की के प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमले में मारे गए पायलट का शव रुस को सौंच दिया जाएगा और इसी के तहत मारे गए सैनिक का शव उसके घर पहुँचा दिया गया। लेकिन रुस ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एरदोगन के साथ पेरिस में बताचीत रद्द कर दी है। पेरिस में चल रहे जलवायु शिखर सम्मेलन में बातचीत के लिए प्रस्ताव तुर्की ने दिया था। शुरुआत में रुस ने इस पर सकारात्मक जवाब दिया था। दूसरी ओर ब्रसेल्स में नाटो अधिकारियों के साथ तुर्की प्रधानमंत्री अहमत दावुतोग्लू ने कहा कि अपनी सीमा की सुरक्षा हमारा दायित्व है और इस दौरान की गई किसी भी कार्रवाई के लिए तर्की माफी नही मांगेगा। दावुतोग्लू ने कहा कि इस घटना को लेकर रूस यदि ज्यादा सूचनाएं चाहता है, बातचीत करना चाहता है, संबंध सामान्य करना चाहता हैं तो हम तैयार हैं। तुर्की ने यह बयान पुतिन के छब्बीस नवंबर को यह कहे जाने पर दिया है कि वे तुर्की की माफी का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि तुर्की के दो एफ-सोलह विमानों ने रशियन प्लेन को मार गिराया था। दो पायलट पैराशूट की मदद से बच निकले थे जब कि इनमें से एक गोली का शिकार हो गया था। बच निकले दो पायलटों में से एक का इलाज सीरिया में चल रहा है। उधर रुस का कहना है कि रशियन प्लेन ने तुर्की की सीमा नही लांघी है। रुस का कहना है कि विमान को तोप से उड़ाया गया है। दूसरी ओर तुर्की का कहना है कि बार-बार की चेतावनी के बाद भी सीमा का उल्लंघन किया गया। विमान गिरने की पूरी घटना कैमरे में भी कैद की गई है।
नई दिल्ली. हिंदू धर्म में हर एक दिन अलग-अलग भगवान की पूजा की मान्यताएं हैं. शनिवार को शनि देव की पूजा-अराधना की जाती है. शास्त्रों में शनि महाराज को सभी 9 ग्रहों को न्यायधीश बताया गया है. इसलिए मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव के पूजन से व्यक्ति के सिर के ऊपर चल रहीं तमाम तरह की परेशानियां दूर होती हैं, साथ ही शनिदेव के पूजन से व्यक्ति को शनि दोष से भी मुक्ति भी मिल जाती है. अगर आपके सिर पर भी शनि दोष भारी है तो हम आपको बता रहे हैं इसे दूर करने के असरदार उपाय. दरअसल, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष होता है जो उसे परेशानियां चारों ओर से घेर लेती हैं. इसी वजह से शनिवार को बजरंगबली हनुमान जी और शनि महाराज के पूजन का विधान है. शनि भगवान को दंड अधिकारी भी कहा जाता है. मान्यता है कि व्यक्ति अपने जीवन में जो भी गलतियां करता है, उसे कभी न कभी किसी तरह का दंड जरूर मिलता है. ऐसे में अगर भक्त से शनि महाराज प्रसन्न हो जाएं तो उसके जीवन से सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में तरक्की का आगमन शुरू होता है. मान्यता है कि शनि दोष को सिर से हटाने के लिए शनिदेव की पूजा की जाती है. शनिवार के दिन शाम के समय सरसों के तेल का दीप जलाकर पीपल के पेड़ के नीचे रख दें. जिस भी व्यक्ति की कुंडली में दोश है उसे किसी शिव मंदिर में त्रिशूल चढ़ाना चाहिए. साथ ही शनिवार के दिन हनुमान जी के स्वरूपी वानरों को केला, गुड़ और काले चने का प्रसाद जरूर खिलाएं. इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. शनिवार के दिन तेल का दान भी अवश्य करें, घर में घुस चुकी दरिद्रता दूर होती है.
नई दिल्ली. हिंदू धर्म में हर एक दिन अलग-अलग भगवान की पूजा की मान्यताएं हैं. शनिवार को शनि देव की पूजा-अराधना की जाती है. शास्त्रों में शनि महाराज को सभी नौ ग्रहों को न्यायधीश बताया गया है. इसलिए मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव के पूजन से व्यक्ति के सिर के ऊपर चल रहीं तमाम तरह की परेशानियां दूर होती हैं, साथ ही शनिदेव के पूजन से व्यक्ति को शनि दोष से भी मुक्ति भी मिल जाती है. अगर आपके सिर पर भी शनि दोष भारी है तो हम आपको बता रहे हैं इसे दूर करने के असरदार उपाय. दरअसल, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष होता है जो उसे परेशानियां चारों ओर से घेर लेती हैं. इसी वजह से शनिवार को बजरंगबली हनुमान जी और शनि महाराज के पूजन का विधान है. शनि भगवान को दंड अधिकारी भी कहा जाता है. मान्यता है कि व्यक्ति अपने जीवन में जो भी गलतियां करता है, उसे कभी न कभी किसी तरह का दंड जरूर मिलता है. ऐसे में अगर भक्त से शनि महाराज प्रसन्न हो जाएं तो उसके जीवन से सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और जीवन में तरक्की का आगमन शुरू होता है. मान्यता है कि शनि दोष को सिर से हटाने के लिए शनिदेव की पूजा की जाती है. शनिवार के दिन शाम के समय सरसों के तेल का दीप जलाकर पीपल के पेड़ के नीचे रख दें. जिस भी व्यक्ति की कुंडली में दोश है उसे किसी शिव मंदिर में त्रिशूल चढ़ाना चाहिए. साथ ही शनिवार के दिन हनुमान जी के स्वरूपी वानरों को केला, गुड़ और काले चने का प्रसाद जरूर खिलाएं. इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. शनिवार के दिन तेल का दान भी अवश्य करें, घर में घुस चुकी दरिद्रता दूर होती है.
* करवा चौथ का त्योहार इस बार 8 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। * इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है। * करवा चौथ के दिन श्री गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। * चंद्रमा पूजन से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख का वरदान मिलता है। * विधि-विधान से ये पर्व मनाने से महिलाओं का सौंदर्य भी बढ़ता है। * करवा चौथ की रात सौभाग्य प्राप्ति के प्रयोग का फल निश्चित ही मिलता है। * केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया हो वही स्त्रियां ये व्रत रख सकती हैं। * व्रत रखने वाली स्त्री को काले और सफेद कपड़े कतई नहीं पहनने चाहिए। * करवा चौथ के दिन लाल और पीले कपड़े पहनना विशेष फलदायी होता है। * करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। * ये व्रत निर्जल या केवल जल ग्रहण करके ही रखना चाहिए। * इस दिन पूर्ण श्रृंगार और अच्छा भोजन करना चाहिए। * पत्नी के अस्वस्थ होने की स्थिति में पति भी ये व्रत रख सकते हैं।
* करवा चौथ का त्योहार इस बार आठ अक्टूबर को मनाया जा रहा है। * इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है। * करवा चौथ के दिन श्री गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। * चंद्रमा पूजन से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख का वरदान मिलता है। * विधि-विधान से ये पर्व मनाने से महिलाओं का सौंदर्य भी बढ़ता है। * करवा चौथ की रात सौभाग्य प्राप्ति के प्रयोग का फल निश्चित ही मिलता है। * केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया हो वही स्त्रियां ये व्रत रख सकती हैं। * व्रत रखने वाली स्त्री को काले और सफेद कपड़े कतई नहीं पहनने चाहिए। * करवा चौथ के दिन लाल और पीले कपड़े पहनना विशेष फलदायी होता है। * करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। * ये व्रत निर्जल या केवल जल ग्रहण करके ही रखना चाहिए। * इस दिन पूर्ण श्रृंगार और अच्छा भोजन करना चाहिए। * पत्नी के अस्वस्थ होने की स्थिति में पति भी ये व्रत रख सकते हैं।
केएल राहुल और हार्दिक पंड्या के बीच गहरी दोस्ती है। इसके बावजूद केएल राहुल को हार्दिक पंड्या के साथ घूमने में डर लगता है। राहुल को लगता है कि हार्दिक पंड्या का जैसा स्वभाव है, उसके कारण वह कभी भी कहीं भी मुसीबत में फंस सकते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजमेंट का भरोसा जीत चुके केएल राहुल ने विक्रम साठिया के यूट्यूब शो 'वॉट द डक' में इस बात का खुलासा किया था। शो में भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी मौजूद थे।
केएल राहुल और हार्दिक पंड्या के बीच गहरी दोस्ती है। इसके बावजूद केएल राहुल को हार्दिक पंड्या के साथ घूमने में डर लगता है। राहुल को लगता है कि हार्दिक पंड्या का जैसा स्वभाव है, उसके कारण वह कभी भी कहीं भी मुसीबत में फंस सकते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजमेंट का भरोसा जीत चुके केएल राहुल ने विक्रम साठिया के यूट्यूब शो 'वॉट द डक' में इस बात का खुलासा किया था। शो में भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी मौजूद थे।
भारतीय मानक ब्यूरो ने देश में ज्वैलरी की शुद्धता बनाए रखने के लिए छह अंकों वाला हॉलमार्क विशिष्ट पहचान अनिवार्य कर दिया है. नई दिल्ली. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देश में ज्वैलरी की शुद्धता (Purity of Jewelery) बनाए रखने के लिए छह अंकों वाला हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) अनिवार्य कर दिया है. देश में चार और पांच अंकों वाली पुरानी हॉलमार्क ज्वैलरी (Hallmark Gold) की बिक्री पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. हालांकि, बीआईएस के इस फैसले का अब दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है. इन लोगों की मांग है कि चार या पांच अंकों वाली पुरानी हॉलमार्क की ज्वैलरी को छह अंकों वाली हॉलमार्क ज्वैलरी में बदलने का पूरा खर्चा अब सरकार उठाए. भारत में सोना खरीदने और इसमें निवेश करने का चलन बहुत ज्यादा है. खासतौर पर शादी-विवाह हो या फिर कोई त्यौहार भारतीय गोल्ड जरूर खरीदते हैं. लेकिन, कई बार किसी कारण से हमें सोना बेचना भी पड़ता है. ऐसे में आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि सोना बेचने के नियम में क्या बदलाव हुए हैं. सोने की हॉलमार्किंग के नियम में एक बार फिर से 1 अप्रैल, 2023 से बदलाव होने वाले हैं. उपभोक्ता मंत्रालय के नए नियम के तहत एक अप्रैल से 6 डिजिट वाले अल्फान्यूमेरिक हॉलमार्किंग के बिना सोना नहीं बिकेगा. जैसे आधार कार्ड पर 12 अंकों का कोड होता है, उसी तरह से सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड होगा. इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं. मंत्रालय का कहना है कि अब केवल 6 अंकों वाला हॉलमार्क की मान्य होगा. गोल्ड हॉलमार्किंग एक स्टैम्प है जो उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे सोने के आभूषणों की शुद्धता बताती है. मोदी सरकार ने 15 जनवरी 2021 से हॉलमार्किंग वाला सोना बेचना अनिवार्य किया था. हालांकि, यह पूरी तरह से 16 जून 2021 से स्वैच्छिक तौर पर लागू हुआ था. मोदी सरकार ने पिछले साल 1 जुलाई से गोल्ड ज्वैलरी की हॉलमार्किंग के संकेतों में बदलाव करते हुए संकेतों की संख्या तीन कर दी थी. हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता की गारंटी होती है. हॉलमार्क हर आभूषण पर लगने वाला एक निशान होता है. इसमें भारतीय मानक ब्यूरों (BIS) का लोगो, उसकी शुद्धता दी होती है. इसके साथ ही टेस्टिंग सेंटर आदि की भी जानकारी हॉलमार्किंग में मिलती है. किसी आभूषण में सोने की मात्रा अलग-अलग होती है, जो उसकी शुद्धता यानी कैरेट के आधार पर तय होती है. कई बार ज्वैलर्स कम कैरेट के आभूषणों पर ऊंची कैरेट की कीमतें वसूलते हैं. इसी को खत्म करने के लिये हॉलमार्किग को अनिवार्य किया गया है. .
भारतीय मानक ब्यूरो ने देश में ज्वैलरी की शुद्धता बनाए रखने के लिए छह अंकों वाला हॉलमार्क विशिष्ट पहचान अनिवार्य कर दिया है. नई दिल्ली. भारतीय मानक ब्यूरो ने देश में ज्वैलरी की शुद्धता बनाए रखने के लिए छह अंकों वाला हॉलमार्क विशिष्ट पहचान अनिवार्य कर दिया है. देश में चार और पांच अंकों वाली पुरानी हॉलमार्क ज्वैलरी की बिक्री पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. हालांकि, बीआईएस के इस फैसले का अब दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है. इन लोगों की मांग है कि चार या पांच अंकों वाली पुरानी हॉलमार्क की ज्वैलरी को छह अंकों वाली हॉलमार्क ज्वैलरी में बदलने का पूरा खर्चा अब सरकार उठाए. भारत में सोना खरीदने और इसमें निवेश करने का चलन बहुत ज्यादा है. खासतौर पर शादी-विवाह हो या फिर कोई त्यौहार भारतीय गोल्ड जरूर खरीदते हैं. लेकिन, कई बार किसी कारण से हमें सोना बेचना भी पड़ता है. ऐसे में आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि सोना बेचने के नियम में क्या बदलाव हुए हैं. सोने की हॉलमार्किंग के नियम में एक बार फिर से एक अप्रैल, दो हज़ार तेईस से बदलाव होने वाले हैं. उपभोक्ता मंत्रालय के नए नियम के तहत एक अप्रैल से छः डिजिट वाले अल्फान्यूमेरिक हॉलमार्किंग के बिना सोना नहीं बिकेगा. जैसे आधार कार्ड पर बारह अंकों का कोड होता है, उसी तरह से सोने पर छः अंकों का हॉलमार्क कोड होगा. इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं. मंत्रालय का कहना है कि अब केवल छः अंकों वाला हॉलमार्क की मान्य होगा. गोल्ड हॉलमार्किंग एक स्टैम्प है जो उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे सोने के आभूषणों की शुद्धता बताती है. मोदी सरकार ने पंद्रह जनवरी दो हज़ार इक्कीस से हॉलमार्किंग वाला सोना बेचना अनिवार्य किया था. हालांकि, यह पूरी तरह से सोलह जून दो हज़ार इक्कीस से स्वैच्छिक तौर पर लागू हुआ था. मोदी सरकार ने पिछले साल एक जुलाई से गोल्ड ज्वैलरी की हॉलमार्किंग के संकेतों में बदलाव करते हुए संकेतों की संख्या तीन कर दी थी. हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता की गारंटी होती है. हॉलमार्क हर आभूषण पर लगने वाला एक निशान होता है. इसमें भारतीय मानक ब्यूरों का लोगो, उसकी शुद्धता दी होती है. इसके साथ ही टेस्टिंग सेंटर आदि की भी जानकारी हॉलमार्किंग में मिलती है. किसी आभूषण में सोने की मात्रा अलग-अलग होती है, जो उसकी शुद्धता यानी कैरेट के आधार पर तय होती है. कई बार ज्वैलर्स कम कैरेट के आभूषणों पर ऊंची कैरेट की कीमतें वसूलते हैं. इसी को खत्म करने के लिये हॉलमार्किग को अनिवार्य किया गया है. .
1971 का साल बहुत ऐतिहासिक था. इसी साल देश में परिस्थितियाँ बदल रहीं थीं और बंगलादेश की आज़ादी के लिए लड़ाई हुई. इस लड़ाई में भारत की जीत हुई और इस जीत ने इंदिरा गांधी के पैर बहुत मज़बूत कर दिए. दिसंबर में यह युद्ध हुआ और मार्च में राज्यों के चुनाव हो गए. इन चुनावों में कांग्रेस ने पूरे देश में जीत दर्ज की. दिलचस्प बात थी कि पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी ख़त्म हो गई, पंजाब से अकालियों का सफ़ाया हो गया. इस लिहाज़ से देखें तो वह इंदिरा गांधी के उत्कर्ष का समय था. उनकी महिमा बढ़ चुकी थी. 1972 के चुनाव में जीत एक बड़ा मुद्दा था. इंदिरा गांधी का अपना क़द बहुत बढ़ गया था और विरोधियों का क़द बिल्कुल घट गया था. 1972 से 74 तक का समय तो कोई बहुत कठिन समय नहीं था लेकिन उसके बाद कठिनाइयाँ शुरु हो गईं. देश में आर्थिक समस्याएँ थीं और भ्रष्टाचार के सवाल उठने लगे थे. यह वही समय था जब संजय गाँधी पर लोग सवाल उठाने लगे थे. शुरुआती दिनों में तो इंदिरा गाँधी के सचिवालय, पीएन हक्सर आदि का बड़ा असर था. जब जेपी का आंदोलन शुरु हो गया तब संजय गाँधी का दबदबा बढ़ा. 1973-74 में इंदिरा गाँधी के नज़दीकी माने जाने वाले लोगों का असर कम होना शुरु हुआ, उनमें पीएन हक्सर, उमाशंकर दीक्षित थे और कुछ हद तक मैं भी था. उस वक्त एलएन मिश्र, वाईपी कपूर और आरके धवन का असर बढ़ना शुरु हुआ था. उसी समय धीरेंद्र ब्रहमचारी का असर बढ़ा. लोग कुछ भी कहें लेकिन इंदिरा गाँधी की पकड़ उस वक़्त तक मज़बूत थी और उनके कानों में जिनकी रिसाई थी उनका प्रभाव बहुत बढ़ रहा था. दो तीन बातें ध्यान रखना चाहिए. एक तो जेपी का आंदोलन बढ़ रहा था. बिहार से शुरु हुआ यह आंदोलन बढ़ता ही जा रहा था. दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका पर इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ फ़ैसला दे दिया. तो फिर एक नए क़िस्म का विवाद चला कि उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए या नहीं देना चाहिए. यह एक हफ़्ता बहुत महत्वपूर्ण था और इसी में उनके ख़ास सलाहकारों की मंडली उनको आपातकाल की ओर ले गई. आपातकाल तो भारतीय लोकतंत्र के ख़िलाफ़ था. सारे मौलिक अधिकार स्थगित कर दिए गए और जो भी विरोध में थे वे जेलों में बंद कर दिए गए. इनमें जयप्रकाश भी शामिल थे. वैसे जयप्रकाश नारायण बुनियादी तौर पर इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं थे, बस उनकी दो तीन शर्तें थीं कि वे यदि ऐसा कर दें तो बात ख़त्म हो सकती थी. लेकिन इंदिरा गाँधी से बात करके भी बात बनी नहीं. इसी समय युवा तुर्क उभरे, जो थे तो कांग्रेसी लेकिन वे भ्रष्टाचार और दूसरे व्यक्तिवाद के ख़िलाफ़ थे. आपातकाल के शुरुआती दिनों में तो लोगों को पता नहीं चला लेकिन ज्यों-ज्यों लोगों को समझ में आना शुरु हुआ उन्होंने कांग्रेस को घातक नुक़सान पहुँचाया और उन पार्टियों को उभरने का मौक़ा दिया जिनका आज बड़ा बोलबाला है. उसी दौर में नए नेता भी उभरे और वे बेहद लोकप्रिय थे. मूल दिक़्क़त उस दौर की थी - व्यक्ति पूजा. एक हद तक तो यह पहले भी शुरु हो चुका था लेकिन वे बड़े लोग थे, महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरू. इंदिरा गाँधी के पहले दौर में तो यह संभव नहीं हो सका लेकिन दूसरे दौर में, लड़ाई के बाद वे भी इस दायरे में आ गईं. बदक़िस्मती से भारतीय राजनीति में पार्टियों के भीतर कोई प्रजातंत्र नहीं है इसलिए पार्टियों के भीतर परिवारों का कब्ज़ा हो गया. ये किसी एक पार्टी का मामला नहीं है बहुत सी पार्टियों में ये समस्या है और इसी से व्यक्ति पूजा शुरु होती है.
एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर का साल बहुत ऐतिहासिक था. इसी साल देश में परिस्थितियाँ बदल रहीं थीं और बंगलादेश की आज़ादी के लिए लड़ाई हुई. इस लड़ाई में भारत की जीत हुई और इस जीत ने इंदिरा गांधी के पैर बहुत मज़बूत कर दिए. दिसंबर में यह युद्ध हुआ और मार्च में राज्यों के चुनाव हो गए. इन चुनावों में कांग्रेस ने पूरे देश में जीत दर्ज की. दिलचस्प बात थी कि पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी ख़त्म हो गई, पंजाब से अकालियों का सफ़ाया हो गया. इस लिहाज़ से देखें तो वह इंदिरा गांधी के उत्कर्ष का समय था. उनकी महिमा बढ़ चुकी थी. एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के चुनाव में जीत एक बड़ा मुद्दा था. इंदिरा गांधी का अपना क़द बहुत बढ़ गया था और विरोधियों का क़द बिल्कुल घट गया था. एक हज़ार नौ सौ बहत्तर से चौहत्तर तक का समय तो कोई बहुत कठिन समय नहीं था लेकिन उसके बाद कठिनाइयाँ शुरु हो गईं. देश में आर्थिक समस्याएँ थीं और भ्रष्टाचार के सवाल उठने लगे थे. यह वही समय था जब संजय गाँधी पर लोग सवाल उठाने लगे थे. शुरुआती दिनों में तो इंदिरा गाँधी के सचिवालय, पीएन हक्सर आदि का बड़ा असर था. जब जेपी का आंदोलन शुरु हो गया तब संजय गाँधी का दबदबा बढ़ा. एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर-चौहत्तर में इंदिरा गाँधी के नज़दीकी माने जाने वाले लोगों का असर कम होना शुरु हुआ, उनमें पीएन हक्सर, उमाशंकर दीक्षित थे और कुछ हद तक मैं भी था. उस वक्त एलएन मिश्र, वाईपी कपूर और आरके धवन का असर बढ़ना शुरु हुआ था. उसी समय धीरेंद्र ब्रहमचारी का असर बढ़ा. लोग कुछ भी कहें लेकिन इंदिरा गाँधी की पकड़ उस वक़्त तक मज़बूत थी और उनके कानों में जिनकी रिसाई थी उनका प्रभाव बहुत बढ़ रहा था. दो तीन बातें ध्यान रखना चाहिए. एक तो जेपी का आंदोलन बढ़ रहा था. बिहार से शुरु हुआ यह आंदोलन बढ़ता ही जा रहा था. दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका पर इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ फ़ैसला दे दिया. तो फिर एक नए क़िस्म का विवाद चला कि उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए या नहीं देना चाहिए. यह एक हफ़्ता बहुत महत्वपूर्ण था और इसी में उनके ख़ास सलाहकारों की मंडली उनको आपातकाल की ओर ले गई. आपातकाल तो भारतीय लोकतंत्र के ख़िलाफ़ था. सारे मौलिक अधिकार स्थगित कर दिए गए और जो भी विरोध में थे वे जेलों में बंद कर दिए गए. इनमें जयप्रकाश भी शामिल थे. वैसे जयप्रकाश नारायण बुनियादी तौर पर इंदिरा गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं थे, बस उनकी दो तीन शर्तें थीं कि वे यदि ऐसा कर दें तो बात ख़त्म हो सकती थी. लेकिन इंदिरा गाँधी से बात करके भी बात बनी नहीं. इसी समय युवा तुर्क उभरे, जो थे तो कांग्रेसी लेकिन वे भ्रष्टाचार और दूसरे व्यक्तिवाद के ख़िलाफ़ थे. आपातकाल के शुरुआती दिनों में तो लोगों को पता नहीं चला लेकिन ज्यों-ज्यों लोगों को समझ में आना शुरु हुआ उन्होंने कांग्रेस को घातक नुक़सान पहुँचाया और उन पार्टियों को उभरने का मौक़ा दिया जिनका आज बड़ा बोलबाला है. उसी दौर में नए नेता भी उभरे और वे बेहद लोकप्रिय थे. मूल दिक़्क़त उस दौर की थी - व्यक्ति पूजा. एक हद तक तो यह पहले भी शुरु हो चुका था लेकिन वे बड़े लोग थे, महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरू. इंदिरा गाँधी के पहले दौर में तो यह संभव नहीं हो सका लेकिन दूसरे दौर में, लड़ाई के बाद वे भी इस दायरे में आ गईं. बदक़िस्मती से भारतीय राजनीति में पार्टियों के भीतर कोई प्रजातंत्र नहीं है इसलिए पार्टियों के भीतर परिवारों का कब्ज़ा हो गया. ये किसी एक पार्टी का मामला नहीं है बहुत सी पार्टियों में ये समस्या है और इसी से व्यक्ति पूजा शुरु होती है.
- मैं आपसे एक प्रश्न करता हूँ । बताइए, विजली बड़ी है या आपके घर का दीपक बड़ा है ? मित्रो । इस बिजली ने तुम्हारे घर का दीपक हटाकर घर की मंगल महिमा का हरण कर लिया है। बिजली के प्रताप ने तुम्हारी आँखों का तेज हर लिया है। इसकी बदौलत मनुष्य को इतनी अधिक क्षति पहुँची है कि उसकी पूर्त्ति होना बहुत कठिन है। बिजली तथा इसी प्रकार की अन्य जड़ वस्तुओं से आपको बहुत हानि पहुँची है। इन वस्तुओं ने आपके सुख को सुलभ नहीं बनाया । आधुनिक विज्ञान की आलोचना करने का समय नहीं, फिर भी इतना तो कहना ही पड़ेगा कि विज्ञान के राक्षसी यंत्रों ने विकराल विध्वंस की सृष्टि की है। विज्ञान की कृपा से ही आज संसार त है । जगत् में हाय-हाय की गगन को गुँजित करने वाली ध्वनि सुनाई पड़ रही है, दुःखियों का जो करुण चीत्कार कर्णगोचर हो रहा है, भुखमरों का जो रोदन सुनाई दे रहा है, यह सब विज्ञान की विरुदावली का बखान है । जिनके कान हैं वे इस विरुदावली को सुनें और विज्ञान की वास्तविकता पर विचार करें । कहने का आशय यह है कि मनुष्य की वैज्ञानिक प्रगति उसके मस्तिष्क की महिमा को भले ही प्रकट करती हो, पर उससे मनुष्य की मनुष्यता जरा भी विकसित नहीं हुई । जो विज्ञान मनुष्य की मनुष्यता नहीं बढ़ाता, बल्कि उसे घटाता है और • पशुता की वृद्धि करता है, उसी विज्ञान की बदौलत मनुष्य अपने विशिष्ट - उच्च श्रेणी का मानता है ! इसे जवाहर-किरणावलीतृतीय भाग [ "मनुष्यता मित्रो ! वात साधारण है, छोटी-सी जान पड़ती है। पर इसके रहस्य का विचार कीजिए । बताइए उन चिड़ियों के मरने में घोष किसका है ? मृत्यु के लिए कुत्ता जिम्मेवर है या वेस्वयमेव ? 'पे स्वयमेव ! ' क्यों ! उन विड़ियों ने ऐसा कौन-सा काम किया, जिसके फारा उन्हें दुःख भोगना पड़ा ? मित्रो ! प्रकृति का नियम निराला है । उस नियम को कोई तोड़ नहीं सकता। विचार कीजिए, क्या उन चिड़ियों को घर चॉटना था ? क्या उन्हे धन-दौलत का बँटवारा करना था ? काश में स्वच्छन्द विचरण करने वाली चिड़िया, कुत्ते की क्या विमात क्या शेर के भी हाथ आ सकती है ? फिर वह दोनों कुत्ते के द्वारा कैसे मारी गई ? क्रोध के कारण । क्रोध ने उनका नाश कर डाला । अगर वे क्रोध में पागल होकर अपनापन भूल गई होतीं तो फुत्ते की क्या मजाल कि वह उनकी परछाई भी पासके । भाइयो और बहिनो ! आपने चिड़ियों के मरने का कारण समझ लिया । श्राप उन्हें यह उपदेश देने के लिए भी तैयार हो गये कि क्रोध नहीं करना चाहिए। पर आप इस उपदेश पर स्वयं भी करते हैं? मैं बहिनों से पूछता हूँ --बहिनो ! तुम तो कभी ऐसा क्रोध नहीं करतीं ? आपकी तरफ से कोई उत्तर नहीं मिल रहा है। पर मुझे से मालूम है कि अगर आप क्रोधन करतो तो सास-बहू, ननददिव्य-सन्देश ] जवाहर किरणावली- तृतीय भाग सौजाई एवं देवरानी-जिठानी में भी लड़ाई न होती। घर-घर कलह के अडून बने होते और आपको पारिवारिक जीवन कुछ का कुछ होता । बहिनो ! कुचाल को छोड़ो । यह कुचाल तुम्हारे विवेक रूपी पख़ को तोड़ डालेगी । जिस प्रकार पंखो के विना पक्षियों का सुखपूर्ण स्वच्छन्द विहार नहीं हो सकत्ता, उसी प्रकार विवेक के नष्ट होने पर तुम्हारा मोक्ष रूप आकाश में क्रीड़ा करना असम्भव हो जायगा । क्रोध महा-भयंकर पिशाच है। इस से सदा दूर रहा करो । भाइयो और वहिनो ! यह बात मैंने अपने मन से बना कर नहीं कही है। इसका विचार शास्त्र में आया है। गीता में भी इसकी अच्छी विषेचना की गई है । इस महान् शत्रु के प्रताप से जीवों को अनेक बार चौकड़ी भरनी पड़ती है। तीर्थंकर क्रोध तथा इसके भाई-वन्द अन्य दुर्गुणों का समूल उन्मूलन करते हैं। इसी कारण वे 'ईश्वर' कहलाते हैं। आत्मा अनन्त गुणों की राशि है। उसमें अपरिमित गुण-रत्न भरे पड़े हैं। फिर भी आप उन गुणों को उपलब्ध नहीं कर पाते । इतना ही नहीं आप उन गुणों को पूरी तरह पहचान भी नहीं पाते हैं। अपनी चीज़, अपने भीतर विद्यमान है, अपने द्वारा ही उसकी उपलब्धि होती है, फिर भी उसे आप नहीं जान पाते । यह कितनी दयनीय दशा है ? जानते हो, इसका कारण क्या है ? इसका एकमात्र कारण क्रोध आदि विकार हैं। विकारों ने आत्मा के स्वाभाविक गुणों को इस प्रकार आच्छा दित कर रक्खा है कि आपकी दृष्टि वहाँ तक पहुँच ही नहीं १७६ ] अवाहर किरणावली - तृतीय भाग जहरीली जड़ प्रस्ताव उपस्थित होने पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी । उन्होंने कन्याओं को और उनके पिताओं को स्पष्ट रूप से बतला दिया था कि मै गृहस्थावस्था मे रहना नहीं चाहता । मुझे दूसरे दिन ही जैनेन्द्री दीक्षा धारण कर लेनी है। यह सब कुछ जानतेबूझते कन्याओं ने जम्बूकुमार के साथ विवाह-संबंध स्वीकार किया था । अतएव मैंने ऊपर जो कुछ कहा है, जम्बू-चरित से उसमे कुछ भी बाधा उपस्थित नहीं होती। जम्बूकुमार ने किसी को धोखा नहीं दिया, किसी को भुलावे में नहीं रक्खा, उन्होंने पहले ही बात साफ कर दी थी । बात यह है कि धर्म की नींव नीति है। नीति के विना धर्म की प्रतिष्ठा नहीं हो सकती । जो पुरुष या स्त्री नीति को भंग करेगा वह धर्म को दीप्त नहीं कर सकता । अतएव जिस क्रिया से नैतिक मर्यादा का उल्लंघन होता है वह क्रिया धर्म-संगत कैसे कही जा सकती है ? यह विचार करना है कि सम्यग्दृष्टि पुरुष को किस वस्तु की कांक्षा नहीं करनी चाहिए ? सम्यक्त्व धारण करने वाले को घतलाया जाता है कि स्वधर्म के देव, गुरु के सिवाय अन्य धर्म के देव और गुरु की कांक्षा नहीं करनी चाहिए। जो ऐसी काक्षा करता है उसे दोप लगता है । प्रश्न उठता है - स्वधर्म क्या ? अपने-अपने धर्म की हर एक बढ़ाई करता हूँ। सत्र कहते हैं - हमारे धर्म को मानो, हमारे गुरुओं को वन्दन करो और किसी दूसरे को मत मानो । गीता मे भी कहा है'स्वधर्म निवनं श्रेय परचम भयावह '
- मैं आपसे एक प्रश्न करता हूँ । बताइए, विजली बड़ी है या आपके घर का दीपक बड़ा है ? मित्रो । इस बिजली ने तुम्हारे घर का दीपक हटाकर घर की मंगल महिमा का हरण कर लिया है। बिजली के प्रताप ने तुम्हारी आँखों का तेज हर लिया है। इसकी बदौलत मनुष्य को इतनी अधिक क्षति पहुँची है कि उसकी पूर्त्ति होना बहुत कठिन है। बिजली तथा इसी प्रकार की अन्य जड़ वस्तुओं से आपको बहुत हानि पहुँची है। इन वस्तुओं ने आपके सुख को सुलभ नहीं बनाया । आधुनिक विज्ञान की आलोचना करने का समय नहीं, फिर भी इतना तो कहना ही पड़ेगा कि विज्ञान के राक्षसी यंत्रों ने विकराल विध्वंस की सृष्टि की है। विज्ञान की कृपा से ही आज संसार त है । जगत् में हाय-हाय की गगन को गुँजित करने वाली ध्वनि सुनाई पड़ रही है, दुःखियों का जो करुण चीत्कार कर्णगोचर हो रहा है, भुखमरों का जो रोदन सुनाई दे रहा है, यह सब विज्ञान की विरुदावली का बखान है । जिनके कान हैं वे इस विरुदावली को सुनें और विज्ञान की वास्तविकता पर विचार करें । कहने का आशय यह है कि मनुष्य की वैज्ञानिक प्रगति उसके मस्तिष्क की महिमा को भले ही प्रकट करती हो, पर उससे मनुष्य की मनुष्यता जरा भी विकसित नहीं हुई । जो विज्ञान मनुष्य की मनुष्यता नहीं बढ़ाता, बल्कि उसे घटाता है और • पशुता की वृद्धि करता है, उसी विज्ञान की बदौलत मनुष्य अपने विशिष्ट - उच्च श्रेणी का मानता है ! इसे जवाहर-किरणावलीतृतीय भाग [ "मनुष्यता मित्रो ! वात साधारण है, छोटी-सी जान पड़ती है। पर इसके रहस्य का विचार कीजिए । बताइए उन चिड़ियों के मरने में घोष किसका है ? मृत्यु के लिए कुत्ता जिम्मेवर है या वेस्वयमेव ? 'पे स्वयमेव ! ' क्यों ! उन विड़ियों ने ऐसा कौन-सा काम किया, जिसके फारा उन्हें दुःख भोगना पड़ा ? मित्रो ! प्रकृति का नियम निराला है । उस नियम को कोई तोड़ नहीं सकता। विचार कीजिए, क्या उन चिड़ियों को घर चॉटना था ? क्या उन्हे धन-दौलत का बँटवारा करना था ? काश में स्वच्छन्द विचरण करने वाली चिड़िया, कुत्ते की क्या विमात क्या शेर के भी हाथ आ सकती है ? फिर वह दोनों कुत्ते के द्वारा कैसे मारी गई ? क्रोध के कारण । क्रोध ने उनका नाश कर डाला । अगर वे क्रोध में पागल होकर अपनापन भूल गई होतीं तो फुत्ते की क्या मजाल कि वह उनकी परछाई भी पासके । भाइयो और बहिनो ! आपने चिड़ियों के मरने का कारण समझ लिया । श्राप उन्हें यह उपदेश देने के लिए भी तैयार हो गये कि क्रोध नहीं करना चाहिए। पर आप इस उपदेश पर स्वयं भी करते हैं? मैं बहिनों से पूछता हूँ --बहिनो ! तुम तो कभी ऐसा क्रोध नहीं करतीं ? आपकी तरफ से कोई उत्तर नहीं मिल रहा है। पर मुझे से मालूम है कि अगर आप क्रोधन करतो तो सास-बहू, ननददिव्य-सन्देश ] जवाहर किरणावली- तृतीय भाग सौजाई एवं देवरानी-जिठानी में भी लड़ाई न होती। घर-घर कलह के अडून बने होते और आपको पारिवारिक जीवन कुछ का कुछ होता । बहिनो ! कुचाल को छोड़ो । यह कुचाल तुम्हारे विवेक रूपी पख़ को तोड़ डालेगी । जिस प्रकार पंखो के विना पक्षियों का सुखपूर्ण स्वच्छन्द विहार नहीं हो सकत्ता, उसी प्रकार विवेक के नष्ट होने पर तुम्हारा मोक्ष रूप आकाश में क्रीड़ा करना असम्भव हो जायगा । क्रोध महा-भयंकर पिशाच है। इस से सदा दूर रहा करो । भाइयो और वहिनो ! यह बात मैंने अपने मन से बना कर नहीं कही है। इसका विचार शास्त्र में आया है। गीता में भी इसकी अच्छी विषेचना की गई है । इस महान् शत्रु के प्रताप से जीवों को अनेक बार चौकड़ी भरनी पड़ती है। तीर्थंकर क्रोध तथा इसके भाई-वन्द अन्य दुर्गुणों का समूल उन्मूलन करते हैं। इसी कारण वे 'ईश्वर' कहलाते हैं। आत्मा अनन्त गुणों की राशि है। उसमें अपरिमित गुण-रत्न भरे पड़े हैं। फिर भी आप उन गुणों को उपलब्ध नहीं कर पाते । इतना ही नहीं आप उन गुणों को पूरी तरह पहचान भी नहीं पाते हैं। अपनी चीज़, अपने भीतर विद्यमान है, अपने द्वारा ही उसकी उपलब्धि होती है, फिर भी उसे आप नहीं जान पाते । यह कितनी दयनीय दशा है ? जानते हो, इसका कारण क्या है ? इसका एकमात्र कारण क्रोध आदि विकार हैं। विकारों ने आत्मा के स्वाभाविक गुणों को इस प्रकार आच्छा दित कर रक्खा है कि आपकी दृष्टि वहाँ तक पहुँच ही नहीं एक सौ छिहत्तर ] अवाहर किरणावली - तृतीय भाग जहरीली जड़ प्रस्ताव उपस्थित होने पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी । उन्होंने कन्याओं को और उनके पिताओं को स्पष्ट रूप से बतला दिया था कि मै गृहस्थावस्था मे रहना नहीं चाहता । मुझे दूसरे दिन ही जैनेन्द्री दीक्षा धारण कर लेनी है। यह सब कुछ जानतेबूझते कन्याओं ने जम्बूकुमार के साथ विवाह-संबंध स्वीकार किया था । अतएव मैंने ऊपर जो कुछ कहा है, जम्बू-चरित से उसमे कुछ भी बाधा उपस्थित नहीं होती। जम्बूकुमार ने किसी को धोखा नहीं दिया, किसी को भुलावे में नहीं रक्खा, उन्होंने पहले ही बात साफ कर दी थी । बात यह है कि धर्म की नींव नीति है। नीति के विना धर्म की प्रतिष्ठा नहीं हो सकती । जो पुरुष या स्त्री नीति को भंग करेगा वह धर्म को दीप्त नहीं कर सकता । अतएव जिस क्रिया से नैतिक मर्यादा का उल्लंघन होता है वह क्रिया धर्म-संगत कैसे कही जा सकती है ? यह विचार करना है कि सम्यग्दृष्टि पुरुष को किस वस्तु की कांक्षा नहीं करनी चाहिए ? सम्यक्त्व धारण करने वाले को घतलाया जाता है कि स्वधर्म के देव, गुरु के सिवाय अन्य धर्म के देव और गुरु की कांक्षा नहीं करनी चाहिए। जो ऐसी काक्षा करता है उसे दोप लगता है । प्रश्न उठता है - स्वधर्म क्या ? अपने-अपने धर्म की हर एक बढ़ाई करता हूँ। सत्र कहते हैं - हमारे धर्म को मानो, हमारे गुरुओं को वन्दन करो और किसी दूसरे को मत मानो । गीता मे भी कहा है'स्वधर्म निवनं श्रेय परचम भयावह '
मुंबई, 23 जुलाई (वार्ता)। राजस्थान (Rajasthan) के सुप्रसिद्ध गायक बल्ली भालपुर का गाना 'इंस्टाग्राम की तितली' रिलीज हो गया है। बैसला म्यूजिक के डायरेक्टर, अजीत गुर्जर उर्फ अजीत बैसला (Ajit Gurjar alias Ajit Baisla) , ने 'इंस्टाग्राम की तितली' को संगीत प्रेमियों के बीच प्रस्तुत किया है। 'इंस्टाग्राम की तितली' (instagram butterfly) के लेखक शिवलाल बैंसला ने भावपूर्ण शब्दों में गीत की गहराई को बयां किया है। म्यूजिक डायरेक्टर दोई ब्रदर ने इस गीत का संगीत रूपांतरित किया है। गाने के वीडियो के निर्देशक, सतीश नेनिवाल, ने गाने को एक रोचक कहानी के साथ जीवंत बनाया है।
मुंबई, तेईस जुलाई । राजस्थान के सुप्रसिद्ध गायक बल्ली भालपुर का गाना 'इंस्टाग्राम की तितली' रिलीज हो गया है। बैसला म्यूजिक के डायरेक्टर, अजीत गुर्जर उर्फ अजीत बैसला , ने 'इंस्टाग्राम की तितली' को संगीत प्रेमियों के बीच प्रस्तुत किया है। 'इंस्टाग्राम की तितली' के लेखक शिवलाल बैंसला ने भावपूर्ण शब्दों में गीत की गहराई को बयां किया है। म्यूजिक डायरेक्टर दोई ब्रदर ने इस गीत का संगीत रूपांतरित किया है। गाने के वीडियो के निर्देशक, सतीश नेनिवाल, ने गाने को एक रोचक कहानी के साथ जीवंत बनाया है।
Uttarakhand : पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को ही ज्यादा रिकॉर्डेड कॉल की गईं थीं। इसके आधार पर पुलिस इस धमकी से ज्यादा पब्लिसिटी स्टंट मान रही है। हालांकि, एहतियात के तौर पर रामनगर में होनी वाली जी-20 की बैठक को लेकर सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस के साथ ही एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां सुरक्षा लेकर मुस्तैद हो गई हैं। डीजीपी अशोक कुमार सहित तमाम बड़े अधिकारी सुरक्षा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। Kirandeep Kaur : किरणदीप कौर यूके की एनआरआई है। शादी के बाद कौर अमृतपाल के पैतृक गांव पंजाब के जल्लूपुर खेड़ा में रहने लगी। दोनों की शादी दिवंगत गायक-अभिनेता दीप सिद्धू के संगठन वारिस पंजाब दे का प्रमुख बनाए जाने के कुछ महीने बाद हुई थी। जानकारी के मुताबिक अमृतपाल सिंह की शादी उनके गांव के गुरुद्वारा साहिब में हुई थी। Tit For Tat :घटना की भारत ने निंदा करते हुए नाराजगी जतायी थी। खालिस्तानी समर्थकों ने उच्चायुक्त कार्यालय के बाहर फहरा रहे तिरंगे को उतारने की कोशिश की थी। भारत ने इस मामले को लेकर दिल्ली में ब्रिटेन के वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया और साफ तौर पर ब्रिटेन का जवाब मांगा।
Uttarakhand : पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को ही ज्यादा रिकॉर्डेड कॉल की गईं थीं। इसके आधार पर पुलिस इस धमकी से ज्यादा पब्लिसिटी स्टंट मान रही है। हालांकि, एहतियात के तौर पर रामनगर में होनी वाली जी-बीस की बैठक को लेकर सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस के साथ ही एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां सुरक्षा लेकर मुस्तैद हो गई हैं। डीजीपी अशोक कुमार सहित तमाम बड़े अधिकारी सुरक्षा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। Kirandeep Kaur : किरणदीप कौर यूके की एनआरआई है। शादी के बाद कौर अमृतपाल के पैतृक गांव पंजाब के जल्लूपुर खेड़ा में रहने लगी। दोनों की शादी दिवंगत गायक-अभिनेता दीप सिद्धू के संगठन वारिस पंजाब दे का प्रमुख बनाए जाने के कुछ महीने बाद हुई थी। जानकारी के मुताबिक अमृतपाल सिंह की शादी उनके गांव के गुरुद्वारा साहिब में हुई थी। Tit For Tat :घटना की भारत ने निंदा करते हुए नाराजगी जतायी थी। खालिस्तानी समर्थकों ने उच्चायुक्त कार्यालय के बाहर फहरा रहे तिरंगे को उतारने की कोशिश की थी। भारत ने इस मामले को लेकर दिल्ली में ब्रिटेन के वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया और साफ तौर पर ब्रिटेन का जवाब मांगा।
चंडीगढ़, 19 अक्टूबरः महेन्द्रा एंड महेन्द्रा की स्वराज डिविजऩ, मोहाली द्वारा कोरोना योद्धाओं के लिए विशेष तौर पर तैयार करवाई गई 500 फेसशील्ड आज चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव श्री डी.के. तिवाड़ी को भेंट किए गए। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि (स्वराज डिविजऩ) महेन्द्रा एंड महेन्द्रा मोहाली के सी.ई.ओ. हरीश चुवान के नेतृत्व में स्वास्थ्य-सुरक्षा वर्करों और अगली कतार के कोविड योद्धाओं को सुरक्षा साजो-सामान मुहैया करवाने के लिए फेस शील्डें बनाई गई हैं। प्रवक्ता ने बताया कि (स्वराज डिविजऩ) महेन्द्रा एंड महेन्द्रा मोहाली अब तक पंजाब सरकार के अधीन विभिन्न संगठनों को ऐसी 22,000 फेस शील्डें बाँट चुके हैं। आज चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के डायरैक्टोरेट में 500 ऐसी फेस शील्डें श्री रंजन मिश्रा, जनरल मैनेजर एम एंड एम (स्वराज डिविजऩ) ने श्री डी.के. तिवारी प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग और डॉ. अवनीश कुमार डायरैक्टर को अमृतसर और पटियाला में सरकारी मैडीकल कॉलेजों के लिए दीं। श्री तिवाड़ी ने महेन्द्रा और महेन्द्रा का कोविड योद्धाओं के लिए दिए गए योगदान के लिए धन्यवाद किया।
चंडीगढ़, उन्नीस अक्टूबरः महेन्द्रा एंड महेन्द्रा की स्वराज डिविजऩ, मोहाली द्वारा कोरोना योद्धाओं के लिए विशेष तौर पर तैयार करवाई गई पाँच सौ फेसशील्ड आज चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव श्री डी.के. तिवाड़ी को भेंट किए गए। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि महेन्द्रा एंड महेन्द्रा मोहाली के सी.ई.ओ. हरीश चुवान के नेतृत्व में स्वास्थ्य-सुरक्षा वर्करों और अगली कतार के कोविड योद्धाओं को सुरक्षा साजो-सामान मुहैया करवाने के लिए फेस शील्डें बनाई गई हैं। प्रवक्ता ने बताया कि महेन्द्रा एंड महेन्द्रा मोहाली अब तक पंजाब सरकार के अधीन विभिन्न संगठनों को ऐसी बाईस,शून्य फेस शील्डें बाँट चुके हैं। आज चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के डायरैक्टोरेट में पाँच सौ ऐसी फेस शील्डें श्री रंजन मिश्रा, जनरल मैनेजर एम एंड एम ने श्री डी.के. तिवारी प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग और डॉ. अवनीश कुमार डायरैक्टर को अमृतसर और पटियाला में सरकारी मैडीकल कॉलेजों के लिए दीं। श्री तिवाड़ी ने महेन्द्रा और महेन्द्रा का कोविड योद्धाओं के लिए दिए गए योगदान के लिए धन्यवाद किया।
रासायनिक शस्त्र का प्रतीक उन शस्त्रों को रासायनिक शस्त्र (chemical weapon (CW)) कहते हैं जिसमें किसी ऐसे रसायन का उपयोग किया जाता है जो मानव को मार सकता है या उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुँचा सकता है। अपनी मारक क्षमता के कारण ये जनसंहार करने वाले शस्त्रों की श्रेणी में आते हैं। रासायनिक शस्त्र, जनसंहार करने वाले शस्त्रों का एक प्रकार है। अन्य जनसंहारक शस्त्र हैं - जैविक शस्त्र (रोग), रासायनिक शस्त्र, तथा रेडियोसक्रिय अस्त्र (radiological weapons)। तंत्रिका गैस, अश्रु गैस, कालीमिर्च स्प्रे ये तीन आधुनिक रासायनिक शत्र के उदाहरण हैं। . 7 संबंधोंः डेल्टा फ़ोर्स (Delta Force), द्वितीय विश्वयुद्ध काल की प्रौद्योगिकी, भारत में सामूहिक विनाश के हथियार, मस्टर्ड गैस, रासायनिक शस्त्र, खाड़ी युद्ध, इराक में सामूहिक विनाश के हथियार। डेल्टा फ़ोर्स (Delta Force) सामान्यतः डेल्टा, डेल्टा फ़ोर्स या संयुक्त राज्य अमेरिका के सुरक्षा विभाग द्वारा कॉम्बैट एप्लिकेशन्स ग्रुप (CAG) के रूप में विख्यात 1st Special Forces Operational Detachment-Delta (1st SFOD-D) एक विशिष्ट अभियान सेना (SOF) है और संयुक्त विशेष अभियान कमान (JSOC) का अभिन्न अंग है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की मुख्य आतंकवाद विरोधी इकाई है। डेल्टा फ़ोर्स के प्रमुख कार्य हैं आतंकवाद का विरोध करना, विद्रोह को दबाना और राष्ट्रीय हस्तक्षेप वाले अभियान, हालांकि यह कई गुप्त मिशन संभालने में सक्षम एक अत्यंत बहुमुखी समूह है जो बंधकों को बचाने और छापों सहित बहुत कुछ करता है। . १६ जुलाई १९४५ का ट्रिनिटी विस्फोटः इससे परमाणु बम के युग का आरम्भ हुआ। जर्मन एनिग्माः कूट का रहस्य खोज निकालने वाली मशीन प्रौद्योगिकी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम को बहुत हद तक प्रभावित और निर्धारित किया। द्वितीय विश्वयुद्ध में बाहर आयी प्रौद्योगिकी का अधिकांश हिस्सा १९२० और १९३० के बीच विकसित किया गया था। लगभग हर प्रकार की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हुआ था जिसमें से प्रमुख हैं-. भारत के पास परमाणु हथियार के रूप में सामूहिक विनाश के हथियार हैं और अतीत में, रासायनिक हथियार भी थे। हालांकि भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार के आकार के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है पर हाल के अनुमान के मुताबिक भारत के पास लगभग 150-160 परमाणु हथियार हैं। 1999 में भारत के पास 800 किलो रिएक्टर ग्रेड और कुल 8300 किलो असैनिक प्लूटोनियम था जो लगभग 1,000 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त है। भारत ने 1968 की परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, भारत का तर्क है कि यह संधि केवल कुछ देशों तक ही परमाणु तकनीक को सीमित करती है और सामान्य परमाणु निरशास्त्रिकारण भी को रोकती है। भारत ने जैविक हथियारों सम्मेलन और रासायनिक हथियार कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किये हैं व पुष्टि भी की है। भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) का एक सदस्य है और द हेग आचार संहिता (The Hague Code of Conduct) की सदस्यता लेने वाला देश है। . मस्टर्ड गैस (Mustard gas) या सल्फर मस्टर्ड (sulfur mustard) एक रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग रासायनिक शस्त्र के रूप में हो सकता है। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मन सेना ने ब्रितानी सेना तथा कनाडा की सेना के विरुद्ध इसका प्रयोग किया था। बाद में इसका प्रयोग फ्रांसीसी द्वितीय सेना (French Second Army) के विरुद्ध भी किया गया था। . रासायनिक शस्त्र का प्रतीक उन शस्त्रों को रासायनिक शस्त्र (chemical weapon (CW)) कहते हैं जिसमें किसी ऐसे रसायन का उपयोग किया जाता है जो मानव को मार सकता है या उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुँचा सकता है। अपनी मारक क्षमता के कारण ये जनसंहार करने वाले शस्त्रों की श्रेणी में आते हैं। रासायनिक शस्त्र, जनसंहार करने वाले शस्त्रों का एक प्रकार है। अन्य जनसंहारक शस्त्र हैं - जैविक शस्त्र (रोग), रासायनिक शस्त्र, तथा रेडियोसक्रिय अस्त्र (radiological weapons)। तंत्रिका गैस, अश्रु गैस, कालीमिर्च स्प्रे ये तीन आधुनिक रासायनिक शत्र के उदाहरण हैं। . कोई विवरण नहीं। इराक के सैन्य शास्त्रगार सामूहिक विनाशक हथियार (जैविक और रासायनिक हथियार) इराक का रासायनिक हथियारो का कार्यक्रम 1960 ईस्वी मेँ शुरु हुआ था लेकीन 1990 के दशक मेँ एक विनाशक हथियारो के रूप मेँ सामने आया था इराक ने युध्द तथा कई अवसरो पर विनाशक हथियारो का प्रयोग किया था जिससे ईरान-इराक युध्द और कुर्दिस्तान जनसंहार जैसी घटनाएँ सामिल है 1991 मेँ प्रथम खाड़ी युध्द के बाद संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने इराक मेँ रासायनिक तथा जैविक हथियार होने की पुष्टि की थी जिसपर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक को अपने अज्ञात परमाणु कार्यक्रमो को नष्ट करने की चेतावनी दी थी। .
रासायनिक शस्त्र का प्रतीक उन शस्त्रों को रासायनिक शस्त्र ) कहते हैं जिसमें किसी ऐसे रसायन का उपयोग किया जाता है जो मानव को मार सकता है या उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुँचा सकता है। अपनी मारक क्षमता के कारण ये जनसंहार करने वाले शस्त्रों की श्रेणी में आते हैं। रासायनिक शस्त्र, जनसंहार करने वाले शस्त्रों का एक प्रकार है। अन्य जनसंहारक शस्त्र हैं - जैविक शस्त्र , रासायनिक शस्त्र, तथा रेडियोसक्रिय अस्त्र । तंत्रिका गैस, अश्रु गैस, कालीमिर्च स्प्रे ये तीन आधुनिक रासायनिक शत्र के उदाहरण हैं। . सात संबंधोंः डेल्टा फ़ोर्स , द्वितीय विश्वयुद्ध काल की प्रौद्योगिकी, भारत में सामूहिक विनाश के हथियार, मस्टर्ड गैस, रासायनिक शस्त्र, खाड़ी युद्ध, इराक में सामूहिक विनाश के हथियार। डेल्टा फ़ोर्स सामान्यतः डेल्टा, डेल्टा फ़ोर्स या संयुक्त राज्य अमेरिका के सुरक्षा विभाग द्वारा कॉम्बैट एप्लिकेशन्स ग्रुप के रूप में विख्यात एकst Special Forces Operational Detachment-Delta एक विशिष्ट अभियान सेना है और संयुक्त विशेष अभियान कमान का अभिन्न अंग है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की मुख्य आतंकवाद विरोधी इकाई है। डेल्टा फ़ोर्स के प्रमुख कार्य हैं आतंकवाद का विरोध करना, विद्रोह को दबाना और राष्ट्रीय हस्तक्षेप वाले अभियान, हालांकि यह कई गुप्त मिशन संभालने में सक्षम एक अत्यंत बहुमुखी समूह है जो बंधकों को बचाने और छापों सहित बहुत कुछ करता है। . सोलह जुलाई एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस का ट्रिनिटी विस्फोटः इससे परमाणु बम के युग का आरम्भ हुआ। जर्मन एनिग्माः कूट का रहस्य खोज निकालने वाली मशीन प्रौद्योगिकी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम को बहुत हद तक प्रभावित और निर्धारित किया। द्वितीय विश्वयुद्ध में बाहर आयी प्रौद्योगिकी का अधिकांश हिस्सा एक हज़ार नौ सौ बीस और एक हज़ार नौ सौ तीस के बीच विकसित किया गया था। लगभग हर प्रकार की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हुआ था जिसमें से प्रमुख हैं-. भारत के पास परमाणु हथियार के रूप में सामूहिक विनाश के हथियार हैं और अतीत में, रासायनिक हथियार भी थे। हालांकि भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार के आकार के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है पर हाल के अनुमान के मुताबिक भारत के पास लगभग एक सौ पचास-एक सौ साठ परमाणु हथियार हैं। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में भारत के पास आठ सौ किलो रिएक्टर ग्रेड और कुल आठ हज़ार तीन सौ किलो असैनिक प्लूटोनियम था जो लगभग एक,शून्य परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त है। भारत ने एक हज़ार नौ सौ अड़सठ की परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, भारत का तर्क है कि यह संधि केवल कुछ देशों तक ही परमाणु तकनीक को सीमित करती है और सामान्य परमाणु निरशास्त्रिकारण भी को रोकती है। भारत ने जैविक हथियारों सम्मेलन और रासायनिक हथियार कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किये हैं व पुष्टि भी की है। भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था का एक सदस्य है और द हेग आचार संहिता की सदस्यता लेने वाला देश है। . मस्टर्ड गैस या सल्फर मस्टर्ड एक रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग रासायनिक शस्त्र के रूप में हो सकता है। प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मन सेना ने ब्रितानी सेना तथा कनाडा की सेना के विरुद्ध इसका प्रयोग किया था। बाद में इसका प्रयोग फ्रांसीसी द्वितीय सेना के विरुद्ध भी किया गया था। . रासायनिक शस्त्र का प्रतीक उन शस्त्रों को रासायनिक शस्त्र ) कहते हैं जिसमें किसी ऐसे रसायन का उपयोग किया जाता है जो मानव को मार सकता है या उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुँचा सकता है। अपनी मारक क्षमता के कारण ये जनसंहार करने वाले शस्त्रों की श्रेणी में आते हैं। रासायनिक शस्त्र, जनसंहार करने वाले शस्त्रों का एक प्रकार है। अन्य जनसंहारक शस्त्र हैं - जैविक शस्त्र , रासायनिक शस्त्र, तथा रेडियोसक्रिय अस्त्र । तंत्रिका गैस, अश्रु गैस, कालीमिर्च स्प्रे ये तीन आधुनिक रासायनिक शत्र के उदाहरण हैं। . कोई विवरण नहीं। इराक के सैन्य शास्त्रगार सामूहिक विनाशक हथियार इराक का रासायनिक हथियारो का कार्यक्रम एक हज़ार नौ सौ साठ ईस्वी मेँ शुरु हुआ था लेकीन एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक मेँ एक विनाशक हथियारो के रूप मेँ सामने आया था इराक ने युध्द तथा कई अवसरो पर विनाशक हथियारो का प्रयोग किया था जिससे ईरान-इराक युध्द और कुर्दिस्तान जनसंहार जैसी घटनाएँ सामिल है एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे मेँ प्रथम खाड़ी युध्द के बाद संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने इराक मेँ रासायनिक तथा जैविक हथियार होने की पुष्टि की थी जिसपर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक को अपने अज्ञात परमाणु कार्यक्रमो को नष्ट करने की चेतावनी दी थी। .
पश्चिम में काम शास्त्र के ग्रन्थ के भीतर, जननेन्द्रियों की बनावट, उन के अवयवों के रूप, कार्य 'निस्स्यन्द आदि के, तथा गर्भाधान-निरोध आदि के प्रकारों के विषय मे नये ज्ञान और उप-ज्ञान, नये आविष्कार, बहुत हुए हैं, और इन विषयों पर बहुत ग्रन्थ लिखे गये हैं । सर्वसाधारण के उपयोग की बातें, डाक्टर मेरी स्टोप्स (Dr. Marie Stopes ) के ग्रन्थों में अच्छी नीयत से लिखी गई हैं, यद्यपि उन का भाव उतना ऊँचा सात्विक नहीं है जैसा पादरी स्टाल का । पृ० २१३ २१४ पर लिख आये हैं कि बच्चे, अक्सर, माता, पिता, अन्य गुरुजनो, वा अधिक उमर वालों से पूछते हैं 'नया बच्चा कहाँ से आया, कैसे आया,' ( जोड़ा- लगते हुए पशुओं पक्षियों को देख कर ) 'यह क्या कर रहे हैं, ' इत्यादि ; वृद्ध लोग प्रायः हँस कर टाल देते हैं, या बहकाने वाले मिथ्या-प्राय उत्तर दे देते हैं, या ( अति अनुचित) धमका देते हैं और ऐसे प्रश्न पूछने को मना कर देते हैं; अपनी बाल्यावस्था के ऐसे ही कुतूहल को, और उचित उत्तर न पाने से जो चित्त मे अशान्ति हुई, और इस का अपने अनुभव मे जो फल हुआ था, उस सब को, दुर्भाग्य से, भूल जाते हैं; फल प्रायः यही हुआ और होता है, कि बच्चे दूसरे सयानों से पूछते हैं, जो उन के हितचिन्तक नहीं, जो निर्लज्ज हैं, अथ च जो अपनी कामिक वासनाओं को इन अभागे भोले बच्चों पर ही निकालते हैं, उन को दुष्ट उपदेश देते हैं, दिखा कर समझाने के बहाने ऐसे पाप तक भी कर डालते हैं जिन से उन बच्चों के शरीर और चित्त सदा के लिये दूषित और रोगी हो जाते हैं, और सारा जीवन विष से सिक्त हो जाता है। ऐसे घोर दुष्फलों का प्रतिपादन, 'सैको-ऐनालिसिस', psycho.analysis, नामक उपशास्त्र के पाश्चात्य ग्रन्थकारों ने बहुत अच्छा किया है । ऊपर सूचना की गईं कि, वात्स्यायन ने प्रलोभन और अधःपतन की सामग्री बहुत, और उन से बचाने वाली चेतावनी के शब्दों की मात्रा, १ पृ० ३२४३२६ पर अन्य ग्रन्थों की चर्चा की गई है; उन मे, डाक्टर स्टोन और डाक्टर एक्सनर के ग्रन्थ बहुत अच्छे और अधिक उपयोगी हैं।
पश्चिम में काम शास्त्र के ग्रन्थ के भीतर, जननेन्द्रियों की बनावट, उन के अवयवों के रूप, कार्य 'निस्स्यन्द आदि के, तथा गर्भाधान-निरोध आदि के प्रकारों के विषय मे नये ज्ञान और उप-ज्ञान, नये आविष्कार, बहुत हुए हैं, और इन विषयों पर बहुत ग्रन्थ लिखे गये हैं । सर्वसाधारण के उपयोग की बातें, डाक्टर मेरी स्टोप्स के ग्रन्थों में अच्छी नीयत से लिखी गई हैं, यद्यपि उन का भाव उतना ऊँचा सात्विक नहीं है जैसा पादरी स्टाल का । पृशून्य दो सौ तेरह दो सौ चौदह पर लिख आये हैं कि बच्चे, अक्सर, माता, पिता, अन्य गुरुजनो, वा अधिक उमर वालों से पूछते हैं 'नया बच्चा कहाँ से आया, कैसे आया,' 'यह क्या कर रहे हैं, ' इत्यादि ; वृद्ध लोग प्रायः हँस कर टाल देते हैं, या बहकाने वाले मिथ्या-प्राय उत्तर दे देते हैं, या धमका देते हैं और ऐसे प्रश्न पूछने को मना कर देते हैं; अपनी बाल्यावस्था के ऐसे ही कुतूहल को, और उचित उत्तर न पाने से जो चित्त मे अशान्ति हुई, और इस का अपने अनुभव मे जो फल हुआ था, उस सब को, दुर्भाग्य से, भूल जाते हैं; फल प्रायः यही हुआ और होता है, कि बच्चे दूसरे सयानों से पूछते हैं, जो उन के हितचिन्तक नहीं, जो निर्लज्ज हैं, अथ च जो अपनी कामिक वासनाओं को इन अभागे भोले बच्चों पर ही निकालते हैं, उन को दुष्ट उपदेश देते हैं, दिखा कर समझाने के बहाने ऐसे पाप तक भी कर डालते हैं जिन से उन बच्चों के शरीर और चित्त सदा के लिये दूषित और रोगी हो जाते हैं, और सारा जीवन विष से सिक्त हो जाता है। ऐसे घोर दुष्फलों का प्रतिपादन, 'सैको-ऐनालिसिस', psycho.analysis, नामक उपशास्त्र के पाश्चात्य ग्रन्थकारों ने बहुत अच्छा किया है । ऊपर सूचना की गईं कि, वात्स्यायन ने प्रलोभन और अधःपतन की सामग्री बहुत, और उन से बचाने वाली चेतावनी के शब्दों की मात्रा, एक पृशून्य तीन लाख चौबीस हज़ार तीन सौ छब्बीस पर अन्य ग्रन्थों की चर्चा की गई है; उन मे, डाक्टर स्टोन और डाक्टर एक्सनर के ग्रन्थ बहुत अच्छे और अधिक उपयोगी हैं।
राजनांदगांव. खैरागढ़ उपचुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गई है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के प्रत्याशी को लेकर खैरागढ़ जोगी कांग्रेस के चुनाव प्रभारी जरनैल सिंह भाटिया नाराज हो गए हैं. भाटिया ने चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि देवव्रत सिंह के परिवार के सदस्य को टिकट मिलता तो सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि मिलती. बता दें कि बुधवार को जेसीसीजे ने खैरागढ़ उपचुनाव के लिए प्रत्याशी की घोषणा की है. नरेंद्र सोनी को अपना प्रत्याशी बनाया है. इसके बाद घमासान मच गया है. पार्टी के सदस्यों में ही नाराजगी देखी जा रही है.
राजनांदगांव. खैरागढ़ उपचुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गई है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशी को लेकर खैरागढ़ जोगी कांग्रेस के चुनाव प्रभारी जरनैल सिंह भाटिया नाराज हो गए हैं. भाटिया ने चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि देवव्रत सिंह के परिवार के सदस्य को टिकट मिलता तो सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि मिलती. बता दें कि बुधवार को जेसीसीजे ने खैरागढ़ उपचुनाव के लिए प्रत्याशी की घोषणा की है. नरेंद्र सोनी को अपना प्रत्याशी बनाया है. इसके बाद घमासान मच गया है. पार्टी के सदस्यों में ही नाराजगी देखी जा रही है.
कई ऐसे लोग हैं जो सरकारी नौकरी के लिए रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। पर सही समय पर सही जानकारी ना मिलने के कारण अच्छा मौका भी हाथ से निकल जाता है। जिसकी वजह से मेहनत बेकार हो जाती है। डाइनामाइट न्यूज़ पर जानिए नौकरी और आवेदन से जुड़ी सारी जानकारी. . नई दिल्लीः अगर आप भी सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं और उसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, तो आपके लिए है ये खबर। यहां जाने नौकरी से जुड़ी आवेदन करने के तरीके से लेकर आखिरी तारीख तक सारी जानकारी। इसरो (ISRO) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)
कई ऐसे लोग हैं जो सरकारी नौकरी के लिए रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। पर सही समय पर सही जानकारी ना मिलने के कारण अच्छा मौका भी हाथ से निकल जाता है। जिसकी वजह से मेहनत बेकार हो जाती है। डाइनामाइट न्यूज़ पर जानिए नौकरी और आवेदन से जुड़ी सारी जानकारी. . नई दिल्लीः अगर आप भी सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं और उसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, तो आपके लिए है ये खबर। यहां जाने नौकरी से जुड़ी आवेदन करने के तरीके से लेकर आखिरी तारीख तक सारी जानकारी। इसरो भारतीय जीवन बीमा निगम
(मैं शाहरुख का आभारी होना कभी बंद नहीं करूंगा)-अली पीटर जॉनमैंने उन्हें पहली बार 'फौजी' और 'सर्कस' जैसे धारावाहिकों में देखा था और कुछ दोस्तों के साथ शर्त लगाई थी कि वह फिल्मों में एक अभिनेता के रूप में एक बड़ा नाम होगा, लेकिन उन्होंने न केवल इसे बड़ा बनाया है, बल्कि इसका अर्थ बदल दिया है। शब्द बड़ा।वह घरेलू हवाई अड्डे पर खोए हुए दिख रहे थे और अजीज मिर्जा के पते की तलाश में थे, जिन्होंने अपने भाई सईद मिर्जा के साथ मिलकर उन्हें "सर्कस" में निर्देशित किया था। वह दिल्ली से आये थे और बॉम्बे के बारे में कुछ नहीं जानते थे, लेकिन कुछ ही समय में वह आश्वस्त और साहसी थे कि वह बॉम्बे को चुनौती दे और बॉम्बे को बताए कि वह एक दिन इसे जीत लेंगे। और कुछ ही समय में, उन्होंने न केवल बंबई पर, बल्कि पूरे हिंदुस्तान पर और यहां तक कि पूरी दुनिया पर जीत हासिल कर ली थी।मैं उनसे बार-बार मिलता रहा (मैंने कभी भी सितारों और यहां तक कि आने वाले सितारों के साथ जरूरत से ज्यादा समय बिताने में विश्वास नहीं किया)। जब मैं मशहूर हस्तियों और सितारों के साथ काम कर रहा था, तब भी उन्होंने मेरे एक निजी व्यक्ति होने पर ध्यान दिया था और एक बार जब मेरे कुछ वरिष्ठ उनसे स्क्रीन अवाॅर्ड्स शो में प्रदर्शन करने के लिए कहने के लिए मिले, तो उन्होंने उनसे कहा, "यह अली साहब एक अजीब आदमी है, वह मुझसे एक बार मिलते हैं और फिर कई महीनों के लिए गायब हो जाते हैं और फिर एक चमत्कार की तरह जीवन में वापस आ जाते हैं" मैंने अपने दोस्तों के साथ जो दांव लगाया था, वह धीरे-धीरे सच हो गया और शाहरुख खान, दिल्ली का अनजान लड़का, अभिनेताओं के बीच लाभ की प्रतिभा के रूप में खड़े हो गये।उनका उदय अभूतपूर्व और अविश्वसनीय था। उन्हें बादशाह, रोमांस के राजा और प्रेम के जीवन के रूप में जाने जाते थे। वह सार्वजनिक और निजी तौर पर राजा थे। उन्होंने अपना "मन्नत" बनाया था और मन्नत ने दुबई में अपना "महल" और लंदन में एक महलनुमा घर बनाया था और वह केकेआर आईपीएल टीम के पीछे के आदमी थे, वह रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के पीछे आदमी थे और एक नंबर के पीछे आदमी थे धर्मार्थ ट्रस्टों और संगठनों के। उनके साथ और उनके निर्देशन में काम करने वाले हजारों लोगों के साथ उनके कार्यालय थे। वह व्यक्ति थे जिनके साथ राजा, रानियां, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पवित्र व्यक्ति, दार्शनिक, विद्वान, वैज्ञानिक, संत और यहां तक कि पापी भी दिखना चाहते थे। वह सफलता के शिखर पर पहुंच गए थे और उनकी कुछ फिल्मों की असफलता भी बादशाह के रूप में उनकी छवि को खराब नहीं कर पाई थी।लेकिन 8 अक्टूबर 2021 को उनके बेटे आर्यन पर ड्रग्स रखने और यहां तक कि खाने का आरोप लगने से एक तरह की डरावनी बिजली उन पर गिर गई। कोई और पिता इस घटना के बारे में शोर मचा सकते थे, लेकिन बादशाह ने एक शांत गरिमा बनाए रखी, जिनकी प्रशंसा उनके सबसे बुरे प्रतिद्वंद्वियों और आलोचकों ने भी की थी। उन्हें लग रहा था कि वह और उनका बेटा सही रास्ते पर है और वे अंततः विजयी हुए। ैत्ज्ञ अपनी सफलता का जश्न मना सकते थे, विशेष रूप से बादशाह के रूप में अपनी छवि बनाए रखने में उनकी सफलता, जो कानून के गलत पक्ष में नहीं हो सकते थे।उन्होंने अभी भी विवाद के बारे में एक शब्द नहीं कहा है और जल्द ही उनके लिए एक प्रतिष्ठित फिल्म "पठान" पर काम करना शुरू कर देंगे और एटली की फिल्म पर काम शुरू करेंगे, वह अन्य स्क्रिप्ट भी देख रहे हैं और उन्हें यह अच्छी तरह से पता है कि वही लोग जिन्होंने उन्हें प्यार किया है, वे भी उन्हें फिसलते या गिरते हुए देखने के लिए उत्सुक हैं। मैंने अभी देखा है कि ज्योतिषी ने अपने भविष्य के बारे में क्या कहा है और उन्होंने जो कहा है वह एक "राजा" के लिए बहुत उज्ज्वल या चापलूसी नहीं है। लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से उनके लिए दुआओं और आशीर्वादों की बाढ़ आ गई है, उनके या उनके परिवार पर अब और काले बादल मंडराने की कोई संभावना नहीं है।ऐसे लोग हैं जिन्हें लगता है कि मैं शाहरुख की प्रशंसा करने के लिए अपने रास्ते से हट जाता हूं। लेकिन मैं कैसे समझा सकता हूं कि मेरा दिल और मेरा पूरा अस्तित्व शाहरुख के बारे में क्या महसूस करता है? 19 नवंबर, 2016 के बाद मेरे लिए जीवन नहीं होता अगर शाहरुख मेरे लिए जीवन और मृत्यु के बीच इतना बड़ा अंतर करने के लिए नहीं आते। मुझे इस कहानी को दोहराने की जरूरत नहीं है कि कैसे शाहरुख ने मुझे और मेरी गरिमा को बचाया, जब उन्होंने उस भीषण दुर्घटना के बाद नानावती अस्पताल में सभी खर्चों का भुगतान किया। मेरा दृढ़ विश्वास है कि मेरा जीवन आज जैसा है, वह काफी हद तक उस बड़े दिल की वजह से है जो शाहरुख खान जैसे राजा के पास है और हमेशा रहेगा।मुझे बताया गया है कि जब मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं तो शाहरुख को शर्मिंदगी महसूस होती है, लेकिन मैं क्या कर सकता हूं? मैं एक आभारी व्यक्ति हूं, एक भावना जो मेरी मां ने सत्तर साल पहले मुझमें पैदा की थी। मैं जब भी शाहरुख को जीवन की खुशियां बिखेरते हुए देखता हूं, तो कभी-कभी तब भी जब वह दर्द में होता है, मुस्कुरा देता हूं। लेकिन मुझे पता है कि जब तक वह अंधेरे के सामने मुस्कुराता रहेगा, तब तक उस पर रोशनी चमकती रहेगी और अंधेरे के बादल उनसे जितना हो सके दूर रहेंगे।जियो, जियो बादशाह, तुमको कोई ताकत रोक नहीं सकती। क्योंकि तुम वो ताकत हो जो खुदा किसी किसी को ही देता है।
-अली पीटर जॉनमैंने उन्हें पहली बार 'फौजी' और 'सर्कस' जैसे धारावाहिकों में देखा था और कुछ दोस्तों के साथ शर्त लगाई थी कि वह फिल्मों में एक अभिनेता के रूप में एक बड़ा नाम होगा, लेकिन उन्होंने न केवल इसे बड़ा बनाया है, बल्कि इसका अर्थ बदल दिया है। शब्द बड़ा।वह घरेलू हवाई अड्डे पर खोए हुए दिख रहे थे और अजीज मिर्जा के पते की तलाश में थे, जिन्होंने अपने भाई सईद मिर्जा के साथ मिलकर उन्हें "सर्कस" में निर्देशित किया था। वह दिल्ली से आये थे और बॉम्बे के बारे में कुछ नहीं जानते थे, लेकिन कुछ ही समय में वह आश्वस्त और साहसी थे कि वह बॉम्बे को चुनौती दे और बॉम्बे को बताए कि वह एक दिन इसे जीत लेंगे। और कुछ ही समय में, उन्होंने न केवल बंबई पर, बल्कि पूरे हिंदुस्तान पर और यहां तक कि पूरी दुनिया पर जीत हासिल कर ली थी।मैं उनसे बार-बार मिलता रहा । जब मैं मशहूर हस्तियों और सितारों के साथ काम कर रहा था, तब भी उन्होंने मेरे एक निजी व्यक्ति होने पर ध्यान दिया था और एक बार जब मेरे कुछ वरिष्ठ उनसे स्क्रीन अवाॅर्ड्स शो में प्रदर्शन करने के लिए कहने के लिए मिले, तो उन्होंने उनसे कहा, "यह अली साहब एक अजीब आदमी है, वह मुझसे एक बार मिलते हैं और फिर कई महीनों के लिए गायब हो जाते हैं और फिर एक चमत्कार की तरह जीवन में वापस आ जाते हैं" मैंने अपने दोस्तों के साथ जो दांव लगाया था, वह धीरे-धीरे सच हो गया और शाहरुख खान, दिल्ली का अनजान लड़का, अभिनेताओं के बीच लाभ की प्रतिभा के रूप में खड़े हो गये।उनका उदय अभूतपूर्व और अविश्वसनीय था। उन्हें बादशाह, रोमांस के राजा और प्रेम के जीवन के रूप में जाने जाते थे। वह सार्वजनिक और निजी तौर पर राजा थे। उन्होंने अपना "मन्नत" बनाया था और मन्नत ने दुबई में अपना "महल" और लंदन में एक महलनुमा घर बनाया था और वह केकेआर आईपीएल टीम के पीछे के आदमी थे, वह रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के पीछे आदमी थे और एक नंबर के पीछे आदमी थे धर्मार्थ ट्रस्टों और संगठनों के। उनके साथ और उनके निर्देशन में काम करने वाले हजारों लोगों के साथ उनके कार्यालय थे। वह व्यक्ति थे जिनके साथ राजा, रानियां, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पवित्र व्यक्ति, दार्शनिक, विद्वान, वैज्ञानिक, संत और यहां तक कि पापी भी दिखना चाहते थे। वह सफलता के शिखर पर पहुंच गए थे और उनकी कुछ फिल्मों की असफलता भी बादशाह के रूप में उनकी छवि को खराब नहीं कर पाई थी।लेकिन आठ अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को उनके बेटे आर्यन पर ड्रग्स रखने और यहां तक कि खाने का आरोप लगने से एक तरह की डरावनी बिजली उन पर गिर गई। कोई और पिता इस घटना के बारे में शोर मचा सकते थे, लेकिन बादशाह ने एक शांत गरिमा बनाए रखी, जिनकी प्रशंसा उनके सबसे बुरे प्रतिद्वंद्वियों और आलोचकों ने भी की थी। उन्हें लग रहा था कि वह और उनका बेटा सही रास्ते पर है और वे अंततः विजयी हुए। ैत्ज्ञ अपनी सफलता का जश्न मना सकते थे, विशेष रूप से बादशाह के रूप में अपनी छवि बनाए रखने में उनकी सफलता, जो कानून के गलत पक्ष में नहीं हो सकते थे।उन्होंने अभी भी विवाद के बारे में एक शब्द नहीं कहा है और जल्द ही उनके लिए एक प्रतिष्ठित फिल्म "पठान" पर काम करना शुरू कर देंगे और एटली की फिल्म पर काम शुरू करेंगे, वह अन्य स्क्रिप्ट भी देख रहे हैं और उन्हें यह अच्छी तरह से पता है कि वही लोग जिन्होंने उन्हें प्यार किया है, वे भी उन्हें फिसलते या गिरते हुए देखने के लिए उत्सुक हैं। मैंने अभी देखा है कि ज्योतिषी ने अपने भविष्य के बारे में क्या कहा है और उन्होंने जो कहा है वह एक "राजा" के लिए बहुत उज्ज्वल या चापलूसी नहीं है। लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से उनके लिए दुआओं और आशीर्वादों की बाढ़ आ गई है, उनके या उनके परिवार पर अब और काले बादल मंडराने की कोई संभावना नहीं है।ऐसे लोग हैं जिन्हें लगता है कि मैं शाहरुख की प्रशंसा करने के लिए अपने रास्ते से हट जाता हूं। लेकिन मैं कैसे समझा सकता हूं कि मेरा दिल और मेरा पूरा अस्तित्व शाहरुख के बारे में क्या महसूस करता है? उन्नीस नवंबर, दो हज़ार सोलह के बाद मेरे लिए जीवन नहीं होता अगर शाहरुख मेरे लिए जीवन और मृत्यु के बीच इतना बड़ा अंतर करने के लिए नहीं आते। मुझे इस कहानी को दोहराने की जरूरत नहीं है कि कैसे शाहरुख ने मुझे और मेरी गरिमा को बचाया, जब उन्होंने उस भीषण दुर्घटना के बाद नानावती अस्पताल में सभी खर्चों का भुगतान किया। मेरा दृढ़ विश्वास है कि मेरा जीवन आज जैसा है, वह काफी हद तक उस बड़े दिल की वजह से है जो शाहरुख खान जैसे राजा के पास है और हमेशा रहेगा।मुझे बताया गया है कि जब मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं तो शाहरुख को शर्मिंदगी महसूस होती है, लेकिन मैं क्या कर सकता हूं? मैं एक आभारी व्यक्ति हूं, एक भावना जो मेरी मां ने सत्तर साल पहले मुझमें पैदा की थी। मैं जब भी शाहरुख को जीवन की खुशियां बिखेरते हुए देखता हूं, तो कभी-कभी तब भी जब वह दर्द में होता है, मुस्कुरा देता हूं। लेकिन मुझे पता है कि जब तक वह अंधेरे के सामने मुस्कुराता रहेगा, तब तक उस पर रोशनी चमकती रहेगी और अंधेरे के बादल उनसे जितना हो सके दूर रहेंगे।जियो, जियो बादशाह, तुमको कोई ताकत रोक नहीं सकती। क्योंकि तुम वो ताकत हो जो खुदा किसी किसी को ही देता है।
Death Toll: जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 110 के पार हुई, कई अस्पाल में हैं भर्ती! Breaking: विधानसभा में गूंजा शराब कांड का मुद्दा, कांगेस ने सीएम योगी का मांगा इस्तीफा! Big News: शादी में समारोह में हर्ष फायरिंग, ढाई साल के मासूम की मौत! Breaking: जहरीली शराब से 11 लोगों की गयी जान, सीएम योगी नाराज, कार्रवाई का दिया आदेश! Accident: सड़क हादसे में भाजपा नेता के पिता और फूफा की मौत! Train Accident: सीमांचल एक्सप्रसे पटरी से उतरी, अब तक 7 की मौत, कई घायल, मचा हड़कम्प! Earthquake: एक के बाद एक तीन भूकंप के झटकों से दहला पालघर! Accident: सवारियों से भरी बुलेरो को ट्रक ने मारी टक्कर, 5 की मौत, कई घायल!
Death Toll: जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या एक सौ दस के पार हुई, कई अस्पाल में हैं भर्ती! Breaking: विधानसभा में गूंजा शराब कांड का मुद्दा, कांगेस ने सीएम योगी का मांगा इस्तीफा! Big News: शादी में समारोह में हर्ष फायरिंग, ढाई साल के मासूम की मौत! Breaking: जहरीली शराब से ग्यारह लोगों की गयी जान, सीएम योगी नाराज, कार्रवाई का दिया आदेश! Accident: सड़क हादसे में भाजपा नेता के पिता और फूफा की मौत! Train Accident: सीमांचल एक्सप्रसे पटरी से उतरी, अब तक सात की मौत, कई घायल, मचा हड़कम्प! Earthquake: एक के बाद एक तीन भूकंप के झटकों से दहला पालघर! Accident: सवारियों से भरी बुलेरो को ट्रक ने मारी टक्कर, पाँच की मौत, कई घायल!
दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली के द्वारका जिले के मटियाला इलाके में बीजेपी किसान मोर्चा के नेता सुरेंद्र मटियाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इससे इलाके में हड़कंप मच गया है। आज यानी शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे अज्ञात बदमाशों ने बीजेपी नेता की गोली मारकर हत्या कर दी है। इस हमले में सुरेंद्र मटियाला को कुल छह गोलियां लगी है। यह घटना उस वक्त हुआ जब वे अपने ऑफिस में बैठे थे, तभी कुछ हमलावरों ने अचानक उनपर गोलियां बरसा दी। इस दौरान बीजेपी नेता बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए फौरन अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बीजेपी नेता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी नेती की हत्या के कारण इलाके में सनसनी फैल गई है। दिनदहाड़े ऑफिस में घुसकर बीजेपी नेता की हत्या करना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पुलिस इसको लेकर अलर्ट हो गई है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस गहनता के साथ हमलावरों की तलाश में जुट गई है। बता दें कि सुरेंद्र मटियाला पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं।
दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली के द्वारका जिले के मटियाला इलाके में बीजेपी किसान मोर्चा के नेता सुरेंद्र मटियाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इससे इलाके में हड़कंप मच गया है। आज यानी शुक्रवार शाम करीब सात:तीस बजे अज्ञात बदमाशों ने बीजेपी नेता की गोली मारकर हत्या कर दी है। इस हमले में सुरेंद्र मटियाला को कुल छह गोलियां लगी है। यह घटना उस वक्त हुआ जब वे अपने ऑफिस में बैठे थे, तभी कुछ हमलावरों ने अचानक उनपर गोलियां बरसा दी। इस दौरान बीजेपी नेता बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए फौरन अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बीजेपी नेता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी नेती की हत्या के कारण इलाके में सनसनी फैल गई है। दिनदहाड़े ऑफिस में घुसकर बीजेपी नेता की हत्या करना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पुलिस इसको लेकर अलर्ट हो गई है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस गहनता के साथ हमलावरों की तलाश में जुट गई है। बता दें कि सुरेंद्र मटियाला पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं।
श्रीआनंदपुर साहिब - साधारण परिवार में जन्मे पले गुरमीत सिंह सुपुत्र मलकीत सिंह गांव बैंसपुर के जज बनने इलाके में खुशी की लहर है। उनके जज बनने पर बाहती महासभा रूपनगर इकाई ने मोमेंटो देकर उन्हें सम्मानित किया। वहीं, उनकी इस कामयाबी से प्रेरित होकर सभी को आगे बढ़ना चाहिए, यह जानकारी वाहती महा सभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रिंसिपल राम गोपाल चौधरी ने दी। इस मौके बाहती महासभा के प्रधान राकेश चौधरी मैलमा, वेलफेयर सभा के चेयरमैन पन्ना लाल चौधरी, विनोद कुमार, केशियर अगमपुर, अमरिक सिंह भट्टी मौजूद थे। इस मौके सदस्यों ने यह कहा कि हम गुरप्रीत के उज्जवल भविष्य की कामना की।
श्रीआनंदपुर साहिब - साधारण परिवार में जन्मे पले गुरमीत सिंह सुपुत्र मलकीत सिंह गांव बैंसपुर के जज बनने इलाके में खुशी की लहर है। उनके जज बनने पर बाहती महासभा रूपनगर इकाई ने मोमेंटो देकर उन्हें सम्मानित किया। वहीं, उनकी इस कामयाबी से प्रेरित होकर सभी को आगे बढ़ना चाहिए, यह जानकारी वाहती महा सभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रिंसिपल राम गोपाल चौधरी ने दी। इस मौके बाहती महासभा के प्रधान राकेश चौधरी मैलमा, वेलफेयर सभा के चेयरमैन पन्ना लाल चौधरी, विनोद कुमार, केशियर अगमपुर, अमरिक सिंह भट्टी मौजूद थे। इस मौके सदस्यों ने यह कहा कि हम गुरप्रीत के उज्जवल भविष्य की कामना की।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की ताजपोशी की खबर से ही राजनीतिक दलों में हलचल मच गई है। शायद यही वजह है कि तीसरे मोर्चे की कवायद को भी रफ्तार दी जा रही है। सीपीआई-एम के राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश करात व माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली ने मंगलवार को यूपी के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की। कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने अखिलेश यादव से मिलकर मुजफ्फनगर दंगों के पीड़ितों की बदतर हालत पर चिंता जताते हुए उसे तत्काल दुरुस्त करने की मांग की। करात ने कहा कि राहत शिविरों की हालत ठीक नहीं है। करात ने कहा कि वहां लोग बस किसी तरह जिंदगी बिता रहे हैं। कुछ लोगों के मरने की भी सूचना है। करात ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को स्थित सही करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। दंगों पर हो रही राजनीति पर करात ने कुछ कहने से मना कर दिया, पर उन्होंने यह जरूर कहा कि बेकुसूर लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए। दूसरी ओर, सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि इस मुलाकात का अहम मुद्दा तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर था। पता चला है कि इस बैठक में भाजपा और कांग्रेस के बिना सरकार बनाने की रणनीति बनाई गई। गौरतलब है कि पिछले दिनों वामपंथी मोर्चे ने दिल्ली में एंटी कम्यूनल फ्रंट की रैली आयोजित की थी। इसमें सपा भी शामिल हुई थी और मुलायम ने कहा था कि तीसरे मोर्चे का गठन देश के लिए जरूरी है। माना जा रहा है कि इस बैठम में एंटी कम्यूनल फ्रंट को ही मजबूत करने पर चर्चा हुई।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की ताजपोशी की खबर से ही राजनीतिक दलों में हलचल मच गई है। शायद यही वजह है कि तीसरे मोर्चे की कवायद को भी रफ्तार दी जा रही है। सीपीआई-एम के राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश करात व माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली ने मंगलवार को यूपी के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की। कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने अखिलेश यादव से मिलकर मुजफ्फनगर दंगों के पीड़ितों की बदतर हालत पर चिंता जताते हुए उसे तत्काल दुरुस्त करने की मांग की। करात ने कहा कि राहत शिविरों की हालत ठीक नहीं है। करात ने कहा कि वहां लोग बस किसी तरह जिंदगी बिता रहे हैं। कुछ लोगों के मरने की भी सूचना है। करात ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को स्थित सही करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। दंगों पर हो रही राजनीति पर करात ने कुछ कहने से मना कर दिया, पर उन्होंने यह जरूर कहा कि बेकुसूर लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए। दूसरी ओर, सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि इस मुलाकात का अहम मुद्दा तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर था। पता चला है कि इस बैठक में भाजपा और कांग्रेस के बिना सरकार बनाने की रणनीति बनाई गई। गौरतलब है कि पिछले दिनों वामपंथी मोर्चे ने दिल्ली में एंटी कम्यूनल फ्रंट की रैली आयोजित की थी। इसमें सपा भी शामिल हुई थी और मुलायम ने कहा था कि तीसरे मोर्चे का गठन देश के लिए जरूरी है। माना जा रहा है कि इस बैठम में एंटी कम्यूनल फ्रंट को ही मजबूत करने पर चर्चा हुई।
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस को बुधवार शाम शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में जामिया नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक बम विस्फोट के बारे में एक "फर्जी" कॉल मिली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, फोन करने वाले ने कहा कि एक कार में एक संदिग्ध बम रखा गया था। अधिकारी ने कहा कि यह पाया गया कि कार वहीं खड़ी थी और उसकी बैटरी को लपेटकर वाहन के अंदर रखा गया था। सीआरपीएफ मुख्यालय में एक बम के बारे में पुलिस को कॉल किए जाने के कुछ घंटे बाद यह बात सामने आई है, जिसे बाद में 'धोखा' घोषित कर दिया गया था। साथ ही दिन के दौरान, पुलिस को एक फोन आया कि पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में दो लावारिस बैग रखे गए हैं, जिससे बम की आशंका है। बाद में, पुलिस ने कहा कि बैग से कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा प्रतिष्ठान अलर्ट पर है।
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस को बुधवार शाम शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में जामिया नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक बम विस्फोट के बारे में एक "फर्जी" कॉल मिली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, फोन करने वाले ने कहा कि एक कार में एक संदिग्ध बम रखा गया था। अधिकारी ने कहा कि यह पाया गया कि कार वहीं खड़ी थी और उसकी बैटरी को लपेटकर वाहन के अंदर रखा गया था। सीआरपीएफ मुख्यालय में एक बम के बारे में पुलिस को कॉल किए जाने के कुछ घंटे बाद यह बात सामने आई है, जिसे बाद में 'धोखा' घोषित कर दिया गया था। साथ ही दिन के दौरान, पुलिस को एक फोन आया कि पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में दो लावारिस बैग रखे गए हैं, जिससे बम की आशंका है। बाद में, पुलिस ने कहा कि बैग से कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा प्रतिष्ठान अलर्ट पर है।
पिछले कई दिनों से जम्मू संभाग की एलओसी और आईबी पर हो रही फायरिंग की आड़ में घुसपैठ करने की जी तोड़ कोशिश की जा रही है। नए साल में आतंकी संगठन राज्य में आतंकी हमला करने की साजिश रच रहे हैं। लश्कर और जमात उद दावा सहित कई आतंकी संगठन घुसपैठ की हर संभव कोशिश में लगे हैं। मंगलवार को पाकिस्तान की ओर से अखनूर के पलांवाला सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास किया और भारतीय सेना की फारवर्ड पोस्ट पर जोरदार फायरिंग की गई। इससे पहले अरनिया, सांबा, हीरानगर में भी फायरिंग की गई। बुधवार को भी सांबा सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों ने फायरिंग की। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन घुसपैठ के लिए कर रहा है ताकि सुरक्षा बलों का ध्यान बंटा कर घुसपैठ कराई जा सके। गणतंत्र दिवस को लेकर जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला की आशंका विदेशी खुफिया एजेंसियां भी जता चुकी हैं। जबकि राज्य की खुफिया एजेंसियों को भी सूचनाएं मिली हैं कि गणतंत्र दिवस पर खलल डालने की आतंकी कोशिश कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी घुसपैठ करना चाहते हैं। जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद ने गणतंत्र दिवस पर हमला करने के लिए पूरा प्लान तैयार किया है। पीओके में बैठकर हाफिज लगातार पाक सेना और पाक रेंजर को भारतीय सीमाओं पर फायरिंग के निर्देश दे रहा है ताकि घुसपैठ हो सके। बताते चलें कि राज्य में घने कोहरे का लाभ उठाकर भी घुसपैठ करने की कोशिश की जा रही है। गणतंत्र दिवस के मद्देनजर पहले से ही राज्य में अलर्ट जारी किया गया है।
पिछले कई दिनों से जम्मू संभाग की एलओसी और आईबी पर हो रही फायरिंग की आड़ में घुसपैठ करने की जी तोड़ कोशिश की जा रही है। नए साल में आतंकी संगठन राज्य में आतंकी हमला करने की साजिश रच रहे हैं। लश्कर और जमात उद दावा सहित कई आतंकी संगठन घुसपैठ की हर संभव कोशिश में लगे हैं। मंगलवार को पाकिस्तान की ओर से अखनूर के पलांवाला सेक्टर में घुसपैठ का प्रयास किया और भारतीय सेना की फारवर्ड पोस्ट पर जोरदार फायरिंग की गई। इससे पहले अरनिया, सांबा, हीरानगर में भी फायरिंग की गई। बुधवार को भी सांबा सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों ने फायरिंग की। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन घुसपैठ के लिए कर रहा है ताकि सुरक्षा बलों का ध्यान बंटा कर घुसपैठ कराई जा सके। गणतंत्र दिवस को लेकर जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला की आशंका विदेशी खुफिया एजेंसियां भी जता चुकी हैं। जबकि राज्य की खुफिया एजेंसियों को भी सूचनाएं मिली हैं कि गणतंत्र दिवस पर खलल डालने की आतंकी कोशिश कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी घुसपैठ करना चाहते हैं। जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद ने गणतंत्र दिवस पर हमला करने के लिए पूरा प्लान तैयार किया है। पीओके में बैठकर हाफिज लगातार पाक सेना और पाक रेंजर को भारतीय सीमाओं पर फायरिंग के निर्देश दे रहा है ताकि घुसपैठ हो सके। बताते चलें कि राज्य में घने कोहरे का लाभ उठाकर भी घुसपैठ करने की कोशिश की जा रही है। गणतंत्र दिवस के मद्देनजर पहले से ही राज्य में अलर्ट जारी किया गया है।
चाय पीना हम ज्यादातर भारतीयों का पहला शौक होता है। सबुह उठे तो चाय, थक गए तो चाय, घर में कोई आ गया तो चाय, यहां तक कि बाहर किसी से मिले तब भी चाय। हालांकि, चाय कई तरीके की हो सकती है, जैसे- दूध वाली चाय, ब्लैक टी, ग्रीन टी आदि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाकी चाय के मुकाबले में मसाला चाय को काफी फायदेमंद माना गया है। खासकर ये चाय सर्दियों में तो हमारे शरीर के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी हो सकती है। तो चलिए आपको मसाला चाय के उन फायदों के बारे में बताते हैं, जो इसे पीने के बाद हमारे शरीर को मिलते हैं। सबसे पहले ये जान लेते हैं कि इस मसाला टी के लिए कौन से मसाले जरूरी हैं, और ये बनती कैसे है। दरअसल, सबसे पहले गैस पर एक बर्तन में पानी चढ़ा लें, फिर उसमें चाय पत्ती डाल लें और इसके बाद तुलसी, लौंग, अदरक, इलायची, दालचीनी को एक साथ पीसकर मसाला बना लें, जिसे चाय में बनाते वक्त डालें। इसके बाद आप अपनी जरूरत के अनुसार इसमें दूध डाल सकते हैं या फिर नहीं भी। इस चाय को पीने के बाद आपको कई लाभकारी फायदे मिल सकते हैं। ये चाय सबसे पहले आपकी थकान दूर करती है। मसाला चाय में मौजूद टैनिन शरीर की थकान को दूर करके राहत पहुंचाने में काफी मदद करता है। थकान के साथ ही शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने में भी ये चाय काफी कारगर है। मसाला चाय में मौजूद लौंग और अदरक के गुण शरीर के दर्द को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ये चाय डायबिटीज में दूसरे प्रकार से फायदा पहुंचाने के लिए भी जानी जाती है। साथ ही ये चीनी की लालसा को भी कम करने में काफी मदद करती है। इसके लिए आपको हर रोज दो कप मसाला चाय पीनी चाहिए। मसाला चाय कैंसर के खतरे को भी कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है। इसमें मौजूद अदरक, दालचीनी और इलायची में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स में कैंसर रोधक विशेषताएं होती हैं। ऐसे में अगर मसाला चाय का सेवन नियमित रूप से किया जाए, तो पेट में होने वाले कैंसर के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। मसाला चाय पीने से ऑक्सीजन लेने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। चाय में जो मसाले उपयोग होते हैं, जैसे- अदरक, लौंग, दालचीनी, अदरक। इन सभी का नियमित सेवन पाचन और पैंक्रियाज में एंजाइम्स को स्टिमुलेट करता है, जिससे ऑक्सीजन लेने की क्षमता बढती है। माहवारी से पहले होने वाले सिंड्रोम यानी पीएमएस के कारण जो दर्द होता है, इसमें मसाला चाय में पड़ने वाले अदरक और दालचीनी काफी मदद करते हैं। साथ ही ये हार्मोन में संतुलन बनाने में भी मदद करते हैं। ऐसे समय में अगर गर्म पानी के बैग से सिकाई करने से कोई राहत न मिले, तो मसाला चाय पीने से आराम मिल सकता है। इसके अलावा सर्दियों में खांसी-जुकाम होना तो आम बात है, लेकिन इसी से बुखार आने की शुरुआत भी होती है। ऐसे में सर्दी-जुकाम को रोकने में मसाला चाय काफी मदद कर सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल हमारी प्रतिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नोटः यह सलाह केवल आपको सामान्य जानकारी प्रदान करने के लिए दी गई है। आप किसी भी चीज का सेवन या कोई भी घरेलू उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
चाय पीना हम ज्यादातर भारतीयों का पहला शौक होता है। सबुह उठे तो चाय, थक गए तो चाय, घर में कोई आ गया तो चाय, यहां तक कि बाहर किसी से मिले तब भी चाय। हालांकि, चाय कई तरीके की हो सकती है, जैसे- दूध वाली चाय, ब्लैक टी, ग्रीन टी आदि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाकी चाय के मुकाबले में मसाला चाय को काफी फायदेमंद माना गया है। खासकर ये चाय सर्दियों में तो हमारे शरीर के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी हो सकती है। तो चलिए आपको मसाला चाय के उन फायदों के बारे में बताते हैं, जो इसे पीने के बाद हमारे शरीर को मिलते हैं। सबसे पहले ये जान लेते हैं कि इस मसाला टी के लिए कौन से मसाले जरूरी हैं, और ये बनती कैसे है। दरअसल, सबसे पहले गैस पर एक बर्तन में पानी चढ़ा लें, फिर उसमें चाय पत्ती डाल लें और इसके बाद तुलसी, लौंग, अदरक, इलायची, दालचीनी को एक साथ पीसकर मसाला बना लें, जिसे चाय में बनाते वक्त डालें। इसके बाद आप अपनी जरूरत के अनुसार इसमें दूध डाल सकते हैं या फिर नहीं भी। इस चाय को पीने के बाद आपको कई लाभकारी फायदे मिल सकते हैं। ये चाय सबसे पहले आपकी थकान दूर करती है। मसाला चाय में मौजूद टैनिन शरीर की थकान को दूर करके राहत पहुंचाने में काफी मदद करता है। थकान के साथ ही शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने में भी ये चाय काफी कारगर है। मसाला चाय में मौजूद लौंग और अदरक के गुण शरीर के दर्द को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ये चाय डायबिटीज में दूसरे प्रकार से फायदा पहुंचाने के लिए भी जानी जाती है। साथ ही ये चीनी की लालसा को भी कम करने में काफी मदद करती है। इसके लिए आपको हर रोज दो कप मसाला चाय पीनी चाहिए। मसाला चाय कैंसर के खतरे को भी कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है। इसमें मौजूद अदरक, दालचीनी और इलायची में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स में कैंसर रोधक विशेषताएं होती हैं। ऐसे में अगर मसाला चाय का सेवन नियमित रूप से किया जाए, तो पेट में होने वाले कैंसर के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। मसाला चाय पीने से ऑक्सीजन लेने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। चाय में जो मसाले उपयोग होते हैं, जैसे- अदरक, लौंग, दालचीनी, अदरक। इन सभी का नियमित सेवन पाचन और पैंक्रियाज में एंजाइम्स को स्टिमुलेट करता है, जिससे ऑक्सीजन लेने की क्षमता बढती है। माहवारी से पहले होने वाले सिंड्रोम यानी पीएमएस के कारण जो दर्द होता है, इसमें मसाला चाय में पड़ने वाले अदरक और दालचीनी काफी मदद करते हैं। साथ ही ये हार्मोन में संतुलन बनाने में भी मदद करते हैं। ऐसे समय में अगर गर्म पानी के बैग से सिकाई करने से कोई राहत न मिले, तो मसाला चाय पीने से आराम मिल सकता है। इसके अलावा सर्दियों में खांसी-जुकाम होना तो आम बात है, लेकिन इसी से बुखार आने की शुरुआत भी होती है। ऐसे में सर्दी-जुकाम को रोकने में मसाला चाय काफी मदद कर सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल हमारी प्रतिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नोटः यह सलाह केवल आपको सामान्य जानकारी प्रदान करने के लिए दी गई है। आप किसी भी चीज का सेवन या कोई भी घरेलू उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
इरफान खान जल्द ही हॉलीवुड की फिल्म 'लाइफ ऑफ पाइ' में नजर आयेंगे। अकादमी पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक आंग ली इस फिल्म के निर्देशक हैं। साथ ही इस फिल्म में भारत के कई कलाकार हैं, जिनमें में इरफान खान मुख्य रोल में है। इस फिल्म की खास बात यह है कि इस फिल्म से इरफान खान के बेटे अयान भी एक्टिंग के फील्ड में कदम रख रहे हैं। इस फिल्म के प्रोमो आ चुके हैं उन प्रोमों में जो बच्चे दिखाई दे रहे हैं उन बच्चों में से एक इरफान का बेटा भी है। यह फिल्म 23 नवम्बर को रिलीज होगी। इससे पहले इरफान कई सफल हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुके हैं। 'लाइफ ऑफ पाइ' में इरफान के अलावा तब्बू भी हैं। इरफान इस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं इरफान के साथ उनके बेटे को एक ही फिल्म में देखना काफी दिलचस्प होगा। इरफान खुद काफी अच्छे एक्टर हैं और अब यह देखना है कि इरफान का बेटा एक्टिंग के फील्ड में क्या कमाल दिखा पाता है। Know when the festival of colors, Holi, is being observed in 2020 and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow. मकर संक्रांति 2020 में 15 जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
इरफान खान जल्द ही हॉलीवुड की फिल्म 'लाइफ ऑफ पाइ' में नजर आयेंगे। अकादमी पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक आंग ली इस फिल्म के निर्देशक हैं। साथ ही इस फिल्म में भारत के कई कलाकार हैं, जिनमें में इरफान खान मुख्य रोल में है। इस फिल्म की खास बात यह है कि इस फिल्म से इरफान खान के बेटे अयान भी एक्टिंग के फील्ड में कदम रख रहे हैं। इस फिल्म के प्रोमो आ चुके हैं उन प्रोमों में जो बच्चे दिखाई दे रहे हैं उन बच्चों में से एक इरफान का बेटा भी है। यह फिल्म तेईस नवम्बर को रिलीज होगी। इससे पहले इरफान कई सफल हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुके हैं। 'लाइफ ऑफ पाइ' में इरफान के अलावा तब्बू भी हैं। इरफान इस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं इरफान के साथ उनके बेटे को एक ही फिल्म में देखना काफी दिलचस्प होगा। इरफान खुद काफी अच्छे एक्टर हैं और अब यह देखना है कि इरफान का बेटा एक्टिंग के फील्ड में क्या कमाल दिखा पाता है। Know when the festival of colors, Holi, is being observed in दो हज़ार बीस and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow. मकर संक्रांति दो हज़ार बीस में पंद्रह जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
बुद्धौर वौद्ध धर्म डा० फर्ग्युसन साहब का यह कथन ठीक है कि जिस प्रकार मध्यमकाल में फ्रान्स के लिये लनी और क्लेखों थे, वैसे ही मध्यकाल में भारत में सच्ची विद्या का केन्द्र नालन्द था । वहीं से अन्य देशों में विद्या का प्रचार होता था। दोनों धर्मों की सत्र बातों में जैसी अद्भुत समानता है, वैसे ही दोनों धर्मों की सब रीतियों के अविष्कार और व्यवहार में बौद्ध लोग ईसाइयों से पाँच शताव्दि पहले रहे । नालन्द का बड़ा विहार जहाँ पर कि विश्वविद्यालय था, उसी के योग्य था । शक्रादित्य, बुद्धगुप्त, तथागत गुप्त और बालादित्य इन चार महान राजाओं ने मिलकर इस विश्वविख्यात विशाल इमारत को बनवाया था। इस इमारत के बन जाने पर इसमें एक बड़ी भारी सभा हुई, जिसमें कि दो-दो हजार मील की दूरी से हजारों श्रदमी एकत्रित हुए थे। इसके बाद कई राजाओं ने इसके आस-पास कई बिहार बनवाये, जिनमें बालादित्य का बनवाया हुआ बिहार सबसे सुन्दर था । वह तीन सौ फीट ऊँचा था और सुन्दरता, बड़ाई और बुद्ध की स्थापित मूर्ति में वह बोधि वृक्ष के नीचे के बड़े बिहार की समानता रखता था।" मगध से हुएनत्संग हिरण्य पर्वत के राज्य में आया, जिसे जनरल कनिंघम ने मुंगेर निश्चित किया है। इस राज्य का घेरा ६०० मील और यहाँ की ज़मीन बहुत उपजाऊ थी । राजधानी के निकट मुँगेर के गरम सोते थे, जिनमें से बहुत-सा धुआँ और भाप निकलती थी । चम्पा जो अंग के पूर्वी बिहार की राजधानी थी, आजकल के भागलपुर के निकट थी । इस राज्य का वेरा ८०० मील और भूमि समतल तथा उपजाऊ थी । राजधानी की दीवारें इस फ़ीट ऊँची और एक ऊँचे चबूतरे पर थीं। अन्य कई स्थानों में होता हुआ हुएनत्संग पुन्द्रवा पुन्द्रवर्धन में या जो आजकल का उत्तरी बङ्गाल है। यह राज्य ८०० मील के घेरे में था, उसमें घनी वस्ती थी । बस्ती के बीच-बीच में बाग, वशीचे, लता, गुल्म, तालाब आदि थे, भूमि चौरस और उपजाऊ थी । यहाँ २० सङ्घाराम और ३०० पुजारी थे, भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के लगभग १०० देव मन्दिर थे । यहाँ नंगे निर्ग्रन्थ लोग सबसे अधिक थे । पूर्व की ओर ब्रह्मपुत्र नदी के उस पार कामरूप का प्रचल राज्य था, जिसका वैरा १००० मील था । इस राज्य में आधुनिक आसाम, मनीपुर, कवार, मैमनसिंह और सिलहट सत्र सम्मिलित थे । यहाँ की भूमि उपजाऊ थी। नारियल और दूसरे फल बहुतायत से होते थे । नदियों या बाँध का जल स्त्रों के चारों ओर बहता था । यहाँ का जलवायु कोमल और लोग ईमानदार थे । वे कुछ नाटे और पीले रंग के होते थे, पर वे क्रोधी होते थे। उनकी भाषा मध्य भारतवासियों से भिन्न थी । उन लोगों की स्मरणशक्ति तेज थी और वे लोग पढ़ने में इत्तचित थे । वे लोग बौद्ध धर्म को नहीं मानते थे, वे देवों की पूजा करते थे। यहाँ लगभग १०० देव मन्दिर थे, वहाँ एक भी बौद्ध संघाराम नहीं था । राजा यहाँ का ब्राह्मरण था और उसका नाम भास्कर वमन था और उसे कुमार बुद्ध बौद्ध धर्म की पदवी थी । इसी राजा ने ही कन्नौज के प्रतापी महाराजा शीलादित्य से हुएनत्संग का परिचय कराया था । कामरूप के दक्षिण में समतन या पूर्वी चंगाल था । इस राज्य का घेरा ६०० मील था। यहाँ की राजधानी ४ मील के घेरे में थी। यहाँ के लोग नाटे, काले, बलिष्ट विद्यानुरागी थे। ये बातें पूर्वीबंगाल के लोगों में पाई जाती हैं। यहाँ ३० संघाराम और दो हजार संन्यासी थे । मन्दिर लगभग १०० थे, नंगे निर्ग्रन्थ असंख्य थे । इसके बाद हुएनत्संग नाम्रलिप्त देश ( तुमुलुक देश ) में गधा जिसे कि आज कल दक्षिण पश्चिमी बंगाल कहते हैं और जिसमें आधुनिक मिदनापुर भी सम्मिलित है । यह राज्य ३०० मील के धेरे में था, इसकी राजधानी एक बन्दरगाह था । यहाँ के लोग बलिष्ट, फुर्तील, शुरवीर और साथ-ही-साथ जल्दबाज़ थे । यहाँ समुद्र कुछ देश के भीतर घुस आया था। यहाँ हीरे, मोती, रव आदिमूल्य वस्तुएँ एकत्रित होती थीं । यहाँ १० संघाराम और ५० देवमन्दिर थे । इसके बाद हुएनत्संग 'कर्ण सुवर्ण' का वर्णन करता है जोकि आजकल पश्चिम बंगाल और मुर्शिदाबाद समझा जाता है। इसी देश के राजा शशांक ने कन्नौज के राजा शीलादित्य के वड़े-भाई को हराया और मार डाला था। इस राज्य का घेरा ३०० मील था । यहाँ के लोग सुशील, समृद्ध और विद्या प्रेमी थे। यहां १० संचाराम और ५० देव मन्दिर थे । इन वृत्तान्तों से पाठकों को भली भांति ज्ञान हो गया होगा कि उस समय खास बंगाल (बिहार और उड़ीसा को छोड़कर) पाँच बड़े-बड़े राज्यों में विभाजित था । १-उत्तरी बंगाल में 'पुन्द्र-राज्य' । - आसाम और उत्तर पश्चिम बंगाल में 'कामरुप-राज्य' । ३ - पूर्वी बंगाल में 'समतत-राज्य' 1४-दक्षिण-पश्चिमी बंगाल में 'ताम्रलिपि-राज्य' । और ५ - पश्चिमी बंगाल में 'करणसुवर्णराज्य' था । हुएनत्संग का उत्तरी भारतवर्ष का वृत्तान्त बंगाल के साथ समाप्त होता है । आगे हुएनत्संग दक्षिणी भारतवर्ष का वर्णन करता है --- उवा अर्थात उड़ीसा का राज्य १४०० मील के घेरे में है। उसकी राजधानी आधुनिक जयपुर के पास पाँच मील के घेरे में थी । वहाँ की जमीन बड़ी ही उपजाऊ थी । उसमें सब प्रकार के अन्न, फलफूल और बहुत से अद्भुत वृक्ष पैदा होते थे । परन्तु यहाँ के मनुष्य असभ्य थे । उनका रंग पीलापन लिए हुए काला था । यहाँ की भाषा मध्य भारत से भिन्न थी । पर ये लोग वड़े विद्या प्रेमी थे । जय बौद्ध-वर्म भारतवर्ष के अन्य स्थानों से उजड़ गया था तब यही देश उसकी रक्षा का स्थान था। यहाँ लगभग १०० संघाराम और १०,००० सन्यासी थे । यहाँ देव मन्दिर सिर्फ ४० थे । उड़ीसा पहले ही तीर्थ स्थान हो गया था । यद्यपि वहाँ उस समय तक पुरी का मन्दिर नहीं बना था। इस देश की दक्षिण-पश्चिम सीमा पर 'स्थत एक बड़े पर्वत पर 'पुष्पगिरी' नामक एक विशाल संचाराम था। कहते हैं कि इस संघाराम के पत्थर के स्तूप में एक अद्भुत बुर और बौद्ध धर्म प्रकाश मिलता था । दूर-दूर के यात्री यहां ग्रा-श्रा कर सुन्दर कार्योबी के छाते भेंट करते थे। वे गुम्बज के सिरे पर गुलदान के नीचे रखे जाते थे और वे पत्थर में सूइयों की तरह खड़े रहते थे। इस तरह झंडा गाड़ने की रीति आजतक जगन्नाथ में प्रचलित है । दक्षिण-पश्चिम की और एक चरित्र नाम का बड़ा भारी बन्दर गाह या। वहाँ के व्यापारी को दूर-दूर के देशों की यात्रा करते थे । विदेशी लोग यहाँ पर आते-जाते और ठहरते थे। नगर की दीवार इद और ऊँगी थी । गहाँ हर प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएँ मिलती थी । वीसा के दक्षिण-पश्चिम में निल्क भील के तट पर कान्योध का राज्य था । यहाँ के निवासी शुरवीर, सच्चे और उद्योगी थे, पर ने काले और मैले थे। लिखने में मध्य भारतवर्ष के अक्षर काम में लाने थे, पर इनका उच्चारण बिल्कुल भिन्न था । यहाँ के निवासी हिन्दू थे, यहाँ चौद्ध धर्म का अधिक प्रचार नहीं था। यह जाति बढ़ी ही प्रचल थी। अपने भुजबल से वह आस-पास के प्रान्ती पर शासन करती भी । समुद्र तट पर रहने के कारण लोगों को बहुत सी क्रीमती वस्तुएँ मिल जाती थीं। लेन-देन में ये लोग मोती और कौड़ियों को काम में लाते थे। वो को खींचने के लिये यह लोग हाथियों को काम में लाते थे । इस राज्य के उत्तर-पश्चिम में एक बड़े जंगल के पार कालिंग का प्राचीन राज्य था इस राज्य का घेरा १०० मील था, इसकी राजधानी ५ मील के घेरे में थी । यहाँ बहुत से घने जंगल थे, जिन दो मर चीनी बौद्ध भिक्षु, में जंगली हाथी रहते थे । यहाँ के लोग यद्यपि जोशीले, उजड्डु और सभ्य थे, पर वे अपनी वात के पक्के और विश्वासपात्र । यद्यपि हुएनत्संग के समय में कलिंग की ऐसी दुरवस्था होगई थी, परन्तु पाठकों को स्मरण होगा कि मेगास्थिनीज के समय में कलिंग का राज्य एक प्रचल महा-साम्राज्य था। कलिंग का राज्य बंगाल से लेकर गोदावरी के मुहाने तक समस्त समुद्र तट तक फैला हुआ था। उसकी प्रचलता का स्मरण अब तक बना हुआ था । हुएनत्संग कहता हूँ-"प्राचीन काल में कलिंग राज्य की वस्ती बहुत घनी थी । लोगों के कन्धे एक-दूसरे से रगड़ खाते थे । रथ के पहिये की धुरी एक-दुसरे रथ की ध्रुरी से टकराती थी ।" यद्यपि प्रभुत्व नहीं रहा था, फिर भी यहाँ की जातियों में एक प्रकार की राजकीय एकता थी । कलिंग के उत्तर-पश्चिमी जंगलों और पहाड़ियों में होकर कोशल का मार्ग था, जो आधुनिक बरार का देश है। इस देश का घेरा १००० मील और इसकी राजधानी का घेरा = मील था । यहाँ वस्ती बहुत घनी थी । यहाँ के लोग जोशीले, बहादुर, लम्बे, काले, कट्टर और सच्चे थे । उनमें से कुछ लोग हिन्दू और कुछ लोग बौद्ध थे। इन दक्षिणी कौशलों के सम्बन्ध में जिन्हें अवध के कोशलों से भिन्न समझना चाहिये, हुएनत्संग प्रसिद्ध वौद्ध ग्रन्थकार नागार्जुन और राजा सह का वर्णन करता है, जिसने एक चट्टान को कटवाकर उसमें सङ्घाराम बनवाया था। फ्राहियान और हुएनत्संग दोनों ने स्वयं इस मठ को नहीं देखा, पर दोनों ने इसका वर्णन किया है । वे लिखते हैं - "इस चट्टान में एक गड्ढा करवाया और उसमें एक सङ्घाराम वनवाया। लगभग दो मील की दूरी पर उन्होंने सुरंग खुदवाकर एक ढका हुआ मार्ग खोला । इस प्रकार इस चट्टान के बीच खड़े रहने से बिल्कुल कटी हुई चट्टानों और लम्बे बरामदों के बीच, जिनमें नीचे चलने के लिए गुफाएँ और ऊपर चढ़ने के लिये गुम्बज बने हैं, खण्डदार इमारत को देख सकते हैं, जो कि पाँच खण्ड ऊँची है । प्रत्येक खण्ड में चार ढालान तथा घिरे हुए बिहार हैं। एक दफा इस सङ्घाराम के पुजारी परस्पर लड़ पड़े और इसके नित्रटारे के लिए राजा के पास पहुँचे । ब्राह्मणों ने इसे अच्छा अवसर देखकर संघाराम को बरबाद कर दिया और उस स्थान की गठबन्दी कर हो।" फिर हुएनत्संग आन्ध्र के प्राचीन देश में आया, जिन्होंने ईसा के कई शताब्दियों पहले दक्षिण भारत में अपने राज्य और सभ्यता की उन्नति की थी और मगध तथा समस्त भारत पर शासन किया था । सातवीं शताब्दि में उसकी प्रधानता उज्जयनां और गुप्तों के हाथ में चली गई थी। अब इनका राज्य केवल ६०० मील के घेरें में था, जहाँ २० संघाराम और २० मन्दिर थे । इस देश के दक्षिण में 'धनकटक' अर्थान् आन्ध्र का बड़ा देश था, जिसका वेरा १२०० मील का था। इसकी राजधानी = मील के घेरे में थी, जिसे कि आजकल बैजवाड़ा कहते हैं। भूमि उपजाऊ और फसल बहुत थी, परन्तु इस देश का बहुत-सा भाग बियावान था, वस्तियाँ बहुत कम थीं, जंगल के जंगल सुनसान और उजाड़ पड़े थे । यहाँ के लोग पीलापन लिये हुए काले थे । वे कट्टर, जोशीले और विद्या प्रेमी थे । सैकड़ों प्राचीन मठ उजाड़ और खण्डहर हो गये थे । केवल ६० मठों में सन्यासी रहते थे । यहाँ पर १०० मन्दिर थे और उनके बहुत से पूजने वाले थे । हुएनत्संग लिखता है ~ "नगर के पूर्व और पश्चिम र दो विशाल मठ हैं, जो पूर्व शिला और अपर शिला के नाम से विख्यात हैं । इन मठों को किसी राजा ने बुद्ध के सम्मानार्थ चनवाया था। उस ने विशाल घाटी में गड्ढा सुदवाया, सड़कें बनवायी और पहाड़ी मार्ग खुलवाये थे ।" डा० फर्ग्यूसन सन् १७९६ में अमरावती में निकले हुए स्तूप के विषय में कहते हैं - कि यही वह पश्चिमी मठ है । डा० वर्जस मठ के पत्थरों पर खुड़े हुए लेखों के आधार पर इस स्तूप को दूसरी शताब्दी का निश्चित करते हैं । बड़े आन्ध्रदेश के दक्षिण-पश्चिम में एक चीला का राज्य था जोकि ५०० मील के घेरे में था । यहाँ वस्ती थोड़ी थी, जंगल और उजाड़ होने के कारण डाकू यहाँ खूब लूट मचाते थे । यहाँ के निवासी दुराचारी और निर्दय थे । इसके दक्षिण में द्राविड़ों का राज्य था । इसका वेरा १२०० मील का था। इसकी राजधानी विशाल 'काजीपुर' थी । जो आज कल काञ्चीवरम के नाम से पुकारी जाती है। यहां पर १०० संघाराम और १०,००० पुजारी थे। द्राविड़ राज्य के दक्षिण में मलयकूट का राज्य था, जिसे डा० वर्नेल ने कावेरी नदी के डेल्टा से मिलाया है। यहाँ के लोग काले, वीर, जोशीलें, विद्याव्यसनी और व्यापार कुशल थे । इस देश के दक्षिण में मलय पर्वत के दक्षिणी भाग थे, जहाँ कपूर और चन्दन होता था। इस पर्वत-अरणी के पूर्व में पोटलक पर्वत था, जहाँ बुद्ध महात्मा अवलोकितश्वर ने, जिनकी पूजा चीन, जापान और तिव्वत में उत्तरी चौद्ध करते हैं - कुछ समय तक निवास किया था । हुएनत्संग यद्यपि लंका में नहीं गया, परन्तु उसने वहाँ का, सव वृत्तान्त लिखा है। उसने महेन्द्र के विषय में और अन्य कई वृत्तान्त और दन्तकथाएँ तथा कथाएँ लिखी है। वह लिखता है" लंका में १०० मठ और २२,००० पुजारी थे । वहाँ पर रत्न अधिक पाये जाते हैं।" द्राविड़ों से उत्तर की ओर यात्रा करता हुआ हुएनत्संग कोकन में आया, जो १०,००० मील के घेरे में था । यहाँ के लोग यद्यपि काले, क्रोधी और जंगली थे, पर वे विद्या का सम्मान करते थे । कोकन के उत्तर-पश्चिम एक भयानक जंगल के पार १००० मील के घेरे में महाराष्ट्र का बड़ा देश था । यहाँ के लोग बड़े वीर सच्चे, पर कठोर और बदला लेने वाले थे । वे उपकृत होकर गुलाम और अपमानित होकर जान के गाहक हो जाते थे । निर्बल की सहायता में अपनी जान तक लड़ा देते थे । अपने शत्रु को वह पहले ही सूचना दे देते और फिर दोनों शस्त्रों से सुसज्जित होकर लड़ते थे । अगर कोई सेनापति युद्ध में हार जाय तो उसे वे दो ग्रमर चीनी बौद्ध भिक्षु दण्ड न देकर स्त्रियों का कपड़ा देकर निकाल देते हैं, जिससे वह स्वयंपनी मृत्यु का उपाय करें । इनका राजा क्षत्रिय है, उसका नाम पुलकेशी था । उन दिनों पुलकेशी की कार्यकुशलता और न्याय-शीलता की धाक चौतरफ थी । हुएनत्संग के समय में यद्यपि महाराज शीलादित्य ( द्वितीय ) ने पूर्व से लेकर पश्चिम तक की जातियों को विजित किया था, पर एक इसी जाति ने उनकी स्वीकार न की । शीलादित्य ने सब दिशाओं से उत्तमउत्तम सैनिकों को एकत्रित करके एक प्रबल सेना बनाई और इस वीर जाति को अपने अधीन करने के लिये उस पर चाक्रमरण किया । पर यह जाति उसके आधीन नहीं हुई। इस युद्ध में पुलकेशी ने शीलादित्य को हराया और मानी मरहठों की स्वतन्त्रता को क़ायम रक्खा । उसी प्रकार हजार वर्ष उपरान्त पुलकेशी के एक उत्तराधिकारी ने उत्तरी भारत के सम्राट श्रीरंगजैब का सामना किया। और मरहठों की खोई हुई स्वतन्त्रता और प्रचलता को पुनरुज्जीवित किया। जब मुग़लों और राजपूतों का पतन होगया, तब भी ये ही मरहठ्ठे अंग्रेजों से लड़े थे । महाराष्ट्र देश की पूर्वी सीमा पर एक बड़े भारी पर्वत पर बने हुए विशाल संघाराम का वर्णन करते हुए हुएनत्संग ने लिखा है"यह संवाराम एक अन्धकारमय घाटी में बना हुआ है, इसके कमरे और दालान चट्टानों के सामने फैले हुए हैं, प्रत्येक चट्टान के पीछे चट्टान और आगे घाटी है।" ये प्रसिद्ध एजेएटा की गुफायें है । वह फिर लिखता है- "इसके अतिरिक्त यहाँ एक सौ फीट ऊँचा विहार है, उसके बीच में पत्थर की ७० फीट ऊँची एक बुद्ध की मूर्ति हैं। इसके ऊपर सात मंजिलका एक पत्थर का चॅढ़ोवा था, जो देखने में निराधार दिखता था ।" महाराष्ट्र के पश्चिम में या उत्तर-पश्चिम में एक मरुकच्छ का देश था । इसका घेरा ५० मील का था । यहाँ की भूमि ऊसर थी, अतः समुद्री मार्ग से ही यहां पहुँचता था । फिर हुएनत्लंग ने मालवे के प्राचीन देश का वृत्तान्त लिखा है - "यह देश विद्या के लिये प्रसिद्ध है। यहां के ऐतिहासिक ग्रंथों में लिखा हुआ है कि मेरे ( हुएनत्संग के ) ६० वर्ष पहले यहां का राजा शीलादित्य था । यह प्रथम शीलादित्य था, जिसने ५५० ई० से ६०० ई० तक राज्य किया । यह सम्भवतः प्रतापी विक्रमादित्य का उत्तराधिकारी था ।" जिस शीलादित्य को हुएनत्संग ने कन्नौज में देखा था, वह शीलादित्य द्वितीय था । इसने ६१० से ६५० ई० तक राज्य किया। हुएनत्संग के समय मालवे में सौ संघाराम और सौ ही मन्दिर थे । तब हुएनत्संग अटाली और कच्छ होता हुआ बल्लभी में आया, जहां एक सौ से भी ज्यादा करोड़पति थे। फिर वह सौराष्ट्र, गुजरात, सिन्ध और मुलतान में गया और वहां से फिर उसने अपने देश को प्रस्थान किया । अब हम हुएनत्संग की डायरी के कुछ अंश को यहाँ पर देंगे, जिनसे कि तत्कालीन राज्य प्रणाली और लोगों के आचार-व्यवहार पर अच्छा प्रकाश पड़ता हैदो मर चीनी बौद्ध भिक्षु, "देश की राज्य प्रणालो उपकारी सिद्धान्तों पर निर्भर होने के कारण शासन-रीति सरल है। राज्य की आय चार मुख्य भागों में वॅटी हुई है। एक भाग राज्य का प्रबन्ध चलाने और यज्ञादि के लिये है। दूसरा भाग मन्त्री, प्रधान और अन्य राज-कर्मचारियों हल्क की आर्थिक सहायता के लिये है। तीसरा भाग बड़े-बड़े योग्य कर मनुष्यो क पुरस्कार के लिये है और चौथा भाग धार्मिक पुरुषों को दान करने के लिये है। राज्य कर बिल्कुल हल्के हैं। अधिकांश लोग भूमि जोतते-चोते हैं, उन्हें उपज का छठा भाग कर की भांति देना पड़ता है। व्यापारी लोग चड़ी दूर-दूर वाणिज्य के लिये आतेजाते हैं। नदी-मार्ग तथा सड़कें बहुत थोड़ी चॅगी पर खुले हैं। जब कभी ग़ज-कार्य के लिये मनुष्यों की जरूरत पड़ती हैं, तो उनसे काम लिया जाता है, पर उनकी पूरी मजदूरी दी जाती है ।" "सैनिक लोग सीमा- प्रदेश की रक्षा करते हैं और वे उपद्रवी लोगों को दण्ड देने के लिये भेजे जाते हैं । वे लोग रात्रि के वक्त, घोड़ों पर सवार होकर राजमहल के चौतरफ़ पहरा भी देते हैं । सैनिक लोग कार्य की आवश्यकतानुसार रक्खे जाते हैं। उन्हें कुछ द्रव्य देने की प्रतिज्ञा की जाती है और प्रकट रूप से उनका नाम लिखा जाता है। शासकों, मन्त्रियों, दण्डनायकों तथा कर्मचारियों को निर्वाह के लिये भूमि दी जाती है । " ऊपर के वृत्तान्त से विदित होता है कि भारतवर्ष की प्राचीन रीति के अनुसार सब कर्मचारियों को उनकी सेवा के लिए भूमि दी जाती थी। हुएनत्संग ने जो राजा की निजी सम्पत्ति लिखी है उससे उसका तात्पर्य सब राज्य से है । पर ऐसे गाँव या भूमि को छोड़कर जो किसी मनुष्य या मठ को सदा के लिए दे दी गई हो, जो राज कर्मचारियों के लिए नियत हो । शान्ति और युद्ध में राज्य का तथा राजा के घर का व्यय राजा की सम्पत्ति तथा कर की आय से किया जाता था । लोगों के चाल व्यवहार के विषय में हुएनत्संग उनके सीधेपन तथा सचाई की आदरणीय साक्षी देता है । वह लिखता है"वे लोग स्वभावतः गम्भीर, सच्चे और आदरणीय हैं । हर क़िस्म के व्यवहार में वे निष्कपट और न्याय करने में गम्भीर हैं, वे लोग दूसरे जन्म में प्रतिफल पाने से डरते हैं और इस संसार की वस्तुओं को तुच्छ समझते हैं । वे थोखेबाज़ कपटी अथवा नहीं हैं और अपनी शपथ अथवा प्रतिज्ञा के सच्चे हैं ।" यही सच्ची सम्मति मेगस्थिनीज के समय से लेकर अब तक के विचारवान् यात्रियों की रही है, जिन्होंने हिन्दुओं को उनके घरों और गाँवों में देखा है और जो उनके नित्य कर्मों और प्रति दिन के व्यवहारों में सम्मिलित हुए हैं। उन आधुनिक अंग्रेजों में, जो भारतवर्ष के लोगों में हिल-मिलकर रहे हैं, ऐसे ही एक निरीक्षक कर्नल स्लीमेन साहव हैं । कर्नल साहब कहते हैं- "गाँव में रहने त्राले स्वभावतः अपनी पंचायतों में दृढ़ता से सत्य का साथ देते है। मेरे सामने सैकड़ों ऐसे अभियोग हुए हैं जिनमें मनुष्य की स्वाधीनता, सम्पत्ति और प्राण उसके झूठ बोल देने पर निर्भर रहे हैं, परन्तु उसने झूठ बोलना स्वीकार नहीं किया ।" बुद्ध गया भारतवर्ष में गया का वौद्ध-मन्दिर वौद्ध धर्म का एक सबसे घड़ा स्मृति चिह्न है। हिन्दुस्तान में यों तो बौद्धों के चार मुख्य तीर्थ स्थान हैं- (१) कपिलवस्तु - जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ था, (२) बुद्ध गया - जहाँ बुद्ध को बुद्धत्व प्राप्त हुआ था, (३) श्रावस्तीजहाँ बुद्ध ने सबसे पहले अपने धर्म का प्रचार किया था, (2) कुसीनगर ~~ जहाँ बुद्ध ने निर्धारण प्राप्त किया था । इन चारों में बुद्ध-गया का सबसे बड़ा भारी महत्व है । कहा जाता है कि बुद्ध ने अपने निर्धारण के समय समस्त अनुयाइयों को यह आदेश दिया कि वह इस स्थान के दर्शन करते रहें। इस मन्दिर का निर्धारण बुद्ध के २३६ वर्ष बाद सम्राट् अशोक ने किया था। और मन्दिर को सुरक्षित रखने के लिये उसके चारों तरफ एक मजबूत पत्थर की चहारदीवारी बनवा दी थी, जिसके लण्डहर अब भी देखने को मिलते हैं । बहुत काल तक तो यह मन्दिर मगध के राजाओं की आधीनता में रहा । जब मुसलमानों की शक्ति बढ़ी और उन्होंने भारतवर्ष पर आक्रमण किया और बिहार उनके दखल में आ गया, तब १२०० ईस्वी में वख्तियार खिलजी ने इस मन्दिर को विध्वंस करा दिया। इसके बाद बहुत काल तक यह स्थान खण्डहर के रूप में पड़ा रहा। अशोक ने जहाँ पर यह मन्दिर बनवाया, वहाँ एक महान् ग्राम था, जोकि टकर राज्य की अमलदारी में था। बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद यद्यपि यह स्थान उजाड़ हो गया था, परन्तु बौद्ध लोग तो बराबर इसके दर्शन के लिये आते ही रहते थे । फाहियान सन जैसे प्रमुख यात्रियों ने भी सके दर्शन किये थे । सन् १७२७ में महमूदशाह ने इस मन्दिर के तत्कालीन महन्व को दो गाँव इनायत किये, जो कि मन्दिर के नजदीक थे। और एक सनद भी लिख दी थी । १६ वीं शताब्दि के अन्त में ब्रह्मा के राजा मिन डूंनमिन ने बहुत से रुपये खर्च करके मन्दिर की मरम्मत करवाई और उसको अपने अधिकार में ले लिया । भूतपूर्व महन्त ने अपने अधिकार उन्हें दे दिये और फिर से वहाँ बुद्ध पुजारी रहने लगे । लेकिन पीछे जब भारत सरकार और बर्मा के राजा में लड़ाई हुई और थीत्रा पकड़ा गया तथा बर्मा सरकार के कब्जे में आ गया, तब बौद्ध-मन्दिर पर भी सरकार ने कब्जा कर लिया। इसके बाद बराबर यह कोशिश की जाती रही कि इस मन्दिर की मरम्मत कराई जाय । ग्रियसन साहब गया के मजिस्ट्रेट ने भी सरकार को मरम्मत के लिये लिखा था । जब बर्मा के राजा ने बौद्ध-मन्दिर की मरम्मत शुरू कराई तो प्राचीन बोधिवृक्ष के नीचे से मिट्टी हटाने से वह गिर गया । उस समय कनिंघम साहब ने वहाँ दो पीपल के पेड़ लगा दिये। श्राज बौद्ध लोग उसी पीपल की पूजा करते हैं। जब वर्मा के राजा ने मन्दिर की मरम्मत की आज्ञा ली थी, तत्र शर्त यह थी कि कोई नया काम शुरू न किया जाय, सिर्फ मरम्मत ही की जाय । सन् १८७७ में बाबू राजेन्द्रपाल ने वर्मी कारीगरों का काम देखने के लिये बौद्ध गया की यात्रा की और उनकी रिपोर्ट पर एप्रिल मास में काम बन्द कर दिया गया । उसी साल फिर जब बर्मा के राजा अँग्रेज अफसरों की अध्यक्षता में मरम्मत का काम कराने को सहभत होगये तो मि० सी० ए० मिल्स की अध्यक्षता में काम शुरू हुआ । सन् १८७६ में मि० वर्गलर में सरकार को वर्मा कारीगरों की लापर्वाही की शिकायत की तो सरकार ने मरम्मत का काम अपने हाथों में ले लिया और उसकी मरम्मत पूरी होगई। इस प्रकार मरम्मत में दो लाख रुपया खर्च हुआ । मरम्मत हो जाने के बाद प्रियसन साहब ने सरकार से यह पूछा कि यह मन्दिर पी० डब्ल्यू० डी० के अधि कार में कब आयगा ? सरकार ने उनको जवाब दिया कि सन १८८१ ई० १ अप्रैल को पी० डब्ल्यू० डी० के अधिकार में ले लिया जायगा । ठीक समय पर सरकार ने मन्दिर को पी० डब्ल्यू० डी० के अधिकार में दे दिया और तब से यह पी० डब्ल्यू० डी० के अधिकार में है। और बरावर मरम्मत होती रहती है । इसके बाद जब नागरिक धर्मपाल ने इस मन्दिर की यात्रा की तो उनके मन में धार्मिक विचार पैदा हुए। और उत्तका यह विचार हुआ कि इस मन्दिर पर बौद्धों का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कोलम्बो में महा बुद्धसमिति स्थापित की और बहुत-सी लिखा-पढ़ी के बाद सरकार ने महा चौद्ध समिति के मन्त्री को विश्रामागार के दो कमरों की तालियाँ दे दी और फिर वहाँ चौद्धभिक्षु रहने लगे और पूजा-अर्चना करने लगे। महन्तजी में और अनागरिक पाल में मेल हो गया । एक चाण्डाल कन्या मन्दिर के सहन को साफ़ किया करती थी । वौद्ध भिक्षु रात-दिन मन्दिर में रहते थे और आराधना करते थे। इसके बाद एक बड़ी भारी सभा पटना में हुई और इस बात की कोशिश की गई कि इस मन्दिर को सर्वथा बौद्धों के अधीन कर लिया जाय । थोड़े ही दिनों मेंवृढे महन्तजी मर गये और नवीन महन्त गद्दी पर बैठे तो उनसे वौद्धों की होगई । इस के बाद जापान में एक ७०० वर्ष पुरानी मूर्ति अनागरिक धर्मपाल को मिली । जिसकी स्थापना उन्होंने मन्दिर की दूसरी मजिल पर करने का विचार किया। लेकिन अनागरिक धर्मपाल का यह इरादा जब महन्त जी को मालूम हुआ तो वह बड़े क्रोधित हुए और उनमें झगड़ा हुआ । परिणाम यह हुआ कि मुक़दमा फ़ौजदारी हो गया और उसमें महन्तजी के तीन चेलों को एक-एक महीने की सज़ा और १०० - १०० रुपये जुर्माने का हुक्म हुआ। हाईकोर्ट में अपील दायर हुई तो यद्यपि अपराधियोंकी सजा वन्द हो गई परन्तु यह स्पष्ट रहा कि यह मन्दिर वौद्धका और इस पर बौद्धों ही का अधिकार रहना चाहिये । थोड़े दिनों बाद जापान से मि० ओकाकोरा हिन्दुस्तान आये और उन्होंने मन्दिर के आस-पास जमीन खरीदकर जापानी विश्रामागार बनाने की चेष्टा की। उन्होंने चौद्ध-गया में स्वामी श्रद्धानन्द और सविता देवी से बात की और वहाँ एक "जापानी हिंदू-संघ" 'खोलने का विचार किया । सरकार को यह बात मालूम हुई और उसने जाना कि इसमें एक महान् राजनैतिक षड्यन्त्र है तो उसने बौद्धों को वहाँ से निकालने का हुक्म दे दिया । लार्ड कर्जन चायसराय थे, उन्होंने एक कमीशन नियत किया, जिसके सदस्य जस्टिस सुरेन्द्र नाथ और हरप्रसाद शास्त्री थे शास्त्री जी ने बौद्धों के पक्ष में और मि० जस्टिस ने विपक्ष में मत दिये। रिपोर्ट पर सरकार ने बौद्धगया से चौद्धों को निकलने का हुक्म दे दिया। ओकाकोरा का विचार ज्यों-का-त्यों रह गया । इसके बाद महन्त ने मन्दिर पर दीवानी मुकदमा दायर किया और उन दोनों विश्रामागार के कमरों पर से भी बौद्धों का अधिकार हट गया और सारे मन्दिर पर महन्त का अधिकार हो गया । इस वक़्त मन्दिर पर महन्त ही का अधिकार है, और इसमें कोई शक नहीं कि उनकी पूजा विधि चौद्धों की पूजा विधि से भिन्न है। बौद्धों को वहाँ पूजा करने से रोका जाता है। यद्यपि साम्प्रदायिकता का जमाना नहीं है फिर भी यह वास्तविक बात है कि वह मन्दिर बौद्धों का है, अतः उस पर वौद्धों हो का अधिकार होना चाहिये । वहाँ प्रति वर्ष सैंकड़ों बकरे काटे जाते हैं और चिड़ियों का शिकार किया जाता है । नालन्दा विश्व-विद्यालय उदय, अस्त और पुनर्दर्शन गुप्तकाल भारतवर्ष का स्वर्ण युग कहा जाता है। नालन्दा विश्व विद्यालय का पूर्ण विकास उसी युग में हुआ था। तब से लगातार सात सौ वर्ष तक क्रमशः गुत, वर्धन और पालवंशा क राजाओं के संरक्षण में यह विश्व विद्यालय ज्ञान का केन्द्र बना रहा। यहीं से ज्ञान की वह ललकार उठी थी - वह 'शृण्वन्तु विश्व अमृतस्य पुत्राः' की उत्साहवर्धक पुकार । इस विश्वविद्यालय के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप का अनुमान हम इसी बात से कर सकते हैं कि चीन, तिब्बत, तुर्किस्तान, सिंहल आदि सुदूर देशों के विद्यार्थी ज्ञानार्जन करने के लिए यहाँ आते थे । इसके इतिहास में भारतवर्ष का लगभग सात सौ वर्षों का इतिहास छिपा हुआ है। आज भी संसार के बिरले ही विश्व विद्यालय इतने दीर्घकालीन जीवन का दावा कर सकते हैं । यह सब केवल यहाँ के तेजस्वी भिक्षुओं के आत्म-त्याग का प्रभाव था । विक्रमकी तेरहवी शताब्दि में, देश के दुर्दिन में, इस महाविद्यालय का संहार हुआ था । पर इसकी उज्ज्वल कीर्ति का प्रकाश छिपने वाली चीज न थी । बीसवीं विक्रमीय शताव्दि के प्रारंभिक काल में इसके कुछ प्राचीन चिह्नों के दर्शन हुए। ज्योंही प्रसिद्ध चीनी यात्री हुएनत्संग की यात्राओं का विवरण प्रकाशित हुआ, त्योंही विद्वानों को इसके महत्व का अनुभव हुआ । विक्रम सम्वत् १९१८-१६ में कनिंघम साहब की खोज के ग्रभाव से मालूम हुआ कि जहाँ इस समय पटना जिले का 'चड़गाँव' नामक ग्राम है, वहीं प्राचीन नालन्दा बसा हुआ था। फिर क्या था, वहाँ चीन, जापान, तिव्वत, वर्मा, सिंहल आदि देशों के तीर्थयात्री आने लगे । इसके बाद ही लन्दन की 'रायल एशियाटिक सोसाइटी' ने हिन्दुस्तान के पुरातत्व विभाग द्वारा 'बढ़गाँव' में खुदाई का प्रबन्ध कराया और प्रान्तीय संग्रहालय में वहाँ से प्राप्त हुई सभी चीजों को सुरक्षित रखने की अनुमति दी । सम्वत् १९७२ में यहाँ खुदाई शुरू करने के लिये प्रसिद्ध पुररातत्वज्ञ डाक्टर स्पूनर भेजे गये । तब से आज तक खुदाई का काम जारी है और अभी इसके पूरा होने में कई साल लगेंगे । इस खुदाई में यहाँ की इमारतों की भव्यता प्रकट होती हैं। कई बहुमूल्य चीजें मिलती जा रही हैं। इस प्रकार भारतवर्ष के बौद्धकालीन इतिहास को पूर्ण करने की बहुत सी चमत्कारपूर्ण सामग्री उपलब्ध होती जा रही है। 'नालन्दा' की खोज 'बड़गाँव' राजगृह से लगभग आठ मील उत्तर की ओर है। पटना जिले के बिहार शरीफ़ क़स्त्रे से लगभग छः मील दक्षिण है। बख्तियारपुर बिहार लाइट रेलवे के नालन्दा नामक स्टेशन से यह लगभग ढाई मील है। यहाँ कनिंघम ने दो शिलालेख पाये थे, जिन में इस स्थान का 'नालन्दा' नाम उल्लेखित हैं । हुएनत्संग के वर्णन के अनुसार 'नालन्दा' बोध-गया के पवित्र बोध-वृक्ष से सात योजन अर्थात् उनचास मील और राजगृह से तीस 'ली' अर्थात् कोई पाँच मील उत्तर है । 'बड़गाँव' के सम्बन्ध में यह दूसरी प्रायः ठीक निकली है । हाल की खुदाई में भी यहाँ ऐसे शिलालेख मिले हैं। जिनपर 'नालन्दा' नाम खुदा है। कई ऐसी-ऐसी मुहरें मिली हैं, जिन पर स्पष्ट 'श्री नालन्दा महाविहारीय आर्य भिक्षुसंघस्य लिखा हुआ है। आधुनिक नाम 'बड़गाँव' शब्द यहाँ की एक भग्न इमारत पर जमे हुए 'बड़' (वट) वृक्ष से व्युत्पन्न हुआ है । 'बड़गाँव' और 'नानन्द' किन्तु इधर हाल में 'चड़गाँव' से कुछ उत्तर हटकर पूर्व की ओर चार-पाँच मील की दूरी पर 'नानन्द' नामक एक गाँव का पता चला है । 'नानन्द' भी 'नालन्दा' का विकृत रूप जान पड़ता है। यहाँ भी दूर तक विस्तीर्ण खण्डहर हैं, कई प्राचीन जलाशय भी है । हुएनत्संग का बतलाया हुआ 'दूरी का हिसाव' भी इस स्थान के सम्बन्ध में बड़गाँव से अधिक ठीक उतरता है । 'नानन्द' राज गृह से लगभग ५ मोल की ही दूरी पर है । भग्नावस्था में पड़े हुए यहाँ के एक बिहार में स्थित बुद्ध की एक बड़ी मूर्ति, बैठी हुई मुद्रा में मिली है। उसके ऊपर कुछ लेख भी हैं। प्रसिद्ध पुरातत्वज्ञ श्री काशीप्रसाद जायसवाल ने उसे पढ़ा है; पर उससे किसी महत्वपूर्ण बात का पता नहीं चलता । श्री P. C. S. ने इस विषय में कुछ जाँच पड़ताल भी की है। आपका तो यह अनुमान है कि यथार्थ में 'नानन्द' ही असल 'नालन्दा' है । 'वड़गाँव' तो नालंदा हो ही नहीं सकता। 'वड़गाँव' जिसकी व्युत्पत्ति ब्राण्डले साहब ने बिहार ग्राम से बतलाई है, स्कन्दगुप्त द्वारा स्थापित विहार ग्राम है। यहाँ के संघारामों के संस्थापक वही होंगे । किन्तु यह अभी अनुमान ही अनुमान है। इस सम्बन्ध में जो कुछ सामग्री मिल सकी है, वह वोर्नट साहब के पास जाँच के लिये भेजी गई है । देखें, वे किस निर्णय पर पहुँचते है। असल में जब तक इस भाग में खुदाई न हो, तब तक निश्चयात्मक रूप से कुछ कहना सम्भव नहीं है। जो हो, नानन्द के 'नालन्दा' होने की सम्भावनायें विश्वास रखते हुए भी हम यह मानने को तैयार नहीं कि बड़गाँव नालन्दा है ही नहीं । हम यह जानते हैं कि 'नालन्दा' महाविहार में दस हजार विद्यार्थियों के रहने का प्रबन्ध था । यह सम्भव नहीं कि इतने अधिक विद्यार्थियों के रहने का स्थान, एक-डेढ़ मील में ही सीमित हो । उसके लिये चार-पाँच मील या इससे भी अधिक विस्तार का होना सम्भव है । इस प्रकार यदि निश्चयात्मक रूप से भी यह मान लिया जाय कि 'नानन्द' में ही 'नालन्दा' बसा हुआ था, तो भी उसके विस्तार का 'बड़गाँव' तक पहुँचना असम्भव नहीं हो सकता । नालन्दा, असल में, बहुत विस्तृत प्रदेश था । और 'वढ्गाँव' निस्सन्देह उसका एक अन्तस्थ भाग था । इसमें भ्रम या तर्क की कोई गुंजायश नहीं । इसके अनेक प्रमाणों में सबसे बड़ा प्रमाण तो यह है कि कनिंघम साहब की खोज के बहुत पहले से 'बड़गाँव' के ही प्राचीन 'नालन्दा' होने का विश्वास प्रचलित था । विक्रम सम्वत् १५६५ में रचित इंससोम के पूर्व - देशचैत्य परिपाटी ग्रन्थ में नालन्दा के साथ उसके वर्तमान नाम 'बड़गाँव' का भी उल्लेख है। लिखा है-"नालन्दे पाईं चौद चौमास सुरणीजै । होड़ा लोक प्रसिद्ध ते बड़गाँव कहीजै । सोल प्रसाद तिहाँ अच्छे जिन विम्ब नमीजै । " इस प्रकार यह प्रकट है कि विक्रम की सोलहवीं शताब्दि से भी पहले लोगों को यह मालूम था कि यह बड़गाँव उस प्राचीन "नालन्दा" का ही वर्तमान रूप है। प्राचीन नालन्दा की स्थिति वे. भूले न थे, फिर भी इसमें सन्देह नहीं कि नानन्द में यदि खुदाई का काम जारी हो तो उससे हमारे नालंदा विषयक ज्ञान में अत्यन्त महत्वपूर्ण सत्य का विकास होगा। नालन्दा का उल्लेख कई बौद्धग्रंथों में भी हुआ हैं । शान्त-रक्षित का 'तत्व संग्रह' कमलशील की 'तत्वसंग्रह पंजिका' तथा नालन्दा के पण्डितों के और भी कई तान्त्रिक ग्रन्थ मिलते हैं । नालंदा के वर्णन में उनसे विशेष सहायता नहीं मिलती। केवल 'अष्ट- साहस्रिका प्रज्ञापारमिता' और कुछ अन्य प्राचीन ग्रंथ जिनकी प्रतिलिपि पालवंशी राजाओं के समय में तैयार की गई थी - ऐसे हैं जिनसे कुछ विशेष सूचनायें मिलती हैं। पालिग्रन्थ महाविहार की स्थापना के बहुत पहले की बातों का उल्लेख करते हैं। जब इस स्थान का सम्बन्ध स्वयं भगवान बुद्ध से था। इस सम्बन्ध में हमें हुएनत्संग, इत्सिंग, चुकुंग आदि चीनी यात्रियों तथा तिब्बती 'तारानाथ' के विवरणों से ही विशेष सहायता मिलती है। और अब तो खुदाई में बहुत से ऐसे शिलालेखादि भी मिले हैं, जिनसे महाविहार सम्बन्धी कई बातों पर प्रचुर प्रकाश पड़ता है। श्री महावीर स्वामी तथा उनके एक श्रेष्ट और प्राचीन शिष्य इन्द्रभूति के सम्बन्ध के कारण जैनी लोग भी अव उस स्थान को तीर्थ समझते हैं । 'सूत्रकृतांग' सरीखे कुछ जैन-ग्रन्थों में नालन्दा का अच्छा वर्णन है, जिससे मालूम होता है कि ईसवी सन के पहले भी नालन्दा बहुत समृद्ध और समुन्नत नगर था । कल्पसूत्र में लिखा है कि यहाँ भगवान महावीर स्वामी ने चातुर्मास्य विताया था । इतना ही नहीं, भगवान बुद्ध ने 'संपसादनीयसुत्तं' और 'केबद्धसुत्त' का प्रवर्तन नालन्दा में ही किया था । हुएनत्संग ने लिखा है- इस स्थान पर एक प्राचीन आम्रवाटिका थी, जिसको ५०० व्यापारियों ने दश कोटि मुद्रा में मोल लेकर बुद्धदेव को समर्पित कर दिया । नालन्दा के 'लेय' नामक एक निवासी के धन, जन, यश और वैभव की बड़ी प्रशंसा थी । यहाँ के 'केवद्ध' नामक एक धनी सज्जन को हम भगवान् बुद्ध के सामने नालन्दा के प्रभाव और पवित्रता की बड़ी बड़ाई करते हुए पाते हैं। 'आनन्द' के मत से तो नालन्दा पाटलिपुत्र से भी बढ़कर था, क्योंकि नालन्दा ही भगवान् बुद्ध के निर्धारण के लिये उपयुक्त स्थान था, पाटलिपुत्र के नहीं । इससे नालन्दा के पाटलिपुत्र से अधिक प्राचीन और श्रेष्ठ होने का परिचय मिलता है। फ़ाहियान के अनुसार सारिपुत्त का बहुत पहले से 'बड़गाँव' के ही प्राचीन 'नालन्दा' होने का विश्वास प्रचलित था । विक्रम सम्वत् १५६५ में रचित हंसमोम के पूर्व - देशचैत्य परिपाटी' ग्रन्थ में नालन्दा के साथ उसके वर्तमान नाम 'बड़गाँव' का भी उल्लेख है। लिखा है"नालन्दे पा चौद चौमास सुरगीजै । होड़ा लोक प्रसिद्ध ते बड़गाँव कहीजे । सोल प्रसाद तिहाँ अच्छे जिन विम्ब नमीजै ।" इस प्रकार यह प्रकट है कि विक्रम की सोलहवीं शताब्दि से भी पहले लोगों को यह मालूम था कि यह बड़गाँव उस प्राचीन "नालन्दा" का ही वर्तमान रूप है। प्राचीन नालन्दा की स्थिति के भूले न थे, फिर भी इसमें सन्देह नहीं कि नानन्द में यदि खुदाई का काम जारी हो तो उससे हमारे नालंदा विषयक ज्ञान में अत्यन्त महत्वपूर्ण सत्य का विकास होगा। नालन्दा का उल्लेख कई बौद्धग्रंथों में भी हुआ है । शान्त रक्षित का 'तत्व संग्रह' कमलशील की 'तत्वसंग्रह पंजिका' तथा नालन्दा के पण्डितों के और भी कई तान्त्रिक ग्रन्थ मिलते हैं । नालंदा के वर्णन में उनसे विशेष सहायता नहीं मिलती। केवल 'अ- साहस्त्रिका प्रज्ञापारमिता' और कुछ अन्य प्राचीन ग्रंथ जिनकी प्रतिलिपि पालवंशी राजाओं के समय में तैयार की गई थी - ऐस हैं जिनसे कुछ विशेष सूचनायें मिलती हैं। पालिग्रन्थ महाविहार की स्थापना के बहुत पहले की बातों का उल्लेख करते हैं। जब इस स्थान का सम्बन्ध स्वयं भगवान बुद्ध से था। इस सम्बन्ध मं हमें हुएनत्संग, इल्लिंग, बुकुंग आदि चीनी यात्रियों तथा तिच्चती 'तारानाथ' के विवरणों से ही विशेष सहायता मिलती है। और अब तो खुदाई में बहुत से ऐसे शिलालेखादि भी मिले हैं, जिनसे महाबिहार-सम्बन्धी कई बातों पर प्रचुर प्रकाश पड़ता है । श्री महावीर स्वामी तथा उनके एक श्रेष्ठ और प्राचीन शिष्य इन्द्रभूति के सम्बन्ध के कारण जैनी लोग भी अच उस स्थान को तीर्थ समझते हैं । 'सूत्रकृतांग' सरीखे कुछ जैन-ग्रन्थों में नालन्दा का वर्णन है, जिससे मालूम होता है कि ईसवी सन के पहले भी नालन्दा बहुत समृद्ध और समुन्नत नगर था । कल्पसूत्र में लिखा है कि यहाँ भगवान महावीर स्वामी ने चातुर्मास्य बिताया था । इतना ही नहीं, भगवान् बुद्ध ने 'संपादनीयसुतं' और 'केवद्धसुत्त' का प्रवर्तन नालन्दा में ही किया था । हुएनत्संग ने लिखा है-इस स्थान पर एक प्राचीन आम्रवाटिका थी, जिसको ५०० व्यापारियों ने दश कोटि मुद्रा में मोल लेकर बुद्धदेव को समर्पित कर दिया । नालन्दा के 'लेय' नामक एक निवासी के धन, जन, यश और वैभव की बड़ी प्रशंसा थी । यहाँ के 'केवद्ध' नामक एक धनी सज्जन को हम भगवान् बुद्ध के सामने नालन्दा के प्रभाव और पवित्रता की बड़ी बड़ाई करते हुए पाते हैं। 'आनन्द' के मत से तो नालन्दा पाटलिपुत्र से भी बढ़कर था, क्योंकि नालन्दा ही भगवान् बुद्ध के निर्धारण के लिये उपयुक्त स्थान था, पाटलिपुत्र नहीं । इससे नालन्दा के पाटलिपुत्र से अधिक प्राचीन और श्रेष्ठ होने का परिचय मिलता है । फाहियान के अनुसार सारिपुत्त का जन्म स्थान 'नाल ' ग्राम था । कुछ विद्वानों का खयाल है कि 'नाल ' नालन्दा का ही द्योतक है। यहीं बुद्धदेव से सारिपुत्त की भेंट हुई और भगवान् ने अपने प्रिय शिष्य की कठिनाइयों का समाधान किया । तिव्बती लामा तारानाथ के अनुसार यहीं सारिपुत्र ने हजारों के साथ निर्वाण प्राप्त किया। बड़गाँव में, हाल की खुदाई में, भूमि-स्पर्श मुद्रा में, भगवान् बुद्ध की एक मूर्ति मिली है, जिसमें आर्य सारिपुत्त और आर्य मौदगल्यायन उड़ते हुए रूप में चित्रित हैं । ये दोनों भगवान् बुद्ध के प्रधान शिष्य थे । इन पवित्र संसर्गों के कारण नालन्दा बहुत प्राचीन समय से पुण्यस्थान माना जाता था। इसके अतिरिक्त यह 'राजगृह' से बहुत निकट है, जो वौद्धों का प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। मगध की राजधानी पाटलिपुत्र भी इस स्थान से बहुत दूर नहीं है । यहाँ की प्राकृतिक शोभा और शान्ति भी बड़ी चित्ताकर्पिणी थी । इस स्थान की इन्हीं विशेषताओं से आकृष्ट होकर एक महान उच्च आदर्श को लिए हुए आत्मती बौद्ध भिक्षुकों ने यहाँ नालन्दा महाबिहार की स्थापना की थी । महाविहार की स्थापना का काल निर्णय परन्तु यह स्थापना कब हुई है, इस सम्बन्ध में मत भेद है । तारानाथ के अनुसार इसके सर्व प्रथम स्थापक अशोक थे । हुएनत्संग ने भी लिखा है कि 'बुद्ध-निर्धारण के थोड़े ही दिन बाद यहाँ के प्रथम संघाराम का निर्माण हुआ, पर नालन्दा महाविहार को इतनी अधिक प्राचीनता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक नहीं मिला है। फाहियान ने (सन् १५८ के लगभग) नालन्दा का कोई उल्लेख नहीं किया है। उसने 'नालो' नामक एक स्थान का जिक्र किया है, जिसे कुछ लोग 'नालन्दा' का ही रूपान्तर समझते हैं । जो हो, यह तो स्पष्ट है कि उस समय नालन्दा में कोई ऐसा विशेष महत्व न होगा, जो फ़ाहियान को आकृष्ट करता । विक्रम की सातवीं सदी ( सम्वत् ६८७-७०३) में हुएनत्संग आया था। उस समय नालन्दा महत्व और ख्याति की पराकाष्टा को पहुँचा हुआ था, इस बात के आधार पर यह अनुमान किया जाता है कि नालन्दा महाबिहार की स्थापना काहियान के आने के बाद और हुएनत्संग के आने के पहले हुई थी - पाँचवीं और सातवीं सदी के बीच में । कनिंघम और स्पूनर ने पाँचवीं ईसवी सदी के मध्य में इसकी स्थापना का समय निश्चित किया है। मगध के राजा बालादित्य, जिन्होंने नालन्दा में एक उच्च बिहार का निर्माण कराया था। हूरणाधिपति मिहिरकुल के समकालीन थे । मिहिरकुल सम्वत् ५७२ (सन् ५१५ ई०) में राज्य करता था । इसलिये वालादित्य का भी समय यही हुआ । विसेन्ट स्मिथ के अनुसार बालादित्य का भी राज्य काल सन् ४६७ ई० से ४७३ तक होना चाहिये । वालादित्य के पहले उनके तीन पूर्वजों ने भी यहाँ संघाराम बनवाये थे, और उनमें शक्रादित्य सर्व प्रथम थे। इस तरह नालन्दा-महाविहार की स्थापना का समय विक्रम की पाँचवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जान पड़ता है। पर मेरा अनुमान तो यह है कि नालन्दा में बुद्ध के निर्वारण के कुछ समय बाद विश्वविद्यालय की न सही, पर किसी बिहार की स्थापना हुई होगी। हुएनत्संग के कथन में जिसका समर्थन लामा तारानाथ भी करते हैं, तब तक बिल्कुल विश्वास करना अनुचित है, जब तक खुदाई समाप्त न हो जाय, मेरा विश्वास है कि "नानन्द" नामक गाँव में अयदि खुदाई का काम जारी किया जाय, तो बहुत सम्भव है कि नालन्दा की प्राची - नता के और अधिक प्रमाण मिलें । महाविहार के संस्थापक और संरक्षक नालन्दा के प्रथम संघाराम के बनाने वाले राजा शक्रादित्य थे । हुएनत्संग के मत के अनुसार इनका समय ईसवी सन् की शताव्दि प्रथम में होना चाहिये । पर यह मत अन्य विद्वानों को मान्य नहीं हूं । शकादित्य के पुत्र और उत्तराधिकारी बुद्धगुप्त राज ने प्रथम संघाराम के दक्षिण में, एक दूसरा संघाराम बनवाया। तीसरे राजा तथागत गुप्त ने दूसरे के पूर्व में एक तीसरा संघाराम वनवाया । इसके उत्तर-पूर्व में बालादित्य ने एक चौथा संघाराम वनवाया। उनके पुत्र यत्र ने अपने पिता के बनवाये हुए संघाराम कं पश्चिम में एक और संघाराभ वनवाया। अन्त में फिर उनके संघाराम के उत्तर में मध्य भारत के किसी एक राजा ने और संघाराम वनवा दिया। और इन सभी संचारामों को एक ऊँची चहार दीवारी से घिरवा भी दिया। इसके बाद भी अनेक राजा सुन्दर तथा भव्य निर्माण से, नालन्दा को सुशोभित करते रहे । रेवरेण्ड हिरास ने एक विद्वत्तापूर्ण लेख में उक्त चारों राजाओं के
बुद्धौर वौद्ध धर्म डाशून्य फर्ग्युसन साहब का यह कथन ठीक है कि जिस प्रकार मध्यमकाल में फ्रान्स के लिये लनी और क्लेखों थे, वैसे ही मध्यकाल में भारत में सच्ची विद्या का केन्द्र नालन्द था । वहीं से अन्य देशों में विद्या का प्रचार होता था। दोनों धर्मों की सत्र बातों में जैसी अद्भुत समानता है, वैसे ही दोनों धर्मों की सब रीतियों के अविष्कार और व्यवहार में बौद्ध लोग ईसाइयों से पाँच शताव्दि पहले रहे । नालन्द का बड़ा विहार जहाँ पर कि विश्वविद्यालय था, उसी के योग्य था । शक्रादित्य, बुद्धगुप्त, तथागत गुप्त और बालादित्य इन चार महान राजाओं ने मिलकर इस विश्वविख्यात विशाल इमारत को बनवाया था। इस इमारत के बन जाने पर इसमें एक बड़ी भारी सभा हुई, जिसमें कि दो-दो हजार मील की दूरी से हजारों श्रदमी एकत्रित हुए थे। इसके बाद कई राजाओं ने इसके आस-पास कई बिहार बनवाये, जिनमें बालादित्य का बनवाया हुआ बिहार सबसे सुन्दर था । वह तीन सौ फीट ऊँचा था और सुन्दरता, बड़ाई और बुद्ध की स्थापित मूर्ति में वह बोधि वृक्ष के नीचे के बड़े बिहार की समानता रखता था।" मगध से हुएनत्संग हिरण्य पर्वत के राज्य में आया, जिसे जनरल कनिंघम ने मुंगेर निश्चित किया है। इस राज्य का घेरा छः सौ मील और यहाँ की ज़मीन बहुत उपजाऊ थी । राजधानी के निकट मुँगेर के गरम सोते थे, जिनमें से बहुत-सा धुआँ और भाप निकलती थी । चम्पा जो अंग के पूर्वी बिहार की राजधानी थी, आजकल के भागलपुर के निकट थी । इस राज्य का वेरा आठ सौ मील और भूमि समतल तथा उपजाऊ थी । राजधानी की दीवारें इस फ़ीट ऊँची और एक ऊँचे चबूतरे पर थीं। अन्य कई स्थानों में होता हुआ हुएनत्संग पुन्द्रवा पुन्द्रवर्धन में या जो आजकल का उत्तरी बङ्गाल है। यह राज्य आठ सौ मील के घेरे में था, उसमें घनी वस्ती थी । बस्ती के बीच-बीच में बाग, वशीचे, लता, गुल्म, तालाब आदि थे, भूमि चौरस और उपजाऊ थी । यहाँ बीस सङ्घाराम और तीन सौ पुजारी थे, भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के लगभग एक सौ देव मन्दिर थे । यहाँ नंगे निर्ग्रन्थ लोग सबसे अधिक थे । पूर्व की ओर ब्रह्मपुत्र नदी के उस पार कामरूप का प्रचल राज्य था, जिसका वैरा एक हज़ार मील था । इस राज्य में आधुनिक आसाम, मनीपुर, कवार, मैमनसिंह और सिलहट सत्र सम्मिलित थे । यहाँ की भूमि उपजाऊ थी। नारियल और दूसरे फल बहुतायत से होते थे । नदियों या बाँध का जल स्त्रों के चारों ओर बहता था । यहाँ का जलवायु कोमल और लोग ईमानदार थे । वे कुछ नाटे और पीले रंग के होते थे, पर वे क्रोधी होते थे। उनकी भाषा मध्य भारतवासियों से भिन्न थी । उन लोगों की स्मरणशक्ति तेज थी और वे लोग पढ़ने में इत्तचित थे । वे लोग बौद्ध धर्म को नहीं मानते थे, वे देवों की पूजा करते थे। यहाँ लगभग एक सौ देव मन्दिर थे, वहाँ एक भी बौद्ध संघाराम नहीं था । राजा यहाँ का ब्राह्मरण था और उसका नाम भास्कर वमन था और उसे कुमार बुद्ध बौद्ध धर्म की पदवी थी । इसी राजा ने ही कन्नौज के प्रतापी महाराजा शीलादित्य से हुएनत्संग का परिचय कराया था । कामरूप के दक्षिण में समतन या पूर्वी चंगाल था । इस राज्य का घेरा छः सौ मील था। यहाँ की राजधानी चार मील के घेरे में थी। यहाँ के लोग नाटे, काले, बलिष्ट विद्यानुरागी थे। ये बातें पूर्वीबंगाल के लोगों में पाई जाती हैं। यहाँ तीस संघाराम और दो हजार संन्यासी थे । मन्दिर लगभग एक सौ थे, नंगे निर्ग्रन्थ असंख्य थे । इसके बाद हुएनत्संग नाम्रलिप्त देश में गधा जिसे कि आज कल दक्षिण पश्चिमी बंगाल कहते हैं और जिसमें आधुनिक मिदनापुर भी सम्मिलित है । यह राज्य तीन सौ मील के धेरे में था, इसकी राजधानी एक बन्दरगाह था । यहाँ के लोग बलिष्ट, फुर्तील, शुरवीर और साथ-ही-साथ जल्दबाज़ थे । यहाँ समुद्र कुछ देश के भीतर घुस आया था। यहाँ हीरे, मोती, रव आदिमूल्य वस्तुएँ एकत्रित होती थीं । यहाँ दस संघाराम और पचास देवमन्दिर थे । इसके बाद हुएनत्संग 'कर्ण सुवर्ण' का वर्णन करता है जोकि आजकल पश्चिम बंगाल और मुर्शिदाबाद समझा जाता है। इसी देश के राजा शशांक ने कन्नौज के राजा शीलादित्य के वड़े-भाई को हराया और मार डाला था। इस राज्य का घेरा तीन सौ मील था । यहाँ के लोग सुशील, समृद्ध और विद्या प्रेमी थे। यहां दस संचाराम और पचास देव मन्दिर थे । इन वृत्तान्तों से पाठकों को भली भांति ज्ञान हो गया होगा कि उस समय खास बंगाल पाँच बड़े-बड़े राज्यों में विभाजित था । एक-उत्तरी बंगाल में 'पुन्द्र-राज्य' । - आसाम और उत्तर पश्चिम बंगाल में 'कामरुप-राज्य' । तीन - पूर्वी बंगाल में 'समतत-राज्य' चौदह-दक्षिण-पश्चिमी बंगाल में 'ताम्रलिपि-राज्य' । और पाँच - पश्चिमी बंगाल में 'करणसुवर्णराज्य' था । हुएनत्संग का उत्तरी भारतवर्ष का वृत्तान्त बंगाल के साथ समाप्त होता है । आगे हुएनत्संग दक्षिणी भारतवर्ष का वर्णन करता है --- उवा अर्थात उड़ीसा का राज्य एक हज़ार चार सौ मील के घेरे में है। उसकी राजधानी आधुनिक जयपुर के पास पाँच मील के घेरे में थी । वहाँ की जमीन बड़ी ही उपजाऊ थी । उसमें सब प्रकार के अन्न, फलफूल और बहुत से अद्भुत वृक्ष पैदा होते थे । परन्तु यहाँ के मनुष्य असभ्य थे । उनका रंग पीलापन लिए हुए काला था । यहाँ की भाषा मध्य भारत से भिन्न थी । पर ये लोग वड़े विद्या प्रेमी थे । जय बौद्ध-वर्म भारतवर्ष के अन्य स्थानों से उजड़ गया था तब यही देश उसकी रक्षा का स्थान था। यहाँ लगभग एक सौ संघाराम और दस,शून्य सन्यासी थे । यहाँ देव मन्दिर सिर्फ चालीस थे । उड़ीसा पहले ही तीर्थ स्थान हो गया था । यद्यपि वहाँ उस समय तक पुरी का मन्दिर नहीं बना था। इस देश की दक्षिण-पश्चिम सीमा पर 'स्थत एक बड़े पर्वत पर 'पुष्पगिरी' नामक एक विशाल संचाराम था। कहते हैं कि इस संघाराम के पत्थर के स्तूप में एक अद्भुत बुर और बौद्ध धर्म प्रकाश मिलता था । दूर-दूर के यात्री यहां ग्रा-श्रा कर सुन्दर कार्योबी के छाते भेंट करते थे। वे गुम्बज के सिरे पर गुलदान के नीचे रखे जाते थे और वे पत्थर में सूइयों की तरह खड़े रहते थे। इस तरह झंडा गाड़ने की रीति आजतक जगन्नाथ में प्रचलित है । दक्षिण-पश्चिम की और एक चरित्र नाम का बड़ा भारी बन्दर गाह या। वहाँ के व्यापारी को दूर-दूर के देशों की यात्रा करते थे । विदेशी लोग यहाँ पर आते-जाते और ठहरते थे। नगर की दीवार इद और ऊँगी थी । गहाँ हर प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएँ मिलती थी । वीसा के दक्षिण-पश्चिम में निल्क भील के तट पर कान्योध का राज्य था । यहाँ के निवासी शुरवीर, सच्चे और उद्योगी थे, पर ने काले और मैले थे। लिखने में मध्य भारतवर्ष के अक्षर काम में लाने थे, पर इनका उच्चारण बिल्कुल भिन्न था । यहाँ के निवासी हिन्दू थे, यहाँ चौद्ध धर्म का अधिक प्रचार नहीं था। यह जाति बढ़ी ही प्रचल थी। अपने भुजबल से वह आस-पास के प्रान्ती पर शासन करती भी । समुद्र तट पर रहने के कारण लोगों को बहुत सी क्रीमती वस्तुएँ मिल जाती थीं। लेन-देन में ये लोग मोती और कौड़ियों को काम में लाते थे। वो को खींचने के लिये यह लोग हाथियों को काम में लाते थे । इस राज्य के उत्तर-पश्चिम में एक बड़े जंगल के पार कालिंग का प्राचीन राज्य था इस राज्य का घेरा एक सौ मील था, इसकी राजधानी पाँच मील के घेरे में थी । यहाँ बहुत से घने जंगल थे, जिन दो मर चीनी बौद्ध भिक्षु, में जंगली हाथी रहते थे । यहाँ के लोग यद्यपि जोशीले, उजड्डु और सभ्य थे, पर वे अपनी वात के पक्के और विश्वासपात्र । यद्यपि हुएनत्संग के समय में कलिंग की ऐसी दुरवस्था होगई थी, परन्तु पाठकों को स्मरण होगा कि मेगास्थिनीज के समय में कलिंग का राज्य एक प्रचल महा-साम्राज्य था। कलिंग का राज्य बंगाल से लेकर गोदावरी के मुहाने तक समस्त समुद्र तट तक फैला हुआ था। उसकी प्रचलता का स्मरण अब तक बना हुआ था । हुएनत्संग कहता हूँ-"प्राचीन काल में कलिंग राज्य की वस्ती बहुत घनी थी । लोगों के कन्धे एक-दूसरे से रगड़ खाते थे । रथ के पहिये की धुरी एक-दुसरे रथ की ध्रुरी से टकराती थी ।" यद्यपि प्रभुत्व नहीं रहा था, फिर भी यहाँ की जातियों में एक प्रकार की राजकीय एकता थी । कलिंग के उत्तर-पश्चिमी जंगलों और पहाड़ियों में होकर कोशल का मार्ग था, जो आधुनिक बरार का देश है। इस देश का घेरा एक हज़ार मील और इसकी राजधानी का घेरा = मील था । यहाँ वस्ती बहुत घनी थी । यहाँ के लोग जोशीले, बहादुर, लम्बे, काले, कट्टर और सच्चे थे । उनमें से कुछ लोग हिन्दू और कुछ लोग बौद्ध थे। इन दक्षिणी कौशलों के सम्बन्ध में जिन्हें अवध के कोशलों से भिन्न समझना चाहिये, हुएनत्संग प्रसिद्ध वौद्ध ग्रन्थकार नागार्जुन और राजा सह का वर्णन करता है, जिसने एक चट्टान को कटवाकर उसमें सङ्घाराम बनवाया था। फ्राहियान और हुएनत्संग दोनों ने स्वयं इस मठ को नहीं देखा, पर दोनों ने इसका वर्णन किया है । वे लिखते हैं - "इस चट्टान में एक गड्ढा करवाया और उसमें एक सङ्घाराम वनवाया। लगभग दो मील की दूरी पर उन्होंने सुरंग खुदवाकर एक ढका हुआ मार्ग खोला । इस प्रकार इस चट्टान के बीच खड़े रहने से बिल्कुल कटी हुई चट्टानों और लम्बे बरामदों के बीच, जिनमें नीचे चलने के लिए गुफाएँ और ऊपर चढ़ने के लिये गुम्बज बने हैं, खण्डदार इमारत को देख सकते हैं, जो कि पाँच खण्ड ऊँची है । प्रत्येक खण्ड में चार ढालान तथा घिरे हुए बिहार हैं। एक दफा इस सङ्घाराम के पुजारी परस्पर लड़ पड़े और इसके नित्रटारे के लिए राजा के पास पहुँचे । ब्राह्मणों ने इसे अच्छा अवसर देखकर संघाराम को बरबाद कर दिया और उस स्थान की गठबन्दी कर हो।" फिर हुएनत्संग आन्ध्र के प्राचीन देश में आया, जिन्होंने ईसा के कई शताब्दियों पहले दक्षिण भारत में अपने राज्य और सभ्यता की उन्नति की थी और मगध तथा समस्त भारत पर शासन किया था । सातवीं शताब्दि में उसकी प्रधानता उज्जयनां और गुप्तों के हाथ में चली गई थी। अब इनका राज्य केवल छः सौ मील के घेरें में था, जहाँ बीस संघाराम और बीस मन्दिर थे । इस देश के दक्षिण में 'धनकटक' अर्थान् आन्ध्र का बड़ा देश था, जिसका वेरा एक हज़ार दो सौ मील का था। इसकी राजधानी = मील के घेरे में थी, जिसे कि आजकल बैजवाड़ा कहते हैं। भूमि उपजाऊ और फसल बहुत थी, परन्तु इस देश का बहुत-सा भाग बियावान था, वस्तियाँ बहुत कम थीं, जंगल के जंगल सुनसान और उजाड़ पड़े थे । यहाँ के लोग पीलापन लिये हुए काले थे । वे कट्टर, जोशीले और विद्या प्रेमी थे । सैकड़ों प्राचीन मठ उजाड़ और खण्डहर हो गये थे । केवल साठ मठों में सन्यासी रहते थे । यहाँ पर एक सौ मन्दिर थे और उनके बहुत से पूजने वाले थे । हुएनत्संग लिखता है ~ "नगर के पूर्व और पश्चिम र दो विशाल मठ हैं, जो पूर्व शिला और अपर शिला के नाम से विख्यात हैं । इन मठों को किसी राजा ने बुद्ध के सम्मानार्थ चनवाया था। उस ने विशाल घाटी में गड्ढा सुदवाया, सड़कें बनवायी और पहाड़ी मार्ग खुलवाये थे ।" डाशून्य फर्ग्यूसन सन् एक हज़ार सात सौ छियानवे में अमरावती में निकले हुए स्तूप के विषय में कहते हैं - कि यही वह पश्चिमी मठ है । डाशून्य वर्जस मठ के पत्थरों पर खुड़े हुए लेखों के आधार पर इस स्तूप को दूसरी शताब्दी का निश्चित करते हैं । बड़े आन्ध्रदेश के दक्षिण-पश्चिम में एक चीला का राज्य था जोकि पाँच सौ मील के घेरे में था । यहाँ वस्ती थोड़ी थी, जंगल और उजाड़ होने के कारण डाकू यहाँ खूब लूट मचाते थे । यहाँ के निवासी दुराचारी और निर्दय थे । इसके दक्षिण में द्राविड़ों का राज्य था । इसका वेरा एक हज़ार दो सौ मील का था। इसकी राजधानी विशाल 'काजीपुर' थी । जो आज कल काञ्चीवरम के नाम से पुकारी जाती है। यहां पर एक सौ संघाराम और दस,शून्य पुजारी थे। द्राविड़ राज्य के दक्षिण में मलयकूट का राज्य था, जिसे डाशून्य वर्नेल ने कावेरी नदी के डेल्टा से मिलाया है। यहाँ के लोग काले, वीर, जोशीलें, विद्याव्यसनी और व्यापार कुशल थे । इस देश के दक्षिण में मलय पर्वत के दक्षिणी भाग थे, जहाँ कपूर और चन्दन होता था। इस पर्वत-अरणी के पूर्व में पोटलक पर्वत था, जहाँ बुद्ध महात्मा अवलोकितश्वर ने, जिनकी पूजा चीन, जापान और तिव्वत में उत्तरी चौद्ध करते हैं - कुछ समय तक निवास किया था । हुएनत्संग यद्यपि लंका में नहीं गया, परन्तु उसने वहाँ का, सव वृत्तान्त लिखा है। उसने महेन्द्र के विषय में और अन्य कई वृत्तान्त और दन्तकथाएँ तथा कथाएँ लिखी है। वह लिखता है" लंका में एक सौ मठ और बाईस,शून्य पुजारी थे । वहाँ पर रत्न अधिक पाये जाते हैं।" द्राविड़ों से उत्तर की ओर यात्रा करता हुआ हुएनत्संग कोकन में आया, जो दस,शून्य मील के घेरे में था । यहाँ के लोग यद्यपि काले, क्रोधी और जंगली थे, पर वे विद्या का सम्मान करते थे । कोकन के उत्तर-पश्चिम एक भयानक जंगल के पार एक हज़ार मील के घेरे में महाराष्ट्र का बड़ा देश था । यहाँ के लोग बड़े वीर सच्चे, पर कठोर और बदला लेने वाले थे । वे उपकृत होकर गुलाम और अपमानित होकर जान के गाहक हो जाते थे । निर्बल की सहायता में अपनी जान तक लड़ा देते थे । अपने शत्रु को वह पहले ही सूचना दे देते और फिर दोनों शस्त्रों से सुसज्जित होकर लड़ते थे । अगर कोई सेनापति युद्ध में हार जाय तो उसे वे दो ग्रमर चीनी बौद्ध भिक्षु दण्ड न देकर स्त्रियों का कपड़ा देकर निकाल देते हैं, जिससे वह स्वयंपनी मृत्यु का उपाय करें । इनका राजा क्षत्रिय है, उसका नाम पुलकेशी था । उन दिनों पुलकेशी की कार्यकुशलता और न्याय-शीलता की धाक चौतरफ थी । हुएनत्संग के समय में यद्यपि महाराज शीलादित्य ने पूर्व से लेकर पश्चिम तक की जातियों को विजित किया था, पर एक इसी जाति ने उनकी स्वीकार न की । शीलादित्य ने सब दिशाओं से उत्तमउत्तम सैनिकों को एकत्रित करके एक प्रबल सेना बनाई और इस वीर जाति को अपने अधीन करने के लिये उस पर चाक्रमरण किया । पर यह जाति उसके आधीन नहीं हुई। इस युद्ध में पुलकेशी ने शीलादित्य को हराया और मानी मरहठों की स्वतन्त्रता को क़ायम रक्खा । उसी प्रकार हजार वर्ष उपरान्त पुलकेशी के एक उत्तराधिकारी ने उत्तरी भारत के सम्राट श्रीरंगजैब का सामना किया। और मरहठों की खोई हुई स्वतन्त्रता और प्रचलता को पुनरुज्जीवित किया। जब मुग़लों और राजपूतों का पतन होगया, तब भी ये ही मरहठ्ठे अंग्रेजों से लड़े थे । महाराष्ट्र देश की पूर्वी सीमा पर एक बड़े भारी पर्वत पर बने हुए विशाल संघाराम का वर्णन करते हुए हुएनत्संग ने लिखा है"यह संवाराम एक अन्धकारमय घाटी में बना हुआ है, इसके कमरे और दालान चट्टानों के सामने फैले हुए हैं, प्रत्येक चट्टान के पीछे चट्टान और आगे घाटी है।" ये प्रसिद्ध एजेएटा की गुफायें है । वह फिर लिखता है- "इसके अतिरिक्त यहाँ एक सौ फीट ऊँचा विहार है, उसके बीच में पत्थर की सत्तर फीट ऊँची एक बुद्ध की मूर्ति हैं। इसके ऊपर सात मंजिलका एक पत्थर का चॅढ़ोवा था, जो देखने में निराधार दिखता था ।" महाराष्ट्र के पश्चिम में या उत्तर-पश्चिम में एक मरुकच्छ का देश था । इसका घेरा पचास मील का था । यहाँ की भूमि ऊसर थी, अतः समुद्री मार्ग से ही यहां पहुँचता था । फिर हुएनत्लंग ने मालवे के प्राचीन देश का वृत्तान्त लिखा है - "यह देश विद्या के लिये प्रसिद्ध है। यहां के ऐतिहासिक ग्रंथों में लिखा हुआ है कि मेरे साठ वर्ष पहले यहां का राजा शीलादित्य था । यह प्रथम शीलादित्य था, जिसने पाँच सौ पचास ईशून्य से छः सौ ईशून्य तक राज्य किया । यह सम्भवतः प्रतापी विक्रमादित्य का उत्तराधिकारी था ।" जिस शीलादित्य को हुएनत्संग ने कन्नौज में देखा था, वह शीलादित्य द्वितीय था । इसने छः सौ दस से छः सौ पचास ईशून्य तक राज्य किया। हुएनत्संग के समय मालवे में सौ संघाराम और सौ ही मन्दिर थे । तब हुएनत्संग अटाली और कच्छ होता हुआ बल्लभी में आया, जहां एक सौ से भी ज्यादा करोड़पति थे। फिर वह सौराष्ट्र, गुजरात, सिन्ध और मुलतान में गया और वहां से फिर उसने अपने देश को प्रस्थान किया । अब हम हुएनत्संग की डायरी के कुछ अंश को यहाँ पर देंगे, जिनसे कि तत्कालीन राज्य प्रणाली और लोगों के आचार-व्यवहार पर अच्छा प्रकाश पड़ता हैदो मर चीनी बौद्ध भिक्षु, "देश की राज्य प्रणालो उपकारी सिद्धान्तों पर निर्भर होने के कारण शासन-रीति सरल है। राज्य की आय चार मुख्य भागों में वॅटी हुई है। एक भाग राज्य का प्रबन्ध चलाने और यज्ञादि के लिये है। दूसरा भाग मन्त्री, प्रधान और अन्य राज-कर्मचारियों हल्क की आर्थिक सहायता के लिये है। तीसरा भाग बड़े-बड़े योग्य कर मनुष्यो क पुरस्कार के लिये है और चौथा भाग धार्मिक पुरुषों को दान करने के लिये है। राज्य कर बिल्कुल हल्के हैं। अधिकांश लोग भूमि जोतते-चोते हैं, उन्हें उपज का छठा भाग कर की भांति देना पड़ता है। व्यापारी लोग चड़ी दूर-दूर वाणिज्य के लिये आतेजाते हैं। नदी-मार्ग तथा सड़कें बहुत थोड़ी चॅगी पर खुले हैं। जब कभी ग़ज-कार्य के लिये मनुष्यों की जरूरत पड़ती हैं, तो उनसे काम लिया जाता है, पर उनकी पूरी मजदूरी दी जाती है ।" "सैनिक लोग सीमा- प्रदेश की रक्षा करते हैं और वे उपद्रवी लोगों को दण्ड देने के लिये भेजे जाते हैं । वे लोग रात्रि के वक्त, घोड़ों पर सवार होकर राजमहल के चौतरफ़ पहरा भी देते हैं । सैनिक लोग कार्य की आवश्यकतानुसार रक्खे जाते हैं। उन्हें कुछ द्रव्य देने की प्रतिज्ञा की जाती है और प्रकट रूप से उनका नाम लिखा जाता है। शासकों, मन्त्रियों, दण्डनायकों तथा कर्मचारियों को निर्वाह के लिये भूमि दी जाती है । " ऊपर के वृत्तान्त से विदित होता है कि भारतवर्ष की प्राचीन रीति के अनुसार सब कर्मचारियों को उनकी सेवा के लिए भूमि दी जाती थी। हुएनत्संग ने जो राजा की निजी सम्पत्ति लिखी है उससे उसका तात्पर्य सब राज्य से है । पर ऐसे गाँव या भूमि को छोड़कर जो किसी मनुष्य या मठ को सदा के लिए दे दी गई हो, जो राज कर्मचारियों के लिए नियत हो । शान्ति और युद्ध में राज्य का तथा राजा के घर का व्यय राजा की सम्पत्ति तथा कर की आय से किया जाता था । लोगों के चाल व्यवहार के विषय में हुएनत्संग उनके सीधेपन तथा सचाई की आदरणीय साक्षी देता है । वह लिखता है"वे लोग स्वभावतः गम्भीर, सच्चे और आदरणीय हैं । हर क़िस्म के व्यवहार में वे निष्कपट और न्याय करने में गम्भीर हैं, वे लोग दूसरे जन्म में प्रतिफल पाने से डरते हैं और इस संसार की वस्तुओं को तुच्छ समझते हैं । वे थोखेबाज़ कपटी अथवा नहीं हैं और अपनी शपथ अथवा प्रतिज्ञा के सच्चे हैं ।" यही सच्ची सम्मति मेगस्थिनीज के समय से लेकर अब तक के विचारवान् यात्रियों की रही है, जिन्होंने हिन्दुओं को उनके घरों और गाँवों में देखा है और जो उनके नित्य कर्मों और प्रति दिन के व्यवहारों में सम्मिलित हुए हैं। उन आधुनिक अंग्रेजों में, जो भारतवर्ष के लोगों में हिल-मिलकर रहे हैं, ऐसे ही एक निरीक्षक कर्नल स्लीमेन साहव हैं । कर्नल साहब कहते हैं- "गाँव में रहने त्राले स्वभावतः अपनी पंचायतों में दृढ़ता से सत्य का साथ देते है। मेरे सामने सैकड़ों ऐसे अभियोग हुए हैं जिनमें मनुष्य की स्वाधीनता, सम्पत्ति और प्राण उसके झूठ बोल देने पर निर्भर रहे हैं, परन्तु उसने झूठ बोलना स्वीकार नहीं किया ।" बुद्ध गया भारतवर्ष में गया का वौद्ध-मन्दिर वौद्ध धर्म का एक सबसे घड़ा स्मृति चिह्न है। हिन्दुस्तान में यों तो बौद्धों के चार मुख्य तीर्थ स्थान हैं- कपिलवस्तु - जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ था, बुद्ध गया - जहाँ बुद्ध को बुद्धत्व प्राप्त हुआ था, श्रावस्तीजहाँ बुद्ध ने सबसे पहले अपने धर्म का प्रचार किया था, कुसीनगर ~~ जहाँ बुद्ध ने निर्धारण प्राप्त किया था । इन चारों में बुद्ध-गया का सबसे बड़ा भारी महत्व है । कहा जाता है कि बुद्ध ने अपने निर्धारण के समय समस्त अनुयाइयों को यह आदेश दिया कि वह इस स्थान के दर्शन करते रहें। इस मन्दिर का निर्धारण बुद्ध के दो सौ छत्तीस वर्ष बाद सम्राट् अशोक ने किया था। और मन्दिर को सुरक्षित रखने के लिये उसके चारों तरफ एक मजबूत पत्थर की चहारदीवारी बनवा दी थी, जिसके लण्डहर अब भी देखने को मिलते हैं । बहुत काल तक तो यह मन्दिर मगध के राजाओं की आधीनता में रहा । जब मुसलमानों की शक्ति बढ़ी और उन्होंने भारतवर्ष पर आक्रमण किया और बिहार उनके दखल में आ गया, तब एक हज़ार दो सौ ईस्वी में वख्तियार खिलजी ने इस मन्दिर को विध्वंस करा दिया। इसके बाद बहुत काल तक यह स्थान खण्डहर के रूप में पड़ा रहा। अशोक ने जहाँ पर यह मन्दिर बनवाया, वहाँ एक महान् ग्राम था, जोकि टकर राज्य की अमलदारी में था। बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद यद्यपि यह स्थान उजाड़ हो गया था, परन्तु बौद्ध लोग तो बराबर इसके दर्शन के लिये आते ही रहते थे । फाहियान सन जैसे प्रमुख यात्रियों ने भी सके दर्शन किये थे । सन् एक हज़ार सात सौ सत्ताईस में महमूदशाह ने इस मन्दिर के तत्कालीन महन्व को दो गाँव इनायत किये, जो कि मन्दिर के नजदीक थे। और एक सनद भी लिख दी थी । सोलह वीं शताब्दि के अन्त में ब्रह्मा के राजा मिन डूंनमिन ने बहुत से रुपये खर्च करके मन्दिर की मरम्मत करवाई और उसको अपने अधिकार में ले लिया । भूतपूर्व महन्त ने अपने अधिकार उन्हें दे दिये और फिर से वहाँ बुद्ध पुजारी रहने लगे । लेकिन पीछे जब भारत सरकार और बर्मा के राजा में लड़ाई हुई और थीत्रा पकड़ा गया तथा बर्मा सरकार के कब्जे में आ गया, तब बौद्ध-मन्दिर पर भी सरकार ने कब्जा कर लिया। इसके बाद बराबर यह कोशिश की जाती रही कि इस मन्दिर की मरम्मत कराई जाय । ग्रियसन साहब गया के मजिस्ट्रेट ने भी सरकार को मरम्मत के लिये लिखा था । जब बर्मा के राजा ने बौद्ध-मन्दिर की मरम्मत शुरू कराई तो प्राचीन बोधिवृक्ष के नीचे से मिट्टी हटाने से वह गिर गया । उस समय कनिंघम साहब ने वहाँ दो पीपल के पेड़ लगा दिये। श्राज बौद्ध लोग उसी पीपल की पूजा करते हैं। जब वर्मा के राजा ने मन्दिर की मरम्मत की आज्ञा ली थी, तत्र शर्त यह थी कि कोई नया काम शुरू न किया जाय, सिर्फ मरम्मत ही की जाय । सन् एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर में बाबू राजेन्द्रपाल ने वर्मी कारीगरों का काम देखने के लिये बौद्ध गया की यात्रा की और उनकी रिपोर्ट पर एप्रिल मास में काम बन्द कर दिया गया । उसी साल फिर जब बर्मा के राजा अँग्रेज अफसरों की अध्यक्षता में मरम्मत का काम कराने को सहभत होगये तो मिशून्य सीशून्य एशून्य मिल्स की अध्यक्षता में काम शुरू हुआ । सन् एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में मिशून्य वर्गलर में सरकार को वर्मा कारीगरों की लापर्वाही की शिकायत की तो सरकार ने मरम्मत का काम अपने हाथों में ले लिया और उसकी मरम्मत पूरी होगई। इस प्रकार मरम्मत में दो लाख रुपया खर्च हुआ । मरम्मत हो जाने के बाद प्रियसन साहब ने सरकार से यह पूछा कि यह मन्दिर पीशून्य डब्ल्यूशून्य डीशून्य के अधि कार में कब आयगा ? सरकार ने उनको जवाब दिया कि सन एक हज़ार आठ सौ इक्यासी ईशून्य एक अप्रैल को पीशून्य डब्ल्यूशून्य डीशून्य के अधिकार में ले लिया जायगा । ठीक समय पर सरकार ने मन्दिर को पीशून्य डब्ल्यूशून्य डीशून्य के अधिकार में दे दिया और तब से यह पीशून्य डब्ल्यूशून्य डीशून्य के अधिकार में है। और बरावर मरम्मत होती रहती है । इसके बाद जब नागरिक धर्मपाल ने इस मन्दिर की यात्रा की तो उनके मन में धार्मिक विचार पैदा हुए। और उत्तका यह विचार हुआ कि इस मन्दिर पर बौद्धों का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कोलम्बो में महा बुद्धसमिति स्थापित की और बहुत-सी लिखा-पढ़ी के बाद सरकार ने महा चौद्ध समिति के मन्त्री को विश्रामागार के दो कमरों की तालियाँ दे दी और फिर वहाँ चौद्धभिक्षु रहने लगे और पूजा-अर्चना करने लगे। महन्तजी में और अनागरिक पाल में मेल हो गया । एक चाण्डाल कन्या मन्दिर के सहन को साफ़ किया करती थी । वौद्ध भिक्षु रात-दिन मन्दिर में रहते थे और आराधना करते थे। इसके बाद एक बड़ी भारी सभा पटना में हुई और इस बात की कोशिश की गई कि इस मन्दिर को सर्वथा बौद्धों के अधीन कर लिया जाय । थोड़े ही दिनों मेंवृढे महन्तजी मर गये और नवीन महन्त गद्दी पर बैठे तो उनसे वौद्धों की होगई । इस के बाद जापान में एक सात सौ वर्ष पुरानी मूर्ति अनागरिक धर्मपाल को मिली । जिसकी स्थापना उन्होंने मन्दिर की दूसरी मजिल पर करने का विचार किया। लेकिन अनागरिक धर्मपाल का यह इरादा जब महन्त जी को मालूम हुआ तो वह बड़े क्रोधित हुए और उनमें झगड़ा हुआ । परिणाम यह हुआ कि मुक़दमा फ़ौजदारी हो गया और उसमें महन्तजी के तीन चेलों को एक-एक महीने की सज़ा और एक सौ - एक सौ रुपयापये जुर्माने का हुक्म हुआ। हाईकोर्ट में अपील दायर हुई तो यद्यपि अपराधियोंकी सजा वन्द हो गई परन्तु यह स्पष्ट रहा कि यह मन्दिर वौद्धका और इस पर बौद्धों ही का अधिकार रहना चाहिये । थोड़े दिनों बाद जापान से मिशून्य ओकाकोरा हिन्दुस्तान आये और उन्होंने मन्दिर के आस-पास जमीन खरीदकर जापानी विश्रामागार बनाने की चेष्टा की। उन्होंने चौद्ध-गया में स्वामी श्रद्धानन्द और सविता देवी से बात की और वहाँ एक "जापानी हिंदू-संघ" 'खोलने का विचार किया । सरकार को यह बात मालूम हुई और उसने जाना कि इसमें एक महान् राजनैतिक षड्यन्त्र है तो उसने बौद्धों को वहाँ से निकालने का हुक्म दे दिया । लार्ड कर्जन चायसराय थे, उन्होंने एक कमीशन नियत किया, जिसके सदस्य जस्टिस सुरेन्द्र नाथ और हरप्रसाद शास्त्री थे शास्त्री जी ने बौद्धों के पक्ष में और मिशून्य जस्टिस ने विपक्ष में मत दिये। रिपोर्ट पर सरकार ने बौद्धगया से चौद्धों को निकलने का हुक्म दे दिया। ओकाकोरा का विचार ज्यों-का-त्यों रह गया । इसके बाद महन्त ने मन्दिर पर दीवानी मुकदमा दायर किया और उन दोनों विश्रामागार के कमरों पर से भी बौद्धों का अधिकार हट गया और सारे मन्दिर पर महन्त का अधिकार हो गया । इस वक़्त मन्दिर पर महन्त ही का अधिकार है, और इसमें कोई शक नहीं कि उनकी पूजा विधि चौद्धों की पूजा विधि से भिन्न है। बौद्धों को वहाँ पूजा करने से रोका जाता है। यद्यपि साम्प्रदायिकता का जमाना नहीं है फिर भी यह वास्तविक बात है कि वह मन्दिर बौद्धों का है, अतः उस पर वौद्धों हो का अधिकार होना चाहिये । वहाँ प्रति वर्ष सैंकड़ों बकरे काटे जाते हैं और चिड़ियों का शिकार किया जाता है । नालन्दा विश्व-विद्यालय उदय, अस्त और पुनर्दर्शन गुप्तकाल भारतवर्ष का स्वर्ण युग कहा जाता है। नालन्दा विश्व विद्यालय का पूर्ण विकास उसी युग में हुआ था। तब से लगातार सात सौ वर्ष तक क्रमशः गुत, वर्धन और पालवंशा क राजाओं के संरक्षण में यह विश्व विद्यालय ज्ञान का केन्द्र बना रहा। यहीं से ज्ञान की वह ललकार उठी थी - वह 'शृण्वन्तु विश्व अमृतस्य पुत्राः' की उत्साहवर्धक पुकार । इस विश्वविद्यालय के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप का अनुमान हम इसी बात से कर सकते हैं कि चीन, तिब्बत, तुर्किस्तान, सिंहल आदि सुदूर देशों के विद्यार्थी ज्ञानार्जन करने के लिए यहाँ आते थे । इसके इतिहास में भारतवर्ष का लगभग सात सौ वर्षों का इतिहास छिपा हुआ है। आज भी संसार के बिरले ही विश्व विद्यालय इतने दीर्घकालीन जीवन का दावा कर सकते हैं । यह सब केवल यहाँ के तेजस्वी भिक्षुओं के आत्म-त्याग का प्रभाव था । विक्रमकी तेरहवी शताब्दि में, देश के दुर्दिन में, इस महाविद्यालय का संहार हुआ था । पर इसकी उज्ज्वल कीर्ति का प्रकाश छिपने वाली चीज न थी । बीसवीं विक्रमीय शताव्दि के प्रारंभिक काल में इसके कुछ प्राचीन चिह्नों के दर्शन हुए। ज्योंही प्रसिद्ध चीनी यात्री हुएनत्संग की यात्राओं का विवरण प्रकाशित हुआ, त्योंही विद्वानों को इसके महत्व का अनुभव हुआ । विक्रम सम्वत् एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह-सोलह में कनिंघम साहब की खोज के ग्रभाव से मालूम हुआ कि जहाँ इस समय पटना जिले का 'चड़गाँव' नामक ग्राम है, वहीं प्राचीन नालन्दा बसा हुआ था। फिर क्या था, वहाँ चीन, जापान, तिव्वत, वर्मा, सिंहल आदि देशों के तीर्थयात्री आने लगे । इसके बाद ही लन्दन की 'रायल एशियाटिक सोसाइटी' ने हिन्दुस्तान के पुरातत्व विभाग द्वारा 'बढ़गाँव' में खुदाई का प्रबन्ध कराया और प्रान्तीय संग्रहालय में वहाँ से प्राप्त हुई सभी चीजों को सुरक्षित रखने की अनुमति दी । सम्वत् एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में यहाँ खुदाई शुरू करने के लिये प्रसिद्ध पुररातत्वज्ञ डाक्टर स्पूनर भेजे गये । तब से आज तक खुदाई का काम जारी है और अभी इसके पूरा होने में कई साल लगेंगे । इस खुदाई में यहाँ की इमारतों की भव्यता प्रकट होती हैं। कई बहुमूल्य चीजें मिलती जा रही हैं। इस प्रकार भारतवर्ष के बौद्धकालीन इतिहास को पूर्ण करने की बहुत सी चमत्कारपूर्ण सामग्री उपलब्ध होती जा रही है। 'नालन्दा' की खोज 'बड़गाँव' राजगृह से लगभग आठ मील उत्तर की ओर है। पटना जिले के बिहार शरीफ़ क़स्त्रे से लगभग छः मील दक्षिण है। बख्तियारपुर बिहार लाइट रेलवे के नालन्दा नामक स्टेशन से यह लगभग ढाई मील है। यहाँ कनिंघम ने दो शिलालेख पाये थे, जिन में इस स्थान का 'नालन्दा' नाम उल्लेखित हैं । हुएनत्संग के वर्णन के अनुसार 'नालन्दा' बोध-गया के पवित्र बोध-वृक्ष से सात योजन अर्थात् उनचास मील और राजगृह से तीस 'ली' अर्थात् कोई पाँच मील उत्तर है । 'बड़गाँव' के सम्बन्ध में यह दूसरी प्रायः ठीक निकली है । हाल की खुदाई में भी यहाँ ऐसे शिलालेख मिले हैं। जिनपर 'नालन्दा' नाम खुदा है। कई ऐसी-ऐसी मुहरें मिली हैं, जिन पर स्पष्ट 'श्री नालन्दा महाविहारीय आर्य भिक्षुसंघस्य लिखा हुआ है। आधुनिक नाम 'बड़गाँव' शब्द यहाँ की एक भग्न इमारत पर जमे हुए 'बड़' वृक्ष से व्युत्पन्न हुआ है । 'बड़गाँव' और 'नानन्द' किन्तु इधर हाल में 'चड़गाँव' से कुछ उत्तर हटकर पूर्व की ओर चार-पाँच मील की दूरी पर 'नानन्द' नामक एक गाँव का पता चला है । 'नानन्द' भी 'नालन्दा' का विकृत रूप जान पड़ता है। यहाँ भी दूर तक विस्तीर्ण खण्डहर हैं, कई प्राचीन जलाशय भी है । हुएनत्संग का बतलाया हुआ 'दूरी का हिसाव' भी इस स्थान के सम्बन्ध में बड़गाँव से अधिक ठीक उतरता है । 'नानन्द' राज गृह से लगभग पाँच मोल की ही दूरी पर है । भग्नावस्था में पड़े हुए यहाँ के एक बिहार में स्थित बुद्ध की एक बड़ी मूर्ति, बैठी हुई मुद्रा में मिली है। उसके ऊपर कुछ लेख भी हैं। प्रसिद्ध पुरातत्वज्ञ श्री काशीप्रसाद जायसवाल ने उसे पढ़ा है; पर उससे किसी महत्वपूर्ण बात का पता नहीं चलता । श्री P. C. S. ने इस विषय में कुछ जाँच पड़ताल भी की है। आपका तो यह अनुमान है कि यथार्थ में 'नानन्द' ही असल 'नालन्दा' है । 'वड़गाँव' तो नालंदा हो ही नहीं सकता। 'वड़गाँव' जिसकी व्युत्पत्ति ब्राण्डले साहब ने बिहार ग्राम से बतलाई है, स्कन्दगुप्त द्वारा स्थापित विहार ग्राम है। यहाँ के संघारामों के संस्थापक वही होंगे । किन्तु यह अभी अनुमान ही अनुमान है। इस सम्बन्ध में जो कुछ सामग्री मिल सकी है, वह वोर्नट साहब के पास जाँच के लिये भेजी गई है । देखें, वे किस निर्णय पर पहुँचते है। असल में जब तक इस भाग में खुदाई न हो, तब तक निश्चयात्मक रूप से कुछ कहना सम्भव नहीं है। जो हो, नानन्द के 'नालन्दा' होने की सम्भावनायें विश्वास रखते हुए भी हम यह मानने को तैयार नहीं कि बड़गाँव नालन्दा है ही नहीं । हम यह जानते हैं कि 'नालन्दा' महाविहार में दस हजार विद्यार्थियों के रहने का प्रबन्ध था । यह सम्भव नहीं कि इतने अधिक विद्यार्थियों के रहने का स्थान, एक-डेढ़ मील में ही सीमित हो । उसके लिये चार-पाँच मील या इससे भी अधिक विस्तार का होना सम्भव है । इस प्रकार यदि निश्चयात्मक रूप से भी यह मान लिया जाय कि 'नानन्द' में ही 'नालन्दा' बसा हुआ था, तो भी उसके विस्तार का 'बड़गाँव' तक पहुँचना असम्भव नहीं हो सकता । नालन्दा, असल में, बहुत विस्तृत प्रदेश था । और 'वढ्गाँव' निस्सन्देह उसका एक अन्तस्थ भाग था । इसमें भ्रम या तर्क की कोई गुंजायश नहीं । इसके अनेक प्रमाणों में सबसे बड़ा प्रमाण तो यह है कि कनिंघम साहब की खोज के बहुत पहले से 'बड़गाँव' के ही प्राचीन 'नालन्दा' होने का विश्वास प्रचलित था । विक्रम सम्वत् एक हज़ार पाँच सौ पैंसठ में रचित इंससोम के पूर्व - देशचैत्य परिपाटी ग्रन्थ में नालन्दा के साथ उसके वर्तमान नाम 'बड़गाँव' का भी उल्लेख है। लिखा है-"नालन्दे पाईं चौद चौमास सुरणीजै । होड़ा लोक प्रसिद्ध ते बड़गाँव कहीजै । सोल प्रसाद तिहाँ अच्छे जिन विम्ब नमीजै । " इस प्रकार यह प्रकट है कि विक्रम की सोलहवीं शताब्दि से भी पहले लोगों को यह मालूम था कि यह बड़गाँव उस प्राचीन "नालन्दा" का ही वर्तमान रूप है। प्राचीन नालन्दा की स्थिति वे. भूले न थे, फिर भी इसमें सन्देह नहीं कि नानन्द में यदि खुदाई का काम जारी हो तो उससे हमारे नालंदा विषयक ज्ञान में अत्यन्त महत्वपूर्ण सत्य का विकास होगा। नालन्दा का उल्लेख कई बौद्धग्रंथों में भी हुआ हैं । शान्त-रक्षित का 'तत्व संग्रह' कमलशील की 'तत्वसंग्रह पंजिका' तथा नालन्दा के पण्डितों के और भी कई तान्त्रिक ग्रन्थ मिलते हैं । नालंदा के वर्णन में उनसे विशेष सहायता नहीं मिलती। केवल 'अष्ट- साहस्रिका प्रज्ञापारमिता' और कुछ अन्य प्राचीन ग्रंथ जिनकी प्रतिलिपि पालवंशी राजाओं के समय में तैयार की गई थी - ऐसे हैं जिनसे कुछ विशेष सूचनायें मिलती हैं। पालिग्रन्थ महाविहार की स्थापना के बहुत पहले की बातों का उल्लेख करते हैं। जब इस स्थान का सम्बन्ध स्वयं भगवान बुद्ध से था। इस सम्बन्ध में हमें हुएनत्संग, इत्सिंग, चुकुंग आदि चीनी यात्रियों तथा तिब्बती 'तारानाथ' के विवरणों से ही विशेष सहायता मिलती है। और अब तो खुदाई में बहुत से ऐसे शिलालेखादि भी मिले हैं, जिनसे महाविहार सम्बन्धी कई बातों पर प्रचुर प्रकाश पड़ता है। श्री महावीर स्वामी तथा उनके एक श्रेष्ट और प्राचीन शिष्य इन्द्रभूति के सम्बन्ध के कारण जैनी लोग भी अव उस स्थान को तीर्थ समझते हैं । 'सूत्रकृतांग' सरीखे कुछ जैन-ग्रन्थों में नालन्दा का अच्छा वर्णन है, जिससे मालूम होता है कि ईसवी सन के पहले भी नालन्दा बहुत समृद्ध और समुन्नत नगर था । कल्पसूत्र में लिखा है कि यहाँ भगवान महावीर स्वामी ने चातुर्मास्य विताया था । इतना ही नहीं, भगवान बुद्ध ने 'संपसादनीयसुत्तं' और 'केबद्धसुत्त' का प्रवर्तन नालन्दा में ही किया था । हुएनत्संग ने लिखा है- इस स्थान पर एक प्राचीन आम्रवाटिका थी, जिसको पाँच सौ व्यापारियों ने दश कोटि मुद्रा में मोल लेकर बुद्धदेव को समर्पित कर दिया । नालन्दा के 'लेय' नामक एक निवासी के धन, जन, यश और वैभव की बड़ी प्रशंसा थी । यहाँ के 'केवद्ध' नामक एक धनी सज्जन को हम भगवान् बुद्ध के सामने नालन्दा के प्रभाव और पवित्रता की बड़ी बड़ाई करते हुए पाते हैं। 'आनन्द' के मत से तो नालन्दा पाटलिपुत्र से भी बढ़कर था, क्योंकि नालन्दा ही भगवान् बुद्ध के निर्धारण के लिये उपयुक्त स्थान था, पाटलिपुत्र के नहीं । इससे नालन्दा के पाटलिपुत्र से अधिक प्राचीन और श्रेष्ठ होने का परिचय मिलता है। फ़ाहियान के अनुसार सारिपुत्त का बहुत पहले से 'बड़गाँव' के ही प्राचीन 'नालन्दा' होने का विश्वास प्रचलित था । विक्रम सम्वत् एक हज़ार पाँच सौ पैंसठ में रचित हंसमोम के पूर्व - देशचैत्य परिपाटी' ग्रन्थ में नालन्दा के साथ उसके वर्तमान नाम 'बड़गाँव' का भी उल्लेख है। लिखा है"नालन्दे पा चौद चौमास सुरगीजै । होड़ा लोक प्रसिद्ध ते बड़गाँव कहीजे । सोल प्रसाद तिहाँ अच्छे जिन विम्ब नमीजै ।" इस प्रकार यह प्रकट है कि विक्रम की सोलहवीं शताब्दि से भी पहले लोगों को यह मालूम था कि यह बड़गाँव उस प्राचीन "नालन्दा" का ही वर्तमान रूप है। प्राचीन नालन्दा की स्थिति के भूले न थे, फिर भी इसमें सन्देह नहीं कि नानन्द में यदि खुदाई का काम जारी हो तो उससे हमारे नालंदा विषयक ज्ञान में अत्यन्त महत्वपूर्ण सत्य का विकास होगा। नालन्दा का उल्लेख कई बौद्धग्रंथों में भी हुआ है । शान्त रक्षित का 'तत्व संग्रह' कमलशील की 'तत्वसंग्रह पंजिका' तथा नालन्दा के पण्डितों के और भी कई तान्त्रिक ग्रन्थ मिलते हैं । नालंदा के वर्णन में उनसे विशेष सहायता नहीं मिलती। केवल 'अ- साहस्त्रिका प्रज्ञापारमिता' और कुछ अन्य प्राचीन ग्रंथ जिनकी प्रतिलिपि पालवंशी राजाओं के समय में तैयार की गई थी - ऐस हैं जिनसे कुछ विशेष सूचनायें मिलती हैं। पालिग्रन्थ महाविहार की स्थापना के बहुत पहले की बातों का उल्लेख करते हैं। जब इस स्थान का सम्बन्ध स्वयं भगवान बुद्ध से था। इस सम्बन्ध मं हमें हुएनत्संग, इल्लिंग, बुकुंग आदि चीनी यात्रियों तथा तिच्चती 'तारानाथ' के विवरणों से ही विशेष सहायता मिलती है। और अब तो खुदाई में बहुत से ऐसे शिलालेखादि भी मिले हैं, जिनसे महाबिहार-सम्बन्धी कई बातों पर प्रचुर प्रकाश पड़ता है । श्री महावीर स्वामी तथा उनके एक श्रेष्ठ और प्राचीन शिष्य इन्द्रभूति के सम्बन्ध के कारण जैनी लोग भी अच उस स्थान को तीर्थ समझते हैं । 'सूत्रकृतांग' सरीखे कुछ जैन-ग्रन्थों में नालन्दा का वर्णन है, जिससे मालूम होता है कि ईसवी सन के पहले भी नालन्दा बहुत समृद्ध और समुन्नत नगर था । कल्पसूत्र में लिखा है कि यहाँ भगवान महावीर स्वामी ने चातुर्मास्य बिताया था । इतना ही नहीं, भगवान् बुद्ध ने 'संपादनीयसुतं' और 'केवद्धसुत्त' का प्रवर्तन नालन्दा में ही किया था । हुएनत्संग ने लिखा है-इस स्थान पर एक प्राचीन आम्रवाटिका थी, जिसको पाँच सौ व्यापारियों ने दश कोटि मुद्रा में मोल लेकर बुद्धदेव को समर्पित कर दिया । नालन्दा के 'लेय' नामक एक निवासी के धन, जन, यश और वैभव की बड़ी प्रशंसा थी । यहाँ के 'केवद्ध' नामक एक धनी सज्जन को हम भगवान् बुद्ध के सामने नालन्दा के प्रभाव और पवित्रता की बड़ी बड़ाई करते हुए पाते हैं। 'आनन्द' के मत से तो नालन्दा पाटलिपुत्र से भी बढ़कर था, क्योंकि नालन्दा ही भगवान् बुद्ध के निर्धारण के लिये उपयुक्त स्थान था, पाटलिपुत्र नहीं । इससे नालन्दा के पाटलिपुत्र से अधिक प्राचीन और श्रेष्ठ होने का परिचय मिलता है । फाहियान के अनुसार सारिपुत्त का जन्म स्थान 'नाल ' ग्राम था । कुछ विद्वानों का खयाल है कि 'नाल ' नालन्दा का ही द्योतक है। यहीं बुद्धदेव से सारिपुत्त की भेंट हुई और भगवान् ने अपने प्रिय शिष्य की कठिनाइयों का समाधान किया । तिव्बती लामा तारानाथ के अनुसार यहीं सारिपुत्र ने हजारों के साथ निर्वाण प्राप्त किया। बड़गाँव में, हाल की खुदाई में, भूमि-स्पर्श मुद्रा में, भगवान् बुद्ध की एक मूर्ति मिली है, जिसमें आर्य सारिपुत्त और आर्य मौदगल्यायन उड़ते हुए रूप में चित्रित हैं । ये दोनों भगवान् बुद्ध के प्रधान शिष्य थे । इन पवित्र संसर्गों के कारण नालन्दा बहुत प्राचीन समय से पुण्यस्थान माना जाता था। इसके अतिरिक्त यह 'राजगृह' से बहुत निकट है, जो वौद्धों का प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। मगध की राजधानी पाटलिपुत्र भी इस स्थान से बहुत दूर नहीं है । यहाँ की प्राकृतिक शोभा और शान्ति भी बड़ी चित्ताकर्पिणी थी । इस स्थान की इन्हीं विशेषताओं से आकृष्ट होकर एक महान उच्च आदर्श को लिए हुए आत्मती बौद्ध भिक्षुकों ने यहाँ नालन्दा महाबिहार की स्थापना की थी । महाविहार की स्थापना का काल निर्णय परन्तु यह स्थापना कब हुई है, इस सम्बन्ध में मत भेद है । तारानाथ के अनुसार इसके सर्व प्रथम स्थापक अशोक थे । हुएनत्संग ने भी लिखा है कि 'बुद्ध-निर्धारण के थोड़े ही दिन बाद यहाँ के प्रथम संघाराम का निर्माण हुआ, पर नालन्दा महाविहार को इतनी अधिक प्राचीनता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक नहीं मिला है। फाहियान ने नालन्दा का कोई उल्लेख नहीं किया है। उसने 'नालो' नामक एक स्थान का जिक्र किया है, जिसे कुछ लोग 'नालन्दा' का ही रूपान्तर समझते हैं । जो हो, यह तो स्पष्ट है कि उस समय नालन्दा में कोई ऐसा विशेष महत्व न होगा, जो फ़ाहियान को आकृष्ट करता । विक्रम की सातवीं सदी में हुएनत्संग आया था। उस समय नालन्दा महत्व और ख्याति की पराकाष्टा को पहुँचा हुआ था, इस बात के आधार पर यह अनुमान किया जाता है कि नालन्दा महाबिहार की स्थापना काहियान के आने के बाद और हुएनत्संग के आने के पहले हुई थी - पाँचवीं और सातवीं सदी के बीच में । कनिंघम और स्पूनर ने पाँचवीं ईसवी सदी के मध्य में इसकी स्थापना का समय निश्चित किया है। मगध के राजा बालादित्य, जिन्होंने नालन्दा में एक उच्च बिहार का निर्माण कराया था। हूरणाधिपति मिहिरकुल के समकालीन थे । मिहिरकुल सम्वत् पाँच सौ बहत्तर में राज्य करता था । इसलिये वालादित्य का भी समय यही हुआ । विसेन्ट स्मिथ के अनुसार बालादित्य का भी राज्य काल सन् चार सौ सरसठ ईशून्य से चार सौ तिहत्तर तक होना चाहिये । वालादित्य के पहले उनके तीन पूर्वजों ने भी यहाँ संघाराम बनवाये थे, और उनमें शक्रादित्य सर्व प्रथम थे। इस तरह नालन्दा-महाविहार की स्थापना का समय विक्रम की पाँचवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जान पड़ता है। पर मेरा अनुमान तो यह है कि नालन्दा में बुद्ध के निर्वारण के कुछ समय बाद विश्वविद्यालय की न सही, पर किसी बिहार की स्थापना हुई होगी। हुएनत्संग के कथन में जिसका समर्थन लामा तारानाथ भी करते हैं, तब तक बिल्कुल विश्वास करना अनुचित है, जब तक खुदाई समाप्त न हो जाय, मेरा विश्वास है कि "नानन्द" नामक गाँव में अयदि खुदाई का काम जारी किया जाय, तो बहुत सम्भव है कि नालन्दा की प्राची - नता के और अधिक प्रमाण मिलें । महाविहार के संस्थापक और संरक्षक नालन्दा के प्रथम संघाराम के बनाने वाले राजा शक्रादित्य थे । हुएनत्संग के मत के अनुसार इनका समय ईसवी सन् की शताव्दि प्रथम में होना चाहिये । पर यह मत अन्य विद्वानों को मान्य नहीं हूं । शकादित्य के पुत्र और उत्तराधिकारी बुद्धगुप्त राज ने प्रथम संघाराम के दक्षिण में, एक दूसरा संघाराम बनवाया। तीसरे राजा तथागत गुप्त ने दूसरे के पूर्व में एक तीसरा संघाराम वनवाया । इसके उत्तर-पूर्व में बालादित्य ने एक चौथा संघाराम वनवाया। उनके पुत्र यत्र ने अपने पिता के बनवाये हुए संघाराम कं पश्चिम में एक और संघाराभ वनवाया। अन्त में फिर उनके संघाराम के उत्तर में मध्य भारत के किसी एक राजा ने और संघाराम वनवा दिया। और इन सभी संचारामों को एक ऊँची चहार दीवारी से घिरवा भी दिया। इसके बाद भी अनेक राजा सुन्दर तथा भव्य निर्माण से, नालन्दा को सुशोभित करते रहे । रेवरेण्ड हिरास ने एक विद्वत्तापूर्ण लेख में उक्त चारों राजाओं के
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों विभागों सहित एजेंसियों के सभी पुरुस्कारों को एक मंच पर लाया जा सके। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पोर्टल सभी नागरिकों के लिए व्यक्तियों और संगठनों को नामित करने की सुविधा देता है। नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सराकर ने देश में जनभागीदारी और पारदर्शिता स्थापित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब विभिन्न क्षेत्रों में शानदार कार्य करने पर मिलने वाले राष्ट्रीय पुरुस्कार के लिए देश के नागरिक एक ही पोर्टल पर आवेदन करने में सक्षम होंगे। केंद्र सरकार द्वारा एक सामान्य राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (Rashtriya Puruskar Portal) विकसित किया गया है ताकि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों सहित एजेंसियों के सभी पुरस्कारों को एक मंच पर लाया जा सके। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पोर्टल सभी नागरिकों के लिए व्यक्तियों और संगठनों को नामित करने की सुविधा देता है। बता दें कि वर्तमान में पोर्टल पर विभिन्न प्रकार के पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशें दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय पुरुस्कार अवॅार्डस डॅाट जीओवी डॅाट इन (https://awards. gov. in) के जरिए पोर्टल को देखा जा सकता है। गौरतलब है कि पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशों की अंतिम तारीख 15 सितंबर है। वहीं, वानिकी में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award for Excellence in Forestry) की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2022 की अंतिम तिथि भी 15 सितंबर है जो राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2022 की अंतिम तिथि भी है। नारी शक्ति पुरस्कार 2023 के लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है। और सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2023 के लिए नामांकन और सिफारिशों की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने में लगे संस्थानों के लिए साल 2021 और 2022 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए अंतिम तिथि 28 अगस्त है। डीसी पार्थ गुप्ता ने जानकारी दी कि इन दिनों पोर्टल पर 14 राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए आवेदन मांगे हुए है। उन्होंने आगे बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में भारत सरकार की कोशिश है कि पुरस्कारों के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा जन भागीदारी हो सके।
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों विभागों सहित एजेंसियों के सभी पुरुस्कारों को एक मंच पर लाया जा सके। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पोर्टल सभी नागरिकों के लिए व्यक्तियों और संगठनों को नामित करने की सुविधा देता है। नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सराकर ने देश में जनभागीदारी और पारदर्शिता स्थापित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब विभिन्न क्षेत्रों में शानदार कार्य करने पर मिलने वाले राष्ट्रीय पुरुस्कार के लिए देश के नागरिक एक ही पोर्टल पर आवेदन करने में सक्षम होंगे। केंद्र सरकार द्वारा एक सामान्य राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल विकसित किया गया है ताकि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों सहित एजेंसियों के सभी पुरस्कारों को एक मंच पर लाया जा सके। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पोर्टल सभी नागरिकों के लिए व्यक्तियों और संगठनों को नामित करने की सुविधा देता है। बता दें कि वर्तमान में पोर्टल पर विभिन्न प्रकार के पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशें दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय पुरुस्कार अवॅार्डस डॅाट जीओवी डॅाट इन के जरिए पोर्टल को देखा जा सकता है। गौरतलब है कि पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशों की अंतिम तारीख पंद्रह सितंबर है। वहीं, वानिकी में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की अंतिम तिथि तीस सितंबर है। राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार दो हज़ार बाईस की अंतिम तिथि भी पंद्रह सितंबर है जो राष्ट्रीय जल पुरस्कार दो हज़ार बाईस की अंतिम तिथि भी है। नारी शक्ति पुरस्कार दो हज़ार तेईस के लिए अंतिम तिथि इकतीस अक्टूबर है। और सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार दो हज़ार तेईस के लिए नामांकन और सिफारिशों की अंतिम तिथि इकतीस अगस्त है। दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने में लगे संस्थानों के लिए साल दो हज़ार इक्कीस और दो हज़ार बाईस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए अंतिम तिथि अट्ठाईस अगस्त है। डीसी पार्थ गुप्ता ने जानकारी दी कि इन दिनों पोर्टल पर चौदह राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए आवेदन मांगे हुए है। उन्होंने आगे बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में भारत सरकार की कोशिश है कि पुरस्कारों के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और ज्यादा से ज्यादा जन भागीदारी हो सके।
ग्रेटर नोएडा : डीएम गौतम बुद्ध नगर ब्रजेश नारायण सिंह ने रोशनी के पर्व दीपावली के अवसर पर समस्त माननीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों,-कर्मचारियों, मीडिया बंधुओं, उद्यमियों, व्यापारियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं समस्त जनपद वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं भेंट करते हुए सभी के मंगलमय जीवन की कामना की है। जिलाधिकारी ब्रजेश नारायण सिंह ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि भारत में सभी त्योहारों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा हमारे देश का प्रत्येक त्यौहार कुछ ना कुछ संदेश समाज को देता है। इसी प्रकार रोशनी का यह पर्व दीपावली हमें संदेश देता है कि सभी के जीवन में हमेशा रोशनी एवं खुशहाली रहे । उन्होंने समस्त जनपद वासियों का आह्वान करते हुए इसी संदेश के साथ दीपावली का पर्व मनाये जाने का आव्हान किया है। उन्होंने इस अवसर पर समस्त जनपद वासियों के जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए अपनी शुभकामनाएं भेंट की हैं। इस अवसर पर एसएसपी लव कुमार के द्वारा भी समस्त जनपद वासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं भेंट करते हुए आपसी सौहार्द के साथ दीपावली पर्व को मनाए जाने का आह्वान किया है।
ग्रेटर नोएडा : डीएम गौतम बुद्ध नगर ब्रजेश नारायण सिंह ने रोशनी के पर्व दीपावली के अवसर पर समस्त माननीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों,-कर्मचारियों, मीडिया बंधुओं, उद्यमियों, व्यापारियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं समस्त जनपद वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं भेंट करते हुए सभी के मंगलमय जीवन की कामना की है। जिलाधिकारी ब्रजेश नारायण सिंह ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि भारत में सभी त्योहारों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा हमारे देश का प्रत्येक त्यौहार कुछ ना कुछ संदेश समाज को देता है। इसी प्रकार रोशनी का यह पर्व दीपावली हमें संदेश देता है कि सभी के जीवन में हमेशा रोशनी एवं खुशहाली रहे । उन्होंने समस्त जनपद वासियों का आह्वान करते हुए इसी संदेश के साथ दीपावली का पर्व मनाये जाने का आव्हान किया है। उन्होंने इस अवसर पर समस्त जनपद वासियों के जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए अपनी शुभकामनाएं भेंट की हैं। इस अवसर पर एसएसपी लव कुमार के द्वारा भी समस्त जनपद वासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं भेंट करते हुए आपसी सौहार्द के साथ दीपावली पर्व को मनाए जाने का आह्वान किया है।
Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली का सबसे पुराना ओवरब्रिज किला है. यह 1982 में एनईआर (पूर्वोत्तर रेलवे) की किला क्रासिंग के ऊपर बनाया गया था. यह ओवरब्रिज अपनी उम्र गुजार चुका है. जिसके चलते काफी गहरे-गहरे गड्ढों के साथ ही जर्जर हो गया है. वाहन गुजरने के दौरान ओवरब्रिज कांपता है. इससे ओवरब्रिज के ऊपर से गुजरने वालों के साथ ही नीचे से गुजरने वालों में भी दहशत होती है. ओवरब्रिज से हर कोई खौफजदा है. मगर अब 40 वर्ष बाद मौत के खौफ से लोगों को निजात मिलेगी. सेतु निगम ने सर्वे पूरा करने के बाद लेआउट डिजाइन कर परियोजना प्रबंधक की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. इसके लिए जल्द ही रेलवे निगम समेत संबंधित विभागों से एनओसी लेने की कवायद शुरू हो गई है. सेतु निगम ने स्मार्ट सिटी में स्मूथ ट्रैफिक से शहरों को कनेक्ट करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना के तहत सेतु निगम ने 250 करोड़ के दो प्रोजेक्ट तैयार किए हैं. इसमें किला क्रॉसिंग और डेलापीर तिराहे पर दो ओवरब्रिज बनाएं जाएंगे. सेतु निगम ने सर्वे करने के बाद डिजाइन और लेआउट तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और धन आवंटन के बाद तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा. रेलवे, वन विभाग, सीयूजीएल, नगर निगम, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड समेत संबंधित विभागों को भी सहमति पत्र के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. शहर की किला क्रॉसिंग पर एक किलोमीटर लंबा ओवरब्रिज बनाया जायेगा. शहर से दिल्ली रोड को कनेक्ट करेगा. उसके बराबर में ही सत्य प्रकाश पार्क से आगे पेट्रोल पंप के सामने से किला फ्लाईओवर की शुरुआत होगी. उसका दूसरा सिरा दूल्हे मियां की मजार के पास रहेगा. यह करीब 100 करोड़ की लागत से ओवर ब्रिज बनेगा. डेलापीर मंडी गेट से लेकर सत्या पेट्रोल पंप तक 12 सौ मीटर लंबा ओवरब्रिज वाईशेप में बनाया जायेगा. इसका एक सिरा स्टेडियम रोड और दूसर हिस्सा पीलीभीत रोड पर रहेगा. इसकी शुरुआत डेलापीर मंडी गेट से की जाएगी. सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक वीके सिंह ने बताया कि ओवरब्रिज के निर्माण में 145 करोड़ की लागत आ रही है. इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है. इसके बनने से शहर से एयरपोर्ट को कनेक्ट किया जायेगा. एनईआर ने किला ओवरब्रिज निर्माण के दौरान 4. 50 लाख रुपए खर्च किए थे. उनको यह क्रॉसिंग बंद करनी थी. मगर यहां के लोगों ने विरोध किया. क्रॉसिंग से गुजरने वाले बंद नहीं होने दे रहे थे. इसके चलते आंदोलन हुआ. इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर क्रासिंग बंद नहीं होने दी. मगर प्रशासन को 4. 25 लाख रुपए रेलवे को वापस देने पड़े.
Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली का सबसे पुराना ओवरब्रिज किला है. यह एक हज़ार नौ सौ बयासी में एनईआर की किला क्रासिंग के ऊपर बनाया गया था. यह ओवरब्रिज अपनी उम्र गुजार चुका है. जिसके चलते काफी गहरे-गहरे गड्ढों के साथ ही जर्जर हो गया है. वाहन गुजरने के दौरान ओवरब्रिज कांपता है. इससे ओवरब्रिज के ऊपर से गुजरने वालों के साथ ही नीचे से गुजरने वालों में भी दहशत होती है. ओवरब्रिज से हर कोई खौफजदा है. मगर अब चालीस वर्ष बाद मौत के खौफ से लोगों को निजात मिलेगी. सेतु निगम ने सर्वे पूरा करने के बाद लेआउट डिजाइन कर परियोजना प्रबंधक की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. इसके लिए जल्द ही रेलवे निगम समेत संबंधित विभागों से एनओसी लेने की कवायद शुरू हो गई है. सेतु निगम ने स्मार्ट सिटी में स्मूथ ट्रैफिक से शहरों को कनेक्ट करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना के तहत सेतु निगम ने दो सौ पचास करोड़ के दो प्रोजेक्ट तैयार किए हैं. इसमें किला क्रॉसिंग और डेलापीर तिराहे पर दो ओवरब्रिज बनाएं जाएंगे. सेतु निगम ने सर्वे करने के बाद डिजाइन और लेआउट तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और धन आवंटन के बाद तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा. रेलवे, वन विभाग, सीयूजीएल, नगर निगम, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड समेत संबंधित विभागों को भी सहमति पत्र के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. शहर की किला क्रॉसिंग पर एक किलोमीटर लंबा ओवरब्रिज बनाया जायेगा. शहर से दिल्ली रोड को कनेक्ट करेगा. उसके बराबर में ही सत्य प्रकाश पार्क से आगे पेट्रोल पंप के सामने से किला फ्लाईओवर की शुरुआत होगी. उसका दूसरा सिरा दूल्हे मियां की मजार के पास रहेगा. यह करीब एक सौ करोड़ की लागत से ओवर ब्रिज बनेगा. डेलापीर मंडी गेट से लेकर सत्या पेट्रोल पंप तक बारह सौ मीटर लंबा ओवरब्रिज वाईशेप में बनाया जायेगा. इसका एक सिरा स्टेडियम रोड और दूसर हिस्सा पीलीभीत रोड पर रहेगा. इसकी शुरुआत डेलापीर मंडी गेट से की जाएगी. सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक वीके सिंह ने बताया कि ओवरब्रिज के निर्माण में एक सौ पैंतालीस करोड़ की लागत आ रही है. इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है. इसके बनने से शहर से एयरपोर्ट को कनेक्ट किया जायेगा. एनईआर ने किला ओवरब्रिज निर्माण के दौरान चार. पचास लाख रुपए खर्च किए थे. उनको यह क्रॉसिंग बंद करनी थी. मगर यहां के लोगों ने विरोध किया. क्रॉसिंग से गुजरने वाले बंद नहीं होने दे रहे थे. इसके चलते आंदोलन हुआ. इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर क्रासिंग बंद नहीं होने दी. मगर प्रशासन को चार. पच्चीस लाख रुपए रेलवे को वापस देने पड़े.
क्या भूकंप की वजह से तुर्किए में फट गया न्यूक्लियर बम? भूकंप की वजह से तुर्किए में तबाही मची हुई है। तुर्किए और सीरिया में मिलाकर अब तक 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मौत का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक जोरदार धमाके के साथ आसमान में धुएं का गुबार उठ रहा है। इस वीडियो को वायरल कर के दावा किया जा रहा है कि यह तुर्किए का न्यूक्लियर पावर प्लांट है और यह भूकंप की वजह से फट गया है। क्या है दावा? दरअसल, यह दावा तब किया जा रहा है जब तुर्किए में भूकंप के बाद तबाही के तमाम वीडियो आ रहे हैं। इसी बीच तुर्किए में न्यूक्लियर पावर प्लांट में ब्लास्ट के बाद धुएं का गुबार निकलने के दावे के साथ एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो फेसबुक से लेकर ट्वीटर तक शेयर किया जा रहा है। आखिर क्या है सच? दरअसल, यह वीडियो तुर्किए का नहीं है और न ही तुर्किए में आए भूकंप से इसका कोई लेना- देना है। हकीकत में यह वीडियो पोर्ट ऑफ बेरुत लेबनान में एक विस्फोट का है। 4 अगस्त 2020 में हुए इस विस्फोट में करीब 200 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हो गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद जब वेबदुनिया ने इसकी सचाई जानने के लिए इस बारे में छानबीन की तो कई मीडिया रिपोर्ट में यह वीडियो और इससे संबंधित फोटो खबरों के साथ मिले। इसके साथ ही हमने इसे गूगल के रिवर्स सर्च इमेज में भी खोजा तो यह साल 2020 में लेबनान में हुए विस्फोट का निकला। मतलब कुल मिलाकर वो दावा झूठा निकला जिसे तुर्किए में आए भूकंप के बाद न्यूक्लियर प्लांट में ब्लास्ट का बताया जा रहा था।
क्या भूकंप की वजह से तुर्किए में फट गया न्यूक्लियर बम? भूकंप की वजह से तुर्किए में तबाही मची हुई है। तुर्किए और सीरिया में मिलाकर अब तक पाँच हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मौत का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक जोरदार धमाके के साथ आसमान में धुएं का गुबार उठ रहा है। इस वीडियो को वायरल कर के दावा किया जा रहा है कि यह तुर्किए का न्यूक्लियर पावर प्लांट है और यह भूकंप की वजह से फट गया है। क्या है दावा? दरअसल, यह दावा तब किया जा रहा है जब तुर्किए में भूकंप के बाद तबाही के तमाम वीडियो आ रहे हैं। इसी बीच तुर्किए में न्यूक्लियर पावर प्लांट में ब्लास्ट के बाद धुएं का गुबार निकलने के दावे के साथ एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो फेसबुक से लेकर ट्वीटर तक शेयर किया जा रहा है। आखिर क्या है सच? दरअसल, यह वीडियो तुर्किए का नहीं है और न ही तुर्किए में आए भूकंप से इसका कोई लेना- देना है। हकीकत में यह वीडियो पोर्ट ऑफ बेरुत लेबनान में एक विस्फोट का है। चार अगस्त दो हज़ार बीस में हुए इस विस्फोट में करीब दो सौ लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हो गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद जब वेबदुनिया ने इसकी सचाई जानने के लिए इस बारे में छानबीन की तो कई मीडिया रिपोर्ट में यह वीडियो और इससे संबंधित फोटो खबरों के साथ मिले। इसके साथ ही हमने इसे गूगल के रिवर्स सर्च इमेज में भी खोजा तो यह साल दो हज़ार बीस में लेबनान में हुए विस्फोट का निकला। मतलब कुल मिलाकर वो दावा झूठा निकला जिसे तुर्किए में आए भूकंप के बाद न्यूक्लियर प्लांट में ब्लास्ट का बताया जा रहा था।
भाश्री नीचे हे खाते । भिननेगं रखवाला आ गया। अपने नीचे सो से जिन दोनोंको पकड़ लिया। छोटभाओं को कहने आम पर ना तो वह कूदकर भाग गये । अन दोनोंको हे मास्टरके मागने पेश किया । अन्होंने दोनोका चार-चार आने जुर्माना किया। संभाजी चाचा जुर्माना माफ कराने के लिये हेड मास्टर के पास गये । परन्तु अन्होंने कहा : "मैं जानता हैं ये उड़के शरारती नहीं है, मगर पकड़े गये है जिलिये मुझेनियमकी खातिर जुर्माना करना ही पड़ेगा " । जूनागढ़ अंक बरस रहे । थुत मारे साटमें हररोज संध्या, अकादशी और दूसरे व्रतके दिनों पर लाजमी ग्रुपवास, हर पखवाड़े अण्डीके तेलका जुलाब, यह कार्यक्रम नियमित चटा । नत्थूराम शर्मा जूनागढ़ आये हों, तब सुनके दर्शनके लिओ जाना होता । वे पूछते : "क्यों, दोनों समयकी संध्या करते हो ? " जिम प्रकार जूनागढ़में थोड़े कड़े अनुशासनका अनुभव हुआ । मूरत दामीस्कूलमें जितनेमे रिवाजको बदली अडाजग में हो गऔं । यह तातोके अम पार सूरतसे कुछ बड़ा मील दूर था। जिसलिओ अडाजग रहकर सूरत में जा सकते हैं, यह सोचकर महादेव और सुनके घाचाके दोनों को पानी तीनों चौगी पूरी होने के बाद जूनागढ़ बुलवा दिया। यहाँ १९०३ के अन्तने महादेव अंग्रेजी पौचवों पश्चामें भर्ती हुआ। श्री जीवलाल दीवान गणित सिमाते और रोज पहला ममय मुनका रहता । रोज अडाजन गौसे आना पड़ता और जाड़ेके दिन थे, मिलिये कक्षा में पहुंचने पन्द-यीन मिनटकी देर हो जाती । जिसके चित्रे दीवान मास्टर जिन्हें चैव पर खड़ा करते । महादेव चुपचाप सड़े रहते । परन्तु दीवान मास्टरने थोड़े ही दिनोंमें देख लिया कि टड़का बहुत सीधा है और पढ़ने में तो बड़ा ही होशियार है, जिमटिओ आठ दस दिनमें ही बैंच पर खड़ा रमना बन्द कर दिया। महादेव बहुत बार कहा करते थे कि दीवान मास्टर भूमिति बहुत अच्छी पढ़ाते थे। वह अब तक याद है। नेयम्बर १९०६ में पन्द्रह बरस मी पूरे न होने पाये थे कि वे सूरन हाऑस्कूटसे मेट्रिक पास हो गये । अडाणके जीवनका आनन्दमय पहलू अडाजण गाँचके तीन वर्षके निवामकालमें अच्छे-बुरे अनेक अनुभव हुने । रोज अडाजणसे सूरत जाना-आना पड़ता था, अिसलिओ खेतोंमें घूमनेको खूब मिला । जाते वक्त तो सीधे स्कूल जाते, मगर लौटते समय खेतोंमें सैर करते-करते. घर आते । अडाजण सूरतके पास होने के कारण वहाँ चावल और जुवारके खेतोंमें लोग बिना पानी पिलाये सागभाजी पैदा कर लेते थे। असमें खास तौर पर सूरती सेमकी फलियाँ होती थीं । साथ ही नदीकी रेतका लाभ भी उन्हें मिलता था; असमें बैंगन, मिर्च और फूट वगैरा फल होते थे । प्रसिद्ध राँदेरी वेरके पेड़ों के झुंडके झुंड रास्ते में आते । घरसे पुड़ियामें नमक ले जाते और ककड़ी और फूट नमकके साथ खाते-खाते और घूमते-घामते : देरसे घर पहुँचते । अप्रैलके महीने में सुबहका स्कूल लगता तब बेरका मौसम होता । स्कूल जाते समय बेर बीनकर ले जाते, सो शहरके अपने यार-दोस्तोंको बाँट देते और लौटते समय बेर खाते-खाते साढ़े बारह अक बजे घर पहुँचते । सेमकी फलियोंके मौसम में गड़ की गड़ फलियाँ सूरत बिकने जातीं । महादेव वगैरा भाभी किसानोंको फलियाँ वीननेमें कभी-कभी मदद देते थे। जब वीनने जाते तब दस सेर फली अन्हें मिलती। ताप्तीके पुल पर अस समय टोलकी चौकी थी । जानेआनेकी खाली आदमीसे अक पाओ और पोटली वाले से दो पाओ ली जाती थीं । स्कूल जानेवालोंको और सरकारी नौकरोंको टोलका ठेकेदार मुफ्त जाने देता था । परन्तु रविवार के दिन या मेलेमें ये लोग सूरत जाते तब टोलवाला टोकता । छोटूभाओ तो पहलेसे ही शरारती थे । वे अससे कहते : " छुट्टी के दिन स्कूल नहीं बुलाया, जिसकी तुझे क्या खबर ? हमारी पाओ लेकर तेरा ठेका पूरा हो जायगा ? " वहाँसे दिहेण सात-आठ
भाश्री नीचे हे खाते । भिननेगं रखवाला आ गया। अपने नीचे सो से जिन दोनोंको पकड़ लिया। छोटभाओं को कहने आम पर ना तो वह कूदकर भाग गये । अन दोनोंको हे मास्टरके मागने पेश किया । अन्होंने दोनोका चार-चार आने जुर्माना किया। संभाजी चाचा जुर्माना माफ कराने के लिये हेड मास्टर के पास गये । परन्तु अन्होंने कहा : "मैं जानता हैं ये उड़के शरारती नहीं है, मगर पकड़े गये है जिलिये मुझेनियमकी खातिर जुर्माना करना ही पड़ेगा " । जूनागढ़ अंक बरस रहे । थुत मारे साटमें हररोज संध्या, अकादशी और दूसरे व्रतके दिनों पर लाजमी ग्रुपवास, हर पखवाड़े अण्डीके तेलका जुलाब, यह कार्यक्रम नियमित चटा । नत्थूराम शर्मा जूनागढ़ आये हों, तब सुनके दर्शनके लिओ जाना होता । वे पूछते : "क्यों, दोनों समयकी संध्या करते हो ? " जिम प्रकार जूनागढ़में थोड़े कड़े अनुशासनका अनुभव हुआ । मूरत दामीस्कूलमें जितनेमे रिवाजको बदली अडाजग में हो गऔं । यह तातोके अम पार सूरतसे कुछ बड़ा मील दूर था। जिसलिओ अडाजग रहकर सूरत में जा सकते हैं, यह सोचकर महादेव और सुनके घाचाके दोनों को पानी तीनों चौगी पूरी होने के बाद जूनागढ़ बुलवा दिया। यहाँ एक हज़ार नौ सौ तीन के अन्तने महादेव अंग्रेजी पौचवों पश्चामें भर्ती हुआ। श्री जीवलाल दीवान गणित सिमाते और रोज पहला ममय मुनका रहता । रोज अडाजन गौसे आना पड़ता और जाड़ेके दिन थे, मिलिये कक्षा में पहुंचने पन्द-यीन मिनटकी देर हो जाती । जिसके चित्रे दीवान मास्टर जिन्हें चैव पर खड़ा करते । महादेव चुपचाप सड़े रहते । परन्तु दीवान मास्टरने थोड़े ही दिनोंमें देख लिया कि टड़का बहुत सीधा है और पढ़ने में तो बड़ा ही होशियार है, जिमटिओ आठ दस दिनमें ही बैंच पर खड़ा रमना बन्द कर दिया। महादेव बहुत बार कहा करते थे कि दीवान मास्टर भूमिति बहुत अच्छी पढ़ाते थे। वह अब तक याद है। नेयम्बर एक हज़ार नौ सौ छः में पन्द्रह बरस मी पूरे न होने पाये थे कि वे सूरन हाऑस्कूटसे मेट्रिक पास हो गये । अडाणके जीवनका आनन्दमय पहलू अडाजण गाँचके तीन वर्षके निवामकालमें अच्छे-बुरे अनेक अनुभव हुने । रोज अडाजणसे सूरत जाना-आना पड़ता था, अिसलिओ खेतोंमें घूमनेको खूब मिला । जाते वक्त तो सीधे स्कूल जाते, मगर लौटते समय खेतोंमें सैर करते-करते. घर आते । अडाजण सूरतके पास होने के कारण वहाँ चावल और जुवारके खेतोंमें लोग बिना पानी पिलाये सागभाजी पैदा कर लेते थे। असमें खास तौर पर सूरती सेमकी फलियाँ होती थीं । साथ ही नदीकी रेतका लाभ भी उन्हें मिलता था; असमें बैंगन, मिर्च और फूट वगैरा फल होते थे । प्रसिद्ध राँदेरी वेरके पेड़ों के झुंडके झुंड रास्ते में आते । घरसे पुड़ियामें नमक ले जाते और ककड़ी और फूट नमकके साथ खाते-खाते और घूमते-घामते : देरसे घर पहुँचते । अप्रैलके महीने में सुबहका स्कूल लगता तब बेरका मौसम होता । स्कूल जाते समय बेर बीनकर ले जाते, सो शहरके अपने यार-दोस्तोंको बाँट देते और लौटते समय बेर खाते-खाते साढ़े बारह अक बजे घर पहुँचते । सेमकी फलियोंके मौसम में गड़ की गड़ फलियाँ सूरत बिकने जातीं । महादेव वगैरा भाभी किसानोंको फलियाँ वीननेमें कभी-कभी मदद देते थे। जब वीनने जाते तब दस सेर फली अन्हें मिलती। ताप्तीके पुल पर अस समय टोलकी चौकी थी । जानेआनेकी खाली आदमीसे अक पाओ और पोटली वाले से दो पाओ ली जाती थीं । स्कूल जानेवालोंको और सरकारी नौकरोंको टोलका ठेकेदार मुफ्त जाने देता था । परन्तु रविवार के दिन या मेलेमें ये लोग सूरत जाते तब टोलवाला टोकता । छोटूभाओ तो पहलेसे ही शरारती थे । वे अससे कहते : " छुट्टी के दिन स्कूल नहीं बुलाया, जिसकी तुझे क्या खबर ? हमारी पाओ लेकर तेरा ठेका पूरा हो जायगा ? " वहाँसे दिहेण सात-आठ
नवनीत कुमार (चर्चा । योगदान) द्वारा परिवर्तित 06:34, 10 जुलाई 2016 का अवतरण (""विश्वा"' का उल्लेख हिन्दू पौराणिक महाकाव्य महा...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) (अंतर) ← पुराना अवतरण । वर्तमान अवतरण (अंतर) । नया अवतरण → (अंतर) विश्वा का उल्लेख हिन्दू पौराणिक महाकाव्य महाभारत में हुआ है। महाभारत के उल्लेखानुसार ये दक्ष की कन्या थी।
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मार्वल कॉमिक यूनिवर्स हीरो, विलेन और कई महत्वपूर्ण संभावनाओं से भरा हुआ है। जब हम कभी सुपरहीरो के बारे में बात करते हैं, तब सबसे पहले हमारे दिमाग में पुरुष सुपरहीरो का ही ख़्याल आता है, जबकि मार्वल यूनिवर्स में कई महिला सुपरहीरो भी हैं। ये महाशक्तिशाली महिलाएँ सशक्तिकरण को परिभाषित करती हैं और दुनियाभर की महिलाओं को प्रेरित करती हैं। यहाँ मार्वल यूनिवर्स की पाँच सबसे शक्तिशाली महिला सुपरहीरो के बारे में बताया गया है। आइए जानें। मार्वल की सबसे शक्तिशाली टेलीपैथ 'जीन ग्रे' जीन ग्रे, मार्वल के सबसे शक्तिशाली टेलीपैथ में से एक हैं और निश्चित रूप से वह इस सूची में सबसे मज़बूत हैं। एक्स-मेंस के सबसे मज़बूत सदस्यों में से एक जीन में टेलिकिनेजीस, टेलीपैथी, माइंड कंट्रोल, एस्ट्रल प्रोजेक्शन और साइकिक ब्लास्ट जैसी अद्भुत क्षमताएँ हैं। फ़ीनिक्स फ़ोर्स के साथ संयुक्त होने पर वह मॉलीक्युलर मैटर में हेरफेर कर सकती हैं और पूरे ग्रह को नष्ट कर सकती हैं। इन्ही ख़ूबियों की वजह से वह सबसे शक्तिशाली म्यूटेंट हैं। वांडा मैक्सिमॉफ, मार्वल यूनिवर्स की सबसे शक्तिशाली म्यूटेंट में से एक हैं। वह हेक्स पॉवर और केओस मैजिक का इस्तेमाल करती हैं, जो उन्हें संभावनाओं को बदलने और यहाँ तक की वास्तविकता के ताने-बाने को भी बदलने में सक्षम बनाता है। वांडा की शक्तियाँ इतनी ज़्यादा हैं कि उन्होंने एक बार पूरी म्यूटेंट आबादी को अपनी इच्छा से गायब कर दिया था। इसके अलावा वो गहरी इच्छाओं के आधार पर वास्तविकता का पुनर्निर्माण भी कर सकती हैं। सबसे शक्तिशाली एवेंजर 'कैप्टन मार्वल' कैरल डेनवर्स या कैप्टन मार्वल को कुछ दिनों पहले ही बड़े पर्दे पर दिखाया गया था। कॉमिक्स की तरह ही उन्हें फिल्म में भी काफ़ी शक्तिशाली दिखाया गया है। कैप्टन मार्वल सबसे शक्तिशाली एवेंजर हैं। ब्रह्मांडीय जागरूकता की शक्तियों और ऊर्जा में हेरफेर करने और अवशोषित करने की क्षमता के साथ कैप्टन मार्वल में उड़ने, सुपर स्पीड, स्थायित्व, शक्ति और सहनशक्ति जैसी शक्तियाँ हैं। उन्हें उनके बाइनरी रूप में हरा पाना लगभग नामुमकिन है। छूकर दूसरों की शक्तियाँ छिन लेती हैं 'रोग' कॉमिक्स में रोग, कैप्टन मार्वल की शक्तियों को छिन लेती हैं, जो उसे काफ़ी शक्तिशाली बनाता है, क्योंकि उनके अंदर किसी को भी छूकर उसकी शक्ति को अवशोषित करने की क्षमता है। इसके साथ ही वह किसी भी सुपरह्यूमन के व्यक्तित्व को केवल छूकर ग्रहण कर सकती है। इस तरह से देखा जाए तो रोग शक्तिशाली महिला सुपरहीरो की सूची में सबसे आगे हैं। इसके अलावा ये मनुष्यों और म्यूटेंट के बीच शांति क़ायम करने में भी आगे है। सबसे सशक्त महिला और शक्तिशाली सुपरहीरो 'अमेरिका शावेज़'
मार्वल कॉमिक यूनिवर्स हीरो, विलेन और कई महत्वपूर्ण संभावनाओं से भरा हुआ है। जब हम कभी सुपरहीरो के बारे में बात करते हैं, तब सबसे पहले हमारे दिमाग में पुरुष सुपरहीरो का ही ख़्याल आता है, जबकि मार्वल यूनिवर्स में कई महिला सुपरहीरो भी हैं। ये महाशक्तिशाली महिलाएँ सशक्तिकरण को परिभाषित करती हैं और दुनियाभर की महिलाओं को प्रेरित करती हैं। यहाँ मार्वल यूनिवर्स की पाँच सबसे शक्तिशाली महिला सुपरहीरो के बारे में बताया गया है। आइए जानें। मार्वल की सबसे शक्तिशाली टेलीपैथ 'जीन ग्रे' जीन ग्रे, मार्वल के सबसे शक्तिशाली टेलीपैथ में से एक हैं और निश्चित रूप से वह इस सूची में सबसे मज़बूत हैं। एक्स-मेंस के सबसे मज़बूत सदस्यों में से एक जीन में टेलिकिनेजीस, टेलीपैथी, माइंड कंट्रोल, एस्ट्रल प्रोजेक्शन और साइकिक ब्लास्ट जैसी अद्भुत क्षमताएँ हैं। फ़ीनिक्स फ़ोर्स के साथ संयुक्त होने पर वह मॉलीक्युलर मैटर में हेरफेर कर सकती हैं और पूरे ग्रह को नष्ट कर सकती हैं। इन्ही ख़ूबियों की वजह से वह सबसे शक्तिशाली म्यूटेंट हैं। वांडा मैक्सिमॉफ, मार्वल यूनिवर्स की सबसे शक्तिशाली म्यूटेंट में से एक हैं। वह हेक्स पॉवर और केओस मैजिक का इस्तेमाल करती हैं, जो उन्हें संभावनाओं को बदलने और यहाँ तक की वास्तविकता के ताने-बाने को भी बदलने में सक्षम बनाता है। वांडा की शक्तियाँ इतनी ज़्यादा हैं कि उन्होंने एक बार पूरी म्यूटेंट आबादी को अपनी इच्छा से गायब कर दिया था। इसके अलावा वो गहरी इच्छाओं के आधार पर वास्तविकता का पुनर्निर्माण भी कर सकती हैं। सबसे शक्तिशाली एवेंजर 'कैप्टन मार्वल' कैरल डेनवर्स या कैप्टन मार्वल को कुछ दिनों पहले ही बड़े पर्दे पर दिखाया गया था। कॉमिक्स की तरह ही उन्हें फिल्म में भी काफ़ी शक्तिशाली दिखाया गया है। कैप्टन मार्वल सबसे शक्तिशाली एवेंजर हैं। ब्रह्मांडीय जागरूकता की शक्तियों और ऊर्जा में हेरफेर करने और अवशोषित करने की क्षमता के साथ कैप्टन मार्वल में उड़ने, सुपर स्पीड, स्थायित्व, शक्ति और सहनशक्ति जैसी शक्तियाँ हैं। उन्हें उनके बाइनरी रूप में हरा पाना लगभग नामुमकिन है। छूकर दूसरों की शक्तियाँ छिन लेती हैं 'रोग' कॉमिक्स में रोग, कैप्टन मार्वल की शक्तियों को छिन लेती हैं, जो उसे काफ़ी शक्तिशाली बनाता है, क्योंकि उनके अंदर किसी को भी छूकर उसकी शक्ति को अवशोषित करने की क्षमता है। इसके साथ ही वह किसी भी सुपरह्यूमन के व्यक्तित्व को केवल छूकर ग्रहण कर सकती है। इस तरह से देखा जाए तो रोग शक्तिशाली महिला सुपरहीरो की सूची में सबसे आगे हैं। इसके अलावा ये मनुष्यों और म्यूटेंट के बीच शांति क़ायम करने में भी आगे है। सबसे सशक्त महिला और शक्तिशाली सुपरहीरो 'अमेरिका शावेज़'
नई दिल्ली। । भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से की गयी गोला-बारी का भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। बता दें कि पाकिस्तान की ओर से हो रही गोलीबारी का मुहतोड़ जवाब देते हुए भारत ने बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। पुंछ और राजौरी जिले की नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की गुरुवार देर रात की गई गोलाबारी का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की कई चौकियां तबाह कर दी। इसके साथ ही इस सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के तीन से चार सैनिकों के मारे जाने की खबर है। गौरतलब है कि पाक सेना ने भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोले बरसाये थे। आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को भी उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा से सटी भारतीय चौकियों को निशाना बनाते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की थी। खबर के मुताबिक इस गोलाबारी में 18 मराठा लाई के JCO बृजेश कराटे शहीद हो गये थे। वहीँ एक स्थानीय महिला नसीमा बेगम की मौत हो गई थी । जानकारी के मुताबिक नसीमा चुरुंदा गांव की रहने वाली थी। भारत के जवानों ने साथी की शहादत का बदला लेते हुए देवा इलाके में पाकिस्तान की चौकी को निशाना बनाकर गोले दागे जिसमें पाकिस्तान के दो सैनिक मारे गये। इस कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकी भी नेस्तनाबूत हो गई।
नई दिल्ली। । भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से की गयी गोला-बारी का भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। बता दें कि पाकिस्तान की ओर से हो रही गोलीबारी का मुहतोड़ जवाब देते हुए भारत ने बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। पुंछ और राजौरी जिले की नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की गुरुवार देर रात की गई गोलाबारी का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की कई चौकियां तबाह कर दी। इसके साथ ही इस सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के तीन से चार सैनिकों के मारे जाने की खबर है। गौरतलब है कि पाक सेना ने भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोले बरसाये थे। आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को भी उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा से सटी भारतीय चौकियों को निशाना बनाते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की थी। खबर के मुताबिक इस गोलाबारी में अट्ठारह मराठा लाई के JCO बृजेश कराटे शहीद हो गये थे। वहीँ एक स्थानीय महिला नसीमा बेगम की मौत हो गई थी । जानकारी के मुताबिक नसीमा चुरुंदा गांव की रहने वाली थी। भारत के जवानों ने साथी की शहादत का बदला लेते हुए देवा इलाके में पाकिस्तान की चौकी को निशाना बनाकर गोले दागे जिसमें पाकिस्तान के दो सैनिक मारे गये। इस कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकी भी नेस्तनाबूत हो गई।
बॉलीवुड से आये दिन कोई न कोई ऐसी घटना सामने आती है जो हमे ये सोचने पर मजबूर कर देती है की इस चकाचौंध भरी जिंदगी के पीछे की स्याह दुनिया कितनी अँधेरी है। जब कोई स्टार बुलंदी पर होता है तो पूरी दुनिया उसे सलाम करती है पर जब सफलता का दौर खत्म होता है तब कोई पूछने वाला तक नसीब में नहीं होता। 70 और 80 के दशक के कई ऐसी कलाकार है जो अपने जमाने में खूब चर्चित थे पर आज गुमनामी के ऐसे अँधेरे में है की यकीन नहीं होता। 70 के दशक में ऐसी ही अदाकारा थी नाम है रेहाना सुल्तान। ये अभिनेत्री अपने समय में बोल्ड अभिनय के लिए काफी चर्चा में रही पर आज ऐसी स्थिति में है की एक एक पाई के लिए मोहताज है। आर्थिक तंगी झेल रही रेहाना सुल्तान की सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (CINTAA) हर महीने आर्थिक मदद करता है। 19 नवंबर, 1950 को इलाहाबाद में जन्मीं रेहाना ने पुणे के FTII से एक्टिंग में ग्रेजुएशन पूरी की। इसके बाद उन्हें 1967 में विश्वनाथ अयंगर द्वारा डिप्लोमा फिल्म 'शादी की पहली सालगिरह' में एक्टिंग करने का मौका मिला। डायरेक्टर राजिंदर सिंह बेदी की 1970 में आयी फिल्म दस्तक में रेहाना ने लीड एक्ट्रेस का रोल निभाया। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस नेशनल अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था। दस्तक फिल्म में उन्होंने बेहद बोल्ड दृश्य देकर उस दौर में सनसनी मचा दी थी। इस फिल्म का पोस्टर उनके बोल्ड किरदार का अक्स भर है। इसके बाद फिल्म चेतना में उन्होंने के कॉल गर्ल का किरदार निभा कर सभी परम्पराओं को तोड़ दिया। अभिनेत्रियों की साफ़ सुथरी छवि के किरदारों से बाहर आकर उन्होंने उस जमाने में बोल्ड सीन किये जब बाकी अभिनेत्रियां ऐसे किरदारों के बारे में सोचती तक नहीं थी। इसके बाद रेहाना ने 'हार-जीत' (1972), 'प्रेम पर्वत' (1973) और 'किस्सा कुर्सी का' (1977) जैसी फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन रेहाना की उस वक्त बॉलीवुड में एक बोल्ड अभिनेत्री की छवि बन गयी थी और साफ़ सुथरे किरदारों में दर्शकों ने उन्हें नकार दिया। रेहाना ने 1984 में 34 साल की उम्र में खुद से 16 साल बड़े फिल्म डायरेक्टर बीआर इशारा से शादी की थी। रेहाना के पति बीआर इशारा 2012 में इस दुनिया से चले गए थे। आखिरी दिनों में इशारा ने फिल्में बनाना भी छोड़ दिया था। जिसकी वजह से वो रेहाना के लिए कोई प्रॉपर्टी या बैंक बैलेंस भी छोड़कर नहीं जा सके थे।
बॉलीवुड से आये दिन कोई न कोई ऐसी घटना सामने आती है जो हमे ये सोचने पर मजबूर कर देती है की इस चकाचौंध भरी जिंदगी के पीछे की स्याह दुनिया कितनी अँधेरी है। जब कोई स्टार बुलंदी पर होता है तो पूरी दुनिया उसे सलाम करती है पर जब सफलता का दौर खत्म होता है तब कोई पूछने वाला तक नसीब में नहीं होता। सत्तर और अस्सी के दशक के कई ऐसी कलाकार है जो अपने जमाने में खूब चर्चित थे पर आज गुमनामी के ऐसे अँधेरे में है की यकीन नहीं होता। सत्तर के दशक में ऐसी ही अदाकारा थी नाम है रेहाना सुल्तान। ये अभिनेत्री अपने समय में बोल्ड अभिनय के लिए काफी चर्चा में रही पर आज ऐसी स्थिति में है की एक एक पाई के लिए मोहताज है। आर्थिक तंगी झेल रही रेहाना सुल्तान की सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन हर महीने आर्थिक मदद करता है। उन्नीस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ पचास को इलाहाबाद में जन्मीं रेहाना ने पुणे के FTII से एक्टिंग में ग्रेजुएशन पूरी की। इसके बाद उन्हें एक हज़ार नौ सौ सरसठ में विश्वनाथ अयंगर द्वारा डिप्लोमा फिल्म 'शादी की पहली सालगिरह' में एक्टिंग करने का मौका मिला। डायरेक्टर राजिंदर सिंह बेदी की एक हज़ार नौ सौ सत्तर में आयी फिल्म दस्तक में रेहाना ने लीड एक्ट्रेस का रोल निभाया। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस नेशनल अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था। दस्तक फिल्म में उन्होंने बेहद बोल्ड दृश्य देकर उस दौर में सनसनी मचा दी थी। इस फिल्म का पोस्टर उनके बोल्ड किरदार का अक्स भर है। इसके बाद फिल्म चेतना में उन्होंने के कॉल गर्ल का किरदार निभा कर सभी परम्पराओं को तोड़ दिया। अभिनेत्रियों की साफ़ सुथरी छवि के किरदारों से बाहर आकर उन्होंने उस जमाने में बोल्ड सीन किये जब बाकी अभिनेत्रियां ऐसे किरदारों के बारे में सोचती तक नहीं थी। इसके बाद रेहाना ने 'हार-जीत' , 'प्रेम पर्वत' और 'किस्सा कुर्सी का' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन रेहाना की उस वक्त बॉलीवुड में एक बोल्ड अभिनेत्री की छवि बन गयी थी और साफ़ सुथरे किरदारों में दर्शकों ने उन्हें नकार दिया। रेहाना ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में चौंतीस साल की उम्र में खुद से सोलह साल बड़े फिल्म डायरेक्टर बीआर इशारा से शादी की थी। रेहाना के पति बीआर इशारा दो हज़ार बारह में इस दुनिया से चले गए थे। आखिरी दिनों में इशारा ने फिल्में बनाना भी छोड़ दिया था। जिसकी वजह से वो रेहाना के लिए कोई प्रॉपर्टी या बैंक बैलेंस भी छोड़कर नहीं जा सके थे।
२. आध्यात्मिक रूपकाव्य-के अन्तर्गत कविको चेतनकमंचरित, षट्अष्टोत्तरी, पंचइन्द्रियसंवाद, मधुबिन्दुकचौपाई, स्वप्नबत्तीसी, द्वादशानुप्रेक्षा आदि रचनाएं प्रमुख हैं। चेतनकर्मचरितमें कुल २९६ पद्य हैं। कल्पना, भावना, अलंकार, रस, उक्ति सौन्दर्य और रमणीयता आदिका समवाय पाया जाता है। भावनाओं के अनुसार मधुर अथवा परुष वर्णोंका प्रयोग इस कृतिमें अपूर्व चमत्कार उत्पन्न कर रहा है । बेकारोंको पात्रकल्पना कर कविने इस चरितकाव्यमें आत्माकी श्रेयता और प्राप्तिका मार्ग प्रदर्शित किया है। कुबुद्धि एवं सुबुद्धि ये दो चेतनकी भार्या हैं । कविने इस काव्यमें प्रमुखरूपसे चेतन और उनकी पत्नियोके वार्तालाप प्रस्तुत किये हैं। सुबुद्धि चेतन-आत्माकी कर्मसंयुक्त अवस्थाको देखकर कहती है - "चेतन, तुम्हारे साथ यह दुष्टोंका संग कहाँसे आ गया ? क्या तुम अपना सर्वस्व खोकर भी सजग होने में विलम्ब करोगे ? जो व्यक्ति जीवनमें प्रमाद करता है, संयमसे दूर रहता है वह अपनी उन्नति नही कर नकता ।" चेतन - "हे महाभागे ! मै तो इस प्रकार फँस गया हूँ, जिससे इस गहन पकसे निकलना मुश्किल-सा लग रहा है। मेरा उद्धार किस प्रकार हा, इसका मुझे जानकारी नही ।" सुबुद्धि - "नाथ ! आप अपना उद्धार स्वय करनेमे समर्थ है। भेदविज्ञान के प्राप्त होते हो आपके समस्त पर सम्बन्ध विगलित हा जायगे और आप स्वतंत्र दिखलाई पड़ेंगे ।" कुबुद्धि - "अरो दुष्टा ! क्या बक रहो है ? मेरे सामने तेरा इतना बोलनेका साहस ? तू नही जानती कि मै प्रसिद्ध शूरवीर मोहकी पुत्री हूँ ?" कविने इस सदर्भमे सुबुद्धि और कुबुद्धिके कलहका सजीव चित्रण किया । और चेतन द्वारा सुबुद्धिका पक्ष लेनेपर कुबुद्धि रूठ कर अपने पिता मोहके यहाँ चली जाती है और मोहको चेतनके प्रति उभारती है। मोह युद्धकी तैयारी कर अपने राग-द्वेषरूपी मंत्रियोंसे साहाय्य प्राप्त करता है और अष्ट कर्मोंकी सेना सजाकर सैन्य सचालनका भार मोहनीय कर्मको देता है। दोनों ओरकी सेनाएँ रणभूमिमें एकत्र हो जाती हैं। एक ओर मोहके सेनापतित्वमे काम, क्रोध आदि विकार और अष्ट कर्मोंका सैन्य दल है। दूसरी ओर ज्ञानके सेनापतित्वमें दर्शन, चरित्र, सुख, वीर्य आदिकी सेनाएं उपस्थित हैं । मोहराज चेतनपर आक्रमण करता है; पर ज्ञानदेव स्वानुभूतिकी सहायतासे विपक्षी दलको परास्त देता है। कविने युद्धका बड़ा ही सजीव वर्णन किया है। निम्न पंक्तियाँ हैंः२६६ : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य-परम्परा सूर बलवंत मदमत्त महामोहके, निकसि सब सेन आगे जु आये । मारि घमासान महाजुद्ध बहुक्रुद्ध करि, एक ते एक सातों सवाए ।। वीर-सुविवेकने धनुष ले ध्यानका, मारि के सुभट सातों गिराए । कुमुक जो ज्ञानको सेन सब संग घसी मोहके सुभट मूर्छा सबाए ।। रणसिंगे बज्जहि कोऊ न भज्जहि, करहि महा दोक जुद्ध । इस जीव हंकारहि, निजपर वारहि, करहै अरिनको रुद्ध । शतअष्टोत्तरी - इसमें १०८ पद्य हैं । कविने आत्मज्ञानका सुन्दर उपदेश अंकित किया है । यह रचना बड़ी ही सरस और हृदयग्राह्य है । अत्यल्प कथानकके सहारे आत्मतत्त्वका पूर्ण परिज्ञान सरस शैलीमें करा देनेमें इस रचनाको अद्वितीय सफलता प्राप्त हुई है। कवि कहता है कि चेतनराजाको दो रानियाँ है, एक सुबुद्धि और दूसरी माया । माया बहुत ही सुन्दर और मोहक है। सुबुद्धि बुद्धिमती होनेपर भी सुन्दरी नहीं है। चेतनराजा मायारानीपर बहुत आसक्त है। दिन-रात भोग-विलासमें संलग्न रहता है। राजकाज देखनेका उसे बिल्कुल अवसर नही मिलता । अतः राज्यकर्मचारी मनमानी करते हैं । यद्यपि चेतन राजाने अपने शरार- देशको सुरक्षा के लिए मोह को सेनापति क्रोधको कोतवाल, लाभका मंत्रा, कर्मोदयको काजो, कामदेवको वैयक्तिक सचिव ओर ईर्ष्या-घणाको प्रबन्धक नियुक्त किया है। फिर भी शरीर देशका शासन चेतनराजाकी असावधानोके कारण विशृंखलित होता जा रहा है। मान और चिन्ताने प्रधानमंत्री बनने के लिए संघर्ष आरंभ कर दिया है। इधर लोभ और कामदेव अपना पद सुरक्षित रखने के लिये नाना प्रकारसे देशको त्रस्त कर रहे हैं। नये-नये प्रकारके कर लगाये जाते हैं, जिससे शरीर-राज्यकी दुरवस्था हो रही है। ज्ञान, दर्शन, सुख वीर्य, जो कि चेतनराजा के विश्वासपात्र अमात्य है, उनको कोतवाल सेनापति, वैयक्तिक सचिव आदिने खदेड़ बाहर कर दिया है। शरीर देशको देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ चेतनराजाका राज्य न हो कर सेनापति मोहने अपना शासन स्थापित कर लिया है। चेतनकी आशाको सभी अवहेलना करते हैं । माया-रानी भी मोह और लोभको चुपचाप-राज्य शरीर-संचालनमें सहायता देती है। उसने इस प्रकार षड्यन्त्र किया है जिससे चेतनराजाका राज्य उलट दिया जाय और वह स्वयं उसकी शासिका बन जाये। जब सुबुद्धिको चेतनराजाके विरुद्ध किये गये षड्यन्त्रका पता लगा तो उसने अपना कर्तव्य और धर्म समझकर चेतनराजाको समझाया तथा उससे प्रार्थना की - "प्रिय चेतन, तुम अपने भीतर रहनेवाले ज्ञान, दर्शन आदि गुणोंकी सम्हाल नहीं करते । आचार्यतुल्य काव्यकार एवं लेखक : २६७
दो. आध्यात्मिक रूपकाव्य-के अन्तर्गत कविको चेतनकमंचरित, षट्अष्टोत्तरी, पंचइन्द्रियसंवाद, मधुबिन्दुकचौपाई, स्वप्नबत्तीसी, द्वादशानुप्रेक्षा आदि रचनाएं प्रमुख हैं। चेतनकर्मचरितमें कुल दो सौ छियानवे पद्य हैं। कल्पना, भावना, अलंकार, रस, उक्ति सौन्दर्य और रमणीयता आदिका समवाय पाया जाता है। भावनाओं के अनुसार मधुर अथवा परुष वर्णोंका प्रयोग इस कृतिमें अपूर्व चमत्कार उत्पन्न कर रहा है । बेकारोंको पात्रकल्पना कर कविने इस चरितकाव्यमें आत्माकी श्रेयता और प्राप्तिका मार्ग प्रदर्शित किया है। कुबुद्धि एवं सुबुद्धि ये दो चेतनकी भार्या हैं । कविने इस काव्यमें प्रमुखरूपसे चेतन और उनकी पत्नियोके वार्तालाप प्रस्तुत किये हैं। सुबुद्धि चेतन-आत्माकी कर्मसंयुक्त अवस्थाको देखकर कहती है - "चेतन, तुम्हारे साथ यह दुष्टोंका संग कहाँसे आ गया ? क्या तुम अपना सर्वस्व खोकर भी सजग होने में विलम्ब करोगे ? जो व्यक्ति जीवनमें प्रमाद करता है, संयमसे दूर रहता है वह अपनी उन्नति नही कर नकता ।" चेतन - "हे महाभागे ! मै तो इस प्रकार फँस गया हूँ, जिससे इस गहन पकसे निकलना मुश्किल-सा लग रहा है। मेरा उद्धार किस प्रकार हा, इसका मुझे जानकारी नही ।" सुबुद्धि - "नाथ ! आप अपना उद्धार स्वय करनेमे समर्थ है। भेदविज्ञान के प्राप्त होते हो आपके समस्त पर सम्बन्ध विगलित हा जायगे और आप स्वतंत्र दिखलाई पड़ेंगे ।" कुबुद्धि - "अरो दुष्टा ! क्या बक रहो है ? मेरे सामने तेरा इतना बोलनेका साहस ? तू नही जानती कि मै प्रसिद्ध शूरवीर मोहकी पुत्री हूँ ?" कविने इस सदर्भमे सुबुद्धि और कुबुद्धिके कलहका सजीव चित्रण किया । और चेतन द्वारा सुबुद्धिका पक्ष लेनेपर कुबुद्धि रूठ कर अपने पिता मोहके यहाँ चली जाती है और मोहको चेतनके प्रति उभारती है। मोह युद्धकी तैयारी कर अपने राग-द्वेषरूपी मंत्रियोंसे साहाय्य प्राप्त करता है और अष्ट कर्मोंकी सेना सजाकर सैन्य सचालनका भार मोहनीय कर्मको देता है। दोनों ओरकी सेनाएँ रणभूमिमें एकत्र हो जाती हैं। एक ओर मोहके सेनापतित्वमे काम, क्रोध आदि विकार और अष्ट कर्मोंका सैन्य दल है। दूसरी ओर ज्ञानके सेनापतित्वमें दर्शन, चरित्र, सुख, वीर्य आदिकी सेनाएं उपस्थित हैं । मोहराज चेतनपर आक्रमण करता है; पर ज्ञानदेव स्वानुभूतिकी सहायतासे विपक्षी दलको परास्त देता है। कविने युद्धका बड़ा ही सजीव वर्णन किया है। निम्न पंक्तियाँ हैंःदो सौ छयासठ : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य-परम्परा सूर बलवंत मदमत्त महामोहके, निकसि सब सेन आगे जु आये । मारि घमासान महाजुद्ध बहुक्रुद्ध करि, एक ते एक सातों सवाए ।। वीर-सुविवेकने धनुष ले ध्यानका, मारि के सुभट सातों गिराए । कुमुक जो ज्ञानको सेन सब संग घसी मोहके सुभट मूर्छा सबाए ।। रणसिंगे बज्जहि कोऊ न भज्जहि, करहि महा दोक जुद्ध । इस जीव हंकारहि, निजपर वारहि, करहै अरिनको रुद्ध । शतअष्टोत्तरी - इसमें एक सौ आठ पद्य हैं । कविने आत्मज्ञानका सुन्दर उपदेश अंकित किया है । यह रचना बड़ी ही सरस और हृदयग्राह्य है । अत्यल्प कथानकके सहारे आत्मतत्त्वका पूर्ण परिज्ञान सरस शैलीमें करा देनेमें इस रचनाको अद्वितीय सफलता प्राप्त हुई है। कवि कहता है कि चेतनराजाको दो रानियाँ है, एक सुबुद्धि और दूसरी माया । माया बहुत ही सुन्दर और मोहक है। सुबुद्धि बुद्धिमती होनेपर भी सुन्दरी नहीं है। चेतनराजा मायारानीपर बहुत आसक्त है। दिन-रात भोग-विलासमें संलग्न रहता है। राजकाज देखनेका उसे बिल्कुल अवसर नही मिलता । अतः राज्यकर्मचारी मनमानी करते हैं । यद्यपि चेतन राजाने अपने शरार- देशको सुरक्षा के लिए मोह को सेनापति क्रोधको कोतवाल, लाभका मंत्रा, कर्मोदयको काजो, कामदेवको वैयक्तिक सचिव ओर ईर्ष्या-घणाको प्रबन्धक नियुक्त किया है। फिर भी शरीर देशका शासन चेतनराजाकी असावधानोके कारण विशृंखलित होता जा रहा है। मान और चिन्ताने प्रधानमंत्री बनने के लिए संघर्ष आरंभ कर दिया है। इधर लोभ और कामदेव अपना पद सुरक्षित रखने के लिये नाना प्रकारसे देशको त्रस्त कर रहे हैं। नये-नये प्रकारके कर लगाये जाते हैं, जिससे शरीर-राज्यकी दुरवस्था हो रही है। ज्ञान, दर्शन, सुख वीर्य, जो कि चेतनराजा के विश्वासपात्र अमात्य है, उनको कोतवाल सेनापति, वैयक्तिक सचिव आदिने खदेड़ बाहर कर दिया है। शरीर देशको देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ चेतनराजाका राज्य न हो कर सेनापति मोहने अपना शासन स्थापित कर लिया है। चेतनकी आशाको सभी अवहेलना करते हैं । माया-रानी भी मोह और लोभको चुपचाप-राज्य शरीर-संचालनमें सहायता देती है। उसने इस प्रकार षड्यन्त्र किया है जिससे चेतनराजाका राज्य उलट दिया जाय और वह स्वयं उसकी शासिका बन जाये। जब सुबुद्धिको चेतनराजाके विरुद्ध किये गये षड्यन्त्रका पता लगा तो उसने अपना कर्तव्य और धर्म समझकर चेतनराजाको समझाया तथा उससे प्रार्थना की - "प्रिय चेतन, तुम अपने भीतर रहनेवाले ज्ञान, दर्शन आदि गुणोंकी सम्हाल नहीं करते । आचार्यतुल्य काव्यकार एवं लेखक : दो सौ सरसठ
India Post GDS Recruitment 2023: इण्डिया पोस्ट ने ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) के 12828 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना प्रकाशित की है। ये भर्तियाँ बैंक रहित गांवों में बीओ के लिए की जाएंगी. पदों पर भर्ती के लिए औनलाइन आवेदन प्रक्रिया इण्डिया पोस्ट की ऑफिसियल वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in पर प्रारम्भ हो रही है। उम्मीदवार 11 जून 2023 तक आवेदन कर सकते हैं. चयनित उम्मीदवारों को ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM), असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर (ABPM) और डाक सेवक के रूप में नियुक्त किया जाएगा. - ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM) - 12,000-29,380 रु। - असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर (ABPM) -10,000-24,470 रु। भारत गवर्नमेंट / राज्य सरकारों / केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा से गणित और अंग्रेजी (अनिवार्य या वैकल्पिक विषयों के रूप में शोध किया गया है) के साथ 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही उम्मीदवार को कंप्यूटर का ज्ञान, साइकिल चलाने का ज्ञान होना भी आवश्यक है। चरण 1: पंजीकरण - विद्यार्थियों को 'रजिस्ट्रेशन टैब' पर क्लिक करना होगा जहां उन्हें अपना विवरण दर्ज करना होगा जैसे कि मोबाइल नंबर, ईमेल, नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, लिंग आदि. चरण 3: वरीयताएँ चुनें - एक आवेदक सिर्फ एक या अधिक चयनित डिवीजनों में से सिर्फ एक में जीडीएस के रिक्त पदों के लिए एक या अधिक आवेदन कर सकता है.
India Post GDS Recruitment दो हज़ार तेईस: इण्डिया पोस्ट ने ग्रामीण डाक सेवक के बारह हज़ार आठ सौ अट्ठाईस पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना प्रकाशित की है। ये भर्तियाँ बैंक रहित गांवों में बीओ के लिए की जाएंगी. पदों पर भर्ती के लिए औनलाइन आवेदन प्रक्रिया इण्डिया पोस्ट की ऑफिसियल वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in पर प्रारम्भ हो रही है। उम्मीदवार ग्यारह जून दो हज़ार तेईस तक आवेदन कर सकते हैं. चयनित उम्मीदवारों को ब्रांच पोस्टमास्टर , असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर और डाक सेवक के रूप में नियुक्त किया जाएगा. - ब्रांच पोस्टमास्टर - बारह,शून्य-उनतीस,तीन सौ अस्सी रुपया। - असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर -दस,शून्य-चौबीस,चार सौ सत्तर रुपया। भारत गवर्नमेंट / राज्य सरकारों / केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा से गणित और अंग्रेजी के साथ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही उम्मीदवार को कंप्यूटर का ज्ञान, साइकिल चलाने का ज्ञान होना भी आवश्यक है। चरण एक: पंजीकरण - विद्यार्थियों को 'रजिस्ट्रेशन टैब' पर क्लिक करना होगा जहां उन्हें अपना विवरण दर्ज करना होगा जैसे कि मोबाइल नंबर, ईमेल, नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, लिंग आदि. चरण तीन: वरीयताएँ चुनें - एक आवेदक सिर्फ एक या अधिक चयनित डिवीजनों में से सिर्फ एक में जीडीएस के रिक्त पदों के लिए एक या अधिक आवेदन कर सकता है.
एलोया टेक्नोलॉजी कंपनी बड़े आकार की धातुओं को आकार देने के लिए "3डी मेटल प्रिंटर" विकसित कर रक्षा उद्योग के स्थानीयकरण में योगदान देती है। 2020 में स्थापित, कंपनी अपनी अनूठी तकनीक विकसित करती है और कई क्षेत्रों, विशेष रूप से तुर्की में विमानन और रक्षा उद्योग कंपनियों को वाणिज्यिक भागों की उत्पादन सेवाएं प्रदान करती है। इस 3डी प्रिंटर के साथ, भौतिक व्यय काफी कम हो जाता है और समय की बचत होती है। Alloya Technology के संस्थापक Mehmet Çetinkaya ने रक्षा उद्योग को 3D प्रिंटर के योगदान और इस अवधारणा के साथ एक उत्पादन के बारे में जानकारी दी। यह कहते हुए कि वे 3डी धातु प्रिंटर के साथ 1×1×1,5 मीटर की मात्रा में धातु के पुर्जों का उत्पादन करते हैं जो बड़े आकार में प्रिंट करता है, मेहमत Çetinkaya ने कहा, "हम आमतौर पर टाइटेनियम, निकल और स्टेनलेस स्टील जैसे मिश्र धातुओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं। . विशेष रूप से एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों द्वारा आवश्यक बड़े आकार के पुर्जे इस अर्थ में क्षेत्र में सामने आते हैं। "हम विभिन्न रॉकेट भागों का उत्पादन करते हैं" "उदाहरण के लिए, हम अपने ग्राहकों द्वारा अनुरोधित धातु से रॉकेट नोजल भागों का उत्पादन करते हैं। दूसरे शब्दों में, यह एक निकास जैसा हिस्सा है जो रॉकेट के तल पर गर्म गैसों का निकास प्रदान करता है। कच्चे माल की आपूर्ति और आंशिक उत्पादन एक ऐसा उत्पाद है जिसके लिए गंभीर समय की आवश्यकता होती है। इन विशेष धातुओं का पारंपरिक तरीकों से निर्माण करना मुश्किल है। इसलिए, जब इस पद्धति के साथ उत्पादन किया जाता है, तो प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है और कचरे की मात्रा कम हो जाती है," Çetinkaya ने कहा, यह कहते हुए कि वे विभिन्न प्रकार के रॉकेट भागों का उत्पादन भी करते हैं। यह 3 महीने की उत्पादन प्रक्रिया को घटाकर 3 दिन कर देता है! एक उदाहरण के साथ प्रिंटर के साथ सामग्री और समय की बचत की व्याख्या करते हुए, Çetinkaya ने कहा, "उदाहरण के लिए, हमारी एक रक्षा उद्योग कंपनी सालाना 150 टन टाइटेनियम चूरा का उत्पादन करती है। आप एक ग्राम धातु को फेंकना नहीं चाहते हैं जिसकी कीमत 60 डॉलर प्रति किलोग्राम है। इसलिए, इस बेकार चिप को कम करने के लिए 3डी प्रिंटिंग पद्धति का उपयोग एक गंभीर लाभ प्रदान करता है। इन सब के अलावा, हम उन प्रक्रियाओं को भी बाहर करते हैं जिनके लिए साँचे की आवश्यकता होती है, क्योंकि जब कोई साँचा होता है, तो प्रक्रियाएँ बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। इस कारण से, हमें कम मात्रा वाले उत्पादों में गंभीर लाभ है, बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं; क्योंकि मोल्ड का उत्पादन मुख्य उत्पाद की लागत से पहले ही बहुत अधिक है। यदि 100 से कम टुकड़ों का वार्षिक उत्पादन होता है, तो वास्तव में, हमने मोल्ड लागत और मोल्ड उत्पादन समय को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस प्रकार, हम अंतिम भाग को जल्दी से तैयार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, हमने 3 प्रक्रियाओं को घटाकर 7-21 प्रक्रियाएं और 7 महीने की प्रक्रिया को 1 घंटे में एक भाग का उत्पादन करके 2 दिन कर दिया, जिनमें से एक का उत्पादन पारंपरिक तरीकों से 3 महीने में 3 अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरकर किया गया। "हम मूल्य वर्धित उत्पादों को निर्यात करने की हमारे देश की क्षमता में योगदान करने के लिए काम कर रहे हैं" Mehmet Çetinkaya, जिन्होंने अपने भविष्य के लक्ष्यों को साझा किया, ने कहा, "हम मूल्यवर्धित उत्पादन को महत्व देते हैं। विकसित देशों को जो प्रौद्योगिकी के आशीर्वाद से लाभान्वित होते हैं, उनके पास हमारे देश के स्मार्ट और मेहनती युवा नहीं हैं। ये युवा चतुराई से व्यावहारिक समाधानों को स्थायी मूल्यों में बदल सकते हैं। जब तक हम धैर्यपूर्वक काम करना जारी रखते हैं, सही कदम उठाते हैं, टिकाऊ मॉडल के साथ काम करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उद्यमियों का ऐसा युवा समूह जो पहले से ही निर्यात कर रहा है, भविष्य में पूरी दुनिया में मूल्यवर्धित बिक्री करेगा।
एलोया टेक्नोलॉजी कंपनी बड़े आकार की धातुओं को आकार देने के लिए "तीनडी मेटल प्रिंटर" विकसित कर रक्षा उद्योग के स्थानीयकरण में योगदान देती है। दो हज़ार बीस में स्थापित, कंपनी अपनी अनूठी तकनीक विकसित करती है और कई क्षेत्रों, विशेष रूप से तुर्की में विमानन और रक्षा उद्योग कंपनियों को वाणिज्यिक भागों की उत्पादन सेवाएं प्रदान करती है। इस तीनडी प्रिंटर के साथ, भौतिक व्यय काफी कम हो जाता है और समय की बचत होती है। Alloya Technology के संस्थापक Mehmet Çetinkaya ने रक्षा उद्योग को तीनD प्रिंटर के योगदान और इस अवधारणा के साथ एक उत्पादन के बारे में जानकारी दी। यह कहते हुए कि वे तीनडी धातु प्रिंटर के साथ एक×एक×एक,पाँच मीटर की मात्रा में धातु के पुर्जों का उत्पादन करते हैं जो बड़े आकार में प्रिंट करता है, मेहमत Çetinkaya ने कहा, "हम आमतौर पर टाइटेनियम, निकल और स्टेनलेस स्टील जैसे मिश्र धातुओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं। . विशेष रूप से एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों द्वारा आवश्यक बड़े आकार के पुर्जे इस अर्थ में क्षेत्र में सामने आते हैं। "हम विभिन्न रॉकेट भागों का उत्पादन करते हैं" "उदाहरण के लिए, हम अपने ग्राहकों द्वारा अनुरोधित धातु से रॉकेट नोजल भागों का उत्पादन करते हैं। दूसरे शब्दों में, यह एक निकास जैसा हिस्सा है जो रॉकेट के तल पर गर्म गैसों का निकास प्रदान करता है। कच्चे माल की आपूर्ति और आंशिक उत्पादन एक ऐसा उत्पाद है जिसके लिए गंभीर समय की आवश्यकता होती है। इन विशेष धातुओं का पारंपरिक तरीकों से निर्माण करना मुश्किल है। इसलिए, जब इस पद्धति के साथ उत्पादन किया जाता है, तो प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है और कचरे की मात्रा कम हो जाती है," Çetinkaya ने कहा, यह कहते हुए कि वे विभिन्न प्रकार के रॉकेट भागों का उत्पादन भी करते हैं। यह तीन महीने की उत्पादन प्रक्रिया को घटाकर तीन दिन कर देता है! एक उदाहरण के साथ प्रिंटर के साथ सामग्री और समय की बचत की व्याख्या करते हुए, Çetinkaya ने कहा, "उदाहरण के लिए, हमारी एक रक्षा उद्योग कंपनी सालाना एक सौ पचास टन टाइटेनियम चूरा का उत्पादन करती है। आप एक ग्राम धातु को फेंकना नहीं चाहते हैं जिसकी कीमत साठ डॉलर प्रति किलोग्राम है। इसलिए, इस बेकार चिप को कम करने के लिए तीनडी प्रिंटिंग पद्धति का उपयोग एक गंभीर लाभ प्रदान करता है। इन सब के अलावा, हम उन प्रक्रियाओं को भी बाहर करते हैं जिनके लिए साँचे की आवश्यकता होती है, क्योंकि जब कोई साँचा होता है, तो प्रक्रियाएँ बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। इस कारण से, हमें कम मात्रा वाले उत्पादों में गंभीर लाभ है, बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं; क्योंकि मोल्ड का उत्पादन मुख्य उत्पाद की लागत से पहले ही बहुत अधिक है। यदि एक सौ से कम टुकड़ों का वार्षिक उत्पादन होता है, तो वास्तव में, हमने मोल्ड लागत और मोल्ड उत्पादन समय को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस प्रकार, हम अंतिम भाग को जल्दी से तैयार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, हमने तीन प्रक्रियाओं को घटाकर सात-इक्कीस प्रक्रियाएं और सात महीने की प्रक्रिया को एक घंटाटे में एक भाग का उत्पादन करके दो दिन कर दिया, जिनमें से एक का उत्पादन पारंपरिक तरीकों से तीन महीने में तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरकर किया गया। "हम मूल्य वर्धित उत्पादों को निर्यात करने की हमारे देश की क्षमता में योगदान करने के लिए काम कर रहे हैं" Mehmet Çetinkaya, जिन्होंने अपने भविष्य के लक्ष्यों को साझा किया, ने कहा, "हम मूल्यवर्धित उत्पादन को महत्व देते हैं। विकसित देशों को जो प्रौद्योगिकी के आशीर्वाद से लाभान्वित होते हैं, उनके पास हमारे देश के स्मार्ट और मेहनती युवा नहीं हैं। ये युवा चतुराई से व्यावहारिक समाधानों को स्थायी मूल्यों में बदल सकते हैं। जब तक हम धैर्यपूर्वक काम करना जारी रखते हैं, सही कदम उठाते हैं, टिकाऊ मॉडल के साथ काम करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उद्यमियों का ऐसा युवा समूह जो पहले से ही निर्यात कर रहा है, भविष्य में पूरी दुनिया में मूल्यवर्धित बिक्री करेगा।
Hardoi News: सूबे के मुख्यमंत्री लगातार महिला अपराधों को लेकर अधिकारियों को निर्देशित करते रहते हैं फिर भी हरदोई के पुलिस अधिकारी महिला अपराधों को गंभीर नहीं मानते हैं। Hardoi News: हरदोई में महिलाओं के मामले को लेकर पुलिस लगातार सवालों के घेरे में है। हरदोई में महिला अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पीड़ित महिलायें पुलिस पर कार्यवाही ना करने का आरोप लगाती है। हरदोई पुलिस सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोल रही है। सूबे के मुख्यमंत्री लगातार महिला अपराधों को लेकर अधिकारियों को निर्देशित करते रहते हैं फिर भी हरदोई के पुलिस अधिकारी महिला अपराधों को गंभीर नहीं मानते हैं। हरदोई में एक रेप पीड़िता ने अपने सहयोगी पर रेप का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके सहयोगी द्वारा उसका कई बार रेप किया गया जिसकी शिकायत शाहाबाद कोतवाली,सीओ शाहाबाद व पुलिस अधीक्षक से की गई। कोतवाली शाहाबाद व सीओ शाहाबाद द्वारा मामला दर्ज करने के बजाय पीड़ित से गलत से सलत बयानबाजी कर वहां से भगा दिया था। जिसके बाद पीड़ित युवती पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शाहबाद कोतवाली में रेप के बजाय छेड़खानी का अभियोग पंजीकृत किया गया। पुलिस के कार्यशैली से परेशानियों से पीड़ित शाहबाद विधानसभा से विधायक व सूबे में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी के पास पहुँची और अपनी दरखास्त लगाई। पीड़ित युवती की बात सुन राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने तत्काल सीओ शाहबाद को मामला दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। पीड़ित युवती ने बताया कि वह 12वीं की छात्रा है। एक ट्रेन एक्सीडेंट में उसके पिता की मौत हो चुकी है। अपने परिवार का पालन पोषण के लिए एक कोल्ड स्टोर में कार्य करती है जिससे उसकी पढ़ाई व घर का खर्चा चलता है। उसी कोल्ड स्टोर में मुनिम पिंकू उर्फ़ प्रमोद पुत्र अशोक निवासी मोहल्ला कटरा ने मौका पाकर कोल्ड स्टोर में उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया जिसके बाद पीड़ित युवती तो जानमाल की धमकी दी थी। युवती ने आरोप लगाया कि पिंकु उर्फ प्रमोद ने इस दौरान कई बार उसका रेप किया उसने आखिरी बार 20 मई 2023 को आखरी बार रेप की घटना को अंजाम दिया था। जिसके बाद पीड़ित युवती थाने पहुंची लेकिन इसकी शिकायत नहीं सुनी गई । पीड़ित युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी की पत्नी व अन्य महिलाएं उसके घर पहुंची और उसकी मां के साथ अभद्रता की व जानमाल की धमकी भी दी। पीड़ित युवती द्वारा उसकी मां को मिली जानमाल की धमकी की भी शिकायत शाहबाद कोतवाली में दर्ज कराई, लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं हुई। पीड़ित युवती द्वारा क्षेत्राधिकारी शाहाबाद से भी की गई। दोनों मामलों की शिकायत की गई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। कार्रवाई ना होने से आहत पीड़ित शाहबाद से भाजपा विधायक व सूबे की राज्यमंत्री रजनी तिवारी से मिली और मामले की शिकायत की। पीड़ित युवती की शिकायत सुन राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने सीओ शाहबाद को तत्काल मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। अब देखना होगा कि क्या पुलिस राज्य मंत्री के आदेशों का पालन करती है या फिर एक फिर पीड़ित युवती न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होगी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शाहाबाद से भाजपा के जिलाध्यक्ष व भाजपा की महिला विधायक व राज्य मंत्री है। फिर भी एक महिला को न्याय के लिए अधिकारियों के चौखट की ठोकरें खानी पड़ रही है।
Hardoi News: सूबे के मुख्यमंत्री लगातार महिला अपराधों को लेकर अधिकारियों को निर्देशित करते रहते हैं फिर भी हरदोई के पुलिस अधिकारी महिला अपराधों को गंभीर नहीं मानते हैं। Hardoi News: हरदोई में महिलाओं के मामले को लेकर पुलिस लगातार सवालों के घेरे में है। हरदोई में महिला अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पीड़ित महिलायें पुलिस पर कार्यवाही ना करने का आरोप लगाती है। हरदोई पुलिस सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोल रही है। सूबे के मुख्यमंत्री लगातार महिला अपराधों को लेकर अधिकारियों को निर्देशित करते रहते हैं फिर भी हरदोई के पुलिस अधिकारी महिला अपराधों को गंभीर नहीं मानते हैं। हरदोई में एक रेप पीड़िता ने अपने सहयोगी पर रेप का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके सहयोगी द्वारा उसका कई बार रेप किया गया जिसकी शिकायत शाहाबाद कोतवाली,सीओ शाहाबाद व पुलिस अधीक्षक से की गई। कोतवाली शाहाबाद व सीओ शाहाबाद द्वारा मामला दर्ज करने के बजाय पीड़ित से गलत से सलत बयानबाजी कर वहां से भगा दिया था। जिसके बाद पीड़ित युवती पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शाहबाद कोतवाली में रेप के बजाय छेड़खानी का अभियोग पंजीकृत किया गया। पुलिस के कार्यशैली से परेशानियों से पीड़ित शाहबाद विधानसभा से विधायक व सूबे में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी के पास पहुँची और अपनी दरखास्त लगाई। पीड़ित युवती की बात सुन राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने तत्काल सीओ शाहबाद को मामला दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। पीड़ित युवती ने बताया कि वह बारहवीं की छात्रा है। एक ट्रेन एक्सीडेंट में उसके पिता की मौत हो चुकी है। अपने परिवार का पालन पोषण के लिए एक कोल्ड स्टोर में कार्य करती है जिससे उसकी पढ़ाई व घर का खर्चा चलता है। उसी कोल्ड स्टोर में मुनिम पिंकू उर्फ़ प्रमोद पुत्र अशोक निवासी मोहल्ला कटरा ने मौका पाकर कोल्ड स्टोर में उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया जिसके बाद पीड़ित युवती तो जानमाल की धमकी दी थी। युवती ने आरोप लगाया कि पिंकु उर्फ प्रमोद ने इस दौरान कई बार उसका रेप किया उसने आखिरी बार बीस मई दो हज़ार तेईस को आखरी बार रेप की घटना को अंजाम दिया था। जिसके बाद पीड़ित युवती थाने पहुंची लेकिन इसकी शिकायत नहीं सुनी गई । पीड़ित युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी की पत्नी व अन्य महिलाएं उसके घर पहुंची और उसकी मां के साथ अभद्रता की व जानमाल की धमकी भी दी। पीड़ित युवती द्वारा उसकी मां को मिली जानमाल की धमकी की भी शिकायत शाहबाद कोतवाली में दर्ज कराई, लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं हुई। पीड़ित युवती द्वारा क्षेत्राधिकारी शाहाबाद से भी की गई। दोनों मामलों की शिकायत की गई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। कार्रवाई ना होने से आहत पीड़ित शाहबाद से भाजपा विधायक व सूबे की राज्यमंत्री रजनी तिवारी से मिली और मामले की शिकायत की। पीड़ित युवती की शिकायत सुन राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने सीओ शाहबाद को तत्काल मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। अब देखना होगा कि क्या पुलिस राज्य मंत्री के आदेशों का पालन करती है या फिर एक फिर पीड़ित युवती न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होगी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शाहाबाद से भाजपा के जिलाध्यक्ष व भाजपा की महिला विधायक व राज्य मंत्री है। फिर भी एक महिला को न्याय के लिए अधिकारियों के चौखट की ठोकरें खानी पड़ रही है।
जब आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो स्वस्थ भोजन खाना और नियमित रूप से व्यायाम करना यकीनन महत्त्वपूर्ण है। लेकिन इसके साथ-साथ आपको रात में अपनी नींद पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए। जब रात में व्यक्ति अच्छी नींद लेते हैं, तो इससे वजन कम करने में मदद मिलती है। यह सच है कि वजन कम करना एक ऐसी चीज है जो रातोंरात नहीं होगी। लेकिन कुछ छोटे-छोटे बदलाव भी हैं, जिन्हें आप रात में कर सकते हैं जिससे आपको स्लिम होने में मदद मिल सकती है। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही आसान ट्रिक्स के बारे में। कभी-कभी लोग रात में ज्यादा खा लेते हैं क्योंकि वे ऊब जाते हैं। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं और ओवरइटिंग से बचना चाहते हैं, तो ऐसे में आप शाम के समय खुद को कुछ वक्त बिजी रखने का प्रयास करें। मसलन, आप शाम में घूमने का प्लॉन करें। जब आप कुछ वक्त के लिए चहलकदमी करते हैं, तो इससे आपको अपने द्वारा खाए गए फूड को अच्छी तरह पचाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही साथ, इससे रात में आपको काफी अच्छी नींद आएगी। आपको शायद पता ना हो, लेकिन जब आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हों, तो पर्याप्त नींद लेना आपकी मदद कर सकता है। कम नींद लेना या फिर ओवरस्लीपिंग करना, दोनों ही आपके लिए हानिकारक है। बेहतर होगा कि आप एक अच्छी स्लीप हाइजीन को फॉलो करें और हर दिन एक नियमित समय पर ही सोएं। बेहतर स्लीप शेड्यूल आपके मैटाबॉलिज्म को बूस्ट अप करेगा। लोग रात में सोने से ठीक पहले खाते हैं या फिर बहुत अधिक लेट नाइट डिनर करते हैं। जिससे आपके पाचन तंत्र को तो परेशानी का सामना करना पड़ता है ही, साथ ही साथ वजन घटाने के प्रयासों में भी बाधा उत्पन्न होती है। देर से खाना आपके लिए सोना मुश्किल बना सकता है। जिससे भी वेट लॉस करना मुश्किल होता है। अगर आप वेट लॉस प्रोसेस में हैं, तो यह छोटी सी ट्रिक आपके बेहद काम आ सकती है। दरअसल लोग रात में सो जाते हैं और अगली सुबह समय की कमी होने पर ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं और कभी-कभी तो लंच भी नहीं लेकर जाते हैं। ऐसे में जब आप बाहर से खाते हैं, तो फैट और सोडियम की अधिकता आपकी सेहत को प्रभावित करती हैं और वजन कम की प्रक्रिया को मुश्किल बनाती है। इसलिए रात में सोने से पहले अगले दिन के मील की तैयारी अवश्य करें। कुछ लोग रात के खाने के दौरान टेलीविजन देखना पसंद कर सकते हैं, लेकिन खाने के दौरान स्क्रीन पर समय बिताना आपके लिए काफी मुश्किल हो सकता है। टीवी देखकर डिनर करने से आप ना केवल ओवरइटिंग करते हैं, बल्कि इससे आपको रात में नींद आने में भी समस्या हो सकती है। कोशिश करें कि आप रात के समय स्क्रीन से दूर ही रहें। रात को तनाव को कहें नो दिनभर हम सभी तरह-तरह के तनाव से जूझते हैं, लेकिन रात के समय खुद को रिलेक्स करने का प्रयास करें। दरअसल तनाव के कारण वजन बढ़ सकता है। रात में आराम करने के लिए समय निकालने की कोशिश करें। आप चाहें तो खुद को रिलेक्स करने के लिए डीप ब्रीदिंग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन का अभ्यास करें। जब आप रात में अपने तनाव के स्तर को कम करने में कामयाब हो जाते हैं, तो इससे आपकी नींद की क्वालिटी पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
जब आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो स्वस्थ भोजन खाना और नियमित रूप से व्यायाम करना यकीनन महत्त्वपूर्ण है। लेकिन इसके साथ-साथ आपको रात में अपनी नींद पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए। जब रात में व्यक्ति अच्छी नींद लेते हैं, तो इससे वजन कम करने में मदद मिलती है। यह सच है कि वजन कम करना एक ऐसी चीज है जो रातोंरात नहीं होगी। लेकिन कुछ छोटे-छोटे बदलाव भी हैं, जिन्हें आप रात में कर सकते हैं जिससे आपको स्लिम होने में मदद मिल सकती है। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही आसान ट्रिक्स के बारे में। कभी-कभी लोग रात में ज्यादा खा लेते हैं क्योंकि वे ऊब जाते हैं। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं और ओवरइटिंग से बचना चाहते हैं, तो ऐसे में आप शाम के समय खुद को कुछ वक्त बिजी रखने का प्रयास करें। मसलन, आप शाम में घूमने का प्लॉन करें। जब आप कुछ वक्त के लिए चहलकदमी करते हैं, तो इससे आपको अपने द्वारा खाए गए फूड को अच्छी तरह पचाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही साथ, इससे रात में आपको काफी अच्छी नींद आएगी। आपको शायद पता ना हो, लेकिन जब आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हों, तो पर्याप्त नींद लेना आपकी मदद कर सकता है। कम नींद लेना या फिर ओवरस्लीपिंग करना, दोनों ही आपके लिए हानिकारक है। बेहतर होगा कि आप एक अच्छी स्लीप हाइजीन को फॉलो करें और हर दिन एक नियमित समय पर ही सोएं। बेहतर स्लीप शेड्यूल आपके मैटाबॉलिज्म को बूस्ट अप करेगा। लोग रात में सोने से ठीक पहले खाते हैं या फिर बहुत अधिक लेट नाइट डिनर करते हैं। जिससे आपके पाचन तंत्र को तो परेशानी का सामना करना पड़ता है ही, साथ ही साथ वजन घटाने के प्रयासों में भी बाधा उत्पन्न होती है। देर से खाना आपके लिए सोना मुश्किल बना सकता है। जिससे भी वेट लॉस करना मुश्किल होता है। अगर आप वेट लॉस प्रोसेस में हैं, तो यह छोटी सी ट्रिक आपके बेहद काम आ सकती है। दरअसल लोग रात में सो जाते हैं और अगली सुबह समय की कमी होने पर ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं और कभी-कभी तो लंच भी नहीं लेकर जाते हैं। ऐसे में जब आप बाहर से खाते हैं, तो फैट और सोडियम की अधिकता आपकी सेहत को प्रभावित करती हैं और वजन कम की प्रक्रिया को मुश्किल बनाती है। इसलिए रात में सोने से पहले अगले दिन के मील की तैयारी अवश्य करें। कुछ लोग रात के खाने के दौरान टेलीविजन देखना पसंद कर सकते हैं, लेकिन खाने के दौरान स्क्रीन पर समय बिताना आपके लिए काफी मुश्किल हो सकता है। टीवी देखकर डिनर करने से आप ना केवल ओवरइटिंग करते हैं, बल्कि इससे आपको रात में नींद आने में भी समस्या हो सकती है। कोशिश करें कि आप रात के समय स्क्रीन से दूर ही रहें। रात को तनाव को कहें नो दिनभर हम सभी तरह-तरह के तनाव से जूझते हैं, लेकिन रात के समय खुद को रिलेक्स करने का प्रयास करें। दरअसल तनाव के कारण वजन बढ़ सकता है। रात में आराम करने के लिए समय निकालने की कोशिश करें। आप चाहें तो खुद को रिलेक्स करने के लिए डीप ब्रीदिंग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन का अभ्यास करें। जब आप रात में अपने तनाव के स्तर को कम करने में कामयाब हो जाते हैं, तो इससे आपकी नींद की क्वालिटी पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
मुसलमान हो, हिन्दी नहीं, उर्दू पढ़ो' बहुत साल हुए, इलाहाबाद में मेरे पास एक लड़का आया, जो वहां के "s" मुसलमानी मुहल्ले अटाला में रहता था और उसने हाई स्कूल के बाद अपने विषयों में हिन्दी ले रखी थी। मेरे आवास पर मिलने आने वालों में `रंगभारती' से जुड़े हुए हर विधा के कलाकार, खिलाड़ी, पत्रकार आदि तो होते ही थे, चूंकि मैं समाजसेवा में भी सक्रिय था, इसलिए अपनी समस्याएं लेकर आने वालों का भी मजमा रहता था। उन सबमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अध्यापक भी होते थे। उन्हीं आगंतुकों में वह मुस्लिम लड़का भी शामिल हो गया था, जिसने उर्दू विषय ले रखा था। वह मुझे बताया करता था कि कैसे उसके मुहल्ले में लोग उसे नित्य इस बात पर बहुत जलील करते हैं कि उसने अपने विषयों में उर्दू के बजाय हिन्दी क्यों ले रखी है। वह उन लोगों की पताड़ना से इतना परेशान था कि अधिकांश समय मेरे ही पास रहता था। वह विचारों से देशभक्त था तथा निर्मल हृदय था, इसीलिए वह मेरा पिय हो गया। वह साहित्यिक रुचि का था और उसे कविता करने का भी शौक था। लेकिन उसकी कवितों पेमी-पेमिका वाली स्तरहीन हुआ करती थी। मैं उससे कहता था कि वह इस तरह की कविताएं न किया करे, बल्कि आधुनिक समय की समस्याओं को अपनी कविता में उकेरे। कुछ समय पूर्व मुझे घर की सफाई के समय उसकी वह कॉपी मिली, जिसमें उसने आशिकी वाली काफी कवितों लिखी हुई थीं। उसने अपना उपनाम `विरही' रखा था। इलाहाबाद में मेरे घर परी भवन में एक सुसज्जित हॉल `केसर कक्ष' था, जिसमें मैं `रंगभारती' के तरह-तरह के आयोजन किया करता था। शास्त्राrय संगीत के कलाकार एवं लोकगीतों के गायक मेरे पास पायः आया करते थे, इसलिए उनकी महफिलें अकसर जमती थीं। `केसर कक्ष' में जब तब `रंगभारती' के बड़े-बड़े आयोजन भी हुआ करते थे। एक बार संभवतः महान गीतकार गोपाल सिंह नेपाली की जयंती पर `केसर कक्ष' में बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित था, जिसमें डॉ. रामकुमार वर्मा सहित अनेक बड़े साहित्यकार, पत्रकार, अवकाशपाप्त न्यायाधीश एवं उच्चाधिकारी मौजूद थे। मेरी शुरू से पवृत्ति रही है कि मैं नए लोगें को आगे बढ़ाता रहा हूं। उस समय भी जिस किसी में कोई गुण या हुनर दिखाई देता था, मैं उसे उस दिशा में बढ़ने के लिए अधिक से अधिक पोत्साहित किया करता था। इसीलिए देशभर में मेरे शिष्यों की संख्या अनगिनत रही। उस आगंतुक मुस्लिम लड़के की भी मैं बराबर हिम्मत बढ़ाता था कि वह अपने मुहल्ले वालों की आलोचनाओं की परवाह न करे तथा उसका मन जिस ओर आगे बढ़ना चाहता है, उस दिशा में वह आगे बढ़े। `केसर कक्ष' में आयोजित समारोह में मैंने उस लड़के का परिचय देते हुए उसे कुछ सुनाने के लिए खड़ा कर दिया। मुझे आज भी वह दृश्य अच्छी तरह याद है, वह लड़का कुछ सुनाने के बजाय बड़ी जोर से रोने लगा था। बड़ी मुश्किल से उसे चुप कराया गया तो उसने कहा कि उसे जीवन में कभी कल्पना नहीं हो सकती थी कि इतने महान लोगों के सामने उसे बै"ने का सौभाग्य मिलेगा। हवा खिलाफ है। मैं उसे एक आयोजन में ले गया था, जहां उसने यह कविता पढ़ी और उसे बहुत सराहना मिली। इस पकार मेरे पयास से उस लड़के के लेखन में बदलाव आ गया। उस लड़के ने धीरे-धीरे आगे पढ़ाई पूरी की और हिन्दी में महारत हासिल करता गया। मेरे सम्पर्प में इतने अधिक लोग रहते थे कि उनमें अनेक कब दृश्य-पटल से ओझल हो जाते थे, इसका भान नहीं हो पाता था। एक अन्य लड़का भी मेरे पास आया करता था, जिसने अपना नाम `हुरदंग' रख रखा था तथा अच्छी कविताएं करता था। बाद में पता नहीं वह कहां चला गया और फिर उससे भेंट नहीं हुई। इसी पकार वह मुस्लिम लड़का भी दृश्य-पटल से ओझल हो गया तथा बहुत वर्षों तक उसका कुछ अता-पता नहीं मिला। काफी समय बाद एक बार किसी ने बताया कि वह लड़का दिल्ली में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में पोफेसर हो गया है और अब हिन्दी का बड़ा साहित्यकार हो गया है। उसी दौरान एक दिन एक अखबार में उसका विस्तृत साक्षात्कार पढ़ा, जिसमें उसने इस बात का उल्लेख किया था कि उसे जीवन में किनसे पेरणा मिली। मैं पूरा साक्षात्कार पढ़ गया, किन्तु उसमें मेरा कहीं भी उल्लेख नहीं था। मैंने अपनी पत्नी को उसकी सारी पृष्ठभूमि बताई कि यदि उस लड़के के सिर पर मैंने हाथ न रखा होता और उसे भरपूर संरक्षण न दिया होता तो वह कहीं मदरसे में उर्दू का अध्यापक होकर रह गया होता। मेरी पत्नी मेरा चरित्र जानती थीं, इसलिए वह समझ गईं कि मुझे वह साक्षात्कार पढ़कर पीड़ा हुई है, अतः उन्होंने ध्यान बंटाने के लिए दूसरी बातें शुरू कर दी थीं। लेकिन मेरे दिल को आघात तो पहुंचा ही था। कुछ वर्ष हुए, किसी आयोजन में वह लड़का लखनऊ आया था। सुविख्यात रंगकर्मी विजय वास्तव के किसी परिचित का वह आयोजन था। विजय वास्तव जब मेरे पास आए तो मैंने उस लड़के के बारे में, जो अब बड़े साहित्यकार के रूप में लखनऊ आया था, सारी बातें बताईं। विजय वास्तव को आश्चर्य हुआ और शायद उन्होंने उससे मेरा उल्लेख किया होगा, क्योंकि उसका मेरे पास फोन आया। मैंने उसे इतने साल सम्पर्प न करने की उलाहना तो दी ही, साथ ही अखबार में पकाशित उसके साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि वह अपने दिल पर हाथ रखकर सोचे कि उसकी पेरणा का असली स्रोत क्या मैं नहीं था और यदि मैंने उसे संरक्षण न दिया होता तो क्या वह वर्तमान मुकाम पर पहुंचता? उसने फोन पर बताया कि अन्यत्र एक संस्मरण में उसने मेरा उल्लेख किया है तथा कहा कि वह मुझसे मिलने आएगा। लेकिन वह नहीं आया। गत दिवस विदित हुआ कि उसका लखनऊ में आयोजित `कथाक्रम' कार्यक्रम में पुनः आगमन हुआ। किन्तु इस बार तो उसने फोन करने का भी कष्ट नहीं किया। अपनी किशोरावस्था में वह जब मेरे पास आया था और उसे कविताएं करने का शौक था तो उसने अपना उपनाम `विरही' रखा था। लेकिन अब वह अपना नाम सिर्प `अब्दुल बिस्मिल्लाह' लिखता है। हां, मुझे संतोष है कि वह संभवतः अभी भी राष्ट्रवादी है तथा इस बात पर जोर देता है कि उसे मुस्लिम लेखक न कहकर केवल लेखक के रूप में जाना जाए।
मुसलमान हो, हिन्दी नहीं, उर्दू पढ़ो' बहुत साल हुए, इलाहाबाद में मेरे पास एक लड़का आया, जो वहां के "s" मुसलमानी मुहल्ले अटाला में रहता था और उसने हाई स्कूल के बाद अपने विषयों में हिन्दी ले रखी थी। मेरे आवास पर मिलने आने वालों में `रंगभारती' से जुड़े हुए हर विधा के कलाकार, खिलाड़ी, पत्रकार आदि तो होते ही थे, चूंकि मैं समाजसेवा में भी सक्रिय था, इसलिए अपनी समस्याएं लेकर आने वालों का भी मजमा रहता था। उन सबमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अध्यापक भी होते थे। उन्हीं आगंतुकों में वह मुस्लिम लड़का भी शामिल हो गया था, जिसने उर्दू विषय ले रखा था। वह मुझे बताया करता था कि कैसे उसके मुहल्ले में लोग उसे नित्य इस बात पर बहुत जलील करते हैं कि उसने अपने विषयों में उर्दू के बजाय हिन्दी क्यों ले रखी है। वह उन लोगों की पताड़ना से इतना परेशान था कि अधिकांश समय मेरे ही पास रहता था। वह विचारों से देशभक्त था तथा निर्मल हृदय था, इसीलिए वह मेरा पिय हो गया। वह साहित्यिक रुचि का था और उसे कविता करने का भी शौक था। लेकिन उसकी कवितों पेमी-पेमिका वाली स्तरहीन हुआ करती थी। मैं उससे कहता था कि वह इस तरह की कविताएं न किया करे, बल्कि आधुनिक समय की समस्याओं को अपनी कविता में उकेरे। कुछ समय पूर्व मुझे घर की सफाई के समय उसकी वह कॉपी मिली, जिसमें उसने आशिकी वाली काफी कवितों लिखी हुई थीं। उसने अपना उपनाम `विरही' रखा था। इलाहाबाद में मेरे घर परी भवन में एक सुसज्जित हॉल `केसर कक्ष' था, जिसमें मैं `रंगभारती' के तरह-तरह के आयोजन किया करता था। शास्त्राrय संगीत के कलाकार एवं लोकगीतों के गायक मेरे पास पायः आया करते थे, इसलिए उनकी महफिलें अकसर जमती थीं। `केसर कक्ष' में जब तब `रंगभारती' के बड़े-बड़े आयोजन भी हुआ करते थे। एक बार संभवतः महान गीतकार गोपाल सिंह नेपाली की जयंती पर `केसर कक्ष' में बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित था, जिसमें डॉ. रामकुमार वर्मा सहित अनेक बड़े साहित्यकार, पत्रकार, अवकाशपाप्त न्यायाधीश एवं उच्चाधिकारी मौजूद थे। मेरी शुरू से पवृत्ति रही है कि मैं नए लोगें को आगे बढ़ाता रहा हूं। उस समय भी जिस किसी में कोई गुण या हुनर दिखाई देता था, मैं उसे उस दिशा में बढ़ने के लिए अधिक से अधिक पोत्साहित किया करता था। इसीलिए देशभर में मेरे शिष्यों की संख्या अनगिनत रही। उस आगंतुक मुस्लिम लड़के की भी मैं बराबर हिम्मत बढ़ाता था कि वह अपने मुहल्ले वालों की आलोचनाओं की परवाह न करे तथा उसका मन जिस ओर आगे बढ़ना चाहता है, उस दिशा में वह आगे बढ़े। `केसर कक्ष' में आयोजित समारोह में मैंने उस लड़के का परिचय देते हुए उसे कुछ सुनाने के लिए खड़ा कर दिया। मुझे आज भी वह दृश्य अच्छी तरह याद है, वह लड़का कुछ सुनाने के बजाय बड़ी जोर से रोने लगा था। बड़ी मुश्किल से उसे चुप कराया गया तो उसने कहा कि उसे जीवन में कभी कल्पना नहीं हो सकती थी कि इतने महान लोगों के सामने उसे बै"ने का सौभाग्य मिलेगा। हवा खिलाफ है। मैं उसे एक आयोजन में ले गया था, जहां उसने यह कविता पढ़ी और उसे बहुत सराहना मिली। इस पकार मेरे पयास से उस लड़के के लेखन में बदलाव आ गया। उस लड़के ने धीरे-धीरे आगे पढ़ाई पूरी की और हिन्दी में महारत हासिल करता गया। मेरे सम्पर्प में इतने अधिक लोग रहते थे कि उनमें अनेक कब दृश्य-पटल से ओझल हो जाते थे, इसका भान नहीं हो पाता था। एक अन्य लड़का भी मेरे पास आया करता था, जिसने अपना नाम `हुरदंग' रख रखा था तथा अच्छी कविताएं करता था। बाद में पता नहीं वह कहां चला गया और फिर उससे भेंट नहीं हुई। इसी पकार वह मुस्लिम लड़का भी दृश्य-पटल से ओझल हो गया तथा बहुत वर्षों तक उसका कुछ अता-पता नहीं मिला। काफी समय बाद एक बार किसी ने बताया कि वह लड़का दिल्ली में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में पोफेसर हो गया है और अब हिन्दी का बड़ा साहित्यकार हो गया है। उसी दौरान एक दिन एक अखबार में उसका विस्तृत साक्षात्कार पढ़ा, जिसमें उसने इस बात का उल्लेख किया था कि उसे जीवन में किनसे पेरणा मिली। मैं पूरा साक्षात्कार पढ़ गया, किन्तु उसमें मेरा कहीं भी उल्लेख नहीं था। मैंने अपनी पत्नी को उसकी सारी पृष्ठभूमि बताई कि यदि उस लड़के के सिर पर मैंने हाथ न रखा होता और उसे भरपूर संरक्षण न दिया होता तो वह कहीं मदरसे में उर्दू का अध्यापक होकर रह गया होता। मेरी पत्नी मेरा चरित्र जानती थीं, इसलिए वह समझ गईं कि मुझे वह साक्षात्कार पढ़कर पीड़ा हुई है, अतः उन्होंने ध्यान बंटाने के लिए दूसरी बातें शुरू कर दी थीं। लेकिन मेरे दिल को आघात तो पहुंचा ही था। कुछ वर्ष हुए, किसी आयोजन में वह लड़का लखनऊ आया था। सुविख्यात रंगकर्मी विजय वास्तव के किसी परिचित का वह आयोजन था। विजय वास्तव जब मेरे पास आए तो मैंने उस लड़के के बारे में, जो अब बड़े साहित्यकार के रूप में लखनऊ आया था, सारी बातें बताईं। विजय वास्तव को आश्चर्य हुआ और शायद उन्होंने उससे मेरा उल्लेख किया होगा, क्योंकि उसका मेरे पास फोन आया। मैंने उसे इतने साल सम्पर्प न करने की उलाहना तो दी ही, साथ ही अखबार में पकाशित उसके साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि वह अपने दिल पर हाथ रखकर सोचे कि उसकी पेरणा का असली स्रोत क्या मैं नहीं था और यदि मैंने उसे संरक्षण न दिया होता तो क्या वह वर्तमान मुकाम पर पहुंचता? उसने फोन पर बताया कि अन्यत्र एक संस्मरण में उसने मेरा उल्लेख किया है तथा कहा कि वह मुझसे मिलने आएगा। लेकिन वह नहीं आया। गत दिवस विदित हुआ कि उसका लखनऊ में आयोजित `कथाक्रम' कार्यक्रम में पुनः आगमन हुआ। किन्तु इस बार तो उसने फोन करने का भी कष्ट नहीं किया। अपनी किशोरावस्था में वह जब मेरे पास आया था और उसे कविताएं करने का शौक था तो उसने अपना उपनाम `विरही' रखा था। लेकिन अब वह अपना नाम सिर्प `अब्दुल बिस्मिल्लाह' लिखता है। हां, मुझे संतोष है कि वह संभवतः अभी भी राष्ट्रवादी है तथा इस बात पर जोर देता है कि उसे मुस्लिम लेखक न कहकर केवल लेखक के रूप में जाना जाए।
आनलाइन ठग गिरोह ने निडाना गांव के एक युवक को एचडीएफसी बैंक में कैशियर लगवाने का झांसा देकर एक लाख चार हजार 898 रुपये हड़प लिए। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। जींद, जागरण संवाददाताः आनलाइन ठग गिरोह ने निडाना गांव के एक युवक को एचडीएफसी बैंक में कैशियर लगवाने का झांसा देकर एक लाख चार हजार 898 रुपये हड़प लिए। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। गांव निडाना निवासी सुमित ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक मई को उसने ओएलएक्स पर एचडीएफसी बैंक में नौकरी से संबंधित विज्ञापन देखा था। जब उसने विज्ञापन को खोलकर देखा तो सामने वाले आरोपित ने पहले अपना नंबर दिया और बाद में मेरा नंबर मांगा। इसके बाद उसने नौकरी लगवाने से संबंधित दस्तावेज मांगे और आवेदन की फीस के तौर पर 272 रुपये फोन पे के माध्यम से करवा लिए। इसके बाद आरोपित नए-नए बहाने बनाकर नौ मई तक कुल एक लाख चार हजार 898 रुपये अपने खाते में डलवा लिए। इसके बाद आरोपित ने वाट्सएप के माध्यम से जींद एचडीएफसी बैंक ब्रांच में कैशियर के पद का ज्वाइनिंग लेटर भेज दिया। इस दौरान आरोपित ने कहा कि वर्दी व आइ कार्ड उनको जींद ब्रांच से ही मिलेगा। इसके बाद आरोपितों ने फिर से रुपये की डिमांड करनी शुरू कर दी। इस पर उसको शक हो गया और उसने बैंक में जाकर पता किया तो वह ज्वाइनिंग लेटर फर्जी मिला। बाद में इसकी शिकायत साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी। जांच अधिकारी एएसआइ जगदीप सिंह ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। फोन नंबर के माध्यम से आरोपितों की पहचान की जा रही है।
आनलाइन ठग गिरोह ने निडाना गांव के एक युवक को एचडीएफसी बैंक में कैशियर लगवाने का झांसा देकर एक लाख चार हजार आठ सौ अट्ठानवे रुपयापये हड़प लिए। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। जींद, जागरण संवाददाताः आनलाइन ठग गिरोह ने निडाना गांव के एक युवक को एचडीएफसी बैंक में कैशियर लगवाने का झांसा देकर एक लाख चार हजार आठ सौ अट्ठानवे रुपयापये हड़प लिए। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। गांव निडाना निवासी सुमित ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक मई को उसने ओएलएक्स पर एचडीएफसी बैंक में नौकरी से संबंधित विज्ञापन देखा था। जब उसने विज्ञापन को खोलकर देखा तो सामने वाले आरोपित ने पहले अपना नंबर दिया और बाद में मेरा नंबर मांगा। इसके बाद उसने नौकरी लगवाने से संबंधित दस्तावेज मांगे और आवेदन की फीस के तौर पर दो सौ बहत्तर रुपयापये फोन पे के माध्यम से करवा लिए। इसके बाद आरोपित नए-नए बहाने बनाकर नौ मई तक कुल एक लाख चार हजार आठ सौ अट्ठानवे रुपयापये अपने खाते में डलवा लिए। इसके बाद आरोपित ने वाट्सएप के माध्यम से जींद एचडीएफसी बैंक ब्रांच में कैशियर के पद का ज्वाइनिंग लेटर भेज दिया। इस दौरान आरोपित ने कहा कि वर्दी व आइ कार्ड उनको जींद ब्रांच से ही मिलेगा। इसके बाद आरोपितों ने फिर से रुपये की डिमांड करनी शुरू कर दी। इस पर उसको शक हो गया और उसने बैंक में जाकर पता किया तो वह ज्वाइनिंग लेटर फर्जी मिला। बाद में इसकी शिकायत साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी। जांच अधिकारी एएसआइ जगदीप सिंह ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। फोन नंबर के माध्यम से आरोपितों की पहचान की जा रही है।
दुबई। आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे ईशान किशन को सुपर ओवर में बल्लेबाजी के लिए नहीं भेजने के मुंबई इंडियन्स के फैसले ने कई लोगों को हैरान किया होगा लेकिन टीम के मुख्य कोच महेला जयवर्धने ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें अपने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा था कि वे काम पूरा करेंगे। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए विकेटकीपर बल्लेबाज किशन (99) और कीरोन पोलार्ड (60) की पारियों की बदौलत मुंबई की टीम ने वापसी की। मैच का नतीजा हालांकि सुपर ओवर से निकला जहां गत चैंपियन टीम ने पोलार्ड के साथ हार्दिक पांड्या को भेजने का फैसला किया। यह रणनीति हालांकि नाकाम रही और नवदीप सैनी के ओवर में टीम सात रन ही जुटा सकी और मैच हार गई। जयवर्धने ने कहा कि लंबी पारी खेलने के बाद किशन थकान महसूस कर रहे थे। इस श्रीलंकाई कोच ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अगर आप देख सकते तो उस समय वह(किशन) काफी थका हुआ था और हम सोच रहे थे कि हमें कुछ तरोताजा खिलाड़ियों की जरूरत है जो बड़े शॉट खेल सकें। उन्होंने कहा कि बाद में ऐसा कहना आसान है लेकिन पोलार्ड और हार्दिक ने अतीत में सुपर ओवर में अच्छा काम किया है, दो अनुभवी खिलाड़ी जो काम को अंजाम देने में सक्षम हैं।
दुबई। आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे ईशान किशन को सुपर ओवर में बल्लेबाजी के लिए नहीं भेजने के मुंबई इंडियन्स के फैसले ने कई लोगों को हैरान किया होगा लेकिन टीम के मुख्य कोच महेला जयवर्धने ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें अपने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा था कि वे काम पूरा करेंगे। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के दो सौ दो रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए विकेटकीपर बल्लेबाज किशन और कीरोन पोलार्ड की पारियों की बदौलत मुंबई की टीम ने वापसी की। मैच का नतीजा हालांकि सुपर ओवर से निकला जहां गत चैंपियन टीम ने पोलार्ड के साथ हार्दिक पांड्या को भेजने का फैसला किया। यह रणनीति हालांकि नाकाम रही और नवदीप सैनी के ओवर में टीम सात रन ही जुटा सकी और मैच हार गई। जयवर्धने ने कहा कि लंबी पारी खेलने के बाद किशन थकान महसूस कर रहे थे। इस श्रीलंकाई कोच ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अगर आप देख सकते तो उस समय वह काफी थका हुआ था और हम सोच रहे थे कि हमें कुछ तरोताजा खिलाड़ियों की जरूरत है जो बड़े शॉट खेल सकें। उन्होंने कहा कि बाद में ऐसा कहना आसान है लेकिन पोलार्ड और हार्दिक ने अतीत में सुपर ओवर में अच्छा काम किया है, दो अनुभवी खिलाड़ी जो काम को अंजाम देने में सक्षम हैं।
चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर थाने में पुलिसकर्मी उस वक्त सकते में आ गए, जब एक बुजुर्ग शख्स ने उनको आकर कहा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है. उसकी लाश गांव में पड़ी है. सूचना पर पुलिस आनन-फानन में बुजुर्ग द्वारा बताए गए गांव में पहुंची तो वहां एक महिला का शव पड़ा था. पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर सूचना देने वाले शख्स को हिरासत में ले लिया. भूपालसागर थाना इलाके के गुलाबपुरा निवासी बुजुर्ग हजारी जाट (65) ने गुरुवार रात को अपनी पत्नी टम्मुबाई की हत्या कर दी थी. हत्या करने के बाद वह सीधा रात करीब दस बजे बाद भूपालपुरा पुलिस थाने पहुंचा. वहां उसने पुलिसकर्मियों को हत्या की जानकारी दी. इससे पुलिसकर्मी भौंचक्के रह गए. पुलिसकर्मी उसे लेकर तत्काल उसके बताए पते पर गुलाबपुरा गांव पहुंचे और शव को कब्जे में लिया. पुलिस की प्रारंभिक तफ्तीश में सामने आया है कि हजारी ने पत्नी टम्मूबाई के सिर में लठ से वार किया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी. पति और पत्नी दोनों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा बताया जा रहा है. इसके चलते पति-पत्नी दोनों ही अलग-अलग रह रहे थे. दोनों के तीन पुत्र हैं. हजारीलाल खेत पर बने मकान पर रह रहा था. जबकि टम्मूबाई एक बेटे के पास रह रही थी. पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में ले लिया है. वह मामले की जांच में जुटी है. .
चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर थाने में पुलिसकर्मी उस वक्त सकते में आ गए, जब एक बुजुर्ग शख्स ने उनको आकर कहा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है. उसकी लाश गांव में पड़ी है. सूचना पर पुलिस आनन-फानन में बुजुर्ग द्वारा बताए गए गांव में पहुंची तो वहां एक महिला का शव पड़ा था. पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर सूचना देने वाले शख्स को हिरासत में ले लिया. भूपालसागर थाना इलाके के गुलाबपुरा निवासी बुजुर्ग हजारी जाट ने गुरुवार रात को अपनी पत्नी टम्मुबाई की हत्या कर दी थी. हत्या करने के बाद वह सीधा रात करीब दस बजे बाद भूपालपुरा पुलिस थाने पहुंचा. वहां उसने पुलिसकर्मियों को हत्या की जानकारी दी. इससे पुलिसकर्मी भौंचक्के रह गए. पुलिसकर्मी उसे लेकर तत्काल उसके बताए पते पर गुलाबपुरा गांव पहुंचे और शव को कब्जे में लिया. पुलिस की प्रारंभिक तफ्तीश में सामने आया है कि हजारी ने पत्नी टम्मूबाई के सिर में लठ से वार किया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी. पति और पत्नी दोनों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा बताया जा रहा है. इसके चलते पति-पत्नी दोनों ही अलग-अलग रह रहे थे. दोनों के तीन पुत्र हैं. हजारीलाल खेत पर बने मकान पर रह रहा था. जबकि टम्मूबाई एक बेटे के पास रह रही थी. पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में ले लिया है. वह मामले की जांच में जुटी है. .
जिराफ - पृथ्वी पर सबसे अद्भुत जानवरों में से एक। यह शरीर के अन्य बहुत बेतुका संरचना से अलग हैः बेहद लंबी गर्दन और पैर (और वापस सामने की तुलना में कम), पीठ, जो एक विकर्ण ढलान, व्यर्थ सींग है . . . लेकिन यह सब नहीं रोकता जिराफ काफी सुंदर जीव हो, इसके अलावा में, में सबसे अधिक ग्रह। यह सब तथ्य यह है कि इन जानवरों की छवि ललित कला में बहुत लोकप्रिय है करने के लिए योगदान देता है। उनके विशिष्ट सिल्हूट तुरंत गर्म देशों जहां वे रहते हैं अप जादू। इसलिए, कैसे एक जिराफ़, रुचि बहुत कई कलाकारों, दोनों शुरुआती और अनुभवी आकर्षित करने के लिए का सवाल। विशेष रूप से, कैसे संरचना की सुविधाओं पर जोर देना पशु के अनुपात में प्रतिनिधित्व करने के लिए। इसके अलावा दिलचस्प पहलू और सामग्री है कि ज्यादातर सवाना बढ़ रहे हैं, जिस पर उमसदार वातावरण पैर सुंदर भटक। पेस्टल, मोम crayons, स्याही, स्याही - वहाँ काफी रोचक विकल्पों में से एक बहुत कुछ है। इसलिए, हम केवल कैसे एक पेंसिल, कलम या किसी अन्य उपलब्ध सामग्री के साथ एक जिराफ आकर्षित करने के लिए का जवाब जलाया जाएगा। छवि में रंग भरें आप खुद करने का अवसर दे देंगे। इस लेख में हम कैसे एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए पर कुछ ही विकल्प पर दिखेगा। आप कार्टून शैली में वयस्क पशु, और पिल्ला है, जो, संस्करण के आधार पर, एक पूरी तरह से यथार्थवादी जानवरों और परियों की कहानी पात्रों के रूप में रूप ले सकते हैं चित्रित करने के लिए कैसे सीखना होगा। के बाद से शुरुआत कलाकार मुश्किल सामान्य निर्देशों का पालन करने के लिए, हम आपको बताएगा कि चरणों में एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए, और प्रत्येक चरण को दर्शाते हैं। काम की शुरुआत में जानवर की आधारभूत हिस्सा रूपरेखा तैयार करने के होना चाहिए। शरीर, गर्दन की लंबाई और थूथन के आकार के आकार का निर्धारण। अब तक जोड़ें। थूथन चित्रित और अयाल, कान, सींग, पूंछ जोड़ें। इन जानवरों में यह काफी kototky (विशेष रूप से शरीर के अन्य भागों की तुलना में) है, अंत पर एक गुच्छा के साथ। हमारे ड्राइंग लगभग समाप्त हो गया है। यह केवल एक जिराफ की त्वचा की विशेषता स्पॉट जोड़ने के लिए बनी हुई है। अब काम पूरा हो गया है। अतिरिक्त लाइनें, स्ट्रोक एक पथ को हटाने और परिणाम का आनंद लें। कैसे रंग में एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए? ऐसा करने के लिए, आप इस तरह gouache या पानी के रंग के रूप में किसी भी रंग एजेंटों, उपयोग कर सकते हैं, या एक छवि स्कैन और का उपयोग ग्राफिक्स कार्यक्रम। यहाँ काम "फ़ोटोशॉप" गैर-पेशेवर उपयोगकर्ता में किया हैः कैसे एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए, फिर भी परिपक्वता की उम्र तक नहीं पहुंचे हैं? सिद्धांत रूप में, प्रौद्योगिकी ही रहता हैः पहला बड़ा अनुपात छीन, और फिर प्रत्येक तैयार की शरीर के अंग। लेकिन एक बच्चे के साथ मामले में पता है कि बच्चे के शरीर के सबसे लंबे समय तक हिस्सा नेत्रहीन पैर है होना चाहिए। इसके अलावा, एक छोटे जिराफ़ सींग अभी तक पूरी तरह का गठन नहीं किया गया है। तो, हम आकृति बाहर स्केच शुरू करते हैं। हमारे बच्चे इतने लंबे समय के रूप में अपने पैरों को अकेला छोड़ दिया जा सकता है, घास पर झूठ होगा। हम एक थूथन पाश निर्दिष्ट करें। आंखों, नाक, कान जोड़ें। गर्दन जोड़ें। अब हम अपने पैरों पर काम कर रहे हैं। सबसे पहले, सामने से अधिक। अब, पीछे से अधिक। अंत में बालों का एक गुच्छा के साथ पूंछ जोड़ें। और त्वचा के धब्बे रंग। अतिरिक्त लाइनें निकालें। अपने बच्चे को जिराफ पर भित्तिचित्रों के बाद कुछ इस तरह दिखाई सकता है। हमें उम्मीद है कि हमारे सबक आप के लिए उपयोगी था, और अब आप बिना किसी कठिनाई के सवाना के इस निवासी चित्रित करने के लिए सक्षम हो जाएगा।
जिराफ - पृथ्वी पर सबसे अद्भुत जानवरों में से एक। यह शरीर के अन्य बहुत बेतुका संरचना से अलग हैः बेहद लंबी गर्दन और पैर , पीठ, जो एक विकर्ण ढलान, व्यर्थ सींग है . . . लेकिन यह सब नहीं रोकता जिराफ काफी सुंदर जीव हो, इसके अलावा में, में सबसे अधिक ग्रह। यह सब तथ्य यह है कि इन जानवरों की छवि ललित कला में बहुत लोकप्रिय है करने के लिए योगदान देता है। उनके विशिष्ट सिल्हूट तुरंत गर्म देशों जहां वे रहते हैं अप जादू। इसलिए, कैसे एक जिराफ़, रुचि बहुत कई कलाकारों, दोनों शुरुआती और अनुभवी आकर्षित करने के लिए का सवाल। विशेष रूप से, कैसे संरचना की सुविधाओं पर जोर देना पशु के अनुपात में प्रतिनिधित्व करने के लिए। इसके अलावा दिलचस्प पहलू और सामग्री है कि ज्यादातर सवाना बढ़ रहे हैं, जिस पर उमसदार वातावरण पैर सुंदर भटक। पेस्टल, मोम crayons, स्याही, स्याही - वहाँ काफी रोचक विकल्पों में से एक बहुत कुछ है। इसलिए, हम केवल कैसे एक पेंसिल, कलम या किसी अन्य उपलब्ध सामग्री के साथ एक जिराफ आकर्षित करने के लिए का जवाब जलाया जाएगा। छवि में रंग भरें आप खुद करने का अवसर दे देंगे। इस लेख में हम कैसे एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए पर कुछ ही विकल्प पर दिखेगा। आप कार्टून शैली में वयस्क पशु, और पिल्ला है, जो, संस्करण के आधार पर, एक पूरी तरह से यथार्थवादी जानवरों और परियों की कहानी पात्रों के रूप में रूप ले सकते हैं चित्रित करने के लिए कैसे सीखना होगा। के बाद से शुरुआत कलाकार मुश्किल सामान्य निर्देशों का पालन करने के लिए, हम आपको बताएगा कि चरणों में एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए, और प्रत्येक चरण को दर्शाते हैं। काम की शुरुआत में जानवर की आधारभूत हिस्सा रूपरेखा तैयार करने के होना चाहिए। शरीर, गर्दन की लंबाई और थूथन के आकार के आकार का निर्धारण। अब तक जोड़ें। थूथन चित्रित और अयाल, कान, सींग, पूंछ जोड़ें। इन जानवरों में यह काफी kototky है, अंत पर एक गुच्छा के साथ। हमारे ड्राइंग लगभग समाप्त हो गया है। यह केवल एक जिराफ की त्वचा की विशेषता स्पॉट जोड़ने के लिए बनी हुई है। अब काम पूरा हो गया है। अतिरिक्त लाइनें, स्ट्रोक एक पथ को हटाने और परिणाम का आनंद लें। कैसे रंग में एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए? ऐसा करने के लिए, आप इस तरह gouache या पानी के रंग के रूप में किसी भी रंग एजेंटों, उपयोग कर सकते हैं, या एक छवि स्कैन और का उपयोग ग्राफिक्स कार्यक्रम। यहाँ काम "फ़ोटोशॉप" गैर-पेशेवर उपयोगकर्ता में किया हैः कैसे एक जिराफ़ आकर्षित करने के लिए, फिर भी परिपक्वता की उम्र तक नहीं पहुंचे हैं? सिद्धांत रूप में, प्रौद्योगिकी ही रहता हैः पहला बड़ा अनुपात छीन, और फिर प्रत्येक तैयार की शरीर के अंग। लेकिन एक बच्चे के साथ मामले में पता है कि बच्चे के शरीर के सबसे लंबे समय तक हिस्सा नेत्रहीन पैर है होना चाहिए। इसके अलावा, एक छोटे जिराफ़ सींग अभी तक पूरी तरह का गठन नहीं किया गया है। तो, हम आकृति बाहर स्केच शुरू करते हैं। हमारे बच्चे इतने लंबे समय के रूप में अपने पैरों को अकेला छोड़ दिया जा सकता है, घास पर झूठ होगा। हम एक थूथन पाश निर्दिष्ट करें। आंखों, नाक, कान जोड़ें। गर्दन जोड़ें। अब हम अपने पैरों पर काम कर रहे हैं। सबसे पहले, सामने से अधिक। अब, पीछे से अधिक। अंत में बालों का एक गुच्छा के साथ पूंछ जोड़ें। और त्वचा के धब्बे रंग। अतिरिक्त लाइनें निकालें। अपने बच्चे को जिराफ पर भित्तिचित्रों के बाद कुछ इस तरह दिखाई सकता है। हमें उम्मीद है कि हमारे सबक आप के लिए उपयोगी था, और अब आप बिना किसी कठिनाई के सवाना के इस निवासी चित्रित करने के लिए सक्षम हो जाएगा।
भारत-नेपाल सीमा से लगे हुए उत्तराखंड (Uttarakhand) के पिथौरागढ़ में बादल फट गया। जानकारी के मुताबिक यह घटना बीती रात लगभग 1 बजे के आसपास घटी। इस आपदा में बड़ी मात्रा में तबाही की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वहां पर बादल फटने से करीब 30 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके साथ ही एक महिला की मौत भी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के फलस्वरूप हो गई। जानकारी के मुताबिक इस दुर्घटना से पिथौरागढ़ के धारचूला के खोतिला गांव में सबसे ज्यादा तबाही हुई। मौसम विभाग के अनुसार जहां मध्य प्रदेश में आज तापमान में काफी अधिकता देखी जा रही है, वहीं प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बूंदाबांदी से लेकर सामान्य बारिश भी देखी गई है। हालाकिं प्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी इलाके तेज बारिश होने जैसी घटनाओं की सुचना मौसम विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। प्रदेश में जहां मानसून की विदाई हो चुकी है, वहीं नए बन रहे वेदर सिस्टम अभी भी बारिश के आसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में बना रहे हैं। इस वर्ष के मानसून में जहां एक ओर देश के विभिन्न राज्यों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई है और साथ ही पर्वतीय राज्यों में बादल फटने जैसी घटनाएं भी देखी गईं, वहीं भारत के उत्तरप्रदेश और बिहार राज्य इस वर्ष मानसून की बेरुखी का शिकार नजर आए। इस वर्ष बारिश के मौसम के आगमन के बाद से ही इन दोनों राज्य के निवासी बारिश की बाँट जोह रहे हैं, जोकि अबतक जारी है। अभी तक इन दोनों राज्यों में सामान्य से बहुत ही कम वर्षा दर्ज की गई है।
भारत-नेपाल सीमा से लगे हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बादल फट गया। जानकारी के मुताबिक यह घटना बीती रात लगभग एक बजे के आसपास घटी। इस आपदा में बड़ी मात्रा में तबाही की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वहां पर बादल फटने से करीब तीस घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके साथ ही एक महिला की मौत भी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के फलस्वरूप हो गई। जानकारी के मुताबिक इस दुर्घटना से पिथौरागढ़ के धारचूला के खोतिला गांव में सबसे ज्यादा तबाही हुई। मौसम विभाग के अनुसार जहां मध्य प्रदेश में आज तापमान में काफी अधिकता देखी जा रही है, वहीं प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बूंदाबांदी से लेकर सामान्य बारिश भी देखी गई है। हालाकिं प्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी इलाके तेज बारिश होने जैसी घटनाओं की सुचना मौसम विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। प्रदेश में जहां मानसून की विदाई हो चुकी है, वहीं नए बन रहे वेदर सिस्टम अभी भी बारिश के आसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में बना रहे हैं। इस वर्ष के मानसून में जहां एक ओर देश के विभिन्न राज्यों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई है और साथ ही पर्वतीय राज्यों में बादल फटने जैसी घटनाएं भी देखी गईं, वहीं भारत के उत्तरप्रदेश और बिहार राज्य इस वर्ष मानसून की बेरुखी का शिकार नजर आए। इस वर्ष बारिश के मौसम के आगमन के बाद से ही इन दोनों राज्य के निवासी बारिश की बाँट जोह रहे हैं, जोकि अबतक जारी है। अभी तक इन दोनों राज्यों में सामान्य से बहुत ही कम वर्षा दर्ज की गई है।
यासिर की डायरी में हिंदी सैड सॉन्ग भी मिले हैं, जैसे कि भुला देना मुझे'. . . । दूसर पन्नों में दिल टूटने, जीवन और मृत्यु को लेकर बाते लिखी गई हैं। वह लिखता है, 'मैं अपनी जिंदगी से नफरत करता हूं। ' जम्मू-कश्मीर के महानिदेशक (कारागार) हेमंत कुमार लोहिया की हत्या के मामले में उनके घरेलू सहायक को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने एक बयान में बताया कि पूरी रात तलाश अभियान चलाने के बाद यासिर लोहार (23) को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि उसे कान्हाचक इलाके के एक खेत से गिरफ्तार किया गया। वह रामबन जिले के हल्ला-धंडरथ गांव का निवासी है। पुलिस के हाथ आरोपी यासिर की डायरी लगी है, जिससे साफ पता चलता है कि वह डिप्रेशन में था। यासिर की डायरी में हिंदी सैड सॉन्ग भी मिले हैं, जैसे कि भुला देना मुझे. . . । दूसरे पन्नों में दिल टूटने, जीवन और मृत्यु को लेकर बाते लिखी गई हैं। वह लिखता है, 'मैं अपनी जिंदगी से नफरत करता हूं। जिंदगी तो बस तकलीफ देती है। सुख तो अब मौत ही देती है। मैं फिर से अपने जीवन की शुरुआत करना चाहता हूं। ' आरोपी यासिर एक जगह लिखता है कि उसकी जिंदगी में प्यार 0%, तनाव 90%, दुख 100% और फेक स्माइल 100% है। डायरी के एक अन्य पेज में उसने लिखा, 'डियर डेथ, कृपया मेरे जीवन में आओ। मैं हमेशा से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। ' आरोपी ने इसमें शायरियां भी लिखी हैं। इन शायरियों में उसने अपनी जिंदगी को खत्म करने का संकेत दिए हैं। वह लिखता है, 'हम डूबते हैं, डूबने दो. . . हम मरते हैं, तो मरने दो. . . पर अब कोई झूठापन मत दिखाओ। ' 'गला काटने के लिए 'केचप' की टूटी हुई बोतल का इस्तेमाल' अधिकारियों ने बताया कि लोहिया सोमवार रात जम्मू के बाहरी इलाके में अपने घर पर मृत मिले थे। उनके शरीर पर जलने के घाव थे और उनका गला रेता गया था। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जम्मू क्षेत्र) मुकेश सिंह ने बताया कि लोहिया 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी थे। घटना स्थल की प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि लोहिया ने अपने पैर में तेल लगाया होगा, जिनमें सूजन दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि हत्यारे ने लोहिया का गला काटने के लिए 'केचप' की टूटी हुई बोतल का इस्तेमाल किया और बाद में शव जलाने की भी कोशिश की। एडीजीपी ने कहा कि अधिकारी के आवास पर मौजूद चौकीदारों ने उनके कमरे के अंदर आग लगी हुई देखी। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़ना पड़ा। एडीजीपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारी के निधन गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि घटना स्थल से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध आरोपी को अपराध के बाद भागते हुए देखा गया। लोहर करीब 6 महीने से इस घर में काम कर रहा था। जांच में पता चला कि वह काफी उग्र मिजाज का व्यक्ति था और अवसाद में भी था।
यासिर की डायरी में हिंदी सैड सॉन्ग भी मिले हैं, जैसे कि भुला देना मुझे'. . . । दूसर पन्नों में दिल टूटने, जीवन और मृत्यु को लेकर बाते लिखी गई हैं। वह लिखता है, 'मैं अपनी जिंदगी से नफरत करता हूं। ' जम्मू-कश्मीर के महानिदेशक हेमंत कुमार लोहिया की हत्या के मामले में उनके घरेलू सहायक को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने एक बयान में बताया कि पूरी रात तलाश अभियान चलाने के बाद यासिर लोहार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि उसे कान्हाचक इलाके के एक खेत से गिरफ्तार किया गया। वह रामबन जिले के हल्ला-धंडरथ गांव का निवासी है। पुलिस के हाथ आरोपी यासिर की डायरी लगी है, जिससे साफ पता चलता है कि वह डिप्रेशन में था। यासिर की डायरी में हिंदी सैड सॉन्ग भी मिले हैं, जैसे कि भुला देना मुझे. . . । दूसरे पन्नों में दिल टूटने, जीवन और मृत्यु को लेकर बाते लिखी गई हैं। वह लिखता है, 'मैं अपनी जिंदगी से नफरत करता हूं। जिंदगी तो बस तकलीफ देती है। सुख तो अब मौत ही देती है। मैं फिर से अपने जीवन की शुरुआत करना चाहता हूं। ' आरोपी यासिर एक जगह लिखता है कि उसकी जिंदगी में प्यार शून्य%, तनाव नब्बे%, दुख एक सौ% और फेक स्माइल एक सौ% है। डायरी के एक अन्य पेज में उसने लिखा, 'डियर डेथ, कृपया मेरे जीवन में आओ। मैं हमेशा से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। ' आरोपी ने इसमें शायरियां भी लिखी हैं। इन शायरियों में उसने अपनी जिंदगी को खत्म करने का संकेत दिए हैं। वह लिखता है, 'हम डूबते हैं, डूबने दो. . . हम मरते हैं, तो मरने दो. . . पर अब कोई झूठापन मत दिखाओ। ' 'गला काटने के लिए 'केचप' की टूटी हुई बोतल का इस्तेमाल' अधिकारियों ने बताया कि लोहिया सोमवार रात जम्मू के बाहरी इलाके में अपने घर पर मृत मिले थे। उनके शरीर पर जलने के घाव थे और उनका गला रेता गया था। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने बताया कि लोहिया एक हज़ार नौ सौ बानवे बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे। घटना स्थल की प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि लोहिया ने अपने पैर में तेल लगाया होगा, जिनमें सूजन दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि हत्यारे ने लोहिया का गला काटने के लिए 'केचप' की टूटी हुई बोतल का इस्तेमाल किया और बाद में शव जलाने की भी कोशिश की। एडीजीपी ने कहा कि अधिकारी के आवास पर मौजूद चौकीदारों ने उनके कमरे के अंदर आग लगी हुई देखी। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़ना पड़ा। एडीजीपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारी के निधन गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि घटना स्थल से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध आरोपी को अपराध के बाद भागते हुए देखा गया। लोहर करीब छः महीने से इस घर में काम कर रहा था। जांच में पता चला कि वह काफी उग्र मिजाज का व्यक्ति था और अवसाद में भी था।
कराची। पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर Zulqarnain Haider ने आरोप लगाया कि साथी खिलाड़ी Umar Akmal द्वारा दी जा रही धमकियों की वजह से उन्हें साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान दूसरे देश भागना पड़ा था। Zulqarnain Haider ने दावा किया कि Umar Akmal और उस समय के टीम के कुछ साथियों की धमकी के बाद वे दुबई में टीम के होटल से अचानक रहस्यमयी परिस्थितियों में लंदन रवाना हो गए थे। Zulqarnain Haider ने कहा कि सीरीज के तीसरे वनडे में खराब प्रदर्शन करने से इंकार करने के बाद उमर अकमल और साथी खिलाड़ियों से मिल रही धमकियों के चलते वे डर के मारे भाग गए थे। जुल्करनैन ने कहा, 'मुझे याद है कि मैंने उमर अकमल से कहा था कि वे अपना काम करे और ड्रिंक्स ले जाए। इसके बाद उमर और कुछ अन्य साथियों ने मुझे सीधे तौर पर इतनी बार धमकियां दी कि मैं मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव में आ गया और बगैर किसी को बताए लंदन रवाना हो गया। ' नवंबर 2010 में हुई इस घटना की वजह से जुल्करनैन के इंटरनेशनल क्रिकेट करियर पर विराम लग गया था। जुल्करनैन ने कहा, सट्टेबाजों द्वारा किए गए एप्रोच की जानकारी की वजह से उमर अकमल पर लगाया गया तीन साल का बैन मामूली सजा है। उमर इस तरह की डील में शामिल रहे हैं और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के साथ ही उनकी संपत्ति को भी जब्त किया जाना चाहिए। जुल्करनैन ने 2010 में बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में 88 रन बनाए थे, वे उस मैच में कामरान अकमल की जगह खेले थे। जुल्करनैन ने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन को बता दिया था कि उमर अकमल उन पर खराब प्रदर्शन करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्हें अनजान लोगों से भी धमकियां मिल रही थी और यह दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाने की वजह से वे लंदन चले गए थे। पाक टीम में वापसी नहीं कर पाएः गृहमंत्री रहमान मलिक द्वारा आश्वसन दिए जाने के बाद जुल्करनैन 2011 में लाहौर वापस लौटे थे लेकिन वे अपने क्रिकेट करियर को पटरी पर नहीं ला सके थे। पाकिस्तान टीम के उस समय के मैनेजर इंतिखाब आलम ने कहा था कि जुल्करनैन के साथ मानसिक समस्या है। जुल्करनैन का इंटरनेशनल करियर : जुल्करनैन ने इंटरनेशनल डेब्यू 2 फरवरी 2007 को जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 मैच में किया था। अपने छोटे करियर में उन्होंने 1 टेस्ट, 4 वनडे और 3 टी20 मैचों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया। उनका अंतिम मैच 5 नवंबर 2010 को दुबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहा जो इंटरनेशनल वनडे था।
कराची। पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर Zulqarnain Haider ने आरोप लगाया कि साथी खिलाड़ी Umar Akmal द्वारा दी जा रही धमकियों की वजह से उन्हें साल दो हज़ार दस में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान दूसरे देश भागना पड़ा था। Zulqarnain Haider ने दावा किया कि Umar Akmal और उस समय के टीम के कुछ साथियों की धमकी के बाद वे दुबई में टीम के होटल से अचानक रहस्यमयी परिस्थितियों में लंदन रवाना हो गए थे। Zulqarnain Haider ने कहा कि सीरीज के तीसरे वनडे में खराब प्रदर्शन करने से इंकार करने के बाद उमर अकमल और साथी खिलाड़ियों से मिल रही धमकियों के चलते वे डर के मारे भाग गए थे। जुल्करनैन ने कहा, 'मुझे याद है कि मैंने उमर अकमल से कहा था कि वे अपना काम करे और ड्रिंक्स ले जाए। इसके बाद उमर और कुछ अन्य साथियों ने मुझे सीधे तौर पर इतनी बार धमकियां दी कि मैं मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव में आ गया और बगैर किसी को बताए लंदन रवाना हो गया। ' नवंबर दो हज़ार दस में हुई इस घटना की वजह से जुल्करनैन के इंटरनेशनल क्रिकेट करियर पर विराम लग गया था। जुल्करनैन ने कहा, सट्टेबाजों द्वारा किए गए एप्रोच की जानकारी की वजह से उमर अकमल पर लगाया गया तीन साल का बैन मामूली सजा है। उमर इस तरह की डील में शामिल रहे हैं और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के साथ ही उनकी संपत्ति को भी जब्त किया जाना चाहिए। जुल्करनैन ने दो हज़ार दस में बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में अठासी रन बनाए थे, वे उस मैच में कामरान अकमल की जगह खेले थे। जुल्करनैन ने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन को बता दिया था कि उमर अकमल उन पर खराब प्रदर्शन करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्हें अनजान लोगों से भी धमकियां मिल रही थी और यह दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाने की वजह से वे लंदन चले गए थे। पाक टीम में वापसी नहीं कर पाएः गृहमंत्री रहमान मलिक द्वारा आश्वसन दिए जाने के बाद जुल्करनैन दो हज़ार ग्यारह में लाहौर वापस लौटे थे लेकिन वे अपने क्रिकेट करियर को पटरी पर नहीं ला सके थे। पाकिस्तान टीम के उस समय के मैनेजर इंतिखाब आलम ने कहा था कि जुल्करनैन के साथ मानसिक समस्या है। जुल्करनैन का इंटरनेशनल करियर : जुल्करनैन ने इंटरनेशनल डेब्यू दो फरवरी दो हज़ार सात को जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीबीस मैच में किया था। अपने छोटे करियर में उन्होंने एक टेस्ट, चार वनडे और तीन टीबीस मैचों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया। उनका अंतिम मैच पाँच नवंबर दो हज़ार दस को दुबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहा जो इंटरनेशनल वनडे था।
काइसेरी मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका अपनी सफाई और कीटाणुशोधन काम जारी रखती है कि वह नियमित रूप से कोविद -19 महामारी के खिलाफ हर क्षेत्र में आचरण करती है। इस संदर्भ में, सार्वजनिक परिवहन वाहनों में कीटाणुशोधन संचालन के लिए कुल 4 हजार 654 लेट कीटाणुनाशक का उपयोग किया गया था, जो नागरिकों द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। Kayseri महानगर पालिका, सफाई और कीटाणुशोधन के लिए महानगर पालिका के महापौर वायरस और रोगाणुओं के खिलाफ लड़ाई के ढांचे के भीतर किए गए। यह मेमडु ब्युनडिसकेली के निर्देशों के साथ जारी है। महामारी की शुरुआत के बाद से, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका, जो सार्वजनिक परिवहन वाहनों में अत्यंत परिश्रम के साथ सफाई अभियान चला रही है, काइसेरी के लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ परिवहन करने में सक्षम बनाती है। तदनुसार, महानगरीय नगर पालिका द्वारा रेल प्रणाली के वाहनों पर 4 हजार 543 कीटाणुरहित किए गए थे और यात्रा के प्रत्येक वाहन को रोजाना कीटाणुरहित किया जाता था। इसके अलावा, बसों में कीटाणुशोधन 14 हजार 825 और बस स्टॉप 365 बार किया गया। जबकि ट्राम स्टेशनों में 792 बार कीटाणुशोधन किया गया था, महानगर पालिका की सभी सेवा इकाइयों, सामान्य क्षेत्रों, रखरखाव कार्यशालाओं और मशीनरी टीम भवनों में सफाई संचालन जारी रहा। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका, जो कासेरी के लोगों के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में आराम के लिए काम करती है, ने कुल 4 हजार 654 लीटर कीटाणुशोधन प्रक्रियाओं का उपयोग किया है।
काइसेरी मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका अपनी सफाई और कीटाणुशोधन काम जारी रखती है कि वह नियमित रूप से कोविद -उन्नीस महामारी के खिलाफ हर क्षेत्र में आचरण करती है। इस संदर्भ में, सार्वजनिक परिवहन वाहनों में कीटाणुशोधन संचालन के लिए कुल चार हजार छः सौ चौवन लेट कीटाणुनाशक का उपयोग किया गया था, जो नागरिकों द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। Kayseri महानगर पालिका, सफाई और कीटाणुशोधन के लिए महानगर पालिका के महापौर वायरस और रोगाणुओं के खिलाफ लड़ाई के ढांचे के भीतर किए गए। यह मेमडु ब्युनडिसकेली के निर्देशों के साथ जारी है। महामारी की शुरुआत के बाद से, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका, जो सार्वजनिक परिवहन वाहनों में अत्यंत परिश्रम के साथ सफाई अभियान चला रही है, काइसेरी के लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ परिवहन करने में सक्षम बनाती है। तदनुसार, महानगरीय नगर पालिका द्वारा रेल प्रणाली के वाहनों पर चार हजार पाँच सौ तैंतालीस कीटाणुरहित किए गए थे और यात्रा के प्रत्येक वाहन को रोजाना कीटाणुरहित किया जाता था। इसके अलावा, बसों में कीटाणुशोधन चौदह हजार आठ सौ पच्चीस और बस स्टॉप तीन सौ पैंसठ बार किया गया। जबकि ट्राम स्टेशनों में सात सौ बानवे बार कीटाणुशोधन किया गया था, महानगर पालिका की सभी सेवा इकाइयों, सामान्य क्षेत्रों, रखरखाव कार्यशालाओं और मशीनरी टीम भवनों में सफाई संचालन जारी रहा। मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका, जो कासेरी के लोगों के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में आराम के लिए काम करती है, ने कुल चार हजार छः सौ चौवन लीटरटर कीटाणुशोधन प्रक्रियाओं का उपयोग किया है।
Ravi Shastri WTC Final 2023 टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का मानना है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया फेवरेट नहीं होगी। शास्त्री के अनुसार मौजूदा भारतीय टीम में ट्रॉफी का सूखा खत्म करने का दमखम है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 7 जून से दोनों टीमों के बीच द ओवल के मैदान पर खिताबी मुकाबला खेला जाना है। इंग्लैंड की कंडिशंस को देखते हुए कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ी कंगारू टीम को डब्ल्यूटीसी फाइनल जीतने का प्रबल दावेदार मान रहे हैं। हालांकि, भारत के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का ऐसा मानना नहीं है। रवि शास्त्री ने कहा कि भारत की इस टीम में आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म करने की काबिलियत मौजूद है। उन्होंने कहा, "आपको मुकाबला करना होगा। कभी-कभी आपको अपने लक की भी जरूरत होती है। मैं यह नहीं कहता हूं कि हमने अच्छी क्रिकेट नहीं खेली है। हमने काफी अच्छी क्रिकेट खेली है। मैं हमेशा कहता हूं कि इस टीम में आईसीसी ट्रॉफी जीतने का दमखम है। जब मैं वहां था तब भी यही कहता था। खासतौर पर आखिरी तीन से चार साल में। मैं सोचता था कि टीम इतनी अच्छी है कि वह आईसीसी ट्रॉफी को जीत सके और अभी भी वो प्लेयर्स टीम में मौजूद हैं। " टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में फेवरेट बिल्कुल भी नहीं होगी। उन्होंने कहा, "हर कोई कह रहा है कि ऑस्ट्रेलिया साफतौर पर फेवरेट है, क्योंकि हम इंग्लैंड में खेल रहे हैं। हालांकि, यह एकमात्र टेस्ट है, जहां एक खराब दिन आपके जीतने के चांस को खत्म कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया को भी चौकन्ना रहना होगा। " भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी में इसी साल धूल चटाई थी। चार मैचों की टेस्ट सीरीज को रोहित की पलटन ने 2-1 से अपने नाम किया था। हालांकि, यह सीरीज भारत में खेली गई थी, जबकि डब्ल्यूटीसी का फाइनल मुकाबला इंग्लैंड के द ओवल मैदान पर खेला जाना है।
Ravi Shastri WTC Final दो हज़ार तेईस टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का मानना है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया फेवरेट नहीं होगी। शास्त्री के अनुसार मौजूदा भारतीय टीम में ट्रॉफी का सूखा खत्म करने का दमखम है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सात जून से दोनों टीमों के बीच द ओवल के मैदान पर खिताबी मुकाबला खेला जाना है। इंग्लैंड की कंडिशंस को देखते हुए कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ी कंगारू टीम को डब्ल्यूटीसी फाइनल जीतने का प्रबल दावेदार मान रहे हैं। हालांकि, भारत के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का ऐसा मानना नहीं है। रवि शास्त्री ने कहा कि भारत की इस टीम में आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म करने की काबिलियत मौजूद है। उन्होंने कहा, "आपको मुकाबला करना होगा। कभी-कभी आपको अपने लक की भी जरूरत होती है। मैं यह नहीं कहता हूं कि हमने अच्छी क्रिकेट नहीं खेली है। हमने काफी अच्छी क्रिकेट खेली है। मैं हमेशा कहता हूं कि इस टीम में आईसीसी ट्रॉफी जीतने का दमखम है। जब मैं वहां था तब भी यही कहता था। खासतौर पर आखिरी तीन से चार साल में। मैं सोचता था कि टीम इतनी अच्छी है कि वह आईसीसी ट्रॉफी को जीत सके और अभी भी वो प्लेयर्स टीम में मौजूद हैं। " टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में फेवरेट बिल्कुल भी नहीं होगी। उन्होंने कहा, "हर कोई कह रहा है कि ऑस्ट्रेलिया साफतौर पर फेवरेट है, क्योंकि हम इंग्लैंड में खेल रहे हैं। हालांकि, यह एकमात्र टेस्ट है, जहां एक खराब दिन आपके जीतने के चांस को खत्म कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया को भी चौकन्ना रहना होगा। " भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी में इसी साल धूल चटाई थी। चार मैचों की टेस्ट सीरीज को रोहित की पलटन ने दो-एक से अपने नाम किया था। हालांकि, यह सीरीज भारत में खेली गई थी, जबकि डब्ल्यूटीसी का फाइनल मुकाबला इंग्लैंड के द ओवल मैदान पर खेला जाना है।
रांचीः झारखंड में सड़क निर्माण की साइट पर माओवादियों के आतंक और भी तेजी से बढ़ने लगा है। झांरखंड के लोहरदगा के पेशरार प्रखंड में सड़क निर्माण साइट पर धावा बोलकर माओवादियों ने 2 ट्रैक्टर, एक रोड रोलर और एक बाइक को आग लगा दी। माओवादियों ने मुंशी सहित दो लोगों को अगवा भी कर लिया है। मुंशी का फोन स्वीच ऑफ आ रहा है। घटना 16 मार्च की दोपहर 1 से 2 बजे के मध्य की है। जानकारी के अनुसार पेशरार के बोंडोबार से दुग्गू तक 6 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क निर्माण की इस परियोजना की लागत 3 करोड़ रुपये के तकरीबन है। इस सड़क का निर्माण कार्य और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस सड़क के निर्माण का टेंडर गढ़वा की एजेंसी जेएस कंस्ट्रक्शन को मिला है। जेएस कंस्ट्रक्शन की ओर से काम कराया जा रहा है। मंगलवार को मदनपुर के बालाअंबा के पास काम चल रहा था कि तकरीबन 15 हथियारबंद माओवादी पहुंचे और ट्रैक्टर और बाइक को आग लगा दी। माओवादियों ने लेहबन गांव के पास रोड रोलर को भी जला दिया है। पेशरार के थाना प्रभारी ऋषि कांत शर्मा ने घटना की पुष्टि की है। हालांकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह पुलिस एहतियात बरत रही है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस घटना स्थल पर नहीं पहुंची है। कहा जा रहा है कि ग्रामीण कार्य विभाग की वर्ष 2017 की इस परियोजना को इसी वर्ष के शुरू में ही पूरा करने का एक्सटेंशन मिला हुआ था लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बावजूद कार्य केवल आधा ही हो सका है। अब ताजा घटना के उपरांत इस महत्वपूर्ण परियोजना पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। गौरतलब है कि अक्टूबर-नवंबर 2020 से ही जिले में माओवादी निरंतर किसी न किसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं जिसकी वजह से कई विकास योजनाएं बंद हैं तो कई पर काम की रफ्तार धीमी है।
रांचीः झारखंड में सड़क निर्माण की साइट पर माओवादियों के आतंक और भी तेजी से बढ़ने लगा है। झांरखंड के लोहरदगा के पेशरार प्रखंड में सड़क निर्माण साइट पर धावा बोलकर माओवादियों ने दो ट्रैक्टर, एक रोड रोलर और एक बाइक को आग लगा दी। माओवादियों ने मुंशी सहित दो लोगों को अगवा भी कर लिया है। मुंशी का फोन स्वीच ऑफ आ रहा है। घटना सोलह मार्च की दोपहर एक से दो बजे के मध्य की है। जानकारी के अनुसार पेशरार के बोंडोबार से दुग्गू तक छः किलोग्राममीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क निर्माण की इस परियोजना की लागत तीन करोड़ रुपये के तकरीबन है। इस सड़क का निर्माण कार्य और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस सड़क के निर्माण का टेंडर गढ़वा की एजेंसी जेएस कंस्ट्रक्शन को मिला है। जेएस कंस्ट्रक्शन की ओर से काम कराया जा रहा है। मंगलवार को मदनपुर के बालाअंबा के पास काम चल रहा था कि तकरीबन पंद्रह हथियारबंद माओवादी पहुंचे और ट्रैक्टर और बाइक को आग लगा दी। माओवादियों ने लेहबन गांव के पास रोड रोलर को भी जला दिया है। पेशरार के थाना प्रभारी ऋषि कांत शर्मा ने घटना की पुष्टि की है। हालांकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह पुलिस एहतियात बरत रही है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस घटना स्थल पर नहीं पहुंची है। कहा जा रहा है कि ग्रामीण कार्य विभाग की वर्ष दो हज़ार सत्रह की इस परियोजना को इसी वर्ष के शुरू में ही पूरा करने का एक्सटेंशन मिला हुआ था लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बावजूद कार्य केवल आधा ही हो सका है। अब ताजा घटना के उपरांत इस महत्वपूर्ण परियोजना पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। गौरतलब है कि अक्टूबर-नवंबर दो हज़ार बीस से ही जिले में माओवादी निरंतर किसी न किसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं जिसकी वजह से कई विकास योजनाएं बंद हैं तो कई पर काम की रफ्तार धीमी है।
हाईटेंशन लाइन से झुलसे कूड़ा गाड़ी सफाई कर्मी की मौत के मामले में कल इलेक्ट्रिक सेफ्टी टीम मझोला थाना क्षेत्र के प्रीतम नगर में हुई घटना की हकीकत जानने पहुंचेंगे। यहां टीम के निरीक्षण के बाद दी जाने वाली रिपोर्ट तय करेगी कि मरने वाले अपनी गलती की वजह से तारों की चपेट में आया या फिर विभाग की कमी से हादसा हुआ, इसके बाद भी मुआवजा देने की बात आगे हो पाएगी। दस दिन पहले मझोला में एकता कालोनी के पास प्रीतम नगर में कूड़ा उठाने वाली कंपनी में लगे अंबेडकर नगर के रितिक हाइटेंशन लाइन में आने से झुलस गया जिसको उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई। मौत के बाद क्षेत्र के लोगों और परिजनों ने बिजली विभाग की कमी से रितिक की मौत होने की बात करते हुए मुआवजे की मांग की,इतना ही नहीं लोगों ने विरोध में हंगामा भी किया जहां एसडीएम और पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत कराकर बिजली अफसरों से घटना के बारे में जानकारी जुटाई। इस मामले डिवीजन तीन के सीतापुरी एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट इलेक्ट्रिक सेफ्टी को भेजी। जिसमें सोमवार को टीम घटना स्थल का मौका मुआयना कर तय करेगी कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाए या नहीं।
हाईटेंशन लाइन से झुलसे कूड़ा गाड़ी सफाई कर्मी की मौत के मामले में कल इलेक्ट्रिक सेफ्टी टीम मझोला थाना क्षेत्र के प्रीतम नगर में हुई घटना की हकीकत जानने पहुंचेंगे। यहां टीम के निरीक्षण के बाद दी जाने वाली रिपोर्ट तय करेगी कि मरने वाले अपनी गलती की वजह से तारों की चपेट में आया या फिर विभाग की कमी से हादसा हुआ, इसके बाद भी मुआवजा देने की बात आगे हो पाएगी। दस दिन पहले मझोला में एकता कालोनी के पास प्रीतम नगर में कूड़ा उठाने वाली कंपनी में लगे अंबेडकर नगर के रितिक हाइटेंशन लाइन में आने से झुलस गया जिसको उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई। मौत के बाद क्षेत्र के लोगों और परिजनों ने बिजली विभाग की कमी से रितिक की मौत होने की बात करते हुए मुआवजे की मांग की,इतना ही नहीं लोगों ने विरोध में हंगामा भी किया जहां एसडीएम और पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत कराकर बिजली अफसरों से घटना के बारे में जानकारी जुटाई। इस मामले डिवीजन तीन के सीतापुरी एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट इलेक्ट्रिक सेफ्टी को भेजी। जिसमें सोमवार को टीम घटना स्थल का मौका मुआयना कर तय करेगी कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाए या नहीं।
बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! इन तस्वीरों को देखेंगे तो वाकई कहेंगे कि हम इंसान कितने बेदर्द हो जाते हैं। हम ये भी नहीं देखते कि अगर कोई जीव हमें परेशान कर रहा है, तो उसे दूर करने के लिए ठीक उपाय क्या होगा। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! ये तस्वीरें हैं मुंबई की जहां लोगों ने एक शैतान बंदर से आजिज आकर उसे बांध दिया। लोगों के मुताबिक उसने कई आते-जाते लोगों को डराया है। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! ले गया। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! जिस शख्स ने इस बंदर को पकड़ा, अब वो उसे महाराष्ट्रा के स्टेट ऑफिशियल डिपार्टमेंट वालों को दे दिया है। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! अब वो इस बंदर को ठीक ढंग से खिला-पिलाकर जंगल में छोड़ देंगे।
बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! इन तस्वीरों को देखेंगे तो वाकई कहेंगे कि हम इंसान कितने बेदर्द हो जाते हैं। हम ये भी नहीं देखते कि अगर कोई जीव हमें परेशान कर रहा है, तो उसे दूर करने के लिए ठीक उपाय क्या होगा। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! ये तस्वीरें हैं मुंबई की जहां लोगों ने एक शैतान बंदर से आजिज आकर उसे बांध दिया। लोगों के मुताबिक उसने कई आते-जाते लोगों को डराया है। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! ले गया। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! जिस शख्स ने इस बंदर को पकड़ा, अब वो उसे महाराष्ट्रा के स्टेट ऑफिशियल डिपार्टमेंट वालों को दे दिया है। बेजुबान जानवरों पर ऐसी बेरहमी, तस्वीरें देख टूट जाएगा आपका कलेजा! अब वो इस बंदर को ठीक ढंग से खिला-पिलाकर जंगल में छोड़ देंगे।
बल्लभगढ़ के सेक्टर-7 थाना क्षेत्र में सेक्टर-4 के पास गुरुग्राम कैनाल से पुलिस ने 11वीं कक्षा के एक छात्र का शव बरामद किया है। छात्र अपनी बड़ी बहन की डांट के बाद नाराज होकर 25 मार्च को अपने घर से निकला था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। सेक्टर-33 के संतोष नगर फरीदाबाद के अजयराम का 19 साल का बेटा रोहित 11वीं कक्षा का छात्र था। उसकी बड़ी बहन ने उससे पढ़ाई करने के लिए कहा। जिससे वह नाराज होकर 25 मार्च को अपने घर से निकल पड़ा। इधर, 27 मार्च को सेक्टर-8 पुलिस चौकी ने सूचना के आधार पर गुरुग्राम कैनाल से एक युवक का शव बरामद किया। शव को पहचान के लिए बीके अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया। जिसकी पहचान रोहित के रूप में हुई है। पुलिस ने खुलासा कि वह अपनी बड़ी बहन की डांट से नाराज होकर घर से निकला और उसने गुरुग्राम कैनाल में छलांग लगा दी थी।
बल्लभगढ़ के सेक्टर-सात थाना क्षेत्र में सेक्टर-चार के पास गुरुग्राम कैनाल से पुलिस ने ग्यारहवीं कक्षा के एक छात्र का शव बरामद किया है। छात्र अपनी बड़ी बहन की डांट के बाद नाराज होकर पच्चीस मार्च को अपने घर से निकला था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। सेक्टर-तैंतीस के संतोष नगर फरीदाबाद के अजयराम का उन्नीस साल का बेटा रोहित ग्यारहवीं कक्षा का छात्र था। उसकी बड़ी बहन ने उससे पढ़ाई करने के लिए कहा। जिससे वह नाराज होकर पच्चीस मार्च को अपने घर से निकल पड़ा। इधर, सत्ताईस मार्च को सेक्टर-आठ पुलिस चौकी ने सूचना के आधार पर गुरुग्राम कैनाल से एक युवक का शव बरामद किया। शव को पहचान के लिए बीके अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया। जिसकी पहचान रोहित के रूप में हुई है। पुलिस ने खुलासा कि वह अपनी बड़ी बहन की डांट से नाराज होकर घर से निकला और उसने गुरुग्राम कैनाल में छलांग लगा दी थी।
अभी तक हमने सिखों और हिन्दुओं द्वारा व्यवहृत वर्णमाला का उल्लेख किया है। याद रहे कि पंजाबी भाषी क्षेत्र में मुसलमानों की बहुत बड़ी जनसंख्या है जो पंजाबी का उतना ही खुला व्यवहार करते हैं जितना उनके हिन्दू पड़ौसी । किन्तु ये लोग भाषा को लिखते समय प्रायः फारसी- अरबी लिपि का, जैसी कि वह हिन्दोस्तानी के लिए ढाली गयी है, प्रयोग करते हैं। इसकी कोई स्थानीय विशेषताएँ नहीं हैं । पूर्वोल्लिखित सभी लिपियों में ( लण्डा को छोड़कर ) लिखे हुए नमूने अगले पृष्ठों में मिलेंगे। लण्डा के कोई नमूने नहीं मिले, और वह लिपि कुछ-एक वाक्यों से अधिक लिखाई के योग्य भी नहीं है। इसका पढ़ पाना उन लोगों के लिए भी, जो इसे लिखते हैं इतना कठिन है कि अशिक्षित दुकानदारों में हिसाब-किताब और इस तरह के काम के अतिरिक्त इसका व्यवहार नहीं के बराबर होता है। पंजाबी व्याकरण, प्रमुखतः हिन्दुस्तानी व्याकरण का अनुसरण करता है, इसलिए अधिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है। उच्चारण की दृष्टि से, ह और कुछ एक महाप्राण व्यंजन मात्र ऐसे वर्ण हैं जिनकी विशेष सूचना देना आवश्यक है । लहँदा में इनका उच्चारण विचित्र रीति से होता है, और यही बात पंजाबी क्षेत्र के पश्चिमी जिलों में स्पष्ट है। इस उच्चारण का उत्तम वर्णन वह है जो ग्राहम बेली ने अपने वजीराबाद की बोली के व्याकरण में दिया है और जिसका सार-संक्षेप नीचे उद्धृत किया जा रहा है। इन जिलों में, जब ह किसी शब्द के आदि में अथवा बलाघात युक्त अक्षर से पहले आता है, तो इसकी एक तीव्र कण्ठ्य ध्वनि होती है, जो कुछ-कुछ अरबी के ट ऐन के सबल उच्चारण से मिलती-जुलती है। हम इसकी तुलना अंग्रेजी हैम के ग्रामीण उच्चारण अंम से कर सकते हैं। इस प्रकार हिय्याँ, चारपाई की पाटियाँ, का उच्चारण अथ्याँ, और पिहाई, पिसाई का पिआई होता है । अन्य स्थितियों में, अर्थात् जब यह शब्द के आदि में अथवा बलाघातयुक्त अक्षर से पूर्व नहीं होता, तब यह कठिनाई से सुना जाता है, या नहीं ही सुना जाता, किन्तु इसके कारण पूर्ववर्ती स्वर की तान ज़ोर से उठ जाती है और प्रायः शब्द का सुरं तक बदल जाता है। जैसे, लाह, उतार, ला, लगा, से बहुत भिन्न ध्वनि है यद्यपि उसमें ह प्रायः अश्रवणीय है। इसी प्रकार काहला, उतावला, में पहला आ- उच्च सुर से बोला जाता है, जबकि काला, श्याम, में इसका सुर साधारण है, यद्यपि काहला का ह ध्वनित नहीं होता। यही बातें सघोष महाप्राण व्यंजनों घ, झ, ढ, ध, भ, ह, न्ह, म्ह, ढ़, रह, व्ह आदि का अक्षरान्तर दिखाते हुए ह पर लागू होती हैं, किन्तु अघोष महाप्राण व्यंजनों ख, छ, ८, थ, फया श में नहीं । जैसे - भ्रा, भाई, का उच्चारण व रा; घुमाँ, घुमाँव का गुमाँ और चन्हाँ, चनाब नदी, का चनाँ करके होता है। दूसरी ओर, कूढ़ में, जहाँ ढ़ बलाघातयुक्त स्वर के बाद में आता है, ह सुनाई नहीं देता, किन्तु ऊ का सुर कूड़, हल का जोड़, के ऊ की अपेक्षा अधिक ऊँचा है, और बग्घी (उच्चारण बेग्गी) में बग्गो, गोरी, की अपेक्षा अ का सुर अधिक ऊँचा है । संज्ञाओं में, सबसे अधिक ध्यान देने योग्य विशेषताएँ ये हैं कि तिर्यक् बहुवचन के अन्त में -आँ होता है, सम्बन्ध कारकीय प्रत्यय दा है, जो कि आकारान्त विशेषणों की भाँति, न केवल लिंग और वचन में, बल्कि कारक में भी उस संज्ञा के अनुरूप होता है जिससे उसका सम्बन्ध होता है । क्रियाओं में, सहायक क्रियाओं के दो रूप उल्लेखनीय हैं। एक तो है जे, वह है। यह पंजाबी क्षेत्र के केवल पश्चिमी जिलों में सुना जाता है, और इसका सही-सही अर्थ पहले-पहल ग्राहम बेली ने उपरि-संदर्भित अपने वजीराबादी व्याकरण में बताया था । उत्पत्ति की दृष्टि से जे सहायक क्रिया (ए) से युक्त मध्यम पुरुष बहुवचन सर्वनाम और इसका ठीक अर्थ है 'तुम्हें या तुमसे है' । यह इस प्रकार के प्रयोगों में स्पष्ट है - की मिळिआ जे, शब्दार्थ -- क्या मिला तुम्हें है, अर्थात् तुम्हें क्या मिला ? आदर्श पंजाबी में तुधनूं की मिलिआ । की आखिआ जे, क्या कहा तुमने ? आदर्श पंजाबी - तुसीं की आखेआ, तुमने क्या कहा ? को जे, तुम्हें क्या हुआ ? साधारणतया, मध्यम पुरुष का संकेत अधिक प्रत्यक्ष नहीं है, और अनुवाद में, यदि कहना ही पड़े तो, इस प्रकार के शब्दों में कहना होगा कि 'मैं तुम्हें पूछता हूँ' या 'मैं तुम्हें कहता हूँ ।' जैसे ऊपर वाले को जे का यह अर्थ भी है कि 'मैं तुमसे पूछता हूं कि क्या हो गया' (किसी को, आवश्यक नहीं कि तुम्हें ) । इसी प्रकार -- ओत्ये दो जे -- मैं तुम्हें कहता हूँ कि वहाँ दो हैं । मैं आया जे- मैं तुम्हें कहता हूँ कि मैं आया हूँ । साहब जे-मैं तुम्हें कहता हूँ कि साहिब हैं । स्पष्ट है कि इन अन्तिम तीन उदाहरणों में 'मैं तुम्हें कहता हूँ कि ' छोड़ा जा सकता है, और जे का रूप, जैसा कि उस व्याकरण में है, 'वह है' या 'वे हैं' हो सकता है । तथापि इसका प्रयोग केवल ऐसे वाक्यों में हो सकता है जैसे ऊपर दिये गये हैं । सहायक क्रिया के भूतकाल का सामान्य रूप पुंल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों के एकवचन के लिए और पुंल्लिंग बहुवचन के लिए प्रायः सी होता है । साधारणतः बताया जाता है कि यह सा का स्त्रीलिंग रूप है, किन्तु अधिक सम्भावना यह है कि यह प्राकृत आसी, संस्कृत आसीत्, वह था, से सम्बद्ध किसी प्राचीन रूप का विकार है । संज्ञार्थक क्रिया के अन्त में सामान्यतः ण होता है (ना नहीं), यद्यपि - ना कुछ क्रियाओं के साथ अवश्य लगता है। भविष्यत् में कुछ अनियम हैं । कर्मवाच्य का एक रूप है जो कर्तृवाच्य धातु के साथ -ई- जोड़कर बनता है (दे० पृ० १९), किन्तु कुल मिलाकर क्रिया के रूप ग्रामीण हिन्दुस्तानी से मिलते-जुलते हैं । अतः विश्वास किया जाता है कि संलग्न संक्षिप्त व्याकरण के द्वारा आगे आनेवाले नमूनों की भाषा को समझने में विद्यार्थी को सहायता मिलेगी।
अभी तक हमने सिखों और हिन्दुओं द्वारा व्यवहृत वर्णमाला का उल्लेख किया है। याद रहे कि पंजाबी भाषी क्षेत्र में मुसलमानों की बहुत बड़ी जनसंख्या है जो पंजाबी का उतना ही खुला व्यवहार करते हैं जितना उनके हिन्दू पड़ौसी । किन्तु ये लोग भाषा को लिखते समय प्रायः फारसी- अरबी लिपि का, जैसी कि वह हिन्दोस्तानी के लिए ढाली गयी है, प्रयोग करते हैं। इसकी कोई स्थानीय विशेषताएँ नहीं हैं । पूर्वोल्लिखित सभी लिपियों में लिखे हुए नमूने अगले पृष्ठों में मिलेंगे। लण्डा के कोई नमूने नहीं मिले, और वह लिपि कुछ-एक वाक्यों से अधिक लिखाई के योग्य भी नहीं है। इसका पढ़ पाना उन लोगों के लिए भी, जो इसे लिखते हैं इतना कठिन है कि अशिक्षित दुकानदारों में हिसाब-किताब और इस तरह के काम के अतिरिक्त इसका व्यवहार नहीं के बराबर होता है। पंजाबी व्याकरण, प्रमुखतः हिन्दुस्तानी व्याकरण का अनुसरण करता है, इसलिए अधिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है। उच्चारण की दृष्टि से, ह और कुछ एक महाप्राण व्यंजन मात्र ऐसे वर्ण हैं जिनकी विशेष सूचना देना आवश्यक है । लहँदा में इनका उच्चारण विचित्र रीति से होता है, और यही बात पंजाबी क्षेत्र के पश्चिमी जिलों में स्पष्ट है। इस उच्चारण का उत्तम वर्णन वह है जो ग्राहम बेली ने अपने वजीराबाद की बोली के व्याकरण में दिया है और जिसका सार-संक्षेप नीचे उद्धृत किया जा रहा है। इन जिलों में, जब ह किसी शब्द के आदि में अथवा बलाघात युक्त अक्षर से पहले आता है, तो इसकी एक तीव्र कण्ठ्य ध्वनि होती है, जो कुछ-कुछ अरबी के ट ऐन के सबल उच्चारण से मिलती-जुलती है। हम इसकी तुलना अंग्रेजी हैम के ग्रामीण उच्चारण अंम से कर सकते हैं। इस प्रकार हिय्याँ, चारपाई की पाटियाँ, का उच्चारण अथ्याँ, और पिहाई, पिसाई का पिआई होता है । अन्य स्थितियों में, अर्थात् जब यह शब्द के आदि में अथवा बलाघातयुक्त अक्षर से पूर्व नहीं होता, तब यह कठिनाई से सुना जाता है, या नहीं ही सुना जाता, किन्तु इसके कारण पूर्ववर्ती स्वर की तान ज़ोर से उठ जाती है और प्रायः शब्द का सुरं तक बदल जाता है। जैसे, लाह, उतार, ला, लगा, से बहुत भिन्न ध्वनि है यद्यपि उसमें ह प्रायः अश्रवणीय है। इसी प्रकार काहला, उतावला, में पहला आ- उच्च सुर से बोला जाता है, जबकि काला, श्याम, में इसका सुर साधारण है, यद्यपि काहला का ह ध्वनित नहीं होता। यही बातें सघोष महाप्राण व्यंजनों घ, झ, ढ, ध, भ, ह, न्ह, म्ह, ढ़, रह, व्ह आदि का अक्षरान्तर दिखाते हुए ह पर लागू होती हैं, किन्तु अघोष महाप्राण व्यंजनों ख, छ, आठ, थ, फया श में नहीं । जैसे - भ्रा, भाई, का उच्चारण व रा; घुमाँ, घुमाँव का गुमाँ और चन्हाँ, चनाब नदी, का चनाँ करके होता है। दूसरी ओर, कूढ़ में, जहाँ ढ़ बलाघातयुक्त स्वर के बाद में आता है, ह सुनाई नहीं देता, किन्तु ऊ का सुर कूड़, हल का जोड़, के ऊ की अपेक्षा अधिक ऊँचा है, और बग्घी में बग्गो, गोरी, की अपेक्षा अ का सुर अधिक ऊँचा है । संज्ञाओं में, सबसे अधिक ध्यान देने योग्य विशेषताएँ ये हैं कि तिर्यक् बहुवचन के अन्त में -आँ होता है, सम्बन्ध कारकीय प्रत्यय दा है, जो कि आकारान्त विशेषणों की भाँति, न केवल लिंग और वचन में, बल्कि कारक में भी उस संज्ञा के अनुरूप होता है जिससे उसका सम्बन्ध होता है । क्रियाओं में, सहायक क्रियाओं के दो रूप उल्लेखनीय हैं। एक तो है जे, वह है। यह पंजाबी क्षेत्र के केवल पश्चिमी जिलों में सुना जाता है, और इसका सही-सही अर्थ पहले-पहल ग्राहम बेली ने उपरि-संदर्भित अपने वजीराबादी व्याकरण में बताया था । उत्पत्ति की दृष्टि से जे सहायक क्रिया से युक्त मध्यम पुरुष बहुवचन सर्वनाम और इसका ठीक अर्थ है 'तुम्हें या तुमसे है' । यह इस प्रकार के प्रयोगों में स्पष्ट है - की मिळिआ जे, शब्दार्थ -- क्या मिला तुम्हें है, अर्थात् तुम्हें क्या मिला ? आदर्श पंजाबी में तुधनूं की मिलिआ । की आखिआ जे, क्या कहा तुमने ? आदर्श पंजाबी - तुसीं की आखेआ, तुमने क्या कहा ? को जे, तुम्हें क्या हुआ ? साधारणतया, मध्यम पुरुष का संकेत अधिक प्रत्यक्ष नहीं है, और अनुवाद में, यदि कहना ही पड़े तो, इस प्रकार के शब्दों में कहना होगा कि 'मैं तुम्हें पूछता हूँ' या 'मैं तुम्हें कहता हूँ ।' जैसे ऊपर वाले को जे का यह अर्थ भी है कि 'मैं तुमसे पूछता हूं कि क्या हो गया' । इसी प्रकार -- ओत्ये दो जे -- मैं तुम्हें कहता हूँ कि वहाँ दो हैं । मैं आया जे- मैं तुम्हें कहता हूँ कि मैं आया हूँ । साहब जे-मैं तुम्हें कहता हूँ कि साहिब हैं । स्पष्ट है कि इन अन्तिम तीन उदाहरणों में 'मैं तुम्हें कहता हूँ कि ' छोड़ा जा सकता है, और जे का रूप, जैसा कि उस व्याकरण में है, 'वह है' या 'वे हैं' हो सकता है । तथापि इसका प्रयोग केवल ऐसे वाक्यों में हो सकता है जैसे ऊपर दिये गये हैं । सहायक क्रिया के भूतकाल का सामान्य रूप पुंल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों के एकवचन के लिए और पुंल्लिंग बहुवचन के लिए प्रायः सी होता है । साधारणतः बताया जाता है कि यह सा का स्त्रीलिंग रूप है, किन्तु अधिक सम्भावना यह है कि यह प्राकृत आसी, संस्कृत आसीत्, वह था, से सम्बद्ध किसी प्राचीन रूप का विकार है । संज्ञार्थक क्रिया के अन्त में सामान्यतः ण होता है , यद्यपि - ना कुछ क्रियाओं के साथ अवश्य लगता है। भविष्यत् में कुछ अनियम हैं । कर्मवाच्य का एक रूप है जो कर्तृवाच्य धातु के साथ -ई- जोड़कर बनता है , किन्तु कुल मिलाकर क्रिया के रूप ग्रामीण हिन्दुस्तानी से मिलते-जुलते हैं । अतः विश्वास किया जाता है कि संलग्न संक्षिप्त व्याकरण के द्वारा आगे आनेवाले नमूनों की भाषा को समझने में विद्यार्थी को सहायता मिलेगी।
नरगिस फाखरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है, जो उनके बोन्स को कतई रास नहीं आ रही है और लोग उन्हें बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। नरगिस फाखरी वैसे तो बालीवुड से दूर हैं, लेकिन इन दिनों वो अपने निजी रिश्ते को लेकर काफी चर्चा में बनी रहती हैं। कभी उनके अपने बॉयफ्रेंड संग छुट्टियों की तस्वीर वायरल होती है तो कभी उनका इटली में खाना बनाने का वीडियो वायरल हो जाता है। इसी सिलसिले में अब नरगिस फाखरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है जो उनके फैंस को कतई रास नहीं आ रही है और लोग उन्हें बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। हाल ही में नर्गिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की जिसमें उनका पूरा लुक बदला हुआ नजर आ रहा है। अपने इस नए लुक में नरगिस ने ब्लॉन्ड बाल किए हैं और फैन्स ने उनके लिप्स में दिख रहे फर्क को नोटिस किया। हालांकि कुछ लोगों को नरगिस फाखरी का ये लुक बहुत ही पसंद आ रहा है तो वहीं कुछ लोग उनके इस लुक को देखने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर खरी खोटी सुना रहे हैं। कुछ लोगों को नरगिस फाखरी का लुक तो पसंद आ रहा है, लेकिन कई लोगों को ऐसा लगता है कि नरगिस फाखरी के होठों की वजह से उनका पूरा लुक खराब हो गया है। कई यूजर्स नरगिस फाखरी के इस ट्रांसफ़ोरमेशन से नाखुश नजर आ रहे हैं। किसी ने उनके इस लुक को गंदा कहा तो किसी ने कहा कि उनहोंने प्लास्टिक सर्जरी करवा ली है। खैर डिफरेन्ट हेयर स्टाइल और डार्क लिपस्टिक में नजर आ रही नर्गिस ने ब्लैक रंग की ड्रेस पहनी हुई है। नरगिस फाखरी की तसवीरों को देखकर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं, एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'हे भगवान ये लड़की प्लास्टिक सर्जरी से पहले ही खूबसूरत थी, पता नहीं इनके दिमाग में क्या आया कि उन्होने सर्जरी करवा ली। तो वही दूसरे यूजर ने लिखा, 'आपने अपना नैचुरल लुक खो दिया तो वही अन्य यूजर ने तो उन्हें भूतनी और डोनल्ड डक तक कह डाला। कुछ समय पहले नरगिस फाखरी ने एक मीडिया चैनल से खास बातचीत करते हुए प्लास्टिक सर्जरी को लेकर बातचीत की थी। उन्होने कहा था कि अगर मुझे ये करना ठीक लगता है तो मैं करूंगी। बता दें कि नरगिस फाखरी की पहले की और अब की तस्वीरों में उनके होंठ में काफी अंतर है।
नरगिस फाखरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है, जो उनके बोन्स को कतई रास नहीं आ रही है और लोग उन्हें बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। नरगिस फाखरी वैसे तो बालीवुड से दूर हैं, लेकिन इन दिनों वो अपने निजी रिश्ते को लेकर काफी चर्चा में बनी रहती हैं। कभी उनके अपने बॉयफ्रेंड संग छुट्टियों की तस्वीर वायरल होती है तो कभी उनका इटली में खाना बनाने का वीडियो वायरल हो जाता है। इसी सिलसिले में अब नरगिस फाखरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है जो उनके फैंस को कतई रास नहीं आ रही है और लोग उन्हें बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। हाल ही में नर्गिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की जिसमें उनका पूरा लुक बदला हुआ नजर आ रहा है। अपने इस नए लुक में नरगिस ने ब्लॉन्ड बाल किए हैं और फैन्स ने उनके लिप्स में दिख रहे फर्क को नोटिस किया। हालांकि कुछ लोगों को नरगिस फाखरी का ये लुक बहुत ही पसंद आ रहा है तो वहीं कुछ लोग उनके इस लुक को देखने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर खरी खोटी सुना रहे हैं। कुछ लोगों को नरगिस फाखरी का लुक तो पसंद आ रहा है, लेकिन कई लोगों को ऐसा लगता है कि नरगिस फाखरी के होठों की वजह से उनका पूरा लुक खराब हो गया है। कई यूजर्स नरगिस फाखरी के इस ट्रांसफ़ोरमेशन से नाखुश नजर आ रहे हैं। किसी ने उनके इस लुक को गंदा कहा तो किसी ने कहा कि उनहोंने प्लास्टिक सर्जरी करवा ली है। खैर डिफरेन्ट हेयर स्टाइल और डार्क लिपस्टिक में नजर आ रही नर्गिस ने ब्लैक रंग की ड्रेस पहनी हुई है। नरगिस फाखरी की तसवीरों को देखकर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं, एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'हे भगवान ये लड़की प्लास्टिक सर्जरी से पहले ही खूबसूरत थी, पता नहीं इनके दिमाग में क्या आया कि उन्होने सर्जरी करवा ली। तो वही दूसरे यूजर ने लिखा, 'आपने अपना नैचुरल लुक खो दिया तो वही अन्य यूजर ने तो उन्हें भूतनी और डोनल्ड डक तक कह डाला। कुछ समय पहले नरगिस फाखरी ने एक मीडिया चैनल से खास बातचीत करते हुए प्लास्टिक सर्जरी को लेकर बातचीत की थी। उन्होने कहा था कि अगर मुझे ये करना ठीक लगता है तो मैं करूंगी। बता दें कि नरगिस फाखरी की पहले की और अब की तस्वीरों में उनके होंठ में काफी अंतर है।
पश्चिमी हिमालय में पुरातात्विक अन्वेषण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार हमीरपुर ज़िला के नेरी स्थित ठाकुर जगदेव चंद स्मृति संस्थान में 15 फ़रवरी से आरम्भ होगा। कार्यक्रम ठाकुर जगदेव चंद स्मृति संस्थान नेरी भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में होगा। राष्ट्रीय परिसंवाद का शुभारम्भ राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे। आयोजन समिति के सचिव डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सेमीनार में 75 से अधिक विद्वान और शोधार्थी अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि 16 फ़रवरी को सांसद अनुराग ठाकुर समापन समारोह में मुख्यातिथि होंगे । उन्होंने बताया कि 16 फ़रवरी को ही हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा शोध संस्थान के संस्थापक ठाकुर राम सिंह का राज्यस्तरीय जयंती समारोह मनाया जाएगा। इस मौक़े पर ठाकुर राम सिंह युवा इतिहासकार पुरस्कार सम्मान और डाक्टर एमएस अहलुवालिया स्मृति इतिहास सम्मान से भी सम्मानित किया जाएगा ।
पश्चिमी हिमालय में पुरातात्विक अन्वेषण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार हमीरपुर ज़िला के नेरी स्थित ठाकुर जगदेव चंद स्मृति संस्थान में पंद्रह फ़रवरी से आरम्भ होगा। कार्यक्रम ठाकुर जगदेव चंद स्मृति संस्थान नेरी भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में होगा। राष्ट्रीय परिसंवाद का शुभारम्भ राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे। आयोजन समिति के सचिव डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सेमीनार में पचहत्तर से अधिक विद्वान और शोधार्थी अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि सोलह फ़रवरी को सांसद अनुराग ठाकुर समापन समारोह में मुख्यातिथि होंगे । उन्होंने बताया कि सोलह फ़रवरी को ही हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा शोध संस्थान के संस्थापक ठाकुर राम सिंह का राज्यस्तरीय जयंती समारोह मनाया जाएगा। इस मौक़े पर ठाकुर राम सिंह युवा इतिहासकार पुरस्कार सम्मान और डाक्टर एमएस अहलुवालिया स्मृति इतिहास सम्मान से भी सम्मानित किया जाएगा ।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
हैदराबाद, 16 अगस्त (वार्ता)। तेलंगाना (Telangana) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) के चंद्रशेखर राव (K Chandrasekhar Rao) ने मंगलवार को यहां एबिड्स जीपीओ सर्कल के पास पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा के सामने राष्ट्रगान के सामूहिक गायन में शामिल हुए। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन में शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल हुए। इससे पहले, राज्य सरकार ने सभी नागरिकों से सोमवार पूर्वाह्न 11. 30 बजे जहां कहीं भी खड़े हो वहीं खड़े होकर राष्ट्रगान (national anthem) गाने का आग्रह किया था। राष्ट्रगान राज्य सरकार द्वारा संचालित दो सप्ताह के स्वतंत्र भारत वज्रोत्सवम कार्यक्रमों का हिस्सा था। पूरे राज्य (State) में आज पूर्वाह्न 11. 30 बजे लोगों ने राष्ट्रगान गाया गया। राज्य में सामूहिक राष्ट्रगान के दौरान दस मिनट तक वाहनों का आवागमन अस्थायी तौर पर बंद रहा और इस बीच, शहर के ट्रैफिक जंक्शनों पर लोग पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान के लिए सावधान की मुद्रा में खड़े रहे। हैदराबाद मेट्रो ट्रेनों को पूर्वाह्न 11:30 बजे एक मिनट के लिए रोक दिया गया और ट्रेनों तथा मेट्रो स्टेशनों पर राष्ट्रगान की धुन सुनायी गयी। ट्रेनों में सभी यात्री राष्ट्रगान का हिस्सा बने।
हैदराबाद, सोलह अगस्त । तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने मंगलवार को यहां एबिड्स जीपीओ सर्कल के पास पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा के सामने राष्ट्रगान के सामूहिक गायन में शामिल हुए। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन में शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल हुए। इससे पहले, राज्य सरकार ने सभी नागरिकों से सोमवार पूर्वाह्न ग्यारह. तीस बजे जहां कहीं भी खड़े हो वहीं खड़े होकर राष्ट्रगान गाने का आग्रह किया था। राष्ट्रगान राज्य सरकार द्वारा संचालित दो सप्ताह के स्वतंत्र भारत वज्रोत्सवम कार्यक्रमों का हिस्सा था। पूरे राज्य में आज पूर्वाह्न ग्यारह. तीस बजे लोगों ने राष्ट्रगान गाया गया। राज्य में सामूहिक राष्ट्रगान के दौरान दस मिनट तक वाहनों का आवागमन अस्थायी तौर पर बंद रहा और इस बीच, शहर के ट्रैफिक जंक्शनों पर लोग पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान के लिए सावधान की मुद्रा में खड़े रहे। हैदराबाद मेट्रो ट्रेनों को पूर्वाह्न ग्यारह:तीस बजे एक मिनट के लिए रोक दिया गया और ट्रेनों तथा मेट्रो स्टेशनों पर राष्ट्रगान की धुन सुनायी गयी। ट्रेनों में सभी यात्री राष्ट्रगान का हिस्सा बने।
लालजी टंडन बसपा सुप्रीमो मायावती के मुंहबोले भाई थे। चौक की पुरानी गलियों में मायावती बतौर मुख्यमंत्री दो बार टंडन को राखी बांधने उनके घर गईं। 22 अगस्त 2002 को मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधी थी। लखनऊः भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का मंगलवार को लखनऊ में निधन हो गया है। लालजी टंडन का पिछले काफी दिनों से लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो लालजी टंडन को भाई मानती थीं और हर साल उनको राखी बांधने उनके घर जाया करती थीं। गौरतलब है कि बसपा के लोग ही नहीं बल्कि दूसरे दल के लोग भी मायावती को बहनजी ही बुलाते हैं। इन्हीं में से एक लालजी टंडन भी थे। उत्तर प्रदेश की राजनीति देश की राजनीति में अहम् भूमिका निभाती है। 1996 में बसपा और बीजेपी के गठबंधन के पीछे लालजी टंडन की अहम भूमिका थी। लालजी टंडन बसपा सुप्रीमो मायावती के मुंहबोले भाई थे। चौक की पुरानी गलियों में मायावती बतौर मुख्यमंत्री दो बार टंडन को राखी बांधने उनके घर गईं। 22 अगस्त 2002 को मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधी थी। वो राखी भी कोई आम राखी नहीं बल्कि चांदी की राखी थी। कहानी दर्दनाक है, 1995 में लखनऊ का गेस्ट हाउस को कोई भूला नहीं है, कांड के दौरान मायावती की जान खतरे में पड़ी, तब भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन मौके पर पहुंचे थे। बीजेपी नेता उमा भारती ने खुद एक बयान में कहा था कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन ने भाजपा कार्यकर्ताओं की मदद से मायावती को उस समय बचाया था। इसके बाद मायावती ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री बनी थी। यहीं से मायावती और लालजी टंडन के बीच भाई-बहन का रिश्ता कायम हुआ। मध्यप्रदेश के गवर्नर व यूपी में बीजेपी की सरकार में कई बार वरिष्ठ मंत्री रहे श्री लालजी टण्डन, जो काफी सामाजिक, मिलनसार व संस्कारी व्यक्ति थे, उनका इलाज के दौरान आज लखनऊ में निधन होने की खबर अति-दुःखद व उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। लालजी टंडन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम प्रयोगों के लिए भी जाना जाता है। 90 के दशक में प्रदेश में बीजेपी और बसपा की गठबंधन सरकार बनाने में भी उनका अहम योगदान माना जाता है। इसके बाद लालजी 1996 से 2009 तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानती थीं और राखी भी बांधा करती थीं। 1997 में वह प्रदेश के नगर विकास मंत्री रहे। लालजी टंडन के निधन पर मायावती ने ट्वीट कर अपनी संवेदना व्यक्त की है। लालजी टंडन संघ से सियासत में आए और पार्षद से सांसद और राजभवन तक का सफर तय किया था। लालजी टंडन खुद कहा करते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति में उनके साथी, भाई और पिता तीनों की भूमिका अदा की है। अटल के साथ उनका करीब 5 दशकों का साथ रहा। इतना लंबा साथ अटल का शायद ही किसी और राजनेता के साथ रहा हो। लालजी टंडन का जन्म 12 अप्रैल 1935 को हुआ था। अपने शुरुआती जीवन में ही लालजी टंडन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की। इसके बाद 1958 में लालजी का कृष्णा टंडन के साथ विवाह हुआ। उनके बेटे गोपाल जी टंडन इस समय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं। संघ से जुड़ने के दौरान ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी मुलाकात हुई। लालजी शुरू से ही अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीब रहे। यूपी की सियासत में लालजी टंडन की अहम भूमिका हुआ करती थी। लालजी टंडन का राजनीतिक सफर साल 1960 में शुरू हुआ। टंडन दो बार पार्षद चुने गए और दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे। 1978 से 1984 तक और 1990 से 1996 तक लालजी टंडन दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। इस दौरान 1991-92 में बीजेपी सरकार में मंत्री बने। 1996 से 2009 तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। कल्याण सिंह से लेकर राजनाथ सिंह तक की सरकार में मंत्री रहे और 2009 में लखनऊ से सांसद चुने गए। इसके बाद लालजी टंडन को साल 2018 में बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और फिर कुछ दिनों के बाद मध्य प्रेदश का राज्यपाल बनाया गया था। लालजी टंडन ने अपनी किताब 'अनकहा लखनऊ' में कई खुलासे किए। इसमें उन्होंने पुराना लखनऊ के लक्ष्मण टीले के पास बसे होने की बात कही थी। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि लक्ष्मण टीला का नाम पूरी तरह से मिटा दिया गया है, अब यह स्थान टीले वाली मस्जिद के नाम से जाना जा रहा है। लालजी टंडन ने पार्षद से लेकर कैबिनेट मंत्री और दो बार सांसद तक का 8 दशक से अधिक का सामाजिक एवं सियासी सफर दर्ज किया है। लालजी टंडन के अनुसार, लखनऊ के पौराणिक इतिहास को नकार 'नवाबी कल्चर' में कैद करने की कुचेष्टा के कारण यह हुआ। लक्ष्मण टीले पर शेष गुफा थी, जहां बड़ा मेला लगता था। खिलजी के वक्त यह गुफा ध्वस्त की गई। बार-बार इसे ध्वस्त किया जाता रहा और यह जगह टीले में तब्दील हो गई। औरंगजेब ने बाद में यहां एक मस्जिद बनवा दी।
लालजी टंडन बसपा सुप्रीमो मायावती के मुंहबोले भाई थे। चौक की पुरानी गलियों में मायावती बतौर मुख्यमंत्री दो बार टंडन को राखी बांधने उनके घर गईं। बाईस अगस्त दो हज़ार दो को मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधी थी। लखनऊः भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का मंगलवार को लखनऊ में निधन हो गया है। लालजी टंडन का पिछले काफी दिनों से लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो लालजी टंडन को भाई मानती थीं और हर साल उनको राखी बांधने उनके घर जाया करती थीं। गौरतलब है कि बसपा के लोग ही नहीं बल्कि दूसरे दल के लोग भी मायावती को बहनजी ही बुलाते हैं। इन्हीं में से एक लालजी टंडन भी थे। उत्तर प्रदेश की राजनीति देश की राजनीति में अहम् भूमिका निभाती है। एक हज़ार नौ सौ छियानवे में बसपा और बीजेपी के गठबंधन के पीछे लालजी टंडन की अहम भूमिका थी। लालजी टंडन बसपा सुप्रीमो मायावती के मुंहबोले भाई थे। चौक की पुरानी गलियों में मायावती बतौर मुख्यमंत्री दो बार टंडन को राखी बांधने उनके घर गईं। बाईस अगस्त दो हज़ार दो को मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधी थी। वो राखी भी कोई आम राखी नहीं बल्कि चांदी की राखी थी। कहानी दर्दनाक है, एक हज़ार नौ सौ पचानवे में लखनऊ का गेस्ट हाउस को कोई भूला नहीं है, कांड के दौरान मायावती की जान खतरे में पड़ी, तब भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन मौके पर पहुंचे थे। बीजेपी नेता उमा भारती ने खुद एक बयान में कहा था कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन ने भाजपा कार्यकर्ताओं की मदद से मायावती को उस समय बचाया था। इसके बाद मायावती ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री बनी थी। यहीं से मायावती और लालजी टंडन के बीच भाई-बहन का रिश्ता कायम हुआ। मध्यप्रदेश के गवर्नर व यूपी में बीजेपी की सरकार में कई बार वरिष्ठ मंत्री रहे श्री लालजी टण्डन, जो काफी सामाजिक, मिलनसार व संस्कारी व्यक्ति थे, उनका इलाज के दौरान आज लखनऊ में निधन होने की खबर अति-दुःखद व उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। लालजी टंडन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम प्रयोगों के लिए भी जाना जाता है। नब्बे के दशक में प्रदेश में बीजेपी और बसपा की गठबंधन सरकार बनाने में भी उनका अहम योगदान माना जाता है। इसके बाद लालजी एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार नौ तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानती थीं और राखी भी बांधा करती थीं। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में वह प्रदेश के नगर विकास मंत्री रहे। लालजी टंडन के निधन पर मायावती ने ट्वीट कर अपनी संवेदना व्यक्त की है। लालजी टंडन संघ से सियासत में आए और पार्षद से सांसद और राजभवन तक का सफर तय किया था। लालजी टंडन खुद कहा करते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति में उनके साथी, भाई और पिता तीनों की भूमिका अदा की है। अटल के साथ उनका करीब पाँच दशकों का साथ रहा। इतना लंबा साथ अटल का शायद ही किसी और राजनेता के साथ रहा हो। लालजी टंडन का जन्म बारह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पैंतीस को हुआ था। अपने शुरुआती जीवन में ही लालजी टंडन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की। इसके बाद एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में लालजी का कृष्णा टंडन के साथ विवाह हुआ। उनके बेटे गोपाल जी टंडन इस समय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं। संघ से जुड़ने के दौरान ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी मुलाकात हुई। लालजी शुरू से ही अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीब रहे। यूपी की सियासत में लालजी टंडन की अहम भूमिका हुआ करती थी। लालजी टंडन का राजनीतिक सफर साल एक हज़ार नौ सौ साठ में शुरू हुआ। टंडन दो बार पार्षद चुने गए और दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे। एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर से एक हज़ार नौ सौ चौरासी तक और एक हज़ार नौ सौ नब्बे से एक हज़ार नौ सौ छियानवे तक लालजी टंडन दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। इस दौरान एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में बीजेपी सरकार में मंत्री बने। एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार नौ तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। कल्याण सिंह से लेकर राजनाथ सिंह तक की सरकार में मंत्री रहे और दो हज़ार नौ में लखनऊ से सांसद चुने गए। इसके बाद लालजी टंडन को साल दो हज़ार अट्ठारह में बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और फिर कुछ दिनों के बाद मध्य प्रेदश का राज्यपाल बनाया गया था। लालजी टंडन ने अपनी किताब 'अनकहा लखनऊ' में कई खुलासे किए। इसमें उन्होंने पुराना लखनऊ के लक्ष्मण टीले के पास बसे होने की बात कही थी। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि लक्ष्मण टीला का नाम पूरी तरह से मिटा दिया गया है, अब यह स्थान टीले वाली मस्जिद के नाम से जाना जा रहा है। लालजी टंडन ने पार्षद से लेकर कैबिनेट मंत्री और दो बार सांसद तक का आठ दशक से अधिक का सामाजिक एवं सियासी सफर दर्ज किया है। लालजी टंडन के अनुसार, लखनऊ के पौराणिक इतिहास को नकार 'नवाबी कल्चर' में कैद करने की कुचेष्टा के कारण यह हुआ। लक्ष्मण टीले पर शेष गुफा थी, जहां बड़ा मेला लगता था। खिलजी के वक्त यह गुफा ध्वस्त की गई। बार-बार इसे ध्वस्त किया जाता रहा और यह जगह टीले में तब्दील हो गई। औरंगजेब ने बाद में यहां एक मस्जिद बनवा दी।
लखनऊ : मुकदमों की मार झेल रहे शिक्षा विभाग को बचाने के लिए सरकार सदन के अगले सत्र में स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल बिल लाएगी। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। शिक्षकों के प्रशासन और सेवा से जुड़े मसलों की इसमें सुनवाई हो सकेगी। सुनवाई के लिए दो स्तर पर व्यवस्था बनाई जाएगी। हाई कोर्ट में शिक्षा विभाग के हजारों मुकदमे पेंडिंग हैं। अकेले लखनऊ बेंच में ही माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के 38 हजार से अधिक मुकदमे चल रहे हैं। विभागीय स्तर पर आने वाले ग्रीवांस के निस्तारण का कोई और फोरम न होने के चलते मामले कोर्ट पहुंचते हैं। आए दिन सचिव से लेकर निदेशक, संयुक्त निदेशक और डीआईओएस स्तर के अधिकारियों को सफाई और समन के लिए कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है। इसको देखते हुए ये फैसला लिया गया है। एजुकेशन ट्रिब्यूनल की गठन की मांग शिक्षक संगठनों की भी रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्यों को ट्रिब्यूनल बनाने को कह चुका है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि फर्जीवाड़े, गलत डॉक्यूमेंट जैसे रास्तों के जरिए बहुत से लोग नौकरी में आ जाते हैं। इसके अलावा छोटे-मोटे विभागीय विवादों में भी अधिकारियों को कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है। प्रक्रिया लंबी खिंचने का नुकसान शिक्षकों को होता है।
लखनऊ : मुकदमों की मार झेल रहे शिक्षा विभाग को बचाने के लिए सरकार सदन के अगले सत्र में स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल बिल लाएगी। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। शिक्षकों के प्रशासन और सेवा से जुड़े मसलों की इसमें सुनवाई हो सकेगी। सुनवाई के लिए दो स्तर पर व्यवस्था बनाई जाएगी। हाई कोर्ट में शिक्षा विभाग के हजारों मुकदमे पेंडिंग हैं। अकेले लखनऊ बेंच में ही माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के अड़तीस हजार से अधिक मुकदमे चल रहे हैं। विभागीय स्तर पर आने वाले ग्रीवांस के निस्तारण का कोई और फोरम न होने के चलते मामले कोर्ट पहुंचते हैं। आए दिन सचिव से लेकर निदेशक, संयुक्त निदेशक और डीआईओएस स्तर के अधिकारियों को सफाई और समन के लिए कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है। इसको देखते हुए ये फैसला लिया गया है। एजुकेशन ट्रिब्यूनल की गठन की मांग शिक्षक संगठनों की भी रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्यों को ट्रिब्यूनल बनाने को कह चुका है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि फर्जीवाड़े, गलत डॉक्यूमेंट जैसे रास्तों के जरिए बहुत से लोग नौकरी में आ जाते हैं। इसके अलावा छोटे-मोटे विभागीय विवादों में भी अधिकारियों को कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है। प्रक्रिया लंबी खिंचने का नुकसान शिक्षकों को होता है।
मुख्य विकास अधिकारी ने टिड्डी दल के सम्भावित प्रकोप को देखते हुए न्याय पंचायत एवं ग्रामवार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये है। अयोध्याः एमपी अग्रवाल ने मण्डल कार्रवाई शुरू कर दिया है, जिसके तहत मंडल के समस्त जिलाधिकरियो, संयुक्त निदेशक कृषि एवं कृषि विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि जनपद में सम्भवित टिड्डी दल के प्रकोप को रोकने हेतु केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्रालय से प्राप्त दिशा निर्देशो के अनुसार कार्यवाही किया जाय तथा इसके लिए लोकस्ट वार्निंग आर्गनाइजेशन (एलडब्लूओ) स्थापित किये गये हैं। यह जो अपने विशेषज्ञो को समय-समय पर क्षेत्रो में भेजा जायेगा तथा इसके साथ समन्वय करने की कार्यवाही भी किया जाये तथा स्थानीय स्तर पर नियंत्रण केन्द्र बनाने का निर्देश दिया है! मण्डलायुक्त श्री अग्रवाल ने नगर विकास, चिकित्सा, राजस्व, पुलिस, शिक्षा, सिचाई, विद्युत, विकास, आदि विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि उ0प्र0 सरकार द्वारा "आयुष कवच कोविड" नाम से मोबाईल एप जारी करें तथा लोगो को कोरोना वायरस से लड़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से जुड़े हुए तथ्यो को उपलब्ध कराने के साथ ही विभिन्न नवीनतम महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है इसलिए समस्त विभाग के अधिकारी इस महत्वपूर्ण एप को डाउनलोड करे तथा इसकी समीक्षा भी किया जाये तथा इसमे सरकारी विभागो के साथ-साथ स्वंयसेवी संगठनो को भी जोड़ा जाये। उधर जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने जनपद मेंसम्भावित टिड्डी दल के प्रकोप से बचने के लिए मुख्य विकास अधिकारी प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है, इसमें उप निदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, महाप्रबन्धक रौजागाॅव चीनी मिल, सहायक महाप्रबन्धक मसौधा चीनी मिल, वरिष्ठ महाप्रबन्धक मसौधा चीनी मिल, कृषि विज्ञान केन्द्र मसौधा के वैज्ञानिक डा0 डीडी सिंह को सदस्य बनाया गया है तथा इस कमेटी के सदस्य सचिव जिला कृषि रक्षा अधिकारी वीके सिंह होंगे । इस कमेटी की बैठक मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन में हुई। जिसमें जनपद के सभी तहसीलो में उप जिलाधिकारी तथा विकास खण्ड में खण्ड विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने का निर्णय लिया गया हैै। मुख्य विकास अधिकारी ने टिड्डी दल के सम्भावित प्रकोप को देखते हुए न्याय पंचायत एवं ग्रामवार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये है। इसमें नगरीय क्षेत्र, नगर पालिका क्षेत्र एवं नगर पंचायत क्षेत्र आदि को भी आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। इस कार्य में कीटनाशक विक्रेताओ/डीलरो से आवश्यक रसायन आरक्षित मात्रा में रखने हेतु निर्देश दिया है। मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि, गन्ना, उद्यान विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग से संबंधित क्षेत्रीय कर्मचारियो को लगाकर टिड्डियो से आक्रमण की दशा में एक साथ इकटठा होकर ढोल नगाड़ो, टीन के डिब्बो, थालियो आदि को बजाते हुए शोर मचाने के साथ-साथ टैक्टर माउंटेड स्प्रेयर्स, पावर स्प्रेयर्स अग्नि शमन विभाग की गाडियो से मैलाथियान 96 प्रतिशत ईसी, क्लोरोपायरिफाॅस 50 प्रतिशत ईसी एवं फिप्रोनिल 5 प्रतिशत ईसी की रात्रि 11 बजे से सूर्योदय तक गहन छिड़काव करने से टिड्डी दल पर नियंत्रण की कार्यवाही करने को कहा है।
मुख्य विकास अधिकारी ने टिड्डी दल के सम्भावित प्रकोप को देखते हुए न्याय पंचायत एवं ग्रामवार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये है। अयोध्याः एमपी अग्रवाल ने मण्डल कार्रवाई शुरू कर दिया है, जिसके तहत मंडल के समस्त जिलाधिकरियो, संयुक्त निदेशक कृषि एवं कृषि विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि जनपद में सम्भवित टिड्डी दल के प्रकोप को रोकने हेतु केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्रालय से प्राप्त दिशा निर्देशो के अनुसार कार्यवाही किया जाय तथा इसके लिए लोकस्ट वार्निंग आर्गनाइजेशन स्थापित किये गये हैं। यह जो अपने विशेषज्ञो को समय-समय पर क्षेत्रो में भेजा जायेगा तथा इसके साथ समन्वय करने की कार्यवाही भी किया जाये तथा स्थानीय स्तर पर नियंत्रण केन्द्र बनाने का निर्देश दिया है! मण्डलायुक्त श्री अग्रवाल ने नगर विकास, चिकित्सा, राजस्व, पुलिस, शिक्षा, सिचाई, विद्युत, विकास, आदि विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि उशून्यप्रशून्य सरकार द्वारा "आयुष कवच कोविड" नाम से मोबाईल एप जारी करें तथा लोगो को कोरोना वायरस से लड़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से जुड़े हुए तथ्यो को उपलब्ध कराने के साथ ही विभिन्न नवीनतम महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है इसलिए समस्त विभाग के अधिकारी इस महत्वपूर्ण एप को डाउनलोड करे तथा इसकी समीक्षा भी किया जाये तथा इसमे सरकारी विभागो के साथ-साथ स्वंयसेवी संगठनो को भी जोड़ा जाये। उधर जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने जनपद मेंसम्भावित टिड्डी दल के प्रकोप से बचने के लिए मुख्य विकास अधिकारी प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है, इसमें उप निदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, महाप्रबन्धक रौजागाॅव चीनी मिल, सहायक महाप्रबन्धक मसौधा चीनी मिल, वरिष्ठ महाप्रबन्धक मसौधा चीनी मिल, कृषि विज्ञान केन्द्र मसौधा के वैज्ञानिक डाशून्य डीडी सिंह को सदस्य बनाया गया है तथा इस कमेटी के सदस्य सचिव जिला कृषि रक्षा अधिकारी वीके सिंह होंगे । इस कमेटी की बैठक मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन में हुई। जिसमें जनपद के सभी तहसीलो में उप जिलाधिकारी तथा विकास खण्ड में खण्ड विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने का निर्णय लिया गया हैै। मुख्य विकास अधिकारी ने टिड्डी दल के सम्भावित प्रकोप को देखते हुए न्याय पंचायत एवं ग्रामवार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये है। इसमें नगरीय क्षेत्र, नगर पालिका क्षेत्र एवं नगर पंचायत क्षेत्र आदि को भी आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। इस कार्य में कीटनाशक विक्रेताओ/डीलरो से आवश्यक रसायन आरक्षित मात्रा में रखने हेतु निर्देश दिया है। मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि, गन्ना, उद्यान विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग से संबंधित क्षेत्रीय कर्मचारियो को लगाकर टिड्डियो से आक्रमण की दशा में एक साथ इकटठा होकर ढोल नगाड़ो, टीन के डिब्बो, थालियो आदि को बजाते हुए शोर मचाने के साथ-साथ टैक्टर माउंटेड स्प्रेयर्स, पावर स्प्रेयर्स अग्नि शमन विभाग की गाडियो से मैलाथियान छियानवे प्रतिशत ईसी, क्लोरोपायरिफाॅस पचास प्रतिशत ईसी एवं फिप्रोनिल पाँच प्रतिशत ईसी की रात्रि ग्यारह बजे से सूर्योदय तक गहन छिड़काव करने से टिड्डी दल पर नियंत्रण की कार्यवाही करने को कहा है।
दरौंदा। दूसरे राज्यों से शनिवार तक 5 प्रखंडस्तरीय आइसोलेशन सह परीक्षण केंद्र में 2 महिला सहित 147 लोग रह रहे हैं। लगातार बढ़ रही प्रवासियों की संख्या से आइसोलेशन केंद्रों पर कुव्यवस्था साफ दिखने लगी है। कहीं शौचालय की परेशानी, तो कहीं पीने के पानी की। जमीन पर एक दरी व चादर बिछाकर लोगों को सुलाया जा रहा है। मिडिल स्कूल केटी भरौली केंद्र पर एक गंदे शौचालय में 40 लोग जा रहे हैं। जिन कमरों में स्कूल के सामान रखे गए है, उसी कमरे में प्रवासी को भी रखा जा रहा है। मिडिल स्कूल बगौरा व हाई स्कूल बगौरा में भी एक-एक ही शौचालय है। प्रशासन अब चलंत शौचालय बनाने में जुटा है। मिडिल स्कूल दरौंदा के स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि इस केंद्र पर बाउंड्री नहीं होने से प्रवासी खुले में शौच के लिए चले जा रहे हैं, जो संक्रमण को आमंत्रण दे रहा है। सभी केंद्रों पर रहने वाले प्रवासी साफ-सफाई व सेनेटाइज नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कैसा आइसोलेशन केंद्र है। यहां तो संक्रमण से बचने की बजाय आमंत्रण दिया जा रहा है। हाई स्कूल धनौती में 39, मिडिल स्कूल दरौंदा में 45, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में 2 महिला व मिडिल स्कूल केटी भरौली में 40 व मिडिल स्कूल बगौरा में 11 प्रवासी रह रहे हैं। बीडीओ रीता कुमारी व प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि अलग-अलग कमरों में बेड लगाए गए हैं। भोजन का पैकेट बनवाकर मंगाया जा रहा है। पीएचसी दरौंदा की टीम इनकी नियमित स्वास्थ्य जांच कर रही है।
दरौंदा। दूसरे राज्यों से शनिवार तक पाँच प्रखंडस्तरीय आइसोलेशन सह परीक्षण केंद्र में दो महिला सहित एक सौ सैंतालीस लोग रह रहे हैं। लगातार बढ़ रही प्रवासियों की संख्या से आइसोलेशन केंद्रों पर कुव्यवस्था साफ दिखने लगी है। कहीं शौचालय की परेशानी, तो कहीं पीने के पानी की। जमीन पर एक दरी व चादर बिछाकर लोगों को सुलाया जा रहा है। मिडिल स्कूल केटी भरौली केंद्र पर एक गंदे शौचालय में चालीस लोग जा रहे हैं। जिन कमरों में स्कूल के सामान रखे गए है, उसी कमरे में प्रवासी को भी रखा जा रहा है। मिडिल स्कूल बगौरा व हाई स्कूल बगौरा में भी एक-एक ही शौचालय है। प्रशासन अब चलंत शौचालय बनाने में जुटा है। मिडिल स्कूल दरौंदा के स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि इस केंद्र पर बाउंड्री नहीं होने से प्रवासी खुले में शौच के लिए चले जा रहे हैं, जो संक्रमण को आमंत्रण दे रहा है। सभी केंद्रों पर रहने वाले प्रवासी साफ-सफाई व सेनेटाइज नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कैसा आइसोलेशन केंद्र है। यहां तो संक्रमण से बचने की बजाय आमंत्रण दिया जा रहा है। हाई स्कूल धनौती में उनतालीस, मिडिल स्कूल दरौंदा में पैंतालीस, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में दो महिला व मिडिल स्कूल केटी भरौली में चालीस व मिडिल स्कूल बगौरा में ग्यारह प्रवासी रह रहे हैं। बीडीओ रीता कुमारी व प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि अलग-अलग कमरों में बेड लगाए गए हैं। भोजन का पैकेट बनवाकर मंगाया जा रहा है। पीएचसी दरौंदा की टीम इनकी नियमित स्वास्थ्य जांच कर रही है।
नयी दिल्ली (एजेंसी): केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डा़ हर्षवर्धन ने कहा है कि पिछले तीन दिनों में देश में कोरोना के मामले दोगुने होने की दर बढ़कर 11. 3 दिन हो गई है जो कोरोना को नियंत्रित करने के केन्द्र सरकार के प्रयासों को दर्शाता है और कोरोना से मरने वालों का वैश्विक औसत सात प्रतिशत है वहीं यह भारत में मात्र तीन प्रतिशत है तथा इसमें 86 प्रतिशत मामले अन्य बीमारियों से जुड़ें हैं। गौरतलब है कि लॉक डाउन से पहले देश में कोरोना के दोगुना होने की दर 3. 2 दिन थी। डा़ हर्षवर्धन ने बुधवार को देश के लायंस क्लब इंटरनेशनल के वालंटियर्स और पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिेंग में कहा कि देश में कोरोना से जितनी मौतें हुई हैं उनमें मरीजों को अन्य बीमारियां थी जिन्हें चिकित्सा भाषा में 'कोमोर्बिडिटी' कहा जाता है। इस समय देश में 0. 33 प्रतिशत मरीज वेंटीलेटर्स पर हैं और 1. 5 प्रतिशत ऑक्सीजन सपोर्ट तथा 2. 34 प्रतिशत मरीज आईसीयू में है जो देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का परिचायक है। अगर किसी तरह की कोई भी और स्थिति उत्तपन्न होती है तो हमारे यहां आइसोलेशन बेड्स, वेंटीलेटर्स, पीपीई और मॉस्कों की पूर्ण उपलब्धता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में इस समय 288 सरकारी और 97 निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाएं कोरोना की जांच में लगी हुई हैं और रोजाना साठ हजार परीक्षण किए जा रहे हैं। अगले कुछ दिनों में सरकार इसे बढ़ाकर एक लाख टेस्ट प्रतिदिन करने जा रही है। उन्होंने कहा कि देश और विदेशों में कोरोना की वैक्सीन बनने का काम जारी है और इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन फिलहाल कोरोना से बचने का एक मात्र तरीका लॉक डाउन और सामजिक दूरी है और ये दोनों की 'सामाजिक वैक्सीन' हैं। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय कईं नवाचार परियोजनाओं पर काम कर रहा है जिनसे जांच प्रकिया में और तेजी लाई जा सकेगी। इस समय देश में कोरोना मरीजों की संख्या 31332 हैं और मरने वालों की संख्या 1007 हो गई हैं । इसके अलावा कोरोना से ठीक हाेने वाले मरीजोंं की संख्या 7696 हो गई हैं तथा इनका रिकवरी रेट 23 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
नयी दिल्ली : केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डा़ हर्षवर्धन ने कहा है कि पिछले तीन दिनों में देश में कोरोना के मामले दोगुने होने की दर बढ़कर ग्यारह. तीन दिन हो गई है जो कोरोना को नियंत्रित करने के केन्द्र सरकार के प्रयासों को दर्शाता है और कोरोना से मरने वालों का वैश्विक औसत सात प्रतिशत है वहीं यह भारत में मात्र तीन प्रतिशत है तथा इसमें छियासी प्रतिशत मामले अन्य बीमारियों से जुड़ें हैं। गौरतलब है कि लॉक डाउन से पहले देश में कोरोना के दोगुना होने की दर तीन. दो दिन थी। डा़ हर्षवर्धन ने बुधवार को देश के लायंस क्लब इंटरनेशनल के वालंटियर्स और पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिेंग में कहा कि देश में कोरोना से जितनी मौतें हुई हैं उनमें मरीजों को अन्य बीमारियां थी जिन्हें चिकित्सा भाषा में 'कोमोर्बिडिटी' कहा जाता है। इस समय देश में शून्य. तैंतीस प्रतिशत मरीज वेंटीलेटर्स पर हैं और एक. पाँच प्रतिशत ऑक्सीजन सपोर्ट तथा दो. चौंतीस प्रतिशत मरीज आईसीयू में है जो देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का परिचायक है। अगर किसी तरह की कोई भी और स्थिति उत्तपन्न होती है तो हमारे यहां आइसोलेशन बेड्स, वेंटीलेटर्स, पीपीई और मॉस्कों की पूर्ण उपलब्धता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में इस समय दो सौ अठासी सरकारी और सत्तानवे निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाएं कोरोना की जांच में लगी हुई हैं और रोजाना साठ हजार परीक्षण किए जा रहे हैं। अगले कुछ दिनों में सरकार इसे बढ़ाकर एक लाख टेस्ट प्रतिदिन करने जा रही है। उन्होंने कहा कि देश और विदेशों में कोरोना की वैक्सीन बनने का काम जारी है और इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन फिलहाल कोरोना से बचने का एक मात्र तरीका लॉक डाउन और सामजिक दूरी है और ये दोनों की 'सामाजिक वैक्सीन' हैं। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय कईं नवाचार परियोजनाओं पर काम कर रहा है जिनसे जांच प्रकिया में और तेजी लाई जा सकेगी। इस समय देश में कोरोना मरीजों की संख्या इकतीस हज़ार तीन सौ बत्तीस हैं और मरने वालों की संख्या एक हज़ार सात हो गई हैं । इसके अलावा कोरोना से ठीक हाेने वाले मरीजोंं की संख्या सात हज़ार छः सौ छियानवे हो गई हैं तथा इनका रिकवरी रेट तेईस प्रतिशत से अधिक हो गया है।
गेव द्वारा कै खुसरो की खोज करने के पूर्व उसने गेव को राजकुमार कै खुसरों की खोज में भेज कर फुरामर्ज को तूरान के पराजित भाग का संरक्षक नियुक्त कर दिया । इन * कार्यों से छुट्टी पाकर वह सब लूट का धन, घोड़ा, हाथी, नौकर चाकर तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुऐं लेकर कैकाऊस के सम्मुख पहुँचा । कैकाऊस सब समाचार सुन कर तथा धन इत्यादि देख कर अतीव प्रसन्न हुआ । रुस्तम के चले जाने के पश्चात् गेव भी अपने घोड़े शब्देश पर चढ़ कर कै खुसरो की खोज में अकेला ही चल पड़ा। पहिले उसने चीन की नदी की ओर प्रस्थान किया। राह चलते प्रत्येक सवार से वह कै खुसरो का पता पूछता पर कोई भी उसे संतोप-प्रद उत्तर न देता । पता न मालूम होते पर वह उस अश्वारोही का बच कर डालता, क्योंकि । उसे भय था कि कहीं कोई जाकर तूरान के शासक से इस मर्म को प्रकर न करदे । वह कै खुसरों की खेज में इतना तन्मय था कि उसे अपने भोजन तथा नींद तक की याद न आता थी । गेव के प्रस्थान के पश्चात् उसके पिता गोदर्ज ने स्वप्न देखा कि गेच कैखुसरो की खोज में अकेला ही मारा-मारा फिरता है। जब सवेरे उसकी आँख खुली तो उसने कुछ विश्वास पात्र व्यक्तियों को उसके पास भेजा कि वह उसके साथ दिन-रात रह कर कै खुसरो को खोज करें । वह लोग चल तो दिये पर रोव की भाँति वह भी भटकते ही रहे और उन्हें उसका कुछ भी पता नहीं मिला करते क्या, गोदुर्ज की आज्ञा से विवश थे 1 योंही खेाजते खोजते एक दिन गेव को कुछ अश्वारोही दिखाई पड़े । जब वह निकट आये तो उन्होंने गेद से पूछा "तुम कौन हो और इस निर्जन स्थान में कैसे या निकले ।" गेव ने उत्तर दिया "मैं एक आखेट के पीछे-पीछे यहाँ आ निवला और अब लौटने का मार्ग भूल कर नहीं भटक रहा हूँ।" इसके पश्चात् गेव ने फिर उनसे तुर्की भाषा में ही जाने का विचार रखते हैं ?" उन लोगों ने कहा "हम अफरासियान के सैनिक हैं और कै खुसरो के पास जा रहे हैं ।" यह सुन कर गेव उनके साथ हो लिया । चलते-चलते रात हो गई, अतः एक स्थान पर उन लोगों ने अपना डेरा डाला गेव कई दिन का थक्का था, पढ़ते ही गाढी निद्रा में निमन्न हो गया। जब वह सो गया तो वन-यश्वारोहियों को कुछ शंका हुई और वे साचने लगे कि यह कोई ईरानी न हो, जो हम लोगों को छल रहा । अतएव वह सब उसको सोता छोड़ कर चल दिये । दूसरे दिन प्रातःकाल जब रोब सो कर उठा तो उन श्रश्वारोहियों में किसी का चिन्ह तक नहीं दिखाई पड़ा । विवस हो वह उसी पत्ते पर जिसे कि उसने उन लोगों से पूछा था, चल दिया । अन्ततः चलते-चलते वह एक सोते के निकट जा पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि एक सुन्दर युवक जिसको देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि वह कोई राजकुमार है, उसी सोने के किनारे मदिरा पात्र अपने हाथ में लिये बैठा है । यह देख कर वह आगे बढ़ा और निकट पहुँच कर अभिवादन करते हुए पूछा 'हे राजकुमार ! क्या मैं यह जान सकता हैं कि आप ही सियावश के पुत्र के खुसरी ?" उसके इस प्रश्न को सुन कर कै खुसरो ने हँस कर कहा "हाँ" और फिर कहा "मुझे विश्वास है कि तुम ही गोदर्ज के पुत्र सेव हो ।" उसकी इस बात को सुन कर गेव घोड़े से उतर पड़ा और उसके सम्मुख जाकर अपने शिर को अभिवादन के रूप में का दिया। श्राश्चर्य चकत हो उसने पूछा "राजकुमार ! श्रापने मुझे पहिचान कैसे लिया ?' उसने उत्तर दिया "मेरे पिता के राजभवन में समस्त पहलवानों के चित्र अंकित हैं और मेरी माता ने मुझे सब के नाम से परिचित करा दिया है। अब यदि रुस्तम, तोस तथा गोदवर्ज़ भी आये तो पल भर में मैं उनको पहिचान सकता हूँ ।" जब गेव ने यह बात सुनी तो उसका कौतूहल शांत हो गया । थोड़ी देर बैठने के पश्चात् कै खुसरो ने फिर गेव से पूछा "भला गेव द्वारा कै खुसरों की खोज तुमतो बताओ कि तुमने मुझे किस प्रकार पहिचान लिया ।" गेव ले उत्तर दिया "हे राजकुमार, आपका सुन्दर मुख तथा तेजस्वी रूप स्वयं ही आपके राजवंशी होने का सजीव प्रमाण है और इन्हीं चिन्हों से मैंने आपको पहिचाना । अब यदि मेरी को क्षमा करें और अपनी भुजा को नग्न करके दिखा दे तो पुष्ट प्रमाण का अभाव न रहे । कैखुसरो ने उसकी इस प्रार्थना को स्वीकार कर तुरन्त अपनी भुजा खोल दी। जब गेव ने भुजा पर अपेक्षित काला चिह्न देखा तो गद्गद् हो गया और अपना मस्तक पृथ्वी पर टेक दिया। प्राचीन काल में प्रत्येक राज-वश का एक चिह्न होता था जो कि उसकी सन्तान की भुजा पर अंकित रहता था और यह वही चिह्न था जिसको देखने के लिये गेव इतना उत्सुक था । शिष्टाचार के पश्चात् गेव ने राजकुमार को घोड़े पर सवार कराया और फ़िरिंगियश के पास चल दिया। वहाँ पहुँच कर उसने ईरान तथा तूशन के युद्ध का सारा वृत्तान्त उन लोगों से कहा । यह समाचार सुन कर फिसिंगयश ने कहा, "अब तुम लोगों की भलाई इसी में है कि तुरन्त तूरान छाड़ कर ईरान के लिये प्रस्थान करो ।" उसने गेव से कहा, "यहीं निकट में एक अश्वसाला है। तुम वहाँ से जाकर एक तेज़ घोड़ा ले आओ।" गेव ने तुरन्त उसकी श्राशा का पालन किया और दो अच्छे घोड़े लेकर फरिंगियश के सम्मुख उपस्थित हुआ। वे तीनों उन्हीं घोड़ों के पर सवार होकर ईरान की ओर चल दिये । इधर पीरान के गुप्तचरों ने जब उस अश्वारोही को अपने स्थान पर न पाया तो सीधे कैखुसरो के कारागृह की ओर गया। जब वहाँ पहुँच कर ● उन लोगों ने देखा कि कैखुसरो भी नहीं है तो सोधे पीरान के पास पहुँचे और उस अश्वारोही तथा कैखुसरो के निकल भागने का वृत्तान्त आद्योपान्त कह सुनाया। उसने कैखुसरो की रक्षा कार अपने सिर लिया हुआ था, अतः अपने हृदय में बहुत डरा और इसी सोभ तथा क्रोध में उसने गुलबाद को गेव, कै खुसरो तथा फिरिंगियश की खोज में सेना सहित भेज दिया । गुलबाद उससे विदा होकर कै खुसरो की खोज में निकले । चलतेचलते गुलबाद उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ यह तीनों विश्राम के हेतु सो रहे थे । ज्योंही यह लोग उनके निकट पहुँचे कि गेव की नीद टूट गई । उसने जब इन लोगों को देखा तो तुरन्त अपनी तलवार तथा गदा लेकर इन लोगों से जुट गया । गेव इतनी वीरता से लड़ा कि अकेले हो गुलबाद की समस्त सेना को धराशायी कर दिया। गुलबाद ने जो यह देखा तो प्राण लेकर भागा और पीरान के पास पहुँच कर सब वृत्तान्त कह सुनाया । गुलबाद तथा उसके संगियों को परास्त करके गेव कैखुसरो के निकट आया और उसे जगा कर उससे सब समाचार कह सुनाया। कैखुसरो, ने कहा, "फिर तुमने मुझे क्यो नहीं जगाया और अकेले ही युद्ध क्यों करते रहे ।" यह सुन कर मेव ने बड़ी नम्रता के साथ कहा, "राजकुमार आप के प्रताप की छाया ही सर्वदा हम लोगों की सहायता करती और उसी के बल पर हम लोग आपके शत्रुओं का दमन करते हैं ।" यह कह कर उसन, जैसा कुछ भोजन जुटा सका उन लोगों को खिलाया और उस स्थान को छोड़ कर अपनी यात्रा फिर आरम्भ कर दी । इधर गुलबाद के पहुंचने तथा सब समाचार सुनने पर पीशन के क्रोध की सीमा न रही । वह तुरन्त असंख्य सैनिक लेकर शेव तथा अपने बन्दियों के लिये चल दिया और इस वेग से चला कि दो-दो दिवस की यात्रा एक ही दिन में पूरी करता था । श्रन्ततः वह गेव के पड़ाव के निकट जा पहुँचा । उस समय फिरिंगियश के अतिरिक्त और सब गाढ़ निद्रा में निमग्न थे। उसने जब दूर से सेना को आते देखा तो यह अनुमान कर लिया कि गुलवाद के पराजित होने का समाचार पाकर श्रीराम स्वयं ही आ रहा है। उसने गेव तथा कैब्रुसरो को जगा ऋतएव दिया और पौरान के आगमन की सूचना दे दी। यह सुनकर कै. ने कहा "माता अब क्या भय है । इस समय तो हम भी दी है।" व जे जब यह सुना तो कहने लगा "राजकुमार जब तक मेरे शरीर में रक्त तथा रक्त में नाम मात्र को भी जीवन शेष है, तब तक आप को युद्ध में जाने को कोई आवश्यकता नहीं । मैं अकेला ही उनसे युद्ध करूँगा ।" कैखुसरो ने कहा "ऐ वीर यह तो ठीक है परन्तु तनक तुम वह तो सोचा कि पीरान की इतनी बड़ी सेना से तुम अकेले किस प्रकार लड़ सकोगे । मेरी इच्छा है कि मैं तुम्हारी सहायता करूँ" गेव ने कहा, "हे राजकुमार, प्रथम तो तुम को युद्ध का कुछ अनुभव नहीं, अतएव चिन्ता इस बात की है कि कहीं तुम को कोई बाव न लग जाय । दूसरे यह कि मैं भी रुस्तम की भांति युद्ध में किसी की सहायता नहीं लेखा । ने इस विष्य में कई बार मेरी परीला ली और प्रत्येक बार उत्तीर्ण होने पर उसने प्रसन्न हो कर अपनी पुत्री का हाथ मेरे हाथ में दिया था ।" मुझे निश्चिन्त होकर युद्ध करने दें और किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ कर देखें कि मैं कैसा युद्ध करता हूँ । "राजकुमार विवश होकर गेव के प्रस्ताव से सहमत हो गया और गेव अकेला ही हुआ । इधर तूरान की ओर से पशन नामक योद्धा अपना भाला मचाता हुए रांगण में उतरा और आते ही बोला 'गेवतु ईरान से कर राजकुमार का चुरा कर भागना चाहता है। याद रख कि आज तू जीवित कदापि नहीं लौट सकता ।" इतना कह कर उसने अपनी गदा का प्रहार के शिर पर किया । गदा के श्राधात से उसके शिर से रक्त की धारा यह चली परन्तु धन्य वीर गेव कि ऐसी करारी चोट खाकर भी अपने घोड़े पर अदल और अचल बैठा रहा और प्रतिरोध में उसने अपने भाले के इस वेग से चलाया कि वह पशन की हड्डियों को तोड़ता हुआ कलेजे में जा घुसा और रक्त की धार बह चली। पशन इस सांघातिक चोट को न सह सका और तुरन्त घोड़े के नीचे जा गिरा । पशन के धराशायी होते ही पौरान अपना घोड़ा कुदा कर राभूमि में आ पहुँचा और कहने लगा - "श्रो गेव, तूने अब तक तूरान की सेना के साथ युद्ध किया है परन्तु अब तू संभल जा । देख तेरा काल तेरे शिर पर आ गया है । तेरे कवच को चूर-चूर कर अब तुझे कफन पहनाऊँगा (221 यह सुन कर गेव ने उत्तर दिया- "अरे कायर, तू किस से बातें कर रहा । मैं वही गेव हूँ जो तेरी दानों पत्नियों को चीन से ल गया था । उस समय क्या किया था तू ने ! रुस्तम के अतिरिक्त इस संसार में और कोई वीर नहीं है जो मुझ से युद्ध कर सके ।" इस बात से पौरान के भावभंगियाँ विकृत हो गयीं और वह भीत हो गया। फिर भी प्रकाशम रूप में कहने लगा 'जा मैंने तुझे मुक्त कर दिया। अब तू चुपचाप चला जा" पौरान की इस भय संयुक्त क्षमा की बात सुन कर गेव ने कहा "तू ने तो मुझे मुक्त कर दिया पर मैं तो तुझे मुक्त नहीं कर सकता । तुके बन्दी रूप में ईरान ले जाऊँगा ।" इतना कह कर उसने अपना घोड़ा बढ़ाया । पीरान ने जो यह यह देखा तो रण-भूमि से भागा। परन्तु गेव कब छोड़ने वाला था । उसने तुरन्त अपनी नागपाश फेंक कर उसका गला जकड़ लिया और लगा अपनी ओर खींचने । तूरानियों ने जो अपने सेनापति को इस प्रकार विपद-मस्त देखा तो तुरन्त मेव पर फट पड़ी और लगी बाण, तलवार तथा गदा की वर्षा करने । परन्तु ईश्वर जाने कि गेन का शरीर था कि वज्र कि उसको इस आक्रमण तथा प्रहार का नाममात्र भी घाव न लगा । इस अवसर पर गेव का युद्ध अवश्य दर्शनीय था । वह एक हाथ से पीरान को अपनी ओर खींचता था और दूसरे से अपनी गदा द्वारा शत्रुओं का कचूमर निकाल रहा था। मारते तथा मार खाते हुये वह पीरान को खींच कर कैखुसरों के निकट ले गया और कमन्द उसके हाथ में देकर स्वयं फिर शत्रुओं में जा घुसा। कहाँ तक कहें कोई भी योद्धा उसका सामना न कर सका और सब के सब भाग खड़े हुये । तरानियों को भगा कर वह फिर राजकुमार के पास आया और पीरान के बध की श्राज्ञा माँगी 1. पर कैखुसरो तथा फिरिंगियश ने सियावश की मृत्यु से लेकर अपने भागने तक की कथा कह सुनाई और कहा, "यह सर्वदा से हम लोगों का शुभचिन्तक रहा है अतएव इसको प्राण-दान देना उचित है ।" फिरिवियश तथा कैब्रुसरो की यह बात कर्ण-गोचर होते ही गेव बोला, "राजकुमार जैने यह शपथ खाई है कि मैं पृथ्वी को पीरान के रक्त से रंजित करूंगा ।" जब राजकुमार को जैव की शपथ का भान हुआ तो उसने कहा, "अच्छा तुम अपने खञ्जर से इसके कान में छेद कर दो । इस भाँति जब इसका रक्त पृथ्वी पर टपकेगा तो तुम्हारी भी शपथ पूर्ण हो जायगी और इसको भी प्राण-दान मिल जायगा । गेव ने राजकुमार के कथनानुसार श्राचरण किया और कर्मा छेद कर पैशन को बत-मुक्त कर दिया । गेव के हाथ से छुटकारा पाते पीशन अफरालियाब के पास चला गया । पीरान जब अमिया के पास पहुँचा तो उसने अपनी पराजय, बन्धन तथा मुक्ति का सारा वृत्तान्त कड सुनाया । अफरामियाज यह सम्पूर्ण वृत्तात सुन कर अत्यन्त खिन हुआ और उसी समय प्रत्येक सीमा रक्षक को इस प्राशय को आज्ञा भेजी कि अमुक वेपधारी दो पुरुष और एक स्त्री को जहाँ कहीं पाश्री मार डालो और स्वयं एक बहुत बड़ी से लेकर इन तीनों की खोज में बल दिया। पौरान को जीवनदान देने तथा उसके चले जाने के पश्चात इन तीनों ने भी अपना रास्त लिया । चलते-चलते ये लोग जेहें नदी के तट पर पहुंचे। उस समय जेड़ें बाढ़ पर थी। कैखुसरो तथा फिरिंगियश को थोड़ी दूर पर छोड़ गेव घाट के संरक्षक के पास पहुँचा और पार जाने को उससे नाव माँगी । मुखिया ने गेव से श्राज्ञा-पत्र माँगा, परन्तु गेव द्वारा यह जान कर कि उनका आज्ञा-पत्र खो गया है कहा, "फिर तो मैं तुमको पार उतारने में विवश हूँ। परन्तु फिर क्षण भर ठहर कर बोला, "यदि वह काला घोड़ा मुझे दे दो तो मैं तुम्हें पार करा दूँ ।" गेव ने कहा यह घोड़ा तो राजकुमार का है और मेरा इस पर कोई अधिकार नहीं है। यह सुन कर वह फिर बोला "अच्छा यदि तुम घोड़ा न देकर बाँदी को ही मुझे दे दो। तो भी मैं तुम्हारा कार्य कर हूँ ।" गेव ने कहा
गेव द्वारा कै खुसरो की खोज करने के पूर्व उसने गेव को राजकुमार कै खुसरों की खोज में भेज कर फुरामर्ज को तूरान के पराजित भाग का संरक्षक नियुक्त कर दिया । इन * कार्यों से छुट्टी पाकर वह सब लूट का धन, घोड़ा, हाथी, नौकर चाकर तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुऐं लेकर कैकाऊस के सम्मुख पहुँचा । कैकाऊस सब समाचार सुन कर तथा धन इत्यादि देख कर अतीव प्रसन्न हुआ । रुस्तम के चले जाने के पश्चात् गेव भी अपने घोड़े शब्देश पर चढ़ कर कै खुसरो की खोज में अकेला ही चल पड़ा। पहिले उसने चीन की नदी की ओर प्रस्थान किया। राह चलते प्रत्येक सवार से वह कै खुसरो का पता पूछता पर कोई भी उसे संतोप-प्रद उत्तर न देता । पता न मालूम होते पर वह उस अश्वारोही का बच कर डालता, क्योंकि । उसे भय था कि कहीं कोई जाकर तूरान के शासक से इस मर्म को प्रकर न करदे । वह कै खुसरों की खेज में इतना तन्मय था कि उसे अपने भोजन तथा नींद तक की याद न आता थी । गेव के प्रस्थान के पश्चात् उसके पिता गोदर्ज ने स्वप्न देखा कि गेच कैखुसरो की खोज में अकेला ही मारा-मारा फिरता है। जब सवेरे उसकी आँख खुली तो उसने कुछ विश्वास पात्र व्यक्तियों को उसके पास भेजा कि वह उसके साथ दिन-रात रह कर कै खुसरो को खोज करें । वह लोग चल तो दिये पर रोव की भाँति वह भी भटकते ही रहे और उन्हें उसका कुछ भी पता नहीं मिला करते क्या, गोदुर्ज की आज्ञा से विवश थे एक योंही खेाजते खोजते एक दिन गेव को कुछ अश्वारोही दिखाई पड़े । जब वह निकट आये तो उन्होंने गेद से पूछा "तुम कौन हो और इस निर्जन स्थान में कैसे या निकले ।" गेव ने उत्तर दिया "मैं एक आखेट के पीछे-पीछे यहाँ आ निवला और अब लौटने का मार्ग भूल कर नहीं भटक रहा हूँ।" इसके पश्चात् गेव ने फिर उनसे तुर्की भाषा में ही जाने का विचार रखते हैं ?" उन लोगों ने कहा "हम अफरासियान के सैनिक हैं और कै खुसरो के पास जा रहे हैं ।" यह सुन कर गेव उनके साथ हो लिया । चलते-चलते रात हो गई, अतः एक स्थान पर उन लोगों ने अपना डेरा डाला गेव कई दिन का थक्का था, पढ़ते ही गाढी निद्रा में निमन्न हो गया। जब वह सो गया तो वन-यश्वारोहियों को कुछ शंका हुई और वे साचने लगे कि यह कोई ईरानी न हो, जो हम लोगों को छल रहा । अतएव वह सब उसको सोता छोड़ कर चल दिये । दूसरे दिन प्रातःकाल जब रोब सो कर उठा तो उन श्रश्वारोहियों में किसी का चिन्ह तक नहीं दिखाई पड़ा । विवस हो वह उसी पत्ते पर जिसे कि उसने उन लोगों से पूछा था, चल दिया । अन्ततः चलते-चलते वह एक सोते के निकट जा पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि एक सुन्दर युवक जिसको देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि वह कोई राजकुमार है, उसी सोने के किनारे मदिरा पात्र अपने हाथ में लिये बैठा है । यह देख कर वह आगे बढ़ा और निकट पहुँच कर अभिवादन करते हुए पूछा 'हे राजकुमार ! क्या मैं यह जान सकता हैं कि आप ही सियावश के पुत्र के खुसरी ?" उसके इस प्रश्न को सुन कर कै खुसरो ने हँस कर कहा "हाँ" और फिर कहा "मुझे विश्वास है कि तुम ही गोदर्ज के पुत्र सेव हो ।" उसकी इस बात को सुन कर गेव घोड़े से उतर पड़ा और उसके सम्मुख जाकर अपने शिर को अभिवादन के रूप में का दिया। श्राश्चर्य चकत हो उसने पूछा "राजकुमार ! श्रापने मुझे पहिचान कैसे लिया ?' उसने उत्तर दिया "मेरे पिता के राजभवन में समस्त पहलवानों के चित्र अंकित हैं और मेरी माता ने मुझे सब के नाम से परिचित करा दिया है। अब यदि रुस्तम, तोस तथा गोदवर्ज़ भी आये तो पल भर में मैं उनको पहिचान सकता हूँ ।" जब गेव ने यह बात सुनी तो उसका कौतूहल शांत हो गया । थोड़ी देर बैठने के पश्चात् कै खुसरो ने फिर गेव से पूछा "भला गेव द्वारा कै खुसरों की खोज तुमतो बताओ कि तुमने मुझे किस प्रकार पहिचान लिया ।" गेव ले उत्तर दिया "हे राजकुमार, आपका सुन्दर मुख तथा तेजस्वी रूप स्वयं ही आपके राजवंशी होने का सजीव प्रमाण है और इन्हीं चिन्हों से मैंने आपको पहिचाना । अब यदि मेरी को क्षमा करें और अपनी भुजा को नग्न करके दिखा दे तो पुष्ट प्रमाण का अभाव न रहे । कैखुसरो ने उसकी इस प्रार्थना को स्वीकार कर तुरन्त अपनी भुजा खोल दी। जब गेव ने भुजा पर अपेक्षित काला चिह्न देखा तो गद्गद् हो गया और अपना मस्तक पृथ्वी पर टेक दिया। प्राचीन काल में प्रत्येक राज-वश का एक चिह्न होता था जो कि उसकी सन्तान की भुजा पर अंकित रहता था और यह वही चिह्न था जिसको देखने के लिये गेव इतना उत्सुक था । शिष्टाचार के पश्चात् गेव ने राजकुमार को घोड़े पर सवार कराया और फ़िरिंगियश के पास चल दिया। वहाँ पहुँच कर उसने ईरान तथा तूशन के युद्ध का सारा वृत्तान्त उन लोगों से कहा । यह समाचार सुन कर फिसिंगयश ने कहा, "अब तुम लोगों की भलाई इसी में है कि तुरन्त तूरान छाड़ कर ईरान के लिये प्रस्थान करो ।" उसने गेव से कहा, "यहीं निकट में एक अश्वसाला है। तुम वहाँ से जाकर एक तेज़ घोड़ा ले आओ।" गेव ने तुरन्त उसकी श्राशा का पालन किया और दो अच्छे घोड़े लेकर फरिंगियश के सम्मुख उपस्थित हुआ। वे तीनों उन्हीं घोड़ों के पर सवार होकर ईरान की ओर चल दिये । इधर पीरान के गुप्तचरों ने जब उस अश्वारोही को अपने स्थान पर न पाया तो सीधे कैखुसरो के कारागृह की ओर गया। जब वहाँ पहुँच कर ● उन लोगों ने देखा कि कैखुसरो भी नहीं है तो सोधे पीरान के पास पहुँचे और उस अश्वारोही तथा कैखुसरो के निकल भागने का वृत्तान्त आद्योपान्त कह सुनाया। उसने कैखुसरो की रक्षा कार अपने सिर लिया हुआ था, अतः अपने हृदय में बहुत डरा और इसी सोभ तथा क्रोध में उसने गुलबाद को गेव, कै खुसरो तथा फिरिंगियश की खोज में सेना सहित भेज दिया । गुलबाद उससे विदा होकर कै खुसरो की खोज में निकले । चलतेचलते गुलबाद उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ यह तीनों विश्राम के हेतु सो रहे थे । ज्योंही यह लोग उनके निकट पहुँचे कि गेव की नीद टूट गई । उसने जब इन लोगों को देखा तो तुरन्त अपनी तलवार तथा गदा लेकर इन लोगों से जुट गया । गेव इतनी वीरता से लड़ा कि अकेले हो गुलबाद की समस्त सेना को धराशायी कर दिया। गुलबाद ने जो यह देखा तो प्राण लेकर भागा और पीरान के पास पहुँच कर सब वृत्तान्त कह सुनाया । गुलबाद तथा उसके संगियों को परास्त करके गेव कैखुसरो के निकट आया और उसे जगा कर उससे सब समाचार कह सुनाया। कैखुसरो, ने कहा, "फिर तुमने मुझे क्यो नहीं जगाया और अकेले ही युद्ध क्यों करते रहे ।" यह सुन कर मेव ने बड़ी नम्रता के साथ कहा, "राजकुमार आप के प्रताप की छाया ही सर्वदा हम लोगों की सहायता करती और उसी के बल पर हम लोग आपके शत्रुओं का दमन करते हैं ।" यह कह कर उसन, जैसा कुछ भोजन जुटा सका उन लोगों को खिलाया और उस स्थान को छोड़ कर अपनी यात्रा फिर आरम्भ कर दी । इधर गुलबाद के पहुंचने तथा सब समाचार सुनने पर पीशन के क्रोध की सीमा न रही । वह तुरन्त असंख्य सैनिक लेकर शेव तथा अपने बन्दियों के लिये चल दिया और इस वेग से चला कि दो-दो दिवस की यात्रा एक ही दिन में पूरी करता था । श्रन्ततः वह गेव के पड़ाव के निकट जा पहुँचा । उस समय फिरिंगियश के अतिरिक्त और सब गाढ़ निद्रा में निमग्न थे। उसने जब दूर से सेना को आते देखा तो यह अनुमान कर लिया कि गुलवाद के पराजित होने का समाचार पाकर श्रीराम स्वयं ही आ रहा है। उसने गेव तथा कैब्रुसरो को जगा ऋतएव दिया और पौरान के आगमन की सूचना दे दी। यह सुनकर कै. ने कहा "माता अब क्या भय है । इस समय तो हम भी दी है।" व जे जब यह सुना तो कहने लगा "राजकुमार जब तक मेरे शरीर में रक्त तथा रक्त में नाम मात्र को भी जीवन शेष है, तब तक आप को युद्ध में जाने को कोई आवश्यकता नहीं । मैं अकेला ही उनसे युद्ध करूँगा ।" कैखुसरो ने कहा "ऐ वीर यह तो ठीक है परन्तु तनक तुम वह तो सोचा कि पीरान की इतनी बड़ी सेना से तुम अकेले किस प्रकार लड़ सकोगे । मेरी इच्छा है कि मैं तुम्हारी सहायता करूँ" गेव ने कहा, "हे राजकुमार, प्रथम तो तुम को युद्ध का कुछ अनुभव नहीं, अतएव चिन्ता इस बात की है कि कहीं तुम को कोई बाव न लग जाय । दूसरे यह कि मैं भी रुस्तम की भांति युद्ध में किसी की सहायता नहीं लेखा । ने इस विष्य में कई बार मेरी परीला ली और प्रत्येक बार उत्तीर्ण होने पर उसने प्रसन्न हो कर अपनी पुत्री का हाथ मेरे हाथ में दिया था ।" मुझे निश्चिन्त होकर युद्ध करने दें और किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ कर देखें कि मैं कैसा युद्ध करता हूँ । "राजकुमार विवश होकर गेव के प्रस्ताव से सहमत हो गया और गेव अकेला ही हुआ । इधर तूरान की ओर से पशन नामक योद्धा अपना भाला मचाता हुए रांगण में उतरा और आते ही बोला 'गेवतु ईरान से कर राजकुमार का चुरा कर भागना चाहता है। याद रख कि आज तू जीवित कदापि नहीं लौट सकता ।" इतना कह कर उसने अपनी गदा का प्रहार के शिर पर किया । गदा के श्राधात से उसके शिर से रक्त की धारा यह चली परन्तु धन्य वीर गेव कि ऐसी करारी चोट खाकर भी अपने घोड़े पर अदल और अचल बैठा रहा और प्रतिरोध में उसने अपने भाले के इस वेग से चलाया कि वह पशन की हड्डियों को तोड़ता हुआ कलेजे में जा घुसा और रक्त की धार बह चली। पशन इस सांघातिक चोट को न सह सका और तुरन्त घोड़े के नीचे जा गिरा । पशन के धराशायी होते ही पौरान अपना घोड़ा कुदा कर राभूमि में आ पहुँचा और कहने लगा - "श्रो गेव, तूने अब तक तूरान की सेना के साथ युद्ध किया है परन्तु अब तू संभल जा । देख तेरा काल तेरे शिर पर आ गया है । तेरे कवच को चूर-चूर कर अब तुझे कफन पहनाऊँगा (दो सौ इक्कीस यह सुन कर गेव ने उत्तर दिया- "अरे कायर, तू किस से बातें कर रहा । मैं वही गेव हूँ जो तेरी दानों पत्नियों को चीन से ल गया था । उस समय क्या किया था तू ने ! रुस्तम के अतिरिक्त इस संसार में और कोई वीर नहीं है जो मुझ से युद्ध कर सके ।" इस बात से पौरान के भावभंगियाँ विकृत हो गयीं और वह भीत हो गया। फिर भी प्रकाशम रूप में कहने लगा 'जा मैंने तुझे मुक्त कर दिया। अब तू चुपचाप चला जा" पौरान की इस भय संयुक्त क्षमा की बात सुन कर गेव ने कहा "तू ने तो मुझे मुक्त कर दिया पर मैं तो तुझे मुक्त नहीं कर सकता । तुके बन्दी रूप में ईरान ले जाऊँगा ।" इतना कह कर उसने अपना घोड़ा बढ़ाया । पीरान ने जो यह यह देखा तो रण-भूमि से भागा। परन्तु गेव कब छोड़ने वाला था । उसने तुरन्त अपनी नागपाश फेंक कर उसका गला जकड़ लिया और लगा अपनी ओर खींचने । तूरानियों ने जो अपने सेनापति को इस प्रकार विपद-मस्त देखा तो तुरन्त मेव पर फट पड़ी और लगी बाण, तलवार तथा गदा की वर्षा करने । परन्तु ईश्वर जाने कि गेन का शरीर था कि वज्र कि उसको इस आक्रमण तथा प्रहार का नाममात्र भी घाव न लगा । इस अवसर पर गेव का युद्ध अवश्य दर्शनीय था । वह एक हाथ से पीरान को अपनी ओर खींचता था और दूसरे से अपनी गदा द्वारा शत्रुओं का कचूमर निकाल रहा था। मारते तथा मार खाते हुये वह पीरान को खींच कर कैखुसरों के निकट ले गया और कमन्द उसके हाथ में देकर स्वयं फिर शत्रुओं में जा घुसा। कहाँ तक कहें कोई भी योद्धा उसका सामना न कर सका और सब के सब भाग खड़े हुये । तरानियों को भगा कर वह फिर राजकुमार के पास आया और पीरान के बध की श्राज्ञा माँगी एक. पर कैखुसरो तथा फिरिंगियश ने सियावश की मृत्यु से लेकर अपने भागने तक की कथा कह सुनाई और कहा, "यह सर्वदा से हम लोगों का शुभचिन्तक रहा है अतएव इसको प्राण-दान देना उचित है ।" फिरिवियश तथा कैब्रुसरो की यह बात कर्ण-गोचर होते ही गेव बोला, "राजकुमार जैने यह शपथ खाई है कि मैं पृथ्वी को पीरान के रक्त से रंजित करूंगा ।" जब राजकुमार को जैव की शपथ का भान हुआ तो उसने कहा, "अच्छा तुम अपने खञ्जर से इसके कान में छेद कर दो । इस भाँति जब इसका रक्त पृथ्वी पर टपकेगा तो तुम्हारी भी शपथ पूर्ण हो जायगी और इसको भी प्राण-दान मिल जायगा । गेव ने राजकुमार के कथनानुसार श्राचरण किया और कर्मा छेद कर पैशन को बत-मुक्त कर दिया । गेव के हाथ से छुटकारा पाते पीशन अफरालियाब के पास चला गया । पीरान जब अमिया के पास पहुँचा तो उसने अपनी पराजय, बन्धन तथा मुक्ति का सारा वृत्तान्त कड सुनाया । अफरामियाज यह सम्पूर्ण वृत्तात सुन कर अत्यन्त खिन हुआ और उसी समय प्रत्येक सीमा रक्षक को इस प्राशय को आज्ञा भेजी कि अमुक वेपधारी दो पुरुष और एक स्त्री को जहाँ कहीं पाश्री मार डालो और स्वयं एक बहुत बड़ी से लेकर इन तीनों की खोज में बल दिया। पौरान को जीवनदान देने तथा उसके चले जाने के पश्चात इन तीनों ने भी अपना रास्त लिया । चलते-चलते ये लोग जेहें नदी के तट पर पहुंचे। उस समय जेड़ें बाढ़ पर थी। कैखुसरो तथा फिरिंगियश को थोड़ी दूर पर छोड़ गेव घाट के संरक्षक के पास पहुँचा और पार जाने को उससे नाव माँगी । मुखिया ने गेव से श्राज्ञा-पत्र माँगा, परन्तु गेव द्वारा यह जान कर कि उनका आज्ञा-पत्र खो गया है कहा, "फिर तो मैं तुमको पार उतारने में विवश हूँ। परन्तु फिर क्षण भर ठहर कर बोला, "यदि वह काला घोड़ा मुझे दे दो तो मैं तुम्हें पार करा दूँ ।" गेव ने कहा यह घोड़ा तो राजकुमार का है और मेरा इस पर कोई अधिकार नहीं है। यह सुन कर वह फिर बोला "अच्छा यदि तुम घोड़ा न देकर बाँदी को ही मुझे दे दो। तो भी मैं तुम्हारा कार्य कर हूँ ।" गेव ने कहा