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सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती हैं। प्रत्येक एकादशी में भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन किया जाता है लेकिन सभी का अपना-अपना महत्व होता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला यानी बिना पानी के व्रत किया जाता है। यह व्रत अत्यंत कठिन होने के साथ सभी एकादशियों में सबसे अधिक महात्म्य रखता है। इस बार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे रखा जाता है एकादशी का व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि। निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि वेदव्यास ने भीम को इस व्रत का महात्मय बताते हुए कहा था कि यदि तुम सभी एकादशी के व्रत नहीं कर सकते तो ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा। तब वृकोदर भीम भी इस व्रत को करने के लिए सहमत हो गए इसलिए इस व्रत को पांडव एकादशी या फिर भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य इस लोक में सुख और यश की प्राप्ति करता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पड़ता है और इसके अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। दशमी तिथि से ही एकादशी के नियम आरंभ हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा 20 जून को मनाया जाएगा और इसके अगले दिन 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। - दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में भूमि पर शयन करें। - एकादशी तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें। - इसके बाद पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प करें। - यह दिन विष्णु जी का होता है इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ रहता है। - स्नान करने के पश्चात सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें। - अब भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाकर दिखाएं। - अब पीले पुष्प, फल, अक्षत, दूर्वा और चंदन आदि से भगवान विष्णु का पूजा करें। - तुलसी विष्णु जी को अति प्रिया है इसलिए पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। - भगवान विष्णु के समक्ष 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। - इसके बाद एकादशी व्रत का महात्म्य पढ़ें और आरती करें। - पूरे दिन निर्जला उपवास करने और रात्रि में जागरण कर भजन कीर्तन करने का विधान है। द्वादशी तिथि को प्रातः जल्दी घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं शुभ मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।
सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में चौबीस एकादशी तिथि होती हैं। प्रत्येक एकादशी में भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन किया जाता है लेकिन सभी का अपना-अपना महत्व होता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला यानी बिना पानी के व्रत किया जाता है। यह व्रत अत्यंत कठिन होने के साथ सभी एकादशियों में सबसे अधिक महात्म्य रखता है। इस बार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इक्कीस जून दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे रखा जाता है एकादशी का व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि। निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि वेदव्यास ने भीम को इस व्रत का महात्मय बताते हुए कहा था कि यदि तुम सभी एकादशी के व्रत नहीं कर सकते तो ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा। तब वृकोदर भीम भी इस व्रत को करने के लिए सहमत हो गए इसलिए इस व्रत को पांडव एकादशी या फिर भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य इस लोक में सुख और यश की प्राप्ति करता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पड़ता है और इसके अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। दशमी तिथि से ही एकादशी के नियम आरंभ हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा बीस जून को मनाया जाएगा और इसके अगले दिन इक्कीस जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। - दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में भूमि पर शयन करें। - एकादशी तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें। - इसके बाद पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प करें। - यह दिन विष्णु जी का होता है इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ रहता है। - स्नान करने के पश्चात सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें। - अब भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाकर दिखाएं। - अब पीले पुष्प, फल, अक्षत, दूर्वा और चंदन आदि से भगवान विष्णु का पूजा करें। - तुलसी विष्णु जी को अति प्रिया है इसलिए पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। - भगवान विष्णु के समक्ष 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। - इसके बाद एकादशी व्रत का महात्म्य पढ़ें और आरती करें। - पूरे दिन निर्जला उपवास करने और रात्रि में जागरण कर भजन कीर्तन करने का विधान है। द्वादशी तिथि को प्रातः जल्दी घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं शुभ मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।
इसी वर्ष ( वि० सं० १८८० की फाल्गुन सुदी ५ = ई० स० १८२४ की ५ मार्चको) मेर और मीणा जातिके उपद्रवको शान्त करनेके लिए मेरवाड़के २१ गाँव - जो कि चंग और कोटकिराना परगने में थे और जिनपर जोधपुर महाराजाका अधिकार था - ८ वर्षके लिये कम्पनीने ले लिए और उनके प्रबन्धके लिए १५,००० रुपए सालाना खर्चके भी लेने तय हुए । वि० सं० १८९२ की कार्तिक सुदीमें ( ई० स० १८३५ की २३ अक्टोबरको ) और भी ७ गाँव इनमें जोड़कर फिर ९ वर्षों के लिए यही प्रबन्ध दोहराया गया । अन्तमें वि० सं० १९०० ( ई० स० १८४३ ) में ७ गाँव तो कम्पनीने लौटा दिये; परन्तु पहलेके २१ गाँव उसने हमेशा के लिए ही अपने अधिकार में ले लिए । वि० सं० १९४२ ( ई० स० १८८५ की २ अगस्त ) को इन २१ गाँवोंकी एवज में कम्पनीने महाराजाको ३००० सालाना देनेका बादा किया और यह भी ठहराव हुआ कि यदि प्रबन्धका खर्च बाद देकर अधिक आमदनी होगी तो ४० रुपए सैकड़ा जोधपुर राज्यको दिया जायगा । जिस समय अँगरेजोंने सिंघपर अधिकार किया और टालपुरोंसे उमरकोट छीना उस समय महाराजाने उक्त प्रदेशपर अपना पहलेका हक प्रकट कियो । यद्यपि कम्पनीने उनको उमरकोट तो नहीं दिया तथापि वहाँकी आमदनी के हिसाबसे १०,००० सालाना देनेका वादा किया और महाराज जो २,२३,००० रुपये सालाना करके रूप में देते थे उसमेंसे यह रकम कम कर दी गई । ( १ ) यह पहले जोधपुर के अधीन था परन्तु वि० सं० १८७० में टालपुराने इसे पीछा छीन लिया था ।
इसी वर्ष मेर और मीणा जातिके उपद्रवको शान्त करनेके लिए मेरवाड़के इक्कीस गाँव - जो कि चंग और कोटकिराना परगने में थे और जिनपर जोधपुर महाराजाका अधिकार था - आठ वर्षके लिये कम्पनीने ले लिए और उनके प्रबन्धके लिए पंद्रह,शून्य रुपयापए सालाना खर्चके भी लेने तय हुए । विशून्य संशून्य एक हज़ार आठ सौ बानवे की कार्तिक सुदीमें और भी सात गाँव इनमें जोड़कर फिर नौ वर्षों के लिए यही प्रबन्ध दोहराया गया । अन्तमें विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ में सात गाँव तो कम्पनीने लौटा दिये; परन्तु पहलेके इक्कीस गाँव उसने हमेशा के लिए ही अपने अधिकार में ले लिए । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ बयालीस को इन इक्कीस गाँवोंकी एवज में कम्पनीने महाराजाको तीन हज़ार सालाना देनेका बादा किया और यह भी ठहराव हुआ कि यदि प्रबन्धका खर्च बाद देकर अधिक आमदनी होगी तो चालीस रुपयापए सैकड़ा जोधपुर राज्यको दिया जायगा । जिस समय अँगरेजोंने सिंघपर अधिकार किया और टालपुरोंसे उमरकोट छीना उस समय महाराजाने उक्त प्रदेशपर अपना पहलेका हक प्रकट कियो । यद्यपि कम्पनीने उनको उमरकोट तो नहीं दिया तथापि वहाँकी आमदनी के हिसाबसे दस,शून्य सालाना देनेका वादा किया और महाराज जो दो,तेईस,शून्य रुपयापये सालाना करके रूप में देते थे उसमेंसे यह रकम कम कर दी गई । यह पहले जोधपुर के अधीन था परन्तु विशून्य संशून्य एक हज़ार आठ सौ सत्तर में टालपुराने इसे पीछा छीन लिया था ।
पाठाः चीकणै घड़े छांट नीं लागै, जे लागै तौ चा 'ठौ । चा 'ठौ = धब्बा । चीकणौ पाप । चिकना पाप । - घी-तेल में मिलावट करे, कम तोले - उसे राजस्थान में चिकना पाप समझा जाता है। जब किसी से इसके बारे में आशंका प्रकट की जाती है तो पुरानी धारणाओं के दुकानदार या घरवाले तुरंत कहते हैं - राम राम, यह चिकना पाप कौन मत्थे ओढ़े? पर आज-कल व्यवसाय में चिकना, गीला, सूखा व भुरभुरा सब तरह के पाप धड़ल्ले से चलते हैं, कोई परवाह नहीं करता। चिकने पाप की खबरें तो आये दिन अखबारों में छपती हैं और छपती रहेंगी । चीठी ऊंदरा लेयग्या । चिट्ठी चूहे ले गये । - किसी काम को न करने का बहाना खोजना । - जो व्यक्ति किसी काम को टालना चाहे तब चीथड़ां रौ रतन । चिदियों का रत्न । - शोक- समाचार के लिए जो पत्र लिखा जाता है, उसे भी चीठी' कहते हैं। कोई वृद्ध बीमार लंबे अर्से तक जीये तो परिहास के आशय से कहते हैं कि उसकी 'चीठी' चूहे ले गये । - गुदड़ी का लाल । - निहायत गरीबी के बीच कोई महान विभूति पैदा हो जाय तब...! चीभड़या व्है तौ परा चाखां, पण छोरी रौ कांईं बेरौ पड़े ! ककड़ी हो तो चख भी लें, पर छोकरी का क्या पता चले ! - खाने योग्य किसी वस्तु की परख करना चाहें तो सूँघकर या चखकर पता लगा सकते हैं कि वह कैसी बनी है - अच्छी या बुरी । उसमें किस बात की कमी है, पर लड़की के लक्षणों की कैसे परख हो कि वह कैसी है - -केवल देखने मात्र से तो पता नहीं चल सकता। राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * १०९८
पाठाः चीकणै घड़े छांट नीं लागै, जे लागै तौ चा 'ठौ । चा 'ठौ = धब्बा । चीकणौ पाप । चिकना पाप । - घी-तेल में मिलावट करे, कम तोले - उसे राजस्थान में चिकना पाप समझा जाता है। जब किसी से इसके बारे में आशंका प्रकट की जाती है तो पुरानी धारणाओं के दुकानदार या घरवाले तुरंत कहते हैं - राम राम, यह चिकना पाप कौन मत्थे ओढ़े? पर आज-कल व्यवसाय में चिकना, गीला, सूखा व भुरभुरा सब तरह के पाप धड़ल्ले से चलते हैं, कोई परवाह नहीं करता। चिकने पाप की खबरें तो आये दिन अखबारों में छपती हैं और छपती रहेंगी । चीठी ऊंदरा लेयग्या । चिट्ठी चूहे ले गये । - किसी काम को न करने का बहाना खोजना । - जो व्यक्ति किसी काम को टालना चाहे तब चीथड़ां रौ रतन । चिदियों का रत्न । - शोक- समाचार के लिए जो पत्र लिखा जाता है, उसे भी चीठी' कहते हैं। कोई वृद्ध बीमार लंबे अर्से तक जीये तो परिहास के आशय से कहते हैं कि उसकी 'चीठी' चूहे ले गये । - गुदड़ी का लाल । - निहायत गरीबी के बीच कोई महान विभूति पैदा हो जाय तब...! चीभड़या व्है तौ परा चाखां, पण छोरी रौ कांईं बेरौ पड़े ! ककड़ी हो तो चख भी लें, पर छोकरी का क्या पता चले ! - खाने योग्य किसी वस्तु की परख करना चाहें तो सूँघकर या चखकर पता लगा सकते हैं कि वह कैसी बनी है - अच्छी या बुरी । उसमें किस बात की कमी है, पर लड़की के लक्षणों की कैसे परख हो कि वह कैसी है - -केवल देखने मात्र से तो पता नहीं चल सकता। राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * एक हज़ार अट्ठानवे
लंदनः बैंकों का करोड़ों रूपये का कर्ज लेकर विदेश में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्या ने अपने खिलाफ पूंजी बाजार नियामक सेबी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने यूनाइटेड स्पिरिट्स कंपनी के धन की हेराफेरी के आरोपों को आधारहीन' बताया है. माल्या ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर इस आरोप को मजाक बताया. लंदन में रह रहे माल्या ने कहा है कि वो अब ऐसी बातों के अभ्यस्त हो चुके हैं. उनको चारों तरफ से घेरने के लिए तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, पर उनका कोई कानूनी आधार नहीं है.
लंदनः बैंकों का करोड़ों रूपये का कर्ज लेकर विदेश में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्या ने अपने खिलाफ पूंजी बाजार नियामक सेबी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने यूनाइटेड स्पिरिट्स कंपनी के धन की हेराफेरी के आरोपों को आधारहीन' बताया है. माल्या ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर इस आरोप को मजाक बताया. लंदन में रह रहे माल्या ने कहा है कि वो अब ऐसी बातों के अभ्यस्त हो चुके हैं. उनको चारों तरफ से घेरने के लिए तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, पर उनका कोई कानूनी आधार नहीं है.
"स्टीम" एक लोकप्रिय सेवा हैकंप्यूटर गेम और प्रोग्राम वितरित करता है। दुनिया भर के लाखों लोग ग्राहक का उपयोग करते हैं, अपना डेटा, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि दर्ज करते हैं। तदनुसार, भाप के रचनाकारों के पास उनके उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी ज़िम्मेदारी है। वाल्व को व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसमें स्टीम गार्ड नामक एक विशेष प्रणाली द्वारा उनकी सहायता की जाती है। इस लेख में, हम आपके और आपके खाते की सुरक्षा के लिए "स्टीम गार्ड" को सक्रिय करने के तरीके के बारे में बात करेंगे। "स्टीम गार्ड" - यह क्या है? स्टीम गार्ड सुरक्षा का एक और स्तर है,जो भाप खाते के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। "स्टीम गार्ड" अनधिकृत व्यक्तियों को आपके खाते तक पहुंचने में मुश्किल बनाता है। इस प्रकार, स्टीम गार्ड पूरी तरह से घुसपैठियों, चोरों, आदि के खिलाफ सुरक्षा करता है। शामिल स्टीम गार्ड सुविधा सरल अनुमति नहीं देता हैतो अपने खाते में साइन इन करें। अतिरिक्त प्राधिकरण से गुजरना आवश्यक है। आपके ई-मेल पर कोड आएगा, जिसे स्टीम में दर्ज किया जाना चाहिए। प्राप्त चरित्र सेट में प्रवेश करने के बाद, आपको अपने खाते तक पहुंच प्राप्त होगी। "भाप गार्ड" कैसे सक्रिय करें? " - तुम पूछो हम इस लेख में इस बारे में बात करेंगे। "भाप गार्ड" को कैसे सक्रिय करें? "स्टीम गार्ड" एक बहुत उपयोगी सुविधा है। इसका उपयोग करके, आप अपने खाते की पूर्ण सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं। जोखिम जो आप "हैक" कम से कम कर दिया गया है। सीखना चाहते हैं कि "भाप गार्ड" को कैसे सक्रिय किया जाए? इस लेख को पढ़ें। आम तौर पर, स्टीम गार्ड डिफ़ॉल्ट रूप से चालू होता है, जैसा किकेवल आपने खाते में मेल टाइप किया और क्लाइंट को 2 बार पुनरारंभ किया। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि उपयोगकर्ता अनजाने में इस फ़ंक्शन को मना कर देते हैं। तो स्टीम फॉरवर्ड को वापस कैसे कनेक्ट करें? आपको सबसे पहले जो करना है वह यह जांचना है कि आपके खाते में मेलबॉक्स की पुष्टि है या नहीं। ऐसा करने के लिए, "सेटिंग्स" अनुभाग पर जाएं। यदि यह कदम पूरा हो गया है, तो आप सीधे स्टीम गार्ड सक्रियण पर जा सकते हैं। यदि बॉक्स की पुष्टि नहीं हुई है, तो इसे ठीक करना आवश्यक हैवर्तनी। ऐसा करने के लिए, "सेटिंग्स" मेनू में "ईमेल पता की पुष्टि करें" पर क्लिक करें। उसके बाद, स्क्रीन पर निर्देशों का पालन करते हुए, आपको अपने ई-मेल पर एक ईमेल प्राप्त होगा। ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से पुष्टिकरण प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और आपके मेलबॉक्स को खाते में लिंक किया जाएगा। अब हम सक्रियण में बदल जाते हैं। दोबारा, "सेटिंग्स" मेनू पर जाएं और "खाता" अनुभाग में "स्टीम गार्ड सेटिंग्स प्रबंधन" पर क्लिक करें। यह सब कुछ है। अब हमारा खाता स्टीम गार्ड द्वारा संरक्षित है। भाप गार्ड कैसे स्थापित करें? अब हर बार जब आप स्टीम में लॉग इन करते हैंअनधिकृत डिवाइस "स्टीम गार्ड" को एक पुष्टिकरण कोड की आवश्यकता होगी (आपके मेलबॉक्स में आएगा)। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी गेम क्लब में जाते हैं या किसी मित्र के कंप्यूटर के माध्यम से किसी ग्राहक के पास जाते हैं, तो आपको एक पुष्टिकरण कोड दर्ज करना होगा। कुछ उपयोगकर्ताओं में स्टीम गार्ड सुविधा नहीं है।जरूरी है तो इसे कैसे बंद करें? यह बहुत आसान है। "सेटिंग्स" अनुभाग "खाता" पर जाएं। वहां, "स्टीम गार्ड सेटिंग्स प्रबंधित करें" पर क्लिक करें। इसके अलावा, अगर आप स्टीम गार्ड को अक्षम करना चाहते हैं, तो आपको स्टीम गार्ड को अक्षम करने के बगल में स्थित बॉक्स को चेक करना होगा। सब कुछ, फ़ंक्शन अक्षम है। हालांकि, एक छोटी सी बात है। आप स्टीम गार्ड को अक्षम करने के 15 दिनों के बाद एक्सचेंज फ़ंक्शन का उपयोग नहीं कर सकते और "बाजार"। ऐसा किया जाता है ताकि हमलावरों को हैक किए जाने की स्थिति में, क़ीमती सामान या धन में फेंकने में सक्षम न हो।
"स्टीम" एक लोकप्रिय सेवा हैकंप्यूटर गेम और प्रोग्राम वितरित करता है। दुनिया भर के लाखों लोग ग्राहक का उपयोग करते हैं, अपना डेटा, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि दर्ज करते हैं। तदनुसार, भाप के रचनाकारों के पास उनके उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी ज़िम्मेदारी है। वाल्व को व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसमें स्टीम गार्ड नामक एक विशेष प्रणाली द्वारा उनकी सहायता की जाती है। इस लेख में, हम आपके और आपके खाते की सुरक्षा के लिए "स्टीम गार्ड" को सक्रिय करने के तरीके के बारे में बात करेंगे। "स्टीम गार्ड" - यह क्या है? स्टीम गार्ड सुरक्षा का एक और स्तर है,जो भाप खाते के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। "स्टीम गार्ड" अनधिकृत व्यक्तियों को आपके खाते तक पहुंचने में मुश्किल बनाता है। इस प्रकार, स्टीम गार्ड पूरी तरह से घुसपैठियों, चोरों, आदि के खिलाफ सुरक्षा करता है। शामिल स्टीम गार्ड सुविधा सरल अनुमति नहीं देता हैतो अपने खाते में साइन इन करें। अतिरिक्त प्राधिकरण से गुजरना आवश्यक है। आपके ई-मेल पर कोड आएगा, जिसे स्टीम में दर्ज किया जाना चाहिए। प्राप्त चरित्र सेट में प्रवेश करने के बाद, आपको अपने खाते तक पहुंच प्राप्त होगी। "भाप गार्ड" कैसे सक्रिय करें? " - तुम पूछो हम इस लेख में इस बारे में बात करेंगे। "भाप गार्ड" को कैसे सक्रिय करें? "स्टीम गार्ड" एक बहुत उपयोगी सुविधा है। इसका उपयोग करके, आप अपने खाते की पूर्ण सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं। जोखिम जो आप "हैक" कम से कम कर दिया गया है। सीखना चाहते हैं कि "भाप गार्ड" को कैसे सक्रिय किया जाए? इस लेख को पढ़ें। आम तौर पर, स्टीम गार्ड डिफ़ॉल्ट रूप से चालू होता है, जैसा किकेवल आपने खाते में मेल टाइप किया और क्लाइंट को दो बार पुनरारंभ किया। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि उपयोगकर्ता अनजाने में इस फ़ंक्शन को मना कर देते हैं। तो स्टीम फॉरवर्ड को वापस कैसे कनेक्ट करें? आपको सबसे पहले जो करना है वह यह जांचना है कि आपके खाते में मेलबॉक्स की पुष्टि है या नहीं। ऐसा करने के लिए, "सेटिंग्स" अनुभाग पर जाएं। यदि यह कदम पूरा हो गया है, तो आप सीधे स्टीम गार्ड सक्रियण पर जा सकते हैं। यदि बॉक्स की पुष्टि नहीं हुई है, तो इसे ठीक करना आवश्यक हैवर्तनी। ऐसा करने के लिए, "सेटिंग्स" मेनू में "ईमेल पता की पुष्टि करें" पर क्लिक करें। उसके बाद, स्क्रीन पर निर्देशों का पालन करते हुए, आपको अपने ई-मेल पर एक ईमेल प्राप्त होगा। ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से पुष्टिकरण प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और आपके मेलबॉक्स को खाते में लिंक किया जाएगा। अब हम सक्रियण में बदल जाते हैं। दोबारा, "सेटिंग्स" मेनू पर जाएं और "खाता" अनुभाग में "स्टीम गार्ड सेटिंग्स प्रबंधन" पर क्लिक करें। यह सब कुछ है। अब हमारा खाता स्टीम गार्ड द्वारा संरक्षित है। भाप गार्ड कैसे स्थापित करें? अब हर बार जब आप स्टीम में लॉग इन करते हैंअनधिकृत डिवाइस "स्टीम गार्ड" को एक पुष्टिकरण कोड की आवश्यकता होगी । उदाहरण के लिए, यदि आप किसी गेम क्लब में जाते हैं या किसी मित्र के कंप्यूटर के माध्यम से किसी ग्राहक के पास जाते हैं, तो आपको एक पुष्टिकरण कोड दर्ज करना होगा। कुछ उपयोगकर्ताओं में स्टीम गार्ड सुविधा नहीं है।जरूरी है तो इसे कैसे बंद करें? यह बहुत आसान है। "सेटिंग्स" अनुभाग "खाता" पर जाएं। वहां, "स्टीम गार्ड सेटिंग्स प्रबंधित करें" पर क्लिक करें। इसके अलावा, अगर आप स्टीम गार्ड को अक्षम करना चाहते हैं, तो आपको स्टीम गार्ड को अक्षम करने के बगल में स्थित बॉक्स को चेक करना होगा। सब कुछ, फ़ंक्शन अक्षम है। हालांकि, एक छोटी सी बात है। आप स्टीम गार्ड को अक्षम करने के पंद्रह दिनों के बाद एक्सचेंज फ़ंक्शन का उपयोग नहीं कर सकते और "बाजार"। ऐसा किया जाता है ताकि हमलावरों को हैक किए जाने की स्थिति में, क़ीमती सामान या धन में फेंकने में सक्षम न हो।
CUET UG 2023 Centers Change: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए को शिक्षा मंत्रालय की ओर से मणिपुर, झारखंड और जम्मू कश्मीर के परीक्षा केंद्रों के संबंध में कई जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। यहां से परीक्षा देने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यूजीसी अध्यक्ष ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। NTA CUET UG Exam 2023: शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी की ओर से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए को सीयूईटी परीक्षा के संबंध में कुछ जरूरी निर्देश दिए गए हैं। इनके अनुसार जम्मू कश्मीर, मणिपुर और झारखंड जैसे राज्यों में अंडरग्रेजुएट प्रवेश के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट ( CUET ) के परीक्षा केंद्रों में बदलाव करने की सुविधा उम्मीदवारों को उपलब्ध कराई जाएगी। सीयूईटी यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों, कार्यक्रम का हिस्सा लेने वाली सभी यूनिवर्सिटी, संस्थानों, संगठनों और स्वायत्त कॉलेजों में सीधे एडमिशन मिलेंगे। यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार का कहना है कि एनटीए उन उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए श्रीनगर में अस्थाई सीयूईटी केंद्र स्थापित करने पर विचार कर रहा है, जिन्हें जम्मू-कश्मीर के बाहर परीक्षा केंद्र आवंटित किये गए हैं। इसके अलावा मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य में सीयूईटी 29 मई से आयोजित किया जाएगा, परीक्षा केंद्र बदलने का विकल्प अब भी उपलब्ध है। मणिपुर में हिंसा के चलते टली परीक्षाः मणिपुर में इस महीने की शुरुआत से ही हिंसा के कारण परीक्षा को एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया है और छात्रों के पास परीक्षा केंद्र में बदलाव का विकल्प होगा। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा, 'एनटीए ने राज्य प्रशासन के साथ विचार विमर्श करके सावधानीपूर्वक कानून एवं व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की और छात्रों से उनकी पसंद के शहर के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए टेलीफोन पर सम्पर्क किया। ' इसी तरह से जम्मू-कश्मीर और झारखंड में भी आवेदकों की बड़ी संख्या को देखते हुए वहां के कुछ उम्मीदवारों को सीयूईटी परीक्षा चयनित राज्य के बाहर देनी होगी। जिन उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र या इंटीमेशन स्लिप नहीं मिल पाई है, उन्हें एनटीए से सम्पर्क करना चाहिए। देश की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षाः परीक्षा के लिए आवेदकों की संख्या के मामले में सीयूईटी-यूजी देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है। सीयूईटी-यूजी साल 2022 में 12. 50 लाख छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था और इसके अलावा 9. 9 लाख छात्रों ने अपने आवेदन भी जमा किए थे। इस साल सीयूईटी-यूजी के लिए करीब 14 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 41 फीसदी ज्यादा हैं। ट्रेंडिंगः
CUET UG दो हज़ार तेईस Centers Change: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए को शिक्षा मंत्रालय की ओर से मणिपुर, झारखंड और जम्मू कश्मीर के परीक्षा केंद्रों के संबंध में कई जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। यहां से परीक्षा देने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यूजीसी अध्यक्ष ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। NTA CUET UG Exam दो हज़ार तेईस: शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी की ओर से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए को सीयूईटी परीक्षा के संबंध में कुछ जरूरी निर्देश दिए गए हैं। इनके अनुसार जम्मू कश्मीर, मणिपुर और झारखंड जैसे राज्यों में अंडरग्रेजुएट प्रवेश के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के परीक्षा केंद्रों में बदलाव करने की सुविधा उम्मीदवारों को उपलब्ध कराई जाएगी। सीयूईटी यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों, कार्यक्रम का हिस्सा लेने वाली सभी यूनिवर्सिटी, संस्थानों, संगठनों और स्वायत्त कॉलेजों में सीधे एडमिशन मिलेंगे। यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार का कहना है कि एनटीए उन उम्मीदवारों को समायोजित करने के लिए श्रीनगर में अस्थाई सीयूईटी केंद्र स्थापित करने पर विचार कर रहा है, जिन्हें जम्मू-कश्मीर के बाहर परीक्षा केंद्र आवंटित किये गए हैं। इसके अलावा मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राज्य में सीयूईटी उनतीस मई से आयोजित किया जाएगा, परीक्षा केंद्र बदलने का विकल्प अब भी उपलब्ध है। मणिपुर में हिंसा के चलते टली परीक्षाः मणिपुर में इस महीने की शुरुआत से ही हिंसा के कारण परीक्षा को एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया है और छात्रों के पास परीक्षा केंद्र में बदलाव का विकल्प होगा। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा, 'एनटीए ने राज्य प्रशासन के साथ विचार विमर्श करके सावधानीपूर्वक कानून एवं व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की और छात्रों से उनकी पसंद के शहर के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए टेलीफोन पर सम्पर्क किया। ' इसी तरह से जम्मू-कश्मीर और झारखंड में भी आवेदकों की बड़ी संख्या को देखते हुए वहां के कुछ उम्मीदवारों को सीयूईटी परीक्षा चयनित राज्य के बाहर देनी होगी। जिन उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र या इंटीमेशन स्लिप नहीं मिल पाई है, उन्हें एनटीए से सम्पर्क करना चाहिए। देश की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षाः परीक्षा के लिए आवेदकों की संख्या के मामले में सीयूईटी-यूजी देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है। सीयूईटी-यूजी साल दो हज़ार बाईस में बारह. पचास लाख छात्रों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था और इसके अलावा नौ. नौ लाख छात्रों ने अपने आवेदन भी जमा किए थे। इस साल सीयूईटी-यूजी के लिए करीब चौदह लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले इकतालीस फीसदी ज्यादा हैं। ट्रेंडिंगः
दाक्षिणात्य में रहना पड़ा था। विद्यानगरपति कृष्णरायने २५१४-१५ ई० मे गजपतिराज्य पर आक्रमण किया और गोदावरीके दक्षिणस्थ तभी भूभागों पर अधिकार जमाया । प्रतापरुद्ध के पुत्र वीरभद्र उस युद्ध में परास्त हुए और उनके चचा तिरुमल कैद किये गये। आसिर प्रतापरुद्ने विजयनगरके साथ मेल कर विजेता कृष्णरायके हाथ अपनी कन्या सौंप दो । प्रतापरुको मृत्यु के बाद कलुआदेव और कल्लारुआादेव नामक उनके दो पुत्रोंने १५४२ ई० तक राज्य किया। ये दोनों नाममात्रके राजा थे, राज चलानेमे उतनी क्षमता न थी। इस समय भोई (कायस्थ) जाति के गोविन्दविद्यावर सर्वमय कर्त्ता थे । प्रतापरुड़के समयसे वे एक प्रधान कर्मचारीका काम करते आ रहे थे। धीरे धीरे प्रतापरुड़के पुलोंको एक एक कर यमपुर तेज दुवृत्त गोविन्द विद्याधरने उत्कलराज्य पर अधि कार जमाया । प्रायः १५४९ ई०मे उनका अभिषेक हुआ। ६५४५ ई० में उन्होंने गोलकुण्डाके मुसलमान राजाके साथ घमासान युद्ध किया था । उनका भांजा रघुभञ्ज छोटराय उत्कलमे विद्रोहो हो गया था। बङ्गालके मुसलमान उसके पक्षमे थे । जो कुछ हो, गोविन्दविद्याधरने दक्षिणसे आ कर रघुमञ्जको परास्त किया और दलवलके साथ उसे गाके दूसरे किनारे मार भगाया । गोविन्दके बाद चक्रप्रताप उत्कलराज्यमे अभिषिक हुए। किसीके मतसे इन्होंने ८ और किसीके मतसे १२॥ वप राज्य किया था । यह राजा अत्यन्त अत्याचारो थे । चक्रप्रतापके वाढ नरसिंहराय-जैना राजसिहाकाम ! सन पर बैठे। उन्हें १ मास १६ दिनसे अधिक राज-याजमानिक ( स० वि०) यजमानसम्बन्धीय यजमानका । सिहासन पर बैठना नहीं पड़ा था। हरिचन्दनने वागा हो कर उनका मनमाम किया । नरसिंहके भाई रघुनाथजेना राजा हुए सही, पर उनके भी भाग्यमे राज्यसुख । याजाज्-~-आगरानिवासी एक मुसलमान कवि। इन्होंने वदान था। मुकुन्द हरिचन्दनका विद्रोहानल दिन पर दिन धक्ने लगा। प्रधान मन्त्री दनाईविद्याघर पराजित और बन्दी हुए। रघुभञ्ज छोटारायने मौका देख कर उत्कल पर चढ़ाई कर दी। वह मी मुकुन्दके साथ युद्ध में परास्त और वन्दी हुआ । आखिर मुकुन्द उत्कलपति रघुरामको मार कर सिंहासन पर बैठे रघुरामने १ वर्ष ७ मास १४ दिन राज्य किया। मुकुन्ददेव हरिचंदन हो उत्कलके अन्तिम स्वाधीन हिंदू राजा थे। चेतैलग जातिके थे। उन्होंने १५५६से १५६८ ई० तक शासन किया था। मुकुन्ददेव के शासनकालमें सम्राट् अकवरने उनकी सभष्मे दूत भेजा था । पठान-सुलतान करराणोने उन्हें छेडछाड की थी, इसी उद्देशसे उत्कल सभामं मुगल दूतका आगमन हुआ । मुगलके साथ उत्कलपतिका मेल हो जानेका खवर पा कर सुलतान करराणीने उत्कदराज्य को ध्वम करनेके लिये कालापहाड़का भेजा । कालापहाड़ उत्कलको देवदेवियोंको तोड़ता, मन्दिरोंको ढाहता और ग्राम नगरोंको लुटता हुआ अग्रसर हुआ । मुकुन्ददेवका सेनापति काळापहाडके हाथ परास्त हुआ । इस समय दक्षिणांशमे फिर एक दूसरा सामन्त विद्रोह हुआ। मुकुन्द पहले गृहशत्रुका विनाश करने निकले । धनसान युद्धकं वाद विद्रोही. के हायसे उत्कलके अन्तिम स्वाधीन राजा यमपुरको सिधारें। इधर कालापहाड़ भी आ धमका। विद्रोही सामन्त मुसलमानों को रोकने में निहत हुए। रघुभञ्ज छोटाराय कैदमें था । उसने बड़ी होशियारीसे छुटकारा पा कर सिहासन दशल करनेकी कोशिश की। किंतु उसके विशेष परिचित मुसलमानोंने उसे चैन नहीं दिया। आखीर मुसलमानों के हायसे वह मारा गया । इस प्रकार १५६८ ई० में उडीसाकी हिन्दू-स्वाधीनता जाती रही । पुरी देखो। याजमान ( सं० लो० ) यमे यजमानका किया हुआ
दाक्षिणात्य में रहना पड़ा था। विद्यानगरपति कृष्णरायने दो हज़ार पाँच सौ चौदह-पंद्रह ईशून्य मे गजपतिराज्य पर आक्रमण किया और गोदावरीके दक्षिणस्थ तभी भूभागों पर अधिकार जमाया । प्रतापरुद्ध के पुत्र वीरभद्र उस युद्ध में परास्त हुए और उनके चचा तिरुमल कैद किये गये। आसिर प्रतापरुद्ने विजयनगरके साथ मेल कर विजेता कृष्णरायके हाथ अपनी कन्या सौंप दो । प्रतापरुको मृत्यु के बाद कलुआदेव और कल्लारुआादेव नामक उनके दो पुत्रोंने एक हज़ार पाँच सौ बयालीस ईशून्य तक राज्य किया। ये दोनों नाममात्रके राजा थे, राज चलानेमे उतनी क्षमता न थी। इस समय भोई जाति के गोविन्दविद्यावर सर्वमय कर्त्ता थे । प्रतापरुड़के समयसे वे एक प्रधान कर्मचारीका काम करते आ रहे थे। धीरे धीरे प्रतापरुड़के पुलोंको एक एक कर यमपुर तेज दुवृत्त गोविन्द विद्याधरने उत्कलराज्य पर अधि कार जमाया । प्रायः एक हज़ार पाँच सौ उनचास ईशून्यमे उनका अभिषेक हुआ। छः हज़ार पाँच सौ पैंतालीस ईशून्य में उन्होंने गोलकुण्डाके मुसलमान राजाके साथ घमासान युद्ध किया था । उनका भांजा रघुभञ्ज छोटराय उत्कलमे विद्रोहो हो गया था। बङ्गालके मुसलमान उसके पक्षमे थे । जो कुछ हो, गोविन्दविद्याधरने दक्षिणसे आ कर रघुमञ्जको परास्त किया और दलवलके साथ उसे गाके दूसरे किनारे मार भगाया । गोविन्दके बाद चक्रप्रताप उत्कलराज्यमे अभिषिक हुए। किसीके मतसे इन्होंने आठ और किसीके मतसे बारह॥ वप राज्य किया था । यह राजा अत्यन्त अत्याचारो थे । चक्रप्रतापके वाढ नरसिंहराय-जैना राजसिहाकाम ! सन पर बैठे। उन्हें एक मास सोलह दिनसे अधिक राज-याजमानिक यजमानसम्बन्धीय यजमानका । सिहासन पर बैठना नहीं पड़ा था। हरिचन्दनने वागा हो कर उनका मनमाम किया । नरसिंहके भाई रघुनाथजेना राजा हुए सही, पर उनके भी भाग्यमे राज्यसुख । याजाज्-~-आगरानिवासी एक मुसलमान कवि। इन्होंने वदान था। मुकुन्द हरिचन्दनका विद्रोहानल दिन पर दिन धक्ने लगा। प्रधान मन्त्री दनाईविद्याघर पराजित और बन्दी हुए। रघुभञ्ज छोटारायने मौका देख कर उत्कल पर चढ़ाई कर दी। वह मी मुकुन्दके साथ युद्ध में परास्त और वन्दी हुआ । आखिर मुकुन्द उत्कलपति रघुरामको मार कर सिंहासन पर बैठे रघुरामने एक वर्ष सात मास चौदह दिन राज्य किया। मुकुन्ददेव हरिचंदन हो उत्कलके अन्तिम स्वाधीन हिंदू राजा थे। चेतैलग जातिके थे। उन्होंने एक हज़ार पाँच सौ छप्पनसे एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ ईशून्य तक शासन किया था। मुकुन्ददेव के शासनकालमें सम्राट् अकवरने उनकी सभष्मे दूत भेजा था । पठान-सुलतान करराणोने उन्हें छेडछाड की थी, इसी उद्देशसे उत्कल सभामं मुगल दूतका आगमन हुआ । मुगलके साथ उत्कलपतिका मेल हो जानेका खवर पा कर सुलतान करराणीने उत्कदराज्य को ध्वम करनेके लिये कालापहाड़का भेजा । कालापहाड़ उत्कलको देवदेवियोंको तोड़ता, मन्दिरोंको ढाहता और ग्राम नगरोंको लुटता हुआ अग्रसर हुआ । मुकुन्ददेवका सेनापति काळापहाडके हाथ परास्त हुआ । इस समय दक्षिणांशमे फिर एक दूसरा सामन्त विद्रोह हुआ। मुकुन्द पहले गृहशत्रुका विनाश करने निकले । धनसान युद्धकं वाद विद्रोही. के हायसे उत्कलके अन्तिम स्वाधीन राजा यमपुरको सिधारें। इधर कालापहाड़ भी आ धमका। विद्रोही सामन्त मुसलमानों को रोकने में निहत हुए। रघुभञ्ज छोटाराय कैदमें था । उसने बड़ी होशियारीसे छुटकारा पा कर सिहासन दशल करनेकी कोशिश की। किंतु उसके विशेष परिचित मुसलमानोंने उसे चैन नहीं दिया। आखीर मुसलमानों के हायसे वह मारा गया । इस प्रकार एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ ईशून्य में उडीसाकी हिन्दू-स्वाधीनता जाती रही । पुरी देखो। याजमान यमे यजमानका किया हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उज्जैन की पावन धरती पर होंगे। वह महाकालेश्वर मंदिर में बनाए गए महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। इसी मौके पर पीएम से मिलने के लिए गुजरात से एक 17 साल का लड़का साइकिल चलाकर उज्जैन पहुंचा है। उज्जैन, मध्य प्रदेश की धरती के लिए आज यानि मंगलवार का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम करीब 7 बजे 'महाकाल लोक' का लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी के दौरे को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। जगह-जगह पुलिस-फोर्स तैनात है, सैंकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री का एक बड़ा फैन उनसे मिलने के लिए वडोदरा से साइकिल चलाकर 380 कमी दूर उज्जैन पहुंचा है। हैरान की बात है कि यह लड़का महज 17 साल का है। लेकिन PM मोदी से मिलने का जुनून देखने लायक है। दरअसल, पीएम के इस फैन का नाम ओम जोशी है। जो 5 अक्टूबर को अपनी साइकिल से उज्जैन के लिए निकला था। वह तीन दिन बाद 7 अक्टूबर को उज्जैन पहुंचा। यहां उसने महाकाल लोक पर ड्यूटी में लगे प्रशासनिक अधिकारियों से गुजारिश की है कि उसे पीएम मोदी से मिलने दिया जाए। वह उनसे मिलने के लिए 380 किमी का सफर करके आया है। हालांकि अभी तक अधिकारियों ने इस लड़के को पीएम से मिलने की कोई अनुमति नहीं दी है। पीएम से मिलने गुजरात से उज्जैन आए ओम जोशी ने बताया कि वह साथ में भारतीय जनता पार्टी वड़ोदरा महानगर के अध्यक्ष डॉ विजय शाह का एक पत्र लेकर आया है। जिसमें यह लिखा हुआ है कि वह वड़ोदरा का रहने वाला है और वो एक साइकिल वीर है। जिसे 11 अक्टूबर 2022 को उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन और महाकाल लोक के लोकार्पण के दौरान प्रधानमंत्री जी से भेंट करवाई जाए। बता दें कि ओम जोशी का कहना है कि वह पहले भी कई बार प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का प्रयास कर चुका है। लेकिन वह जब यहां सफल नहीं हुआ तो वो उज्जैन साइकिल चलाकर आया है। यहां भी उसे मिलने नहीं दिया गया तो वह प्रधानमंत्री से मिलने के लिए यहीं से साइकिल चलाकर दिल्ली जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उज्जैन की पावन धरती पर होंगे। वह महाकालेश्वर मंदिर में बनाए गए महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। इसी मौके पर पीएम से मिलने के लिए गुजरात से एक सत्रह साल का लड़का साइकिल चलाकर उज्जैन पहुंचा है। उज्जैन, मध्य प्रदेश की धरती के लिए आज यानि मंगलवार का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम करीब सात बजे 'महाकाल लोक' का लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी के दौरे को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। जगह-जगह पुलिस-फोर्स तैनात है, सैंकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री का एक बड़ा फैन उनसे मिलने के लिए वडोदरा से साइकिल चलाकर तीन सौ अस्सी कमी दूर उज्जैन पहुंचा है। हैरान की बात है कि यह लड़का महज सत्रह साल का है। लेकिन PM मोदी से मिलने का जुनून देखने लायक है। दरअसल, पीएम के इस फैन का नाम ओम जोशी है। जो पाँच अक्टूबर को अपनी साइकिल से उज्जैन के लिए निकला था। वह तीन दिन बाद सात अक्टूबर को उज्जैन पहुंचा। यहां उसने महाकाल लोक पर ड्यूटी में लगे प्रशासनिक अधिकारियों से गुजारिश की है कि उसे पीएम मोदी से मिलने दिया जाए। वह उनसे मिलने के लिए तीन सौ अस्सी किमी का सफर करके आया है। हालांकि अभी तक अधिकारियों ने इस लड़के को पीएम से मिलने की कोई अनुमति नहीं दी है। पीएम से मिलने गुजरात से उज्जैन आए ओम जोशी ने बताया कि वह साथ में भारतीय जनता पार्टी वड़ोदरा महानगर के अध्यक्ष डॉ विजय शाह का एक पत्र लेकर आया है। जिसमें यह लिखा हुआ है कि वह वड़ोदरा का रहने वाला है और वो एक साइकिल वीर है। जिसे ग्यारह अक्टूबर दो हज़ार बाईस को उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन और महाकाल लोक के लोकार्पण के दौरान प्रधानमंत्री जी से भेंट करवाई जाए। बता दें कि ओम जोशी का कहना है कि वह पहले भी कई बार प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का प्रयास कर चुका है। लेकिन वह जब यहां सफल नहीं हुआ तो वो उज्जैन साइकिल चलाकर आया है। यहां भी उसे मिलने नहीं दिया गया तो वह प्रधानमंत्री से मिलने के लिए यहीं से साइकिल चलाकर दिल्ली जाएगा।
थाईलैंड की प्रकृति अद्भुत है, खासकर राज्य के सबसे बड़े द्वीपों में से एक - कोह सामुई। द्वीप न केवल अपने शानदार विचारों के लिए उल्लेखनीय है, बल्कि मुख्य भूमि से इसकी थोड़ी अलग जलवायु स्थितियों के लिए भी उल्लेखनीय है। तो, हम आपको महीनों तक कोह सामुई के मौसम के बारे में बताएंगे। आम तौर पर, द्वीप एक आर्द्र और गर्म उष्णकटिबंधीय जलवायु द्वारा विशेषता है। आप यहां साल भर आराम कर सकते हैं। औसतन, वर्ष के दौरान हवा का तापमान +31 + 35⁰С के भीतर उतार-चढ़ाव होता है, रात में +20 + 26⁰С, समुद्र का पानी +26 + 28⁰С तक चला जाता है। दिसंबर में सामुई शुष्क मौसम (और इसलिए उच्च) की शुरुआत को चिह्नित करता है, जहां लगभग हर दिन धूप होती है, लेकिन बहुत गर्म नहीं होती है। तटीय हवा उच्च तरंगों को उठाती है जैसे सर्फर पसंद करते हैं। जनवरी में सामुई का मौसम गर्म है, हवा अभी भी मजबूत है, लेकिन समुद्र तट पर बहुत सारे पर्यटक हैं। फरवरी में, स्थिति काफी बदल रही हैः यह धूप है, लेकिन पहले से ही हवाहीन है, जिसका मतलब है कि कोई मजबूत लहरें और कम ज्वार नहीं हैंः लंबे समय तक आलसी समुद्र तट छुट्टी रहें! द्वीप पर मार्च के आगमन के साथ, वर्षा की थोड़ी सी मात्रा के साथ, हवा का तापमान बढ़ता है। कोह सामुई के कुछ समुद्र तटों पर , कम ज्वार शुरू होते हैं। जल्द ही रिसॉर्ट में वर्ष का सबसे गर्म और सबसे थकाऊ महीना आता है - अप्रैल। इस समय वर्षा केवल छोटी है - केवल 60 मिमी। मई में कोह सामुई में मौसम गर्म है, लेकिन वर्षा की मात्रा बढ़ जाती है। जून में, सामुई का मौसम हवा के तापमान में गिरावट के साथ प्रसन्न होता है। इसके साथ-साथ, वर्षा की मात्रा बढ़ जाती है (110 मिमी)। लगभग वही जुलाई और अगस्त में सामुई का मौसम हैः दिन के दौरान आरामदायक तापमान, लगभग हवाहीन, और बारिश में अल्पावधि चरित्र होता है और शाम या रात में होता है। शरद ऋतु की शुरुआत - सितंबर - मौसम को द्वीप में लाती हैः धूप के दिनों को उदास और बरसात के दिनों से बदल दिया जाता है, इसलिए बरसात का मौसम आ रहा है। मौसम अक्टूबर और नवंबर में कोह सामुई पर समान है। वर्षा की मात्रा 250 से 400 मिमी तक पहुंच सकती है।
थाईलैंड की प्रकृति अद्भुत है, खासकर राज्य के सबसे बड़े द्वीपों में से एक - कोह सामुई। द्वीप न केवल अपने शानदार विचारों के लिए उल्लेखनीय है, बल्कि मुख्य भूमि से इसकी थोड़ी अलग जलवायु स्थितियों के लिए भी उल्लेखनीय है। तो, हम आपको महीनों तक कोह सामुई के मौसम के बारे में बताएंगे। आम तौर पर, द्वीप एक आर्द्र और गर्म उष्णकटिबंधीय जलवायु द्वारा विशेषता है। आप यहां साल भर आराम कर सकते हैं। औसतन, वर्ष के दौरान हवा का तापमान +इकतीस + पैंतीस⁰С के भीतर उतार-चढ़ाव होता है, रात में +बीस + छब्बीस⁰С, समुद्र का पानी +छब्बीस + अट्ठाईस⁰С तक चला जाता है। दिसंबर में सामुई शुष्क मौसम की शुरुआत को चिह्नित करता है, जहां लगभग हर दिन धूप होती है, लेकिन बहुत गर्म नहीं होती है। तटीय हवा उच्च तरंगों को उठाती है जैसे सर्फर पसंद करते हैं। जनवरी में सामुई का मौसम गर्म है, हवा अभी भी मजबूत है, लेकिन समुद्र तट पर बहुत सारे पर्यटक हैं। फरवरी में, स्थिति काफी बदल रही हैः यह धूप है, लेकिन पहले से ही हवाहीन है, जिसका मतलब है कि कोई मजबूत लहरें और कम ज्वार नहीं हैंः लंबे समय तक आलसी समुद्र तट छुट्टी रहें! द्वीप पर मार्च के आगमन के साथ, वर्षा की थोड़ी सी मात्रा के साथ, हवा का तापमान बढ़ता है। कोह सामुई के कुछ समुद्र तटों पर , कम ज्वार शुरू होते हैं। जल्द ही रिसॉर्ट में वर्ष का सबसे गर्म और सबसे थकाऊ महीना आता है - अप्रैल। इस समय वर्षा केवल छोटी है - केवल साठ मिमी। मई में कोह सामुई में मौसम गर्म है, लेकिन वर्षा की मात्रा बढ़ जाती है। जून में, सामुई का मौसम हवा के तापमान में गिरावट के साथ प्रसन्न होता है। इसके साथ-साथ, वर्षा की मात्रा बढ़ जाती है । लगभग वही जुलाई और अगस्त में सामुई का मौसम हैः दिन के दौरान आरामदायक तापमान, लगभग हवाहीन, और बारिश में अल्पावधि चरित्र होता है और शाम या रात में होता है। शरद ऋतु की शुरुआत - सितंबर - मौसम को द्वीप में लाती हैः धूप के दिनों को उदास और बरसात के दिनों से बदल दिया जाता है, इसलिए बरसात का मौसम आ रहा है। मौसम अक्टूबर और नवंबर में कोह सामुई पर समान है। वर्षा की मात्रा दो सौ पचास से चार सौ मिमी तक पहुंच सकती है।
मध्यप्रदेश के पन्ना में शनिवार को एक व्यापारी ने पहले अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी, फिर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी लगते ही पूरे शहर में सनसनी फैल गई। मौके से पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। ये घटना शहर के बीचों-बीच स्थित मोहल्ला किशोरगंज में दोपहर करीब 3 बजे हुई। मृतकों के नाम संजय सेठ व मीनू सेठ है। घटना की जानकारी लगते ही पन्ना एडिशनल एसपी, एसडीओपी और कोतवाली टीआई अरुण सोनी अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक पति-पत्नी के शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। वहीं पुलिस संजय सेठ के घर पर जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के बयानों के बाद मामले का खुलासा हो पाएगा कि आखिर उन्होंने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। टीआई अरुण कुमार सोनी ने बताया कि पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें मृतक संजय सेठ ने स्वेच्छा से आत्महत्या करने की बात लिखी है। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जाएगा। मामले में बारीकी से जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, घटना के समय घर की दूसरी मंजिल के कमरे में संजय और मीनू दोनों ही थे। गोली की आवाज सुनते ही परिवार के अन्य लोग ऊपर पहुंचे। तब तक महिला ने दम तोड़ दिया था। संजय की सांसें चल रही थी। जिसे परिवार के लोग अस्पताल ले जाते इससे पहले ही संजय ने दम तोड़ दिया। संजय नगर के प्रतिष्ठित स्वर्गीय रतन सेठ के छोटे बेटे थे और उनका कपड़ों का कारोबार है। बताया जा रहा है कि संजय ने अपने ही नाम से लाइसेंसी बंदूक ले रखी थी, हालांकि पुलिस का कहना है कि इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। संजय सेठ का एक बड़ा भाई भी है। जिनकी कपड़े की दुकान घर के समीप साईं मंदिर के सामने है। जबकि संजय पंचम सिंह चौराहे पर स्थित अपनी दुकान को संचालित करते थे। वे नगर के प्रतिष्ठित व्यापारियों में जाने जाते थे। संजय के बेटा-बेटी भी हैं। इस मामले में पन्ना एसपी धर्मराज मीणा ने बताया कि किशोरगंज मोहल्ला में व्यापारी दंपती की मौत का मामला सामने आया है। जानकारी लगते ही मौके पर पन्ना एडिशनल एसपी और कोतवाली पुलिस को भेजा गया। दंपती के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा है। फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच करवाई जा रही है, कारण अज्ञात है। घटना घर के अंदर घटित हुई है इसलिए जांच के बाद मौत का कारण पता चल पाएगा। बंदूक लाइसेंसी है या फिर अवैध इसकी भी जांच की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मध्यप्रदेश के पन्ना में शनिवार को एक व्यापारी ने पहले अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी, फिर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी लगते ही पूरे शहर में सनसनी फैल गई। मौके से पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। ये घटना शहर के बीचों-बीच स्थित मोहल्ला किशोरगंज में दोपहर करीब तीन बजे हुई। मृतकों के नाम संजय सेठ व मीनू सेठ है। घटना की जानकारी लगते ही पन्ना एडिशनल एसपी, एसडीओपी और कोतवाली टीआई अरुण सोनी अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक पति-पत्नी के शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। वहीं पुलिस संजय सेठ के घर पर जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के बयानों के बाद मामले का खुलासा हो पाएगा कि आखिर उन्होंने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। टीआई अरुण कुमार सोनी ने बताया कि पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें मृतक संजय सेठ ने स्वेच्छा से आत्महत्या करने की बात लिखी है। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जाएगा। मामले में बारीकी से जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, घटना के समय घर की दूसरी मंजिल के कमरे में संजय और मीनू दोनों ही थे। गोली की आवाज सुनते ही परिवार के अन्य लोग ऊपर पहुंचे। तब तक महिला ने दम तोड़ दिया था। संजय की सांसें चल रही थी। जिसे परिवार के लोग अस्पताल ले जाते इससे पहले ही संजय ने दम तोड़ दिया। संजय नगर के प्रतिष्ठित स्वर्गीय रतन सेठ के छोटे बेटे थे और उनका कपड़ों का कारोबार है। बताया जा रहा है कि संजय ने अपने ही नाम से लाइसेंसी बंदूक ले रखी थी, हालांकि पुलिस का कहना है कि इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। संजय सेठ का एक बड़ा भाई भी है। जिनकी कपड़े की दुकान घर के समीप साईं मंदिर के सामने है। जबकि संजय पंचम सिंह चौराहे पर स्थित अपनी दुकान को संचालित करते थे। वे नगर के प्रतिष्ठित व्यापारियों में जाने जाते थे। संजय के बेटा-बेटी भी हैं। इस मामले में पन्ना एसपी धर्मराज मीणा ने बताया कि किशोरगंज मोहल्ला में व्यापारी दंपती की मौत का मामला सामने आया है। जानकारी लगते ही मौके पर पन्ना एडिशनल एसपी और कोतवाली पुलिस को भेजा गया। दंपती के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा है। फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच करवाई जा रही है, कारण अज्ञात है। घटना घर के अंदर घटित हुई है इसलिए जांच के बाद मौत का कारण पता चल पाएगा। बंदूक लाइसेंसी है या फिर अवैध इसकी भी जांच की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोणः - अपने उत्तर की शुरुआत ईमानदारी के संक्षिप्त परिचय से कीजिये। - शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा किये गए उपायों की चर्चा कीजिये। - उपायों का मूल्यांकन कीजिये, चुनौतियों को लिखिये और इन उपायों में और अधिक सुधार कैसे कर सकते हैं, वह भी बताइये। - तदनुसार निष्कर्ष लिखिये। शासन में ईमानदारी का तात्पर्य सार्वजनिक मामलों के संचालन में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे नैतिक मूल्यों के पालन से है। जनता का विश्वास बढ़ाने, भ्रष्टाचार रोकने, दक्षता सुनिश्चित करने और सुशासन को बढ़ावा देने के लिये शासन में ईमानदारी आवश्यक है। मुख्य भागः शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा किये गए कुछ उपाय इस प्रकार हैंः - विधायी उपायः - सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित करने के लिये विभिन्न कानून और नियम बनाए हैं, जैसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2014, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, आदि। - संस्थागत उपायः - सरकार ने शासन में ईमानदारी को सुनिश्चित करने और उसे लागू करने के लिये विभिन्न संस्थानों और तंत्रों की स्थापना की है, जैसे केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी), भारत निर्वाचन आयोग। (ईसीआई) आदि। - प्रशासनिक उपायः - सरकार ने सार्वजनिक सेवा वितरण की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिये विभिन्न सुधार और पहलें शुरू की हैं, जैसे ई-गवर्नेंस, नागरिक चार्टर, प्रदर्शन मूल्यांकन, आचार संहिता आदि। - इन उपायों की प्रभावशीलता विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे उनका कार्यान्वयन, समन्वय, जागरूकता, भागीदारी और निरीक्षण। इन उपायों के सामने आने वाली चुनौतियाँ हैंः - भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की कमी। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों के कामकाज पर निहित स्वार्थों और दबाव समूहों का हस्तक्षेप तथा प्रभाव। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों के पास अपर्याप्त संसाधन, क्षमता और स्वायत्तता। - शासन में ईमानदारी की मांग करने और सुनिश्चित करने में नागरिकों और नागरिक समाज की कम जागरूकता और भागीदारी। इन उपायों में सुधार लाने के निम्नलिखित तरीके हैंः - कानूनी ढाँचे को मज़बूत करना और इसका कड़ाई से कार्यान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित करना। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों की स्वतंत्रता, अधिकार और जवाबदेही को बढ़ाना। - मानवीय विवेक को कम करने और पारदर्शिता तथा पहुँच बढ़ाने के लिये प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का उपयोग बढ़ाना। - शिक्षा, प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से लोक सेवकों और नागरिकों के बीच नैतिकता एवं मूल्यों की संस्कृति को बढ़ावा देना। शासन में ईमानदारी सुशासन का एक प्रमुख निर्धारक है। सरकार ने शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये कई उपाय किये हैं, लेकिन मौजूदा कमियों तथा चुनौतियों को दूर करने के लिये उनमें और सुधार करने की आवश्यकता है। शासन में ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिये सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोणः - अपने उत्तर की शुरुआत ईमानदारी के संक्षिप्त परिचय से कीजिये। - शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा किये गए उपायों की चर्चा कीजिये। - उपायों का मूल्यांकन कीजिये, चुनौतियों को लिखिये और इन उपायों में और अधिक सुधार कैसे कर सकते हैं, वह भी बताइये। - तदनुसार निष्कर्ष लिखिये। शासन में ईमानदारी का तात्पर्य सार्वजनिक मामलों के संचालन में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे नैतिक मूल्यों के पालन से है। जनता का विश्वास बढ़ाने, भ्रष्टाचार रोकने, दक्षता सुनिश्चित करने और सुशासन को बढ़ावा देने के लिये शासन में ईमानदारी आवश्यक है। मुख्य भागः शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये सरकार द्वारा किये गए कुछ उपाय इस प्रकार हैंः - विधायी उपायः - सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित करने के लिये विभिन्न कानून और नियम बनाए हैं, जैसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ अठासी, लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, दो हज़ार तेरह, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार चौदह, सूचना का अधिकार अधिनियम, दो हज़ार पाँच, आदि। - संस्थागत उपायः - सरकार ने शासन में ईमानदारी को सुनिश्चित करने और उसे लागू करने के लिये विभिन्न संस्थानों और तंत्रों की स्थापना की है, जैसे केंद्रीय सतर्कता आयोग , केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो , भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक , भारत निर्वाचन आयोग। आदि। - प्रशासनिक उपायः - सरकार ने सार्वजनिक सेवा वितरण की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिये विभिन्न सुधार और पहलें शुरू की हैं, जैसे ई-गवर्नेंस, नागरिक चार्टर, प्रदर्शन मूल्यांकन, आचार संहिता आदि। - इन उपायों की प्रभावशीलता विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे उनका कार्यान्वयन, समन्वय, जागरूकता, भागीदारी और निरीक्षण। इन उपायों के सामने आने वाली चुनौतियाँ हैंः - भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की कमी। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों के कामकाज पर निहित स्वार्थों और दबाव समूहों का हस्तक्षेप तथा प्रभाव। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों के पास अपर्याप्त संसाधन, क्षमता और स्वायत्तता। - शासन में ईमानदारी की मांग करने और सुनिश्चित करने में नागरिकों और नागरिक समाज की कम जागरूकता और भागीदारी। इन उपायों में सुधार लाने के निम्नलिखित तरीके हैंः - कानूनी ढाँचे को मज़बूत करना और इसका कड़ाई से कार्यान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित करना। - भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों और संस्थानों की स्वतंत्रता, अधिकार और जवाबदेही को बढ़ाना। - मानवीय विवेक को कम करने और पारदर्शिता तथा पहुँच बढ़ाने के लिये प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का उपयोग बढ़ाना। - शिक्षा, प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से लोक सेवकों और नागरिकों के बीच नैतिकता एवं मूल्यों की संस्कृति को बढ़ावा देना। शासन में ईमानदारी सुशासन का एक प्रमुख निर्धारक है। सरकार ने शासन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये कई उपाय किये हैं, लेकिन मौजूदा कमियों तथा चुनौतियों को दूर करने के लिये उनमें और सुधार करने की आवश्यकता है। शासन में ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिये सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
भारतीय रेलवे ने 2023 में 75 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लॉन्च करने का लक्ष रखा है। वंदे भारत एक्प्रेस ट्रेन आज भारत के कई राज्यों में सेवा दे रही है। यात्रियों को वंदे भारत का सफर बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि इस ट्रेन में बहुत सी हाई फैसिलिटी है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन टेक्नोलॉजी से बनी हुई है। वर्तमान में वंदे भारत 8 राज्यों में अपनी सेवा दे रही है। आपको बता दें कि इस ट्रेन की सुविधा और जनता के बीच इसकी लोकप्रियता को देखते हुए साल 2023 में वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधा और राज्यों में भी दे सकती है। आपको बता दें कि फरवरी 2023 में देश का बजट पेश होना है। अनुमान है कि बजट सत्र के दौरान सरकार इस बात पर मुहर लगा सकती है। इस बजट में सरकार 200 से 300 नई वंदे भारत एक्सप्रेस को लॉन्च करने की बात कह सकती है। आपको बता दें कि वर्तमान में वंदे भारत की सेवा दिल्ली से वाराणसी, दिल्ली से कटरा, गांधीनगर से मुंबई, नई दिल्ली से अंदौरा (हिमाचल प्रदेश) चेन्नई से मैसूर, बिलासपुर से नागपुर, हावड़ा से जलपाईगुड़ी, बेंगलुरु से चेन्नई चल रही है। भारतीय रेलवे ने 2023 में 75 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लॉन्च करने का लक्ष रखा है।
भारतीय रेलवे ने दो हज़ार तेईस में पचहत्तर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लॉन्च करने का लक्ष रखा है। वंदे भारत एक्प्रेस ट्रेन आज भारत के कई राज्यों में सेवा दे रही है। यात्रियों को वंदे भारत का सफर बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि इस ट्रेन में बहुत सी हाई फैसिलिटी है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन टेक्नोलॉजी से बनी हुई है। वर्तमान में वंदे भारत आठ राज्यों में अपनी सेवा दे रही है। आपको बता दें कि इस ट्रेन की सुविधा और जनता के बीच इसकी लोकप्रियता को देखते हुए साल दो हज़ार तेईस में वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधा और राज्यों में भी दे सकती है। आपको बता दें कि फरवरी दो हज़ार तेईस में देश का बजट पेश होना है। अनुमान है कि बजट सत्र के दौरान सरकार इस बात पर मुहर लगा सकती है। इस बजट में सरकार दो सौ से तीन सौ नई वंदे भारत एक्सप्रेस को लॉन्च करने की बात कह सकती है। आपको बता दें कि वर्तमान में वंदे भारत की सेवा दिल्ली से वाराणसी, दिल्ली से कटरा, गांधीनगर से मुंबई, नई दिल्ली से अंदौरा चेन्नई से मैसूर, बिलासपुर से नागपुर, हावड़ा से जलपाईगुड़ी, बेंगलुरु से चेन्नई चल रही है। भारतीय रेलवे ने दो हज़ार तेईस में पचहत्तर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लॉन्च करने का लक्ष रखा है।
इन दिनों राष्ट्रीय उच्च मार्ग चंडीगढ़ मनाली लगातार बंद रहने से पर्यटकों के साथ आम लोग परेशान हैं। जब यह सडक़ मार्ग थोड़ी देर के लिए सुचारू हो भी जाती है तो मलबा पत्थर गिरने का लगातार खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन ने पंडोह से चैलचौक सडक़ मार्ग को वैकल्पिक मार्ग के रूप में आरंभ किया है। जो पंडोह से मंडी 65 किलोमीटर बनता है। इसे तय करने में कम से कम 3 घंटे यदि जाम हुआ तो 6 घंटे भी लग जाते हैं। इससे बचने के लिए पंडोह धुआं देवी मंडी सडक़ बेहतर विकल्प हो सकती है। ग्राम पंचायत धुआं देवी के प्रधान जीवन लाल व पूर्व में रहे बीडीसी सदस्य दीवान चंद ठाकुर ने इसे लेकर बहुत ही बेहतरीन सुझाव दिया है। उनका कहना है कि पंडोह से बाया गाड़ा नाल धुआं देवी से मंडी सडक़ मार्ग मात्र 30 किलोमीटर है। पंडोह से चंढेह साढ़े 12 किलोमीटर है। जो कच्चा है, मगर टिप्पर योग्य है। उधर मंडी से चंढेह थाई तक सडक़ मार्ग बस योग्य है। बस नियमित थाई तक चलती है और सडक़ भी पक्की है। इस सडक़ मार्ग को पंडोह से मंडी वैकल्पिक सडक़ मार्ग के रूप में उपयोग करना चाहिए। जिससे जहां पडोह चैलचौक सडक़ मार्ग पर वाहनों का बढ़ता बोझ कम होगा और जाम से मुक्ति मिलेगी। इतना ही नहीं पर्यटकों व आम लोगों को मंडी पहुंचने में समय के साथ पैसे भी बचेंगे। उन्होंने कहा कि यह सडक़ मार्ग बहुत ही सुगम और रमणीक है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है। जो पर्यटकों को खूब लुभाएगा। उन्होंने कहा कि इस सडक़ मार्ग में तवा राफ ी में प्रसिद्ध प्राचीन जोगनी माता का मंदिर, बगयोद में बड़ा देव चंढेहिया का मंदिर और धूमा देवी का रमणीक स्थल एवं मंदिर इस सडक़ मार्ग की सुंदरता के प्रतीक हैं। दीवान चंद ने कहा कि इस सडक़ मार्ग में हल्के हल्के स्लीप हैं। जिन्हें जेसीबी मशीन के माध्यम से पांच 7 घंटे में साफ किया जा सकता है। निश्चित रूप से यह सडक़ मार्ग जिला मुख्यालय को जोडऩे का सबसे उपयुक्त वैकल्पिक मार्ग है। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के छोटे वाहनों को इस मार्ग से आने जानें के लिए प्रशासन को आरंभ करना चाहिए।
इन दिनों राष्ट्रीय उच्च मार्ग चंडीगढ़ मनाली लगातार बंद रहने से पर्यटकों के साथ आम लोग परेशान हैं। जब यह सडक़ मार्ग थोड़ी देर के लिए सुचारू हो भी जाती है तो मलबा पत्थर गिरने का लगातार खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन ने पंडोह से चैलचौक सडक़ मार्ग को वैकल्पिक मार्ग के रूप में आरंभ किया है। जो पंडोह से मंडी पैंसठ किलोग्राममीटर बनता है। इसे तय करने में कम से कम तीन घंटाटे यदि जाम हुआ तो छः घंटाटे भी लग जाते हैं। इससे बचने के लिए पंडोह धुआं देवी मंडी सडक़ बेहतर विकल्प हो सकती है। ग्राम पंचायत धुआं देवी के प्रधान जीवन लाल व पूर्व में रहे बीडीसी सदस्य दीवान चंद ठाकुर ने इसे लेकर बहुत ही बेहतरीन सुझाव दिया है। उनका कहना है कि पंडोह से बाया गाड़ा नाल धुआं देवी से मंडी सडक़ मार्ग मात्र तीस किलोग्राममीटर है। पंडोह से चंढेह साढ़े बारह किलोग्राममीटर है। जो कच्चा है, मगर टिप्पर योग्य है। उधर मंडी से चंढेह थाई तक सडक़ मार्ग बस योग्य है। बस नियमित थाई तक चलती है और सडक़ भी पक्की है। इस सडक़ मार्ग को पंडोह से मंडी वैकल्पिक सडक़ मार्ग के रूप में उपयोग करना चाहिए। जिससे जहां पडोह चैलचौक सडक़ मार्ग पर वाहनों का बढ़ता बोझ कम होगा और जाम से मुक्ति मिलेगी। इतना ही नहीं पर्यटकों व आम लोगों को मंडी पहुंचने में समय के साथ पैसे भी बचेंगे। उन्होंने कहा कि यह सडक़ मार्ग बहुत ही सुगम और रमणीक है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है। जो पर्यटकों को खूब लुभाएगा। उन्होंने कहा कि इस सडक़ मार्ग में तवा राफ ी में प्रसिद्ध प्राचीन जोगनी माता का मंदिर, बगयोद में बड़ा देव चंढेहिया का मंदिर और धूमा देवी का रमणीक स्थल एवं मंदिर इस सडक़ मार्ग की सुंदरता के प्रतीक हैं। दीवान चंद ने कहा कि इस सडक़ मार्ग में हल्के हल्के स्लीप हैं। जिन्हें जेसीबी मशीन के माध्यम से पांच सात घंटाटे में साफ किया जा सकता है। निश्चित रूप से यह सडक़ मार्ग जिला मुख्यालय को जोडऩे का सबसे उपयुक्त वैकल्पिक मार्ग है। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के छोटे वाहनों को इस मार्ग से आने जानें के लिए प्रशासन को आरंभ करना चाहिए।
न्यूज डेस्कः क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज नोबॉल फेकता हैं तो इसके बाद बल्लेबाज को फ्री हिट मिलती हैं। इसमें बल्लेबाज को आउट होने का खतरा नहीं रहता हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे बल्लेबाजों के बारे में जिन्होंने फ्री हिट पर सबसे ज्यादा छक्के मारे हैं। फ्री हिट गेंदों पर सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले 4 बल्लेबाज, जानें नाम। 1 . रोहित शर्माः भारत के रोहित शर्मा फ्री हिट गेंदों पर सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉड बनाये हैं। रोहित शर्मा को 13 बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे उन्होंने 10 बार छक्के मारे हैं। 2 . ब्रैंडन मैकुलमः इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के बल्लेबाज ब्रैंडन मैकुलम का नाम हैं। इन्हे 12 बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे इन्होने छह बार छक्के मारे हैं। 3 . शेन वाटसनः ऑस्ट्रेलिया के शेन वाटसन को 11 बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे उन्होंने पांच बार छक्के लगाए हैं। इस लिस्ट में ये तीसरे नंबर पर हैं। 4 . मार्टिन गुप्टिलः बता दें की इस लिस्ट में न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल पांचवे नंबर पर हैं। इन्हे 11 बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे इन्होने 5 बार छक्के लगाए हैं।
न्यूज डेस्कः क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज नोबॉल फेकता हैं तो इसके बाद बल्लेबाज को फ्री हिट मिलती हैं। इसमें बल्लेबाज को आउट होने का खतरा नहीं रहता हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे बल्लेबाजों के बारे में जिन्होंने फ्री हिट पर सबसे ज्यादा छक्के मारे हैं। फ्री हिट गेंदों पर सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले चार बल्लेबाज, जानें नाम। एक . रोहित शर्माः भारत के रोहित शर्मा फ्री हिट गेंदों पर सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉड बनाये हैं। रोहित शर्मा को तेरह बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे उन्होंने दस बार छक्के मारे हैं। दो . ब्रैंडन मैकुलमः इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के बल्लेबाज ब्रैंडन मैकुलम का नाम हैं। इन्हे बारह बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे इन्होने छह बार छक्के मारे हैं। तीन . शेन वाटसनः ऑस्ट्रेलिया के शेन वाटसन को ग्यारह बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे उन्होंने पांच बार छक्के लगाए हैं। इस लिस्ट में ये तीसरे नंबर पर हैं। चार . मार्टिन गुप्टिलः बता दें की इस लिस्ट में न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल पांचवे नंबर पर हैं। इन्हे ग्यारह बार फ्री हिट गेंद मिली हैं। जिसमे इन्होने पाँच बार छक्के लगाए हैं।
नई दिल्ली, 20 जून कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर ध्यान न देकर गुरुवार को एक नए विवाद में फंस गए। राष्ट्रपति संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। सत्रहवीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति जब पहले संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे, उस समय राहुल गांधी 20 मिनट तक अपने फोन को देखने में व्यस्त रहे और अन्य नेताओं से बात करते रहे। उधर, उनकी मां और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी पूरे ध्यान से घंटे पर चले राष्ट्रपति के अभिभाषण को सुनती रहीं। राष्ट्रपति ने जब उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र किया तो संसद का पूरा केंद्रीय कक्ष गूंज उठा और प्रशंसा में सोनिया गांधी मेज थपथपाती रहीं। हालांकि राहुल गांधी अपने मोबाइल फोन देखते रहे। सोनिया गांधी द्वारा वैसा नहीं किए जाने का इशारा करने पर भी वह सदन के पटल को घूरते रहे।
नई दिल्ली, बीस जून कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर ध्यान न देकर गुरुवार को एक नए विवाद में फंस गए। राष्ट्रपति संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। सत्रहवीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति जब पहले संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे, उस समय राहुल गांधी बीस मिनट तक अपने फोन को देखने में व्यस्त रहे और अन्य नेताओं से बात करते रहे। उधर, उनकी मां और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी पूरे ध्यान से घंटे पर चले राष्ट्रपति के अभिभाषण को सुनती रहीं। राष्ट्रपति ने जब उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र किया तो संसद का पूरा केंद्रीय कक्ष गूंज उठा और प्रशंसा में सोनिया गांधी मेज थपथपाती रहीं। हालांकि राहुल गांधी अपने मोबाइल फोन देखते रहे। सोनिया गांधी द्वारा वैसा नहीं किए जाने का इशारा करने पर भी वह सदन के पटल को घूरते रहे।
अगहन बृहस्पति पर्व की शुरुवात हो चुकी है। गुरुवार को मनाए जाने वाले अगहन बृहस्पत व्रत में महिलाएं धन संपदा वैभव के लिए विधि विधान से माता लक्ष्मी की पूजन करती हैं। हिंदू पंचांग का नौवां महीना मार्गशीष जिसे अगहन भी कहते ह. . . chhattisgarhFri, 03 Dec 2021 12:43 AM (IST)
अगहन बृहस्पति पर्व की शुरुवात हो चुकी है। गुरुवार को मनाए जाने वाले अगहन बृहस्पत व्रत में महिलाएं धन संपदा वैभव के लिए विधि विधान से माता लक्ष्मी की पूजन करती हैं। हिंदू पंचांग का नौवां महीना मार्गशीष जिसे अगहन भी कहते ह. . . chhattisgarhFri, तीन दिसंबर दो हज़ार इक्कीस बारह:तैंतालीस AM
मधुबनी में सोमवार को अपराधियों ने दो अलग-अलग जगहों पर लूट की घटना को अंजाम दिया। पहली घटना सकरी थाना में दरभंगा से आए किराना व्यवसायी के साथ हुई। व्यवसायी से अपराधियों ने 12 लाख रुपए लूट लिए। वहीं दूसरी घटना नंदिनी इंटरप्राइजेज के कैशियर के साथ हुए। उनसे अपराधियों ने 2 लाख 24 हजार रुपए लूट लिए। शहर के स्टेडियम रोड में एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर संचालित उड़ान एक्सप्रेस और नंदिनी इंटरप्राइजेज ऑफिस के कैशियर के साथ दिनदहाड़े महारानी पेट्रोल पंप के निकट पुलिया के पास अपराधियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया। मालूम हो कि दरभंगा किराना व्यवसायी सोमवार की दोपहर कलेक्शन के लिए सकरी बाजार आए थे रुपए की कलेक्शन कर जब व्यापारी ऑटो में बैठकर जा रहे थे इसी बीच ऑटो में बैठे पहले से दो अपराधियों ने उसके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सकरी थाना सकरी थाना अध्यक्ष अमित शाह सदर एसडीपीओ राजीव कुमार मामले की जांच में जुट गए हैं। सकरी थाना अध्यक्ष अमित शाह ने बताया कि लूट का घटना संज्ञान में आया है लेकिन इस संबंध में व्यापारी की ओर से आवेदन नहीं दिया गया है आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पीड़ित ने बताया, नंदिनी इंटरप्राइजेज से कैशियर नवीन चंद्र 12 बजे नंदिनी इंटरप्राइजेज में आए और वहां से नवीन चंद्र ने 2 लाख 24 हजार 260 रुपए कैश लेकर अकेले निकल गए। इसी क्रम में महारानी पेट्रोल पंप को क्रॉस करने के बाद पुलिया के पास अपराधियों ने उनकी बाइक को घेर लिया और नवीन चंद्र के ऊपर गोली चलाने लगे। इसी क्रम में नवीन चंद्र को गोली भी लगी और उसके पास से बैग में रखे दिन भर के कलेक्शन किए हुए पैसे लुटेरे लेकर फरार हो गए। इसके बाद नवीन चंद्र किसी तरह अपनी जान बचाते हुए वहां से तुरंत पैदल भागते हुए नंदनी इंटरप्राइजेज पर वापस आए जहां पर उस कंपनी के स्टाफ ने देखा कि उनके दाहिने हाथ से खून बह रही है। इसके बाद लोगों ने तुरंत ही नवीन चंद्र को गाड़ी पर बैठा कर मधुबनी सदर अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया। इस घटना में घायल नवीन चंद को बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद घटना की जानकारी मधुबनी नगर थाना को दी गई। सूचना पाते ही नगर थाना अध्यक्ष अमित कुमार साथ ही दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और घटना के बारे में कंपनी के स्टाफ और वहां पर मौजूद लोगों से पूछताछ करने लगे। साथ ही कंपनी के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगालने लगे। लूट की घटना पूरे मधुबनी शहर में आग की तरह फैल गई जिसके बाद सदर एसडीपीओ राजीव कुमार घटनास्थल पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मधुबनी में सोमवार को अपराधियों ने दो अलग-अलग जगहों पर लूट की घटना को अंजाम दिया। पहली घटना सकरी थाना में दरभंगा से आए किराना व्यवसायी के साथ हुई। व्यवसायी से अपराधियों ने बारह लाख रुपए लूट लिए। वहीं दूसरी घटना नंदिनी इंटरप्राइजेज के कैशियर के साथ हुए। उनसे अपराधियों ने दो लाख चौबीस हजार रुपए लूट लिए। शहर के स्टेडियम रोड में एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर संचालित उड़ान एक्सप्रेस और नंदिनी इंटरप्राइजेज ऑफिस के कैशियर के साथ दिनदहाड़े महारानी पेट्रोल पंप के निकट पुलिया के पास अपराधियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया। मालूम हो कि दरभंगा किराना व्यवसायी सोमवार की दोपहर कलेक्शन के लिए सकरी बाजार आए थे रुपए की कलेक्शन कर जब व्यापारी ऑटो में बैठकर जा रहे थे इसी बीच ऑटो में बैठे पहले से दो अपराधियों ने उसके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सकरी थाना सकरी थाना अध्यक्ष अमित शाह सदर एसडीपीओ राजीव कुमार मामले की जांच में जुट गए हैं। सकरी थाना अध्यक्ष अमित शाह ने बताया कि लूट का घटना संज्ञान में आया है लेकिन इस संबंध में व्यापारी की ओर से आवेदन नहीं दिया गया है आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पीड़ित ने बताया, नंदिनी इंटरप्राइजेज से कैशियर नवीन चंद्र बारह बजे नंदिनी इंटरप्राइजेज में आए और वहां से नवीन चंद्र ने दो लाख चौबीस हजार दो सौ साठ रुपयापए कैश लेकर अकेले निकल गए। इसी क्रम में महारानी पेट्रोल पंप को क्रॉस करने के बाद पुलिया के पास अपराधियों ने उनकी बाइक को घेर लिया और नवीन चंद्र के ऊपर गोली चलाने लगे। इसी क्रम में नवीन चंद्र को गोली भी लगी और उसके पास से बैग में रखे दिन भर के कलेक्शन किए हुए पैसे लुटेरे लेकर फरार हो गए। इसके बाद नवीन चंद्र किसी तरह अपनी जान बचाते हुए वहां से तुरंत पैदल भागते हुए नंदनी इंटरप्राइजेज पर वापस आए जहां पर उस कंपनी के स्टाफ ने देखा कि उनके दाहिने हाथ से खून बह रही है। इसके बाद लोगों ने तुरंत ही नवीन चंद्र को गाड़ी पर बैठा कर मधुबनी सदर अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया। इस घटना में घायल नवीन चंद को बेहतर इलाज के लिए डीएमसीएच के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद घटना की जानकारी मधुबनी नगर थाना को दी गई। सूचना पाते ही नगर थाना अध्यक्ष अमित कुमार साथ ही दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और घटना के बारे में कंपनी के स्टाफ और वहां पर मौजूद लोगों से पूछताछ करने लगे। साथ ही कंपनी के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगालने लगे। लूट की घटना पूरे मधुबनी शहर में आग की तरह फैल गई जिसके बाद सदर एसडीपीओ राजीव कुमार घटनास्थल पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बॉलीवुड के दंबग खान यानी सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म 'लवरात्रि' पिछले कुछ समय से काफी सुखियों में हैं। इसकी वजह सलमान के जीजा आयुष शर्मा की डेब्यू फिल्म नहीं, बल्कि इस फिल्म का टाइटल है। दरअसल, आयुष की डेब्यू फिल्म का नाम 'लवरात्रि' हिंदुओं के पावन पर्व 'नवरात्रि' त्योहार से मिलता जुलता रखा गया था। क्योंकि फिल्म की पूरी कहानी इसी त्योहार के इर्द-गिर्द घूमती है, इसीलिए फिल्म का टाइटल भी 'लवरात्रि' रखा गया। हालांकि कई लोगों ने इस नाम पर आपत्ति जताई थी। दरअसल, लवरात्रि का ट्रेलर रिलीज होने के बाद फिल्म के टाइटल पर कड़ा विरोध किया हुआ और साथ में मूवी के पोस्टर भी जलाए थे। इतना ही नहीं बिहार के कोर्ट में एक वकील ने मूवी के टाइटल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि मूवी का टाइटल लवरात्रि हिंदुओं की भावनाओं को आहत करता है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
बॉलीवुड के दंबग खान यानी सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म 'लवरात्रि' पिछले कुछ समय से काफी सुखियों में हैं। इसकी वजह सलमान के जीजा आयुष शर्मा की डेब्यू फिल्म नहीं, बल्कि इस फिल्म का टाइटल है। दरअसल, आयुष की डेब्यू फिल्म का नाम 'लवरात्रि' हिंदुओं के पावन पर्व 'नवरात्रि' त्योहार से मिलता जुलता रखा गया था। क्योंकि फिल्म की पूरी कहानी इसी त्योहार के इर्द-गिर्द घूमती है, इसीलिए फिल्म का टाइटल भी 'लवरात्रि' रखा गया। हालांकि कई लोगों ने इस नाम पर आपत्ति जताई थी। दरअसल, लवरात्रि का ट्रेलर रिलीज होने के बाद फिल्म के टाइटल पर कड़ा विरोध किया हुआ और साथ में मूवी के पोस्टर भी जलाए थे। इतना ही नहीं बिहार के कोर्ट में एक वकील ने मूवी के टाइटल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि मूवी का टाइटल लवरात्रि हिंदुओं की भावनाओं को आहत करता है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? भारत के महापंजीयक (RGI) द्वारा प्रस्तुत आँकड़े वर्ष 2005 के बाद भारत की मातृ और शिशु मृत्यु दर (MMR और IMR) में गिरावट की गति में वृद्धि दर्शाते हैं। - दुर्भाग्य से, पोषण एक प्रमुख क्षेत्र है जो किसी भी बड़ी प्रगति से दूर है। भारत का महापंजीयक (Registrar General of India): - वर्ष 1961 में भारत का महापंजीयक की स्थापना गृह मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा की गई थी। यह भारत की जनगणना और भारतीय भाषा सर्वेक्षण सहित भारत के जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों के परिणामों की व्यवस्था, संचालन तथा विश्लेषण करता है। - प्रायः एक सिविल सेवक को ही रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जाता है जिसकी रैंक संयुक्त सचिव पद के समान होती है। - RGI का कार्यालय मुख्य रूप से निम्नलिखित के संचालन हेतु ज़िम्मेदार हैः - सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) - नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) - राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) MMR और IMR को कम करने में प्रगतिः - गिरावट के रुझानः - RGI के कार्यालय द्वारा जारी एक विशेष बुलेटिन के अनुसार, भारत का MMR वर्ष 2001-03 के दौरान 301 की तुलना में वर्ष 2018-2020 में 97 था। - IMR भी वर्ष 2005 में 58 की तुलना में घटकर 27 (वर्ष 2021 तक) हो गया है। - इस संदर्भ में ग्रामीण-शहरी अंतराल भी कम हो गया है। - NHM और NRHM की भूमिकाः पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के मामले में देश के लिये गेम चेंजर रहे हैं। - प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की एक सार्वजनिक प्रणाली के माध्यम से सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिये वर्ष 2005 में NRHM शुरू किया गया था। - NHM को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (2005 में लॉन्च) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (2013 में लॉन्च) को एकीकृत करते हुए लॉन्च किया गया था। कुपोषण से निपटने का परिदृश्यः - परिचयः - कुपोषण वह स्थिति है जो तब विकसित होती है जब शरीर विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्त्वों से वंचित हो जाता है, जिससे उसे स्वस्थ ऊतक तथा अंग के कार्य को बनाए रखने की आवश्यकता होती है। - कुपोषण उन लोगों में होता है जो या तो अल्पपोषित होते हैं या अधिक पोषित होते हैं। - NFHS 5 के निष्कर्षः - राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5, 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार- 5 वर्ष से कम उम्र के 35.5 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं, 19.3 प्रतिशत कमज़ोर हैं और 32.1 प्रतिशत कम वजन वाले हैं। - मेघालय में अविकसित बच्चों की संख्या सबसे अधिक (46.5%) है, इसके बाद बिहार (42.9%) का स्थान है। - महाराष्ट्र में 25.6% चाइल्ड वेस्टिंग/बच्चों में निर्बलता सबसे अधिक हैं, इसके बाद गुजरात (25.1%) का स्थान है। - NFHS-4 की तुलना में, NFHS -5 में अधिकांश राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में अधिक वजन या मोटापे की व्यापकता में वृद्धि हुई है। - राष्ट्रीय स्तर पर, यह महिलाओं के बीच 21% से बढ़कर 24% और पुरुषों के बीच 19% से 23% हो गया। - भारत के सभी राज्यों में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों (58.6 से 67%), महिलाओं (53.1 से 57%) में एनीमिया की स्थिति बिगड़ गई है। - राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5, 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार- 5 वर्ष से कम उम्र के 35.5 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं, 19.3 प्रतिशत कमज़ोर हैं और 32.1 प्रतिशत कम वजन वाले हैं। - सरकार की पहलों की अक्षमताः - पोषण अभियान, हालांँकि अभिनव है, अभी भी संस्थागत विकेंद्रीकृत सार्वजनिक कार्रवाई चुनौती को संबोधित नहीं कर पा रहा है। - पोषण के लिये की गई पहल विखंडित बनी हुई है; स्थानीय पंचायतों और असंबद्ध वित्तीय संसाधनों वाले समुदायों की संस्थागत भूमिका अभी भी पिछड़ रही है। - अन्य मुद्देः - गरीबी, अल्पपोषण, कम कार्य क्षमता, कम कमाई और गरीबी का दुष्चक्र। - मलेरिया और खसरा जैसे संक्रमण तीव्र कुपोषण को जन्म देते हैं और मौजूदा पोषण संबंधी कमी को बढ़ाते हैं। - किसी परिवार की BPL स्थिति निर्धारित करने में अवैज्ञानिकता और अंतर-राज्य-भिन्नता के परिणामस्वरूप भूख की अवैज्ञानिकता पहचान होती है। - सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (प्रच्छन भूख) के प्रति लापरवाही और पोषण तथा स्तनपान के बारे में माताओं के बीच अपर्याप्त ज्ञान। कुपोषण से निपटने के लिये पहलः - पोषण अभियानः भारत सरकार ने 2022 तक "कुपोषण मुक्त भारत" सुनिश्चित करने के लिये राष्ट्रीय पोषण मिशन (NNM) या पोषण अभियान शुरू किया है। - एनीमिया मुक्त भारत अभियानः 2018 में शुरू किये गए, मिशन का उद्देश्य एनीमिया की गिरावट की वार्षिक दर को एक से तीन प्रतिशत तेज़ करना है। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: इसका उद्देश्य अपनी संबद्ध योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे कमज़ोर वर्गों के लिये खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। - प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं के प्रसव के लिये बेहतर सुविधाओं का लाभ उठाने के लिये उनके बैंक खातों में सीधे 6,000 रुपए हस्तांतरित किये जाते हैं। - एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजनाः यह 1975 में शुरू की गई थी और इस योजना का उद्देश्य 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और उनकी माताओं को भोजन, पूर्वस्कूली शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएँ प्रदान करना है। - ईट राइट इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट स्वस्थ भोजन और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिये कुछ अन्य पहल हैं। पोषण की सफलता के लिये पुनर्गठन सिद्धांतः - ज़मीनी स्तर के प्रशासन (ग्राम पंचायत, ग्राम सभा और अन्य सामुदायिक संगठनों) को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल और विविध आजीविका की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। - विकेंद्रीकृत वित्तीय संसाधनों के साथ ग्राम-विशिष्ट योजना प्रक्रिया का संचालन करना। - कदन्न सहित स्थानीय भोजन की विविधता को प्रोत्साहित करना। - तीव्र व्यवहार संचार। - सामुदायिक संबंध और माता-पिता की भागीदारी के साथ प्रत्येक आंँगनवाड़ी केंद्र में मासिक स्वास्थ्य दिवसों को संस्थागत बनाना। - सशक्तीकरण के लिये और कौशल के माध्यम से विविध आजीविका के लिये हर गांँव में किशोर लड़कियों के लिये एक मंच बनाना। - एक विषय के रूप में पोषण के लिये संपूर्ण सरकार और पूरे समाज के दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी सबसे अच्छा एक साधन हो सकती है और निगरानी भी स्थानीय हो सकती है। पंचायत और सामुदायिक संगठन आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs) प्रश्नः निम्नलिखित में से कौन-से 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्य हैं? (2017) नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः क्या महिला स्वयं सहायता समूहों के माइक्रोफाइनेंसिंग माध्यम से लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ा जा सकता है? उदाहरणों सहित समझाइए। (2021)
प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? भारत के महापंजीयक द्वारा प्रस्तुत आँकड़े वर्ष दो हज़ार पाँच के बाद भारत की मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट की गति में वृद्धि दर्शाते हैं। - दुर्भाग्य से, पोषण एक प्रमुख क्षेत्र है जो किसी भी बड़ी प्रगति से दूर है। भारत का महापंजीयक : - वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकसठ में भारत का महापंजीयक की स्थापना गृह मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा की गई थी। यह भारत की जनगणना और भारतीय भाषा सर्वेक्षण सहित भारत के जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों के परिणामों की व्यवस्था, संचालन तथा विश्लेषण करता है। - प्रायः एक सिविल सेवक को ही रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जाता है जिसकी रैंक संयुक्त सचिव पद के समान होती है। - RGI का कार्यालय मुख्य रूप से निम्नलिखित के संचालन हेतु ज़िम्मेदार हैः - सिविल पंजीकरण प्रणाली - नमूना पंजीकरण प्रणाली - राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर MMR और IMR को कम करने में प्रगतिः - गिरावट के रुझानः - RGI के कार्यालय द्वारा जारी एक विशेष बुलेटिन के अनुसार, भारत का MMR वर्ष दो हज़ार एक-तीन के दौरान तीन सौ एक की तुलना में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-दो हज़ार बीस में सत्तानवे था। - IMR भी वर्ष दो हज़ार पाँच में अट्ठावन की तुलना में घटकर सत्ताईस हो गया है। - इस संदर्भ में ग्रामीण-शहरी अंतराल भी कम हो गया है। - NHM और NRHM की भूमिकाः पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के मामले में देश के लिये गेम चेंजर रहे हैं। - प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की एक सार्वजनिक प्रणाली के माध्यम से सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिये वर्ष दो हज़ार पाँच में NRHM शुरू किया गया था। - NHM को भारत सरकार द्वारा वर्ष दो हज़ार तेरह में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन को एकीकृत करते हुए लॉन्च किया गया था। कुपोषण से निपटने का परिदृश्यः - परिचयः - कुपोषण वह स्थिति है जो तब विकसित होती है जब शरीर विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्त्वों से वंचित हो जाता है, जिससे उसे स्वस्थ ऊतक तथा अंग के कार्य को बनाए रखने की आवश्यकता होती है। - कुपोषण उन लोगों में होता है जो या तो अल्पपोषित होते हैं या अधिक पोषित होते हैं। - NFHS पाँच के निष्कर्षः - राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पाँच, दो हज़ार उन्नीस-इक्कीस की रिपोर्ट के अनुसार- पाँच वर्ष से कम उम्र के पैंतीस.पाँच प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं, उन्नीस.तीन प्रतिशत कमज़ोर हैं और बत्तीस.एक प्रतिशत कम वजन वाले हैं। - मेघालय में अविकसित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद बिहार का स्थान है। - महाराष्ट्र में पच्चीस.छः% चाइल्ड वेस्टिंग/बच्चों में निर्बलता सबसे अधिक हैं, इसके बाद गुजरात का स्थान है। - NFHS-चार की तुलना में, NFHS -पाँच में अधिकांश राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में अधिक वजन या मोटापे की व्यापकता में वृद्धि हुई है। - राष्ट्रीय स्तर पर, यह महिलाओं के बीच इक्कीस% से बढ़कर चौबीस% और पुरुषों के बीच उन्नीस% से तेईस% हो गया। - भारत के सभी राज्यों में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों , महिलाओं में एनीमिया की स्थिति बिगड़ गई है। - राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पाँच, दो हज़ार उन्नीस-इक्कीस की रिपोर्ट के अनुसार- पाँच वर्ष से कम उम्र के पैंतीस.पाँच प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं, उन्नीस.तीन प्रतिशत कमज़ोर हैं और बत्तीस.एक प्रतिशत कम वजन वाले हैं। - सरकार की पहलों की अक्षमताः - पोषण अभियान, हालांँकि अभिनव है, अभी भी संस्थागत विकेंद्रीकृत सार्वजनिक कार्रवाई चुनौती को संबोधित नहीं कर पा रहा है। - पोषण के लिये की गई पहल विखंडित बनी हुई है; स्थानीय पंचायतों और असंबद्ध वित्तीय संसाधनों वाले समुदायों की संस्थागत भूमिका अभी भी पिछड़ रही है। - अन्य मुद्देः - गरीबी, अल्पपोषण, कम कार्य क्षमता, कम कमाई और गरीबी का दुष्चक्र। - मलेरिया और खसरा जैसे संक्रमण तीव्र कुपोषण को जन्म देते हैं और मौजूदा पोषण संबंधी कमी को बढ़ाते हैं। - किसी परिवार की BPL स्थिति निर्धारित करने में अवैज्ञानिकता और अंतर-राज्य-भिन्नता के परिणामस्वरूप भूख की अवैज्ञानिकता पहचान होती है। - सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के प्रति लापरवाही और पोषण तथा स्तनपान के बारे में माताओं के बीच अपर्याप्त ज्ञान। कुपोषण से निपटने के लिये पहलः - पोषण अभियानः भारत सरकार ने दो हज़ार बाईस तक "कुपोषण मुक्त भारत" सुनिश्चित करने के लिये राष्ट्रीय पोषण मिशन या पोषण अभियान शुरू किया है। - एनीमिया मुक्त भारत अभियानः दो हज़ार अट्ठारह में शुरू किये गए, मिशन का उद्देश्य एनीमिया की गिरावट की वार्षिक दर को एक से तीन प्रतिशत तेज़ करना है। - राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम , दो हज़ार तेरह: इसका उद्देश्य अपनी संबद्ध योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे कमज़ोर वर्गों के लिये खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। - प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना : गर्भवती महिलाओं के प्रसव के लिये बेहतर सुविधाओं का लाभ उठाने के लिये उनके बैंक खातों में सीधे छः,शून्य रुपयापए हस्तांतरित किये जाते हैं। - एकीकृत बाल विकास सेवा योजनाः यह एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में शुरू की गई थी और इस योजना का उद्देश्य छः वर्ष से कम उम्र के बच्चों और उनकी माताओं को भोजन, पूर्वस्कूली शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और रेफरल सेवाएँ प्रदान करना है। - ईट राइट इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट स्वस्थ भोजन और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिये कुछ अन्य पहल हैं। पोषण की सफलता के लिये पुनर्गठन सिद्धांतः - ज़मीनी स्तर के प्रशासन को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल और विविध आजीविका की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। - विकेंद्रीकृत वित्तीय संसाधनों के साथ ग्राम-विशिष्ट योजना प्रक्रिया का संचालन करना। - कदन्न सहित स्थानीय भोजन की विविधता को प्रोत्साहित करना। - तीव्र व्यवहार संचार। - सामुदायिक संबंध और माता-पिता की भागीदारी के साथ प्रत्येक आंँगनवाड़ी केंद्र में मासिक स्वास्थ्य दिवसों को संस्थागत बनाना। - सशक्तीकरण के लिये और कौशल के माध्यम से विविध आजीविका के लिये हर गांँव में किशोर लड़कियों के लिये एक मंच बनाना। - एक विषय के रूप में पोषण के लिये संपूर्ण सरकार और पूरे समाज के दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी सबसे अच्छा एक साधन हो सकती है और निगरानी भी स्थानीय हो सकती है। पंचायत और सामुदायिक संगठन आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न प्रश्नः निम्नलिखित में से कौन-से 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्य हैं? नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः क्या महिला स्वयं सहायता समूहों के माइक्रोफाइनेंसिंग माध्यम से लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ा जा सकता है? उदाहरणों सहित समझाइए।
देहरादून - मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में कहा कि हिमालय पूरे देश और दुनिया का है, इसलिए आवश्यक हो जाता है कि हम इस हिमालय दिवस पर देश और दुनिया का ध्यान इसकी ओर आकर्षित करें और सभी लोग सामूहिक रूप से संकल्प लें कि हम हिमालय को बचाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हिमालय विश्व की महानतम पर्वत श्रंखला है। हिमालय अपनी नदियों और जलवायु से पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है। हमारा राज्य हिमालयी क्षेत्र का नवीनतम राज्य है। गंगा, यमुना और कई जीवनदायिनी नदियां यहां से निकलती हैं।
देहरादून - मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में कहा कि हिमालय पूरे देश और दुनिया का है, इसलिए आवश्यक हो जाता है कि हम इस हिमालय दिवस पर देश और दुनिया का ध्यान इसकी ओर आकर्षित करें और सभी लोग सामूहिक रूप से संकल्प लें कि हम हिमालय को बचाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हिमालय विश्व की महानतम पर्वत श्रंखला है। हिमालय अपनी नदियों और जलवायु से पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है। हमारा राज्य हिमालयी क्षेत्र का नवीनतम राज्य है। गंगा, यमुना और कई जीवनदायिनी नदियां यहां से निकलती हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में लागू लॉकडाउन को एक और हफ्ते के लिए बढ़ाने का रविवार को ऐलान करते हुए कहा कि दिल्ली में कोविड-19 की स्थिति गंभीर बनी हुई है और बीते कुछ दिनों में संक्रमण दर 36 प्रतिशत के उच्चतर स्तर पर पहुंच गई थी. केजरीवाल ने कहा कि 19 अप्रैल की रात को लगाया गया लॉकडाउन तीन मई सुबह पांच बजे तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा, "हमें कुछ और दिन स्थिति देखनी होगी कि मामले घटते हैं या बढ़ते हैं. " बता दें राष्ट्रीय राजधानी में पहले लॉकडाउन को 26 अप्रैल की सुबह पांच बजे खत्म होना था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता पर नजर रखने के लिए एक पोर्टल बनाया गया है और फैसला किया गया है कि उत्पादक, आपूर्तिकर्ता और अस्पताल हर दो घंटे पर आपूर्ति और उपभोग जानकारी को अपडेट करेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली का ऑक्सीजन का कोटा प्रतिदिन 10 टन और बढ़ा दिया है जिससे उम्मीद है कि ऑक्सीजन को लेकर अव्यवस्थित स्थिति कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी. केजरीवाल ने कहा, "केंद्र सरकार ने दिल्ली का (ऑक्सीजन) कोटा प्रतिदिन 480 टन से बढ़ाकर 490 टन कर दिया है. लेकिन हमें अभी पूरा कोटा नहीं मिला है. फिलहाल, हमें रोजाना 330-335 टन की आपूर्ति मिल रही है. " मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को केंद्र से बहुत समर्थन मिल रहा है और दोनों ऑक्सीजन आपूर्ति की समस्या को हल करने के लिए उचित तरीके से समन्वय कर रहे हैं.
इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में लागू लॉकडाउन को एक और हफ्ते के लिए बढ़ाने का रविवार को ऐलान करते हुए कहा कि दिल्ली में कोविड-उन्नीस की स्थिति गंभीर बनी हुई है और बीते कुछ दिनों में संक्रमण दर छत्तीस प्रतिशत के उच्चतर स्तर पर पहुंच गई थी. केजरीवाल ने कहा कि उन्नीस अप्रैल की रात को लगाया गया लॉकडाउन तीन मई सुबह पांच बजे तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा, "हमें कुछ और दिन स्थिति देखनी होगी कि मामले घटते हैं या बढ़ते हैं. " बता दें राष्ट्रीय राजधानी में पहले लॉकडाउन को छब्बीस अप्रैल की सुबह पांच बजे खत्म होना था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता पर नजर रखने के लिए एक पोर्टल बनाया गया है और फैसला किया गया है कि उत्पादक, आपूर्तिकर्ता और अस्पताल हर दो घंटे पर आपूर्ति और उपभोग जानकारी को अपडेट करेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली का ऑक्सीजन का कोटा प्रतिदिन दस टन और बढ़ा दिया है जिससे उम्मीद है कि ऑक्सीजन को लेकर अव्यवस्थित स्थिति कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी. केजरीवाल ने कहा, "केंद्र सरकार ने दिल्ली का कोटा प्रतिदिन चार सौ अस्सी टन से बढ़ाकर चार सौ नब्बे टन कर दिया है. लेकिन हमें अभी पूरा कोटा नहीं मिला है. फिलहाल, हमें रोजाना तीन सौ तीस-तीन सौ पैंतीस टन की आपूर्ति मिल रही है. " मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को केंद्र से बहुत समर्थन मिल रहा है और दोनों ऑक्सीजन आपूर्ति की समस्या को हल करने के लिए उचित तरीके से समन्वय कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर की महिला पत्रकार सुश्री सोमा शर्मा को राष्ट्रीय लाडली मीडिया पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है. ज्ञातव्य है कि सुश्री शर्मा को महिला उत्थान के क्षेत्र में विशेष रिर्पोटिंग के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या कोष और समाजसेवी संस्था पापुलेशन फर्स्ट द्वारा पिछले माह की बीस तारीख को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से विधानसभा में सुश्री शर्मा ने सौजन्य मुलाकात कर उन्हें पुरस्कार में मिले प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दिखाए. विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टी. एस. बाबा ने भी इस विशेष उपलब्धि के लिए सुश्री शर्मा को बधाई दी है.
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर की महिला पत्रकार सुश्री सोमा शर्मा को राष्ट्रीय लाडली मीडिया पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है. ज्ञातव्य है कि सुश्री शर्मा को महिला उत्थान के क्षेत्र में विशेष रिर्पोटिंग के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या कोष और समाजसेवी संस्था पापुलेशन फर्स्ट द्वारा पिछले माह की बीस तारीख को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से विधानसभा में सुश्री शर्मा ने सौजन्य मुलाकात कर उन्हें पुरस्कार में मिले प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दिखाए. विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टी. एस. बाबा ने भी इस विशेष उपलब्धि के लिए सुश्री शर्मा को बधाई दी है.
म्यांमार में सेना द्वारा सत्ता को कब्जे में लेने के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में मंगलवार को भी देश के सबसे बड़े शहर यांगून की सड़कों लोग विरोध करते दिखे। इस बीच सोमवार को हड़ताल और उससे पहले हुई हिंसा को लेकर विदेशी नेताओं ने चिंता जताई है। देश में लगातार हो रहे प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों पर हमले की निंदा करता है और अधिक हिंसा होने पर वह कार्रवाई करेगा। अमेरिका और कई पश्चिमी देशों की सरकारों ने म्यांमार की जुंटा सरकार से हिंसा से बचने, हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने और सू की सरकार को बहाल करने को कहा है। अमेरिका ने सोमवार को यह भी कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या को लेकर वह जुंटा के और सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंध लगा रहा है। अमेरिका ने लेफ्टिनेंट जनरल मोए मिंट तुन और जनरल मौंग मौंग क्याव का नाम भी प्रतिबंधित लोगों और संस्थाओं की सूची में शामिल कर दिया है। ब्रिटेन और कनाडा ने भी तख्तापलट के बाद ऐसे ही कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि सोमवार को देश में आम हड़ताल रखी गई थी। इस दौरान तमाम दुकानें बंद रहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कल के मुकाबले मंगलवार को प्रदर्शनकारियों की संख्या सड़कों पर कम रही, लेकिन यांगून में करीब एक हजार लोग शहर के लेदान सेंटर पर एकत्र हुए। इसके अलावा विरोध-प्रदर्शन के लिए लोग अन्य जगहों पर भी जुट रहे हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले में शनिवार को सुरक्षा बलों की गोली लगने से मरे 37 साल के थेट नियांग विन की अंतिम यात्रा में लोग शामिल हुए। शनिवार को काफी लोग बंदरगाहों और गोदी में काम करने वाले कामगारों के समर्थन में एकत्र हुए थे, जिन पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं। इस दौरान विन और एक किशोर की गोली लगने से मौत हो गई। गौरतलब है कि प्रशासन हड़ताल के बावजूद गोदी में लोगों पर काम जारी रखने का दबाव बना रहा था। म्यांमार में पिछले साल नवंबर में आम चुनाव हुए थे जिसमें आंग सान सू की को जीत मिली थी, लेकिन सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए एक फरवरी को सत्ता पर कब्जा कर लिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
म्यांमार में सेना द्वारा सत्ता को कब्जे में लेने के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में मंगलवार को भी देश के सबसे बड़े शहर यांगून की सड़कों लोग विरोध करते दिखे। इस बीच सोमवार को हड़ताल और उससे पहले हुई हिंसा को लेकर विदेशी नेताओं ने चिंता जताई है। देश में लगातार हो रहे प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों पर हमले की निंदा करता है और अधिक हिंसा होने पर वह कार्रवाई करेगा। अमेरिका और कई पश्चिमी देशों की सरकारों ने म्यांमार की जुंटा सरकार से हिंसा से बचने, हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने और सू की सरकार को बहाल करने को कहा है। अमेरिका ने सोमवार को यह भी कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या को लेकर वह जुंटा के और सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंध लगा रहा है। अमेरिका ने लेफ्टिनेंट जनरल मोए मिंट तुन और जनरल मौंग मौंग क्याव का नाम भी प्रतिबंधित लोगों और संस्थाओं की सूची में शामिल कर दिया है। ब्रिटेन और कनाडा ने भी तख्तापलट के बाद ऐसे ही कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि सोमवार को देश में आम हड़ताल रखी गई थी। इस दौरान तमाम दुकानें बंद रहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कल के मुकाबले मंगलवार को प्रदर्शनकारियों की संख्या सड़कों पर कम रही, लेकिन यांगून में करीब एक हजार लोग शहर के लेदान सेंटर पर एकत्र हुए। इसके अलावा विरोध-प्रदर्शन के लिए लोग अन्य जगहों पर भी जुट रहे हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले में शनिवार को सुरक्षा बलों की गोली लगने से मरे सैंतीस साल के थेट नियांग विन की अंतिम यात्रा में लोग शामिल हुए। शनिवार को काफी लोग बंदरगाहों और गोदी में काम करने वाले कामगारों के समर्थन में एकत्र हुए थे, जिन पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं। इस दौरान विन और एक किशोर की गोली लगने से मौत हो गई। गौरतलब है कि प्रशासन हड़ताल के बावजूद गोदी में लोगों पर काम जारी रखने का दबाव बना रहा था। म्यांमार में पिछले साल नवंबर में आम चुनाव हुए थे जिसमें आंग सान सू की को जीत मिली थी, लेकिन सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए एक फरवरी को सत्ता पर कब्जा कर लिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सरकार को बताया है कि 2020 में 3,564 दुर्घटनाएं गड्ढों के कारण हुईं। यह आंकड़ा 2019 में 4,775 दुर्घटनाओं में बहुत अधिक था। मंत्रालय को यह जानकारी Parliament के साथ साझा करनी पड़ी जब Telugu Desam Party (टीडीपी) ) विधायक Jayadev Galla ने जानना चाहा कि राजमार्गों के खराब रखरखाव के कारण कितनी दुर्घटनाएँ हुईं। मंत्रालय ने नोट किया है कि सड़क दुर्घटनाएं खराब रोशनी, तेज गति, चालक की त्रुटियों, ओवरलोड वाहनों, दोषपूर्ण सड़कों, मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले लोगों, दोषपूर्ण वाहनों, शराब के नशे में गाड़ी चलाने, लाल बत्ती कूदने, साइकिल चालकों की गलती, खराब मौसम के कारण हो रही थीं। ओवरटेकिंग, बाइकर की गलती और गलत साइड ड्राइविंग। गाला ने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार सड़क सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए सड़क और सुरक्षा डेटाबेस या राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड पेश करने की योजना बना रही है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वे Integrated Road Accident Database (IRAD) के रूप में जाना जाने वाला एक नया डेटाबेस तैयार करेंगे, जो केंद्र और राज्यों को सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और यातायात को विनियमित करने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की सलाह देगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों की तुलना में गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं पिछले साल सबसे कम थीं। उन्होंने बताया कि 2016 में 6,424 दुर्घटनाएं हुईं, 2017 में यह आंकड़ा 9,423 हो गया, 2018 में यह आंकड़ा गिरकर 4,869 हो गया और 2019 में 4,775 दुर्घटनाएं हुईं। यह जानकारी Gadkari ने इस साल की शुरुआत में Parliament के मानसून सत्र के दौरान साझा की थी। सड़कों पर गड्ढे कैसे बनते हैं? खराब रोड डिजाइन :गड्ढों के विकास का एक मुख्य कारण खराब सड़क डिजाइन है। कुछ पैसे बचाने के लिए ठेकेदार अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग नहीं करेंगे। इससे सड़क की संरचना से खिलवाड़ हो रहा है। फिर जो वाहन ओवरलोड होते हैं वे सड़क में दरारें पैदा कर सकते हैं, अपर्याप्त जल निकासी से जलभराव हो सकता है जो सड़क की संरचना को भी कमजोर कर सकता है। सड़क मरम्मत कार्य :यदि सड़कों का उपयोग किया जा रहा है तो वे समय के साथ क्षतिग्रस्त हो जाएंगी जिससे उनकी मरम्मत की जाएगी। लेकिन, अक्सर मरम्मत का काम जो किया जाता है वह निशान तक नहीं होता है और इससे फिर से उम्मीद से जल्दी दरारें पड़ जाती हैं जो फिर धीरे-धीरे गड्ढों में विकसित हो जाती हैं। ओवरलोडिंगः सड़कों को एक विशिष्ट मात्रा में भार लेने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ओवरलोड वाहन सड़कों पर बहुत अधिक दबाव डालते हैं और इस वजह से समय के साथ सड़कों में दरारें आ सकती हैं। 2021 की शुरुआत में, NHAI या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग संघ ने एक नई नीति जारी की जिसमें कहा गया है कि खराब सड़कों के निर्माण के लिए ठेकेदारों को दंडित किया जाएगा। यदि सड़क खराब डिजाइन या घटिया गुणवत्ता की बनी है तो वह बार-बार टूटती है। जुर्माने की राशि विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जिन्हें साझा नहीं किया जाता है। जुर्माना रुपये के बीच होगा। 1 करोड़ से रु. 10 करोड़। ठेकेदारों को भविष्य की परियोजनाओं से भी तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। अगर कोई कंसल्टेंसी फर्म इसमें शामिल है तो उन्हें जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा, यदि दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो कंसल्टेंसी फर्म को दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। उन्हें एक हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा। 40 लाख। प्रमुख कर्मियों को तीन साल तक NHAI के साथ काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सरकार को बताया है कि दो हज़ार बीस में तीन,पाँच सौ चौंसठ दुर्घटनाएं गड्ढों के कारण हुईं। यह आंकड़ा दो हज़ार उन्नीस में चार,सात सौ पचहत्तर दुर्घटनाओं में बहुत अधिक था। मंत्रालय को यह जानकारी Parliament के साथ साझा करनी पड़ी जब Telugu Desam Party ) विधायक Jayadev Galla ने जानना चाहा कि राजमार्गों के खराब रखरखाव के कारण कितनी दुर्घटनाएँ हुईं। मंत्रालय ने नोट किया है कि सड़क दुर्घटनाएं खराब रोशनी, तेज गति, चालक की त्रुटियों, ओवरलोड वाहनों, दोषपूर्ण सड़कों, मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले लोगों, दोषपूर्ण वाहनों, शराब के नशे में गाड़ी चलाने, लाल बत्ती कूदने, साइकिल चालकों की गलती, खराब मौसम के कारण हो रही थीं। ओवरटेकिंग, बाइकर की गलती और गलत साइड ड्राइविंग। गाला ने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार सड़क सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए सड़क और सुरक्षा डेटाबेस या राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड पेश करने की योजना बना रही है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वे Integrated Road Accident Database के रूप में जाना जाने वाला एक नया डेटाबेस तैयार करेंगे, जो केंद्र और राज्यों को सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और यातायात को विनियमित करने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की सलाह देगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों की तुलना में गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं पिछले साल सबसे कम थीं। उन्होंने बताया कि दो हज़ार सोलह में छः,चार सौ चौबीस दुर्घटनाएं हुईं, दो हज़ार सत्रह में यह आंकड़ा नौ,चार सौ तेईस हो गया, दो हज़ार अट्ठारह में यह आंकड़ा गिरकर चार,आठ सौ उनहत्तर हो गया और दो हज़ार उन्नीस में चार,सात सौ पचहत्तर दुर्घटनाएं हुईं। यह जानकारी Gadkari ने इस साल की शुरुआत में Parliament के मानसून सत्र के दौरान साझा की थी। सड़कों पर गड्ढे कैसे बनते हैं? खराब रोड डिजाइन :गड्ढों के विकास का एक मुख्य कारण खराब सड़क डिजाइन है। कुछ पैसे बचाने के लिए ठेकेदार अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग नहीं करेंगे। इससे सड़क की संरचना से खिलवाड़ हो रहा है। फिर जो वाहन ओवरलोड होते हैं वे सड़क में दरारें पैदा कर सकते हैं, अपर्याप्त जल निकासी से जलभराव हो सकता है जो सड़क की संरचना को भी कमजोर कर सकता है। सड़क मरम्मत कार्य :यदि सड़कों का उपयोग किया जा रहा है तो वे समय के साथ क्षतिग्रस्त हो जाएंगी जिससे उनकी मरम्मत की जाएगी। लेकिन, अक्सर मरम्मत का काम जो किया जाता है वह निशान तक नहीं होता है और इससे फिर से उम्मीद से जल्दी दरारें पड़ जाती हैं जो फिर धीरे-धीरे गड्ढों में विकसित हो जाती हैं। ओवरलोडिंगः सड़कों को एक विशिष्ट मात्रा में भार लेने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ओवरलोड वाहन सड़कों पर बहुत अधिक दबाव डालते हैं और इस वजह से समय के साथ सड़कों में दरारें आ सकती हैं। दो हज़ार इक्कीस की शुरुआत में, NHAI या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग संघ ने एक नई नीति जारी की जिसमें कहा गया है कि खराब सड़कों के निर्माण के लिए ठेकेदारों को दंडित किया जाएगा। यदि सड़क खराब डिजाइन या घटिया गुणवत्ता की बनी है तो वह बार-बार टूटती है। जुर्माने की राशि विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जिन्हें साझा नहीं किया जाता है। जुर्माना रुपये के बीच होगा। एक करोड़ से रु. दस करोड़। ठेकेदारों को भविष्य की परियोजनाओं से भी तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। अगर कोई कंसल्टेंसी फर्म इसमें शामिल है तो उन्हें जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा, यदि दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो कंसल्टेंसी फर्म को दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। उन्हें एक हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा। चालीस लाख। प्रमुख कर्मियों को तीन साल तक NHAI के साथ काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Quick links: सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो सामने आते हैं। इस दौरान इंसानों के साथ-साथ जानवरों के वीडियो काफी पसंद किये जाते हैं, जिसे देख लोगों के चेहरे पर खुद ब खुद स्माइल आ जाती है। खास तौर पर बंदरों के किसी भी हरकत वाली वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, जिसे देख लोग इमोशनल भी हो रहे हैं। हाल ही में वायरल हुए इस वीडियो में देख सकते हैं कि एक बंदर का बच्चा, जो अपने परिवार से अलग हो गया और उसे उसके परिजनों के पास वापस भेज दिया गया। वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा बंदर के बच्चे को फिर से ले जाया गया और उसे उसके परिवार के पास छोड़ दिया जाता है, जिसमें बच्चे को देख बंदर इस तरह गले लगाता, जिसे देख लोग इमोशनल रिएक्ट कर रहे हैं। इस वीडियो को Yog नाम के ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर किया है, जिसे शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, "रिहाबिल किए गए जंगली बंदर को रिहा होने पर परिवार से बहुत बड़ा गले मिलता है।" बंदर के वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर कई लोगों का ध्यान खींचा है और कई लाइक और कमेंट्स के साथ इसे लगभग 1 मिलियन बार देखा जा चुका है। इसे देख लोग भावुक अंदाज में कमेंट्स भी कर रहे हैं। इससे पहले भी एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसमें क्यूट बंदर (Monkey) का अनोखा अंदाज दिख रहा था। इसमें एक छोटा बंदर साइकिल चलाता हुए लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसे देख लोग क्यूट रिएक्शन भी मिले। इसमें देख सकते हैं कि बंदर ग्रीन कलर का यूनिफॉर्म पहना होता है, जो साथ में पिंक कलर स्कूल बैग भी लेकर स्टूडेंट लुक में साईकल से गोल-गोल चक्कर लगाता है। इस पोस्ट को helicopter_yatra_ नामक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया है, जिसे देख लोग दिल के इमोजी लगा रहे हैं। खास बात यह है कि यह बंदर अपने फ्लो में चलता रहता है, इस दौरान कई लोग इशारा भी करते हैं, लेकिन वह इग्नोर कर अपनी मस्ती में मगन रहता है।
Quick links: सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो सामने आते हैं। इस दौरान इंसानों के साथ-साथ जानवरों के वीडियो काफी पसंद किये जाते हैं, जिसे देख लोगों के चेहरे पर खुद ब खुद स्माइल आ जाती है। खास तौर पर बंदरों के किसी भी हरकत वाली वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, जिसे देख लोग इमोशनल भी हो रहे हैं। हाल ही में वायरल हुए इस वीडियो में देख सकते हैं कि एक बंदर का बच्चा, जो अपने परिवार से अलग हो गया और उसे उसके परिजनों के पास वापस भेज दिया गया। वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा बंदर के बच्चे को फिर से ले जाया गया और उसे उसके परिवार के पास छोड़ दिया जाता है, जिसमें बच्चे को देख बंदर इस तरह गले लगाता, जिसे देख लोग इमोशनल रिएक्ट कर रहे हैं। इस वीडियो को Yog नाम के ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर किया है, जिसे शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, "रिहाबिल किए गए जंगली बंदर को रिहा होने पर परिवार से बहुत बड़ा गले मिलता है।" बंदर के वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर कई लोगों का ध्यान खींचा है और कई लाइक और कमेंट्स के साथ इसे लगभग एक मिलियन बार देखा जा चुका है। इसे देख लोग भावुक अंदाज में कमेंट्स भी कर रहे हैं। इससे पहले भी एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसमें क्यूट बंदर का अनोखा अंदाज दिख रहा था। इसमें एक छोटा बंदर साइकिल चलाता हुए लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसे देख लोग क्यूट रिएक्शन भी मिले। इसमें देख सकते हैं कि बंदर ग्रीन कलर का यूनिफॉर्म पहना होता है, जो साथ में पिंक कलर स्कूल बैग भी लेकर स्टूडेंट लुक में साईकल से गोल-गोल चक्कर लगाता है। इस पोस्ट को helicopter_yatra_ नामक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया है, जिसे देख लोग दिल के इमोजी लगा रहे हैं। खास बात यह है कि यह बंदर अपने फ्लो में चलता रहता है, इस दौरान कई लोग इशारा भी करते हैं, लेकिन वह इग्नोर कर अपनी मस्ती में मगन रहता है।
अब कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों की लिस्ट और लंबी होती जा रही है। संभावित लिस्ट में नया नाम शामिल हो गया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी भी कांग्रेस का अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। मनीष तिवारी के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में राज्य के पार्टी प्रतिनिधियों से मिलने गए थे। ये प्रतिनिधि चुनाव में मतदाता भी हैं। बता दें की सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस से असंतुष्ट जी-23 के सदस्य भी रहे हैं। अन्य नेताओं के साथ उन्होंने भी पार्टी में सुधारों की बात कही थी। मनीष तिवारी के चुनाव लड़ने पर मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की दावेदारी ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की। राजस्थान में कांग्रेस विधायकों के साथ बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि मैं राहुल गांधी को मनाने की आखिरी कोशिश करूंगा। अगर वह नहीं मानते हैं तो मैं आलाकमान के निर्देशों का पालन करूंगा। उधर, अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, गुरुवार से नामांकन फार्म उपलब्ध हुए हैं। 24 से 30 सितंबर तक पर्चा दाखिल किया जा सकेगा। एक अक्टूबर तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उसी दिन वैध उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। 8 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा। इसके बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी। एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर 17 अक्टूबर को चुनाव कराया जाएगा। वोटों की गिनती 19 अक्टूबर को होगी।
अब कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों की लिस्ट और लंबी होती जा रही है। संभावित लिस्ट में नया नाम शामिल हो गया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, कांग्रेस के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी भी कांग्रेस का अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। मनीष तिवारी के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में राज्य के पार्टी प्रतिनिधियों से मिलने गए थे। ये प्रतिनिधि चुनाव में मतदाता भी हैं। बता दें की सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस से असंतुष्ट जी-तेईस के सदस्य भी रहे हैं। अन्य नेताओं के साथ उन्होंने भी पार्टी में सुधारों की बात कही थी। मनीष तिवारी के चुनाव लड़ने पर मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की दावेदारी ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की। राजस्थान में कांग्रेस विधायकों के साथ बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि मैं राहुल गांधी को मनाने की आखिरी कोशिश करूंगा। अगर वह नहीं मानते हैं तो मैं आलाकमान के निर्देशों का पालन करूंगा। उधर, अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, गुरुवार से नामांकन फार्म उपलब्ध हुए हैं। चौबीस से तीस सितंबर तक पर्चा दाखिल किया जा सकेगा। एक अक्टूबर तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उसी दिन वैध उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। आठ अक्टूबर तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा। इसके बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी की जाएगी। एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर सत्रह अक्टूबर को चुनाव कराया जाएगा। वोटों की गिनती उन्नीस अक्टूबर को होगी।
नागपुर. कुछ दिन पहले थाना क्षेत्र से स्पोर्ट्स बाइक चोरी करने वाले वाहन चोर को हुड़केश्वर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उसने वाहन चोरी की 6 वारदातों को अंजाम देना कबूला. पकड़ा गया आरोपी दत्तात्रयनगर निवासी अंश नितिन गजबे (20) बताया गया. विगत 17 मार्च को जवाहरनगर निवासी प्रफुल रामकृष्ण ठाकरे (57) ने अपनी बाइक घर के सामने खड़ी की थी. दिनदहाड़े उनका वाहन चोरी हो गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और खबरी के जरिए पुलिस को अंश का पता चला. उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर प्रफुल का वाहन चोरी करने की कबूली दी. कोर्ट ने पीसीआर मंजूर किया. अधिक पूछताछ करने पर अंश ने हुड़केश्वर थाना क्षेत्र से 1 और वाहन चोरी करने की जानकारी दी. इसके अलावा न्यू कामठी, कोराडी, पारडी और बेलतरोड़ी थाना क्षेत्र में भी वाहन चोरी कबूली. उससे अब तक 6 वाहन जब्त किए जा चुके हैं. इंस्पेक्टर जगवेंद्र राजपूत, विक्रांत सगणे, पीएसआई प्रमोद खंडार, प्रशांत राऊत, हेड कांस्टेबल मनोज नेवारे, शरद चव्हाण, प्रशांत कोड़ापे, दिनेश गाड़ेकर, विजय सिन्हा, राहुल इंगोले और मंगेश मड़ावी ने कार्रवाई की.
नागपुर. कुछ दिन पहले थाना क्षेत्र से स्पोर्ट्स बाइक चोरी करने वाले वाहन चोर को हुड़केश्वर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उसने वाहन चोरी की छः वारदातों को अंजाम देना कबूला. पकड़ा गया आरोपी दत्तात्रयनगर निवासी अंश नितिन गजबे बताया गया. विगत सत्रह मार्च को जवाहरनगर निवासी प्रफुल रामकृष्ण ठाकरे ने अपनी बाइक घर के सामने खड़ी की थी. दिनदहाड़े उनका वाहन चोरी हो गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और खबरी के जरिए पुलिस को अंश का पता चला. उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर प्रफुल का वाहन चोरी करने की कबूली दी. कोर्ट ने पीसीआर मंजूर किया. अधिक पूछताछ करने पर अंश ने हुड़केश्वर थाना क्षेत्र से एक और वाहन चोरी करने की जानकारी दी. इसके अलावा न्यू कामठी, कोराडी, पारडी और बेलतरोड़ी थाना क्षेत्र में भी वाहन चोरी कबूली. उससे अब तक छः वाहन जब्त किए जा चुके हैं. इंस्पेक्टर जगवेंद्र राजपूत, विक्रांत सगणे, पीएसआई प्रमोद खंडार, प्रशांत राऊत, हेड कांस्टेबल मनोज नेवारे, शरद चव्हाण, प्रशांत कोड़ापे, दिनेश गाड़ेकर, विजय सिन्हा, राहुल इंगोले और मंगेश मड़ावी ने कार्रवाई की.
साकारवादी, आलोचनात्मक और प्रयोगशील वैज्ञानिको को अपने अदर जो विश्वास है और जनता उनके सिद्धातो को जिस आदर की दृष्टि से देखती है, उसका कारण क्या अब भी वही है जो पहले था यह वात वडी विचित्र मालूम होती है कि विकासवाद के सिद्धात से लोगो के अन्यायपूर्ण कार्यो को उचित ठहराया जा सकता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो विज्ञान का सम्बन्ध केवल वस्तु से है और वह उसीका अध्ययन करता है । किंतु यह वात केवल देखने मे ऐसी मालूम पड़ती है। ऐसा ही धार्मिक सिद्धातो के विषय में भी थी । ऐसा जान पडता था कि धर्म का सम्बन्ध केवल सिद्धातो से है, मनुष्य के जीवन से नही । दर्शन के विपय में भी ऐसी हो भ्राति थी । ऐसा लगता था कि उसका सम्वन्ध केवल पारलौकिक तर्कों से है । किंतु ये सब वाते केवल देखने में ऐसी लगती थी । यही वात व्यापक रूप से हीगेल के सिद्धातो और विशेष रूप से माल्थस की विचारधारा के विषय मे भी थी । हीगेल का दर्शन-शास्त्र केवल तार्किक निष्कर्षो से सम्बन्धित जान पडता था, लोगो के जीवन से नही । ऐसी ही प्रतीति माल्थस की विचारधारा के विषय मे भी होती थी । उसका एक मात्र सम्वन्ध वस्तु सम्वन्धी आकडो से जान पडता था, किंतु वह भी केवल प्रतीत हो होता था । आधुनिक विज्ञान वस्तुस्थिति की जाच करता है। किंतु कौन-सी वस्तुस्थिति ? क्या कारण है कि कुछ विशेष वस्तुस्थितियो का ही अध्ययन किया जाता है, दूसरियो का नहीं ? आजकल के विज्ञान-वेत्ताओ को वडी गम्भीरता और विश्वास के साथ यह कहने का शौक है - "हम केवल वस्तुस्थिति का अध्ययन करते है, " मानो इन शब्दों का कोई अर्थ हो । केवल वस्तुस्थिति की जाच करना सम्भव नहीं है, क्योकि जाच के लिए उपलब्ध पदार्थों की संख्या वस्तुत. अपरिमित है । वस्तुस्थिति की परीक्षा करने से पहले एक ऐसे सिद्धात का होना आवश्यक है
साकारवादी, आलोचनात्मक और प्रयोगशील वैज्ञानिको को अपने अदर जो विश्वास है और जनता उनके सिद्धातो को जिस आदर की दृष्टि से देखती है, उसका कारण क्या अब भी वही है जो पहले था यह वात वडी विचित्र मालूम होती है कि विकासवाद के सिद्धात से लोगो के अन्यायपूर्ण कार्यो को उचित ठहराया जा सकता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो विज्ञान का सम्बन्ध केवल वस्तु से है और वह उसीका अध्ययन करता है । किंतु यह वात केवल देखने मे ऐसी मालूम पड़ती है। ऐसा ही धार्मिक सिद्धातो के विषय में भी थी । ऐसा जान पडता था कि धर्म का सम्बन्ध केवल सिद्धातो से है, मनुष्य के जीवन से नही । दर्शन के विपय में भी ऐसी हो भ्राति थी । ऐसा लगता था कि उसका सम्वन्ध केवल पारलौकिक तर्कों से है । किंतु ये सब वाते केवल देखने में ऐसी लगती थी । यही वात व्यापक रूप से हीगेल के सिद्धातो और विशेष रूप से माल्थस की विचारधारा के विषय मे भी थी । हीगेल का दर्शन-शास्त्र केवल तार्किक निष्कर्षो से सम्बन्धित जान पडता था, लोगो के जीवन से नही । ऐसी ही प्रतीति माल्थस की विचारधारा के विषय मे भी होती थी । उसका एक मात्र सम्वन्ध वस्तु सम्वन्धी आकडो से जान पडता था, किंतु वह भी केवल प्रतीत हो होता था । आधुनिक विज्ञान वस्तुस्थिति की जाच करता है। किंतु कौन-सी वस्तुस्थिति ? क्या कारण है कि कुछ विशेष वस्तुस्थितियो का ही अध्ययन किया जाता है, दूसरियो का नहीं ? आजकल के विज्ञान-वेत्ताओ को वडी गम्भीरता और विश्वास के साथ यह कहने का शौक है - "हम केवल वस्तुस्थिति का अध्ययन करते है, " मानो इन शब्दों का कोई अर्थ हो । केवल वस्तुस्थिति की जाच करना सम्भव नहीं है, क्योकि जाच के लिए उपलब्ध पदार्थों की संख्या वस्तुत. अपरिमित है । वस्तुस्थिति की परीक्षा करने से पहले एक ऐसे सिद्धात का होना आवश्यक है
खामियाजा एक बॉलीवुड थ्रिलर है, जिसका निर्देशन और लेखन दीक्षित कॉल ने किया है। फिल्म में हेरंब त्रिपाठी, पियाली मुन्सी, आलोक चतुर्वेदी, श्रावणी सहाय मुख्य भूमिका में नजर आये थे। फिल्म की कहानी एक आम आदमी अभिमन्यु की है, जोकि एक समाज सेवी सत्य प्रकाश की जान बचाता है, बिना जाने कि वह मंत्री का निशाना है और अपनी जान गंवा बैठता है। Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
खामियाजा एक बॉलीवुड थ्रिलर है, जिसका निर्देशन और लेखन दीक्षित कॉल ने किया है। फिल्म में हेरंब त्रिपाठी, पियाली मुन्सी, आलोक चतुर्वेदी, श्रावणी सहाय मुख्य भूमिका में नजर आये थे। फिल्म की कहानी एक आम आदमी अभिमन्यु की है, जोकि एक समाज सेवी सत्य प्रकाश की जान बचाता है, बिना जाने कि वह मंत्री का निशाना है और अपनी जान गंवा बैठता है। Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
कैसे आवों हो नन्दनलाल तेरी ब्रजनगरी, गोकुल नगरी । इत मथुरा उत गोकुल नगरी, वीच बहे जमुना गहरी । पाँव धर्यो मेरी पायल भीजै, कूदि परो वहि जाओ सारी । में दधि बैचन जात वृन्दावन, मारग मे मोहन झगरी । वरज यशोदा अपने लाल को, छीन लई मोरी नथली । रहु रहु ग्वालिन झूठ न वोलो, कान अकेलो तुम सगरी । मेरो कन्हैया पाँच वरस को, तुम ग्वालन अलमस्त भई । जाय पुकारों हो कंस राजा से, न्याय नही तेरी गोकुल नगरी । वृन्दावन की कुज गलिन में, बाँह पकर राधे झगरी । मीरॉ के प्रभु गिरिधर नागर, साधु संग करि हम सुधरी ॥५०४।। पदाभिव्यक्ति में पूर्वापर सबंध और संगति का अभाव है। तृतीय पक्ति "पॉव धर्या". जाओ सारी" सर्वथा अर्थहीन है । "झूठ न बोलो," "तेरी," "तुम" आदि शब्दो से पद की भाषा पर खड़ी बोली का प्रभाव सुस्पष्ट हो उठता है । "अलमस्त" शब्द का प्रयोग उर्दू के प्रभाव को भी इगित करता है । इसी प्रकार का एक पद मीरॉ के नाम पर प्रचलित गुजराती पदो मे भी प्राप्त है । हमरो प्रणाम वाँके बिहारी को । मोर मुकुट माथे तिलक बिराजै, कुडल अलकाकारी को । अधर मधुर पर बसी बाज, रीझ रीझावै राधा प्यारी को । यह छवि देख भगन भई मीरॉ, मोहन गिरिधारी को ॥५०५॥ अन्तिम पक्ति की शैली सर्वथा नूतन है । झट द्यो मेरो चीर रे मोरारी रे, झट द्यो मेरो चीर । मेरो चीर कदम चढ़ बैठो, मै जल बीच उघाडी ।
कैसे आवों हो नन्दनलाल तेरी ब्रजनगरी, गोकुल नगरी । इत मथुरा उत गोकुल नगरी, वीच बहे जमुना गहरी । पाँव धर्यो मेरी पायल भीजै, कूदि परो वहि जाओ सारी । में दधि बैचन जात वृन्दावन, मारग मे मोहन झगरी । वरज यशोदा अपने लाल को, छीन लई मोरी नथली । रहु रहु ग्वालिन झूठ न वोलो, कान अकेलो तुम सगरी । मेरो कन्हैया पाँच वरस को, तुम ग्वालन अलमस्त भई । जाय पुकारों हो कंस राजा से, न्याय नही तेरी गोकुल नगरी । वृन्दावन की कुज गलिन में, बाँह पकर राधे झगरी । मीरॉ के प्रभु गिरिधर नागर, साधु संग करि हम सुधरी ॥पाँच सौ चार।। पदाभिव्यक्ति में पूर्वापर सबंध और संगति का अभाव है। तृतीय पक्ति "पॉव धर्या". जाओ सारी" सर्वथा अर्थहीन है । "झूठ न बोलो," "तेरी," "तुम" आदि शब्दो से पद की भाषा पर खड़ी बोली का प्रभाव सुस्पष्ट हो उठता है । "अलमस्त" शब्द का प्रयोग उर्दू के प्रभाव को भी इगित करता है । इसी प्रकार का एक पद मीरॉ के नाम पर प्रचलित गुजराती पदो मे भी प्राप्त है । हमरो प्रणाम वाँके बिहारी को । मोर मुकुट माथे तिलक बिराजै, कुडल अलकाकारी को । अधर मधुर पर बसी बाज, रीझ रीझावै राधा प्यारी को । यह छवि देख भगन भई मीरॉ, मोहन गिरिधारी को ॥पाँच सौ पाँच॥ अन्तिम पक्ति की शैली सर्वथा नूतन है । झट द्यो मेरो चीर रे मोरारी रे, झट द्यो मेरो चीर । मेरो चीर कदम चढ़ बैठो, मै जल बीच उघाडी ।
प्रणय रहता है, वहाँ हम दोनों प्रणय शत्रुत इंपतो बनकर प्रणय लीलामृत तरंगों में प्रणय के जूलों पर प्रेम से झूलते प्रेम गोगाते प्रणय शासन को मानते हुए प्रणय साम्राज्य का पालन करेंगे। एकांतसेवा-16 यही एक साधना है जो सब साधनों का साधन है। मिलन हो जाता है। इस में सब साधनों का दोनों मनोषियों का लक्ष्य अद्र्खेत सिद्धि संयोग है। वे प्रिय का दर्शन चाहते कैटपार्वतोश कांव मन से कहते हैं जब जब मेरे प्रेम मंदिर में प्रभु पधारेगा, आनंद साम्राज्य में अधिष्टित काम होकर मिल होगा, और दिग्विजय को हुंदुभो बजौ, सब मन । विधर न जा। जा। (एकांतसेवा - 3 रविबाबू को भी प्रियदर्शन को बाह इससे जीवन में है। वे उसे देखने के लिए व्या है। उन्हें यह आशंका है कि ऐसा न हो कि इस जीवन में पिय का दर्शन न मिल पाये। अतरव उनको आतुरता इन शब्दों में व्यक्त होत है प्रभो। यदि अब इस जोवन में तुझे न देख पाया। यह बात मन में काँटे की तरह चुमतो रहेगो 'तुझे नहीं देख पाया। दोनों के को प्रिय का अभाव मिल गया है। वैकट पार्वतीश उन प्रिय को सौ मंदिर में नहीं बल्कि दृश्यमान बराबर जगढ़ में हो देखने का प्रयत्न करते हैं। प्रकृति के कण-कण में उनको उस प्रिय का अभाव होता है। "अनुराग जलधि की अमृत करता होगा - (एकांतसेवा -31) फूलों को शय्या पर प्रभु सोया होगा। होगा। (एकांतसेवा- 20) तरंगों में विकसित पुष्प दोने पर प्रिय विहार प्रशांत बन में वर्ण सीध में, या सुविकसित (स्कतिसेवा -32) पद्मालय में प्रियतम सोया
प्रणय रहता है, वहाँ हम दोनों प्रणय शत्रुत इंपतो बनकर प्रणय लीलामृत तरंगों में प्रणय के जूलों पर प्रेम से झूलते प्रेम गोगाते प्रणय शासन को मानते हुए प्रणय साम्राज्य का पालन करेंगे। एकांतसेवा-सोलह यही एक साधना है जो सब साधनों का साधन है। मिलन हो जाता है। इस में सब साधनों का दोनों मनोषियों का लक्ष्य अद्र्खेत सिद्धि संयोग है। वे प्रिय का दर्शन चाहते कैटपार्वतोश कांव मन से कहते हैं जब जब मेरे प्रेम मंदिर में प्रभु पधारेगा, आनंद साम्राज्य में अधिष्टित काम होकर मिल होगा, और दिग्विजय को हुंदुभो बजौ, सब मन । विधर न जा। जा। फूलों को शय्या पर प्रभु सोया होगा। होगा। तरंगों में विकसित पुष्प दोने पर प्रिय विहार प्रशांत बन में वर्ण सीध में, या सुविकसित पद्मालय में प्रियतम सोया
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के करीबी गैंगस्टर्स के निशाने पर हैं। पहले मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी दी गई। अब मूसेवाला के मुक्तसर में रहने वाले दोस्त की रेकी की गई। यह वही दोस्त हैं, जिनका जिक्र गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने अपनी वीडियो में किया था। गोल्डी ने दावा किया था कि यही दोस्त मूसेवाला के साथ सौदेबाजी करा रहे थे। मूसेवाला का 29 मई को कत्ल कर दिया गया था। जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने ली थी। मूसेवाला के करीबी मुक्तसर में रहते हैं। उन्होंने सीसीटीवी में देखा कि एक युवक उनकी रेकी कर रहा है। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने तुरंत उनके घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी। मूसेवाला के करीबी पहले गांव भंगचिड़ी में रहते थे। तब भी उनके घर फायरिंग होने के बाद उन्हें सिक्योरिटी दी गई है। पुलिस का कहना है कि रेकी करने की शिकायत की हर एंगल से जांच की जा रही है। मूसेवाला मर्डर के मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ ने कुछ दिन पहले एक वीडियो जारी की थी। जिसमें उसने कहा कि मूसेवाला ने अपनी जान बख्शने के लिए 2 करोड़ की ऑफर की थी। यह ऑफर भंगचिड़ी के कुछ युवकों के जरिए दी गई थी। जो हर वक्त मूसेवाला के साथ रहते हैं। हालांकि मूसेवाला के करीबियों ने इस बात को नकारा था कि जान बचाने के लिए ऐसा कोई ऑफर दिया गया था। मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को पाकिस्तानी नंबरों से धमकाया गया। सोशल मीडिया के जरिए भी उन्हें धमकी दी गई। जिसमें 'अगला नंबर बापू दा' लिखा हुआ था। हालांकि पंजाब पुलिस ने दावा किया कि मूसेवाला के पिता की सिक्योरिटी पूरी तरह से पुख्ता है। मूसेवाला की हत्या के बाद उनके पिता लगातार बुलेटप्रूफ गाड़ी में ही आते-जाते हैं। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के 3 शार्पशूटर प्रियवर्त फौजी, कशिश और अंकित सेरसा गिरफ्तार हो चुके हैं। शूटर जगरूप रूपा और मनप्रीत मन्नू का पंजाब पुलिस ने अमृतसर में एनकाउंटर कर दिया। छठा शार्पशूटर दीपक मुंडी अभी फरार है। इस वजह से पुलिस सतर्क होकर रेकी के आरोपों की जांच में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के करीबी गैंगस्टर्स के निशाने पर हैं। पहले मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी दी गई। अब मूसेवाला के मुक्तसर में रहने वाले दोस्त की रेकी की गई। यह वही दोस्त हैं, जिनका जिक्र गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने अपनी वीडियो में किया था। गोल्डी ने दावा किया था कि यही दोस्त मूसेवाला के साथ सौदेबाजी करा रहे थे। मूसेवाला का उनतीस मई को कत्ल कर दिया गया था। जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने ली थी। मूसेवाला के करीबी मुक्तसर में रहते हैं। उन्होंने सीसीटीवी में देखा कि एक युवक उनकी रेकी कर रहा है। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने तुरंत उनके घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी। मूसेवाला के करीबी पहले गांव भंगचिड़ी में रहते थे। तब भी उनके घर फायरिंग होने के बाद उन्हें सिक्योरिटी दी गई है। पुलिस का कहना है कि रेकी करने की शिकायत की हर एंगल से जांच की जा रही है। मूसेवाला मर्डर के मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ ने कुछ दिन पहले एक वीडियो जारी की थी। जिसमें उसने कहा कि मूसेवाला ने अपनी जान बख्शने के लिए दो करोड़ की ऑफर की थी। यह ऑफर भंगचिड़ी के कुछ युवकों के जरिए दी गई थी। जो हर वक्त मूसेवाला के साथ रहते हैं। हालांकि मूसेवाला के करीबियों ने इस बात को नकारा था कि जान बचाने के लिए ऐसा कोई ऑफर दिया गया था। मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को पाकिस्तानी नंबरों से धमकाया गया। सोशल मीडिया के जरिए भी उन्हें धमकी दी गई। जिसमें 'अगला नंबर बापू दा' लिखा हुआ था। हालांकि पंजाब पुलिस ने दावा किया कि मूसेवाला के पिता की सिक्योरिटी पूरी तरह से पुख्ता है। मूसेवाला की हत्या के बाद उनके पिता लगातार बुलेटप्रूफ गाड़ी में ही आते-जाते हैं। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के तीन शार्पशूटर प्रियवर्त फौजी, कशिश और अंकित सेरसा गिरफ्तार हो चुके हैं। शूटर जगरूप रूपा और मनप्रीत मन्नू का पंजाब पुलिस ने अमृतसर में एनकाउंटर कर दिया। छठा शार्पशूटर दीपक मुंडी अभी फरार है। इस वजह से पुलिस सतर्क होकर रेकी के आरोपों की जांच में जुट गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग में "ट्रस्टेड स्मार्ट प्रोडक्ट" की थीम पर 15 मार्च 2019 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2019 मनाया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एनसीडीआरसी के प्रेसिडेंट जस्टिस आरके अग्रवाल ने की। इस विषय पर संबोधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी विभाग के स्टैंडर्डाइजेशन, टेस्टिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन (एसटीक्यूसी) के महानिदेशक शुमेश कुमार नंदवानी मौजूद रहे।उन्होंने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्मार्ट उत्पादों की अहमियत, उनके उपयोग पर बात की और प्रभावी उपभोक्ता संरक्षण को देखते हुए साइबर सुरक्षा और डाटा प्राइवेसी के क्षेत्र में प्रभावी नियम की जरूरतों पर प्रकाश डाला। उपभोक्ता मामलों के सचिव श्री अविनाश के श्रीवास्तव ने उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की प्रणाली के बारे में बात की।उन्होंने राज्य सरकारों से राज्य स्तरीय उपभोक्ता कल्याण फंड स्थापिक करने का भी आग्रह किया।एनसीडीआरसी के प्रेसिडेंट जस्टिस आरके अग्रवाल ने डिजिटल दुनिया के सभी महत्वपूर्ण मामलों जिसमें डाटा सुरक्षा, निजता, सुरक्षा और शिकायतों का निपटारे के साथ ही विनियामक और पर्यवेक्षी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में व्यापक दृष्टिकोण के जरिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग में "ट्रस्टेड स्मार्ट प्रोडक्ट" की थीम पर पंद्रह मार्च दो हज़ार उन्नीस को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस दो हज़ार उन्नीस मनाया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एनसीडीआरसी के प्रेसिडेंट जस्टिस आरके अग्रवाल ने की। इस विषय पर संबोधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी विभाग के स्टैंडर्डाइजेशन, टेस्टिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन के महानिदेशक शुमेश कुमार नंदवानी मौजूद रहे।उन्होंने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्मार्ट उत्पादों की अहमियत, उनके उपयोग पर बात की और प्रभावी उपभोक्ता संरक्षण को देखते हुए साइबर सुरक्षा और डाटा प्राइवेसी के क्षेत्र में प्रभावी नियम की जरूरतों पर प्रकाश डाला। उपभोक्ता मामलों के सचिव श्री अविनाश के श्रीवास्तव ने उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की प्रणाली के बारे में बात की।उन्होंने राज्य सरकारों से राज्य स्तरीय उपभोक्ता कल्याण फंड स्थापिक करने का भी आग्रह किया।एनसीडीआरसी के प्रेसिडेंट जस्टिस आरके अग्रवाल ने डिजिटल दुनिया के सभी महत्वपूर्ण मामलों जिसमें डाटा सुरक्षा, निजता, सुरक्षा और शिकायतों का निपटारे के साथ ही विनियामक और पर्यवेक्षी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में व्यापक दृष्टिकोण के जरिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया।
‡ 66वीं अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में उठेंगे महत्वपूर्ण मुद्दे हमारे संवाददाता नई दिल्ली। विश्वभर के होम्योपैथी डाक्टरों की अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन राजधानी के सिरी फोर्ट सभागार में एक से चार दिसम्बर को किया जा रहा है। इस वर्ष का विषय `जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी' के माध्यम से सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस कार्यक्रम को होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएमएआई), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथिक फिजीशंस (आईआईएचपी) और एशियन होम्योपैथिक एसोसिएशन द्वारा सह आयोजित किया जा रहा है और सहयोगियों में आयुष विभाग, होम्योपैथिक केंद्रीय परिषद, होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली का मंडल (दिल्ली), जर्मन संस्थान, इंस्टीट्यूट फॉर गेस्चिष्टे डेर मेडिसिन, रॉबर्ट बॉश स्टिफटंग (आईजीएम) शामिल है। जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी के विषय के साथ लीगा 2011 महामारियों के प्रबंधन तथा उनसे निपटने के उपायों पर भी चर्चा करेगा जिसमें डेंगू, चिकनगुनिया, प्रसव के दौरान दर्द, होम्योपैथिक द्वारा एचआईवी तथा एड्स का उपचार, बच्चों में मिर्गी के मामले में होम्योपैथिक दवाइयों का चिकित्सीय अध्ययन जैसे मुख्य बिन्दु होंगे। सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी अर्थात् सीसीएच के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण भस्म कहते हैं कि भारत होम्योपैथी के मामले में एक महाशक्ति बनकर उभर रहा है तथा यह उनके लिए एकदम अनुकूल तथा सर्वश्रेष्ठ स्थान है जो कि होम्योपैथी सीखना चाहते हैं तथा इसमें अनुसंधान करना चाहते हैं। लीगा कांग्रेस 2011 के आयोजन सचिव डॉ. आरके मनचंदा कहते हैं कि होम्योपैथी एक सस्ती चिकित्सीय प्रणाली है जो कि सालों साल से और भी सुरक्षित प्रमाणित होती हुई आई है। साथ ही लीगा 2011 के विषय जन स्वास्थ्य पर होम्योपैथी के साथ सामान्य सेहत को बेहतर उपायों को बेहतर बनाने के लिए जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों की संभावनाओं का विस्तार चाह रहे हैं। यह कांग्रेस फिजीशियनों, क्लिनिशयन, अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों तथा होम्योपैथी के विशिष्ट बुद्धिजीवी वर्गों को एक मंच प्रदान करेगी। ऐसे वृहद प्रतिनिधिमंडल के बहुहितों को पूरा करने के लिए लीगा एक विस्तृत तथा व्यापक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है जिसमें होम्योपैथिक शिक्षा तथा अवसर, सरकारी नीतियां, फार्मास्यूटिकल उद्योग की मांगें, जीएमपी, संबद्ध विज्ञानों में होम्योपैथी आदि पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का उद्घाटन गुलाम नबी आजाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भारत सरकार द्वारा किया जाएगा और अध्यक्षता श्रीमती शीला दीक्षित मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार द्वारा की जाएगी। डॉ. अशोक कुमार वालिया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिल्ली सरकार और श्री राव नरेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हरियाणा सरकार सम्माननीय अतिथि होंगे। एलएमएचआई प्रोफेसर (डॉ. ) दीवान हरीशचन्द कहते हैं कि एलएमएचआई की 66वीं विश्व कांग्रेस भारत में होम्योपैथी की वर्तमान स्थिति को प्रदर्शित करेगी तथा साथ ही अन्य देशों के विद्वान सहकर्मियों तथा अनुसंधानकर्ताओं के साथ बातचीत कर भारतीय होम्योपैथ काफी लाभ उठाएंगे। लीगा कांग्रेस 2011 के संरक्षक डॉ. आरएस पारिख के अनुसार होम्योपैथी अपने सुरक्षित तथा नरम इलाज के लिए जानी जाती है तथा इसके पास चिकित्सा जगत को देने के लिए बहुत कुछ है। नए अनुसंधान तथा दक्ष चिकित्सकों के साथ होम्योपैथी के पास इलाज को एक दुरुह स्वप्न के स्थान पर हकीकत का रूप देने की क्षमता है। लीगा 2011 तथा सीसीएच के अध्यक्ष डॉ. रामजी सिंह कहते हैं कि 16 सालों के बाद भारत में होने वाले इस सम्मेलन में 2500 से अधिक होम्योपैथिक चिकित्सकों के भाग लेने की उम्मीद है। पूरे विश्व में होम्योपैथिक से संबंधित मुद्दों को उठाने के लिए लीगा एक विश्वविख्यात नाम है तथा यह वर्तमान स्वास्थ्य डिलीवरी व्यवस्था में होम्योपैथी के क्षेत्र को विस्तृत करती है। ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, यूरोप, अमेरिका, कनाडा, बेल्जियम, ब्राजील, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, जापान, आयरलैंड तथा जर्मनी से विश्वविख्यात वक्ता नवीनतम अनुसंधान पेपर प्रस्तुत करेंगे जो कि भारतीय विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक लाभ प्रदान करेंगे। सम्मेलन के दौरान चर्चा के लिए लगभग 290 पेपर्स प्रस्तुत किए जाएंगे। लीगा कांग्रेस के प्रेसीडेंट डॉ. एसपीएस बख्शी कहते हैं कि भारत पूरे संसार में होम्योपैथी के सबसे बड़ा गतिविधि केंद्र के रूप में उभरा है। यह कांग्रेस होम्योपैथी पर ज्ञान तथा चेतना के लिए एक मंच का वादा करती है तथा आज के चिकित्सकीय संसार में यह कैसे अन्तर बना सकती है। इन सभी का श्रेय जाता है हमारे भारतीय होम्योपैथ चिकित्सकों को, अतिसक्रिय साथियों तथा भारत सरकार के समर्थन को। आय के उत्पादन में फार्मास्यूटिकल उद्योग अग्रणी उद्योगों में से एक है तथा 25 से 30 प्रतिशत सालाना की दर से प्रगति कर रहा है। एलएमएचआई वह मंच प्रदान करेगा जहां विविध विचार, सोच तथा अनुभवों को जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी के स्वप्त को साकार करने के लिए प्रयोग किया जा सके। कांग्रेस में अत्याधुनिक व्यापार प्रदर्शनी का भी आयोजन होम्योपैथी के विविध पहलुओं को दिखाने के लिए किया जाएगा तथा साथ ही यह पूरे संसार में विख्यात पेशेवरों के साथ सम्पर्प स्थापित करने का भी अवसर देता है। प्रदर्शनकर्ता भारत, यूनान, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका से आएंगे।
‡ छयासठवीं अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में उठेंगे महत्वपूर्ण मुद्दे हमारे संवाददाता नई दिल्ली। विश्वभर के होम्योपैथी डाक्टरों की अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन राजधानी के सिरी फोर्ट सभागार में एक से चार दिसम्बर को किया जा रहा है। इस वर्ष का विषय `जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी' के माध्यम से सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस कार्यक्रम को होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया , इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथिक फिजीशंस और एशियन होम्योपैथिक एसोसिएशन द्वारा सह आयोजित किया जा रहा है और सहयोगियों में आयुष विभाग, होम्योपैथिक केंद्रीय परिषद, होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली का मंडल , जर्मन संस्थान, इंस्टीट्यूट फॉर गेस्चिष्टे डेर मेडिसिन, रॉबर्ट बॉश स्टिफटंग शामिल है। जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी के विषय के साथ लीगा दो हज़ार ग्यारह महामारियों के प्रबंधन तथा उनसे निपटने के उपायों पर भी चर्चा करेगा जिसमें डेंगू, चिकनगुनिया, प्रसव के दौरान दर्द, होम्योपैथिक द्वारा एचआईवी तथा एड्स का उपचार, बच्चों में मिर्गी के मामले में होम्योपैथिक दवाइयों का चिकित्सीय अध्ययन जैसे मुख्य बिन्दु होंगे। सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी अर्थात् सीसीएच के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण भस्म कहते हैं कि भारत होम्योपैथी के मामले में एक महाशक्ति बनकर उभर रहा है तथा यह उनके लिए एकदम अनुकूल तथा सर्वश्रेष्ठ स्थान है जो कि होम्योपैथी सीखना चाहते हैं तथा इसमें अनुसंधान करना चाहते हैं। लीगा कांग्रेस दो हज़ार ग्यारह के आयोजन सचिव डॉ. आरके मनचंदा कहते हैं कि होम्योपैथी एक सस्ती चिकित्सीय प्रणाली है जो कि सालों साल से और भी सुरक्षित प्रमाणित होती हुई आई है। साथ ही लीगा दो हज़ार ग्यारह के विषय जन स्वास्थ्य पर होम्योपैथी के साथ सामान्य सेहत को बेहतर उपायों को बेहतर बनाने के लिए जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों की संभावनाओं का विस्तार चाह रहे हैं। यह कांग्रेस फिजीशियनों, क्लिनिशयन, अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों तथा होम्योपैथी के विशिष्ट बुद्धिजीवी वर्गों को एक मंच प्रदान करेगी। ऐसे वृहद प्रतिनिधिमंडल के बहुहितों को पूरा करने के लिए लीगा एक विस्तृत तथा व्यापक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है जिसमें होम्योपैथिक शिक्षा तथा अवसर, सरकारी नीतियां, फार्मास्यूटिकल उद्योग की मांगें, जीएमपी, संबद्ध विज्ञानों में होम्योपैथी आदि पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का उद्घाटन गुलाम नबी आजाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भारत सरकार द्वारा किया जाएगा और अध्यक्षता श्रीमती शीला दीक्षित मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार द्वारा की जाएगी। डॉ. अशोक कुमार वालिया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिल्ली सरकार और श्री राव नरेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हरियाणा सरकार सम्माननीय अतिथि होंगे। एलएमएचआई प्रोफेसर दीवान हरीशचन्द कहते हैं कि एलएमएचआई की छयासठवीं विश्व कांग्रेस भारत में होम्योपैथी की वर्तमान स्थिति को प्रदर्शित करेगी तथा साथ ही अन्य देशों के विद्वान सहकर्मियों तथा अनुसंधानकर्ताओं के साथ बातचीत कर भारतीय होम्योपैथ काफी लाभ उठाएंगे। लीगा कांग्रेस दो हज़ार ग्यारह के संरक्षक डॉ. आरएस पारिख के अनुसार होम्योपैथी अपने सुरक्षित तथा नरम इलाज के लिए जानी जाती है तथा इसके पास चिकित्सा जगत को देने के लिए बहुत कुछ है। नए अनुसंधान तथा दक्ष चिकित्सकों के साथ होम्योपैथी के पास इलाज को एक दुरुह स्वप्न के स्थान पर हकीकत का रूप देने की क्षमता है। लीगा दो हज़ार ग्यारह तथा सीसीएच के अध्यक्ष डॉ. रामजी सिंह कहते हैं कि सोलह सालों के बाद भारत में होने वाले इस सम्मेलन में दो हज़ार पाँच सौ से अधिक होम्योपैथिक चिकित्सकों के भाग लेने की उम्मीद है। पूरे विश्व में होम्योपैथिक से संबंधित मुद्दों को उठाने के लिए लीगा एक विश्वविख्यात नाम है तथा यह वर्तमान स्वास्थ्य डिलीवरी व्यवस्था में होम्योपैथी के क्षेत्र को विस्तृत करती है। ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, यूरोप, अमेरिका, कनाडा, बेल्जियम, ब्राजील, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, जापान, आयरलैंड तथा जर्मनी से विश्वविख्यात वक्ता नवीनतम अनुसंधान पेपर प्रस्तुत करेंगे जो कि भारतीय विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक लाभ प्रदान करेंगे। सम्मेलन के दौरान चर्चा के लिए लगभग दो सौ नब्बे पेपर्स प्रस्तुत किए जाएंगे। लीगा कांग्रेस के प्रेसीडेंट डॉ. एसपीएस बख्शी कहते हैं कि भारत पूरे संसार में होम्योपैथी के सबसे बड़ा गतिविधि केंद्र के रूप में उभरा है। यह कांग्रेस होम्योपैथी पर ज्ञान तथा चेतना के लिए एक मंच का वादा करती है तथा आज के चिकित्सकीय संसार में यह कैसे अन्तर बना सकती है। इन सभी का श्रेय जाता है हमारे भारतीय होम्योपैथ चिकित्सकों को, अतिसक्रिय साथियों तथा भारत सरकार के समर्थन को। आय के उत्पादन में फार्मास्यूटिकल उद्योग अग्रणी उद्योगों में से एक है तथा पच्चीस से तीस प्रतिशत सालाना की दर से प्रगति कर रहा है। एलएमएचआई वह मंच प्रदान करेगा जहां विविध विचार, सोच तथा अनुभवों को जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी के स्वप्त को साकार करने के लिए प्रयोग किया जा सके। कांग्रेस में अत्याधुनिक व्यापार प्रदर्शनी का भी आयोजन होम्योपैथी के विविध पहलुओं को दिखाने के लिए किया जाएगा तथा साथ ही यह पूरे संसार में विख्यात पेशेवरों के साथ सम्पर्प स्थापित करने का भी अवसर देता है। प्रदर्शनकर्ता भारत, यूनान, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका से आएंगे।
डॉ शीला बालाकृष्णन एक प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञा हैं। उन्होंने प्रसूति और स्त्री रोग पर तीन पुस्तकों लिखी हैं। वह वर्तमान में प्रसूति और स्त्री रोग विभाग, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम क्र रही हैं। उन्होंने एमडी और डीएनबी त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज से की है। उन्हें 1994 में रॉयल कॉलेज ऑफ ओब्सटेटरिशियनज़ एंड गाईनेकोलोजिस्टस द्वारा सदस्यता से सम्मानित किया गया था और 2008 में फैलोशिप से सम्मानित किया गया था। वह राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति पुरस्कार, यूनाइटेड किंगडम प्राप्तकर्ता हैं। वह प्रसूति और स्त्री रोग सोसायटी ऑफ इंडिया (FOGSI) संघ और इंडियन कालेज ऑफ़ ओब्सटेटरिशियनज़ एंड गाईनेकोलोजिस्टस के सदस्य हैं। वर्तमान में वह FOGSI के गर्भनिरोधक और चिकित्सा विकारों समिति के सदस्य हैं। नवंबर 2013 में, उनके द्वारा निर्देशित मेडिकल टीम ने दक्षिण भारत में पहली बार त्रिवेन्द्रम मेडिकल कालेज अस्पताल में इन विट्रो निषेचन से हुए बच्चों के जन्म की घोषणा की। वह तीन किताबें, टेक्सटबुक ऑफ़ ओब्सटेटरिक्स, टेक्सटबुक ऑफ़ गाईनेकोलोजी और क्लीनिकल केस डिसकशन इन ओब्सटेटरिक्स एंड गाईनेकोलोजी प्रकाशित की हैं और कई शोध पत्र भी प्रकाशित किये हैं। . 0 संबंधों।
डॉ शीला बालाकृष्णन एक प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञा हैं। उन्होंने प्रसूति और स्त्री रोग पर तीन पुस्तकों लिखी हैं। वह वर्तमान में प्रसूति और स्त्री रोग विभाग, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम क्र रही हैं। उन्होंने एमडी और डीएनबी त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज से की है। उन्हें एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में रॉयल कॉलेज ऑफ ओब्सटेटरिशियनज़ एंड गाईनेकोलोजिस्टस द्वारा सदस्यता से सम्मानित किया गया था और दो हज़ार आठ में फैलोशिप से सम्मानित किया गया था। वह राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति पुरस्कार, यूनाइटेड किंगडम प्राप्तकर्ता हैं। वह प्रसूति और स्त्री रोग सोसायटी ऑफ इंडिया संघ और इंडियन कालेज ऑफ़ ओब्सटेटरिशियनज़ एंड गाईनेकोलोजिस्टस के सदस्य हैं। वर्तमान में वह FOGSI के गर्भनिरोधक और चिकित्सा विकारों समिति के सदस्य हैं। नवंबर दो हज़ार तेरह में, उनके द्वारा निर्देशित मेडिकल टीम ने दक्षिण भारत में पहली बार त्रिवेन्द्रम मेडिकल कालेज अस्पताल में इन विट्रो निषेचन से हुए बच्चों के जन्म की घोषणा की। वह तीन किताबें, टेक्सटबुक ऑफ़ ओब्सटेटरिक्स, टेक्सटबुक ऑफ़ गाईनेकोलोजी और क्लीनिकल केस डिसकशन इन ओब्सटेटरिक्स एंड गाईनेकोलोजी प्रकाशित की हैं और कई शोध पत्र भी प्रकाशित किये हैं। . शून्य संबंधों।
UP News: उत्तर प्रदेश के तीन जिलों के छह गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि सरकार ने दावा किया है कि वर्तमान में प्रदेश के सभी तटबंध सुरक्षित हैं और कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति नहीं है। प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने सोमवार को यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी। प्रसाद ने बताया कि 24 घंटो में प्रदेश के दस जिलों में 25 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गोंडा ,मऊ, सीतापुर जिलों के छह गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत आयुक्त ने कहा कि प्रदेश के वर्तमान में सभी तटबंध सुरक्षित हैं, कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में औसतन 10. 3 मिमी वर्षा हुई। उन्होंने बताया कि इस प्रकार प्रदेश में एक जून से अब तक 248 मिमी औसत वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा 416. 4 मिमी के सापेक्ष में 60 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि बदायूं जिले में गंगा नदी व लखीमपुर खीरी ज़िले में शारदा नदी, बलिया में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रसाद ने कहा कि प्रदेश के वर्षा से प्रभावित 35 जिलों में तलाशी एवं बचाव अभियान के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचक बल (एसडीआरएफ) और पीएसी की 55 टीमें तैनात की गयी हैं। यूपी के 32 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया किया था। जबकि, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा और इनके आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। जिन 32 जिलों में अलर्ट जारी किया गया था उनमें शामली, मुज्जफरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड, गौतम बुद्ध नगर, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, बांदा, चित्रकूट, कानपुर देहात, कानपुर शहर, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, संत कबीर नगर, अमरोहा, महौबा, झांसी, जालौन, हमीरपुर और ललितपुर शामिल थे।
UP News: उत्तर प्रदेश के तीन जिलों के छह गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि सरकार ने दावा किया है कि वर्तमान में प्रदेश के सभी तटबंध सुरक्षित हैं और कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति नहीं है। प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने सोमवार को यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी। प्रसाद ने बताया कि चौबीस घंटाटो में प्रदेश के दस जिलों में पच्चीस मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गोंडा ,मऊ, सीतापुर जिलों के छह गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत आयुक्त ने कहा कि प्रदेश के वर्तमान में सभी तटबंध सुरक्षित हैं, कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान प्रदेश में औसतन दस. तीन मिमी वर्षा हुई। उन्होंने बताया कि इस प्रकार प्रदेश में एक जून से अब तक दो सौ अड़तालीस मिमी औसत वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा चार सौ सोलह. चार मिमी के सापेक्ष में साठ प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि बदायूं जिले में गंगा नदी व लखीमपुर खीरी ज़िले में शारदा नदी, बलिया में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रसाद ने कहा कि प्रदेश के वर्षा से प्रभावित पैंतीस जिलों में तलाशी एवं बचाव अभियान के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचक बल , राज्य आपदा मोचक बल और पीएसी की पचपन टीमें तैनात की गयी हैं। यूपी के बत्तीस जिलों में मौसम विभाग ने बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया किया था। जबकि, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा और इनके आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। जिन बत्तीस जिलों में अलर्ट जारी किया गया था उनमें शामली, मुज्जफरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड, गौतम बुद्ध नगर, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, बांदा, चित्रकूट, कानपुर देहात, कानपुर शहर, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, संत कबीर नगर, अमरोहा, महौबा, झांसी, जालौन, हमीरपुर और ललितपुर शामिल थे।
रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते 24 घंटे में चाकूबाजी की दो घटनाओं के बाद पुलिस एक्शन मोड पर आ गई है। शहर में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के मद्देेनजर रायपुर पुलिस ने पुलिस महानिरीक्षक डॉ आनंद छाबड़ा के मार्गदर्शन में शहर में आतंक फैलाने वाले गुंडे बदमाशों की गिरफ्तारी की है। डॉ आनंद छाबड़ा के निर्देश में चलाए गए 'ऑपरेशन थंडर' के तहत अलग-अलग थानों की पुलिस ने 83 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर पुलिस ने पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ एच शेख के निर्देशन में दो दिवसीय ऑपरेशन थंडर' चलाने का फैसला लिया है। इस 'ऑपरेशन थंडर' के तहत पुलिस उन आरोपियों को गिरफ्तार करेगी जो शहर में आतंक फैलाने का काम कर रहे हैं। पहले दिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 83 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 69 व्यक्तियों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक धाराओं, 14व्यक्तियों के विरूद्ध आम्र्स एक्ट एवं 02 व्यक्तियों के विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत् कार्यवाही करने के साथ- साथ अलग - अलग थाना क्षेत्रों में 75 संदिग्ध व्यक्तियों को भी थानों में लाकर पूछताछ की गई।
रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते चौबीस घंटाटे में चाकूबाजी की दो घटनाओं के बाद पुलिस एक्शन मोड पर आ गई है। शहर में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के मद्देेनजर रायपुर पुलिस ने पुलिस महानिरीक्षक डॉ आनंद छाबड़ा के मार्गदर्शन में शहर में आतंक फैलाने वाले गुंडे बदमाशों की गिरफ्तारी की है। डॉ आनंद छाबड़ा के निर्देश में चलाए गए 'ऑपरेशन थंडर' के तहत अलग-अलग थानों की पुलिस ने तिरासी बदमाशों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर पुलिस ने पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ एच शेख के निर्देशन में दो दिवसीय ऑपरेशन थंडर' चलाने का फैसला लिया है। इस 'ऑपरेशन थंडर' के तहत पुलिस उन आरोपियों को गिरफ्तार करेगी जो शहर में आतंक फैलाने का काम कर रहे हैं। पहले दिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों से तिरासी बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से उनहत्तर व्यक्तियों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक धाराओं, चौदहव्यक्तियों के विरूद्ध आम्र्स एक्ट एवं दो व्यक्तियों के विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत् कार्यवाही करने के साथ- साथ अलग - अलग थाना क्षेत्रों में पचहत्तर संदिग्ध व्यक्तियों को भी थानों में लाकर पूछताछ की गई।
सोलन -जिला दंडाधिकारी सोलन केसी चमन ने कोविड-19 के खतरे के दृष्टिगत जिला की अंतरराज्यीय सीमाओं पर अन्य राज्यों से आने वाले प्रदेश के निवासियों के समुचित प्रबंधन एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशों की अनुपालना के लिए जिला के परवाणू नाका तथा क्वारंटाइन केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सेवाएं प्रदान करने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं। छह से 12 जुलाई 2020 तक परवाणू नाके पर प्रातः कालीन ड्यूटी में सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल की श्वेता भास्कर एवं मंगखानलयान सायंकालीन ड्यूटी में महर्षि मार्कंडेश्वर चिकित्सा महाविद्यालय कुम्हारहट्टी के तिलक राज एवं सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पुनियो नाबिंग, रात्रि सेवा में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के पवन कुमार एवं सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के शुभम दीक्षित सेवाएं प्रदान करेंगे। इसी अवधि में जिला के टीटीआर नाके पर प्रातः कालीन ड्यूटी में सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अमित कौशल एवं लता ठाकुर, सायंकालीन ड्यूटी में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के विनोद डोगरा एवं देवेंद्र कुमार तथा रात्रि समय में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के रंजीत सिंह एवं राजेश कुमार सेवाएं प्रदान करेंगे। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
सोलन -जिला दंडाधिकारी सोलन केसी चमन ने कोविड-उन्नीस के खतरे के दृष्टिगत जिला की अंतरराज्यीय सीमाओं पर अन्य राज्यों से आने वाले प्रदेश के निवासियों के समुचित प्रबंधन एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशों की अनुपालना के लिए जिला के परवाणू नाका तथा क्वारंटाइन केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सेवाएं प्रदान करने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम-दो हज़ार पाँच की धारा तीस के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं। छह से बारह जुलाई दो हज़ार बीस तक परवाणू नाके पर प्रातः कालीन ड्यूटी में सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल की श्वेता भास्कर एवं मंगखानलयान सायंकालीन ड्यूटी में महर्षि मार्कंडेश्वर चिकित्सा महाविद्यालय कुम्हारहट्टी के तिलक राज एवं सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पुनियो नाबिंग, रात्रि सेवा में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के पवन कुमार एवं सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के शुभम दीक्षित सेवाएं प्रदान करेंगे। इसी अवधि में जिला के टीटीआर नाके पर प्रातः कालीन ड्यूटी में सोलन होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अमित कौशल एवं लता ठाकुर, सायंकालीन ड्यूटी में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के विनोद डोगरा एवं देवेंद्र कुमार तथा रात्रि समय में एमएन डीएवी दंत महाविद्यालय के रंजीत सिंह एवं राजेश कुमार सेवाएं प्रदान करेंगे। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आते जा रहे हैं नेताओं के बयानों का स्तर गिरता जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के शैतान कहे जाने का जवाब देते हुए लालू प्रसाद यादव ने उन्हें 'ब्रह्मपिशाच' बता दिया है. लालू ने कहा कि पीएम मोदी ने बिहार के लोगों का अपमान किया है. मुझे गाली दी है. पीएम ने बिहार के दलित और पिछड़ों का अपमान किया है. वह प्रधानमंत्री बनने लायक नहीं हैं. आरक्षण की बात की तो मुझे 'शैतान' कहा. औरों को नसीहत देने वाले से पूछो 2002 में गुजरात में उस पर कौन शैतान सवार था? उस वक़्त राजधर्म नहीं निभाने पर वाजपेयी जी की आत्मा रोई थी.
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आते जा रहे हैं नेताओं के बयानों का स्तर गिरता जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के शैतान कहे जाने का जवाब देते हुए लालू प्रसाद यादव ने उन्हें 'ब्रह्मपिशाच' बता दिया है. लालू ने कहा कि पीएम मोदी ने बिहार के लोगों का अपमान किया है. मुझे गाली दी है. पीएम ने बिहार के दलित और पिछड़ों का अपमान किया है. वह प्रधानमंत्री बनने लायक नहीं हैं. आरक्षण की बात की तो मुझे 'शैतान' कहा. औरों को नसीहत देने वाले से पूछो दो हज़ार दो में गुजरात में उस पर कौन शैतान सवार था? उस वक़्त राजधर्म नहीं निभाने पर वाजपेयी जी की आत्मा रोई थी.
जानिए ब्रेन ट्यूमर के बारे में सबकुछः स्वास्थ्य के लिहाज से सावधानी बहुत जरूरी है। कई बार हम छोटी-छोटी समस्याओं को टाल देते हैं और बाद में वह समस्या गंभीर हो जाती है। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है ब्रेन ट्यूमर, जिसके लक्षण शुरुआत में सामान्य लगते हैं, लेकिन इसके इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है। शुरुआत में सिर में हल्का दर्द होता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है दर्द बढ़ने लगता है। आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर का कोई इलाज नहीं है। आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर का कोई इलाज नहीं है। अगर शुरुआती दौर में इसका पता चल जाए तो सर्जरी या अन्य तरीकों से इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन अगर आप इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं देंगे तो स्थिति गंभीर हो सकती है, तो आइए आपको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताते हैं। ब्रेन ट्यूमर क्या है? किसी भी ट्यूमर का अर्थ है कुछ ऊतकों का तेजी से बढ़ना। अगर यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाए तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। लेकिन अगर बंद खोपड़ी में ऊतक असामान्य रूप से बढ़ने लगें, तो मस्तिष्क को काफी नुकसान हो सकता है। साथ ही, मस्तिष्क की सर्जरी भी बहुत कठिन है। जरा सी चूक जानलेवा हो सकती है. इसीलिए ब्रेन ट्यूमर को बहुत ही गंभीर बीमारी माना जाता है। पहले तो सिर में लगातार हल्का दर्द रहता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। इसलिए गोलियां खाकर सिरदर्द की समस्या को दबाने की कोशिश न करें। जैसे-जैसे सिरदर्द बढ़ता है, चक्कर आना, उल्टी, धुंधली दृष्टि, हाथों और पैरों में संवेदना का नुकसान, बोलने या समझने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि सिरदर्द की शिकायत रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ब्रेन ट्यूमर का इलाज केवल सर्जरी के जरिए ही किया जा सकता है। लेकिन यह सर्जरी तभी की जा सकती है जब ट्यूमर का आकार छोटा हो। साथ ही यह ज्यादा दूर तक नहीं फैल सकता है. आजकल, ट्यूमर के ऊतकों को मारने के लिए एक्स-रे या प्रोटॉन जैसे विकिरण का भी उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में, कीमोथेरेपी का उपयोग ट्यूमर के ऊतकों को नष्ट करने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि जितनी जल्दी इस बीमारी का पता चल जाए, उतना बेहतर होगा। आपको भी इसी बात का ख्याल रखना होगा.
जानिए ब्रेन ट्यूमर के बारे में सबकुछः स्वास्थ्य के लिहाज से सावधानी बहुत जरूरी है। कई बार हम छोटी-छोटी समस्याओं को टाल देते हैं और बाद में वह समस्या गंभीर हो जाती है। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है ब्रेन ट्यूमर, जिसके लक्षण शुरुआत में सामान्य लगते हैं, लेकिन इसके इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है। शुरुआत में सिर में हल्का दर्द होता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है दर्द बढ़ने लगता है। आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर का कोई इलाज नहीं है। आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर का कोई इलाज नहीं है। अगर शुरुआती दौर में इसका पता चल जाए तो सर्जरी या अन्य तरीकों से इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन अगर आप इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं देंगे तो स्थिति गंभीर हो सकती है, तो आइए आपको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताते हैं। ब्रेन ट्यूमर क्या है? किसी भी ट्यूमर का अर्थ है कुछ ऊतकों का तेजी से बढ़ना। अगर यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाए तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। लेकिन अगर बंद खोपड़ी में ऊतक असामान्य रूप से बढ़ने लगें, तो मस्तिष्क को काफी नुकसान हो सकता है। साथ ही, मस्तिष्क की सर्जरी भी बहुत कठिन है। जरा सी चूक जानलेवा हो सकती है. इसीलिए ब्रेन ट्यूमर को बहुत ही गंभीर बीमारी माना जाता है। पहले तो सिर में लगातार हल्का दर्द रहता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। इसलिए गोलियां खाकर सिरदर्द की समस्या को दबाने की कोशिश न करें। जैसे-जैसे सिरदर्द बढ़ता है, चक्कर आना, उल्टी, धुंधली दृष्टि, हाथों और पैरों में संवेदना का नुकसान, बोलने या समझने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि सिरदर्द की शिकायत रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ब्रेन ट्यूमर का इलाज केवल सर्जरी के जरिए ही किया जा सकता है। लेकिन यह सर्जरी तभी की जा सकती है जब ट्यूमर का आकार छोटा हो। साथ ही यह ज्यादा दूर तक नहीं फैल सकता है. आजकल, ट्यूमर के ऊतकों को मारने के लिए एक्स-रे या प्रोटॉन जैसे विकिरण का भी उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में, कीमोथेरेपी का उपयोग ट्यूमर के ऊतकों को नष्ट करने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि जितनी जल्दी इस बीमारी का पता चल जाए, उतना बेहतर होगा। आपको भी इसी बात का ख्याल रखना होगा.
टीवी जगत की लोकप्रिय अदाकारा मोनालिसा हमेशा इंटरनेट पर अपनी बोल्ड फोटो के लिए धमाल मचाती रहती है. बता दे कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में टीवी की दुनिया में एंट्री लेने वाली मोनालिसा अपनी हॉट और बोल्ड अदाओं के लिए जानी जाती हैं. मोनालिसा की कुछ तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होती दिखाई दे रही हैं. मोनालिसा इन तस्वीरों में रॉयल लुक में कहर बरपाती नजर आई. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भोजपुरी फिल्मों की ग्लैमरस ऐक्ट्रेस मोनालिसा ऐसी नायिका है जो धूमधड़ाके और शानदार अदायगी के लिए अपने फैंस के बीच पॉपुलर है. भोजपुरी सिनेमा की सुपरस्टार एक्ट्रेस मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अक्सर मोनालिसा सोशल मीडिया पर अपनी नई तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. सामने आई इन तस्वीरों में मोनालिसा का रॉयल लुक तेजी से वायरल होता दिखाई दे रहा हैं. उनके इस खूबसूरत लुक ने इंटरनेट पर आग लगा दी है. बहुत कम समय में उनके इन फोटोंस पर ढेर सारे लाइक और कमेंट आने प्रांरभ हो गए है. जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है. वही बात करें हिंदी टीवी करियर की तो उन्होने बिग बॉस से अपनी शुरूआत की थी. जिसमें उनकी सादगी ने हर दर्शक को प्रभावित किया था. बिग बॉस के बाद वह नजर शो में डायन के रोल में नजर आ रही है. BB13 : रश्मि के मुंहबोले भाई ने लगाई सिद्धार्थ की लताड़, कहा- 'ये आदमी. . . '
टीवी जगत की लोकप्रिय अदाकारा मोनालिसा हमेशा इंटरनेट पर अपनी बोल्ड फोटो के लिए धमाल मचाती रहती है. बता दे कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में टीवी की दुनिया में एंट्री लेने वाली मोनालिसा अपनी हॉट और बोल्ड अदाओं के लिए जानी जाती हैं. मोनालिसा की कुछ तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होती दिखाई दे रही हैं. मोनालिसा इन तस्वीरों में रॉयल लुक में कहर बरपाती नजर आई. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भोजपुरी फिल्मों की ग्लैमरस ऐक्ट्रेस मोनालिसा ऐसी नायिका है जो धूमधड़ाके और शानदार अदायगी के लिए अपने फैंस के बीच पॉपुलर है. भोजपुरी सिनेमा की सुपरस्टार एक्ट्रेस मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अक्सर मोनालिसा सोशल मीडिया पर अपनी नई तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. सामने आई इन तस्वीरों में मोनालिसा का रॉयल लुक तेजी से वायरल होता दिखाई दे रहा हैं. उनके इस खूबसूरत लुक ने इंटरनेट पर आग लगा दी है. बहुत कम समय में उनके इन फोटोंस पर ढेर सारे लाइक और कमेंट आने प्रांरभ हो गए है. जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है. वही बात करें हिंदी टीवी करियर की तो उन्होने बिग बॉस से अपनी शुरूआत की थी. जिसमें उनकी सादगी ने हर दर्शक को प्रभावित किया था. बिग बॉस के बाद वह नजर शो में डायन के रोल में नजर आ रही है. BBतेरह : रश्मि के मुंहबोले भाई ने लगाई सिद्धार्थ की लताड़, कहा- 'ये आदमी. . . '
माताको Dear Madani एवं पिता को 'Dear Sir भी लिखते हैं । जबकि पत्र लिखनेवाला किसी ऐसी लेडी ( lady ) को पत्र लिखना चाहे, जिससे उसका परिचय यानो जानपहिचान न हो; तो उसे उसके सम्बोधनके लिये : Madam लिखना चाहिये । यदि पत्र लेखक किसी परिचित लेडोको पत्र लिखना चाहे तो उसे Dear Madam, Dear Mrs. Scott, Dear Mrs. Ram Protap, Dear Miss Radha, My dear Kusum Kumaii, इस माफिक Form of Address लिखनी चाहिये । "जब कि पत्र लेखक अपने किसी परिचित प्रॉफेसर ( प्राचार्य ), डाकर, या फ़ौजी अफ़सर करनैल, मेजर अथवा कप्तानको पत्र लिखना चाहे तो वह उनको इस भाँति सम्बोधन कर सकता है :- Dear Doctor, Dear Doctor Kailash Chandra Bose, My Dear Doctor, Dear Colonel, My Dear Colonel, Dear Major, My dear Major, Dear Captain Heath, Dear Professor, My dear Professor · Basantlal, इत्यादि । लेकिन इस बातपर ध्यान रहे, कि पत्र-लेखक उपरोक्त अफ़सरोंको उपरोक्त रीतिने उसी दशा में सम्बोधन कर सकता है, जबकि वह उत अफ़सरोंको बराबरी का हो यानी दर्जेमें उनसे कम न हो । अगर पत्र लेखक डाकर, प्रोफेसर, करनैल, मेजर इत्यादि 'अफसरों से दर्जे में नीचा हो यानी उक्त अफ़सर पत्र लेखक से दजेंमें ऊँचे हों; तब पत्र- लेखक उन्हें My dear Colonel, Dear Captain Heath, Dear Professor, इस भाँति सम्बोधन नहीं कर सकता । ऐसी दशामें पत्र लेखकको उनके सम्बोधन करने में "Sir" शब्द इस्तेमाल करना बहुत ही ठीक हैं। जैसे Colonel Babington, 3rd. B. N. I. Ramlal Gupta, Esq., B. A. Professor of Mathemetics Rev. Sir, अथवा Rev. and dear Sir, ये Form of Address साधारण पादरियोंकी चिट्ठियोंमें लिखी जाती हैं । पादरियोंके लिये Sir या Dear Sir के बजाय Rev. Sir या Rev. and dear Sir लिखना अच्छा समझा जाता है । किन्तु जब कि पत्र-लेखक और पादरीके दर्ज्यान बहुत कुछ मेल- झोल और बेतकल्लुफ़ी हो तो वह Rev. को छोड़ सकता है और उसके लिये My dear Mr. Scott, पंथवा My dear Sir, लिख सकता है । - जब किसीके लिये Dear या My dear इस्तेमाल किया जावे; तब उसके नाम के पहिले Hon. (Honourable) और पोछे Esq. लिखना ग़लतो समझा जाता है। इसी भाँति ऐले शख़्स के नाम के आगे B. A.; M. 4. इत्यादि यूनी28
माताको Dear Madani एवं पिता को 'Dear Sir भी लिखते हैं । जबकि पत्र लिखनेवाला किसी ऐसी लेडी को पत्र लिखना चाहे, जिससे उसका परिचय यानो जानपहिचान न हो; तो उसे उसके सम्बोधनके लिये : Madam लिखना चाहिये । यदि पत्र लेखक किसी परिचित लेडोको पत्र लिखना चाहे तो उसे Dear Madam, Dear Mrs. Scott, Dear Mrs. Ram Protap, Dear Miss Radha, My dear Kusum Kumaii, इस माफिक Form of Address लिखनी चाहिये । "जब कि पत्र लेखक अपने किसी परिचित प्रॉफेसर , डाकर, या फ़ौजी अफ़सर करनैल, मेजर अथवा कप्तानको पत्र लिखना चाहे तो वह उनको इस भाँति सम्बोधन कर सकता है :- Dear Doctor, Dear Doctor Kailash Chandra Bose, My Dear Doctor, Dear Colonel, My Dear Colonel, Dear Major, My dear Major, Dear Captain Heath, Dear Professor, My dear Professor · Basantlal, इत्यादि । लेकिन इस बातपर ध्यान रहे, कि पत्र-लेखक उपरोक्त अफ़सरोंको उपरोक्त रीतिने उसी दशा में सम्बोधन कर सकता है, जबकि वह उत अफ़सरोंको बराबरी का हो यानी दर्जेमें उनसे कम न हो । अगर पत्र लेखक डाकर, प्रोफेसर, करनैल, मेजर इत्यादि 'अफसरों से दर्जे में नीचा हो यानी उक्त अफ़सर पत्र लेखक से दजेंमें ऊँचे हों; तब पत्र- लेखक उन्हें My dear Colonel, Dear Captain Heath, Dear Professor, इस भाँति सम्बोधन नहीं कर सकता । ऐसी दशामें पत्र लेखकको उनके सम्बोधन करने में "Sir" शब्द इस्तेमाल करना बहुत ही ठीक हैं। जैसे Colonel Babington, तीनrd. B. N. I. Ramlal Gupta, Esq., B. A. Professor of Mathemetics Rev. Sir, अथवा Rev. and dear Sir, ये Form of Address साधारण पादरियोंकी चिट्ठियोंमें लिखी जाती हैं । पादरियोंके लिये Sir या Dear Sir के बजाय Rev. Sir या Rev. and dear Sir लिखना अच्छा समझा जाता है । किन्तु जब कि पत्र-लेखक और पादरीके दर्ज्यान बहुत कुछ मेल- झोल और बेतकल्लुफ़ी हो तो वह Rev. को छोड़ सकता है और उसके लिये My dear Mr. Scott, पंथवा My dear Sir, लिख सकता है । - जब किसीके लिये Dear या My dear इस्तेमाल किया जावे; तब उसके नाम के पहिले Hon. और पोछे Esq. लिखना ग़लतो समझा जाता है। इसी भाँति ऐले शख़्स के नाम के आगे B. A.; M. चार. इत्यादि यूनीअट्ठाईस
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार में राजद नेता कार्तिकेय सिंह को कानून मंत्री बनाए जाने पर बवाल हो गया है। उन पर अपहरण का आरोप है। नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल गठन में राजद ने 'माई (मुस्लिम+यादव)' के उस समीकरण का पूरा ध्यान रखा है जो लालू यादव का बनाया हुआ है। बिहार में सोमवार को सदाकत आश्रम में कॉन्ग्रेस कोटे से पाँच मंत्री बनाने की माँग को लेकर खूब हंगामा किया गया। इस दौरान जमकर गाली-गलौज भी हुई। बाहुबली आनंद मोहन कोर्ट में पेशी के लिए सहरसा जेल से पटना लाए गए थे। लेकिन वे पाटलिपुत्र स्थित घर भी चले गए। उनके बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक हैं। RJD के पूर्व विधायक अनंत कुमार सिंह को एक और मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई है। इससे तिलमिलाए अनंत सिंह ने जज को सरकार का आदमी बताया। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन राष्ट्रगीत गाने के दौरान राजद के विधायक सऊद आलम अपनी सीट पर बैठे रहे। इसको लेकर बवाल हो गया है। बिहार के RJD से बाहुबली विधायक अनंत सिंह को एके 47 मामले में पटना की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। बिहार के मोकामा से RJD विधायक अनंत सिंह को एके 47 व हैंड ग्रेनेड बरामदगी के मामले में दोषी करार दिया गया है। अब 21 जून को सज़ा सुनाएगी अदालत। तेज प्रताप यादव ने उनका इंटरव्यू लेने आए एक पत्रकार को उन्होंने न सिर्फ दौड़ा दिया बल्कि उसका वीडियो भी बनाया। लगाया बदनाम करने का आरोप। बिहार की राजधानी पटना में एक महिला ने राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव और IAS अधिकारी संजीव हंस के विरुद्ध बलात्कार का मामला दर्ज कराया है।
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार में राजद नेता कार्तिकेय सिंह को कानून मंत्री बनाए जाने पर बवाल हो गया है। उन पर अपहरण का आरोप है। नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल गठन में राजद ने 'माई ' के उस समीकरण का पूरा ध्यान रखा है जो लालू यादव का बनाया हुआ है। बिहार में सोमवार को सदाकत आश्रम में कॉन्ग्रेस कोटे से पाँच मंत्री बनाने की माँग को लेकर खूब हंगामा किया गया। इस दौरान जमकर गाली-गलौज भी हुई। बाहुबली आनंद मोहन कोर्ट में पेशी के लिए सहरसा जेल से पटना लाए गए थे। लेकिन वे पाटलिपुत्र स्थित घर भी चले गए। उनके बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक हैं। RJD के पूर्व विधायक अनंत कुमार सिंह को एक और मामले में दस साल की सजा सुनाई गई है। इससे तिलमिलाए अनंत सिंह ने जज को सरकार का आदमी बताया। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन राष्ट्रगीत गाने के दौरान राजद के विधायक सऊद आलम अपनी सीट पर बैठे रहे। इसको लेकर बवाल हो गया है। बिहार के RJD से बाहुबली विधायक अनंत सिंह को एके सैंतालीस मामले में पटना की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। बिहार के मोकामा से RJD विधायक अनंत सिंह को एके सैंतालीस व हैंड ग्रेनेड बरामदगी के मामले में दोषी करार दिया गया है। अब इक्कीस जून को सज़ा सुनाएगी अदालत। तेज प्रताप यादव ने उनका इंटरव्यू लेने आए एक पत्रकार को उन्होंने न सिर्फ दौड़ा दिया बल्कि उसका वीडियो भी बनाया। लगाया बदनाम करने का आरोप। बिहार की राजधानी पटना में एक महिला ने राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव और IAS अधिकारी संजीव हंस के विरुद्ध बलात्कार का मामला दर्ज कराया है।
Gemini Daily Horoscope । Today's Gemini Rashifal in Hindi (आज का मिथुन राशिफल गुरुवार, 4 मई 2023) : ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में राशिफल के माध्यम से विभिन्न काल खण्डों के बारे में भविष्यवाणी की जाती है. दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) रोजाना की भविष्य का कथन करता है, जो ग्रह नक्षत्रों की चाल पर निर्भर होता है. आइये जानते हैं मिथुन राशि के जातको का राशिफल आज गुरुवार को क्या है. आज लोग आपकी दयालुता की सराहना करेंगे और आपको काफ़ी तारीफ़ भी मिल सकती है. यदि आपका पैसा कोर्ट कचहरी में अटका हुआ था तो आज के दिन आपको जीत मिल सकती है और कुछ धन की प्राप्ति भी हो सकती है. अगर किसी को आपकी मदद की जरूरत है, तो उनके लिए तैयार रहें क्योंकि यह उनकी बहुत मदद कर सकता है. अगर आप किसी को पसंद करते हैं तो आज ही उन्हें बता देना जरूरी है क्योंकि हो सकता है कि आपको दूसरा मौका न मिले. अगर आपको कला या रंगमंच पसंद है तो आज आपको अपना हुनर दिखाने के कुछ नए मौके मिल सकते हैं. आज आपके पास कुछ नए विचार हो सकते हैं जो आपको चीजों को वास्तव में अच्छी तरह से करने में मदद करेंगे. लेकिन सावधान रहें क्योंकि अन्य लोग आपके विवाह में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं.
Gemini Daily Horoscope । Today's Gemini Rashifal in Hindi : ज्योतिष शास्त्र में राशिफल के माध्यम से विभिन्न काल खण्डों के बारे में भविष्यवाणी की जाती है. दैनिक राशिफल रोजाना की भविष्य का कथन करता है, जो ग्रह नक्षत्रों की चाल पर निर्भर होता है. आइये जानते हैं मिथुन राशि के जातको का राशिफल आज गुरुवार को क्या है. आज लोग आपकी दयालुता की सराहना करेंगे और आपको काफ़ी तारीफ़ भी मिल सकती है. यदि आपका पैसा कोर्ट कचहरी में अटका हुआ था तो आज के दिन आपको जीत मिल सकती है और कुछ धन की प्राप्ति भी हो सकती है. अगर किसी को आपकी मदद की जरूरत है, तो उनके लिए तैयार रहें क्योंकि यह उनकी बहुत मदद कर सकता है. अगर आप किसी को पसंद करते हैं तो आज ही उन्हें बता देना जरूरी है क्योंकि हो सकता है कि आपको दूसरा मौका न मिले. अगर आपको कला या रंगमंच पसंद है तो आज आपको अपना हुनर दिखाने के कुछ नए मौके मिल सकते हैं. आज आपके पास कुछ नए विचार हो सकते हैं जो आपको चीजों को वास्तव में अच्छी तरह से करने में मदद करेंगे. लेकिन सावधान रहें क्योंकि अन्य लोग आपके विवाह में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं.
वहीं कुलदीप के अलावा उनके साथ युजवेंद्र चहल भी मेजबानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। स्पिन में भारत मजबूत हैं लेकिन पहले मैच में उसके तेज गेंदबाज ज्यादा प्रभावी नहीं रहे थे। उमेश ने जरूर दो विकेट लिए तो लेकिन वो विकेट आखिरी ओवरंों में आए थे। शुरूआती ओवरों में भुवनेश्वर कुमार की कमी कोहली को खली थी। पदार्पण करने वाले सिद्धार्थ कौल काफी महंगे साबित हुए थे। यह एक श्रेत्र है जो भारत के लिए पेरशानी का सबब है। बल्लेबाजी टीम की ताकत है और उसके लगभग सभी बल्लेबाज फॉर्म में हैं। रोहित और कोहली ने अपनी फॉर्म का परिचय दे दिया है। शिखर धवन ने भी पहले मैच में रोहित के साथ मिलकर टीम को अच्छी शुरूआत दी थी। वहीं लोकेश राहुल, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पांड्या ने बीती टी-20 सीरीज में अच्छा प्रदर्शन किया था।
वहीं कुलदीप के अलावा उनके साथ युजवेंद्र चहल भी मेजबानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। स्पिन में भारत मजबूत हैं लेकिन पहले मैच में उसके तेज गेंदबाज ज्यादा प्रभावी नहीं रहे थे। उमेश ने जरूर दो विकेट लिए तो लेकिन वो विकेट आखिरी ओवरंों में आए थे। शुरूआती ओवरों में भुवनेश्वर कुमार की कमी कोहली को खली थी। पदार्पण करने वाले सिद्धार्थ कौल काफी महंगे साबित हुए थे। यह एक श्रेत्र है जो भारत के लिए पेरशानी का सबब है। बल्लेबाजी टीम की ताकत है और उसके लगभग सभी बल्लेबाज फॉर्म में हैं। रोहित और कोहली ने अपनी फॉर्म का परिचय दे दिया है। शिखर धवन ने भी पहले मैच में रोहित के साथ मिलकर टीम को अच्छी शुरूआत दी थी। वहीं लोकेश राहुल, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पांड्या ने बीती टी-बीस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन किया था।
Shani Uday 2023: कुंडली में मौजूद नौ ग्रहों की चाल हमारे जीवन में बदलाव की सबसे बड़ी इकाई है। इन्हीं ग्रहों की वजह से हमारे जीवन और भविष्य में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। वहीं कुंडली में बैठे शनि ग्रह को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। शनि देव हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। आपको बता दें कि होलिका दहन से ठीक एक दिन पहले यानी 6 मार्च को शनि का उदय होने जा रहा है, जो कुछ राशियों के लिए फलदायी साबित होगा। 6 मार्च को रात करीब 11. 36 बजे शनि उदय होगा। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए शनि उदय फलदायी साबित होगा। वृष राशि के जातकों के लिए शनि का उदय होना अत्यंत लाभकारी रहेगा। वृष राशि का स्वामी शुक्र है जो कि शनि देव का मित्र ग्रह भी है। इसलिए इन दोनों ग्रहों की पूजा करने से आपको भरपूर लाभ मिल सकता है। शनि के उदित होते ही इस राशि के जातकों के भाग्य में वृद्धि होगी। आपके कई रुके हुए काम तेजी से पूरे होने लगेंगे। साथ ही सफलता के मार्ग में आ रही रुकावटें दूर होंगी। आप अपने शत्रुओं पर हावी रहेंगे और उनकी रणनीतियां विफल होंगी। सिंह राशि के जातकों को शनि के उदय होने से लाभ मिलेगा। लंबे समय से बकाया कर्ज से मुक्ति मिलेगी साथ ही आप धन संचय करने में भी सफल रहेंगे। आपका अटका हुआ पैसा भी आपको वापस मिल सकता है। आर्थिक मोर्चे पर लाभ की प्रबल संभावनाएं हैं। शनि के उदय होते ही आपको कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा और लंबे समय से चला आ रहा मतभेद या तनाव दूर होगा। लेकिन सिंह राशि वालों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। लापरवाही के कारण परेशानी बढ़ सकती है। वक्री शनि भी तुला राशि के जातकों का भाग्य चमका सकता है। तुला राशि वालों को उदयवन शनि रोजगार संबंधी लाभ दे सकता है। नौकरी, व्यापार में तरक्की होगी। कार्यशैली में सुधार होगा। कार्यस्थल पर आपके काम की तारीफ होगी। आपके घर में समृद्धि दस्तक दे। मेहनत से किए गए हर काम का उचित फल आपको मिलेगा। नियमित रूप से शनि की पूजा करें और बीज मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं शनैश्चराय नमः' का जाप करें। इस समय शनि कुंभ राशि में ही विराजमान हैं। शनि उदय के समय आपको मित्रों और रिश्तेदारों का पूरा सहयोग मिलेगा। शनि के उदय होते ही निवेश की योजनाएं आपको दीर्घकालीन लाभ देंगी। ख़र्चे थोड़े बढ़ेंगे, लेकिन आमदनी के स्रोतों से काफ़ी धन का आगमन होगा। शनि के उदय होते ही लोगों से आपकी निकटता बढ़ेगी, लेकिन किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करने से आपको बचना होगा। इस दौरान 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें और शनि से सुख-समृद्धि की कामना करते रहें। (ज्योतिषी चिराग दारूवाला विशेषज्ञ ज्योतिषी बेजान दारूवाला के पुत्र हैं। उन्हें प्रेम, वित्त, करियर, स्वास्थ्य और व्यवसाय पर विस्तृत ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है। )
Shani Uday दो हज़ार तेईस: कुंडली में मौजूद नौ ग्रहों की चाल हमारे जीवन में बदलाव की सबसे बड़ी इकाई है। इन्हीं ग्रहों की वजह से हमारे जीवन और भविष्य में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। वहीं कुंडली में बैठे शनि ग्रह को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। शनि देव हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। आपको बता दें कि होलिका दहन से ठीक एक दिन पहले यानी छः मार्च को शनि का उदय होने जा रहा है, जो कुछ राशियों के लिए फलदायी साबित होगा। छः मार्च को रात करीब ग्यारह. छत्तीस बजे शनि उदय होगा। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए शनि उदय फलदायी साबित होगा। वृष राशि के जातकों के लिए शनि का उदय होना अत्यंत लाभकारी रहेगा। वृष राशि का स्वामी शुक्र है जो कि शनि देव का मित्र ग्रह भी है। इसलिए इन दोनों ग्रहों की पूजा करने से आपको भरपूर लाभ मिल सकता है। शनि के उदित होते ही इस राशि के जातकों के भाग्य में वृद्धि होगी। आपके कई रुके हुए काम तेजी से पूरे होने लगेंगे। साथ ही सफलता के मार्ग में आ रही रुकावटें दूर होंगी। आप अपने शत्रुओं पर हावी रहेंगे और उनकी रणनीतियां विफल होंगी। सिंह राशि के जातकों को शनि के उदय होने से लाभ मिलेगा। लंबे समय से बकाया कर्ज से मुक्ति मिलेगी साथ ही आप धन संचय करने में भी सफल रहेंगे। आपका अटका हुआ पैसा भी आपको वापस मिल सकता है। आर्थिक मोर्चे पर लाभ की प्रबल संभावनाएं हैं। शनि के उदय होते ही आपको कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा और लंबे समय से चला आ रहा मतभेद या तनाव दूर होगा। लेकिन सिंह राशि वालों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। लापरवाही के कारण परेशानी बढ़ सकती है। वक्री शनि भी तुला राशि के जातकों का भाग्य चमका सकता है। तुला राशि वालों को उदयवन शनि रोजगार संबंधी लाभ दे सकता है। नौकरी, व्यापार में तरक्की होगी। कार्यशैली में सुधार होगा। कार्यस्थल पर आपके काम की तारीफ होगी। आपके घर में समृद्धि दस्तक दे। मेहनत से किए गए हर काम का उचित फल आपको मिलेगा। नियमित रूप से शनि की पूजा करें और बीज मंत्र- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं शनैश्चराय नमः' का जाप करें। इस समय शनि कुंभ राशि में ही विराजमान हैं। शनि उदय के समय आपको मित्रों और रिश्तेदारों का पूरा सहयोग मिलेगा। शनि के उदय होते ही निवेश की योजनाएं आपको दीर्घकालीन लाभ देंगी। ख़र्चे थोड़े बढ़ेंगे, लेकिन आमदनी के स्रोतों से काफ़ी धन का आगमन होगा। शनि के उदय होते ही लोगों से आपकी निकटता बढ़ेगी, लेकिन किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करने से आपको बचना होगा। इस दौरान 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें और शनि से सुख-समृद्धि की कामना करते रहें।
गुरुग्राम सामूहिक हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। वैज्ञानिक डॉ. श्रीप्रकाश ने जिस फरसे से परिवार को काटा, उसे उसकी बेटी आदित ही लाई थी। पढ़ें पूरी कहानी आखिर वैज्ञानिक की बेटी आदित फरसे को घर क्यों लाई थी। दरअसल, अदिति ने स्टार्टअप के तौर पर आर्गेनिक साबुन का काम शुरू किया था। साबुन के सैंपल को काटने के लिए कुछ दिनों पहले मीट काटने वाला फरसा लेकर आई थी जबकि हथौड़ा घर में ही रखा हुआ था। सबसे पहले अदिति की हथौड़े और फरसा (मीट काटने वाला) से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी। डॉ. श्रीप्रकाश ने वारदात में इन दोनों का प्रयोग किया था। इसके बाद उसने अपनी पत्नी पर वार किया और फिर बेटे की तरफ बढ़ा। पुलिस को अंदेशा है कि इस दौरान खून से लथपथ डॉ. सोनू ने अपने पति को पीछे से पकड़ने की कोशिश की, जिसमें हाथ में लगा खून डॉ. श्रीप्रकाश की शर्ट के पीछे की तरफ लग गया। जिस समय घर का दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची तो उस समय कोमल का लहूलुहान शव बेडरूम में फर्श पर और दोनों बच्चों के शव बेड पर पड़े थे। बता दें कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम में सोमवार सुबह यह सनसनीखेज वारदात सामने आई। एक वैज्ञानिक ने अपने पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया, और फिर खुद आत्महत्या कर ली। गुरुग्राम के सेक्टर-49 स्थित उप्पल साउथ एंड एस ब्लॉक के फ्लैट नंबर 299 में डॉक्टर प्रकाश सिंह(55) अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सोनू सिंह(50), बेटी अदिति(22) और बेटा आदित्य(13) थे। कोमल एक गैर सरकारी पाठशाला का संचालन करती थीं। अदिति जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय में बी-फार्मा की छात्रा थी, जोकि गुरुग्राम के बेस्टेक पार्क स्थित एक कंपनी में इंटर्नशिप कर रही थी। बेटा आदित्य डीएवी स्कूल में 9वीं कक्षा का छात्र था।
गुरुग्राम सामूहिक हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। वैज्ञानिक डॉ. श्रीप्रकाश ने जिस फरसे से परिवार को काटा, उसे उसकी बेटी आदित ही लाई थी। पढ़ें पूरी कहानी आखिर वैज्ञानिक की बेटी आदित फरसे को घर क्यों लाई थी। दरअसल, अदिति ने स्टार्टअप के तौर पर आर्गेनिक साबुन का काम शुरू किया था। साबुन के सैंपल को काटने के लिए कुछ दिनों पहले मीट काटने वाला फरसा लेकर आई थी जबकि हथौड़ा घर में ही रखा हुआ था। सबसे पहले अदिति की हथौड़े और फरसा से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी। डॉ. श्रीप्रकाश ने वारदात में इन दोनों का प्रयोग किया था। इसके बाद उसने अपनी पत्नी पर वार किया और फिर बेटे की तरफ बढ़ा। पुलिस को अंदेशा है कि इस दौरान खून से लथपथ डॉ. सोनू ने अपने पति को पीछे से पकड़ने की कोशिश की, जिसमें हाथ में लगा खून डॉ. श्रीप्रकाश की शर्ट के पीछे की तरफ लग गया। जिस समय घर का दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची तो उस समय कोमल का लहूलुहान शव बेडरूम में फर्श पर और दोनों बच्चों के शव बेड पर पड़े थे। बता दें कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम में सोमवार सुबह यह सनसनीखेज वारदात सामने आई। एक वैज्ञानिक ने अपने पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया, और फिर खुद आत्महत्या कर ली। गुरुग्राम के सेक्टर-उनचास स्थित उप्पल साउथ एंड एस ब्लॉक के फ्लैट नंबर दो सौ निन्यानवे में डॉक्टर प्रकाश सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सोनू सिंह, बेटी अदिति और बेटा आदित्य थे। कोमल एक गैर सरकारी पाठशाला का संचालन करती थीं। अदिति जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय में बी-फार्मा की छात्रा थी, जोकि गुरुग्राम के बेस्टेक पार्क स्थित एक कंपनी में इंटर्नशिप कर रही थी। बेटा आदित्य डीएवी स्कूल में नौवीं कक्षा का छात्र था।
आज सुंदर सिंह ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार नें जिला कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में निर्माणधीन जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) का निरिक्षण किया । जिस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ० एन०आर पवार एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ० नरेश चंद भी विशेष रूप से मौजूद रहे । मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ० एन०आर पवार नें जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं साम्फिया फाउंडेशन का एक संयुक्त कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के परिसर में दिव्यांग बच्चों को विभिन्न तरह की थैरेपी सुविधाएं मुहिया कराई जाएगी । जिसमें मुखतः 0-8 साल के दिव्यांग बच्चों के लिए मुफ्त थैरेपी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएगी । वहीँ सुंदर सिंह ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार नें इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि जिला कुल्लू में इस तरह कि थैरेपी सेवाएँ एक ही छत के निचे मिल रही है जो कि क्षेत्र वासियों के लिए ख़ुशी का विषय है,और इस के अंतर्गत बैरा(सुनने कि जांच) जैसे टेस्ट भी उपलब्ध होंगे जिसके लिए आमतौर पर हमें शिमला या चंडीगढ़ जाना पड़ता है । उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू व साम्फिया फाउंडेशन को अग्रीम शुभकामनाएं भी दी । डॉ० श्रुति भारद्वाज,निदेशक साम्फिया फाउंडेशन नें जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए DEIC नामक परियोजना बहुत ही सरहानीय कदम है और हम बहुत भाग्य शाली हैं कि इस नेक कार्य के लिए हमारी फाउंडेशन सरकार के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर कार्य करेगी । जिस दौरान साम्फिया फाउंडेशन के निदेशक रेखा ठाकुर व कार्यक्रम प्रबंधक बीजू हिमदल भी मौजूद रहे ।
आज सुंदर सिंह ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार नें जिला कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में निर्माणधीन जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र का निरिक्षण किया । जिस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉशून्य एनशून्यआर पवार एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉशून्य नरेश चंद भी विशेष रूप से मौजूद रहे । मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉशून्य एनशून्यआर पवार नें जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं साम्फिया फाउंडेशन का एक संयुक्त कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के परिसर में दिव्यांग बच्चों को विभिन्न तरह की थैरेपी सुविधाएं मुहिया कराई जाएगी । जिसमें मुखतः शून्य-आठ साल के दिव्यांग बच्चों के लिए मुफ्त थैरेपी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएगी । वहीँ सुंदर सिंह ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार नें इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि जिला कुल्लू में इस तरह कि थैरेपी सेवाएँ एक ही छत के निचे मिल रही है जो कि क्षेत्र वासियों के लिए ख़ुशी का विषय है,और इस के अंतर्गत बैरा जैसे टेस्ट भी उपलब्ध होंगे जिसके लिए आमतौर पर हमें शिमला या चंडीगढ़ जाना पड़ता है । उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू व साम्फिया फाउंडेशन को अग्रीम शुभकामनाएं भी दी । डॉशून्य श्रुति भारद्वाज,निदेशक साम्फिया फाउंडेशन नें जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए DEIC नामक परियोजना बहुत ही सरहानीय कदम है और हम बहुत भाग्य शाली हैं कि इस नेक कार्य के लिए हमारी फाउंडेशन सरकार के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर कार्य करेगी । जिस दौरान साम्फिया फाउंडेशन के निदेशक रेखा ठाकुर व कार्यक्रम प्रबंधक बीजू हिमदल भी मौजूद रहे ।
बॉलीवुड (Bollywood) एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) केस में ईडी (ED) की जांच जारी है। एजेंसी ने इस मामले अब तक कई लोगों से पूछताछ की है। ईडी ने आज फिल्म डायरेक्टर रूमी जाफरी (Film director roomy jafri) को पूछताछ के लिए बुलाया था। ऐसे में रूमी जाफरी ईडी ऑफिस पहुंच चुके हैं।
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस में ईडी की जांच जारी है। एजेंसी ने इस मामले अब तक कई लोगों से पूछताछ की है। ईडी ने आज फिल्म डायरेक्टर रूमी जाफरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। ऐसे में रूमी जाफरी ईडी ऑफिस पहुंच चुके हैं।
२ तन्त्रों का इतिहास और प्रमुख ग्रंथ 'तन्त्र' शब्द का अर्थ जितना विस्तृत है, उसका इतिहास भी उतना ही प्राचीन है । हमारे सर्वमान्य तथा प्राचीन ग्रन्थ वेद हैं, जिन्हें 'अपौरुषेय' - ईश्वर की वाणी कहा जाता है । सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर की जो वाणी सुनी गई थी, वही वेद है । वेद की चार संहिताएँ हैं - ऋग्, यजुः, साम और अथर्व । इन चारों वेदों के एक-एक उपवेद हैं । 'तन्त्र' अथर्ववेद का उपवेद है । अतः 'तन्त्र' भी वेदरूप ही है। वैसे अनेक गवेषकों का कथन है कि तन्त्र, वेद से भी प्राचीन है, क्योंकि बीजरूपात्मक ओंकार का जो सर्वप्रथम आविर्भाव हुआ, उसी से समस्त वाङमय का विकास हुआ है । ॐ तन्त्र का तत्व है । यदि हमारे जीवन से 'तन्त्र' निकाल दिया जाए, तो शेष क्या रहेगा ? आज जितनी भी पूजा, साधना, हवन, तर्पण, मार्जन आदि होते हैं, ये सभी तन्त्र के ही तो अंग हैं । 'महानिर्वाण-तन्त्र' में कलियुग में तन्त्रोक्त विधान को ही सर्वश्रेष्ठ बतलाया गया है । इस तरह अतिप्राचीन तथा अतिमहत्वपूर्ण इस साहित्य के ग्रन्थों के बारे में भी कुछ ज्ञान प्राप्त कर लेना आवश्यक है। भारतीय वेदवेदांग के अध्ययन से उपेक्षित सामान्य वर्ग के लिए दयालु आचार्यों ने विभिन्न सम्प्रदायों के उदय के साथ ही तन्त्रों के भी विभिन्न सम्प्रदाय विकसित किए और उनके अनुसार ही ग्रन्थों की रचना की, जिनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है२० तन्त्र-ग्रन्थों का प्रणयन सर्वप्रथम कब और कहाँ हुआ ? - यह प्रश्न भी आज तक अनुत्तरित ही है। कुछ विद्वानों का मत है कि सर्वप्रथम बंगाल में और साथ-ही-साथ काश्मीर में इसका आलेखन आरम्भ हुआ होगा । आज भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् विद्वानों का यह दायित्व है कि इसके यत्र-तत्र बिखरे हुए साहित्य को संगृहीत करें तथा इसकी ग्रन्थ-सम्पदा को संकलित कर, विश्व खलित कड़ियों को जोड़ें । उपलब्ध तन्त्रग्रन्थों में चार बातें प्रमुख हैं - (१) ज्ञान, (२) योग, (३) क्रिया तथा (४) चर्या । इनमें प्रथम ज्ञान-विभाग में दर्शन के साथ ही मन्त्रों के रहस्यात्मक प्रभाव का वर्णन किया गया है । यन्त्र और मन्त्र भी इसी में आ जाते हैं। योग-विभाग में समाधि और योग के अन्यान्य अंगों की चर्चा प्रमुख है तथा साथ ही यह भी दिखाया गया है कि योग के अभ्यास से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। क्रिया - विभाग में मूर्ति पूजा का विधान प्रमुख हैं। मूर्ति और मन्दिर का निर्माण तथा प्रतिष्ठा का विधान भी इसमें सम्मिलित है । चर्या - विभाग में उत्सव, व्रत एवं सामाजिक अनुष्ठानों का विवरण प्रस्तुत है। इस प्रकार तन्त्र-ग्रन्थों की विषय-गत व्यापकता दर्शनीय है । इतना ही नहीं, इन ग्रन्थों का दार्शनिक दृष्टि से अनुशीलन करने पर तीन प्रकार के विमर्श प्रतीत होते हैं - (१) द्वैत-विमर्श, (२) अद्वैतविमर्श तथा (४) द्वैताद्वैत-विमर्श । देवता-भेद से भी इसके अनेक भेद हैं, जिनमें बहुचर्चित हैं - (१) वैष्णवतन्त्र, (२) शैवतन्त्र, (३) शाक्ततन्त्र, (४) गाणपत्यतन्त्र, (५) बौद्धतन्त्र और (६) जैनतन्त्र आदि । अवान्तर भेदोपभेदों के कारण इनमें भी कई शाखा-प्रशाखाएं बनी हुई हैं। व्यवहार में वैष्णवतन्त्र को 'संहिता' कहते हैं, शैवतन्त्र को 'आगम' कहा जाता है तथा शाक्त२१ तन्त्र को 'तन्त्र' की संज्ञा दी गई है। इसीलिए लोक में 'तन्त्र' का अर्थ 'शाक्त श्रागमों की साधना पद्धति' ऐसा प्रचलित है । (१) वैष्णव-तन्त्र इस तन्त्र में 'पाञ्चरात्र की प्रमुखता है। पांचरात्र संहिताओं की सूची के अनुसार इसके ग्रन्थों की संख्या २०० से अधिक है । इनमें कुछ ग्रन्थ प्रकाशित भी हो चुके हैं। इनकी रचना का काल पाँचवें शतक से सोलहवें शतक तक माना जाता है। इसमें नारदजी शिव से प्रश्न करते हैं तथा शिवजी उसका उत्तर देते हैं। ग्रन्थ के वर्ण्य विषयों में 'धर्म, दर्शन, वर्णाश्रम, अक्षरों की दार्शनिक अभिव्यक्ति, दीक्षावर्णन, मन्त्र, यन्त्र, चक्र, योग तथा युद्ध में विजय प्राप्त करानेवाले विधानों की प्रधानता है। इन सबका वर्णन दीक्षात्मक शैली में किया गया है । ईश्वरसंहिता, पौष्करसंहिता, तमसंहिता, सात्त्वतसंहिता, बृहद्भ्रमसंहिता, ज्ञानामृतसार आदि संहिताओं की रचना उपर्युक्त काल की प्रमुख देन है। ज्ञानामृतसारसंहिता 'नारदपंचरात्र' के नाम से प्रकाशित है। इसमें कृष्ण और राधा के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा है । सभी प्राणियों पर एकाधिपत्य प्राप्त करने के लिए पाँच दिन का अनुष्ठान करने से इसका नाम पाञ्चरात्र पड़ा है। इसमें भी आज अनेक सम्प्रदाय प्रचलित हैं; लोग दीक्षित होते हैं तथा पारम्परिक साधना द्वारा स्वपर-कल्याण में व्यस्त रहते हैं । (२) शैव-तन्त्र शैवागम-साहित्य अति विस्तृत है, क्योंकि इनमें सिद्धान्त शैव, वीरशैव, जंगमशैव, रौद्र, पाशुपत, कापालिक, वाम, भैरव आदि अनेक अवान्तर भेद हैं । अद्वैतदृष्टि से शैवसम्प्रदाय में विक अथवा प्रत्यभिज्ञा और स्पन्द प्रभृति विभाग हैं। अद्वैतमत में भी शक्ति की प्रधानता मानने पर स्पन्द, महार्थ क्रम इत्यादि भेद प्राप्त होते हैं । १० शैवागम और १८ रुद्रागम प्रसिद्ध हैं । यह भी कहा जाता है कि परमशिव की पाँच शक्तियाँ - चित्, आनन्द, ज्ञान, इच्छा और किया हैं। इसीलिए उन्हें 'पञ्चवक्त्र' कहते हैं। उनके पाँच मुखों के नाम ईशान, तत्पुरुष, सद्योजात, वामदेव और अघोर हैं । इन्हीं पाँच मुखों से निकली वाणियों के प्रस्तारविस्तार से १० सात्त्विक आगम, १८ रौद्रागम तथा ६४ भैरवागमों की उत्पत्ति हुई है । इनमें भेदप्रधान अवस्था से १० सात्त्विक आगम, भेदाभेद प्रधानरूप से १८ रौद्रागम तथा अभेदप्रधान रूप से ६४ भैरवागमों का आविर्भाव हुआ है। 'सम्मोहन-तन्त्र' में बाईस भिन्न-भिन्न आगमों की चर्चा है। इनमें चीनागम, कापालिक, अघोर, जैन तथा बौद्ध आदि आगमों की भी चर्चा है । इनमें पाशुपत, सिद्धान्ती और प्रत्यभिज्ञादर्शन प्रसिद्ध एवं प्रधान हैं। पाशुपत सम्प्रदाय की प्रसिद्धि किसी समय पश्चिम भारत में अधिक थी । सिद्धान्ती सम्प्रदाय का स्थान दक्षिण में है। प्रत्यभिज्ञा-दर्शन का केन्द्र काश्मीर है । किसी समय भारतवर्ष में पाशुपत-संस्कृति का व्यापक विस्तार हुआ था । न्यायवार्तिककार 'उद्योतकर' एवं न्यायभूषणकार 'भासर्वज्ञ' पाशुपत थे। भासर्वज्ञ की 'गण-कारिका' आकार में यद्यपि छोटी है तथापि यह पाशुपत-दर्शन के विशिष्ट ग्रन्थों में से एक है। यह 'पाशुपत-दर्शन' 'पञ्चार्थवाद-दर्शन' तथा 'पञ्चार्थ लाकुलाम्नाय' से विख्यात था । प्राचीन 'पाशुपत सूत्रों' पर राशिकर का भाष्य था । वर्तमान में इस पर कौण्डिन्य-भाष्य का प्रकाशन दक्षिण से हुआ है। इसमें कुछ उपागम भी हैं, जो 'सृगेन्द्र' और 'पुष्कर' नाम ने प्रसिद्ध हैं । इन आगमों में 'सृष्टि, प्रलय, देवपूजा, मंत्रसाधन, पुरश्चरण, षट्कर्म-साधन और ध्यानयोग'. इन सात विषयों की प्रधानता रहती है। आगम-प्रामाण्य, शिव पुराण तथा आगम-पुराण में और भी अनेक तान्त्रिक सम्प्रदाय-भेद वर्णित हैं । वैष्णवागमों की अपेक्षा शैवागमों में पर्याप्त विस्तार पाया है तथा इसी में शाक्त शिद्धान्तों का सम्मिश्रण होने से अनेक धाराएँ फैल गईं। डॉ० प्रबोधचन्द्र बागची ने 'स्टडीज इन द तन्त्राज' में तरतमभाव से स्थित
दो तन्त्रों का इतिहास और प्रमुख ग्रंथ 'तन्त्र' शब्द का अर्थ जितना विस्तृत है, उसका इतिहास भी उतना ही प्राचीन है । हमारे सर्वमान्य तथा प्राचीन ग्रन्थ वेद हैं, जिन्हें 'अपौरुषेय' - ईश्वर की वाणी कहा जाता है । सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर की जो वाणी सुनी गई थी, वही वेद है । वेद की चार संहिताएँ हैं - ऋग्, यजुः, साम और अथर्व । इन चारों वेदों के एक-एक उपवेद हैं । 'तन्त्र' अथर्ववेद का उपवेद है । अतः 'तन्त्र' भी वेदरूप ही है। वैसे अनेक गवेषकों का कथन है कि तन्त्र, वेद से भी प्राचीन है, क्योंकि बीजरूपात्मक ओंकार का जो सर्वप्रथम आविर्भाव हुआ, उसी से समस्त वाङमय का विकास हुआ है । ॐ तन्त्र का तत्व है । यदि हमारे जीवन से 'तन्त्र' निकाल दिया जाए, तो शेष क्या रहेगा ? आज जितनी भी पूजा, साधना, हवन, तर्पण, मार्जन आदि होते हैं, ये सभी तन्त्र के ही तो अंग हैं । 'महानिर्वाण-तन्त्र' में कलियुग में तन्त्रोक्त विधान को ही सर्वश्रेष्ठ बतलाया गया है । इस तरह अतिप्राचीन तथा अतिमहत्वपूर्ण इस साहित्य के ग्रन्थों के बारे में भी कुछ ज्ञान प्राप्त कर लेना आवश्यक है। भारतीय वेदवेदांग के अध्ययन से उपेक्षित सामान्य वर्ग के लिए दयालु आचार्यों ने विभिन्न सम्प्रदायों के उदय के साथ ही तन्त्रों के भी विभिन्न सम्प्रदाय विकसित किए और उनके अनुसार ही ग्रन्थों की रचना की, जिनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार हैबीस तन्त्र-ग्रन्थों का प्रणयन सर्वप्रथम कब और कहाँ हुआ ? - यह प्रश्न भी आज तक अनुत्तरित ही है। कुछ विद्वानों का मत है कि सर्वप्रथम बंगाल में और साथ-ही-साथ काश्मीर में इसका आलेखन आरम्भ हुआ होगा । आज भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् विद्वानों का यह दायित्व है कि इसके यत्र-तत्र बिखरे हुए साहित्य को संगृहीत करें तथा इसकी ग्रन्थ-सम्पदा को संकलित कर, विश्व खलित कड़ियों को जोड़ें । उपलब्ध तन्त्रग्रन्थों में चार बातें प्रमुख हैं - ज्ञान, योग, क्रिया तथा चर्या । इनमें प्रथम ज्ञान-विभाग में दर्शन के साथ ही मन्त्रों के रहस्यात्मक प्रभाव का वर्णन किया गया है । यन्त्र और मन्त्र भी इसी में आ जाते हैं। योग-विभाग में समाधि और योग के अन्यान्य अंगों की चर्चा प्रमुख है तथा साथ ही यह भी दिखाया गया है कि योग के अभ्यास से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। क्रिया - विभाग में मूर्ति पूजा का विधान प्रमुख हैं। मूर्ति और मन्दिर का निर्माण तथा प्रतिष्ठा का विधान भी इसमें सम्मिलित है । चर्या - विभाग में उत्सव, व्रत एवं सामाजिक अनुष्ठानों का विवरण प्रस्तुत है। इस प्रकार तन्त्र-ग्रन्थों की विषय-गत व्यापकता दर्शनीय है । इतना ही नहीं, इन ग्रन्थों का दार्शनिक दृष्टि से अनुशीलन करने पर तीन प्रकार के विमर्श प्रतीत होते हैं - द्वैत-विमर्श, अद्वैतविमर्श तथा द्वैताद्वैत-विमर्श । देवता-भेद से भी इसके अनेक भेद हैं, जिनमें बहुचर्चित हैं - वैष्णवतन्त्र, शैवतन्त्र, शाक्ततन्त्र, गाणपत्यतन्त्र, बौद्धतन्त्र और जैनतन्त्र आदि । अवान्तर भेदोपभेदों के कारण इनमें भी कई शाखा-प्रशाखाएं बनी हुई हैं। व्यवहार में वैष्णवतन्त्र को 'संहिता' कहते हैं, शैवतन्त्र को 'आगम' कहा जाता है तथा शाक्तइक्कीस तन्त्र को 'तन्त्र' की संज्ञा दी गई है। इसीलिए लोक में 'तन्त्र' का अर्थ 'शाक्त श्रागमों की साधना पद्धति' ऐसा प्रचलित है । वैष्णव-तन्त्र इस तन्त्र में 'पाञ्चरात्र की प्रमुखता है। पांचरात्र संहिताओं की सूची के अनुसार इसके ग्रन्थों की संख्या दो सौ से अधिक है । इनमें कुछ ग्रन्थ प्रकाशित भी हो चुके हैं। इनकी रचना का काल पाँचवें शतक से सोलहवें शतक तक माना जाता है। इसमें नारदजी शिव से प्रश्न करते हैं तथा शिवजी उसका उत्तर देते हैं। ग्रन्थ के वर्ण्य विषयों में 'धर्म, दर्शन, वर्णाश्रम, अक्षरों की दार्शनिक अभिव्यक्ति, दीक्षावर्णन, मन्त्र, यन्त्र, चक्र, योग तथा युद्ध में विजय प्राप्त करानेवाले विधानों की प्रधानता है। इन सबका वर्णन दीक्षात्मक शैली में किया गया है । ईश्वरसंहिता, पौष्करसंहिता, तमसंहिता, सात्त्वतसंहिता, बृहद्भ्रमसंहिता, ज्ञानामृतसार आदि संहिताओं की रचना उपर्युक्त काल की प्रमुख देन है। ज्ञानामृतसारसंहिता 'नारदपंचरात्र' के नाम से प्रकाशित है। इसमें कृष्ण और राधा के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा है । सभी प्राणियों पर एकाधिपत्य प्राप्त करने के लिए पाँच दिन का अनुष्ठान करने से इसका नाम पाञ्चरात्र पड़ा है। इसमें भी आज अनेक सम्प्रदाय प्रचलित हैं; लोग दीक्षित होते हैं तथा पारम्परिक साधना द्वारा स्वपर-कल्याण में व्यस्त रहते हैं । शैव-तन्त्र शैवागम-साहित्य अति विस्तृत है, क्योंकि इनमें सिद्धान्त शैव, वीरशैव, जंगमशैव, रौद्र, पाशुपत, कापालिक, वाम, भैरव आदि अनेक अवान्तर भेद हैं । अद्वैतदृष्टि से शैवसम्प्रदाय में विक अथवा प्रत्यभिज्ञा और स्पन्द प्रभृति विभाग हैं। अद्वैतमत में भी शक्ति की प्रधानता मानने पर स्पन्द, महार्थ क्रम इत्यादि भेद प्राप्त होते हैं । दस शैवागम और अट्ठारह रुपयाद्रागम प्रसिद्ध हैं । यह भी कहा जाता है कि परमशिव की पाँच शक्तियाँ - चित्, आनन्द, ज्ञान, इच्छा और किया हैं। इसीलिए उन्हें 'पञ्चवक्त्र' कहते हैं। उनके पाँच मुखों के नाम ईशान, तत्पुरुष, सद्योजात, वामदेव और अघोर हैं । इन्हीं पाँच मुखों से निकली वाणियों के प्रस्तारविस्तार से दस सात्त्विक आगम, अट्ठारह रौद्रागम तथा चौंसठ भैरवागमों की उत्पत्ति हुई है । इनमें भेदप्रधान अवस्था से दस सात्त्विक आगम, भेदाभेद प्रधानरूप से अट्ठारह रौद्रागम तथा अभेदप्रधान रूप से चौंसठ भैरवागमों का आविर्भाव हुआ है। 'सम्मोहन-तन्त्र' में बाईस भिन्न-भिन्न आगमों की चर्चा है। इनमें चीनागम, कापालिक, अघोर, जैन तथा बौद्ध आदि आगमों की भी चर्चा है । इनमें पाशुपत, सिद्धान्ती और प्रत्यभिज्ञादर्शन प्रसिद्ध एवं प्रधान हैं। पाशुपत सम्प्रदाय की प्रसिद्धि किसी समय पश्चिम भारत में अधिक थी । सिद्धान्ती सम्प्रदाय का स्थान दक्षिण में है। प्रत्यभिज्ञा-दर्शन का केन्द्र काश्मीर है । किसी समय भारतवर्ष में पाशुपत-संस्कृति का व्यापक विस्तार हुआ था । न्यायवार्तिककार 'उद्योतकर' एवं न्यायभूषणकार 'भासर्वज्ञ' पाशुपत थे। भासर्वज्ञ की 'गण-कारिका' आकार में यद्यपि छोटी है तथापि यह पाशुपत-दर्शन के विशिष्ट ग्रन्थों में से एक है। यह 'पाशुपत-दर्शन' 'पञ्चार्थवाद-दर्शन' तथा 'पञ्चार्थ लाकुलाम्नाय' से विख्यात था । प्राचीन 'पाशुपत सूत्रों' पर राशिकर का भाष्य था । वर्तमान में इस पर कौण्डिन्य-भाष्य का प्रकाशन दक्षिण से हुआ है। इसमें कुछ उपागम भी हैं, जो 'सृगेन्द्र' और 'पुष्कर' नाम ने प्रसिद्ध हैं । इन आगमों में 'सृष्टि, प्रलय, देवपूजा, मंत्रसाधन, पुरश्चरण, षट्कर्म-साधन और ध्यानयोग'. इन सात विषयों की प्रधानता रहती है। आगम-प्रामाण्य, शिव पुराण तथा आगम-पुराण में और भी अनेक तान्त्रिक सम्प्रदाय-भेद वर्णित हैं । वैष्णवागमों की अपेक्षा शैवागमों में पर्याप्त विस्तार पाया है तथा इसी में शाक्त शिद्धान्तों का सम्मिश्रण होने से अनेक धाराएँ फैल गईं। डॉशून्य प्रबोधचन्द्र बागची ने 'स्टडीज इन द तन्त्राज' में तरतमभाव से स्थित
. थाना सेक्टर-126 नोएडा पुलिस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मैनुअल इंटेलीजेंस और सीक्रेट सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए वांछित 20 हजार रुपए के इनामी अभियुक्त मेहंदी हसन को जिंदल फॉर्म हाउस पुश्ता रोड सेक्टर-127 नोएडा के पास से अरैस्ट किया गया है. उसके कब्जे से 1 तमंचा, 2 जिन्दा कारतूस बरामद हुए हैं. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 10 जून 2022 को ऋषिपाल शर्मा, निवासी 107 नीयर शर्मा मार्केट, प्रहलादपुर, बदरपुर, साउथ दिल्ली, अपनी स्कूटी से काम करके वापस अपने घर जा रहे थे. तभी अचानक दो मोटरसाइकिल सवार व्यक्तियों ने पीछे से आकर सेक्टर-94 सुपरनोवा बिल्डिंग के पास उन्हें गोली मार दी और मौके से भाग गये थे. पुलिस ने ऋषिपाल शर्मा को जिला हॉस्पिटल निठारी नोएडा में भर्ती कराया था. जिन्हें बाद में उच्च संस्थान सफदरजंग दिल्ली में रेफर कर दिया गया. जहां उनकी 14 जून को मौत हो गयी थी. उस समय पुलिस ने मुद्दे में कार्रवाई करते हुए अकील, विशाल और मृतक की पत्नी पूजा को अरैस्ट कर लिया था. मुद्दे में चौथा आरोपी अभियुक्त मेहंदी हसन पिछले एक साल से भी अधिक समय से फरार चल रहा था. जिस पर 20 हजार रुपए का पुरस्कार भी घोषित था. गिरफ्तार अभियुक्त मेहंदी हसन ने पूछताछ पर बताया कि सह-अभियुक्त अकील उसका सम्बन्धी है. जिसने मुझे पूजा और पूजा के बेटे विशाल से मिलवाया. पूजा और अकील ने मुझे बताया कि उन दोनों के आपस में प्रेम संबंध हैं और वो दोनों एक साथ रहना चाहते हैं. लेकिन पूजा विवाह शुदा है. पूजा के पति ऋषिपाल के पास काफी संपत्ति है. यदि हमें ऋषिपाल की संपत्ति और पैसा चाहिये और हमें एक साथ रहना है तो हमें ऋषिपाल को रास्ते से हटाना पडेगा. ऋषिपाल की मर्डर के लिये 1 लाख रुपए में बात हुई. फिर मुझे अकील और विशाल ने 1 तमंचा और कारतूस लाकर दिये, मैं तमंचा और कारतूस लेकर नोएडा आ गया. नोएडा आकर हमने योजना बनायी और योजना के मुताबिक अकील ने दिनांक 10 जून को अपनी मोटरसाइकिल होन्डा शाइन की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगा दी और मोटरसाइकिल मुझे और विशाल को दे दी. बाइक विशाल चला रहा था और मैं पीछे बैठा था. हमने ऋषिपाल का पीछा किया. ऋषिपाल अपनी स्कूटी पर था, जैसे ही ऋषिपाल सेक्टर-94 नोएडा सुपरनोवा बिल्डिंग के पास पहुंचा तो मैंने पीछे से ऋषिपाल को गोली मार दी और मोटरसाइकिल पर फरार हो गए.
. थाना सेक्टर-एक सौ छब्बीस नोएडा पुलिस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मैनुअल इंटेलीजेंस और सीक्रेट सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए वांछित बीस हजार रुपए के इनामी अभियुक्त मेहंदी हसन को जिंदल फॉर्म हाउस पुश्ता रोड सेक्टर-एक सौ सत्ताईस नोएडा के पास से अरैस्ट किया गया है. उसके कब्जे से एक तमंचा, दो जिन्दा कारतूस बरामद हुए हैं. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दस जून दो हज़ार बाईस को ऋषिपाल शर्मा, निवासी एक सौ सात नीयर शर्मा मार्केट, प्रहलादपुर, बदरपुर, साउथ दिल्ली, अपनी स्कूटी से काम करके वापस अपने घर जा रहे थे. तभी अचानक दो मोटरसाइकिल सवार व्यक्तियों ने पीछे से आकर सेक्टर-चौरानवे सुपरनोवा बिल्डिंग के पास उन्हें गोली मार दी और मौके से भाग गये थे. पुलिस ने ऋषिपाल शर्मा को जिला हॉस्पिटल निठारी नोएडा में भर्ती कराया था. जिन्हें बाद में उच्च संस्थान सफदरजंग दिल्ली में रेफर कर दिया गया. जहां उनकी चौदह जून को मौत हो गयी थी. उस समय पुलिस ने मुद्दे में कार्रवाई करते हुए अकील, विशाल और मृतक की पत्नी पूजा को अरैस्ट कर लिया था. मुद्दे में चौथा आरोपी अभियुक्त मेहंदी हसन पिछले एक साल से भी अधिक समय से फरार चल रहा था. जिस पर बीस हजार रुपए का पुरस्कार भी घोषित था. गिरफ्तार अभियुक्त मेहंदी हसन ने पूछताछ पर बताया कि सह-अभियुक्त अकील उसका सम्बन्धी है. जिसने मुझे पूजा और पूजा के बेटे विशाल से मिलवाया. पूजा और अकील ने मुझे बताया कि उन दोनों के आपस में प्रेम संबंध हैं और वो दोनों एक साथ रहना चाहते हैं. लेकिन पूजा विवाह शुदा है. पूजा के पति ऋषिपाल के पास काफी संपत्ति है. यदि हमें ऋषिपाल की संपत्ति और पैसा चाहिये और हमें एक साथ रहना है तो हमें ऋषिपाल को रास्ते से हटाना पडेगा. ऋषिपाल की मर्डर के लिये एक लाख रुपए में बात हुई. फिर मुझे अकील और विशाल ने एक तमंचा और कारतूस लाकर दिये, मैं तमंचा और कारतूस लेकर नोएडा आ गया. नोएडा आकर हमने योजना बनायी और योजना के मुताबिक अकील ने दिनांक दस जून को अपनी मोटरसाइकिल होन्डा शाइन की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगा दी और मोटरसाइकिल मुझे और विशाल को दे दी. बाइक विशाल चला रहा था और मैं पीछे बैठा था. हमने ऋषिपाल का पीछा किया. ऋषिपाल अपनी स्कूटी पर था, जैसे ही ऋषिपाल सेक्टर-चौरानवे नोएडा सुपरनोवा बिल्डिंग के पास पहुंचा तो मैंने पीछे से ऋषिपाल को गोली मार दी और मोटरसाइकिल पर फरार हो गए.
सेवा कर सकता है। अपनी जाति और देश की सेवा मनुष्य का धर्म है किन्तु उस सेवा को वहीं तक सीमित नहीं रखना चाहिए । मनुष्य राष्ट्रीय होकर भी दूसरे राष्ट्रों से अविरोध रख सकता है और किसी देश को अपने से नीचा न समझता हुआ और अपने देश की हानि न करते हुए उसके उत्थान में सहायता होना, यही राष्ट्रीय मानवता है । राष्ट्रीय मानवता से पहले मनुष्य को वैयक्तिक मानवता का अभ्यास करना चाहिए । जो मनुष्य निवासियों के प्रति उदार नहीं है उसका दूर देशों के लोगों के प्रति उदार होना बिडम्बना मात्र है । मानवता के कुछ लक्षण नीचे के श्लोक में दिये गये हैं, देखिएःये दीनेषु दयालवः स्पृशति वानल्पोऽपि न श्रीमदो । व्यग्रा ये च परोपकारकरणे हृष्यन्ति ये याचिताः ॥ स्वस्था सान्त च यौवन्मदमहाव्याधिप्रकोपेऽपि ये । तैभरि सुस्थिरै किलभारक्लान्ता धरा धार्यते ।। अर्थात् जो दोनों के प्रति दयाल हैं और जिनको जरा-सा भी धन का मद स्पर्शे नहीं करता है, जो लोग परोपकार करने के लिए व्यग्र रहते हैं और जो माँगे जाने पर प्रसन्न होते हैं । ( याचक हमारे ऊपर उपकार करता है कि वह स्वयं हमको सेवा करने का अवसर देता है, वे लोग उनमें से नहीं होते जो कुछ माँगने पर मुँह बना लेते हैं ) जो कि यौवन-मद की महाव्याधि के प्रकोप होने पर भी स्वस्थ बने रहते हैं, उन्ही सुदृढ़ स्तम्भों के सहारे यह भाराक्लान्त पृथ्वी सधी रहती है । विरले ही मनुष्यों में यह गुण होता है कि जो परोपकार उत्साह के साथ करते हैं और जो उपकृत पर अहसान न जताकर उसके मान की रक्षा करते हैं। उदार
सेवा कर सकता है। अपनी जाति और देश की सेवा मनुष्य का धर्म है किन्तु उस सेवा को वहीं तक सीमित नहीं रखना चाहिए । मनुष्य राष्ट्रीय होकर भी दूसरे राष्ट्रों से अविरोध रख सकता है और किसी देश को अपने से नीचा न समझता हुआ और अपने देश की हानि न करते हुए उसके उत्थान में सहायता होना, यही राष्ट्रीय मानवता है । राष्ट्रीय मानवता से पहले मनुष्य को वैयक्तिक मानवता का अभ्यास करना चाहिए । जो मनुष्य निवासियों के प्रति उदार नहीं है उसका दूर देशों के लोगों के प्रति उदार होना बिडम्बना मात्र है । मानवता के कुछ लक्षण नीचे के श्लोक में दिये गये हैं, देखिएःये दीनेषु दयालवः स्पृशति वानल्पोऽपि न श्रीमदो । व्यग्रा ये च परोपकारकरणे हृष्यन्ति ये याचिताः ॥ स्वस्था सान्त च यौवन्मदमहाव्याधिप्रकोपेऽपि ये । तैभरि सुस्थिरै किलभारक्लान्ता धरा धार्यते ।। अर्थात् जो दोनों के प्रति दयाल हैं और जिनको जरा-सा भी धन का मद स्पर्शे नहीं करता है, जो लोग परोपकार करने के लिए व्यग्र रहते हैं और जो माँगे जाने पर प्रसन्न होते हैं । जो कि यौवन-मद की महाव्याधि के प्रकोप होने पर भी स्वस्थ बने रहते हैं, उन्ही सुदृढ़ स्तम्भों के सहारे यह भाराक्लान्त पृथ्वी सधी रहती है । विरले ही मनुष्यों में यह गुण होता है कि जो परोपकार उत्साह के साथ करते हैं और जो उपकृत पर अहसान न जताकर उसके मान की रक्षा करते हैं। उदार
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. राजस्थान पुलिस ने एक्ट्रेस पायल रोहतगी को नेहरू परिवार पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में गिरफ्तार किया था. जिसके बाद बुधवार को पायल रोहतगी को जमानत मिल गई. जेल से बाहर आने के बाद पायल रोहतगी ने फेसबुक लाइव किया जिसमें उन्होंने राजस्थान सरकार, पुलिस और कांग्रेस पर हमला बोला. एक्ट्रेस ने कहा कि उनका जुर्म ही क्या था, सिर्फ इतना कि उन्होंने मौजूदा सूचना को एक वीडियो के जरिए साझा किया. उन्होंने कहा कि मैं सउदी या ईरान में नहीं रहती जो मुझे बोलने की आजादी नहीं है. वह वीडियो में कहती हैं कि मैंने खुद से कुछ नहीं कहा मैंने सिर्फ वह कहा जो इंफोर्मेशन मुझे पीएम जवाहर लाल नेहरू के सेक्रेटरी की किताबी से मिली थी. मेरी उस वीडियो से किसी हिंसा को बढ़ावा नहीं मिलता है और न ही उससे किसी देश के साथ हमारे रिश्ते खराब होते हैं. क्योंकि पुलवामा आंतकी हमले के बाद से तो हमारे रिश्ते पहले से ही पाक के साथ खराब है. मुझे बेवजह 30 घंटे जेल में रखा गया. बूंदी में जहां रखा गया वहां बहुत ठंड थी और साफ सफाई भी नहीं थी. वह इस वीडियो में कहती हैं कि अगर गांधी परिवार को कुछ वीडियो में गलत लगा तो मुझे नहीं बल्कि सूत्रों पर अटैक करना चाहिए. मैंने तो तभी माफी मांग ली थी जब मुझे पता चला कि राजस्थान पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. अरेस्ट करने की बात है तो उन लोगों को करना चाहिए जो भारत तेरे टुकड़े होंगे. . जैसे नारे लगाते हैं. पायल रोहतगी ने नागरिकता कानून का विरोध करने वालो पर भी हमला किया. वह कहती हैं कि जो सीएए को लोकतांत्रिक तरीके से पास करवाया गया है. 6 सितंबर और 21 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर समेत सोशल मीडिया पर बिग बॉस एक्स कंटेस्टेंट पायल रोहतगी ने एक वीडियो शेयर किया. जिसमें उन्होंने मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और गांधी परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहीं. इस मामले पर कांग्रेस के सदस्य ने शिकायत दर्ज करायी थी. उसके बाद अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. राजस्थान पुलिस ने एक्ट्रेस पायल रोहतगी को नेहरू परिवार पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में गिरफ्तार किया था. जिसके बाद बुधवार को पायल रोहतगी को जमानत मिल गई. जेल से बाहर आने के बाद पायल रोहतगी ने फेसबुक लाइव किया जिसमें उन्होंने राजस्थान सरकार, पुलिस और कांग्रेस पर हमला बोला. एक्ट्रेस ने कहा कि उनका जुर्म ही क्या था, सिर्फ इतना कि उन्होंने मौजूदा सूचना को एक वीडियो के जरिए साझा किया. उन्होंने कहा कि मैं सउदी या ईरान में नहीं रहती जो मुझे बोलने की आजादी नहीं है. वह वीडियो में कहती हैं कि मैंने खुद से कुछ नहीं कहा मैंने सिर्फ वह कहा जो इंफोर्मेशन मुझे पीएम जवाहर लाल नेहरू के सेक्रेटरी की किताबी से मिली थी. मेरी उस वीडियो से किसी हिंसा को बढ़ावा नहीं मिलता है और न ही उससे किसी देश के साथ हमारे रिश्ते खराब होते हैं. क्योंकि पुलवामा आंतकी हमले के बाद से तो हमारे रिश्ते पहले से ही पाक के साथ खराब है. मुझे बेवजह तीस घंटाटे जेल में रखा गया. बूंदी में जहां रखा गया वहां बहुत ठंड थी और साफ सफाई भी नहीं थी. वह इस वीडियो में कहती हैं कि अगर गांधी परिवार को कुछ वीडियो में गलत लगा तो मुझे नहीं बल्कि सूत्रों पर अटैक करना चाहिए. मैंने तो तभी माफी मांग ली थी जब मुझे पता चला कि राजस्थान पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. अरेस्ट करने की बात है तो उन लोगों को करना चाहिए जो भारत तेरे टुकड़े होंगे. . जैसे नारे लगाते हैं. पायल रोहतगी ने नागरिकता कानून का विरोध करने वालो पर भी हमला किया. वह कहती हैं कि जो सीएए को लोकतांत्रिक तरीके से पास करवाया गया है. छः सितंबर और इक्कीस सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर समेत सोशल मीडिया पर बिग बॉस एक्स कंटेस्टेंट पायल रोहतगी ने एक वीडियो शेयर किया. जिसमें उन्होंने मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और गांधी परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहीं. इस मामले पर कांग्रेस के सदस्य ने शिकायत दर्ज करायी थी. उसके बाद अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया.
थाना कोट के अंतर्गत गत दिनों हुए हत्या के मामले को लेकर गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। गुस्साए ग्रामीणों ने चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाई-वे पर प्रदर्शन किया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही ग्रामीणों ने इस मामले में बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया। वहीं, पुलिस के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। जानकारी के अनुसार कोट थाना के अंतर्गत गत दिनों महावाली में हुए हत्या के मामले मेंं पुलिस की एसआईटी टीम गहनता से जांच करने मेंं जुटी हुई है। वहीं, ग्राम पंचायत कोंडावाला के प्रधान प्रदीप कुमार दीपू और बैहल पंचायत के पूर्व उपप्रधान के परिवार वालों ने पुलिस पर बेवजह परेशान करने के आरोप लगाए हैं। जिसके चलते गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। एनएच-205 हिमाचल पंजाब के प्रवेश द्वार गरामोड़ा मेंं चक्का जाम किया। पुलिस थाना स्वारघाट के एसएचओ देवानंद शर्मा अपनी टीम सहित मौके पर पहुंचे और बाद में डीएसपी नयनादेवी विक्रांत ने ग्रामीणों को आश्वासन देते हुए कहा कि किसी के साथ कोई अन्याय नहींं किया जाएगा। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। बताया जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन से सडक़ के दोनों और लंबा जाम लग गया था। लोगों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए लगभग एक घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन में ग्राम पंचायत कोंडावाला के उपप्रधान भजन ठाकुर, बैहल पंचायत के उपप्रधान हरपाल ठाकुर, मान सिंह, शादी लाल, तरसेम, बुध राम सहित कई लोग शामिल थे।
थाना कोट के अंतर्गत गत दिनों हुए हत्या के मामले को लेकर गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। गुस्साए ग्रामीणों ने चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाई-वे पर प्रदर्शन किया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही ग्रामीणों ने इस मामले में बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया। वहीं, पुलिस के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। जानकारी के अनुसार कोट थाना के अंतर्गत गत दिनों महावाली में हुए हत्या के मामले मेंं पुलिस की एसआईटी टीम गहनता से जांच करने मेंं जुटी हुई है। वहीं, ग्राम पंचायत कोंडावाला के प्रधान प्रदीप कुमार दीपू और बैहल पंचायत के पूर्व उपप्रधान के परिवार वालों ने पुलिस पर बेवजह परेशान करने के आरोप लगाए हैं। जिसके चलते गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। एनएच-दो सौ पाँच हिमाचल पंजाब के प्रवेश द्वार गरामोड़ा मेंं चक्का जाम किया। पुलिस थाना स्वारघाट के एसएचओ देवानंद शर्मा अपनी टीम सहित मौके पर पहुंचे और बाद में डीएसपी नयनादेवी विक्रांत ने ग्रामीणों को आश्वासन देते हुए कहा कि किसी के साथ कोई अन्याय नहींं किया जाएगा। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। बताया जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन से सडक़ के दोनों और लंबा जाम लग गया था। लोगों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए लगभग एक घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन में ग्राम पंचायत कोंडावाला के उपप्रधान भजन ठाकुर, बैहल पंचायत के उपप्रधान हरपाल ठाकुर, मान सिंह, शादी लाल, तरसेम, बुध राम सहित कई लोग शामिल थे।
jamshedpur : मानगो ट्रैफिक थाना में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी, जब एक कार चालक थाना में घुस कर एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से उलझ गया. इससे थाना के बाहर हो-हंगामे की स्थिति पैदा हो गयी. बीच-बचाव करने आये स्थानीय लोगों के साथ भी कार चालक की बहस हो गयी. हंगामे की खबर पाकर मानगो थाना की जीप भी वहां पहुंची. इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से थाने में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं करायी गयी है. घटना शाम करीब सात-साढ़े सात बजे की है. इस बारे में पूछे जाने पर पुलिस पदाधिकारियों ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जतायी. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार विवाद मानगो ट्रैफिक थाना के सामने गाड़ी लगाने को लेकर हुआ. वहां तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उक्त व्यक्ति को थाना के सामने गाड़ी लगाने से मना किया. इस बात को लेकर कार चला रहे व्यक्ति और ट्रैफिक पुलिसकर्मी के बीच बहस होने लगी. विवाद बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और कार चालक के साथ उनकी तीखी बहस हुई. काफी बहसबाजी के बाद उक्त व्यक्ति अपनी कार में बैठकर निकल गया.
jamshedpur : मानगो ट्रैफिक थाना में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी, जब एक कार चालक थाना में घुस कर एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से उलझ गया. इससे थाना के बाहर हो-हंगामे की स्थिति पैदा हो गयी. बीच-बचाव करने आये स्थानीय लोगों के साथ भी कार चालक की बहस हो गयी. हंगामे की खबर पाकर मानगो थाना की जीप भी वहां पहुंची. इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से थाने में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं करायी गयी है. घटना शाम करीब सात-साढ़े सात बजे की है. इस बारे में पूछे जाने पर पुलिस पदाधिकारियों ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जतायी. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार विवाद मानगो ट्रैफिक थाना के सामने गाड़ी लगाने को लेकर हुआ. वहां तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उक्त व्यक्ति को थाना के सामने गाड़ी लगाने से मना किया. इस बात को लेकर कार चला रहे व्यक्ति और ट्रैफिक पुलिसकर्मी के बीच बहस होने लगी. विवाद बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और कार चालक के साथ उनकी तीखी बहस हुई. काफी बहसबाजी के बाद उक्त व्यक्ति अपनी कार में बैठकर निकल गया.
Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलने के बाद अचानक भाजपा सांसद सुशील मोदी का वहां पहुंच जाने से बिहार की राजनीति में अटकलबाजियां होने लगीं. राजनीतिक कयासबाजियों के बीच सीएम नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी की राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात को औपचारिक बताया जाता रहा, लेकिन सियासी गर्माहट कम नहीं हुई. Bikaner: क्या आपने देखा है चलता फिरता बाजार? मार्केट से आधी कीमत पर मिलता है सामान!
Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलने के बाद अचानक भाजपा सांसद सुशील मोदी का वहां पहुंच जाने से बिहार की राजनीति में अटकलबाजियां होने लगीं. राजनीतिक कयासबाजियों के बीच सीएम नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी की राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात को औपचारिक बताया जाता रहा, लेकिन सियासी गर्माहट कम नहीं हुई. Bikaner: क्या आपने देखा है चलता फिरता बाजार? मार्केट से आधी कीमत पर मिलता है सामान!
लैंडिंग के प्रयास में कामयाब नहीं रहा जापान का पहला मून लैंडर. (फोटोः ispace_inc) टोक्योः जापान की प्राइवेट कंपनी आईस्पेस (Ispace) का चंद्रमा पर उतरने वाला मून लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. जापान के मून लैंडर को चांद पर ले जाने वाली पहली कंपनी आईस्पेस ने बुधवार को यह जानकारी दी कि उनका प्रयास विफल हो गया है. इस मून लैंडर को हाकुटो-आर मिशन 1 के नाम से जाना जा रहा है. कंपनी ने बताया कि उसने मून लैंडर को रात में चंद्रमा की सतह पर उतारने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन लैंडिंग होने के लगभग 25 मिनट बाद कंपनी से संपर्क टूट गया था. कंपनी ने वादा किया है कि वह नए मिशन के साथ आगे बढ़ेगी. AFP की रिपोर्ट के अनुसार, हाकुटो-आर ने चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई से 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भरी. मंगलवार को लैंडिंग के दौरान संचार बाधित हो गया. आईस्पेस ने एक बयान में कहा, 'कंपनी पहले से मान रही थी कि यह लैंडर चंद्रमा की सतह पर बड़ी मुश्किल से ही लैंड करेगा. ' कंपनी ने एक ट्वीट में कहा कि उसके इंजीनियर यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि लैंडिंग विफल क्यों हुई? क्या है हाकुटो-आर मिशन 1? आईस्पेस का यह लैंडर 2 मीटर (6. 5 फीट) से अधिक लंबा और 340 किलोग्राम (750 पाउंड) वजनी है. हाकुटो ने पिछले महीने चंद्र कक्षा (Lunar Orbit) में प्रवेश किया था. इस लैंडर को राशिद रोवर ले जा रहा था. यह पहला अरब निर्मित चंद्र अंतरिक्ष यान था, जिसे दुबई में मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केंद्र द्वारा बनाया गया था. इसे पिछले साल दिसंबर में फ्लोरिडा के केप केनवरल से स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था. इसका चांद पर उतरना पूरी तरह से स्वचालित था और चांद की सतह को छूते ही संचार फिर से स्थापित करना था. अब तक, केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों के माध्यम से चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यान भेजने में कामयाब रहे हैं. भारत ने भी 2016 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने का प्रयास किया था, लेकिन वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. . 'हमारे पास तेज गेंदबाजों की लाइन नहीं लगी हुई है. . . ' प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज दिखे रोहित, क्यों कहा ऐसा?
लैंडिंग के प्रयास में कामयाब नहीं रहा जापान का पहला मून लैंडर. टोक्योः जापान की प्राइवेट कंपनी आईस्पेस का चंद्रमा पर उतरने वाला मून लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. जापान के मून लैंडर को चांद पर ले जाने वाली पहली कंपनी आईस्पेस ने बुधवार को यह जानकारी दी कि उनका प्रयास विफल हो गया है. इस मून लैंडर को हाकुटो-आर मिशन एक के नाम से जाना जा रहा है. कंपनी ने बताया कि उसने मून लैंडर को रात में चंद्रमा की सतह पर उतारने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन लैंडिंग होने के लगभग पच्चीस मिनट बाद कंपनी से संपर्क टूट गया था. कंपनी ने वादा किया है कि वह नए मिशन के साथ आगे बढ़ेगी. AFP की रिपोर्ट के अनुसार, हाकुटो-आर ने चांद की सतह से एक सौ किलोग्राममीटर की ऊंचाई से छः,शून्य किलोग्राममीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भरी. मंगलवार को लैंडिंग के दौरान संचार बाधित हो गया. आईस्पेस ने एक बयान में कहा, 'कंपनी पहले से मान रही थी कि यह लैंडर चंद्रमा की सतह पर बड़ी मुश्किल से ही लैंड करेगा. ' कंपनी ने एक ट्वीट में कहा कि उसके इंजीनियर यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि लैंडिंग विफल क्यों हुई? क्या है हाकुटो-आर मिशन एक? आईस्पेस का यह लैंडर दो मीटर से अधिक लंबा और तीन सौ चालीस किलोग्रामग्राम वजनी है. हाकुटो ने पिछले महीने चंद्र कक्षा में प्रवेश किया था. इस लैंडर को राशिद रोवर ले जा रहा था. यह पहला अरब निर्मित चंद्र अंतरिक्ष यान था, जिसे दुबई में मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केंद्र द्वारा बनाया गया था. इसे पिछले साल दिसंबर में फ्लोरिडा के केप केनवरल से स्पेसएक्स फाल्कन-नौ रॉकेट से लॉन्च किया गया था. इसका चांद पर उतरना पूरी तरह से स्वचालित था और चांद की सतह को छूते ही संचार फिर से स्थापित करना था. अब तक, केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों के माध्यम से चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यान भेजने में कामयाब रहे हैं. भारत ने भी दो हज़ार सोलह में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने का प्रयास किया था, लेकिन वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. . 'हमारे पास तेज गेंदबाजों की लाइन नहीं लगी हुई है. . . ' प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराज दिखे रोहित, क्यों कहा ऐसा?
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
गोवा में हो रहे पंचम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के स्थल पर संपन्न पत्रकार परिषद में विदेश के हिन्दुआें की व्यथाआें पर डाला गया प्रकाश ! रामनाथी - बांग्लादेश के हिन्दुआें की समस्याआें पर आवाज उठानेवाले 'निखिल बंग नागरिक संघ' नामक संगठन के सचिव श्री. सुभाष चक्रवर्ती ने पंचम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन स्थल पर २१ जून २०१६ को संपन्न पत्रकार परिषद में मांग करते हुए कहा कि, जब से पूर्व पाकिस्तान बना है, तब से वहां के हिन्दुआें पर अत्यधिक अत्याचार हो रहे हैं । तत्पश्चात वर्ष १९७१ में भारत शासन ने स्वतंत्र बांग्लादेश बनाया; परंतु हिन्दुआें पर होनेवाले अत्याचारों में वृद्धि ही हुई है । इसलिए करोडों बांग्लादेशी हिन्दू भारत में पलायन कर रहे हैं । हिन्दू अखंड भारत का अविभाज्य घटक हैं । इसलिए इन हिन्दुआें के लिए भारत शासन बांग्लादेश में स्वतंत्र भूमि (होमलैंड) बनाए । इस अवसर पर नेपाल के फोरम ऑफ नेपालीज मीडिया के (नेपाली प्रसारमाध्यम मंच) अध्यक्ष प्रा. निरंजन ओझा, श्रीलंका के श्री. मरवनपुलावू सच्चिदानंदन, यूथ फॉर पनून कश्मीर (हमारा कश्मीर) के राष्ट्रीय समन्वयक श्री. राहुल कौल और सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस उपस्थित थे । भारत में आए हुए बांग्लादेशी हिन्दुआें को शरणार्थी का दर्जा दें ! श्री. सुभाष चक्रवर्ती आगे बोले कि, बांग्लादेश के ६५ लाख हिन्दू परिवारों को विस्थापित किया गया । उनकी ८० लाख बीघा भूमि और कृषिभूमि जब्त कर ली गई । पलायन कर भारत में आए बांग्लादेशी हिन्दुआें को शरणार्थी का दर्जा (रिफ्यूजी स्टेटस) मिलना चाहिए । बांग्लादेश के हिन्दुआें पर होनेवाले इन अत्याचारों के विषय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्रसंघ में आवाज उठानी चाहिए तथा भारतीय प्रसारमाध्यमों को बांग्लादेश के हिन्दुआें की सहायता करनी चाहिए । बांग्लादेश में हिन्दू महिलाआें पर बलात्कार करना, भूमि हडपना, मंदिर तोडना, पुजारियों की हत्या करना आदि अत्याचार रोकने के लिए भारत शासन को प्रयास कर बांग्लादेश में हिन्दुआें को सम्मान तथा सुरक्षित स्थान बनाकर देना चाहिए । वर्ष १९९० में आतंकवादग्रस्त कश्मीर से ४ लाख हिन्दुआें को पलायन करना पडा । सर्वपक्षीय राज्यकर्ता गत २६ वर्ष से विस्थापित कश्मीरी हिन्दुआें का यह प्रश्न नहीं सुलझा सके हैं । कश्मीर के विस्थापित हिन्दुआें को अस्थायी निवास देने का शासन का विचार है । ऐसा अस्थायी निवास हमें नहीं चाहिए । कश्मीर से विस्थापित हुए हिन्दुआें के लिए स्वतंत्र स्थान होना चाहिए । इस स्थान पर स्मार्ट सिटी बनाने पर हिन्दू आर्थिक दृष्टि से विकसित हो सकेंगे । कश्मीर से धारा ३७० हटाई जानी चाहिए । विस्थापित हुए कश्मीरी हिन्दू सम्मान के साथ कश्मीर में निवास कर सकें, इसलिए राष्ट्रभर के हिन्दुआें को संगठित होकर केंद्रशासन पर दबाव बनाना चाहिए । इस दृष्टि से कश्मीरी हिन्दुआें के लिए भारतभर में १९ स्थानों पर अधिवेशन आयोजित करना निश्चित किया गया है । ५ सहस्र वर्षों से श्रीलंका में रहनेवाले हिन्दुआें को बौद्धों द्वारा प्रताडित किया जा रहा है । श्रीलंका के बौद्ध शासन द्वारा वहां के हिन्दुआें का दमन किया जा रहा है । वहां के हिन्दुआें के साथ गुलामों के समान व्यवहार किया जा रहा है । वहां के मंदिरों का विध्वंस किया गया । मूर्तियां तोडी गईं । निरंतर हिन्दुआें की हत्या की जा रही है । यह प्रताडना गत ६० वर्षों से चल रही है । मई २००९ में ३ लाख हिन्दुआें की हत्या कर दी गर्इ । हिन्दुआें के लगभग २ सहस्र मंदिर तोड दिए गए हैं । प्रत्येक गांव में सेना की छावनी बनाकर बौद्ध मंदिर बनाया गया है । देश की सीमा में आनेवाले हिन्दू मछुआरों को गोलियां मारनेवाला श्रीलंका एकमात्र देश है । हिन्दुआें को मारने तथा पकडने का अधिकारवाला वहां का अत्याचारी कानून परिवर्तित होना चाहिए । इसलिए सक्षम तथा हिन्दू बहुल भारत शासन को वहां के शासन पर दबाव बनाना चाहिए । नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए वहां के ८५ प्रतिशत हिन्दुआें ने विरोध किया था । अलोकतांत्रिक पद्धति से नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया । नेपाल के संविधान को निधर्मी बनाकर नेपाल के हिन्दुआें का धर्मपरिवर्तन करने का षड्यंत्र है । एक वर्ष पूर्व नेपाल में आए भूकंप के समय प्रलोभन देकर हिन्दुआें का बडी मात्रा में धर्मपरिवर्तन किया गया । वर्ष २०३० तक नेपाल को ईसाई राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र है । इसलिए नेपाल के ईसाई नेता, ईसाई संगठनों का समर्थन प्राप्त नेता, स्वयंसेवी संगठन बडी मात्रा में कार्यरत हैं । इस अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के कारण नेपाल यदि ईसाई देश बन गया, तो उसका सीधा परिणाम भारत पर होनेवाला है । इसलिए नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए भारत शासन तथा भारत के हिन्दुआें को सहायता करनी चाहिए । इस अवसर पर श्री चेतन राजहंस ने कहा कि पाकिस्तान से भारत में आए हुए हिन्दुआें को भारतीय नागरिकता मिलना और घुसपैठ रोकने के लिए भारत से जुडी बांग्लादेश सीमा सीलबंद करने की प्रक्रिया होना, यह पिछले अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनों से प्रेरणा लेकर हिन्दुआें द्वारा किए गए प्रयासों का फल है । इस पत्रकार परिषद में ८ समाचार पत्र और ३ समाचारवाहिनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
गोवा में हो रहे पंचम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के स्थल पर संपन्न पत्रकार परिषद में विदेश के हिन्दुआें की व्यथाआें पर डाला गया प्रकाश ! रामनाथी - बांग्लादेश के हिन्दुआें की समस्याआें पर आवाज उठानेवाले 'निखिल बंग नागरिक संघ' नामक संगठन के सचिव श्री. सुभाष चक्रवर्ती ने पंचम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन स्थल पर इक्कीस जून दो हज़ार सोलह को संपन्न पत्रकार परिषद में मांग करते हुए कहा कि, जब से पूर्व पाकिस्तान बना है, तब से वहां के हिन्दुआें पर अत्यधिक अत्याचार हो रहे हैं । तत्पश्चात वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत शासन ने स्वतंत्र बांग्लादेश बनाया; परंतु हिन्दुआें पर होनेवाले अत्याचारों में वृद्धि ही हुई है । इसलिए करोडों बांग्लादेशी हिन्दू भारत में पलायन कर रहे हैं । हिन्दू अखंड भारत का अविभाज्य घटक हैं । इसलिए इन हिन्दुआें के लिए भारत शासन बांग्लादेश में स्वतंत्र भूमि बनाए । इस अवसर पर नेपाल के फोरम ऑफ नेपालीज मीडिया के अध्यक्ष प्रा. निरंजन ओझा, श्रीलंका के श्री. मरवनपुलावू सच्चिदानंदन, यूथ फॉर पनून कश्मीर के राष्ट्रीय समन्वयक श्री. राहुल कौल और सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस उपस्थित थे । भारत में आए हुए बांग्लादेशी हिन्दुआें को शरणार्थी का दर्जा दें ! श्री. सुभाष चक्रवर्ती आगे बोले कि, बांग्लादेश के पैंसठ लाख हिन्दू परिवारों को विस्थापित किया गया । उनकी अस्सी लाख बीघा भूमि और कृषिभूमि जब्त कर ली गई । पलायन कर भारत में आए बांग्लादेशी हिन्दुआें को शरणार्थी का दर्जा मिलना चाहिए । बांग्लादेश के हिन्दुआें पर होनेवाले इन अत्याचारों के विषय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्रसंघ में आवाज उठानी चाहिए तथा भारतीय प्रसारमाध्यमों को बांग्लादेश के हिन्दुआें की सहायता करनी चाहिए । बांग्लादेश में हिन्दू महिलाआें पर बलात्कार करना, भूमि हडपना, मंदिर तोडना, पुजारियों की हत्या करना आदि अत्याचार रोकने के लिए भारत शासन को प्रयास कर बांग्लादेश में हिन्दुआें को सम्मान तथा सुरक्षित स्थान बनाकर देना चाहिए । वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे में आतंकवादग्रस्त कश्मीर से चार लाख हिन्दुआें को पलायन करना पडा । सर्वपक्षीय राज्यकर्ता गत छब्बीस वर्ष से विस्थापित कश्मीरी हिन्दुआें का यह प्रश्न नहीं सुलझा सके हैं । कश्मीर के विस्थापित हिन्दुआें को अस्थायी निवास देने का शासन का विचार है । ऐसा अस्थायी निवास हमें नहीं चाहिए । कश्मीर से विस्थापित हुए हिन्दुआें के लिए स्वतंत्र स्थान होना चाहिए । इस स्थान पर स्मार्ट सिटी बनाने पर हिन्दू आर्थिक दृष्टि से विकसित हो सकेंगे । कश्मीर से धारा तीन सौ सत्तर हटाई जानी चाहिए । विस्थापित हुए कश्मीरी हिन्दू सम्मान के साथ कश्मीर में निवास कर सकें, इसलिए राष्ट्रभर के हिन्दुआें को संगठित होकर केंद्रशासन पर दबाव बनाना चाहिए । इस दृष्टि से कश्मीरी हिन्दुआें के लिए भारतभर में उन्नीस स्थानों पर अधिवेशन आयोजित करना निश्चित किया गया है । पाँच सहस्र वर्षों से श्रीलंका में रहनेवाले हिन्दुआें को बौद्धों द्वारा प्रताडित किया जा रहा है । श्रीलंका के बौद्ध शासन द्वारा वहां के हिन्दुआें का दमन किया जा रहा है । वहां के हिन्दुआें के साथ गुलामों के समान व्यवहार किया जा रहा है । वहां के मंदिरों का विध्वंस किया गया । मूर्तियां तोडी गईं । निरंतर हिन्दुआें की हत्या की जा रही है । यह प्रताडना गत साठ वर्षों से चल रही है । मई दो हज़ार नौ में तीन लाख हिन्दुआें की हत्या कर दी गर्इ । हिन्दुआें के लगभग दो सहस्र मंदिर तोड दिए गए हैं । प्रत्येक गांव में सेना की छावनी बनाकर बौद्ध मंदिर बनाया गया है । देश की सीमा में आनेवाले हिन्दू मछुआरों को गोलियां मारनेवाला श्रीलंका एकमात्र देश है । हिन्दुआें को मारने तथा पकडने का अधिकारवाला वहां का अत्याचारी कानून परिवर्तित होना चाहिए । इसलिए सक्षम तथा हिन्दू बहुल भारत शासन को वहां के शासन पर दबाव बनाना चाहिए । नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए वहां के पचासी प्रतिशत हिन्दुआें ने विरोध किया था । अलोकतांत्रिक पद्धति से नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया । नेपाल के संविधान को निधर्मी बनाकर नेपाल के हिन्दुआें का धर्मपरिवर्तन करने का षड्यंत्र है । एक वर्ष पूर्व नेपाल में आए भूकंप के समय प्रलोभन देकर हिन्दुआें का बडी मात्रा में धर्मपरिवर्तन किया गया । वर्ष दो हज़ार तीस तक नेपाल को ईसाई राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र है । इसलिए नेपाल के ईसाई नेता, ईसाई संगठनों का समर्थन प्राप्त नेता, स्वयंसेवी संगठन बडी मात्रा में कार्यरत हैं । इस अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के कारण नेपाल यदि ईसाई देश बन गया, तो उसका सीधा परिणाम भारत पर होनेवाला है । इसलिए नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए भारत शासन तथा भारत के हिन्दुआें को सहायता करनी चाहिए । इस अवसर पर श्री चेतन राजहंस ने कहा कि पाकिस्तान से भारत में आए हुए हिन्दुआें को भारतीय नागरिकता मिलना और घुसपैठ रोकने के लिए भारत से जुडी बांग्लादेश सीमा सीलबंद करने की प्रक्रिया होना, यह पिछले अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनों से प्रेरणा लेकर हिन्दुआें द्वारा किए गए प्रयासों का फल है । इस पत्रकार परिषद में आठ समाचार पत्र और तीन समाचारवाहिनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
शहरी विकास मंत्री श्री एम वेंकैया नायडू ने शहर की कठोर वास्तविकताओं पर चिंता व्यक्त की जिसका छोटे बच्चों विशेष रूप से गरीब बच्चों के दिमाग के विकास और सोच पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आज यहां पर '21वीं सदी के लिए भारत में बच्चों के अनुकूल स्मार्ट शहरों का निर्माण' पर दो दिवसीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए श्री नायडू ने शहरी योजना बनाने वालों, वास्तुकारों और सभी भागीदारों से कहा कि वे बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर अनुकूल निर्माण की योजना तैयार करे। देश में शहरी योजना में ढांचागत विकास ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित साफ-सफाई जैसे आम उद्देश्यों को ध्यान में रखकर देश में शहरी योजना तैयार की जाती है। इस पर श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि वह समय आ गया है जब शहर की योजना तैयार करने वालों को छोटे बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष प्रयास करना होगा। उन्होंने बच्चों में रचनात्मकता पैदा करने के लिए पर्याप्त खुले स्थान और खेल केंद्रों आदि उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री महोदय ने कहा कि शहरी आयोजना में कमी के कारण बच्चों पर और विशेष रूप से गरीब बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसमें गलत व्यवहार और पढ़ाई प्रभावित होना, बीमारियों का जोखिम, शुरूआती स्तर पर मस्तिष्क और शारीरिक विकास प्रभावित होना, अभिभावकों की उचित देखभाल का अभाव आदि शामिल हैं। श्री वेंकैया नायडू ने शहरी स्थानों में असंगति, गरीब की कीमत पर अमीर लोगों को अवसर दिए जाने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि शहरी योजना बनाने और लागू करने के हर स्तर पर इन समस्याओं को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के 158 मिलियन बच्चों में से 26 प्रतिशत अर्थात 41 मिलियन शहरी क्षेत्रों में रहते हैं और इनमें से भी 8 मिलियन मलिन बस्तियों में रहते है। यह सम्मेलन, शहरी विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय शहरी मामले संस्थान और प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर स्कूल के सहयोग से बर्नाड वेन लीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया है।
शहरी विकास मंत्री श्री एम वेंकैया नायडू ने शहर की कठोर वास्तविकताओं पर चिंता व्यक्त की जिसका छोटे बच्चों विशेष रूप से गरीब बच्चों के दिमाग के विकास और सोच पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आज यहां पर 'इक्कीसवीं सदी के लिए भारत में बच्चों के अनुकूल स्मार्ट शहरों का निर्माण' पर दो दिवसीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए श्री नायडू ने शहरी योजना बनाने वालों, वास्तुकारों और सभी भागीदारों से कहा कि वे बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर अनुकूल निर्माण की योजना तैयार करे। देश में शहरी योजना में ढांचागत विकास ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित साफ-सफाई जैसे आम उद्देश्यों को ध्यान में रखकर देश में शहरी योजना तैयार की जाती है। इस पर श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि वह समय आ गया है जब शहर की योजना तैयार करने वालों को छोटे बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष प्रयास करना होगा। उन्होंने बच्चों में रचनात्मकता पैदा करने के लिए पर्याप्त खुले स्थान और खेल केंद्रों आदि उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री महोदय ने कहा कि शहरी आयोजना में कमी के कारण बच्चों पर और विशेष रूप से गरीब बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसमें गलत व्यवहार और पढ़ाई प्रभावित होना, बीमारियों का जोखिम, शुरूआती स्तर पर मस्तिष्क और शारीरिक विकास प्रभावित होना, अभिभावकों की उचित देखभाल का अभाव आदि शामिल हैं। श्री वेंकैया नायडू ने शहरी स्थानों में असंगति, गरीब की कीमत पर अमीर लोगों को अवसर दिए जाने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि शहरी योजना बनाने और लागू करने के हर स्तर पर इन समस्याओं को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के एक सौ अट्ठावन मिलियन बच्चों में से छब्बीस प्रतिशत अर्थात इकतालीस मिलियन शहरी क्षेत्रों में रहते हैं और इनमें से भी आठ मिलियन मलिन बस्तियों में रहते है। यह सम्मेलन, शहरी विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय शहरी मामले संस्थान और प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर स्कूल के सहयोग से बर्नाड वेन लीर फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया है।
जम्मू-कश्मीर। ठंड के इस मौसम में जहां हर प्रदेश में ओले भी गिर रहे हैं और बारिश भी हो रही है। वहीं जम्मू-कश्मीर में भी जोरदार बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी इतनी तेज है कि बर्फ घुटनों तक पहुंच चुकी है और हमारे देश के जवान ऐसी ही विकट स्थित में डटे हुए हैं। सर्दियों के मौसम में ऊंचाई वाले इलाकों पर अकसर जमकर बर्फबारी होती है, लेकिन ये बर्फ भी जवानो का हौसला कम नहीं करती। बता दें कि पुंछ में भी बर्फीली वादियों में BSF जवानों की गश्त जारी है। देश की आन बान शान ये जवान माइनस तापमान में भी बर्फबारी और ठंड के बीच राष्ट्र की सुरक्षा में डटे हुए हैं। बर्फ की मोटी परत भी इनका रास्ता नहीं रोक पा रही है। बता दें विपरीत हालात में भी जवानों का जज्बा गजब है। इन जवानों को देख ऐसा लगता है मानों इनको इस बर्फबारी से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है।
जम्मू-कश्मीर। ठंड के इस मौसम में जहां हर प्रदेश में ओले भी गिर रहे हैं और बारिश भी हो रही है। वहीं जम्मू-कश्मीर में भी जोरदार बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी इतनी तेज है कि बर्फ घुटनों तक पहुंच चुकी है और हमारे देश के जवान ऐसी ही विकट स्थित में डटे हुए हैं। सर्दियों के मौसम में ऊंचाई वाले इलाकों पर अकसर जमकर बर्फबारी होती है, लेकिन ये बर्फ भी जवानो का हौसला कम नहीं करती। बता दें कि पुंछ में भी बर्फीली वादियों में BSF जवानों की गश्त जारी है। देश की आन बान शान ये जवान माइनस तापमान में भी बर्फबारी और ठंड के बीच राष्ट्र की सुरक्षा में डटे हुए हैं। बर्फ की मोटी परत भी इनका रास्ता नहीं रोक पा रही है। बता दें विपरीत हालात में भी जवानों का जज्बा गजब है। इन जवानों को देख ऐसा लगता है मानों इनको इस बर्फबारी से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है।
बता दें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव एटा जिले के जैथरा गांव के तरिगमा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा. उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सलामी दी जाएगी. बुलंदशहर में भीड़ हिंसा का शिकार हुए स्याना कोतवाली के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का 2015 में बिसाहड़ा के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से गहरा नाता है. मोहम्मद अखलाक जब मॉब लिचिंग का शिकार हुए थे, उस दौरान सुबोध दादरी के थाने में तैनात थे. अखलाक के भाई जान मोहम्मद ने बताया कि जिस वक्त उनके भाई के साथ मॉब लिंचिंग हुई थी उस समय सुबोध कुमार घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मी थे. उन्होंने बताया कि सुबोध कुमार ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे और वो इस केस में पहले जांच अधिकारी थे. बता दें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव एटा जिले के जैथरा गांव के तरिगमा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा. उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सलामी दी जाएगी. उससे पहले शहीद सुबोध कुमार के शव को एटा पुलिस लाइन में लाया जाएगा, जहां पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी जाएगी. एटा पुलिस लाइन में आगरा जोन के एडीजी अजय आनंद, अलीगढ़ मंडल के डीआईजी डॉ प्रतिन्दर सिंह, एटा के एसएसपी आशीष तिवारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी मौके पर पहुंच चुके हैं. ये भी पढ़ेंः .
बता दें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव एटा जिले के जैथरा गांव के तरिगमा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा. उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सलामी दी जाएगी. बुलंदशहर में भीड़ हिंसा का शिकार हुए स्याना कोतवाली के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का दो हज़ार पंद्रह में बिसाहड़ा के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से गहरा नाता है. मोहम्मद अखलाक जब मॉब लिचिंग का शिकार हुए थे, उस दौरान सुबोध दादरी के थाने में तैनात थे. अखलाक के भाई जान मोहम्मद ने बताया कि जिस वक्त उनके भाई के साथ मॉब लिंचिंग हुई थी उस समय सुबोध कुमार घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले पुलिसकर्मी थे. उन्होंने बताया कि सुबोध कुमार ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे और वो इस केस में पहले जांच अधिकारी थे. बता दें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव एटा जिले के जैथरा गांव के तरिगमा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा. उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सलामी दी जाएगी. उससे पहले शहीद सुबोध कुमार के शव को एटा पुलिस लाइन में लाया जाएगा, जहां पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी जाएगी. एटा पुलिस लाइन में आगरा जोन के एडीजी अजय आनंद, अलीगढ़ मंडल के डीआईजी डॉ प्रतिन्दर सिंह, एटा के एसएसपी आशीष तिवारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी मौके पर पहुंच चुके हैं. ये भी पढ़ेंः .
पिछले वर्षों में खासकर राजनैतिक आन्दोलन ने रखा था उसमें सफलता मिल जाने से वह शक्ति सकती है। विचारशील पाठकों को जिस दिशा में अपनी शक्ति का अधिक उपयोग होता मालूम हो, उसमें काफ़ी सहयोग प्रदान करना चाहिए, और दूसरे प्रकार की जागृति का महत्व समझते हुए उसमें सहायता देनेवालों से सहानुभूति रखनी चाहिए ! हम अपनी शक्ति के अनुसार इस महान यज्ञ में अपनी भेंट चढ़ाएँ । स्वर्ग में राजा राममोहन राय, स्वामी दयानन्द, विवेकानन्द, दादाभाई नौरोजी, लो० तिलक, महमना मालवीय जी और म० गांधी आदि, तथा इस पृथ्वी पर जवाहरलाल नेहरू, प्राचार्य विनोवाभावे, मौलाना अब्दुलकलाम आज़ाद आदि हमारे कार्यों को उत्सुकता से देख रहे हैं, हम सुयोग्य माता की सुयोग्य सन्तान साचित हों। भारतीय जागृति के क्या-क्या सुपरिणाम होंगे, इस विषय का विचार भारत हित को दृष्टि से भी हो सकता है, संसार-हित की दृष्टि से भी। पहले भारत-हित को दृष्टि से विचार करते हैं । जागृत भारत-जागृति के अभी तक के प्रभाव से कुछ भारतीय सज्जनों को अपने विविध अधिकार पाने की दृढ़ इच्छा हो चली है, उन्हें अपने महत्वपूर्ण कर्तव्य के पालन का भी ध्यान रहता है। परन्तु अधिकांश समाज को रोटी कपड़े की चिन्ता में ही अपना सर्व समय बिताना होता है, वह जैसे-तैसे अपने दिन पूरे कर रहा है। उसकी जीवनलीला में अभिमान करने योग्य कुछ बात नहीं। जब यहाँ जागृति का का कार्य यथेष्ट हो जायगा तो यह देश, इसे सहन न करेगा। आपस के वादविवाद और लड़ाई-झगड़े स्वप्न हो जायेंगे । सब को यथायोग्य अधिकार मिले रहेंगे और हरेक का अपना कर्तव्य पालने की ओर पूरा-पूरा ध्यान होगा। हम दूसरे के सुख को अनसुख समझ कर उसको बढ़ाने के लिए जी-जान से उद्योग करेंगे, तथा दूसरों के दुःखों को अपना दुःख मान कर उनके हटाने में कोई कोशिश उठा न रखेगे ।
पिछले वर्षों में खासकर राजनैतिक आन्दोलन ने रखा था उसमें सफलता मिल जाने से वह शक्ति सकती है। विचारशील पाठकों को जिस दिशा में अपनी शक्ति का अधिक उपयोग होता मालूम हो, उसमें काफ़ी सहयोग प्रदान करना चाहिए, और दूसरे प्रकार की जागृति का महत्व समझते हुए उसमें सहायता देनेवालों से सहानुभूति रखनी चाहिए ! हम अपनी शक्ति के अनुसार इस महान यज्ञ में अपनी भेंट चढ़ाएँ । स्वर्ग में राजा राममोहन राय, स्वामी दयानन्द, विवेकानन्द, दादाभाई नौरोजी, लोशून्य तिलक, महमना मालवीय जी और मशून्य गांधी आदि, तथा इस पृथ्वी पर जवाहरलाल नेहरू, प्राचार्य विनोवाभावे, मौलाना अब्दुलकलाम आज़ाद आदि हमारे कार्यों को उत्सुकता से देख रहे हैं, हम सुयोग्य माता की सुयोग्य सन्तान साचित हों। भारतीय जागृति के क्या-क्या सुपरिणाम होंगे, इस विषय का विचार भारत हित को दृष्टि से भी हो सकता है, संसार-हित की दृष्टि से भी। पहले भारत-हित को दृष्टि से विचार करते हैं । जागृत भारत-जागृति के अभी तक के प्रभाव से कुछ भारतीय सज्जनों को अपने विविध अधिकार पाने की दृढ़ इच्छा हो चली है, उन्हें अपने महत्वपूर्ण कर्तव्य के पालन का भी ध्यान रहता है। परन्तु अधिकांश समाज को रोटी कपड़े की चिन्ता में ही अपना सर्व समय बिताना होता है, वह जैसे-तैसे अपने दिन पूरे कर रहा है। उसकी जीवनलीला में अभिमान करने योग्य कुछ बात नहीं। जब यहाँ जागृति का का कार्य यथेष्ट हो जायगा तो यह देश, इसे सहन न करेगा। आपस के वादविवाद और लड़ाई-झगड़े स्वप्न हो जायेंगे । सब को यथायोग्य अधिकार मिले रहेंगे और हरेक का अपना कर्तव्य पालने की ओर पूरा-पूरा ध्यान होगा। हम दूसरे के सुख को अनसुख समझ कर उसको बढ़ाने के लिए जी-जान से उद्योग करेंगे, तथा दूसरों के दुःखों को अपना दुःख मान कर उनके हटाने में कोई कोशिश उठा न रखेगे ।
पोक्लॉन्स्काया नतालिया व्लादिमीरोवना - Crimea के अभियोजक,जो इसकी सीमाओं से काफी दूर है। उसके बारे में गाने बनाने, कविता लिखने, पेंट चित्रों, और जापानी भी एनीम बनाते हैं। कई स्रोतों में नतालिया की लोकप्रियता उनकी सुंदर उपस्थिति से जुड़ी हुई है। हालांकि अधिकांश इंटरनेट उपयोगकर्ता, लड़की की सुंदरता अभियोजक की स्थिति से संबद्ध नहीं होती है। इस लेख में नतालिया पोक्लॉन्स्काया की जीवनी प्रस्तुत की जाएगी। तो, चलो शुरू करें। नतालिया का जन्म 1 9 80 में मिखाइलोव्का गांव में हुआ था(यूक्रेन)। लड़की के माता-पिता सबसे साधारण लोग थे और उन्हें देशभक्ति की भावना में लाया। महान देशभक्ति युद्ध में मातृभाषा पर उनके दादाजी मर गए, और परिवार को फासीवादी उत्पीड़न के अधीन किया गया। स्कूल नतालिया Vladimirovna Poklonskaya में स्नातक की उपाधि प्राप्त कीदेशी गांव उच्च शिक्षा के लिए लड़की Evpatoria गया था। वहां उन्होंने खारकोव यूनिवर्सिटी ऑफ इंटरनल अफेयर्स (शाखा) में प्रवेश किया, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक 2002 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उसकी लड़की ने प्रायद्वीप Crimea पर अपना करियर शुरू किया। नतालिया Vladimirovna Poklonskaya पर नौकरी मिल गईस्नातक स्तर के बाद तुरंत अभियोजक के कार्यालय में काम करते हैं। वहां, इस आलेख की नायिका ने एक करियर बनाया, धीरे-धीरे एक स्थिति से दूसरे स्थान पर जा रहा था। नतालिया ने चार वर्षों में सबसे बड़ी सफलता हासिल की। 2006 में, लड़की Crimea (Krasnogvardeysky जिला) में अभियोजक के सहायक बन गई। अगले चार वर्षों तक पोक्लॉन्स्काया ने एक ही पद आयोजित किया, लेकिन केवल एवेपेटोरिया में। 2010 में, लड़की ने खुद को पर्यवेक्षी प्राधिकरण के प्रमुख के लिए सहायक पाया, जो अपराध से लड़ने वाले स्थानीय संस्थानों की गतिविधियों पर नियंत्रण प्रदान करता है। 2011 में, पोक्लॉन्स्काया ने एक उच्च प्रोफ़ाइल केस आयोजित कियाआपराधिक समूह "बाशमक्स"। इसके सदस्य हत्या, लूट और रैकेटियरिंग में लगे थे। "जूते" 1990-2000-ies के सबसे गंभीर संगठित अपराध समूह थे। नतालिया ने एक सरकारी अभियोजक के रूप में कार्य किया। 2012 में, पोक्लॉन्स्काया ने सिम्फरोपोल इंटरडिस्ट्रिट प्रकृति संरक्षण अभियोजक के कार्यालय का नेतृत्व किया। फिर कानून प्रवर्तन में कुछ और पद थे। लड़की के करियर में तेजी से वृद्धि यूक्रेन में कूप डी'एटैट के समय के साथ हुई। फरवरी 2014 के अंत में, नतालिया Vladimirovnaपोक्लॉन्स्काया ने इस्तीफे का एक पत्र लिखा था। महिला के अनुसार, वह, रहते हैं और देश, जहां वह पैदा हुआ था में काम करने के लिए शर्म आ रही थी के रूप में नव-फासिस्टों के अपने नियम हुक्म चलाना करने के लिए सड़कों और देश के नेताओं में घूमने के लिए मुक्त थे। हालांकि, नतालिया को काम से रिहा नहीं किया गया था। आधिकारिक तौर पर वह छुट्टी पर थी। Poklonskaya सिम्फ़रोपोल में मेरी माँ के पास गया, और संभव अशांति की रोकथाम में सहायता करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के लिए आमंत्रित किया। मार्च में महिला क्रीमिया के अभियोजक नियुक्त किया है। यूक्रेन में, पोक्लॉन्स्काया तब से खराब प्रतिक्रिया देता हैअधिकांश आबादी Crimea में जीवन और काम के बारे में अपने निर्णय से सहमत नहीं है। लड़की खुद रूस को एक मूल भूमि मानती है और बहुत खुश है कि प्रायद्वीप इस देश का हिस्सा बन गया है। सार्वजनिक अभियोजक बार-बार प्रयासों और उत्पीड़न के संपर्क में था। समय-समय पर, मीडिया में इस विषय पर नोट्स हैं। कार्यालय नतालिया लेने के अवसर परव्लादिमीरोवना पोक्लॉन्स्काया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दिया, जिसकी रिकॉर्डिंग इंटरनेट पर थी। उसके बाद Crimean अभियोजक लोकप्रियता "गिर गया"। सोशल नेटवर्क्स के कई उपयोगकर्ताओं ने लड़की "न्याशा" का उपनाम दिया और कहा कि कानून के मंत्री की सुंदर उपस्थिति उनकी स्थिति से जुड़ी नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से छः मिनट का वीडियो नहीं देखा गया थाकेवल रूस में, बल्कि जापान में भी। उसी दिन नतालिया इस देश के कई मंचों, कार्टून और सोशल नेटवर्क्स की नायिका बन गई। और थोड़ी देर बाद जापानी समर्पित पोक्लॉन्स्काया कई एनीम और हेनतई। प्रशंसक वीडियो में, लड़की "न्याशा" दिखाई देती है, लेकिन नतालिया इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की नकारात्मक रचनात्मक गतिविधि को संदर्भित करती है। उन्होंने एक से अधिक बार कहा कि उनके प्रदर्शन की मूल्यांकन करने के लिए यह और अधिक सुखद होगा, लेकिन विशेष रूप से व्यावसायिक उपलब्धियां। पोक्लॉन्स्काया की उच्च लोकप्रियता को कैसे समझाया जाए?राजनीतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण तीन कारक हैं। पहला रूस की स्थिति है, दूसरा Crimea है, और तीसरा नतालिया की उम्र है। नियुक्ति के समय अभियोजक 34 वर्ष का था। इसलिए, यह हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। आखिरकार, पोक्लॉन्स्काया सख्त सामान्य पुरुष राजनेताओं से मूल रूप से अलग है जो लगातार संबंधों और सूट में जाते हैं। उनकी पृष्ठभूमि के खिलाफ, लड़की अपने मनोविज्ञान, शिष्टाचार, व्यवहार, उपस्थिति और आकर्षण में एक उज्ज्वल विपरीत के रूप में दिखाई देती है। खैर, यह स्पष्ट है कि दर्शकों का पुरुष हिस्सा हमेशा एक आकर्षक लड़की का जवाब देगा।
पोक्लॉन्स्काया नतालिया व्लादिमीरोवना - Crimea के अभियोजक,जो इसकी सीमाओं से काफी दूर है। उसके बारे में गाने बनाने, कविता लिखने, पेंट चित्रों, और जापानी भी एनीम बनाते हैं। कई स्रोतों में नतालिया की लोकप्रियता उनकी सुंदर उपस्थिति से जुड़ी हुई है। हालांकि अधिकांश इंटरनेट उपयोगकर्ता, लड़की की सुंदरता अभियोजक की स्थिति से संबद्ध नहीं होती है। इस लेख में नतालिया पोक्लॉन्स्काया की जीवनी प्रस्तुत की जाएगी। तो, चलो शुरू करें। नतालिया का जन्म एक नौ अस्सी में मिखाइलोव्का गांव में हुआ था। लड़की के माता-पिता सबसे साधारण लोग थे और उन्हें देशभक्ति की भावना में लाया। महान देशभक्ति युद्ध में मातृभाषा पर उनके दादाजी मर गए, और परिवार को फासीवादी उत्पीड़न के अधीन किया गया। स्कूल नतालिया Vladimirovna Poklonskaya में स्नातक की उपाधि प्राप्त कीदेशी गांव उच्च शिक्षा के लिए लड़की Evpatoria गया था। वहां उन्होंने खारकोव यूनिवर्सिटी ऑफ इंटरनल अफेयर्स में प्रवेश किया, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक दो हज़ार दो में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उसकी लड़की ने प्रायद्वीप Crimea पर अपना करियर शुरू किया। नतालिया Vladimirovna Poklonskaya पर नौकरी मिल गईस्नातक स्तर के बाद तुरंत अभियोजक के कार्यालय में काम करते हैं। वहां, इस आलेख की नायिका ने एक करियर बनाया, धीरे-धीरे एक स्थिति से दूसरे स्थान पर जा रहा था। नतालिया ने चार वर्षों में सबसे बड़ी सफलता हासिल की। दो हज़ार छः में, लड़की Crimea में अभियोजक के सहायक बन गई। अगले चार वर्षों तक पोक्लॉन्स्काया ने एक ही पद आयोजित किया, लेकिन केवल एवेपेटोरिया में। दो हज़ार दस में, लड़की ने खुद को पर्यवेक्षी प्राधिकरण के प्रमुख के लिए सहायक पाया, जो अपराध से लड़ने वाले स्थानीय संस्थानों की गतिविधियों पर नियंत्रण प्रदान करता है। दो हज़ार ग्यारह में, पोक्लॉन्स्काया ने एक उच्च प्रोफ़ाइल केस आयोजित कियाआपराधिक समूह "बाशमक्स"। इसके सदस्य हत्या, लूट और रैकेटियरिंग में लगे थे। "जूते" एक हज़ार नौ सौ नब्बे-दो हज़ार-ies के सबसे गंभीर संगठित अपराध समूह थे। नतालिया ने एक सरकारी अभियोजक के रूप में कार्य किया। दो हज़ार बारह में, पोक्लॉन्स्काया ने सिम्फरोपोल इंटरडिस्ट्रिट प्रकृति संरक्षण अभियोजक के कार्यालय का नेतृत्व किया। फिर कानून प्रवर्तन में कुछ और पद थे। लड़की के करियर में तेजी से वृद्धि यूक्रेन में कूप डी'एटैट के समय के साथ हुई। फरवरी दो हज़ार चौदह के अंत में, नतालिया Vladimirovnaपोक्लॉन्स्काया ने इस्तीफे का एक पत्र लिखा था। महिला के अनुसार, वह, रहते हैं और देश, जहां वह पैदा हुआ था में काम करने के लिए शर्म आ रही थी के रूप में नव-फासिस्टों के अपने नियम हुक्म चलाना करने के लिए सड़कों और देश के नेताओं में घूमने के लिए मुक्त थे। हालांकि, नतालिया को काम से रिहा नहीं किया गया था। आधिकारिक तौर पर वह छुट्टी पर थी। Poklonskaya सिम्फ़रोपोल में मेरी माँ के पास गया, और संभव अशांति की रोकथाम में सहायता करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के लिए आमंत्रित किया। मार्च में महिला क्रीमिया के अभियोजक नियुक्त किया है। यूक्रेन में, पोक्लॉन्स्काया तब से खराब प्रतिक्रिया देता हैअधिकांश आबादी Crimea में जीवन और काम के बारे में अपने निर्णय से सहमत नहीं है। लड़की खुद रूस को एक मूल भूमि मानती है और बहुत खुश है कि प्रायद्वीप इस देश का हिस्सा बन गया है। सार्वजनिक अभियोजक बार-बार प्रयासों और उत्पीड़न के संपर्क में था। समय-समय पर, मीडिया में इस विषय पर नोट्स हैं। कार्यालय नतालिया लेने के अवसर परव्लादिमीरोवना पोक्लॉन्स्काया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दिया, जिसकी रिकॉर्डिंग इंटरनेट पर थी। उसके बाद Crimean अभियोजक लोकप्रियता "गिर गया"। सोशल नेटवर्क्स के कई उपयोगकर्ताओं ने लड़की "न्याशा" का उपनाम दिया और कहा कि कानून के मंत्री की सुंदर उपस्थिति उनकी स्थिति से जुड़ी नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से छः मिनट का वीडियो नहीं देखा गया थाकेवल रूस में, बल्कि जापान में भी। उसी दिन नतालिया इस देश के कई मंचों, कार्टून और सोशल नेटवर्क्स की नायिका बन गई। और थोड़ी देर बाद जापानी समर्पित पोक्लॉन्स्काया कई एनीम और हेनतई। प्रशंसक वीडियो में, लड़की "न्याशा" दिखाई देती है, लेकिन नतालिया इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की नकारात्मक रचनात्मक गतिविधि को संदर्भित करती है। उन्होंने एक से अधिक बार कहा कि उनके प्रदर्शन की मूल्यांकन करने के लिए यह और अधिक सुखद होगा, लेकिन विशेष रूप से व्यावसायिक उपलब्धियां। पोक्लॉन्स्काया की उच्च लोकप्रियता को कैसे समझाया जाए?राजनीतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण तीन कारक हैं। पहला रूस की स्थिति है, दूसरा Crimea है, और तीसरा नतालिया की उम्र है। नियुक्ति के समय अभियोजक चौंतीस वर्ष का था। इसलिए, यह हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। आखिरकार, पोक्लॉन्स्काया सख्त सामान्य पुरुष राजनेताओं से मूल रूप से अलग है जो लगातार संबंधों और सूट में जाते हैं। उनकी पृष्ठभूमि के खिलाफ, लड़की अपने मनोविज्ञान, शिष्टाचार, व्यवहार, उपस्थिति और आकर्षण में एक उज्ज्वल विपरीत के रूप में दिखाई देती है। खैर, यह स्पष्ट है कि दर्शकों का पुरुष हिस्सा हमेशा एक आकर्षक लड़की का जवाब देगा।
रोटियाँ मत सेंको, साथ बैठकर झोंपड़े में तुम्हारे। बोटियाँ मत फेंको, ये आज तुम्हारे घर का पता, पता करके आयेंगे। ये खुद लापता हो जायेंगे, बकरी बन मिनमिनायेंगे। दाँत दिखा गुर्रायेंगे, हिंदू-मुस्लिम, ऊँच-नीच, वोट बाँट लिये जायेंगे। भ्रष्टाचार और महंगाई की मार खायेंगे, बिरयानी पकेगी, ये सारी डकार जायेंगे। और बाइज़्ज़त बरी कर दिये जायेंगे।।
रोटियाँ मत सेंको, साथ बैठकर झोंपड़े में तुम्हारे। बोटियाँ मत फेंको, ये आज तुम्हारे घर का पता, पता करके आयेंगे। ये खुद लापता हो जायेंगे, बकरी बन मिनमिनायेंगे। दाँत दिखा गुर्रायेंगे, हिंदू-मुस्लिम, ऊँच-नीच, वोट बाँट लिये जायेंगे। भ्रष्टाचार और महंगाई की मार खायेंगे, बिरयानी पकेगी, ये सारी डकार जायेंगे। और बाइज़्ज़त बरी कर दिये जायेंगे।।
सुरेश रैना (Suresh Raina) को ट्विटर पर फैंस के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। रैना ने आईपीएल (IPL) में खेलने को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है और इसके बाद से उन्हें ट्टिटर पर काफी ट्रोल किया गया। सुरेश रैना ने खुलासा किया है कि अगर एम एस धोनी (MS Dhoni) अगले साल आईपीएल नहीं खेले, तो वो भी नहीं खेलेंगे। न्यूज24 स्पोर्ट्स को दिए इंटरव्यू में रैना ने कहा कि अगर सीएसके के कप्तान एमएस धोनी टी20 लीग का हिस्सा नहीं होंगे तो वो भी आईपीएल का अगला सीजन नहीं खेलना चाहेंगे। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने हालांकि कहा कि वो धोनी को एक और सीजन खेलने के लिए मनाएंगे। यह तभी संभव होगा जब सीएसके आईपीएल 2021 का खिताब जीतेगा। रैना ने इंटरव्यू के दौरान कहा, 'अगर धोनी अगले साल आईपीएल नहीं खेलेंगे तो मैं भी नहीं खेलूंगा। हमने 2008 से साथ खेला है। अगर इस साल हम आईपीएल जीतने में कामयाब हुए तो मैं उन्हें अगला सीजन खेलने के लिए मनाऊंगा। ' रैना के इस बयान के बाद ट्विटर पर उन्हें तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। इससे पहले रैना ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास भी धोनी के साथ ही लिया था।
सुरेश रैना को ट्विटर पर फैंस के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। रैना ने आईपीएल में खेलने को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है और इसके बाद से उन्हें ट्टिटर पर काफी ट्रोल किया गया। सुरेश रैना ने खुलासा किया है कि अगर एम एस धोनी अगले साल आईपीएल नहीं खेले, तो वो भी नहीं खेलेंगे। न्यूजचौबीस स्पोर्ट्स को दिए इंटरव्यू में रैना ने कहा कि अगर सीएसके के कप्तान एमएस धोनी टीबीस लीटरग का हिस्सा नहीं होंगे तो वो भी आईपीएल का अगला सीजन नहीं खेलना चाहेंगे। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने हालांकि कहा कि वो धोनी को एक और सीजन खेलने के लिए मनाएंगे। यह तभी संभव होगा जब सीएसके आईपीएल दो हज़ार इक्कीस का खिताब जीतेगा। रैना ने इंटरव्यू के दौरान कहा, 'अगर धोनी अगले साल आईपीएल नहीं खेलेंगे तो मैं भी नहीं खेलूंगा। हमने दो हज़ार आठ से साथ खेला है। अगर इस साल हम आईपीएल जीतने में कामयाब हुए तो मैं उन्हें अगला सीजन खेलने के लिए मनाऊंगा। ' रैना के इस बयान के बाद ट्विटर पर उन्हें तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। इससे पहले रैना ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास भी धोनी के साथ ही लिया था।
इन दोनों बहनों का प्यार सभी के लिए मासल बना हुआ है। करिश्मा अपनी छोटी बहन करीना पर जान छिड़कती है। आपने भी अक्सर दोनों बहनों को एक-साथ देखा होगा। शमिता शेट्टी अपनी बहन जैसी पॉप्युलर न हो लेकिन इन दोनों के बीच प्यार काफी है। शिल्पा अपनी बहन को हर इवेंट पर अपने साथ रखती है। वहीं शमिता अपने जीजा के साथ अच्छी बॉन्डिंग रखती है। आइटम नंबर से बॉलीवुड पर राज करने वाली मलाइका अपनी छोटी बहन अमृता को जान से भी ज़्यादा चाहती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान मलाइका ने कहा था कि मेरी बहन मेरे लिए काफी मायने रखती है। टि्वंकल काम से ज्यादा अपने परिवार अहमियत देती हैं। अपनी छोटी बहन रिंकी को वह बेहद प्यार करती है और रिंकी भी अपनी लाइफ का हर फैसला टि्वंकल से पूछकर ही करती है। यह दोनों बहने अपने बच्चों के साथ खूब हॉलिडे एंजॉय करती है। इन दोनों बहनों के बीच भी बेहद प्यार है। इनकी मां श्रीदेवी की बात करें तो वह भी अपनी फैमिली का ज्यादा अहमियत देती है। खुशी- जाह्नवी अक्सर एक-साथ दिखाई देती है।
इन दोनों बहनों का प्यार सभी के लिए मासल बना हुआ है। करिश्मा अपनी छोटी बहन करीना पर जान छिड़कती है। आपने भी अक्सर दोनों बहनों को एक-साथ देखा होगा। शमिता शेट्टी अपनी बहन जैसी पॉप्युलर न हो लेकिन इन दोनों के बीच प्यार काफी है। शिल्पा अपनी बहन को हर इवेंट पर अपने साथ रखती है। वहीं शमिता अपने जीजा के साथ अच्छी बॉन्डिंग रखती है। आइटम नंबर से बॉलीवुड पर राज करने वाली मलाइका अपनी छोटी बहन अमृता को जान से भी ज़्यादा चाहती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान मलाइका ने कहा था कि मेरी बहन मेरे लिए काफी मायने रखती है। टि्वंकल काम से ज्यादा अपने परिवार अहमियत देती हैं। अपनी छोटी बहन रिंकी को वह बेहद प्यार करती है और रिंकी भी अपनी लाइफ का हर फैसला टि्वंकल से पूछकर ही करती है। यह दोनों बहने अपने बच्चों के साथ खूब हॉलिडे एंजॉय करती है। इन दोनों बहनों के बीच भी बेहद प्यार है। इनकी मां श्रीदेवी की बात करें तो वह भी अपनी फैमिली का ज्यादा अहमियत देती है। खुशी- जाह्नवी अक्सर एक-साथ दिखाई देती है।
बारां के मंडोला इलाके में एक चलती वैन में अचानक आग लग गई। वैन में सवार तीन लोगों ने कूदकर अपनी जान बचाई। वैन सवार सभी लोग गाड़ी को छोड़कर भाग निकले। वैन में आग लगने से मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। वैन में से ऊंची-ऊंची लपटे उठने लगी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने और आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन तब तक वैन पूरी तरह से जलकर राख हो गई। दरअसल वैन सवार लोग बारां से अटरू किसी काम से जा रहे थे। इस दौरान बीच रास्ते में अचानक से वैन में आग लग गई थी देखते ही देखते वैन आग का गोला बन गई। सहायक अग्निशमन अधिकारी ओवेश शेख ने बताया कि शुक्रवार शाम को सूचना मिली थी कि अटरु रोड़ पर एक चलती वैन में अचानक से आग लग गई थी। वैन में सवार तीन लोगों ने कूदकर अपने आपको बचाया। ऐसे में बड़ा हादसा होने से टल गया। वहीं आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की गई थी लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वैन में सीएनजी किट लगा हुआ है। ऐसे में तेज गर्मी के कारण सीएनजी शार्ट सर्किट से आग लगी होगी। हालांकि गनीमत रही कि वैन में आग लगने से कोई जनहानि नहीं हुई। आग बुझाने के दौरान मौके पर फायरमैन सत्यनारायण मीना, राजाराम मीना, रामपाल मेघवाल सहित अन्य मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बारां के मंडोला इलाके में एक चलती वैन में अचानक आग लग गई। वैन में सवार तीन लोगों ने कूदकर अपनी जान बचाई। वैन सवार सभी लोग गाड़ी को छोड़कर भाग निकले। वैन में आग लगने से मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। वैन में से ऊंची-ऊंची लपटे उठने लगी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने और आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन तब तक वैन पूरी तरह से जलकर राख हो गई। दरअसल वैन सवार लोग बारां से अटरू किसी काम से जा रहे थे। इस दौरान बीच रास्ते में अचानक से वैन में आग लग गई थी देखते ही देखते वैन आग का गोला बन गई। सहायक अग्निशमन अधिकारी ओवेश शेख ने बताया कि शुक्रवार शाम को सूचना मिली थी कि अटरु रोड़ पर एक चलती वैन में अचानक से आग लग गई थी। वैन में सवार तीन लोगों ने कूदकर अपने आपको बचाया। ऐसे में बड़ा हादसा होने से टल गया। वहीं आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की गई थी लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वैन में सीएनजी किट लगा हुआ है। ऐसे में तेज गर्मी के कारण सीएनजी शार्ट सर्किट से आग लगी होगी। हालांकि गनीमत रही कि वैन में आग लगने से कोई जनहानि नहीं हुई। आग बुझाने के दौरान मौके पर फायरमैन सत्यनारायण मीना, राजाराम मीना, रामपाल मेघवाल सहित अन्य मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जैविक युद्ध (Biological warfare; BW) अथवा कीटाणु युद्ध (germ warfare) किसी युद्ध में किसी व्यक्ति, पशु अथवा पौधे को मारने के उद्देश्य से उसके उसमें जीवाणु, विषाणु अथवा फफूंद जैसे जैविक आविष अथवा संक्रमणकारी तत्वों का उपयोग करना कहलाता है। परम्परागत अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी विधियों एवं कई अंतर्राष्ट्रीय सन्धियों द्वारा जैविक हथियारों का प्रयोग प्रतिबन्धित है सशस्त्र-संघर्ष के दौरान जैविक हथियारों का इस्तेमाल युद्ध-अपराध की श्रेणी में आता है। . विश्व युद्ध II, अथवा द्वितीय विश्व युद्ध, (इसको संक्षेप में WWII या WW2 लिखते हैं), ये एक वैश्विक सैन्य संघर्ष था जिसमें, सभी महान शक्तियों समेत दुनिया के अधिकांश देश शामिल थे, जो दो परस्पर विरोधी सैन्य गठबन्धनों में संगठित थेः मित्र राष्ट्र एवं धुरी राष्ट्र.इस युद्ध में 10 करोड़ से ज्यादा सैन्य कर्मी शामिल थे, इस वजह से ये इतिहास का सबसे व्यापक युद्ध माना जाता है।"पूर्ण युद्ध" की अवस्था में, प्रमुख सहभागियों ने नागरिक और सैन्य संसाधनों के बीच के अंतर को मिटा कर युद्ध प्रयास की सेवा में अपनी पूरी औद्योगिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षमताओं को झोक दिया। इसमें सात करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश साधारण नागरिक थे, इसलिए इसको मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष माना जाता है। युद्ध की शुरुआत को आम तौर पर 1 सितम्बर 1939 माना जाता है, जर्मनी के पोलैंड के ऊपर आक्रमण करने और परिणामस्वरूप ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल के अधिकांश देशों और फ्रांस द्वारा जर्मनी पर युद्ध की घोषणा के साथ. जैविक युद्ध और द्वितीय विश्व युद्घ आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): रासायनिक युद्ध। विषाक्त गैस के आक्रमण से अंधे हुए ब्रिटिश सैनिक, चिकित्सा के लिये प्रतीक्षारत रासायनिक युद्ध (Chemical warfare) का अर्थ है - किसी युद्ध में रासायनिक पदार्थों के विषैले गुणों का उपयोग करके जन-धन की हानि पहुँचाना। रासायनिक युद्ध, परमाणु युद्ध (या, नाभिकीय युद्ध) से अलग है। सैनिक भाषा में नाभिकीय युद्ध, जैविक युद्ध तथा रासायनिक युद्ध को सम्मिलित रूप से महासंहारक हथियार (weapons of mass destruction (WMD)) कहलाते हैं। रासायनिक युद्ध अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये विस्फोटक बल पर निर्भर नहीं करता है बल्कि रसायनों के विषकारी घातक प्रभावों पर निर्भर है। . जैविक युद्ध 7 संबंध है और द्वितीय विश्व युद्घ 95 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 0.98% है = 1 / (7 + 95)। यह लेख जैविक युद्ध और द्वितीय विश्व युद्घ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जैविक युद्ध अथवा कीटाणु युद्ध किसी युद्ध में किसी व्यक्ति, पशु अथवा पौधे को मारने के उद्देश्य से उसके उसमें जीवाणु, विषाणु अथवा फफूंद जैसे जैविक आविष अथवा संक्रमणकारी तत्वों का उपयोग करना कहलाता है। परम्परागत अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी विधियों एवं कई अंतर्राष्ट्रीय सन्धियों द्वारा जैविक हथियारों का प्रयोग प्रतिबन्धित है सशस्त्र-संघर्ष के दौरान जैविक हथियारों का इस्तेमाल युद्ध-अपराध की श्रेणी में आता है। . विश्व युद्ध II, अथवा द्वितीय विश्व युद्ध, , ये एक वैश्विक सैन्य संघर्ष था जिसमें, सभी महान शक्तियों समेत दुनिया के अधिकांश देश शामिल थे, जो दो परस्पर विरोधी सैन्य गठबन्धनों में संगठित थेः मित्र राष्ट्र एवं धुरी राष्ट्र.इस युद्ध में दस करोड़ से ज्यादा सैन्य कर्मी शामिल थे, इस वजह से ये इतिहास का सबसे व्यापक युद्ध माना जाता है।"पूर्ण युद्ध" की अवस्था में, प्रमुख सहभागियों ने नागरिक और सैन्य संसाधनों के बीच के अंतर को मिटा कर युद्ध प्रयास की सेवा में अपनी पूरी औद्योगिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षमताओं को झोक दिया। इसमें सात करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश साधारण नागरिक थे, इसलिए इसको मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष माना जाता है। युद्ध की शुरुआत को आम तौर पर एक सितम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस माना जाता है, जर्मनी के पोलैंड के ऊपर आक्रमण करने और परिणामस्वरूप ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल के अधिकांश देशों और फ्रांस द्वारा जर्मनी पर युद्ध की घोषणा के साथ. जैविक युद्ध और द्वितीय विश्व युद्घ आम में एक बात है : रासायनिक युद्ध। विषाक्त गैस के आक्रमण से अंधे हुए ब्रिटिश सैनिक, चिकित्सा के लिये प्रतीक्षारत रासायनिक युद्ध का अर्थ है - किसी युद्ध में रासायनिक पदार्थों के विषैले गुणों का उपयोग करके जन-धन की हानि पहुँचाना। रासायनिक युद्ध, परमाणु युद्ध से अलग है। सैनिक भाषा में नाभिकीय युद्ध, जैविक युद्ध तथा रासायनिक युद्ध को सम्मिलित रूप से महासंहारक हथियार ) कहलाते हैं। रासायनिक युद्ध अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये विस्फोटक बल पर निर्भर नहीं करता है बल्कि रसायनों के विषकारी घातक प्रभावों पर निर्भर है। . जैविक युद्ध सात संबंध है और द्वितीय विश्व युद्घ पचानवे है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक शून्य.अट्ठानवे% है = एक / । यह लेख जैविक युद्ध और द्वितीय विश्व युद्घ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
यूपीईएस में स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस के सीएसई बिग डाटा में बीटेक ऑनर्स की अंतिम वर्ष की छात्रा मुस्कान हांडा को माइक्रोसॉफ्ट की ओर से 48 लाख रुपए सालाना का पैकेज ऑफर किया गया है, जो बिग डाटा के क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए बढ़ती मांग का संकेत है। माइक्रोसॉफ्ट में अपनी नियुक्ति पर मुस्कान हांडा का कहना है कि मैंने पहले राउंड में अच्छा प्रदर्शन किया। मेरी खुशी का उस समय कोई ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने मुझसे सीधे फाइनल राउंड में क्वालिफाई करने के लिए कहा। 24 घंटे में मुझे अपना सिलेक्शन लेटर भी ई-मेल से मिल गया। इसके मिलने के बाद मैं इतनी खुश हुई, जितनी खुश मैं पहले कभी नही हुई थी। यूपीईएस के वीसीए डा. सुनील राय ने कहा कि आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले कर्मचारियों की डिमांड बढ़ती जा रही है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां उन लोगों को अपने यहां नौकरी पर रख रही है, जिनके पास जटिल आंकड़ों को समझने की क्षमता हो और जो उसे प्रतिभाशाली ढंग से बेहद उपयोगी जानकारी में बदल सके।
यूपीईएस में स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस के सीएसई बिग डाटा में बीटेक ऑनर्स की अंतिम वर्ष की छात्रा मुस्कान हांडा को माइक्रोसॉफ्ट की ओर से अड़तालीस लाख रुपए सालाना का पैकेज ऑफर किया गया है, जो बिग डाटा के क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए बढ़ती मांग का संकेत है। माइक्रोसॉफ्ट में अपनी नियुक्ति पर मुस्कान हांडा का कहना है कि मैंने पहले राउंड में अच्छा प्रदर्शन किया। मेरी खुशी का उस समय कोई ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने मुझसे सीधे फाइनल राउंड में क्वालिफाई करने के लिए कहा। चौबीस घंटाटे में मुझे अपना सिलेक्शन लेटर भी ई-मेल से मिल गया। इसके मिलने के बाद मैं इतनी खुश हुई, जितनी खुश मैं पहले कभी नही हुई थी। यूपीईएस के वीसीए डा. सुनील राय ने कहा कि आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले कर्मचारियों की डिमांड बढ़ती जा रही है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां उन लोगों को अपने यहां नौकरी पर रख रही है, जिनके पास जटिल आंकड़ों को समझने की क्षमता हो और जो उसे प्रतिभाशाली ढंग से बेहद उपयोगी जानकारी में बदल सके।
नई दिल्ली, । पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद रविवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई। सूत्रों की मानें तो बैठक में हार के कारणों की समीक्षा के साथ ही भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, हरीश रावत, मल्लिकार्जुन खड़गे और अंबिका सोनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) एवं तीन अन्य कांग्रेस नेता पार्टी कार्य समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस नेता एके एंटनी बैठक में शामिल नहीं हो पाए क्योंकि उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक से इतर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठी। कुछ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पार्टी के मुख्यालय के नजदीक जमा होकर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने के समर्थन में नारेबाजी की। इसमें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नेता अलका लांबा, अनिल भारद्वाज समेत कई अन्य नेता शामिल थे। इन नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में धरना भी दिया। अलका लांबा का कहना था कि कांग्रेस का आम कार्यकर्ता राहुल को अध्यक्ष के तौर पर देखना चाहता है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस के असंतुष्ट गुट यानी जी-23 समूह के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई जिसमें भावी रणनीति पर मंथन हुआ। गुलाम नबी आजाद के आवास पर हुई इस बैठक में आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी जैसे दिग्गज शामिल हुए थे। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने उन रिपोर्टों को फेक बताया जिसमें गांधी परिवार के सदस्यों के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की बात कही गई थी।
नई दिल्ली, । पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद रविवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई। सूत्रों की मानें तो बैठक में हार के कारणों की समीक्षा के साथ ही भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, हरीश रावत, मल्लिकार्जुन खड़गे और अंबिका सोनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं तीन अन्य कांग्रेस नेता पार्टी कार्य समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस नेता एके एंटनी बैठक में शामिल नहीं हो पाए क्योंकि उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक से इतर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठी। कुछ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पार्टी के मुख्यालय के नजदीक जमा होकर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने के समर्थन में नारेबाजी की। इसमें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नेता अलका लांबा, अनिल भारद्वाज समेत कई अन्य नेता शामिल थे। इन नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में धरना भी दिया। अलका लांबा का कहना था कि कांग्रेस का आम कार्यकर्ता राहुल को अध्यक्ष के तौर पर देखना चाहता है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस के असंतुष्ट गुट यानी जी-तेईस समूह के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई जिसमें भावी रणनीति पर मंथन हुआ। गुलाम नबी आजाद के आवास पर हुई इस बैठक में आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी जैसे दिग्गज शामिल हुए थे। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने उन रिपोर्टों को फेक बताया जिसमें गांधी परिवार के सदस्यों के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की बात कही गई थी।
जापान की जसमीना से महमेहाती चांदनी रात ! नदी की धार पर केलिको मलमल-सी टंगी हवा की हड्डियां : किनारे सरकडे और बांसों की रेखाली महीन छांहों में एक लिली के नीले फूल-सा लकड़ी का जापानी बंगला सूने बंद फाटक पर छायी अंगूर की रेशमी बेलियां पोर्च पर लटकते हुए कागजी फानूस की फूलों-भरी अलसायी रोशनी । खिड़की-दरवाजों के फूल-पत्ती- चिड़िया चित्रित फेनिल पदों पर पग्ने-सी मीठी गहरी हरी आभाएं । एक खुली खिड़की के सूने चौखट पर निर्जन वायलेट उजाला : इतना अनाविल, निस्तरंग, निस्पंद कि जैसे अभी-अभी वहां कोई आयेगा । अभी कोई चमेली की तैरती गंध का पीताभ चेहरा वहां आविर्मान हो जायेगा... - 'छाया, महफिल और जापानी बंगला' / 'मुक्त साहचर्य' शैली का प्रयोग भी वीरेंद्र कुमार जैन ने काफी किया है। कवि को अपनी प्रिया की गोरी बांह को रोमावली पता नही कहां-कहां किनकिन विवों के पास ले जाती है । वर्षा की पहली फुहार उसे किसी की शवनमो अंगुलियों की याद दिला देती है और वे अंगुलिया किसी दूधिया साड़ी की आभा उसके कमरे में फैला देती हैं। कवि एक विव से दूसरे बिब तक एक ही राग के सेतु के सहारे बढ़ता जाता है । और एक राग से दूसरे राम तक एक ही विव के सहारे । क्या इसे मुक्त साहचर्य की जगह 'रागात्मकं साहचर्य' कहना ज्यादा उपयुक्त होगा ? नये शिल्प-विधान के बावजूद न तो वीरेंद्र कुमार जैन में शिल्पवादी-प्रयोगवादी कवियों सी दुरुहता और शिल्पगत विशृंखलता है और न चौंकाने की वृत्ति । नये प्रयोग उन्होंने महज शब्दों से खेलने के लिए नही किये, किसी आंतरिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए ही किये है। एक बात और अपने अध्यात्मवादी रुझान के बावजूद वीरेंद्र कुमार जैन ने पंत जी की तरह 'सिद्धात कथन' नही किया है। उनकी कविताएं सब रुझानों के बावजूद कविताएं है । 'अनागता की आंखें की बत्तोस कविताओं में से सिर्फ एक ही कविता - योगरात्रि में सीधा-सादा सिद्धांत-कथन मिलता है । अरविंद के प्रभाव ने, जैसा कि प्रारंभ में भी संकेत किया जा चुका है, उन्हे दो चीजें दी हैं। एक तो प्रar Treat को aferiओं में it after के बिसेरने की क्षमता और दूसरे एक मसीहाई उन्माद का स्वर, जो उनकी कई कविताओं को एक जबर्दस्त प्रभावशीलता देता है । (द्र. में तुम्हारी चरम चाहत का हिरण्यगर्भ जाया हूं', और 'मेरा प्रणाम लो, मेरो चुनौती तो हे भगवान अमिताभ !' कविताएं) एक पवित्रता का, उदात्तता का वातावरण उनकी लगभग सभी कविताओं में मिलता है। और इसका मूल रहस्य है उनका अतींद्रिय, अतलांत, वलयित, चिरंतन, तमिस्र, आरोहण, अवरोहण, ऊध्वं, अनाहत, घरावर, दिगंत, विराट, अमित, अनिर्वार, अक्षुण्ण जैसे शब्दों का पर्याप्त प्रयोग । हिंदी को प्रगतिशील कविता में वीरेंद्र कुमार जैन की कविताएं अपनी दो विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण है। एक तो अपने विराट तत्व के कारण और दूसरे मानवीय भोग को पवित्रता देने के कारण, उसके प्रति दकियानूसी कुठाओं से मुक्ति के कारण । विराट तत्व वीरेंद्र कुमार जैन में सिर्फ मानवीय गौरवगायन और भौगोलिक विराटता के रूपों में ही अभिव्यक्त नहीं हुआ है। इन रूपो के अतिरिक्त एक 'खगोलिक' रूप मे --एक कॉस्मिक रूप में भी सामने मेआया है। नारी के रूप-सौंदर्य और उसके प्यार की शक्ति का जो विराट वर्णन उनको कविताओं में मिलता है, वह हिंदी में अपने ढंग को एक हो चीज है। फिल्मी गीतकार इंदीवर को कविताओं का एक संग्रह प्यार बांटते चलो (५६) प्रकाशित हुआ है । इदीवर भी रूमानी रुझान के प्रगतिशील कवि हैं । इस संकलन की सभी कविताएं उर्दू से प्रभावित शैली में परपरागत छन्दोबद्ध रचनाए है। प्रारंभ में कवि ने अपनी कविता के प्रति अपनी eft को इन पक्तियों में प्रकट किया है : कुछ लोग सोचते हैं मेरे ये गीत जल्द मर जायेंगे जो काम इन्हें सौपा मैंने, वो काम मगर कर जायेंगे सूरज न सही में शमा सही, बस एक रात ही काफी है जिससे कि बदल जाये जीवन, बस एक बात ही काफी है। सौंदर्य और प्रेम उनकी कविताओं के प्रधान विषय हैं। उनकी शैली में सरलता, सहजता और गोतात्मकता है। पर यह सरलता, कभी कभी थोड़े नीचे स्तर पर उतर कर एक हल्कापन, फिल्मोपन या Artress भोला देती है । ऐसी कविताएं अनपढ़ मजदूर वर्ग को तो प्रभावित करती हैं पर सुसंस्कृत मनो को ये 'सस्ती' लगती हैं। जैसे : धंन वाले से प्यार जताकर तूने अपना मन बेचा है तू कहती है ब्याह किया है मैं कहता हूं तन बेचा है घेश्या बिकती है क्षण को, तूने सारा जीवन बेचा है प्यार संबंधी इन कविताओं में कही उसने पूजी की तरह प्यार का भी 'समाजीकरण' करने की मांग रखी है, और शायद उसने इसे अपनी प्रगतिशीलता का प्रमाण भी समझा है : मेरे ही आगे तुम ममता का भंडार न डालो मेरी ही झोली में अपना सारा प्यार न डालो कितने ही ऐसे जिनका दामन खाली जीवन खाली जिनके प्यासे होठों से गुजरा है हर सावन खाली प्यार बांटती चलो किसी की पूंजी नहीं बनाओ तुम मरुथल बहुत पड़े हैं, सागर को न यहीं बरसाओ तुम आलकारिक अर्थ में सब पर प्यार लुटाने की बात तो समझ में आती है, पर वास्तव में पूजी की तरह उसके समाजीकरण की धारणा कोई प्रगतिशील धारणा नहीं है, वह निम्न मध्यम वर्गीय फूहड़ धारणा है । पर इंदीवर की विशेषता यह है कि उसने बहुत सहज शैली में, साधारण अनपढ़ लोगो के समझ में आ सकने लायक ढंग से कई नये नये विषयो पर कविताएं लिखी हैः उदाहरणस्वरूप उनकी कविता 'कोई हरिश्चन्द्र' वेश्या जीवन के दर्द पर लिखी हुई एक सुन्दर कविता है । 'परित्यक्ता' में नारी के प्रति नर के युगों पुराने अत्याचार को चुनौती दी गयी है : नर ही समाज का नेता है, जो चाहे सो कर लेता है घर पर भी उसकी जीत और बाहर भी वही विजेता है मां ने बालक को जन्म दिया, जग नाम पिता का लेता है ! 'आंसू को पसीने में बदलो दुखियो को कर्म की प्रेरणा देती हैः कब ओस से भरता है सागर, अश्कों से दिया कब जलता है आंसू को पसीने में बदलो, मेहनत से नसीब बदलता है 'मेहनत में भगवान छुपा है ईश्वर के प्रति रावीन्द्रिक मानववादी भावना को अभिव्यक्ति देती हैः वो खेत में मिलेगा, खलिहान में मिलेगा भगवान तो ए बन्दे इन्सान में मिलेगा
जापान की जसमीना से महमेहाती चांदनी रात ! नदी की धार पर केलिको मलमल-सी टंगी हवा की हड्डियां : किनारे सरकडे और बांसों की रेखाली महीन छांहों में एक लिली के नीले फूल-सा लकड़ी का जापानी बंगला सूने बंद फाटक पर छायी अंगूर की रेशमी बेलियां पोर्च पर लटकते हुए कागजी फानूस की फूलों-भरी अलसायी रोशनी । खिड़की-दरवाजों के फूल-पत्ती- चिड़िया चित्रित फेनिल पदों पर पग्ने-सी मीठी गहरी हरी आभाएं । एक खुली खिड़की के सूने चौखट पर निर्जन वायलेट उजाला : इतना अनाविल, निस्तरंग, निस्पंद कि जैसे अभी-अभी वहां कोई आयेगा । अभी कोई चमेली की तैरती गंध का पीताभ चेहरा वहां आविर्मान हो जायेगा... - 'छाया, महफिल और जापानी बंगला' / 'मुक्त साहचर्य' शैली का प्रयोग भी वीरेंद्र कुमार जैन ने काफी किया है। कवि को अपनी प्रिया की गोरी बांह को रोमावली पता नही कहां-कहां किनकिन विवों के पास ले जाती है । वर्षा की पहली फुहार उसे किसी की शवनमो अंगुलियों की याद दिला देती है और वे अंगुलिया किसी दूधिया साड़ी की आभा उसके कमरे में फैला देती हैं। कवि एक विव से दूसरे बिब तक एक ही राग के सेतु के सहारे बढ़ता जाता है । और एक राग से दूसरे राम तक एक ही विव के सहारे । क्या इसे मुक्त साहचर्य की जगह 'रागात्मकं साहचर्य' कहना ज्यादा उपयुक्त होगा ? नये शिल्प-विधान के बावजूद न तो वीरेंद्र कुमार जैन में शिल्पवादी-प्रयोगवादी कवियों सी दुरुहता और शिल्पगत विशृंखलता है और न चौंकाने की वृत्ति । नये प्रयोग उन्होंने महज शब्दों से खेलने के लिए नही किये, किसी आंतरिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए ही किये है। एक बात और अपने अध्यात्मवादी रुझान के बावजूद वीरेंद्र कुमार जैन ने पंत जी की तरह 'सिद्धात कथन' नही किया है। उनकी कविताएं सब रुझानों के बावजूद कविताएं है । 'अनागता की आंखें की बत्तोस कविताओं में से सिर्फ एक ही कविता - योगरात्रि में सीधा-सादा सिद्धांत-कथन मिलता है । अरविंद के प्रभाव ने, जैसा कि प्रारंभ में भी संकेत किया जा चुका है, उन्हे दो चीजें दी हैं। एक तो प्रar Treat को aferiओं में it after के बिसेरने की क्षमता और दूसरे एक मसीहाई उन्माद का स्वर, जो उनकी कई कविताओं को एक जबर्दस्त प्रभावशीलता देता है । एक पवित्रता का, उदात्तता का वातावरण उनकी लगभग सभी कविताओं में मिलता है। और इसका मूल रहस्य है उनका अतींद्रिय, अतलांत, वलयित, चिरंतन, तमिस्र, आरोहण, अवरोहण, ऊध्वं, अनाहत, घरावर, दिगंत, विराट, अमित, अनिर्वार, अक्षुण्ण जैसे शब्दों का पर्याप्त प्रयोग । हिंदी को प्रगतिशील कविता में वीरेंद्र कुमार जैन की कविताएं अपनी दो विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण है। एक तो अपने विराट तत्व के कारण और दूसरे मानवीय भोग को पवित्रता देने के कारण, उसके प्रति दकियानूसी कुठाओं से मुक्ति के कारण । विराट तत्व वीरेंद्र कुमार जैन में सिर्फ मानवीय गौरवगायन और भौगोलिक विराटता के रूपों में ही अभिव्यक्त नहीं हुआ है। इन रूपो के अतिरिक्त एक 'खगोलिक' रूप मे --एक कॉस्मिक रूप में भी सामने मेआया है। नारी के रूप-सौंदर्य और उसके प्यार की शक्ति का जो विराट वर्णन उनको कविताओं में मिलता है, वह हिंदी में अपने ढंग को एक हो चीज है। फिल्मी गीतकार इंदीवर को कविताओं का एक संग्रह प्यार बांटते चलो प्रकाशित हुआ है । इदीवर भी रूमानी रुझान के प्रगतिशील कवि हैं । इस संकलन की सभी कविताएं उर्दू से प्रभावित शैली में परपरागत छन्दोबद्ध रचनाए है। प्रारंभ में कवि ने अपनी कविता के प्रति अपनी eft को इन पक्तियों में प्रकट किया है : कुछ लोग सोचते हैं मेरे ये गीत जल्द मर जायेंगे जो काम इन्हें सौपा मैंने, वो काम मगर कर जायेंगे सूरज न सही में शमा सही, बस एक रात ही काफी है जिससे कि बदल जाये जीवन, बस एक बात ही काफी है। सौंदर्य और प्रेम उनकी कविताओं के प्रधान विषय हैं। उनकी शैली में सरलता, सहजता और गोतात्मकता है। पर यह सरलता, कभी कभी थोड़े नीचे स्तर पर उतर कर एक हल्कापन, फिल्मोपन या Artress भोला देती है । ऐसी कविताएं अनपढ़ मजदूर वर्ग को तो प्रभावित करती हैं पर सुसंस्कृत मनो को ये 'सस्ती' लगती हैं। जैसे : धंन वाले से प्यार जताकर तूने अपना मन बेचा है तू कहती है ब्याह किया है मैं कहता हूं तन बेचा है घेश्या बिकती है क्षण को, तूने सारा जीवन बेचा है प्यार संबंधी इन कविताओं में कही उसने पूजी की तरह प्यार का भी 'समाजीकरण' करने की मांग रखी है, और शायद उसने इसे अपनी प्रगतिशीलता का प्रमाण भी समझा है : मेरे ही आगे तुम ममता का भंडार न डालो मेरी ही झोली में अपना सारा प्यार न डालो कितने ही ऐसे जिनका दामन खाली जीवन खाली जिनके प्यासे होठों से गुजरा है हर सावन खाली प्यार बांटती चलो किसी की पूंजी नहीं बनाओ तुम मरुथल बहुत पड़े हैं, सागर को न यहीं बरसाओ तुम आलकारिक अर्थ में सब पर प्यार लुटाने की बात तो समझ में आती है, पर वास्तव में पूजी की तरह उसके समाजीकरण की धारणा कोई प्रगतिशील धारणा नहीं है, वह निम्न मध्यम वर्गीय फूहड़ धारणा है । पर इंदीवर की विशेषता यह है कि उसने बहुत सहज शैली में, साधारण अनपढ़ लोगो के समझ में आ सकने लायक ढंग से कई नये नये विषयो पर कविताएं लिखी हैः उदाहरणस्वरूप उनकी कविता 'कोई हरिश्चन्द्र' वेश्या जीवन के दर्द पर लिखी हुई एक सुन्दर कविता है । 'परित्यक्ता' में नारी के प्रति नर के युगों पुराने अत्याचार को चुनौती दी गयी है : नर ही समाज का नेता है, जो चाहे सो कर लेता है घर पर भी उसकी जीत और बाहर भी वही विजेता है मां ने बालक को जन्म दिया, जग नाम पिता का लेता है ! 'आंसू को पसीने में बदलो दुखियो को कर्म की प्रेरणा देती हैः कब ओस से भरता है सागर, अश्कों से दिया कब जलता है आंसू को पसीने में बदलो, मेहनत से नसीब बदलता है 'मेहनत में भगवान छुपा है ईश्वर के प्रति रावीन्द्रिक मानववादी भावना को अभिव्यक्ति देती हैः वो खेत में मिलेगा, खलिहान में मिलेगा भगवान तो ए बन्दे इन्सान में मिलेगा
हरियाणा के करनाल में मंगलवार तड़के बड़ा हादसा हो गया. यहां राइस मिल की तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से अब तक 4 लोगों की मौत हो गई. 20 लोग जख्मी बताए जा रहे हैं. 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. कई और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. रेस्क्यू अभियान जारी है. हादसा करनाल के तरावड़ी में सुबह तीन बजे हुआ. यहां स्थित शिव शक्ति राइज मिल की तीन मंजिला इमारत गिर गई. इस हादसे में 157 मजदूर मलबे में दब गए. हालांकि 100 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया. अब तक 4 लोगों की मौत हुई है. जबकि 20 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि मिल की इमारत में बने लेबर क्वार्टर का एक हिस्सा गिर गया. मिल में ही मजदूर ठहरते हैं. हादसा मंगलवार तड़के हुआ, ऐसे में राइस मिल में सो रहे मजदूर दब गए. मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है. मलबा हटाया जा रहा है. पुलिस औऱ प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए 2 टीमें बनाई हैं.
हरियाणा के करनाल में मंगलवार तड़के बड़ा हादसा हो गया. यहां राइस मिल की तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से अब तक चार लोगों की मौत हो गई. बीस लोग जख्मी बताए जा रहे हैं. एक सौ से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. कई और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. रेस्क्यू अभियान जारी है. हादसा करनाल के तरावड़ी में सुबह तीन बजे हुआ. यहां स्थित शिव शक्ति राइज मिल की तीन मंजिला इमारत गिर गई. इस हादसे में एक सौ सत्तावन मजदूर मलबे में दब गए. हालांकि एक सौ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया. अब तक चार लोगों की मौत हुई है. जबकि बीस घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि मिल की इमारत में बने लेबर क्वार्टर का एक हिस्सा गिर गया. मिल में ही मजदूर ठहरते हैं. हादसा मंगलवार तड़के हुआ, ऐसे में राइस मिल में सो रहे मजदूर दब गए. मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है. मलबा हटाया जा रहा है. पुलिस औऱ प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए दो टीमें बनाई हैं.
Best Electric Bike: साल 2022 खत्म होने वाला है। इस साल देश के मार्केट कई बेहतरीन इलेक्ट्रिक बाइक्स को कंपनियों ने लॉन्च किया। आज इस रिपोर्ट में हम आपको साल 2022 में लॉन्च हुई कुछ बेहतरीन इलेक्ट्रिक बाइक्स के बारे में बताएंगे। इन बाइक्स का लुक बहुत आकर्षक हैं और इनमें आपको जबरदस्त रेंज देखने को मिल जाता है। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को 99,999 रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप 200 किलोमीटर की रेंज तक चला सकते हैं। इसमें आपको तीन राइडिंग मोड क्रमशः इको, सिटी और हैवॉक मोड्स कंपनी उपलब्ध कराती है। हैवॉक मोड में इस इलेक्ट्रिक बाइक की टॉप स्पीड 100 किमी प्रति घंटा पर पहुँच जाती है। इसमें कंपनी ने 4.4 kWh का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसकी क्षमता महज तीन सेकंड में 0 से 40Kmph की रफ्तार पकड़ने की है। Ultraviolette F77 कंपन्ह की भारतीय बाजार में मौजूद पहली इलेक्ट्रिक बाइक है। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को 3.80 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसमें आपको 10.3 kWh का लिथियम-आयन बैटरी पैक मिलता है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप 307 किलोमीटर की रेंज तक चला सकते हैं। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को 1.22 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप 180 किलोमीटर की रेंज तक चला सकते हैं। कंपनी इसमें 100 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड भी ऑफर करती है। इसमें कंपनी ने 4 kWh का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसकी क्षमता महज चार सेकंड में 0 से 40Kmph की रफ्तार पकड़ने की है। इस इलेक्ट्रिक बाइक को दो वेरिएंट क्रमशः OXO और OXO X में कंपनी ने पेश किया है। कंपनी इसमें 90 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड भी ऑफर करती है। टर्बो मोड में यह महज चार सेकंड में 0 से 40Kmph की रफ्तार पकड़ लेती है। इसमें कंपनी ने 3.75kWh का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप 150 किलोमीटर की रेंज तक चला सकते हैं।
Best Electric Bike: साल दो हज़ार बाईस खत्म होने वाला है। इस साल देश के मार्केट कई बेहतरीन इलेक्ट्रिक बाइक्स को कंपनियों ने लॉन्च किया। आज इस रिपोर्ट में हम आपको साल दो हज़ार बाईस में लॉन्च हुई कुछ बेहतरीन इलेक्ट्रिक बाइक्स के बारे में बताएंगे। इन बाइक्स का लुक बहुत आकर्षक हैं और इनमें आपको जबरदस्त रेंज देखने को मिल जाता है। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को निन्यानवे,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप दो सौ किलोग्राममीटर की रेंज तक चला सकते हैं। इसमें आपको तीन राइडिंग मोड क्रमशः इको, सिटी और हैवॉक मोड्स कंपनी उपलब्ध कराती है। हैवॉक मोड में इस इलेक्ट्रिक बाइक की टॉप स्पीड एक सौ किमी प्रति घंटा पर पहुँच जाती है। इसमें कंपनी ने चार दशमलव चार किलोवाट-घंटा का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसकी क्षमता महज तीन सेकंड में शून्य से चालीसKmph की रफ्तार पकड़ने की है। Ultraviolette Fसतहत्तर कंपन्ह की भारतीय बाजार में मौजूद पहली इलेक्ट्रिक बाइक है। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को तीन.अस्सी लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसमें आपको दस दशमलव तीन किलोवाट-घंटा का लिथियम-आयन बैटरी पैक मिलता है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप तीन सौ सात किलोग्राममीटर की रेंज तक चला सकते हैं। कंपनी ने अपनी इस इलेक्ट्रिक को एक.बाईस लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर बाजार में पेश किया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप एक सौ अस्सी किलोग्राममीटर की रेंज तक चला सकते हैं। कंपनी इसमें एक सौ किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड भी ऑफर करती है। इसमें कंपनी ने चार किलोवाट-घंटा का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसकी क्षमता महज चार सेकंड में शून्य से चालीसKmph की रफ्तार पकड़ने की है। इस इलेक्ट्रिक बाइक को दो वेरिएंट क्रमशः OXO और OXO X में कंपनी ने पेश किया है। कंपनी इसमें नब्बे किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड भी ऑफर करती है। टर्बो मोड में यह महज चार सेकंड में शून्य से चालीसKmph की रफ्तार पकड़ लेती है। इसमें कंपनी ने तीन दशमलव पचहत्तर किलोवाट-घंटा का लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया है। इसे एक बार फुल चार्ज करके आप एक सौ पचास किलोग्राममीटर की रेंज तक चला सकते हैं।
ग्रन्थों, यथा व्यवहारमयूख ( पृ० ११३), निर्णयसिन्धु ( ३, पूर्वार्ध पृ० २४९ ) एवं धर्मसिन्धु के मत से वसिष्ठ का वचन केवल उस पत्नी की ओर संकेत करता है जिसका पति अभी जीवित है और विधवा बिना पति की आज्ञा के पुत्रीकरण कर सकती है। इस सम्प्रदाय के अनुसार पति का पुत्रीकरण सम्बन्धी अधिकार सदा कल्पित कर लेना चाहिए, जब तक कि उसने स्पष्ट रूप से या आवश्यकतावश दत्तक लेने से अपनी विधवा को मना न कर दिया हो । 'अप्रतिषिद्धं परमतमनुमतं भवति' न्याय के अनुसार दत्तकचन्द्रिका ने मत प्रकाशित किया है कि दूसरे ( या विरोधी ) का मत ( जब तक कि उसने विरोध न किया हो) स्वीकृति रूप में ग्रहण कर लेना चाहिए । गोद लेने के अधिकार-निर्माण, सपत्नियों के पुत्र प्रतिग्रहण ( गोद लेने ) के अधिकार एवं गोद लेने में विधवा के अधिकार की सीमाओं के विषय में बहुत से कानून आधुनिक काल में उद्धृत किये गये हैं, जिन्हें हम स्थानाभाव से यहाँ नहीं दे रहे हैं और न उनकी इस ग्रन्थ में कोई आवश्यकता ही है । गोड ( पुत्र प्रतिग्रहण या दत्तक होने) के योग्य व्यक्ति - जैसा कि प्राचीन ग्रन्थों में आया है कि ('अष्टव ब्राह्मणमुपनयीत) आठवें वर्ष में उपनयन होना चाहिए, व्यवहारमयूख (५० १०८ १९०९) ने इसके आधार पर केवल पुरुष वर्ग को ही दत्तक के योग्य माना है। भारतीय न्यायालयों ने इस बात को मान लिया है। किन्तु दत्तकमीमांसा ( पृ० ११२ - ११६), संस्कारकौस्तुभ ( पृ० १८८) एवं धर्मसिन्धु ने दशरथ की पुत्री शान्ता (जिसे लोमपाद ने गोद लिया था) एवं पृथा ( जो शूर की कन्या थी और जिसे कुन्तिभोज ने गोद लिया था) के उदाहरणों के आधार पर कहा है कि कन्या भी दत्तक रूप में प्रतिगृहीत हो सकती है। पन्नालाल ने अपनी पुस्तक 'कुमायूँ लोकल कस्टम्स' में लिखा है कि कुमायूं में परम्परा के अनुसार कन्या भी गोद ली जाती है । दत्तक पुत्र गोद लेनेवाले की जाति का होना चाहिए । याज्ञ० (२।१३३) ने जो यह व्यवस्था दी है कि बारहों प्रकार के पुत्र पिण्डदान करते हैं और कम से सम्पत्ति के अधिकारी होते हैं, उससे यह प्रकट है कि वे सभी पिता की जाति के होते हैं। मेधातिथि ने स्पष्ट कहा है कि ब्राह्मण क्षत्रिय को भी गोद ले सकता है।' किन्तु मनु के अन्य टीकाकार, यथा - कुल्लूक आदि, तथा व्यवहारमयूख एवं अन्य ग्रन्थों ने लिखा है कि दत्तक समान जाति का होना चाहिए । संस्कारकौस्तुभ ( पृ० १५० ) एवं धर्मसिन्धु आगे जाकर कहते . हैं कि ब्राह्मण भी अपने देश के किसी अन्य वर्ण को गोद ले सकता है। वायुपुराण (९९।१३७ - १३९) ने वर्णन किया है कि दुष्यन्त के पुत्र भरत ने ब्राह्मण बृहस्पति के पुत्र भरद्वाज को गोद लिया, जो क्षत्रिय बन गया । आज के न्यायालयों ने ३. दत्तकश्च पुमानेव भवति न कन्या । ज्ञेयो दत्रिमः सुतः' ( मनु ९।१६८) इति संज्ञासंज्ञिसम्बन्धबोधकवाक्यगतेन स इति सर्वनाम्ना मातापितृकर्तृक - प्रीतिजलगुणकापन्निमित्तकदानकर्मीभूतसजातीयपुंस एव, 'अष्टवर्षं ब्राह्मणमुपनयीत तमध्यापयीत' इति तच्छब्बेनाष्टवर्षं ब्राह्मण्यपुंस्त्वोपनयनादिसंस्कृतस्यैव परामर्शात् । व्य० म० ( १०८ - १०९ ) । और देखिए आपस्तम्बगृह्यसूत्र ( ४ । १० । २ ) एवं धर्मसिन्धु ( ३, पूर्वार्ध, पू० १६२ ) । ४. दत्तकमीमांसा ने इस विषय में स्कन्दपुराण, लिंगपुराण, हरिवंश एवं आदिपर्व से भी उदाहरण दिये हैं। देखिए आदिपर्व (१११॥२-३, जहाँ कुन्ती के प्रतिग्रहण का उल्लेख है) एवं रामायण (बालकाण्ड, अध्याय ९ जहाँ शान्ता का उल्लेख है) । ५. सदृशं न ज्ञातितः कि तहि कुलानुरूपैर्गुणैः । क्षत्रियादिरपि ब्राह्मणस्य दत्तको युज्यते । मेघातिथि ( मनु ९।१६८ ) । विप्रादीनां वर्णानां समानवर्ण एव । तत्रापि देशभेदप्रयुक्तगुर्जरत्वान्प्रत्वाविना समानजातीय एव । धर्मसिन्धु ( ३, पूर्वार्ध, पृ० १५८ ) । ६. तस्माद् दिव्यो भरद्वाजो ब्राह्मण्यात् क्षत्रियोऽभवत् । द्विमुख्यायननामा स स्मृतो द्विपितृकस्तु वै ॥ वायु ० ९९।१५७ ) । लगता है, यहाँ 'द्विमुख्यायन' 'द्वयामुष्यायण' का अपभ्रंश है।
ग्रन्थों, यथा व्यवहारमयूख , निर्णयसिन्धु एवं धर्मसिन्धु के मत से वसिष्ठ का वचन केवल उस पत्नी की ओर संकेत करता है जिसका पति अभी जीवित है और विधवा बिना पति की आज्ञा के पुत्रीकरण कर सकती है। इस सम्प्रदाय के अनुसार पति का पुत्रीकरण सम्बन्धी अधिकार सदा कल्पित कर लेना चाहिए, जब तक कि उसने स्पष्ट रूप से या आवश्यकतावश दत्तक लेने से अपनी विधवा को मना न कर दिया हो । 'अप्रतिषिद्धं परमतमनुमतं भवति' न्याय के अनुसार दत्तकचन्द्रिका ने मत प्रकाशित किया है कि दूसरे का मत स्वीकृति रूप में ग्रहण कर लेना चाहिए । गोद लेने के अधिकार-निर्माण, सपत्नियों के पुत्र प्रतिग्रहण के अधिकार एवं गोद लेने में विधवा के अधिकार की सीमाओं के विषय में बहुत से कानून आधुनिक काल में उद्धृत किये गये हैं, जिन्हें हम स्थानाभाव से यहाँ नहीं दे रहे हैं और न उनकी इस ग्रन्थ में कोई आवश्यकता ही है । गोड के योग्य व्यक्ति - जैसा कि प्राचीन ग्रन्थों में आया है कि आठवें वर्ष में उपनयन होना चाहिए, व्यवहारमयूख ने इसके आधार पर केवल पुरुष वर्ग को ही दत्तक के योग्य माना है। भारतीय न्यायालयों ने इस बात को मान लिया है। किन्तु दत्तकमीमांसा , संस्कारकौस्तुभ एवं धर्मसिन्धु ने दशरथ की पुत्री शान्ता एवं पृथा के उदाहरणों के आधार पर कहा है कि कन्या भी दत्तक रूप में प्रतिगृहीत हो सकती है। पन्नालाल ने अपनी पुस्तक 'कुमायूँ लोकल कस्टम्स' में लिखा है कि कुमायूं में परम्परा के अनुसार कन्या भी गोद ली जाती है । दत्तक पुत्र गोद लेनेवाले की जाति का होना चाहिए । याज्ञशून्य ने जो यह व्यवस्था दी है कि बारहों प्रकार के पुत्र पिण्डदान करते हैं और कम से सम्पत्ति के अधिकारी होते हैं, उससे यह प्रकट है कि वे सभी पिता की जाति के होते हैं। मेधातिथि ने स्पष्ट कहा है कि ब्राह्मण क्षत्रिय को भी गोद ले सकता है।' किन्तु मनु के अन्य टीकाकार, यथा - कुल्लूक आदि, तथा व्यवहारमयूख एवं अन्य ग्रन्थों ने लिखा है कि दत्तक समान जाति का होना चाहिए । संस्कारकौस्तुभ एवं धर्मसिन्धु आगे जाकर कहते . हैं कि ब्राह्मण भी अपने देश के किसी अन्य वर्ण को गोद ले सकता है। वायुपुराण ने वर्णन किया है कि दुष्यन्त के पुत्र भरत ने ब्राह्मण बृहस्पति के पुत्र भरद्वाज को गोद लिया, जो क्षत्रिय बन गया । आज के न्यायालयों ने तीन. दत्तकश्च पुमानेव भवति न कन्या । ज्ञेयो दत्रिमः सुतः' इति संज्ञासंज्ञिसम्बन्धबोधकवाक्यगतेन स इति सर्वनाम्ना मातापितृकर्तृक - प्रीतिजलगुणकापन्निमित्तकदानकर्मीभूतसजातीयपुंस एव, 'अष्टवर्षं ब्राह्मणमुपनयीत तमध्यापयीत' इति तच्छब्बेनाष्टवर्षं ब्राह्मण्यपुंस्त्वोपनयनादिसंस्कृतस्यैव परामर्शात् । व्यशून्य मशून्य । और देखिए आपस्तम्बगृह्यसूत्र एवं धर्मसिन्धु । चार. दत्तकमीमांसा ने इस विषय में स्कन्दपुराण, लिंगपुराण, हरिवंश एवं आदिपर्व से भी उदाहरण दिये हैं। देखिए आदिपर्व एवं रामायण । पाँच. सदृशं न ज्ञातितः कि तहि कुलानुरूपैर्गुणैः । क्षत्रियादिरपि ब्राह्मणस्य दत्तको युज्यते । मेघातिथि । विप्रादीनां वर्णानां समानवर्ण एव । तत्रापि देशभेदप्रयुक्तगुर्जरत्वान्प्रत्वाविना समानजातीय एव । धर्मसिन्धु । छः. तस्माद् दिव्यो भरद्वाजो ब्राह्मण्यात् क्षत्रियोऽभवत् । द्विमुख्यायननामा स स्मृतो द्विपितृकस्तु वै ॥ वायु शून्य निन्यानवे।एक सौ सत्तावन ) । लगता है, यहाँ 'द्विमुख्यायन' 'द्वयामुष्यायण' का अपभ्रंश है।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 में महर्षि पाणिनि धर्मार्थ ट्रस्ट (रजि.) द्वारा गुरुकुल के संचालन के लिए भूमि पूजन अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर किया गया। शहर के गणमान्य एवं विद्वान आचार्यों एवं बटुकों के द्वारा वेद प्रकाश शर्मा ने परिवार सहित भूमि पूजन किया। कार्यक्रम में पधारे परम पूज्य आनंद ब्रह्मचारी जी महाराज ने आशीर्वचन दिया और गुरुकुल भवन निर्माण में सहयोग के लिए भक्तों का आह्वान किया। पूजन के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य रविकान्त दीक्षित ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार हेतु महर्षि पाणिनि वेद वेदांग विद्यापीठ गुरुकुल का संचालन विगत 11 वर्षों से अस्थाई भूखंड पर किया जा रहा है। उन्होंने सभी सज्जनों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि प्रारंभ से ही स्थाई भूमि की आवश्यकता थी जो अनेक महानुभावों के प्रयास से पूर्ण हुई। उन्होंने आग्रह किया कि भवन निर्माण हेतु आप सभी महानुभावों से यथासाध्य सहयोग की अपेक्षा है। पूजन के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीपी नवानी, एसएस शुक्ला , सहसराम त्रिपाठी , ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, श्री राकेश शर्मा, विनीत पांडेय, रोहित हूण एवं गुरुकुल संस्था से जुड़े सभी सदस्य उपस्थित रहे।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर छत्तीस में महर्षि पाणिनि धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा गुरुकुल के संचालन के लिए भूमि पूजन अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर किया गया। शहर के गणमान्य एवं विद्वान आचार्यों एवं बटुकों के द्वारा वेद प्रकाश शर्मा ने परिवार सहित भूमि पूजन किया। कार्यक्रम में पधारे परम पूज्य आनंद ब्रह्मचारी जी महाराज ने आशीर्वचन दिया और गुरुकुल भवन निर्माण में सहयोग के लिए भक्तों का आह्वान किया। पूजन के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य रविकान्त दीक्षित ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार हेतु महर्षि पाणिनि वेद वेदांग विद्यापीठ गुरुकुल का संचालन विगत ग्यारह वर्षों से अस्थाई भूखंड पर किया जा रहा है। उन्होंने सभी सज्जनों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि प्रारंभ से ही स्थाई भूमि की आवश्यकता थी जो अनेक महानुभावों के प्रयास से पूर्ण हुई। उन्होंने आग्रह किया कि भवन निर्माण हेतु आप सभी महानुभावों से यथासाध्य सहयोग की अपेक्षा है। पूजन के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीपी नवानी, एसएस शुक्ला , सहसराम त्रिपाठी , ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, श्री राकेश शर्मा, विनीत पांडेय, रोहित हूण एवं गुरुकुल संस्था से जुड़े सभी सदस्य उपस्थित रहे।
मैनपुरी जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दर्जन भर बच्चे ऐसे आ रहे हैं जिनमें निमोनिया के शुरुआती लक्षण मिलते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती है। ऐसे में मौसम का परिवर्तन सबसे पहले उन्हें अपनी चपेट में लेता है। आगरा, जागरण टीम। मैनपुरी में सर्दी की शुरुआत के साथ मासूम बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। दिसंबर की शुरुआत के साथ सर्दी, जुकाम और बुखार की वजह से इसकी चपेट में आने वाले बच्चों की संख्या में भी इजाफा हो गया है। पिछले 30 दिनों में लगभग दर्जन भर बच्चों की निमोनिया की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। मैनपुरी जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दर्जन भर बच्चे ऐसे आ रहे हैं, जिनमें निमोनिया के शुरुआती लक्षण मिलते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डा. डीके शाक्य का कहना है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती है। ऐसे में मौसम का परिवर्तन सबसे पहले उन्हें अपनी चपेट में लेता है। सर्दी में जुकाम की वजह से जकडऩ बढ़ती है, जिससे बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है। एलाऊ थाना क्षेत्र के गांव अंबरपुर निवासी दीपक के तीन माह के पुत्र उमेश कुछ दिनों से बुखार से बीमार चल रहे थे। स्वजन झोलाछाप से उपचार दिला रहे थे। 17 दिसंबर को तबियत ज्यादा बिगडऩे के बाद स्वजन बालक को इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। कस्बा एलाऊ निवासी सोमवीर के आठ माह के पुत्र यश को भी बुखार और जुकाम की शिकायत थी। स्वजन शुरुआत में तो झोलाछाप से उपचार दिलाते रहे। स्थिति बिगड़ी तो 14 दिसंबर को इमरजेंसी लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया था। जिला अस्पताल में व्यवस्था ज्यादा बेहतर नहीं है। इमरजेंसी में गंभीर हालत में आने वाले बच्चों के उपचार के लिए कोई भी बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। ऐसे में ईएमओ द्वारा ज्यादातर को रेफर कर दिया जाता है। कई बार उपचार में देर की वजह से पीडि़त बच्चों की मौत भी हो जाती है। जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में प्रतिदिन ऐसे कई बच्चे आते हैं, जिनकी हालत निमोनिया या बुखार की वजह से गंभीर होती है। ऐसे सभी गंभीर बच्चों को भर्ती कर उपचार देने के लिए पीकू वार्ड की सुविधा तो है, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा अभी तक किसी भी बच्चे को यहां भर्ती नहीं किया गया है। जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी पर बच्चों को भर्ती करने की सुविधा है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर झोलाछाप के पास न जाकर जिला अस्पताल ही आएं। हमारे यहां अभी तक किसी भी बच्चे की निमोनिया से मौत नहीं हुई है। जो भी इमरजेंसी में मृत आए, स्वजन उन्हें झोलाछाप से उपचार दिलाते रहे हैं। डा. पीपी सिंह, सीएमओ मैनपुरी।
मैनपुरी जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दर्जन भर बच्चे ऐसे आ रहे हैं जिनमें निमोनिया के शुरुआती लक्षण मिलते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती है। ऐसे में मौसम का परिवर्तन सबसे पहले उन्हें अपनी चपेट में लेता है। आगरा, जागरण टीम। मैनपुरी में सर्दी की शुरुआत के साथ मासूम बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। दिसंबर की शुरुआत के साथ सर्दी, जुकाम और बुखार की वजह से इसकी चपेट में आने वाले बच्चों की संख्या में भी इजाफा हो गया है। पिछले तीस दिनों में लगभग दर्जन भर बच्चों की निमोनिया की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। मैनपुरी जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन दर्जन भर बच्चे ऐसे आ रहे हैं, जिनमें निमोनिया के शुरुआती लक्षण मिलते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डा. डीके शाक्य का कहना है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती है। ऐसे में मौसम का परिवर्तन सबसे पहले उन्हें अपनी चपेट में लेता है। सर्दी में जुकाम की वजह से जकडऩ बढ़ती है, जिससे बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है। एलाऊ थाना क्षेत्र के गांव अंबरपुर निवासी दीपक के तीन माह के पुत्र उमेश कुछ दिनों से बुखार से बीमार चल रहे थे। स्वजन झोलाछाप से उपचार दिला रहे थे। सत्रह दिसंबर को तबियत ज्यादा बिगडऩे के बाद स्वजन बालक को इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। कस्बा एलाऊ निवासी सोमवीर के आठ माह के पुत्र यश को भी बुखार और जुकाम की शिकायत थी। स्वजन शुरुआत में तो झोलाछाप से उपचार दिलाते रहे। स्थिति बिगड़ी तो चौदह दिसंबर को इमरजेंसी लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया था। जिला अस्पताल में व्यवस्था ज्यादा बेहतर नहीं है। इमरजेंसी में गंभीर हालत में आने वाले बच्चों के उपचार के लिए कोई भी बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। ऐसे में ईएमओ द्वारा ज्यादातर को रेफर कर दिया जाता है। कई बार उपचार में देर की वजह से पीडि़त बच्चों की मौत भी हो जाती है। जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में प्रतिदिन ऐसे कई बच्चे आते हैं, जिनकी हालत निमोनिया या बुखार की वजह से गंभीर होती है। ऐसे सभी गंभीर बच्चों को भर्ती कर उपचार देने के लिए पीकू वार्ड की सुविधा तो है, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा अभी तक किसी भी बच्चे को यहां भर्ती नहीं किया गया है। जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी पर बच्चों को भर्ती करने की सुविधा है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर झोलाछाप के पास न जाकर जिला अस्पताल ही आएं। हमारे यहां अभी तक किसी भी बच्चे की निमोनिया से मौत नहीं हुई है। जो भी इमरजेंसी में मृत आए, स्वजन उन्हें झोलाछाप से उपचार दिलाते रहे हैं। डा. पीपी सिंह, सीएमओ मैनपुरी।
साल 2007 के बाद से अब तक चीन के 16 नागरिक भारत की सदस्यता ले चुके हैं। केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में ये जानकारी दी है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने बताया कि 10 एप्लिकेशन अभी लंबित हैं। नई दिल्ली, एएनआइ। पिछले कुछ सालों में चीन के 16 नागरिकों (Chinese Nationals) ने भारत की सदस्यता ली है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा (Budget Session 2022) में बुधवार को ये जानकारी दी है। नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में कहा कि साल 2007 से अब तक चीन के 16 नागरिक भारत की सदस्यता ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि चीनी नागरिकों की 10 एप्लिकेशन अभी लंबित हैं। बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने इस पर सवाल पूछा था। केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में बताया, 'ऑनलाइन नागरिकता मॉड्यूल में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीनी नागरिकों के 10 आवेदन नागरिकता के लिए लंबित हैं। इसके अलावा, 16 चीनी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है। ' उन्होंने आगे कहा कि केवल राष्ट्रीयता के आधार पर आंकड़े रखे जाते हैं। बता दें कि बजट सत्र के दूसरे चरण का आज तीसरा दिन है। इसके अलावा नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि पिछले एक साल के दौरान देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए 45,314 मामले दर्ज किए गए। पिछले एक साल के दौरान देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए गिरफ्तार किए गए 99. 36% भारतीयों के साथ 61,882 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि, 0. 64% विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को लोकसभा में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। सोनिया गांधी ने कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसी वैश्विक कंपनियों का उपयोग नेताओं, राजनीतिक दलों द्वारा पालिटिकल नरेटिव को आकार देने के लिए किया जा रहा है। यह बार-बार नोटिस में आया है कि वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियां सभी पार्टियों को समान अवसर प्रदान नहीं कर रही हैं।
साल दो हज़ार सात के बाद से अब तक चीन के सोलह नागरिक भारत की सदस्यता ले चुके हैं। केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में ये जानकारी दी है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने बताया कि दस एप्लिकेशन अभी लंबित हैं। नई दिल्ली, एएनआइ। पिछले कुछ सालों में चीन के सोलह नागरिकों ने भारत की सदस्यता ली है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बुधवार को ये जानकारी दी है। नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में कहा कि साल दो हज़ार सात से अब तक चीन के सोलह नागरिक भारत की सदस्यता ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि चीनी नागरिकों की दस एप्लिकेशन अभी लंबित हैं। बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने इस पर सवाल पूछा था। केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में बताया, 'ऑनलाइन नागरिकता मॉड्यूल में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीनी नागरिकों के दस आवेदन नागरिकता के लिए लंबित हैं। इसके अलावा, सोलह चीनी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है। ' उन्होंने आगे कहा कि केवल राष्ट्रीयता के आधार पर आंकड़े रखे जाते हैं। बता दें कि बजट सत्र के दूसरे चरण का आज तीसरा दिन है। इसके अलावा नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि पिछले एक साल के दौरान देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए पैंतालीस,तीन सौ चौदह मामले दर्ज किए गए। पिछले एक साल के दौरान देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए गिरफ्तार किए गए निन्यानवे. छत्तीस% भारतीयों के साथ इकसठ,आठ सौ बयासी लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि, शून्य. चौंसठ% विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को लोकसभा में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। सोनिया गांधी ने कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसी वैश्विक कंपनियों का उपयोग नेताओं, राजनीतिक दलों द्वारा पालिटिकल नरेटिव को आकार देने के लिए किया जा रहा है। यह बार-बार नोटिस में आया है कि वैश्विक सोशल मीडिया कंपनियां सभी पार्टियों को समान अवसर प्रदान नहीं कर रही हैं।
अन्य देश मनुष्यों की जन्मभूमि है, यह भारत देश मानवता की जन्मभूमि है। चन्द्रगुप्त शुभे, यह सुनकर मैं चकित हो गया हूँ। और मैं मर्माहत हो गयी हूँ - चन्द्रगुप्त मुझे पूर्ण विश्वास था कि यहाँ कि क्षत्रप पिताजी नियुक्त होगे और मैं अलेग्जेन्द्रिया में समीप ही रहकर भारत को देख सकूँगी । परन्तु वैसा न हुआ। सम्राट में फिलिप्स को यहाँ का शासक नियुक्त कर दिया है । (अकस्मात् फिलिप्स का प्रवेश) फिलिप्स तो बुरा क्या है कुमारी। सिल्यूकस के क्षत्रप न होने पर भी कार्नेलिया यहाँ की शासिका हो सकती है। फिलिप्स अनुचर होगा (चन्द्रगुप्त को देखकर फिर वही भारतीय युवक ! चन्द्रगुप्त सावधान यवन! हम लोग एक बार एक दूसरे की परीक्षा से चुके है । ऊँह! तुमसे मेरा सम्बन्ध ही क्या है, परन्तुऔर मुझसे भी नहीं, फिलिप्स ! मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे न बोलो।
अन्य देश मनुष्यों की जन्मभूमि है, यह भारत देश मानवता की जन्मभूमि है। चन्द्रगुप्त शुभे, यह सुनकर मैं चकित हो गया हूँ। और मैं मर्माहत हो गयी हूँ - चन्द्रगुप्त मुझे पूर्ण विश्वास था कि यहाँ कि क्षत्रप पिताजी नियुक्त होगे और मैं अलेग्जेन्द्रिया में समीप ही रहकर भारत को देख सकूँगी । परन्तु वैसा न हुआ। सम्राट में फिलिप्स को यहाँ का शासक नियुक्त कर दिया है । फिलिप्स तो बुरा क्या है कुमारी। सिल्यूकस के क्षत्रप न होने पर भी कार्नेलिया यहाँ की शासिका हो सकती है। फिलिप्स अनुचर होगा (चन्द्रगुप्त को देखकर फिर वही भारतीय युवक ! चन्द्रगुप्त सावधान यवन! हम लोग एक बार एक दूसरे की परीक्षा से चुके है । ऊँह! तुमसे मेरा सम्बन्ध ही क्या है, परन्तुऔर मुझसे भी नहीं, फिलिप्स ! मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे न बोलो।
पंजाब रेजिमेंट सेंटर द्वारा पांच जनवरी, 2021 को डीएससी में पूर्व सैनिकों की भर्ती हेतु भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। यह जानकारी जिला सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि भर्ती में भाग लेने के लिए भूतपूर्व सैनिकों को चार जनवरी, 2021 को रेजीमेंट सेंटर में रिपोर्ट करना होगा। उन्होंने बताया कि पंजाब रेजीमेंट के सेवानिवृत्त जवान (सैनिक सामान्य ड्यूटी/लिपिक), जिनकी आयु 46 वर्ष से कम हो और जिन्हें पेंशन पर गए हुए अभी दो वर्ष से कम समय हुआ हो, इस भर्ती रैली में भाग ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि भर्ती में भाग लेने के लिए आवेदक अपने साथ आर्मी व सिविल के प्रमाण पत्र, आर्मी डिस्चार्ज बुक और 16 पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाएं। इसके अलावा यदि कोई कृत्रिम दांत अथवा चश्मा प्रयोग करता हो, तो वे भी साथ ले जाने होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती से संबंधित अन्य व विस्तृत जानकारी के लिए जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
पंजाब रेजिमेंट सेंटर द्वारा पांच जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को डीएससी में पूर्व सैनिकों की भर्ती हेतु भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। यह जानकारी जिला सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि भर्ती में भाग लेने के लिए भूतपूर्व सैनिकों को चार जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को रेजीमेंट सेंटर में रिपोर्ट करना होगा। उन्होंने बताया कि पंजाब रेजीमेंट के सेवानिवृत्त जवान , जिनकी आयु छियालीस वर्ष से कम हो और जिन्हें पेंशन पर गए हुए अभी दो वर्ष से कम समय हुआ हो, इस भर्ती रैली में भाग ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि भर्ती में भाग लेने के लिए आवेदक अपने साथ आर्मी व सिविल के प्रमाण पत्र, आर्मी डिस्चार्ज बुक और सोलह पासपोर्ट साइज फोटो साथ ले जाएं। इसके अलावा यदि कोई कृत्रिम दांत अथवा चश्मा प्रयोग करता हो, तो वे भी साथ ले जाने होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती से संबंधित अन्य व विस्तृत जानकारी के लिए जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
Photo Se Video Kaise Banaye Song Ke Sath Online यदि आप भी अपनी Image से कोई अच्छा सा वीडियो बनाने की सोच रहे हैं तो इस पोस्ट में हम आपको इसका सबसे आसान तरीका बताने जा रहे हैं। कुछ समय पहले जब हमें कई Photo जोड़कर Video बनाना होता था तब इसके लिए कंप्यूटर की आवश्यकता पड़ती थी लेकिन अब यह काम अपने मोबाइल से भी कर सकते हैं। जब भी लोग कहीं घूमने जाते हैं तो वहां की यादों को संजोये रखने के लिए फोटो अवश्य क्लिक करते हैं। और वर्तमान में सेल्फी काफी लोकप्रिय है क्योंकि ज्यादातर लोग सेल्फी लेना पसंद करते हैं। इन फोटो को देखकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। इन्हें देखने का मजा तब दौगुना हो जाता है जब फोटो की वीडियो दिखने लग जाए। साथ बैकग्राउंड में कोई song गाना बजने लग जाए। अगर आप भी जानना चाहते है कि Photo Se Video Banane Wala App With Song तो इस पोस्ट को ध्यानपूर्वक पढ़ें। इसमें हम आपको एंड्राइड और जिओ फोन दोनों का तरीका बताने जा रहे हैं। आज के समय इंटरनेट में कई सारे Apps और वेबसाइट आ गए जिनकी मदद से हम कुछ मिनिट के अन्दर अपना वीडियो क्रिएट कर सकते हैं। Status, Slideshow या फिर अन्य वीडियोस बनाने के लिए काफी लोग इन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो चलिए जानते हैं ऑनलाइन फोटो से वीडियो कैसे बनाएं उम्मीद करते हैं यह आर्टिकल आपको पसंद आएगा। जहाँ तक एंड्राइड फोन की बात करे तो इसमें आपको Video बनाने के बहुत सारे ऑप्शन मिल जाते हैं। गूगल प्लेस्टोर में आपको सैकड़ों फोटो से वीडियो बनाने का तरीका मिल जायेंगे लेकिन इनमें कुछ चुनिंदा एप्लीकेशन ही अच्छे से काम करते हैं। यहाँ हम जिस ऐप के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम Music Video Maker है जिसे आप यहाँ से Install कर सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर में इस अप्प को 5 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। साथ ही इसे 4. 3 की शानदार रेटिंग मिली हुई है Photo से स्लाइडशो वीडियो बनाने के मामले में यह काफी लोकप्रिय ऐप है। तो इसे कैसे उपयोग करना है उसकी जानकारी नीचे दी गयी है। 1. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या यहाँ से Music Video Maker Slideshow को डाउनलोड करके इंस्टाल करे। 2. इसके होमपेज में आपको वीडियो बनाने के लिए एक प्लस का आइकॉन दिखाई देगा इस पर क्लिक करें। 3. अब यह कुछ परमिशन मांगेगा आपको सभी Allow कर देना है। 4. इसके बाद आपकी मोबाइल की गैलरी ओपन हो जाएगी आपको जिन भी फोटो का वीडियो बनाना है उन्हें सेलेक्ट करके Next पर क्लिक करिए। 5. वीडियो पर गाना लगाने के लिए आपको म्यूजिक के आइकॉन पर क्लिक करना है। 6. इससे आप इस ऐप में मौजूद म्यूजिक को लगा सकते हैं या फिर My Music में जाकर अपने फोन में मौजूद Song को भी सेट कर सकते हैं। 7. सब कुछ एडिट करने के बाद Done पर क्लिक करे इससे यह वीडियो की क्वालिटी सेलेक्ट करने के लिए कहेगा क्वालिटी सेलेक्ट करते ही यह कुछ सेकंड के अन्दर क्रिएट होकर आपके गैलरी में Save हो जायेगा। इस तरह आप महज कुछ सेकंड के अन्दर अपनी इमेज से पर्सनल वीडियो बना सकते हैं बिना किसी कंप्यूटर की सहायता से। यदि आप ऑनलाइन फोटो से वीडियो बनाना चाहते हैं तो आपको Video बनाने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट की सहायता लेनी होगी। ऐसी ही एक वेबसाइट का नाम imagetovideo. com है इसे कैसे इस्तेमाल करना है उसकी जानकारी नीचे दी गयी है। - सबसे पहले अपने जिओ फोन का इंटरनेट डाटा ऑन करें। - अब अपने ब्राउज़र में जाए और वहां imagetovideo. com वेबसाइट को सर्च करके ओपन करले। - इसके होमपेज में आपको इमेज अपलोड करने का ऑप्शन दिखाई देगा जिसपर क्लिक करके आप अधिकतम 30 फोटो अपलोड कर सकते हैं। - इसके बाद आपको अपना कोई पसंदीदा अपने मोबाइल से Song अपलोड करना है। - अब आपको क्रिएट वीडियो पर क्लिक करना है। इससे कुछ सेकंड की प्रोसेस होगी और आपका वीडियो बनकर तैयार हो जायेगा जिसके बाद आपको डाउनलोड करने का बटन मिल जायेगा। फोटो से वीडियो बनाने वाला एप्स कौन सा है? Music Video Maker App से वीडियो बनाना बहुत आसान है हालाकि इसमें आप ज्यादा क्रिएटिविटी नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर आप अपने फोटो के वीडियो को क्रिएटिव बनाना चाहते हैं तो KineMaster, PowerDirector का इस्तेमाल कर सकते हैं। फोटो से वीडियो बनाने में कितना समय लगता है? अगर आप स्लाइडशो एप जैसे Music Video Maker का इस्तेमाल करते हैं इसमें आप कुछ मिनिट के अंदर अपना वीडियो बना सकते हैं। क्या फोटो से वीडियो बनाने में पैसे लगते हैं? जी नहीं, प्लेस्टोर में मौजूद ज्यादातर वीडियो बनाने वाले एप्स फ्री हैं इसके लिए आपको कोई पैसे देने की जरुरत नहीं है हालाकि प्लेस्टोर में पैसे वाले एप भी हैं लेकिन आपको उनकी जरुरत नहीं पड़ेगी। फोटो से वीडियो बनाने वाली वेबसाइट कौन सी है? वैसे तो वीडियो बनाने के लिए आज कोई वेबसाइट का इस्तेमाल नहीं करता है लेकिन फिर भी आप clideo. com या canva. com का इस्तेमाल कर सकते हैं। फोटो से वीडियो बनाने के लिए वेबसाइट और एप में कौन बेस्ट है? वीडियो बनाने के लिए एप सबसे बेस्ट विकल्प है क्योंकि वेबसाइट में एडिट करने के लिए इंटरनेट और ज्यादा समय लगता है लेकिन एप में बहुत कम समय में अच्छी से अच्छी वीडियो बना सकते हैं। तो अब आप Photo Se Video Banane Wala App जान गए होंगे इस प्रोसेस में इंटरनेट कनेक्शन होना आवश्यक है ऐसे में आपको सबसे पहले अपने मोबाइल इंटरनेट चालू कर लेना चाहिए। इसके बाद ही Image से वीडियोज क्रिएट करना चाहिए। अगर आपके पास एंड्राइड फोन है तो आपके लिए Music Video Maker Slideshow App काफी काम आएगा। तो उम्मीद करते हैं यह पोस्ट आपके लिए हेल्पफुल साबित होगा अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे शेयर अवश्य करें।
Photo Se Video Kaise Banaye Song Ke Sath Online यदि आप भी अपनी Image से कोई अच्छा सा वीडियो बनाने की सोच रहे हैं तो इस पोस्ट में हम आपको इसका सबसे आसान तरीका बताने जा रहे हैं। कुछ समय पहले जब हमें कई Photo जोड़कर Video बनाना होता था तब इसके लिए कंप्यूटर की आवश्यकता पड़ती थी लेकिन अब यह काम अपने मोबाइल से भी कर सकते हैं। जब भी लोग कहीं घूमने जाते हैं तो वहां की यादों को संजोये रखने के लिए फोटो अवश्य क्लिक करते हैं। और वर्तमान में सेल्फी काफी लोकप्रिय है क्योंकि ज्यादातर लोग सेल्फी लेना पसंद करते हैं। इन फोटो को देखकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। इन्हें देखने का मजा तब दौगुना हो जाता है जब फोटो की वीडियो दिखने लग जाए। साथ बैकग्राउंड में कोई song गाना बजने लग जाए। अगर आप भी जानना चाहते है कि Photo Se Video Banane Wala App With Song तो इस पोस्ट को ध्यानपूर्वक पढ़ें। इसमें हम आपको एंड्राइड और जिओ फोन दोनों का तरीका बताने जा रहे हैं। आज के समय इंटरनेट में कई सारे Apps और वेबसाइट आ गए जिनकी मदद से हम कुछ मिनिट के अन्दर अपना वीडियो क्रिएट कर सकते हैं। Status, Slideshow या फिर अन्य वीडियोस बनाने के लिए काफी लोग इन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो चलिए जानते हैं ऑनलाइन फोटो से वीडियो कैसे बनाएं उम्मीद करते हैं यह आर्टिकल आपको पसंद आएगा। जहाँ तक एंड्राइड फोन की बात करे तो इसमें आपको Video बनाने के बहुत सारे ऑप्शन मिल जाते हैं। गूगल प्लेस्टोर में आपको सैकड़ों फोटो से वीडियो बनाने का तरीका मिल जायेंगे लेकिन इनमें कुछ चुनिंदा एप्लीकेशन ही अच्छे से काम करते हैं। यहाँ हम जिस ऐप के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम Music Video Maker है जिसे आप यहाँ से Install कर सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर में इस अप्प को पाँच करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। साथ ही इसे चार. तीन की शानदार रेटिंग मिली हुई है Photo से स्लाइडशो वीडियो बनाने के मामले में यह काफी लोकप्रिय ऐप है। तो इसे कैसे उपयोग करना है उसकी जानकारी नीचे दी गयी है। एक. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या यहाँ से Music Video Maker Slideshow को डाउनलोड करके इंस्टाल करे। दो. इसके होमपेज में आपको वीडियो बनाने के लिए एक प्लस का आइकॉन दिखाई देगा इस पर क्लिक करें। तीन. अब यह कुछ परमिशन मांगेगा आपको सभी Allow कर देना है। चार. इसके बाद आपकी मोबाइल की गैलरी ओपन हो जाएगी आपको जिन भी फोटो का वीडियो बनाना है उन्हें सेलेक्ट करके Next पर क्लिक करिए। पाँच. वीडियो पर गाना लगाने के लिए आपको म्यूजिक के आइकॉन पर क्लिक करना है। छः. इससे आप इस ऐप में मौजूद म्यूजिक को लगा सकते हैं या फिर My Music में जाकर अपने फोन में मौजूद Song को भी सेट कर सकते हैं। सात. सब कुछ एडिट करने के बाद Done पर क्लिक करे इससे यह वीडियो की क्वालिटी सेलेक्ट करने के लिए कहेगा क्वालिटी सेलेक्ट करते ही यह कुछ सेकंड के अन्दर क्रिएट होकर आपके गैलरी में Save हो जायेगा। इस तरह आप महज कुछ सेकंड के अन्दर अपनी इमेज से पर्सनल वीडियो बना सकते हैं बिना किसी कंप्यूटर की सहायता से। यदि आप ऑनलाइन फोटो से वीडियो बनाना चाहते हैं तो आपको Video बनाने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट की सहायता लेनी होगी। ऐसी ही एक वेबसाइट का नाम imagetovideo. com है इसे कैसे इस्तेमाल करना है उसकी जानकारी नीचे दी गयी है। - सबसे पहले अपने जिओ फोन का इंटरनेट डाटा ऑन करें। - अब अपने ब्राउज़र में जाए और वहां imagetovideo. com वेबसाइट को सर्च करके ओपन करले। - इसके होमपेज में आपको इमेज अपलोड करने का ऑप्शन दिखाई देगा जिसपर क्लिक करके आप अधिकतम तीस फोटो अपलोड कर सकते हैं। - इसके बाद आपको अपना कोई पसंदीदा अपने मोबाइल से Song अपलोड करना है। - अब आपको क्रिएट वीडियो पर क्लिक करना है। इससे कुछ सेकंड की प्रोसेस होगी और आपका वीडियो बनकर तैयार हो जायेगा जिसके बाद आपको डाउनलोड करने का बटन मिल जायेगा। फोटो से वीडियो बनाने वाला एप्स कौन सा है? Music Video Maker App से वीडियो बनाना बहुत आसान है हालाकि इसमें आप ज्यादा क्रिएटिविटी नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर आप अपने फोटो के वीडियो को क्रिएटिव बनाना चाहते हैं तो KineMaster, PowerDirector का इस्तेमाल कर सकते हैं। फोटो से वीडियो बनाने में कितना समय लगता है? अगर आप स्लाइडशो एप जैसे Music Video Maker का इस्तेमाल करते हैं इसमें आप कुछ मिनिट के अंदर अपना वीडियो बना सकते हैं। क्या फोटो से वीडियो बनाने में पैसे लगते हैं? जी नहीं, प्लेस्टोर में मौजूद ज्यादातर वीडियो बनाने वाले एप्स फ्री हैं इसके लिए आपको कोई पैसे देने की जरुरत नहीं है हालाकि प्लेस्टोर में पैसे वाले एप भी हैं लेकिन आपको उनकी जरुरत नहीं पड़ेगी। फोटो से वीडियो बनाने वाली वेबसाइट कौन सी है? वैसे तो वीडियो बनाने के लिए आज कोई वेबसाइट का इस्तेमाल नहीं करता है लेकिन फिर भी आप clideo. com या canva. com का इस्तेमाल कर सकते हैं। फोटो से वीडियो बनाने के लिए वेबसाइट और एप में कौन बेस्ट है? वीडियो बनाने के लिए एप सबसे बेस्ट विकल्प है क्योंकि वेबसाइट में एडिट करने के लिए इंटरनेट और ज्यादा समय लगता है लेकिन एप में बहुत कम समय में अच्छी से अच्छी वीडियो बना सकते हैं। तो अब आप Photo Se Video Banane Wala App जान गए होंगे इस प्रोसेस में इंटरनेट कनेक्शन होना आवश्यक है ऐसे में आपको सबसे पहले अपने मोबाइल इंटरनेट चालू कर लेना चाहिए। इसके बाद ही Image से वीडियोज क्रिएट करना चाहिए। अगर आपके पास एंड्राइड फोन है तो आपके लिए Music Video Maker Slideshow App काफी काम आएगा। तो उम्मीद करते हैं यह पोस्ट आपके लिए हेल्पफुल साबित होगा अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे शेयर अवश्य करें।
जिसकी डोज थी, 10 माइक्रोग्राम और 100 माइक्रोग्राम। जिन बंदरों को वैक्सीनेट किया गया, उन्होंने वायरस को मारने वाले हाइल लेवल के एंटीबॉडी का निर्माण किया जो कोशिकाओं पर आक्रमण के उपयोग के लिए सार्स-कोव-2 वायरस के एक हिस्से पर हमला करते हैं। उस वैक्सीन ने वायरस को जानवरों के फेफड़ों में प्रवेश करने और उन्हें बहुत बीमार होने से रोक दिया था। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, मॉडर्ना एनिमल स्टडी में 8 बंदरों के तीन समहूों को या तो वैक्सीन दी गई या फिर प्लेसीबो। वहीँ स्टडी के मुताबिक, वैक्सीन ने वायरस को बंदर के नाक में कॉपी करने से रोका और यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इससे संक्रमण का दूसरों तक फैलना रुक जाता है। कोरोना के कहर से बचने की एक मात्र उम्मीद वैक्सीन को ही माना जा रहा है, जिसके चलते लोगों को इससे सबसे अधिक उम्मीद है. बता दें कि वैक्सीन को लेकर एक बार फिर से बड़ी उम्मीद जगी है। कोरोना वायरस को लेकर मॉडर्ना की वैक्सीन बंदरों पर हुए ट्रायल में पूरी तरह से कारगर साबित हुई है।
जिसकी डोज थी, दस माइक्रोग्राम और एक सौ माइक्रोग्राम। जिन बंदरों को वैक्सीनेट किया गया, उन्होंने वायरस को मारने वाले हाइल लेवल के एंटीबॉडी का निर्माण किया जो कोशिकाओं पर आक्रमण के उपयोग के लिए सार्स-कोव-दो वायरस के एक हिस्से पर हमला करते हैं। उस वैक्सीन ने वायरस को जानवरों के फेफड़ों में प्रवेश करने और उन्हें बहुत बीमार होने से रोक दिया था। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, मॉडर्ना एनिमल स्टडी में आठ बंदरों के तीन समहूों को या तो वैक्सीन दी गई या फिर प्लेसीबो। वहीँ स्टडी के मुताबिक, वैक्सीन ने वायरस को बंदर के नाक में कॉपी करने से रोका और यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इससे संक्रमण का दूसरों तक फैलना रुक जाता है। कोरोना के कहर से बचने की एक मात्र उम्मीद वैक्सीन को ही माना जा रहा है, जिसके चलते लोगों को इससे सबसे अधिक उम्मीद है. बता दें कि वैक्सीन को लेकर एक बार फिर से बड़ी उम्मीद जगी है। कोरोना वायरस को लेकर मॉडर्ना की वैक्सीन बंदरों पर हुए ट्रायल में पूरी तरह से कारगर साबित हुई है।
नई दिल्ली. केंट के ऑलराउंडर डैरेन स्टीवंस (Darren Stevens) काउंटी चैंपियनशिप में ग्लैमॉर्गन (Kent Vs Glamorgan) के खिलाफ ताबड़तोड़ 190 रनों पारी खेली है. 45 साल के डैरेन स्टीवंस और तेज गेंदबाज मिगुएल कमिंस के बीच 9वें विकेट लिए 166 रनों की साझेदारी हुई जिसमें कमिंस ने सिर्फ एक रन का योगदान दिया है. यह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे बड़ी साझेदारी है जिसमें किसी एक खिलाड़ी ने 90 फीसदी से ज्यादा रन बनाए. इस साझेदारी में पांच रन अतिरिक्त थे. डैरेन स्टीवंस ने 166 रनों की साझेदारी में 160 रन (96. 39%) का योगदान दिया. ग्लैमॉर्गन के खिलाफ एक समय केंट की टीम 128 रन पर 8 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी. सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने डैरेन स्टीवंस ने 190 रन बनाने के लिए महज 149 गेंद खेली. इस बल्लेबाज ने 15 छक्के और 15 चौके लगाए. उनकी इस पारी की बदौलत केंट की टीम पहली पारी में 307 रन बनाने में सफल रही. दिलचस्प बात यह रही है कि 11वें नंबर पर उतरे मैथ्यू क्विन ने पहले ही गेंद पर छक्का जड़ा और सात रन बनाए जबकि करीब 30 ओवर तक क्रीज पर रहने वाले कमिंस ने भी सात रन (61 गेंद) ही बनाए. मार्नस लाबुशेन ने कमिंस को पगबाधा आउट कर केंट की पारी को समेटा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐसी साझेदारी साल 1911 में देखने को मिली थी जब टेड एलिस्टन और विलियम रिले के बीच 152 रनों की साझेदारी हुई थी और उसमें टेड ने अकेले 142 ठोके थे. इस साझेदारी के बारे में जॉन अर्लाट ने एक किताब में जिक्र किया है. इस मैच में केंट की तरफ इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी सैम बिलिंग्स और जैक क्राउले भी खेल रहे थे. लेकिन ग्लोमॉर्गन के गेंदबाजों के आगे केंट के बल्लेबाज बेदम नजर आए. विकेटकीपर ऑली रॉबिंसन ने 43 रन बनाए लेकिन इसके बाद जैक क्रॉले 0, कप्तान सैम बिलिंग्स सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए. देखते ही देखते केंट के बल्लेबाजों ने माइकल नेसर और गुग्टेन के आगे घुटने टेक दिये. नेसर और गुग्टेन ने चार-चार विकेट लिए.
नई दिल्ली. केंट के ऑलराउंडर डैरेन स्टीवंस काउंटी चैंपियनशिप में ग्लैमॉर्गन के खिलाफ ताबड़तोड़ एक सौ नब्बे रनों पारी खेली है. पैंतालीस साल के डैरेन स्टीवंस और तेज गेंदबाज मिगुएल कमिंस के बीच नौवें विकेट लिए एक सौ छयासठ रनों की साझेदारी हुई जिसमें कमिंस ने सिर्फ एक रन का योगदान दिया है. यह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे बड़ी साझेदारी है जिसमें किसी एक खिलाड़ी ने नब्बे फीसदी से ज्यादा रन बनाए. इस साझेदारी में पांच रन अतिरिक्त थे. डैरेन स्टीवंस ने एक सौ छयासठ रनों की साझेदारी में एक सौ साठ रन का योगदान दिया. ग्लैमॉर्गन के खिलाफ एक समय केंट की टीम एक सौ अट्ठाईस रन पर आठ विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी. सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने डैरेन स्टीवंस ने एक सौ नब्बे रन बनाने के लिए महज एक सौ उनचास गेंद खेली. इस बल्लेबाज ने पंद्रह छक्के और पंद्रह चौके लगाए. उनकी इस पारी की बदौलत केंट की टीम पहली पारी में तीन सौ सात रन बनाने में सफल रही. दिलचस्प बात यह रही है कि ग्यारहवें नंबर पर उतरे मैथ्यू क्विन ने पहले ही गेंद पर छक्का जड़ा और सात रन बनाए जबकि करीब तीस ओवर तक क्रीज पर रहने वाले कमिंस ने भी सात रन ही बनाए. मार्नस लाबुशेन ने कमिंस को पगबाधा आउट कर केंट की पारी को समेटा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐसी साझेदारी साल एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में देखने को मिली थी जब टेड एलिस्टन और विलियम रिले के बीच एक सौ बावन रनों की साझेदारी हुई थी और उसमें टेड ने अकेले एक सौ बयालीस ठोके थे. इस साझेदारी के बारे में जॉन अर्लाट ने एक किताब में जिक्र किया है. इस मैच में केंट की तरफ इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी सैम बिलिंग्स और जैक क्राउले भी खेल रहे थे. लेकिन ग्लोमॉर्गन के गेंदबाजों के आगे केंट के बल्लेबाज बेदम नजर आए. विकेटकीपर ऑली रॉबिंसन ने तैंतालीस रन बनाए लेकिन इसके बाद जैक क्रॉले शून्य, कप्तान सैम बिलिंग्स सिर्फ ग्यारह रन बनाकर आउट हो गए. देखते ही देखते केंट के बल्लेबाजों ने माइकल नेसर और गुग्टेन के आगे घुटने टेक दिये. नेसर और गुग्टेन ने चार-चार विकेट लिए.
ये मामला पिथौरागढ़ जिले के बांसपटान के गोदीगाड़ इलाके के पास हुआ. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह को एक यात्री वाहन गोदीगाड़ पुल के पास खाई में गिर गया. उत्तराखंड (Uttarakhand) के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. जहां एक वाहन खाई में गिर गया. इस हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई है. जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं, तीन घायलों को जिले के सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. जहां उनका इलाज जारी है. वहीं, एक्सीडेंट की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों बाहर निकाला गया. दरअसल, ये मामला पिथौरागढ़ जिले के बांसपटान के गोदीगाड़ इलाके के पास हुआ. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह को एक यात्री वाहन गोदीगाड़ पुल के पास खाई में गिर गया. वहीं, इस घटना में तीन महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. घटना की सूचना मिलने पर बेड़ीनाग थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. इस दौरान पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी घायलों को एंबुलेंस और अन्य सरकारी वाहनों से बेड़ीनाग जिला अस्पताल पहुंचाया गया. बता दें कि इस मामले में पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहां पर डॉक्टरों ने रश्मि चंद, गीता चंद रहने वाली लेजम कौली थल और प्रियंका चंद रहने वाली गैना बड़ालू को मृत घोषित कर दिया गया है. जबकि यात्री वाहन ड्राइवर अनिल कन्याल निवासी थल, चंदन सिंह सामंत निवासी गोलाकुड़ी तड़ीगांव और बृजेश चंद निवासी लेजम कौली गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं, इन सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. गौरतलब हैं कि बीते दिन उत्तराखंड के श्रीनगर में बदरीनाथ NH पर मालढैया में बुधवार देर रात एक कार अलकनंदा नदी में जा गिरी. इस हादसे में कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, उसके चचेरे भाई को बचा लिया गया. उसे बेस हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. बीते बुधवार रात लगभग साढ़े 12 बजे उफल्डा और श्रीयंत्र टापू के बीच मालढैया में एक कार लगभग 50 मीटर नीचे अलकनंदा नदी में जा गिरी. इस दौरान कार के नदी में गिरने के बाद इसमें सवार आकाश राठी रहने वाले नारसन कलां, हरिद्वार छिटक कर बाहर आ गया. वह तैरकर नदी किनारे एक पत्थर पर चढ़ गया और मदद के लिए पुकारने लगा. उसकी आवाज सुनकर स्थानीय निवासी ने पुलिस को जानकारी दी. घटना की सूचना मिलने पर जल पुलिस, SDRF, फायर बिग्रेड व कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और रस्सों की मदद से युवक को बाहर निकाला. हालांकि गुरुवार को कई घंटे की मेहनत के बाद कार नदी में मिल गई, लेकिन मृतक संदीप का शव के अंदर ही बरामद हो गया.
ये मामला पिथौरागढ़ जिले के बांसपटान के गोदीगाड़ इलाके के पास हुआ. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह को एक यात्री वाहन गोदीगाड़ पुल के पास खाई में गिर गया. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. जहां एक वाहन खाई में गिर गया. इस हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई है. जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं, तीन घायलों को जिले के सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. जहां उनका इलाज जारी है. वहीं, एक्सीडेंट की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों बाहर निकाला गया. दरअसल, ये मामला पिथौरागढ़ जिले के बांसपटान के गोदीगाड़ इलाके के पास हुआ. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह को एक यात्री वाहन गोदीगाड़ पुल के पास खाई में गिर गया. वहीं, इस घटना में तीन महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. घटना की सूचना मिलने पर बेड़ीनाग थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. इस दौरान पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी घायलों को एंबुलेंस और अन्य सरकारी वाहनों से बेड़ीनाग जिला अस्पताल पहुंचाया गया. बता दें कि इस मामले में पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहां पर डॉक्टरों ने रश्मि चंद, गीता चंद रहने वाली लेजम कौली थल और प्रियंका चंद रहने वाली गैना बड़ालू को मृत घोषित कर दिया गया है. जबकि यात्री वाहन ड्राइवर अनिल कन्याल निवासी थल, चंदन सिंह सामंत निवासी गोलाकुड़ी तड़ीगांव और बृजेश चंद निवासी लेजम कौली गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं, इन सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. गौरतलब हैं कि बीते दिन उत्तराखंड के श्रीनगर में बदरीनाथ NH पर मालढैया में बुधवार देर रात एक कार अलकनंदा नदी में जा गिरी. इस हादसे में कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, उसके चचेरे भाई को बचा लिया गया. उसे बेस हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है. बीते बुधवार रात लगभग साढ़े बारह बजे उफल्डा और श्रीयंत्र टापू के बीच मालढैया में एक कार लगभग पचास मीटर नीचे अलकनंदा नदी में जा गिरी. इस दौरान कार के नदी में गिरने के बाद इसमें सवार आकाश राठी रहने वाले नारसन कलां, हरिद्वार छिटक कर बाहर आ गया. वह तैरकर नदी किनारे एक पत्थर पर चढ़ गया और मदद के लिए पुकारने लगा. उसकी आवाज सुनकर स्थानीय निवासी ने पुलिस को जानकारी दी. घटना की सूचना मिलने पर जल पुलिस, SDRF, फायर बिग्रेड व कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और रस्सों की मदद से युवक को बाहर निकाला. हालांकि गुरुवार को कई घंटे की मेहनत के बाद कार नदी में मिल गई, लेकिन मृतक संदीप का शव के अंदर ही बरामद हो गया.
23 जुलाई, 1954 को मिन्ह ऑटोमोबाइल ऑटोमोबाइल प्लांट के आधार पर बायरलोरियन एसएसआर में एक विशेष डिजाइन ब्यूरो का गठन किया गया था। महान बोरिस ल्वोविच शापोशनिक ने विकास की निगरानी की। कम से कम संभव समय में, यह सबसे जटिल रणनीतिक वाहन MAZ-535 बनाने के लिए निकला। डिजाइन ब्यूरो केवल पांच वर्षों में ऐसा करने में कामयाब रहा - 1954-1959। हां, पाठक मुझे माफ कर देंगे, लेकिन यहां कोई भी आधुनिक रूसी विकास "प्लेटफॉर्म-ओ" के साथ समानताएं नहीं बना सकता है, जिसे कामाज़ दस साल से अधिक समय तक ध्यान में नहीं ला सका है। हाल ही में, एक इलेक्ट्रिक रॉकेट जहाज, जिसे विशेष पहिएदार चेसिस में बेलारूसी एकाधिकार को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, नए सिरे से विकसित किया जाने लगा। सोवियत संघ में, एक भारी कार केवल पांच वर्षों में खरोंच से व्यावहारिक रूप से बनाई गई थी। निस्संदेह, MAZ-535 में कमियों का एक समूह था - V-2 टैंक डीजल इंजन का छोटा जीवन, प्रमुख घटकों की कम विश्वसनीयता और उच्च तेल और ईंधन की खपत। लेकिन यह एक वास्तविक रॉकेट वाहक था जिसे सेना ने मांग की थी। बाद में, कार को एक टैंक ट्रैक्टर में अपग्रेड किया गया और उत्पादन को कुरगन के एक बैकअप प्लांट में स्थानांतरित कर दिया गया। आधुनिक इंजीनियरों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो प्लेटफ़ॉर्म-ओ परियोजना के विकास में खुलकर देरी करते हैं? यह सवाल लफ्फाजी भरा है। मिन्स्क ऑटोमोबाइल प्लांट के विशेष ब्यूरो का सबसे सफल विकास, निश्चित रूप से, दो-कैब MAZ-543 था, जो अभी भी विभिन्न रूपों में निर्मित है! लेकिन तकनीक को पहले चालीस से पचास वर्षों के लिए सफल माना जा सकता था। इस साल, सभी मामलों में, अप्रचलित कार 64 साल पुरानी हो जाएगी। कुछ सैन्य घटनाक्रम इतने लंबे समय तक घमंड कर सकते हैं इतिहास. . . अब क्लासिक वोलेट MAZ रूस को मुख्य रूप से निर्यात किया जाता है, इसका उपयोग MLRS "Smerch", "Tornado-S", तोपखाने परिसर "Bereg" और वायु रक्षा प्रणाली S-300PS के लिए एक मंच के रूप में किया जाता है। रूसी सेना को प्राचीन चेसिस केवल इसलिए खरीदना पड़ता है क्योंकि बेलारूसवासी इस सेगमेंट में कुछ और नहीं देना चाहते हैं। MZKT-7930 विशेष रूप से घर पर मांग में नहीं है। केवल "पोलोन्ज़" के वाहक के रूप में। 543 वें के उत्तराधिकारी को MZKT-7930 माना जाता था, लेकिन कार समानांतर में उत्पादित होने वाली केवल अपनी आधुनिक एनालॉग बन गई। अब चेसिस 7930 को ऑपरेशनल-टैक्टिकल इस्केंडर में देखा जा सकता है। बेलारूसियों ने इस वाहन को पोलोनज़ रॉकेट लांचर के वाहक के रूप में अपनाया है। वैसे, बेलारूसी सेना में ऐसे वाहन अधिक नहीं हैं। MZKT-79221 के साथ सेवा में लापता होने के साथ - रूसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के विशाल सोलह पहियों वाले वाहक। अब इन अद्वितीय उत्पादों को विशेष रूप से रूस में निर्यात किया जाता है, हालांकि, ऐसे राक्षस कहीं और मांग में नहीं हैं। आठ-एक्सल और आठ-सौ-हार्सपावर का वोल्ट 80 टन तक ले जाने में सक्षम है, जबकि प्रति 300 किमी पर लगभग 100 लीटर ईंधन की खपत होती है - जैसे कई मुकाबला टैंक! मिन्स्क व्हील ट्रेक्टर प्लांट ने ऑपरेशन के 67 वर्षों में लगभग 27 हजार वाहनों का उत्पादन किया है, जिनमें से तीन चौथाई से अधिक अन्य देशों या यूएसएसआर के गणराज्यों को निर्यात किए गए थे। वर्तमान में, स्थिति मौलिक रूप से नहीं बदली है। अन्य वर्षों में, रूसी सशस्त्र बलों द्वारा सभी उत्पादों के 68% तक खरीदे गए, कुछ तीसरे देशों में गए, और केवल 14% बेलारूस में गए। इसी समय, उत्पादन रेंज में न केवल विशेष पहिएदार चेसिस, बल्कि साधारण ट्रक MZKT-600103 भी शामिल हैं, जो रक्षा मंत्रालय के आरएफ कभी नहीं खरीदेंगे। सच है, बेलारूस की सेना खरीद के साथ जल्दी में नहीं है - केवल आपूर्ति के लिए सीमा सैनिकों में केवल बच्चा MZKT-500200 (GAZ-66 का एनालॉग) को स्वीकार किया गया था। नतीजतन, एक अद्वितीय उद्यम मिन्स्क में बड़ा हो गया है, लगभग पूरी तरह से निर्यात पर केंद्रित है। इस मामले में, मुख्य खरीदार संघ राज्य है, जो कि आय का शेर हिस्सा प्रदान करता है। शायद रूसी सेना की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए अलेक्जेंडर लुकाशेंको से MZKT खरीदना बहुत अधिक तर्कसंगत होगा? MZKT बिक्री के लिए नहीं है! दस साल पहले, रूसी रक्षा-औद्योगिक परिसर प्रयासों के समेकन के एक चरण से गुजर रहा था। रणनीतिक उत्पादों से निपटने वाले बड़े क्लस्टर बनाए गए थे। एक ऐसा देश जो खुद को न केवल एक क्षेत्रीय नेता मानता है, बल्कि एक बहुध्रुवीय दुनिया में अभिनेताओं में से एक है, बस एक रणनीतिक रूप से खुद को प्रदान करने के लिए बाध्य है हथियार स्वयं। इस संबंध में, MZKT स्पष्ट रूप से अवधारणा से बाहर हो गया। परमाणु हथियारों की गतिशीलता निर्भर है और अभी भी एक विदेशी संयंत्र से उत्पादों की आपूर्ति पर निर्भर करता है। 2011 के बाद से, दिमित्री मेदवेदेव प्लांट के 100% शेयरों की बिक्री, या कम से कम एक नियंत्रित हिस्सेदारी की बिक्री पर बेलारूसी नेतृत्व के साथ असफल वार्ता कर रहा है। वार्ता प्रक्रिया की स्थिति को गंभीरता से यूक्रेनी इतिहास ने बढ़ाया, जब रूस व्यावहारिक रूप से आयातित इकाइयों के पूरे परिसर के बिना छोड़ दिया गया था। इसने कुछ समय के लिए घरेलू हेलीकॉप्टर और जहाज निर्माण उद्योग को पंगु बना दिया। क्रेमलिन के विश्लेषकों ने सैन्य-तकनीकी क्षेत्र में विदेशी साझेदारों के साथ मिन्स्क के चुलबुलेपन को निराशाजनक रूप से देखा। इसके अलावा, किसी ने बेलारूस में अपने रूसी विरोधी मैदान को रद्द नहीं किया, जिससे घरेलू सैन्य-औद्योगिक परिसर के लिए नुकसान यूक्रेनी लोगों की तुलना में बहुत बड़ा होगा। लुकाशेंका ने इसे सूक्ष्मता से महसूस किया और लगातार पहिया ट्रैक्टर संयंत्र की बिक्री को चकमा दिया। 2016 में, पर्म में "मोटोविलिखिनस्की ज़ावड़ी" में दिमित्री मेदवेदेव ने अपने दिल में कहाः उन्होंने हमें इस MZKT को तीन साल के लिए बेच दिया, लेकिन हम किसी भी बात पर सहमत नहीं हुए। वे बेचना नहीं चाहते हैं, हमें जरूरत नहीं है, हम कामाज़ में उत्पादन स्थापित करेंगे। योजनाओं को नाबेरेज़िन चेल्नी और मिन्स्क में कारखानों को एक मेगा-होल्डिंग में विलय करना था। सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, लुकाशेंको ने फिर मिन्स्क संयंत्र के लिए 3 बिलियन डॉलर या बाशनेफ्ट में 330 मिलियन रूबल की कीमत के लिए एक नियंत्रित हिस्सेदारी की मांग की। 2016 में एक साक्षात्कार में, बेलारूसी नेता ने एक ही बार में सैन्य-औद्योगिक परिसर के चार उद्यमों में रूसी हित का उल्लेख किया और मास्को को बार के समान कुछ की पेशकश कीः मैं कहता हूंः ठीक है, इन उद्यमों में आपकी रुचि है, तेल उत्पादन में हमारी रुचि है। हम आपसे 7-8 मिलियन टन निकाल सकते हैं। मॉस्को ने भी इस तरह के "लुभावने" प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया। बेलारूस के साथ बातचीत की वास्तविक विफलता के बाद, विश्लेषकों ने रूस को अपने MZKT-5 मिसाइल वाहक विकसित करने के लिए केवल 6-79221 साल की भविष्यवाणी की। बेशक, यह खरोंच से बनाने के लिए बहुत महंगा और मुश्किल है, यह तैयार उत्पादों को खरीदने के लिए बहुत सस्ता है। यह 2021 है, और प्लेटफ़ॉर्म-ओ परिवार के विकास पर कोई जानकारी नहीं है, नियमित सैनिकों में मिन्स्क चेसिस के प्रतिस्थापन का उल्लेख नहीं करना है। एकमात्र उम्मीद ब्रायोन्स्क ऑटोमोबाइल प्लांट की कारों के लिए है, लेकिन वे अब तक अल्माज-एंटेई चिंता के वायु रक्षा उपकरणों को फिर से लैस करना शुरू कर चुके हैं। मिन्स्क व्हील ट्रेक्टर प्लांट में एक अनोखी स्थिति विकसित हुई है। सबसे पहले, एक मजबूत डिजाइन स्टाफ का गठन किया गया है, जो परिष्कृत प्रौद्योगिकी विकसित करने के दशकों से गुस्सा है। बेलारूस के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की मशीनों के पूरे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिक्स और विश्वसनीयता उद्यम की जरूरतों के लिए काम करती है। यह, वैसे, रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर में सीखने लायक है। दूसरे, उत्पादन रेंज में विविधता लाने के लिए MZKT प्रबंधकों का मुख्यालय हर संभव कोशिश कर रहा है। इसलिए, उदाहरण के लिए, टर्मिनल ट्रैक्टर MZKT-730240 बंदरगाहों में काम के लिए प्रकट होता है। विकास में बख्तरबंद कारों के कई मॉडल हैं जो रूस के लिए बिल्कुल भी इरादा नहीं हैं - बेलारूसवासी रूसी निर्भरता से दूर होने की कोशिश कर रहे हैं। और सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने स्पष्ट रूप से कहानी को खराब कर दिया। अब उन्होंने वास्तव में देश को अंतर्राष्ट्रीय अलगाव में डाल दिया है, केवल रूस और चीन को भागीदारों के बीच छोड़ दिया है। अब स्थिति का लाभ क्यों नहीं उठाया और मिन्स्क को एक प्रस्ताव दिया कि वह मना नहीं कर सकता? यह उच्च समय है, खासकर जब से लुकाशेंका के पास बस पैंतरेबाज़ी के लिए कोई जगह नहीं है - वह निश्चित रूप से MZKT के बदले में एक तेल कंपनी से पूछने की हिम्मत नहीं करेगा। हालाँकि, इस योजना में कई जटिलताएँ हैं। यह 2011 में पूरी तरह से स्पष्ट नहीं था, और पांच साल बाद, आप विदेशों में स्थित सैन्य-औद्योगिक परिसर कैसे खरीद सकते हैं? यहां तक कि अभी भी एक अनुकूल राज्य के क्षेत्र पर। तकनीकी रूप से, सब कुछ सरल है - मैंने पैसे दिए, और दस्तावेजों के अनुसार, MZKT रूसी स्वामित्व में है। लेकिन यह मिस्टरेल हेलीकॉप्टर वाहक नहीं है, इसे बंदरगाह में मूर नहीं किया जा सकता है। कहाँ गारंटी है कि नई सरकार जिसने लुकाशेंका की जगह ली, या यहाँ तक कि वह खुद भी प्लांट का राष्ट्रीयकरण नहीं करेगी? जनरल मोटर्स के स्वामित्व वाले ओपल का उदाहरण और द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में जर्मनों द्वारा जब्त किया गया, इस तरह के विकास को बाहर नहीं करता है। हां, युद्ध के बाद इसे उसके मालिकों को लौटा दिया गया था, लेकिन 160 ओपल ब्लिट्ज मध्यम-ड्यूटी ट्रक वेहरमाट की शानदार सेवा करने में कामयाब रहे। इसलिए, रूसी रक्षा मंत्रालय की जरूरतों के लिए MZKT की खरीद शुरू में एक जुआ की तरह लग रही थी। जब तक, निश्चित रूप से, मास्को की योजना धीरे-धीरे पूरे मुख्यालय को डिजाइन मुख्यालय के साथ नाबेरेज़िन चेल्नी के पास ले जाने की थी। डिज़ाइनर, इंजीनियरों और उपयुक्त स्तर के प्रौद्योगिकीविदों को शिक्षित करने के लिए, विशेष पहिएदार चेसिस के अपने उत्पादन को विकसित करने के लिए केवल एक ही चीज़ बची है। यदि यह सिद्धांत रूप में संभव है, तो MZKT केवल सहानुभूति कर सकता है - सही निष्पादन में रूसी "प्लेटफॉर्म-ओ" का पुनरुद्धार वास्तव में मिन्स्क संयंत्र को मार देगा। या, सबसे अच्छे रूप में, यह विदेशी भारी ट्रकों के लिए दुर्लभ आदेशों को पूरा करने वाले छोटे पैमाने पर सब्सिडी वाले एटलियर में बदल जाएगा। - लेखकः
तेईस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ चौवन को मिन्ह ऑटोमोबाइल ऑटोमोबाइल प्लांट के आधार पर बायरलोरियन एसएसआर में एक विशेष डिजाइन ब्यूरो का गठन किया गया था। महान बोरिस ल्वोविच शापोशनिक ने विकास की निगरानी की। कम से कम संभव समय में, यह सबसे जटिल रणनीतिक वाहन MAZ-पाँच सौ पैंतीस बनाने के लिए निकला। डिजाइन ब्यूरो केवल पांच वर्षों में ऐसा करने में कामयाब रहा - एक हज़ार नौ सौ चौवन-एक हज़ार नौ सौ उनसठ। हां, पाठक मुझे माफ कर देंगे, लेकिन यहां कोई भी आधुनिक रूसी विकास "प्लेटफॉर्म-ओ" के साथ समानताएं नहीं बना सकता है, जिसे कामाज़ दस साल से अधिक समय तक ध्यान में नहीं ला सका है। हाल ही में, एक इलेक्ट्रिक रॉकेट जहाज, जिसे विशेष पहिएदार चेसिस में बेलारूसी एकाधिकार को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, नए सिरे से विकसित किया जाने लगा। सोवियत संघ में, एक भारी कार केवल पांच वर्षों में खरोंच से व्यावहारिक रूप से बनाई गई थी। निस्संदेह, MAZ-पाँच सौ पैंतीस में कमियों का एक समूह था - V-दो टैंक डीजल इंजन का छोटा जीवन, प्रमुख घटकों की कम विश्वसनीयता और उच्च तेल और ईंधन की खपत। लेकिन यह एक वास्तविक रॉकेट वाहक था जिसे सेना ने मांग की थी। बाद में, कार को एक टैंक ट्रैक्टर में अपग्रेड किया गया और उत्पादन को कुरगन के एक बैकअप प्लांट में स्थानांतरित कर दिया गया। आधुनिक इंजीनियरों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो प्लेटफ़ॉर्म-ओ परियोजना के विकास में खुलकर देरी करते हैं? यह सवाल लफ्फाजी भरा है। मिन्स्क ऑटोमोबाइल प्लांट के विशेष ब्यूरो का सबसे सफल विकास, निश्चित रूप से, दो-कैब MAZ-पाँच सौ तैंतालीस था, जो अभी भी विभिन्न रूपों में निर्मित है! लेकिन तकनीक को पहले चालीस से पचास वर्षों के लिए सफल माना जा सकता था। इस साल, सभी मामलों में, अप्रचलित कार चौंसठ साल पुरानी हो जाएगी। कुछ सैन्य घटनाक्रम इतने लंबे समय तक घमंड कर सकते हैं इतिहास. . . अब क्लासिक वोलेट MAZ रूस को मुख्य रूप से निर्यात किया जाता है, इसका उपयोग MLRS "Smerch", "Tornado-S", तोपखाने परिसर "Bereg" और वायु रक्षा प्रणाली S-तीन सौPS के लिए एक मंच के रूप में किया जाता है। रूसी सेना को प्राचीन चेसिस केवल इसलिए खरीदना पड़ता है क्योंकि बेलारूसवासी इस सेगमेंट में कुछ और नहीं देना चाहते हैं। MZKT-सात हज़ार नौ सौ तीस विशेष रूप से घर पर मांग में नहीं है। केवल "पोलोन्ज़" के वाहक के रूप में। पाँच सौ तैंतालीस वें के उत्तराधिकारी को MZKT-सात हज़ार नौ सौ तीस माना जाता था, लेकिन कार समानांतर में उत्पादित होने वाली केवल अपनी आधुनिक एनालॉग बन गई। अब चेसिस सात हज़ार नौ सौ तीस को ऑपरेशनल-टैक्टिकल इस्केंडर में देखा जा सकता है। बेलारूसियों ने इस वाहन को पोलोनज़ रॉकेट लांचर के वाहक के रूप में अपनाया है। वैसे, बेलारूसी सेना में ऐसे वाहन अधिक नहीं हैं। MZKT-उन्यासी हज़ार दो सौ इक्कीस के साथ सेवा में लापता होने के साथ - रूसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के विशाल सोलह पहियों वाले वाहक। अब इन अद्वितीय उत्पादों को विशेष रूप से रूस में निर्यात किया जाता है, हालांकि, ऐसे राक्षस कहीं और मांग में नहीं हैं। आठ-एक्सल और आठ-सौ-हार्सपावर का वोल्ट अस्सी टन तक ले जाने में सक्षम है, जबकि प्रति तीन सौ किमी पर लगभग एक सौ लीटरटर ईंधन की खपत होती है - जैसे कई मुकाबला टैंक! मिन्स्क व्हील ट्रेक्टर प्लांट ने ऑपरेशन के सरसठ वर्षों में लगभग सत्ताईस हजार वाहनों का उत्पादन किया है, जिनमें से तीन चौथाई से अधिक अन्य देशों या यूएसएसआर के गणराज्यों को निर्यात किए गए थे। वर्तमान में, स्थिति मौलिक रूप से नहीं बदली है। अन्य वर्षों में, रूसी सशस्त्र बलों द्वारा सभी उत्पादों के अड़सठ% तक खरीदे गए, कुछ तीसरे देशों में गए, और केवल चौदह% बेलारूस में गए। इसी समय, उत्पादन रेंज में न केवल विशेष पहिएदार चेसिस, बल्कि साधारण ट्रक MZKT-छः लाख एक सौ तीन भी शामिल हैं, जो रक्षा मंत्रालय के आरएफ कभी नहीं खरीदेंगे। सच है, बेलारूस की सेना खरीद के साथ जल्दी में नहीं है - केवल आपूर्ति के लिए सीमा सैनिकों में केवल बच्चा MZKT-पाँच लाख दो सौ को स्वीकार किया गया था। नतीजतन, एक अद्वितीय उद्यम मिन्स्क में बड़ा हो गया है, लगभग पूरी तरह से निर्यात पर केंद्रित है। इस मामले में, मुख्य खरीदार संघ राज्य है, जो कि आय का शेर हिस्सा प्रदान करता है। शायद रूसी सेना की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए अलेक्जेंडर लुकाशेंको से MZKT खरीदना बहुत अधिक तर्कसंगत होगा? MZKT बिक्री के लिए नहीं है! दस साल पहले, रूसी रक्षा-औद्योगिक परिसर प्रयासों के समेकन के एक चरण से गुजर रहा था। रणनीतिक उत्पादों से निपटने वाले बड़े क्लस्टर बनाए गए थे। एक ऐसा देश जो खुद को न केवल एक क्षेत्रीय नेता मानता है, बल्कि एक बहुध्रुवीय दुनिया में अभिनेताओं में से एक है, बस एक रणनीतिक रूप से खुद को प्रदान करने के लिए बाध्य है हथियार स्वयं। इस संबंध में, MZKT स्पष्ट रूप से अवधारणा से बाहर हो गया। परमाणु हथियारों की गतिशीलता निर्भर है और अभी भी एक विदेशी संयंत्र से उत्पादों की आपूर्ति पर निर्भर करता है। दो हज़ार ग्यारह के बाद से, दिमित्री मेदवेदेव प्लांट के एक सौ% शेयरों की बिक्री, या कम से कम एक नियंत्रित हिस्सेदारी की बिक्री पर बेलारूसी नेतृत्व के साथ असफल वार्ता कर रहा है। वार्ता प्रक्रिया की स्थिति को गंभीरता से यूक्रेनी इतिहास ने बढ़ाया, जब रूस व्यावहारिक रूप से आयातित इकाइयों के पूरे परिसर के बिना छोड़ दिया गया था। इसने कुछ समय के लिए घरेलू हेलीकॉप्टर और जहाज निर्माण उद्योग को पंगु बना दिया। क्रेमलिन के विश्लेषकों ने सैन्य-तकनीकी क्षेत्र में विदेशी साझेदारों के साथ मिन्स्क के चुलबुलेपन को निराशाजनक रूप से देखा। इसके अलावा, किसी ने बेलारूस में अपने रूसी विरोधी मैदान को रद्द नहीं किया, जिससे घरेलू सैन्य-औद्योगिक परिसर के लिए नुकसान यूक्रेनी लोगों की तुलना में बहुत बड़ा होगा। लुकाशेंका ने इसे सूक्ष्मता से महसूस किया और लगातार पहिया ट्रैक्टर संयंत्र की बिक्री को चकमा दिया। दो हज़ार सोलह में, पर्म में "मोटोविलिखिनस्की ज़ावड़ी" में दिमित्री मेदवेदेव ने अपने दिल में कहाः उन्होंने हमें इस MZKT को तीन साल के लिए बेच दिया, लेकिन हम किसी भी बात पर सहमत नहीं हुए। वे बेचना नहीं चाहते हैं, हमें जरूरत नहीं है, हम कामाज़ में उत्पादन स्थापित करेंगे। योजनाओं को नाबेरेज़िन चेल्नी और मिन्स्क में कारखानों को एक मेगा-होल्डिंग में विलय करना था। सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, लुकाशेंको ने फिर मिन्स्क संयंत्र के लिए तीन बिलियन डॉलर या बाशनेफ्ट में तीन सौ तीस मिलियन रूबल की कीमत के लिए एक नियंत्रित हिस्सेदारी की मांग की। दो हज़ार सोलह में एक साक्षात्कार में, बेलारूसी नेता ने एक ही बार में सैन्य-औद्योगिक परिसर के चार उद्यमों में रूसी हित का उल्लेख किया और मास्को को बार के समान कुछ की पेशकश कीः मैं कहता हूंः ठीक है, इन उद्यमों में आपकी रुचि है, तेल उत्पादन में हमारी रुचि है। हम आपसे सात-आठ मिलियन टन निकाल सकते हैं। मॉस्को ने भी इस तरह के "लुभावने" प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया। बेलारूस के साथ बातचीत की वास्तविक विफलता के बाद, विश्लेषकों ने रूस को अपने MZKT-पाँच मिसाइल वाहक विकसित करने के लिए केवल छः-उन्यासी हज़ार दो सौ इक्कीस साल की भविष्यवाणी की। बेशक, यह खरोंच से बनाने के लिए बहुत महंगा और मुश्किल है, यह तैयार उत्पादों को खरीदने के लिए बहुत सस्ता है। यह दो हज़ार इक्कीस है, और प्लेटफ़ॉर्म-ओ परिवार के विकास पर कोई जानकारी नहीं है, नियमित सैनिकों में मिन्स्क चेसिस के प्रतिस्थापन का उल्लेख नहीं करना है। एकमात्र उम्मीद ब्रायोन्स्क ऑटोमोबाइल प्लांट की कारों के लिए है, लेकिन वे अब तक अल्माज-एंटेई चिंता के वायु रक्षा उपकरणों को फिर से लैस करना शुरू कर चुके हैं। मिन्स्क व्हील ट्रेक्टर प्लांट में एक अनोखी स्थिति विकसित हुई है। सबसे पहले, एक मजबूत डिजाइन स्टाफ का गठन किया गया है, जो परिष्कृत प्रौद्योगिकी विकसित करने के दशकों से गुस्सा है। बेलारूस के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की मशीनों के पूरे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिक्स और विश्वसनीयता उद्यम की जरूरतों के लिए काम करती है। यह, वैसे, रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर में सीखने लायक है। दूसरे, उत्पादन रेंज में विविधता लाने के लिए MZKT प्रबंधकों का मुख्यालय हर संभव कोशिश कर रहा है। इसलिए, उदाहरण के लिए, टर्मिनल ट्रैक्टर MZKT-सात लाख तीस हज़ार दो सौ चालीस बंदरगाहों में काम के लिए प्रकट होता है। विकास में बख्तरबंद कारों के कई मॉडल हैं जो रूस के लिए बिल्कुल भी इरादा नहीं हैं - बेलारूसवासी रूसी निर्भरता से दूर होने की कोशिश कर रहे हैं। और सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने स्पष्ट रूप से कहानी को खराब कर दिया। अब उन्होंने वास्तव में देश को अंतर्राष्ट्रीय अलगाव में डाल दिया है, केवल रूस और चीन को भागीदारों के बीच छोड़ दिया है। अब स्थिति का लाभ क्यों नहीं उठाया और मिन्स्क को एक प्रस्ताव दिया कि वह मना नहीं कर सकता? यह उच्च समय है, खासकर जब से लुकाशेंका के पास बस पैंतरेबाज़ी के लिए कोई जगह नहीं है - वह निश्चित रूप से MZKT के बदले में एक तेल कंपनी से पूछने की हिम्मत नहीं करेगा। हालाँकि, इस योजना में कई जटिलताएँ हैं। यह दो हज़ार ग्यारह में पूरी तरह से स्पष्ट नहीं था, और पांच साल बाद, आप विदेशों में स्थित सैन्य-औद्योगिक परिसर कैसे खरीद सकते हैं? यहां तक कि अभी भी एक अनुकूल राज्य के क्षेत्र पर। तकनीकी रूप से, सब कुछ सरल है - मैंने पैसे दिए, और दस्तावेजों के अनुसार, MZKT रूसी स्वामित्व में है। लेकिन यह मिस्टरेल हेलीकॉप्टर वाहक नहीं है, इसे बंदरगाह में मूर नहीं किया जा सकता है। कहाँ गारंटी है कि नई सरकार जिसने लुकाशेंका की जगह ली, या यहाँ तक कि वह खुद भी प्लांट का राष्ट्रीयकरण नहीं करेगी? जनरल मोटर्स के स्वामित्व वाले ओपल का उदाहरण और द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में जर्मनों द्वारा जब्त किया गया, इस तरह के विकास को बाहर नहीं करता है। हां, युद्ध के बाद इसे उसके मालिकों को लौटा दिया गया था, लेकिन एक सौ साठ ओपल ब्लिट्ज मध्यम-ड्यूटी ट्रक वेहरमाट की शानदार सेवा करने में कामयाब रहे। इसलिए, रूसी रक्षा मंत्रालय की जरूरतों के लिए MZKT की खरीद शुरू में एक जुआ की तरह लग रही थी। जब तक, निश्चित रूप से, मास्को की योजना धीरे-धीरे पूरे मुख्यालय को डिजाइन मुख्यालय के साथ नाबेरेज़िन चेल्नी के पास ले जाने की थी। डिज़ाइनर, इंजीनियरों और उपयुक्त स्तर के प्रौद्योगिकीविदों को शिक्षित करने के लिए, विशेष पहिएदार चेसिस के अपने उत्पादन को विकसित करने के लिए केवल एक ही चीज़ बची है। यदि यह सिद्धांत रूप में संभव है, तो MZKT केवल सहानुभूति कर सकता है - सही निष्पादन में रूसी "प्लेटफॉर्म-ओ" का पुनरुद्धार वास्तव में मिन्स्क संयंत्र को मार देगा। या, सबसे अच्छे रूप में, यह विदेशी भारी ट्रकों के लिए दुर्लभ आदेशों को पूरा करने वाले छोटे पैमाने पर सब्सिडी वाले एटलियर में बदल जाएगा। - लेखकः
बुढाना। सडक हादसे मे एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि उसके चार अन्य साथी घायल हो गए। जिन्हे पुलिस ने उपचार के अस्पताल भिजवाया गया। युवक की मौत से परिजनो मे कोहराम मचा रहा। जानकारी के अनुसार आज सुबह बुढाना कोतवाली क्षेत्र के मेरठ-करनाल मार्ग हाईवे पर ट्रक की चपेट मे आ जाने से टै्रक्टर-ट्राली सवार एक युवक की मौत हो गई। तथा ट्राली मे सवार उसके चार अन्य साथी घायल हो गए। आसपास के खेतो मे काम कर रहे ग्रामीण तुरन्त ही मौके पर पहुंचे। ग्रामीणो ने पुलिस को हादसे की जानकारी दी। सडक हादसे युवक की मौत की खबर मिलते ही इंस्पैक्टर बुढाना एम. एस. गिल मय फोर्स के मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मृतक के परिजनो को हादसे की जानकारी दी। युवक आमिर की मौत की खबर मिलते ही परिजनो मे कोहराम मच गया। बताया जाता है कि गांव जौली निवासी उक्त ग्रामीण मेरठ मे पुरानी पुराली बेचकर वापिस लौट रहे थे। रोते-बिलखते परिजन तथा कुछ अन्य ग्रामीण तुरन्त ही घटना स्थल की और रवाना हो गए। इसी बीच पुलिस ने चारो घायलो को एम्बूलैन्स की मदद से उपचार के लिए अस्पताल भिजवा दिया। पुलिस ने परिजनो व ग्रामीणो की मौजूदगी मे पंचनामा भरकर शव को पोस्ट मार्टम के लिए मोर्चरी पर भिजवा दिया। परिजनो की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ तहरीर लेते भागदौड शुरू की। युवक की मौत की से ग्रामीणो मे शोक छाया हुआ है।
बुढाना। सडक हादसे मे एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि उसके चार अन्य साथी घायल हो गए। जिन्हे पुलिस ने उपचार के अस्पताल भिजवाया गया। युवक की मौत से परिजनो मे कोहराम मचा रहा। जानकारी के अनुसार आज सुबह बुढाना कोतवाली क्षेत्र के मेरठ-करनाल मार्ग हाईवे पर ट्रक की चपेट मे आ जाने से टै्रक्टर-ट्राली सवार एक युवक की मौत हो गई। तथा ट्राली मे सवार उसके चार अन्य साथी घायल हो गए। आसपास के खेतो मे काम कर रहे ग्रामीण तुरन्त ही मौके पर पहुंचे। ग्रामीणो ने पुलिस को हादसे की जानकारी दी। सडक हादसे युवक की मौत की खबर मिलते ही इंस्पैक्टर बुढाना एम. एस. गिल मय फोर्स के मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मृतक के परिजनो को हादसे की जानकारी दी। युवक आमिर की मौत की खबर मिलते ही परिजनो मे कोहराम मच गया। बताया जाता है कि गांव जौली निवासी उक्त ग्रामीण मेरठ मे पुरानी पुराली बेचकर वापिस लौट रहे थे। रोते-बिलखते परिजन तथा कुछ अन्य ग्रामीण तुरन्त ही घटना स्थल की और रवाना हो गए। इसी बीच पुलिस ने चारो घायलो को एम्बूलैन्स की मदद से उपचार के लिए अस्पताल भिजवा दिया। पुलिस ने परिजनो व ग्रामीणो की मौजूदगी मे पंचनामा भरकर शव को पोस्ट मार्टम के लिए मोर्चरी पर भिजवा दिया। परिजनो की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ तहरीर लेते भागदौड शुरू की। युवक की मौत की से ग्रामीणो मे शोक छाया हुआ है।
विवाहित बेटी के नाम पत्रःनारी- धर्म - शिक्षा ता० २६-४-२८ वासलीगंज, मिर्जापुर प्यारी बेटी रमा, आशा है कि तू सानन्द होगी। यहां का समाचार भी साधारणतः अच्छा ही है। इधर कोई गया नहीं, इससे तू किसी प्रकारकी चिन्ता न करना । रोज-रोज जाना आना भले आदमियोंकी रीति नहीं है। चिरं० राधेके यज्ञोपवीतमें मैं तुझे अवश्य बुलाऊंगो । चेटी देखना अपनी तथा मेरी बदनामी न कराना। जिस प्रकार अव तक तू वहाँ सास-ससुर, पति तथा घरके अन्य लोगों की कृपा-पात्री बनकर रही है, उसी प्रकार जन्मभर रहनेकी चेष्टो करना । यदि कभी कोई कुछ कह दे, तो उलटकर जवाब न देता । और गम खाना बड़े लोग का काम है," इस कहावतको उठते-बैठते सदा अपने मन में जपा करना । यदि तू दो बात सहकर रहेगी, तो मुख पावेगी और सबलोग तुरुपर स्नेह रखेंगे। सहनशीलताके वराघर स्त्री के लिए दूसरा फोई भी गुण नहीं है । इमार मुझे एक अच्छी सी बात याद आयो है । वह इस प्रकार है, ध्यानसे सुनःकिसी स्त्री-पुरुप मा लगड़ा हुआ करता था । पारने घर आते हो स्वामी बहुत तरहसे अपनी स्त्री पर चिढ़ता और अपमान किया करना था। यह स्त्री भी अपने पतिकी यातांका मुंहतोड़ जयाय दे दिया करती थी। एक भी यातले मदन पा मानो की शक्ति से बाहर था। भगदहो न था। दोनों ही एक दूसरेके मिलनसे दुखी रहने लगे। अन्तमें पास-पड़ोसकी स्त्रियोंने उस स्त्री से कहा - तुम्हारा पति मंत्र बलसे तुम्हारे वश हो सकता है । उस स्त्रीने इस युक्तिको स्वीकार कर लिया। उसे पूर्ण विश्वास हो गया कि किसी ओझाके मंत्र बल द्वारा यह काम किया जा सकता है। फिर क्या था. एक दिन वह एक नामी ओझाके पास गयी और साफ-साफ अपना अभिप्राय कह सुनाया । ओझा बुद्धिमान् था । उसने उस स्त्रीके विश्वासको बिगाड़ना उचित नहीं समझा । उसने एक लोटा जल मगाकर उसे मंत्र द्वारा फूंक दिया और उस रमणीको देकर कहाकि जब तेरा पति घर आवे तब तू एक घूंट जल अपने मुंहमें रखलेना और जबतक वह सो न जाय, तबतक मुंहका जल मत गिराना ! इस प्रकार लगातार इक्कीस दिनतक करते रहनेसे तेरा पति अवश्य ही तेरे वश हो जायगा । उस स्त्रीने ऐसा ही किया। पतिके घरमें पैर रखतेही वह मुंहमें पानी भर लिया करती थी। इससे उसे अपने पतिको कड़ीसे कड़ी बातें चुपचाप सहन कर लेना पड़ता था। क्योंकि यदि उत्तर देती. तो मुंहका पानी नीचे गिर जाता । इस प्रकार जब १५२० दिन बीत गये, तब उसके पतिने देखा कि आजकल यह इतनी शान्त हो गयी है कि मेरा एक भी बातका जला-कटा जबाव नहीं देती। मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे चुपचाप सह लेती है। ऐसी दशामें अब उसे फड़ी बातें सुनाकर व्यर्थ कट पहुँचाना, उचिव : नहीं है । फलतः ओझाके इस कौतूहल - पूर्ण उपायसे पति और पत्नोंके स्वभाव में विचित्र परिवर्त्तन हो गया और उनकी पारस्परिक कलह अनायास ही मिट गयी । इसलिए बेटी. तू सदा सहकर रहना, ऐसा करनेसे कभी • किसी के साथ तेरा झगड़ा बिगाड़ होगा ही नहीं। मैं तुझे हर चिट्टीमें कुछ-न-कुछ उपदेशकी बातें लिखा करती हूँ, इतने पर भी यदि तू कभी मेरी शिक्षाके विरुद्ध काम करेगी, तो मैं सच कहती हूँ कि यद्यपि तू मेरी एकमात्र और अत्यन्त लाड़ली लड़की है, फिर भी मैं तुझे जन्म भरके लिए त्याग दूंगी, तेरा मुंह भी न देखूंगी। क्योंकि मैं संसारमें सब कुछ सह सकती हूँ. पर बदनामी नहीं सह सकती । बस अब इस पत्रमें और कुछ न लिखूंगी। मेरी याताका घुरा न मानना पेटी, मैंने तेरे हितको बात लिखी है। शुभचिन्तिकातेरी मां घड़े भाईके नाम पत्र :श्रद्धेय भैया आपकी आशा के अनुसार मैंने फार्यारम्भ कर दिया है। सफ लता होना आपछी के हाथ है । क्योंकि मुझमें इतनी विद्या बुद्धि नहीं कि ऐसे गुस्तर कामको बिना आपकी सहायता के कर सकूं। पुस्तक समाप्त होने पर आपकी सेवामें भेजूंगी। आपके फट्नेसे शुरू तो फर दिया पर गृहस्योकी गंकटोंसे लिखने बहुत ही कम मिलता है। आप जल्द आनेकी पूजा फोजियेगा नहीं
विवाहित बेटी के नाम पत्रःनारी- धर्म - शिक्षा ताशून्य छब्बीस अप्रैल अट्ठाईस वासलीगंज, मिर्जापुर प्यारी बेटी रमा, आशा है कि तू सानन्द होगी। यहां का समाचार भी साधारणतः अच्छा ही है। इधर कोई गया नहीं, इससे तू किसी प्रकारकी चिन्ता न करना । रोज-रोज जाना आना भले आदमियोंकी रीति नहीं है। चिरंशून्य राधेके यज्ञोपवीतमें मैं तुझे अवश्य बुलाऊंगो । चेटी देखना अपनी तथा मेरी बदनामी न कराना। जिस प्रकार अव तक तू वहाँ सास-ससुर, पति तथा घरके अन्य लोगों की कृपा-पात्री बनकर रही है, उसी प्रकार जन्मभर रहनेकी चेष्टो करना । यदि कभी कोई कुछ कह दे, तो उलटकर जवाब न देता । और गम खाना बड़े लोग का काम है," इस कहावतको उठते-बैठते सदा अपने मन में जपा करना । यदि तू दो बात सहकर रहेगी, तो मुख पावेगी और सबलोग तुरुपर स्नेह रखेंगे। सहनशीलताके वराघर स्त्री के लिए दूसरा फोई भी गुण नहीं है । इमार मुझे एक अच्छी सी बात याद आयो है । वह इस प्रकार है, ध्यानसे सुनःकिसी स्त्री-पुरुप मा लगड़ा हुआ करता था । पारने घर आते हो स्वामी बहुत तरहसे अपनी स्त्री पर चिढ़ता और अपमान किया करना था। यह स्त्री भी अपने पतिकी यातांका मुंहतोड़ जयाय दे दिया करती थी। एक भी यातले मदन पा मानो की शक्ति से बाहर था। भगदहो न था। दोनों ही एक दूसरेके मिलनसे दुखी रहने लगे। अन्तमें पास-पड़ोसकी स्त्रियोंने उस स्त्री से कहा - तुम्हारा पति मंत्र बलसे तुम्हारे वश हो सकता है । उस स्त्रीने इस युक्तिको स्वीकार कर लिया। उसे पूर्ण विश्वास हो गया कि किसी ओझाके मंत्र बल द्वारा यह काम किया जा सकता है। फिर क्या था. एक दिन वह एक नामी ओझाके पास गयी और साफ-साफ अपना अभिप्राय कह सुनाया । ओझा बुद्धिमान् था । उसने उस स्त्रीके विश्वासको बिगाड़ना उचित नहीं समझा । उसने एक लोटा जल मगाकर उसे मंत्र द्वारा फूंक दिया और उस रमणीको देकर कहाकि जब तेरा पति घर आवे तब तू एक घूंट जल अपने मुंहमें रखलेना और जबतक वह सो न जाय, तबतक मुंहका जल मत गिराना ! इस प्रकार लगातार इक्कीस दिनतक करते रहनेसे तेरा पति अवश्य ही तेरे वश हो जायगा । उस स्त्रीने ऐसा ही किया। पतिके घरमें पैर रखतेही वह मुंहमें पानी भर लिया करती थी। इससे उसे अपने पतिको कड़ीसे कड़ी बातें चुपचाप सहन कर लेना पड़ता था। क्योंकि यदि उत्तर देती. तो मुंहका पानी नीचे गिर जाता । इस प्रकार जब एक हज़ार पाँच सौ बीस दिन बीत गये, तब उसके पतिने देखा कि आजकल यह इतनी शान्त हो गयी है कि मेरा एक भी बातका जला-कटा जबाव नहीं देती। मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे चुपचाप सह लेती है। ऐसी दशामें अब उसे फड़ी बातें सुनाकर व्यर्थ कट पहुँचाना, उचिव : नहीं है । फलतः ओझाके इस कौतूहल - पूर्ण उपायसे पति और पत्नोंके स्वभाव में विचित्र परिवर्त्तन हो गया और उनकी पारस्परिक कलह अनायास ही मिट गयी । इसलिए बेटी. तू सदा सहकर रहना, ऐसा करनेसे कभी • किसी के साथ तेरा झगड़ा बिगाड़ होगा ही नहीं। मैं तुझे हर चिट्टीमें कुछ-न-कुछ उपदेशकी बातें लिखा करती हूँ, इतने पर भी यदि तू कभी मेरी शिक्षाके विरुद्ध काम करेगी, तो मैं सच कहती हूँ कि यद्यपि तू मेरी एकमात्र और अत्यन्त लाड़ली लड़की है, फिर भी मैं तुझे जन्म भरके लिए त्याग दूंगी, तेरा मुंह भी न देखूंगी। क्योंकि मैं संसारमें सब कुछ सह सकती हूँ. पर बदनामी नहीं सह सकती । बस अब इस पत्रमें और कुछ न लिखूंगी। मेरी याताका घुरा न मानना पेटी, मैंने तेरे हितको बात लिखी है। शुभचिन्तिकातेरी मां घड़े भाईके नाम पत्र :श्रद्धेय भैया आपकी आशा के अनुसार मैंने फार्यारम्भ कर दिया है। सफ लता होना आपछी के हाथ है । क्योंकि मुझमें इतनी विद्या बुद्धि नहीं कि ऐसे गुस्तर कामको बिना आपकी सहायता के कर सकूं। पुस्तक समाप्त होने पर आपकी सेवामें भेजूंगी। आपके फट्नेसे शुरू तो फर दिया पर गृहस्योकी गंकटोंसे लिखने बहुत ही कम मिलता है। आप जल्द आनेकी पूजा फोजियेगा नहीं
चंडीगढ़, 9 नवंबर (ट्रिन्यू) हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत सिंह बैनीवाल को कारण बताओ नोटिस भेजा है। बैनीवाल पर ऐलनाबाद उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी पवन बैनीवाल के खिलाफ काम करने और उपचुनाव में नकारात्मक भूमिका में रहने के आरोप हैं। भरत सिंह को एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है। जवाब नहीं देने की सूरत में भरत सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद कुमारी सैलजा हरियाणा मामलों के प्रभारी विवेक बंसल के माध्यम से सोनिया गांधी को ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर पूरी रिपोर्ट भेज चुकी हैं। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी न केवल तीसरे नंबर पर रहे बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हुई। भरत सिंह बैनीवाल भी यहां से टिकट के प्रबलतम दावेदारों में शामिल थे। कांग्रेस ने उनकी जगह कुछ दिन पूर्व ही भाजपा छोड़कर आए पवन बैनीवाल को टिकट दिया था। ऐसे में भरत सिंह बैनीवाल ने उपचुनाव में किसी तरह से काम नहीं किया। वे घर पर ही रहे। इतना ही नहीं, उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे यह कहते सुनाई-दिखाई दे रहे हैं कि उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहेगा। कांग्रेस ने इसे अनुशासनहीनता का मामला माना है। नोटिस में कहा गया है कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान भरत सिंह की भूमिका नकारात्मक रही। नोटिस में कहा गया है कि भरत सिंह की गतिविधियों से न केवल उनकी पार्टी विरोधी मानसिकता उजागर हुई है बल्कि उनके इस बर्ताव से पार्टी संविधान का भी उल्लंघन हुआ है। भरत सिंह को नोटिस मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। अगर वे जवाब नहीं देते तो कांग्रेस उनके खिलाफ अपने स्तर पर निर्णय लेने में स्वतंत्र होगी। वहीं दूसरी ओर, भरत सिंह बैनीवाल का कहना है कि उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है।
चंडीगढ़, नौ नवंबर हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत सिंह बैनीवाल को कारण बताओ नोटिस भेजा है। बैनीवाल पर ऐलनाबाद उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी पवन बैनीवाल के खिलाफ काम करने और उपचुनाव में नकारात्मक भूमिका में रहने के आरोप हैं। भरत सिंह को एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है। जवाब नहीं देने की सूरत में भरत सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश के बाद कुमारी सैलजा हरियाणा मामलों के प्रभारी विवेक बंसल के माध्यम से सोनिया गांधी को ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर पूरी रिपोर्ट भेज चुकी हैं। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी न केवल तीसरे नंबर पर रहे बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हुई। भरत सिंह बैनीवाल भी यहां से टिकट के प्रबलतम दावेदारों में शामिल थे। कांग्रेस ने उनकी जगह कुछ दिन पूर्व ही भाजपा छोड़कर आए पवन बैनीवाल को टिकट दिया था। ऐसे में भरत सिंह बैनीवाल ने उपचुनाव में किसी तरह से काम नहीं किया। वे घर पर ही रहे। इतना ही नहीं, उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे यह कहते सुनाई-दिखाई दे रहे हैं कि उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहेगा। कांग्रेस ने इसे अनुशासनहीनता का मामला माना है। नोटिस में कहा गया है कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान भरत सिंह की भूमिका नकारात्मक रही। नोटिस में कहा गया है कि भरत सिंह की गतिविधियों से न केवल उनकी पार्टी विरोधी मानसिकता उजागर हुई है बल्कि उनके इस बर्ताव से पार्टी संविधान का भी उल्लंघन हुआ है। भरत सिंह को नोटिस मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। अगर वे जवाब नहीं देते तो कांग्रेस उनके खिलाफ अपने स्तर पर निर्णय लेने में स्वतंत्र होगी। वहीं दूसरी ओर, भरत सिंह बैनीवाल का कहना है कि उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है।
- #VideoSonbhadra: चप्पल चटाने वाले लाइनमैन की नौकरी गई, घर पर बुलडोजर चलवाने उठी मांग, सड़क पर आएगा परिवार? नई दिल्लीः खुद को फिट रखने के लिए जिम जाना अच्छी बात है, लेकिन ये तभी तक अच्छा है, जब जिम के अंदर केवल एक्सरसाइज की जाए। दरअसल कुछ लोग जिम में एक्सरसाइज करने से ज्यादा ध्यान फोटोशूट और दूसरों को इंप्रेस करने पर लगा देते हैं। सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो शेयर करने के लिए अक्सर लोग जिम के अंदर आधे से ज्यादा वक्त मोबाइल पर बिताते हुए भी नजर आते हैं। अब एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसमें जिम के अंदर एक महिला को इंप्रेस करने की कोशिश एक शख्स को भारी पड़ गई। शख्स का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। (वीडियो खबर के आखिर में) 'डेली स्टार' की खबर के मुताबिक, 'ट्रिस्टन यशायाह' नाम के इस वेट लिफ्टर ने अपने वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर भी किया है, जहां लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। दरअसल, हर रोज की तरह ट्रिस्टन जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे। एक्सरसाइज के दौरान ट्रिस्टन ने जिम में एक महिला को वर्कआउट करते हुए देखा और तय किया कि वो वहीं जाकर एक्सरसाइज करते हुए उसे इंप्रेस करेंगे। ट्रिस्टन उस महिला के पास पहुंचे और बिना कुछ कहे, उसके सामने पड़ी एक बेंच पर बैठकर स्ट्रेचिंग करने लगे। लेकिन, ट्रिस्टन ने स्ट्रेचिंग शुरू की ही थी कि अचानक पूरा मामला उलटा हो गया। दरअसल स्ट्रेचिंग करते हुए ट्रिस्टन का बैलेंस बिगड़ गया और पीछे की तरफ गिर गए। इस दौरान ट्रिस्टन के पैर ऊपर हवा में थे और सिर नीचे। ये पूरी घटना जिम के अंदर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। ट्रिस्टन ने सीसीटीवी की इसी फुटेज को टिकटॉक और अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। टिकटॉक पर इस वीडियो को अभी तक 10. 5 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो के साथ कैप्शन में ट्रिस्टन ने लिखा है, 'अगर मैं अपने पैर संभाल पाता तो शायद एक अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती, लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि पीछे का हिस्सा कितनी दूर है और इसीलिए ग्रेविटी ने मुझे नीचे की तरफ खींच लिया। ' 'ये तो सबसे बढ़िया तरीका बन गया' वीडियो में नजर आ रहा है कि जैसे ही ट्रिस्टन बेंच से पीछे की तरफ गिरते हैं, वो महिला भी चौंककर अपना वर्कआउट रोक देती है और ट्रिस्टन की मदद करने जाती है। हालांकि, महिला को इंप्रेस करने की ट्रिस्टन की कोशिश भले ही नाकाम हो गई, लेकिन उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कुछ लोग वीडियो पर कमेंट करते हुए लिख रहे हैं कि उस महिला का अटेंशन पाने के लिए ये सबसे बढ़िया तरीका बन गया। ये भी पढ़ें- 'मैं प्रेग्नेंट थी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने पोर्न स्टार से गुपचुप चैटिंग में 8 लाख रुपए उड़ा दिए' इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने लिखा, 'जिस तरह से आपका ये वीडियो कई पेज पर वायरल हो रहा है, उतना ही मुश्किल आपको खोजना था. . . '। एक और यूजर ने लिखा, 'और इसके बाद क्या हुआ, क्यो वो महिला वहां से चली गई. . . ? ' तीसरे यूजर ने वीडियो पर लिखा, 'तो. . . मोबाइल नंबर मिला क्या. . . । ' इसके अलावा कुछ और मजाकिया कमेंट भी वीडियो पर आए। इन्हीं में से एक कमेंट पर जवाब देते हुए ट्रिस्टन ने बताया कि वो महिला अब उनसे बात करने लगी है यानी मिशन पूरा हो गया। '
- #VideoSonbhadra: चप्पल चटाने वाले लाइनमैन की नौकरी गई, घर पर बुलडोजर चलवाने उठी मांग, सड़क पर आएगा परिवार? नई दिल्लीः खुद को फिट रखने के लिए जिम जाना अच्छी बात है, लेकिन ये तभी तक अच्छा है, जब जिम के अंदर केवल एक्सरसाइज की जाए। दरअसल कुछ लोग जिम में एक्सरसाइज करने से ज्यादा ध्यान फोटोशूट और दूसरों को इंप्रेस करने पर लगा देते हैं। सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो शेयर करने के लिए अक्सर लोग जिम के अंदर आधे से ज्यादा वक्त मोबाइल पर बिताते हुए भी नजर आते हैं। अब एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसमें जिम के अंदर एक महिला को इंप्रेस करने की कोशिश एक शख्स को भारी पड़ गई। शख्स का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। 'डेली स्टार' की खबर के मुताबिक, 'ट्रिस्टन यशायाह' नाम के इस वेट लिफ्टर ने अपने वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर भी किया है, जहां लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। दरअसल, हर रोज की तरह ट्रिस्टन जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे। एक्सरसाइज के दौरान ट्रिस्टन ने जिम में एक महिला को वर्कआउट करते हुए देखा और तय किया कि वो वहीं जाकर एक्सरसाइज करते हुए उसे इंप्रेस करेंगे। ट्रिस्टन उस महिला के पास पहुंचे और बिना कुछ कहे, उसके सामने पड़ी एक बेंच पर बैठकर स्ट्रेचिंग करने लगे। लेकिन, ट्रिस्टन ने स्ट्रेचिंग शुरू की ही थी कि अचानक पूरा मामला उलटा हो गया। दरअसल स्ट्रेचिंग करते हुए ट्रिस्टन का बैलेंस बिगड़ गया और पीछे की तरफ गिर गए। इस दौरान ट्रिस्टन के पैर ऊपर हवा में थे और सिर नीचे। ये पूरी घटना जिम के अंदर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। ट्रिस्टन ने सीसीटीवी की इसी फुटेज को टिकटॉक और अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। टिकटॉक पर इस वीडियो को अभी तक दस. पाँच मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो के साथ कैप्शन में ट्रिस्टन ने लिखा है, 'अगर मैं अपने पैर संभाल पाता तो शायद एक अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती, लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि पीछे का हिस्सा कितनी दूर है और इसीलिए ग्रेविटी ने मुझे नीचे की तरफ खींच लिया। ' 'ये तो सबसे बढ़िया तरीका बन गया' वीडियो में नजर आ रहा है कि जैसे ही ट्रिस्टन बेंच से पीछे की तरफ गिरते हैं, वो महिला भी चौंककर अपना वर्कआउट रोक देती है और ट्रिस्टन की मदद करने जाती है। हालांकि, महिला को इंप्रेस करने की ट्रिस्टन की कोशिश भले ही नाकाम हो गई, लेकिन उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कुछ लोग वीडियो पर कमेंट करते हुए लिख रहे हैं कि उस महिला का अटेंशन पाने के लिए ये सबसे बढ़िया तरीका बन गया। ये भी पढ़ें- 'मैं प्रेग्नेंट थी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने पोर्न स्टार से गुपचुप चैटिंग में आठ लाख रुपए उड़ा दिए' इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने लिखा, 'जिस तरह से आपका ये वीडियो कई पेज पर वायरल हो रहा है, उतना ही मुश्किल आपको खोजना था. . . '। एक और यूजर ने लिखा, 'और इसके बाद क्या हुआ, क्यो वो महिला वहां से चली गई. . . ? ' तीसरे यूजर ने वीडियो पर लिखा, 'तो. . . मोबाइल नंबर मिला क्या. . . । ' इसके अलावा कुछ और मजाकिया कमेंट भी वीडियो पर आए। इन्हीं में से एक कमेंट पर जवाब देते हुए ट्रिस्टन ने बताया कि वो महिला अब उनसे बात करने लगी है यानी मिशन पूरा हो गया। '
मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय से कहा कि वे उसी को अपना उत्तराधिकारी बनाएंगे जो तीनों लोकों की परिक्रमा कर पहले कैलाश पर पहुंचेगा। यह सुनकर दोनों यात्रा पर निकल गए। भगवान गणेश को रास्ते में नारद मुनि मिले जिन्होंने कहा कि समस्त लोक तो माता-पिता के चरणों में हैं। ऐसा सुनते ही गणेश कैलाश लौट आए और माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम किया। इस पर भगवान शिव ने अपना उत्तराधिकारी गणेश को बना दिया। जब कार्तिकेय को इस बात का पता चला तो वो नाराज हो गए। वे रूठकर उस स्थान पर पहुंचे जो आज अचलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि उस समय कार्तिकेय को मनाने 33 करोड़ देवी-देवता इसी स्थान पर आए थे लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब वह कहीं नहीं जाएंगे और सारा जीवन उसी स्थान पर रहेंगे। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि इसी स्थान पर हर साल कार्तिक माह की नवमी-दशमी को 33 करोड़ देवी-देवता आएंगे और मंदिर परिसर में बने सरोवर में स्नान करने वालों की मन्नत पूरी होगी। इतिहास के अनुसार बटाला के कस्बा अचल में सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी भी पहुंचे थे। यहां उन्होंने सिद्धों, योगियों और नाथों के वरिष्ठ आगू भंगर नाथ से गोष्ठी की। अपने विचारों को उनके सामने रखा। इसके बाद वहां गुरुद्वारा साहिब बना दिया गया। अचलेश्वर धाम मंदिर के बिल्कुल सामने पहली पातशाही श्री गुरुनानक देव जी के चरण स्पर्श प्राप्त स्थान पर बना गुरुद्वारा साहिब सिख समुदाय के लिए काफी अहम है। अचलेश्वर धाम में सोमवार और मंगलवार को दो दिवसीय मेला लगेगा। यह मेला नवमी-दशमी के मेले के नाम से भी प्रचलित हैं। इन दोनों दिन में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव औैर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं। इसके अलावा पवित्र सरोवर में स्नान भी किया जाता है। मंदिर परिसर से बाहर स्टाल लगाकर लंगरों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने तहसील बटाला में 23 नवंबर को छुट्टी का एलान भी किया है। श्री अचलेश्वर धाम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य संचालक पवन कुमार पम्मा ने बताया कि इस दो दिवसीय मेले को लेकर सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। 23 नवंबर की रात को मंदिर परिसर में स्थापित कार्तिकेय हाल में जागरण भी होगा। पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों से साधु-संत भी पहुंच गए हैं। मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय से कहा कि वे उसी को अपना उत्तराधिकारी बनाएंगे जो तीनों लोकों की परिक्रमा कर पहले कैलाश पर पहुंचेगा। यह सुनकर दोनों यात्रा पर निकल गए। भगवान गणेश को रास्ते में नारद मुनि मिले जिन्होंने कहा कि समस्त लोक तो माता-पिता के चरणों में हैं। ऐसा सुनते ही गणेश कैलाश लौट आए और माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम किया। इस पर भगवान शिव ने अपना उत्तराधिकारी गणेश को बना दिया। जब कार्तिकेय को इस बात का पता चला तो वो नाराज हो गए। वे रूठकर उस स्थान पर पहुंचे जो आज अचलेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि उस समय कार्तिकेय को मनाने तैंतीस करोड़ देवी-देवता इसी स्थान पर आए थे लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब वह कहीं नहीं जाएंगे और सारा जीवन उसी स्थान पर रहेंगे। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि इसी स्थान पर हर साल कार्तिक माह की नवमी-दशमी को तैंतीस करोड़ देवी-देवता आएंगे और मंदिर परिसर में बने सरोवर में स्नान करने वालों की मन्नत पूरी होगी। इतिहास के अनुसार बटाला के कस्बा अचल में सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी भी पहुंचे थे। यहां उन्होंने सिद्धों, योगियों और नाथों के वरिष्ठ आगू भंगर नाथ से गोष्ठी की। अपने विचारों को उनके सामने रखा। इसके बाद वहां गुरुद्वारा साहिब बना दिया गया। अचलेश्वर धाम मंदिर के बिल्कुल सामने पहली पातशाही श्री गुरुनानक देव जी के चरण स्पर्श प्राप्त स्थान पर बना गुरुद्वारा साहिब सिख समुदाय के लिए काफी अहम है। अचलेश्वर धाम में सोमवार और मंगलवार को दो दिवसीय मेला लगेगा। यह मेला नवमी-दशमी के मेले के नाम से भी प्रचलित हैं। इन दोनों दिन में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव औैर भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं। इसके अलावा पवित्र सरोवर में स्नान भी किया जाता है। मंदिर परिसर से बाहर स्टाल लगाकर लंगरों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने तहसील बटाला में तेईस नवंबर को छुट्टी का एलान भी किया है। श्री अचलेश्वर धाम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य संचालक पवन कुमार पम्मा ने बताया कि इस दो दिवसीय मेले को लेकर सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। तेईस नवंबर की रात को मंदिर परिसर में स्थापित कार्तिकेय हाल में जागरण भी होगा। पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों से साधु-संत भी पहुंच गए हैं। मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
मैंने एक बार एक सपना देखा था। उस सपने में, इवान द टेरिबल, कज़ान की यात्रा कर रहे थे। और मैंने उससे कहाः ज़ार-पिता, कज़ान में अजनबी लोग रहते हैं, उन्होंने हमें उन्हें मुक्त करने के लिए नहीं कहा, हमारे सैनिक वहां मर जाएंगे, हम बाद में दोष देंगे, हम पीठ में गोली मार देंगे, वे हमसे नफरत करते हैं - एक विदेशी लोग, नहीं भाई हमारे पास - ज़ार, पिता, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, यूरोप हमारी निंदा करेगा! तब राजा उठे और गुस्से में मुझे तुरंत फांसी देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः मुझे यूरोप में मत आना! और उसने मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने हमले से पहले देखा कि हमारी सेना में टैटार कज़ान की दीवारों की तुलना में अधिक हैं। और हम कज़ान ले गए। और यह पता चला कि राजा सही था। और यूरोप एक डिक्री नहीं है। और टाटर्स के बारे में, मैं गलत था। और योद्धा, जो मर गए, व्यर्थ में नहीं, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए मर गए। और फिर मैं उठा। एक बार जब मेरा सपना था - ज़ार पीटर पोल्टावा में लड़ाई करने जा रहा था। मैंने उससे कहाः ज़ार-पिता, पोल्टावा में हमारे बीच में अजनबी, हमारे बीच के देशद्रोही और स्थानीय लोग स्वेद और डंडों के साथ यूरोप जाना चाहते हैं, हमारे सैनिक वहीं मर जाएंगे, हम दोषी रहेंगे, हम पीठ में गोली मार देंगे। वे हमसे नफरत करते हैं - वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, यूरोप हमारी निंदा करेगा! तब राजा उठे और गुस्से में मुझे तुरंत फांसी देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः मुझे यूरोप में मत आना! और उसने मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सेना में देखा कि पोल्टावा की जेल को स्वेड्स से बचाव किया जा रहा है, कि रूसी सैनिक और स्थानीय कोसाक कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं। और हमने स्वेद को तोड़ा। और यह पता चला कि राजा सही था। और यूरोप एक डिक्री नहीं है। और Cossacks के बारे में, मैं गलत था। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। तीसरी बार मैंने एक सपना देखा - महारानी कैथरीन ने क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए सेना भेजी। मैंने उससे कहाः माँ महारानी, तुर्क क्रीमिया में रहती हैं, लोग हमारे लिए अलग-थलग हैं, वे ओटोमन साम्राज्य के साथ रहना चाहते हैं, उनके पास एक संप्रभु राज्य है - क्रीमियन खानटे, और वे रूसियों को कैद में ले जाते हैं और उन्हें गुलामी में चोरी करते हैं, हमारे सैनिक वहां मर जाएंगे, हमें दोषी ठहराया जाएगा, वे हमें पीठ में गोली मारेंगे, वे हमसे नफरत करते हैं - वे भाई नहीं हैं, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, तुर्की खान हमें जज करेंगे! फिर साम्राज्ञी उठी और तुरंत मुझे दंडात्मक सेवा में भेजना चाहती थी, लेकिन उसने सोचा और कहाः मेरे तुर्की खान को मत मनाओ! और मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सैनिकों में देखा कि हमारे तुर्क से छोटे हैं, लेकिन हम मजबूत हैं। और हमने तुर्की सैनिकों को निकाल दिया। और यह पता चला कि साम्राज्य सही था। और उन्होंने क्रीमिया ले लिया। और तुर्की खान एक डिक्री नहीं था। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। चौथी बार जब मैंने एक सपना देखा - यह सम्राट अलेक्जेंडर को बताया गया था कि मॉस्को जल गया था। नेपोलियन ने जले हुए मास्को से सम्राट को लिखा कि वह शांति के लिए पूछ रहा था। सम्राट ने कोई उत्तर नहीं दिया। नेपोलियन ने दूसरी बार लिखा। और दूसरी बार सम्राट ने जवाब नहीं दिया। जब तीसरा पत्र नेपोलियन से आया, तो मैंने सम्राट से कहाः ग्रैंड ड्यूक, हम शांति बनाएंगे! सैनिकों को समाप्त कर दिया जाता है, हम इतने लंबे समय तक हमला नहीं कर पाएंगे, हमें फिर से इकट्ठा होने की जरूरत है, अगर हम युद्ध जारी रखते हैं - सैनिक मर जाएंगे, हम दोषी होंगे, यूरोप हमें न्याय देगा, पेरिस न्याय करेगा, लोगों को शांति की आवश्यकता है! यहाँ यह है - दुनिया, कागज पर, आपको केवल हमारे सैनिकों के बीच एक रेखा खींचने और बंदूकें वापस लेने की ज़रूरत है - और शांति होगी! तब सम्राट उठे और मुझे ट्रिब्यूनल के तहत भेजना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः शांति के बाद होगा! और मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सेना में देखा कि हम फ्रांसीसी ड्राइव करने के लिए तैयार थे। और हमने उन्हें निकाल दिया। जिस सड़क पर वे मास्को गए थे। और फ्रांसीसी घुड़सवार सेना खो रहे थे, ताकत खो रहे थे, फेंक रहे थे हथियारगिर गया और मर गया। और रूसी सैनिकों ने दुश्मन को रूसी भूमि से दूर कर दिया, ठीक सीमाओं तक। और यह पता चला कि सम्राट सही था। और रूसी सैनिकों ने पेरिस में प्रवेश किया। और पेरिस एक डिक्री नहीं थी। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। पांचवीं बार मेरे पास एक सपना था - इसमें, कॉमरेड स्टालिन ने कीव की मुक्ति का आदेश दिया। और मैंने कहाः कॉमरेड स्टालिन! कीव, बांदेरा, एसएस डिवीजन गैलिसिया, देशद्रोही, संक्रमण में, यह सोवियत लोग नहीं हैं, वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, वे हमारे साथ नहीं रहना चाहते हैं, वे मुक्ति नहीं चाहते हैं, लेकिन सोवियत सैनिक वहां मर जाएंगे, वे हमें पीछे से गोली मार देंगे। सहयोगी दल हमारी निंदा करेंगे! चलो खारकोव, कॉमरेड स्टालिन में रुकें! और सोवियत सैनिकों ने कीव को मुक्त कराया। बिल्कुल आज़ाद। मुक्त लविवि। लिबरेटेड वॉरसॉ, प्राग, बर्लिन ले गया। और यूक्रेन में, निप्रॉप्स बहाल किया गया था। प्रकाश चालू करें। चलो ट्राम। और Ukrainians ने रूसियों के साथ मिलकर शहर का पुनर्निर्माण किया - एक साथ, जैसा कि उन्होंने लड़ा। एक बंदरिया लंबे समय तक जंगल में दफन रही। लेकिन वे उनके साथ लड़े। दोनों रूसी और Ukrainians। दुश्मनों के साथ के रूप में। साथ में। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। दोनों रूसी और Ukrainians। साथ में। और फिर मैं उठा। और मैंने इसे देखने के बाद - सैनिकों को चेचन्या भेजा गया। और मैं यह कहना चाहता था कि अजनबी लोग वहां रहते हैं, दूसरे लोग, वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, और उन्हें अलग से रहने देते हैं, वे अपना इस्लामिक राज्य बनाना चाहते हैं - उन्हें ऐसा करने दो, और अगर हम वहां जाते हैं - तो वे हमें गोली मार देंगे, सैनिक मर जाएंगे, अमेरिका हम हमें माफ नहीं करेंगे, यूरोप माफ नहीं करेगा, पूरी दुनिया हमारे खिलाफ लड़ेगी - मैं इसे चिल्लाना चाहता था, लेकिन कुछ नहीं कहा। क्योंकि मैं इसे चिल्ला नहीं सकता था। मैं अभी नहीं कर सका। और मैंने चेचन्या में प्रवेश करने वाले सैनिकों को देखा। और फिर सेना चेचन्या से बाहर आ गई। खवासवूर था। लेकिन दुनिया छोटी थी। और मुझे फिर से प्रवेश करना था। कई सैनिक मारे गए। लेकिन यह कुछ भी नहीं था कि वे मर गए, लेकिन रूस के नाम पर नहीं। और बाद में मुझे एहसास हुआ कि चेचन गणराज्य हमारी सीमाओं पर इस्लामिक राज्य से बेहतर है, क्योंकि अगर आईएसआईएस हमारी सीमाओं पर पैदा होता, तो यह और अधिक मारता। लेकिन यह अब एक सपना नहीं है। - लेखकः - मूल स्रोतः
मैंने एक बार एक सपना देखा था। उस सपने में, इवान द टेरिबल, कज़ान की यात्रा कर रहे थे। और मैंने उससे कहाः ज़ार-पिता, कज़ान में अजनबी लोग रहते हैं, उन्होंने हमें उन्हें मुक्त करने के लिए नहीं कहा, हमारे सैनिक वहां मर जाएंगे, हम बाद में दोष देंगे, हम पीठ में गोली मार देंगे, वे हमसे नफरत करते हैं - एक विदेशी लोग, नहीं भाई हमारे पास - ज़ार, पिता, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, यूरोप हमारी निंदा करेगा! तब राजा उठे और गुस्से में मुझे तुरंत फांसी देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः मुझे यूरोप में मत आना! और उसने मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने हमले से पहले देखा कि हमारी सेना में टैटार कज़ान की दीवारों की तुलना में अधिक हैं। और हम कज़ान ले गए। और यह पता चला कि राजा सही था। और यूरोप एक डिक्री नहीं है। और टाटर्स के बारे में, मैं गलत था। और योद्धा, जो मर गए, व्यर्थ में नहीं, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए मर गए। और फिर मैं उठा। एक बार जब मेरा सपना था - ज़ार पीटर पोल्टावा में लड़ाई करने जा रहा था। मैंने उससे कहाः ज़ार-पिता, पोल्टावा में हमारे बीच में अजनबी, हमारे बीच के देशद्रोही और स्थानीय लोग स्वेद और डंडों के साथ यूरोप जाना चाहते हैं, हमारे सैनिक वहीं मर जाएंगे, हम दोषी रहेंगे, हम पीठ में गोली मार देंगे। वे हमसे नफरत करते हैं - वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, यूरोप हमारी निंदा करेगा! तब राजा उठे और गुस्से में मुझे तुरंत फांसी देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः मुझे यूरोप में मत आना! और उसने मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सेना में देखा कि पोल्टावा की जेल को स्वेड्स से बचाव किया जा रहा है, कि रूसी सैनिक और स्थानीय कोसाक कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं। और हमने स्वेद को तोड़ा। और यह पता चला कि राजा सही था। और यूरोप एक डिक्री नहीं है। और Cossacks के बारे में, मैं गलत था। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। तीसरी बार मैंने एक सपना देखा - महारानी कैथरीन ने क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए सेना भेजी। मैंने उससे कहाः माँ महारानी, तुर्क क्रीमिया में रहती हैं, लोग हमारे लिए अलग-थलग हैं, वे ओटोमन साम्राज्य के साथ रहना चाहते हैं, उनके पास एक संप्रभु राज्य है - क्रीमियन खानटे, और वे रूसियों को कैद में ले जाते हैं और उन्हें गुलामी में चोरी करते हैं, हमारे सैनिक वहां मर जाएंगे, हमें दोषी ठहराया जाएगा, वे हमें पीठ में गोली मारेंगे, वे हमसे नफरत करते हैं - वे भाई नहीं हैं, सैनिकों को मौत के घाट नहीं भेजेंगे, तुर्की खान हमें जज करेंगे! फिर साम्राज्ञी उठी और तुरंत मुझे दंडात्मक सेवा में भेजना चाहती थी, लेकिन उसने सोचा और कहाः मेरे तुर्की खान को मत मनाओ! और मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सैनिकों में देखा कि हमारे तुर्क से छोटे हैं, लेकिन हम मजबूत हैं। और हमने तुर्की सैनिकों को निकाल दिया। और यह पता चला कि साम्राज्य सही था। और उन्होंने क्रीमिया ले लिया। और तुर्की खान एक डिक्री नहीं था। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। चौथी बार जब मैंने एक सपना देखा - यह सम्राट अलेक्जेंडर को बताया गया था कि मॉस्को जल गया था। नेपोलियन ने जले हुए मास्को से सम्राट को लिखा कि वह शांति के लिए पूछ रहा था। सम्राट ने कोई उत्तर नहीं दिया। नेपोलियन ने दूसरी बार लिखा। और दूसरी बार सम्राट ने जवाब नहीं दिया। जब तीसरा पत्र नेपोलियन से आया, तो मैंने सम्राट से कहाः ग्रैंड ड्यूक, हम शांति बनाएंगे! सैनिकों को समाप्त कर दिया जाता है, हम इतने लंबे समय तक हमला नहीं कर पाएंगे, हमें फिर से इकट्ठा होने की जरूरत है, अगर हम युद्ध जारी रखते हैं - सैनिक मर जाएंगे, हम दोषी होंगे, यूरोप हमें न्याय देगा, पेरिस न्याय करेगा, लोगों को शांति की आवश्यकता है! यहाँ यह है - दुनिया, कागज पर, आपको केवल हमारे सैनिकों के बीच एक रेखा खींचने और बंदूकें वापस लेने की ज़रूरत है - और शांति होगी! तब सम्राट उठे और मुझे ट्रिब्यूनल के तहत भेजना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सोचा और कहाः शांति के बाद होगा! और मुझे सैनिकों के पास भेजा। और मैंने सेना में देखा कि हम फ्रांसीसी ड्राइव करने के लिए तैयार थे। और हमने उन्हें निकाल दिया। जिस सड़क पर वे मास्को गए थे। और फ्रांसीसी घुड़सवार सेना खो रहे थे, ताकत खो रहे थे, फेंक रहे थे हथियारगिर गया और मर गया। और रूसी सैनिकों ने दुश्मन को रूसी भूमि से दूर कर दिया, ठीक सीमाओं तक। और यह पता चला कि सम्राट सही था। और रूसी सैनिकों ने पेरिस में प्रवेश किया। और पेरिस एक डिक्री नहीं थी। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। और फिर मैं उठा। पांचवीं बार मेरे पास एक सपना था - इसमें, कॉमरेड स्टालिन ने कीव की मुक्ति का आदेश दिया। और मैंने कहाः कॉमरेड स्टालिन! कीव, बांदेरा, एसएस डिवीजन गैलिसिया, देशद्रोही, संक्रमण में, यह सोवियत लोग नहीं हैं, वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, वे हमारे साथ नहीं रहना चाहते हैं, वे मुक्ति नहीं चाहते हैं, लेकिन सोवियत सैनिक वहां मर जाएंगे, वे हमें पीछे से गोली मार देंगे। सहयोगी दल हमारी निंदा करेंगे! चलो खारकोव, कॉमरेड स्टालिन में रुकें! और सोवियत सैनिकों ने कीव को मुक्त कराया। बिल्कुल आज़ाद। मुक्त लविवि। लिबरेटेड वॉरसॉ, प्राग, बर्लिन ले गया। और यूक्रेन में, निप्रॉप्स बहाल किया गया था। प्रकाश चालू करें। चलो ट्राम। और Ukrainians ने रूसियों के साथ मिलकर शहर का पुनर्निर्माण किया - एक साथ, जैसा कि उन्होंने लड़ा। एक बंदरिया लंबे समय तक जंगल में दफन रही। लेकिन वे उनके साथ लड़े। दोनों रूसी और Ukrainians। दुश्मनों के साथ के रूप में। साथ में। और जो सैनिक मारे गए, वे व्यर्थ नहीं मरे, बल्कि पितृभूमि की महिमा के लिए गए। दोनों रूसी और Ukrainians। साथ में। और फिर मैं उठा। और मैंने इसे देखने के बाद - सैनिकों को चेचन्या भेजा गया। और मैं यह कहना चाहता था कि अजनबी लोग वहां रहते हैं, दूसरे लोग, वे हमारे लिए भाई नहीं हैं, और उन्हें अलग से रहने देते हैं, वे अपना इस्लामिक राज्य बनाना चाहते हैं - उन्हें ऐसा करने दो, और अगर हम वहां जाते हैं - तो वे हमें गोली मार देंगे, सैनिक मर जाएंगे, अमेरिका हम हमें माफ नहीं करेंगे, यूरोप माफ नहीं करेगा, पूरी दुनिया हमारे खिलाफ लड़ेगी - मैं इसे चिल्लाना चाहता था, लेकिन कुछ नहीं कहा। क्योंकि मैं इसे चिल्ला नहीं सकता था। मैं अभी नहीं कर सका। और मैंने चेचन्या में प्रवेश करने वाले सैनिकों को देखा। और फिर सेना चेचन्या से बाहर आ गई। खवासवूर था। लेकिन दुनिया छोटी थी। और मुझे फिर से प्रवेश करना था। कई सैनिक मारे गए। लेकिन यह कुछ भी नहीं था कि वे मर गए, लेकिन रूस के नाम पर नहीं। और बाद में मुझे एहसास हुआ कि चेचन गणराज्य हमारी सीमाओं पर इस्लामिक राज्य से बेहतर है, क्योंकि अगर आईएसआईएस हमारी सीमाओं पर पैदा होता, तो यह और अधिक मारता। लेकिन यह अब एक सपना नहीं है। - लेखकः - मूल स्रोतः
लखनऊः पं. सागरजी महाराज के अनुसार जानिए शनिवार का राशिफल। कैसी रहेगी सभी राशियों पर शनि की कृपा। मेषः वेब डिजाइनर्स के लिए बेहतरीन दिन है। पूरी एकाग्रता से काम करें, क्योंकि आज आप चमक सकते हैं। कुछ लोगों को विदेश जाने का मौक़ा भी मिल सकता है। बातचीत में कुशलता आज आपका मज़बूत पक्ष साबित होगी, लेकिन जीवनसाथी की ओर से इससे निबटने में बहुत मदद मिलेगी। बृषः समझ-बूझ के कदम उठाने का है, इसलिए तब तक अपने विचार व्यक्त न करें, जब तक आप उनकी सफलता के लिए आश्वस्त न हों। उन लोगों पर नजर रखें जो आपको गलत राह पर ले जा सकते हैं या फिर ऐसी जानकारी दे सकते हैं, जो आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। हो सकता है आपका जीवनसाथी आपको बेवजह तंग करेगा। मिथुनः नए प्रेम-संबंधों के बनने की संभावना ठोस है, लेकिन व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारियों को उजागर करने से बचें। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर आपके पास हालात से उबरने के लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति है, तो कुछ भी असंभव नहीं है। आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा नहीं रहेगा क्योंकि कई मामलों में आपसी असहमति रह सकती है; और इससे आपके रिश्ते कमजोर होंगे। कर्कः अपनी महत्वाकांक्षाओं को ऐसे बड़ों के साथ बांटें, जो आपकी सहायता कर सकते हैं। आज आपके प्रिय की मनोदशा ज्वार-भाटे की तरह उतार-चढ़ाव भरी होगी। दफ़्तर में कोई आपकी योजनाओं में अड़ंगा लगा सकता है- इसलिए आंखें खोलकर रखिए और अपने चारों तरफ हो रही गतिविधियों के प्रति सजग रहिए। आज लोग आपकी वह प्रशंसा करेंगे, जिसे आप हमेशा से सुनना चाहते थे। सिंहः उन लोगों खराब मिज़ाज के चलते आप महसूस कर सकते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको बेवजह तंग कर रहा हैऐसे लोगों को भूल जाए जो सिर्फ़ गाल बजाना जानते हैं और कोई परिणाम नहीं देते। व्यक्तिगत संबंध संवेदनशील और नाज़ुक रहेंगे। कामकाज के दौरान आप पूरे दिन काफ़ी हतोत्साहित महसूस कर सकते हैं। कन्याः आप महसूस करेंगे कि प्यार में बहुत गहराई है और आपका साथी आपको सदा बहुत प्यार करेगा। आपने भली-भांति काम किया है, इसलिए अब उसके फायदे लेने का समय है। सुनी-सुनाई बातों पर आंखें मूंदकर यक़ीन न करें और उनकी सच्चाई को भली-भांति परख लें। परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तुलाः रिश्तेदारों के यहां छोटी यात्रा आपके भागदौड़ भरे दिन में आराम और सुकून देने वाली साबित होगी। आप अपने साथी की बांहों में आराम महसूस करेंगे। अगर आप अपनी योजनाओं को सबके सामने खोलने में बिल्कुल नहीं हिचकते, तो आप अपनी परियोजना को ख़राब कर सकते हैं। अगर आप यात्रा कर रहें है तो सभी ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखना न भूलें। वृश्चिकः दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन खुशनुमा कर देंगे। आपके प्रिय के कड़वे शब्दों के कारण आपका मूड खराब हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी उन्नति कुछ बाधाओं के चलते अटक सकती है, बस धैर्य से काम लें। अगर आप ख़रीदारी पर जाएं तो जरूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें। लगता है कि आपका जीवनसाथी आज बहुत ख़ुश है। आपको सिर्फ़ वैवाहिक जीवन से जुड़ी उसकी योजनाओं में मदद करने की ज़रूरत है। धनुः जो लोग आपके लिए सबसे ज़्यादा अहमियत रखते हैं, उन्हें अपनी बात समझाने में आप परेशानी महसूस करेंगे। आज आपके और आपके प्यार के बीच कोई आ सकता है। अपने वरिष्ठों को नजरअंदाज न करें। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है जो बहुत दौड़-भाग भरा होगा, लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। आज आपका जीवनसाथी आपकी ज़रूरतों को अनदेखा कर सकता है, जिसके चलते आप चिड़चिड़े हो सकते हैं। मकरः संदिग्ध आर्थिक लेन-देन में फंसने से सावधान रहें। कोई नया रिश्ता न सिर्फ़ लंबे वक़्त तक कायम रहेगा, बल्कि फायदेमंद भी साबित होगा। रोमांस- घूमना-फिरना और पार्टी रोमांचक तो होंगे, लेकिन साथ ही थकाऊ भी रहेंगे। आज का दिन बढ़िया प्रदर्शन और ख़ास कामों के लिए है। आप उन लोगों की तरफ़ वादे का हाथ बढ़ाएंगे, जो आपसे मदद की गुहार करेंगे। कुम्भः आपको अपने घर के माहौल में कुछ सकारात्मक बदलाव करने पड़ेंगे। रोमांस आपके दिल-दिमाग़ पर छाया रहेगा, क्योंकि आज आपकी मुलाक़ात अपने प्रिय से होगी। कामकाज के दबाव से ख़ुद को शान्त करने के लिए हो सकता है कि आपको पर्याप्त समय न मिले। यात्रा करना फ़ायदेमंद, लेकिन महंगा साबित होगा। मीनः अपने साथी को नजरअंदाज करना घर पर तनाव का कारण बन सकता है। करियर के नज़रिए से शुरू किया सफ़र कारगर रहेगा, लेकिन ऐसा करने से पहले अपने माता-पिता से इजाजत जरूर ले लें, नहीं तो बाद में वे आपत्ति कर सकते हैं। जल्दबाजी में फैसले न करें, ताकि ज़िंदगी में आगे आपको पछताना न पड़ें।
लखनऊः पं. सागरजी महाराज के अनुसार जानिए शनिवार का राशिफल। कैसी रहेगी सभी राशियों पर शनि की कृपा। मेषः वेब डिजाइनर्स के लिए बेहतरीन दिन है। पूरी एकाग्रता से काम करें, क्योंकि आज आप चमक सकते हैं। कुछ लोगों को विदेश जाने का मौक़ा भी मिल सकता है। बातचीत में कुशलता आज आपका मज़बूत पक्ष साबित होगी, लेकिन जीवनसाथी की ओर से इससे निबटने में बहुत मदद मिलेगी। बृषः समझ-बूझ के कदम उठाने का है, इसलिए तब तक अपने विचार व्यक्त न करें, जब तक आप उनकी सफलता के लिए आश्वस्त न हों। उन लोगों पर नजर रखें जो आपको गलत राह पर ले जा सकते हैं या फिर ऐसी जानकारी दे सकते हैं, जो आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। हो सकता है आपका जीवनसाथी आपको बेवजह तंग करेगा। मिथुनः नए प्रेम-संबंधों के बनने की संभावना ठोस है, लेकिन व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारियों को उजागर करने से बचें। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर आपके पास हालात से उबरने के लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति है, तो कुछ भी असंभव नहीं है। आज का दिन आपके लिए बहुत अच्छा नहीं रहेगा क्योंकि कई मामलों में आपसी असहमति रह सकती है; और इससे आपके रिश्ते कमजोर होंगे। कर्कः अपनी महत्वाकांक्षाओं को ऐसे बड़ों के साथ बांटें, जो आपकी सहायता कर सकते हैं। आज आपके प्रिय की मनोदशा ज्वार-भाटे की तरह उतार-चढ़ाव भरी होगी। दफ़्तर में कोई आपकी योजनाओं में अड़ंगा लगा सकता है- इसलिए आंखें खोलकर रखिए और अपने चारों तरफ हो रही गतिविधियों के प्रति सजग रहिए। आज लोग आपकी वह प्रशंसा करेंगे, जिसे आप हमेशा से सुनना चाहते थे। सिंहः उन लोगों खराब मिज़ाज के चलते आप महसूस कर सकते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको बेवजह तंग कर रहा हैऐसे लोगों को भूल जाए जो सिर्फ़ गाल बजाना जानते हैं और कोई परिणाम नहीं देते। व्यक्तिगत संबंध संवेदनशील और नाज़ुक रहेंगे। कामकाज के दौरान आप पूरे दिन काफ़ी हतोत्साहित महसूस कर सकते हैं। कन्याः आप महसूस करेंगे कि प्यार में बहुत गहराई है और आपका साथी आपको सदा बहुत प्यार करेगा। आपने भली-भांति काम किया है, इसलिए अब उसके फायदे लेने का समय है। सुनी-सुनाई बातों पर आंखें मूंदकर यक़ीन न करें और उनकी सच्चाई को भली-भांति परख लें। परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तुलाः रिश्तेदारों के यहां छोटी यात्रा आपके भागदौड़ भरे दिन में आराम और सुकून देने वाली साबित होगी। आप अपने साथी की बांहों में आराम महसूस करेंगे। अगर आप अपनी योजनाओं को सबके सामने खोलने में बिल्कुल नहीं हिचकते, तो आप अपनी परियोजना को ख़राब कर सकते हैं। अगर आप यात्रा कर रहें है तो सभी ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखना न भूलें। वृश्चिकः दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन खुशनुमा कर देंगे। आपके प्रिय के कड़वे शब्दों के कारण आपका मूड खराब हो सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी उन्नति कुछ बाधाओं के चलते अटक सकती है, बस धैर्य से काम लें। अगर आप ख़रीदारी पर जाएं तो जरूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें। लगता है कि आपका जीवनसाथी आज बहुत ख़ुश है। आपको सिर्फ़ वैवाहिक जीवन से जुड़ी उसकी योजनाओं में मदद करने की ज़रूरत है। धनुः जो लोग आपके लिए सबसे ज़्यादा अहमियत रखते हैं, उन्हें अपनी बात समझाने में आप परेशानी महसूस करेंगे। आज आपके और आपके प्यार के बीच कोई आ सकता है। अपने वरिष्ठों को नजरअंदाज न करें। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है जो बहुत दौड़-भाग भरा होगा, लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। आज आपका जीवनसाथी आपकी ज़रूरतों को अनदेखा कर सकता है, जिसके चलते आप चिड़चिड़े हो सकते हैं। मकरः संदिग्ध आर्थिक लेन-देन में फंसने से सावधान रहें। कोई नया रिश्ता न सिर्फ़ लंबे वक़्त तक कायम रहेगा, बल्कि फायदेमंद भी साबित होगा। रोमांस- घूमना-फिरना और पार्टी रोमांचक तो होंगे, लेकिन साथ ही थकाऊ भी रहेंगे। आज का दिन बढ़िया प्रदर्शन और ख़ास कामों के लिए है। आप उन लोगों की तरफ़ वादे का हाथ बढ़ाएंगे, जो आपसे मदद की गुहार करेंगे। कुम्भः आपको अपने घर के माहौल में कुछ सकारात्मक बदलाव करने पड़ेंगे। रोमांस आपके दिल-दिमाग़ पर छाया रहेगा, क्योंकि आज आपकी मुलाक़ात अपने प्रिय से होगी। कामकाज के दबाव से ख़ुद को शान्त करने के लिए हो सकता है कि आपको पर्याप्त समय न मिले। यात्रा करना फ़ायदेमंद, लेकिन महंगा साबित होगा। मीनः अपने साथी को नजरअंदाज करना घर पर तनाव का कारण बन सकता है। करियर के नज़रिए से शुरू किया सफ़र कारगर रहेगा, लेकिन ऐसा करने से पहले अपने माता-पिता से इजाजत जरूर ले लें, नहीं तो बाद में वे आपत्ति कर सकते हैं। जल्दबाजी में फैसले न करें, ताकि ज़िंदगी में आगे आपको पछताना न पड़ें।
Selfiee New Song Kudiye Ni Teri out: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म सेल्फी (Selfiee) का नया गाना कुडिये नी तेजी वाइब (Kudiye Ni Teri Vibe) यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। फिल्म का नया रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, हालांकि यह ऑरिजनल गाना नहीं है। - अक्षय कुमार की फिल्म सेल्फी का नया गाना हुआ रिलीज। - नया गाना Kudiye Ni Teri रिलीज हो गया है। - इस गाने में अक्षय कुमार और मृणाल ठाकुर नजर आ रहे हैं। Kudiye Ni Teri out: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार ( Akshay Kumar ) की अपकमिंग फिल्म 'सेल्फी' ( Selfiee ) का नया गाना 'कुड़िए नी तेरी' (Kudiyee Ni Teri Song) रिलीज कर दिया गया है। यह गाना आज 9 फरवरी 2023 को रिलीज किया है। सेल्फी के मेकर्स ने इस गाने को एक ग्रैंड म्यूजिक वीडियो की तरह रिलीज किया है। यह गाना रिलीज होते ही यूट्यूब पर वायरल हो गया है। इस गाने में अक्षय कुमार के साथ मृणाल ठाकुर नजर आ रही हैं। गाने में मृणाल ठाकुर और अक्षय कुमार की दमदार केमिस्ट्री नजर आ रही है। अक्षय कुमार का डांस भी फैन्स का दिल जीत रहा है। इस गाने को द प्रोफेसी और जहराह एस खान ने मिलकर गाया है। हालांकि यह एक ऑरिजनल गाना नहीं है बल्कि पंजाबी गाने Vibe का रीमेक है। यही वजह है कि अक्षय कुमार को फिर से ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। इस गाने को यूट्यूब पर महज कुछ ही देर में 4 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। अक्षय कुमार के अलावा फिल्म 'सेल्फी' में इमरान हाशमी, नुसरत भरूचा और डायना पेंटी अहम भूमिका में नजर आएंगी। अक्षय कुमार की फिल्म सेल्फी (Selfiee) इसी महीने 24 फरवरी के दिन रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से पहले दो गाने रिलीज कर दिए गए हैं। कुड़िए नी तेरी से पहले मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी गाना रिलीज किया गया था। यह भी एक रीमेक गाना ही था। हालांकि इस नए गाने में अक्षय कुमार काफी हॉट अवतार में नजर आ रहे हैं जो फैंस को काफी पसंद आ रहा है। इस गाने में एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक्ट्रेस की अदाओं ने सोशल मीडिया पर लहलका मचा दिया है। अक्षय-मृणाल की जोड़ी को भी फैंस सुपरहिट बता रहे हैं। ट्रेंडिंगः
Selfiee New Song Kudiye Ni Teri out: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की फिल्म सेल्फी का नया गाना कुडिये नी तेजी वाइब यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। फिल्म का नया रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, हालांकि यह ऑरिजनल गाना नहीं है। - अक्षय कुमार की फिल्म सेल्फी का नया गाना हुआ रिलीज। - नया गाना Kudiye Ni Teri रिलीज हो गया है। - इस गाने में अक्षय कुमार और मृणाल ठाकुर नजर आ रहे हैं। Kudiye Ni Teri out: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म 'सेल्फी' का नया गाना 'कुड़िए नी तेरी' रिलीज कर दिया गया है। यह गाना आज नौ फरवरी दो हज़ार तेईस को रिलीज किया है। सेल्फी के मेकर्स ने इस गाने को एक ग्रैंड म्यूजिक वीडियो की तरह रिलीज किया है। यह गाना रिलीज होते ही यूट्यूब पर वायरल हो गया है। इस गाने में अक्षय कुमार के साथ मृणाल ठाकुर नजर आ रही हैं। गाने में मृणाल ठाकुर और अक्षय कुमार की दमदार केमिस्ट्री नजर आ रही है। अक्षय कुमार का डांस भी फैन्स का दिल जीत रहा है। इस गाने को द प्रोफेसी और जहराह एस खान ने मिलकर गाया है। हालांकि यह एक ऑरिजनल गाना नहीं है बल्कि पंजाबी गाने Vibe का रीमेक है। यही वजह है कि अक्षय कुमार को फिर से ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। इस गाने को यूट्यूब पर महज कुछ ही देर में चार लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। अक्षय कुमार के अलावा फिल्म 'सेल्फी' में इमरान हाशमी, नुसरत भरूचा और डायना पेंटी अहम भूमिका में नजर आएंगी। अक्षय कुमार की फिल्म सेल्फी इसी महीने चौबीस फरवरी के दिन रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से पहले दो गाने रिलीज कर दिए गए हैं। कुड़िए नी तेरी से पहले मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी गाना रिलीज किया गया था। यह भी एक रीमेक गाना ही था। हालांकि इस नए गाने में अक्षय कुमार काफी हॉट अवतार में नजर आ रहे हैं जो फैंस को काफी पसंद आ रहा है। इस गाने में एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक्ट्रेस की अदाओं ने सोशल मीडिया पर लहलका मचा दिया है। अक्षय-मृणाल की जोड़ी को भी फैंस सुपरहिट बता रहे हैं। ट्रेंडिंगः
नोएडाः उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध जिले के नोएडा में रहने वाले एअर इंडिया के उन कर्मचारियों को दिल्ली के होटलों में ही पृथकवास में रहना होगा जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में चालक दल के रूप में शामिल होंगे। इन कर्मचारियों की कोविड-19 जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें नोएडा भेजा जाएगा। अपर पुलिस आयुक्त श्रीपर्णा गांगुली ने बताया कि कोविड-19 महामारी से प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में गौतमबुद्ध नगर 'रेड जोन' में है। यहां के नागरिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के दृष्टिगत अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, एअर इंडिया से गौतमबुद्ध नगर में निवास कर रहे उनके कर्मचारियों जो विदेश में हवाई यात्राओं में सम्मिलित होंगे, उन्हें दिल्ली में ही रखे जाने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, एअर इंडिया ने अपने पत्र दिनांक आठ मई, 2020 द्वारा सूचित किया कि कंपनी द्वारा चालक दल सदस्यों के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पूरी तरह से अमल किया जा रहा है और उड़ान से वापस आने पर उनकी नियमानुसार आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी और परिणाम आने तक उन्हें होटल में ठहराया जायेगा। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही चालक दल सदस्यों को नोएडा स्थित उनके आवास पर जाने की अनुमति दी जायेगी। इसके अतिरिक्त चालक दल सदस्यों का पांचवें दिन दूसरी आरटी-पीसीआर जांच की जाएगी और नतीजे निगेटिव आने तथा कोविड़-19 के लक्षण न दिखने पर ही उन्हें अगली ड्यूटी पर भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों का गौतमबुद्ध नगर से दिल्ली आवागमन नियमानुसार जारी रहेगा जिससे कि विदेश से भारतीयों को लाने के लिए शुरू की गई उड़ाने प्रभावित नहीं हो। गौरतलब है कि कोविड-19 की वजह से हजारों भारतीय विदेश मे फंसे हैं। उन्हें भारत सरकार हवाई जहाज से स्वदेश वापस ला रही है।
नोएडाः उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध जिले के नोएडा में रहने वाले एअर इंडिया के उन कर्मचारियों को दिल्ली के होटलों में ही पृथकवास में रहना होगा जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में चालक दल के रूप में शामिल होंगे। इन कर्मचारियों की कोविड-उन्नीस जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें नोएडा भेजा जाएगा। अपर पुलिस आयुक्त श्रीपर्णा गांगुली ने बताया कि कोविड-उन्नीस महामारी से प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में गौतमबुद्ध नगर 'रेड जोन' में है। यहां के नागरिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के दृष्टिगत अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, एअर इंडिया से गौतमबुद्ध नगर में निवास कर रहे उनके कर्मचारियों जो विदेश में हवाई यात्राओं में सम्मिलित होंगे, उन्हें दिल्ली में ही रखे जाने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, एअर इंडिया ने अपने पत्र दिनांक आठ मई, दो हज़ार बीस द्वारा सूचित किया कि कंपनी द्वारा चालक दल सदस्यों के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पूरी तरह से अमल किया जा रहा है और उड़ान से वापस आने पर उनकी नियमानुसार आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी और परिणाम आने तक उन्हें होटल में ठहराया जायेगा। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही चालक दल सदस्यों को नोएडा स्थित उनके आवास पर जाने की अनुमति दी जायेगी। इसके अतिरिक्त चालक दल सदस्यों का पांचवें दिन दूसरी आरटी-पीसीआर जांच की जाएगी और नतीजे निगेटिव आने तथा कोविड़-उन्नीस के लक्षण न दिखने पर ही उन्हें अगली ड्यूटी पर भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों का गौतमबुद्ध नगर से दिल्ली आवागमन नियमानुसार जारी रहेगा जिससे कि विदेश से भारतीयों को लाने के लिए शुरू की गई उड़ाने प्रभावित नहीं हो। गौरतलब है कि कोविड-उन्नीस की वजह से हजारों भारतीय विदेश मे फंसे हैं। उन्हें भारत सरकार हवाई जहाज से स्वदेश वापस ला रही है।
अपनी रिलीज के साथ ही बाहुबली-2 फिल्म कई रिकॉड्र्स बनाती जा रही है। खासतौर से इस फिल्म के किरदार बाहुबली, कटप्पा और शिवगामी को फैंस का काफी प्यार मिल रहा है। बता दें कि इस फिल्म में शिवगामी, महिष्मती राज्य की पूर्व रानी के किरदार में हैं और कटप्पा एक गुलाम के रोल में हैं, लेकिन इन दिनों शिवगामी और कटप्पा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कटप्पा शिवगामी के पति के रोल में नजर आ रहे हैं। दरअसल कृष्णन और सत्यराज को एक टेक्सटाइल कंपनी की तरफ से एक एडवर्टिजमेंट मिला है, जिसमें दोनों कपल बने हैं। गौरतलब है कि कटप्पा यानी सत्यराज कुछ वर्ष पहले से इस टेक्सटाइल ब्रांड से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर इसके विज्ञापनों में नजर आ चुके हैं, लेकिन बाहुबली की सफलता को कैश करने के इरादे से उक्त टेक्सटाइल ब्रांड ने कटप्पा के साथ शिवगामी की जोड़ी बनायी है।
अपनी रिलीज के साथ ही बाहुबली-दो फिल्म कई रिकॉड्र्स बनाती जा रही है। खासतौर से इस फिल्म के किरदार बाहुबली, कटप्पा और शिवगामी को फैंस का काफी प्यार मिल रहा है। बता दें कि इस फिल्म में शिवगामी, महिष्मती राज्य की पूर्व रानी के किरदार में हैं और कटप्पा एक गुलाम के रोल में हैं, लेकिन इन दिनों शिवगामी और कटप्पा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कटप्पा शिवगामी के पति के रोल में नजर आ रहे हैं। दरअसल कृष्णन और सत्यराज को एक टेक्सटाइल कंपनी की तरफ से एक एडवर्टिजमेंट मिला है, जिसमें दोनों कपल बने हैं। गौरतलब है कि कटप्पा यानी सत्यराज कुछ वर्ष पहले से इस टेक्सटाइल ब्रांड से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर इसके विज्ञापनों में नजर आ चुके हैं, लेकिन बाहुबली की सफलता को कैश करने के इरादे से उक्त टेक्सटाइल ब्रांड ने कटप्पा के साथ शिवगामी की जोड़ी बनायी है।
चित्रकूट। जिले के व्यस्ततम करवी क्षेत्र में चाेरों ने एक आभूषण प्रतिष्ठान में सेंध लगाकर आठ लाख रूपये के जेवरात और 25 हजार रूपये की नगदी पर हाथ साफ (Stole) कर दिया। सोमवार सुबह घटना की जानकारी होने पर दुकान मालिक के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के पुरानी बाजार मुख्य डाकघर के सामने स्थित सरजू आभूषण मंदिर के मालिक विनोद सोनी उर्फ लाला ने पुलिस को दर्ज करायी गयी तहरीर में कहा कि वह शहर के बाहर गया था। सोमवार को दुकान के पड़ोस में रहने वालों ने बताया कि दुकान की दूसरी मंजिल के बाहर का दरवाजा टूटा है। जानकारी होते ही उनके परिजन दुकान पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में दुकान के अंदर पहुंचे तो देखा कि ऊपरी मंजिल के बीच के चार दरवाजे टूटे हैं। शोकेस काउंटर में रखे लगभग दस किलो चांदी व 50 ग्राम सोने के आभूषण गायब हैं। 25 हजार रुपये की नगदी भी गायब है। सीसीटीवी कैमरे का सीडीआर गायब है। दुकान के अंदर रखे बड़े लॉकर को तोडने का प्रयास किया गया लेकिन खुल नहीं पाया। शहर के मध्य बडी चोरी की जानकारी होते ही अपर एसपी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ हर्ष पांडेय व कोतवाल एके मिश्रा डॉग स्क्वायड व फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ टीम के साथ पहुंचे। दो घंटे की जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि चोर दुकान के बगल के घरों से चढ़े और बाहरी हिस्से की जाली तोडकर दरवाजा तोडा। इसके बाद नीचे आने के दौरान तीन और दरवाजे तोडे तब काउंटर के पास पहुंचे और लाखों की चोरी करके इसी रास्ते से भाग निकले। दुकान मालिक के भाई रामविशाल सोनी की तहरीर पर अज्ञात चोरों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जल्द ही चोरों का पता लगाया जाएगा।
चित्रकूट। जिले के व्यस्ततम करवी क्षेत्र में चाेरों ने एक आभूषण प्रतिष्ठान में सेंध लगाकर आठ लाख रूपये के जेवरात और पच्चीस हजार रूपये की नगदी पर हाथ साफ कर दिया। सोमवार सुबह घटना की जानकारी होने पर दुकान मालिक के परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के पुरानी बाजार मुख्य डाकघर के सामने स्थित सरजू आभूषण मंदिर के मालिक विनोद सोनी उर्फ लाला ने पुलिस को दर्ज करायी गयी तहरीर में कहा कि वह शहर के बाहर गया था। सोमवार को दुकान के पड़ोस में रहने वालों ने बताया कि दुकान की दूसरी मंजिल के बाहर का दरवाजा टूटा है। जानकारी होते ही उनके परिजन दुकान पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में दुकान के अंदर पहुंचे तो देखा कि ऊपरी मंजिल के बीच के चार दरवाजे टूटे हैं। शोकेस काउंटर में रखे लगभग दस किलो चांदी व पचास ग्राम सोने के आभूषण गायब हैं। पच्चीस हजार रुपये की नगदी भी गायब है। सीसीटीवी कैमरे का सीडीआर गायब है। दुकान के अंदर रखे बड़े लॉकर को तोडने का प्रयास किया गया लेकिन खुल नहीं पाया। शहर के मध्य बडी चोरी की जानकारी होते ही अपर एसपी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ हर्ष पांडेय व कोतवाल एके मिश्रा डॉग स्क्वायड व फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ टीम के साथ पहुंचे। दो घंटे की जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि चोर दुकान के बगल के घरों से चढ़े और बाहरी हिस्से की जाली तोडकर दरवाजा तोडा। इसके बाद नीचे आने के दौरान तीन और दरवाजे तोडे तब काउंटर के पास पहुंचे और लाखों की चोरी करके इसी रास्ते से भाग निकले। दुकान मालिक के भाई रामविशाल सोनी की तहरीर पर अज्ञात चोरों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जल्द ही चोरों का पता लगाया जाएगा।
भुवनेश्वरः ओडिशा के राज्यपाल प्राे. गणेशी लाल ने मंगलवार को 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी भुवनेश्वर के महात्मा गांधी रोड पर राज्य स्तरीय समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी उपस्थित रहे। इस बार कोरोना महामारी के कारण भव्य समारोह आयोजित नहीं किया गया। स्कूलों और कॉलेज के छात्रों, स्वैच्छिक संगठनों को परेड में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी। परेड के दौरान कोई झांकी नहीं थी और न की किसी तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। परेड इलाके को सील किया गया था और वहां परेड को देखने के लिए लोगों को आने की अनुमति नहीं थी। समारोह को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए पुलिस के कम से कम 25 दस्तों को तैनात किया गया था। परेड में केवल 14 टुकड़ियों ने हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की युवा अधिकारी केसिंगा की एसडीपीओ एस. सुश्री ने किया।
भुवनेश्वरः ओडिशा के राज्यपाल प्राे. गणेशी लाल ने मंगलवार को बहत्तरवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी भुवनेश्वर के महात्मा गांधी रोड पर राज्य स्तरीय समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी उपस्थित रहे। इस बार कोरोना महामारी के कारण भव्य समारोह आयोजित नहीं किया गया। स्कूलों और कॉलेज के छात्रों, स्वैच्छिक संगठनों को परेड में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी। परेड के दौरान कोई झांकी नहीं थी और न की किसी तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। परेड इलाके को सील किया गया था और वहां परेड को देखने के लिए लोगों को आने की अनुमति नहीं थी। समारोह को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए पुलिस के कम से कम पच्चीस दस्तों को तैनात किया गया था। परेड में केवल चौदह टुकड़ियों ने हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा की युवा अधिकारी केसिंगा की एसडीपीओ एस. सुश्री ने किया।
असम और मिजोरम में सीमा विवाद को लेकर लोगों के बीच में झड़प हो गई है। जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं। यह झगड़ा कई सालों से हो रहा है, इसको सुलझाने के लिए कई तरह से बात की लेकिन सुलझा नहीं पाए। लेकिन अब ये बात इतनी बढ़ गई है कि केंद्र तक तक पहुँच गई है। हाल ही में हुई सीमा विवाद झड़प पर गृह मंत्री अमित शाह असम और मिजोरम सीमा विवाद को शांत करने के लिए एक कदम उठाया है। गृहमंत्री ने मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा को असम और मिज़ोरम के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को बहाल करने के कदमों का आश्वासन दिया है और इसी के साथ झड़प पर "खेद" व्यक्त किया है। अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों को अपने बीच में सौहार्दपूर्ण संबंधों को बहाल करने के कदमों का आश्वासन दिया है। जानकारी दे दें कि दो राज्य मिजोरम सीमा के साथ दक्षिण असम के जिले के लेलपौर में सीमा को भड़काने के लिए गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक बैठक की। बता दें कि इस सीमा विवाद पर कम से कम 20 घरों और दुकानों को तबाह कर दिया गया है क्योंकि मिज़ोस ने चेकपॉइंट पर कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंके थे। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने सोमवार को लायलपुर में भड़काऊ हल निकालने के लिए बातचीत की। यह मामला बढ़ता ही जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर कब तक फैसला लेगी इसका इंतजार किया जा रहा है।
असम और मिजोरम में सीमा विवाद को लेकर लोगों के बीच में झड़प हो गई है। जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं। यह झगड़ा कई सालों से हो रहा है, इसको सुलझाने के लिए कई तरह से बात की लेकिन सुलझा नहीं पाए। लेकिन अब ये बात इतनी बढ़ गई है कि केंद्र तक तक पहुँच गई है। हाल ही में हुई सीमा विवाद झड़प पर गृह मंत्री अमित शाह असम और मिजोरम सीमा विवाद को शांत करने के लिए एक कदम उठाया है। गृहमंत्री ने मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा को असम और मिज़ोरम के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को बहाल करने के कदमों का आश्वासन दिया है और इसी के साथ झड़प पर "खेद" व्यक्त किया है। अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों को अपने बीच में सौहार्दपूर्ण संबंधों को बहाल करने के कदमों का आश्वासन दिया है। जानकारी दे दें कि दो राज्य मिजोरम सीमा के साथ दक्षिण असम के जिले के लेलपौर में सीमा को भड़काने के लिए गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक बैठक की। बता दें कि इस सीमा विवाद पर कम से कम बीस घरों और दुकानों को तबाह कर दिया गया है क्योंकि मिज़ोस ने चेकपॉइंट पर कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंके थे। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने सोमवार को लायलपुर में भड़काऊ हल निकालने के लिए बातचीत की। यह मामला बढ़ता ही जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर कब तक फैसला लेगी इसका इंतजार किया जा रहा है।
Eclipse 2022: 15 दिन के अंतराल में लगेंगे सूर्य-चन्द्र ग्रहण, क्या राशियों पर पड़ेगा असर? धर्म, डेस्क रिपोर्ट। साल 2022 में 4 ग्रहण (Eclipse 2022) लगेंगे। इसमें पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2022) अप्रैल और दूसरा चन्द्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2022) मई में लगेगा। खास बात ये है कि दोनों ग्रहण 15 दिन के अंतराल में लगेंगे। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण की घटना को शुभ नहीं माना जाता है, ऐसे में इन दोनों ग्रहणों का मानव जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। इस दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। ग्रहण के दौरान लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह ग्रहण 12 राशियों को अलग अलग तरीके से प्रभावित कर सकता है। साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को लगेगा। यह दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम के 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। भारत में यह पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2022) आंशिक रहेगा, इस सूर्य ग्रहण को दक्षिणी और पश्चिमी अमेरिका, पेसिफिक अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा। इस सूर्य ग्रहण का सूतक का मान्य नहीं होगा। खास बात ये है कि साल का पहला सूर्य ग्रहण शनिवार के दिन लगने जा रहा है और यह मेष राशि में लगेगा। वही साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2022) 16 मई को सुबह 7. 02 बजे से शुरू होकर 12. 20 बजे तक चलेगा। इसे साउथ-वेस्ट यूरोप, साउथ-वेस्ट एशिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, साउथ अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर अंटार्कटिका और अटलांटिक महासागर में देखा जा सकेगा। मेष राशि- साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण मेष राशि में लगेगा। दोनों ग्रहण शुभ प्रभाव डालेंगे। पदोन्नति और मुनाफे के योग बनेंगे। व्यापार में लाभ हो सकता है। किसी नए कार्य में निवेश कर सकते हैं, लेकिन परिवार के बड़े की सलाह लें। जीवन आनंदमय और परिवार में शांति रहेगी। सिंह राशि- चंद्र और सूर्य ग्रहण का राशि पर प्रभाव दिखेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना है। ऑफिस में आपके काम से बॉस खुश रहेंगे और पदोन्नति भी मिल सकती है। आय में वृद्धि के आसार है और यात्रा के योग बन सकते है। निवेश में सावधानी बरते और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। धनु राशि-धनु राशि वालों पर दोनों ग्रहण का शुभ प्रभाव पड़ेगा। जॉब के नए अवसर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और अटके काम पूरे होंगे। दोस्तों के साथ घूमने का मौका मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार होने के आसार है, किसी भी कार्य को करने से पहले घर में सलाह-विचार जरूर करें। दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिलेगा। वृषभ, कर्क और तुला राशि- इस राशियों पर भी सूर्य ग्रहण का प्रभाव दिखेगा। ग्रहण शुभ फल देने वाला साबित हो सकता है यात्रा निवेश के अवसर मिलेंगे। भाग्य वृद्धि करेगा। काम और समाज में मान सम्मान बढ़ेगा । अपनी योग्यता दिखाने का मौका मिलेगा और उसका फायदा भी मिलेगा। किसी भी नई चुनौती का समाधान करने की ज़िम्मेदारी ले सकते हैं, उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने के साथ प्रमोशन हो सकता है। नौकरी में अच्छे अवसर और तरक्की होने की संभावना है। - ज्योतिषीय के अनुसार, सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। सूतक काल लगते ही तुलसी या कुश मिश्रित जल को खाने-पीने की चीजों में रखना चाहिए। - गर्भवतियों को खासतौर से सावधानी रखनी चाहिए। सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। घर में भी मंदिर को कपड़े से कवर कर देना चाहिए। इस दौरान कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है। - ग्रहण समाप्ति के बाद देवी-देवताओं को स्नान कराकर मंदिर फिर से खोले जाते हैं। - ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें। ग्रहण (Solar) को खुली आंखों से न देखें। ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी विभिन्न माध्यमों, ज्योतिषियों, पंचांग और धार्मिक मान्यताओं से ली गई है। MP BREAKING NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है। लागू करने से पहले एक बार अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से चर्चा कर लें)
Eclipse दो हज़ार बाईस: पंद्रह दिन के अंतराल में लगेंगे सूर्य-चन्द्र ग्रहण, क्या राशियों पर पड़ेगा असर? धर्म, डेस्क रिपोर्ट। साल दो हज़ार बाईस में चार ग्रहण लगेंगे। इसमें पहला सूर्य ग्रहण अप्रैल और दूसरा चन्द्र ग्रहण मई में लगेगा। खास बात ये है कि दोनों ग्रहण पंद्रह दिन के अंतराल में लगेंगे। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण की घटना को शुभ नहीं माना जाता है, ऐसे में इन दोनों ग्रहणों का मानव जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। इस दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। ग्रहण के दौरान लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह ग्रहण बारह राशियों को अलग अलग तरीके से प्रभावित कर सकता है। साल दो हज़ार बाईस का पहला सूर्य ग्रहण तीस अप्रैल दो हज़ार बाईस को लगेगा। यह दोपहर बारह बजकर पंद्रह मिनट से लेकर शाम के चार बजकर सात मिनट तक रहेगा। भारत में यह पहला सूर्य ग्रहण आंशिक रहेगा, इस सूर्य ग्रहण को दक्षिणी और पश्चिमी अमेरिका, पेसिफिक अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा। इस सूर्य ग्रहण का सूतक का मान्य नहीं होगा। खास बात ये है कि साल का पहला सूर्य ग्रहण शनिवार के दिन लगने जा रहा है और यह मेष राशि में लगेगा। वही साल दो हज़ार बाईस का पहला चंद्र ग्रहण सोलह मई को सुबह सात. दो बजे से शुरू होकर बारह. बीस बजे तक चलेगा। इसे साउथ-वेस्ट यूरोप, साउथ-वेस्ट एशिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, साउथ अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर अंटार्कटिका और अटलांटिक महासागर में देखा जा सकेगा। मेष राशि- साल दो हज़ार बाईस का पहला सूर्य ग्रहण मेष राशि में लगेगा। दोनों ग्रहण शुभ प्रभाव डालेंगे। पदोन्नति और मुनाफे के योग बनेंगे। व्यापार में लाभ हो सकता है। किसी नए कार्य में निवेश कर सकते हैं, लेकिन परिवार के बड़े की सलाह लें। जीवन आनंदमय और परिवार में शांति रहेगी। सिंह राशि- चंद्र और सूर्य ग्रहण का राशि पर प्रभाव दिखेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना है। ऑफिस में आपके काम से बॉस खुश रहेंगे और पदोन्नति भी मिल सकती है। आय में वृद्धि के आसार है और यात्रा के योग बन सकते है। निवेश में सावधानी बरते और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। धनु राशि-धनु राशि वालों पर दोनों ग्रहण का शुभ प्रभाव पड़ेगा। जॉब के नए अवसर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और अटके काम पूरे होंगे। दोस्तों के साथ घूमने का मौका मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार होने के आसार है, किसी भी कार्य को करने से पहले घर में सलाह-विचार जरूर करें। दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिलेगा। वृषभ, कर्क और तुला राशि- इस राशियों पर भी सूर्य ग्रहण का प्रभाव दिखेगा। ग्रहण शुभ फल देने वाला साबित हो सकता है यात्रा निवेश के अवसर मिलेंगे। भाग्य वृद्धि करेगा। काम और समाज में मान सम्मान बढ़ेगा । अपनी योग्यता दिखाने का मौका मिलेगा और उसका फायदा भी मिलेगा। किसी भी नई चुनौती का समाधान करने की ज़िम्मेदारी ले सकते हैं, उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने के साथ प्रमोशन हो सकता है। नौकरी में अच्छे अवसर और तरक्की होने की संभावना है। - ज्योतिषीय के अनुसार, सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। सूतक काल लगते ही तुलसी या कुश मिश्रित जल को खाने-पीने की चीजों में रखना चाहिए। - गर्भवतियों को खासतौर से सावधानी रखनी चाहिए। सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। घर में भी मंदिर को कपड़े से कवर कर देना चाहिए। इस दौरान कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है। - ग्रहण समाप्ति के बाद देवी-देवताओं को स्नान कराकर मंदिर फिर से खोले जाते हैं। - ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें। ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। ग्रहणकाल के दौरान गुरु प्रदत्त मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्स्टेबल (CSBC) ने बिहार पुलिस में फायरमैन के 2380 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। इच्छुक कैंडिडेट्स बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर कैंडिडेट्स का सिलेक्शन लिखित परीक्षा, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। इस भर्ती प्रक्रिया में महिला और पुरुष कैंडिडेट्स शामिल हो सकते हैं। इन पदों के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से इंटरमीडिएट परीक्षा पास कर चुके कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 25 साल होनी चाहिए। हालांकि, रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को नियमानुसार उम्र सीमा में छूट दी जाएगी। उम्र की गणना 1 अगस्त 2020 से की जाएगी। इन पदों के लिए सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्स्टेबल की ऑफिशियल वेबसाइट http://csbc. bih. nic. in/ के जरिए आवेदन किया जा सकता है। वेबसाइट पर आपको भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी और नोटिफिकेशन मिल जाएगा। एप्लीकेशन फॉर्म सावधानी से भरें, फॉर्म में गलती होने पर इसे निरस्त किया जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्स्टेबल ने बिहार पुलिस में फायरमैन के दो हज़ार तीन सौ अस्सी पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। इच्छुक कैंडिडेट्स बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर कैंडिडेट्स का सिलेक्शन लिखित परीक्षा, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। इस भर्ती प्रक्रिया में महिला और पुरुष कैंडिडेट्स शामिल हो सकते हैं। इन पदों के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से इंटरमीडिएट परीक्षा पास कर चुके कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स की न्यूनतम उम्र अट्ठारह साल और अधिकतम उम्र पच्चीस साल होनी चाहिए। हालांकि, रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को नियमानुसार उम्र सीमा में छूट दी जाएगी। उम्र की गणना एक अगस्त दो हज़ार बीस से की जाएगी। इन पदों के लिए सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्स्टेबल की ऑफिशियल वेबसाइट http://csbc. bih. nic. in/ के जरिए आवेदन किया जा सकता है। वेबसाइट पर आपको भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी और नोटिफिकेशन मिल जाएगा। एप्लीकेशन फॉर्म सावधानी से भरें, फॉर्म में गलती होने पर इसे निरस्त किया जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.