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महाराष्ट्र वर्तमान में एक गंभीर कोविड-19 संकट से गुजर रहा है और सरकार ने लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लगाकर इससे लड़ने की तैयारी कर ली है। नागरिकों को केवल आवश्यक सेवाओं के लिए बाहर निकलने की अनुमति है, और पुलिस भी किसी गैर-आवश्यक गतिविधि के लिए छूट देने के मूड में नहीं दिख रही है। इस बीच, मुंबई पुलिस ने एक ऐसे शख्स का जवाब दिया है जो लॉकडाउन में अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए तड़प रहा है। मुंबई पुलिस ने हाल ही में वाहनों के लिए लाल, हरे और नारंगी रंग के तीन स्टिकर निकाले हैं। लाल स्टिकर का उपयोग स्वास्थ्य पेशेवरों, एम्बुलेंस और अन्य चिकित्सा सेवा प्रदाताओं द्वारा किया जाना है, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के साथ काम करने वालों और बिजली, मीडिया, आदि जैसी आवश्यक सेवाओं में कार्यरत लोगों के लिए नारंगी स्टिकर और किराने का सामान, सब्जियां, इत्यादि का परिवहन करने वालों के लिए हरा स्टिकर निकाला गया है। इन नियमों के बीच, एक नागरिक ने मुंबई पुलिस से पूछा है कि अपनी प्रेमिका से मिलने जाने के लिए वाहन पर कौन सा स्टिकर चिपकाना चाहिए क्योंकि वह उसे बहुत मिस कर रहा है। जैसी उन्होंने ये ट्वीट किया, वैसे ही ये वायरल हो गया है। लोगों को मुंबई पुलिस का जवाब काफी पसंद आ रहा है और वे कमेंट्स के जरिए रिएक्ट कर रहे हैं। इस बीच, मुंबई ने बुधवार को 7,684 नए कोरोना के मामले देखे, जिससे कुल मामलों की संख्या 6,01,590 पहुंच गई है। इसने 62 मौतें भी दर्ज कीं, जिससे कुल आंकड़ा 12,501 तक चढ़ गया है। महामारी में महाराष्ट्र सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य रहा है जहां बुधवार को 24 घंटे के अंतराल में इसमें 67,468 मामले दर्ज किए गए, साथ ही एक ही समय सीमा में सबसे अधिक 568 मौतें हुईं हैं।
महाराष्ट्र वर्तमान में एक गंभीर कोविड-उन्नीस संकट से गुजर रहा है और सरकार ने लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लगाकर इससे लड़ने की तैयारी कर ली है। नागरिकों को केवल आवश्यक सेवाओं के लिए बाहर निकलने की अनुमति है, और पुलिस भी किसी गैर-आवश्यक गतिविधि के लिए छूट देने के मूड में नहीं दिख रही है। इस बीच, मुंबई पुलिस ने एक ऐसे शख्स का जवाब दिया है जो लॉकडाउन में अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए तड़प रहा है। मुंबई पुलिस ने हाल ही में वाहनों के लिए लाल, हरे और नारंगी रंग के तीन स्टिकर निकाले हैं। लाल स्टिकर का उपयोग स्वास्थ्य पेशेवरों, एम्बुलेंस और अन्य चिकित्सा सेवा प्रदाताओं द्वारा किया जाना है, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के साथ काम करने वालों और बिजली, मीडिया, आदि जैसी आवश्यक सेवाओं में कार्यरत लोगों के लिए नारंगी स्टिकर और किराने का सामान, सब्जियां, इत्यादि का परिवहन करने वालों के लिए हरा स्टिकर निकाला गया है। इन नियमों के बीच, एक नागरिक ने मुंबई पुलिस से पूछा है कि अपनी प्रेमिका से मिलने जाने के लिए वाहन पर कौन सा स्टिकर चिपकाना चाहिए क्योंकि वह उसे बहुत मिस कर रहा है। जैसी उन्होंने ये ट्वीट किया, वैसे ही ये वायरल हो गया है। लोगों को मुंबई पुलिस का जवाब काफी पसंद आ रहा है और वे कमेंट्स के जरिए रिएक्ट कर रहे हैं। इस बीच, मुंबई ने बुधवार को सात,छः सौ चौरासी नए कोरोना के मामले देखे, जिससे कुल मामलों की संख्या छः,एक,पाँच सौ नब्बे पहुंच गई है। इसने बासठ मौतें भी दर्ज कीं, जिससे कुल आंकड़ा बारह,पाँच सौ एक तक चढ़ गया है। महामारी में महाराष्ट्र सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य रहा है जहां बुधवार को चौबीस घंटाटे के अंतराल में इसमें सरसठ,चार सौ अड़सठ मामले दर्ज किए गए, साथ ही एक ही समय सीमा में सबसे अधिक पाँच सौ अड़सठ मौतें हुईं हैं।
भोजपुर का मोस्ट वांटेड मनीष उर्फ हीरो पुलिस के हाथ से निकल गया। पुलिस के आने के पहले ही वह भाग निकला। हालांकि पुलिस ने उसके दो शागिर्दों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें चौरी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव निवासी सोनु कुमार व बिट्टु कुमार है। दोनों सहोदर भाई हैं। इन पर हीरो को संरक्षण देने व भगाने का आरोप है। जानकारी के अनुसार एसपी को बहुआरा गांव निवासी नंदजी यादव के घर में हीरो के होने की सूचना मिली। इसके बाद एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने बहुआरा गांव में छापेमारी की। इस दौरान करीब दो घंटे तक पुलिस नंदजी यादव के घर की तलाशी ली गयी। हालांकि हीरो हाथ नहीं आ सका। इसके बाद पुलिस ने नंदजी यादव के पुत्र बिट्टु व सोनू को गिरफ्तार कर लिया गया। एसपी आदित्य कुमार ने बताया कि गिरफ्तार दोनों युवक हीरो के शागिर्द हैं। इनके द्वारा हीरो को पनाह दिया जा रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान दोनों की मदद से हीरो भागने में सफल रहा। दोनों से पूछताछ की जा रही है। उनकी निशानदेही पर हीरो के अन्य ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है। छापेमारी टीम में चौरी व सहार सहित आधा दर्जन थानों की पुलिस शामिल थी।
भोजपुर का मोस्ट वांटेड मनीष उर्फ हीरो पुलिस के हाथ से निकल गया। पुलिस के आने के पहले ही वह भाग निकला। हालांकि पुलिस ने उसके दो शागिर्दों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें चौरी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव निवासी सोनु कुमार व बिट्टु कुमार है। दोनों सहोदर भाई हैं। इन पर हीरो को संरक्षण देने व भगाने का आरोप है। जानकारी के अनुसार एसपी को बहुआरा गांव निवासी नंदजी यादव के घर में हीरो के होने की सूचना मिली। इसके बाद एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने बहुआरा गांव में छापेमारी की। इस दौरान करीब दो घंटे तक पुलिस नंदजी यादव के घर की तलाशी ली गयी। हालांकि हीरो हाथ नहीं आ सका। इसके बाद पुलिस ने नंदजी यादव के पुत्र बिट्टु व सोनू को गिरफ्तार कर लिया गया। एसपी आदित्य कुमार ने बताया कि गिरफ्तार दोनों युवक हीरो के शागिर्द हैं। इनके द्वारा हीरो को पनाह दिया जा रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान दोनों की मदद से हीरो भागने में सफल रहा। दोनों से पूछताछ की जा रही है। उनकी निशानदेही पर हीरो के अन्य ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है। छापेमारी टीम में चौरी व सहार सहित आधा दर्जन थानों की पुलिस शामिल थी।
अतः केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त उक्त अधिनियम की धारा । को उपधारा ४५४ द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए उपर्युक्त स्थापनाओं पर उस या उसी प्रभावी तिथि से अधिनियम को लागू करते हैं जो उक्त स्थापनाओं के नाम के सामने दर्शायी गयी है । हास रघुराम हूँ एस० रघुराम क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त । भाग III - - खण्ड 4 ] सं. के.भ.नि.आ.1(4)एएस(1816)/2000/1922-केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त को जहां प्रतीत होता है कि निम्नलिखित स्थापनाओं से संबंधित नियोक्ता तथा कर्मचारियों का बहुमत इस बात से सहमत हैं कि कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 31952 का 198 के उपबंध उक्त स्थापनाओं पर लागू किये जायें । क्र०सं०. कोड नं०. मै० ए. डी. एन्टरप्राईजिज, पुबरन पक, हटीगांव, दोसपुर, गुवाहाटी 6.आता मई पै० इंडियन इंस्टीटूट ऑफ एन्टरप्रीन्यूर शिप, जू- नरेन्गो रोग, गुवाहाटी - 781024. & HTHTAR मै० वैलकम एन्टरप्राईजिज प्राoलिo. राज सिंह पैलेस, एस. एस. रोड, गुवाहाटी हूँ आसाम मै० एन्जल्स अॅप गोड हाई स्कूल, पी. डी. चालोहा रोड़, हिदायतपुर, गुवाहाटी-38 आसाम मै० प्रियंका हैल्थ केयर एण्ड एलाईड प्रोडक्टस-YTo लिए. केयर / ऑफ गुवाहाटी न्यूरोलोजीकल रिसर्च इंस्टीटूट, दीसपुर, गुवाहाटी 68 असा प
अतः केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त उक्त अधिनियम की धारा । को उपधारा चार सौ चौवन द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए उपर्युक्त स्थापनाओं पर उस या उसी प्रभावी तिथि से अधिनियम को लागू करते हैं जो उक्त स्थापनाओं के नाम के सामने दर्शायी गयी है । हास रघुराम हूँ एसशून्य रघुराम क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त । भाग III - - खण्ड चार ] सं. के.भ.नि.आ.एकएएस/दो हज़ार/एक हज़ार नौ सौ बाईस-केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त को जहां प्रतीत होता है कि निम्नलिखित स्थापनाओं से संबंधित नियोक्ता तथा कर्मचारियों का बहुमत इस बात से सहमत हैं कि कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बावन इकतीस हज़ार नौ सौ बावन का एक सौ अट्ठानवे के उपबंध उक्त स्थापनाओं पर लागू किये जायें । क्रशून्यसंशून्य. कोड नंशून्य. मैशून्य ए. डी. एन्टरप्राईजिज, पुबरन पक, हटीगांव, दोसपुर, गुवाहाटी छः.आता मई पैशून्य इंडियन इंस्टीटूट ऑफ एन्टरप्रीन्यूर शिप, जू- नरेन्गो रोग, गुवाहाटी - सात लाख इक्यासी हज़ार चौबीस. & HTHTAR मैशून्य वैलकम एन्टरप्राईजिज प्राoलिo. राज सिंह पैलेस, एस. एस. रोड, गुवाहाटी हूँ आसाम मैशून्य एन्जल्स अॅप गोड हाई स्कूल, पी. डी. चालोहा रोड़, हिदायतपुर, गुवाहाटी-अड़तीस आसाम मैशून्य प्रियंका हैल्थ केयर एण्ड एलाईड प्रोडक्टस-YTo लिए. केयर / ऑफ गुवाहाटी न्यूरोलोजीकल रिसर्च इंस्टीटूट, दीसपुर, गुवाहाटी अड़सठ असा प
शिमला। कोविड-19 के मामलों बढ़ते मामलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की अपील की है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ पार्लियामेंटेरियन्स ऑन पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को स्पेशलाइज्ड चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार कर रही है। आने वाले समय में इन सुधारों के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों को विश्व स्तरीय बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का समावेश किया जाएगा ताकि लोगों के उनके घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। टांडा में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद गवर्मेट मेडिकल कॉलेज और शिमला में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (आईजीएमसीएच) में अगले छह महीने में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे मरीजों का समय बचेगा और सर्जरी के सटीक परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आईजीएमसीएच में एक पीईटी ब्लॉक का निर्माण शुरू हो गया है। वहीं, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद गवर्मेट मेडिकल कॉलेज में 50 करोड़ रुपए की लागत से पीईटी स्कैन मशीन लगाई जा रही है। सुक्खू ने कहा कि सरकार ने आईजीएमसीएच में ट्रामा सेंटर समेत 175 बेड वाले आपात चिकित्सा सुविधा के लिए 11 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। उन्होंने कहा कि चम्बा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की इमारतें बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इनके इस साल पूरा होन की उम्मीद है। इसके बाद लोगों को उनके घरों के पास ही स्पेशलाइज्ड चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
शिमला। कोविड-उन्नीस के मामलों बढ़ते मामलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की अपील की है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ पार्लियामेंटेरियन्स ऑन पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को स्पेशलाइज्ड चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार कर रही है। आने वाले समय में इन सुधारों के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों को विश्व स्तरीय बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का समावेश किया जाएगा ताकि लोगों के उनके घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। टांडा में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद गवर्मेट मेडिकल कॉलेज और शिमला में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल में अगले छह महीने में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे मरीजों का समय बचेगा और सर्जरी के सटीक परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आईजीएमसीएच में एक पीईटी ब्लॉक का निर्माण शुरू हो गया है। वहीं, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद गवर्मेट मेडिकल कॉलेज में पचास करोड़ रुपए की लागत से पीईटी स्कैन मशीन लगाई जा रही है। सुक्खू ने कहा कि सरकार ने आईजीएमसीएच में ट्रामा सेंटर समेत एक सौ पचहत्तर बेड वाले आपात चिकित्सा सुविधा के लिए ग्यारह करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। उन्होंने कहा कि चम्बा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की इमारतें बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इनके इस साल पूरा होन की उम्मीद है। इसके बाद लोगों को उनके घरों के पास ही स्पेशलाइज्ड चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
रेखा और आरती छाबड़िया से जुड़े कुछ खास किस्सा हम आपको बताने वाले हैं। जब रेखा ने फिल्म के सेट पर आरती छाबड़िया को मारा था थप्पड़ जाने पूरा किस्सा विस्तार से। बॉलीवुड एक्ट्रेस आरती छाबड़िया आज भले इंडस्ट्री से गायब है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वह इंडस्ट्री पर राज किया करती थीं। कुछ ही फिल्म में आरती छाबड़िया नजर आई थी लेकिन उनकी वह भी फिल्म धमाकेदार साबित हुई। आज के इस आर्टिकल में हम आपको आरती छाबड़िया के निजी जिंदगी से जुड़ी एक बात बता रहे हैं जब एक्ट्रेस रेखा ने उन्हें जोरदार थप्पड़ मारा था। एक बार रेखा को आरती छाबड़िया ने फिल्म के सेट पर थप्पड़ मारा था। इस बात का खुलासा किसी और ने नही बल्कि खुद आरती छाबड़िया ने किया है। आरती छाबड़िया ने कहा था कि- रेखा जी ने मुझे फिल्म 'लज्जा' के दौरान पीटा था। यह घटना साल 2001 की है। आरती छाबड़िया ने आगे यह भी कहा था कि- 'रेखा जी ने मुझे थप्पड़ मारा था. लज्जा के दौरान मुझे पीटा गया था। ये मेरी पहली फिल्म थी जिसमें मैंने कैमियो किया था। मैं इतना रोई हूं. मेरा रोना बंद ही नहीं हो रहा था. हालांकि, ये एक ऑनस्क्रीन थप्पड़ था जिसके बारे में आरती ने खुलासा किया था। आरती छाबड़िया के करियर की बात करें तो उन्होनें तीन साल की उम्र में ऐड में एक मॉडल के रूप में अपना करियर शुरू किया था। अब भले अभिनेत्री फिल्मों से दूर है लेकिन आज भी वह किसी पहचान की मौहताज नही हैं। आरती छाबड़िया ने नवंबर 1999 में 'मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 1999' पेजेंट जीता था। साथ ही सब राउंड के लिए पुरस्कार भी जीते जहां उन्हें 'मिस फोटोजेनिक' और 'मिस ब्यूटीफुल फेस' का ताज पहनाया गया। आरती ने साल 2002 में फिल्म 'तुमसे अच्छा कौन है' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा एक्ट्रेस ने 'आवारा पागल दीवाना', 'राजा भैया', 'तीसरी आंख', 'हे बेबी', 'डैडी कूल' जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
रेखा और आरती छाबड़िया से जुड़े कुछ खास किस्सा हम आपको बताने वाले हैं। जब रेखा ने फिल्म के सेट पर आरती छाबड़िया को मारा था थप्पड़ जाने पूरा किस्सा विस्तार से। बॉलीवुड एक्ट्रेस आरती छाबड़िया आज भले इंडस्ट्री से गायब है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वह इंडस्ट्री पर राज किया करती थीं। कुछ ही फिल्म में आरती छाबड़िया नजर आई थी लेकिन उनकी वह भी फिल्म धमाकेदार साबित हुई। आज के इस आर्टिकल में हम आपको आरती छाबड़िया के निजी जिंदगी से जुड़ी एक बात बता रहे हैं जब एक्ट्रेस रेखा ने उन्हें जोरदार थप्पड़ मारा था। एक बार रेखा को आरती छाबड़िया ने फिल्म के सेट पर थप्पड़ मारा था। इस बात का खुलासा किसी और ने नही बल्कि खुद आरती छाबड़िया ने किया है। आरती छाबड़िया ने कहा था कि- रेखा जी ने मुझे फिल्म 'लज्जा' के दौरान पीटा था। यह घटना साल दो हज़ार एक की है। आरती छाबड़िया ने आगे यह भी कहा था कि- 'रेखा जी ने मुझे थप्पड़ मारा था. लज्जा के दौरान मुझे पीटा गया था। ये मेरी पहली फिल्म थी जिसमें मैंने कैमियो किया था। मैं इतना रोई हूं. मेरा रोना बंद ही नहीं हो रहा था. हालांकि, ये एक ऑनस्क्रीन थप्पड़ था जिसके बारे में आरती ने खुलासा किया था। आरती छाबड़िया के करियर की बात करें तो उन्होनें तीन साल की उम्र में ऐड में एक मॉडल के रूप में अपना करियर शुरू किया था। अब भले अभिनेत्री फिल्मों से दूर है लेकिन आज भी वह किसी पहचान की मौहताज नही हैं। आरती छाबड़िया ने नवंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में 'मिस इंडिया वर्ल्डवाइड एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे' पेजेंट जीता था। साथ ही सब राउंड के लिए पुरस्कार भी जीते जहां उन्हें 'मिस फोटोजेनिक' और 'मिस ब्यूटीफुल फेस' का ताज पहनाया गया। आरती ने साल दो हज़ार दो में फिल्म 'तुमसे अच्छा कौन है' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा एक्ट्रेस ने 'आवारा पागल दीवाना', 'राजा भैया', 'तीसरी आंख', 'हे बेबी', 'डैडी कूल' जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
जीवन वृत्त एवं रचनाएँ है। विरह की साक्षात मूर्ति घनानन्द ने अपनी कथनी और करनी, अर्थात अपने जीवन और काव्य म एकात्म्य स्थापित किया था - जिसे मुख गाई सोईकरों है के माध्यम से सर्वतित किया गया है । 'राधाकृष्ण दास' ग्रंथावली म एक विवरण आया है। घनानन्द से सम्बद्ध एक किंवदन्ती पर आधारित इस विवरण म कहा गया है कि मथुरा म कत्लेआम के समय घनानन्दन सैनिका से कहा था कि मुझ धोर धीर देर तक तलवार की घाव दो तलवार की धाव के साथ व्रज की धूलि म लेटते हुए इन्होन प्राण त्याग किया। उपर्युक्त ववित्त के तीसरे वद म इस तथ्य की आर भी सकेन हुआ है। ऐसे हू हरि सत जन मारे जमनन आइ'के उल्लेख द्वारा ता वृदावन दास जी न घनानन्द की मृत्यु के कारण को एकदम निर्विवाद बना दिया है। अपने व्यक्तित्व की भाति ही घनानंद का कृतित्व भी रीतिकालीन अन्य कवियो की अपेक्षा अधिक व्यापक जौर गहरी भावभूमि पर प्रतिष्ठित है। छद विधान की दष्टि से भी ये जपन समकालीन कवियोस पयाप्त भिन है । कवित्त, सवया, दोहा, सोरठा, अरत्ल, शोभन निभगी, ताटव, निसानी, सुमेर, घनाक्षरी चौपाई, प्लवग, छप्पय, विष्णुपद जाति विभिन छदा के साथ ही इन्होन पद शली म राग-रागिनिया पर आधारित बहुत बड़ी संख्या म गीत भी लिसे है । इनके गीत सूर, तुलसी, ववीर, मीरा आदि के गीता से पर्याप्त भिन और शास्त्रीय संगीत की मर्यादा से पूरी तरह मयादिन है। अधिवाशत चार चार पक्तिया म आबद्ध य गीत ताल और सुर के अदभुत जारोह-अवराह के माध्यम से घनान द की संगीत ममनता का प्रामाणित करत हैं। एक विशिष्ट संगीतन होन के इनक परम्परागत छदो - विशेषत ववित्त सवयोम भी संगीतात्मक्ता वा सुन्दर विधान मिलता है। घनानन्द ग्रथावली म सकलित रचनाओं का दखन से स्पष्ट पता चलता है कि भाव वविष्य व साथ ही शली वविध्य का भी सुंदर विधान घनानादन किया है। भाषा की दृष्टि से य मुम्यत प्रभाषा के कवि है । लक्नि पूर्वी हिन्दी, अवधी पजाबी, राजस्थानी जादि के साथ ही अरबी फारसी मिश्रित भाषा के प्रयोग में भी इन्होने अपनी निपुणता का परिचय दिया है। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र न 'घनानद प्रथावली के अवगत इनकी निम्नलिखित रचनाओं को स्थान दिया है १ सुजानहित, २ कृपा वाद निबंध ३ वियागवलि, ४ इश्शलता, ५ यमुना यश ६ प्रोतिपावस ७ प्रेमपनिका ८ प्रेम सरोवर, ६ नजविलास १० सरम बात, ११ अनुभव पद्रिया १२ रग बधाई १३ प्रेम-पद्धति १४ वृषभानुपुर उपमा, १५ गाडुल गीत, १६ नाम माधुरी, १७ गिरि पूजन, १८ विचार मार, १६ दान घटा, २० भावना प्रकाश, २१ कृष्ण गौमुदी, २२ धाम चमत्कार, २३ प्रिया प्रसाद, २४ बृगवन मुद्रा २५ व्रज स्वरूप, २६ गोकुल चरित्र, २७ प्रेम महली, २८ रसना यश, २६ गोकुल विनोद, ३० ग्रज प्रसाद, ३१ मुरलिया माद, ३२ मनोरथ मजरी, ३३ व्रज व्यवहार, ३४ गिरिगाथा, ३५ प्रजवर्णन, ३६ छत्रप्टव, ३७ निभगी छ २८ ववित्त संग्रह, ३६ स्फुट, ४० पदावली जोर ४१ परमहंस वशावली । वस्तुत ऊपर गिनायी गई रचनाजा में से अधिकाश स्वता रचना न होकर विभिन छादो म भिन्न भिन्न विषयो वे सक्षिप्त वणन हैं । जसे- 'प्रेम सरोवर' केवल आठ दोहाम वृंदावन के एक सुन्दर स्थल की झावी है। इसी प्रकार 'वियोग वेलि, यमुना यश', 'प्रीतिपावस', 'नज विलास', सरस वसत, 'अनुभव चद्रिया, 'रग वधाई 'प्रेम पहेलो, रसना यश', छदाप्टर, 'निभगी' आदि दो से लेकर पृष्ठो तक की अत्यंत छोटी रचनाएँ है। यहां एक बात विशेष रूप से विचारणीय है कि इन सभी रचनाओं को निविप से घनानंद द्वारा रचित मान लेना कठिन है। उनके विरक्त होन से पूर्व की 'सुजानहित' और विरक्ति स बाद की 'पदावली' सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचनाएँ ह जा उनके तीन चौथाई सभी अधिक कृतित्व को समेटे हुए है। छोटी रचनाओ मे 'प्रेम पनिवा', कृपावाद निवध', प्रेम पद्धति जादि को भी निविवाद रूप से घनानन्द कृत माना जा सकता है। अत 'घनजान द ग्रथावली' म सक्लित लगभग ८० प्रतिशत रचनाए निश्चित रूप से प्रामाणिक मानी जा सकती यहा इस तथ्य की ओर भी सवेत कर देना आवश्यक है कि घनानद की रचानाओ का सबसे प्राचीन संग्रह घनआनद कवित्त है । इसे उनके समसामयिक एव मित्र ब्रजनाथ ने बडे श्रम स तयार किया था। इसम लगभग ५०० ववित्तसवये रखे गए हैं। 'कृपाक द निबंध 'प्रेम पत्रिका 'दान घटा आदि छोटी रचनाजो वे कवित्त सवयो के साथ ही सुजानहित के अधिकाश ववित्त सवयं भी इसम आ गए है। आचाय विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का तो यहाँ तक कहना है कि 'घनआन द ववित्त' को हो किसी अस्त यस्त प्रति के आधार पर 'सुजानहित' सग्रह तयार किया गया है। इस सम्बध मे वास्तविकता चाहे जो हो, लेकिन यह एक स्पष्ट तथ्य है कि 'धनजानद ववित्त' म चौबीस ऐसे कवित्त सवये है जि हे घनआन द ग्रथावली' की किसी भी रचना में स्थान नहीं मिला है। अत ग्रथावली के जतगत इह 'प्रीशोप से रखा गया है। अपनी विषय वस्तु, भाव भगिमा भाषा शैली आदि सभी दष्टिया से इन कवित्त सवयों की प्रामा णिकता के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की आशका की गुजाइश नही है। कृपा वाद निबंध', प्रेमपनिका दान घटा' जादि के कवित्त सवया का 'घनआनद ववित्त म समावेश कवि के भक्त रूप का भी सक्तक है। इस प्रकार यह संग्रह लौकिक शृगार और भक्ति भावना- दोनो का प्रतिनिधित्व करता है। यदि जीवन वृत्त एव रचनाएँ ग्रयावली म सगहीत पदावली को इसके साथ मिला लिया जाए तो विवेचन कवि का समग्र कृतित्व हमार सामने आ जाता है । इसके आधार पर उसके वायवी अतर्राह्य सभी विशेषताओं का समुचित आकलन किया जा सकता है। वैसे घनान द की साहित्यिक कीर्ति का प्रमुख स्तम्भ 'सुजानहिन' ही है । यह मुख्यत लौकिक शृंगार की रचना है, जिसम शृगार के सयाग और वियोग दोना पक्षो का चित्रण है। शेष सभी रचनाएँ किसी न किसी रूप मकवि को भक्ति भावना व्यजित करती है । ३ 'लोग है लागि कवित्त वनावत मोहिं तो मेरे कवित्त वनावत' 'घनानन्द और अ य रीतिमुक्त कवि भी रीतिवद्ध लक्षणवार कविया की भाँति ही तत्कालीन युग चेतना से जुड़े हुए थे । तत्युगीन ह्रासोमुख सामती समाज के मानवी सामाजिक सबधों के अंतर्गत रह कर हो इन कविया की स्वच्छ दता और मुक्ति की कल्पना को आकार मिला था। घनानन्द के साथ ही अधिवाश रीति मुक्त कविया को राजदरबारा वा जाश्रय ग्रहण करना पड़ा था। यद्यपि कवि के रूप मे घनान द न किसी राजदरवार का आश्रय नही ग्रहण किया, फिर भी मुहम्मदशाह के दरवार से सम्वद्ध कमचारी होने के नाते जाने अनजान बुछ दरबारी प्रभाव उन पर अवश्य था । बोधा पाना नरेश के आश्रित कवि थे और आलम को बहादुरशाह का आश्रय मिला था । ठाकुर कई राजदरवारा से सम्बद्ध रहे हैं लेकिन किसी प्रलोभन म अपनी स्वच्छता पर उहान कभी आच नहीं आने दो । कहा जाता है कि एक बार बादा नरेश हिम्मतबहादुर ने अपन भरे दरबार म ठाकुर को कुछ क्टुवचन वह दिया था। इसस क्रुद्ध होकर ठाकुर ने म्यान से तलवार निकाल लिया था और कहा था सेवक सिपाही हम उन रजपूतन के, दान जुद्ध जुरिवेम नवु जेन मुरवे । नीति दनवार ह मही के महिपालन का, हिय वे विसुद्ध है, सनही साचे उरके । के ठाकुर कहत हम वरी बेवकूफन जालिम दमाद है जानिया ससुर के । चोजिन के चोजी महा मोजिन के महाराज, हम कविराज है मैं चावर चतुर वे ॥ - आचाय रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य का इतिहास, पृ० ३६२ । इन सभी रीतिमुक्त कविया ने युग की प्रमुख काय प्रवत्ति शृगार का ही अपन काव्य का विषय बनाया । युगीन भावधारा से वध कर भी य कवि रीति या परम्परा के जधानुयायी नहीं बने । जहा इन्होने जावश्यक समझा वहाँ रूढ परम्परा वा - चाहे वह सामाजिक हा या काय की - यथाशक्ति तोडन कर प्रयास किया ।
जीवन वृत्त एवं रचनाएँ है। विरह की साक्षात मूर्ति घनानन्द ने अपनी कथनी और करनी, अर्थात अपने जीवन और काव्य म एकात्म्य स्थापित किया था - जिसे मुख गाई सोईकरों है के माध्यम से सर्वतित किया गया है । 'राधाकृष्ण दास' ग्रंथावली म एक विवरण आया है। घनानन्द से सम्बद्ध एक किंवदन्ती पर आधारित इस विवरण म कहा गया है कि मथुरा म कत्लेआम के समय घनानन्दन सैनिका से कहा था कि मुझ धोर धीर देर तक तलवार की घाव दो तलवार की धाव के साथ व्रज की धूलि म लेटते हुए इन्होन प्राण त्याग किया। उपर्युक्त ववित्त के तीसरे वद म इस तथ्य की आर भी सकेन हुआ है। ऐसे हू हरि सत जन मारे जमनन आइ'के उल्लेख द्वारा ता वृदावन दास जी न घनानन्द की मृत्यु के कारण को एकदम निर्विवाद बना दिया है। अपने व्यक्तित्व की भाति ही घनानंद का कृतित्व भी रीतिकालीन अन्य कवियो की अपेक्षा अधिक व्यापक जौर गहरी भावभूमि पर प्रतिष्ठित है। छद विधान की दष्टि से भी ये जपन समकालीन कवियोस पयाप्त भिन है । कवित्त, सवया, दोहा, सोरठा, अरत्ल, शोभन निभगी, ताटव, निसानी, सुमेर, घनाक्षरी चौपाई, प्लवग, छप्पय, विष्णुपद जाति विभिन छदा के साथ ही इन्होन पद शली म राग-रागिनिया पर आधारित बहुत बड़ी संख्या म गीत भी लिसे है । इनके गीत सूर, तुलसी, ववीर, मीरा आदि के गीता से पर्याप्त भिन और शास्त्रीय संगीत की मर्यादा से पूरी तरह मयादिन है। अधिवाशत चार चार पक्तिया म आबद्ध य गीत ताल और सुर के अदभुत जारोह-अवराह के माध्यम से घनान द की संगीत ममनता का प्रामाणित करत हैं। एक विशिष्ट संगीतन होन के इनक परम्परागत छदो - विशेषत ववित्त सवयोम भी संगीतात्मक्ता वा सुन्दर विधान मिलता है। घनानन्द ग्रथावली म सकलित रचनाओं का दखन से स्पष्ट पता चलता है कि भाव वविष्य व साथ ही शली वविध्य का भी सुंदर विधान घनानादन किया है। भाषा की दृष्टि से य मुम्यत प्रभाषा के कवि है । लक्नि पूर्वी हिन्दी, अवधी पजाबी, राजस्थानी जादि के साथ ही अरबी फारसी मिश्रित भाषा के प्रयोग में भी इन्होने अपनी निपुणता का परिचय दिया है। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र न 'घनानद प्रथावली के अवगत इनकी निम्नलिखित रचनाओं को स्थान दिया है एक सुजानहित, दो कृपा वाद निबंध तीन वियागवलि, चार इश्शलता, पाँच यमुना यश छः प्रोतिपावस सात प्रेमपनिका आठ प्रेम सरोवर, छः नजविलास दस सरम बात, ग्यारह अनुभव पद्रिया बारह रग बधाई तेरह प्रेम-पद्धति चौदह वृषभानुपुर उपमा, पंद्रह गाडुल गीत, सोलह नाम माधुरी, सत्रह गिरि पूजन, अट्ठारह विचार मार, सोलह दान घटा, बीस भावना प्रकाश, इक्कीस कृष्ण गौमुदी, बाईस धाम चमत्कार, तेईस प्रिया प्रसाद, चौबीस बृगवन मुद्रा पच्चीस व्रज स्वरूप, छब्बीस गोकुल चरित्र, सत्ताईस प्रेम महली, अट्ठाईस रसना यश, छब्बीस गोकुल विनोद, तीस ग्रज प्रसाद, इकतीस मुरलिया माद, बत्तीस मनोरथ मजरी, तैंतीस व्रज व्यवहार, चौंतीस गिरिगाथा, पैंतीस प्रजवर्णन, छत्तीस छत्रप्टव, सैंतीस निभगी छ अट्ठाईस ववित्त संग्रह, छत्तीस स्फुट, चालीस पदावली जोर इकतालीस परमहंस वशावली । वस्तुत ऊपर गिनायी गई रचनाजा में से अधिकाश स्वता रचना न होकर विभिन छादो म भिन्न भिन्न विषयो वे सक्षिप्त वणन हैं । जसे- 'प्रेम सरोवर' केवल आठ दोहाम वृंदावन के एक सुन्दर स्थल की झावी है। इसी प्रकार 'वियोग वेलि, यमुना यश', 'प्रीतिपावस', 'नज विलास', सरस वसत, 'अनुभव चद्रिया, 'रग वधाई 'प्रेम पहेलो, रसना यश', छदाप्टर, 'निभगी' आदि दो से लेकर पृष्ठो तक की अत्यंत छोटी रचनाएँ है। यहां एक बात विशेष रूप से विचारणीय है कि इन सभी रचनाओं को निविप से घनानंद द्वारा रचित मान लेना कठिन है। उनके विरक्त होन से पूर्व की 'सुजानहित' और विरक्ति स बाद की 'पदावली' सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचनाएँ ह जा उनके तीन चौथाई सभी अधिक कृतित्व को समेटे हुए है। छोटी रचनाओ मे 'प्रेम पनिवा', कृपावाद निवध', प्रेम पद्धति जादि को भी निविवाद रूप से घनानन्द कृत माना जा सकता है। अत 'घनजान द ग्रथावली' म सक्लित लगभग अस्सी प्रतिशत रचनाए निश्चित रूप से प्रामाणिक मानी जा सकती यहा इस तथ्य की ओर भी सवेत कर देना आवश्यक है कि घनानद की रचानाओ का सबसे प्राचीन संग्रह घनआनद कवित्त है । इसे उनके समसामयिक एव मित्र ब्रजनाथ ने बडे श्रम स तयार किया था। इसम लगभग पाँच सौ ववित्तसवये रखे गए हैं। 'कृपाक द निबंध 'प्रेम पत्रिका 'दान घटा आदि छोटी रचनाजो वे कवित्त सवयो के साथ ही सुजानहित के अधिकाश ववित्त सवयं भी इसम आ गए है। आचाय विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का तो यहाँ तक कहना है कि 'घनआन द ववित्त' को हो किसी अस्त यस्त प्रति के आधार पर 'सुजानहित' सग्रह तयार किया गया है। इस सम्बध मे वास्तविकता चाहे जो हो, लेकिन यह एक स्पष्ट तथ्य है कि 'धनजानद ववित्त' म चौबीस ऐसे कवित्त सवये है जि हे घनआन द ग्रथावली' की किसी भी रचना में स्थान नहीं मिला है। अत ग्रथावली के जतगत इह 'प्रीशोप से रखा गया है। अपनी विषय वस्तु, भाव भगिमा भाषा शैली आदि सभी दष्टिया से इन कवित्त सवयों की प्रामा णिकता के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की आशका की गुजाइश नही है। कृपा वाद निबंध', प्रेमपनिका दान घटा' जादि के कवित्त सवया का 'घनआनद ववित्त म समावेश कवि के भक्त रूप का भी सक्तक है। इस प्रकार यह संग्रह लौकिक शृगार और भक्ति भावना- दोनो का प्रतिनिधित्व करता है। यदि जीवन वृत्त एव रचनाएँ ग्रयावली म सगहीत पदावली को इसके साथ मिला लिया जाए तो विवेचन कवि का समग्र कृतित्व हमार सामने आ जाता है । इसके आधार पर उसके वायवी अतर्राह्य सभी विशेषताओं का समुचित आकलन किया जा सकता है। वैसे घनान द की साहित्यिक कीर्ति का प्रमुख स्तम्भ 'सुजानहिन' ही है । यह मुख्यत लौकिक शृंगार की रचना है, जिसम शृगार के सयाग और वियोग दोना पक्षो का चित्रण है। शेष सभी रचनाएँ किसी न किसी रूप मकवि को भक्ति भावना व्यजित करती है । तीन 'लोग है लागि कवित्त वनावत मोहिं तो मेरे कवित्त वनावत' 'घनानन्द और अ य रीतिमुक्त कवि भी रीतिवद्ध लक्षणवार कविया की भाँति ही तत्कालीन युग चेतना से जुड़े हुए थे । तत्युगीन ह्रासोमुख सामती समाज के मानवी सामाजिक सबधों के अंतर्गत रह कर हो इन कविया की स्वच्छ दता और मुक्ति की कल्पना को आकार मिला था। घनानन्द के साथ ही अधिवाश रीति मुक्त कविया को राजदरबारा वा जाश्रय ग्रहण करना पड़ा था। यद्यपि कवि के रूप मे घनान द न किसी राजदरवार का आश्रय नही ग्रहण किया, फिर भी मुहम्मदशाह के दरवार से सम्वद्ध कमचारी होने के नाते जाने अनजान बुछ दरबारी प्रभाव उन पर अवश्य था । बोधा पाना नरेश के आश्रित कवि थे और आलम को बहादुरशाह का आश्रय मिला था । ठाकुर कई राजदरवारा से सम्बद्ध रहे हैं लेकिन किसी प्रलोभन म अपनी स्वच्छता पर उहान कभी आच नहीं आने दो । कहा जाता है कि एक बार बादा नरेश हिम्मतबहादुर ने अपन भरे दरबार म ठाकुर को कुछ क्टुवचन वह दिया था। इसस क्रुद्ध होकर ठाकुर ने म्यान से तलवार निकाल लिया था और कहा था सेवक सिपाही हम उन रजपूतन के, दान जुद्ध जुरिवेम नवु जेन मुरवे । नीति दनवार ह मही के महिपालन का, हिय वे विसुद्ध है, सनही साचे उरके । के ठाकुर कहत हम वरी बेवकूफन जालिम दमाद है जानिया ससुर के । चोजिन के चोजी महा मोजिन के महाराज, हम कविराज है मैं चावर चतुर वे ॥ - आचाय रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य का इतिहास, पृशून्य तीन सौ बासठ । इन सभी रीतिमुक्त कविया ने युग की प्रमुख काय प्रवत्ति शृगार का ही अपन काव्य का विषय बनाया । युगीन भावधारा से वध कर भी य कवि रीति या परम्परा के जधानुयायी नहीं बने । जहा इन्होने जावश्यक समझा वहाँ रूढ परम्परा वा - चाहे वह सामाजिक हा या काय की - यथाशक्ति तोडन कर प्रयास किया ।
कर के वहाँ मन्दिर आदि चिन्ह बनवाना वह ) भी पैसे ही फल को देनेवाले हैं। और भी फार्मण तथा आकर्पण ( वशीकरणादि ) के ज्ञाता मदनादि निर्जीर पुतले पर जिन जीवों के नाम से विधि करते हैं वे उस निधि से मूर्छित हो जाते हैं । इसी तरह स्व इश की प्रतिमा को प्रभु के नाममहणपूर्वक पूजा करनेवाला कुशल पुरुष ज्ञानमय प्रभु को प्राप्त करता है । जैसे कोई मालीक अपने चित्र को बहुमान करनेवाले सेवकों से खुश रहता है उसी तरह परमात्मा भी उन की प्रतिमा के पूजन से प्रसन्न होते हैं एसा हेतु के लिए भी मानो ( अन्यथा परमेश्वर तो सदाकाल प्रसन्न ही रहते हैं ) । प्र० चादी प्रतिवादी को प्रश्न करता है कि ---पूजन के लाभ विषयक दृष्टान्त आपने दिये मगर दृष्टान्त में और दान्तिक में महान् चन्तर है क्यों कि उपर्युक्त देवादि रागी और पूजा की चाहना करनेवाले हैं किन्तु प्रभु परमात्मा पैसे नहीं है उन का क्या ? ४० सवाल का जवान यही है कि अनीह (स्पृहा रहित ) की सेवा अत्युत्तम फल को देनेवाली है और उन की सेवा से ही परमार्थ सिद्धि होती है जैसे स्पृहा से रहित सिद्धपुरुष की सेवा इष्ट की प्राप्ति के लिए होती है । म० सिद्ध पुरुष तो साक्षात् पर देते हैं किन्तु परमात्मा की प्रतिविव प्रविमा अजीव होती है तो वह क्या फल दे सकती है ? ० परिपूजनीय द्रव्य में (सेव्य के विषय में ) ऐमा विचार नहीं किया जाता । ओ पूज्य होता है वह पूजा के पात्र होता है। दक्षिणावर्त ( शमादि), कामकुम चिंतामणी और वल्ली आदि को इन्द्रियाँ नहीं होती किन्तु क्या फल को नहीं देती ? तो अनीव होने से वह रहित होते हुए भी स्वभाव म पूजक की इच्छा को पूर्ण करती है वैसे ही परमात्मा की पूजित मूर्ति भी पुण्य प्राप्ति के लिए अवश्य होती है । प्र० दक्षिणावर्त आदि पदार्थ अनीव होने पर भी विशिष्ट जाति के दुर्लभ होते हैं इसी से उन का धाराधन इष्टप्राप्ति के लिए हो सकता है किन्तु प्रतिमा के विषय में पैसा नहीं है। वे तो मुलभ पापाण आदि की बनाई जाती है तो फिर कैसे फल को दे सकेगी ? ९० जिस चीन में स्वभाव से ही गुणों का प्रकाश होता है, उसी से भी पच मान्य या स्थापित धीज विशेष गुणाढ्य ( गुणवाली ) गिनी जाती है जैसे किसी एक राजपुत्र को जिस में वीर्यादि गुणों का आविर्भाव हो उस को त्याग कर के (छोड करके) किसी दुर्बल वश में समुत्पन्न पुरुप को उस के पुण्य के परियल से कोई प्रामाणिक पथ राजा स्थापन करता है तब वह दुर्लभ भी यह समक्ष राजवशीय पर भी शासन चलाता है। और पदाचित् यह राजवशी उस का अपमान करता है तो नदराज की तरह शिक्षा को पान होता है ।
कर के वहाँ मन्दिर आदि चिन्ह बनवाना वह ) भी पैसे ही फल को देनेवाले हैं। और भी फार्मण तथा आकर्पण के ज्ञाता मदनादि निर्जीर पुतले पर जिन जीवों के नाम से विधि करते हैं वे उस निधि से मूर्छित हो जाते हैं । इसी तरह स्व इश की प्रतिमा को प्रभु के नाममहणपूर्वक पूजा करनेवाला कुशल पुरुष ज्ञानमय प्रभु को प्राप्त करता है । जैसे कोई मालीक अपने चित्र को बहुमान करनेवाले सेवकों से खुश रहता है उसी तरह परमात्मा भी उन की प्रतिमा के पूजन से प्रसन्न होते हैं एसा हेतु के लिए भी मानो । प्रशून्य चादी प्रतिवादी को प्रश्न करता है कि ---पूजन के लाभ विषयक दृष्टान्त आपने दिये मगर दृष्टान्त में और दान्तिक में महान् चन्तर है क्यों कि उपर्युक्त देवादि रागी और पूजा की चाहना करनेवाले हैं किन्तु प्रभु परमात्मा पैसे नहीं है उन का क्या ? चालीस सवाल का जवान यही है कि अनीह की सेवा अत्युत्तम फल को देनेवाली है और उन की सेवा से ही परमार्थ सिद्धि होती है जैसे स्पृहा से रहित सिद्धपुरुष की सेवा इष्ट की प्राप्ति के लिए होती है । मशून्य सिद्ध पुरुष तो साक्षात् पर देते हैं किन्तु परमात्मा की प्रतिविव प्रविमा अजीव होती है तो वह क्या फल दे सकती है ? शून्य परिपूजनीय द्रव्य में ऐमा विचार नहीं किया जाता । ओ पूज्य होता है वह पूजा के पात्र होता है। दक्षिणावर्त , कामकुम चिंतामणी और वल्ली आदि को इन्द्रियाँ नहीं होती किन्तु क्या फल को नहीं देती ? तो अनीव होने से वह रहित होते हुए भी स्वभाव म पूजक की इच्छा को पूर्ण करती है वैसे ही परमात्मा की पूजित मूर्ति भी पुण्य प्राप्ति के लिए अवश्य होती है । प्रशून्य दक्षिणावर्त आदि पदार्थ अनीव होने पर भी विशिष्ट जाति के दुर्लभ होते हैं इसी से उन का धाराधन इष्टप्राप्ति के लिए हो सकता है किन्तु प्रतिमा के विषय में पैसा नहीं है। वे तो मुलभ पापाण आदि की बनाई जाती है तो फिर कैसे फल को दे सकेगी ? नब्बे जिस चीन में स्वभाव से ही गुणों का प्रकाश होता है, उसी से भी पच मान्य या स्थापित धीज विशेष गुणाढ्य गिनी जाती है जैसे किसी एक राजपुत्र को जिस में वीर्यादि गुणों का आविर्भाव हो उस को त्याग कर के किसी दुर्बल वश में समुत्पन्न पुरुप को उस के पुण्य के परियल से कोई प्रामाणिक पथ राजा स्थापन करता है तब वह दुर्लभ भी यह समक्ष राजवशीय पर भी शासन चलाता है। और पदाचित् यह राजवशी उस का अपमान करता है तो नदराज की तरह शिक्षा को पान होता है ।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 34 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 34 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल १,१३७ बार देखा गया है। जार केंडल (Jar Candle) के पूरे जल जाने के बाद, वो किसी काम की नहीं रहती, लेकिन आपके पास में अभी भी उसका ग्लास जार तो रहता है। फिर चाहे आप उसे फिर से यूज करना चाहते हैं या फिर उसे रिसाइकिल करना चाहते हैं, इसके लिए पहले उसके वेक्स को किसी भी तरह से बाहर निकालना जरूरी होगा! यहाँ पर वेक्स को निकालने के कुछ आसान तरीके दिए गए हैं; आपके लिए जो भी तरीका सबसे ज्यादा आसान लगे, उसे चुनें। विधि 1 का 4: वेक्स को निकालने के लिए फ्रीजर का इस्तेमाल करना (Using a Freezer to Get Wax Out) 1एक सही इस्तेमाल हुई केंडल की तलाश करेंः ये मेथड केवल उन्हीं केंडल जार पर अच्छी तरह से काम करेगी, जब जार में नीचे केवल बहुत जरा सी वेक्स बची रह गई हो। साथ ही, सुनिश्चित करें कि मोमबत्ती की बाती को नीचे से चिपका कर नहीं रखा गया है। - अगर आपकी केंडल की बाती नीचे ग्लू से चिपकाई गई है, तो वेक्स शायद पूरा बाहर नहीं निकलेगा।[१] X रिसर्च सोर्स इसकी बजाय फिर वेक्स निकालने के लिए उबलते पानी का इस्तेमाल करने वाली मेथड का इस्तेमाल करने का सोचें। 2केंडल जार को तैयार करेंः ज़्यादातर केंडल जार ओपनिंग में सँकरे हो जाते हैं, जिसका मतलब कि आप जब वेक्स को निकालने की कोशिश करेंगे, तब वो उसमें अंदर अटक सकती है। एक बटर नाइफ की मदद से वेक्स को अंदर से उठाकर, आप ऐसा होने से रोक सकते हैं। वेक्स जब फ्रीज़ होती है, तब ये छोटे-छोटे पीस में टूट जाएगी। पीस जितने ज्यादा छोटे होंगे, उन्हें एक बड़े पीस के मुक़ाबले ज्यादा आसानी से बाहर निकाला जा सकेगा। आप एक शेप केंडल होल्डर के लिए भी इसी तरीके को इस्तेमाल कर सकते हैं। - अगर आप स्ट्रेट वॉल के साथ रेगुलर केंडल होल्डर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो फिर आपको वेक्स को स्लाइस करके निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 3जार को फ्रीजर में रखेंः जार को एक स्टेबल या स्थिर जगह पर रखें, ताकि ये पलटे नहीं। पानी फ्रीज़ होने पर फैलता है, लेकिन वेक्स उल्टा सिकुड़ता है। जिसका मतलब कि वेक्स ग्लास के साइड्स से खुद ही अलग होती जाएगी। 4जब तक कि वेक्स फ्रीज़ न हो जाए, तब तक के लिए जार को फ्रीजर में रखेंः इसमें कुछ 20 से 30 मिनट का समय[२] X रिसर्च सोर्स SF Gate, [homeguides.sfgate.com/remove-candle-wax-glass-votives-35843.html How to Remove Candle Wax from Glass Votives] से लेकर कुछ घंटे तक का समय लगेगा। 5जार को फ्रीजर से बाहर निकालेंः जैसे ही वेक्स फ्रीज़ हो जाए, फिर आप जार को फ्रीजर से बाहर निकाल सकते हैं। आप वेक्स के कोनों पर दबाकर वेक्स के फ्रीज़ होने की जांच कर सकते और देख सकते हैं। अगर वेक्स बाहर आ रही है या फिर ढीली लगे, तो इसका मतलब की वो फ्रीज़ हो गई है और निकालने के लिए तैयार है। 6वेक्स को जार से निकालेंः जार को उल्टा करें। वेक्स को सीधे बाहर गिर जाना चाहिए। अगर ये नहीं गिरती है, तो आप उसे अपने टेबल या काउंटर के ऊपर हल्का सा ठोक सकते हैं। आप चाहें तो वेक्स और ग्लास के बीच में एक बटर नाइफ भी डाल सकते हैं और फिर चाकू के हैंडल को थोड़ा सा धक्का देकर उसे बाहर निकालने की कोशिश कर सकते हैं। 7अगर जरूरत पड़े, तो केंडल की बाती के होल्डर को निकालेंः अगर बाती का होल्डर अभी भी जार के बॉटम में चिपका है, तो आप एक बटर नाइफ के सिरे को उसके नीचे डालकर और नाइफ के हैंडल पर धक्का देकर भी उसे सीधे बाहर खिसका सकते हैं। 9केंडल जार को फिर से यूज करेंः अब आप उसमें एक नई बाती डालकर और ऊपर से उसमें नई वेक्स डालकर, अपने केंडल जार को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। आप चाहें तो उसे थोड़ा डेकोरेट भी कर सकते हैं और उसमें पेन, बर्तन या दूसरी चीजें भी रख सकते हैं। - वेक्स को सेव करने के बारे में सोचें। अगर आप चाहें तो इस वेक्स को एक डबल बॉयलर में पिघला सकते हैं और इसे केंडल बनाने में यूज कर सकते हैं। विधि 2 का 4: 1आप जहां काम कर रहे हैं, उस जगह को प्रोटेक्ट करेंः इस मेथड में थोड़ी गंदगी फैल सकती है, इसलिए आपको अपने टेबल या काउंटर को पहले से ही गिरने वाली वेक्स से बचाने की तैयारी करना होगी। आप जहां काम कर रहे हैं, वहाँ पर एक पुराना टॉवल या न्यूज़पेपर फैलाकर उस सर्फ़ेस को इस गंदगी से बचा सकते हैं। आप चाहें तो इसकी जगह पर एक पुरानी बेकिंग शीट के ऊपर भी इस काम को कर सकते हैं। 3जार में उबलता पानी डालेंः हालांकि, जार को पूरा भी न भरें। आखिर में वेक्स पिघलना शुरू कर देगी और पिघलने के बाद पानी के ऊपर तैरना शुरू कर देगी। 4जार को कुछ घंटे के लिए ठंडा होने देंः कुछ घंटे के बाद, पानी ठंडा हो जाएगा और पिघली हुई वेक्स सॉलिड हो जाएगी। इसमें फर्क केवल इतना ही है कि वेक्स अब पानी के ऊपर तैर रही होगी, जिसके बाद उसे बड़ी आसानी से पानी से बाहर निकाला जा सकेगा। 5वेक्स को बाहर निकालेंः जैसे ही वेक्स कड़क हो जाए, फिर आप बस उसे सीधे बाहर निकाल सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि ऐसा करते समय पानी भी शायद जार से बाहर आ सकता है। 7बचे हुए अवशेषों को निकालेंः अगर जार के अंदर अभी भी वेक्स बची रह गई है, तो आप उसे चाकू से स्क्रेप करके भी निकाल सकेंगे। आप जार को पानी और साबुन से भी धो सकते हैं। वेक्स के अवशेषों को निकालने का एक और दूसरा तरीका ये है कि आप बेबी ऑयल में एक कॉटन बॉल सोखें और उससे ग्लास के ऊपर वाइप करें। 8जार को फिर से इस्तेमाल करेंः अब आप आपके जार को किसी भी तरह से फिर से यूज कर सकते हैं। आप उसमें एक नई बाती डालकर और ऊपर से उसमें नई वेक्स डालकर, या फिर उसे थोड़ा सा सजाकर और उसके अंदर कुछ चीजों को स्टोर करके भी अपने केंडल जार को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। - वेक्स को सेव करने के बारे में सोचें। अगर आप चाहें तो इस वेक्स को एक डबल बॉयलर में पिघला सकते हैं और इसे केंडल बनाने में यूज कर सकते हैं। विधि 3 का 4: 1केंडल जार को सिंक या पॉट में रखेंः अगर आपके पास में ऐसे कई सारे जार हैं, जिन्हें साफ करने की जरूरत है, तो आप सिंक या पॉट के अंदर जितने फिट आ जाएँ, उतने और भी रख सकते हैं, बस इन्हें थोड़ा लूज या दूर-दूर रहना चाहिए। ये तरीका शायद बहुत हार्ड वेक्स से बनी केंडल्स के ऊपर काम न करे, लेकिन ये सोया-बेस्ड केंडल्स के लो मेल्टिंग पॉइंट की वजह से सोया केंडल (soy candles) के ऊपर जरूर काम करेगा। 2पॉट या सिंक को गरम पानी से भरेंः सुनिश्चित करें कि जार में पानी का लेवल वेक्स के लेवल से बहुत ज्यादा आगे तक नहीं जा रहा है, और वेक्स के ऊपर भी जरा सा भी पानी मत जाने दें। अगर आप सिंक यूज कर रहे हैं, तो उसे बंद करना न भूलें। 3वेक्स के ठंडे होने का इंतज़ार करेंः अगर आप किसी बहुत सॉफ्ट वेक्स का यूज कर रहे हैं, जैसे कि सोया वेक्स, तो इसमें ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। आप अपनी उँगलियों से वेक्स पर दबाकर टेस्ट कर सकते हैं कि वेक्स सॉफ्ट है या नहीं। अगर आप वेक्स में दबा पा रहे हैं, तो फिर इसका मतलब कि वेक्स अब बाहर निकलने के लिए तैयार है। - ठोस वेक्स से बने केंडल्स को निकाल पाना शायद और भी ज्यादा मुश्किल होगा; हालांकि, जो हिस्सा ग्लास को टच करता है, उसे इतना सॉफ्ट होना चाहिए कि उसकी किनार पर थोड़ा सा दबाकर ही आप से वेक्स बाहर निकल आए। 4पानी जब गरम हो, तभी सॉफ्ट किए वेक्स को निकाल लेंः जार को अभी पानी से बाहर मत लाएँ। बल्कि, जार को अपने एक ही हाथ से पकड़ें। अपने दूसरे हाथ में एक बटर नाइफ लें और उसके ब्लेड को वेक्स और ग्लास के बीच से अंदर डालें। वेक्स के अंदर ही चाकू को हल्का सा हिलाएँ। चाकू के हैंडल को बहुत आराम से थोड़ा सा धकेलें। ऐसा करने से वेक्स बाहर निकल आएगी, या कम से कम इतनी ढीली तो हो ही जाएगी कि आप उसे काफी आसानी से बाहर निकाल पाएँ। 5जार को सिंक या पॉट में से बाहर निकालेंः अगर वेक्स अभी भी जार के अंदर ही है, तो आप जार को उल्टा करके और फिर उसे आराम से काउंटर की किनार पर टैप करके निकाल सकते हैं। 6अगर जरूरत पड़े, तो बाती के होल्डर को निकालेंः बाती के होल्डर को भी केंडल के साथ में बाहर आ जाना चाहिए, लेकिन अगर ये नहीं निकलता है, तो आप बटर नाइफ के सिरे को बाती के होल्डर और ग्लास के बीच में डालकर और फिर चाकू के हैंडल को थोड़ा सा धकेलकर उसे निकाल सकते हैं। 7बचे रह गए अवशेष को निकालेंः अगर जार के अंदर अभी भी वेक्स के कुछ अवशेष रह गए हैं, तो आप जार को साबुन और गरम पानी से धोकर उसे साफ कर सकते हैं। आप चाहें तो उसमें अंदर बेबी ऑयल लगाकर भी आप अंदर बचे रह गए अवशेषों को निकाल सकते हैं। 8जार को फिर से इस्तेमाल करेंः जार अब फिर से इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। आप चाहें तो जार को पेंट कर सकते हैं या फिर डेकोरेट कर सकते हैं, या फिर उसके अंदर अपने पसंद की चीजों को रख सकते हैं। आप चाहें तो इसके अंदर एक नई बाती भी डाल सकते हैं और उसे नए वेक्स से भरकर एक नई केंडल बना सकते हैं। - पुरानी वेक्स को पिघलाकर और इसे नए केंडल बनाने में यूज करके भी वेक्स को दोबारा यूज कर सकते हैं। विधि 4 का 4: 1अपने अवन को प्री-हीट करेंः अवन को चालू करें और टेम्परेचर को 200°F (94°C) पर सेट करें। अवन का गरम टेम्परेचर भी केंडल के वेक्स को पिघलाने के लिए काफी रहेगा। 2एल्यूमिनियम फॉइल से बेकिंग शीट को कवर करेंः ये न केवल आपके बेकिंग शीट को प्रोटेक्ट करेगा, बल्कि इसकी वजह से आपके लिए सफाई करना आसान भी बन जाएगा; इसके लिए आपको केवल फॉइल को खींचना है, उसे मोड़ना है और फिर उसे फेंक देना है। बस इतना ध्यान रखें कि आप फॉइल को साइड को दिखाए अनुसार मोड़कर ही फेंकें, ताकि आप जब बेकिंग शीट को अवन से बाहर निकालें, तब पिघली हुई वेक्स बेकिंग शीट पर न गिरे (और आप जब अगली बार कुकी बनाएँ, तब उनमें एक अजीब ही फ्लेवर न छोड़ दे)। 3केंडल जार को बेकिंग शीट पर उल्टा करके रखेंः आप बेकिंग शीट को अवन में रखेंगे और वेक्स को पिघलने देंगे, इसलिए ध्यान रखें कि आप हर एक जार के बीच में काफी जगह छोड़ रहे हैं। अगर आपके पास में कई सारे जार हैं या फिर जार में काफी सारी वेक्स है, तो एक बार में केवल कुछ ही जार को शीट पर रखने के बारे में सोचें; नहीं तो, पिघली हुई वेक्स के ओवरफ़्लो होने का और उसके आपके अवन के बॉटम में फैलने का खतरा रहेगा। 4बेकिंग शीट को अवन में रखें और वेक्स के पिघलने का इंतज़ार करेंः 15 मिनट के बाद, वेक्स को पिघल जाना चाहिए और बेकिंग शीट के बॉटम में भर जाना चाहिए। अवन को चालू छोड़कर भूल न जाएँ। पिघली हुई वेक्स बहुत ज्वलनशील (flammable) होती है। - खिड़की को खुला रखें। पिघली वेक्स से कई सारे खुशबूदार ऑयल निकलेंगे। ये आपके घर में अच्छी खुशबू छोड़ेंगे, लेकिन इससे शायद आपको सिरदर्द भी हो सकता है। 5बेकिंग शीट को अवन से बाहर निकालेंः ट्रे को नीचे एक हीट रजिस्टेंस (heat resistant) सर्फ़ेस पर रखें। 6जार को बेकिंग शीट से हटाएँः ग्लास बहुत गरम रहेगा, इसलिए ध्यान रखें कि अपने हाथों को बचने के लिए उसे टच करने के लिए आप अवन मिट्स का का इस्तेमाल करें। 7पेपर टॉवल का यूज करके जार को साफ करेंः जार के अंदर, खासतौर से उसके रिम के साइड में, जो पिघले वेक्स के टच में रहा था, शायद वेक्स का थोड़ा सा अवशेष बचा रह सकता है। - अगर एक पेपर टॉवल से वेक्स नहीं बाहर आ रहा है, तो फिर केंडल जार को साबुन और पानी से धोएँ या फिर उसे बेबी ऑयल में भीगे एक कॉटन बॉल से साफ करें। 8जार को फिर से इस्तेमाल करेंः अब आप जार में केंडल की एक बाती लगा सकते हैं और उसमें वेक्स भरके एक नई केंडल बना सकते हैं। आप चाहें तो जार को पेंट भी कर सकते हैं और उसमें पेन जैसी चीजें रखने के लिए यूज कर सकते हैं। - पुराने वेक्स को पिघलाएँ और पिघले हुए वेक्स को इस्तेमाल करके छोटे केंडल्स या वेक्स मेल्ट्स बनाने के बारे में सोचें। - सोया वेक्स साबुन और पानी में घुल जाती है। ये आसानी से साफ हो जाती है और ये एनवायरनमेंट के लिए पैराफिन के मुक़ाबले काफी ज्यादा ज्यादा अच्छी होती है। आप चाहें तो पिघले हुए वेक्स को एक बहुत शानदार बॉडी लोशन की तरह यूज कर सकते हैं। - पानी इस्तेमाल करने वाली किसी भी मेथड का इस्तेमाल करने से पहले, ध्यान रखें कि जार पर ऐसा कोई लेबल नहीं लगा है, जो पानी में डूबने की वजह से बर्बाद हो जाए। - केंडल को पूरा इस्तेमाल करने से पहले, जार पर पड़ी बूंदों को जल्दी से साफ कर लें और हर बार इस्तेमाल करने के बाद इन पीस को अलग करें। ऐसा करने से बाद में जब केंडल किसी काम की नहीं रहेगी, उस समय आपके लिए उसे साफ करने में मुश्किल नहीं जाएगी। - ध्यान रखें कि पानी के साथ पिघले हुए वेक्स क्कों ड्रेन में न जाने दें। ये पाइप में जाकर सॉलिड हो जाएगी, उसे क्लोग कर देगी। - ग्लास को बहुत ज्यादा भी गरम न करें--अगर जार केंडल बहुत ज्यादा गरम हो जाएगी या इलेक्ट्रिक हॉटप्लेट्स को सीधे टच करेगी, तो उसके एक्सप्लोड होने का रिस्क रहेगा। - वेक्स को फ्रीज़ करना और जार में उबलता पानी डालना, इन दोनों ही तरीकों में जार के टूटने के रिस्क रहता है। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो १,१३७ बार पढ़ा गया है।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, चौंतीस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, चौंतीस लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल एक,एक सौ सैंतीस बार देखा गया है। जार केंडल के पूरे जल जाने के बाद, वो किसी काम की नहीं रहती, लेकिन आपके पास में अभी भी उसका ग्लास जार तो रहता है। फिर चाहे आप उसे फिर से यूज करना चाहते हैं या फिर उसे रिसाइकिल करना चाहते हैं, इसके लिए पहले उसके वेक्स को किसी भी तरह से बाहर निकालना जरूरी होगा! यहाँ पर वेक्स को निकालने के कुछ आसान तरीके दिए गए हैं; आपके लिए जो भी तरीका सबसे ज्यादा आसान लगे, उसे चुनें। विधि एक का चार: वेक्स को निकालने के लिए फ्रीजर का इस्तेमाल करना एकएक सही इस्तेमाल हुई केंडल की तलाश करेंः ये मेथड केवल उन्हीं केंडल जार पर अच्छी तरह से काम करेगी, जब जार में नीचे केवल बहुत जरा सी वेक्स बची रह गई हो। साथ ही, सुनिश्चित करें कि मोमबत्ती की बाती को नीचे से चिपका कर नहीं रखा गया है। - अगर आपकी केंडल की बाती नीचे ग्लू से चिपकाई गई है, तो वेक्स शायद पूरा बाहर नहीं निकलेगा।[एक] X रिसर्च सोर्स इसकी बजाय फिर वेक्स निकालने के लिए उबलते पानी का इस्तेमाल करने वाली मेथड का इस्तेमाल करने का सोचें। दोकेंडल जार को तैयार करेंः ज़्यादातर केंडल जार ओपनिंग में सँकरे हो जाते हैं, जिसका मतलब कि आप जब वेक्स को निकालने की कोशिश करेंगे, तब वो उसमें अंदर अटक सकती है। एक बटर नाइफ की मदद से वेक्स को अंदर से उठाकर, आप ऐसा होने से रोक सकते हैं। वेक्स जब फ्रीज़ होती है, तब ये छोटे-छोटे पीस में टूट जाएगी। पीस जितने ज्यादा छोटे होंगे, उन्हें एक बड़े पीस के मुक़ाबले ज्यादा आसानी से बाहर निकाला जा सकेगा। आप एक शेप केंडल होल्डर के लिए भी इसी तरीके को इस्तेमाल कर सकते हैं। - अगर आप स्ट्रेट वॉल के साथ रेगुलर केंडल होल्डर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो फिर आपको वेक्स को स्लाइस करके निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तीनजार को फ्रीजर में रखेंः जार को एक स्टेबल या स्थिर जगह पर रखें, ताकि ये पलटे नहीं। पानी फ्रीज़ होने पर फैलता है, लेकिन वेक्स उल्टा सिकुड़ता है। जिसका मतलब कि वेक्स ग्लास के साइड्स से खुद ही अलग होती जाएगी। चारजब तक कि वेक्स फ्रीज़ न हो जाए, तब तक के लिए जार को फ्रीजर में रखेंः इसमें कुछ बीस से तीस मिनट का समय[दो] X रिसर्च सोर्स SF Gate, [homeguides.sfgate.com/remove-candle-wax-glass-votives-पैंतीस हज़ार आठ सौ तैंतालीस.html How to Remove Candle Wax from Glass Votives] से लेकर कुछ घंटे तक का समय लगेगा। पाँचजार को फ्रीजर से बाहर निकालेंः जैसे ही वेक्स फ्रीज़ हो जाए, फिर आप जार को फ्रीजर से बाहर निकाल सकते हैं। आप वेक्स के कोनों पर दबाकर वेक्स के फ्रीज़ होने की जांच कर सकते और देख सकते हैं। अगर वेक्स बाहर आ रही है या फिर ढीली लगे, तो इसका मतलब की वो फ्रीज़ हो गई है और निकालने के लिए तैयार है। छःवेक्स को जार से निकालेंः जार को उल्टा करें। वेक्स को सीधे बाहर गिर जाना चाहिए। अगर ये नहीं गिरती है, तो आप उसे अपने टेबल या काउंटर के ऊपर हल्का सा ठोक सकते हैं। आप चाहें तो वेक्स और ग्लास के बीच में एक बटर नाइफ भी डाल सकते हैं और फिर चाकू के हैंडल को थोड़ा सा धक्का देकर उसे बाहर निकालने की कोशिश कर सकते हैं। सातअगर जरूरत पड़े, तो केंडल की बाती के होल्डर को निकालेंः अगर बाती का होल्डर अभी भी जार के बॉटम में चिपका है, तो आप एक बटर नाइफ के सिरे को उसके नीचे डालकर और नाइफ के हैंडल पर धक्का देकर भी उसे सीधे बाहर खिसका सकते हैं। नौकेंडल जार को फिर से यूज करेंः अब आप उसमें एक नई बाती डालकर और ऊपर से उसमें नई वेक्स डालकर, अपने केंडल जार को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। आप चाहें तो उसे थोड़ा डेकोरेट भी कर सकते हैं और उसमें पेन, बर्तन या दूसरी चीजें भी रख सकते हैं। - वेक्स को सेव करने के बारे में सोचें। अगर आप चाहें तो इस वेक्स को एक डबल बॉयलर में पिघला सकते हैं और इसे केंडल बनाने में यूज कर सकते हैं। विधि दो का चार: एकआप जहां काम कर रहे हैं, उस जगह को प्रोटेक्ट करेंः इस मेथड में थोड़ी गंदगी फैल सकती है, इसलिए आपको अपने टेबल या काउंटर को पहले से ही गिरने वाली वेक्स से बचाने की तैयारी करना होगी। आप जहां काम कर रहे हैं, वहाँ पर एक पुराना टॉवल या न्यूज़पेपर फैलाकर उस सर्फ़ेस को इस गंदगी से बचा सकते हैं। आप चाहें तो इसकी जगह पर एक पुरानी बेकिंग शीट के ऊपर भी इस काम को कर सकते हैं। तीनजार में उबलता पानी डालेंः हालांकि, जार को पूरा भी न भरें। आखिर में वेक्स पिघलना शुरू कर देगी और पिघलने के बाद पानी के ऊपर तैरना शुरू कर देगी। चारजार को कुछ घंटे के लिए ठंडा होने देंः कुछ घंटे के बाद, पानी ठंडा हो जाएगा और पिघली हुई वेक्स सॉलिड हो जाएगी। इसमें फर्क केवल इतना ही है कि वेक्स अब पानी के ऊपर तैर रही होगी, जिसके बाद उसे बड़ी आसानी से पानी से बाहर निकाला जा सकेगा। पाँचवेक्स को बाहर निकालेंः जैसे ही वेक्स कड़क हो जाए, फिर आप बस उसे सीधे बाहर निकाल सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि ऐसा करते समय पानी भी शायद जार से बाहर आ सकता है। सातबचे हुए अवशेषों को निकालेंः अगर जार के अंदर अभी भी वेक्स बची रह गई है, तो आप उसे चाकू से स्क्रेप करके भी निकाल सकेंगे। आप जार को पानी और साबुन से भी धो सकते हैं। वेक्स के अवशेषों को निकालने का एक और दूसरा तरीका ये है कि आप बेबी ऑयल में एक कॉटन बॉल सोखें और उससे ग्लास के ऊपर वाइप करें। आठजार को फिर से इस्तेमाल करेंः अब आप आपके जार को किसी भी तरह से फिर से यूज कर सकते हैं। आप उसमें एक नई बाती डालकर और ऊपर से उसमें नई वेक्स डालकर, या फिर उसे थोड़ा सा सजाकर और उसके अंदर कुछ चीजों को स्टोर करके भी अपने केंडल जार को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। - वेक्स को सेव करने के बारे में सोचें। अगर आप चाहें तो इस वेक्स को एक डबल बॉयलर में पिघला सकते हैं और इसे केंडल बनाने में यूज कर सकते हैं। विधि तीन का चार: एककेंडल जार को सिंक या पॉट में रखेंः अगर आपके पास में ऐसे कई सारे जार हैं, जिन्हें साफ करने की जरूरत है, तो आप सिंक या पॉट के अंदर जितने फिट आ जाएँ, उतने और भी रख सकते हैं, बस इन्हें थोड़ा लूज या दूर-दूर रहना चाहिए। ये तरीका शायद बहुत हार्ड वेक्स से बनी केंडल्स के ऊपर काम न करे, लेकिन ये सोया-बेस्ड केंडल्स के लो मेल्टिंग पॉइंट की वजह से सोया केंडल के ऊपर जरूर काम करेगा। दोपॉट या सिंक को गरम पानी से भरेंः सुनिश्चित करें कि जार में पानी का लेवल वेक्स के लेवल से बहुत ज्यादा आगे तक नहीं जा रहा है, और वेक्स के ऊपर भी जरा सा भी पानी मत जाने दें। अगर आप सिंक यूज कर रहे हैं, तो उसे बंद करना न भूलें। तीनवेक्स के ठंडे होने का इंतज़ार करेंः अगर आप किसी बहुत सॉफ्ट वेक्स का यूज कर रहे हैं, जैसे कि सोया वेक्स, तो इसमें ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। आप अपनी उँगलियों से वेक्स पर दबाकर टेस्ट कर सकते हैं कि वेक्स सॉफ्ट है या नहीं। अगर आप वेक्स में दबा पा रहे हैं, तो फिर इसका मतलब कि वेक्स अब बाहर निकलने के लिए तैयार है। - ठोस वेक्स से बने केंडल्स को निकाल पाना शायद और भी ज्यादा मुश्किल होगा; हालांकि, जो हिस्सा ग्लास को टच करता है, उसे इतना सॉफ्ट होना चाहिए कि उसकी किनार पर थोड़ा सा दबाकर ही आप से वेक्स बाहर निकल आए। चारपानी जब गरम हो, तभी सॉफ्ट किए वेक्स को निकाल लेंः जार को अभी पानी से बाहर मत लाएँ। बल्कि, जार को अपने एक ही हाथ से पकड़ें। अपने दूसरे हाथ में एक बटर नाइफ लें और उसके ब्लेड को वेक्स और ग्लास के बीच से अंदर डालें। वेक्स के अंदर ही चाकू को हल्का सा हिलाएँ। चाकू के हैंडल को बहुत आराम से थोड़ा सा धकेलें। ऐसा करने से वेक्स बाहर निकल आएगी, या कम से कम इतनी ढीली तो हो ही जाएगी कि आप उसे काफी आसानी से बाहर निकाल पाएँ। पाँचजार को सिंक या पॉट में से बाहर निकालेंः अगर वेक्स अभी भी जार के अंदर ही है, तो आप जार को उल्टा करके और फिर उसे आराम से काउंटर की किनार पर टैप करके निकाल सकते हैं। छःअगर जरूरत पड़े, तो बाती के होल्डर को निकालेंः बाती के होल्डर को भी केंडल के साथ में बाहर आ जाना चाहिए, लेकिन अगर ये नहीं निकलता है, तो आप बटर नाइफ के सिरे को बाती के होल्डर और ग्लास के बीच में डालकर और फिर चाकू के हैंडल को थोड़ा सा धकेलकर उसे निकाल सकते हैं। सातबचे रह गए अवशेष को निकालेंः अगर जार के अंदर अभी भी वेक्स के कुछ अवशेष रह गए हैं, तो आप जार को साबुन और गरम पानी से धोकर उसे साफ कर सकते हैं। आप चाहें तो उसमें अंदर बेबी ऑयल लगाकर भी आप अंदर बचे रह गए अवशेषों को निकाल सकते हैं। आठजार को फिर से इस्तेमाल करेंः जार अब फिर से इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। आप चाहें तो जार को पेंट कर सकते हैं या फिर डेकोरेट कर सकते हैं, या फिर उसके अंदर अपने पसंद की चीजों को रख सकते हैं। आप चाहें तो इसके अंदर एक नई बाती भी डाल सकते हैं और उसे नए वेक्स से भरकर एक नई केंडल बना सकते हैं। - पुरानी वेक्स को पिघलाकर और इसे नए केंडल बनाने में यूज करके भी वेक्स को दोबारा यूज कर सकते हैं। विधि चार का चार: एकअपने अवन को प्री-हीट करेंः अवन को चालू करें और टेम्परेचर को दो सौ°F पर सेट करें। अवन का गरम टेम्परेचर भी केंडल के वेक्स को पिघलाने के लिए काफी रहेगा। दोएल्यूमिनियम फॉइल से बेकिंग शीट को कवर करेंः ये न केवल आपके बेकिंग शीट को प्रोटेक्ट करेगा, बल्कि इसकी वजह से आपके लिए सफाई करना आसान भी बन जाएगा; इसके लिए आपको केवल फॉइल को खींचना है, उसे मोड़ना है और फिर उसे फेंक देना है। बस इतना ध्यान रखें कि आप फॉइल को साइड को दिखाए अनुसार मोड़कर ही फेंकें, ताकि आप जब बेकिंग शीट को अवन से बाहर निकालें, तब पिघली हुई वेक्स बेकिंग शीट पर न गिरे । तीनकेंडल जार को बेकिंग शीट पर उल्टा करके रखेंः आप बेकिंग शीट को अवन में रखेंगे और वेक्स को पिघलने देंगे, इसलिए ध्यान रखें कि आप हर एक जार के बीच में काफी जगह छोड़ रहे हैं। अगर आपके पास में कई सारे जार हैं या फिर जार में काफी सारी वेक्स है, तो एक बार में केवल कुछ ही जार को शीट पर रखने के बारे में सोचें; नहीं तो, पिघली हुई वेक्स के ओवरफ़्लो होने का और उसके आपके अवन के बॉटम में फैलने का खतरा रहेगा। चारबेकिंग शीट को अवन में रखें और वेक्स के पिघलने का इंतज़ार करेंः पंद्रह मिनट के बाद, वेक्स को पिघल जाना चाहिए और बेकिंग शीट के बॉटम में भर जाना चाहिए। अवन को चालू छोड़कर भूल न जाएँ। पिघली हुई वेक्स बहुत ज्वलनशील होती है। - खिड़की को खुला रखें। पिघली वेक्स से कई सारे खुशबूदार ऑयल निकलेंगे। ये आपके घर में अच्छी खुशबू छोड़ेंगे, लेकिन इससे शायद आपको सिरदर्द भी हो सकता है। पाँचबेकिंग शीट को अवन से बाहर निकालेंः ट्रे को नीचे एक हीट रजिस्टेंस सर्फ़ेस पर रखें। छःजार को बेकिंग शीट से हटाएँः ग्लास बहुत गरम रहेगा, इसलिए ध्यान रखें कि अपने हाथों को बचने के लिए उसे टच करने के लिए आप अवन मिट्स का का इस्तेमाल करें। सातपेपर टॉवल का यूज करके जार को साफ करेंः जार के अंदर, खासतौर से उसके रिम के साइड में, जो पिघले वेक्स के टच में रहा था, शायद वेक्स का थोड़ा सा अवशेष बचा रह सकता है। - अगर एक पेपर टॉवल से वेक्स नहीं बाहर आ रहा है, तो फिर केंडल जार को साबुन और पानी से धोएँ या फिर उसे बेबी ऑयल में भीगे एक कॉटन बॉल से साफ करें। आठजार को फिर से इस्तेमाल करेंः अब आप जार में केंडल की एक बाती लगा सकते हैं और उसमें वेक्स भरके एक नई केंडल बना सकते हैं। आप चाहें तो जार को पेंट भी कर सकते हैं और उसमें पेन जैसी चीजें रखने के लिए यूज कर सकते हैं। - पुराने वेक्स को पिघलाएँ और पिघले हुए वेक्स को इस्तेमाल करके छोटे केंडल्स या वेक्स मेल्ट्स बनाने के बारे में सोचें। - सोया वेक्स साबुन और पानी में घुल जाती है। ये आसानी से साफ हो जाती है और ये एनवायरनमेंट के लिए पैराफिन के मुक़ाबले काफी ज्यादा ज्यादा अच्छी होती है। आप चाहें तो पिघले हुए वेक्स को एक बहुत शानदार बॉडी लोशन की तरह यूज कर सकते हैं। - पानी इस्तेमाल करने वाली किसी भी मेथड का इस्तेमाल करने से पहले, ध्यान रखें कि जार पर ऐसा कोई लेबल नहीं लगा है, जो पानी में डूबने की वजह से बर्बाद हो जाए। - केंडल को पूरा इस्तेमाल करने से पहले, जार पर पड़ी बूंदों को जल्दी से साफ कर लें और हर बार इस्तेमाल करने के बाद इन पीस को अलग करें। ऐसा करने से बाद में जब केंडल किसी काम की नहीं रहेगी, उस समय आपके लिए उसे साफ करने में मुश्किल नहीं जाएगी। - ध्यान रखें कि पानी के साथ पिघले हुए वेक्स क्कों ड्रेन में न जाने दें। ये पाइप में जाकर सॉलिड हो जाएगी, उसे क्लोग कर देगी। - ग्लास को बहुत ज्यादा भी गरम न करें--अगर जार केंडल बहुत ज्यादा गरम हो जाएगी या इलेक्ट्रिक हॉटप्लेट्स को सीधे टच करेगी, तो उसके एक्सप्लोड होने का रिस्क रहेगा। - वेक्स को फ्रीज़ करना और जार में उबलता पानी डालना, इन दोनों ही तरीकों में जार के टूटने के रिस्क रहता है। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो एक,एक सौ सैंतीस बार पढ़ा गया है।
इसके अलावा इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण बात - इसी दिन पिशाच मोचन श्राद्ध भी है। जिनकी अकाल मृत्यु हो जाती है या जो किसी दुर्घटना आदि में मारे जाते हैं, आज के दिन उन लोगों का श्राद्ध करने का विधान है। तो आज के दिन कौन-से खास उपाय करके आप अपने पितरों को खुश कर सकते हैं, अपनी जिंदगी को खुशहाल बना सकते हैं, जीवन में तरक्की सुनिश्चित कर सकते हैं आज हम इस सब की बताएंगे। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की सुरक्षा कैसे करें?
इसके अलावा इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण बात - इसी दिन पिशाच मोचन श्राद्ध भी है। जिनकी अकाल मृत्यु हो जाती है या जो किसी दुर्घटना आदि में मारे जाते हैं, आज के दिन उन लोगों का श्राद्ध करने का विधान है। तो आज के दिन कौन-से खास उपाय करके आप अपने पितरों को खुश कर सकते हैं, अपनी जिंदगी को खुशहाल बना सकते हैं, जीवन में तरक्की सुनिश्चित कर सकते हैं आज हम इस सब की बताएंगे। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की सुरक्षा कैसे करें?
पश्चिमी मीडिया कहता रहा है कि वूहान की जानी-मानी जैविक शोध प्रयोगशाला में सूअरों और चमगादड़ों में कोरोना परिवार के विभिन्न वायरसों के पलने-बढ़ने के बारे में वर्षों से शोधकार्य हो रहे थे. लंदन के दैनिक 'डेली मेल' ने लिखा कि 'कोविड-19' नाम की नयी विश्वव्यापी महामारी इसी प्रयोगशाला के आस-पास से फैली. इस रिपोर्ट से चीन इस बुरी तरह बौखलाया कि चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने ब्रिटेन के विदेशमंत्री डोमिनिक राब को तुरंत फ़ोन किया. कहा कि इस प्रकार की "हानिकारक" रिपोर्टिंग का अतिशीघ्र अंत होना चाहिये. चीन की सरकार चाहती है कि पत्रकार ही नहीं, वैज्ञानिक भी नये कोरोना वायरस की उत्पत्ति और प्रसार के बारे में कोई खोजबीन न करें. सरकार ने नये सेंसरशिप निर्देश जारी किये हैं. इन निर्देशों के अनुसार, चीनी वैज्ञानिक 'सार्स-कोव-2' के उद्गम और प्रसार के बारे में जो कुछ प्रकाशित करना चाहेंगे, उसकी संबंद्ध मंत्रालय पहले जांच करेगा. मंत्रालय की आधिकारिक अनुमति के बिना ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकती. विश्व जनमत की तरह ही चीनी शोधकर्ता भी आरंभ में यही मान रहे थे कि 'सार्स-कोव-2' वायरस वूहान के उस मछली बाज़ार से फैला, जहां समुद्री जीव-जंतुओं के अलावा ऐसे अन्य जीव-जंतु भी बेचे जाते हैं, जिन्हें चीनी बड़े चाव से खाते हैं. चीन के 'रोग-निरोधक और बचाव केंद्र' के निदेशक गाओ फ़ू ने, 22 जनवरी को, एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि यह नया कोरोना वायरस इसी बाज़ार में किसी जानवर के माध्यम से मनुष्यों तक पहुंचा. गाओ फ़ू के अनुसार, जिन लोगों को शुरू-शुरू में इस वायरस का संक्रमण लगा है. उनमें से कुछ इसी बाज़ार में या तो काम कर रहे थे या वहीं उसके संपर्क में आये. 10 दिसंबर 2019 को बीमार पड़ी, झींगा बेचने वाली 57 वर्षीय वेई गुइच्यान नाम की एक महिला, इस संक्रमण का पहला शिकार बतायी जाती थी. चीन से उपजे कोरोना वायरस 'सार्स-कोव-2' के कुल मामलों की संख्या 40 लाख को छूने वाली है. मौतों का आंकड़ा पौने तीन लाख के करीब पहुंच गया है. चीन के व्यवहार से पश्चिमी देशों को अब इसमें कोई संदेह नहीं दिखता कि वह इस वायरस के उद्गम की सच्चाई छिपाने और दुनिया को बेवकूफ़ बनाने में लगा है. चीन की सरकार अपने लोगों या विदेशियों की ओर से हर खोजबीन पर तिलमिला कर प्रतिबंध लगा देती है. लंदन स्थित चीनी दूतावास ने अप्रैल के मध्य में एक खुले पत्र में दावा किया कि पश्चिमी मीडिया का यह कहना सरासर ग़लत है कि यह वायरस वूहान की एक प्रयोगशाला में से लीक हो कर फैला था.
पश्चिमी मीडिया कहता रहा है कि वूहान की जानी-मानी जैविक शोध प्रयोगशाला में सूअरों और चमगादड़ों में कोरोना परिवार के विभिन्न वायरसों के पलने-बढ़ने के बारे में वर्षों से शोधकार्य हो रहे थे. लंदन के दैनिक 'डेली मेल' ने लिखा कि 'कोविड-उन्नीस' नाम की नयी विश्वव्यापी महामारी इसी प्रयोगशाला के आस-पास से फैली. इस रिपोर्ट से चीन इस बुरी तरह बौखलाया कि चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने ब्रिटेन के विदेशमंत्री डोमिनिक राब को तुरंत फ़ोन किया. कहा कि इस प्रकार की "हानिकारक" रिपोर्टिंग का अतिशीघ्र अंत होना चाहिये. चीन की सरकार चाहती है कि पत्रकार ही नहीं, वैज्ञानिक भी नये कोरोना वायरस की उत्पत्ति और प्रसार के बारे में कोई खोजबीन न करें. सरकार ने नये सेंसरशिप निर्देश जारी किये हैं. इन निर्देशों के अनुसार, चीनी वैज्ञानिक 'सार्स-कोव-दो' के उद्गम और प्रसार के बारे में जो कुछ प्रकाशित करना चाहेंगे, उसकी संबंद्ध मंत्रालय पहले जांच करेगा. मंत्रालय की आधिकारिक अनुमति के बिना ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकती. विश्व जनमत की तरह ही चीनी शोधकर्ता भी आरंभ में यही मान रहे थे कि 'सार्स-कोव-दो' वायरस वूहान के उस मछली बाज़ार से फैला, जहां समुद्री जीव-जंतुओं के अलावा ऐसे अन्य जीव-जंतु भी बेचे जाते हैं, जिन्हें चीनी बड़े चाव से खाते हैं. चीन के 'रोग-निरोधक और बचाव केंद्र' के निदेशक गाओ फ़ू ने, बाईस जनवरी को, एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि यह नया कोरोना वायरस इसी बाज़ार में किसी जानवर के माध्यम से मनुष्यों तक पहुंचा. गाओ फ़ू के अनुसार, जिन लोगों को शुरू-शुरू में इस वायरस का संक्रमण लगा है. उनमें से कुछ इसी बाज़ार में या तो काम कर रहे थे या वहीं उसके संपर्क में आये. दस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को बीमार पड़ी, झींगा बेचने वाली सत्तावन वर्षीय वेई गुइच्यान नाम की एक महिला, इस संक्रमण का पहला शिकार बतायी जाती थी. चीन से उपजे कोरोना वायरस 'सार्स-कोव-दो' के कुल मामलों की संख्या चालीस लाख को छूने वाली है. मौतों का आंकड़ा पौने तीन लाख के करीब पहुंच गया है. चीन के व्यवहार से पश्चिमी देशों को अब इसमें कोई संदेह नहीं दिखता कि वह इस वायरस के उद्गम की सच्चाई छिपाने और दुनिया को बेवकूफ़ बनाने में लगा है. चीन की सरकार अपने लोगों या विदेशियों की ओर से हर खोजबीन पर तिलमिला कर प्रतिबंध लगा देती है. लंदन स्थित चीनी दूतावास ने अप्रैल के मध्य में एक खुले पत्र में दावा किया कि पश्चिमी मीडिया का यह कहना सरासर ग़लत है कि यह वायरस वूहान की एक प्रयोगशाला में से लीक हो कर फैला था.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा नदी में विसिर्जत कर दी गई हैं हर की पौढ़ी पर विधिविधान के साथ अस्थि विसर्जन की रस्म में श्री वाजपेयी के परिजनों के अलावा अन्य नेता भी उपस्थित थे हमारे संवाददाता ने बताया कि हर की पौड़ी के लिए अस्थि कलश यात्रा आज पूर्वाह्न शुरू हुई अस्थि कलश यात्रा में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वाजपेयी के परिजनों के साथ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे हर की पौड़ी पर विद्वानों और ब्राह्मणों ने सनातनी परम्पराओं के अनुरूप मंत्रोच्चार के बीच अस्थियों का विसर्जन कराया उधर प्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा स्थगित कर दी गई है भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने आकाशवाणी को बताया कि अब अस्थि कलश इक्कीस अगस्त को लखनऊ पहुंचेंगें इसके बाद प्रदेश के पचहत्तर जिलों की नदियों में अस्थियों के विसर्जन के लिए कलश यात्रा शुरू होगी पहले दिवंगत नेता के अस्थि कलशों को आज लखनऊ ले आने का कार्यक्रम था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिये कि त्यौहारों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये जाए उन्होंने कहा कि ईदउलअजहा बकरीद एवं अन्य त्यौहारों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम के साथसाथ कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में अधिकारी हर स्तर पर सतर्क रहें श्री योगी ने ईद के मद्देनजर सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने तथा हर स्तर पर त्यौहार को शान्ति पूर्वक सम्पन्न कराने सुरक्षा प्रबंध चाकचौबंद रखने तथा असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगाह रखने के निर्देश दिये उन्होंने कहा कि परम्परा के विपरीत किसी भी कार्य को किये जाने की मंजूरी न दी जाए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ईदउलअजहा के अवसर पर नमाज के समय मंदिरों में पूजाअर्चना के समय सतर्क दृष्टि रखी जाए उन्होंने अधिकारियों को ईदउलअजहा के दौरान पूर्व में हुयी घटनाओं की समीक्षा किये जाने के भी निर्देश देते हुये कहा कि असामाजिक तत्वों के विरूद्ध निरोधात्मक कार्रवायी सुनिश्चित की जाए उन्होंने कहा कि इस अवसर पर साफसफाई के विशेष प्रबंध और निर्वाध विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण गृह महिला संरक्षण गृह आदि का नियमानुसार निरन्तर निरीक्षण करें उन्होंने कहा कि सभी स्तर के अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन प्राथमिकता के आधार पर करें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज मॉरिशस के पोर्टलुई में ग्यारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान पाणिनी भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया हमारे संवाददाता ने बताया है कि सम्मेलन के दूसरे दिन आज भाषा और संस्कृति से संबंधित विषयों पर विचारविमर्श किया जा रहा है फिल्मों की हिन्दी के प्रचारप्रसार में काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है प्रसिद्ध हिन्दी गीतकार पटकथा लेखक और कवि प्रसून जोशी फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता कर रहे है इसके साथ ही संचार माध्यम और भारतीय संस्कृति प्रवासी जगतः भाषा और संस्कृति तथा हिन्दी बाल साहित्य और भारतीय संस्कृति विषयों पर गहन मंथन किया जा रहा है भारत और मॉरिशस समेत बीस देशों से आये प्रतिनिधि और विद्वान इन सत्रों में भाग ले रहे हैं इसके अलावा तकनीक के भविष्य विषय पर एक विचार गोष्ठी भी आयोजित की गई शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा राजकुमार आकाशवाणी समाचार पोर्ट लुई मॉरिशस प्रदेश सरकार ने सिद्धार्थनगर जिले के तीन तहसील मुख्यालय इटवा बांसी और शोहरतगढ़ में फायर स्टेशन बनाने की स्वीकृति प्रदान की है सरकारी सूत्रों ने बताया कि इटवा और बांसी तहसील मुख्यालयों पर फायर स्टेशन के निर्माण के लिये जमीन मिल चुकी है जबकि शोहरतगढ़ तहसील मुख्यालय पर जमीन की तलाश की जा रही है इन स्टेशनों के बन जाने से आपातकाल एवं गर्मी के समय में ग्रामीणों को विशेष लाभ मिलेगा जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इकतालिस खिलाड़ियों और दस टीम कोच प्रबंधकों को आगामी उन्तीस अगस्त को राज्यपाल राम नाईक द्वारा सम्मानित किया जाएगा कुलपति डॉक्टर राजाराम यादव ने बताया कि सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों ने अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में भाग लिया हैं प्रदेश में बाढ़ की स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुयी है हालांकि कुछ स्थानों पर नदियों में पानी घटने लगा है लेकिन अभी भी कई जिलों में तटवर्ती स्थानों पर बसे लाखों लोग बाढ़ से घिरे हुये हैं बस्ती जिले में सरयू नदी में बाढ़ के कारण हरैया तहसील के पचास से अधिक गांव प्रभावित हैं वहां नदी खतरे के निशान से पचपन सेंटीमीटर ऊपर बह रही है फिलहाल नदी स्थिर है लेकिन कटान और बाढ़ से फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है गोण्डा जिले की घाघरा नदी खतरे के निशान से साठ सेंटीमीटर ऊपर बह रही है जिले के करनैलगंज और तरबगंज तहसील के तीन सौ पचास से अधिक गांव की एक लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा नदी में विसिर्जत कर दी गई हैं हर की पौढ़ी पर विधिविधान के साथ अस्थि विसर्जन की रस्म में श्री वाजपेयी के परिजनों के अलावा अन्य नेता भी उपस्थित थे हमारे संवाददाता ने बताया कि हर की पौड़ी के लिए अस्थि कलश यात्रा आज पूर्वाह्न शुरू हुई अस्थि कलश यात्रा में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वाजपेयी के परिजनों के साथ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे हर की पौड़ी पर विद्वानों और ब्राह्मणों ने सनातनी परम्पराओं के अनुरूप मंत्रोच्चार के बीच अस्थियों का विसर्जन कराया उधर प्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा स्थगित कर दी गई है भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने आकाशवाणी को बताया कि अब अस्थि कलश इक्कीस अगस्त को लखनऊ पहुंचेंगें इसके बाद प्रदेश के पचहत्तर जिलों की नदियों में अस्थियों के विसर्जन के लिए कलश यात्रा शुरू होगी पहले दिवंगत नेता के अस्थि कलशों को आज लखनऊ ले आने का कार्यक्रम था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिये कि त्यौहारों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये जाए उन्होंने कहा कि ईदउलअजहा बकरीद एवं अन्य त्यौहारों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम के साथसाथ कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में अधिकारी हर स्तर पर सतर्क रहें श्री योगी ने ईद के मद्देनजर सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने तथा हर स्तर पर त्यौहार को शान्ति पूर्वक सम्पन्न कराने सुरक्षा प्रबंध चाकचौबंद रखने तथा असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगाह रखने के निर्देश दिये उन्होंने कहा कि परम्परा के विपरीत किसी भी कार्य को किये जाने की मंजूरी न दी जाए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ईदउलअजहा के अवसर पर नमाज के समय मंदिरों में पूजाअर्चना के समय सतर्क दृष्टि रखी जाए उन्होंने अधिकारियों को ईदउलअजहा के दौरान पूर्व में हुयी घटनाओं की समीक्षा किये जाने के भी निर्देश देते हुये कहा कि असामाजिक तत्वों के विरूद्ध निरोधात्मक कार्रवायी सुनिश्चित की जाए उन्होंने कहा कि इस अवसर पर साफसफाई के विशेष प्रबंध और निर्वाध विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण गृह महिला संरक्षण गृह आदि का नियमानुसार निरन्तर निरीक्षण करें उन्होंने कहा कि सभी स्तर के अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन प्राथमिकता के आधार पर करें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज मॉरिशस के पोर्टलुई में ग्यारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान पाणिनी भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया हमारे संवाददाता ने बताया है कि सम्मेलन के दूसरे दिन आज भाषा और संस्कृति से संबंधित विषयों पर विचारविमर्श किया जा रहा है फिल्मों की हिन्दी के प्रचारप्रसार में काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है प्रसिद्ध हिन्दी गीतकार पटकथा लेखक और कवि प्रसून जोशी फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता कर रहे है इसके साथ ही संचार माध्यम और भारतीय संस्कृति प्रवासी जगतः भाषा और संस्कृति तथा हिन्दी बाल साहित्य और भारतीय संस्कृति विषयों पर गहन मंथन किया जा रहा है भारत और मॉरिशस समेत बीस देशों से आये प्रतिनिधि और विद्वान इन सत्रों में भाग ले रहे हैं इसके अलावा तकनीक के भविष्य विषय पर एक विचार गोष्ठी भी आयोजित की गई शाम को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा राजकुमार आकाशवाणी समाचार पोर्ट लुई मॉरिशस प्रदेश सरकार ने सिद्धार्थनगर जिले के तीन तहसील मुख्यालय इटवा बांसी और शोहरतगढ़ में फायर स्टेशन बनाने की स्वीकृति प्रदान की है सरकारी सूत्रों ने बताया कि इटवा और बांसी तहसील मुख्यालयों पर फायर स्टेशन के निर्माण के लिये जमीन मिल चुकी है जबकि शोहरतगढ़ तहसील मुख्यालय पर जमीन की तलाश की जा रही है इन स्टेशनों के बन जाने से आपातकाल एवं गर्मी के समय में ग्रामीणों को विशेष लाभ मिलेगा जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इकतालिस खिलाड़ियों और दस टीम कोच प्रबंधकों को आगामी उन्तीस अगस्त को राज्यपाल राम नाईक द्वारा सम्मानित किया जाएगा कुलपति डॉक्टर राजाराम यादव ने बताया कि सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों ने अखिल भारतीय अन्तर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में भाग लिया हैं प्रदेश में बाढ़ की स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुयी है हालांकि कुछ स्थानों पर नदियों में पानी घटने लगा है लेकिन अभी भी कई जिलों में तटवर्ती स्थानों पर बसे लाखों लोग बाढ़ से घिरे हुये हैं बस्ती जिले में सरयू नदी में बाढ़ के कारण हरैया तहसील के पचास से अधिक गांव प्रभावित हैं वहां नदी खतरे के निशान से पचपन सेंटीमीटर ऊपर बह रही है फिलहाल नदी स्थिर है लेकिन कटान और बाढ़ से फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है गोण्डा जिले की घाघरा नदी खतरे के निशान से साठ सेंटीमीटर ऊपर बह रही है जिले के करनैलगंज और तरबगंज तहसील के तीन सौ पचास से अधिक गांव की एक लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है
मैनचेस्टर : भारतीय आलराउंडर हार्दिक पांड्या का मानना है कि एक गेंदबाज के रूप में अंततः उन्होंने लय हासिल कर ली है और भविष्य में जब भी जरूरत होगी तो वह अपनी पूरी गति के साथ गेंदबाजी करेंगे। फिटनेस समस्याओं के कारण नियमित रूप से गेंदबाजी नहीं कर पाने से हार्दिक ने भारतीय टीम में अपनी जगह गंवा दी थी लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग के 2022 सत्र में उन्होंने जोरदार वापसी की। वह इग्लैंड के खिलाफ हाल में सीमित ओवरों की श्रृंखला के दौरान भी गेंद और बल्ले दोनों से उम्दा प्रदर्शन करने में सफल रहे। बल्ले से हार्दिक की क्षमता पर कभी संदेह नहीं था लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। हार्दिक ने टी20 और एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान क्रमशः 33 रन देकर चार विकेट और 24 रन देकर चार विकेट का करियर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। रविवार को अंतिम एकदिवसीय में उन्होंने गेंदबाजी में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और फिर ऋषभ पंत के साथ शतकीय साझेदारी करके भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। तीसरे एकदिवसीय के बाद मीडिया से बात करते हुए पंड्या ने कहा कि नियमित रूप से गेंदबाजी कर पाने से उन्हें काफी संतोष मिलता है। हार्दिक ने कहा, 'सबसे पहले अपनी गेंदबाजी की बात करता हूं। प्रत्येक श्रृंखला के बाद मैं चार या पांच दिन ट्रेनिंग करता हूं क्योंकि इससे मेरी फिटनेस बेहतर होती है और मैं तरोताजा रहता हूं। मैं शत प्रतिशत क्षमता के साथ खेलना पसंद करता हूं क्योंकि इससे मुझे वह सभी चीजें करने का मौका मिलता है जो मैंने आज की। ' हार्दिक आयरलैंड के खिलाफ पिछली श्रृंखला में लय हासिल नहीं कर पाए थे लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, 'आईपीएल के बाद मैंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला में वापसी की। मैंने एक ओवर गेंदबाजी की और फिर दो मैच में गेंदबाजी नहीं की। एक गेंदबाज के रूप में मेरे लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि मैं गेंदबाजी करता रहूं। ' हार्दिक ने कहा कि पहले टी20 में चार विकेट चटकाने से उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिला। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए निरंतरता हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण है और मैं इस पर काम करता हूं। मैं आम तौर पर मैच से पहले अभ्यास नहीं करता लेकिन मैंने पूरे प्रयास के साथ कुछ घंटों तक गेंदबाजी की। ' इस आलराउंडर ने कहा, 'यहीं से मुझे लय मिली और फिर चार विकेट चटकाने (इंग्लैंड के खिलाफ टी20 में) से सब कुछ बदल गया। इससे मुझे निरंतरता और आत्मविश्वास मिला। ' हार्दिक को नहीं लगता कि हर समय पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं चतुराई के साथ गेंदबाजी करता हूं। मैं जरूरत पड़ने पर ही अपनी पूरी गति के साथ गेंदबाजी करूंगा। अगर आप मेरे पिछले कुछ मैच देखो तो मैं 130 किमी प्रति घंटा के आसपास की रफ्तार के साथ गेंदबाजी कर रहा था। ऐसा नहीं है कि मैं तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता। ' हार्दिक ने कहा, 'यह स्थिति पर अधिक निर्भर करता है। मैंने महसूस किया कि पूरा जोर लगाने से बेहतर चतुराई से गेंदबाजी करना रहेगा। आज मैदान बड़ा था, मैं चाहता था कि वे बड़े शॉट खेलें और स्क्वायर लेग तथा फाइन लेग के क्षेत्ररक्षण के ऊपर से शॉट खेलने का जोखिम लें। '
मैनचेस्टर : भारतीय आलराउंडर हार्दिक पांड्या का मानना है कि एक गेंदबाज के रूप में अंततः उन्होंने लय हासिल कर ली है और भविष्य में जब भी जरूरत होगी तो वह अपनी पूरी गति के साथ गेंदबाजी करेंगे। फिटनेस समस्याओं के कारण नियमित रूप से गेंदबाजी नहीं कर पाने से हार्दिक ने भारतीय टीम में अपनी जगह गंवा दी थी लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग के दो हज़ार बाईस सत्र में उन्होंने जोरदार वापसी की। वह इग्लैंड के खिलाफ हाल में सीमित ओवरों की श्रृंखला के दौरान भी गेंद और बल्ले दोनों से उम्दा प्रदर्शन करने में सफल रहे। बल्ले से हार्दिक की क्षमता पर कभी संदेह नहीं था लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। हार्दिक ने टीबीस और एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान क्रमशः तैंतीस रन देकर चार विकेट और चौबीस रन देकर चार विकेट का करियर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। रविवार को अंतिम एकदिवसीय में उन्होंने गेंदबाजी में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और फिर ऋषभ पंत के साथ शतकीय साझेदारी करके भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। तीसरे एकदिवसीय के बाद मीडिया से बात करते हुए पंड्या ने कहा कि नियमित रूप से गेंदबाजी कर पाने से उन्हें काफी संतोष मिलता है। हार्दिक ने कहा, 'सबसे पहले अपनी गेंदबाजी की बात करता हूं। प्रत्येक श्रृंखला के बाद मैं चार या पांच दिन ट्रेनिंग करता हूं क्योंकि इससे मेरी फिटनेस बेहतर होती है और मैं तरोताजा रहता हूं। मैं शत प्रतिशत क्षमता के साथ खेलना पसंद करता हूं क्योंकि इससे मुझे वह सभी चीजें करने का मौका मिलता है जो मैंने आज की। ' हार्दिक आयरलैंड के खिलाफ पिछली श्रृंखला में लय हासिल नहीं कर पाए थे लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, 'आईपीएल के बाद मैंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला में वापसी की। मैंने एक ओवर गेंदबाजी की और फिर दो मैच में गेंदबाजी नहीं की। एक गेंदबाज के रूप में मेरे लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि मैं गेंदबाजी करता रहूं। ' हार्दिक ने कहा कि पहले टीबीस में चार विकेट चटकाने से उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिला। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए निरंतरता हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण है और मैं इस पर काम करता हूं। मैं आम तौर पर मैच से पहले अभ्यास नहीं करता लेकिन मैंने पूरे प्रयास के साथ कुछ घंटों तक गेंदबाजी की। ' इस आलराउंडर ने कहा, 'यहीं से मुझे लय मिली और फिर चार विकेट चटकाने से सब कुछ बदल गया। इससे मुझे निरंतरता और आत्मविश्वास मिला। ' हार्दिक को नहीं लगता कि हर समय पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं चतुराई के साथ गेंदबाजी करता हूं। मैं जरूरत पड़ने पर ही अपनी पूरी गति के साथ गेंदबाजी करूंगा। अगर आप मेरे पिछले कुछ मैच देखो तो मैं एक सौ तीस किमी प्रति घंटा के आसपास की रफ्तार के साथ गेंदबाजी कर रहा था। ऐसा नहीं है कि मैं तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता। ' हार्दिक ने कहा, 'यह स्थिति पर अधिक निर्भर करता है। मैंने महसूस किया कि पूरा जोर लगाने से बेहतर चतुराई से गेंदबाजी करना रहेगा। आज मैदान बड़ा था, मैं चाहता था कि वे बड़े शॉट खेलें और स्क्वायर लेग तथा फाइन लेग के क्षेत्ररक्षण के ऊपर से शॉट खेलने का जोखिम लें। '
नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की नवंबर 2013 में आयोजित भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा 2013 के लिखित भाग के परिणाम के आधार पर उम्मीदवारों का साक्षात्कार और व्यक्तित्व परीक्षण के लिए परिणाम घोषित कर दिया गया है। सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी उनके हर प्रकार से पात्र पाए जाने के अध्यधीन अनंतिम है। उम्मीदवारों को अपनी आयु, शैक्षिक योग्यता, समुदाय, शारीरिक अक्षमता आदि के अपने दावे के समर्थन में व्यक्तित्व परीक्षण के समय मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। उन्हें व्यक्तित्व परीक्षण बोर्डों के समक्ष उपस्थित होने से पूर्व आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध महत्वपूर्ण अनुदेशों के अनुसार अपने प्रमाण पत्र तैयार रखने और प्रमाण पत्रों की आवश्यकता की पहले ही जांच कर लेने की सलाह दी गई है। परीक्षा की नियमावली के अनुसार सभी उम्मीदवारों को विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ), जो आयोग की वेबसाइट http://www. upsc. gov. in पर उपलब्ध होगा, में आवेदन करना है और उसे ऑनलाइन जमा करना है। विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) आयोग की वेबसाइट पर 17. 01. 2014 तक रात्रि 11. 59 बजे तक उपलब्ध रहेगा। डीएएफ भरने और उसे आयोग में ऑनलाइन जमा करने संबंधी महत्वपूर्ण अनुदेश भी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों को ऑनलाइन विस्तृत आवेदन प्रपत्र भरने से पहले वेबसाइट के संगत पृष्ठ पर अपने को रजिस्टर करना होगा। अर्हक उम्मीदवारों को दिनांक 17. 08. 2013 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा 2013 की नियमावली का अवलोकन करने की भी सलाह दी गई है, जोकि आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। डीएएफ विधिवत भरकर ऑनलाइन जमा करने के बाद उम्मीदवारों से अपेक्षा की गई है कि वे अंतिम रूप से प्रस्तुत डीएएफ का अलग से एक प्रिंटआउट ले लें और विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) की उस मुद्रित प्रति पर उम्मीदवार स्याही से विधिवत हस्ताक्षर करके सभी संगत दस्तावेजों सहित अवर सचिव (आईईएस/ आईएसएस), संघ लोक सेवा आयोग, धौलपुर हाउस, शाहजहां रोड, नई दिल्ली-110069 को भेज दें, जिससे कि ये आयोग के कार्यालय में दिनांक 20. 01. 2014 तक अवश्य पहुंच जाए। ऑनलाइन जमा किए गए डीएएफ के प्रिंटआउटकी प्रति वाले लिफाफे पर "भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2013" हेतु आवेदन प्रपत्र लिखा होना चाहिए। इसे संघ लोक सेवा आयोग में दस्ती रूप से भी दिनांक 20. 01. 2014 (सायं 5. 00 बजे तक) जमा करवाया जा सकता है। स्याही से हस्ताक्षरित डीएएफ की प्रति प्राप्त नहीं होने की स्थिति में बिना कोई सूचना दिए उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। उम्मीदवारों से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे साक्षात्कार के समय मूल दस्तावेज और प्रत्येक की फोटोप्रति के साथ-साथ विस्तृत आवेदन-प्रपत्रकी विधिवत हस्ताक्षरित (उम्मीदवार द्वारा) मुद्रित प्रति साथ लाएं। उम्मीदवार, साक्षात्कार के समय प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों के संदर्भ में भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2013 नियमावली के साथ-साथ वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत आवेदन-प्रपत्र भरने से संबंधित अनुदेशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। उम्मीदवार अपनी आयु, जन्म तिथि, शैक्षिक योग्यता, जाति (अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अति पिछड़ा वर्ग) तथा शारीरिक विकलांगता की स्थिति के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाने के लिए स्वयं उत्तरदायी होगा। व्यक्तित्व परीक्षण के लिए अर्हता प्राप्त उम्मीदवारों के साक्षात्कार 24. 02. 2014 से प्रारंभ होने की उम्मीद है, तथापि साक्षात्कार की सही तारीख की सूचना उम्मीदवारों को साक्षात्कार पत्र से दी जाएगी। अनुक्रमांक-वार साक्षात्कार का कार्यक्रम भी आयोग की वेबसाइट पर है और उम्मीदवारों को व्यक्तित्व परीक्षण हेतु सूचित की गई तारीख और समय में परिवर्तन करने संबंधी अनुरोध पर किसी भी स्थिति में विचार नहीं किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में अर्हता प्राप्त नहीं की है, उनके अंक-पत्र अंतिम परिणाम के प्रकाशन के 15 दिन के अंदर (व्यक्तित्व परीक्षण के आयोजन के बाद) आयोग की वेबसाइट पर प्रस्तुत कर दिए जाएंगे और ये अंक पत्र वेबसाइट पर 60 दिनों की अवधि के लिए उपलब्ध रहेंगे। उम्मीदवार अपना अनुक्रमांक और जन्म की तारीख अंकित करने के बाद अंक-पत्र प्राप्त कर सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों को अंक-पत्र की मुद्रित प्रतियां, उम्मीदवारों के डाक टिकट लगे स्व-पता लिखे लिफाफे सहित उनके द्वारा विशेष अनुरोध प्राप्त होने पर ही भेजी जाएंगी। अंक-पत्रों की मुद्रित प्रतियां प्राप्त करने के इच्छुक उम्मीदवारों को ऐसा अनुरोध आयोग की वेबसाइट पर अंक-पत्रों के प्रदर्शित किए जाने के तीस दिन के अंदर करना होगा, इसके बाद ऐसे किसी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। परिणाम संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट http://www. upsc. gov. in पर भी उपलब्ध रहेगा। संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में एक सुविधा काउंटर है। उम्मीदवार अपनी किसी भी प्रकार की जानकारी या स्पष्टीकरण इस काउंटर से व्यक्तिगत रूप से अथवा दूरभाष संख्या (011) 23385271/ 23381125/ 23098543 पर कार्य दिवसों में प्रातः 10 से सायं 5 बजे के बीच प्राप्त कर सकते हैं।
नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की नवंबर दो हज़ार तेरह में आयोजित भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा दो हज़ार तेरह के लिखित भाग के परिणाम के आधार पर उम्मीदवारों का साक्षात्कार और व्यक्तित्व परीक्षण के लिए परिणाम घोषित कर दिया गया है। सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी उनके हर प्रकार से पात्र पाए जाने के अध्यधीन अनंतिम है। उम्मीदवारों को अपनी आयु, शैक्षिक योग्यता, समुदाय, शारीरिक अक्षमता आदि के अपने दावे के समर्थन में व्यक्तित्व परीक्षण के समय मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। उन्हें व्यक्तित्व परीक्षण बोर्डों के समक्ष उपस्थित होने से पूर्व आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध महत्वपूर्ण अनुदेशों के अनुसार अपने प्रमाण पत्र तैयार रखने और प्रमाण पत्रों की आवश्यकता की पहले ही जांच कर लेने की सलाह दी गई है। परीक्षा की नियमावली के अनुसार सभी उम्मीदवारों को विस्तृत आवेदन प्रपत्र , जो आयोग की वेबसाइट http://www. upsc. gov. in पर उपलब्ध होगा, में आवेदन करना है और उसे ऑनलाइन जमा करना है। विस्तृत आवेदन प्रपत्र आयोग की वेबसाइट पर सत्रह. एक. दो हज़ार चौदह तक रात्रि ग्यारह. उनसठ बजे तक उपलब्ध रहेगा। डीएएफ भरने और उसे आयोग में ऑनलाइन जमा करने संबंधी महत्वपूर्ण अनुदेश भी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों को ऑनलाइन विस्तृत आवेदन प्रपत्र भरने से पहले वेबसाइट के संगत पृष्ठ पर अपने को रजिस्टर करना होगा। अर्हक उम्मीदवारों को दिनांक सत्रह. आठ. दो हज़ार तेरह के भारत के राजपत्र में प्रकाशित भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा दो हज़ार तेरह की नियमावली का अवलोकन करने की भी सलाह दी गई है, जोकि आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। डीएएफ विधिवत भरकर ऑनलाइन जमा करने के बाद उम्मीदवारों से अपेक्षा की गई है कि वे अंतिम रूप से प्रस्तुत डीएएफ का अलग से एक प्रिंटआउट ले लें और विस्तृत आवेदन प्रपत्र की उस मुद्रित प्रति पर उम्मीदवार स्याही से विधिवत हस्ताक्षर करके सभी संगत दस्तावेजों सहित अवर सचिव , संघ लोक सेवा आयोग, धौलपुर हाउस, शाहजहां रोड, नई दिल्ली-एक लाख दस हज़ार उनहत्तर को भेज दें, जिससे कि ये आयोग के कार्यालय में दिनांक बीस. एक. दो हज़ार चौदह तक अवश्य पहुंच जाए। ऑनलाइन जमा किए गए डीएएफ के प्रिंटआउटकी प्रति वाले लिफाफे पर "भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, दो हज़ार तेरह" हेतु आवेदन प्रपत्र लिखा होना चाहिए। इसे संघ लोक सेवा आयोग में दस्ती रूप से भी दिनांक बीस. एक. दो हज़ार चौदह जमा करवाया जा सकता है। स्याही से हस्ताक्षरित डीएएफ की प्रति प्राप्त नहीं होने की स्थिति में बिना कोई सूचना दिए उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। उम्मीदवारों से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे साक्षात्कार के समय मूल दस्तावेज और प्रत्येक की फोटोप्रति के साथ-साथ विस्तृत आवेदन-प्रपत्रकी विधिवत हस्ताक्षरित मुद्रित प्रति साथ लाएं। उम्मीदवार, साक्षात्कार के समय प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों के संदर्भ में भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, दो हज़ार तेरह नियमावली के साथ-साथ वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत आवेदन-प्रपत्र भरने से संबंधित अनुदेशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। उम्मीदवार अपनी आयु, जन्म तिथि, शैक्षिक योग्यता, जाति तथा शारीरिक विकलांगता की स्थिति के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाने के लिए स्वयं उत्तरदायी होगा। व्यक्तित्व परीक्षण के लिए अर्हता प्राप्त उम्मीदवारों के साक्षात्कार चौबीस. दो. दो हज़ार चौदह से प्रारंभ होने की उम्मीद है, तथापि साक्षात्कार की सही तारीख की सूचना उम्मीदवारों को साक्षात्कार पत्र से दी जाएगी। अनुक्रमांक-वार साक्षात्कार का कार्यक्रम भी आयोग की वेबसाइट पर है और उम्मीदवारों को व्यक्तित्व परीक्षण हेतु सूचित की गई तारीख और समय में परिवर्तन करने संबंधी अनुरोध पर किसी भी स्थिति में विचार नहीं किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में अर्हता प्राप्त नहीं की है, उनके अंक-पत्र अंतिम परिणाम के प्रकाशन के पंद्रह दिन के अंदर आयोग की वेबसाइट पर प्रस्तुत कर दिए जाएंगे और ये अंक पत्र वेबसाइट पर साठ दिनों की अवधि के लिए उपलब्ध रहेंगे। उम्मीदवार अपना अनुक्रमांक और जन्म की तारीख अंकित करने के बाद अंक-पत्र प्राप्त कर सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों को अंक-पत्र की मुद्रित प्रतियां, उम्मीदवारों के डाक टिकट लगे स्व-पता लिखे लिफाफे सहित उनके द्वारा विशेष अनुरोध प्राप्त होने पर ही भेजी जाएंगी। अंक-पत्रों की मुद्रित प्रतियां प्राप्त करने के इच्छुक उम्मीदवारों को ऐसा अनुरोध आयोग की वेबसाइट पर अंक-पत्रों के प्रदर्शित किए जाने के तीस दिन के अंदर करना होगा, इसके बाद ऐसे किसी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। परिणाम संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट http://www. upsc. gov. in पर भी उपलब्ध रहेगा। संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में एक सुविधा काउंटर है। उम्मीदवार अपनी किसी भी प्रकार की जानकारी या स्पष्टीकरण इस काउंटर से व्यक्तिगत रूप से अथवा दूरभाष संख्या दो करोड़ तैंतीस लाख पचासी हज़ार दो सौ इकहत्तर/ दो करोड़ तैंतीस लाख इक्यासी हज़ार एक सौ पच्चीस/ दो करोड़ तीस लाख अट्ठानवे हज़ार पाँच सौ तैंतालीस पर कार्य दिवसों में प्रातः दस से सायं पाँच बजे के बीच प्राप्त कर सकते हैं।
नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार के संकेत देखने को मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले निर्यात में बढ़त लगातार जारी है। सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 50 प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं कीमतों में तेज बढ़त की वजह से कच्चे तेल का आयात बिल 141 प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि सोने के आयात में गिरावट देखने को मिली है। देश का निर्यात एक से सात अगस्त के दौरान 50. 45 प्रतिशत बढ़कर 7. 41 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के अस्थायी आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है। इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषणों का निर्यात अच्छा रहने से कुल निर्यात बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार एक से सात अगस्त के दौरान आयात भी 70 प्रतिशत बढ़कर 10. 45 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस तरह व्यापार घाटा तीन अरब डॉलर रहा। समीक्षाधीन अवधि में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 63 प्रतिशत बढ़कर 83. 4 करोड़ डॉलर रहा। इसी तरह रत्न एवं आभूषणों का निर्यात 121 प्रतिशत बढ़कर 41. 8 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 14. 5 प्रतिशत बढ़कर 52. 2 करोड़ डॉलर रहा। हालांकि, इस दौरान लौह अयस्त, खली तथा तिलहन के निर्यात में गिरावट आई। एक से सात अगस्त के दौरान देश का कच्चे तेल का आयात 141 प्रतिशत बढ़कर 1. 80 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 30. 8 करोड़ डॉलर रहा। समीक्षाधीन अवधि में सोने का आयात 12. 48 प्रतिशत घटकर 10 करोड़ डॉलर रह गया। इस दौरान अमेरिका को निर्यात 48. 4 प्रतिशत बढ़कर 46. 27 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निर्यात 70 प्रतिशत बढ़कर 20. 97 करोड़ डॉलर और सऊदी अरब को 180 प्रतिशत बढ़कर 16. 4 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया।
नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार के संकेत देखने को मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले निर्यात में बढ़त लगातार जारी है। सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश का निर्यात पिछले साल के मुकाबले पचास प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं कीमतों में तेज बढ़त की वजह से कच्चे तेल का आयात बिल एक सौ इकतालीस प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि सोने के आयात में गिरावट देखने को मिली है। देश का निर्यात एक से सात अगस्त के दौरान पचास. पैंतालीस प्रतिशत बढ़कर सात. इकतालीस अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के अस्थायी आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है। इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषणों का निर्यात अच्छा रहने से कुल निर्यात बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार एक से सात अगस्त के दौरान आयात भी सत्तर प्रतिशत बढ़कर दस. पैंतालीस अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस तरह व्यापार घाटा तीन अरब डॉलर रहा। समीक्षाधीन अवधि में इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात तिरेसठ प्रतिशत बढ़कर तिरासी. चार करोड़ डॉलर रहा। इसी तरह रत्न एवं आभूषणों का निर्यात एक सौ इक्कीस प्रतिशत बढ़कर इकतालीस. आठ करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात चौदह. पाँच प्रतिशत बढ़कर बावन. दो करोड़ डॉलर रहा। हालांकि, इस दौरान लौह अयस्त, खली तथा तिलहन के निर्यात में गिरावट आई। एक से सात अगस्त के दौरान देश का कच्चे तेल का आयात एक सौ इकतालीस प्रतिशत बढ़कर एक. अस्सी अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का आयात इकतीस प्रतिशत बढ़कर तीस. आठ करोड़ डॉलर रहा। समीक्षाधीन अवधि में सोने का आयात बारह. अड़तालीस प्रतिशत घटकर दस करोड़ डॉलर रह गया। इस दौरान अमेरिका को निर्यात अड़तालीस. चार प्रतिशत बढ़कर छियालीस. सत्ताईस करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात सत्तर प्रतिशत बढ़कर बीस. सत्तानवे करोड़ डॉलर और सऊदी अरब को एक सौ अस्सी प्रतिशत बढ़कर सोलह. चार करोड़ डॉलर पर पहुंच गया।
कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं? जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड! अब सब ये समझ जाएँ कि ज़बरदस्ती से किसी को कुछ हासिल नहीं होगा, अगर मैं 'ना' करूँ तो वो सिर्फ 'ना' है और 'मैं नहीं हूँ तेरी किरण! ' काश कि हर महिला यह समझ पाती कि वह सिर्फ एक देह नहीं बल्कि बुद्धि, बल, विवेक का भंडार भी है। देह समाहित है हम में, हम देह में नहीं। कई बार ज़िक्र हुआ, कई बार बहस हुई, ढेरों लेख लिखे गए, लेकिन हर घर में कभी ना कभी ये ज़रूर सुनाई दिया है, "ये कुछ नहीं करती! " सिगरेट का धुआँ मेरे फेफड़ों में पूरी तरह से भर गया है। क्या सिगरेट पीने वाले हर इंसान के साथ यही होता है? यदि हाँ, तो सिगरेट क्यों पीते हैं? "भाभी को सरपंच पद पर चुनाव में खड़ा कर दीजिये भैया। इससे चित और पट दोनों आप ही के रहेंगे। है कि नहीं? " जब मानव समाज के नियमों का ताना-बाना बुन रहा था, तो बुद्धिमत्ता वाले काम पुरुष के हिस्से में रखे, और शरीरिक क्षमता वाले काम स्त्रियों के हवाले कर दिये। अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!
कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं? जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड! अब सब ये समझ जाएँ कि ज़बरदस्ती से किसी को कुछ हासिल नहीं होगा, अगर मैं 'ना' करूँ तो वो सिर्फ 'ना' है और 'मैं नहीं हूँ तेरी किरण! ' काश कि हर महिला यह समझ पाती कि वह सिर्फ एक देह नहीं बल्कि बुद्धि, बल, विवेक का भंडार भी है। देह समाहित है हम में, हम देह में नहीं। कई बार ज़िक्र हुआ, कई बार बहस हुई, ढेरों लेख लिखे गए, लेकिन हर घर में कभी ना कभी ये ज़रूर सुनाई दिया है, "ये कुछ नहीं करती! " सिगरेट का धुआँ मेरे फेफड़ों में पूरी तरह से भर गया है। क्या सिगरेट पीने वाले हर इंसान के साथ यही होता है? यदि हाँ, तो सिगरेट क्यों पीते हैं? "भाभी को सरपंच पद पर चुनाव में खड़ा कर दीजिये भैया। इससे चित और पट दोनों आप ही के रहेंगे। है कि नहीं? " जब मानव समाज के नियमों का ताना-बाना बुन रहा था, तो बुद्धिमत्ता वाले काम पुरुष के हिस्से में रखे, और शरीरिक क्षमता वाले काम स्त्रियों के हवाले कर दिये। अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे!
[भाग I--खण्ड 1] भारत का राजपत्र प्रसाधारण इस में संलग्न भुगतन अनुसूची के अनुसार अपेक्षित (संविदावेजों को नत्थी करना है सौवा तय करने के लिये ड्राफ्टसभी ड्राफ्ट और दस्तावेज अपरिवर्तणीय सपत्र सं. सुना लिये गये हैं, से चिह्नित होने चाहिये । यह मोडिट हस्तान्तरणीय नहीं है । हम एतद्द्वारा बचन देते हैं कि इस क्रेडिट के अन्तर्गत इसकी शर्तों को अनुपालना में भुनाये गये सभी ड्राफ्ट प्रस्तुत करने पर और प्रदेशितों को सुपुर्दगी पर विधिवत् स्वीकार किये जयेंगे । भुगतान अनुसूची --और परियोजना जब तक अन्यथारूप में विस्तार पूर्वक न बताया जाये, यह क्रेडिट "यूनिफार्म कस्टम एंड प्रोक्टस फार डाकूमेंटरी क्रेडिट् 1974 डिवीजन इन्टरनेशनल चेम्बर अफ कमर्स नं. 290" के अधीन है। सौदा करने वाले बैंक को विशेष प्रवेश इसमें संलग्न प्रपत्न के अनुसार ( ऋणों और इसके मनोनीत अधिकारी द्वारा जारी किये गये निष्पादन के मूल विवरण की प्राप्ति के पश्चात् इस क्रेडिट के अंतर्गत भुगतान इसमें संलग्न शीट में निर्धारित भुगतान अनुसूची के अनुसार किया जाने चाहियें। प्रारंभिक भुगतान के मामले में उपर्युक्त निष्पादन के विवरण के बजाय लाभकारी विवरण की आवश्यकता है। * यह भुगतान अनुसूची हमारे साखपन सं.. 1. प्रारम्भिक भुगतानधनराशिऊपर उल्लिखित ऋण समझौते के अधीन जारी किये गये बचनबद्धता पत्न के उपबन्धों के अनुसार विदेशी प्रार्थिक सहयोग निधि के अपने भुगतान के लिये प्रतिपूर्ति प्राप्त करने के बाद हम ड्राफ्टों की धनराशि का मोल तोल करने वाले बैंक द्वारा जारी किये गये अनुवेशों के अनुसार प्रेषित करने का बचन देते हैं । 3. उपर्युक्त मद 1 में यथा उल्लिखित दस्तावेज की एक प्रति और मसौदे हमें उसकी प्राप्ति के तुरन्त बाद ही भेजे जायेंगे । 4. इस साख के प्रस्तर्गत बैंक के सभी खर्च सम्भरकों के लेखे के लिये हैं । 2. भुगतान बृद्धि सम्पूर्ण योग की धनराशिकुल संविदा मूल्य कॉदोय धनराशि येनपहली किस्त देय-~से पहले प्रस्तुत किये जाने चाहिये के अन्तर्गत कुल संविा मूल्य का --प्रतिशत है । अपेक्षित दस्तावेज लाभकारी विवरण की अंतिम भुगतान तिथि - ) से ( वाणिज्यिक बैंक ) ( प्राधिकृत हस्ताक्षर) --का एक अभिन्न अंग है। -प्रतिशत निम्न प्रकार से भुगतान किया जाता है अंतिमभुगतान तिथि अपेक्षित दस्तावेज (ॠणी अथवा उसके मनोनीत प्राधिकारी) द्वारा जारी किये गये निष्पादन के विवरण की एक प्रति जिसकी एक प्रपत्र संलग्न है ।
[भाग I--खण्ड एक] भारत का राजपत्र प्रसाधारण इस में संलग्न भुगतन अनुसूची के अनुसार अपेक्षित से --का एक अभिन्न अंग है। -प्रतिशत निम्न प्रकार से भुगतान किया जाता है अंतिमभुगतान तिथि अपेक्षित दस्तावेज द्वारा जारी किये गये निष्पादन के विवरण की एक प्रति जिसकी एक प्रपत्र संलग्न है ।
प्लास्टिक कचरा (Plastic Waste) से फैलता प्रदूषण पृथ्वी के वातावरण को नष्ट कर रहा है. धरती पर प्लास्टिक की वस्तुओं का संचय मनुष्यों, वन्यजीवों और उनके आवास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. प्लास्टिक के तीन प्रमुख रूप हैं जो प्लास्टिक प्रदूषण में योगदान करते हैं- सूक्ष्म, मैक्रो और मेगा-प्लास्टिक. मेगा और माइक्रो प्लास्टिक उत्तरी गोलार्ध में उच्चतम घनत्व में जमा हो रहे हैं, जो शहरी केंद्रों और जल मोर्चों के आसपास केंद्रित हैं (Types of Plastics). प्लास्टिक सस्ते और टिकाऊ होते हैं जो उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए बहुत अनुकूल बनाते हैं. जिस कारण निर्माता अन्य सामग्रियों की तुलना में प्लास्टिक का उपयोग ज्यादा करते हैं (More use of Plastic). प्लास्टिक प्रदूषण भूमि, जलमार्ग और महासागरों को प्रभावित करते हैं. यह अनुमान है कि 1. 1 से 8. 8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा हर साल समुद्र में प्रवेश करता है. यह अनुमान है कि 2013 के अंत तक दुनिया भर से महासागर में 86 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्री मलबे का भंडार है. 1950 से 2013 तक उत्पादित वैश्विक प्लास्टिक का 1. 4% महासागर में प्रवेश कर चुका है और वहां जमा हो गया है. कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि 2050 तक समुद्रों में वजन के हिसाब से मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो सकता है (Plastic Pollution). COVID-19 के दौरान, सुरक्षात्मक उपकरणों और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती मांग के कारण प्लास्टिक कचरे की मात्रा में वृद्धि हुई (Plastic Waste increases). प्लास्टिक मलबे को प्राथमिक या माध्यमिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है. प्राथमिक प्लास्टिक एकत्र करने पर अपने मूल रूप में होते हैं जैसे- बोतल के ढक्कन, सिगरेट बट्स और माइक्रोबीड्स हैं. दूसरी ओर, माध्यमिक प्लास्टिक, छोटे प्लास्टिक होते है (Plastic Debris). चिकन के भ्रूण में प्लास्टिक मिला है. सवाल ये है कि क्या आप अब मुर्गा खा पाएंगे? क्या ये प्लास्टिक आपके शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाएगा? हाल ही में हुई एक स्टडी में यह डराने वाला खुलासा हुआ है कि मुर्गे के भ्रूण में अब नैनोप्लास्टिक मिल रहे हैं. जिसका लोगों की सेहत पर बुरा असर होगा. केरल के कोच्चि में 2 मार्च को एक कचरा प्लांट में आग लगी थी. आग से जहरीला धुआं उठ रहा है. इससे कोच्चि के लोगों का दम घुटने लगा है. सांस लेने में तकलीफ हो रही है. आग को बुझाने में अग्निशमन दल के 30 टैंकर, नौसेना के हेलिकॉप्टर्स और जवान लगे हुए हैं. ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट में रोजाना 390 टन कचरा डंप किया जा रहा है. इसमें सिर्फ 64 प्रतिशत कचरा ही बायोडिग्रेडेबल है. सात दिन हो चुके हैं कोच्चि के कचरा प्लांट में आग लगे हुए. एक हफ्ते में जहरीले धुएं ने पूरे शहर को घेर लिया है. अब तो लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है. केरल के हाईकोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई है. शहर को गैस चेंबर तक बोल दिया है. आइए जानते हैं कि देश का ये शहर धुआं-धुआं क्यों है? शरीर में जाने वाले प्लास्टिक से होने वाली बीमारी का पहली बार पता चला है. इसका नाम प्लास्टिकोसिस रखा गया है. इससे ज्यादातर समुद्री पक्षी परेशान हो रहे हैं. समुद्र में शिकार करने के दौरान शरीर में प्लास्टिक चला जाता है, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी मौत हो जाती है. जानिए इस बीमारी के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया है. हाल ही आई एक रिसर्च में एक खुलासा हुआ है जिसमें पता चला है कि इंसानों के शरीर में काफी मात्रा में प्लास्टिक पहुंच गया है, जिसे एक बड़ा खतरा बताया जा रहा है. बंधन बैंक में एफडी की ब्याज 8. 5% कर दी है. देखें आजतक मोबाइल बुलेटिन में देखें आपके काम की खबरें. प्लास्टिक अब सिर्फ खिलौनों, बर्तन या किसी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हमारी नसों में घुलने लगा है. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इंसानों नसों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी का पता लगाया है. इसमें हर ग्राम ऊतक में माइक्रोप्लास्टिक के लगभग 15 कण मिले. माना जा रहा है कि इसी तरह से हर हफ्ते हम लगभग एक क्रेडिट कार्ड जितना प्लास्टिक खा जाते हैं. केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार जिस तकनीक को मिला है. वह कैंसर का इलाज कर सकती है. डीएनए में बदलाव कर सकती है. प्लास्टिक कचरे से निजात दिला सकती है. आपके घर को सुरक्षित बना सकती है. शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग से बचा सकती है. यानी आपके जीवन की हर समस्या का समधान कर सकती है. इंसान की फितरत है गंदगी फैलाना. धरती पर तो गंद मचाकर रखी ही है. पिछले 50 सालों में मंगल ग्रह पर इतना कचरा छोड़ आए जितना आप 7-8 साल में अपने घरों से निकालते हैं. यहां तो कचरा साफ हो जाता है लेकिन मंगल ग्रह पर कौन सफाई अभियान चलाएगा? कौन करेगा वहां के कचरों को साफ? अंतरिक्ष से कचरे का एक बड़ा टुकड़ा ऑस्ट्रेलिया के एक खेत में गिरा. दावा किया जा रहा है कि यह टुकड़ा Elon Musk की स्पेसएक्स कंपनी के किसी रॉकेट या यान का कोई हिस्सा हो सकता है. यह टुकड़ा 10 फीट लंबा त्रिकोण आकार का है. कोका कोला (Coca Cola) का कहना है कि स्प्राइट की बोतल हरे रंग से सफेद या ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक में बदली जा रही है. इससे प्लास्टिक मैटेरियल को दोबारा बोतल बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता. साल 1961 में पहली बार कोका कोला ने लेमन लाइम सॉफ्ट ड्रिंक के रूप में Sprite को लॉन्च किया था. Polar Bears Eating Garbage: आपको कचरा खाने को दिया जाए तो कैसा लगेगा? लेकिन मछली, छोटी लोमड़ियों का शिकार करने वाले पोलर बीयर अब इंसानों की वजह से कचरा खा रहे हैं. मजबूर हैं. . . क्या करें? क्लाइमेट चेंज की वजह से उनका इलाका जो पिघल रहा है. Single use Plastic Ban: सरकार ने कूड़ा-करकट वाले सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. 1 जुलाई से करीब डेढ़ दर्जन से अधिक प्लास्टिक की वस्तुओं को बैन कर दिया है. आने वाले 15 अगस्त को आप प्लास्टिक के तिरंगे के साथ आजादी का उत्सव नहीं मना पाएंगे. Single Use Plastic Ban: राजधानी दिल्ली में प्लास्टिक बनाने वाली कई कंपनियों को बंद करने का आदेश दिया गया है. साथ ही बिजली वितरण कंपनियों को फैक्ट्री के कनेक्शन काटने को भी कहा गया है. Best Business Idea: अगर आप छोटा सा निवेश करके अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो Non Woven बैग का बिजनेस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. देश में सिंगल यूज प्लास्चिक Ban होने के बाद इसकी मांग में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है. स्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं. कचरा भी निकलता है. उसका क्या होता है? स्पेस स्टेशन पर वेस्ट मैनेजमेंट के कई तरीके हैं. आज हम आपको पुराने और नए दोनों तरीके बता रहे हैं. Business Idea: अगर आप छोटा सा निवेश करके अचछी कमाई करना चाहते हैं, तो Non Woven बैग का बिजनेस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. देश में सिंगल यूज प्लास्चिक Ban होने के बाद इसकी मांग में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है.
प्लास्टिक कचरा से फैलता प्रदूषण पृथ्वी के वातावरण को नष्ट कर रहा है. धरती पर प्लास्टिक की वस्तुओं का संचय मनुष्यों, वन्यजीवों और उनके आवास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. प्लास्टिक के तीन प्रमुख रूप हैं जो प्लास्टिक प्रदूषण में योगदान करते हैं- सूक्ष्म, मैक्रो और मेगा-प्लास्टिक. मेगा और माइक्रो प्लास्टिक उत्तरी गोलार्ध में उच्चतम घनत्व में जमा हो रहे हैं, जो शहरी केंद्रों और जल मोर्चों के आसपास केंद्रित हैं . प्लास्टिक सस्ते और टिकाऊ होते हैं जो उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए बहुत अनुकूल बनाते हैं. जिस कारण निर्माता अन्य सामग्रियों की तुलना में प्लास्टिक का उपयोग ज्यादा करते हैं . प्लास्टिक प्रदूषण भूमि, जलमार्ग और महासागरों को प्रभावित करते हैं. यह अनुमान है कि एक. एक से आठ. आठ मिलियन टन प्लास्टिक कचरा हर साल समुद्र में प्रवेश करता है. यह अनुमान है कि दो हज़ार तेरह के अंत तक दुनिया भर से महासागर में छियासी मिलियन टन प्लास्टिक समुद्री मलबे का भंडार है. एक हज़ार नौ सौ पचास से दो हज़ार तेरह तक उत्पादित वैश्विक प्लास्टिक का एक. चार% महासागर में प्रवेश कर चुका है और वहां जमा हो गया है. कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि दो हज़ार पचास तक समुद्रों में वजन के हिसाब से मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो सकता है . COVID-उन्नीस के दौरान, सुरक्षात्मक उपकरणों और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती मांग के कारण प्लास्टिक कचरे की मात्रा में वृद्धि हुई . प्लास्टिक मलबे को प्राथमिक या माध्यमिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है. प्राथमिक प्लास्टिक एकत्र करने पर अपने मूल रूप में होते हैं जैसे- बोतल के ढक्कन, सिगरेट बट्स और माइक्रोबीड्स हैं. दूसरी ओर, माध्यमिक प्लास्टिक, छोटे प्लास्टिक होते है . चिकन के भ्रूण में प्लास्टिक मिला है. सवाल ये है कि क्या आप अब मुर्गा खा पाएंगे? क्या ये प्लास्टिक आपके शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाएगा? हाल ही में हुई एक स्टडी में यह डराने वाला खुलासा हुआ है कि मुर्गे के भ्रूण में अब नैनोप्लास्टिक मिल रहे हैं. जिसका लोगों की सेहत पर बुरा असर होगा. केरल के कोच्चि में दो मार्च को एक कचरा प्लांट में आग लगी थी. आग से जहरीला धुआं उठ रहा है. इससे कोच्चि के लोगों का दम घुटने लगा है. सांस लेने में तकलीफ हो रही है. आग को बुझाने में अग्निशमन दल के तीस टैंकर, नौसेना के हेलिकॉप्टर्स और जवान लगे हुए हैं. ब्रह्मपुरम वेस्ट प्लांट में रोजाना तीन सौ नब्बे टन कचरा डंप किया जा रहा है. इसमें सिर्फ चौंसठ प्रतिशत कचरा ही बायोडिग्रेडेबल है. सात दिन हो चुके हैं कोच्चि के कचरा प्लांट में आग लगे हुए. एक हफ्ते में जहरीले धुएं ने पूरे शहर को घेर लिया है. अब तो लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है. केरल के हाईकोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई है. शहर को गैस चेंबर तक बोल दिया है. आइए जानते हैं कि देश का ये शहर धुआं-धुआं क्यों है? शरीर में जाने वाले प्लास्टिक से होने वाली बीमारी का पहली बार पता चला है. इसका नाम प्लास्टिकोसिस रखा गया है. इससे ज्यादातर समुद्री पक्षी परेशान हो रहे हैं. समुद्र में शिकार करने के दौरान शरीर में प्लास्टिक चला जाता है, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी मौत हो जाती है. जानिए इस बीमारी के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया है. हाल ही आई एक रिसर्च में एक खुलासा हुआ है जिसमें पता चला है कि इंसानों के शरीर में काफी मात्रा में प्लास्टिक पहुंच गया है, जिसे एक बड़ा खतरा बताया जा रहा है. बंधन बैंक में एफडी की ब्याज आठ. पाँच% कर दी है. देखें आजतक मोबाइल बुलेटिन में देखें आपके काम की खबरें. प्लास्टिक अब सिर्फ खिलौनों, बर्तन या किसी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हमारी नसों में घुलने लगा है. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इंसानों नसों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी का पता लगाया है. इसमें हर ग्राम ऊतक में माइक्रोप्लास्टिक के लगभग पंद्रह कण मिले. माना जा रहा है कि इसी तरह से हर हफ्ते हम लगभग एक क्रेडिट कार्ड जितना प्लास्टिक खा जाते हैं. केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार जिस तकनीक को मिला है. वह कैंसर का इलाज कर सकती है. डीएनए में बदलाव कर सकती है. प्लास्टिक कचरे से निजात दिला सकती है. आपके घर को सुरक्षित बना सकती है. शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग से बचा सकती है. यानी आपके जीवन की हर समस्या का समधान कर सकती है. इंसान की फितरत है गंदगी फैलाना. धरती पर तो गंद मचाकर रखी ही है. पिछले पचास सालों में मंगल ग्रह पर इतना कचरा छोड़ आए जितना आप सात-आठ साल में अपने घरों से निकालते हैं. यहां तो कचरा साफ हो जाता है लेकिन मंगल ग्रह पर कौन सफाई अभियान चलाएगा? कौन करेगा वहां के कचरों को साफ? अंतरिक्ष से कचरे का एक बड़ा टुकड़ा ऑस्ट्रेलिया के एक खेत में गिरा. दावा किया जा रहा है कि यह टुकड़ा Elon Musk की स्पेसएक्स कंपनी के किसी रॉकेट या यान का कोई हिस्सा हो सकता है. यह टुकड़ा दस फीट लंबा त्रिकोण आकार का है. कोका कोला का कहना है कि स्प्राइट की बोतल हरे रंग से सफेद या ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक में बदली जा रही है. इससे प्लास्टिक मैटेरियल को दोबारा बोतल बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता. साल एक हज़ार नौ सौ इकसठ में पहली बार कोका कोला ने लेमन लाइम सॉफ्ट ड्रिंक के रूप में Sprite को लॉन्च किया था. Polar Bears Eating Garbage: आपको कचरा खाने को दिया जाए तो कैसा लगेगा? लेकिन मछली, छोटी लोमड़ियों का शिकार करने वाले पोलर बीयर अब इंसानों की वजह से कचरा खा रहे हैं. मजबूर हैं. . . क्या करें? क्लाइमेट चेंज की वजह से उनका इलाका जो पिघल रहा है. Single use Plastic Ban: सरकार ने कूड़ा-करकट वाले सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. एक जुलाई से करीब डेढ़ दर्जन से अधिक प्लास्टिक की वस्तुओं को बैन कर दिया है. आने वाले पंद्रह अगस्त को आप प्लास्टिक के तिरंगे के साथ आजादी का उत्सव नहीं मना पाएंगे. Single Use Plastic Ban: राजधानी दिल्ली में प्लास्टिक बनाने वाली कई कंपनियों को बंद करने का आदेश दिया गया है. साथ ही बिजली वितरण कंपनियों को फैक्ट्री के कनेक्शन काटने को भी कहा गया है. Best Business Idea: अगर आप छोटा सा निवेश करके अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो Non Woven बैग का बिजनेस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. देश में सिंगल यूज प्लास्चिक Ban होने के बाद इसकी मांग में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है. स्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं. कचरा भी निकलता है. उसका क्या होता है? स्पेस स्टेशन पर वेस्ट मैनेजमेंट के कई तरीके हैं. आज हम आपको पुराने और नए दोनों तरीके बता रहे हैं. Business Idea: अगर आप छोटा सा निवेश करके अचछी कमाई करना चाहते हैं, तो Non Woven बैग का बिजनेस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. देश में सिंगल यूज प्लास्चिक Ban होने के बाद इसकी मांग में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है.
जाट आरक्षण पर सीएम ने कहा कि कमीशन सर्वे कराके तीन माह में रिपोर्ट देगा। रिपोर्ट के आधार पर निर्णय होगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश सरकार लोगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के प्रयासों की ओर अग्रसर है। पंचकुला, अंबाला और गुरूग्राम में 24 घंटे बिजली दी जा रही है। अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था को जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जाट आरक्षण पर सीएम ने कहा कि कमीशन सर्वे कराके तीन माह में रिपोर्ट देगा। रिपोर्ट के आधार पर निर्णय होगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश सरकार लोगों को चौबीस घंटाटे बिजली उपलब्ध करवाने के प्रयासों की ओर अग्रसर है। पंचकुला, अंबाला और गुरूग्राम में चौबीस घंटाटे बिजली दी जा रही है। अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था को जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुंबईः अभिनेता कुणाल खेमू ने सोशल मीडिया पर अपनी एक हॉट तस्वीर साझा की है, जिसमें वह अपने एब्स फ्लॉन्ट करते नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई मिरर सेल्फी में एक्टर ने ग्रे रंग की हुडी पहनी हुई है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, भाई कवर मस्त है। इससे पहले कुणाल ने अपने बाल कटवाने का वीडियो साझा किया था। उन्होंने फोटो शेयरिंग एप पर अपनी पहले और बाद की तस्वीर साझा की थी। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, नया साल नया रूप। अभिनेता को हाल ही में वेब सीरीज अभय के दूसरे सीजन में देखा गया था। इसके पहले, उन्होंने लुटकेस और मलंग में अपनी फिल्मी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को लुभाया।
मुंबईः अभिनेता कुणाल खेमू ने सोशल मीडिया पर अपनी एक हॉट तस्वीर साझा की है, जिसमें वह अपने एब्स फ्लॉन्ट करते नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई मिरर सेल्फी में एक्टर ने ग्रे रंग की हुडी पहनी हुई है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, भाई कवर मस्त है। इससे पहले कुणाल ने अपने बाल कटवाने का वीडियो साझा किया था। उन्होंने फोटो शेयरिंग एप पर अपनी पहले और बाद की तस्वीर साझा की थी। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, नया साल नया रूप। अभिनेता को हाल ही में वेब सीरीज अभय के दूसरे सीजन में देखा गया था। इसके पहले, उन्होंने लुटकेस और मलंग में अपनी फिल्मी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को लुभाया।
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन तोमर के युवा जिला अध्यक्ष चौधरी अंकित गुर्जर के नेतृत्व में सैकड़ों से अधिक संख्या में किसानों ने बिजली से संबंधित समस्याओं को लेकर रोहाना बिजलीघर पर धरना प्रदर्शन किया। चौधरी अंकित गुर्जर ने यह आरोप लगाया कि रोहाना बिजलीघर के जेई किसानों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम बहेड़ी निवासी जगवीर के घर मैन लाइन पर एक फेस भागे होने की वजह से उसने दूसरी लाइन पर तार डाल दिया था। बिजली घर के जेई द्वारा जब चेकिंग की गई तो जगबीर पर पैसे का दबाव बनाया गया और पैसे ना देने की वजह से उसके खिलाफ नाजायज भारी भरकम लोड दिखाकर जुर्माना प्रस्तुत किया गया। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन तोमर में भारी रोष है। किसानों व मजदूरों का शोषण भारतीय किसान यूनियन तोमर किसी भी तरीके से बर्दाश्त नहीं करेगा। भारतीय किसान यूनियन तोमर के जिला प्रभारी मास्टर अरशद जलाल ने कहा कि बहेड़ी निवासी मोबीन ने अपने घर के कनेक्शन का सारा बिल जमा किया है, इसके बावजूद भी उस पर बिजली विभाग द्वारा 64,084 रुपए का नोटिस भेज दिया गया। कुछ समय पहले बहेड़ी निवासी मोबीन का मीटर खराब हो गया था, जिसका प्रार्थना पत्र देकर विभाग को सूचित भी कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि इस तरह का शोषण भारतीय किसान यूनियन तोमर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं मौके पर पहुंचे बिजली विभाग के एसडीओ साहब ने सभी समस्याओं का समाधान करने का मजबूत आश्वासन दिया, उसके बाद धरना समाप्त किया गया। इस मौके पर ब्लॉक सचिव नगर अध्यक्ष अखिल ठाकुर, उपाध्यक्ष युवा जिला संगठन मंत्री जिला महासचिव नाजिम सैफी, प्रशांत राठी चरथावल युवा ब्लॉक अध्यक्ष नौशाद सोनू, राजेश अन्य मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन तोमर के युवा जिला अध्यक्ष चौधरी अंकित गुर्जर के नेतृत्व में सैकड़ों से अधिक संख्या में किसानों ने बिजली से संबंधित समस्याओं को लेकर रोहाना बिजलीघर पर धरना प्रदर्शन किया। चौधरी अंकित गुर्जर ने यह आरोप लगाया कि रोहाना बिजलीघर के जेई किसानों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम बहेड़ी निवासी जगवीर के घर मैन लाइन पर एक फेस भागे होने की वजह से उसने दूसरी लाइन पर तार डाल दिया था। बिजली घर के जेई द्वारा जब चेकिंग की गई तो जगबीर पर पैसे का दबाव बनाया गया और पैसे ना देने की वजह से उसके खिलाफ नाजायज भारी भरकम लोड दिखाकर जुर्माना प्रस्तुत किया गया। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन तोमर में भारी रोष है। किसानों व मजदूरों का शोषण भारतीय किसान यूनियन तोमर किसी भी तरीके से बर्दाश्त नहीं करेगा। भारतीय किसान यूनियन तोमर के जिला प्रभारी मास्टर अरशद जलाल ने कहा कि बहेड़ी निवासी मोबीन ने अपने घर के कनेक्शन का सारा बिल जमा किया है, इसके बावजूद भी उस पर बिजली विभाग द्वारा चौंसठ,चौरासी रुपयापए का नोटिस भेज दिया गया। कुछ समय पहले बहेड़ी निवासी मोबीन का मीटर खराब हो गया था, जिसका प्रार्थना पत्र देकर विभाग को सूचित भी कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि इस तरह का शोषण भारतीय किसान यूनियन तोमर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं मौके पर पहुंचे बिजली विभाग के एसडीओ साहब ने सभी समस्याओं का समाधान करने का मजबूत आश्वासन दिया, उसके बाद धरना समाप्त किया गया। इस मौके पर ब्लॉक सचिव नगर अध्यक्ष अखिल ठाकुर, उपाध्यक्ष युवा जिला संगठन मंत्री जिला महासचिव नाजिम सैफी, प्रशांत राठी चरथावल युवा ब्लॉक अध्यक्ष नौशाद सोनू, राजेश अन्य मौजूद रहे।
शाहजहांपुरः बीस दिन पहले लापता हुए ठेकेदार का शव उसकी प्रेमिका के घर से बरामद हुआ है। ठेकेदार जिससे प्यार करता था उसी ने उसकी हत्या की और अपने घर में ही गढ्ढा खोदकर शव को दफना दिया। ठेकेदार के बेटे ने बीस दिन पहले पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने ठेकेदार के फोन नंबर की कॉल डिटेल निकलवाने के बाद आरोपी महिला उसकी बेटी समेत सभी लोगों को अरेस्ट कर लिया है। क्या है पूरा मामला? -ठेकेदार शराफत कटरा थाना क्षेत्र के स्माईलनगर मोहल्ले में रहते थे। -उनके एक कमला नाम की महिला से अवैध संबंध थे। -उस महिला की एक बेटी भी है। -बीस दिन पहले महिला ने फोन कर शराफत को रात में अपने घर बुलाया। -शराफत अपने घर बगैर कुछ बताए उस महिला के घर चले गए। -उसके बाद जब वह पूरी घर नहीं पहुंचे तो शराफत के बेटे राजू ने पिता को ढूंढने की कोशिश की। -कुछ न पता चलने पर बेटे राजू ने कटरा पुलिस को सूचना दी। -पुलिस ने राजू की तहरीर पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू कर दी। -कुछ दिन बाद थाना जैतापुर क्षेत्र के जंगल में एक प्लेटिना बाईक बरामद हुई। -बरामद हुई बाईक शराफत की थी जिससे वह अपने घर से निकले थे। -पुलिस का शक अब किसी घटना की ओर इशारा कर रहा था। -कटरा पुलिस ने शराफत का फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिया और कॉल डिटेल निकलवाई। -इसमें कमला नाम की महिला से उस रात बात हुई थी। -कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने उस महिला से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। क्या कहा आरोपी महिला ने? आरोपी महिला ने पुलिस को बताया कि उसके और शराफत के पिछले कई सालों से अवैध संबंध थे। उसी ने बीस दिन पहले फोन करके अपने घर बुलाया था। रात में उसकी नीयत उसकी बेटी अर्चना पर खराब हो गई। वह उससे जबरदस्ती करने लगा। ये देखकर घर में मौजूद महिला कमला पत्नी प्रमोद, पुत्री अर्चना, दमाद मनोज, और जेठ का पुत्र सोनू को गुस्सा आ गया। सभी ने मिलकर शराफत का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी महिला की माने तो हत्या करने के बाद उसने उसके शरीर पर से सभी कपङे उतार दिए बस एक अंडरवियर छोङ दिया था। शव को गायब करने के लिए रात में ही घर में एक चार फिट का गहरा गढ्ढा खोदा उसमें शव को दफना दिया। इतना ही नहीं महिला ने शव को गलाने के लिए उस पर नमक भी डाला था। शराफत की मोटर साइकिल को रसेवंन गांव के पास कोटा नाले में डाल दिया था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला की निशानदेही पर शव बरामद कर सभी आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है। क्या कहते हैं एसओ नरेंद्र यादव? -बीस दिन पहले एक ठेकेदार लापता हो गए थे। -उसकी तलाश की जा रही थी लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था। -लापता ठेकेदार के कॉल डिटेल से पता चला कि उसके एक महिला से अवैध संबंध थे। -उसी महिला ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। -उसके शव को अपने ही घर में गढ्ढे में दफना दिया था। -आरोपी महिला की निशानदेही पर महिला और उसकी बेटी समेत चार लोगों को अरेस्ट कर लिया है।
शाहजहांपुरः बीस दिन पहले लापता हुए ठेकेदार का शव उसकी प्रेमिका के घर से बरामद हुआ है। ठेकेदार जिससे प्यार करता था उसी ने उसकी हत्या की और अपने घर में ही गढ्ढा खोदकर शव को दफना दिया। ठेकेदार के बेटे ने बीस दिन पहले पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने ठेकेदार के फोन नंबर की कॉल डिटेल निकलवाने के बाद आरोपी महिला उसकी बेटी समेत सभी लोगों को अरेस्ट कर लिया है। क्या है पूरा मामला? -ठेकेदार शराफत कटरा थाना क्षेत्र के स्माईलनगर मोहल्ले में रहते थे। -उनके एक कमला नाम की महिला से अवैध संबंध थे। -उस महिला की एक बेटी भी है। -बीस दिन पहले महिला ने फोन कर शराफत को रात में अपने घर बुलाया। -शराफत अपने घर बगैर कुछ बताए उस महिला के घर चले गए। -उसके बाद जब वह पूरी घर नहीं पहुंचे तो शराफत के बेटे राजू ने पिता को ढूंढने की कोशिश की। -कुछ न पता चलने पर बेटे राजू ने कटरा पुलिस को सूचना दी। -पुलिस ने राजू की तहरीर पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू कर दी। -कुछ दिन बाद थाना जैतापुर क्षेत्र के जंगल में एक प्लेटिना बाईक बरामद हुई। -बरामद हुई बाईक शराफत की थी जिससे वह अपने घर से निकले थे। -पुलिस का शक अब किसी घटना की ओर इशारा कर रहा था। -कटरा पुलिस ने शराफत का फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिया और कॉल डिटेल निकलवाई। -इसमें कमला नाम की महिला से उस रात बात हुई थी। -कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने उस महिला से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। क्या कहा आरोपी महिला ने? आरोपी महिला ने पुलिस को बताया कि उसके और शराफत के पिछले कई सालों से अवैध संबंध थे। उसी ने बीस दिन पहले फोन करके अपने घर बुलाया था। रात में उसकी नीयत उसकी बेटी अर्चना पर खराब हो गई। वह उससे जबरदस्ती करने लगा। ये देखकर घर में मौजूद महिला कमला पत्नी प्रमोद, पुत्री अर्चना, दमाद मनोज, और जेठ का पुत्र सोनू को गुस्सा आ गया। सभी ने मिलकर शराफत का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी महिला की माने तो हत्या करने के बाद उसने उसके शरीर पर से सभी कपङे उतार दिए बस एक अंडरवियर छोङ दिया था। शव को गायब करने के लिए रात में ही घर में एक चार फिट का गहरा गढ्ढा खोदा उसमें शव को दफना दिया। इतना ही नहीं महिला ने शव को गलाने के लिए उस पर नमक भी डाला था। शराफत की मोटर साइकिल को रसेवंन गांव के पास कोटा नाले में डाल दिया था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला की निशानदेही पर शव बरामद कर सभी आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है। क्या कहते हैं एसओ नरेंद्र यादव? -बीस दिन पहले एक ठेकेदार लापता हो गए थे। -उसकी तलाश की जा रही थी लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा था। -लापता ठेकेदार के कॉल डिटेल से पता चला कि उसके एक महिला से अवैध संबंध थे। -उसी महिला ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। -उसके शव को अपने ही घर में गढ्ढे में दफना दिया था। -आरोपी महिला की निशानदेही पर महिला और उसकी बेटी समेत चार लोगों को अरेस्ट कर लिया है।
राम नवमी के अवसर पर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के शिमला में जाखू मंदिर में पूजा-अर्चना की। इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रामनवमी के अवसर पर बधाई दी और सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। देशवासियों को रामनवमी की ढेरों शुभकामनाएं। भगवान श्रीराम की कृपा से हर किसी को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त हो। जय श्रीराम! राम नवमी हर साल चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन भगवान राम के जन्म को चिह्नित करने के लिए पूरे भारत में मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर, देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करने वाली कंजको को उपहार और प्रसाद (मीठा) दिया जाता है।
राम नवमी के अवसर पर, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के शिमला में जाखू मंदिर में पूजा-अर्चना की। इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रामनवमी के अवसर पर बधाई दी और सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। देशवासियों को रामनवमी की ढेरों शुभकामनाएं। भगवान श्रीराम की कृपा से हर किसी को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त हो। जय श्रीराम! राम नवमी हर साल चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन भगवान राम के जन्म को चिह्नित करने के लिए पूरे भारत में मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर, देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करने वाली कंजको को उपहार और प्रसाद दिया जाता है।
'जादुई पिटारा' तैयार करने वाली एनसीईआरटी टीम की सदस्य प्रोफेसर रंजना अरोड़ा ने बताया कि इसे प्लेबुक, खिलौने, पहेलियां, कठपुतलियां, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, कहानी की किताबें, वर्कशीट, एनीमेशन, आकर्षक किताबें के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ और भाषाओं को मिलाकर तैयार किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को बालवाटिका एक, दो व तीन और पहली व दूसरी कक्षा के लिए एनसीईआरटी द्वारा तैयार 'जादुई पिटारा' नामक पाठ्यक्रम को लॉन्च किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस उम्र के बच्चे खेल-खेल में अधिक सीखते हैं। इसलिए उन्हें किताबों के बोझ से निजात देने वाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के तहत तैयार यह "जादुई पिटारा" खेल, चित्रकला, नृत्य व संगीत के माध्यम से शिक्षा से जोड़ेगा। बालवाटिका एक, बालवाटिका दो, बालवाटिका तीन तक के बच्चों को कोई स्कूल बैग नहीं होगा, जबकि पहली व दूसरी कक्षा के छात्रों को भी किताबों के भारीभरकम बोझ से निजात मिलेगी। इन सभी कक्षाओं के छात्रों को 13 भारतीय भाषाओं में पढ़ाई का मौका मिलेगा। दिल्ली स्थित आंबेडकर भवन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा और राष्ट्रीय संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. के कस्तूरीरंगन की उपस्थिति में बुनियादी चरण के लिए शिक्षण-अध्यापन सामग्री का शुभारंभ किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार इस 'जादुई पिटारा' में 3 से 8 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए खेल, चित्रकला, नृत्य व संगीत पर आधारित शिक्षा की रूपरेखा तैयार की गयी है। 'जादुई पिटारा' तैयार करने वाली एनसीईआरटी टीम की सदस्य प्रोफेसर रंजना अरोड़ा ने बताया कि इसे प्लेबुक, खिलौने, पहेलियां, कठपुतलियां, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, कहानी की किताबें, वर्कशीट, एनीमेशन, आकर्षक किताबें के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ और भाषाओं को मिलाकर तैयार किया गया है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा के तहत विकसित 'जादुई पिटारा' 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। यह सीखने-सिखाने के माहौल को समृद्ध करने, बाल-केंद्रित, जीवंत और आनंदमय बनाने की दिशा में कारगर होगा। बालवाटिका एक, दो और तीन के बच्चों का कोई स्कूल बैग नहीं होगा। बच्चे घर से अपने स्कूल बैग में अपने मनपसंद खिलौने, कपड़े और टिफिन लेकर आएंगे। स्कूल में पारंपरिक डेस्क व बेंच की जगह लकड़ी के घोड़े, गोल आकार की मेज, छोटी-छोटी कु़र्सियां और सामने दीवार पर बड़ी सी स्क्रीन। यहां अलग-अलग कार्टून, कहानियां, डांस, ड्राइंग के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में जमा-घटाव, अंक, बात करने का तरीका, भाषा और अन्य जानकारियां हासिल करेंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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श्रीनगर । एक तरफ देश कोरोना संकट से लड़ रहा तो दूसरी तरफ भारतीय सेना आतंकवादियों से दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों और आतंकियों में बुधवार आधी रात के बाद मुठभेड़ आरंभ हो गई है। इस दौरान मौके पर दो से तीन आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सूचना के आधार पर सेना की 34 आरआर, सीआरपीएफ और पुलिस ने कुलगाम के यमराक में तलाशी अभियान चलाया। आधी रात के करीब गांव में एक घर में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाल लिया। देर रात तक दोनों ओर से फायरिंग जारी थी। आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच बुधवार रात दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम के यमराक इलाके में एक मुठभेड़ शुरू हुई है। 34 आरआर बटालियन और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की टीम ने यमराक के पूरे इलाके को घेर कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जॉइंट टीम ने तलाशी अभियान में संदिग्ध जगह की ओर से जैसे ही बढ़ना शुरू किया, आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। यह पुलिस और सेना का संयुक्त अभियान है। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों के छिपे होने की खबर है। पुलिस की एक जॉइंट टीम ने आतंकियों की तलाशी में पूरे इलाके में बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया है। 34 आरआर बटालियन और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की टीम ने यमराक के पूरे इलाके को घेर कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जॉइंट टीम ने संदिग्ध जगह की ओर से जैसे ही बढ़ना शुरू किया, आतंकियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। यह पुलिस और सेना का संयुक्त अभियान है। इससे पहले बुधवार को अवंतीपोरा की स्थानीय पुलिस ने आंतकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में सुरक्षा बलों और पुलिस की आतंकियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई चल रही है। इसी बीच पुलिस की ओर से चलाए जा रहे तलाशी अभियान में मंगलवार को जैश के ये आतंकी गिरफ्तार किए गए- जो आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं उनके नाम हैं- शबीर अहमद पारे, शिराज अहमद डार, शफत अहमद मीर और इशफाक अहमद शाह. चारों बाथे इलाके के रहने वाले हैं। चारों पर आरोप है कि इन्होंने जैश के सक्रिय आतंकियों को रहने, खाने-पीने में मदद पहुंचाई। त्राल के जंगलों में टिके आतंकियों को इन लोगों ने मदद पहुंचाई। इनके पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया।
श्रीनगर । एक तरफ देश कोरोना संकट से लड़ रहा तो दूसरी तरफ भारतीय सेना आतंकवादियों से दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों और आतंकियों में बुधवार आधी रात के बाद मुठभेड़ आरंभ हो गई है। इस दौरान मौके पर दो से तीन आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सूचना के आधार पर सेना की चौंतीस आरआर, सीआरपीएफ और पुलिस ने कुलगाम के यमराक में तलाशी अभियान चलाया। आधी रात के करीब गांव में एक घर में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाल लिया। देर रात तक दोनों ओर से फायरिंग जारी थी। आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच बुधवार रात दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम के यमराक इलाके में एक मुठभेड़ शुरू हुई है। चौंतीस आरआर बटालियन और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की टीम ने यमराक के पूरे इलाके को घेर कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जॉइंट टीम ने तलाशी अभियान में संदिग्ध जगह की ओर से जैसे ही बढ़ना शुरू किया, आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। यह पुलिस और सेना का संयुक्त अभियान है। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों के छिपे होने की खबर है। पुलिस की एक जॉइंट टीम ने आतंकियों की तलाशी में पूरे इलाके में बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया है। चौंतीस आरआर बटालियन और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की टीम ने यमराक के पूरे इलाके को घेर कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जॉइंट टीम ने संदिग्ध जगह की ओर से जैसे ही बढ़ना शुरू किया, आतंकियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। यह पुलिस और सेना का संयुक्त अभियान है। इससे पहले बुधवार को अवंतीपोरा की स्थानीय पुलिस ने आंतकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को गिरफ्तार किया था। पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में सुरक्षा बलों और पुलिस की आतंकियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई चल रही है। इसी बीच पुलिस की ओर से चलाए जा रहे तलाशी अभियान में मंगलवार को जैश के ये आतंकी गिरफ्तार किए गए- जो आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं उनके नाम हैं- शबीर अहमद पारे, शिराज अहमद डार, शफत अहमद मीर और इशफाक अहमद शाह. चारों बाथे इलाके के रहने वाले हैं। चारों पर आरोप है कि इन्होंने जैश के सक्रिय आतंकियों को रहने, खाने-पीने में मदद पहुंचाई। त्राल के जंगलों में टिके आतंकियों को इन लोगों ने मदद पहुंचाई। इनके पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया।
जयपुरः राजस्थान सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों को 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा के तहत एक प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा सरकार ने एक सकुर्लर के माध्यम से कल मंत्रिमंडल की स्वीकृति लेने के बाद इस बारे में निर्णय लिया है। राजस्थान के संसदीय कार्यमत्री राजेन्द्र राठौड ने आज बताया कि गुर्जर सहित पांच जातियों को अति पिछडा वर्ग श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की जायेगी। राजस्थान विधानसभा ने पिछले वर्ष अक्टूबर में एक विधेयक के माध्यम से गुर्जर सहित अन्य पांच जातियों को अन्य पिछडा वर्ग लोगों के साथ आरक्षण देने के लिए आरक्षण 21 प्रतिशत से बढाकर 26 प्रतिशत कर दिया था। इससे प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में दिया जाने वाला कुल आरक्षण बढ़कर 54 प्रतिशत पहुंच गया लेकिन उच्च न्यायालय ने इस विधेयक पर रोक लगा दी थी, बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी सरकार को 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण सीमा को पार नहीं करने के निर्देश दिए थे। वर्ष 1994 में अन्य पिछड़ा जातियों के साथ गुजर/गुर्जर, बंजारा/बालदिया/लबाना, गाडिया - लुहार/गाडिया, रायका/रेबारी और गडरिया को शामिल किया गया था।
जयपुरः राजस्थान सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों को पचास प्रतिशत की कानूनी सीमा के तहत एक प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा सरकार ने एक सकुर्लर के माध्यम से कल मंत्रिमंडल की स्वीकृति लेने के बाद इस बारे में निर्णय लिया है। राजस्थान के संसदीय कार्यमत्री राजेन्द्र राठौड ने आज बताया कि गुर्जर सहित पांच जातियों को अति पिछडा वर्ग श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की जायेगी। राजस्थान विधानसभा ने पिछले वर्ष अक्टूबर में एक विधेयक के माध्यम से गुर्जर सहित अन्य पांच जातियों को अन्य पिछडा वर्ग लोगों के साथ आरक्षण देने के लिए आरक्षण इक्कीस प्रतिशत से बढाकर छब्बीस प्रतिशत कर दिया था। इससे प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में दिया जाने वाला कुल आरक्षण बढ़कर चौवन प्रतिशत पहुंच गया लेकिन उच्च न्यायालय ने इस विधेयक पर रोक लगा दी थी, बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी सरकार को पचास प्रतिशत से अधिक आरक्षण सीमा को पार नहीं करने के निर्देश दिए थे। वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में अन्य पिछड़ा जातियों के साथ गुजर/गुर्जर, बंजारा/बालदिया/लबाना, गाडिया - लुहार/गाडिया, रायका/रेबारी और गडरिया को शामिल किया गया था।
झील के घाट पर एक प्राचीन मन्दिर था। क्यांेकि यहां पर, जल, मन्दिर और सुविधाएंे थी सो श्मशान भी यहीं पर था। झील मंे वर्षा का पानी आता है। गर्मियांे मंे झील सूखने के कगार पर होती थी तो शहर के भू-माफिया की नजर इस लम्बे चौड़े विशाल भू-भाग पर पड़ती थी। उनकी आंखांे मंे एक विशाल मॉल, शापिंग कॉम्पलैक्स या टाऊनशिप का सपना तैरने लगता था। मगर वर्षा के पानी के साथ-साथ आंखांे के सपने भी बह जाते थे। झील मंे मछलियां पकड़ने का धन्धा भी वर्षा के बाद चल पड़ता था। जो पूरी सर्दी-सर्दी चलता रहता था। स्थानीय निकाय ने झील के किनारे-किनारे एक वाकिंग ट्रेक बना दिया था जिस पर सुबह-शाम बूढ़े, वरिष्ठ नागरिक, दमा, डायबीटीज, ब्लड प्रेशर, हृदयरोगी आदि घूमने आते थे। बड़े लोग कार या स्कूटर से आते, घूमते और कार मंे बैठकर वापस चले जाते। मनचले अपनी बाईक पर आते। घूमते। खाते। पीते। पीते। खाते। और देर रात गये घर वापस चले जाते। झील से थोड़ा आगे जाये तो कस्बा समाप्त हो जाता है। खेत-खलिहाल शुरू हो जाते। मगर कुछ ही दूरी पर नेशनल हाईवे शुरू हो जाता। प्रधानमंत्री योजना के अनुसार विकास के दर्शन होने लग जाते। ग्रामीण रोजगार योजना के चक्कर मंे लोग सड़क खोद-खोद कर मिट्टी उठाकर देश के विकास मंे अपना योगदान करते। 'अरे भाई हमंे क्या करना है मगर जिस कार से तुम उतरे हो उसे एक केस मंे पुलिस ढूंढ रही है। 'कहो तो पुलिस को खबर करे।' पुलिस के नाम से युवक परेशान हो उठा। कुलदीपकजी अभी-अभी अखबार के दफ्तर मंे अपनी फिल्मी समीक्षा देकर आये थे। पिछली समीक्षा के छपने पर बड़ा गुल-गुपाडा मचा था। पूरी समीक्षा मंे केवल नाम-नाम उनका था उनकी लिखी समीक्षा मंे आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया गया था। उपसम्पादक ने स्पष्ट कह दिया यह सब ऊपर के आदेश से हुआ था। कुलदीपकजी खून का घूंट पीकर रह गये। न उगलते बन रहा था और न निगलते। उपसम्पादक को उनकी औकात का पता था। सम्पादकजी की पी.ए. का भाई यही उनकी एकमात्र योग्यता थी, इधर उपसम्पादक को पूर परिवार के लिए फिल्म के पास और शानदार डिनर मिल चुका था। अतः वहीं समीक्षा छपी जो ऐसे अवसर पर छपनी चाहिये थी। लेकिन इस बार कोई गड़बड़ नहीं हो इस खातिर कुलदीपकजी ने पूरी समीक्षा सीधे सम्पादक को दिखाकर टाइप सेटिंग के लिए दे दी साथ मंे दर्शक-उवाच भी लिखकर दे दिया। एक महिलादर्शक की प्रतिक्रिया भी सचित्र चिपका दी। उन्हंे पूरी आशा थी कि इस बार पहले की तरह नहीं होगा। कुलदीपकजी बस स्टेण्ड का जायजा ले रहे थे कि उन्हंे प्रेरणा-संख्या 303 दिख गई। उन्हंे पुरानी कविता की बड़ी याद आई, अभी डायरी होती तो वे तुरन्त कविता करते, कविता सुनाते, कविता गुनगुनाते मगर अफसोस इस समीक्षा के चक्कर मंे डायरी और कविता कहीं पीछे छूट गई थी। कुलदीपक ने प्रेरणा संख्या 303 का पीछा किया। उसे गली के मोड़ तक छोड़कर आये और ठण्डी आहंे भरते रहे। उन्हंे अपना जीवन बेकार लगने लगा। वे झील के किनारे उदास बैठे रहे। उधर से एक पागल की हंसी सुनकर उनका ध्यान टूटा। वे उठे और उदास कदमांे से घर की ओर चल पड़े। घर तक आने मंे उन्हंे काफी समय और श्रम लगा। बस स्टेण्ड वीरान था। केवल कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। रात्रिकालीन वीडियांे कोचेज का आना-जाना शुरू होने वाला था। एक पगली इधर से उधर भाग रही थी। पगली को देख कर उन्हंे कुछ याद आया। मगर वे रूके नही, घर पहुंचकर ठण्डी रोटी खाकर सो गये। कस्बे और झील के सहारे ही एक पुराना महलनुमा रावरा था। राजा-रजवाड़े, राणा, रावरा राव, उमराव तो रहे नही। गोलियां, दावड़िया, दासियां, पड़दायते भी नहीं रही। मगर ये खण्डहर उस अतीत के वैभव के मूक साक्षी है। इस महलनुमा किले मंे दरबार-ए-खास, दरबार-ए-आम, जनानी ड्योढी, कंगूरे, गोखड़े, बरामदे, बारादरियां, टांके, कंुए अभी भी है जो पुरानी यादांे को ताजा करते है। प्रजातन्त्र के बाद ये सब सरकारी हो गये। सरकार भी समझदार थी। इस किले मंे सभी स्थानीय सरकारी दफ्तर स्थानान्तरित कर दिये। अब यहां पर कोर्ट है। कचहरी है। तहसील है। पुलिस थाना है। एक कोने मंे एक छोटी सी डिस्पेन्सरी भी है। तहसील मंे तहसीलदार, नायब, पटवारी, हेणा, चपरासी, मजिस्ट्रेट सभी बैठते है। फरीकांे को सरकारी फार्म बांटने वाले एक-दो स्टॉफ वेन्डर भी बैठे रहते है। काम अधिक होने तथा जगह कम होने के कारण पटवारी अपनी मिसलांे के साथ बाहर बैठे रहते है। इतना सरकारी अमला होने के कारण चाय, पान, गुटका, तम्बाकू की दुकानंे भी है और वकीलांे का हजूम तो है ही। सूचना का अधिकार मिल जाने के कारण एक-दो स्वयंसेवी संगठनांे के कार्यकर्ता भी यही पर विचरते रहते है, जरा खबर लगी नही कि अधिकार का उपयोग करते हुए प्रार्थना-पत्र लगा देते है। लेकिन अभी भी नकल प्राप्त करने मंे समय लग जाता है। चाय की थड़ी के पास ही एक पगला, अधनंगा पागलनुमा व्यक्ति लम्बे समय से अपनी जमीन का टुकड़ा अपने खाते मंे कराने के लिए प्रयासरत है। मगर पटवारी, नायब, तहसीलदार, वकील, स्वयंसेवी संगठन के कर्ता-धर्ता कोई भी उसके काम को पूरा कराने मंे असमर्थ रहे है। कारण स्पष्ट है कि वह गान्धीवादी तरीके से खातेदारी नकल पाना चाहता है, जो संभव नही है। गान्धीगिरी से भी काम नही चल रहा है। रेवेन्यू विभाग मंे लगान माफ कराना आसान है। खातेदारी बदलवाना बहुत मुश्किल है। इसी तहसील रूपी किले को भेदने मंे कभी कुलदीपकजी के बापू को भी पसीने आ गये थे। काम छोटा था, मगर दाम बड़ा था। बापू ने दिन-रात एक करके एक जमीन के टुकड़े पर एक कमरा बना लिया था। सरकार ने इसे कृषिभूमि घोषित कर रखा था यह ग्रीन बैल्ट था। बापू का कमरा तोड़ने के लिए नोटिस चस्पा हो चुका था। बापू तहसील मंे चक्कर लगाते-लगाते थक चुके थे। तभी एक स्थानीय वकील ने बड़ी नेक सलाह दी, तहसील के बजाय ग्राम पंचायत से पट्टा ले लो। सरपंच ने अपनी कीमत लेकर एक पुराना पट्टा जारी कर दिया, जो आज तक काम आ रहा है। और बापू, मां, यशोधरा और कुलदीपकजी आराम से रह रहे है। अतिक्रमण का यह खतरा बाद मंे स्वतः समाप्त हो गया। नई बनी सरकार ने सभी बने हुए मकानांे का नियमन कर दिया। यहां तक की पार्टी फण्ड मंे मोटी रकम देने वालांे को रिहायशी इलाके मंे दुकानंे तक लगाने की मंजूरी दे दी। तहसील मंे वैसे भी गहमागहमी रहती है और यदि इजलास पर कोई सख्त अफसर हो तो और भी मजा आ जाता है। इधर कस्बे के आसपास के मंगरो, डूंगरो पर पत्थर निकालने के ठेकांे मंे भारी गड़बड़ियांे के समाचार छपने मात्र से ही गरीब मजूदरांे की मजदूरी बन्द हो गई थी। आज ऐसी ही एक मजदूर टोली का प्रदर्शन तहसील पर था। तहसीलदार ने ज्ञापन लेने के लिए अपने नायब को भेज दिया था। उत्तेजित भीड़ ने नायब से घक्का-मुक्की कर दी थी, फलस्वरूप तहसील कार्यालय के आसपास धारा एक सौ चवालीस लगा दी गई थी। पुलिस प्रशासन ने एकाध बार लाठी भांज दी, कुछ घायल भी हुए थे। इसी तहसील से सटा हुआ एक अस्पताल भी था। अस्पताल मंे एक डॉक्टर, एक नर्स, एक चतुर्थ श्रेणी अधिकारी थे, जो बारी-बारी से शहर से ड्यूटी पर आते थे। सोमवार को डॉक्टर आता था। मंगलवार को नर्स और बुधवार को चपरासी, गुरूवार अघोषित अवकाश था। शुक्रवार को वापस डॉक्टर ही आते थे और यह क्रम इसी प्रकार चलता रहता था। दवाआंे के नाम पर पट्टी बांधने के सामान के अलावा कुछ नही था। समान्यतया रोगी को बड़े अस्पताल रेफर करने का चलन था। मलेरिया के दिनांे मंे मलेरिया, गरमी मंे उल्टी-दस्त आदि के रोगी अपने आप आते और दवा के नाम पर आश्वासन लेकर चले जाते। कस्बे के ज्यादातर रोगी एक पुराने निजि अस्पताल मंे जाते जहां का डॉक्टर आयुर्वेद होम्योपैथी, एलोपैथी, झाड़ाफूंक, तंत्र, मंत्र, इन्जेक्शन आदि सभी प्रकार का इलाज एक साथ करता था। मामूली फीस लेता था। उसने अपनी दुकान पर एक एक्स-रे देखने का बक्सा ओर एक माइक्रोस्कोप भी रख छोड़ा था। लेकिन उसने आज तक कोई टेस्ट नहीं किया था। रोगी सामान्यतया भगवान भरोसे ही ठीक हो जाते थे। जो ठीक नहीं होेते वे बड़े अस्पताल चले जाते और जो और भी ज्यादा गम्भीर होते थे वे सबसे बड़े अस्पताल की राह पकड़ लेते। डॉक्टर भगवान का रूप होता है, ऐसी मान्यता थी, मगर चिकित्सा शास्त्र मंे वैद्यांे को यमराज का सहोदर कहा गया है और इस सत्य से कौन इन्कार कर सकता है। कस्बे की डिस्पेसंरी मंे आज डॉक्टर का दिन था। वे ही नर्स चपरासी का काम भी देख रहे थे। ऐसा सहकार सरकारी कार्यालयांे मंे दिखना बड़ा अद्भुत होता है। पास ही उनका अलेशेशियन भी बैठा था जिसे वे शहर से अपने साथ ही लाते-ले जाते है। ठीक इसी समय मंच पर झपकलालजी अवतरित हुए। डॉक्टर ने उनको देखकर अनदेखा किया। सुबह से वो बीस मरीजांे मंे सिर खपा चुके थे। बारह बज चुके थे। एक बजे की बस से उन्हंे वापस जाना था। ऐसे नाजुक समय पर झपकलाल जी कराहते हुए आये तो डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया। डॉक्टर को गुस्सा आना ही था सो आ गया। उन्हांेने झपकलाल को देखा एक गोली दी और शून्य की ओर देखने लगे। झपकलाल ने गोली वहीं कूड़ेदान मंे फंेकी, हवा मंे कुछ गालियां उछाली और बस स्टेण्ड की ओर चल दिये। डॉक्टर ने चैन की सांस ली क्यांेकि झपकलाल डॉक्टर के बजाय डॉक्टर के कुत्ते से ज्यादा डर गये थे। बस स्टेण्ड पर एक शानदार नजारा था। एक सेल्स टेक्स इन्सपेक्टर, एक दुकानदार से टेक्स नही देने के कारणांे की विस्तृत जांच रिपोर्ट ले रहा था। झपकलाल उसे तुरन्त पहचान गये। वह कस्बे का ढग था, उन्हंे देखते ही ढग ने अपना परचम लहराया। हाय हलो किया और बचाने की गुहार मचाई। झपकलाल खुद कड़के थे, कण्डक्टर को तो समझा सकते थे, मगर सेल्स टेक्स वाला साहब नया-नया आया था। अचानक झपकलाल ने ढग को आंख मारी ढग समझ गया और बेहोश होकर गिर पड़ा। बस फिर क्या था पूरा बस स्टेण्ड इन्सपेक्टर के गले पड़ गया। जान छुड़ाना मुश्किल हो गया। झपकलाल ने इस्पेक्टर से दवा-दारु के नाम पर सौ रूपया ले लिया। भविष्य मंे नहीं छेड़ने की हिदायत के साथ इन्सपेक्टर को जाने की मौन स्वीकृति प्रदान की। उसके जाते ही ढग ओर झपकलाल ने रूपये आधे-आधे आपस मंे बांट लिये। डॉक्टर, इन्सपेक्टर से लड़ने से झपकलाल का मूड ऑफ हो गया था। वे झील के किनारे-किनारे टहलने लगे। ठीक इसी समय सामने से उन्हंे वे तीनांे आती दिखाई दी। वे तीनांे यानि मास्टरनीजी, नर्सजी और आंगनबाड़ी की बहिनजी। उन्हंे एक साथ देखकर उन्हंे खुशी और आश्चर्य दोनांे हुए। वे जानते थे, ये बेचारी सरकार मंे ठेेके की नौकरी करती थी, यदि इमानदारी से टिकट खरीदे और नौकरी पर जाये तो पूरी तनखा जो मुश्किल से हजार रूपया थी, बसांे के किराये और चायपानी मंे ही खर्चे हो जाती। सो तीनांे चूंकि एक ही गांव मंे स्थापित थी, अतः बारी-बारी से जाती, सरकारी काम को गैर सरकारी तरीके से पूरा करती। सरपंच जी, प्रधानजी, जिला प्रमुखजी, ग्राम सचिव जी, बी.डी.यो. आदि की हाजरी बजाती और वापस आ जाती। वैसे भी अल्प वेतन भोगी सरकारी कर्मचारी होने के कारण तथा महिला होने के कारण वे सुरक्षित थी। आज तीनांे एक साथ कैसे ? इस गहन गम्भीर प्रश्न पर झपकलाल का दिमाग चलने लगा । मन भटकने लगा। तब तक तीनों मोहतरमाएं उनके पास तक आ गई थी। 'सरकार के बाप का क्या जाता है।' बच्चे तो हमारे भूख से बिलबिला रहे है।' नर्स बोली। 'और मेरे वो तो बस सुनने के बजाय ऐसी पूजा करंेगे कि कई दिनांे तक कमर चटकेगी,' मास्टरनीजी बोली। 'हड्डिया चटकाने मंे तो मेरे वो भी कुछ कम नहीं है।' आंगनबाड़ी बहिन जी ने अपना दुखड़ा रोया। तीनांे महिलाआंे को देश की प्रजातन्त्र मंे कुछ खास रूचि नहीं थी, उन्हंे तो घर मंे गठबन्धन धर्म निभाना था और देहधर्म के अलावा वे क्या कर सकती थी। उन्हंे जाते हुए उदास निगाहांे से झपकलाल देर तक देखते रहे। उन्हांेने झील मंे कुछ कंकड़ फंेके। कुछ लहरंे उठी। फिर सब शान्त हो गया। कस्बा मोहल्लांे मंे बंटा हुआ है। कस्बे के शुरुआती दिनांे मंे मोहल्लंे जातियांे के आधार पर बने थे। मगर समय के साथ, आधुनिक जीवन के कारण, नौकरी पेशा लोगांे के आने के कारण जातिवादी मोहल्ले कमजोर जरूर पड़े मगर समाप्त नहीं हुए। आज भी किसी भी मोहल्ले मंे नया आने वाला मकान मालिक या किरायेदार सबसे पहले अपने जात वालांे को ढंूढ़ता है। फिर गौत्र वालांे से मेल मुलाकात करता है, दुआ सलाम रखता है। जरूरत पड़ने पर रोटी-बेटी का व्यवहार भी कर लेता है। मुस्लिम मौहल्ले की भी यही स्थिति है जो गरीब हिन्दू इसाई धर्म की शरण मंे चले गये वे अवसर की नजाकत को समझकर इधर-उधर हो जाते है। चुनाव के दिनांे मंे जाति मंे वोटांे के लिये बंटने वाले कम्बल, शराब, मुफ्त का खाना-पीना आदि सभी उम्मीदवारांे से जाति के नेता लेकर बांट-चूंटकर खा जाते है। कभी बूथ छापने का ठेका भी ले लिया जाता है। मगर यह सब दबे-के रूप मंे ही चलता है। खुले आम प्रजातन्त्र की रक्षा की कसमंे खाई जाती है। मोहल्लेदारी जरूर कमजोर हुई है, मगर अभी भी भुवा, काकी, दादी, नानी, मासी, भाभी आदि के रिश्ते जिंदा है। बूढे-बुजर्ग मोहल्ले के नुक्कड पर चौपड़, ताश, शतरंज खेलते है। हुक्का-बीड़ी, सिगरेट, खैनी, तम्बाकू का शौक फरमाते है और आने जाने वालांे पर निगाह रखते है। मजाल है जो कोई बाहरी परिंदा पर भी मार जाये। इसी प्रकार के माहौल मंे कुलदीपकजी के घर के पास मंे नये किरायेदार के रूप मंे शुक्लाजी आये। शुक्लाजी स्थानीय जूनियर कॉलेज मंे अध्यापक होकर आये थे। मगर उन्हंे प्रोफेसर कहना ही आज के युग का यथार्थ होगा। जाति बिरादरी का होने के कारण मां बापूजी ने उन्हंे हाथांे-हाथ लिया। शुक्लाजी मुश्किल से तीस वर्ष के थे। शुक्लाइन की गोद मंे एक बच्चा था। गोरा चिट्टा, मुलायम, सुन्दर, प्यारा। इसी की वजह से दोनो परिवार एकाकार होने की कगार पर आ गये। शुक्लाईन दिन भर खाली ही रहती थी। मां को उसने सास मां बना लिया फिर क्या था। बापू ससुर का दर्जा पा गये। कुलदीपकजी देवर हो गये और यशोधरा दीदी। दीदी का रोबदाब अब दोनांे घरांे मंे चल निकला था। वे अपनी नौकरी से खुश थी। घरवाले उसकी पगार से खुश थे। सम्पादकजी महिला सहकर्मी के साहचर्य से खुश थे। कुलदीपकजी अपनी समीक्षा लेखन से खुश थे। उनकी दूसरी फिल्मी समीक्षा जब छपकर आई तो सब कुछ ठीक था बस दर्शक उवाच महिला दर्शक के चित्र के साथ छप गया था और महिला दर्शक के स्थान पर एक पुरूष दर्शक का चित्र छप गया था। कुलदीपकजी इस बात को पी गये। उन्हंे समीक्षाआंे के खतरांे का आभास होने लगा था। कभी-कभी तो वे समीक्षा के स्थान पर वापस काव्य जगत मंे लौटने की सोचते मगर कविताआंे का प्रकाशन बहुत तकलीफदेह था। इधर पिछली समीक्षा का पारिश्रमिक 'पचास रुपये' पाकर कुलभूषणजी सब अवसाद भूल गये और इस पारिश्रमिक को सेलीब्रेट करने के लिये झपकलाल को साथ लेकर बस स्टेण्ड की ओर चल पड़े। सायं सांझ धीरे-धीरे उतर रही थी। बस स्टेण्ड पर रेलमपेल मची हुई थी। कुलदीपकजी ने एक थड़ी के पिछवाड़े जाकर सायंकालीन आचमन का पहला घूंट भरा ही था कि झाड़ियांे मंे कुछ सरसराहट हुई। सरसराहट की तरह ध्यान देने के बजाय झपकलाल ने आचमन की ओर ध्यान देना शुरू किया। मगर सरसराहट फुसफसाहट और फुसफुसाहट बाद मंे चिल्लाहट मंे बदल गई। अब एक जागरूक शहरी नागरिक होने के नाते इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी था। कुछ सरूर का असर, कुछ शाम का अन्धेरा, उन्हंे कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा था, मगर कुछ ही देर मंे सब कुछ साफ हो गया। 'पीढी का क्या होना-जाना है। खाओ-पीओ। बच्चे जनो। परिवार नियोजन का काम करो और मर जाओ यही हर एक की नियति है।
झील के घाट पर एक प्राचीन मन्दिर था। क्यांेकि यहां पर, जल, मन्दिर और सुविधाएंे थी सो श्मशान भी यहीं पर था। झील मंे वर्षा का पानी आता है। गर्मियांे मंे झील सूखने के कगार पर होती थी तो शहर के भू-माफिया की नजर इस लम्बे चौड़े विशाल भू-भाग पर पड़ती थी। उनकी आंखांे मंे एक विशाल मॉल, शापिंग कॉम्पलैक्स या टाऊनशिप का सपना तैरने लगता था। मगर वर्षा के पानी के साथ-साथ आंखांे के सपने भी बह जाते थे। झील मंे मछलियां पकड़ने का धन्धा भी वर्षा के बाद चल पड़ता था। जो पूरी सर्दी-सर्दी चलता रहता था। स्थानीय निकाय ने झील के किनारे-किनारे एक वाकिंग ट्रेक बना दिया था जिस पर सुबह-शाम बूढ़े, वरिष्ठ नागरिक, दमा, डायबीटीज, ब्लड प्रेशर, हृदयरोगी आदि घूमने आते थे। बड़े लोग कार या स्कूटर से आते, घूमते और कार मंे बैठकर वापस चले जाते। मनचले अपनी बाईक पर आते। घूमते। खाते। पीते। पीते। खाते। और देर रात गये घर वापस चले जाते। झील से थोड़ा आगे जाये तो कस्बा समाप्त हो जाता है। खेत-खलिहाल शुरू हो जाते। मगर कुछ ही दूरी पर नेशनल हाईवे शुरू हो जाता। प्रधानमंत्री योजना के अनुसार विकास के दर्शन होने लग जाते। ग्रामीण रोजगार योजना के चक्कर मंे लोग सड़क खोद-खोद कर मिट्टी उठाकर देश के विकास मंे अपना योगदान करते। 'अरे भाई हमंे क्या करना है मगर जिस कार से तुम उतरे हो उसे एक केस मंे पुलिस ढूंढ रही है। 'कहो तो पुलिस को खबर करे।' पुलिस के नाम से युवक परेशान हो उठा। कुलदीपकजी अभी-अभी अखबार के दफ्तर मंे अपनी फिल्मी समीक्षा देकर आये थे। पिछली समीक्षा के छपने पर बड़ा गुल-गुपाडा मचा था। पूरी समीक्षा मंे केवल नाम-नाम उनका था उनकी लिखी समीक्षा मंे आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया गया था। उपसम्पादक ने स्पष्ट कह दिया यह सब ऊपर के आदेश से हुआ था। कुलदीपकजी खून का घूंट पीकर रह गये। न उगलते बन रहा था और न निगलते। उपसम्पादक को उनकी औकात का पता था। सम्पादकजी की पी.ए. का भाई यही उनकी एकमात्र योग्यता थी, इधर उपसम्पादक को पूर परिवार के लिए फिल्म के पास और शानदार डिनर मिल चुका था। अतः वहीं समीक्षा छपी जो ऐसे अवसर पर छपनी चाहिये थी। लेकिन इस बार कोई गड़बड़ नहीं हो इस खातिर कुलदीपकजी ने पूरी समीक्षा सीधे सम्पादक को दिखाकर टाइप सेटिंग के लिए दे दी साथ मंे दर्शक-उवाच भी लिखकर दे दिया। एक महिलादर्शक की प्रतिक्रिया भी सचित्र चिपका दी। उन्हंे पूरी आशा थी कि इस बार पहले की तरह नहीं होगा। कुलदीपकजी बस स्टेण्ड का जायजा ले रहे थे कि उन्हंे प्रेरणा-संख्या तीन सौ तीन दिख गई। उन्हंे पुरानी कविता की बड़ी याद आई, अभी डायरी होती तो वे तुरन्त कविता करते, कविता सुनाते, कविता गुनगुनाते मगर अफसोस इस समीक्षा के चक्कर मंे डायरी और कविता कहीं पीछे छूट गई थी। कुलदीपक ने प्रेरणा संख्या तीन सौ तीन का पीछा किया। उसे गली के मोड़ तक छोड़कर आये और ठण्डी आहंे भरते रहे। उन्हंे अपना जीवन बेकार लगने लगा। वे झील के किनारे उदास बैठे रहे। उधर से एक पागल की हंसी सुनकर उनका ध्यान टूटा। वे उठे और उदास कदमांे से घर की ओर चल पड़े। घर तक आने मंे उन्हंे काफी समय और श्रम लगा। बस स्टेण्ड वीरान था। केवल कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। रात्रिकालीन वीडियांे कोचेज का आना-जाना शुरू होने वाला था। एक पगली इधर से उधर भाग रही थी। पगली को देख कर उन्हंे कुछ याद आया। मगर वे रूके नही, घर पहुंचकर ठण्डी रोटी खाकर सो गये। कस्बे और झील के सहारे ही एक पुराना महलनुमा रावरा था। राजा-रजवाड़े, राणा, रावरा राव, उमराव तो रहे नही। गोलियां, दावड़िया, दासियां, पड़दायते भी नहीं रही। मगर ये खण्डहर उस अतीत के वैभव के मूक साक्षी है। इस महलनुमा किले मंे दरबार-ए-खास, दरबार-ए-आम, जनानी ड्योढी, कंगूरे, गोखड़े, बरामदे, बारादरियां, टांके, कंुए अभी भी है जो पुरानी यादांे को ताजा करते है। प्रजातन्त्र के बाद ये सब सरकारी हो गये। सरकार भी समझदार थी। इस किले मंे सभी स्थानीय सरकारी दफ्तर स्थानान्तरित कर दिये। अब यहां पर कोर्ट है। कचहरी है। तहसील है। पुलिस थाना है। एक कोने मंे एक छोटी सी डिस्पेन्सरी भी है। तहसील मंे तहसीलदार, नायब, पटवारी, हेणा, चपरासी, मजिस्ट्रेट सभी बैठते है। फरीकांे को सरकारी फार्म बांटने वाले एक-दो स्टॉफ वेन्डर भी बैठे रहते है। काम अधिक होने तथा जगह कम होने के कारण पटवारी अपनी मिसलांे के साथ बाहर बैठे रहते है। इतना सरकारी अमला होने के कारण चाय, पान, गुटका, तम्बाकू की दुकानंे भी है और वकीलांे का हजूम तो है ही। सूचना का अधिकार मिल जाने के कारण एक-दो स्वयंसेवी संगठनांे के कार्यकर्ता भी यही पर विचरते रहते है, जरा खबर लगी नही कि अधिकार का उपयोग करते हुए प्रार्थना-पत्र लगा देते है। लेकिन अभी भी नकल प्राप्त करने मंे समय लग जाता है। चाय की थड़ी के पास ही एक पगला, अधनंगा पागलनुमा व्यक्ति लम्बे समय से अपनी जमीन का टुकड़ा अपने खाते मंे कराने के लिए प्रयासरत है। मगर पटवारी, नायब, तहसीलदार, वकील, स्वयंसेवी संगठन के कर्ता-धर्ता कोई भी उसके काम को पूरा कराने मंे असमर्थ रहे है। कारण स्पष्ट है कि वह गान्धीवादी तरीके से खातेदारी नकल पाना चाहता है, जो संभव नही है। गान्धीगिरी से भी काम नही चल रहा है। रेवेन्यू विभाग मंे लगान माफ कराना आसान है। खातेदारी बदलवाना बहुत मुश्किल है। इसी तहसील रूपी किले को भेदने मंे कभी कुलदीपकजी के बापू को भी पसीने आ गये थे। काम छोटा था, मगर दाम बड़ा था। बापू ने दिन-रात एक करके एक जमीन के टुकड़े पर एक कमरा बना लिया था। सरकार ने इसे कृषिभूमि घोषित कर रखा था यह ग्रीन बैल्ट था। बापू का कमरा तोड़ने के लिए नोटिस चस्पा हो चुका था। बापू तहसील मंे चक्कर लगाते-लगाते थक चुके थे। तभी एक स्थानीय वकील ने बड़ी नेक सलाह दी, तहसील के बजाय ग्राम पंचायत से पट्टा ले लो। सरपंच ने अपनी कीमत लेकर एक पुराना पट्टा जारी कर दिया, जो आज तक काम आ रहा है। और बापू, मां, यशोधरा और कुलदीपकजी आराम से रह रहे है। अतिक्रमण का यह खतरा बाद मंे स्वतः समाप्त हो गया। नई बनी सरकार ने सभी बने हुए मकानांे का नियमन कर दिया। यहां तक की पार्टी फण्ड मंे मोटी रकम देने वालांे को रिहायशी इलाके मंे दुकानंे तक लगाने की मंजूरी दे दी। तहसील मंे वैसे भी गहमागहमी रहती है और यदि इजलास पर कोई सख्त अफसर हो तो और भी मजा आ जाता है। इधर कस्बे के आसपास के मंगरो, डूंगरो पर पत्थर निकालने के ठेकांे मंे भारी गड़बड़ियांे के समाचार छपने मात्र से ही गरीब मजूदरांे की मजदूरी बन्द हो गई थी। आज ऐसी ही एक मजदूर टोली का प्रदर्शन तहसील पर था। तहसीलदार ने ज्ञापन लेने के लिए अपने नायब को भेज दिया था। उत्तेजित भीड़ ने नायब से घक्का-मुक्की कर दी थी, फलस्वरूप तहसील कार्यालय के आसपास धारा एक सौ चवालीस लगा दी गई थी। पुलिस प्रशासन ने एकाध बार लाठी भांज दी, कुछ घायल भी हुए थे। इसी तहसील से सटा हुआ एक अस्पताल भी था। अस्पताल मंे एक डॉक्टर, एक नर्स, एक चतुर्थ श्रेणी अधिकारी थे, जो बारी-बारी से शहर से ड्यूटी पर आते थे। सोमवार को डॉक्टर आता था। मंगलवार को नर्स और बुधवार को चपरासी, गुरूवार अघोषित अवकाश था। शुक्रवार को वापस डॉक्टर ही आते थे और यह क्रम इसी प्रकार चलता रहता था। दवाआंे के नाम पर पट्टी बांधने के सामान के अलावा कुछ नही था। समान्यतया रोगी को बड़े अस्पताल रेफर करने का चलन था। मलेरिया के दिनांे मंे मलेरिया, गरमी मंे उल्टी-दस्त आदि के रोगी अपने आप आते और दवा के नाम पर आश्वासन लेकर चले जाते। कस्बे के ज्यादातर रोगी एक पुराने निजि अस्पताल मंे जाते जहां का डॉक्टर आयुर्वेद होम्योपैथी, एलोपैथी, झाड़ाफूंक, तंत्र, मंत्र, इन्जेक्शन आदि सभी प्रकार का इलाज एक साथ करता था। मामूली फीस लेता था। उसने अपनी दुकान पर एक एक्स-रे देखने का बक्सा ओर एक माइक्रोस्कोप भी रख छोड़ा था। लेकिन उसने आज तक कोई टेस्ट नहीं किया था। रोगी सामान्यतया भगवान भरोसे ही ठीक हो जाते थे। जो ठीक नहीं होेते वे बड़े अस्पताल चले जाते और जो और भी ज्यादा गम्भीर होते थे वे सबसे बड़े अस्पताल की राह पकड़ लेते। डॉक्टर भगवान का रूप होता है, ऐसी मान्यता थी, मगर चिकित्सा शास्त्र मंे वैद्यांे को यमराज का सहोदर कहा गया है और इस सत्य से कौन इन्कार कर सकता है। कस्बे की डिस्पेसंरी मंे आज डॉक्टर का दिन था। वे ही नर्स चपरासी का काम भी देख रहे थे। ऐसा सहकार सरकारी कार्यालयांे मंे दिखना बड़ा अद्भुत होता है। पास ही उनका अलेशेशियन भी बैठा था जिसे वे शहर से अपने साथ ही लाते-ले जाते है। ठीक इसी समय मंच पर झपकलालजी अवतरित हुए। डॉक्टर ने उनको देखकर अनदेखा किया। सुबह से वो बीस मरीजांे मंे सिर खपा चुके थे। बारह बज चुके थे। एक बजे की बस से उन्हंे वापस जाना था। ऐसे नाजुक समय पर झपकलाल जी कराहते हुए आये तो डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया। डॉक्टर को गुस्सा आना ही था सो आ गया। उन्हांेने झपकलाल को देखा एक गोली दी और शून्य की ओर देखने लगे। झपकलाल ने गोली वहीं कूड़ेदान मंे फंेकी, हवा मंे कुछ गालियां उछाली और बस स्टेण्ड की ओर चल दिये। डॉक्टर ने चैन की सांस ली क्यांेकि झपकलाल डॉक्टर के बजाय डॉक्टर के कुत्ते से ज्यादा डर गये थे। बस स्टेण्ड पर एक शानदार नजारा था। एक सेल्स टेक्स इन्सपेक्टर, एक दुकानदार से टेक्स नही देने के कारणांे की विस्तृत जांच रिपोर्ट ले रहा था। झपकलाल उसे तुरन्त पहचान गये। वह कस्बे का ढग था, उन्हंे देखते ही ढग ने अपना परचम लहराया। हाय हलो किया और बचाने की गुहार मचाई। झपकलाल खुद कड़के थे, कण्डक्टर को तो समझा सकते थे, मगर सेल्स टेक्स वाला साहब नया-नया आया था। अचानक झपकलाल ने ढग को आंख मारी ढग समझ गया और बेहोश होकर गिर पड़ा। बस फिर क्या था पूरा बस स्टेण्ड इन्सपेक्टर के गले पड़ गया। जान छुड़ाना मुश्किल हो गया। झपकलाल ने इस्पेक्टर से दवा-दारु के नाम पर सौ रूपया ले लिया। भविष्य मंे नहीं छेड़ने की हिदायत के साथ इन्सपेक्टर को जाने की मौन स्वीकृति प्रदान की। उसके जाते ही ढग ओर झपकलाल ने रूपये आधे-आधे आपस मंे बांट लिये। डॉक्टर, इन्सपेक्टर से लड़ने से झपकलाल का मूड ऑफ हो गया था। वे झील के किनारे-किनारे टहलने लगे। ठीक इसी समय सामने से उन्हंे वे तीनांे आती दिखाई दी। वे तीनांे यानि मास्टरनीजी, नर्सजी और आंगनबाड़ी की बहिनजी। उन्हंे एक साथ देखकर उन्हंे खुशी और आश्चर्य दोनांे हुए। वे जानते थे, ये बेचारी सरकार मंे ठेेके की नौकरी करती थी, यदि इमानदारी से टिकट खरीदे और नौकरी पर जाये तो पूरी तनखा जो मुश्किल से हजार रूपया थी, बसांे के किराये और चायपानी मंे ही खर्चे हो जाती। सो तीनांे चूंकि एक ही गांव मंे स्थापित थी, अतः बारी-बारी से जाती, सरकारी काम को गैर सरकारी तरीके से पूरा करती। सरपंच जी, प्रधानजी, जिला प्रमुखजी, ग्राम सचिव जी, बी.डी.यो. आदि की हाजरी बजाती और वापस आ जाती। वैसे भी अल्प वेतन भोगी सरकारी कर्मचारी होने के कारण तथा महिला होने के कारण वे सुरक्षित थी। आज तीनांे एक साथ कैसे ? इस गहन गम्भीर प्रश्न पर झपकलाल का दिमाग चलने लगा । मन भटकने लगा। तब तक तीनों मोहतरमाएं उनके पास तक आ गई थी। 'सरकार के बाप का क्या जाता है।' बच्चे तो हमारे भूख से बिलबिला रहे है।' नर्स बोली। 'और मेरे वो तो बस सुनने के बजाय ऐसी पूजा करंेगे कि कई दिनांे तक कमर चटकेगी,' मास्टरनीजी बोली। 'हड्डिया चटकाने मंे तो मेरे वो भी कुछ कम नहीं है।' आंगनबाड़ी बहिन जी ने अपना दुखड़ा रोया। तीनांे महिलाआंे को देश की प्रजातन्त्र मंे कुछ खास रूचि नहीं थी, उन्हंे तो घर मंे गठबन्धन धर्म निभाना था और देहधर्म के अलावा वे क्या कर सकती थी। उन्हंे जाते हुए उदास निगाहांे से झपकलाल देर तक देखते रहे। उन्हांेने झील मंे कुछ कंकड़ फंेके। कुछ लहरंे उठी। फिर सब शान्त हो गया। कस्बा मोहल्लांे मंे बंटा हुआ है। कस्बे के शुरुआती दिनांे मंे मोहल्लंे जातियांे के आधार पर बने थे। मगर समय के साथ, आधुनिक जीवन के कारण, नौकरी पेशा लोगांे के आने के कारण जातिवादी मोहल्ले कमजोर जरूर पड़े मगर समाप्त नहीं हुए। आज भी किसी भी मोहल्ले मंे नया आने वाला मकान मालिक या किरायेदार सबसे पहले अपने जात वालांे को ढंूढ़ता है। फिर गौत्र वालांे से मेल मुलाकात करता है, दुआ सलाम रखता है। जरूरत पड़ने पर रोटी-बेटी का व्यवहार भी कर लेता है। मुस्लिम मौहल्ले की भी यही स्थिति है जो गरीब हिन्दू इसाई धर्म की शरण मंे चले गये वे अवसर की नजाकत को समझकर इधर-उधर हो जाते है। चुनाव के दिनांे मंे जाति मंे वोटांे के लिये बंटने वाले कम्बल, शराब, मुफ्त का खाना-पीना आदि सभी उम्मीदवारांे से जाति के नेता लेकर बांट-चूंटकर खा जाते है। कभी बूथ छापने का ठेका भी ले लिया जाता है। मगर यह सब दबे-के रूप मंे ही चलता है। खुले आम प्रजातन्त्र की रक्षा की कसमंे खाई जाती है। मोहल्लेदारी जरूर कमजोर हुई है, मगर अभी भी भुवा, काकी, दादी, नानी, मासी, भाभी आदि के रिश्ते जिंदा है। बूढे-बुजर्ग मोहल्ले के नुक्कड पर चौपड़, ताश, शतरंज खेलते है। हुक्का-बीड़ी, सिगरेट, खैनी, तम्बाकू का शौक फरमाते है और आने जाने वालांे पर निगाह रखते है। मजाल है जो कोई बाहरी परिंदा पर भी मार जाये। इसी प्रकार के माहौल मंे कुलदीपकजी के घर के पास मंे नये किरायेदार के रूप मंे शुक्लाजी आये। शुक्लाजी स्थानीय जूनियर कॉलेज मंे अध्यापक होकर आये थे। मगर उन्हंे प्रोफेसर कहना ही आज के युग का यथार्थ होगा। जाति बिरादरी का होने के कारण मां बापूजी ने उन्हंे हाथांे-हाथ लिया। शुक्लाजी मुश्किल से तीस वर्ष के थे। शुक्लाइन की गोद मंे एक बच्चा था। गोरा चिट्टा, मुलायम, सुन्दर, प्यारा। इसी की वजह से दोनो परिवार एकाकार होने की कगार पर आ गये। शुक्लाईन दिन भर खाली ही रहती थी। मां को उसने सास मां बना लिया फिर क्या था। बापू ससुर का दर्जा पा गये। कुलदीपकजी देवर हो गये और यशोधरा दीदी। दीदी का रोबदाब अब दोनांे घरांे मंे चल निकला था। वे अपनी नौकरी से खुश थी। घरवाले उसकी पगार से खुश थे। सम्पादकजी महिला सहकर्मी के साहचर्य से खुश थे। कुलदीपकजी अपनी समीक्षा लेखन से खुश थे। उनकी दूसरी फिल्मी समीक्षा जब छपकर आई तो सब कुछ ठीक था बस दर्शक उवाच महिला दर्शक के चित्र के साथ छप गया था और महिला दर्शक के स्थान पर एक पुरूष दर्शक का चित्र छप गया था। कुलदीपकजी इस बात को पी गये। उन्हंे समीक्षाआंे के खतरांे का आभास होने लगा था। कभी-कभी तो वे समीक्षा के स्थान पर वापस काव्य जगत मंे लौटने की सोचते मगर कविताआंे का प्रकाशन बहुत तकलीफदेह था। इधर पिछली समीक्षा का पारिश्रमिक 'पचास रुपये' पाकर कुलभूषणजी सब अवसाद भूल गये और इस पारिश्रमिक को सेलीब्रेट करने के लिये झपकलाल को साथ लेकर बस स्टेण्ड की ओर चल पड़े। सायं सांझ धीरे-धीरे उतर रही थी। बस स्टेण्ड पर रेलमपेल मची हुई थी। कुलदीपकजी ने एक थड़ी के पिछवाड़े जाकर सायंकालीन आचमन का पहला घूंट भरा ही था कि झाड़ियांे मंे कुछ सरसराहट हुई। सरसराहट की तरह ध्यान देने के बजाय झपकलाल ने आचमन की ओर ध्यान देना शुरू किया। मगर सरसराहट फुसफसाहट और फुसफुसाहट बाद मंे चिल्लाहट मंे बदल गई। अब एक जागरूक शहरी नागरिक होने के नाते इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी था। कुछ सरूर का असर, कुछ शाम का अन्धेरा, उन्हंे कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा था, मगर कुछ ही देर मंे सब कुछ साफ हो गया। 'पीढी का क्या होना-जाना है। खाओ-पीओ। बच्चे जनो। परिवार नियोजन का काम करो और मर जाओ यही हर एक की नियति है।
By: ABP Live । Updated at : 07 Jun 2023 05:32 PM (IST) रोहित शर्मा. ( Image Source : PTI ) Rohit Sharma On Ravi Ashwin: ओवल के मैदान पर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबला खेल रहा है. इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में 4 तेज गेंदबाजों के अलावा रवीन्द्र जडेजा के साथ उतरी है. रवि अश्विन टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं. सोशल मीडिया पर फैंस समेत कई क्रिकेट दिग्गज का मानना है कि टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन में रवि अश्विन को होना चाहिए था, लेकिन इस ऑलराउंडर को प्लेइंग इलेवन में शामिल क्यों नहीं किया गया? इस सवाल का जवाब टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने दिया है. रवि अश्विन पर रोहित शर्मा ने क्या कहा? टॉस के वक्त नासिर हुसैन ने रोहित शर्मा से पूछा कि वर्ल्ड नंबर-1 रवि अश्विन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने का फैसला कितना मुश्किल था? इस सवाल के जवाब में रोहित शर्मा ने कहा कि यह फैसला हमारे लिए आसान नहीं था, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि रवि अश्विन जैसे खिलाड़ी के बिना उतरना आसान नहीं है. . . क्योंकि वह एक मैच विनर हैं. पिछले लंबे वक्त से रवि अश्विन टीम इंडिया के लिए मैच विनर रहे हैं. ऐसे में इस खिलाड़ी के बिना मैदान पर उतरना आसान नहीं था. 'आप उस चीज के पीछे जाते हैं जो टीम के हित में हो' रोहित शर्मा ने कहा कि आप उस चीज के पीछे जाते हैं जो टीम के हित में हो. बहरहाल, हमने रवि अश्विन को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि हालात तेज गेंदबाजों के मुताबिक है. इस वजह से हमने 4 तेज गेंदबाजों के साथ उतरने का फैसला लिया. भारतीय कप्तान ने आगे कहा कि लगातार बादल छाए हुए हैं. . . लेकिन मुझे नहीं लगता कि पिच के स्वाभाव में बहुत ज्यादा बदलाव होगा. हम प्लेइंग इलेवन में 4 तेज गेंदबाजों के अलावा रवीन्द्र जडेजा के साथ उतरे हैं. सचिन-सीमा की मोहब्बत और 5 तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
By: ABP Live । Updated at : सात जून दो हज़ार तेईस पाँच:बत्तीस PM रोहित शर्मा. Rohit Sharma On Ravi Ashwin: ओवल के मैदान पर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबला खेल रहा है. इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है. भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में चार तेज गेंदबाजों के अलावा रवीन्द्र जडेजा के साथ उतरी है. रवि अश्विन टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं. सोशल मीडिया पर फैंस समेत कई क्रिकेट दिग्गज का मानना है कि टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन में रवि अश्विन को होना चाहिए था, लेकिन इस ऑलराउंडर को प्लेइंग इलेवन में शामिल क्यों नहीं किया गया? इस सवाल का जवाब टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने दिया है. रवि अश्विन पर रोहित शर्मा ने क्या कहा? टॉस के वक्त नासिर हुसैन ने रोहित शर्मा से पूछा कि वर्ल्ड नंबर-एक रवि अश्विन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने का फैसला कितना मुश्किल था? इस सवाल के जवाब में रोहित शर्मा ने कहा कि यह फैसला हमारे लिए आसान नहीं था, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि रवि अश्विन जैसे खिलाड़ी के बिना उतरना आसान नहीं है. . . क्योंकि वह एक मैच विनर हैं. पिछले लंबे वक्त से रवि अश्विन टीम इंडिया के लिए मैच विनर रहे हैं. ऐसे में इस खिलाड़ी के बिना मैदान पर उतरना आसान नहीं था. 'आप उस चीज के पीछे जाते हैं जो टीम के हित में हो' रोहित शर्मा ने कहा कि आप उस चीज के पीछे जाते हैं जो टीम के हित में हो. बहरहाल, हमने रवि अश्विन को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि हालात तेज गेंदबाजों के मुताबिक है. इस वजह से हमने चार तेज गेंदबाजों के साथ उतरने का फैसला लिया. भारतीय कप्तान ने आगे कहा कि लगातार बादल छाए हुए हैं. . . लेकिन मुझे नहीं लगता कि पिच के स्वाभाव में बहुत ज्यादा बदलाव होगा. हम प्लेइंग इलेवन में चार तेज गेंदबाजों के अलावा रवीन्द्र जडेजा के साथ उतरे हैं. सचिन-सीमा की मोहब्बत और पाँच तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
(३) कारागी, पशुपालक, परिश्रमी, मित्रो का प्रेमी । (४) क्रोधो स्वभाव, कार्य मे विघ्नबाधा पानेवाला, स्वजनो का विरोधी, उन्नतिशील । मूल - (१) बड़े आदमी की आज्ञा भंग करनेवाला, अपनी इच्छा से कार्य करनेवाला, पिता को कष्टकारी । ( २ ) पढ़ने मे बुद्धिमान, उदररोगी, दूसरो की बात न माननेवाला, प्रदेश भ्रमणकारी (३) ऐन्द्रजालिक और तात्रिक विद्यामे निपुण, स्वच्छताप्रेभी, वस्त्रालंकार का प्रेमी, शत्रु विजयी, गर्दन मे दर्दवाला, औषधियों के क्रय-विक्रय से लाभ पानेवाला । पूर्वाषाढा - (१) दूसरो से मान पानेवाला, मध्यावस्था में सुख शाति भोगी, कामी और स्त्रीप्रेमी । ( २ ) एकान्तप्रिय, दुर्बल शरीर, शुभ कार्य का इच्छुक, प्रबल गायनशक्ति (३) द्रव्यसग्रही, आयु में पिता के कष्ट से पीड़ित, चिन्ताग्रस्त । (४) कार्य मे सफल, नीरोग, उन्नतिशील, लाभ पानेवाला । उत्तराषाढा -- (१) श्रेष्ठ बुद्धि, चित्रकला मे निपुण, स्वच्छवस्त्रधारी, मानप्रतिष्ठाभागी । (२) भाषण देने मे चतुर, अल्प द्रव्यवाला, पुष्ट शरीर, प्रबल इच्छाशक्ति । (३) अभिमानी, सत्यभाषी, रुक-रुककर बात करनेवाला, अद्भुत स्वप्नदर्शी । (४) व्यापार पक्ष से लाभ पानेवाला, ठोस काम. करनेवाला, गृहकार्यों में निपुण, तीव्रबुद्धि । श्रवण - (१) च चल, अभिमानी, मातृपितृभक्त, जलकल कार्य में. निपुण । (२) मित्रविरोधी, सोच-विचारकर काम करनेवाला, द्रव्यसंग्रह कम करनेवाला । (३) धनवान्, व्यापार से लाभभोगी, उन्नतिशील, अस्वस्थ । (४) धार्मिक कार्य में उत्साही, धनसम्पन्न, कृषि से द्रव्य पानेवाला । धनिष्ठा ~~ ( १ ) सोच-विचारकर काम न करनेवाला, उन्नति कार्य में बाधा पानेवाला, सेना विभाग मे नौकर । (२) लड़ाई-दंगे में आहत होनेवाला गरीब, श्रम से द्रव्य पानेवाला, स्त्रीप्रेमी । (३) ईमानदारी से कार्य करने वाला, स्वच्छ वस्त्रधारी उन्नतिशील । (४) धार्मिक काम मे उन्नतिशील, क्रोधी, अभिमानी, लोहे की वस्तु से लाभ पानेवाला ।
कारागी, पशुपालक, परिश्रमी, मित्रो का प्रेमी । क्रोधो स्वभाव, कार्य मे विघ्नबाधा पानेवाला, स्वजनो का विरोधी, उन्नतिशील । मूल - बड़े आदमी की आज्ञा भंग करनेवाला, अपनी इच्छा से कार्य करनेवाला, पिता को कष्टकारी । पढ़ने मे बुद्धिमान, उदररोगी, दूसरो की बात न माननेवाला, प्रदेश भ्रमणकारी ऐन्द्रजालिक और तात्रिक विद्यामे निपुण, स्वच्छताप्रेभी, वस्त्रालंकार का प्रेमी, शत्रु विजयी, गर्दन मे दर्दवाला, औषधियों के क्रय-विक्रय से लाभ पानेवाला । पूर्वाषाढा - दूसरो से मान पानेवाला, मध्यावस्था में सुख शाति भोगी, कामी और स्त्रीप्रेमी । एकान्तप्रिय, दुर्बल शरीर, शुभ कार्य का इच्छुक, प्रबल गायनशक्ति द्रव्यसग्रही, आयु में पिता के कष्ट से पीड़ित, चिन्ताग्रस्त । कार्य मे सफल, नीरोग, उन्नतिशील, लाभ पानेवाला । उत्तराषाढा -- श्रेष्ठ बुद्धि, चित्रकला मे निपुण, स्वच्छवस्त्रधारी, मानप्रतिष्ठाभागी । भाषण देने मे चतुर, अल्प द्रव्यवाला, पुष्ट शरीर, प्रबल इच्छाशक्ति । अभिमानी, सत्यभाषी, रुक-रुककर बात करनेवाला, अद्भुत स्वप्नदर्शी । व्यापार पक्ष से लाभ पानेवाला, ठोस काम. करनेवाला, गृहकार्यों में निपुण, तीव्रबुद्धि । श्रवण - च चल, अभिमानी, मातृपितृभक्त, जलकल कार्य में. निपुण । मित्रविरोधी, सोच-विचारकर काम करनेवाला, द्रव्यसंग्रह कम करनेवाला । धनवान्, व्यापार से लाभभोगी, उन्नतिशील, अस्वस्थ । धार्मिक कार्य में उत्साही, धनसम्पन्न, कृषि से द्रव्य पानेवाला । धनिष्ठा ~~ सोच-विचारकर काम न करनेवाला, उन्नति कार्य में बाधा पानेवाला, सेना विभाग मे नौकर । लड़ाई-दंगे में आहत होनेवाला गरीब, श्रम से द्रव्य पानेवाला, स्त्रीप्रेमी । ईमानदारी से कार्य करने वाला, स्वच्छ वस्त्रधारी उन्नतिशील । धार्मिक काम मे उन्नतिशील, क्रोधी, अभिमानी, लोहे की वस्तु से लाभ पानेवाला ।
अमरावती : विदर्भ के विकास की दृष्टि से अमरावती का संतरा प्रक्रिया प्रकल्प एक मील का पत्थर साबित होने वाला है. विदर्भ के संतरे से अब कोका कोला जैसी ब्रांडेड कंपनी का नाम जुड़ने जा रहा है. अमरावती में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस द्वारा संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का भूमिपूजन गुरुवार को संपन्न हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मेक इन इंडिया के सपने में महाराष्ट्र के तीन प्रकल्पों में संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का नाम शामिल था, उसमें यह प्रकल्प जुड़ गया है. उन्होंने कहा कि आज बड़ी खुशी हो रही है कि इस संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का भूमिपूजन अमरावती में हो गया, जो अगले 2 वर्षो में बनकर तैयार हो जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि विदर्भ में बड़े पैमाने पर संतरा उत्पादन किया जाता है, लेकिन संतरा उत्पादक किसानों को अब तक व्यपारियों पर अवलंबित रहना पड़ रहा है. इसके कारण किसानों को संतरे का उचित कीमत नहीं मिल पाता है. लेकिन अब अमरावती के इस संतरा प्रक्रिया प्रकल्प के जरिए, जो कोको कोला जैसा ब्रांड मिलने वाला है के कारण अब संतरा उत्पादक किसानों के दिन बदलने वाले हैं. यही नहीं विदर्भ की मौसंबी, अमरूद, पपीता जैसे फलों पर भी प्रक्रिया कर लोगों को 12 महीने रोजगार देने का प्रयास राज्य सरकार कर रही हैं.
अमरावती : विदर्भ के विकास की दृष्टि से अमरावती का संतरा प्रक्रिया प्रकल्प एक मील का पत्थर साबित होने वाला है. विदर्भ के संतरे से अब कोका कोला जैसी ब्रांडेड कंपनी का नाम जुड़ने जा रहा है. अमरावती में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस द्वारा संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का भूमिपूजन गुरुवार को संपन्न हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मेक इन इंडिया के सपने में महाराष्ट्र के तीन प्रकल्पों में संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का नाम शामिल था, उसमें यह प्रकल्प जुड़ गया है. उन्होंने कहा कि आज बड़ी खुशी हो रही है कि इस संतरा प्रक्रिया प्रकल्प का भूमिपूजन अमरावती में हो गया, जो अगले दो वर्षो में बनकर तैयार हो जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि विदर्भ में बड़े पैमाने पर संतरा उत्पादन किया जाता है, लेकिन संतरा उत्पादक किसानों को अब तक व्यपारियों पर अवलंबित रहना पड़ रहा है. इसके कारण किसानों को संतरे का उचित कीमत नहीं मिल पाता है. लेकिन अब अमरावती के इस संतरा प्रक्रिया प्रकल्प के जरिए, जो कोको कोला जैसा ब्रांड मिलने वाला है के कारण अब संतरा उत्पादक किसानों के दिन बदलने वाले हैं. यही नहीं विदर्भ की मौसंबी, अमरूद, पपीता जैसे फलों पर भी प्रक्रिया कर लोगों को बारह महीने रोजगार देने का प्रयास राज्य सरकार कर रही हैं.
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान का पोस्टर रिलीज किया. इस रीलिज के दौरान उन्होंने बच्चों से इस अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेने का कहाँ, और साथ में हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र की गूंज दुनिया में हो ऐसी अपील बच्चों से की. पोस्टर रिलीज के अवसर पर डिजिटल बाल मेला की को फाउंडर प्रिया शर्मा शर्मा ने बताया की, हिमाचल प्रदेश विधानसभा स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया ने मार्च में विशेष विधानसभा बाल सत्र की घोषणा की थी है. बता दें कि 12 जून होने वाले इस बाल सत्र में देश के 68 बच्चों को दुनिया के सामने बात रखने का मौका दिया जाएगा. शिमला विधानसभा बाल सत्र में बच्चे बाल समस्या, सुझाव और बाल मुद्दों को विधानसभा भवन में उठाएंगे. बता दें कि इस पोस्टर रिलीज़ के दौरान शिमला में मुख्यमंत्री के साथ जाह्नवी रघुवंशी, विदिशा रघुवंशी, माला चंद और तारक राणा मौजूद थे. गौरतलब है कि इन बच्चों को चुनाव हेतु एक सुझाव विडियो बनानी है, जिसमें वह बच्चों की सरकार कैसी हो? विषय पर अपनी राय रखेंगे. इसके बाद बच्चे अपने द्वारा बनायी गयी विडियो को अपने नाम सहित डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर रजिस्टर कर सकते है. वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने हेतु कोई शुल्क बच्चों से नहीं लिया जा रहा है. इतना ही नहीं इन बच्चों के चुनाव हेतु भी जजेज़ की एक टीम गठित की जाएगी जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज शामिल होंगे. फ्यूचर सोसायटी द्वारा आयोजित और एल आई सी द्वारा प्रायोजित इस अभियान का मकसद बच्चों की राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बच्चों की सरकार कैसी हो? अभियान का पोस्टर रिलीज किया. इस रीलिज के दौरान उन्होंने बच्चों से इस अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेने का कहाँ, और साथ में हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र की गूंज दुनिया में हो ऐसी अपील बच्चों से की. पोस्टर रिलीज के अवसर पर डिजिटल बाल मेला की को फाउंडर प्रिया शर्मा शर्मा ने बताया की, हिमाचल प्रदेश विधानसभा स्पीकर श्री कुलदीप सिंह पठानिया ने मार्च में विशेष विधानसभा बाल सत्र की घोषणा की थी है. बता दें कि बारह जून होने वाले इस बाल सत्र में देश के अड़सठ बच्चों को दुनिया के सामने बात रखने का मौका दिया जाएगा. शिमला विधानसभा बाल सत्र में बच्चे बाल समस्या, सुझाव और बाल मुद्दों को विधानसभा भवन में उठाएंगे. बता दें कि इस पोस्टर रिलीज़ के दौरान शिमला में मुख्यमंत्री के साथ जाह्नवी रघुवंशी, विदिशा रघुवंशी, माला चंद और तारक राणा मौजूद थे. गौरतलब है कि इन बच्चों को चुनाव हेतु एक सुझाव विडियो बनानी है, जिसमें वह बच्चों की सरकार कैसी हो? विषय पर अपनी राय रखेंगे. इसके बाद बच्चे अपने द्वारा बनायी गयी विडियो को अपने नाम सहित डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर रजिस्टर कर सकते है. वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने हेतु कोई शुल्क बच्चों से नहीं लिया जा रहा है. इतना ही नहीं इन बच्चों के चुनाव हेतु भी जजेज़ की एक टीम गठित की जाएगी जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज शामिल होंगे. फ्यूचर सोसायटी द्वारा आयोजित और एल आई सी द्वारा प्रायोजित इस अभियान का मकसद बच्चों की राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना है।
Begin typing your search above and press return to search. भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम का शानदार प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी हैं। महिला टीम ने तीसरे मैच में गुयाना के खिलाफ 3-0 से जीत दर्ज की हैं। भारत की स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एकल मुकाबले में थुराइया थामस के खिलाफ 11-1, 11-3, 11-3 की एकतरफा जीत हासिल की जबकि युगल स्पर्धा में भारतीय जोड़ी श्रीजा अकुला और रीत टेन्नीसन ने 11-7, 14-12, 13-11 के अंतर से चेल्सी को हराकर जीत हासिल की। इसके साथ ही महिला टीम ने ग्रुप में पहले स्थान पर अपना कब्जा कर लिया हैं। इससे पहले कल यानी की राष्ट्रमंडल खेलों के पहले दिन भी भारतीय महिला टेनिस टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 3-0 और फिजी को भी 3-0 से से मात दी थी।
Begin typing your search above and press return to search. भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम का शानदार प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी हैं। महिला टीम ने तीसरे मैच में गुयाना के खिलाफ तीन-शून्य से जीत दर्ज की हैं। भारत की स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एकल मुकाबले में थुराइया थामस के खिलाफ ग्यारह-एक, ग्यारह-तीन, ग्यारह-तीन की एकतरफा जीत हासिल की जबकि युगल स्पर्धा में भारतीय जोड़ी श्रीजा अकुला और रीत टेन्नीसन ने ग्यारह-सात, चौदह-बारह, तेरह-ग्यारह के अंतर से चेल्सी को हराकर जीत हासिल की। इसके साथ ही महिला टीम ने ग्रुप में पहले स्थान पर अपना कब्जा कर लिया हैं। इससे पहले कल यानी की राष्ट्रमंडल खेलों के पहले दिन भी भारतीय महिला टेनिस टीम ने दक्षिण अफ्रीका को तीन-शून्य और फिजी को भी तीन-शून्य से से मात दी थी।
बैंकाक (आईएएनएस)। थाईलैंड सरकार और पूर्व पधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा के समर्थकों की जंग अब सड़क से अदालत जा पहुंची है। दो महीने से सरकार विरोधी पदर्शनों में जुटे आंदोलनकारियों के खिलाफ थाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई के महज सप्ताह भर बाद सरकार ने पूर्व पधानमंत्री और उनके समर्थकों के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी है। सरकार के पवक्पा पनिथम वत्तनायकोर्न का कहना है, ``सड़कों पर उतरने से अच्छा विकल्प कानूनी जंग है। यह दर्शाता है कि व्यवस्था फिर से काम कर रही है। " शिनावात्रा को गिरफ्तार और पत्यर्पित कराने के लिए थाई पुलिस अगले सप्ताह इंटरपोल से औपचारिक मदद मांग सकती है। पदर्शनों का आयोजन और उन्हें वित्तीय मदद मुहैया कराने में कथित भूमिका की वजह से शिनावात्रा के खिलाफ आतंकवाद का आरोप लग सकता है। थाईलैंड में दो महीने तक चले विरोध पदर्शनों में 88 लोग मारे गए थे और 1885 घायल हो गए थे। शिनावात्रा के वकीलों ने बुधवार को अदालत में अपील दाखिल कर पूर्व पधानमंत्री के खिलाफ मंगलवार को जारी हुए गिरफ्तारी के वारंट को रद्द कराने की मांग की थी। अपने खिलाफ आरोपों के संबंध में शिनावात्रा ने पहली बार पकाशित पतिकिया में गुरुवार को कहा कि उन्होंने रेड शर्ट्स पदर्शनकारियों के कथित आंदोलन को पायोजित नहीं किया था और इंटरपोल को उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी के वारंट की अनदेखी करनी चाहिए। आस्ट्रेलियाई पसारक एबीसी को दिए साक्षात्कार में शिनावात्रा ने कहा, ``हम कभी भी हिंसा में शामिल नहीं रहे। ये आरोप पूरी तरह राजनीति से पेरित और निराधार हैं। . . . इंटरपोल ने हमेशा थाई सरकार की ओर से दी गई जानकारी को अविश्वसनीय और राजनीति से पेरित पाया है। " शिनावात्रा ने गत 19 मई को पदर्शनकारियों द्वारा बैंकाक की इमारतों को आग के हवाले किए जाने संबंधी रपटों को भी गलत बताया है। शिनावात्रा को फौजी विदोह के जरिये 2006 में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। वह इस समय मोंटेनगरो में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। इस बीच सरकारी पवक्ता पनिथम ने स्वीकार किया है कि विरोध पदर्शनों के बाद जनता का विश्वास हासिल करने के लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पदर्शनों की जांच के लिए एक निष्पक्ष समिति बनाई गई है। उन्होंने बताया कि सरकार को अफवाहों पर काबू पाने के लिए भी काफी कोशिश करनी पड़ रही है।
बैंकाक । थाईलैंड सरकार और पूर्व पधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा के समर्थकों की जंग अब सड़क से अदालत जा पहुंची है। दो महीने से सरकार विरोधी पदर्शनों में जुटे आंदोलनकारियों के खिलाफ थाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई के महज सप्ताह भर बाद सरकार ने पूर्व पधानमंत्री और उनके समर्थकों के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ दी है। सरकार के पवक्पा पनिथम वत्तनायकोर्न का कहना है, ``सड़कों पर उतरने से अच्छा विकल्प कानूनी जंग है। यह दर्शाता है कि व्यवस्था फिर से काम कर रही है। " शिनावात्रा को गिरफ्तार और पत्यर्पित कराने के लिए थाई पुलिस अगले सप्ताह इंटरपोल से औपचारिक मदद मांग सकती है। पदर्शनों का आयोजन और उन्हें वित्तीय मदद मुहैया कराने में कथित भूमिका की वजह से शिनावात्रा के खिलाफ आतंकवाद का आरोप लग सकता है। थाईलैंड में दो महीने तक चले विरोध पदर्शनों में अठासी लोग मारे गए थे और एक हज़ार आठ सौ पचासी घायल हो गए थे। शिनावात्रा के वकीलों ने बुधवार को अदालत में अपील दाखिल कर पूर्व पधानमंत्री के खिलाफ मंगलवार को जारी हुए गिरफ्तारी के वारंट को रद्द कराने की मांग की थी। अपने खिलाफ आरोपों के संबंध में शिनावात्रा ने पहली बार पकाशित पतिकिया में गुरुवार को कहा कि उन्होंने रेड शर्ट्स पदर्शनकारियों के कथित आंदोलन को पायोजित नहीं किया था और इंटरपोल को उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी के वारंट की अनदेखी करनी चाहिए। आस्ट्रेलियाई पसारक एबीसी को दिए साक्षात्कार में शिनावात्रा ने कहा, ``हम कभी भी हिंसा में शामिल नहीं रहे। ये आरोप पूरी तरह राजनीति से पेरित और निराधार हैं। . . . इंटरपोल ने हमेशा थाई सरकार की ओर से दी गई जानकारी को अविश्वसनीय और राजनीति से पेरित पाया है। " शिनावात्रा ने गत उन्नीस मई को पदर्शनकारियों द्वारा बैंकाक की इमारतों को आग के हवाले किए जाने संबंधी रपटों को भी गलत बताया है। शिनावात्रा को फौजी विदोह के जरिये दो हज़ार छः में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। वह इस समय मोंटेनगरो में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। इस बीच सरकारी पवक्ता पनिथम ने स्वीकार किया है कि विरोध पदर्शनों के बाद जनता का विश्वास हासिल करने के लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पदर्शनों की जांच के लिए एक निष्पक्ष समिति बनाई गई है। उन्होंने बताया कि सरकार को अफवाहों पर काबू पाने के लिए भी काफी कोशिश करनी पड़ रही है।
सार्क देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की 5वीं बैठक आज नई दिल्ली में हुई, जिसमें सार्क स्वास्थ्य मंत्रियों ने "सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर दिल्ली घोषणापत्र" को स्वीकार किया गया। घोषणापत्र में कहा गया है कि प्रत्येक देश में खासतौर से उन देशों में जहां वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की कमी है, स्वास्थ्य प्रणालियों और प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। घोषणा पत्र में कुछ देशों में हाल ही में इबोला वायरस पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा किए गए समर्पित कार्य की चर्चा की गई है। 6 अप्रैल को हुई 5वीं बैठक में की गई सिफारिशों की चर्चा की गई है, जिसमें सार्क सदस्य देशों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया था, जिसमें आधुनिक निगरानी प्रणाली के साथ रोग निरोधक टीकों के लिए उच्च गुणवत्ता टीकाकरण की जरूरत, तपेदिक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्य, कीड़े मकौड़ों से होने वाली बीमारियों, हैपीटाइटिस बी और सी, गैर संचारी रोगों, मानसिक रोगों, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों और संचारी रोगों की रोकथाम, एंटी-माइक्रोबायल प्रतिरोधक के खतरे की रोकथाम, दवाओं तक पहुंच प्रदान करने और स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधनों की गुणवत्ता उपलब्धता बढ़ाने के बारे में चर्चा की गई है। घोषणा-पत्र में 7 अप्रैल को हुई बैठक में एचआईवी/एड्स पर विशेषज्ञ समूह द्वारा की गई सिफारिशों की चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य और जनसंख्या गतिविधियों के बारे में तकनीकी समिति तथा एचआईवी/एड्स पर विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया गया। घोषणा-पत्र में क्षेत्र से 2030 तक एड्स जैसी घातक बीमारी को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रयासों में तेज़ी लाने की ज़रूरत बताई गई है, जैसा कि 18वीं सार्क शिखर बैठक में प्रस्ताव किया गया था। इस बात की चर्चा करते हुए कि पुरानी गैर संचारी बीमारियों के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में से 80 प्रतिशत विकासशील देशों में होती हैं, इसलिए गैर संचारी रोगों पर व्यापक उपाय करने की आवश्यकता है, सार्क सदस्य देशों ने इस प्रतिबद्धता को दोहराया है कि स्वास्थ्य मुद्दों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए वे मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा पेंटावेलेंट वैक्सीन सहित सस्ते टीकों की उपलब्धता के लिए मिलकर सहयोग को मज़बूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है और सार्क क्षेत्र को पोलियो मुक्त बनाने की बात कही गई है। घोषणा पत्र में विशेषज्ञों के दौरे को प्रोत्साहन देने, संगोष्ठियों का आयोजन, अंतर्राष्ट्रीय फैलोशिप के अंतर्गत परम्परागत दवाओं के बारे में पाठ्यक्रमों को बढ़ावा अथवा देश की सहायता से कार्यक्रमों, शैक्षणिक स्तर में सुधार, दवाओं की गुणवत्ता और मानकीकरण आश्वासन, औषधीय पौधों की उपलब्धता में सुधार, अनुसंधान और विकास, जागरूकता पैदा करने सहित दवाओं की परम्परागत प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई है।
सार्क देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की पाँचवीं बैठक आज नई दिल्ली में हुई, जिसमें सार्क स्वास्थ्य मंत्रियों ने "सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर दिल्ली घोषणापत्र" को स्वीकार किया गया। घोषणापत्र में कहा गया है कि प्रत्येक देश में खासतौर से उन देशों में जहां वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की कमी है, स्वास्थ्य प्रणालियों और प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। घोषणा पत्र में कुछ देशों में हाल ही में इबोला वायरस पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा किए गए समर्पित कार्य की चर्चा की गई है। छः अप्रैल को हुई पाँचवीं बैठक में की गई सिफारिशों की चर्चा की गई है, जिसमें सार्क सदस्य देशों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया था, जिसमें आधुनिक निगरानी प्रणाली के साथ रोग निरोधक टीकों के लिए उच्च गुणवत्ता टीकाकरण की जरूरत, तपेदिक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कार्य, कीड़े मकौड़ों से होने वाली बीमारियों, हैपीटाइटिस बी और सी, गैर संचारी रोगों, मानसिक रोगों, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों और संचारी रोगों की रोकथाम, एंटी-माइक्रोबायल प्रतिरोधक के खतरे की रोकथाम, दवाओं तक पहुंच प्रदान करने और स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधनों की गुणवत्ता उपलब्धता बढ़ाने के बारे में चर्चा की गई है। घोषणा-पत्र में सात अप्रैल को हुई बैठक में एचआईवी/एड्स पर विशेषज्ञ समूह द्वारा की गई सिफारिशों की चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य और जनसंख्या गतिविधियों के बारे में तकनीकी समिति तथा एचआईवी/एड्स पर विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया गया। घोषणा-पत्र में क्षेत्र से दो हज़ार तीस तक एड्स जैसी घातक बीमारी को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रयासों में तेज़ी लाने की ज़रूरत बताई गई है, जैसा कि अट्ठारहवीं सार्क शिखर बैठक में प्रस्ताव किया गया था। इस बात की चर्चा करते हुए कि पुरानी गैर संचारी बीमारियों के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में से अस्सी प्रतिशत विकासशील देशों में होती हैं, इसलिए गैर संचारी रोगों पर व्यापक उपाय करने की आवश्यकता है, सार्क सदस्य देशों ने इस प्रतिबद्धता को दोहराया है कि स्वास्थ्य मुद्दों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए वे मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा पेंटावेलेंट वैक्सीन सहित सस्ते टीकों की उपलब्धता के लिए मिलकर सहयोग को मज़बूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है और सार्क क्षेत्र को पोलियो मुक्त बनाने की बात कही गई है। घोषणा पत्र में विशेषज्ञों के दौरे को प्रोत्साहन देने, संगोष्ठियों का आयोजन, अंतर्राष्ट्रीय फैलोशिप के अंतर्गत परम्परागत दवाओं के बारे में पाठ्यक्रमों को बढ़ावा अथवा देश की सहायता से कार्यक्रमों, शैक्षणिक स्तर में सुधार, दवाओं की गुणवत्ता और मानकीकरण आश्वासन, औषधीय पौधों की उपलब्धता में सुधार, अनुसंधान और विकास, जागरूकता पैदा करने सहित दवाओं की परम्परागत प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई है।
कानपुर के यतीमखाना इलाके (Kanpur Violence) में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जफर हयात हाशमी (Zafar Hayat Hashmi) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जफर हयात से अज्ञात जगह पर पूछताछ की जा रही है। जफर हयात पर हिंसा की साजिश रचने और भड़काऊ पोस्टर लगवाने के आरोप हैं। जफर हयात पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की बात कही जा रही है। कानपुर की हिंसा के मामले में अब तक कुल 3 एफआईआर दर्ज हुई है। इस मामले में 40 नामजद और 1000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। जो लोग आरोपी बने हैं, पुलिस लगातार उनके घर पहुंच रही है। इसके अलावा हिंसा के मास्टरमाइंड जफर हयात हाशमी को भी खोजने के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। पुलिस अफसरों के मुताबिक, कानपुर के आरोपियों पर गैंगस्टर लगाकर इनकी संपत्ति जब्त करने का काम भी शुरू होना है। ऐसे में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के अलावा, पीएसी, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के लोग भी लगातार जांच में जुटे हुए हैं।
कानपुर के यतीमखाना इलाके में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जफर हयात हाशमी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जफर हयात से अज्ञात जगह पर पूछताछ की जा रही है। जफर हयात पर हिंसा की साजिश रचने और भड़काऊ पोस्टर लगवाने के आरोप हैं। जफर हयात पर कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की बात कही जा रही है। कानपुर की हिंसा के मामले में अब तक कुल तीन एफआईआर दर्ज हुई है। इस मामले में चालीस नामजद और एक हज़ार अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। जो लोग आरोपी बने हैं, पुलिस लगातार उनके घर पहुंच रही है। इसके अलावा हिंसा के मास्टरमाइंड जफर हयात हाशमी को भी खोजने के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। पुलिस अफसरों के मुताबिक, कानपुर के आरोपियों पर गैंगस्टर लगाकर इनकी संपत्ति जब्त करने का काम भी शुरू होना है। ऐसे में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के अलावा, पीएसी, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के लोग भी लगातार जांच में जुटे हुए हैं।
बिग बॉस 13 फेम पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा(Mahira Sharma) एक बार फिर से साथ नजर आने वाले हैं। जी हां वो जल्द ही एक नए म्यूजिक वीडियो में दिखाई देंगे। रूमर्ड कपल इस समय सांग की शूटिंग के लिए दुबई गए हुए हैं। इस गाने को अमाल मल्लिक बना रहे हैं।फिलहाल इस सांग को लेकर कोई भी इन्फॉर्मेशन सामने नहीं आई है। लेकिन कुछ समय पहले ही पारस ने अपने सोशल मीडिया पर एक शॉर्ट वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में हम माहिरा(Mahira Sharma) को समुंद्र के किनारे बैठकर नारियल पानी पीते देख सकते है।जिसके बाद पारस उसके हाथ से नारियल पानी छीनकर भाग जाते हैं। इसके पीछे हाल ही में रिलीज हुआ पारस छाबड़ा और रुबीना दिलैक का सांग गलत प्ले हो रहा है। ये वीडियो काफी फनी है। इससे पहले पारस और माहिरा(Mahira Sharma) सांग बारिश, रंग लगया, रिंग में नजर आ चुके हैं। जल्द ही दोनों के साथ फिर से नजर आएंगे।
बिग बॉस तेरह फेम पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा एक बार फिर से साथ नजर आने वाले हैं। जी हां वो जल्द ही एक नए म्यूजिक वीडियो में दिखाई देंगे। रूमर्ड कपल इस समय सांग की शूटिंग के लिए दुबई गए हुए हैं। इस गाने को अमाल मल्लिक बना रहे हैं।फिलहाल इस सांग को लेकर कोई भी इन्फॉर्मेशन सामने नहीं आई है। लेकिन कुछ समय पहले ही पारस ने अपने सोशल मीडिया पर एक शॉर्ट वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में हम माहिरा को समुंद्र के किनारे बैठकर नारियल पानी पीते देख सकते है।जिसके बाद पारस उसके हाथ से नारियल पानी छीनकर भाग जाते हैं। इसके पीछे हाल ही में रिलीज हुआ पारस छाबड़ा और रुबीना दिलैक का सांग गलत प्ले हो रहा है। ये वीडियो काफी फनी है। इससे पहले पारस और माहिरा सांग बारिश, रंग लगया, रिंग में नजर आ चुके हैं। जल्द ही दोनों के साथ फिर से नजर आएंगे।
अन्तिम था पर खेद है कि उसका देहान्त हो जानेसे यह कार्य रह ही गया। आज बद्यपि वर्तमान के दस्यु राजा ( अंग्रेजी राज ) से आर्यावर्त देश की मुक्ति हो रही है किन्तु मुक्ति के उपरान्त अनेक अवान्छनीय विपत्तियों के आने की सम्भावना है। इस लिये अब आर्य राजाओं को विशेषरूप से संगठित होने की आवश्यकता है संगठित होकर अपने कार्यक्रम पर विचार करना दस्यु राजाओं के संसर्ग से आई दस्युता को अपने अन्दर से हटाना और अपने को बिशुद्ध आर्य राजा बनाना फिर से वैदिक राष्ट्रियता को लाना है ऋषि दयानन्द ने आर्यावर्त देश में दस्युराज्य को देख कितने अत्यन्त दुःख के साथ लिखा --"सृष्टि से लेकर महाभारत पर्यन्त चक्रवर्ती सार्बभौम राजा आप कुल में हुए थे अब इनके में सन्तानों का अभाग्योदय होने से राजभ्रष्ट होकर विदेशियों के पादाक्रान्त हो रहे हैं। जब रघुगण राजा थे तब राजण भी यहां के आधीन था। महाराजा युधिष्ठिर जी के राजसूय यज्ञ और महाभारत पर्यन्त यहां के राज्याधीन सब राज्य थे। ऐसे शिरोमणि देश को महाभारत के युद्ध ने ऐसा बक्का दिया कि अब तक भी अपनी पूर्व दशा में नहीं आया क्योंकि जब भाई को भाई मारने लगे तो नाश होने में क्या सम्देह" ( सत्यार्थप्रकाश, एकादश समुल्लास ) "अब भाग्योदय से और भार्यों के आलस्य प्रमाद के परस्पर के विरोध से अन्य देशों के राज्य करने की तो कथा ही क्या कहनी किन्तु धार्यानतं में भी भार्यों का अखण्ड स्वतन्त्र स्वाधीन निर्भय राज्य इस समय नहीं है जो कुछ है सो भी विदेशियों के पादा फ्रान्त हो रहा है शिक कुछ थोड़े राजा स्वतन्त्र हैं दुर्दिन जब आता है तब देशवासियों को अनेक प्रकार के दुःख भोगना पडता है कोई कितना ही कहे परन्तु जो स्वदेशीय राजा होता है वह सर्वोपरि उत्तम होता है अथवा मतमतान्तर के आग्रह से रहित अपने और पराए का पक्षपात शून्य प्रजा पर पिता माता के समान कृपा न्याय और दया के साथ विदेशियों का राज्य भी पूर्ण सुख दायक नहीं है" ( सत्यार्थ प्रकाश । अष्टम समुल्लास ) " विदेशियों के आर्यावर्त में राज्य होने का कारण आपस की फूट मत भेद है जब आपस में भाई भाई लड़ते हैं तभी तीसरा विदेशी आकर पंच बन बैठता है। क्या तुम लोग महा भारत की बातें जो पांच सहस्र वर्ष पूर्व हुई थीं उनको भी भूल गए । आपस की फूट से कौरन पाएडव और यादवों का सत्यानाश होगया सो तो हो गया परन्तु अब तक भी वही रोग पीछे लगा है न जाने यह भयङ्कर राक्षस कभी छूटेगा वा आर्यों को सब सुखों से छुड़ाकर दुःख सागर में दुबा मारेगा ! उसी दुष्ट दुर्योधन गोत्र इत्यारे स्वदेश बिनाशक नीच के 'फूट' दुष्ट मार्ग में आर्य लोग अब तक भी चलकर दुःख बढा रहे हैं परमेश्वर कृपा करे कि यह राज रोग हम आर्यों में से नष्ट हो जाये" (सत्यार्थ प्रकाश वशम समुल्लास) यह है दयानन्द का ककरण कन्दन, यह है उसका भार्तविलाप, यह है उसका दुःखभरा रोना । महा भारत काल की फूट से भार्यों के हाथ से सार्वभौम सत्ता चली गई और मध्यकालीन भार्य राजाओं की फूट से भार्यावर्त देश की स्वतन्त्रता नष्ट हुई। अस्तु । इतने दोघं कासीन फूट रोग के ।
अन्तिम था पर खेद है कि उसका देहान्त हो जानेसे यह कार्य रह ही गया। आज बद्यपि वर्तमान के दस्यु राजा से आर्यावर्त देश की मुक्ति हो रही है किन्तु मुक्ति के उपरान्त अनेक अवान्छनीय विपत्तियों के आने की सम्भावना है। इस लिये अब आर्य राजाओं को विशेषरूप से संगठित होने की आवश्यकता है संगठित होकर अपने कार्यक्रम पर विचार करना दस्यु राजाओं के संसर्ग से आई दस्युता को अपने अन्दर से हटाना और अपने को बिशुद्ध आर्य राजा बनाना फिर से वैदिक राष्ट्रियता को लाना है ऋषि दयानन्द ने आर्यावर्त देश में दस्युराज्य को देख कितने अत्यन्त दुःख के साथ लिखा --"सृष्टि से लेकर महाभारत पर्यन्त चक्रवर्ती सार्बभौम राजा आप कुल में हुए थे अब इनके में सन्तानों का अभाग्योदय होने से राजभ्रष्ट होकर विदेशियों के पादाक्रान्त हो रहे हैं। जब रघुगण राजा थे तब राजण भी यहां के आधीन था। महाराजा युधिष्ठिर जी के राजसूय यज्ञ और महाभारत पर्यन्त यहां के राज्याधीन सब राज्य थे। ऐसे शिरोमणि देश को महाभारत के युद्ध ने ऐसा बक्का दिया कि अब तक भी अपनी पूर्व दशा में नहीं आया क्योंकि जब भाई को भाई मारने लगे तो नाश होने में क्या सम्देह" "अब भाग्योदय से और भार्यों के आलस्य प्रमाद के परस्पर के विरोध से अन्य देशों के राज्य करने की तो कथा ही क्या कहनी किन्तु धार्यानतं में भी भार्यों का अखण्ड स्वतन्त्र स्वाधीन निर्भय राज्य इस समय नहीं है जो कुछ है सो भी विदेशियों के पादा फ्रान्त हो रहा है शिक कुछ थोड़े राजा स्वतन्त्र हैं दुर्दिन जब आता है तब देशवासियों को अनेक प्रकार के दुःख भोगना पडता है कोई कितना ही कहे परन्तु जो स्वदेशीय राजा होता है वह सर्वोपरि उत्तम होता है अथवा मतमतान्तर के आग्रह से रहित अपने और पराए का पक्षपात शून्य प्रजा पर पिता माता के समान कृपा न्याय और दया के साथ विदेशियों का राज्य भी पूर्ण सुख दायक नहीं है" " विदेशियों के आर्यावर्त में राज्य होने का कारण आपस की फूट मत भेद है जब आपस में भाई भाई लड़ते हैं तभी तीसरा विदेशी आकर पंच बन बैठता है। क्या तुम लोग महा भारत की बातें जो पांच सहस्र वर्ष पूर्व हुई थीं उनको भी भूल गए । आपस की फूट से कौरन पाएडव और यादवों का सत्यानाश होगया सो तो हो गया परन्तु अब तक भी वही रोग पीछे लगा है न जाने यह भयङ्कर राक्षस कभी छूटेगा वा आर्यों को सब सुखों से छुड़ाकर दुःख सागर में दुबा मारेगा ! उसी दुष्ट दुर्योधन गोत्र इत्यारे स्वदेश बिनाशक नीच के 'फूट' दुष्ट मार्ग में आर्य लोग अब तक भी चलकर दुःख बढा रहे हैं परमेश्वर कृपा करे कि यह राज रोग हम आर्यों में से नष्ट हो जाये" यह है दयानन्द का ककरण कन्दन, यह है उसका भार्तविलाप, यह है उसका दुःखभरा रोना । महा भारत काल की फूट से भार्यों के हाथ से सार्वभौम सत्ता चली गई और मध्यकालीन भार्य राजाओं की फूट से भार्यावर्त देश की स्वतन्त्रता नष्ट हुई। अस्तु । इतने दोघं कासीन फूट रोग के ।
कथावाचन के क्षेत्र में जया किशोरी एक बड़ा नाम हैं। उन्हीं की तरह MP कि एक 17 साल की युवती पलक किशोरी ने भी कथावाचन शुरु कर दिया है। बता दें कि पलक किशोरी ने भागवत की पढ़ाई नहीं की है। कथावाचन के क्षेत्र में जया किशोरी एक बड़ा नाम हैं। उन्हीं की तरह MP कि एक 17 साल की युवती पलक किशोरी ने भी कथावाचन शुरु कर दिया है। बता दें कि पलक किशोरी ने भागवत की पढ़ाई नहीं की है, इसके बावजूद वो कथावाचन करती हैं। महज 17 साल की उम्र और 12वीं की छात्रा पलक किशोरी दो भागवत कथाएं और 3 श्रीकृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। बता दें कि उनकी कथा सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ आती है। उनके संगीतमय कथावाचन के लोग दीवाने हैं। कौन हैं पलक किशोरी? पलक किशोरी मध्य प्रदेश के सतना जिले की रहने वाली हैं। सतना शहर के मुख्तियारगंज, महाराणा प्रतापनगर की रहने वाली हैं। वह 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। पलक किशोरी के पिता का नाम संतोष मिश्रा है। माता का नाम अराधना मिश्रा है। वह अब तक दो भागवत कथाएं और 3 कृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। पलक किशोरी मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। पलक किशोरी ने बताया कि जिस तरह जया किशोरी जी भागवत कथा करती हैं और उनके सुविचार आते हैं, उनके वीडियोज देखकर मैं प्रेरित हुई और अब उनके मार्गदर्शन में कथावाचन भी कर रही हैं। पलक किशोरी ने बताया कि उनके भक्तगण उन्हें जया किशोरी कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो जया किशोरी की तरह ही कथा करने लगी हैं। पलक किशोरी ने बताया कि वह मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना आदर्श भी मानती हैं और उनके वीडियोज देखकर सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शैली जया किशोरी से मिलती-जुलती है इसलिए सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जया किशोरी के नाम से ही बुलाते हैं। पलक किशोरी ने बताया कि उन्होंने पहली बार 2021 में नवरात्रि के पर्व पर कथावाचन किया था। नवरात्रि पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक कृष्ण प्रवचन किया था। पलक ने बताया कि वह बचपन से ही कृष्ण भगवान की भक्त हैं और जया किशोरी की वीडियोज देख-देखकर उनसे सीखती रही और आगे बढ़ती रही। पलक ने बताया कि उन्होंने भागवत के लिए कोई प्रोफेशनल पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने कहा लॉकडाउन के दौरान जब लोग घरों में रहते थे तभी वह भी घर में रहकर ही भागवत कथा का अध्ययन करती थीं। उन्होंने बताया कि अध्ययन करते-करते वह कथावाचन करने लगीं। कथावाचिका पलक किशोरी खुद को कृष्ण भगवान का भक्त मानती हैं। वह कहती हैं कि वह लोगों को कृष्ण भगवान के बारे में ज्यादा से ज्यादा बता सकें। इस दौरान उन्होंने एक कथन याद दिलाते हुए कहा कि भगवान कृ्ष्ण कहते हैं यह मत देखो कि दुनिया ने आपको क्या दिया बल्कि यह देखो कि दुनिया को आप क्या दे रहे हो।
कथावाचन के क्षेत्र में जया किशोरी एक बड़ा नाम हैं। उन्हीं की तरह MP कि एक सत्रह साल की युवती पलक किशोरी ने भी कथावाचन शुरु कर दिया है। बता दें कि पलक किशोरी ने भागवत की पढ़ाई नहीं की है। कथावाचन के क्षेत्र में जया किशोरी एक बड़ा नाम हैं। उन्हीं की तरह MP कि एक सत्रह साल की युवती पलक किशोरी ने भी कथावाचन शुरु कर दिया है। बता दें कि पलक किशोरी ने भागवत की पढ़ाई नहीं की है, इसके बावजूद वो कथावाचन करती हैं। महज सत्रह साल की उम्र और बारहवीं की छात्रा पलक किशोरी दो भागवत कथाएं और तीन श्रीकृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। बता दें कि उनकी कथा सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ आती है। उनके संगीतमय कथावाचन के लोग दीवाने हैं। कौन हैं पलक किशोरी? पलक किशोरी मध्य प्रदेश के सतना जिले की रहने वाली हैं। सतना शहर के मुख्तियारगंज, महाराणा प्रतापनगर की रहने वाली हैं। वह बारहवीं कक्षा की छात्रा हैं। पलक किशोरी के पिता का नाम संतोष मिश्रा है। माता का नाम अराधना मिश्रा है। वह अब तक दो भागवत कथाएं और तीन कृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। पलक किशोरी मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। पलक किशोरी ने बताया कि जिस तरह जया किशोरी जी भागवत कथा करती हैं और उनके सुविचार आते हैं, उनके वीडियोज देखकर मैं प्रेरित हुई और अब उनके मार्गदर्शन में कथावाचन भी कर रही हैं। पलक किशोरी ने बताया कि उनके भक्तगण उन्हें जया किशोरी कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो जया किशोरी की तरह ही कथा करने लगी हैं। पलक किशोरी ने बताया कि वह मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना आदर्श भी मानती हैं और उनके वीडियोज देखकर सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शैली जया किशोरी से मिलती-जुलती है इसलिए सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जया किशोरी के नाम से ही बुलाते हैं। पलक किशोरी ने बताया कि उन्होंने पहली बार दो हज़ार इक्कीस में नवरात्रि के पर्व पर कथावाचन किया था। नवरात्रि पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक कृष्ण प्रवचन किया था। पलक ने बताया कि वह बचपन से ही कृष्ण भगवान की भक्त हैं और जया किशोरी की वीडियोज देख-देखकर उनसे सीखती रही और आगे बढ़ती रही। पलक ने बताया कि उन्होंने भागवत के लिए कोई प्रोफेशनल पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने कहा लॉकडाउन के दौरान जब लोग घरों में रहते थे तभी वह भी घर में रहकर ही भागवत कथा का अध्ययन करती थीं। उन्होंने बताया कि अध्ययन करते-करते वह कथावाचन करने लगीं। कथावाचिका पलक किशोरी खुद को कृष्ण भगवान का भक्त मानती हैं। वह कहती हैं कि वह लोगों को कृष्ण भगवान के बारे में ज्यादा से ज्यादा बता सकें। इस दौरान उन्होंने एक कथन याद दिलाते हुए कहा कि भगवान कृ्ष्ण कहते हैं यह मत देखो कि दुनिया ने आपको क्या दिया बल्कि यह देखो कि दुनिया को आप क्या दे रहे हो।
नयी दिल्ली, 30 दिसंबर (एजेंसी) सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (अफस्पा) के तहत अगले छह महीने तक नगालैंड एक 'अशांत क्षेत्र' बना रहेगा क्योंकि राज्य की स्थिति 'खतरनाक' बनी हुई है। इस महीने की शुरुआत में गलत पहचान के कारण 14 आम नागरिकों की मौत के बाद सशस्त्र बलों को प्राप्त विशेष शक्तियां वापस लेने के लिए बढ़ती मांग के बीच केंद्र का यह कदम सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना में कहा कि अफ्सपा के तहत छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र को 30 दिसंबर से बढ़ा दिया गया है। राज्य 1958 से अफ्सपा के अधीन रहा है। अफ्सपा की अवधि में विस्तार केंद्र द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष गोयल को सदस्य-सचिव के रूप में तथा महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किए जाने के तीन दिन बाद आया है।
नयी दिल्ली, तीस दिसंबर सशस्त्र बल अधिनियम के तहत अगले छह महीने तक नगालैंड एक 'अशांत क्षेत्र' बना रहेगा क्योंकि राज्य की स्थिति 'खतरनाक' बनी हुई है। इस महीने की शुरुआत में गलत पहचान के कारण चौदह आम नागरिकों की मौत के बाद सशस्त्र बलों को प्राप्त विशेष शक्तियां वापस लेने के लिए बढ़ती मांग के बीच केंद्र का यह कदम सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना में कहा कि अफ्सपा के तहत छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र को तीस दिसंबर से बढ़ा दिया गया है। राज्य एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन से अफ्सपा के अधीन रहा है। अफ्सपा की अवधि में विस्तार केंद्र द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष गोयल को सदस्य-सचिव के रूप में तथा महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किए जाने के तीन दिन बाद आया है।
मंत्रिमंडल में चित्रकूट धाम मंडल को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। सभी 10 सीटें भाजपा की झोली में डाल देने वाले बाशिंदे इस बात से हैरत में हैं। इस विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से बंपर वोट मिले हैं। यह अपने आप में रिकॉर्ड हैं। फिर भी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की टीम में चित्रकूट धाम मंडल को 'अनाथ' रखा गया है। उधर, झांसी मंडल से भी निर्वाचित विधायकों में सिर्फ महरौनी सीट से मन्नू कोरी को ही राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। सपा, बसपा और कांग्रेस की तमाम लुभावनी घोषणाओं और वादों को नजरअंदाज कर अबकी बुंदेलखंड के बाशिंदों ने भाजपा पर वोटों की बरसात कर दी। सभी सातों जिलों की 19 सीटें भाजपा को सौंप दीं। रिकार्ड तोड़ जीत देने वाले बुंदेली मतदाताओं को भरोसा था कि प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भाजपा उनकी इस दरियादिली का जरूर बदला देते हुए बुंदेलखंड में 'अच्छे दिन' की शुरूआत करेगी। लेकिन रविवार को शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड से मात्र महरौनी सीट से राज्यमंत्री मन्नू कोरी को जगह मिली। गौरतलब है कि सपा सरकार में भी पूरे 5 साल बुंदेलखंड को मंत्रिमंडल से वंचित रखा गया। सपा के 8 विधायक होने के बाद भी किसी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। न ही किसी सपा नेता को 'लालबत्ती' दी गई। क्या हुआ तेरा वादाः बांदा। प्रवास सोसायटी और भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारी आशीष सागर दीक्षित ने भाजपा को वादाखिलाफ और बुंदेलखंड के साथ छल करने वाला बताया है। कहा है कि विधान सभा चुनाव के दौरान झांसी में केंद्रीय मंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमाभारती ने जनसभा में कहा था कि झांसी सीट से भाजपा प्रत्याशी रवि शर्मा जीते तो उन्हें प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। श्री शर्मा सीनियर लीडर हैं। फिर भी उन्हें शामिल नहीं किया गया। वादा झूठा रहा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मंत्रिमंडल में चित्रकूट धाम मंडल को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। सभी दस सीटें भाजपा की झोली में डाल देने वाले बाशिंदे इस बात से हैरत में हैं। इस विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से बंपर वोट मिले हैं। यह अपने आप में रिकॉर्ड हैं। फिर भी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की टीम में चित्रकूट धाम मंडल को 'अनाथ' रखा गया है। उधर, झांसी मंडल से भी निर्वाचित विधायकों में सिर्फ महरौनी सीट से मन्नू कोरी को ही राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। सपा, बसपा और कांग्रेस की तमाम लुभावनी घोषणाओं और वादों को नजरअंदाज कर अबकी बुंदेलखंड के बाशिंदों ने भाजपा पर वोटों की बरसात कर दी। सभी सातों जिलों की उन्नीस सीटें भाजपा को सौंप दीं। रिकार्ड तोड़ जीत देने वाले बुंदेली मतदाताओं को भरोसा था कि प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भाजपा उनकी इस दरियादिली का जरूर बदला देते हुए बुंदेलखंड में 'अच्छे दिन' की शुरूआत करेगी। लेकिन रविवार को शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड से मात्र महरौनी सीट से राज्यमंत्री मन्नू कोरी को जगह मिली। गौरतलब है कि सपा सरकार में भी पूरे पाँच साल बुंदेलखंड को मंत्रिमंडल से वंचित रखा गया। सपा के आठ विधायक होने के बाद भी किसी को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। न ही किसी सपा नेता को 'लालबत्ती' दी गई। क्या हुआ तेरा वादाः बांदा। प्रवास सोसायटी और भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारी आशीष सागर दीक्षित ने भाजपा को वादाखिलाफ और बुंदेलखंड के साथ छल करने वाला बताया है। कहा है कि विधान सभा चुनाव के दौरान झांसी में केंद्रीय मंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमाभारती ने जनसभा में कहा था कि झांसी सीट से भाजपा प्रत्याशी रवि शर्मा जीते तो उन्हें प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। श्री शर्मा सीनियर लीडर हैं। फिर भी उन्हें शामिल नहीं किया गया। वादा झूठा रहा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Samsung Galaxy M54 5G Launch Date : सैमसंग जल्द ही अपने नवीनतम हैंडसेट के रूप में Galaxy M54 5G को लांच कर सकता है। डिवाइस एक मिड रेंज स्मार्टफोन के रूप में लांच होगा जिसकी कीमत 30,000 रुपये से कम होगी। Samsung Galaxy M54 5G Price And Specifications : दक्षिण कोरियाई फोन निर्माता कंपनी Samsung अपने Galaxy M53 5G स्मार्टफोन के अगले मॉडल Galaxy M54 5G का जल्द ही अनावरण कर सकती है। फिलहाल फोन निर्माता ने आगामी स्मार्टफोन के लॉन्चिंग तिथि तथा स्पेसिफिकेशंस को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की है। हालांकि, इस डिवाइस के लांच होने से पहले ही इसके स्पेसिफिकेशन से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आ चुकी हैं। हाल ही में आए कुछ रिपोर्ट के मुताबिक आगामी स्मार्टफोन एक मिड रेंज सेगमेंट का डिवाइस होगा जो क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 888 चिपसेट द्वारा संचालित होगा। कहा जा रहा है कि, गैलेक्सी M54 5G की कीमत अपने पूर्ववर्ती की सीमा के करीब होने की उम्मीद है, जो लगभग 30,000 रुपये है। आइए जानते हैं आगामी स्मार्टफोन के संभावित कीमत तथा स्पेसिफिकेशंस के बारे में संपूर्ण जानकारी। Samsung Galaxy M54 5G स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन को लेकर फिलहाल कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि इससे जुड़े लीक रिपोर्ट्स यह संकेत देते हैं कि सैमसंग का अपकमिंग स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 888 चिपसेट के साथ आएगा। द पिक्सेल नामक एक YouTube चैनल के माध्यम से इंटरनेट पर प्रसारित नई जानकारी के अनुसार, आगामी सैमसंग गैलेक्सी M54 5G एक स्नैपड्रैगन 888 SoC के साथ आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक आगामी स्मार्टफोन एक मिड रेंज सेगमेंट के रूप में लांच किया जाएगा, जिसकी अधिकतम कीमत 30,000 रुपये के आसपास हो सकती है। आगामी स्मार्टफोन का स्नैपड्रैगन 888 SoC 8GB रैम और 256GB तक की इंटरनल स्टोरेज के साथ जुड़ा होगा। इस प्रोसेसर के साथ आप इस स्मार्टफोन पर बड़े आसानी से हैवी एप्स को संचालित कर सकेंगे और मल्टीटास्किंग करने के दौरान भी आपको कोई दिक्कत नहीं महसूस होगी। इसके अलावा, गैलेक्सी M54 5G को 6. 7-इंच AMOLED डिस्प्ले के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आने के लिए कहा गया है। डिस्प्ले सेटअप के साथ फिल्म देखने तथा गेम खेलने के दौरान एक बेहतर कलर कॉन्बिनेशन वाला स्मूथ ग्राफिक एक्सपीरियंस आपको प्राप्त होगा। Samsung Galaxy M54 5G स्मार्टफोन की बैटरी में भी सुधार होने की उम्मीद है यानी 6,000mAh की बड़ी सेल। यह बैटरी सेटअप एक फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा जिसके साथ आप बैकअप की चिंता किए बगैर काफी लंबे वक्त तक फोन का इस्तेमाल फिल्म देखने, कॉल करने, फोटो क्लिक करने, म्यूजिक सुनने समेत कई अन्य कामों के लिए कर सकते हैं। सैमसंग का आगामी स्मार्टफोन ऑप्टिक्स के मोर्चे पर भी काफी ज्यादा बेहतरीन होगा। गौरतलब है कि M53 5G में 108MP का क्वाड-कैमरा सिस्टम है, जो हमें बताता है कि इस बार इसमें सुधार किया जाएगा। हालाँकि, YouTube चैनल के अनुसार, इसमें 64MP ट्रिपल कैमरा सिस्टम होगा। आगे की तरफ, सेल्फी के लिए 32MP का स्नैपर होने की उम्मीद है। बता दें फिलहाल स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन को लेकर कंपनी की ओर से कोई जानकारी साझा नहीं की गई है यह सभी जानकारियां केवल लीक रिपोर्ट्स के आधार पर ही बताई जा रही हैं। एम-सीरीज़ के सैमसंग फोन बजट रेंज से शुरू होते हैं और मिड-रेंज सेगमेंट में खत्म होते हैं। गैलेक्सी M53 5G वर्तमान में 8GB रैम वैरिएंट के लिए 24,999 रुपये और 6GB रैम वैरिएंट के लिए 21,999 रुपये में बिक रहा है। रिपोर्ट के अनुसार आगामी डिवाइस अधिकतम सीमा 30,000 रुपये तक आती है। अगर रिपोर्ट्स पर विश्वास किया जाए, तो स्नैपड्रैगन 888 SoC के साथ गैलेक्सी M54 5G इस प्राइस सेगमेंट के लिए एक बेहतरीन डिवाइस होगा।
Samsung Galaxy Mचौवन पाँचG Launch Date : सैमसंग जल्द ही अपने नवीनतम हैंडसेट के रूप में Galaxy Mचौवन पाँचG को लांच कर सकता है। डिवाइस एक मिड रेंज स्मार्टफोन के रूप में लांच होगा जिसकी कीमत तीस,शून्य रुपयापये से कम होगी। Samsung Galaxy Mचौवन पाँचG Price And Specifications : दक्षिण कोरियाई फोन निर्माता कंपनी Samsung अपने Galaxy Mतिरेपन पाँचG स्मार्टफोन के अगले मॉडल Galaxy Mचौवन पाँचG का जल्द ही अनावरण कर सकती है। फिलहाल फोन निर्माता ने आगामी स्मार्टफोन के लॉन्चिंग तिथि तथा स्पेसिफिकेशंस को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की है। हालांकि, इस डिवाइस के लांच होने से पहले ही इसके स्पेसिफिकेशन से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आ चुकी हैं। हाल ही में आए कुछ रिपोर्ट के मुताबिक आगामी स्मार्टफोन एक मिड रेंज सेगमेंट का डिवाइस होगा जो क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी चिपसेट द्वारा संचालित होगा। कहा जा रहा है कि, गैलेक्सी Mचौवन पाँचG की कीमत अपने पूर्ववर्ती की सीमा के करीब होने की उम्मीद है, जो लगभग तीस,शून्य रुपयापये है। आइए जानते हैं आगामी स्मार्टफोन के संभावित कीमत तथा स्पेसिफिकेशंस के बारे में संपूर्ण जानकारी। Samsung Galaxy Mचौवन पाँचG स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन को लेकर फिलहाल कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि इससे जुड़े लीक रिपोर्ट्स यह संकेत देते हैं कि सैमसंग का अपकमिंग स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी चिपसेट के साथ आएगा। द पिक्सेल नामक एक YouTube चैनल के माध्यम से इंटरनेट पर प्रसारित नई जानकारी के अनुसार, आगामी सैमसंग गैलेक्सी Mचौवन पाँचG एक स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी SoC के साथ आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक आगामी स्मार्टफोन एक मिड रेंज सेगमेंट के रूप में लांच किया जाएगा, जिसकी अधिकतम कीमत तीस,शून्य रुपयापये के आसपास हो सकती है। आगामी स्मार्टफोन का स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी SoC आठGB रैम और दो सौ छप्पनGB तक की इंटरनल स्टोरेज के साथ जुड़ा होगा। इस प्रोसेसर के साथ आप इस स्मार्टफोन पर बड़े आसानी से हैवी एप्स को संचालित कर सकेंगे और मल्टीटास्किंग करने के दौरान भी आपको कोई दिक्कत नहीं महसूस होगी। इसके अलावा, गैलेक्सी Mचौवन पाँचG को छः. सात-इंच AMOLED डिस्प्ले के साथ एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ आने के लिए कहा गया है। डिस्प्ले सेटअप के साथ फिल्म देखने तथा गेम खेलने के दौरान एक बेहतर कलर कॉन्बिनेशन वाला स्मूथ ग्राफिक एक्सपीरियंस आपको प्राप्त होगा। Samsung Galaxy Mचौवन पाँचG स्मार्टफोन की बैटरी में भी सुधार होने की उम्मीद है यानी छः,शून्यmAh की बड़ी सेल। यह बैटरी सेटअप एक फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा जिसके साथ आप बैकअप की चिंता किए बगैर काफी लंबे वक्त तक फोन का इस्तेमाल फिल्म देखने, कॉल करने, फोटो क्लिक करने, म्यूजिक सुनने समेत कई अन्य कामों के लिए कर सकते हैं। सैमसंग का आगामी स्मार्टफोन ऑप्टिक्स के मोर्चे पर भी काफी ज्यादा बेहतरीन होगा। गौरतलब है कि Mतिरेपन पाँचG में एक सौ आठMP का क्वाड-कैमरा सिस्टम है, जो हमें बताता है कि इस बार इसमें सुधार किया जाएगा। हालाँकि, YouTube चैनल के अनुसार, इसमें चौंसठMP ट्रिपल कैमरा सिस्टम होगा। आगे की तरफ, सेल्फी के लिए बत्तीसMP का स्नैपर होने की उम्मीद है। बता दें फिलहाल स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन को लेकर कंपनी की ओर से कोई जानकारी साझा नहीं की गई है यह सभी जानकारियां केवल लीक रिपोर्ट्स के आधार पर ही बताई जा रही हैं। एम-सीरीज़ के सैमसंग फोन बजट रेंज से शुरू होते हैं और मिड-रेंज सेगमेंट में खत्म होते हैं। गैलेक्सी Mतिरेपन पाँचG वर्तमान में आठGB रैम वैरिएंट के लिए चौबीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये और छःGB रैम वैरिएंट के लिए इक्कीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में बिक रहा है। रिपोर्ट के अनुसार आगामी डिवाइस अधिकतम सीमा तीस,शून्य रुपयापये तक आती है। अगर रिपोर्ट्स पर विश्वास किया जाए, तो स्नैपड्रैगन आठ सौ अठासी SoC के साथ गैलेक्सी Mचौवन पाँचG इस प्राइस सेगमेंट के लिए एक बेहतरीन डिवाइस होगा।
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सोमवार को दिल्ली पहुंचे, जहा उन्होंने उद्यमियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री पत्रकारों से रूबरू हुए। पत्रकारों के सवालों जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि रोहतक मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में होगी, गुरुग्राम मामले में भी उन्होंने कहा की इस तरह के घिनोने अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा, जल्द दोषियों को उनके किये की सज़ा मिलेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली में उद्यमियों के साथ बैठक की। बैठक के उपरान्त उन्होंने अपने तीन दिवसीय सिंगापुर और हांगकांग दौरे की जानकारी दी। सीएम ने बताया कि इस दौरे का मकसद हरियाणा में ज्यादा से जयादा निवेश बढ़ाने का है।
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सोमवार को दिल्ली पहुंचे, जहा उन्होंने उद्यमियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री पत्रकारों से रूबरू हुए। पत्रकारों के सवालों जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि रोहतक मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में होगी, गुरुग्राम मामले में भी उन्होंने कहा की इस तरह के घिनोने अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा, जल्द दोषियों को उनके किये की सज़ा मिलेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली में उद्यमियों के साथ बैठक की। बैठक के उपरान्त उन्होंने अपने तीन दिवसीय सिंगापुर और हांगकांग दौरे की जानकारी दी। सीएम ने बताया कि इस दौरे का मकसद हरियाणा में ज्यादा से जयादा निवेश बढ़ाने का है।
मारवाड़ के ग्राम गोत भँवर म्हाने खेलण दो गनगोर ॥ ६ ॥ पगलों में पायल लाय भँवर म्हारे पगलों नां पायल लाय । हांजी म्हारा बिछीया रतन जड़ाय भँवर म्हाने खेलण दो गणगौर विलाला म्हाने रमण दो दिन घार ॥ १० ॥ उपरोक्त त्यौहार के सम्बन्ध का यह भी गौत है। इसमें स्त्री अपने पति को विदेश जाने से घसन्त ऋतु तक के लिये रोकती है : म्हारे माथा ने महिमद ल्याव म्हारा ह जा मारू ईयां ही रेवो जो ईहांही रहो उगंता सूरज इंहा हो रेवो जी धाने कोट बूंदी मे होसी गणगौर म्हारां हंजा मारू ईहां ही रेवो जो ॥ १ ॥ जावा दो छिपगारी नार जावा दो ना ए म्हारां साथीड़ा उभा दरबार जावा दो ना ऐ ॥ २ ॥ म्हारे / काना ने कुण्डल ल्याव म्हारा म्हारां हंजा मारू ईयांही रेवो जी इंहा ही रेवो उगंता तायत, ईहाही रेवो जी थाने रसता में होसी गणगोर म्हारे गलै ने कंठी ल्याव महारां हंजा मारू ईहांही रेवो जी ईहाँही रेवो उगता सूरज इंहा ही रेवो जी । म्हारी पायां ने बाजुबन्द ल्याव म्हारा हंजा मारू ईहां ही रेवो जी ॥ म्हारे पंचां ने गजरा त्याव म्हारा हंजा मारू इंघा ही रेथो जी । म्हारी होली रा कर गया कौल हंजा मारू इहा हो रेवो जी । जावा दो छिएगारी नार जावा दो ना जो धानें आय पुजावां गणगोर म्हारी मिरधानेणी जावा दो ना ए । भारवाड के ग्राम गोत पान मारू साधण की बहार है और नायक बीकानेर नौकरी पर गया है । युवती मारवाड में बैठी उसके विरह में टकटकी लगाये हुवे यह गीत गाती है :कृण धानें घाला चालियां हो, पना मारुजी हो किए थानें दीवी रे ढोला सीख सीख हो पिया प्यारी रा ढोला जी हो हां रे सावणियो विलूव्यो रे बीकानेर ॥ १ ॥ साथीड़ा तो चालिया सुन्दर गौरी जी हो, राजाजी म्हाने दीवी है सीख प्यारी सीग्व, सीख हो मृगानैपीजी हो । हां रे सावणियो विलूव्यो रे बीकानेर ॥ २ ॥ साथीड़ा रे हुईजो फांणी बेटियां हो पना मारूजी हो राजाजी री बधजो रे बेल बेल हो म्हारा ढोला मारूजी हो हो सावणियो विलूम्यो रे विलूम्यो रे थीकानेर ॥ ३ ॥ चढ़ो तो सजाऊं ढोला करहलो हो डोलाजी हो पोढो तो विधाऊँ सेज
मारवाड़ के ग्राम गोत भँवर म्हाने खेलण दो गनगोर ॥ छः ॥ पगलों में पायल लाय भँवर म्हारे पगलों नां पायल लाय । हांजी म्हारा बिछीया रतन जड़ाय भँवर म्हाने खेलण दो गणगौर विलाला म्हाने रमण दो दिन घार ॥ दस ॥ उपरोक्त त्यौहार के सम्बन्ध का यह भी गौत है। इसमें स्त्री अपने पति को विदेश जाने से घसन्त ऋतु तक के लिये रोकती है : म्हारे माथा ने महिमद ल्याव म्हारा ह जा मारू ईयां ही रेवो जो ईहांही रहो उगंता सूरज इंहा हो रेवो जी धाने कोट बूंदी मे होसी गणगौर म्हारां हंजा मारू ईहां ही रेवो जो ॥ एक ॥ जावा दो छिपगारी नार जावा दो ना ए म्हारां साथीड़ा उभा दरबार जावा दो ना ऐ ॥ दो ॥ म्हारे / काना ने कुण्डल ल्याव म्हारा म्हारां हंजा मारू ईयांही रेवो जी इंहा ही रेवो उगंता तायत, ईहाही रेवो जी थाने रसता में होसी गणगोर म्हारे गलै ने कंठी ल्याव महारां हंजा मारू ईहांही रेवो जी ईहाँही रेवो उगता सूरज इंहा ही रेवो जी । म्हारी पायां ने बाजुबन्द ल्याव म्हारा हंजा मारू ईहां ही रेवो जी ॥ म्हारे पंचां ने गजरा त्याव म्हारा हंजा मारू इंघा ही रेथो जी । म्हारी होली रा कर गया कौल हंजा मारू इहा हो रेवो जी । जावा दो छिएगारी नार जावा दो ना जो धानें आय पुजावां गणगोर म्हारी मिरधानेणी जावा दो ना ए । भारवाड के ग्राम गोत पान मारू साधण की बहार है और नायक बीकानेर नौकरी पर गया है । युवती मारवाड में बैठी उसके विरह में टकटकी लगाये हुवे यह गीत गाती है :कृण धानें घाला चालियां हो, पना मारुजी हो किए थानें दीवी रे ढोला सीख सीख हो पिया प्यारी रा ढोला जी हो हां रे सावणियो विलूव्यो रे बीकानेर ॥ एक ॥ साथीड़ा तो चालिया सुन्दर गौरी जी हो, राजाजी म्हाने दीवी है सीख प्यारी सीग्व, सीख हो मृगानैपीजी हो । हां रे सावणियो विलूव्यो रे बीकानेर ॥ दो ॥ साथीड़ा रे हुईजो फांणी बेटियां हो पना मारूजी हो राजाजी री बधजो रे बेल बेल हो म्हारा ढोला मारूजी हो हो सावणियो विलूम्यो रे विलूम्यो रे थीकानेर ॥ तीन ॥ चढ़ो तो सजाऊं ढोला करहलो हो डोलाजी हो पोढो तो विधाऊँ सेज
PATNA : चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने की राह पर निकल चुके प्रशांत किशोर के निशाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने अब अपनी जन सुराज यात्रा के दौरान लालू यादव की चर्चा की है। दरअसल, प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा का आज 50 वां दिन था। प्रशांत किशोर पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर से अरेराज पहुंचे और इसी दौरान उन्होंने लालू यादव की चर्चा की। प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू यादव ने कमजोरों को आवाज दी लेकिन यह आवाज केवल लालू यादव के लिए नारेबाजी में ही व्यस्त रह गई। लालू यादव कमजोर और पिछड़े तबके के लोगों को शिक्षा मुहैया नहीं करा पाए। प्रशांत किशोर ने लालू यादव की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बिहार में लालू ने सामाजिक न्याय के नाम पर समाज को आवाज दी लेकिन उनको शिक्षा मुहैया नहीं करा पाए। लालू अगर लोगों को शिक्षा भी मुहैया करा देते तो बिहार में बड़ा बदलाव हो जाता। जिस समाज को लालू यादव ने आवाज दी वह उनके समर्थन में नारे तो लगा सकता है लेकिन उनकी बराबरी में कभी बैठ नहीं सकता था। इतना ही नहीं प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की भी आज जन सुराज यात्रा के दौरान चर्चा की। पीके ने कहा कि नीतीश कुमार पेंडुलम की तरह बिहार की राजनीति में झूल रहे हैं। कभी कमल तो कभी लालटेन के बीच झूलते नीतीश ने बिहार की किस्मत खराब कर दी है। प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार जब लालटेन के साथ थे और जनता ने उन्हें वोट दिया तो वह जाकर बीजेपी में मिल गए और जब बीजेपी के साथ थे, जनता ने उन्हें वोट दिया तो लालटेन की तरफ जा पहुंचे। पीके ने लोगों से अपील की कि ऐसे लोगों को वोट ना दें जो अपना पाला बदल लेते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में शराबबंदी की वजह से नीतीश कुमार बिहार की जनता से यूपी के मुकाबले डीजल में हर लीटर 9 रुपए ज्यादा वसूल रहें हैं। पीके ने कहा कि मोदी जी आपसे पेट्रोल का दाम सौ रुपए लेते हैं, लेकिन बिहार में आपको पेट्रोल पर 13 रुपए प्रति लीटर ज्यादा देने पड़ते हैं। इसपे नीतीश जी का तर्क है कि शराबबंदी की वजह से ये बढ़े हुए दामों का असर जनता की जेबों पर पड़ रहा है और वो भी तब जब बिहार में शराब की धड़ाके से होम डिलीवरी हो रही है। जब बिहार में शराबबंदी पूरी तरह से विफल है उसके बावजूद लोगों को शराबबंदी का हर्जाना पेट्रोल-डीजल की ज्यादा कीमत देकर चुकानी पड़ रही है।
PATNA : चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने की राह पर निकल चुके प्रशांत किशोर के निशाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे हैं, लेकिन प्रशांत किशोर ने अब अपनी जन सुराज यात्रा के दौरान लालू यादव की चर्चा की है। दरअसल, प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा का आज पचास वां दिन था। प्रशांत किशोर पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर से अरेराज पहुंचे और इसी दौरान उन्होंने लालू यादव की चर्चा की। प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू यादव ने कमजोरों को आवाज दी लेकिन यह आवाज केवल लालू यादव के लिए नारेबाजी में ही व्यस्त रह गई। लालू यादव कमजोर और पिछड़े तबके के लोगों को शिक्षा मुहैया नहीं करा पाए। प्रशांत किशोर ने लालू यादव की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बिहार में लालू ने सामाजिक न्याय के नाम पर समाज को आवाज दी लेकिन उनको शिक्षा मुहैया नहीं करा पाए। लालू अगर लोगों को शिक्षा भी मुहैया करा देते तो बिहार में बड़ा बदलाव हो जाता। जिस समाज को लालू यादव ने आवाज दी वह उनके समर्थन में नारे तो लगा सकता है लेकिन उनकी बराबरी में कभी बैठ नहीं सकता था। इतना ही नहीं प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की भी आज जन सुराज यात्रा के दौरान चर्चा की। पीके ने कहा कि नीतीश कुमार पेंडुलम की तरह बिहार की राजनीति में झूल रहे हैं। कभी कमल तो कभी लालटेन के बीच झूलते नीतीश ने बिहार की किस्मत खराब कर दी है। प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार जब लालटेन के साथ थे और जनता ने उन्हें वोट दिया तो वह जाकर बीजेपी में मिल गए और जब बीजेपी के साथ थे, जनता ने उन्हें वोट दिया तो लालटेन की तरफ जा पहुंचे। पीके ने लोगों से अपील की कि ऐसे लोगों को वोट ना दें जो अपना पाला बदल लेते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में शराबबंदी की वजह से नीतीश कुमार बिहार की जनता से यूपी के मुकाबले डीजल में हर लीटर नौ रुपयापए ज्यादा वसूल रहें हैं। पीके ने कहा कि मोदी जी आपसे पेट्रोल का दाम सौ रुपए लेते हैं, लेकिन बिहार में आपको पेट्रोल पर तेरह रुपयापए प्रति लीटर ज्यादा देने पड़ते हैं। इसपे नीतीश जी का तर्क है कि शराबबंदी की वजह से ये बढ़े हुए दामों का असर जनता की जेबों पर पड़ रहा है और वो भी तब जब बिहार में शराब की धड़ाके से होम डिलीवरी हो रही है। जब बिहार में शराबबंदी पूरी तरह से विफल है उसके बावजूद लोगों को शराबबंदी का हर्जाना पेट्रोल-डीजल की ज्यादा कीमत देकर चुकानी पड़ रही है।
FactCheck : पीआईबी ने अपने ट्विटर हैंडिल से ट्वीट करके इसे अफवाह बताया है. Fact Check : कोरोना महामारी के चलते देश में दोबारा लॉक डाउन लगने के साथ स्कूल और कॉलेज भी फिर से बंद हो जाएंगे. 15 दिन के लिए स्कूल-कॉलेज बंद होने की घोषणा की जा रही है. ऐसा दावा सोशल मीडिया सहित कई वेबसाइट्स पर भी किया जा रहा है. आपने भी इन खबरों पर यकीन किया है तो सतर्क हो जाएं. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी ने ऐसी खबरों का फैक्ट चेक किया है. पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में बताया है कि लॉकडाउन और स्कूल-कॉलेज बंद होने की खबरें अफवाह हैं. इस आशय की खबरों में कोई सत्यता नहीं है. पीआईबी ने अपने ट्विटर हैंडिल से एक ट्वीट किया है. ट्वीट में कहा है, सोशल मीडिया पर कई खबरों को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कोविड-19 के कारण देश में लॉक डाउन लगेगा और स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे. ये सभी दावे फर्जी हैं. कोविड से जुड़ी ऐसी किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले फैक्ट चेक जरूर करें. स्कूलों-कॉलेजों में 15 दिन छुट्टी रहने की बात को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. दरअसल उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में कड़ाके की ठंड के चलते शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है. यह अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा. लेकिन झूठी खबरों में शीतकालीन अवकाश की बजाए इसे कोरोना महामारी के चलते बताया जा रहा है. .
FactCheck : पीआईबी ने अपने ट्विटर हैंडिल से ट्वीट करके इसे अफवाह बताया है. Fact Check : कोरोना महामारी के चलते देश में दोबारा लॉक डाउन लगने के साथ स्कूल और कॉलेज भी फिर से बंद हो जाएंगे. पंद्रह दिन के लिए स्कूल-कॉलेज बंद होने की घोषणा की जा रही है. ऐसा दावा सोशल मीडिया सहित कई वेबसाइट्स पर भी किया जा रहा है. आपने भी इन खबरों पर यकीन किया है तो सतर्क हो जाएं. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी ने ऐसी खबरों का फैक्ट चेक किया है. पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में बताया है कि लॉकडाउन और स्कूल-कॉलेज बंद होने की खबरें अफवाह हैं. इस आशय की खबरों में कोई सत्यता नहीं है. पीआईबी ने अपने ट्विटर हैंडिल से एक ट्वीट किया है. ट्वीट में कहा है, सोशल मीडिया पर कई खबरों को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कोविड-उन्नीस के कारण देश में लॉक डाउन लगेगा और स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे. ये सभी दावे फर्जी हैं. कोविड से जुड़ी ऐसी किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले फैक्ट चेक जरूर करें. स्कूलों-कॉलेजों में पंद्रह दिन छुट्टी रहने की बात को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. दरअसल उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में कड़ाके की ठंड के चलते शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है. यह अवकाश इकतीस दिसंबर से चौदह जनवरी तक रहेगा. लेकिन झूठी खबरों में शीतकालीन अवकाश की बजाए इसे कोरोना महामारी के चलते बताया जा रहा है. .
चना का काम बिलकुल सहज हो जाता है। परन्तु सक्ति और ईर्ष्या दोनो से परे होकर केवल कर्त्तव्य बुद्धि से की हुई सात्विक समाचोलना लिखने मे जो कठिनाई हुआ करती है, उसका अनुभव केवल लोग कर सकते हैं जिन्होने ऐसी राग-द्वेष-विमुक्त आलोचना कभी की हो । वर्त्तमान हिन्दी - साहित्य मे ऐसी पक्षपातरहित वैज्ञानिक आलोचनां कम देखने में आती है। " नीचे की पंक्तियों में समालोचक जौहरी के रूप में प्रस्तुत किया गया हैःव "जौहरी दो काम करता है । जब अन्य मनुष्य कोई मूल्यवान् पत्थर वेचने को लाता है तब उसकी जॉच पडताल करता है और गुण-दोष दोनों को देखता है । यद्यपि मूल्य घटाने के लिए बहुधा दोषों का ही वर्णन करता है, पर स्मरण रहे कि जो मूल्य वह देता है वह गुणों का, जिससे प्रकट होता है कि गुण-ग्राहक है। कभी-कभी वह अपनी दूकान से और बढ़िया नगीना लेकर मुकाबला करने लगता है कहता है कि देखो, अमुक गुण जो मेरे नगीने मे है, तुम्हारे में नही है और मुक दोष जो तुम्हारे में है, मेरे मे नहीं है । यह तो हुआ खरीदते समय का काम । दूसरा काम होता है बेचते समय का जब वह तारीफ के पुल बाँधता हुआ अपनगीने के दोषो को छिपाता है।" समालोचक का काम इस जौहरी के जौहरी का काम मौखिक है, जिसमे पकड वह मूल्यवान पत्थर मोल लेते समय दोप- बाहुल्य प्रशंसाधिक्य का प्रदर्शन कर सकता है । किन्तु समालोचक तो अपनी पुस्तक मे एक जगह जो कुछ लिख देगा, चाहे वह निन्दा हो चाहे प्रशंसा, उसके लिए वह सम्पूर्ण ससार के सामने सदा के लिए द्ध हो जायगा । अतएव समालोचक उक्त जौहरी की नीति से काम नही कर सकता । गुगजा का काव्य-भारा के उपासक हो तो हमें दो रूप धारण करने की आवश्यकता नहीं और पर का भगवा राजनीति में भले ही उठाया जा सके, किन्तु शुरु साहित्यिक कृति मे हमें अपने पाठक को वा प्रयाग और काशी का निवासी हो, अथवा पेरिस या लन्दन का-~-अपने से भिन्न न समभना चाहिए। अँगरेजी की प्रोपेगैडा की नीति को अपनाकर यदि हमने अपने साहित्य क्षेत्र में मकीर्ण स्वदेशी नीति का अनुसरण किया, तो जिनने यश में हमारे कार्य में मिथ्या और कृतिम तत्वों का समावेश होगा उतने ऋशों में वह हमारे लिये घातक होगा । अनेक पत्रकारों के सहयोग से जो प्रसाद श्रद्धेय हरिौंध जी को वृद्धावस्था में प्राप्त हुआ है वह 'उद्भट' आदि समालोचकों की कृपा से बाबू मैथिलीशरण गुप्त को युवाकाल ही में उपलब्ध हो चुका । गुमजी के लिए यह अच्छा ही हुआ; क्योकि तरुण वय मे प्रहार सहन की शक्ति भी अधिक रहती है; यद्यपि क्रोध के कारण स्थिरता के हाथ से निकल जाने की आशा भी बनी रहती है । सन्तोष की बात है कि गुप्तजी ने समालोचनाओं के दूषित शों से भी प्रायः प्रभावित रह जाने का अपना है, उन्हें अपनी मौत आप मरने के लिए करके, तथा निरपेक्ष भाव से अपना काम ज्यों का त्यों ही नहीं, दुगुने, तिगुने उत्साह से करते रह कर अपने गौरव की वृद्धि की है। किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि प्रायः अद्ध सत्य ही पर याश्रित रहने वाली आलोचनाओं ने उनके सम्बन्ध मे हिन्दी - ससार में बहुत अधिक गलतफहमी फैला दी है, जो थोड़े समय से कम तो हुई है, किन्तु बिलकुल मिटी नहीं । जिस समाज में लोक-मत का प्रभाव होता है, उसमे भेड़ियाधसान की प्रवृत्ति ही अधिक देखी जाती है । इसका स्वाभाविक परिणाम यह है कि उनके सम्बन्ध मे दो मत एक दूसरे के उतने ही विरोधी हो गये हैं जितने विरोधी छत्तीस के तीन और छः होते हैं$
चना का काम बिलकुल सहज हो जाता है। परन्तु सक्ति और ईर्ष्या दोनो से परे होकर केवल कर्त्तव्य बुद्धि से की हुई सात्विक समाचोलना लिखने मे जो कठिनाई हुआ करती है, उसका अनुभव केवल लोग कर सकते हैं जिन्होने ऐसी राग-द्वेष-विमुक्त आलोचना कभी की हो । वर्त्तमान हिन्दी - साहित्य मे ऐसी पक्षपातरहित वैज्ञानिक आलोचनां कम देखने में आती है। " नीचे की पंक्तियों में समालोचक जौहरी के रूप में प्रस्तुत किया गया हैःव "जौहरी दो काम करता है । जब अन्य मनुष्य कोई मूल्यवान् पत्थर वेचने को लाता है तब उसकी जॉच पडताल करता है और गुण-दोष दोनों को देखता है । यद्यपि मूल्य घटाने के लिए बहुधा दोषों का ही वर्णन करता है, पर स्मरण रहे कि जो मूल्य वह देता है वह गुणों का, जिससे प्रकट होता है कि गुण-ग्राहक है। कभी-कभी वह अपनी दूकान से और बढ़िया नगीना लेकर मुकाबला करने लगता है कहता है कि देखो, अमुक गुण जो मेरे नगीने मे है, तुम्हारे में नही है और मुक दोष जो तुम्हारे में है, मेरे मे नहीं है । यह तो हुआ खरीदते समय का काम । दूसरा काम होता है बेचते समय का जब वह तारीफ के पुल बाँधता हुआ अपनगीने के दोषो को छिपाता है।" समालोचक का काम इस जौहरी के जौहरी का काम मौखिक है, जिसमे पकड वह मूल्यवान पत्थर मोल लेते समय दोप- बाहुल्य प्रशंसाधिक्य का प्रदर्शन कर सकता है । किन्तु समालोचक तो अपनी पुस्तक मे एक जगह जो कुछ लिख देगा, चाहे वह निन्दा हो चाहे प्रशंसा, उसके लिए वह सम्पूर्ण ससार के सामने सदा के लिए द्ध हो जायगा । अतएव समालोचक उक्त जौहरी की नीति से काम नही कर सकता । गुगजा का काव्य-भारा के उपासक हो तो हमें दो रूप धारण करने की आवश्यकता नहीं और पर का भगवा राजनीति में भले ही उठाया जा सके, किन्तु शुरु साहित्यिक कृति मे हमें अपने पाठक को वा प्रयाग और काशी का निवासी हो, अथवा पेरिस या लन्दन का-~-अपने से भिन्न न समभना चाहिए। अँगरेजी की प्रोपेगैडा की नीति को अपनाकर यदि हमने अपने साहित्य क्षेत्र में मकीर्ण स्वदेशी नीति का अनुसरण किया, तो जिनने यश में हमारे कार्य में मिथ्या और कृतिम तत्वों का समावेश होगा उतने ऋशों में वह हमारे लिये घातक होगा । अनेक पत्रकारों के सहयोग से जो प्रसाद श्रद्धेय हरिौंध जी को वृद्धावस्था में प्राप्त हुआ है वह 'उद्भट' आदि समालोचकों की कृपा से बाबू मैथिलीशरण गुप्त को युवाकाल ही में उपलब्ध हो चुका । गुमजी के लिए यह अच्छा ही हुआ; क्योकि तरुण वय मे प्रहार सहन की शक्ति भी अधिक रहती है; यद्यपि क्रोध के कारण स्थिरता के हाथ से निकल जाने की आशा भी बनी रहती है । सन्तोष की बात है कि गुप्तजी ने समालोचनाओं के दूषित शों से भी प्रायः प्रभावित रह जाने का अपना है, उन्हें अपनी मौत आप मरने के लिए करके, तथा निरपेक्ष भाव से अपना काम ज्यों का त्यों ही नहीं, दुगुने, तिगुने उत्साह से करते रह कर अपने गौरव की वृद्धि की है। किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि प्रायः अद्ध सत्य ही पर याश्रित रहने वाली आलोचनाओं ने उनके सम्बन्ध मे हिन्दी - ससार में बहुत अधिक गलतफहमी फैला दी है, जो थोड़े समय से कम तो हुई है, किन्तु बिलकुल मिटी नहीं । जिस समाज में लोक-मत का प्रभाव होता है, उसमे भेड़ियाधसान की प्रवृत्ति ही अधिक देखी जाती है । इसका स्वाभाविक परिणाम यह है कि उनके सम्बन्ध मे दो मत एक दूसरे के उतने ही विरोधी हो गये हैं जितने विरोधी छत्तीस के तीन और छः होते हैं$
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए किस राज्य सरकार ने "नाईट वाक" का आयोजन करने का निर्णय लिया है? केरल महिला व बाल विकास विभाग ने महिलाओं के लिए "नाईट वाक" आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना तथा महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना है। इस इवेंट का आयोजन राज्य में 100 से अधिक स्थानों में किया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए किस राज्य सरकार ने "नाईट वाक" का आयोजन करने का निर्णय लिया है? केरल महिला व बाल विकास विभाग ने महिलाओं के लिए "नाईट वाक" आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना तथा महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना है। इस इवेंट का आयोजन राज्य में एक सौ से अधिक स्थानों में किया जाएगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
श्री अमिताभ बच्चन और श्री आमिर खान, एक भारतीय के रूप में, मुझे गर्व होता है कि आप जैसे भारतीय फिल्म सुपरस्टार न केवल हमारे देश में करोड़ों लोगों के प्यार और प्रशंसा के पात्र बने हैं बल्कि चीन जैसे देश में भी आपकी एक बड़ी फैन फोलोइंग है। इससे यही साबित होता है कि प्रतिभा सीमाओं की मोहताज नहीं होती और भाषा कोई रुकावट पैदा नहीं करती। दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही आपकी लोकप्रियता के साथ स्वाभाविक है कि बड़े कॉर्पोरेट और मार्केटिंग गुरु आपको ब्रांड एंबेसडर के रूप में निवेश में बड़ी संभावनाएं देखते हैं, जिससे आपके आकर्षण और लोकप्रियता का रंग अपने ब्रांडस पर चढ़ा सकें और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ा सकें। मैं चीनी उत्पादों से जुड़े कुछ तथ्यों को आपके समक्ष रखना चाहूँगा जिनका सेलिब्रिटीज प्रचार कर रहे हैं। सावधानी का एक शब्द, हो सकता है ये तथ्य आपको बहुत घिनोने लगें। क्या आप जानते हैं कि चीन भर में हजारों लेबर कैंप हैं जहाँ लाखों आध्यात्मिक और राजनैतिक समर्थक कैद हैं। इन कैदियों का शोषण कर उनसे मुफ्त खिलोने, कपड़े, मूर्तियाँ और अन्य उत्पाद बनवाये जाते हैं। यही कारण है कि ये इतने सस्ते होते हैं। इसमें से बहुत से सस्ते सामान की खपत भारत में भी होती है। याद रखें, हर बार जब आप 'मेड इन चाइना' उत्पाद खरीदते हैं, तो आप एक क्रूर शासन को समृद्ध और सशक्त बना रहे हैं। पिछले साल दिवाली के दौरान चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए सार्वजनिक अभियान चलाया गया। विडंबनापूर्ण यह है कि एक लोकप्रिय चीनी मोबाइल फोन निर्माता ने भारत में उसी दौरान 18 दिनों में दस लाख स्मार्ट फोन बेचे। पिछले कुछ वर्षों में चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण के लिए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है। हजारों लोग वहां अंग प्रत्यारोपण के लिए जाते हैं। किन्तु उन्हें यह जानकारी नहीं है कि ये अंग कहाँ से आते हैं। पिछले 15 वर्षों से चीन में सालाना 10,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए हैं। चीन में अंग दान में देने की प्रथा नहीं है। तो ये अंग कहाँ से आते हैं? आश्चर्यजनक यह है कि चीन में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा अवधि बहुत कम है - केवल कुछ हफ्ते। जबकि दूसरे देशों में अनुकूल अंग मिलने में वर्षों लग जाते हैं। तो यह कैसे संभव है? यह अविश्वसनीय लगता है, किन्तु चीन में अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अंग न केवल मृत्युदण्ड प्राप्त कैदियों से आते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में कैद "फालुन गोंग" अभ्यासियों से आते हैं। चीन में मानवीय अंग प्रत्यारोपण के इस अपराध में बड़े पैमाने पर अवैध धन कमाया जा रहा है। चीन के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण उद्योग का सालाना कारोबार 1 बिलियन डॉलर का है। स्वतंत्र जाँच द्वारा यह प्रकाश में आया है कि चीनी शासन, सरकारी अस्पतालों की मिलीभगत से, कैदियों के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के अपराध में संग्लित है। चीन में कैद फालुन गोंग अभ्यासी इस मानवता के विरुद्ध अपराध के मुख्य शिकार हैं। इस अमानवीय कृत्य में हजारों फालुन गोंग अभ्यासियों की हत्या की जा चुकी है। फालुन गोंग, जिसे फालुन दाफा भी कहा जाता है, मन और शरीर का एक साधना अभ्यास है जिसकी शुरुआत चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा की गयी। इसके स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण फालुन दाफा इतना लोकप्रिय हुआ कि 1999 तक चीन में करीब 7 से 10 करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे। इसका बढ़ता जनाधार चीनी शासकों को खलने लगा। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने फालुन दाफा की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपने प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और 20 जुलाई 1999 को इसपर पाबंदी लगा दी और इसे कुछ ही महीनों में जड़ से उखाड़ देने की मुहीम चला दी। (www. faluninfo. net पर और पढ़ें) हम आपको नैतिक दुविधा में डाल कर चीनी कंपनियों के साथ व्यावसायिक अनुबंध तोड़ने के बारे में नहीं कह रहे हैं क्योंकि इससे आपकी साख और अखंडता पर आंच आ सकती है। हमें लगता है कि मानवता के खिलाफ इन अपराधों के बारे में लोगों को जागरूक करके आप एक उदार समाधान का भाग बन सकते हैं। आप कॉर्पोरेट जगत के मुखियाओं और चीनी सरकार के अधिकारियों से इस दमन को समाप्त करने के बारे में बात कर सकते हैं। इसे एक राजनीतिक विषय न समझें, यह एक नैतिक विषय है - एक मानवाधिकार विषय। हम आपकी ईमानदारी और नैतिकता के लिए आपकी अनुकरणीय भावना का सम्मान करते हैं। जब आप सामाजिक कारणों के लिए खड़े हो जाते हैं और समाज की बुराइयों का खुलासा करते हैं, यह सहज ही आपके चरित्र और समाज के लिए आपके दायित्व को दर्शाता है। श्री अमिताभ बच्चन का शराब या धूम्रपान संबंधित किसी भी उत्पाद का समर्थन न करना और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे सार्वजनिक सेवा अभियानो को समर्थन देना आपके नैतिक आदर्श को दर्शाता है। इसी प्रकार श्री आमिर खान का सक्रिय टीवी धारावाहिक सत्यमेव जयते' भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने और सामाजिक बुराइयों को उजागर करने के लिए प्रशंसा का पात्र रहा है। आपकी जानकारी के लिए फालुन दाफा को भारत में सन से 2000 से सिखाना आरम्भ किया गया था और 2004 में इसे पंजीकृत किया गया। तब से, देश भर के अनेकों स्कूल और कॉलेजों में इस ध्यान अभ्यास को सिखाया गया है। दिल्ली और हैदराबाद में पुलिस अकादमी में फालुन दाफा अभ्यास की वर्कशॉप आयोजित की गयीं। कई बड़े संगठनों ने इसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सिखाने के लिए फालुन दाफा अभ्यासियों को आमंत्रित किया। दिलचस्प बात यह है कि कई जेल अधीक्षकों ने कारागृहों में कैदियों के स्वास्थ्य और नैतिक गुण उत्थान के लिए इस अभ्यास को सिखाने के लिए अनुरोध किया है। यह आपके लिए विशेष रूचिकर होगा कि मुंबई फिल्म उद्योग के अनेक हेयर स्टाइलिस्ट, मेक-अप कलाकार, फोटोग्राफर और टैलेंट सर्च एजेंसियों के संचालक रोजमर्रा का तनाव दूर करने के लिए फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं। आपके धैर्य के लिए धन्यवाद और हम आपसे इस बारे में सकारात्मक कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।
श्री अमिताभ बच्चन और श्री आमिर खान, एक भारतीय के रूप में, मुझे गर्व होता है कि आप जैसे भारतीय फिल्म सुपरस्टार न केवल हमारे देश में करोड़ों लोगों के प्यार और प्रशंसा के पात्र बने हैं बल्कि चीन जैसे देश में भी आपकी एक बड़ी फैन फोलोइंग है। इससे यही साबित होता है कि प्रतिभा सीमाओं की मोहताज नहीं होती और भाषा कोई रुकावट पैदा नहीं करती। दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही आपकी लोकप्रियता के साथ स्वाभाविक है कि बड़े कॉर्पोरेट और मार्केटिंग गुरु आपको ब्रांड एंबेसडर के रूप में निवेश में बड़ी संभावनाएं देखते हैं, जिससे आपके आकर्षण और लोकप्रियता का रंग अपने ब्रांडस पर चढ़ा सकें और अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ा सकें। मैं चीनी उत्पादों से जुड़े कुछ तथ्यों को आपके समक्ष रखना चाहूँगा जिनका सेलिब्रिटीज प्रचार कर रहे हैं। सावधानी का एक शब्द, हो सकता है ये तथ्य आपको बहुत घिनोने लगें। क्या आप जानते हैं कि चीन भर में हजारों लेबर कैंप हैं जहाँ लाखों आध्यात्मिक और राजनैतिक समर्थक कैद हैं। इन कैदियों का शोषण कर उनसे मुफ्त खिलोने, कपड़े, मूर्तियाँ और अन्य उत्पाद बनवाये जाते हैं। यही कारण है कि ये इतने सस्ते होते हैं। इसमें से बहुत से सस्ते सामान की खपत भारत में भी होती है। याद रखें, हर बार जब आप 'मेड इन चाइना' उत्पाद खरीदते हैं, तो आप एक क्रूर शासन को समृद्ध और सशक्त बना रहे हैं। पिछले साल दिवाली के दौरान चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए सार्वजनिक अभियान चलाया गया। विडंबनापूर्ण यह है कि एक लोकप्रिय चीनी मोबाइल फोन निर्माता ने भारत में उसी दौरान अट्ठारह दिनों में दस लाख स्मार्ट फोन बेचे। पिछले कुछ वर्षों में चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण के लिए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है। हजारों लोग वहां अंग प्रत्यारोपण के लिए जाते हैं। किन्तु उन्हें यह जानकारी नहीं है कि ये अंग कहाँ से आते हैं। पिछले पंद्रह वर्षों से चीन में सालाना दस,शून्य से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए हैं। चीन में अंग दान में देने की प्रथा नहीं है। तो ये अंग कहाँ से आते हैं? आश्चर्यजनक यह है कि चीन में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा अवधि बहुत कम है - केवल कुछ हफ्ते। जबकि दूसरे देशों में अनुकूल अंग मिलने में वर्षों लग जाते हैं। तो यह कैसे संभव है? यह अविश्वसनीय लगता है, किन्तु चीन में अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अंग न केवल मृत्युदण्ड प्राप्त कैदियों से आते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में कैद "फालुन गोंग" अभ्यासियों से आते हैं। चीन में मानवीय अंग प्रत्यारोपण के इस अपराध में बड़े पैमाने पर अवैध धन कमाया जा रहा है। चीन के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण उद्योग का सालाना कारोबार एक बिलियन डॉलर का है। स्वतंत्र जाँच द्वारा यह प्रकाश में आया है कि चीनी शासन, सरकारी अस्पतालों की मिलीभगत से, कैदियों के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के अपराध में संग्लित है। चीन में कैद फालुन गोंग अभ्यासी इस मानवता के विरुद्ध अपराध के मुख्य शिकार हैं। इस अमानवीय कृत्य में हजारों फालुन गोंग अभ्यासियों की हत्या की जा चुकी है। फालुन गोंग, जिसे फालुन दाफा भी कहा जाता है, मन और शरीर का एक साधना अभ्यास है जिसकी शुरुआत चीन में एक हज़ार नौ सौ बानवे में श्री ली होंगज़ी द्वारा की गयी। इसके स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण फालुन दाफा इतना लोकप्रिय हुआ कि एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे तक चीन में करीब सात से दस करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे। इसका बढ़ता जनाधार चीनी शासकों को खलने लगा। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने फालुन दाफा की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपने प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और बीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को इसपर पाबंदी लगा दी और इसे कुछ ही महीनों में जड़ से उखाड़ देने की मुहीम चला दी। हम आपको नैतिक दुविधा में डाल कर चीनी कंपनियों के साथ व्यावसायिक अनुबंध तोड़ने के बारे में नहीं कह रहे हैं क्योंकि इससे आपकी साख और अखंडता पर आंच आ सकती है। हमें लगता है कि मानवता के खिलाफ इन अपराधों के बारे में लोगों को जागरूक करके आप एक उदार समाधान का भाग बन सकते हैं। आप कॉर्पोरेट जगत के मुखियाओं और चीनी सरकार के अधिकारियों से इस दमन को समाप्त करने के बारे में बात कर सकते हैं। इसे एक राजनीतिक विषय न समझें, यह एक नैतिक विषय है - एक मानवाधिकार विषय। हम आपकी ईमानदारी और नैतिकता के लिए आपकी अनुकरणीय भावना का सम्मान करते हैं। जब आप सामाजिक कारणों के लिए खड़े हो जाते हैं और समाज की बुराइयों का खुलासा करते हैं, यह सहज ही आपके चरित्र और समाज के लिए आपके दायित्व को दर्शाता है। श्री अमिताभ बच्चन का शराब या धूम्रपान संबंधित किसी भी उत्पाद का समर्थन न करना और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे सार्वजनिक सेवा अभियानो को समर्थन देना आपके नैतिक आदर्श को दर्शाता है। इसी प्रकार श्री आमिर खान का सक्रिय टीवी धारावाहिक सत्यमेव जयते' भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने और सामाजिक बुराइयों को उजागर करने के लिए प्रशंसा का पात्र रहा है। आपकी जानकारी के लिए फालुन दाफा को भारत में सन से दो हज़ार से सिखाना आरम्भ किया गया था और दो हज़ार चार में इसे पंजीकृत किया गया। तब से, देश भर के अनेकों स्कूल और कॉलेजों में इस ध्यान अभ्यास को सिखाया गया है। दिल्ली और हैदराबाद में पुलिस अकादमी में फालुन दाफा अभ्यास की वर्कशॉप आयोजित की गयीं। कई बड़े संगठनों ने इसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सिखाने के लिए फालुन दाफा अभ्यासियों को आमंत्रित किया। दिलचस्प बात यह है कि कई जेल अधीक्षकों ने कारागृहों में कैदियों के स्वास्थ्य और नैतिक गुण उत्थान के लिए इस अभ्यास को सिखाने के लिए अनुरोध किया है। यह आपके लिए विशेष रूचिकर होगा कि मुंबई फिल्म उद्योग के अनेक हेयर स्टाइलिस्ट, मेक-अप कलाकार, फोटोग्राफर और टैलेंट सर्च एजेंसियों के संचालक रोजमर्रा का तनाव दूर करने के लिए फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं। आपके धैर्य के लिए धन्यवाद और हम आपसे इस बारे में सकारात्मक कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।
नोरा फतेही(Nora Fatehi) डांस की दीवानी हैं. यही कारण है कि उन्हें कुछ समय के लिए ही सही लेकिन रियलिटी शो इंडिया बेस्ट डांसर(India's Best Dancer) में बतौर गेस्ट जज बुलाया गया था. कुछ ही समय में नोरा को कंटेस्टेंट पसंद करने लगे थे लेकिन टेरेंस लुइस(Terrence Lewis) को हमेशा शो में नोरा का नाम लेकर छेड़ा गया. खासतौर से शो के बाकी जज मलाइका अरोड़ा(Malaika Arora) और गीता कपूर(Geeta Kapoor) हमेशा टेरेंस को नोरा का नाम लेकर चिढ़ाते हैं. अक्सर दोनों को स्टेज पर साथ में डांस करते हुए भी देखा गया वहीं एक मौका ऐसा भी आया जब नोरा फतेही के लिए टेरेंस लुइस ने गाया था - पहला पहला प्यार है, पहली पहली बार है. जैसे ही ये गाना शो पर बजा तो मशहूर कोरियोग्राफर टेरेंस लुइस ने पहले नोरा के साथ डांस किया और फिर देखते ही देखते उन्हें गोद में उठा लिया. वहीं खास बात ये थी कि इस दौरान नोरा का चेहरा शर्म से लाल हो गया था. वहीं मलाइका और गीता भी दोनों को छेड़ने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती थीं. हालांकि हर कोई जानता था कि ये सब मज़ाक हो रहा है. वहीं इस एपिसोड में टेरेंस ने नोरा फतेही और मलाइका अरोड़ा के साथ भी ज़बरदस्त डांस परफॉर्मेंस दी. और इनका डांस देखकर हर कोई दंग रह गया था. टेरेंस तो ज़बरदस्त कोरियोग्राफर है हीं , साथ ही नोरा भी कितनी बेहतरीन डांसर हैं ये हर कोई जानता है. वहीं बात करें मलाइका की तो उन्होंने भी डांसर के तौर पर अपनी पहचान बनाई है. नोरा, मलाइका और टेरेंस एक टीम में दिखे जिनका मुकाबला हुआ टीम गीता से.
नोरा फतेही डांस की दीवानी हैं. यही कारण है कि उन्हें कुछ समय के लिए ही सही लेकिन रियलिटी शो इंडिया बेस्ट डांसर में बतौर गेस्ट जज बुलाया गया था. कुछ ही समय में नोरा को कंटेस्टेंट पसंद करने लगे थे लेकिन टेरेंस लुइस को हमेशा शो में नोरा का नाम लेकर छेड़ा गया. खासतौर से शो के बाकी जज मलाइका अरोड़ा और गीता कपूर हमेशा टेरेंस को नोरा का नाम लेकर चिढ़ाते हैं. अक्सर दोनों को स्टेज पर साथ में डांस करते हुए भी देखा गया वहीं एक मौका ऐसा भी आया जब नोरा फतेही के लिए टेरेंस लुइस ने गाया था - पहला पहला प्यार है, पहली पहली बार है. जैसे ही ये गाना शो पर बजा तो मशहूर कोरियोग्राफर टेरेंस लुइस ने पहले नोरा के साथ डांस किया और फिर देखते ही देखते उन्हें गोद में उठा लिया. वहीं खास बात ये थी कि इस दौरान नोरा का चेहरा शर्म से लाल हो गया था. वहीं मलाइका और गीता भी दोनों को छेड़ने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती थीं. हालांकि हर कोई जानता था कि ये सब मज़ाक हो रहा है. वहीं इस एपिसोड में टेरेंस ने नोरा फतेही और मलाइका अरोड़ा के साथ भी ज़बरदस्त डांस परफॉर्मेंस दी. और इनका डांस देखकर हर कोई दंग रह गया था. टेरेंस तो ज़बरदस्त कोरियोग्राफर है हीं , साथ ही नोरा भी कितनी बेहतरीन डांसर हैं ये हर कोई जानता है. वहीं बात करें मलाइका की तो उन्होंने भी डांसर के तौर पर अपनी पहचान बनाई है. नोरा, मलाइका और टेरेंस एक टीम में दिखे जिनका मुकाबला हुआ टीम गीता से.
बिग बॉस मराठी के विनर शिव ठाकरे स्ट्रांग कंटेस्टेंट्स में से एक हैं। फैंस का कहना है कि शिव बिग बॉस 16 को जीतने के प्रमुख दावेदार है। अर्चना गौतम बिग बॉस 16 की टॉप 5 कंटेस्टेंट्स में से एक हैं। अर्चना ने अपनी पर्सनैलिटी से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया है। दीपिका कक्कड़ बिग बॉस 12 की विनर रह चुकी हैं। श्वेता तिवारी भी बिग बॉस 4 की विनर रह चुकी हैं। एक्ट्रेस की शानदार पर्सनैलिटी और कॉन्फिडेंस ने हर किसी को हैरान कर दिया था। बिग बॉस 7 में काम्या पंजाबी ने हिस्सा लिया था। एक्ट्रेस अपने बेबाक अंदाज को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। निक्की तंबोली ने बिग बॉस 14 में हिस्सा लिया था। साउथ एक्ट्रेस ने अपने निडर अंदाज से फैंस को काफी इंप्रेस किया था। निक्की के फैशन सेंस ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थी। उर्वशी ढोलकिया ने बिग बॉस सीजन 6 की ट्राफी अपने नाम की थी। बिना किसी लव एंगल के उर्वशी ने शानदार तरीके से अपना गेम खेला था। विंदू दारा सिंह बिग बॉस 3 के विनर थे। एक्टर की शानदार पर्सनैलिटी ने हर किसी का दिल जीत लिया था।
बिग बॉस मराठी के विनर शिव ठाकरे स्ट्रांग कंटेस्टेंट्स में से एक हैं। फैंस का कहना है कि शिव बिग बॉस सोलह को जीतने के प्रमुख दावेदार है। अर्चना गौतम बिग बॉस सोलह की टॉप पाँच कंटेस्टेंट्स में से एक हैं। अर्चना ने अपनी पर्सनैलिटी से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया है। दीपिका कक्कड़ बिग बॉस बारह की विनर रह चुकी हैं। श्वेता तिवारी भी बिग बॉस चार की विनर रह चुकी हैं। एक्ट्रेस की शानदार पर्सनैलिटी और कॉन्फिडेंस ने हर किसी को हैरान कर दिया था। बिग बॉस सात में काम्या पंजाबी ने हिस्सा लिया था। एक्ट्रेस अपने बेबाक अंदाज को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। निक्की तंबोली ने बिग बॉस चौदह में हिस्सा लिया था। साउथ एक्ट्रेस ने अपने निडर अंदाज से फैंस को काफी इंप्रेस किया था। निक्की के फैशन सेंस ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थी। उर्वशी ढोलकिया ने बिग बॉस सीजन छः की ट्राफी अपने नाम की थी। बिना किसी लव एंगल के उर्वशी ने शानदार तरीके से अपना गेम खेला था। विंदू दारा सिंह बिग बॉस तीन के विनर थे। एक्टर की शानदार पर्सनैलिटी ने हर किसी का दिल जीत लिया था।
तो उपलक्षरण है । अर्थ उसका यह है कि किसी प्रकारकी हिंसा न हो ऐसा लो । बाजारकी चीजें न लिया करें क्योंकि वे मर्यादित चीजें है, हिंसाके, दोपसे युक्त हैं । कितनेही दिनोंका रखा हुआ सामान होता है, सड़ा गला कर बनाया जाता है । जलेवी इत्यादि ऐसे ही बनती है। ऐसे भोजन सव अभक्ष्य है । जो मर्यादा के भीतर है ऐसा ही ग्राहार लिया जा सकता है। दूधको श्रमक्ष्य माननेकी शकाका उत्तर - प्रश्न - दूध दही, दोनोंको लोग कहते है कि ये अभक्ष्य हैं । क्या ये अभक्ष्य हैं ? उत्तर - मर्यादाके भीतरमें दूध व दही अभक्ष्य नहीं । अण्डेसे रुचि करनेवाले युवक जन यह कहते है कि जैसा दूध है वैसा अण्डा है पर दूध और अण्डेमें महान अन्तर है । अण्डा जीवका योनिभूत होता है । अण्डेसे बच्चे निकलते हैं । कोई ऐसा भी अण्डा है जिसमें बच्चे न उत्पन्न होते हों ? लेकिन जीव उत्पन्न करनेका अण्डा साधन है । किसी अण्डेमें बच्चा न हो सका तो क्या जाति तो एक है। जैसे अनाज होता है । किसी जके दानेसे पौधे हो जाते हैं कितनेमें नहीं, पर जाति तो एक है। दूसरी बात जैसे गाय भेंस दूध दिया करती हैं, मूत्र भी करती है । मूत्र तो हिंसा रहित है। गाय से निकलने के कारण दूध मांसका अंश मानो तो मूत्र भो गायसे निकलता है वह तो मांसका नहीं । मांस खून निकालने में पशुको बाधा होती है किन्तु दूधके निकालनेसे तो बाधा नहीं होता है । दूधके उद्गमकी निर्वाधता - भले ही लोग मूत्र नहीं चाहते हैं, यह बात अलग है पर वह हिंसाकी चीज नहीं, इसमें मांस खून आदि नहीं है । जैसे भोजनसे या पाचनसे शुद्ध होकर मूत्र बनता है इसी तरहसे भोजन पाचन से शुद्ध होकर एक दूध बनता है । दूध पानीका वहाँ हिसाब अलग है । यदि दूध न निकाला जाय तो गाय भेंसके पीड़ा हो जाय । दूध निकलनेसे पीड़ा नहीं होती है। और फिर ऋपियोंने यह भी बारीक वात बता दी है कि अन्तर्मुहूर्त में यदि उस दूधको गरम न कर लिया जाय तो उससे जीवोंकी उत्पत्ति होती है । अगर दूधको कुछ ही घंटे रख दो तो उसमें जीव पैदा हो जाते हैं । जिस प्रकार कि अन्तर्मुहूर्त में पानीको गरम न कर लिया जाय तो पानी में कीड़े पड़ जाते हैं । दहीके भक्ष्य व अभक्ष्यपनेका निर्णय - अब रही दहीकी बात । दूधको जमाया तो दही हो गया । एकही रात बीती हो तव तो दही भक्ष्य है, दो रात बीत जांय तो भक्ष्य नहीं । ऐसा निमित्त - नैमित्तिक सम्वन्ध है कि खटाई का योग हो तो दूध दहीरूप हो जाता है । कोई कहे कि दुर्वीनसे देखते हैं तो उसमें कुछ चलता हुआ नजर आता है। तो आप दुर्वीनसे कुछ भी चीजें
तो उपलक्षरण है । अर्थ उसका यह है कि किसी प्रकारकी हिंसा न हो ऐसा लो । बाजारकी चीजें न लिया करें क्योंकि वे मर्यादित चीजें है, हिंसाके, दोपसे युक्त हैं । कितनेही दिनोंका रखा हुआ सामान होता है, सड़ा गला कर बनाया जाता है । जलेवी इत्यादि ऐसे ही बनती है। ऐसे भोजन सव अभक्ष्य है । जो मर्यादा के भीतर है ऐसा ही ग्राहार लिया जा सकता है। दूधको श्रमक्ष्य माननेकी शकाका उत्तर - प्रश्न - दूध दही, दोनोंको लोग कहते है कि ये अभक्ष्य हैं । क्या ये अभक्ष्य हैं ? उत्तर - मर्यादाके भीतरमें दूध व दही अभक्ष्य नहीं । अण्डेसे रुचि करनेवाले युवक जन यह कहते है कि जैसा दूध है वैसा अण्डा है पर दूध और अण्डेमें महान अन्तर है । अण्डा जीवका योनिभूत होता है । अण्डेसे बच्चे निकलते हैं । कोई ऐसा भी अण्डा है जिसमें बच्चे न उत्पन्न होते हों ? लेकिन जीव उत्पन्न करनेका अण्डा साधन है । किसी अण्डेमें बच्चा न हो सका तो क्या जाति तो एक है। जैसे अनाज होता है । किसी जके दानेसे पौधे हो जाते हैं कितनेमें नहीं, पर जाति तो एक है। दूसरी बात जैसे गाय भेंस दूध दिया करती हैं, मूत्र भी करती है । मूत्र तो हिंसा रहित है। गाय से निकलने के कारण दूध मांसका अंश मानो तो मूत्र भो गायसे निकलता है वह तो मांसका नहीं । मांस खून निकालने में पशुको बाधा होती है किन्तु दूधके निकालनेसे तो बाधा नहीं होता है । दूधके उद्गमकी निर्वाधता - भले ही लोग मूत्र नहीं चाहते हैं, यह बात अलग है पर वह हिंसाकी चीज नहीं, इसमें मांस खून आदि नहीं है । जैसे भोजनसे या पाचनसे शुद्ध होकर मूत्र बनता है इसी तरहसे भोजन पाचन से शुद्ध होकर एक दूध बनता है । दूध पानीका वहाँ हिसाब अलग है । यदि दूध न निकाला जाय तो गाय भेंसके पीड़ा हो जाय । दूध निकलनेसे पीड़ा नहीं होती है। और फिर ऋपियोंने यह भी बारीक वात बता दी है कि अन्तर्मुहूर्त में यदि उस दूधको गरम न कर लिया जाय तो उससे जीवोंकी उत्पत्ति होती है । अगर दूधको कुछ ही घंटे रख दो तो उसमें जीव पैदा हो जाते हैं । जिस प्रकार कि अन्तर्मुहूर्त में पानीको गरम न कर लिया जाय तो पानी में कीड़े पड़ जाते हैं । दहीके भक्ष्य व अभक्ष्यपनेका निर्णय - अब रही दहीकी बात । दूधको जमाया तो दही हो गया । एकही रात बीती हो तव तो दही भक्ष्य है, दो रात बीत जांय तो भक्ष्य नहीं । ऐसा निमित्त - नैमित्तिक सम्वन्ध है कि खटाई का योग हो तो दूध दहीरूप हो जाता है । कोई कहे कि दुर्वीनसे देखते हैं तो उसमें कुछ चलता हुआ नजर आता है। तो आप दुर्वीनसे कुछ भी चीजें
आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी राष्ट्र पाक में महंगाई ने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पाकिस्तान गवर्नमेंट ने अब इस संकट को स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान के सांख्यिकी विभाग (पीबीएस) ने स्वीकार किया है कि मार्च 2022 से मार्च 2023 तक पाक में मुद्रास्फीति 35. 37% बढ़ी है, जो 1965 के बाद का उच्चतम स्तर है. आसान शब्दों में कहें तो पाक में महंगाई ने 58 वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई के आंकड़े पाक के सांख्यिकी विभाग ने ट्विटर पर जारी किए हैं। इसके अनुसार पिछले एक वर्ष में महंगाई का सबसे अधिक असर खाने-पीने और ट्रांसपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर पड़ा है। इधर, पिछले एक वर्ष में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में 47. 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस तरह यहां की महंगाई ने आम लोगों की किस्मत ही तोड़ दी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने बोला है कि संकट की इस घड़ी में वह चीन के आभारी हैं, जिसने 16 हजार करोड़ रुपये का ऋण चुकाने की समय सीमा बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि पाक को चीन से करोड़ों रुपए का ऋण भी मिल सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ ने कुछ दिनों पहले चीन की सहायता से बने दो बिजली संयंत्रों का उद्घाटन किया था, जो अब पाक को हजारों मेगावाट बिजली की आपूर्ति करेंगे। पाकिस्तान में महंगाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक किलो आटा 185 रुपये में मिल रहा है। 'दुनिया न्यूज' टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार लाहौर में तंदूरी रोटी करीब 40 रुपये में मिल रही है। इसके साथ ही दूध 250 रुपए प्रति लीटर तक मिल रहा है. चिकन- 780 और मटन का रेट 1100 के पार पहुंच गया है. इसी तरह देसी घी के रेट 2500 से 3 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी राष्ट्र पाक में महंगाई ने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पाकिस्तान गवर्नमेंट ने अब इस संकट को स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान के सांख्यिकी विभाग ने स्वीकार किया है कि मार्च दो हज़ार बाईस से मार्च दो हज़ार तेईस तक पाक में मुद्रास्फीति पैंतीस. सैंतीस% बढ़ी है, जो एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के बाद का उच्चतम स्तर है. आसान शब्दों में कहें तो पाक में महंगाई ने अट्ठावन वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई के आंकड़े पाक के सांख्यिकी विभाग ने ट्विटर पर जारी किए हैं। इसके अनुसार पिछले एक वर्ष में महंगाई का सबसे अधिक असर खाने-पीने और ट्रांसपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर पड़ा है। इधर, पिछले एक वर्ष में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में सैंतालीस. दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस तरह यहां की महंगाई ने आम लोगों की किस्मत ही तोड़ दी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने बोला है कि संकट की इस घड़ी में वह चीन के आभारी हैं, जिसने सोलह हजार करोड़ रुपये का ऋण चुकाने की समय सीमा बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि पाक को चीन से करोड़ों रुपए का ऋण भी मिल सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ ने कुछ दिनों पहले चीन की सहायता से बने दो बिजली संयंत्रों का उद्घाटन किया था, जो अब पाक को हजारों मेगावाट बिजली की आपूर्ति करेंगे। पाकिस्तान में महंगाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक किलो आटा एक सौ पचासी रुपयापये में मिल रहा है। 'दुनिया न्यूज' टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार लाहौर में तंदूरी रोटी करीब चालीस रुपयापये में मिल रही है। इसके साथ ही दूध दो सौ पचास रुपयापए प्रति लीटर तक मिल रहा है. चिकन- सात सौ अस्सी और मटन का रेट एक हज़ार एक सौ के पार पहुंच गया है. इसी तरह देसी घी के रेट दो हज़ार पाँच सौ से तीन हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
जिन्दगी है तो उलझन-झमेले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। आसमाँ भी नही और धरा भी नही, जिन्दगी में भरे खेल-खेले भी है। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। एक तन भी मिला एक मन भी मिला, शुद्ध भी है बहुत और मैले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। दान है पुण्य है साथ में लोभ है, सद्-गुरू, ज्ञान है और चेले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। प्रीत है मीत है और दंगल भी हैं, कुछ शहद से भरे कुछ विषैले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको "आपका ब्लॉग" पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। "वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') रंग भी रूप भी छाँव भी धूप भी, देखते-देखते ही तो ढल जायेंगे। देश भी भेष भी और परिवेश भी, वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। जग में आकर सभी हैं जगाते अलख, प्रीत भी रीत भी, शब्द भी गीत भी, एक न एक दिन तो मचल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। याद रक्खेंगे हम तो सदा ही तुम्हें, तंग दिल मत बनो, संगे दिल मत बनो, पत्थरों में से धारे निकल आयेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। याद आता दुखों में ही भगवान है, दो कदम तुम बढ़ो, दो कदम हम बढ़ें, रास्ते मंजिलों से ही मिल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। पथ बुलाता तुम्हें रोशनी से भरा, हार को छोड़ दो, जीत को ओढ़ लो, फूल फिर से बगीचे में खिल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। "आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "हसीन ख्वाब" (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') ।इक हादसे में उनसे मुलाकात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। देखा उन्हें मगर न कोई बात कर सके, केवल नजर मिली, नजर में बात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। वो भी थे बेकरार और हम भी थे गरजमन्द, दोनो के लिए प्रेम की सौगात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। इक दूजे के जज्बात दोनो तोलते रहे, हम डाल-डाल थे वो पात-पात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। खाई थी खेल में उन्होंने शह हजार बार, जब अन्त आ गया तो मेरी मात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। धूप-छाँव के चले थे सिलसिले बहुत, मंजिल के बीच में ही तो बरसात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। साया तलाशते रहे हम तो तमाम दिन, केवल इसी उधेड़-बुन में रात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। आँखें खुली हसीन ख्वाब टूट गया था, सूरज चढ़ा हुआ था और प्रात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। "काले बादल बरस रहे हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') गरज रहे हैं, लरज रहे हैं, काले बादल बरस रहे हैं। कल तक तो सावन सूखा था, धरती का तन-मन रूखा था, आज झमा-झम बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। भीग रहे हैं आँगन-उपवन, तृप्त हो रहे खेत, बाग, वन, उमड़-घुमड़ घन बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। मुन्ना भीगा, मुन्नी भीगी, गोरी की है चुन्नी भीगी, जोर-शोर से बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। श्याम घटाएँ घिर-घिर आयी, रिम-झिम की बजती शहनाई, जी भर कर अब बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। "एक मुक्तक" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') दुर्बल पौधों को ही ज्यादा पानी-खाद मिला करती है। यौवन ढल जाने पर सबकी गर्दन बहुत हिला करती है।। "बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') मेरे बहुत से ब्लागर मित्र अपनी पोस्ट में केवल एक शेर ही लगाते हैं। आज मैंने भी केवल कुछ शेर ही पोस्ट करने का मन बनाया है। कुछ मित्रों की रचनाओं को टिपियाते-टिपियाते यह छन्द बन गये। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें मिलने की आदत है, मगर हम बढ़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें भिड़ने की आदत है, मगर हम लड़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें उड़ने की आदत है, मगर हम चढ़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। "जग के झंझावातों में।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') मानव दानव बन बैठा है, जग के झंझावातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। मुख में राम बगल में चाकू, मनवा है कितना पापी, दिवस-रैन उलझा रहता है, घातों में प्रतिघातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। ठोकर पर ठोकर खाकर भी, खुद को नही संभाला है, ज्ञान-पुंज से ध्यान हटाकर, लिपटा गन्दी बातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। भूल चुके हैं सीधी-सादी, सम्बन्धों की परिभाषा। विष के पादप उगे बाग में, जहर भरा है नातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। बाँट लिया गुलशन को, लेकिन दूर न मन के भेद हुए, खेल रहे हैं ग्राहक बन कर, दुष्ट-बणिक के हाथों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। "झूला झूलें सावन में।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे, कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। हरियाली तीजों पर, कैसे लायें चोटी-बिन्दी को, सूखे मौसम में कैसे, अब सजें-सवाँरे सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। आँगन से कट गये नीम,बागों का नाम-निशान मिटा, रस्सी-डोरी के झूले, अब कहाँ लगायें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। "अब तो जम करके बरसो, क्यों करते हो कल और परसों?"(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') नदिया-नाले सूख रहे हैं, जलचर प्यासे-प्यासे हैं। पौधे-पेड़ बिना पानी के, व्याकुल खड़े उदासे हैं।। चौमासे के मौसम में, सूरज से आग बरसती है। जल की बून्दें पा जाने को, धरती आज तरसती है।। नभ की ओर उठा कर मुण्डी, मेंढक चिल्लाते हैं। बरसो मेघ धड़ाके से, ये कातर स्वर में गाते हैं।। दीन-कृषक है दुखी हुआ, बादल की आँख-मिचौली से। पानी अब तक गिरा नही, क्यों आसमान की झोली से? तितली पानी की चाहत में दर-दर घूम रही है। फड़-फड़ करती तुलसी की ठूँठों को चूम रही है।। दया करो घनश्याम, सुधा सा अब तो जम करके बरसो। रिम-झिम झड़ी लगा जाओ, क्यों करते हो कल और परसों? "मौत से सब बेखबर हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') ब्लॉगर मित्रों! 300वीं रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। आप सबका स्नेह मुझे आगे भी मिलता रहेगा। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं। आयेंगे चौराहे और दोराहे कितने, एक जैसी अन्त में सबकी डगर हैं।। जिन्दगी में स्वप्न सुन्दर हैं सजाये, गगनचुम्बी भवन सुन्दर हैं बनाये, साथ तन नही जायेगा, तन्हा सफर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। देह कुन्दन कनक सी सब राख ही हो जायेंगे। चाँद-सूरज फेर ही लेंगे, नजर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। सब तमन्नाएँ धरी की धरी ही रह जायेंगी, स्वर्ग की सरिता में, कितने ही भँवर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। "जीत की गन्ध आने लगी हार में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') कितनी ताकत छिपी शब्द की धार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। वो तो बातों से नश्तर चुभोते रहे, हम तो हँसते हुए, घाव ढोते रहे, घात ही घात था उनके हर वार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। मेरे धीरज को वो आजमाते रहे, हम भी दिल पर सभी जख्म खाते रहे, पीठ हमने दिखाई नही प्यार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। दाँव-पेंचों को वो आजमा जब चुके, हार थक कर के अब वार उनके रुके, धार कुंठित हुई उनके हथियार मे। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। संग-ए-दिल बन गया मोम जैसा मृदुल, नेह आया उमड़ सिन्धु जैसा विपुल, हार कर जीत पाई थी उपहार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। "याद वो मंजर पुराने आ गये हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')" ।फिर चली पुरवाई बादल छा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। पेड़ के नीचे अचानक बैठ जाना, गीत लिखना और उनको गुनगुनाना, शब्द बनकर छन्द लय को पा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। झूमते भौंरो का गुंजन-गान गाना, मस्त होकर सुमन का सौरभ लुटाना, फूल-पत्ते भी नजर को भा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। झाँक कर खिड़की से उनका मुस्कुराना, नजर मिलते ही नजर अपनी झुकाना, नयन में सपने सुहाने छा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। "आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') ।भार हम जिन्दगी का ही ढोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। हाथ पर हाथ रख कर नही बैठे हम, सुख में हँसते रहे, गम में रोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। कुछ भी आगे नही बढ़ सके राह में, हादसे दिन-ब-दिन रोज होते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। हमने महफिल में उनके तराने पढ़े, मखमली ख्वाब दिल में संजोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। आँखों-आखों में काटी थी राते बहुत, वो तो खर्राटे भर-भर के सोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। "क्यों यहाँ हिंसा बहाने पर तुले हो?" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "पाँच शेर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') हौसला रख कर जरा आगे बढ़ो, फासले इतने तो मत पैदा करो। मत अमावस से भरी बातें करो। मत इसे जज्बात में रौंदा करो। हारकर, थककर न यूँ बैठा करो। मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो। वादियों-जंगल, कानन, वस्ल-मिलन, मुलाकात, सवा-हवा, "जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') बढ़ेंगे तुम्हारी तरफ धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। नया है मुसाफिर, नयी जिन्दगी है, नया फलसफा है, नयी बन्दगी है, पढ़ेंगे-लिखेंगे, बरक धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। उल्फत की राहों की सँकरी गली है, अभी सो रही गुलिस्ताँ की कली है, मिटेगा दिलों का फरक धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। दुर्गम डगर में हैं चट्टान भारी, हटानी पड़ेंगी, परत आज सारी, परबत बनेंगे, सड़क धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। "सुख की मुस्कान नही छाई" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') आसमान में बादल छाये, इन्द्रधनुष भी दिया दिखाई। "रंग-बिरंगी, तितली आई" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक) "जरा ठहर जाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') अभी तो शाम है शब जल्द आने वाली है। अभी चराग सजे हैं, जरा ठहर जाओ।। तुम्हीं से ईद है, तुमसे मेरी दिवाली है। मेरी ये अर्ज है, कुछ देर तो ठहर जाओ।। तुम्हारे वास्ते दिल का मकान खाली है। दिल-ए-चमन में मिरे, दो घड़ी ठहर जाओ।। ज़फा-ए-दौर में, उम्मीद भी मवाली है, गम-ए-दयार में आकर जरा ठहर जाओ।। "एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा" (डॉ रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') तुम अगर रोज मिलते-मिलाते रहे, एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा। मद-भरे मय के प्याले पिलाते रहे, प्यार का ज़ाम उपहार हो जायेगा।। गन्ध से हो गये भाव मदहोश हैं, तुम अगर लाज से मुँह छिपाते रहे, मेरा जीना भी दुश्वार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। खिल-खिलाते हुए, मीत बन कर मिलो, हुस्न से इश्क को गर रिझाते रहे, प्रीत में भी, अलंकार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। हो खिजाओं में तुम और बहारों में तुम, मेरे आँगन में गर आते-जाते रहे, सुख का सागर ये परिवार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। "पानी नदारत है, आने वाली कयामत है?" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') पानी नदारत है, प्यासे हैं बाग, तड़ाग, कयामत है? "तुम ही मेरा सकल काव्य संसार हो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "तुम अगर मेरे जीवन में आते नही" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") तुम अगर मेरे जीवन में आते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। होती खेतों में तम्बू-कनाते गड़ी, एक सुन्दर सा घर हम बनाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। प्यार करना न आता हमें उम्र भर, गीत-कविताएँ हम गुन-गुनाते नही।। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। करनी पड़ती हमें एक दिन खुदकशी, राह जीने की गर तुम दिखाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। डर गयीं थी सभी रोशनी की किरण, आँख चन्दा व सूरज मिलाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। ले ही जाती भँवर में लहर खींच कर, हाथ अपना अगर तुम थमाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। "चलो झूला झूलेंगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "बिन डोर खिचें सब आते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') शब्दों के मौन निमन्त्रण से, बिन डोर खिचें सब आते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। इनके बिन बात अधूरी है, नजदीकी में भी दूरी है, दुनिया दारी में पड़ करके, बतियाना बहुत जरूरी है, मकड़ी के नाजुक जालों में, बलवान सिंह फंद जाते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। पशु-पक्षी और संगी-साथी, शब्दों से मन को भरमाते, तीखे शब्दों से मीत सभी, पल भर में दुश्मन बन जाते, पहले तोलो, फिर कुछ बोलो, स्वर मधुर छन्द बन जाते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। "तप कर निखर गये हम तो" (डॉ रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') इश्क की राह में चल कर बिखर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। कल तलक ख्वाब था अब बनके हकीकत आया, उनका इक वार मेरे दिल में नसीहत लाया, अपने जज्बात में आकर सिहर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। बदले हालात में, किस्मत ने साथ छोड़ दिया, बीती यादों ने मुकद्दर को गम से जोड़ दिया, तुम जिधर को चले थे, बस उधर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। तुम कहाँ हो? मेरे हालात पर तरस खाओ, चाँदनी रात में आकर के दरस दिखलाओ, राह-ए -उल्फत में कुछ सुधर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। "घन छाये हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "गगन में छा गये बादल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') धरा में जो दरारें थी, मिटी बारिश की बून्दों से, "इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। दिल में घुसा हुआ है, दल-दल दलों का जमघट। संसद में फिल्म जैसा, होता है खूब झंझट। फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।। गुस्सा व प्यार इनका, केवल दिखावटी है। और देश-प्रेम इनका, बिल्कुल बनावटी है। बदमाश, माफिया सब इनके ही घर पलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। खादी की केंचुली में, रिश्वत भरा हुआ मन। देंगे वहीं मदद ये, होगा जहाँ कमीशन। दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। "जंगल और जीव" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') समझदार है, सीधा भी है, काम हमारे आता है। मूक प्राणियों पर हमको तो, तरस बहुत ही आता है। इनकी देख दुर्दशा अपना, सीना फटता जाता है।। इनकी रक्षा करना होगा। जीवन जीने की खातिर, "जोकर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') जो काम नही कर पायें दूसरे, वो जोकर कर जाये। सरकस मे जोकर ही, दर्शक-गण को खूब रिझाये। नाक नुकीली, चड्ढी ढीली, लम्बी टोपी पहने, उछल-कूद कर जोकर राजा, सबको खूब हँसाये। चाँटा मारा साथी को, खुद रोता जोर-शोर से, हाव-भाव से, शैतानी से, सबका मन भरमाये। लम्बावाला तो सीधा है, बौना बड़ा चतुर है, उल्टी-सीधी हरकत करके, बच्चों को ललचाये। (चित्र गूगल सर्च से साभार) "जग की यही कहानी है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। मेड़ खेत को लगी निगलने, किसको दोषी ठहरायें, रक्षक ही भक्षक बन बैठे, न्याय कहाँ से हम पायें, अन्धा है कानून, न्याय की डगर बनी बेगानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। दुर्जन कुर्सी पर, लेकिन सज्जन फिरते मारे-मारे, सच्चों की अब खैर नही, झूठों के हैं वारे-न्यारे, शौर्य-वीरता की तो मानों, थम सी गयी रवानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। दुर्बल को बलवान लूटता, जनता को राजा लूटे, निर्धन बिना मौत मरता, धन के बल से कातिल छूटे, बे-ईमानों की इस कलयुग में, चमक रही पेशानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। "माता और पिता" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "सुन्दर सुमन खिलाना होगा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') मानवता मर गयी विश्व में, सूरज है पथराया। डोल गये ईमान-धर्म, सारा जग है बौराया।। नदियों में बहने वाले, तालाबों को क्या पहचाने। महलों में रहने वाले, सर्दी-गर्मी को क्या जाने।। जगत बँधा है, प्रीत-रीत के अभिनव बन्धन में। ब्याल लिप्त रहता है, चन्दन के महके तन में।। जीवन एक सफर, इसमें यादें आती जाती है। रिश्तों की बुनियाद, राह में बनती जाती है।। जितना जख्म कुरेदोगे, उतना ही दर्द बढ़ेगा। जितनी धूल उड़ाओगे, उतना ही गर्द चढ़ेगा।। जोड़-तोड़ करके अपना परिवार चलाना होगा। वीराने गुलशन में सुन्दर सुमन खिलाना होगा।। "जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') अन्तर रखने वालों से, मेरा अन्तर नही मिलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। जीवन कभी कठोर कठिन है, कभी सरल सा है, भोजन अमृत-तुल्य कभी है, कभी गरल सा है, माली बिना किसी उपवन में, फूल नही खिलता हैं। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। सावन मे भी कभी-कभी सूखा भी होता है, खाना खाकर कभी, उदर भूखा भी होता है, काँटे जिनकी करें सुरक्षा उनका तन नही छिलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। नर्म-नर्म बिस्तर में, सुख की नींद नही आती है, किन्तु श्रमिक को कंकड़ की ढेरी पर आ जाती है, तप और श्रम से पत्थर का भी हृदय पिघलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। "आओ तो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') सब अंधियारे मिट जायेंगे, आशा का दीप जलाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। बागों में कोयल बोल रही, मिश्री कानों में घोल रही, हम साज बजाने आयेंगे, तुम अभिनव राग सुनाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। क्यों नील गगन को ताक रहे, चितवन से क्यों हो झाँक रहे, हम मर कर भी जी जायेंगे, अमृत की बून्द पिलाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। लहरों से कटते हैं कगार, करते हो किसका इन्तजार, हम चप्पू लेकर आयेंगे, तुम नौका बन कर आओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। "जरा सी बात" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') जरा सी बात में ही युद्ध होते हैं बहुत भारी। जरा सी बात में ही क्रुद्ध होते हैं धनुर्धारी।। जरा सी बात ही माहौल में विष घोल देती है। जरा सी जीभ ही कड़ुए वचन को बोल देती है।। मगर हमको नही इसका कभी आभास होता है। अभी जो घट रहा कल को वही इतिहास होता है।। "सुमन से मन का नाता जोड़ो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') "वि़द्यालय से नाता जोड़ो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') सुस्ती, मस्ती, आलस छोडो़। विद्यालय से नाता जोड़ो। गरमी ने कितना झुलसाया। अब बारिश का मौसम आया।। पुस्तक, बस्ता, पेन सम्भालो। छोटा छाता एक मँगा लो।। नित्य-प्रति विद्यालय जाओ। पढ़ने में मन खूब लगाओ।। होम-वर्क करना मत भूलो। फिर अपने झूले पर झूलो।।
जिन्दगी है तो उलझन-झमेले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। आसमाँ भी नही और धरा भी नही, जिन्दगी में भरे खेल-खेले भी है। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। एक तन भी मिला एक मन भी मिला, शुद्ध भी है बहुत और मैले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। दान है पुण्य है साथ में लोभ है, सद्-गुरू, ज्ञान है और चेले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। प्रीत है मीत है और दंगल भी हैं, कुछ शहद से भरे कुछ विषैले भी हैं। वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।। "उच्चारण" एक हज़ार नौ सौ छियानवे से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति "वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।" रंग भी रूप भी छाँव भी धूप भी, देखते-देखते ही तो ढल जायेंगे। देश भी भेष भी और परिवेश भी, वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। जग में आकर सभी हैं जगाते अलख, प्रीत भी रीत भी, शब्द भी गीत भी, एक न एक दिन तो मचल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। याद रक्खेंगे हम तो सदा ही तुम्हें, तंग दिल मत बनो, संगे दिल मत बनो, पत्थरों में से धारे निकल आयेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। याद आता दुखों में ही भगवान है, दो कदम तुम बढ़ो, दो कदम हम बढ़ें, रास्ते मंजिलों से ही मिल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। पथ बुलाता तुम्हें रोशनी से भरा, हार को छोड़ दो, जीत को ओढ़ लो, फूल फिर से बगीचे में खिल जायेंगे। वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।। "आ गई वर्षा हमारे आज द्वारे" "हसीन ख्वाब" ।इक हादसे में उनसे मुलाकात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। देखा उन्हें मगर न कोई बात कर सके, केवल नजर मिली, नजर में बात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। वो भी थे बेकरार और हम भी थे गरजमन्द, दोनो के लिए प्रेम की सौगात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। इक दूजे के जज्बात दोनो तोलते रहे, हम डाल-डाल थे वो पात-पात हो गयी। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। खाई थी खेल में उन्होंने शह हजार बार, जब अन्त आ गया तो मेरी मात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। धूप-छाँव के चले थे सिलसिले बहुत, मंजिल के बीच में ही तो बरसात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। साया तलाशते रहे हम तो तमाम दिन, केवल इसी उधेड़-बुन में रात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। आँखें खुली हसीन ख्वाब टूट गया था, सूरज चढ़ा हुआ था और प्रात हो गई। रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।। "काले बादल बरस रहे हैं" गरज रहे हैं, लरज रहे हैं, काले बादल बरस रहे हैं। कल तक तो सावन सूखा था, धरती का तन-मन रूखा था, आज झमा-झम बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। भीग रहे हैं आँगन-उपवन, तृप्त हो रहे खेत, बाग, वन, उमड़-घुमड़ घन बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। मुन्ना भीगा, मुन्नी भीगी, गोरी की है चुन्नी भीगी, जोर-शोर से बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। श्याम घटाएँ घिर-घिर आयी, रिम-झिम की बजती शहनाई, जी भर कर अब बरस रहे हैं। काले बादल बरस रहे हैं।। "एक मुक्तक" दुर्बल पौधों को ही ज्यादा पानी-खाद मिला करती है। यौवन ढल जाने पर सबकी गर्दन बहुत हिला करती है।। "बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।" मेरे बहुत से ब्लागर मित्र अपनी पोस्ट में केवल एक शेर ही लगाते हैं। आज मैंने भी केवल कुछ शेर ही पोस्ट करने का मन बनाया है। कुछ मित्रों की रचनाओं को टिपियाते-टिपियाते यह छन्द बन गये। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें मिलने की आदत है, मगर हम बढ़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें भिड़ने की आदत है, मगर हम लड़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। उन्हें उड़ने की आदत है, मगर हम चढ़ नही सकते। बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।। "जग के झंझावातों में।" मानव दानव बन बैठा है, जग के झंझावातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। मुख में राम बगल में चाकू, मनवा है कितना पापी, दिवस-रैन उलझा रहता है, घातों में प्रतिघातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। ठोकर पर ठोकर खाकर भी, खुद को नही संभाला है, ज्ञान-पुंज से ध्यान हटाकर, लिपटा गन्दी बातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। भूल चुके हैं सीधी-सादी, सम्बन्धों की परिभाषा। विष के पादप उगे बाग में, जहर भरा है नातों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। बाँट लिया गुलशन को, लेकिन दूर न मन के भेद हुए, खेल रहे हैं ग्राहक बन कर, दुष्ट-बणिक के हाथों में। दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।। "झूला झूलें सावन में।" पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे, कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। हरियाली तीजों पर, कैसे लायें चोटी-बिन्दी को, सूखे मौसम में कैसे, अब सजें-सवाँरे सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। आँगन से कट गये नीम,बागों का नाम-निशान मिटा, रस्सी-डोरी के झूले, अब कहाँ लगायें सावन में। मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।। "अब तो जम करके बरसो, क्यों करते हो कल और परसों?" नदिया-नाले सूख रहे हैं, जलचर प्यासे-प्यासे हैं। पौधे-पेड़ बिना पानी के, व्याकुल खड़े उदासे हैं।। चौमासे के मौसम में, सूरज से आग बरसती है। जल की बून्दें पा जाने को, धरती आज तरसती है।। नभ की ओर उठा कर मुण्डी, मेंढक चिल्लाते हैं। बरसो मेघ धड़ाके से, ये कातर स्वर में गाते हैं।। दीन-कृषक है दुखी हुआ, बादल की आँख-मिचौली से। पानी अब तक गिरा नही, क्यों आसमान की झोली से? तितली पानी की चाहत में दर-दर घूम रही है। फड़-फड़ करती तुलसी की ठूँठों को चूम रही है।। दया करो घनश्याम, सुधा सा अब तो जम करके बरसो। रिम-झिम झड़ी लगा जाओ, क्यों करते हो कल और परसों? "मौत से सब बेखबर हैं" ब्लॉगर मित्रों! तीन सौवीं रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। आप सबका स्नेह मुझे आगे भी मिलता रहेगा। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं। आयेंगे चौराहे और दोराहे कितने, एक जैसी अन्त में सबकी डगर हैं।। जिन्दगी में स्वप्न सुन्दर हैं सजाये, गगनचुम्बी भवन सुन्दर हैं बनाये, साथ तन नही जायेगा, तन्हा सफर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। देह कुन्दन कनक सी सब राख ही हो जायेंगे। चाँद-सूरज फेर ही लेंगे, नजर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। सब तमन्नाएँ धरी की धरी ही रह जायेंगी, स्वर्ग की सरिता में, कितने ही भँवर हैं। किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।। "जीत की गन्ध आने लगी हार में" कितनी ताकत छिपी शब्द की धार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। वो तो बातों से नश्तर चुभोते रहे, हम तो हँसते हुए, घाव ढोते रहे, घात ही घात था उनके हर वार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। मेरे धीरज को वो आजमाते रहे, हम भी दिल पर सभी जख्म खाते रहे, पीठ हमने दिखाई नही प्यार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। दाँव-पेंचों को वो आजमा जब चुके, हार थक कर के अब वार उनके रुके, धार कुंठित हुई उनके हथियार मे। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। संग-ए-दिल बन गया मोम जैसा मृदुल, नेह आया उमड़ सिन्धु जैसा विपुल, हार कर जीत पाई थी उपहार में। जीत की गन्ध आने लगी हार में।। "याद वो मंजर पुराने आ गये हैं" " ।फिर चली पुरवाई बादल छा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। पेड़ के नीचे अचानक बैठ जाना, गीत लिखना और उनको गुनगुनाना, शब्द बनकर छन्द लय को पा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। झूमते भौंरो का गुंजन-गान गाना, मस्त होकर सुमन का सौरभ लुटाना, फूल-पत्ते भी नजर को भा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। झाँक कर खिड़की से उनका मुस्कुराना, नजर मिलते ही नजर अपनी झुकाना, नयन में सपने सुहाने छा गये हैं। याद वो मंजर पुराने आ गये हैं।। "आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे" ।भार हम जिन्दगी का ही ढोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। हाथ पर हाथ रख कर नही बैठे हम, सुख में हँसते रहे, गम में रोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। कुछ भी आगे नही बढ़ सके राह में, हादसे दिन-ब-दिन रोज होते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। हमने महफिल में उनके तराने पढ़े, मखमली ख्वाब दिल में संजोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। आँखों-आखों में काटी थी राते बहुत, वो तो खर्राटे भर-भर के सोते रहे। आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।। "क्यों यहाँ हिंसा बहाने पर तुले हो?" "पाँच शेर" हौसला रख कर जरा आगे बढ़ो, फासले इतने तो मत पैदा करो। मत अमावस से भरी बातें करो। मत इसे जज्बात में रौंदा करो। हारकर, थककर न यूँ बैठा करो। मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो। वादियों-जंगल, कानन, वस्ल-मिलन, मुलाकात, सवा-हवा, "जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे" बढ़ेंगे तुम्हारी तरफ धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। नया है मुसाफिर, नयी जिन्दगी है, नया फलसफा है, नयी बन्दगी है, पढ़ेंगे-लिखेंगे, बरक धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। उल्फत की राहों की सँकरी गली है, अभी सो रही गुलिस्ताँ की कली है, मिटेगा दिलों का फरक धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। दुर्गम डगर में हैं चट्टान भारी, हटानी पड़ेंगी, परत आज सारी, परबत बनेंगे, सड़क धीरे-धीरे। जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।। "सुख की मुस्कान नही छाई" आसमान में बादल छाये, इन्द्रधनुष भी दिया दिखाई। "रंग-बिरंगी, तितली आई" "जरा ठहर जाओ" अभी तो शाम है शब जल्द आने वाली है। अभी चराग सजे हैं, जरा ठहर जाओ।। तुम्हीं से ईद है, तुमसे मेरी दिवाली है। मेरी ये अर्ज है, कुछ देर तो ठहर जाओ।। तुम्हारे वास्ते दिल का मकान खाली है। दिल-ए-चमन में मिरे, दो घड़ी ठहर जाओ।। ज़फा-ए-दौर में, उम्मीद भी मवाली है, गम-ए-दयार में आकर जरा ठहर जाओ।। "एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा" तुम अगर रोज मिलते-मिलाते रहे, एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा। मद-भरे मय के प्याले पिलाते रहे, प्यार का ज़ाम उपहार हो जायेगा।। गन्ध से हो गये भाव मदहोश हैं, तुम अगर लाज से मुँह छिपाते रहे, मेरा जीना भी दुश्वार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। खिल-खिलाते हुए, मीत बन कर मिलो, हुस्न से इश्क को गर रिझाते रहे, प्रीत में भी, अलंकार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। हो खिजाओं में तुम और बहारों में तुम, मेरे आँगन में गर आते-जाते रहे, सुख का सागर ये परिवार हो जायेगा। एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।। "पानी नदारत है, आने वाली कयामत है?" पानी नदारत है, प्यासे हैं बाग, तड़ाग, कयामत है? "तुम ही मेरा सकल काव्य संसार हो" "तुम अगर मेरे जीवन में आते नही" तुम अगर मेरे जीवन में आते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। होती खेतों में तम्बू-कनाते गड़ी, एक सुन्दर सा घर हम बनाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। प्यार करना न आता हमें उम्र भर, गीत-कविताएँ हम गुन-गुनाते नही।। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। करनी पड़ती हमें एक दिन खुदकशी, राह जीने की गर तुम दिखाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। डर गयीं थी सभी रोशनी की किरण, आँख चन्दा व सूरज मिलाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। ले ही जाती भँवर में लहर खींच कर, हाथ अपना अगर तुम थमाते नही। हमको रंग जिन्दगी के लुभाते नही।। "चलो झूला झूलेंगे" "बिन डोर खिचें सब आते हैं" शब्दों के मौन निमन्त्रण से, बिन डोर खिचें सब आते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। इनके बिन बात अधूरी है, नजदीकी में भी दूरी है, दुनिया दारी में पड़ करके, बतियाना बहुत जरूरी है, मकड़ी के नाजुक जालों में, बलवान सिंह फंद जाते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। पशु-पक्षी और संगी-साथी, शब्दों से मन को भरमाते, तीखे शब्दों से मीत सभी, पल भर में दुश्मन बन जाते, पहले तोलो, फिर कुछ बोलो, स्वर मधुर छन्द बन जाते हैं। मुद्दत से टूटे रिश्ते भी, सम्बन्धों में बंध जाते हैं।। "तप कर निखर गये हम तो" इश्क की राह में चल कर बिखर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। कल तलक ख्वाब था अब बनके हकीकत आया, उनका इक वार मेरे दिल में नसीहत लाया, अपने जज्बात में आकर सिहर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। बदले हालात में, किस्मत ने साथ छोड़ दिया, बीती यादों ने मुकद्दर को गम से जोड़ दिया, तुम जिधर को चले थे, बस उधर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। तुम कहाँ हो? मेरे हालात पर तरस खाओ, चाँदनी रात में आकर के दरस दिखलाओ, राह-ए -उल्फत में कुछ सुधर गये हम तो। आग के ताप में तप कर निखर गये हम तो।। "घन छाये हैं" "गगन में छा गये बादल" धरा में जो दरारें थी, मिटी बारिश की बून्दों से, "इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे" इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। दिल में घुसा हुआ है, दल-दल दलों का जमघट। संसद में फिल्म जैसा, होता है खूब झंझट। फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।। गुस्सा व प्यार इनका, केवल दिखावटी है। और देश-प्रेम इनका, बिल्कुल बनावटी है। बदमाश, माफिया सब इनके ही घर पलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। खादी की केंचुली में, रिश्वत भरा हुआ मन। देंगे वहीं मदद ये, होगा जहाँ कमीशन। दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।। "जंगल और जीव" समझदार है, सीधा भी है, काम हमारे आता है। मूक प्राणियों पर हमको तो, तरस बहुत ही आता है। इनकी देख दुर्दशा अपना, सीना फटता जाता है।। इनकी रक्षा करना होगा। जीवन जीने की खातिर, "जोकर" जो काम नही कर पायें दूसरे, वो जोकर कर जाये। सरकस मे जोकर ही, दर्शक-गण को खूब रिझाये। नाक नुकीली, चड्ढी ढीली, लम्बी टोपी पहने, उछल-कूद कर जोकर राजा, सबको खूब हँसाये। चाँटा मारा साथी को, खुद रोता जोर-शोर से, हाव-भाव से, शैतानी से, सबका मन भरमाये। लम्बावाला तो सीधा है, बौना बड़ा चतुर है, उल्टी-सीधी हरकत करके, बच्चों को ललचाये। "जग की यही कहानी है" छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। मेड़ खेत को लगी निगलने, किसको दोषी ठहरायें, रक्षक ही भक्षक बन बैठे, न्याय कहाँ से हम पायें, अन्धा है कानून, न्याय की डगर बनी बेगानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। दुर्जन कुर्सी पर, लेकिन सज्जन फिरते मारे-मारे, सच्चों की अब खैर नही, झूठों के हैं वारे-न्यारे, शौर्य-वीरता की तो मानों, थम सी गयी रवानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। दुर्बल को बलवान लूटता, जनता को राजा लूटे, निर्धन बिना मौत मरता, धन के बल से कातिल छूटे, बे-ईमानों की इस कलयुग में, चमक रही पेशानी है। छिपी हुई खारे आँसू में, दुख की कोई निशानी है।। "माता और पिता" "सुन्दर सुमन खिलाना होगा" मानवता मर गयी विश्व में, सूरज है पथराया। डोल गये ईमान-धर्म, सारा जग है बौराया।। नदियों में बहने वाले, तालाबों को क्या पहचाने। महलों में रहने वाले, सर्दी-गर्मी को क्या जाने।। जगत बँधा है, प्रीत-रीत के अभिनव बन्धन में। ब्याल लिप्त रहता है, चन्दन के महके तन में।। जीवन एक सफर, इसमें यादें आती जाती है। रिश्तों की बुनियाद, राह में बनती जाती है।। जितना जख्म कुरेदोगे, उतना ही दर्द बढ़ेगा। जितनी धूल उड़ाओगे, उतना ही गर्द चढ़ेगा।। जोड़-तोड़ करके अपना परिवार चलाना होगा। वीराने गुलशन में सुन्दर सुमन खिलाना होगा।। "जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है" अन्तर रखने वालों से, मेरा अन्तर नही मिलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। जीवन कभी कठोर कठिन है, कभी सरल सा है, भोजन अमृत-तुल्य कभी है, कभी गरल सा है, माली बिना किसी उपवन में, फूल नही खिलता हैं। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। सावन मे भी कभी-कभी सूखा भी होता है, खाना खाकर कभी, उदर भूखा भी होता है, काँटे जिनकी करें सुरक्षा उनका तन नही छिलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। नर्म-नर्म बिस्तर में, सुख की नींद नही आती है, किन्तु श्रमिक को कंकड़ की ढेरी पर आ जाती है, तप और श्रम से पत्थर का भी हृदय पिघलता है। जब आती है हवा, तभी बूटा-पत्ता हिलता है।। "आओ तो" सब अंधियारे मिट जायेंगे, आशा का दीप जलाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। बागों में कोयल बोल रही, मिश्री कानों में घोल रही, हम साज बजाने आयेंगे, तुम अभिनव राग सुनाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। क्यों नील गगन को ताक रहे, चितवन से क्यों हो झाँक रहे, हम मर कर भी जी जायेंगे, अमृत की बून्द पिलाओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। लहरों से कटते हैं कगार, करते हो किसका इन्तजार, हम चप्पू लेकर आयेंगे, तुम नौका बन कर आओ तो। भँवरे गुन-गुन कर गायेंगे, गुलशन में फूल खिलाओ तो।। "जरा सी बात" जरा सी बात में ही युद्ध होते हैं बहुत भारी। जरा सी बात में ही क्रुद्ध होते हैं धनुर्धारी।। जरा सी बात ही माहौल में विष घोल देती है। जरा सी जीभ ही कड़ुए वचन को बोल देती है।। मगर हमको नही इसका कभी आभास होता है। अभी जो घट रहा कल को वही इतिहास होता है।। "सुमन से मन का नाता जोड़ो" "वि़द्यालय से नाता जोड़ो" सुस्ती, मस्ती, आलस छोडो़। विद्यालय से नाता जोड़ो। गरमी ने कितना झुलसाया। अब बारिश का मौसम आया।। पुस्तक, बस्ता, पेन सम्भालो। छोटा छाता एक मँगा लो।। नित्य-प्रति विद्यालय जाओ। पढ़ने में मन खूब लगाओ।। होम-वर्क करना मत भूलो। फिर अपने झूले पर झूलो।।
भिवानी, 24 फरवरी(हप्र) इनसो ने जिला अध्यक्ष सेठी धनाना की अध्यक्षता में छात्रों द्वारा की जा रही ऑनलाइन परीक्षा की मांग का समर्थन करते हुए चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि बिना कोरोना वैक्सीन लगाए छात्रों को एक साथ शैक्षणिक परिसरों में बुलाना सुरक्षित नहीं है, इसलिए छात्रों को ऑफलाइन परीक्षाओं के साथ-साथ ऑनलाइन परीक्षा देने का भी विकल्प दिया जाए। उन्होंने कहा कि इनसो छात्रों की मांग का समर्थन करती है और ऑनलाइन परीक्षा देने का विकल्प छात्रों के स्वास्थ्य व शिक्षा के हित में है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षाएं पूरी तरह ऑफलाइन कराई गई तो पूरी संख्या में छात्रों को विश्वविद्यालय व कालेजों में बुलाया जाएगा और बिना कोरोना वैक्सीन दिए इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को शैक्षणिक परिसरों में इकट्ठा करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि इनसो छात्रों द्वारा की जा रही ऑनलाइन परीक्षा की मांग का समर्थन करती है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से कुलपति व शिक्षा मंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि छात्रों को परीक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से देने का भी विकल्प देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
भिवानी, चौबीस फरवरी इनसो ने जिला अध्यक्ष सेठी धनाना की अध्यक्षता में छात्रों द्वारा की जा रही ऑनलाइन परीक्षा की मांग का समर्थन करते हुए चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि बिना कोरोना वैक्सीन लगाए छात्रों को एक साथ शैक्षणिक परिसरों में बुलाना सुरक्षित नहीं है, इसलिए छात्रों को ऑफलाइन परीक्षाओं के साथ-साथ ऑनलाइन परीक्षा देने का भी विकल्प दिया जाए। उन्होंने कहा कि इनसो छात्रों की मांग का समर्थन करती है और ऑनलाइन परीक्षा देने का विकल्प छात्रों के स्वास्थ्य व शिक्षा के हित में है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षाएं पूरी तरह ऑफलाइन कराई गई तो पूरी संख्या में छात्रों को विश्वविद्यालय व कालेजों में बुलाया जाएगा और बिना कोरोना वैक्सीन दिए इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को शैक्षणिक परिसरों में इकट्ठा करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि इनसो छात्रों द्वारा की जा रही ऑनलाइन परीक्षा की मांग का समर्थन करती है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से कुलपति व शिक्षा मंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि छात्रों को परीक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से देने का भी विकल्प देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
मेरठ। डीएम बी. चन्द्रकला ने बुधवार को विकास भवन के मीटिंग हाल का जीर्णोद्धार के बाद लोकार्पण किया। इस दौरान प्रभारी सीडीओ मुकेश चन्द्र, पीडी आरके त्रिवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मेरठ। डीएम बी. चन्द्रकला ने बुधवार को विकास भवन के मीटिंग हाल का जीर्णोद्धार के बाद लोकार्पण किया। इस दौरान प्रभारी सीडीओ मुकेश चन्द्र, पीडी आरके त्रिवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। भारतीय सेना (Indian Army) दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। पाकिस्तान (Pakistan) आजादी के बाद लगातार भारत के खिलाफ धोखेबाजी करता आया है। कश्मीर (Kashmir) को हड़पने के लिए पाकिस्तानी सेना अब तक सारी हदें पार कर चुकी है। भारतीय सेना के आगे दुश्मन देश को हमेशा हार का मुंह देखना पड़ा है। ऐसा ही 1965 के युद्ध में भी हुआ था। पाकिस्तानी सेना के 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' को हमारी सेना ने बुरी तरह से धवस्त कर दिया था। दरसअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर हड़पने के लिए ऑपरेशन जिब्राल्टर की साजिश रची थी। दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। कश्मीर हड़पने का पाक सेना का यह एक बड़ा ही दुस्साहसी प्लान था। इस ऑपरेशन के प्लान के तहत पाक सेना के जवान अलग-अलग वेश में कश्मीर में दाखिल होते और दंगे करवाते। प्लान के मुताबिक करीब 3 हजार सैनिक 8 अगस्त को कश्मीर में दाखिल हो गए और पुंछ में तैनात ब्रिगेड पर हमला बोल दिया। इस दौरान करारा जवाब दिया गया और ऑपरेशन जिब्राल्टर को नाकामयाब कर दिया गया। कश्मीरी मुसलमानों के बीच हिंसा उकसाने के मकसद से कश्मीर में प्रवेश किया गया। सब कुछ प्लान के मुताबिक न होने के अभाव की में शुरूआत से ही रणनीति बहुत ही खराब हो गई। फिर क्या था भारतीय सेना ने घुसपैठियों को जल्द ही ढूंढ निकाला। इसी ऑपरेशन ने 1965 में भारत-पाक युद्ध की शुरुआत की थी।
दुश्मनों ने आठ सितंबर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। भारतीय सेना दुश्मनों ने आठ सितंबर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। पाकिस्तान आजादी के बाद लगातार भारत के खिलाफ धोखेबाजी करता आया है। कश्मीर को हड़पने के लिए पाकिस्तानी सेना अब तक सारी हदें पार कर चुकी है। भारतीय सेना के आगे दुश्मन देश को हमेशा हार का मुंह देखना पड़ा है। ऐसा ही एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के युद्ध में भी हुआ था। पाकिस्तानी सेना के 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' को हमारी सेना ने बुरी तरह से धवस्त कर दिया था। दरसअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर हड़पने के लिए ऑपरेशन जिब्राल्टर की साजिश रची थी। दुश्मनों ने आठ सितंबर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ को खेमकरण सेक्टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। कश्मीर हड़पने का पाक सेना का यह एक बड़ा ही दुस्साहसी प्लान था। इस ऑपरेशन के प्लान के तहत पाक सेना के जवान अलग-अलग वेश में कश्मीर में दाखिल होते और दंगे करवाते। प्लान के मुताबिक करीब तीन हजार सैनिक आठ अगस्त को कश्मीर में दाखिल हो गए और पुंछ में तैनात ब्रिगेड पर हमला बोल दिया। इस दौरान करारा जवाब दिया गया और ऑपरेशन जिब्राल्टर को नाकामयाब कर दिया गया। कश्मीरी मुसलमानों के बीच हिंसा उकसाने के मकसद से कश्मीर में प्रवेश किया गया। सब कुछ प्लान के मुताबिक न होने के अभाव की में शुरूआत से ही रणनीति बहुत ही खराब हो गई। फिर क्या था भारतीय सेना ने घुसपैठियों को जल्द ही ढूंढ निकाला। इसी ऑपरेशन ने एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में भारत-पाक युद्ध की शुरुआत की थी।
'फेसबुक' (Facebook) की पैरेंट कंपनी 'मेटा' (Meta) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। यदि आप पत्रकार हैं और नई नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए यह खबर काफी काम की हो सकती है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के संपादकीय पेज पर आज लिखे अपने एक कॉलम में 'टाइम्स ग्रुप' के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर समीर जैन ने पीएम मोदी की 'कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता' के लिए सराहना भी की है। इस बारे में एनडीटीवी की ग्रुप प्रेजिडेंट सुपर्णा सिंह ने एंप्लॉयीज को एक लेटर लिखा है। बिजनेस मीडिया की इस तेज ग्रोथ में वही टिकेगा और आगे बढ़ेगा-जो सही, सटीक और स्पष्ट जानकारी व सलाह देगा। इन सबसे ऊपर, किसी फिल्म या स्टार के बहिष्कार की घोषणा करने का नया चलन ताबूत में आखिरी कील साबित हो रहा है। किसी भी फिल्म या फिल्म स्टार के बहिष्कार का आह्वान पूरी तरह से अलोकतांत्रिक हैं। पत्रकार प्रशांत सिंह ने 'जी' (Zee) समूह में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब चार साल से 'जी बिजनेस' (Zee Business) की अंग्रेजी वेबसाइट में बतौर डिप्टी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। नजीब सिद्दीकी ने अपने करियर की शुरुआत बीसीसीएल के साथ की और बाद में मिड-डे मल्टीमीडिया लिमिटेड से जुड़ गए। मीडिया फर्म 'नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड' (NDTV) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। NDTV ने दावा किया कि अडानी समूह की VCPL ने ओपन ऑफर के जरिए कंपनी में 5,330,792 इक्विटी शेयरों के साथ 8. 27% की हिस्सेदारी प्राप्त की है। तमांग को विभिन्न मीडिया संस्थानों में डिजिटल बिजनेस को संभालने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। इन पदों पर काम करने के इच्छुक युवाओं के पास पत्रकारिता में स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री के साथ हिंदी पर अच्छी पकड़ तथा अंग्रेजी का व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक ओपन ऑफर को 53,27,989 इक्विटी शेयरों का सब्सक्रिप्शन मिला है। देश का प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान 'BW बिजनेस वर्ल्ड' एक बार फिर 'इंडिया बिजनेस लिटरेचर फेस्टिवल' (IBLF) कार्यक्रम का आगाज कर रहा है। इस कदम ने अडानी समूह को मीडिया फर्म के अधिग्रहण करने के और करीब पहुंचा दिया है।
'फेसबुक' की पैरेंट कंपनी 'मेटा' से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। यदि आप पत्रकार हैं और नई नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए यह खबर काफी काम की हो सकती है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के संपादकीय पेज पर आज लिखे अपने एक कॉलम में 'टाइम्स ग्रुप' के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर समीर जैन ने पीएम मोदी की 'कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता' के लिए सराहना भी की है। इस बारे में एनडीटीवी की ग्रुप प्रेजिडेंट सुपर्णा सिंह ने एंप्लॉयीज को एक लेटर लिखा है। बिजनेस मीडिया की इस तेज ग्रोथ में वही टिकेगा और आगे बढ़ेगा-जो सही, सटीक और स्पष्ट जानकारी व सलाह देगा। इन सबसे ऊपर, किसी फिल्म या स्टार के बहिष्कार की घोषणा करने का नया चलन ताबूत में आखिरी कील साबित हो रहा है। किसी भी फिल्म या फिल्म स्टार के बहिष्कार का आह्वान पूरी तरह से अलोकतांत्रिक हैं। पत्रकार प्रशांत सिंह ने 'जी' समूह में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब चार साल से 'जी बिजनेस' की अंग्रेजी वेबसाइट में बतौर डिप्टी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। नजीब सिद्दीकी ने अपने करियर की शुरुआत बीसीसीएल के साथ की और बाद में मिड-डे मल्टीमीडिया लिमिटेड से जुड़ गए। मीडिया फर्म 'नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड' से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। NDTV ने दावा किया कि अडानी समूह की VCPL ने ओपन ऑफर के जरिए कंपनी में पाँच,तीन सौ तीस,सात सौ बानवे इक्विटी शेयरों के साथ आठ. सत्ताईस% की हिस्सेदारी प्राप्त की है। तमांग को विभिन्न मीडिया संस्थानों में डिजिटल बिजनेस को संभालने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। इन पदों पर काम करने के इच्छुक युवाओं के पास पत्रकारिता में स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री के साथ हिंदी पर अच्छी पकड़ तथा अंग्रेजी का व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक ओपन ऑफर को तिरेपन,सत्ताईस,नौ सौ नवासी इक्विटी शेयरों का सब्सक्रिप्शन मिला है। देश का प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान 'BW बिजनेस वर्ल्ड' एक बार फिर 'इंडिया बिजनेस लिटरेचर फेस्टिवल' कार्यक्रम का आगाज कर रहा है। इस कदम ने अडानी समूह को मीडिया फर्म के अधिग्रहण करने के और करीब पहुंचा दिया है।
इस पद्यभाग में वैज्ञानिक युग और आधुनिक मानव का विश्लेषण हुआ है. कवि दिनकर जी इस कविता द्वारा यह संदेश देना चाहते हैं कि आज के मानव ने प्रकृति के हर तत्व पर विजय प्राप्त कर ली है. परंतु कैसी विडंबना है कि उसने स्वयं को नहीं पहचाना, अपने भाईचारे को नहीं समझा. प्रकृति पर विजय प्राप्त करना मनुष्य की साधना है, मानवमानव के बीच स्नेह का बाँध बाँधना मानव की सिद्धि है. जो मानव दूसरे मानव से प्रेम का रिश्ता जोड़कर आपस की दूरी को मिटाए, वही मानव कहलाने का अधिकारी होगा. कवि रामधारीसिंह दिनकर जी का जन्म ई. सन् १९०८ को बिहार प्रांत के मुंगेर जिले में हुआ. पहले वे रेडियो विभाग में काम करते थे. बाद में एक सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक बने. आगे चलकर वे भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के पद पर नियुक्त हुए. ई. सन् १९७४ को इनका देहावसान हुआ. कवि की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं- हुँकार, रेणुका, रसवंती, सामधेनी, धूप-छाँह, कुरुक्षेत्र, बापू, रश्मिरथि आदि कवि की हर रचना में हृदय को प्रभावित और उत्साहित करने की पूर्ण शक्ति है. इनकी भाषा सजीव और विषय के अनुकूल है. 'अभिनव मनुष्य' पद्यभाग 'कुरुक्षेत्र' के षष्ठ सर्ग से लिया गया है.
इस पद्यभाग में वैज्ञानिक युग और आधुनिक मानव का विश्लेषण हुआ है. कवि दिनकर जी इस कविता द्वारा यह संदेश देना चाहते हैं कि आज के मानव ने प्रकृति के हर तत्व पर विजय प्राप्त कर ली है. परंतु कैसी विडंबना है कि उसने स्वयं को नहीं पहचाना, अपने भाईचारे को नहीं समझा. प्रकृति पर विजय प्राप्त करना मनुष्य की साधना है, मानवमानव के बीच स्नेह का बाँध बाँधना मानव की सिद्धि है. जो मानव दूसरे मानव से प्रेम का रिश्ता जोड़कर आपस की दूरी को मिटाए, वही मानव कहलाने का अधिकारी होगा. कवि रामधारीसिंह दिनकर जी का जन्म ई. सन् एक हज़ार नौ सौ आठ को बिहार प्रांत के मुंगेर जिले में हुआ. पहले वे रेडियो विभाग में काम करते थे. बाद में एक सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक बने. आगे चलकर वे भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के पद पर नियुक्त हुए. ई. सन् एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर को इनका देहावसान हुआ. कवि की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं- हुँकार, रेणुका, रसवंती, सामधेनी, धूप-छाँह, कुरुक्षेत्र, बापू, रश्मिरथि आदि कवि की हर रचना में हृदय को प्रभावित और उत्साहित करने की पूर्ण शक्ति है. इनकी भाषा सजीव और विषय के अनुकूल है. 'अभिनव मनुष्य' पद्यभाग 'कुरुक्षेत्र' के षष्ठ सर्ग से लिया गया है.
Ganga Dussehra 2022: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है. इस साल गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) 9 जून 2022 को मनाया जाएगा. सनातन धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व होता है. इस दिन मां गंगा स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आई थीं. तभी से मां गंगा को पूजने की पंरपरा शुरू हो गई थी और ये पंरपरा आज भी जारी है. गंगा दशहरा के दिन सुबह में लोग गंगा में स्नान करके सूर्य को जल देते हैं और इसके बाद मां गंगा की आरती करते है. इससे मनुष्य को सारे मानसिक और शारीरिक कष्ट से निजात मिलती है. मां गंगा सभी पापों को हरने वाली हैं. मां की कृपा से सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं. ऐस कहा जाता है कि इस दिन स्नान के बाद इन 10 चीजों का दान जरूर करना चाहिए. मान्यता ऐसी है कि इन चीजों के दान से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन की सभी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है. एबीपी न्यूज के लेख के अनुसार, यदि आप इस दिन दान करते है. तो ग्रहों की पीड़ा से भी मुक्ति मिलना सरल हो जाता है. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 9 जून को सुबह 8 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 10 जून को शाम 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगी. 10 जून को उदया तिथि प्राप्त हो रही है. इस आधार पर गंगा दशहरा 10 जून को मनाई जाएगा. गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने का महत्व होता है. इसके साथ ही दान करने की परंपरा है. गंगा दशहरा के दिन पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगानी चाहिए. हालांकि, आप किसी तालाब या आस-पास की नदी में ही स्नान कर सकते हैं. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है. )
Ganga Dussehra दो हज़ार बाईस: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है. इस साल गंगा दशहरा नौ जून दो हज़ार बाईस को मनाया जाएगा. सनातन धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व होता है. इस दिन मां गंगा स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आई थीं. तभी से मां गंगा को पूजने की पंरपरा शुरू हो गई थी और ये पंरपरा आज भी जारी है. गंगा दशहरा के दिन सुबह में लोग गंगा में स्नान करके सूर्य को जल देते हैं और इसके बाद मां गंगा की आरती करते है. इससे मनुष्य को सारे मानसिक और शारीरिक कष्ट से निजात मिलती है. मां गंगा सभी पापों को हरने वाली हैं. मां की कृपा से सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं. ऐस कहा जाता है कि इस दिन स्नान के बाद इन दस चीजों का दान जरूर करना चाहिए. मान्यता ऐसी है कि इन चीजों के दान से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन की सभी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है. एबीपी न्यूज के लेख के अनुसार, यदि आप इस दिन दान करते है. तो ग्रहों की पीड़ा से भी मुक्ति मिलना सरल हो जाता है. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि नौ जून को सुबह आठ बजकर इक्कीस मिनट से शुरू होकर दस जून को शाम सात बजकर पच्चीस मिनट तक रहेगी. दस जून को उदया तिथि प्राप्त हो रही है. इस आधार पर गंगा दशहरा दस जून को मनाई जाएगा. गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने का महत्व होता है. इसके साथ ही दान करने की परंपरा है. गंगा दशहरा के दिन पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगानी चाहिए. हालांकि, आप किसी तालाब या आस-पास की नदी में ही स्नान कर सकते हैं.
। । श्री। । 24 मई 2019 (शुक्रवार) मेष- सांयकाल तक आपके हाथों से किसी विशेष गैदरिंग का आयोजन होगा या फिर कहीं पर बैठकर रंगीन शाम का जायजा लिया जाएगा। वृष- जिस महत्वपूर्ण कार्य में लगातार बाधा आ रही थी आज उस काम के बनने का दिन है। फाइनेंस के मामले में ज्यादा चिन्तित न रहें। मदद मिल जाएगी। मिथुन - हो सकता है अभी आपको इस बात की शंका हो कि सफलता मिलेगी या नहीं। दोपहर बाद इस बात की तस्कीद हो जाएगी कि आप अपने वेंचर में कामयाब हैं। कर्क- किसी फंक्शन या पार्टी को सेलिब्रेट करने के लिए सांयकाल का समय भी अच्छा रहेगा। खर्चा बढ़ सकता है। समय पर सभी काम निबटाने होंगे। सिंह- आपके और आपके चहेतों के बीच किसी बात की गलतफहमी हो तो उसके लिए आप अपना पक्ष रखने की कोशिश कर सकते हैं। कन्या- आप एडवांस में ही अपने जरूरी काम निपटा लें। सांयकाल का समय जरूरी मीटिंग्स के लिए रिजर्व रखें। कुछ मुद्दे आपके हक में अनुकूल हो सकते हैं। तुला- पहले अपने दैनिक कार्यों को निपटाना ही अच्छा है। प्रक्रिया के चलते हो सकता है आपके किसी जरूरी काम में विलम्ब हो जाए। बेहतर होगा समय का उपयोग तत्काल करें। वृश्चिक- आज किसी कारण आपकी जेब में पैसा नहीं टिक सकता है। कोई जरूरी डाक या मेल की प्रतीक्षा करनी भी आपके लिए जरूरी है। धनु- हो सकता है दोपहर बाद किसी बड़े आदमी या सेलिब्रिटी से भी आपकी मुलाकात करवाई जाए। इन सबके बीच आज की सारी भागदौड़ आगे चलकर कुछ महत्वूर्ण बदलाव को जन्म देगी। मकर- आज अपने ही कामकाज से आप उत्साहित रहेंगे। दूसरों की गिरती छवि के आगे आपकी पर्सनलिटी कुछ ज्यादा ही असरदार नज़र आ रही है। कुंभ-दोपहर बाद किसी आमंत्रण या महत्वपूर्ण सूचना से आपकी गतिविधि और भी बढ़ जाएगी। जितना हो सके उतना ही काम हाथ में लेना चाहिए अन्यथा गुडविल खराब होती है। मीन- रिलेशनशिप यानि प्यार प्रेम के मामले में अभी कुछ उलझने आपके सामने रहेंगी। पैसें आदि के लेन देन पर अभी कोई निर्णय लेना भी ठीक नहीं होगा।
। । श्री। । चौबीस मई दो हज़ार उन्नीस मेष- सांयकाल तक आपके हाथों से किसी विशेष गैदरिंग का आयोजन होगा या फिर कहीं पर बैठकर रंगीन शाम का जायजा लिया जाएगा। वृष- जिस महत्वपूर्ण कार्य में लगातार बाधा आ रही थी आज उस काम के बनने का दिन है। फाइनेंस के मामले में ज्यादा चिन्तित न रहें। मदद मिल जाएगी। मिथुन - हो सकता है अभी आपको इस बात की शंका हो कि सफलता मिलेगी या नहीं। दोपहर बाद इस बात की तस्कीद हो जाएगी कि आप अपने वेंचर में कामयाब हैं। कर्क- किसी फंक्शन या पार्टी को सेलिब्रेट करने के लिए सांयकाल का समय भी अच्छा रहेगा। खर्चा बढ़ सकता है। समय पर सभी काम निबटाने होंगे। सिंह- आपके और आपके चहेतों के बीच किसी बात की गलतफहमी हो तो उसके लिए आप अपना पक्ष रखने की कोशिश कर सकते हैं। कन्या- आप एडवांस में ही अपने जरूरी काम निपटा लें। सांयकाल का समय जरूरी मीटिंग्स के लिए रिजर्व रखें। कुछ मुद्दे आपके हक में अनुकूल हो सकते हैं। तुला- पहले अपने दैनिक कार्यों को निपटाना ही अच्छा है। प्रक्रिया के चलते हो सकता है आपके किसी जरूरी काम में विलम्ब हो जाए। बेहतर होगा समय का उपयोग तत्काल करें। वृश्चिक- आज किसी कारण आपकी जेब में पैसा नहीं टिक सकता है। कोई जरूरी डाक या मेल की प्रतीक्षा करनी भी आपके लिए जरूरी है। धनु- हो सकता है दोपहर बाद किसी बड़े आदमी या सेलिब्रिटी से भी आपकी मुलाकात करवाई जाए। इन सबके बीच आज की सारी भागदौड़ आगे चलकर कुछ महत्वूर्ण बदलाव को जन्म देगी। मकर- आज अपने ही कामकाज से आप उत्साहित रहेंगे। दूसरों की गिरती छवि के आगे आपकी पर्सनलिटी कुछ ज्यादा ही असरदार नज़र आ रही है। कुंभ-दोपहर बाद किसी आमंत्रण या महत्वपूर्ण सूचना से आपकी गतिविधि और भी बढ़ जाएगी। जितना हो सके उतना ही काम हाथ में लेना चाहिए अन्यथा गुडविल खराब होती है। मीन- रिलेशनशिप यानि प्यार प्रेम के मामले में अभी कुछ उलझने आपके सामने रहेंगी। पैसें आदि के लेन देन पर अभी कोई निर्णय लेना भी ठीक नहीं होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी, निजी, लघु वित्त, भुगतान बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंकों के पूर्णकालिक निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतनमान से जुड़े नए नियम सोमवार को जारी कर दिए। पिछले वित्त वर्ष में मित्तल को 21. 19 करोड़ रुपए का अतिरिक्त पारिश्रमिक दिया गया था, जो कंपनी के शुद्ध लाभ के 11 प्रतिशत की सीमा से अधिक है। देश में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक की प्रमुख चंदा कोचर को वित्त वर्ष 2016-17 में कुल 7. 85 करोड़ रुपए का वेतन मिला है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी, निजी, लघु वित्त, भुगतान बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंकों के पूर्णकालिक निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतनमान से जुड़े नए नियम सोमवार को जारी कर दिए। पिछले वित्त वर्ष में मित्तल को इक्कीस. उन्नीस करोड़ रुपए का अतिरिक्त पारिश्रमिक दिया गया था, जो कंपनी के शुद्ध लाभ के ग्यारह प्रतिशत की सीमा से अधिक है। देश में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक की प्रमुख चंदा कोचर को वित्त वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह में कुल सात. पचासी करोड़ रुपए का वेतन मिला है।
जब कहा मैंने गला काटके मरजाऊं मैं । हँसके बोले मेरी शमशीरका जौहर निकले ।। पहले यह नाज यःशोखी यःशरारत कब थी । अब तो दो हाथ क़यामतसेभी बढ़कर निकले। जब कहा मैंने लिपट जाओ मेरे सीनेसे । हँसके फ़र्माया कि अब आपके भी पर निकले ॥ दस्ते गुस्ताख न बढ़जाय उन्हें खौफ़यः था । इसलिये क़ब्र से दामन वः बचाकर निकले ।। हमनशीं हज़रते-उस्तादके शागिदों में । हां जो निकलेभीतो कुछ ज़ारसकुन-वरनिकले वज़न ( १० ) 'फायळातुन फायलाउन फायलातुन फायलुन्" गज़ल ज़ख्मी । ए दिला ! बचना हसीनों की नज़र से देखना। नाजाना अब कहीं उस फितूना-गरसे देखना । फँसगया है दिल मेरा उस बेखबरसे देखना । जो समझता गुनह तो सीधी नज़रसे देखना । दिलनहीं क़ाबूमें रहता जिसघड़ी आता है याद । मुस्कराकर वह तेरा तिर्धी नजरसे देखना ।। कबसे हम मुश्ताक़ बैठे हैं तेरे दीदार के । आज हमको भी जरा सीधी नज़र से देखना ।। अब न दिल देना उसे ज़ख्मी कहे देताहूं मैं । दूरही रहना सदा उस बेखबरसे देखना १४४॥ गजल ऐश । मायल उस पर्दा-नशी पर है तबीअत देखता। उम्र भर है गैर मुम्किन जिस्की सुरत देखना । नाज़की रत्फ़ार से चलना अगर आया तुम्हें। ठोकरें खाती फिरेगी फिर कयामत देखना । जब सुना बीमार-उल्फ़त है हमारा जां-ब-लब । खुद चले आए अयादत को मुहब्बत देखना ।। वस्फे-गेस मुझसे सुनकर गैर से कहता है यार । केस बलाकी पाई है इसने तबीअत देखना ।। ना- लहद दोशे- हसीनां पर जनाज़ा जायगा । ऐश मरनेपर मेरे लाशेकी शौकत देखना १४५ गज़ल रसा । दिल मेरा तीरे सितम-गर का निशाना होगया । आफ़ते-जां हक़में मेरे दिल लगाना होगया ।। खाकसारीने दिखाया बादे-मुर्दन भी उरूज । आस्मां तुर्बत पै मेरी शामियाना होगया ।। फरले-गुलमें भी न कुछ सूरत रिहाईकी हुई । क़ैद में सैयाद मुझको यक ज़माना होगया ।। बादे-मुर्दन कौन आता है ख़बर को ए-रसा । ख़ित्म सब कुंजे-लहद तल दोस्ताना होगया १४६ सरन तनसे कट सका बे-कार खंजर होगया । सख्त जानीसे मेरी आजिज सितम्-गर होगया ॥ रूह जब तनहा मेरी जाने लगी सूए-अदम् । हसरतो-अन्दोह का हमराह लश्कर होगया ।। उनके तेगे नाज़से सीने की कड़ियां कटगईं। चार - दीवारे - अनासिर में नयादर होगया ।। वस्फ़े-जुल्फेःअम्बरी जिस दम हुवा उसपर रकम । पर्चए किर्तास सर तासर मोअत्तर होगया ।। क्या खताओ जुर्मक्याबाइससबबक्याक्यावजह। सच कहो आईनए-दिल क्यों मुकद्दर होगया ।। अक्ल हैरां होगई उनके दहाने-तंग से ।। चश्मएः हैवां मेंसर गर्दा सिकन्दर होगया ।। हासिले- इश्के-बुतां हमको अमानत यह हुवा । अपनी रुसवाईका चर्चा आजघरघरहोगया १४७ कूचए-दिल्दार में आशिक का मस्कन होगया । बुलबुले-शैदाका गुलशनमें नशेमन होगया ।। बाहरी दुनिया जो हमने दोस्तीकी आपसे । लीजिये सारा ज़माना अपना दुश्मन होगया ।। ख़तभी गर्दनपर न आया, तेग बल खाखागई । सख्त जानीसे हमारी, मोम आहन होगया । अम्बरी जुल्फें रुखे - अनवरसे आकर मिलगई । तिब्बतो तातारियोंका एक मस्कन होगया ।। जब्ते खामोशी अगर पूछो तो इसका नाम है । बुतन बोले उम्रभरआ जिज़बरहमनहोगया १४८॥ ग़ज़लशंकर । रूए-रोशन पर फिदा जबसे मेरा दिल होगया । खाले-आरिज़उन्का मेरी आंखका तिल होगया ।। मुस्करा उट्ठे सवाले - वस्ल पर वह झेपकर । मुद्दआ दिलका हमारे आज हासिल होगया ।। दस्ते कातिल न ठहरा नीमचा गिरगिरपड़ा । कत्ल पर मेरे उठाना हाथ मुस्किल होगया ।। एक दिन वह था हमारी यादसे खाली न थे । अब हमारा नाम लेना उन्को मुश्किल होगया ।। वस्ली शब हँसके शंकरसे वःफरमाने लगे । मुद्दआदिलकातुम्हारेअबतोहासिल होगया १४९
जब कहा मैंने गला काटके मरजाऊं मैं । हँसके बोले मेरी शमशीरका जौहर निकले ।। पहले यह नाज यःशोखी यःशरारत कब थी । अब तो दो हाथ क़यामतसेभी बढ़कर निकले। जब कहा मैंने लिपट जाओ मेरे सीनेसे । हँसके फ़र्माया कि अब आपके भी पर निकले ॥ दस्ते गुस्ताख न बढ़जाय उन्हें खौफ़यः था । इसलिये क़ब्र से दामन वः बचाकर निकले ।। हमनशीं हज़रते-उस्तादके शागिदों में । हां जो निकलेभीतो कुछ ज़ारसकुन-वरनिकले वज़न 'फायळातुन फायलाउन फायलातुन फायलुन्" गज़ल ज़ख्मी । ए दिला ! बचना हसीनों की नज़र से देखना। नाजाना अब कहीं उस फितूना-गरसे देखना । फँसगया है दिल मेरा उस बेखबरसे देखना । जो समझता गुनह तो सीधी नज़रसे देखना । दिलनहीं क़ाबूमें रहता जिसघड़ी आता है याद । मुस्कराकर वह तेरा तिर्धी नजरसे देखना ।। कबसे हम मुश्ताक़ बैठे हैं तेरे दीदार के । आज हमको भी जरा सीधी नज़र से देखना ।। अब न दिल देना उसे ज़ख्मी कहे देताहूं मैं । दूरही रहना सदा उस बेखबरसे देखना एक सौ चौंतालीस॥ गजल ऐश । मायल उस पर्दा-नशी पर है तबीअत देखता। उम्र भर है गैर मुम्किन जिस्की सुरत देखना । नाज़की रत्फ़ार से चलना अगर आया तुम्हें। ठोकरें खाती फिरेगी फिर कयामत देखना । जब सुना बीमार-उल्फ़त है हमारा जां-ब-लब । खुद चले आए अयादत को मुहब्बत देखना ।। वस्फे-गेस मुझसे सुनकर गैर से कहता है यार । केस बलाकी पाई है इसने तबीअत देखना ।। ना- लहद दोशे- हसीनां पर जनाज़ा जायगा । ऐश मरनेपर मेरे लाशेकी शौकत देखना एक सौ पैंतालीस गज़ल रसा । दिल मेरा तीरे सितम-गर का निशाना होगया । आफ़ते-जां हक़में मेरे दिल लगाना होगया ।। खाकसारीने दिखाया बादे-मुर्दन भी उरूज । आस्मां तुर्बत पै मेरी शामियाना होगया ।। फरले-गुलमें भी न कुछ सूरत रिहाईकी हुई । क़ैद में सैयाद मुझको यक ज़माना होगया ।। बादे-मुर्दन कौन आता है ख़बर को ए-रसा । ख़ित्म सब कुंजे-लहद तल दोस्ताना होगया एक सौ छियालीस सरन तनसे कट सका बे-कार खंजर होगया । सख्त जानीसे मेरी आजिज सितम्-गर होगया ॥ रूह जब तनहा मेरी जाने लगी सूए-अदम् । हसरतो-अन्दोह का हमराह लश्कर होगया ।। उनके तेगे नाज़से सीने की कड़ियां कटगईं। चार - दीवारे - अनासिर में नयादर होगया ।। वस्फ़े-जुल्फेःअम्बरी जिस दम हुवा उसपर रकम । पर्चए किर्तास सर तासर मोअत्तर होगया ।। क्या खताओ जुर्मक्याबाइससबबक्याक्यावजह। सच कहो आईनए-दिल क्यों मुकद्दर होगया ।। अक्ल हैरां होगई उनके दहाने-तंग से ।। चश्मएः हैवां मेंसर गर्दा सिकन्दर होगया ।। हासिले- इश्के-बुतां हमको अमानत यह हुवा । अपनी रुसवाईका चर्चा आजघरघरहोगया एक सौ सैंतालीस कूचए-दिल्दार में आशिक का मस्कन होगया । बुलबुले-शैदाका गुलशनमें नशेमन होगया ।। बाहरी दुनिया जो हमने दोस्तीकी आपसे । लीजिये सारा ज़माना अपना दुश्मन होगया ।। ख़तभी गर्दनपर न आया, तेग बल खाखागई । सख्त जानीसे हमारी, मोम आहन होगया । अम्बरी जुल्फें रुखे - अनवरसे आकर मिलगई । तिब्बतो तातारियोंका एक मस्कन होगया ।। जब्ते खामोशी अगर पूछो तो इसका नाम है । बुतन बोले उम्रभरआ जिज़बरहमनहोगया एक सौ अड़तालीस॥ ग़ज़लशंकर । रूए-रोशन पर फिदा जबसे मेरा दिल होगया । खाले-आरिज़उन्का मेरी आंखका तिल होगया ।। मुस्करा उट्ठे सवाले - वस्ल पर वह झेपकर । मुद्दआ दिलका हमारे आज हासिल होगया ।। दस्ते कातिल न ठहरा नीमचा गिरगिरपड़ा । कत्ल पर मेरे उठाना हाथ मुस्किल होगया ।। एक दिन वह था हमारी यादसे खाली न थे । अब हमारा नाम लेना उन्को मुश्किल होगया ।। वस्ली शब हँसके शंकरसे वःफरमाने लगे । मुद्दआदिलकातुम्हारेअबतोहासिल होगया एक सौ उनचास
बॉलीवुड की फेमस फिल्म मेकर रिया कपूर इन दिनों अपनी बहन और बॉलीवुड की सबसे फेमस एक्ट्रेस सोनम कपूर के साथ लंदन में उनके घर में क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रही हैं। हाल ही में रिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर कर फैंस को अपनी और सोनम की बॉन्डिंग दिखाई। रिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 'सिस्टर बॉन्ड' की कई तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें से पहले फोटो में सोनम, जहान्वी किसी रेस्टोरेंट में बैठकर मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं तो वहीं इस फोटो में जाह्नवी ने बाइट बॉडीकॉन ड्रेस पहनी है और सोनम ऑरेंज कलर के आउटफिट में काफी खूबसूरत दिखाई दे रही है। इसके बाद वाली फोटो में लिया ने लंदन की सड़कों की कुछ झलक दिखाई है। इसके अलावा कुछ तस्वीर में रिया ने सोनम के घर का डायनिंग एरिया अपने इस पोस्ट में शेयर किया है। जिसे डिनर के लिए सुंदर फूलों और मोमबत्ती से सजाया गया है। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए रिया ने इन्हें कैप्शन दिया है। कैप्शन में लिखा- "शाम 7 बजे स्वीट समर सोलस्टाइस. . . #लंदनबायनाइट. . " रिया की इस पोस्ट पर तीनों के फैंस काफी प्यार लुटा रहे हैं और उनके लुक को शानदार बता रहे हैं। बात करें सोनम कपूर की तो इन दिनों सोनम एक्टिंग से दूर अपने पति आनंद अहूजा और बेटे वायु के साथ लंदन में टाइम स्पेंड कर रही हैं। हिंदी सिनेमा के स्टार अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने अपने करियर की शुरुआत रणबीर कपूर के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से की थी। जिसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में एक से एक फिल्मी की और नाम कमाया।
बॉलीवुड की फेमस फिल्म मेकर रिया कपूर इन दिनों अपनी बहन और बॉलीवुड की सबसे फेमस एक्ट्रेस सोनम कपूर के साथ लंदन में उनके घर में क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रही हैं। हाल ही में रिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर कर फैंस को अपनी और सोनम की बॉन्डिंग दिखाई। रिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 'सिस्टर बॉन्ड' की कई तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें से पहले फोटो में सोनम, जहान्वी किसी रेस्टोरेंट में बैठकर मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं तो वहीं इस फोटो में जाह्नवी ने बाइट बॉडीकॉन ड्रेस पहनी है और सोनम ऑरेंज कलर के आउटफिट में काफी खूबसूरत दिखाई दे रही है। इसके बाद वाली फोटो में लिया ने लंदन की सड़कों की कुछ झलक दिखाई है। इसके अलावा कुछ तस्वीर में रिया ने सोनम के घर का डायनिंग एरिया अपने इस पोस्ट में शेयर किया है। जिसे डिनर के लिए सुंदर फूलों और मोमबत्ती से सजाया गया है। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए रिया ने इन्हें कैप्शन दिया है। कैप्शन में लिखा- "शाम सात बजे स्वीट समर सोलस्टाइस. . . #लंदनबायनाइट. . " रिया की इस पोस्ट पर तीनों के फैंस काफी प्यार लुटा रहे हैं और उनके लुक को शानदार बता रहे हैं। बात करें सोनम कपूर की तो इन दिनों सोनम एक्टिंग से दूर अपने पति आनंद अहूजा और बेटे वायु के साथ लंदन में टाइम स्पेंड कर रही हैं। हिंदी सिनेमा के स्टार अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने अपने करियर की शुरुआत रणबीर कपूर के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से की थी। जिसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में एक से एक फिल्मी की और नाम कमाया।
अमेरिकी कदम से पहले चीन ने शायद उसका हल भी निकाल लिया है क्योंकि बीती 9 मई को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसका शीर्षक 'India to fill gap in China market amid trade row' है। चीन और अमेरिका दोनों एक-दूसरे के लिए बड़े बाजार हैं। इन दिनों दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ा है। अमेरिका धमकी दे रहा था कि चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ बढ़ा देगा और उसने ऐसा कर भी दिया। अमेरिका ने 200 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर टैरिफ दर 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी। चीन ने अमेरिका को ऐसा करने पर खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी थी। कई दिनों से चीनी प्रतिनिधि भी इस लड़ाई को सुलझाने के लिए अमेरिका में डटे हुए थे लेकिन हल नहीं निकला। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थानीय समय के अनुसार शनिवार को चीन को एक और चेतावनी दी कि वह अमेरिका के साथ व्यापारिक सौदे पर तत्काल प्रभाव से फैसला ले नहीं तो 2020 के बाद उसे बुरे नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप के मुताबिक उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने पर चीन को बुरे परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी कदम से पहले चीन ने शायद उसका हल भी निकाल लिया है क्योंकि बीती 9 मई को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसका शीर्षक 'India to fill gap in China market amid trade row' है। इसका मतलब है कि ट्रेड विवाद के दौरान भारत चीनी बाजार की पूर्ति करेगा। लेख में कहा गया है कि यह अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण सप्ताह है, जिसके दौरान उनके मतभेदों को चीन और भारत के बीच घनिष्ठ आर्थिक संबंधों को बनाने के लिए एक अवसर के रूप में लिया जा सकता है। दक्षिण एशियाई राष्ट्र उन देशों में से है जो अमेरिकी उत्पादों द्वारा चीनी बाजार में बनी जगह को भर सकते हैं। लेख में कहा गया है कि भारतीय पक्ष में सहयोग करने की प्रबल इच्छा है। लेख में द हिंदू बिजनेस के हवाले से लिखा गया है कि दोनों देशों के अधिकारियों ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई थी जिसमें भारत से कृषि वस्तुओं और कुछ अन्य वस्तुओं के चीन के आयात को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई थी। लेख में कहा गया है कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए और अमेरिका द्वारा संभावित एकतरफा टैरिफ वृद्धि के खिलाफ पूरी तरह से तैयार है। अगर व्यापार विवाद के कारण कुछ कृषि उत्पाद आपूर्ति में कम हैं तो चीनी बाजार में भारत निर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने का यह अवसर होगा। भारत ने चीन के बाजार में चीनी, चावल, अंगूर और उत्पादों की एक फेहरिस्त के साथ हाल के वर्षों में पहुंच बनाई है। लेख में कहा गया है कि अमेरिका के साथ व्यापार विवाद ने चीन-भारत संबंधों में एक पुरानी बीमारी को दूर करने का मौका दिया है। बता दें कि हाल में चीन ने मसूद अजहर मामले में भी भारत के लिए नरम रुख दिखाया और विश्व बिरादरी में जैश सरगना को वैश्विक आतंकी घोषित करने में वर्षों से लगे अड़ंगे को हटा लिया। अमेरिका से व्यापार में कटु संबंध होने पर भारत के लिए चीन में अपने उत्पादों को खपाने की संभावना बनी है तो पड़ोसी के लिए भी भारत लगभग सबसे बड़ा बाजार है और यह बात वह जानता है। पुराना तजुर्बा यह कहता है कि अगर घर के आसपास के लोग आपसे खुश हैं तो दुश्मन आप पर हाथ डालने से पहले दस बार सोचेगा। शायद ऐसा ही इस वक्त चीन को महसूस हो रहा है।
अमेरिकी कदम से पहले चीन ने शायद उसका हल भी निकाल लिया है क्योंकि बीती नौ मई को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसका शीर्षक 'India to fill gap in China market amid trade row' है। चीन और अमेरिका दोनों एक-दूसरे के लिए बड़े बाजार हैं। इन दिनों दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ा है। अमेरिका धमकी दे रहा था कि चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ बढ़ा देगा और उसने ऐसा कर भी दिया। अमेरिका ने दो सौ अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर टैरिफ दर दस फीसदी से बढ़ाकर पच्चीस फीसदी कर दी। चीन ने अमेरिका को ऐसा करने पर खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी थी। कई दिनों से चीनी प्रतिनिधि भी इस लड़ाई को सुलझाने के लिए अमेरिका में डटे हुए थे लेकिन हल नहीं निकला। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थानीय समय के अनुसार शनिवार को चीन को एक और चेतावनी दी कि वह अमेरिका के साथ व्यापारिक सौदे पर तत्काल प्रभाव से फैसला ले नहीं तो दो हज़ार बीस के बाद उसे बुरे नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप के मुताबिक उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने पर चीन को बुरे परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी कदम से पहले चीन ने शायद उसका हल भी निकाल लिया है क्योंकि बीती नौ मई को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसका शीर्षक 'India to fill gap in China market amid trade row' है। इसका मतलब है कि ट्रेड विवाद के दौरान भारत चीनी बाजार की पूर्ति करेगा। लेख में कहा गया है कि यह अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण सप्ताह है, जिसके दौरान उनके मतभेदों को चीन और भारत के बीच घनिष्ठ आर्थिक संबंधों को बनाने के लिए एक अवसर के रूप में लिया जा सकता है। दक्षिण एशियाई राष्ट्र उन देशों में से है जो अमेरिकी उत्पादों द्वारा चीनी बाजार में बनी जगह को भर सकते हैं। लेख में कहा गया है कि भारतीय पक्ष में सहयोग करने की प्रबल इच्छा है। लेख में द हिंदू बिजनेस के हवाले से लिखा गया है कि दोनों देशों के अधिकारियों ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक बैठक बुलाई थी जिसमें भारत से कृषि वस्तुओं और कुछ अन्य वस्तुओं के चीन के आयात को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई थी। लेख में कहा गया है कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए और अमेरिका द्वारा संभावित एकतरफा टैरिफ वृद्धि के खिलाफ पूरी तरह से तैयार है। अगर व्यापार विवाद के कारण कुछ कृषि उत्पाद आपूर्ति में कम हैं तो चीनी बाजार में भारत निर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने का यह अवसर होगा। भारत ने चीन के बाजार में चीनी, चावल, अंगूर और उत्पादों की एक फेहरिस्त के साथ हाल के वर्षों में पहुंच बनाई है। लेख में कहा गया है कि अमेरिका के साथ व्यापार विवाद ने चीन-भारत संबंधों में एक पुरानी बीमारी को दूर करने का मौका दिया है। बता दें कि हाल में चीन ने मसूद अजहर मामले में भी भारत के लिए नरम रुख दिखाया और विश्व बिरादरी में जैश सरगना को वैश्विक आतंकी घोषित करने में वर्षों से लगे अड़ंगे को हटा लिया। अमेरिका से व्यापार में कटु संबंध होने पर भारत के लिए चीन में अपने उत्पादों को खपाने की संभावना बनी है तो पड़ोसी के लिए भी भारत लगभग सबसे बड़ा बाजार है और यह बात वह जानता है। पुराना तजुर्बा यह कहता है कि अगर घर के आसपास के लोग आपसे खुश हैं तो दुश्मन आप पर हाथ डालने से पहले दस बार सोचेगा। शायद ऐसा ही इस वक्त चीन को महसूस हो रहा है।
माफिया मुख्तार अंसारी एम्बुलेंस केस में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी की करीबी अलका राय का मऊ में स्थित श्याम संजीवनी अस्पताल को कुर्क कर लिया गया है। बाराबंकी पुलिस ने मऊ में कार्रवाई की। माफिया मुख्तार अंसारी एम्बुलेंस केस में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी की करीबी अलका राय का मऊ में स्थित श्याम संजीवनी अस्पताल को कुर्क कर लिया गया है। बाराबंकी और मऊ की पुलिस ने सोमवार को संयुक्त कार्रवाई की। यूपी के बाराबंकी में रजिस्टर्ड नंबर की एम्बुलेंस से पंजाब की कोर्ट में मुख्तार अंसारी की पेशी के बाद मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि एम्बुलेंस अलका राय के मऊ में स्थित अस्पताल श्याम संजीवनी के नाम से रजिस्टर्ड कराई गई है। इसी के बाद मुख्तार के अन्य करीबियों के साथ ही अलका राय पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा था। अलका राय को भी गिरफ्तार कर गैंगस्टर में कार्रवाई की गई थी। गैगस्टर एक्ट के उसी मुकदमे में सोमवार को अलका राय की संपत्ति को कुर्क करने बाराबंकी से पुलिस टीम मऊ पहुंची थी। यहां मऊ की पुलिस टीम के साथ अस्पताल और उससे जुड़ी जमीन को कुर्क करने की कार्यवाही पूरी की गई। कुर्क की गई संपत्ति की कुल कीमत 2. 65 करोड़ बताई जा रही है। अलका राय फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर हैं। मुख्तार अंसारी को एम्बुलेंस देने के मामले में अपने ऊपर केस दर्ज होते ही अलका राय भी थाने पहुंची थी। उन्होंने पूरे मामले को अपने खिलाफ षडयंत्र बताते हुए मुख्तार अंसारी समेत कई लोगों के खिलाफ पुलिस से शिकायत करते हुए एफआईआर दर्ज करने की अपील कर दी थी। अलका राय ने मऊ शहर कोतवाली में मुख्तार अंसारी और अन्य के खिलाफ तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वह विभिन्न सामाजिक कार्यों में अपनी सहभागिता निभा रही हैं। कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी में भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। इसलिए उनके सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए राजनीतिक षणयंत्र के तहत गलत तरीके से एंबुलेंस मामले में मुकदमा दर्ज करके फंसाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के साथ ही मुख्तार अंसारी व उनके सहयोगियों तथा उनके प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। अलका राय ने बताया था कि मीडिया से पता चला कि एम्बुलेंस श्याम संजीवनी अस्पताल बाराबंकी के नाम से पंजीकृत है। उस पर मऊ के पते के नाम भी अंकित हैं। बाराबंकी में एक इंच भी भूमि या सम्पत्ति नहीं है और न ही बाराबंकी जनपद में कभी भी श्याम संजीवनी अस्पताल के नाम से कोई अस्पताल ही खोला था। तहरीर में डॉ. अलका राय ने आरोप लगाते हुए कहा था कि एम्बुलेंस परिवहन विभाग बाराबंकी में मेरे नाम से पंजीकृत कही जा रही है। इस एम्बुलेंस के सम्बंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी न ही कभी मैंने या मेरे प्रतिनिधि ने किसी भी एम्बुलेंस की जनपद बाराबंकी में पंजीयन कराया था।
माफिया मुख्तार अंसारी एम्बुलेंस केस में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी की करीबी अलका राय का मऊ में स्थित श्याम संजीवनी अस्पताल को कुर्क कर लिया गया है। बाराबंकी पुलिस ने मऊ में कार्रवाई की। माफिया मुख्तार अंसारी एम्बुलेंस केस में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी की करीबी अलका राय का मऊ में स्थित श्याम संजीवनी अस्पताल को कुर्क कर लिया गया है। बाराबंकी और मऊ की पुलिस ने सोमवार को संयुक्त कार्रवाई की। यूपी के बाराबंकी में रजिस्टर्ड नंबर की एम्बुलेंस से पंजाब की कोर्ट में मुख्तार अंसारी की पेशी के बाद मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि एम्बुलेंस अलका राय के मऊ में स्थित अस्पताल श्याम संजीवनी के नाम से रजिस्टर्ड कराई गई है। इसी के बाद मुख्तार के अन्य करीबियों के साथ ही अलका राय पर भी पुलिस ने शिकंजा कसा था। अलका राय को भी गिरफ्तार कर गैंगस्टर में कार्रवाई की गई थी। गैगस्टर एक्ट के उसी मुकदमे में सोमवार को अलका राय की संपत्ति को कुर्क करने बाराबंकी से पुलिस टीम मऊ पहुंची थी। यहां मऊ की पुलिस टीम के साथ अस्पताल और उससे जुड़ी जमीन को कुर्क करने की कार्यवाही पूरी की गई। कुर्क की गई संपत्ति की कुल कीमत दो. पैंसठ करोड़ बताई जा रही है। अलका राय फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर हैं। मुख्तार अंसारी को एम्बुलेंस देने के मामले में अपने ऊपर केस दर्ज होते ही अलका राय भी थाने पहुंची थी। उन्होंने पूरे मामले को अपने खिलाफ षडयंत्र बताते हुए मुख्तार अंसारी समेत कई लोगों के खिलाफ पुलिस से शिकायत करते हुए एफआईआर दर्ज करने की अपील कर दी थी। अलका राय ने मऊ शहर कोतवाली में मुख्तार अंसारी और अन्य के खिलाफ तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वह विभिन्न सामाजिक कार्यों में अपनी सहभागिता निभा रही हैं। कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी में भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। इसलिए उनके सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए राजनीतिक षणयंत्र के तहत गलत तरीके से एंबुलेंस मामले में मुकदमा दर्ज करके फंसाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के साथ ही मुख्तार अंसारी व उनके सहयोगियों तथा उनके प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। अलका राय ने बताया था कि मीडिया से पता चला कि एम्बुलेंस श्याम संजीवनी अस्पताल बाराबंकी के नाम से पंजीकृत है। उस पर मऊ के पते के नाम भी अंकित हैं। बाराबंकी में एक इंच भी भूमि या सम्पत्ति नहीं है और न ही बाराबंकी जनपद में कभी भी श्याम संजीवनी अस्पताल के नाम से कोई अस्पताल ही खोला था। तहरीर में डॉ. अलका राय ने आरोप लगाते हुए कहा था कि एम्बुलेंस परिवहन विभाग बाराबंकी में मेरे नाम से पंजीकृत कही जा रही है। इस एम्बुलेंस के सम्बंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी न ही कभी मैंने या मेरे प्रतिनिधि ने किसी भी एम्बुलेंस की जनपद बाराबंकी में पंजीयन कराया था।
श्यक है कि गरीबों की आमदनी इस प्रकार से पढ़ाई जाय, और इस प्रकार के प्रकिये जाये कि रोग लाग घनमी होने के पद अधिक कार्य कुशल मनन और अपनीमती अधिक पदान की कोशिश करें। उन लोगों को इस प्रकार की शिक्षा देनी चाहिये जिसमे इस घात को छी तरह से समझ जाये फि भामदनी को वृद्धि का सदुपयोग करने से उनको कितना शाम होगा और उसका दुरपयोग करन से कितना भयङ्कर परि याम होगा। इसलिए यह घाव निश्चित है कि अगर सतर्कता स गरीबों की मामी में बुद्धि की जाय तो देश का उपकार हो होगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि धमो भागों से जो मन लेकर गरीरों को दिया जायगा, उसका अधिकांश उनको क्षमत अथवा पूँजी में से भाषेगा और ग्राम लोग इस धन को उप भोग के पदार्या में खय फर देंगे। इसलिए देश को पूँनी और सत्पत्ति भी कम दावी जायगी। पहले तो इस बात का कोई पासधूस नहीं है कि गरीयों को दिया जान वाला धन यथम अथवा पूँजी में कमी कर आयेगा । यह याद भी मुमकिन है कि धनी लोग अपने ऐशो भागम की कुछ वस्तुओं का उपयोग कम फरफ इस घन का एक हिस्सा शरापों के लिए निकाल स । दूसरी पास यह है कि यह घन मा राम पर किया जायेगा, इसस भी भविष्य में देश के लिए पूँजी पन जायगी । बहुत से गरीय लोग फार्य-सुरा मन जाएँगे, बहुत स थे और नौजमान
श्यक है कि गरीबों की आमदनी इस प्रकार से पढ़ाई जाय, और इस प्रकार के प्रकिये जाये कि रोग लाग घनमी होने के पद अधिक कार्य कुशल मनन और अपनीमती अधिक पदान की कोशिश करें। उन लोगों को इस प्रकार की शिक्षा देनी चाहिये जिसमे इस घात को छी तरह से समझ जाये फि भामदनी को वृद्धि का सदुपयोग करने से उनको कितना शाम होगा और उसका दुरपयोग करन से कितना भयङ्कर परि याम होगा। इसलिए यह घाव निश्चित है कि अगर सतर्कता स गरीबों की मामी में बुद्धि की जाय तो देश का उपकार हो होगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि धमो भागों से जो मन लेकर गरीरों को दिया जायगा, उसका अधिकांश उनको क्षमत अथवा पूँजी में से भाषेगा और ग्राम लोग इस धन को उप भोग के पदार्या में खय फर देंगे। इसलिए देश को पूँनी और सत्पत्ति भी कम दावी जायगी। पहले तो इस बात का कोई पासधूस नहीं है कि गरीयों को दिया जान वाला धन यथम अथवा पूँजी में कमी कर आयेगा । यह याद भी मुमकिन है कि धनी लोग अपने ऐशो भागम की कुछ वस्तुओं का उपयोग कम फरफ इस घन का एक हिस्सा शरापों के लिए निकाल स । दूसरी पास यह है कि यह घन मा राम पर किया जायेगा, इसस भी भविष्य में देश के लिए पूँजी पन जायगी । बहुत से गरीय लोग फार्य-सुरा मन जाएँगे, बहुत स थे और नौजमान
स्वदेशी कंपनी माइक्रोमैक्स ने Canvas सीरीज में एक नया स्मार्टफोन Canvas Nitro 3 शामिल किया है जिसकी बिक्री शुरू हो गई है. इस फोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट से 8,130 रुपये में खरीदा जा सकता है. कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी इस फोन की डिटेल अपलोड की गई हैं. इस 5 इंच एचडी डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन में 1. 4GHz का ऑक्टाकोर प्रोसेसर लगाया गया है. साथ ही इसमें 2GB रैम और 16GB की इंटरनेल मेमोरी दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड से बढ़ा कर 32GB तक किया जा सकता है. यह ड्यूल सिम स्मार्टफोन एंड्रॉयड 5. 1 लॉलीपॉप पर चलता है और इसमें फोटोग्राफी के लिए 13 मेगापिक्सल का रियर व 5 मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा दिया गया है. - डिस्प्लेः 5 इंच एचडी (1920X1080)
स्वदेशी कंपनी माइक्रोमैक्स ने Canvas सीरीज में एक नया स्मार्टफोन Canvas Nitro तीन शामिल किया है जिसकी बिक्री शुरू हो गई है. इस फोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट से आठ,एक सौ तीस रुपयापये में खरीदा जा सकता है. कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी इस फोन की डिटेल अपलोड की गई हैं. इस पाँच इंच एचडी डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन में एक. चारGHz का ऑक्टाकोर प्रोसेसर लगाया गया है. साथ ही इसमें दोGB रैम और सोलहGB की इंटरनेल मेमोरी दी गई है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड से बढ़ा कर बत्तीसGB तक किया जा सकता है. यह ड्यूल सिम स्मार्टफोन एंड्रॉयड पाँच. एक लॉलीपॉप पर चलता है और इसमें फोटोग्राफी के लिए तेरह मेगापिक्सल का रियर व पाँच मेगापिक्सल सेल्फी कैमरा दिया गया है. - डिस्प्लेः पाँच इंच एचडी
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लेने वाले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने कहा कि उनके लिए अपने टेस्ट करियर को शब्दों में बयां कर पाना लगभग नामुमकिन है। स्टेन (36) ने इंग्लैंड के खिलाफ 2004 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था और दक्षिण अफ्रीका के लिए अपने करियर में 93 मैचों में कुल 439 विकेट लिए। उन्होंने सन्यास की घोषणा करने के बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर एक संदेश लिखा। स्टेन ने उन सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्हें शुभकामनाएं दीं। स्टेन ने सोमवार को टेस्ट से सन्यास लेने की घोषणा की थी।
नई दिल्ली, आठ अगस्त । टेस्ट क्रिकेट से सन्यास लेने वाले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने कहा कि उनके लिए अपने टेस्ट करियर को शब्दों में बयां कर पाना लगभग नामुमकिन है। स्टेन ने इंग्लैंड के खिलाफ दो हज़ार चार में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था और दक्षिण अफ्रीका के लिए अपने करियर में तिरानवे मैचों में कुल चार सौ उनतालीस विकेट लिए। उन्होंने सन्यास की घोषणा करने के बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर एक संदेश लिखा। स्टेन ने उन सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्हें शुभकामनाएं दीं। स्टेन ने सोमवार को टेस्ट से सन्यास लेने की घोषणा की थी।
अंडमान में मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4. 9 मापी गई। राष्ट्रीय भूकम्प विज्ञान केंद्र ने यह जानकारी दी है। भूकंप के कारण किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप के झटके मंगलवार रात 12 बजकर 15 मिनट पर महसूस किए गए और इसका केंद्र अंडमान सागर में था। भूकंप की गहराई 77 किलोमीटर थी।
अंडमान में मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता चार. नौ मापी गई। राष्ट्रीय भूकम्प विज्ञान केंद्र ने यह जानकारी दी है। भूकंप के कारण किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप के झटके मंगलवार रात बारह बजकर पंद्रह मिनट पर महसूस किए गए और इसका केंद्र अंडमान सागर में था। भूकंप की गहराई सतहत्तर किलोग्राममीटर थी।
नई सरकार के गठन के लिए भारतीय लोकतंत्र के महाकुंभ में पहली आहुति डालने की गुरुवार को विधिवत शुरुआत हो गई. इस महाकुंभ की शुरुआत का गूगल ने भी डूडल बनाकर स्वागत किया है. गौरतलब है कि सात चरणों की 19वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया के तहत पहले चरण का मतदान गुरुवार सुबह सात बजे शुरू हुआ. जनमानस को अपने-अपने घरों से निकल कर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए गूगल ने भी डूडल बनाकर संदेश जारी किया है. यही नहीं, वोट डालने की पूरी प्रक्रिया की गूगल ने अपने डूडल से लोगों को जानकारी भी दी है. गूगल भी इस महाचुनाव मे मतदाओ को वोट करने के लिए प्रेरित कर रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 राज्यों की 91 संसदीय सीटों पर पहले चरण में चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों का भाग्य मतपेटी में बंद हो जाएगा. 91 संसदीय सीटों के अलावा आंध्र प्रदेश, सिक्किम और 60 सदस्यीय अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के लिए पहले चरण में वोट डाले जा रहे हैं. ओड़िशा विधानसभा के पहले चरण का मतदान भी गुरुवार को ही हो रहा है. लोकसभा के लिए अपना-अपना भाग्य पहले चरण में कुल 1,279 उम्मीदवार आजमा रहे हैं. दुनिया के लोकतांत्रिक इतिहास का भी 2019 का आम चुनाव सबसे महंगा चुनाव होने जा रहा है. अमेरिका के कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंक-टैंक के मुताबिक अमेरिका में 2016 में हुए राष्ट्रपति और कांग्रेस के चुनाव में लगभग 650 करोड़ अमेरिकी डालर खर्च हुए, यानी 46 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा. वहीं 2014 के आम चुनाव में भारत में 500 करोड़ अमेरिकी डालर यानी 35 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए. थिंक टैंक का अनुमान है कि इस बार भारत में यह आंकड़ा 2014 के चुनाव के मुकाबले दोगुना होगा. माना जा रहा है कि इस बार चुनाव मे 70 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है.
नई सरकार के गठन के लिए भारतीय लोकतंत्र के महाकुंभ में पहली आहुति डालने की गुरुवार को विधिवत शुरुआत हो गई. इस महाकुंभ की शुरुआत का गूगल ने भी डूडल बनाकर स्वागत किया है. गौरतलब है कि सात चरणों की उन्नीसवीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया के तहत पहले चरण का मतदान गुरुवार सुबह सात बजे शुरू हुआ. जनमानस को अपने-अपने घरों से निकल कर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए गूगल ने भी डूडल बनाकर संदेश जारी किया है. यही नहीं, वोट डालने की पूरी प्रक्रिया की गूगल ने अपने डूडल से लोगों को जानकारी भी दी है. गूगल भी इस महाचुनाव मे मतदाओ को वोट करने के लिए प्रेरित कर रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार बीस राज्यों की इक्यानवे संसदीय सीटों पर पहले चरण में चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों का भाग्य मतपेटी में बंद हो जाएगा. इक्यानवे संसदीय सीटों के अलावा आंध्र प्रदेश, सिक्किम और साठ सदस्यीय अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के लिए पहले चरण में वोट डाले जा रहे हैं. ओड़िशा विधानसभा के पहले चरण का मतदान भी गुरुवार को ही हो रहा है. लोकसभा के लिए अपना-अपना भाग्य पहले चरण में कुल एक,दो सौ उन्यासी उम्मीदवार आजमा रहे हैं. दुनिया के लोकतांत्रिक इतिहास का भी दो हज़ार उन्नीस का आम चुनाव सबसे महंगा चुनाव होने जा रहा है. अमेरिका के कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंक-टैंक के मुताबिक अमेरिका में दो हज़ार सोलह में हुए राष्ट्रपति और कांग्रेस के चुनाव में लगभग छः सौ पचास करोड़ अमेरिकी डालर खर्च हुए, यानी छियालीस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा. वहीं दो हज़ार चौदह के आम चुनाव में भारत में पाँच सौ करोड़ अमेरिकी डालर यानी पैंतीस हजार करोड़ रुपए खर्च हुए. थिंक टैंक का अनुमान है कि इस बार भारत में यह आंकड़ा दो हज़ार चौदह के चुनाव के मुकाबले दोगुना होगा. माना जा रहा है कि इस बार चुनाव मे सत्तर हजार करोड़ से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है.
1. रात में सोने से पहले मोजे में नींबू डालकर सोएं, इससे न सिर्फ आपके पैर की त्वचा मुलायम रहते हैं बल्कि फटी हुई एड़ियां भी ठीक हो जाती हैं। 2. पैरों से आने वाली बदबू लोगों के लिए बड़ी समस्या है। जूता-चप्पल पहनने के बाद बाद पसीना आना और इसके बाद जबरदस्त बदबू हर किसी के लिए परेशानी का विषय होता है। यदि आप इससे जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं तो रोजाना आपको सोते वक्त मोजे में नींबू डालकर सोना चाहिए। 3. यदि आपके पैर में दाद या फिर रंग दबा हुआ हो तो इसका रंग साफ करने और गोरापन पाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। पैरों में यदि दाने होते हैं तो भी यह फायदेमंद हो सकता है। 4. पैरों से जुड़ी समस्याओं में सबसे ज्यादा परेशानी रूखापन होता है। इसके लिए लोग कई प्रकार के लोशन आदि का प्रयोग करते हैं। पैरों के रूखेपन को दूर करने के लिए यह तरीका आपके लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है। 5. रात में सोते वक्त नींबू को मोजे में डालकर सोने से नमी तो आती ही है, साथ ही दाद जैसी कोई समस्या दूर रहती है। इतना ही नहीं नींबू के पोषक तत्व आपके पैरों के दुर्गंध को दूर भी कर देता है।
एक. रात में सोने से पहले मोजे में नींबू डालकर सोएं, इससे न सिर्फ आपके पैर की त्वचा मुलायम रहते हैं बल्कि फटी हुई एड़ियां भी ठीक हो जाती हैं। दो. पैरों से आने वाली बदबू लोगों के लिए बड़ी समस्या है। जूता-चप्पल पहनने के बाद बाद पसीना आना और इसके बाद जबरदस्त बदबू हर किसी के लिए परेशानी का विषय होता है। यदि आप इससे जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं तो रोजाना आपको सोते वक्त मोजे में नींबू डालकर सोना चाहिए। तीन. यदि आपके पैर में दाद या फिर रंग दबा हुआ हो तो इसका रंग साफ करने और गोरापन पाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। पैरों में यदि दाने होते हैं तो भी यह फायदेमंद हो सकता है। चार. पैरों से जुड़ी समस्याओं में सबसे ज्यादा परेशानी रूखापन होता है। इसके लिए लोग कई प्रकार के लोशन आदि का प्रयोग करते हैं। पैरों के रूखेपन को दूर करने के लिए यह तरीका आपके लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है। पाँच. रात में सोते वक्त नींबू को मोजे में डालकर सोने से नमी तो आती ही है, साथ ही दाद जैसी कोई समस्या दूर रहती है। इतना ही नहीं नींबू के पोषक तत्व आपके पैरों के दुर्गंध को दूर भी कर देता है।
नादौन। नादौन के कांगू कस्बे की 16 वर्षीय युवती ने गलती से जहरीली दवाई का सेवन कर लिया है। इस कारण उसकी हालत काफी बिगड़ गई। परिजन उसे उपचार के स्थानीय अस्पताल ले आए। यहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डाक्टरों ने मेडिकल कालेज टांडा रैफर कर दिया, लेकिन यहां उसने दम तोड़ दिया। हमीरपुर - नगर परिषद के वार्डों की सफाई की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को सौंपने की तैयारी हो गई है। वार्ड नंबर चार से इस योजना को शुरू करने पर विचार हुआ है। सफाई कर्मचारी के कार्य पर अब स्वयं सहायता समूह की नजर रहेगी। कार्य में बरती गई कोताही सफाई कर्मी पर भारी पड़ेगी।
नादौन। नादौन के कांगू कस्बे की सोलह वर्षीय युवती ने गलती से जहरीली दवाई का सेवन कर लिया है। इस कारण उसकी हालत काफी बिगड़ गई। परिजन उसे उपचार के स्थानीय अस्पताल ले आए। यहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डाक्टरों ने मेडिकल कालेज टांडा रैफर कर दिया, लेकिन यहां उसने दम तोड़ दिया। हमीरपुर - नगर परिषद के वार्डों की सफाई की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को सौंपने की तैयारी हो गई है। वार्ड नंबर चार से इस योजना को शुरू करने पर विचार हुआ है। सफाई कर्मचारी के कार्य पर अब स्वयं सहायता समूह की नजर रहेगी। कार्य में बरती गई कोताही सफाई कर्मी पर भारी पड़ेगी।
• मुख़्तसर सा वक़्त बचा है, नमाज़ फजिर पढ़ कर सोया • जाये, अय्यूब साहब चाये लेकर हाज़िर हुये, इसी वक़्फ़ा में हज़रत ने मुझे कुछ लिखने का हुक्म फरमाया, मैंने वह मरासिला तैयार किया। इतने में फजिर की अज़ान होने लगी। नमाज़ जमाअत से पढ़ी गई, फिर मुसलसल सफर की थकावट की वहज से नींद फ़ौरन ही आ गई,11बजे बेदार हुये, फिर चलने की तैयार होने लगी, शाम को चार बजे की फलाइट दमदम एयरपोर्ट से देहली के लिए थी। नाश्ता और खाना एक साथ किया, नमाज़ ज़ोहर घर पर अदा हुई शब ही में फलाइट के दो टिकट अय्यूब मरहूम ने ला कर मुझे दिए थे, वह टिकट मैंने हज़रत की तकिया के नीचे रख दिए थे। इस ख़्याल से कि चलते वक्त"सदरी"की जेब में रख लूँगा मगर मैं भूल गया। एयर पोर्ट चलने की तैयारी होने लगी, हज़रत ने अपनी सदरी मुझे ऐनायत फ़रमाते हुये कहा कि उस को पहन लो मैंने हज़रत की सदरी पहन ली, और अकसर दौराने सफर हज़रत की सदरी मैं ही पहन लिया करता था, हज़रत बहुत कम सदरी पहनते थे, मगर सदरी साथ में ज़रूर रखते थे, उस की वजह यह थी कि उस में जरूरी कागजात, पास्पोर्ट, टिकट, कलम और दवा वगैरा रखे जाते थे, जब एयरपोर्ट के लिए चलने लगे तो हज़रत ने फ़रमाया कि सब सामान रख लिया है, मैं ने अर्ज किया हुज़ूर सारा सामान रख लिया है। हज़रत मुतमइन हुये, गाड़ी में बैठे कुछ ही दूर चले थे, कि फिर फ़रमाया कि सामान चेक कर लिया है, मैंने फिर वही जवाब दिया कि सब चेक कर लिया है। जब एयरपोर्ट के करीब पहुॅचे फरमाया कि एक एक सामान चेक किया है मैंने अज़ किया कि हुज़ूर हॉ, फिर फरमाया कि टिकट कहा है, बस इतना कहना था कि फौरन याद आया कि टिकट तो तकिया के नीचे ही रह गया। सदरी के चारों जेब चेक किए मगर टिकट तो मैंने रखा ही नहीं था। वह भूल गया था। एयरपोर्ट बिल्कुल क़रीब था प्लेन का वक्त बिल्कुल आधा घन्टा बचा था, मैं फ़ौरन अय्यूब रज़वी के साथ घर वापस आया, यह वक़्त बहुत ट्रेफिक के रश का होता है घर गया एक घन्टा लगा, इधर लोग हज़रत से प्लेन के ताख़ीर से उड़ने के लिए दुआ कराने लगे। जब मैं टिकट लेकर वापस पहुँचा तो मालूम हुआ कि दो घन्टा प्लेन लेट है, बहुत आराम से बोर्डिंग कराया। तब पता चला कि हज़रत शुरू ही से याद दिहानी करा रहे थे, और यह हज़रत की ज़िन्दा करामत है कि मैं टिकट भी ले आया पिलेन लेट हो गया, बहुत सारे लोग ताख़ीर की वजह से दाखिले सिलसिला भी हो गये। यह है औलिया किराम का मर्तबा यह है अहलुल्लाह की शान । (9 अगस्त 2015 ई बरोज़ हफ़्ता) मस्जिद में चन्दा 1997 ई की बात है कि सूबाए बिहार का राकिमुस्सुतूर ने हज़रत की तरफ से प्रोग्राम दे दिया था यह तारीखें तक़रीबन दस दिन की थीं, हर एक दिन हज़रत के तीन से चार इजलास हुआ करते थे। और ख़ाका तैयार किया था कि जिस जगह से हज़रत चलेंगे और जहाँ तक जाना है तो लबे सड़क से मुत्तसिल जितने भी गाँव और कस्बे होंगे सभी जगह 15 मिनट हज़रत रुक कर बैअत व इरशाद फरमायेंगे, इस तरह उन दस दिनों में दरजनों प्रोग्राम हो गये । और दरजनों गाँव व देहात के इलाकों में हज़रत के कुदूम मैमनत लुज़ूम पहुँच गये तक़रीबन आधा सूबाए बिहार आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फ़ाज़िले बरेलवी और ताजदारे अहले सुन्नत हुज़ूर मुफ्तीए आज़म कुदिसा सिरुहु के फैज़ान से माला माल हो गया था । हज़रत शहरे किशन गंज से बहादुर गंज जाते हुये मुफ्ती मतीउर्रहमान मुज़तर रज़वी और ख़्वाजए इल्म व फन हज़रत ख़्वाजा मुज़फ़्फर हुसैन रज़वी मरहूम के गाँव तशरीफ़ ले गये। रास्ते में एक साहब गालिबन मौलाना मुफ़्ती अय्यूब मज़हर क़ादरी के भाई या क़रीबी रिशतेदार मिले, वहाँ से आगे बढ़े होंगे कि एक मस्जिद या मदरसा की तामीर हो रही थी । चन्दा की अपील का बैनर लगा हुया था मअन मुझे ख़्याला आया कि यह गरीब मुसलमानों का इलाका है, यहाँ मदद होना चाहिए, मेरे पास इतने रुपये भी नहीं हैं कि मैं फिलहाल उनकी मदद कर दूँ मैं अपने ज़हन व ख़्याल में सोचता हुआ जा रहा था, गाड़ी तेज़ रफ़्तारी के साथ बढ़ रही थी, आगे ही कुछ फासले पर कियाम गाह थी । कियाम गाह पर पहुँचे सामान गाड़ी से ला कर कमरा में रखा, हज़रत कुछ देर के लिए आराम करने लगे, जब बेदार हुये फ़रमाया कि तुम इस वक़्त क्या सौच रहे थे, बैग मैं फलाँ जगह का www.muftiakhtarrazakhan.com नज़राना रखा होगा, उस को ले लो और जा कर उस मस्जिद या मदरसा में तआउन कर दो, यह निहायत ही अच्छा अमल है। अल्लाह ऐसे लोगों को बेतरीन जज़ा देता है। मैं ने अर्ज़ किया हुज़ूर मैं वाकई यही सोंच रहा था कि उन की मदद होनी चाहिए। आप ने कश्फ के ज़रीओ मेरे दिल का हाल जान लिया है। अब मैं वहाँ के जो ज़िम्मे दार होंगे उन से मिलकर आप की तरफ से तामीर मस्जिद में चन्दा दूँगा। फिर फरमाया कि जा कर तआउन करो मगर नाम के इज़हार की ज़रूरत नहीं है। मैंने एक मोटरसाइकिल वाले को साथ में लिया और अकेले ही चला गया। मुतवल्ली साहब से मुलाक़ात हुई मैं ने सिर्फ अपना इतना तआरूफ कराया कि मैं बरेली शरीफ़ से हाज़िर हुआ हूँ फलाँ जलसा में आया हूँ यह दस हज़ार रुपये मस्जिद की तामीर में बतौर तआउन हाज़िर हैं। वह बहुत खुश हुये । हज़रत दिलों का हाल जानते हैं। अपने मुरीदीन व खुद्दाम के जज़बात व एहसासात की कद्र करते हैं। यही औलियाए किराम व मुकुर्रिबाने बारगाहे इलाही की पहचान है। (17 अगस्त 2015 ई ) कैंसर से निजात अज़ीज़म अब्दुल्लाह रज़वी साकिन महल्ला मलूकपुर बरेली किसी कम्पयूटर कम्पनी में मुलाज़िमत करते हैं। डाक्टर ने आप को कैंसर का मर्ज़ बता दिया । बरेली से देहली पहुँचे यहाँ जांच करा कर टाटा कैंसर
• मुख़्तसर सा वक़्त बचा है, नमाज़ फजिर पढ़ कर सोया • जाये, अय्यूब साहब चाये लेकर हाज़िर हुये, इसी वक़्फ़ा में हज़रत ने मुझे कुछ लिखने का हुक्म फरमाया, मैंने वह मरासिला तैयार किया। इतने में फजिर की अज़ान होने लगी। नमाज़ जमाअत से पढ़ी गई, फिर मुसलसल सफर की थकावट की वहज से नींद फ़ौरन ही आ गई,ग्यारहबजे बेदार हुये, फिर चलने की तैयार होने लगी, शाम को चार बजे की फलाइट दमदम एयरपोर्ट से देहली के लिए थी। नाश्ता और खाना एक साथ किया, नमाज़ ज़ोहर घर पर अदा हुई शब ही में फलाइट के दो टिकट अय्यूब मरहूम ने ला कर मुझे दिए थे, वह टिकट मैंने हज़रत की तकिया के नीचे रख दिए थे। इस ख़्याल से कि चलते वक्त"सदरी"की जेब में रख लूँगा मगर मैं भूल गया। एयर पोर्ट चलने की तैयारी होने लगी, हज़रत ने अपनी सदरी मुझे ऐनायत फ़रमाते हुये कहा कि उस को पहन लो मैंने हज़रत की सदरी पहन ली, और अकसर दौराने सफर हज़रत की सदरी मैं ही पहन लिया करता था, हज़रत बहुत कम सदरी पहनते थे, मगर सदरी साथ में ज़रूर रखते थे, उस की वजह यह थी कि उस में जरूरी कागजात, पास्पोर्ट, टिकट, कलम और दवा वगैरा रखे जाते थे, जब एयरपोर्ट के लिए चलने लगे तो हज़रत ने फ़रमाया कि सब सामान रख लिया है, मैं ने अर्ज किया हुज़ूर सारा सामान रख लिया है। हज़रत मुतमइन हुये, गाड़ी में बैठे कुछ ही दूर चले थे, कि फिर फ़रमाया कि सामान चेक कर लिया है, मैंने फिर वही जवाब दिया कि सब चेक कर लिया है। जब एयरपोर्ट के करीब पहुॅचे फरमाया कि एक एक सामान चेक किया है मैंने अज़ किया कि हुज़ूर हॉ, फिर फरमाया कि टिकट कहा है, बस इतना कहना था कि फौरन याद आया कि टिकट तो तकिया के नीचे ही रह गया। सदरी के चारों जेब चेक किए मगर टिकट तो मैंने रखा ही नहीं था। वह भूल गया था। एयरपोर्ट बिल्कुल क़रीब था प्लेन का वक्त बिल्कुल आधा घन्टा बचा था, मैं फ़ौरन अय्यूब रज़वी के साथ घर वापस आया, यह वक़्त बहुत ट्रेफिक के रश का होता है घर गया एक घन्टा लगा, इधर लोग हज़रत से प्लेन के ताख़ीर से उड़ने के लिए दुआ कराने लगे। जब मैं टिकट लेकर वापस पहुँचा तो मालूम हुआ कि दो घन्टा प्लेन लेट है, बहुत आराम से बोर्डिंग कराया। तब पता चला कि हज़रत शुरू ही से याद दिहानी करा रहे थे, और यह हज़रत की ज़िन्दा करामत है कि मैं टिकट भी ले आया पिलेन लेट हो गया, बहुत सारे लोग ताख़ीर की वजह से दाखिले सिलसिला भी हो गये। यह है औलिया किराम का मर्तबा यह है अहलुल्लाह की शान । मस्जिद में चन्दा एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे ई की बात है कि सूबाए बिहार का राकिमुस्सुतूर ने हज़रत की तरफ से प्रोग्राम दे दिया था यह तारीखें तक़रीबन दस दिन की थीं, हर एक दिन हज़रत के तीन से चार इजलास हुआ करते थे। और ख़ाका तैयार किया था कि जिस जगह से हज़रत चलेंगे और जहाँ तक जाना है तो लबे सड़क से मुत्तसिल जितने भी गाँव और कस्बे होंगे सभी जगह पंद्रह मिनट हज़रत रुक कर बैअत व इरशाद फरमायेंगे, इस तरह उन दस दिनों में दरजनों प्रोग्राम हो गये । और दरजनों गाँव व देहात के इलाकों में हज़रत के कुदूम मैमनत लुज़ूम पहुँच गये तक़रीबन आधा सूबाए बिहार आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फ़ाज़िले बरेलवी और ताजदारे अहले सुन्नत हुज़ूर मुफ्तीए आज़म कुदिसा सिरुहु के फैज़ान से माला माल हो गया था । हज़रत शहरे किशन गंज से बहादुर गंज जाते हुये मुफ्ती मतीउर्रहमान मुज़तर रज़वी और ख़्वाजए इल्म व फन हज़रत ख़्वाजा मुज़फ़्फर हुसैन रज़वी मरहूम के गाँव तशरीफ़ ले गये। रास्ते में एक साहब गालिबन मौलाना मुफ़्ती अय्यूब मज़हर क़ादरी के भाई या क़रीबी रिशतेदार मिले, वहाँ से आगे बढ़े होंगे कि एक मस्जिद या मदरसा की तामीर हो रही थी । चन्दा की अपील का बैनर लगा हुया था मअन मुझे ख़्याला आया कि यह गरीब मुसलमानों का इलाका है, यहाँ मदद होना चाहिए, मेरे पास इतने रुपये भी नहीं हैं कि मैं फिलहाल उनकी मदद कर दूँ मैं अपने ज़हन व ख़्याल में सोचता हुआ जा रहा था, गाड़ी तेज़ रफ़्तारी के साथ बढ़ रही थी, आगे ही कुछ फासले पर कियाम गाह थी । कियाम गाह पर पहुँचे सामान गाड़ी से ला कर कमरा में रखा, हज़रत कुछ देर के लिए आराम करने लगे, जब बेदार हुये फ़रमाया कि तुम इस वक़्त क्या सौच रहे थे, बैग मैं फलाँ जगह का www.muftiakhtarrazakhan.com नज़राना रखा होगा, उस को ले लो और जा कर उस मस्जिद या मदरसा में तआउन कर दो, यह निहायत ही अच्छा अमल है। अल्लाह ऐसे लोगों को बेतरीन जज़ा देता है। मैं ने अर्ज़ किया हुज़ूर मैं वाकई यही सोंच रहा था कि उन की मदद होनी चाहिए। आप ने कश्फ के ज़रीओ मेरे दिल का हाल जान लिया है। अब मैं वहाँ के जो ज़िम्मे दार होंगे उन से मिलकर आप की तरफ से तामीर मस्जिद में चन्दा दूँगा। फिर फरमाया कि जा कर तआउन करो मगर नाम के इज़हार की ज़रूरत नहीं है। मैंने एक मोटरसाइकिल वाले को साथ में लिया और अकेले ही चला गया। मुतवल्ली साहब से मुलाक़ात हुई मैं ने सिर्फ अपना इतना तआरूफ कराया कि मैं बरेली शरीफ़ से हाज़िर हुआ हूँ फलाँ जलसा में आया हूँ यह दस हज़ार रुपये मस्जिद की तामीर में बतौर तआउन हाज़िर हैं। वह बहुत खुश हुये । हज़रत दिलों का हाल जानते हैं। अपने मुरीदीन व खुद्दाम के जज़बात व एहसासात की कद्र करते हैं। यही औलियाए किराम व मुकुर्रिबाने बारगाहे इलाही की पहचान है। कैंसर से निजात अज़ीज़म अब्दुल्लाह रज़वी साकिन महल्ला मलूकपुर बरेली किसी कम्पयूटर कम्पनी में मुलाज़िमत करते हैं। डाक्टर ने आप को कैंसर का मर्ज़ बता दिया । बरेली से देहली पहुँचे यहाँ जांच करा कर टाटा कैंसर
परबस जीव स्वबस भगवंता । अनेक एक स्त्रीकंता ।। सुधा भेद जयपि कृत माया । बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया ॥४७७-२४ से २८ मायावस परिछिन जड़ जीव कि इस समान ॥४६६-२२ ईस्वर श्रंस जीव अबिनासी । श्रमल सहज बँधेड कीर मरकट की नाई ॥२००-३,१० सुखरासी ॥ गोसाई । वह शरीर के साथ नष्ट होनेवाली वस्तु नहीं हैछिति जल पावक गगन समीरां । पंच रचित प्रति अषम सरीरा ॥ प्रगट सो तनु तव आगे सोबा । जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा ॥३३३-१७,१८ जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान । जिमि नूतन पट पहिरई नर परिहरइ पुरान ।।४३५-१,२ उसकी मलिनता का कारण हैं मायाभूमि परत भा ढाबर पानी । जीवहि माया ( ३ ) यह माया क्या है-* सत्यता से जड़ माया । भास सत्य इव मोह सहाया । AND W + went * माया में न केवल विवर्तरचना सामर्थ्य ( विद्यां ) है, वरं वह विवर्त में सत्प्रतीतिस्थापन सामर्थ्य (विद्या ) भी रखती है। राम की
परबस जीव स्वबस भगवंता । अनेक एक स्त्रीकंता ।। सुधा भेद जयपि कृत माया । बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया ॥चार सौ सतहत्तर-चौबीस से अट्ठाईस मायावस परिछिन जड़ जीव कि इस समान ॥चार सौ छयासठ-बाईस ईस्वर श्रंस जीव अबिनासी । श्रमल सहज बँधेड कीर मरकट की नाई ॥दो सौ-तीन,दस सुखरासी ॥ गोसाई । वह शरीर के साथ नष्ट होनेवाली वस्तु नहीं हैछिति जल पावक गगन समीरां । पंच रचित प्रति अषम सरीरा ॥ प्रगट सो तनु तव आगे सोबा । जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा ॥तीन सौ तैंतीस-सत्रह,अट्ठारह जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान । जिमि नूतन पट पहिरई नर परिहरइ पुरान ।।चार सौ पैंतीस-एक,दो उसकी मलिनता का कारण हैं मायाभूमि परत भा ढाबर पानी । जीवहि माया यह माया क्या है-* सत्यता से जड़ माया । भास सत्य इव मोह सहाया । AND W + went * माया में न केवल विवर्तरचना सामर्थ्य है, वरं वह विवर्त में सत्प्रतीतिस्थापन सामर्थ्य भी रखती है। राम की
नई दिल्ली, मार्च 27। आईपीएल 2022 सीजन शुरू हो गया है। इसी के मद्देनजर रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों के लिए 279 रुपये का नया क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान लॉन्च किया है। इस प्लान में 15 जीबी मोबाइल डेटा मिलता है। यह एक ऐड-ऑन पैक है, इसलिए इसके तहत कोई वॉयस कॉलिंग बेनेफिट नहीं है। इंटरनेट डेटा के साथ, इस प्लान में एक साल का डिज्नी+ हॉटस्टार मोबाइल सब्सक्रिप्शन भी मिलता है। रिलायंस जियो 279 रुपये का क्रिकेट ऐड-ऑन प्रीपेड प्लान यूजर के मौजूदा प्लान की वैलिडिटी तक एक्टिव रहेगा। नया प्रीपेड क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान माई जियो ऐप के जरिए रिचार्ज के लिए उपलब्ध है। टेलीकॉम ऑपरेटर ने ऐप में नए प्लान का विज्ञापन बैनर लगा दिया है। ध्यान दिया जाना चाहिए कि जियो का 279 रुपये का क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान वर्तमान में केवल चुनिंदा उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। जैसा कि जियो. कॉम पर लिस्टेड हैं कंपनी वर्तमान में 7 अलग-अलग क्रिकेट प्लान पेश कर रही है। इनमें सबसे सस्ता प्लान 499 रुपये से शुरू होता है, जबकि सबसे महंगे प्लान की कीमत 3,119 रुपये है। ये सभी प्लान एक साल के लिए डिज्नी+ हॉटस्टार मोबाइल सब्सक्रिप्शन मुफ्त में देते हैं। जियो के 499 रुपये वाले क्रिकेट प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और 100 एसएमएस दैनिक लिमिट के साथ प्रति दिन 2 जीबी मोबाइल डेटा ऑफर करता है। इसी तरह 555 रुपये के क्रिकेट प्लान की वैलिडिटी 55 दिनों की है और यह 55 जीबी इंटरनेट डेटा के साथ आता है। योजना के तहत कोई एसएमएस या कॉल लाभ नहीं हैं। जियो के 601 रुपये के क्रिकेट प्रीपेड प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ 90 जीबी कुल इंटरनेट डेटा और प्रतिदिन 100 एसएमएस प्रदान करता है। रिलायंस जियो के 659 रुपये के क्रिकेट प्लान में प्रतिदिन 1. 5 जीबी मोबाइल डेटा मिलता है। इस प्लान की वैलिडिटी 56 दिनों की है और इसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग बेनेफिट मिलता है। जियो द्वारा पेश किया गया एक और क्रिकेट प्लान है। इसकी कीमत 799 रुपये है जिसकी वैलिडिटी 56 दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ 2 जीबी डेली मोबाइल डेटा के साथ आता है। जियो का 1,066 रुपये का प्रीपेड प्लान 84 दिनों की वैलिडिटी के लिए 173 जीबी मोबाइल डेटा पैक के साथ आता है। यह डेली 100 एसएमएस के साथ असीमित वॉयस कॉलिंग बेनेफिट ऑफर करता है। अंत में जियो के 3,119 रुपये के क्रिकेट प्रीपेड प्लान की वैलिडिटी 365 दिनों की है और यह प्रति दिन 2 जीबी मोबाइल डेटा ऑफर करता है। प्लान के तहत यूजर्स को वॉयस कॉलिंग और प्रतिदिन 100 एसएमएस के साथ 10 जीबी डेटा का बेनेफिट भी मिलेगा। जियो का एक 666 रु वाला प्लान है, जिसकी वैलिडिटी 84 दिनों की है। ये प्लान डेली 1. 5 जीबी डेटा और अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग के साथ आता है। आपको डेली 100 एसएमएस मिलेंगे। साथ ही फ्री में जियो ऐप्स का एक्सेस भी दिया जाएगा।
नई दिल्ली, मार्च सत्ताईस। आईपीएल दो हज़ार बाईस सीजन शुरू हो गया है। इसी के मद्देनजर रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों के लिए दो सौ उन्यासी रुपयापये का नया क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान लॉन्च किया है। इस प्लान में पंद्रह जीबी मोबाइल डेटा मिलता है। यह एक ऐड-ऑन पैक है, इसलिए इसके तहत कोई वॉयस कॉलिंग बेनेफिट नहीं है। इंटरनेट डेटा के साथ, इस प्लान में एक साल का डिज्नी+ हॉटस्टार मोबाइल सब्सक्रिप्शन भी मिलता है। रिलायंस जियो दो सौ उन्यासी रुपयापये का क्रिकेट ऐड-ऑन प्रीपेड प्लान यूजर के मौजूदा प्लान की वैलिडिटी तक एक्टिव रहेगा। नया प्रीपेड क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान माई जियो ऐप के जरिए रिचार्ज के लिए उपलब्ध है। टेलीकॉम ऑपरेटर ने ऐप में नए प्लान का विज्ञापन बैनर लगा दिया है। ध्यान दिया जाना चाहिए कि जियो का दो सौ उन्यासी रुपयापये का क्रिकेट ऐड-ऑन प्लान वर्तमान में केवल चुनिंदा उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। जैसा कि जियो. कॉम पर लिस्टेड हैं कंपनी वर्तमान में सात अलग-अलग क्रिकेट प्लान पेश कर रही है। इनमें सबसे सस्ता प्लान चार सौ निन्यानवे रुपयापये से शुरू होता है, जबकि सबसे महंगे प्लान की कीमत तीन,एक सौ उन्नीस रुपयापये है। ये सभी प्लान एक साल के लिए डिज्नी+ हॉटस्टार मोबाइल सब्सक्रिप्शन मुफ्त में देते हैं। जियो के चार सौ निन्यानवे रुपयापये वाले क्रिकेट प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और एक सौ एसएमएस दैनिक लिमिट के साथ प्रति दिन दो जीबी मोबाइल डेटा ऑफर करता है। इसी तरह पाँच सौ पचपन रुपयापये के क्रिकेट प्लान की वैलिडिटी पचपन दिनों की है और यह पचपन जीबी इंटरनेट डेटा के साथ आता है। योजना के तहत कोई एसएमएस या कॉल लाभ नहीं हैं। जियो के छः सौ एक रुपयापये के क्रिकेट प्रीपेड प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ नब्बे जीबी कुल इंटरनेट डेटा और प्रतिदिन एक सौ एसएमएस प्रदान करता है। रिलायंस जियो के छः सौ उनसठ रुपयापये के क्रिकेट प्लान में प्रतिदिन एक. पाँच जीबी मोबाइल डेटा मिलता है। इस प्लान की वैलिडिटी छप्पन दिनों की है और इसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग बेनेफिट मिलता है। जियो द्वारा पेश किया गया एक और क्रिकेट प्लान है। इसकी कीमत सात सौ निन्यानवे रुपयापये है जिसकी वैलिडिटी छप्पन दिनों की है। यह अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ दो जीबी डेली मोबाइल डेटा के साथ आता है। जियो का एक,छयासठ रुपयापये का प्रीपेड प्लान चौरासी दिनों की वैलिडिटी के लिए एक सौ तिहत्तर जीबी मोबाइल डेटा पैक के साथ आता है। यह डेली एक सौ एसएमएस के साथ असीमित वॉयस कॉलिंग बेनेफिट ऑफर करता है। अंत में जियो के तीन,एक सौ उन्नीस रुपयापये के क्रिकेट प्रीपेड प्लान की वैलिडिटी तीन सौ पैंसठ दिनों की है और यह प्रति दिन दो जीबी मोबाइल डेटा ऑफर करता है। प्लान के तहत यूजर्स को वॉयस कॉलिंग और प्रतिदिन एक सौ एसएमएस के साथ दस जीबी डेटा का बेनेफिट भी मिलेगा। जियो का एक छः सौ छयासठ रुपया वाला प्लान है, जिसकी वैलिडिटी चौरासी दिनों की है। ये प्लान डेली एक. पाँच जीबी डेटा और अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग के साथ आता है। आपको डेली एक सौ एसएमएस मिलेंगे। साथ ही फ्री में जियो ऐप्स का एक्सेस भी दिया जाएगा।
कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा शुक्रवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किए जाने के बाद केरल पुलिस ने राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी है और जिला पुलिस प्रमुखों को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं. देश में आतंकी गतिविधियों को कथित रूप से समर्थन देने के आरोप में पीएफआई ने अपने नेताओं के कार्यालयों और आवासों पर छापेमारी और एनआईए और अन्य एजेंसियों द्वारा गुरुवार को उनकी गिरफ्तारी के विरोध में सुबह से शाम की हड़ताल का आह्वान किया था. देखें वीडियोः पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. बयान में कहा गया, "राज्य में सभी पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया जाएगा. "इस बीच, राज्य द्वारा संचालित केएसआरटीसी ने सूचित किया है कि यह हमेशा की तरह काम करेगा. परिवहन निगम ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो अस्पतालों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए विशेष सेवाओं की व्यवस्था की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा भी मांगी जाएगी. पीएफआई ने गुरुवार को कहा था कि राज्य में 23 सितंबर को "संघ द्वारा नियंत्रित फासीवादी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके असंतोषजनक आवाजों को चुप कराने के प्रयास के खिलाफ" हड़ताल की जाएगी. पीएफआई के राज्य महासचिव ए अब्दुल सथर ने बयान में कहा कि हड़ताल सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक होगी.
कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा शुक्रवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किए जाने के बाद केरल पुलिस ने राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी है और जिला पुलिस प्रमुखों को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं. देश में आतंकी गतिविधियों को कथित रूप से समर्थन देने के आरोप में पीएफआई ने अपने नेताओं के कार्यालयों और आवासों पर छापेमारी और एनआईए और अन्य एजेंसियों द्वारा गुरुवार को उनकी गिरफ्तारी के विरोध में सुबह से शाम की हड़ताल का आह्वान किया था. देखें वीडियोः पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. बयान में कहा गया, "राज्य में सभी पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया जाएगा. "इस बीच, राज्य द्वारा संचालित केएसआरटीसी ने सूचित किया है कि यह हमेशा की तरह काम करेगा. परिवहन निगम ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो अस्पतालों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए विशेष सेवाओं की व्यवस्था की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा भी मांगी जाएगी. पीएफआई ने गुरुवार को कहा था कि राज्य में तेईस सितंबर को "संघ द्वारा नियंत्रित फासीवादी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके असंतोषजनक आवाजों को चुप कराने के प्रयास के खिलाफ" हड़ताल की जाएगी. पीएफआई के राज्य महासचिव ए अब्दुल सथर ने बयान में कहा कि हड़ताल सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक होगी.
रायपुरः धान खरीदी को लेकर जारी मंत्री मंडलीय उपसमिति की बैठक समाप्त हो गई है। इसमें प्रमुख रूप से ये बात सामने आई की बेमौसम बारिश से धान को बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा धान के कैप कवर खरीदी के लिए पूरी राशि देने के बावजूद धान कैसे भीगा इस पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। दरअसल पिछले दिनों हुई बारिश से धन केंद्रों में 38 हज़ार टन धान बारिश से भीग गया। इसके अलावा वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी देते हुए कहा, प्रदेश में अब तक 58 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। जिसमें कही से भी बारदाना शॉर्टेज की शिकायत नहीं मिली है। आगामी दिनों में धान खरीदी के लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त बारदाने उपलब्ध हैं। यहां तक की अब किसानों को बारदाने लाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
रायपुरः धान खरीदी को लेकर जारी मंत्री मंडलीय उपसमिति की बैठक समाप्त हो गई है। इसमें प्रमुख रूप से ये बात सामने आई की बेमौसम बारिश से धान को बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा धान के कैप कवर खरीदी के लिए पूरी राशि देने के बावजूद धान कैसे भीगा इस पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। दरअसल पिछले दिनों हुई बारिश से धन केंद्रों में अड़तीस हज़ार टन धान बारिश से भीग गया। इसके अलावा वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी देते हुए कहा, प्रदेश में अब तक अट्ठावन लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। जिसमें कही से भी बारदाना शॉर्टेज की शिकायत नहीं मिली है। आगामी दिनों में धान खरीदी के लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त बारदाने उपलब्ध हैं। यहां तक की अब किसानों को बारदाने लाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
झुंझुनूं डिपो के 350 रोडवेज कर्मचारियों को RGHS योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पिछले एक महीने से कार्ड में बैलेंस नहीं होने से कर्मचारियों को भटकना पड़ रहा है। जबकि कर्मचारियों की हर माह तय कटौती जारी है। राज्य सरकार के अन्य कार्मिकों की भांति राजस्थान रोडवेज के कर्मचारियों को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) योजना से जोड़ा गया था। झुंझुनूं समेत प्रदेश के करीब 12 हजार रोडवेज कर्मियों को आरजीएचएस कार्ड बंद होने से इस योजना के जरिए निशुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। नतीजतन रोडवेज कर्मियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, दवाइयां भी नगद पैसे देकर खरीदनी पड़ रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों को मासिक वेतन भी 2-3 माह की देरी से मिलता है। ऐसे से इलाज का खर्च अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है। झुंझुनूं डिपो के मुख्य प्रबंधक राकेश गढ़वाल ने बताया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण बैलेंस नहीं दिखा रहा है। इस संबंध में मुख्यालय पर पत्र भेजा है। दो-तीन दिन में योजना का लाभ रोडवेज कर्मियों को मिलने लगेगा। आरजीएचएस कार्ड बंद होने से रोडवेज कर्मचारियों में आक्रोश नजर आ रहा है। कार्मिकों का कहना है कि हर माह कटौती हो रही है। जरूरत पड़ने पर दवा लेने जाते हैं तो पता चलता है कि कार्ड में बैलेंस नहीं है। ऐसे में दवाएं बाजार से नकद रुपए देकर खरीदनी पड़ रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों से आरजीएचएस कार्ड की ओपीडी इलाज की बैलेंस सीमा को लेकर भी भेदभाव होता है। राज्य कर्मचारियों को योजना के तहत 25 लाख रुपए का निशुल्क इलाज मिलता है, जिसमें ओपीडी भी शामिल है। वहीं रोडवेज के कर्मचारियों को निशुल्क ओपीडी इलाज केवल 20 हजार की सीमा तक ही मिल रहा है। रोडवेज कर्मचारियों के अप्रैल माह के मासिक वेतन बिलों से कटौती के बावजूद समय पर प्रीमियम जमा नहीं होने से आरजीएचएस कार्ड में वित्तीय वर्ष 2023-24 का कैश लेस बैलेंस आरजीएचएस वॉलेट में जमा नहीं हुआ है। कर्मचारी के आरजीएचएस से इलाज के लिए अस्पताल जाने पर बैलेंस शून्य बता रहा है। कर्मचारियों को आरजीएचएस की सुविधा बंद होने से इलाज का खर्च जेब से जमा करवाना पड़ रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
झुंझुनूं डिपो के तीन सौ पचास रोडवेज कर्मचारियों को RGHS योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पिछले एक महीने से कार्ड में बैलेंस नहीं होने से कर्मचारियों को भटकना पड़ रहा है। जबकि कर्मचारियों की हर माह तय कटौती जारी है। राज्य सरकार के अन्य कार्मिकों की भांति राजस्थान रोडवेज के कर्मचारियों को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम योजना से जोड़ा गया था। झुंझुनूं समेत प्रदेश के करीब बारह हजार रोडवेज कर्मियों को आरजीएचएस कार्ड बंद होने से इस योजना के जरिए निशुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। नतीजतन रोडवेज कर्मियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, दवाइयां भी नगद पैसे देकर खरीदनी पड़ रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों को मासिक वेतन भी दो-तीन माह की देरी से मिलता है। ऐसे से इलाज का खर्च अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है। झुंझुनूं डिपो के मुख्य प्रबंधक राकेश गढ़वाल ने बताया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण बैलेंस नहीं दिखा रहा है। इस संबंध में मुख्यालय पर पत्र भेजा है। दो-तीन दिन में योजना का लाभ रोडवेज कर्मियों को मिलने लगेगा। आरजीएचएस कार्ड बंद होने से रोडवेज कर्मचारियों में आक्रोश नजर आ रहा है। कार्मिकों का कहना है कि हर माह कटौती हो रही है। जरूरत पड़ने पर दवा लेने जाते हैं तो पता चलता है कि कार्ड में बैलेंस नहीं है। ऐसे में दवाएं बाजार से नकद रुपए देकर खरीदनी पड़ रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों से आरजीएचएस कार्ड की ओपीडी इलाज की बैलेंस सीमा को लेकर भी भेदभाव होता है। राज्य कर्मचारियों को योजना के तहत पच्चीस लाख रुपए का निशुल्क इलाज मिलता है, जिसमें ओपीडी भी शामिल है। वहीं रोडवेज के कर्मचारियों को निशुल्क ओपीडी इलाज केवल बीस हजार की सीमा तक ही मिल रहा है। रोडवेज कर्मचारियों के अप्रैल माह के मासिक वेतन बिलों से कटौती के बावजूद समय पर प्रीमियम जमा नहीं होने से आरजीएचएस कार्ड में वित्तीय वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस का कैश लेस बैलेंस आरजीएचएस वॉलेट में जमा नहीं हुआ है। कर्मचारी के आरजीएचएस से इलाज के लिए अस्पताल जाने पर बैलेंस शून्य बता रहा है। कर्मचारियों को आरजीएचएस की सुविधा बंद होने से इलाज का खर्च जेब से जमा करवाना पड़ रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। राजधानी के डाबड़ी इलाके में पड़ने वाले सीतापुर गांव में आज उस समय हड़कंप मच गया जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक टेम्पों का पीछा करते हुए एक मकान को घेर लिया। पुलिस टीम ने इस टैम्पो और मकान से करीब छह करोड़ रुपए के जाली नोट बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मकान से एक हसन अली नाम के एक शख्स को भी गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस के आलाधिकारी अभी तक इस बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं। दरअसल इन नोटों को कपड़े के थानों में छुपा कर रखा गया था। स्पेशल सेल ने ये कार्रवाई आईबी और बीएसएफ की टीम को साथ लेकर अंजाम दी है। सूत्रों के मुताबिक जाली नोटों की ये खेप सीमा पार से आई लगती है। स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त पीएन अग्रवाल के मुताबिक पुलिस टीम ने ऐसे दो ऐम्पो को जब्त किया है जिसमें लादे कपड़े में छुपकर जाली नोट रखे गए थे। जानकारी के मुताबिक मामला दोपहर करीब ढाई बजे का है। स्पेशल सेल की एक टीम आईबी से मिले इनपुट के बाद बीएसएफ की टीम के साथ एक ऐम्पो का पीछा करते हुए डाबड़ी के सीतापुर गांव पहुंच गई। टीम ने इस टैम्पो को घेर लिया और जैसे ही टैम्पो सवार उसमें से कपड़े के थान निकालने लगे, वैसे ही पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने उस टैम्पो से कपड़े के थानों में छुपा कर रखे गए जाली नोटों की खेप बरामद की। टीम ने उस मकान को न केवल चारों ओर से घेर लिया बल्कि उसकी सशस्त्र तलाशी लेनी शुरू कर दी। बताया जाता है कि छापे के दौरान पुलिस टीम यह देखकर दंग रह गई कि कपड़े के इन थानों से बेहद उम्दा क्वालिटी के हजार और पांच सौ के नोट लगातार निकलते ही जा रहे थे। सूत्र बताते हैं कि देर शाम तक पुलिस टीम के उक्त मकान को घेरकर नोटों की गिनती की है सूत्र बताते हैं कि देर शाम तक पुलिस टीम ने उक्त मकान को घेरकर नोटों की गिनती की है सूत्र बताते हैं कि इस ठिकाने से पुलिस ने करीब छह करोड़ रुपए के जाली नोट बरामद किए हैं। पकड़े गए हसन अली के बारे में इलाके के लोग बताते हैं कि यह इस मकान में काफी समय से रहता है। लेकिन कभी भी ऐसी कोई गतिविधि नहीं देखी जिससे उस पर शक हो सके। इलाके में ही रहने वाले नरेश कुमार ने बताया कि ये शख्स पहले इसी इलाके में रेहड़ी लगाकर कप प्लेट आदि बेचा करता था और इसने कुछ समय के लिए एक खाने का होटल भी खोला था। इलाके के लोग ये देखकर हैरान थे कि उनके इलाके से पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों की खेप बरामद कर ली है। हर कोई बस हैरत से इस मामले पर चर्चा करता हुआ दिखाई दे रहा था। दूसरी तरफ, उड़ीसा के क्योंझर जिले में पुलिस ने दो लोगों को एक साप्ताहिक बाज़ार में नकली नोटों का इस्तेमाल करते हुए धर दबोचा है। इनके पास से 6 हजार के नकली नोट बरामद किए गए हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जाली भारतीय नोटों के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया था। एजेंसी ने इस सिलसिले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस रैकेट के तार देश के कई राज्यों में फैले हुए हैं और इनके तार सीमा पार पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं जहां इन नकली नोटों को छापा जाता है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गैंग के सरगना भी शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल के माल्दा जिले से रैकेट चलाते थे। एनआईए के अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भारत को अस्थिर और आर्थिक तौर पर कमजोर करने की साजिश के तहत वहां से नकली नोटों का जखीरा भारत में लाया जा रहा है।
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। राजधानी के डाबड़ी इलाके में पड़ने वाले सीतापुर गांव में आज उस समय हड़कंप मच गया जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक टेम्पों का पीछा करते हुए एक मकान को घेर लिया। पुलिस टीम ने इस टैम्पो और मकान से करीब छह करोड़ रुपए के जाली नोट बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मकान से एक हसन अली नाम के एक शख्स को भी गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस के आलाधिकारी अभी तक इस बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं। दरअसल इन नोटों को कपड़े के थानों में छुपा कर रखा गया था। स्पेशल सेल ने ये कार्रवाई आईबी और बीएसएफ की टीम को साथ लेकर अंजाम दी है। सूत्रों के मुताबिक जाली नोटों की ये खेप सीमा पार से आई लगती है। स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त पीएन अग्रवाल के मुताबिक पुलिस टीम ने ऐसे दो ऐम्पो को जब्त किया है जिसमें लादे कपड़े में छुपकर जाली नोट रखे गए थे। जानकारी के मुताबिक मामला दोपहर करीब ढाई बजे का है। स्पेशल सेल की एक टीम आईबी से मिले इनपुट के बाद बीएसएफ की टीम के साथ एक ऐम्पो का पीछा करते हुए डाबड़ी के सीतापुर गांव पहुंच गई। टीम ने इस टैम्पो को घेर लिया और जैसे ही टैम्पो सवार उसमें से कपड़े के थान निकालने लगे, वैसे ही पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया। पुलिस ने उस टैम्पो से कपड़े के थानों में छुपा कर रखे गए जाली नोटों की खेप बरामद की। टीम ने उस मकान को न केवल चारों ओर से घेर लिया बल्कि उसकी सशस्त्र तलाशी लेनी शुरू कर दी। बताया जाता है कि छापे के दौरान पुलिस टीम यह देखकर दंग रह गई कि कपड़े के इन थानों से बेहद उम्दा क्वालिटी के हजार और पांच सौ के नोट लगातार निकलते ही जा रहे थे। सूत्र बताते हैं कि देर शाम तक पुलिस टीम के उक्त मकान को घेरकर नोटों की गिनती की है सूत्र बताते हैं कि देर शाम तक पुलिस टीम ने उक्त मकान को घेरकर नोटों की गिनती की है सूत्र बताते हैं कि इस ठिकाने से पुलिस ने करीब छह करोड़ रुपए के जाली नोट बरामद किए हैं। पकड़े गए हसन अली के बारे में इलाके के लोग बताते हैं कि यह इस मकान में काफी समय से रहता है। लेकिन कभी भी ऐसी कोई गतिविधि नहीं देखी जिससे उस पर शक हो सके। इलाके में ही रहने वाले नरेश कुमार ने बताया कि ये शख्स पहले इसी इलाके में रेहड़ी लगाकर कप प्लेट आदि बेचा करता था और इसने कुछ समय के लिए एक खाने का होटल भी खोला था। इलाके के लोग ये देखकर हैरान थे कि उनके इलाके से पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों की खेप बरामद कर ली है। हर कोई बस हैरत से इस मामले पर चर्चा करता हुआ दिखाई दे रहा था। दूसरी तरफ, उड़ीसा के क्योंझर जिले में पुलिस ने दो लोगों को एक साप्ताहिक बाज़ार में नकली नोटों का इस्तेमाल करते हुए धर दबोचा है। इनके पास से छः हजार के नकली नोट बरामद किए गए हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जाली भारतीय नोटों के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया था। एजेंसी ने इस सिलसिले में चौदह लोगों को गिरफ्तार किया था। इस रैकेट के तार देश के कई राज्यों में फैले हुए हैं और इनके तार सीमा पार पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं जहां इन नकली नोटों को छापा जाता है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गैंग के सरगना भी शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल के माल्दा जिले से रैकेट चलाते थे। एनआईए के अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भारत को अस्थिर और आर्थिक तौर पर कमजोर करने की साजिश के तहत वहां से नकली नोटों का जखीरा भारत में लाया जा रहा है।
गुजरात में बढ़ रही कोरोना की लहर के चलते राज्य के 15 प्रमुख अस्पतालों के 215 हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हो गए हैं। कोरोना संक्रमितों को मंगलवार से होम आइसोलेशन में रखा गया है। इसके अलावा राज्य में 7476 नए कोरोना केसेस दर्ज हुए थे। इन 195 में से 154 हेल्थ वर्कर्स अहमदाबाद के प्रमुख पब्लिक सेक्टर हॉस्पिटल्स के हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में 64 हेल्थ वर्कर्स, अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 40, एलजी अस्पताल में 18, जीएमईआरएस सोला में 15, सरकारी डेंटल कॉलेज में 9, गुजरात कैंसर अनुसधान संसथान में 6 और शारदाबहन अस्पताल में 2 हेल्थ वर्कर्स कोरोना पॉजिटिव हैं। हालांकि 11 जनवरी तक IKDRC में कोई भी स्टाफ कोरोना पॉजिटिव नहीं है। दूसरी तरफ, मध्य गुजरात की बात करें तो वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में 12 हेल्थ वर्कर्स और गोत्री स्थित जीएमईआरएस में 3 नर्सें कोरोना पॉजिटिव हैं। जबकि गांधीनगर GMERS में 17 हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हुए हैं। सौराष्ट्र के 4 अस्पतालों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। जहां राजकोट सिविल अस्पताल में 5, जामनगर सिविल अस्पताल में 4, भावनगर के सर टी सिविल अस्पताल में 3 हेल्थ वर्कर्स और GMERS जूनागढ़ में एक डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। दूसरी तरफ, दक्षिण गुजरात में सूरत में शहर के 98 हेल्थ वर्कर्स अब तक कोविड पॉजिटिव आए हैं। इनमें 15 सूरत न्यू सिविल अस्पताल के स्टाफ मेंबर्स थे जिसमें मेडिकल सुप्रिटेंडेंट और आरएमओ भी शामिल है। इसके आलावा स्मिमेर अस्पताल के स्टाफ समेत सूरत म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कुल 83 हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हुए हैं।
गुजरात में बढ़ रही कोरोना की लहर के चलते राज्य के पंद्रह प्रमुख अस्पतालों के दो सौ पंद्रह हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हो गए हैं। कोरोना संक्रमितों को मंगलवार से होम आइसोलेशन में रखा गया है। इसके अलावा राज्य में सात हज़ार चार सौ छिहत्तर नए कोरोना केसेस दर्ज हुए थे। इन एक सौ पचानवे में से एक सौ चौवन हेल्थ वर्कर्स अहमदाबाद के प्रमुख पब्लिक सेक्टर हॉस्पिटल्स के हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में चौंसठ हेल्थ वर्कर्स, अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चालीस, एलजी अस्पताल में अट्ठारह, जीएमईआरएस सोला में पंद्रह, सरकारी डेंटल कॉलेज में नौ, गुजरात कैंसर अनुसधान संसथान में छः और शारदाबहन अस्पताल में दो हेल्थ वर्कर्स कोरोना पॉजिटिव हैं। हालांकि ग्यारह जनवरी तक IKDRC में कोई भी स्टाफ कोरोना पॉजिटिव नहीं है। दूसरी तरफ, मध्य गुजरात की बात करें तो वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में बारह हेल्थ वर्कर्स और गोत्री स्थित जीएमईआरएस में तीन नर्सें कोरोना पॉजिटिव हैं। जबकि गांधीनगर GMERS में सत्रह हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हुए हैं। सौराष्ट्र के चार अस्पतालों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। जहां राजकोट सिविल अस्पताल में पाँच, जामनगर सिविल अस्पताल में चार, भावनगर के सर टी सिविल अस्पताल में तीन हेल्थ वर्कर्स और GMERS जूनागढ़ में एक डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। दूसरी तरफ, दक्षिण गुजरात में सूरत में शहर के अट्ठानवे हेल्थ वर्कर्स अब तक कोविड पॉजिटिव आए हैं। इनमें पंद्रह सूरत न्यू सिविल अस्पताल के स्टाफ मेंबर्स थे जिसमें मेडिकल सुप्रिटेंडेंट और आरएमओ भी शामिल है। इसके आलावा स्मिमेर अस्पताल के स्टाफ समेत सूरत म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कुल तिरासी हेल्थ वर्कर्स कोरोना संक्रमित हुए हैं।
तिरुवनैकवल (तिरुवनैकल भी कहा जाता है) एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह तिरुचिरापल्ली (त्रिची), तमिल नाडु में स्थित है। यह मंदिर आरंभिक चोल राजा, कोचेन्गनन चोल, ने १८०० वर्ष पूर्व निर्माण करवाया था। यह श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के निकट ही स्थित है। . 5 संबंधोंः चिदंबरम मंदिर, तमिल नाडु, तिरुवन्नमलई, मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर, कामाक्षी मन्दिर। चिदंबरम मंदिर (சிதம்பரம் கோயில்) भगवान शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जो मंदिरों की नगरी चिदंबरम के मध्य में, पौंडीचेरी से दक्षिण की ओर 78 किलोमीटर की दूरी पर और कुड्डालोर जिले के उत्तर की ओर 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कुड्डालोर जिला भारत के दक्षिणपूर्वीय राज्य तमिलनाडु का पूर्व-मध्य भाग है। संगम क्लासिक्स विडूवेल्वीडुगु पेरुमटक्कन के पारंपरिक विश्वकर्माओं के एक सम्माननीय खानदान की ओर संकेत करता है जो मंदिर पुनर्निर्माण के प्रमुख वास्तुकार थे। मंदिर के इतिहास में कई जीर्णोद्धार हुए हैं, विशेषतः पल्लव/चोल शासकों के द्वारा प्राचीन एवम पूर्व मध्ययुगीन काल के दौरान. तमिल नाडु (तमिलः, तमिऴ् नाडु) भारत का एक दक्षिणी राज्य है। तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई (चेऩ्ऩै) है। तमिल नाडु के अन्य महत्त्वपूर्ण नगर मदुरै, त्रिचि (तिरुच्चि), कोयम्बतूर (कोऽयम्बुत्तूर), सेलम (सेऽलम), तिरूनेलवेली (तिरुनेल्वेऽली) हैं। इसके पड़ोसी राज्य आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल हैं। तमिल नाडु में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा तमिल है। तमिल नाडु के वर्तमान मुख्यमन्त्री एडाप्पडी पलानिस्वामी और राज्यपाल विद्यासागर राव हैं। . भारत के तमिलनाडु राज्य स्थित तिरुवन्नमलई जिले में बसा तिरुवन्नमलई एक तीर्थ शहर और नगरपालिका है। यह तिरुवन्नमलई जिले का मुख्यालय भी है। अन्नमलईयर मंदिर इसी तिरुवन्नमलई में बसा हुआ है, जो कि अन्नमलई पहाड़ की तराई में स्थित है और यह मंदिर तमिलनाडु में भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। लम्बे समय से तिरुवन्नमलई कई योगियों और सिद्धों से जुड़ा रहा है, और सबसे हाल के समय की बात करें तो अरुणाचल की पहाड़ियां, जहां 20वीं सदी के गुरु रमण महर्षि रहते थे, वह एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो चुका है। . मीनाक्षी सुन्दरेश्वरर मन्दिर या मीनाक्षी अम्मां मन्दिर या केवल मीनाक्षी मन्दिर (மீனாக்ஷி அம்மன் கோவில்) भारत के तमिल नाडु राज्य के मदुरई नगर, में स्थित एक ऐतिहासिक मन्दिर है। यह हिन्दू देवता शिव ("'सुन्दरेश्वरर"' या सुन्दर ईश्वर के रूप में) एवं उनकी भार्या देवी पार्वती (मीनाक्षी या मछली के आकार की आंख वाली देवी के रूप में) दोनो को समर्पित है। यह ध्यान योग्य है कि मछली पांड्य राजाओं को राजचिह्न है। यह मन्दिर तमिल भाषा के गृहस्थान 2500 वर्ष पुराने मदुरई नगर, की जीवनरेखा है। हिन्दु पौराणिक कथानुसार भगवान शिव सुन्दरेश्वरर रूप में अपने गणों के साथ पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने मदुरई नगर में आये थे। मीनाक्षी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। इस मन्दिर को देवी पार्वती के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। अन्य स्थानों में कांचीपुरम का कामाक्षी मन्दिर, तिरुवनैकवल का अकिलन्देश्वरी मन्दिर एवं वाराणसी का विशालाक्षी मन्दिर प्रमुख हैं। इस मन्दिर का स्थापत्य एवं वास्तु आश्चर्यचकित कर देने वाला है, जिस कारण यह आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों की सूची में प्रथम स्थान पर स्थित है, एवं इसका कारण इसका विस्मयकारक स्थापत्य ही है। इस इमारत समूह में 12 भव्य गोपुरम हैं, जो अतीव विस्तृत रूप से शिल्पित हैं। इन पर बडी़ महीनता एवं कुशलतापूर्वक रंग एवं चित्रकारी की गई है, जो देखते ही बनती है। यह मन्दिर तमिल लोगों का एक अति महत्वपूर्ण द्योतक है, एवं इसका वर्णन तमिल साहित्य में पुरातन काल से ही होता रहा है। हालांकि वर्तमान निर्माण आरम्भिक सत्रहवीं शताब्दी का बताया जाता है। . कामाक्षी अम्मा मन्दिर दक्षिण भारत में स्थित हिन्दू मन्दिर है। यह देवी त्रिपुर सुंदरी रूप में देवी कामाक्षी को समर्पित है। यह कांचीपुरम की एतिहासिक नगरी, तमिल नाडू में स्थित है। इसके साथ आदि गुरु शंकराचार्य का नाम भी जुडा़ है। यह मदुरई के मीनाक्षी मन्दिर, तिरुवनैकवल के अकिलन्देश्वरी मंदिर के साथ साथ वाराणसी के विशालाक्षी मन्दिर समेत देवी पार्वती का मुख्य मन्दिर है। यहां पद्मासन में विराजमान देवी की भव्य मूर्ती है। .
तिरुवनैकवल एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह तिरुचिरापल्ली , तमिल नाडु में स्थित है। यह मंदिर आरंभिक चोल राजा, कोचेन्गनन चोल, ने एक हज़ार आठ सौ वर्ष पूर्व निर्माण करवाया था। यह श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के निकट ही स्थित है। . पाँच संबंधोंः चिदंबरम मंदिर, तमिल नाडु, तिरुवन्नमलई, मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर, कामाक्षी मन्दिर। चिदंबरम मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जो मंदिरों की नगरी चिदंबरम के मध्य में, पौंडीचेरी से दक्षिण की ओर अठहत्तर किलोग्राममीटर की दूरी पर और कुड्डालोर जिले के उत्तर की ओर साठ किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है, कुड्डालोर जिला भारत के दक्षिणपूर्वीय राज्य तमिलनाडु का पूर्व-मध्य भाग है। संगम क्लासिक्स विडूवेल्वीडुगु पेरुमटक्कन के पारंपरिक विश्वकर्माओं के एक सम्माननीय खानदान की ओर संकेत करता है जो मंदिर पुनर्निर्माण के प्रमुख वास्तुकार थे। मंदिर के इतिहास में कई जीर्णोद्धार हुए हैं, विशेषतः पल्लव/चोल शासकों के द्वारा प्राचीन एवम पूर्व मध्ययुगीन काल के दौरान. तमिल नाडु भारत का एक दक्षिणी राज्य है। तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई है। तमिल नाडु के अन्य महत्त्वपूर्ण नगर मदुरै, त्रिचि , कोयम्बतूर , सेलम , तिरूनेलवेली हैं। इसके पड़ोसी राज्य आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल हैं। तमिल नाडु में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा तमिल है। तमिल नाडु के वर्तमान मुख्यमन्त्री एडाप्पडी पलानिस्वामी और राज्यपाल विद्यासागर राव हैं। . भारत के तमिलनाडु राज्य स्थित तिरुवन्नमलई जिले में बसा तिरुवन्नमलई एक तीर्थ शहर और नगरपालिका है। यह तिरुवन्नमलई जिले का मुख्यालय भी है। अन्नमलईयर मंदिर इसी तिरुवन्नमलई में बसा हुआ है, जो कि अन्नमलई पहाड़ की तराई में स्थित है और यह मंदिर तमिलनाडु में भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। लम्बे समय से तिरुवन्नमलई कई योगियों और सिद्धों से जुड़ा रहा है, और सबसे हाल के समय की बात करें तो अरुणाचल की पहाड़ियां, जहां बीसवीं सदी के गुरु रमण महर्षि रहते थे, वह एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो चुका है। . मीनाक्षी सुन्दरेश्वरर मन्दिर या मीनाक्षी अम्मां मन्दिर या केवल मीनाक्षी मन्दिर भारत के तमिल नाडु राज्य के मदुरई नगर, में स्थित एक ऐतिहासिक मन्दिर है। यह हिन्दू देवता शिव एवं उनकी भार्या देवी पार्वती दोनो को समर्पित है। यह ध्यान योग्य है कि मछली पांड्य राजाओं को राजचिह्न है। यह मन्दिर तमिल भाषा के गृहस्थान दो हज़ार पाँच सौ वर्ष पुराने मदुरई नगर, की जीवनरेखा है। हिन्दु पौराणिक कथानुसार भगवान शिव सुन्दरेश्वरर रूप में अपने गणों के साथ पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने मदुरई नगर में आये थे। मीनाक्षी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। इस मन्दिर को देवी पार्वती के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। अन्य स्थानों में कांचीपुरम का कामाक्षी मन्दिर, तिरुवनैकवल का अकिलन्देश्वरी मन्दिर एवं वाराणसी का विशालाक्षी मन्दिर प्रमुख हैं। इस मन्दिर का स्थापत्य एवं वास्तु आश्चर्यचकित कर देने वाला है, जिस कारण यह आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों की सूची में प्रथम स्थान पर स्थित है, एवं इसका कारण इसका विस्मयकारक स्थापत्य ही है। इस इमारत समूह में बारह भव्य गोपुरम हैं, जो अतीव विस्तृत रूप से शिल्पित हैं। इन पर बडी़ महीनता एवं कुशलतापूर्वक रंग एवं चित्रकारी की गई है, जो देखते ही बनती है। यह मन्दिर तमिल लोगों का एक अति महत्वपूर्ण द्योतक है, एवं इसका वर्णन तमिल साहित्य में पुरातन काल से ही होता रहा है। हालांकि वर्तमान निर्माण आरम्भिक सत्रहवीं शताब्दी का बताया जाता है। . कामाक्षी अम्मा मन्दिर दक्षिण भारत में स्थित हिन्दू मन्दिर है। यह देवी त्रिपुर सुंदरी रूप में देवी कामाक्षी को समर्पित है। यह कांचीपुरम की एतिहासिक नगरी, तमिल नाडू में स्थित है। इसके साथ आदि गुरु शंकराचार्य का नाम भी जुडा़ है। यह मदुरई के मीनाक्षी मन्दिर, तिरुवनैकवल के अकिलन्देश्वरी मंदिर के साथ साथ वाराणसी के विशालाक्षी मन्दिर समेत देवी पार्वती का मुख्य मन्दिर है। यहां पद्मासन में विराजमान देवी की भव्य मूर्ती है। .
केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे में लाल किला समेत दिल्ली के 5 हेरिटेज साइट्स को अडॉप्ट किया जा चुका है यानी इनके लिए मॉन्यूमेंट मित्र चुने जा चुके हैं। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किए जाते हैं। इस स्कीम के तहत स्मारकों का रखरखाव, डिवेलपमेंट, मेनटेनेंस और ऑपरेट करने की जिम्मेदारी निजी हाथों में दी जाती है। ऐसे में लाल किला समेत दिल्ली के 5 हेरिटेज साइट्स को अडॉप्ट किया जा चुका है यानी इनके लिए मॉन्यूमेंट मित्र चुने जा चुके हैं। इन साइट्स को किया गया अडॉप्ट दिल्ली के लाल किला के अलावा मेहरौली-गुड़गांव रोड पर स्थित अजीम खान का मकबरा, मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में स्थित जमाली-कमाली हेरिटेज, राजों की बाउली और मोठ की मस्जिद ये वे 5 हेरिटेज साइट्स हैं जिन्हें अडॉप्ट किया गया है। राज्य सरकार के साथ साइन किए गए MoU के बाद डालमिया भारत ग्रुप को लाल किला का मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किया गया है जबकि कैपर ट्रैवल कंपनी को बाकी के 4 हेरिटेज साइट का मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किया गया है। ऐतिहासिक जगहों को गोद लेती हैं कंपनियां केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने डिवेलपमेंट ऑफ टूरिस्ट फ्रेंडली डेस्टिनेशन प्रॉजेक्ट सितंबर 2017 में शुरू किया था। इस योजना के तहत कॉर्पोरेट हाउसेस केंद्रीय मंत्रालय से अग्रीमेंट करके ऐतिहासिक जगहों को गोद ले सकते हैं। अजीम खान का मकबरा अजीम खान, मुगल सेना का जनरल था और उसका मकबरा दिल्ली-गुड़गांव रोज पर छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है। इस मकबरे को 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था। ऐतिहासिक महत्व रखने वाली इमारतों में इसे शामिल किया गया है। जमाली-कमाली दिल्ली के महरौली स्थित आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स में एक दूसरे के बगल में बना है दो स्मारक। इसमें से एक स्मारक मस्जिद है जबकि दूसरा दो लोगों का मकबरा है जिनके नाथ थे- जमाली और कमाली। मुगल साम्राज्य से पहले लोधी वंश के शासन के दौरान एक प्रसिद्ध सूफी संत थे शेख जमाली जिनकी मृत्यु के बाद उन्हें इस मकबरे में दफनाया गया था। राजों की बाउली दिल्ली स्थित मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क के अंदर ही है राजों की बाउली जो अपनी खड़ी सीढ़ियों वाले कुएं के प्रसिद्ध है जिसका निर्माण दौलत खान ने करवाया था। मोठ की मस्जिद लोधी वंश के शासनकाल के दौरान वजीर मिया भोइया नाम के शख्स ने 1505 में इस मस्जिद का निर्माण करवाया था।
केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे में लाल किला समेत दिल्ली के पाँच हेरिटेज साइट्स को अडॉप्ट किया जा चुका है यानी इनके लिए मॉन्यूमेंट मित्र चुने जा चुके हैं। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किए जाते हैं। इस स्कीम के तहत स्मारकों का रखरखाव, डिवेलपमेंट, मेनटेनेंस और ऑपरेट करने की जिम्मेदारी निजी हाथों में दी जाती है। ऐसे में लाल किला समेत दिल्ली के पाँच हेरिटेज साइट्स को अडॉप्ट किया जा चुका है यानी इनके लिए मॉन्यूमेंट मित्र चुने जा चुके हैं। इन साइट्स को किया गया अडॉप्ट दिल्ली के लाल किला के अलावा मेहरौली-गुड़गांव रोड पर स्थित अजीम खान का मकबरा, मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में स्थित जमाली-कमाली हेरिटेज, राजों की बाउली और मोठ की मस्जिद ये वे पाँच हेरिटेज साइट्स हैं जिन्हें अडॉप्ट किया गया है। राज्य सरकार के साथ साइन किए गए MoU के बाद डालमिया भारत ग्रुप को लाल किला का मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किया गया है जबकि कैपर ट्रैवल कंपनी को बाकी के चार हेरिटेज साइट का मॉन्यूमेंट मित्र नियुक्त किया गया है। ऐतिहासिक जगहों को गोद लेती हैं कंपनियां केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने डिवेलपमेंट ऑफ टूरिस्ट फ्रेंडली डेस्टिनेशन प्रॉजेक्ट सितंबर दो हज़ार सत्रह में शुरू किया था। इस योजना के तहत कॉर्पोरेट हाउसेस केंद्रीय मंत्रालय से अग्रीमेंट करके ऐतिहासिक जगहों को गोद ले सकते हैं। अजीम खान का मकबरा अजीम खान, मुगल सेना का जनरल था और उसका मकबरा दिल्ली-गुड़गांव रोज पर छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है। इस मकबरे को सत्रहवीं शताब्दी में बनवाया गया था। ऐतिहासिक महत्व रखने वाली इमारतों में इसे शामिल किया गया है। जमाली-कमाली दिल्ली के महरौली स्थित आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स में एक दूसरे के बगल में बना है दो स्मारक। इसमें से एक स्मारक मस्जिद है जबकि दूसरा दो लोगों का मकबरा है जिनके नाथ थे- जमाली और कमाली। मुगल साम्राज्य से पहले लोधी वंश के शासन के दौरान एक प्रसिद्ध सूफी संत थे शेख जमाली जिनकी मृत्यु के बाद उन्हें इस मकबरे में दफनाया गया था। राजों की बाउली दिल्ली स्थित मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क के अंदर ही है राजों की बाउली जो अपनी खड़ी सीढ़ियों वाले कुएं के प्रसिद्ध है जिसका निर्माण दौलत खान ने करवाया था। मोठ की मस्जिद लोधी वंश के शासनकाल के दौरान वजीर मिया भोइया नाम के शख्स ने एक हज़ार पाँच सौ पाँच में इस मस्जिद का निर्माण करवाया था।
दिलेर समाचार, वाशिंगटन. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) से निपटने के लिए शुरुआती चरण में लगाए गए लॉकडाउन को 'सफल' बताया है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई उसके नागरिकों ने लड़ी है. पीएम मोदी ने ये बातें भारतीय मूल के 'अमेरिकी एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन' (एएपीआई) की बैठक को शनिवार को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही. उन्होंने ये भी कहा कि कोविड-19 संकट का इस्तेमाल देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया. 'भारत में मौत की दर बेहद कम'
दिलेर समाचार, वाशिंगटन. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए शुरुआती चरण में लगाए गए लॉकडाउन को 'सफल' बताया है. उन्होंने कहा कि कोविड-उन्नीस के खिलाफ भारत की लड़ाई उसके नागरिकों ने लड़ी है. पीएम मोदी ने ये बातें भारतीय मूल के 'अमेरिकी एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन' की बैठक को शनिवार को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही. उन्होंने ये भी कहा कि कोविड-उन्नीस संकट का इस्तेमाल देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया. 'भारत में मौत की दर बेहद कम'
इंडिया न्यूज, बदायूं (Uttar Pradesh): उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने बुधवार को जन्मे 9 पिल्लों को कथित तौर पर तालाब में फेंक दिया। जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना बिसौली कोतवाली क्षेत्र के बसई गांव की है। सूचना मिलने पर पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से तालाब से सभी पिल्लों के शव निकाले। इस मामले में आरोपी महिला और उसके पति के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार बसई गांव में रहने वाले सूर्यकांत के घर में एक कुतिया ने 9 पिल्लों को जन्म दिया था। अधिकारियों ने बताया कि सूर्यकांत की पत्नी अनीता ने सुबह इन 9 पिल्लों को कथित तौर पर गांव के पास एक तालाब में फेंक दिया। जिससे पिल्लों की मौत हो गई। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पिल्लों के शव तालाब से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने पशु प्रेमी विभोर शर्मा की तहरीर पर महिला और उसके पति के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा-429 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
इंडिया न्यूज, बदायूं : उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने बुधवार को जन्मे नौ पिल्लों को कथित तौर पर तालाब में फेंक दिया। जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना बिसौली कोतवाली क्षेत्र के बसई गांव की है। सूचना मिलने पर पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से तालाब से सभी पिल्लों के शव निकाले। इस मामले में आरोपी महिला और उसके पति के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार बसई गांव में रहने वाले सूर्यकांत के घर में एक कुतिया ने नौ पिल्लों को जन्म दिया था। अधिकारियों ने बताया कि सूर्यकांत की पत्नी अनीता ने सुबह इन नौ पिल्लों को कथित तौर पर गांव के पास एक तालाब में फेंक दिया। जिससे पिल्लों की मौत हो गई। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पिल्लों के शव तालाब से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने पशु प्रेमी विभोर शर्मा की तहरीर पर महिला और उसके पति के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा-चार सौ उनतीस के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 25000 सिपाहियों को प्रमोशन का लॉलीपॉप और बॉर्डर स्कीम खत्म करने का झांसा काम नहीं आया है। प्रदेश भर में सिपाही और दरोगाओं का काली पट्टी बांधकर विरोध जताना जारी है। सरकार की कार्रवाई के मद्देनजर इस बार सिपाही और दरोगा ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कार्रवाई से बचने के लिए सिपाही और दरोगा हेलमेट पहनकर चेहरा छिपाकर सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर रहे हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पच्चीस हज़ार सिपाहियों को प्रमोशन का लॉलीपॉप और बॉर्डर स्कीम खत्म करने का झांसा काम नहीं आया है। प्रदेश भर में सिपाही और दरोगाओं का काली पट्टी बांधकर विरोध जताना जारी है। सरकार की कार्रवाई के मद्देनजर इस बार सिपाही और दरोगा ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कार्रवाई से बचने के लिए सिपाही और दरोगा हेलमेट पहनकर चेहरा छिपाकर सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर रहे हैं।
इस्लामाबाद (एएनआई): पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा कि शहबाज शरीफ सरकार ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अप्रासंगिक बना दिया है और इसका लोकतंत्र, कानून का शासन और संपूर्ण आर्थिक और संस्थागत ढांचा ढह रहा है। पीटीआई प्रमुख भारत-अमेरिका संयुक्त बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें पाकिस्तान को भारत में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया गया था। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक साथ खड़े हैं और सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अल-कायदा, आईएसआईएस/दाएश, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) सहित सभी संयुक्त राष्ट्र-सूचीबद्ध आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान दोहराया। और हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन। बयान के जवाब में, इमरान खान ने कहाः "जनरल बाजवा ने अपने पीडीएम साथियों के साथ दावा किया कि मैंने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है। हम उनसे और पीडीएम से जो सवाल पूछना चाहते हैं वह यह है कि सरकार में एक साल रहने और पाकिस्तान के विदेश मंत्री की अनगिनत यात्राओं के बाद अमेरिका, भारत/अमेरिका का संयुक्त बयान पाकिस्तान को भारत में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले के रूप में दर्शाता है और इससे अधिक कुछ नहीं। " खान ने लिखा, "तो अब आयातित सरकारी प्रयोग ने न केवल पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अप्रासंगिक बना दिया है, बल्कि हमारा लोकतंत्र, कानून का शासन और संपूर्ण आर्थिक और संस्थागत ढांचा भी हमारी आंखों के सामने ढह रहा है। " भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, सीमा पार आतंकवाद द्विपक्षीय संबंधों को ख़राब करने वाले कई जटिल मुद्दों में से एक है। परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसियों ने तीन युद्ध लड़े हैं, जिनमें से दो जम्मू और कश्मीर को लेकर हैं। (एएनआई)
इस्लामाबाद : पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा कि शहबाज शरीफ सरकार ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अप्रासंगिक बना दिया है और इसका लोकतंत्र, कानून का शासन और संपूर्ण आर्थिक और संस्थागत ढांचा ढह रहा है। पीटीआई प्रमुख भारत-अमेरिका संयुक्त बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें पाकिस्तान को भारत में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया गया था। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक साथ खड़े हैं और सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अल-कायदा, आईएसआईएस/दाएश, लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद सहित सभी संयुक्त राष्ट्र-सूचीबद्ध आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान दोहराया। और हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन। बयान के जवाब में, इमरान खान ने कहाः "जनरल बाजवा ने अपने पीडीएम साथियों के साथ दावा किया कि मैंने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है। हम उनसे और पीडीएम से जो सवाल पूछना चाहते हैं वह यह है कि सरकार में एक साल रहने और पाकिस्तान के विदेश मंत्री की अनगिनत यात्राओं के बाद अमेरिका, भारत/अमेरिका का संयुक्त बयान पाकिस्तान को भारत में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले के रूप में दर्शाता है और इससे अधिक कुछ नहीं। " खान ने लिखा, "तो अब आयातित सरकारी प्रयोग ने न केवल पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अप्रासंगिक बना दिया है, बल्कि हमारा लोकतंत्र, कानून का शासन और संपूर्ण आर्थिक और संस्थागत ढांचा भी हमारी आंखों के सामने ढह रहा है। " भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, सीमा पार आतंकवाद द्विपक्षीय संबंधों को ख़राब करने वाले कई जटिल मुद्दों में से एक है। परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसियों ने तीन युद्ध लड़े हैं, जिनमें से दो जम्मू और कश्मीर को लेकर हैं।
गजरौला औद्योगिक नगरी क्षेत्र के नेशनल हाईवे किनारे स्थित अलग-अलग सड़क हादसों में 5 लोग बुरी तरह घायल हो गए। जिसमें महिला सहित तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सूचना पर पहुंची निजी एंबुलेंस ने अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टर ने हालत नाजुक देख तीन लोगों को रेफर कर दिया है। बता दें कि नेशनल हाईवे स्थित जुबिलेंट फैक्ट्री के पास में हापुड़ के गांव पुठी निवासी शौकीन अपनी पत्नी आश्मीन के साथ गजरौला में दवाई लेने के लिए आ रहा था। जुबिलेंट फैक्ट्री के पास में पहुंचा तो ई-रिक्शा ने उसे टक्कर मार दी। जिसमें पति-पत्नी दोनों ही गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची निजी एंबुलेंस ने कराया अस्पताल में भर्ती डॉक्टर ने हालत नाजुक होता देख मेरठ के लिए रेफर किया है। वहीं बीकानेर होटल के पास तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार दो लोग घायल हो गए। मुरादाबाद काशीराम कॉलोनी निवासी सोनू मैं प्रदीप अपनी बाइक लेकर दिल्ली कपड़ा फैक्ट्री में काम करने जा रहे थे। जैसे ही वह बीकानेर होटल के पास गजरौला में पहुंचे तो पीछे से आए अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी जिसमें दोनों घायल हो गए। सूचना पर पहुंची हाईवे पुलिस ने घायलों को गजरौला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया है। जहां एक की हालत नाजुक हो तब एक डॉक्टर ने मेरठ के लिए रेफर किया है। इसी दौरान हाइवे पर स्थित झनकपुरी के पास बाइक फिसलने से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची हाईवे पुलिस ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अमरोहा के मोहल्ला कोर्ट निवासी आरिफ अपनी बाइक लेकर गजरौला की ओर आ रहा था। जैसे ही जनकपुरी के पास पहुंचा तो अचानक उसकी बाइक फिसल गई, जिसमें आरिफ गंभीर रूप से घायल हो गया। जहां उसकी हालत नाजुक हो तब एक डॉक्टर ने मेरठ के लिए रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गजरौला औद्योगिक नगरी क्षेत्र के नेशनल हाईवे किनारे स्थित अलग-अलग सड़क हादसों में पाँच लोग बुरी तरह घायल हो गए। जिसमें महिला सहित तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सूचना पर पहुंची निजी एंबुलेंस ने अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टर ने हालत नाजुक देख तीन लोगों को रेफर कर दिया है। बता दें कि नेशनल हाईवे स्थित जुबिलेंट फैक्ट्री के पास में हापुड़ के गांव पुठी निवासी शौकीन अपनी पत्नी आश्मीन के साथ गजरौला में दवाई लेने के लिए आ रहा था। जुबिलेंट फैक्ट्री के पास में पहुंचा तो ई-रिक्शा ने उसे टक्कर मार दी। जिसमें पति-पत्नी दोनों ही गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची निजी एंबुलेंस ने कराया अस्पताल में भर्ती डॉक्टर ने हालत नाजुक होता देख मेरठ के लिए रेफर किया है। वहीं बीकानेर होटल के पास तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार दो लोग घायल हो गए। मुरादाबाद काशीराम कॉलोनी निवासी सोनू मैं प्रदीप अपनी बाइक लेकर दिल्ली कपड़ा फैक्ट्री में काम करने जा रहे थे। जैसे ही वह बीकानेर होटल के पास गजरौला में पहुंचे तो पीछे से आए अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी जिसमें दोनों घायल हो गए। सूचना पर पहुंची हाईवे पुलिस ने घायलों को गजरौला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया है। जहां एक की हालत नाजुक हो तब एक डॉक्टर ने मेरठ के लिए रेफर किया है। इसी दौरान हाइवे पर स्थित झनकपुरी के पास बाइक फिसलने से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची हाईवे पुलिस ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अमरोहा के मोहल्ला कोर्ट निवासी आरिफ अपनी बाइक लेकर गजरौला की ओर आ रहा था। जैसे ही जनकपुरी के पास पहुंचा तो अचानक उसकी बाइक फिसल गई, जिसमें आरिफ गंभीर रूप से घायल हो गया। जहां उसकी हालत नाजुक हो तब एक डॉक्टर ने मेरठ के लिए रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हैदराबाद। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यथाशीघ्र पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग ने जोर पकड़ ली है। पार्टी की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि परिवर्तन का यही सही समय है, क्योंकि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को तैयार करने का समय आ गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पायलट ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इससे लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हुई हार से हताश पार्टी में उत्साह का संचार हुआ है। सचिन ने इसका सारा श्रेय राहुल को दिया। बिहार में कांग्रेस ने 41 प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से 28 विजयी हुए। पिछली विधानसभा में चार ही सीटें मिली थीं। पार्टी जदयू और राजद के महागठबंधन में शामिल थी। राज्य की 243 सीटों में से महागठबंधन को 178 सीटों पर सफलता मिली। उन्होंने कहा, "25 वर्षों तक हम बिहार में मुख्यधारा में नहीं थे। लेकिन राहुल के प्रयासों और प्रतिस्पर्द्धा के कारण हम आगे बढ़े। " उन्होंने बताया कि बिहार में महागठबंधन की पृष्ठभूमि भी राहुल ने तैयार की। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने नीतीश कुमार से संपर्क किया और मुलाकात की। कुमार को मुख्यमंत्री के प्रत्याशी के रूप में पेश किया गया और इसके बाद लालू यादव भी इसमें शामिल हुए।
हैदराबाद। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यथाशीघ्र पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग ने जोर पकड़ ली है। पार्टी की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि परिवर्तन का यही सही समय है, क्योंकि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को तैयार करने का समय आ गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पायलट ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इससे लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हुई हार से हताश पार्टी में उत्साह का संचार हुआ है। सचिन ने इसका सारा श्रेय राहुल को दिया। बिहार में कांग्रेस ने इकतालीस प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से अट्ठाईस विजयी हुए। पिछली विधानसभा में चार ही सीटें मिली थीं। पार्टी जदयू और राजद के महागठबंधन में शामिल थी। राज्य की दो सौ तैंतालीस सीटों में से महागठबंधन को एक सौ अठहत्तर सीटों पर सफलता मिली। उन्होंने कहा, "पच्चीस वर्षों तक हम बिहार में मुख्यधारा में नहीं थे। लेकिन राहुल के प्रयासों और प्रतिस्पर्द्धा के कारण हम आगे बढ़े। " उन्होंने बताया कि बिहार में महागठबंधन की पृष्ठभूमि भी राहुल ने तैयार की। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने नीतीश कुमार से संपर्क किया और मुलाकात की। कुमार को मुख्यमंत्री के प्रत्याशी के रूप में पेश किया गया और इसके बाद लालू यादव भी इसमें शामिल हुए।
सोनी टीवी (Sony Tv) के इंडियाज बेस्ट डांसर 2 (India's Best Dancer 2) के सेमि फिनाले राउंड में उम्मीद की जा रही थी कि दर्शकों को 8 जोड़ियों के बीच एक शानदार डांसिंग परफॉर्मेंस देखने मिलेगा. सोनी टीवी (Sony Tv) के सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 2' (India's Best Dancer 2) का 'रेस टू फिनाले' जितना सोचा था उतना रोमांचक नहीं हो पाया क्योंकि टॉप 8 में से दो कंटेस्टेंट्स ने सेमि फिनाले राउंड में परफॉर्म किए बिना शो से एग्जिट कर दिया. 4 रियलिटी शो जीतकर पहले ही अपने आप को साबित करने वाले कर्नाटक के डांसर संकेत गावकर (Sanket Gaonkar) को इस शो का विनर माना जा रहा था. अपने कैंसर से लड़ रहे पिता के इलाज के लिए लगने वाले पैसों के लिए संकेत इस शो में शामिल हुए थे. हालांकि, 10 दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया. संकेत के पिता का निधन होने की खबर शेयर करते हुए मनीष पॉल ने कहा था कि संकेत आने वाले हफ्ते में परफॉर्म करेंगे लेकिन इस हफ्ते भी संकेत गावकर इंडियाज बेस्ट डांसर के 'रेस टू फिनाले' में शामिल नहीं हो पाए और उनके जैसा टैलेंटेड डांसर बाहर होने के बाद कंटेस्टेंट्स के बीच की स्पर्धा लगभग कम हो गई. हालांकि, संकेत ने खुद अब तक अपने शो के क्विट करने का कारण स्पष्ट नहीं किया है लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि पिता के निधन की वजह से ही संकेत ने शो क्विट किया होगा. असम से मुंबई आकर फूड डिलीवरी का काम करने वाले 'फूड डिलीवरी बॉय' दिब्बय दास (Dibbay Das) ने अपने कोरियोग्राफर पंकज के साथ मिलकर इंडियाज बेस्ट डांसर में कमाल के परफॉर्मेंस दिए थे. हालांकि, उन्हें उनकी आंखों के ठीक ऊपर हुए 'फ्रैक्चर' की वजह से डॉक्टर ने डांस न करने की सलाह दी और इसलिए दिब्बय को यह शो क्विट करना पड़ा. हालांकि, उनका फैसला जजों के लिए भी काफी ज्यादा शॉकिंग था लेकिन उनके सामने और कोई भी पर्याय नहीं था. हालांकि, दिब्बय को जाते-जाते शो के जज 'टेरेंस लुईस' (Terence Lewis) ने एक शानदार गिफ्ट दिया. दरअसल, ऑडिशन राउंड में ही उन्होंने दिब्बय को अपने डांसिंग इंस्टिट्यूट में डांस ट्रेनिंग के लिए दाखिला दिया था लेकिन अब उन्होंने अपने इंस्टिट्यूट के एक प्रोफेशनल डांसिंग कोर्स की ट्रेनिंग में उन्हें शामिल किया. टेरेंस से मिला हुआ यह गिफ्ट देखकर दिब्बय काफी ज्यादा भावुक हो गए. संकेत गावकर और उनके बाहर जाने की वजह से सिर्फ 6 कंटेस्टेंट्स में सेमी फिनाले की जंग हुई, जिसमें आकाश और उनके कोरियोग्राफर तुषार शेट्टी शो से बाहर हुए. मार्वल की 'Eternals' ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए है तैयार, जानिए कब और कहां होगी स्ट्रीम?
सोनी टीवी के इंडियाज बेस्ट डांसर दो के सेमि फिनाले राउंड में उम्मीद की जा रही थी कि दर्शकों को आठ जोड़ियों के बीच एक शानदार डांसिंग परफॉर्मेंस देखने मिलेगा. सोनी टीवी के सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन दो' का 'रेस टू फिनाले' जितना सोचा था उतना रोमांचक नहीं हो पाया क्योंकि टॉप आठ में से दो कंटेस्टेंट्स ने सेमि फिनाले राउंड में परफॉर्म किए बिना शो से एग्जिट कर दिया. चार रियलिटी शो जीतकर पहले ही अपने आप को साबित करने वाले कर्नाटक के डांसर संकेत गावकर को इस शो का विनर माना जा रहा था. अपने कैंसर से लड़ रहे पिता के इलाज के लिए लगने वाले पैसों के लिए संकेत इस शो में शामिल हुए थे. हालांकि, दस दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया. संकेत के पिता का निधन होने की खबर शेयर करते हुए मनीष पॉल ने कहा था कि संकेत आने वाले हफ्ते में परफॉर्म करेंगे लेकिन इस हफ्ते भी संकेत गावकर इंडियाज बेस्ट डांसर के 'रेस टू फिनाले' में शामिल नहीं हो पाए और उनके जैसा टैलेंटेड डांसर बाहर होने के बाद कंटेस्टेंट्स के बीच की स्पर्धा लगभग कम हो गई. हालांकि, संकेत ने खुद अब तक अपने शो के क्विट करने का कारण स्पष्ट नहीं किया है लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि पिता के निधन की वजह से ही संकेत ने शो क्विट किया होगा. असम से मुंबई आकर फूड डिलीवरी का काम करने वाले 'फूड डिलीवरी बॉय' दिब्बय दास ने अपने कोरियोग्राफर पंकज के साथ मिलकर इंडियाज बेस्ट डांसर में कमाल के परफॉर्मेंस दिए थे. हालांकि, उन्हें उनकी आंखों के ठीक ऊपर हुए 'फ्रैक्चर' की वजह से डॉक्टर ने डांस न करने की सलाह दी और इसलिए दिब्बय को यह शो क्विट करना पड़ा. हालांकि, उनका फैसला जजों के लिए भी काफी ज्यादा शॉकिंग था लेकिन उनके सामने और कोई भी पर्याय नहीं था. हालांकि, दिब्बय को जाते-जाते शो के जज 'टेरेंस लुईस' ने एक शानदार गिफ्ट दिया. दरअसल, ऑडिशन राउंड में ही उन्होंने दिब्बय को अपने डांसिंग इंस्टिट्यूट में डांस ट्रेनिंग के लिए दाखिला दिया था लेकिन अब उन्होंने अपने इंस्टिट्यूट के एक प्रोफेशनल डांसिंग कोर्स की ट्रेनिंग में उन्हें शामिल किया. टेरेंस से मिला हुआ यह गिफ्ट देखकर दिब्बय काफी ज्यादा भावुक हो गए. संकेत गावकर और उनके बाहर जाने की वजह से सिर्फ छः कंटेस्टेंट्स में सेमी फिनाले की जंग हुई, जिसमें आकाश और उनके कोरियोग्राफर तुषार शेट्टी शो से बाहर हुए. मार्वल की 'Eternals' ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए है तैयार, जानिए कब और कहां होगी स्ट्रीम?
1977 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बोस को 17 नवंबर को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने गवर्नर के रूप में ला गणेशन की जगह पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। बता दें कि बोस ने 2011 में सेवानिवृत्त होने से पहले कोलकाता में राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रशासक के रूप में काम किया था। बता दें कि बोस मंगलवार सुबह कलकत्ता पहुंचे थे, जहां हवाईअड्डे पर राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम और उद्योग मंत्री शशि पांजा ने उनका स्वागत किया। सिविल सेवक के रूप में अपने करियर के दौरान बोस ने संयुक्त सचिव, परमाणु ऊर्जा, अतिरिक्त सचिव, कृषि के रूप में और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया है। वे केरल में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने पर 2011 की सर्वोच्च न्यायालय समिति के प्रमुख भी थे।
एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बोस को सत्रह नवंबर को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने गवर्नर के रूप में ला गणेशन की जगह पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। बता दें कि बोस ने दो हज़ार ग्यारह में सेवानिवृत्त होने से पहले कोलकाता में राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रशासक के रूप में काम किया था। बता दें कि बोस मंगलवार सुबह कलकत्ता पहुंचे थे, जहां हवाईअड्डे पर राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम और उद्योग मंत्री शशि पांजा ने उनका स्वागत किया। सिविल सेवक के रूप में अपने करियर के दौरान बोस ने संयुक्त सचिव, परमाणु ऊर्जा, अतिरिक्त सचिव, कृषि के रूप में और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया है। वे केरल में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने पर दो हज़ार ग्यारह की सर्वोच्च न्यायालय समिति के प्रमुख भी थे।
फर्रुखाबाद। शमसाबाद थाना क्षेत्र में गुरुवार को 45 फीट गहरे बोरबेल में ईंटे निकालने के लिए घुसे दो मजदूर कुआं धसक जाने से दब गये। उनको निकालने के लिए जिले के आलाधिकारियों के सामने ऑपरेशन चलाया गया। बड़ी संख्या में भीड़ मौके पर एकत्रित है। कई घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया। थाना क्षेत्र के ग्राम अलेपुर पीत धौलेश्वर निवासी असरफ(50) 45 फुट गहरे बोरबेल में गांव के ही 60 वर्षीय नंदन राजपूत के साथ ईंटे निकालने के लिए घुसे थे, कुल 6 लोग ऊपर थे। अचानक ईंटे निकालने के दौरान बोरवेल की मिट्टी धस गयी, जिससे दोनों असरफ और नन्दन मिट्टी में दब गये। दोनों के दबने से चीखपुकार मच गयी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ मौके पर आ गयी। सूचना पर तहसीलदार कायमगंज प्रदीप कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर आ गये। तीन जेसीबी रेस्क्यू आपरेशन में लगायीं गयी है। थानाध्यक्ष एके रावत नें बताया की कि दोनों को निकाला गया है। उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा गया है, फिलहाल दोनों की हालत गम्भीर बनी हुई है।
फर्रुखाबाद। शमसाबाद थाना क्षेत्र में गुरुवार को पैंतालीस फीट गहरे बोरबेल में ईंटे निकालने के लिए घुसे दो मजदूर कुआं धसक जाने से दब गये। उनको निकालने के लिए जिले के आलाधिकारियों के सामने ऑपरेशन चलाया गया। बड़ी संख्या में भीड़ मौके पर एकत्रित है। कई घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया। थाना क्षेत्र के ग्राम अलेपुर पीत धौलेश्वर निवासी असरफ पैंतालीस फुट गहरे बोरबेल में गांव के ही साठ वर्षीय नंदन राजपूत के साथ ईंटे निकालने के लिए घुसे थे, कुल छः लोग ऊपर थे। अचानक ईंटे निकालने के दौरान बोरवेल की मिट्टी धस गयी, जिससे दोनों असरफ और नन्दन मिट्टी में दब गये। दोनों के दबने से चीखपुकार मच गयी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ मौके पर आ गयी। सूचना पर तहसीलदार कायमगंज प्रदीप कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर आ गये। तीन जेसीबी रेस्क्यू आपरेशन में लगायीं गयी है। थानाध्यक्ष एके रावत नें बताया की कि दोनों को निकाला गया है। उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा गया है, फिलहाल दोनों की हालत गम्भीर बनी हुई है।
२. जैसे परमेश्वर में और पदार्थ प्रारोपित हैं उसी प्रकार बन्धन भी, वास्तविक नहीं, आरोपित है । तन्निवृत्तिरूप मोक्ष एवं मोक्षमार्ग का उपदेश भी वास्तविक नहीं । परन्तु उपदेश का विषय वास्तविक है । भतः विषय दृष्टि से मोक्षशास्त्र में पारमार्थिकता भी स्वीकृत है। जैसे वर्णों में दीघंता, प्लुततां, उदात्तता मादि कल्पित हैं पर वर वास्तविक हैं, ठीक उसी प्रकार यहाँ भी स्वीकृत है । भगवान् गौडपादाचार्य 'न निरोधो न चोत्पत्तिनं बद्धो न च साधकः । न मुमुक्षुर्न वै मुक्त इत्येषा परमार्थता ।। ' (माण्डूक्यकारिका २.३२) के द्वारा इसी रहस्य का प्रतिपादन करते हैं । यही भाषं सिद्धान्त है । सभी दर्शन अपने वाद की सत्यता सिद्ध करने में शक्ति खर्च करते हैं । वेदान्त ब्रह्म को सत्ता सिद्ध करने में स्वयं अपने वाद को हो समाप्त करने में गौरव अनुभव करता है। इसीलिये इसको प्रविवाद सिद्धान्त माना गया है । प्रर्वाचीन काल में वेदान्तियों में जो प्रक्रियाओं का भाग्रह देख पड़ता है और जो इनको रटने में ही ज्ञान साधना की इतिश्री मान ली जाती है, वह अनुभव प्रधान प्राचीन झाचार्यों के सिद्धान्त के अनुरूप नहीं है। इस बात को दशमोल्लास में भी वार्तिककार बताएंगे । इतिश्रीदक्षिरणामूत्तिस्तोत्रार्थप्रतिपादके । प्रबन्धे मानसोल्लासे द्वितीयील्लाससंग्रहः ॥ ५७॥ इस प्रकार श्रीदक्षिणामूर्तिस्तोत्र के प्रथं का निरूपण करने वाले मानसोल्लास नामक प्रवन्ध का द्वितोयोल्लास संक्षेप से समाप्त हुआ ।
दो. जैसे परमेश्वर में और पदार्थ प्रारोपित हैं उसी प्रकार बन्धन भी, वास्तविक नहीं, आरोपित है । तन्निवृत्तिरूप मोक्ष एवं मोक्षमार्ग का उपदेश भी वास्तविक नहीं । परन्तु उपदेश का विषय वास्तविक है । भतः विषय दृष्टि से मोक्षशास्त्र में पारमार्थिकता भी स्वीकृत है। जैसे वर्णों में दीघंता, प्लुततां, उदात्तता मादि कल्पित हैं पर वर वास्तविक हैं, ठीक उसी प्रकार यहाँ भी स्वीकृत है । भगवान् गौडपादाचार्य 'न निरोधो न चोत्पत्तिनं बद्धो न च साधकः । न मुमुक्षुर्न वै मुक्त इत्येषा परमार्थता ।। ' के द्वारा इसी रहस्य का प्रतिपादन करते हैं । यही भाषं सिद्धान्त है । सभी दर्शन अपने वाद की सत्यता सिद्ध करने में शक्ति खर्च करते हैं । वेदान्त ब्रह्म को सत्ता सिद्ध करने में स्वयं अपने वाद को हो समाप्त करने में गौरव अनुभव करता है। इसीलिये इसको प्रविवाद सिद्धान्त माना गया है । प्रर्वाचीन काल में वेदान्तियों में जो प्रक्रियाओं का भाग्रह देख पड़ता है और जो इनको रटने में ही ज्ञान साधना की इतिश्री मान ली जाती है, वह अनुभव प्रधान प्राचीन झाचार्यों के सिद्धान्त के अनुरूप नहीं है। इस बात को दशमोल्लास में भी वार्तिककार बताएंगे । इतिश्रीदक्षिरणामूत्तिस्तोत्रार्थप्रतिपादके । प्रबन्धे मानसोल्लासे द्वितीयील्लाससंग्रहः ॥ सत्तावन॥ इस प्रकार श्रीदक्षिणामूर्तिस्तोत्र के प्रथं का निरूपण करने वाले मानसोल्लास नामक प्रवन्ध का द्वितोयोल्लास संक्षेप से समाप्त हुआ ।
"दिल की श्रावाज" - इन दोनों के लेखक निर्देशक थौर निर्माता धार स्वयं ही है। इनके अतिरिक और बहुत सी फिल्मों की कहानियाँ और संवाद प्रापने लिखे हैं और प्राजकन भी आपका लेखन के अतिरिक्त बाको समय फ़िल्म जगत् के काम ही आता है। परन्तु दोनों में से पहला स्थान लेखन कला को ही प्राप्त है। बंगाल के दुभिध ने आपके विचारों में एक नई क्रान्ति पैदा कर दी। लाखों पीड़ितों के भयकर चीत्कार ने श्रापके रोमान्टिक दृष्टिकोण को बुरी तरह मडकीर दिया । परिणामतः कृतियों में इस मानव निर्मित थकाल के प्रति विरोध की एक गहरी छाप अंकित होने लगी। यह नया पहलू सर्वप्रथम "श्रमदाता" में प्रकट हुआ। उसके बाद घापने "बालकोनी" नाम से एक कहानी लिखी जो श्रापके मतानुसार आपकी सबसे अच्छी कहानी है। इनके याद दो और कृतियों प्रकट हुईं- "मोबी" और "एक सुरीली तस्वीर" । "अन्नदाता" को बहुत प्रसिद्धि मिली और भारत-भर की लगभग सभी मुख्य भाषायों में इसका अनुवाद किया गया। इसके इलावा अंग्रेजी, फ्रेंच, चीनी और लंका की भाषा सिंहाली में भी इसका रूपान्तर हुआ। "अन्नदाता" के बाद की सभी कहानियों में राष्ट्रीयता और प्रजातन्त्रवाद की फलक है और ब्रिटिश साम्राज्यवादियों और उनके पिट्टू भारतीय पूँजीवादियों को बुरी तरह लताड़ा है। जगह-जगह पर फ़ासिम और युद्ध के प्रति भी विरोध का प्रदर्शन है। इसके याद श्रापके दृष्टिकोण में एक और परिवर्तन ग्राया जय बम्बई में समुद्री येड़े के सिपाहियों ने हड़ताल कर दी। यम्बई की जनता ने उनको सहयोग दिया और देश भर में क्रान्ति की एक नई लहर दौड़ गई। ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने स्थानीय पूँजीपतियों का सहयोग प्राप्त किया और इस विद्रोह को कुचल दिया। इस समय कृष्णचन्द्रजी ने लिखा- "तीन गुण्ढे" । भारत के विभाजन पर चार पहले लेखक थे जिन्होंने लोगों के खाकानियों द्वारा किया। आपने राष्ट्रीय की नीति का विरोध किया। विय मातृभूमि के होने पर गहरी टेल लगी। इस अवसर पर भारत व्यावीसंमद "हम बहश हूँ" के नाम से प्रकट हुआ जिसे बहुत मराठा । विचारमा और आपका पूरा में शासन द्वारा ही जनसाधारण को चादरयुक्त स्थान मममसंगठन में ही समस्याओं का न्यायपूर्ण हाही मरता है। यामधीवियों को सपने विप कार प्रान हो । अपनी राष्ट्रीय और साम्रा-विरोधी कहानियों के कारण हो शेषन गए। भूतपूर्वमय दिन पारिता समिति और श्रीमती सरोजनी गीत प्यार करती थी । की मेिं आपकप्रकाशिन दी है। डीएम नुसार ६-१. "दम अंग्रेजी साहित्य में जैसे मोन्टे परिवार के तीन सदस्य मशहूर है, वैसे ही कृष्णचन्द्रजी और उनके भाई और बहिन ने स्थान बना लिया है । प्रगतिशील लेखक संघ के साप प्रधान रह चुके हैं और उसके काम में विशेष उत्साह ले रहे हैं। बापका उत्तरोत्तर हिन्दी की ओर झुकाव हो रहा है और शाशा की जाती है कि स्वर्गीय मुन्शी प्रेमचन्द जी की तरह थाप भी उर्दू से निकल कर हिन्दी के क्षेत्र में प्रकाशमान होंगे ।
"दिल की श्रावाज" - इन दोनों के लेखक निर्देशक थौर निर्माता धार स्वयं ही है। इनके अतिरिक और बहुत सी फिल्मों की कहानियाँ और संवाद प्रापने लिखे हैं और प्राजकन भी आपका लेखन के अतिरिक्त बाको समय फ़िल्म जगत् के काम ही आता है। परन्तु दोनों में से पहला स्थान लेखन कला को ही प्राप्त है। बंगाल के दुभिध ने आपके विचारों में एक नई क्रान्ति पैदा कर दी। लाखों पीड़ितों के भयकर चीत्कार ने श्रापके रोमान्टिक दृष्टिकोण को बुरी तरह मडकीर दिया । परिणामतः कृतियों में इस मानव निर्मित थकाल के प्रति विरोध की एक गहरी छाप अंकित होने लगी। यह नया पहलू सर्वप्रथम "श्रमदाता" में प्रकट हुआ। उसके बाद घापने "बालकोनी" नाम से एक कहानी लिखी जो श्रापके मतानुसार आपकी सबसे अच्छी कहानी है। इनके याद दो और कृतियों प्रकट हुईं- "मोबी" और "एक सुरीली तस्वीर" । "अन्नदाता" को बहुत प्रसिद्धि मिली और भारत-भर की लगभग सभी मुख्य भाषायों में इसका अनुवाद किया गया। इसके इलावा अंग्रेजी, फ्रेंच, चीनी और लंका की भाषा सिंहाली में भी इसका रूपान्तर हुआ। "अन्नदाता" के बाद की सभी कहानियों में राष्ट्रीयता और प्रजातन्त्रवाद की फलक है और ब्रिटिश साम्राज्यवादियों और उनके पिट्टू भारतीय पूँजीवादियों को बुरी तरह लताड़ा है। जगह-जगह पर फ़ासिम और युद्ध के प्रति भी विरोध का प्रदर्शन है। इसके याद श्रापके दृष्टिकोण में एक और परिवर्तन ग्राया जय बम्बई में समुद्री येड़े के सिपाहियों ने हड़ताल कर दी। यम्बई की जनता ने उनको सहयोग दिया और देश भर में क्रान्ति की एक नई लहर दौड़ गई। ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने स्थानीय पूँजीपतियों का सहयोग प्राप्त किया और इस विद्रोह को कुचल दिया। इस समय कृष्णचन्द्रजी ने लिखा- "तीन गुण्ढे" । भारत के विभाजन पर चार पहले लेखक थे जिन्होंने लोगों के खाकानियों द्वारा किया। आपने राष्ट्रीय की नीति का विरोध किया। विय मातृभूमि के होने पर गहरी टेल लगी। इस अवसर पर भारत व्यावीसंमद "हम बहश हूँ" के नाम से प्रकट हुआ जिसे बहुत मराठा । विचारमा और आपका पूरा में शासन द्वारा ही जनसाधारण को चादरयुक्त स्थान मममसंगठन में ही समस्याओं का न्यायपूर्ण हाही मरता है। यामधीवियों को सपने विप कार प्रान हो । अपनी राष्ट्रीय और साम्रा-विरोधी कहानियों के कारण हो शेषन गए। भूतपूर्वमय दिन पारिता समिति और श्रीमती सरोजनी गीत प्यार करती थी । की मेिं आपकप्रकाशिन दी है। डीएम नुसार छः-एक. "दम अंग्रेजी साहित्य में जैसे मोन्टे परिवार के तीन सदस्य मशहूर है, वैसे ही कृष्णचन्द्रजी और उनके भाई और बहिन ने स्थान बना लिया है । प्रगतिशील लेखक संघ के साप प्रधान रह चुके हैं और उसके काम में विशेष उत्साह ले रहे हैं। बापका उत्तरोत्तर हिन्दी की ओर झुकाव हो रहा है और शाशा की जाती है कि स्वर्गीय मुन्शी प्रेमचन्द जी की तरह थाप भी उर्दू से निकल कर हिन्दी के क्षेत्र में प्रकाशमान होंगे ।
जौनपुर। थाना बक्शा पुलिस ने 2 वाहन चोर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की एक मोटर साइकिल व एक देशी रिवाल्वर 32 बोर मय दो कारतूस 32 बोर बरामद किया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल शर्मा के कुशल निर्देशन मे चलाई जा रहे वाँछित अभियुक्तो की गिरफ्तारी व संदिग्ध व्यक्ति/वाहन की चेकिंग अभियान के क्रम में थाना बक्शा पुलिस ने मई मोड़ नौपेड़वा बाजार के पास से वाहन व संदिग्ध व्यक्तियो की चेकिंग के दौरान दो मोटर साइकिल सवार वाहन चोर जिनमें राजेश चौहान उर्फ छोटू पुत्र स्व. शंकर चौहान निवासी चुरावनपुर थाना बक्शा तथा सूरज चौहान पुत्र राय साहब चौहान निवासी चुरावनपुर थाना बक्शा को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से चोरी की एक मोटर साइकिल सुपर आई स्मार्ट जिस पर धोखा देने कि नियत से फर्जी नम्बर प्लेट लगा हुआ व एक देशी रिवाल्वर 32 बोर मय दो कारतूस 32 बोर बरामद किया गया।
जौनपुर। थाना बक्शा पुलिस ने दो वाहन चोर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की एक मोटर साइकिल व एक देशी रिवाल्वर बत्तीस बोर मय दो कारतूस बत्तीस बोर बरामद किया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल शर्मा के कुशल निर्देशन मे चलाई जा रहे वाँछित अभियुक्तो की गिरफ्तारी व संदिग्ध व्यक्ति/वाहन की चेकिंग अभियान के क्रम में थाना बक्शा पुलिस ने मई मोड़ नौपेड़वा बाजार के पास से वाहन व संदिग्ध व्यक्तियो की चेकिंग के दौरान दो मोटर साइकिल सवार वाहन चोर जिनमें राजेश चौहान उर्फ छोटू पुत्र स्व. शंकर चौहान निवासी चुरावनपुर थाना बक्शा तथा सूरज चौहान पुत्र राय साहब चौहान निवासी चुरावनपुर थाना बक्शा को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से चोरी की एक मोटर साइकिल सुपर आई स्मार्ट जिस पर धोखा देने कि नियत से फर्जी नम्बर प्लेट लगा हुआ व एक देशी रिवाल्वर बत्तीस बोर मय दो कारतूस बत्तीस बोर बरामद किया गया।
नई दिल्ली। भीषण सर्दी से ठिठुर रही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश व पंजाब समेत उत्तर और पश्चिमोत्तर भारत के लोगों को 19 जनवरी के बाद से कुछ राहत मिलने की संभावना है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं से इन इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। आईएमडी ने बताया कि आज सुबह 8. 30 बजे सफदरजंग का तापमान 2. 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और पालम का 4. 8 डिग्री दर्ज किया गया। मंगलवार धूप निकलने के साथ ही एक बार फिर मौसम बेहद सुहाना हो गया है। हालांकि कोहरे के कारण उत्तर भारत में कई ट्रेनें लेट हुईं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोग ट्रेनों का इंतजार करते देखे गए। बता दें कि सोमवार को दिल्ली के मुख्य मौसम विज्ञान केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 1. 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इससे 16 जनवरी राजधानी में इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, दिल्ली में मंगलवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है। विभाग के मुताबिक, 18 और 20 जनवरी की रात पश्चिमी विक्षोभ के चलते गुरुवार से सर्दी कुछ कम होनी शुरू होगी। हालांकि, घने कोहरे से लगभग मुक्ति मिल जाने की उम्मीद है। जन्मदर घटने से चिंता में चीन! बीजिंग। चीन की जनसंख्या में साल 1961 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चीन में अब नकारात्मक जनसंख्या ग्रोथ शुरू हो गई है। बता दें कि चीन में मरने वालों का आंकड़ा, पैदा होने वाले बच्चों से अधिक है। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिक्स के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 के अंत में देश की जनसंख्या 1. 41175 अरब थी जो कि साल 2021 के 1. 41260 अरब के मुकाबले कम है। चीन में कई दशकों तक जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू रही और माना जा रहा है कि उन जनसंख्या नियंत्रण के उपायों के चलते ही देश की जनसंख्या में गिरावट आ रही है। हालांकि गिरती जनसंख्या से चीन की सरकार चिंतित है और वह देश की आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए कई उपाय कर रही है लेकिन किसी का भी सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आ रहा है। आबादी में गिरावट, बुजुर्ग होती आबादी और जनसांख्यिकी में आ रहे बदलावों को रोकने के लिए चीन की सरकार कई नीतियां लेकर आई है, जिससे लोग एक से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित हो जिनमें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा शामिल है, लेकिन इसके बावजूद चीन की आबादी नहीं बढ़ पा रही है। साल 2021 में चीन में जन्मदर 7. 52 बच्चे प्रति एक हजार लोग थी लेकिन बीते साल यह घटकर 6. 77 बच्चे प्रति एक हजार हो गई। इससे चीन की जनसंख्या में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कम पैदा हुए। इतना ही नहीं चीन में मृत्युदर भी साल 1976 के बाद सबसे ज्यादा है। चीन में 2022 में मृत्युदर 7. 37 मौते प्रति एक हजार लोग रही। बुजुर्ग होती जनसंख्या के चलते चीन के सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ रहा है और चीन की सरकार को बुजुर्गों की देखभाल और पेंशन आदि पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह खर्च और बढ़ेगा। नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के दूसरे दिन की शुरुआत भी काफी हंगामेदार रही। आज भी दिल्ली विधानसभा में शिक्षकों को फिनलैंड जाने से रोकने के मामले में जोरदार हंगामा देखने को मिला। सीएम अरविंद केजरीवाल ने सदन में एलजी को टीचर्स ट्रेनिंग की फाइल रोकने पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि एलजी साहब संविधान व सुप्रीमकोर्ट की भी नही सुन रहे। वह आम आदमी की सरकार को काम नही करने दे रहे। केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यापल के ंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर दिल्ली की चुनी सरकार को परेशान कर रहे है। उन्होंने कहा ऐसा लगता जैसे वह दिल्ली से चुनाव लडऩे की योजना बना रहे हैं। इससे पहले सदन में बीजेपी विधायकों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया, वहीं मार्शल के जरिए बीजेपी विधायक ओपी शर्मा , जितेंद्र महाजन ,अजय महावर को सदन से बाहर किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने आज पूरे दिन के लिए बीजेपी के 6 सदस्यों को सदन से बाहर निकाला। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन टैक्स नहीं चुकाने के मामले मेेंं सुर्खियों आ गई है। ऐसी जानकारी मिली है कि ऐश्वर्या राय बच्चन को उनकी जमीन पर बाकी टैक्स जमा नहीं करने की वजह से नासिक के तहसीलदार ने नोटिस भेजा है। ऐश्वर्या राय को नोटिस सिन्नर (नासिक) तहसीलदार की तरफ से भेजा गया है। नासिक के सिन्नर के अदवाड़ी शिवरात में एक्ट्रेस की जमीन है। इस जमीन का एक साल का टैक्स बाकी है, जो 21,960 रुपये है, इसे एक्ट्रेस ने जमा नहीं किया है, इसी बकाया टैक्स के चलते तहसीलदार ने ऐश्वर्या राय के खिलाफ नोटिस जारी किया है। नोटिस 9 जनवरी को जारी किया गया था और ऐश्वर्या राय बच्चन को मिला या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या के पास सिन्नर के थानगांव के पास अदवाड़ी के पहाड़ी इलाके में करीब 1 हेक्टेयर जमीन है। जानकारी सामने आ रही है कि ऐश्वर्या पर इस जमीन का एक साल का टैक्स बकाया है, ऐश्वर्या के साथ ही 1200 अन्य संपत्ति मालिकों को भी टैक्स बकाया के लिए नोटिस जारी किया गया है। राजस्व विभाग द्वारा यह कार्रवाई मार्च के अंत तक, वसूली के लक्ष्य को पूरा करने के लिए की गई है, क्योंकि मार्च का महीना राजस्व विभाग के लिए क्लोजिंग का महीना होता है। हालांकि, ऐश्वर्या राय ने अभी इस मामले पर रिएक्ट नहीं किया है। ये भी बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या ने पवन ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनी सुजलॉन में निवेश किया है, ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ-साथ कई मशहूर हस्तियों ने भी पवन ऊर्जा कंपनी सुजलॉन में निवेश किया है। नई दिल्ली। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी इस बार गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि होंगे। भारत और मिस्र के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जश्न मनाने के लिए मिस्र के राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने पर विदेश मंत्रालय के सचिव औसाफ सईद ने कहा कि इस दौरान दोनों देशों के बीच आपसी गर्मजोशी और दोस्ती मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिलने के सिर्फ तीन दिन के बाद ही दोनों देशों ने औपचारिक संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिस्र के राष्टï्रपति अब्देल फतह को गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था, जिसका उन्होंने गर्मजोशी से स्वीकार किया।
नई दिल्ली। भीषण सर्दी से ठिठुर रही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश व पंजाब समेत उत्तर और पश्चिमोत्तर भारत के लोगों को उन्नीस जनवरी के बाद से कुछ राहत मिलने की संभावना है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं से इन इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। आईएमडी ने बताया कि आज सुबह आठ. तीस बजे सफदरजंग का तापमान दो. चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और पालम का चार. आठ डिग्री दर्ज किया गया। मंगलवार धूप निकलने के साथ ही एक बार फिर मौसम बेहद सुहाना हो गया है। हालांकि कोहरे के कारण उत्तर भारत में कई ट्रेनें लेट हुईं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोग ट्रेनों का इंतजार करते देखे गए। बता दें कि सोमवार को दिल्ली के मुख्य मौसम विज्ञान केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान एक. चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इससे सोलह जनवरी राजधानी में इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, दिल्ली में मंगलवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है। विभाग के मुताबिक, अट्ठारह और बीस जनवरी की रात पश्चिमी विक्षोभ के चलते गुरुवार से सर्दी कुछ कम होनी शुरू होगी। हालांकि, घने कोहरे से लगभग मुक्ति मिल जाने की उम्मीद है। जन्मदर घटने से चिंता में चीन! बीजिंग। चीन की जनसंख्या में साल एक हज़ार नौ सौ इकसठ के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चीन में अब नकारात्मक जनसंख्या ग्रोथ शुरू हो गई है। बता दें कि चीन में मरने वालों का आंकड़ा, पैदा होने वाले बच्चों से अधिक है। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिक्स के आंकड़ों के अनुसार, साल दो हज़ार बाईस के अंत में देश की जनसंख्या एक. इकतालीस हज़ार एक सौ पचहत्तर अरब थी जो कि साल दो हज़ार इक्कीस के एक. इकतालीस हज़ार दो सौ साठ अरब के मुकाबले कम है। चीन में कई दशकों तक जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू रही और माना जा रहा है कि उन जनसंख्या नियंत्रण के उपायों के चलते ही देश की जनसंख्या में गिरावट आ रही है। हालांकि गिरती जनसंख्या से चीन की सरकार चिंतित है और वह देश की आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए कई उपाय कर रही है लेकिन किसी का भी सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आ रहा है। आबादी में गिरावट, बुजुर्ग होती आबादी और जनसांख्यिकी में आ रहे बदलावों को रोकने के लिए चीन की सरकार कई नीतियां लेकर आई है, जिससे लोग एक से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित हो जिनमें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा शामिल है, लेकिन इसके बावजूद चीन की आबादी नहीं बढ़ पा रही है। साल दो हज़ार इक्कीस में चीन में जन्मदर सात. बावन बच्चे प्रति एक हजार लोग थी लेकिन बीते साल यह घटकर छः. सतहत्तर बच्चे प्रति एक हजार हो गई। इससे चीन की जनसंख्या में दस लाख से ज्यादा बच्चे कम पैदा हुए। इतना ही नहीं चीन में मृत्युदर भी साल एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर के बाद सबसे ज्यादा है। चीन में दो हज़ार बाईस में मृत्युदर सात. सैंतीस मौते प्रति एक हजार लोग रही। बुजुर्ग होती जनसंख्या के चलते चीन के सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ रहा है और चीन की सरकार को बुजुर्गों की देखभाल और पेंशन आदि पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह खर्च और बढ़ेगा। नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के दूसरे दिन की शुरुआत भी काफी हंगामेदार रही। आज भी दिल्ली विधानसभा में शिक्षकों को फिनलैंड जाने से रोकने के मामले में जोरदार हंगामा देखने को मिला। सीएम अरविंद केजरीवाल ने सदन में एलजी को टीचर्स ट्रेनिंग की फाइल रोकने पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि एलजी साहब संविधान व सुप्रीमकोर्ट की भी नही सुन रहे। वह आम आदमी की सरकार को काम नही करने दे रहे। केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यापल के ंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर दिल्ली की चुनी सरकार को परेशान कर रहे है। उन्होंने कहा ऐसा लगता जैसे वह दिल्ली से चुनाव लडऩे की योजना बना रहे हैं। इससे पहले सदन में बीजेपी विधायकों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया, वहीं मार्शल के जरिए बीजेपी विधायक ओपी शर्मा , जितेंद्र महाजन ,अजय महावर को सदन से बाहर किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने आज पूरे दिन के लिए बीजेपी के छः सदस्यों को सदन से बाहर निकाला। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन टैक्स नहीं चुकाने के मामले मेेंं सुर्खियों आ गई है। ऐसी जानकारी मिली है कि ऐश्वर्या राय बच्चन को उनकी जमीन पर बाकी टैक्स जमा नहीं करने की वजह से नासिक के तहसीलदार ने नोटिस भेजा है। ऐश्वर्या राय को नोटिस सिन्नर तहसीलदार की तरफ से भेजा गया है। नासिक के सिन्नर के अदवाड़ी शिवरात में एक्ट्रेस की जमीन है। इस जमीन का एक साल का टैक्स बाकी है, जो इक्कीस,नौ सौ साठ रुपयापये है, इसे एक्ट्रेस ने जमा नहीं किया है, इसी बकाया टैक्स के चलते तहसीलदार ने ऐश्वर्या राय के खिलाफ नोटिस जारी किया है। नोटिस नौ जनवरी को जारी किया गया था और ऐश्वर्या राय बच्चन को मिला या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या के पास सिन्नर के थानगांव के पास अदवाड़ी के पहाड़ी इलाके में करीब एक हेक्टेयर जमीन है। जानकारी सामने आ रही है कि ऐश्वर्या पर इस जमीन का एक साल का टैक्स बकाया है, ऐश्वर्या के साथ ही एक हज़ार दो सौ अन्य संपत्ति मालिकों को भी टैक्स बकाया के लिए नोटिस जारी किया गया है। राजस्व विभाग द्वारा यह कार्रवाई मार्च के अंत तक, वसूली के लक्ष्य को पूरा करने के लिए की गई है, क्योंकि मार्च का महीना राजस्व विभाग के लिए क्लोजिंग का महीना होता है। हालांकि, ऐश्वर्या राय ने अभी इस मामले पर रिएक्ट नहीं किया है। ये भी बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या ने पवन ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनी सुजलॉन में निवेश किया है, ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ-साथ कई मशहूर हस्तियों ने भी पवन ऊर्जा कंपनी सुजलॉन में निवेश किया है। नई दिल्ली। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी इस बार गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि होंगे। भारत और मिस्र के बीच राजनयिक संबंधों के पचहत्तर साल पूरे होने के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जश्न मनाने के लिए मिस्र के राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के पचहत्तर साल पूरे होने पर विदेश मंत्रालय के सचिव औसाफ सईद ने कहा कि इस दौरान दोनों देशों के बीच आपसी गर्मजोशी और दोस्ती मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को भारत को स्वतंत्रता मिलने के सिर्फ तीन दिन के बाद ही दोनों देशों ने औपचारिक संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिस्र के राष्टï्रपति अब्देल फतह को गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था, जिसका उन्होंने गर्मजोशी से स्वीकार किया।
तृतीय स्थान- तृतीय उद्देश] तीन स्थान निर्ग्रन्थ और निर्ग्रन्थियों के लिए अहितकर, प्रशुभ, अक्षम ( प्रयुक्त ) मनिःश्रेयस ( प्रकल्याणकर) मनानुगामिक, प्रमुक्तिकारी और प्रशुभानुबन्धी होते हैं१. कूजनता-आतंस्वर मे करुण क्रन्दन करना। २. कर्करणता- शय्या, उपधि आदि के दोष प्रकट करने के लिए प्रलाप करना । ३ अपध्यानता - प्रातं और रौद्रध्यान करना ( ३८३ ) । ३८४-सम्रो ठाणा णिग्गंथाण वा निग्गंथीण वा हिताए सुहाए खमाए जिस्सेसाए प्राणुगामिप्रसाए भवंति, तं जहा प्रकूग्रणता, अकक्करणता, प्रणवज्झाणता । तीन स्थान निर्ग्रन्थ और निर्ग्रन्थियो के लिए हितकर, शुभ, क्षम, नि. श्रेयस एव प्रानुगामिता (मुक्ति प्राप्ति) के लिए होते हैं१. अकूजनता-प्रार्तस्वर से करुण ऋन्दन नही करना । २. अकर्करणता - शय्या आदि के दोषो को प्रकट करने के लिए प्रलाप नही करना । ३ अनपध्यानता - प्रातं- रौद्ररूप दुर्ध्यान नही करना ( ३८४ ) । ३८५ -तम्रो सल्ला पण्णत्ता, तं जहा-मायासल्ले, णियाणसल्ले, मिच्छादसणसल्ले । शल्य तीन है - मायागल्य, निदान शल्य और मिथ्यादर्शन शल्य (३८५) । पाने से । ३८६ - तिहि ठाणेह समणे जिग्गथे सखित्त विउल ते उलेस्से भवति, तं जहा- मायावणयाए, खतिखमाए, प्रपाणगेण तवोकम्मेण । तोन स्थानों से श्रमण निर्ग्रन्थ सक्षिप्त की हुई विपुल तेजोलेश्यावाले होते है. १ लेने से सूर्य की प्रचण्ड किरणो द्वारा उष्णता सहन करने से । २ क्षान्ति क्षमा धारण करने से बदला लेने के लिए समर्थ होते हुए भी क्रोध पर विजय ३. श्रपानक तप कर्म से---निर्जल - जल विना पीये तपश्चरण करने से ( ३८६ ) । मिक्षु- प्रतिमा-सूत्र ३८७ - तिमासियं णं भिक्खुपडिमं पडिवण्णस्स अणगारस्स कप्पंसि तम्रो दत्तीश्रो भोघणस्स पडिगाहेत्तए, तम्रो पाणगस्स । त्रैमासिक भिक्षु प्रतिमा को स्वीकार करने वाले अनगार के लिए तीन दत्तिया भोजन की और तीन दत्तिया पानक को ग्रहण करना कल्पता है (३८७) । ३८८- एगरातियं भिक्खुपडिमं सम्मं प्रणणुपालेमाणस्स अणगारस्स इमे तभो ठाणा महिताए
तृतीय स्थान- तृतीय उद्देश] तीन स्थान निर्ग्रन्थ और निर्ग्रन्थियों के लिए अहितकर, प्रशुभ, अक्षम मनिःश्रेयस मनानुगामिक, प्रमुक्तिकारी और प्रशुभानुबन्धी होते हैंएक. कूजनता-आतंस्वर मे करुण क्रन्दन करना। दो. कर्करणता- शय्या, उपधि आदि के दोष प्रकट करने के लिए प्रलाप करना । तीन अपध्यानता - प्रातं और रौद्रध्यान करना । तीन सौ चौरासी-सम्रो ठाणा णिग्गंथाण वा निग्गंथीण वा हिताए सुहाए खमाए जिस्सेसाए प्राणुगामिप्रसाए भवंति, तं जहा प्रकूग्रणता, अकक्करणता, प्रणवज्झाणता । तीन स्थान निर्ग्रन्थ और निर्ग्रन्थियो के लिए हितकर, शुभ, क्षम, नि. श्रेयस एव प्रानुगामिता के लिए होते हैंएक. अकूजनता-प्रार्तस्वर से करुण ऋन्दन नही करना । दो. अकर्करणता - शय्या आदि के दोषो को प्रकट करने के लिए प्रलाप नही करना । तीन अनपध्यानता - प्रातं- रौद्ररूप दुर्ध्यान नही करना । तीन सौ पचासी -तम्रो सल्ला पण्णत्ता, तं जहा-मायासल्ले, णियाणसल्ले, मिच्छादसणसल्ले । शल्य तीन है - मायागल्य, निदान शल्य और मिथ्यादर्शन शल्य । पाने से । तीन सौ छियासी - तिहि ठाणेह समणे जिग्गथे सखित्त विउल ते उलेस्से भवति, तं जहा- मायावणयाए, खतिखमाए, प्रपाणगेण तवोकम्मेण । तोन स्थानों से श्रमण निर्ग्रन्थ सक्षिप्त की हुई विपुल तेजोलेश्यावाले होते है. एक लेने से सूर्य की प्रचण्ड किरणो द्वारा उष्णता सहन करने से । दो क्षान्ति क्षमा धारण करने से बदला लेने के लिए समर्थ होते हुए भी क्रोध पर विजय तीन. श्रपानक तप कर्म से---निर्जल - जल विना पीये तपश्चरण करने से । मिक्षु- प्रतिमा-सूत्र तीन सौ सत्तासी - तिमासियं णं भिक्खुपडिमं पडिवण्णस्स अणगारस्स कप्पंसि तम्रो दत्तीश्रो भोघणस्स पडिगाहेत्तए, तम्रो पाणगस्स । त्रैमासिक भिक्षु प्रतिमा को स्वीकार करने वाले अनगार के लिए तीन दत्तिया भोजन की और तीन दत्तिया पानक को ग्रहण करना कल्पता है । तीन सौ अठासी- एगरातियं भिक्खुपडिमं सम्मं प्रणणुपालेमाणस्स अणगारस्स इमे तभो ठाणा महिताए
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। भारतीय वैज्ञानिकों ने मूंगफली के छिलकों से पर्यावरण के अनुकूल एक स्मार्ट स्क्रीन विकसित की है, जो न केवल गोपनीयता को बनाए रखने में मदद कर सकती है बल्कि इससे गुजरने वाले प्रकाश एवं गर्मी को नियंत्रित करके ऊर्जा संरक्षण और एयर कंडीशनिंग लोड को कम करने में भी मदद कर सकती है। प्रोफेसर एस. कृष्णा प्रसाद के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक समूह ने सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बैंगलोर, जोकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है, के डॉ. शंकर राव के साथ मिलकर मूंगफली के फेंके हुए छिलकों से इस तरह के एक सेलूलोज़-आधारित स्मार्ट स्क्रीन को विकसित करने में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। इस स्मार्ट स्क्रीन के अनुप्रयोग में, तरल क्रिस्टल अणुओं को एक बहुलक सांचे में ढाला गया। इस सांचे का निर्माण सेलुलोज नैनोक्रिस्टल (सीएनसी) का उपयोग करके किया गया। ये सेलुलोज नैनोक्रिस्टल आईआईटी रुड़की में प्रोफेसर युवराज सिंह नेगी की टीम द्वारा मूंगफली के छोड़े हुए छिलकों से तैयार किए गए थे। तरल क्रिस्टल अणुओं के अपवर्तनांक को एक विद्युतीय क्षेत्र के अनुप्रयोग के जरिए एक खास दिशा की ओर मोड़ दिया गया। विद्युतीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में, बहुलक और तरल क्रिस्टल के अपवर्तनांकों के बेमेल होने की वजह से प्रकाश का प्रकीर्णन हुआ। कुछ वोल्ट के एक विद्युतीय क्षेत्र के अनुप्रयोग से, तरल क्रिस्टल अणु दिशा परिवर्तन की एक प्रक्रिया से गुजरे, जिसके परिणामस्वरूप अपवर्तनांकों में मेल हुआ और उपकरण लगभग तुरंत ही पारदर्शी हो उठा। जैसे ही विद्युतीय क्षेत्र का प्रयोग बंद किया गया, यह प्रणाली प्रकीर्णन वाली अवस्था में वापस लौट आई। बटन दबाने पर उपलब्ध दो अवस्थाओं के बीच यह उत्क्रमणीय बदलाव हजारों चक्रों में हुआ। इस उत्क्रमणीय बदलाव के दौरान अनिवार्य रूप से व्यतिरेक या बटन दबाने की गति में कोई परिवर्तन नहीं होने दिया गया। इन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस उपकरण ने, जिसका जिक्र एप्लाइड फिजिक्स लेटर्स के हाल के अंक में किया गया है, उसी सिद्धांत का अनुसरण किया जिसकी वजह से सर्दियों में सुबह के समय कोहरा पैदा होता है। ऐसा केवल तभी होता है जब पानी की बूंदें सही आकार की होती हैं, और वह हवा के साथ मौजूद रहती हैं। प्रकाश की आने वाली किरणें इन दोनों को अलग-अलग अपवर्तनांकों वाली वस्तुओं के रूप में देखती हैं और इस तरह से उनका प्रकीर्णन हो जाता है जिसके परिणामस्वरुप कोहरे का नजारा उपस्थित होताहै। इसी तरह, बहुलक और तरल क्रिस्टल को सही आकार में सह-अस्तित्व में होना चाहिए ताकि स्मार्ट स्क्रीन के लिए आवश्यक प्रकाशीय गुण निर्मित हो सकें। इस उपकरण पर काम करने वाले छात्र, सुश्री प्रज्ञा और डॉ. श्रीविद्या, इस बात पर जोर देते हैं किवाणिज्यिक स्रोतों से उपलब्ध सीएनसी के मुकाबले आईआईटी रूड़कीकी सामग्री के बेहतर प्रदर्शन के साथ इस उपकरण के व्यतिरेक को नियंत्रित करने में सीएनसी के निर्माण का प्रोटोकॉल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन वैज्ञानिकों ने बताया कि सैद्धांतिक रूप से इस उपकरण को किसी भी सेल्यूलोज या कृषि जनित अपशिष्ट से विकसित किया जा सकता है। मूंगफली के कचरे के कुछ खास गुणों के कारण, मूंगफली के कचरे से विकसित स्मार्ट स्क्रीन को सबसे अधिक कारगर पाया गया है। लक्षित गोपनीयता निर्माण के मूल इरादे के अलावा, इस उपकरण को व्यापक संभावित अनुप्रयोगों, खासकर अवरक्त प्रकाश की मात्रा और खिड़की को नियंत्रित करके इसे अनुमन्य सीमा तक गुजारते हुए ऊर्जा संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस तकनीक लैस एक खिड़की पूरे दृश्य क्षेत्र के लिए पारदर्शी रहेगी, पूरे प्रांगण को ठंडा रखते हुए गर्मी के विकिरण के अवांछनीय स्तर को काफी कम किया जा सकता है। स्त्राेत : पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। भारतीय वैज्ञानिकों ने मूंगफली के छिलकों से पर्यावरण के अनुकूल एक स्मार्ट स्क्रीन विकसित की है, जो न केवल गोपनीयता को बनाए रखने में मदद कर सकती है बल्कि इससे गुजरने वाले प्रकाश एवं गर्मी को नियंत्रित करके ऊर्जा संरक्षण और एयर कंडीशनिंग लोड को कम करने में भी मदद कर सकती है। प्रोफेसर एस. कृष्णा प्रसाद के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक समूह ने सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज , बैंगलोर, जोकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है, के डॉ. शंकर राव के साथ मिलकर मूंगफली के फेंके हुए छिलकों से इस तरह के एक सेलूलोज़-आधारित स्मार्ट स्क्रीन को विकसित करने में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। इस स्मार्ट स्क्रीन के अनुप्रयोग में, तरल क्रिस्टल अणुओं को एक बहुलक सांचे में ढाला गया। इस सांचे का निर्माण सेलुलोज नैनोक्रिस्टल का उपयोग करके किया गया। ये सेलुलोज नैनोक्रिस्टल आईआईटी रुड़की में प्रोफेसर युवराज सिंह नेगी की टीम द्वारा मूंगफली के छोड़े हुए छिलकों से तैयार किए गए थे। तरल क्रिस्टल अणुओं के अपवर्तनांक को एक विद्युतीय क्षेत्र के अनुप्रयोग के जरिए एक खास दिशा की ओर मोड़ दिया गया। विद्युतीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में, बहुलक और तरल क्रिस्टल के अपवर्तनांकों के बेमेल होने की वजह से प्रकाश का प्रकीर्णन हुआ। कुछ वोल्ट के एक विद्युतीय क्षेत्र के अनुप्रयोग से, तरल क्रिस्टल अणु दिशा परिवर्तन की एक प्रक्रिया से गुजरे, जिसके परिणामस्वरूप अपवर्तनांकों में मेल हुआ और उपकरण लगभग तुरंत ही पारदर्शी हो उठा। जैसे ही विद्युतीय क्षेत्र का प्रयोग बंद किया गया, यह प्रणाली प्रकीर्णन वाली अवस्था में वापस लौट आई। बटन दबाने पर उपलब्ध दो अवस्थाओं के बीच यह उत्क्रमणीय बदलाव हजारों चक्रों में हुआ। इस उत्क्रमणीय बदलाव के दौरान अनिवार्य रूप से व्यतिरेक या बटन दबाने की गति में कोई परिवर्तन नहीं होने दिया गया। इन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस उपकरण ने, जिसका जिक्र एप्लाइड फिजिक्स लेटर्स के हाल के अंक में किया गया है, उसी सिद्धांत का अनुसरण किया जिसकी वजह से सर्दियों में सुबह के समय कोहरा पैदा होता है। ऐसा केवल तभी होता है जब पानी की बूंदें सही आकार की होती हैं, और वह हवा के साथ मौजूद रहती हैं। प्रकाश की आने वाली किरणें इन दोनों को अलग-अलग अपवर्तनांकों वाली वस्तुओं के रूप में देखती हैं और इस तरह से उनका प्रकीर्णन हो जाता है जिसके परिणामस्वरुप कोहरे का नजारा उपस्थित होताहै। इसी तरह, बहुलक और तरल क्रिस्टल को सही आकार में सह-अस्तित्व में होना चाहिए ताकि स्मार्ट स्क्रीन के लिए आवश्यक प्रकाशीय गुण निर्मित हो सकें। इस उपकरण पर काम करने वाले छात्र, सुश्री प्रज्ञा और डॉ. श्रीविद्या, इस बात पर जोर देते हैं किवाणिज्यिक स्रोतों से उपलब्ध सीएनसी के मुकाबले आईआईटी रूड़कीकी सामग्री के बेहतर प्रदर्शन के साथ इस उपकरण के व्यतिरेक को नियंत्रित करने में सीएनसी के निर्माण का प्रोटोकॉल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन वैज्ञानिकों ने बताया कि सैद्धांतिक रूप से इस उपकरण को किसी भी सेल्यूलोज या कृषि जनित अपशिष्ट से विकसित किया जा सकता है। मूंगफली के कचरे के कुछ खास गुणों के कारण, मूंगफली के कचरे से विकसित स्मार्ट स्क्रीन को सबसे अधिक कारगर पाया गया है। लक्षित गोपनीयता निर्माण के मूल इरादे के अलावा, इस उपकरण को व्यापक संभावित अनुप्रयोगों, खासकर अवरक्त प्रकाश की मात्रा और खिड़की को नियंत्रित करके इसे अनुमन्य सीमा तक गुजारते हुए ऊर्जा संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस तकनीक लैस एक खिड़की पूरे दृश्य क्षेत्र के लिए पारदर्शी रहेगी, पूरे प्रांगण को ठंडा रखते हुए गर्मी के विकिरण के अवांछनीय स्तर को काफी कम किया जा सकता है। स्त्राेत : पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार।
अष्टमासवशाद् युक्तो दिव्यगर्भः प्रजायते ॥१००।। श्रावणे शुक्लपक्षे स्यात् स्वातीऋऋण सप्तमी । सत्र वर्षति पर्जन्यः सत्यमेतद् वरानने ! ॥१०१॥ अत्र शुक्ला दिमासपक्ष एवं गर्भपा कस्तत्फलं चोक्तम्, त. था कृष्पक्षादिमासमतेऽपि । अष्टमासवशादिति कथनादेव तन्मतं दृढीकृतं पौषकृष्णपक्षादित्वेन आवणशुलेटमासी भावात् । अत एव चैत्रस्यान्ते कृष्णपक्षमाश्रित्य चैत्रोऽयं षहुरूप इत्युक्ति ज्योतिर्मतेन, तदा कृष्णपक्षादिमतेन वैशाखात्, तत्र पञ्चरूपताया युक्तस्वात्, तेनैव कार्तिकामावास्यां वीरनिर्वाणात् । सिद्धान्ते कृष्णपक्षादिर्मासः । पूर्णो मासो यस्यां सा पौर्णमासीति सत्योक्तिः । अत्रापि सम्मतिर्यथापौषे मूलाद् भरण्यन्तं चन्द्रचारेण साम्रखे । बादलो से घेरे हुए हो तो आठ मासका सुंदर गर्भ होता है ॥ १०० ॥ हे श्रेष्ठ मुखवाली! श्रावण मासक शुक्ल पक्ष में सप्तमी के दिन स्वाति नक्षत्र हो तो अवश्य वर्षा होती है ॥ १०१ ॥ यहां जैसे शुक्लादि मास और पक्ष में गर्भ पाक का फल कहा बैंस कृष्णादि मास में भी यही मत (अभिप्राय) समझना । आठ मास ऐसा कहा है जिससे पौष कृष्ण पक्षसे श्रावण शुक्ल पक्ष तक आठ मास हो जानेसे यही मत निश्चय किया । इसलिये चैत्रनास के अंत में कृष्ण पक्ष आश्री 'चैत्रोऽयं बहु रूप ' ऐसी युक्ति ज्योतिष मतसं है, क्योकि ज्योतिष सिद्धान्तों में शुक्रादि मास माना है और कृष्ण पक्षादिके मतसे वैशाख माससे वर्षा के गर्भ पंच रूप (वायु, गर्जना, विद्युत आदि) समझना । कार्तिक अमावास्या के दिन श्रीमहावीर जिनवरका निर्वाण होने से सिद्धान्तमें कृष्णादि मास की प्रवृत्ति है, जिस समय महीना पूर्ण हो उसको पूर्णमासी कहते है यह सत्य उक्ति है। पौष मास में मूलसे भरी तक चन्द्रनक्षत्रों में आकाश आर्द्रादौ च विशाखान्तं रविचारेण वर्षति ॥१०२ ॥ न चैवं शुक्लपक्षाद्यैः पौषेऽपि मूलसङ्गतिः । तथा गर्भोदयो ज्ञेय इति वाच्यं वचस्विना ॥१०३॥ मूलादि गर्भहेतुः स्याद् नक्षत्रं धन्वगे रवी । सम्बन्धाद् धनुषः पौधे कृष्णादौ चापगो रविः ॥१०४॥ उक्तं मेघमालायाम् - धन्वराशौ स्थिते सूर्ये मूलाधा गर्भधारणाः । गर्भोदयाद् ध्रुवं वृष्टिः पञ्चोनद्विशतिदिनैः ।।१०५।। दिनसंख्यानुसाराच वर्षस्यत्र न संशयः । मुलाद् वर्षति चार्द्राभं पूषायाश्च पुनर्वसुः ।।१०६॥ उषाया गर्भतः पुष्यं श्रवणात् सर्पदैवतम् । धनिष्ठाया मघाबृष्टि र्वारुणात् पूर्वफाल्गुनी ॥१०७।। बादलोंसे घेरा हुआ हो याने बादन सहित हो तो आर्द्रा विशाखा तक सूर्यनक्षत्रों में वर्षा हो ॥१०२।। यहा शुक्ल या कृष्ण पक्षका विचार नही करना, पौष मासमें जबसे मूल नक्षत्र पर सूर्य हो तबसे गर्भकी वृद्धि समझना ऐसे विद्वान् लोग कहते हैं ॥ १०३ ॥ धनुराशि पर सूर्य माने से मूलादि नक्षत्र गर्भके हेतु होते हैं। पौष मासमें धनुराशि का संबंध से कृष्णादिमें धनुः संक्रान्ति आती है ॥ १०४ ॥ धनुराशि पर सूर्य आने से मूल आदि नक्षत्र गर्भको धारण करनेवाले होते हैं। गर्भका उदय होनेसे १६५ दिनोंमें निश्चयसे वर्षा होती है ।। १०५॥ दिन संख्या तुषार (हीम) गिरने लगे वहां से गिनना, उपरोक्त दिन पर अवश्य वर्षा होती है इसमें संशय नहीं। मूल नक्षत्रका गर्भसे पार्द्रा नक्षत्र में वर्षा होती है, ऐसे पूर्वाषाढाका गर्भसे पुनर्वसु में ॥१०६॥ उत्तराषाढा का गर्भसे पुष्य में, श्रवणका गर्भसे आश्लेषा में, धनिष्टाका गर्भ से मघामें, शतभिषाका गर्भसे पूर्वाफाल्गुनी में वर्षा होती है ॥ १०७॥ पूर्वाभाद्रपदका पूर्वभद्रपदागर्भाद् वृष्टिरायमदैवते । उभायां हस्तवर्षा स्याद् रेवत्यां त्वाष्ट्रवर्षणम् ॥ १०८ ॥ आश्विन्यां स्वातिवर्षा स्याद् भरण्यां तु द्विदैवतम् । पूर्णगर्ने भवेद् वृष्टिः सर्वलोकाः सुखावहाः ॥१०९॥ एवं व गर्भपूर्णत्वं कृष्णपक्षक्रमाद् भवेत् । पौषादिज्येष्ठमासान्ता षण्मास्य शुचेः पुनः ॥११०॥ अत्रोदाहरणं- संवत् १७३७ वर्षे पौषकृष्णचतुर्थ्या ध नुष्यर्कः ५४, ततः संवत् १७३८ वर्षे कृष्णपक्षादिके आषाढे अमावास्यां रौद्रे रविः १४ । इति गर्भसम्पूर्णता । वृष्टी चाया एत्र मुख्यत्वं तथा चोक्तं प्राक् 'मेषसंक्रान्तिकालात्तु' इत्यादि । लोकेऽप्याहमिगसर वाय न वाहमा अद्द न वूठा मेह। तो जागेवो भडली, वरसह आयो वेह ॥१११॥ प्रन्थान्तरेऽपि - मेषराशिगते सूर्ये अश्विनीचन्द्र संयुता । यदा प्रवर्षति देवि ! मूलगर्भो विनश्यति ॥११२ ॥ भरण्याः सर्पदेवान्तं कमेगा वर्षणे प्रिये ! । गर्भसे उत्तराफाल्गुनिमे, उत्तराभाद्रपदाका गर्भ हस्तम, रेवती का गर्म से मे चित्रामें वर्षा होती है ॥ १०८ ॥ अन्तिनका गर्मसे स्वानिम और भरी का गर्भमे विशाखामे गर्भ की गणना में वर्षा होती है और सब लोग मुखी होते हैं ॥१०६॥ इसी तरह कृष्ण पक्षादिका कमसे पौष ज्येष्ठ तक छ महीने और आधा आपमान गर्मी पता होती है ॥ १५० ॥ मार्गशिरमाममं वायु न चले और आर्द्रा में वर्षा नहीं तो वर्ष अच्छा न हो ।।१११।। मेपराशि पर सूर्य हो तब चद्रमा का अश्विनी नक्षत्र में यदि वर्षा हो तो मृलनक्षत्रके गर्भका विनाश होता है ॥ ११२ । इसी तरह भगधी पूर्वाषाढा दिपौष्णान्तं गर्भश्चैवं विनश्यति ॥११३॥ पञ्चमे पञ्चमे स्थाने गर्भः पतति चाव्ययात् । आर्द्राप्रवर्षणं देवि ! गर्जने या कथञ्चन ।।११४॥ सर्वे गर्भाश्च विज्ञेया तत्रैव वृष्टिकारकाः । आर्द्रादिपञ्चके दृष्टे छिद्रं वर्षति माधवः ।। ११५॥ न चैवं गर्भनियमः स्यान्मासाष्टकनिमित्तेन चतुष्टयमभीष्टदमिति मेघमालावचनात, निमित्तरूपगर्भसंख्यायां न्यूनाधिकत्वस्यापि दर्शनात् । यहाहुः श्रीहीरविजयसूरयः स्वमेघमालायाम्(२५३) कत्तिय यारसि गन्भा छाया, मासाढां धुरि बरसे भाया । मिगसिर पञ्चमि मेघाडंबर, तो वर मे सघलो संबच्छर ।११६ । इति कृतं प्रसङ्गेन प्रकृतमनुत्रियते - पूर्वाश्रयं रोहिणी च हस्तब्ध प्रतिपहिने । पक्षादौ वा नेष्टं सर्वधान्यमहर्घकृत् ॥११७।। आग्नेयं पौष्णयुगलं मूलश्चेत् प्रतिपद्दिने । नक्षत्रसे आश्लेषा तक नक्षत्रों में किसी भी दिन वर्षा हो तो कमसे पूर्वाषाढ़ा से रेवती नक्षत्र तक के गर्भका विनाश होता है । ११३ ।। पाचवें २ मास मे स्विगर्मक पातहो जाता है। कभी आर्द्रा में वर्षा हो या गर्जना हो तो गर्भपात होता है ॥ ११७ ॥ जहा गर्म हो वहा सब दृष्टि करनेवाले जानमा । आर्द्रादि पाच नक्षत्रोंमे वर्षावाती है ॥ ११५ ॥ कात्तिकमासकी द्वादशी के दिन गर्भ आच्छादित होतो आषाढ में निश्चय से वर्षा हो और मार्गशीर्ष पंचमी के दिन भी वर्षाका आडंबर होतो सम्पूर्ण वर्ष में वर्षा हो ।। ११६ ॥ पक्षकी अदिति के दिन यदि तीनों पूर्वा, रोहिणी, हस्त और शतभिषा ये नक्षत्र होतो सब प्रकार के वान्य तेजहों ॥ ११७ ॥ कृतिका, रेवती, अश्विनी और मूल ये नक्षत्र हो तो समान भाव रहे और बाकी के सदा धान्ये समाधत्वं शेषऋ समर्थता ।।११८।। अथ दिनविचारःबायको दुभिक्खं तेवने होइ मजिप्तमं कालं । चजबसे समभावं पश्चावत्रे य सुभिक्खं ॥११६॥ द्विपाशदू युते वर्षे दिवसानां शतत्रये । सुभिक्षं केचिदप्याहुः परं देशेषु विग्रहः ।।१२०।। बाणेषुत्रिदिनैः कालो मध्यमोऽद्विशरत्रिभिः । वर्ष खषद् त्रिभिः श्रेष्ठं सुभिक्षं तत्र निश्चितम् ॥ १२१ ।। अथ रोहिणीवृष्टौ दिनमानवर्षणस्य रविणा भुज्यमानायां रोहिग्रयां मेघवर्षणं । वाससति दिनान्यब्द-सृष्टिर्नाद्यदिने तदा ।।१२२।। द्वितोयदिवसे वृष्टा-वष्टपञ्चाशता दिनैः । दृष्टिरोवस्तृतीयेऽहि चत्वारिंश नवोत्तराः ॥ १२३॥ नक्षत्र हो तो सस्ते हो ॥ ११८ ॥ यदि ३५२ दिनका वर्ष हो तो दुर्भिक्ष, ३५३ दिनका वर्ष हो तो मध्यम, ३५४ दिनका समान और ३५५ दिनका हो तो सुकाल जानना ॥ ११६ ॥ कोई ऐसा भी कहते हैं- ३५२ दिनका वर्ष हो तो सुकाल हो, परंतु देश में विग्रह हो । १२० ॥ ३५५ दिनका वर्ष हो तो काल, ३५७ दिनका मध्यम और ३६० दिनका वर्ष श्रेष्ठ तथा निश्चय से सुभिक्ष कारक होता है॥ १२१ ॥ जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र का भोग कर रहे हो अर्थात् जितने समय रोहिणी नक्षत्र पर सूर्य रहे, इतने समयमें कभी वर्षा हो तो उसका फल कहते है - यदि प्रथम दिन वर्षा हो तो उसके पीछे ७२ दिन तक वर्षा न बरसे बादमें वरसे ।। १२२ ॥ दूसरे दिन वर्षा हो तो ५८ दिन तक वर्षा न बरसे । तीसरे दिन वर्षा हो तो ४६ दिन तक वर्षा न बरसे । १२३ ॥ चौथे दिन वर्षा होतो ४२ दिन वर्षा नहो । पाचवें दिन वर्षा द्विचत्वारिंशत् तूर्येहि वृष्टौ दृष्टिर्न जायते । पत्रमे त्रिंशदेवात्र नवाहमाहिता मता ॥ १२४॥ चतुत्रिंशहिनानां हि षष्ठेऽहि नहि वर्षणम् । एकत्रिंशत् सप्तमेऽहि नवमे चाष्टविंशतिः ॥१२५॥ दशमेऽहि चतुर्विंश-त्येकादश दिनेऽम्बुदे । दिनाना मे कविंशत्या षोडशद्वादशेऽहनि ।।१२६ ।। त्रयोदशदिने सृष्टौ दिनद्वादश के पुनः । दृष्टिरोधः पयोदस्य ततो मेघमहोदयः ।। १२७।। मतान्तरे(२५३) पहिले चरण यहोत्तर दीह, बीजे यासहि न टले लीह । तीजे बावन्न चोध ययाल, रोहिणी खंच करे तिणकाल ११२८ प्रथ वृष्टिसर्वायदिनसंख्या ---- पञ्चाशदिवसा वृष्टि-वर्षदीपोत्सवे रवौ । हो तो ३६ दिन वर्षा न हो ॥ १२४ ॥ छट्ठे दिन वर्षा हो तो ३४ दिन वर्षा न हो । सातवें दिन वर्षा हो तो ३१ दिन वर्षा न हो । नववें दिन वर्षा होतो २८ दिन वर्षा न हो ॥ १२५ ॥ दशवें दिन वर्षा हो तो २४ दिन वर्षा न हो । ग्यारहवें दिन वर्षा होतो २१ दिन बाद वर्षा हो। बारहवें दिन वर्षा हो तो १६ दिन बाद वर्षा हो ।। १२६ ।। तेरहवें दिन वर्षा हो तो १२ दिन तक वर्षा न हो, बादमें वर्षा हो ॥ १२७॥ प्रकारान्तरसे - रोहिणीके प्रथम चरण पर सूर्य रहने पर वर्षा हो तो ७२ दिन नहीं बरसे बाद वर्षा बरसे। दूसरे चरण में वर्षा हो तो ६२ दिन बाद वर्षा हो । तीसरे चरण में वर्षा हो तो ५२ दिन और चौथे चरण में वर्षा हो तो ४२ दिन तक वर्षा न हो बाद वर्षा बरसे ॥ १२८ ॥ यदि दीपमालिका ( दीवाली) के दिन रविवार हो तो उस वर्ष में ५० दिन वर्षा हो । सोमबार हो तो १०० दिन, मंगलवार हो तो ४० दिन सोमे दिनशतं वृष्टित्वारिंशय मङ्गले ।।१२६॥ बुधे षष्टिदिनैर्वृष्टि रशीति दिवसा गुरौ । शुके दिनानां नवतिः शनौ विंशतिरेव च ॥१३०॥ तिथिवारमध्ये रोहिणीदिनफलम् --- पक्षान्तः प्रतिपहिने भवति चेद् ब्राह्मी तदा चिन्तितः, कालस्तस्पस्तः सुभिक्षमशनं स्तोकं तृतीया दिने । धान्यं भूरितरं तुरीयदिवसे किश्चिन्न किञ्चित् पुनः, पम्यां गगनेऽ तिवादलघन-च्छायाथ षष्ठीदिने ।।१३१॥ सप्तम्यां जलशोष उत्तरदिशि स्यादन्ननाशोऽष्टमीतिथ्यां कष्टमतीव वाणिजकुले भूम्यां नवम्यां भवेत् । सौभिक्ष्यं दशमीदिने जनभयं धान्यं महर्च तथैकादश्यां वणिजां भयं परिभवः स्याद् द्वादशीसङ्गमे । १३२। वृष्टिः स्वल्परसा त्रयोदशदिने वर्षा पुनर्भूयसी, नूनं भूततिथौ जलं नभसि न स्यात् पूर्णिमादर्शयोः । वर्षा हो ॥ १२६॥ बुवचार हो तो ६० दिन, गुरुवार हो तो ८० दिन, शुकवार हो तो ६० दिन और शनिवार हो तो २० दिन वर्षा बरसे ।।१३० ॥ पक्षके अन्तमे एकम के दिन रोहिणी नक्षत्र पर सूर्य आवे तो दुष्काल, दुजके दिन रोहिणी हो तो मुभिक्ष, तीजके दिन हो तो थोड़ी अन्न प्राप्ति, चोथ के दिन हो तो अधिक अन्न प्राप्ति, पचमी के दिन हो तो कुछ भी अन्न न हो या थोडासा हो, छठके दिन होतो आकाश मेघाडंबर से आच्छादित रहे ।। १३१ ।। सप्तमीके दिन रोहिणी हो तो उत्तर दिशा में जल सूख जाय, अष्टमी के दिन हो तो अनका नाश हो, नवमी के दिन रोहिणी हो तो भूमि पर वणिक् कुलको अधिक कष्ट पड़े। दशमीके दिन हो तो सुकाल, एकादशी के दिन हो तो धान्य महँगे और मनुष्योंको भय हो, द्वादशी के दिन हो तो वैश्योंको भय और परिभव हो, तेरमके दिन हो तो थोडा रसवाली दुर्भिक्षं च सुभिक्षमग्निदहनं रोगाः शिशूनां मृतिवृष्टिः काल इति क्रमात् प्रथमतां वृष्टे घनेऽर्कादिषु । १३३ । ज्येष्ठमासे तथा वाढे गाढे वृष्टे घनाघने । फलमेतदुपाख्यायि मेघांदयनिवेदिभिः ॥१३४॥ प्रथमदृष्टिदिनफलम् - चैत्रस्य कृष्णम्या आरभ्य दिवसा नव । खे नैर्मल्यं तदार्द्रादि-नवके विपुलं जलम् ।।१३५ ॥ अत्र प विनियः स्वदेश व्यवहारतः । मरौ फाल्गुनपूर्णायाः परचैत्रः सितेतरः ।। १३६॥ गूर्जरत्रादिषु पुनः स्वपूर्णायाः परोऽसितः । सर्वमासफलं चैवं यथायोग्यं विचार्यते ।।१३७।। सिनपक्षादिके चैत्रे मीने सूर्यसमागमे । वर्षा हो, चौदशके दिन हो तो बहुत वर्षा, पूर्णिमा और अमावस के दिन रोहिणी हो तो आकाश में जल प्राप्ति न हो । सूर्यादि वारों में रोहिणी पर सूर्य आवे तो क्रमसे दुष्काल, सुकाल, अग्निदाह, रोग, बालकों की मृत्यु, वर्षा और दुष्काल ये फल हों ॥१३३ ॥ ज्येष्ठ तथा आषाढमे रोहिणी नक्षत्र पर जिस दिन सूर्य आवे उस दिन यदि घनघोर दृष्टि हो जाय तो पूर्वोत समग्र फल मेघमहोदयको जाननेवालेने कहा है ॥ १३४ ॥ चैत्रमास में कृष्ण पंचमीसे नव दिन तक आकाश निर्मल हो तो आर्द्रा आदि नव नक्षत्रों में वर्षा अच्छी हो ॥१३५॥ यहा अपने अपने देशके व्यवहार से पक्षका निर्णय करना - मारवाड आदि देशों में फाल्गुन पूर्णिमा के पीछे चैत्र कृष्णपक्ष मानते हैं ।। १३६ ।। और गुजरात आदि देशों में अपने मास की पूर्णिमा के पीछे कृष्णपक्ष माना जाता है, इसी तरह यथायोग्य व्यवहारके अनुकूल समस्त मासका फल विचारना ॥ १३७॥ चैत्र शुक्लपक्ष में मीरा पर सूर्य आने से मूल आदि नव नक्षत्र निर्मल हो तो बर्ष ३३ मूलादिनवनक्षत्र-नैर्मल्ये वत्सरः शुभः ॥१३८॥ 'मेषसंक्रान्तिकालानु' इत्यादि । लोके पुनर्विशेषःबैत्र अजुमाली बडथथी, मेस थका नव दीह जल प्रामुविज्जु लवे, तो कुडंयी मम बीह ॥१३९॥ वैशाखमासे प्रतिपदिनाचे- मेघोदयः सप्तदिनानि यावत् । अभ्रेषु गर्जो घनविद्युदादि, तदा सुभिक्षं मुनयो वदन्ति । १४०। माघमासस्य सप्तम्यां पञ्चम्यां फाल्गुनस्य च । चैत्रस्यापि तृतीयायां वैशाखे प्रथमेऽहनि ॥१४१॥ मेघस्य गर्जितं श्रुत्वा जलदस्य तु दर्शने । चतुरो वार्षिकान् मासान् जलवृष्टिं तदा बदेत् ॥ १४२ ॥ हीरसूरयस्त्वाहुःकत्तियमासह बारसइ, मगसिर दसमी भाल। पोसहमासि पंचमी, सत्तमी माह निहाल ॥१४३॥ जह बरसे विज्जु लवे, ग्रह उन्नमण करेय । मासा च्यारे पावसह, धाराधरवरिसेय ॥१४४।। अच्छा होता है ॥ १३८ ॥ चैत्र मासकी शुक्ल चतुर्थीके बाद मेष संकान्ति से नव दिन वर्षा हो या बिजली चमके तो हे कृषिकार ! तुम डर नहीं ॥ १३६ ॥ वैशाख मासमें प्रतिपदासे मात दिन तक मेघ का उदय हो, गर्जना हो, वर्षा और बिजली आदि हो तो सुभिक्ष होता है ऐसा मुनियों ने कहा है ॥ १४० ॥ माघमासकी सप्तमी, फाल्गुनकी पंचमी, चैत्र की तृतीया और वैशाखका प्रथम दिन ॥१४१॥ इनमें मेघकी गर्जना हो और उनका दर्शन भी हो तो चौमासे के चार मासमें वर्षा मच्छी होती है ॥१४२॥ श्रीही विजयसूरिने भी कहा है कि कार्तिक मासकी बारस, मार्गशीर्षकी दशमी, पौष मासकी पंचमी और माघ मासकी सप्तमी ॥१४३॥ इन दिनों में यदि वर्षा हो, बिजली चमके तो चौमासे में धाराबंध वर्षा हो ॥१४४ ॥ वर्षरा र्वराजादिकप एवं शाकसमायनादिसमयं ज्योतिर्विदां वाङ्मयादू, नित्याभ्यासवशाद विमृश्य सुदृढं प्राज्यप्रभाभासुरः । श्रीमन्मेघमहोदयं सविजयं जानाति नातिश्रमाहू, भूपानामनुरञ्जनात् स लभते सिद्धिं सदा सम्पदाम् ॥ १४५ ॥ इति श्री मेघमहोदयसाधने वर्षयोधे तपागच्छीय-महोपाध्यायश्रीमेघविजयगणिविर चितेऽयनमासपक्षनिरूपणनामा षष्ठोऽधिकारः । अथ वर्षराजादिकथने सप्तमोऽधिकारः । अथ अगस्तिद्वारम् अथ यदि समुदेति चेतिमानं धानः, सकलकलशजन्मा सिन्धुपानप्रधानः । भगवति भगदैवे भे स्थिते पद्मिनीशे, निशि दिशि दिशि लक्ष्म्यै स्यादयं सप्तमेऽहि ॥१॥ इस प्रकार शकसंवत्सर अयन आदि समयको ज्योतिर्विदों के शास्त्रों से और हमेशा के अभ्यासवशते प्रभावशाली ज्योतिषी अच्छी तरह विचार कर के सफलीभूत ऐसा मेघमहोदय को थोड़ा परिश्रम से जानता है, और वह राजाओंको खुश करके हमेशा सिद्धि और संपदाको प्राप्त करता है ॥ १४५ ॥ सौराष्ट्रगष्ट्रान्तर्गत-पादलिप्तपूरनियासिना पण्डित भगवानदासाख्यजैनेन विरचितया मेघमहोदये बालावबोधिन्याऽऽर्यभाषया टीकितोऽयनमासपक्षनिरूपणनामा षष्ठोऽधिकारः । जब सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आवे तब उससे सातवें दिन रात्रि में प्रकाशको धारण करनेवाला और समुद्रको पीजाने में प्रधान ऐसा अगस्ति ऋऋषिका उदय हो तो चारोही दिशा में लक्ष्मीके लिये शुभ होता है ॥ १॥ यधुदेति दिने प्रातः पीताब्धिमुनिपुः । मिक्षं रौरवं घोरं राष्ट्रङ्गं तदादिशेत् ।।२।। रवौ च पूर्वफाल्गुन्यां प्राप्ते चेष्टमेऽहनि । अगस्तेरुद्यो लोके न शुभाय कचिन्मते ॥३॥ कृतिकायां रवौ जाते रुसमे वाष्टमेऽहनि । ऋषेरस्तंगतिः श्रेष्ठा दिवसे यदि जायते ॥४॥ रात्रावुदयनं श्रेष्ठं नेष्टवास्तमो मुनेः । दिवसेऽस्तङ्गमः श्रेष्ठो नेष्टाभ्युदयस्तदा ॥५॥ लोकेऽपि - सिंहा हुंती भडली, दिन इकवीसे जोय । अगस्ति महाऋषि उगीया, घन बहु वर से लोग ॥६॥ हीरसरयोऽप्याहुःदुभिक्खं वीस दिणे इगवीसे होइ मज्झिमं समयं । यदि अगस्त्यका उदय प्रातः काल में हो तो दुर्भिक्ष, घोर उपद्रव और राज्य भंग हों ।।२।। सूर्य जब पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आवे तब उस से आठवें दिन अगस्त्यका उदय हो तो लोक में शुभ नहीं होता ऐसा किसीका मत है ।।३।। सूर्य जब कृत्तिका नक्षत्र पर आवे तब उसमे सातवें या आठवे दिन अगस्यका अस्त यदि दिन में हो तो श्रेष्ठ होता है ॥४॥ अगस्त्यका उदय रात्रि में श्रेष्ठ माना जाता है और अम्त अशुभ माना है। दिन में अस्त होना श्रेष्ठ और उदय होना श्रेष्ठ नहीं ।।५।। लोक भाषामें बोलते है कि-- सिंह राशि पर सूर्य अवे तबसे इकईस दिनों में अगस्त्यका उदय होना है तब भूमि पर वर्षा बहुत होती है ॥६॥ श्रीहिर विजयसूरि ने भी कहा है कि सिहराशि पर सूर्य आवे तबसे वीस दिन पर अगस्त्य का उदय हो तो दुर्भिक्ष हो. इईदिनप उदय हो तो मध्यमं समय हो और बाईस दिन पर उदय हो तो मुकाले हो ॥७॥ जिस महीने में चुनसे
अष्टमासवशाद् युक्तो दिव्यगर्भः प्रजायते ॥एक सौ।। श्रावणे शुक्लपक्षे स्यात् स्वातीऋऋण सप्तमी । सत्र वर्षति पर्जन्यः सत्यमेतद् वरानने ! ॥एक सौ एक॥ अत्र शुक्ला दिमासपक्ष एवं गर्भपा कस्तत्फलं चोक्तम्, त. था कृष्पक्षादिमासमतेऽपि । अष्टमासवशादिति कथनादेव तन्मतं दृढीकृतं पौषकृष्णपक्षादित्वेन आवणशुलेटमासी भावात् । अत एव चैत्रस्यान्ते कृष्णपक्षमाश्रित्य चैत्रोऽयं षहुरूप इत्युक्ति ज्योतिर्मतेन, तदा कृष्णपक्षादिमतेन वैशाखात्, तत्र पञ्चरूपताया युक्तस्वात्, तेनैव कार्तिकामावास्यां वीरनिर्वाणात् । सिद्धान्ते कृष्णपक्षादिर्मासः । पूर्णो मासो यस्यां सा पौर्णमासीति सत्योक्तिः । अत्रापि सम्मतिर्यथापौषे मूलाद् भरण्यन्तं चन्द्रचारेण साम्रखे । बादलो से घेरे हुए हो तो आठ मासका सुंदर गर्भ होता है ॥ एक सौ ॥ हे श्रेष्ठ मुखवाली! श्रावण मासक शुक्ल पक्ष में सप्तमी के दिन स्वाति नक्षत्र हो तो अवश्य वर्षा होती है ॥ एक सौ एक ॥ यहां जैसे शुक्लादि मास और पक्ष में गर्भ पाक का फल कहा बैंस कृष्णादि मास में भी यही मत समझना । आठ मास ऐसा कहा है जिससे पौष कृष्ण पक्षसे श्रावण शुक्ल पक्ष तक आठ मास हो जानेसे यही मत निश्चय किया । इसलिये चैत्रनास के अंत में कृष्ण पक्ष आश्री 'चैत्रोऽयं बहु रूप ' ऐसी युक्ति ज्योतिष मतसं है, क्योकि ज्योतिष सिद्धान्तों में शुक्रादि मास माना है और कृष्ण पक्षादिके मतसे वैशाख माससे वर्षा के गर्भ पंच रूप समझना । कार्तिक अमावास्या के दिन श्रीमहावीर जिनवरका निर्वाण होने से सिद्धान्तमें कृष्णादि मास की प्रवृत्ति है, जिस समय महीना पूर्ण हो उसको पूर्णमासी कहते है यह सत्य उक्ति है। पौष मास में मूलसे भरी तक चन्द्रनक्षत्रों में आकाश आर्द्रादौ च विशाखान्तं रविचारेण वर्षति ॥एक सौ दो ॥ न चैवं शुक्लपक्षाद्यैः पौषेऽपि मूलसङ्गतिः । तथा गर्भोदयो ज्ञेय इति वाच्यं वचस्विना ॥एक सौ तीन॥ मूलादि गर्भहेतुः स्याद् नक्षत्रं धन्वगे रवी । सम्बन्धाद् धनुषः पौधे कृष्णादौ चापगो रविः ॥एक सौ चार॥ उक्तं मेघमालायाम् - धन्वराशौ स्थिते सूर्ये मूलाधा गर्भधारणाः । गर्भोदयाद् ध्रुवं वृष्टिः पञ्चोनद्विशतिदिनैः ।।एक सौ पाँच।। दिनसंख्यानुसाराच वर्षस्यत्र न संशयः । मुलाद् वर्षति चार्द्राभं पूषायाश्च पुनर्वसुः ।।एक सौ छः॥ उषाया गर्भतः पुष्यं श्रवणात् सर्पदैवतम् । धनिष्ठाया मघाबृष्टि र्वारुणात् पूर्वफाल्गुनी ॥एक सौ सात।। बादलोंसे घेरा हुआ हो याने बादन सहित हो तो आर्द्रा विशाखा तक सूर्यनक्षत्रों में वर्षा हो ॥एक सौ दो।। यहा शुक्ल या कृष्ण पक्षका विचार नही करना, पौष मासमें जबसे मूल नक्षत्र पर सूर्य हो तबसे गर्भकी वृद्धि समझना ऐसे विद्वान् लोग कहते हैं ॥ एक सौ तीन ॥ धनुराशि पर सूर्य माने से मूलादि नक्षत्र गर्भके हेतु होते हैं। पौष मासमें धनुराशि का संबंध से कृष्णादिमें धनुः संक्रान्ति आती है ॥ एक सौ चार ॥ धनुराशि पर सूर्य आने से मूल आदि नक्षत्र गर्भको धारण करनेवाले होते हैं। गर्भका उदय होनेसे एक सौ पैंसठ दिनोंमें निश्चयसे वर्षा होती है ।। एक सौ पाँच॥ दिन संख्या तुषार गिरने लगे वहां से गिनना, उपरोक्त दिन पर अवश्य वर्षा होती है इसमें संशय नहीं। मूल नक्षत्रका गर्भसे पार्द्रा नक्षत्र में वर्षा होती है, ऐसे पूर्वाषाढाका गर्भसे पुनर्वसु में ॥एक सौ छः॥ उत्तराषाढा का गर्भसे पुष्य में, श्रवणका गर्भसे आश्लेषा में, धनिष्टाका गर्भ से मघामें, शतभिषाका गर्भसे पूर्वाफाल्गुनी में वर्षा होती है ॥ एक सौ सात॥ पूर्वाभाद्रपदका पूर्वभद्रपदागर्भाद् वृष्टिरायमदैवते । उभायां हस्तवर्षा स्याद् रेवत्यां त्वाष्ट्रवर्षणम् ॥ एक सौ आठ ॥ आश्विन्यां स्वातिवर्षा स्याद् भरण्यां तु द्विदैवतम् । पूर्णगर्ने भवेद् वृष्टिः सर्वलोकाः सुखावहाः ॥एक सौ नौ॥ एवं व गर्भपूर्णत्वं कृष्णपक्षक्रमाद् भवेत् । पौषादिज्येष्ठमासान्ता षण्मास्य शुचेः पुनः ॥एक सौ दस॥ अत्रोदाहरणं- संवत् एक हज़ार सात सौ सैंतीस वर्षे पौषकृष्णचतुर्थ्या ध नुष्यर्कः चौवन, ततः संवत् एक हज़ार सात सौ अड़तीस वर्षे कृष्णपक्षादिके आषाढे अमावास्यां रौद्रे रविः चौदह । इति गर्भसम्पूर्णता । वृष्टी चाया एत्र मुख्यत्वं तथा चोक्तं प्राक् 'मेषसंक्रान्तिकालात्तु' इत्यादि । लोकेऽप्याहमिगसर वाय न वाहमा अद्द न वूठा मेह। तो जागेवो भडली, वरसह आयो वेह ॥एक सौ ग्यारह॥ प्रन्थान्तरेऽपि - मेषराशिगते सूर्ये अश्विनीचन्द्र संयुता । यदा प्रवर्षति देवि ! मूलगर्भो विनश्यति ॥एक सौ बारह ॥ भरण्याः सर्पदेवान्तं कमेगा वर्षणे प्रिये ! । गर्भसे उत्तराफाल्गुनिमे, उत्तराभाद्रपदाका गर्भ हस्तम, रेवती का गर्म से मे चित्रामें वर्षा होती है ॥ एक सौ आठ ॥ अन्तिनका गर्मसे स्वानिम और भरी का गर्भमे विशाखामे गर्भ की गणना में वर्षा होती है और सब लोग मुखी होते हैं ॥एक सौ छः॥ इसी तरह कृष्ण पक्षादिका कमसे पौष ज्येष्ठ तक छ महीने और आधा आपमान गर्मी पता होती है ॥ एक सौ पचास ॥ मार्गशिरमाममं वायु न चले और आर्द्रा में वर्षा नहीं तो वर्ष अच्छा न हो ।।एक सौ ग्यारह।। मेपराशि पर सूर्य हो तब चद्रमा का अश्विनी नक्षत्र में यदि वर्षा हो तो मृलनक्षत्रके गर्भका विनाश होता है ॥ एक सौ बारह । इसी तरह भगधी पूर्वाषाढा दिपौष्णान्तं गर्भश्चैवं विनश्यति ॥एक सौ तेरह॥ पञ्चमे पञ्चमे स्थाने गर्भः पतति चाव्ययात् । आर्द्राप्रवर्षणं देवि ! गर्जने या कथञ्चन ।।एक सौ चौदह॥ सर्वे गर्भाश्च विज्ञेया तत्रैव वृष्टिकारकाः । आर्द्रादिपञ्चके दृष्टे छिद्रं वर्षति माधवः ।। एक सौ पंद्रह॥ न चैवं गर्भनियमः स्यान्मासाष्टकनिमित्तेन चतुष्टयमभीष्टदमिति मेघमालावचनात, निमित्तरूपगर्भसंख्यायां न्यूनाधिकत्वस्यापि दर्शनात् । यहाहुः श्रीहीरविजयसूरयः स्वमेघमालायाम् कत्तिय यारसि गन्भा छाया, मासाढां धुरि बरसे भाया । मिगसिर पञ्चमि मेघाडंबर, तो वर मे सघलो संबच्छर ।एक सौ सोलह । इति कृतं प्रसङ्गेन प्रकृतमनुत्रियते - पूर्वाश्रयं रोहिणी च हस्तब्ध प्रतिपहिने । पक्षादौ वा नेष्टं सर्वधान्यमहर्घकृत् ॥एक सौ सत्रह।। आग्नेयं पौष्णयुगलं मूलश्चेत् प्रतिपद्दिने । नक्षत्रसे आश्लेषा तक नक्षत्रों में किसी भी दिन वर्षा हो तो कमसे पूर्वाषाढ़ा से रेवती नक्षत्र तक के गर्भका विनाश होता है । एक सौ तेरह ।। पाचवें दो मास मे स्विगर्मक पातहो जाता है। कभी आर्द्रा में वर्षा हो या गर्जना हो तो गर्भपात होता है ॥ एक सौ सत्रह ॥ जहा गर्म हो वहा सब दृष्टि करनेवाले जानमा । आर्द्रादि पाच नक्षत्रोंमे वर्षावाती है ॥ एक सौ पंद्रह ॥ कात्तिकमासकी द्वादशी के दिन गर्भ आच्छादित होतो आषाढ में निश्चय से वर्षा हो और मार्गशीर्ष पंचमी के दिन भी वर्षाका आडंबर होतो सम्पूर्ण वर्ष में वर्षा हो ।। एक सौ सोलह ॥ पक्षकी अदिति के दिन यदि तीनों पूर्वा, रोहिणी, हस्त और शतभिषा ये नक्षत्र होतो सब प्रकार के वान्य तेजहों ॥ एक सौ सत्रह ॥ कृतिका, रेवती, अश्विनी और मूल ये नक्षत्र हो तो समान भाव रहे और बाकी के सदा धान्ये समाधत्वं शेषऋ समर्थता ।।एक सौ अट्ठारह।। अथ दिनविचारःबायको दुभिक्खं तेवने होइ मजिप्तमं कालं । चजबसे समभावं पश्चावत्रे य सुभिक्खं ॥एक सौ सोलह॥ द्विपाशदू युते वर्षे दिवसानां शतत्रये । सुभिक्षं केचिदप्याहुः परं देशेषु विग्रहः ।।एक सौ बीस।। बाणेषुत्रिदिनैः कालो मध्यमोऽद्विशरत्रिभिः । वर्ष खषद् त्रिभिः श्रेष्ठं सुभिक्षं तत्र निश्चितम् ॥ एक सौ इक्कीस ।। अथ रोहिणीवृष्टौ दिनमानवर्षणस्य रविणा भुज्यमानायां रोहिग्रयां मेघवर्षणं । वाससति दिनान्यब्द-सृष्टिर्नाद्यदिने तदा ।।एक सौ बाईस।। द्वितोयदिवसे वृष्टा-वष्टपञ्चाशता दिनैः । दृष्टिरोवस्तृतीयेऽहि चत्वारिंश नवोत्तराः ॥ एक सौ तेईस॥ नक्षत्र हो तो सस्ते हो ॥ एक सौ अट्ठारह ॥ यदि तीन सौ बावन दिनका वर्ष हो तो दुर्भिक्ष, तीन सौ तिरेपन दिनका वर्ष हो तो मध्यम, तीन सौ चौवन दिनका समान और तीन सौ पचपन दिनका हो तो सुकाल जानना ॥ एक सौ सोलह ॥ कोई ऐसा भी कहते हैं- तीन सौ बावन दिनका वर्ष हो तो सुकाल हो, परंतु देश में विग्रह हो । एक सौ बीस ॥ तीन सौ पचपन दिनका वर्ष हो तो काल, तीन सौ सत्तावन दिनका मध्यम और तीन सौ साठ दिनका वर्ष श्रेष्ठ तथा निश्चय से सुभिक्ष कारक होता है॥ एक सौ इक्कीस ॥ जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र का भोग कर रहे हो अर्थात् जितने समय रोहिणी नक्षत्र पर सूर्य रहे, इतने समयमें कभी वर्षा हो तो उसका फल कहते है - यदि प्रथम दिन वर्षा हो तो उसके पीछे बहत्तर दिन तक वर्षा न बरसे बादमें वरसे ।। एक सौ बाईस ॥ दूसरे दिन वर्षा हो तो अट्ठावन दिन तक वर्षा न बरसे । तीसरे दिन वर्षा हो तो छियालीस दिन तक वर्षा न बरसे । एक सौ तेईस ॥ चौथे दिन वर्षा होतो बयालीस दिन वर्षा नहो । पाचवें दिन वर्षा द्विचत्वारिंशत् तूर्येहि वृष्टौ दृष्टिर्न जायते । पत्रमे त्रिंशदेवात्र नवाहमाहिता मता ॥ एक सौ चौबीस॥ चतुत्रिंशहिनानां हि षष्ठेऽहि नहि वर्षणम् । एकत्रिंशत् सप्तमेऽहि नवमे चाष्टविंशतिः ॥एक सौ पच्चीस॥ दशमेऽहि चतुर्विंश-त्येकादश दिनेऽम्बुदे । दिनाना मे कविंशत्या षोडशद्वादशेऽहनि ।।एक सौ छब्बीस ।। त्रयोदशदिने सृष्टौ दिनद्वादश के पुनः । दृष्टिरोधः पयोदस्य ततो मेघमहोदयः ।। एक सौ सत्ताईस।। मतान्तरे पहिले चरण यहोत्तर दीह, बीजे यासहि न टले लीह । तीजे बावन्न चोध ययाल, रोहिणी खंच करे तिणकाल एक हज़ार एक सौ अट्ठाईस प्रथ वृष्टिसर्वायदिनसंख्या ---- पञ्चाशदिवसा वृष्टि-वर्षदीपोत्सवे रवौ । हो तो छत्तीस दिन वर्षा न हो ॥ एक सौ चौबीस ॥ छट्ठे दिन वर्षा हो तो चौंतीस दिन वर्षा न हो । सातवें दिन वर्षा हो तो इकतीस दिन वर्षा न हो । नववें दिन वर्षा होतो अट्ठाईस दिन वर्षा न हो ॥ एक सौ पच्चीस ॥ दशवें दिन वर्षा हो तो चौबीस दिन वर्षा न हो । ग्यारहवें दिन वर्षा होतो इक्कीस दिन बाद वर्षा हो। बारहवें दिन वर्षा हो तो सोलह दिन बाद वर्षा हो ।। एक सौ छब्बीस ।। तेरहवें दिन वर्षा हो तो बारह दिन तक वर्षा न हो, बादमें वर्षा हो ॥ एक सौ सत्ताईस॥ प्रकारान्तरसे - रोहिणीके प्रथम चरण पर सूर्य रहने पर वर्षा हो तो बहत्तर दिन नहीं बरसे बाद वर्षा बरसे। दूसरे चरण में वर्षा हो तो बासठ दिन बाद वर्षा हो । तीसरे चरण में वर्षा हो तो बावन दिन और चौथे चरण में वर्षा हो तो बयालीस दिन तक वर्षा न हो बाद वर्षा बरसे ॥ एक सौ अट्ठाईस ॥ यदि दीपमालिका के दिन रविवार हो तो उस वर्ष में पचास दिन वर्षा हो । सोमबार हो तो एक सौ दिन, मंगलवार हो तो चालीस दिन सोमे दिनशतं वृष्टित्वारिंशय मङ्गले ।।एक सौ छब्बीस॥ बुधे षष्टिदिनैर्वृष्टि रशीति दिवसा गुरौ । शुके दिनानां नवतिः शनौ विंशतिरेव च ॥एक सौ तीस॥ तिथिवारमध्ये रोहिणीदिनफलम् --- पक्षान्तः प्रतिपहिने भवति चेद् ब्राह्मी तदा चिन्तितः, कालस्तस्पस्तः सुभिक्षमशनं स्तोकं तृतीया दिने । धान्यं भूरितरं तुरीयदिवसे किश्चिन्न किञ्चित् पुनः, पम्यां गगनेऽ तिवादलघन-च्छायाथ षष्ठीदिने ।।एक सौ इकतीस॥ सप्तम्यां जलशोष उत्तरदिशि स्यादन्ननाशोऽष्टमीतिथ्यां कष्टमतीव वाणिजकुले भूम्यां नवम्यां भवेत् । सौभिक्ष्यं दशमीदिने जनभयं धान्यं महर्च तथैकादश्यां वणिजां भयं परिभवः स्याद् द्वादशीसङ्गमे । एक सौ बत्तीस। वृष्टिः स्वल्परसा त्रयोदशदिने वर्षा पुनर्भूयसी, नूनं भूततिथौ जलं नभसि न स्यात् पूर्णिमादर्शयोः । वर्षा हो ॥ एक सौ छब्बीस॥ बुवचार हो तो साठ दिन, गुरुवार हो तो अस्सी दिन, शुकवार हो तो साठ दिन और शनिवार हो तो बीस दिन वर्षा बरसे ।।एक सौ तीस ॥ पक्षके अन्तमे एकम के दिन रोहिणी नक्षत्र पर सूर्य आवे तो दुष्काल, दुजके दिन रोहिणी हो तो मुभिक्ष, तीजके दिन हो तो थोड़ी अन्न प्राप्ति, चोथ के दिन हो तो अधिक अन्न प्राप्ति, पचमी के दिन हो तो कुछ भी अन्न न हो या थोडासा हो, छठके दिन होतो आकाश मेघाडंबर से आच्छादित रहे ।। एक सौ इकतीस ।। सप्तमीके दिन रोहिणी हो तो उत्तर दिशा में जल सूख जाय, अष्टमी के दिन हो तो अनका नाश हो, नवमी के दिन रोहिणी हो तो भूमि पर वणिक् कुलको अधिक कष्ट पड़े। दशमीके दिन हो तो सुकाल, एकादशी के दिन हो तो धान्य महँगे और मनुष्योंको भय हो, द्वादशी के दिन हो तो वैश्योंको भय और परिभव हो, तेरमके दिन हो तो थोडा रसवाली दुर्भिक्षं च सुभिक्षमग्निदहनं रोगाः शिशूनां मृतिवृष्टिः काल इति क्रमात् प्रथमतां वृष्टे घनेऽर्कादिषु । एक सौ तैंतीस । ज्येष्ठमासे तथा वाढे गाढे वृष्टे घनाघने । फलमेतदुपाख्यायि मेघांदयनिवेदिभिः ॥एक सौ चौंतीस॥ प्रथमदृष्टिदिनफलम् - चैत्रस्य कृष्णम्या आरभ्य दिवसा नव । खे नैर्मल्यं तदार्द्रादि-नवके विपुलं जलम् ।।एक सौ पैंतीस ॥ अत्र प विनियः स्वदेश व्यवहारतः । मरौ फाल्गुनपूर्णायाः परचैत्रः सितेतरः ।। एक सौ छत्तीस॥ गूर्जरत्रादिषु पुनः स्वपूर्णायाः परोऽसितः । सर्वमासफलं चैवं यथायोग्यं विचार्यते ।।एक सौ सैंतीस।। सिनपक्षादिके चैत्रे मीने सूर्यसमागमे । वर्षा हो, चौदशके दिन हो तो बहुत वर्षा, पूर्णिमा और अमावस के दिन रोहिणी हो तो आकाश में जल प्राप्ति न हो । सूर्यादि वारों में रोहिणी पर सूर्य आवे तो क्रमसे दुष्काल, सुकाल, अग्निदाह, रोग, बालकों की मृत्यु, वर्षा और दुष्काल ये फल हों ॥एक सौ तैंतीस ॥ ज्येष्ठ तथा आषाढमे रोहिणी नक्षत्र पर जिस दिन सूर्य आवे उस दिन यदि घनघोर दृष्टि हो जाय तो पूर्वोत समग्र फल मेघमहोदयको जाननेवालेने कहा है ॥ एक सौ चौंतीस ॥ चैत्रमास में कृष्ण पंचमीसे नव दिन तक आकाश निर्मल हो तो आर्द्रा आदि नव नक्षत्रों में वर्षा अच्छी हो ॥एक सौ पैंतीस॥ यहा अपने अपने देशके व्यवहार से पक्षका निर्णय करना - मारवाड आदि देशों में फाल्गुन पूर्णिमा के पीछे चैत्र कृष्णपक्ष मानते हैं ।। एक सौ छत्तीस ।। और गुजरात आदि देशों में अपने मास की पूर्णिमा के पीछे कृष्णपक्ष माना जाता है, इसी तरह यथायोग्य व्यवहारके अनुकूल समस्त मासका फल विचारना ॥ एक सौ सैंतीस॥ चैत्र शुक्लपक्ष में मीरा पर सूर्य आने से मूल आदि नव नक्षत्र निर्मल हो तो बर्ष तैंतीस मूलादिनवनक्षत्र-नैर्मल्ये वत्सरः शुभः ॥एक सौ अड़तीस॥ 'मेषसंक्रान्तिकालानु' इत्यादि । लोके पुनर्विशेषःबैत्र अजुमाली बडथथी, मेस थका नव दीह जल प्रामुविज्जु लवे, तो कुडंयी मम बीह ॥एक सौ उनतालीस॥ वैशाखमासे प्रतिपदिनाचे- मेघोदयः सप्तदिनानि यावत् । अभ्रेषु गर्जो घनविद्युदादि, तदा सुभिक्षं मुनयो वदन्ति । एक सौ चालीस। माघमासस्य सप्तम्यां पञ्चम्यां फाल्गुनस्य च । चैत्रस्यापि तृतीयायां वैशाखे प्रथमेऽहनि ॥एक सौ इकतालीस॥ मेघस्य गर्जितं श्रुत्वा जलदस्य तु दर्शने । चतुरो वार्षिकान् मासान् जलवृष्टिं तदा बदेत् ॥ एक सौ बयालीस ॥ हीरसूरयस्त्वाहुःकत्तियमासह बारसइ, मगसिर दसमी भाल। पोसहमासि पंचमी, सत्तमी माह निहाल ॥एक सौ तैंतालीस॥ जह बरसे विज्जु लवे, ग्रह उन्नमण करेय । मासा च्यारे पावसह, धाराधरवरिसेय ॥एक सौ चौंतालीस।। अच्छा होता है ॥ एक सौ अड़तीस ॥ चैत्र मासकी शुक्ल चतुर्थीके बाद मेष संकान्ति से नव दिन वर्षा हो या बिजली चमके तो हे कृषिकार ! तुम डर नहीं ॥ एक सौ छत्तीस ॥ वैशाख मासमें प्रतिपदासे मात दिन तक मेघ का उदय हो, गर्जना हो, वर्षा और बिजली आदि हो तो सुभिक्ष होता है ऐसा मुनियों ने कहा है ॥ एक सौ चालीस ॥ माघमासकी सप्तमी, फाल्गुनकी पंचमी, चैत्र की तृतीया और वैशाखका प्रथम दिन ॥एक सौ इकतालीस॥ इनमें मेघकी गर्जना हो और उनका दर्शन भी हो तो चौमासे के चार मासमें वर्षा मच्छी होती है ॥एक सौ बयालीस॥ श्रीही विजयसूरिने भी कहा है कि कार्तिक मासकी बारस, मार्गशीर्षकी दशमी, पौष मासकी पंचमी और माघ मासकी सप्तमी ॥एक सौ तैंतालीस॥ इन दिनों में यदि वर्षा हो, बिजली चमके तो चौमासे में धाराबंध वर्षा हो ॥एक सौ चौंतालीस ॥ वर्षरा र्वराजादिकप एवं शाकसमायनादिसमयं ज्योतिर्विदां वाङ्मयादू, नित्याभ्यासवशाद विमृश्य सुदृढं प्राज्यप्रभाभासुरः । श्रीमन्मेघमहोदयं सविजयं जानाति नातिश्रमाहू, भूपानामनुरञ्जनात् स लभते सिद्धिं सदा सम्पदाम् ॥ एक सौ पैंतालीस ॥ इति श्री मेघमहोदयसाधने वर्षयोधे तपागच्छीय-महोपाध्यायश्रीमेघविजयगणिविर चितेऽयनमासपक्षनिरूपणनामा षष्ठोऽधिकारः । अथ वर्षराजादिकथने सप्तमोऽधिकारः । अथ अगस्तिद्वारम् अथ यदि समुदेति चेतिमानं धानः, सकलकलशजन्मा सिन्धुपानप्रधानः । भगवति भगदैवे भे स्थिते पद्मिनीशे, निशि दिशि दिशि लक्ष्म्यै स्यादयं सप्तमेऽहि ॥एक॥ इस प्रकार शकसंवत्सर अयन आदि समयको ज्योतिर्विदों के शास्त्रों से और हमेशा के अभ्यासवशते प्रभावशाली ज्योतिषी अच्छी तरह विचार कर के सफलीभूत ऐसा मेघमहोदय को थोड़ा परिश्रम से जानता है, और वह राजाओंको खुश करके हमेशा सिद्धि और संपदाको प्राप्त करता है ॥ एक सौ पैंतालीस ॥ सौराष्ट्रगष्ट्रान्तर्गत-पादलिप्तपूरनियासिना पण्डित भगवानदासाख्यजैनेन विरचितया मेघमहोदये बालावबोधिन्याऽऽर्यभाषया टीकितोऽयनमासपक्षनिरूपणनामा षष्ठोऽधिकारः । जब सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आवे तब उससे सातवें दिन रात्रि में प्रकाशको धारण करनेवाला और समुद्रको पीजाने में प्रधान ऐसा अगस्ति ऋऋषिका उदय हो तो चारोही दिशा में लक्ष्मीके लिये शुभ होता है ॥ एक॥ यधुदेति दिने प्रातः पीताब्धिमुनिपुः । मिक्षं रौरवं घोरं राष्ट्रङ्गं तदादिशेत् ।।दो।। रवौ च पूर्वफाल्गुन्यां प्राप्ते चेष्टमेऽहनि । अगस्तेरुद्यो लोके न शुभाय कचिन्मते ॥तीन॥ कृतिकायां रवौ जाते रुसमे वाष्टमेऽहनि । ऋषेरस्तंगतिः श्रेष्ठा दिवसे यदि जायते ॥चार॥ रात्रावुदयनं श्रेष्ठं नेष्टवास्तमो मुनेः । दिवसेऽस्तङ्गमः श्रेष्ठो नेष्टाभ्युदयस्तदा ॥पाँच॥ लोकेऽपि - सिंहा हुंती भडली, दिन इकवीसे जोय । अगस्ति महाऋषि उगीया, घन बहु वर से लोग ॥छः॥ हीरसरयोऽप्याहुःदुभिक्खं वीस दिणे इगवीसे होइ मज्झिमं समयं । यदि अगस्त्यका उदय प्रातः काल में हो तो दुर्भिक्ष, घोर उपद्रव और राज्य भंग हों ।।दो।। सूर्य जब पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आवे तब उस से आठवें दिन अगस्त्यका उदय हो तो लोक में शुभ नहीं होता ऐसा किसीका मत है ।।तीन।। सूर्य जब कृत्तिका नक्षत्र पर आवे तब उसमे सातवें या आठवे दिन अगस्यका अस्त यदि दिन में हो तो श्रेष्ठ होता है ॥चार॥ अगस्त्यका उदय रात्रि में श्रेष्ठ माना जाता है और अम्त अशुभ माना है। दिन में अस्त होना श्रेष्ठ और उदय होना श्रेष्ठ नहीं ।।पाँच।। लोक भाषामें बोलते है कि-- सिंह राशि पर सूर्य अवे तबसे इकईस दिनों में अगस्त्यका उदय होना है तब भूमि पर वर्षा बहुत होती है ॥छः॥ श्रीहिर विजयसूरि ने भी कहा है कि सिहराशि पर सूर्य आवे तबसे वीस दिन पर अगस्त्य का उदय हो तो दुर्भिक्ष हो. इईदिनप उदय हो तो मध्यमं समय हो और बाईस दिन पर उदय हो तो मुकाले हो ॥सात॥ जिस महीने में चुनसे
कल्याण आयुर्वेद - आज के समय मे खानपान और बदलते लाइफस्टाइल की वजह से ज्यादातर लोगों को कम कामेच्छा की समस्या है. यदि आपके साथ भी यह समस्या है, तो यह खबर आपके काम आ सकता है. कामेच्छा वैवाहिक जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए बहुत ही जरूरी होता है. इसके लिए कई चीजों का सेवन करना फायदेमंद होता है. आज हम आपको 5 ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कामेच्छा को बढ़ाने में मदद करता है. बादाम हमारे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यह हमारे मष्तिष्क की सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमन्द होता है. बादाम रक्त संचार को सुधारने का काम करता है और यौनेच्छा में इजाफा करता है. इससे प्रजजन क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है. साथ ही साथ रोजाना इसका सेवन करने से शरीर मे दोगुनी ताकत आती है. इसलिए सुबह की डाइट में आप इसे शामिल कर सकते हैं. महिलाओं को चॉकलेट खाना बहुत पसंद होता है. यह आप सभी जानते होंगे. लेकिन क्या आपने सुना है, कि डार्क चॉकलेट सेक्स से संबंधित समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है. दरअसल डार्क चॉकलेट में एक ऐसा केमिकल पाया जाता है, जो आपके अंदर प्यार बढ़ाता है. इसलिए महिलाओं को यह बहुत पसंद आती है. सेक्स से पहले लोगों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए. इससे उनकी कामेच्छा बढ़ती है. स्ट्रॉबेरी स्वाद में मीठी होती है और सेहत के लिए भी बेहद ही गुणवान होती है. इसमें बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं जो आपके योन शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसका सेवन महिला और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो दिल की बीमारियों से भी बचाता हैं. यदि आप यौन सम्बंधित समस्याओं से परेशान है तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए. अंडा एनर्जी देने में बहुत ही मददगार साबित होता है. पुरुषों को एनर्जी की काफी जरूरत होती है. जिससे उनका शरीर भारी भरकम काम करने के लिए तैयार है. लेकिन भारत के पुरुषों में एनर्जी की कमी के साथ मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है. इस समस्या को दूर करने के लिए अंडे का सेवन किया जा सकता है. पुरुषों के लिए सुपर फूड अंडे में प्रोटीन हेल्दी फैट, कोलीन आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं. अंडा ज्यादा कैलोरी नहीं देता है, जिससे मोटापे की समस्या भी कंट्रोल में रहती है. पुरुषों में मोटापा, डायबिटीज होना काफी आम समस्या बन चुकी है. लेकिन पुरुषों की समस्या को दूर करने के लिए साबुत अनाज का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. एक शोध के अनुसार साबुत अनाज का सेवन करने वाले पुरुषों का बैली फैट कम देखा गया. इसके साथ ही उनमें ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल पाया गया. आप अपनी डाइट में साबुत अनाज को जरूर शामिल करें. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगती हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर कर ले. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
कल्याण आयुर्वेद - आज के समय मे खानपान और बदलते लाइफस्टाइल की वजह से ज्यादातर लोगों को कम कामेच्छा की समस्या है. यदि आपके साथ भी यह समस्या है, तो यह खबर आपके काम आ सकता है. कामेच्छा वैवाहिक जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए बहुत ही जरूरी होता है. इसके लिए कई चीजों का सेवन करना फायदेमंद होता है. आज हम आपको पाँच ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कामेच्छा को बढ़ाने में मदद करता है. बादाम हमारे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यह हमारे मष्तिष्क की सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमन्द होता है. बादाम रक्त संचार को सुधारने का काम करता है और यौनेच्छा में इजाफा करता है. इससे प्रजजन क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है. साथ ही साथ रोजाना इसका सेवन करने से शरीर मे दोगुनी ताकत आती है. इसलिए सुबह की डाइट में आप इसे शामिल कर सकते हैं. महिलाओं को चॉकलेट खाना बहुत पसंद होता है. यह आप सभी जानते होंगे. लेकिन क्या आपने सुना है, कि डार्क चॉकलेट सेक्स से संबंधित समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है. दरअसल डार्क चॉकलेट में एक ऐसा केमिकल पाया जाता है, जो आपके अंदर प्यार बढ़ाता है. इसलिए महिलाओं को यह बहुत पसंद आती है. सेक्स से पहले लोगों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए. इससे उनकी कामेच्छा बढ़ती है. स्ट्रॉबेरी स्वाद में मीठी होती है और सेहत के लिए भी बेहद ही गुणवान होती है. इसमें बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं जो आपके योन शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसका सेवन महिला और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो दिल की बीमारियों से भी बचाता हैं. यदि आप यौन सम्बंधित समस्याओं से परेशान है तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए. अंडा एनर्जी देने में बहुत ही मददगार साबित होता है. पुरुषों को एनर्जी की काफी जरूरत होती है. जिससे उनका शरीर भारी भरकम काम करने के लिए तैयार है. लेकिन भारत के पुरुषों में एनर्जी की कमी के साथ मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है. इस समस्या को दूर करने के लिए अंडे का सेवन किया जा सकता है. पुरुषों के लिए सुपर फूड अंडे में प्रोटीन हेल्दी फैट, कोलीन आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं. अंडा ज्यादा कैलोरी नहीं देता है, जिससे मोटापे की समस्या भी कंट्रोल में रहती है. पुरुषों में मोटापा, डायबिटीज होना काफी आम समस्या बन चुकी है. लेकिन पुरुषों की समस्या को दूर करने के लिए साबुत अनाज का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. एक शोध के अनुसार साबुत अनाज का सेवन करने वाले पुरुषों का बैली फैट कम देखा गया. इसके साथ ही उनमें ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल पाया गया. आप अपनी डाइट में साबुत अनाज को जरूर शामिल करें. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगती हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर कर ले. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
मुंबई से सटे उल्हासनगर में बिना किसी प्रोटोकॉल के कोरोना टेस्ट किट में उपयोग होने वाले स्वैब स्टिक की पैकिंग करते हुए लोगों की विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. विडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक घर में कुछ औरतें और बच्चे पैकिंग कर रहे हैं. जमीन पर किट के पैकेट बिखरे पड़े हैं. पैक करने वालों के हाथों में ग्लब्स भी नहीं हैं. खबरों के अनुसार उल्हासनगर के कई घरों में ऐसे ही स्वैब स्टिक की पैकिंग हो रही है. इस पुरे मामले से जुड़ा कांट्रेक्टर की तलाश पुलिस कर रही है. मेडिकल एक्पर्ट्स के अनुसार सुराक्षा को अनदेखा करके इस तरह पैक किया गए स्वैब स्टिक से किसी शख्स की टेस्टिंग की जाती है, तो उसे वायरल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है. विडियो में दिखाए गए जगह पर ठाणे पुलिस ने रेड मारी. पुलिस के मुताबिक, इस तरह के कई घरों में आर्टिफिशियल किट बनाई जा रही है. कोरोना महामारी से निपटने के लिए बनाए गए वैज्ञानिकों के संगठन ISRC के को फाउंडर डॉ. एस कृष्णास्वामी के मुताबिक, इस तरह पैक की गई स्वैब स्टिक को नाक में डालने से वायरल इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन का खतरा है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
मुंबई से सटे उल्हासनगर में बिना किसी प्रोटोकॉल के कोरोना टेस्ट किट में उपयोग होने वाले स्वैब स्टिक की पैकिंग करते हुए लोगों की विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. विडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक घर में कुछ औरतें और बच्चे पैकिंग कर रहे हैं. जमीन पर किट के पैकेट बिखरे पड़े हैं. पैक करने वालों के हाथों में ग्लब्स भी नहीं हैं. खबरों के अनुसार उल्हासनगर के कई घरों में ऐसे ही स्वैब स्टिक की पैकिंग हो रही है. इस पुरे मामले से जुड़ा कांट्रेक्टर की तलाश पुलिस कर रही है. मेडिकल एक्पर्ट्स के अनुसार सुराक्षा को अनदेखा करके इस तरह पैक किया गए स्वैब स्टिक से किसी शख्स की टेस्टिंग की जाती है, तो उसे वायरल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है. विडियो में दिखाए गए जगह पर ठाणे पुलिस ने रेड मारी. पुलिस के मुताबिक, इस तरह के कई घरों में आर्टिफिशियल किट बनाई जा रही है. कोरोना महामारी से निपटने के लिए बनाए गए वैज्ञानिकों के संगठन ISRC के को फाउंडर डॉ. एस कृष्णास्वामी के मुताबिक, इस तरह पैक की गई स्वैब स्टिक को नाक में डालने से वायरल इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन का खतरा है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.