raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
आईपीएल 2022 के मुंबई चरण के दौरान सभी 10 टीमें अलग-अलग होटल में रहेंगी।
सनराइजर्स हैदराबाद मुंबई में अंधेरी ईस्ट में स्थित आईटीसी मराठा में रहेगा। इस होटल की सबसे अच्छी बात यह है कि यह मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 1. 1 मील की दूरी पर स्थित है और साथ ही यह मुंबई घरेलू हवाई अड्डे से 3. 1 मील दूर है।
इस पांच सितारा होटल में सबसे अच्छी सेवाओं में मसाज चेयर और बटलर सेवाएं शामिल हैं, सभी अतिथि कमरे जिनमें न केवल एक सैटेलाइट टीवी है, बल्कि विभिन्न अन्य अनूठी और सामान्य सुविधाओं के अलावा चाय / कॉफी बनाने की सुविधा भी है। सबसे अच्छी चीज जिसका SRH सदस्य यहां आनंद ले सकते हैं, वह है फैबेल, चॉकलेट बुटीक जहां वो एक से बढ़कर एक चॉकलेट, डेसर्ट और आइसक्रीम का लुत्फ़ उठा सकते हैं।
आईपीएलआईपीएल 2022 (IPL 2022)आईपीएल 2023कोलकाता नाइट राइडर्सगुजरात टाइटन्सचेन्नई सुपर किंग्समुंबई इंडियंसराजस्थन रॉयल्सरॉयल चैलेंजर्स बैंगलोरलखनऊ सुपर जायंट्स (LSG)
|
आईपीएल दो हज़ार बाईस के मुंबई चरण के दौरान सभी दस टीमें अलग-अलग होटल में रहेंगी। सनराइजर्स हैदराबाद मुंबई में अंधेरी ईस्ट में स्थित आईटीसी मराठा में रहेगा। इस होटल की सबसे अच्छी बात यह है कि यह मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ एक. एक मील की दूरी पर स्थित है और साथ ही यह मुंबई घरेलू हवाई अड्डे से तीन. एक मील दूर है। इस पांच सितारा होटल में सबसे अच्छी सेवाओं में मसाज चेयर और बटलर सेवाएं शामिल हैं, सभी अतिथि कमरे जिनमें न केवल एक सैटेलाइट टीवी है, बल्कि विभिन्न अन्य अनूठी और सामान्य सुविधाओं के अलावा चाय / कॉफी बनाने की सुविधा भी है। सबसे अच्छी चीज जिसका SRH सदस्य यहां आनंद ले सकते हैं, वह है फैबेल, चॉकलेट बुटीक जहां वो एक से बढ़कर एक चॉकलेट, डेसर्ट और आइसक्रीम का लुत्फ़ उठा सकते हैं। आईपीएलआईपीएल दो हज़ार बाईस आईपीएल दो हज़ार तेईसकोलकाता नाइट राइडर्सगुजरात टाइटन्सचेन्नई सुपर किंग्समुंबई इंडियंसराजस्थन रॉयल्सरॉयल चैलेंजर्स बैंगलोरलखनऊ सुपर जायंट्स
|
चंडीगढ़/पंचकूला, 19 अक्तूबर (नस)
मनीमाजरा में सोमवार सुबह केंद्र सरकार से रिटायर्ड इंजीनियर ने खुद को गोली मार ली। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। 70 वर्षीय शैलेंद्र फुल्का ने अपनी पिस्तौल से गोली मारी। शैलेंद्र अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। पुलिस को प्राथमिक जांच में पता चला है कि शैलेंद्र दिमागी रूप से परेशान थे और जीएमसीएच 32 में उनका इलाज चल रहा है। सुबह घर में पत्नी को कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब वे कमरे में पहुंची तो शैलेंद्र जमीन पर लहूलुहान हालत में गिरे हुए थे। पड़ोस के लोग घर पहुंचे और पुलिस कंट्रोल रूम पर घटना की जानकारी दी। पीसीआर शैलेंद्र फुल्का को अस्पताल ले गयी, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
|
चंडीगढ़/पंचकूला, उन्नीस अक्तूबर मनीमाजरा में सोमवार सुबह केंद्र सरकार से रिटायर्ड इंजीनियर ने खुद को गोली मार ली। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। सत्तर वर्षीय शैलेंद्र फुल्का ने अपनी पिस्तौल से गोली मारी। शैलेंद्र अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। पुलिस को प्राथमिक जांच में पता चला है कि शैलेंद्र दिमागी रूप से परेशान थे और जीएमसीएच बत्तीस में उनका इलाज चल रहा है। सुबह घर में पत्नी को कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब वे कमरे में पहुंची तो शैलेंद्र जमीन पर लहूलुहान हालत में गिरे हुए थे। पड़ोस के लोग घर पहुंचे और पुलिस कंट्रोल रूम पर घटना की जानकारी दी। पीसीआर शैलेंद्र फुल्का को अस्पताल ले गयी, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
|
72 Hoorain: अशोक पंडित ने सीबीएफसी पर जताई नाराजगी, बोले- जिस फिल्म को सराहा, उसके ट्रेलर से क्या दिक्कत?
फिल्म मेकर अशोक पंडित ने सीबीएफसी पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया गया है तो ट्रेलर को क्यों नहीं मिल रहा है?
फिल्म '72 हूरें' चर्चा में है। आज इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। हालांकि, ट्रेलर को डिजिटल माध्यम से जारी किया गया है, क्योंकि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के ट्रेलर को सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा '72 हूरें' के ट्रेलर को सर्टिफिकेट न दिए जाने से इस फिल्म के निर्माता अशोक पंडित काफी नाराज हैं। हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने सीबीएफसी पर जमकर गुस्सा निकाला है।
अशोक पंडित से जब पूछा गया कि '72 हूरें' सेंसर पर अटक गई है और वह एक बड़ा चर्चा का विषय हो गया है? इस पर अशोक पंडित ने कहा, 'चर्चा का विषय इसलिए हुआ क्योंकि आपने हमारे ट्रेलर को कट्स देकर कहा कि ये शॉट काटिए, उसके बाद आपको सर्टिफिकेट देंगे। हम एक प्रोड्यूसर, मेकर और इंडस्ट्री से होने के नाते यह सवाल कर रहे हैं कि जिस फिल्म को आपने सेंसर सर्टिफिकेट दिया है, जिसे आपने सराहा है, उसी फिल्म के ही शॉट का अंश है ट्रेलर। जब फिल्म में आपको पसंद है, आपने उसके लिए तालियां बजाईं तो आपको ट्रेलर में क्या दिक्कत है? यह साधारण सा सवाल है हमारा। यह लॉजिकल बात है। '
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
बहत्तर Hoorain: अशोक पंडित ने सीबीएफसी पर जताई नाराजगी, बोले- जिस फिल्म को सराहा, उसके ट्रेलर से क्या दिक्कत? फिल्म मेकर अशोक पंडित ने सीबीएफसी पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया गया है तो ट्रेलर को क्यों नहीं मिल रहा है? फिल्म 'बहत्तर हूरें' चर्चा में है। आज इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। हालांकि, ट्रेलर को डिजिटल माध्यम से जारी किया गया है, क्योंकि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के ट्रेलर को सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा 'बहत्तर हूरें' के ट्रेलर को सर्टिफिकेट न दिए जाने से इस फिल्म के निर्माता अशोक पंडित काफी नाराज हैं। हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने सीबीएफसी पर जमकर गुस्सा निकाला है। अशोक पंडित से जब पूछा गया कि 'बहत्तर हूरें' सेंसर पर अटक गई है और वह एक बड़ा चर्चा का विषय हो गया है? इस पर अशोक पंडित ने कहा, 'चर्चा का विषय इसलिए हुआ क्योंकि आपने हमारे ट्रेलर को कट्स देकर कहा कि ये शॉट काटिए, उसके बाद आपको सर्टिफिकेट देंगे। हम एक प्रोड्यूसर, मेकर और इंडस्ट्री से होने के नाते यह सवाल कर रहे हैं कि जिस फिल्म को आपने सेंसर सर्टिफिकेट दिया है, जिसे आपने सराहा है, उसी फिल्म के ही शॉट का अंश है ट्रेलर। जब फिल्म में आपको पसंद है, आपने उसके लिए तालियां बजाईं तो आपको ट्रेलर में क्या दिक्कत है? यह साधारण सा सवाल है हमारा। यह लॉजिकल बात है। ' हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
1 अगस्त 2019 से एशेज़ सीरीज़ के साथ शुरु हुई आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अब पूरी तरह से अपने आखिरी चरण में आ चुका है. दुनिया भर की टेस्ट खेलने वाली टीमों के बीच 2 साल तक चली कड़ी प्रतिद्वंदिता के बाद अब इस टूर्नामेंट का फ़ाइनल भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेला जाएगा.
भारतीय टीम के लिए सीनियर बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) की भूमिका इस मैच में काफ़ी अहम होने वाली है. इसी सिलसिले में पूर्व सीनियर भारतीय बल्लेबाज़ और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने रोहित शर्मा की सलामी बल्लेबाज़ी को लेकर काफ़ी अहम बयान दिया है.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 जुन से साउथैम्पटन में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेला जाएगा. इस मुक़ाबले में रोहित शर्मा पारी की शुरुआत कर सकते हैं. जिसको लेकर अभी से क्रिकेट पंडितों की राय सामने आने लगी हैं .
हिंदुस्तान टाइम्स के लेख में संजय कहतें हैं कि,
हिट मैन शर्मा की इंग्लैंड दौरे पर बैटिंग का टेस्ट होगा. उन्हे एक बल्लेबाज के तौर पर अपने कैरेक्टर में बदलाव करना पड़ सकता है. एक टेस्ट ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा के लिए चुनौती तो ज़रूर हैं.
टेस्ट चैंपियनशिप में बतौर ओपनर रोहित शर्मा के साथ मंयक अग्रवाल, केएल राहुल (KL Rahul) या फिर शुभमन गिल को मौका मिल सकता है . राहुल ने न्यूजीलैंडके खिलाफ टी-20 सीरीज़ में बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन इस बार राहुल का भी टेस्ट होना हैं.
|
एक अगस्त दो हज़ार उन्नीस से एशेज़ सीरीज़ के साथ शुरु हुई आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अब पूरी तरह से अपने आखिरी चरण में आ चुका है. दुनिया भर की टेस्ट खेलने वाली टीमों के बीच दो साल तक चली कड़ी प्रतिद्वंदिता के बाद अब इस टूर्नामेंट का फ़ाइनल भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेला जाएगा. भारतीय टीम के लिए सीनियर बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और कप्तान विराट कोहली की भूमिका इस मैच में काफ़ी अहम होने वाली है. इसी सिलसिले में पूर्व सीनियर भारतीय बल्लेबाज़ और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने रोहित शर्मा की सलामी बल्लेबाज़ी को लेकर काफ़ी अहम बयान दिया है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच अट्ठारह जुन से साउथैम्पटन में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेला जाएगा. इस मुक़ाबले में रोहित शर्मा पारी की शुरुआत कर सकते हैं. जिसको लेकर अभी से क्रिकेट पंडितों की राय सामने आने लगी हैं . हिंदुस्तान टाइम्स के लेख में संजय कहतें हैं कि, हिट मैन शर्मा की इंग्लैंड दौरे पर बैटिंग का टेस्ट होगा. उन्हे एक बल्लेबाज के तौर पर अपने कैरेक्टर में बदलाव करना पड़ सकता है. एक टेस्ट ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा के लिए चुनौती तो ज़रूर हैं. टेस्ट चैंपियनशिप में बतौर ओपनर रोहित शर्मा के साथ मंयक अग्रवाल, केएल राहुल या फिर शुभमन गिल को मौका मिल सकता है . राहुल ने न्यूजीलैंडके खिलाफ टी-बीस सीरीज़ में बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन इस बार राहुल का भी टेस्ट होना हैं.
|
शिमला। सेब की MSP, APMC एक्ट, लीगल मैट्रौलॉजी एक्ट, हिमाचल प्रदेश पैसेंजर एंड गुड्स एक्ट जैसी 17 मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradseh) के बागवान 6 जुलाई को सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। सेब उत्पादक संघ (Apple Growers Association) के आज यहां संपन्न अधिवेशन में यह फैसला लिया गया। विरोध प्रदर्शन सभी ब्लाक में SDM या तहसीलदार दफ्तर के बाहर किया जाएगा।
अधिवेशन में बागवानों की 17 मांगों को लेकर चर्चा की गई। 6 जून के प्रदर्शन के दौरान बागवानों की मांगे नहीं मानी गई तो इसके बाद आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। सेब उत्पादक संघ के हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने बताया कि बागवानों ने APMC एक्ट 2005, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 और पैसेंजर एंड गुड्स टैक्स एक्ट 1955 के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की है।
संघ ने अधिवेशन में APMC एक्ट, लीगल मैट्रौलॉजी एक्ट, हिमाचल प्रदेश पैसेंजर एंड गुड्स एक्ट को लागू करने, यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने, सेब की पैकेजिंग सामग्री को GST फ्री करने, ए ग्रेड सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य 80 रुपए, बी ग्रेड का 60 रुपए, सी ग्रेड का 30 रुपए तय करने, HPMC व व हिमफैड द्वारा बागवानों की बकाया पेमेंट का भुगतान करने, ओलावृष्टि व असामयिक बारिश-बर्फबारी से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
अधिवेशन में बागवानों ने प्रति पेटी 24 किलो सेब भरने की शर्त का विरोध किया। सोहन ठाकुर ने बताया कि कुल्लू में 24 किलो की पेटी का बागवान को 20 किलो का पर्चा देकर रेट तय किया जाएगा। यह प्रदेश के बागवानों के साथ ठगी होगी। यह निर्णय व्यावहारिक नहीं है। सेब की पैकिंग इंटरनेशनल स्टेंडर्ड के हिसाब से यानी 20 किलो प्रति पेटी होनी है। उन्होंने बताया कि अधिवेशन में बागवानों ने टेलीस्कोपिक की जगह यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने की मांग की।
|
शिमला। सेब की MSP, APMC एक्ट, लीगल मैट्रौलॉजी एक्ट, हिमाचल प्रदेश पैसेंजर एंड गुड्स एक्ट जैसी सत्रह मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश के बागवान छः जुलाई को सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। सेब उत्पादक संघ के आज यहां संपन्न अधिवेशन में यह फैसला लिया गया। विरोध प्रदर्शन सभी ब्लाक में SDM या तहसीलदार दफ्तर के बाहर किया जाएगा। अधिवेशन में बागवानों की सत्रह मांगों को लेकर चर्चा की गई। छः जून के प्रदर्शन के दौरान बागवानों की मांगे नहीं मानी गई तो इसके बाद आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। सेब उत्पादक संघ के हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने बताया कि बागवानों ने APMC एक्ट दो हज़ार पाँच, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट दो हज़ार नौ और पैसेंजर एंड गुड्स टैक्स एक्ट एक हज़ार नौ सौ पचपन के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। संघ ने अधिवेशन में APMC एक्ट, लीगल मैट्रौलॉजी एक्ट, हिमाचल प्रदेश पैसेंजर एंड गुड्स एक्ट को लागू करने, यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने, सेब की पैकेजिंग सामग्री को GST फ्री करने, ए ग्रेड सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य अस्सी रुपयापए, बी ग्रेड का साठ रुपयापए, सी ग्रेड का तीस रुपयापए तय करने, HPMC व व हिमफैड द्वारा बागवानों की बकाया पेमेंट का भुगतान करने, ओलावृष्टि व असामयिक बारिश-बर्फबारी से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। अधिवेशन में बागवानों ने प्रति पेटी चौबीस किलो सेब भरने की शर्त का विरोध किया। सोहन ठाकुर ने बताया कि कुल्लू में चौबीस किलो की पेटी का बागवान को बीस किलो का पर्चा देकर रेट तय किया जाएगा। यह प्रदेश के बागवानों के साथ ठगी होगी। यह निर्णय व्यावहारिक नहीं है। सेब की पैकिंग इंटरनेशनल स्टेंडर्ड के हिसाब से यानी बीस किलो प्रति पेटी होनी है। उन्होंने बताया कि अधिवेशन में बागवानों ने टेलीस्कोपिक की जगह यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने की मांग की।
|
Posted On:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 जून 2022 को देश के युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने के लिए 'अग्निपथ' नामक एक आकर्षक भर्ती योजना को मंजूरी दी। इस योजना को अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा। अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों में चार साल की अवधि के लिए सेवा करने हेतु देशभक्त युवाओं को प्रेरित करेगी। अग्निपथ योजना को सशस्त्र बलों के युवा प्रोफाइल को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है।
हमारे अग्निवीरों की भावी करियर संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें असैनिक क्षेत्र में विभिन्न नौकरियों के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय, रक्षा कर्मियों की सेवा के लिए एक विशेष तीन वर्षीय कौशल आधारित स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू कर रहा है जो रक्षा प्रतिष्ठानों में अग्निवीरों द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त किए गए कौशल प्रशिक्षण को मान्यता देगा।
इग्नू द्वारा तैयार और निष्पादित किए जाने वाले इस कार्यक्रम के तहत स्नातक उपाधि के लिए आवश्यक 50 प्रतिशत क्रेडिट कौशल प्रशिक्षण से मिलेगा जिसमे अग्निवीर द्वारा प्राप्त तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों प्रशिक्षण शामिल हैं और शेष 50 प्रतिशत क्रेडिट विभिन्न पाठ्यक्रमों से आएगा जिसमें भाषा, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, गणित, शिक्षा, वाणिज्य, पर्यटन, व्यावसायिक अध्ययन, कृषि और ज्योतिष जैसे विषयों की व्यापक विविधता शामिल है। इसके अलावा इसमें पर्यावरण अध्ययन और संचार कौशल के बारे में अंग्रेजी भाषा में क्षमता वृद्धि करने वाले पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।
यह स्नातक डिग्री कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क/राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप है। इसमें कई निकास बिंदुओं का भी प्रावधान है - प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर 'अवर स्नातक सर्टिफिकेट' (प्रमाणपत्र), प्रथम और द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर 'अवर स्नातक डिप्लोमा' और तीन वर्ष की समय सीमा में सभी पाठ्यक्रमों के पूरा होने पर डिग्री प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम की रूपरेखा को संबंधित नियामक निकायों- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) और यूजीसी द्वारा विधिवत मान्यता दी गई है। डिग्री यूजीसी नामकरण के अनुसार इग्नू द्वारा प्रदान की जाएगी। इसमें (बीए; बी कॉम; बीए (व्यावसायिक); बीए (पर्यटन प्रबंधन)) की शामिल है। इन्हें जिसे रोजगार और आगे की पढ़ाई के लिए भारत और विदेश दोनों में मान्यता प्राप्त होगी।
योजना के कार्यान्वयन के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना इग्नू के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगी।
|
Posted On: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चौदह जून दो हज़ार बाईस को देश के युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने के लिए 'अग्निपथ' नामक एक आकर्षक भर्ती योजना को मंजूरी दी। इस योजना को अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा। अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों में चार साल की अवधि के लिए सेवा करने हेतु देशभक्त युवाओं को प्रेरित करेगी। अग्निपथ योजना को सशस्त्र बलों के युवा प्रोफाइल को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है। हमारे अग्निवीरों की भावी करियर संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें असैनिक क्षेत्र में विभिन्न नौकरियों के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय, रक्षा कर्मियों की सेवा के लिए एक विशेष तीन वर्षीय कौशल आधारित स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू कर रहा है जो रक्षा प्रतिष्ठानों में अग्निवीरों द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त किए गए कौशल प्रशिक्षण को मान्यता देगा। इग्नू द्वारा तैयार और निष्पादित किए जाने वाले इस कार्यक्रम के तहत स्नातक उपाधि के लिए आवश्यक पचास प्रतिशत क्रेडिट कौशल प्रशिक्षण से मिलेगा जिसमे अग्निवीर द्वारा प्राप्त तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों प्रशिक्षण शामिल हैं और शेष पचास प्रतिशत क्रेडिट विभिन्न पाठ्यक्रमों से आएगा जिसमें भाषा, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र, गणित, शिक्षा, वाणिज्य, पर्यटन, व्यावसायिक अध्ययन, कृषि और ज्योतिष जैसे विषयों की व्यापक विविधता शामिल है। इसके अलावा इसमें पर्यावरण अध्ययन और संचार कौशल के बारे में अंग्रेजी भाषा में क्षमता वृद्धि करने वाले पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। यह स्नातक डिग्री कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदंडों व राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के तहत अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क/राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप है। इसमें कई निकास बिंदुओं का भी प्रावधान है - प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर 'अवर स्नातक सर्टिफिकेट' , प्रथम और द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रमों के सफल समापन पर 'अवर स्नातक डिप्लोमा' और तीन वर्ष की समय सीमा में सभी पाठ्यक्रमों के पूरा होने पर डिग्री प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम की रूपरेखा को संबंधित नियामक निकायों- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद और यूजीसी द्वारा विधिवत मान्यता दी गई है। डिग्री यूजीसी नामकरण के अनुसार इग्नू द्वारा प्रदान की जाएगी। इसमें ; बीए ) की शामिल है। इन्हें जिसे रोजगार और आगे की पढ़ाई के लिए भारत और विदेश दोनों में मान्यता प्राप्त होगी। योजना के कार्यान्वयन के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना इग्नू के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगी।
|
- #Narendra ModiParliament Monsoon Session 20 जुलाई से, एक दिन पहले NDA फ्लोर लीडर्स की बैठक, प्रह्लाद जोशी ने क्या बताया?
- #Narendra Modi2024 में दक्षिण भारत से भी चुनाव लड़ सकते हैं पीएम मोदी, 'सुरक्षित' सीट की तलाश?
9 Years of Modi Gov: भाजपा-एनडीए की अगुवाई वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने 9 साल के कार्यकाल को पूरा कर लिया है। पीएम मोदी ने 2014 में 26 मई को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 में फिर से वह दूसरी बार पीएम बने थे।
पिछले 9 साल में पीएम मोदी ने कई जन योजनाओं की शुरुआत की। आइए डालते हैं पीएम मोदी के 9 साल के कार्यकाल के दौरान शुरू की 9 अहम योजनाओं के बारे में जो जनहित में शुरू की गई और जिसने लोगों के जीवन को बदलने का काम किया।
इस योजना के तहत 1. 70 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया जोकि गरीबों की मदद के लिए शुरू की गई थी। कोरोना काल में मार्च 2020 में गरीबों की मदद के लिए इसकी शुरुआत की गई थी, ताकि गरीबों तक पैसा और खाद्य सामग्री पहुंच सके और उन्हें मुश्किलों का सामना ना करना पड़े।
1जुलाई 2017 को जीएसटी को लागू किया गया। इससे पहले केंद्र और राज्य अलग-अलग टैक्स वसूलते थे, लेकिन जीएसटी के आने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, सीएसटी, पर्चेज टैक्स खत्म हो गया। जीएसटी मे 17 करों को और 13 सेस को शामिल किया गया।
इसकी शुरुआत 24 फरवरी 2019 में हुई थी, जिसके जरिए किसानों को उनके खेत के आधार पर आर्थिक मदद की जाती है। किसानों को 6000 रुपए प्रति वर्ष तीन किश्तों में दिया जाता है। हर चार महीने पर यह राशि दी जाती है।
इस योजना की शुरुआत 9 मई 2015 में हुई थी। असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे 18-40 साल की उम्र के लोगों के लिए यह योजना शुरू हुई थी, इसके लिए आपके पास बैंक खाता होना चाहिए। इसके लिए न्यूनतम सीमा 20 साल या उससे अधिक होना चाहिए। इसके तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1000-5000 रुपए तक की पेंशन मिलेगी।
इसकी शुरुआत 15 अगस्त 2014 को हुई थी। इसके तहत देश में अगस्त 2021 तक 43. 04 करोड़ बैंक खाते खोले गए, जिसमे कुल 146231 करोड़ रुपए जमा हैं। इस योजना का मुख्य लक्ष्य लोगों को वित्तीय सेवाओं, बैंकिंग सेवाओं आदि को पहुंचाना था।
इसकी शुरुआत 1 जून 2020 को हुई थी। इसके जरिए पटरी दुकानदार जो कोरोना काल में प्रभावित हुए थे, उन्हें लोन मुहैया कराया जाता है।
इसकी शुरुआत 2015 में की3 गई थी। इसके तहत लोगो को कम दाम पर बीमा मुहैया कराना है। 18-50 साल की उम्र के लोगों के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत अगर व्यक्ति की मृत्यु होती है तो 2 लाख रुपए का राशि मिलीत है, इसके लिए प्रति माह सिर्फ 330 रुपए प्रति वर्ष देना होता है।
इस योजना के तहत अगर किसी की मृत्यु होती है या वह दिव्यांग होता है तो उसे आर्थिक मदद मुहैया कराई जाती है। यह योजना 18-70 वर्ष के लोगों के लिए है। इसके लिए भी बैंक खाता होना जरूरी है। हादसे में मृत्यु होने पर 2 लाख, दिव्यांग होने पर 1 लाख रुपए की राशि मिलती है।
इसकी शुरुआत 1 मई 2016 को हुई थी। इसके तहत लोगों को मुफ्त में गैस कनेक्शन मुहैया कराया गया था। 10 अगस्त 2021 को उज्ज्वला 2. 0 की शुरुआत हुई थी।
|
- #Narendra ModiParliament Monsoon Session बीस जुलाई से, एक दिन पहले NDA फ्लोर लीडर्स की बैठक, प्रह्लाद जोशी ने क्या बताया? - #Narendra Modiदो हज़ार चौबीस में दक्षिण भारत से भी चुनाव लड़ सकते हैं पीएम मोदी, 'सुरक्षित' सीट की तलाश? नौ Years of Modi Gov: भाजपा-एनडीए की अगुवाई वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने नौ साल के कार्यकाल को पूरा कर लिया है। पीएम मोदी ने दो हज़ार चौदह में छब्बीस मई को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद दो हज़ार उन्नीस में फिर से वह दूसरी बार पीएम बने थे। पिछले नौ साल में पीएम मोदी ने कई जन योजनाओं की शुरुआत की। आइए डालते हैं पीएम मोदी के नौ साल के कार्यकाल के दौरान शुरू की नौ अहम योजनाओं के बारे में जो जनहित में शुरू की गई और जिसने लोगों के जीवन को बदलने का काम किया। इस योजना के तहत एक. सत्तर लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया जोकि गरीबों की मदद के लिए शुरू की गई थी। कोरोना काल में मार्च दो हज़ार बीस में गरीबों की मदद के लिए इसकी शुरुआत की गई थी, ताकि गरीबों तक पैसा और खाद्य सामग्री पहुंच सके और उन्हें मुश्किलों का सामना ना करना पड़े। एकजुलाई दो हज़ार सत्रह को जीएसटी को लागू किया गया। इससे पहले केंद्र और राज्य अलग-अलग टैक्स वसूलते थे, लेकिन जीएसटी के आने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, सीएसटी, पर्चेज टैक्स खत्म हो गया। जीएसटी मे सत्रह करों को और तेरह सेस को शामिल किया गया। इसकी शुरुआत चौबीस फरवरी दो हज़ार उन्नीस में हुई थी, जिसके जरिए किसानों को उनके खेत के आधार पर आर्थिक मदद की जाती है। किसानों को छः हज़ार रुपयापए प्रति वर्ष तीन किश्तों में दिया जाता है। हर चार महीने पर यह राशि दी जाती है। इस योजना की शुरुआत नौ मई दो हज़ार पंद्रह में हुई थी। असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे अट्ठारह-चालीस साल की उम्र के लोगों के लिए यह योजना शुरू हुई थी, इसके लिए आपके पास बैंक खाता होना चाहिए। इसके लिए न्यूनतम सीमा बीस साल या उससे अधिक होना चाहिए। इसके तहत साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर एक हज़ार-पाँच हज़ार रुपयापए तक की पेंशन मिलेगी। इसकी शुरुआत पंद्रह अगस्त दो हज़ार चौदह को हुई थी। इसके तहत देश में अगस्त दो हज़ार इक्कीस तक तैंतालीस. चार करोड़ बैंक खाते खोले गए, जिसमे कुल एक लाख छियालीस हज़ार दो सौ इकतीस करोड़ रुपए जमा हैं। इस योजना का मुख्य लक्ष्य लोगों को वित्तीय सेवाओं, बैंकिंग सेवाओं आदि को पहुंचाना था। इसकी शुरुआत एक जून दो हज़ार बीस को हुई थी। इसके जरिए पटरी दुकानदार जो कोरोना काल में प्रभावित हुए थे, उन्हें लोन मुहैया कराया जाता है। इसकी शुरुआत दो हज़ार पंद्रह में कीतीन गई थी। इसके तहत लोगो को कम दाम पर बीमा मुहैया कराना है। अट्ठारह-पचास साल की उम्र के लोगों के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत अगर व्यक्ति की मृत्यु होती है तो दो लाख रुपए का राशि मिलीत है, इसके लिए प्रति माह सिर्फ तीन सौ तीस रुपयापए प्रति वर्ष देना होता है। इस योजना के तहत अगर किसी की मृत्यु होती है या वह दिव्यांग होता है तो उसे आर्थिक मदद मुहैया कराई जाती है। यह योजना अट्ठारह-सत्तर वर्ष के लोगों के लिए है। इसके लिए भी बैंक खाता होना जरूरी है। हादसे में मृत्यु होने पर दो लाख, दिव्यांग होने पर एक लाख रुपए की राशि मिलती है। इसकी शुरुआत एक मई दो हज़ार सोलह को हुई थी। इसके तहत लोगों को मुफ्त में गैस कनेक्शन मुहैया कराया गया था। दस अगस्त दो हज़ार इक्कीस को उज्ज्वला दो. शून्य की शुरुआत हुई थी।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
कल्याण आयुर्वेद - बीमार पड़ने पर अक्सर अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डिहाइड्रेशन कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. जी हां जी मिचलाना भी डीहाइड्रेशन का परिणाम हो सकता है. यह आगे उल्टी का कारण बन सकता है. जी मिचलाना एक बहुत ही बुरा एहसास है जो आपको असहज कर सकता है. ऐसी स्थिति में लोग चाय पीते हैं ऐसे में आज हम आपको चाय के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी स्थिति को दूर करने का काम करेगी.
चाय कई लोगों के लिए दैनिक दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. बहुत से लोग अपने दिन की शुरुआत एक कप चाय के बिना नहीं कर सकते हैं. जबकि कुछ लोगों को चाहे ना मिलने की वजह से सिर दर्द भी होने लगता है. लेकिन यह चाय सेहत के लिए हानिकारक होती है. ऐसे में आप कुछ हर्बल चाय जैसे अदरक की चाय पुदीने की चाय या कैमोमाइल चाय का सेवन कर सकते हैं. इससे आपको जी मिचलाने की समस्या से राहत तो मिलेगा ही साथ ही अलग-अलग शारीरिक और मानसिक समस्याओं से लड़ने में मदद मिलेगी.
पूरी ने में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आपको बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है. पुदीने की चाय जी मिचलाने के साथ-साथ अन्य समस्याओं में भी राहत दिलाने में मदद करती है. पुदीने की चाय पीने से पेट की समस्याओं के साथ साथ डीहाइड्रेशन से भी राहत मिल सकती है. यह आपको तनाव से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है.
मुलेठी कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है मुलेठी वाली चाय पीने से आपको अनगिनत स्वास्थ्य फायदे मिल सकते हैं. इस चाय को तैयार करने के लिए मुलेठी की जड़ का उपयोग कर सकते हैं. जिसे अक्सर स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मुलेठी की चाय जी मिचलाने का कारगर उपाय मानी जाती है. इस चाय के एंटीबैक्टीरियल गुण आपको चक्कर आना और उल्टी जैसी समस्या से बचाने में मदद करते हैं. यह डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करता है.
नींबू की चाय हल्की खट्टी और स्वाद में बेहतरीन होती है यह मतली को ठीक करने में आपकी मदद कर सकती है. नींबू की चाय में साइट्रिक एसिड की उपस्थिति होती है जो पाचन को बढ़ावा देती है और पेट की खराबी का इलाज करने में मदद करती है. यह डिटॉक्सिफिकेशन में भी मददगार साबित होती है.
अदरक की चाय आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए वरदान की तरह है. यह अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को खत्म करने में मदद कर सकती है. अदरक अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर होती है. यह आपको जी मिचलाने के साथ-साथ पेट की कई समस्याओं का इलाज करने में भी मदद कर सकती है. इससे तनाव को कम करने में भी मदद मिलती.
आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर करें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
|
कल्याण आयुर्वेद - बीमार पड़ने पर अक्सर अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डिहाइड्रेशन कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. जी हां जी मिचलाना भी डीहाइड्रेशन का परिणाम हो सकता है. यह आगे उल्टी का कारण बन सकता है. जी मिचलाना एक बहुत ही बुरा एहसास है जो आपको असहज कर सकता है. ऐसी स्थिति में लोग चाय पीते हैं ऐसे में आज हम आपको चाय के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी स्थिति को दूर करने का काम करेगी. चाय कई लोगों के लिए दैनिक दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. बहुत से लोग अपने दिन की शुरुआत एक कप चाय के बिना नहीं कर सकते हैं. जबकि कुछ लोगों को चाहे ना मिलने की वजह से सिर दर्द भी होने लगता है. लेकिन यह चाय सेहत के लिए हानिकारक होती है. ऐसे में आप कुछ हर्बल चाय जैसे अदरक की चाय पुदीने की चाय या कैमोमाइल चाय का सेवन कर सकते हैं. इससे आपको जी मिचलाने की समस्या से राहत तो मिलेगा ही साथ ही अलग-अलग शारीरिक और मानसिक समस्याओं से लड़ने में मदद मिलेगी. पूरी ने में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आपको बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है. पुदीने की चाय जी मिचलाने के साथ-साथ अन्य समस्याओं में भी राहत दिलाने में मदद करती है. पुदीने की चाय पीने से पेट की समस्याओं के साथ साथ डीहाइड्रेशन से भी राहत मिल सकती है. यह आपको तनाव से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है. मुलेठी कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है मुलेठी वाली चाय पीने से आपको अनगिनत स्वास्थ्य फायदे मिल सकते हैं. इस चाय को तैयार करने के लिए मुलेठी की जड़ का उपयोग कर सकते हैं. जिसे अक्सर स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मुलेठी की चाय जी मिचलाने का कारगर उपाय मानी जाती है. इस चाय के एंटीबैक्टीरियल गुण आपको चक्कर आना और उल्टी जैसी समस्या से बचाने में मदद करते हैं. यह डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करता है. नींबू की चाय हल्की खट्टी और स्वाद में बेहतरीन होती है यह मतली को ठीक करने में आपकी मदद कर सकती है. नींबू की चाय में साइट्रिक एसिड की उपस्थिति होती है जो पाचन को बढ़ावा देती है और पेट की खराबी का इलाज करने में मदद करती है. यह डिटॉक्सिफिकेशन में भी मददगार साबित होती है. अदरक की चाय आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए वरदान की तरह है. यह अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को खत्म करने में मदद कर सकती है. अदरक अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर होती है. यह आपको जी मिचलाने के साथ-साथ पेट की कई समस्याओं का इलाज करने में भी मदद कर सकती है. इससे तनाव को कम करने में भी मदद मिलती. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक तथा शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर करें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
|
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चुनाव की मतदान प्रक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात प्रत्याशियों व उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है। मतदान का अगला पूरा दिन प्रत्याशियों ने अपने परिवार के साथ बिताया और लगातार 15 दिन तक चुनाव प्रचार कर हुई थकान के बाद घर पर रहकर आराम किया। इस दौरान प्रत्याशियों के समर्थक उनसे मिलने आते रहे और हार-जीत के आंकड़े भी बताते रहे।
मुजफ्फरनगर नगरपालिका से अध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप ने शुक्रवार का दिन अपने परिवार के साथ बिताया। पिछले लगभग 15 दिन से दिन-रात चुनाव प्रचार में जुटी रही मीनाक्षी स्वरूप व उनके पति गौरव स्वरूप ने घर पर रहकर आराम किया और अपने दोनों पुत्रों व परिवार के साथ चुनाव को लेकर चर्चा की। गौरव स्वरूप के पटेलनगर स्थित आवास पर सुबह से ही समर्थकों का आना-जाना लगा रहा और मतदान को लेकर चर्चा होती रही।
सभी प्रत्याशियों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं, लेकिन आने वाली 13 तारीख को सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्येांकि इसी दिन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। 13 तारीख को ही तय होगा कि किसके सिर पर जीत का ताज बंधे और कौन मायूस होकर अपने घर को लौटेगा, लेकिन मतदान होने के बाद सभी प्रत्याशी अपने परिवार के साथ प्रसन्नमुद्रा में नजर आये।
सपा गठबंधन प्रत्याशी लवली शर्मा ने भी चुनाव प्रचार के दौरान खूब मेहनत की और हर गली, मौहल्ले में घर-घर जाकर वोट मांगे। मतदान सम्पन्न होने के बाद देर रात तक चुनाव को लेकर चर्चा हुई और अगली सुबह लवली शर्मा व उनके पति राकेश शर्मा ने मंदिर में जाकर पूजापाठ की। इसके बाद घर पर परिवार के साथ समय बिताया। राकेश शर्मा के अंकित विहार स्थित आवास पर पूरा दिन समर्थक पहुंचते रहे और चुनाव को लेकर चर्चा हुई। सपा प्रत्याशी के समर्थकों मे भी अच्छा-खासा उत्साह दिखाई दे रहा है और वह भी भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों की तरह ही जीत के दावे कर रहे और उंगलियों पर गिनकर आंकड़े फिट कर रहे हैं।
बसपा प्रत्याशी रोशन जहां ने हालांकि चुनाव प्रचार नाममात्र का किया है और उनके पति इंतजार त्यागी भी एक निश्चित दायरे में चुनाव प्रचार करते रहे। बसपा प्रत्याशी ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में ही चुनाव प्रचार किया और मंडी, गांधी कालोनी जैसे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने के लिये नहीं आये, लेकिन मतदान के बाद वह भी अपनी जीत का दावा करते हुए नजर आये। उनके समर्थक भी अपने हिसाब से आंकड़े सेट कर किसको कितनी वोट मिल रही है, इस पर चर्चा करते रहे।
इन चुनाव में सबसे बुरा हाल कांग्रेस का रहा। लगातार दो बार नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव जीती कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी बिलकिस चौधरी ने बिल्कुल भी चुनाव प्रचार नहीं किया और मात्र एक गाड़ी के साथ निश्चित स्थानों पर जाकर चुनाव प्रचार की रस्म अदायगी की। नगर पालिका चुनाव में वर्ष 2012 व 2017 में लगातार चेयरमैनी जीतने वाली कांग्रेस हाईकमान ने इस बार बेहद कमजोर प्रत्याशी मैदान में उतारा।
2012 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय अग्रवाल को कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अग्रवाल ने 4200 वोटों से हराया था और इसके बाद 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा को कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल ने 12250 वोटों से हरा दिया था। दो बार के चुनाव में इतना शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी इस बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की केवल रस्म अदायगी की। इन चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा-सपा प्रत्याशी के बीच ही सिमट कर रह गया है। कुछ जगह बसपा प्रत्याशी भी अपनी उपस्थित दर्ज करने के प्रयास में है।
भाजपा व सपा प्रत्याशी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है और दोनों के समर्थक ही जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि, कम मतदान प्रतिशत दोनों प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की चिंता बढ़ाने का काम कर रहा है। इस बार जनपद में मुजफ्फरनगर नगर पालिका में सबसे कम 50. 19 प्रतिशत वोट पड़े, जो पिछली बार के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत कम हैं।
सबसे ज्यादा बुढ़ाना नगर पंचायत में वोटिंग हुई है। मुजफ्फरनगर नगर पालिका क्षेत्र में सबसे कम मतदान मदनमोहन मालवीय इंटर कालेज के कक्ष संख्या पांच में 10. 18 प्रतिशत हुआ, जबकि सबसे ज्यादा वोट प्राथमिक विद्यालय वहलना के कक्ष संख्या एक में 75. 23 प्रतिशत वोट पड़े। हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही समुदायों के मतदाताओं में कोई खासा उत्साह देखने को नहीं मिला। इस बार मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी वोट प्रतिशत उतना नहीं रहा, जितनी उम्मीद थी। ऐसे ही हालात हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में भी रहे और बेहद कम मतदान हुआ।
दोनों ही क्षेत्रों में वोट प्रतिशत कम रहने के कारण प्रत्याशी व उनके समर्थक टेंशन में है और केवल आंकडों से ही हार-जीत तय करने में जुटे हुए है। अब लगातार 13 मई तक यही चलता रहेगा और प्रत्याशियों के घरों पर पहुंचकर उनके समर्थक अपने-अपने हिसाब से हार-जीत के आंकडे पेश करते रहेंगे, लेकिन असली तस्वीर तो आने वाली 13 मई को ही मतगणना के पश्चात सामने आ पायेगी, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।
|
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चुनाव की मतदान प्रक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात प्रत्याशियों व उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है। मतदान का अगला पूरा दिन प्रत्याशियों ने अपने परिवार के साथ बिताया और लगातार पंद्रह दिन तक चुनाव प्रचार कर हुई थकान के बाद घर पर रहकर आराम किया। इस दौरान प्रत्याशियों के समर्थक उनसे मिलने आते रहे और हार-जीत के आंकड़े भी बताते रहे। मुजफ्फरनगर नगरपालिका से अध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप ने शुक्रवार का दिन अपने परिवार के साथ बिताया। पिछले लगभग पंद्रह दिन से दिन-रात चुनाव प्रचार में जुटी रही मीनाक्षी स्वरूप व उनके पति गौरव स्वरूप ने घर पर रहकर आराम किया और अपने दोनों पुत्रों व परिवार के साथ चुनाव को लेकर चर्चा की। गौरव स्वरूप के पटेलनगर स्थित आवास पर सुबह से ही समर्थकों का आना-जाना लगा रहा और मतदान को लेकर चर्चा होती रही। सभी प्रत्याशियों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं, लेकिन आने वाली तेरह तारीख को सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्येांकि इसी दिन प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। तेरह तारीख को ही तय होगा कि किसके सिर पर जीत का ताज बंधे और कौन मायूस होकर अपने घर को लौटेगा, लेकिन मतदान होने के बाद सभी प्रत्याशी अपने परिवार के साथ प्रसन्नमुद्रा में नजर आये। सपा गठबंधन प्रत्याशी लवली शर्मा ने भी चुनाव प्रचार के दौरान खूब मेहनत की और हर गली, मौहल्ले में घर-घर जाकर वोट मांगे। मतदान सम्पन्न होने के बाद देर रात तक चुनाव को लेकर चर्चा हुई और अगली सुबह लवली शर्मा व उनके पति राकेश शर्मा ने मंदिर में जाकर पूजापाठ की। इसके बाद घर पर परिवार के साथ समय बिताया। राकेश शर्मा के अंकित विहार स्थित आवास पर पूरा दिन समर्थक पहुंचते रहे और चुनाव को लेकर चर्चा हुई। सपा प्रत्याशी के समर्थकों मे भी अच्छा-खासा उत्साह दिखाई दे रहा है और वह भी भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों की तरह ही जीत के दावे कर रहे और उंगलियों पर गिनकर आंकड़े फिट कर रहे हैं। बसपा प्रत्याशी रोशन जहां ने हालांकि चुनाव प्रचार नाममात्र का किया है और उनके पति इंतजार त्यागी भी एक निश्चित दायरे में चुनाव प्रचार करते रहे। बसपा प्रत्याशी ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में ही चुनाव प्रचार किया और मंडी, गांधी कालोनी जैसे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने के लिये नहीं आये, लेकिन मतदान के बाद वह भी अपनी जीत का दावा करते हुए नजर आये। उनके समर्थक भी अपने हिसाब से आंकड़े सेट कर किसको कितनी वोट मिल रही है, इस पर चर्चा करते रहे। इन चुनाव में सबसे बुरा हाल कांग्रेस का रहा। लगातार दो बार नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव जीती कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी बिलकिस चौधरी ने बिल्कुल भी चुनाव प्रचार नहीं किया और मात्र एक गाड़ी के साथ निश्चित स्थानों पर जाकर चुनाव प्रचार की रस्म अदायगी की। नगर पालिका चुनाव में वर्ष दो हज़ार बारह व दो हज़ार सत्रह में लगातार चेयरमैनी जीतने वाली कांग्रेस हाईकमान ने इस बार बेहद कमजोर प्रत्याशी मैदान में उतारा। दो हज़ार बारह के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय अग्रवाल को कांग्रेस प्रत्याशी पंकज अग्रवाल ने चार हज़ार दो सौ वोटों से हराया था और इसके बाद दो हज़ार सत्रह के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा को कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल ने बारह हज़ार दो सौ पचास वोटों से हरा दिया था। दो बार के चुनाव में इतना शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी इस बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की केवल रस्म अदायगी की। इन चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा-सपा प्रत्याशी के बीच ही सिमट कर रह गया है। कुछ जगह बसपा प्रत्याशी भी अपनी उपस्थित दर्ज करने के प्रयास में है। भाजपा व सपा प्रत्याशी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है और दोनों के समर्थक ही जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि, कम मतदान प्रतिशत दोनों प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की चिंता बढ़ाने का काम कर रहा है। इस बार जनपद में मुजफ्फरनगर नगर पालिका में सबसे कम पचास. उन्नीस प्रतिशत वोट पड़े, जो पिछली बार के मुकाबले लगभग छः प्रतिशत कम हैं। सबसे ज्यादा बुढ़ाना नगर पंचायत में वोटिंग हुई है। मुजफ्फरनगर नगर पालिका क्षेत्र में सबसे कम मतदान मदनमोहन मालवीय इंटर कालेज के कक्ष संख्या पांच में दस. अट्ठारह प्रतिशत हुआ, जबकि सबसे ज्यादा वोट प्राथमिक विद्यालय वहलना के कक्ष संख्या एक में पचहत्तर. तेईस प्रतिशत वोट पड़े। हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही समुदायों के मतदाताओं में कोई खासा उत्साह देखने को नहीं मिला। इस बार मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी वोट प्रतिशत उतना नहीं रहा, जितनी उम्मीद थी। ऐसे ही हालात हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में भी रहे और बेहद कम मतदान हुआ। दोनों ही क्षेत्रों में वोट प्रतिशत कम रहने के कारण प्रत्याशी व उनके समर्थक टेंशन में है और केवल आंकडों से ही हार-जीत तय करने में जुटे हुए है। अब लगातार तेरह मई तक यही चलता रहेगा और प्रत्याशियों के घरों पर पहुंचकर उनके समर्थक अपने-अपने हिसाब से हार-जीत के आंकडे पेश करते रहेंगे, लेकिन असली तस्वीर तो आने वाली तेरह मई को ही मतगणना के पश्चात सामने आ पायेगी, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।
|
डाओ के विरोध में गैस पीड़ितों का `भोपाल ओलम्पिक'
भोपाल, (आईएएनएस)। लंदन ओलम्पिक में डाओ केमिकल को पायोजक बनाए जाने के विरोध में मध्य पदेश की राजधानी भोपाल में गैस पीड़ितों के संगठन 27 जुलाई से भोपाल ओलम्पिक का आयोजन करेंगे। इस आयोजन में डाओ केमिकल की वजह से भोपाल और अन्य जगहों में विकलांग हुए बच्चे भाग लेंगे। भोपाल में यूनियन कार्बाइड की कम्पनी में दिसम्बर 1984 में जहरीली गैस के रिसाव के कारण दो हजार से अधिक लोग मारे गए थ और बड़ी संख्या में लोग अभी भी इसके अभिशाप को झेल रहे हैं। डाओ केमिकल ने बाद में यूनियन कार्बाइड को खरीद लिया था। भोपाल ओलम्पिक के आयोजनकर्ता पांच संगठनों- गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संगठन, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा और भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एड एक्शन -के नेताओं ने कहा कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन में, अमेरिका के बर्पले एवं बोस्टन में तथा कनाडा के सेंट कैथरीन्स में इसी तरह के पदर्शन आयोजि किए जा रहे हैं। भोपाल पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ रहें सामाजिक कार्यकर्ता सतीनाथ षडंगी का कहना है कि ओलम्पिक खेलों का पायोजक बनकर डाओ केमिकल भोपाल के साथ-साथ वियतनाम, निकारगुआ, दक्षिण अफीका, न्यूजीलैंड और अमरीका सहित विश्व के अन्य देशों के लोगों पर किए जा रहे अपराधों पर पर्दा डालने का पयास कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि डाओ को पायोजक बनाए जाने के विरोध में 27 जुलाई से भोपाल ओलम्पिक का आयोजन हो रहा है, जिसमें इस कम्पनी की वजह से भोपाल और अन्य जगहों में विकलांग हुए बच्चे भाग लेंगे। संगठनों के नेताओं ने कहा कि जहां लंदन ओलम्पिक खेलों के उद्घाटन समारोह में ब्रिटेन के ग्रामीण परिवेश को याद किया जाएगा, वहीं भोपाल ओलम्पिक का उद्घाटन समारोह ईस्ट इंडिया कम्पनी से डाओ केमिकल कम्पनी पर केंदित होगा। संगठनों ने बताया कि भोपाल ओलम्पिक के उद्घाटन समारोह में बंगाल के अकाल, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने की कार्रवाई, जलियांवाला बाग का नरसंहार और डाओ केमिकल के अपराधों पर पर्दा डालने में ब्रिटेन के पधानमंत्री की भूमिका पर पस्तुतियां होंगी। संगठनों का कहना है कि यूनियन कार्बाइड कम्पनी को खरीदने के बाद डाओ केमिकल ने उसका दीवानी, फौजदारी एवं पर्यावरणीय दायित्व स्वीकार किया था पर अब इन जिम्मेदारियों को निभाने से इंकार कर रहा है। संगठनों ने कहा कि भोपाल में आज भी लोग असमय मर रहे हैं, एक लाख से अधिक लोग पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं और यह सब इसलिए कि डाओ, भोपाल में यूनियन कार्बाइड की जिम्मेदारियों से भाग रहा है।
|
डाओ के विरोध में गैस पीड़ितों का `भोपाल ओलम्पिक' भोपाल, । लंदन ओलम्पिक में डाओ केमिकल को पायोजक बनाए जाने के विरोध में मध्य पदेश की राजधानी भोपाल में गैस पीड़ितों के संगठन सत्ताईस जुलाई से भोपाल ओलम्पिक का आयोजन करेंगे। इस आयोजन में डाओ केमिकल की वजह से भोपाल और अन्य जगहों में विकलांग हुए बच्चे भाग लेंगे। भोपाल में यूनियन कार्बाइड की कम्पनी में दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ चौरासी में जहरीली गैस के रिसाव के कारण दो हजार से अधिक लोग मारे गए थ और बड़ी संख्या में लोग अभी भी इसके अभिशाप को झेल रहे हैं। डाओ केमिकल ने बाद में यूनियन कार्बाइड को खरीद लिया था। भोपाल ओलम्पिक के आयोजनकर्ता पांच संगठनों- गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संगठन, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा और भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एड एक्शन -के नेताओं ने कहा कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन में, अमेरिका के बर्पले एवं बोस्टन में तथा कनाडा के सेंट कैथरीन्स में इसी तरह के पदर्शन आयोजि किए जा रहे हैं। भोपाल पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ रहें सामाजिक कार्यकर्ता सतीनाथ षडंगी का कहना है कि ओलम्पिक खेलों का पायोजक बनकर डाओ केमिकल भोपाल के साथ-साथ वियतनाम, निकारगुआ, दक्षिण अफीका, न्यूजीलैंड और अमरीका सहित विश्व के अन्य देशों के लोगों पर किए जा रहे अपराधों पर पर्दा डालने का पयास कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि डाओ को पायोजक बनाए जाने के विरोध में सत्ताईस जुलाई से भोपाल ओलम्पिक का आयोजन हो रहा है, जिसमें इस कम्पनी की वजह से भोपाल और अन्य जगहों में विकलांग हुए बच्चे भाग लेंगे। संगठनों के नेताओं ने कहा कि जहां लंदन ओलम्पिक खेलों के उद्घाटन समारोह में ब्रिटेन के ग्रामीण परिवेश को याद किया जाएगा, वहीं भोपाल ओलम्पिक का उद्घाटन समारोह ईस्ट इंडिया कम्पनी से डाओ केमिकल कम्पनी पर केंदित होगा। संगठनों ने बताया कि भोपाल ओलम्पिक के उद्घाटन समारोह में बंगाल के अकाल, एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने की कार्रवाई, जलियांवाला बाग का नरसंहार और डाओ केमिकल के अपराधों पर पर्दा डालने में ब्रिटेन के पधानमंत्री की भूमिका पर पस्तुतियां होंगी। संगठनों का कहना है कि यूनियन कार्बाइड कम्पनी को खरीदने के बाद डाओ केमिकल ने उसका दीवानी, फौजदारी एवं पर्यावरणीय दायित्व स्वीकार किया था पर अब इन जिम्मेदारियों को निभाने से इंकार कर रहा है। संगठनों ने कहा कि भोपाल में आज भी लोग असमय मर रहे हैं, एक लाख से अधिक लोग पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं और यह सब इसलिए कि डाओ, भोपाल में यूनियन कार्बाइड की जिम्मेदारियों से भाग रहा है।
|
एजबेस्टन । भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वुमेन्स सुपर लीग के छठे मुकाबले में अपनी टीम वेस्टर्न स्टोर्म को जीत दिलाई। मंधाना ने वेस्टर्न स्टोर्म और यॉर्कशायर डायमन्डस के बीच खेले गए इस मुकाबले में 56 रन बनाकर टीम को 7 विकेट से जीत दिलाई। मंधाना और रशेन प्रिस्ट ने वेस्टर्न स्टोर्म की अच्छी शुरुआत करते हुए शतकीय साझेदारी बनायी। रशेन ने 37 रन और फिर मंधाना ने 56 रन बनाये।
इसके बाद कप्तान हीथर नाइट ने नाबाद 45 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी। इस जीत के साथ वेस्टर्न स्टोर्म की टीम अंकतालिका में 23 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर पहुंच गई है। मंधाना ने 6 मुकाबलों में 2 अर्धशतक और एक शतक के साथ ही कुल 338 रन बनाये हैं। मंधाना ने अपनी आक्रामक पारी में पांच चौके और तीन छक्के और 36 गेंदों में ही 56 रन बना दिये। इस मुकाबले में यॉर्कशायर डायमन्डस ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवरों में 172 रन बनाए। यॉर्कशायर की ओर से विकेटकीपर बल्लेबाज़ बेथ मूनी ने 69 रन बनाये। इसके बाद वेस्टर्न स्टोर्म की टीम ने आसानी से केवल तीन विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया।
|
एजबेस्टन । भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वुमेन्स सुपर लीग के छठे मुकाबले में अपनी टीम वेस्टर्न स्टोर्म को जीत दिलाई। मंधाना ने वेस्टर्न स्टोर्म और यॉर्कशायर डायमन्डस के बीच खेले गए इस मुकाबले में छप्पन रन बनाकर टीम को सात विकेट से जीत दिलाई। मंधाना और रशेन प्रिस्ट ने वेस्टर्न स्टोर्म की अच्छी शुरुआत करते हुए शतकीय साझेदारी बनायी। रशेन ने सैंतीस रन और फिर मंधाना ने छप्पन रन बनाये। इसके बाद कप्तान हीथर नाइट ने नाबाद पैंतालीस रन बनाकर टीम को जीत दिला दी। इस जीत के साथ वेस्टर्न स्टोर्म की टीम अंकतालिका में तेईस अंकों के साथ दूसरे पायदान पर पहुंच गई है। मंधाना ने छः मुकाबलों में दो अर्धशतक और एक शतक के साथ ही कुल तीन सौ अड़तीस रन बनाये हैं। मंधाना ने अपनी आक्रामक पारी में पांच चौके और तीन छक्के और छत्तीस गेंदों में ही छप्पन रन बना दिये। इस मुकाबले में यॉर्कशायर डायमन्डस ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए बीस ओवरों में एक सौ बहत्तर रन बनाए। यॉर्कशायर की ओर से विकेटकीपर बल्लेबाज़ बेथ मूनी ने उनहत्तर रन बनाये। इसके बाद वेस्टर्न स्टोर्म की टीम ने आसानी से केवल तीन विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया।
|
मंजूर की। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुलाब चंद्र अग्रहरी ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) दिनेश चंद्र गौतम की विशेष अदालत ने अतीक और अशरफ के तीनो शूटरों को चार दिन का पुलिस रिमांड का आदेश दिया है।
पुलिस ने तीनों शूटरों की 14 दिन की रिमांड मांगी है। लेकिन कोर्ट ने तीनों शूटरों की चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है।
अग्रहरि ने बताया कि भारी सुरक्षा के बीच इन आरोपियों को सीजेएम डी. के. गौतम की अदालत में पेश किया गया और करीब एक घंटे की पेशी के बाद उन्हें यहां से पुलिस अपने साथ ले गई।
उन्होंने बताया कि पेशी के बाद आरोपियों को दौड़ा कर अदालत परिसर से बाहर ले जाया गया। उनके अनुसार, ऐसा एहतियात के तौर पर किया गया।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को अतीक अहमद और अशरफ को चिकित्सा जांच के लिए कॉल्विन अस्पताल ले जाते समय इन तीन आरोपियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।
इसके बाद इन आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में नैनी जेल भेज दिया गया था। सोमवार को सुरक्षा कारणों से इन अभियुक्तों को प्रतापगढ़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया।
|
मंजूर की। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है। जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरी ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र गौतम की विशेष अदालत ने अतीक और अशरफ के तीनो शूटरों को चार दिन का पुलिस रिमांड का आदेश दिया है। पुलिस ने तीनों शूटरों की चौदह दिन की रिमांड मांगी है। लेकिन कोर्ट ने तीनों शूटरों की चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है। अग्रहरि ने बताया कि भारी सुरक्षा के बीच इन आरोपियों को सीजेएम डी. के. गौतम की अदालत में पेश किया गया और करीब एक घंटे की पेशी के बाद उन्हें यहां से पुलिस अपने साथ ले गई। उन्होंने बताया कि पेशी के बाद आरोपियों को दौड़ा कर अदालत परिसर से बाहर ले जाया गया। उनके अनुसार, ऐसा एहतियात के तौर पर किया गया। उल्लेखनीय है कि शनिवार को अतीक अहमद और अशरफ को चिकित्सा जांच के लिए कॉल्विन अस्पताल ले जाते समय इन तीन आरोपियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद इन आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था जहां से उन्हें चौदह दिन की न्यायिक अभिरक्षा में नैनी जेल भेज दिया गया था। सोमवार को सुरक्षा कारणों से इन अभियुक्तों को प्रतापगढ़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया।
|
दावोस में चल रहे वल्र्ड इकनॉमिक फोरम में ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट 'टाइम टू केयर' में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नये नजरिया, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं अमीरी गरीबी के बीच बढ़ते फासले की तथ्यपरक प्रभावी प्रस्तुति देते हुए इसे घातक बताया है। आज दुनिया की समृद्धि कुछ लोगों तक केन्द्रित हो गयी है, हमारे देश में भी ऐसी तस्वीर दुनिया की तुलना में अधिक तीव्रता से देखने को मिल रही है।
देश में मानवीय मूल्यों और आर्थिक समानता को हाशिये पर डाल दिया गया है और येन-केन-प्रकारेण धन कमाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य बनता जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या इस प्रवृत्ति के बीज हमारी परंपराओं में रहे हैं या यह बाजार के दबाव का नतीजा है? इस तरह की मानसिकता राष्ट्र को कहां ले जाएगी? ये कुछ प्रश्न ऑक्सफैम रिपोर्ट एवं प्रस्तुत होने वाले आम बजट के सन्दर्भ महत्त्वपूर्ण हैं, जिनपर मंथन जरूरी है।
ऑक्सफैम रिपोर्ट के कुछ चैंकाने वाले तथ्य है, जैसे देश के एक फीसदी अमीरों के पास 70 फीसदी आबादी के मुकाबले चार गुणा ज्यादा धन है। देश को चलाने के लिए जारी होने वाले बजट 2020 से ज्यादा धन देश के 63 अरबपतियों के पास है। भले ही 2019 में वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की कुल संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन पिछले एक दशक में अरबपतियों की संख्या में तेजी आई है। इस रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि पूरे विश्व में आर्थिक असमानता बहुत तेजी से फैल रही है। अमीर बहुत तेजी से ज्यादा अमीर हो रहे हैं।
साम्राज्यवाद की पीठ पर सवार पूंजीवाद ने जहां एक ओर अमीरी को बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर गरीबी भी बढ़ती गई है। यह अमीरी और गरीबी का फासला कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है जिसके परिणामों के रूप में हम आतंकवाद को, नक्सलवाद को, सांप्रदायिकता को, प्रांतीयता को देख सकते हैं, जिनकी निष्पत्तियां समाज में हिंसा, नफरत, द्वेष, लोभ, गलाकाट प्रतिस्पर्धा, रिश्ते में दरारें आदि के रूप में देख सकते हैं। सर्वाधिक प्रभाव पर्यावरणीय असंतुलन एवं प्रदूषण के रूप में उभरा है।
चंद हाथों में सिमटी समृद्धि की वजह से बड़े और तथाकथित संपन्न लोग ही नहीं बल्कि देश का एक बड़ा तबका मानवीयता से शून्य अपसंस्कृति का शिकार हो गया है। ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा कि अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई तब तक नहीं कम होगी, जब तक सरकार की तरफ से इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि असमानता दूर करने के लिए सरकार को गरीबों के लिए विशेष नीतियां अमल में लानी होगी।
हमारे देश में जरूरत यह नहीं है कि चंद लोगों के हाथों में ही बहुत सारी पूंजी इकट्ठी हो जाये, पूंजी का वितरण ऐसा होना चाहिए कि विशाल देश के लाखों गांवों को आसानी से उपलब्ध हो सके। लेकिन क्या कारण है कि महात्मा गांधी को पूजने वाले सत्ताशीर्ष का नेतृत्व उनके ट्रस्टीशीप के सिद्धान्त को बड़ी चतुराई से किनारे कर रखा है। यही कारण है कि एक ओर अमीरों की ऊंची अट्टालिकाएं हैं तो दूसरी ओर फुटपाथों पर रेंगती गरीबी। एक ओर वैभव ने व्यक्ति को विलासिता दी और विलासिता ने व्यक्ति के भीतर क्रूरता जगाई, तो दूसरी ओर गरीबी तथा अभावों की त्रासदी ने उसके भीतर विद्रोह की आग जला दी। वह प्रतिशोध में तपने लगा, अनेक बुराइयां बिन बुलाए घर आ गईं। इसी से आतंकवाद जनमा। आदमी-आदमी से असुरक्षित हो गया। हिंसा, झूठ, चोरी, बलात्कार, संग्रह जैसे निषेधात्मक संस्कारों ने मनुष्य को पकड़ लिया। चेहरे ही नहीं चरित्र तक अपनी पहचान खोने लगे। नीति और निष्ठा के केंद्र बदलने लगे। आस्था की नींव कमजोर पड़ने लगे।
अर्थ की अंधी दौड़ ने व्यक्ति को संग्रह, सुविधा, सुख, विलास और स्वार्थ से जोड़ दिया। समस्या सामने आई-पदार्थ कम, उपभोक्ता ज्यादा। व्यक्तिवादी मनोवृत्ति जागी। स्वार्थों के संघर्ष में अन्याय और शोषण होने लगा। हर व्यक्ति अकेला पड़ गया। जीवन आदर्श थम से गए। नई आर्थिक प्रक्रिया को आजादी के बाद दो अर्थों में और बल मिला। एक तो हमारे राष्ट्र का लक्ष्य समग्र मानवीय विकास के स्थान पर आर्थिक विकास रह गया। दूसरा सारे देश में उपभोग का एक ऊंचा स्तर प्राप्त करने की दौड़ शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया में सारा समाज ही अर्थ प्रधान हो गया है।
इस प्रक्रिया में सारी सामाजिक मान्यताओं, मानवीय मूल्यों, मर्यादाओं को ताक पर रखकर कैसे भी धन एकत्र कर लेने को सफलता का मानक माने जाने लगा है जिससे राजनीति, साहित्य, कला, धर्म सभी को पैसे की तराजू पर तोला जाने लगा है। इस प्रवृत्ति के बड़े खतरनाक नतीजे सामने आ रहे हैं। अब तक के देश की आर्थिक नीतियां और विकास का लक्ष्य चंद लोगों की समृद्धि में चार चांद लगाना हो गया है। चंद लोगों के हाथों में समृद्धि को केन्द्रित कर भारत को महाशक्ति बनाने का सपना भी देखा जा रहा है। संभवतः यह महाशक्ति बनाने की बजाय हमें कमजोर राष्ट्र के रूप में आगे धकेलने की तथाकथित कोशिश है।
समृद्धि हर युग का सपना रहा है और जीवन की अनिवार्यता में इसे शामिल भी किया जाता रहा है। सापेक्ष दृष्टि से सोचे तो समृद्धि बुरी नहीं है लेकिन बुरी है वह मानसिकता जिसमें अधिसंख्य लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं को लील कर कुछ लोगों को उनके शोषण से अर्जित वैभव पर प्रतिष्ठित किया जाता है। बुरा है समृद्धि का वह वैभव प्रदर्शन जिसमें अपराधों को पनपने का खुला अवसर मिलता है। अपनों के बीच संबंधों में कड़वाहट आती है, ऊंच-नीच की भेद-रेखा खींचती है।
आवश्यकता से ज्यादा संग्रह की प्रतिस्पर्धा होती है। अनियंत्रित मांग और इंद्रिय असंयम व्यक्ति को स्वच्छन्द बना देता है। हिंसा और परिग्रह के संस्कार जागते हैं। मनुष्य के सुख-दुख, आशाएं-आकांक्षाएं, आचार-विचार वैयक्तिक होते हुए भी समाज के साथ संपृक्त है। जंगल के निरंकुश जीवन से निकलकर जबसे मनुष्य ने दूसरों से हिल-मिलकर जीना सीखा है, तबसे यही स्थिति चली आती है, यही सामाजिक सभ्यता की पहली शर्त भी है। पड़ोस से कराह उठकर आती हो तो कोई हृदयहीन व्यक्ति ही चैन की नींद सो सकता है। पड़ोस में कोई भूख से बेहाल हो रहा हो तो भोजन से भरी थाली का स्वाद फीका पड़ जाता है। लेकिन यह बात कोई अंबानी, अडानी के समझ से परे है।
समृद्धि को हम भले ही जीवन विकास का एक माध्यम माने लेकिन समृद्धि के बदलते मायने तभी कल्याणकारी बन सकते हैं जब समृद्धि के साथ चरित्र निष्ठा और नैतिकता भी कायम रहे। शुद्ध साध्य के लिए शुद्ध साधन अपनाने की बात इसीलिए जरूरी है कि समृद्धि के रूप में प्राप्त साधनों का सही दिशा में सही लक्ष्य के साथ उपयोग हो। संग्रह के साथ विसर्जन की चेतना जागे। किसी व्यक्ति विशेष या व्यापारिक-व्यावसायिक समूह को समृद्ध के अमाप्य शिखर देने की बजाय संतुलित आर्थिक समाज की संरचना को विकसित करना होगा।
समृद्धि की बदलती फिजाएं एवं आर्थिक संरचनाएं अमीरी-गरीबी की खाई को पाटे। आज कहां सुरक्षित रह पाया है-ईमान के साथ इंसान तक पहुंचने वाली समृद्धि का आदर्श? कौन करता है अपनी सुविधाओं का संयमन? कौन करता है ममत्व का विसर्जन? कौन दे पाता है अपने स्वार्थों को संयम की लगाम? और कौन अपनी समृद्धि के साथ समाज को समृद्धि की ओर अग्रसर कर पाता है? भारतीय मनीषा ने "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः" का मूल-मंत्र दिया था-अर्थात् सब सुखी हों, सब निरोग हों, सब समृद्ध हो। गांधीजी ने इसी बात को अपने शब्दों में इस प्रकार कहा था, "जब तक एक भी आंख में आंसू है, मेरे संघर्ष का अंत नहीं हो सकता।
" व्यक्ति को अपने जीवन में क्या करना चाहिए, जिससे वह स्वयं सुखी रहे, दूसरे भी सुखी रहें। इसके कई उपाय हो सकते हैं, क्योंकि मानव-जीवन के कई पहलू हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास ने मनुष्य के सबसे बड़े धर्म की व्याख्या करते हुए लिखा है- "परहित सरिस धर्म नहीं भाई। " भले हमारे पास कार, कोठी और कुर्सी न हो लेकिन चारित्रिक गुणों की काबिलियत अवश्य हो क्योंकि इसी काबिलियत के बल पर हम अपने आपको महाशक्तिशाली बना सकेगे अन्यथा हमारे देश के शासक जिस रास्ते पर हमें ले जा रहे हैं वह आगे चलकर अंधी खाई की ओर मुड़ने वाली हैं।
प्रेषकः (ललित गर्ग)
|
दावोस में चल रहे वल्र्ड इकनॉमिक फोरम में ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट 'टाइम टू केयर' में समृद्धि के नाम पर पनप रहे नये नजरिया, विसंगतिपूर्ण आर्थिक संरचना एवं अमीरी गरीबी के बीच बढ़ते फासले की तथ्यपरक प्रभावी प्रस्तुति देते हुए इसे घातक बताया है। आज दुनिया की समृद्धि कुछ लोगों तक केन्द्रित हो गयी है, हमारे देश में भी ऐसी तस्वीर दुनिया की तुलना में अधिक तीव्रता से देखने को मिल रही है। देश में मानवीय मूल्यों और आर्थिक समानता को हाशिये पर डाल दिया गया है और येन-केन-प्रकारेण धन कमाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य बनता जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या इस प्रवृत्ति के बीज हमारी परंपराओं में रहे हैं या यह बाजार के दबाव का नतीजा है? इस तरह की मानसिकता राष्ट्र को कहां ले जाएगी? ये कुछ प्रश्न ऑक्सफैम रिपोर्ट एवं प्रस्तुत होने वाले आम बजट के सन्दर्भ महत्त्वपूर्ण हैं, जिनपर मंथन जरूरी है। ऑक्सफैम रिपोर्ट के कुछ चैंकाने वाले तथ्य है, जैसे देश के एक फीसदी अमीरों के पास सत्तर फीसदी आबादी के मुकाबले चार गुणा ज्यादा धन है। देश को चलाने के लिए जारी होने वाले बजट दो हज़ार बीस से ज्यादा धन देश के तिरेसठ अरबपतियों के पास है। भले ही दो हज़ार उन्नीस में वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की कुल संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन पिछले एक दशक में अरबपतियों की संख्या में तेजी आई है। इस रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि पूरे विश्व में आर्थिक असमानता बहुत तेजी से फैल रही है। अमीर बहुत तेजी से ज्यादा अमीर हो रहे हैं। साम्राज्यवाद की पीठ पर सवार पूंजीवाद ने जहां एक ओर अमीरी को बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर गरीबी भी बढ़ती गई है। यह अमीरी और गरीबी का फासला कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है जिसके परिणामों के रूप में हम आतंकवाद को, नक्सलवाद को, सांप्रदायिकता को, प्रांतीयता को देख सकते हैं, जिनकी निष्पत्तियां समाज में हिंसा, नफरत, द्वेष, लोभ, गलाकाट प्रतिस्पर्धा, रिश्ते में दरारें आदि के रूप में देख सकते हैं। सर्वाधिक प्रभाव पर्यावरणीय असंतुलन एवं प्रदूषण के रूप में उभरा है। चंद हाथों में सिमटी समृद्धि की वजह से बड़े और तथाकथित संपन्न लोग ही नहीं बल्कि देश का एक बड़ा तबका मानवीयता से शून्य अपसंस्कृति का शिकार हो गया है। ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा कि अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई तब तक नहीं कम होगी, जब तक सरकार की तरफ से इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि असमानता दूर करने के लिए सरकार को गरीबों के लिए विशेष नीतियां अमल में लानी होगी। हमारे देश में जरूरत यह नहीं है कि चंद लोगों के हाथों में ही बहुत सारी पूंजी इकट्ठी हो जाये, पूंजी का वितरण ऐसा होना चाहिए कि विशाल देश के लाखों गांवों को आसानी से उपलब्ध हो सके। लेकिन क्या कारण है कि महात्मा गांधी को पूजने वाले सत्ताशीर्ष का नेतृत्व उनके ट्रस्टीशीप के सिद्धान्त को बड़ी चतुराई से किनारे कर रखा है। यही कारण है कि एक ओर अमीरों की ऊंची अट्टालिकाएं हैं तो दूसरी ओर फुटपाथों पर रेंगती गरीबी। एक ओर वैभव ने व्यक्ति को विलासिता दी और विलासिता ने व्यक्ति के भीतर क्रूरता जगाई, तो दूसरी ओर गरीबी तथा अभावों की त्रासदी ने उसके भीतर विद्रोह की आग जला दी। वह प्रतिशोध में तपने लगा, अनेक बुराइयां बिन बुलाए घर आ गईं। इसी से आतंकवाद जनमा। आदमी-आदमी से असुरक्षित हो गया। हिंसा, झूठ, चोरी, बलात्कार, संग्रह जैसे निषेधात्मक संस्कारों ने मनुष्य को पकड़ लिया। चेहरे ही नहीं चरित्र तक अपनी पहचान खोने लगे। नीति और निष्ठा के केंद्र बदलने लगे। आस्था की नींव कमजोर पड़ने लगे। अर्थ की अंधी दौड़ ने व्यक्ति को संग्रह, सुविधा, सुख, विलास और स्वार्थ से जोड़ दिया। समस्या सामने आई-पदार्थ कम, उपभोक्ता ज्यादा। व्यक्तिवादी मनोवृत्ति जागी। स्वार्थों के संघर्ष में अन्याय और शोषण होने लगा। हर व्यक्ति अकेला पड़ गया। जीवन आदर्श थम से गए। नई आर्थिक प्रक्रिया को आजादी के बाद दो अर्थों में और बल मिला। एक तो हमारे राष्ट्र का लक्ष्य समग्र मानवीय विकास के स्थान पर आर्थिक विकास रह गया। दूसरा सारे देश में उपभोग का एक ऊंचा स्तर प्राप्त करने की दौड़ शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया में सारा समाज ही अर्थ प्रधान हो गया है। इस प्रक्रिया में सारी सामाजिक मान्यताओं, मानवीय मूल्यों, मर्यादाओं को ताक पर रखकर कैसे भी धन एकत्र कर लेने को सफलता का मानक माने जाने लगा है जिससे राजनीति, साहित्य, कला, धर्म सभी को पैसे की तराजू पर तोला जाने लगा है। इस प्रवृत्ति के बड़े खतरनाक नतीजे सामने आ रहे हैं। अब तक के देश की आर्थिक नीतियां और विकास का लक्ष्य चंद लोगों की समृद्धि में चार चांद लगाना हो गया है। चंद लोगों के हाथों में समृद्धि को केन्द्रित कर भारत को महाशक्ति बनाने का सपना भी देखा जा रहा है। संभवतः यह महाशक्ति बनाने की बजाय हमें कमजोर राष्ट्र के रूप में आगे धकेलने की तथाकथित कोशिश है। समृद्धि हर युग का सपना रहा है और जीवन की अनिवार्यता में इसे शामिल भी किया जाता रहा है। सापेक्ष दृष्टि से सोचे तो समृद्धि बुरी नहीं है लेकिन बुरी है वह मानसिकता जिसमें अधिसंख्य लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं को लील कर कुछ लोगों को उनके शोषण से अर्जित वैभव पर प्रतिष्ठित किया जाता है। बुरा है समृद्धि का वह वैभव प्रदर्शन जिसमें अपराधों को पनपने का खुला अवसर मिलता है। अपनों के बीच संबंधों में कड़वाहट आती है, ऊंच-नीच की भेद-रेखा खींचती है। आवश्यकता से ज्यादा संग्रह की प्रतिस्पर्धा होती है। अनियंत्रित मांग और इंद्रिय असंयम व्यक्ति को स्वच्छन्द बना देता है। हिंसा और परिग्रह के संस्कार जागते हैं। मनुष्य के सुख-दुख, आशाएं-आकांक्षाएं, आचार-विचार वैयक्तिक होते हुए भी समाज के साथ संपृक्त है। जंगल के निरंकुश जीवन से निकलकर जबसे मनुष्य ने दूसरों से हिल-मिलकर जीना सीखा है, तबसे यही स्थिति चली आती है, यही सामाजिक सभ्यता की पहली शर्त भी है। पड़ोस से कराह उठकर आती हो तो कोई हृदयहीन व्यक्ति ही चैन की नींद सो सकता है। पड़ोस में कोई भूख से बेहाल हो रहा हो तो भोजन से भरी थाली का स्वाद फीका पड़ जाता है। लेकिन यह बात कोई अंबानी, अडानी के समझ से परे है। समृद्धि को हम भले ही जीवन विकास का एक माध्यम माने लेकिन समृद्धि के बदलते मायने तभी कल्याणकारी बन सकते हैं जब समृद्धि के साथ चरित्र निष्ठा और नैतिकता भी कायम रहे। शुद्ध साध्य के लिए शुद्ध साधन अपनाने की बात इसीलिए जरूरी है कि समृद्धि के रूप में प्राप्त साधनों का सही दिशा में सही लक्ष्य के साथ उपयोग हो। संग्रह के साथ विसर्जन की चेतना जागे। किसी व्यक्ति विशेष या व्यापारिक-व्यावसायिक समूह को समृद्ध के अमाप्य शिखर देने की बजाय संतुलित आर्थिक समाज की संरचना को विकसित करना होगा। समृद्धि की बदलती फिजाएं एवं आर्थिक संरचनाएं अमीरी-गरीबी की खाई को पाटे। आज कहां सुरक्षित रह पाया है-ईमान के साथ इंसान तक पहुंचने वाली समृद्धि का आदर्श? कौन करता है अपनी सुविधाओं का संयमन? कौन करता है ममत्व का विसर्जन? कौन दे पाता है अपने स्वार्थों को संयम की लगाम? और कौन अपनी समृद्धि के साथ समाज को समृद्धि की ओर अग्रसर कर पाता है? भारतीय मनीषा ने "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः" का मूल-मंत्र दिया था-अर्थात् सब सुखी हों, सब निरोग हों, सब समृद्ध हो। गांधीजी ने इसी बात को अपने शब्दों में इस प्रकार कहा था, "जब तक एक भी आंख में आंसू है, मेरे संघर्ष का अंत नहीं हो सकता। " व्यक्ति को अपने जीवन में क्या करना चाहिए, जिससे वह स्वयं सुखी रहे, दूसरे भी सुखी रहें। इसके कई उपाय हो सकते हैं, क्योंकि मानव-जीवन के कई पहलू हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास ने मनुष्य के सबसे बड़े धर्म की व्याख्या करते हुए लिखा है- "परहित सरिस धर्म नहीं भाई। " भले हमारे पास कार, कोठी और कुर्सी न हो लेकिन चारित्रिक गुणों की काबिलियत अवश्य हो क्योंकि इसी काबिलियत के बल पर हम अपने आपको महाशक्तिशाली बना सकेगे अन्यथा हमारे देश के शासक जिस रास्ते पर हमें ले जा रहे हैं वह आगे चलकर अंधी खाई की ओर मुड़ने वाली हैं। प्रेषकः
|
वलेंसिया (स्पेन) : स्पेन की फुटबाल लीग (एलएफपी) के अध्यक्ष जेवियर तेबास ने कहा है कि 2010-11 के ला लीग के अंतिम राउंड में लेवांते और रियल जारागोजा के बीच हुए मैच में धांधली हुई थी। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, तेबास ने सोमवार को कहा कि उस मैच में धांधली करने की कोशिश की गई थी और इस बात पर भी जोर दिया है कि मैच फिक्स भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उस समय के जारागोजा के अध्यक्ष और मालिक के खिलाड़ियों के साथ समझौता हो जाने के बाद या तो खिलाड़ियों द्वारा धनराशि वापस ले ली गई थी या फिर वह धनराशि उन्होंने अपना बताया था। दोनों ही हालात में यह अपराध है।
|
वलेंसिया : स्पेन की फुटबाल लीग के अध्यक्ष जेवियर तेबास ने कहा है कि दो हज़ार दस-ग्यारह के ला लीग के अंतिम राउंड में लेवांते और रियल जारागोजा के बीच हुए मैच में धांधली हुई थी। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, तेबास ने सोमवार को कहा कि उस मैच में धांधली करने की कोशिश की गई थी और इस बात पर भी जोर दिया है कि मैच फिक्स भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि उस समय के जारागोजा के अध्यक्ष और मालिक के खिलाड़ियों के साथ समझौता हो जाने के बाद या तो खिलाड़ियों द्वारा धनराशि वापस ले ली गई थी या फिर वह धनराशि उन्होंने अपना बताया था। दोनों ही हालात में यह अपराध है।
|
अखिलेश यादव ने मंगलवार को ब्रिटिश राजनयिकों से मुलाकात कर कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कर्नाटक के चुनाव में भाजपा की हार और विपक्ष की जीत का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को ब्रिटिश राजनयिकों से मुलाकात कर कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर चर्चा की। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि कर्नाटक के चुनाव में भाजपा की हार और विपक्ष की जीत का असर 2024 के लोकसभा चुनाव में पड़ेगा। यूपी में समाजवादी पार्टी ही भाजपा को मजबूत चुनौती दे रही है। बीजेपी सत्य से भागती है। उसमें वास्तविकता का सामना करने का साहस नहीं है।
नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाईकमीशन के मिनिस्टर एवं डिप्टी हाई कमिश्नर क्रिस्टीना स्काट सीएमजी, नवनियुक्त राजनैतिक मसलों के अध्यक्ष नटालिया लेह, सीनियर पोलिटिकल इकोनामी ऐडवाइजर भावना विज एवं अध्यक्ष राजनैतिक एवं द्विपक्षीय मुद्दे रिचर्ड वारलो सपा मुख्यालय आए। अखिलेश ने उनसे विभिन्न मसलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर लखनऊ में गोमतीनगर में एशिया का सबसे बड़ा जनेश्वर मिश्र पार्क बनाया गया है।
अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का जय प्रकाश नारायण इन्टरनेशनल सेन्टर (जेपीएनआईसी) का निर्माण हुआ था। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का इकाना क्रिकेट स्टेडियम बनाया, लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो रेल चलाई गई। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी पर रिवरफ्रंट बनाया गया। समाजवादियों ने लखनऊ को विश्व में नई पहचान दी। आज आईपीएल और अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की वजह से लखनऊ पूरी दुनिया में जाना जाता है।
|
अखिलेश यादव ने मंगलवार को ब्रिटिश राजनयिकों से मुलाकात कर कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कर्नाटक के चुनाव में भाजपा की हार और विपक्ष की जीत का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को ब्रिटिश राजनयिकों से मुलाकात कर कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर चर्चा की। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि कर्नाटक के चुनाव में भाजपा की हार और विपक्ष की जीत का असर दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में पड़ेगा। यूपी में समाजवादी पार्टी ही भाजपा को मजबूत चुनौती दे रही है। बीजेपी सत्य से भागती है। उसमें वास्तविकता का सामना करने का साहस नहीं है। नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाईकमीशन के मिनिस्टर एवं डिप्टी हाई कमिश्नर क्रिस्टीना स्काट सीएमजी, नवनियुक्त राजनैतिक मसलों के अध्यक्ष नटालिया लेह, सीनियर पोलिटिकल इकोनामी ऐडवाइजर भावना विज एवं अध्यक्ष राजनैतिक एवं द्विपक्षीय मुद्दे रिचर्ड वारलो सपा मुख्यालय आए। अखिलेश ने उनसे विभिन्न मसलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लंदन के हाइड पार्क की तर्ज पर लखनऊ में गोमतीनगर में एशिया का सबसे बड़ा जनेश्वर मिश्र पार्क बनाया गया है। अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का जय प्रकाश नारायण इन्टरनेशनल सेन्टर का निर्माण हुआ था। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का इकाना क्रिकेट स्टेडियम बनाया, लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो रेल चलाई गई। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी पर रिवरफ्रंट बनाया गया। समाजवादियों ने लखनऊ को विश्व में नई पहचान दी। आज आईपीएल और अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की वजह से लखनऊ पूरी दुनिया में जाना जाता है।
|
कोविड-19 वायरस को समझने की वैज्ञानिक जितनी कोशिश कर रहे हैं, उतने ही रहस्य गहराते जा रहे हैं। पहले अध्ययनों में यह बात सामने आई थी कि 25 फीसदी लोगों में बीमारी के लक्षण ही प्रकट नहीं होते हैं, वहीं अब नये अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ठीक हो चुके करीब आठ फीसदी कोविड संक्रमितों में एंटीबॉडीज नहीं बन रहे है। एंटीबाडीज वायरस संक्रमण के खिलाफ काम करते हैं। सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या यह वायरस लोगों के प्रतिरोधक तंत्र को खराब बना रहा है ?
यह शोध भारत के संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार कोविड हॉट स्पॉट में एंटीबॉडीज के आधार पर संग्दिध मरीजों की जांच शुरू करने जा रही है। लेकिन यदि रोगी के शहरी में एंटीबॉडीज बनेंगे ही नहीं तो मरीज की पहचान कैसे हो पाएगी।
चीन के फुदान विश्वविद्यालय ने अस्पताल में भर्ती 130 मरीजों में एंटीबॉडीज की जांच की। कोविड के ये मरीज स्वस्थ हो चुके थे और करीब 15 दिनों के बाद एंटीबॉडीज टेस्ट किया गया। लेकिन आठ फीसदी यानि दस मरीजों में एंटीबॉडीज मिले ही नहीं। जबकि तीस फीसदी में एंटीबाडीज मिले तो सही लेकिन उनकी मात्रा बेहद कम थी। जिन मरीजों में एंटीबॉडीज नहीं पाए गये, उन दस में से नौ की उम्र 40 साल से नीचे थी। एक ज्यादा उम्र का था।
इस अध्ययन पर वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज के कम्युनिटी मेडिसिन के निदेशक डॉक्टर जुगल किशोर ने कहा कि पहला सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यह वायरस संक्रमण के बाद प्रतिरोधक तंत्र को ही बिगाड़ रहा है। दूसरे, इन मरीजों की आगे जांच होनी चाहिए कि कहीं उनमें देर से तो एंडीबॉडीज नहीं बन रही हैं। डॉक्टर किशोर के अनुसार यह आरंभिक अध्ययन है लेकिन आगे अध्ययन की जरूरत को दर्शाता है।
दुनिया के कई देशों में यह बात सामने आ रही है कि कोविड मरीजों में उपचार के बाद भी संक्रमण की पुष्टि हो रही है या उनका कोरोना का टेस्ट पॉजीटिव आ रहा है। यह अध्ययन भी इसी ओर ईशारा करता है कि यदि ठीक होने के बाद रक्त में एंटीबॉडीज नहीं बन रही हैं तो दोबारा संक्रमण का खतरा हो सकता है।
|
कोविड-उन्नीस वायरस को समझने की वैज्ञानिक जितनी कोशिश कर रहे हैं, उतने ही रहस्य गहराते जा रहे हैं। पहले अध्ययनों में यह बात सामने आई थी कि पच्चीस फीसदी लोगों में बीमारी के लक्षण ही प्रकट नहीं होते हैं, वहीं अब नये अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ठीक हो चुके करीब आठ फीसदी कोविड संक्रमितों में एंटीबॉडीज नहीं बन रहे है। एंटीबाडीज वायरस संक्रमण के खिलाफ काम करते हैं। सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या यह वायरस लोगों के प्रतिरोधक तंत्र को खराब बना रहा है ? यह शोध भारत के संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार कोविड हॉट स्पॉट में एंटीबॉडीज के आधार पर संग्दिध मरीजों की जांच शुरू करने जा रही है। लेकिन यदि रोगी के शहरी में एंटीबॉडीज बनेंगे ही नहीं तो मरीज की पहचान कैसे हो पाएगी। चीन के फुदान विश्वविद्यालय ने अस्पताल में भर्ती एक सौ तीस मरीजों में एंटीबॉडीज की जांच की। कोविड के ये मरीज स्वस्थ हो चुके थे और करीब पंद्रह दिनों के बाद एंटीबॉडीज टेस्ट किया गया। लेकिन आठ फीसदी यानि दस मरीजों में एंटीबॉडीज मिले ही नहीं। जबकि तीस फीसदी में एंटीबाडीज मिले तो सही लेकिन उनकी मात्रा बेहद कम थी। जिन मरीजों में एंटीबॉडीज नहीं पाए गये, उन दस में से नौ की उम्र चालीस साल से नीचे थी। एक ज्यादा उम्र का था। इस अध्ययन पर वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज के कम्युनिटी मेडिसिन के निदेशक डॉक्टर जुगल किशोर ने कहा कि पहला सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यह वायरस संक्रमण के बाद प्रतिरोधक तंत्र को ही बिगाड़ रहा है। दूसरे, इन मरीजों की आगे जांच होनी चाहिए कि कहीं उनमें देर से तो एंडीबॉडीज नहीं बन रही हैं। डॉक्टर किशोर के अनुसार यह आरंभिक अध्ययन है लेकिन आगे अध्ययन की जरूरत को दर्शाता है। दुनिया के कई देशों में यह बात सामने आ रही है कि कोविड मरीजों में उपचार के बाद भी संक्रमण की पुष्टि हो रही है या उनका कोरोना का टेस्ट पॉजीटिव आ रहा है। यह अध्ययन भी इसी ओर ईशारा करता है कि यदि ठीक होने के बाद रक्त में एंटीबॉडीज नहीं बन रही हैं तो दोबारा संक्रमण का खतरा हो सकता है।
|
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सीरिया से रूस की सेना को वापस बुला लेने पर चर्चा की.
व्हाइट हाउस ने कल एक बयान में कहा, 'उन्होंने सीरिया से रूसी बलों की आंशिक वापसी की राष्ट्रपति पुतिन की घोषणा और संघर्ष विराम को पूरी तरह लागू करने के लिए आवश्यक अगले कदमों पर आज चर्चा की. ' इससे पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने आज से 'सीरियाई अरब गणराज्य से रूसी सैन्य टुकड़ियों के अहम भाग' की वापसी शुरू करने के पुतिन के आदेश पर सोच-विचार का प्रस्ताव रखा.
पुतिन ने सितंबर में हवाई हमले शुरू करके और बड़े स्तर पर सेना की तैनाती करके लंबे और बर्बर युद्ध में हवा का रुख सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की ओर मोड़ दिया था और उनकी सत्ता को ढहने की कगार से बचा लिया था. हाल में शुरू किए गए 'संघषर्विराम' का बार-बार उल्लंघन किया गया है लेकिन ओबामा ने कहा कि इससे 'हिंसा में काफी कमी आई है. '
|
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सीरिया से रूस की सेना को वापस बुला लेने पर चर्चा की. व्हाइट हाउस ने कल एक बयान में कहा, 'उन्होंने सीरिया से रूसी बलों की आंशिक वापसी की राष्ट्रपति पुतिन की घोषणा और संघर्ष विराम को पूरी तरह लागू करने के लिए आवश्यक अगले कदमों पर आज चर्चा की. ' इससे पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने आज से 'सीरियाई अरब गणराज्य से रूसी सैन्य टुकड़ियों के अहम भाग' की वापसी शुरू करने के पुतिन के आदेश पर सोच-विचार का प्रस्ताव रखा. पुतिन ने सितंबर में हवाई हमले शुरू करके और बड़े स्तर पर सेना की तैनाती करके लंबे और बर्बर युद्ध में हवा का रुख सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की ओर मोड़ दिया था और उनकी सत्ता को ढहने की कगार से बचा लिया था. हाल में शुरू किए गए 'संघषर्विराम' का बार-बार उल्लंघन किया गया है लेकिन ओबामा ने कहा कि इससे 'हिंसा में काफी कमी आई है. '
|
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (Honda Motorcycle and Scooter India) प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात के विठ्ठलपुर (अहमदाबाद जिला) में अपने चौथे कारखाने से वैश्विक इंजनों का निर्माण शुरू कर दिया है।
नई दिल्ली। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (Honda Motorcycle and Scooter India) प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात के विठ्ठलपुर (अहमदाबाद जिला) में अपने चौथे कारखाने से वैश्विक इंजनों का निर्माण शुरू कर दिया है। अपने 250 सीसी (और ऊपर) श्रेणी के दोपहिया वाहनों को पावर देते हुए, समर्पित इंजन लाइन थाईलैंड, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों जैसे वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए तैयार है।
इसके पहले साल में कुल 50,000 इंजन इकाइयां प्रोडक्शन के लिए तय की गई हैं और बाजार की मांग के अनुसार क्षमता को और बढ़ाया जाएगा। 135 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ, कंपनी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए अपने गुजरात प्लांट से मिडसाइज फन मॉडल इंजन का प्रोडक्शन करेगी।
लाइन-ऑफ समारोह में बोलते हुए, अत्सुशी ओगाटा, प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष और सीईओ, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, "जैसा कि वैश्विक स्तर पर गतिशीलता की मांग बढ़ती है, होंडा दुनिया भर में अपने निर्यात पदचिह्न के और विस्तार की कल्पना करता है। भारत में BSVI मानदंडों की शुरुआत के साथ, हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम और करीब हैं। विनिर्माण के वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादों का निर्माण, यह नया विस्तार एचएमएसआई को दुनिया के लिए मेक इन इंडिया की हमारी दिशा को मजबूत करने के लिए उत्पादन क्षमताओं को विकसित करने की अनुमति देगा।
|
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात के विठ्ठलपुर में अपने चौथे कारखाने से वैश्विक इंजनों का निर्माण शुरू कर दिया है। नई दिल्ली। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात के विठ्ठलपुर में अपने चौथे कारखाने से वैश्विक इंजनों का निर्माण शुरू कर दिया है। अपने दो सौ पचास सीसी श्रेणी के दोपहिया वाहनों को पावर देते हुए, समर्पित इंजन लाइन थाईलैंड, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों जैसे वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। इसके पहले साल में कुल पचास,शून्य इंजन इकाइयां प्रोडक्शन के लिए तय की गई हैं और बाजार की मांग के अनुसार क्षमता को और बढ़ाया जाएगा। एक सौ पैंतीस करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ, कंपनी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए अपने गुजरात प्लांट से मिडसाइज फन मॉडल इंजन का प्रोडक्शन करेगी। लाइन-ऑफ समारोह में बोलते हुए, अत्सुशी ओगाटा, प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष और सीईओ, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, "जैसा कि वैश्विक स्तर पर गतिशीलता की मांग बढ़ती है, होंडा दुनिया भर में अपने निर्यात पदचिह्न के और विस्तार की कल्पना करता है। भारत में BSVI मानदंडों की शुरुआत के साथ, हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम और करीब हैं। विनिर्माण के वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादों का निर्माण, यह नया विस्तार एचएमएसआई को दुनिया के लिए मेक इन इंडिया की हमारी दिशा को मजबूत करने के लिए उत्पादन क्षमताओं को विकसित करने की अनुमति देगा।
|
बैंकों में नौकरी करने की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छा मौका है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने भर्ती की अधिसूचना जारी की है. इसके तहत कुल 105 पदों पर भर्ती निकाली गई है. बैंक द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इस विभाग में 47 एग्री मार्केटिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती की जानी है. वहीं, बैंक द्वारा दूसरे विज्ञापन के अनुसार वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेस डिपार्टमेंट में विभिन्न पदों की कुल 58 रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाना है.
दोनों ही भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 7 जनवरी से शुरू हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार 27 जनवरी 2022 तक अपना आवेदन कर सकते हैं.
बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी 47 एग्री मार्केटिंग ऑफिसर भर्ती 2022 विज्ञापन के अनुसार, कृषि या सम्बन्धित विषयों में कम से कम 4 वर्षीय डिग्री और सम्बन्धित विषयों में दो वर्षीय डिग्री या डिप्लोमा किए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. साथ ही, उम्मीदवारों के पास कम से कम 3 वर्ष का अनुभव होना चाहिए और उनकी आयु 1 जनवरी 2022 को 25 वर्ष से कम और 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.
वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेस डिपार्टमेंट में विभिन्न पदों की कुल 58 रिक्तियों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है. इन पदों में वेल्थ स्ट्रेटेजिस्ट (इन्वेस्टमेंट एण्ड इंश्योरेंस) के 28 पद, प्राइवेंट बैंकर - रेडिएंस प्राइवेट के 20 पदों समेत अन्य पद शामिल हैं.
इन पदों के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर कैरियर सेक्शन में दिए गए सम्बन्धित भर्ती के लिए इस आवेदन लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
|
बैंकों में नौकरी करने की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छा मौका है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने भर्ती की अधिसूचना जारी की है. इसके तहत कुल एक सौ पाँच पदों पर भर्ती निकाली गई है. बैंक द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इस विभाग में सैंतालीस एग्री मार्केटिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती की जानी है. वहीं, बैंक द्वारा दूसरे विज्ञापन के अनुसार वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेस डिपार्टमेंट में विभिन्न पदों की कुल अट्ठावन रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाना है. दोनों ही भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया सात जनवरी से शुरू हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार सत्ताईस जनवरी दो हज़ार बाईस तक अपना आवेदन कर सकते हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी सैंतालीस एग्री मार्केटिंग ऑफिसर भर्ती दो हज़ार बाईस विज्ञापन के अनुसार, कृषि या सम्बन्धित विषयों में कम से कम चार वर्षीय डिग्री और सम्बन्धित विषयों में दो वर्षीय डिग्री या डिप्लोमा किए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. साथ ही, उम्मीदवारों के पास कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए और उनकी आयु एक जनवरी दो हज़ार बाईस को पच्चीस वर्ष से कम और चालीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेस डिपार्टमेंट में विभिन्न पदों की कुल अट्ठावन रिक्तियों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है. इन पदों में वेल्थ स्ट्रेटेजिस्ट के अट्ठाईस पद, प्राइवेंट बैंकर - रेडिएंस प्राइवेट के बीस पदों समेत अन्य पद शामिल हैं. इन पदों के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर कैरियर सेक्शन में दिए गए सम्बन्धित भर्ती के लिए इस आवेदन लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
|
. . . मेरा नंबर कब आएगा?
ये बर्तनों की लाइन खाने के लिए लगी है। अपनी बारी का इंतजार करते दो बच्चे।
लाइन मतलब लाइन, बारिश भी आए तो क्या। इन बच्चों से सीखिए। तस्वीर कोलकाता की है।
ये तस्वीर जम्मू कश्मीर की है। पुलिस अफसर प्रवासी मजदूरों के बच्चों को मास्क लगाना सिखा रहे हैं।
सर्कल और उनमें खड़े बच्चे। ये सिखाते हैं कि कोरोना को हराना है तो सोशल डिस्टेंस बनाकर रखना ही होगा।
दिल्ली के एक कैंप की तस्वीर। प्रवासी मजदूरों के बच्चे इस मास्क की अहमियत समझते हैं।
बंद गेट के पीछे खड़े इन बच्चों का चेहरा देखिए। बाहर खेलने जाने का पूरा मन है, लेकिन समझते हैं कि लॉकडाउन में बाहर जाना मतलब कोरोना को दावत देना।
|
. . . मेरा नंबर कब आएगा? ये बर्तनों की लाइन खाने के लिए लगी है। अपनी बारी का इंतजार करते दो बच्चे। लाइन मतलब लाइन, बारिश भी आए तो क्या। इन बच्चों से सीखिए। तस्वीर कोलकाता की है। ये तस्वीर जम्मू कश्मीर की है। पुलिस अफसर प्रवासी मजदूरों के बच्चों को मास्क लगाना सिखा रहे हैं। सर्कल और उनमें खड़े बच्चे। ये सिखाते हैं कि कोरोना को हराना है तो सोशल डिस्टेंस बनाकर रखना ही होगा। दिल्ली के एक कैंप की तस्वीर। प्रवासी मजदूरों के बच्चे इस मास्क की अहमियत समझते हैं। बंद गेट के पीछे खड़े इन बच्चों का चेहरा देखिए। बाहर खेलने जाने का पूरा मन है, लेकिन समझते हैं कि लॉकडाउन में बाहर जाना मतलब कोरोना को दावत देना।
|
लारा दत्ता हिन्दी फिल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। वह वर्ष २००० की मिस यूनीवर्स थीं। लारा की पहली फ़िल्म अंदाज़ थी। उसके बाद वो कई सफल फ़िल्मों में दिख चुकी है जैसे-मस्ती, नो एन्ट्री, काल, भागम भाग, पार्टनर, हाउसफुल, और चलो दिल्ली। .
26 संबंधोंः टेनिस, दूल्हा मिल गया, नो एन्ट्री (२००५ फिल्म), पार्टनर (2007 फ़िल्म), पंजाबी समुदाय, फ़ना (२००६ चलचित्र), ब्रह्माण्ड सुन्दरी, भागम भाग (2006 फ़िल्म), मस्ती, मस्ती (2004 फ़िल्म), महेश भूपति, मिस यूनीवर्स 2000, हाउसफुल (2010 फ़िल्म), हे बेबी (2007 फ़िल्म), होमो सेपियन्स, ग़ाज़ियाबाद, आंग्ल-भारतीय समुदाय, काल, काल (२००५ चलचित्र), अभिनेत्री, अंदाज़, अंदाज़ (2003 फ़िल्म), उत्तर प्रदेश, १६ अप्रैल, १९७८, २००७।
टेनिस खेल 2 टीमों के बीच गेंद से खेले जाने वाला एक खेल है जिसमें कुल 2 खिलाडी (एकल मुकाबला) या ४ खिलाड़ी (युगल) होते हैं। टेनिस के बल्ले को टेनिस रैकट और मैदान को टेनिस कोर्ट कहते है। खिलाडी तारो से बुने हुए टेनिस रैकट के द्वारा टेनिस गेंद जोकि रबर की बनी, खोखली और गोल होती है एवम जिस के ऊपर महीन रोए होते है को जाल के ऊपर से विरोधी के कोर्ट में फेकते है। टेनिस की शुरूआत फ्रांस में मध्य काल में हुई मानी जाती है। उस समय यह खेल इन-डोर यानि छत के नीचे हुआ करता था। इंगलैड में 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षो में लान टेनिस, यानि छत से बाहर उद्यान में खेले जाने वाले का जन्म हुआ और बाद में सारे विश्व में लोकप्रिय हुआ। आज यह खेल ओलम्पिक में शामिल है और विश्व के सभी प्रमुख देशों के करोड़ों लोगो में काफी लोकप्रिय है। टेनिस की विश्व स्तर पर चार प्रमुख स्पर्धाए होती है जिन्हे ग्रेन्ड स्लेम कहा जाता है - हर साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलियन ओपन, मई में फ़्रांस की फ़्रेन्च ओपन और उसके दो हफ़्तों के बाद लंदन की विम्बलडन, सितम्बर में अमेरिका में होने वाली स्पर्धा को अमेरिकन ओपन (संक्षेप में यूएस ओपन) कहा जाता है। विम्बलडन एक घास के कोर्ट पर खेला जाता है। फ्रेंच ओपन मिट्टी के आंगन (क्ले कोर्ट) पर खेला जाता है। यूएस ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिश्रित कोर्ट पर खेला जाता है। .
दूल्हा मिल गया (दुल्हा मिल गया, دولھا مل گیا, Found A Groom) मुदस्सर अज़ीज़ द्वारा निर्देशित 2010 की एक बॉलीवुड रोमांस फिल्म है। सुष्मिता सेन, इशिता शर्मा और फरदीन खान इसके मुख्य कलाकार हैं। फिल्म 8 जनवरी 2010 को रिलीज़ की गई और वह 2010 में रिलीज होने वाली सबसे पहली बॉलीवुड फिल्मों में से एक थी (उसी दिन दूसरी फिल्म प्यार इम्पॉसिबल भी रिलीज़ की गई).
नो एन्ट्री (२००५ फिल्म)
नो एन्ट्री २००५ में बनी हिन्दी भाषा का एक हास्य चलचित्र है। इसके निर्देशक अनीस बाज्मी और निर्माता बोनी कपूर हैं। इसमें मुख्य भुमिका में हैं - सलमान खान, अनिल कपूर, फ़रदीन खान, लारा दत्ता, सेलिना जेठली, ईशा देओल और बिपाशा बसु। समीरा रेड्डी विशेष भूमिका में हैं। यह चलचित्र को एक तमिल चलचित्र चार्ली चैपलिन पर आधारित है। .
पार्टनर (2007 फ़िल्म)
पार्टनर 2007 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
पंजाबी समुदाय में मुख्यतः पंजाबी भाषा बोलने वाले लोग, पंजाब प्रांत में रहने वाले या पलायन करने वाले लोग आते हैं। श्रेणीःपंजाबी लोग.
फ़ना (२००६ चलचित्र)
कोई विवरण नहीं।
ब्रह्माण्ड सुन्दरी (मिस यूनिवर्स) मिस यूनिवर्स संगठन द्वारा आयोजित किया जाने वाली एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सौन्दर्य प्रतियोगिता है। प्रतियोगिता को १९५२ में कैलिफोर्निया स्थित कपड़ा कंपनी पेसेफिक मिल्स द्वारा स्थापित किया गया था। प्रतियोगिता कैसर-रोथ और बाद में गल्फ एंड वेस्टर्न इण्डस्ट्रीज का हिस्सा बनी, वर्ष १९९६ में इसे डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिग्रहित कर लिया। अपने प्रतिद्वंद्वी प्रतियोगिताओं - मिस वर्ल्ड और मिस अर्थ - की तरह दुनिया की सबसे अधिक प्रचारित सौंदर्य प्रतियोगिताओं में से एक है। वर्ष 2013 में यह खिताब वेनेजुएला की गैब्रिएला इसलऱ़ ने जीता है। .
भागम भाग (2006 फ़िल्म)
भागम भाग 2006 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
मस्ती कुछ लोगों द्वारा मिलकर, बिना किसी को नुक्सान पहुंचाए, मजे करना मस्ती के दायरे में आता है। .
मस्ती (2004 फ़िल्म)
मस्ती 2004 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
महेश भूपति (जन्मः 7 जून, 1974) एक भारत के पेशेवर टेनिस खिलाड़ी हैं। लिएंडर पेस के साथ मिलकर उन्होंने तीन डबल्स खिताब जीते हैं जिनमें 1999 का विबंलडन का खिताब भी शामिल है। साल 1999 भूपति के लिए स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ क्योंकि इसमें उन्होंने अमेरिकी ओपन मिश्रित खिताब जीता और फिर लिएंडर पेस के साथ रोलां गैरां और विंबलडन समेत तीन युगल ट्राफी अपने नाम की। वह और पेस सभी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली युगल जोड़ी बने थे। साल 1999 में ही दोनों को युगल की विश्व रैंकिंग में पहली भारतीय टीम बनने का गौरव हासिल हुआ। ओपन युग में 1952 के बाद यह पहली उपलब्धि थी। हालांकि बीच के सालों में महेश भूपति और लिएंडर पेस के बीच कुछ मतभेद हो गए जिसकी वजह से दोनों ने एक-दूसरे के साथ खेलना बंद कर दिया पर 2008 बीजिंग ओलंपिक्स के बाद से उन्होंने पुनः साथ-साथ खेलना शुरू कर दिया। .
मिस यूनीवर्स 2000 मिस यूनीवर्स का ४९वाँ संस्करण था जिसे भारत की लारा दत्ता ने जीता। श्रेणीःमिस यूनीवर्स.
हाउसफुल (2010 फ़िल्म)
हाउसफुल ३० अप्रैल २०१० को प्रदशित होने वाली एक बॉलीवुड फिल्म है जिसका निर्देशन साजिद खान ने किया है। फिल्म के प्रमुख सितारों में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अर्जुन रामपाल, लारा दत्ता, दीपिका पादुकोण और जिया खान हैं। फिल्म के अन्य चरित्र बोमन ईरानी और रणबीर कपूर ने निभाए हैं। फिल्म के एक गाने में जैकलीन फर्नांडीज़ विशेष भूमिका में हैं। फिल्म में संगीत शंकर-अहसान-लॉय का है। फिल्म को अधिकतर लंदन में फिल्माया गया है। .
हे बेबी (2007 फ़िल्म)
हे बेबी 2007 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
होमो सेपियन्स/आधुनिक मानव स्तनपायी सर्वाहारी प्रधान जंतुओं की एक जाति, जो बात करने, अमूर्त्त सोचने, ऊर्ध्व चलने तथा परिश्रम के साधन बनाने योग्य है। मनुष्य की तात्विक प्रवीणताएँ हैंः तापीय संसाधन के द्वारा खाना बनाना और कपडों का उपयोग। मनुष्य प्राणी जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है। जैव विवर्तन के फलस्वरूप मनुष्य ने जीव के सर्वोत्तम गुणों को पाया है। मनुष्य अपने साथ-साथ प्राकृतिक परिवेश को भी अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखता है। अपने इसी गुण के कारण हम मनुष्यों नें प्रकृति के साथ काफी खिलवाड़ किया है। आधुनिक मानव अफ़्रीका में 2 लाख साल पहले, सबके पूर्वज अफ़्रीकी थे। होमो इरेक्टस के बाद विकास दो शाखाओं में विभक्त हो गया। पहली शाखा का निएंडरथल मानव में अंत हो गया और दूसरी शाखा क्रोमैग्नॉन मानव अवस्था से गुजरकर वर्तमान मनुष्य तक पहुंच पाई है। संपूर्ण मानव विकास मस्तिष्क की वृद्धि पर ही केंद्रित है। यद्यपि मस्तिष्क की वृद्धि स्तनी वर्ग के अन्य बहुत से जंतुसमूहों में भी हुई, तथापि कुछ अज्ञात कारणों से यह वृद्धि प्राइमेटों में सबसे अधिक हुई। संभवतः उनका वृक्षीय जीवन मस्तिष्क की वृद्धि के अन्य कारणों में से एक हो सकता है। .
ग़ाज़ियाबाद, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में स्थित एक नगर है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है और दिल्ली के पूर्व और मेरठ के दक्षिणपश्चिम में स्थित है। ग़ाज़ियाबाद में ग़ाज़ियाबाद जिले का मुख्यालय स्थित है। स्वतंत्रता से पहले ग़ाज़ियाबाद जिला, मेरठ जिले का भाग था पर स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राजनैतिक कारणों से इसे एक पृथक जिला बनाया गया। ग़ाज़ियाबाद का नाम इसके संस्थापक ग़ाज़ीउद्दीन के नाम पर पड़ा है, जिसने इसका नाम अपने नाम पर ग़ाज़ीउद्दीननगर रखा था, लेकिन बाद में, इसका नाम छोटा करके ग़ाज़ियाबाद कर दिया गया। .
आंग्ल-भारतीय या ऐंग्लो इंडियन(ऍङ्ग्लो-इण्डियन) विशेष शब्द है जो जाति और भाषा के संबंध में प्रयुक्त होता है। जाति के संबंध में यह उन अंग्रेजों की ओर संकेत करता है जो भारत में बस गए हैं या व्यवसाय अथवा पदाधिकार से यहाँ प्रवास करते हैं। इनकी संख्या तो आज भारत में विशेष नहीं है और मात्र प्रवासी होने के कारण उनको देश के राजनीतिक अधिकार भी प्राप्त नहीं, परंतु एक दूसरा वर्ग उनसे संबंधित इस देश का है और उसे देश के नागरिकों के सारे हक भी हासिल हैं। यह वर्ग भारत के अंग्रेज प्रवासियों और भारतीय स्त्रियों के संपर्क से उत्पन्न हुआ है जो ऐंग्लो इंडियन कहलाता है। इनकी संख्या काफी है और लोकसभा में इनके विशेष प्रतिनिधि के लिए संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित हैं। इस समुदाय के समझदार व्यक्ति अपने को सर्वथा भारतीय और भारत के सुख-दुःख में शरीक मानते हैं, परंतु अधिकतर ये स्थानीय जनता से घना संपर्क नहीं बना पाते और इंग्लैंड की सहायता की अपेक्षा करते हैं। इनका अंग्रेजों से रक्तसंबंध होना, अंग्रेजी का इनकी जन्मजात और साधारण बोलचाल की भाषा होना और उनका धर्म से ईसाई होना भी उन्हें अपना विदेशी रूप बनाए रखने में सहायक होते हैं। उनकी समूची संस्कृति अंग्रेजी विचारधारा और रहन-सहन से प्रभावित तथा अनुप्रमाणित है। तथापि अब वे धीरे-धीरे देश की नित्य बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होते जा रहे हैं। ऐंग्लो इंडियन शब्द का व्यवहार प्रवासी अंग्रेजों की भारतीय माताओं से प्रसूत संततियों अथवा उनसे प्रजनित संतानों से भिन्न भाषा के अर्थ में भी होता है। ऐंग्लो इंडियन भाषा के अनेक रूप हैं। कभी तो इसका प्रयोग भारतीयों द्वारा लिखी शुद्ध अंग्रेजी के अर्थ में हुआ है और कभी उन अंग्रेजों की भाषा के संबंध में भी जिन्होंने भारत में रहकर लिखा है, यद्यपि भाषाशास्त्र की दृष्टि से दोनों में स्थानीय प्रभावों के अतिरिक्त कोई विशेष भेद नहीं है। फिर ऐंग्लो इंडियन से तात्पर्य उस संकर हिंदी भाषा से भी है जो भारत के ऐंग्लों इंडियन अपने से भिन्न भारतीयों से बोलते हैं। इस शब्द का व्यवहार अनेक बार उस हिंदी भाषा के संबंध में भी हुआ है जिसे हिंदुस्तानी कहते हैं। परंतु इस अर्थ में इसका उपयोग अकारण और अनुचित दोनों हैं। नोट':- राष्ट्रपति को लोकसभा में 2 एंग्लो इंडियन को मनोनीत करने का अधिकार हैं। जबकि राज्यपाल विधान सभा मे 01 एंग्लो इंडियन को मनोनीत करता है। .
काल .
काल (२००५ चलचित्र)
काल २००५ में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
अभिनेत्री वह महिला कलाकार है जो एक चलचित्र या नाटक में किसी चरित्र का अभिनय करती है। पुरुष कलाकार के लिए अभिनेता शब्द का प्रयोग किया जाता है। .
अंदाज़ के कई अर्थ है.
अंदाज़ (2003 फ़िल्म)
अंदाज़ 2003 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
16 अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 106वॉ (लीप वर्ष मे 107 वॉ) दिन है। साल मे अभी और 259 दिन बाकी है। .
१९७८ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। .
वर्ष २००७ सोमवार से प्रारम्भ होने वाला ग्रेगोरी कैलंडर का सामान्य वर्ष है। .
|
लारा दत्ता हिन्दी फिल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। वह वर्ष दो हज़ार की मिस यूनीवर्स थीं। लारा की पहली फ़िल्म अंदाज़ थी। उसके बाद वो कई सफल फ़िल्मों में दिख चुकी है जैसे-मस्ती, नो एन्ट्री, काल, भागम भाग, पार्टनर, हाउसफुल, और चलो दिल्ली। . छब्बीस संबंधोंः टेनिस, दूल्हा मिल गया, नो एन्ट्री , पार्टनर , पंजाबी समुदाय, फ़ना , ब्रह्माण्ड सुन्दरी, भागम भाग , मस्ती, मस्ती , महेश भूपति, मिस यूनीवर्स दो हज़ार, हाउसफुल , हे बेबी , होमो सेपियन्स, ग़ाज़ियाबाद, आंग्ल-भारतीय समुदाय, काल, काल , अभिनेत्री, अंदाज़, अंदाज़ , उत्तर प्रदेश, सोलह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर, दो हज़ार सात। टेनिस खेल दो टीमों के बीच गेंद से खेले जाने वाला एक खेल है जिसमें कुल दो खिलाडी या चार खिलाड़ी होते हैं। टेनिस के बल्ले को टेनिस रैकट और मैदान को टेनिस कोर्ट कहते है। खिलाडी तारो से बुने हुए टेनिस रैकट के द्वारा टेनिस गेंद जोकि रबर की बनी, खोखली और गोल होती है एवम जिस के ऊपर महीन रोए होते है को जाल के ऊपर से विरोधी के कोर्ट में फेकते है। टेनिस की शुरूआत फ्रांस में मध्य काल में हुई मानी जाती है। उस समय यह खेल इन-डोर यानि छत के नीचे हुआ करता था। इंगलैड में उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षो में लान टेनिस, यानि छत से बाहर उद्यान में खेले जाने वाले का जन्म हुआ और बाद में सारे विश्व में लोकप्रिय हुआ। आज यह खेल ओलम्पिक में शामिल है और विश्व के सभी प्रमुख देशों के करोड़ों लोगो में काफी लोकप्रिय है। टेनिस की विश्व स्तर पर चार प्रमुख स्पर्धाए होती है जिन्हे ग्रेन्ड स्लेम कहा जाता है - हर साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया की ऑस्ट्रेलियन ओपन, मई में फ़्रांस की फ़्रेन्च ओपन और उसके दो हफ़्तों के बाद लंदन की विम्बलडन, सितम्बर में अमेरिका में होने वाली स्पर्धा को अमेरिकन ओपन कहा जाता है। विम्बलडन एक घास के कोर्ट पर खेला जाता है। फ्रेंच ओपन मिट्टी के आंगन पर खेला जाता है। यूएस ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिश्रित कोर्ट पर खेला जाता है। . दूल्हा मिल गया मुदस्सर अज़ीज़ द्वारा निर्देशित दो हज़ार दस की एक बॉलीवुड रोमांस फिल्म है। सुष्मिता सेन, इशिता शर्मा और फरदीन खान इसके मुख्य कलाकार हैं। फिल्म आठ जनवरी दो हज़ार दस को रिलीज़ की गई और वह दो हज़ार दस में रिलीज होने वाली सबसे पहली बॉलीवुड फिल्मों में से एक थी . नो एन्ट्री नो एन्ट्री दो हज़ार पाँच में बनी हिन्दी भाषा का एक हास्य चलचित्र है। इसके निर्देशक अनीस बाज्मी और निर्माता बोनी कपूर हैं। इसमें मुख्य भुमिका में हैं - सलमान खान, अनिल कपूर, फ़रदीन खान, लारा दत्ता, सेलिना जेठली, ईशा देओल और बिपाशा बसु। समीरा रेड्डी विशेष भूमिका में हैं। यह चलचित्र को एक तमिल चलचित्र चार्ली चैपलिन पर आधारित है। . पार्टनर पार्टनर दो हज़ार सात में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . पंजाबी समुदाय में मुख्यतः पंजाबी भाषा बोलने वाले लोग, पंजाब प्रांत में रहने वाले या पलायन करने वाले लोग आते हैं। श्रेणीःपंजाबी लोग. फ़ना कोई विवरण नहीं। ब्रह्माण्ड सुन्दरी मिस यूनिवर्स संगठन द्वारा आयोजित किया जाने वाली एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सौन्दर्य प्रतियोगिता है। प्रतियोगिता को एक हज़ार नौ सौ बावन में कैलिफोर्निया स्थित कपड़ा कंपनी पेसेफिक मिल्स द्वारा स्थापित किया गया था। प्रतियोगिता कैसर-रोथ और बाद में गल्फ एंड वेस्टर्न इण्डस्ट्रीज का हिस्सा बनी, वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे में इसे डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिग्रहित कर लिया। अपने प्रतिद्वंद्वी प्रतियोगिताओं - मिस वर्ल्ड और मिस अर्थ - की तरह दुनिया की सबसे अधिक प्रचारित सौंदर्य प्रतियोगिताओं में से एक है। वर्ष दो हज़ार तेरह में यह खिताब वेनेजुएला की गैब्रिएला इसलऱ़ ने जीता है। . भागम भाग भागम भाग दो हज़ार छः में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . मस्ती कुछ लोगों द्वारा मिलकर, बिना किसी को नुक्सान पहुंचाए, मजे करना मस्ती के दायरे में आता है। . मस्ती मस्ती दो हज़ार चार में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . महेश भूपति एक भारत के पेशेवर टेनिस खिलाड़ी हैं। लिएंडर पेस के साथ मिलकर उन्होंने तीन डबल्स खिताब जीते हैं जिनमें एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे का विबंलडन का खिताब भी शामिल है। साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे भूपति के लिए स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ क्योंकि इसमें उन्होंने अमेरिकी ओपन मिश्रित खिताब जीता और फिर लिएंडर पेस के साथ रोलां गैरां और विंबलडन समेत तीन युगल ट्राफी अपने नाम की। वह और पेस सभी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली युगल जोड़ी बने थे। साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में ही दोनों को युगल की विश्व रैंकिंग में पहली भारतीय टीम बनने का गौरव हासिल हुआ। ओपन युग में एक हज़ार नौ सौ बावन के बाद यह पहली उपलब्धि थी। हालांकि बीच के सालों में महेश भूपति और लिएंडर पेस के बीच कुछ मतभेद हो गए जिसकी वजह से दोनों ने एक-दूसरे के साथ खेलना बंद कर दिया पर दो हज़ार आठ बीजिंग ओलंपिक्स के बाद से उन्होंने पुनः साथ-साथ खेलना शुरू कर दिया। . मिस यूनीवर्स दो हज़ार मिस यूनीवर्स का उनचासवाँ संस्करण था जिसे भारत की लारा दत्ता ने जीता। श्रेणीःमिस यूनीवर्स. हाउसफुल हाउसफुल तीस अप्रैल दो हज़ार दस को प्रदशित होने वाली एक बॉलीवुड फिल्म है जिसका निर्देशन साजिद खान ने किया है। फिल्म के प्रमुख सितारों में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अर्जुन रामपाल, लारा दत्ता, दीपिका पादुकोण और जिया खान हैं। फिल्म के अन्य चरित्र बोमन ईरानी और रणबीर कपूर ने निभाए हैं। फिल्म के एक गाने में जैकलीन फर्नांडीज़ विशेष भूमिका में हैं। फिल्म में संगीत शंकर-अहसान-लॉय का है। फिल्म को अधिकतर लंदन में फिल्माया गया है। . हे बेबी हे बेबी दो हज़ार सात में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . होमो सेपियन्स/आधुनिक मानव स्तनपायी सर्वाहारी प्रधान जंतुओं की एक जाति, जो बात करने, अमूर्त्त सोचने, ऊर्ध्व चलने तथा परिश्रम के साधन बनाने योग्य है। मनुष्य की तात्विक प्रवीणताएँ हैंः तापीय संसाधन के द्वारा खाना बनाना और कपडों का उपयोग। मनुष्य प्राणी जगत का सर्वाधिक विकसित जीव है। जैव विवर्तन के फलस्वरूप मनुष्य ने जीव के सर्वोत्तम गुणों को पाया है। मनुष्य अपने साथ-साथ प्राकृतिक परिवेश को भी अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखता है। अपने इसी गुण के कारण हम मनुष्यों नें प्रकृति के साथ काफी खिलवाड़ किया है। आधुनिक मानव अफ़्रीका में दो लाख साल पहले, सबके पूर्वज अफ़्रीकी थे। होमो इरेक्टस के बाद विकास दो शाखाओं में विभक्त हो गया। पहली शाखा का निएंडरथल मानव में अंत हो गया और दूसरी शाखा क्रोमैग्नॉन मानव अवस्था से गुजरकर वर्तमान मनुष्य तक पहुंच पाई है। संपूर्ण मानव विकास मस्तिष्क की वृद्धि पर ही केंद्रित है। यद्यपि मस्तिष्क की वृद्धि स्तनी वर्ग के अन्य बहुत से जंतुसमूहों में भी हुई, तथापि कुछ अज्ञात कारणों से यह वृद्धि प्राइमेटों में सबसे अधिक हुई। संभवतः उनका वृक्षीय जीवन मस्तिष्क की वृद्धि के अन्य कारणों में से एक हो सकता है। . ग़ाज़ियाबाद, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में स्थित एक नगर है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है और दिल्ली के पूर्व और मेरठ के दक्षिणपश्चिम में स्थित है। ग़ाज़ियाबाद में ग़ाज़ियाबाद जिले का मुख्यालय स्थित है। स्वतंत्रता से पहले ग़ाज़ियाबाद जिला, मेरठ जिले का भाग था पर स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राजनैतिक कारणों से इसे एक पृथक जिला बनाया गया। ग़ाज़ियाबाद का नाम इसके संस्थापक ग़ाज़ीउद्दीन के नाम पर पड़ा है, जिसने इसका नाम अपने नाम पर ग़ाज़ीउद्दीननगर रखा था, लेकिन बाद में, इसका नाम छोटा करके ग़ाज़ियाबाद कर दिया गया। . आंग्ल-भारतीय या ऐंग्लो इंडियन विशेष शब्द है जो जाति और भाषा के संबंध में प्रयुक्त होता है। जाति के संबंध में यह उन अंग्रेजों की ओर संकेत करता है जो भारत में बस गए हैं या व्यवसाय अथवा पदाधिकार से यहाँ प्रवास करते हैं। इनकी संख्या तो आज भारत में विशेष नहीं है और मात्र प्रवासी होने के कारण उनको देश के राजनीतिक अधिकार भी प्राप्त नहीं, परंतु एक दूसरा वर्ग उनसे संबंधित इस देश का है और उसे देश के नागरिकों के सारे हक भी हासिल हैं। यह वर्ग भारत के अंग्रेज प्रवासियों और भारतीय स्त्रियों के संपर्क से उत्पन्न हुआ है जो ऐंग्लो इंडियन कहलाता है। इनकी संख्या काफी है और लोकसभा में इनके विशेष प्रतिनिधि के लिए संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित हैं। इस समुदाय के समझदार व्यक्ति अपने को सर्वथा भारतीय और भारत के सुख-दुःख में शरीक मानते हैं, परंतु अधिकतर ये स्थानीय जनता से घना संपर्क नहीं बना पाते और इंग्लैंड की सहायता की अपेक्षा करते हैं। इनका अंग्रेजों से रक्तसंबंध होना, अंग्रेजी का इनकी जन्मजात और साधारण बोलचाल की भाषा होना और उनका धर्म से ईसाई होना भी उन्हें अपना विदेशी रूप बनाए रखने में सहायक होते हैं। उनकी समूची संस्कृति अंग्रेजी विचारधारा और रहन-सहन से प्रभावित तथा अनुप्रमाणित है। तथापि अब वे धीरे-धीरे देश की नित्य बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होते जा रहे हैं। ऐंग्लो इंडियन शब्द का व्यवहार प्रवासी अंग्रेजों की भारतीय माताओं से प्रसूत संततियों अथवा उनसे प्रजनित संतानों से भिन्न भाषा के अर्थ में भी होता है। ऐंग्लो इंडियन भाषा के अनेक रूप हैं। कभी तो इसका प्रयोग भारतीयों द्वारा लिखी शुद्ध अंग्रेजी के अर्थ में हुआ है और कभी उन अंग्रेजों की भाषा के संबंध में भी जिन्होंने भारत में रहकर लिखा है, यद्यपि भाषाशास्त्र की दृष्टि से दोनों में स्थानीय प्रभावों के अतिरिक्त कोई विशेष भेद नहीं है। फिर ऐंग्लो इंडियन से तात्पर्य उस संकर हिंदी भाषा से भी है जो भारत के ऐंग्लों इंडियन अपने से भिन्न भारतीयों से बोलते हैं। इस शब्द का व्यवहार अनेक बार उस हिंदी भाषा के संबंध में भी हुआ है जिसे हिंदुस्तानी कहते हैं। परंतु इस अर्थ में इसका उपयोग अकारण और अनुचित दोनों हैं। नोट':- राष्ट्रपति को लोकसभा में दो एंग्लो इंडियन को मनोनीत करने का अधिकार हैं। जबकि राज्यपाल विधान सभा मे एक एंग्लो इंडियन को मनोनीत करता है। . काल . काल काल दो हज़ार पाँच में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . अभिनेत्री वह महिला कलाकार है जो एक चलचित्र या नाटक में किसी चरित्र का अभिनय करती है। पुरुष कलाकार के लिए अभिनेता शब्द का प्रयोग किया जाता है। . अंदाज़ के कई अर्थ है. अंदाज़ अंदाज़ दो हज़ार तीन में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . सोलह अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का एक सौ छःवॉ दिन है। साल मे अभी और दो सौ उनसठ दिन बाकी है। . एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . वर्ष दो हज़ार सात सोमवार से प्रारम्भ होने वाला ग्रेगोरी कैलंडर का सामान्य वर्ष है। .
|
बिहार के भागलपुर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है जहां गर्लफ्रेंड की बेवफाई पर 10वीं के छात्र रोशन कुमार ( उम्र 18 वर्ष ) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना मोजाहिदपुर थाने के सिकंदरपुर मोहल्ला स्थित गुड़हट्टा रोड के पास हुई। जिसके बाद से पूरा परिवार सदमे में हैं।
पारिवार वालों के मुताबिक दो दिन से रोशन घर में खाना नहीं खा रहा था और मोबाइल तोड़ दिया था। वह काफी तनाव में रह रहा था। सोमवार शाम मां ने खाना खाने को दिया लेकिन गुस्से में उसने थाली फेंक दिया। आसपास रहने वाले दोस्तों ने भी उसे समझाया। समोसा लाकर खिलाया। रात दस बजे तक दोस्तों के साथ लैपटॉप पर गेम खेला और सिनेमा देख रहा था। मार्च में रौशन ने दसवीं की परीक्षा दी थी।
दोस्तों की माने तो रोशन का स्कूल में साथ पढ़ने वाली एक लड़की से गहरी दोस्ती थी। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों अक्सर मिलते जुलते रहते थे लेकिन सप्ताह भर से दोनों में किसी बात को लेकर मतभेद हो गया था। लड़की बात नहीं कर रही थी। दोस्तों के अनुसार लड़की रोशन को छोड़कर किसी और के साथ दोस्ती बढ़ा रही थी। इसी बात से रोशन परेशान था। गुस्से में आकर रोशन ने मोबाइल तोड़ दिया था। मां ने पूछा तो कहा गिर जाने से मोबाइल टूट गया है। सुबह जब लड़की को रोशन के खुदकुशी की सूचना दी गई तो लड़की को लेकर परिवार वाले घर में ताला लगाकर बाहर चले गए।
पिता ने कहा कि सोमवार देर रात रात 11 बजे खाना खाकर घर के सभी लोग कमरे में सोने चले गए। रौशन भी बाहर के कमरे में चला गया था। मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे टहलने के उठे तो रौशन के कमरे में लाइट जल रही थी। टहलने के लिए उसे जगाया तो कोई आवाज नहीं मिलने पर संदेह होने लगा। खिड़की से बेटे का शव देखकर परिवार के लोग रोने पीटने लगे। आसपास के लोग जुट गए। मंगलवार सुबह मोजाहिदपुर थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर राम इकबाल प्रसाद यादव ने कहा कि घटना की यूडी रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। मोबाइल कॉल डिटेल से घटना की सच्चाई का पता लगाया जाएगा।
|
बिहार के भागलपुर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है जहां गर्लफ्रेंड की बेवफाई पर दसवीं के छात्र रोशन कुमार ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना मोजाहिदपुर थाने के सिकंदरपुर मोहल्ला स्थित गुड़हट्टा रोड के पास हुई। जिसके बाद से पूरा परिवार सदमे में हैं। पारिवार वालों के मुताबिक दो दिन से रोशन घर में खाना नहीं खा रहा था और मोबाइल तोड़ दिया था। वह काफी तनाव में रह रहा था। सोमवार शाम मां ने खाना खाने को दिया लेकिन गुस्से में उसने थाली फेंक दिया। आसपास रहने वाले दोस्तों ने भी उसे समझाया। समोसा लाकर खिलाया। रात दस बजे तक दोस्तों के साथ लैपटॉप पर गेम खेला और सिनेमा देख रहा था। मार्च में रौशन ने दसवीं की परीक्षा दी थी। दोस्तों की माने तो रोशन का स्कूल में साथ पढ़ने वाली एक लड़की से गहरी दोस्ती थी। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों अक्सर मिलते जुलते रहते थे लेकिन सप्ताह भर से दोनों में किसी बात को लेकर मतभेद हो गया था। लड़की बात नहीं कर रही थी। दोस्तों के अनुसार लड़की रोशन को छोड़कर किसी और के साथ दोस्ती बढ़ा रही थी। इसी बात से रोशन परेशान था। गुस्से में आकर रोशन ने मोबाइल तोड़ दिया था। मां ने पूछा तो कहा गिर जाने से मोबाइल टूट गया है। सुबह जब लड़की को रोशन के खुदकुशी की सूचना दी गई तो लड़की को लेकर परिवार वाले घर में ताला लगाकर बाहर चले गए। पिता ने कहा कि सोमवार देर रात रात ग्यारह बजे खाना खाकर घर के सभी लोग कमरे में सोने चले गए। रौशन भी बाहर के कमरे में चला गया था। मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे टहलने के उठे तो रौशन के कमरे में लाइट जल रही थी। टहलने के लिए उसे जगाया तो कोई आवाज नहीं मिलने पर संदेह होने लगा। खिड़की से बेटे का शव देखकर परिवार के लोग रोने पीटने लगे। आसपास के लोग जुट गए। मंगलवार सुबह मोजाहिदपुर थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर राम इकबाल प्रसाद यादव ने कहा कि घटना की यूडी रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। मोबाइल कॉल डिटेल से घटना की सच्चाई का पता लगाया जाएगा।
|
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को चौथे बिम्सटेक सम्मलेन में हिस्सा लेने के लिए काठमांडू पहुंचे, जहां वह सदस्य देशों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे. वह बिम्सटेक उद्घाटन सत्र में भाग लेंगे और भाषण देंगे.
उद्घाटन सत्र के बाद, मोदी अपने नेपाली और बांग्लादेशी समकक्ष के. पी. शर्मा ओली और शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.
लेकिन ये वह बिम्सटेक सम्मेलन है क्या और भारत के इससे क्या हित जुड़े हैं.
दरअसल बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी से जुड़े हुए देशों का एक समूह है. बिम्सटेक संगठन में बंगाल की खाड़ी से जुड़े देश एकदूसरे को आर्थिक और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देते हैं. हालांकि इस समूह की शुरूआत 1997 में हूई थी लेकिन इसका पहला सम्मेलन 2004 में थाईलैंड में हुआ था. बिम्सटेक को एशिआन, सार्क की तरह ही एक औऱ क्षेत्रीय संगठन कहा जा सकता है. शुरूआत में इसके सदस्यों में बांग्लादेश, इंडिया, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हुए, इसके बाद 1997 में म्यांमार और 2004 में नेपाल औऱ भूटान भी इस समूह के सदस्य बने.
अब तक इस समूह के 3 सम्मेलन हुए हैं और चौथा नेपाल में हो रहा है. 2008 में भारत में भी बिम्सटेक सम्मलेन हुआ था.
हालांकि नेपाल किसी भी तरह बंगाल की की खाड़ी से जुड़ा देश नही है फिर भी इसे बिम्सटेक देशों में शामिल किया गया है. अकसर इस बात की चर्चा के दौरान इसकी वजह ये बताई जाती है कि भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए नेपाल को इस समूह का सदस्य बनवाया है.
2014 में इस समूह का मुख्य कार्यालय ढ़ाका में बनवाया गया था जिसके बनने का 36 फीसदी खर्चा भारत द्वारा उठाया गया था.
हालांकि अभी इस समूह को मजबूत करने की जरूरत है और इसी कड़ी में एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है . बिम्सटेक देशों में बंगाल की खाड़ी के जरिए व्यापार को मजबूत करने की कोशिशें भी की जा रही हैं जिसके लिए कोस्टल शिपिंग एग्रीमेंट भी तैयार होने को है.
चाइना जिस तरह एशिया में अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा है ऐसे में बिम्सटेक देश भारत के साथ मिलकर इस संगठन को कामयाब बनाने की कोशिश में हैं. न सिर्फ अन्य देशों के लिए बल्कि भारत के लिए भी ये संगठन पड़ोसी देशों को करीब ला कर संबंधों को मजबूत कर सकता है.
वहीं म्यांमार और नेपाल जिसकी भारत से दूरियां बन रही हैं और ये चाइना के करीब जा रहे हैं ऐसे में बिम्सटेक एक अच्छा मौका है जिसके तहत भारत फिर से इन देशों को अपने भरोसे में ला सकता है.
भारत इस संगठन को बिना पाकिस्तान वाले सार्क संगठन की तरह बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसके लिए बजट सबसे बड़ी मांग है. 2016 का भारत का बिम्सटेक बजट मात्र 12 लाख था जिससे बिम्सटेक में भारत की दिलचस्पी पर सवाल भी उठाए जाने लगे थे. हालांकि बाद में इसे बढ़ा कर 4. 5 करोड़ कर दिया गया था.
बिम्सटेक से उम्मीद की जाती है कि वो एशिआन या युरोपीयन युनियन के जैसा एक संगठन बन सकता है लेकिन अभी ये प्रथम स्तर पर है और यदि अभी इस पर ध्यान नही दिया गया तो शायद ही ये अपनी उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा.
|
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को चौथे बिम्सटेक सम्मलेन में हिस्सा लेने के लिए काठमांडू पहुंचे, जहां वह सदस्य देशों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे. वह बिम्सटेक उद्घाटन सत्र में भाग लेंगे और भाषण देंगे. उद्घाटन सत्र के बाद, मोदी अपने नेपाली और बांग्लादेशी समकक्ष के. पी. शर्मा ओली और शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. लेकिन ये वह बिम्सटेक सम्मेलन है क्या और भारत के इससे क्या हित जुड़े हैं. दरअसल बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी से जुड़े हुए देशों का एक समूह है. बिम्सटेक संगठन में बंगाल की खाड़ी से जुड़े देश एकदूसरे को आर्थिक और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देते हैं. हालांकि इस समूह की शुरूआत एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में हूई थी लेकिन इसका पहला सम्मेलन दो हज़ार चार में थाईलैंड में हुआ था. बिम्सटेक को एशिआन, सार्क की तरह ही एक औऱ क्षेत्रीय संगठन कहा जा सकता है. शुरूआत में इसके सदस्यों में बांग्लादेश, इंडिया, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हुए, इसके बाद एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में म्यांमार और दो हज़ार चार में नेपाल औऱ भूटान भी इस समूह के सदस्य बने. अब तक इस समूह के तीन सम्मेलन हुए हैं और चौथा नेपाल में हो रहा है. दो हज़ार आठ में भारत में भी बिम्सटेक सम्मलेन हुआ था. हालांकि नेपाल किसी भी तरह बंगाल की की खाड़ी से जुड़ा देश नही है फिर भी इसे बिम्सटेक देशों में शामिल किया गया है. अकसर इस बात की चर्चा के दौरान इसकी वजह ये बताई जाती है कि भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए नेपाल को इस समूह का सदस्य बनवाया है. दो हज़ार चौदह में इस समूह का मुख्य कार्यालय ढ़ाका में बनवाया गया था जिसके बनने का छत्तीस फीसदी खर्चा भारत द्वारा उठाया गया था. हालांकि अभी इस समूह को मजबूत करने की जरूरत है और इसी कड़ी में एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है . बिम्सटेक देशों में बंगाल की खाड़ी के जरिए व्यापार को मजबूत करने की कोशिशें भी की जा रही हैं जिसके लिए कोस्टल शिपिंग एग्रीमेंट भी तैयार होने को है. चाइना जिस तरह एशिया में अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा है ऐसे में बिम्सटेक देश भारत के साथ मिलकर इस संगठन को कामयाब बनाने की कोशिश में हैं. न सिर्फ अन्य देशों के लिए बल्कि भारत के लिए भी ये संगठन पड़ोसी देशों को करीब ला कर संबंधों को मजबूत कर सकता है. वहीं म्यांमार और नेपाल जिसकी भारत से दूरियां बन रही हैं और ये चाइना के करीब जा रहे हैं ऐसे में बिम्सटेक एक अच्छा मौका है जिसके तहत भारत फिर से इन देशों को अपने भरोसे में ला सकता है. भारत इस संगठन को बिना पाकिस्तान वाले सार्क संगठन की तरह बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसके लिए बजट सबसे बड़ी मांग है. दो हज़ार सोलह का भारत का बिम्सटेक बजट मात्र बारह लाख था जिससे बिम्सटेक में भारत की दिलचस्पी पर सवाल भी उठाए जाने लगे थे. हालांकि बाद में इसे बढ़ा कर चार. पाँच करोड़ कर दिया गया था. बिम्सटेक से उम्मीद की जाती है कि वो एशिआन या युरोपीयन युनियन के जैसा एक संगठन बन सकता है लेकिन अभी ये प्रथम स्तर पर है और यदि अभी इस पर ध्यान नही दिया गया तो शायद ही ये अपनी उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा.
|
यूक्रेनी सेना बखमुत को आत्मसमर्पण नहीं करेगी (जैसा कि कीव में आर्टेमोव्स्क कहा जाता है)। यह यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा था।
स्मरण करो कि यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आज कीव में आयोजित किया गया था। इसमें उर्सुला वॉन डेर लेयेन और जोसेप बोरेल सहित यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
जैसा कि ज़ेलेंस्की ने कहा, बखमुट (आर्टेमोव्स्क) में, यूक्रेन की सशस्त्र सेना "जितना हो सके उतना लड़ेगी। " यही है, उन्होंने वास्तव में यूक्रेनी संरचनाओं के भारी नुकसान के बावजूद, शहर को नहीं छोड़ने और किसी भी कीमत पर इसे जारी रखने की अपनी मूल रेखा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रमुख के सलाहकार मिखाइल पोडोलीक ने कहा था कि कीव आर्टेमिव्स्क को रखने के लिए बहुत अधिक कीमत चुकाता है। लेकिन, जाहिरा तौर पर, ज़ेलेंस्की ने अपनी पसंद बनाई, और यह देखते हुए कि उन्होंने इन शब्दों को यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अंत में कहा था, यह संभव है कि ऐसा निर्णय या तो "पश्चिमी जनता के लिए" या उच्च रैंकिंग वाले यूरोपीय के साथ समझौते से किया गया हो मेहमान।
स्मरण करो कि वर्तमान में, रूसी संघ के सशस्त्र बलों के समर्थन के साथ पीएमसी "वैगनर" की सेना ने आर्टेमोव्स्क पर हमला जारी रखा है। पहले इस शहर के बाहरी इलाके में लड़ाई की सूचना मिली थी। शहर में ही, यूक्रेनी सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया गया था। यहां तक कि अमेरिकी विश्लेषकों ने बार-बार कहा है कि यूएएफ को अंततः आर्टेमोव्स्क को वैसे भी छोड़ना होगा।
|
यूक्रेनी सेना बखमुत को आत्मसमर्पण नहीं करेगी । यह यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा था। स्मरण करो कि यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आज कीव में आयोजित किया गया था। इसमें उर्सुला वॉन डेर लेयेन और जोसेप बोरेल सहित यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। जैसा कि ज़ेलेंस्की ने कहा, बखमुट में, यूक्रेन की सशस्त्र सेना "जितना हो सके उतना लड़ेगी। " यही है, उन्होंने वास्तव में यूक्रेनी संरचनाओं के भारी नुकसान के बावजूद, शहर को नहीं छोड़ने और किसी भी कीमत पर इसे जारी रखने की अपनी मूल रेखा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रमुख के सलाहकार मिखाइल पोडोलीक ने कहा था कि कीव आर्टेमिव्स्क को रखने के लिए बहुत अधिक कीमत चुकाता है। लेकिन, जाहिरा तौर पर, ज़ेलेंस्की ने अपनी पसंद बनाई, और यह देखते हुए कि उन्होंने इन शब्दों को यूक्रेन-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के अंत में कहा था, यह संभव है कि ऐसा निर्णय या तो "पश्चिमी जनता के लिए" या उच्च रैंकिंग वाले यूरोपीय के साथ समझौते से किया गया हो मेहमान। स्मरण करो कि वर्तमान में, रूसी संघ के सशस्त्र बलों के समर्थन के साथ पीएमसी "वैगनर" की सेना ने आर्टेमोव्स्क पर हमला जारी रखा है। पहले इस शहर के बाहरी इलाके में लड़ाई की सूचना मिली थी। शहर में ही, यूक्रेनी सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया गया था। यहां तक कि अमेरिकी विश्लेषकों ने बार-बार कहा है कि यूएएफ को अंततः आर्टेमोव्स्क को वैसे भी छोड़ना होगा।
|
REET मेंस यानी शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 के दूसरे दिन इंटरनेट बंद के बीच पहली पारी में सामाजिक विज्ञान की सेकंड लेवल की परीक्षा आयोजित की गई। सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक हुई यह परीक्षा शांतिपूर्ण संपंन हुई। परीक्षा केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया और इस दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस जवान तैनात करने के साथ वीडियोग्राफी भी करवाई गई। परीक्षा में 91. 88 प्रतिशत परीक्षार्थी मौजूद रहे।
परीक्षा कंट्रोल रूम प्रभारी सुगर सिंह मीना ने बताया कि रविवार सुबह रीट मेंस (सामाजिक विज्ञान) परीक्षा में 11 हजार 779 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड हैं, जिसमे से 10 हजार 823 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी, जो प्रतिशत के हिसाब से शनिवार को हुई परीक्षा से करीब 7 प्रतिशत कम रही। 956 अभ्यर्थियों ने परीक्षा नहीं दी। परीक्षा केंद्रों पर चेकिंग के बाद प्रवेश दिया गया। शिक्षक भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए अभ्यर्थियों को मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही केंद्र में प्रवेश दिया गया।
इस परीक्षा में टोंक के अलावा बूंदी जिले के परीक्षार्थी शामिल हुए। इसके लिए सुबह से ही अभ्यर्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। परीक्षा देने बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक पहुंचने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षार्थियों को सेंटर तक पहुंचने के लिए मुंहमांगा किराया देकर पहुंचना पड़ा। शिक्षक भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए इस बार आयोग द्वारा जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा, बीकानेर, टोंक, भरतपुर, अलवर, श्रीगंगानगर और उदयपुर जिले में परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
REET मेंस यानी शिक्षक भर्ती परीक्षा-दो हज़ार बाईस के दूसरे दिन इंटरनेट बंद के बीच पहली पारी में सामाजिक विज्ञान की सेकंड लेवल की परीक्षा आयोजित की गई। सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक हुई यह परीक्षा शांतिपूर्ण संपंन हुई। परीक्षा केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया और इस दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस जवान तैनात करने के साथ वीडियोग्राफी भी करवाई गई। परीक्षा में इक्यानवे. अठासी प्रतिशत परीक्षार्थी मौजूद रहे। परीक्षा कंट्रोल रूम प्रभारी सुगर सिंह मीना ने बताया कि रविवार सुबह रीट मेंस परीक्षा में ग्यारह हजार सात सौ उन्यासी अभ्यर्थी रजिस्टर्ड हैं, जिसमे से दस हजार आठ सौ तेईस परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी, जो प्रतिशत के हिसाब से शनिवार को हुई परीक्षा से करीब सात प्रतिशत कम रही। नौ सौ छप्पन अभ्यर्थियों ने परीक्षा नहीं दी। परीक्षा केंद्रों पर चेकिंग के बाद प्रवेश दिया गया। शिक्षक भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए अभ्यर्थियों को मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही केंद्र में प्रवेश दिया गया। इस परीक्षा में टोंक के अलावा बूंदी जिले के परीक्षार्थी शामिल हुए। इसके लिए सुबह से ही अभ्यर्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। परीक्षा देने बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक पहुंचने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षार्थियों को सेंटर तक पहुंचने के लिए मुंहमांगा किराया देकर पहुंचना पड़ा। शिक्षक भर्ती परीक्षा में नकल रोकने के लिए इस बार आयोग द्वारा जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा, बीकानेर, टोंक, भरतपुर, अलवर, श्रीगंगानगर और उदयपुर जिले में परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति रविवार को मुंबई में बैठक कर न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम का ऐलान करेगी। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 19 जनवरी को होने वाले आखिरी वनडे के एक दिन बाद न्यूजीलैंड दौरे के लिए रवाना हो जाएगी। जहां पर भारतीय टीम को पांच टी20, तीन वनडे और दो टेस्ट खेलने हैं।
आईएएनएस ने टीम से जुड़े एक सूत्र के हवाले से लिखा कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम का ऐलान रविवार को होगा और टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरू में खेले जाने वाले तीसरे वनडे के एक दिन बाद न्यूजीलैंड रवाना हो जाएगी।
ऐसी उम्मीद है कि हार्दिक पांड्या टी-20 सीरीज के लिए टीम में वापसी कर सकते हैं। वो अक्टूबर से अपनी पीठ का इलाज करा रहे हैं। पांड्या को न्यूजीलैंड दौरे के लिए इंडिया-ए टीम में चुना गया है।
This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings.
If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
|
बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति रविवार को मुंबई में बैठक कर न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम का ऐलान करेगी। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्नीस जनवरी को होने वाले आखिरी वनडे के एक दिन बाद न्यूजीलैंड दौरे के लिए रवाना हो जाएगी। जहां पर भारतीय टीम को पांच टीबीस, तीन वनडे और दो टेस्ट खेलने हैं। आईएएनएस ने टीम से जुड़े एक सूत्र के हवाले से लिखा कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम का ऐलान रविवार को होगा और टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरू में खेले जाने वाले तीसरे वनडे के एक दिन बाद न्यूजीलैंड रवाना हो जाएगी। ऐसी उम्मीद है कि हार्दिक पांड्या टी-बीस सीरीज के लिए टीम में वापसी कर सकते हैं। वो अक्टूबर से अपनी पीठ का इलाज करा रहे हैं। पांड्या को न्यूजीलैंड दौरे के लिए इंडिया-ए टीम में चुना गया है। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
|
भरमौर - उपमंडल की खड़ामुख होली मुख्य सड़क पर सफरसुरक्षित नहीं है। कच्चे डंगों के सहारे टिकी इस सड़क के कई हिस्से बेहद खतरनाक हो चुके है। वहीं, सड़क के ज्यूरा वाले हिस्से में खस्ताहालत सड़क के साथ-साथ यहां पर सुरक्षा के लिहाज से अभी तक क्रैश बैरियर भी नहीं लग पाए है। इसके चलते यहां पर वाहन चालक की एक हल्की सी चूक बडे़ हादसे का कारण बन सकती है। हालांकि सड़क के इसी हिस्से में सड़क दुर्घटनाएं भी हो चुकी है, लेकिन यहां पर सफर को सुरक्षित बनाने की दिशा में अभी तक पहल नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार खड़ामुख-होली सड़क में ज्यूरा से लेकर मच्छेतर तक के सड़क के हिस्से में कई जगह पर दुर्घटना संभावित स्थान बन चुके है। सड़क के इसी हिस्से में पूर्व में निजी बस भी मलबे की चपेट में आ चुकी है, जबकि यहां पर हाल ही के वर्षों में पिकअप और कार दुर्घटना के चलते लोग काल का ग्रास बन चुके है। पता चला है कि सड़क के इस हिस्से में अभी तक कच्चे डंगों के सहारे ही यातायात व्यवस्था टिकी हुई है। वहीं होली घाटी में निर्माणाधीन विद्युत प्रोजेक्ट की सामग्री लेकर हर रोज यहां से बड़े ट्राले और भारी वाहन भी गुजर रहे है, जिस कारण यहां पर हर पल हादसे का खतरा बना हुआ है। वाहन चालकों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यहां पर सड़क किनारे क्रैश बैरियर लगाना भी बेहद जरूरी है, लेकिन लोक निर्माण विभाग की ओर से इस दिशा में अभी तक पहल ही नहीं की गई है। कुल-मिलाकर सड़क की हालत को देखकर यहां पर सफर सुरक्षित नहीं है और यहां हर पल हादसे का भी अंदेशा बना रहता है। अब हाल यह होकर रह गया है लोगों को हर पल हादसे का डर सताता रहता है। लोगों ने यहां पर क्रैश बैरियर लगाने की मांग की है।
|
भरमौर - उपमंडल की खड़ामुख होली मुख्य सड़क पर सफरसुरक्षित नहीं है। कच्चे डंगों के सहारे टिकी इस सड़क के कई हिस्से बेहद खतरनाक हो चुके है। वहीं, सड़क के ज्यूरा वाले हिस्से में खस्ताहालत सड़क के साथ-साथ यहां पर सुरक्षा के लिहाज से अभी तक क्रैश बैरियर भी नहीं लग पाए है। इसके चलते यहां पर वाहन चालक की एक हल्की सी चूक बडे़ हादसे का कारण बन सकती है। हालांकि सड़क के इसी हिस्से में सड़क दुर्घटनाएं भी हो चुकी है, लेकिन यहां पर सफर को सुरक्षित बनाने की दिशा में अभी तक पहल नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार खड़ामुख-होली सड़क में ज्यूरा से लेकर मच्छेतर तक के सड़क के हिस्से में कई जगह पर दुर्घटना संभावित स्थान बन चुके है। सड़क के इसी हिस्से में पूर्व में निजी बस भी मलबे की चपेट में आ चुकी है, जबकि यहां पर हाल ही के वर्षों में पिकअप और कार दुर्घटना के चलते लोग काल का ग्रास बन चुके है। पता चला है कि सड़क के इस हिस्से में अभी तक कच्चे डंगों के सहारे ही यातायात व्यवस्था टिकी हुई है। वहीं होली घाटी में निर्माणाधीन विद्युत प्रोजेक्ट की सामग्री लेकर हर रोज यहां से बड़े ट्राले और भारी वाहन भी गुजर रहे है, जिस कारण यहां पर हर पल हादसे का खतरा बना हुआ है। वाहन चालकों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यहां पर सड़क किनारे क्रैश बैरियर लगाना भी बेहद जरूरी है, लेकिन लोक निर्माण विभाग की ओर से इस दिशा में अभी तक पहल ही नहीं की गई है। कुल-मिलाकर सड़क की हालत को देखकर यहां पर सफर सुरक्षित नहीं है और यहां हर पल हादसे का भी अंदेशा बना रहता है। अब हाल यह होकर रह गया है लोगों को हर पल हादसे का डर सताता रहता है। लोगों ने यहां पर क्रैश बैरियर लगाने की मांग की है।
|
मुंबईः परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में अपने फैंस और फॉलोवर्स को हैरान कर दिया है, आमिर खान ने कहा है कि वो परफेक्शन में यकीन नहीं रखते हैं, आमिर खान जल्द ही अपनी आगामी फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' की रिलीज के लिए तैयार हैं। जाहिर है कि फैंस ने अभिनेता को मिस्टर परफेक्शनिस्ट की उपाधि दी है, लेकिन हाल ही में आमिर ने इस मिथ को तोड़ दिया है।
आमिर ने एक इंटरव्यू में कहा है-"मैं परफेक्शन में विश्वास नहीं करता, क्योंकि मुझे लगता है कि सुंदरता अपूर्णता में समाहित है। मुझे नहीं लगता कि मैं एक परफेक्टनिस्ट हूं। मुझे लगता है कि यह टैग मुझे मीडिया द्वारा दिया गया था, क्योंकि मेरे पास बहुत लंबा समय था, जिसमें मेरे पास कोई ऐसी फिल्म नहीं थी जो काम न करे। "
#BoycottRakshaBandhan पर आया Akshay kumar का रिएक्शन, बोले- 'ये आजाद देश है, लेकिन. . . '
इसके अलावा, उन्होंने अपने करियर की हाइलाइट्स के बारे में भी बात की। आमिर खान जल्द ही 'लाल सिंह चड्ढा' में नजर आएंगे और इस फिल्म को लेकर की सारी खबर सामने आ रही हैं।
|
मुंबईः परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में अपने फैंस और फॉलोवर्स को हैरान कर दिया है, आमिर खान ने कहा है कि वो परफेक्शन में यकीन नहीं रखते हैं, आमिर खान जल्द ही अपनी आगामी फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' की रिलीज के लिए तैयार हैं। जाहिर है कि फैंस ने अभिनेता को मिस्टर परफेक्शनिस्ट की उपाधि दी है, लेकिन हाल ही में आमिर ने इस मिथ को तोड़ दिया है। आमिर ने एक इंटरव्यू में कहा है-"मैं परफेक्शन में विश्वास नहीं करता, क्योंकि मुझे लगता है कि सुंदरता अपूर्णता में समाहित है। मुझे नहीं लगता कि मैं एक परफेक्टनिस्ट हूं। मुझे लगता है कि यह टैग मुझे मीडिया द्वारा दिया गया था, क्योंकि मेरे पास बहुत लंबा समय था, जिसमें मेरे पास कोई ऐसी फिल्म नहीं थी जो काम न करे। " #BoycottRakshaBandhan पर आया Akshay kumar का रिएक्शन, बोले- 'ये आजाद देश है, लेकिन. . . ' इसके अलावा, उन्होंने अपने करियर की हाइलाइट्स के बारे में भी बात की। आमिर खान जल्द ही 'लाल सिंह चड्ढा' में नजर आएंगे और इस फिल्म को लेकर की सारी खबर सामने आ रही हैं।
|
लखनऊ। जीआरपी पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता को गंगा गोमती एक्सप्रेस में जबरन तेजाब पिलाने वाले आरोपी दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी, ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) लखनऊ जोन को पूरे प्रकरण की जांच किये जाने के निर्देश दिये हैं।
गुरुवार सुबह ऊॅचाहार रेलवे स्टेशन से गंगा गोमती एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होरक लखनऊ आ रही सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता सीमा (बदला हुआ नाम) को मोहनलालगंज रेलवे स्टेशन के पास आरोपी गुड्डे और भोंदू ने जबरन तेजाब पिला कर जान से मारने का प्रयास किया गया। पीड़िता चारबाग रेलवे स्टेशन पर गंभीर हालत में लड़खड़ाते हुए मिली थी। उसे दबंगों ने चलती ट्रेन में तेजाब पिला दिया था और जान लेने की धमकी देकर फरार हो गये थे।
बेसुध हालत में जब वह जीआरपी थाने की तरफ जा रही थी। तभी रास्ते में एक महिला दरोगा की नजर उस पर पड़ी तो वह थाने में जानकारी देने के बाद सीधे उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पंहुची जहां पर उसका उपचार शुरू हुआ। शुक्रवार को पिड़िता से मिलने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रामा सेंटर पहुंचे और पुलिस को कार्यवाही के निर्देश दिए थे। जिस पर डीजीपी जावीद अहमद ने भी इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए सख्त कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये हैं।
निर्देशों पर हरकत में आई पुलिस ने थाना जीआरपी चारबाग पर महिला के पति की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की। एक्शन में आई थाना जीआरपी चारबाग पुलिस ने शुक्रवार को दी दोनों आरापियों भोंदू सिंह और गुड्डू पुत्र गण त्रिभुवन सिंह को गिरफ्तार कर लिया। वहीं इस पूरे मामले में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) कानून व्यवस्था दलजीत चैधरी ने आईजी जोन लखनऊ जोन को पूरे प्रकरण की जांच किये जाने के निर्देश दिये हैं।
|
लखनऊ। जीआरपी पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता को गंगा गोमती एक्सप्रेस में जबरन तेजाब पिलाने वाले आरोपी दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक , कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी, ने पुलिस महानिरीक्षक लखनऊ जोन को पूरे प्रकरण की जांच किये जाने के निर्देश दिये हैं। गुरुवार सुबह ऊॅचाहार रेलवे स्टेशन से गंगा गोमती एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होरक लखनऊ आ रही सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता सीमा को मोहनलालगंज रेलवे स्टेशन के पास आरोपी गुड्डे और भोंदू ने जबरन तेजाब पिला कर जान से मारने का प्रयास किया गया। पीड़िता चारबाग रेलवे स्टेशन पर गंभीर हालत में लड़खड़ाते हुए मिली थी। उसे दबंगों ने चलती ट्रेन में तेजाब पिला दिया था और जान लेने की धमकी देकर फरार हो गये थे। बेसुध हालत में जब वह जीआरपी थाने की तरफ जा रही थी। तभी रास्ते में एक महिला दरोगा की नजर उस पर पड़ी तो वह थाने में जानकारी देने के बाद सीधे उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पंहुची जहां पर उसका उपचार शुरू हुआ। शुक्रवार को पिड़िता से मिलने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रामा सेंटर पहुंचे और पुलिस को कार्यवाही के निर्देश दिए थे। जिस पर डीजीपी जावीद अहमद ने भी इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए सख्त कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये हैं। निर्देशों पर हरकत में आई पुलिस ने थाना जीआरपी चारबाग पर महिला के पति की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की। एक्शन में आई थाना जीआरपी चारबाग पुलिस ने शुक्रवार को दी दोनों आरापियों भोंदू सिंह और गुड्डू पुत्र गण त्रिभुवन सिंह को गिरफ्तार कर लिया। वहीं इस पूरे मामले में अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था दलजीत चैधरी ने आईजी जोन लखनऊ जोन को पूरे प्रकरण की जांच किये जाने के निर्देश दिये हैं।
|
झारखंड के राँची के ओरामाँझी इलाके में स्थित 'प्लस टू उच्च विद्यालय' में घुसकर हिंदू छात्राओं को धमकाने वाले और स्कूल परिसर में हथियार लहराने वाले 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मुजम्मिल अंसारी, फिरदौस अंसारी, जमील अंसारी और तौफीक अंसारी के तौर पर हुई है। वहीं सुहैल को अब भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में हैं।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार लड़कों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान पता चला कि ये लड़के स्कूल में दीवार फाँदकर आते थे और छात्राओं को छेड़ते थे। रोक-टोक होने पर ये धमकी भी देते थे।
बता दें कि इससे पहले रविवार को खबर आई थी कि राँची के स्कूल में कुछ मुस्लिम युवक सरकारी स्कूल में घुसकर कक्षा नौवीं की छात्रा को धमका रहे थे कि या तो दोस्ती करो वरना वो लोग उन्हें उठा ले जाएँगे। छात्राओं की शिकायत के मुताबिक ये युवक लड़कियों से कहते थे कि अगर इनकी बात नहीं सुनी गई तो अंजाम भुगतने के लिए सब तैयार रहें।
छात्राओं ने 10 सितंबर को इस बाबत शिकायत दी थी जिसके बाद इस मामले में 5 आरोपितों को नामजद किया गया। छात्राओं ने शिकायत में बताया था कि उनके साथ ये हरकतें हफ्ते भर से हो रही हैं। युवक स्कूल की छतों पर बैठ जाते हैं और आने-जाने वाली लड़कियों पर छींटाकशी करते हैं।
पीड़ित छात्राओं के मुताबिक कि युवकों के टारगेट पर विशेषकर आदिवासी और हिंदू लड़कियाँ होती हैं। जब भी कोई इन छात्राओं के पक्ष में बोलता है तो लड़के उसे भी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहते हैं। चाहे फिर वो कोई छात्र हो या कोई टीचर।
पीड़ित छात्राओं और उनके परिजनों ने थाने में तहरीर दे कर बताया है कि कुछ दिन पहले शिक्षक दिवस के दिन इन सभी आरोपितों ने स्कूल में लगा जेनरेटर पलट दिया था।
स्कूली छात्राओं की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसआईटी गठित की गई थी। इस टीम में एसआई व इंस्पेक्टर थे। टीम ने स्कूल के सीसीटीवी कैमरे से फुटेज निकाली और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपितों को दबोचा। छानबीन में पता चला कि इन लोगों ने स्कूल के लिपिक आशीष महतो को जान से मारने की धमकी और छात्राओं को हथियार के बल पर उठाने को कहा था। बाद में इस संबंध में आशीष महतो ने शिकायत भी दी और बताया कि कैसे इन लड़कों ने उन पर पिस्तौल तान दी थी। वहीं स्कूल प्रशासन भी डर से कुछ नहीं कर पा रहा था।
|
झारखंड के राँची के ओरामाँझी इलाके में स्थित 'प्लस टू उच्च विद्यालय' में घुसकर हिंदू छात्राओं को धमकाने वाले और स्कूल परिसर में हथियार लहराने वाले चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मुजम्मिल अंसारी, फिरदौस अंसारी, जमील अंसारी और तौफीक अंसारी के तौर पर हुई है। वहीं सुहैल को अब भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में हैं। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार लड़कों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान पता चला कि ये लड़के स्कूल में दीवार फाँदकर आते थे और छात्राओं को छेड़ते थे। रोक-टोक होने पर ये धमकी भी देते थे। बता दें कि इससे पहले रविवार को खबर आई थी कि राँची के स्कूल में कुछ मुस्लिम युवक सरकारी स्कूल में घुसकर कक्षा नौवीं की छात्रा को धमका रहे थे कि या तो दोस्ती करो वरना वो लोग उन्हें उठा ले जाएँगे। छात्राओं की शिकायत के मुताबिक ये युवक लड़कियों से कहते थे कि अगर इनकी बात नहीं सुनी गई तो अंजाम भुगतने के लिए सब तैयार रहें। छात्राओं ने दस सितंबर को इस बाबत शिकायत दी थी जिसके बाद इस मामले में पाँच आरोपितों को नामजद किया गया। छात्राओं ने शिकायत में बताया था कि उनके साथ ये हरकतें हफ्ते भर से हो रही हैं। युवक स्कूल की छतों पर बैठ जाते हैं और आने-जाने वाली लड़कियों पर छींटाकशी करते हैं। पीड़ित छात्राओं के मुताबिक कि युवकों के टारगेट पर विशेषकर आदिवासी और हिंदू लड़कियाँ होती हैं। जब भी कोई इन छात्राओं के पक्ष में बोलता है तो लड़के उसे भी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहते हैं। चाहे फिर वो कोई छात्र हो या कोई टीचर। पीड़ित छात्राओं और उनके परिजनों ने थाने में तहरीर दे कर बताया है कि कुछ दिन पहले शिक्षक दिवस के दिन इन सभी आरोपितों ने स्कूल में लगा जेनरेटर पलट दिया था। स्कूली छात्राओं की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसआईटी गठित की गई थी। इस टीम में एसआई व इंस्पेक्टर थे। टीम ने स्कूल के सीसीटीवी कैमरे से फुटेज निकाली और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपितों को दबोचा। छानबीन में पता चला कि इन लोगों ने स्कूल के लिपिक आशीष महतो को जान से मारने की धमकी और छात्राओं को हथियार के बल पर उठाने को कहा था। बाद में इस संबंध में आशीष महतो ने शिकायत भी दी और बताया कि कैसे इन लड़कों ने उन पर पिस्तौल तान दी थी। वहीं स्कूल प्रशासन भी डर से कुछ नहीं कर पा रहा था।
|
एक बार किसी टी.वी. चैनल ने 'अर्धसत्य' में दिखाया कि मैहर माता मंदिर में कोई अज्ञात व्यक्ति या देव पूजा करने आता है। प्रातः जब मंदिर के द्वार खुलते हैं तो पत्र, पुष्प, जल को देखकर इस विश्वास को बल मिलता है। पुजारी एवं आस-पास में पूछताछ से टी.वी. ऐंकरों को पता चलता है कि यहाँ आल्हा पूजा करने आता है। आल्हा सामान्य जन से अधिक लंबा है । वह वीर वेश में आता है, परंतु किसी-किसी भाग्यवान को ही दिखाई पड़ता है उसके आने से पहले जोर की आँधी चलती है । चैनल के द्वारा दिखाया गया सत्य आधा है या पूरा, यह तो अलग प्रश्न है, परंतु मेरे पास बैठी पोती संस्कृति एवं प्रकृति, धेवती वत्सला और वंशिका, धेवते तेजस्वी और त्वरित; सभी ने मुझसे प्रश्न कर दिया, "यह आल्हा कौन है, क्या यह देवता है या मनुष्य ? इसके बारे में जानकारी कराइए । " मैंने बताया कि "मेरे पिताजी आल्हा की पुस्तक गा-गाकर सारे लोगों को सुनाया करते थे। मैंने भी अपनी माता, चाची, भाभी आदि को आल्हा पढ़कर सुनाई है। अब तो मैं इतना ही बता सकता हूँ कि आल्हा-ऊदल दो वीर राजकुमार थे, जो महोबा के रहनेवाले थे।" कुछ पंक्तियाँ याद आई -
बड़े लड़इया महोबेवाले इनकी मार सही ना जाय,
एक को मारे दो मर जाएँ, मरै तीसरा दहशत खाय।
बच्चों की जिज्ञासा और बढ़ गई । कैसे अनुपम वीर थे । एक को मारने पर तीन मर जाते थे। उनके युद्ध का क्या कारण था, वे किससे लड़ते थे, क्यों लड़ते थे?
सच तो यह है कि बचपन में पढ़ी आल्हा की कथा अब मैं भी भूल चुका था, परंतु इतना ध्यान में था कि वे पुस्तकें मेरठ के 'मटरूमल अत्तार' प्रकाशन से छपी थीं। किसी मित्र को भेजकर पता किया तो ज्ञात हुआ कि वह प्रकाशन बंद हो चुका है, फिर अग्रवाल प्रकाशन, खारी बावली, दिल्ली से एक पुस्तक प्राप्त हुई।
दोनों पुस्तकें आल्हा छंद या वीर छंद में ही हैं। भाषा भी बुंदेलखंडी है । बारहवीं पास वत्सला भी उससे पूरा अर्थ नहीं निकाल पाई। तब मैंने विचार किया कि ऐसी महान् शौर्य गाथा लुप्त न हो जाए, इसका संक्षिप्त रूपांतर खड़ी बोली प्रचलित गद्य में किया जाना चाहिए। आनेवाली पीढ़ी को भी आल्हा ऊदल की वीरगाथा की जानकारी प्राप्त हो सके ।
अतः मैंने यह पावन कार्य स्वयं किया । आशा करता हूँ कि पुस्तक पाठकों को पसंद आएगी तथा आल्हा-ऊदल की वीरगाथा की सही जानकारी आगामी पीढ़ी तक पहुँचाएगी । सर्वे भवन्तु सुखिनः!
- आचार्य मायाराम पतंग
महाभारत से नाता
कवि जगनिक रचित 'परिमाल रासो' में वर्णित आल्हा-ऊदल की इस वीरगाथा को प्रत्यक्ष युद्ध-वर्णन के रूप में लिखा गया है। बारहवीं शताब्दी में हुए वावन (52) गढ़ के युद्धों का इसमें प्रत्यक्ष वर्णन है। स्वयं कवि जगनिक ने इन वीरों को महाभारत काल के पांडवों-कौरवों का पुनर्जन्म माना है। बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में इनकी कथाएँ गाँव-गाँव गाई जाती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में तो आल्हा को 'रामचरित मानस' से भी अधिक लोकप्रियता प्राप्त है। गाँवों में फाल्गुन के दिनों में होली पर ढोल-नगाड़ों के साथ होली गाने की परंपरा है तो सावन में मोहल्ले- मोहल्ले आल्हा गानेवाले रंग जमाते हैं।
महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए; कौरव हार गए, बल्कि समाप्त ही हो गए। अर्जुन ने एक भी कौरव नहीं मारा; सभी सौ भाई भीम ने ही मारे । युधिष्ठिर तो लड़े, पर किसी महत्त्वपूर्ण वीर को नहीं मार सके। अतः पांडवों ने श्रीकृष्ण से कहा, "भगवन्! युद्ध तो हम आपकी कृपा से ही जीत गए, परंतु हमारी युद्ध की प्यास तृप्त नहीं हुई। लड़ने की प्रबल इच्छा मन में बची रह गई । "
भगवान् बोले, "तुम्हारी यह इच्छा कलियुग में पुनः योद्धा - जीवन देकर पूर्ण कर देता हूँ।" भगवान् श्रीकृष्ण अपने भक्तों के मन में उपजे अहंकार को कभी नहीं रहने देते । अहंकार मिटाने के लिए कोई-न-कोई लीला रच देते हैं। उन्होंने सोचा, कलियुग में उन्हें लड़ने का पूरा अवसर देता हूँ और हारने का भी अनुभव करवाता हूँ।
भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से कलियुग में इन पाँचों पांडवों ने जन्म लिया। पिछले जन्म की युद्ध की प्यास को तृप्त करने के लिए प्रभु ने युद्ध का बार-बार अवसर दिया । युधिष्ठिरजी आल्हा बने, भीम ने ऊदल का जन्म लिया। अर्जुन ब्रह्मानंद बने, नकुल लाखन तथा सहदेव वीर मलखान कहलाए । कौरवराज दुर्योधन दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान कहलाए । दुःशासन का नाम धाँधू हुआ । राजा कर्ण ताहर कहलाए । द्रोणाचार्य इस जन्म में चौंडा ब्राह्मण बने। इस प्रकार एक बार पुनः इन्हें युद्ध की प्यास बुझाने का अवसर दिया गया। सबने वीरता दिखाई, परंतु सब नष्ट हो गए। फिर भी विधिवत् बताता हूँ कि कहानी कब, कैसे आगे बढ़ी?
चंदेल वंश में परिमाल का जन्म
चंदेली नगर में चंद्रवंशी राजा चंद्रब्रह्म राज्य किया करते थे। वे बड़े धर्मात्मा थे। स्वयं चंद्र देवता ने उन्हें पारसमणि प्रदान की थी । पारसमणि लोहे को सोना बनाने में सक्ष्म होती है। राज चंद्रब्रह्म पारसमणि से सोना बनाकर प्रजा का कल्याण करते थे। उन्होंने अनेक यज्ञ करके प्रजा का प्रेम और यश प्राप्त किया । बहुत से राजाओं को जीतकर अपने राज्य का विस्तार भी किया । तोमरवंशी क्षत्रिय चिंतामणि उनके मंत्री थे। चंद्रब्रह्म के वंश में ही सूर्यब्रह्म हुए, जिन्होंने सूर्यकुंड बनवाया । इसी वंश में कीर्तिब्रह्म हुए, जिन्होंने कीर्ति सागर झील बनवाई। इन्हीं कीर्तिब्रह्म के पुत्र परिमाल हुए।
राजा परिमाल ने भी यज्ञ किए तथा ब्राह्मणों को पर्याप्त दान दिया। कालांतर में अपने गुरु अमरनाथ के आदेश पर अपनी तलवार को सागर में धोकर फिर कभी शस्त्र न उठाने की शपथ ली। कुछ विरोधी राजा सिर उठाने लगे। तब राजा के दो सेनापति ही युद्ध का संचालन कुशलतापूर्वक किया करते थे।
राजा परिमाल के विवाह की भी एक अलग कहानी है । महोबे में माल्यवंत नामक राजा का राज था। उन्हीं का एक नाम वासुदेव भी था । उनके दो पुत्र थे - माहिल और भूपति; एक अत्यंत रूपवती कन्या थी, जिसका नाम था मल्हना। महोबे पर युवा परिमाल ने आक्रमण किया। अपने पराक्रम से विजय प्राप्त की । राजा माल्यवंत ने अपनी
पुत्री मल्हना का विवाह राजा परिमाल से कर दिया तथा अपना राज्य वापस ले लिया । मल्हना चंदेली की रानी बन गई। सुंदरी मल्हना को राजा परिमाल बहुत प्रेम करते थे। उसकी हर बात मानी जाती थी । मल्हना को चंदेरी का महल रुचिकर नहीं लगा। उसने इच्छा व्यक्त की कि वह अपने महोबा के महल में ही रहना चाहती है। अतः परिमाल ने अपने ससुर और सालों को महोबे से उरई के महल में जाने का आदेश दिया। परिमाल और रानी मल्हना महोबा में आ गए। मल्हना के भाई माहिल को यह व्यवहार भीतर तक घायल कर गया । रिश्तेदार और ऊपर से मृदुभाषी दिखाई देनेवाला माहिल भीतर से परिमाल की प्रसिद्धि से जलने लगा।
माहिल ने अनुज भूपति को जगनेरी का किला दे दिया और माहिल स्वयं उरई में राज करने लगा। प्रगट में माहिल और भूपति राजा परिमाल की अनुमति से ही सब कार्य करते थे, परंतु माहिल भीतर से सदैव बहन के परिवार से ईर्ष्या रखता था। राजा परिमाल जान गए थे कि माहिल का चुगली करने का स्वभाव है, अतः वे माहिल की बातों पर अधिक ध्यान नहीं देते थे । माहिल अवसर पाकर अहित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ता था। भूपति को जगनेरी दुर्ग का राजा बनाया था, अतः उसका नाम 'जगनिक' भी पड़ गया । जगनिक वीर तो था ही, कवि भी था। वह युद्ध में साथ रहकर अपनी कविता से सैनिकों का उत्साहवर्धन करता था । राजा परिमाल तथा आल्हा-ऊदल की वीरता का मूल वर्णन 'परिमाल रासो' में मिलता है।
आल्हा-ऊदल का जन्म
गुरु के आदेश पर राजा परिमाल ने युद्ध करना छोड़ दिया था, तो भी कोई राजा उनका बाल-बाँका नहीं कर सकता था। उनके पास जस्सराज और बच्छराज नामक के दो योद्धा थे । इनके पराक्रम से परिमाल के राज्य की पूर्ण सुरक्षा होती थी। एक बार मांडौगढ़ के राजकुमार करिया राय गढ़गंगा पर स्नान करने गए। उन दिनों गढ़ मुक्तेश्वर के गंगास्नान मेले में स्नानार्थी राजाओं के शिविर लगा करते थे। वहीं सब प्रकार के सामान भी बिकने के लिए लाए जाते थे। एक महीने तक बड़ा आकर्षक बाजार लगा रहता था । राजा करिया राय मेले में नौलखा हार (हीरों का जड़ा) खोज रहे थे, जो उन्हें अपनी बहन को उपहारस्वरूप देना था । हार बिकने ही नहीं आया था, तो मिला भी नहीं। हार तो नहीं मिला, पर करिया राय को माहिल मिल गया । माहिल ने कहा, "हार तो मिल जाएगा, परंतु खरीद नहीं सकते, लूटना पड़ेगा।" करिया राय के पूछने पर माहिल ने बताया, "मेरी बहन मल्हना के पास असली हीरों का नौलखा हार है। तुम्हारी हिम्मत है तो महोबा जाकर लूट लो । " करिया राय माहिल के उकसावे में आ गया और हार लूटने के लिए महोबा पहुँच गया, लेकिन महोबा में जस्सराज, बच्छराज, ताल्हन सैयद ने उसे युद्ध में बुरी तरह परास्त कर भगा दिया।
कुछ दिन बाद ताल्हन सैयद किसी काम से काशी गए थे। माहिल ने फिर चुगली खाई । उसने करिया राय को जाकर बताया कि अब अवसर है। महोबे जाकर नौलखा हार लूट लो । करिया राय ने मौके पर मिली सूचना का पूरा लाभ उठाया। उसने आधी रात को छापा मारा । जस्सराज और बच्छराज दोनों वीरों को सोते हुए ही पकड़ लिया। दिवला रानी के गले से नौलखा हार झपट लिया । अनेक स्वर्ण आभूषण, पचसावत नामक हाथी तथा पपीहा नामक घोड़ा आदि लूटकर मांडौगढ़ लौट गया । जस्सराज और बच्छराज दोनों भाइयों की वीरता के कारण ही परिमाल राजा पर कोई आक्रमण नहीं करता था । उनको बंदी बनाकर करिया राय ने उन्हें बहुत कष्ट दिए । माहिल की सलाह पर दोनों के सिर काटकर बड़ के पेड़ पर लटका दिए, जिसकी सूचना लोगों ने राजा परिमाल तक पहुँचाई। जस्सराज के पुत्रों को परिमाल अपने ही महल में ले आए। उनकी रानी ने उन बच्चों का पालन-पोषण किया । जस्सराज और बच्छराज को तो परिमाल वन से लाए थे। वे वनवासी थे, अतः बाद में उनका गोत्र ही 'बनाफर राय' प्रसिद्ध हुआ। आल्हा-ऊदल ही जस्सराज के पुत्र थे, जिनका पालन-पोषण परिमाल राजा की रानी मल्हना ने किया था।
पात्रों का संक्षिप्त परिचय
आल्हा खंड की कथा में जिन-जिन का नाम तथा वर्णन आएगा, उन पात्रों का संक्षिप्त परिचय देने से पाठकों को सरलता से कहानी समझ में आती रहेगी। अभी तक यह बताया गया है कि आल्हा-ऊदल जस्सराज के पुत्र थे । उनको करिया राय (मांडौगढ़ का राजा) ने धोखे से पकड़कर मरवा दिया। माहिल राजा परिमाल का साला था, अतः आल्हा का मामा था । माहिल मन का दुष्ट, ईर्ष्यालु तथा चुगलखोर था । उसे महोबा से निकालकर उरई भेज दिया गया था। अतः वह ऊपर से खुश दिखाई देता था, पर अपने बहनोई तथा भानजों से बदला लेने का कोई अवसर चूकता नहीं था। अपनी ही बहन के नौलखा हार की लूट माहिल ने करवाई थी।
पृथ्वीराज की जन्म कथा
पृथ्वीराज भारतीय इतिहास का प्रसिद्ध पात्र है, परंतु उसके जन्म की कथा इतिहास के छात्रों के लिए भी अज्ञात
है। साहित्य भी ऐतिहासिक शोध के लिए एक प्रमुख स्रोत होता है । 'पृथ्वीराज रासो', 'परिमाल रासो' तथा 'बलभद्र विलास' नामक ग्रंथों से ज्ञात होता है कि हस्तिनापुर (दिल्ली) के राजा अनंगपाल तोमर का राजा कामध्वज से युद्ध हुआ। अजमेर के राजा सोमेश्वर ने राजा अनंगपाल की सहायता की । तब अनंगपाल ने अपनी पुत्री इंद्रावती का विवाह राजा सोमेश्वर से करके उनका एहसान चुकाया । रानी इंद्रावती का ही एक नाम कमला भी था। एक बार इंद्रावती अपने मायके (दिल्ली) आई । ज्ञात हुआ कि वह गर्भवती है। अनंगपाल ने पंडित चंदनलालजी से गर्भस्थ शिशु का भविष्य जानना चाहा। यों तो जन्म के समय एवं नक्षत्र से ही भविष्य बताया जा सकता है, परंतु जन्म होने के समय की गणना करके भी अनुमान लगाया जा सकता है। पंडितजी ने बताया कि 'जातक बहुत बलशाली होगा । प्रतापी राजा बनेगा। आपके हस्तिनापुर का राजा भी यही बनेगा।' जब कुटुंब के अन्य जनों को यह ज्ञात हुआ तो उन लोगों ने साजिश रची। रानी इंद्रावती को बताया गया - "तुम्हारे प्रतापी पुत्र होनेवाला है, परंतु यदि मायके में बनी रही तो गर्भ गिरने की संभावना है, अतः तुम परिवार और सैनिक साथ लेकर तीर्थाटन पर चली जाओ।" इंद्रावती ने अपने पिता की बात का भरोसा किया और तीर्थाटन को चली गई। जिनको साजिश की जिम्मेदारी दी गई थी, उन लोगों ने एक रात को सोती हुई इंद्रावती को कुएँ में फेंक दिया और लौटकर यह खबर फैला दी कि इंद्रावती की मृत्यु हो गई।
इंद्रावती की जब नींद खुली और वह चीखी -चिल्लाई, तब वन में रहनेवाले एक साधु ने उसे कुएँ से बाहर निकाला। इंद्रावती ने अपने पिता अनंगपाल तथा पति सोमेश्वर का परिचय दिया। योगी अश्वत्थामा ने रानी को पतिगृह या पितृगृह जाने की इच्छा पूछी तो इंद्रावती ने कहा, "महाराज! आपने मुझे जीवन दान दिया है। अब आप ही मेरी रक्षा करें। मैं कहीं और नहीं जाना चाहती।" योगी संन्यासी तो स्वभाव से ही परोपकारी होते हैं। इंद्रावती की प्रार्थना स्वीकृत हुई। पृथ्वीराज का जन्म संवत् 1132 में वन में ही हुआ । अश्वत्थामा संन्यासी ने ही पृथ्वीराज का नामकरण तथा पालन-पोषण किया । गुरु बनकर धनुष-बाण चलाने सिखाए तथा अच्छे संस्कार भी दिए ।
एक दिन शिकार की खोज में राजा सोमेश्वर उसी जंगल में आ निकले। वहाँ एक बालक को वन में विचरण करते देखकर चकित हुए । बालक से परिचय पूछा तो उसने माता का नाम कमला बताया, परंतु पिता का नाम नहीं बताया। उसने कहा, "मैं और मेरी माता एक ऋषि के आश्रम में रहते हैं। आप मिलना चाहें तो मेरे साथ चलें।" राजा सोमेश्वर के मन में बालक के प्रति मोह उमड़ रहा था । वे बालक पृथ्वीराज के साथ ऋषि अश्वत्थामा के आश्रम में पहुँच गए। राजा ने प्रथम अपना परिचय दिया और यह भी बताया, "मेरी रानी इंद्रावती अपने मायके से तीर्थाटन के लिए गई थी। मार्ग में उसकी मृत्यु हो गई। वह गर्भवती थी । यदि उसके भी पुत्र होता तो इतना ही बड़ा होता।" इतना कहकर राजा रुआँसा हो गया। रानी इंद्रावती भी पति को पहचान चुकी थी, उसकी गाथा सुनकर वह भी रो पड़ी। तब अश्वत्थामा मुनि ने बताया कि रानी के साथ साजिश रची गई थी। उसे जीवित ही कुएँ में फेंक दिया गया था। जो उसे मारना चाहते थे, परमात्मा ने उसे बचाने के लिए मुझे भेज दिया। किसी को मारने की इच्छा रखनेवाले स्वयं मर जाते हैं, परंतु जिसे ईश्वर बचाना चाहे, उसे कोई नहीं मार सकता ।
ऋषि ने अपनी आँखों देखी एक घटना सुनाई । एक कबूतर - कबूतरी पेड़ की डाल पर मौज से बैठे थे। तभी एक शिकारी की निगाह उनपर पड़ी। उसने अपने धनुष-बाण उठाए । वह निशाना साधनेवाला था, तभी ऊपर से एक बाज उन्हें झपटने के लिए मँडराने लगा । बाज कबूतरों को अपना भोजन बनाना चाहता था । कबूतरों ने सोचा, अब तो ईश्वर ही बचा सकता है । यहाँ से उड़े तो बाज झपट्टा मारेगा । इधर कुआँ, उधर खाई। बचने की राह नहीं दिखाई देती। तभी पेड़ की जड़ से सर्प निकला और शिकारी को डस लिया । शिकारी का निशाना हिला और बाण बाज को जाकर लगा। बाज धरती पर आ गिरा । तब तक शिकारी भी धरती पर लोट-पोट हो चुका था । कबूतर का जोड़ा उड़
गया। मारने आए शिकारी और बाज दोनों मर गए । कथा सुनकर सोमेश्वर मुनि की बात समझ गए कि सबकुछ ईश्वर की इच्छा से ही होता है । मुनि ने इंद्रावती और पृथ्वीराज को सोमेश्वर के साथ विदा कर दिया । पृथ्वीराज अजमेर का राजकुमार बन गया।
पृथ्वीराज का दिल्ली का राजा बनना
पृथ्वीराज की कहानी हमारा लक्ष्य नहीं है, परंतु वह अजमेर से दिल्ली कैसे आया तथा पंडित चंदन लाल की भविष्यवाणी कैसे पूर्ण हुई, यह बताना आवश्यक है। अतः प्रसंगवश जान लीजिए। एक बार गजनी का बादशाह भारत पर आक्रमण करने आ गया। उसने अटक नदी के पार डेरा डाल दिया और राजा अनंगपाल को संदेश भेज दिया कि वे लड़ना चाहते हैं या बिना लड़े ही मुझे अपना राज्य सौंप देंगे। राजा अनंगपाल ने सभासदों से चर्चा की। निर्णय लिया गया कि वे अपने नाती पृथ्वीराज को बुलवा लें । उसे यहाँ कुछ दिनों के लिए राजा बना दें, फिर गजनी के बादशाह से युद्ध करने जाएँ । पृथ्वीराज को बुलाया गया। उस समय वह सोलह वर्ष का नवयुवक था। अनंगपाल का प्रस्ताव उन्होंने मान तो लिया, परंतु शर्त रख दी कि आपके परिवारजन तथा सभा के दरबारी सब मुझे राजा स्वीकार करें। आप भी लौटकर आएँ तो मुझसे अनुमति लें । शर्त स्वीकार कर ली गई । इस तरह पृथ्वीराज दिल्ली के शासक बन गए । राजा अनंगपाल युद्ध करने चले गए।
पृथ्वीराज के विवाह
उस काल में विवाह बिना युद्ध के नहीं होते थे। पृथ्वीराज ने गुजरात के राजा भोलाराम की पुत्री इच्छा कुमारी से विवाह किया। फिर दाहिनी नामक सुंदरी (जो चंडपुडार की कन्या थी) से विवाह किया। इसके पश्चात् पद्मसेन की पुत्री पद्मावती से विवाह किया । हर विवाह - युद्ध में अन्य राजाओं के साथ हुआ । हाँ, राजा माहिल की बहन अगया से बिना युद्ध के विवाह हुआ । वह रूपवती ही नहीं, बुद्धिमती भी थी । सब पर उसी का शासन चलता था। उसकी बेटी का नाम बेला था । ऐसा माना जाता है कि बेला ही द्रौपदी का अवतार थी ।
मुख्य विवाह संयोगिता से हुआ। संयोगिता कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री थी । पृथ्वीराज इतनी पत्नियों के रहते हुए भी संयोजिता को युद्ध से अपहरण करके ले आए। इसी कारण भीषण युद्ध में दोनों ओर के अनेक योद्धा मारे गए। जयचंद और पृथ्वीराज की शत्रुता बढ़ी । जयचंद्र जाकर शहाबुद्दीन मोहम्मद गोरी से मिल गया । पृथ्वीराज को हरवाने और मरवाने में जयचंद ने सहायता की । साधारण प्रेम और वैर के कारण से देश यवनों मुसलमानों के अधीन हो गया। हिंदुस्तान का गौरवमय इतिहास राजाओं की आपसी लड़ाई ही गुलामी का कारण बना।
आल्हा का परिचय
जस्सराज ही दस्सराज कहलाता था । वनवासी होने के कारण उन्हें 'बनाफर' कहकर भी पुकारा जाता था। जस्सराज का विवाह देव कुँवर से हुआ था । उसी की प्रथम संतान होने पर राजा परिमाल ने पंडितों को बुलाकर उसका नामकरण करवाया तथा भविष्य पूछा । पंडितों ने कहा कि बालक सिंह लग्न में जनमा है। सिंह के समान निर्भय वीर होगा। वीरता एवं धर्मपालन में सबसे उत्तम होगा, अतः इसका नाम 'आल्हा' रहेगा । राजा परिमाल ने प्रसन्न होकर पंडितों को दक्षिणा और पुरस्कार दिए।
आल्हा का विवाह नैनागढ़ के राजा नेपाल सिंह की सुंदर कन्या सुलक्षणा के साथ हुआ था, जिसका एक नाम 'मछला' भी था। आल्हा ने अनेक युद्ध किए, परंतु कभी हार का मुँह नहीं देखा । आल्हा को युधिष्ठिर का अवतार माना जाता है। आल्हा ने कभी अधर्म तथा अन्याय नहीं किया।
ऊदल वीर
दस्सराज और देव कुँवरि का दूसरा पुत्र था ऊदल । राजा परिमाल ने इसके लिए भी पंडित बुलवाकर भविष्य पुछवाया। वह महान् वीर होगा, यह जानकर राजा प्रसन्न हुआ, परंतु माँ देव कुँवरि ऊदल के जन्म से दुःखी थी। चूँकि उसके जन्म से पहले ही दस्सराज और बच्छराज को करिया राय चुराकर ले गया था और उनके सिर काटकर वटवृक्ष पर टाँग दिए थे। इस तरह ऊदल का जन्म पिता की मृत्यु के पश्चात् हुआ था, तभी वह इसका जन्म अशुभ मान रही थी। इस बालक को उसने अपनी दासी को पालने के लिए दे दिया था, क्योंकि वह उस बालक को देखना नहीं चाहती थी। दासी ने ऊदल को ले जाकर महारानी मल्हना को सौंप दिया। रानी ने ही बड़े प्रेम से आल्हा, ऊदल दोनों का पालन-पोषण किया । ऊदल को भीम का अवतार माना जाता है। उसमें भी शारीरिक बल सैकड़ों हाथियों के बराबर बताया गया है। ऊदल भी युद्धों में केवल जीतने के लिए जनमा था।
ब्रह्मानंद का जन्म
राजा परिमाल की रानी मल्हना के गर्भ से भी एक पुत्र का जन्म हुआ। अधेड़ अवस्था में पुत्र जन्म से राजा का प्रसन्न होना स्वाभाविक था। राजकुमार के जन्म से पूरे महोबा में ही प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। ज्योतिषियों ने बताया कि मेष लग्न में सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र में तथा वृष राशि में जनमा यह बालक अत्यंत तेजस्वी होगा। इसी अक्षय तृतीया के दिन ऋषि परशुराम का भी जन्म हुआ था। अरिष्ट ग्रह पूछने पर ज्योतिषी बोले, "संसार में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसके सब ग्रह श्रेष्ठ हों। एक-आध नेष्ट ग्रह तो हो ही जाता है।" उन्होंने बताया कि स्त्री पक्ष नहीं है । स्त्री के कारण ही इसका प्राणांत भी हो सकता है। बालक का नाम ब्रह्मानंद रखा गया। इसे वेदज्ञ पंडितों ने अर्जुन का अवतार माना है। पृथ्वीराज की पुत्री बेला कुँवरि से इसका विवाह होना तय हुआ था। पृथ्वीराज के सब वीर मिलकर भी ब्रह्मानंद को नहीं हरा सके, तब माहिल ने अपनी दुष्टता का परिचय दिया और पृथ्वीराज को बचपन में प्राप्त अश्वत्थामा मुनि के दिए उस अर्ध-चंद्राकार बाण की याद दिलाई, जिसका वार कभी खाली नहीं जा सकता था । वही तीर ब्रह्मानंद की मृत्यु का कारण बना । इस प्रकार श्रीकृष्ण भगवान् ने अर्जुन को पृथ्वीराज रूपी दुर्योधन के द्वारा युद्ध में मरवाकर दोनों की पिछले जन्म की युद्ध - पिपासा को तृप्त किया।
लाखन राठौर
कन्नौज के राजा वीरवर जयचंद्र का अनुज रतिभानु भी महान् वीर था । युद्ध में उसका कौशल देखते ही बनता था। उसी का सुपुत्र विशाल नेत्रों तथा सुंदर मुखवाला हुआ । लाखों में एक होने के कारण उसका नाम 'लाखन' रखा गया। बूँदी शहर के राजा गंगाधर राव की राजकुमारी कुसुमा से इनका विवाह हुआ था। उसकी मृत्यु पृथ्वीराज के बाणों से हुई। लाखन को नकुल का अवतार माना जाता है।
मलखान का जन्म
जस्सराज के भाई बच्छराज की रानी तिलका ने बच्छराज की मृत्यु के पश्चात् मलखान को जन्म दिया। राजा परिमाल ने पंडितों से पूछा तो ज्ञात हुआ कि यह बालक भी सिंह लग्न में उत्पन्न हुआ है। सिंह के समान निर्भय तथा वीर होने की तो भविष्यवाणी थी ही, एक विशेष बात और थी कि इसके पाँव में पद्म का चिह्न है । यह किसी अन्य के शस्त्रों से नहीं मरेगा। जब इसके पाँव का पद्म फटेगा, तभी इसकी मृत्यु होगी। यह बालक देवी का सच्चा भक्त होगा तथा देवी से वरदान भी प्राप्त करेगा । वास्तव में मलखान बड़ा वीर और देवीभक्त हुआ । मलखान को सहदेव का अवतार माना जाता है ।
ढेवा का परिचय
महोबा के राज पुरोहित चिंतामणि का पुत्र देव कर्ण ही 'ढेवा' नाम से जाना जाता था। रानी मल्हना इसे बहुत स्नेह करती थी। इसकी ऊदल से गहरी मित्रता थी । एक बार ढेवा ने युद्धभूमि में मूर्च्छित पड़े पृथ्वीराज की रक्षा की थी ।
धाँधू का परिचय
दस्सराज की पत्नी देवकुँवरि ने ही इस शिशु को जन्म दिया था, परंतु यह अभुक्त मूल नक्षत्र में जनमा था। पंडितों ने बताया था कि इसका मुख देखकर पिता जीवित नहीं रहेगा । यह अपने ही वंशवालों से युद्ध करेगा। ऐसा सुनकर राजा परिमाल ने इस बालक को एक दासी (धाय) को दे दिया । उसे नगर के बाहर एक मंदिर में रहने और बालक को पालने-पोसने का आदेश दिया। एक बार वह धाय गंगास्नान के कार्तिक मेले में गई । वहाँ पृथ्वीराज ने इस तेजस्वी बालक को देखा तो अपने गुप्तचरों से शिशु को चुराकर मँगवा लिया । पृथ्वीराज के भाई कान्ह कुमार के कोई संतान नहीं थी। उसने प्रार्थना करके यह बालक पृथ्वीराज से माँग लिया। बालक का पालन-पोषण राजघराने में होने लगा। उसका नाम 'देवपाल' रखा गया। बालक मोटा-ताजा और मस्त था, अतः उसको प्यार से 'धाँधू' कहा जाने लगा। धाय ने महोबा जाकर बालक के चोरी होने का समाचार दिया । परिवार को संतोष हुआ । बाद में परिमाल राजा को यह ज्ञात भी हो गया कि कान्ह कुमार ने एक बालक को गोद लिया है, वह बालक हमारा ही है। अतः उसके अशुभ होने का भय भी समाप्त हो गया ।
कुँवरि चंद्रावलि
महोबा के महाराज परिमाल की महारानी मल्हना ने एक पुत्री को भी जन्म दिया, जिसका नाम चंद्रावलि रखा गया। अपनी माता मल्हना से भी अधिक सुंदर इस कन्या की ख्याति सुगंध के समान चारों ओर फैल गई। अभी सोलह वर्ष की भी नहीं हुई थी कि बौरीगढ़ के राजा वीर सिंह ने महोबा को घेर लिया। दूत के हाथ संदेश भिजवाया कि महोबा को तहस-नहस होने से बचाना चाहते हो तो अपनी पुत्री चंद्रावलि का विवाह राजा वीरसिंह के साथ कर दो। राजा परिमाल ने अपनी पत्नी मल्हना से सलाह ली । मल्हना सुंदर ही नहीं, बुद्धिमती भी थी। उसने कहा,
"राजन! आपने तो शस्त्र उठाना छोड़ दिया । हमारे वीर जस्सराज, बच्छराज को सोते में अपहरण करके मौत के घाट उतार दिया। सैयद ताल्हन वाराणसी में जाकर बस गए । आल्हा-ऊदल अभी छोटे हैं तो युद्ध करेगा कौन? भलाई इसी में है कि वीरसिंह से बेटी चंद्रावलि का विवाह कर दिया जाए । विवाह तो किसी-न-किसी से करना ही होगा। तब राजा परिमाल ने संदेश भिजवाया कि विवाह तो चंद्रावलि का आपके साथ ही करेंगे, परंतु युद्ध से नहीं, प्रेम से करेंगे। आप वापस जाओ। हम तिलक (सगाई) लेकर सम्मान सहित आपके यहाँ आएँगे। तिथि, वार शुभमुहूर्त निश्चित कर देंगे, तब आप सादर बरात लेकर हमारे द्वार पधारें । हम वैदिक विधि से विवाह करेंगे। चंद्रावलि को आदर तथा प्रेम से अपनी रानी बनाइएगा । "
समय पर धूमधाम से चंद्रावलि और वीर शाह का विवाह बिना युद्ध के ही संपन्न हुआ। चंद्रावलि का पुत्र जगनिक हुआ, जिसे बाद में माहिल के भाई भौपतिवाला जगनेरी का राज्य दे दिया गया। जगनिक वीर और सुंदर तो था ही, कवि भी था। जगनिक कवि ने ही 'परिमाल रासो' नाम से काव्य लिखा, जो आल्हा खंड का मूल ग्रंथ है ।
तत्कालीन राज समाज
राजा हर्षवर्धन के पश्चात् भारत में एकछत्र राज किसी सम्राट् का नहीं रहा । छोटी-छोटी रियासतें बन गई। सभी ने अपनी राजधानियाँ बना लीं। अपने-अपने गढ़ (किले) बना लिये। एक-दूसरे के शादी - संबंध और उत्सवों में सभी आते-जाते थे। बात बारहवीं शताब्दी की है। दिल्ली में राजा अनंगपाल का शासन था। उनकी एक पुत्री कन्नौज में ब्याही थी तथा दूसरी अजमेर में । अजमेर में पृथ्वीराज तथा कन्नौज के राजा जयचंद के अनंगपाल नाना लगते थे। अनंगपाल के पुत्र नहीं हुआ था। उन्होंने पृथ्वीराज को गोद ले लिया और दिल्ली का युवराज बना दिया। इसीलिए जयचंद और पृथ्वीराज में वैमनस्य हो गया। जस्सराज और बच्छराज की मृत्यु के पश्चात् सिरसा पर पृथ्वीराज ने कब्जा कर लिया। बच्छराज के वीर पुत्र मलखान ने युद्ध जीतकर सिरसागढ़ वापस छीन लिया।
कुछ घायल वीरों सहित पृथ्वीराज एक उद्यान में ठहरे । माली ने विरोध किया तो एक घायल सैनिक ने माली का सिर काट डाला। परिमाल ने आल्हा-ऊदल को बुलाया । उन्होंने राजा को समझाया कि घायलों पर हमें वार नहीं करना चाहिए, परंतु मामा माहिल ने अपनी आदत के अनुसार राजा को भड़काया तथा उनकी चुगली की । आल्हा ने ऊदल को जाने के लिए कह दिया । ऊदल ने जाकर पृथ्वीराज के उन घायल सैनिकों को मार दिया। पृथ्वीराज को दिल्ली में समाचार मिला कि घायल सैनिक मार दिए गए। चुगलखोर माहिल ने इधर तो परिमाल को भड़काकर सैनिक मरवाए थे, उधर दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज को राजा परिमाल के विरुद्ध भड़काया । ऐसी घटनाओं से सभी राजा एक-दूसरे के शत्रु बन गए। उनमें देशभक्ति की जगह अपनी राजगद्दी का लोभ और स्वार्थ बढ़ता गया । इसी आपसी फूट का लाभ उठाकर मुसलिम आक्रमणकारियों ने बार-बार आक्रमण किए। पहले लूटपाट की, फिर यहीं बसकर स्थायी लूट में लग गए। ऐसे महान् वीर योद्धाओं के होते हुए आपसी फूट के कारण हिंदुस्तान बारह सौ वर्ष गुलाम रहा। आज भी हिंदू यदि आपसी कलह छोड़कर संगठित हो जाएँ तो विश्व में अपनी प्रतिभा का प्रभाव स्थापित कर सकते हैं ।
परिमाल राय का विवाह
चंद्रवंशी राजाओं की राजधानी सिरसागढ़ थी। किले का नाम कालिंजर था। चंद्रवंशी क्षत्रिय अब चंदेले कहलाते
थे। उनकी राजधानी को चंदेरी भी कहा जाता था। चंदेले राजा कीर्ति राय का प्रतापी पुत्र था परिमाल राय। यह बारहवीं शताब्दी की घटना है।
उन दिनों महोबा में राजा वासुदेव का शासन था । उनके दो पुत्र थे - माहिल और भोपति । तीन पुत्रियाँ थीं - मल्हना, दिवला और तिलका । मल्हना अनुपम सुंदरी थी । उसके अंग-अंग में तेज और सौंदर्य था। सिंह के समान कटि और हंस के समान चाल । उसके विशाल और चंचल नयनों के मृग समान होने से मल्हना को मृगनयनी कहा जाता था। वासुदेव राजा का ही एक नाम माल्यवंत भी था । वासुदेव की अनिंद्य सुंदरी पुत्री मल्हना की चर्चा चंदेले राजकुमार परिमाल देव राय के कानों तक पहुँची । देखे बिना सुनने मात्र से ही उसने निश्चय कर लिया कि मल्हना को ही अपनी रानी बनाऊँगा ।
राजा परिमाल का विद्वान् मंत्री था पंडित चिंतामणि । मंत्री को बुलाकर परिमाल राय ने पूछा, "पंडितजी! अपना पंचांग देखिए और शोध करके ऐसा मुहूर्त निकालिए कि हमारी मंशा सफल हो जाए। " पंडित चिंतामणि ने श्रेष्ठ मुहूर्त निकाला और बरात सजाने को कहा। उन दिनों क्षत्रियों की बरात वीरों की सेना होती थी । अतः सेना को तैयार होने का आदेश दे दिया गया । तोपें तैयार कर ली गई । रथ भी सजाए गए। हाथियों पर हौदे सजाए गए। ऊँटों पर बीकानेरी झूलें डाल दी गईं। घोड़ों पर जीन और लगाम कसी गई । जो-जो बहादुर जिस सवारी के लिए निश्चित थे, वे अपनी-अपनी सवारी पर चढ़ गए। एक दाँतवाले हाथी अलग तथा दो दाँतवाले हाथी अलग सजाए गए। घोड़ों की तो अलग सेना ही सज गई। कुछ तुर्की घोड़े थे, कुछ काबुली - कंधारी । कुछ घोड़े रश्की, मुश्की, सब्जा, सुर्खा घोड़े और कुछ नकुला नसल के घोड़े सजाए गए। काठियावाड़ी घोड़ों की तो तुलना ही नहीं थी। उन पर मखमलवाली जीन सजाई गई थी। मारवाड़ के सजीले ऊँट, अरबी ऊँट तथा करहल के ऊँट तैयार किए गए, जिन पर चंदन की बनी काठी और काठी पर गद्दे सजाए गए।
चंदेले राजा परिमाल के आदेश पर सारी तोपें तुरंत साफ करवाई गई। उनके साथ गोला-बारूद के छकड़े भी लाद दिए गए। सभी सैनिकों को आदेश दिया गया कि अपने-अपने काम के अनुसार अपना लिबास (वर्दी) पहनकर शीघ्र तैयार हो जाओ। लाल कमीज के साथ चुस्त पायजामा पहन लो । छाती पर बख्तर (बुलैट पूरफ जैकट, । जो धड़ पर पहनी जाती है) बाँध लो । उस पर झालरदार कोट डालो, जिसमें छप्पन छुरियाँ तथा गुजराती कटार टाँगी जाती हैं। दोनों तरफ दो पिस्तौलें टाँग लो और दाहिनी ओर तलवार लटका लो । सिर पर टोप (हैल्मेट) पहन लो, जिस पर गोली लगे तो भी असर न कर पाए । चंदेली सेना के जवानों ने सब गहनों और हथियारों सहित स्वयं को सजाकर तैयार कर लिया। इसके पश्चात् वीर राजा परिमाल के मंत्री नवल चौहान ने हाथ उठाकर सभी जवानों को संबोधित किया - "हे वीर क्षत्रियो ! ध्यान से मेरी बात सुनो। जिनको अपनी पत्नियों से बहुत प्यार हो या जिसकी पत्नी अभी मायके से विदा होकर आई है, वे सब अपने हथियार वापस रख दें, परंतु जिन्हें अपनी मर्यादा प्यारी है, वे युद्ध में हमारे साथ चलें । उनको हम दुगुनी पगार ( तनख्वाह ) देंगे। वे रणभूमि में खुलकर अपने शस्त्रों का प्रदर्शन कर वीरता दिखाएँ।"
इसके पश्चात् सैनिक समवेत स्वर में बोले, "हे नवल चौहान! हम राजा के मन- प्राण से साथ हैं। जहाँ राजा परिमाल का पसीना गिरेगा, हम अपना खून बहा देंगे । अगर हमारे सिर भी कटकर धरती पर गिर जाएँगे तो भी बिना सिर का धड़ खड़े होकर तलवार चलाएगा ।" इतनी बात सुनकर मुंशी नवल चौहान राजा परिमाल के पास गए और
|
एक बार किसी टी.वी. चैनल ने 'अर्धसत्य' में दिखाया कि मैहर माता मंदिर में कोई अज्ञात व्यक्ति या देव पूजा करने आता है। प्रातः जब मंदिर के द्वार खुलते हैं तो पत्र, पुष्प, जल को देखकर इस विश्वास को बल मिलता है। पुजारी एवं आस-पास में पूछताछ से टी.वी. ऐंकरों को पता चलता है कि यहाँ आल्हा पूजा करने आता है। आल्हा सामान्य जन से अधिक लंबा है । वह वीर वेश में आता है, परंतु किसी-किसी भाग्यवान को ही दिखाई पड़ता है उसके आने से पहले जोर की आँधी चलती है । चैनल के द्वारा दिखाया गया सत्य आधा है या पूरा, यह तो अलग प्रश्न है, परंतु मेरे पास बैठी पोती संस्कृति एवं प्रकृति, धेवती वत्सला और वंशिका, धेवते तेजस्वी और त्वरित; सभी ने मुझसे प्रश्न कर दिया, "यह आल्हा कौन है, क्या यह देवता है या मनुष्य ? इसके बारे में जानकारी कराइए । " मैंने बताया कि "मेरे पिताजी आल्हा की पुस्तक गा-गाकर सारे लोगों को सुनाया करते थे। मैंने भी अपनी माता, चाची, भाभी आदि को आल्हा पढ़कर सुनाई है। अब तो मैं इतना ही बता सकता हूँ कि आल्हा-ऊदल दो वीर राजकुमार थे, जो महोबा के रहनेवाले थे।" कुछ पंक्तियाँ याद आई - बड़े लड़इया महोबेवाले इनकी मार सही ना जाय, एक को मारे दो मर जाएँ, मरै तीसरा दहशत खाय। बच्चों की जिज्ञासा और बढ़ गई । कैसे अनुपम वीर थे । एक को मारने पर तीन मर जाते थे। उनके युद्ध का क्या कारण था, वे किससे लड़ते थे, क्यों लड़ते थे? सच तो यह है कि बचपन में पढ़ी आल्हा की कथा अब मैं भी भूल चुका था, परंतु इतना ध्यान में था कि वे पुस्तकें मेरठ के 'मटरूमल अत्तार' प्रकाशन से छपी थीं। किसी मित्र को भेजकर पता किया तो ज्ञात हुआ कि वह प्रकाशन बंद हो चुका है, फिर अग्रवाल प्रकाशन, खारी बावली, दिल्ली से एक पुस्तक प्राप्त हुई। दोनों पुस्तकें आल्हा छंद या वीर छंद में ही हैं। भाषा भी बुंदेलखंडी है । बारहवीं पास वत्सला भी उससे पूरा अर्थ नहीं निकाल पाई। तब मैंने विचार किया कि ऐसी महान् शौर्य गाथा लुप्त न हो जाए, इसका संक्षिप्त रूपांतर खड़ी बोली प्रचलित गद्य में किया जाना चाहिए। आनेवाली पीढ़ी को भी आल्हा ऊदल की वीरगाथा की जानकारी प्राप्त हो सके । अतः मैंने यह पावन कार्य स्वयं किया । आशा करता हूँ कि पुस्तक पाठकों को पसंद आएगी तथा आल्हा-ऊदल की वीरगाथा की सही जानकारी आगामी पीढ़ी तक पहुँचाएगी । सर्वे भवन्तु सुखिनः! - आचार्य मायाराम पतंग महाभारत से नाता कवि जगनिक रचित 'परिमाल रासो' में वर्णित आल्हा-ऊदल की इस वीरगाथा को प्रत्यक्ष युद्ध-वर्णन के रूप में लिखा गया है। बारहवीं शताब्दी में हुए वावन गढ़ के युद्धों का इसमें प्रत्यक्ष वर्णन है। स्वयं कवि जगनिक ने इन वीरों को महाभारत काल के पांडवों-कौरवों का पुनर्जन्म माना है। बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में इनकी कथाएँ गाँव-गाँव गाई जाती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में तो आल्हा को 'रामचरित मानस' से भी अधिक लोकप्रियता प्राप्त है। गाँवों में फाल्गुन के दिनों में होली पर ढोल-नगाड़ों के साथ होली गाने की परंपरा है तो सावन में मोहल्ले- मोहल्ले आल्हा गानेवाले रंग जमाते हैं। महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए; कौरव हार गए, बल्कि समाप्त ही हो गए। अर्जुन ने एक भी कौरव नहीं मारा; सभी सौ भाई भीम ने ही मारे । युधिष्ठिर तो लड़े, पर किसी महत्त्वपूर्ण वीर को नहीं मार सके। अतः पांडवों ने श्रीकृष्ण से कहा, "भगवन्! युद्ध तो हम आपकी कृपा से ही जीत गए, परंतु हमारी युद्ध की प्यास तृप्त नहीं हुई। लड़ने की प्रबल इच्छा मन में बची रह गई । " भगवान् बोले, "तुम्हारी यह इच्छा कलियुग में पुनः योद्धा - जीवन देकर पूर्ण कर देता हूँ।" भगवान् श्रीकृष्ण अपने भक्तों के मन में उपजे अहंकार को कभी नहीं रहने देते । अहंकार मिटाने के लिए कोई-न-कोई लीला रच देते हैं। उन्होंने सोचा, कलियुग में उन्हें लड़ने का पूरा अवसर देता हूँ और हारने का भी अनुभव करवाता हूँ। भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से कलियुग में इन पाँचों पांडवों ने जन्म लिया। पिछले जन्म की युद्ध की प्यास को तृप्त करने के लिए प्रभु ने युद्ध का बार-बार अवसर दिया । युधिष्ठिरजी आल्हा बने, भीम ने ऊदल का जन्म लिया। अर्जुन ब्रह्मानंद बने, नकुल लाखन तथा सहदेव वीर मलखान कहलाए । कौरवराज दुर्योधन दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान कहलाए । दुःशासन का नाम धाँधू हुआ । राजा कर्ण ताहर कहलाए । द्रोणाचार्य इस जन्म में चौंडा ब्राह्मण बने। इस प्रकार एक बार पुनः इन्हें युद्ध की प्यास बुझाने का अवसर दिया गया। सबने वीरता दिखाई, परंतु सब नष्ट हो गए। फिर भी विधिवत् बताता हूँ कि कहानी कब, कैसे आगे बढ़ी? चंदेल वंश में परिमाल का जन्म चंदेली नगर में चंद्रवंशी राजा चंद्रब्रह्म राज्य किया करते थे। वे बड़े धर्मात्मा थे। स्वयं चंद्र देवता ने उन्हें पारसमणि प्रदान की थी । पारसमणि लोहे को सोना बनाने में सक्ष्म होती है। राज चंद्रब्रह्म पारसमणि से सोना बनाकर प्रजा का कल्याण करते थे। उन्होंने अनेक यज्ञ करके प्रजा का प्रेम और यश प्राप्त किया । बहुत से राजाओं को जीतकर अपने राज्य का विस्तार भी किया । तोमरवंशी क्षत्रिय चिंतामणि उनके मंत्री थे। चंद्रब्रह्म के वंश में ही सूर्यब्रह्म हुए, जिन्होंने सूर्यकुंड बनवाया । इसी वंश में कीर्तिब्रह्म हुए, जिन्होंने कीर्ति सागर झील बनवाई। इन्हीं कीर्तिब्रह्म के पुत्र परिमाल हुए। राजा परिमाल ने भी यज्ञ किए तथा ब्राह्मणों को पर्याप्त दान दिया। कालांतर में अपने गुरु अमरनाथ के आदेश पर अपनी तलवार को सागर में धोकर फिर कभी शस्त्र न उठाने की शपथ ली। कुछ विरोधी राजा सिर उठाने लगे। तब राजा के दो सेनापति ही युद्ध का संचालन कुशलतापूर्वक किया करते थे। राजा परिमाल के विवाह की भी एक अलग कहानी है । महोबे में माल्यवंत नामक राजा का राज था। उन्हीं का एक नाम वासुदेव भी था । उनके दो पुत्र थे - माहिल और भूपति; एक अत्यंत रूपवती कन्या थी, जिसका नाम था मल्हना। महोबे पर युवा परिमाल ने आक्रमण किया। अपने पराक्रम से विजय प्राप्त की । राजा माल्यवंत ने अपनी पुत्री मल्हना का विवाह राजा परिमाल से कर दिया तथा अपना राज्य वापस ले लिया । मल्हना चंदेली की रानी बन गई। सुंदरी मल्हना को राजा परिमाल बहुत प्रेम करते थे। उसकी हर बात मानी जाती थी । मल्हना को चंदेरी का महल रुचिकर नहीं लगा। उसने इच्छा व्यक्त की कि वह अपने महोबा के महल में ही रहना चाहती है। अतः परिमाल ने अपने ससुर और सालों को महोबे से उरई के महल में जाने का आदेश दिया। परिमाल और रानी मल्हना महोबा में आ गए। मल्हना के भाई माहिल को यह व्यवहार भीतर तक घायल कर गया । रिश्तेदार और ऊपर से मृदुभाषी दिखाई देनेवाला माहिल भीतर से परिमाल की प्रसिद्धि से जलने लगा। माहिल ने अनुज भूपति को जगनेरी का किला दे दिया और माहिल स्वयं उरई में राज करने लगा। प्रगट में माहिल और भूपति राजा परिमाल की अनुमति से ही सब कार्य करते थे, परंतु माहिल भीतर से सदैव बहन के परिवार से ईर्ष्या रखता था। राजा परिमाल जान गए थे कि माहिल का चुगली करने का स्वभाव है, अतः वे माहिल की बातों पर अधिक ध्यान नहीं देते थे । माहिल अवसर पाकर अहित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ता था। भूपति को जगनेरी दुर्ग का राजा बनाया था, अतः उसका नाम 'जगनिक' भी पड़ गया । जगनिक वीर तो था ही, कवि भी था। वह युद्ध में साथ रहकर अपनी कविता से सैनिकों का उत्साहवर्धन करता था । राजा परिमाल तथा आल्हा-ऊदल की वीरता का मूल वर्णन 'परिमाल रासो' में मिलता है। आल्हा-ऊदल का जन्म गुरु के आदेश पर राजा परिमाल ने युद्ध करना छोड़ दिया था, तो भी कोई राजा उनका बाल-बाँका नहीं कर सकता था। उनके पास जस्सराज और बच्छराज नामक के दो योद्धा थे । इनके पराक्रम से परिमाल के राज्य की पूर्ण सुरक्षा होती थी। एक बार मांडौगढ़ के राजकुमार करिया राय गढ़गंगा पर स्नान करने गए। उन दिनों गढ़ मुक्तेश्वर के गंगास्नान मेले में स्नानार्थी राजाओं के शिविर लगा करते थे। वहीं सब प्रकार के सामान भी बिकने के लिए लाए जाते थे। एक महीने तक बड़ा आकर्षक बाजार लगा रहता था । राजा करिया राय मेले में नौलखा हार खोज रहे थे, जो उन्हें अपनी बहन को उपहारस्वरूप देना था । हार बिकने ही नहीं आया था, तो मिला भी नहीं। हार तो नहीं मिला, पर करिया राय को माहिल मिल गया । माहिल ने कहा, "हार तो मिल जाएगा, परंतु खरीद नहीं सकते, लूटना पड़ेगा।" करिया राय के पूछने पर माहिल ने बताया, "मेरी बहन मल्हना के पास असली हीरों का नौलखा हार है। तुम्हारी हिम्मत है तो महोबा जाकर लूट लो । " करिया राय माहिल के उकसावे में आ गया और हार लूटने के लिए महोबा पहुँच गया, लेकिन महोबा में जस्सराज, बच्छराज, ताल्हन सैयद ने उसे युद्ध में बुरी तरह परास्त कर भगा दिया। कुछ दिन बाद ताल्हन सैयद किसी काम से काशी गए थे। माहिल ने फिर चुगली खाई । उसने करिया राय को जाकर बताया कि अब अवसर है। महोबे जाकर नौलखा हार लूट लो । करिया राय ने मौके पर मिली सूचना का पूरा लाभ उठाया। उसने आधी रात को छापा मारा । जस्सराज और बच्छराज दोनों वीरों को सोते हुए ही पकड़ लिया। दिवला रानी के गले से नौलखा हार झपट लिया । अनेक स्वर्ण आभूषण, पचसावत नामक हाथी तथा पपीहा नामक घोड़ा आदि लूटकर मांडौगढ़ लौट गया । जस्सराज और बच्छराज दोनों भाइयों की वीरता के कारण ही परिमाल राजा पर कोई आक्रमण नहीं करता था । उनको बंदी बनाकर करिया राय ने उन्हें बहुत कष्ट दिए । माहिल की सलाह पर दोनों के सिर काटकर बड़ के पेड़ पर लटका दिए, जिसकी सूचना लोगों ने राजा परिमाल तक पहुँचाई। जस्सराज के पुत्रों को परिमाल अपने ही महल में ले आए। उनकी रानी ने उन बच्चों का पालन-पोषण किया । जस्सराज और बच्छराज को तो परिमाल वन से लाए थे। वे वनवासी थे, अतः बाद में उनका गोत्र ही 'बनाफर राय' प्रसिद्ध हुआ। आल्हा-ऊदल ही जस्सराज के पुत्र थे, जिनका पालन-पोषण परिमाल राजा की रानी मल्हना ने किया था। पात्रों का संक्षिप्त परिचय आल्हा खंड की कथा में जिन-जिन का नाम तथा वर्णन आएगा, उन पात्रों का संक्षिप्त परिचय देने से पाठकों को सरलता से कहानी समझ में आती रहेगी। अभी तक यह बताया गया है कि आल्हा-ऊदल जस्सराज के पुत्र थे । उनको करिया राय ने धोखे से पकड़कर मरवा दिया। माहिल राजा परिमाल का साला था, अतः आल्हा का मामा था । माहिल मन का दुष्ट, ईर्ष्यालु तथा चुगलखोर था । उसे महोबा से निकालकर उरई भेज दिया गया था। अतः वह ऊपर से खुश दिखाई देता था, पर अपने बहनोई तथा भानजों से बदला लेने का कोई अवसर चूकता नहीं था। अपनी ही बहन के नौलखा हार की लूट माहिल ने करवाई थी। पृथ्वीराज की जन्म कथा पृथ्वीराज भारतीय इतिहास का प्रसिद्ध पात्र है, परंतु उसके जन्म की कथा इतिहास के छात्रों के लिए भी अज्ञात है। साहित्य भी ऐतिहासिक शोध के लिए एक प्रमुख स्रोत होता है । 'पृथ्वीराज रासो', 'परिमाल रासो' तथा 'बलभद्र विलास' नामक ग्रंथों से ज्ञात होता है कि हस्तिनापुर के राजा अनंगपाल तोमर का राजा कामध्वज से युद्ध हुआ। अजमेर के राजा सोमेश्वर ने राजा अनंगपाल की सहायता की । तब अनंगपाल ने अपनी पुत्री इंद्रावती का विवाह राजा सोमेश्वर से करके उनका एहसान चुकाया । रानी इंद्रावती का ही एक नाम कमला भी था। एक बार इंद्रावती अपने मायके आई । ज्ञात हुआ कि वह गर्भवती है। अनंगपाल ने पंडित चंदनलालजी से गर्भस्थ शिशु का भविष्य जानना चाहा। यों तो जन्म के समय एवं नक्षत्र से ही भविष्य बताया जा सकता है, परंतु जन्म होने के समय की गणना करके भी अनुमान लगाया जा सकता है। पंडितजी ने बताया कि 'जातक बहुत बलशाली होगा । प्रतापी राजा बनेगा। आपके हस्तिनापुर का राजा भी यही बनेगा।' जब कुटुंब के अन्य जनों को यह ज्ञात हुआ तो उन लोगों ने साजिश रची। रानी इंद्रावती को बताया गया - "तुम्हारे प्रतापी पुत्र होनेवाला है, परंतु यदि मायके में बनी रही तो गर्भ गिरने की संभावना है, अतः तुम परिवार और सैनिक साथ लेकर तीर्थाटन पर चली जाओ।" इंद्रावती ने अपने पिता की बात का भरोसा किया और तीर्थाटन को चली गई। जिनको साजिश की जिम्मेदारी दी गई थी, उन लोगों ने एक रात को सोती हुई इंद्रावती को कुएँ में फेंक दिया और लौटकर यह खबर फैला दी कि इंद्रावती की मृत्यु हो गई। इंद्रावती की जब नींद खुली और वह चीखी -चिल्लाई, तब वन में रहनेवाले एक साधु ने उसे कुएँ से बाहर निकाला। इंद्रावती ने अपने पिता अनंगपाल तथा पति सोमेश्वर का परिचय दिया। योगी अश्वत्थामा ने रानी को पतिगृह या पितृगृह जाने की इच्छा पूछी तो इंद्रावती ने कहा, "महाराज! आपने मुझे जीवन दान दिया है। अब आप ही मेरी रक्षा करें। मैं कहीं और नहीं जाना चाहती।" योगी संन्यासी तो स्वभाव से ही परोपकारी होते हैं। इंद्रावती की प्रार्थना स्वीकृत हुई। पृथ्वीराज का जन्म संवत् एक हज़ार एक सौ बत्तीस में वन में ही हुआ । अश्वत्थामा संन्यासी ने ही पृथ्वीराज का नामकरण तथा पालन-पोषण किया । गुरु बनकर धनुष-बाण चलाने सिखाए तथा अच्छे संस्कार भी दिए । एक दिन शिकार की खोज में राजा सोमेश्वर उसी जंगल में आ निकले। वहाँ एक बालक को वन में विचरण करते देखकर चकित हुए । बालक से परिचय पूछा तो उसने माता का नाम कमला बताया, परंतु पिता का नाम नहीं बताया। उसने कहा, "मैं और मेरी माता एक ऋषि के आश्रम में रहते हैं। आप मिलना चाहें तो मेरे साथ चलें।" राजा सोमेश्वर के मन में बालक के प्रति मोह उमड़ रहा था । वे बालक पृथ्वीराज के साथ ऋषि अश्वत्थामा के आश्रम में पहुँच गए। राजा ने प्रथम अपना परिचय दिया और यह भी बताया, "मेरी रानी इंद्रावती अपने मायके से तीर्थाटन के लिए गई थी। मार्ग में उसकी मृत्यु हो गई। वह गर्भवती थी । यदि उसके भी पुत्र होता तो इतना ही बड़ा होता।" इतना कहकर राजा रुआँसा हो गया। रानी इंद्रावती भी पति को पहचान चुकी थी, उसकी गाथा सुनकर वह भी रो पड़ी। तब अश्वत्थामा मुनि ने बताया कि रानी के साथ साजिश रची गई थी। उसे जीवित ही कुएँ में फेंक दिया गया था। जो उसे मारना चाहते थे, परमात्मा ने उसे बचाने के लिए मुझे भेज दिया। किसी को मारने की इच्छा रखनेवाले स्वयं मर जाते हैं, परंतु जिसे ईश्वर बचाना चाहे, उसे कोई नहीं मार सकता । ऋषि ने अपनी आँखों देखी एक घटना सुनाई । एक कबूतर - कबूतरी पेड़ की डाल पर मौज से बैठे थे। तभी एक शिकारी की निगाह उनपर पड़ी। उसने अपने धनुष-बाण उठाए । वह निशाना साधनेवाला था, तभी ऊपर से एक बाज उन्हें झपटने के लिए मँडराने लगा । बाज कबूतरों को अपना भोजन बनाना चाहता था । कबूतरों ने सोचा, अब तो ईश्वर ही बचा सकता है । यहाँ से उड़े तो बाज झपट्टा मारेगा । इधर कुआँ, उधर खाई। बचने की राह नहीं दिखाई देती। तभी पेड़ की जड़ से सर्प निकला और शिकारी को डस लिया । शिकारी का निशाना हिला और बाण बाज को जाकर लगा। बाज धरती पर आ गिरा । तब तक शिकारी भी धरती पर लोट-पोट हो चुका था । कबूतर का जोड़ा उड़ गया। मारने आए शिकारी और बाज दोनों मर गए । कथा सुनकर सोमेश्वर मुनि की बात समझ गए कि सबकुछ ईश्वर की इच्छा से ही होता है । मुनि ने इंद्रावती और पृथ्वीराज को सोमेश्वर के साथ विदा कर दिया । पृथ्वीराज अजमेर का राजकुमार बन गया। पृथ्वीराज का दिल्ली का राजा बनना पृथ्वीराज की कहानी हमारा लक्ष्य नहीं है, परंतु वह अजमेर से दिल्ली कैसे आया तथा पंडित चंदन लाल की भविष्यवाणी कैसे पूर्ण हुई, यह बताना आवश्यक है। अतः प्रसंगवश जान लीजिए। एक बार गजनी का बादशाह भारत पर आक्रमण करने आ गया। उसने अटक नदी के पार डेरा डाल दिया और राजा अनंगपाल को संदेश भेज दिया कि वे लड़ना चाहते हैं या बिना लड़े ही मुझे अपना राज्य सौंप देंगे। राजा अनंगपाल ने सभासदों से चर्चा की। निर्णय लिया गया कि वे अपने नाती पृथ्वीराज को बुलवा लें । उसे यहाँ कुछ दिनों के लिए राजा बना दें, फिर गजनी के बादशाह से युद्ध करने जाएँ । पृथ्वीराज को बुलाया गया। उस समय वह सोलह वर्ष का नवयुवक था। अनंगपाल का प्रस्ताव उन्होंने मान तो लिया, परंतु शर्त रख दी कि आपके परिवारजन तथा सभा के दरबारी सब मुझे राजा स्वीकार करें। आप भी लौटकर आएँ तो मुझसे अनुमति लें । शर्त स्वीकार कर ली गई । इस तरह पृथ्वीराज दिल्ली के शासक बन गए । राजा अनंगपाल युद्ध करने चले गए। पृथ्वीराज के विवाह उस काल में विवाह बिना युद्ध के नहीं होते थे। पृथ्वीराज ने गुजरात के राजा भोलाराम की पुत्री इच्छा कुमारी से विवाह किया। फिर दाहिनी नामक सुंदरी से विवाह किया। इसके पश्चात् पद्मसेन की पुत्री पद्मावती से विवाह किया । हर विवाह - युद्ध में अन्य राजाओं के साथ हुआ । हाँ, राजा माहिल की बहन अगया से बिना युद्ध के विवाह हुआ । वह रूपवती ही नहीं, बुद्धिमती भी थी । सब पर उसी का शासन चलता था। उसकी बेटी का नाम बेला था । ऐसा माना जाता है कि बेला ही द्रौपदी का अवतार थी । मुख्य विवाह संयोगिता से हुआ। संयोगिता कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री थी । पृथ्वीराज इतनी पत्नियों के रहते हुए भी संयोजिता को युद्ध से अपहरण करके ले आए। इसी कारण भीषण युद्ध में दोनों ओर के अनेक योद्धा मारे गए। जयचंद और पृथ्वीराज की शत्रुता बढ़ी । जयचंद्र जाकर शहाबुद्दीन मोहम्मद गोरी से मिल गया । पृथ्वीराज को हरवाने और मरवाने में जयचंद ने सहायता की । साधारण प्रेम और वैर के कारण से देश यवनों मुसलमानों के अधीन हो गया। हिंदुस्तान का गौरवमय इतिहास राजाओं की आपसी लड़ाई ही गुलामी का कारण बना। आल्हा का परिचय जस्सराज ही दस्सराज कहलाता था । वनवासी होने के कारण उन्हें 'बनाफर' कहकर भी पुकारा जाता था। जस्सराज का विवाह देव कुँवर से हुआ था । उसी की प्रथम संतान होने पर राजा परिमाल ने पंडितों को बुलाकर उसका नामकरण करवाया तथा भविष्य पूछा । पंडितों ने कहा कि बालक सिंह लग्न में जनमा है। सिंह के समान निर्भय वीर होगा। वीरता एवं धर्मपालन में सबसे उत्तम होगा, अतः इसका नाम 'आल्हा' रहेगा । राजा परिमाल ने प्रसन्न होकर पंडितों को दक्षिणा और पुरस्कार दिए। आल्हा का विवाह नैनागढ़ के राजा नेपाल सिंह की सुंदर कन्या सुलक्षणा के साथ हुआ था, जिसका एक नाम 'मछला' भी था। आल्हा ने अनेक युद्ध किए, परंतु कभी हार का मुँह नहीं देखा । आल्हा को युधिष्ठिर का अवतार माना जाता है। आल्हा ने कभी अधर्म तथा अन्याय नहीं किया। ऊदल वीर दस्सराज और देव कुँवरि का दूसरा पुत्र था ऊदल । राजा परिमाल ने इसके लिए भी पंडित बुलवाकर भविष्य पुछवाया। वह महान् वीर होगा, यह जानकर राजा प्रसन्न हुआ, परंतु माँ देव कुँवरि ऊदल के जन्म से दुःखी थी। चूँकि उसके जन्म से पहले ही दस्सराज और बच्छराज को करिया राय चुराकर ले गया था और उनके सिर काटकर वटवृक्ष पर टाँग दिए थे। इस तरह ऊदल का जन्म पिता की मृत्यु के पश्चात् हुआ था, तभी वह इसका जन्म अशुभ मान रही थी। इस बालक को उसने अपनी दासी को पालने के लिए दे दिया था, क्योंकि वह उस बालक को देखना नहीं चाहती थी। दासी ने ऊदल को ले जाकर महारानी मल्हना को सौंप दिया। रानी ने ही बड़े प्रेम से आल्हा, ऊदल दोनों का पालन-पोषण किया । ऊदल को भीम का अवतार माना जाता है। उसमें भी शारीरिक बल सैकड़ों हाथियों के बराबर बताया गया है। ऊदल भी युद्धों में केवल जीतने के लिए जनमा था। ब्रह्मानंद का जन्म राजा परिमाल की रानी मल्हना के गर्भ से भी एक पुत्र का जन्म हुआ। अधेड़ अवस्था में पुत्र जन्म से राजा का प्रसन्न होना स्वाभाविक था। राजकुमार के जन्म से पूरे महोबा में ही प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। ज्योतिषियों ने बताया कि मेष लग्न में सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र में तथा वृष राशि में जनमा यह बालक अत्यंत तेजस्वी होगा। इसी अक्षय तृतीया के दिन ऋषि परशुराम का भी जन्म हुआ था। अरिष्ट ग्रह पूछने पर ज्योतिषी बोले, "संसार में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसके सब ग्रह श्रेष्ठ हों। एक-आध नेष्ट ग्रह तो हो ही जाता है।" उन्होंने बताया कि स्त्री पक्ष नहीं है । स्त्री के कारण ही इसका प्राणांत भी हो सकता है। बालक का नाम ब्रह्मानंद रखा गया। इसे वेदज्ञ पंडितों ने अर्जुन का अवतार माना है। पृथ्वीराज की पुत्री बेला कुँवरि से इसका विवाह होना तय हुआ था। पृथ्वीराज के सब वीर मिलकर भी ब्रह्मानंद को नहीं हरा सके, तब माहिल ने अपनी दुष्टता का परिचय दिया और पृथ्वीराज को बचपन में प्राप्त अश्वत्थामा मुनि के दिए उस अर्ध-चंद्राकार बाण की याद दिलाई, जिसका वार कभी खाली नहीं जा सकता था । वही तीर ब्रह्मानंद की मृत्यु का कारण बना । इस प्रकार श्रीकृष्ण भगवान् ने अर्जुन को पृथ्वीराज रूपी दुर्योधन के द्वारा युद्ध में मरवाकर दोनों की पिछले जन्म की युद्ध - पिपासा को तृप्त किया। लाखन राठौर कन्नौज के राजा वीरवर जयचंद्र का अनुज रतिभानु भी महान् वीर था । युद्ध में उसका कौशल देखते ही बनता था। उसी का सुपुत्र विशाल नेत्रों तथा सुंदर मुखवाला हुआ । लाखों में एक होने के कारण उसका नाम 'लाखन' रखा गया। बूँदी शहर के राजा गंगाधर राव की राजकुमारी कुसुमा से इनका विवाह हुआ था। उसकी मृत्यु पृथ्वीराज के बाणों से हुई। लाखन को नकुल का अवतार माना जाता है। मलखान का जन्म जस्सराज के भाई बच्छराज की रानी तिलका ने बच्छराज की मृत्यु के पश्चात् मलखान को जन्म दिया। राजा परिमाल ने पंडितों से पूछा तो ज्ञात हुआ कि यह बालक भी सिंह लग्न में उत्पन्न हुआ है। सिंह के समान निर्भय तथा वीर होने की तो भविष्यवाणी थी ही, एक विशेष बात और थी कि इसके पाँव में पद्म का चिह्न है । यह किसी अन्य के शस्त्रों से नहीं मरेगा। जब इसके पाँव का पद्म फटेगा, तभी इसकी मृत्यु होगी। यह बालक देवी का सच्चा भक्त होगा तथा देवी से वरदान भी प्राप्त करेगा । वास्तव में मलखान बड़ा वीर और देवीभक्त हुआ । मलखान को सहदेव का अवतार माना जाता है । ढेवा का परिचय महोबा के राज पुरोहित चिंतामणि का पुत्र देव कर्ण ही 'ढेवा' नाम से जाना जाता था। रानी मल्हना इसे बहुत स्नेह करती थी। इसकी ऊदल से गहरी मित्रता थी । एक बार ढेवा ने युद्धभूमि में मूर्च्छित पड़े पृथ्वीराज की रक्षा की थी । धाँधू का परिचय दस्सराज की पत्नी देवकुँवरि ने ही इस शिशु को जन्म दिया था, परंतु यह अभुक्त मूल नक्षत्र में जनमा था। पंडितों ने बताया था कि इसका मुख देखकर पिता जीवित नहीं रहेगा । यह अपने ही वंशवालों से युद्ध करेगा। ऐसा सुनकर राजा परिमाल ने इस बालक को एक दासी को दे दिया । उसे नगर के बाहर एक मंदिर में रहने और बालक को पालने-पोसने का आदेश दिया। एक बार वह धाय गंगास्नान के कार्तिक मेले में गई । वहाँ पृथ्वीराज ने इस तेजस्वी बालक को देखा तो अपने गुप्तचरों से शिशु को चुराकर मँगवा लिया । पृथ्वीराज के भाई कान्ह कुमार के कोई संतान नहीं थी। उसने प्रार्थना करके यह बालक पृथ्वीराज से माँग लिया। बालक का पालन-पोषण राजघराने में होने लगा। उसका नाम 'देवपाल' रखा गया। बालक मोटा-ताजा और मस्त था, अतः उसको प्यार से 'धाँधू' कहा जाने लगा। धाय ने महोबा जाकर बालक के चोरी होने का समाचार दिया । परिवार को संतोष हुआ । बाद में परिमाल राजा को यह ज्ञात भी हो गया कि कान्ह कुमार ने एक बालक को गोद लिया है, वह बालक हमारा ही है। अतः उसके अशुभ होने का भय भी समाप्त हो गया । कुँवरि चंद्रावलि महोबा के महाराज परिमाल की महारानी मल्हना ने एक पुत्री को भी जन्म दिया, जिसका नाम चंद्रावलि रखा गया। अपनी माता मल्हना से भी अधिक सुंदर इस कन्या की ख्याति सुगंध के समान चारों ओर फैल गई। अभी सोलह वर्ष की भी नहीं हुई थी कि बौरीगढ़ के राजा वीर सिंह ने महोबा को घेर लिया। दूत के हाथ संदेश भिजवाया कि महोबा को तहस-नहस होने से बचाना चाहते हो तो अपनी पुत्री चंद्रावलि का विवाह राजा वीरसिंह के साथ कर दो। राजा परिमाल ने अपनी पत्नी मल्हना से सलाह ली । मल्हना सुंदर ही नहीं, बुद्धिमती भी थी। उसने कहा, "राजन! आपने तो शस्त्र उठाना छोड़ दिया । हमारे वीर जस्सराज, बच्छराज को सोते में अपहरण करके मौत के घाट उतार दिया। सैयद ताल्हन वाराणसी में जाकर बस गए । आल्हा-ऊदल अभी छोटे हैं तो युद्ध करेगा कौन? भलाई इसी में है कि वीरसिंह से बेटी चंद्रावलि का विवाह कर दिया जाए । विवाह तो किसी-न-किसी से करना ही होगा। तब राजा परिमाल ने संदेश भिजवाया कि विवाह तो चंद्रावलि का आपके साथ ही करेंगे, परंतु युद्ध से नहीं, प्रेम से करेंगे। आप वापस जाओ। हम तिलक लेकर सम्मान सहित आपके यहाँ आएँगे। तिथि, वार शुभमुहूर्त निश्चित कर देंगे, तब आप सादर बरात लेकर हमारे द्वार पधारें । हम वैदिक विधि से विवाह करेंगे। चंद्रावलि को आदर तथा प्रेम से अपनी रानी बनाइएगा । " समय पर धूमधाम से चंद्रावलि और वीर शाह का विवाह बिना युद्ध के ही संपन्न हुआ। चंद्रावलि का पुत्र जगनिक हुआ, जिसे बाद में माहिल के भाई भौपतिवाला जगनेरी का राज्य दे दिया गया। जगनिक वीर और सुंदर तो था ही, कवि भी था। जगनिक कवि ने ही 'परिमाल रासो' नाम से काव्य लिखा, जो आल्हा खंड का मूल ग्रंथ है । तत्कालीन राज समाज राजा हर्षवर्धन के पश्चात् भारत में एकछत्र राज किसी सम्राट् का नहीं रहा । छोटी-छोटी रियासतें बन गई। सभी ने अपनी राजधानियाँ बना लीं। अपने-अपने गढ़ बना लिये। एक-दूसरे के शादी - संबंध और उत्सवों में सभी आते-जाते थे। बात बारहवीं शताब्दी की है। दिल्ली में राजा अनंगपाल का शासन था। उनकी एक पुत्री कन्नौज में ब्याही थी तथा दूसरी अजमेर में । अजमेर में पृथ्वीराज तथा कन्नौज के राजा जयचंद के अनंगपाल नाना लगते थे। अनंगपाल के पुत्र नहीं हुआ था। उन्होंने पृथ्वीराज को गोद ले लिया और दिल्ली का युवराज बना दिया। इसीलिए जयचंद और पृथ्वीराज में वैमनस्य हो गया। जस्सराज और बच्छराज की मृत्यु के पश्चात् सिरसा पर पृथ्वीराज ने कब्जा कर लिया। बच्छराज के वीर पुत्र मलखान ने युद्ध जीतकर सिरसागढ़ वापस छीन लिया। कुछ घायल वीरों सहित पृथ्वीराज एक उद्यान में ठहरे । माली ने विरोध किया तो एक घायल सैनिक ने माली का सिर काट डाला। परिमाल ने आल्हा-ऊदल को बुलाया । उन्होंने राजा को समझाया कि घायलों पर हमें वार नहीं करना चाहिए, परंतु मामा माहिल ने अपनी आदत के अनुसार राजा को भड़काया तथा उनकी चुगली की । आल्हा ने ऊदल को जाने के लिए कह दिया । ऊदल ने जाकर पृथ्वीराज के उन घायल सैनिकों को मार दिया। पृथ्वीराज को दिल्ली में समाचार मिला कि घायल सैनिक मार दिए गए। चुगलखोर माहिल ने इधर तो परिमाल को भड़काकर सैनिक मरवाए थे, उधर दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज को राजा परिमाल के विरुद्ध भड़काया । ऐसी घटनाओं से सभी राजा एक-दूसरे के शत्रु बन गए। उनमें देशभक्ति की जगह अपनी राजगद्दी का लोभ और स्वार्थ बढ़ता गया । इसी आपसी फूट का लाभ उठाकर मुसलिम आक्रमणकारियों ने बार-बार आक्रमण किए। पहले लूटपाट की, फिर यहीं बसकर स्थायी लूट में लग गए। ऐसे महान् वीर योद्धाओं के होते हुए आपसी फूट के कारण हिंदुस्तान बारह सौ वर्ष गुलाम रहा। आज भी हिंदू यदि आपसी कलह छोड़कर संगठित हो जाएँ तो विश्व में अपनी प्रतिभा का प्रभाव स्थापित कर सकते हैं । परिमाल राय का विवाह चंद्रवंशी राजाओं की राजधानी सिरसागढ़ थी। किले का नाम कालिंजर था। चंद्रवंशी क्षत्रिय अब चंदेले कहलाते थे। उनकी राजधानी को चंदेरी भी कहा जाता था। चंदेले राजा कीर्ति राय का प्रतापी पुत्र था परिमाल राय। यह बारहवीं शताब्दी की घटना है। उन दिनों महोबा में राजा वासुदेव का शासन था । उनके दो पुत्र थे - माहिल और भोपति । तीन पुत्रियाँ थीं - मल्हना, दिवला और तिलका । मल्हना अनुपम सुंदरी थी । उसके अंग-अंग में तेज और सौंदर्य था। सिंह के समान कटि और हंस के समान चाल । उसके विशाल और चंचल नयनों के मृग समान होने से मल्हना को मृगनयनी कहा जाता था। वासुदेव राजा का ही एक नाम माल्यवंत भी था । वासुदेव की अनिंद्य सुंदरी पुत्री मल्हना की चर्चा चंदेले राजकुमार परिमाल देव राय के कानों तक पहुँची । देखे बिना सुनने मात्र से ही उसने निश्चय कर लिया कि मल्हना को ही अपनी रानी बनाऊँगा । राजा परिमाल का विद्वान् मंत्री था पंडित चिंतामणि । मंत्री को बुलाकर परिमाल राय ने पूछा, "पंडितजी! अपना पंचांग देखिए और शोध करके ऐसा मुहूर्त निकालिए कि हमारी मंशा सफल हो जाए। " पंडित चिंतामणि ने श्रेष्ठ मुहूर्त निकाला और बरात सजाने को कहा। उन दिनों क्षत्रियों की बरात वीरों की सेना होती थी । अतः सेना को तैयार होने का आदेश दे दिया गया । तोपें तैयार कर ली गई । रथ भी सजाए गए। हाथियों पर हौदे सजाए गए। ऊँटों पर बीकानेरी झूलें डाल दी गईं। घोड़ों पर जीन और लगाम कसी गई । जो-जो बहादुर जिस सवारी के लिए निश्चित थे, वे अपनी-अपनी सवारी पर चढ़ गए। एक दाँतवाले हाथी अलग तथा दो दाँतवाले हाथी अलग सजाए गए। घोड़ों की तो अलग सेना ही सज गई। कुछ तुर्की घोड़े थे, कुछ काबुली - कंधारी । कुछ घोड़े रश्की, मुश्की, सब्जा, सुर्खा घोड़े और कुछ नकुला नसल के घोड़े सजाए गए। काठियावाड़ी घोड़ों की तो तुलना ही नहीं थी। उन पर मखमलवाली जीन सजाई गई थी। मारवाड़ के सजीले ऊँट, अरबी ऊँट तथा करहल के ऊँट तैयार किए गए, जिन पर चंदन की बनी काठी और काठी पर गद्दे सजाए गए। चंदेले राजा परिमाल के आदेश पर सारी तोपें तुरंत साफ करवाई गई। उनके साथ गोला-बारूद के छकड़े भी लाद दिए गए। सभी सैनिकों को आदेश दिया गया कि अपने-अपने काम के अनुसार अपना लिबास पहनकर शीघ्र तैयार हो जाओ। लाल कमीज के साथ चुस्त पायजामा पहन लो । छाती पर बख्तर बाँध लो । उस पर झालरदार कोट डालो, जिसमें छप्पन छुरियाँ तथा गुजराती कटार टाँगी जाती हैं। दोनों तरफ दो पिस्तौलें टाँग लो और दाहिनी ओर तलवार लटका लो । सिर पर टोप पहन लो, जिस पर गोली लगे तो भी असर न कर पाए । चंदेली सेना के जवानों ने सब गहनों और हथियारों सहित स्वयं को सजाकर तैयार कर लिया। इसके पश्चात् वीर राजा परिमाल के मंत्री नवल चौहान ने हाथ उठाकर सभी जवानों को संबोधित किया - "हे वीर क्षत्रियो ! ध्यान से मेरी बात सुनो। जिनको अपनी पत्नियों से बहुत प्यार हो या जिसकी पत्नी अभी मायके से विदा होकर आई है, वे सब अपने हथियार वापस रख दें, परंतु जिन्हें अपनी मर्यादा प्यारी है, वे युद्ध में हमारे साथ चलें । उनको हम दुगुनी पगार देंगे। वे रणभूमि में खुलकर अपने शस्त्रों का प्रदर्शन कर वीरता दिखाएँ।" इसके पश्चात् सैनिक समवेत स्वर में बोले, "हे नवल चौहान! हम राजा के मन- प्राण से साथ हैं। जहाँ राजा परिमाल का पसीना गिरेगा, हम अपना खून बहा देंगे । अगर हमारे सिर भी कटकर धरती पर गिर जाएँगे तो भी बिना सिर का धड़ खड़े होकर तलवार चलाएगा ।" इतनी बात सुनकर मुंशी नवल चौहान राजा परिमाल के पास गए और
|
खुद को आराम करने के लिए समय दीजीए। आराम करने से पहले अपने सभी काम और होमवर्क निपटा लें। अपने मन, शरीर और आत्मा पर कुछ ध्यान दे और थोडी देर के लिए अपनी चिंताओं को दूर बहा दें। इससे मन व शरीर को शांति मिलेगी और आप तरोताजा महसूस करेंगी।
|
खुद को आराम करने के लिए समय दीजीए। आराम करने से पहले अपने सभी काम और होमवर्क निपटा लें। अपने मन, शरीर और आत्मा पर कुछ ध्यान दे और थोडी देर के लिए अपनी चिंताओं को दूर बहा दें। इससे मन व शरीर को शांति मिलेगी और आप तरोताजा महसूस करेंगी।
|
वैश्विक व्यापार कंपनियों है कि आधुनिक दुनिया में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए चाहते हैं के लिए एक निर्णायक अधीन है। वैश्विक व्यापार उचित काम पर रखने प्रथाओं में कर्मचारियों के प्रशिक्षण के साथ ही विभिन्न देशों और संस्कृतियों से प्रबंध और व्यक्तियों के प्रशिक्षण से निपटने के द्वारा मदद कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने पर केंद्रित है।
ओशिनिया, काम के अवसरों और वर्क परमिट के कानूनों के भीतर कई देशों के कारण ही सीमित किया जा रहा है कुछ देशों में अवसरों के बारे में डेटा के साथ काफी भिन्न होते हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड क्षेत्र में सबसे उन्नत देश हैं.
पाठ्यक्रम कि दुनिया भर में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, जूनियर कॉलेजों, और व्यापार स्कूलों में लिया जा सकता है अलग अलग वर्गों रहे हैं। यहां तक कि अधिक से अधिक लचीलेपन के लिए, कई स्कूलों में भी ऑनलाइन कक्षाओं की पेशकश। छात्र अलग अलग वर्गों लेने के लिए या डिग्री कार्यक्रमों का पीछा कर सकते।
|
वैश्विक व्यापार कंपनियों है कि आधुनिक दुनिया में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए चाहते हैं के लिए एक निर्णायक अधीन है। वैश्विक व्यापार उचित काम पर रखने प्रथाओं में कर्मचारियों के प्रशिक्षण के साथ ही विभिन्न देशों और संस्कृतियों से प्रबंध और व्यक्तियों के प्रशिक्षण से निपटने के द्वारा मदद कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने पर केंद्रित है। ओशिनिया, काम के अवसरों और वर्क परमिट के कानूनों के भीतर कई देशों के कारण ही सीमित किया जा रहा है कुछ देशों में अवसरों के बारे में डेटा के साथ काफी भिन्न होते हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड क्षेत्र में सबसे उन्नत देश हैं. पाठ्यक्रम कि दुनिया भर में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, जूनियर कॉलेजों, और व्यापार स्कूलों में लिया जा सकता है अलग अलग वर्गों रहे हैं। यहां तक कि अधिक से अधिक लचीलेपन के लिए, कई स्कूलों में भी ऑनलाइन कक्षाओं की पेशकश। छात्र अलग अलग वर्गों लेने के लिए या डिग्री कार्यक्रमों का पीछा कर सकते।
|
गुजरात में H1N1 और H3N2 मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है। अब तक इस इन्फ्लुएंजा के 140 मामले भी सामने आ चुके हैं। अब भी ये मामले देखने को मिल रहे हैं जब ये मामले मार्च महीने में सामने आए थे.
एक ओर जहां कोरोना के मामलों में वृद्धि और कमी हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार के इन्फ्लुएंजा के मामलों ने भी मुझे किनारे कर दिया है। 10 मार्च तक, गुजरात में एच1एन1 के 77 और एच3एन2 के 3 मामले थे, इसके बाद भी मामलों में वृद्धि जारी रही।
गुजरात में अब तक एच1एन1 के 98 और एच3एन2 के 42 मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात में H1N1 और H3N2 की स्थिति अभी तक बहुत चिंताजनक साबित नहीं हुई है, लेकिन इससे पहले भावनगर और वडोदरा में एक-एक मौत की सूचना मिली थी, हालांकि, वडोदरा में मौत एक संदिग्ध मामला था। विशेष रूप से, 25 मार्च तक इन्फ्लूएंजा के कुल 140 मामले सामने आए थे। हालांकि आने वाले समय में इन मामलों में भी इजाफा हो सकता है।
खासकर राज्य सरकार अब कोरोना को लेकर चिंतित है. शहर और ग्रामीण स्तर पर सरकारी सिविल अस्पतालों और निजी अस्पतालों में दो दिवसीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया है। जिसमें मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त होने पर आपात स्थिति में ये सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इतना ही नहीं, कोरोना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रदेश में प्रतिदिन 20 से 22 हजार कोरोना टेस्टिंग हो रही है. उस वक्त इंफ्लुएंजा और कोरोना दोनों ही मामले सामने आ रहे हैं।
|
गुजरात में HएकNएक और HतीनNदो मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है। अब तक इस इन्फ्लुएंजा के एक सौ चालीस मामले भी सामने आ चुके हैं। अब भी ये मामले देखने को मिल रहे हैं जब ये मामले मार्च महीने में सामने आए थे. एक ओर जहां कोरोना के मामलों में वृद्धि और कमी हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार के इन्फ्लुएंजा के मामलों ने भी मुझे किनारे कर दिया है। दस मार्च तक, गुजरात में एचएकएनएक के सतहत्तर और एचतीनएनदो के तीन मामले थे, इसके बाद भी मामलों में वृद्धि जारी रही। गुजरात में अब तक एचएकएनएक के अट्ठानवे और एचतीनएनदो के बयालीस मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात में HएकNएक और HतीनNदो की स्थिति अभी तक बहुत चिंताजनक साबित नहीं हुई है, लेकिन इससे पहले भावनगर और वडोदरा में एक-एक मौत की सूचना मिली थी, हालांकि, वडोदरा में मौत एक संदिग्ध मामला था। विशेष रूप से, पच्चीस मार्च तक इन्फ्लूएंजा के कुल एक सौ चालीस मामले सामने आए थे। हालांकि आने वाले समय में इन मामलों में भी इजाफा हो सकता है। खासकर राज्य सरकार अब कोरोना को लेकर चिंतित है. शहर और ग्रामीण स्तर पर सरकारी सिविल अस्पतालों और निजी अस्पतालों में दो दिवसीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया है। जिसमें मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त होने पर आपात स्थिति में ये सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इतना ही नहीं, कोरोना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रदेश में प्रतिदिन बीस से बाईस हजार कोरोना टेस्टिंग हो रही है. उस वक्त इंफ्लुएंजा और कोरोना दोनों ही मामले सामने आ रहे हैं।
|
क़ससुल अंबिया हज़रत शुऐब ने बड़ी दिलसोजी और मुहब्बत के साथ फ़रमायाः 'ऐ क़ौम ! मुझे यह डर लग रहा है कि तेरी ये बेबाकियां और अल्लाह के मुक़ाबले में नाफ़रमानियां कहीं तेरा भी वह अंजाम न कर दें, जो तुझसे पहले क़ौमे नूह, क़ौमे हूद, क़ौम सालेह और क़ौमे लूत का हुआ। अब भी कुछ नहीं गया, अल्लाह के सामने झुक जा और अपनी बद-किरदारियों के लिए बरिख़्शश का तलबगार बन और हमेशा के लिए उनसे तौबा कर ले। बेशक मेरा परवरदिगार रहम करने वाला और बहुत ही मेहरबान है। वह तेरी तमाम ख़ताएं बख़्श देगा ।
क़ौम के सरदारों ने यह सुनकर जवाब दिया, शुऐब हमारी समझ में कुछ नहीं आता कि तू क्या कहता है? तू हम सबसे कमज़ोर और ग़रीब है। अगर तेरी बातें सच्ची होतीं, तो तेरी जिंदगी हम सबसे अच्छी होती और हमको सिर्फ तेरे ख़ानदान का डर है, वरना तुझको संगसार करके छोड़ते, तू हरगिज़ हम पर ग़ालिब नहीं आ सकता।
हज़रत शुऐब ने फ़रमायाः 'अफ़सोस है तुम पर क्या तुम्हारे लिए अल्लाह के मुक़ाबले में मेरा ख़ानदान ज़्यादा डर की वजह बन रहा है, हालांकि मेरा रब तुम्हारे तमाम कामों का एहाता किए हुए है और वह दाना व बीना है।'
'ख़ैर, अगर तुम नहीं मानते तो तुम जानो, तो वह सब कुछ करते रहो जो कर रहे हो, बहुत जल्द अल्लाह का फ़ैसला बता देगा कि अज़ाब का हक़दार कौन है और कौन झूठा और काज़िव है, तुम मी इन्तिज़ार करो और में भी इन्तिज़ार करता हूं?"
आख़िर वही हुआ जो अल्लाह के क़ानून का अवदी व सरमदी फ़ैसला है, यानी हुज्जत व बुरहान की रोशनी आने के बाद भी जब बातिल पर इसरार हो और उसकी सच्चाई का मज़ाक़ उड़ाया जाए और उसकी इशाअंत में रुकावटें डाली जाएं, तो फिर अल्लाह का अज़ाब इस मुरिमाना जिंदगी का ख़ात्मा कर देता है और आने वाली क़ौमों के लिए उसको इबरत व मौइज़त वना दिया करत है।
|
क़ससुल अंबिया हज़रत शुऐब ने बड़ी दिलसोजी और मुहब्बत के साथ फ़रमायाः 'ऐ क़ौम ! मुझे यह डर लग रहा है कि तेरी ये बेबाकियां और अल्लाह के मुक़ाबले में नाफ़रमानियां कहीं तेरा भी वह अंजाम न कर दें, जो तुझसे पहले क़ौमे नूह, क़ौमे हूद, क़ौम सालेह और क़ौमे लूत का हुआ। अब भी कुछ नहीं गया, अल्लाह के सामने झुक जा और अपनी बद-किरदारियों के लिए बरिख़्शश का तलबगार बन और हमेशा के लिए उनसे तौबा कर ले। बेशक मेरा परवरदिगार रहम करने वाला और बहुत ही मेहरबान है। वह तेरी तमाम ख़ताएं बख़्श देगा । क़ौम के सरदारों ने यह सुनकर जवाब दिया, शुऐब हमारी समझ में कुछ नहीं आता कि तू क्या कहता है? तू हम सबसे कमज़ोर और ग़रीब है। अगर तेरी बातें सच्ची होतीं, तो तेरी जिंदगी हम सबसे अच्छी होती और हमको सिर्फ तेरे ख़ानदान का डर है, वरना तुझको संगसार करके छोड़ते, तू हरगिज़ हम पर ग़ालिब नहीं आ सकता। हज़रत शुऐब ने फ़रमायाः 'अफ़सोस है तुम पर क्या तुम्हारे लिए अल्लाह के मुक़ाबले में मेरा ख़ानदान ज़्यादा डर की वजह बन रहा है, हालांकि मेरा रब तुम्हारे तमाम कामों का एहाता किए हुए है और वह दाना व बीना है।' 'ख़ैर, अगर तुम नहीं मानते तो तुम जानो, तो वह सब कुछ करते रहो जो कर रहे हो, बहुत जल्द अल्लाह का फ़ैसला बता देगा कि अज़ाब का हक़दार कौन है और कौन झूठा और काज़िव है, तुम मी इन्तिज़ार करो और में भी इन्तिज़ार करता हूं?" आख़िर वही हुआ जो अल्लाह के क़ानून का अवदी व सरमदी फ़ैसला है, यानी हुज्जत व बुरहान की रोशनी आने के बाद भी जब बातिल पर इसरार हो और उसकी सच्चाई का मज़ाक़ उड़ाया जाए और उसकी इशाअंत में रुकावटें डाली जाएं, तो फिर अल्लाह का अज़ाब इस मुरिमाना जिंदगी का ख़ात्मा कर देता है और आने वाली क़ौमों के लिए उसको इबरत व मौइज़त वना दिया करत है।
|
विनीत सक्सेना पॉजीटिव मीडिया ग्रुप के नए सीईओ होंगे. वे ग्रुप के चैनल एनईटीवी, फोकस टीवी, हमार टीवी, एनई बांग्ला, एचवाई, एनई हाईफाई की जिम्मेदारी संभालेंगे. विनीत सक्सेना पॉजीटिव ग्रुप से जुड़ने वाले दूसरे सीईओ होंगे. पहले सीईओ राजीव अरोड़ा था, जिन्होंने लगभग एक साल पहले ग्रुप के अंदर चल रहे विवाद से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया था. वे तीन महीने भी इस ग्रुप के साथ नहीं रह पाए थे.
फोकस टीवी से कृष्ण कुमार सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर करेस्पांडेंट थे. उन्होंने अपनी नई पारी सीएनईबी से शुरू की है. उन्हें यहां भी करेस्पांडेंट बनाया गया है. कृष्ण की सीएनईबी के साथ यह दूसरी पारी है. इन्होंने करियर की शुरुआत 2002 में दिल्ली में ईटीवी के साथ की थी. इसके बाद ये सहारा, सीएनईबी, दैनिक जागरण होते हुए वॉयस ऑफ इंडिया पहुंचे थे. वॉयस आफ इंडिया छोड़ने के बाद फोकस टीवी ज्वाइन कर लिया था.
फोकस टीवी से दूसरी खबर है कि निरंजन नांदल को हरियाणा पंजाब का स्टेट हेड बनाया गया है. उनको हरियाणा और पंजाब की सम्पूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. नांदल इससे पहले ए2जेड न्यूज़ के हरियाणा प्रमुख थे. उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ फोकस टीवी ज्वाइन किया है. सूत्रों का कहना है कि निरंजन नांदल को रेवेन्यू बेस पर रखा गया है. वे पंजाब और हरियाणा के इलाकों से कंटेंट के साथ बिजनेस डेवलपमेंट का काम करेंगे और चैनल को एकमुश्त रकम हर महीने देते रहेंगे. बदले में उन्हें हरियाणा व पंजाब में अपनी टीम किसी भी शर्त पर बनाने की छूट होगी.
फोकस टीवी से अंजू ग्रोवर ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पोस्ट पर थीं. उनके पास प्रोग्रामिंग की जिम्मेदारी थी. उनके जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू कर रही हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.
: अनिल जैन ने नई दुनिया, दिल्ली ज्वाइन किया : न्यूज 24 के स्पेशल स्पोर्टस करस्पांडेंट पुष्पेन्द्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही उन्होंने मीडिया को नमस्कार कर दिया है. पुष्पेन्द्र अब किसी मीडिया से नहीं जुड़ रहे हैं. उन्होंने खुद का बिजनेस करने का फैसला किया है. पुष्पेन्द्र ग्यारह वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आगरा के एक लोकल न्यूज पेपर के साथ की थी. इसके बाद वे सिटी केबल, मून टीवी, जी न्यूज, ईटीवी के साथ लम्बी पारियां खेलते हुए न्यूज 24 पहुंचे थे.
पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के महिला बेस्ड न्यूज चैनल फोकस टीवी की आउटपुट हेड गार्गी बारदोलोई को प्रमोशन दे दिया गया है. अब उन्हें पॉजिटिव मीडिया ग्रुप का वाइस प्रेसिडेंट कंटेंट एंड ग्लोबल न्यूज बना दिया गया है. अब उन पर पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के सभी छह चैनल और रेडियो के कंटेंट वाइज बेहतर प्रजेंटेशन की जिम्मेदारी होगी. अभी गार्गी इस ग्रुप के फोकस टीवी को लीड कर रही थी. गार्गी को इस ग्रुप के नए प्रोजेक्टों को भी लांच कराने की जिम्मेदारी दी गई है. जिनमें चार नए चैनल और फिल्म एंड मीडिया इंस्टीट्यूट भी शामिल हैं.
: दोनों चैनलों में नए चैनल हेड और नए इनपुट व आउटपुट हेड नियुक्त किए जाएंगे : खबर है कि पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के नोएडा स्थित दोनों कार्यालयों हमार और फोकस टीवी में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि फोकस और हमार चैनल के इनपुट औऱ आउटपुट हेड सहित सभी स्तरों पर नए लोगों की भर्ती की जा रही है. इसकी वजह से चैनल में वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनो स्तर के लोग दहशत में हैं. कई लोगों के प्रोफाइल में बदलाव हो सकता है तो कई लोगों की छुट्टी भी की जा सकती है.
हमार टीवी से सूचना है कि चैनल हेड उदय चंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. करीब डेढ़ वर्षों से उदय हमार टीवी में थे. कुमार संजॉय सिंह के नेतृत्व में हमार टीवी की लांचिंग के कुछ महीनों बाद उदय चंद्र को तब चैनल हेड बनाया गया जब कुमार संजॉय ने ग्रुप मैनेजिंग एडिटर पद से इस्तीफा दे दिया था. कई तरह की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उदय चंद्र सिंह चैनल का संचालन करते रहे.
Focus TV, Asia's first news and current affairs channel for women has been conferred with the Great Women Award 2009 at a glittering ceremony in the capital. The award function was held by Aadhi Aabdi, a women based programme on DD News. The award was given to the channel for its outstanding performance as first women channel.
|
विनीत सक्सेना पॉजीटिव मीडिया ग्रुप के नए सीईओ होंगे. वे ग्रुप के चैनल एनईटीवी, फोकस टीवी, हमार टीवी, एनई बांग्ला, एचवाई, एनई हाईफाई की जिम्मेदारी संभालेंगे. विनीत सक्सेना पॉजीटिव ग्रुप से जुड़ने वाले दूसरे सीईओ होंगे. पहले सीईओ राजीव अरोड़ा था, जिन्होंने लगभग एक साल पहले ग्रुप के अंदर चल रहे विवाद से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया था. वे तीन महीने भी इस ग्रुप के साथ नहीं रह पाए थे. फोकस टीवी से कृष्ण कुमार सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर करेस्पांडेंट थे. उन्होंने अपनी नई पारी सीएनईबी से शुरू की है. उन्हें यहां भी करेस्पांडेंट बनाया गया है. कृष्ण की सीएनईबी के साथ यह दूसरी पारी है. इन्होंने करियर की शुरुआत दो हज़ार दो में दिल्ली में ईटीवी के साथ की थी. इसके बाद ये सहारा, सीएनईबी, दैनिक जागरण होते हुए वॉयस ऑफ इंडिया पहुंचे थे. वॉयस आफ इंडिया छोड़ने के बाद फोकस टीवी ज्वाइन कर लिया था. फोकस टीवी से दूसरी खबर है कि निरंजन नांदल को हरियाणा पंजाब का स्टेट हेड बनाया गया है. उनको हरियाणा और पंजाब की सम्पूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. नांदल इससे पहले एदोजेड न्यूज़ के हरियाणा प्रमुख थे. उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ फोकस टीवी ज्वाइन किया है. सूत्रों का कहना है कि निरंजन नांदल को रेवेन्यू बेस पर रखा गया है. वे पंजाब और हरियाणा के इलाकों से कंटेंट के साथ बिजनेस डेवलपमेंट का काम करेंगे और चैनल को एकमुश्त रकम हर महीने देते रहेंगे. बदले में उन्हें हरियाणा व पंजाब में अपनी टीम किसी भी शर्त पर बनाने की छूट होगी. फोकस टीवी से अंजू ग्रोवर ने इस्तीफा दे दिया है. वे यहां पर सीनियर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पोस्ट पर थीं. उनके पास प्रोग्रामिंग की जिम्मेदारी थी. उनके जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. वे अपनी नई पारी कहां से शुरू कर रही हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. : अनिल जैन ने नई दुनिया, दिल्ली ज्वाइन किया : न्यूज चौबीस के स्पेशल स्पोर्टस करस्पांडेंट पुष्पेन्द्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही उन्होंने मीडिया को नमस्कार कर दिया है. पुष्पेन्द्र अब किसी मीडिया से नहीं जुड़ रहे हैं. उन्होंने खुद का बिजनेस करने का फैसला किया है. पुष्पेन्द्र ग्यारह वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आगरा के एक लोकल न्यूज पेपर के साथ की थी. इसके बाद वे सिटी केबल, मून टीवी, जी न्यूज, ईटीवी के साथ लम्बी पारियां खेलते हुए न्यूज चौबीस पहुंचे थे. पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के महिला बेस्ड न्यूज चैनल फोकस टीवी की आउटपुट हेड गार्गी बारदोलोई को प्रमोशन दे दिया गया है. अब उन्हें पॉजिटिव मीडिया ग्रुप का वाइस प्रेसिडेंट कंटेंट एंड ग्लोबल न्यूज बना दिया गया है. अब उन पर पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के सभी छह चैनल और रेडियो के कंटेंट वाइज बेहतर प्रजेंटेशन की जिम्मेदारी होगी. अभी गार्गी इस ग्रुप के फोकस टीवी को लीड कर रही थी. गार्गी को इस ग्रुप के नए प्रोजेक्टों को भी लांच कराने की जिम्मेदारी दी गई है. जिनमें चार नए चैनल और फिल्म एंड मीडिया इंस्टीट्यूट भी शामिल हैं. : दोनों चैनलों में नए चैनल हेड और नए इनपुट व आउटपुट हेड नियुक्त किए जाएंगे : खबर है कि पॉजिटिव मीडिया ग्रुप के नोएडा स्थित दोनों कार्यालयों हमार और फोकस टीवी में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि फोकस और हमार चैनल के इनपुट औऱ आउटपुट हेड सहित सभी स्तरों पर नए लोगों की भर्ती की जा रही है. इसकी वजह से चैनल में वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनो स्तर के लोग दहशत में हैं. कई लोगों के प्रोफाइल में बदलाव हो सकता है तो कई लोगों की छुट्टी भी की जा सकती है. हमार टीवी से सूचना है कि चैनल हेड उदय चंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. करीब डेढ़ वर्षों से उदय हमार टीवी में थे. कुमार संजॉय सिंह के नेतृत्व में हमार टीवी की लांचिंग के कुछ महीनों बाद उदय चंद्र को तब चैनल हेड बनाया गया जब कुमार संजॉय ने ग्रुप मैनेजिंग एडिटर पद से इस्तीफा दे दिया था. कई तरह की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उदय चंद्र सिंह चैनल का संचालन करते रहे. Focus TV, Asia's first news and current affairs channel for women has been conferred with the Great Women Award दो हज़ार नौ at a glittering ceremony in the capital. The award function was held by Aadhi Aabdi, a women based programme on DD News. The award was given to the channel for its outstanding performance as first women channel.
|
Meerut : दो साल पहले सोतीगंज में बिलाल की हत्या से सलमान व शारिक के बीच शुरू हुई गैंगवार समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। हिसाब बराबरी के लिए ऐलानिया मर्डर किए जा रहे हैं। पुलिस भी गैंगवार को समाप्त नहीं कर पा रही है। शारिक के रिश्तेदार व उसके नौकर का भी हिसाब बराबरी के लिए ऐलानिया मर्डर किया गया। चूंकि शारिक गैंग ने भी सलमान गैंग के रिश्तेदार का डबल मर्डर किया था। दो साल में आठ मर्डर हो चुके है।
गैंग में शामिल हुए शार्प शूटर गैंगवार को आगे बढ़ाने के लिए धड़ाधड़ ऐलानिया कत्ल कर रहे है। पुलिस जानते हुए भी आंख मूंदे बैठे हुई है। पुलिस के सामने ही इस गैंग ने दो साल में आठ से ज्यादा लोगों पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी है। लोगों में गैंग की दहशत के लिए पहले आसपास भी गोलियां चलाई जाती है। जिससे लोगों में दहशत रहे। ओर लोग उसके खिलाफ गवाही न दे सके।
दो साल पहले शारिक पक्ष के बिलाल को सलमान ने गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में सलमान अभी डासना जेल में बंद है।
डेढ़ साल पहले शारिक गैंग ने सलमान पक्ष के शमसाद उर्फ सोनाली किन्नर की हत्या की थी। जिसमें शारिक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें शारिक अभी भी जेल में बंद है।
16 मई 2017 को शारिक पक्ष के हाजी फाको किन्नर को सलमान पक्ष ने मौत के घाट उतार दिया था। जिसमें पांच लाख रुपये की सुपारी शूटरों को दी गई थी। इसमें पुलिस ने आठ शूटरों को दबोच लिया था। सभी इस मामले में जेल में बंद है।
9 जुलाई 2017 को सलमान के रिश्तेदार पार्षद आरिफ व आबिद का शारिक गैंग ने खुलेआम मर्डर कर दिया था, जिसमें आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिसमें शारिक के चार भाई समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। कई लोग इसमें जेल गए थे।
16 अक्टूबर 2017 को सलमान पक्ष के फल मंडी अध्यक्ष रहीसुद्दीन कुरैशी का शारिक गैंग ने गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। जिसमें शारिक गैंग के सूटर नदीम का नाम सामने आ रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जिसमें दो आरोपी जेल में बंद है।
2 नवंबर 2017 की शाम को शारिक पक्ष के सलीम व उसके नौकर समी उर्फ समीम की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी, जिसमें सलमान के पिता व उसके भाईयों समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा नौचंदी थाने में दर्ज कराया गया।
सलमान व शारिक गैंग के शूटरों की तलाश की जा रही है। गैंगवार खत्म करने के लिए क्राइम टीम को लगाया गया है।
|
Meerut : दो साल पहले सोतीगंज में बिलाल की हत्या से सलमान व शारिक के बीच शुरू हुई गैंगवार समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। हिसाब बराबरी के लिए ऐलानिया मर्डर किए जा रहे हैं। पुलिस भी गैंगवार को समाप्त नहीं कर पा रही है। शारिक के रिश्तेदार व उसके नौकर का भी हिसाब बराबरी के लिए ऐलानिया मर्डर किया गया। चूंकि शारिक गैंग ने भी सलमान गैंग के रिश्तेदार का डबल मर्डर किया था। दो साल में आठ मर्डर हो चुके है। गैंग में शामिल हुए शार्प शूटर गैंगवार को आगे बढ़ाने के लिए धड़ाधड़ ऐलानिया कत्ल कर रहे है। पुलिस जानते हुए भी आंख मूंदे बैठे हुई है। पुलिस के सामने ही इस गैंग ने दो साल में आठ से ज्यादा लोगों पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी है। लोगों में गैंग की दहशत के लिए पहले आसपास भी गोलियां चलाई जाती है। जिससे लोगों में दहशत रहे। ओर लोग उसके खिलाफ गवाही न दे सके। दो साल पहले शारिक पक्ष के बिलाल को सलमान ने गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में सलमान अभी डासना जेल में बंद है। डेढ़ साल पहले शारिक गैंग ने सलमान पक्ष के शमसाद उर्फ सोनाली किन्नर की हत्या की थी। जिसमें शारिक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें शारिक अभी भी जेल में बंद है। सोलह मई दो हज़ार सत्रह को शारिक पक्ष के हाजी फाको किन्नर को सलमान पक्ष ने मौत के घाट उतार दिया था। जिसमें पांच लाख रुपये की सुपारी शूटरों को दी गई थी। इसमें पुलिस ने आठ शूटरों को दबोच लिया था। सभी इस मामले में जेल में बंद है। नौ जुलाई दो हज़ार सत्रह को सलमान के रिश्तेदार पार्षद आरिफ व आबिद का शारिक गैंग ने खुलेआम मर्डर कर दिया था, जिसमें आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिसमें शारिक के चार भाई समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। कई लोग इसमें जेल गए थे। सोलह अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को सलमान पक्ष के फल मंडी अध्यक्ष रहीसुद्दीन कुरैशी का शारिक गैंग ने गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया। जिसमें शारिक गैंग के सूटर नदीम का नाम सामने आ रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जिसमें दो आरोपी जेल में बंद है। दो नवंबर दो हज़ार सत्रह की शाम को शारिक पक्ष के सलीम व उसके नौकर समी उर्फ समीम की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी, जिसमें सलमान के पिता व उसके भाईयों समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा नौचंदी थाने में दर्ज कराया गया। सलमान व शारिक गैंग के शूटरों की तलाश की जा रही है। गैंगवार खत्म करने के लिए क्राइम टीम को लगाया गया है।
|
चूरू-जयपुर हाइवे पर रविवार देर शाम भांजी के जन्मदिन पर केक लेने जा रहे मामा की निजी बस की टक्कर से मौत हो गई। बाइक पर सवार दूसरा युवक गंभीर घायल हो गया। दोनों को 108 एम्बुलेंस की सहायता से राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया। ध्यावली सीकर निवासी श्रीचंद मेघवाल (21) रविवार को अपनी भांजी के जन्मदिन पर बहन के घर गया था। शाम के समय केक लेने के लिए अनिल कुमार (18) के साथ बाइक पर जा रहा था। रामगढ़ हाइवे पर सामने से आ रही निजी बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों बाइक सवार घायल हो गए। दोनों को राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल लाया गया। जहां श्रीचंद को मृत घोषित कर दिया। घायल अनिल कुमार की भी हालत गंभीर होने पर उपचार किया गया।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
चूरू-जयपुर हाइवे पर रविवार देर शाम भांजी के जन्मदिन पर केक लेने जा रहे मामा की निजी बस की टक्कर से मौत हो गई। बाइक पर सवार दूसरा युवक गंभीर घायल हो गया। दोनों को एक सौ आठ एम्बुलेंस की सहायता से राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया। ध्यावली सीकर निवासी श्रीचंद मेघवाल रविवार को अपनी भांजी के जन्मदिन पर बहन के घर गया था। शाम के समय केक लेने के लिए अनिल कुमार के साथ बाइक पर जा रहा था। रामगढ़ हाइवे पर सामने से आ रही निजी बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों बाइक सवार घायल हो गए। दोनों को राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल लाया गया। जहां श्रीचंद को मृत घोषित कर दिया। घायल अनिल कुमार की भी हालत गंभीर होने पर उपचार किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
जावेद अख्तर के लेखन की बात की जाए तो उनकी तारीफों के पुल बंधते जाएंगे, और निरंतर बंधते ही चले जायँगे. उनके लिखने की कला में उर्दू भाषा का प्रयोग और तलफ़्फ़ुज़ की बारीकियों को मापने वाले दीवानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. इसी के साथ-साथ जावेद अख्तर अपने उसूलों के भी बड़े पक्के हैं. इसीलिए उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म 'कुछ कुछ होता है' नहीं लिखी. जावेद ने शाहरुख के शो 'टेड टॉक्स- इंडिया नई सोच' के दौरान इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि उस वक्त उन्हें लगा था कि फिल्म का नाम 'डबल मीनिंग' वाला है.
करन जौहर के निर्देशन में बनी फिल्म 'कुछ कुछ होता है' के लिए काम न करने के बारे में जब जावेद अख्तर से पूछा गया तो उन्होंने, "मुझे लगा कि फिल्म का नाम 'डबल मीनिंग' है, इसलिए मैं इस फिल्म को लिखने के लिए तैयार नहीं हुआ. लेकिन मैं 'कल हो ना हो' में शाहरुख के अभिनय का कायल हो गया और खुश हूं कि मैं उस यात्रा का हिस्सा बन सका. मैंने एक अर्थपूर्ण गीत बनाने के लिए उन शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें मैंने पहले खुद सिरे से नकार दिया था. लेकिन दर्शकों को गीत बहुत पसंद आया और बहुत मशहूर भी हुआ. यह गाना था 'कुछ तो हुआ है, कुछ हो गया है'. "
साल 1998 में रिलीज 'कुछ कुछ होता है' ने 90 के दशक के अंतिम सालों में रिलीज हो रही मार-धाड़ वाली फिल्मों के बीच दोस्ती और प्यार का एक सन्देश लेकर उभरी थी. यह फिल्म एक ट्रेडमार्क बन गई थी. जावेद अख्तर के मना करने के बाद इसकी कहानी करन जौहर ने खुद ही लिखी थी.
शाहरुख खान टेड टॉक के जरिए देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग और नया काम करने वालों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की उम्मीद रखते हैं जिसे टेलीविजन चैनल स्टार प्लस पर ब्रॉडकास्ट किया जाता है.
तो इसलिए जावेद अख्तर ने नहीं लिखी 'कुछ कुछ होता है'
शबाना ने जावेद को कहा- "आप में अब्बा कैफी आजमी वाली बात नहीं"
|
जावेद अख्तर के लेखन की बात की जाए तो उनकी तारीफों के पुल बंधते जाएंगे, और निरंतर बंधते ही चले जायँगे. उनके लिखने की कला में उर्दू भाषा का प्रयोग और तलफ़्फ़ुज़ की बारीकियों को मापने वाले दीवानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. इसी के साथ-साथ जावेद अख्तर अपने उसूलों के भी बड़े पक्के हैं. इसीलिए उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म 'कुछ कुछ होता है' नहीं लिखी. जावेद ने शाहरुख के शो 'टेड टॉक्स- इंडिया नई सोच' के दौरान इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि उस वक्त उन्हें लगा था कि फिल्म का नाम 'डबल मीनिंग' वाला है. करन जौहर के निर्देशन में बनी फिल्म 'कुछ कुछ होता है' के लिए काम न करने के बारे में जब जावेद अख्तर से पूछा गया तो उन्होंने, "मुझे लगा कि फिल्म का नाम 'डबल मीनिंग' है, इसलिए मैं इस फिल्म को लिखने के लिए तैयार नहीं हुआ. लेकिन मैं 'कल हो ना हो' में शाहरुख के अभिनय का कायल हो गया और खुश हूं कि मैं उस यात्रा का हिस्सा बन सका. मैंने एक अर्थपूर्ण गीत बनाने के लिए उन शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें मैंने पहले खुद सिरे से नकार दिया था. लेकिन दर्शकों को गीत बहुत पसंद आया और बहुत मशहूर भी हुआ. यह गाना था 'कुछ तो हुआ है, कुछ हो गया है'. " साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में रिलीज 'कुछ कुछ होता है' ने नब्बे के दशक के अंतिम सालों में रिलीज हो रही मार-धाड़ वाली फिल्मों के बीच दोस्ती और प्यार का एक सन्देश लेकर उभरी थी. यह फिल्म एक ट्रेडमार्क बन गई थी. जावेद अख्तर के मना करने के बाद इसकी कहानी करन जौहर ने खुद ही लिखी थी. शाहरुख खान टेड टॉक के जरिए देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग और नया काम करने वालों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की उम्मीद रखते हैं जिसे टेलीविजन चैनल स्टार प्लस पर ब्रॉडकास्ट किया जाता है. तो इसलिए जावेद अख्तर ने नहीं लिखी 'कुछ कुछ होता है' शबाना ने जावेद को कहा- "आप में अब्बा कैफी आजमी वाली बात नहीं"
|
Nagaur Marriage: राजस्थान के नागौर में एक शादी को लेकर काफी चर्चा हो रही है जहां अपनी भांजी की शादी से पहले उसके तीन मामा ने 3 करोड़ 21 लाख रुपए का मायरा भरा. वहीं मायरे में कैश के अलावा गहने से लेकर अनाज तक भी दिया गया है.
नागौरः राजस्थान में इन दिनों शादियों की धूम है जहां मारवाड़ इलाके में होने वाली शादियां किसी ना किसी कारण से चर्चा में आ जाती है. ताजा मामला नागौर जिले का है जहां एक शादी को लेकर खासी चर्चा हो रही है. दरअसल शादी से पहले ननिहाल पक्ष की ओर से भरे जाने वाले मायरे के लिए प्रचलित नागौर में एक शादी में तीन मामा ने अपनी भांजी के लिए इतना मायरा भरा कि जिसने देखा वो हैरान रह गया. जानकारी के मुताबिक जिले के जायल क्षेत्र के झाड़ेली गांव में तीन किसान भाइयों ने अपनी भांजी की शादी में 3 करोड़ 21 लाख रुपए का मायरा भरा है. बताया जा रहा है कि मायरा भरने के लिए जब मामा घर पहुंचे तो थाली में सजा कैश देखकर वहां लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली. वहीं कैश के अलावा मायरे में गहने से लेकर अनाज तक दिया गया है. अब इस मायरे की चर्चा नागौर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया पर हो रही है.
बता दें कि घेवरी देवी और भंवरलाल पोटलिया की बेटी अनुष्का की नागौर में बीते बुधवार को शादी संपन्न हुई जहां बुरड़ी गांव में रहने वाले अनुष्का के नाना भंवरलाल गरवा के तीनों बेटे हरेंद्र, रामेश्वर और राजेंद्र ने अपनी भांजी के लिए करोड़ों रुपए का मायरा भरा. इधर पिता के इस सम्मान को देखकर घेवरी देवी की आंखों में आंसू आ गए.
बता दें कि मायरा भरने के लिए खुद अनुष्का के नाना सिर पर थाली रखकर घर पहुंचे थे जहां थाली में 81 लाख रुपए कैश सजे हुए थे जिसमें 500-500 रुपए के नोटों की गडि्डयां थी.
इसके अलावा मायरे में ननिहाल पक्ष की ओर से अनुष्का को साढ़े 16 बीघा खेती के लिए जमीन, एक 30 लाख रुपए का प्लॉट और 41 तोला सोने के अलावा 3 किलो चांदी के गहने दिए गए. वहीं अनुष्का के तीनों मामा इस दौरान अनाज की बोरियों से भरकर नई ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक स्कूटी भी साथ लेकर आए थे.
वहीं मायरे के दौरान ननिहाल पक्ष की ओर से जमीन के सारे डॉक्यूमेंट्स बेटी के परिवार को दिए गए और तीनों भाइयों ने बहन के ससुराल वालों के हर एक सदस्य को एक चांदी का सिक्के भी भेंट किया. इसके अलावा तीनों भाइयों ने बहन को 500-500 रुपए के नोटों से सजी एक चुनरी ओढाकर सम्मान भी दिया.
ये भी पढ़ें : 4 साल वसुंधरा राजे पर रही सरकार की मेहरबानी CM के सलाहकार ने पूछा बीजेपी से क्या याराना है ?
घेवरी देवी के पिता भंवरलाल गरवा का कहना है कि उनके पास करीब 350 बीघा खेती की जमीन है और घेवरी उनकी इकलौती बेटी है. बता दें कि इतिहासिक मान्यता है कि बहन-बेटी के ससुराल में दिल खोलकर मायरा भरना चाहिए. इसके अलावा मारवाड़ के नागौर में मायरा काफी फेमस है और यहां शादियों में मायरे को लेकर काफी चर्चा होती है.
|
Nagaur Marriage: राजस्थान के नागौर में एक शादी को लेकर काफी चर्चा हो रही है जहां अपनी भांजी की शादी से पहले उसके तीन मामा ने तीन करोड़ इक्कीस लाख रुपए का मायरा भरा. वहीं मायरे में कैश के अलावा गहने से लेकर अनाज तक भी दिया गया है. नागौरः राजस्थान में इन दिनों शादियों की धूम है जहां मारवाड़ इलाके में होने वाली शादियां किसी ना किसी कारण से चर्चा में आ जाती है. ताजा मामला नागौर जिले का है जहां एक शादी को लेकर खासी चर्चा हो रही है. दरअसल शादी से पहले ननिहाल पक्ष की ओर से भरे जाने वाले मायरे के लिए प्रचलित नागौर में एक शादी में तीन मामा ने अपनी भांजी के लिए इतना मायरा भरा कि जिसने देखा वो हैरान रह गया. जानकारी के मुताबिक जिले के जायल क्षेत्र के झाड़ेली गांव में तीन किसान भाइयों ने अपनी भांजी की शादी में तीन करोड़ इक्कीस लाख रुपए का मायरा भरा है. बताया जा रहा है कि मायरा भरने के लिए जब मामा घर पहुंचे तो थाली में सजा कैश देखकर वहां लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली. वहीं कैश के अलावा मायरे में गहने से लेकर अनाज तक दिया गया है. अब इस मायरे की चर्चा नागौर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया पर हो रही है. बता दें कि घेवरी देवी और भंवरलाल पोटलिया की बेटी अनुष्का की नागौर में बीते बुधवार को शादी संपन्न हुई जहां बुरड़ी गांव में रहने वाले अनुष्का के नाना भंवरलाल गरवा के तीनों बेटे हरेंद्र, रामेश्वर और राजेंद्र ने अपनी भांजी के लिए करोड़ों रुपए का मायरा भरा. इधर पिता के इस सम्मान को देखकर घेवरी देवी की आंखों में आंसू आ गए. बता दें कि मायरा भरने के लिए खुद अनुष्का के नाना सिर पर थाली रखकर घर पहुंचे थे जहां थाली में इक्यासी लाख रुपए कैश सजे हुए थे जिसमें पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए के नोटों की गडि्डयां थी. इसके अलावा मायरे में ननिहाल पक्ष की ओर से अनुष्का को साढ़े सोलह बीघा खेती के लिए जमीन, एक तीस लाख रुपए का प्लॉट और इकतालीस तोला सोने के अलावा तीन किलो चांदी के गहने दिए गए. वहीं अनुष्का के तीनों मामा इस दौरान अनाज की बोरियों से भरकर नई ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक स्कूटी भी साथ लेकर आए थे. वहीं मायरे के दौरान ननिहाल पक्ष की ओर से जमीन के सारे डॉक्यूमेंट्स बेटी के परिवार को दिए गए और तीनों भाइयों ने बहन के ससुराल वालों के हर एक सदस्य को एक चांदी का सिक्के भी भेंट किया. इसके अलावा तीनों भाइयों ने बहन को पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए के नोटों से सजी एक चुनरी ओढाकर सम्मान भी दिया. ये भी पढ़ें : चार साल वसुंधरा राजे पर रही सरकार की मेहरबानी CM के सलाहकार ने पूछा बीजेपी से क्या याराना है ? घेवरी देवी के पिता भंवरलाल गरवा का कहना है कि उनके पास करीब तीन सौ पचास बीघा खेती की जमीन है और घेवरी उनकी इकलौती बेटी है. बता दें कि इतिहासिक मान्यता है कि बहन-बेटी के ससुराल में दिल खोलकर मायरा भरना चाहिए. इसके अलावा मारवाड़ के नागौर में मायरा काफी फेमस है और यहां शादियों में मायरे को लेकर काफी चर्चा होती है.
|
गयाओं के दो भेद किये जा सकते हैं। महिला समाज में प्रचलित और पुरप समाज में घसने वाली महिला समाज में प्रचलित कहानियों के भी वो भए किये जा सकते हैं - सुनने वाली एक बधाएं और सुनाने वाली लोग कमाएं ! इनम प्रथम व्रत कथाएं आती हैं और दूसरे में बच्चा की कहानियां होती हैं। पुरुष समाज की कहानिया में मनोरंजन, उपवेध, घटना वर्णन और वाक-चातुर्य आदि कई अभिप्रायों को लेकर लोक बहानिय भलती है। अत राजस्थानी लोक स्याओं का निम्न ढंग से विश्लेषण कर सकते हैं। यहां मनोरंजन, उपदेश, इस वणन महात्म्य और महायतों आदि प्रधानताओं माली कथाएं चलती है। उपदेश की दृष्टि से भी मनारंजन, उपदेश, धार्मिक सस्पों की म्यास्पा और महात्म्य की कहानियों मुख्प है। श्री अगरचंद माहटा कपाओं के प्रचार और तस्सबंधी साहित्य निर्माण के सोन प्रयोजन वसासे है- १ मनोरजन २ बुद्धि वृद्धि और शिक्षा तथा ३ धार्मिक प्रेरणा । पति कृष्णानंद गुप्त ने मादिम मानव की धार्मिक और भीति भावना में विश्वास, आस्था, प्रकृति की बहुमता देखकर सोक कहानी के धार्मिक और मनोरंजन दो रूप और निम्नलिखित तीन भेद किये है ।
क धार्मिक तत्वा से युक्त कहानियाँ जिनमें व्रत या महात्म्य कमा यायेगी। मनोरजनात्मक तस्यों से मुक्त और ग उपदेशात्मक सत्य मूलक । डा० शंकरलाल यादव ने अपने शोष प्रथ (हरिमाना प्रदेश का फोक साहित्य) में लोक कहानियों को बारह वर्गों में बांटा है। राजस्थानी शोध संस्थान (जोधपुर) वालों ने परपरा के मात सर्वमी विक्षेपांक के लिए अपने हग से उनका वर्गीकरण करके थी अगरभव माहटा के पास भेजा था ऐतिहासिक परंपराय, सामा जिक मालौकिक परियों और देवी देवताओं संबंभी, पौराणिक, प्रकृति संबंधी, पशु पक्षी और वनस्पति प्रेम कथाएं उपदेशात्मक कहावती कचाएं, पारिवारिक बयाए घटना प्रधान तिलस्मी जासूसी, बच्चों की क्याए उत्सय और मोहार, व्रत कथाए, पशु चारण कथाएं रोग निवारण के लिए बात, संस्कार कमाएं, हास्यात्मक लेस सबंधी नीति विषयक जातियों पर आधारित माई, बाट, बमार की कथाएं हाजिर जवाबी मनोबज्ञानिक, प्रतीकात्मक कुरीति निवारण भूत प्रेस की कहानिर्या, कलाकारों की कहानियां साम्राज्यवाद विरोधी कमाएं, बनजारों की कपाए और भौगोलिक । मरुवाणी के वात अंक में संपावक ने राज स्थानी परंपरित कहानियों में आने वाले कई वर्णन लिखे हैं। ऋऋतु वर्णन, नामिका वर्णन, भोज वर्णन शिकार वणन आदि कई वर्णनों को परंपरा यसलाई है। संयुक्त राजस्थान में श्री रावत सारस्वत ने अपना राजस्थानी का यात साहिएम नामक से छपवाया था उसमें कई प्रकार से पर्गीकरण किया है और प्रत्येक
१३४राजस्थानी लोक साहित्य
वर्म के आगे उसकी कथाओं की मामावलि भी दी है। हम अपनी राजस्थानी सोक कथा वार्ताओं का विषय गट वर्गीकरण मोटे तौर पर कर सकते है १ बोर मावात्मक बातें २ नीति सबंधी बातें ३ धर्म, व्रत तथा त्यौहार विषयक वातें ४ देव विषयक बातें ५ पौराधिक वार्ते ६ एतिहासिक बातें ७ प्रम सर्वधी बार्से ८ स्त्री चातुर्य की बातें ९ कहावतों की कहानियां १० अपच बद्ध या सघुछम्य बातें [आ] हास्म सबंधी बातें ११ चोर घाईतियों की यात १२ प्रश्नो तर [ दुसौषम वातें] वार्से
रामस्थानी का यात साहित्य यहा भरा पूरा है। उसके वैज्ञानिक वर्गीकरण की मत्यन्त आवश्यकता है। समस्त राजस्थानी लोक साहित्य के मेरे इस अध्ययन में बात वैविष्य साहित्य का रहित वर्गीकरण कर देना संभव नहीं होगा । फिर भी प्रत्येक राजस्थानी यात को प्रमुखता देकर विभाजन किया गया है। इस विषय में सुविभजन सन्तोष करेंगे ।
१ बीर भावात्मक घास - पहले हम वीर भावात्मक लोक कहानियों के लक्षण सिस हैं। ये कहानियां इस प्रवेश की प्राण हैं। इन के कारण ही सो राजस्थान को वीर समंद महा जाता है । अंग्रेजी में वीरभावात्मक वातों को एडवेन्चर टेल्स कहा जाता है। ऐसी बातों में जान जोखिम के साथ बुद्धि चातुर्म का प्रदर्शन होता हैं। इनमें सिंह बघेरे, बाड़ाळा सूर, शत्रु-दाने, राक्षस और डायन-योगनियों जस भयकर पात्र होते हैं। इन कहानियों का उद्देश्य श्रोताओं के साहस शौर्य का संचार करके उन्हें कर्तरूप पथ की ओर से जाने का होता है। ऐसी पौठपेम कहा नियाँ या अधिक मात्रा में पाई जाती हैं। यहां हल्के वजे की छिछली कहानियां बहुत कम हैं। इन में सो बीवट युवर्गों के ओजस्वी वर्णन ही मिलते हैं। जला मुख मासोदामी जैसे वीर पैतालों की बातें [प्रकाशमान लोक कमाएं] राज स्थानी लोक साहित्य की मणियां हैं। सिवें विस, राजा भोज, सापगे घोर, दीपासवे, कूगरा थलोष सोनगरा मालवे, गोरा बादल, ममरसिंह राठौड पार्टी राठौड़ जगदेश पुंवार, वीरमदे सुलखान, ऊको, गूगो, गरड़पस उभो पिरथी राम, विणकारी भोम सिंघ, घूँडी, सादूळी, वसूजी पंपावत, मनासिष, ल्हासर सजना कमा भटियांणी, सांबत सोम वी बोभावत, अगमा मालावत आदि की बातें वीर भावात्मक हैं। ऐसी कहानियों के दोहे
मीरा रा माझा ई मुख बन्द मारी मार । मामाबत अजमाल हरी बहन समी तलवार पत्र पत्र नेजा पाड़िया, पग पग पाड़ी डाल । बीबी के काम में पोज किता जगमाम ।।
राजस्थानी साहित्य१३५
|
गयाओं के दो भेद किये जा सकते हैं। महिला समाज में प्रचलित और पुरप समाज में घसने वाली महिला समाज में प्रचलित कहानियों के भी वो भए किये जा सकते हैं - सुनने वाली एक बधाएं और सुनाने वाली लोग कमाएं ! इनम प्रथम व्रत कथाएं आती हैं और दूसरे में बच्चा की कहानियां होती हैं। पुरुष समाज की कहानिया में मनोरंजन, उपवेध, घटना वर्णन और वाक-चातुर्य आदि कई अभिप्रायों को लेकर लोक बहानिय भलती है। अत राजस्थानी लोक स्याओं का निम्न ढंग से विश्लेषण कर सकते हैं। यहां मनोरंजन, उपदेश, इस वणन महात्म्य और महायतों आदि प्रधानताओं माली कथाएं चलती है। उपदेश की दृष्टि से भी मनारंजन, उपदेश, धार्मिक सस्पों की म्यास्पा और महात्म्य की कहानियों मुख्प है। श्री अगरचंद माहटा कपाओं के प्रचार और तस्सबंधी साहित्य निर्माण के सोन प्रयोजन वसासे है- एक मनोरजन दो बुद्धि वृद्धि और शिक्षा तथा तीन धार्मिक प्रेरणा । पति कृष्णानंद गुप्त ने मादिम मानव की धार्मिक और भीति भावना में विश्वास, आस्था, प्रकृति की बहुमता देखकर सोक कहानी के धार्मिक और मनोरंजन दो रूप और निम्नलिखित तीन भेद किये है । क धार्मिक तत्वा से युक्त कहानियाँ जिनमें व्रत या महात्म्य कमा यायेगी। मनोरजनात्मक तस्यों से मुक्त और ग उपदेशात्मक सत्य मूलक । डाशून्य शंकरलाल यादव ने अपने शोष प्रथ में लोक कहानियों को बारह वर्गों में बांटा है। राजस्थानी शोध संस्थान वालों ने परपरा के मात सर्वमी विक्षेपांक के लिए अपने हग से उनका वर्गीकरण करके थी अगरभव माहटा के पास भेजा था ऐतिहासिक परंपराय, सामा जिक मालौकिक परियों और देवी देवताओं संबंभी, पौराणिक, प्रकृति संबंधी, पशु पक्षी और वनस्पति प्रेम कथाएं उपदेशात्मक कहावती कचाएं, पारिवारिक बयाए घटना प्रधान तिलस्मी जासूसी, बच्चों की क्याए उत्सय और मोहार, व्रत कथाए, पशु चारण कथाएं रोग निवारण के लिए बात, संस्कार कमाएं, हास्यात्मक लेस सबंधी नीति विषयक जातियों पर आधारित माई, बाट, बमार की कथाएं हाजिर जवाबी मनोबज्ञानिक, प्रतीकात्मक कुरीति निवारण भूत प्रेस की कहानिर्या, कलाकारों की कहानियां साम्राज्यवाद विरोधी कमाएं, बनजारों की कपाए और भौगोलिक । मरुवाणी के वात अंक में संपावक ने राज स्थानी परंपरित कहानियों में आने वाले कई वर्णन लिखे हैं। ऋऋतु वर्णन, नामिका वर्णन, भोज वर्णन शिकार वणन आदि कई वर्णनों को परंपरा यसलाई है। संयुक्त राजस्थान में श्री रावत सारस्वत ने अपना राजस्थानी का यात साहिएम नामक से छपवाया था उसमें कई प्रकार से पर्गीकरण किया है और प्रत्येक एक सौ चौंतीसराजस्थानी लोक साहित्य वर्म के आगे उसकी कथाओं की मामावलि भी दी है। हम अपनी राजस्थानी सोक कथा वार्ताओं का विषय गट वर्गीकरण मोटे तौर पर कर सकते है एक बोर मावात्मक बातें दो नीति सबंधी बातें तीन धर्म, व्रत तथा त्यौहार विषयक वातें चार देव विषयक बातें पाँच पौराधिक वार्ते छः एतिहासिक बातें सात प्रम सर्वधी बार्से आठ स्त्री चातुर्य की बातें नौ कहावतों की कहानियां दस अपच बद्ध या सघुछम्य बातें [आ] हास्म सबंधी बातें ग्यारह चोर घाईतियों की यात बारह प्रश्नो तर [ दुसौषम वातें] वार्से रामस्थानी का यात साहित्य यहा भरा पूरा है। उसके वैज्ञानिक वर्गीकरण की मत्यन्त आवश्यकता है। समस्त राजस्थानी लोक साहित्य के मेरे इस अध्ययन में बात वैविष्य साहित्य का रहित वर्गीकरण कर देना संभव नहीं होगा । फिर भी प्रत्येक राजस्थानी यात को प्रमुखता देकर विभाजन किया गया है। इस विषय में सुविभजन सन्तोष करेंगे । एक बीर भावात्मक घास - पहले हम वीर भावात्मक लोक कहानियों के लक्षण सिस हैं। ये कहानियां इस प्रवेश की प्राण हैं। इन के कारण ही सो राजस्थान को वीर समंद महा जाता है । अंग्रेजी में वीरभावात्मक वातों को एडवेन्चर टेल्स कहा जाता है। ऐसी बातों में जान जोखिम के साथ बुद्धि चातुर्म का प्रदर्शन होता हैं। इनमें सिंह बघेरे, बाड़ाळा सूर, शत्रु-दाने, राक्षस और डायन-योगनियों जस भयकर पात्र होते हैं। इन कहानियों का उद्देश्य श्रोताओं के साहस शौर्य का संचार करके उन्हें कर्तरूप पथ की ओर से जाने का होता है। ऐसी पौठपेम कहा नियाँ या अधिक मात्रा में पाई जाती हैं। यहां हल्के वजे की छिछली कहानियां बहुत कम हैं। इन में सो बीवट युवर्गों के ओजस्वी वर्णन ही मिलते हैं। जला मुख मासोदामी जैसे वीर पैतालों की बातें [प्रकाशमान लोक कमाएं] राज स्थानी लोक साहित्य की मणियां हैं। सिवें विस, राजा भोज, सापगे घोर, दीपासवे, कूगरा थलोष सोनगरा मालवे, गोरा बादल, ममरसिंह राठौड पार्टी राठौड़ जगदेश पुंवार, वीरमदे सुलखान, ऊको, गूगो, गरड़पस उभो पिरथी राम, विणकारी भोम सिंघ, घूँडी, सादूळी, वसूजी पंपावत, मनासिष, ल्हासर सजना कमा भटियांणी, सांबत सोम वी बोभावत, अगमा मालावत आदि की बातें वीर भावात्मक हैं। ऐसी कहानियों के दोहे मीरा रा माझा ई मुख बन्द मारी मार । मामाबत अजमाल हरी बहन समी तलवार पत्र पत्र नेजा पाड़िया, पग पग पाड़ी डाल । बीबी के काम में पोज किता जगमाम ।। राजस्थानी साहित्यएक सौ पैंतीस
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
नई दिल्ली : RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी ने तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन करना "शैतान का साथ देने" जैसा होगा. उन्होंने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को "गैर इस्लामिक" और "गैरकानूनी" करारा दिया. इंद्रेश कुमार ने कहा कि, 'कुरान शरीफ में कहीं भी तीन तलाक और हलाला का जिक्र नहीं है.
मुस्लिमों की पवित्र किताब में इसकी मंजूरी नहीं दी गई है. ऐसे में तीन तलाक मानवता और महिलाओं पर सबसे बुरा अत्याचार है. ' RSS से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक कुमार के अनुसार आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई कानूनी संस्थान नहीं है न ही वह देश में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है.
इस बोर्ड को कोई इस्लामी, संवैधानिक या कानूनी दर्जा नहीं दिया हुआ है. ऐसे में तीन तलाक के मुद्दे पर इसके साथ खड़ा होना 'शैतान' का साथ देने जैसा है.
|
नई दिल्ली : RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी ने तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन करना "शैतान का साथ देने" जैसा होगा. उन्होंने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को "गैर इस्लामिक" और "गैरकानूनी" करारा दिया. इंद्रेश कुमार ने कहा कि, 'कुरान शरीफ में कहीं भी तीन तलाक और हलाला का जिक्र नहीं है. मुस्लिमों की पवित्र किताब में इसकी मंजूरी नहीं दी गई है. ऐसे में तीन तलाक मानवता और महिलाओं पर सबसे बुरा अत्याचार है. ' RSS से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक कुमार के अनुसार आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई कानूनी संस्थान नहीं है न ही वह देश में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है. इस बोर्ड को कोई इस्लामी, संवैधानिक या कानूनी दर्जा नहीं दिया हुआ है. ऐसे में तीन तलाक के मुद्दे पर इसके साथ खड़ा होना 'शैतान' का साथ देने जैसा है.
|
मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी की चंबा जिला इकाई की बैठक शनिवार को मुख्यालय में मुहम्मद सलीम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुस्लिम समुदाय की विभिन्न मांगों व समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। तदोपरांत सोसायटी की कार्यकारिणी का नए सिरे से गठन किया गया। नवगठित कार्यकारिणी की कमान एडवोकेट लतीफ मोहम्मद को सौंपी गई। इसके अलावा हसनदीन मुख्य सचिव, मुहम्मद युसूफ कार्यकारी सचिव और साजिद खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। इसके अलावा तहसील स्तर पर इकाइयों के गठन के लिए उपाध्यक्षों व सचिवों की तैनाती की गई।
चंबा से मुहम्मद अब्बास व आरिफ मलिक, भटियात में रफीक आलम, भरमौर से लतीफ मोहम्मद, डलहौजी से गुलाम नवी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। तहसील स्तर पर सचिव पद पर चंबा से शाकिर अली शाह, चुराह से मुहम्मद याकूब व हारून मोहम्मद, सलूणी से लियाकत अली, भटियात से अब्दुला और भरमौर से शामू प्रधान को तैनाती दी गई। इन पदाधिकारियों को जल्द तहसील स्तर पर कार्यकारिणी के गठन को कहा गया है। इसके साथ ही फैसला लिया गया कि मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के राज्य कार्यकारिणी के चुनावों में चंबा जिला से भी पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
|
मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी की चंबा जिला इकाई की बैठक शनिवार को मुख्यालय में मुहम्मद सलीम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुस्लिम समुदाय की विभिन्न मांगों व समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। तदोपरांत सोसायटी की कार्यकारिणी का नए सिरे से गठन किया गया। नवगठित कार्यकारिणी की कमान एडवोकेट लतीफ मोहम्मद को सौंपी गई। इसके अलावा हसनदीन मुख्य सचिव, मुहम्मद युसूफ कार्यकारी सचिव और साजिद खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। इसके अलावा तहसील स्तर पर इकाइयों के गठन के लिए उपाध्यक्षों व सचिवों की तैनाती की गई। चंबा से मुहम्मद अब्बास व आरिफ मलिक, भटियात में रफीक आलम, भरमौर से लतीफ मोहम्मद, डलहौजी से गुलाम नवी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। तहसील स्तर पर सचिव पद पर चंबा से शाकिर अली शाह, चुराह से मुहम्मद याकूब व हारून मोहम्मद, सलूणी से लियाकत अली, भटियात से अब्दुला और भरमौर से शामू प्रधान को तैनाती दी गई। इन पदाधिकारियों को जल्द तहसील स्तर पर कार्यकारिणी के गठन को कहा गया है। इसके साथ ही फैसला लिया गया कि मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के राज्य कार्यकारिणी के चुनावों में चंबा जिला से भी पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
|
अंडर-19 एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ 90 रन की पारी खेलकर शेख रशीद ने टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया। रशीद आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहने वाले हैं। रशीद को क्रिकेटर बनाने में पिता शेख बलीशा ने बहुत बड़ा किरदार निभाया और कई कुर्बानियां भी दीं। रशीद को बल्लेबाजी की प्रैक्टिस कराने के लिए उन्होंने बैंक की नौकरी को छोड़ दी। बलीशा अब बेटे की पारी से बेहत खुश हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि एक दिन उनका बेटा टीम इंडिया के लिए खेलेगा।
बलीशा ने बताया कि वे प्राइवेट बैंक में जॉब करते थे। उन्होंने देखा कि रशीद को प्रैक्टिस करने में दिक्कत आ रही है। तब वे नौकरी छोड़ कर रशीद को प्रैक्टिस कराने लगे। बलीशा अब भी कोई जॉब नहीं कर रहे हैं। घर का खर्च पहले की सेविंग से चलता है।
बलीशा ने बताया कि रशीद का चयन पहले आंध्र प्रदेश की अंडर-14 टीम और बाद में अंडर-16 टीम के लिए हुआ। रशीद दोनों वर्गों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे। उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन पिता के समझाने के बाद वे फिर से ट्रेनिंग करने लगे और आंध्र प्रदेश की टीम में जगह बनाई। इसके बाद उनके करियर का ग्राफ ऊपर चढ़ता गया और वे देश की अंडर-19 टीम में चुन लिए गए।
रशीद की मुलाकात 8 साल की उम्र में टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज लक्ष्मण से हुई थी। रशीद के पिता ने बताया कि एक घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में लक्ष्मण मुख्य अतिथि थे। उस समय वो टीम इंडिया के लिए खेलते थे। रशीद ने उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और लक्ष्मण ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किया था। जिसके बाद रशीद उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना लक्ष्य टीम इंडिया के लिए खेलने के लिए बना दिया।
बलीशा ने बताया कि गुंटूर में जब वह रहते थे तो रशीद कॉलोनी में ही अन्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते थे। वे शुरू से ही बल्लेबाजी करना पसंद करते थे। कई बार वे इतनी जोर से शॉट मारते थे कि लोगों के घरों दरवाजों और खिड़कियों के कांच टूट जाते थे। लोग इसकी शिकायत उनसे किया करते थे। तब फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न उसे क्रिकेट की ट्रेनिंग कराई जाए। फिर रशीद को आंध्र प्रदेश क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन कराने के लिए तैयारी करवाई। बाद में रशीद का सिलेक्शन हैदराबाद में आंध्र प्रदेश की क्रिकेट एकेडमी में हो गया। जिसके बाद पूरा परिवार ही हैदराबाद शिफ्ट हो गया।
बलीशा ने कहा कि वह भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसलिए वह चाहते थे कि उनके दो बेटों में से कोई उनके सपने को पूरा करे। बड़ा बेटा पढ़ाई में अच्छा था। जबकि छोटा रशीद को क्रिकेट खेलना पसंद था। इसलिए उन्होंने रशीद को क्रिकेटर बनाने की ठानी। अब वह चाहते हैं कि रशीद देश के लिए खेलकर उनका सपना पूरा करें।
रशीद के पिता ने बताया कि रशीद कोहली को अपना आदर्श मानते हैं। वह उन्हीं की तरह बल्लेबाजी करना चाहते हैं। वह उनके स्टाइल को भी फॉलो करते हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
अंडर-उन्नीस एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ नब्बे रन की पारी खेलकर शेख रशीद ने टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया। रशीद आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहने वाले हैं। रशीद को क्रिकेटर बनाने में पिता शेख बलीशा ने बहुत बड़ा किरदार निभाया और कई कुर्बानियां भी दीं। रशीद को बल्लेबाजी की प्रैक्टिस कराने के लिए उन्होंने बैंक की नौकरी को छोड़ दी। बलीशा अब बेटे की पारी से बेहत खुश हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि एक दिन उनका बेटा टीम इंडिया के लिए खेलेगा। बलीशा ने बताया कि वे प्राइवेट बैंक में जॉब करते थे। उन्होंने देखा कि रशीद को प्रैक्टिस करने में दिक्कत आ रही है। तब वे नौकरी छोड़ कर रशीद को प्रैक्टिस कराने लगे। बलीशा अब भी कोई जॉब नहीं कर रहे हैं। घर का खर्च पहले की सेविंग से चलता है। बलीशा ने बताया कि रशीद का चयन पहले आंध्र प्रदेश की अंडर-चौदह टीम और बाद में अंडर-सोलह टीम के लिए हुआ। रशीद दोनों वर्गों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे। उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन पिता के समझाने के बाद वे फिर से ट्रेनिंग करने लगे और आंध्र प्रदेश की टीम में जगह बनाई। इसके बाद उनके करियर का ग्राफ ऊपर चढ़ता गया और वे देश की अंडर-उन्नीस टीम में चुन लिए गए। रशीद की मुलाकात आठ साल की उम्र में टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज लक्ष्मण से हुई थी। रशीद के पिता ने बताया कि एक घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में लक्ष्मण मुख्य अतिथि थे। उस समय वो टीम इंडिया के लिए खेलते थे। रशीद ने उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और लक्ष्मण ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किया था। जिसके बाद रशीद उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना लक्ष्य टीम इंडिया के लिए खेलने के लिए बना दिया। बलीशा ने बताया कि गुंटूर में जब वह रहते थे तो रशीद कॉलोनी में ही अन्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते थे। वे शुरू से ही बल्लेबाजी करना पसंद करते थे। कई बार वे इतनी जोर से शॉट मारते थे कि लोगों के घरों दरवाजों और खिड़कियों के कांच टूट जाते थे। लोग इसकी शिकायत उनसे किया करते थे। तब फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न उसे क्रिकेट की ट्रेनिंग कराई जाए। फिर रशीद को आंध्र प्रदेश क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन कराने के लिए तैयारी करवाई। बाद में रशीद का सिलेक्शन हैदराबाद में आंध्र प्रदेश की क्रिकेट एकेडमी में हो गया। जिसके बाद पूरा परिवार ही हैदराबाद शिफ्ट हो गया। बलीशा ने कहा कि वह भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसलिए वह चाहते थे कि उनके दो बेटों में से कोई उनके सपने को पूरा करे। बड़ा बेटा पढ़ाई में अच्छा था। जबकि छोटा रशीद को क्रिकेट खेलना पसंद था। इसलिए उन्होंने रशीद को क्रिकेटर बनाने की ठानी। अब वह चाहते हैं कि रशीद देश के लिए खेलकर उनका सपना पूरा करें। रशीद के पिता ने बताया कि रशीद कोहली को अपना आदर्श मानते हैं। वह उन्हीं की तरह बल्लेबाजी करना चाहते हैं। वह उनके स्टाइल को भी फॉलो करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
दुनिया के सबसे बड़े छात्र संगठन 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' ने आज अपना 72 वां स्थापना दिवस मनाया। बता दें कि अभाविप की स्थापना 9 जुलाई 1949 को हुई थी। इस मौके पर अभाविप ने दिल्ली में बदरपुर, जेएनयू आदि स्थानों पर पौधारोपण किया।
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े छात्र संगठन 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' ने आज अपना 72 वां स्थापना दिवस मनाया। बता दें कि अभाविप की स्थापना 9 जुलाई 1949 को हुई थी। इस मौके पर अभाविप ने दिल्ली में बदरपुर, जेएनयू आदि स्थानों पर पौधारोपण किया।
अभाविप ने इस मौके पर डिजिटल माध्यमों से क्विज प्रतियोगिता, काव्य सम्मेलन, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, स्लोगन लेखन आदि प्रतियोगिताएं तथा युवाओं और छात्रों के संदर्भ में महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न वेबिनारों का आयोजन किया।
इसके अलावा अभाविप द्वारा विभिन्न विषयों पर आयोजित वेबीनार तथा फेसबुक लाइव के माध्यम से अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत, राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनु शर्मा कटारिया, राष्ट्रीय मीडिया संयोजक राहुल चौधरी, क्षेत्रीय सह-संगठन मंत्री उत्तर क्षेत्र अजय ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप महापात्रा , दिल्ली अभाविप के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक टंडन, अभाविप दिल्ली प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव, प्रदेश संगठन मंत्री आनंद श्रीवास्तव, डूसू अध्यक्ष अक्षित दहिया आदि ने छात्रों को संबोधित किया।
जानकारी के लिए बता दे कि अभाविप द्वारा आयोजित विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में इस बार डीयू, जेएनयू, जामिया, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ आदि के छात्रों ने हिस्सा लिया। इन विभिन्न कार्यक्रमों में अलग-अलग माध्यमों से हजार से अधिक की संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया है।
|
दुनिया के सबसे बड़े छात्र संगठन 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' ने आज अपना बहत्तर वां स्थापना दिवस मनाया। बता दें कि अभाविप की स्थापना नौ जुलाई एक हज़ार नौ सौ उनचास को हुई थी। इस मौके पर अभाविप ने दिल्ली में बदरपुर, जेएनयू आदि स्थानों पर पौधारोपण किया। नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े छात्र संगठन 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' ने आज अपना बहत्तर वां स्थापना दिवस मनाया। बता दें कि अभाविप की स्थापना नौ जुलाई एक हज़ार नौ सौ उनचास को हुई थी। इस मौके पर अभाविप ने दिल्ली में बदरपुर, जेएनयू आदि स्थानों पर पौधारोपण किया। अभाविप ने इस मौके पर डिजिटल माध्यमों से क्विज प्रतियोगिता, काव्य सम्मेलन, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, स्लोगन लेखन आदि प्रतियोगिताएं तथा युवाओं और छात्रों के संदर्भ में महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न वेबिनारों का आयोजन किया। इसके अलावा अभाविप द्वारा विभिन्न विषयों पर आयोजित वेबीनार तथा फेसबुक लाइव के माध्यम से अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रफुल्ल आकांत, राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनु शर्मा कटारिया, राष्ट्रीय मीडिया संयोजक राहुल चौधरी, क्षेत्रीय सह-संगठन मंत्री उत्तर क्षेत्र अजय ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप महापात्रा , दिल्ली अभाविप के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक टंडन, अभाविप दिल्ली प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव, प्रदेश संगठन मंत्री आनंद श्रीवास्तव, डूसू अध्यक्ष अक्षित दहिया आदि ने छात्रों को संबोधित किया। जानकारी के लिए बता दे कि अभाविप द्वारा आयोजित विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में इस बार डीयू, जेएनयू, जामिया, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ आदि के छात्रों ने हिस्सा लिया। इन विभिन्न कार्यक्रमों में अलग-अलग माध्यमों से हजार से अधिक की संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया है।
|
सभी प्राइवेट अस्पताल मरीज से सरकार के द्वारा तय किए रेट्स ही चार्ज करेंगे. अब सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को किसी भी कोविड के मरीज को भर्ती करने के पहले BMC की अनुमति लेनी होगी.
मुंबई में ओमिक्रॉन (Mumbai corona case) के बढ़ते मामलों को देखते हुए बीएमसी (BMC) ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है. BMC ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिया है कि दूसरी लहर के दरम्यान जितने मैक्सिमम बेड की उनकी कपैसिटी थी उसी कपैसिटी को फिर से एक्टिवेट करें. इसी के ही साथ असिम्प्टमैटिक मरीज अगर कोमोर्बिड हैं तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाए और अगर पहले से एडमिट हैं और बेड की कमी महसूस होती हैं तो उनकी हालत देख कर उन्हें 3 दिन मैं डिस्चार्ज दिया जाए.
BMC ने कहा है कि अस्पताल 80 % कोविड बेड और 100 ICU बेड वाले वार्ड वॉर रूम खोलें. ये वार्ड रूम रिजर्व रहेंगे. और बीएमसी के अनुमति के बिना यहां कोई एडमिट नहीं होगा. सभी प्राइवेट अस्पताल मरीज से सरकार के द्वारा तय किए रेट्स ही चार्ज करेंगे. अब सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को किसी भी कोविड के मरीज को भर्ती करने के पहले BMC की अनुमति लेनी होगी.
BMC ने बिल्डिंग सील करने के प्रोटोकॉल में संशोधन किया है. BMC के नए सर्कुलर के अनुसार, किसी बिल्डिंग के विंग, कॉम्प्लेक्स या सोसायटी के कुल फ्लैट के 20 प्रतिशत फ्लैट में यदि कोरोना के पॉजिटिव मरीज पाए जाते हैं, तो पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया जाएगा. BMC कमिश्नर आईएस चहल ने सर्कुलर जारी किया है. जिसके अनुसार पेशंट और उसके कॉन्टैक्ट में आने वाले लोगों को कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन करना होगा. कोरोना मरीज को 10 दिन तक आइसोलेटेड रहना अनिवार्य किया गया है.
इसी तरह, हाई रिस्क वाले लोगों को 7 दिन तक अनिवार्य रूप से क्वारंटीन रहना होगा. 5वें और 7वें दिन उन्हें कोरोना टेस्ट कराना होगा. सोसायटी मैनेजिंग कमेटी क्वारंटीन परिवार के लिए राशन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगी. बिल्डिंग को सील करने की प्रक्रिया वॉर्ड स्तर पर होगी. कोरोना को लेकर मेडिकल ऑफिसर या वॉर्ड ऑफिसर द्वारा जारी प्रोटोकॉल और कंटेन्मेंट के नियमों का लोगों को कड़ाई से पालन करना होगा. कोरोना को लेकर मेडिकल ऑफिसर या वॉर्ड ऑफिसर द्वारा जारी प्रोटोकॉल और कंटेन्मेंट के नियमों का लोगों को कड़ाई से पालन करना होगा.
बता दें कि मुंबई में स्लम से ज्यादा बिल्डिंगों में कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, इसलिए बीएमसी ने बिल्डिंग सील करने के नियम में संशोधन किया है.
|
सभी प्राइवेट अस्पताल मरीज से सरकार के द्वारा तय किए रेट्स ही चार्ज करेंगे. अब सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को किसी भी कोविड के मरीज को भर्ती करने के पहले BMC की अनुमति लेनी होगी. मुंबई में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए बीएमसी ने प्राइवेट अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है. BMC ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिया है कि दूसरी लहर के दरम्यान जितने मैक्सिमम बेड की उनकी कपैसिटी थी उसी कपैसिटी को फिर से एक्टिवेट करें. इसी के ही साथ असिम्प्टमैटिक मरीज अगर कोमोर्बिड हैं तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाए और अगर पहले से एडमिट हैं और बेड की कमी महसूस होती हैं तो उनकी हालत देख कर उन्हें तीन दिन मैं डिस्चार्ज दिया जाए. BMC ने कहा है कि अस्पताल अस्सी % कोविड बेड और एक सौ ICU बेड वाले वार्ड वॉर रूम खोलें. ये वार्ड रूम रिजर्व रहेंगे. और बीएमसी के अनुमति के बिना यहां कोई एडमिट नहीं होगा. सभी प्राइवेट अस्पताल मरीज से सरकार के द्वारा तय किए रेट्स ही चार्ज करेंगे. अब सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को किसी भी कोविड के मरीज को भर्ती करने के पहले BMC की अनुमति लेनी होगी. BMC ने बिल्डिंग सील करने के प्रोटोकॉल में संशोधन किया है. BMC के नए सर्कुलर के अनुसार, किसी बिल्डिंग के विंग, कॉम्प्लेक्स या सोसायटी के कुल फ्लैट के बीस प्रतिशत फ्लैट में यदि कोरोना के पॉजिटिव मरीज पाए जाते हैं, तो पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया जाएगा. BMC कमिश्नर आईएस चहल ने सर्कुलर जारी किया है. जिसके अनुसार पेशंट और उसके कॉन्टैक्ट में आने वाले लोगों को कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन करना होगा. कोरोना मरीज को दस दिन तक आइसोलेटेड रहना अनिवार्य किया गया है. इसी तरह, हाई रिस्क वाले लोगों को सात दिन तक अनिवार्य रूप से क्वारंटीन रहना होगा. पाँचवें और सातवें दिन उन्हें कोरोना टेस्ट कराना होगा. सोसायटी मैनेजिंग कमेटी क्वारंटीन परिवार के लिए राशन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगी. बिल्डिंग को सील करने की प्रक्रिया वॉर्ड स्तर पर होगी. कोरोना को लेकर मेडिकल ऑफिसर या वॉर्ड ऑफिसर द्वारा जारी प्रोटोकॉल और कंटेन्मेंट के नियमों का लोगों को कड़ाई से पालन करना होगा. कोरोना को लेकर मेडिकल ऑफिसर या वॉर्ड ऑफिसर द्वारा जारी प्रोटोकॉल और कंटेन्मेंट के नियमों का लोगों को कड़ाई से पालन करना होगा. बता दें कि मुंबई में स्लम से ज्यादा बिल्डिंगों में कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, इसलिए बीएमसी ने बिल्डिंग सील करने के नियम में संशोधन किया है.
|
बच्चों को नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है। इससे मानवीय मूल्यों की रक्षा के साथ ही आदर्श नागरिक बनाया जा सकता है। बच्चों में जानने की अधिक जिज्ञासा रहती है। ये बातें कवि डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने गुरुवार को नवजीवन वासुदेव पुस्तकालय बजलपुरा में आयोजित नैतिक शिक्षा वर्ग कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में कहीं। पुस्तकालय के प्रबंधक सह प्रधानाध्यापक महेश प्रसाद सिंह ने नैतिक शिक्षा व इसके मूल्यों के महत्व को विस्तार से बताया। पुस्तकालय प्रबंधन समिति सदस्य वीरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि आज की परिस्थिति में लोगों में नैतिक मूल्यों की कमी से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता मौजे लाल सिंह ने कहा कि नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए।
बाबूल कुमारी, दीपशिखा, भारती कुमारी तथा नीलू कुमारी आदि ने भी अपनी बातें रखीं। पुस्तकालय प्रबंधन की ओर से डॉ. पाठक को चादर प्रदान कर सम्मानित किया गया। बबलू कुमार व मंजेश कुमार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।
|
बच्चों को नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है। इससे मानवीय मूल्यों की रक्षा के साथ ही आदर्श नागरिक बनाया जा सकता है। बच्चों में जानने की अधिक जिज्ञासा रहती है। ये बातें कवि डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने गुरुवार को नवजीवन वासुदेव पुस्तकालय बजलपुरा में आयोजित नैतिक शिक्षा वर्ग कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में कहीं। पुस्तकालय के प्रबंधक सह प्रधानाध्यापक महेश प्रसाद सिंह ने नैतिक शिक्षा व इसके मूल्यों के महत्व को विस्तार से बताया। पुस्तकालय प्रबंधन समिति सदस्य वीरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि आज की परिस्थिति में लोगों में नैतिक मूल्यों की कमी से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता मौजे लाल सिंह ने कहा कि नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। बाबूल कुमारी, दीपशिखा, भारती कुमारी तथा नीलू कुमारी आदि ने भी अपनी बातें रखीं। पुस्तकालय प्रबंधन की ओर से डॉ. पाठक को चादर प्रदान कर सम्मानित किया गया। बबलू कुमार व मंजेश कुमार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।
|
खुम्बु क्षेत्र के नक्शे खुम्बु (एवरेस्ट क्षेत्र के रूप में जाना जाता है) माउंट एवरेस्ट की नेपाली दिशा पर स्थित पूर्वोत्तर नेपाल का एक क्षेत्र है। यह सोलुखुम्बु जिला का हिस्सा है, जो सागरमाथा अंचल कि अन्तर्गत है। Bradley, Mayhew; "Trekking in the Nepal Himalaya"; (2009); 9 edição; pp 84-141; Lonely Planet;.
3 संबंधोंः एवरेस्ट पर्वत, बौद्ध धर्म, सगरमाथा अंचल।
एवरेस्ट पर्वत (नेपालीःसागरमाथा, संस्कृतः देवगिरि) दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिसकी ऊँचाई 8,850 मीटर है। पहले इसे XV के नाम से जाना जाता था। माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई उस समय 29,002 फीट या 8,840 मीटर मापी गई। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष 2 से॰मी॰ के हिसाब से बढ़ रही है। नेपाल में इसे स्थानीय लोग सागरमाथा (अर्थात स्वर्ग का शीर्ष) नाम से जानते हैं, जो नाम नेपाल के इतिहासविद बाबुराम आचार्य ने सन् 1930 के दशक में रखा था - आकाश का भाल। तिब्बत में इसे सदियों से चोमोलंगमा अर्थात पर्वतों की रानी के नाम से जाना जाता है। सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा प्रकाशित, (1:50,000 के स्केल पर 57 मैप सेट में से 50वां मैप) "फर्स्ट जॉईन्ट इन्सपेक्सन सर्वे सन् 1979-80, नेपाल-चीन सीमा के मुख्य पाठ्य के साथ अटैच" पृष्ठ पर ऊपर की ओर बीच में, लिखा है, सीमा रेखा, की पहचान की गई है जो चीन और नेपाल को अलग करते हैं, जो ठीक शिखर से होकर गुजरता है। यह यहाँ सीमा का काम करता है और चीन-नेपाल सीमा पर मुख्य हिमालयी जलसंभर विभाजित होकर दोनो तरफ बहता है। .
बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व 6 वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण 483 ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग ५४ करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का ७वाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल 18 देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। .
सगरमाथा प्रान्त Sagarmatha zone नेपाल के पूर्वांचल विकास क्षेत्र का एक प्रान्त है। हिमालय पर्वत के सर्वोच्च शिखर माउण्ट एवरेस्ट को नेपाल में "सगरमाथा" कहा जाता है। इसी "सगरमाथा" के नाम पर इस अंचल का नाम रखा गया है। यह अंचल पूर्वांचल विकास क्षेत्र, नेपाल में अवस्थित है। इस अंचल के पूर्व में कोशी अंचल दक्षिण में भारतीय राज्य बिहार, पश्चिम मैं जनकपुर अंचल और उत्तर में चीन का स्वशासित क्षेत्र तिब्बत स्थित है। इसमें ६ जिले - सोलुखुंबु जिला, खोटांग जिला, ओखालढुंगा जिला, उदयपुर जिला (नेपाल), सिराहा जिला व सप्तरी जिला तथा प्रमुख नगर हैं- त्रियुगा, गाइघाट, लाहान, राजविराज, सिराहा, कटारी, सल्लेरी, वखलढुंगा, दिक्तेल, नाम्चे बजार, लुक्ला, रूम्जाटार, बेलटार .
|
खुम्बु क्षेत्र के नक्शे खुम्बु माउंट एवरेस्ट की नेपाली दिशा पर स्थित पूर्वोत्तर नेपाल का एक क्षेत्र है। यह सोलुखुम्बु जिला का हिस्सा है, जो सागरमाथा अंचल कि अन्तर्गत है। Bradley, Mayhew; "Trekking in the Nepal Himalaya"; ; नौ edição; pp चौरासी-एक सौ इकतालीस; Lonely Planet;. तीन संबंधोंः एवरेस्ट पर्वत, बौद्ध धर्म, सगरमाथा अंचल। एवरेस्ट पर्वत दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिसकी ऊँचाई आठ,आठ सौ पचास मीटर है। पहले इसे XV के नाम से जाना जाता था। माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई उस समय उनतीस,दो फीट या आठ,आठ सौ चालीस मीटर मापी गई। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष दो से॰मी॰ के हिसाब से बढ़ रही है। नेपाल में इसे स्थानीय लोग सागरमाथा नाम से जानते हैं, जो नाम नेपाल के इतिहासविद बाबुराम आचार्य ने सन् एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक में रखा था - आकाश का भाल। तिब्बत में इसे सदियों से चोमोलंगमा अर्थात पर्वतों की रानी के नाम से जाना जाता है। सर्वे ऑफ नेपाल द्वारा प्रकाशित, "फर्स्ट जॉईन्ट इन्सपेक्सन सर्वे सन् एक हज़ार नौ सौ उन्यासी-अस्सी, नेपाल-चीन सीमा के मुख्य पाठ्य के साथ अटैच" पृष्ठ पर ऊपर की ओर बीच में, लिखा है, सीमा रेखा, की पहचान की गई है जो चीन और नेपाल को अलग करते हैं, जो ठीक शिखर से होकर गुजरता है। यह यहाँ सीमा का काम करता है और चीन-नेपाल सीमा पर मुख्य हिमालयी जलसंभर विभाजित होकर दोनो तरफ बहता है। . बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और महान दर्शन है। इसा पूर्व छः वी शताब्धी में बौद्ध धर्म की स्थापना हुई है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। भगवान बुद्ध का जन्म पाँच सौ तिरेसठ ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल और महापरिनिर्वाण चार सौ तिरासी ईसा पूर्व कुशीनगर, भारत में हुआ था। उनके महापरिनिर्वाण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैल गया। आज, हालाँकि बौद्ध धर्म में चार प्रमुख सम्प्रदाय हैंः हीनयान/ थेरवाद, महायान, वज्रयान और नवयान, परन्तु बौद्ध धर्म एक ही है किन्तु सभी बौद्ध सम्प्रदाय बुद्ध के सिद्धान्त ही मानते है। बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है।आज पूरे विश्व में लगभग चौवन करोड़ लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी है, जो दुनिया की आबादी का सातवाँ हिस्सा है। आज चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैण्ड, म्यान्मार, भूटान, श्रीलंका, कम्बोडिया, मंगोलिया, तिब्बत, लाओस, हांगकांग, ताइवान, मकाउ, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया एवं उत्तर कोरिया समेत कुल अट्ठारह देशों में बौद्ध धर्म 'प्रमुख धर्म' धर्म है। भारत, नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, रूस, ब्रुनेई, मलेशिया आदि देशों में भी लाखों और करोडों बौद्ध हैं। . सगरमाथा प्रान्त Sagarmatha zone नेपाल के पूर्वांचल विकास क्षेत्र का एक प्रान्त है। हिमालय पर्वत के सर्वोच्च शिखर माउण्ट एवरेस्ट को नेपाल में "सगरमाथा" कहा जाता है। इसी "सगरमाथा" के नाम पर इस अंचल का नाम रखा गया है। यह अंचल पूर्वांचल विकास क्षेत्र, नेपाल में अवस्थित है। इस अंचल के पूर्व में कोशी अंचल दक्षिण में भारतीय राज्य बिहार, पश्चिम मैं जनकपुर अंचल और उत्तर में चीन का स्वशासित क्षेत्र तिब्बत स्थित है। इसमें छः जिले - सोलुखुंबु जिला, खोटांग जिला, ओखालढुंगा जिला, उदयपुर जिला , सिराहा जिला व सप्तरी जिला तथा प्रमुख नगर हैं- त्रियुगा, गाइघाट, लाहान, राजविराज, सिराहा, कटारी, सल्लेरी, वखलढुंगा, दिक्तेल, नाम्चे बजार, लुक्ला, रूम्जाटार, बेलटार .
|
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स तिरंगे से स्कूटी साफ करता दिख रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उसकी स्कूटी भी जब्त कर ली है और तिरंगे को भी बरामद कर लिया गया है। हालांकि, स्कूटी किसके नाम से है पुलिस ने इसका खुलासा नहीं किया है।
29 सेकेंड के वीडियो में शख्स को तिरंगे का अपमान करते हुए देखा गया। उसने पहले सीट को साफ किया, फिर सामने के शीशे को पोछा। इसके बाद पूरे स्कूटी की सफाई तिरंगे से की। पुलिस के मुताबिक गाड़ी का इंशोरेंस भी एक्सपायर हो चुका है। बताया जा रहा है कि वह रोज इसी तरीके से अपनी स्कूटी साफ करता है।
मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा- सोशल मीडिया पर तिरंगे के अपमान का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज की गई है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम 1971 के तहत दो धाराओं में FIR किया गया है। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स तिरंगे से स्कूटी साफ करता दिख रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उसकी स्कूटी भी जब्त कर ली है और तिरंगे को भी बरामद कर लिया गया है। हालांकि, स्कूटी किसके नाम से है पुलिस ने इसका खुलासा नहीं किया है। उनतीस सेकेंड के वीडियो में शख्स को तिरंगे का अपमान करते हुए देखा गया। उसने पहले सीट को साफ किया, फिर सामने के शीशे को पोछा। इसके बाद पूरे स्कूटी की सफाई तिरंगे से की। पुलिस के मुताबिक गाड़ी का इंशोरेंस भी एक्सपायर हो चुका है। बताया जा रहा है कि वह रोज इसी तरीके से अपनी स्कूटी साफ करता है। मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा- सोशल मीडिया पर तिरंगे के अपमान का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज की गई है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के तहत दो धाराओं में FIR किया गया है। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
असमिया गायक जुबीन गर्ग (Assamese singer Zubeen Garg) को तबीयत खराब होने पर गुवाहाटी के आयुरसुंद्रा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, गायक उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) से पीड़ित था। डॉक्टरों ने आश्वस्त किया कि गायक अब बेहतर स्थिति में है और अपनी बीमारी से ठीक हो रहा है।
बताया गया है कि जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) अस्वस्थ महसूस कर रहे थे, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद रात करीब 10:45 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। गायक की डॉक्टरों की एक टीम द्वारा आयुसुंद्रा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में उसकी अच्छी देखभाल की जाती है, जो उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं और उसका इलाज कर रहे हैं। डॉक्टरों की टीम को विशेषज्ञ बताया गया है जो उसके स्वास्थ्य मानकों की जांच कर रहे हैं।
अस्पताल की मेडिकल टीम द्वारा कई परीक्षण जैसे ECG और अन्य परीक्षण किए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गायक किसी अन्य चिकित्सा समस्या से पीड़ित है या नहीं। आयुरसुंदरा स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट अच्छे नतीजे आने पर जुबीन गर्ग को आज अस्पताल से रिहा करने की संभावना है. यह तब पता चलेगा जब डॉक्टर आज गायक (Zubeen Garg) पर कई अन्य परीक्षण करेंगे।
|
असमिया गायक जुबीन गर्ग को तबीयत खराब होने पर गुवाहाटी के आयुरसुंद्रा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, गायक उच्च रक्तचाप से पीड़ित था। डॉक्टरों ने आश्वस्त किया कि गायक अब बेहतर स्थिति में है और अपनी बीमारी से ठीक हो रहा है। बताया गया है कि जुबीन गर्ग अस्वस्थ महसूस कर रहे थे, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद रात करीब दस:पैंतालीस बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। गायक की डॉक्टरों की एक टीम द्वारा आयुसुंद्रा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में उसकी अच्छी देखभाल की जाती है, जो उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं और उसका इलाज कर रहे हैं। डॉक्टरों की टीम को विशेषज्ञ बताया गया है जो उसके स्वास्थ्य मानकों की जांच कर रहे हैं। अस्पताल की मेडिकल टीम द्वारा कई परीक्षण जैसे ECG और अन्य परीक्षण किए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गायक किसी अन्य चिकित्सा समस्या से पीड़ित है या नहीं। आयुरसुंदरा स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट अच्छे नतीजे आने पर जुबीन गर्ग को आज अस्पताल से रिहा करने की संभावना है. यह तब पता चलेगा जब डॉक्टर आज गायक पर कई अन्य परीक्षण करेंगे।
|
करता है । 'ध्रुषोऽसि - धर्ममसि-धरुणममि' (यमु सहिता १९१८)) के अनुसार भारतीय विज्ञानकारद में पदार्थों का तीन भेयों में वर्गीकरण हुआ है। ध्रुवावस्था ही निमिायस्था, किया मनावस्था है। पर्यावस्थाही प्रमावस्था, किंवा सरलावस्था है। एवं भरुगणामस्था दी पाप्यावस्था, किया विरलावस्था है । जगत् उपादानमूस भुगु, और अशिरा नामक सत्य इन्ही तीन अवस्थाओं के कारण क्रमश आपः-पायु - सोमः, एवं अग्निः यम- आादिस्यः, इन सीन तीन अपस्थामावों में परितो रहे हैं। तीनों भार्गय सोम्य धयों में से, सभा तीनों भारिस भाग्नेय सथों में से प्रुषसोम, तथा मुनाम्नि के अन्तर्ग्यामसम्मधारमक मितिसम्बन्ध में । भौतिक पिराड की भ्यरूपनिष्पति होती है।
पैदिक विज्ञानपरम्पराओं की विलुप्ति के दुष्परिणामम्मरूप संस्कृत पाठशासा- विद्यालयों का सुप्रसिद्ध पाठप प्रत्य तर्कसंमइ' श्राम-'सोसिद्धिर्फ व्यस्य जो रूप से पानी के द्वय धर्म को नित्य मानने की भ्रान्ति कर रहा है, अम कि पानी भुषाग्नि के प्रवेश से सुपार (घर) धन भाता है, पर्याग्निप्रयेश से ध्रुव हो जाता है, एवं धरणाग्निप्रवेश से रूप में भाकर उस्कान्त हो जाता है। पदार्थविज्ञान की परिधि भौतिक परिभाषाओं का दिग्दर्शन कराने वाले स्वयं महर्षि कणाद धपने वैदर्शन में संघातो, विलयन च तेज संयोगात्' (६० सूत्र ) इत्यादि रूप से पानों का संघात, तथा विलयन से :संयोग पर अमलम्बित मान रहे हैं, तो सर्ककार ने अपने हीं न्यायसिमान्त के विपरीस कैसे पानी को निस्मय मान लिया है यह एक अन्त्यि ही प्रश्न है। इन्ही कुछ एक कारणों से संस्कृतविद्या भाम उपेक्षा की वस्तु पनी हुई है कि संस्कृतभाषा भाषाविज्ञान की दृष्टि से सम्पूर्गा इतर प्राच्य-मसीन्समापाची के समतुलन में सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित हो रही है ।
मान्य राष्ट्रपति महाभाग !
सबसे बड़ा अभियोग यह है कि, "यह रटन्स भाषा है, पोमूविधा है, साथ ही विज्ञानशून्या, अतएव मुखमाया माषा है" । यथाथ है। रटना को अपक्ष की पड़ता है इसे । किन्तु यदि उगतापूर्ण यह प्रश्न करने की पृष्ठता कर ली जाय, तो क्षमा करेंगे आप मुझे कि, जिस माया के शब्दों के साथ साथ अक्षर या भी रटे बायें, यह मापा कठिन है ?, अमया मिस के केवल शब्द रटे बायें, यह भाषा कठिन है ।। यम -मानवः- मार दि
|
करता है । 'ध्रुषोऽसि - धर्ममसि-धरुणममि' ) के अनुसार भारतीय विज्ञानकारद में पदार्थों का तीन भेयों में वर्गीकरण हुआ है। ध्रुवावस्था ही निमिायस्था, किया मनावस्था है। पर्यावस्थाही प्रमावस्था, किंवा सरलावस्था है। एवं भरुगणामस्था दी पाप्यावस्था, किया विरलावस्था है । जगत् उपादानमूस भुगु, और अशिरा नामक सत्य इन्ही तीन अवस्थाओं के कारण क्रमश आपः-पायु - सोमः, एवं अग्निः यम- आादिस्यः, इन सीन तीन अपस्थामावों में परितो रहे हैं। तीनों भार्गय सोम्य धयों में से, सभा तीनों भारिस भाग्नेय सथों में से प्रुषसोम, तथा मुनाम्नि के अन्तर्ग्यामसम्मधारमक मितिसम्बन्ध में । भौतिक पिराड की भ्यरूपनिष्पति होती है। पैदिक विज्ञानपरम्पराओं की विलुप्ति के दुष्परिणामम्मरूप संस्कृत पाठशासा- विद्यालयों का सुप्रसिद्ध पाठप प्रत्य तर्कसंमइ' श्राम-'सोसिद्धिर्फ व्यस्य जो रूप से पानी के द्वय धर्म को नित्य मानने की भ्रान्ति कर रहा है, अम कि पानी भुषाग्नि के प्रवेश से सुपार धन भाता है, पर्याग्निप्रयेश से ध्रुव हो जाता है, एवं धरणाग्निप्रवेश से रूप में भाकर उस्कान्त हो जाता है। पदार्थविज्ञान की परिधि भौतिक परिभाषाओं का दिग्दर्शन कराने वाले स्वयं महर्षि कणाद धपने वैदर्शन में संघातो, विलयन च तेज संयोगात्' इत्यादि रूप से पानों का संघात, तथा विलयन से :संयोग पर अमलम्बित मान रहे हैं, तो सर्ककार ने अपने हीं न्यायसिमान्त के विपरीस कैसे पानी को निस्मय मान लिया है यह एक अन्त्यि ही प्रश्न है। इन्ही कुछ एक कारणों से संस्कृतविद्या भाम उपेक्षा की वस्तु पनी हुई है कि संस्कृतभाषा भाषाविज्ञान की दृष्टि से सम्पूर्गा इतर प्राच्य-मसीन्समापाची के समतुलन में सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित हो रही है । मान्य राष्ट्रपति महाभाग ! सबसे बड़ा अभियोग यह है कि, "यह रटन्स भाषा है, पोमूविधा है, साथ ही विज्ञानशून्या, अतएव मुखमाया माषा है" । यथाथ है। रटना को अपक्ष की पड़ता है इसे । किन्तु यदि उगतापूर्ण यह प्रश्न करने की पृष्ठता कर ली जाय, तो क्षमा करेंगे आप मुझे कि, जिस माया के शब्दों के साथ साथ अक्षर या भी रटे बायें, यह मापा कठिन है ?, अमया मिस के केवल शब्द रटे बायें, यह भाषा कठिन है ।। यम -मानवः- मार दि
|
बीएलओ का पशिक्षण शिविर संपन्न बालकृष्ण शुक्ला कोटपूतली। राजकीय सरदार उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहे ब्लाक लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का पशिक्षण शिविर शनिवार को संपन्न हुआ। शिविर के अंतिम दिन निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी (एसडीएम) डा. रामौतार गुर्जर ने कहा कि मतदाता सूची अपडेशन कार्य के दौरान सावधानी बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि लापरवाही सामने आने पर संबंधित बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने फोटो से वंचित मतदाताओं की फोटो लेने, नए नाम जोडक्वने, अशुद्धियों को दुरूस्त करने आदि के निर्देश दिए। एसडीएम डा. गुर्जर ने बताया कि कोटपूतली विधान सभा क्षेत्र में 98. 69 पतिशत मतदाताओं की फोटोग्राफी हो चुकी है, शेष रहे 1. 31 पतिशत मतदाताओं की फोटोग्राफी जांच के बाद करवाने का पयास किया जा रहा है। एसडीएम ने डबल एंट्री वाले मतदाताओं का नाम एक जगह से काटने के निर्देश भी दिए। इस मौके पर मास्टर ट्रेनर हरचंद मीणा (बीईईओ) एवं संतोष कुमार खण्डेलवाल (अध्यापक) ने बीएलओ को मतदाता सूचियों की पविष्टियों एवं मतदाताओं का सत्यापन करने के संबंध में पशिक्षण दिया। उन्होंने मतदाताओं की पहचान करने के साथ ही अशुद्धियों को दुरूस्त करने व नए नाम जोडक्वने के लिए आवेदन भी लेने के निर्देश दिए। सभी ब्लाक लेवल अधिकारी 8 से 20 जुलाई तक मतदाता सूची को अधतन एवं शुद्ध बनाने के लिए घर-घर जाकर पत्येक मतदाता के बारे में जानकारी पाप्त कर मतदाता सूची को तैयार करेंगे और 18 साल की आयु पूर्ण कर चुके व्यक्पियों का नाम जोडक्वेंगे। इस दौरान जन्म तिथि का साक्ष्य पस्तुत करने वाले मतदाताओं का पहचान पत्र पर जन्म तिथि भी अंकित हो सकेगी। 6 बीएलओ को कारण बताओ नोटिसः विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 1 से 180 तक मतदाता सूचियों की पविष्टियों तथा मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के तीन दिवसीय पशिक्षण कार्यकम कुल 6 अधिकारी अनुपस्थित रहे। छाए रहे बादल, बूंदाबांदी से मिली राहत- रात्रि को इलाके में मूसलाधार बरसात होने के बाद शनिवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर में हुई बूंदाबांदी से इलाके वासियों को गर्मी से बेहद राहत मिली। रात्रि को हुई मूसलाधार बरसात का असर शनिवार को भी रहा। इससे तपन और गर्मी से काफी राहत मिली। शहर एवं आसपास के इलाकों में बादलों की मौजूदगी से धूप भी नाम मात्र की कभी कभार ही खिली। वैसे तो उमस लोगों पर हावी होने का पयास करती रही, लेकिन बीच-बीच में चली ठण्डी हवाओं के चलते गर्मी दूर होती रही। दोपहर के समय हुई बूंदाबांदी से भी क्षेत्रवासियों ने काफी राहत महसूस की।
|
बीएलओ का पशिक्षण शिविर संपन्न बालकृष्ण शुक्ला कोटपूतली। राजकीय सरदार उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहे ब्लाक लेवल अधिकारियों का पशिक्षण शिविर शनिवार को संपन्न हुआ। शिविर के अंतिम दिन निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी डा. रामौतार गुर्जर ने कहा कि मतदाता सूची अपडेशन कार्य के दौरान सावधानी बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि लापरवाही सामने आने पर संबंधित बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने फोटो से वंचित मतदाताओं की फोटो लेने, नए नाम जोडक्वने, अशुद्धियों को दुरूस्त करने आदि के निर्देश दिए। एसडीएम डा. गुर्जर ने बताया कि कोटपूतली विधान सभा क्षेत्र में अट्ठानवे. उनहत्तर पतिशत मतदाताओं की फोटोग्राफी हो चुकी है, शेष रहे एक. इकतीस पतिशत मतदाताओं की फोटोग्राफी जांच के बाद करवाने का पयास किया जा रहा है। एसडीएम ने डबल एंट्री वाले मतदाताओं का नाम एक जगह से काटने के निर्देश भी दिए। इस मौके पर मास्टर ट्रेनर हरचंद मीणा एवं संतोष कुमार खण्डेलवाल ने बीएलओ को मतदाता सूचियों की पविष्टियों एवं मतदाताओं का सत्यापन करने के संबंध में पशिक्षण दिया। उन्होंने मतदाताओं की पहचान करने के साथ ही अशुद्धियों को दुरूस्त करने व नए नाम जोडक्वने के लिए आवेदन भी लेने के निर्देश दिए। सभी ब्लाक लेवल अधिकारी आठ से बीस जुलाई तक मतदाता सूची को अधतन एवं शुद्ध बनाने के लिए घर-घर जाकर पत्येक मतदाता के बारे में जानकारी पाप्त कर मतदाता सूची को तैयार करेंगे और अट्ठारह साल की आयु पूर्ण कर चुके व्यक्पियों का नाम जोडक्वेंगे। इस दौरान जन्म तिथि का साक्ष्य पस्तुत करने वाले मतदाताओं का पहचान पत्र पर जन्म तिथि भी अंकित हो सकेगी। छः बीएलओ को कारण बताओ नोटिसः विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या एक से एक सौ अस्सी तक मतदाता सूचियों की पविष्टियों तथा मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के तीन दिवसीय पशिक्षण कार्यकम कुल छः अधिकारी अनुपस्थित रहे। छाए रहे बादल, बूंदाबांदी से मिली राहत- रात्रि को इलाके में मूसलाधार बरसात होने के बाद शनिवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर में हुई बूंदाबांदी से इलाके वासियों को गर्मी से बेहद राहत मिली। रात्रि को हुई मूसलाधार बरसात का असर शनिवार को भी रहा। इससे तपन और गर्मी से काफी राहत मिली। शहर एवं आसपास के इलाकों में बादलों की मौजूदगी से धूप भी नाम मात्र की कभी कभार ही खिली। वैसे तो उमस लोगों पर हावी होने का पयास करती रही, लेकिन बीच-बीच में चली ठण्डी हवाओं के चलते गर्मी दूर होती रही। दोपहर के समय हुई बूंदाबांदी से भी क्षेत्रवासियों ने काफी राहत महसूस की।
|
- #IPL 2022IPL 2023: पिछले सीजन के बेस्ट बॉलर, जिसमें सर्वाधिक विकेट लेकर भी युजवेंद्र चहल बने 'फिसड्डी'
नई दिल्ली, 14 अप्रैलः दीपक चाहर की चोट ने चेन्नई सुपर किंग्स के साथ-साथ भारतीय टीम की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। चाहर पहले ही आईपीएल 2022 से बाहर हो चुके हैं और सीएसके ने मेगा नीलामी में उन पर 14 करोड़ रुपये खर्च किए थे। अब भारतीय टीम के संदर्भ में बुरी खबर यह है कि चाहर कम से कम चार महीने के लिए बाहर रह सकते हैं। अब उनके टी20 वर्ल्ड कप में खेलने को लेकर भी संशय बन गया है। यह विश्व कप अक्टूबर-नवंबर में इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने जा रहा है।
चाहर बेंगलुरु में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में एक क्वाड्रिसेप्स टियर से उबर रहे थे, फिर उन्हें नेट्स में गेंदबाजी करते हुए पीठ में नई चोट लगी। इसका मतलब है कि सीएसके बाकी सीजन के लिए चाहर के बिना ही खेलने उतरेगा। इस टीम ने चार हार के बाद अपनी पहली जीत दर्ज की है।
वैसे चाहर शुरू में सीजन के दूसरे भाग के लिए टीम में शामिल होने के लिए तैयार थे। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ताजा स्कैन से पता चलता है कि दाएं हाथ के तेज गेंदबाज को कम से कम चार महीने तक मैदान से बाहर रहना पड़ेगा। इसका मतलब है कि वह टी20 वर्ल्ड कप 2022 को भी मिस कर सकते हैं।
इस बीच, 29 वर्षीय चाहर सीएसके टीम के एक महत्वपूर्ण क्रिकेटर के रूप में उभरे थे। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भले ही सबसे तेज नहीं हैं, लेकिन नई गेंद को स्विंग करने की उनकी क्षमता उन्हें एक शक्तिशाली बॉलर बनाती है। स्लॉग ओवरों में काम करने के लिए, पेसर के पास एक तेज यॉर्कर और धीमी गेंद भी होती है।
वे निचले क्रम में एक हिटिंग बल्लेबाज भी हैं, जिसके पास दो एकदिवसीय अर्धशतक भी हैं। इन सभी के कारण, सीएसके ने चाहर को लेने के लिए अपनी तिजोरी से 14 करोड़ रुपये खर्च कर डाले थे। हालाँकि, इसने उन्हें इस सीजन में प्रोफिट का भुगतान नहीं किया क्योंकि रवींद्र जडेजा की अगुवाई वाली टीम को पूरे टूर्नामेंट के लिए चाहर के बिना काम करना होगा।
भारतीय टीम, हालांकि, चाहर के ठीक होने की उम्मीद में रहेगी क्योंकि एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर ऑस्ट्रेलियाई ट्रैक पर एक बड़ी चीज होगा।
|
- #IPL दो हज़ार बाईसIPL दो हज़ार तेईस: पिछले सीजन के बेस्ट बॉलर, जिसमें सर्वाधिक विकेट लेकर भी युजवेंद्र चहल बने 'फिसड्डी' नई दिल्ली, चौदह अप्रैलः दीपक चाहर की चोट ने चेन्नई सुपर किंग्स के साथ-साथ भारतीय टीम की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। चाहर पहले ही आईपीएल दो हज़ार बाईस से बाहर हो चुके हैं और सीएसके ने मेगा नीलामी में उन पर चौदह करोड़ रुपये खर्च किए थे। अब भारतीय टीम के संदर्भ में बुरी खबर यह है कि चाहर कम से कम चार महीने के लिए बाहर रह सकते हैं। अब उनके टीबीस वर्ल्ड कप में खेलने को लेकर भी संशय बन गया है। यह विश्व कप अक्टूबर-नवंबर में इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने जा रहा है। चाहर बेंगलुरु में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में एक क्वाड्रिसेप्स टियर से उबर रहे थे, फिर उन्हें नेट्स में गेंदबाजी करते हुए पीठ में नई चोट लगी। इसका मतलब है कि सीएसके बाकी सीजन के लिए चाहर के बिना ही खेलने उतरेगा। इस टीम ने चार हार के बाद अपनी पहली जीत दर्ज की है। वैसे चाहर शुरू में सीजन के दूसरे भाग के लिए टीम में शामिल होने के लिए तैयार थे। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ताजा स्कैन से पता चलता है कि दाएं हाथ के तेज गेंदबाज को कम से कम चार महीने तक मैदान से बाहर रहना पड़ेगा। इसका मतलब है कि वह टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस को भी मिस कर सकते हैं। इस बीच, उनतीस वर्षीय चाहर सीएसके टीम के एक महत्वपूर्ण क्रिकेटर के रूप में उभरे थे। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भले ही सबसे तेज नहीं हैं, लेकिन नई गेंद को स्विंग करने की उनकी क्षमता उन्हें एक शक्तिशाली बॉलर बनाती है। स्लॉग ओवरों में काम करने के लिए, पेसर के पास एक तेज यॉर्कर और धीमी गेंद भी होती है। वे निचले क्रम में एक हिटिंग बल्लेबाज भी हैं, जिसके पास दो एकदिवसीय अर्धशतक भी हैं। इन सभी के कारण, सीएसके ने चाहर को लेने के लिए अपनी तिजोरी से चौदह करोड़ रुपये खर्च कर डाले थे। हालाँकि, इसने उन्हें इस सीजन में प्रोफिट का भुगतान नहीं किया क्योंकि रवींद्र जडेजा की अगुवाई वाली टीम को पूरे टूर्नामेंट के लिए चाहर के बिना काम करना होगा। भारतीय टीम, हालांकि, चाहर के ठीक होने की उम्मीद में रहेगी क्योंकि एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर ऑस्ट्रेलियाई ट्रैक पर एक बड़ी चीज होगा।
|
India becomes IAEA external auditor: जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर जीसी मुर्मू (GC Murmu) को IAEA के एक्सटर्नल ऑडिटर (External auditor) के रूप में नियुक्त गया है.
भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के लिए एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में चुना गया है. IAEA एक प्रतिष्ठित संस्थान है जो परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है. भारत का चुनाव 2022 से 2027 तक छह साल की अवधि के लिए किया गया है. इस पद के लिए भारत ने जर्मनी (Germany) और ब्रिटेन (Britain) जैसे मुल्कों को मात दी है. भारत के कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल जीसी मुर्मू (GC Murmu) को IAEA के एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में नियुक्त गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जीसी मुर्मू की उम्मीदवारी को IAEA आम सम्मेलन का बहुमत प्राप्त हुआ.
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि IAEA का ऑडिटर चुना जाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की स्थिति और CAG की साख, प्रोफेशनलिज्म और अनुभव की वैश्विक स्वीकृति को मान्यता देता है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, CAG की बोली को IAEA आम सम्मेलन का बहुमत समर्थन मिला, जिसके लिए विभिन्न देशों से कई बोलियां लगाई गईं. इस पद के लिए पहले दौर के मतदान में जर्मनी को 36, भारत को 30, ब्रिटेन को 8, रूस को 11, तुर्की को 9, मिस्र को 20, दक्षिण कोरिया को 2 और फिलीपींस को 7 वोट मिले. दूसरे दौर में भारत और जर्मनी के बीच की दौड़ में भारत ने यूरोपीय देश को मात दी.
वहीं, भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) के 10 गैर-स्थायी सदस्यों में से भी है, जिनका चुनाव दो साल के लिए होता है. चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं. वोटिंग के लिए डाले गए कुल मतपत्रों की संख्या 125 थी. हालांकि, दो लोग अनुपस्थित रहे और इस तरह 123 लोगों की मौजूदगी की वजह से आवश्यक बहुमत 62 रहा. इससे पहले, भारत 2012 से 2015 तक IAEA का एक्सटर्नल ऑडिटर रह चुका है. मुर्मू ने पिछले साल 8 अगस्त को भारत के कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल के रूप में कार्यभार संभाला था.
बता दें कि जीसी मुर्मू जम्मू-कश्मीर के गवर्नर भी रह चुके हैं. इससे पहले उन्होंने सरकार के विभिन्न विभागों में काम किया है. वह व्यय विभाग के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग और राजस्व विभाग में विशेष और अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं. IAEA आम सम्मेलन का 65वां वार्षिक नियमित सत्र 20 से 24 सितंबर तक वियना (Vienna) में आयोजित किया गया था. पूरे हफ्ते में, संगठन ने परमाणु विषयों पर 80 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए. IAEA परमाणु क्षेत्र में सहयोग के लिए दुनिया का केंद्र है, जो परमाणु प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है.
|
India becomes IAEA external auditor: जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर जीसी मुर्मू को IAEA के एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में नियुक्त गया है. भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के लिए एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में चुना गया है. IAEA एक प्रतिष्ठित संस्थान है जो परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है. भारत का चुनाव दो हज़ार बाईस से दो हज़ार सत्ताईस तक छह साल की अवधि के लिए किया गया है. इस पद के लिए भारत ने जर्मनी और ब्रिटेन जैसे मुल्कों को मात दी है. भारत के कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल जीसी मुर्मू को IAEA के एक्सटर्नल ऑडिटर के रूप में नियुक्त गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जीसी मुर्मू की उम्मीदवारी को IAEA आम सम्मेलन का बहुमत प्राप्त हुआ. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि IAEA का ऑडिटर चुना जाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की स्थिति और CAG की साख, प्रोफेशनलिज्म और अनुभव की वैश्विक स्वीकृति को मान्यता देता है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, CAG की बोली को IAEA आम सम्मेलन का बहुमत समर्थन मिला, जिसके लिए विभिन्न देशों से कई बोलियां लगाई गईं. इस पद के लिए पहले दौर के मतदान में जर्मनी को छत्तीस, भारत को तीस, ब्रिटेन को आठ, रूस को ग्यारह, तुर्की को नौ, मिस्र को बीस, दक्षिण कोरिया को दो और फिलीपींस को सात वोट मिले. दूसरे दौर में भारत और जर्मनी के बीच की दौड़ में भारत ने यूरोपीय देश को मात दी. वहीं, भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दस गैर-स्थायी सदस्यों में से भी है, जिनका चुनाव दो साल के लिए होता है. चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं. वोटिंग के लिए डाले गए कुल मतपत्रों की संख्या एक सौ पच्चीस थी. हालांकि, दो लोग अनुपस्थित रहे और इस तरह एक सौ तेईस लोगों की मौजूदगी की वजह से आवश्यक बहुमत बासठ रहा. इससे पहले, भारत दो हज़ार बारह से दो हज़ार पंद्रह तक IAEA का एक्सटर्नल ऑडिटर रह चुका है. मुर्मू ने पिछले साल आठ अगस्त को भारत के कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल के रूप में कार्यभार संभाला था. बता दें कि जीसी मुर्मू जम्मू-कश्मीर के गवर्नर भी रह चुके हैं. इससे पहले उन्होंने सरकार के विभिन्न विभागों में काम किया है. वह व्यय विभाग के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग और राजस्व विभाग में विशेष और अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं. IAEA आम सम्मेलन का पैंसठवां वार्षिक नियमित सत्र बीस से चौबीस सितंबर तक वियना में आयोजित किया गया था. पूरे हफ्ते में, संगठन ने परमाणु विषयों पर अस्सी से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए. IAEA परमाणु क्षेत्र में सहयोग के लिए दुनिया का केंद्र है, जो परमाणु प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है.
|
बुधवार रात चिम्मन टांडा गांव के पास खेतों में जंगली हाथी पहुंच गए। गुरुवार सुबह तक हाथी खेतों में उत्पात करते रहे। सुबह खेत गए किसानों ने जंगली हाथियों को देख शोर करके उनको भगाने की कोशिश की। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। उन्होंने खेत की घेराबंदी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है।
बुधवार रात दो हाथी चिम्मन टांडा की सावित्री देवी के खेत में आ गए। हाथियों ने फसल रौंद कर और चबाकर नष्ट की। गांव के बलराम ने बताया कि गुरुवार सुबह जब किसान खेत पहुंचे तो हाथियों को देख दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और टिन, पीपे आदि पीटकर उनको भगाने की कोशिश की। हाथियों के टस से मस न होने पर उन्होंने वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। रेंजर दिनेश बडोला के निर्देश पर वन दारोगा सुरेंद्र सिंह, फारेस्ट गार्ड श्याम सिंह, रमाशंकर पांडे, नसीम अहमद और संदीप आदि पहुंचे और हाथियों को भगाने का भरसक प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हो सके। वहां पहुंचे कोतवाल हनुमान प्रसाद ने बताया कि वन विभाग और एसएसबी के जवानों ने खेत की घेराबंदी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। मानसून के दौरान दुधवा पार्क से लगे तराई क्षेत्र के किसानों की फसलों को जंगली हाथी नुकसान पहुंचाते हैं। उनको खे तों से भगाने की कोशिश करने पर किसानों को अक्सर उनके आक्रोश का भी सामना करना पड़ता है। रेंजर दिनेश बडोला ने बताया कि ऐसा लगता है कि दुधवा नेशनल पार्क से बेला परसुआ होते हुए सीमा पर आए हाथियों के झुंड से ये दो हाथी बिछड़ गए हैं और गन्ने के खेत में छिपे हैं। रात तक उनके यहां से चले जाने की उम्मीद है। वनकर्मियों की टीम लगी हुई है।
|
बुधवार रात चिम्मन टांडा गांव के पास खेतों में जंगली हाथी पहुंच गए। गुरुवार सुबह तक हाथी खेतों में उत्पात करते रहे। सुबह खेत गए किसानों ने जंगली हाथियों को देख शोर करके उनको भगाने की कोशिश की। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। उन्होंने खेत की घेराबंदी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। बुधवार रात दो हाथी चिम्मन टांडा की सावित्री देवी के खेत में आ गए। हाथियों ने फसल रौंद कर और चबाकर नष्ट की। गांव के बलराम ने बताया कि गुरुवार सुबह जब किसान खेत पहुंचे तो हाथियों को देख दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और टिन, पीपे आदि पीटकर उनको भगाने की कोशिश की। हाथियों के टस से मस न होने पर उन्होंने वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। रेंजर दिनेश बडोला के निर्देश पर वन दारोगा सुरेंद्र सिंह, फारेस्ट गार्ड श्याम सिंह, रमाशंकर पांडे, नसीम अहमद और संदीप आदि पहुंचे और हाथियों को भगाने का भरसक प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हो सके। वहां पहुंचे कोतवाल हनुमान प्रसाद ने बताया कि वन विभाग और एसएसबी के जवानों ने खेत की घेराबंदी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। मानसून के दौरान दुधवा पार्क से लगे तराई क्षेत्र के किसानों की फसलों को जंगली हाथी नुकसान पहुंचाते हैं। उनको खे तों से भगाने की कोशिश करने पर किसानों को अक्सर उनके आक्रोश का भी सामना करना पड़ता है। रेंजर दिनेश बडोला ने बताया कि ऐसा लगता है कि दुधवा नेशनल पार्क से बेला परसुआ होते हुए सीमा पर आए हाथियों के झुंड से ये दो हाथी बिछड़ गए हैं और गन्ने के खेत में छिपे हैं। रात तक उनके यहां से चले जाने की उम्मीद है। वनकर्मियों की टीम लगी हुई है।
|
गर्लफ्रेंड (GirlFriend) से प्यार का इजहार करना आज कल लड़कों के लिए काफी आम बात हो गया है। पहले के समय में जहां लड़के अपनी दिल की बात बताने के लिए 100 बार सोचते थे वहीं अब बिना किसी हिचकीचाहट के लोग अपने प्यार का इजहार कर देते हैं।
24 साल के भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने प्रदर्शन से वाहवाही लुटी है। कुलदीप यादव ने मौजूदा वर्ल्ड कप मे पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप मुकाबले में जिस गेंद पर बाबर को बोल्ड किया से सबको आकर्षित किया है।
आईसीसी (icc) क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 मे रविवार को भारत और पाकिस्तान जब मैनचेस्टर के मैदान पर भारतीय टीम ने पाकिस्तान को डकवर्थ लुईस नियम(drs) के अनुसार 89 रनो से हराया, जिसके साथ भारत ने पाकिस्तान को लगातार सातवी बार शिकस्त दी।
मैनचेस्टर के मौसम को देखते हुए भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि हालात और ओवरों की संख्या के मद्देनजर पाकिस्तान के खिलाफ रविवार को विश्व कप के मैच के लिये टीम संयोजन तय किया जायेगा।
आईसीसी (ICC) क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 मे रविवार को भारत और पाकिस्तान जब मैनचेस्टर के मैदान पर आमने- सामने होंगे तो रोमांच चरम पर होगा।
|
गर्लफ्रेंड से प्यार का इजहार करना आज कल लड़कों के लिए काफी आम बात हो गया है। पहले के समय में जहां लड़के अपनी दिल की बात बताने के लिए एक सौ बार सोचते थे वहीं अब बिना किसी हिचकीचाहट के लोग अपने प्यार का इजहार कर देते हैं। चौबीस साल के भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने प्रदर्शन से वाहवाही लुटी है। कुलदीप यादव ने मौजूदा वर्ल्ड कप मे पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप मुकाबले में जिस गेंद पर बाबर को बोल्ड किया से सबको आकर्षित किया है। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस मे रविवार को भारत और पाकिस्तान जब मैनचेस्टर के मैदान पर भारतीय टीम ने पाकिस्तान को डकवर्थ लुईस नियम के अनुसार नवासी रनो से हराया, जिसके साथ भारत ने पाकिस्तान को लगातार सातवी बार शिकस्त दी। मैनचेस्टर के मौसम को देखते हुए भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि हालात और ओवरों की संख्या के मद्देनजर पाकिस्तान के खिलाफ रविवार को विश्व कप के मैच के लिये टीम संयोजन तय किया जायेगा। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस मे रविवार को भारत और पाकिस्तान जब मैनचेस्टर के मैदान पर आमने- सामने होंगे तो रोमांच चरम पर होगा।
|
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, बड़ी संख्या में सांसद और कई देशों के राजदूत इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने।
उन्होंने सवाल किया, "ज़रा सोचिए, इन सब को रौंद कर बनाई जा रही संसद की नई इमारत कैसी होगी? " प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को नये संसद भवन की आधारशिला रखी। चार मंजिला नये संसद भवन का निर्माण कार्य भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, बड़ी संख्या में सांसद और कई देशों के राजदूत इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने।
Parliament is not mortar & stones,
It envisions Democracy,
It imbibes Constitution,
It is Economic-Political-Social Equality,
It is Compassion & Camaraderie,
It is aspirations of 130 Cr Indians.
Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, बड़ी संख्या में सांसद और कई देशों के राजदूत इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने। उन्होंने सवाल किया, "ज़रा सोचिए, इन सब को रौंद कर बनाई जा रही संसद की नई इमारत कैसी होगी? " प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को नये संसद भवन की आधारशिला रखी। चार मंजिला नये संसद भवन का निर्माण कार्य भारत की स्वतंत्रता की पचहत्तरवीं वर्षगांठ तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, बड़ी संख्या में सांसद और कई देशों के राजदूत इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने। Parliament is not mortar & stones, It envisions Democracy, It imbibes Constitution, It is Economic-Political-Social Equality, It is Compassion & Camaraderie, It is aspirations of एक सौ तीस Cr Indians. Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
बस्तर के IG सुंदरराज पी ने 20 अप्रैल को कहा था- हर साल गर्मी के मौसम में नक्सलियों की हिंसक घटनाएं बढ़ जाती है, सुरक्षा बलों पर हमला करना और हिंसात्मक गतिविधियां की जाती हैं। 2022 में नक्सली कोई बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे पाए, 2023 में भी हम उनकी साजिश को नाकाम करेंगे।
'इस साल 2023 में नक्सली कोई बड़ी घटना की साजिश करते हैं तो इसे हम नाकाम करेंगे. . . ' ये बातें पिछले गुरुवार को कही गईं। अब बुधवार 26 अप्रैल को दंतेवाड़ा से खबर आई कि नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया इसमें 10 जवान शहीद हो गए। इस रिपोर्ट में जानिए प्रदेश में हुए बड़े नक्सल अटैक्स के बारे में जिनमें से लगभग सभी घटनाएं गर्मी के महीनों में ही हुईं।
अप्रैल के ही महीने में साल 2021 में बीजापुर में एक गांव में नक्सलियों ने जवानों को घेरकर फायरिंग की 22 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद अब दंतेवाड़ा में 10 जानें ले लीं, इसी साल फरवरी में नक्सलियों के हमले में 3 जवान शहीद हुए। साल 2013 के मई के महीने में कांग्रेस नेताओं पर हुआ झीरम हमला कोई नहीं भूला, इसमें 30 नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी।
नक्सली गर्मी में टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चलाते हैं। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देख पाना संभव होता है। नदी-नाले सूखने के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है। नक्सली साल भर अपनी मांद में दुबककर साथियों की मौत, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को चुपचाप देखते हैं। बाद में टीसीओसी में पलटवार करते हैं।
नक्सली गर्मियों के महीनों में बेहद आक्रामक होते हैं। जानकार बताते हैं कि अप्रैल, मई के महीने में जंगल सूख जाते हैं। हरियाली जिसकी आड़ में छुपकर नक्सली जीवन बिताते हैं वो नहीं बचती। इस वजह से वो अटैकिंग मोड में रहते हैं। साल 2021 से 2023 की ताजा घटनाओं को समझें तो सिर्फ इसी दरम्यान 30 से ज्यादा जवानों की जान नक्सलियों ने ली है।
बीजापुर की घटना हालिया सालों का सबसे बड़ा हमला था। उस सर्चिंग में जवान 1500 से अधिक की तादाद में थे। इस हमले में फोर्स को घेरने में नक्सलियों का साथ गांव के लोगों ने भी दिया। CRPF के DG कुलदीप सिंह ने बताया था कि जहां जवानों पर हमला हुआ वहां के जन मीलिशिया (गांव के ऐसे लोग जो नक्सलियों के लिए काम करते हैं) मिलकर जवानों को घेरने लगे। दूर कहीं उन्होंने LMG (लाइट मशीन गन) लगा कर रखी थी, उसी से हैवी फायरिंग की गई।
नवंबर 2020 में इसी तरह के हमले में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट शहीद हो गए थे। 22 मार्च 2020 में नक्सलियों की फायरिंग में 3 जवान शहीद हो गए थे इसमें 6 नक्सलियों के मारे जाने की खबर थी।
मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ के सुकमा स्थित किस्टाराम एरिया में नक्सलियों ने आइईडी विस्फोट की घटना को अंजाम दिया। इस विस्फोट में सीआरपीएफ के 212 बटालियन के 9 जवान शहीद हो गए थे।
इसी साल 25 फरवरी को सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्याें की सुरक्षा देने के लिए जगरगुंडा कैंप से पुलिस जवानों की टुकड़ी मोटरसाइकिल पर रवाना हुई थी जहां पर पहले से घात लगाए नक्सलियों ने पुलिस टुकड़ी पर फायरिंग कर दी जिसमें 3 पुलिस जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद डीजीपी अशाेक जुनेजा ने घटना स्थल का भी जायजा लिया और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत की।
नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी घटना 6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी। इसमें सीआरपीएफ के 76 और जिला बल के एक जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों के बड़े दल ने जवानों पर हमला किया था ये महीना भी अप्रैल का ही था।
सुकमा जिले के मिनपा में 21 मार्च 2020 को नक्सलियों की बस्तर दंडकारण्य (बस्तर) कमेटी ने जवानों पर हमला किया था। 17 जवान शहीद हुए थे। तीन नक्सलियों को भी जवानों ने मार गिराया था। फिर मई के महीने में इस कांड से जुड़ा वीडियो नक्सलियों ने जारी किया और दावा किया गया है कि 17 नहीं 19 जवानों को मारा और एके 47, इंसास जैसी 15 बदूंकें और जवानों की वॉकी-टॉकी, गोलियां लूटी। लूट के हथियार की नक्सलियों ने प्रदर्शनी लगाई थी।
24 अप्रैल साल 2017 बुर्कापाल कैंप के 90 जवानों का दल रोड ओपनिंग और निर्माण की सुरक्षा के लिए निकला था। फोर्स के जवान भोजन करके बैठे ही थे कि एंबुश लगाए नक्सलियों ने दोपहर करीब 1 बजे हमला कर दिया। 25 जवान इस हमले में शहीद हुए थे।
अप्रैल का ही महीना और साल था 2019। दंतेवाड़ा से भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या 9 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव प्रचार से जिला मुख्याल लौटने के दौरान हुई थी। नकुलनार के श्यामगिरी गांव के पास आईईडी लगाकर नक्सलियों ने उनके काफिले को विस्फोट से उड़ा दिया था। इसमें विधायक भीमा मंडावी उनके ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड सहित कुल चार लोगों की मौत हो गई थी।
25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने एंबुश लगाया था, जिसमें राज्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता शहीद हो गए थे। इसमें तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के अलावा कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर कहलाने वाले महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत 29 लोग शामिल थे। इस वारदात के ठीक साढ़े पांच साल के बाद कांग्रेस सत्ता में वापस आई। इसके बाद से ही कयास लग रहे थे कि हमले का सच सामने आएगा जो नहीं आया।
प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने हाल ही में बयान दिया था कि, विकास,विश्वास और सुरक्षा की रणनीति के कारण ही प्रदेश में नक्सली हिंसा की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है। गृहमंत्रालय दावा करता है कि बीते 3-4 सालों मंे 1 हजार से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। 50 नक्सली मारे गए। कभी 50 प्रतिशत को कभी 70 प्रतिशत नक्सल वारदातों मंे कमी का दावा किया जाता है।
प्रदेश में नई नक्सल उन्मूलन नीति बनी है। इसमें नक्सल हिंसा से पीड़ित लोगों के साथ ही नक्सलियों के लिए भी योजना और ऑफर हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
बस्तर के IG सुंदरराज पी ने बीस अप्रैल को कहा था- हर साल गर्मी के मौसम में नक्सलियों की हिंसक घटनाएं बढ़ जाती है, सुरक्षा बलों पर हमला करना और हिंसात्मक गतिविधियां की जाती हैं। दो हज़ार बाईस में नक्सली कोई बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे पाए, दो हज़ार तेईस में भी हम उनकी साजिश को नाकाम करेंगे। 'इस साल दो हज़ार तेईस में नक्सली कोई बड़ी घटना की साजिश करते हैं तो इसे हम नाकाम करेंगे. . . ' ये बातें पिछले गुरुवार को कही गईं। अब बुधवार छब्बीस अप्रैल को दंतेवाड़ा से खबर आई कि नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया इसमें दस जवान शहीद हो गए। इस रिपोर्ट में जानिए प्रदेश में हुए बड़े नक्सल अटैक्स के बारे में जिनमें से लगभग सभी घटनाएं गर्मी के महीनों में ही हुईं। अप्रैल के ही महीने में साल दो हज़ार इक्कीस में बीजापुर में एक गांव में नक्सलियों ने जवानों को घेरकर फायरिंग की बाईस जवान शहीद हुए थे। इसके बाद अब दंतेवाड़ा में दस जानें ले लीं, इसी साल फरवरी में नक्सलियों के हमले में तीन जवान शहीद हुए। साल दो हज़ार तेरह के मई के महीने में कांग्रेस नेताओं पर हुआ झीरम हमला कोई नहीं भूला, इसमें तीस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। नक्सली गर्मी में टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन चलाते हैं। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देख पाना संभव होता है। नदी-नाले सूखने के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है। नक्सली साल भर अपनी मांद में दुबककर साथियों की मौत, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को चुपचाप देखते हैं। बाद में टीसीओसी में पलटवार करते हैं। नक्सली गर्मियों के महीनों में बेहद आक्रामक होते हैं। जानकार बताते हैं कि अप्रैल, मई के महीने में जंगल सूख जाते हैं। हरियाली जिसकी आड़ में छुपकर नक्सली जीवन बिताते हैं वो नहीं बचती। इस वजह से वो अटैकिंग मोड में रहते हैं। साल दो हज़ार इक्कीस से दो हज़ार तेईस की ताजा घटनाओं को समझें तो सिर्फ इसी दरम्यान तीस से ज्यादा जवानों की जान नक्सलियों ने ली है। बीजापुर की घटना हालिया सालों का सबसे बड़ा हमला था। उस सर्चिंग में जवान एक हज़ार पाँच सौ से अधिक की तादाद में थे। इस हमले में फोर्स को घेरने में नक्सलियों का साथ गांव के लोगों ने भी दिया। CRPF के DG कुलदीप सिंह ने बताया था कि जहां जवानों पर हमला हुआ वहां के जन मीलिशिया मिलकर जवानों को घेरने लगे। दूर कहीं उन्होंने LMG लगा कर रखी थी, उसी से हैवी फायरिंग की गई। नवंबर दो हज़ार बीस में इसी तरह के हमले में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट शहीद हो गए थे। बाईस मार्च दो हज़ार बीस में नक्सलियों की फायरिंग में तीन जवान शहीद हो गए थे इसमें छः नक्सलियों के मारे जाने की खबर थी। मार्च दो हज़ार अट्ठारह में छत्तीसगढ़ के सुकमा स्थित किस्टाराम एरिया में नक्सलियों ने आइईडी विस्फोट की घटना को अंजाम दिया। इस विस्फोट में सीआरपीएफ के दो सौ बारह बटालियन के नौ जवान शहीद हो गए थे। इसी साल पच्चीस फरवरी को सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्याें की सुरक्षा देने के लिए जगरगुंडा कैंप से पुलिस जवानों की टुकड़ी मोटरसाइकिल पर रवाना हुई थी जहां पर पहले से घात लगाए नक्सलियों ने पुलिस टुकड़ी पर फायरिंग कर दी जिसमें तीन पुलिस जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद डीजीपी अशाेक जुनेजा ने घटना स्थल का भी जायजा लिया और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत की। नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी घटना छः अप्रैल दो हज़ार दस को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी। इसमें सीआरपीएफ के छिहत्तर और जिला बल के एक जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों के बड़े दल ने जवानों पर हमला किया था ये महीना भी अप्रैल का ही था। सुकमा जिले के मिनपा में इक्कीस मार्च दो हज़ार बीस को नक्सलियों की बस्तर दंडकारण्य कमेटी ने जवानों पर हमला किया था। सत्रह जवान शहीद हुए थे। तीन नक्सलियों को भी जवानों ने मार गिराया था। फिर मई के महीने में इस कांड से जुड़ा वीडियो नक्सलियों ने जारी किया और दावा किया गया है कि सत्रह नहीं उन्नीस जवानों को मारा और एके सैंतालीस, इंसास जैसी पंद्रह बदूंकें और जवानों की वॉकी-टॉकी, गोलियां लूटी। लूट के हथियार की नक्सलियों ने प्रदर्शनी लगाई थी। चौबीस अप्रैल साल दो हज़ार सत्रह बुर्कापाल कैंप के नब्बे जवानों का दल रोड ओपनिंग और निर्माण की सुरक्षा के लिए निकला था। फोर्स के जवान भोजन करके बैठे ही थे कि एंबुश लगाए नक्सलियों ने दोपहर करीब एक बजे हमला कर दिया। पच्चीस जवान इस हमले में शहीद हुए थे। अप्रैल का ही महीना और साल था दो हज़ार उन्नीस। दंतेवाड़ा से भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या नौ अप्रैल दो हज़ार उन्नीस को लोकसभा चुनाव प्रचार से जिला मुख्याल लौटने के दौरान हुई थी। नकुलनार के श्यामगिरी गांव के पास आईईडी लगाकर नक्सलियों ने उनके काफिले को विस्फोट से उड़ा दिया था। इसमें विधायक भीमा मंडावी उनके ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड सहित कुल चार लोगों की मौत हो गई थी। पच्चीस मई दो हज़ार तेरह को झीरम घाटी में नक्सलियों ने एंबुश लगाया था, जिसमें राज्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता शहीद हो गए थे। इसमें तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के अलावा कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर कहलाने वाले महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत उनतीस लोग शामिल थे। इस वारदात के ठीक साढ़े पांच साल के बाद कांग्रेस सत्ता में वापस आई। इसके बाद से ही कयास लग रहे थे कि हमले का सच सामने आएगा जो नहीं आया। प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने हाल ही में बयान दिया था कि, विकास,विश्वास और सुरक्षा की रणनीति के कारण ही प्रदेश में नक्सली हिंसा की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है। गृहमंत्रालय दावा करता है कि बीते तीन-चार सालों मंे एक हजार से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। पचास नक्सली मारे गए। कभी पचास प्रतिशत को कभी सत्तर प्रतिशत नक्सल वारदातों मंे कमी का दावा किया जाता है। प्रदेश में नई नक्सल उन्मूलन नीति बनी है। इसमें नक्सल हिंसा से पीड़ित लोगों के साथ ही नक्सलियों के लिए भी योजना और ऑफर हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
बात मुंह से निकलती है। इसी से मुंह की बात कह रहा हूँ । चाहे इसमें मुंह की खानी पड़े - अथवा चार लोग कहें कि, 'जी कुछ नहीं मुंहदेखे की बात है। असल में जितने मुंह, उतनी बातें । कहा गया है कि 'ब्राह्मणोऽस्य मुखमा र संयोगवश हम भी
जन्म से भगवान के मुख में से निकले । पता नहीं लार के रूप में या खकार के। किसी मीठी चीज़ को देखकर भगवान के गुरौंह में पानी भर या होगा और तभी से मिष्टान्न ब्राह्मणों को बहुत भाने लगे ।
मुंह कई किस्म के होते हैं। कई मुंह कुछ विधना की भट्टी में से घपके, ज्यादह पके या ऐसे-वैसे ही निकल आते हैं। मनचले उन्हें देखकर मुंह बनाते हैं। पर जो भाई मनचले नहीं, वे भी इन्हें देखकर मुंह लटकाये नहीं रह सकते। देखिए यह चालू जैसे मुंह वाले लाला * ब्राह्मण मुख से पैदा हुए ।
|
बात मुंह से निकलती है। इसी से मुंह की बात कह रहा हूँ । चाहे इसमें मुंह की खानी पड़े - अथवा चार लोग कहें कि, 'जी कुछ नहीं मुंहदेखे की बात है। असल में जितने मुंह, उतनी बातें । कहा गया है कि 'ब्राह्मणोऽस्य मुखमा र संयोगवश हम भी जन्म से भगवान के मुख में से निकले । पता नहीं लार के रूप में या खकार के। किसी मीठी चीज़ को देखकर भगवान के गुरौंह में पानी भर या होगा और तभी से मिष्टान्न ब्राह्मणों को बहुत भाने लगे । मुंह कई किस्म के होते हैं। कई मुंह कुछ विधना की भट्टी में से घपके, ज्यादह पके या ऐसे-वैसे ही निकल आते हैं। मनचले उन्हें देखकर मुंह बनाते हैं। पर जो भाई मनचले नहीं, वे भी इन्हें देखकर मुंह लटकाये नहीं रह सकते। देखिए यह चालू जैसे मुंह वाले लाला * ब्राह्मण मुख से पैदा हुए ।
|
धर्मपाल वशिष्ठ चंडीगढ़। हरियाणा के वित्त मंत्री सरदार हरमोहिन्द सिंह चट्ठा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा पंजाबी समाज का मान सम्मान किया है और कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलती है। श्री चट्ठा ने आज रतिया विधानसभा क्षेत्र के गांव रतनगढ, मिराना, ब्राह्मणवाला, बलियाला, बोडा, खाई, महमदकी, पिलछियां, नंगल, लुठेरा सहित लगभग डेढ दर्जन गांवों का दौरा कर कांग्रेस पत्याशी जरनैल सिंह के लिए चुनाव पचार कर रहे थे। श्री चट्ठा ने कहा कि जनता विपक्ष की असलियत पहचान चुकी है और उपचुनाव में कांग्रेस पत्याशियों को जीताकर सरकार में सीधी भागीदारी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता अब भलीभांति समझ चुकी है कि विपक्षी नेता और विधायक क्षेत्र का विकास करवाने में सक्षम नहीं है और वे केवल खोखली ब्यानबाजी कर सकते हैं लेकिन जनता ब्यानबाजी नहीं अपितु तेज गति का विकास चाहती है जो केवल कांग्रेसी विधायक ही करवा सकता है। उन्होंने कहा कि रतिया क्षेत्र की जनता के साथ हमेशा धोखा हुआ है। विपक्षी उम्मीदवार चुनाव के समय वोट बटोरने का काम करते हैं और चुनावों के उपरांत क्षेत्र में दिखाई तक नहीं देते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पत्याशी जरनैल सिंह जनता के बीच के उम्मीदवार हैं और कांग्रेस पार्टी ने उम्मीदवार बनाकर आपके बीच में भेजा है जो रतिया क्षेत्र की मांग को विधानसभा में उठाकर रतिया क्षेत्र के विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि आप इस बनी बनाई सरकार में सांझेदारी कर रतिया के विकास में अपना सहयोग दें। श्री चट्ठा ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में रतिया समूचे हरियाणा पदेश में अपनी एक अलग पहचान कायम करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष शेष हैं और अब तक विपक्ष में रहे दोनों विधानसभा क्षेत्र के लोग भी कांग्रेस विधायक को जीताकर सत्ता में सीधी भागीदारी करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सता में रहते हुए श्री चौटाला ने रतिया की सुध नहीं ली लेकिन अब उप-चुनाव आने पर वहां जाकर विकास करवाने के आधारहीन और खोखले वायदे कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि वर्ष 1977 के बाद 13 वर्षों तक इनेलो की सरकार रही है लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए चौटाला परिवार को कभी रतिया की याद क्यों नहीं आई। श्री चट्ठा ने कहा कि विपक्षी दल केवल जातिवाद फैलाकर वोट हासिल करना जानते हैं जबकि कांग्रेस पार्टी सभी धर्मों, जातियों और इलाकों का समुचित सम्मान करते हुए उन्हें सरकार में भागीदारी देती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी भारत के पधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह के पधानमंत्रीत्व और काबलियत की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सदैव ही सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है लेकिन विपक्षी भाजपा उन्हीं मनमोहन सिंह को कमजोर बताने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि पदेश सरकार में भी सभी को समुचित भागीदारी व जिम्मेदारी मिली हुई है।
|
धर्मपाल वशिष्ठ चंडीगढ़। हरियाणा के वित्त मंत्री सरदार हरमोहिन्द सिंह चट्ठा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा पंजाबी समाज का मान सम्मान किया है और कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलती है। श्री चट्ठा ने आज रतिया विधानसभा क्षेत्र के गांव रतनगढ, मिराना, ब्राह्मणवाला, बलियाला, बोडा, खाई, महमदकी, पिलछियां, नंगल, लुठेरा सहित लगभग डेढ दर्जन गांवों का दौरा कर कांग्रेस पत्याशी जरनैल सिंह के लिए चुनाव पचार कर रहे थे। श्री चट्ठा ने कहा कि जनता विपक्ष की असलियत पहचान चुकी है और उपचुनाव में कांग्रेस पत्याशियों को जीताकर सरकार में सीधी भागीदारी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता अब भलीभांति समझ चुकी है कि विपक्षी नेता और विधायक क्षेत्र का विकास करवाने में सक्षम नहीं है और वे केवल खोखली ब्यानबाजी कर सकते हैं लेकिन जनता ब्यानबाजी नहीं अपितु तेज गति का विकास चाहती है जो केवल कांग्रेसी विधायक ही करवा सकता है। उन्होंने कहा कि रतिया क्षेत्र की जनता के साथ हमेशा धोखा हुआ है। विपक्षी उम्मीदवार चुनाव के समय वोट बटोरने का काम करते हैं और चुनावों के उपरांत क्षेत्र में दिखाई तक नहीं देते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पत्याशी जरनैल सिंह जनता के बीच के उम्मीदवार हैं और कांग्रेस पार्टी ने उम्मीदवार बनाकर आपके बीच में भेजा है जो रतिया क्षेत्र की मांग को विधानसभा में उठाकर रतिया क्षेत्र के विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि आप इस बनी बनाई सरकार में सांझेदारी कर रतिया के विकास में अपना सहयोग दें। श्री चट्ठा ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में रतिया समूचे हरियाणा पदेश में अपनी एक अलग पहचान कायम करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष शेष हैं और अब तक विपक्ष में रहे दोनों विधानसभा क्षेत्र के लोग भी कांग्रेस विधायक को जीताकर सत्ता में सीधी भागीदारी करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सता में रहते हुए श्री चौटाला ने रतिया की सुध नहीं ली लेकिन अब उप-चुनाव आने पर वहां जाकर विकास करवाने के आधारहीन और खोखले वायदे कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के बाद तेरह वर्षों तक इनेलो की सरकार रही है लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए चौटाला परिवार को कभी रतिया की याद क्यों नहीं आई। श्री चट्ठा ने कहा कि विपक्षी दल केवल जातिवाद फैलाकर वोट हासिल करना जानते हैं जबकि कांग्रेस पार्टी सभी धर्मों, जातियों और इलाकों का समुचित सम्मान करते हुए उन्हें सरकार में भागीदारी देती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी भारत के पधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह के पधानमंत्रीत्व और काबलियत की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सदैव ही सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है लेकिन विपक्षी भाजपा उन्हीं मनमोहन सिंह को कमजोर बताने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि पदेश सरकार में भी सभी को समुचित भागीदारी व जिम्मेदारी मिली हुई है।
|
कैटरीना कैफ ने अपने शुरुआती कैरियर के दौर में भले ही हर तरह की फिल्में की हों लेकिन अब वे अपने कैरियर के लिए बेहद चूजी हो गई हैं. यही वजह है उन की भी आमिर खान की तरह साल में इक्कादुक्का फिल्में ही रिलीज होती हैं. फिलहाल कैटरीना फिल्म 'फितूर' को ले कर बड़ी जनूनी हो रही हैं. उन के मुताबिक, फितूर ने कलाकार के तौर पर उन के जनून को फिर से जिंदा कर दिया, "जब यह फिल्म शुरू हुई तो हम लोग सुस्त हो गए थे लेकिन बाद में मैं ने समझना शुरू किया और इस फिल्म से बहुतकुछ सीखा." हालांकि एक सच यह भी है इस फिल्म में देरी रेखा की वजह से हो रही है. पहले वे लीड रोल में थीं और बाद में किन्हीं कारणों से फिल्म छोड़ दी और उन्हें तब्बू ने रिप्लेस किया और फिल्म को दोबारा शूट करना पड़ा. इस के चलते फिल्म लटक गई.
|
कैटरीना कैफ ने अपने शुरुआती कैरियर के दौर में भले ही हर तरह की फिल्में की हों लेकिन अब वे अपने कैरियर के लिए बेहद चूजी हो गई हैं. यही वजह है उन की भी आमिर खान की तरह साल में इक्कादुक्का फिल्में ही रिलीज होती हैं. फिलहाल कैटरीना फिल्म 'फितूर' को ले कर बड़ी जनूनी हो रही हैं. उन के मुताबिक, फितूर ने कलाकार के तौर पर उन के जनून को फिर से जिंदा कर दिया, "जब यह फिल्म शुरू हुई तो हम लोग सुस्त हो गए थे लेकिन बाद में मैं ने समझना शुरू किया और इस फिल्म से बहुतकुछ सीखा." हालांकि एक सच यह भी है इस फिल्म में देरी रेखा की वजह से हो रही है. पहले वे लीड रोल में थीं और बाद में किन्हीं कारणों से फिल्म छोड़ दी और उन्हें तब्बू ने रिप्लेस किया और फिल्म को दोबारा शूट करना पड़ा. इस के चलते फिल्म लटक गई.
|
Yuvika Chaudhary: युविका चौधरी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनके दिल के सबसे करीबी की मौत हो चुकी है। दरअसल युविका के पेट बडी का देहांत हो गया है। कहा जा रहा है कि बडी का देहांत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है।
नई दिल्ली। बिग बॉस के विनर रहे प्रिंस नरूला इस वक्त कंगना के शो लॉकअप में अपना समय बिता रहे हैं लेकिन उनकी पत्नी युविका चौधरी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनके दिल के सबसे करीबी की मौत हो चुकी है। दरअसल युविका के पेट बडी का देहांत हो गया है। कहा जा रहा है कि बडी का देहांत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है। इस बात की जानकारी खुद युविका चौधरी ने सोशल मीडिया पर शेयर की है और अपने दिल का दर्द बयां किया है। उन्होंने पेट की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो युविका के पेट की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई है और ये घटना तब घटी जब पेट ग्राउंड में खेल रहा था। सब कुछ बहुत अचानक से हुआ। युविका पेट के अचानक निधन से काफी दुखी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को शेयर किया है और अपने दुख को कम करने की कोशिश की है। फैंस भी बडी की आत्मा की शांति के लिए प्रे कर रहे हैं।
|
Yuvika Chaudhary: युविका चौधरी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनके दिल के सबसे करीबी की मौत हो चुकी है। दरअसल युविका के पेट बडी का देहांत हो गया है। कहा जा रहा है कि बडी का देहांत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है। नई दिल्ली। बिग बॉस के विनर रहे प्रिंस नरूला इस वक्त कंगना के शो लॉकअप में अपना समय बिता रहे हैं लेकिन उनकी पत्नी युविका चौधरी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही हैं। उनके दिल के सबसे करीबी की मौत हो चुकी है। दरअसल युविका के पेट बडी का देहांत हो गया है। कहा जा रहा है कि बडी का देहांत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है। इस बात की जानकारी खुद युविका चौधरी ने सोशल मीडिया पर शेयर की है और अपने दिल का दर्द बयां किया है। उन्होंने पेट की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो युविका के पेट की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई है और ये घटना तब घटी जब पेट ग्राउंड में खेल रहा था। सब कुछ बहुत अचानक से हुआ। युविका पेट के अचानक निधन से काफी दुखी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को शेयर किया है और अपने दुख को कम करने की कोशिश की है। फैंस भी बडी की आत्मा की शांति के लिए प्रे कर रहे हैं।
|
लखनऊ : नरेश अग्रवाल ने साइकल छोड़ दी है। अब भला गर्मी के मौसम में कौन साइकलों पर चलता है। तो अपने नरेश ने भी भगवा गमछा सिर पर डाल लिया है। लेकिन उनसे बहुत बड़ी गलती हो गई। पार्टी तो बदल ली लेकिन अपनी पिछली निशानियां जहां तहां पसरी रहने दी। अब मुए विरोधी पुरानी बयानबाजी के वीडियोज सोशल नेटवर्क पर रायते की तरह फैला रहे हैं। ऐसे में मुझसे उनका दुःख नहीं देखा जाता। तो पूरी रिसर्च के बाद बहुते काम का ज्ञान निकाले हैं। आप भी पढ़ लीजिए शायद कभी पार्टी छोडनी पड़े तो बाबा चिरकन के ताबीज की तरह शर्तिया काम आएगा।
तो सबसे पहले पतंजलि की अगरबत्ती जला लो। क्योंकि यही है जो हमें कैंसर फैलाने वाले मिनरल आयल से बचाती है। शतप्रतिशत देशी है. . . . अरे बीच में मत बोलो यार। ज्ञान लेने से पहले माहौल भी वैसा होना चाहिए की नहीं होना चाहिए। तो फिर सामने जो दरी है उसपर बैठ जाओ। जब तक कहा न जाए मुहं और उसे भी बंद रखना। (समझ तो गए होगे क्या बंद रखना है)।
1 कभी भी नई वाली पार्टी में जाने से पहले और बाद में पुरानी पार्टी की इज्जत नहीं उतारना चाहिए। क्या पता मामला पटे नहीं और फिर पुरानी वाली को गले लगाना पड़े। इसलिए बोलो मुहं खोलो लेकिन मुहं की बवासीर किसी को मत दिखाओ।
2 जैसे ही पार्टी के साथ सौदा पटे दो चार या दस लड़कों को ट्वीट और फेसबुक की पोस्ट डिलीट करने में लगा दो। बहुत बेरोजगारी है बाबा। कम पैसे में लड़के मिल जाएंगे। लेकिन कुछ भी गंध बचनी नहीं चाहिए।
3 अगर बेटा जवान हो तो उसे पहले नई पार्टी में भी भेज सकते हैं। ताकि वो माहौल बना सके बाद में स्वयं इंट्री ले लो। अपने साथ अपने ही टाइप के या फिर पैसे देकर सौ-दो सौ मजदूरों को भी पार्टी में घुसा दो भौकाल बन जाएगा।
4 ज्यादा बोल बचन से बचो। नई पार्टी में जाने के बाद अध्यक्ष जी जब कुछ बोलें तो सिर्फ मुस्कराते रहो। जब माले की बारी आए तो साफ़ मना कर दो। ये कहो कि ये माला तब ही गले में जाएगी जब चुनाव जीत कर आपके पास आएंगे।
5 कोशिश करो कि जिस बीच के बंदे ने नई पार्टी में सैटिंग करवाईं है। वो सदस्यता समारोह में ही अध्यक्ष जी से सभी बातें मंच से बुलवा ले। वर्ना बाद में सिर्फ गुर्दे में खुजली होगी हाथ में कुछ नहीं आएगा।
6 अपने नारद मित्रों को बोलें कि सदस्यता समारोह से पहले सिर्फ अच्छी अच्छी बातें ही सामने आनी चाहिए। इसके लिए उनकी दवा का भरपूर इंतजाम रखना चाहिए। शाम की।
अब ये 6 टिप्स गांठ बांध लो बिलकुल बाबा चिरकन के ताबीज की तरह। जब मौका मिले रट्टा मार लेना। बाकी जय भीम, जय समाजवाद और जय श्री राम।
नोट : नेता जी, बुरी लगे तो माफी। लेकिन कही-सही पर विचार जरुर करिएगा।
|
लखनऊ : नरेश अग्रवाल ने साइकल छोड़ दी है। अब भला गर्मी के मौसम में कौन साइकलों पर चलता है। तो अपने नरेश ने भी भगवा गमछा सिर पर डाल लिया है। लेकिन उनसे बहुत बड़ी गलती हो गई। पार्टी तो बदल ली लेकिन अपनी पिछली निशानियां जहां तहां पसरी रहने दी। अब मुए विरोधी पुरानी बयानबाजी के वीडियोज सोशल नेटवर्क पर रायते की तरह फैला रहे हैं। ऐसे में मुझसे उनका दुःख नहीं देखा जाता। तो पूरी रिसर्च के बाद बहुते काम का ज्ञान निकाले हैं। आप भी पढ़ लीजिए शायद कभी पार्टी छोडनी पड़े तो बाबा चिरकन के ताबीज की तरह शर्तिया काम आएगा। तो सबसे पहले पतंजलि की अगरबत्ती जला लो। क्योंकि यही है जो हमें कैंसर फैलाने वाले मिनरल आयल से बचाती है। शतप्रतिशत देशी है. . . . अरे बीच में मत बोलो यार। ज्ञान लेने से पहले माहौल भी वैसा होना चाहिए की नहीं होना चाहिए। तो फिर सामने जो दरी है उसपर बैठ जाओ। जब तक कहा न जाए मुहं और उसे भी बंद रखना। । एक कभी भी नई वाली पार्टी में जाने से पहले और बाद में पुरानी पार्टी की इज्जत नहीं उतारना चाहिए। क्या पता मामला पटे नहीं और फिर पुरानी वाली को गले लगाना पड़े। इसलिए बोलो मुहं खोलो लेकिन मुहं की बवासीर किसी को मत दिखाओ। दो जैसे ही पार्टी के साथ सौदा पटे दो चार या दस लड़कों को ट्वीट और फेसबुक की पोस्ट डिलीट करने में लगा दो। बहुत बेरोजगारी है बाबा। कम पैसे में लड़के मिल जाएंगे। लेकिन कुछ भी गंध बचनी नहीं चाहिए। तीन अगर बेटा जवान हो तो उसे पहले नई पार्टी में भी भेज सकते हैं। ताकि वो माहौल बना सके बाद में स्वयं इंट्री ले लो। अपने साथ अपने ही टाइप के या फिर पैसे देकर सौ-दो सौ मजदूरों को भी पार्टी में घुसा दो भौकाल बन जाएगा। चार ज्यादा बोल बचन से बचो। नई पार्टी में जाने के बाद अध्यक्ष जी जब कुछ बोलें तो सिर्फ मुस्कराते रहो। जब माले की बारी आए तो साफ़ मना कर दो। ये कहो कि ये माला तब ही गले में जाएगी जब चुनाव जीत कर आपके पास आएंगे। पाँच कोशिश करो कि जिस बीच के बंदे ने नई पार्टी में सैटिंग करवाईं है। वो सदस्यता समारोह में ही अध्यक्ष जी से सभी बातें मंच से बुलवा ले। वर्ना बाद में सिर्फ गुर्दे में खुजली होगी हाथ में कुछ नहीं आएगा। छः अपने नारद मित्रों को बोलें कि सदस्यता समारोह से पहले सिर्फ अच्छी अच्छी बातें ही सामने आनी चाहिए। इसके लिए उनकी दवा का भरपूर इंतजाम रखना चाहिए। शाम की। अब ये छः टिप्स गांठ बांध लो बिलकुल बाबा चिरकन के ताबीज की तरह। जब मौका मिले रट्टा मार लेना। बाकी जय भीम, जय समाजवाद और जय श्री राम। नोट : नेता जी, बुरी लगे तो माफी। लेकिन कही-सही पर विचार जरुर करिएगा।
|
देहरादून (वीअ)। पदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकताओं ने बुधवार को स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के अग्रनायक पंजाब केसरी लाला लाजपतराय की 81वी पुण्यतिथि पर भारत की आजादी में उनके योगदान को समरण कर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की। पदेश कांग्रेस मुख्यालय सभागार में कांग्रेस स्थापना की 125 वीं जयंती के उपलच्य में चल रहें कार्पामों की कड़ी में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की पुण्य तिथि पर एक कार्पाम का आयोजन किया गया। इन मौके पर उपस्थित कांग्रेस जनों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्पाम में बोलते हुये पदेश पवक्ता सुरेन्द आर्य ने कहा कि लाला लाजपत राय ने आर्यसमाज और कांग्रेस पार्टी के माध्यम से सािढय रह कर समाज सेवा और भारत की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हेने भारत के व्यापारिक जगत की वित्तीय समस्याओं के हल के लिये पंजाब नैशनल बैक की स्थापना की साथ ही जनता के हक और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज को बुलंद करने के लिये दैनिक समाचार पत्र की शुरूवात किया। उनके द्वारा लिखे गये लेखों, यंग इंडिया, इग्लैण्ड डैट टू इंडिया, द पलिटिकल फियुचरऑफ इण्डिया और अनहैप्पी इन्डिया, ने भारत के पबुद्ध समाज को वैचारिक उत्तेजना पदान की। इस मौके पर बोलते हुये पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने लाला लाजपतराय के कांग्रेस पार्टी के संग"न और उसके अधिवेशनें में व्यक्त विचारों को आज भी महत्वपूर्ण बताया, उन्होंने कहा कि लालालाजपत राय ने कांग्रेस के 1905 में बनारस में हुये अधिवेशन में विदेशी वस्त्राsं के बहिष्कार का पुरजोर समर्थन किया। श्रद्धाजंलि सभा में पदेश महामंत्री शंकर चन्द रमोला, सुमेर चन्द रवि, स्वतंत्रता सेनानी तोता राम काला ने भी अपने विचार व्यक्त कियें। इस अवसर पर जितेन्द चौहान पृथ्वी सिंह, पमोद मुंशी, जितेन्द सक्सेना, कुंवर सिंह यादव आदि अनेक कार्यकता उपस्थित रहे।
|
देहरादून । पदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकताओं ने बुधवार को स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के अग्रनायक पंजाब केसरी लाला लाजपतराय की इक्यासीवी पुण्यतिथि पर भारत की आजादी में उनके योगदान को समरण कर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की। पदेश कांग्रेस मुख्यालय सभागार में कांग्रेस स्थापना की एक सौ पच्चीस वीं जयंती के उपलच्य में चल रहें कार्पामों की कड़ी में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की पुण्य तिथि पर एक कार्पाम का आयोजन किया गया। इन मौके पर उपस्थित कांग्रेस जनों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्पाम में बोलते हुये पदेश पवक्ता सुरेन्द आर्य ने कहा कि लाला लाजपत राय ने आर्यसमाज और कांग्रेस पार्टी के माध्यम से सािढय रह कर समाज सेवा और भारत की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हेने भारत के व्यापारिक जगत की वित्तीय समस्याओं के हल के लिये पंजाब नैशनल बैक की स्थापना की साथ ही जनता के हक और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज को बुलंद करने के लिये दैनिक समाचार पत्र की शुरूवात किया। उनके द्वारा लिखे गये लेखों, यंग इंडिया, इग्लैण्ड डैट टू इंडिया, द पलिटिकल फियुचरऑफ इण्डिया और अनहैप्पी इन्डिया, ने भारत के पबुद्ध समाज को वैचारिक उत्तेजना पदान की। इस मौके पर बोलते हुये पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने लाला लाजपतराय के कांग्रेस पार्टी के संग"न और उसके अधिवेशनें में व्यक्त विचारों को आज भी महत्वपूर्ण बताया, उन्होंने कहा कि लालालाजपत राय ने कांग्रेस के एक हज़ार नौ सौ पाँच में बनारस में हुये अधिवेशन में विदेशी वस्त्राsं के बहिष्कार का पुरजोर समर्थन किया। श्रद्धाजंलि सभा में पदेश महामंत्री शंकर चन्द रमोला, सुमेर चन्द रवि, स्वतंत्रता सेनानी तोता राम काला ने भी अपने विचार व्यक्त कियें। इस अवसर पर जितेन्द चौहान पृथ्वी सिंह, पमोद मुंशी, जितेन्द सक्सेना, कुंवर सिंह यादव आदि अनेक कार्यकता उपस्थित रहे।
|
शीर्ष अदालत ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनके जवाब मांगे। याचिका में एक मामले को सीबीआई दिल्ली को स्थानांतरित करने की भी मांग की गयी है जो अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में एक महिला की मौत के सिलसिले में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दर्ज किया गया था।
याचिका न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। इसमें कहा गया कि महिला ने 30 जुलाई को आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने आपबीती सुनाई और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी समेत कुछ लोगों के नाम लेते हुए उन्हें कथित रूप से अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया।
दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह का बयान मृत्यु पूर्व बयान की तरह है और पुलिस ने आज तक उन लोगों के खिलाफ कोई जांच नहीं की जिनके नाम महिला ने वीडियो में विशेष रूप से लिये थे।
याचिका में आरोप है कि महिला ने वीडियो में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह पुलिस के एक आला अधिकारी का नाम प्रमुखता से लिया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस साल मई में महिला और उसके खिलाफ अपने ट्विटर एकाउंट से अनेक 'अशोभनीय ट्वीट' किये।
|
शीर्ष अदालत ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनके जवाब मांगे। याचिका में एक मामले को सीबीआई दिल्ली को स्थानांतरित करने की भी मांग की गयी है जो अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में एक महिला की मौत के सिलसिले में भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छः के तहत दर्ज किया गया था। याचिका न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। इसमें कहा गया कि महिला ने तीस जुलाई को आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने आपबीती सुनाई और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी समेत कुछ लोगों के नाम लेते हुए उन्हें कथित रूप से अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह का बयान मृत्यु पूर्व बयान की तरह है और पुलिस ने आज तक उन लोगों के खिलाफ कोई जांच नहीं की जिनके नाम महिला ने वीडियो में विशेष रूप से लिये थे। याचिका में आरोप है कि महिला ने वीडियो में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह पुलिस के एक आला अधिकारी का नाम प्रमुखता से लिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस साल मई में महिला और उसके खिलाफ अपने ट्विटर एकाउंट से अनेक 'अशोभनीय ट्वीट' किये।
|
Posted On:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के बारे में समझौता ज्ञापन को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की। इस समझौता ज्ञापन पर स्विट्जरलैंड में 13 सितंबर, 2019 को हस्ताक्षर हुए थे।
पर्यावरण में गिरावट का समाज के बेहतर तबकों के मुकाबले सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित तबकों पर कहीं अधिक प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण में गिरावट को दूर करने के किसी प्रयास से समाज के सभी तबकों के लिए बेहतर पर्यावरणीय संसाधनों की उपलब्धता के रूप में पर्यावरण की समानता को बढ़ावा मिलेगा।
इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के लागू कानूनों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए समानता, पारस्परिकता और आपसी लाभ के आधार पर दोनों देशों में पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में नजदीकी और दीर्घकालीन सहयोग को स्थापित करने और बढ़ावा देने मदद मिलेगी। यह दोनों देशों के बीच जानकारी और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के द्वारा सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाएगा। इसके अलावा इससे बेहतर पर्यावरण सुरक्षा, बेहतर संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के बेहतर प्रबंधन तथा वन्यजीवन सुरक्षा/संरक्षण स्थापित करने के लिए उपयुक्त नवीनतम प्रौद्योगिकियों और बेहतर प्रक्रियाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
|
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के बारे में समझौता ज्ञापन को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की। इस समझौता ज्ञापन पर स्विट्जरलैंड में तेरह सितंबर, दो हज़ार उन्नीस को हस्ताक्षर हुए थे। पर्यावरण में गिरावट का समाज के बेहतर तबकों के मुकाबले सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित तबकों पर कहीं अधिक प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण में गिरावट को दूर करने के किसी प्रयास से समाज के सभी तबकों के लिए बेहतर पर्यावरणीय संसाधनों की उपलब्धता के रूप में पर्यावरण की समानता को बढ़ावा मिलेगा। इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के लागू कानूनों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए समानता, पारस्परिकता और आपसी लाभ के आधार पर दोनों देशों में पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में नजदीकी और दीर्घकालीन सहयोग को स्थापित करने और बढ़ावा देने मदद मिलेगी। यह दोनों देशों के बीच जानकारी और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के द्वारा सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाएगा। इसके अलावा इससे बेहतर पर्यावरण सुरक्षा, बेहतर संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के बेहतर प्रबंधन तथा वन्यजीवन सुरक्षा/संरक्षण स्थापित करने के लिए उपयुक्त नवीनतम प्रौद्योगिकियों और बेहतर प्रक्रियाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
|
वाशिंगटन, 6 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रांत अलाबामा में आए बवंडर के चलते हुए हादसों में मरने वाले 23 लोगों में एक परिवार के सात सदस्य भी शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बचाव दल ने कहा कि चार बच्चों सहित हर मृतक अपने घरों के करीब पाया गया। ली काउंटी के कॉरनर बिल हैरिस ने एक न्यूज कांफ्रेंस में बताया कि मृतकों की उम्र छह से लेकर 89 वर्ष तक के बीच है।
बीबीसी ने मंगलवार को बताया कि आठ लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि इसमें बचे एक शख्स ने परिवार के सात सदस्यों को खो दिया और कहा कि कई अंतिम संस्कार करने के कारण उसे आर्थिक समस्या का सामाना करने पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग परिवार की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।
पूर्वी अलाबामा में रविवार को बवंडर आया था।
दक्षिण-पूर्व अलाबामा और जॉर्जिया में आए बवंडर के चलते कई घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसना पहुंचा और कम से कम 50 लोग घायल हो गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुक्रवार को क्षेत्र का दौरा करने की योजना है।
|
वाशिंगटन, छः मार्च । अमेरिकी प्रांत अलाबामा में आए बवंडर के चलते हुए हादसों में मरने वाले तेईस लोगों में एक परिवार के सात सदस्य भी शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बचाव दल ने कहा कि चार बच्चों सहित हर मृतक अपने घरों के करीब पाया गया। ली काउंटी के कॉरनर बिल हैरिस ने एक न्यूज कांफ्रेंस में बताया कि मृतकों की उम्र छह से लेकर नवासी वर्ष तक के बीच है। बीबीसी ने मंगलवार को बताया कि आठ लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इसमें बचे एक शख्स ने परिवार के सात सदस्यों को खो दिया और कहा कि कई अंतिम संस्कार करने के कारण उसे आर्थिक समस्या का सामाना करने पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग परिवार की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। पूर्वी अलाबामा में रविवार को बवंडर आया था। दक्षिण-पूर्व अलाबामा और जॉर्जिया में आए बवंडर के चलते कई घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसना पहुंचा और कम से कम पचास लोग घायल हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुक्रवार को क्षेत्र का दौरा करने की योजना है।
|
उपस्थित हो सकते हैं। पर उह सरकार के स्वरूप को निर्धारित करने का अधिकार नहीं होगा। किसी स्वाभिमानी राष्ट्र को इससे अधिक और क्या अपमान प्रदान किया जा सकता था।"
दूसरे, यह अनुभव किया गया कि लाड बर्केनहेड अपने को विजेता के रूप में पेश कर रहा है और अपनी इच्छा जनता को अधीन मानकर उन पर लाद रहा है। भारतीय नेता 1927 मे आक्सफोड छानों के समक्ष उसके भाषण को अब भी नहीं भूले थे जिसमे उसने कहा था, "भारत पर हमारा पारितोषिकीय अधिकार है । इग्लैंड म हमे उसी के आश्रित रहना है और भारतीयो को वहा हमारे आश्रित यह काम आप युवा लोगो का है कि आप अपने खून की अतिम बूंद तक भारत पर अधिकार बनाये रखने की चेष्टा करें । '
भारतीय राष्ट्रवादियों के लिये मजदूर और उदार सदस्यों का अनुदार वादियों को इस मामले में सहयोग भी क्म कष्टदायी नहीं था। इसने "ब्रिटिश उदारवादियों व समाजवादियों के प्रति उनके विश्वास को हिलाकर रख दिया । ""
1927 मे ही वु० कैथरीन मेयो की पुस्तक 'मदर इडिया' प्रकाशित हुई जिसमें विशेष प्रयास करके भारतीय समाज की सामाजिक व धार्मिक बुराइया ढूंढकर एकत्रित की गई थी । इसे पश्चिमी जगत के समक्ष इस तरह उजागर किया गया जसे कि यही भारतीय समाज की विशेषता हो । भारत को एक अत्यधिक पिछड़े और बबर देश के रूप में पेश किया गया जिससे भारतीय नेताओं को ग्लानि व क्रोध का अनुभव हुआ। इसमे उह ब्रिटिश साम्राज्यवादिया की चाल दिखाई पडी जो इस तरह की चाला के द्वारा भारत पर अपनी पकड़ बनाये रखना चाहते थे। इसके अतिरिक्त आयोग भारत की ओर किसी नीति के अपनाने की योजना नही रखता था और इस अभाव को सभी संप्रदाया के बुद्धि वाले नापसद करते थे ।
इस तरह सभी गोरा युक्त बना हुआ आयोग पूर्ण असफलता की ओर आगे वढा । कांग्रेस सहित सभी भारतीय दल मुस्लिम लीग और उदारवादियो ने जायोग की रचना का विरोध किया और सर तेजबहादुर सप्रू, एनी बेसेण्ट, श्री एम० ए० जिना, श्री याकूब हसन और अन्य अखिल भारतीय नेताओ ने 16 नवम्बर 1927 के एक स्वहस्ताभरित माग पत्र मे हर तरह के असहयोग की घोषणा की। श्री एस० श्रीनिवासन आयगर जो वाग्रेस के अध्यक्ष थे, ने इस भारतीय विरोध के कई कारण बताये
1 रोड, सरस्टनले द इंडिया आई निव (1897-1947) प 191921 2 बनर्जी ए सी इंडियन कास्टीच्यूशनल डाकू मटस, भाग 3 व 196
आधुनिक भारतीय इतिहास - - एक प्रगत अध्ययन
(1) 'भारतीय लाग अपन संविधान की रचना के अधिकारी हैं इस अधिकार को निश्चित हो नवार दिया गया है ।" (2) " ऐसी किसी छानबीन से अपने को नहीं जोड़ना चाहते जो हमारे स्वराज की योग्यता पर पश्नचिह्न लगाये । ' ( 3 ) "तोसरा कारण निश्चित रूप से भारतीय स्वाभिमान को पहुँचाई गई वह चोट है जिसने अतगत आयोग म किसी भारतीय को स्थान नही प्रदान किया गया है ।" (4) आयोग हम पर थोपा गया है जिसे हम नहीं चाहते और इस समय तो बिल्कुल नही " (5) 'बहिष्कार का अतिम कारण इन प्रस्तावा के पीछे छिपा अस्ताव व पृष्ठभूमि है। इससे यह नहीं लगता कि हमारे प्रति उदारता के दशन हुये हैं बल्कि उनके वठोर होने का चित्र सामने आया है।"
पर आयोग ने देश की यात्रा से अपना कार्य करना प्रारंभ किया और नौकरशाही तथा उनके चमचो से तथ्य प्राप्त करना प्रारंभ किया। पर ये जहा भी गये धूमधाम से इनका काले अडा, हडतालो और बहिष्कारो से स्वागत हुआ। 'साइमन वापस जाओ ही इनका नारा था जिसे इसे हर जगह झेलना पड़ा। पुलिस को बम्बई और मद्रास में गोली चलानी पड़ी और लाहौर जसे स्थान पर जन विरोध को शांत करने के लिये लाठी चाज करना पडा । पर यह सब बेकार गया । लाला लाजपतराय को लाहौर में लाठी से ही चोट लगी तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू और जी० बी० पत उत्तर प्रदेश में विरोध का नेतृत्व वरते हुये बुरी तरह घायत हुये। पर आयोग अपन काय में लगा रहा और अतत उसने अपनी रिपोट प्रस्तुत कर दी जो दो भागो में प्रकाशित हुई - प्रथम 11 जून को और द्वितीय 24 जून, 1930 को ।
साइमन कमीशन रिपोर्ट
परिस्थिति के अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट में नये संविधान पर जोर देत हुये कहा गया कि "इसमें एसी धारायें होनी चाहिए जिससे इसका विकास अपने आप हो' एव इसके ध्ययो पर विचार करते समय यह निश्चित नहीं करना चाहिये कि इसके लिये कितना कुछ करना होगा और कित चरणा से होकर गुजरना होगा ।' आयोग ने बहुत सो संस्तुतिया की ।
1 द इंडियन एनुअल रजिस्टर 1927 भाग 2, 2 नहरू जवाहरान आटोदाईग्राफीप 174
प्राप्तों के सम्म ध में
प्रान्तों के संबंध में आयोग ने सस्तुत किया कि (1) द्वितन का उद्देश्य ले पूरा हो गया है इसलिये अब इसे समाप्त कर दिया जाय और गवनरों के द्वारा बहुमत दल मे से मती नामजद किया जाना चाहिये जो प्राता का शासन अपने हाथ मे ले । ये मत्री जिनके बीच गवनर को पोटफोलियो का विभाजन करना चाहिये, और जिनकी बैठको से गवर्नर को सभापतित्व करना चाहिये उह विधायकों के प्रति उत्तरदायी होता चाहिये । पर मंत्रि मडल की रचना लचीली होनी चाहिये जिससे कि आवश्यकतानुसार गवनर उसमे नौकरशाही के तत्वा का भी समावेश वर सके । (2) वेद्रीय सरकार अनावश्यक रूप से प्राप्त के प्रशासकीय व वैधानिक कार्यों में हस्तक्षेप न करे । पर साथ ही गयनो को आवश्यकतानुसार मfat के नियो को न मानने का भी अधिकार होना चाहिये । कुछ आवश्यक उद्देश्यो जसे अल्पमत वालो की रक्षा के लिये गवनर की शक्ति निश्चित हो जानी चाहिये । संविधान की अक्षमता की स्थिति मे उह गवनर जनरल से निर्देश तथा शक्ति दोनो प्राप्त होना चाहिय । ( 3 ) प्रातीय विधान सभाओं मे मताधिकार का विचार किया जाना चाहिये और इसमे अधिक से अधिक महिला मतदाताओं को सम्मिलित किया जाना चाहिये । (4) जब तक कोई और बेहतर तरीवा न निक्ल आये कुछ महत्वपूर्ण अल्पमत वाना को ठीक से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसके लिये साम्प्रदायिक चुनाव क्षेत्र बनाये जाने चाहिये । पिछडे वस्त वर्ग के लागा का सीट सुरक्षित करके सहायता दी जानी चाहिए । (5) विधान सभा को विस्तृत किया जाना चाहिए और विधायक क्षेत्र की सोमा घटा दी जानी चाहिए जिससे उसकी ठीक से व्यवस्था की जा सके । प्रातीय परिषदो को केवल विधायिका के हो अधिकार न देकर अपन प्रति निधित्व प्रणाली पर भी कुछ परन का अधिकार होना चाहिए । (6) प्रातो को विस्तृत आर्थिक साधन प्रयोग में लाना चाहिए । (7) प्रातीय सेना के पुनर्वितरण का मामला फिर से प्रारंभ करना चाहिए और मिधी व उडिया लोगा वा मामला सबसे पहले हाथ में लेना चाहिए । (8) वर्मा को भारत से अलग कर दिया जाना चाहिये और तुरंत उसके लिये अलग से सविधान की व्यवस्था की जानी चाहिए । (9) उत्तर पश्चिम सीमाप्रान्त की एक अलग विधान सभा होनी चाहिए और इस व बलूचिस्तान दोनो को केंद्र में प्रतिनिधिव मिलना चाहिए । (10) भविष्य में आयोग के अनुसार प्रत्येक प्रशत को जहा तक सभव हो अपने घर का माfer होना मालिक चाहिए ।
केंद्रीय विधायित के संबंध में आयोग ने निम्न संस्तुतियाँ वी( 1 ) वेद्रीय विधायिका सघीय एसम्बली' नाम प्रदान किया जाय जिसकी रचना प्राप्ता के प्रतिनिधित्व के आधार पर तथा ब्रिटिश भारत के क्षेत्रों के आधार पर हो । पर इसका आधार जनसङ्ख्या हो । ( 2 ) प्रातीय गवनरो का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्या वे प्रातीय वौसिला से आनु पातिक प्रतिनिधित्वा वे आधार पर चुना जाना चाहिये जिससे पर्याप्त अल्पमतीय लोग का प्रतिनिधित्व हो जाय । उत्तर पश्चिम सीमा प्राप्त और अयक्षेत्रा से बाहर भेजे जाने वाले सदस्य उचित रीति में चुनकर भेजे जाने चाहिए । (3) संधीय एसेम्बली के सदस्य गवनर जनरल वे कौसिल वे ऐसे सदस्य होने चाहिए जो अन्य नामावित सदस्या के साथ सदन में बैठ सर्वे । (4) गैर चुने और चुने सदस्यों के बीच का अनुपात अपरिवर्तित रहना चाहिए और (5) विधान सभा का वाल 5 वप का होना चाहिये ।
राज्य परिषदें
( 1 ) अपने चुने गये और नामित सदस्यों सहित राज्य परिषदा या वही अधिकार चलते रहना चाहिए । ( 2 ) चूकि इनवे सदस्य जो चुने जाते हैं अत्यधिक योग्य होते है, उनका चुनाव प्रातीय निम्न सदनो से जप्रत्यक्ष रीति से होना चाहिए । पर यदि य सस्याए चुनाव के लिये न हा तो इनका चुनाव परिषदा द्वारा होना चाहिए । ( 3 ) इस परिषद का जीवनकाल 7 वप होना चाहिए । (4) केंद्र के दोना सदना के आवि तथा वधानिक अधिकार चलते रहने चाहिये । पर सघीय एसेम्बली को केंद्र द्वारा एकत्रित किये जाने वाले प्रत्यक्ष करा पर मत देने का विशेष अधिकार होना चाहिए जिसकी आय पूर्णतया विभाजनाथ प्रातो में जान थी ।
(1) वेद्रीय कायपालिका के रूप मे कौसिल में गवनर जनरल को ही सब अधिकार प्राप्त होने चाहिये । पर अब से गवनर जनरल को वाय कारिणो के लिय सदस्य नियुक्त करने चाहिये । ( 2 ) वायकारिणी के सदस्यो को वतमान योग्यता बनी रहनी चाहिये । ( 3 ) इन सदस्यो मे से कोई एक ऐसा होना चाहिए जो संघीय परिषद मे नतत्व करे । (4) सेनापति को अब न तो कायकारिणी परिषद और न ही केंद्रीय विधायिका का सदस्य बनाया जाना चाहिये । ( 5 ) केद्र म द्वितन की स्थापना की जानी चाहिए क्योकि केद्रीय वायकारिणी में एकता की रक्षा अति आवश्यक
सेना व भारतीयकरण की आवश्यक्ता स्वीकार की गई। पर आयोग ने भी सस्तुत किया कि भारत की सुरक्षा गवनर जनरल के उत्तरदायित्व क्षेत्र में माना जाना चाहिए जो सम्राट की और उसके अffe की जोर से मेनापति के परामण से काय करेगा। यह भारत सरकार के उत्तरदायित्वों के मश मे नहीं होगा और न इसवा के द्रीय विधायिका से हो सवध होगा।
नागरिक सेवायें
आयोग ने कहा (1) इंडियन सिविल सविस तथा इंडियन पुलिस सर्विस की सुरक्षा सेवाओं की तरह भर्ती अखिल भारतीय सेवाओं के रूप मे सटी आफ स्टेट के हाथ स ही होनी रहे। ऐसे हो विचाई सेवाओ व जगल सेवाओं के विषय मे भी विचार होना चाहिए । (2) आयोग के अनुसार भारतीयकरण की क्रिया चलती रहनी चाहिए । ( 3 ) वतमान लोक सेवा आध्याग के अतिरिक्त प्रान्ता में भी सेवाओं के चयन के लिये ऐसे हो सगठन बनाये जाने चाहिए
इंडिया आफिस के संबध मे
यह सस्तुत किया गया कि (1) कौसिल से गवर्नर जनरल को सिद्धान्तत संवैधानिक रूप से सेट्री आफ स्टट के अधीन रहना चाहिए। यह नियंत्रण मिना ढीला किया जाय, इसे भविष्य के अनुभव के लिये छोड दिया जाय । (2) सेनेट्री आफ स्टट प्रान्तीय सरकाश पर कोई नियंत्रण नहीं रमेगा सिवाय इसके कि वह गवनर में निहित अपने अधिकार का प्रयोग करे। ( 3 ) भारत की मिना की रचना में परिवर्तन होना चाहिए, इसके आकार को छोटा किया जाना चाहिए और इसके बहुल सदस्यो को तात्कालिक भ रतीय अनुभव की योग्यता होनी चाहिए। बौसिल को परामशदात्री संगठन के रूप में काम करना चाहिए। पर इसकी स्वतन्त्र शक्ति सवा शर्तों पर नियंत्रणाय चलती रहनी चाहिए। इसका नियंत्रण ऐसे व्यय पर भी होना चाहिए जिस पर मत न लिया जाता हो ।
आयोग ने 'बेसिल फार ग्रेटर इडिया' नामक संस्था की स्थापना वी मस्तुति को जिमम राजाओ के राज्य का प्रतिनिधित्व हो और ब्रिटिश भारत के सदस्य का भी जो सामान्य हित के मसला पर विचार पर आयोग व अनुसार यह एक ऐसो शुरुआत होगी जिसके आधार पर बहत्तर भारत का
एक सघ बन सकेगा। पर तुर त भविष्य मे ऐसे किसी सघ की रचना सभव न होगी ।
इस तरह की संस्तुतिया थी आयोग को । जसा कि स्पष्ट है, आयोग ने भारत के भविष्य के गत का जिक्र नहीं किया जिस पर स्वाभाविक रूप से जनता ने इतराज किया। वे द्द्रीय सदन के लिये अप्रत्यक्ष चुनाव को सस्तुति स्पष्ट रूप से एक प्रतिनियावादी कदम था । प्रातो मे गवनरों के अधिकार शक्तिपूर्ण थे क्योकि वह मतिया को नामित कर सकता था, उनके बीच काय का विभाजन कर सकता था और उनकी वठक की अध्यक्षता करता था । पर फिर भी भारतीयों के आयोग की संस्तुतिया की भत्सना के बावजूद यह महत्वपूर्ण था। कीथ का विचार है कि भारतीया की सभवत यह गलतो थी कि उन्हाने रिपोट को पूर्णतया वेकार समया । यदि यह स्वीकार कर लिया गया होता तो प्राता में उत्तरदायी सरकारें काफी पहले स्थापित हो गई होती । "" पर यह स्मरण रखा जाना चाहिए कि वसे तो रिपोट पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, पर इसकी संस्तुतिया ध्यान में रखी गई । इनमें से कुछ को 1935 के एक्ट में स्थान दिया गया । इस रिपोट की यह भी महत्ता थी कि इसन सघ के संबंध में भी अपने विचार प्रस्तुत किये और यह भी बताया कि राजा भी इससे भूमिया जदा कर सक्ते हैं। इस राय के आधार पर बाद में काय किया गया और सघ योजना पर भी कायावयन हुआ। 1919 के सुधारों की जसफलता को सरकार ने स्वीकार किया और इसके लिए भी रिपोट का ही जिम्मेदार माना गया ।
नेहरू रिपोर्ट
अनुदारवादी सेकेट्री ऑफ स्टेट लाड बर्केनहेड ने 1925 और पुन 1927 में भारतीया को चुनौती दी कि वे ऐसा संविधान दें कि जो देश के सभी दला को हो । काग्रेस ने चुनौती स्वीकार की और उमने 28 फरवरी 1928 को एक सवदतीय सम्मेलन दिल्ली में आमंत्रित किया जिसमे 29 सगठनों ने अपने प्रतिनिधि भेजे । सम्मेलन न कुछ प्रारम्भिक बातो पर दिल्ली म विचार किया और यह तय किया कि 19 मई 1928 को इसकी दूसरी वॅटव जिसम 9 सदस्या को एक छोटी समिति ५० मोती लाल नेहरू की 1 कोष कांस्टीच्यशनल हिस्ट्री मार इडियाप 29394
|
उपस्थित हो सकते हैं। पर उह सरकार के स्वरूप को निर्धारित करने का अधिकार नहीं होगा। किसी स्वाभिमानी राष्ट्र को इससे अधिक और क्या अपमान प्रदान किया जा सकता था।" दूसरे, यह अनुभव किया गया कि लाड बर्केनहेड अपने को विजेता के रूप में पेश कर रहा है और अपनी इच्छा जनता को अधीन मानकर उन पर लाद रहा है। भारतीय नेता एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस मे आक्सफोड छानों के समक्ष उसके भाषण को अब भी नहीं भूले थे जिसमे उसने कहा था, "भारत पर हमारा पारितोषिकीय अधिकार है । इग्लैंड म हमे उसी के आश्रित रहना है और भारतीयो को वहा हमारे आश्रित यह काम आप युवा लोगो का है कि आप अपने खून की अतिम बूंद तक भारत पर अधिकार बनाये रखने की चेष्टा करें । ' भारतीय राष्ट्रवादियों के लिये मजदूर और उदार सदस्यों का अनुदार वादियों को इस मामले में सहयोग भी क्म कष्टदायी नहीं था। इसने "ब्रिटिश उदारवादियों व समाजवादियों के प्रति उनके विश्वास को हिलाकर रख दिया । "" एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस मे ही वुशून्य कैथरीन मेयो की पुस्तक 'मदर इडिया' प्रकाशित हुई जिसमें विशेष प्रयास करके भारतीय समाज की सामाजिक व धार्मिक बुराइया ढूंढकर एकत्रित की गई थी । इसे पश्चिमी जगत के समक्ष इस तरह उजागर किया गया जसे कि यही भारतीय समाज की विशेषता हो । भारत को एक अत्यधिक पिछड़े और बबर देश के रूप में पेश किया गया जिससे भारतीय नेताओं को ग्लानि व क्रोध का अनुभव हुआ। इसमे उह ब्रिटिश साम्राज्यवादिया की चाल दिखाई पडी जो इस तरह की चाला के द्वारा भारत पर अपनी पकड़ बनाये रखना चाहते थे। इसके अतिरिक्त आयोग भारत की ओर किसी नीति के अपनाने की योजना नही रखता था और इस अभाव को सभी संप्रदाया के बुद्धि वाले नापसद करते थे । इस तरह सभी गोरा युक्त बना हुआ आयोग पूर्ण असफलता की ओर आगे वढा । कांग्रेस सहित सभी भारतीय दल मुस्लिम लीग और उदारवादियो ने जायोग की रचना का विरोध किया और सर तेजबहादुर सप्रू, एनी बेसेण्ट, श्री एमशून्य एशून्य जिना, श्री याकूब हसन और अन्य अखिल भारतीय नेताओ ने सोलह नवम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस के एक स्वहस्ताभरित माग पत्र मे हर तरह के असहयोग की घोषणा की। श्री एसशून्य श्रीनिवासन आयगर जो वाग्रेस के अध्यक्ष थे, ने इस भारतीय विरोध के कई कारण बताये एक रोड, सरस्टनले द इंडिया आई निव प एक लाख इक्यानवे हज़ार नौ सौ इक्कीस दो बनर्जी ए सी इंडियन कास्टीच्यूशनल डाकू मटस, भाग तीन व एक सौ छियानवे आधुनिक भारतीय इतिहास - - एक प्रगत अध्ययन 'भारतीय लाग अपन संविधान की रचना के अधिकारी हैं इस अधिकार को निश्चित हो नवार दिया गया है ।" " ऐसी किसी छानबीन से अपने को नहीं जोड़ना चाहते जो हमारे स्वराज की योग्यता पर पश्नचिह्न लगाये । ' "तोसरा कारण निश्चित रूप से भारतीय स्वाभिमान को पहुँचाई गई वह चोट है जिसने अतगत आयोग म किसी भारतीय को स्थान नही प्रदान किया गया है ।" आयोग हम पर थोपा गया है जिसे हम नहीं चाहते और इस समय तो बिल्कुल नही " 'बहिष्कार का अतिम कारण इन प्रस्तावा के पीछे छिपा अस्ताव व पृष्ठभूमि है। इससे यह नहीं लगता कि हमारे प्रति उदारता के दशन हुये हैं बल्कि उनके वठोर होने का चित्र सामने आया है।" पर आयोग ने देश की यात्रा से अपना कार्य करना प्रारंभ किया और नौकरशाही तथा उनके चमचो से तथ्य प्राप्त करना प्रारंभ किया। पर ये जहा भी गये धूमधाम से इनका काले अडा, हडतालो और बहिष्कारो से स्वागत हुआ। 'साइमन वापस जाओ ही इनका नारा था जिसे इसे हर जगह झेलना पड़ा। पुलिस को बम्बई और मद्रास में गोली चलानी पड़ी और लाहौर जसे स्थान पर जन विरोध को शांत करने के लिये लाठी चाज करना पडा । पर यह सब बेकार गया । लाला लाजपतराय को लाहौर में लाठी से ही चोट लगी तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू और जीशून्य बीशून्य पत उत्तर प्रदेश में विरोध का नेतृत्व वरते हुये बुरी तरह घायत हुये। पर आयोग अपन काय में लगा रहा और अतत उसने अपनी रिपोट प्रस्तुत कर दी जो दो भागो में प्रकाशित हुई - प्रथम ग्यारह जून को और द्वितीय चौबीस जून, एक हज़ार नौ सौ तीस को । साइमन कमीशन रिपोर्ट परिस्थिति के अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट में नये संविधान पर जोर देत हुये कहा गया कि "इसमें एसी धारायें होनी चाहिए जिससे इसका विकास अपने आप हो' एव इसके ध्ययो पर विचार करते समय यह निश्चित नहीं करना चाहिये कि इसके लिये कितना कुछ करना होगा और कित चरणा से होकर गुजरना होगा ।' आयोग ने बहुत सो संस्तुतिया की । एक द इंडियन एनुअल रजिस्टर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस भाग दो, दो नहरू जवाहरान आटोदाईग्राफीप एक सौ चौहत्तर प्राप्तों के सम्म ध में प्रान्तों के संबंध में आयोग ने सस्तुत किया कि द्वितन का उद्देश्य ले पूरा हो गया है इसलिये अब इसे समाप्त कर दिया जाय और गवनरों के द्वारा बहुमत दल मे से मती नामजद किया जाना चाहिये जो प्राता का शासन अपने हाथ मे ले । ये मत्री जिनके बीच गवनर को पोटफोलियो का विभाजन करना चाहिये, और जिनकी बैठको से गवर्नर को सभापतित्व करना चाहिये उह विधायकों के प्रति उत्तरदायी होता चाहिये । पर मंत्रि मडल की रचना लचीली होनी चाहिये जिससे कि आवश्यकतानुसार गवनर उसमे नौकरशाही के तत्वा का भी समावेश वर सके । वेद्रीय सरकार अनावश्यक रूप से प्राप्त के प्रशासकीय व वैधानिक कार्यों में हस्तक्षेप न करे । पर साथ ही गयनो को आवश्यकतानुसार मfat के नियो को न मानने का भी अधिकार होना चाहिये । कुछ आवश्यक उद्देश्यो जसे अल्पमत वालो की रक्षा के लिये गवनर की शक्ति निश्चित हो जानी चाहिये । संविधान की अक्षमता की स्थिति मे उह गवनर जनरल से निर्देश तथा शक्ति दोनो प्राप्त होना चाहिय । प्रातीय विधान सभाओं मे मताधिकार का विचार किया जाना चाहिये और इसमे अधिक से अधिक महिला मतदाताओं को सम्मिलित किया जाना चाहिये । जब तक कोई और बेहतर तरीवा न निक्ल आये कुछ महत्वपूर्ण अल्पमत वाना को ठीक से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इसके लिये साम्प्रदायिक चुनाव क्षेत्र बनाये जाने चाहिये । पिछडे वस्त वर्ग के लागा का सीट सुरक्षित करके सहायता दी जानी चाहिए । विधान सभा को विस्तृत किया जाना चाहिए और विधायक क्षेत्र की सोमा घटा दी जानी चाहिए जिससे उसकी ठीक से व्यवस्था की जा सके । प्रातीय परिषदो को केवल विधायिका के हो अधिकार न देकर अपन प्रति निधित्व प्रणाली पर भी कुछ परन का अधिकार होना चाहिए । प्रातो को विस्तृत आर्थिक साधन प्रयोग में लाना चाहिए । प्रातीय सेना के पुनर्वितरण का मामला फिर से प्रारंभ करना चाहिए और मिधी व उडिया लोगा वा मामला सबसे पहले हाथ में लेना चाहिए । वर्मा को भारत से अलग कर दिया जाना चाहिये और तुरंत उसके लिये अलग से सविधान की व्यवस्था की जानी चाहिए । उत्तर पश्चिम सीमाप्रान्त की एक अलग विधान सभा होनी चाहिए और इस व बलूचिस्तान दोनो को केंद्र में प्रतिनिधिव मिलना चाहिए । भविष्य में आयोग के अनुसार प्रत्येक प्रशत को जहा तक सभव हो अपने घर का माfer होना मालिक चाहिए । केंद्रीय विधायित के संबंध में आयोग ने निम्न संस्तुतियाँ वी वेद्रीय विधायिका सघीय एसम्बली' नाम प्रदान किया जाय जिसकी रचना प्राप्ता के प्रतिनिधित्व के आधार पर तथा ब्रिटिश भारत के क्षेत्रों के आधार पर हो । पर इसका आधार जनसङ्ख्या हो । प्रातीय गवनरो का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्या वे प्रातीय वौसिला से आनु पातिक प्रतिनिधित्वा वे आधार पर चुना जाना चाहिये जिससे पर्याप्त अल्पमतीय लोग का प्रतिनिधित्व हो जाय । उत्तर पश्चिम सीमा प्राप्त और अयक्षेत्रा से बाहर भेजे जाने वाले सदस्य उचित रीति में चुनकर भेजे जाने चाहिए । संधीय एसेम्बली के सदस्य गवनर जनरल वे कौसिल वे ऐसे सदस्य होने चाहिए जो अन्य नामावित सदस्या के साथ सदन में बैठ सर्वे । गैर चुने और चुने सदस्यों के बीच का अनुपात अपरिवर्तित रहना चाहिए और विधान सभा का वाल पाँच वप का होना चाहिये । राज्य परिषदें अपने चुने गये और नामित सदस्यों सहित राज्य परिषदा या वही अधिकार चलते रहना चाहिए । चूकि इनवे सदस्य जो चुने जाते हैं अत्यधिक योग्य होते है, उनका चुनाव प्रातीय निम्न सदनो से जप्रत्यक्ष रीति से होना चाहिए । पर यदि य सस्याए चुनाव के लिये न हा तो इनका चुनाव परिषदा द्वारा होना चाहिए । इस परिषद का जीवनकाल सात वप होना चाहिए । केंद्र के दोना सदना के आवि तथा वधानिक अधिकार चलते रहने चाहिये । पर सघीय एसेम्बली को केंद्र द्वारा एकत्रित किये जाने वाले प्रत्यक्ष करा पर मत देने का विशेष अधिकार होना चाहिए जिसकी आय पूर्णतया विभाजनाथ प्रातो में जान थी । वेद्रीय कायपालिका के रूप मे कौसिल में गवनर जनरल को ही सब अधिकार प्राप्त होने चाहिये । पर अब से गवनर जनरल को वाय कारिणो के लिय सदस्य नियुक्त करने चाहिये । वायकारिणी के सदस्यो को वतमान योग्यता बनी रहनी चाहिये । इन सदस्यो मे से कोई एक ऐसा होना चाहिए जो संघीय परिषद मे नतत्व करे । सेनापति को अब न तो कायकारिणी परिषद और न ही केंद्रीय विधायिका का सदस्य बनाया जाना चाहिये । केद्र म द्वितन की स्थापना की जानी चाहिए क्योकि केद्रीय वायकारिणी में एकता की रक्षा अति आवश्यक सेना व भारतीयकरण की आवश्यक्ता स्वीकार की गई। पर आयोग ने भी सस्तुत किया कि भारत की सुरक्षा गवनर जनरल के उत्तरदायित्व क्षेत्र में माना जाना चाहिए जो सम्राट की और उसके अffe की जोर से मेनापति के परामण से काय करेगा। यह भारत सरकार के उत्तरदायित्वों के मश मे नहीं होगा और न इसवा के द्रीय विधायिका से हो सवध होगा। नागरिक सेवायें आयोग ने कहा इंडियन सिविल सविस तथा इंडियन पुलिस सर्विस की सुरक्षा सेवाओं की तरह भर्ती अखिल भारतीय सेवाओं के रूप मे सटी आफ स्टेट के हाथ स ही होनी रहे। ऐसे हो विचाई सेवाओ व जगल सेवाओं के विषय मे भी विचार होना चाहिए । आयोग के अनुसार भारतीयकरण की क्रिया चलती रहनी चाहिए । वतमान लोक सेवा आध्याग के अतिरिक्त प्रान्ता में भी सेवाओं के चयन के लिये ऐसे हो सगठन बनाये जाने चाहिए इंडिया आफिस के संबध मे यह सस्तुत किया गया कि कौसिल से गवर्नर जनरल को सिद्धान्तत संवैधानिक रूप से सेट्री आफ स्टट के अधीन रहना चाहिए। यह नियंत्रण मिना ढीला किया जाय, इसे भविष्य के अनुभव के लिये छोड दिया जाय । सेनेट्री आफ स्टट प्रान्तीय सरकाश पर कोई नियंत्रण नहीं रमेगा सिवाय इसके कि वह गवनर में निहित अपने अधिकार का प्रयोग करे। भारत की मिना की रचना में परिवर्तन होना चाहिए, इसके आकार को छोटा किया जाना चाहिए और इसके बहुल सदस्यो को तात्कालिक भ रतीय अनुभव की योग्यता होनी चाहिए। बौसिल को परामशदात्री संगठन के रूप में काम करना चाहिए। पर इसकी स्वतन्त्र शक्ति सवा शर्तों पर नियंत्रणाय चलती रहनी चाहिए। इसका नियंत्रण ऐसे व्यय पर भी होना चाहिए जिस पर मत न लिया जाता हो । आयोग ने 'बेसिल फार ग्रेटर इडिया' नामक संस्था की स्थापना वी मस्तुति को जिमम राजाओ के राज्य का प्रतिनिधित्व हो और ब्रिटिश भारत के सदस्य का भी जो सामान्य हित के मसला पर विचार पर आयोग व अनुसार यह एक ऐसो शुरुआत होगी जिसके आधार पर बहत्तर भारत का एक सघ बन सकेगा। पर तुर त भविष्य मे ऐसे किसी सघ की रचना सभव न होगी । इस तरह की संस्तुतिया थी आयोग को । जसा कि स्पष्ट है, आयोग ने भारत के भविष्य के गत का जिक्र नहीं किया जिस पर स्वाभाविक रूप से जनता ने इतराज किया। वे द्द्रीय सदन के लिये अप्रत्यक्ष चुनाव को सस्तुति स्पष्ट रूप से एक प्रतिनियावादी कदम था । प्रातो मे गवनरों के अधिकार शक्तिपूर्ण थे क्योकि वह मतिया को नामित कर सकता था, उनके बीच काय का विभाजन कर सकता था और उनकी वठक की अध्यक्षता करता था । पर फिर भी भारतीयों के आयोग की संस्तुतिया की भत्सना के बावजूद यह महत्वपूर्ण था। कीथ का विचार है कि भारतीया की सभवत यह गलतो थी कि उन्हाने रिपोट को पूर्णतया वेकार समया । यदि यह स्वीकार कर लिया गया होता तो प्राता में उत्तरदायी सरकारें काफी पहले स्थापित हो गई होती । "" पर यह स्मरण रखा जाना चाहिए कि वसे तो रिपोट पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, पर इसकी संस्तुतिया ध्यान में रखी गई । इनमें से कुछ को एक हज़ार नौ सौ पैंतीस के एक्ट में स्थान दिया गया । इस रिपोट की यह भी महत्ता थी कि इसन सघ के संबंध में भी अपने विचार प्रस्तुत किये और यह भी बताया कि राजा भी इससे भूमिया जदा कर सक्ते हैं। इस राय के आधार पर बाद में काय किया गया और सघ योजना पर भी कायावयन हुआ। एक हज़ार नौ सौ उन्नीस के सुधारों की जसफलता को सरकार ने स्वीकार किया और इसके लिए भी रिपोट का ही जिम्मेदार माना गया । नेहरू रिपोर्ट अनुदारवादी सेकेट्री ऑफ स्टेट लाड बर्केनहेड ने एक हज़ार नौ सौ पच्चीस और पुन एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में भारतीया को चुनौती दी कि वे ऐसा संविधान दें कि जो देश के सभी दला को हो । काग्रेस ने चुनौती स्वीकार की और उमने अट्ठाईस फरवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस को एक सवदतीय सम्मेलन दिल्ली में आमंत्रित किया जिसमे उनतीस सगठनों ने अपने प्रतिनिधि भेजे । सम्मेलन न कुछ प्रारम्भिक बातो पर दिल्ली म विचार किया और यह तय किया कि उन्नीस मई एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस को इसकी दूसरी वॅटव जिसम नौ सदस्या को एक छोटी समिति पचास मोती लाल नेहरू की एक कोष कांस्टीच्यशनल हिस्ट्री मार इडियाप उनतीस हज़ार तीन सौ चौरानवे
|
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों।
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
|
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
|
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में बन रहीं नई दुकानें अब इन्हें चलाने वाले कारोबारियों की सुविधा के अनुसार तैयार किया जा सकता हैं। दुकान के भीतर किस तरह का स्ट्रक्चर चाहिए। यह कारोबारी की मांग पर तैयार किया जाएगा। सब्जी, करियाना शॉप और ढाबे के अंदर का डिजाइन अलग-अलग रहेगा, ताकि कारोबारियों को सामान रखने या बेचने में परेशानी न हो। कारोबारी बताएंगे कि दुकान के भीतर उन्हें किस तरह के रैक या अलमारियां चाहिए। रैक छोटे चाहिए या बड़े, फिटिंग किस दिशा में कितनी हो, कितनी शेल्फें हो, यह सब कारोबारियों की मांग पर तय होगा।
हिमुडा इनकी मांग के अनुसार दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार कर देगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि निर्माण करने के बाद कारोबारियों को दुकान के भीतर रैक आदि बनाने के लिए तोड़फोड़ करने की जरूरत न रहे। शहर में नगर निगम की 467 दुकानों को तोड़कर नया बनाया जा रहा है। सब्जी मंडी, लोअर बाजार, रामबाजार और गंज में नगर निगम की चार सौ से अधिक दुकानें हैं जिनको तोड़कर इनकी जगह नई दुकानें बननी हैं। हिमुडा ने सब्जी मंडी एरिया में चार दुकानों का निर्माणकार्य शुरू भी कर दिया है। बताया जा रहा है कि दीवाली से पहले ही इन चारों दुकानों को तैयार कर लिया जाएगा। यहां लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है। जल्द ही इसे दुकान का आकार दिया जाएगा।
सभी दुकानों की चौड़ाई, ऊंचाई एक समान होगी। दो दिन पहले एक कारोबारी ने अपनी दुकान के स्ट्रक्चर को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं। इसे भी अब दूर किया जा रहा है। इससे पहले कारोबारियों की मांग थी कि नगर निगम ही दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार करके दें। कारोबारी की जरूरत के हिसाब से दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार होगा। एक बार दुकान बनने के बाद कारोबारियों को अलग से तोड़फोड कर रैक, अलमारियां आदि बनाने की जरूरत नहीं रहेगी।
|
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में बन रहीं नई दुकानें अब इन्हें चलाने वाले कारोबारियों की सुविधा के अनुसार तैयार किया जा सकता हैं। दुकान के भीतर किस तरह का स्ट्रक्चर चाहिए। यह कारोबारी की मांग पर तैयार किया जाएगा। सब्जी, करियाना शॉप और ढाबे के अंदर का डिजाइन अलग-अलग रहेगा, ताकि कारोबारियों को सामान रखने या बेचने में परेशानी न हो। कारोबारी बताएंगे कि दुकान के भीतर उन्हें किस तरह के रैक या अलमारियां चाहिए। रैक छोटे चाहिए या बड़े, फिटिंग किस दिशा में कितनी हो, कितनी शेल्फें हो, यह सब कारोबारियों की मांग पर तय होगा। हिमुडा इनकी मांग के अनुसार दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार कर देगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि निर्माण करने के बाद कारोबारियों को दुकान के भीतर रैक आदि बनाने के लिए तोड़फोड़ करने की जरूरत न रहे। शहर में नगर निगम की चार सौ सरसठ दुकानों को तोड़कर नया बनाया जा रहा है। सब्जी मंडी, लोअर बाजार, रामबाजार और गंज में नगर निगम की चार सौ से अधिक दुकानें हैं जिनको तोड़कर इनकी जगह नई दुकानें बननी हैं। हिमुडा ने सब्जी मंडी एरिया में चार दुकानों का निर्माणकार्य शुरू भी कर दिया है। बताया जा रहा है कि दीवाली से पहले ही इन चारों दुकानों को तैयार कर लिया जाएगा। यहां लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है। जल्द ही इसे दुकान का आकार दिया जाएगा। सभी दुकानों की चौड़ाई, ऊंचाई एक समान होगी। दो दिन पहले एक कारोबारी ने अपनी दुकान के स्ट्रक्चर को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं। इसे भी अब दूर किया जा रहा है। इससे पहले कारोबारियों की मांग थी कि नगर निगम ही दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार करके दें। कारोबारी की जरूरत के हिसाब से दुकान के भीतर का स्ट्रक्चर तैयार होगा। एक बार दुकान बनने के बाद कारोबारियों को अलग से तोड़फोड कर रैक, अलमारियां आदि बनाने की जरूरत नहीं रहेगी।
|
Giridih: गिरिडीह जिले में केंद्र सरकार की चल रही योजनाओं की जानकारी लेने केन्द्रीय गृह मंत्रालय के ज्वाइंट सचिव सुनील बर्णवाल डीसी समेत कई अधिकारियो के साथ नीति आयोग का बैठक किया. इस दौरान बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव सुनील बर्णवाल के साथ डीसी नमन प्रियेश लकड़ा और केंद्रीय जल आयोग के सदस्य मीना भी शामिल हुए.
दो दिनों के गिरिडीह प्रवास के दौरान केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन योजना के नोडल अधिकारी और सचिव सुनील बर्णवाल कई प्रखंडों का दौरा किया. सदर प्रखंड के अग्दोनीखुर्द के एक घर में जल जीवन मिशन योजना का निरीक्षण किया, तो देखा की योजना में पीएचईडी के ठेकेदार द्वारा बेहद घटिया क्वालिटी के सामान लगाए गए हैं. फिर क्या था, नोडल अधिकारी सुनील बर्णवाल ने मौके पर मौजूद पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता मुकेश मंडल को जमकर फटकार लगायी और सारे समानों को बदल कर अच्छी क्वालिटी के सामान लगाने का निर्देश दिया. वैसे तीन दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी पीएचईडी के अधिकारियो के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी थी. इसी तरह जमुआ में जहां रेन हार्वेस्टिंग योजना का जायजा लिया. तो सदर प्रखंड के मटरुखा में अमृत सरोवर योजना का हाल भी देखा. सचिव सुनील बर्णवाल ने इस दौरान जेएसपीएलएस में महिलाओ के द्वारा कई स्वावलंबी की दिशा में किए जा रहे है कार्यों को भी देखा.
मंगलवार को सुनील बर्णवाल और जल आयोग के सदस्य मीना ने डीसी नमन प्रियेश लकड़ा समेत कई अधिकारयों के साथ बैठक की. तो सचिव ने इस बात पर खुशी जताई की सही मॉनिटरिंग के कारण आकांक्षी जिले की लिस्ट में शामिल गिरिडीह ने शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बेहतर कार्य किया, और अब 112 आकांक्षी जिले में शिक्षा विभाग डेल्टा रैंकिंग में 12वें स्थान पर आ चुका है. लेकिन जिले में जल जीवन मिशन योजना का हाल सबसे खराब देख सचिव ने चिंता जतायी और अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा की जल जीवन मिशन योजना में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इधर बैठक में डीडीसी शशिभूषण मेहरा, उप नगर आयुक्त स्मृति कुमारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अलका हेंब्रम समेत कई अधिकारी शामिल हुए.
|
Giridih: गिरिडीह जिले में केंद्र सरकार की चल रही योजनाओं की जानकारी लेने केन्द्रीय गृह मंत्रालय के ज्वाइंट सचिव सुनील बर्णवाल डीसी समेत कई अधिकारियो के साथ नीति आयोग का बैठक किया. इस दौरान बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव सुनील बर्णवाल के साथ डीसी नमन प्रियेश लकड़ा और केंद्रीय जल आयोग के सदस्य मीना भी शामिल हुए. दो दिनों के गिरिडीह प्रवास के दौरान केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन योजना के नोडल अधिकारी और सचिव सुनील बर्णवाल कई प्रखंडों का दौरा किया. सदर प्रखंड के अग्दोनीखुर्द के एक घर में जल जीवन मिशन योजना का निरीक्षण किया, तो देखा की योजना में पीएचईडी के ठेकेदार द्वारा बेहद घटिया क्वालिटी के सामान लगाए गए हैं. फिर क्या था, नोडल अधिकारी सुनील बर्णवाल ने मौके पर मौजूद पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता मुकेश मंडल को जमकर फटकार लगायी और सारे समानों को बदल कर अच्छी क्वालिटी के सामान लगाने का निर्देश दिया. वैसे तीन दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी पीएचईडी के अधिकारियो के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी थी. इसी तरह जमुआ में जहां रेन हार्वेस्टिंग योजना का जायजा लिया. तो सदर प्रखंड के मटरुखा में अमृत सरोवर योजना का हाल भी देखा. सचिव सुनील बर्णवाल ने इस दौरान जेएसपीएलएस में महिलाओ के द्वारा कई स्वावलंबी की दिशा में किए जा रहे है कार्यों को भी देखा. मंगलवार को सुनील बर्णवाल और जल आयोग के सदस्य मीना ने डीसी नमन प्रियेश लकड़ा समेत कई अधिकारयों के साथ बैठक की. तो सचिव ने इस बात पर खुशी जताई की सही मॉनिटरिंग के कारण आकांक्षी जिले की लिस्ट में शामिल गिरिडीह ने शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बेहतर कार्य किया, और अब एक सौ बारह आकांक्षी जिले में शिक्षा विभाग डेल्टा रैंकिंग में बारहवें स्थान पर आ चुका है. लेकिन जिले में जल जीवन मिशन योजना का हाल सबसे खराब देख सचिव ने चिंता जतायी और अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा की जल जीवन मिशन योजना में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इधर बैठक में डीडीसी शशिभूषण मेहरा, उप नगर आयुक्त स्मृति कुमारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अलका हेंब्रम समेत कई अधिकारी शामिल हुए.
|
फ़ोन में 5 मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा दिया गया है. फ़ोन 5 मेगापिक्सल के रियर कैमरे के साथ आता है. रियर कैमरे के साथ LED फ़्लैश भी दी गई है.
भारतीय मोबाइल डिवाइसेस निर्माता कम्पनी माइक्रोमैक्स ने बाज़ार में अपना नया फ़ोन बोल्ट सेल्फी पेश किया है. कम्पनी ने फ़िलहाल इस फ़ोन को कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्ट किया है. वैसे इस फ़ोन को ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट से ख़रीदा जा सकेगा. इस फ़ोन की कीमत Rs. 4,999 है. यह फ़ोन वाइट और शैम्पेन रंग में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा.
अगर इस स्मार्टफ़ोन के फीचर्स पर नज़र डालें तो इसमें 4.5-इंच की FWVGA IPS डिस्प्ले मौजूद है, इस डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 480×854 पिक्सल है. फ़ोन में 5 मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा दिया गया है. फ़ोन 5 मेगापिक्सल के रियर कैमरे के साथ आता है. रियर कैमरे के साथ LED फ़्लैश भी दी गई है. फ़ोन 4G LTE सपोर्ट के साथ आता है.
इसके साथ ही यह फ़ोन 1GHz क्वाड-कोर मीडियाटेक (MT6735) प्रोसेसर और 1GB की रैम से लैस है. फ़ोन में 8GB की इंटरनल स्टोरेज भी दी गई है. फ़ोन की स्टोरेज को माइक्रो-SD कार्ड के जरिये 32GB तक बढ़ाया जा सकता है. फ़ोन एंड्राइड 5.1 लोलीपॉप ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है. यह एक ड्यूल सिम स्मार्टफ़ोन है. इस फ़ोन में 1750mAh की बैटरी मौजूद है.
|
फ़ोन में पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा दिया गया है. फ़ोन पाँच मेगापिक्सल के रियर कैमरे के साथ आता है. रियर कैमरे के साथ LED फ़्लैश भी दी गई है. भारतीय मोबाइल डिवाइसेस निर्माता कम्पनी माइक्रोमैक्स ने बाज़ार में अपना नया फ़ोन बोल्ट सेल्फी पेश किया है. कम्पनी ने फ़िलहाल इस फ़ोन को कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्ट किया है. वैसे इस फ़ोन को ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ्लिपकार्ट से ख़रीदा जा सकेगा. इस फ़ोन की कीमत Rs. चार,नौ सौ निन्यानवे है. यह फ़ोन वाइट और शैम्पेन रंग में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. अगर इस स्मार्टफ़ोन के फीचर्स पर नज़र डालें तो इसमें चार.पाँच-इंच की FWVGA IPS डिस्प्ले मौजूद है, इस डिस्प्ले का रेजोल्यूशन चार सौ अस्सी×आठ सौ चौवन पिक्सल है. फ़ोन में पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा दिया गया है. फ़ोन पाँच मेगापिक्सल के रियर कैमरे के साथ आता है. रियर कैमरे के साथ LED फ़्लैश भी दी गई है. फ़ोन चारG LTE सपोर्ट के साथ आता है. इसके साथ ही यह फ़ोन एकGHz क्वाड-कोर मीडियाटेक प्रोसेसर और एकGB की रैम से लैस है. फ़ोन में आठGB की इंटरनल स्टोरेज भी दी गई है. फ़ोन की स्टोरेज को माइक्रो-SD कार्ड के जरिये बत्तीसGB तक बढ़ाया जा सकता है. फ़ोन एंड्राइड पाँच.एक लोलीपॉप ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है. यह एक ड्यूल सिम स्मार्टफ़ोन है. इस फ़ोन में एक हज़ार सात सौ पचासmAh की बैटरी मौजूद है.
|
"मुझे कहानी लिखना पसंद है ताकि शब्द रुपी मोती से भावों की माला पिरो सकूं।"
ऐसी बयार मैं हिंदी हूं।
ऐसी बयार मैं हिंदी हूं।
उन्हें मोबाइल ,कंम्पयूटर, लैपटॉप से दूर कराएं।
मैं भी सुंदर डिजाइन के कपड़े पहनूं।
मैं भी सुंदर डिजाइन के कपड़े पहनूं।
मन न विचलित हो पाए।
मन न विचलित हो पाए।
यही तो जिंदगी की तलाश है।
मंजिल की राह पकड़,
जीवन की चुनौती पार कर।
मंजिल की राह पकड़,
जीवन की चुनौती पार कर।
एक ममता रुपी आंचल है वो।
एक ममता रुपी आंचल है वो।
क्यों यादें में बस गई वो।
क्यों यादें में बस गई वो।
ख्वाइशों का कारवां यूं ही बढ़ने दो।
ख्वाइशों का कारवां यूं ही बढ़ने दो।
|
"मुझे कहानी लिखना पसंद है ताकि शब्द रुपी मोती से भावों की माला पिरो सकूं।" ऐसी बयार मैं हिंदी हूं। ऐसी बयार मैं हिंदी हूं। उन्हें मोबाइल ,कंम्पयूटर, लैपटॉप से दूर कराएं। मैं भी सुंदर डिजाइन के कपड़े पहनूं। मैं भी सुंदर डिजाइन के कपड़े पहनूं। मन न विचलित हो पाए। मन न विचलित हो पाए। यही तो जिंदगी की तलाश है। मंजिल की राह पकड़, जीवन की चुनौती पार कर। मंजिल की राह पकड़, जीवन की चुनौती पार कर। एक ममता रुपी आंचल है वो। एक ममता रुपी आंचल है वो। क्यों यादें में बस गई वो। क्यों यादें में बस गई वो। ख्वाइशों का कारवां यूं ही बढ़ने दो। ख्वाइशों का कारवां यूं ही बढ़ने दो।
|
NewDelhi : भारत का इतिहास वीरता का रहा है, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा, जो गुलामी के कालखंड साजिशन रचा गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार को यहां विज्ञान भवन में पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य के जनरल लचित बोड़फूकन की 400वीं जयंती पर साल भर आयोजित हुए कार्यक्रमों के समापन समारोह में बोल रहे थे.
पीएम ने कहा कि आजादी के बाद जरूरत थी कि भारत को गुलाम बनाने वाले विदेशियों के एजेंडे को बदला जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. जान लें कि पीएम मोदी इससे पहले बोड़फूकन की 400वीं जयंती के उपलक्ष्य में यहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया. इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्यपाल जगदीश मुखी और केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
उन्होंने कहा, भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है. भारत का इतिहास योद्धाओं का इतिहास है, अत्याचारियों के विरूद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने का इतिहास है. भारत का इतिहास वीरता की परंपरा का रहा है. उन्होंने कहा, "लेकिन दुर्भाग्य से हमें आजादी के बाद भी वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा जो गुलामी के कालखंड में साजिशन रचा गया था. देश के कोने-कोने में भारत के सपूतों ने आतताइयों का मुकाबला किया लेकिन इस इतिहास को जानबूझकर दबा दिया गया. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे बलिदानियों को मुख्यधारा में ना लाकर जो गलती पहले की गयी. उसे सुधारा जा रहा है.
लचित बोड़फूकन की जयंती मनाने के लिए दिल्ली में किया गया यह आयोजन इसी का प्रतिबिंब है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज गुलामी की मानसिकता को छोड़ अपनी विरासत पर गर्व करने के भाव से भरा हुआ है और भारत ना सिर्फ अपनी सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मना रहा है बल्कि अपनी संस्कृति के ऐतिहासिक नायक-नायिकाओं को भी गर्व से याद कर रहा है. मोदी ने कहा कि बोड़फकून ऐसे वीर योद्धा थे, जिन्होंने दिखा दिया कि हर आतंकी का अंत हो जाता है लेकिन भारत की अमर ज्योति अमर बनी रहती है.
बता दें कि लचित बोड़फूकन के 400वें जयंती वर्ष समारोह का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी साल फरवरी में असम के जोरहाट में किया था. 24 नवंबर 1622 को पैदा हुए लासित बोरफुकान अहोम साम्राज्य के सेनापति थे. अहोम राजा चक्रध्वज सिंह ने उन्हें अपने साम्राज्य का सेनापति बनाया और सोलाधार बोरुआ, घोड़ा बोरुआ और सिमूलगढ़ किले का सेनापति जैसी कई उपाधियां दीं. वर्ष 1671 में गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर हुए सराईघाट के युद्ध में उन्होंने जो वीरता दिखाई वो इतिहास बन गयी.
इस युद्ध में उन्होंने औरंगजेब की सेना को इतनी भयानक शिकस्त दी कि अगले 250 सालों तक मुगल पूर्वोत्तर की ओर आना ही भूल गये. इस विजय की याद में असम में 24 नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है. सरायघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर लड़ा गया था.
|
NewDelhi : भारत का इतिहास वीरता का रहा है, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा, जो गुलामी के कालखंड साजिशन रचा गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार को यहां विज्ञान भवन में पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य के जनरल लचित बोड़फूकन की चार सौवीं जयंती पर साल भर आयोजित हुए कार्यक्रमों के समापन समारोह में बोल रहे थे. पीएम ने कहा कि आजादी के बाद जरूरत थी कि भारत को गुलाम बनाने वाले विदेशियों के एजेंडे को बदला जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. जान लें कि पीएम मोदी इससे पहले बोड़फूकन की चार सौवीं जयंती के उपलक्ष्य में यहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया. इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्यपाल जगदीश मुखी और केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. उन्होंने कहा, भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है. भारत का इतिहास योद्धाओं का इतिहास है, अत्याचारियों के विरूद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने का इतिहास है. भारत का इतिहास वीरता की परंपरा का रहा है. उन्होंने कहा, "लेकिन दुर्भाग्य से हमें आजादी के बाद भी वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा जो गुलामी के कालखंड में साजिशन रचा गया था. देश के कोने-कोने में भारत के सपूतों ने आतताइयों का मुकाबला किया लेकिन इस इतिहास को जानबूझकर दबा दिया गया. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे बलिदानियों को मुख्यधारा में ना लाकर जो गलती पहले की गयी. उसे सुधारा जा रहा है. लचित बोड़फूकन की जयंती मनाने के लिए दिल्ली में किया गया यह आयोजन इसी का प्रतिबिंब है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज गुलामी की मानसिकता को छोड़ अपनी विरासत पर गर्व करने के भाव से भरा हुआ है और भारत ना सिर्फ अपनी सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मना रहा है बल्कि अपनी संस्कृति के ऐतिहासिक नायक-नायिकाओं को भी गर्व से याद कर रहा है. मोदी ने कहा कि बोड़फकून ऐसे वीर योद्धा थे, जिन्होंने दिखा दिया कि हर आतंकी का अंत हो जाता है लेकिन भारत की अमर ज्योति अमर बनी रहती है. बता दें कि लचित बोड़फूकन के चार सौवें जयंती वर्ष समारोह का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी साल फरवरी में असम के जोरहाट में किया था. चौबीस नवंबर एक हज़ार छः सौ बाईस को पैदा हुए लासित बोरफुकान अहोम साम्राज्य के सेनापति थे. अहोम राजा चक्रध्वज सिंह ने उन्हें अपने साम्राज्य का सेनापति बनाया और सोलाधार बोरुआ, घोड़ा बोरुआ और सिमूलगढ़ किले का सेनापति जैसी कई उपाधियां दीं. वर्ष एक हज़ार छः सौ इकहत्तर में गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर हुए सराईघाट के युद्ध में उन्होंने जो वीरता दिखाई वो इतिहास बन गयी. इस युद्ध में उन्होंने औरंगजेब की सेना को इतनी भयानक शिकस्त दी कि अगले दो सौ पचास सालों तक मुगल पूर्वोत्तर की ओर आना ही भूल गये. इस विजय की याद में असम में चौबीस नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है. सरायघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर लड़ा गया था.
|
पनारसा - सब्जियों का सीजन अब लगभग सिर पर है, लेकिन कुल्लू-मंडी की सीमा पर बनने वाला दलाशणी पुल अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में शियाह वैली के लोगों को 15 किलोमीटर ज्यादा घूमकर अपनी सब्जियों को मंडी पहुंचाना पड़ेगा। बता दें कि ब्यास नदी पर दलाशणी के पास एक नया पुल बन रहा है। पुराने पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद है। पिछले कई दिनों से यहां पर पुल के निर्माण का कार्य चला हुआ है। पुल का काम करने वाली गोरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भी साफ कर दिया है कि इस सीजन में तो यह पुल बनकर तैयार नहीं हो पाएगा, लेकिन उसके बावजूद कंपनी के कर्मचारी जल्द पुल के निर्माण कार्य में जुटे हैं। गौर रहे कि इस पुल के जल्द न बनने से शियाह बैली के दाड़ी, दलाशणी, महीं और सचाणी गांव के किसान काफी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस क्षेत्र के अधिकतर लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। वहीं, इस बार जिस तरह से यहां के किसानों और बागबानों को अपनी फसलें तकरीबन 15 किलोमीटर ज्यादा घूमकर सब्जी मंडी पहुंचानी पड़ेंगी। उससे यहां के किसानों और बागवानों को ज्यादा पैसे नहीं बचेंगे। ऐसे में स्थानीय लोगों ने कंपनी के अधिकारियों से भी आह्वान किया है कि वह जल्द से जल्द दलाशणी पुल के निर्माण कार्य को करे ताकि यहां के लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े। उधर, गोरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के एमडी राजेश राव का कहना है कि बेशक इस साल शियाह वैली के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भविष्य में इस पुल का निर्माण कार्य पूरा होने से लोगों को काफी सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी के कर्मचारी जल्द से जल्द पुल के निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
पनारसा - सब्जियों का सीजन अब लगभग सिर पर है, लेकिन कुल्लू-मंडी की सीमा पर बनने वाला दलाशणी पुल अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में शियाह वैली के लोगों को पंद्रह किलोग्राममीटर ज्यादा घूमकर अपनी सब्जियों को मंडी पहुंचाना पड़ेगा। बता दें कि ब्यास नदी पर दलाशणी के पास एक नया पुल बन रहा है। पुराने पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद है। पिछले कई दिनों से यहां पर पुल के निर्माण का कार्य चला हुआ है। पुल का काम करने वाली गोरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भी साफ कर दिया है कि इस सीजन में तो यह पुल बनकर तैयार नहीं हो पाएगा, लेकिन उसके बावजूद कंपनी के कर्मचारी जल्द पुल के निर्माण कार्य में जुटे हैं। गौर रहे कि इस पुल के जल्द न बनने से शियाह बैली के दाड़ी, दलाशणी, महीं और सचाणी गांव के किसान काफी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस क्षेत्र के अधिकतर लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। वहीं, इस बार जिस तरह से यहां के किसानों और बागबानों को अपनी फसलें तकरीबन पंद्रह किलोग्राममीटर ज्यादा घूमकर सब्जी मंडी पहुंचानी पड़ेंगी। उससे यहां के किसानों और बागवानों को ज्यादा पैसे नहीं बचेंगे। ऐसे में स्थानीय लोगों ने कंपनी के अधिकारियों से भी आह्वान किया है कि वह जल्द से जल्द दलाशणी पुल के निर्माण कार्य को करे ताकि यहां के लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े। उधर, गोरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के एमडी राजेश राव का कहना है कि बेशक इस साल शियाह वैली के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भविष्य में इस पुल का निर्माण कार्य पूरा होने से लोगों को काफी सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी के कर्मचारी जल्द से जल्द पुल के निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
मुलायम सिंह यादव के निधन खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहु और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की पत्नी डिंपल यादव (Dimple Yadav) को सपा का उम्मीदवार बनाया गया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहु और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की पत्नी डिंपल यादव (Dimple Yadav) को सपा का उम्मीदवार बनाया गया है। डिंपल यादव सपा के टिकट पर अपना नामांकन दाखिल मैनपुरी करने पहुंची हैं।
डिंपल यादव दोपहर मैनपुरी कलेक्ट्रेट पहुंची और अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। इसे लेकर पुलिस-प्रशासन भी सजग है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मैनपुरी लोकसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में सपा की उम्मीदवार डिंपल यादव ने ट्वीट किया है। डिंपल यादव ने ट्वीट कर कहा है कि नेताजी को सादर नमन करते हुए हम आज का नामांकन उनके सिद्धांतों और मूल्यों को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में ये भी कहा है कि नेताजी का आशीर्वाद हम सबके साथ हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा।
वहीं मैनपुरी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। बसपा और कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। डिंपल यादव नामांकन के लिए मैनपुरी रवाना होने से पहले अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह यादव के समाधि स्थल पर पहुंचीं. डिंपल और अखिलेश यादव ने अपने दिवंगत पिता के समाधि स्थल पहुंच उनकी समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और इसके बाद वो मैनपुरी के लिए रवाना हुईं।
|
मुलायम सिंह यादव के निधन खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहु और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को सपा का उम्मीदवार बनाया गया है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहु और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को सपा का उम्मीदवार बनाया गया है। डिंपल यादव सपा के टिकट पर अपना नामांकन दाखिल मैनपुरी करने पहुंची हैं। डिंपल यादव दोपहर मैनपुरी कलेक्ट्रेट पहुंची और अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। इसे लेकर पुलिस-प्रशासन भी सजग है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मैनपुरी लोकसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में सपा की उम्मीदवार डिंपल यादव ने ट्वीट किया है। डिंपल यादव ने ट्वीट कर कहा है कि नेताजी को सादर नमन करते हुए हम आज का नामांकन उनके सिद्धांतों और मूल्यों को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में ये भी कहा है कि नेताजी का आशीर्वाद हम सबके साथ हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा। वहीं मैनपुरी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। बसपा और कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। डिंपल यादव नामांकन के लिए मैनपुरी रवाना होने से पहले अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह यादव के समाधि स्थल पर पहुंचीं. डिंपल और अखिलेश यादव ने अपने दिवंगत पिता के समाधि स्थल पहुंच उनकी समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और इसके बाद वो मैनपुरी के लिए रवाना हुईं।
|
बस उसी दिन से हम मुहाजिर बन गए ।
के अब हम मुमिन से काफिर बन गए।
के जाते जाते भी मुझे बेआबरू कर गए।
मुँह फेर के बो फिर अजनबी से बन गए।
जो साथ बैठे थे बो सब अपने घर गए।
|
बस उसी दिन से हम मुहाजिर बन गए । के अब हम मुमिन से काफिर बन गए। के जाते जाते भी मुझे बेआबरू कर गए। मुँह फेर के बो फिर अजनबी से बन गए। जो साथ बैठे थे बो सब अपने घर गए।
|
रूस में पच्चास मास्त्र
यहां ट्राखाली मिल जाती थीं । हम मजे में उसपर चढ़कर घर को रवाना हो जाते । यदि इन्तूरिस्त से काम होता - अंग्रेजी अखबारों के लालच में काम रहता ही था - तो थोड़ा ही आगे इन्तुरिस्त का कार्यालय स्तरिया होटल में था । बरफ जाड़े का प्रभाव ट्राम की माड़ियों पर भी पड़ता था। जहां शून्य-विन्दु के पास तापमान पहुँचता कि आदमी श्वास की जगह भाषा निकालने लगते । आदमियों से भरी ट्राम में भाप जमा हो जाती, जो शीशे में जमकर उसपर एक खासी मोटी बरफ की तह लेप देती । सतके वक्त विशेष करके ट्रामवे में चढ़ने में एक दिक्कत यह होती, कि उतरने की टिकान का पता नही लगता । लोग नाखून से खरोंच-खरोंच कर जंगले के शीशों में कुछ जगह बना लेते, जहां से बाहर देखते । तापमान के ऊपर उठते ही यह बरफ अपने आस पिचलकर गिर जाती । २२ दिसम्बर को ऐसा ही हुआ था ।
क्रिसमस - २५ दिसम्बर ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्वदिन है, लेकिन सोवियत में किसी भी धार्मिक पर्वदिन की छुट्टी नहीं होती । वहाँ लोग राष्ट्र के तौरपर धर्मका प्रदर्शन नहीं करते। हमारे यहां तो इन धार्मिक पर्कदिनों ने नाक में दम कर रखा है। हिन्दुओं के तो ३६५ दिन ही धार्मिक पर्व के हैं। अलग अलग संप्रदाय अपने अपने पत्र - दिनों की छुट्टी की मांग करते हैं । अग्रेजों को चलाई परम्परा अब भी चली ही जा रही है। हाँ, नये, पुराने पर्वेदिनों को आंख मूंद कर माननेवाली सरकार भारत के सबसे महान् ऐतिहासिक पुरुष बुद्ध के जन्म और निर्वाण दिवस के लिये एक दिन का भी छुट्टी करना नहीं पसन्द करती ।
सरकारी छुट्टी न भी हो, सरकार चाहेब धर्मनिरपेक्ष हो, किन्तु वहां की जनता व्यक्तिगत तौर से धर्म निरपेक्ष नहीं है। आज भी रूसी गिरजे के दिन भक्तों से भरे रहते हैं। क्रिसमस के लिये हरी देवदार की शाखा खूब बिकती है, और बहुत कम ही ऐसे घर होंगे, जिनमें किसमस वृक्ष लगा हो । बाप-दादा बचपन से क्रिसमस कल्पवृक्ष से सुपरिचित चले आये थे। सुन्दर हरी हरी देवदार शाखाओं में तरह-तरह के खिलोंने लटकते, बत्तियां
जलती और ऋती फल या स्वादिष्ट मिठाइयों का फल लटकता । खिलौनों और मिठाई को लड़के कैसे भूल सकते हैं ? इसलिये क्रिसमस का महत्व लड़कों के लिये बहुत था । यद्यपि रूसके नेताओं ने क्रिसमस के उत्सव को कालान्तरित करके बच्चों के दिवस और नव वर्ष के दिवस में परिणत करने की कोशिश की, लेकिन इसका फल इतना ही हुआ, कि अब २५ दिसम्बर की जगह लड़कों का उत्सव २५ से पहिली जनवरी तक का हो गया । हमारे घर में भी क्रिसमस कल्पवृक्ष गाड़ दिया गया था। उसके लिये रवाने की मेज को एक और करना पड़ा । रंगीन बिजली के लट्टवाले तार को भी शाखाओं में लगा दिया गया। कई छोटे छोटे क्लिाने भी लटकाये गये । लड़के के लिये वैसे ही खिलौने की एक पूरी आलमारी भरी हुई था, लेकिन फिर भी १ दर्जन नये खिलौनों की आवश्यकता जान पड़ी । अब तक ईगर करे स्कोल्निक हो जाना चाहिये था, लेकिन जैसा कि पहिले कहा, चार दिन की कमी के कारण उसे अभी बालोद्यान में ही रखा गया था। यह लड़कों का सप्ताह था । सब अपने इष्ट मित्रों को लेकर अपने कल्पवृक्ष को दिखलाते और वह खिलौने मिठाईयों और बिजली के लट्टुओं पर अपनी गम्भीर राम्र देते । २५ दिसम्बर १९४५ का क्रिसमस बहुत सर्द था । तापमान हिमबिन्दु से २७° सेन्टीग्रेट ( या पचास डिगरी फारनहाइट ) नीचे था। तापमान के ऊंच होने का हम भारतीयों को ज्ञान है । जब १००° फारनहाइट तापमान होता है, तो शरीर से पसीना चुने लगता है, २०४° होने पर विकलता होने लगती हैं, लेकिन हमारे यहां ऐसे भी स्थान हैं, जहां तापमान ९१६° तक पहुंचता है; जब कि घरके भीतर भी गरमी सह हो जाती है, शरीर चिष-चिष करने लगता है, कोई काम करने का मन नहीं करता । ऐसे तापमान का अनुमान रूसवालों को नहीं हो सकता। उसकी जगह उनको अनुभव है हिमविन्दु से ५.००, ६०° तक तापमान का नीचे जाना । सारी दुनिया में कितनी ही गणित संबंधी बातें एकसी मानी जाती हैं, लेकिन अंग्रेजों ने अपनी मथुरा को तीनों लोकों से न्यारी ही रखना चाहा है । इंगलैंड और इंगलैंड के साम्राज्य को छोड़कर सारी दुनिया में लोग सड़कों और रास्तों पर दाहिने चलने
रूस में पच्चीस मास्त्र
हैं, लेकिन अंग्रेज "बायें चलो" की बात को मानते हैं। जिस वक्त भारत मणराज्य घोषित होने जा रहा था, उसके एक ही दो दिन पहिले मैंने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से कहा, कि अंग्रेजों के रख छोड़े कम से कम इस बड़े कलंक को तो दूर कर दीजिये और २६ जनवरी (१९५०) को गणतन्य की घोषणा के साथ साथ यह भी घोषित कर दीजिए- आज से हमारे यहां चलना दाहिनी ओर होगा । ईरान, अफगानिस्तान, चीन, जैसे छोटे बड़े हमारे पड़ोसी राज्य दाहिने चलने को मानते हैं; अमेरिका, युरोप के सारे देश दाहिने चलने को स्वीकार करते हैं, फिर भारत क्यों अंग्रेजों के पीछे बाममार्गी बना रहे । राष्ट्रपति ने पसन्दः किया, लेकिन वह अपने को पाते थे, कहा - नेहरूजी से क । भला
नेहरू जी की खोपड़ी में कभी यह बात धँसनेवाली थी ।
माप में भी सारी दुनिया शतिक मानको मानती है । सन्तीमीतर, देसी मीतर, मीतर किलोमीतर मानिस्तान ईरान तक में चलते हैं। सारी दुनिया इस वैज्ञानिक मान को मानती है । दशोत्तर बृद्धि के होने से हिसाबमें इससे बहुत आसानी होती है, लेकिन अंग्रेज १२ इंच का १ फुट, ३ फुट का १ गज और १७६० गज का १ मील अभी भी मानते जा रहे हैं । थर्मामीटर में भी दुनिया शून्य डिगरी को हिमबिन्दु और सौ डिगरीको उबाल-बिन्दु मान सेन्तीप्रेद तापमान का व्यवहार करती है, लेकिन अंग्रेज उस धर्मामीतर को स्वीकार करते हैं, जिसमें ३३ डिगरी पर हिमबिन्दु माना जाता है । विज्ञान संबन्धी कितनी ही बड़ी खोजें नेचाहे क्यों न की हों, लेकिन जाति के तौर पर वह महा अवैज्ञानिक हैं। उसके साथ रहकर हम भी अपनी इस मूढ़ता का परिचय अंग्रेज-भिन्न दूसरे लोगों के सामने दिखलाते हैं ।
हां, तो - २७° (ऋण) तापमान कहने में जितना आसान मालूम होता है, उतना सहने में नहीं । हिमबिन्दु से २४° तक तापमान के नीचे जाने पर मुझे कोई खास तकलीफ नहीं मालूम होती थी । वैसे इतनी सदर्दी में मी मैं लोगों को कान खोले देखता था, लेकिन मैं केवल आंख, नाक और मुंह को ही नंगा रखनेका पक्षपाती था । जब - २५° से नीचे तापमान जाता, तो उसका अमर
सांस लेते समय छाती में मालूम देता । इस वक्त नाक से निकली श्वासकी भाष मुछ्न्दर आदमियों के ठोंके ऊपर जम जाती, भौंहों पर भी सफेदी पुत जाती, और महिलाओं के आगे निकत्ते बालों को भी रुपहला बना देती । इतना होने पर भी मैं उसे असह्य नहीं अनुभव करता था । वस्तुतः आदमी जितना निम्न तापमान पर नियंत्रण कर सकता है, उतना उच्च तापमान पर नहीं । यदि हिमबिन्दु से पचास डिगरी नीचे तापमान चला जाये, तो अधिक गरम कपड़ों की आवश्यकता होगी, जिनके नीचे चमड़ा या पोस्तीन रखना भी आवश्यक होगा। सारे शरीर को आप चमड़े के पतलून, चमड़े के कोट और ओवरकोट, चमड़े की टोपी तथा चमड़े के दस्ताने से गरम रख सकते हैं। अपनी द्वितीय यात्रा में मैं यह सारी चीजें ईरान में अपने साथ ले गया था, लेकिन अबकी केवल टोपी और श्रोवर कोट चमड़े के लेगया था । चमड़े के ओवरकोट को पहन कर तो निश्चय ही कड़ी से कड़ी सर्दी पर विजय प्राप्त की जा सकती है, लेकिन ११० ११२° डिगरी की अपने यहां की गरमी पर आप कैसे नियंत्रण कर सकते हैं ? ठंडे तहखानों में बैठने का रवाज हमारे यहां बहुत पुराना है, छिड़काव के साथ खसकी टट्टियां भी मदद करती हैं और अब दिल्ली के देवताओं की कृपास कम से कम उनकी कोठियों में वायु-नियंत्रित ( एयर कंडीशन्ड ) वातावरण रखने का प्रबन्ध हुआ है। लेकिन यह सभी साधन बहुत खर्चीले हैं और साथ ही ऐसे हैं, जो आपकी क्रियाशीलता और गति की रोक को हटा नहीं सकते । इसके विरुद्ध सर्द से सर्द मुल्क में अपने शरीर भर को अच्छी तरह ढांक कर चलफिर सकते हैं । सारा काम कर सकते हैं ।
२७° (सेन्तीभेद) हिमबिन्दु से नीचे तापमान था, किन्तु तापन- मशीन की मरम्मत का अभी कोई ठिकाना नहीं था। घर-घर में क्रिसमस की पारम्परिक मिठाई (पुडिंग ) तैयार की गई थी । पनीर, अंडा, चीनी और क्या क्या न्यामतें मिलाकर यह रूसी पुडिंग तैयार होती है। उसके चौकोर पिंड के चारों पावों में क्रास ( सलेव) का चिन्ह अंकित करने का सांचा प्रायः सभी घरों में होता है। यह मिठाई बड़ी स्वादिष्ट होती है, और प्रभु मसीह का प्रसाद मानकर
बड़े सन्मान के साथ खाई जाती है। क्रिसमस के दिन जो इष्ट, मत्रि, संबंधा घरपर मिलने आते हैं, वह इस प्रसाद में से थोड़ा अवश्य पाते हैं । पहिने क्रिसमस की बात तो मुझे याद नहीं, लेकिन १६४६ के क्रिसमस का दिन मुझे अच्छी तरह याद है । घरमें मिठाई बनाकर चुपचाप खाली नहीं जाती, बल्कि उसे गिरजा में भेजना पड़ता है, जहां कुशकी तरह की एक घास से गड़ये में रक्वे पवित्र जल को छिड़क कर पुरोहित भोग लगा देता है, तब वह घरमें लाकर खाई जाती है। हमारे यहां रथ-यात्राओं और दूसरी जगहों पर इसी तरह भक्त लोग भोग लगाने के लिये अपनी अपनी चीज ले जाते हैं। रामलीला के चढ़ावे में आधा दोना खाली कर लेनेपर भी हमारे यहां के पुजारियों का संतोष नहीं होता, लेकिन रूसी पुजारी केवल पवित्र जल छिड़क भर देना ही अपना कर्तव्य समझते हैं । पास ही के गिरजे में ईगर नौकरानी के साथ भोग लगाने के लिये अपनी मिठाई न्ने गया था । उनके लौटने में दो घंटे से ऊपर लगे । पता लगा, गिरजा के हाल ही नहीं, बल्कि उसके बाहर पगडंडी पर भी बहुत दूर तक भक्तों की दुहरी पंक्ति खड़ी थी । सबके पास पहुंचने में पुरोहित को काफी समय लगा, इसीलिये यह देर हुई। कम्युनिज्म का दर्शन भले ही ईश्वर और धर्म का विरोधी हो, लेकिन लोगों के लिये धर्म का छोड़ना उतना आसान नहीं है । सोवियत के तजवें में यह मालूम होता है । जिन लोगों को मसीह के भगवान् होने पर विश्वास नहीं यह भी जब अपनी कला, संस्कृति और इतिहास देखते हैं, तो पिछले सात-आठ साँ वर्षों से ईसाई धर्म के साथ उसका घनिष्ट संबंध पाते हैं । हरेक आदमी की सहानुभूति र रुचि सदा अपनी परंपरा के साथ होती है । बचपन के संस्कार मनुष्य के मन से सहज भूलनेवाले नहीं है । किसमस को ही ले लीजिये, इसके साथ कितने पुराने संबन्ध याद आते हैं । श्राजक्ल पंचांग बदल गया है, किन्तु मुझे १९३७ का क्रिसमस याद है । डा० श्चेत्स्की ने अपना क्रिसमस पुराने पंचांग के अनुसार मनाया था ।
आदमी जिस परिस्थिति में रहता है, उसी के अनुसार अपनी आत्मरक्षा और सुख का प्रबन्ध कर लेता है। रूस के लोग हजारों वर्षों से घुटने तक के
पहिलं तीन माम
लंबे बूट पहनते आये हैं। आजकल वह ज्यादातर चमड़े का होता है, लेकिन पूर्वजों का नमदे का बूट भी लुप्त नहीं हुआ है। यह वही बूट है, जो कि शकों के साथ भारत आया और वहां की सूर्य प्रतिमाओं के पैरों में आज भी दिखलायी पड़ता है । पुरुष को अपने कोट के ऊपर एक और कन्टोप जैमी जाड़ों की टोपी रग्वनी पड़ती है, जिसे खोलकर आवश्यकता पड़ने पर कान और गरदन को ढाँका जा सकता है, नहीं तो ऊपर करके उसे गोल टोपी-सा बना दिया जाता है। अधिकतर टोपियां पोस्तीन या समूर की होती हैं । स्त्रियां ऐसी कन्टोपदार टोपी नहीं पहिनती, उसको जगह उनके ओवरकोट का कालर काफी बड़ा होता है, जिसमें चमड़ा या समूर भी मढ़ा रहता है, जिस को उठा देने से सारा सिर कान और गरदन ढक जाता है ।
२७ दिसम्बर को हम विश्वविद्यालय गये, तो वहां मध्यएसिया के एक प्रोफेसर से मुलाकात हुई । वह तुर्कमानी भाषा के पंडित तथा ऋशकाबाद में २२ साल से अध्यापन करते थे। अब हमारे सिर पर मध्यएसिया जाने की धुन सवार हुई । पिछले छ महीनों में मध्यएसिया के इतिहास और आधुनिक मध्यएसिया को जानने के लिये काफी पुस्तकें पढ़ी थीं । इतने दिनों में यह तो मालूम हो गया था, कि यहां रहकर हम पुस्तक नहीं लिख सकते । पुस्तक लिखें भी तो दुहरे सेंसरों के कारण उसका भारत में पहुँचना संदिग्ध है । फिर् खो जाने के डर से दो दो कापी करना हमारे बस की बात नहीं थी । मन यहीं कहता था, कि चलो सोवियत का दर्शन तीसरी बार भी कर लिया । यदि मध्यएसिया देखने का अवसर मिले तो अबकी गरमियों में वहां चला जाय, नहीं तो देशका रास्ता पकड़ना ही अच्छा है। भारत की कोई खबर नहीं मिलती भी । चिट्ठियाँ के भी आने में छ छ महीने लग जाते थे । तुर्कमानिया के प्रोफेसर से मालूम हुआ, कि मास्को से अश्काबाद का वैमानिक किराया ७०० रूबल है। अकेले के लिये राशनकार्ड पर २० रूबल में होटल का इंतजाम हो जायगा। उनके कहने से मुझे मालूम होगया कि अगर जाने की आज्ञा मिल जाय, तो मैं अपने पैसे के बलपर भी वहां चार महीने घूम आ सकता हूं ।
प्रोफेसर ने बतलाया, कि चीजों का दाम यहीं जैसा है, सिर्फ मौसिम के समय मेवे कुछ सस्ते होते हैं । कह रह थे - वहां गरमी बहुत पड़ती है, इसलिये ऐन गरमी के महीनों ( मई, जून, जुलाई ) में नहीं जाना चाहिये, लेकिन उनको क्या मालूम कि हिन्दुस्तान में कितनी गरमी पड़ती है। उन्होंने बतलाया कि तुर्कमानिया में भी अरबी-भाषा-भाषी कहीं कहीं मिल जाते हैं, उजबेकिस्तान में और भी मिलेंगे । उनके कहने में यह भी मालूम हुआ कि तुर्कमानिया में बलोची और बोलने वालों के कुछ गांव हैं । शाम को लौटकर जब घर आया, तो देखा मकान गरम है -- मशीन की मरम्मत करढ़ी गई थी ।
२१ दिसम्बर को घरके भीतर तापमान - १२०° और-१५' था, लेकिन मरदी बहुत मालूम नहीं होती थी । विद्यार्थी अर्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, इसलिये नया पाठ नहीं चल रहा था । ३० दिसम्बर से नववर्ष की तैयारी होने लगी । लाल झंडों और दूसरी चीजों से संस्थाओं के घरों को सजाया जाने लगा ।
३१ दिसम्बर भी आया । १६४५ का सन् विदाई लेने लगा और १९४६ आने को हुआ । सालभर के कामों का जब मैं लेखाजोखा करने लगा, तो मालूम हुआ इस साल में कुछ नहीं लिख सफा । "मधुरस्वप्न" और "मध्य एसिया" के संबंध में सामग्री अवश्य जमा की, लेकिन मालूम नहीं उन्हें कब लिखने का मौका मिलेगा । अगला साल भी यदि इसी तरह बीता, तो बहुत बुरा होगा। आज सोफी के यहां दावत थी। उसका पति ३ साल बाद लौटा था । पान दावत का अनिवार्य अंग है, फिर उसके बाद नाम भी । मैं दोनों ही में श्रनारी था । सोफी ने बहुत चाहा कि यदि पीता नहीं तो थोड़ा नाच ही लूं, लेकिन जिन्दगी में जब सीखा ही नहीं था, तो आज नाच कैसे सकता था । २ बजे रात तक दावत चलती रही । मेहमान कुछ होश में और कुछ पैरों से लड़खड़ाते अपने घरों की तरफ चले । अगले वर्ष के लिये यही सोचा कि यदि मध्यएसिया को अच्छी तरह देखने का मौका मिल गया, तो अगले ३६५ दिनों को भी यहां अर्पण करने के लिये तैयार हैं ।
९ वसन्त की प्रतीक्षा (१९४६)
जाड़ों को दो सालों में बाटना बिलकुल बेवकूफा मालूम होती हैनवम्बर- दिसम्बर को १६४५ में और जनवरी-फरवरी को १६४६
में । वसम्त के आरम्भ से सम्वत्सर का आरम्भ ठीक था, लेकिन दुनिया से परम्परा के पीछे इतनी पड़ी हुई है, कि वह अपने पंचांग में इस साधारण से सुधार के लिये भी तैयार नहीं है, चाहे इसके कारण आय-व्यय पेश करते समय एक साल की जगह १९४५ - १६४६ भले ही लिखना पड़े। वसन्त की प्रतीक्षा जितनी उत्कंठा के साथ रूस जैसे ठंडे देशो में की जाती हैं, उतना हमारे देश में नहीं हो सकती। लड़कों की एक रूमी कविता में मुना था ---- वसन्त, मेरी बहिनियाखिड़की पर बैठी तेरी प्रतीक्षा कर रही है ।
छोटी सी बहिनिया ( सेस्त्रुच्का ) नहीं बल्कि जवान-बूढ़े सभी वसन्तं की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन लेनिनग्राद में उसके पहुंचने में अभी पूरी चार महीन की देरी थी । पहिली जनवरी को तापमान १२° से १५° था । ३ जनवरी को युनिवर्सिटा गये । प्रथम वर्ष के छात्रों को कुछ पढ़ाया, फिर व्यापक तथा
चतुर्थवर्ष के छात्रों ने पाठ्य पुस्तक से भिन्न "मृच्छकटिक" नाटक शुरू किया । अर्धवार्षिक परीक्षा हो रही थी । परीक्षा समाप्त होते ही कुछ दिनों की छुट्टी थी, इसलिये १० फरवरी तक के लिये मेरा युनिवर्सिटी में कोई काम नहीं था । मैं अब अधिकतर घर पर ही रह पुस्तकों को पढ़ता और उनसे नोट लेता ।
८ जनवरी को पहिली बार देखा कि ५० के करीब जर्मन बन्दी मेरी खिड़की के बाहर से जा रहे हैं । इसके बाद तो रोज १० बजे उन्हें काम की ओर जाने देखता और ४ बजे डेरे की ओर लौटते । उनकी देखभाल के लिये कभी कभी नो बन्दुक लिये एक स्त्री-सिपाही होती । बन्दियों के चेहरे उदास और श्रीहीन हो तो आश्चर्य ही क्या ? हिटलर ने विश्वविजय के लिये उनको दुनिया के देशों में भेजा था । हिटलर तो दूसरे लोक को विजय करने चला गया, लेकिन यह बेचारे अपने देश से दूर रूस की सख्त सर्दी में काम करने के लिये छोड़ दिये गये थे । उनके खाने पीने का इंतिजाम अच्छा था, यह उनके स्वस्थ शरीर से मालूम होता था । हाँ, कपड़े उनके अपने पुराने फौज के थे, जो फौज के थे, जो कुछ अधिक मैले थे ।
१४ जनवरी को युनिवर्सिटी गये । चतुर्थवर्ष की दोनां छात्रायें संस्कृत में उत्तीर्ण हुई । "मेघदूत" से कुछ प्रश्न पूछे गये । सोवियत के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में परीक्षा के लिये कागज स्याही बिलकुल खर्च नहीं करनी पड़ती । परीक्षा मौखिक होती है, और परोक्षक होकर अपने ही अध्यापकों में से तीन कुर्सी पर उठते हैं। पूर्णांक ५ होते हैं। छात्राओं के उत्तर देकर बाहर जाने के बाद तानिया को मैंने दो नंबर देने के लिये कहा, तो मेरे सहकर्मियों ने बतलाया - इसका अर्थ तो है फेल करना । जान पड़ता है फेल शब्द विद्यार्थियों में ही नहीं वर्जित है, बल्कि व्यापकों और परीक्षकों में भी । पर्याप्त दिनों तक जिस छात्र ने उपस्थिति दी हैं, उसे सोवियत की विद्या संस्था में फेल होने की संभावना ही नहीं है । प्रश्न का उत्तर देते समय विद्यार्थी अपनी सारी पुस्तकों को साथ रख सकते हैं, क्योंकि परीक्षा स्मृति की नहीं बल्कि समझ की ली जाती है ।
हमारे घर में अभी कोई नौकर नहीं था ! ग़शन के जमाने में एक नौकर
और रखकर राशन दुकान से दस गुने दामपर चीजें खरीदकर खिलाना आसान काम नहीं था । बर्तन मलना और चारपाई ठीक-ठाक करना मेरे जिम्मे था । जाड़े के दिन थे । नल का पानी काटने को दौड़ता था। मैं गरम पानी से धोने का पक्षपाती नहीं था, क्योंकि उसमें समय अधिक लगता था। और घर के नल के ठंडे पानी से धोने पर एक मिनट में ही दर्द के मारे हाथ और मन तिलमिला उठते । हमारा तो यह सिद्धान्त था - शारीरिक परिश्रम से घृणा करने की - वश्यकता नहीं, लेकिन उसमें इतना समय नहीं लगाना चाहिये कि लिखने पढ़ने के समय में कोताही हो । मालकिन का विचार कुछ दूसरा ही था । हम बैठे बैठे रात के १-२ बजे तक पढ़ते और नोट लेते रहते, जिसे वह बेकार समझतीं ।
२४ जनवरी को जर्मन बन्दी सड़कों की बरफ पैंक रहे थे। मकान के काम को इस समय बन्द रखा गया था, लेकिन अगले जाड़ों में वह २४ घंटे अखंड चलता रहा। शहर की सभी बरफ तो कहां फेंकी जा सकती थी ? छोटी छोटी सड़कों और गलियों की बरफ वसन्त के आरम्भ होने पर ही गलकर साफ होती, लेकिन बड़ी सड़कों पर उसे बराबर हटाते रहना पड़ता, नहीं तो ट्रामों और मोटरों का आना-जाना रुक जाता, क्योंकि बरफ पर चलने से वह ऊंची-नीची हो जाती है, जिसके कारण उसपर यानों का चलना सरल काम नहीं होता ।
अभी भी भारत में क्या हो रहा है, इसके जानने का कोई इंतिजाम नहीं हो सका था । स्थानीय रेडियो और रूसी समाचार पत्रों से काम चलनेवाला नहीं था। उनमें महीनों बाद शायद कभी कोई दो-चार पंक्तियाँ देखने-सुनने को मिलतीं । मुझे सबसे जरूरी मालूम होता था - एक रेडियो खरीदना, जिसमें देश विदेश की खबरें मालूम होती रहें, लेकिन यह इच्छा पूरी होने में अभी चारसाढ़ेचार महीनों की देर थी । २३ जनवरी की रात के रेडियो से मालूम हुआ, कि दिल्ली की एसेम्बली ने राष्ट्रीय सरकार की मांग की है। जावा में वहां के स्वतंत्रता प्रेमियों को दबाकर फिर से डचों का राज्य कायम करने से अंग्रेजी सेना ने जब इंकार कर दिया, तो अंग्रेजों ने वहां भारतीय सैना भेजी। कहने को अब
बिलायत में मजदूरदल का शासन था, जो अपने को समाजवादी कहने का अभिमान करता है, लेकिन विलायत की मजूरपार्टी भी साम्राज्यवाद के अन्धानुसरण में अपने टोरी भाइयों से पीछे नहीं है । अब उसने भारतीय सेना का जात्रा में उपयोग करना शुरू किया था। दिल्ली की एसेम्बली ने इसका भी विरोध किया था । "प्राब्दा" सोवियत के सबसे अधिक छपनेवाले दो रूसी पत्रों में से एक है। कुछ स्थानीय खबरों के साथ मास्को की "प्राब्दा " का लेनिनग्रादीय संस्करण भी निकलता था, जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय खबरें और कुछ लेख भी रहा करते थे । चाहे खबरें दो-चार ही पंक्ति की कमी कभी निकलती हो, लेकिन उनसे यह मालूम हो रहा था, कि युद्ध के बाद का भारत चुपचाप अंग्रेजों के जुए को नहीं हो सकता । लेकिन मेरा वृद्ध नेताओं पर विश्वास नहीं था । मैन २३ जनवरी ( १९४६ ) की डायरी में लिखा था- वृद्ध नेता तो सभी कामो में रोड़ा टकानेवाले हैं, राजनीत में और भी । नेता तरुणों को होना चाहिये । वृद्ध अपने ज्ञान और तजब से परामर्श दे सकते हैं । भारतीय हिन्दू राजनीतिक बुड्ढों के ख्याल में ही नहीं आता कि वह समय वाला है जबकि हिन्दू-मुसलमानों की सीमायें रोटी-बेटी से भी मिट जायेंगी । ( हमारे वृद्ध नेता तो ) अतीत पर नजर डालकर समझौता करना चाहते हैं ।
रूस म पच्चाम मास
द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और ऐसे भीषण नरसंहार के साथ, जो कि "न भूतो न भविष्यति, " - सोवियत रूस को सत्तर लाख आदमियों की बलि चढ़ानी पड़ी । लेकिन २७ जनवरी को मैं देख रहा था, कि अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में फिर तनातनी शुरू हो गयी हैं । राष्ट्रसंघ की बैठक में सोवियत प्रतिनिधि ने जावा में अंग्रेजी तथा उसकी सहायक जापानी सेना के इस्तेमाल करने के विरोध में पत्र लिखा । उक्रइन के प्रतिनिधि ने ग्रीस में अंग्रेजी सेना की फासिज्म पोषक नीति का विरोध किया । ईरानी प्रतिनिधि ने ईरान के भीतर हस्तक्षेप करने का इल्जाम रूस के ऊपर लगाया । कोरिया में सोवियत और अमेरिका रस्साकशी कर रहे थे । अमेरिका अल्पसंख्यक धनिकों के पक्ष में था और वहां की बहुसंख्यक पाड़ित जनता सोवियत के पक्ष में ।
|
रूस में पच्चास मास्त्र यहां ट्राखाली मिल जाती थीं । हम मजे में उसपर चढ़कर घर को रवाना हो जाते । यदि इन्तूरिस्त से काम होता - अंग्रेजी अखबारों के लालच में काम रहता ही था - तो थोड़ा ही आगे इन्तुरिस्त का कार्यालय स्तरिया होटल में था । बरफ जाड़े का प्रभाव ट्राम की माड़ियों पर भी पड़ता था। जहां शून्य-विन्दु के पास तापमान पहुँचता कि आदमी श्वास की जगह भाषा निकालने लगते । आदमियों से भरी ट्राम में भाप जमा हो जाती, जो शीशे में जमकर उसपर एक खासी मोटी बरफ की तह लेप देती । सतके वक्त विशेष करके ट्रामवे में चढ़ने में एक दिक्कत यह होती, कि उतरने की टिकान का पता नही लगता । लोग नाखून से खरोंच-खरोंच कर जंगले के शीशों में कुछ जगह बना लेते, जहां से बाहर देखते । तापमान के ऊपर उठते ही यह बरफ अपने आस पिचलकर गिर जाती । बाईस दिसम्बर को ऐसा ही हुआ था । क्रिसमस - पच्चीस दिसम्बर ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्वदिन है, लेकिन सोवियत में किसी भी धार्मिक पर्वदिन की छुट्टी नहीं होती । वहाँ लोग राष्ट्र के तौरपर धर्मका प्रदर्शन नहीं करते। हमारे यहां तो इन धार्मिक पर्कदिनों ने नाक में दम कर रखा है। हिन्दुओं के तो तीन सौ पैंसठ दिन ही धार्मिक पर्व के हैं। अलग अलग संप्रदाय अपने अपने पत्र - दिनों की छुट्टी की मांग करते हैं । अग्रेजों को चलाई परम्परा अब भी चली ही जा रही है। हाँ, नये, पुराने पर्वेदिनों को आंख मूंद कर माननेवाली सरकार भारत के सबसे महान् ऐतिहासिक पुरुष बुद्ध के जन्म और निर्वाण दिवस के लिये एक दिन का भी छुट्टी करना नहीं पसन्द करती । सरकारी छुट्टी न भी हो, सरकार चाहेब धर्मनिरपेक्ष हो, किन्तु वहां की जनता व्यक्तिगत तौर से धर्म निरपेक्ष नहीं है। आज भी रूसी गिरजे के दिन भक्तों से भरे रहते हैं। क्रिसमस के लिये हरी देवदार की शाखा खूब बिकती है, और बहुत कम ही ऐसे घर होंगे, जिनमें किसमस वृक्ष लगा हो । बाप-दादा बचपन से क्रिसमस कल्पवृक्ष से सुपरिचित चले आये थे। सुन्दर हरी हरी देवदार शाखाओं में तरह-तरह के खिलोंने लटकते, बत्तियां जलती और ऋती फल या स्वादिष्ट मिठाइयों का फल लटकता । खिलौनों और मिठाई को लड़के कैसे भूल सकते हैं ? इसलिये क्रिसमस का महत्व लड़कों के लिये बहुत था । यद्यपि रूसके नेताओं ने क्रिसमस के उत्सव को कालान्तरित करके बच्चों के दिवस और नव वर्ष के दिवस में परिणत करने की कोशिश की, लेकिन इसका फल इतना ही हुआ, कि अब पच्चीस दिसम्बर की जगह लड़कों का उत्सव पच्चीस से पहिली जनवरी तक का हो गया । हमारे घर में भी क्रिसमस कल्पवृक्ष गाड़ दिया गया था। उसके लिये रवाने की मेज को एक और करना पड़ा । रंगीन बिजली के लट्टवाले तार को भी शाखाओं में लगा दिया गया। कई छोटे छोटे क्लिाने भी लटकाये गये । लड़के के लिये वैसे ही खिलौने की एक पूरी आलमारी भरी हुई था, लेकिन फिर भी एक दर्जन नये खिलौनों की आवश्यकता जान पड़ी । अब तक ईगर करे स्कोल्निक हो जाना चाहिये था, लेकिन जैसा कि पहिले कहा, चार दिन की कमी के कारण उसे अभी बालोद्यान में ही रखा गया था। यह लड़कों का सप्ताह था । सब अपने इष्ट मित्रों को लेकर अपने कल्पवृक्ष को दिखलाते और वह खिलौने मिठाईयों और बिजली के लट्टुओं पर अपनी गम्भीर राम्र देते । पच्चीस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस का क्रिसमस बहुत सर्द था । तापमान हिमबिन्दु से सत्ताईस° सेन्टीग्रेट नीचे था। तापमान के ऊंच होने का हम भारतीयों को ज्ञान है । जब एक सौ° फारनहाइट तापमान होता है, तो शरीर से पसीना चुने लगता है, दो सौ चार° होने पर विकलता होने लगती हैं, लेकिन हमारे यहां ऐसे भी स्थान हैं, जहां तापमान नौ सौ सोलह° तक पहुंचता है; जब कि घरके भीतर भी गरमी सह हो जाती है, शरीर चिष-चिष करने लगता है, कोई काम करने का मन नहीं करता । ऐसे तापमान का अनुमान रूसवालों को नहीं हो सकता। उसकी जगह उनको अनुभव है हिमविन्दु से पाँच.शून्य, साठ° तक तापमान का नीचे जाना । सारी दुनिया में कितनी ही गणित संबंधी बातें एकसी मानी जाती हैं, लेकिन अंग्रेजों ने अपनी मथुरा को तीनों लोकों से न्यारी ही रखना चाहा है । इंगलैंड और इंगलैंड के साम्राज्य को छोड़कर सारी दुनिया में लोग सड़कों और रास्तों पर दाहिने चलने रूस में पच्चीस मास्त्र हैं, लेकिन अंग्रेज "बायें चलो" की बात को मानते हैं। जिस वक्त भारत मणराज्य घोषित होने जा रहा था, उसके एक ही दो दिन पहिले मैंने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति से कहा, कि अंग्रेजों के रख छोड़े कम से कम इस बड़े कलंक को तो दूर कर दीजिये और छब्बीस जनवरी को गणतन्य की घोषणा के साथ साथ यह भी घोषित कर दीजिए- आज से हमारे यहां चलना दाहिनी ओर होगा । ईरान, अफगानिस्तान, चीन, जैसे छोटे बड़े हमारे पड़ोसी राज्य दाहिने चलने को मानते हैं; अमेरिका, युरोप के सारे देश दाहिने चलने को स्वीकार करते हैं, फिर भारत क्यों अंग्रेजों के पीछे बाममार्गी बना रहे । राष्ट्रपति ने पसन्दः किया, लेकिन वह अपने को पाते थे, कहा - नेहरूजी से क । भला नेहरू जी की खोपड़ी में कभी यह बात धँसनेवाली थी । माप में भी सारी दुनिया शतिक मानको मानती है । सन्तीमीतर, देसी मीतर, मीतर किलोमीतर मानिस्तान ईरान तक में चलते हैं। सारी दुनिया इस वैज्ञानिक मान को मानती है । दशोत्तर बृद्धि के होने से हिसाबमें इससे बहुत आसानी होती है, लेकिन अंग्रेज बारह इंच का एक फुट, तीन फुट का एक गज और एक हज़ार सात सौ साठ गज का एक मील अभी भी मानते जा रहे हैं । थर्मामीटर में भी दुनिया शून्य डिगरी को हिमबिन्दु और सौ डिगरीको उबाल-बिन्दु मान सेन्तीप्रेद तापमान का व्यवहार करती है, लेकिन अंग्रेज उस धर्मामीतर को स्वीकार करते हैं, जिसमें तैंतीस डिगरी पर हिमबिन्दु माना जाता है । विज्ञान संबन्धी कितनी ही बड़ी खोजें नेचाहे क्यों न की हों, लेकिन जाति के तौर पर वह महा अवैज्ञानिक हैं। उसके साथ रहकर हम भी अपनी इस मूढ़ता का परिचय अंग्रेज-भिन्न दूसरे लोगों के सामने दिखलाते हैं । हां, तो - सत्ताईस° तापमान कहने में जितना आसान मालूम होता है, उतना सहने में नहीं । हिमबिन्दु से चौबीस° तक तापमान के नीचे जाने पर मुझे कोई खास तकलीफ नहीं मालूम होती थी । वैसे इतनी सदर्दी में मी मैं लोगों को कान खोले देखता था, लेकिन मैं केवल आंख, नाक और मुंह को ही नंगा रखनेका पक्षपाती था । जब - पच्चीस° से नीचे तापमान जाता, तो उसका अमर सांस लेते समय छाती में मालूम देता । इस वक्त नाक से निकली श्वासकी भाष मुछ्न्दर आदमियों के ठोंके ऊपर जम जाती, भौंहों पर भी सफेदी पुत जाती, और महिलाओं के आगे निकत्ते बालों को भी रुपहला बना देती । इतना होने पर भी मैं उसे असह्य नहीं अनुभव करता था । वस्तुतः आदमी जितना निम्न तापमान पर नियंत्रण कर सकता है, उतना उच्च तापमान पर नहीं । यदि हिमबिन्दु से पचास डिगरी नीचे तापमान चला जाये, तो अधिक गरम कपड़ों की आवश्यकता होगी, जिनके नीचे चमड़ा या पोस्तीन रखना भी आवश्यक होगा। सारे शरीर को आप चमड़े के पतलून, चमड़े के कोट और ओवरकोट, चमड़े की टोपी तथा चमड़े के दस्ताने से गरम रख सकते हैं। अपनी द्वितीय यात्रा में मैं यह सारी चीजें ईरान में अपने साथ ले गया था, लेकिन अबकी केवल टोपी और श्रोवर कोट चमड़े के लेगया था । चमड़े के ओवरकोट को पहन कर तो निश्चय ही कड़ी से कड़ी सर्दी पर विजय प्राप्त की जा सकती है, लेकिन एक सौ दस एक सौ बारह° डिगरी की अपने यहां की गरमी पर आप कैसे नियंत्रण कर सकते हैं ? ठंडे तहखानों में बैठने का रवाज हमारे यहां बहुत पुराना है, छिड़काव के साथ खसकी टट्टियां भी मदद करती हैं और अब दिल्ली के देवताओं की कृपास कम से कम उनकी कोठियों में वायु-नियंत्रित वातावरण रखने का प्रबन्ध हुआ है। लेकिन यह सभी साधन बहुत खर्चीले हैं और साथ ही ऐसे हैं, जो आपकी क्रियाशीलता और गति की रोक को हटा नहीं सकते । इसके विरुद्ध सर्द से सर्द मुल्क में अपने शरीर भर को अच्छी तरह ढांक कर चलफिर सकते हैं । सारा काम कर सकते हैं । सत्ताईस° हिमबिन्दु से नीचे तापमान था, किन्तु तापन- मशीन की मरम्मत का अभी कोई ठिकाना नहीं था। घर-घर में क्रिसमस की पारम्परिक मिठाई तैयार की गई थी । पनीर, अंडा, चीनी और क्या क्या न्यामतें मिलाकर यह रूसी पुडिंग तैयार होती है। उसके चौकोर पिंड के चारों पावों में क्रास का चिन्ह अंकित करने का सांचा प्रायः सभी घरों में होता है। यह मिठाई बड़ी स्वादिष्ट होती है, और प्रभु मसीह का प्रसाद मानकर बड़े सन्मान के साथ खाई जाती है। क्रिसमस के दिन जो इष्ट, मत्रि, संबंधा घरपर मिलने आते हैं, वह इस प्रसाद में से थोड़ा अवश्य पाते हैं । पहिने क्रिसमस की बात तो मुझे याद नहीं, लेकिन एक हज़ार छः सौ छियालीस के क्रिसमस का दिन मुझे अच्छी तरह याद है । घरमें मिठाई बनाकर चुपचाप खाली नहीं जाती, बल्कि उसे गिरजा में भेजना पड़ता है, जहां कुशकी तरह की एक घास से गड़ये में रक्वे पवित्र जल को छिड़क कर पुरोहित भोग लगा देता है, तब वह घरमें लाकर खाई जाती है। हमारे यहां रथ-यात्राओं और दूसरी जगहों पर इसी तरह भक्त लोग भोग लगाने के लिये अपनी अपनी चीज ले जाते हैं। रामलीला के चढ़ावे में आधा दोना खाली कर लेनेपर भी हमारे यहां के पुजारियों का संतोष नहीं होता, लेकिन रूसी पुजारी केवल पवित्र जल छिड़क भर देना ही अपना कर्तव्य समझते हैं । पास ही के गिरजे में ईगर नौकरानी के साथ भोग लगाने के लिये अपनी मिठाई न्ने गया था । उनके लौटने में दो घंटे से ऊपर लगे । पता लगा, गिरजा के हाल ही नहीं, बल्कि उसके बाहर पगडंडी पर भी बहुत दूर तक भक्तों की दुहरी पंक्ति खड़ी थी । सबके पास पहुंचने में पुरोहित को काफी समय लगा, इसीलिये यह देर हुई। कम्युनिज्म का दर्शन भले ही ईश्वर और धर्म का विरोधी हो, लेकिन लोगों के लिये धर्म का छोड़ना उतना आसान नहीं है । सोवियत के तजवें में यह मालूम होता है । जिन लोगों को मसीह के भगवान् होने पर विश्वास नहीं यह भी जब अपनी कला, संस्कृति और इतिहास देखते हैं, तो पिछले सात-आठ साँ वर्षों से ईसाई धर्म के साथ उसका घनिष्ट संबंध पाते हैं । हरेक आदमी की सहानुभूति र रुचि सदा अपनी परंपरा के साथ होती है । बचपन के संस्कार मनुष्य के मन से सहज भूलनेवाले नहीं है । किसमस को ही ले लीजिये, इसके साथ कितने पुराने संबन्ध याद आते हैं । श्राजक्ल पंचांग बदल गया है, किन्तु मुझे एक हज़ार नौ सौ सैंतीस का क्रिसमस याद है । डाशून्य श्चेत्स्की ने अपना क्रिसमस पुराने पंचांग के अनुसार मनाया था । आदमी जिस परिस्थिति में रहता है, उसी के अनुसार अपनी आत्मरक्षा और सुख का प्रबन्ध कर लेता है। रूस के लोग हजारों वर्षों से घुटने तक के पहिलं तीन माम लंबे बूट पहनते आये हैं। आजकल वह ज्यादातर चमड़े का होता है, लेकिन पूर्वजों का नमदे का बूट भी लुप्त नहीं हुआ है। यह वही बूट है, जो कि शकों के साथ भारत आया और वहां की सूर्य प्रतिमाओं के पैरों में आज भी दिखलायी पड़ता है । पुरुष को अपने कोट के ऊपर एक और कन्टोप जैमी जाड़ों की टोपी रग्वनी पड़ती है, जिसे खोलकर आवश्यकता पड़ने पर कान और गरदन को ढाँका जा सकता है, नहीं तो ऊपर करके उसे गोल टोपी-सा बना दिया जाता है। अधिकतर टोपियां पोस्तीन या समूर की होती हैं । स्त्रियां ऐसी कन्टोपदार टोपी नहीं पहिनती, उसको जगह उनके ओवरकोट का कालर काफी बड़ा होता है, जिसमें चमड़ा या समूर भी मढ़ा रहता है, जिस को उठा देने से सारा सिर कान और गरदन ढक जाता है । सत्ताईस दिसम्बर को हम विश्वविद्यालय गये, तो वहां मध्यएसिया के एक प्रोफेसर से मुलाकात हुई । वह तुर्कमानी भाषा के पंडित तथा ऋशकाबाद में बाईस साल से अध्यापन करते थे। अब हमारे सिर पर मध्यएसिया जाने की धुन सवार हुई । पिछले छ महीनों में मध्यएसिया के इतिहास और आधुनिक मध्यएसिया को जानने के लिये काफी पुस्तकें पढ़ी थीं । इतने दिनों में यह तो मालूम हो गया था, कि यहां रहकर हम पुस्तक नहीं लिख सकते । पुस्तक लिखें भी तो दुहरे सेंसरों के कारण उसका भारत में पहुँचना संदिग्ध है । फिर् खो जाने के डर से दो दो कापी करना हमारे बस की बात नहीं थी । मन यहीं कहता था, कि चलो सोवियत का दर्शन तीसरी बार भी कर लिया । यदि मध्यएसिया देखने का अवसर मिले तो अबकी गरमियों में वहां चला जाय, नहीं तो देशका रास्ता पकड़ना ही अच्छा है। भारत की कोई खबर नहीं मिलती भी । चिट्ठियाँ के भी आने में छ छ महीने लग जाते थे । तुर्कमानिया के प्रोफेसर से मालूम हुआ, कि मास्को से अश्काबाद का वैमानिक किराया सात सौ रूबल है। अकेले के लिये राशनकार्ड पर बीस रूबल में होटल का इंतजाम हो जायगा। उनके कहने से मुझे मालूम होगया कि अगर जाने की आज्ञा मिल जाय, तो मैं अपने पैसे के बलपर भी वहां चार महीने घूम आ सकता हूं । प्रोफेसर ने बतलाया, कि चीजों का दाम यहीं जैसा है, सिर्फ मौसिम के समय मेवे कुछ सस्ते होते हैं । कह रह थे - वहां गरमी बहुत पड़ती है, इसलिये ऐन गरमी के महीनों में नहीं जाना चाहिये, लेकिन उनको क्या मालूम कि हिन्दुस्तान में कितनी गरमी पड़ती है। उन्होंने बतलाया कि तुर्कमानिया में भी अरबी-भाषा-भाषी कहीं कहीं मिल जाते हैं, उजबेकिस्तान में और भी मिलेंगे । उनके कहने में यह भी मालूम हुआ कि तुर्कमानिया में बलोची और बोलने वालों के कुछ गांव हैं । शाम को लौटकर जब घर आया, तो देखा मकान गरम है -- मशीन की मरम्मत करढ़ी गई थी । इक्कीस दिसम्बर को घरके भीतर तापमान - एक सौ बीस° और-पंद्रह' था, लेकिन मरदी बहुत मालूम नहीं होती थी । विद्यार्थी अर्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, इसलिये नया पाठ नहीं चल रहा था । तीस दिसम्बर से नववर्ष की तैयारी होने लगी । लाल झंडों और दूसरी चीजों से संस्थाओं के घरों को सजाया जाने लगा । इकतीस दिसम्बर भी आया । एक हज़ार छः सौ पैंतालीस का सन् विदाई लेने लगा और एक हज़ार नौ सौ छियालीस आने को हुआ । सालभर के कामों का जब मैं लेखाजोखा करने लगा, तो मालूम हुआ इस साल में कुछ नहीं लिख सफा । "मधुरस्वप्न" और "मध्य एसिया" के संबंध में सामग्री अवश्य जमा की, लेकिन मालूम नहीं उन्हें कब लिखने का मौका मिलेगा । अगला साल भी यदि इसी तरह बीता, तो बहुत बुरा होगा। आज सोफी के यहां दावत थी। उसका पति तीन साल बाद लौटा था । पान दावत का अनिवार्य अंग है, फिर उसके बाद नाम भी । मैं दोनों ही में श्रनारी था । सोफी ने बहुत चाहा कि यदि पीता नहीं तो थोड़ा नाच ही लूं, लेकिन जिन्दगी में जब सीखा ही नहीं था, तो आज नाच कैसे सकता था । दो बजे रात तक दावत चलती रही । मेहमान कुछ होश में और कुछ पैरों से लड़खड़ाते अपने घरों की तरफ चले । अगले वर्ष के लिये यही सोचा कि यदि मध्यएसिया को अच्छी तरह देखने का मौका मिल गया, तो अगले तीन सौ पैंसठ दिनों को भी यहां अर्पण करने के लिये तैयार हैं । नौ वसन्त की प्रतीक्षा जाड़ों को दो सालों में बाटना बिलकुल बेवकूफा मालूम होती हैनवम्बर- दिसम्बर को एक हज़ार छः सौ पैंतालीस में और जनवरी-फरवरी को एक हज़ार छः सौ छियालीस में । वसम्त के आरम्भ से सम्वत्सर का आरम्भ ठीक था, लेकिन दुनिया से परम्परा के पीछे इतनी पड़ी हुई है, कि वह अपने पंचांग में इस साधारण से सुधार के लिये भी तैयार नहीं है, चाहे इसके कारण आय-व्यय पेश करते समय एक साल की जगह एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस - एक हज़ार छः सौ छियालीस भले ही लिखना पड़े। वसन्त की प्रतीक्षा जितनी उत्कंठा के साथ रूस जैसे ठंडे देशो में की जाती हैं, उतना हमारे देश में नहीं हो सकती। लड़कों की एक रूमी कविता में मुना था ---- वसन्त, मेरी बहिनियाखिड़की पर बैठी तेरी प्रतीक्षा कर रही है । छोटी सी बहिनिया नहीं बल्कि जवान-बूढ़े सभी वसन्तं की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन लेनिनग्राद में उसके पहुंचने में अभी पूरी चार महीन की देरी थी । पहिली जनवरी को तापमान बारह° से पंद्रह° था । तीन जनवरी को युनिवर्सिटा गये । प्रथम वर्ष के छात्रों को कुछ पढ़ाया, फिर व्यापक तथा चतुर्थवर्ष के छात्रों ने पाठ्य पुस्तक से भिन्न "मृच्छकटिक" नाटक शुरू किया । अर्धवार्षिक परीक्षा हो रही थी । परीक्षा समाप्त होते ही कुछ दिनों की छुट्टी थी, इसलिये दस फरवरी तक के लिये मेरा युनिवर्सिटी में कोई काम नहीं था । मैं अब अधिकतर घर पर ही रह पुस्तकों को पढ़ता और उनसे नोट लेता । आठ जनवरी को पहिली बार देखा कि पचास के करीब जर्मन बन्दी मेरी खिड़की के बाहर से जा रहे हैं । इसके बाद तो रोज दस बजे उन्हें काम की ओर जाने देखता और चार बजे डेरे की ओर लौटते । उनकी देखभाल के लिये कभी कभी नो बन्दुक लिये एक स्त्री-सिपाही होती । बन्दियों के चेहरे उदास और श्रीहीन हो तो आश्चर्य ही क्या ? हिटलर ने विश्वविजय के लिये उनको दुनिया के देशों में भेजा था । हिटलर तो दूसरे लोक को विजय करने चला गया, लेकिन यह बेचारे अपने देश से दूर रूस की सख्त सर्दी में काम करने के लिये छोड़ दिये गये थे । उनके खाने पीने का इंतिजाम अच्छा था, यह उनके स्वस्थ शरीर से मालूम होता था । हाँ, कपड़े उनके अपने पुराने फौज के थे, जो फौज के थे, जो कुछ अधिक मैले थे । चौदह जनवरी को युनिवर्सिटी गये । चतुर्थवर्ष की दोनां छात्रायें संस्कृत में उत्तीर्ण हुई । "मेघदूत" से कुछ प्रश्न पूछे गये । सोवियत के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में परीक्षा के लिये कागज स्याही बिलकुल खर्च नहीं करनी पड़ती । परीक्षा मौखिक होती है, और परोक्षक होकर अपने ही अध्यापकों में से तीन कुर्सी पर उठते हैं। पूर्णांक पाँच होते हैं। छात्राओं के उत्तर देकर बाहर जाने के बाद तानिया को मैंने दो नंबर देने के लिये कहा, तो मेरे सहकर्मियों ने बतलाया - इसका अर्थ तो है फेल करना । जान पड़ता है फेल शब्द विद्यार्थियों में ही नहीं वर्जित है, बल्कि व्यापकों और परीक्षकों में भी । पर्याप्त दिनों तक जिस छात्र ने उपस्थिति दी हैं, उसे सोवियत की विद्या संस्था में फेल होने की संभावना ही नहीं है । प्रश्न का उत्तर देते समय विद्यार्थी अपनी सारी पुस्तकों को साथ रख सकते हैं, क्योंकि परीक्षा स्मृति की नहीं बल्कि समझ की ली जाती है । हमारे घर में अभी कोई नौकर नहीं था ! ग़शन के जमाने में एक नौकर और रखकर राशन दुकान से दस गुने दामपर चीजें खरीदकर खिलाना आसान काम नहीं था । बर्तन मलना और चारपाई ठीक-ठाक करना मेरे जिम्मे था । जाड़े के दिन थे । नल का पानी काटने को दौड़ता था। मैं गरम पानी से धोने का पक्षपाती नहीं था, क्योंकि उसमें समय अधिक लगता था। और घर के नल के ठंडे पानी से धोने पर एक मिनट में ही दर्द के मारे हाथ और मन तिलमिला उठते । हमारा तो यह सिद्धान्त था - शारीरिक परिश्रम से घृणा करने की - वश्यकता नहीं, लेकिन उसमें इतना समय नहीं लगाना चाहिये कि लिखने पढ़ने के समय में कोताही हो । मालकिन का विचार कुछ दूसरा ही था । हम बैठे बैठे रात के एक-दो बजे तक पढ़ते और नोट लेते रहते, जिसे वह बेकार समझतीं । चौबीस जनवरी को जर्मन बन्दी सड़कों की बरफ पैंक रहे थे। मकान के काम को इस समय बन्द रखा गया था, लेकिन अगले जाड़ों में वह चौबीस घंटाटे अखंड चलता रहा। शहर की सभी बरफ तो कहां फेंकी जा सकती थी ? छोटी छोटी सड़कों और गलियों की बरफ वसन्त के आरम्भ होने पर ही गलकर साफ होती, लेकिन बड़ी सड़कों पर उसे बराबर हटाते रहना पड़ता, नहीं तो ट्रामों और मोटरों का आना-जाना रुक जाता, क्योंकि बरफ पर चलने से वह ऊंची-नीची हो जाती है, जिसके कारण उसपर यानों का चलना सरल काम नहीं होता । अभी भी भारत में क्या हो रहा है, इसके जानने का कोई इंतिजाम नहीं हो सका था । स्थानीय रेडियो और रूसी समाचार पत्रों से काम चलनेवाला नहीं था। उनमें महीनों बाद शायद कभी कोई दो-चार पंक्तियाँ देखने-सुनने को मिलतीं । मुझे सबसे जरूरी मालूम होता था - एक रेडियो खरीदना, जिसमें देश विदेश की खबरें मालूम होती रहें, लेकिन यह इच्छा पूरी होने में अभी चारसाढ़ेचार महीनों की देर थी । तेईस जनवरी की रात के रेडियो से मालूम हुआ, कि दिल्ली की एसेम्बली ने राष्ट्रीय सरकार की मांग की है। जावा में वहां के स्वतंत्रता प्रेमियों को दबाकर फिर से डचों का राज्य कायम करने से अंग्रेजी सेना ने जब इंकार कर दिया, तो अंग्रेजों ने वहां भारतीय सैना भेजी। कहने को अब बिलायत में मजदूरदल का शासन था, जो अपने को समाजवादी कहने का अभिमान करता है, लेकिन विलायत की मजूरपार्टी भी साम्राज्यवाद के अन्धानुसरण में अपने टोरी भाइयों से पीछे नहीं है । अब उसने भारतीय सेना का जात्रा में उपयोग करना शुरू किया था। दिल्ली की एसेम्बली ने इसका भी विरोध किया था । "प्राब्दा" सोवियत के सबसे अधिक छपनेवाले दो रूसी पत्रों में से एक है। कुछ स्थानीय खबरों के साथ मास्को की "प्राब्दा " का लेनिनग्रादीय संस्करण भी निकलता था, जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय खबरें और कुछ लेख भी रहा करते थे । चाहे खबरें दो-चार ही पंक्ति की कमी कभी निकलती हो, लेकिन उनसे यह मालूम हो रहा था, कि युद्ध के बाद का भारत चुपचाप अंग्रेजों के जुए को नहीं हो सकता । लेकिन मेरा वृद्ध नेताओं पर विश्वास नहीं था । मैन तेईस जनवरी की डायरी में लिखा था- वृद्ध नेता तो सभी कामो में रोड़ा टकानेवाले हैं, राजनीत में और भी । नेता तरुणों को होना चाहिये । वृद्ध अपने ज्ञान और तजब से परामर्श दे सकते हैं । भारतीय हिन्दू राजनीतिक बुड्ढों के ख्याल में ही नहीं आता कि वह समय वाला है जबकि हिन्दू-मुसलमानों की सीमायें रोटी-बेटी से भी मिट जायेंगी । अतीत पर नजर डालकर समझौता करना चाहते हैं । रूस म पच्चाम मास द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और ऐसे भीषण नरसंहार के साथ, जो कि "न भूतो न भविष्यति, " - सोवियत रूस को सत्तर लाख आदमियों की बलि चढ़ानी पड़ी । लेकिन सत्ताईस जनवरी को मैं देख रहा था, कि अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में फिर तनातनी शुरू हो गयी हैं । राष्ट्रसंघ की बैठक में सोवियत प्रतिनिधि ने जावा में अंग्रेजी तथा उसकी सहायक जापानी सेना के इस्तेमाल करने के विरोध में पत्र लिखा । उक्रइन के प्रतिनिधि ने ग्रीस में अंग्रेजी सेना की फासिज्म पोषक नीति का विरोध किया । ईरानी प्रतिनिधि ने ईरान के भीतर हस्तक्षेप करने का इल्जाम रूस के ऊपर लगाया । कोरिया में सोवियत और अमेरिका रस्साकशी कर रहे थे । अमेरिका अल्पसंख्यक धनिकों के पक्ष में था और वहां की बहुसंख्यक पाड़ित जनता सोवियत के पक्ष में ।
|
BCCI Central Contracts: हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) ग्रेड ए से ग्रेड सी में पहुंचे. (AFP)
नई दिल्ली. स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) की फिटनेस पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट के लिए चिंता का विषय बनी है. बड़ौदा में जन्मे इस क्रिकेटर ने खुद को बखूबी साबित किया है लेकिन पिछले कुछ साल में पीठ की चोट ने उन्हें काफी परेशान किया. पंड्या चोट के कारण कुछ वक्त से गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं और टी20 वर्ल्ड कप में इसी के कारण उनके चयन पर सवाल भी खड़े हुए. बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) उम्मीद जता रहै हैं कि पंड्या जब मैदान पर वापसी करेंगे तो बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कमाल दिखाएंगे.
हार्दिक पंड्या ने क्रिकेट से ब्रेक लिया है और अपना पूरा ध्यान रिहैब पर लगा रहे हैं. वह एक ऑलराउंडर के तौर पर वापसी करने के लिए मेहनत कर रहे हैं. टी20 विश्व कप-2021 में भी हार्दिक ने सभी मैचों में गेंदबाजी नहीं की थी. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी चाहते हैं कि पंड्या तीनों विभागों में अपनी सेवाएं दें. हार्दिक के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर गांगुली ने कहा कि इस ऑलराउंडर को पूरी तरह से ठीक होने के लिए समय दिया गया है.
गांगुली ने एनडीटीवी से कहा, 'हार्दिक चोटिल हो गए थे और उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के लिए एक ब्रेक दिया गया, ताकि वह लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करना जारी रख सकें. मुझे भरोसा है कि मैं उन्हें शुरुआत में कुछ रणजी ट्रॉफी मैच खेलते देखूंगा. ' गांगुली ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पंड्या के पूरी तरह फिट होकर गेंदबाजी करने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि वह जब मैदान पर वापसी करेंगे तो और अधिक ओवर करेंगे. उनका फिटनेस स्तर भी बढ़ेगा और वह मजबूत होंगा. वह अब आईपीएल में अहमदाबाद की कप्तानी भी संभालेंगे. यह एक ऐसा मंच होगा जहां चयनकर्ता उनकी फॉर्म और फिटनेस की जांच करेंगे. इसके बाद फैसला लिया जाएगा. ' हार्दिक पंड्या आईपीएल के आगामी सीजन (IPL-2022) में नई टीम अहमदाबाद का नेतृत्व करेंगे.
.
|
BCCI Central Contracts: हार्दिक पंड्या ग्रेड ए से ग्रेड सी में पहुंचे. नई दिल्ली. स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की फिटनेस पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट के लिए चिंता का विषय बनी है. बड़ौदा में जन्मे इस क्रिकेटर ने खुद को बखूबी साबित किया है लेकिन पिछले कुछ साल में पीठ की चोट ने उन्हें काफी परेशान किया. पंड्या चोट के कारण कुछ वक्त से गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं और टीबीस वर्ल्ड कप में इसी के कारण उनके चयन पर सवाल भी खड़े हुए. बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली उम्मीद जता रहै हैं कि पंड्या जब मैदान पर वापसी करेंगे तो बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कमाल दिखाएंगे. हार्दिक पंड्या ने क्रिकेट से ब्रेक लिया है और अपना पूरा ध्यान रिहैब पर लगा रहे हैं. वह एक ऑलराउंडर के तौर पर वापसी करने के लिए मेहनत कर रहे हैं. टीबीस विश्व कप-दो हज़ार इक्कीस में भी हार्दिक ने सभी मैचों में गेंदबाजी नहीं की थी. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी चाहते हैं कि पंड्या तीनों विभागों में अपनी सेवाएं दें. हार्दिक के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर गांगुली ने कहा कि इस ऑलराउंडर को पूरी तरह से ठीक होने के लिए समय दिया गया है. गांगुली ने एनडीटीवी से कहा, 'हार्दिक चोटिल हो गए थे और उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के लिए एक ब्रेक दिया गया, ताकि वह लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करना जारी रख सकें. मुझे भरोसा है कि मैं उन्हें शुरुआत में कुछ रणजी ट्रॉफी मैच खेलते देखूंगा. ' गांगुली ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पंड्या के पूरी तरह फिट होकर गेंदबाजी करने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि वह जब मैदान पर वापसी करेंगे तो और अधिक ओवर करेंगे. उनका फिटनेस स्तर भी बढ़ेगा और वह मजबूत होंगा. वह अब आईपीएल में अहमदाबाद की कप्तानी भी संभालेंगे. यह एक ऐसा मंच होगा जहां चयनकर्ता उनकी फॉर्म और फिटनेस की जांच करेंगे. इसके बाद फैसला लिया जाएगा. ' हार्दिक पंड्या आईपीएल के आगामी सीजन में नई टीम अहमदाबाद का नेतृत्व करेंगे. .
|
शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश में सीआईडी अफसर (CID TI) से थाने में मारपीट मामले में कोर्ट ने बड़ा एक्शन लिया है। मामले में कोर्ट ने पुलिस कर्मियों को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने एमपी नगर और अजाक टीआई (TI) समेत 8 पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजा है।
जानकारी के अनुसार सीआईडी के टीआई के साथ थाने में मारपीट की गई थी। सीआईडी (CID) टीआई ने अजाक थाने में इसकी शिकायत की थी। थाने में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। कार्रवाई नहीं होने के बाद CID टीआई सिद्धार्थ प्रियदर्शन ने कोर्ट की शरण ली थी। वहीं इस मारपीट का वीडियो भी सामने आया था।
मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ प्रियदर्शन सार्वजनिक जगह पर शराब पीते पकड़े गए थे। जिसके बाद उन्होंने एमपी नगर थाने के पुलिसकर्मियों को धौंस दिखाते हुए मारपीट और झूमाझटकी की थी, और जमकर हंगामा भी किया था।
|
शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश में सीआईडी अफसर से थाने में मारपीट मामले में कोर्ट ने बड़ा एक्शन लिया है। मामले में कोर्ट ने पुलिस कर्मियों को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने एमपी नगर और अजाक टीआई समेत आठ पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजा है। जानकारी के अनुसार सीआईडी के टीआई के साथ थाने में मारपीट की गई थी। सीआईडी टीआई ने अजाक थाने में इसकी शिकायत की थी। थाने में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। कार्रवाई नहीं होने के बाद CID टीआई सिद्धार्थ प्रियदर्शन ने कोर्ट की शरण ली थी। वहीं इस मारपीट का वीडियो भी सामने आया था। मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ प्रियदर्शन सार्वजनिक जगह पर शराब पीते पकड़े गए थे। जिसके बाद उन्होंने एमपी नगर थाने के पुलिसकर्मियों को धौंस दिखाते हुए मारपीट और झूमाझटकी की थी, और जमकर हंगामा भी किया था।
|
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi) का शुक्रवार को निधन हो गया। अजीत जोगी को पिछले 20 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह रायपुर के अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर दी है।
अजीत जोगी का निधन 74 साल की उम्र में हुआ। बीते कई दिनों से उनकी तबीयत काफी खराब चल रही थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस होने के बाद उन्हें 9 मई को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अजीत जोगी (Ajit Jogi Death) नौकरशाह से राजनेता बने थे। अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के बंटवारे के बाद अजीत जोगी नवंबर साल 2000 से नवंबर 2003 तक मुख्यमंत्री रहे। साल 2016 में अजित जोगी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और अपनी खुद की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की स्थापना की थी।
|
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया। अजीत जोगी को पिछले बीस दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह रायपुर के अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर दी है। अजीत जोगी का निधन चौहत्तर साल की उम्र में हुआ। बीते कई दिनों से उनकी तबीयत काफी खराब चल रही थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस होने के बाद उन्हें नौ मई को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अजीत जोगी नौकरशाह से राजनेता बने थे। अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के बंटवारे के बाद अजीत जोगी नवंबर साल दो हज़ार से नवंबर दो हज़ार तीन तक मुख्यमंत्री रहे। साल दो हज़ार सोलह में अजित जोगी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और अपनी खुद की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की स्थापना की थी।
|
पति / पत्नी से एक या कई बच्चों का जन्म इस बात की गारंटी नहीं देता है कि युवा परिवार विघटित नहीं होगा। दुर्भाग्यवश, दुनिया में हर दिन विवाहों की एक बड़ी संख्या तोड़ दी जा रही है, और पति और पत्नी से मामूली संतान की उपस्थिति व्यावहारिक रूप से उन्हें तलाक की प्रक्रिया शुरू करने से रोकती नहीं है।
फिर भी, कानून के शासन के बाद, सबसे पहले, कमजोर नागरिकों के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, और माता-पिता के विवाह के विघटन से उनके बच्चों के जीवन और भाग्य को जरूरी रूप से प्रभावित किया जाएगा, इस प्रक्रिया को संचालित करना इतना आसान नहीं है। इसके अतिरिक्त, जब आप अपने दूसरे छमाही के साथ संबंध तोड़ने का प्रयास करते हैं, तो आप 18 वर्ष से कम उम्र के संयुक्त बच्चे होने से संबंधित कई कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं।
इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि तलाक को औपचारिक रूप से कैसे औपचारिक बनाना है, यदि कमजोर बच्चे हैं, और इस प्रक्रिया की कौन सी विशेषताएं मौजूद हैं।
एक सामान्य नियम के रूप में, एक आदमी और एक महिला के बीच तलाक जो कमजोर बच्चों के बीच है, केवल अदालतों के माध्यम से संभव है । यह उन मामलों पर भी लागू होता है जब मां और पिता इस बात पर सहमत हुए कि किसके भविष्य में उनका बच्चा रहेगा, और वे उन्हें कैसे शिक्षित करेंगे, और उन परिस्थितियों में जब उन्हें इस या किसी अन्य मुद्दे पर गंभीर असहमति हो।
मुकदमे की शुरूआत करने के लिए, पति या पत्नी को आवश्यक दस्तावेज जमा करना होगा, व्यक्तिगत रूप से दावा का बयान लिखना होगा, साथ ही न्यायपालिका को आवेदन करने के लिए राज्य शुल्क का भुगतान करना होगा। अदालत द्वारा मामले का विचार काफी जल्दी खत्म हो सकता है या कई महीनों तक खींच सकता है।
आम तौर पर, यदि दोनों वयस्क परिवार के सदस्य तलाक के लिए सहमत होते हैं, तो उनके वंश के आगे भाग्य के साथ-साथ संयुक्त रूप से अधिग्रहित संपत्ति के विभाजन और रखरखाव पर अपना मौखिक या लिखित समझौता होता है, अदालत विवाहित जोड़े को सुलह के लिए एक अवधि प्रदान करती है, जो आम तौर पर लगभग 3 महीने होती है। यदि, इस समय के अंत में, पति और पत्नी द्वारा लिया गया निर्णय नहीं बदलता है, और वे अपने विवाह के आधिकारिक विघटन पर जोर देते रहेंगे, अदालत उनके बीच पारिवारिक संबंधों को समाप्त करने और पिता या मां के साथ टुकड़ों को छोड़ने पर एक फैसले जारी करती है।
यदि पति और पत्नी के बीच कम से कम एक मुद्दे संयुक्त समझौते से नहीं पहुंचता है, तो अदालत सावधानीपूर्वक दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत सभी सबूतों और तर्कों की जांच करती है और एक ऐसे प्रस्ताव को जारी करती है जो सभी विवादित मुद्दों को हल करती है। बेशक, इस स्थिति में एक अनुभवी पेशेवर वकील की ओर मुड़ना बेहतर होगा जो आपको बताएगा कि तलाक की व्यवस्था कैसे करें और सही तरीके से तलाक की व्यवस्था करें यदि परिवार का छोटा बच्चा है और सभी आवश्यक दस्तावेजों को इकट्ठा करने में मदद करेगा।
अदालत द्वारा तय निर्णय के बाद कानूनी बल में आता है, दोनों पति / पत्नी को इस दस्तावेज़ की एक प्रति अपने हाथों में प्राप्त करने का अधिकार है और तलाक के प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में स्थानांतरित करने का अधिकार है।
रजिस्ट्री कार्यालय के माध्यम से एक छोटे बच्चे के साथ तलाक की व्यवस्था कैसे करें?
रूस और यूक्रेन के कानूनों के तहत, यह प्रक्रिया न्यायपालिका को अनिवार्य सहारा प्रदान करती है। इस बीच, असाधारण मामले हैं जो विशेष रूप से रजिस्ट्री कार्यालयों के माध्यम से नाबालिग बच्चों की उपस्थिति में तलाक की अनुमति देते हैं, जैसे किः
- लापता होने के रूप में दूसरे पति की पहचान;
- पत्नी या पति की अक्षमता;
- माता-पिता में से एक की आपराधिक सजा और 36 महीने से अधिक की अवधि के लिए उनकी सजा।
इसके अलावा, यह ध्यान में रखना चाहिए कि यदि जोड़ा अभी तक एक वर्ष की आयु तक नहीं पहुंच पाया है, और यदि महिला बच्चे के जन्म की अपेक्षा करती है, तो न्यायपालिका के माध्यम से तलाक की शुरुआत केवल पत्नी की पहल पर ही संभव है।
|
पति / पत्नी से एक या कई बच्चों का जन्म इस बात की गारंटी नहीं देता है कि युवा परिवार विघटित नहीं होगा। दुर्भाग्यवश, दुनिया में हर दिन विवाहों की एक बड़ी संख्या तोड़ दी जा रही है, और पति और पत्नी से मामूली संतान की उपस्थिति व्यावहारिक रूप से उन्हें तलाक की प्रक्रिया शुरू करने से रोकती नहीं है। फिर भी, कानून के शासन के बाद, सबसे पहले, कमजोर नागरिकों के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, और माता-पिता के विवाह के विघटन से उनके बच्चों के जीवन और भाग्य को जरूरी रूप से प्रभावित किया जाएगा, इस प्रक्रिया को संचालित करना इतना आसान नहीं है। इसके अतिरिक्त, जब आप अपने दूसरे छमाही के साथ संबंध तोड़ने का प्रयास करते हैं, तो आप अट्ठारह वर्ष से कम उम्र के संयुक्त बच्चे होने से संबंधित कई कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि तलाक को औपचारिक रूप से कैसे औपचारिक बनाना है, यदि कमजोर बच्चे हैं, और इस प्रक्रिया की कौन सी विशेषताएं मौजूद हैं। एक सामान्य नियम के रूप में, एक आदमी और एक महिला के बीच तलाक जो कमजोर बच्चों के बीच है, केवल अदालतों के माध्यम से संभव है । यह उन मामलों पर भी लागू होता है जब मां और पिता इस बात पर सहमत हुए कि किसके भविष्य में उनका बच्चा रहेगा, और वे उन्हें कैसे शिक्षित करेंगे, और उन परिस्थितियों में जब उन्हें इस या किसी अन्य मुद्दे पर गंभीर असहमति हो। मुकदमे की शुरूआत करने के लिए, पति या पत्नी को आवश्यक दस्तावेज जमा करना होगा, व्यक्तिगत रूप से दावा का बयान लिखना होगा, साथ ही न्यायपालिका को आवेदन करने के लिए राज्य शुल्क का भुगतान करना होगा। अदालत द्वारा मामले का विचार काफी जल्दी खत्म हो सकता है या कई महीनों तक खींच सकता है। आम तौर पर, यदि दोनों वयस्क परिवार के सदस्य तलाक के लिए सहमत होते हैं, तो उनके वंश के आगे भाग्य के साथ-साथ संयुक्त रूप से अधिग्रहित संपत्ति के विभाजन और रखरखाव पर अपना मौखिक या लिखित समझौता होता है, अदालत विवाहित जोड़े को सुलह के लिए एक अवधि प्रदान करती है, जो आम तौर पर लगभग तीन महीने होती है। यदि, इस समय के अंत में, पति और पत्नी द्वारा लिया गया निर्णय नहीं बदलता है, और वे अपने विवाह के आधिकारिक विघटन पर जोर देते रहेंगे, अदालत उनके बीच पारिवारिक संबंधों को समाप्त करने और पिता या मां के साथ टुकड़ों को छोड़ने पर एक फैसले जारी करती है। यदि पति और पत्नी के बीच कम से कम एक मुद्दे संयुक्त समझौते से नहीं पहुंचता है, तो अदालत सावधानीपूर्वक दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत सभी सबूतों और तर्कों की जांच करती है और एक ऐसे प्रस्ताव को जारी करती है जो सभी विवादित मुद्दों को हल करती है। बेशक, इस स्थिति में एक अनुभवी पेशेवर वकील की ओर मुड़ना बेहतर होगा जो आपको बताएगा कि तलाक की व्यवस्था कैसे करें और सही तरीके से तलाक की व्यवस्था करें यदि परिवार का छोटा बच्चा है और सभी आवश्यक दस्तावेजों को इकट्ठा करने में मदद करेगा। अदालत द्वारा तय निर्णय के बाद कानूनी बल में आता है, दोनों पति / पत्नी को इस दस्तावेज़ की एक प्रति अपने हाथों में प्राप्त करने का अधिकार है और तलाक के प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में स्थानांतरित करने का अधिकार है। रजिस्ट्री कार्यालय के माध्यम से एक छोटे बच्चे के साथ तलाक की व्यवस्था कैसे करें? रूस और यूक्रेन के कानूनों के तहत, यह प्रक्रिया न्यायपालिका को अनिवार्य सहारा प्रदान करती है। इस बीच, असाधारण मामले हैं जो विशेष रूप से रजिस्ट्री कार्यालयों के माध्यम से नाबालिग बच्चों की उपस्थिति में तलाक की अनुमति देते हैं, जैसे किः - लापता होने के रूप में दूसरे पति की पहचान; - पत्नी या पति की अक्षमता; - माता-पिता में से एक की आपराधिक सजा और छत्तीस महीने से अधिक की अवधि के लिए उनकी सजा। इसके अलावा, यह ध्यान में रखना चाहिए कि यदि जोड़ा अभी तक एक वर्ष की आयु तक नहीं पहुंच पाया है, और यदि महिला बच्चे के जन्म की अपेक्षा करती है, तो न्यायपालिका के माध्यम से तलाक की शुरुआत केवल पत्नी की पहल पर ही संभव है।
|
शहर के शीतला चौक क्षेत्र में रविवार को एक युवक ने कमरे में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। मृतक किशनगंज का रहने वाला था और यहां कमरा किराये पर लेकर रहता था। पुलिस ने सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली थाना एएसआई महावीर ने बताया कि किशनगंज के मदनपुरा निवासी विनोद (24) पुत्र रामदयाल मीणा कुछ महीने से बारां में रहकर मजदूरी करता था। वह शहर के शीतला चौक में एक मकान में किराए से रहता था। कुछ दिन से मकान मालिक कोटा गया हुआ था। इसी दौरान युवक घर पर अकेला था, जिसने रविवार को घर पर किराए के कमरे में पंखे से फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। रात को जब मकान मालिक घर लौटा तो युवक कमरे में फंदे पर लटका मिला।
सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने उसे अचेतावस्था में अस्पताल पंहुचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को अस्पताल मोर्चरी में रखवया दिया। जहां परिजनों के पहुचने पर सोमवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों की रिपोर्ट पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई ने बताया कि फिलहाल घटना के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
शहर के शीतला चौक क्षेत्र में रविवार को एक युवक ने कमरे में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। मृतक किशनगंज का रहने वाला था और यहां कमरा किराये पर लेकर रहता था। पुलिस ने सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोतवाली थाना एएसआई महावीर ने बताया कि किशनगंज के मदनपुरा निवासी विनोद पुत्र रामदयाल मीणा कुछ महीने से बारां में रहकर मजदूरी करता था। वह शहर के शीतला चौक में एक मकान में किराए से रहता था। कुछ दिन से मकान मालिक कोटा गया हुआ था। इसी दौरान युवक घर पर अकेला था, जिसने रविवार को घर पर किराए के कमरे में पंखे से फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। रात को जब मकान मालिक घर लौटा तो युवक कमरे में फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने उसे अचेतावस्था में अस्पताल पंहुचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को अस्पताल मोर्चरी में रखवया दिया। जहां परिजनों के पहुचने पर सोमवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों की रिपोर्ट पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई ने बताया कि फिलहाल घटना के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
Mahashivratri 2023: महाशिवरात्रि का पर्व 18 फरवरी को मनाई जाएगी । लेकिन भगवान शंकर को समर्पित इस पर्व से पहले दो बड़े ग्रहों की चाल चल रही है। 13 फरवरी को सूर्य ने कुम्भ राशि में प्रवेश किया और फिर शुक्र ने भी 15 फरवरी को मीन राशि में प्रवेश किया। महाशिवरात्रि से पहले प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि से पहले ग्रहों की यह चाल पांच राशियों के लिए अच्छे दिन ला सकती है।
मिथुन राशि : ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि पर मिथुन राशि वालों को बेहद शुभ फल मिल सकते हैं। उन्हें आर्थिक लाभ होगा। आपको भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। नौकरी और व्यापार में खूब तरक्की होगी। वर्क प्लेस पर आपके काम की तारीफ होगी। पराक्रम और पराक्रम में वृद्धि होगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। रिलेशनशिप की बात करें तो दांपत्य जीवन में खुशियां रहेंगी। आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे।
सिंह राशि : सिंह राशि वालों को नौकरी और बिजनेस में तरक्की मिलने की संभावना है। योजनाएं और रणनीतियां जरूर सफल होंगी। जो लोग नौकरी को लेकर परेशान थे, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। आपको वेतन वृद्धि और पदोन्नति मिल सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी सब कुछ अच्छा रहने वाला है। सरकारी नौकरी की तैयारी से जुड़े लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है। परीक्षा में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे।
कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए यह महाशिवरात्रि शुभ मानी जाती है। नौकरी और व्यापार से जुड़े लाभ होंगे। धन संपत्ति में वृद्धि की संभावना है। धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। अगर आप किसी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल रहेगा। इस अवधि में किए गए निवेश का दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। दाम्पत्य जीवन में मधुरता रहेगी। आप अपने पार्टनर के साथ रिश्तों की मधुरता महसूस करेंगे।
धनु राशि : धनु राशि वालों के भी अच्छे दिनों की शुरुआत महाशिवरात्रि से होगी। पैसे-पैसे के लेन-देन के लिए समय अनुकूल रहेगा। कर्ज में फंसा पैसा आपको मिल सकता है। निवेश के लिए भी समय अच्छा है। आय के स्रोत बढ़ेंगे। व्यावसायिक रणनीतियां भी आपको काफ़ी मुनाफ़ा देंगी। समाज में मान-प्रतिष्ठा पर चोट लगेगी। कार्यस्थल पर आपके काम की खूब तारीफ होगी।
कुंभ राशि : महाशिवरात्रि का पर्व कुंभ राशि वालों की किस्मत चमका सकता है। महाशिवरात्रि से आपको हर काम में सफलता मिलेगी। कुंभ राशि वालों को अचानक धन लाभ होने की संभावना है। धन की बचत होगी। खर्च पर नियंत्रण बढ़ेगा। आपको नौकरी के अच्छे प्रस्ताव भी मिल सकते हैं। यह अवधि आपके लिए बहुत ही अनुकूल रहने वाली है। भाई-बहनों से संबंध अच्छे रहेंगे। माता-पिता का भी पूरा सहयोग मिलेगा।
|
Mahashivratri दो हज़ार तेईस: महाशिवरात्रि का पर्व अट्ठारह फरवरी को मनाई जाएगी । लेकिन भगवान शंकर को समर्पित इस पर्व से पहले दो बड़े ग्रहों की चाल चल रही है। तेरह फरवरी को सूर्य ने कुम्भ राशि में प्रवेश किया और फिर शुक्र ने भी पंद्रह फरवरी को मीन राशि में प्रवेश किया। महाशिवरात्रि से पहले प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि से पहले ग्रहों की यह चाल पांच राशियों के लिए अच्छे दिन ला सकती है। मिथुन राशि : ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि पर मिथुन राशि वालों को बेहद शुभ फल मिल सकते हैं। उन्हें आर्थिक लाभ होगा। आपको भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। नौकरी और व्यापार में खूब तरक्की होगी। वर्क प्लेस पर आपके काम की तारीफ होगी। पराक्रम और पराक्रम में वृद्धि होगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। रिलेशनशिप की बात करें तो दांपत्य जीवन में खुशियां रहेंगी। आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे। सिंह राशि : सिंह राशि वालों को नौकरी और बिजनेस में तरक्की मिलने की संभावना है। योजनाएं और रणनीतियां जरूर सफल होंगी। जो लोग नौकरी को लेकर परेशान थे, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। आपको वेतन वृद्धि और पदोन्नति मिल सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी सब कुछ अच्छा रहने वाला है। सरकारी नौकरी की तैयारी से जुड़े लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है। परीक्षा में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। कन्या राशि : कन्या राशि वालों के लिए यह महाशिवरात्रि शुभ मानी जाती है। नौकरी और व्यापार से जुड़े लाभ होंगे। धन संपत्ति में वृद्धि की संभावना है। धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। अगर आप किसी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल रहेगा। इस अवधि में किए गए निवेश का दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। दाम्पत्य जीवन में मधुरता रहेगी। आप अपने पार्टनर के साथ रिश्तों की मधुरता महसूस करेंगे। धनु राशि : धनु राशि वालों के भी अच्छे दिनों की शुरुआत महाशिवरात्रि से होगी। पैसे-पैसे के लेन-देन के लिए समय अनुकूल रहेगा। कर्ज में फंसा पैसा आपको मिल सकता है। निवेश के लिए भी समय अच्छा है। आय के स्रोत बढ़ेंगे। व्यावसायिक रणनीतियां भी आपको काफ़ी मुनाफ़ा देंगी। समाज में मान-प्रतिष्ठा पर चोट लगेगी। कार्यस्थल पर आपके काम की खूब तारीफ होगी। कुंभ राशि : महाशिवरात्रि का पर्व कुंभ राशि वालों की किस्मत चमका सकता है। महाशिवरात्रि से आपको हर काम में सफलता मिलेगी। कुंभ राशि वालों को अचानक धन लाभ होने की संभावना है। धन की बचत होगी। खर्च पर नियंत्रण बढ़ेगा। आपको नौकरी के अच्छे प्रस्ताव भी मिल सकते हैं। यह अवधि आपके लिए बहुत ही अनुकूल रहने वाली है। भाई-बहनों से संबंध अच्छे रहेंगे। माता-पिता का भी पूरा सहयोग मिलेगा।
|
झाबुआ(नईदुनिया प्रतिनिधि)। 10 सितंबर 2018 को झाबुआ कोतवाली से आरोपित रूपसिंह बारिया निवासी सालरपाड़ा फरार हो गया था। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। प्रथम श्रेणी न्यायाधीश प्रतिभा वास्कले ने मंगलवार को आरोपित रूपसिंह को धारा 324 के तहत कसुरवार मानते हुए 2 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। एडीपीओ सूरज बैरागी ने बताया कि 10 सितंबर को फरियादी आरक्षक जितेंद्र द्वारा झाबुआ कोतवाली पर रिपोट दर्ज करवाई थी कि चौकी पारा के आयुष अधिनियम के अपराध में गिरफ्तार शुदा आरोपित रूपसिंह को न्यायलय में पेश करने के लिए झाबुआ कोतवाली लाया गया था। इस दौरान वह फरार हो गया। न्यायाधीश वास्कले ने उसे दंडित किया है। प्रकरण का संचालन जिला लोक अभियोजन अधिकारी सिमी रत्नम ने किया।
झाबुआ(नईदुनिया प्रतिनिधि)। आचार संहिता लागू रहने के दौरान 12 बोर की बंदूक लेकर घूमने पर आरोपित को प्रथम श्रेणी न्यायाधीश प्रतिभा वास्कले ने मंगलवार को आचार संहिता का उल्लघंन साबित होने पर 6 माह का सश्रम कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। एडीपीओ सूरज बैरागी ने बताया कि फरियादी उप निरीक्षक हरिसिंह चुंडावत द्वारा थाना कालीदेवी पर रिपोट दर्ज करवाई थी कि कलेक्टर के आदेश के दौरान निर्वाचन 2019 के दौरान 10 मार्च 2019 में वे कल्याणपुरा कस्बे में डिप्टी कर रहे थे। इस दौरान रायपूरिया रोड खेड़ा फाटे पर चैकिंग चल रही थी। आरोपित हवसिंह मेड़ा 12 बोर की बंदूक सिंगल नाल लेकर निकला जब उसे रोका गया और पूछताछ की गई तो उसके पास छूट के संबंध में कोई अनुज्ञप्ति का या आदेश नहीं था। अतः उसके विरुद्ध आचार संहिता उल्लघंन की धारा 188 तथा धारा 30 आयुष अधिनियम के तहत बंदूक जब्त कर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में उसे पेश किया गया। मंगलवार को प्रथम श्रेणी न्यायाधीश वास्कले ने उसे कसूरवार मानते हुए सश्रम कारावास व अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण का संचालन जिला लोक अभियोन अधिकारी सिमी रत्नम द्वारा किया गया।
|
झाबुआ। दस सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को झाबुआ कोतवाली से आरोपित रूपसिंह बारिया निवासी सालरपाड़ा फरार हो गया था। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। प्रथम श्रेणी न्यायाधीश प्रतिभा वास्कले ने मंगलवार को आरोपित रूपसिंह को धारा तीन सौ चौबीस के तहत कसुरवार मानते हुए दो वर्ष का सश्रम कारावास तथा पाँच सौ रुपयापये अर्थदंड से दंडित किया है। एडीपीओ सूरज बैरागी ने बताया कि दस सितंबर को फरियादी आरक्षक जितेंद्र द्वारा झाबुआ कोतवाली पर रिपोट दर्ज करवाई थी कि चौकी पारा के आयुष अधिनियम के अपराध में गिरफ्तार शुदा आरोपित रूपसिंह को न्यायलय में पेश करने के लिए झाबुआ कोतवाली लाया गया था। इस दौरान वह फरार हो गया। न्यायाधीश वास्कले ने उसे दंडित किया है। प्रकरण का संचालन जिला लोक अभियोजन अधिकारी सिमी रत्नम ने किया। झाबुआ। आचार संहिता लागू रहने के दौरान बारह बोर की बंदूक लेकर घूमने पर आरोपित को प्रथम श्रेणी न्यायाधीश प्रतिभा वास्कले ने मंगलवार को आचार संहिता का उल्लघंन साबित होने पर छः माह का सश्रम कारावास व दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। एडीपीओ सूरज बैरागी ने बताया कि फरियादी उप निरीक्षक हरिसिंह चुंडावत द्वारा थाना कालीदेवी पर रिपोट दर्ज करवाई थी कि कलेक्टर के आदेश के दौरान निर्वाचन दो हज़ार उन्नीस के दौरान दस मार्च दो हज़ार उन्नीस में वे कल्याणपुरा कस्बे में डिप्टी कर रहे थे। इस दौरान रायपूरिया रोड खेड़ा फाटे पर चैकिंग चल रही थी। आरोपित हवसिंह मेड़ा बारह बोर की बंदूक सिंगल नाल लेकर निकला जब उसे रोका गया और पूछताछ की गई तो उसके पास छूट के संबंध में कोई अनुज्ञप्ति का या आदेश नहीं था। अतः उसके विरुद्ध आचार संहिता उल्लघंन की धारा एक सौ अठासी तथा धारा तीस आयुष अधिनियम के तहत बंदूक जब्त कर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में उसे पेश किया गया। मंगलवार को प्रथम श्रेणी न्यायाधीश वास्कले ने उसे कसूरवार मानते हुए सश्रम कारावास व अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण का संचालन जिला लोक अभियोन अधिकारी सिमी रत्नम द्वारा किया गया।
|
Giridih: गिरिडीह के बेंगाबाद थाना पुलिस कुख्यात अपराधी और राजद नेता कैलाश यादव हत्याकांड के मुख्य आरोपी मुकेश राय को आखिरकार दबोचने में सफल रही. शुक्रवार देर शाम प्रेसवार्ता कर डीएसपी संजय राणा, एसडीपीओ अनिल सिंह और बेंगाबाद थाना प्रभारी शशि सिंह ने पूरे मामले की जानकारी दी. गिरफ्तार अपराधी मुकेश राय को पुलिस ने मोतीलेदा के बीएड कॉलेज के समीप से दबोचा. इस दौरान पुलिस ने अपराधी के पास से एक देसी लोडेड पिस्तौल के साथ चार जिंदा कारतूस, एक स्मार्ट फोन के साथ बाईक भी बरामद किया. राजद नेता हत्याकांड का यह अपराधी पिछले दो सालों से फरार चल रहा था और दो सालों बाद जब पुलिस ने इसे दबोचा, इसके खिलाफ कई और अपराधिक घटनााओं की लिस्ट सामने आई. जिसमें अवैध हथियार रखने के साथ गिरिडीह-मधुपूर ट्रैन और सड़क लूट कांड का केस भी शामिल है. लिहाजा, पुलिस इस अपराधी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है.
बताते चलें कि दो साल पहले साल 2020 इस मुख्य आरोपी ने राजद नेता कैलाश की हत्या निर्ममता के साथ अपने पिता समेत कई और साथियों के साथ मिलकर कर दिया था. घटना के वक्त मृतक राजद नेता मोतीलेदा के ही एक ग्रामीण को लेकर बेंगाबाद थाना से इसी अपराधी के खिलाफ किसी और मामले का केस दर्ज कराकर लौट रहा था. इसी दौरान देर रात राजेश राय ने अपने पिता सुखदेव राय और भाईयों के साथ मिलकर कर दिया था. घटना के बाद यह आरोपी फरार हो गया था लेकिन चर्चित हत्याकांड बेंगाबाद पुलिस ने इसके कुछ साथियों के साथ इसके भाई और पिता सुखदेव राय को दबोचने में सफल रही थी. जबकि इसके फरार रहने के कारण पुलिस ने इसके मोतीलेदा स्थित घर का कुर्की जब्ती भी किया था. इसके बाद भी यह फरार चल रहा था. इसी क्रम में गुरुवार की देर रात मिले गुप्त सूचना के आधार पर इसे मोतीलेदा स्थित बीएड कॉलेज के समीप से दबोचा गया.
|
Giridih: गिरिडीह के बेंगाबाद थाना पुलिस कुख्यात अपराधी और राजद नेता कैलाश यादव हत्याकांड के मुख्य आरोपी मुकेश राय को आखिरकार दबोचने में सफल रही. शुक्रवार देर शाम प्रेसवार्ता कर डीएसपी संजय राणा, एसडीपीओ अनिल सिंह और बेंगाबाद थाना प्रभारी शशि सिंह ने पूरे मामले की जानकारी दी. गिरफ्तार अपराधी मुकेश राय को पुलिस ने मोतीलेदा के बीएड कॉलेज के समीप से दबोचा. इस दौरान पुलिस ने अपराधी के पास से एक देसी लोडेड पिस्तौल के साथ चार जिंदा कारतूस, एक स्मार्ट फोन के साथ बाईक भी बरामद किया. राजद नेता हत्याकांड का यह अपराधी पिछले दो सालों से फरार चल रहा था और दो सालों बाद जब पुलिस ने इसे दबोचा, इसके खिलाफ कई और अपराधिक घटनााओं की लिस्ट सामने आई. जिसमें अवैध हथियार रखने के साथ गिरिडीह-मधुपूर ट्रैन और सड़क लूट कांड का केस भी शामिल है. लिहाजा, पुलिस इस अपराधी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है. बताते चलें कि दो साल पहले साल दो हज़ार बीस इस मुख्य आरोपी ने राजद नेता कैलाश की हत्या निर्ममता के साथ अपने पिता समेत कई और साथियों के साथ मिलकर कर दिया था. घटना के वक्त मृतक राजद नेता मोतीलेदा के ही एक ग्रामीण को लेकर बेंगाबाद थाना से इसी अपराधी के खिलाफ किसी और मामले का केस दर्ज कराकर लौट रहा था. इसी दौरान देर रात राजेश राय ने अपने पिता सुखदेव राय और भाईयों के साथ मिलकर कर दिया था. घटना के बाद यह आरोपी फरार हो गया था लेकिन चर्चित हत्याकांड बेंगाबाद पुलिस ने इसके कुछ साथियों के साथ इसके भाई और पिता सुखदेव राय को दबोचने में सफल रही थी. जबकि इसके फरार रहने के कारण पुलिस ने इसके मोतीलेदा स्थित घर का कुर्की जब्ती भी किया था. इसके बाद भी यह फरार चल रहा था. इसी क्रम में गुरुवार की देर रात मिले गुप्त सूचना के आधार पर इसे मोतीलेदा स्थित बीएड कॉलेज के समीप से दबोचा गया.
|
अगर नहीं, तो यह जरूर जान लें कि गर्मियों में प्याज का सेवन करने के कारण यह हीट स्ट्रोक से बचाने का काम तो करेगा ही, साथ ही साथ अन्य कई हानिकारक बीमारियों से भी आपको बचाएगा। नीचे जानिए प्याज का सेवन करने से क्या-क्या फायदे होते हैं।
गर्मियों का समय उत्तर भारत में इतना भयानक होता है कि हर साल कई लोग हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं। प्याज का सेवन करने के कारण हीट स्ट्रोक की समस्या से बचे रहने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि प्याज में जल की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है जो आपकी बॉडी को जरूरत पड़ने पर पानी की कमी को पूरा कर सकता है। इसलिए गर्मियों में नियमित रूप से प्याज का सेवन कर सकते हैं।
कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से भारत में हर साल लाखों लोग की जान जाती है। विभिन्न प्रकार के कैंसर से आपके शरीर को बचाए रखने के लिए प्याज में एंटीकैंसर गुण पाया जाता है। यह शरीर में पनप रही कैंसर सेल्स को मारने का गुण रखता है। इसी प्रभाव के कारण आपका शरीर कैंसर के जोखिम से बचा रहता है।
प्याज को आप अपनी डायट में सलाद की तरह शामिल कर सकते हैं। खासकर यह उन लोगों के लिए काफी लाभदायक साबित होकर और जिनका ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से पूरी बॉडी तक नहीं पहुंचता है। इसके कारण व्यक्ति को थकान और कमजोरी भी महसूस होने लगती है। जबकि प्याज का सेवन करने के कारण इसमें मौजूद विशेष गुण ब्लड सर्कुलेशन को मेंटेन करने में सक्रिय रूप से मदद करता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के कारण ही हमारे शरीर कई प्रकार के संक्रामक बीमारियों से बचा रहता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत होती है वह जल्दी बीमार नहीं पड़ते और उन्हें सर्दी जुकाम की समस्या भी नहीं होती है। प्याज में इम्यून सेल्स को मेंटेन बनाए रखने की विशेष क्रिया पाई जाती है। इसलिए आप भी अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्याज का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।
पाचन क्रिया में गड़बड़ी होने के कारण और जंक फूड का अधिक सेवन करने से भी पेट में अल्सर की समस्या हो सकती है। यही अल्सर बड़े होकर कैंसर का रूप ले सकते हैं और आपके कोलन इन्फेक्शन का कारण भी बन सकते हैं। इस समस्या से बचे रहने के लिए प्याज का सेवन किया जा सकता है क्योंकि यह पेट के अल्सर को ठीक करने के लिए प्रभावी रूप से मददगार होती है।
आपने अक्सर देखा होगा कि जब कभी घर पर किसी को चोट लग जाती है तो उसे प्याज और हल्दी को चोट लगने वाली जगह पर लगाने की सलाह दी जाती है। इसका वैज्ञानिक कारण क्या है कि प्याज में एंटी इन्फ्लेमेटरी और पेन रिलीविंग गुण पाया जाता है। यह दर्द के कारण होने वाली सूजन को कम करने में प्रभावी रूप से कार्य करता है। इसलिए प्याज का सेवन करने के कारण आपके शरीर में को दर्द में तो राहत मिलेगी ही, जबकि इसका इस्तेमाल करने के कारण ही आप स्वस्थ बने रहेंगे।
|
अगर नहीं, तो यह जरूर जान लें कि गर्मियों में प्याज का सेवन करने के कारण यह हीट स्ट्रोक से बचाने का काम तो करेगा ही, साथ ही साथ अन्य कई हानिकारक बीमारियों से भी आपको बचाएगा। नीचे जानिए प्याज का सेवन करने से क्या-क्या फायदे होते हैं। गर्मियों का समय उत्तर भारत में इतना भयानक होता है कि हर साल कई लोग हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं। प्याज का सेवन करने के कारण हीट स्ट्रोक की समस्या से बचे रहने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि प्याज में जल की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है जो आपकी बॉडी को जरूरत पड़ने पर पानी की कमी को पूरा कर सकता है। इसलिए गर्मियों में नियमित रूप से प्याज का सेवन कर सकते हैं। कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से भारत में हर साल लाखों लोग की जान जाती है। विभिन्न प्रकार के कैंसर से आपके शरीर को बचाए रखने के लिए प्याज में एंटीकैंसर गुण पाया जाता है। यह शरीर में पनप रही कैंसर सेल्स को मारने का गुण रखता है। इसी प्रभाव के कारण आपका शरीर कैंसर के जोखिम से बचा रहता है। प्याज को आप अपनी डायट में सलाद की तरह शामिल कर सकते हैं। खासकर यह उन लोगों के लिए काफी लाभदायक साबित होकर और जिनका ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से पूरी बॉडी तक नहीं पहुंचता है। इसके कारण व्यक्ति को थकान और कमजोरी भी महसूस होने लगती है। जबकि प्याज का सेवन करने के कारण इसमें मौजूद विशेष गुण ब्लड सर्कुलेशन को मेंटेन करने में सक्रिय रूप से मदद करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के कारण ही हमारे शरीर कई प्रकार के संक्रामक बीमारियों से बचा रहता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत होती है वह जल्दी बीमार नहीं पड़ते और उन्हें सर्दी जुकाम की समस्या भी नहीं होती है। प्याज में इम्यून सेल्स को मेंटेन बनाए रखने की विशेष क्रिया पाई जाती है। इसलिए आप भी अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्याज का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं। पाचन क्रिया में गड़बड़ी होने के कारण और जंक फूड का अधिक सेवन करने से भी पेट में अल्सर की समस्या हो सकती है। यही अल्सर बड़े होकर कैंसर का रूप ले सकते हैं और आपके कोलन इन्फेक्शन का कारण भी बन सकते हैं। इस समस्या से बचे रहने के लिए प्याज का सेवन किया जा सकता है क्योंकि यह पेट के अल्सर को ठीक करने के लिए प्रभावी रूप से मददगार होती है। आपने अक्सर देखा होगा कि जब कभी घर पर किसी को चोट लग जाती है तो उसे प्याज और हल्दी को चोट लगने वाली जगह पर लगाने की सलाह दी जाती है। इसका वैज्ञानिक कारण क्या है कि प्याज में एंटी इन्फ्लेमेटरी और पेन रिलीविंग गुण पाया जाता है। यह दर्द के कारण होने वाली सूजन को कम करने में प्रभावी रूप से कार्य करता है। इसलिए प्याज का सेवन करने के कारण आपके शरीर में को दर्द में तो राहत मिलेगी ही, जबकि इसका इस्तेमाल करने के कारण ही आप स्वस्थ बने रहेंगे।
|
दिल्ली सरकार राज्य में रिक्त पड़े दिव्यांग पदों जल्द भरने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार को दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए आरक्षित विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने का निर्देश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पीडब्ल्यूडी सीधी भर्ती कोटा के तहत उपलब्ध 1,351 रिक्तियों पर ध्यान देने के बाद आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने यह भी कहा कि पदों में दृष्टिबाधित लोगों के लिए 356 रिक्त पद भी शामिल हैं। अदालत ने संबंधित दिल्ली सरकार के अधिकारियों को एक महीने के भीतर दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसबी) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को मांग पत्र भेजने का निर्देश दिया है।
डीएसएसबी और यूपीएससी को इसके बाद 30 दिनों के भीतर अधिसूचना विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया गया है। आदेश में कहा गया कि डीएसएसएसबी/यूपीएससी, जैसा भी मामला हो, डीएसएसएसबी/यूपीएससी द्वारा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि से 30 दिनों के भीतर एक लिखित परीक्षा/साक्षात्कार/चयन की प्रक्रिया आयोजित करेगा, जैसा कि मामला हो सकता है, परिणाम घोषित करेगा और नियुक्ति की प्रक्रिया परिणाम/साक्षात्कार की घोषणा की तारीख से 30 दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी।
अदालत का आदेश नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें नेत्रहीन या कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को भरने में सरकारी अधिकारियों की ओर से निष्क्रियता का आरोप लगाया गया था। यह दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार खुले पदों को भरने में विफल रही है और दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दे रही है।
|
दिल्ली सरकार राज्य में रिक्त पड़े दिव्यांग पदों जल्द भरने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पीडब्ल्यूडी सीधी भर्ती कोटा के तहत उपलब्ध एक,तीन सौ इक्यावन रिक्तियों पर ध्यान देने के बाद आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने यह भी कहा कि पदों में दृष्टिबाधित लोगों के लिए तीन सौ छप्पन रिक्त पद भी शामिल हैं। अदालत ने संबंधित दिल्ली सरकार के अधिकारियों को एक महीने के भीतर दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड और संघ लोक सेवा आयोग को मांग पत्र भेजने का निर्देश दिया है। डीएसएसबी और यूपीएससी को इसके बाद तीस दिनों के भीतर अधिसूचना विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया गया है। आदेश में कहा गया कि डीएसएसएसबी/यूपीएससी, जैसा भी मामला हो, डीएसएसएसबी/यूपीएससी द्वारा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि से तीस दिनों के भीतर एक लिखित परीक्षा/साक्षात्कार/चयन की प्रक्रिया आयोजित करेगा, जैसा कि मामला हो सकता है, परिणाम घोषित करेगा और नियुक्ति की प्रक्रिया परिणाम/साक्षात्कार की घोषणा की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जाएगी। अदालत का आदेश नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें नेत्रहीन या कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को भरने में सरकारी अधिकारियों की ओर से निष्क्रियता का आरोप लगाया गया था। यह दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार खुले पदों को भरने में विफल रही है और दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दे रही है।
|
सप्तविंशः सर्गः श्रीवसिष्ठ उवाच
तस्मिन् गिरित ग्रामे तस्य मण्डपकोटरे । अन्तर्धिमाश्याययतस्तत्रस्थे एव ते स्त्रियाँ ॥ १ ॥ अस्माकं चनदेवीभ्यां प्रसादः कृत इत्यथ । शान्तदुःखे गृहजड़े स्वव्यापारपरे स्थिते ॥ २ ॥ मण्डपाकाशसंलीनां लीलामाह सरस्वती । व्योमरूपा व्योमरूपां स्मयात्तूष्णीमित्र स्थिताम् ॥ ३ ॥ सङ्कल्पस्वप्नयोर्येयां यत्र संकथनं मिथः । यथेहाऽर्थक्रियां धत्ते तयोः सा संकथा तथा ॥ ४ ॥
अत्यन्त शुद्ध है। बोध ही सर्वत्र पदार्थसंघ है, स्वप्नोंमें और कल्पित नगरों में यह बात शतशः अनुभूत है ॥ ५७ ॥
सत्ताईसवाँ सर्ग
[ आश्चर्यमम लीला द्वारा फिर अपने पतिके दर्शनको अभिलाषा व्यक्त करना तथा सरस्वती देवीके उपदेशसे बोध प्राप्त कर अपने पूर्व जन्मोंका वर्णन करना ]
श्रीवसिष्ठजीने कहा ~~चत्स श्रीरामचन्द्रजी, उस पर्वतशिखरके ग्राममें उस ब्राह्मण के घरके मण्डपाकाशमें ही चहांपर ज्येष्ठशर्मा आदिके सामने स्थित वे दोनों ललनाएँ शीघ्र अन्तर्हित हो गई। हम लोगोंपर वनदेवियोंने अनुग्रह किया, ऐसा विचार कर ज्येष्ठशर्मा आदि घरके लोगोंका दुःख मिट गया और वे अपने गृहकृत्य में संलग्न हो गये । तदुपरान्त गृहमण्डपाकाशमें अन्य लोगोंकी दृष्टिमें अन्तर्हित विस्मयसे चुपचाप-सी बैठी हुई व्योमरूपिणी लीला से व्योमरूपा शुन्यरूप संकल्पशरीरवाली ) सरस्वतीने कहा ॥१-३॥
● लोक में प्रसिद्ध है कि दूसरेके सङ्कल्पशरीरको दूसरा नहीं देख सकता, ऐसी अवस्था में संकल्पशरीरधारिणी उन दोनोंका संवाद कैसे हो सकता है ?
|
सप्तविंशः सर्गः श्रीवसिष्ठ उवाच तस्मिन् गिरित ग्रामे तस्य मण्डपकोटरे । अन्तर्धिमाश्याययतस्तत्रस्थे एव ते स्त्रियाँ ॥ एक ॥ अस्माकं चनदेवीभ्यां प्रसादः कृत इत्यथ । शान्तदुःखे गृहजड़े स्वव्यापारपरे स्थिते ॥ दो ॥ मण्डपाकाशसंलीनां लीलामाह सरस्वती । व्योमरूपा व्योमरूपां स्मयात्तूष्णीमित्र स्थिताम् ॥ तीन ॥ सङ्कल्पस्वप्नयोर्येयां यत्र संकथनं मिथः । यथेहाऽर्थक्रियां धत्ते तयोः सा संकथा तथा ॥ चार ॥ अत्यन्त शुद्ध है। बोध ही सर्वत्र पदार्थसंघ है, स्वप्नोंमें और कल्पित नगरों में यह बात शतशः अनुभूत है ॥ सत्तावन ॥ सत्ताईसवाँ सर्ग [ आश्चर्यमम लीला द्वारा फिर अपने पतिके दर्शनको अभिलाषा व्यक्त करना तथा सरस्वती देवीके उपदेशसे बोध प्राप्त कर अपने पूर्व जन्मोंका वर्णन करना ] श्रीवसिष्ठजीने कहा ~~चत्स श्रीरामचन्द्रजी, उस पर्वतशिखरके ग्राममें उस ब्राह्मण के घरके मण्डपाकाशमें ही चहांपर ज्येष्ठशर्मा आदिके सामने स्थित वे दोनों ललनाएँ शीघ्र अन्तर्हित हो गई। हम लोगोंपर वनदेवियोंने अनुग्रह किया, ऐसा विचार कर ज्येष्ठशर्मा आदि घरके लोगोंका दुःख मिट गया और वे अपने गृहकृत्य में संलग्न हो गये । तदुपरान्त गृहमण्डपाकाशमें अन्य लोगोंकी दृष्टिमें अन्तर्हित विस्मयसे चुपचाप-सी बैठी हुई व्योमरूपिणी लीला से व्योमरूपा शुन्यरूप संकल्पशरीरवाली ) सरस्वतीने कहा ॥एक-तीन॥ ● लोक में प्रसिद्ध है कि दूसरेके सङ्कल्पशरीरको दूसरा नहीं देख सकता, ऐसी अवस्था में संकल्पशरीरधारिणी उन दोनोंका संवाद कैसे हो सकता है ?
|
६० ५० चन्दाबाई अभिनन्दन ग्रन्थ
लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीतने वालों का संघ स्थापित करना चाहते थे । इसके लिए अपरिग्रह की सख्त जरूरत थी, और तात्कालिक समाज में परिग्रहों में स्त्री परिग्रह पहला था । यही कारण था कि स्त्रियों को प्रत्रजित होने से वे सुखी नही हुए । उनका वंसा सोचना सही भी बीस पुरुषों के एक साथ रहने से भी उनका ससार एक कदम भागे नहीं बढ़ता, पर यदि वहाँ एक भी स्त्री प्रा गई, तो उनकी दुनिया कहाँ से कहाँ चली जाती है । कारण स्पष्ट है । प्रकृति स्त्री के द्वारा विकास पाती है अथवा यों कहें कि प्रकृति के विकास का साधन स्त्री है इसलिए अहिंसक सैनिकों को उस काल में स्त्री परिग्रह से बचाना बुद्ध के लिए जरूरी था । पर जब उन्होंने स्त्रियों को प्रवजित होने की अनुज्ञा दे दी, तब सभावित दोषों के मार्जन के लिए भाठ अनुशासन भी लगा दिए ।
संघ में दाखिल हो जाने पर भिक्षुणियों के लिए भी नियम बने । कुछ विद्वानों के अनुसार इन नियमों की संख्या छियालीस है। इन नियमों में यौन सम्बन्ध के प्रति तीव्र सजगता है। साथ ही एक नियम यह भी है कि - भिक्षु भिक्षुणी को नमस्कार नहीं करेगा, अथवा सम्मान नही प्रद शित करेगा ।' ऐसे नियम किस अभिप्राय से बनाये कि इनसे स्त्रियों की सामाजिक मर्यादा सकुचित हुई ।
विद्वानों का मत है कि 'मानसिक, नैतिक, पारिवारिक एवं सामाजिक दुःखों से छुटकारा पाना प्रथवा किसी प्रसह्य अवस्था से मुक्त होने के लिए स्त्रियाँ अपने पति पुत्र और पिता को छोड़कर संघ की शरण लेती थी । पण्डित हरप्रसाद शास्त्री का मत है कि ..बहुत सी युवतियाँ ज्यादा रुपयों में बिकने के अपमान से बचने के लिए और बहुत सी चिन्तनशील स्त्रियाँ युग युगान्तर के सस्कारों से अपने को मुक्त करने तथा मुक्तिपथ की बाधाओं से बचने के लिए प्रव्रज्या ग्रहण करती सघ की शरण में जाकर स्त्रियों को अपनी मुक्ति की साधना में सभी सुविधाएँ थी संस्कृति में खासकर बौद्ध संस्कृति में ध्यान को बहुत महत्त्व दिया गया । ध्यान के लिए जंगल हो पहले उपयुक्त स्थान समझा जाता था । सघ में शामिल होने वाली भिक्षुणियों के लिए भरण्य निवास करना होता था। ऐसे ही अवसर पर बौद्ध भिक्षुणियों में सर्व श्रेष्ठ उत्पल वर्षा पर प्रासक्त उसके मामा के लड़के नन्द ने धोखे से उस पर अत्याचार किया । उत्पल दर्षा ने जब इस प्रत्याचार की कथा भगवान से कही, सब बुद्ध ने भिक्षुणियों के लिए भरण्य निवास का निषेध कर दिया । मिक्षुणी शुभा पर जीवक के अभ्र कुंज में भ्रमण करते समय एक लम्पट ने बुरी नीयत से प्राक्रमण किया, जब समझाने पर भी नही माना, तो शुभा ने क्रोध से उसका हाथ पकड़कर झटक दिया । इस तरह और भी कितनी घटनाएं उस समय की भिक्षुणियो के चरित्र बल पर प्रकाश डालती है ।
बौद्ध संघ में बहुत सी चिन्तन शील स्त्रियाँ बौद्धिक और माध्यात्मिक आकर्षण से प्रविष्ट हुई थीं। निश्चय ही सघ में दाखिल होने के पहले उनकी जिज्ञासा बलवती थी । पर उस काल में स्त्री शिक्षा के लिए किसी विद्यालय का जिक्र नहीं मिलता। घरों में ही लड़कियों की शिक्षा होती थी भौर घरों के अन्दर ही उनकी धार्मिक जिज्ञासा भी जगती थी । बाद में जब मिक्षुणियों का संघ बन गया तो उनकी शिक्षा की ठीक व्यवस्था मठों में हुई। मठों में भिक्षुणियों को विभिवत् बौद्ध५८०
बौद्ध संस्कृति में नारी
शास्त्रों तथा और भी सामाजिक चिन्ताधारामों का ज्ञान कराया जाता था । विद्वानों का मत है कि थेरी गाया बौद्ध भिक्षुणियों की रचना है। प्राचीन पाली साहित्य में दर्जनों घुरन्धर दार्शनिक भिक्षुणियो का जिक्र मिलता है । संयुक्त निकाय में सुक्का नामक एक भिक्षुणी द्वारा राजगृह में धर्मोपदेश का उल्लेख है । भिक्षुणी क्षेमा का विनयपिटक पर पूरा अधिकार था। वह वक्तृत्व कला में निपुण थी । कहा जाता है कि एक बार प्रसेनजित ने उसके पास जाकर पूछा- "मृत्यु के बाद जीव का पुनर्जन्म होता या नहीं ? ।"
'भगवान् बुद्ध ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया है ।" "भगवान् ने इस प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दिया है ?"
"आप ऐसे किसी को जानते हैं, जो गंगा की बालू और समुद्र के जल-बिन्दुनों को को गिन सके ?"
नही ।
क्षेमाः- "यदि कोई पचस्कन्धों के आकर्षण से अपने को मुक्त कर सकेगा, तो वह भसीम
मतलस्पर्शी समुद्र का भाकार धारण कर सकेगा, प्रतः मत्यु के बाद जीव के पुर्नजन्म की धारणा प्रतीत की बात है ।" इस उत्तर से राजा खुश हो गया । उसी काल में मद्दा कुण्डलकेशा सारिपुत्र के समकक्ष पण्डिता थी ।
क्षेमाःराजाःक्षेमाःबौद्ध धर्म की व्यापकता ---
बौद्धधर्म का प्रधान सुर था - "बहुजन हिताय बहुजन सुखाय" इसलिए उसमें प्रचार की भावना बहुत बलवती थी। यह बहुत आसानी से कहा जा सकता है कि सेवा और नम्रता से अपने सिद्धान्त के प्रचार का उदाहरण बौद्ध धर्म के अलावा और कही नही है । सम्राट् अशोक के प्रोत्साहन से बौद्ध संघ के अन्दर प्रचार की भावना भोर भी बलवती हुई । सम्राट अशोक की पुत्री ने प्रत्रज्या ग्रहण को भौर सिंहल में बौद्ध धर्म के प्रचार का जिम्मा लिया। उसके साथ बहुत सी पण्डिता भिक्षुणियाँ सिहल में धर्मप्रचार के लिए गई । संघमित्रा त्रिविध विज्ञान में पारदर्शिनी थी। विनयपिटक पर उसका पूरा अधिकार था । धनुराधपुर के बोद्ध बिहार में सुत्तपिटक के पाँच और अभिधर्म के सात ग्रंथो की वह शिक्षा देती थी। इसके अलावा प्रजलि, उत्तरा, सपत्ता, छन्ना, उपालि, रेवती इत्यादि करीब तीस सर्व शास्त्र -पारंगता भिक्षुणियो का जिक्र सिंहल के साहित्य में मिलता है ।
बौद्धधर्म सदाचार-परायणता, बुद्धि की प्रधानता और लोक-जीवन के मेल के साथ जोरों से फैलता गया । जैसे-जैसे बौद्ध धर्म बढ़ता गया, वँसे से ही क्रमशः उसमें नाना प्रकार के लोग भी भाते गये । बुद्ध निर्माण के १०० वर्ष बाद, पर्थात् वैशाली की संगति के पश्चात् उसमें दो सम्प्रदाय हो गये थे । अशोक के समय में बौद्ध संघ में कुछ भवांछनीय व्यक्ति भा गये थे, जिन्हें निकाला गया था। बौद्ध के द्वारा प्रोत्साहन मिलने से बौद्धधर्म पूरी बाढ़ पर था। इस काल में हजारों मठ बने ।
१० पं० चन्याबाई भिन्नमठों में दान की विपुल सम्पत्ति जमा होने लगी। संघ में मिक्षुणियों का प्रवेश पहले ही हो चुका था। इस प्रकार जिस धर्म में परिग्रहण का कोई स्थान नहीं था, भिक्षु के लिए जहाँ सिर्फ तीन चीवर भोर एक पात्र रखने की भाशा थी वहाँ (स्त्री, सम्पत्ति ) दोनो प्रधान परिग्रह जमा हो गये । इसका जो परिणाम होना था वही हुमा । महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार ईसा की पहली शताब्दी में बौद्धधर्म के अन्दर एक वैपुल्यवादी सम्प्रदाय पैदा हो गया। यह सम्प्रदाय बुद्ध के मूल उपदेशों से अलग जा पड़ा । इसका कहना था - ( १ ) संघ न दान ग्रहण करता है, न उसे परिशुद्ध या उसका उपयोग करता है, न संघ को देने में महाफल है; (२) बुद्ध को दान देने में न महाफल है, न बुद्ध लोक में प्राकर ठहरे और न बुद्ध ने धर्मोपदेश किया, (३) खास मतलब से ( एकाभिप्रयाण ) ब्रह्मचर्य का नियम तोड़ा जा सकता है। यहाँ ऐतिहासिक बुद्ध के भस्तित्व से इन्कार किया गया है, संघ के प्रति गलत धारणा का प्रचार किया गया है और ब्रह्मचर्य की अनिवार्यता हटा ली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि दूषित मनोवृत्ति के भिक्षुओंों ने अपनी सुविधा के लिए इस सिद्धान्त को गढ़ा। राहुल जी इन्ही तीनो बातों के अन्दर महायान और वज्रयान के बीज पाते हैं । इसका नतीजा यह हुआ कि बौद्ध मठों में मनाचार फैल गया । भिक्षु भौर भिक्षुणियाँ दोनों का चरित्र भ्रष्ट हो गया और लोकदृष्टि में उनका मूल्य गिर गया। इन्ही तथा कुछ और कारणो से बौद्ध धर्म का ह्रास हो चला । इस तरह भगवान् बुद्ध की भविष्यवाणी के अनुसार पांच सौ साल बाद उनके अनुशासित धर्म का अन्त हो गया ।
बौद्ध-कालीन सामाजिक नियमबुद्ध के समय में कोई सार्वभौम सत्ता नहीं थी, इसलिए किसी सार्वभौम सामाजिक कानून का पता नही लगता। पर बुद्ध निर्वाण के १५८ वर्ष बाद सन् ईसवी से ३३५ वर्ष पूर्व चन्द्रगुप्त मौर्य ने सार्वभौम सत्ता कायम को । उसीके समय में उसके प्रधान मंत्री कौटिल्य ने "अर्थशास्त्र" नामक विधानग्रन्थ बनाया । कौटिल्य के पहले भी कुछ विधानप्रन्थ थे, जिनका अब पता नहीं लगता । इसमें शक नहीं कि वे सब विधान छोटे-छोटे गणतन्त्रो के रहे होगे । जो हो, पर इतना सही है कि कुछ प्राचीन पाली साहित्य और कौटिल्य अर्थशास्त्र से उस काल की सामाजिक स्थिति पर प्रकाश पड़ता है, जिसके अन्दर से हमें स्त्रियों को सामाजिक मर्यादा का पता लग सकता है ।
धम्मपद भट्टकथा के दूसरे खण्ड में उल्लेख है कि १५ साल की उम्र में लड़कियों के मन में पुरुष सग लाभ की इच्छा बलवती हो उठती है। विद्वानों का मत है कि साधारणतः लड़कियों की शादी १५ वर्ष की उम्र में कर दी जाती थी। कौटिल्य अर्थशास्त्र ( प्रकरण २७ कन्याकर्म ११, १२, १३ ) के अनुसार- "यदि तीन वर्ष तक मासिक धर्म होने पर भी कन्या न व्याही जाय तो उसकी जाति का कोई भी पुरुष उसका संग कर सकता है । यदि तीन साल से अधिक वक्त गुजर जाय तो किसी भी जाति का पुरुष उसको अपनी स्त्री बना सकता है। पर लड़की के माता-पिता का भाभूषण लेने पर उसे चोरी का दण्ड दिया जा सकता था।" इससे ज्ञात होता है कि उस काल में लड़कियों की रक्षा और उनकी शादी की समस्या थी ।
|
साठ पचास चन्दाबाई अभिनन्दन ग्रन्थ लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीतने वालों का संघ स्थापित करना चाहते थे । इसके लिए अपरिग्रह की सख्त जरूरत थी, और तात्कालिक समाज में परिग्रहों में स्त्री परिग्रह पहला था । यही कारण था कि स्त्रियों को प्रत्रजित होने से वे सुखी नही हुए । उनका वंसा सोचना सही भी बीस पुरुषों के एक साथ रहने से भी उनका ससार एक कदम भागे नहीं बढ़ता, पर यदि वहाँ एक भी स्त्री प्रा गई, तो उनकी दुनिया कहाँ से कहाँ चली जाती है । कारण स्पष्ट है । प्रकृति स्त्री के द्वारा विकास पाती है अथवा यों कहें कि प्रकृति के विकास का साधन स्त्री है इसलिए अहिंसक सैनिकों को उस काल में स्त्री परिग्रह से बचाना बुद्ध के लिए जरूरी था । पर जब उन्होंने स्त्रियों को प्रवजित होने की अनुज्ञा दे दी, तब सभावित दोषों के मार्जन के लिए भाठ अनुशासन भी लगा दिए । संघ में दाखिल हो जाने पर भिक्षुणियों के लिए भी नियम बने । कुछ विद्वानों के अनुसार इन नियमों की संख्या छियालीस है। इन नियमों में यौन सम्बन्ध के प्रति तीव्र सजगता है। साथ ही एक नियम यह भी है कि - भिक्षु भिक्षुणी को नमस्कार नहीं करेगा, अथवा सम्मान नही प्रद शित करेगा ।' ऐसे नियम किस अभिप्राय से बनाये कि इनसे स्त्रियों की सामाजिक मर्यादा सकुचित हुई । विद्वानों का मत है कि 'मानसिक, नैतिक, पारिवारिक एवं सामाजिक दुःखों से छुटकारा पाना प्रथवा किसी प्रसह्य अवस्था से मुक्त होने के लिए स्त्रियाँ अपने पति पुत्र और पिता को छोड़कर संघ की शरण लेती थी । पण्डित हरप्रसाद शास्त्री का मत है कि ..बहुत सी युवतियाँ ज्यादा रुपयों में बिकने के अपमान से बचने के लिए और बहुत सी चिन्तनशील स्त्रियाँ युग युगान्तर के सस्कारों से अपने को मुक्त करने तथा मुक्तिपथ की बाधाओं से बचने के लिए प्रव्रज्या ग्रहण करती सघ की शरण में जाकर स्त्रियों को अपनी मुक्ति की साधना में सभी सुविधाएँ थी संस्कृति में खासकर बौद्ध संस्कृति में ध्यान को बहुत महत्त्व दिया गया । ध्यान के लिए जंगल हो पहले उपयुक्त स्थान समझा जाता था । सघ में शामिल होने वाली भिक्षुणियों के लिए भरण्य निवास करना होता था। ऐसे ही अवसर पर बौद्ध भिक्षुणियों में सर्व श्रेष्ठ उत्पल वर्षा पर प्रासक्त उसके मामा के लड़के नन्द ने धोखे से उस पर अत्याचार किया । उत्पल दर्षा ने जब इस प्रत्याचार की कथा भगवान से कही, सब बुद्ध ने भिक्षुणियों के लिए भरण्य निवास का निषेध कर दिया । मिक्षुणी शुभा पर जीवक के अभ्र कुंज में भ्रमण करते समय एक लम्पट ने बुरी नीयत से प्राक्रमण किया, जब समझाने पर भी नही माना, तो शुभा ने क्रोध से उसका हाथ पकड़कर झटक दिया । इस तरह और भी कितनी घटनाएं उस समय की भिक्षुणियो के चरित्र बल पर प्रकाश डालती है । बौद्ध संघ में बहुत सी चिन्तन शील स्त्रियाँ बौद्धिक और माध्यात्मिक आकर्षण से प्रविष्ट हुई थीं। निश्चय ही सघ में दाखिल होने के पहले उनकी जिज्ञासा बलवती थी । पर उस काल में स्त्री शिक्षा के लिए किसी विद्यालय का जिक्र नहीं मिलता। घरों में ही लड़कियों की शिक्षा होती थी भौर घरों के अन्दर ही उनकी धार्मिक जिज्ञासा भी जगती थी । बाद में जब मिक्षुणियों का संघ बन गया तो उनकी शिक्षा की ठीक व्यवस्था मठों में हुई। मठों में भिक्षुणियों को विभिवत् बौद्धपाँच सौ अस्सी बौद्ध संस्कृति में नारी शास्त्रों तथा और भी सामाजिक चिन्ताधारामों का ज्ञान कराया जाता था । विद्वानों का मत है कि थेरी गाया बौद्ध भिक्षुणियों की रचना है। प्राचीन पाली साहित्य में दर्जनों घुरन्धर दार्शनिक भिक्षुणियो का जिक्र मिलता है । संयुक्त निकाय में सुक्का नामक एक भिक्षुणी द्वारा राजगृह में धर्मोपदेश का उल्लेख है । भिक्षुणी क्षेमा का विनयपिटक पर पूरा अधिकार था। वह वक्तृत्व कला में निपुण थी । कहा जाता है कि एक बार प्रसेनजित ने उसके पास जाकर पूछा- "मृत्यु के बाद जीव का पुनर्जन्म होता या नहीं ? ।" 'भगवान् बुद्ध ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया है ।" "भगवान् ने इस प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दिया है ?" "आप ऐसे किसी को जानते हैं, जो गंगा की बालू और समुद्र के जल-बिन्दुनों को को गिन सके ?" नही । क्षेमाः- "यदि कोई पचस्कन्धों के आकर्षण से अपने को मुक्त कर सकेगा, तो वह भसीम मतलस्पर्शी समुद्र का भाकार धारण कर सकेगा, प्रतः मत्यु के बाद जीव के पुर्नजन्म की धारणा प्रतीत की बात है ।" इस उत्तर से राजा खुश हो गया । उसी काल में मद्दा कुण्डलकेशा सारिपुत्र के समकक्ष पण्डिता थी । क्षेमाःराजाःक्षेमाःबौद्ध धर्म की व्यापकता --- बौद्धधर्म का प्रधान सुर था - "बहुजन हिताय बहुजन सुखाय" इसलिए उसमें प्रचार की भावना बहुत बलवती थी। यह बहुत आसानी से कहा जा सकता है कि सेवा और नम्रता से अपने सिद्धान्त के प्रचार का उदाहरण बौद्ध धर्म के अलावा और कही नही है । सम्राट् अशोक के प्रोत्साहन से बौद्ध संघ के अन्दर प्रचार की भावना भोर भी बलवती हुई । सम्राट अशोक की पुत्री ने प्रत्रज्या ग्रहण को भौर सिंहल में बौद्ध धर्म के प्रचार का जिम्मा लिया। उसके साथ बहुत सी पण्डिता भिक्षुणियाँ सिहल में धर्मप्रचार के लिए गई । संघमित्रा त्रिविध विज्ञान में पारदर्शिनी थी। विनयपिटक पर उसका पूरा अधिकार था । धनुराधपुर के बोद्ध बिहार में सुत्तपिटक के पाँच और अभिधर्म के सात ग्रंथो की वह शिक्षा देती थी। इसके अलावा प्रजलि, उत्तरा, सपत्ता, छन्ना, उपालि, रेवती इत्यादि करीब तीस सर्व शास्त्र -पारंगता भिक्षुणियो का जिक्र सिंहल के साहित्य में मिलता है । बौद्धधर्म सदाचार-परायणता, बुद्धि की प्रधानता और लोक-जीवन के मेल के साथ जोरों से फैलता गया । जैसे-जैसे बौद्ध धर्म बढ़ता गया, वँसे से ही क्रमशः उसमें नाना प्रकार के लोग भी भाते गये । बुद्ध निर्माण के एक सौ वर्ष बाद, पर्थात् वैशाली की संगति के पश्चात् उसमें दो सम्प्रदाय हो गये थे । अशोक के समय में बौद्ध संघ में कुछ भवांछनीय व्यक्ति भा गये थे, जिन्हें निकाला गया था। बौद्ध के द्वारा प्रोत्साहन मिलने से बौद्धधर्म पूरी बाढ़ पर था। इस काल में हजारों मठ बने । दस पंशून्य चन्याबाई भिन्नमठों में दान की विपुल सम्पत्ति जमा होने लगी। संघ में मिक्षुणियों का प्रवेश पहले ही हो चुका था। इस प्रकार जिस धर्म में परिग्रहण का कोई स्थान नहीं था, भिक्षु के लिए जहाँ सिर्फ तीन चीवर भोर एक पात्र रखने की भाशा थी वहाँ दोनो प्रधान परिग्रह जमा हो गये । इसका जो परिणाम होना था वही हुमा । महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार ईसा की पहली शताब्दी में बौद्धधर्म के अन्दर एक वैपुल्यवादी सम्प्रदाय पैदा हो गया। यह सम्प्रदाय बुद्ध के मूल उपदेशों से अलग जा पड़ा । इसका कहना था - संघ न दान ग्रहण करता है, न उसे परिशुद्ध या उसका उपयोग करता है, न संघ को देने में महाफल है; बुद्ध को दान देने में न महाफल है, न बुद्ध लोक में प्राकर ठहरे और न बुद्ध ने धर्मोपदेश किया, खास मतलब से ब्रह्मचर्य का नियम तोड़ा जा सकता है। यहाँ ऐतिहासिक बुद्ध के भस्तित्व से इन्कार किया गया है, संघ के प्रति गलत धारणा का प्रचार किया गया है और ब्रह्मचर्य की अनिवार्यता हटा ली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि दूषित मनोवृत्ति के भिक्षुओंों ने अपनी सुविधा के लिए इस सिद्धान्त को गढ़ा। राहुल जी इन्ही तीनो बातों के अन्दर महायान और वज्रयान के बीज पाते हैं । इसका नतीजा यह हुआ कि बौद्ध मठों में मनाचार फैल गया । भिक्षु भौर भिक्षुणियाँ दोनों का चरित्र भ्रष्ट हो गया और लोकदृष्टि में उनका मूल्य गिर गया। इन्ही तथा कुछ और कारणो से बौद्ध धर्म का ह्रास हो चला । इस तरह भगवान् बुद्ध की भविष्यवाणी के अनुसार पांच सौ साल बाद उनके अनुशासित धर्म का अन्त हो गया । बौद्ध-कालीन सामाजिक नियमबुद्ध के समय में कोई सार्वभौम सत्ता नहीं थी, इसलिए किसी सार्वभौम सामाजिक कानून का पता नही लगता। पर बुद्ध निर्वाण के एक सौ अट्ठावन वर्ष बाद सन् ईसवी से तीन सौ पैंतीस वर्ष पूर्व चन्द्रगुप्त मौर्य ने सार्वभौम सत्ता कायम को । उसीके समय में उसके प्रधान मंत्री कौटिल्य ने "अर्थशास्त्र" नामक विधानग्रन्थ बनाया । कौटिल्य के पहले भी कुछ विधानप्रन्थ थे, जिनका अब पता नहीं लगता । इसमें शक नहीं कि वे सब विधान छोटे-छोटे गणतन्त्रो के रहे होगे । जो हो, पर इतना सही है कि कुछ प्राचीन पाली साहित्य और कौटिल्य अर्थशास्त्र से उस काल की सामाजिक स्थिति पर प्रकाश पड़ता है, जिसके अन्दर से हमें स्त्रियों को सामाजिक मर्यादा का पता लग सकता है । धम्मपद भट्टकथा के दूसरे खण्ड में उल्लेख है कि पंद्रह साल की उम्र में लड़कियों के मन में पुरुष सग लाभ की इच्छा बलवती हो उठती है। विद्वानों का मत है कि साधारणतः लड़कियों की शादी पंद्रह वर्ष की उम्र में कर दी जाती थी। कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार- "यदि तीन वर्ष तक मासिक धर्म होने पर भी कन्या न व्याही जाय तो उसकी जाति का कोई भी पुरुष उसका संग कर सकता है । यदि तीन साल से अधिक वक्त गुजर जाय तो किसी भी जाति का पुरुष उसको अपनी स्त्री बना सकता है। पर लड़की के माता-पिता का भाभूषण लेने पर उसे चोरी का दण्ड दिया जा सकता था।" इससे ज्ञात होता है कि उस काल में लड़कियों की रक्षा और उनकी शादी की समस्या थी ।
|
इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire (गरेना फ्री फायर) में इन-गेम से Dragon Gangster और Dragon Mafia बडंल को कैसे खरीद सकते हैं। यहां पर दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें।
Garena Free Fire (गरेना फ्री फायर) गेम गूगल प्ले स्टोर पर काफी ज्यादा डाउनलोड किया गया गेम है। गेमिंग श्रृंखला की बात की जाती है तो फ्री फायर मैक्स ही अवल स्थान पर देखने को मिलता है। क्योंकि, ये गेम प्लेयर्स को कॉस्मेटिक और आकर्षित आइटम प्रदान करता है।
फ्री फायर में इन-गेम हर कोई गेमर कैरेक्टर पर एक यूनिक और कॉस्मेटिक बंडल का इस्तेमाल करना पसंद करता है। यहां पर हम आपको स्टोर सेक्शन से मेल और फीमेल बंडल को किस तरह कलेक्ट कर सकते हैं पूरी जानकारी देने वाले हैं। ये भी पढ़े :- Free Fire : Light Fest में यूजर्स को कुल 4 मिशन प्रदान किए हैं......जानिए क्या-क्या इनाम मिलने वाले हैं?
Free Fire : यूजर्स इन-गेम 'Dragon Gangster' और 'Dragon Mafia' बंडल को कैसे खरीद सकते हैं?
Free Fire में हर कोई गेमर्स कैरेक्टर पर यूनिक और अद्भुद बंडल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। इन-गेम स्टोर सेक्शन के भीतर एक्सपेंसिव ऑउटफिट के ऑप्शन है। गेमर्स किसी भी ऑउटफिट को परचेस कर सकते हैं। यहां पर हम दो मेल और फीमेल बंडल के बारे में जानकारी देने वाले हैं।
1: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करना होगा। इसके बाद में यूजर्स को लेफ्ट साइड में स्टोर वाली बटन दिख जाएगी।
2: स्टोर खुलने के बाद में राइट साइड में Bundle वाले पेज पर टच करें। इसके बाद में यूजर्स को सभी बंडल्स दिख जाएंगे।
|
इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire में इन-गेम से Dragon Gangster और Dragon Mafia बडंल को कैसे खरीद सकते हैं। यहां पर दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। Garena Free Fire गेम गूगल प्ले स्टोर पर काफी ज्यादा डाउनलोड किया गया गेम है। गेमिंग श्रृंखला की बात की जाती है तो फ्री फायर मैक्स ही अवल स्थान पर देखने को मिलता है। क्योंकि, ये गेम प्लेयर्स को कॉस्मेटिक और आकर्षित आइटम प्रदान करता है। फ्री फायर में इन-गेम हर कोई गेमर कैरेक्टर पर एक यूनिक और कॉस्मेटिक बंडल का इस्तेमाल करना पसंद करता है। यहां पर हम आपको स्टोर सेक्शन से मेल और फीमेल बंडल को किस तरह कलेक्ट कर सकते हैं पूरी जानकारी देने वाले हैं। ये भी पढ़े :- Free Fire : Light Fest में यूजर्स को कुल चार मिशन प्रदान किए हैं......जानिए क्या-क्या इनाम मिलने वाले हैं? Free Fire : यूजर्स इन-गेम 'Dragon Gangster' और 'Dragon Mafia' बंडल को कैसे खरीद सकते हैं? Free Fire में हर कोई गेमर्स कैरेक्टर पर यूनिक और अद्भुद बंडल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। इन-गेम स्टोर सेक्शन के भीतर एक्सपेंसिव ऑउटफिट के ऑप्शन है। गेमर्स किसी भी ऑउटफिट को परचेस कर सकते हैं। यहां पर हम दो मेल और फीमेल बंडल के बारे में जानकारी देने वाले हैं। एक: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करना होगा। इसके बाद में यूजर्स को लेफ्ट साइड में स्टोर वाली बटन दिख जाएगी। दो: स्टोर खुलने के बाद में राइट साइड में Bundle वाले पेज पर टच करें। इसके बाद में यूजर्स को सभी बंडल्स दिख जाएंगे।
|
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ ने अपने पूर्व अध्यक्ष के कामों देखते हुए कहा कि मंगलवार को फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का नाम अपने पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली के नाम पर रखने का फैसला किया है। अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया था। इस स्टेडियम को अब अरुण जेटली स्टेडियम के नाम से जाना जाएगा। इसका नया नामकरण 12 सितंबर को एक समारोह में किया जाएगा। इसमें एक स्टैंड का नाम भारतीय कप्तान विराट कोहली के नाम पर भी रखा जाएगा, जिसकी पूर्व में घोषणा की गई थी।
|
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ ने अपने पूर्व अध्यक्ष के कामों देखते हुए कहा कि मंगलवार को फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का नाम अपने पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली के नाम पर रखने का फैसला किया है। अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया था। इस स्टेडियम को अब अरुण जेटली स्टेडियम के नाम से जाना जाएगा। इसका नया नामकरण बारह सितंबर को एक समारोह में किया जाएगा। इसमें एक स्टैंड का नाम भारतीय कप्तान विराट कोहली के नाम पर भी रखा जाएगा, जिसकी पूर्व में घोषणा की गई थी।
|
रूप से सहम गई है । उसकी जड़ों को अपनी पोषण सामग्री ग्रहण करने के लिए कठोर धरती का आश्रय लेना पड़ रहा है । और युग-जीवन ने उसके चिर-संचित सुख-स्वप्नों को जो चुनौती दी है, उसको उसे स्वीकार करना पड़ा है । "
कवि के कथन का अर्थ है कि यह युग की माँग पर स्वप्न जगत् छोड़ कर धरती पर आ गया और उसने वास्तविकता का निमंत्रण स्वीकार किया । उसके पश्चात् उसने जीवन की विकृति और वीभत्सता को गहरी दृष्टि से देखा । किसान मज़दूर वर्ग के लिए उसके मन में बौद्धिक सहानुभूति जागत हुई और उसने 'युगवाणी' दी, जिसमें उसमें उसने समाजवादी सिद्धान्तों का विश्लेषण किया और उसके बाद 'ग्राम्या' में उन सिद्धान्तों का प्रयोग किया । यही कारण है कि कला की दृष्टि से 'ग्राम्या' 'युगवाणी' की अपेक्षा अधिक सुन्दर है। परंतु अभी हम कला की बात को यहीं छोड़ कर केवल कवि के प्रतिपाद्य को देखना चाहते हैं । 'युगवाणी' और 'ग्राम्या' 'युगान्त' के बाद कवि की मानव-पूजा की कृतियाँ हैं, जिनमें उसने भावी संस्कृति की रूप-रेखा देने के साथ-साथ वर्तमान का भी चित्रण किया है। वर्तमान संसार की दुर्दशा से व्याकुल होकर 'युगान्त' में कवि ने 'बापू' के प्रति कविता लिखी थी, जिसमें उसने गाँधी जी की प्रशस्ति के साथ उनके गांधीवाद की भी प्रशंसा की थी । चरखा आदि जो गाँधीवाद के प्रतीक हैं उनपर अपना मत दिया था और उनको 'शुद्ध बुद्ध श्रात्मा केवल' कहकर सम्बोधित करते हुए अन्त में लिखा थाआए तुम मुक्त पुरुष कहनेमिथ्या जड़ बन्धन, सत्य राम,
नानृतं जयति सत्यं मा मेंः, जय ज्ञान ज्योति तुमको प्रणाम ।
लेकिन 'ग्राम्या' में 'महात्मा जी के प्रति' कविता में उन्होंने ने इस 'मुक्त पुरुष' की पराजय दिखाई है और कहा है
हे भारत के हृदय तुम्हारे साथ आज निःसंशय चूर्ण होगया विगत सांस्कृतिक हृदय जगत का जर्जर । यह मानो गाँधीवाद से समाजवाद की ओर कवि की रुचि का परिचायक है । कवि के हृदय का यह परिवर्तन उसको श्रद्धा से, जो काव्य का प्राण है, शंका की ओर, जो विज्ञान का जीवन है ले गया और काव्य यात्मकता तथा विज्ञान या वास्तविकता के समन्वय की उसने चेष्टा की। उसने दोनों को स्वीकार किया और आशा की कि यंत्र-युग के साथ जब साम्यवाद द्वारा स्वर्ण युग का अवतरण विश्व में होगा तब गाँधीवाद और साम्यवाद दोनों एक हो जाएँगे२८०
मनुष्यत्व का तत्त्व सिखाता निश्चय हमको गाँधीवाद ।
सामूहिक जीवन विकास की साम्य योजना है विवाद । इस प्रकार उसने सामन्तवाद से पूँजीवाद और पूँजीवाद से साम्यवाद तक की भावना को अपने काव्य में स्थान दिया । 'पल्लव' तक की सौंदर्य-वासना में सामन्तवाद, 'गु'जन' की दार्शनिकता में पूँजीवाद और 'युगान्त', 'युगवाणी' और 'ग्राम्या' की वास्तविकता में साम्यवाद की यात्रा पंत ने की है। इस यात्रा में वे अपने कवित्व को श्रीहीन होने से नहीं बचा पाये हैं। और यह शुष्क विश्लेषण होकर ही रह गया है; यद्यपि 'ग्राम्या' मे वे कवित्व भी लाए हैं। परंतु 'पल्लव' के उपवन में विहार करने वाले पाठक को 'युगान्त' के बाद
की कृतियाँ रेतीला मैदान जान पड़ती हैं, जिनमें कहीं-कहीं नखलिस्तान के दर्शन हो जाते हैं । कवि के पास इसका कोई उत्तर नहीं हैं क्योंकि वह स्पष्ट कह चुका है कि जब वे काल्पनिक व्यंजनाएँ ही नहीं रहीं तब वह सरसता कहाँ से आवेगी ? वास्तविकता में हमें अपने मस्तिष्क से भी काम लेना है । अत्र से पहले उसने हृदय को गुदगुदाया उसने मस्तिष्क को कुरेदा है । पं० शान्तिप्रिय द्विवेदी के शब्दों में "आज पंत के कवि की लेखना और तूलिका का स्थान छेनी और कुदाली ने ले लिया है, रूप-रंग का स्थान रक्त-मांस ने। अब वह कला की उतनी चिंता नहीं करता जितनी सृष्टि-निर्माणकारी विचारों की । इसीलिए उसने स्पष्ट कहा है कि 'युगवाणी और 'ग्राम्या' में निम्नवर्ग को उसने बौद्धिक सहानुभूति दी है । पंत जी इससे अधिक कर भी नहीं सकते। उनका संकोचशील स्वभाव, अभिजात्य वर्ग की रुचि और एकाकी जीवन, उन्हें मज़दूरों-किसानों के बीच काम करने की नहीं देते, वे तटस्थ दर्शक की भाँति उनकी स्थिति का अवलोकन करके ही उनके सुख-दुख का चित्रण कर सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि उनके चित्रण में अनुभूति का सरस रूप नहीं दिखाई देता। लेकिन उनकी दृष्टि इतनी पैनी है कि वे बड़ी गहराई तक जाते हैं और उनका अध्ययन ठीक होता है, इसीलिए वे मानव की उपासना के अधिकारी होकर जनकवि भी बन सकते हैं ।
पंतजी की चिंतनशील प्रवृत्ति ने उनको आशावादी बनाया है अतः वे विकृति का यथातथ्य चित्रण करते हुए भी किसानोंमज़दूरों के लिए हाय ! हाय ! नहीं करते वरन् उनको भविष्य की ओर ही देखने की प्रेरणा करते हैं और जहाँ ऐसा नहीं करते वहाँ
उनको ज्यों का त्यों रख देते हैं । इसीलिए भारतीय ग्राम का चित्रण करते हुए उसकी तुलना नरक से की है। किसान को भी वज्रमूढ़, जड़भूत, हठी और ऐसे कितने ही विशेषण ने डाले है । २ इसका कारण यह है कि कवि उनकी दुर्दशा को सहन नहीं कर सकता और उसका हृदय व्यथित हो जाता है - "इन कीड़ों का भी मनुज बीज यह सोच हृदय उठता पसीज !" लेकिन एक बात है कि कवि इसको राजनीति का प्रश्न नहीं बनाता, वह इसको सांस्कृतिक प्रश्न बनाता है । कलाकार के नाते वह राजन ति या पार्टीनीति से प्रभावित नहीं है । 'संस्कृति का प्रश्न' शार्षक 'ग्राम्या' की कविता में
वे कहते हैंःराजनीति का प्रश्न नहीं रेाज जगत के सम्मुख अर्थ साम्य भी मिटा न मकता मानव जीवन के दुख ।
आज वृहत् सांस्कृतिक समस्या जग के निकट उपस्थित खण्ड मनुजता को युग युग की होना है नव-निर्मित । वस्तुतः बात यह है कि कवि के संस्कारी हृदय ने विश्व की
आधुनिक विकार-दशा का उपचार सांस्कृतिक समन्वय में ही
१ - यह तो मानव लोक नहीं रे यह है नरक अपरिचित,
यह भारत का ग्राम सभ्यता, संस्कृति से निर्वासित,
प्रकृति धाम यह तृण-तृण करण-कण जहाँ प्रफुल्लित जीवित यहाँ अकेला मानव ही रे चिर विषण्ण जीवन्मृत ।
२ - वज्रमूढ़, जयभूत, हठी, तृष बान्धब कर्षक
ध्रुव ममत्व की मूर्ति रुढ़ियों के चिर रक्षक ।
|
रूप से सहम गई है । उसकी जड़ों को अपनी पोषण सामग्री ग्रहण करने के लिए कठोर धरती का आश्रय लेना पड़ रहा है । और युग-जीवन ने उसके चिर-संचित सुख-स्वप्नों को जो चुनौती दी है, उसको उसे स्वीकार करना पड़ा है । " कवि के कथन का अर्थ है कि यह युग की माँग पर स्वप्न जगत् छोड़ कर धरती पर आ गया और उसने वास्तविकता का निमंत्रण स्वीकार किया । उसके पश्चात् उसने जीवन की विकृति और वीभत्सता को गहरी दृष्टि से देखा । किसान मज़दूर वर्ग के लिए उसके मन में बौद्धिक सहानुभूति जागत हुई और उसने 'युगवाणी' दी, जिसमें उसमें उसने समाजवादी सिद्धान्तों का विश्लेषण किया और उसके बाद 'ग्राम्या' में उन सिद्धान्तों का प्रयोग किया । यही कारण है कि कला की दृष्टि से 'ग्राम्या' 'युगवाणी' की अपेक्षा अधिक सुन्दर है। परंतु अभी हम कला की बात को यहीं छोड़ कर केवल कवि के प्रतिपाद्य को देखना चाहते हैं । 'युगवाणी' और 'ग्राम्या' 'युगान्त' के बाद कवि की मानव-पूजा की कृतियाँ हैं, जिनमें उसने भावी संस्कृति की रूप-रेखा देने के साथ-साथ वर्तमान का भी चित्रण किया है। वर्तमान संसार की दुर्दशा से व्याकुल होकर 'युगान्त' में कवि ने 'बापू' के प्रति कविता लिखी थी, जिसमें उसने गाँधी जी की प्रशस्ति के साथ उनके गांधीवाद की भी प्रशंसा की थी । चरखा आदि जो गाँधीवाद के प्रतीक हैं उनपर अपना मत दिया था और उनको 'शुद्ध बुद्ध श्रात्मा केवल' कहकर सम्बोधित करते हुए अन्त में लिखा थाआए तुम मुक्त पुरुष कहनेमिथ्या जड़ बन्धन, सत्य राम, नानृतं जयति सत्यं मा मेंः, जय ज्ञान ज्योति तुमको प्रणाम । लेकिन 'ग्राम्या' में 'महात्मा जी के प्रति' कविता में उन्होंने ने इस 'मुक्त पुरुष' की पराजय दिखाई है और कहा है हे भारत के हृदय तुम्हारे साथ आज निःसंशय चूर्ण होगया विगत सांस्कृतिक हृदय जगत का जर्जर । यह मानो गाँधीवाद से समाजवाद की ओर कवि की रुचि का परिचायक है । कवि के हृदय का यह परिवर्तन उसको श्रद्धा से, जो काव्य का प्राण है, शंका की ओर, जो विज्ञान का जीवन है ले गया और काव्य यात्मकता तथा विज्ञान या वास्तविकता के समन्वय की उसने चेष्टा की। उसने दोनों को स्वीकार किया और आशा की कि यंत्र-युग के साथ जब साम्यवाद द्वारा स्वर्ण युग का अवतरण विश्व में होगा तब गाँधीवाद और साम्यवाद दोनों एक हो जाएँगेदो सौ अस्सी मनुष्यत्व का तत्त्व सिखाता निश्चय हमको गाँधीवाद । सामूहिक जीवन विकास की साम्य योजना है विवाद । इस प्रकार उसने सामन्तवाद से पूँजीवाद और पूँजीवाद से साम्यवाद तक की भावना को अपने काव्य में स्थान दिया । 'पल्लव' तक की सौंदर्य-वासना में सामन्तवाद, 'गु'जन' की दार्शनिकता में पूँजीवाद और 'युगान्त', 'युगवाणी' और 'ग्राम्या' की वास्तविकता में साम्यवाद की यात्रा पंत ने की है। इस यात्रा में वे अपने कवित्व को श्रीहीन होने से नहीं बचा पाये हैं। और यह शुष्क विश्लेषण होकर ही रह गया है; यद्यपि 'ग्राम्या' मे वे कवित्व भी लाए हैं। परंतु 'पल्लव' के उपवन में विहार करने वाले पाठक को 'युगान्त' के बाद की कृतियाँ रेतीला मैदान जान पड़ती हैं, जिनमें कहीं-कहीं नखलिस्तान के दर्शन हो जाते हैं । कवि के पास इसका कोई उत्तर नहीं हैं क्योंकि वह स्पष्ट कह चुका है कि जब वे काल्पनिक व्यंजनाएँ ही नहीं रहीं तब वह सरसता कहाँ से आवेगी ? वास्तविकता में हमें अपने मस्तिष्क से भी काम लेना है । अत्र से पहले उसने हृदय को गुदगुदाया उसने मस्तिष्क को कुरेदा है । पंशून्य शान्तिप्रिय द्विवेदी के शब्दों में "आज पंत के कवि की लेखना और तूलिका का स्थान छेनी और कुदाली ने ले लिया है, रूप-रंग का स्थान रक्त-मांस ने। अब वह कला की उतनी चिंता नहीं करता जितनी सृष्टि-निर्माणकारी विचारों की । इसीलिए उसने स्पष्ट कहा है कि 'युगवाणी और 'ग्राम्या' में निम्नवर्ग को उसने बौद्धिक सहानुभूति दी है । पंत जी इससे अधिक कर भी नहीं सकते। उनका संकोचशील स्वभाव, अभिजात्य वर्ग की रुचि और एकाकी जीवन, उन्हें मज़दूरों-किसानों के बीच काम करने की नहीं देते, वे तटस्थ दर्शक की भाँति उनकी स्थिति का अवलोकन करके ही उनके सुख-दुख का चित्रण कर सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि उनके चित्रण में अनुभूति का सरस रूप नहीं दिखाई देता। लेकिन उनकी दृष्टि इतनी पैनी है कि वे बड़ी गहराई तक जाते हैं और उनका अध्ययन ठीक होता है, इसीलिए वे मानव की उपासना के अधिकारी होकर जनकवि भी बन सकते हैं । पंतजी की चिंतनशील प्रवृत्ति ने उनको आशावादी बनाया है अतः वे विकृति का यथातथ्य चित्रण करते हुए भी किसानोंमज़दूरों के लिए हाय ! हाय ! नहीं करते वरन् उनको भविष्य की ओर ही देखने की प्रेरणा करते हैं और जहाँ ऐसा नहीं करते वहाँ उनको ज्यों का त्यों रख देते हैं । इसीलिए भारतीय ग्राम का चित्रण करते हुए उसकी तुलना नरक से की है। किसान को भी वज्रमूढ़, जड़भूत, हठी और ऐसे कितने ही विशेषण ने डाले है । दो इसका कारण यह है कि कवि उनकी दुर्दशा को सहन नहीं कर सकता और उसका हृदय व्यथित हो जाता है - "इन कीड़ों का भी मनुज बीज यह सोच हृदय उठता पसीज !" लेकिन एक बात है कि कवि इसको राजनीति का प्रश्न नहीं बनाता, वह इसको सांस्कृतिक प्रश्न बनाता है । कलाकार के नाते वह राजन ति या पार्टीनीति से प्रभावित नहीं है । 'संस्कृति का प्रश्न' शार्षक 'ग्राम्या' की कविता में वे कहते हैंःराजनीति का प्रश्न नहीं रेाज जगत के सम्मुख अर्थ साम्य भी मिटा न मकता मानव जीवन के दुख । आज वृहत् सांस्कृतिक समस्या जग के निकट उपस्थित खण्ड मनुजता को युग युग की होना है नव-निर्मित । वस्तुतः बात यह है कि कवि के संस्कारी हृदय ने विश्व की आधुनिक विकार-दशा का उपचार सांस्कृतिक समन्वय में ही एक - यह तो मानव लोक नहीं रे यह है नरक अपरिचित, यह भारत का ग्राम सभ्यता, संस्कृति से निर्वासित, प्रकृति धाम यह तृण-तृण करण-कण जहाँ प्रफुल्लित जीवित यहाँ अकेला मानव ही रे चिर विषण्ण जीवन्मृत । दो - वज्रमूढ़, जयभूत, हठी, तृष बान्धब कर्षक ध्रुव ममत्व की मूर्ति रुढ़ियों के चिर रक्षक ।
|
गले में 'राधे-राधे' का दुपट्टा और मंगलसूत्र. हाथ में लाल चूड़ियां और माथे पर लाल बिंदी.
दो कमरे के घर में चारों तरफ पत्रकारों, कैमरों और माइक से घिरीं सीमा हैदर बहुत आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब दे रही हैं. पास में ही उनके प्रेमी सचिन मीणा भी कुर्सी पर बैठे हुए हैं.
देश के बड़े न्यूज़ चैनलों के एंकर, रिपोर्टर से लेकर दर्जनों की तादाद में यू-ट्यूबर सीमा से बात करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
घर में लगी भीड़ के बीच सीमा के चार बच्चों को आसानी से पहचाना जा सकता है. कुछ पत्रकार इन बच्चों से 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' के नारे लगवा रहे हैं और ऐसा करते हुए बच्चों को अपने कैमरे में शूट कर रहे हैं.
बीच-बीच में कस्बे की कुछ महिलाएं और कुछ हिंदूवादी संगठनों के लोग भी मिलने के लिए आ रहे हैं. ये लोग आशीर्वाद देते हुए सीमा के हाथ में कुछ पैसे पकड़ा रहे हैं और अपनी तस्वीरें खिंचवा रहे हैं.
उमस भरे माहौल के बीच घर में 'जय श्री राम' के नारे भी सुनाई देते हैं, तो वहीं कुछ लोग सीमा से घर में लगी तुलसी में पानी देने को भी कहते हैं.
ये दृश्य उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा स्थित सचिन मीणा के घर के हैं. दोनों को जमानत मिलने के बाद यहां आने जाने वालों की भीड़ लगी हुई है.
सुबह से हो रही तेज बारिश के बीच बीबीसी हिंदी की टीम भी सीमा हैदर और सचिन मीणा से मिलने के लिए पहुंची.
कुछ घंटों के इंतजार के बाद सीमा और सचिन से बात करने के लिए हमारा नंबर आया.
करीब बीस मिनट की बातचीत में दोनों ने दोस्ती से शुरू हुए प्यार, अवैध तरीके से भारत में एंट्री, जासूसी के आरोप, शादी, हिंदू धर्म में शामिल होने से लेकर उन तमाम सवालों के जवाब दिए जो इस वक्त लोगों के मन में उठ रहे हैं.
पाकिस्तान की सीमा हैदर की शादी साल 2014 में जकोबाबाद के रहने वाले गुलाम हैदर से हुई थी. इस शादी से उन्हें चार बच्चे हुए. बाद में दोनों कराची शिफ्ट हो गए और साल 2019 में गुलाम हैदर काम के सिलसिले से सऊदी अरब चले गए.
यही वो समय था जब सीमा की बातचीत सचिन मीणा से शुरू हुई और इसका जरिए बनी एक ऑनलाइन गेम.
सीमा बताती हैं, "हमारी प्रेम कहानी की शुरुआत पब्जी खेलने से शुरू हुई. सचिन पुराने प्लेयर थे और मैं नई. मेरा 'पब्जी' पर मारिया ख़ान नाम था. सचिन ने मुझे गेम खेलने की रिक्वेस्ट भेजी थी. "
सीमा बताती हैं, "तीन चार महीने गेम खेलने के बाद हम दोस्त बन गए. मैं वीडियो कॉल पर इन्हें पाकिस्तान दिखाती थी ये मुझे भारत. ये खुश होता था कि पाकिस्तान देख रहा हूं और मैं खुश होती थी कि मैं भारत देख रही हूं. खुशी होती है न कि दूसरे देश का बंदा आपसे बात करे. "
प्यार, परवान चढ़ा तो सीमा ने सचिन से मिलने का फैसला किया, लेकिन यह सीमा के लिए आसान नहीं था.
सीमा हैदर कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि मैं पाकिस्तान से नफरत करती हूं, मैं वहां रही हूं, वहां मेरा बचपन बीता. मेरे भाई-बहन, मम्मी-पापा सब वहीं के हैं. मेरे मां-बाप की कब्र वहीं पर है. "
अपने प्यार से मिलने के लिए सीमा हैदर ने नेपाल को चुना, लेकिन इसे चुनने के पीछे एक खास वजह थी.
मुलाकात का वक्त और जगह तय होने पर सीमा ने नेपाल का टूरिस्ट वीजा लिया और शारजाह होते हुए काठमांडू पहुंचीं.
सीमा बताती हैं, "पहली बार मैं 10 मार्च, 2023 को पाकिस्तान से निकली और शाम को काठमांडू पहुंच गई. मैं पहली बार हवाई जहाज से जा रही थी. जहाज उड़ा, तो मैं बिल्कुल बहरी सी हो गई थी. "
काठमांडू में सचिन पहले से सीमा का इंतजार कर रहा था. सचिन के मुताबिक उन्होंने न्यू बस पार्क इलाके के न्यू विनायक होटल में एक कमरा किराए पर लिया जिसके लिए वो होटल मालिक को हर रोज 500 रुपये देते थे.
सीमा हैदर के इंस्टाग्राम पर इस दौरान के कई ऐसे वीडियो पड़े हैं जिसमें दोनों काठमांडू की सड़कों पर घूमते हुए नजर आ रहे हैं. इसी दौरान दोनों ने एक बड़ा फैसला किया.
सीमा बताती हैं, "हमने 13 मार्च को काठमांडू में पशुपति नाथ मंदिर में शादी की. एक टैक्सी वाले भाई की मदद से हम लोग शादी कर पाए. हमारे पास वीडियो भी हैं...मैंने खुद हिंदू धर्म अपनाया है. मुझे किसी ने दबाव नहीं डाला. "
शादी तो हुई, लेकिन सीमा भारत नहीं आ पाईं, क्योंकि चार बच्चे कराची में उसका इंतजार कर रहे थे. वह लाहौर में एक दरगाह पर जाने का बहाना बनाकर सचिन से मिलने नेपाल आई थी.
सीमा वापस पाकिस्तान तो चली आईं लेकिन अब यहां उनका दिल नहीं लग रहा था.
दो महीने का वक्त बीता और सीमा ने हमेशा के लिए अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान छोड़ने का फैसला कर लिया.
इस बार सीमा का इरादा नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने का था. सफर के लिए सीमा ने फिर से 10 मई तारीख को ही चुना, क्योंकि उनका मानना था कि यह तारीख उनके लिए किस्मत वाली साबित होगी, क्योंकि 10 मार्च को ही वे पहली बार सचिन से नेपाल में मिली थीं.
सीमा कहती हैं, "दूसरी बार आना आसान था, क्योंकि एंट्री, एग्जिट और कनेक्टिंग फ्लाइट का पहले से पता लग गया था. 10 मई को अपने बच्चों के साथ मैं वहां (पाकिस्तान) से चली और 11 मई की सुबह काठमांडू पहुंच गई, फिर वहां से पोखरा गई और रात भर वहीं रुकी. "
यहां सचिन उनका इंतजार कर रहे थे, जिसके बाद वह उन्हें रबूपुरा स्थित कमरे पर ले आया. यह कमरा चार दिन पहले ही सचिन ने गिरजेश नाम के व्यक्ति से 2,500 रुपये प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लिया था.
पोखरा से हर सुबह दिल्ली के लिए बस चलती है. करीब 28 घंटे के इस सफर में भारत-नेपाल की सरहद पड़ती है, जहां सभी यात्रियों की चेकिंग होती है, लेकिन सीमा ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से भेद दिया.
सीमा के पति गुलाम हैदर ने सऊदी अरब से अपील की है कि उनकी पत्नी और बच्चों को वापस पाकिस्तान भेज दिया जाए.
वहीं सीमा का कहना है कि गुलाम हैदर से उनकी शादी जबरन करवाई गई थी और उन्होंने उसे तलाक दे दिया है, जबकि गुलाम हैदर का कहना है कि उनके बीच में तलाक नहीं हुआ है.
वे बताती हैं, "पाकिस्तान में भी 18 साल की लड़की को इजाजत है कि कोई भी फैसला ले सकती है. मैं आज 27 साल की हूं. मैं अपनी जिंदगी का फैसला ले सकती हूं. ऐसा भी नहीं है कि मैं औरत हूं, तो आदमी से तलाक नहीं ले सकती. "
बीबीसी उर्दू से बातचीत में सीमा के ससुर मीर जान जख़रानी ने आरोप लगाया कि वह घर से भागते हुए सात लाख रुपये और सात तोला सोना लेकर गई है.
सीमा हैदर जिस तरीके से भारत में दाखिल हुईं, उसे देखने के बाद कई लोगों ने उन पर आरोप लगाए कि वे पाकिस्तान की जासूस हैं.
पाकिस्तानी सेना में उनके भाई की नौकरी, उनके पास से चार मोबाइल फोन की बरामदगी ने भी लोगों के मन में शक को गहरा कर दिया.
इन आरोपों पर बोलते हुए सीमा ने कहा, "मैं जासूस नहीं हूं. सचिन से प्यार के चक्कर में मैंने घर से बाहर घूमना शुरू किया. पासपोर्ट बनवाए. हमारे यहां घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती. "
सीमा का कहना है कि अब वे भारत में ही रहना चाहती हैं और सचिन के साथ खुश हैं, लेकिन अपनी बहनों को याद कर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं.
फिलहाल जमानत मिलने के बाद सीमा और सचिन अब साथ-साथ हैं. धर्मों और देशों की सरहदों को पार करने वाली ये कहानी आगे कहां पहुंचती है, देखना दिलचस्प होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
|
गले में 'राधे-राधे' का दुपट्टा और मंगलसूत्र. हाथ में लाल चूड़ियां और माथे पर लाल बिंदी. दो कमरे के घर में चारों तरफ पत्रकारों, कैमरों और माइक से घिरीं सीमा हैदर बहुत आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब दे रही हैं. पास में ही उनके प्रेमी सचिन मीणा भी कुर्सी पर बैठे हुए हैं. देश के बड़े न्यूज़ चैनलों के एंकर, रिपोर्टर से लेकर दर्जनों की तादाद में यू-ट्यूबर सीमा से बात करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. घर में लगी भीड़ के बीच सीमा के चार बच्चों को आसानी से पहचाना जा सकता है. कुछ पत्रकार इन बच्चों से 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' के नारे लगवा रहे हैं और ऐसा करते हुए बच्चों को अपने कैमरे में शूट कर रहे हैं. बीच-बीच में कस्बे की कुछ महिलाएं और कुछ हिंदूवादी संगठनों के लोग भी मिलने के लिए आ रहे हैं. ये लोग आशीर्वाद देते हुए सीमा के हाथ में कुछ पैसे पकड़ा रहे हैं और अपनी तस्वीरें खिंचवा रहे हैं. उमस भरे माहौल के बीच घर में 'जय श्री राम' के नारे भी सुनाई देते हैं, तो वहीं कुछ लोग सीमा से घर में लगी तुलसी में पानी देने को भी कहते हैं. ये दृश्य उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा स्थित सचिन मीणा के घर के हैं. दोनों को जमानत मिलने के बाद यहां आने जाने वालों की भीड़ लगी हुई है. सुबह से हो रही तेज बारिश के बीच बीबीसी हिंदी की टीम भी सीमा हैदर और सचिन मीणा से मिलने के लिए पहुंची. कुछ घंटों के इंतजार के बाद सीमा और सचिन से बात करने के लिए हमारा नंबर आया. करीब बीस मिनट की बातचीत में दोनों ने दोस्ती से शुरू हुए प्यार, अवैध तरीके से भारत में एंट्री, जासूसी के आरोप, शादी, हिंदू धर्म में शामिल होने से लेकर उन तमाम सवालों के जवाब दिए जो इस वक्त लोगों के मन में उठ रहे हैं. पाकिस्तान की सीमा हैदर की शादी साल दो हज़ार चौदह में जकोबाबाद के रहने वाले गुलाम हैदर से हुई थी. इस शादी से उन्हें चार बच्चे हुए. बाद में दोनों कराची शिफ्ट हो गए और साल दो हज़ार उन्नीस में गुलाम हैदर काम के सिलसिले से सऊदी अरब चले गए. यही वो समय था जब सीमा की बातचीत सचिन मीणा से शुरू हुई और इसका जरिए बनी एक ऑनलाइन गेम. सीमा बताती हैं, "हमारी प्रेम कहानी की शुरुआत पब्जी खेलने से शुरू हुई. सचिन पुराने प्लेयर थे और मैं नई. मेरा 'पब्जी' पर मारिया ख़ान नाम था. सचिन ने मुझे गेम खेलने की रिक्वेस्ट भेजी थी. " सीमा बताती हैं, "तीन चार महीने गेम खेलने के बाद हम दोस्त बन गए. मैं वीडियो कॉल पर इन्हें पाकिस्तान दिखाती थी ये मुझे भारत. ये खुश होता था कि पाकिस्तान देख रहा हूं और मैं खुश होती थी कि मैं भारत देख रही हूं. खुशी होती है न कि दूसरे देश का बंदा आपसे बात करे. " प्यार, परवान चढ़ा तो सीमा ने सचिन से मिलने का फैसला किया, लेकिन यह सीमा के लिए आसान नहीं था. सीमा हैदर कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि मैं पाकिस्तान से नफरत करती हूं, मैं वहां रही हूं, वहां मेरा बचपन बीता. मेरे भाई-बहन, मम्मी-पापा सब वहीं के हैं. मेरे मां-बाप की कब्र वहीं पर है. " अपने प्यार से मिलने के लिए सीमा हैदर ने नेपाल को चुना, लेकिन इसे चुनने के पीछे एक खास वजह थी. मुलाकात का वक्त और जगह तय होने पर सीमा ने नेपाल का टूरिस्ट वीजा लिया और शारजाह होते हुए काठमांडू पहुंचीं. सीमा बताती हैं, "पहली बार मैं दस मार्च, दो हज़ार तेईस को पाकिस्तान से निकली और शाम को काठमांडू पहुंच गई. मैं पहली बार हवाई जहाज से जा रही थी. जहाज उड़ा, तो मैं बिल्कुल बहरी सी हो गई थी. " काठमांडू में सचिन पहले से सीमा का इंतजार कर रहा था. सचिन के मुताबिक उन्होंने न्यू बस पार्क इलाके के न्यू विनायक होटल में एक कमरा किराए पर लिया जिसके लिए वो होटल मालिक को हर रोज पाँच सौ रुपयापये देते थे. सीमा हैदर के इंस्टाग्राम पर इस दौरान के कई ऐसे वीडियो पड़े हैं जिसमें दोनों काठमांडू की सड़कों पर घूमते हुए नजर आ रहे हैं. इसी दौरान दोनों ने एक बड़ा फैसला किया. सीमा बताती हैं, "हमने तेरह मार्च को काठमांडू में पशुपति नाथ मंदिर में शादी की. एक टैक्सी वाले भाई की मदद से हम लोग शादी कर पाए. हमारे पास वीडियो भी हैं...मैंने खुद हिंदू धर्म अपनाया है. मुझे किसी ने दबाव नहीं डाला. " शादी तो हुई, लेकिन सीमा भारत नहीं आ पाईं, क्योंकि चार बच्चे कराची में उसका इंतजार कर रहे थे. वह लाहौर में एक दरगाह पर जाने का बहाना बनाकर सचिन से मिलने नेपाल आई थी. सीमा वापस पाकिस्तान तो चली आईं लेकिन अब यहां उनका दिल नहीं लग रहा था. दो महीने का वक्त बीता और सीमा ने हमेशा के लिए अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान छोड़ने का फैसला कर लिया. इस बार सीमा का इरादा नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने का था. सफर के लिए सीमा ने फिर से दस मई तारीख को ही चुना, क्योंकि उनका मानना था कि यह तारीख उनके लिए किस्मत वाली साबित होगी, क्योंकि दस मार्च को ही वे पहली बार सचिन से नेपाल में मिली थीं. सीमा कहती हैं, "दूसरी बार आना आसान था, क्योंकि एंट्री, एग्जिट और कनेक्टिंग फ्लाइट का पहले से पता लग गया था. दस मई को अपने बच्चों के साथ मैं वहां से चली और ग्यारह मई की सुबह काठमांडू पहुंच गई, फिर वहां से पोखरा गई और रात भर वहीं रुकी. " यहां सचिन उनका इंतजार कर रहे थे, जिसके बाद वह उन्हें रबूपुरा स्थित कमरे पर ले आया. यह कमरा चार दिन पहले ही सचिन ने गिरजेश नाम के व्यक्ति से दो,पाँच सौ रुपयापये प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लिया था. पोखरा से हर सुबह दिल्ली के लिए बस चलती है. करीब अट्ठाईस घंटाटे के इस सफर में भारत-नेपाल की सरहद पड़ती है, जहां सभी यात्रियों की चेकिंग होती है, लेकिन सीमा ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से भेद दिया. सीमा के पति गुलाम हैदर ने सऊदी अरब से अपील की है कि उनकी पत्नी और बच्चों को वापस पाकिस्तान भेज दिया जाए. वहीं सीमा का कहना है कि गुलाम हैदर से उनकी शादी जबरन करवाई गई थी और उन्होंने उसे तलाक दे दिया है, जबकि गुलाम हैदर का कहना है कि उनके बीच में तलाक नहीं हुआ है. वे बताती हैं, "पाकिस्तान में भी अट्ठारह साल की लड़की को इजाजत है कि कोई भी फैसला ले सकती है. मैं आज सत्ताईस साल की हूं. मैं अपनी जिंदगी का फैसला ले सकती हूं. ऐसा भी नहीं है कि मैं औरत हूं, तो आदमी से तलाक नहीं ले सकती. " बीबीसी उर्दू से बातचीत में सीमा के ससुर मीर जान जख़रानी ने आरोप लगाया कि वह घर से भागते हुए सात लाख रुपये और सात तोला सोना लेकर गई है. सीमा हैदर जिस तरीके से भारत में दाखिल हुईं, उसे देखने के बाद कई लोगों ने उन पर आरोप लगाए कि वे पाकिस्तान की जासूस हैं. पाकिस्तानी सेना में उनके भाई की नौकरी, उनके पास से चार मोबाइल फोन की बरामदगी ने भी लोगों के मन में शक को गहरा कर दिया. इन आरोपों पर बोलते हुए सीमा ने कहा, "मैं जासूस नहीं हूं. सचिन से प्यार के चक्कर में मैंने घर से बाहर घूमना शुरू किया. पासपोर्ट बनवाए. हमारे यहां घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती. " सीमा का कहना है कि अब वे भारत में ही रहना चाहती हैं और सचिन के साथ खुश हैं, लेकिन अपनी बहनों को याद कर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं. फिलहाल जमानत मिलने के बाद सीमा और सचिन अब साथ-साथ हैं. धर्मों और देशों की सरहदों को पार करने वाली ये कहानी आगे कहां पहुंचती है, देखना दिलचस्प होगा.
|
हिन्दू धर्म शास्त्रों में तुलसी को पूज्य और शुभता का प्रतीक माना गया है। पूजा-पाठ में भी तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ देवी-देवता ऐसे हैं जिनकी पूजा में तुलसी के पत्ते का होन अनिवार्य भी माना गया है। आखिर क्यों तुलसी के पत्ते के बिना कुछ देवी-देवताओं की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है? भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग अनिवार्य क्यों माना जाता है? साथ ही तुलसी कौन हैं? और भगवान विष्णु को तुलसी ने श्राप क्यों दिया था? भागवत पुराण के अनुसार इसे जानते हैं।
देवी भागवत पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने तेज को समुद्र में फेंक दिया था। जिससे जलंधर की उत्पत्ति हुई। कहा जाता है जलंधर के पास अद्भुत शक्तियां थी। उसकी इस शक्ति का कारण उसकी पत्नी वृंदा थी। वृंदा के पतिव्रता धर्म के कारण सभी देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में जलंधर को अपनी अद्भुत शक्ति पर अभिमान हो गया। जिस कारण वह अपनी पत्नी वृंदा की अवहेलना करने लगा। कहते हैं कि जलंधर ने खुद को शक्तिशाली साबित करने के लिए पहले इंद्र देव को परास्त किया। फिर उसने भगवान विष्णु को पराजित कर देवी लक्ष्मी को उनसे छीन लेने की योजना बनाई। कारण उसने वैकुंठ पर आक्रमण कर दिया। लेकिन देवी लक्ष्मी ने जलंधर से कहा हम दोनों का जन्म जल से हुआ है। इसलिए हमलोग भाई-बहन हैं। उनकी बातों से प्रभावित होकर जलंधर वहां से चला गया।
जलंधर इस बात को जनता था कि इस ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली महादेव हैं। इसलिए उसने कैलाश पर आक्रमण करने की सोची। जिसके बाद महादेव को उससे युद्ध करना पड़ा। परंतु उसकी पत्नी वृंदा के तप की वजह से शिव का हर प्रहार जलंधर पर बेकार गया। उस युद्ध में एक माया से उसने भगवान सहित सभी देवताओं को भ्रमित कर दिया। जिसके बाद वह महादेव के वेश में कैलाश पहुंच गया। लेकिन पार्वती जी उसे देखते ही समझ गईं कि वह जलंधर है जो महादेव के रूप में आया है। यह देखकर मां पार्वती गुस्से में आ गईं और उसे मारने के लिए अपना अस्त्र उठा लिया। इधर जलंधर को पता था कि पार्वती शक्ति की देवी दुर्गा की ही एक रूप हैं। और वह उन्हें पराजित नहीं कर सकता है। इसलिए जलंधर वहां से भाग निकला।
फिर देवी पार्वती ने भगवान विष्णु को इस घटना के बारे में बताया। तब भगवान विष्णु ने उनसे बताया कि जलंधर की अद्भुत शक्ति का कारण उसकी पतिव्रता पत्नी वृंदा है। जो जलंधर के हर युद्ध से पहले तप करती है। जिससे उसे अद्भुत शक्ति मिलती है। अंत में भगवान विष्णु ने योजना बनाई और जलंधर का वेश बनाकर देवी वृंदा के पास पहुंचे। वृंदा भगवान विष्णु को अपना पति समझकर उनके साथ पत्नी जैसा व्यवहार करने लगी। इससे वृंदा का तप टूट गया और भगवान शिव ने जलंधर का वध कर दिया। तब देवी वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि एक दिन वो भी अपनी पत्नी से ऐसे ही बिछड़ जाएंगे। कहते हैं कि इस वजह से ही भगवान विष्णु रामावतार में रावण द्वारा सीता हरण के कारण माता सीता से बिछड़ गए थे। भगवान विष्णु द्वारा सतीत्व भंग किए जाने पर देवी वृंदा ने आत्मदाह कर लिया। तब उस राख के ऊपर तुलसी का पौधा जन्मा। माना जाता है कि तुलसी का पौधा देवी वृंदा का ही स्वरूप है। कहते हैं कि तब से ही भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
|
हिन्दू धर्म शास्त्रों में तुलसी को पूज्य और शुभता का प्रतीक माना गया है। पूजा-पाठ में भी तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ देवी-देवता ऐसे हैं जिनकी पूजा में तुलसी के पत्ते का होन अनिवार्य भी माना गया है। आखिर क्यों तुलसी के पत्ते के बिना कुछ देवी-देवताओं की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है? भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का प्रयोग अनिवार्य क्यों माना जाता है? साथ ही तुलसी कौन हैं? और भगवान विष्णु को तुलसी ने श्राप क्यों दिया था? भागवत पुराण के अनुसार इसे जानते हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने तेज को समुद्र में फेंक दिया था। जिससे जलंधर की उत्पत्ति हुई। कहा जाता है जलंधर के पास अद्भुत शक्तियां थी। उसकी इस शक्ति का कारण उसकी पत्नी वृंदा थी। वृंदा के पतिव्रता धर्म के कारण सभी देवी-देवता मिलकर भी जलंधर को पराजित नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में जलंधर को अपनी अद्भुत शक्ति पर अभिमान हो गया। जिस कारण वह अपनी पत्नी वृंदा की अवहेलना करने लगा। कहते हैं कि जलंधर ने खुद को शक्तिशाली साबित करने के लिए पहले इंद्र देव को परास्त किया। फिर उसने भगवान विष्णु को पराजित कर देवी लक्ष्मी को उनसे छीन लेने की योजना बनाई। कारण उसने वैकुंठ पर आक्रमण कर दिया। लेकिन देवी लक्ष्मी ने जलंधर से कहा हम दोनों का जन्म जल से हुआ है। इसलिए हमलोग भाई-बहन हैं। उनकी बातों से प्रभावित होकर जलंधर वहां से चला गया। जलंधर इस बात को जनता था कि इस ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली महादेव हैं। इसलिए उसने कैलाश पर आक्रमण करने की सोची। जिसके बाद महादेव को उससे युद्ध करना पड़ा। परंतु उसकी पत्नी वृंदा के तप की वजह से शिव का हर प्रहार जलंधर पर बेकार गया। उस युद्ध में एक माया से उसने भगवान सहित सभी देवताओं को भ्रमित कर दिया। जिसके बाद वह महादेव के वेश में कैलाश पहुंच गया। लेकिन पार्वती जी उसे देखते ही समझ गईं कि वह जलंधर है जो महादेव के रूप में आया है। यह देखकर मां पार्वती गुस्से में आ गईं और उसे मारने के लिए अपना अस्त्र उठा लिया। इधर जलंधर को पता था कि पार्वती शक्ति की देवी दुर्गा की ही एक रूप हैं। और वह उन्हें पराजित नहीं कर सकता है। इसलिए जलंधर वहां से भाग निकला। फिर देवी पार्वती ने भगवान विष्णु को इस घटना के बारे में बताया। तब भगवान विष्णु ने उनसे बताया कि जलंधर की अद्भुत शक्ति का कारण उसकी पतिव्रता पत्नी वृंदा है। जो जलंधर के हर युद्ध से पहले तप करती है। जिससे उसे अद्भुत शक्ति मिलती है। अंत में भगवान विष्णु ने योजना बनाई और जलंधर का वेश बनाकर देवी वृंदा के पास पहुंचे। वृंदा भगवान विष्णु को अपना पति समझकर उनके साथ पत्नी जैसा व्यवहार करने लगी। इससे वृंदा का तप टूट गया और भगवान शिव ने जलंधर का वध कर दिया। तब देवी वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि एक दिन वो भी अपनी पत्नी से ऐसे ही बिछड़ जाएंगे। कहते हैं कि इस वजह से ही भगवान विष्णु रामावतार में रावण द्वारा सीता हरण के कारण माता सीता से बिछड़ गए थे। भगवान विष्णु द्वारा सतीत्व भंग किए जाने पर देवी वृंदा ने आत्मदाह कर लिया। तब उस राख के ऊपर तुलसी का पौधा जन्मा। माना जाता है कि तुलसी का पौधा देवी वृंदा का ही स्वरूप है। कहते हैं कि तब से ही भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
|
गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से आज जारी किए गए एक प्रस्ताव के अनुसार राज्य में स्थित सभी बोर्ड के स्कूलों की कक्षा 6 से लेकर 8 तक की कक्षाओं में पढ़ाई 18 फरवरी से पुनः शुरू होंगी।
ही ऐसे स्कूलों को कोरोना संक्रमण नियंत्रण के संदर्भ में भारत सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निदेर्शों तथा राज्य शिक्षा विभाग की 8 जनवरी, 2021 को जारी मार्गदर्शिका का सख्ती से पालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षाधिकारियों तथा प्राथमिक शिक्षाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्कूलों में सरकार की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनिवार्य रूप से पालन हो।
शिक्षा सचिव ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के गहन प्रयासों के चलते अब कोरोना संक्रमण काफी हद तक घट चुका है और ऐसे में विद्यार्थियों के दीर्घकालिक शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 6वीं से 8वीं तक की कक्षाओं को पुनः शुरू करने का राज्य सरकार ने निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि ऑफलाइन यानी प्रत्यक्ष शैक्षणिक कार्य में विद्यार्थियों की हाजिरी स्वैच्छिक रहेगी तथा शिक्षण संस्थाओं को विद्यार्थियों के अभिभावकों से नियत सहमति पत्र प्राप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी कक्षा में होने वाली पढ़ाई में शामिल नहीं होते हैं, उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की वर्तमान व्यवस्था को संबंधित संस्थान- स्कूलों को जारी रखना होगा।
श्री राव ने कहा कि कोरोना संक्रमण का शिकार बने विद्यार्थी, शिक्षक या अन्य स्टाफ को स्कूल नहीं आने तथा कंटेनमेंट जोन में स्थित स्कूलों को शुरू नही करने के निर्देश भी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव में दिए गए हैं। कक्षा 6वीं से 8वीं तक की कक्षाओं में विद्यार्थियों के बीच सामाजिक दूरी के नियमों का पालन, हर एक विद्यार्थी और शिक्षक द्वारा अनिवार्य रूप से मास्क के उपयोग तथा एसओपी के अन्य बिंदुओं के पालन को लेकर विशेष ताकीद की गई है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में कोरोना संक्रमण के दौरान भी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था जारी थी। कोरोना की स्थिति में सुधार के चलते कक्षाओं में शिक्षण कार्य को क्रमशः शुरू किया गया है। जिसके अनुसार गत 11 जनवरी से राज्य में कक्षा 10वीं-12वीं और स्नातक एवं परास्नातक के अंतिम वर्ष की कक्षाओं को शुरू किया गया। कक्षा 9वीं और 11वीं की कक्षाएं भी 1 फरवरी से पुनः शुरू हो चुकी हैं तथा 8 फरवरी से कॉलेज के प्रथम वर्ष की कक्षाएं भी कार्यरत हो चुकी हैं।
सरकारी विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि कक्षा 9वीं से 12वीं की कक्षाओं में शुरुआती चरण में 40 फीसदी विद्यार्थियों की उपस्थिति रही थी, जो अब बढ़कर 70 से 72 फीसदी तक पहुंच गई है।
|
गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से आज जारी किए गए एक प्रस्ताव के अनुसार राज्य में स्थित सभी बोर्ड के स्कूलों की कक्षा छः से लेकर आठ तक की कक्षाओं में पढ़ाई अट्ठारह फरवरी से पुनः शुरू होंगी। ही ऐसे स्कूलों को कोरोना संक्रमण नियंत्रण के संदर्भ में भारत सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निदेर्शों तथा राज्य शिक्षा विभाग की आठ जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को जारी मार्गदर्शिका का सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षाधिकारियों तथा प्राथमिक शिक्षाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्कूलों में सरकार की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन हो। शिक्षा सचिव ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के गहन प्रयासों के चलते अब कोरोना संक्रमण काफी हद तक घट चुका है और ऐसे में विद्यार्थियों के दीर्घकालिक शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक स्कूलों में कक्षा छःवीं से आठवीं तक की कक्षाओं को पुनः शुरू करने का राज्य सरकार ने निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि ऑफलाइन यानी प्रत्यक्ष शैक्षणिक कार्य में विद्यार्थियों की हाजिरी स्वैच्छिक रहेगी तथा शिक्षण संस्थाओं को विद्यार्थियों के अभिभावकों से नियत सहमति पत्र प्राप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी कक्षा में होने वाली पढ़ाई में शामिल नहीं होते हैं, उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की वर्तमान व्यवस्था को संबंधित संस्थान- स्कूलों को जारी रखना होगा। श्री राव ने कहा कि कोरोना संक्रमण का शिकार बने विद्यार्थी, शिक्षक या अन्य स्टाफ को स्कूल नहीं आने तथा कंटेनमेंट जोन में स्थित स्कूलों को शुरू नही करने के निर्देश भी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव में दिए गए हैं। कक्षा छःवीं से आठवीं तक की कक्षाओं में विद्यार्थियों के बीच सामाजिक दूरी के नियमों का पालन, हर एक विद्यार्थी और शिक्षक द्वारा अनिवार्य रूप से मास्क के उपयोग तथा एसओपी के अन्य बिंदुओं के पालन को लेकर विशेष ताकीद की गई है। उल्लेखनीय है कि राज्य में कोरोना संक्रमण के दौरान भी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था जारी थी। कोरोना की स्थिति में सुधार के चलते कक्षाओं में शिक्षण कार्य को क्रमशः शुरू किया गया है। जिसके अनुसार गत ग्यारह जनवरी से राज्य में कक्षा दसवीं-बारहवीं और स्नातक एवं परास्नातक के अंतिम वर्ष की कक्षाओं को शुरू किया गया। कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं की कक्षाएं भी एक फरवरी से पुनः शुरू हो चुकी हैं तथा आठ फरवरी से कॉलेज के प्रथम वर्ष की कक्षाएं भी कार्यरत हो चुकी हैं। सरकारी विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि कक्षा नौवीं से बारहवीं की कक्षाओं में शुरुआती चरण में चालीस फीसदी विद्यार्थियों की उपस्थिति रही थी, जो अब बढ़कर सत्तर से बहत्तर फीसदी तक पहुंच गई है।
|
भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नंदीग्राम विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। इस सीट पर उनका मुकाबला मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से होगा। अधिकारी ने एक रैली के बाद हल्दिया में उप-विभागीय कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन दाखिल करने से पहले हुई रैली में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और स्मृति ईरानी ने भी शिरकत की।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नंदीग्राम विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। इस सीट पर उनका मुकाबला मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से होगा। अधिकारी ने एक रैली के बाद हल्दिया में उप-विभागीय कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन दाखिल करने से पहले हुई रैली में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और स्मृति ईरानी ने भी शिरकत की। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
उमर खैयाम की रुबाइयो का प्रस्तुत गीता तर मैंने सन् १९२६ मे उर्दू के प्रसिद्ध शायर तथा अपने स्नेही मित्र स्वर्गीय असगर साहब, गोडवी की महायता से इण्डियन प्रेस के प्राग्रह पर किया था। असगर साहब जिस भावुकता एवं तल्लीनता से मुझे फारसी की रुवाइयो का भावाथ समझाते थे और साथ ही फारसी के अन्य कवियों की मिलती जुलती रुवाइया को भी सुनाना नहीं मूलते थे, उससे प्रेरणा पाकर मैंने उस प्रेम और सोदय के गधोच्छवास से घने वातावरण को गीतो की प्यालियो मे ढालने का प्रयत्न किया था। उसके बाद ही में बीमार पड गया और यह संग्रह भी तब स श्रप्रकाशित हो रह गया । आशा है, उमर के प्रीति मधु के प्रेरित इन उदगारो मे पाठका को मनोरजन की पर्याप्त सामग्री मिलेगी । स्वर्गीय प्रसगर साहब की इस मधुरस्मति को पाठको के हाथ सौंपने में मुझे श्राज प्रसनता हो रही है। हिन्दी मे उमर की रुबाइयो के अधिकाश अनुवाद फिट्ज़रैल्ड के भग्रेजी रूपातर के आधार पर हुए हैं । फिटजरल्ड का कल्पना सौदय अपना है, भाव उमर के । इसी का अनुसरण मैंने भी अपने इस चपल प्रयास में किया है। इसलिए बुलबुल के साथ कोयल के स्वर, गुलाब के साथ ग्राम्र मजरी की गध भी इन स्वप्न मद-भरे गीतो मे सहज ही मिल गयी है ।
|
उमर खैयाम की रुबाइयो का प्रस्तुत गीता तर मैंने सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस मे उर्दू के प्रसिद्ध शायर तथा अपने स्नेही मित्र स्वर्गीय असगर साहब, गोडवी की महायता से इण्डियन प्रेस के प्राग्रह पर किया था। असगर साहब जिस भावुकता एवं तल्लीनता से मुझे फारसी की रुवाइयो का भावाथ समझाते थे और साथ ही फारसी के अन्य कवियों की मिलती जुलती रुवाइया को भी सुनाना नहीं मूलते थे, उससे प्रेरणा पाकर मैंने उस प्रेम और सोदय के गधोच्छवास से घने वातावरण को गीतो की प्यालियो मे ढालने का प्रयत्न किया था। उसके बाद ही में बीमार पड गया और यह संग्रह भी तब स श्रप्रकाशित हो रह गया । आशा है, उमर के प्रीति मधु के प्रेरित इन उदगारो मे पाठका को मनोरजन की पर्याप्त सामग्री मिलेगी । स्वर्गीय प्रसगर साहब की इस मधुरस्मति को पाठको के हाथ सौंपने में मुझे श्राज प्रसनता हो रही है। हिन्दी मे उमर की रुबाइयो के अधिकाश अनुवाद फिट्ज़रैल्ड के भग्रेजी रूपातर के आधार पर हुए हैं । फिटजरल्ड का कल्पना सौदय अपना है, भाव उमर के । इसी का अनुसरण मैंने भी अपने इस चपल प्रयास में किया है। इसलिए बुलबुल के साथ कोयल के स्वर, गुलाब के साथ ग्राम्र मजरी की गध भी इन स्वप्न मद-भरे गीतो मे सहज ही मिल गयी है ।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.