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नई दिल्लीः महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे (Pune) शहर में गुरुवार को पबजी (PUBG) खेलते समय एक 25 वर्षीय नवयुवक की लकवा (Stroke) की वजह से मौत हो गई. बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब PUBG खेलने से किसी की मौत हुई है. इससे पहले महाराष्ट्र राज्य के हिंगोली (Hingoli) जिले में दो युवकों की ऑनलाइन गेम पबजी खेलने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी.
वहीं इन घटनाओं के अलावा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले (Mathura) में एक बच्चे ने अपनी मां से नाराज होकर खुदकुशी कर ली. बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने वाला बच्चा मोबाइल पर पबजी मोबाइल गेम (PUBG Mobile) खेला करता था. बेटे के गेम की लत से परेशान होकर उसकी मां ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था जिसके वजह से उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर थी.
यह भी पढ़ें- मुरादाबादः पबजी गेम की लत के शिकार बच्चे चाकू-बंदूक लेकर पहुंच गए स्कूल, प्रिंसिपल ने किया सस्पेंड!
बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया था. हर कोई बच्चे के इस कदम से आहत था. सूचना मिलने पर सीओ सिटी राकेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए और बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया.
जानें क्या है पबजी गेम?
'Player Unknows Bettlegrounds' या शॉर्ट में PUBG (पबजी) दक्षिण कोरियाई मूल का एक ऑनलाइन गेम है. इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को खुद को जिंदा रखने और गेम जीतने के लिए दूसरों को मारना पड़ता है. हिंसक प्रवृत्ति के इस खेल का असर छोटे बच्चों, किशोरों यहां तक व्यस्कों को अपनी चपेट में ले रहा है. उनका बर्ताव हिंसक होता देखा गया है.
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नई दिल्लीः महाराष्ट्र के पुणे शहर में गुरुवार को पबजी खेलते समय एक पच्चीस वर्षीय नवयुवक की लकवा की वजह से मौत हो गई. बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब PUBG खेलने से किसी की मौत हुई है. इससे पहले महाराष्ट्र राज्य के हिंगोली जिले में दो युवकों की ऑनलाइन गेम पबजी खेलने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी. वहीं इन घटनाओं के अलावा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक बच्चे ने अपनी मां से नाराज होकर खुदकुशी कर ली. बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने वाला बच्चा मोबाइल पर पबजी मोबाइल गेम खेला करता था. बेटे के गेम की लत से परेशान होकर उसकी मां ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था जिसके वजह से उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर थी. यह भी पढ़ें- मुरादाबादः पबजी गेम की लत के शिकार बच्चे चाकू-बंदूक लेकर पहुंच गए स्कूल, प्रिंसिपल ने किया सस्पेंड! बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया था. हर कोई बच्चे के इस कदम से आहत था. सूचना मिलने पर सीओ सिटी राकेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए और बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. जानें क्या है पबजी गेम? 'Player Unknows Bettlegrounds' या शॉर्ट में PUBG दक्षिण कोरियाई मूल का एक ऑनलाइन गेम है. इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को खुद को जिंदा रखने और गेम जीतने के लिए दूसरों को मारना पड़ता है. हिंसक प्रवृत्ति के इस खेल का असर छोटे बच्चों, किशोरों यहां तक व्यस्कों को अपनी चपेट में ले रहा है. उनका बर्ताव हिंसक होता देखा गया है.
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Haryana, 04 September : हरियाणा पुलिस ने गुरमीत राम रहीम के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय से भारी संख्या में हथियार बरामद किए हैं. सूत्रों ने बताया कि डेरा समर्थकों के पास करीब 67 हथियार है. जिनमें से 33 हथियार जमा कराए गए हैं. वहीं 34 हथियार जमा करवाना बाकी है. हरियाणा पुलिस ने कहा कि भारी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं. जिन लोगों ने हथियार जमा नहीं कराया है उन्हें भी जल्द से जल्द इसे जमा करना होगा. ऐसा नहीं होने पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. पुलिस को इस कार्रवाई में अलग-अलग तरह की बंदूकें, पिस्टल और कई तरह के दूसरे हथियार मिले हैं.
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई की विशेष अदालत ने 20 साल जेल की सजा सुनाई है. राम रहीम के जेल जाने के बाद से डेरा सच्चा सौदा पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए हैं. पुलिस ने 33 हथियार जमा करवाए हैं और बाकी के 34 हथियार को भी जमा करने के लिए डेरा समर्थकों को कहा है. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. फिलहाल पुलिस को जो हथियार मिले हैं उनमें अलग-अलग तरह की बंदूकें और पिस्टल शामिल हैं.
बता दें कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम पर एक साध्वी के साथ बलात्कार का आरोप साल 2002 में लगा था. एक गुमनाम लेटर के जरिए साध्वी ने इस बात का खुलासा किया था. मामले में उच्च न्यायालय ने लेटर का संज्ञान लेते हुए सितम्बर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. हरियाणा पुलिस ने की कार्रवाई सीबीआई ने जांच में आरोप सही पाए और डेरा प्रमुख के खिलाफ विशेष अदालत के सामने 31 जुलाई, 2007 में आरोप पत्र दाखिल किया. इस मामले में गुरमीत राम रहीम को जमानत तो मिल गई, लेकिन यह मामला लंबे समय से पंचकुला की सीबीआई अदालत में चल रहा था. 25 अगस्त को सीबीआई की विशेष कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और 28 अगस्त को उन्हें 20 साल जेल की सजा सुनाई गई.
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Haryana, चार सितंबरtember : हरियाणा पुलिस ने गुरमीत राम रहीम के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय से भारी संख्या में हथियार बरामद किए हैं. सूत्रों ने बताया कि डेरा समर्थकों के पास करीब सरसठ हथियार है. जिनमें से तैंतीस हथियार जमा कराए गए हैं. वहीं चौंतीस हथियार जमा करवाना बाकी है. हरियाणा पुलिस ने कहा कि भारी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं. जिन लोगों ने हथियार जमा नहीं कराया है उन्हें भी जल्द से जल्द इसे जमा करना होगा. ऐसा नहीं होने पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. पुलिस को इस कार्रवाई में अलग-अलग तरह की बंदूकें, पिस्टल और कई तरह के दूसरे हथियार मिले हैं. डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई की विशेष अदालत ने बीस साल जेल की सजा सुनाई है. राम रहीम के जेल जाने के बाद से डेरा सच्चा सौदा पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए हैं. पुलिस ने तैंतीस हथियार जमा करवाए हैं और बाकी के चौंतीस हथियार को भी जमा करने के लिए डेरा समर्थकों को कहा है. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. फिलहाल पुलिस को जो हथियार मिले हैं उनमें अलग-अलग तरह की बंदूकें और पिस्टल शामिल हैं. बता दें कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम पर एक साध्वी के साथ बलात्कार का आरोप साल दो हज़ार दो में लगा था. एक गुमनाम लेटर के जरिए साध्वी ने इस बात का खुलासा किया था. मामले में उच्च न्यायालय ने लेटर का संज्ञान लेते हुए सितम्बर दो हज़ार दो को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. हरियाणा पुलिस ने की कार्रवाई सीबीआई ने जांच में आरोप सही पाए और डेरा प्रमुख के खिलाफ विशेष अदालत के सामने इकतीस जुलाई, दो हज़ार सात में आरोप पत्र दाखिल किया. इस मामले में गुरमीत राम रहीम को जमानत तो मिल गई, लेकिन यह मामला लंबे समय से पंचकुला की सीबीआई अदालत में चल रहा था. पच्चीस अगस्त को सीबीआई की विशेष कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और अट्ठाईस अगस्त को उन्हें बीस साल जेल की सजा सुनाई गई.
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले विनीत कुमार पिछले कुछ दिनों काफी परेशान रहे। विनीत की पत्नी की डिलीवरी की डेट नजदीक आ चुकी थी और डॉक्टर ने डिलीवरी कराने में असमर्थता जाहिर कर दी थी। दरअसल विनीत की पत्नी हेपेटाइटिस की मरीज हैं, ऐसे में डिलीवरी के वक्त हेपेटाइटिस बी की एक किट इस्तेमाल होती है जो कि डॉक्टर के पास नहीं थी। लॉकडाउन की वजह से स्थानीय बाजार में भी यह किट उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में विनीत ने अपनी परेशानी सोशल मीडिया में साझा की और फिर उनके एक दोस्त ने दिल्ली से इस किट को उन्हें भेजा।
लॉकडाउन के वक्त में दवा और इलाज से जुड़े सामानों को लेकर ऐसी परेशानियां आम हो गई हैं। भले ही दवा दुकानें खुल रही हों, लेकिन जरूरी दवाओं का स्टॉक तेजी खत्म हो रहा है और नया स्टॉक इन दुकानों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा। ऐसे में दवा दुकानदार अपने स्टॉक के भरोसे ही लोगों की जरूरतों को पूरा करने में जुटे हैं।
"मेरे मेडिकल स्टोर में दवाएं तेजी से खत्म हो रही हैं। मैं गोरखपुर से दवा मंगाता हूं, पहले रोज दवा आ जाती थी, अब 4 से 5 दिन में एक बार दवा आ रही है। लोग भी अपनी जरूरत से ज्यादा दवाएं खरीद रहे हैं, शायद वो दवाएं स्टॉक करने में जुटे हैं। ऐसे हाल में मेरी दुकान का स्टॉक खत्म होता जा रहा है।" - उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में स्थित जमजम मेडिकल स्टोर के मालिक फुरकान कहते हैं।
यह हाल सिर्फ फुरकान का नहीं है। लॉकडाउन के पहले हफ्ते में ही देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसी ही खबरें आ रही हैं जहां मेडिकल स्टोर्स में दवाओं का स्टॉक खत्म होता जा रहा है। हाल ही में हैदराबाद से खबर आई कि वहां की 60 प्रतिशत दवा की दुकानें बंद की जा रही हैं। इस बारे में हैदराबाद मेडिकल स्टोर्स एसोसिएशन के महासचिव किशन मुरारे शेट्टी का कहना है कि 'थोक बाजारों से मेडिकल स्टोर्स तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं, ऐसे में मजबूरन दवा की दुकानें बंद की गई हैं।' ऐसी ही खबरें दिल्ली और यूपी के कानपुर में स्थित दवा की थोक मार्केट से आ रही हैं।
मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी से यह सवाल उठता है जब सरकार ने साफ कहा है कि लॉकडाउन के दौरान अवाश्यक वस्तुओं की सप्लाई में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी तो दवाएं मेडिकल स्टोर तक क्यों नहीं पहुंच पा रहीं? इस बारे में जानने के लिए हमने हिमाचल प्रदेश ड्रग मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के महामंत्री मुनीष ठाकुर से बात की।
मुनीष बताते हैं, "हिमाचल प्रदेश का बद्दी फार्मास्यूटिक्ल हब कहा जाता है, लेकिन आज यहां 95 प्रतिशत कंपनियां बंद पड़ी हैं, वजह यह है कि कंपनियों के पास दवा बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध ही नहीं है। भारत में दवा कंपनियां चीन से एक्टिव फार्मास्यूटिक्ल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) का आयात करती हैं। करीब 80 फीसदी एपीआई चीन से ही आता था, जोकि अब नहीं आ रहा। वहीं, जो थोड़ा बहुत कच्चा माल भारत आया है वो लॉकडाउन की वजह से बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। ऐसे में जब कच्चा माल ही नहीं होगा तो कंपनियां दवा कहां से बनाएंगी।"
मुनीष जिस ट्रांसपोर्ट की दिक्कत की बात कर रहे हैं। यह दिक्कत सरकार तक भी पहुंची थी। इसी स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन के करीब छह दिन बाद केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा कि लॉकडाउन के दौरान जरूरी और गैर जरूरी वस्तुओं में भेद किए बिना सभी सामान की ढुलाई की अनुमति दी जाए। इस आदेश के बाद मुनीष ठाकुर को लगता है कि अब ट्रांसपोर्ट की दिक्कत थोड़ी कम होगी और छोटी दवा कंपनियां भी अपना सामान थोक बाजार तक पहुंचा सकेंगी।
कंपनियों के थोक बाजार तक दवा पहुंचा देने भर से सप्लाई चेन चलने नहीं लगेगी। लॉकडाउन का असल असर तो इन थोक बाजारों में ही देखने को मिलता है। कंपनियों और आपके हमारे बाजार के मेडिकल स्टोर के बीच की कड़ी यह थोक बाजार ही होते हैं। इस लॉकडाउन का असर इन थोक बाजारों पर कैसा है यह जानने के लिए हमने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद में स्थित थोक मार्केट से जुड़े व्यापारियों से बात की।
उत्तर प्रदेश सर्चिकल एसोसिएशन के महामंत्री और दवाओं के थोक व्यापारी अनिल उपाध्याय बताते हैं, "हमारे लिए बहुत दिक्कत बढ़ गई है। कंपनियों से दवा आ नहीं पा रही है, हम दूसरे जिलों तक दवा ठीक से भेज नहीं पा रहे हैं। लॉकडाउन ने एकदम बांध दिया है। कई व्यापारियों का स्टॉक खत्म हो चुका है। बाजार में महत्वपूर्ण दवाएं जैसे एंटिबायोटिक, बीपी, हृदय रोग से संबंधित दवाइयां तेजी से खत्म हो रही हैं। हमारे पास जो भी उपलब्ध था हम बाजार में जैसे-तैसे भेज चुके हैं, अब कंपनियों से माल का इंतजार हो रहा है।"
दवा कारोबार से जुड़े इन लोगों की बातों से एक बात तो साफ होती है कि कंपनियां दवा बना नहीं पा रही, जो बनी हैं वो सप्लाई नहीं हो पा रही और मार्केट में उपलब्ध दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। इन सब बातों के इतर भी दवा कारोबार से जुड़े लोग अन्य चीजों से जूझ रहे हैं। जैसे दवा को बनाने के बाद उसे पैकेट में रखा जाता है। कंपनियां अपने पास उपलब्ध कच्चे माल से दवा तो तैयार कर लेंगे, लेकिन पैकेट कहां से लाएंगी। ऐसी ही परेशानी से पंजाब के मोहाली में स्थित पेरेक्स फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के मालिक जगदीप सिंह जूझ रहे हैं।
जगदीप बताते हैं, "मार्केट में दवाएं कोरी तो भेजी नहीं जा सकती। मैं दवाएं बना दूं लेकिन उसको पैक करने के लिए भी पैकेट चाहिए, यह पैकेट बनाने वाली कंपनी बंद पड़ी है। इस हाल में दवा कैसे बन पाएगी। बाजार में तो सब एक दूसरे से जुड़ा है न, सब चेन से बंधे है। एक काम नहीं करेगा तो दूसरे का काम कैसे चलेगा।"
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले विनीत कुमार पिछले कुछ दिनों काफी परेशान रहे। विनीत की पत्नी की डिलीवरी की डेट नजदीक आ चुकी थी और डॉक्टर ने डिलीवरी कराने में असमर्थता जाहिर कर दी थी। दरअसल विनीत की पत्नी हेपेटाइटिस की मरीज हैं, ऐसे में डिलीवरी के वक्त हेपेटाइटिस बी की एक किट इस्तेमाल होती है जो कि डॉक्टर के पास नहीं थी। लॉकडाउन की वजह से स्थानीय बाजार में भी यह किट उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में विनीत ने अपनी परेशानी सोशल मीडिया में साझा की और फिर उनके एक दोस्त ने दिल्ली से इस किट को उन्हें भेजा। लॉकडाउन के वक्त में दवा और इलाज से जुड़े सामानों को लेकर ऐसी परेशानियां आम हो गई हैं। भले ही दवा दुकानें खुल रही हों, लेकिन जरूरी दवाओं का स्टॉक तेजी खत्म हो रहा है और नया स्टॉक इन दुकानों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा। ऐसे में दवा दुकानदार अपने स्टॉक के भरोसे ही लोगों की जरूरतों को पूरा करने में जुटे हैं। "मेरे मेडिकल स्टोर में दवाएं तेजी से खत्म हो रही हैं। मैं गोरखपुर से दवा मंगाता हूं, पहले रोज दवा आ जाती थी, अब चार से पाँच दिन में एक बार दवा आ रही है। लोग भी अपनी जरूरत से ज्यादा दवाएं खरीद रहे हैं, शायद वो दवाएं स्टॉक करने में जुटे हैं। ऐसे हाल में मेरी दुकान का स्टॉक खत्म होता जा रहा है।" - उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में स्थित जमजम मेडिकल स्टोर के मालिक फुरकान कहते हैं। यह हाल सिर्फ फुरकान का नहीं है। लॉकडाउन के पहले हफ्ते में ही देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसी ही खबरें आ रही हैं जहां मेडिकल स्टोर्स में दवाओं का स्टॉक खत्म होता जा रहा है। हाल ही में हैदराबाद से खबर आई कि वहां की साठ प्रतिशत दवा की दुकानें बंद की जा रही हैं। इस बारे में हैदराबाद मेडिकल स्टोर्स एसोसिएशन के महासचिव किशन मुरारे शेट्टी का कहना है कि 'थोक बाजारों से मेडिकल स्टोर्स तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं, ऐसे में मजबूरन दवा की दुकानें बंद की गई हैं।' ऐसी ही खबरें दिल्ली और यूपी के कानपुर में स्थित दवा की थोक मार्केट से आ रही हैं। मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी से यह सवाल उठता है जब सरकार ने साफ कहा है कि लॉकडाउन के दौरान अवाश्यक वस्तुओं की सप्लाई में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी तो दवाएं मेडिकल स्टोर तक क्यों नहीं पहुंच पा रहीं? इस बारे में जानने के लिए हमने हिमाचल प्रदेश ड्रग मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के महामंत्री मुनीष ठाकुर से बात की। मुनीष बताते हैं, "हिमाचल प्रदेश का बद्दी फार्मास्यूटिक्ल हब कहा जाता है, लेकिन आज यहां पचानवे प्रतिशत कंपनियां बंद पड़ी हैं, वजह यह है कि कंपनियों के पास दवा बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध ही नहीं है। भारत में दवा कंपनियां चीन से एक्टिव फार्मास्यूटिक्ल इंग्रीडिएंट्स का आयात करती हैं। करीब अस्सी फीसदी एपीआई चीन से ही आता था, जोकि अब नहीं आ रहा। वहीं, जो थोड़ा बहुत कच्चा माल भारत आया है वो लॉकडाउन की वजह से बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। ऐसे में जब कच्चा माल ही नहीं होगा तो कंपनियां दवा कहां से बनाएंगी।" मुनीष जिस ट्रांसपोर्ट की दिक्कत की बात कर रहे हैं। यह दिक्कत सरकार तक भी पहुंची थी। इसी स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन के करीब छह दिन बाद केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा कि लॉकडाउन के दौरान जरूरी और गैर जरूरी वस्तुओं में भेद किए बिना सभी सामान की ढुलाई की अनुमति दी जाए। इस आदेश के बाद मुनीष ठाकुर को लगता है कि अब ट्रांसपोर्ट की दिक्कत थोड़ी कम होगी और छोटी दवा कंपनियां भी अपना सामान थोक बाजार तक पहुंचा सकेंगी। कंपनियों के थोक बाजार तक दवा पहुंचा देने भर से सप्लाई चेन चलने नहीं लगेगी। लॉकडाउन का असल असर तो इन थोक बाजारों में ही देखने को मिलता है। कंपनियों और आपके हमारे बाजार के मेडिकल स्टोर के बीच की कड़ी यह थोक बाजार ही होते हैं। इस लॉकडाउन का असर इन थोक बाजारों पर कैसा है यह जानने के लिए हमने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद में स्थित थोक मार्केट से जुड़े व्यापारियों से बात की। उत्तर प्रदेश सर्चिकल एसोसिएशन के महामंत्री और दवाओं के थोक व्यापारी अनिल उपाध्याय बताते हैं, "हमारे लिए बहुत दिक्कत बढ़ गई है। कंपनियों से दवा आ नहीं पा रही है, हम दूसरे जिलों तक दवा ठीक से भेज नहीं पा रहे हैं। लॉकडाउन ने एकदम बांध दिया है। कई व्यापारियों का स्टॉक खत्म हो चुका है। बाजार में महत्वपूर्ण दवाएं जैसे एंटिबायोटिक, बीपी, हृदय रोग से संबंधित दवाइयां तेजी से खत्म हो रही हैं। हमारे पास जो भी उपलब्ध था हम बाजार में जैसे-तैसे भेज चुके हैं, अब कंपनियों से माल का इंतजार हो रहा है।" दवा कारोबार से जुड़े इन लोगों की बातों से एक बात तो साफ होती है कि कंपनियां दवा बना नहीं पा रही, जो बनी हैं वो सप्लाई नहीं हो पा रही और मार्केट में उपलब्ध दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। इन सब बातों के इतर भी दवा कारोबार से जुड़े लोग अन्य चीजों से जूझ रहे हैं। जैसे दवा को बनाने के बाद उसे पैकेट में रखा जाता है। कंपनियां अपने पास उपलब्ध कच्चे माल से दवा तो तैयार कर लेंगे, लेकिन पैकेट कहां से लाएंगी। ऐसी ही परेशानी से पंजाब के मोहाली में स्थित पेरेक्स फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के मालिक जगदीप सिंह जूझ रहे हैं। जगदीप बताते हैं, "मार्केट में दवाएं कोरी तो भेजी नहीं जा सकती। मैं दवाएं बना दूं लेकिन उसको पैक करने के लिए भी पैकेट चाहिए, यह पैकेट बनाने वाली कंपनी बंद पड़ी है। इस हाल में दवा कैसे बन पाएगी। बाजार में तो सब एक दूसरे से जुड़ा है न, सब चेन से बंधे है। एक काम नहीं करेगा तो दूसरे का काम कैसे चलेगा।"
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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जो लोग हज़रत मूसा पर ईमान लाए थे उन्होंने उनकी बातें सुनीं और कहा कि हम केवल ईश्वर पर भरोसा करते हैं और उसके अतिरिक्त हमारी कोई शरण नहीं है।
मूसा ने कहा कि हे मेरी जाति वालों यदि तुम ईश्वर पर ईमान लाए हो और उसके समक्ष नतमस्तक हो तो केवल उसी पर भरोसा करो। तो उन्होंने कहा कि हमने ईश्वर पर भरोसा किया है। हे हमारे पालनहार हमें अत्याचारी गुट की परीक्षाओं और यातनाओं में ग्रस्त न कर तथा अपनी दया से हमें काफ़िरों से मुक्ति दिला दे।
संक्षिप्त टिप्पणीः
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम, फ़िरऔन और उसके लोगों की भारी यातनाओं के समक्ष अपनी जाति के लोगों को ईश्वर पर भरोसा करने की सिफ़ारिश करते हैं और इसे ईमान और इस्लाम का अटूट अंग बताते हैं।
इस आयत से मिलने वाले पाठः
- कठिनाइयों और दुखों में ईमान वाले व्यक्ति का एक मात्रा सहारा ईश्वर होता है कि जिस पर भरोसा करके और उसके आदेशों का पालन करके कठिनाइयों को पीछे छोड़ा जा सकता है।
यदि प्रार्थना लाभदायक न होती तो ईश्वर हम से उसकी सिफ़ारिश न करता।
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जो लोग हज़रत मूसा पर ईमान लाए थे उन्होंने उनकी बातें सुनीं और कहा कि हम केवल ईश्वर पर भरोसा करते हैं और उसके अतिरिक्त हमारी कोई शरण नहीं है। मूसा ने कहा कि हे मेरी जाति वालों यदि तुम ईश्वर पर ईमान लाए हो और उसके समक्ष नतमस्तक हो तो केवल उसी पर भरोसा करो। तो उन्होंने कहा कि हमने ईश्वर पर भरोसा किया है। हे हमारे पालनहार हमें अत्याचारी गुट की परीक्षाओं और यातनाओं में ग्रस्त न कर तथा अपनी दया से हमें काफ़िरों से मुक्ति दिला दे। संक्षिप्त टिप्पणीः हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम, फ़िरऔन और उसके लोगों की भारी यातनाओं के समक्ष अपनी जाति के लोगों को ईश्वर पर भरोसा करने की सिफ़ारिश करते हैं और इसे ईमान और इस्लाम का अटूट अंग बताते हैं। इस आयत से मिलने वाले पाठः - कठिनाइयों और दुखों में ईमान वाले व्यक्ति का एक मात्रा सहारा ईश्वर होता है कि जिस पर भरोसा करके और उसके आदेशों का पालन करके कठिनाइयों को पीछे छोड़ा जा सकता है। यदि प्रार्थना लाभदायक न होती तो ईश्वर हम से उसकी सिफ़ारिश न करता।
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KSP Constable Recruitment 2021: अगर आप पुलिस विभाग में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं तो आपके लिए ये शानदार मौका हो सकता है. दरअसल, कर्नाटक राज्य पुलिस (KSP) के सिविल विभाग में कांस्टेबल (Constable) के पदों के लिए आवेदन मांगे हैं. इस भर्ती के माध्यम से विभाग कांस्टेबल के 4000 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन करेगा. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार कर्नाटक राज्य पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर आवेदन कर सकेत हैं. आवेदन प्रक्रिया 23 अप्रैल 2021 को शुरु हो चुकी है. उम्मीदवार 31 मई 2021 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
संस्था का नाम- कर्नाटक राज्य पुलिस (KSP)
पद नाम- कांस्टेबल (Constable)
शैक्षणिक योग्यता- उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड/संस्थान/विश्वविद्यालय से दसवीं या बारहवीं की परीक्षा पास की हो.
आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु कम से कम 18 साल और अधिकतम 25 साल होनी चाहिए. इसके साथ ही आरक्षित वर्ग वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी.
आवेदन शुल्क- सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 250/- रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आवेदन शुल्क में छूट मिलेगी.
पदों की संख्या- पदों की कुल संख्या 4000 है.
कैसे करें आवेदन- इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार कर्नाटक राज्य पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट recruitment. ksp. gov. in पर विजिट कर आवेदन कर सकेत हैं.
कितनी मिलेगी सैलरी- चयनित उम्मीदवारों को 16,000 रुपये से 21,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा.
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KSP Constable Recruitment दो हज़ार इक्कीस: अगर आप पुलिस विभाग में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं तो आपके लिए ये शानदार मौका हो सकता है. दरअसल, कर्नाटक राज्य पुलिस के सिविल विभाग में कांस्टेबल के पदों के लिए आवेदन मांगे हैं. इस भर्ती के माध्यम से विभाग कांस्टेबल के चार हज़ार पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन करेगा. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार कर्नाटक राज्य पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर आवेदन कर सकेत हैं. आवेदन प्रक्रिया तेईस अप्रैल दो हज़ार इक्कीस को शुरु हो चुकी है. उम्मीदवार इकतीस मई दो हज़ार इक्कीस तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. संस्था का नाम- कर्नाटक राज्य पुलिस पद नाम- कांस्टेबल शैक्षणिक योग्यता- उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड/संस्थान/विश्वविद्यालय से दसवीं या बारहवीं की परीक्षा पास की हो. आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु कम से कम अट्ठारह साल और अधिकतम पच्चीस साल होनी चाहिए. इसके साथ ही आरक्षित वर्ग वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी. आवेदन शुल्क- सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को दो सौ पचास/- रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आवेदन शुल्क में छूट मिलेगी. पदों की संख्या- पदों की कुल संख्या चार हज़ार है. कैसे करें आवेदन- इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार कर्नाटक राज्य पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट recruitment. ksp. gov. in पर विजिट कर आवेदन कर सकेत हैं. कितनी मिलेगी सैलरी- चयनित उम्मीदवारों को सोलह,शून्य रुपयापये से इक्कीस,शून्य रुपयापये प्रति माह वेतन मिलेगा.
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बेशक लघु ग्रह पृथ्वी के सबसे बड़े दुश्मन हों, मगर निकट भविष्य में फिलहाल इनसे कोई खतरा नहीं है। 15 फरवरी को धरती के करीब आ रहे लघु ग्रह के धरती से टकराने की अफवाहों को वैज्ञानिकों ने सिरे से नकार दिया है। इसे 163373 संख्या के नाम से जाना जाता है और 2002 में खोज गया था। लघु ग्रह को पृथ्वी के निकट से गुजरने वाले पिंडों में शामिल किया गया है। खोज के बाद से ही नासा समेत दुनिया की अनेक स्पेस एजेंसियां इस पर नजर रखे हुए हैं। आकार में यह 589 मीटर का है। यह हमारे सौर परिवार का सदस्य है। सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में इस ग्रह को 650 दिन का सफर तय करना होता है। इस लघु ग्रह को लेकर चर्चा है कि 15 फरवरी को धरती के पास से गुजरते समय पृथ्वी से टकरा जाएगा।
भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बेंगलुरु के वरिष्ठ खगोलीय वैज्ञानिक प्रो. आरसी कपूर का कहना है कि जब यह हमारे पास से गुजरेगा तो धरती व इसके बीच की दूरी 58 लाख किमी होगी। इतनी अधिक दूरी के चलते धरती से टकराने की संभावना कोसो दूर तक नहीं रह जाती। पृथ्वी के साथ इसकी कक्षा की तुलना करें तो इसकी कक्षा दीर्घ वृत्ताकार है। जिसके चलते अपने भ्रमणकाल में यह जब सूर्य के सर्वाधिक नजदीक होता है तब दस करोड़ किमी दूर होता है और जब दूर से गुजरता है तो दूरी 33 करोड़ किमी हो जाती है। लिहाजा इस लघु ग्रह की धरती से टकराने की अफवाह कोरी हैं।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे का कहना है कि हमारे सौर परिवार में असंख्य छोटे-बड़े पिंड हैं। साल में कई बार धरती के नजदीक से होकर अपने पथ में आगे बढ़ जाते हैं। इनके धरती से टकराने की संभावना बनी रहती है। परंतु निकट भविष्य में ऐसा कोई भी पिंड पृथ्वी के बेहद करीब से नहीं गुजर रहा है, जिसके धरती से टकराने की संभावना हो।
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बेशक लघु ग्रह पृथ्वी के सबसे बड़े दुश्मन हों, मगर निकट भविष्य में फिलहाल इनसे कोई खतरा नहीं है। पंद्रह फरवरी को धरती के करीब आ रहे लघु ग्रह के धरती से टकराने की अफवाहों को वैज्ञानिकों ने सिरे से नकार दिया है। इसे एक लाख तिरेसठ हज़ार तीन सौ तिहत्तर संख्या के नाम से जाना जाता है और दो हज़ार दो में खोज गया था। लघु ग्रह को पृथ्वी के निकट से गुजरने वाले पिंडों में शामिल किया गया है। खोज के बाद से ही नासा समेत दुनिया की अनेक स्पेस एजेंसियां इस पर नजर रखे हुए हैं। आकार में यह पाँच सौ नवासी मीटर का है। यह हमारे सौर परिवार का सदस्य है। सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में इस ग्रह को छः सौ पचास दिन का सफर तय करना होता है। इस लघु ग्रह को लेकर चर्चा है कि पंद्रह फरवरी को धरती के पास से गुजरते समय पृथ्वी से टकरा जाएगा। भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बेंगलुरु के वरिष्ठ खगोलीय वैज्ञानिक प्रो. आरसी कपूर का कहना है कि जब यह हमारे पास से गुजरेगा तो धरती व इसके बीच की दूरी अट्ठावन लाख किमी होगी। इतनी अधिक दूरी के चलते धरती से टकराने की संभावना कोसो दूर तक नहीं रह जाती। पृथ्वी के साथ इसकी कक्षा की तुलना करें तो इसकी कक्षा दीर्घ वृत्ताकार है। जिसके चलते अपने भ्रमणकाल में यह जब सूर्य के सर्वाधिक नजदीक होता है तब दस करोड़ किमी दूर होता है और जब दूर से गुजरता है तो दूरी तैंतीस करोड़ किमी हो जाती है। लिहाजा इस लघु ग्रह की धरती से टकराने की अफवाह कोरी हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे का कहना है कि हमारे सौर परिवार में असंख्य छोटे-बड़े पिंड हैं। साल में कई बार धरती के नजदीक से होकर अपने पथ में आगे बढ़ जाते हैं। इनके धरती से टकराने की संभावना बनी रहती है। परंतु निकट भविष्य में ऐसा कोई भी पिंड पृथ्वी के बेहद करीब से नहीं गुजर रहा है, जिसके धरती से टकराने की संभावना हो।
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इस 15 सेकंड के क्लिप में हम देख सकते हैं कि हाथियों का एक झुंड शावकों के साथ दलदल से जा रहा थआ। अचानक पानी और बड़ी घास के बीच छिपा एक शिकारी (मगरमच्छ) हाथी के मासूम बच्चे को उसकी सूंड से दबोच लेता है। बच्चा खुद को छुड़ाने के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगता है। पहले तो साभी हाथी पीछे हट जाते हैं, लेकिन पलभर बाद ही वे मगरमच्छ को बच्चे को छोड़ने के लिए मजबूर कर देते हैं। जी हां, मम्मा हथिनी मगरमच्छ से भिड़ जाती है और बच्चे को मौत के मुंह से बचा लाती है।
यह वीडियो आईएएस अधिकारी सुप्रिया साहू ने 30 जुलाई को शेयर किया था। उन्होंने कैप्शन में लिखा- हथिनी ने मगरमच्छ के जबड़ों से अपने बच्चे को बचाया। हाथी अतुल्य हैं! इस क्लिप को न्यूज लिखे जाने तक 37 हजार से अधिक व्यूज और 1 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। इस घटना को देखने के बाद यूजर्स लगातार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि हर मां अपने बच्चे के लिए ऐसा ही करती है।
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इस पंद्रह सेकंड के क्लिप में हम देख सकते हैं कि हाथियों का एक झुंड शावकों के साथ दलदल से जा रहा थआ। अचानक पानी और बड़ी घास के बीच छिपा एक शिकारी हाथी के मासूम बच्चे को उसकी सूंड से दबोच लेता है। बच्चा खुद को छुड़ाने के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगता है। पहले तो साभी हाथी पीछे हट जाते हैं, लेकिन पलभर बाद ही वे मगरमच्छ को बच्चे को छोड़ने के लिए मजबूर कर देते हैं। जी हां, मम्मा हथिनी मगरमच्छ से भिड़ जाती है और बच्चे को मौत के मुंह से बचा लाती है। यह वीडियो आईएएस अधिकारी सुप्रिया साहू ने तीस जुलाई को शेयर किया था। उन्होंने कैप्शन में लिखा- हथिनी ने मगरमच्छ के जबड़ों से अपने बच्चे को बचाया। हाथी अतुल्य हैं! इस क्लिप को न्यूज लिखे जाने तक सैंतीस हजार से अधिक व्यूज और एक हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। इस घटना को देखने के बाद यूजर्स लगातार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि हर मां अपने बच्चे के लिए ऐसा ही करती है।
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मे लाचार होकर जब नीचे उतरने लगे, तब उन्होंने यह निश्चय कर लिया था कि अबकी बार 'चलि औचक चुपचाप यहाँ का काम देखा जायगा । हजारीलाल नीचे उतरे और पतिया की वही हॅसी फिर वहाँ छिटक घड़ी।
सॉझ हो आयी है । काम बन्द करके वे दोनों छत से उतर रहे हैं । मुझे भी अब अपनी खिड़की बन्द करनी पड़ेगी ।
घूमते समय हजारीलाल से भेंट हो गयी थी । उनसे भी मालूम हुआ कि उनकी छत पर कुछ काम लगा है । कुछ झूठ थोड़े कहा था । मालूम हुआ राज का नाम है काशीराम । हॉ, पतिया का नाम रधिया निकला । बहुत अन्तर नहीं पड़ता। मैं पतिया ही कहूँगा । कोई कवि हों, तो वह भी बिना छन्दोभय के ऐसा ही कर सकते हैं ।
विशेष बात मैंने उनसे नहीं की। यह ठीक नही जान पड़ता कि अपनी
वातों की सच्चाई का प्रमाण पत्र उनसे चाहा जाय । मेरे कहने से ही कोई वात झूठ और हजारीलाल के कहने से ही सच हो, यह हो कैसे सकता है ।
लिखने के कमरे की खिड़की मैने बन्द कर रखी है, काशीराम और पतिया उस छत पर से चले गये है, तब भी मेरा निज का काम रुकना नहीं चाहता । न जाने नये-नये कितने रूपों मे वे दोनों मेरे सामने उपस्थित हो रहे हैं। प्रयत्न करता हूँ; पर नींद नहीं आती । आँखें बन्द कर लेने पर वे और भी स्पष्ट हो उठते हैं । अँधेरा है, सुनसान है, सब ओर सन्नाटा है; तब भी कवि सूर की भाँति रूप और दृश्य का नया सागरसा मेरे चारों ओर उमड़ उठा है ! मेरे मस्तक में गरमी है । विश्राम नहीं मिलने पाता। सोचता हूँ, इससे बचने का उपाय ही क्या ? लेखक बनना है, तो यह सब मुसीबत भी झेलनी होगी। बहुत रात गये किसी तरह नीद आती भी है; किन्तु ये काशीराम और पतिया मेरा साथ नहीं
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मे लाचार होकर जब नीचे उतरने लगे, तब उन्होंने यह निश्चय कर लिया था कि अबकी बार 'चलि औचक चुपचाप यहाँ का काम देखा जायगा । हजारीलाल नीचे उतरे और पतिया की वही हॅसी फिर वहाँ छिटक घड़ी। सॉझ हो आयी है । काम बन्द करके वे दोनों छत से उतर रहे हैं । मुझे भी अब अपनी खिड़की बन्द करनी पड़ेगी । घूमते समय हजारीलाल से भेंट हो गयी थी । उनसे भी मालूम हुआ कि उनकी छत पर कुछ काम लगा है । कुछ झूठ थोड़े कहा था । मालूम हुआ राज का नाम है काशीराम । हॉ, पतिया का नाम रधिया निकला । बहुत अन्तर नहीं पड़ता। मैं पतिया ही कहूँगा । कोई कवि हों, तो वह भी बिना छन्दोभय के ऐसा ही कर सकते हैं । विशेष बात मैंने उनसे नहीं की। यह ठीक नही जान पड़ता कि अपनी वातों की सच्चाई का प्रमाण पत्र उनसे चाहा जाय । मेरे कहने से ही कोई वात झूठ और हजारीलाल के कहने से ही सच हो, यह हो कैसे सकता है । लिखने के कमरे की खिड़की मैने बन्द कर रखी है, काशीराम और पतिया उस छत पर से चले गये है, तब भी मेरा निज का काम रुकना नहीं चाहता । न जाने नये-नये कितने रूपों मे वे दोनों मेरे सामने उपस्थित हो रहे हैं। प्रयत्न करता हूँ; पर नींद नहीं आती । आँखें बन्द कर लेने पर वे और भी स्पष्ट हो उठते हैं । अँधेरा है, सुनसान है, सब ओर सन्नाटा है; तब भी कवि सूर की भाँति रूप और दृश्य का नया सागरसा मेरे चारों ओर उमड़ उठा है ! मेरे मस्तक में गरमी है । विश्राम नहीं मिलने पाता। सोचता हूँ, इससे बचने का उपाय ही क्या ? लेखक बनना है, तो यह सब मुसीबत भी झेलनी होगी। बहुत रात गये किसी तरह नीद आती भी है; किन्तु ये काशीराम और पतिया मेरा साथ नहीं
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भारत और न्यूजीलैंड की महिला टीमों के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज का तीसरा और अंतिम टी-20 मैच 10 फरवरी रविवार को खेला गया.
सीरीज का यह तीसरा मैच काफी रोमांचक रहा है, लेकिन इस मुकाबले को अंत में न्यूजीलैंड की महिला क्रिकेट टीम ने 2 रन के करीबी अंतर से जीत लिया. साथ ही इस सीरीज को भी न्यूजीलैंड की टीम ने 3-0 के अंतर से जीत लिया है.
न्यूजीलैंड की टीम ने इस मैच का टॉस जीता था और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 161 रन बनाये.
न्यूजीलैंड टीम के लिए सबसे ज्यादा 52 गेंदों पर 72 रन की पारी सोफी डेविन ने खेली. वहीं टीम की कप्तान एमी सेथरवेट ने भी 23 गेंदों पर 31 रन का योगदान दिया.
भारत के लिए सबसे सफल गेंदबाज दीप्ती शर्मा रही, जिसमे उन्होंने अपने 4 ओवर में मात्र 28 रन देकर कुल 2 विकेट हासिल किये.
162 रन के इस लक्ष्य के जवाब में भारत की महिला क्रिकेट टीम निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 159 रन ही बना पाई.
भारत की स्टार ओपनर बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने 62 गेंदों पर 86 रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान शानदार 12 चौके व एक छक्का लगाया, लेकिन स्मृति मंधाना की यह लाजवाब पारी भी भारतीय टीम को जीत नहीं दिला पाई.
भारत के लिए मिताली राज ने भी 20 गेंदों पर 24 रन की नाबाद पारी खेली. वहीं दीप्ती शर्मा ने भारत के लिए 16 गेंदों पर 21 रन की नाबाद पारी खेली.
न्यूजीलैंड के लिए सोफी डेविन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अपने 4 ओवर में मात्र 21 रन देकर 2 विकेट हासिल किये. सोफी डेविन को शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ़ द मैच' के ख़िताब से नवाजा गया.
अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें. अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें. साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें. अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपकों जल्दी पहुंचा सकें.
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भारत और न्यूजीलैंड की महिला टीमों के बीच तीन मैचों की टी-बीस सीरीज का तीसरा और अंतिम टी-बीस मैच दस फरवरी रविवार को खेला गया. सीरीज का यह तीसरा मैच काफी रोमांचक रहा है, लेकिन इस मुकाबले को अंत में न्यूजीलैंड की महिला क्रिकेट टीम ने दो रन के करीबी अंतर से जीत लिया. साथ ही इस सीरीज को भी न्यूजीलैंड की टीम ने तीन-शून्य के अंतर से जीत लिया है. न्यूजीलैंड की टीम ने इस मैच का टॉस जीता था और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड टीम ने निर्धारित बीस ओवर में सात विकेट के नुकसान पर एक सौ इकसठ रन बनाये. न्यूजीलैंड टीम के लिए सबसे ज्यादा बावन गेंदों पर बहत्तर रन की पारी सोफी डेविन ने खेली. वहीं टीम की कप्तान एमी सेथरवेट ने भी तेईस गेंदों पर इकतीस रन का योगदान दिया. भारत के लिए सबसे सफल गेंदबाज दीप्ती शर्मा रही, जिसमे उन्होंने अपने चार ओवर में मात्र अट्ठाईस रन देकर कुल दो विकेट हासिल किये. एक सौ बासठ रन के इस लक्ष्य के जवाब में भारत की महिला क्रिकेट टीम निर्धारित बीस ओवर में चार विकेट के नुकसान पर एक सौ उनसठ रन ही बना पाई. भारत की स्टार ओपनर बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने बासठ गेंदों पर छियासी रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान शानदार बारह चौके व एक छक्का लगाया, लेकिन स्मृति मंधाना की यह लाजवाब पारी भी भारतीय टीम को जीत नहीं दिला पाई. भारत के लिए मिताली राज ने भी बीस गेंदों पर चौबीस रन की नाबाद पारी खेली. वहीं दीप्ती शर्मा ने भारत के लिए सोलह गेंदों पर इक्कीस रन की नाबाद पारी खेली. न्यूजीलैंड के लिए सोफी डेविन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अपने चार ओवर में मात्र इक्कीस रन देकर दो विकेट हासिल किये. सोफी डेविन को शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ़ द मैच' के ख़िताब से नवाजा गया. अगर आपकों हमारा आर्टिकल पसंद आया, तो प्लीज इसे लाइक करें. अपने दोस्तों तक ये खबर सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें. साथ ही अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो प्लीज कमेंट करें. अगर आपने अब तक हमारा पेज लाइक नहीं किया हैं, तो कृपया अभी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट हम आपकों जल्दी पहुंचा सकें.
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पुचि च इण्हि च अणागय च मणप्पदोसो न मे अस्थि कोइ । जक्खा हु वेयावडियं करेन्ति तम्हा हु एए निहया कुमारा ॥३२॥ अत्य च धम्मं च वियागमाणा तुम्मे न वि कुप्पह भूइपन्ना । तुमं तु पाए सरण उवेमो समागया सव्वजणेण अम्हे ॥३३॥
इन समानताओं के अतिरिक्त इन दोनो में काफी अन्तर भी है । मातङ्ग जातक में मातङ्ग-पण्डित की कथा के अतिरिक्त एक और कथा का समावेश किया गया है । पहली कथा में चाण्डाल मातङ्ग-पंडित ब्राह्मणो को शिक्षा देकर सही मार्ग पर लाते है और दूसरी कथा में ब्राह्मण मातङ्ग को राजा से मरवा देते है। विद्वानो की मान्यता है कि यह दूसरी कथा वाद में जोडी गई है ।
डॉ० घाटगे का अभिमत है कि जंब हम जैन और वौद्ध परम्राओ मे प्रचलित इन कथाओं की तुलना करते हैं, तब हमें यह ज्ञात होता है कि वौद्ध परम्परा की कथावस्तु विस्तृत है और उसका कथ्य अनेक विचारो से मिश्रित है । जैन परम्परा की कथावस्तु वहुत सरल है और कथ्यमात्र को छूने वाली है । लेकिन एक तथ्य ऐमा है जिसके आधार पर यह माना जा सकता है कि जैन-कथावस्तु वौद्ध-कथावस्तु से प्राचीन है । मातङ्ग जातक मे प्रतिपाद्य विषय के सूक्ष्म अध्ययन से यह ज्ञात हो जाता है कि ब्राह्मणों के प्रति लेखक की भावनाएँ बहुत अधिक उद्धत और कटु है जब कि जैन कथावस्तु में ऐसा नही है । वौद्धों की कथावस्तु मे ब्राह्मणों को सहज धोखा देना और उन द्वारा किए गए अपराधो के लिए जूठन खाने के लिए प्रेरित करना - ये दो तथ्य उपरोक्त मान्यता को स्पष्ट कर देते हैं । 'इन्ही तथ्यो ने दूसरी कथा को इसी जातक मे समाविष्ट करने के लिए लेखक को प्रेरित किया होगा और इस प्रकार की भावनाएँ साम्प्रदायिक पक्षपातो के आधार पर आगे चल कर पनपी होगी ।" उस समय ब्राह्मण जन्मना जाति के आधार पर विशेषताओ
1 Annals of the Bhandarkar Oriental Research Institute, Vol 17 (1935, 1936 ) ' A few Parallels in Jains and Buddhist works', page 345, by A M Ghatage, MA
This must have also led the writer to include the other story in the same Jätaka And such an attitude, must have arisen in later times as the effect of sectarian bias
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पुचि च इण्हि च अणागय च मणप्पदोसो न मे अस्थि कोइ । जक्खा हु वेयावडियं करेन्ति तम्हा हु एए निहया कुमारा ॥बत्तीस॥ अत्य च धम्मं च वियागमाणा तुम्मे न वि कुप्पह भूइपन्ना । तुमं तु पाए सरण उवेमो समागया सव्वजणेण अम्हे ॥तैंतीस॥ इन समानताओं के अतिरिक्त इन दोनो में काफी अन्तर भी है । मातङ्ग जातक में मातङ्ग-पण्डित की कथा के अतिरिक्त एक और कथा का समावेश किया गया है । पहली कथा में चाण्डाल मातङ्ग-पंडित ब्राह्मणो को शिक्षा देकर सही मार्ग पर लाते है और दूसरी कथा में ब्राह्मण मातङ्ग को राजा से मरवा देते है। विद्वानो की मान्यता है कि यह दूसरी कथा वाद में जोडी गई है । डॉशून्य घाटगे का अभिमत है कि जंब हम जैन और वौद्ध परम्राओ मे प्रचलित इन कथाओं की तुलना करते हैं, तब हमें यह ज्ञात होता है कि वौद्ध परम्परा की कथावस्तु विस्तृत है और उसका कथ्य अनेक विचारो से मिश्रित है । जैन परम्परा की कथावस्तु वहुत सरल है और कथ्यमात्र को छूने वाली है । लेकिन एक तथ्य ऐमा है जिसके आधार पर यह माना जा सकता है कि जैन-कथावस्तु वौद्ध-कथावस्तु से प्राचीन है । मातङ्ग जातक मे प्रतिपाद्य विषय के सूक्ष्म अध्ययन से यह ज्ञात हो जाता है कि ब्राह्मणों के प्रति लेखक की भावनाएँ बहुत अधिक उद्धत और कटु है जब कि जैन कथावस्तु में ऐसा नही है । वौद्धों की कथावस्तु मे ब्राह्मणों को सहज धोखा देना और उन द्वारा किए गए अपराधो के लिए जूठन खाने के लिए प्रेरित करना - ये दो तथ्य उपरोक्त मान्यता को स्पष्ट कर देते हैं । 'इन्ही तथ्यो ने दूसरी कथा को इसी जातक मे समाविष्ट करने के लिए लेखक को प्रेरित किया होगा और इस प्रकार की भावनाएँ साम्प्रदायिक पक्षपातो के आधार पर आगे चल कर पनपी होगी ।" उस समय ब्राह्मण जन्मना जाति के आधार पर विशेषताओ एक Annals of the Bhandarkar Oriental Research Institute, Vol सत्रह ' A few Parallels in Jains and Buddhist works', page तीन सौ पैंतालीस, by A M Ghatage, MA This must have also led the writer to include the other story in the same Jätaka And such an attitude, must have arisen in later times as the effect of sectarian bias
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तू परमेश्वर का पुत्र है तो -"। वह मरकुस के १५ : ३२ के शब्दों को परिवर्तित - करता और २७ः४३ को जोड़ता है। लूका के २३ : २७-३२ पद केवल उसी सुसमाचार में हैं। लूका दो कुकर्मयों का वर्णन आरंभ में गुलगुता को चले जाने से पहले करता है । उस में "गुलगुता" नाम नहीं, केवल "खोपड़ी" है। कुकर्मियों का उल्लेख फिर २३ : ३३ में भी है, और पद ३४ में यीशु का महावाक्य है, "हे पिता उन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं"। लूका आरंभ में मुर्र मिले दाखरस का वर्णन नहीं करता, परंतु उसके २३ : ३६ में सैनिक यीशु का उपहास करते और उसे सिरका देना चाहते हैं । २३ : ३९३-४३ केवल लूका में हैं ।
१५ : २१ प्रथा यह थी कि वह व्यक्ति जिसको क्रूस का दंड दिया जाता था अपने की आड़ी लकड़ी को क्रूसीकरण के स्थान पर ले जाता था ( देखिए बाइबल ज्ञानकोष पृष्ठ ११३) । यु. १६ : १७ के अनुसार "वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया"। संभव है कि यीशु उसको कुछ दूरी तक ले गया और फिर शमौन बेगार में पकड़ा गया । कुरेने उत्तर अफ्रीका में, यूनान के संमुख, स्थित था। "गांव से" (हि. प्र.) ठीक अनुवाद है। "खेत से" (हि. सं., ध. ग्रं., बुल्के) में यह विचार निहित है कि वह खेत में कार्य करके आ रहा था, परंतु यह अनुवाद ठीक नहीं है। यदि वह यहूदी था तो ऐसा कार्य पर्व के दिन करना निषिद्ध था। सिकंदर और रूफुस के उल्लेख से पता चलता है कि वे रोम में, जहां संभाव्यतः यह सुसमाचार लिखा गया, ख्रिस्ती थे। कदाचित् शमौन ख्रिस्ती हो गया था, पर यह अनुमान ही है। १५ : २२ गुलगुता अरामी शब्द है, जिसका अर्थ है, खोपड़ी। कदाचित् खोपड़ी के रूप का कोई टीला था, परंतु हम निश्चित रूप से नहीं जानते। १५ : २३ यीशु ने दाखरस नहीं पिया। कदाचित दाखरस बेहोश करनेवाला था, और यीशु पूर्ण रूप से सचेतन होकर इस पीड़ा को सह लेना चाहता था । १५ : २४ में क्रूसीकरण का वर्णन अत्यंत संक्षिप्त है। सब लोग इस भयानक दंड से भली भांति परिचित थे। क्रूस भिन्न रूपों के होते थे, परंतु अधिकतर एक खंभा होता था जिस पर एक आड़ी लकड़ी लगाई जाती थी। कभी कभी खंभे के ऊपरी भाग को, T के रूप में, कभी कभी कुछ नीचे जैसे क्रूस साधारणतः माना जाता है । अपराधी के हाथ और पांव रस्सियों से बांधे जाते या कीलों से जकड़े जाते थे। कभी कभी केवल हाथों में कीलें ठोकी जाती थीं। सुसमाचारों में केवल यूहन्ना १९ : २५, २० : २०, २५ और २७ में कीलों का उल्लेख है। क्रूसित व्यक्ति बड़ी यंत्रणा का अनुभव करता था। उसके कपड़े आदि उनको मिलते थे जो उसे क्रूस पर चढ़ाते थे ।
१५ : २५ सहदर्शी सुसमाचारों में से केवल मरकुस समय का उल्लेख करता है । यह "पहले पहर" (हि. सं.) था, अर्थात् नौ बजे, परंतु यू १९ : १४ के अनुसार वह "छटे घंटे के लग भग" हुआ, अर्थात् बारह बजे दो पहर को। ऐसा प्रतीत होता है कि इन दो सुसमाचारों में दो पृथक परंपराएं हैं। संभवतः यूहन्ना ने जान बूझकर वह समय बताया है जब मेम्ने वध किए जाते थे। कुछ टीकाकार मानते हैं कि मरकुस समयों को एक कृत्रिम आयोजन के अनुसार बताता है। यह भी संभव है कि दोनों लेखक समय
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तू परमेश्वर का पुत्र है तो -"। वह मरकुस के पंद्रह : बत्तीस के शब्दों को परिवर्तित - करता और सत्ताईसःतैंतालीस को जोड़ता है। लूका के तेईस : सत्ताईस-बत्तीस पद केवल उसी सुसमाचार में हैं। लूका दो कुकर्मयों का वर्णन आरंभ में गुलगुता को चले जाने से पहले करता है । उस में "गुलगुता" नाम नहीं, केवल "खोपड़ी" है। कुकर्मियों का उल्लेख फिर तेईस : तैंतीस में भी है, और पद चौंतीस में यीशु का महावाक्य है, "हे पिता उन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं"। लूका आरंभ में मुर्र मिले दाखरस का वर्णन नहीं करता, परंतु उसके तेईस : छत्तीस में सैनिक यीशु का उपहास करते और उसे सिरका देना चाहते हैं । तेईस : तीन सौ तिरानवे-तैंतालीस केवल लूका में हैं । पंद्रह : इक्कीस प्रथा यह थी कि वह व्यक्ति जिसको क्रूस का दंड दिया जाता था अपने की आड़ी लकड़ी को क्रूसीकरण के स्थान पर ले जाता था । यु. सोलह : सत्रह के अनुसार "वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया"। संभव है कि यीशु उसको कुछ दूरी तक ले गया और फिर शमौन बेगार में पकड़ा गया । कुरेने उत्तर अफ्रीका में, यूनान के संमुख, स्थित था। "गांव से" ठीक अनुवाद है। "खेत से" में यह विचार निहित है कि वह खेत में कार्य करके आ रहा था, परंतु यह अनुवाद ठीक नहीं है। यदि वह यहूदी था तो ऐसा कार्य पर्व के दिन करना निषिद्ध था। सिकंदर और रूफुस के उल्लेख से पता चलता है कि वे रोम में, जहां संभाव्यतः यह सुसमाचार लिखा गया, ख्रिस्ती थे। कदाचित् शमौन ख्रिस्ती हो गया था, पर यह अनुमान ही है। पंद्रह : बाईस गुलगुता अरामी शब्द है, जिसका अर्थ है, खोपड़ी। कदाचित् खोपड़ी के रूप का कोई टीला था, परंतु हम निश्चित रूप से नहीं जानते। पंद्रह : तेईस यीशु ने दाखरस नहीं पिया। कदाचित दाखरस बेहोश करनेवाला था, और यीशु पूर्ण रूप से सचेतन होकर इस पीड़ा को सह लेना चाहता था । पंद्रह : चौबीस में क्रूसीकरण का वर्णन अत्यंत संक्षिप्त है। सब लोग इस भयानक दंड से भली भांति परिचित थे। क्रूस भिन्न रूपों के होते थे, परंतु अधिकतर एक खंभा होता था जिस पर एक आड़ी लकड़ी लगाई जाती थी। कभी कभी खंभे के ऊपरी भाग को, T के रूप में, कभी कभी कुछ नीचे जैसे क्रूस साधारणतः माना जाता है । अपराधी के हाथ और पांव रस्सियों से बांधे जाते या कीलों से जकड़े जाते थे। कभी कभी केवल हाथों में कीलें ठोकी जाती थीं। सुसमाचारों में केवल यूहन्ना उन्नीस : पच्चीस, बीस : बीस, पच्चीस और सत्ताईस में कीलों का उल्लेख है। क्रूसित व्यक्ति बड़ी यंत्रणा का अनुभव करता था। उसके कपड़े आदि उनको मिलते थे जो उसे क्रूस पर चढ़ाते थे । पंद्रह : पच्चीस सहदर्शी सुसमाचारों में से केवल मरकुस समय का उल्लेख करता है । यह "पहले पहर" था, अर्थात् नौ बजे, परंतु यू उन्नीस : चौदह के अनुसार वह "छटे घंटे के लग भग" हुआ, अर्थात् बारह बजे दो पहर को। ऐसा प्रतीत होता है कि इन दो सुसमाचारों में दो पृथक परंपराएं हैं। संभवतः यूहन्ना ने जान बूझकर वह समय बताया है जब मेम्ने वध किए जाते थे। कुछ टीकाकार मानते हैं कि मरकुस समयों को एक कृत्रिम आयोजन के अनुसार बताता है। यह भी संभव है कि दोनों लेखक समय
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Ukraine मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते हुए विवाद और यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई के निरंतर खतरे को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने राजनयिक परिवारों को कीव से बाहर जाने का आदेश दिया है. अमेरिकी सरकार का मानना है कि रूस के नियंत्रण वाले क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन में स्थिति काफी बिगड़ सकती है.
गौरतलब है कि यूएस ने Ukraine जाने वाले यात्रियों के लिए एक ट्रैवेल एडवाइजरी भी जारी की है. इस एडवाइजरी में अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वह Ukraine की यात्रा करने से बचें क्योंकि वहां पर कोविड और रूस द्वारा संभावित सैन्य हमलों का अंदेशा है. वहीं उन्होंने क्रीमिया, डोनेट्स्क और लुहान्स्क को अधिर खतरे वाला इलाका बताया है.
वहीं वाशिंगटन ने अपने गैर जरूरी दूतावास कर्मचारियों को कीव Ukraine से 'स्वैच्छिक' प्रस्थान की अनुमति दी है और पूर्वी यूरोपीय देश में अमेरिकी नागरिकों से भी अभी वहां से जल्द से जल्द प्रस्थान करने पर विचार करने का आग्रह किया है. इसके पीछे अमेरिका का तर्क है कि यह मास्को द्वारा किसी भी संभावित घुसपैठ के बाद उन्हें निकालने की स्थिति में नहीं होगा.
उल्लेखनीय है कि इन सभी विवादों के बीच ब्रिटिश विदेश विभाग ने एक इस संबंध में एक बयान जारी करके माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था. उन्होंने दावा किया कि क्रेमलिन यूक्रेन Ukraine में रूस समर्थक नेता को सत्ता में बिठाने की योजना बना रहा है.
NEW: We will not tolerate Kremlin plot to install pro-Russian leadership in Ukraine.
उन्होंने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में दावा किया कि उनके पास ऐसी जानकारी है जो इस तरफ इशारा करती है कि रूसी सरकार कीव से यूक्रेन में एक रूसी समर्थक नेता को सत्ता में बिठाने की लिये साजिश रच रही है. वह ऐसे नेता को सत्ता में बिठाने पर काम कर रही है जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण कर कब्जा करने का समर्थन करे. ब्रिटिश विदेश विभाग का आरोप है कि यूक्रेन Ukraine के ही पूर्व सांसद येवेन मुरायेव को रूस इस मामले में अपना संभावित उम्मीदवार मान रहा है.
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Ukraine मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते हुए विवाद और यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई के निरंतर खतरे को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने राजनयिक परिवारों को कीव से बाहर जाने का आदेश दिया है. अमेरिकी सरकार का मानना है कि रूस के नियंत्रण वाले क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन में स्थिति काफी बिगड़ सकती है. गौरतलब है कि यूएस ने Ukraine जाने वाले यात्रियों के लिए एक ट्रैवेल एडवाइजरी भी जारी की है. इस एडवाइजरी में अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वह Ukraine की यात्रा करने से बचें क्योंकि वहां पर कोविड और रूस द्वारा संभावित सैन्य हमलों का अंदेशा है. वहीं उन्होंने क्रीमिया, डोनेट्स्क और लुहान्स्क को अधिर खतरे वाला इलाका बताया है. वहीं वाशिंगटन ने अपने गैर जरूरी दूतावास कर्मचारियों को कीव Ukraine से 'स्वैच्छिक' प्रस्थान की अनुमति दी है और पूर्वी यूरोपीय देश में अमेरिकी नागरिकों से भी अभी वहां से जल्द से जल्द प्रस्थान करने पर विचार करने का आग्रह किया है. इसके पीछे अमेरिका का तर्क है कि यह मास्को द्वारा किसी भी संभावित घुसपैठ के बाद उन्हें निकालने की स्थिति में नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि इन सभी विवादों के बीच ब्रिटिश विदेश विभाग ने एक इस संबंध में एक बयान जारी करके माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था. उन्होंने दावा किया कि क्रेमलिन यूक्रेन Ukraine में रूस समर्थक नेता को सत्ता में बिठाने की योजना बना रहा है. NEW: We will not tolerate Kremlin plot to install pro-Russian leadership in Ukraine. उन्होंने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में दावा किया कि उनके पास ऐसी जानकारी है जो इस तरफ इशारा करती है कि रूसी सरकार कीव से यूक्रेन में एक रूसी समर्थक नेता को सत्ता में बिठाने की लिये साजिश रच रही है. वह ऐसे नेता को सत्ता में बिठाने पर काम कर रही है जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण कर कब्जा करने का समर्थन करे. ब्रिटिश विदेश विभाग का आरोप है कि यूक्रेन Ukraine के ही पूर्व सांसद येवेन मुरायेव को रूस इस मामले में अपना संभावित उम्मीदवार मान रहा है.
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अल्जीरियन ग्राउंड फोर्सेस के एक्सएनयूएमएक्स मोटराइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड के हालिया अभ्यास में, सशर्त दुश्मन के पदों पर हमला करते समय आधुनिक टी-एक्सएनयूएनएक्सएएमवी को देखा गया। उनके साथ, अल्जीरियाई ने BMPzhok मुकाबला मॉड्यूल के साथ BMP-12 का आधुनिकीकरण किया और उसी रैंक में हमला किया।
इस अपग्रेड ऑप्शन को 1985 वर्ष में ओम्स्क KBTM में T-55A टैंकों के लिए विकसित किया गया था। आधुनिकीकरण के दौरान, T-55 पर संपर्क- 1 गतिशील संरक्षण इकाइयाँ स्थापित की गईं, जो टॉवर के ललाट भाग और साथ ही पतवार के किनारों को कवर करती हैं। 902B Tucha स्मोक ग्रेनेड लॉन्च सिस्टम स्थापित किया गया है। समाक्षीय 100-mm मशीन गन के साथ 7,62-mm टैंक पर लगाई गई राइफ़ल बंदूक जगह में बनी रही, बुर्ज में एक बड़ा-कैलिबर 12,7-mm कैलिबर DShKM जोड़ा गया। तोप पर हीट शील्ड लगाई गई थी। एक नया "वोल्ना" फायर कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया गया था (KTD-2 लेजर रेंजफाइंडर, BV-62 बैलिस्टिक कंप्यूटर, TShSM-32PV दृष्टि और "साइक्लोन" M1 स्टेबलाइजर)। इसके अलावा, 620 हॉर्सपावर वाला एक नया इंजन टैंक पर लगाया गया है। और ट्रैक किए गए ट्रैक बदले गए। अपग्रेड किए गए T-55 ने 37,4 टन के लिए थोड़ा वजन जोड़ा, लेकिन यह खराब प्रदर्शन नहीं था। राजमार्ग पर अधिकतम गति 50 किमी / घंटा है। क्रूज़िंग रेंज - 450 किमी। चालक दल में 4 लोग शामिल हैं। वर्तमान में, सैनिकों में ऐसे वाहनों के लगभग 300-t हैं।
आधुनिकीकरण के दौरान, टैंक बैशन परिसर की 9М117 निर्देशित मिसाइलों का उपयोग करने में सक्षम था।
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अल्जीरियन ग्राउंड फोर्सेस के एक्सएनयूएमएक्स मोटराइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड के हालिया अभ्यास में, सशर्त दुश्मन के पदों पर हमला करते समय आधुनिक टी-एक्सएनयूएनएक्सएएमवी को देखा गया। उनके साथ, अल्जीरियाई ने BMPzhok मुकाबला मॉड्यूल के साथ BMP-बारह का आधुनिकीकरण किया और उसी रैंक में हमला किया। इस अपग्रेड ऑप्शन को एक हज़ार नौ सौ पचासी वर्ष में ओम्स्क KBTM में T-पचपन एम्पीयर टैंकों के लिए विकसित किया गया था। आधुनिकीकरण के दौरान, T-पचपन पर संपर्क- एक गतिशील संरक्षण इकाइयाँ स्थापित की गईं, जो टॉवर के ललाट भाग और साथ ही पतवार के किनारों को कवर करती हैं। नौ सौ दोB Tucha स्मोक ग्रेनेड लॉन्च सिस्टम स्थापित किया गया है। समाक्षीय एक सौ-mm मशीन गन के साथ सात,बासठ-mm टैंक पर लगाई गई राइफ़ल बंदूक जगह में बनी रही, बुर्ज में एक बड़ा-कैलिबर बारह,सात-mm कैलिबर DShKM जोड़ा गया। तोप पर हीट शील्ड लगाई गई थी। एक नया "वोल्ना" फायर कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया गया था । इसके अलावा, छः सौ बीस हॉर्सपावर वाला एक नया इंजन टैंक पर लगाया गया है। और ट्रैक किए गए ट्रैक बदले गए। अपग्रेड किए गए T-पचपन ने सैंतीस,चार टन के लिए थोड़ा वजन जोड़ा, लेकिन यह खराब प्रदर्शन नहीं था। राजमार्ग पर अधिकतम गति पचास किमी / घंटा है। क्रूज़िंग रेंज - चार सौ पचास किमी। चालक दल में चार लोग शामिल हैं। वर्तमान में, सैनिकों में ऐसे वाहनों के लगभग तीन सौ-t हैं। आधुनिकीकरण के दौरान, टैंक बैशन परिसर की नौМएक सौ सत्रह निर्देशित मिसाइलों का उपयोग करने में सक्षम था।
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लखनऊ, कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिस वालों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में मारा गया।
सूत्रों के अनुसार, यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर ले जा रही थी। लेकिन शहर से 17 किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह 6:30 बजे काफिले की वह कार पलट गई जिसमें विकास बैठा था।
हादसे के बाद उसने पुलिस टीम से पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में वह बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे सीने और कमर में दो गोली लगीं। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर मृत घोषित कर दिया।
कानपुर रेंज के आईजी ने विकास के मारे जाने की पुष्टि की है।
गाड़ी में मौजूद एसटीएफ के दो कर्मचारी भी घायल हुए हैं। घायलों को हैलेट अस्पताल पहुंचाया गया है। विकास दुबे को भी अस्पताल लाया गया है। बताया जा रहा है कि जिस गाड़ी में विकास दुबे था वह गाड़ी कानपुर में एंट्री करते ही पलट गई। इस गाड़ी में एसटीएफ के जवान मौजूद थे। इस हादसे में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया।
इससे पहले गुरुवार को दुबे का साथी प्रभात भी इसी तरह भागने की कोशिश के दौरान मारा गया था। विकास दुबे के कई और साथी भी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से कल विकास दुबे पकड़ा गया था। उसकी गिरफ्तारी बड़े फिल्मी अंदाज में हुई थ। . उज्जैन पुलिस की माने तो विकास दुबे महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा था। पहले माली को शक हुआ, फिर मंदिर के गार्ड ने विकास दुबे की पहचान की।
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लखनऊ, कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिस वालों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में मारा गया। सूत्रों के अनुसार, यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर ले जा रही थी। लेकिन शहर से सत्रह किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह छः:तीस बजे काफिले की वह कार पलट गई जिसमें विकास बैठा था। हादसे के बाद उसने पुलिस टीम से पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में वह बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे सीने और कमर में दो गोली लगीं। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे सुबह सात बजकर पचपन मिनट पर मृत घोषित कर दिया। कानपुर रेंज के आईजी ने विकास के मारे जाने की पुष्टि की है। गाड़ी में मौजूद एसटीएफ के दो कर्मचारी भी घायल हुए हैं। घायलों को हैलेट अस्पताल पहुंचाया गया है। विकास दुबे को भी अस्पताल लाया गया है। बताया जा रहा है कि जिस गाड़ी में विकास दुबे था वह गाड़ी कानपुर में एंट्री करते ही पलट गई। इस गाड़ी में एसटीएफ के जवान मौजूद थे। इस हादसे में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया। इससे पहले गुरुवार को दुबे का साथी प्रभात भी इसी तरह भागने की कोशिश के दौरान मारा गया था। विकास दुबे के कई और साथी भी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से कल विकास दुबे पकड़ा गया था। उसकी गिरफ्तारी बड़े फिल्मी अंदाज में हुई थ। . उज्जैन पुलिस की माने तो विकास दुबे महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचा था। पहले माली को शक हुआ, फिर मंदिर के गार्ड ने विकास दुबे की पहचान की।
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औरैया में जीजा साली का प्रेम-प्रसंग युवती की मौत का कारण बन गया। क्योंकि वह दोनों के रिश्ते में बाधा बन रही थी। इसीलिए दोनों ने पहले तो उसे नींद की गोलियां दी और बाद में उसके गले में फंदा लगाकर उसे लटकाकर मौत के घाट उतार दिया। दोनों ने इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। मृतका के बच्चे ने अपने नाना को बताया कि मौसी और पापा ने मिलकर मम्मी को मार डाला है। जिसके बाद नाना श्रीचंद ने अपनी छोटी बेटी व दामाद के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने पूछताछ में अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है।
जिले के अयाना के गांव छिदामीपुर निवासी श्रीचंद की बेटी सुषमा(29) की शादी इटावा के सैफई ब्लॉक के गांव के ककरइ निवासी नरेंद्र पाल से हुई थी। कुछ साल से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। दिवाली में सुषमा घर आ गई। 31 दिसंबर को उसका पति नरेंद्र भी घर आया था। 1 जनवरी को सुषमा का शव फंदे पर झूलता मिला था। मामले में आत्महत्या लग रही थी।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इधर सुषमा के पांच साल के बेटे सैंकी ने घटना के बारे में नाना श्रीचंद को बताया। तब श्रीचंद ने अपनी छोटी बेटी रजनी और दामाद नरेंद्र के खिलाफ सुषमा की हत्या करने का केस दर्ज करवाया था।
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दामाद नरेंद्र और रजनी को हिरासत में ले लिया है। दोनों ने पूछताछ में बताया कि पिता श्रीचंद के एक कार्यक्रम में जाने के बाद उन लोगों में सुषमा को नींद की गोलियां खिला दी। इसके बाद बेहोशी हालात में जानवरों वाले कमरे में ले जाकर उसको दुपट्टे का फंदा बनाकर लटका दिया। सीओ प्रदीप कुमार का कहना है कि दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। ।
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औरैया में जीजा साली का प्रेम-प्रसंग युवती की मौत का कारण बन गया। क्योंकि वह दोनों के रिश्ते में बाधा बन रही थी। इसीलिए दोनों ने पहले तो उसे नींद की गोलियां दी और बाद में उसके गले में फंदा लगाकर उसे लटकाकर मौत के घाट उतार दिया। दोनों ने इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। मृतका के बच्चे ने अपने नाना को बताया कि मौसी और पापा ने मिलकर मम्मी को मार डाला है। जिसके बाद नाना श्रीचंद ने अपनी छोटी बेटी व दामाद के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने पूछताछ में अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है। जिले के अयाना के गांव छिदामीपुर निवासी श्रीचंद की बेटी सुषमा की शादी इटावा के सैफई ब्लॉक के गांव के ककरइ निवासी नरेंद्र पाल से हुई थी। कुछ साल से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। दिवाली में सुषमा घर आ गई। इकतीस दिसंबर को उसका पति नरेंद्र भी घर आया था। एक जनवरी को सुषमा का शव फंदे पर झूलता मिला था। मामले में आत्महत्या लग रही थी। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इधर सुषमा के पांच साल के बेटे सैंकी ने घटना के बारे में नाना श्रीचंद को बताया। तब श्रीचंद ने अपनी छोटी बेटी रजनी और दामाद नरेंद्र के खिलाफ सुषमा की हत्या करने का केस दर्ज करवाया था। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दामाद नरेंद्र और रजनी को हिरासत में ले लिया है। दोनों ने पूछताछ में बताया कि पिता श्रीचंद के एक कार्यक्रम में जाने के बाद उन लोगों में सुषमा को नींद की गोलियां खिला दी। इसके बाद बेहोशी हालात में जानवरों वाले कमरे में ले जाकर उसको दुपट्टे का फंदा बनाकर लटका दिया। सीओ प्रदीप कुमार का कहना है कि दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। । This website follows the DNPA Code of Ethics.
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IIM कोझिकोड ने अग्नि सुरक्षा पर्यवेक्षक रिक्तियों के लिए आवेदन करने के लिए पात्र उम्मीदवारों को आमंत्रित करने के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना की घोषणा की है।
उम्मीदवार जो IIM कोझिकोड भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके पास डिप्लोमा योग्यता होनी चाहिए। पात्रता मानदंड के बारे में अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और 20/03/2023 से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। IIM कोझिकोड भर्ती 2023 के लिए रिक्ति संख्या 1 है। IIM कोझिकोड भर्ती 2023 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक अधिसूचना देखें।
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IIM कोझिकोड ने अग्नि सुरक्षा पर्यवेक्षक रिक्तियों के लिए आवेदन करने के लिए पात्र उम्मीदवारों को आमंत्रित करने के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना की घोषणा की है। उम्मीदवार जो IIM कोझिकोड भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उनके पास डिप्लोमा योग्यता होनी चाहिए। पात्रता मानदंड के बारे में अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और बीस मार्च दो हज़ार तेईस से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। IIM कोझिकोड भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए रिक्ति संख्या एक है। IIM कोझिकोड भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक अधिसूचना देखें।
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फरिश्ता ने सलीम का जन्म वृत्तान्त स्पष्ट रूप से लिखा है। उसके देखने से विदित होता है कि सलीम अकबर की प्रियतमा बेगम सुलताना के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। बादशाह के कई सन्तान शैशव अवस्था ही में मर चुके थे। इससे शेख सलीम की कृपा और उसके आशीर्वाद से पुत्र के चिर जीवित होने पर उसका नाम अकबर ने सलीम ही रक्खा ।
फ़रिश्ता के देखने से विदित होता है कि सलीम अकबर की *प्यारी बेगम सुलाताना का ही पुत्र था। जोधाबाई का सुलताना नाम से इतिहासों में कहीं भी परिचय नहीं पाया जाता । इसके अतिरिक्त, इस सम्बन्ध में और भी एक आपत्ति उपस्थित होती है ।
फुरिश्ता के कथनानुसार सलीम ने ६७७ हिजरी, अर्थात् १५६६ ई० में जन्म ग्रहण किया। यही मत निज़ामुद्दीन अहमद का भी है। राजस्थान में उसी साल मालदेव का देहान्त लिखा हुआ है । उस समय उदय सिंह सिंहासनासीन हो चुके थे कि नहीं, सो भली-भाँति ज्ञात नहीं होता। सिंहासनासीन हो जाने के बाद उन्होंने जोधाबाई को बादशाह के हाथ में सौंपा था । मालदेव के जीवितावस्था में जोधाबाई का विवाह अकबर के साथ नहीं हुआ । १५६६ ईसवी में सलीम का जन्म जोधाबाई के गर्भ से होना किसी भाँति प्रमाणित नहीं होता। परन्तु प्राइस साहब के द्वारा अनुवादित जहाँगीर के आत्म-चरित के अनुसार, जहाँगीर का जन्म ६७८ हिजरी में हुआ था। इसी हिजरी में जोधाबाई के गर्भ से जहाँगीर का जन्म होना असम्भव नहीं कहा जा सकता । किन्तु निजामुद्दीन अहमद ने सलीम के
जन्म-समय की कविता का अर्थ ६७७ लगाया है। यदि ६७७ हिजरी में सलीम का उत्पन्न होना मान लिया जाय तो उक्त आत्म-जीवनी का अनुवाद ठीक नहीं कहा जा सकता। जहाँगीर ने अपनी जीवनी में अपने अन्यान्य भाई बहनों का जन्मवृत्तान्त लिखा है। किन्तु अपनी माँ के नाम परिचय उसने कहीं भी नहीं दिया । फ़रिश्ता और निजामुद्दीन अहमद इत्यादि के ग्रन्थों में भी लिखा है कि "सलीम और सुराद के जन्म होने के बाद जोधपुर के युवराज चन्द्रसेन ने बादशाह की अधीनता को स्वीकार किया ।" इससे स्पष्ट बोध होता है कि सलीम के जन्म होने के बाद जोधाबाई का विवाह हुआ था ।
जोधाबाई बीकानेर के राजा राय सिंह की बीकानेर का राजवंश भी राठौर घराने में है। मुगल सम्राट का सेनापति होकर अनेक स्थानों में असीम वीरता और पराक्रम दिखाया था । अहमदाबाद के शासनकर्ता मिर्जा महमूद को उसने द्वन्द युद्ध में मारा था। उसने अच्छे गौरव को प्राप्त किया। उसके उस कार्य से प्रसन्न होकर अकबर ने उसकी कन्या के साथ शाहजहाँ सलीमा का विवाह कर दिया । राय सिंह की यह अनुपम कन्या इतिहास प्रिय पाठकों के निकट जोधाबाई के नाम से प्रसिद्ध हो रही है । फरिश्ता और जहाँगीर की आत्म-जीवनी में इस विवाह का उल्लेख हैं। जोधाबाई सलीम की प्रियतमा थीं। भुवनमोहिनी मेहरुन्निसा को वेगम बनाने पर भी जहाँगीर ने जोधाबाई के कथनानुसार ही मिर्जा जयसिंह को आमेर का राज्य प्रदान किया था। जहाँगीर बहुत सी बातों में जोधाबाई के परामर्शानुसार ही काम
करता था। जब तक मेहरुन्निसा (नूरजहाँ) शाही महल में नहीं आई थी, तब तक जहाँगीर जोधाबाई के प्रति अत्यन्त अनुरक्त था। नूरजहाँ के आने पर जोधाबाई के प्रति जहाँगीर का पूर्वानुराग कुछ कम हो गया था। ज्योतिर्मयी नूरजहाँ को पाकर जहाँगीर सिर्फ जोधाबाई को ही नहीं भूला किन्तु अपने आपको भी वह भूल गया । जोधाबाई के अतिरिक्त शाही महलों में और भी कई राजपूत वेगमे थीं। उनमें से एक अम्बर के राजा बिहारी मल की कन्या और दूसरी मारवाड़ की एक राजपुत्री थी । बिहारीमल की कन्या से खुसरो का जन्म हुआ और अकबर के मंत्री आजिम खाँ की लड़की खुसरो से व्याही गई। अकबर के देहान्त होने पर राजा मानसिंह ओर आजम खाँ सलीम के बदले खुसरो को बादशाह बनाने की चेष्टा में थे, परन्तु सफलता प्राप्त न हुई । सलीम की दूसरी बेगम मारवाड़ की राजकुमारी के गर्भ से खुर्रम उत्पन्न हुआ था ।
यहाँ तक जो कुछ लिखा गया उससे सिद्ध है कि जोधाबाई जोधपुर की राजकन्या नहीं, बीकानेर की राजकन्या थीं। इस विषय में कर्नल टाड ने भी कुछ कम भूलें नहीं की हैं। उनका कथन है कि जहाँगीर का ज्येष्ठ पुत्र सुल्तान परवेज मारवाड़ की किसी राजकुमारी से और दूसरा पुत्र खुर्रम अम्बर की राजकुमारी से उत्पन्न हुए थे। टाड साहब की उक्त दोनों ही बातें भ्रमपूर्ण हैं। क्योंकि परवेज किसी हिन्दू बेगम के गर्भ से नहीं उत्पन्न हुआ था और खुर्रम की माता जोधपुर की राजकुमारी (उदयसिंह की कन्या) थीं ।
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फरिश्ता ने सलीम का जन्म वृत्तान्त स्पष्ट रूप से लिखा है। उसके देखने से विदित होता है कि सलीम अकबर की प्रियतमा बेगम सुलताना के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। बादशाह के कई सन्तान शैशव अवस्था ही में मर चुके थे। इससे शेख सलीम की कृपा और उसके आशीर्वाद से पुत्र के चिर जीवित होने पर उसका नाम अकबर ने सलीम ही रक्खा । फ़रिश्ता के देखने से विदित होता है कि सलीम अकबर की *प्यारी बेगम सुलाताना का ही पुत्र था। जोधाबाई का सुलताना नाम से इतिहासों में कहीं भी परिचय नहीं पाया जाता । इसके अतिरिक्त, इस सम्बन्ध में और भी एक आपत्ति उपस्थित होती है । फुरिश्ता के कथनानुसार सलीम ने छः सौ सतहत्तर हिजरी, अर्थात् एक हज़ार पाँच सौ छयासठ ईशून्य में जन्म ग्रहण किया। यही मत निज़ामुद्दीन अहमद का भी है। राजस्थान में उसी साल मालदेव का देहान्त लिखा हुआ है । उस समय उदय सिंह सिंहासनासीन हो चुके थे कि नहीं, सो भली-भाँति ज्ञात नहीं होता। सिंहासनासीन हो जाने के बाद उन्होंने जोधाबाई को बादशाह के हाथ में सौंपा था । मालदेव के जीवितावस्था में जोधाबाई का विवाह अकबर के साथ नहीं हुआ । एक हज़ार पाँच सौ छयासठ ईसवी में सलीम का जन्म जोधाबाई के गर्भ से होना किसी भाँति प्रमाणित नहीं होता। परन्तु प्राइस साहब के द्वारा अनुवादित जहाँगीर के आत्म-चरित के अनुसार, जहाँगीर का जन्म छः सौ अठहत्तर हिजरी में हुआ था। इसी हिजरी में जोधाबाई के गर्भ से जहाँगीर का जन्म होना असम्भव नहीं कहा जा सकता । किन्तु निजामुद्दीन अहमद ने सलीम के जन्म-समय की कविता का अर्थ छः सौ सतहत्तर लगाया है। यदि छः सौ सतहत्तर हिजरी में सलीम का उत्पन्न होना मान लिया जाय तो उक्त आत्म-जीवनी का अनुवाद ठीक नहीं कहा जा सकता। जहाँगीर ने अपनी जीवनी में अपने अन्यान्य भाई बहनों का जन्मवृत्तान्त लिखा है। किन्तु अपनी माँ के नाम परिचय उसने कहीं भी नहीं दिया । फ़रिश्ता और निजामुद्दीन अहमद इत्यादि के ग्रन्थों में भी लिखा है कि "सलीम और सुराद के जन्म होने के बाद जोधपुर के युवराज चन्द्रसेन ने बादशाह की अधीनता को स्वीकार किया ।" इससे स्पष्ट बोध होता है कि सलीम के जन्म होने के बाद जोधाबाई का विवाह हुआ था । जोधाबाई बीकानेर के राजा राय सिंह की बीकानेर का राजवंश भी राठौर घराने में है। मुगल सम्राट का सेनापति होकर अनेक स्थानों में असीम वीरता और पराक्रम दिखाया था । अहमदाबाद के शासनकर्ता मिर्जा महमूद को उसने द्वन्द युद्ध में मारा था। उसने अच्छे गौरव को प्राप्त किया। उसके उस कार्य से प्रसन्न होकर अकबर ने उसकी कन्या के साथ शाहजहाँ सलीमा का विवाह कर दिया । राय सिंह की यह अनुपम कन्या इतिहास प्रिय पाठकों के निकट जोधाबाई के नाम से प्रसिद्ध हो रही है । फरिश्ता और जहाँगीर की आत्म-जीवनी में इस विवाह का उल्लेख हैं। जोधाबाई सलीम की प्रियतमा थीं। भुवनमोहिनी मेहरुन्निसा को वेगम बनाने पर भी जहाँगीर ने जोधाबाई के कथनानुसार ही मिर्जा जयसिंह को आमेर का राज्य प्रदान किया था। जहाँगीर बहुत सी बातों में जोधाबाई के परामर्शानुसार ही काम करता था। जब तक मेहरुन्निसा शाही महल में नहीं आई थी, तब तक जहाँगीर जोधाबाई के प्रति अत्यन्त अनुरक्त था। नूरजहाँ के आने पर जोधाबाई के प्रति जहाँगीर का पूर्वानुराग कुछ कम हो गया था। ज्योतिर्मयी नूरजहाँ को पाकर जहाँगीर सिर्फ जोधाबाई को ही नहीं भूला किन्तु अपने आपको भी वह भूल गया । जोधाबाई के अतिरिक्त शाही महलों में और भी कई राजपूत वेगमे थीं। उनमें से एक अम्बर के राजा बिहारी मल की कन्या और दूसरी मारवाड़ की एक राजपुत्री थी । बिहारीमल की कन्या से खुसरो का जन्म हुआ और अकबर के मंत्री आजिम खाँ की लड़की खुसरो से व्याही गई। अकबर के देहान्त होने पर राजा मानसिंह ओर आजम खाँ सलीम के बदले खुसरो को बादशाह बनाने की चेष्टा में थे, परन्तु सफलता प्राप्त न हुई । सलीम की दूसरी बेगम मारवाड़ की राजकुमारी के गर्भ से खुर्रम उत्पन्न हुआ था । यहाँ तक जो कुछ लिखा गया उससे सिद्ध है कि जोधाबाई जोधपुर की राजकन्या नहीं, बीकानेर की राजकन्या थीं। इस विषय में कर्नल टाड ने भी कुछ कम भूलें नहीं की हैं। उनका कथन है कि जहाँगीर का ज्येष्ठ पुत्र सुल्तान परवेज मारवाड़ की किसी राजकुमारी से और दूसरा पुत्र खुर्रम अम्बर की राजकुमारी से उत्पन्न हुए थे। टाड साहब की उक्त दोनों ही बातें भ्रमपूर्ण हैं। क्योंकि परवेज किसी हिन्दू बेगम के गर्भ से नहीं उत्पन्न हुआ था और खुर्रम की माता जोधपुर की राजकुमारी थीं ।
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मंगलवार देर रात होशियारपुर के गांव मनराइयां को पंजाब पुलिस के 700 से अधिक जवानों ने घेर लिया और चप्पे-चप्पे पर नाकाबंदी कर दी। काउंटर इंटेलिजेंस के अनुसार एक इनोवा कार में अमृतपाल और उसके साथियों के होने का संदेह था।
फगवाड़ा से पुलिस ने कार का होशियारपुर तक पीछा किया। इसके बाद कार सवार चार लोग मनराइयां गांव के एक गुुरुद्वारा के पास पहुंचे और गाड़ी वहीं छोड़कर भाग गए। रात एक बजे तक पुलिस गांव के हर घर की तलाशी ले रही थी।
सूत्रों के मुताबिक फगवाड़ा से 2 लोग हिरासत में लिए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार 4 जिलों की पुलिस और सैनिक बल के जवान सर्च में लगे थे। देर रात अमृतसर से भी पुलिस मंगवाई गई। मौके पर एडीजीपी गुरिंदर सिंह ढिल्लों मौजूद थे।
रात को 12 बजे के बाद जहान खेलां अकेडमी से 200 जवान और बुलाए गए। पुलिस ने इनोवा कार को बरामद कर लिया है। मनराइयां गांव के जसविंदर सिंह जस्सा ने बताया कि गुरुद्वारा बाबा भाई चैंचल जी के पास 3 केशधारी युवकों को देखा गया, जिससे शोर मच गया।
वहीं इससे पहले दिन में अमृतपाल सिंह का नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इसमें दावा किया जा रहा है कि यह दिल्ली के एक बाजार का है। वीडियाे कब का है, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
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मंगलवार देर रात होशियारपुर के गांव मनराइयां को पंजाब पुलिस के सात सौ से अधिक जवानों ने घेर लिया और चप्पे-चप्पे पर नाकाबंदी कर दी। काउंटर इंटेलिजेंस के अनुसार एक इनोवा कार में अमृतपाल और उसके साथियों के होने का संदेह था। फगवाड़ा से पुलिस ने कार का होशियारपुर तक पीछा किया। इसके बाद कार सवार चार लोग मनराइयां गांव के एक गुुरुद्वारा के पास पहुंचे और गाड़ी वहीं छोड़कर भाग गए। रात एक बजे तक पुलिस गांव के हर घर की तलाशी ले रही थी। सूत्रों के मुताबिक फगवाड़ा से दो लोग हिरासत में लिए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार चार जिलों की पुलिस और सैनिक बल के जवान सर्च में लगे थे। देर रात अमृतसर से भी पुलिस मंगवाई गई। मौके पर एडीजीपी गुरिंदर सिंह ढिल्लों मौजूद थे। रात को बारह बजे के बाद जहान खेलां अकेडमी से दो सौ जवान और बुलाए गए। पुलिस ने इनोवा कार को बरामद कर लिया है। मनराइयां गांव के जसविंदर सिंह जस्सा ने बताया कि गुरुद्वारा बाबा भाई चैंचल जी के पास तीन केशधारी युवकों को देखा गया, जिससे शोर मच गया। वहीं इससे पहले दिन में अमृतपाल सिंह का नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। इसमें दावा किया जा रहा है कि यह दिल्ली के एक बाजार का है। वीडियाे कब का है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लखनऊ। यूपी के बजट सत्र की तैयारियां अब धीरे धीरे तेज होने लगी है। राज्य सरकार बड़े अर्थशास्त्रियों के साथ बजटकी रूपरेखा को लेकर लगातार मंथन कर रही है। प्रदेश सरकार आमलोगों को ध्यान में रखकर बजट तैयार करवा रही है। संभावना है कि अगले माह १८ से २० फरवरी के बीच आमबजट विधानसभा में पेश किया जायेगा। इस बार का बजट अन्य वर्षो की तुलना में बड़ा होने का अनुमान है। बजट में अयोध्या, काशी सहित अन्य महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के लिए धन का ज्यादा आवंटन होगा। सरकार की महत्वाकाक्षी योजना स्मार्टसिटी के लिए भी बजट में व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त आगामी साल में यूपी में होने वाली ले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बजट में और भी कई घोषाणायें की जा सकती है। प्रदेश भर में चल रहे कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर गरीब और मध्यमवर्ग केलोगों कोलेकर बड़ा ऐलान किया जा सकता है। प्रदेश की आमजनता को भी प्रदेश सरकार के बजट से काफी उम्मीदें है।
यूपी के शाहजहांपुर में दवा व्यापारी ने पूरे परिवार के साथ की सामूहिक खुदकुशी,
वाराणसी के डीएम बोले- पीएम मोदी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं,
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लखनऊ। यूपी के बजट सत्र की तैयारियां अब धीरे धीरे तेज होने लगी है। राज्य सरकार बड़े अर्थशास्त्रियों के साथ बजटकी रूपरेखा को लेकर लगातार मंथन कर रही है। प्रदेश सरकार आमलोगों को ध्यान में रखकर बजट तैयार करवा रही है। संभावना है कि अगले माह अट्ठारह से बीस फरवरी के बीच आमबजट विधानसभा में पेश किया जायेगा। इस बार का बजट अन्य वर्षो की तुलना में बड़ा होने का अनुमान है। बजट में अयोध्या, काशी सहित अन्य महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के लिए धन का ज्यादा आवंटन होगा। सरकार की महत्वाकाक्षी योजना स्मार्टसिटी के लिए भी बजट में व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त आगामी साल में यूपी में होने वाली ले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बजट में और भी कई घोषाणायें की जा सकती है। प्रदेश भर में चल रहे कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर गरीब और मध्यमवर्ग केलोगों कोलेकर बड़ा ऐलान किया जा सकता है। प्रदेश की आमजनता को भी प्रदेश सरकार के बजट से काफी उम्मीदें है। यूपी के शाहजहांपुर में दवा व्यापारी ने पूरे परिवार के साथ की सामूहिक खुदकुशी, वाराणसी के डीएम बोले- पीएम मोदी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं,
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[ भाग 1 - खण्ड 1]
भारतीय बाजार में संबद्ध वस्तु का पाटन करने के लिए कोरियायी उत्पादकों/निर्यातकों हेतु अधिक आकर्षक हो सकती है ।
क्षति एवं कारणात्मक संबंध का निर्धारण
च. 1 निर्यातकों, आयातकों, प्रयोक्ताओं और अन्य हितबद्ध पार्टियों के विचार
जर्मनी तथा कोरिया गणराज्य के किसी उत्पादक/निर्यातक अथवा किसी अन्य हितबद्ध पार्टी से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है ।
घरेलू उद्योग के विचार
घरेलू उद्योग ने क्षति एवं कारणात्मक संबंध के बारे में कई तर्क दिए हैं जिनका संक्षेप में उल्लेख निम्नानुसार है । मुख्य तर्क ये हैं कि
घरेलू उद्योग के निष्पादन में वर्ष 2004-05 में भारी गिरावट आई और तत्पश्चात वर्ष 2005-06 में सुधार हुआ । तथापि, निष्पादन में प्रस्तावित जांच अवधि में पुनः गिरावट आई है ।
लाभ, क्षमता उपयोग जैसे मापदंडों से क्षति अवधि के दौरान गिरावट का पता चलता है ।
(iii) नकद लाभ एवं निवेश पर आय जैसे मापदंड नकारात्मक बने रहे ।
बाजार हिस्सा, उत्पादन, बिक्री मात्रा जैसे मापदंड इष्टतम से कम रहे ।
घरेलू उद्योग द्वारा पाटित आयातों के न होने पर और अधिक मात्रा में बिक्री की जा सकती थी जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन, उत्पादकता तथा अन्य संबंधित मापदंडों में सुधार हो सकता
था ।
च. 3. प्राधिकारी द्वारा जांच
30. प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग को हुई क्षति के संबंध में दिए गए विभिन्न तर्कों को नोट किया है । प्राधिकारी नोट करते हैं कि संबद्ध देशों से वर्तमान पाटन मार्जिन न्यूनतम सीमा से अधिक है । अतः प्राधिकारी संबद्ध देशों से आयातों के पाटन और उसके कारण हुई क्षति की संभावना के पहलुओं की जांच शुरू करने से पूर्व घरेलू उद्योग को हुई वर्तमान क्षति, यदि कोई हो की जांच करने की कार्यवाही शुरू करते हैं ।
डब्ल्यूटीओ करार के अनुच्छेद 3.1 और नियमावली के अनुबंध ।। में (क) पाटित आयातों की मात्रा तथा समान वस्तुओं के लिए घरेलू बाजार में कीमतों पर पाटित आयातों के प्रभाव (ख) ऐसे उत्पादों के घरेलू उत्पादकों पर इन आयातों के अनुवर्ती प्रभाव की वस्तुपरक जांच किए जाने का प्रावधान है । जहां तक पाटित आयातों के मात्रात्मक प्रभाव का संबंध है, प्राधिकारी द्वारा यह जांच किया जाना अपेक्षित है कि क्या आयातों में सापेक्ष रूप से या भारत में उत्पादन अथवा खपत की तुलना में अत्यधिक वृद्धि हुई है । पाटित आयातों के कीमत पर प्रभाव के संबंध में प्राधिकारी द्वारा यह जांच किया जाना अपेक्षित है कि क्या भारत में समान उत्पाद की कीमत की तुलना में पाटित आयातों से अत्यधिक कीमत कटौती हुई है,
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[ भाग एक - खण्ड एक] भारतीय बाजार में संबद्ध वस्तु का पाटन करने के लिए कोरियायी उत्पादकों/निर्यातकों हेतु अधिक आकर्षक हो सकती है । क्षति एवं कारणात्मक संबंध का निर्धारण च. एक निर्यातकों, आयातकों, प्रयोक्ताओं और अन्य हितबद्ध पार्टियों के विचार जर्मनी तथा कोरिया गणराज्य के किसी उत्पादक/निर्यातक अथवा किसी अन्य हितबद्ध पार्टी से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है । घरेलू उद्योग के विचार घरेलू उद्योग ने क्षति एवं कारणात्मक संबंध के बारे में कई तर्क दिए हैं जिनका संक्षेप में उल्लेख निम्नानुसार है । मुख्य तर्क ये हैं कि घरेलू उद्योग के निष्पादन में वर्ष दो हज़ार चार-पाँच में भारी गिरावट आई और तत्पश्चात वर्ष दो हज़ार पाँच-छः में सुधार हुआ । तथापि, निष्पादन में प्रस्तावित जांच अवधि में पुनः गिरावट आई है । लाभ, क्षमता उपयोग जैसे मापदंडों से क्षति अवधि के दौरान गिरावट का पता चलता है । नकद लाभ एवं निवेश पर आय जैसे मापदंड नकारात्मक बने रहे । बाजार हिस्सा, उत्पादन, बिक्री मात्रा जैसे मापदंड इष्टतम से कम रहे । घरेलू उद्योग द्वारा पाटित आयातों के न होने पर और अधिक मात्रा में बिक्री की जा सकती थी जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन, उत्पादकता तथा अन्य संबंधित मापदंडों में सुधार हो सकता था । च. तीन. प्राधिकारी द्वारा जांच तीस. प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग को हुई क्षति के संबंध में दिए गए विभिन्न तर्कों को नोट किया है । प्राधिकारी नोट करते हैं कि संबद्ध देशों से वर्तमान पाटन मार्जिन न्यूनतम सीमा से अधिक है । अतः प्राधिकारी संबद्ध देशों से आयातों के पाटन और उसके कारण हुई क्षति की संभावना के पहलुओं की जांच शुरू करने से पूर्व घरेलू उद्योग को हुई वर्तमान क्षति, यदि कोई हो की जांच करने की कार्यवाही शुरू करते हैं । डब्ल्यूटीओ करार के अनुच्छेद तीन.एक और नियमावली के अनुबंध ।। में पाटित आयातों की मात्रा तथा समान वस्तुओं के लिए घरेलू बाजार में कीमतों पर पाटित आयातों के प्रभाव ऐसे उत्पादों के घरेलू उत्पादकों पर इन आयातों के अनुवर्ती प्रभाव की वस्तुपरक जांच किए जाने का प्रावधान है । जहां तक पाटित आयातों के मात्रात्मक प्रभाव का संबंध है, प्राधिकारी द्वारा यह जांच किया जाना अपेक्षित है कि क्या आयातों में सापेक्ष रूप से या भारत में उत्पादन अथवा खपत की तुलना में अत्यधिक वृद्धि हुई है । पाटित आयातों के कीमत पर प्रभाव के संबंध में प्राधिकारी द्वारा यह जांच किया जाना अपेक्षित है कि क्या भारत में समान उत्पाद की कीमत की तुलना में पाटित आयातों से अत्यधिक कीमत कटौती हुई है,
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चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का खतरा कोटा में पहले कम माना जा रहा था लेकिन अब गुजरात से प्रवेश करने बाद और राजस्थान में असर दिखने के बाद कोटा भी ग्रीन जोन से यलो जोन में आ गया है। कोटा के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर दिया है। पहले यह बूंदी जिले के लिए था और कोटा ग्रीन जोन में था। राजस्थान में बिपरजॉय का असर दिखना शुरू हो गया है हालांकि कोटा में शुक्रवार शाम तक तेज धूप रही और उमस रही।
हालांकि हवाएं चल रही थी। लेकिन वह भी सामान्य रफ्तार से चली। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार देर शाम के बाद यहां मौसम में बदलाव हो सकता है। बिपरजॉय का असर कोटा में शनिवार को नजर आ सकता है। ज्यादा असर की संभावना 19 जून की है, जब 115 एमएम बारिश की संभावना जताई जा रही है और पचास किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलेगी। इधर, मौसम विभाग का अलर्ट जारी होने के बाद जिला प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है। तीन दिन तक सभी कर्मचारियों की छुट्टी कैंसल कर दी गई है।
16 से 18 तक बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए है। साथ ही लोगों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। जिसमें उन्हें घरों में रहने, पेड़ों के नीचे न रुकने समेत कई निर्देश दिए है। बिपरजॉय का हाड़ौती में सबसे ज्यादा असर बूंदी जिले में रहेगा। जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने बताया कि तूफान को लेकर आपदा से जुड़े विभागों को अलर्ट कर दिया है और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
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चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का खतरा कोटा में पहले कम माना जा रहा था लेकिन अब गुजरात से प्रवेश करने बाद और राजस्थान में असर दिखने के बाद कोटा भी ग्रीन जोन से यलो जोन में आ गया है। कोटा के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर दिया है। पहले यह बूंदी जिले के लिए था और कोटा ग्रीन जोन में था। राजस्थान में बिपरजॉय का असर दिखना शुरू हो गया है हालांकि कोटा में शुक्रवार शाम तक तेज धूप रही और उमस रही। हालांकि हवाएं चल रही थी। लेकिन वह भी सामान्य रफ्तार से चली। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार देर शाम के बाद यहां मौसम में बदलाव हो सकता है। बिपरजॉय का असर कोटा में शनिवार को नजर आ सकता है। ज्यादा असर की संभावना उन्नीस जून की है, जब एक सौ पंद्रह एमएम बारिश की संभावना जताई जा रही है और पचास किलोमीटर की रफ्तार से हवा चलेगी। इधर, मौसम विभाग का अलर्ट जारी होने के बाद जिला प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है। तीन दिन तक सभी कर्मचारियों की छुट्टी कैंसल कर दी गई है। सोलह से अट्ठारह तक बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए है। साथ ही लोगों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। जिसमें उन्हें घरों में रहने, पेड़ों के नीचे न रुकने समेत कई निर्देश दिए है। बिपरजॉय का हाड़ौती में सबसे ज्यादा असर बूंदी जिले में रहेगा। जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने बताया कि तूफान को लेकर आपदा से जुड़े विभागों को अलर्ट कर दिया है और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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शादी हर किसी के जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला होता है। ऐसे में हर कोई इसे यादगार बनाना चाहता है। मनोरंजन जगत में होने वाली अभिनेता और अभिनेत्रियों की शादियां तो कई-कई सालों तक लोगों को याद रह जाती हैं। लेकिन पिछले साल कोरोना महामारी के चलते कुछ सितारों ने भी बहुत ही साधारण तरह से शादी की और इन्हीं सितारों में शामिल हैं जय मां वैष्णोदेवी और देवो के देव महादेव में नजर आ चुकीं पूजा बनर्जी और टीवी अभिनेता कुणाल वर्मा।
कोरोना महामारी के कारण साल 2020 में कई सितारे धूमधाम से शादी नहीं कर पाए थे। पूजा और कुणाल वर्मा भी बीते साल अप्रैल में धूमधाम से शादी करने वाले थे, लेकिन कोरोना महामारी के चलते उन्हें अपने सारे प्लान कैंसिल करने पड़े और साधारण तरह से दोनों ने कोर्ट मैरिज की। साल 2020 अक्तूबर में ही पूजा बनर्जी ने बाते को जन्म दिया। हालांकि अब कोविड कम होने के बाद और सब चीजें सामान्य होने के बाद पूजा बनर्जी ने एक बार फिर से धूमधाम से शादी रचाई।
पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने गोवा में दोबारा शादी की। दोनों की शादी का कार्यक्रम 15 नवम्बर को हुआ जहां दोनों ने धूमधाम से गोवा के बीच वेडिंग की। पूजा बनर्जी बंगाली हैं और उन्होंने बंगाली रीति-रिवाज के साथ कुणाल वर्मा से शादी की। पूजा जहां खूबसूरत पालकी में बैठकर वेडिंग वेन्यू पर पहुंची तो वहीं कुणाल भी अपनी दुल्हनियां को लेने घोड़ी पर आए।
पूजा बनर्जी ने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने प्रशंसकों के साथ अपनी खुशी साझा की। उन्होंने अपनी शादी के सभी फंक्शन्स की तस्वीरें साझा की। एक तस्वीर में हाथों में पूजा ने नई दुल्हन की तरह मेहंदी लगाई हुई है तो वहीं दूसरी तस्वीर में वो अपनी हल्दी को काफी एंजॉय करती हुईं नजर आ रही हैं। अन्य तस्वीर साझा करते हुए पूजा ने कैप्शन में लिखा, 'दोबारा से नए शादीशुदा जोड़ा'। उनकी तस्वीर देखने के बाद लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।
पूजा बनर्जी और कुणाल बनर्जी की शादी में टेलीविजन के कलाकार तो शामिल नहीं हुए। इस दौरान उनका परिवार और करीबी दोस्त शामिल हुए। उनकी शादी में शामिल होने के लिए मोनालिसा पहुंची। मोनालिसा भी पूजा बनर्जी की शादी की रस्मों का हिस्सा बनीं। मोनालिसा, पूजा बनर्जी की सबसे करीबी दोस्त हैं। मोनालिसा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पूजा और कुणाल की शादी से कई तस्वीरें शेयर की हैं।
पूजा बनर्जी और उनके पति कुणाल दोनों ही पेशे से कलाकार हैं। पूजा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2008 में कहानी हमारे महाभारत की से की थी। इसके बाद उन्होंने कई शोज में काम किया। जिसमें बालिका वधू, सर्वगुण सम्पन्न, कयामत जैसे शोज शामिल हैं। इसके अलावा पूजा ने कई भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है।
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शादी हर किसी के जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला होता है। ऐसे में हर कोई इसे यादगार बनाना चाहता है। मनोरंजन जगत में होने वाली अभिनेता और अभिनेत्रियों की शादियां तो कई-कई सालों तक लोगों को याद रह जाती हैं। लेकिन पिछले साल कोरोना महामारी के चलते कुछ सितारों ने भी बहुत ही साधारण तरह से शादी की और इन्हीं सितारों में शामिल हैं जय मां वैष्णोदेवी और देवो के देव महादेव में नजर आ चुकीं पूजा बनर्जी और टीवी अभिनेता कुणाल वर्मा। कोरोना महामारी के कारण साल दो हज़ार बीस में कई सितारे धूमधाम से शादी नहीं कर पाए थे। पूजा और कुणाल वर्मा भी बीते साल अप्रैल में धूमधाम से शादी करने वाले थे, लेकिन कोरोना महामारी के चलते उन्हें अपने सारे प्लान कैंसिल करने पड़े और साधारण तरह से दोनों ने कोर्ट मैरिज की। साल दो हज़ार बीस अक्तूबर में ही पूजा बनर्जी ने बाते को जन्म दिया। हालांकि अब कोविड कम होने के बाद और सब चीजें सामान्य होने के बाद पूजा बनर्जी ने एक बार फिर से धूमधाम से शादी रचाई। पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने गोवा में दोबारा शादी की। दोनों की शादी का कार्यक्रम पंद्रह नवम्बर को हुआ जहां दोनों ने धूमधाम से गोवा के बीच वेडिंग की। पूजा बनर्जी बंगाली हैं और उन्होंने बंगाली रीति-रिवाज के साथ कुणाल वर्मा से शादी की। पूजा जहां खूबसूरत पालकी में बैठकर वेडिंग वेन्यू पर पहुंची तो वहीं कुणाल भी अपनी दुल्हनियां को लेने घोड़ी पर आए। पूजा बनर्जी ने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने प्रशंसकों के साथ अपनी खुशी साझा की। उन्होंने अपनी शादी के सभी फंक्शन्स की तस्वीरें साझा की। एक तस्वीर में हाथों में पूजा ने नई दुल्हन की तरह मेहंदी लगाई हुई है तो वहीं दूसरी तस्वीर में वो अपनी हल्दी को काफी एंजॉय करती हुईं नजर आ रही हैं। अन्य तस्वीर साझा करते हुए पूजा ने कैप्शन में लिखा, 'दोबारा से नए शादीशुदा जोड़ा'। उनकी तस्वीर देखने के बाद लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। पूजा बनर्जी और कुणाल बनर्जी की शादी में टेलीविजन के कलाकार तो शामिल नहीं हुए। इस दौरान उनका परिवार और करीबी दोस्त शामिल हुए। उनकी शादी में शामिल होने के लिए मोनालिसा पहुंची। मोनालिसा भी पूजा बनर्जी की शादी की रस्मों का हिस्सा बनीं। मोनालिसा, पूजा बनर्जी की सबसे करीबी दोस्त हैं। मोनालिसा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पूजा और कुणाल की शादी से कई तस्वीरें शेयर की हैं। पूजा बनर्जी और उनके पति कुणाल दोनों ही पेशे से कलाकार हैं। पूजा ने अपने करियर की शुरुआत साल दो हज़ार आठ में कहानी हमारे महाभारत की से की थी। इसके बाद उन्होंने कई शोज में काम किया। जिसमें बालिका वधू, सर्वगुण सम्पन्न, कयामत जैसे शोज शामिल हैं। इसके अलावा पूजा ने कई भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है।
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१०६ :: ग्रन्थ परीक्षा
श्रेष्ठ फल होता है। परन्तु इस तबदीली से यह मालूम न हुआ कि इसे करके ग्रन्थकर्ता ने कौनसी बुद्धिमत्ता का कार्य किया है । क्या 'साधु' शब्द में 'जिन' का और 'जिनादि' शब्दों में 'साधु' का समावेश नहीं होता था? यदि होता था तो फिर साधु और जिनादि ये दो शब्द अलग अलग क्यों रखे गये? साथ ही, जिस गौ और ब्राह्मण के नाम को उड़ाया गया हैं उसको यदि कोई 'आदि' शब्द से ग्रहण कर ले तो उसका ग्रन्थकर्ता ने इस श्लोक में क्या प्रतीकार रखा है? उत्तर इन सब बातों का कुछ नहीं हो सकता। इसलिए ग्रन्थकर्ता का यह सब परिवर्तन निरा भूलभरा और मूर्खता का द्योतक है । धीवरशाकुनिकानां सप्तमभागे भयं भवति दीप्ते ।
भोजनविघात उक्तो निधनभयं च तत्परतः ॥२-३३॥
इस पद्य में सिर्फ 'निर्ग्रन्थभयं' के स्थान में 'निर्धनभयं' बनाया गया है और इसका अभिप्राय शायद ऐसा मालूम होता है कि ग्रन्थकर्ता को 'निग्रंथ' शब्द खटका है। उसने इसका अर्थ दिगम्बर मुनि या जैन साधु समझा है और जैन साधुओं से किसी को भय नहीं होता, इसलिए उसके स्थान में 'निर्धन' शब्द बनाया गया है । परन्तु वास्तव में निग्रंथ का अर्थ दिगम्बर मुनि या जैन साधु ही नहीं है बल्कि 'निर्धन' और 'मूर्ख' भी उसका अर्थ है १२ और यहाँ पर वह ऐसे ही अर्थ में व्यवहृत हुआ है। अस्तु ग्रन्थकर्ता का इस परिवर्तन से कुछ ही अभिप्राय हो, परन्तु छंद की दृष्टि से उसका यह परिवर्तन ठीक नहीं हुआ ऐसा करने से इस आर्या छंद के चौथे चरण में दो मात्रायें कम हो गई हैं१५ के स्थान में १३ ही मात्रायें रह गई हैं।
यहाँ पाठकों का यह जानकर आश्चर्य होगा कि वराहमिहिर आचार्य ने तो अपना यह सम्पूर्ण शकुनसम्बन्धी वर्णन अनेक वैदिक ऋषियों तथा विद्वानों के आधार पर अनेक ग्रन्थों का आशय लेकर लिखा है और उसकी सूचना उक्त वर्णन के शुरू में लगा दी है । परन्तु भद्रबाहुसंहिता के कर्ता इतने कृतज्ञ थे कि उन्होंने जिस विद्वान् के शब्दों की इतनी अधिक नकल कर डाली है उसका आभार तक नहीं माना। प्रत्युत अध्याय के शुरू में मंगलाचरण के बाद यह लिखकर कि " श्रेणिक के प्रश्नानुसार गौतम ने शुभ अशुभ शकुन का जो कुछ कथन किया है वह (यहाँ मेरे द्वारा) विशेष रूप से निरूपण किया गया है१३" इस सम्पूर्ण कथन को जैन का ही नहीं बल्कि जैनियों के केवली का बना डाला है ! पाठक सोचें और विचार करें, इसमें कितना अधिक धोखा दिया गया है ।
(घ) भद्रबाहुसंहिता में शकुनाध्याय के बाद, 'पाक' नाम का ३२वाँ अध्याय है, जिसमें १७ पद्य हैं। यह पूरा अध्याय भी बृहत्संहिता से नकल किया गया है। बृहत्संहिता में इसका नं० ९७ है और पद्यों की संख्या वही १७ दी है । इन पद्यों में से ८ पद्यों की नकल भद्रबाहुसंहिता में ज्यों की त्यों है पाई जाती है। बाकी के पद्य कुछ परिवर्तन के साथ उठाकर रखे गये हैं। परिवर्तन आम तौर पर शब्दों को प्रायः आगे पीछे कर देने या किसी-किसी शब्द के स्थान में उसका पर्यायवाचक शब्द रख देने १२. यथा- 'निर्ग्रन्थः क्षपणेऽधने बालिशेऽपि ।' इति श्रीधरसेनः ॥ 'निर्ग्रथो निस्वमूर्खयोः श्रमणे च ।' इति हेमचन्द्रः॥ १३. श्रेणिकेन यथा पृष्ठं तथा गौतमभाषितम् । शुभाशुभं च शकुनं विशेषेण निरूपितम् ॥२॥
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एक सौ छः :: ग्रन्थ परीक्षा श्रेष्ठ फल होता है। परन्तु इस तबदीली से यह मालूम न हुआ कि इसे करके ग्रन्थकर्ता ने कौनसी बुद्धिमत्ता का कार्य किया है । क्या 'साधु' शब्द में 'जिन' का और 'जिनादि' शब्दों में 'साधु' का समावेश नहीं होता था? यदि होता था तो फिर साधु और जिनादि ये दो शब्द अलग अलग क्यों रखे गये? साथ ही, जिस गौ और ब्राह्मण के नाम को उड़ाया गया हैं उसको यदि कोई 'आदि' शब्द से ग्रहण कर ले तो उसका ग्रन्थकर्ता ने इस श्लोक में क्या प्रतीकार रखा है? उत्तर इन सब बातों का कुछ नहीं हो सकता। इसलिए ग्रन्थकर्ता का यह सब परिवर्तन निरा भूलभरा और मूर्खता का द्योतक है । धीवरशाकुनिकानां सप्तमभागे भयं भवति दीप्ते । भोजनविघात उक्तो निधनभयं च तत्परतः ॥दो-तैंतीस॥ इस पद्य में सिर्फ 'निर्ग्रन्थभयं' के स्थान में 'निर्धनभयं' बनाया गया है और इसका अभिप्राय शायद ऐसा मालूम होता है कि ग्रन्थकर्ता को 'निग्रंथ' शब्द खटका है। उसने इसका अर्थ दिगम्बर मुनि या जैन साधु समझा है और जैन साधुओं से किसी को भय नहीं होता, इसलिए उसके स्थान में 'निर्धन' शब्द बनाया गया है । परन्तु वास्तव में निग्रंथ का अर्थ दिगम्बर मुनि या जैन साधु ही नहीं है बल्कि 'निर्धन' और 'मूर्ख' भी उसका अर्थ है बारह और यहाँ पर वह ऐसे ही अर्थ में व्यवहृत हुआ है। अस्तु ग्रन्थकर्ता का इस परिवर्तन से कुछ ही अभिप्राय हो, परन्तु छंद की दृष्टि से उसका यह परिवर्तन ठीक नहीं हुआ ऐसा करने से इस आर्या छंद के चौथे चरण में दो मात्रायें कम हो गई हैंपंद्रह के स्थान में तेरह ही मात्रायें रह गई हैं। यहाँ पाठकों का यह जानकर आश्चर्य होगा कि वराहमिहिर आचार्य ने तो अपना यह सम्पूर्ण शकुनसम्बन्धी वर्णन अनेक वैदिक ऋषियों तथा विद्वानों के आधार पर अनेक ग्रन्थों का आशय लेकर लिखा है और उसकी सूचना उक्त वर्णन के शुरू में लगा दी है । परन्तु भद्रबाहुसंहिता के कर्ता इतने कृतज्ञ थे कि उन्होंने जिस विद्वान् के शब्दों की इतनी अधिक नकल कर डाली है उसका आभार तक नहीं माना। प्रत्युत अध्याय के शुरू में मंगलाचरण के बाद यह लिखकर कि " श्रेणिक के प्रश्नानुसार गौतम ने शुभ अशुभ शकुन का जो कुछ कथन किया है वह विशेष रूप से निरूपण किया गया हैतेरह" इस सम्पूर्ण कथन को जैन का ही नहीं बल्कि जैनियों के केवली का बना डाला है ! पाठक सोचें और विचार करें, इसमें कितना अधिक धोखा दिया गया है । भद्रबाहुसंहिता में शकुनाध्याय के बाद, 'पाक' नाम का बत्तीसवाँ अध्याय है, जिसमें सत्रह पद्य हैं। यह पूरा अध्याय भी बृहत्संहिता से नकल किया गया है। बृहत्संहिता में इसका नंशून्य सत्तानवे है और पद्यों की संख्या वही सत्रह दी है । इन पद्यों में से आठ पद्यों की नकल भद्रबाहुसंहिता में ज्यों की त्यों है पाई जाती है। बाकी के पद्य कुछ परिवर्तन के साथ उठाकर रखे गये हैं। परिवर्तन आम तौर पर शब्दों को प्रायः आगे पीछे कर देने या किसी-किसी शब्द के स्थान में उसका पर्यायवाचक शब्द रख देने बारह. यथा- 'निर्ग्रन्थः क्षपणेऽधने बालिशेऽपि ।' इति श्रीधरसेनः ॥ 'निर्ग्रथो निस्वमूर्खयोः श्रमणे च ।' इति हेमचन्द्रः॥ तेरह. श्रेणिकेन यथा पृष्ठं तथा गौतमभाषितम् । शुभाशुभं च शकुनं विशेषेण निरूपितम् ॥दो॥
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24 जनवरी को, मेटा (पूर्व में फेसबुक) की घोषणा की कि इसने मेटावर्स में अपने विकास में तेजी लाने के लिए दुनिया के सबसे तेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले सुपरकंप्यूटर का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है।
घोषणा के अनुसार, AI ने कार्य करना शुरू कर दिया है और पहले से ही अपने प्रकार की सबसे तेज मशीनों में से एक है। यह 2022 के मध्य में पूरी तरह से पूर्ण होने के बाद सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बन जाएगा। जुकरबर्ग ने में लिखा है ब्लॉग भेजाः
ऐसा लगता है कि बड़ी संख्या में लोगों के साथ बात करते समय आरएससी का उपयोग ऐसी तकनीक को सक्षम करने के लिए किया जाएगा जो वास्तविक समय में विभिन्न भाषाओं का अनुवाद करती है और एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) गेम में सहज खेल को सक्षम बनाती है।
मेटा ने सुपरकंप्यूटर के निर्माण के समय और लागत के साथ-साथ इसके वर्तमान स्थान का खुलासा नहीं किया है।
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चौबीस जनवरी को, मेटा की घोषणा की कि इसने मेटावर्स में अपने विकास में तेजी लाने के लिए दुनिया के सबसे तेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले सुपरकंप्यूटर का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है। घोषणा के अनुसार, AI ने कार्य करना शुरू कर दिया है और पहले से ही अपने प्रकार की सबसे तेज मशीनों में से एक है। यह दो हज़ार बाईस के मध्य में पूरी तरह से पूर्ण होने के बाद सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बन जाएगा। जुकरबर्ग ने में लिखा है ब्लॉग भेजाः ऐसा लगता है कि बड़ी संख्या में लोगों के साथ बात करते समय आरएससी का उपयोग ऐसी तकनीक को सक्षम करने के लिए किया जाएगा जो वास्तविक समय में विभिन्न भाषाओं का अनुवाद करती है और एआर गेम में सहज खेल को सक्षम बनाती है। मेटा ने सुपरकंप्यूटर के निर्माण के समय और लागत के साथ-साथ इसके वर्तमान स्थान का खुलासा नहीं किया है।
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क्या आपको साइकिल चलाना आता है तो पहले चला कर दिखाओ. . . । ये किसी सरकारी अधिकारी का कोई आदेश या निर्देश नहीं है, बल्कि मंत्रालय में मंत्री की स्थापना के तहत कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों की विभागीय परीक्षा का एक हिस्सा है। इस परीक्षा के जरिए इन अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाता है। मंत्रालय में अब यह कवायद तेज हो गई है। इसकी वजह यह है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, विश्वास सारंग समेत 15 मंत्रियों ने इन कर्मचारियों को नियमित करने की सिफारिश करते हुए नोटशीट लिख दी है।
इनकी इस विभागीय परीक्षा में जो कर्मचारी जितने साल से कार्यरत है, उस हिसाब से 1 साल का एक बोनस अंक भी दिया जाता है। खुद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार ने भी नियमितीकरण की एक सिफारिश की हुई है। उन्होंने भास्कर से कहा कि हां मैंने भी सिफारिश की है, लेकिन ये सब प्रक्रिया के तहत ही है। यूनियन लीडर सुधीर नायक ने बताया कि इन कर्मचारियों को नियमित करने से राज्य सरकार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं आएगा क्योंकि अभी इन्हें चतुर्थ श्रेणी का ही नियमित वेतनमान 15500 -49000 मिल रहा है। रेगुलर होने से यह फायदा होगा कि सरकार बदलने पर भी इन्हें हटाया नहीं जाएगा। गृह भाड़ा भत्ता ( एचआरए ) सहित अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
एक मंत्री को उनके कार्यकाल के दौरान 7 कर्मचारियों को बंगले पर रखने की पात्रता है, जो मंत्री का कार्यकाल पूरा होने तक रहेंगे। विधानसभा चुनाव से 9 महीने पहले मंत्रियों ने अपने स्टाफ में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए सिफारिश की है। मंत्रियों ने नोटशीट की कॉपी मुख्यमंत्री को भी भेजी है। परीक्षा का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि अगले तीन महीनों में इनकी स्थायी नियुक्ति के आदेश हो जाएंगे। इनमें ज्यादातर जमादार, भृत्य और चौकीदार के रूप में काम कर रहे हैं। 11 साल से इन कर्मचारियों की मंत्रालय में स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है।
15 मंत्रियों ने सिफारिश की है। शासन के पहले से ही नियम बने हैं। इन कर्मचारियों का जल्द नियमितीकरण होगा।
- रमेश चंद्र शर्मा, चेयरमैन, राज्य कर्मचारी कल्याण समिति (जीएडी)
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क्या आपको साइकिल चलाना आता है तो पहले चला कर दिखाओ. . . । ये किसी सरकारी अधिकारी का कोई आदेश या निर्देश नहीं है, बल्कि मंत्रालय में मंत्री की स्थापना के तहत कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों की विभागीय परीक्षा का एक हिस्सा है। इस परीक्षा के जरिए इन अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाता है। मंत्रालय में अब यह कवायद तेज हो गई है। इसकी वजह यह है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, विश्वास सारंग समेत पंद्रह मंत्रियों ने इन कर्मचारियों को नियमित करने की सिफारिश करते हुए नोटशीट लिख दी है। इनकी इस विभागीय परीक्षा में जो कर्मचारी जितने साल से कार्यरत है, उस हिसाब से एक साल का एक बोनस अंक भी दिया जाता है। खुद सामान्य प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार ने भी नियमितीकरण की एक सिफारिश की हुई है। उन्होंने भास्कर से कहा कि हां मैंने भी सिफारिश की है, लेकिन ये सब प्रक्रिया के तहत ही है। यूनियन लीडर सुधीर नायक ने बताया कि इन कर्मचारियों को नियमित करने से राज्य सरकार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं आएगा क्योंकि अभी इन्हें चतुर्थ श्रेणी का ही नियमित वेतनमान पंद्रह हज़ार पाँच सौ -उनचास हज़ार मिल रहा है। रेगुलर होने से यह फायदा होगा कि सरकार बदलने पर भी इन्हें हटाया नहीं जाएगा। गृह भाड़ा भत्ता सहित अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। एक मंत्री को उनके कार्यकाल के दौरान सात कर्मचारियों को बंगले पर रखने की पात्रता है, जो मंत्री का कार्यकाल पूरा होने तक रहेंगे। विधानसभा चुनाव से नौ महीने पहले मंत्रियों ने अपने स्टाफ में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए सिफारिश की है। मंत्रियों ने नोटशीट की कॉपी मुख्यमंत्री को भी भेजी है। परीक्षा का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि अगले तीन महीनों में इनकी स्थायी नियुक्ति के आदेश हो जाएंगे। इनमें ज्यादातर जमादार, भृत्य और चौकीदार के रूप में काम कर रहे हैं। ग्यारह साल से इन कर्मचारियों की मंत्रालय में स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। पंद्रह मंत्रियों ने सिफारिश की है। शासन के पहले से ही नियम बने हैं। इन कर्मचारियों का जल्द नियमितीकरण होगा। - रमेश चंद्र शर्मा, चेयरमैन, राज्य कर्मचारी कल्याण समिति This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पाप को छिपाओ मत !
कृत्वा पाप न गृहेत, गूहमान विवर्धते ।
-शड खस्मृति
पाप करके उसे छिपाओ मत । छिपाया हुआ पाप प्रत्युत बढ़ता है ।
छिपा हुआ (पाप) लगा रहता है, खुलने पर नहीं लगा रहता । इसलिये छिपे पाप को खोल दो, आत्मालोचन के रूप में प्रकट कर दो, फिर वह नही लगा रहेगा ।
३. अपने पापो पर पर्दा डालना अपने भविष्य पर पर्दा डालना है ।
कड कडेत्ति भासेज्जा, अकड नो कडेत्ति य ।
- उत्तराध्ययन १११ पूछने पर किये हुए पाप को छिपाना नही चाहिए । किया हो तो किया कहना एव नही किया हो तो नही किया - ऐसा कहना । ५. छाद्यमानमपि प्रायः, कुकर्म स्फुटति स्वयम् ।
- शुभचन्द्राचार्य कुकर्म को चाहे कितना ही छिपाया जाय प्रायः वह अपने आप प्रकट हो जाता है ।
छन्नमतिवस्सति विवट
नातिवस्सति ।
तस्मा छन्न विवरेथ, एव त नातिवस्सति ।।
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पाप को छिपाओ मत ! कृत्वा पाप न गृहेत, गूहमान विवर्धते । -शड खस्मृति पाप करके उसे छिपाओ मत । छिपाया हुआ पाप प्रत्युत बढ़ता है । छिपा हुआ लगा रहता है, खुलने पर नहीं लगा रहता । इसलिये छिपे पाप को खोल दो, आत्मालोचन के रूप में प्रकट कर दो, फिर वह नही लगा रहेगा । तीन. अपने पापो पर पर्दा डालना अपने भविष्य पर पर्दा डालना है । कड कडेत्ति भासेज्जा, अकड नो कडेत्ति य । - उत्तराध्ययन एक सौ ग्यारह पूछने पर किये हुए पाप को छिपाना नही चाहिए । किया हो तो किया कहना एव नही किया हो तो नही किया - ऐसा कहना । पाँच. छाद्यमानमपि प्रायः, कुकर्म स्फुटति स्वयम् । - शुभचन्द्राचार्य कुकर्म को चाहे कितना ही छिपाया जाय प्रायः वह अपने आप प्रकट हो जाता है । छन्नमतिवस्सति विवट नातिवस्सति । तस्मा छन्न विवरेथ, एव त नातिवस्सति ।।
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दीप सिद्धू (Deep Sidhu) ने 26 जनवरी की हिंसा के बाद फेसबुक वीडियो के जरिए खुद स्वीकार किया था कि वह लाल किले पर मौजूद था.
26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally) के दौरान लाल किले पर हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू (Deep Sidhu) की पुलिस हिरासत बढ़ा दी गई है. दीप सिद्धू को एक बार फिर 7 दिन की रिमांड पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने सिद्धू को 8 फरवरी की रात हरियाणा में करनाल बाइपास के पास से गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उसे 7 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था.
अभी हाल ही में सिद्धू और इस मामले में गिरफ्तार एक अन्य आरोपी इकबाल सिंह को क्राइम ब्रांच की टीम लाल किला लेकर गई थी, ताकि गणतंत्र दिवस पर वहां हुई हिंसा और अराजकता संबंधी घटनाक्रम को समझा जा सके. क्राइम ब्रांच की टीम घटनास्थल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शनकारी किस रास्ते से वहां पहुंचे और लाल किले पर क्या घटनाक्रम हुआ था.
पुलिस ने सिद्धू की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा था. अपनी गिरफ्तारी के बाद दीप सिद्धू ने पूछताछ में बताया था कि उसका कोई 'बुरा इरादा' नहीं था और जैसे सभी वहां जा रहे थे तो वह भी चला गया था. पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद सिद्धू से उसके ठिकानों और 26 जनवरी को लाल किले तक पहुंचने के बारे में पूछताछ की थी.
दीप सिद्धू ने 26 जनवरी की हिंसा के बाद फेसबुक वीडियो के जरिए खुद स्वीकार किया था कि वह लाल किले पर मौजूद था. हालांकि हिंसा के बाद वह फरार चल रहा था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि 26 जनवरी को रात 10 बजे दीप सिद्धू की लोकेशन हरियाणा के शाहबाद-कुरुक्षेत्र इलाके में मिली और यहां मोबाइल फोन बंद हो गया, जिसके बाद उसने दूसरा मोबाइल नंबर एक्टिवेट किया गया था.
पुलिस को चकमा देने के लिए दीप सिद्धू ने एक पेशेवर अपराधी की तरह अपना 'प्लान' सेट किया था, शायद यही वजह की पूरी दिल्ली पुलिस को वो 13 दिन तक चकमा देते हुए गिरफ्तारी से बचता रहा था. सिद्धू पंजाब-हरियाणा के अलग-अलग लोकेशन पर वीडियो बनाता था और लोकेशन डिस्क्लोज न हो इसके लिए पीछे कम्बल भी लगाता था.
टेलीग्राम के जरिए दीप सिद्धू अलग-अलग लोगों से मोबाइल लेकर अमेरिका के नंबर पर पंजाब की अभिनेत्री और अपनी महिला मित्र को अपने वीडियो भेजता था. वो अभिनेत्री उसे फेसबुक पर अपलोड करती थी. इसके अलावा उसने पुलिस को चकमा देने के लिए 26 जनवरी के बाद मुंबई में मौजूद अपनी पत्नी को जानबूझकर बिहार के पूर्णिया भेज दिया था. दीप को पता था कि पुलिस उसकी पत्नी के जरिए उस तक पहुंचने की कोशिश करेगी. हुआ भी ऐसा, दीप सिद्धू की तलाश में कई पुलिस टीमें बिहार में भी रेड करने पहुंची थीं.
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दीप सिद्धू ने छब्बीस जनवरी की हिंसा के बाद फेसबुक वीडियो के जरिए खुद स्वीकार किया था कि वह लाल किले पर मौजूद था. छब्बीस जनवरी की ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किले पर हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू की पुलिस हिरासत बढ़ा दी गई है. दीप सिद्धू को एक बार फिर सात दिन की रिमांड पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने सिद्धू को आठ फरवरी की रात हरियाणा में करनाल बाइपास के पास से गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उसे सात दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था. अभी हाल ही में सिद्धू और इस मामले में गिरफ्तार एक अन्य आरोपी इकबाल सिंह को क्राइम ब्रांच की टीम लाल किला लेकर गई थी, ताकि गणतंत्र दिवस पर वहां हुई हिंसा और अराजकता संबंधी घटनाक्रम को समझा जा सके. क्राइम ब्रांच की टीम घटनास्थल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शनकारी किस रास्ते से वहां पहुंचे और लाल किले पर क्या घटनाक्रम हुआ था. पुलिस ने सिद्धू की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा था. अपनी गिरफ्तारी के बाद दीप सिद्धू ने पूछताछ में बताया था कि उसका कोई 'बुरा इरादा' नहीं था और जैसे सभी वहां जा रहे थे तो वह भी चला गया था. पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद सिद्धू से उसके ठिकानों और छब्बीस जनवरी को लाल किले तक पहुंचने के बारे में पूछताछ की थी. दीप सिद्धू ने छब्बीस जनवरी की हिंसा के बाद फेसबुक वीडियो के जरिए खुद स्वीकार किया था कि वह लाल किले पर मौजूद था. हालांकि हिंसा के बाद वह फरार चल रहा था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि छब्बीस जनवरी को रात दस बजे दीप सिद्धू की लोकेशन हरियाणा के शाहबाद-कुरुक्षेत्र इलाके में मिली और यहां मोबाइल फोन बंद हो गया, जिसके बाद उसने दूसरा मोबाइल नंबर एक्टिवेट किया गया था. पुलिस को चकमा देने के लिए दीप सिद्धू ने एक पेशेवर अपराधी की तरह अपना 'प्लान' सेट किया था, शायद यही वजह की पूरी दिल्ली पुलिस को वो तेरह दिन तक चकमा देते हुए गिरफ्तारी से बचता रहा था. सिद्धू पंजाब-हरियाणा के अलग-अलग लोकेशन पर वीडियो बनाता था और लोकेशन डिस्क्लोज न हो इसके लिए पीछे कम्बल भी लगाता था. टेलीग्राम के जरिए दीप सिद्धू अलग-अलग लोगों से मोबाइल लेकर अमेरिका के नंबर पर पंजाब की अभिनेत्री और अपनी महिला मित्र को अपने वीडियो भेजता था. वो अभिनेत्री उसे फेसबुक पर अपलोड करती थी. इसके अलावा उसने पुलिस को चकमा देने के लिए छब्बीस जनवरी के बाद मुंबई में मौजूद अपनी पत्नी को जानबूझकर बिहार के पूर्णिया भेज दिया था. दीप को पता था कि पुलिस उसकी पत्नी के जरिए उस तक पहुंचने की कोशिश करेगी. हुआ भी ऐसा, दीप सिद्धू की तलाश में कई पुलिस टीमें बिहार में भी रेड करने पहुंची थीं.
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मुंबई : दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर पर शुरुआत की है, जिस पर बेटे अभिनेता सनी देओल ने उनका स्वागत किया है. 81 साल के धर्मेंद्र ने गुरुवार को ट्विटर पर शुरुआत के साथ आगामी फिल्म 'यमला पगला दीवाना फिर से' के सेट से अपनी दो तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "आपके प्यार ने मुझे आपके करीब आने के लिए प्रोत्साहित किया है इसलिए मैं 'यमला पगला दीवाना फिर से' के सेट से. नई शुरुआत, हैदराबाद. "
सनी, बॉबी और पोते करण देओल सहित 'शोले' के अभिनेता के ट्विटर पर अभी तकरीबन 10 हजार फॉलोवर्स हैं. करण देओल जल्द ही 'पल पल दिल के पास' के साथ बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे है. सनी ने गुरुवार को ट्विटर पर बताया कि वह और उनके भाई बॉबी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर अपने पिता को लाने में सफल हुए. सनी ने ट्विटर पर लिखा, "मैं और बॉबी आखिरकार डैड को यहां लाने में सफल रहे. "
Me and Bob eventually succeeded in getting dad here. . Welcome Dad! ! https://t. co/v42oZb42ij - Sunny Deol (@iamsunnydeol) August 17, 2017'यमला पगला दीवाना' के तीसरे भाग की शूटिंग हैदराबाद में होगी. इसमें बॉबी और सनी भी हैं.
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मुंबई : दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर पर शुरुआत की है, जिस पर बेटे अभिनेता सनी देओल ने उनका स्वागत किया है. इक्यासी साल के धर्मेंद्र ने गुरुवार को ट्विटर पर शुरुआत के साथ आगामी फिल्म 'यमला पगला दीवाना फिर से' के सेट से अपनी दो तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "आपके प्यार ने मुझे आपके करीब आने के लिए प्रोत्साहित किया है इसलिए मैं 'यमला पगला दीवाना फिर से' के सेट से. नई शुरुआत, हैदराबाद. " सनी, बॉबी और पोते करण देओल सहित 'शोले' के अभिनेता के ट्विटर पर अभी तकरीबन दस हजार फॉलोवर्स हैं. करण देओल जल्द ही 'पल पल दिल के पास' के साथ बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे है. सनी ने गुरुवार को ट्विटर पर बताया कि वह और उनके भाई बॉबी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर अपने पिता को लाने में सफल हुए. सनी ने ट्विटर पर लिखा, "मैं और बॉबी आखिरकार डैड को यहां लाने में सफल रहे. " Me and Bob eventually succeeded in getting dad here. . Welcome Dad! ! https://t. co/vबयालीसoZbबयालीसij - Sunny Deol August सत्रह, दो हज़ार सत्रह'यमला पगला दीवाना' के तीसरे भाग की शूटिंग हैदराबाद में होगी. इसमें बॉबी और सनी भी हैं.
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अपनी ज़िंदगी में सहे पतरस ने, दर्द से भरे सैंकड़ों इम्तहान।
परमेश्वर के लिये उसके सबसे ऊँचे प्रेम की बुनियाद था ऐसा शोधन।
उसके पूरे जीवन का ये सबसे अहम अनुभव था।
परमेश्वर के लिये उसका प्रेम उसके संकल्प के कारण था,
मगर ये ज़्यादा उसके शोधन और कष्टों के कारण था।
परमेश्वर-प्रेम में ऐसा दुख उसका रहनुमा था, उसकी सबसे यादगार चीज़ था।
परमेश्वर से प्रेम की राह में, अगर शोधन के दर्द से न गुज़रे इंसान,
तो प्राथमिकताओं से भरा, अपनी कुदरती राह पर ही चलता है उसका प्यार।
परमेश्वर से प्रेम की राह में, अगर शोधन के दर्द से न गुज़रे इंसान,
तो शैतान के विचारों से भरा होता है उसका प्यार,
और परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर नहीं सकता उसका प्यार।
परमेश्वर को प्रेम करने का संकल्प करना,
नहीं है परमेश्वर को सच्चा प्रेम करने के समान।
हो सकता है इंसान के दिल की सोच,
परमेश्वर को प्रेम करने, उसे संतुष्ट करने की हो,
मानो उसमें इंसानी विचार न हों, मानो वो सब परमेश्वर की ख़ातिर ही हों।
मगर नहीं मिलती परमेश्वर के सामने प्रशंसा या आशीष इन विचारों को।
अगर समझ और जान भी ले इंसान सारे सत्यों को,
तो भी ये निशानी नहीं है, सचमुच प्रेम करने की परमेश्वर को।
हो सकता है बिना शोधन के समझ गया हो इंसान अनेक सत्यों को,
तो भी अमल में लाने के काबिल नहीं है इंसान इन सत्यों को।
और सराह सकता है इनके गहन अर्थ को।
उस समय परमेश्वर की इच्छा के मुताबिक,
ला सकता है इंसान अमल में सत्य को।
तभी छूटेंगे उसके इंसानी ख़्याल, तभी कम होगी सहजता उसकी।
और तभी कम होंगे सारे इंसानी जज़्बे भी उसके।
तभी जो कुछ करता है इंसान,
उससे ज़ाहिर होगा परमेश्वर के लिये इंसान का प्यार।
हासिल नहीं होती परमेश्वर को प्रेम करने की सच्चाई,
बल्कि चुकानी पड़ती है कीमत उसकी।
ये चाहती है दुख सहे इंसान, शुद्धिकरण में दुख सहे इंसान।
और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा,
और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा,
और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा।
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अपनी ज़िंदगी में सहे पतरस ने, दर्द से भरे सैंकड़ों इम्तहान। परमेश्वर के लिये उसके सबसे ऊँचे प्रेम की बुनियाद था ऐसा शोधन। उसके पूरे जीवन का ये सबसे अहम अनुभव था। परमेश्वर के लिये उसका प्रेम उसके संकल्प के कारण था, मगर ये ज़्यादा उसके शोधन और कष्टों के कारण था। परमेश्वर-प्रेम में ऐसा दुख उसका रहनुमा था, उसकी सबसे यादगार चीज़ था। परमेश्वर से प्रेम की राह में, अगर शोधन के दर्द से न गुज़रे इंसान, तो प्राथमिकताओं से भरा, अपनी कुदरती राह पर ही चलता है उसका प्यार। परमेश्वर से प्रेम की राह में, अगर शोधन के दर्द से न गुज़रे इंसान, तो शैतान के विचारों से भरा होता है उसका प्यार, और परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर नहीं सकता उसका प्यार। परमेश्वर को प्रेम करने का संकल्प करना, नहीं है परमेश्वर को सच्चा प्रेम करने के समान। हो सकता है इंसान के दिल की सोच, परमेश्वर को प्रेम करने, उसे संतुष्ट करने की हो, मानो उसमें इंसानी विचार न हों, मानो वो सब परमेश्वर की ख़ातिर ही हों। मगर नहीं मिलती परमेश्वर के सामने प्रशंसा या आशीष इन विचारों को। अगर समझ और जान भी ले इंसान सारे सत्यों को, तो भी ये निशानी नहीं है, सचमुच प्रेम करने की परमेश्वर को। हो सकता है बिना शोधन के समझ गया हो इंसान अनेक सत्यों को, तो भी अमल में लाने के काबिल नहीं है इंसान इन सत्यों को। और सराह सकता है इनके गहन अर्थ को। उस समय परमेश्वर की इच्छा के मुताबिक, ला सकता है इंसान अमल में सत्य को। तभी छूटेंगे उसके इंसानी ख़्याल, तभी कम होगी सहजता उसकी। और तभी कम होंगे सारे इंसानी जज़्बे भी उसके। तभी जो कुछ करता है इंसान, उससे ज़ाहिर होगा परमेश्वर के लिये इंसान का प्यार। हासिल नहीं होती परमेश्वर को प्रेम करने की सच्चाई, बल्कि चुकानी पड़ती है कीमत उसकी। ये चाहती है दुख सहे इंसान, शुद्धिकरण में दुख सहे इंसान। और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा, और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा, और यकीनन परमेश्वर के दिल को संतुष्ट कर पाएगा।
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होम लोन लेने से पहले आपको इसके ब्याज दर से लेकर अन्य चीजों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए. कोरोना वायरल महामारी की वजह से लोगों में घर खरीदने को लेकर दिलचस्पी कम हुई है. इस बीच लोगों को घर खरीदने के लिए बढ़ावा देने के लिए कई बैंकों ने होम लोन की ब्याज दर को घटा दिया है.
हाल ही में SBI ने होम लोन पर 70 बेसिस प्वाइंट तक छूट देने की घोषणा की थी. इसके बाद स्टेट बैंक होम लोन पर ब्याज दर 6. 70 प्रतिशत से शुरू हो रहा है. हालांकि, बैंक ने छूट का फायदा लेने के लिए 31 मार्च की समयसीमा निर्धारित की है. वहीं, बैंक ने ग्राहकों को प्रोसेसिंग फीस में 100 प्रतिशत छूट देने का ऐलान किया है.
होम लोन के लिए छूट कितनी मिलेगी ये ग्राहक के सिबिल स्कोर पर निर्भर करता है. SBI के 75 लाख तक के होम लोन पर 6. 70 प्रतिशत ब्याज दर शुरू होता है. इसके बाद 6. 75 प्रतिशत ब्याज दर रखा गया है.
कोटेक महिंद्रा बैंक ने भी होम लोन पर 0. 10 प्रतिशत की कटौती की है. इसके बाद बैंक का होम लोन ब्याज दर 6. 65 प्रतिशत है. कोटेक महिंद्रा बैंक ने भी इस ऑफर की समयसीमा 31 मार्च निर्धारित की है. इस बैंक के भी होम लोन का ब्याज दर ग्राहक के सिबिल स्कोर पर निर्भर करेगा.
HDFC बैंक ने भी होम लोन की ब्याज दर में कटौती करने का ऐलान किया है. बैंक के मुताबिक 4 मार्च से नई दर प्रभावी हो जाएगी. बैंक ने 5 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है. इसके बाद बैंक की होम लोन का ब्याज दर 6. 75 प्रतिशत हो गई है. बैंक के अनुसार ये फायदा सभी वर्तमान रिटेल होम लोन ग्राहकों को मिलेगा.
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होम लोन लेने से पहले आपको इसके ब्याज दर से लेकर अन्य चीजों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए. कोरोना वायरल महामारी की वजह से लोगों में घर खरीदने को लेकर दिलचस्पी कम हुई है. इस बीच लोगों को घर खरीदने के लिए बढ़ावा देने के लिए कई बैंकों ने होम लोन की ब्याज दर को घटा दिया है. हाल ही में SBI ने होम लोन पर सत्तर बेसिस प्वाइंट तक छूट देने की घोषणा की थी. इसके बाद स्टेट बैंक होम लोन पर ब्याज दर छः. सत्तर प्रतिशत से शुरू हो रहा है. हालांकि, बैंक ने छूट का फायदा लेने के लिए इकतीस मार्च की समयसीमा निर्धारित की है. वहीं, बैंक ने ग्राहकों को प्रोसेसिंग फीस में एक सौ प्रतिशत छूट देने का ऐलान किया है. होम लोन के लिए छूट कितनी मिलेगी ये ग्राहक के सिबिल स्कोर पर निर्भर करता है. SBI के पचहत्तर लाख तक के होम लोन पर छः. सत्तर प्रतिशत ब्याज दर शुरू होता है. इसके बाद छः. पचहत्तर प्रतिशत ब्याज दर रखा गया है. कोटेक महिंद्रा बैंक ने भी होम लोन पर शून्य. दस प्रतिशत की कटौती की है. इसके बाद बैंक का होम लोन ब्याज दर छः. पैंसठ प्रतिशत है. कोटेक महिंद्रा बैंक ने भी इस ऑफर की समयसीमा इकतीस मार्च निर्धारित की है. इस बैंक के भी होम लोन का ब्याज दर ग्राहक के सिबिल स्कोर पर निर्भर करेगा. HDFC बैंक ने भी होम लोन की ब्याज दर में कटौती करने का ऐलान किया है. बैंक के मुताबिक चार मार्च से नई दर प्रभावी हो जाएगी. बैंक ने पाँच बेसिस प्वाइंट की कटौती की है. इसके बाद बैंक की होम लोन का ब्याज दर छः. पचहत्तर प्रतिशत हो गई है. बैंक के अनुसार ये फायदा सभी वर्तमान रिटेल होम लोन ग्राहकों को मिलेगा.
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Gyanvapi Mosque Survey: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वे पर सुनवाई है. सर्वे की सुनवाई पर नई बेंच का गठन किया गया है. मुस्लिम पक्ष ने सर्वे पर रोक की मांग की है. वाराणसी जिला जज के फैसले के खिलाफ दाखिल रिट पिटिशन पर कल सुनवाई होगी. जस्टिस जयंत बनर्जी की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई होगी. जिला जज के एएसआई सर्वे के खिलाफ रिट पिटीशन दाखिल की गई है.जिला जज ने ज्ञानवापी विवादित परिसर का एसआई सर्वे का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को ज्ञानवापी परिसर में एएसआई की टीम ने सर्वे किया. इस दौरान एएसआई की चार टीमों ने अलग-अलग जगहों पर सर्वे किया. ASI की टीम में पश्चिमी दीवार के पास,गुंबदों का सर्वे,मस्जिद के चबूतरों का और परिसर का सर्वे किया. ये सर्वे करीब चार घंटे तक चला. हालांकि मुस्लिम पक्ष की ओऱ से सर्वे को रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद इस सर्वे को रोक दिया गया. SC ने 26 जुलाई तक रोक लगा दी है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी. आज ज्ञानवापी सर्वे के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है.
वाराणसी -ज्ञानवापी मामले में हिन्दू पक्ष जनजागरण अभियान चलाएगा. इस अभियान की शुरुआत 30 जुलाई से होगी. आदि विश्वेश्वर मंदिर का मॉडल जेम्स प्रिंसेफ के नक्शे को आधार बनाकर तैयार किया गया. हिन्दू पक्ष पिछले सर्वे में मिले फोटो और नक्शे के साथ जनता के बीच जाएगा.आज काशी में इसे लेकर बड़ी बैठक है.
प्रयागराज ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है.इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष ने दो कैविएट दाखिल की हैं. एक आर्टिकल 227 और दूसरी सिविल revision में कैविएट दाखिल हुई है. हिंदू पक्ष की तरफ से चार पक्षकार शामिल हैं. इन पक्षकारों में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने कैविएट दाखिल की है. वाराणसी जिला अदालत द्वारा 21 जुलाई को दिए गए ASI के सर्वे पर आदेश से पहले हिंदू पक्ष को सुना जाए. अधिवक्ता प्रभाष पांडेय के माध्यम से कैविएट दायर की गई है.
हिंदू पक्ष की तरफ से चार पक्षकारों में शामिल लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने दाखिल की कैविएट, वाराणसी जिला अदालत द्वारा 21 जुलाई को दिए गए ASI के सर्वे पर आदेश से पहले हिंदू पक्ष को सुना जाए, अधिवक्ता प्रभाष पांडेय के माध्यम से दायर की कैविएट दाखिल की गई है.
श्रृंगार गौरी मामले में हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी राखी सिंह की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी. अधिवक्ता सौरभ तिवारी के माध्यम से कैविएट पेटीशन ई-फाइलिंग मोड से दाखिल किया गया था. मुख्य वादिनी राखी सिंह ASI सर्वे के समर्थन में हैं, इस वजह से हाईकोर्ट में उनके द्वारा कैविएट इसलिए दायर किया गया. ये कैविएट सोमवार asi सर्वे शुरू होने के समय ही दाखिल कर दिया गया था.
हिन्दू पक्ष ने आज बैठक बुलाई है. ये बैठक चौकाघाट क्षेत्र में बुलाई गई है. इसके मुख्य पैरोकार सोहनलाल हैं. सर्वे को लेकर आज मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट में अपील करेगा. इसके अलावा हिन्दू पक्ष इस पर अपनी रणनीति तैयार करेगा.
एएसआई सर्वे आदेश और सिविल वाद की वैधता को लेकर दाखिल याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश पाडिया की बेंच में मामले की सुनवाई होगी. 8 अप्रैल 2021 को वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे का आदेश दिया था.
मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में वाराणसी कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. सिविल वाद की वैधता को लेकर भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है. दोपहर 12 बजे से जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच मामले में सुनवाई करेगी. नवंबर 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. जून 2023 में कोर्ट ने कुछ बिंदुओं पर दुबारा सुनवाई का फैसला लिया, अब आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. स्वयंभू आदि विशेश्वर नाथ मंदिर है हिंदुओं की तरफ से पक्षकार है.
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Gyanvapi Mosque Survey: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वे पर सुनवाई है. सर्वे की सुनवाई पर नई बेंच का गठन किया गया है. मुस्लिम पक्ष ने सर्वे पर रोक की मांग की है. वाराणसी जिला जज के फैसले के खिलाफ दाखिल रिट पिटिशन पर कल सुनवाई होगी. जस्टिस जयंत बनर्जी की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई होगी. जिला जज के एएसआई सर्वे के खिलाफ रिट पिटीशन दाखिल की गई है.जिला जज ने ज्ञानवापी विवादित परिसर का एसआई सर्वे का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को ज्ञानवापी परिसर में एएसआई की टीम ने सर्वे किया. इस दौरान एएसआई की चार टीमों ने अलग-अलग जगहों पर सर्वे किया. ASI की टीम में पश्चिमी दीवार के पास,गुंबदों का सर्वे,मस्जिद के चबूतरों का और परिसर का सर्वे किया. ये सर्वे करीब चार घंटे तक चला. हालांकि मुस्लिम पक्ष की ओऱ से सर्वे को रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद इस सर्वे को रोक दिया गया. SC ने छब्बीस जुलाई तक रोक लगा दी है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी. आज ज्ञानवापी सर्वे के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है. वाराणसी -ज्ञानवापी मामले में हिन्दू पक्ष जनजागरण अभियान चलाएगा. इस अभियान की शुरुआत तीस जुलाई से होगी. आदि विश्वेश्वर मंदिर का मॉडल जेम्स प्रिंसेफ के नक्शे को आधार बनाकर तैयार किया गया. हिन्दू पक्ष पिछले सर्वे में मिले फोटो और नक्शे के साथ जनता के बीच जाएगा.आज काशी में इसे लेकर बड़ी बैठक है. प्रयागराज ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है.इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष ने दो कैविएट दाखिल की हैं. एक आर्टिकल दो सौ सत्ताईस और दूसरी सिविल revision में कैविएट दाखिल हुई है. हिंदू पक्ष की तरफ से चार पक्षकार शामिल हैं. इन पक्षकारों में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने कैविएट दाखिल की है. वाराणसी जिला अदालत द्वारा इक्कीस जुलाई को दिए गए ASI के सर्वे पर आदेश से पहले हिंदू पक्ष को सुना जाए. अधिवक्ता प्रभाष पांडेय के माध्यम से कैविएट दायर की गई है. हिंदू पक्ष की तरफ से चार पक्षकारों में शामिल लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने दाखिल की कैविएट, वाराणसी जिला अदालत द्वारा इक्कीस जुलाई को दिए गए ASI के सर्वे पर आदेश से पहले हिंदू पक्ष को सुना जाए, अधिवक्ता प्रभाष पांडेय के माध्यम से दायर की कैविएट दाखिल की गई है. श्रृंगार गौरी मामले में हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी राखी सिंह की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी. अधिवक्ता सौरभ तिवारी के माध्यम से कैविएट पेटीशन ई-फाइलिंग मोड से दाखिल किया गया था. मुख्य वादिनी राखी सिंह ASI सर्वे के समर्थन में हैं, इस वजह से हाईकोर्ट में उनके द्वारा कैविएट इसलिए दायर किया गया. ये कैविएट सोमवार asi सर्वे शुरू होने के समय ही दाखिल कर दिया गया था. हिन्दू पक्ष ने आज बैठक बुलाई है. ये बैठक चौकाघाट क्षेत्र में बुलाई गई है. इसके मुख्य पैरोकार सोहनलाल हैं. सर्वे को लेकर आज मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट में अपील करेगा. इसके अलावा हिन्दू पक्ष इस पर अपनी रणनीति तैयार करेगा. एएसआई सर्वे आदेश और सिविल वाद की वैधता को लेकर दाखिल याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश पाडिया की बेंच में मामले की सुनवाई होगी. आठ अप्रैल दो हज़ार इक्कीस को वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे का आदेश दिया था. मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में वाराणसी कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. सिविल वाद की वैधता को लेकर भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है. दोपहर बारह बजे से जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच मामले में सुनवाई करेगी. नवंबर दो हज़ार बाईस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. जून दो हज़ार तेईस में कोर्ट ने कुछ बिंदुओं पर दुबारा सुनवाई का फैसला लिया, अब आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. स्वयंभू आदि विशेश्वर नाथ मंदिर है हिंदुओं की तरफ से पक्षकार है.
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जागरण संवाददाता, मंडी : मंडी में शनिवार को आम आदमी पार्टी की बदलाव यात्रा पहुंची। यात्रा का नेतृत्व पार्टी के उपाध्यक्ष शेर सिंह ठाकुर व बलवंत सिंह ने किया। भूतनाथ मंदिर में भजन कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली। यात्रा के दौरान जेल रोड, स्कूल बाजार, गांधी चौक, मोती बाजार आदि में रोड शो निकाला। मंडी के सेरी बाजार में संगठन मंत्री कश्मीर सिंह ठाकुर के साथ सैकड़ों लोग रोड शो में शामिल हुए। जनसंवाद में शहर के स्कूल भवन को तोड़कर शपिग माल बनाने के मुद्दे पर चर्चा हुई।
लोगों का कहना है कि सरकार स्कूल भवन तो बना नहीं पा रही है, जो स्कूल बने हैं उन्हें तोड़कर शापिग माल बना रही है। इससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्राथमिकता में शिक्षा और स्कूल नहीं है बल्कि शापिग माल बनाना है। स्कूल तोड़कर शापिग माल बनाने को लेकर मंडी की जनता में सरकार के प्रति गुस्सा है। शहर में पार्किंग की गंभीर समस्या है। लोगों के पास गाड़ी तो हैं लेकिन मंडी शहर में जाते समय उसका उपयोग नहीं कर पाते हैं।
कीरतपुर मनाली फोरलेन का काम धीमी गति से चल रहा है। पंडोह और सात मील की ओर जाने पर घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। शहर में घर का कचरा कलेक्शन का कार्य सही ढंग से नहीं होता है। प्रशासन ने घर से कूड़ा उठाने की स्कीम तो लागू कर दी है लेकिन उचित प्रबंध नहीं किया। कर्मचारी चार या पांच दिन बाद कचरा लेने आते हैं।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही विकास नजर नहीं आता तो प्रदेश में विकास के क्या हाल होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बदलाव यात्रा में आप के कार्यकर्ताओं ने जनता से कहा कि प्रदेश के विकास और बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं के लिए केजरीवाल को एक मौका दो। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी तो बच्चों का भविष्य भी सुधरेगा। प्रदेश में दिल्ली माडल पर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास होगा।
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जागरण संवाददाता, मंडी : मंडी में शनिवार को आम आदमी पार्टी की बदलाव यात्रा पहुंची। यात्रा का नेतृत्व पार्टी के उपाध्यक्ष शेर सिंह ठाकुर व बलवंत सिंह ने किया। भूतनाथ मंदिर में भजन कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली। यात्रा के दौरान जेल रोड, स्कूल बाजार, गांधी चौक, मोती बाजार आदि में रोड शो निकाला। मंडी के सेरी बाजार में संगठन मंत्री कश्मीर सिंह ठाकुर के साथ सैकड़ों लोग रोड शो में शामिल हुए। जनसंवाद में शहर के स्कूल भवन को तोड़कर शपिग माल बनाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। लोगों का कहना है कि सरकार स्कूल भवन तो बना नहीं पा रही है, जो स्कूल बने हैं उन्हें तोड़कर शापिग माल बना रही है। इससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्राथमिकता में शिक्षा और स्कूल नहीं है बल्कि शापिग माल बनाना है। स्कूल तोड़कर शापिग माल बनाने को लेकर मंडी की जनता में सरकार के प्रति गुस्सा है। शहर में पार्किंग की गंभीर समस्या है। लोगों के पास गाड़ी तो हैं लेकिन मंडी शहर में जाते समय उसका उपयोग नहीं कर पाते हैं। कीरतपुर मनाली फोरलेन का काम धीमी गति से चल रहा है। पंडोह और सात मील की ओर जाने पर घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। शहर में घर का कचरा कलेक्शन का कार्य सही ढंग से नहीं होता है। प्रशासन ने घर से कूड़ा उठाने की स्कीम तो लागू कर दी है लेकिन उचित प्रबंध नहीं किया। कर्मचारी चार या पांच दिन बाद कचरा लेने आते हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही विकास नजर नहीं आता तो प्रदेश में विकास के क्या हाल होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बदलाव यात्रा में आप के कार्यकर्ताओं ने जनता से कहा कि प्रदेश के विकास और बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाओं के लिए केजरीवाल को एक मौका दो। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी तो बच्चों का भविष्य भी सुधरेगा। प्रदेश में दिल्ली माडल पर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास होगा।
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हालांकि अभी 2019 आने में एक महीने से ज्यादा का समय बचा है, ऑटो निर्माता तैयारियों में पहले ही जुट गए हैं. कई कंपनियों ने अपने गाड़ियों पर डिस्काउंट और ऑफर्स की घोषणा कर दी है, और बाकी कंपनियां भी जल्द ही ऐसा करने वाली हैं.
ऐसे ही ब्रांड्स में से एक है Mahindra जो अपनी गाड़ियों पर बड़े डिस्काउंट ऑफर कर रही है ताकि वो 2018 के अंत तक सेल्स में अग्रणी रहे. आइये एक नाज़ार डालते हैं की कंपनी अपनी गाड़ियों पर कैसे डिस्काउंट ऑफर कर रही है.
KUV100 फिलहाल Mahindra की सबसे किफायती गाड़ी है. फिलहाल इसे आकर्षक डील बनाने के लिए इसपर बड़े डिस्काउंट मिल रहे हैं. कंपनी K2 वैरिएंट पर 20,000 रूपए का डिस्काउंट दे रही है. K4 वैरिएंट पर भी 26,000 रूपए का कैश डिस्काउंट मिल रहा है.
वहीँ K6+ और K8 वैरिएंट पर और भी बड़ा 43,000 रूपए का कैश डिस्काउंट मिल रहा है. इस कार पर एक्सचेंज ऑफर भी उपलब्ध है, और इसका मूल्य 29,000 रूपए है. इन सब के अलावे, इस कार पर 4000 रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी मिल रहा है.
TUV300 को Mahindra ने Maruti Vitara Brezza और Tata Nexon जैसी गाड़ियों से टक्कर लेने के लिए उतारा था. इस कॉम्पैक्ट SUV पर फिलहाल कुछ बेहद आकर्षक डिस्काउंट मिल रहे हैं. इस डिस्काउंट में 38,000 कैश डिस्काउंट और 15,000 रूपए का एक्सचेंज बोनस शामिल है. साथ ही इन सब के अलावे इसपर 5,000 रूपए का बोनस कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी मिल रहा है.
Mahindra की लेटेस्ट गाड़ी Marazzo पर भी कुछ डिस्काउंट मिल रहे हैं. Marazzo पर फिलहाल केवल 15,000 रूपए का एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. नयी गाड़ी होने के चलते फिलहाल Marazzo पर कोई बड़ा डिस्काउंट नहीं मिल रहा लेकिन अब चूंकि नयी Ertiga लॉन्च हो गयी है, हम कुछ डिस्काउंट की उम्मीद कर सकते हैं.
Scorpio पर फिलहाल इस लिस्ट की सभी कार्स में से सबसे ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा है और इस डिस्काउंट का कुल मूल्य 88,500 रूपए है. इस डिस्काउंट में S5, S7, और S11 वैरिएंट पर 40,000 रूपए का कैश डिस्काउंट शामिल है. साथ ही 25,000 का एक्सचेंज बोनस और 5,500 रूपए का कॉर्पोरेट बोनस भी मिल रहा है. लेकिन इस लेख के लिखे जाने तक हाल ही में लॉन्च हुए S9 वैरिएंट पर कोई डिस्काउंट नहीं मिल रहा है.
Bolero की टैंक जैसी बिल्ड क्वालिटी एक कारण है की ये SUV काफी समय से बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. फिलहाल इस गाड़ी पर Mahindra कुछ अच्छे डिस्काउंट दे रही है जिसमें 15,000 रूपए का कैश डिस्काउंट, 10,000 रूपए का एक्सचेंज बोनस और 5000 रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट शामिल है.
Mahindra Thar कंपनी की लाइफस्टाइल UV है और ऑफ-रोडिंग शौकीनों की पसंदीदा गाड़ियों में से एक है. कंपनी इसपर सेल्स को लेकर दांव नहीं लगाती है और इसीलिए इसपर केवल 6,000 रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट मिल रहा है. ये शौकीनों की गाड़ी है और इसके सेल्स पर डिस्काउंट का कोई असर नहीं पड़ता.
XUV500 लम्बे समय से Mahindra की फ्लैगशिप गाड़ी रही है. लेकिन, इसी महीने लॉन्च होने वाली Alturas G4 जल्द ही इसकी जगह ले लेगी. XUV500 पर फ़िलहाल 10,000 रूपए का कैश डिस्काउंट और 25,000 रूपए का एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. साथ ही इसपर 10,000 रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी उपलब्ध है.
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हालांकि अभी दो हज़ार उन्नीस आने में एक महीने से ज्यादा का समय बचा है, ऑटो निर्माता तैयारियों में पहले ही जुट गए हैं. कई कंपनियों ने अपने गाड़ियों पर डिस्काउंट और ऑफर्स की घोषणा कर दी है, और बाकी कंपनियां भी जल्द ही ऐसा करने वाली हैं. ऐसे ही ब्रांड्स में से एक है Mahindra जो अपनी गाड़ियों पर बड़े डिस्काउंट ऑफर कर रही है ताकि वो दो हज़ार अट्ठारह के अंत तक सेल्स में अग्रणी रहे. आइये एक नाज़ार डालते हैं की कंपनी अपनी गाड़ियों पर कैसे डिस्काउंट ऑफर कर रही है. KUVएक सौ फिलहाल Mahindra की सबसे किफायती गाड़ी है. फिलहाल इसे आकर्षक डील बनाने के लिए इसपर बड़े डिस्काउंट मिल रहे हैं. कंपनी Kदो वैरिएंट पर बीस,शून्य रूपए का डिस्काउंट दे रही है. Kचार वैरिएंट पर भी छब्बीस,शून्य रूपए का कैश डिस्काउंट मिल रहा है. वहीँ Kछः+ और Kआठ वैरिएंट पर और भी बड़ा तैंतालीस,शून्य रूपए का कैश डिस्काउंट मिल रहा है. इस कार पर एक्सचेंज ऑफर भी उपलब्ध है, और इसका मूल्य उनतीस,शून्य रूपए है. इन सब के अलावे, इस कार पर चार हज़ार रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी मिल रहा है. TUVतीन सौ को Mahindra ने Maruti Vitara Brezza और Tata Nexon जैसी गाड़ियों से टक्कर लेने के लिए उतारा था. इस कॉम्पैक्ट SUV पर फिलहाल कुछ बेहद आकर्षक डिस्काउंट मिल रहे हैं. इस डिस्काउंट में अड़तीस,शून्य कैश डिस्काउंट और पंद्रह,शून्य रूपए का एक्सचेंज बोनस शामिल है. साथ ही इन सब के अलावे इसपर पाँच,शून्य रूपए का बोनस कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी मिल रहा है. Mahindra की लेटेस्ट गाड़ी Marazzo पर भी कुछ डिस्काउंट मिल रहे हैं. Marazzo पर फिलहाल केवल पंद्रह,शून्य रूपए का एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. नयी गाड़ी होने के चलते फिलहाल Marazzo पर कोई बड़ा डिस्काउंट नहीं मिल रहा लेकिन अब चूंकि नयी Ertiga लॉन्च हो गयी है, हम कुछ डिस्काउंट की उम्मीद कर सकते हैं. Scorpio पर फिलहाल इस लिस्ट की सभी कार्स में से सबसे ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा है और इस डिस्काउंट का कुल मूल्य अठासी,पाँच सौ रूपए है. इस डिस्काउंट में Sपाँच, Sसात, और Sग्यारह वैरिएंट पर चालीस,शून्य रूपए का कैश डिस्काउंट शामिल है. साथ ही पच्चीस,शून्य का एक्सचेंज बोनस और पाँच,पाँच सौ रूपए का कॉर्पोरेट बोनस भी मिल रहा है. लेकिन इस लेख के लिखे जाने तक हाल ही में लॉन्च हुए Sनौ वैरिएंट पर कोई डिस्काउंट नहीं मिल रहा है. Bolero की टैंक जैसी बिल्ड क्वालिटी एक कारण है की ये SUV काफी समय से बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. फिलहाल इस गाड़ी पर Mahindra कुछ अच्छे डिस्काउंट दे रही है जिसमें पंद्रह,शून्य रूपए का कैश डिस्काउंट, दस,शून्य रूपए का एक्सचेंज बोनस और पाँच हज़ार रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट शामिल है. Mahindra Thar कंपनी की लाइफस्टाइल UV है और ऑफ-रोडिंग शौकीनों की पसंदीदा गाड़ियों में से एक है. कंपनी इसपर सेल्स को लेकर दांव नहीं लगाती है और इसीलिए इसपर केवल छः,शून्य रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट मिल रहा है. ये शौकीनों की गाड़ी है और इसके सेल्स पर डिस्काउंट का कोई असर नहीं पड़ता. XUVपाँच सौ लम्बे समय से Mahindra की फ्लैगशिप गाड़ी रही है. लेकिन, इसी महीने लॉन्च होने वाली Alturas Gचार जल्द ही इसकी जगह ले लेगी. XUVपाँच सौ पर फ़िलहाल दस,शून्य रूपए का कैश डिस्काउंट और पच्चीस,शून्य रूपए का एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. साथ ही इसपर दस,शून्य रूपए का कॉर्पोरेट डिस्काउंट भी उपलब्ध है.
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क्षेत्र है । ऐसी दशा में कवि को अपनी वस्तु के लिये सदा सतर्क रहना चाहिए । निकृष्ट उपादान से उत्कृष्ट भाव की सृष्टि एकदम असम्भव है । क्या समाज के लिए हेय तथा अमाल्य उपकरण से उच्च काव्य की कथमपि सृष्टि हो सकती है ? काव्य का लक्ष्य अध्यात्म के सदृश ही श्रेयस्कर की सृष्टि है और यह तभी साध्य है जब समाज के शोभन उपकरणों का योग कवि अपने काव्य में करता है। ऐसी दृष्टि से काव्य का अन्तिम लक्ष्य काव्य नहीं हो सकता ।
काव्य का द्विविध पक्ष
ध्यान देने की बात है कि काव्य के दो ही पक्ष होते हैं - सुन्दर तथा कुरूप । कवि की दृष्टि सदा सौन्दर्य की ओर जाती है, चाहे वह नहीं हो - वस्तु के रूपरंगों में हो अथवा मनुष्य के मन, वाणी तथा कर्म में हो । कवि की अन्तर्दृष्टि सौन्दर्य को निरखती है और उसकी वाणी उसी को अभिव्यक्ति सुन्दर शब्दों के द्वारा करती है । भला-बुरा, मंगल-अमंगल, पाप-पुण्य - आदि शब्द नीतिशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा अर्थशास्त्र से सम्बद्ध शब्द है । ये काव्यक्षेत्र से बाहर रहते हैं । विशुद्ध काव्य के क्षेत्र में न कोई वस्तु भली होती है न बुरी, न उपयोगी होती है, न अनुपयोगो । कवि केवल दो ही बातों पर ध्यान देता है कि वह सुन्दर है या कुरूप । मंगल वस्तु या सुन्दर वस्तु में कथमपि अन्तर नहीं होता । धार्मिक जिस वस्तु को अपनी दृष्टि से मंगलमय मानता है उसे ही कवि अपनी दृष्टि से सुन्दर समझता है । दृष्टिभेद होनेपर भी वस्तु का रूपगत भेद नहीं होता । कवि के इस दृष्टिविशेष पर ध्यान देने से अनेक समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाता है :काव्य सत् होता है या असत् ? कवि प्रचारक होता है या उपदेशक १ काव्य का नीति से ऐकमत्य है या वैमत्य १ जो सुन्दर है वही शिव है, वही सत्य है ।
कवि के इस वैशिष्टय पर लक्ष्य रखने से काव्य सौन्दर्य से युक्त होने से ही मंगलमय होता है । सौन्दर्य मंगल का प्रतीक है । सौन्दर्य सत्य का प्रतिनिधि है । काव्य में जितने प्रकार के सौन्दर्य का एकत्र संविधानक प्रस्तुत किया जाता है वह उतना ही रमणीय तथा आवर्जनीय, प्रभावशाली तथा उत्कर्षाधायक बन जाता है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र के चित्रण में अन्तःसौन्दर्य के साथ रूपमाधुरी का सन्निवेश वाल्मीकि की प्रतिभा का सुन्दर विलास है। उदात्त नायक का बाहरी सौन्दयें उसके अन्तःकरण के सौन्दर्य
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क्षेत्र है । ऐसी दशा में कवि को अपनी वस्तु के लिये सदा सतर्क रहना चाहिए । निकृष्ट उपादान से उत्कृष्ट भाव की सृष्टि एकदम असम्भव है । क्या समाज के लिए हेय तथा अमाल्य उपकरण से उच्च काव्य की कथमपि सृष्टि हो सकती है ? काव्य का लक्ष्य अध्यात्म के सदृश ही श्रेयस्कर की सृष्टि है और यह तभी साध्य है जब समाज के शोभन उपकरणों का योग कवि अपने काव्य में करता है। ऐसी दृष्टि से काव्य का अन्तिम लक्ष्य काव्य नहीं हो सकता । काव्य का द्विविध पक्ष ध्यान देने की बात है कि काव्य के दो ही पक्ष होते हैं - सुन्दर तथा कुरूप । कवि की दृष्टि सदा सौन्दर्य की ओर जाती है, चाहे वह नहीं हो - वस्तु के रूपरंगों में हो अथवा मनुष्य के मन, वाणी तथा कर्म में हो । कवि की अन्तर्दृष्टि सौन्दर्य को निरखती है और उसकी वाणी उसी को अभिव्यक्ति सुन्दर शब्दों के द्वारा करती है । भला-बुरा, मंगल-अमंगल, पाप-पुण्य - आदि शब्द नीतिशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा अर्थशास्त्र से सम्बद्ध शब्द है । ये काव्यक्षेत्र से बाहर रहते हैं । विशुद्ध काव्य के क्षेत्र में न कोई वस्तु भली होती है न बुरी, न उपयोगी होती है, न अनुपयोगो । कवि केवल दो ही बातों पर ध्यान देता है कि वह सुन्दर है या कुरूप । मंगल वस्तु या सुन्दर वस्तु में कथमपि अन्तर नहीं होता । धार्मिक जिस वस्तु को अपनी दृष्टि से मंगलमय मानता है उसे ही कवि अपनी दृष्टि से सुन्दर समझता है । दृष्टिभेद होनेपर भी वस्तु का रूपगत भेद नहीं होता । कवि के इस दृष्टिविशेष पर ध्यान देने से अनेक समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाता है :काव्य सत् होता है या असत् ? कवि प्रचारक होता है या उपदेशक एक काव्य का नीति से ऐकमत्य है या वैमत्य एक जो सुन्दर है वही शिव है, वही सत्य है । कवि के इस वैशिष्टय पर लक्ष्य रखने से काव्य सौन्दर्य से युक्त होने से ही मंगलमय होता है । सौन्दर्य मंगल का प्रतीक है । सौन्दर्य सत्य का प्रतिनिधि है । काव्य में जितने प्रकार के सौन्दर्य का एकत्र संविधानक प्रस्तुत किया जाता है वह उतना ही रमणीय तथा आवर्जनीय, प्रभावशाली तथा उत्कर्षाधायक बन जाता है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र के चित्रण में अन्तःसौन्दर्य के साथ रूपमाधुरी का सन्निवेश वाल्मीकि की प्रतिभा का सुन्दर विलास है। उदात्त नायक का बाहरी सौन्दयें उसके अन्तःकरण के सौन्दर्य
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अयोध्या के मिल्कीपुर में तेधा गांव के पास घूम रहे 22 वर्षीय विक्षिप्त युवक को पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत परिजनों को सौंप दिया है। विक्षिप्त युवक आजमगढ़ जनपद के गंभीरपुर थाना क्षेत्र के बहोरापुर का रहने वाला था।
मिल्कीपुर तहसील अंतर्गत थाना कुमारगंज क्षेत्र के तेधा बाजार में कई दिनों से घूम रहे एक 22 वर्षीय विक्षिप्त युवक को ग्रामीणों ने देखा तो इसकी सूचना पीआरबी पुलिस को दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पीआरबी 0943 पर तैनात हेड कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार कुशवाहा जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे। विक्षिप्त युवक को कुमारगंज थाने ले गए।
जहां पर पुलिस ने युवक को मुंह धुलाते हुए चाय पानी पिला कर जब उससे उसके निवास स्थान के बारे में पूछताछ शुरू की, तो युवक ने अपना नाम सुनील कुमार पुत्र सहदुल सरोज निवासी बहोरापुर पोस्ट मगरावां थाना गम्भीरपुर जनपद आजमगढ बताया। तब ऑपरेशन मुस्कान के तहत कुमारगंज थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजाराम व मुंशी दीपक कुमार पटेल युवक के परिजनों से सम्पर्क कर कुमारगंज थाने बुलाया गया।
जानकारी मिलने के बाद पर झिन्नूप्रसाद पुत्र राजबली सरोज निवासी बहोरापुर पोस्ट मगरावां थाना गम्भीरपुर आजमगढ व उनके बडे़ पापा फेकन सरोज थाने पहुंच गए। उन्होंने उक्त विक्षिप्त व्यक्ति की पहचान करने के बाद पुलिस को बताया कि यह मेरा चचेरा भाई सुनील कुमार है। जो लगभग 2 महीने से घर से लापता है। जिसका दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। जिस कारण घर से लापता हो गया था।
पुलिस द्वारा मेरे भाई को खोजकर मेरे परिवार पर बहुत बड़ा एहसान किया गया है। जिसका एहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूल पाऊंगा। थानाध्यक्ष कुमारगंज वीर सिंह ने बताया कि तेधा गांव के पास घूम रहे 22 वर्षीय विक्षिप्त युवक को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया और परिजन अपने साथ ले गए।
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अयोध्या के मिल्कीपुर में तेधा गांव के पास घूम रहे बाईस वर्षीय विक्षिप्त युवक को पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत परिजनों को सौंप दिया है। विक्षिप्त युवक आजमगढ़ जनपद के गंभीरपुर थाना क्षेत्र के बहोरापुर का रहने वाला था। मिल्कीपुर तहसील अंतर्गत थाना कुमारगंज क्षेत्र के तेधा बाजार में कई दिनों से घूम रहे एक बाईस वर्षीय विक्षिप्त युवक को ग्रामीणों ने देखा तो इसकी सूचना पीआरबी पुलिस को दी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पीआरबी नौ सौ तैंतालीस पर तैनात हेड कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार कुशवाहा जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे। विक्षिप्त युवक को कुमारगंज थाने ले गए। जहां पर पुलिस ने युवक को मुंह धुलाते हुए चाय पानी पिला कर जब उससे उसके निवास स्थान के बारे में पूछताछ शुरू की, तो युवक ने अपना नाम सुनील कुमार पुत्र सहदुल सरोज निवासी बहोरापुर पोस्ट मगरावां थाना गम्भीरपुर जनपद आजमगढ बताया। तब ऑपरेशन मुस्कान के तहत कुमारगंज थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजाराम व मुंशी दीपक कुमार पटेल युवक के परिजनों से सम्पर्क कर कुमारगंज थाने बुलाया गया। जानकारी मिलने के बाद पर झिन्नूप्रसाद पुत्र राजबली सरोज निवासी बहोरापुर पोस्ट मगरावां थाना गम्भीरपुर आजमगढ व उनके बडे़ पापा फेकन सरोज थाने पहुंच गए। उन्होंने उक्त विक्षिप्त व्यक्ति की पहचान करने के बाद पुलिस को बताया कि यह मेरा चचेरा भाई सुनील कुमार है। जो लगभग दो महीने से घर से लापता है। जिसका दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। जिस कारण घर से लापता हो गया था। पुलिस द्वारा मेरे भाई को खोजकर मेरे परिवार पर बहुत बड़ा एहसान किया गया है। जिसका एहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूल पाऊंगा। थानाध्यक्ष कुमारगंज वीर सिंह ने बताया कि तेधा गांव के पास घूम रहे बाईस वर्षीय विक्षिप्त युवक को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया और परिजन अपने साथ ले गए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Giridih : गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के मोतीलेदा गांव में ग्रामीणों ने तीन बच्चों के माता-पिता प्रेमी युगल को आपत्तिजनक हालात में दबोचा. महिला को उसके सास-ससुर के हवाले कर दिया. लेकिन पुरुष का सिर मुंडवाकर पूरे मोतीलेदा गांव में घुमाया गया. उसकी पिटायी भी की गयी.
जानकारी मिलने के बाद बेंगाबाद थाना प्रभारी प्रशांत कुमार पुलिस जवानों के साथ मोतीलेदा गांव पहुंचे और आरोपी को गिरफ्तार कर बेंगाबाद थाना ले आये.
पुलिस जब मामले की जानकारी लेने के लिए आरोपी महिला को लाने उसके ससुराल मोतीलेदा गांव पहुंची तो सास-ससुर ने महिला को डांट-फटकार कर उसके मायके भेज दिया. लिहाजा, मामले में अब तक आरोपी महिला का पक्ष सामने नहीं आ पाया है.
बताया जा रहा है कि गांव के तीन बच्चों की मां से मोतीलेदा गांव के ही एक व्यक्ति का कई दिनों से अफेयर चल रहा था. जानकारी के अनुसार जिस आरोपी को ग्रामीणों ने दबोचा, वह मोतीलेदा गांव का है. वह भी तीन बच्चों का पिता है. महिला का पति गुजरात के सूरत में रहकर काम करता है. महिला ससुराल में सास-ससुर के साथ रहती है.
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Giridih : गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के मोतीलेदा गांव में ग्रामीणों ने तीन बच्चों के माता-पिता प्रेमी युगल को आपत्तिजनक हालात में दबोचा. महिला को उसके सास-ससुर के हवाले कर दिया. लेकिन पुरुष का सिर मुंडवाकर पूरे मोतीलेदा गांव में घुमाया गया. उसकी पिटायी भी की गयी. जानकारी मिलने के बाद बेंगाबाद थाना प्रभारी प्रशांत कुमार पुलिस जवानों के साथ मोतीलेदा गांव पहुंचे और आरोपी को गिरफ्तार कर बेंगाबाद थाना ले आये. पुलिस जब मामले की जानकारी लेने के लिए आरोपी महिला को लाने उसके ससुराल मोतीलेदा गांव पहुंची तो सास-ससुर ने महिला को डांट-फटकार कर उसके मायके भेज दिया. लिहाजा, मामले में अब तक आरोपी महिला का पक्ष सामने नहीं आ पाया है. बताया जा रहा है कि गांव के तीन बच्चों की मां से मोतीलेदा गांव के ही एक व्यक्ति का कई दिनों से अफेयर चल रहा था. जानकारी के अनुसार जिस आरोपी को ग्रामीणों ने दबोचा, वह मोतीलेदा गांव का है. वह भी तीन बच्चों का पिता है. महिला का पति गुजरात के सूरत में रहकर काम करता है. महिला ससुराल में सास-ससुर के साथ रहती है.
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राज्य के नागरिक का अपनी सरकार की उन करतूतों के सम्बन्ध में नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए, जो क्यूबा और फिलीपाइन्स में हो रही है ? हबशियों के साथ में होने वाले व्यवहार और चीनियों के देश-निकाले के सम्बन्ध में क्या एक अमेरिकन के चित्त में यही भाव उत्पन्न नहीं होने चाहिएं ? अथवा इंग्लैण्ड का नागरिक अफीम-सम्बन्धी नीति और बोर लोगों के साथ होने वाले श्रमानुषिक व्यवहार के सम्बन्ध में अपनी सरकार के प्रति ऐसा ही भाव नहीं धारण कर सकता और उसे न करना चाहिए ? अथवा क्या फ्रांस का नागरिक फ्रांस की सरकार के सम्बन्ध में भी ऐसा ही भाव नहीं धारण कर सकता जिसने सैनिकवाद का हौ दिखाकर लोगों पर आतंक जमा रखा है ?
इसलिए सरकारों के नग्न स्वरूप को एक बार पहचान लेने पर कोई भी सच्चा मनुष्य, जो अपने देशवासी भाइयों की सेवा करना चाहता है, उसमें किसी प्रकार का कोई हिस्सा नहीं ले सकता। बशर्ते कि वह यह न मानता हो कि साधन की पवित्रता का प्रमाण साध्य की सिद्ध ही है । परन्तु ऐसे कार्य से किसी का उपकार नहीं हो सकता, न सेवकों का और न सेवितों का ।
बात बिलकुल सीधी है। सरकारकी अधीनता स्वीकार करके और उसके कानून की सहायता द्वारा आप लोगों के लिए अधिक स्वतंत्रता लेना चाहते हैं न ? परंतु लोगों की स्वतंत्रता और अधि
कार सरकार तथा सामान्यतया, शासक-समाज की सत्ता के विरोधी अनुपात में हैं। जितनी ही अधिक स्वतंत्रता और अधिकार लोगों को प्राप्त होंगे उतनी ही कम शक्ति और लाभ उनसे सरकार को होगा। और इस बात को सरकारें खूब अच्छी तरह जानती हैं । उनके हाथ में सत्ता होने के कारण वे लोगों को खूब आजादी के साथ मनमानी बातें
देती हैं और कुछ थोड़े से मामूली सुधार भी दे देती हैं, जिससे उनकी उंदारता का परिचय मिलता रहे । परंतु जिस समय कोई ऐसा आन्दोलन उठाया जाता है जिससे शासकों के विशेषाधिकार ही नहीं
वरन् उसका अस्तित्व ( हस्ती) भी खतरे में पड़ जाता है तो वे बलप्रयोग द्वारा इन आन्दोलनको दबाकर आन्दोलन करने वालों को फौरन गिरफ्तार कर लेते हैं। इसलिए सरकारी शासन की सहायता का, अथवा पार्लमेंट के द्वारा लोगों की सेवा करने के आपके सारे प्रयत्नों का परिणाम केवल यह होगा कि आप अपने इस कार्य से शासकों की शक्ति को भी अधिक बढ़ा देंगे और जितनी ही अधिक आप में इस काम की सच्ची लगन होगी उतना ही अधिक आप जानते हुए अथवा अनजान में इस शक्ति में भाग लेने के दोषी होंगे। यही बात उन लोगों के सम्बन्ध में है जो लोग वर्तमान शासन व्यवस्था के द्वारा जनता की सेवा करना चाहते हैं ।
यदि, इसके विपरीत आप उन सच्चे हृदय वाले लोगों में से हैं जो क्रान्तिकारी साम्यवादी आन्दोलनों के द्वारा राष्ट्र की सेवा करना चाहते हैं ( मनुष्य को कभी सन्तोष न देने वाले पार्थिव सुखोंके पीछे दौड़ने के लिए जो आदर्श प्रेरणा करता है उसकी तुच्छता के विषय में विशेष कहने की जरूरत नहीं) तो आपको उन साधनों पर भी विचार कर लेना चाहिए जो आपको अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए प्राप्त हैं । ये साधन सर्वप्रथम तो नीति विरुद्ध हैं, इनमें झूठ, दगाबाजी, जोर-जब्त और हत्या भरी पड़ी है; दूसरे इन साधनों से किसी भी प्रकार उद्देश्य की सिद्धि नहीं हो सकती। अपने अस्तित्व की रक्षा करने वाली सरकारों का बल और चौकन्नापन इस समय इतना ज्यादा है कि छल-कपट, धोखेबाजी अथवा सख्ती से उनका मिटना केवल असम्भव ही नहीं हैं वरन् ये चीजें उन्हें हिला तक नहीं सकतीं । जितने भी क्रान्तिकारी आन्दोलन किये जाते हैं उन सबके कारण सरकारों को यह बतलाने का फिर से मौका मिल जाता है कि उनका पशु-बल एक अच्छी चीज है । और इससे उनकी शक्ति और भी बढ़ जाती है ।
लेकिन अगर हम असम्भव बात को भी सम्भव मान लें अर्थात् यह मान लें कि हमारे समय में भी क्रान्तिकारी आन्दोलन को सफलता
प्राप्त हो सकती है, तो सबसे पहले, हम इस बात की आशा कैसे कर लें कि परम्परागत प्रथा के विरुद्ध एक शक्ति पर विजय प्राप्त करने वाली दूसरी शक्ति लोगों की स्वाधीनता को बढ़ा देगी और विजय प्राप्ति द्वारा उसने जिस शक्ति का स्थान ग्रहण किया है, उसकी अपेक्षा अधिक उदार और दयालु होगी ? दूसरे यदि सामान्य बुद्धि और अनुभव के विरुद्ध, यह भी सम्भव हो कि एक शक्ति को मिटाकर दूसरी शक्ति लोगों को ऐसी स्वतंत्रता प्रदान कर सकेगा जो जोवन की उन अवस्थाको स्थापित करने के लिए आवश्यक है, जिन्हें वे लिए अत्यधिक
लाभ-प्रद समझते है, तब तो हमें यह भी मान लेना होगा कि स्वार्थमय वैयक्तिक जीवन व्यतीत करने वाले लोग आपस में पहले की अपेक्षा वस्था उत्पन्न कर सकेंगे ।
हम मान लेते हैं कि डाहोमियों की एक महारानी उदार-से-उदार शासन की स्थापना करती है। वह परिश्रम के साधनों को राष्ट्रीय सम्पत्ति बनाने की बात को भी स्वीकार कर लेती है। फिर भी शासन का कार्य ठीक तरह से चलाने और परिश्रम के साधन किसी व्यक्तिविशेष को निजी सम्पत्ति न बनाये जा सकें इत्यादि बातों की देख-माल करने के लिए किसी-न-किसी को अपने हाथो में सत्ता तो लेनी ही पड़ेगी । परन्तु जिस समय तक ये लोग अपने-आपको डाहोमी समझते रहेंगे और उनके जीवनादर्श में कोई परिवर्तन न होगा, तब तक यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि - यद्यपि दूसरे ही रूप में क्यों न सही - थोड़े से डहोमी दूसरों के ऊपर वैसा ही अत्याचार और बल प्रयोग करते रहेंगे जैसा कि शासन व्यवस्था के अभाव में और परिश्रम के साधनों को बिना राष्ट्रीय सम्पत्ति बनाये किया जा सकता है। साम्यवादी ढंग परको संगठित करने से पहले डाहोमियों को चाहिए कि वे प्रजा-पीड़न और रक्तपात की तरफ से अपनी तबियत को खींच लें । ठीक यही बात यूरोप के लोगों के लिए भो आवश्यक है । हम चाहते हैं कि लोग एक-दूसरे को बिना कष्ट दिये और सताये
परस्पर प्रेम-मय जीवन व्यतीत कर सकें । पर यह पशु-बल अथवा किसी संस्था द्वारा नहीं किया जा सकता । उसके लिए तो ऐसी सुनीति- पूर्ण परिस्थितिकीकता है जिसके अनुसार लोग किसी के दबाव से नहीं, बल्कि अपने अन्तःकरण से ही दूसरों के प्रति वैसा व्यवहार करें जैसा कि वे चाहते हैं दूसरे लोग उनके साथ करें । यह असम्भव नहीं, ऐसे लोग अब भी मौजूद हैं । वे धार्मिक सम्प्रदाय के लोगों में विद्य मान हैं। ऐसे लोग वास्तव में पशु-बल द्वारा रक्षित कानून की सहायता नहीं लेते । वे बिना एक-दूसरे को कष्ट पहुंचाये अब भी संसार में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अतः इस समय हमारे ईसाई समाज का कर्त्तव्य स्पष्ट है । उन्हें चाहिए कि वे ईसा के सन्देश को संसार के कोने-कोने में पहुंचावें । ईसा का सन्देश यह नहीं है कि वर्तमानाचारी सरकारों की सत्ता को स्वीकार कर धर्म ग्रन्थों में लिखी कवायद रोज़ सुबह-शाम या हर रविवार मंत्रोच्चार के साथ करते जाओ । ईसाई धर्म यह करने का आदेश नहीं करता, न इसके प्रचार की जरूरत है कि
की शरण गहो, वह तुम्हें पापों से बचायेगा । प्रचार उन्हें इस बात का करना चाहिए कि लोग सरकारों के काम में कोई भाग न लें; उनकी सारी मांगों को अस्वीकार कर दें। क्योंकि ये सारी मांगें-- एकसिरे से लेकर दूसरे सिरे तक सच्चे ईसाई धर्म के सर्वथा विरुद्ध हैं। और यद बात ऐसी ही हो, तो यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि जो लोग अपने पड़ोसियों की सेवा करने के इच्छुक हैं, उन्हें अपनी शक्ति नवीन रूप से समाज-संगठन करने में नहीं, वरन् अपने तथा दूसरे लोगों के
में परिवर्तन करने और उसे शुद्ध एवं पवित्र बनाने में लगानी चाहिए । जिन लोगों का कार्यक्रम दूसरा है, वे प्रायः यह समझते हैं कि मनुष्यों के आचरण सम्बन्धी विश्वास और रहन-सहन के ढंग आदि में साथ-ही-साथ उन्नति होती है। परन्तु ऐसा ख्याल करके वे एक कार्य को कारण और कारण को अथवा उससे सम्बन्ध रखने वाली किसी बात को कार्य समझ बैठने की गलती करते हैं ।
मनुष्यों के चरित्र और जीवन-सिद्धान्तों में परिवर्तन होने से लोगों के रहन-सहन में अपने श्राप परिवर्तन हो जाता है; रहन-सहन के ढंग में परिवर्तन होने से मनुष्यों के चरित्र और जीवन सिद्धान्तों में कोई परिवर्तन नहीं होता । मनुष्यों को सुधारने का यह गलत तरीका है। इससे तो उलटा मनुष्य का ध्यान मिथ्या और कल्पित स्रोत की ओर कृष्ट हो जाता है। अतः लोगों के चरित्र और जीवन-सिद्धान्तों में परिवर्तन करने की प्राशा से उनके रहन-सहन के ढंग में परिवर्तन करना व्यर्थ है । इससे अपने निश्चित ध्येय की तरफ पहुंचने की बजाय हम अनजान में दूसरी ही तरफ भटक जावेंगे ।
यह बात बिलकुल साफ है । फिर भी लोग गलती कर जाते हैं । इसलिए कि अपना सुधार करने की अपेक्षा पशु-बल की सहायता से दूसरों को मजबूरन अपनी इच्छा के अनुकूल झुका लेना कुछ प्रासान है । और इसका प्रभाव भी वैसा ही भ्रमोत्पादक है ।
परन्तु प्यारे सुधारको, अगर तुम सच्चा सुधार चाहते हो तो इस गलती से बचना । नहीं तो तुम्हारा सारा त्याग, सारा बलिदान और तुम्हारा सारा कार्य मिट्टी हो जायगा जिसके लिए तुम अपने प्राणों की भी पर्वाह नहीं करते ।
लोग कुछ सच्चे और कुछ बनावटी क्रोध में आकर कहते हैं"लेकिन जब हम देखते देखते हैं कि हमारे चारों श्रोर लोग दुःख से पीड़ित हैं और नाना प्रकार के कष्ट भोग रहे हैं, तो शान्ति के साथ ईसाई धर्म का उपदेश और प्रचार करने से हमारी आत्मा को सन्तोष नहीं होता । हम बहुत जल्दी उनकी सेवा करना चाहते हैं। इसके लिए हम अपने परिश्रम का, यहां तक कि अपने जीवन तक का बलिदान करने को तैयार हैं।"
इन लोगों को मेरा उत्तर यह होगा कि तुम कैसे जानते हो कि तुम्हें ठीक उसी तरीके से लोगों की सेवा करने की प्रज्ञा मिली है जिसे
तुम सबसे अधिक उपयोगी और व्यवहार्य समझते हो ? जो कुछ तुम कहते हो, उससे तो सिर्फ इतना पता चलता है कि तुम यह बात पहले से ही तय कर चुके हो कि धर्म के अनुसार जीवन व्यतीत करते हुए तुम मनुष्य समाज की सेवा नहीं कर सकते, तुमने तो मानो निश्चय कर रखा है कि सच्ची सेवा उस राजनीतिक कार्य द्वारा ही हो सकती है जो तुम्हें सबसे अधिक करता है 1
सभी राजनीतिज्ञ इसी तरह सोचते हैं और उन सबकी बातें परस्पर एक-दूसरे के विरुद्ध है और इसलिए यह बात निश्चय है कि वे सभी सही नहीं हो सकते । क्या ही अच्छा होता यदि प्रत्येक मनुष्य अपनी इच्छानुसार जिस प्रकार चाहता, लोगों की सेवा कर सकता ? ? पर बात ऐसी नहीं है। लोगों की सेवा करने और उनकी दशा सुधारने का केवल एक ही उपाय है । यह उपाय है उस शिक्षा का उपदेश करना और उसके अनुसार कार्य करना जिससे मनुष्य में अपने आपको सुधारने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। एक सच्चा धार्मिक पुरुष, जो हमेशा मनुष्यों के बीच में रहता है; उनसे द्वोष नहीं करता, त् अपनी शुद्धि इसी में समझता है कि वह अपने तथा दूसरे लोगों के बीच उत्तम अधिकाधिक प्रेममय सम्बन्ध स्थापित करे। मनुष्यों में प्रेम-पूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो जाने से उनकी साधारण अवस्था का अश्य सुधार होगा, यद्यपि इस उन्नति का रूप लोगों पर प्रकट ही रहता है ।
यह सच है कि सरकारी पार्लमेण्ट अथवा क्रान्तिकारी आन्दोलनों द्वारा लोगों की सेवा करने में हम पहले से ही उस फल का अनुमान कर सकते हैं जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं, और साथ ही इसके श्रानन्द और विलासिता पूर्ण जीवन की समस्त सुविधाओं से लाभ उठा सकते हैं, और भारी ख्याति, लोगों की स्वीकृति और अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। यदि उन लोगों को, जो ऐसे कामों में हिस्सा लेते हैं, किसी समय कष्ट भी उठाना पड़ता है, तो लोग उस विजय की आशा से उसे भुला देते हैं जो कि वे सोचते हैं, उन्हें मिलेगी ।
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राज्य के नागरिक का अपनी सरकार की उन करतूतों के सम्बन्ध में नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए, जो क्यूबा और फिलीपाइन्स में हो रही है ? हबशियों के साथ में होने वाले व्यवहार और चीनियों के देश-निकाले के सम्बन्ध में क्या एक अमेरिकन के चित्त में यही भाव उत्पन्न नहीं होने चाहिएं ? अथवा इंग्लैण्ड का नागरिक अफीम-सम्बन्धी नीति और बोर लोगों के साथ होने वाले श्रमानुषिक व्यवहार के सम्बन्ध में अपनी सरकार के प्रति ऐसा ही भाव नहीं धारण कर सकता और उसे न करना चाहिए ? अथवा क्या फ्रांस का नागरिक फ्रांस की सरकार के सम्बन्ध में भी ऐसा ही भाव नहीं धारण कर सकता जिसने सैनिकवाद का हौ दिखाकर लोगों पर आतंक जमा रखा है ? इसलिए सरकारों के नग्न स्वरूप को एक बार पहचान लेने पर कोई भी सच्चा मनुष्य, जो अपने देशवासी भाइयों की सेवा करना चाहता है, उसमें किसी प्रकार का कोई हिस्सा नहीं ले सकता। बशर्ते कि वह यह न मानता हो कि साधन की पवित्रता का प्रमाण साध्य की सिद्ध ही है । परन्तु ऐसे कार्य से किसी का उपकार नहीं हो सकता, न सेवकों का और न सेवितों का । बात बिलकुल सीधी है। सरकारकी अधीनता स्वीकार करके और उसके कानून की सहायता द्वारा आप लोगों के लिए अधिक स्वतंत्रता लेना चाहते हैं न ? परंतु लोगों की स्वतंत्रता और अधि कार सरकार तथा सामान्यतया, शासक-समाज की सत्ता के विरोधी अनुपात में हैं। जितनी ही अधिक स्वतंत्रता और अधिकार लोगों को प्राप्त होंगे उतनी ही कम शक्ति और लाभ उनसे सरकार को होगा। और इस बात को सरकारें खूब अच्छी तरह जानती हैं । उनके हाथ में सत्ता होने के कारण वे लोगों को खूब आजादी के साथ मनमानी बातें देती हैं और कुछ थोड़े से मामूली सुधार भी दे देती हैं, जिससे उनकी उंदारता का परिचय मिलता रहे । परंतु जिस समय कोई ऐसा आन्दोलन उठाया जाता है जिससे शासकों के विशेषाधिकार ही नहीं वरन् उसका अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाता है तो वे बलप्रयोग द्वारा इन आन्दोलनको दबाकर आन्दोलन करने वालों को फौरन गिरफ्तार कर लेते हैं। इसलिए सरकारी शासन की सहायता का, अथवा पार्लमेंट के द्वारा लोगों की सेवा करने के आपके सारे प्रयत्नों का परिणाम केवल यह होगा कि आप अपने इस कार्य से शासकों की शक्ति को भी अधिक बढ़ा देंगे और जितनी ही अधिक आप में इस काम की सच्ची लगन होगी उतना ही अधिक आप जानते हुए अथवा अनजान में इस शक्ति में भाग लेने के दोषी होंगे। यही बात उन लोगों के सम्बन्ध में है जो लोग वर्तमान शासन व्यवस्था के द्वारा जनता की सेवा करना चाहते हैं । यदि, इसके विपरीत आप उन सच्चे हृदय वाले लोगों में से हैं जो क्रान्तिकारी साम्यवादी आन्दोलनों के द्वारा राष्ट्र की सेवा करना चाहते हैं तो आपको उन साधनों पर भी विचार कर लेना चाहिए जो आपको अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए प्राप्त हैं । ये साधन सर्वप्रथम तो नीति विरुद्ध हैं, इनमें झूठ, दगाबाजी, जोर-जब्त और हत्या भरी पड़ी है; दूसरे इन साधनों से किसी भी प्रकार उद्देश्य की सिद्धि नहीं हो सकती। अपने अस्तित्व की रक्षा करने वाली सरकारों का बल और चौकन्नापन इस समय इतना ज्यादा है कि छल-कपट, धोखेबाजी अथवा सख्ती से उनका मिटना केवल असम्भव ही नहीं हैं वरन् ये चीजें उन्हें हिला तक नहीं सकतीं । जितने भी क्रान्तिकारी आन्दोलन किये जाते हैं उन सबके कारण सरकारों को यह बतलाने का फिर से मौका मिल जाता है कि उनका पशु-बल एक अच्छी चीज है । और इससे उनकी शक्ति और भी बढ़ जाती है । लेकिन अगर हम असम्भव बात को भी सम्भव मान लें अर्थात् यह मान लें कि हमारे समय में भी क्रान्तिकारी आन्दोलन को सफलता प्राप्त हो सकती है, तो सबसे पहले, हम इस बात की आशा कैसे कर लें कि परम्परागत प्रथा के विरुद्ध एक शक्ति पर विजय प्राप्त करने वाली दूसरी शक्ति लोगों की स्वाधीनता को बढ़ा देगी और विजय प्राप्ति द्वारा उसने जिस शक्ति का स्थान ग्रहण किया है, उसकी अपेक्षा अधिक उदार और दयालु होगी ? दूसरे यदि सामान्य बुद्धि और अनुभव के विरुद्ध, यह भी सम्भव हो कि एक शक्ति को मिटाकर दूसरी शक्ति लोगों को ऐसी स्वतंत्रता प्रदान कर सकेगा जो जोवन की उन अवस्थाको स्थापित करने के लिए आवश्यक है, जिन्हें वे लिए अत्यधिक लाभ-प्रद समझते है, तब तो हमें यह भी मान लेना होगा कि स्वार्थमय वैयक्तिक जीवन व्यतीत करने वाले लोग आपस में पहले की अपेक्षा वस्था उत्पन्न कर सकेंगे । हम मान लेते हैं कि डाहोमियों की एक महारानी उदार-से-उदार शासन की स्थापना करती है। वह परिश्रम के साधनों को राष्ट्रीय सम्पत्ति बनाने की बात को भी स्वीकार कर लेती है। फिर भी शासन का कार्य ठीक तरह से चलाने और परिश्रम के साधन किसी व्यक्तिविशेष को निजी सम्पत्ति न बनाये जा सकें इत्यादि बातों की देख-माल करने के लिए किसी-न-किसी को अपने हाथो में सत्ता तो लेनी ही पड़ेगी । परन्तु जिस समय तक ये लोग अपने-आपको डाहोमी समझते रहेंगे और उनके जीवनादर्श में कोई परिवर्तन न होगा, तब तक यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि - यद्यपि दूसरे ही रूप में क्यों न सही - थोड़े से डहोमी दूसरों के ऊपर वैसा ही अत्याचार और बल प्रयोग करते रहेंगे जैसा कि शासन व्यवस्था के अभाव में और परिश्रम के साधनों को बिना राष्ट्रीय सम्पत्ति बनाये किया जा सकता है। साम्यवादी ढंग परको संगठित करने से पहले डाहोमियों को चाहिए कि वे प्रजा-पीड़न और रक्तपात की तरफ से अपनी तबियत को खींच लें । ठीक यही बात यूरोप के लोगों के लिए भो आवश्यक है । हम चाहते हैं कि लोग एक-दूसरे को बिना कष्ट दिये और सताये परस्पर प्रेम-मय जीवन व्यतीत कर सकें । पर यह पशु-बल अथवा किसी संस्था द्वारा नहीं किया जा सकता । उसके लिए तो ऐसी सुनीति- पूर्ण परिस्थितिकीकता है जिसके अनुसार लोग किसी के दबाव से नहीं, बल्कि अपने अन्तःकरण से ही दूसरों के प्रति वैसा व्यवहार करें जैसा कि वे चाहते हैं दूसरे लोग उनके साथ करें । यह असम्भव नहीं, ऐसे लोग अब भी मौजूद हैं । वे धार्मिक सम्प्रदाय के लोगों में विद्य मान हैं। ऐसे लोग वास्तव में पशु-बल द्वारा रक्षित कानून की सहायता नहीं लेते । वे बिना एक-दूसरे को कष्ट पहुंचाये अब भी संसार में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अतः इस समय हमारे ईसाई समाज का कर्त्तव्य स्पष्ट है । उन्हें चाहिए कि वे ईसा के सन्देश को संसार के कोने-कोने में पहुंचावें । ईसा का सन्देश यह नहीं है कि वर्तमानाचारी सरकारों की सत्ता को स्वीकार कर धर्म ग्रन्थों में लिखी कवायद रोज़ सुबह-शाम या हर रविवार मंत्रोच्चार के साथ करते जाओ । ईसाई धर्म यह करने का आदेश नहीं करता, न इसके प्रचार की जरूरत है कि की शरण गहो, वह तुम्हें पापों से बचायेगा । प्रचार उन्हें इस बात का करना चाहिए कि लोग सरकारों के काम में कोई भाग न लें; उनकी सारी मांगों को अस्वीकार कर दें। क्योंकि ये सारी मांगें-- एकसिरे से लेकर दूसरे सिरे तक सच्चे ईसाई धर्म के सर्वथा विरुद्ध हैं। और यद बात ऐसी ही हो, तो यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि जो लोग अपने पड़ोसियों की सेवा करने के इच्छुक हैं, उन्हें अपनी शक्ति नवीन रूप से समाज-संगठन करने में नहीं, वरन् अपने तथा दूसरे लोगों के में परिवर्तन करने और उसे शुद्ध एवं पवित्र बनाने में लगानी चाहिए । जिन लोगों का कार्यक्रम दूसरा है, वे प्रायः यह समझते हैं कि मनुष्यों के आचरण सम्बन्धी विश्वास और रहन-सहन के ढंग आदि में साथ-ही-साथ उन्नति होती है। परन्तु ऐसा ख्याल करके वे एक कार्य को कारण और कारण को अथवा उससे सम्बन्ध रखने वाली किसी बात को कार्य समझ बैठने की गलती करते हैं । मनुष्यों के चरित्र और जीवन-सिद्धान्तों में परिवर्तन होने से लोगों के रहन-सहन में अपने श्राप परिवर्तन हो जाता है; रहन-सहन के ढंग में परिवर्तन होने से मनुष्यों के चरित्र और जीवन सिद्धान्तों में कोई परिवर्तन नहीं होता । मनुष्यों को सुधारने का यह गलत तरीका है। इससे तो उलटा मनुष्य का ध्यान मिथ्या और कल्पित स्रोत की ओर कृष्ट हो जाता है। अतः लोगों के चरित्र और जीवन-सिद्धान्तों में परिवर्तन करने की प्राशा से उनके रहन-सहन के ढंग में परिवर्तन करना व्यर्थ है । इससे अपने निश्चित ध्येय की तरफ पहुंचने की बजाय हम अनजान में दूसरी ही तरफ भटक जावेंगे । यह बात बिलकुल साफ है । फिर भी लोग गलती कर जाते हैं । इसलिए कि अपना सुधार करने की अपेक्षा पशु-बल की सहायता से दूसरों को मजबूरन अपनी इच्छा के अनुकूल झुका लेना कुछ प्रासान है । और इसका प्रभाव भी वैसा ही भ्रमोत्पादक है । परन्तु प्यारे सुधारको, अगर तुम सच्चा सुधार चाहते हो तो इस गलती से बचना । नहीं तो तुम्हारा सारा त्याग, सारा बलिदान और तुम्हारा सारा कार्य मिट्टी हो जायगा जिसके लिए तुम अपने प्राणों की भी पर्वाह नहीं करते । लोग कुछ सच्चे और कुछ बनावटी क्रोध में आकर कहते हैं"लेकिन जब हम देखते देखते हैं कि हमारे चारों श्रोर लोग दुःख से पीड़ित हैं और नाना प्रकार के कष्ट भोग रहे हैं, तो शान्ति के साथ ईसाई धर्म का उपदेश और प्रचार करने से हमारी आत्मा को सन्तोष नहीं होता । हम बहुत जल्दी उनकी सेवा करना चाहते हैं। इसके लिए हम अपने परिश्रम का, यहां तक कि अपने जीवन तक का बलिदान करने को तैयार हैं।" इन लोगों को मेरा उत्तर यह होगा कि तुम कैसे जानते हो कि तुम्हें ठीक उसी तरीके से लोगों की सेवा करने की प्रज्ञा मिली है जिसे तुम सबसे अधिक उपयोगी और व्यवहार्य समझते हो ? जो कुछ तुम कहते हो, उससे तो सिर्फ इतना पता चलता है कि तुम यह बात पहले से ही तय कर चुके हो कि धर्म के अनुसार जीवन व्यतीत करते हुए तुम मनुष्य समाज की सेवा नहीं कर सकते, तुमने तो मानो निश्चय कर रखा है कि सच्ची सेवा उस राजनीतिक कार्य द्वारा ही हो सकती है जो तुम्हें सबसे अधिक करता है एक सभी राजनीतिज्ञ इसी तरह सोचते हैं और उन सबकी बातें परस्पर एक-दूसरे के विरुद्ध है और इसलिए यह बात निश्चय है कि वे सभी सही नहीं हो सकते । क्या ही अच्छा होता यदि प्रत्येक मनुष्य अपनी इच्छानुसार जिस प्रकार चाहता, लोगों की सेवा कर सकता ? ? पर बात ऐसी नहीं है। लोगों की सेवा करने और उनकी दशा सुधारने का केवल एक ही उपाय है । यह उपाय है उस शिक्षा का उपदेश करना और उसके अनुसार कार्य करना जिससे मनुष्य में अपने आपको सुधारने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। एक सच्चा धार्मिक पुरुष, जो हमेशा मनुष्यों के बीच में रहता है; उनसे द्वोष नहीं करता, त् अपनी शुद्धि इसी में समझता है कि वह अपने तथा दूसरे लोगों के बीच उत्तम अधिकाधिक प्रेममय सम्बन्ध स्थापित करे। मनुष्यों में प्रेम-पूर्ण सम्बन्ध स्थापित हो जाने से उनकी साधारण अवस्था का अश्य सुधार होगा, यद्यपि इस उन्नति का रूप लोगों पर प्रकट ही रहता है । यह सच है कि सरकारी पार्लमेण्ट अथवा क्रान्तिकारी आन्दोलनों द्वारा लोगों की सेवा करने में हम पहले से ही उस फल का अनुमान कर सकते हैं जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं, और साथ ही इसके श्रानन्द और विलासिता पूर्ण जीवन की समस्त सुविधाओं से लाभ उठा सकते हैं, और भारी ख्याति, लोगों की स्वीकृति और अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। यदि उन लोगों को, जो ऐसे कामों में हिस्सा लेते हैं, किसी समय कष्ट भी उठाना पड़ता है, तो लोग उस विजय की आशा से उसे भुला देते हैं जो कि वे सोचते हैं, उन्हें मिलेगी ।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें।
बिहार में भागलपुर के काजवलीचक में हुए बम धमाके की गूंज ने नींद में सोए शहरवासियों के होश उड़ा दिए। आसपास के एक दर्जन मोहल्ले के 10 हजार घरों ने धमाके की आवाज सुनी और लोग दहशत में आ गए। करीब एक लाख लोगों की नींद टूट गई। धमाके की गूंज इतनी अधिक थी कि नींद में सोए लोग घरों से बाहर निकलने लगे। विक्रमशिला कॉलोनी, रामसर, उर्दू बाजार, बिजली चक मुहल्ले के बच्चे जग गए और घरों में रोने लग गए।
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शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। बिहार में भागलपुर के काजवलीचक में हुए बम धमाके की गूंज ने नींद में सोए शहरवासियों के होश उड़ा दिए। आसपास के एक दर्जन मोहल्ले के दस हजार घरों ने धमाके की आवाज सुनी और लोग दहशत में आ गए। करीब एक लाख लोगों की नींद टूट गई। धमाके की गूंज इतनी अधिक थी कि नींद में सोए लोग घरों से बाहर निकलने लगे। विक्रमशिला कॉलोनी, रामसर, उर्दू बाजार, बिजली चक मुहल्ले के बच्चे जग गए और घरों में रोने लग गए।
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मेघालय में चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है। यहां कम से कम 34 विधानसभा क्षेत्रों की खर्च के लिहाज से संवेदनशील के तौर पर पहचान की गई है। इन सीटों की कड़ी निगरानी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) एफआर खारकोंगोर ने गुरुवार को बताया कि मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 फरवरी को मतदान होगा। नतीजे दो मार्च को आएंगे।
खारकोंगोर ने बताया कि हमें रिपोर्ट मिली है कि राज्य भर में कम से कम 34 विधानसभा क्षेत्रों में धन के बहुत अधिक उपयोग की संभावना है। यहां सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 747 मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील हैं, जबकि 399 मतदान केंद्रों की पहचान विभिन्न कारणों से संवेदनशील के रूप में की गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 120 कंपनियां तैनात की जाएंगी।
वैध दस्तावेजों के बिना 50,000 रुपये से अधिक की नकदी या सोना या चांदी ले जाना, दीवार पर लिखावट, पोस्टर या कागज चिपकाना या अधिकारियों की अनुमति के बिना कट-आउट और बैनर प्रदर्शित करना पश्चिम खासी हिल्स जिले में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण प्रतिबंधित है।
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मेघालय में चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है। यहां कम से कम चौंतीस विधानसभा क्षेत्रों की खर्च के लिहाज से संवेदनशील के तौर पर पहचान की गई है। इन सीटों की कड़ी निगरानी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एफआर खारकोंगोर ने गुरुवार को बताया कि मेघालय की साठ सदस्यीय विधानसभा के लिए सत्ताईस फरवरी को मतदान होगा। नतीजे दो मार्च को आएंगे। खारकोंगोर ने बताया कि हमें रिपोर्ट मिली है कि राज्य भर में कम से कम चौंतीस विधानसभा क्षेत्रों में धन के बहुत अधिक उपयोग की संभावना है। यहां सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सात सौ सैंतालीस मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील हैं, जबकि तीन सौ निन्यानवे मतदान केंद्रों की पहचान विभिन्न कारणों से संवेदनशील के रूप में की गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की एक सौ बीस कंपनियां तैनात की जाएंगी। वैध दस्तावेजों के बिना पचास,शून्य रुपयापये से अधिक की नकदी या सोना या चांदी ले जाना, दीवार पर लिखावट, पोस्टर या कागज चिपकाना या अधिकारियों की अनुमति के बिना कट-आउट और बैनर प्रदर्शित करना पश्चिम खासी हिल्स जिले में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण प्रतिबंधित है।
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कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) और विक्की कौशल (Vicky Kaushal) दोनों शादी के बंधन में बंधने के लिए तैयार हैं। जैसे-जैसे शादी की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे कपल की शादी को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अब आखिरकार दोनों की शादी की डेट सामने आ गई है। बता दें कि 9 दिसंबर को कैटरीना और विक्की शादी के बंधन में बंधेगे।
दोनों राजस्थान के 700 साल पुराने किले सिक्स सेंसेस फोर्ट बरवाड़ा (Rjasthan Fort) में हिंदु रीतिरीवाज से शादी करेंगे एक्ट्रेस के एक करीबी सूत्र ने बताया है कि 7 दिसंबर को इस कपल की संगीत सेरेमनी और 8 दिसंबर को मेहंदी की रसम होने वाली हैं। उसके बाद 9 को दोनों सात फेरे लेगें।
कैटरीना के ड्रेस की बात करे तो वह मनीष मल्होत्रा (Manish Malhotra) का डिजाइन किया ड्रेस पहनेंगी, और मेहंदी में डिजाइनर अबू जानी (Abu Jaani) और अपने रिसेप्शन में वह गूची ब्रांड (Gucci) का ड्रेस पहनेंगी।
अब एक और खबर सूत्रों के मुताबिक सामने आ रही है कि विक्की और कैटरीना विवाह स्थल पर मेहमानों के लिए नो-मोबाइल डिक्टेट लागू करेंगे। इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कोई भी फोटो या वीडियो उनकी जानकारी के बिना सोशल मीडिया पर न आए। अंदरूनी सूत्र का कहना है, कि "यह उन दोनों के लिए एक बड़ा दिन है, इसलिए यह स्पष्ट है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कि कोई ऐसी स्थिति न हो जहां सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो को बिना जाने उन्हें लीक किया जा रहा हो।
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कैटरीना कैफ और विक्की कौशल दोनों शादी के बंधन में बंधने के लिए तैयार हैं। जैसे-जैसे शादी की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे कपल की शादी को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अब आखिरकार दोनों की शादी की डेट सामने आ गई है। बता दें कि नौ दिसंबर को कैटरीना और विक्की शादी के बंधन में बंधेगे। दोनों राजस्थान के सात सौ साल पुराने किले सिक्स सेंसेस फोर्ट बरवाड़ा में हिंदु रीतिरीवाज से शादी करेंगे एक्ट्रेस के एक करीबी सूत्र ने बताया है कि सात दिसंबर को इस कपल की संगीत सेरेमनी और आठ दिसंबर को मेहंदी की रसम होने वाली हैं। उसके बाद नौ को दोनों सात फेरे लेगें। कैटरीना के ड्रेस की बात करे तो वह मनीष मल्होत्रा का डिजाइन किया ड्रेस पहनेंगी, और मेहंदी में डिजाइनर अबू जानी और अपने रिसेप्शन में वह गूची ब्रांड का ड्रेस पहनेंगी। अब एक और खबर सूत्रों के मुताबिक सामने आ रही है कि विक्की और कैटरीना विवाह स्थल पर मेहमानों के लिए नो-मोबाइल डिक्टेट लागू करेंगे। इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कोई भी फोटो या वीडियो उनकी जानकारी के बिना सोशल मीडिया पर न आए। अंदरूनी सूत्र का कहना है, कि "यह उन दोनों के लिए एक बड़ा दिन है, इसलिए यह स्पष्ट है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कि कोई ऐसी स्थिति न हो जहां सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो को बिना जाने उन्हें लीक किया जा रहा हो।
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आजकल के डिजिटल वर्ल्ड में लगातार सभी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स स्मार्ट होते जा रहे हैं। अब मार्केट में स्मार्ट बल्ब भी उपलब्ध हैं, इन्हें बोलकर बंद या चालू किया जा सकता है। स्मार्ट बल्ब को अपने फोन से भी कनेक्ट किया जा सकता है। इस रिपोर्ट में हम आपको भारत में बिकने वाले टॉप-5 स्मार्ट बल्ब के बारे में बताएंगे। इन स्मार्ट बल्ब पर अमेजन पर शानदार ऑफर्स भी मिल रहा है। आइए जानते हैं।
एमआई के इस बल्ब की क्षमता 9W की है और इसकी ब्राइटनेस 105 ल्यूमेंस है। इस बल्ब को 649 रुपये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। इसमें 16 मिलियन कलर्स और 11 साल लॉन्ग लाइफ मिलती है। इस बल्ब को एमआई होम एप से कंट्रोल किया जा सकता है। यह एप आईओएस और एंड्रॉयड दोनों के लिए काम करता है। इस बल्ब को बोलकर भी कंट्रोल किया जा सकता है। बल्ब में गूगल असिस्टेंट और एलेक्सा जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है।
Halonix Prime Prizm स्मार्ट बल्ब की क्षमता 12W की है। इसकी अमेजन पर कीमत 694 रुपये है। इस बल्ब में वाई-फाई और अमेजन एलेक्सा के साथ गूगल असिस्टेंट का भी सपोर्ट है। इसे फोन और टैबलेट से कंट्रोल किया जा सकता है। यह बल्ब एलेक्सा के साथ हिंदी कमांड भी समझ लेता है। बल्ब के साथ 16 मिलियन कलर्स का सपोर्ट है।
MI Smart LED Bulb के साथ 7. 5W की क्षमता और 108 ल्यूमेंस की ब्राइटनेस मिलती है। बल्ब में गूगल असिस्टेंट और एलेक्सा जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है। MI Smart LED Bulb को एमआई होम एप से कंट्रोल किया जा सकता है। शाओमी के बल्ब की लाइफ को लेकर 15,000 घंटे का दावा है। बल्ब को अमेजन से 500 रुपये की कीमत पर खरीदा जा सकता है।
स्मार्ट बल्ब के साथ 9W की क्षमता और 16 मिलियन कलर्स का सपोर्ट है। बल्ब को अमेजन एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है। बल्ब के साथ म्यूजिक सिंक कंपैटिबल का सपोर्ट भी है। बल्ब की ब्राइटनेस को भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ दो साल की वारंटी भी मिलती है। अमेजन पर wipro Wi-Fi Smart LED Bulb को 635 रुपये की कीमत पर खरीदा जा सकता है।
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आजकल के डिजिटल वर्ल्ड में लगातार सभी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स स्मार्ट होते जा रहे हैं। अब मार्केट में स्मार्ट बल्ब भी उपलब्ध हैं, इन्हें बोलकर बंद या चालू किया जा सकता है। स्मार्ट बल्ब को अपने फोन से भी कनेक्ट किया जा सकता है। इस रिपोर्ट में हम आपको भारत में बिकने वाले टॉप-पाँच स्मार्ट बल्ब के बारे में बताएंगे। इन स्मार्ट बल्ब पर अमेजन पर शानदार ऑफर्स भी मिल रहा है। आइए जानते हैं। एमआई के इस बल्ब की क्षमता नौ वाट की है और इसकी ब्राइटनेस एक सौ पाँच ल्यूमेंस है। इस बल्ब को छः सौ उनचास रुपयापये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। इसमें सोलह मिलियन कलर्स और ग्यारह साल लॉन्ग लाइफ मिलती है। इस बल्ब को एमआई होम एप से कंट्रोल किया जा सकता है। यह एप आईओएस और एंड्रॉयड दोनों के लिए काम करता है। इस बल्ब को बोलकर भी कंट्रोल किया जा सकता है। बल्ब में गूगल असिस्टेंट और एलेक्सा जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है। Halonix Prime Prizm स्मार्ट बल्ब की क्षमता बारह वाट की है। इसकी अमेजन पर कीमत छः सौ चौरानवे रुपयापये है। इस बल्ब में वाई-फाई और अमेजन एलेक्सा के साथ गूगल असिस्टेंट का भी सपोर्ट है। इसे फोन और टैबलेट से कंट्रोल किया जा सकता है। यह बल्ब एलेक्सा के साथ हिंदी कमांड भी समझ लेता है। बल्ब के साथ सोलह मिलियन कलर्स का सपोर्ट है। MI Smart LED Bulb के साथ सात. पाँच वाट की क्षमता और एक सौ आठ ल्यूमेंस की ब्राइटनेस मिलती है। बल्ब में गूगल असिस्टेंट और एलेक्सा जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है। MI Smart LED Bulb को एमआई होम एप से कंट्रोल किया जा सकता है। शाओमी के बल्ब की लाइफ को लेकर पंद्रह,शून्य घंटाटे का दावा है। बल्ब को अमेजन से पाँच सौ रुपयापये की कीमत पर खरीदा जा सकता है। स्मार्ट बल्ब के साथ नौ वाट की क्षमता और सोलह मिलियन कलर्स का सपोर्ट है। बल्ब को अमेजन एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट जैसे वॉयस असिस्टेंट का भी सपोर्ट दिया गया है। बल्ब के साथ म्यूजिक सिंक कंपैटिबल का सपोर्ट भी है। बल्ब की ब्राइटनेस को भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ दो साल की वारंटी भी मिलती है। अमेजन पर wipro Wi-Fi Smart LED Bulb को छः सौ पैंतीस रुपयापये की कीमत पर खरीदा जा सकता है।
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किसी एनआरआई के लिए भारत जान से प्यारा है या भारत में जान प्यारी है?
इस दौरान केन्द्रीय हिन्दी संस्थान दिल्ली के सेवानिवृत निदेशक प्रोफेसर महावीर सरन जैन ने कहा कि भारत 22 परिगणित भाषाओं का देश हैं। लेकिन हिन्दी की एकतरफा बोधगम्य उपभाषाओं के माध्यम से भारत के नागरिक हिन्दी में संवाद करते हैं।
श्रीलंका हमारी मां है और हम अपनी मां की रक्षा करेंगे, समय-समय पर राक्षस पैदा हो जाते हैं, उनसे हम अपनी मां को बचाएँगे। हमारे लोगों में सिंह का खून है, अब यह खून ललकार रहा है। यह कहना है अतिला कोतलावल का।
कोटा से स्नातक की पढ़ाई, जर्मनी से स्नातकोत्तर और सिंगापुर में निवास, इतने विविध प्रांतों-देशों की यात्रा करने वाली शार्दुला जी जब इंदौर आती हैं तो मालवा की मिठास उनकी आमद से और भी दुगुनी हो जाती है।
अमेरिका की स्टेट नॉर्थ कैरोलाइना के शार्लिट शहर के 'साहित्य संगम' ग्रुप की पहली कविता गोष्ठी की रिपोर्ट यहां पेश की जा रही है।
ढींगरा फैमिली फाउंडेशन (Dhingra Family Foundation, USA) अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान (International Story Poetry Award by Shivna Prakashan) घोषित कर दिए हैं।
इस सम्मान में छह महिला कवयित्री लेखक और कथाकार को शामिल किया गया है। इनमें से एक लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार भी है।
ढींगरा फैमिली फाउंडेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं।
डॉ. पद्मेश गुप्त 2007 से ऑक्सफ़ोर्ड में ऑक्सफ़ोर्ड बिजनेस कॉलेज के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। आप हिन्दी भाषा के विकास को लेकर पूरे दमखम के साथ लगे हुए हैं।
भारत से बाहर नए देश में, नए परिवेश में, नए वातावरण में, नई भाषा में, नई संस्कृति, नए संस्कार, नए कानून, नए खानपान, वेशभूषा में जब भारत की संस्कृति विकसित होने लगती है, अपनी जगह बनाने लगती है, वह है प्रवासी संसार!
ओस्लो, नार्वे में नेलसन मंडेला की जन्मशती पर और गोपालदास नीरज जी की मृत्यु पर याद किए गए और श्रद्धांजलि दी गई।
लंदन के स्लोह सबर्ब में हिन्दी महोत्सव 2018 का हिन्दी शिक्षा और साधन पर सत्र तथा उत्सव का समापन समारोह संपन्न हुआ।
पहला दिन 'हिन्दी महोत्सव' का चौथा अध्याय और यूनाइटेड किंगडम के पहले अध्याय का उद्घाटन गत 28 जून 2018 को ऑक्सफोर्ड में किया गया।
भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 9 जनवरी के दिन 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है। महात्मा गांधी इसी दिन सन् 1915 में दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए थे।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यहां पहले दीपावाली 'पॉवर ऑफ वन' पुरस्कार से एक भारतीय महिला समेत छह शीर्ष राजनयिकों को सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार और अधिक 'आदर्श, शांतिपूर्ण और सुरक्षित' दुनिया बनाने में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया।
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किसी एनआरआई के लिए भारत जान से प्यारा है या भारत में जान प्यारी है? इस दौरान केन्द्रीय हिन्दी संस्थान दिल्ली के सेवानिवृत निदेशक प्रोफेसर महावीर सरन जैन ने कहा कि भारत बाईस परिगणित भाषाओं का देश हैं। लेकिन हिन्दी की एकतरफा बोधगम्य उपभाषाओं के माध्यम से भारत के नागरिक हिन्दी में संवाद करते हैं। श्रीलंका हमारी मां है और हम अपनी मां की रक्षा करेंगे, समय-समय पर राक्षस पैदा हो जाते हैं, उनसे हम अपनी मां को बचाएँगे। हमारे लोगों में सिंह का खून है, अब यह खून ललकार रहा है। यह कहना है अतिला कोतलावल का। कोटा से स्नातक की पढ़ाई, जर्मनी से स्नातकोत्तर और सिंगापुर में निवास, इतने विविध प्रांतों-देशों की यात्रा करने वाली शार्दुला जी जब इंदौर आती हैं तो मालवा की मिठास उनकी आमद से और भी दुगुनी हो जाती है। अमेरिका की स्टेट नॉर्थ कैरोलाइना के शार्लिट शहर के 'साहित्य संगम' ग्रुप की पहली कविता गोष्ठी की रिपोर्ट यहां पेश की जा रही है। ढींगरा फैमिली फाउंडेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं। इस सम्मान में छह महिला कवयित्री लेखक और कथाकार को शामिल किया गया है। इनमें से एक लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार भी है। ढींगरा फैमिली फाउंडेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं। डॉ. पद्मेश गुप्त दो हज़ार सात से ऑक्सफ़ोर्ड में ऑक्सफ़ोर्ड बिजनेस कॉलेज के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। आप हिन्दी भाषा के विकास को लेकर पूरे दमखम के साथ लगे हुए हैं। भारत से बाहर नए देश में, नए परिवेश में, नए वातावरण में, नई भाषा में, नई संस्कृति, नए संस्कार, नए कानून, नए खानपान, वेशभूषा में जब भारत की संस्कृति विकसित होने लगती है, अपनी जगह बनाने लगती है, वह है प्रवासी संसार! ओस्लो, नार्वे में नेलसन मंडेला की जन्मशती पर और गोपालदास नीरज जी की मृत्यु पर याद किए गए और श्रद्धांजलि दी गई। लंदन के स्लोह सबर्ब में हिन्दी महोत्सव दो हज़ार अट्ठारह का हिन्दी शिक्षा और साधन पर सत्र तथा उत्सव का समापन समारोह संपन्न हुआ। पहला दिन 'हिन्दी महोत्सव' का चौथा अध्याय और यूनाइटेड किंगडम के पहले अध्याय का उद्घाटन गत अट्ठाईस जून दो हज़ार अट्ठारह को ऑक्सफोर्ड में किया गया। भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष नौ जनवरी के दिन 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है। महात्मा गांधी इसी दिन सन् एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आए थे। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यहां पहले दीपावाली 'पॉवर ऑफ वन' पुरस्कार से एक भारतीय महिला समेत छह शीर्ष राजनयिकों को सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार और अधिक 'आदर्श, शांतिपूर्ण और सुरक्षित' दुनिया बनाने में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया।
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नाहन - पर्यावरण की स्वच्छता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जिला प्रशासन सिरमौर सात दिसंबर, 2019 को जिला के लगभग एक हजार ग्रीष्म अवकाश वाले स्कूलों में 'एक दिन स्कूल के नाम' से एक अनूठा अभियान शुरू करेगा, जिसके तहत छात्र पोलिथीन एकत्रित करेंगे और सूखा कचरा जिसका उपयोग सड़क निर्माण और पॉली ईंट बनाने के लिए किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत उपायुक्त सिरमौर डा. आरके परूथी द्वारा सात दिसंबर को प्रातः 10 बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मोगीनंद से करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि यह आठ दिवसीय अभियान दिसंबर, 2019 से मार्च, 2020 तक प्रत्येक पहले और चौथे शनिवार को लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत कूड़ा-कचरा फेंकने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाएगी और पर्यावरण की स्वच्छता के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस अभियान के तहत आगामी दिनों में जो लोग सड़कों व अपने आसपास के क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा फेंकते हुए पकड़े जाएंगे उनका चालान किया जाएगा। इसके अलावा पौधा रोपण या नवरतन थीम पार्क स्थापित करने के लिए भूमि की भी पहचान की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान दो घंटे तक जारी रहेगा, जिसके तहत कक्षा पांचवीं तक के छात्र स्कूल परिसर के भीतर प्लास्टिक कचरे को उठाएंगे, जबकि पांचवीं कक्षा से उपर के छात्र, ईको क्लब, स्काउट और गाइड, एनएसएस और एनसीसी के छात्र स्कूल के बाहर शिक्षकों की देखरेख में 500 मीटर क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को उठाएंगे। जो क्षेत्र बहुत गंदे होंगे उनकी केवल पहचान की जाएगी और ऐसे क्षेत्रों में छात्र व छात्राएं सफाई में शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा जो छात्र-छात्राएं अपनी प्री-बोर्ड की परीक्षा दे रहे हैं उनको इस स्वच्छता अभियान में शामिल नहीं किया जाएगा। डा. परूथी ने कहा कि इस संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को पहले ही इस अभियान में भाग लेने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यह अभियान जिले भर के सभी ग्रीष्म अवकाश वाले स्कूलों में लागू हो। उन्होंने अधिकारियों को हर स्कूल द्वारा एकत्रित कुल कचरे का उचित डेटा प्रदान करने के भी निर्देश दिए।
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नाहन - पर्यावरण की स्वच्छता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जिला प्रशासन सिरमौर सात दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को जिला के लगभग एक हजार ग्रीष्म अवकाश वाले स्कूलों में 'एक दिन स्कूल के नाम' से एक अनूठा अभियान शुरू करेगा, जिसके तहत छात्र पोलिथीन एकत्रित करेंगे और सूखा कचरा जिसका उपयोग सड़क निर्माण और पॉली ईंट बनाने के लिए किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत उपायुक्त सिरमौर डा. आरके परूथी द्वारा सात दिसंबर को प्रातः दस बजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मोगीनंद से करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि यह आठ दिवसीय अभियान दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस से मार्च, दो हज़ार बीस तक प्रत्येक पहले और चौथे शनिवार को लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत कूड़ा-कचरा फेंकने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाएगी और पर्यावरण की स्वच्छता के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस अभियान के तहत आगामी दिनों में जो लोग सड़कों व अपने आसपास के क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा फेंकते हुए पकड़े जाएंगे उनका चालान किया जाएगा। इसके अलावा पौधा रोपण या नवरतन थीम पार्क स्थापित करने के लिए भूमि की भी पहचान की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान दो घंटे तक जारी रहेगा, जिसके तहत कक्षा पांचवीं तक के छात्र स्कूल परिसर के भीतर प्लास्टिक कचरे को उठाएंगे, जबकि पांचवीं कक्षा से उपर के छात्र, ईको क्लब, स्काउट और गाइड, एनएसएस और एनसीसी के छात्र स्कूल के बाहर शिक्षकों की देखरेख में पाँच सौ मीटर क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को उठाएंगे। जो क्षेत्र बहुत गंदे होंगे उनकी केवल पहचान की जाएगी और ऐसे क्षेत्रों में छात्र व छात्राएं सफाई में शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा जो छात्र-छात्राएं अपनी प्री-बोर्ड की परीक्षा दे रहे हैं उनको इस स्वच्छता अभियान में शामिल नहीं किया जाएगा। डा. परूथी ने कहा कि इस संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को पहले ही इस अभियान में भाग लेने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यह अभियान जिले भर के सभी ग्रीष्म अवकाश वाले स्कूलों में लागू हो। उन्होंने अधिकारियों को हर स्कूल द्वारा एकत्रित कुल कचरे का उचित डेटा प्रदान करने के भी निर्देश दिए।
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SUPAUL : सिंचाई प्रमंडल त्रिवेणीगंज में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता ई. विद्यानंद प्रसाद व अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार के बीच मारपीट की घटना सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। घटना को लेकर दोनों और से आरोप प्रत्यारोप लगाया जा रहा है। साथ ही घटना के बाबत दोनो और से इसकी शिकायत पुलिस से की गई है।
कार्यपालक अभियंता द्वारा लिखित आवेदन देकर विभाग के अवर प्रमंडल पदाधिकारी पर मारपीट करने का आरोप लगाते प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दर्ज प्राथमिकी में कहा गया कि सिंचाई अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार कार्यालय में अन्य कर्मियों के साथ उलझकर बात कर रहे थे। हल्ला सुनकर वह उनलोगों के पास आकर अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार को अपने कार्यालय में जाकर कार्य करने के लिए कहा।
लेकिन अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार उन्हें गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगे। जिससे उनके आंख में काफी चोट लगी है। कहा गया कि घटना के समय उनके कार्यालय के कर्मी उपस्थित थे जो उनके साथ थाना भी आए हैं।
इधर अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार भी थाने में लिखित शिकायत करते हुए कहा कि अपने विभागीय पत्र लेकर कार्यपालक अभियंता सिंचाई ई. विधानंद प्रसाद के कार्यालय गए। जहां कागजात देख गुस्सा में आकर मेरे साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। विभागीय अधिकारियों के आपसी झगड़े के बाद विभाग से जुड़े अधिकारी इसे सुलझाने में लगे है।
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SUPAUL : सिंचाई प्रमंडल त्रिवेणीगंज में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता ई. विद्यानंद प्रसाद व अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार के बीच मारपीट की घटना सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। घटना को लेकर दोनों और से आरोप प्रत्यारोप लगाया जा रहा है। साथ ही घटना के बाबत दोनो और से इसकी शिकायत पुलिस से की गई है। कार्यपालक अभियंता द्वारा लिखित आवेदन देकर विभाग के अवर प्रमंडल पदाधिकारी पर मारपीट करने का आरोप लगाते प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दर्ज प्राथमिकी में कहा गया कि सिंचाई अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार कार्यालय में अन्य कर्मियों के साथ उलझकर बात कर रहे थे। हल्ला सुनकर वह उनलोगों के पास आकर अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार को अपने कार्यालय में जाकर कार्य करने के लिए कहा। लेकिन अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार उन्हें गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगे। जिससे उनके आंख में काफी चोट लगी है। कहा गया कि घटना के समय उनके कार्यालय के कर्मी उपस्थित थे जो उनके साथ थाना भी आए हैं। इधर अवर प्रमंडल पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार भी थाने में लिखित शिकायत करते हुए कहा कि अपने विभागीय पत्र लेकर कार्यपालक अभियंता सिंचाई ई. विधानंद प्रसाद के कार्यालय गए। जहां कागजात देख गुस्सा में आकर मेरे साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। विभागीय अधिकारियों के आपसी झगड़े के बाद विभाग से जुड़े अधिकारी इसे सुलझाने में लगे है।
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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक ने कहा है कि अहमद शहजाद लगातार अच्छा करते आये होते तो ये भारतीय टीम के पूर्व ओपनर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग से भी आगे निकल सकते थे। इनका यही कहना है कि ये इन भारतीय दिग्गजों को पछाड़ सकते थे।
अब्दुल रज्जाक जिन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए काफी समय तक क्रिकेट खेला है जिसमें उन्होंने एक ऑलराउंडर की भूमिका निभाई और सचिन तथा सहवाग जैसे खिलाड़ियों के साथ काफी क्रिकेट खेला है। उन्होंने सचिन और सहवाग को पीछे छोड़ने की बात पीटीवी चैनल पर बताई है जिसे सुन सभी चौंक गए।
बता दें कि इस कार्यक्रम के दौरान जब एंकर ने उन पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बारे में पूछा जिन्होंने अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं और जिनके क्षमता पर उन्हें भरोसा था, तो पूर्व क्रिकेटर रज्जाक ने कहा कि, जी बिल्कुल है। मैं कहता हूं अहमद शहजाद जबरदस्त था। ये सहवाग और सचिन जैसे बड़े खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ सकता था।
"ये खिलाड़ी पीसीबी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) के तंत्र के पीड़ित हैं क्योंकि अगर कोई खिलाड़ी एक या दो मैच में खराब बल्लेबाजी करते है तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। मैं यही मानता हूँ कि अगर किसी खिलाड़ी को अवसर मिलता है तो उन्हें खुलकर खेलना चाहिए और पूरा योगदान देना चाहिए, "इन्होंने आगे बताया है।
26 वर्षीय बल्लेबाज अहमद शहजाद ने शुरू से ही अच्छा क्रिकेट खेला है लेकिन हमेशा से ही बाहर अंदर और बाहर होते रहे है और ऐसा ही हाल उमर अकमल का रहा है। इस कारण इनका कैरियर इतना लंबा नहीं जा पाया है।
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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक ने कहा है कि अहमद शहजाद लगातार अच्छा करते आये होते तो ये भारतीय टीम के पूर्व ओपनर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग से भी आगे निकल सकते थे। इनका यही कहना है कि ये इन भारतीय दिग्गजों को पछाड़ सकते थे। अब्दुल रज्जाक जिन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए काफी समय तक क्रिकेट खेला है जिसमें उन्होंने एक ऑलराउंडर की भूमिका निभाई और सचिन तथा सहवाग जैसे खिलाड़ियों के साथ काफी क्रिकेट खेला है। उन्होंने सचिन और सहवाग को पीछे छोड़ने की बात पीटीवी चैनल पर बताई है जिसे सुन सभी चौंक गए। बता दें कि इस कार्यक्रम के दौरान जब एंकर ने उन पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बारे में पूछा जिन्होंने अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं और जिनके क्षमता पर उन्हें भरोसा था, तो पूर्व क्रिकेटर रज्जाक ने कहा कि, जी बिल्कुल है। मैं कहता हूं अहमद शहजाद जबरदस्त था। ये सहवाग और सचिन जैसे बड़े खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ सकता था। "ये खिलाड़ी पीसीबी के तंत्र के पीड़ित हैं क्योंकि अगर कोई खिलाड़ी एक या दो मैच में खराब बल्लेबाजी करते है तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। मैं यही मानता हूँ कि अगर किसी खिलाड़ी को अवसर मिलता है तो उन्हें खुलकर खेलना चाहिए और पूरा योगदान देना चाहिए, "इन्होंने आगे बताया है। छब्बीस वर्षीय बल्लेबाज अहमद शहजाद ने शुरू से ही अच्छा क्रिकेट खेला है लेकिन हमेशा से ही बाहर अंदर और बाहर होते रहे है और ऐसा ही हाल उमर अकमल का रहा है। इस कारण इनका कैरियर इतना लंबा नहीं जा पाया है।
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भारत के परमानेंट कैप्टन रोहित शर्मा कोविड के चंगूल से बाहर आ चुके है और 7 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले टी-20 के लिए नेट प्रैक्टिस में भी जुट गए है. चल रहे पांचवे और आखिरी टेस्ट मैच से कुछ दिन पहले ही रोहित कोविड के शिकार हो गए थे, जिसकी वजह से वो मैच का हिस्सा नहीं बन पाए थे.
लेकिन अब वो पूरी तरह से फिट है, उनकी तीनों रिपोर्ट नेगेटिव आई है और फिलहाल चल रहे टेस्ट मैच का भी आनंद ले रहे है. अब सबकी निगाह रोहित पर होगी क्योंकि कोविड से रिकवर होकर फील्ड पर वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता है. ऐसे में ना सिर्फ उन्हें बल्लेबाजी करनी है, बल्कि फील्ड पर कप्तानी भी करनी है.
कोविड की वजह से वो टी20 मैच से होने वाले प्रैक्टिस मैच का भी हिस्सा नहीं बन पाए थे. इसका मतलब है कि वो बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज आईपीएल के बाद पहली बार मैदान पर उतरेंगे. रोहित एक अनुभवी खिलाड़ी है और उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारत को जीत मिलगी हीं, क्योंकि वो एक बेहतरीन कप्तान हैं. उन्होंने भारत के लिए बहुत कम कप्तानी की है मगर आईपीएल की टीम मुंबई के लिए वो कई सालों से कप्तानी कर रहे है और उनके कैप्टंसी में नीता अंबानी की टीम मुंबई इंडियंस 5 बार चैंपियन रह चुकी है.
हालांकि रोहित को कोविड होने से पहले सेलेक्शन कमिटी ने यह फैसला लिया था कि वो आखिरी टेस्ट मैच का हिस्सा होंगे और 7 जुलाई से होने वाले पहले टी-20 में हार्दिक पांड्या कप्तानी करेंगे. लेकिन रोहित जब कोविड के शिकार हुए और फिर जब वो धीरे-धीरे रिकवर करना शुरू किए तो फिर चयनकर्ताओं ने अपने इस फैसले को बदलकर रोहित को पहले टी-20 से ही जोड़ने का फैसला किया है. हालांकि पहले टी-20 के लिए वही टीम होगी जो आयरलैंड के खिलाफ खेली थी. दूसरे टी20 से सीनियर खिलाड़ी बुमराह, कोहली, पंत और श्रेयस अय्यर टीम से जुड़ेंगे.
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भारत के परमानेंट कैप्टन रोहित शर्मा कोविड के चंगूल से बाहर आ चुके है और सात जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले टी-बीस के लिए नेट प्रैक्टिस में भी जुट गए है. चल रहे पांचवे और आखिरी टेस्ट मैच से कुछ दिन पहले ही रोहित कोविड के शिकार हो गए थे, जिसकी वजह से वो मैच का हिस्सा नहीं बन पाए थे. लेकिन अब वो पूरी तरह से फिट है, उनकी तीनों रिपोर्ट नेगेटिव आई है और फिलहाल चल रहे टेस्ट मैच का भी आनंद ले रहे है. अब सबकी निगाह रोहित पर होगी क्योंकि कोविड से रिकवर होकर फील्ड पर वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता है. ऐसे में ना सिर्फ उन्हें बल्लेबाजी करनी है, बल्कि फील्ड पर कप्तानी भी करनी है. कोविड की वजह से वो टीबीस मैच से होने वाले प्रैक्टिस मैच का भी हिस्सा नहीं बन पाए थे. इसका मतलब है कि वो बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज आईपीएल के बाद पहली बार मैदान पर उतरेंगे. रोहित एक अनुभवी खिलाड़ी है और उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारत को जीत मिलगी हीं, क्योंकि वो एक बेहतरीन कप्तान हैं. उन्होंने भारत के लिए बहुत कम कप्तानी की है मगर आईपीएल की टीम मुंबई के लिए वो कई सालों से कप्तानी कर रहे है और उनके कैप्टंसी में नीता अंबानी की टीम मुंबई इंडियंस पाँच बार चैंपियन रह चुकी है. हालांकि रोहित को कोविड होने से पहले सेलेक्शन कमिटी ने यह फैसला लिया था कि वो आखिरी टेस्ट मैच का हिस्सा होंगे और सात जुलाई से होने वाले पहले टी-बीस में हार्दिक पांड्या कप्तानी करेंगे. लेकिन रोहित जब कोविड के शिकार हुए और फिर जब वो धीरे-धीरे रिकवर करना शुरू किए तो फिर चयनकर्ताओं ने अपने इस फैसले को बदलकर रोहित को पहले टी-बीस से ही जोड़ने का फैसला किया है. हालांकि पहले टी-बीस के लिए वही टीम होगी जो आयरलैंड के खिलाफ खेली थी. दूसरे टीबीस से सीनियर खिलाड़ी बुमराह, कोहली, पंत और श्रेयस अय्यर टीम से जुड़ेंगे.
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उन्नाव। असोहा (saint conference) स्थित पावन धाम कुटीबीर बाबा में सातवां नौ दिवसीय हनुमत रूद्र महायज्ञ एवं मानस वेदांत संत सम्मेलन का शुभारंभ बृहस्पतिवार को कलश यात्रा के साथ होगा। महायज्ञ एवं संत समागम (saint conference) कार्यक्रम के मुख्य आयोजक भाजपा नेता संजय शुक्ल ने बताया कि उक्त नव दिवसीय हनुमत रूद्र महायज्ञ लगातार सातवीं बार हो रहा है। उक्त कार्यक्रम में अयोध्या से पधारे यज्ञाचारी विनोदाचारी के द्वारा यज्ञ कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाएगा।
वहीं नैमिष, बनारस, इलाहबाद एवं उरई से पधारे विद्वतजनों द्वारा मानस, भागवत व अन्य विषयों पर प्रवचन दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कलश यात्रा कुटीबीर बाबा मंदिर प्रांगड़ से शुरू होकर सई नदी स्थित देवल मुनि आश्रम तक बाजे गाजे के साथ जाएगी। क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कलश यात्रा में शामिल होने का आग्रह आयोजकों द्वारा किया गया है।
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उन्नाव। असोहा स्थित पावन धाम कुटीबीर बाबा में सातवां नौ दिवसीय हनुमत रूद्र महायज्ञ एवं मानस वेदांत संत सम्मेलन का शुभारंभ बृहस्पतिवार को कलश यात्रा के साथ होगा। महायज्ञ एवं संत समागम कार्यक्रम के मुख्य आयोजक भाजपा नेता संजय शुक्ल ने बताया कि उक्त नव दिवसीय हनुमत रूद्र महायज्ञ लगातार सातवीं बार हो रहा है। उक्त कार्यक्रम में अयोध्या से पधारे यज्ञाचारी विनोदाचारी के द्वारा यज्ञ कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाएगा। वहीं नैमिष, बनारस, इलाहबाद एवं उरई से पधारे विद्वतजनों द्वारा मानस, भागवत व अन्य विषयों पर प्रवचन दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कलश यात्रा कुटीबीर बाबा मंदिर प्रांगड़ से शुरू होकर सई नदी स्थित देवल मुनि आश्रम तक बाजे गाजे के साथ जाएगी। क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कलश यात्रा में शामिल होने का आग्रह आयोजकों द्वारा किया गया है।
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शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
संगारेड्डीः जोगीपेट में ऑक्सफोर्ड स्कूल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. डीईओ को शिकायत मिली थी कि ऑक्सफोर्ड स्कूल ऊंची फीस और किताबें बेच रहा है। इसकी शिकायत छात्र संघों ने डीईओ से की है।
इसी पृष्ठभूमि में डीईओ के आदेश पर एमईओ कृष्णा ने ऑक्सफोर्ड स्कूल में निरीक्षण किया। हालांकि, स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे एमईओ के साथ स्कूल स्टाफ ने अभद्र व्यवहार किया. इस क्रम में एमईओ ने स्कूल प्रशासक वेणु के खिलाफ जोगीपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
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शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. संगारेड्डीः जोगीपेट में ऑक्सफोर्ड स्कूल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. डीईओ को शिकायत मिली थी कि ऑक्सफोर्ड स्कूल ऊंची फीस और किताबें बेच रहा है। इसकी शिकायत छात्र संघों ने डीईओ से की है। इसी पृष्ठभूमि में डीईओ के आदेश पर एमईओ कृष्णा ने ऑक्सफोर्ड स्कूल में निरीक्षण किया। हालांकि, स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे एमईओ के साथ स्कूल स्टाफ ने अभद्र व्यवहार किया. इस क्रम में एमईओ ने स्कूल प्रशासक वेणु के खिलाफ जोगीपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके साथ ही पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
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के प्रबन्धों का काव्य- विवेचन
होता है और जीव जीवनमुक्त हो जाता है। साथ ही जीवनमुक्त, विदेह प्रौर महात्यागी के लक्षण भी बताती है । निदान वेदसिद्धि के भांति-भांति के उपदेश से जीव को समस्त संसार मिथ्या प्रतीत होने लगता है और अपने वास्तविक रूप पारब्रह्मत्व का ज्ञान होने पर उसके हृदय में प्रबोध का उदय हो जाता है। इस प्रकार 'विज्ञानगीता' की कथा समाप्त होती है। विवेक के द्वारा किस प्रकार मोह का नाश और प्रबोध का उदय होता है, यही 'विज्ञानगीता' का प्रतिपाद्य विषय है। इसी का प्रतिपादन इसमें नाना प्रकार से किया गया है ।
आधार और मौलिकता - 'विज्ञानगीता' की कथा का प्रमुख आवार 'प्रबोध चन्द्रोदय' है। स्थूल रूप से दोनों ग्रन्थों की कथावस्तु समान ही है परन्तु सूक्ष्म व्योरों में दोनों की कथावस्तु में पर्याप्त अन्तर है। इसके कई कारण हैं । प्रथम तो 'प्रबोधचन्द्रोदय' नाटक है और 'विज्ञानगीता' एक काव्य-ग्रन्थ है । जहाँ नाटककार को कुछ बन्धन में रहना पड़ता है वहाँ कवि स्वतन्त्र होता है। रंगमंच पर सुगमतापूर्वक न दिखलाई जाने वाली बातों, जैसे युद्ध, विवाह आदि की नाटककार केवल सूचनामात्र ही देता है किन्तु कवि इनका भी विस्तार के साथ वर्णन कर सकता है। इस स्वतन्त्रता का उपयोग करते हुए केशव ने महामोह के अनेक द्वीपों और देशों को जीतने एवं महामोह और विवेक के युद्ध का बड़ा ही विस्तारपूर्वक वर्णन किया है, जिसका 'प्रबोधचन्द्रोदय' में प्रभाव है। दूसरे, केशव ने 'प्रबोधचन्द्रोदय' के कुछ ऐसे दृश्यों का जान-बूझकर उल्लेख नहीं किया है, जिनको छोड़ देने से मूल कथा के विकास में कोई अन्तर नहीं आता। तीसरे, नवीनता की भावना से प्रेरित होकर कथानक में बहुत सी बातें केशव ने अपनी ओर से भी जोड़ दी हैं, जिनका आधार उक्त नाटक न होकर 'योगवासिष्ठ', 'भागवत', 'गीता' आदि ग्रन्थ हैं । ज्ञान चर्चा के प्रसंग में उल्लिखित गाधि - ऋषि, राजा शिखिध्वज, व्यासपुत्र शुकदेव, प्रह्लाद, बलि आदि के आख्यानों एवं ज्ञान - ज्ञान की भूमिकाओं के वर्णन का सन्निवेश 'योगवासिष्ठ' नामक ग्रन्थ के आधार पर किया गया है। सूक्ष्म व्योरों के अन्तर्गत कुछ अन्य स्थलों पर भी 'योगवासिष्ठ' के दार्शनिक सिद्धान्तों की छाप दिखलाई देती है, जैसा कि आगे के विवेचन से स्पष्ट हो जायेगा । कहीं-कहीं 'विज्ञानगीता' के विचार 'गीता' और 'भागवत' के दार्शनिक विचारों से भी मेल खाते हैं । ब्राह्मणों की पूज्यता का निरूपण तथा नवधा भक्ति का प्रतिपादन 'भागवत' के समान किया गया है । मन और उसकी दशात्रों का विवेचन 'गीता' के अनुकरण पर हुप्रा है। 'विज्ञानगीता' की रचना करते समय केशव के मस्तिष्क में 'गीता' और 'भागवत' के सिद्धान्त विद्यमान थे, जिसको पुष्टि 'विज्ञानगीता' के दोहे से हो जाती है ।
विज्ञानगीता तथा प्रबोधचन्द्रोदय और योगवासिष्ठ - केशव की कथावस्तु 'प्रबोधचन्द्रोदय' की अपेक्षा अधिक नाटकीय ढंग से प्रारम्भ होती है । वीरसिंह के
१. कहै भागवत में असम, गीता कहै समान । अमान कौनहिं करों, कौर्नाह करों प्रमान ।।
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के प्रबन्धों का काव्य- विवेचन होता है और जीव जीवनमुक्त हो जाता है। साथ ही जीवनमुक्त, विदेह प्रौर महात्यागी के लक्षण भी बताती है । निदान वेदसिद्धि के भांति-भांति के उपदेश से जीव को समस्त संसार मिथ्या प्रतीत होने लगता है और अपने वास्तविक रूप पारब्रह्मत्व का ज्ञान होने पर उसके हृदय में प्रबोध का उदय हो जाता है। इस प्रकार 'विज्ञानगीता' की कथा समाप्त होती है। विवेक के द्वारा किस प्रकार मोह का नाश और प्रबोध का उदय होता है, यही 'विज्ञानगीता' का प्रतिपाद्य विषय है। इसी का प्रतिपादन इसमें नाना प्रकार से किया गया है । आधार और मौलिकता - 'विज्ञानगीता' की कथा का प्रमुख आवार 'प्रबोध चन्द्रोदय' है। स्थूल रूप से दोनों ग्रन्थों की कथावस्तु समान ही है परन्तु सूक्ष्म व्योरों में दोनों की कथावस्तु में पर्याप्त अन्तर है। इसके कई कारण हैं । प्रथम तो 'प्रबोधचन्द्रोदय' नाटक है और 'विज्ञानगीता' एक काव्य-ग्रन्थ है । जहाँ नाटककार को कुछ बन्धन में रहना पड़ता है वहाँ कवि स्वतन्त्र होता है। रंगमंच पर सुगमतापूर्वक न दिखलाई जाने वाली बातों, जैसे युद्ध, विवाह आदि की नाटककार केवल सूचनामात्र ही देता है किन्तु कवि इनका भी विस्तार के साथ वर्णन कर सकता है। इस स्वतन्त्रता का उपयोग करते हुए केशव ने महामोह के अनेक द्वीपों और देशों को जीतने एवं महामोह और विवेक के युद्ध का बड़ा ही विस्तारपूर्वक वर्णन किया है, जिसका 'प्रबोधचन्द्रोदय' में प्रभाव है। दूसरे, केशव ने 'प्रबोधचन्द्रोदय' के कुछ ऐसे दृश्यों का जान-बूझकर उल्लेख नहीं किया है, जिनको छोड़ देने से मूल कथा के विकास में कोई अन्तर नहीं आता। तीसरे, नवीनता की भावना से प्रेरित होकर कथानक में बहुत सी बातें केशव ने अपनी ओर से भी जोड़ दी हैं, जिनका आधार उक्त नाटक न होकर 'योगवासिष्ठ', 'भागवत', 'गीता' आदि ग्रन्थ हैं । ज्ञान चर्चा के प्रसंग में उल्लिखित गाधि - ऋषि, राजा शिखिध्वज, व्यासपुत्र शुकदेव, प्रह्लाद, बलि आदि के आख्यानों एवं ज्ञान - ज्ञान की भूमिकाओं के वर्णन का सन्निवेश 'योगवासिष्ठ' नामक ग्रन्थ के आधार पर किया गया है। सूक्ष्म व्योरों के अन्तर्गत कुछ अन्य स्थलों पर भी 'योगवासिष्ठ' के दार्शनिक सिद्धान्तों की छाप दिखलाई देती है, जैसा कि आगे के विवेचन से स्पष्ट हो जायेगा । कहीं-कहीं 'विज्ञानगीता' के विचार 'गीता' और 'भागवत' के दार्शनिक विचारों से भी मेल खाते हैं । ब्राह्मणों की पूज्यता का निरूपण तथा नवधा भक्ति का प्रतिपादन 'भागवत' के समान किया गया है । मन और उसकी दशात्रों का विवेचन 'गीता' के अनुकरण पर हुप्रा है। 'विज्ञानगीता' की रचना करते समय केशव के मस्तिष्क में 'गीता' और 'भागवत' के सिद्धान्त विद्यमान थे, जिसको पुष्टि 'विज्ञानगीता' के दोहे से हो जाती है । विज्ञानगीता तथा प्रबोधचन्द्रोदय और योगवासिष्ठ - केशव की कथावस्तु 'प्रबोधचन्द्रोदय' की अपेक्षा अधिक नाटकीय ढंग से प्रारम्भ होती है । वीरसिंह के एक. कहै भागवत में असम, गीता कहै समान । अमान कौनहिं करों, कौर्नाह करों प्रमान ।।
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रायपुर। जैन दादाबाड़ी एमजी रोड में श्री साधुमार्गी शांतक्रांति जैन श्रावक संघ द्वारा जैन भगवती दीक्षा महोत्सव रखा गया है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि साहू समाज की एक युवती आज जैन साध्वी की दीक्षा लेंगी। साथ ही एक जैन समाज की युवती भी दीक्षा लेंगी। सोमवार को सुबह 8. 30 बजे महाभिनिष्क्रमण यात्रा व आचार्य विजयराज की आज्ञानुवर्तिनी महाश्रमणी रत्नाश्री प्रभावती का प्रवज्या प्रत्याख्यान 11. 30 बजे से शुरू होगा। जहां महाश्रमणी रत्ना प्रभावती के सानिध्य में सांसारिक सुख-सुविधा छोड़कर दोनों युवतियां जैन साध्वी की दीक्षा लेंगी। दीक्षा पाठ सुनकर शपथ लेंगी, जिसके बाद सफेद वस्त्र और रजो हरण धारण कर साध्वी मार्ग का पालन करेंगी। साथ ही केश लोचन भी किया जाएगा, जिसके बाद साल में दो बार केश लोचन किया जाएगा। महाश्रमणी ने बताया कि साध्वी बनने के बाद 5 महाव्रत का पालन करना पड़ेगा, जिसमें अहिंसा, सत्य, अचौरत्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्र्रह। मेरे पास किसी भी चीज के महत्व का भाव नहीं होना चाहिए, कपड़ा भी हम सिर्फ शरीर ढंकने के लिए पहनते हैं।
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रायपुर। जैन दादाबाड़ी एमजी रोड में श्री साधुमार्गी शांतक्रांति जैन श्रावक संघ द्वारा जैन भगवती दीक्षा महोत्सव रखा गया है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि साहू समाज की एक युवती आज जैन साध्वी की दीक्षा लेंगी। साथ ही एक जैन समाज की युवती भी दीक्षा लेंगी। सोमवार को सुबह आठ. तीस बजे महाभिनिष्क्रमण यात्रा व आचार्य विजयराज की आज्ञानुवर्तिनी महाश्रमणी रत्नाश्री प्रभावती का प्रवज्या प्रत्याख्यान ग्यारह. तीस बजे से शुरू होगा। जहां महाश्रमणी रत्ना प्रभावती के सानिध्य में सांसारिक सुख-सुविधा छोड़कर दोनों युवतियां जैन साध्वी की दीक्षा लेंगी। दीक्षा पाठ सुनकर शपथ लेंगी, जिसके बाद सफेद वस्त्र और रजो हरण धारण कर साध्वी मार्ग का पालन करेंगी। साथ ही केश लोचन भी किया जाएगा, जिसके बाद साल में दो बार केश लोचन किया जाएगा। महाश्रमणी ने बताया कि साध्वी बनने के बाद पाँच महाव्रत का पालन करना पड़ेगा, जिसमें अहिंसा, सत्य, अचौरत्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्र्रह। मेरे पास किसी भी चीज के महत्व का भाव नहीं होना चाहिए, कपड़ा भी हम सिर्फ शरीर ढंकने के लिए पहनते हैं।
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भोपाल (Bhopal)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता (eight and a half million people) की खुशहाली बढ़ाना हमारा उद्देश्य है। इसके लिए हमने प्रदेश में आनंद विभाग (pleasure department) खोला है। आनंद विभाग की ओर से प्रदेश के गांव- गांव में आनंद उत्सव होंगे। टीम मध्यप्रदेश जनता की खुशहाली के लिए दिन-रात काम करने में लगी हुई है।
मुख्यमंत्री चौहान शनिवार देर शाम भोपाल कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आईएएस समिट के सांस्कृतिक कार्यक्रम संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान की धर्मपत्नी साधना सिंह चौहान और आईएएस अधिकारियों के परिजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से तनाव कम होता है। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी लगातार काम करते हैं। उनके जीवन में एसे क्षण आने से तनाव कम होता है और काम करने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम की व्यस्तता में भी अपने बच्चों का जरूर ध्यान रखें। उन्हें बेहतर संस्कार और समय देना माता-पिता का कर्तव्य है। काम की व्यस्तता में बच्चे तन्हा न रहें।
आईएएस समिट के दूसरे दिन शनिवार देर शाम आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आईएएस महिला अधिकारियों और उनके परिजन द्वारा फैशन शो में रैंप पर वॉक किया गया। महिला अधिकारियों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। (एजेंसी, हि. स. )
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भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की खुशहाली बढ़ाना हमारा उद्देश्य है। इसके लिए हमने प्रदेश में आनंद विभाग खोला है। आनंद विभाग की ओर से प्रदेश के गांव- गांव में आनंद उत्सव होंगे। टीम मध्यप्रदेश जनता की खुशहाली के लिए दिन-रात काम करने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री चौहान शनिवार देर शाम भोपाल कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आईएएस समिट के सांस्कृतिक कार्यक्रम संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान की धर्मपत्नी साधना सिंह चौहान और आईएएस अधिकारियों के परिजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से तनाव कम होता है। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी लगातार काम करते हैं। उनके जीवन में एसे क्षण आने से तनाव कम होता है और काम करने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम की व्यस्तता में भी अपने बच्चों का जरूर ध्यान रखें। उन्हें बेहतर संस्कार और समय देना माता-पिता का कर्तव्य है। काम की व्यस्तता में बच्चे तन्हा न रहें। आईएएस समिट के दूसरे दिन शनिवार देर शाम आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आईएएस महिला अधिकारियों और उनके परिजन द्वारा फैशन शो में रैंप पर वॉक किया गया। महिला अधिकारियों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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नयी दिल्ली, नौ दिसंबर महात्मा गांधी ने ब्रह्मचर्य को लेकर तमाम तरह के प्रयोग किए और काम वासना के प्रति राग विराग का यह अंतर्द्वंद्व आजीवन चलता रहा। महात्मा के जीवन के इसी विवादास्पद पहलू की गहराई से पड़ताल करती एक नई किताब में दावा किया गया है कि महात्मा के ब्रह्मचर्य के पीछे बहुत से कारण रहे थे और ये कारण इतने मजबूत थे कि महात्मा का पूरा जीवन वासनाओं के खिलाफ संघर्ष में बीत गया।
किताब में एक स्थान पर जिक्र किया गया है कि सेवाग्राम आश्रम में अपने निजी सचिव प्यारेलाल की आकर्षक बहन, सुशीला नायर, जो कि उनकी निजी चिकित्सक भी थीं, के साथ नग्न स्नान को लेकर आश्रम में कानाफूसियों का दौर शुरू हो गया। आश्रमवासियों का अरोप था कि महात्मा मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। उनका एतराज इस बात पर था कि सुशीला उन्हें स्नान कराते वक्त खुद भी स्नान करती है और तब गांधी उनकी साड़ी ओढ़ लेते हैं। महात्मा गांधी को इस मामले में सफाई देनी पड़ी थी।
महात्मा गांधी के युवतियों के साथ नग्न सोने के उनके अनोखे प्रयोगों के तमाम पहलुओं का मनोवैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण करती वरिष्ठ लेखक/पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर की नई शोधपरक किताब 'अधनंगा फ़क़ीर' में दावा किया गया है कि महात्मा एक तरह का ऐसा उत्कृष्ट नैतिक जीवन जी रहे थे, जो आम आदमी की कल्पना के बाहर की चीज थी।
किताब में इस प्रयोग के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। शुक्ल का निष्कर्ष है कि दरअसल महात्मा खुद को सही साबित करने के लिए 'युक्तिकरण' का सहारा लेते रहे। मनोवैज्ञानिकों ने इसे 'रेशनेलाइजेशन' कहा है। यह खुद को सही साबित करने का ऐसा ढंग है जिसमें व्यक्ति यह नहीं जानता कि अचेतन रूप से झूठे कारण और तर्क पेश कर रहा है। यह खुद को धोखा देने का ऐसा ढंग है जिसमें व्यक्ति खुद को नैतिक और प्रतिष्ठित समझने लगता है।
वह कहते हैं कि महात्मा अगर निर्विकार थे तो उन्हें सुशीला के स्नान करने के समय आंखें बंद करने की कोई जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। आंखें बंद करना उनके अंदर के डर को दर्शाता है।
किताब के अनुसार- गांधीजी का दावा था कि वे नहीं जानते थे कि सुशीला कैसे स्नान करती है । लेकिन आंखें बंद करके भी यह रोचक कल्पना की जा सकती है कि समीप कोई स्त्री कैसे स्नान कर रही है। महात्मा ने आवाज से अनुमान लगाया कि वह नहाते वक्त साबुन का इस्तेमाल करती थी। यानी बंद आंखों में भी महात्मा का सारा ध्यान सुशीला की स्नान प्रक्रिया की ओर लगा रहता। फिर आंखें बंद करके भी काम भावना का आनंद लिया जा सकता है।
किताब के अनुसार, मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि युक्तिकरण एक ऐसा आवरण है जिसे हम अपनी कमियों और बुराइयों के ऊपर डाल देते हैं जिससे हमें उनका सामना न करना पड़े। यह शतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर धंसा लेने जैसा है। मनोवैज्ञानिक सेमॉडस युक्तिकरण को 'खुद का खुद के लिए वेष बदलना मानते हैं। ' यह निःसंदेह खतरनाक स्थिति है। मनोरचना की एक स्थिति 'वास्तविकता अस्वीकरण' की होती है जिसे मनोवैज्ञानिकों ने 'डिनायल ऑफ रिएलिटी' कहा। ऐसे में मनुष्य अपनी विफलताओं को अस्वीकार करने में जरा भी हिचक नहीं दिखाता।
गांधी ने ब्रह्मचर्य व्रत लेने के बाद अपने समाचार पत्र 'इंडियन ओपिनियन' के पाठकों से कहा,"यह हर विचारशील भारतीय का कर्तव्य है कि वह विवाह न करे। यदि विवाह के संबंध में वह असहाय है, तो वो अपनी पत्नी के साथ संभोग न करे। " सेक्स को लेकर इतने कट्टर विचार रखने वाले गांधीजी के ये प्रयोग सभी के लिए हमेशा चौंकाने वाले रहे।
पति पत्नी के रूप में बापू और बा के संबंधों पर भी किताब कुछ महत्वपूर्ण आयामों से पाठक का परिचय कराती है। इसी अध्याय में कहा गया है कि मिलन और वियोग के तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद पति-पत्नी में खूब झगड़े होते थे। पति पर संकट के समय भारतीय नारी होने के कारण कस्तूरबा भले 'देवदूत' बन जाती हों लेकिन सामान्यतः दोनों एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते थे।
एक समय दोनों के जीवन में ऐसा भी आया , जब बा केवल 'सत्याग्रह' आश्रम तक सिमट कर रह गईं और महात्मा के जीवन में उनकी जगह सरला देवी चौधरानी ने ले ली। अपने करीबी मित्र और जर्मन वास्तुकार हरमन कैलेन बैक को लिखे एक पत्र में महात्मा गांधी ने कहा था, " मैं उसे अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहता हूँ। एक मित्र ने हमारे संबंधों को 'बौद्धिक विवाह' कहा है। लेकिन उनके क़रीबी दोस्त सी. राजगोपालाचारी ने तो सरला देवी और कस्तूरबा की तुलना 'केरोसिन लैम्प और सुबह के सूरज' से करते हुए महात्मा को लिखे पत्र में कहा - 'आपने सबसे भयानक भ्रम को जन्म दिया है। ' सीआर ने आगे लिखा- 'इस आध्यात्मिक प्रेम में अभी तक शरीर है, मसीह नहीं हैं। ' ।
महात्मा गांधी के जीवन में काम और ब्रह्मचर्य को गहराई से पेश करती किताब ' अधनंगा फकीर' उस व्यक्ति के जीवन के ऐसे विवादास्पद पहलू को समझने की दृष्टि प्रदान करती है जिसे महान फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने 'दूसरा ईसा ' कहा था।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, नौ दिसंबर महात्मा गांधी ने ब्रह्मचर्य को लेकर तमाम तरह के प्रयोग किए और काम वासना के प्रति राग विराग का यह अंतर्द्वंद्व आजीवन चलता रहा। महात्मा के जीवन के इसी विवादास्पद पहलू की गहराई से पड़ताल करती एक नई किताब में दावा किया गया है कि महात्मा के ब्रह्मचर्य के पीछे बहुत से कारण रहे थे और ये कारण इतने मजबूत थे कि महात्मा का पूरा जीवन वासनाओं के खिलाफ संघर्ष में बीत गया। किताब में एक स्थान पर जिक्र किया गया है कि सेवाग्राम आश्रम में अपने निजी सचिव प्यारेलाल की आकर्षक बहन, सुशीला नायर, जो कि उनकी निजी चिकित्सक भी थीं, के साथ नग्न स्नान को लेकर आश्रम में कानाफूसियों का दौर शुरू हो गया। आश्रमवासियों का अरोप था कि महात्मा मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। उनका एतराज इस बात पर था कि सुशीला उन्हें स्नान कराते वक्त खुद भी स्नान करती है और तब गांधी उनकी साड़ी ओढ़ लेते हैं। महात्मा गांधी को इस मामले में सफाई देनी पड़ी थी। महात्मा गांधी के युवतियों के साथ नग्न सोने के उनके अनोखे प्रयोगों के तमाम पहलुओं का मनोवैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण करती वरिष्ठ लेखक/पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर की नई शोधपरक किताब 'अधनंगा फ़क़ीर' में दावा किया गया है कि महात्मा एक तरह का ऐसा उत्कृष्ट नैतिक जीवन जी रहे थे, जो आम आदमी की कल्पना के बाहर की चीज थी। किताब में इस प्रयोग के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। शुक्ल का निष्कर्ष है कि दरअसल महात्मा खुद को सही साबित करने के लिए 'युक्तिकरण' का सहारा लेते रहे। मनोवैज्ञानिकों ने इसे 'रेशनेलाइजेशन' कहा है। यह खुद को सही साबित करने का ऐसा ढंग है जिसमें व्यक्ति यह नहीं जानता कि अचेतन रूप से झूठे कारण और तर्क पेश कर रहा है। यह खुद को धोखा देने का ऐसा ढंग है जिसमें व्यक्ति खुद को नैतिक और प्रतिष्ठित समझने लगता है। वह कहते हैं कि महात्मा अगर निर्विकार थे तो उन्हें सुशीला के स्नान करने के समय आंखें बंद करने की कोई जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। आंखें बंद करना उनके अंदर के डर को दर्शाता है। किताब के अनुसार- गांधीजी का दावा था कि वे नहीं जानते थे कि सुशीला कैसे स्नान करती है । लेकिन आंखें बंद करके भी यह रोचक कल्पना की जा सकती है कि समीप कोई स्त्री कैसे स्नान कर रही है। महात्मा ने आवाज से अनुमान लगाया कि वह नहाते वक्त साबुन का इस्तेमाल करती थी। यानी बंद आंखों में भी महात्मा का सारा ध्यान सुशीला की स्नान प्रक्रिया की ओर लगा रहता। फिर आंखें बंद करके भी काम भावना का आनंद लिया जा सकता है। किताब के अनुसार, मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि युक्तिकरण एक ऐसा आवरण है जिसे हम अपनी कमियों और बुराइयों के ऊपर डाल देते हैं जिससे हमें उनका सामना न करना पड़े। यह शतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर धंसा लेने जैसा है। मनोवैज्ञानिक सेमॉडस युक्तिकरण को 'खुद का खुद के लिए वेष बदलना मानते हैं। ' यह निःसंदेह खतरनाक स्थिति है। मनोरचना की एक स्थिति 'वास्तविकता अस्वीकरण' की होती है जिसे मनोवैज्ञानिकों ने 'डिनायल ऑफ रिएलिटी' कहा। ऐसे में मनुष्य अपनी विफलताओं को अस्वीकार करने में जरा भी हिचक नहीं दिखाता। गांधी ने ब्रह्मचर्य व्रत लेने के बाद अपने समाचार पत्र 'इंडियन ओपिनियन' के पाठकों से कहा,"यह हर विचारशील भारतीय का कर्तव्य है कि वह विवाह न करे। यदि विवाह के संबंध में वह असहाय है, तो वो अपनी पत्नी के साथ संभोग न करे। " सेक्स को लेकर इतने कट्टर विचार रखने वाले गांधीजी के ये प्रयोग सभी के लिए हमेशा चौंकाने वाले रहे। पति पत्नी के रूप में बापू और बा के संबंधों पर भी किताब कुछ महत्वपूर्ण आयामों से पाठक का परिचय कराती है। इसी अध्याय में कहा गया है कि मिलन और वियोग के तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद पति-पत्नी में खूब झगड़े होते थे। पति पर संकट के समय भारतीय नारी होने के कारण कस्तूरबा भले 'देवदूत' बन जाती हों लेकिन सामान्यतः दोनों एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते थे। एक समय दोनों के जीवन में ऐसा भी आया , जब बा केवल 'सत्याग्रह' आश्रम तक सिमट कर रह गईं और महात्मा के जीवन में उनकी जगह सरला देवी चौधरानी ने ले ली। अपने करीबी मित्र और जर्मन वास्तुकार हरमन कैलेन बैक को लिखे एक पत्र में महात्मा गांधी ने कहा था, " मैं उसे अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहता हूँ। एक मित्र ने हमारे संबंधों को 'बौद्धिक विवाह' कहा है। लेकिन उनके क़रीबी दोस्त सी. राजगोपालाचारी ने तो सरला देवी और कस्तूरबा की तुलना 'केरोसिन लैम्प और सुबह के सूरज' से करते हुए महात्मा को लिखे पत्र में कहा - 'आपने सबसे भयानक भ्रम को जन्म दिया है। ' सीआर ने आगे लिखा- 'इस आध्यात्मिक प्रेम में अभी तक शरीर है, मसीह नहीं हैं। ' । महात्मा गांधी के जीवन में काम और ब्रह्मचर्य को गहराई से पेश करती किताब ' अधनंगा फकीर' उस व्यक्ति के जीवन के ऐसे विवादास्पद पहलू को समझने की दृष्टि प्रदान करती है जिसे महान फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने 'दूसरा ईसा ' कहा था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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ढरे, वह नवन कैसा ?
तुमको वहाँ ले जायगा जहाँ का हुक्म मिला है । गरज यह है कि धर्म के गैर-जरूरी काम पर इतना जोर दिया गया है और दिया जा रहा है कि जिन्दगी के बेहद जरूरी सवाल 'हवा की सफाई' तक से धर्म मे मस्त फेर लेते हैं और हवा को गन्दा करते
रहते हैं ।
खाने-पीने का मवाल भी बहुत जरूरी है। उनकी तरफ हम नज़र ही नहीं डालते । काम हम सारा करते हैं, खाने-पीने के लिए, पर मन में उस सवाल को जो जगह दे रखी है वह धर्म से कहीं नीची है। खाने के सवाल में जीने-मरने का सवाल है; फिर भी हम उस तरफ से वे परवाह बने हुए हैं ।
सुखी बनने के लिए जरूरी सवालों को जरूरी समझने में जरा भी नहीं झिकना चाहिए ।
मिसाल के लिए ईश्वर के सवाल को ले लीजिए । यह सवाल सबसे जरूरी मान लिया गया है। पर इसका जवान सोचना हमारा व्नम नहीं बताया गया । वह काम हमारे लिए हमारे माँ-बाप करे । और उनके लिए उनके पुरोहित-मुल्ला करे और उनके लिए धर्म की किताबे करें। हमारा काम सिर्फ इतना है कि हम ईश्वर को मान लें । समाज ने कानून बना रखा है, ईश्वर को मानो, नहीं तो समाज बाहर । कुदरत की अगर ईश्वर की दासी मान लें तो वह ईश्वर का पता देने या उसको समझाने में रत्ती भर मदद नहीं करती । हॉ, धोखा खूच देती हैं। कुदरत नास्तिक के खेत मे पानी बरसा देती है, उसे लहरा देती है और आस्तिक के खेत में एक बूँद नहीं गिराती और रही-सही नमी भो सोख लेती है । वह खुदा के मानने या न मानने वाले ने कोई तमीज़ ही नहीं करती। ज्यादातर तो यह देखा गया है कि वह खुढा के न मानने वाले के साथ रिश्रायत करती है। मानो वह खुढा के खिलाफ बागी हो गई हो। उसके एक्-टो नहीं, हजारों कान ऐसे होते हैं कि वह खुदा की गुत्थी को और उलझा देते हैं ।
समझ मे तो साफ आता हैं कि ईश्वर का सवाल एक-टम गैर-जरूरी हैं;
पर समाज ने हमको नकेल का लॅट बना रखा है और नकेल सरकार के हाथों में थमा रखी है। अव नकेल तुड़ाने से पहले हम अपना खाना प जुटाना सीख लें और फिर नकेल तुड़ा लें तो सुख मिले ।
अगर सचमुच हम जो कुछ हैं उससे ऊँचा उठना मंजूर है तो हमे चाहिए कि हम एक नई पूजा ईजाद करें यानी जिन्दगी की पूजा और वह यह कि जीवन बहुत पाक चीज है । इस पर ऐसा कोई धन्वा न लगे कि हमारा सुख ही हमाग दुःख बन जाय । धर्म अपनाना ही है तो ऐसा तो हो जो हमको सुख न दे, पर सुख पाने से रोके तो नहीं ।
ईश्वर मानो; पर डरो ईश्वर से भी नहीं। डरे, वह जवान भी कैसा ?
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ढरे, वह नवन कैसा ? तुमको वहाँ ले जायगा जहाँ का हुक्म मिला है । गरज यह है कि धर्म के गैर-जरूरी काम पर इतना जोर दिया गया है और दिया जा रहा है कि जिन्दगी के बेहद जरूरी सवाल 'हवा की सफाई' तक से धर्म मे मस्त फेर लेते हैं और हवा को गन्दा करते रहते हैं । खाने-पीने का मवाल भी बहुत जरूरी है। उनकी तरफ हम नज़र ही नहीं डालते । काम हम सारा करते हैं, खाने-पीने के लिए, पर मन में उस सवाल को जो जगह दे रखी है वह धर्म से कहीं नीची है। खाने के सवाल में जीने-मरने का सवाल है; फिर भी हम उस तरफ से वे परवाह बने हुए हैं । सुखी बनने के लिए जरूरी सवालों को जरूरी समझने में जरा भी नहीं झिकना चाहिए । मिसाल के लिए ईश्वर के सवाल को ले लीजिए । यह सवाल सबसे जरूरी मान लिया गया है। पर इसका जवान सोचना हमारा व्नम नहीं बताया गया । वह काम हमारे लिए हमारे माँ-बाप करे । और उनके लिए उनके पुरोहित-मुल्ला करे और उनके लिए धर्म की किताबे करें। हमारा काम सिर्फ इतना है कि हम ईश्वर को मान लें । समाज ने कानून बना रखा है, ईश्वर को मानो, नहीं तो समाज बाहर । कुदरत की अगर ईश्वर की दासी मान लें तो वह ईश्वर का पता देने या उसको समझाने में रत्ती भर मदद नहीं करती । हॉ, धोखा खूच देती हैं। कुदरत नास्तिक के खेत मे पानी बरसा देती है, उसे लहरा देती है और आस्तिक के खेत में एक बूँद नहीं गिराती और रही-सही नमी भो सोख लेती है । वह खुदा के मानने या न मानने वाले ने कोई तमीज़ ही नहीं करती। ज्यादातर तो यह देखा गया है कि वह खुढा के न मानने वाले के साथ रिश्रायत करती है। मानो वह खुढा के खिलाफ बागी हो गई हो। उसके एक्-टो नहीं, हजारों कान ऐसे होते हैं कि वह खुदा की गुत्थी को और उलझा देते हैं । समझ मे तो साफ आता हैं कि ईश्वर का सवाल एक-टम गैर-जरूरी हैं; पर समाज ने हमको नकेल का लॅट बना रखा है और नकेल सरकार के हाथों में थमा रखी है। अव नकेल तुड़ाने से पहले हम अपना खाना प जुटाना सीख लें और फिर नकेल तुड़ा लें तो सुख मिले । अगर सचमुच हम जो कुछ हैं उससे ऊँचा उठना मंजूर है तो हमे चाहिए कि हम एक नई पूजा ईजाद करें यानी जिन्दगी की पूजा और वह यह कि जीवन बहुत पाक चीज है । इस पर ऐसा कोई धन्वा न लगे कि हमारा सुख ही हमाग दुःख बन जाय । धर्म अपनाना ही है तो ऐसा तो हो जो हमको सुख न दे, पर सुख पाने से रोके तो नहीं । ईश्वर मानो; पर डरो ईश्वर से भी नहीं। डरे, वह जवान भी कैसा ?
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मोदी सरकार (modi goverment) के लिए वाकई बहुत बड़ी जीत है कि अब लोकसभा (loksabha) में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को पास कराने में सफलता मिली है। लोकसभा में आज वोटिंग हुई जिसमें इस बिल के पक्ष में 366 वोट पड़े तो विरोध में 66 वोट पड़े। इससे पहले सोमवार को मोदी सरकार ने राज्यसभा (rajyasabha) में पास करा लिया था। अब राष्ट्रपति के मंजूरी के साथ ही धारा 370 राज्य में समाप्त हो जाएगा।
सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने सदन में अपनी सीट के पास वाली सीट की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज वह (फारूख) सदन में नहीं हैं, उनकी आवाज नहीं सुनी जा सकी। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,"वह न तो हिरासत में हैं और न ही गिरफ्तार किया गया है, वह अपनी मर्जी से अपने घर पर हैं । " जब सुले ने कहा कि हो सकता है नेशनल कांफ्रेंस नेता अस्वस्थ हों। इस पर शाह ने कहा कि इसके बारे में डाक्टर बता सकते हैं ।
" मैं इलाज नहीं कर सकता, यह डाक्टरों को करना है। " लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 एवं जम्मू कश्मीर (Jammu kashmir) संबंधी संकल्प पर चर्चा के दौरान सुप्रिया सुले के अलावा कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और द्रमुक के टी आर बालू ने भी नेशनल कांफ्रेंस नेता के बारे में जानना चाहा ।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मोदी सरकार के लिए वाकई बहुत बड़ी जीत है कि अब लोकसभा में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को पास कराने में सफलता मिली है। लोकसभा में आज वोटिंग हुई जिसमें इस बिल के पक्ष में तीन सौ छयासठ वोट पड़े तो विरोध में छयासठ वोट पड़े। इससे पहले सोमवार को मोदी सरकार ने राज्यसभा में पास करा लिया था। अब राष्ट्रपति के मंजूरी के साथ ही धारा तीन सौ सत्तर राज्य में समाप्त हो जाएगा। सुप्रिया सुले ने सदन में अपनी सीट के पास वाली सीट की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज वह सदन में नहीं हैं, उनकी आवाज नहीं सुनी जा सकी। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,"वह न तो हिरासत में हैं और न ही गिरफ्तार किया गया है, वह अपनी मर्जी से अपने घर पर हैं । " जब सुले ने कहा कि हो सकता है नेशनल कांफ्रेंस नेता अस्वस्थ हों। इस पर शाह ने कहा कि इसके बारे में डाक्टर बता सकते हैं । " मैं इलाज नहीं कर सकता, यह डाक्टरों को करना है। " लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक दो हज़ार उन्नीस एवं जम्मू कश्मीर संबंधी संकल्प पर चर्चा के दौरान सुप्रिया सुले के अलावा कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और द्रमुक के टी आर बालू ने भी नेशनल कांफ्रेंस नेता के बारे में जानना चाहा । Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
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पता बता रहे हैं कि यही गंगानदी देवोंके राष्ट्र से बहती हुई यहाँ गई है। यह प्रारम्भमेदेवोंकी नदी थी, भारतवर्ष यही नदी आर्योको सुख देने लगी है। यह गंगानदी वाचक शब्द भीतिदेवोंका लोक है यही भाव व्यक्त कर रहे हैं। नदी बाचक शब्द स्थानका निर्देश स्पष्टरीतिसे करते हैं इसलिये देवोंके राष्ट्रका निश्चय करने के लिये ये शब्द बड़े सहायक हो सकते हैं ।
देवों का
भाग ।
अस्तु इस प्रकार देवनामक मानवजाति। त्रिविष्ट ) तिब्बत में रहती थी. अपने अन्नके लिये भारतीय लोगों पर निर्भर रहती थी । भारतीय आर्य लोग यज्ञ याग करते थे और इन्द्रादि देवता के नामसे की मुष्टियाँ अथवा अधिक भाग अलग रखते थे, जैसे फल फंड होते हैं। देवोंके लिये अन्न भाग अलग रखने के बिना वे आर्य लोग किसी भी अन्नका सेवन नहीं करते थे। इस प्रकार देवोंके लिये आवश्यक अनुभाग भारतसे मिलता था। देवोंको पहुंचाने की व्यवस्था सब छोटे और बड़े यागोंमें याग के प्रमाणसे तथा यजमानके धनके अनुसार होती थी।
यज्ञ का पारितोषिक ।
इस प्रकार यज्ञके द्वारा देवोंको अभाग देनेके कारण देव भारतीय की रक्षा करते थे, यह तो स्पष्ट ही है परन्तु इसके अतिरिक्त भी यज्ञकर्ताओं को एक बड़ा भारी पारतोषिक मिलता था, वह "स्वर्गवास" के नाम से प्रसिद्ध है. आजकल स्वर्गवास " का अर्थ विपरीत ही हुआ है, स्वर्गवास, कैलाशवास, बैकुंठवास आदि शब्द आजकल मरणोत्तरकी स्थिति दर्शाने वाले शब्द समझे जाते हैं, परन्तु जिस समय देवजाति जीवित थी और
उनका आसे परस्पर मेलमिलापका संबंध था, उस समय पूर्वोक्त स्वर्गवांसादि शब्द मरणोत्तरकी अवस्था बताने वाले न थे। महाभारतमें भी इसके कई प्रमाण मिल सकते हैं१ - अरू सीखनेके लिये वीर अर्जुन स्वर्गमें गया था, इन्द्रके पास चार वर्ष रहा था, और वहाँ अस्त्र विद्या सीखकर वापस गया था। यह अर्जुनका स्वर्गवास जीवित दशा में ही हुआ था । ( इन्द्रलोका भिगमनपर्व - वनपर्व अ ४०-४७)
० नारदमुनि स्वर्गसे भारतवर्ष में और यहाँ से नागलोकम कई बार भ्रमण कर चुके थे। उनको देवोंके मुनि कहते थे । इनका राजनैतिक कार्य इतिहास में प्रसिद्ध है। ये स्वर्ग में रहते हुए भारत में भी रहते थे ।
३ - लोमश ऋषि स्वर्गमें गये थे और वहाँका वृत्तांत उन्होंने धर्मराजको कथन किया है। ( वनपर्व अ६१ )
ये सब जीवित दशामें ही स्वर्गवासी होगये थे । इस प्रकार कई प्रमाण दिये जा सकते हैं परन्तु सब प्रमाण यहाँ रख देनेकी कोई आवश्यकता नहीं है। महाभारतके पाठ करते २ ये प्रमाण पाठकोंके सन्मुख सकते हैं। तात्पर्य उस अतिप्राचीन समय में स्वर्गवास जीतेजी होता था और उसका अर्थ "तिब्बत में निवास " इतना ही था । यहाँ पाठक पूछ सकते हैं कि स्वर्गका प्रलोभन इतना विशेष क्यों है ? वहाँ तो भाजनके लिये अन भी पैदा नहीं होता. फिर वहाँ जाकर रहनेसे सुख किस प्रकार होसकता है ? इसका उत्तर जिन्होंने हिमालयकी सैरकी है उनको कहनेकी आवश्यकता नहीं है। हिमालयकी पहाड़ियोंमें खाने-पीने के पदार्थ इतने विपुल नहीं प्राप्त होते, परन्तु वहॉकी जल वायुके सुख और
वहां की शांति अद्वितीय ही है। इस कारण इस समय भी उत्तरभारत के लोग बस दो मास की छुट्टियों में पहाड की सेह जरूर करते हैं, तथा धनिक लोग सीलनात्यादि स्थानों में छोटासा मान बनानेकी इच्छा करते हैं। इससे स्पष्ट है कि हिमालय और उसके उत्तरंभागके स्थान में कुछ विशेष सुख हैं, जो यहाँ विपुल धान्य होते हुए भी नहीं मिल सकता। इसीलिये प्राचीन कालके लोग स्वर्ग ने लिये स्थान मिलने का प्रयत्न करते थे, स्थान मिलने पर वृद्धावस्था में वहाँ आकर आनन्दसे रहते थे। भारतदेश में जीवन कलह है वह यहाँ नहीं, साझ रहना और हवाकी उत्तमता रहने के कारण आय भावकः ही रहता है। जलकी निर्मलता के कारण रोग कम होते हैं सुख स्वदेश
के हैं। इसलिये भारतीय लोग स्वर्गमें थोड़ी भूमि प्राप्त करने के इच्छुक थे और जो बहुत यशयाम करते थे और देवोको धान्यादिक बहुत देते थे उनको तिब्बतमें थोड़ा स्थान दिया भी जाक था। देखिये इस विषय में महाभारतकी साक्षी
अष्टक उवाचः
इच्छामित्व मा. प्रपतपातं यदि लोकाः पार्थिव संति -- मेऽत्र । वद्यन्तरिक्षे यदि यो दिनि स्थिताः क्षेत्रनं त्वा तस्य धर्मस्य मन्ये ॥ ६ ॥
ययातिरुवाच'यावत्पृथिव्यां विहितं गवाश्वं सहाररोयेः पशुभिः पादतेश्च । तावन्लीका दिवि ते संस्थिता वै तथा विज्ञानी.. नरेन्द्रसिंह ।।-१०- ।। ,
बोलेऐनाक! को जान पड़ता है
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पता बता रहे हैं कि यही गंगानदी देवोंके राष्ट्र से बहती हुई यहाँ गई है। यह प्रारम्भमेदेवोंकी नदी थी, भारतवर्ष यही नदी आर्योको सुख देने लगी है। यह गंगानदी वाचक शब्द भीतिदेवोंका लोक है यही भाव व्यक्त कर रहे हैं। नदी बाचक शब्द स्थानका निर्देश स्पष्टरीतिसे करते हैं इसलिये देवोंके राष्ट्रका निश्चय करने के लिये ये शब्द बड़े सहायक हो सकते हैं । देवों का भाग । अस्तु इस प्रकार देवनामक मानवजाति। त्रिविष्ट ) तिब्बत में रहती थी. अपने अन्नके लिये भारतीय लोगों पर निर्भर रहती थी । भारतीय आर्य लोग यज्ञ याग करते थे और इन्द्रादि देवता के नामसे की मुष्टियाँ अथवा अधिक भाग अलग रखते थे, जैसे फल फंड होते हैं। देवोंके लिये अन्न भाग अलग रखने के बिना वे आर्य लोग किसी भी अन्नका सेवन नहीं करते थे। इस प्रकार देवोंके लिये आवश्यक अनुभाग भारतसे मिलता था। देवोंको पहुंचाने की व्यवस्था सब छोटे और बड़े यागोंमें याग के प्रमाणसे तथा यजमानके धनके अनुसार होती थी। यज्ञ का पारितोषिक । इस प्रकार यज्ञके द्वारा देवोंको अभाग देनेके कारण देव भारतीय की रक्षा करते थे, यह तो स्पष्ट ही है परन्तु इसके अतिरिक्त भी यज्ञकर्ताओं को एक बड़ा भारी पारतोषिक मिलता था, वह "स्वर्गवास" के नाम से प्रसिद्ध है. आजकल स्वर्गवास " का अर्थ विपरीत ही हुआ है, स्वर्गवास, कैलाशवास, बैकुंठवास आदि शब्द आजकल मरणोत्तरकी स्थिति दर्शाने वाले शब्द समझे जाते हैं, परन्तु जिस समय देवजाति जीवित थी और उनका आसे परस्पर मेलमिलापका संबंध था, उस समय पूर्वोक्त स्वर्गवांसादि शब्द मरणोत्तरकी अवस्था बताने वाले न थे। महाभारतमें भी इसके कई प्रमाण मिल सकते हैंएक - अरू सीखनेके लिये वीर अर्जुन स्वर्गमें गया था, इन्द्रके पास चार वर्ष रहा था, और वहाँ अस्त्र विद्या सीखकर वापस गया था। यह अर्जुनका स्वर्गवास जीवित दशा में ही हुआ था । शून्य नारदमुनि स्वर्गसे भारतवर्ष में और यहाँ से नागलोकम कई बार भ्रमण कर चुके थे। उनको देवोंके मुनि कहते थे । इनका राजनैतिक कार्य इतिहास में प्रसिद्ध है। ये स्वर्ग में रहते हुए भारत में भी रहते थे । तीन - लोमश ऋषि स्वर्गमें गये थे और वहाँका वृत्तांत उन्होंने धर्मराजको कथन किया है। ये सब जीवित दशामें ही स्वर्गवासी होगये थे । इस प्रकार कई प्रमाण दिये जा सकते हैं परन्तु सब प्रमाण यहाँ रख देनेकी कोई आवश्यकता नहीं है। महाभारतके पाठ करते दो ये प्रमाण पाठकोंके सन्मुख सकते हैं। तात्पर्य उस अतिप्राचीन समय में स्वर्गवास जीतेजी होता था और उसका अर्थ "तिब्बत में निवास " इतना ही था । यहाँ पाठक पूछ सकते हैं कि स्वर्गका प्रलोभन इतना विशेष क्यों है ? वहाँ तो भाजनके लिये अन भी पैदा नहीं होता. फिर वहाँ जाकर रहनेसे सुख किस प्रकार होसकता है ? इसका उत्तर जिन्होंने हिमालयकी सैरकी है उनको कहनेकी आवश्यकता नहीं है। हिमालयकी पहाड़ियोंमें खाने-पीने के पदार्थ इतने विपुल नहीं प्राप्त होते, परन्तु वहॉकी जल वायुके सुख और वहां की शांति अद्वितीय ही है। इस कारण इस समय भी उत्तरभारत के लोग बस दो मास की छुट्टियों में पहाड की सेह जरूर करते हैं, तथा धनिक लोग सीलनात्यादि स्थानों में छोटासा मान बनानेकी इच्छा करते हैं। इससे स्पष्ट है कि हिमालय और उसके उत्तरंभागके स्थान में कुछ विशेष सुख हैं, जो यहाँ विपुल धान्य होते हुए भी नहीं मिल सकता। इसीलिये प्राचीन कालके लोग स्वर्ग ने लिये स्थान मिलने का प्रयत्न करते थे, स्थान मिलने पर वृद्धावस्था में वहाँ आकर आनन्दसे रहते थे। भारतदेश में जीवन कलह है वह यहाँ नहीं, साझ रहना और हवाकी उत्तमता रहने के कारण आय भावकः ही रहता है। जलकी निर्मलता के कारण रोग कम होते हैं सुख स्वदेश के हैं। इसलिये भारतीय लोग स्वर्गमें थोड़ी भूमि प्राप्त करने के इच्छुक थे और जो बहुत यशयाम करते थे और देवोको धान्यादिक बहुत देते थे उनको तिब्बतमें थोड़ा स्थान दिया भी जाक था। देखिये इस विषय में महाभारतकी साक्षी अष्टक उवाचः इच्छामित्व मा. प्रपतपातं यदि लोकाः पार्थिव संति -- मेऽत्र । वद्यन्तरिक्षे यदि यो दिनि स्थिताः क्षेत्रनं त्वा तस्य धर्मस्य मन्ये ॥ छः ॥ ययातिरुवाच'यावत्पृथिव्यां विहितं गवाश्वं सहाररोयेः पशुभिः पादतेश्च । तावन्लीका दिवि ते संस्थिता वै तथा विज्ञानी.. नरेन्द्रसिंह ।।-दस- ।। , बोलेऐनाक! को जान पड़ता है
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कोरोना संक्रमण को लेकर अगले सात दिन हरिद्वार सहित पूरे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लोग एक सप्ताह तक घरों से बाहर नहीं निकले तो संक्रमण की कड़ी टूट जाएगी। अगर लोगों से संयम बरतने में चूक हुई तो संक्रमण को नियंत्रित करना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जिला अस्पताल के पीएमएस और मेला अस्पताल आइसोलेशन सेंटर के प्रभारी डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि हाल के दिनों में विदेश और विभिन्न राज्यों से काफी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे हैं। हालांकि विभाग स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच कर बाहर से आए लोगों को कोरंटाइन और आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कर रहा है।
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कोरोना संक्रमण को लेकर अगले सात दिन हरिद्वार सहित पूरे राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लोग एक सप्ताह तक घरों से बाहर नहीं निकले तो संक्रमण की कड़ी टूट जाएगी। अगर लोगों से संयम बरतने में चूक हुई तो संक्रमण को नियंत्रित करना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। जिला अस्पताल के पीएमएस और मेला अस्पताल आइसोलेशन सेंटर के प्रभारी डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि हाल के दिनों में विदेश और विभिन्न राज्यों से काफी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे हैं। हालांकि विभाग स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच कर बाहर से आए लोगों को कोरंटाइन और आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कर रहा है।
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मुकूटबन. झरी जामणी इस आदिवासीबहूल तहसील के अहेरअल्ली इस गांव के किसान लगभग 21 वर्ष से बांध के जल से वंचित रहे है. सतपल्ली से एक किलोमिटर दूरी पर उमरी (पोड) बांध से इन किसानों को जल तो मिला नही लेकिन किसानों की जमीन भी कुछ काम की नही रही है. अहेरअल्ली के किसानों ने जमीन पूर्वत कारने की मांग की है.
'सरकारी काम ओर एक साल रूक यह कहावत है. लेकिन एक दो नही लगभग 21 वर्ष पहले लघु सिचाई विभाग पांढरकवडा ने सतपल्ली समीप उमरी में बांध का निर्माण किया है. दाय ओर बाए ऐसे दो नहर भी तैयार की है. उसके लिए किसानों के खेतो में खोदकाम कीया गया. उसके लिए बडे पैमाने पर सरकार ने जमीन अधिग्रहण की. लेकिन 21 वर्ष के बाद भी आज तक इस बांध की एक बुंद भी अहेरअल्ली के किसानों को नही मिला. नहर लेकिन खोदकर रखी. जिस वजह से किसानों को पिछले 21 वर्ष से फसल लेना असंभव हुआ है. जिसके चलते किसानों को पिछले 21 वर्ष से अर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड रहा है.
हम खुद नहर में गई जमीन पहले जैसे करने के लिए लाखों रूपये का खर्च आता है वैसे अर्थिक परिस्थिती हमारी नही है. पिछले 21 वर्ष से इस बांध का पानी नही मिला है ओर अब मिलने की संभावना भी नही है. जिस वजह से सरकार से विनंती है कि, जल ना दे लेकिन हमारी जमीन पहली जैसे करके दिया जाए. बांध लिकेज होने कारन यह पानी ढूढने से भी नही मिलेगा. जिस वजह से बांध में नही तो खेत में कैसे आयेगा ऐसा सवाल किसान वैभव राऊत, रिवास भोयर, रोहित राऊत ने किया.
बांध में पानी नही है लेकिन जमीन गई है. बांध में मछली का उत्पादन करने का नियोजन किया था. मछली मार संस्था भी तैयार की. लेकिन बांध में पानी थमने का नाम नही लेता है जिस वजह से उनका भी बडे पैमाने पर नुकसान हुआ है. इस बांध के लिए जमिन अधिग्रहण करते समय यहा के परिवार सुखी होने वचन सरकार ने दिया था लेकिन अब तक कुछ नही हुआ है. आज इस बांध पर एक भी कर्मचारी नही है.
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मुकूटबन. झरी जामणी इस आदिवासीबहूल तहसील के अहेरअल्ली इस गांव के किसान लगभग इक्कीस वर्ष से बांध के जल से वंचित रहे है. सतपल्ली से एक किलोमिटर दूरी पर उमरी बांध से इन किसानों को जल तो मिला नही लेकिन किसानों की जमीन भी कुछ काम की नही रही है. अहेरअल्ली के किसानों ने जमीन पूर्वत कारने की मांग की है. 'सरकारी काम ओर एक साल रूक यह कहावत है. लेकिन एक दो नही लगभग इक्कीस वर्ष पहले लघु सिचाई विभाग पांढरकवडा ने सतपल्ली समीप उमरी में बांध का निर्माण किया है. दाय ओर बाए ऐसे दो नहर भी तैयार की है. उसके लिए किसानों के खेतो में खोदकाम कीया गया. उसके लिए बडे पैमाने पर सरकार ने जमीन अधिग्रहण की. लेकिन इक्कीस वर्ष के बाद भी आज तक इस बांध की एक बुंद भी अहेरअल्ली के किसानों को नही मिला. नहर लेकिन खोदकर रखी. जिस वजह से किसानों को पिछले इक्कीस वर्ष से फसल लेना असंभव हुआ है. जिसके चलते किसानों को पिछले इक्कीस वर्ष से अर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड रहा है. हम खुद नहर में गई जमीन पहले जैसे करने के लिए लाखों रूपये का खर्च आता है वैसे अर्थिक परिस्थिती हमारी नही है. पिछले इक्कीस वर्ष से इस बांध का पानी नही मिला है ओर अब मिलने की संभावना भी नही है. जिस वजह से सरकार से विनंती है कि, जल ना दे लेकिन हमारी जमीन पहली जैसे करके दिया जाए. बांध लिकेज होने कारन यह पानी ढूढने से भी नही मिलेगा. जिस वजह से बांध में नही तो खेत में कैसे आयेगा ऐसा सवाल किसान वैभव राऊत, रिवास भोयर, रोहित राऊत ने किया. बांध में पानी नही है लेकिन जमीन गई है. बांध में मछली का उत्पादन करने का नियोजन किया था. मछली मार संस्था भी तैयार की. लेकिन बांध में पानी थमने का नाम नही लेता है जिस वजह से उनका भी बडे पैमाने पर नुकसान हुआ है. इस बांध के लिए जमिन अधिग्रहण करते समय यहा के परिवार सुखी होने वचन सरकार ने दिया था लेकिन अब तक कुछ नही हुआ है. आज इस बांध पर एक भी कर्मचारी नही है.
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Singal Use Plastics ban पहली जुलाई से एक बार प्रयोग होने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध रहेगा। पहली जुलाई से प्लास्टिक उपयोग पर रोक को प्रभावी करने और कानूनी कारवाई के लिए पुलिस जिला मजिस्ट्रेट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहरी निकाय और अन्य संबंधित एजेंसियां काम करें।
शिमला, राज्य ब्यूरो। Singal Use Plastics ban, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने सभी जिला के उपायुक्तों को आदेश दिए हैं कि पहली जुलाई से एक बार प्रयोग होने वाले, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध सुनिश्चित करें। सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को सभी जिलों में प्लास्टिक उपयोग को रोकने के केंद्र सरकार की अधिसूचना को क्रियान्वित करें। पहली जुलाई से प्लास्टिक उपयोग पर रोक को प्रभावी करने और कानूनी कारवाई के लिए पुलिस, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी निकाय और अन्य संबंधित एजेंसियां काम करें।
पहली जुलाई से पाली स्टाइरीन, थर्माकोल वस्तुओं में प्लास्टिक ईयर बड, गुब्बारों की प्लास्टिक डंडियां, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम की डंडियां और प्लास्टिक सजावटी सामग्री पर रोक लगाई गई है। सभी प्रकार की प्लास्टिक कटलरी, मिठाई के डिब्बों को लपेटने का प्लास्टिक पेपर, सिगरेट पैक, निमंत्रण कार्ड और 100 माइक्रोन से कम मोटे प्लास्टिक के बने बैनरों का भी इस्तेमाल नहीं होगा।
प्लास्टिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की पहल करने वाला हिमाचल देश का मार्ग दर्शक राज्य है। प्रदेश में पहले से प्लास्टिक की थैलियों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह से रोक है। अब प्लास्टिक की वस्तुओं के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक को सख्ती से लागू करने का काम किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं और कानूनी कारवाई करने वाली सभी एजेंसियों को तत्परता से कार्य करने के लिए कहा गया है।
एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बैठक में निदेशक पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीक ललित जैन, निदेशक शहरी विकास मनमोहन शर्मा, निदेशक ग्रामीण विकास ऋग्वेद ठाकुर, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क विभाग हरबंस सिंह ब्रसकोन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अपूर्व देवगन, वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न जिलों के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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Singal Use Plastics ban पहली जुलाई से एक बार प्रयोग होने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध रहेगा। पहली जुलाई से प्लास्टिक उपयोग पर रोक को प्रभावी करने और कानूनी कारवाई के लिए पुलिस जिला मजिस्ट्रेट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहरी निकाय और अन्य संबंधित एजेंसियां काम करें। शिमला, राज्य ब्यूरो। Singal Use Plastics ban, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने सभी जिला के उपायुक्तों को आदेश दिए हैं कि पहली जुलाई से एक बार प्रयोग होने वाले, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध सुनिश्चित करें। सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को सभी जिलों में प्लास्टिक उपयोग को रोकने के केंद्र सरकार की अधिसूचना को क्रियान्वित करें। पहली जुलाई से प्लास्टिक उपयोग पर रोक को प्रभावी करने और कानूनी कारवाई के लिए पुलिस, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी निकाय और अन्य संबंधित एजेंसियां काम करें। पहली जुलाई से पाली स्टाइरीन, थर्माकोल वस्तुओं में प्लास्टिक ईयर बड, गुब्बारों की प्लास्टिक डंडियां, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम की डंडियां और प्लास्टिक सजावटी सामग्री पर रोक लगाई गई है। सभी प्रकार की प्लास्टिक कटलरी, मिठाई के डिब्बों को लपेटने का प्लास्टिक पेपर, सिगरेट पैक, निमंत्रण कार्ड और एक सौ माइक्रोन से कम मोटे प्लास्टिक के बने बैनरों का भी इस्तेमाल नहीं होगा। प्लास्टिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की पहल करने वाला हिमाचल देश का मार्ग दर्शक राज्य है। प्रदेश में पहले से प्लास्टिक की थैलियों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह से रोक है। अब प्लास्टिक की वस्तुओं के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक को सख्ती से लागू करने का काम किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं और कानूनी कारवाई करने वाली सभी एजेंसियों को तत्परता से कार्य करने के लिए कहा गया है। एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बैठक में निदेशक पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीक ललित जैन, निदेशक शहरी विकास मनमोहन शर्मा, निदेशक ग्रामीण विकास ऋग्वेद ठाकुर, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क विभाग हरबंस सिंह ब्रसकोन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अपूर्व देवगन, वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न जिलों के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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दक्षिण कोरिया की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी SAMSUNG एक नया कारनामा करने जा रही हैं. हमेशा अपने दमदार स्मार्टफोन के जरिये बाजार और यूजर्स के दिलों पर राज करने वाली SAMSUNG जल्द अपना अगला स्मार्टफोन लाएगी. बताया जा रहा हैं कि कंपनी का अगला स्मार्टफोएन 12GB रैम के साथ आएगा. अगर ऐसा होता हैं तो कंपनी इतिहास रच देगी.
आपको बता दें कि कंपनी इस बार भारतीय बाजार में अपना एक ऐसा स्मार्टफोन पेश करने वाली है. बता दें कि हाल ही में कंपनी द्वारा ऐसा दावा किया गया है कि अब आने वाला नया स्मार्टफोन 12 जीबी रैम के साथ पेश किया जाएगा. कहा जा रहा हैं कि 2019 के शुरूआत में पेश कराये जाने वाला एस सीरीज का यह नया फ़ोन होगा. इसे 4 अलग-अलग संस्करण में पेश किया जाना हैं. साथ ही ख़बरें यह भी हैं कि 4 में से एक वेरिएंट 5G होगा.
आपको बता दें कि 2019 की शुरूआत में पेश किए जाने वाले इस फ़ोन में स्टोरेज भी काफी अधिक होगी. कहा जा रहा है कि स्मार्टफोन में आपको 6. 3 इंच की लंबी फुल एचडी प्लस डिस्पले देखने को मिल सकती है. वहीं बैक पैनल पर चार कैमरे और फ्रंट पैनल पर दो कैमरे देखने को मिलेंगे. इसकी कीमत और नाम को लेकर कोई खुलासा नहीं हुआ है.
यूजर्स के लिए आई बुरी खबर, JIO छीन सकती है आपसे सारी सुविधाएं ?
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दक्षिण कोरिया की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी SAMSUNG एक नया कारनामा करने जा रही हैं. हमेशा अपने दमदार स्मार्टफोन के जरिये बाजार और यूजर्स के दिलों पर राज करने वाली SAMSUNG जल्द अपना अगला स्मार्टफोन लाएगी. बताया जा रहा हैं कि कंपनी का अगला स्मार्टफोएन बारहGB रैम के साथ आएगा. अगर ऐसा होता हैं तो कंपनी इतिहास रच देगी. आपको बता दें कि कंपनी इस बार भारतीय बाजार में अपना एक ऐसा स्मार्टफोन पेश करने वाली है. बता दें कि हाल ही में कंपनी द्वारा ऐसा दावा किया गया है कि अब आने वाला नया स्मार्टफोन बारह जीबी रैम के साथ पेश किया जाएगा. कहा जा रहा हैं कि दो हज़ार उन्नीस के शुरूआत में पेश कराये जाने वाला एस सीरीज का यह नया फ़ोन होगा. इसे चार अलग-अलग संस्करण में पेश किया जाना हैं. साथ ही ख़बरें यह भी हैं कि चार में से एक वेरिएंट पाँचG होगा. आपको बता दें कि दो हज़ार उन्नीस की शुरूआत में पेश किए जाने वाले इस फ़ोन में स्टोरेज भी काफी अधिक होगी. कहा जा रहा है कि स्मार्टफोन में आपको छः. तीन इंच की लंबी फुल एचडी प्लस डिस्पले देखने को मिल सकती है. वहीं बैक पैनल पर चार कैमरे और फ्रंट पैनल पर दो कैमरे देखने को मिलेंगे. इसकी कीमत और नाम को लेकर कोई खुलासा नहीं हुआ है. यूजर्स के लिए आई बुरी खबर, JIO छीन सकती है आपसे सारी सुविधाएं ?
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नरवाना, 5 अक्तूबर (अस)
हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर सत्संग भवन के निकट मंगलवार तड़के हिसार से चंडीगढ़ जा रही हरियाणा रोडवेज की एक बस व एक ट्राले के बीच सीधी टक्कर में एक यात्री की मौत हो गई जबकि चालक व परिचालक सहित 2 दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हो गये। चालक राजेंद्र सिंह सहित 12 गंभीर घायलों को पीजीआई अग्रोहा रेफर किया गया है। मृतक का सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक की पहचान आजाद नगर हिसार निवासी सूबे सिंह (62) के रूप में हुई। वह अपनी पत्नी राजरानी के साथ हिसार से चंडीगढ़ जा रहा था। राजरानी को भी गंभीर हालत में पीजीआई रेफर किया गया है।
यात्रियों से भरी बस सुबह हिसार से चडीगढ़ जा रही थी। इसमें लगभग 50 यात्री सवार थे। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब यह बस नरवाना बाइपास मोड़ पर पहुंची तो नरवाना की तरफ से सड़क क्रॉस कर रहे ट्राले से टक्कर हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर घायलों में मीना निवासी सोंगल (कैथल), कशिश (कैथल), रामकिशन (हिसार), सोमलाल (जम्मू कशमीर), राजेंद्र (बालक), राजरानी पत्नी सूबे सिंह (हिसार), सुरजीत (नरवाना), प्रवीण (कैथल), महेंद्र (सिरसा), राजेंद्र (बस चालक), शिवराज, मुकेश (सुदकैन कलां)को अग्रोहा पीजीआई में रैफर कर दिया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एएसपी वसीम अकरम ने सिविल अस्पताल में पहुंच कर घायलों से मिलकर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों से बातचीत कर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
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नरवाना, पाँच अक्तूबर हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर सत्संग भवन के निकट मंगलवार तड़के हिसार से चंडीगढ़ जा रही हरियाणा रोडवेज की एक बस व एक ट्राले के बीच सीधी टक्कर में एक यात्री की मौत हो गई जबकि चालक व परिचालक सहित दो दर्जन से ज्यादा यात्री घायल हो गये। चालक राजेंद्र सिंह सहित बारह गंभीर घायलों को पीजीआई अग्रोहा रेफर किया गया है। मृतक का सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतक की पहचान आजाद नगर हिसार निवासी सूबे सिंह के रूप में हुई। वह अपनी पत्नी राजरानी के साथ हिसार से चंडीगढ़ जा रहा था। राजरानी को भी गंभीर हालत में पीजीआई रेफर किया गया है। यात्रियों से भरी बस सुबह हिसार से चडीगढ़ जा रही थी। इसमें लगभग पचास यात्री सवार थे। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब यह बस नरवाना बाइपास मोड़ पर पहुंची तो नरवाना की तरफ से सड़क क्रॉस कर रहे ट्राले से टक्कर हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर घायलों में मीना निवासी सोंगल , कशिश , रामकिशन , सोमलाल , राजेंद्र , राजरानी पत्नी सूबे सिंह , सुरजीत , प्रवीण , महेंद्र , राजेंद्र , शिवराज, मुकेश को अग्रोहा पीजीआई में रैफर कर दिया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एएसपी वसीम अकरम ने सिविल अस्पताल में पहुंच कर घायलों से मिलकर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों से बातचीत कर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
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नवनियुक्त सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार यानी आज न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के बोर्ड सदस्यों से मुलाकात की।
यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट को लेकर केरल उच्च न्यायालय का रुख किया है।
बता दें कि 'एनबीए' ने नए इंटरमीडियरी नियमों (new intermediary rules) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का रुख किया था।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है।
'यूनाइटेड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन' (United Indian Journalist Association) ने विभिन्न राज्यों एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करते हुए कई नियुक्तियां की हैं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा है।
प्रशंसक अब स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट और स्टार स्पोर्ट्स 1 पर 2021 NBA Playoffs और The Finals के चुनिंदा गेम्स देख सकते हैं।
'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा और किसान आंदोलन की कवरेज को लेकर वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की निंदा की है।
सार्वजनिक सेवा प्रसारक 'प्रसार भारती' (Prasar Bharati) और 'नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन' (NBA) ने कंटेंट पार्टनरशिप की घोषणा की है।
टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर इन दिनों 'घमासान' मचा हुआ है।
टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच BARC ने 15 अक्टूबर 2020 को 12 हफ्तों के लिए न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स न जारी करने का फैसला लिया था।
एसोसिएशन के फाउंडिंग मेंबर्स में OpIndia. com, Goachronicle. com, Republicworld. com, OTV Digital, DeshGujarat. com, Assamlive. com, NewsX. com, Sundayguardianlive. com और InKhabar. com आदि शामिल हैं।
निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने मुंबई में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम पर चिंता जताई है।
लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है।
निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने इस बारे में एक स्टेटमेंट भी जारी किया है।
एनबीए के प्रेजिडेंट और 'इंडिया टीवी' के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने हेट स्पीच के खिलाफ कुछ एडवर्टाइजर्स द्वारा उठाए गए कदम की सराहना की है।
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नवनियुक्त सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार यानी आज न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के बोर्ड सदस्यों से मुलाकात की। यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट को लेकर केरल उच्च न्यायालय का रुख किया है। बता दें कि 'एनबीए' ने नए इंटरमीडियरी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का रुख किया था। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में इस निर्णय की पुष्टि की गई है। 'यूनाइटेड इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन' ने विभिन्न राज्यों एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपना विस्तार करते हुए कई नियुक्तियां की हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा है। प्रशंसक अब स्टार स्पोर्ट्स सेलेक्ट और स्टार स्पोर्ट्स एक पर दो हज़ार इक्कीस NBA Playoffs और The Finals के चुनिंदा गेम्स देख सकते हैं। 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा और किसान आंदोलन की कवरेज को लेकर वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की निंदा की है। सार्वजनिक सेवा प्रसारक 'प्रसार भारती' और 'नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन' ने कंटेंट पार्टनरशिप की घोषणा की है। टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर इन दिनों 'घमासान' मचा हुआ है। टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच BARC ने पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार बीस को बारह हफ्तों के लिए न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स न जारी करने का फैसला लिया था। एसोसिएशन के फाउंडिंग मेंबर्स में OpIndia. com, Goachronicle. com, Republicworld. com, OTV Digital, DeshGujarat. com, Assamlive. com, NewsX. com, Sundayguardianlive. com और InKhabar. com आदि शामिल हैं। निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने मुंबई में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम पर चिंता जताई है। लंबे समय से चली आ रही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया है। निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' ने इस बारे में एक स्टेटमेंट भी जारी किया है। एनबीए के प्रेजिडेंट और 'इंडिया टीवी' के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने हेट स्पीच के खिलाफ कुछ एडवर्टाइजर्स द्वारा उठाए गए कदम की सराहना की है।
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बाहर निकालने का आदेश दे दिया। दूसरी बार एक जत्था फिर आया। मंत्री ने उसी तरह उनलोगो की भी परीक्षा ली। रात को सोने के समय समस्या थी पलङ्ग पर कौन सोए ? सब कहने लगे मैं इस बड़पन के योग्य नहीं हूँ । एक दूसरे से मनुहारें होने 2 लगीं। किन्तु किसी ने भी पलङ्ग पर सोना स्वीकार नहीं किया । सव बडे समझदार थे। सोचा - नींद क्यो नष्ट की जाय। कोई पलङ्ग पर सोना नहीं चाहता। बड़ा बनना नहीं चाहता । अपने सब समान हैं पलङ्ग को बीच में रख कर इसके चारो ओर सबको सो जाना चाहिये । मत्री बाहर खड़ा खड़ा सब कुछ देख रहा था। सबके पारस्परिक व्यवहार व बुद्धिमत्ता को देखकर वह बड़ा प्रभावित हुआ । सब अपने-अपने स्थान पर लेट गए । सूर्योदय होते ही मंत्री वहाँ पहुॅचा और सबको राजा के पास ले गया । मन्त्री ने राजा को सारी घटना सुनाई। फलतः सभी वहाँ रख
लिये गए ।
अणुवती बनने की कसौटी
हम उपदेश देते हैं। लोगो के शिथिल जीवन में एक स्फूर्ति का सचार होता है । अपने जीवन की बुराइयों को छोड़ने के लिये तैयार होते हैं। कोई जुआ खेलने का कोई मद्य-मास सेवन करने का कोई झूठ बोलने का तो कोई दूध में पानी मिलाने का प्रत्याख्यान करता है, ओर हम कराते भी हैं। उस समय
यह सोचने की आवश्यकता नहीं कि यह सम्यक्त्री है या मिथ्यात्वी । क्योंकि इस प्रकार के त्याग करने मे सम्यक्त्वी और मिथ्यात्वी के वीच में कोई भेद-रेखा नहीं सकती । सम्यक्त्वी के साथ त्याग करना सोने मे सुगन्ध है । किन्तु सम्यक्त्व की सीढी तक विरले ही पहुॅच पाते हैं। हम ऐसे अनेक देहाती में जाते है जहाँ के लोग सम्यक्त्र को कुछ नहीं समझने । क्या उस स्थिति में उनको त्याग प्रत्याख्यान नहीं करना में चाहिये 2 अणुव्रती बनने का मतलब भी यही है, अणुव्रतो में निर्दिष्ट अपनी जीवन गत बुराइयो को छोडना । फिर चाहे वह मिथ्यात्वी हो या सम्यक्त्त्री । यहाॅ अणुव्रतियो का मतलब पचम गुण स्थानवाले श्रावक से नहीं है किन्तु अहिंसा, सत्यादि अणुव्रतों की अणु-आशिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए यह 'अणुव्रती' सज्ञा दी गई है । अणुव्रती बनने की कसौटी सम्यक्त्व या मिथ्यात्त्र नहीं - किन्तु जीवन-शोधन है । जीवन-शोधन की इच्छा रखने वाला व्यक्ति अणुव्रती वन सकता है। भगवान् महावीर के उपदेश सुननेवाले करोड़ी थे, किन्तु सम्यक्त्वधारी श्रावक सिर्फ १५६००० ही थे। सम्यक्त्व रत्न की प्राप्ति बहुत मुश्किल है। जैसा कि कहा गया हैदृढ समकित धर थोडला, समकित विन शिव दूर समकित समकित कर रह्या, पामे विरला शुरु ।।
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बाहर निकालने का आदेश दे दिया। दूसरी बार एक जत्था फिर आया। मंत्री ने उसी तरह उनलोगो की भी परीक्षा ली। रात को सोने के समय समस्या थी पलङ्ग पर कौन सोए ? सब कहने लगे मैं इस बड़पन के योग्य नहीं हूँ । एक दूसरे से मनुहारें होने दो लगीं। किन्तु किसी ने भी पलङ्ग पर सोना स्वीकार नहीं किया । सव बडे समझदार थे। सोचा - नींद क्यो नष्ट की जाय। कोई पलङ्ग पर सोना नहीं चाहता। बड़ा बनना नहीं चाहता । अपने सब समान हैं पलङ्ग को बीच में रख कर इसके चारो ओर सबको सो जाना चाहिये । मत्री बाहर खड़ा खड़ा सब कुछ देख रहा था। सबके पारस्परिक व्यवहार व बुद्धिमत्ता को देखकर वह बड़ा प्रभावित हुआ । सब अपने-अपने स्थान पर लेट गए । सूर्योदय होते ही मंत्री वहाँ पहुॅचा और सबको राजा के पास ले गया । मन्त्री ने राजा को सारी घटना सुनाई। फलतः सभी वहाँ रख लिये गए । अणुवती बनने की कसौटी हम उपदेश देते हैं। लोगो के शिथिल जीवन में एक स्फूर्ति का सचार होता है । अपने जीवन की बुराइयों को छोड़ने के लिये तैयार होते हैं। कोई जुआ खेलने का कोई मद्य-मास सेवन करने का कोई झूठ बोलने का तो कोई दूध में पानी मिलाने का प्रत्याख्यान करता है, ओर हम कराते भी हैं। उस समय यह सोचने की आवश्यकता नहीं कि यह सम्यक्त्री है या मिथ्यात्वी । क्योंकि इस प्रकार के त्याग करने मे सम्यक्त्वी और मिथ्यात्वी के वीच में कोई भेद-रेखा नहीं सकती । सम्यक्त्वी के साथ त्याग करना सोने मे सुगन्ध है । किन्तु सम्यक्त्व की सीढी तक विरले ही पहुॅच पाते हैं। हम ऐसे अनेक देहाती में जाते है जहाँ के लोग सम्यक्त्र को कुछ नहीं समझने । क्या उस स्थिति में उनको त्याग प्रत्याख्यान नहीं करना में चाहिये दो अणुव्रती बनने का मतलब भी यही है, अणुव्रतो में निर्दिष्ट अपनी जीवन गत बुराइयो को छोडना । फिर चाहे वह मिथ्यात्वी हो या सम्यक्त्त्री । यहाॅ अणुव्रतियो का मतलब पचम गुण स्थानवाले श्रावक से नहीं है किन्तु अहिंसा, सत्यादि अणुव्रतों की अणु-आशिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए यह 'अणुव्रती' सज्ञा दी गई है । अणुव्रती बनने की कसौटी सम्यक्त्व या मिथ्यात्त्र नहीं - किन्तु जीवन-शोधन है । जीवन-शोधन की इच्छा रखने वाला व्यक्ति अणुव्रती वन सकता है। भगवान् महावीर के उपदेश सुननेवाले करोड़ी थे, किन्तु सम्यक्त्वधारी श्रावक सिर्फ एक लाख छप्पन हज़ार ही थे। सम्यक्त्व रत्न की प्राप्ति बहुत मुश्किल है। जैसा कि कहा गया हैदृढ समकित धर थोडला, समकित विन शिव दूर समकित समकित कर रह्या, पामे विरला शुरु ।।
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उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने आज यहां एक समारोह में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी एक प्रसिद्ध कवि, स्वतंत्रता सेनानी और अतुलनीय व्यक्ति थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1921 में अहमदाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में 'पूर्ण स्वाधीनता' का मुद्दा उठाया था। हमें हमेशा उनके योगदान को याद रखना चाहिए और उनके सपनों को साकार करने की कोशिश करनी चाहिए।
मौलाना हसरत मोहानी 20वीं सदी के पूर्वाध में महान स्वतंत्रता सेनानी थे। वे मुख्य रूप से गजल लिखते थे। उत्तर प्रदेश के मोहान स्थान से होने के कारण उन्हें मोहानी कहा जाता था। वे लोकमान्य तिलक के प्रशंसक थे और वे अपनी कविताओं में भी उन्हें तिलक महाराज कह कर संबोधित करते थे।
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उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने आज यहां एक समारोह में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी एक प्रसिद्ध कवि, स्वतंत्रता सेनानी और अतुलनीय व्यक्ति थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में अहमदाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में 'पूर्ण स्वाधीनता' का मुद्दा उठाया था। हमें हमेशा उनके योगदान को याद रखना चाहिए और उनके सपनों को साकार करने की कोशिश करनी चाहिए। मौलाना हसरत मोहानी बीसवीं सदी के पूर्वाध में महान स्वतंत्रता सेनानी थे। वे मुख्य रूप से गजल लिखते थे। उत्तर प्रदेश के मोहान स्थान से होने के कारण उन्हें मोहानी कहा जाता था। वे लोकमान्य तिलक के प्रशंसक थे और वे अपनी कविताओं में भी उन्हें तिलक महाराज कह कर संबोधित करते थे।
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जिले में 24 घंटे के भीतर चार नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जिले में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 30 हो गई है। जबकि 4 लोग ने कोरोना को हरा दिया हैं। फिलहाल जिले में कुल एक्टिव मरीजों का संख्या 26 है। पश्चिम चंपारण के सिविल सर्जन डॉ. श्रीकांत दुबे ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार देर शाम आरटीपीसीआर जांच में चार नए एक्टिव मरीज मिले हैं। उन्होंने बताया कि एक भी मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं है। सभी होम आइसोलेशन में है। विभाग उनकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। सिविल सर्जन ने लोगों से कोरोना गाइडलाइन के पालन की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकले एवं भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से परहेज करें।
बता दे कि सोमवार देर शाम आई रिपोर्ट में चार लोगों की कोरोना रिपोर्ट आरटीपीसीआर विधि से पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही जिले में कोरोना मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है। हालांकि चार मरीज कोरोना को मात दे चुके है। वर्तमान में एक्टिव केस की संख्या 26 है। सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने बताया कि सोमवार को जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उसमे चमुआ,नरकटियागंज एवं बेतिया के लोग शामिल है। उन्होंने बताया कि फिलहाल एक भी संक्रमित मरीजों का इलाज गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नहीं चल रहा है। सभी मरीज होम आइसोलेशन में है।
सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। जिले में अब तक जितने भी संक्रमित मिले है। वे होम क्वारंटाइन है। किसी में भी कोई गंभीर समस्या अभी तक देखने को नहीं मिली है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जिसमें छह बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। जिले के अन्य अस्पतालों में भी आइसोलेशन वार्ड बनाए गए है। ऑक्सीजन से लेकर कोरोना के इलाज में प्रयुक्त होने वाली आवश्यक दवाइयां भी सभी अस्पतालों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कोरोना की जांच बढ़ा दी गयी है। सोमवार,रविवार शनिवार, शुक्रवार एवं गुरुवार को आई जांच रिपोर्ट में जीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों के 30 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जिसमें चार लोग कोरोना को मात दे चुके हैं। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि कोरोना की जांच तेज कर दी गयी है। प्रतिदिन 9 सौ से ज्यादा लोगों का सैंपल आरटीपीसीआर एवं एंटीजन विधि से किया जा रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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जिले में चौबीस घंटाटे के भीतर चार नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जिले में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या तीस हो गई है। जबकि चार लोग ने कोरोना को हरा दिया हैं। फिलहाल जिले में कुल एक्टिव मरीजों का संख्या छब्बीस है। पश्चिम चंपारण के सिविल सर्जन डॉ. श्रीकांत दुबे ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार देर शाम आरटीपीसीआर जांच में चार नए एक्टिव मरीज मिले हैं। उन्होंने बताया कि एक भी मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं है। सभी होम आइसोलेशन में है। विभाग उनकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। सिविल सर्जन ने लोगों से कोरोना गाइडलाइन के पालन की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकले एवं भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाने से परहेज करें। बता दे कि सोमवार देर शाम आई रिपोर्ट में चार लोगों की कोरोना रिपोर्ट आरटीपीसीआर विधि से पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही जिले में कोरोना मरीजों की कुल संख्या बढ़कर तीस हो गई है। हालांकि चार मरीज कोरोना को मात दे चुके है। वर्तमान में एक्टिव केस की संख्या छब्बीस है। सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने बताया कि सोमवार को जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उसमे चमुआ,नरकटियागंज एवं बेतिया के लोग शामिल है। उन्होंने बताया कि फिलहाल एक भी संक्रमित मरीजों का इलाज गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नहीं चल रहा है। सभी मरीज होम आइसोलेशन में है। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। जिले में अब तक जितने भी संक्रमित मिले है। वे होम क्वारंटाइन है। किसी में भी कोई गंभीर समस्या अभी तक देखने को नहीं मिली है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जिसमें छह बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। जिले के अन्य अस्पतालों में भी आइसोलेशन वार्ड बनाए गए है। ऑक्सीजन से लेकर कोरोना के इलाज में प्रयुक्त होने वाली आवश्यक दवाइयां भी सभी अस्पतालों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कोरोना की जांच बढ़ा दी गयी है। सोमवार,रविवार शनिवार, शुक्रवार एवं गुरुवार को आई जांच रिपोर्ट में जीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों के तीस लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जिसमें चार लोग कोरोना को मात दे चुके हैं। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि कोरोना की जांच तेज कर दी गयी है। प्रतिदिन नौ सौ से ज्यादा लोगों का सैंपल आरटीपीसीआर एवं एंटीजन विधि से किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को किया जागरूक....
उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में राष्ट्रीय महिला दिवस पर गुलाबी महिला उत्थान समिति द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित किए गए कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण अंचल से आई महिलाओं को सरकारी योजनाओं समेत तमाम जानकारियां दी गई। इस मौके पर गुलाबी महिला उत्थान समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन सिंह चैहान ने गरीब और असहाय महिलाओं को हर संभव मदद देने की बात कही है।
शहर के अंबेडकर पार्क में गुलाबी महिला उत्थान समिति द्वारा राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के दौरान समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन सिंह चैहान ने गांव देहात से आई महिलाओं को सरकारी और जनहितकारी योजनाओं की बारीकी से जानकारी दी है। महिला सुरक्षा और नारी शशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ ही सुमन सिंह चैहान ने गरीब और बेसहारा महिलाओं को हर संभव मदद देने की बात कही है। उन्होने कहा है की जो अधिकारी महिलाओं को सम्मान नही देतें हैं उनकों जल्द सबक सिखाया जाएगा ताकि कोई भी अधिकारी भविष्य में किसी भी महिला के साथ दुव्यवहार न करें। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों की तादात में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
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राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को किया जागरूक.... उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में राष्ट्रीय महिला दिवस पर गुलाबी महिला उत्थान समिति द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित किए गए कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण अंचल से आई महिलाओं को सरकारी योजनाओं समेत तमाम जानकारियां दी गई। इस मौके पर गुलाबी महिला उत्थान समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन सिंह चैहान ने गरीब और असहाय महिलाओं को हर संभव मदद देने की बात कही है। शहर के अंबेडकर पार्क में गुलाबी महिला उत्थान समिति द्वारा राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के दौरान समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन सिंह चैहान ने गांव देहात से आई महिलाओं को सरकारी और जनहितकारी योजनाओं की बारीकी से जानकारी दी है। महिला सुरक्षा और नारी शशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ ही सुमन सिंह चैहान ने गरीब और बेसहारा महिलाओं को हर संभव मदद देने की बात कही है। उन्होने कहा है की जो अधिकारी महिलाओं को सम्मान नही देतें हैं उनकों जल्द सबक सिखाया जाएगा ताकि कोई भी अधिकारी भविष्य में किसी भी महिला के साथ दुव्यवहार न करें। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों की तादात में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
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झारसुगुड़ा जिले में ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नाबा किशोर दास (Naba Kishore Das) को रविवार को एक पुलिस वाले ने गोली मारी दी. पुलिस वाले ने स्वास्थ्य मंत्री को झारसुगुड़ा जिले के ब्रजराजनगर के गांधी चौक के पास उस समय गोली मारी. जब वह एक उद्घाटन समारोह में भाग लेने जा रहे थे. फायिरंग के बाद जख्मी अवस्था में पहले आम को झारसुगुड़ा में ही भर्ती करवया गया. जिसके कुछ समय बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कराकर भुनेश्वर ले अपोलो अस्पताल लाया गया. भुनेश्वर लाये जाने के बाद दाम को देखने अपोलो अस्पताल सीएम पटनायक पहुंचे.
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झारसुगुड़ा जिले में ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नाबा किशोर दास को रविवार को एक पुलिस वाले ने गोली मारी दी. पुलिस वाले ने स्वास्थ्य मंत्री को झारसुगुड़ा जिले के ब्रजराजनगर के गांधी चौक के पास उस समय गोली मारी. जब वह एक उद्घाटन समारोह में भाग लेने जा रहे थे. फायिरंग के बाद जख्मी अवस्था में पहले आम को झारसुगुड़ा में ही भर्ती करवया गया. जिसके कुछ समय बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कराकर भुनेश्वर ले अपोलो अस्पताल लाया गया. भुनेश्वर लाये जाने के बाद दाम को देखने अपोलो अस्पताल सीएम पटनायक पहुंचे.
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देवास (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भोपाल रोड स्थित जान डियर ट्रैक्टर फैक्ट्री के सामने बांस फर्नीचर कारखाने में भीषण आग लग गई। इससे कारखाने में रखा माल खाक हो गया। आग शनिवार देर रात लगी थी, जिसे बुझाने में पांच घंटे से ज्यादा का समय लगा। रविवार को दिन में आग फिर भड़क उठी।
आग आर्टिसन बांस कारखाने के पिछले हिस्से में खुली जगह रखे कच्चे माल में लगी थी। आग में कच्चा माल और नर्सरी में रखे बांस के पौधे जलकर नष्ट हो गए। कच्चे माल से सैनिटरी नेपकीन, बायोडीजल आदि बनता है। कंपनी के फाउंडर डायरेक्टर देवोपम मुखर्जी ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि आग किसी ने जान-बूझकर लगाई है।
गौरतलब है कि देवास जिले में एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत बांस के उत्पाद बनाए जाते हैं। आर्टिसन में बने बांस के फर्नीचर विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं। शनिवार रात आग की सूचना पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, अधिकारी और रविवार को निगम आयुक्त भी कंपनी पहुंचे थे। रविवार शाम तक आग पर पूरी तरह काबू कर लिया गया था। इस दौरान नगर निगम की दर्जनों दमकलों ने लगातार पानी की बौछारें कर आग पर काबू पाया।
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देवास । भोपाल रोड स्थित जान डियर ट्रैक्टर फैक्ट्री के सामने बांस फर्नीचर कारखाने में भीषण आग लग गई। इससे कारखाने में रखा माल खाक हो गया। आग शनिवार देर रात लगी थी, जिसे बुझाने में पांच घंटे से ज्यादा का समय लगा। रविवार को दिन में आग फिर भड़क उठी। आग आर्टिसन बांस कारखाने के पिछले हिस्से में खुली जगह रखे कच्चे माल में लगी थी। आग में कच्चा माल और नर्सरी में रखे बांस के पौधे जलकर नष्ट हो गए। कच्चे माल से सैनिटरी नेपकीन, बायोडीजल आदि बनता है। कंपनी के फाउंडर डायरेक्टर देवोपम मुखर्जी ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि आग किसी ने जान-बूझकर लगाई है। गौरतलब है कि देवास जिले में एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत बांस के उत्पाद बनाए जाते हैं। आर्टिसन में बने बांस के फर्नीचर विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं। शनिवार रात आग की सूचना पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, अधिकारी और रविवार को निगम आयुक्त भी कंपनी पहुंचे थे। रविवार शाम तक आग पर पूरी तरह काबू कर लिया गया था। इस दौरान नगर निगम की दर्जनों दमकलों ने लगातार पानी की बौछारें कर आग पर काबू पाया।
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राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म दो अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। साल 1948 में उनकी मत्यू के बाद से ही हर साल 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। सरकारी दफ्तरों से लेकर स्कूल-कॉलेजों में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। वह अपने परिवार में सबसे छोटे थे। उनकी बहन का नाम रलियत और दो बड़े भाई का नाम लक्ष्मीदास और कृष्ण दास था। उनकी दो भाभियों का नाम नंद कुंवरबेन और गंगा था।
गांधी जी के 4 बेटे और 13 पोते-पोतियां हैं। उनके पोते-पोतियां और उनके 154 वंशज दुनिया के 6 देशों में रह रहे हैं। इनमें 12 डॉक्टर, 12 प्रोफेसर, 5 इंजीनियर, 4 वकील, 3 पत्रकार, 2 आईएएस, 1 वैज्ञानिक, 1 चार्टड एकाउंटेंट, 5 निजी कंपनियों मे अच्छे पदों पर काम कर रहे हैं। इनमें 4 पीएचडी की डिग्री हासिल किए हुए हैं।
गांधीजी के वंशज आज भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, कनाडा, अमेरीका और ऑस्ट्रेलिया में हैं। महात्मा गांधी की बेटी नहीं थी इस बात का उन्हें अफसोस भी रहा।
हरिलाल (परिवार में 68 सदस्य)
मणिलाल (परिवार में 39 सदस्य)
रामदास (परिवार में 19 सदस्य)
देवदास (परिवार में 28 सदस्य)
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राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म दो अक्तूबर एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। साल एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में उनकी मत्यू के बाद से ही हर साल दो अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। सरकारी दफ्तरों से लेकर स्कूल-कॉलेजों में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। वह अपने परिवार में सबसे छोटे थे। उनकी बहन का नाम रलियत और दो बड़े भाई का नाम लक्ष्मीदास और कृष्ण दास था। उनकी दो भाभियों का नाम नंद कुंवरबेन और गंगा था। गांधी जी के चार बेटे और तेरह पोते-पोतियां हैं। उनके पोते-पोतियां और उनके एक सौ चौवन वंशज दुनिया के छः देशों में रह रहे हैं। इनमें बारह डॉक्टर, बारह प्रोफेसर, पाँच इंजीनियर, चार वकील, तीन पत्रकार, दो आईएएस, एक वैज्ञानिक, एक चार्टड एकाउंटेंट, पाँच निजी कंपनियों मे अच्छे पदों पर काम कर रहे हैं। इनमें चार पीएचडी की डिग्री हासिल किए हुए हैं। गांधीजी के वंशज आज भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, कनाडा, अमेरीका और ऑस्ट्रेलिया में हैं। महात्मा गांधी की बेटी नहीं थी इस बात का उन्हें अफसोस भी रहा। हरिलाल मणिलाल रामदास देवदास हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने जिस प्रकार स्वच्छ सर्वेक्षण 2020-2021 में प्रयागराज को उत्तर प्रदेश में चतुर्थ स्थान व भारत में 20वें स्थान पर दिलाया अब स्वच्छ सर्वेक्षण 2021-2022 में सहयोग कर यूपी में नंबर वन बनाने की प्रयागराजवासियों से अपील की। कहा कि आप लोगों के सहयोग से ही यूपी में नंबर वन बन सकते हैं। उक्त बातें मेयर ने मीरापुर, गुरुनानक पार्क में आयोजित प्रयागराज नगर निगम द्वारा सीडीसी के तहत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाडि़यों को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र के लिए रवाना करने के बाद कही। सीडीसी द्वारा यह कार्य नगर निगम प्रयागराज के जोन-1, जोन-2 व जोन-5 के लगभग 40 वार्डो के डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा।
महापौर ने स्मार्ट सिटी के तहत गुरुनानक पार्क में क्षेत्रवासियों को उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए निíमत ओपन जिम का भी फीता काट कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद साहिल अरोरा, पार्षद फजल खान, अनूप मिश्रा, नीरज टंडन, उत्तम वर्मा, मयंक यादव, एसके गुप्ता, अश्विनी वर्मा, कुणाल सागर, मनोज भाई, देवेंदर सिंह, मनजीत सिंह, निर्मल चड्ढा, मिंटू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
प्रयागराज लॉयन वेस्ट मैनेजमेंट ने फेज तीन में तीन और वार्डो से डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य मंगलवार को शुरू कर दिया। इसके साथ ही कूड़ा उठाने के लिए अब 12 वार्डो में सीटी बजने लगी है। पोर्ट स्टेशन पर मोहित्समगंज वार्ड के घरों से कूड़ा लिये जाने का उद्घाटन वहां की पार्षद कुसुमलता ने किया। कुंदन गेस्ट हाउस के पास एलनगंज और भारद्वाजपुरम वार्ड के लिये कार्यक्रम आयोजित किया गया। जोन चार के जोनल अधिकारी संजय ममगई ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राजेश विश्वकर्मा, मनोज मिश्रा, ओम किशोर आदि मौजूद रहे।
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मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने जिस प्रकार स्वच्छ सर्वेक्षण दो हज़ार बीस-दो हज़ार इक्कीस में प्रयागराज को उत्तर प्रदेश में चतुर्थ स्थान व भारत में बीसवें स्थान पर दिलाया अब स्वच्छ सर्वेक्षण दो हज़ार इक्कीस-दो हज़ार बाईस में सहयोग कर यूपी में नंबर वन बनाने की प्रयागराजवासियों से अपील की। कहा कि आप लोगों के सहयोग से ही यूपी में नंबर वन बन सकते हैं। उक्त बातें मेयर ने मीरापुर, गुरुनानक पार्क में आयोजित प्रयागराज नगर निगम द्वारा सीडीसी के तहत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाडि़यों को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र के लिए रवाना करने के बाद कही। सीडीसी द्वारा यह कार्य नगर निगम प्रयागराज के जोन-एक, जोन-दो व जोन-पाँच के लगभग चालीस वार्डो के डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा। महापौर ने स्मार्ट सिटी के तहत गुरुनानक पार्क में क्षेत्रवासियों को उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए निíमत ओपन जिम का भी फीता काट कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद साहिल अरोरा, पार्षद फजल खान, अनूप मिश्रा, नीरज टंडन, उत्तम वर्मा, मयंक यादव, एसके गुप्ता, अश्विनी वर्मा, कुणाल सागर, मनोज भाई, देवेंदर सिंह, मनजीत सिंह, निर्मल चड्ढा, मिंटू सहित अन्य लोग मौजूद रहे। प्रयागराज लॉयन वेस्ट मैनेजमेंट ने फेज तीन में तीन और वार्डो से डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य मंगलवार को शुरू कर दिया। इसके साथ ही कूड़ा उठाने के लिए अब बारह वार्डो में सीटी बजने लगी है। पोर्ट स्टेशन पर मोहित्समगंज वार्ड के घरों से कूड़ा लिये जाने का उद्घाटन वहां की पार्षद कुसुमलता ने किया। कुंदन गेस्ट हाउस के पास एलनगंज और भारद्वाजपुरम वार्ड के लिये कार्यक्रम आयोजित किया गया। जोन चार के जोनल अधिकारी संजय ममगई ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राजेश विश्वकर्मा, मनोज मिश्रा, ओम किशोर आदि मौजूद रहे।
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इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर कल मुंबई में मनीकंट्रोल इंडिया फिनटेक कॉन्क्लेव कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
श्री राजीव चंद्रशेखर भारत में फिनटेक इकोसिस्टम के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और इस मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होगा कि किस तरह से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी सफलता की गाथाओं में से एक रहा है।
उनके संबोधन के बाद मनीकंट्रोल की डिप्टी एडिटर सुश्री श्वेता पुंज और मनीकंट्रोल के स्टार्टअप्स एंड न्यू इकोनॉमी में एडिटर-टेक श्री चंद्रा आर. श्रीकांत द्वारा संचालित एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
श्री राजीव चंद्रशेखर 7 मार्च की सुबह मुंबई पहुंचेंगे और देर शाम को नई दिल्ली वापस जाने के लिए प्रस्थान करेंगे।
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Posted On: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर कल मुंबई में मनीकंट्रोल इंडिया फिनटेक कॉन्क्लेव कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। श्री राजीव चंद्रशेखर भारत में फिनटेक इकोसिस्टम के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और इस मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होगा कि किस तरह से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी सफलता की गाथाओं में से एक रहा है। उनके संबोधन के बाद मनीकंट्रोल की डिप्टी एडिटर सुश्री श्वेता पुंज और मनीकंट्रोल के स्टार्टअप्स एंड न्यू इकोनॉमी में एडिटर-टेक श्री चंद्रा आर. श्रीकांत द्वारा संचालित एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया जाएगा। श्री राजीव चंद्रशेखर सात मार्च की सुबह मुंबई पहुंचेंगे और देर शाम को नई दिल्ली वापस जाने के लिए प्रस्थान करेंगे।
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PATNA : पटना से सटे पालीगंज में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. जहाँ महबलीपुर के अंकुरी के सामने सोन नदी में डूबने से एक युवक की मौत हो गयी. मृतक का नाम विकास कुमार बताया जा रहा है, जो अरवल जिले के पारसी गाँव का रहनेवाला बताया जा रहा है.
मिली जानकारी के अनुसार मृतक अपनी फूफा सागर महतो के घर आया था. शाम में वह अंकुरी महादेव स्थान के सामने सोन नदी में स्नान करने गया था. स्नान करने के दौरान ही वह डूब गया. जिससे उसकी मौत हो गयी.
पालीगंज पुलिस की सूचना के बाद एन डी आर एफ की टीम मौके पर पहुंची और शव को सोन नदी में खोज रही है. उधर मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
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PATNA : पटना से सटे पालीगंज में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. जहाँ महबलीपुर के अंकुरी के सामने सोन नदी में डूबने से एक युवक की मौत हो गयी. मृतक का नाम विकास कुमार बताया जा रहा है, जो अरवल जिले के पारसी गाँव का रहनेवाला बताया जा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार मृतक अपनी फूफा सागर महतो के घर आया था. शाम में वह अंकुरी महादेव स्थान के सामने सोन नदी में स्नान करने गया था. स्नान करने के दौरान ही वह डूब गया. जिससे उसकी मौत हो गयी. पालीगंज पुलिस की सूचना के बाद एन डी आर एफ की टीम मौके पर पहुंची और शव को सोन नदी में खोज रही है. उधर मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
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गर्मी की छुट्टी में रेलवे ने यात्रियों के सौगात दी है। बिहार खासकर सहरसा से दिल्ली आने जाने के लिए सुविधा बढ़ जाएगी। कोरोना काल से पहले की तरह पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलेगी।
कोरोना काल से पहले की तरह सप्ताह में दो दिन पुरबिया एक्सप्रेस चलेगी। पूर्व मध्य रेल ने इसको लेकर पत्र जारी कर दिया है। सहरसा से आनंद विहार के लिए पुरबिया एक्सप्रेस सात जुलाई से सप्ताह में दो दिन चलने लगेगी। आनंद विहार से सहरसा के लिए पुरबिया एक्सप्रेस आठ जुलाई से सप्ताह में दो दिन चलने लगेगी। सहरसा से पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन रवि और गुरुवार को चलेगी। आनंद विहार टर्मिनल से पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन सोम और शुक्रवार को चलेगी।
सहरसा से सात और आनंद विहार से आठ जुलाई से यह प्रभावी होगा। ट्रेन का फेरा पहले की तरह होकर बढ़ जाने से यात्रियों को राहत मिलेगी। सप्ताह में दो दिन ट्रेन चलने के बाद फिर से इस ट्रेन में पेंट्रीकार की सुविधा बहाल होने की उम्मीद बढ़ गई है। पेंट्रीकार शुरू हो जाने के बाद भोजन पानी के लिए यात्रियों को भटकना नहीं पड़ेगा। उनका सफर आरामदायक तय होगा।
वहीं कोसी क्षेत्र से एक और ट्रेन की सुविधा छीन जाएगी। सफर में काफी आरामदायक ट्रेन क्लोन स्पेशल की सुविधा कोसी क्षेत्र से जुलाई के पहले सप्ताह से छीन जाएगी। इससे पहले कटिहार से पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा होकर दिल्ली जाने वाली चंपारण हमसफर ट्रेन की सुविधा रूट डायवर्ट कर छीन ली गई थी। अब सहरसा-नई दिल्ली अप डाउन क्लोन स्पेशल ट्रेन(02563/64) को सहरसा की बजाय बरौनी से चलाने का निर्णय लिया गया है। सहरसा की बजाय बरौनी से ट्रेन को चलाने के संबंध में रेलवे ने पत्र जारी कर दिया है।
पूर्व मध्य रेल के परिचालन विभाग द्वारा जारी पत्र के मुताबिक सहरसा-नई दिल्ली क्लोन स्पेशल ट्रेन का टर्मिनल बदलकर बरौनी हो जाएगा। पांच जुलाई से नई दिल्ली से बरैनी के लिए क्लोन स्पेशल ट्रेन चलने लगेगी। छह जुलाई से बरौनी से नई दिल्ली के लिए क्लोन स्पेशल ट्रेन चलने लगेगी। ट्रेन का बरौनी और दिल्ली के बीच आगमन और प्रस्थान का समय पूर्ववत रखा गया है। मतलब साफ कि सहरसा से पहुंचने के बाद बरौनी-दिल्ली रूट पर जिस समय पर ट्रेन का आगमन और प्रस्थान होता है वही रहेगा। ऐसे में सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी।
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गर्मी की छुट्टी में रेलवे ने यात्रियों के सौगात दी है। बिहार खासकर सहरसा से दिल्ली आने जाने के लिए सुविधा बढ़ जाएगी। कोरोना काल से पहले की तरह पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलेगी। कोरोना काल से पहले की तरह सप्ताह में दो दिन पुरबिया एक्सप्रेस चलेगी। पूर्व मध्य रेल ने इसको लेकर पत्र जारी कर दिया है। सहरसा से आनंद विहार के लिए पुरबिया एक्सप्रेस सात जुलाई से सप्ताह में दो दिन चलने लगेगी। आनंद विहार से सहरसा के लिए पुरबिया एक्सप्रेस आठ जुलाई से सप्ताह में दो दिन चलने लगेगी। सहरसा से पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन रवि और गुरुवार को चलेगी। आनंद विहार टर्मिनल से पुरबिया एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन सोम और शुक्रवार को चलेगी। सहरसा से सात और आनंद विहार से आठ जुलाई से यह प्रभावी होगा। ट्रेन का फेरा पहले की तरह होकर बढ़ जाने से यात्रियों को राहत मिलेगी। सप्ताह में दो दिन ट्रेन चलने के बाद फिर से इस ट्रेन में पेंट्रीकार की सुविधा बहाल होने की उम्मीद बढ़ गई है। पेंट्रीकार शुरू हो जाने के बाद भोजन पानी के लिए यात्रियों को भटकना नहीं पड़ेगा। उनका सफर आरामदायक तय होगा। वहीं कोसी क्षेत्र से एक और ट्रेन की सुविधा छीन जाएगी। सफर में काफी आरामदायक ट्रेन क्लोन स्पेशल की सुविधा कोसी क्षेत्र से जुलाई के पहले सप्ताह से छीन जाएगी। इससे पहले कटिहार से पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा होकर दिल्ली जाने वाली चंपारण हमसफर ट्रेन की सुविधा रूट डायवर्ट कर छीन ली गई थी। अब सहरसा-नई दिल्ली अप डाउन क्लोन स्पेशल ट्रेन को सहरसा की बजाय बरौनी से चलाने का निर्णय लिया गया है। सहरसा की बजाय बरौनी से ट्रेन को चलाने के संबंध में रेलवे ने पत्र जारी कर दिया है। पूर्व मध्य रेल के परिचालन विभाग द्वारा जारी पत्र के मुताबिक सहरसा-नई दिल्ली क्लोन स्पेशल ट्रेन का टर्मिनल बदलकर बरौनी हो जाएगा। पांच जुलाई से नई दिल्ली से बरैनी के लिए क्लोन स्पेशल ट्रेन चलने लगेगी। छह जुलाई से बरौनी से नई दिल्ली के लिए क्लोन स्पेशल ट्रेन चलने लगेगी। ट्रेन का बरौनी और दिल्ली के बीच आगमन और प्रस्थान का समय पूर्ववत रखा गया है। मतलब साफ कि सहरसा से पहुंचने के बाद बरौनी-दिल्ली रूट पर जिस समय पर ट्रेन का आगमन और प्रस्थान होता है वही रहेगा। ऐसे में सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी।
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रोकथाम हेतु जिला स्तर पर नियुक्त किया गया था ? (ख) प्रश्नांश (क) में महामारी की रोकथाम हेतु नियुक्त किए गए डॉक्टरों/स्वास्थ्यकर्मियों की क्या सेवा समाप्त की जा रही है? यदि हाँ, तो सेवा समाप्त किए जाने का कारण बतावे यदि नहीं तो नियुक्त किए गए इन कर्मचारियों को क्या शासन द्वारा संविदा नियुक्ति/नियमित किया जावेगा? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतावें । (ग) कोविड19 की रोकथाम हेतु नियुक्त किए गए इन स्वास्थ्यकर्मियों को संविदा / स्थाई नियुक्ति दिये जाने संबंधी शासन द्वारा क्या कोई नियम निर्धारित किए गए है? यदि हाँ, तो नियम की प्रति उपलब्ध करावें ।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. प्रभुराम चौधरी ) : (क) संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/2020/288 भोपाल दिनांक 25.03.2020 के द्वारा कोविड-19 महामारी की रोकथाम हेतु जिला कलेक्टर को अस्थाई मानव संसाधन नियोजित करने हेतु अधिकार प्रत्यायोजित किये गये थे। पत्र के अनुसरण में जिलों द्वारा 2403 स्वास्थ्यकर्मी एवं 897 डॉक्टर नियोजित किये गये थे। (ख) जी नहीं, अपितु कोविड-19 केस के घटते क्रम को देखते हुये एवं अधिकांश मरीजों के होम आइसोलेशन में रहने तथा अस्थाई बनाये गये कोविड केयर सेंटर बंद होने से अस्थाई पैरामेडिकल स्टॉफ की आवश्यकता नहीं होने से आवश्यक पैरामेडिकल स्टॉफ को कोविड- 19 महामारी नियंत्रण के अंतर्गत विभिन्न मापदण्डों के आधार पर समय-समय पर पत्रों के माध्यम से जिलों में कार्य करने की अनुमति दी जाती रही। जी नहीं। विभाग के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/2020/288 भोपाल दिनांक 25.03.2020 के अनुसार "यह सेवाएं निश्चित समयावधि 03 माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया / घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा।" अतः नियमतीकरण तथा संविदा पर रखने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
स्वीकृत ग्रामीण पेयजल योजना
[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]
16. ( क्र. 2029 ) श्री रामचन्द्र दांगी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की ब्यावरा विधानसभा में बागपुरा मोहनपुरा कुशलपुरा ग्रामीण पेयजल योजना कब स्वीकृत की गई थी व इसके कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा क्या थी? (ख) जब से कार्य प्रारंभ हुआ उस दिनांक से आज तक पेयजल की क्या व्यवस्था गांव में है वह कौन सा विभाग देख रहा है ठेकेदार द्वारा सामग्री का पूर्ण भुगतान प्राप्त कर लिया गया यदि हाँ, तो कितना भुगतान प्राप्त किया जानकारी उपलब्ध कराएं। (ग) उक्त कार्य में क्या सिविल कार्य नहीं किया जा रहा है? क्या कारण रहा उक्त ग्रामों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कार्य करना बंद कर दिया क्या यह नियम में है यदि हाँ, तो अवगत कराएं। (घ) उक्त ग्रामों में पेयजल हेतु वैकल्पिक व्यवस्था करने हेतु शासन द्वारा क्या कार्य योजना है यदि हाँ, तो पेयजल कब तक व कैसे उपलब्ध होगा यदि नहीं तो ग्रामीण जन बिना पानी के कैसे रहेंगे ?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) राजगढ़ जिले के ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र में बांकपुराकुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह जलप्रदाय योजना क्रमशः दिनांक 07.02.2017 एवं 16.08.2017 को स्वीकृत हुई थी एवं कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा 24 माह थी । (ख) विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा में
वर्तमान पेयजल व्यवस्था की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। उक्त व्यवस्था लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग देख रहा है। बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह नलजल योजना में विभिन्न सामग्री हेतु क्रमशः रूपये 66 करोड़ एवं रूपये 150 करोड़ का भुगतान ठेकेदार को किया गया है। (ग) बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह योजना में सिविल कार्य किया जा रहा है। जी नहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामों में पूर्व से विद्यमान पेयजल व्यवस्था के समस्त आवश्यक कार्य किये जा रहे हैं, शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है । (घ) बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह योजनाओं के कार्य पूर्ण होने पर इन योजनाओं से नियमित जलप्रदाय किया जा सकेगा। विभाग द्वारा प्रश्नाधीन ग्रामों में पूर्व से स्थापित पेयजल योजनाओं, हैण्डपंप के माध्यम से जलप्रदाय के कार्य किये जा रहे हैं एवं 19 रेट्रोफिटिंग की योजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
परिशिष्ट - "नौ"
फर्जी प्रमाण पत्र पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति की जांच
17. ( क्र. 2084 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्ड जिले के विकासखण्ड लहार के अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्र रावतपुरा खुर्द की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनिता पत्नी मुरारीलाल तिवारी की शैक्षणिक योग्यता (माध्यमिक शाला कक्षा 8) का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में नियुक्ति प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर भिण्ड के न्यायालयीन प्रकरण क्र. 26/2019-20 /अं० आंगनवाड़ी में पारित आदेश दिनांक 13.03.2020 के तहत सेवा से पृथक कर दिया था ? (ख) यदि हाँ, तो उक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में क्या श्रीमती सुनीता तिवारी द्वारा आंगनवाड़ी का पद प्राप्त करने के लिए कक्षा 8 पास की फर्जी अंकसूची जनता इंटर कॉलेज अकनीवा जिला जालौन (उ.प्र.) से प्राप्त करने के संबंध में पुलिस थाना दवोह जिला भिण्ड द्वारा भा.द.सं. की धारा 420, 465, 467, 468, 471 एवं 261 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया था? (ग) यदि हाँ, तो क्या आयुक्त चम्बल संभाग मुरैना ने सेवानिवृत्ति के पूर्व तथ्यों की जाँच किए बिना ही आरोपी श्रीमती सुनीता तिवारी पत्नी मुरारीलाल तिवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को पुनः सेवा में लिए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं? (घ) यदि हाँ, तो क्या इस समूचे प्रकरण की उच्च स्तरीय जाँच कराकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता तिवारी को सेवा से पृथक किया जाएगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) आयुक्त चम्बल संभाग मुरैना द्वारा पारित निर्णय दिनांक 24/11/2020 के द्वारा न्यायालय कलेक्टर भिण्ड के आदेश दिनांक 13/03/2020 एवं परियोजना अधिकारी लहार जिला भिण्ड के आदेश क्र. / आईसीडीएस / स्थापना-2/2019/402-403 लहार, दिनांक 24/08/2019 विधि सम्मत न होने से अपास्त किये जाने के कारण परियोजना अधिकारी लहार जिला भिण्ड के आदेश क्र./एबावि/आ.वा./स्था./2020-21/477478 दिनांक 29/12/2020 द्वारा पुनः सेवा में लेकर आंगनवाड़ी केन्द्र रावतपुरा खुर्द में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पुनः पदस्थ किया गया । (घ) प्रश्नांश (ग) अनुसार जानकारी होने से शेष का प्रश्न ही नहीं ।
पर्यटन स्थलों के विकास हेतु संचालित योजनायें [पर्यटन]
परिशिष्ट - "दस"
18. ( क्र. 2305 ) श्री रामपाल सिंह : क्या पर्यटन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) रायसेन जिले के किस-किस स्थान पर कौन-कौन से पर्यटन स्थल / एतिहासिक धरोहर है, उनके विकास के लिए राज्य सरकार तथा भारत सरकार की कौन-कौन सी योजनायें संचालित है? (ख) रायसेन जिले में पर्यटन स्थलों के विकास, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु 1 जनवरी 19 से फरवरी 2021 तक की अवधि में रायसेन जिले में किस किस योजना में किन-किन स्थलों पर क्या-क्या कार्य करवाये गये पूर्ण विवरण दें। (ग) प्रश्नांश (ख) के कार्यों हेतु राज्य शासन द्वारा भारत सरकार को किन-किन योजनाओं में कौन-कौन से प्रस्ताव कब-कब भिजवाये तथा उनपर आज दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही हुई पूर्ण विवरण दें? (घ) विभाग के अधिकारियों द्वारा भारत सरकार से राशि स्वीकृत करवाने के संबंध में क्या-क्या कार्यवाही तथा प्रयास किये गये पूर्ण विवरण दें।
पर्यटन मंत्री ( सुश्री उषा ठाकुर ) : (क) रायसेन जिले में सांची स्तूप, उदयगिरी एवं भीम बैठका में शैलचित्र / गुफायें, भोजपुर मंदिर, आशापुरी, सतधारा, मुरलखुर्द एवं सोनारी व रायसेन दुर्ग आदि पर्यटन स्थल/ऐतिहासिक धरोहर है, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार । वर्तमान में कोई योजना संचालित नहीं है । (ख) बुद्धिस्ट सर्किट के अंतर्गत कार्य कराये गये हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार । (ग) प्रश्नांश 'ख' के संबंध में रायसेन जिले में बुद्धिस्ट सर्किट से संबंधित प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार को दिनांक 08-09-2016 को प्रेषित किया गया है। पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बुद्धिस्ट सर्किट के स्वीकृति आदेश क्रं 5 (16)/2016-SD दिनांक 19-9-2016 द्वारा राशि रू. 99.77 करोड़ स्वीकृत की गई। पुनरीक्षित स्वीकृति दिनांक 3-6-2020 जिसकी राशि रू. 87.82 करोड़ प्रदान की गई। जिसमें रायसेन जिले के बुद्धिस्ट स्थलों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार । (घ) पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार को स्वदेश दर्शन योजनान्तर्गत बुद्धिस्ट सर्किट का प्रस्ताव एवं डी. पी. आर. प्रेषित किया गया तथा निर्देशानुसार उनमें आवश्यक सुधार कर योजना स्वीकृत कराई गई।
विधायक निधि से स्वीकृत राशि का प्रदाय
[ योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी] 3
19. ( क्र. 2414 ) श्री प्रियव्रत सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या खिलचीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर माचलपुर, विकासखण्ड जीरापुर, जिला राजगढ़ में दिनांक 18.10.2019 को विधायक निधि से स्वीकृत कार्य सामुदायिक भवन निर्माण (विद्याधाम कॉलोनी के पास ) राशि 15 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृत जारी की गई थी, जिसकी क्रियान्वयन एजेंसी कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा राजगढ़ को बनाया गया था ? यदि हाँ, तो क्या इसकी राशि जारी की गई ? यदि हाँ, तो कब तक की गई, कार्यलीन आदेश का क्रमांक / दिनांक बताएं। यदि नहीं, तो क्यों नहीं की गई? इसमें कौन अधिकारी / कर्मचारी दोषी हैं? इनके खिलाफ क्या कार्यवाही की जा रही
है? (ख) उक्त राशि को योजना एवं सांख्यिकी विभाग के वी.सी.ओ. से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के बी.सी.ओ. में राशि डालने में विलंब के क्या कारण है? यह राशि कब तक संबंधित विभाग के बी.सी.ओ. में डाल दी जाएगी ? (ग) वित्तीय वर्ष 2019-20 में विधायक निधि अंतर्गत राशि 12,07,320 रूपये एवं विधायक स्वेच्छानुदान अंतर्गत राशि रूपये 1 लाख का बजट अप्राप्त है, उपरोक्त स्वीकृत राशि का बजट कब तक प्राप्त हो जाएगा?
वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा लिपिकीय त्रुटि से ई-मेल पता सही नहीं लिखने के कारण जारी नहीं हो सकी। इस त्रुटि के लिये संबंधित कर्मचारी दोषी है। संबंधित को भविष्य के लिये कड़ी चेतावनी दी गई है। (ख) प्रकरण विशेष में मुख्यतः लिपिकीय त्रुटि से विलम्ब हुआ है। अब क्रियान्वयन एजेन्सी को राशि जारी कर दिये जाने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। बी.सी.ओ. से बी.सी.ओ. को राशि ट्रांस्फर में समय लगने के कारण भी प्रकरणों में विलंब परिलक्षित हुआ है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिनांक 24.02.2021 से सरल प्रक्रिया बनाई गई है। (ग) जी हाँ । राशि आवंटित कर दी गई है।
कुपोषण की रोकथाम हेतु राशि का आवंटन
20. ( क्र. 2496 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला जबलपुर में कुपोषण की रोकथाम और इससे जुड़ी बीमारियों का इलाज तथा गर्भवती महिलाओं से संबंधित राज्य व केन्द्र सरकार शासन द्वारा संचालित किन-किन योजनान्तर्गत कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई एवं कितनी-कितनी राशि व्यय हुई ? किन-किन योजनाओं के प्रचार-प्रसार मुद्रण सामग्री की खरीदी, जागरूकता अभियान, दस्तक अभियान व शिविरों आदि के आयोजन पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? बतलावें। वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में जागरूकता अभियान व शिविरों का आयोजन कब से कब तक कितने दिवसीय कहां-कहां पर आयोजित किये गये। इनमें किन-किन अधिकारियों ने कब-कब भाग लिया। किन-किन शिविरों में कितने-कितने बच्चों व गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से 0 से लेकर 5 वर्ष तक की आयु के कितने-कितने बच्चे कम वजन, अतिकम वजन के तथा कितने-कितने बच्चे गंभीर व अतिकुषोपित पाये गये। कितने बच्चों व महिलाओं को कितनी-कितनी राशि की दवाईयां व पौष्टिक पोषण आहार का वितरण किया गया? शिविरों के आयोजन पर किन-किन कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई। इसका सत्यापन कब और किसने किया? बतलावें। विकासखण्डवार जानकारी दें। (ग) प्रश्नांश (क) में अतिकुपोषित चिंहित कितने-कितने बच्चों को उपचार हेतु किन-किन एन. आर. सी. में भर्ती कराया गया ? इनमें से कितने बच्चों का फालोअप किया गया? कितने बच्चों के वजन में वृद्धि हुई। कितने बच्चें पूर्ण स्वस्थ्य हुए एवं कितने बच्चों की मृत्यु हुई ? बतलावें ।
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) कुपोषण की रोकथाम और इससे जुड़ी बीमारियों का इलाज तथा गर्भवती महिलाओं से संबंधित संचालित योजना, वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक आवंटन राशि एवं व्यय राशि योजनावार पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "क" अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) में जागरूकता व शिविरों के आयोजन किये जाने का दिनांक स्थान एवं भाग लेने
वाले अधिकारी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ख ( 1 ), ख ( 2 ) एवं ख ( 3 ) अनुसार है। ऐसे शिविरों का आयोजन नहीं किया गया है जिसमें बच्चों व गर्भवती महिला का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया हो। आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रत्येक माह वजन अभियान का आयोजन किया जाता है, जिसमें से 0 से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन लिया जाता है। वजन आयोजन के दौरान कम वजन, अतिकम वजन तथा गंभीर व अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाता है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ग" अनुसार है। जिले में स्नेह शिविर का आयोजन वर्ष 2018-19 में किया गया है। जिसमें बच्चों और महिलाओं पर व्यय की गयी दवाइयाँ, पौष्टिक आहार, अन्य व्यय सत्यापनकर्ता अधिकारी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "घ" पर विकासखण्डवार है। (ग) अति कुपोषित चिन्हित बच्चों के उपचार हेतु एन. आर. सी. में भर्ती कराना, फालोअप कराना, बच्चों के वजन में वृद्धि, पूर्ण स्वस्थ्य हुए तथा बच्चों की मृत्यु से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - "ड" अनुसार है।
सूचना प्रकाशन विभाग अंतर्गत अधिमान्य पत्रकार [जनसंपर्क]
21. ( क्र. 2540 ) श्री अनिरुध्द (माधव) मारू : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश शासन सूचना प्रकाशन विभाग द्वारा किन-किन पत्रकारों को राज्य एवं राज्य के अलावा अधिमान्यता दी गयी है ? जिलेवार सूची उपलब्ध कराएं। (ख) अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार किन-किन समाचार पत्र एवं किन-किन टीवी चैनल, संस्था के लिए कार्यरत है? (ग) सूचना प्रकाशन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों एवं टीवी चैनलों को वर्ष 2019, 2020 एवं 2021 में कितनी राशि के विज्ञापन दिये गये ? संस्था अनुसार विज्ञापन की राशि एवं भुगतान की राशि बतायें। (घ) सूचना प्रकाशन के अधीन म.प्र. माध्यम कितने प्रिंटर्स पंजीकृत है? सूची सहित बताए। (ड.) म.प्र. माध्यम में पंजीकृत प्रिंटर्स को वर्ष 2018, 2019, 2020 में कितनी राशि का भुगतान किया गया एवं इसमें किन-किन विभागों का कार्य करवाया गया ? सूचीवार बताएं। मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - एक अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - दो अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - तीन अनुसार है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - चार अनुसार है।
कर्मचारियों के वेतन निर्धारण उपरांत अधिक भुगतान की वसूली
22. ( क्र. 2541 ) श्री अनिरुध्द (माधव) मारूः क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नीमच जिले में कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन उपरांत अधिक भुगतान की वसूली से वर्ष 2019 से प्रश्न दिनांक तक कितनी राशि शासन के खजाने में जमा की गई? (ख) क्या जिले में पेंशन कार्यालयों में अधिक भुगतान की वसूली के सम्बन्ध में आपत्तियां लगाई जाती है और फिर वसूली न करते हुए निराकरण कर दिया जाता है? (ग) क्या पेंशनरों से उपादान / पेंशन भुगतान के आदेश के नाम पर चक्कर लगवाए जाते हैं और उनका भुगतान समय से नहीं होता? उनकी
समय-सीमा क्या है? (घ) नीमच जिले में पेंशन कार्यालयों में नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन के वर्ष 2019 से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण लंबित है किस अवधि के है उनकी विभागवार जानकारी दें?
वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वर्ष 2019 से प्रश्न दिनांक तक शासन के खजाने में राशि रूपये 1,27,51,808/- जमा की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - अ अनुसार है। (ख) शासन द्वारा पदोन्नति / समयमान वेतनमान / वारिष्ठ वेतनमान आदि के जारी आदेशों के अनुसार कार्यालय द्वारा सक्षम अनुमोदन कराये बिना भुगतान के कारण अधिक भुगतान की स्थिति निर्मित होने पर पूर्ति हेतु प्रकरण विभाग को लौटाया जाता है। पूर्ति होने के पश्चात् ही प्रकरण का निराकरण किया जाता है। (ग) जी नहीं । उपादान / पेंशन भुगतान आई. एफ.एम.आई.एस. से ऑनलाईन किया जाता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) नीमच जिला पेंशन कार्यालय में नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन के वर्ष 2019 से प्रश्न दिनांक तक पुनरीक्षित वेतनमान निर्धारण / उन्नयन / समयमान वेतनमान के 18 प्रकरण लंबित है। जिनके निराकरण की कार्यवाही प्रचलन में है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - ब अनुसार है।
पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ [वित्त]
23. ( क्र. 2664 ) श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में जनवरी 2005 के पश्चात से प्रश्न दिनांक तक शासन द्वारा जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भर्ती की गई है? इन्हें पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ कब तक मिल जाएगा?
वित्त मंत्री ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) म.प्र. में जनवरी, 2005 के पश्चात् से प्रश्न दिनांक तक शासन द्वारा भर्ती अधिकारियों एवं कर्मचारियों को (नवीन अंशदायी पेंशन योजना) राष्ट्रीय पेंशन योजना लागू की है। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
मंदिर की जमीनों पर कब्जा
24. ( क्र. 2739 ) श्री महेश परमार : क्या पर्यटन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या राज्य सरकार हिंदू सनातन धर्म के प्रतीक आगर रोड स्थित राधाकृष्ण मंदिर कि रिक्त भूमि को शासकीय धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 2.34 करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है? यदि हाँ, तो यह हिंदू मंदिरों कि ज़मीनों को हड़पनें का षड्यंत्र नहीं है? यदि नहीं है तो, उसी क्षेत्र में इंदौर टेक्सटाइल से लेकर हीरामील तक ताकायमी जमीन शासकीय जमीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है उसके उपरांत भी हिंदू सनातन धर्म के प्रतीक मंदिरों कि जमीन क्यों छीनी जा रही है? (ख) क्या राज्य सरकार हिंदू मंदिरों की जमीन लेकर अपनी ज़मीनों को महंगे भाव में बेचकर मुनाफा नहीं कमाना चाहती है ? अगर ऐसा नहीं है तो, उक्त प्रयोजन के लिए हिंदू धर्म के मंदिरों की ही ज़मीनें क्यों? (ग) उक्त योजना का पुनः भूमि परिवर्तन कर उपलब्ध शासकीय भूमि पर महाविद्यालय निर्माण क्यों नहीं किया जा रहा है? कारण प्रस्तुत करें।
पर्यटन मंत्री ( सुश्री उषा ठाकुर ) : (क) शासकीय स्वशासी धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय उज्जैन के विस्तार हेतु आपसी सहमति क्रय निति के अर्जन प्रस्ताव के आधार पर महाविद्यालय के पक्ष में एक हेक्टेयर भूमि वर्तमान बाजार मूल्य से दो गुने मूल्य पर 2,64,08,000/- में अर्जन किया गया तथा उक्त राशि महाविद्यालय द्वारा राधाकृष्ण मंदिर के खाते में जमा कराई गई। जी नहीं उक्त भूमि शासकीय धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय के विस्तारीकरण हेतु महाविद्यालय की सीमा से लगी होने के कारण महाविद्यालय के पक्ष में अर्जित की गई। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। प्रश्नांश "क" अनुसार। (ग) जी नहीं। प्रश्नांश "क" अनुसार
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर कार्यवाही
25. ( क्र. 2885 ) श्री नारायण सिंह पट्टा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के पत्र क्रमांक 354/2176/2019/3एफ, भोपाल दिनांक 09 मार्च 2020 के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में दिनांक 08 फरवरी 2020 की बैठक में लिए निर्णय के बिंदु क्रमांक 4 में दिए गए निर्देश के संबंध में विभागों को नियम संशोधन करने एवं पदोन्नति/क्रमोन्नति संबंधी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया था, उपरोक्त के संदर्भ में कितने विभागों द्वारा कार्यवाही की गई है? जिन विभागों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है तो उन विभागों को पुनः कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया जाऐगा?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : जी हाँ। शेषांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है।
गैर व्यवसायिक वाहनों का विभाग में अटैचमेंट
[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]
26. ( क्र. 2911 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2018-19 से 2020-21 की अवधि में प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत अटैच / उपयोग किये जाने वाले वाहनों के व्यवसायिक उपयोग के संबंध में शासन द्वारा कोई दिशा निर्देश जारी कर रखें हैं या स्थानीय स्तर पर निविदा आमंत्रित कर वाहनों की दर निर्धारित कर वाहनों का व्यवसायिक रुप से अटैच/उपयोग किये जाने का प्रावधान है। (ख) प्रश्नाधीन अवधि में नीमच जिला चिकित्सालय द्वारा व्यवसायिक रुप से अटैच/उपयोग किये वाहन क्रमांक क्रमशः एम.पी.- 44 सी.ए.-6423, 6884, 4223, 5983, 5058, 6176, 5099, 4806, 1275, 9913, 5048, 7296, 7545, 8975, 8605 को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया ? (ग) प्रश्नांश (ख) में भुगतान की गई राशि क्या गैर व्यवसायिक वाहनों को की गई है ? यदि हाँ, तो इससे शासन को कितनी राशि की हानि हुई है तथा इसकी किस प्रकार से वसूली की जावेगी । (घ) नियम विरुद्ध अटैच/उपयोग किये जाने वाले वाहनों के संबंध में कौन उत्तरदायी हैं तथा उसके विरुद्ध क्या कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी ? यदि नहीं तो कारण बतायें।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. प्रभुराम चौधरी ) : (क) जी हाँ, दिशा निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है । (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे
परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। (ग) जी हाँ। जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा इन वाहनों की खुली ई-निविदा की न्यूनतम दर पर अनुबंध वाहनों का उपयोग किया गया क्योंकि इस क्षेत्र में व्यवसायिक वाहनों की अनु उपलब्धता होने से गैर व्यवसायिक वाहनों का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू रूप से संचालित करने के लिए किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्नांश ( ग ) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहरों का निर्माण [नर्मदा घाटी विकास]
27. ( क्र. 3020 ) श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदा घाटी विकास विभाग विधानसभा क्षेत्र कसरावद में इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर की आर.डी. 118.600 किमी पर स्केप तथा सी. आर. का निर्माण एवं कठोरा उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत जेकवेल माकड़खेड़ा से कसरावद रोड ओझरा तक 13.53 कि.मी. रोड का सुधार कार्य प्राक्कलन राशि रूपये 233.84 लाख एवं इलेक्ट्रिक ग्रिड की फैंसिंग तथा कांक्रीट बीम मरम्मत कार्य प्राक्कलन राशि रू. 2.45 लाख की स्वीकृति जारी की गई है यदि हाँ, तो कब कार्यवाहीवार प्रश्न दिनांक तक की अद्यतन स्थिति में जानकारी दें ? ( ख ) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में प्रश्नकर्ता के पत्र क्रमांक 629 दिनांक 22/2/19163 दिनांक 22/2/20 एवं 2046 दिनांक 21/8/19 के तारतम्य में क्या कार्यवाही की गई? नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के पत्र क्रमांक 1696/450/53/10/19 दिनांक 23/9/19 के तत्संबंध में प्रश्न दिनांक तक उक्त कार्यों की स्वीकृति आदेश जारी किए गए हैं यदि हाँ, तो बतायें नहीं तो स्पष्ट कारण सहित जानकारी दें? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के अति महत्वपूर्ण कार्यों को पूर्ण किए जाने हेतु स्थानवार किस-किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा सर्वे कर पालन प्रतिवेदन की प्रस्तुति दिनांक के साथ-साथ दिनांक तक की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति सहित जानकारी दें?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) स्केप तथा सी.आर. का निर्माण कार्य पीपरी उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना के अंतर्गत प्रारंभ हो चुका है। जी नहीं । प्रश्नांकित कार्यों का प्रावधान पूर्व में प्राप्त प्रशासकीय स्वीकृति में सम्मिलित नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) उत्तरांश (क) एवं (ख) अनुसार ।
परिशिष्ट - "ग्यारह"
किसानों को पानी उपलब्ध कराया जाना
[ नर्मदा घाटी विकास]
28. ( क्र. 3021 ) श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र कसरावद में किसानों को पानी उपलब्ध कराने एवं भीकनगांव में वेदा नदी के कृषकों को अपर वेदा बांध के ग्राम नेमित तह. भीकनगांव के कमाण्ड क्षेत्र से जोड़ने के संबंध में नर्मदा घाटी को प्रश्नकर्ता द्वारा प्राप्त पत्र क्रमाक 303 / दिनांक 1/2/19 628/दिनांक 22/02/19 एवं इसी अवधि में अन्य माध्यमों से प्राप्त पत्रों के तारतम्य में प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई कार्यवाहीवार जानकारी दें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में विभागीय स्तर पर क्या-क्या
निर्देश/स्वीकृति/आदेश जारी कब-कब किए गये। हाँ तो बताएं यदि नहीं तो क्यों, कारणों का उल्लेख करें? (ग) उक्त किसानों को पानी उपलब्ध कराये जाने के लिए क्या शासन प्रतिबद्ध नहीं है हाँ, तो कब तक किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उपरोक्तानुसार कार्यवाही पूर्ण कर किसानों को पानी उपलब्ध करा दिया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) पत्र क्रमांक 303 पीपरी माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना से संबंधित है। इससे कुल 7000 हेक्टेयर में से कसरावद विधानसभा क्षेत्र के 11 ग्रामों में 1861 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। योजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। पत्र क्रमांक 628 दिनांक 22/02/2019 अपरबेदा परियोजना से संबंधित है। अपरबेदा जलाशय से कसरावद विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई किया जाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विभिन्न परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निर्माणाधीन परियोजनाओं से भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराया जाना लक्षित है।
परिशिष्ट - "बारह"
आर्थिक अपराध अनुसंधान के लंबित प्रकरणों की जानकारी
29. ( क्र. 3155 ) श्री कुणाल चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ने 01 जनवरी 2015 के बाद से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण किन लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं? कितने मामलों में पी.ई. दर्ज की है? दर्ज मामलों में कितने मामले दवितीय श्रेणी और उससे ऊपर के अधिकारियों पर दर्ज हैं? प्रकरण वार जानकारी दी जायें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार दर्ज कितने मामलों में चालान प्रस्तुत कर दिया गया है? कितने मामलों में चालान प्रस्तुत करने की कार्यवाही लंबित है? लंबित प्रकरणों की जानकारी बतायें। (ग) ई-टेंडरिंग घोटाले में कितने प्रकरण किन-किन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किये हैं? प्रकरणवार जानकारी देवें । (घ) ई. ओ. डब्ल्यू. में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड में 2013 में खरीदी ए. सी. बसों की खरीदी से जुड़ी कितनी शिकायतें लंबित हैं? उन पर अब तक ब्यूरो ने क्या कार्यवाही की है? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत पंजीकृत अस्पताल
30. ( क्र. 3195 ) सुश्री चंद्रभागा किराड़े : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म. प्र. में आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत कुल कितने शासकीय एवं निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जिलेवार सूची देवें । (ख) प्रश्नांश (क) की सूची अनुसार किस अस्पताल में किन-किन बीमारियों के उपचार की सुविधा प्रश्न दिनांक तक कि स्थिति में है, अस्पतालवार, बीमारीवार सूची देवें । (ग) आयुष्मान भारत योजना में मरीज के एप्रूवल के लिए भेजी जाने वाली जांचों में व्यय कि गई राशि स्वीकृति उपरान्त संबंधित अस्पताल को भुगतान कि जाती है या मरीज के खाते में डाली जाती है। (घ) शासकीय अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना अन्तर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस में उपचार के
लिए क्या कोई पृथक से राशि प्रदान कि गई है, हाँ या नहीं, यदि हाँ, तो राशि के व्यय संबंधी विगत एक वर्ष का विवरण उपलब्ध करावें। (इ.) जिला चिकित्सालय बड़वानी में गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस में मरीज के उपचार एवं ऑपरेशन के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध है और क्या-क्या नहीं है, बीमारीवार बताएं एवं जो सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, उसके लिए विभाग क्या कार्यवाही करेगा।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. प्रभुराम चौधरी ) : (क) मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत सम्बद्ध शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है । (ख) आयुष्मान भारत "निरामयम" मध्यप्रदेश योजनान्तर्गत चिकित्सालयों को विभिन्न विषय विशेषज्ञताओं के अन्तर्गत नियमानुसार सम्बद्ध किया जाता है। उक्त विषय
विशेषज्ञताओं के अन्तर्गत उपलब्ध पैकेजेस के माध्यम से भर्ती मरीजों का उपचार योजनान्तर्गत किया जाता है। सम्बद्ध चिकित्सालयों की सूची विषय विशेषज्ञता सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत भर्ती मरीजों के उपचार (दवाईयां, जांचें, कन्ज्यूमेवल्स इत्यादि) पर होने वाले व्यय का भुगतान नियत पैकेज राशि अनुसार सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों के खाते में ऑनलाईन किया जाता है। योजनान्तर्गत मरीजों के खाते में राशि के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। (घ) आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत विभिन्न प्रकार के गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस के उपचार हेतु सम्बद्ध चिकित्सालय उपलब्ध पैकेज का उपयोग कर नियत पैकेज राशि अनुसार भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। शासकीय चिकित्सालयों को गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस के उपचार लिये कोई पृथक से राशि प्रदान नहीं की जाती है। (ड.) 1. जिला चिकित्सालय बड़वानी में गंभीर ऑपरेशन से संबंधित उपचार हेतु मुख्य ऑपरेशन थियेटर में पिडियाट्रीक, सर्किट बीथिग बेग, हाईड्रोलिक टेबल मल्टी पारामानिटर की कमी है तथा शेष सुविधायें उपलब्ध है। 2. जिला चिकित्सालय बड़वानी में एक्सीडेन्ट की स्थिति में मरीजों के हड्डी से संबंधित ऑपरेशन हेतु हड्डी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में इम्प्लान्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा शेष सुविधायें उपलब्ध है। 3. जिला चिकित्सालय बड़वानी में बिन्दु क्रमांक 1 व 2 के अतिक्ति ब्लड बैंक विशेषज्ञ ऑनकॉल उपलब्ध रहते हैं एवं 108 एम्बूलेंस की सेवायें निःशुल्क उपलब्ध हैं परन्तु सीटी स्कैन एवं एमआरआई की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जो सुविधाएं नहीं है उन्हें यथासंभव शीघ्र उपलब्ध कराया जावेगा।
कोविड-19 महामारी में नियुक्त कर्मचारियों को बिना सूचना के सेवा समाप्ति [लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ]
31. ( क्र. 3207 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कोविड- 19 महामारी के कारण विभाग में/जिले में नर्सिंग स्टॉफ, सपोर्ट स्टॉफ एवं अन्य स्टॉफ की भर्ती अस्थाई मानदेय के आधार पर की गई थी ? (ख) यदि हाँ, तो क्या बिना कोई पूर्व सूचना के इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई? क्या इन कर्मचारियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना कोविड- 19 महामारी में काम किया तो क्या विभाग का यह दायित्व नहीं था कि इन कर्मचारियों को एक माह पूर्व नोटिस दिया जावें ताकि वे अपने रोजगार की व्यवस्था कर सकें। (ग) क्या इन कर्मचारियों ने कोरोना मरीज के सीधे संपर्क में कार्य किया? यदि
हाँ, तो क्या इन कर्मचारियों को कोरोना टीका लगाया गया ? यदि नहीं तो क्यों ? (घ) क्या विभाग में इनके निरंतर सेवाएं बने रहने की व्यवस्था की जा सकती है? यदि नहीं तो क्यों?
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. प्रभुराम चौधरी ) : (क) जी हाँ । (ख) जी नहीं, समस्त जिला कलेक्टरों को कोविड-19 महामारी की रोकथाम हेतु पत्र क्रमांक / आई.डी.एस.पी/ 2020/288 दिनांक 25.03.2020 द्वारा आवश्यक मानव संसाधन सुनिश्चित करने हेतु अधिकार प्रत्यायोजित किये गये थे। उक्त पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि यह सेवाएं एक निश्चित समयावधि 03 माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया/घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा। इस आशय से संबंधित जिलों में अस्थाई मानव संसाधन को पूर्व से ही नियुक्ति के समय अवगत कराया गया था। (ग) जी हाँ, भारत सरकार द्वारा प्रदाय गाइड लाइन अनुसार समस्त शासकीय एवं अशासकीय हेल्थ वर्करों को भारत सरकार के पोर्टल पर जो पंजीकृत थे उन्हें कोविड-19 वैक्सीन का टीका संस्थाओं में उपस्थित होने पर निःशुल्क दिया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। विभाग के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/2020/288 भोपाल दिनांक 25.03.2020 के अनुसार यह यह सेवाएं निश्चित समयावधि 03 माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया/घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा। अतः नियमतीकरण तथा संविदा पर रखने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाएं
[ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम]
32. ( क्र. 3271 ) श्री पी.सी. शर्मा, श्री संजय उइके, श्री कुणाल चौधरी : क्या सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सरकार द्वारा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना बंद कर दी गई है? यदि हाँ, तो किस दिनांक से ये योजनाएं बंद की गई हैं ? ( ख ) इन योजनाओं में कितने उद्यमियों ने कर्ज लिया था तथा योजनाओं को बंद करने के बाद कितने युवा उद्यमियों की कितनी राशि की सब्सिडी रोक दी गई है? (ग) सरकार द्वारा सब्सिडी रोकने के कारण कितने उद्यमी बैंकों द्वारा डिफाल्टर हो चुके हैं? (घ) इन योजनाओं के अंतर्गत कर्ज लेकर रोजगार करने वाले उद्यमियों के रोजगार बंद होने और उनके डिफाल्टर होने के लिए कौन उत्तरदायी है ?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री ओमप्रकाश सखलेचा ) : (क) जी नहीं। दिनांक 18/12/2020 पश्चात ऋण वितरण की कार्यवाही स्थगित की गई है । (ख) वित्तीय वर्ष 2020-21 में इन योजनाओं का संचालन नहीं किया गया, इसलिये इस वर्ष आवेदन लेकर किसी भी उद्यमियों को कोई कर्ज नहीं दिया गया था। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) किसी भी युवा उद्यमी की सब्सिडी राशि रोके जाने के आदेश शासन द्वारा नहीं दिये गये हैं, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्नांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
कोरोना महामारी के लिये केन्द्र से प्राप्त राशि
33. ( क्र. 3276 ) श्री पी.सी. शर्मा : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कोरोना महामारी से निपटने के लिए 31 जनवरी 2021 तक प्रदेश सरकार को केन्द्र सरकार से अलग-अलग तारीखों में किस-किस मद में कितनी-कितनी राशि प्राप्त हुई है? (ख) 31 जनवरी 2021 तक उपरोक्त में से किस-किस मद में कितनी-कितनी राशि खर्च की गई है? (ग) क्या सरकार ने कोरोना के लिए लगाए जाने वाले वैक्सीन के दो डोज के लिए कोई शुल्क निर्धारित किया है यदि हाँ, तो वह कितना है? (घ) क्या सरकार सभी प्रदेश वासियों को कोरोना के लिए लगाए जाने वाले वैक्सीन के दो डोज निःशुल्क उपलब्ध कराने पर विचार करेगी ? (ड.) भोपाल स्थित पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में को-वैक्सीन के थर्ड फेस ट्रायल के अंतर्गत कितने लोगों को वैक्सीन लगाई गई? (च) क्या यह शिकायत मिली है इन लोगों को यह नहीं बताया गया है कि उन पर को-वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है न ही उन्हें नियमानुसार डायरी दी गई और न ही हेल्थ फालोअप किया गया? (छ) क्या यह सच है कि को-वैक्सीन के थर्ड फेस ट्रायल में शामिल दीपक मरावी की मृत्यु पीपुलस मेडिकल कॉलेज की लापरवाही के कारण है?
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. प्रभुराम चौधरी ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ"अनुसार है । (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (ग) जी नहीं। (घ) वर्तमान में प्रदेश के समस्त हेल्थ केयर वर्कर्स एवं फ्रंट लाईन वर्कर्स को कोविड-19 वैक्सीन के दो डोज निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं। आगामी कार्यवाही भारत शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जावेगी। (ड.) भोपाल स्थिति पीपुल्स ऑफ मेडिकल साईंस एण्ड रिसर्च सेंटर को-वैक्सीन के थर्ड फेज ट्रायल के अन्तर्गत कुल 1724 व्यक्तियों को प्रथम डोज एवं 1422 व्यक्तियों को वैक्सीन की द्वितीय डोज लगाई गई। (च) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (छ) जी नहीं ।
परिशिष्ट - "तेरह "
चौरई विधानसभा में प्रोटोकाल उल्लंघन
34. ( क्र. 3297 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या चौरई विधानसभा के कार्यक्रमों में प्रश्नकर्ता व क्षेत्रीय सांसद को आमंत्रित न कर प्रोटोकाल का उल्लंघन किया जा रहा है, क्यों? (ख) दि. 01.06.2020 से 06.05.2021 तक चौरई विधानसभा में हुए समस्त भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्र की प्रमाणित प्रति देवें। इसी तरह समस्त शिलालेखों की फोटो भी उपलब्ध करावें । (ग) क्या कारण है कि इनमें प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया? ऐसा करने वाले अधिकारियों के नाम, पदनाम देकर बतावें कि शासन ने उन पर अब तक क्या कार्यवाही की ? (घ) यदि कार्यवाही नहीं की गई तो प्रकरणवार कब तक की जाएगी?
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रोकथाम हेतु जिला स्तर पर नियुक्त किया गया था ? प्रश्नांश में महामारी की रोकथाम हेतु नियुक्त किए गए डॉक्टरों/स्वास्थ्यकर्मियों की क्या सेवा समाप्त की जा रही है? यदि हाँ, तो सेवा समाप्त किए जाने का कारण बतावे यदि नहीं तो नियुक्त किए गए इन कर्मचारियों को क्या शासन द्वारा संविदा नियुक्ति/नियमित किया जावेगा? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतावें । कोविडउन्नीस की रोकथाम हेतु नियुक्त किए गए इन स्वास्थ्यकर्मियों को संविदा / स्थाई नियुक्ति दिये जाने संबंधी शासन द्वारा क्या कोई नियम निर्धारित किए गए है? यदि हाँ, तो नियम की प्रति उपलब्ध करावें । लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री : संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/दो हज़ार बीस/दो सौ अठासी भोपाल दिनांक पच्चीस.तीन.दो हज़ार बीस के द्वारा कोविड-उन्नीस महामारी की रोकथाम हेतु जिला कलेक्टर को अस्थाई मानव संसाधन नियोजित करने हेतु अधिकार प्रत्यायोजित किये गये थे। पत्र के अनुसरण में जिलों द्वारा दो हज़ार चार सौ तीन स्वास्थ्यकर्मी एवं आठ सौ सत्तानवे डॉक्टर नियोजित किये गये थे। जी नहीं, अपितु कोविड-उन्नीस केस के घटते क्रम को देखते हुये एवं अधिकांश मरीजों के होम आइसोलेशन में रहने तथा अस्थाई बनाये गये कोविड केयर सेंटर बंद होने से अस्थाई पैरामेडिकल स्टॉफ की आवश्यकता नहीं होने से आवश्यक पैरामेडिकल स्टॉफ को कोविड- उन्नीस महामारी नियंत्रण के अंतर्गत विभिन्न मापदण्डों के आधार पर समय-समय पर पत्रों के माध्यम से जिलों में कार्य करने की अनुमति दी जाती रही। जी नहीं। विभाग के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/दो हज़ार बीस/दो सौ अठासी भोपाल दिनांक पच्चीस.तीन.दो हज़ार बीस के अनुसार "यह सेवाएं निश्चित समयावधि तीन माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया / घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा।" अतः नियमतीकरण तथा संविदा पर रखने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। स्वीकृत ग्रामीण पेयजल योजना [लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी] सोलह. श्री रामचन्द्र दांगी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि राजगढ़ जिले की ब्यावरा विधानसभा में बागपुरा मोहनपुरा कुशलपुरा ग्रामीण पेयजल योजना कब स्वीकृत की गई थी व इसके कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा क्या थी? जब से कार्य प्रारंभ हुआ उस दिनांक से आज तक पेयजल की क्या व्यवस्था गांव में है वह कौन सा विभाग देख रहा है ठेकेदार द्वारा सामग्री का पूर्ण भुगतान प्राप्त कर लिया गया यदि हाँ, तो कितना भुगतान प्राप्त किया जानकारी उपलब्ध कराएं। उक्त कार्य में क्या सिविल कार्य नहीं किया जा रहा है? क्या कारण रहा उक्त ग्रामों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कार्य करना बंद कर दिया क्या यह नियम में है यदि हाँ, तो अवगत कराएं। उक्त ग्रामों में पेयजल हेतु वैकल्पिक व्यवस्था करने हेतु शासन द्वारा क्या कार्य योजना है यदि हाँ, तो पेयजल कब तक व कैसे उपलब्ध होगा यदि नहीं तो ग्रामीण जन बिना पानी के कैसे रहेंगे ? मुख्यमंत्री : राजगढ़ जिले के ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र में बांकपुराकुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह जलप्रदाय योजना क्रमशः दिनांक सात.दो.दो हज़ार सत्रह एवं सोलह.आठ.दो हज़ार सत्रह को स्वीकृत हुई थी एवं कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा चौबीस माह थी । विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा में वर्तमान पेयजल व्यवस्था की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। उक्त व्यवस्था लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग देख रहा है। बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह नलजल योजना में विभिन्न सामग्री हेतु क्रमशः रूपये छयासठ करोड़ एवं रूपये एक सौ पचास करोड़ का भुगतान ठेकेदार को किया गया है। बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह योजना में सिविल कार्य किया जा रहा है। जी नहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामों में पूर्व से विद्यमान पेयजल व्यवस्था के समस्त आवश्यक कार्य किये जा रहे हैं, शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है । बांकपुरा-कुशलपुरा एवं मोहनपुरा समूह योजनाओं के कार्य पूर्ण होने पर इन योजनाओं से नियमित जलप्रदाय किया जा सकेगा। विभाग द्वारा प्रश्नाधीन ग्रामों में पूर्व से स्थापित पेयजल योजनाओं, हैण्डपंप के माध्यम से जलप्रदाय के कार्य किये जा रहे हैं एवं उन्नीस रेट्रोफिटिंग की योजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। परिशिष्ट - "नौ" फर्जी प्रमाण पत्र पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति की जांच सत्रह. डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि भिण्ड जिले के विकासखण्ड लहार के अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्र रावतपुरा खुर्द की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनिता पत्नी मुरारीलाल तिवारी की शैक्षणिक योग्यता का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में नियुक्ति प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर भिण्ड के न्यायालयीन प्रकरण क्र. छब्बीस/दो हज़ार उन्नीस-बीस /अंशून्य आंगनवाड़ी में पारित आदेश दिनांक तेरह.तीन.दो हज़ार बीस के तहत सेवा से पृथक कर दिया था ? यदि हाँ, तो उक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में क्या श्रीमती सुनीता तिवारी द्वारा आंगनवाड़ी का पद प्राप्त करने के लिए कक्षा आठ पास की फर्जी अंकसूची जनता इंटर कॉलेज अकनीवा जिला जालौन से प्राप्त करने के संबंध में पुलिस थाना दवोह जिला भिण्ड द्वारा भा.द.सं. की धारा चार सौ बीस, चार सौ पैंसठ, चार सौ सरसठ, चार सौ अड़सठ, चार सौ इकहत्तर एवं दो सौ इकसठ के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया था? यदि हाँ, तो क्या आयुक्त चम्बल संभाग मुरैना ने सेवानिवृत्ति के पूर्व तथ्यों की जाँच किए बिना ही आरोपी श्रीमती सुनीता तिवारी पत्नी मुरारीलाल तिवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को पुनः सेवा में लिए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं? यदि हाँ, तो क्या इस समूचे प्रकरण की उच्च स्तरीय जाँच कराकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता तिवारी को सेवा से पृथक किया जाएगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं तो क्यों? मुख्यमंत्री : जी हाँ। जी हाँ। आयुक्त चम्बल संभाग मुरैना द्वारा पारित निर्णय दिनांक चौबीस नवंबर दो हज़ार बीस के द्वारा न्यायालय कलेक्टर भिण्ड के आदेश दिनांक तेरह मार्च दो हज़ार बीस एवं परियोजना अधिकारी लहार जिला भिण्ड के आदेश क्र. / आईसीडीएस / स्थापना-दो/दो हज़ार उन्नीस/चार सौ दो-चार सौ तीन लहार, दिनांक चौबीस अगस्त दो हज़ार उन्नीस विधि सम्मत न होने से अपास्त किये जाने के कारण परियोजना अधिकारी लहार जिला भिण्ड के आदेश क्र./एबावि/आ.वा./स्था./सैंतालीस इक्कीस दो हज़ार बीससात हज़ार चार सौ अठहत्तर दिनांक उनतीस दिसंबर दो हज़ार बीस द्वारा पुनः सेवा में लेकर आंगनवाड़ी केन्द्र रावतपुरा खुर्द में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पुनः पदस्थ किया गया । प्रश्नांश अनुसार जानकारी होने से शेष का प्रश्न ही नहीं । पर्यटन स्थलों के विकास हेतु संचालित योजनायें [पर्यटन] परिशिष्ट - "दस" अट्ठारह. श्री रामपाल सिंह : क्या पर्यटन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि रायसेन जिले के किस-किस स्थान पर कौन-कौन से पर्यटन स्थल / एतिहासिक धरोहर है, उनके विकास के लिए राज्य सरकार तथा भारत सरकार की कौन-कौन सी योजनायें संचालित है? रायसेन जिले में पर्यटन स्थलों के विकास, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु एक जनवरी उन्नीस से फरवरी दो हज़ार इक्कीस तक की अवधि में रायसेन जिले में किस किस योजना में किन-किन स्थलों पर क्या-क्या कार्य करवाये गये पूर्ण विवरण दें। प्रश्नांश के कार्यों हेतु राज्य शासन द्वारा भारत सरकार को किन-किन योजनाओं में कौन-कौन से प्रस्ताव कब-कब भिजवाये तथा उनपर आज दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही हुई पूर्ण विवरण दें? विभाग के अधिकारियों द्वारा भारत सरकार से राशि स्वीकृत करवाने के संबंध में क्या-क्या कार्यवाही तथा प्रयास किये गये पूर्ण विवरण दें। पर्यटन मंत्री : रायसेन जिले में सांची स्तूप, उदयगिरी एवं भीम बैठका में शैलचित्र / गुफायें, भोजपुर मंदिर, आशापुरी, सतधारा, मुरलखुर्द एवं सोनारी व रायसेन दुर्ग आदि पर्यटन स्थल/ऐतिहासिक धरोहर है, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार । वर्तमान में कोई योजना संचालित नहीं है । बुद्धिस्ट सर्किट के अंतर्गत कार्य कराये गये हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार । प्रश्नांश 'ख' के संबंध में रायसेन जिले में बुद्धिस्ट सर्किट से संबंधित प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार को दिनांक आठ सितंबर दो हज़ार सोलह को प्रेषित किया गया है। पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बुद्धिस्ट सर्किट के स्वीकृति आदेश क्रं पाँच /दो हज़ार सोलह-SD दिनांक उन्नीस सितंबर दो हज़ार सोलह द्वारा राशि रू. निन्यानवे.सतहत्तर करोड़ स्वीकृत की गई। पुनरीक्षित स्वीकृति दिनांक तीन जून दो हज़ार बीस जिसकी राशि रू. सत्तासी.बयासी करोड़ प्रदान की गई। जिसमें रायसेन जिले के बुद्धिस्ट स्थलों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार । पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार को स्वदेश दर्शन योजनान्तर्गत बुद्धिस्ट सर्किट का प्रस्ताव एवं डी. पी. आर. प्रेषित किया गया तथा निर्देशानुसार उनमें आवश्यक सुधार कर योजना स्वीकृत कराई गई। विधायक निधि से स्वीकृत राशि का प्रदाय [ योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी] तीन उन्नीस. श्री प्रियव्रत सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या खिलचीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर माचलपुर, विकासखण्ड जीरापुर, जिला राजगढ़ में दिनांक अट्ठारह.दस.दो हज़ार उन्नीस को विधायक निधि से स्वीकृत कार्य सामुदायिक भवन निर्माण राशि पंद्रह लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृत जारी की गई थी, जिसकी क्रियान्वयन एजेंसी कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा राजगढ़ को बनाया गया था ? यदि हाँ, तो क्या इसकी राशि जारी की गई ? यदि हाँ, तो कब तक की गई, कार्यलीन आदेश का क्रमांक / दिनांक बताएं। यदि नहीं, तो क्यों नहीं की गई? इसमें कौन अधिकारी / कर्मचारी दोषी हैं? इनके खिलाफ क्या कार्यवाही की जा रही है? उक्त राशि को योजना एवं सांख्यिकी विभाग के वी.सी.ओ. से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के बी.सी.ओ. में राशि डालने में विलंब के क्या कारण है? यह राशि कब तक संबंधित विभाग के बी.सी.ओ. में डाल दी जाएगी ? वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में विधायक निधि अंतर्गत राशि बारह,सात,तीन सौ बीस रूपये एवं विधायक स्वेच्छानुदान अंतर्गत राशि रूपये एक लाख का बजट अप्राप्त है, उपरोक्त स्वीकृत राशि का बजट कब तक प्राप्त हो जाएगा? वित्त मंत्री : जी हाँ। जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा लिपिकीय त्रुटि से ई-मेल पता सही नहीं लिखने के कारण जारी नहीं हो सकी। इस त्रुटि के लिये संबंधित कर्मचारी दोषी है। संबंधित को भविष्य के लिये कड़ी चेतावनी दी गई है। प्रकरण विशेष में मुख्यतः लिपिकीय त्रुटि से विलम्ब हुआ है। अब क्रियान्वयन एजेन्सी को राशि जारी कर दिये जाने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। बी.सी.ओ. से बी.सी.ओ. को राशि ट्रांस्फर में समय लगने के कारण भी प्रकरणों में विलंब परिलक्षित हुआ है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिनांक चौबीस.दो.दो हज़ार इक्कीस से सरल प्रक्रिया बनाई गई है। जी हाँ । राशि आवंटित कर दी गई है। कुपोषण की रोकथाम हेतु राशि का आवंटन बीस. श्री लखन घनघोरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि जिला जबलपुर में कुपोषण की रोकथाम और इससे जुड़ी बीमारियों का इलाज तथा गर्भवती महिलाओं से संबंधित राज्य व केन्द्र सरकार शासन द्वारा संचालित किन-किन योजनान्तर्गत कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई एवं कितनी-कितनी राशि व्यय हुई ? किन-किन योजनाओं के प्रचार-प्रसार मुद्रण सामग्री की खरीदी, जागरूकता अभियान, दस्तक अभियान व शिविरों आदि के आयोजन पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? बतलावें। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से दो हज़ार बीस-इक्कीस तक जानकारी दें। प्रश्नांश में जागरूकता अभियान व शिविरों का आयोजन कब से कब तक कितने दिवसीय कहां-कहां पर आयोजित किये गये। इनमें किन-किन अधिकारियों ने कब-कब भाग लिया। किन-किन शिविरों में कितने-कितने बच्चों व गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से शून्य से लेकर पाँच वर्ष तक की आयु के कितने-कितने बच्चे कम वजन, अतिकम वजन के तथा कितने-कितने बच्चे गंभीर व अतिकुषोपित पाये गये। कितने बच्चों व महिलाओं को कितनी-कितनी राशि की दवाईयां व पौष्टिक पोषण आहार का वितरण किया गया? शिविरों के आयोजन पर किन-किन कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई। इसका सत्यापन कब और किसने किया? बतलावें। विकासखण्डवार जानकारी दें। प्रश्नांश में अतिकुपोषित चिंहित कितने-कितने बच्चों को उपचार हेतु किन-किन एन. आर. सी. में भर्ती कराया गया ? इनमें से कितने बच्चों का फालोअप किया गया? कितने बच्चों के वजन में वृद्धि हुई। कितने बच्चें पूर्ण स्वस्थ्य हुए एवं कितने बच्चों की मृत्यु हुई ? बतलावें । मुख्यमंत्री : कुपोषण की रोकथाम और इससे जुड़ी बीमारियों का इलाज तथा गर्भवती महिलाओं से संबंधित संचालित योजना, वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से दो हज़ार बीस-इक्कीस तक आवंटन राशि एवं व्यय राशि योजनावार पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "क" अनुसार है। प्रश्नांश में जागरूकता व शिविरों के आयोजन किये जाने का दिनांक स्थान एवं भाग लेने वाले अधिकारी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ख , ख एवं ख अनुसार है। ऐसे शिविरों का आयोजन नहीं किया गया है जिसमें बच्चों व गर्भवती महिला का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया हो। आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रत्येक माह वजन अभियान का आयोजन किया जाता है, जिसमें से शून्य से लेकर पाँच वर्ष तक के बच्चों का वजन लिया जाता है। वजन आयोजन के दौरान कम वजन, अतिकम वजन तथा गंभीर व अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जाता है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ग" अनुसार है। जिले में स्नेह शिविर का आयोजन वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में किया गया है। जिसमें बच्चों और महिलाओं पर व्यय की गयी दवाइयाँ, पौष्टिक आहार, अन्य व्यय सत्यापनकर्ता अधिकारी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "घ" पर विकासखण्डवार है। अति कुपोषित चिन्हित बच्चों के उपचार हेतु एन. आर. सी. में भर्ती कराना, फालोअप कराना, बच्चों के वजन में वृद्धि, पूर्ण स्वस्थ्य हुए तथा बच्चों की मृत्यु से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - "ड" अनुसार है। सूचना प्रकाशन विभाग अंतर्गत अधिमान्य पत्रकार [जनसंपर्क] इक्कीस. श्री अनिरुध्द मारू : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि मध्य प्रदेश शासन सूचना प्रकाशन विभाग द्वारा किन-किन पत्रकारों को राज्य एवं राज्य के अलावा अधिमान्यता दी गयी है ? जिलेवार सूची उपलब्ध कराएं। अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार किन-किन समाचार पत्र एवं किन-किन टीवी चैनल, संस्था के लिए कार्यरत है? सूचना प्रकाशन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों एवं टीवी चैनलों को वर्ष दो हज़ार उन्नीस, दो हज़ार बीस एवं दो हज़ार इक्कीस में कितनी राशि के विज्ञापन दिये गये ? संस्था अनुसार विज्ञापन की राशि एवं भुगतान की राशि बतायें। सूचना प्रकाशन के अधीन म.प्र. माध्यम कितने प्रिंटर्स पंजीकृत है? सूची सहित बताए। म.प्र. माध्यम में पंजीकृत प्रिंटर्स को वर्ष दो हज़ार अट्ठारह, दो हज़ार उन्नीस, दो हज़ार बीस में कितनी राशि का भुगतान किया गया एवं इसमें किन-किन विभागों का कार्य करवाया गया ? सूचीवार बताएं। मुख्यमंत्री : एवं जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - एक अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - दो अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - तीन अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - चार अनुसार है। कर्मचारियों के वेतन निर्धारण उपरांत अधिक भुगतान की वसूली बाईस. श्री अनिरुध्द मारूः क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि नीमच जिले में कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन उपरांत अधिक भुगतान की वसूली से वर्ष दो हज़ार उन्नीस से प्रश्न दिनांक तक कितनी राशि शासन के खजाने में जमा की गई? क्या जिले में पेंशन कार्यालयों में अधिक भुगतान की वसूली के सम्बन्ध में आपत्तियां लगाई जाती है और फिर वसूली न करते हुए निराकरण कर दिया जाता है? क्या पेंशनरों से उपादान / पेंशन भुगतान के आदेश के नाम पर चक्कर लगवाए जाते हैं और उनका भुगतान समय से नहीं होता? उनकी समय-सीमा क्या है? नीमच जिले में पेंशन कार्यालयों में नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन के वर्ष दो हज़ार उन्नीस से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण लंबित है किस अवधि के है उनकी विभागवार जानकारी दें? वित्त मंत्री : वर्ष दो हज़ार उन्नीस से प्रश्न दिनांक तक शासन के खजाने में राशि रूपये एक,सत्ताईस,इक्यावन,आठ सौ आठ/- जमा की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - अ अनुसार है। शासन द्वारा पदोन्नति / समयमान वेतनमान / वारिष्ठ वेतनमान आदि के जारी आदेशों के अनुसार कार्यालय द्वारा सक्षम अनुमोदन कराये बिना भुगतान के कारण अधिक भुगतान की स्थिति निर्मित होने पर पूर्ति हेतु प्रकरण विभाग को लौटाया जाता है। पूर्ति होने के पश्चात् ही प्रकरण का निराकरण किया जाता है। जी नहीं । उपादान / पेंशन भुगतान आई. एफ.एम.आई.एस. से ऑनलाईन किया जाता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। नीमच जिला पेंशन कार्यालय में नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण अनुमोदन के वर्ष दो हज़ार उन्नीस से प्रश्न दिनांक तक पुनरीक्षित वेतनमान निर्धारण / उन्नयन / समयमान वेतनमान के अट्ठारह प्रकरण लंबित है। जिनके निराकरण की कार्यवाही प्रचलन में है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र - ब अनुसार है। पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ [वित्त] तेईस. श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि म.प्र. में जनवरी दो हज़ार पाँच के पश्चात से प्रश्न दिनांक तक शासन द्वारा जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भर्ती की गई है? इन्हें पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ कब तक मिल जाएगा? वित्त मंत्री : म.प्र. में जनवरी, दो हज़ार पाँच के पश्चात् से प्रश्न दिनांक तक शासन द्वारा भर्ती अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन योजना लागू की है। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। मंदिर की जमीनों पर कब्जा चौबीस. श्री महेश परमार : क्या पर्यटन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि क्या राज्य सरकार हिंदू सनातन धर्म के प्रतीक आगर रोड स्थित राधाकृष्ण मंदिर कि रिक्त भूमि को शासकीय धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय के लिए दो.चौंतीस करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है? यदि हाँ, तो यह हिंदू मंदिरों कि ज़मीनों को हड़पनें का षड्यंत्र नहीं है? यदि नहीं है तो, उसी क्षेत्र में इंदौर टेक्सटाइल से लेकर हीरामील तक ताकायमी जमीन शासकीय जमीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है उसके उपरांत भी हिंदू सनातन धर्म के प्रतीक मंदिरों कि जमीन क्यों छीनी जा रही है? क्या राज्य सरकार हिंदू मंदिरों की जमीन लेकर अपनी ज़मीनों को महंगे भाव में बेचकर मुनाफा नहीं कमाना चाहती है ? अगर ऐसा नहीं है तो, उक्त प्रयोजन के लिए हिंदू धर्म के मंदिरों की ही ज़मीनें क्यों? उक्त योजना का पुनः भूमि परिवर्तन कर उपलब्ध शासकीय भूमि पर महाविद्यालय निर्माण क्यों नहीं किया जा रहा है? कारण प्रस्तुत करें। पर्यटन मंत्री : शासकीय स्वशासी धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय उज्जैन के विस्तार हेतु आपसी सहमति क्रय निति के अर्जन प्रस्ताव के आधार पर महाविद्यालय के पक्ष में एक हेक्टेयर भूमि वर्तमान बाजार मूल्य से दो गुने मूल्य पर दो,चौंसठ,आठ,शून्य/- में अर्जन किया गया तथा उक्त राशि महाविद्यालय द्वारा राधाकृष्ण मंदिर के खाते में जमा कराई गई। जी नहीं उक्त भूमि शासकीय धन्वन्तरी आयुर्वेद एवं चिकित्सा महाविद्यालय के विस्तारीकरण हेतु महाविद्यालय की सीमा से लगी होने के कारण महाविद्यालय के पक्ष में अर्जित की गई। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जी नहीं। प्रश्नांश "क" अनुसार। जी नहीं। प्रश्नांश "क" अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर कार्यवाही पच्चीस. श्री नारायण सिंह पट्टा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के पत्र क्रमांक तीन सौ चौवन/दो हज़ार एक सौ छिहत्तर/दो हज़ार उन्नीस/तीनएफ, भोपाल दिनांक नौ मार्च दो हज़ार बीस के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में दिनांक आठ फरवरी दो हज़ार बीस की बैठक में लिए निर्णय के बिंदु क्रमांक चार में दिए गए निर्देश के संबंध में विभागों को नियम संशोधन करने एवं पदोन्नति/क्रमोन्नति संबंधी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया था, उपरोक्त के संदर्भ में कितने विभागों द्वारा कार्यवाही की गई है? जिन विभागों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है तो उन विभागों को पुनः कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया जाऐगा? मुख्यमंत्री : जी हाँ। शेषांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है। गैर व्यवसायिक वाहनों का विभाग में अटैचमेंट [लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण] छब्बीस. श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से दो हज़ार बीस-इक्कीस की अवधि में प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत अटैच / उपयोग किये जाने वाले वाहनों के व्यवसायिक उपयोग के संबंध में शासन द्वारा कोई दिशा निर्देश जारी कर रखें हैं या स्थानीय स्तर पर निविदा आमंत्रित कर वाहनों की दर निर्धारित कर वाहनों का व्यवसायिक रुप से अटैच/उपयोग किये जाने का प्रावधान है। प्रश्नाधीन अवधि में नीमच जिला चिकित्सालय द्वारा व्यवसायिक रुप से अटैच/उपयोग किये वाहन क्रमांक क्रमशः एम.पी.- चौंतालीस सी.ए.-छः हज़ार चार सौ तेईस, छः हज़ार आठ सौ चौरासी, चार हज़ार दो सौ तेईस, पाँच हज़ार नौ सौ तिरासी, पाँच हज़ार अट्ठावन, छः हज़ार एक सौ छिहत्तर, पाँच हज़ार निन्यानवे, चार हज़ार आठ सौ छः, एक हज़ार दो सौ पचहत्तर, नौ हज़ार नौ सौ तेरह, पाँच हज़ार अड़तालीस, सात हज़ार दो सौ छियानवे, सात हज़ार पाँच सौ पैंतालीस, आठ हज़ार नौ सौ पचहत्तर, आठ हज़ार छः सौ पाँच को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया ? प्रश्नांश में भुगतान की गई राशि क्या गैर व्यवसायिक वाहनों को की गई है ? यदि हाँ, तो इससे शासन को कितनी राशि की हानि हुई है तथा इसकी किस प्रकार से वसूली की जावेगी । नियम विरुद्ध अटैच/उपयोग किये जाने वाले वाहनों के संबंध में कौन उत्तरदायी हैं तथा उसके विरुद्ध क्या कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी ? यदि नहीं तो कारण बतायें। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री : जी हाँ, दिशा निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है । जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। जी हाँ। जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा इन वाहनों की खुली ई-निविदा की न्यूनतम दर पर अनुबंध वाहनों का उपयोग किया गया क्योंकि इस क्षेत्र में व्यवसायिक वाहनों की अनु उपलब्धता होने से गैर व्यवसायिक वाहनों का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू रूप से संचालित करने के लिए किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहरों का निर्माण [नर्मदा घाटी विकास] सत्ताईस. श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि नर्मदा घाटी विकास विभाग विधानसभा क्षेत्र कसरावद में इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर की आर.डी. एक सौ अट्ठारह.छः सौ किमी पर स्केप तथा सी. आर. का निर्माण एवं कठोरा उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत जेकवेल माकड़खेड़ा से कसरावद रोड ओझरा तक तेरह.तिरेपन कि.मी. रोड का सुधार कार्य प्राक्कलन राशि रूपये दो सौ तैंतीस.चौरासी लाख एवं इलेक्ट्रिक ग्रिड की फैंसिंग तथा कांक्रीट बीम मरम्मत कार्य प्राक्कलन राशि रू. दो.पैंतालीस लाख की स्वीकृति जारी की गई है यदि हाँ, तो कब कार्यवाहीवार प्रश्न दिनांक तक की अद्यतन स्थिति में जानकारी दें ? प्रश्नांश के संदर्भ में प्रश्नकर्ता के पत्र क्रमांक छः सौ उनतीस दिनांक बाईस फ़रवरी एक हज़ार नौ सौ सोलहतीन दिनांक बाईस फ़रवरी बीस एवं दो हज़ार छियालीस दिनांक इक्कीस अगस्त उन्नीस के तारतम्य में क्या कार्यवाही की गई? नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के पत्र क्रमांक एक हज़ार छः सौ छियानवे/चारपचास तिरेपन दस/उन्नीस दिनांक तेईस सितंबर उन्नीस के तत्संबंध में प्रश्न दिनांक तक उक्त कार्यों की स्वीकृति आदेश जारी किए गए हैं यदि हाँ, तो बतायें नहीं तो स्पष्ट कारण सहित जानकारी दें? प्रश्नांश एवं के अति महत्वपूर्ण कार्यों को पूर्ण किए जाने हेतु स्थानवार किस-किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा सर्वे कर पालन प्रतिवेदन की प्रस्तुति दिनांक के साथ-साथ दिनांक तक की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति सहित जानकारी दें? मुख्यमंत्री : स्केप तथा सी.आर. का निर्माण कार्य पीपरी उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना के अंतर्गत प्रारंभ हो चुका है। जी नहीं । प्रश्नांकित कार्यों का प्रावधान पूर्व में प्राप्त प्रशासकीय स्वीकृति में सम्मिलित नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। उत्तरांश एवं अनुसार । परिशिष्ट - "ग्यारह" किसानों को पानी उपलब्ध कराया जाना [ नर्मदा घाटी विकास] अट्ठाईस. श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि विधानसभा क्षेत्र कसरावद में किसानों को पानी उपलब्ध कराने एवं भीकनगांव में वेदा नदी के कृषकों को अपर वेदा बांध के ग्राम नेमित तह. भीकनगांव के कमाण्ड क्षेत्र से जोड़ने के संबंध में नर्मदा घाटी को प्रश्नकर्ता द्वारा प्राप्त पत्र क्रमाक तीन सौ तीन / दिनांक एक फ़रवरी उन्नीस छः सौ अट्ठाईस/दिनांक बाईस फ़रवरी उन्नीस एवं इसी अवधि में अन्य माध्यमों से प्राप्त पत्रों के तारतम्य में प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई कार्यवाहीवार जानकारी दें? प्रश्नांश के संदर्भ में विभागीय स्तर पर क्या-क्या निर्देश/स्वीकृति/आदेश जारी कब-कब किए गये। हाँ तो बताएं यदि नहीं तो क्यों, कारणों का उल्लेख करें? उक्त किसानों को पानी उपलब्ध कराये जाने के लिए क्या शासन प्रतिबद्ध नहीं है हाँ, तो कब तक किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उपरोक्तानुसार कार्यवाही पूर्ण कर किसानों को पानी उपलब्ध करा दिया जावेगा? मुख्यमंत्री : पत्र क्रमांक तीन सौ तीन पीपरी माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना से संबंधित है। इससे कुल सात हज़ार हेक्टेयर में से कसरावद विधानसभा क्षेत्र के ग्यारह ग्रामों में एक हज़ार आठ सौ इकसठ हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। योजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। पत्र क्रमांक छः सौ अट्ठाईस दिनांक बाईस फ़रवरी दो हज़ार उन्नीस अपरबेदा परियोजना से संबंधित है। अपरबेदा जलाशय से कसरावद विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई किया जाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। विभिन्न परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निर्माणाधीन परियोजनाओं से भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराया जाना लक्षित है। परिशिष्ट - "बारह" आर्थिक अपराध अनुसंधान के लंबित प्रकरणों की जानकारी उनतीस. श्री कुणाल चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ने एक जनवरी दो हज़ार पंद्रह के बाद से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण किन लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं? कितने मामलों में पी.ई. दर्ज की है? दर्ज मामलों में कितने मामले दवितीय श्रेणी और उससे ऊपर के अधिकारियों पर दर्ज हैं? प्रकरण वार जानकारी दी जायें। प्रश्नांश अनुसार दर्ज कितने मामलों में चालान प्रस्तुत कर दिया गया है? कितने मामलों में चालान प्रस्तुत करने की कार्यवाही लंबित है? लंबित प्रकरणों की जानकारी बतायें। ई-टेंडरिंग घोटाले में कितने प्रकरण किन-किन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किये हैं? प्रकरणवार जानकारी देवें । ई. ओ. डब्ल्यू. में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड में दो हज़ार तेरह में खरीदी ए. सी. बसों की खरीदी से जुड़ी कितनी शिकायतें लंबित हैं? उन पर अब तक ब्यूरो ने क्या कार्यवाही की है? मुख्यमंत्री : से जानकारी एकत्रित की जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत पंजीकृत अस्पताल तीस. सुश्री चंद्रभागा किराड़े : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि म. प्र. में आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत कुल कितने शासकीय एवं निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जिलेवार सूची देवें । प्रश्नांश की सूची अनुसार किस अस्पताल में किन-किन बीमारियों के उपचार की सुविधा प्रश्न दिनांक तक कि स्थिति में है, अस्पतालवार, बीमारीवार सूची देवें । आयुष्मान भारत योजना में मरीज के एप्रूवल के लिए भेजी जाने वाली जांचों में व्यय कि गई राशि स्वीकृति उपरान्त संबंधित अस्पताल को भुगतान कि जाती है या मरीज के खाते में डाली जाती है। शासकीय अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना अन्तर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस में उपचार के लिए क्या कोई पृथक से राशि प्रदान कि गई है, हाँ या नहीं, यदि हाँ, तो राशि के व्यय संबंधी विगत एक वर्ष का विवरण उपलब्ध करावें। जिला चिकित्सालय बड़वानी में गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस में मरीज के उपचार एवं ऑपरेशन के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध है और क्या-क्या नहीं है, बीमारीवार बताएं एवं जो सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, उसके लिए विभाग क्या कार्यवाही करेगा। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री : मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत सम्बद्ध शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है । आयुष्मान भारत "निरामयम" मध्यप्रदेश योजनान्तर्गत चिकित्सालयों को विभिन्न विषय विशेषज्ञताओं के अन्तर्गत नियमानुसार सम्बद्ध किया जाता है। उक्त विषय विशेषज्ञताओं के अन्तर्गत उपलब्ध पैकेजेस के माध्यम से भर्ती मरीजों का उपचार योजनान्तर्गत किया जाता है। सम्बद्ध चिकित्सालयों की सूची विषय विशेषज्ञता सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत भर्ती मरीजों के उपचार पर होने वाले व्यय का भुगतान नियत पैकेज राशि अनुसार सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों के खाते में ऑनलाईन किया जाता है। योजनान्तर्गत मरीजों के खाते में राशि के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। आयुष्मान भारत "निरामयम" योजनान्तर्गत विभिन्न प्रकार के गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस के उपचार हेतु सम्बद्ध चिकित्सालय उपलब्ध पैकेज का उपयोग कर नियत पैकेज राशि अनुसार भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। शासकीय चिकित्सालयों को गंभीर ऑपरेशन एवं एक्सीडेन्टल केसेस के उपचार लिये कोई पृथक से राशि प्रदान नहीं की जाती है। एक. जिला चिकित्सालय बड़वानी में गंभीर ऑपरेशन से संबंधित उपचार हेतु मुख्य ऑपरेशन थियेटर में पिडियाट्रीक, सर्किट बीथिग बेग, हाईड्रोलिक टेबल मल्टी पारामानिटर की कमी है तथा शेष सुविधायें उपलब्ध है। दो. जिला चिकित्सालय बड़वानी में एक्सीडेन्ट की स्थिति में मरीजों के हड्डी से संबंधित ऑपरेशन हेतु हड्डी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में इम्प्लान्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा शेष सुविधायें उपलब्ध है। तीन. जिला चिकित्सालय बड़वानी में बिन्दु क्रमांक एक व दो के अतिक्ति ब्लड बैंक विशेषज्ञ ऑनकॉल उपलब्ध रहते हैं एवं एक सौ आठ एम्बूलेंस की सेवायें निःशुल्क उपलब्ध हैं परन्तु सीटी स्कैन एवं एमआरआई की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जो सुविधाएं नहीं है उन्हें यथासंभव शीघ्र उपलब्ध कराया जावेगा। कोविड-उन्नीस महामारी में नियुक्त कर्मचारियों को बिना सूचना के सेवा समाप्ति [लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ] इकतीस. श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या कोविड- उन्नीस महामारी के कारण विभाग में/जिले में नर्सिंग स्टॉफ, सपोर्ट स्टॉफ एवं अन्य स्टॉफ की भर्ती अस्थाई मानदेय के आधार पर की गई थी ? यदि हाँ, तो क्या बिना कोई पूर्व सूचना के इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई? क्या इन कर्मचारियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना कोविड- उन्नीस महामारी में काम किया तो क्या विभाग का यह दायित्व नहीं था कि इन कर्मचारियों को एक माह पूर्व नोटिस दिया जावें ताकि वे अपने रोजगार की व्यवस्था कर सकें। क्या इन कर्मचारियों ने कोरोना मरीज के सीधे संपर्क में कार्य किया? यदि हाँ, तो क्या इन कर्मचारियों को कोरोना टीका लगाया गया ? यदि नहीं तो क्यों ? क्या विभाग में इनके निरंतर सेवाएं बने रहने की व्यवस्था की जा सकती है? यदि नहीं तो क्यों? लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री : जी हाँ । जी नहीं, समस्त जिला कलेक्टरों को कोविड-उन्नीस महामारी की रोकथाम हेतु पत्र क्रमांक / आई.डी.एस.पी/ दो हज़ार बीस/दो सौ अठासी दिनांक पच्चीस.तीन.दो हज़ार बीस द्वारा आवश्यक मानव संसाधन सुनिश्चित करने हेतु अधिकार प्रत्यायोजित किये गये थे। उक्त पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि यह सेवाएं एक निश्चित समयावधि तीन माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया/घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा। इस आशय से संबंधित जिलों में अस्थाई मानव संसाधन को पूर्व से ही नियुक्ति के समय अवगत कराया गया था। जी हाँ, भारत सरकार द्वारा प्रदाय गाइड लाइन अनुसार समस्त शासकीय एवं अशासकीय हेल्थ वर्करों को भारत सरकार के पोर्टल पर जो पंजीकृत थे उन्हें कोविड-उन्नीस वैक्सीन का टीका संस्थाओं में उपस्थित होने पर निःशुल्क दिया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जी नहीं। विभाग के पत्र क्रमांक/आईडीएसपी/दो हज़ार बीस/दो सौ अठासी भोपाल दिनांक पच्चीस.तीन.दो हज़ार बीस के अनुसार यह यह सेवाएं निश्चित समयावधि तीन माह के लिए ली जा रही है जिसे आवश्यकता होने पर बढ़ाया/घटाया जा सकेगा। अतः निर्धारित अवधि पश्चात् आदेश स्वतः समाप्त माना जावेगा। अतः नियमतीकरण तथा संविदा पर रखने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजनाएं [ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम] बत्तीस. श्री पी.सी. शर्मा, श्री संजय उइके, श्री कुणाल चौधरी : क्या सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सरकार द्वारा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना बंद कर दी गई है? यदि हाँ, तो किस दिनांक से ये योजनाएं बंद की गई हैं ? इन योजनाओं में कितने उद्यमियों ने कर्ज लिया था तथा योजनाओं को बंद करने के बाद कितने युवा उद्यमियों की कितनी राशि की सब्सिडी रोक दी गई है? सरकार द्वारा सब्सिडी रोकने के कारण कितने उद्यमी बैंकों द्वारा डिफाल्टर हो चुके हैं? इन योजनाओं के अंतर्गत कर्ज लेकर रोजगार करने वाले उद्यमियों के रोजगार बंद होने और उनके डिफाल्टर होने के लिए कौन उत्तरदायी है ? सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री : जी नहीं। दिनांक अट्ठारह दिसंबर दो हज़ार बीस पश्चात ऋण वितरण की कार्यवाही स्थगित की गई है । वित्तीय वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में इन योजनाओं का संचालन नहीं किया गया, इसलिये इस वर्ष आवेदन लेकर किसी भी उद्यमियों को कोई कर्ज नहीं दिया गया था। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। किसी भी युवा उद्यमी की सब्सिडी राशि रोके जाने के आदेश शासन द्वारा नहीं दिये गये हैं, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। कोरोना महामारी के लिये केन्द्र से प्राप्त राशि तैंतीस. श्री पी.सी. शर्मा : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए इकतीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक प्रदेश सरकार को केन्द्र सरकार से अलग-अलग तारीखों में किस-किस मद में कितनी-कितनी राशि प्राप्त हुई है? इकतीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक उपरोक्त में से किस-किस मद में कितनी-कितनी राशि खर्च की गई है? क्या सरकार ने कोरोना के लिए लगाए जाने वाले वैक्सीन के दो डोज के लिए कोई शुल्क निर्धारित किया है यदि हाँ, तो वह कितना है? क्या सरकार सभी प्रदेश वासियों को कोरोना के लिए लगाए जाने वाले वैक्सीन के दो डोज निःशुल्क उपलब्ध कराने पर विचार करेगी ? भोपाल स्थित पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में को-वैक्सीन के थर्ड फेस ट्रायल के अंतर्गत कितने लोगों को वैक्सीन लगाई गई? क्या यह शिकायत मिली है इन लोगों को यह नहीं बताया गया है कि उन पर को-वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है न ही उन्हें नियमानुसार डायरी दी गई और न ही हेल्थ फालोअप किया गया? क्या यह सच है कि को-वैक्सीन के थर्ड फेस ट्रायल में शामिल दीपक मरावी की मृत्यु पीपुलस मेडिकल कॉलेज की लापरवाही के कारण है? लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री : जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ"अनुसार है । जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। जी नहीं। वर्तमान में प्रदेश के समस्त हेल्थ केयर वर्कर्स एवं फ्रंट लाईन वर्कर्स को कोविड-उन्नीस वैक्सीन के दो डोज निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं। आगामी कार्यवाही भारत शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जावेगी। भोपाल स्थिति पीपुल्स ऑफ मेडिकल साईंस एण्ड रिसर्च सेंटर को-वैक्सीन के थर्ड फेज ट्रायल के अन्तर्गत कुल एक हज़ार सात सौ चौबीस व्यक्तियों को प्रथम डोज एवं एक हज़ार चार सौ बाईस व्यक्तियों को वैक्सीन की द्वितीय डोज लगाई गई। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जी नहीं । परिशिष्ट - "तेरह " चौरई विधानसभा में प्रोटोकाल उल्लंघन चौंतीस. चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या चौरई विधानसभा के कार्यक्रमों में प्रश्नकर्ता व क्षेत्रीय सांसद को आमंत्रित न कर प्रोटोकाल का उल्लंघन किया जा रहा है, क्यों? दि. एक.छः.दो हज़ार बीस से छः.पाँच.दो हज़ार इक्कीस तक चौरई विधानसभा में हुए समस्त भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्र की प्रमाणित प्रति देवें। इसी तरह समस्त शिलालेखों की फोटो भी उपलब्ध करावें । क्या कारण है कि इनमें प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया? ऐसा करने वाले अधिकारियों के नाम, पदनाम देकर बतावें कि शासन ने उन पर अब तक क्या कार्यवाही की ? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो प्रकरणवार कब तक की जाएगी?
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कड़ाके की सर्दी ने पिछले 9 सालों की रिकार्ड तोड़ दिया। बर्फीली हवाएं ताजनगरी में शूल की तरह से ऐसी चुभीं कि जानलेवा साबित हो गईं। शनिवार को ताजनगरी में अधिकतम तापमान 9. 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया जो सामान्य से 13 डिग्री नीचे है। इससे पहले 19 जनवरी 2010 को दिन में तापमान 10. 2 डिग्री पर पहुंचा था। शनिवार को आगरा प्रदेश का चौथा सर्द शहर रहा। बरेली 8. 3 डिग्री के साथ सबसे सर्द, मुजफ्फर नगर 8. 4 डिग्री पर दूसरे और मुरादाबाद 8. 7 डिग्री पर तीसरे नंबर पर रहा।
शनिवार सुबह कोहरा बेहद घना रहा। शुक्रवार रात नौ बजे के बाद से ही कोहरा शुरू हो गया, जो रात में घना होता गया। रात से लेकर सुबह 8 बजे तक दृश्यता शून्य रही। दिन में धूप भी बेहद हल्की रही, जिससे तापमान सामान्य से 13 डिग्री नीचे आ गया। आगरा में अधिकतम तापमान केवल 9. 9 डिग्री दर्ज किया गया, जिसने 9 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया।
अभी तक का सबसे सर्द दिन का रिकार्ड भी टूटने के कगार पर है। 13 जनवरी 2003 को दिन में पारा 8. 4 डिग्री तक पहुंच चुका है। बर्फीली हवाओं के कारण इस साल के अंत तक यह भी टूट सकता है। मौसम विभाग के 119 साल के इतिहास में यह सबसे सर्द दिन है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक अगले तीन दिनों में घना कोहरा छाया रहेगा। दिन में कड़ाके की सर्दी बनी रहेगी। पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फीली हवाओं का सितम आगरा और पड़ोसी जिलों पर बरकरार रहेगा। नए साल पर बारिश और ओले पड़ सकते हैं। गरज चमक के साथ तीन जनवरी तक बारिश होने के आसार हैं।
पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हो रही है, लेकिन दिन में तापमान मैदानों से बेहतर है। आगरा पहाड़ी इलाकों से ज्यादा ठंडा चल रहा है। पहाड़ी शहरों मसूरी में दिन में पारा 14. 1 डिग्री, टिहरी में 13. 4 डिग्री है तो धर्मशाला में 10. 8, मनाली में 11. 6, कुल्लू में 18. 3, शिमला में 14. 8, सोलन में 18. 5 ऊना में 14. 8 डिग्री तापमान पहुंच रहा है। इन शहरों में न्यूनतम तापमान बेहद कम है।
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कड़ाके की सर्दी ने पिछले नौ सालों की रिकार्ड तोड़ दिया। बर्फीली हवाएं ताजनगरी में शूल की तरह से ऐसी चुभीं कि जानलेवा साबित हो गईं। शनिवार को ताजनगरी में अधिकतम तापमान नौ. नौ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया जो सामान्य से तेरह डिग्री नीचे है। इससे पहले उन्नीस जनवरी दो हज़ार दस को दिन में तापमान दस. दो डिग्री पर पहुंचा था। शनिवार को आगरा प्रदेश का चौथा सर्द शहर रहा। बरेली आठ. तीन डिग्री के साथ सबसे सर्द, मुजफ्फर नगर आठ. चार डिग्री पर दूसरे और मुरादाबाद आठ. सात डिग्री पर तीसरे नंबर पर रहा। शनिवार सुबह कोहरा बेहद घना रहा। शुक्रवार रात नौ बजे के बाद से ही कोहरा शुरू हो गया, जो रात में घना होता गया। रात से लेकर सुबह आठ बजे तक दृश्यता शून्य रही। दिन में धूप भी बेहद हल्की रही, जिससे तापमान सामान्य से तेरह डिग्री नीचे आ गया। आगरा में अधिकतम तापमान केवल नौ. नौ डिग्री दर्ज किया गया, जिसने नौ साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया। अभी तक का सबसे सर्द दिन का रिकार्ड भी टूटने के कगार पर है। तेरह जनवरी दो हज़ार तीन को दिन में पारा आठ. चार डिग्री तक पहुंच चुका है। बर्फीली हवाओं के कारण इस साल के अंत तक यह भी टूट सकता है। मौसम विभाग के एक सौ उन्नीस साल के इतिहास में यह सबसे सर्द दिन है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक अगले तीन दिनों में घना कोहरा छाया रहेगा। दिन में कड़ाके की सर्दी बनी रहेगी। पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फीली हवाओं का सितम आगरा और पड़ोसी जिलों पर बरकरार रहेगा। नए साल पर बारिश और ओले पड़ सकते हैं। गरज चमक के साथ तीन जनवरी तक बारिश होने के आसार हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हो रही है, लेकिन दिन में तापमान मैदानों से बेहतर है। आगरा पहाड़ी इलाकों से ज्यादा ठंडा चल रहा है। पहाड़ी शहरों मसूरी में दिन में पारा चौदह. एक डिग्री, टिहरी में तेरह. चार डिग्री है तो धर्मशाला में दस. आठ, मनाली में ग्यारह. छः, कुल्लू में अट्ठारह. तीन, शिमला में चौदह. आठ, सोलन में अट्ठारह. पाँच ऊना में चौदह. आठ डिग्री तापमान पहुंच रहा है। इन शहरों में न्यूनतम तापमान बेहद कम है।
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हर किसी का एक पास्ट होता है, और यह सिचुएशन तब तक नुकसानदायक नहीं है, जब तक आपकी शादी और आज की जिंदगी को इफेक्ट न कर रही हो।
यह बात सही है कि अगर पति या पत्नी में से किसी को भी शादी के बाद, अपने पार्टनर के शादी से पहले के अफेयर के बारे में पता चले तो, भरोसा टूटता है और चीटेड फील होता है।
लेकिन रिश्तों में यह समझना भी जरूरी है कि पास्ट को पास्ट बनाए रखना और प्रेजेंन्ट पर उसकी परछाईं न पड़ने देना आपके अपने हाथ में होता है।
अगर आपका या आपके पार्टनर का पास्ट में कोई अफेयर था, लेकिन आप दोनों ही उस बात से भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो यह रही कुछ उपयोगी टिप्स।
प्यार और रिश्ते को बचाने की जिम्मेदारी दोनों लोगों की आधी-आधी होती है। इसलिए ब्लेम गेम के बजाए, सिचुएशन को प्यार से हैंडल करें।
खुद की गलती न होने पर भी आपको अपने रिश्ते में ही प्यार, लगाव और कोशिश डालने होंगे। क्योंकि गलती इंसान से ही होती है।
कई बार हालातों की तुलना गलतियों को सुधारने और उनसे सीखने का शानदार तरीका होता है, लेकिन हर छोटी चीज़ की तुलना करने चीजों को ठीक कर पाना शायद उतना आसान न हो।
प्यार में नो सॉरी, नो थैंक्यू की फिलॉसफी किसी ने यूं ही नहीं कहीं। माफी का रास्ता चाहें कितना ही कठिन क्यों न हो, अपने रिश्ते की खातिर यह करें। इसी को प्यार कहते हैं।
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हर किसी का एक पास्ट होता है, और यह सिचुएशन तब तक नुकसानदायक नहीं है, जब तक आपकी शादी और आज की जिंदगी को इफेक्ट न कर रही हो। यह बात सही है कि अगर पति या पत्नी में से किसी को भी शादी के बाद, अपने पार्टनर के शादी से पहले के अफेयर के बारे में पता चले तो, भरोसा टूटता है और चीटेड फील होता है। लेकिन रिश्तों में यह समझना भी जरूरी है कि पास्ट को पास्ट बनाए रखना और प्रेजेंन्ट पर उसकी परछाईं न पड़ने देना आपके अपने हाथ में होता है। अगर आपका या आपके पार्टनर का पास्ट में कोई अफेयर था, लेकिन आप दोनों ही उस बात से भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो यह रही कुछ उपयोगी टिप्स। प्यार और रिश्ते को बचाने की जिम्मेदारी दोनों लोगों की आधी-आधी होती है। इसलिए ब्लेम गेम के बजाए, सिचुएशन को प्यार से हैंडल करें। खुद की गलती न होने पर भी आपको अपने रिश्ते में ही प्यार, लगाव और कोशिश डालने होंगे। क्योंकि गलती इंसान से ही होती है। कई बार हालातों की तुलना गलतियों को सुधारने और उनसे सीखने का शानदार तरीका होता है, लेकिन हर छोटी चीज़ की तुलना करने चीजों को ठीक कर पाना शायद उतना आसान न हो। प्यार में नो सॉरी, नो थैंक्यू की फिलॉसफी किसी ने यूं ही नहीं कहीं। माफी का रास्ता चाहें कितना ही कठिन क्यों न हो, अपने रिश्ते की खातिर यह करें। इसी को प्यार कहते हैं। Thanks For Reading!
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व्यवसायः स्टील फैब्रिकेशन प्लांट में सीनियर मशीन ऑपरेटर।
56 वर्षीय डेव फंडरबर्ग, यह सोचते थे कि अतिरिक्त वजन ऐसा था जो अनिवार्य रूप से आपके ऊपर बढ़ता है जब आप बूढ़े हो जाते हैं। उन्होंने सोचा कि उन्हें काम करने की जरूरत नहीं है क्योंकि स्टील फैब्रिकेशन प्लांट में मशीन ऑपरेटर के रूप में उनकी नौकरी ने उन्हें पर्याप्त अभ्यास दिया। उसके पास नाश्ते के लिए केवल कॉफी होगी, फिर पूरे दिन चकमा दें, सोने के समय 3 या 4 छोटे डेबी स्नैक केक डालें। उसने धूम्रपान किया। वह overate। उन्होंने 214 पौंड वजन और 45 इंच कमर था। "मैंने सोचा था कि जिस उम्र में मैं उम्र के साथ आया था," MightyBear कहते हैं। "यह मेरा रवैया था। 'इसके बारे में कुछ भी नहीं है।'"
जब उनकी पत्नी ने एक और आहार एपिसोड शुरू किया, तो माटीबियर ने सहायक होने का फैसला किया। वह और उनकी पत्नी उन्हें सरल बनाने के लिए एक आसान व्यायाम पुस्तिका की तलाश में थे, उन्हें आकार देने के लिए उन्हें क्या करना था। वह तब मिला जब उन्होंने पाया एब्स आहार किताब। इसके माध्यम से पढ़ने के बाद, सब कुछ पूरी तरह से समझ में आया। "यह आसान और समझदार था - मैं इस पर कैसे प्रतिबद्ध नहीं हो सकता," MightyBear कहते हैं। चूंकि उनकी पत्नी ने किताब पर दावा किया, इसलिए वह ऑनलाइन गया और खरीदा एब्स आहार ऑनलाइन, एक कार्यक्रम जो आपके सभी कसरत और भोजन की तरह व्यक्तिगत ट्रेनर की तरह योजना बनाता है, के आधार पर एब्स आहार किताब। उन्होंने यार्ड बिक्री में आसानी से एक होम जिम बनाने के सौदों का निर्माण किया, और घर के 210 पाउंड वजन प्लेट, एक सीधी बार, और $ 30 के लिए आसान कर्ल बार लाया, और डंबेल और वजन बेंच जोड़ा।
अब, 35.5 इंच कमर के साथ 188 पौंड पर, माटीबियर का कहना है कि वह 35 साल पहले आकार के करीब था जब वह वियतनाम में सेवा से घर लौट आया था। माटीबियर कहते हैं, "इसमें काफी बदलाव लाने के लिए केवल 5 सप्ताह लग गए," मैं सक्रिय रूप से भाग ले रहा हूं, 5 सप्ताह में खुद को बदलो फिटनेस पर मंच- एन_-Health.com। "पहले 5 हफ्तों के बाद मैं स्वस्थ और फिट जीवनशैली में था कि मैं जीने के किसी अन्य तरीके के बारे में भी सोच नहीं सकता और इसे किसी और तरीके से नहीं चाहता।"
वह अपने नाश्ते के साथ हर रोज चिकनी पीता है, और एक दिन में 6 भोजन खाता है एब्स डाइट पावर 12। वह शुक्रवार को प्रति सप्ताह अपने एक धोखा भोजन का भी उपयोग करता है जब वह और उसकी पत्नी एक रात को एक रेस्तरां में जाते हैं। लेकिन फिर भी यह वास्तव में एक धोखा खाना नहीं है - वह हमेशा अपने भोजन के साथ सलाद और सब्जियों का आदेश देता है। "मैं इसका विश्लेषण किए बिना कुछ भी ऑर्डर करने में सक्षम नहीं हूं," वह कहता है।
अगला कदम 40 साल की आदत के बाद धूम्रपान छोड़ रहा था। मास्टबियर ने इसे पिछले हेलोवीन के लिए अच्छा दिया। उसने सोचा, "मुझे सही खाने और व्यायाम करने से अच्छा लगता है, धूम्रपान के बिना मुझे कितना बेहतर लगेगा?" तो हर बार जब वह धूम्रपान करता था, तो वह अपने दोपहर के भोजन की पूंछ तक पहुंच जाएगा और एक बच्चे के गाजर को पकड़ लेगा। पहले वह गाजर के लिए लगातार पहुंच रहा था, लेकिन आखिर में वह दिन में केवल दो या तीन तक काट गया।
जंकफूड और धूम्रपान को बदलने के लिए व्यायाम करना और अच्छी तरह से खाना बनाना एक स्वचालित आदत बन गया। "परिणाम जो मैं देख रहा था और महसूस कर रहा था, यह नशे की लत थी," वह कहते हैं।
MightyBear के कसरत अनुसूचीः सोमवार, ऊपरी शरीर शक्ति प्रशिक्षण; मंगलवार, कार्डियो; बुधवार कम शरीर शक्ति प्रशिक्षण; गुरुवार, कार्डियो; शुक्रवार, दिन बंद; शनिवार, कुल शरीर; रविवार कार्डियो इसके अलावा, ताकत के दिनों में abs workouts।
में MightyBear पर जाएं वेलेंटाइन दिवस के लिए फ़िट करें मंच, जहां वह और पुरुषों का एक छोटा समूह एक दूसरे को प्रेरित करता है - ऑनलाइन कसरत मित्रों के रूप में - वेलेंटाइन दिवस द्वारा फिटनेस लक्ष्यों को पूरा करने के लिए।
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व्यवसायः स्टील फैब्रिकेशन प्लांट में सीनियर मशीन ऑपरेटर। छप्पन वर्षीय डेव फंडरबर्ग, यह सोचते थे कि अतिरिक्त वजन ऐसा था जो अनिवार्य रूप से आपके ऊपर बढ़ता है जब आप बूढ़े हो जाते हैं। उन्होंने सोचा कि उन्हें काम करने की जरूरत नहीं है क्योंकि स्टील फैब्रिकेशन प्लांट में मशीन ऑपरेटर के रूप में उनकी नौकरी ने उन्हें पर्याप्त अभ्यास दिया। उसके पास नाश्ते के लिए केवल कॉफी होगी, फिर पूरे दिन चकमा दें, सोने के समय तीन या चार छोटे डेबी स्नैक केक डालें। उसने धूम्रपान किया। वह overate। उन्होंने दो सौ चौदह पौंड वजन और पैंतालीस इंच कमर था। "मैंने सोचा था कि जिस उम्र में मैं उम्र के साथ आया था," MightyBear कहते हैं। "यह मेरा रवैया था। 'इसके बारे में कुछ भी नहीं है।'" जब उनकी पत्नी ने एक और आहार एपिसोड शुरू किया, तो माटीबियर ने सहायक होने का फैसला किया। वह और उनकी पत्नी उन्हें सरल बनाने के लिए एक आसान व्यायाम पुस्तिका की तलाश में थे, उन्हें आकार देने के लिए उन्हें क्या करना था। वह तब मिला जब उन्होंने पाया एब्स आहार किताब। इसके माध्यम से पढ़ने के बाद, सब कुछ पूरी तरह से समझ में आया। "यह आसान और समझदार था - मैं इस पर कैसे प्रतिबद्ध नहीं हो सकता," MightyBear कहते हैं। चूंकि उनकी पत्नी ने किताब पर दावा किया, इसलिए वह ऑनलाइन गया और खरीदा एब्स आहार ऑनलाइन, एक कार्यक्रम जो आपके सभी कसरत और भोजन की तरह व्यक्तिगत ट्रेनर की तरह योजना बनाता है, के आधार पर एब्स आहार किताब। उन्होंने यार्ड बिक्री में आसानी से एक होम जिम बनाने के सौदों का निर्माण किया, और घर के दो सौ दस पाउंड वजन प्लेट, एक सीधी बार, और तीस डॉलर के लिए आसान कर्ल बार लाया, और डंबेल और वजन बेंच जोड़ा। अब, पैंतीस.पाँच इंच कमर के साथ एक सौ अठासी पौंड पर, माटीबियर का कहना है कि वह पैंतीस साल पहले आकार के करीब था जब वह वियतनाम में सेवा से घर लौट आया था। माटीबियर कहते हैं, "इसमें काफी बदलाव लाने के लिए केवल पाँच सप्ताह लग गए," मैं सक्रिय रूप से भाग ले रहा हूं, पाँच सप्ताह में खुद को बदलो फिटनेस पर मंच- एन_-Health.com। "पहले पाँच हफ्तों के बाद मैं स्वस्थ और फिट जीवनशैली में था कि मैं जीने के किसी अन्य तरीके के बारे में भी सोच नहीं सकता और इसे किसी और तरीके से नहीं चाहता।" वह अपने नाश्ते के साथ हर रोज चिकनी पीता है, और एक दिन में छः भोजन खाता है एब्स डाइट पावर बारह। वह शुक्रवार को प्रति सप्ताह अपने एक धोखा भोजन का भी उपयोग करता है जब वह और उसकी पत्नी एक रात को एक रेस्तरां में जाते हैं। लेकिन फिर भी यह वास्तव में एक धोखा खाना नहीं है - वह हमेशा अपने भोजन के साथ सलाद और सब्जियों का आदेश देता है। "मैं इसका विश्लेषण किए बिना कुछ भी ऑर्डर करने में सक्षम नहीं हूं," वह कहता है। अगला कदम चालीस साल की आदत के बाद धूम्रपान छोड़ रहा था। मास्टबियर ने इसे पिछले हेलोवीन के लिए अच्छा दिया। उसने सोचा, "मुझे सही खाने और व्यायाम करने से अच्छा लगता है, धूम्रपान के बिना मुझे कितना बेहतर लगेगा?" तो हर बार जब वह धूम्रपान करता था, तो वह अपने दोपहर के भोजन की पूंछ तक पहुंच जाएगा और एक बच्चे के गाजर को पकड़ लेगा। पहले वह गाजर के लिए लगातार पहुंच रहा था, लेकिन आखिर में वह दिन में केवल दो या तीन तक काट गया। जंकफूड और धूम्रपान को बदलने के लिए व्यायाम करना और अच्छी तरह से खाना बनाना एक स्वचालित आदत बन गया। "परिणाम जो मैं देख रहा था और महसूस कर रहा था, यह नशे की लत थी," वह कहते हैं। MightyBear के कसरत अनुसूचीः सोमवार, ऊपरी शरीर शक्ति प्रशिक्षण; मंगलवार, कार्डियो; बुधवार कम शरीर शक्ति प्रशिक्षण; गुरुवार, कार्डियो; शुक्रवार, दिन बंद; शनिवार, कुल शरीर; रविवार कार्डियो इसके अलावा, ताकत के दिनों में abs workouts। में MightyBear पर जाएं वेलेंटाइन दिवस के लिए फ़िट करें मंच, जहां वह और पुरुषों का एक छोटा समूह एक दूसरे को प्रेरित करता है - ऑनलाइन कसरत मित्रों के रूप में - वेलेंटाइन दिवस द्वारा फिटनेस लक्ष्यों को पूरा करने के लिए।
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बदायूंः बदायूं में जनाक्रोश यात्रा के दौरान केशव देव मौर्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान वे प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे और अपने गठबंधन को लेकर पत्रकारों से बात की. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बारे में उन्होंने कहा वो अपमान होने के बाद आज भी बेशर्म की तरह भारतीय जनता पार्टी में पड़े हैं. उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया जो संवैधानिक पद है ही नहीं. केवल झुनझुना है, संतुष्ट करने के लिए. जो अपना सम्मान नहीं बचा सकता वह अपने समाज को हक और अधिकार क्या दिलवाएगा.
महानदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने अपने समाज के लोगों को हक दिलाने की बात पर कहा, अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद महानदल के गरीब, कमजोर समाज के लोगों का अपमान या अन्याय हुआ तो हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें चाहे जितनी लड़ाई लड़नी पड़े, हम लड़ेंगे, जितने धरने प्रदर्शन करने पड़े, करेंगे. चाहे हमें अखिलेश यादव के दरवाज़े पर धरना क्यों ना देना पड़े.
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सहानुभूति के सवाल पर कहा कि, मेरी अपने समाज के सभी लोगों से सहानुभूति है. मैं घोर बिरादरी वादी हूं. हमसे वोट तो सभी ले लेते हैं, मगर हमें लात- घूंसे और फर्जी मुकदमे मिलते हैं. केशव प्रसाद मौर्या को पार्टी में लाने की बात पर कहा कि, वो वही स्टूल पर बैठकर खुश हैं उन्हें वहीं खुश रहने दीजिए.
सब सीटों के बारे में तय है. किस का क्या पद होगा, सब तय है. मगर अभी हम मीडिया को कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि इससे बेकार का विवाद पैदा होगा. सरकार में रहने के सवाल पर कहा कि, मैं सरकार में नहीं रहना चाहता, मगर मैं किंग मेकर की भूमिका में रहना पसंद करूंगा.
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बदायूंः बदायूं में जनाक्रोश यात्रा के दौरान केशव देव मौर्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान वे प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे और अपने गठबंधन को लेकर पत्रकारों से बात की. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बारे में उन्होंने कहा वो अपमान होने के बाद आज भी बेशर्म की तरह भारतीय जनता पार्टी में पड़े हैं. उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया जो संवैधानिक पद है ही नहीं. केवल झुनझुना है, संतुष्ट करने के लिए. जो अपना सम्मान नहीं बचा सकता वह अपने समाज को हक और अधिकार क्या दिलवाएगा. महानदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने अपने समाज के लोगों को हक दिलाने की बात पर कहा, अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद महानदल के गरीब, कमजोर समाज के लोगों का अपमान या अन्याय हुआ तो हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें चाहे जितनी लड़ाई लड़नी पड़े, हम लड़ेंगे, जितने धरने प्रदर्शन करने पड़े, करेंगे. चाहे हमें अखिलेश यादव के दरवाज़े पर धरना क्यों ना देना पड़े. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सहानुभूति के सवाल पर कहा कि, मेरी अपने समाज के सभी लोगों से सहानुभूति है. मैं घोर बिरादरी वादी हूं. हमसे वोट तो सभी ले लेते हैं, मगर हमें लात- घूंसे और फर्जी मुकदमे मिलते हैं. केशव प्रसाद मौर्या को पार्टी में लाने की बात पर कहा कि, वो वही स्टूल पर बैठकर खुश हैं उन्हें वहीं खुश रहने दीजिए. सब सीटों के बारे में तय है. किस का क्या पद होगा, सब तय है. मगर अभी हम मीडिया को कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि इससे बेकार का विवाद पैदा होगा. सरकार में रहने के सवाल पर कहा कि, मैं सरकार में नहीं रहना चाहता, मगर मैं किंग मेकर की भूमिका में रहना पसंद करूंगा. ये भी पढ़ें.
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रेत माफिया के आगे बेबस शिवराज, देंगे इस्तीफा?
एमपी में अवैध रेत माफिया ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। मुरैना में एक कॉन्सटेबल धर्मेंद्र चौहान की अवैध रेत से भरे ट्रक को रोकने में जान चली गई।
देखेंः क्या ISIS से संबंधों के आरोपियों का समर्थन कर ओवैसी ने देशद्रोह' किया है?
क्या आतंकियों को शहीद बताने वाले पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करना चाहिए?
क्या शीला दीक्षित यूपी में 'मजबूरी' का चेहरा है?
क्या रॉबर्ट वाड्रा की वजह से सोनिया-राहुल-प्रियंका की छवि धूमिल हो रही है?
क्या वेतन बढ़ने पर भी सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल की धमकी ब्लैकमेलिंग है?
क्या यूपी में प्रियंका गांधी का प्रचार SP-BSP-BJP के लिए मुसीबत बनेगा?
क्या नीतीश कुमार के सुशासन-बिहार पुलिस पर धब्बा है बिहार का 'निर्भया' कांड?
क्या केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द बन गए हैं सुब्रह्मण्यम स्वामी?
क्या सलमान खान को 'बलात्कार' पर दिए बयान पर माफी मांगनी चाहिए?
क्या 'हिंदुत्व'पर बीजेपी-संघ के आक्रामक बयान यूपी में चुनावी जीत दिलाएंगे?
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रेत माफिया के आगे बेबस शिवराज, देंगे इस्तीफा? एमपी में अवैध रेत माफिया ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। मुरैना में एक कॉन्सटेबल धर्मेंद्र चौहान की अवैध रेत से भरे ट्रक को रोकने में जान चली गई। देखेंः क्या ISIS से संबंधों के आरोपियों का समर्थन कर ओवैसी ने देशद्रोह' किया है? क्या आतंकियों को शहीद बताने वाले पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करना चाहिए? क्या शीला दीक्षित यूपी में 'मजबूरी' का चेहरा है? क्या रॉबर्ट वाड्रा की वजह से सोनिया-राहुल-प्रियंका की छवि धूमिल हो रही है? क्या वेतन बढ़ने पर भी सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल की धमकी ब्लैकमेलिंग है? क्या यूपी में प्रियंका गांधी का प्रचार SP-BSP-BJP के लिए मुसीबत बनेगा? क्या नीतीश कुमार के सुशासन-बिहार पुलिस पर धब्बा है बिहार का 'निर्भया' कांड? क्या केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द बन गए हैं सुब्रह्मण्यम स्वामी? क्या सलमान खान को 'बलात्कार' पर दिए बयान पर माफी मांगनी चाहिए? क्या 'हिंदुत्व'पर बीजेपी-संघ के आक्रामक बयान यूपी में चुनावी जीत दिलाएंगे?
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लगभग 20 साल पहले, इंटरनेट ने घनी में प्रवेश किया हमारेजीवन, लेकिन अब तक अधिकांश उपयोगकर्ताओं को काफी कल्पना नहीं है कि एक डोमेन क्या है और यह किस मानदंड को चुना जाता है। सबसे लोकप्रिय ग़लतफ़हमी यह है कि तीसरे स्तर के डोमेन का अनुमान खराब है और अत्यंत दुर्लभ मामलों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्या इसका उपयोग करने के लिए वास्तव में असत्य है, उदाहरण के लिए, ऑनलाइन स्टोर्स में, और चुनने पर क्या करना है? और अवधारणाओं के बीच अंतर क्या है - डोमेन, डोमेन नाम, डोमेन क्षेत्र?
तो, परिभाषाओं के बारे में पहले थोड़ा। डोमेन नाम या डोमेन, इंटरनेट पर इसकी पहचान के लिए साइट का प्रतीकात्मक नाम है। उदाहरण के लिए, yandex.ru एक द्वितीय स्तरीय डोमेन नाम है। डोमेन क्षेत्र डॉट के बाद समाप्त होता है, इस उदाहरण में यह है .ru, जिसका अर्थ है कि साइट Runet से संबंधित है।
ज़्यादातर, क्षेत्रीय क्षेत्र के अनुसार डोमेन क्षेत्र समूहों में बांटा जाता हैः
एक अन्य वर्गीकरण का अर्थ है उनमें विषय के एक विभाजनः
कुछ संगठनात्मक डोमेन क्षेत्र लागू होते हैंः
ये डोमेन क्षेत्र प्रथम के डोमेन से संबंधित हैंस्तर। यदि आप डॉट से पहले एक शब्द जोड़ते हैं - आपको दूसरा स्तरीय डोमेन मिलेगा (उदाहरण के लिए, yandex.ru), और यदि एक और बिंदु और आगे शब्द है, तो तीसरे स्तर के डोमेन (news.yandex.ru)।
बेशक, पहली जगह में, आपको यह तय करना चाहिए कि साइट पर कौन लक्षित करेगा।
रूसी भाषी दर्शकों के लिए, डोमेनक्षेत्र .ru, बेलारूसी के लिए - .by, यूक्रेनी के लिए .ua, आदि। यदि आपको किसी देश के लिए बाध्य करने की आवश्यकता नहीं है, तो अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र का चुनाव करना बेहतर होगा। कॉम एक ब्रंक्चर्ड इंटरनेट ट्रेडिंग संरचना वाले बड़ी कंपनियां कई डोमेन क्षेत्रों में समान नाम वाली साइट बनाना पसंद करती हैं। उदाहरण के लिए, dom.ua - यूक्रेनी खरीदारों के लिए, dom.ru - रूसी के लिए, dom.com - अंतर्राष्ट्रीय भुगतान के लिए।
किसी विशिष्ट देश या क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए, डोमेन क्षेत्र की सूची का उपयोग करें।
आप अक्सर कुछ शहरों और क्षेत्रों - spb.ru (सेंट पीटर्सबर्ग), msk.ru (मास्को), nov.ru (नोवगोरोड क्षेत्र) आदि में भागीदारी के साथ डोमेन नाम पा सकते हैं।
इंटरनेट संसाधन अधिक से अधिक होते जा रहे हैं, सभीसाइट का अनूठा नाम ढूंढना अधिक मुश्किल हो जाता है इसलिए, दो या तीन शब्दों वाले वेरिएंट हाइफ़न के माध्यम से लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, सरल- डोमेन-name.ru संक्षेप का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन शर्त पर कि यह आमतौर पर ज्ञात है, उदाहरण के लिए, बेलारूस की नेशनल बैंक - nbrb.by। कई अक्षरों से एक समझ से बाहर नाराज़गी सबसे सफल संस्करण नहीं है, क्योंकि उपयोगकर्ता शायद ही इसे याद रखेगा और भविष्य में स्मृति से टाइप करने में सक्षम नहीं होगा।
मुख्य बात यह है कि डोमेन (डोमेन नाम), डोमेनक्षेत्र याद रखना आसान था और बाद में खेलते थे। गलत वर्तनी वाले शब्दों का प्रयोग न करें - cofe.ru या cofie.ru। पता लिखने के लिए अपने दोस्तों से कान से पूछें। यदि कोई व्यक्ति सही ढंग से प्रवेश करते समय इसे दर्ज कर सकता है, तो अन्य उपयोगकर्ता आपको ढूंढने में सक्षम होंगे।
कुछ स्थितियों में, डोमेन का उपयोग करना अधिक उपयुक्त हैउदाहरण के लिए, यदि यह एक ब्लॉग या एक पोर्टफोलियो है एक डोमेन के रूप में, इस मामले में, .name कार्य कर सकता है। एक उदाहरण ivan.ivanov.name है। इस मामले में, द्वितीयस्तरीय डोमेन अन्य सभी इवानोव्स के लिए उपलब्ध होगा।
लेकिन ज़ाहिर है, अक्सर तीसरे स्तर के डोमेन परजब वे साइट के लिए भुगतान नहीं करना चाहते थे तब सहारा लिया था। उदाहरण के लिए, यदि यह एक वाणिज्यिक संसाधन नहीं है, तो यदि व्यवस्थापक वेब प्रोग्रामिंग की मूल बातें अभ्यास करना चाहता है, तो यह साइट का परीक्षण संस्करण है। डोमेन को मुफ्त में कैसे प्राप्त करें नीचे वर्णित है, लेकिन अभी के लिए हम इसका विश्लेषण करते हैं कि दूसरे स्तर के डोमेन को खोलने के लिए क्या होगा।
इसलिए, साइट का नाम आविष्कार किया गया है, यह केवल बनी हुई हैविशिष्टता के लिए इसे जांचें और पंजीकरण करें ताकि साइट कामकाज शुरू कर सके। ऐसा करने के लिए, आप पहले WHOIS सूचना सेवा पर जाएं और जांच लें कि डोमेन निशुल्क है या नहीं।
यदि नाम अद्वितीय है, तो अधिकृत पंजीयक Rutsentra - nic.ru की वेबसाइट पर जाएं। यहां डोमेन ज़ोन के पंजीकरण के लिए निम्न चरणों की आवश्यकता होगीः
जो लोग किसी कारण से साइट के लिए पैसे का भुगतान नहीं करना चाहते हैं या साइट बिल्डिंग में अपना पहला कदम बनाते हैं, वहां निशुल्क डोमेन क्षेत्र हैं। यह क्या है और वे कैसे काम करते हैं?
तत्काल यह उल्लेख के लायक है कि 2 का डोमेन प्राप्त करने के लिएस्तर लगभग असंभव है और अगर इस तरह की पेशकश आपको मिलती है, तो सबसे अधिक संभावना है, एक साल बाद भी उसे भुगतान करना पड़ता है, और काफी कुछ।
अधिकतर अक्सर 3 स्तर के निशुल्क डोमेन होते हैं। उन्हें कैसे खोजें?
विकल्पों में से एक को मुफ्त होस्टिंग और साइट डिज़ाइनरों से संपर्क करना है- ucoz.com, narod.ru।
बढ़ती लोकप्रियता की भर्ती नए डोमेन जोन - .cu.cc, .uni.me, .cz.cc, .eu.org .de.cc, .at.cc, .ch.cc और अन्य।
घरेलू सेवाओं के लिए, मुक्त डोमेन प्राप्त करने की अच्छी स्थिति .pp.ua (निजी व्यक्ति) द्वारा की जाती है। यहां आप आसानी से किसी भी व्यक्तिगत वेबसाइट या व्यक्तिगत ब्लॉग को स्थानांतरित कर सकते हैं।
ऐसे डोमेन से संबंधित मुख्य प्रश्न हैकैसे खोज इंजन उन्हें और क्या यह इन प्लेटफार्मों की चोटी पर साइट को बढ़ावा देने के लिए संभव है प्रासंगिक है? ऐसा करने के लिए ब्याज साइट की एक खोज इंजन क्वेरी में दर्ज करेंः ch.cc या साइटः at.cc (गूगल के लिए) या url = »* ch.cc करें और देखें कि इन डोमेन खोज में सूचीबद्ध ..
डोमेन, डोमेन नाम, डोमेन क्षेत्र ऐसा कुछ है जो बिना किसी साइट कार्य कर सकता है उपर्युक्त सभी का सारांश, हम एक डोमेन को जोड़ने और एक वेबसाइट बनाने के 5 प्रमुख चरणों को भेद कर सकते हैंः
यह एक सशुल्क डोमेन प्राप्त करने के बारे में है यदि आप इसे मुफ्त में करना चाहते हैं, तो केवल 2 के चरण - एक उपयुक्त सेवा प्राप्त करें जो आपके लिए सुविधाजनक स्थितियों पर 3 स्तर के एक डोमेन प्रदान करेगी, और एक अद्वितीय डोमेन नाम बनाएं।
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लगभग बीस साल पहले, इंटरनेट ने घनी में प्रवेश किया हमारेजीवन, लेकिन अब तक अधिकांश उपयोगकर्ताओं को काफी कल्पना नहीं है कि एक डोमेन क्या है और यह किस मानदंड को चुना जाता है। सबसे लोकप्रिय ग़लतफ़हमी यह है कि तीसरे स्तर के डोमेन का अनुमान खराब है और अत्यंत दुर्लभ मामलों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्या इसका उपयोग करने के लिए वास्तव में असत्य है, उदाहरण के लिए, ऑनलाइन स्टोर्स में, और चुनने पर क्या करना है? और अवधारणाओं के बीच अंतर क्या है - डोमेन, डोमेन नाम, डोमेन क्षेत्र? तो, परिभाषाओं के बारे में पहले थोड़ा। डोमेन नाम या डोमेन, इंटरनेट पर इसकी पहचान के लिए साइट का प्रतीकात्मक नाम है। उदाहरण के लिए, yandex.ru एक द्वितीय स्तरीय डोमेन नाम है। डोमेन क्षेत्र डॉट के बाद समाप्त होता है, इस उदाहरण में यह है .ru, जिसका अर्थ है कि साइट Runet से संबंधित है। ज़्यादातर, क्षेत्रीय क्षेत्र के अनुसार डोमेन क्षेत्र समूहों में बांटा जाता हैः एक अन्य वर्गीकरण का अर्थ है उनमें विषय के एक विभाजनः कुछ संगठनात्मक डोमेन क्षेत्र लागू होते हैंः ये डोमेन क्षेत्र प्रथम के डोमेन से संबंधित हैंस्तर। यदि आप डॉट से पहले एक शब्द जोड़ते हैं - आपको दूसरा स्तरीय डोमेन मिलेगा , और यदि एक और बिंदु और आगे शब्द है, तो तीसरे स्तर के डोमेन । बेशक, पहली जगह में, आपको यह तय करना चाहिए कि साइट पर कौन लक्षित करेगा। रूसी भाषी दर्शकों के लिए, डोमेनक्षेत्र .ru, बेलारूसी के लिए - .by, यूक्रेनी के लिए .ua, आदि। यदि आपको किसी देश के लिए बाध्य करने की आवश्यकता नहीं है, तो अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र का चुनाव करना बेहतर होगा। कॉम एक ब्रंक्चर्ड इंटरनेट ट्रेडिंग संरचना वाले बड़ी कंपनियां कई डोमेन क्षेत्रों में समान नाम वाली साइट बनाना पसंद करती हैं। उदाहरण के लिए, dom.ua - यूक्रेनी खरीदारों के लिए, dom.ru - रूसी के लिए, dom.com - अंतर्राष्ट्रीय भुगतान के लिए। किसी विशिष्ट देश या क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए, डोमेन क्षेत्र की सूची का उपयोग करें। आप अक्सर कुछ शहरों और क्षेत्रों - spb.ru , msk.ru , nov.ru आदि में भागीदारी के साथ डोमेन नाम पा सकते हैं। इंटरनेट संसाधन अधिक से अधिक होते जा रहे हैं, सभीसाइट का अनूठा नाम ढूंढना अधिक मुश्किल हो जाता है इसलिए, दो या तीन शब्दों वाले वेरिएंट हाइफ़न के माध्यम से लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, सरल- डोमेन-name.ru संक्षेप का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन शर्त पर कि यह आमतौर पर ज्ञात है, उदाहरण के लिए, बेलारूस की नेशनल बैंक - nbrb.by। कई अक्षरों से एक समझ से बाहर नाराज़गी सबसे सफल संस्करण नहीं है, क्योंकि उपयोगकर्ता शायद ही इसे याद रखेगा और भविष्य में स्मृति से टाइप करने में सक्षम नहीं होगा। मुख्य बात यह है कि डोमेन , डोमेनक्षेत्र याद रखना आसान था और बाद में खेलते थे। गलत वर्तनी वाले शब्दों का प्रयोग न करें - cofe.ru या cofie.ru। पता लिखने के लिए अपने दोस्तों से कान से पूछें। यदि कोई व्यक्ति सही ढंग से प्रवेश करते समय इसे दर्ज कर सकता है, तो अन्य उपयोगकर्ता आपको ढूंढने में सक्षम होंगे। कुछ स्थितियों में, डोमेन का उपयोग करना अधिक उपयुक्त हैउदाहरण के लिए, यदि यह एक ब्लॉग या एक पोर्टफोलियो है एक डोमेन के रूप में, इस मामले में, .name कार्य कर सकता है। एक उदाहरण ivan.ivanov.name है। इस मामले में, द्वितीयस्तरीय डोमेन अन्य सभी इवानोव्स के लिए उपलब्ध होगा। लेकिन ज़ाहिर है, अक्सर तीसरे स्तर के डोमेन परजब वे साइट के लिए भुगतान नहीं करना चाहते थे तब सहारा लिया था। उदाहरण के लिए, यदि यह एक वाणिज्यिक संसाधन नहीं है, तो यदि व्यवस्थापक वेब प्रोग्रामिंग की मूल बातें अभ्यास करना चाहता है, तो यह साइट का परीक्षण संस्करण है। डोमेन को मुफ्त में कैसे प्राप्त करें नीचे वर्णित है, लेकिन अभी के लिए हम इसका विश्लेषण करते हैं कि दूसरे स्तर के डोमेन को खोलने के लिए क्या होगा। इसलिए, साइट का नाम आविष्कार किया गया है, यह केवल बनी हुई हैविशिष्टता के लिए इसे जांचें और पंजीकरण करें ताकि साइट कामकाज शुरू कर सके। ऐसा करने के लिए, आप पहले WHOIS सूचना सेवा पर जाएं और जांच लें कि डोमेन निशुल्क है या नहीं। यदि नाम अद्वितीय है, तो अधिकृत पंजीयक Rutsentra - nic.ru की वेबसाइट पर जाएं। यहां डोमेन ज़ोन के पंजीकरण के लिए निम्न चरणों की आवश्यकता होगीः जो लोग किसी कारण से साइट के लिए पैसे का भुगतान नहीं करना चाहते हैं या साइट बिल्डिंग में अपना पहला कदम बनाते हैं, वहां निशुल्क डोमेन क्षेत्र हैं। यह क्या है और वे कैसे काम करते हैं? तत्काल यह उल्लेख के लायक है कि दो का डोमेन प्राप्त करने के लिएस्तर लगभग असंभव है और अगर इस तरह की पेशकश आपको मिलती है, तो सबसे अधिक संभावना है, एक साल बाद भी उसे भुगतान करना पड़ता है, और काफी कुछ। अधिकतर अक्सर तीन स्तर के निशुल्क डोमेन होते हैं। उन्हें कैसे खोजें? विकल्पों में से एक को मुफ्त होस्टिंग और साइट डिज़ाइनरों से संपर्क करना है- ucoz.com, narod.ru। बढ़ती लोकप्रियता की भर्ती नए डोमेन जोन - .cu.cc, .uni.me, .cz.cc, .eu.org .de.cc, .at.cc, .ch.cc और अन्य। घरेलू सेवाओं के लिए, मुक्त डोमेन प्राप्त करने की अच्छी स्थिति .pp.ua द्वारा की जाती है। यहां आप आसानी से किसी भी व्यक्तिगत वेबसाइट या व्यक्तिगत ब्लॉग को स्थानांतरित कर सकते हैं। ऐसे डोमेन से संबंधित मुख्य प्रश्न हैकैसे खोज इंजन उन्हें और क्या यह इन प्लेटफार्मों की चोटी पर साइट को बढ़ावा देने के लिए संभव है प्रासंगिक है? ऐसा करने के लिए ब्याज साइट की एक खोज इंजन क्वेरी में दर्ज करेंः ch.cc या साइटः at.cc या url = »* ch.cc करें और देखें कि इन डोमेन खोज में सूचीबद्ध .. डोमेन, डोमेन नाम, डोमेन क्षेत्र ऐसा कुछ है जो बिना किसी साइट कार्य कर सकता है उपर्युक्त सभी का सारांश, हम एक डोमेन को जोड़ने और एक वेबसाइट बनाने के पाँच प्रमुख चरणों को भेद कर सकते हैंः यह एक सशुल्क डोमेन प्राप्त करने के बारे में है यदि आप इसे मुफ्त में करना चाहते हैं, तो केवल दो के चरण - एक उपयुक्त सेवा प्राप्त करें जो आपके लिए सुविधाजनक स्थितियों पर तीन स्तर के एक डोमेन प्रदान करेगी, और एक अद्वितीय डोमेन नाम बनाएं।
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मेरे पिछले पोस्ट पर "अजय कुमार जी" और "राजीव जी" ने कहा कमरा बदल लेने को... पर मैं इनकी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता... भागना मैंने सिखा नहीं... मैं तो और उसे जानना चाहता हूँ... डरता नहीं मैं इन सब चीजों से... आप लोगों के शब्दों में अगर कहूँ तो यदि भगवान ने इस श्रृष्टि की रचना की है तो उस साए की रचना भी भगवान द्वारा ही हुई होगी. फिर उससे खौफ खाने या भागने का क्या मतलब... अगर मैं मान भी लूँ कि वो आत्मा या साया बुराई को समर्थित है तो भी नहीं भागूँगा... ऐसे तो हम फिर कायर ही कहलायेंगे... आतंकवादी, क्रिमनल, गुंडे तो उस साए से भी खतरनाक है... फिर तो हमें उनसे भी छिप कर भागना चाहिए... पर कहाँ तक और कब तक? ? ?
थोडा अपनी जिन्दगी में पीछे चलता हूँ जहाँ दो और ऐसी ही घटनाएं मेरे साथ घट चुकी है. आज से लगभग ६ साल पहले वर्ष २००३, स्थान पटना का कुर्जी स्थित मेरा किराये का कमरा, महिना अगस्त का (दिनांक याद नहीं), समय रात के २ बजे (लगभग)... मैं नया नया ही अपने पैत्रिक घर पूर्णिया से पटना आया था अपनी होटल प्रबंधन की पढाई के लिए. कोलेज के पास ही कुर्जी में किराये के कमरे में रहता था. मेरे कमरे से लगा एक बड़ा सा बालकोनी भी था (पीछे की तरफ, बालकोनी के कारण ही उस एक छोटे से कमरे का किराया बाकी कमरों से २०० रुपये ज्यादा था). मुझे देर रात तक पढने की आदत थी (अब देर रात ही पढूंगा न, ९ बजे तो कमरे पर वापस ही आता था). कमरे में बालकोनी में जाने के लिए एक दरवाजा था और दरवाजे के दोनों ओर दो छोटी-छोटी खिड़कियाँ थी. एक खिड़की के समीप मैंने अपना बिस्तर लगा रखा था. गर्मी का ही मौसम था इसलिए बालकोनी की तरफ का दरवाजा और खिड़कियाँ खोल कर ही सोता था और बिस्तर पर अपना सर खिड़की की ओर रखता था. लगभग एक बजे मैं सो गया. कुछ ही देर बाद अचानक मेरी नींद खुली (वैसे मेरी नींद बहुत कड़ी है, और बीच में ढोल-नगाड़ों की आवाज से ही खुलती है). लगा जसे मेरी खिडकी से कोई मुझे देख रहा है. कमरे की बत्ती बंद थी. अँधेरे के अलावा और कुछ दिख तो रहा नहीं था. बाहार दूर से आती किसी रौशनी से हलके तौर पर चीजों को देख सकता था. एक बार तो डर गया कि कहीं कोई चोर तो नहीं. तेजी से उठ कर बैठा और सीधे हाथ स्वीच बोर्ड की ओर चले गए. खिड़की की ओर देखा तो कोई नजर नहीं आया. उठ कर बालकोनी में गया, जैसे ही दरवाजे से बाहर झाँका एक बार को तो मेरे प्राण सुख गए. कोने में एक साया खड़ा था. लगभग एक मिनट तक मैं उस साए को और वो साया मुझे देखता रहा. दिमाग और शरीर पर जोड़ डालने पर भी मैं हिल भी नहीं पा रहा था. जब बहुत जोड़ लगाने पर अपने कदम आगे बढ़ाये तो वो साया धीरे से मुस्कुराते हुए आँखों के सामने से गायब हो गया. मैंने इसकी चर्चा किसी से नहीं की. पर अगले ही दिन मैंने वो कमरा छोड़ दिया तथा अपने मामा के घर (अशोक नगर, कंकडबाग) में शिफ्ट हो गया. मामा का घर खाली ही था क्योंकि हाल ही में उनका ट्रान्सफर पटना से बेगुसराय हो गया था. निचले तल्ले में एक किरायेदार रहते थे. और ऊपर के तल्ले में मामा के घर में मैं रहने लगा (इससे एक फायदा तो हुआ था, किराये के जो ७०० रुपये लगते थे एक छोटे से कमरे के वो नहीं लगने वाले थे और घर भी बड़ा था. सुख सुविधाओं की हर वस्तुओं के साथ).
उस घटना के लगभग ६-७ महीने के बाद महिना शायद मार्च का था एक घटना और घटी. मामा के घर में आगे साइड से दो कमरे थे एक मेरा बेडरूम हो गया था और दूसरा उसके साथ लगा कमरा ड्राविंग रूम था. दोनों कमरे के साथ भी बालकोनी थी जो आगे की साइड में थी कमरे से लगी हुई पर दोनों कमरे की बालकोनी सेपरेट थी. देर रात पढने की आदत तो थी ही (वो जाने वाली भी नहीं थी. ) मैं रोज ड्राविंग रूम में ही सोफे पर पढता था और कई बार सोफे पर ही सो भी जाता था. उस रात भी २ बजे तक पढने के बाद सोफे पर ही गया. थोड़ी ही देर में बंद आँखों से ही (नींद पूरी तरह से आई भी नहीं थी उस वक़्त तक) महसूस हुआ कि कोई ठीक मेरे सामने खड़ा है. आँख खोली तो लगभग २ साल का एक बहुत ही खुबसूरत बच्चा मुझे एकटक देख रहा है और धीमे-धीमे मुस्कुरा रहा है. पल भर को डर और बेचैनी से मेरी धडकनें इतनी तेज हो गयी कि लगा दिल बाहर आ जायेगा सीना चीड कर. शरीर बिलकुल कड़ा हो गया. २०-२५ सेकेंड के बाद वो बच्चा हँसता हुआ सीधे बालकोनी की तरफ भागा और गायब हो गया. घर के अन्दर आने का दरवाजा बंद था. सीधी की ग्रिल भी ताले से बंद थी. फिर वो किधर से आ गया. और भागा भी बालकोनी की तरफ. पहली मंजिल से वो कैसे भाग सकता है. रात भर फिर सो नहीं पाया. कुछ दोस्तों से इसकी चर्चा की तो उन्होंने वहम बताया. मैंने भी मान लिया कि सपना या वहम ही होगा... थका हुआ होऊंगा तो ऐसे ख्याल पनप गए होंगे... उसके बाद जब तक पटना में रहा (२००६ तक) फिर कोई घटना नहीं घटी, इससे पहले भी कभी ऐसा नहीं हुआ था.
सच है कि मैं भगवान (जिन्हें लोग कहते है) को नहीं मानता, भुत-प्रेत, आत्मा-परमात्मा, अगला या पिछला जन्म जैसी बातों पर विश्वास नहीं है मेरा... पर इन घटनाओं के बाद पूरी तरह से नकार भी नहीं पाता. बस दिल को तसल्ली दे देता हूँ कि "ALL IS WELL"....
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मेरे पिछले पोस्ट पर "अजय कुमार जी" और "राजीव जी" ने कहा कमरा बदल लेने को... पर मैं इनकी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता... भागना मैंने सिखा नहीं... मैं तो और उसे जानना चाहता हूँ... डरता नहीं मैं इन सब चीजों से... आप लोगों के शब्दों में अगर कहूँ तो यदि भगवान ने इस श्रृष्टि की रचना की है तो उस साए की रचना भी भगवान द्वारा ही हुई होगी. फिर उससे खौफ खाने या भागने का क्या मतलब... अगर मैं मान भी लूँ कि वो आत्मा या साया बुराई को समर्थित है तो भी नहीं भागूँगा... ऐसे तो हम फिर कायर ही कहलायेंगे... आतंकवादी, क्रिमनल, गुंडे तो उस साए से भी खतरनाक है... फिर तो हमें उनसे भी छिप कर भागना चाहिए... पर कहाँ तक और कब तक? ? ? थोडा अपनी जिन्दगी में पीछे चलता हूँ जहाँ दो और ऐसी ही घटनाएं मेरे साथ घट चुकी है. आज से लगभग छः साल पहले वर्ष दो हज़ार तीन, स्थान पटना का कुर्जी स्थित मेरा किराये का कमरा, महिना अगस्त का , समय रात के दो बजे ... मैं नया नया ही अपने पैत्रिक घर पूर्णिया से पटना आया था अपनी होटल प्रबंधन की पढाई के लिए. कोलेज के पास ही कुर्जी में किराये के कमरे में रहता था. मेरे कमरे से लगा एक बड़ा सा बालकोनी भी था . मुझे देर रात तक पढने की आदत थी . कमरे में बालकोनी में जाने के लिए एक दरवाजा था और दरवाजे के दोनों ओर दो छोटी-छोटी खिड़कियाँ थी. एक खिड़की के समीप मैंने अपना बिस्तर लगा रखा था. गर्मी का ही मौसम था इसलिए बालकोनी की तरफ का दरवाजा और खिड़कियाँ खोल कर ही सोता था और बिस्तर पर अपना सर खिड़की की ओर रखता था. लगभग एक बजे मैं सो गया. कुछ ही देर बाद अचानक मेरी नींद खुली . लगा जसे मेरी खिडकी से कोई मुझे देख रहा है. कमरे की बत्ती बंद थी. अँधेरे के अलावा और कुछ दिख तो रहा नहीं था. बाहार दूर से आती किसी रौशनी से हलके तौर पर चीजों को देख सकता था. एक बार तो डर गया कि कहीं कोई चोर तो नहीं. तेजी से उठ कर बैठा और सीधे हाथ स्वीच बोर्ड की ओर चले गए. खिड़की की ओर देखा तो कोई नजर नहीं आया. उठ कर बालकोनी में गया, जैसे ही दरवाजे से बाहर झाँका एक बार को तो मेरे प्राण सुख गए. कोने में एक साया खड़ा था. लगभग एक मिनट तक मैं उस साए को और वो साया मुझे देखता रहा. दिमाग और शरीर पर जोड़ डालने पर भी मैं हिल भी नहीं पा रहा था. जब बहुत जोड़ लगाने पर अपने कदम आगे बढ़ाये तो वो साया धीरे से मुस्कुराते हुए आँखों के सामने से गायब हो गया. मैंने इसकी चर्चा किसी से नहीं की. पर अगले ही दिन मैंने वो कमरा छोड़ दिया तथा अपने मामा के घर में शिफ्ट हो गया. मामा का घर खाली ही था क्योंकि हाल ही में उनका ट्रान्सफर पटना से बेगुसराय हो गया था. निचले तल्ले में एक किरायेदार रहते थे. और ऊपर के तल्ले में मामा के घर में मैं रहने लगा . उस घटना के लगभग छः-सात महीने के बाद महिना शायद मार्च का था एक घटना और घटी. मामा के घर में आगे साइड से दो कमरे थे एक मेरा बेडरूम हो गया था और दूसरा उसके साथ लगा कमरा ड्राविंग रूम था. दोनों कमरे के साथ भी बालकोनी थी जो आगे की साइड में थी कमरे से लगी हुई पर दोनों कमरे की बालकोनी सेपरेट थी. देर रात पढने की आदत तो थी ही मैं रोज ड्राविंग रूम में ही सोफे पर पढता था और कई बार सोफे पर ही सो भी जाता था. उस रात भी दो बजे तक पढने के बाद सोफे पर ही गया. थोड़ी ही देर में बंद आँखों से ही महसूस हुआ कि कोई ठीक मेरे सामने खड़ा है. आँख खोली तो लगभग दो साल का एक बहुत ही खुबसूरत बच्चा मुझे एकटक देख रहा है और धीमे-धीमे मुस्कुरा रहा है. पल भर को डर और बेचैनी से मेरी धडकनें इतनी तेज हो गयी कि लगा दिल बाहर आ जायेगा सीना चीड कर. शरीर बिलकुल कड़ा हो गया. बीस-पच्चीस सेकेंड के बाद वो बच्चा हँसता हुआ सीधे बालकोनी की तरफ भागा और गायब हो गया. घर के अन्दर आने का दरवाजा बंद था. सीधी की ग्रिल भी ताले से बंद थी. फिर वो किधर से आ गया. और भागा भी बालकोनी की तरफ. पहली मंजिल से वो कैसे भाग सकता है. रात भर फिर सो नहीं पाया. कुछ दोस्तों से इसकी चर्चा की तो उन्होंने वहम बताया. मैंने भी मान लिया कि सपना या वहम ही होगा... थका हुआ होऊंगा तो ऐसे ख्याल पनप गए होंगे... उसके बाद जब तक पटना में रहा फिर कोई घटना नहीं घटी, इससे पहले भी कभी ऐसा नहीं हुआ था. सच है कि मैं भगवान को नहीं मानता, भुत-प्रेत, आत्मा-परमात्मा, अगला या पिछला जन्म जैसी बातों पर विश्वास नहीं है मेरा... पर इन घटनाओं के बाद पूरी तरह से नकार भी नहीं पाता. बस दिल को तसल्ली दे देता हूँ कि "ALL IS WELL"....
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Swan Viral Video: चाहे जीव-जंतु हों या फिर पक्षी, उन्हें खुले आसमान के नीचे रहना बहुत पसंद होता है। बात करें पक्षियों की तो खुली हवा में उड़ते और पानी में तैरते हुए पक्षियों को आपने कई बार देखा होगा, लेकिन इन्हें पानी में भिन्न-भिन्न स्टाइल से मस्ती करते हुए ये कम ही दिखाई देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पक्षी को दिखाएंगे, जो अपनी मस्ती से किसी के भी चेहरे पर मुस्कान ला दे।
इंटरनेट पर वायरल होने वाले अनेक वीडियो आपको प्रकृति की कुछ ऐसी चीज़ों से रूबरू कराया जाता है, जो आपका दिन बना देते हैं। इस समय वायरल हो रहे वीडियो में एक हंस जिस स्टाइल में पानी में आकर लैंड होता है, वो कमाल है। इस दौरान न केवल उसे तैरते हुए बल्कि पानी पर दौड़ते हुए भी देखा जा सकता है। उसका ये अतरंगी स्टाइल लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
वायरल हो रहे वीडियो एक हंस को पानी में मस्ती करते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में हंस पानी में अपनी तैराकी से स्टंट करता हुआ दिख रहा है। इस काम में उसकी सहायता पैरों में बनी झिल्लियां करती हैं, जिससे वो बहुत बढ़िया तैराकी कर सकते हैं। पहले तो हंस अनोखे अंदाज में पानी पर लैंड करता है, मानो कोई प्लेन लैंड कर रहा हो। इसके बाद वो अपने पैरों का उपयोग करते हुए नीचे पानी में लैंड हो जाता है।
मज़ेदार वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर roysrolls1 नाम के एकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे अब तक लाखों व्यूज़ मिल चुके हैं। वहीं इसे 34 हजार से अधिक यूजर्स ने इस वीडियो को लाइक किया है। वीडियो देखने के बाद यूजर्स इस पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं और हंस के स्टाइल की प्रशंसा कर रहे हैं।
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Swan Viral Video: चाहे जीव-जंतु हों या फिर पक्षी, उन्हें खुले आसमान के नीचे रहना बहुत पसंद होता है। बात करें पक्षियों की तो खुली हवा में उड़ते और पानी में तैरते हुए पक्षियों को आपने कई बार देखा होगा, लेकिन इन्हें पानी में भिन्न-भिन्न स्टाइल से मस्ती करते हुए ये कम ही दिखाई देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे पक्षी को दिखाएंगे, जो अपनी मस्ती से किसी के भी चेहरे पर मुस्कान ला दे। इंटरनेट पर वायरल होने वाले अनेक वीडियो आपको प्रकृति की कुछ ऐसी चीज़ों से रूबरू कराया जाता है, जो आपका दिन बना देते हैं। इस समय वायरल हो रहे वीडियो में एक हंस जिस स्टाइल में पानी में आकर लैंड होता है, वो कमाल है। इस दौरान न केवल उसे तैरते हुए बल्कि पानी पर दौड़ते हुए भी देखा जा सकता है। उसका ये अतरंगी स्टाइल लोगों को खूब पसंद आ रहा है। वायरल हो रहे वीडियो एक हंस को पानी में मस्ती करते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में हंस पानी में अपनी तैराकी से स्टंट करता हुआ दिख रहा है। इस काम में उसकी सहायता पैरों में बनी झिल्लियां करती हैं, जिससे वो बहुत बढ़िया तैराकी कर सकते हैं। पहले तो हंस अनोखे अंदाज में पानी पर लैंड करता है, मानो कोई प्लेन लैंड कर रहा हो। इसके बाद वो अपने पैरों का उपयोग करते हुए नीचे पानी में लैंड हो जाता है। मज़ेदार वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर roysrollsएक नाम के एकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे अब तक लाखों व्यूज़ मिल चुके हैं। वहीं इसे चौंतीस हजार से अधिक यूजर्स ने इस वीडियो को लाइक किया है। वीडियो देखने के बाद यूजर्स इस पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं और हंस के स्टाइल की प्रशंसा कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली, 25 जून राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के कार्यकारी निदेशक मीनेश शाह ने छह महीने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है।
एनडीडीबी ने एक बयान में कहा कि वर्षा जोशी का 31 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद शाह ने उनका स्थान लिया है।
उन्होंने एक जून से अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण किया और छह महीने या अगले आदेश तक अध्यक्ष के रूप में बने रहेंगे।
शाह का डेयरी क्षेत्र में 35 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ (आईडीएफ) की भारतीय राष्ट्रीय समिति (आईएनसी) के सदस्य सचिव हैं और आईडीएफ की डेयरी नीति और अर्थशास्त्र पर स्थायी समिति के सदस्य भी हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, पच्चीस जून राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के कार्यकारी निदेशक मीनेश शाह ने छह महीने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। एनडीडीबी ने एक बयान में कहा कि वर्षा जोशी का इकतीस मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद शाह ने उनका स्थान लिया है। उन्होंने एक जून से अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण किया और छह महीने या अगले आदेश तक अध्यक्ष के रूप में बने रहेंगे। शाह का डेयरी क्षेत्र में पैंतीस से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ की भारतीय राष्ट्रीय समिति के सदस्य सचिव हैं और आईडीएफ की डेयरी नीति और अर्थशास्त्र पर स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर पलटवार किया है। जेटली ने कहा कि वह कितना जानते हैं और वह आखिर कब जानेंगे। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर राहुल गांधी द्वारा बुधवार को लोकसभा में पीएम मोदी पर किसी की बात न सुनने के आरोप का जवाब दिया।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर पलटवार किया है। जेटली ने कहा कि वह कितना जानते हैं और वह आखिर कब जानेंगे। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर राहुल गांधी द्वारा बुधवार को लोकसभा में पीएम मोदी पर किसी की बात न सुनने के आरोप का जवाब दिया।
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पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है. लोगों को इस महंगाई (Pakistan Inflation) में जहां खाने के लाले पड़ रहे हैं तो वहीं इमरान सरकार ने पेट्रोल (Petrol Price in Pakistan) में लगभग 26 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़तरी करने का ऐलान कर दिया है.
कराची. पाकिस्तान में बेलगाम महंगाई (Pakistan Inflation Rate 2020) ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है. पेट्रोल के दाम बढ़ने से खाने-पीने की चीजों की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई है. पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, पेट्रोल की मौजूदा कीमत में एक ही बार में 25. 58 रुपये (पाकिस्तानी रुपया) की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है. अब वहां पेट्रोल के दाम 100. 10 रुपये प्रति लीटर हो गए है. इससे पहले पेट्रोल के दाम 74. 52 रुपये प्रति लीटर थे. आपको बता दें कि पाकिस्तान में नई कीमतें अक्सर महीने के अंतिम दिन घोषित की जाती हैं और यह 12 बजे के बाद लागू होती हैं, लेकिन इस बार महीना खत्म होने के पहले ही कर दी गई है.
पाकिस्तान में पेट्रोल से ज्यादा महंगा है डीज़ल-हाई स्पीड डीजल (HSD) की मौजूदा कीमत में 21. 31 रुपये की बढ़ोतरी के बाद लोगों को 101. 46 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे.
लाइट डीजल की कीमत में 17. 55 रुपये की बढ़ोतरी होने से लोगों को 55. 98 रुपये प्रति लीटर के दर से खर्च करने होंगे.
इस साल में दुनिया में सबसे ज्यादा पाकिस्तान में महंगाई- साल 2020 में पाकिस्तानी रुपये में दुनियाभर के अन्य देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. पाकिस्तानी स्टेट बैंक (SBP) ने बताया कि हमने वित्त वर्ष 2020 में दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई देखी है, जिससे हमें ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
बैंक की अप्रैल महीने के लिए जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने न केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश और नेपाल जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी सबसे बड़ी महंगाई दर दर्ज की है.
उद्योग संगठनों ने कहा है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस समय बेहद मुश्किलों में फंसी हुई है. क्योंकि, मौजूदा समय में तुरंत 3-4 खरब रुपये के निवेश की जरूरत है. जबकि, सरकाार के पास एक भी पैसा नहीं है.
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पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है. लोगों को इस महंगाई में जहां खाने के लाले पड़ रहे हैं तो वहीं इमरान सरकार ने पेट्रोल में लगभग छब्बीस रुपयापये प्रति लीटर तक की भारी बढ़तरी करने का ऐलान कर दिया है. कराची. पाकिस्तान में बेलगाम महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है. पेट्रोल के दाम बढ़ने से खाने-पीने की चीजों की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई है. पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, पेट्रोल की मौजूदा कीमत में एक ही बार में पच्चीस. अट्ठावन रुपयापये की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है. अब वहां पेट्रोल के दाम एक सौ. दस रुपयापये प्रति लीटर हो गए है. इससे पहले पेट्रोल के दाम चौहत्तर. बावन रुपयापये प्रति लीटर थे. आपको बता दें कि पाकिस्तान में नई कीमतें अक्सर महीने के अंतिम दिन घोषित की जाती हैं और यह बारह बजे के बाद लागू होती हैं, लेकिन इस बार महीना खत्म होने के पहले ही कर दी गई है. पाकिस्तान में पेट्रोल से ज्यादा महंगा है डीज़ल-हाई स्पीड डीजल की मौजूदा कीमत में इक्कीस. इकतीस रुपयापये की बढ़ोतरी के बाद लोगों को एक सौ एक. छियालीस रुपयापये प्रति लीटर चुकाने होंगे. लाइट डीजल की कीमत में सत्रह. पचपन रुपयापये की बढ़ोतरी होने से लोगों को पचपन. अट्ठानवे रुपयापये प्रति लीटर के दर से खर्च करने होंगे. इस साल में दुनिया में सबसे ज्यादा पाकिस्तान में महंगाई- साल दो हज़ार बीस में पाकिस्तानी रुपये में दुनियाभर के अन्य देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. पाकिस्तानी स्टेट बैंक ने बताया कि हमने वित्त वर्ष दो हज़ार बीस में दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई देखी है, जिससे हमें ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. बैंक की अप्रैल महीने के लिए जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने न केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश और नेपाल जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी सबसे बड़ी महंगाई दर दर्ज की है. उद्योग संगठनों ने कहा है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस समय बेहद मुश्किलों में फंसी हुई है. क्योंकि, मौजूदा समय में तुरंत तीन-चार खरब रुपये के निवेश की जरूरत है. जबकि, सरकाार के पास एक भी पैसा नहीं है. .
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उत्तराखंड में सेब की मार्केटिंग को बढ़ाने के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव शुरू हो गया। देहरादून में आयोजित इस इस अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड समेत अन्य प्रदेशों से तमाम सेब उत्पादकों ने हिस्सा लिया। इस महोत्सव में तकरीबन देशभर से 50 सेब की वैरायटी सम्मिलित की गई। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना है और उत्तराखंड के सेब की पहचान इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाना है। ताकि उत्तराखंड की सेब की ब्रांडिंग नेशनल से लेकर इंटरनेशनल मार्केट में हो सके। वहीं, उत्तरकाशी जिले में हर्षिल घाटी के आठ गांवों के सेब कास्तकार देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव का विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में उत्तरकाशी में कास्तकारों ने कलक्ट्रेट परिसर में ढोल नगाड़ों के जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया।
देहरादून में महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। इस मौके पर कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, उच्च शिक्षा एवं सहकारिता विभाग मंत्री धन सिंह रावत, द्वाराहाट के विधायक महेश जोशी भी मौजूद रहे।
इस मौके पर मुखयमंत्री ने उद्यान विभाग की ओर से आयोजित महोत्सव की प्रसंशा की। साथ ही उन्होंने उद्यान कर्मियों को भी कोरोना वारियर्स घोषित किया। साथ ही कहा कि राज्य सरकार की ओर से संचालित मिशन एप्पल योजना के बजट को दोगुना किया जाएगा। उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस कार्यक्रम से सेब उत्पादन को नई दिशा मिलेगी। साथ ही कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को नवनीतम तकनीकी की जानकारी मिलती है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन किए जाएंगे।
इस मौके पर उद्यान निदेशक डा. एचएस बवेजा ने सभी का स्वागत किया। कहा कि प्रदेश के किसानों को नवनीतम तकनीकी के माध्यम से गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। शीघ्र ही उत्तराखंड सेब उत्पादन में वृद्धि प्राप्त करेगा। कार्यक्रम के अन्त में कृषि एवं कृषक कल्याण के अपर सचिव डा. राम बिलास यादव, ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय भरसार के कुलपति डा अजय कुमार कर्नाटक, बागवानी मिशन के निदेशक संजय श्रीवास्तव, कृषि निदेशक गौरी शंकर, निदेशक कैम डा नृपेन्द्र चैहान, निदेशक रेशम डा एके यादव, उद्यान विभाग के पूर्व निदेशक, डा बीएस नेगी, कैम के अपर निदेशक डा जगदीश चन्द्र, डा रतन कुमार, अमर सिंह, डा. सुरेश राम, महेन्द्र पाल, आलोक गुप्ता, एम0पी0 शाही, अरूण पाण्डे, उत्तराखंड सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष डीपी उनियाल आदि उपस्थित थे।
उत्तरकाशी में हर्षिल घाटी के आठ गांवों के सेब कास्तकार देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव के विरोध में कलक्ट्रेट परिसर में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकला। सेब काश्तकारों का कहना है कि हर्षिल घाटी में सेब की तुड़ान शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक झाला में करोड़ों की लागत से तैयार कोल्ड स्टोर का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इस कारण सेब काश्तकारों को सेब केअच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं। दूसरी और प्रदेश सरकार उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हर्षिल के सेब के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पीठ थपथपाना चाहती है।
हर्षिल घाटी के सेब कास्तकार शुक्रवार को उत्तरकाशी के रामलीला मैदान में एकत्रित हुए। उसके बाद घाटी के दर्जनों सेब काश्तकारों ने ढोल दमाऊ के साथ जिला कलक्ट्रेट मुख्यालय में कूच किया। जहां पर सेब काश्तकारों ने कृषि मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हर्षिल घाटी के सेब काश्तकारों हर्षिल प्रधान दिनेश रावत, सतेंद्र पंवार, संजय पंवार, माधवेन्द्र रावत, उमेश पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि देहरादून में आयोजित सेब महोत्सव में हर्षिल घाटी के सेबों की प्रदर्शनी लगाई जाई। कृषि मंत्री और प्रदेश सरकार की ओर सेब काश्तकारों की अनदेखी की गई है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव का विरोध कर एक भी सेब महोत्सव में नहीं भेजा गया।
हर्षिल घाटी के सेब काश्तकारों ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा कि झाला में बना कोल्ड स्टोर अभी तक शुरू नहीं किया गया है। जिस कारण सेब काश्तकारों को अच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं। साथ ही कहा कि हर्षिल घाटी का सेब कश्मीर के सेब से गुणवत्ता में कई बेहतर है। फिर भी कृषि मंत्री अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि आज सरकार की अनदेखी के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। जहां एक और कोविडकाल की मार रही, तो वहीं अब सेब के दाम न मिलने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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उत्तराखंड में सेब की मार्केटिंग को बढ़ाने के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव शुरू हो गया। देहरादून में आयोजित इस इस अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड समेत अन्य प्रदेशों से तमाम सेब उत्पादकों ने हिस्सा लिया। इस महोत्सव में तकरीबन देशभर से पचास सेब की वैरायटी सम्मिलित की गई। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना है और उत्तराखंड के सेब की पहचान इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाना है। ताकि उत्तराखंड की सेब की ब्रांडिंग नेशनल से लेकर इंटरनेशनल मार्केट में हो सके। वहीं, उत्तरकाशी जिले में हर्षिल घाटी के आठ गांवों के सेब कास्तकार देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव का विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में उत्तरकाशी में कास्तकारों ने कलक्ट्रेट परिसर में ढोल नगाड़ों के जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। देहरादून में महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। इस मौके पर कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, उच्च शिक्षा एवं सहकारिता विभाग मंत्री धन सिंह रावत, द्वाराहाट के विधायक महेश जोशी भी मौजूद रहे। इस मौके पर मुखयमंत्री ने उद्यान विभाग की ओर से आयोजित महोत्सव की प्रसंशा की। साथ ही उन्होंने उद्यान कर्मियों को भी कोरोना वारियर्स घोषित किया। साथ ही कहा कि राज्य सरकार की ओर से संचालित मिशन एप्पल योजना के बजट को दोगुना किया जाएगा। उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस कार्यक्रम से सेब उत्पादन को नई दिशा मिलेगी। साथ ही कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को नवनीतम तकनीकी की जानकारी मिलती है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन किए जाएंगे। इस मौके पर उद्यान निदेशक डा. एचएस बवेजा ने सभी का स्वागत किया। कहा कि प्रदेश के किसानों को नवनीतम तकनीकी के माध्यम से गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। शीघ्र ही उत्तराखंड सेब उत्पादन में वृद्धि प्राप्त करेगा। कार्यक्रम के अन्त में कृषि एवं कृषक कल्याण के अपर सचिव डा. राम बिलास यादव, ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय भरसार के कुलपति डा अजय कुमार कर्नाटक, बागवानी मिशन के निदेशक संजय श्रीवास्तव, कृषि निदेशक गौरी शंकर, निदेशक कैम डा नृपेन्द्र चैहान, निदेशक रेशम डा एके यादव, उद्यान विभाग के पूर्व निदेशक, डा बीएस नेगी, कैम के अपर निदेशक डा जगदीश चन्द्र, डा रतन कुमार, अमर सिंह, डा. सुरेश राम, महेन्द्र पाल, आलोक गुप्ता, एमशून्यपीशून्य शाही, अरूण पाण्डे, उत्तराखंड सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष डीपी उनियाल आदि उपस्थित थे। उत्तरकाशी में हर्षिल घाटी के आठ गांवों के सेब कास्तकार देहरादून में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव के विरोध में कलक्ट्रेट परिसर में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकला। सेब काश्तकारों का कहना है कि हर्षिल घाटी में सेब की तुड़ान शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक झाला में करोड़ों की लागत से तैयार कोल्ड स्टोर का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इस कारण सेब काश्तकारों को सेब केअच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं। दूसरी और प्रदेश सरकार उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हर्षिल के सेब के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पीठ थपथपाना चाहती है। हर्षिल घाटी के सेब कास्तकार शुक्रवार को उत्तरकाशी के रामलीला मैदान में एकत्रित हुए। उसके बाद घाटी के दर्जनों सेब काश्तकारों ने ढोल दमाऊ के साथ जिला कलक्ट्रेट मुख्यालय में कूच किया। जहां पर सेब काश्तकारों ने कृषि मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हर्षिल घाटी के सेब काश्तकारों हर्षिल प्रधान दिनेश रावत, सतेंद्र पंवार, संजय पंवार, माधवेन्द्र रावत, उमेश पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि देहरादून में आयोजित सेब महोत्सव में हर्षिल घाटी के सेबों की प्रदर्शनी लगाई जाई। कृषि मंत्री और प्रदेश सरकार की ओर सेब काश्तकारों की अनदेखी की गई है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव का विरोध कर एक भी सेब महोत्सव में नहीं भेजा गया। हर्षिल घाटी के सेब काश्तकारों ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा कि झाला में बना कोल्ड स्टोर अभी तक शुरू नहीं किया गया है। जिस कारण सेब काश्तकारों को अच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं। साथ ही कहा कि हर्षिल घाटी का सेब कश्मीर के सेब से गुणवत्ता में कई बेहतर है। फिर भी कृषि मंत्री अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि आज सरकार की अनदेखी के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। जहां एक और कोविडकाल की मार रही, तो वहीं अब सेब के दाम न मिलने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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रेगुलर टेस्ट कप्तान पेन के उपर आरोप लगा है कि उन्होंने साल 2017 में अपनी महिला सहकर्मी को अश्लील फोटो और गंदे मैसेज भेजे थे। इस मामले के दोबारा सामने आने के बाद पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज से पहले कप्तानी पद से इस्तीफा दे दिया।
ऑस्ट्रेलिया को आगामी एशेज ट्रॉफी से पहले बड़ा झटका लगा। रेगुलर टेस्ट कप्तान टिम पेन ने अपनी सहकर्मी को आपत्तिजनक संदेश भेजने का खुलासा होने के बाद कप्तान पद छोड़ दिया था। इसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) को नए कप्तान की तलाश है। तेज गेंदबाज पैट कमिंस कप्तान बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके अलावा पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ भी दौड़ में हैं।
इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश की है। उन्होंने तीन खिलाड़ियों का नाम लिया जो ऑस्ट्रेलिया के नए टेस्ट कप्तान बनने के लिए मजबूत दावेदार हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर पैट कमिंस इस रेस में सबसे आगे हैं। इसके पीछे उन्होंने वजह बताई कि कमिंस टीम में सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं और काफी चतुर भी हैं।
आकाश ने कहा कि स्टीव स्मिथ भी इस पद के लिए मजबूत दावेदार हैं, क्योंकि पहले भी वह कमान संभाल चुके हैं और अपनी कप्तानी में स्मिथ ने ऑस्ट्रेलिया को काफी मैच जिताए थे। स्मिथ काफी समझदार कप्तान हैं और गेंदबाजों का सही इस्तेमाल करना जानते हैं। आकाश का तीसरा नाम चौंकान वाला था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के मध्यक्रम के बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन का नाम लिया।
आकाश ने कहा कि अगर स्मिथ ऑस्ट्रेलियाई टीम का दुबारा कप्तान बनते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका नाम बॉल टैंपरिंग मामले में जुड़ चूका है। इसलिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलियाई नियमों के तहत शायद ही उन्हें अगला कप्तान बनाए। आकाश ने कहा कि अगर लाबुशेन को ऑस्ट्रेलिया का अगला कप्तान बनाया जाता है तो इसमें कोई चौकने वाली बात नहीं होगी।
लाबुशेन पिछले कुछ सालों में ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। लाबुशेन ने 18 टेस्ट में 60. 81 की औसत से 1885 रन बनाए हैं। इसके अलावा उनके नाम 12 टेस्ट विकेट हैं। लाबुशेन ने 2018 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। तब से वह लगातार टीम का हिस्सा रहे हैं।
रेगुलर टेस्ट कप्तान पेन के उपर आरोप लगा है कि उन्होंने साल 2017 में अपनी महिला सहकर्मी को अश्लील फोटो और गंदे मैसेज भेजे थे। इस मामले के दोबारा सामने आने के बाद पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज से पहले कप्तानी पद से इस्तीफा दे दिया।
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रेगुलर टेस्ट कप्तान पेन के उपर आरोप लगा है कि उन्होंने साल दो हज़ार सत्रह में अपनी महिला सहकर्मी को अश्लील फोटो और गंदे मैसेज भेजे थे। इस मामले के दोबारा सामने आने के बाद पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज से पहले कप्तानी पद से इस्तीफा दे दिया। ऑस्ट्रेलिया को आगामी एशेज ट्रॉफी से पहले बड़ा झटका लगा। रेगुलर टेस्ट कप्तान टिम पेन ने अपनी सहकर्मी को आपत्तिजनक संदेश भेजने का खुलासा होने के बाद कप्तान पद छोड़ दिया था। इसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को नए कप्तान की तलाश है। तेज गेंदबाज पैट कमिंस कप्तान बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके अलावा पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ भी दौड़ में हैं। इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश की है। उन्होंने तीन खिलाड़ियों का नाम लिया जो ऑस्ट्रेलिया के नए टेस्ट कप्तान बनने के लिए मजबूत दावेदार हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर पैट कमिंस इस रेस में सबसे आगे हैं। इसके पीछे उन्होंने वजह बताई कि कमिंस टीम में सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं और काफी चतुर भी हैं। आकाश ने कहा कि स्टीव स्मिथ भी इस पद के लिए मजबूत दावेदार हैं, क्योंकि पहले भी वह कमान संभाल चुके हैं और अपनी कप्तानी में स्मिथ ने ऑस्ट्रेलिया को काफी मैच जिताए थे। स्मिथ काफी समझदार कप्तान हैं और गेंदबाजों का सही इस्तेमाल करना जानते हैं। आकाश का तीसरा नाम चौंकान वाला था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के मध्यक्रम के बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन का नाम लिया। आकाश ने कहा कि अगर स्मिथ ऑस्ट्रेलियाई टीम का दुबारा कप्तान बनते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका नाम बॉल टैंपरिंग मामले में जुड़ चूका है। इसलिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलियाई नियमों के तहत शायद ही उन्हें अगला कप्तान बनाए। आकाश ने कहा कि अगर लाबुशेन को ऑस्ट्रेलिया का अगला कप्तान बनाया जाता है तो इसमें कोई चौकने वाली बात नहीं होगी। लाबुशेन पिछले कुछ सालों में ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। लाबुशेन ने अट्ठारह टेस्ट में साठ. इक्यासी की औसत से एक हज़ार आठ सौ पचासी रन बनाए हैं। इसके अलावा उनके नाम बारह टेस्ट विकेट हैं। लाबुशेन ने दो हज़ार अट्ठारह में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। तब से वह लगातार टीम का हिस्सा रहे हैं। रेगुलर टेस्ट कप्तान पेन के उपर आरोप लगा है कि उन्होंने साल दो हज़ार सत्रह में अपनी महिला सहकर्मी को अश्लील फोटो और गंदे मैसेज भेजे थे। इस मामले के दोबारा सामने आने के बाद पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज से पहले कप्तानी पद से इस्तीफा दे दिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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(१) सधारे की विधि में प्रमाद करना अर्थात उसका पडिलेहन प्रमार्जन न करना, (२) अच्छी तरह पटिलेट्न प्रमार्जन न करना, (३) दस्त, पेशाच आदि करने की जगह का पडिलहन प्रमार्जन न करना, (४) पडिलेहन प्रमान अच्छी तरह न करना श्रोग् (२) भोजन आदि की चिता करना कि कथ सबेरा हो औौर कब में अपने लिये अमुक चीज बनवाऊँ ।।२६।।
[ यारहये व्रत के अतिचारों को श्राखोचना ] * सचित्ते निश्वित्रणे, पिदिणे वापसमच्छरे चेव । कालाइकमदाणे, चउन्ध सिक्खायए निंदे ।।३०।।‡ भावार्थ - साधु, श्रावक श्रादि सुपान अतिथि को देश काल का विचार कर के भक्ति पूर्वक अन्न, जल आदि देश यह अतिथिसविभाग नामक चोथा शिक्षालन अर्थात बारहवा नत है। इस क अतिचारों की इस गाया में आलोचना की गई है । वे अतिचार इस प्रकार है
● मचित्त निर्दोषण, पिधान देशमरे चैव । वाशातिकमदारे, चतुर्थी शिक्षा निमि ॥ ३० ॥
अनिदिम विभागस समय हमे पंचनमदा - मचिसनियखेवया, सच्चिसविडियया कालहस्व मे, परतवरम, मरिया [मू० १०८३७]
(१) साधु फा देने योग्य अचित वस्तु में सचित वस्तु डाल देना, (२) अचित वस्तु को सचित्त वस्तु से ढाक देना, (३) दान करने के लिथ पराई वस्तु को अपनी कहना और दान न करने के अभिप्राय से अपनी वस्तु को पराइ कहना, ( ४ ) मन्सराक्पाय पूर्वक दान देना और (५) समय चीन जाने पर भिक्षा यादि के लिये आमन्त्रण करना ॥३०॥ * सुहिएस अ दुद्दिएस भ, जा मे अस्संजयसु अणुकरा । रागेण व दोसेण व तं निंदे त च गरिहामि ॥३१॥ भावार्थ - -जो साधु ज्ञानादि गुण में रत है या जो यत्रपात्र आदि उपधि वाले है, वे सुम्वा कहलाते है । जो व्याधि से पीडित हैं, तपस्या से खिन्न है, या वस्त्र पात्र आदि उपधि से विहीन है, वे दुखी कहे जाते हैं। जो गुरू की निश्रा से उनकी याज्ञा के अनुसार वर्तते है, ये साधु अस्वयत कहलाते हैं। जो सयम-हीन हैं, ये असयत कहे जाते है। ऐस सुखी, दुखी, अम्वयत और असयत साधुओं पर यह व्यक्ति मेरा सम्व धी है, यह कुलीन है या यह प्रतिष्ठित है इत्यादि प्रकार के ममत्व● सुखितेषु च दुखितेषु च याममा अस्वयतेषु ( वसमतेषु ) अनुपम्पा रागेश मा द्वेषेण वा हो नि दामि तान्च गई ॥ ३१ ॥
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सधारे की विधि में प्रमाद करना अर्थात उसका पडिलेहन प्रमार्जन न करना, अच्छी तरह पटिलेट्न प्रमार्जन न करना, दस्त, पेशाच आदि करने की जगह का पडिलहन प्रमार्जन न करना, पडिलेहन प्रमान अच्छी तरह न करना श्रोग् भोजन आदि की चिता करना कि कथ सबेरा हो औौर कब में अपने लिये अमुक चीज बनवाऊँ ।।छब्बीस।। [ यारहये व्रत के अतिचारों को श्राखोचना ] * सचित्ते निश्वित्रणे, पिदिणे वापसमच्छरे चेव । कालाइकमदाणे, चउन्ध सिक्खायए निंदे ।।तीस।।‡ भावार्थ - साधु, श्रावक श्रादि सुपान अतिथि को देश काल का विचार कर के भक्ति पूर्वक अन्न, जल आदि देश यह अतिथिसविभाग नामक चोथा शिक्षालन अर्थात बारहवा नत है। इस क अतिचारों की इस गाया में आलोचना की गई है । वे अतिचार इस प्रकार है ● मचित्त निर्दोषण, पिधान देशमरे चैव । वाशातिकमदारे, चतुर्थी शिक्षा निमि ॥ तीस ॥ अनिदिम विभागस समय हमे पंचनमदा - मचिसनियखेवया, सच्चिसविडियया कालहस्व मे, परतवरम, मरिया [मूशून्य दस हज़ार आठ सौ सैंतीस] साधु फा देने योग्य अचित वस्तु में सचित वस्तु डाल देना, अचित वस्तु को सचित्त वस्तु से ढाक देना, दान करने के लिथ पराई वस्तु को अपनी कहना और दान न करने के अभिप्राय से अपनी वस्तु को पराइ कहना, मन्सराक्पाय पूर्वक दान देना और समय चीन जाने पर भिक्षा यादि के लिये आमन्त्रण करना ॥तीस॥ * सुहिएस अ दुद्दिएस भ, जा मे अस्संजयसु अणुकरा । रागेण व दोसेण व तं निंदे त च गरिहामि ॥इकतीस॥ भावार्थ - -जो साधु ज्ञानादि गुण में रत है या जो यत्रपात्र आदि उपधि वाले है, वे सुम्वा कहलाते है । जो व्याधि से पीडित हैं, तपस्या से खिन्न है, या वस्त्र पात्र आदि उपधि से विहीन है, वे दुखी कहे जाते हैं। जो गुरू की निश्रा से उनकी याज्ञा के अनुसार वर्तते है, ये साधु अस्वयत कहलाते हैं। जो सयम-हीन हैं, ये असयत कहे जाते है। ऐस सुखी, दुखी, अम्वयत और असयत साधुओं पर यह व्यक्ति मेरा सम्व धी है, यह कुलीन है या यह प्रतिष्ठित है इत्यादि प्रकार के ममत्व● सुखितेषु च दुखितेषु च याममा अस्वयतेषु अनुपम्पा रागेश मा द्वेषेण वा हो नि दामि तान्च गई ॥ इकतीस ॥
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सबसे पहले तो ध्यान रखिए कि गुस्सा किसी का भी हो, उससे डरना नहीं है। गुस्सा बहादुरी नहीं बल्कि कमजोरी होती है, ये उन लोगों की कमजोरी होती है, जो खुद पर कंट्रोल जरा भी नहीं कर पाते हैं। इसको बच्चे के रोने की तरह देखें न कि शेर की दहाड़ की तरह। इसलिए इस वक्त डरने से अच्छा है मन शांत करके सही निर्णय लें।
इस वक्त आपको ये भी देखना है कि ये गुस्सा कहीं आपकी वजह से तो नहीं बढ़ा है। ध्यान दीजिए और अगर गलती है तो माफी मांगने से भी पीछे न हटिए। मगर गलती नहीं है तो आपको दूसरे एंगल से सबकुछ समझने की जरूरत है। फिर आपको पति को ये समझाना होगा कि उन्होंने आपको गलत समझ लिया है। लेकिन ये काम तुरंत करना गलत होगा। आपको इस स्थिति से बाहर आने का इंतजार करना होगा।
कई सारे पुरुष ऐसे होते हैं, जिनको गुस्सा करने की आदत होती है। वो किसी भी बात पर गुस्सा होने लगते हैं और बाट बढ़ती चली जाती है। जैसे नमक कम है तो गुस्सा, कहीं पर गंदगी है तो गुस्सा। ऐसे लोगों की एक खासियत और होती है। वो अपने गुस्से के लिए अपने व्यवहार और सोच पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और इसकी ज़िम्मेदारी आमतौर पर पत्नी या किसी खास स्थिति को देते हैं। जबकि गुस्सा करने और खराब व्यवहार के लिए वो खुद जिम्मेदार होते हैं। इसलिए उनकी वजह से खराब हुए माहौल की ज़िम्मेदारी खुद लेने की बजाए इसका कारण उनकी मनः स्थिति को मानिए।
कभी भी गुस्से वाले मौके पर पति को बदलने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। क्योंकि आप उसको बदल नहीं सकती हैं, ये काम उन्हें खुद ही करना होगा। इस वक्त सिर्फ एक काम किया जा सकता है कि आप अपने व्यवहार पर काम करें और उसे सुधारने की कोशिश करें। कोशिश करें कि जिस गुस्से की आग में वो तप रहे हैं उसमें आप न जलें।
जब भी पति गुस्सा हों तो याद रखिए कि उस दौरान सुधार के लिए और मौके को ज्यादा न बिगड़ने देने के लिए कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है।
देखिए जब आग लगी हो तो और आग देने से मामला बिगड़ सकता है। मतलब जब पति गुस्सा हो रहे हों तो खुद पर कंट्रोल ना करना आग में तेल का काम करता है। थोड़े धैर्य के साथ रहिए क्योंकि गुस्सा आने का भी एक समय होता है, इसके बाद ये बिलकुल शांत हो जाता है। ध्यान रखिए गुस्सा तो कुछ देर में खत्म हो जाता है लेकिन इसकी वजह से हुई लड़ाई आपका रिश्ता खराब कर देती है। इसलिए इस वक्त खुद को शांत रखना जरूरी हो जाता है।
पति के गुस्से पर बात करने के लिए गुस्सा जाने का इंतजार आपको करना ही होगा। क्योंकि याद रखिए गुस्से में उनको आपकी कोई बात समझ नहीं आएगी। बल्कि उनका गुस्सा और बढ़ने की संभावना जरूर होगी। इसलिए गुस्सा शांत होने के बाद ही उनसे पूरी स्थिति पर बात करें। बात करें कि क्यों ऐसा हुआ और क्यों नहीं होना चाहिए था।
आप कितना सहन करेंगी और कब आप एक्शन लेंगी, ये बात आपको पहले से ही ब्तानी होगी। ये वो बार्डर होगा, जिससे आगे आने की आजादी आपके पति को भी नहीं होगी। जैसे उन्हें पता होना चाहिए कि अपशब्द सुनने के लिए आप बिलकुल तैयार नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो आप सख्त कदम उठाएंगी। इस चेतावनी पर आपको अड़े भी रहना होगा।
आप दोनों के लिए किसी बहस या लड़ाई में जीतना जरूरी नहीं होना चाहिए। ये आपके लिए तो जरूरी होना ही चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आपको हर किसी बात पर अपनी ऊर्जा को खराब करने से बचिए। आप उन बातों को ही अहमियत दीजिए, जिसमें बात करना असल में जरूरी हो। जैसे बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी कोई बात। सिर्फ अहम को खुश करने के लिए पैदा हुए गुस्से को सुलझाने की आपकी जरूरत नहीं है। इसलिए जब भी पति गुस्सा हों तो उनसे जीतने की होड में मत रहिए। बल्कि उसी वक्त पर सही निर्णय लीजिए कि आपको बोलना है या नहीं। आपको निर्णय लेना है कि अपनी ऊर्जा गलत जघ निवेश करनी है या सही जगह।
इस दुनिया में हर इंसान सम्मान का हकदार है। ये बातें आमतौर पर महिलाएं नहीं समझती हैं। उन्हें सम्मान में कटौती बहुत गलत नहीं लगती बल्कि वो इसको अपनी किस्मत मन लेती हैं। या पति की अच्छाइयों के सामने इसे छोटी चीज मान लेती हैं। ये सोच बिलकुल गलत है। सबसे पहले अपने सम्मान की रक्षा आपको खुद करनी होगी, येयड रखिए।
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सबसे पहले तो ध्यान रखिए कि गुस्सा किसी का भी हो, उससे डरना नहीं है। गुस्सा बहादुरी नहीं बल्कि कमजोरी होती है, ये उन लोगों की कमजोरी होती है, जो खुद पर कंट्रोल जरा भी नहीं कर पाते हैं। इसको बच्चे के रोने की तरह देखें न कि शेर की दहाड़ की तरह। इसलिए इस वक्त डरने से अच्छा है मन शांत करके सही निर्णय लें। इस वक्त आपको ये भी देखना है कि ये गुस्सा कहीं आपकी वजह से तो नहीं बढ़ा है। ध्यान दीजिए और अगर गलती है तो माफी मांगने से भी पीछे न हटिए। मगर गलती नहीं है तो आपको दूसरे एंगल से सबकुछ समझने की जरूरत है। फिर आपको पति को ये समझाना होगा कि उन्होंने आपको गलत समझ लिया है। लेकिन ये काम तुरंत करना गलत होगा। आपको इस स्थिति से बाहर आने का इंतजार करना होगा। कई सारे पुरुष ऐसे होते हैं, जिनको गुस्सा करने की आदत होती है। वो किसी भी बात पर गुस्सा होने लगते हैं और बाट बढ़ती चली जाती है। जैसे नमक कम है तो गुस्सा, कहीं पर गंदगी है तो गुस्सा। ऐसे लोगों की एक खासियत और होती है। वो अपने गुस्से के लिए अपने व्यवहार और सोच पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और इसकी ज़िम्मेदारी आमतौर पर पत्नी या किसी खास स्थिति को देते हैं। जबकि गुस्सा करने और खराब व्यवहार के लिए वो खुद जिम्मेदार होते हैं। इसलिए उनकी वजह से खराब हुए माहौल की ज़िम्मेदारी खुद लेने की बजाए इसका कारण उनकी मनः स्थिति को मानिए। कभी भी गुस्से वाले मौके पर पति को बदलने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। क्योंकि आप उसको बदल नहीं सकती हैं, ये काम उन्हें खुद ही करना होगा। इस वक्त सिर्फ एक काम किया जा सकता है कि आप अपने व्यवहार पर काम करें और उसे सुधारने की कोशिश करें। कोशिश करें कि जिस गुस्से की आग में वो तप रहे हैं उसमें आप न जलें। जब भी पति गुस्सा हों तो याद रखिए कि उस दौरान सुधार के लिए और मौके को ज्यादा न बिगड़ने देने के लिए कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है। देखिए जब आग लगी हो तो और आग देने से मामला बिगड़ सकता है। मतलब जब पति गुस्सा हो रहे हों तो खुद पर कंट्रोल ना करना आग में तेल का काम करता है। थोड़े धैर्य के साथ रहिए क्योंकि गुस्सा आने का भी एक समय होता है, इसके बाद ये बिलकुल शांत हो जाता है। ध्यान रखिए गुस्सा तो कुछ देर में खत्म हो जाता है लेकिन इसकी वजह से हुई लड़ाई आपका रिश्ता खराब कर देती है। इसलिए इस वक्त खुद को शांत रखना जरूरी हो जाता है। पति के गुस्से पर बात करने के लिए गुस्सा जाने का इंतजार आपको करना ही होगा। क्योंकि याद रखिए गुस्से में उनको आपकी कोई बात समझ नहीं आएगी। बल्कि उनका गुस्सा और बढ़ने की संभावना जरूर होगी। इसलिए गुस्सा शांत होने के बाद ही उनसे पूरी स्थिति पर बात करें। बात करें कि क्यों ऐसा हुआ और क्यों नहीं होना चाहिए था। आप कितना सहन करेंगी और कब आप एक्शन लेंगी, ये बात आपको पहले से ही ब्तानी होगी। ये वो बार्डर होगा, जिससे आगे आने की आजादी आपके पति को भी नहीं होगी। जैसे उन्हें पता होना चाहिए कि अपशब्द सुनने के लिए आप बिलकुल तैयार नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो आप सख्त कदम उठाएंगी। इस चेतावनी पर आपको अड़े भी रहना होगा। आप दोनों के लिए किसी बहस या लड़ाई में जीतना जरूरी नहीं होना चाहिए। ये आपके लिए तो जरूरी होना ही चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आपको हर किसी बात पर अपनी ऊर्जा को खराब करने से बचिए। आप उन बातों को ही अहमियत दीजिए, जिसमें बात करना असल में जरूरी हो। जैसे बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी कोई बात। सिर्फ अहम को खुश करने के लिए पैदा हुए गुस्से को सुलझाने की आपकी जरूरत नहीं है। इसलिए जब भी पति गुस्सा हों तो उनसे जीतने की होड में मत रहिए। बल्कि उसी वक्त पर सही निर्णय लीजिए कि आपको बोलना है या नहीं। आपको निर्णय लेना है कि अपनी ऊर्जा गलत जघ निवेश करनी है या सही जगह। इस दुनिया में हर इंसान सम्मान का हकदार है। ये बातें आमतौर पर महिलाएं नहीं समझती हैं। उन्हें सम्मान में कटौती बहुत गलत नहीं लगती बल्कि वो इसको अपनी किस्मत मन लेती हैं। या पति की अच्छाइयों के सामने इसे छोटी चीज मान लेती हैं। ये सोच बिलकुल गलत है। सबसे पहले अपने सम्मान की रक्षा आपको खुद करनी होगी, येयड रखिए।
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UPPSC उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 31 अक्टूबर को सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का परिणाम संशोधित किया था। परिणाम संशोधित होने के कारण पहले से चयनित 27 अभ्यर्थी बाहर हो गए। जबकि 22 नए अभ्यर्थी सफल हुए हैं।
प्रयागराज, राज्य ब्यूरो। सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य/विशेष चयन)-2021 की स्क्रीनिंग परीक्षा के संशोधित परिणाम से चयनित 22 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 15 नवंबर को होगा। इस परीक्षा के जरिए प्रदेश सरकार के विभागों में सहायक अभियंता का चयन किया जाएगा। यह कृषि इंजीनियरिंग शाखा के अभ्यर्थी है। इससे पहले अन्य शाखाओं का साक्षात्कार 11 नवंबर तक पूरा हो जाएगा।
सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का संशोधित परिणाम : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 31 अक्टूबर को सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का परिणाम संशोधित किया था। परिणाम संशोधित होने के कारण पहले से चयनित 27 अभ्यर्थी बाहर हो गए। जबकि 22 नए अभ्यर्थी सफल हुए हैं। सहायक अभियंता के 283 पदों पर भर्ती के लिए 29 मई 2022 को स्क्रीनिंग परीक्षा हुई थी। उसका परिणाम 29 सितंबर को जारी हुआ तो अलग-अलग शाखाओं के 870 अभ्यर्थी सफल हुए थे। इन अभ्यर्थियों का आयोग में 17 अक्टूबर से 11 नवंबर तक साक्षात्कार चल रहा है।
15 नवंबर को दो शिफ्टों में होगा इंटरव्यू : जांच इसी बीच आयोग में शिकायत हुई कि कृषि अभियंत्रण शाखा में सिविल और मैकेनिकल अभियंत्रण के 27 अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया है। इसकी जांच हुई तो आयोग की गलती पकड़ी गई। आयोग ने इसमें सुधार करते हुए सिविल और मैकेनिकल से चयनित हुए अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया। फिर कृषि अभियंत्रण के अभ्यर्थियों का चयन किया। उनका साक्षात्कार 15 नवंबर को दो शिफ्ट में सुबह नौ और दोपहर एक बजे से होगा। आयोग के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी ने बताया कि इन अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र का लिंक शनिवार को जारी कर दिया गया है। अभ्यर्थी उसे डाउनलोड कर लें।
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UPPSC उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इकतीस अक्टूबर को सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का परिणाम संशोधित किया था। परिणाम संशोधित होने के कारण पहले से चयनित सत्ताईस अभ्यर्थी बाहर हो गए। जबकि बाईस नए अभ्यर्थी सफल हुए हैं। प्रयागराज, राज्य ब्यूरो। सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा -दो हज़ार इक्कीस की स्क्रीनिंग परीक्षा के संशोधित परिणाम से चयनित बाईस अभ्यर्थियों का साक्षात्कार पंद्रह नवंबर को होगा। इस परीक्षा के जरिए प्रदेश सरकार के विभागों में सहायक अभियंता का चयन किया जाएगा। यह कृषि इंजीनियरिंग शाखा के अभ्यर्थी है। इससे पहले अन्य शाखाओं का साक्षात्कार ग्यारह नवंबर तक पूरा हो जाएगा। सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का संशोधित परिणाम : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इकतीस अक्टूबर को सहायक अभियंता कृषि अभियंत्रण शाखा का परिणाम संशोधित किया था। परिणाम संशोधित होने के कारण पहले से चयनित सत्ताईस अभ्यर्थी बाहर हो गए। जबकि बाईस नए अभ्यर्थी सफल हुए हैं। सहायक अभियंता के दो सौ तिरासी पदों पर भर्ती के लिए उनतीस मई दो हज़ार बाईस को स्क्रीनिंग परीक्षा हुई थी। उसका परिणाम उनतीस सितंबर को जारी हुआ तो अलग-अलग शाखाओं के आठ सौ सत्तर अभ्यर्थी सफल हुए थे। इन अभ्यर्थियों का आयोग में सत्रह अक्टूबर से ग्यारह नवंबर तक साक्षात्कार चल रहा है। पंद्रह नवंबर को दो शिफ्टों में होगा इंटरव्यू : जांच इसी बीच आयोग में शिकायत हुई कि कृषि अभियंत्रण शाखा में सिविल और मैकेनिकल अभियंत्रण के सत्ताईस अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया है। इसकी जांच हुई तो आयोग की गलती पकड़ी गई। आयोग ने इसमें सुधार करते हुए सिविल और मैकेनिकल से चयनित हुए अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया। फिर कृषि अभियंत्रण के अभ्यर्थियों का चयन किया। उनका साक्षात्कार पंद्रह नवंबर को दो शिफ्ट में सुबह नौ और दोपहर एक बजे से होगा। आयोग के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी ने बताया कि इन अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र का लिंक शनिवार को जारी कर दिया गया है। अभ्यर्थी उसे डाउनलोड कर लें।
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अप्रैल 2016 में शिखर सिंह और उनकी पत्नी निधि ने तय किया कि वे अपना फ्लैट बेचकर समोसे का काम शुरू करेंगे और उन्होंने ऐसा ही किया। बंगलुरू में 'समोसा सिंह' अब ब्रांड लोगों की पसंद बन चुका है। समोसे का बेहतरीन स्वाद लोगों को रिझा और ललचा रहा है। मगर चंद लोग ही इस बात को जानते हैं कि अपने इस स्टार्टअप के लिए पति और पत्नी ने अपनी अपना फ्लैट बेच दिया था। आज वह हर दिन करीब दस हजार समोसे की सेल कर रहे हैं।
निधि और उनके पति शिखर सिंह ने अपने फ्लैट को बेचकर साल 2016 में वॉकनस्टोव फूडवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी बनाई। इसके बाद उन्होंने समोसा सिंह नाम से समोसे बनाना शुरू कर दिया। इन्होंने अपने ब्रांडेड समोसे की कीमतों को कम रखा है। 20 रुपए में आपको आलू वाले दो समोसे की एक प्लेट मिल सकती है और चिकन मखनी समोसे के दो पीस के लिए आपको 55 रुपए चुकाने होंगे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करते हुए निधि और शिखर की मुलाकात हुई थी। निधि को लगा कि बायोटेक्नोलॉजी से अधिक उन्हें मार्केटिंग और सेल्स का काम पसंद है। उन्होंने साल 2007 में स्नातक करने के बाद अमेरिका स्थित फार्मा कंपनी के दिल्ली कार्यालय में बिजनेस डेवलपमेंट के रूप में नौकरी की। वहीं, शिखर को बायोटेक में रुचि थी तो वह हैदराबाद के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज में आगे की पढ़ाई करने चले आए। यहां शिखर को एहसास हुआ कि भारतीय स्नैक्स के लिए उपलब्ध कोई भी स्वच्छ, फास्ट फूड जैसा मॉडल नहीं था। उन्होंने निधि कि समोसा कियोस्क खोलने के बारे में कहा। दरअसल, देश के हर क्षेत्र में खाने की कोई न कोई अलग डिश है, लेकिन समोसा पूरे देश में बिकता है। यहीं से समोसा सिंह की शुरुआत हुई थी।
निधि की सेल्स और मार्केटिंग का बैकग्राउंड होने की वजह से उन्होंने कार्पोरेट्स तक पहुंच बनाने का फैसला किया। जर्मन इंजीनियरिंग की एक कंपनी ने उनसे पूछा कि क्या वे एक दिन में 8,000 समोसे मुहैया करा सकते हैं। निधि और शिखर ने उनसे कुछ समय मांगा। दरअसल, इसके लिए बड़े किचन की जरूरत थी। कर्मचारियों से एक दिन में 8000 समोसे तैयार कराना संभव नहीं था। तब उन्होंने अपना फ्लैट बेचने का फैसाल किया और उससे मिले पैसों से एक बड़ा रसोईघर बनाया। इसके बाद उन्होंने उस कॉर्पोरेट ऑफिस में दोबारा संपर्क कर बताया कि वे 8,000 समोसे दो हफ्ते में तैयार करके देंगे। उन्होंने काफी रिसर्च के बाद बिना प्रिजर्वेटिव्स के समोसे तैयार किए। वर्तमान में वे अब प्रतिदिन दस हजार से अधिक समोसे की सेल करते हैं। वहीं, अब उन्होंने अपने स्वाद की पहुंच को हैदराबाद सहित पुणे और आस-पास के अन्य क्षेत्रों में भी पहुंचाना शुरू कर दिया है। उनका लक्ष्य है कि वह अगले वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन 50 हजार समोसे बेचें।
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अप्रैल दो हज़ार सोलह में शिखर सिंह और उनकी पत्नी निधि ने तय किया कि वे अपना फ्लैट बेचकर समोसे का काम शुरू करेंगे और उन्होंने ऐसा ही किया। बंगलुरू में 'समोसा सिंह' अब ब्रांड लोगों की पसंद बन चुका है। समोसे का बेहतरीन स्वाद लोगों को रिझा और ललचा रहा है। मगर चंद लोग ही इस बात को जानते हैं कि अपने इस स्टार्टअप के लिए पति और पत्नी ने अपनी अपना फ्लैट बेच दिया था। आज वह हर दिन करीब दस हजार समोसे की सेल कर रहे हैं। निधि और उनके पति शिखर सिंह ने अपने फ्लैट को बेचकर साल दो हज़ार सोलह में वॉकनस्टोव फूडवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी बनाई। इसके बाद उन्होंने समोसा सिंह नाम से समोसे बनाना शुरू कर दिया। इन्होंने अपने ब्रांडेड समोसे की कीमतों को कम रखा है। बीस रुपयापए में आपको आलू वाले दो समोसे की एक प्लेट मिल सकती है और चिकन मखनी समोसे के दो पीस के लिए आपको पचपन रुपयापए चुकाने होंगे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करते हुए निधि और शिखर की मुलाकात हुई थी। निधि को लगा कि बायोटेक्नोलॉजी से अधिक उन्हें मार्केटिंग और सेल्स का काम पसंद है। उन्होंने साल दो हज़ार सात में स्नातक करने के बाद अमेरिका स्थित फार्मा कंपनी के दिल्ली कार्यालय में बिजनेस डेवलपमेंट के रूप में नौकरी की। वहीं, शिखर को बायोटेक में रुचि थी तो वह हैदराबाद के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज में आगे की पढ़ाई करने चले आए। यहां शिखर को एहसास हुआ कि भारतीय स्नैक्स के लिए उपलब्ध कोई भी स्वच्छ, फास्ट फूड जैसा मॉडल नहीं था। उन्होंने निधि कि समोसा कियोस्क खोलने के बारे में कहा। दरअसल, देश के हर क्षेत्र में खाने की कोई न कोई अलग डिश है, लेकिन समोसा पूरे देश में बिकता है। यहीं से समोसा सिंह की शुरुआत हुई थी। निधि की सेल्स और मार्केटिंग का बैकग्राउंड होने की वजह से उन्होंने कार्पोरेट्स तक पहुंच बनाने का फैसला किया। जर्मन इंजीनियरिंग की एक कंपनी ने उनसे पूछा कि क्या वे एक दिन में आठ,शून्य समोसे मुहैया करा सकते हैं। निधि और शिखर ने उनसे कुछ समय मांगा। दरअसल, इसके लिए बड़े किचन की जरूरत थी। कर्मचारियों से एक दिन में आठ हज़ार समोसे तैयार कराना संभव नहीं था। तब उन्होंने अपना फ्लैट बेचने का फैसाल किया और उससे मिले पैसों से एक बड़ा रसोईघर बनाया। इसके बाद उन्होंने उस कॉर्पोरेट ऑफिस में दोबारा संपर्क कर बताया कि वे आठ,शून्य समोसे दो हफ्ते में तैयार करके देंगे। उन्होंने काफी रिसर्च के बाद बिना प्रिजर्वेटिव्स के समोसे तैयार किए। वर्तमान में वे अब प्रतिदिन दस हजार से अधिक समोसे की सेल करते हैं। वहीं, अब उन्होंने अपने स्वाद की पहुंच को हैदराबाद सहित पुणे और आस-पास के अन्य क्षेत्रों में भी पहुंचाना शुरू कर दिया है। उनका लक्ष्य है कि वह अगले वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन पचास हजार समोसे बेचें।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव के लिए हो रहे प्रचार के अंतिम दिन शुक्रवार को छात्रगुटों में जमकर मारपीट हो गई। अफरा तफरी के बीच पुलिस ने उपद्रवी छात्रों को कैंपस के बाहर खदेड़ दिया। बवाल में कई छात्र चोटिल भी हो गए। बाद में छात्रों का एक गुट दूसरे पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गया। सोशल साइंस चौराहे पर दोनों गुटों के छात्रों ने एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों प्रदर्शन व नारेबाजी की। बाद में पुलिस प्रशासन के समझने पर छात्र शांत हुए। हालांकि छात्रों के दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ सिगरा थाने में तहरीर दी है।
यूनिवर्सिटी में आठ नवंबर को होने वाले छात्रसंघ इलेक्शन को लेकर कैंपस में सुबह से गहमागहमी बनी हुई थी। प्रचार का अंतिम दिन कैंडीडेट्स व उनके समर्थकों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस बीच थक कर छात्र एकता मंच के कुछ समर्थक पंत प्रशासनिक भवन के सामने पार्क में जाकर बैठ गए। दोपहर में करीब क्. ब्भ् बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की छात्रसंघ अध्यक्ष पद की कैंडीडेट आयुषी श्रीमाली प्रचार करने पार्क में पहुंची। आयुषी ने आरोप लगाया कि एकता मंच के समर्थक मेरे समर्थकों को पार्क में देखकर मिसबिहैव करने लगे। इतना ही नहीं मेरा हाथ मरोड़ दिया। उन्होंने थाने में दी तहरीर में मंच के समर्थकों पर छींटाकशी व बदसलूकी का भी आरोप लगाया है। दूसरी ओर छात्र एकता मंच के समर्थकों ने आयुषी के आरोपों को खारिज किया है। कहा कि वोटर्स की सहानभूति बटोरने और हाईलाइट होने के लिए आयुषी स्वयं आकर हम लोगों से उलझ गईं और गाली देना स्टार्ट कर दिया। बहरहाल दोनों गुटों के समर्थकों की हाथापाई में आयुषी की अंगुली में मोच आ गई है। इससे नाराज एबीवीपी के कार्यकर्ता सामाजिक विज्ञान चौराहे पर धरने पर बैठ गए।
कैंपस में मेन चौराहे पर धरना प्रदर्शन होने की सूचना मिलते ही चीफ प्रॉक्टर प्रो। कल्पलता पांडेय, चुनाव अधिकारी प्रो। रविप्रकाश पांडेय सहित प्रॉक्टोरियल बोर्ड मेंबर्स के साथ बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स भी पहुंच गई। वह छात्रों को समझाने बुझाने का प्रयास कर ही रहे थे कि छात्र एकता मंच के कैंडीडेट शशांक सिंह रघुवंशी भी समर्थकों के साथ चौराहे पर पहुंच धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते शशांक सिंह फफककर रोने लगा। जिसके बाद समर्थक उसे चुप कराने में जुट गए। उधर पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को किसी तरह समझा-बुझा कर शांत कराया। वहीं एबीवीपी के समर्थक सिगरा थाने तहरीर देने चले गए। इसके बाद दूसरा गुट भी यह कहते हुए वहां से हट गया कि हम कैंपस में शांति चाहते हैं।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव के लिए हो रहे प्रचार के अंतिम दिन शुक्रवार को छात्रगुटों में जमकर मारपीट हो गई। अफरा तफरी के बीच पुलिस ने उपद्रवी छात्रों को कैंपस के बाहर खदेड़ दिया। बवाल में कई छात्र चोटिल भी हो गए। बाद में छात्रों का एक गुट दूसरे पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गया। सोशल साइंस चौराहे पर दोनों गुटों के छात्रों ने एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों प्रदर्शन व नारेबाजी की। बाद में पुलिस प्रशासन के समझने पर छात्र शांत हुए। हालांकि छात्रों के दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ सिगरा थाने में तहरीर दी है। यूनिवर्सिटी में आठ नवंबर को होने वाले छात्रसंघ इलेक्शन को लेकर कैंपस में सुबह से गहमागहमी बनी हुई थी। प्रचार का अंतिम दिन कैंडीडेट्स व उनके समर्थकों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस बीच थक कर छात्र एकता मंच के कुछ समर्थक पंत प्रशासनिक भवन के सामने पार्क में जाकर बैठ गए। दोपहर में करीब क्. ब्भ् बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की छात्रसंघ अध्यक्ष पद की कैंडीडेट आयुषी श्रीमाली प्रचार करने पार्क में पहुंची। आयुषी ने आरोप लगाया कि एकता मंच के समर्थक मेरे समर्थकों को पार्क में देखकर मिसबिहैव करने लगे। इतना ही नहीं मेरा हाथ मरोड़ दिया। उन्होंने थाने में दी तहरीर में मंच के समर्थकों पर छींटाकशी व बदसलूकी का भी आरोप लगाया है। दूसरी ओर छात्र एकता मंच के समर्थकों ने आयुषी के आरोपों को खारिज किया है। कहा कि वोटर्स की सहानभूति बटोरने और हाईलाइट होने के लिए आयुषी स्वयं आकर हम लोगों से उलझ गईं और गाली देना स्टार्ट कर दिया। बहरहाल दोनों गुटों के समर्थकों की हाथापाई में आयुषी की अंगुली में मोच आ गई है। इससे नाराज एबीवीपी के कार्यकर्ता सामाजिक विज्ञान चौराहे पर धरने पर बैठ गए। कैंपस में मेन चौराहे पर धरना प्रदर्शन होने की सूचना मिलते ही चीफ प्रॉक्टर प्रो। कल्पलता पांडेय, चुनाव अधिकारी प्रो। रविप्रकाश पांडेय सहित प्रॉक्टोरियल बोर्ड मेंबर्स के साथ बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स भी पहुंच गई। वह छात्रों को समझाने बुझाने का प्रयास कर ही रहे थे कि छात्र एकता मंच के कैंडीडेट शशांक सिंह रघुवंशी भी समर्थकों के साथ चौराहे पर पहुंच धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते शशांक सिंह फफककर रोने लगा। जिसके बाद समर्थक उसे चुप कराने में जुट गए। उधर पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को किसी तरह समझा-बुझा कर शांत कराया। वहीं एबीवीपी के समर्थक सिगरा थाने तहरीर देने चले गए। इसके बाद दूसरा गुट भी यह कहते हुए वहां से हट गया कि हम कैंपस में शांति चाहते हैं।
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तेउवायु, वनस्पति दादोंणोरे ॥ ॥ २ ॥ बे, ते, चो, पचेन्द्री तीर्थच, मनुप गतिमें रमीयोरे, व्यतर जोतिपी वैमानिकमें, काल अनता गमीयोरे ।। सु० ॥ ३ ॥ पतला पड्या कर्म हमारा, जद या रुची जागीरे, अब तो नामो मडासु नाहन, तुम वीतरागीरे ।। मु० ।। ४ ।। करणी करके सनही तीरीया, काइ बडाइ धारीरे, साचो दाता जवही याशो, मुन निगुणाने दो तारीरे ।। मु० ।। ५ ।। दुसे पीडीयो चाडो तेडो, बोली चम्पा कीजोरे, ज्ञानसुन्दर चाकर चरणाको, हीचडे लगाई लीजोरे ।। मु० ॥ ६ ॥ इति
न १० श्री जैसलमेर मडन श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ मुक्ति दिजो चिंतामणिमाने चोडे सुनो चाहे छाने । मुक्ति० ।। लेनदार जो आने बेठे, देरी करे क्या जाने । मु० ॥ १ ॥ पावणो ने मो जिमने जाये, करे टालाटुली शाने ।। मु० ॥ २ ॥ वीणो होवे तो न्यासने आवे, नहीं तो ।। ० ।।३।। हु छु दीन ने तु है दाता, क्यु तरमावे माने ।। सु० ॥ ४ ॥ सर्व पातको जानो साइन, घणो शु कहे थाने ।। मु० ॥ ५ ॥ इति
तुठो तुठोरे चामाको जायो, म्हेतो महेज मुक्त गढ पाया ।। ढेर ।। निज सेवकपर करुया थाणी, अरजीपे हुक्म लगायो ।। तु० ॥ १ ॥ हु छोरु कुन्छो तो पय, लीनो कष्ट लगायो ।। तु० ॥ २ ॥ तीन भुवनका राजसे अधिको, ध्यान
आनन्द मोय ।। तु० ।। ३ ।। आज आनन्द रंग ज्ञान बघावो, मो मन हरप सवायो । तु० ॥ ४ ॥ इति.
नं. १२ श्री जैनलमेर मंडन अष्टापद नायक. अष्टापदन्दो. भरत भराया वि भावसे ।। देर ॥ आदिश्वरजी केवल पायो, भरत वन्दनने आयो. हाथ जोडने प्रश्न पुच्छे, और होंगे जिनराया हो ।। अष्टा० ॥ १ ॥ सुन सरतेश्वर राजवि सरे, भाषे जगदाधिश, इणहीज काले भरत क्षेत्रमें, होसे जिन तेवीस हो ॥ २ ॥ २ ॥ मुन भरतेश्वर श्रष्टापदपर, शिखर बन्ध चोविस, चैत्य कराया वित्र स्थपाया, जिस भाख्या जगदिस हो ।। अ० ।। ३ ।। रत्नमय मृतिसरे, वर्ण अवगाहना सरखी, उत्तराध्ययने गौतमस्वामि, चैत्यवन्दन कर निरखी हो ।। ऋ० ॥ ४ ॥ कृत्यवस्तु संख्याता कालतक, बादि इसपर बोले, देव साहित्य काल असंख्या, जम्बुद्विप नवि खोले हो ।। अ० ॥ ५ ॥ उत्तराध्ययन सागर चक्रीका, पुत्रे रक्षा की आवश्यक में भद्रबाहु विस्तारे टीका लीनी हो । अ० ॥ ६ ॥ श्रष्टापद नामको मन्दिर, जेसलमेरके मांहि, नरुदेविको नन्दन दिठो, कमी रहे नहीं कांड़ हो । अ० ॥७॥ जहां भेटुं तहां रत्नविजयजी, आवे मुजने याद, जल्दी मुक्ति होजो तेहनी, मुज मन आज प्रहलाद हो ॥ श्र० ॥ ८ ॥ उपकेशगच्छके नायक कहीजे, रत्नप्रभसूरी राया, ज्ञानसुन्दर चाकर चरणोंको, दिन दिन सुख सवाया हो ॥०॥६॥ इति.
न /२ श्री जसरसर मंडल शान्तिनाथजी ( देशी गाराके गीतर )
यागी सुच बनी है ढीनानाथकीजी, मनडो हरख्यां मारो देसी छनी नाथकीजी । टेर । सर्वार्थसिद्ध थकी यावियाजी, मारो मृगीकों रोग निवारीयाजी-माता अचरादेनी जाया, जहोंके सूरवर इन्द्र आया, प्रभुकों मेरुशिखर न्हवाया, इन्द्र महोत्सव करे भक्ति नाथर्किनी ॥ आ० ।। १ ।। मगल गाने इन्द्राणी आयनेजी, माता आसपुरे हुलरायनेजी-माता आसापुरी रमके, नंवर घुघर पगमें घमके, पगल्या घर रया टम टम ठमके, आशा सफळ करी प्रभू मातकिनी ॥ श्रा० ॥ ॥ २ ॥ पचविश सहस्र कुमर पढ गयाजी, इतनाही प्रभु मटलीक ग्याजी-मया छे सढ केरानाथ, ज्याने मुरनर जोड हाय, प्रभुजी तत्वीय त्यागी श्राथ, दीक्षा महोत्सन म्हारा नाथकॉजी ।। श्रा० ॥ ३ ॥ छदमस्त मास केवल जन्योनी, मुर समासरण थानि रच्योजी, प्रभुके चौतीस अति शय छाजे, पानी घन जीयू गाजे, इन्द्र आन वन्दन काने, ना ठीक करे इन्द्राणी सर साथकीजी ॥ था० ॥ ४ म्हेतों थान आनन्द शान्ति लोजी, योतों अष्टापढ उपर रयोजी, येतो पुप्प सुगन्धी लाने, श्रावक आगी सुध रचाये, भावे ज्ञान सुन्दर गुण गावे, जेसलमेरमें निरसी मुद्रा नाथकीजी । मा० ।। ४ ।। इति ।।
नं. १३ श्री जेसलमेर मंडन-वीरप्रभु. वीर तौरे दर्शनकि बलीहारी, ३ । वारी जाउं वार हजारी । वी० ढेर । अनन्त ज्ञान दर्शनकों नायक, लायक शिव सुखधारी अटल अबाधित सुखके दाता, ताते शरण तुम्हारी ।। वी० ॥ १ ॥ सत्ता अनुभवकि रीती, प्रीति की गति न्यारी, भोगिभग योग योग, लखी न जाय गति हारी ।। वी० ।। २ ।। भेदभेद खेद अखेद, जान भारी, अकल कळा गीनी नही जावत, अन्दर रहे के न्यारी । वी० ॥ ३ ॥ सुख न दुःख अनुभव रसमें, रोग ।। सोग रहै न्यारा, चाहत ज्ञान सुधारस, मीलादो सुमति प्यारी । वी० ॥ ४ ॥ इति ।।
नं. १४ श्री जेसलमेरके ज्ञानभंडार.
सुनो चैतन प्यारे भक्ति करोनि श्रुतज्ञानकी ।। ढेर ।। जैसलमेर किलाके अन्दर, चैत्य जिनेश्वर पास, गुप्त भोयरा मोहनसरे, ज्ञानभंडारो खामरे ।। सु० ।। १ ।। दोय उपासरे रहे कुंजीयों, यति श्रावक के पास, श्री संघसे करी याचना, पुरी मनकी आशरे ।। सु० ॥ २ ॥ श्रावक यतिजी आये सरे, खोल दीयो भंडार, स्तुतिकर अन्दर आये हृदय हरष अपाररे ।। सु० ।।३।। गुप्त भंडारा मोहनेसरे, सूत्रपेटी सात, बाविश सौ जाजेरी प्रति, आछे टीपनी वातरे ।। सु० ॥ ४ ॥ भंडार मोहन पडे अंधारो, जीन्हसुं सूत्र लाया बारे, ताडपत्रपर आगम
देखी आनन्द परत्यो म्हारेरे ॥ सु० ॥ ५ ॥ हजार वर्षका जुना टेसा, ताडपनका लेख, सून ओर ग्रन्थ है बहूला में प्रत्यक्ष लीधा देखरे ॥ मु० ॥ ६ ॥ पचागीको साची मानो, जो चाही तुम तीरणो, शका हो तो में बतलाउ, जुठो हठ नहीं करणोरे ॥ सु० ॥ ७॥ जिननाणीसे तीरणो होसी, कलीकालके अन्त, ज्ञान कहे आधार हमारे, जिननाणी महिमावन्तरे ।। सु० ।। ८ ।। इति.
न १५ श्री लोदरवा पाश्वनाथजी ( देशी गोगा )
यो लोदरवाजी भेटनाने, मारा भवभव पातिक मेटवाने ।। आ० ।। टेर ।। चामादेविको नन्दो, तु तो दुरोइ बसीयो, लारेलारे हु पण आयो, तुमेरा चित्तमें धसीयो ।। आ० ॥ १ ॥ ससाररुपी अटनिभारी, डर लागो के तुजने, तेथी आण एकान्ते बेठो, छोड आयो प्रभु मुजने ॥ आ० ॥ २ ॥ विषम चाटने भुट काकरा, शीत सताड मांने, सोरो दोरो आयो साहेन, अरज करी के थांने ।। आ० ।। ३ ।। इतना दिन तो भर्म भटकीयो, फीरीयो चौरासी ताई, पतो न लागो साहेब तोरो, उम्मर वृथा गमाई ॥ श्रा० ॥ ४ ॥ तेरागच्छमें जन्म लीयो पण, दुढक जालमें फसीयो, कुलिंग वेप मुडो बाधी, कमों आगे कसीयो । आ० ॥ ५ ॥ मिथ्या मोहको दूर कर्या, अन अन्तराय गइ भागी, चैतनवलीये कर्म इठाया, अन्तर शुद्ध मति जागी ॥ आ०॥६॥ बहुत दिनोंमेथी
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तेउवायु, वनस्पति दादोंणोरे ॥ ॥ दो ॥ बे, ते, चो, पचेन्द्री तीर्थच, मनुप गतिमें रमीयोरे, व्यतर जोतिपी वैमानिकमें, काल अनता गमीयोरे ।। सुशून्य ॥ तीन ॥ पतला पड्या कर्म हमारा, जद या रुची जागीरे, अब तो नामो मडासु नाहन, तुम वीतरागीरे ।। मुशून्य ।। चार ।। करणी करके सनही तीरीया, काइ बडाइ धारीरे, साचो दाता जवही याशो, मुन निगुणाने दो तारीरे ।। मुशून्य ।। पाँच ।। दुसे पीडीयो चाडो तेडो, बोली चम्पा कीजोरे, ज्ञानसुन्दर चाकर चरणाको, हीचडे लगाई लीजोरे ।। मुशून्य ॥ छः ॥ इति न दस श्री जैसलमेर मडन श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ मुक्ति दिजो चिंतामणिमाने चोडे सुनो चाहे छाने । मुक्तिशून्य ।। लेनदार जो आने बेठे, देरी करे क्या जाने । मुशून्य ॥ एक ॥ पावणो ने मो जिमने जाये, करे टालाटुली शाने ।। मुशून्य ॥ दो ॥ वीणो होवे तो न्यासने आवे, नहीं तो ।। शून्य ।।तीन।। हु छु दीन ने तु है दाता, क्यु तरमावे माने ।। सुशून्य ॥ चार ॥ सर्व पातको जानो साइन, घणो शु कहे थाने ।। मुशून्य ॥ पाँच ॥ इति तुठो तुठोरे चामाको जायो, म्हेतो महेज मुक्त गढ पाया ।। ढेर ।। निज सेवकपर करुया थाणी, अरजीपे हुक्म लगायो ।। तुशून्य ॥ एक ॥ हु छोरु कुन्छो तो पय, लीनो कष्ट लगायो ।। तुशून्य ॥ दो ॥ तीन भुवनका राजसे अधिको, ध्यान आनन्द मोय ।। तुशून्य ।। तीन ।। आज आनन्द रंग ज्ञान बघावो, मो मन हरप सवायो । तुशून्य ॥ चार ॥ इति. नं. बारह श्री जैनलमेर मंडन अष्टापद नायक. अष्टापदन्दो. भरत भराया वि भावसे ।। देर ॥ आदिश्वरजी केवल पायो, भरत वन्दनने आयो. हाथ जोडने प्रश्न पुच्छे, और होंगे जिनराया हो ।। अष्टाशून्य ॥ एक ॥ सुन सरतेश्वर राजवि सरे, भाषे जगदाधिश, इणहीज काले भरत क्षेत्रमें, होसे जिन तेवीस हो ॥ दो ॥ दो ॥ मुन भरतेश्वर श्रष्टापदपर, शिखर बन्ध चोविस, चैत्य कराया वित्र स्थपाया, जिस भाख्या जगदिस हो ।। अशून्य ।। तीन ।। रत्नमय मृतिसरे, वर्ण अवगाहना सरखी, उत्तराध्ययने गौतमस्वामि, चैत्यवन्दन कर निरखी हो ।। ऋशून्य ॥ चार ॥ कृत्यवस्तु संख्याता कालतक, बादि इसपर बोले, देव साहित्य काल असंख्या, जम्बुद्विप नवि खोले हो ।। अशून्य ॥ पाँच ॥ उत्तराध्ययन सागर चक्रीका, पुत्रे रक्षा की आवश्यक में भद्रबाहु विस्तारे टीका लीनी हो । अशून्य ॥ छः ॥ श्रष्टापद नामको मन्दिर, जेसलमेरके मांहि, नरुदेविको नन्दन दिठो, कमी रहे नहीं कांड़ हो । अशून्य ॥सात॥ जहां भेटुं तहां रत्नविजयजी, आवे मुजने याद, जल्दी मुक्ति होजो तेहनी, मुज मन आज प्रहलाद हो ॥ श्रशून्य ॥ आठ ॥ उपकेशगच्छके नायक कहीजे, रत्नप्रभसूरी राया, ज्ञानसुन्दर चाकर चरणोंको, दिन दिन सुख सवाया हो ॥शून्य॥छः॥ इति. न /दो श्री जसरसर मंडल शान्तिनाथजी यागी सुच बनी है ढीनानाथकीजी, मनडो हरख्यां मारो देसी छनी नाथकीजी । टेर । सर्वार्थसिद्ध थकी यावियाजी, मारो मृगीकों रोग निवारीयाजी-माता अचरादेनी जाया, जहोंके सूरवर इन्द्र आया, प्रभुकों मेरुशिखर न्हवाया, इन्द्र महोत्सव करे भक्ति नाथर्किनी ॥ आशून्य ।। एक ।। मगल गाने इन्द्राणी आयनेजी, माता आसपुरे हुलरायनेजी-माता आसापुरी रमके, नंवर घुघर पगमें घमके, पगल्या घर रया टम टम ठमके, आशा सफळ करी प्रभू मातकिनी ॥ श्राशून्य ॥ ॥ दो ॥ पचविश सहस्र कुमर पढ गयाजी, इतनाही प्रभु मटलीक ग्याजी-मया छे सढ केरानाथ, ज्याने मुरनर जोड हाय, प्रभुजी तत्वीय त्यागी श्राथ, दीक्षा महोत्सन म्हारा नाथकॉजी ।। श्राशून्य ॥ तीन ॥ छदमस्त मास केवल जन्योनी, मुर समासरण थानि रच्योजी, प्रभुके चौतीस अति शय छाजे, पानी घन जीयू गाजे, इन्द्र आन वन्दन काने, ना ठीक करे इन्द्राणी सर साथकीजी ॥ थाशून्य ॥ चार म्हेतों थान आनन्द शान्ति लोजी, योतों अष्टापढ उपर रयोजी, येतो पुप्प सुगन्धी लाने, श्रावक आगी सुध रचाये, भावे ज्ञान सुन्दर गुण गावे, जेसलमेरमें निरसी मुद्रा नाथकीजी । माशून्य ।। चार ।। इति ।। नं. तेरह श्री जेसलमेर मंडन-वीरप्रभु. वीर तौरे दर्शनकि बलीहारी, तीन । वारी जाउं वार हजारी । वीशून्य ढेर । अनन्त ज्ञान दर्शनकों नायक, लायक शिव सुखधारी अटल अबाधित सुखके दाता, ताते शरण तुम्हारी ।। वीशून्य ॥ एक ॥ सत्ता अनुभवकि रीती, प्रीति की गति न्यारी, भोगिभग योग योग, लखी न जाय गति हारी ।। वीशून्य ।। दो ।। भेदभेद खेद अखेद, जान भारी, अकल कळा गीनी नही जावत, अन्दर रहे के न्यारी । वीशून्य ॥ तीन ॥ सुख न दुःख अनुभव रसमें, रोग ।। सोग रहै न्यारा, चाहत ज्ञान सुधारस, मीलादो सुमति प्यारी । वीशून्य ॥ चार ॥ इति ।। नं. चौदह श्री जेसलमेरके ज्ञानभंडार. सुनो चैतन प्यारे भक्ति करोनि श्रुतज्ञानकी ।। ढेर ।। जैसलमेर किलाके अन्दर, चैत्य जिनेश्वर पास, गुप्त भोयरा मोहनसरे, ज्ञानभंडारो खामरे ।। सुशून्य ।। एक ।। दोय उपासरे रहे कुंजीयों, यति श्रावक के पास, श्री संघसे करी याचना, पुरी मनकी आशरे ।। सुशून्य ॥ दो ॥ श्रावक यतिजी आये सरे, खोल दीयो भंडार, स्तुतिकर अन्दर आये हृदय हरष अपाररे ।। सुशून्य ।।तीन।। गुप्त भंडारा मोहनेसरे, सूत्रपेटी सात, बाविश सौ जाजेरी प्रति, आछे टीपनी वातरे ।। सुशून्य ॥ चार ॥ भंडार मोहन पडे अंधारो, जीन्हसुं सूत्र लाया बारे, ताडपत्रपर आगम देखी आनन्द परत्यो म्हारेरे ॥ सुशून्य ॥ पाँच ॥ हजार वर्षका जुना टेसा, ताडपनका लेख, सून ओर ग्रन्थ है बहूला में प्रत्यक्ष लीधा देखरे ॥ मुशून्य ॥ छः ॥ पचागीको साची मानो, जो चाही तुम तीरणो, शका हो तो में बतलाउ, जुठो हठ नहीं करणोरे ॥ सुशून्य ॥ सात॥ जिननाणीसे तीरणो होसी, कलीकालके अन्त, ज्ञान कहे आधार हमारे, जिननाणी महिमावन्तरे ।। सुशून्य ।। आठ ।। इति. न पंद्रह श्री लोदरवा पाश्वनाथजी यो लोदरवाजी भेटनाने, मारा भवभव पातिक मेटवाने ।। आशून्य ।। टेर ।। चामादेविको नन्दो, तु तो दुरोइ बसीयो, लारेलारे हु पण आयो, तुमेरा चित्तमें धसीयो ।। आशून्य ॥ एक ॥ ससाररुपी अटनिभारी, डर लागो के तुजने, तेथी आण एकान्ते बेठो, छोड आयो प्रभु मुजने ॥ आशून्य ॥ दो ॥ विषम चाटने भुट काकरा, शीत सताड मांने, सोरो दोरो आयो साहेन, अरज करी के थांने ।। आशून्य ।। तीन ।। इतना दिन तो भर्म भटकीयो, फीरीयो चौरासी ताई, पतो न लागो साहेब तोरो, उम्मर वृथा गमाई ॥ श्राशून्य ॥ चार ॥ तेरागच्छमें जन्म लीयो पण, दुढक जालमें फसीयो, कुलिंग वेप मुडो बाधी, कमों आगे कसीयो । आशून्य ॥ पाँच ॥ मिथ्या मोहको दूर कर्या, अन अन्तराय गइ भागी, चैतनवलीये कर्म इठाया, अन्तर शुद्ध मति जागी ॥ आशून्य॥छः॥ बहुत दिनोंमेथी
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एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल उच्च शिक्षा निदेशालय में छात्रों की समस्याओं को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक से मिला। इस दौरान मांग पत्र के माध्यम से एसएफआई ने छात्रों की समस्याओं को सरकार व प्रशासन के समक्ष रखा। एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर ने विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए बताया कि चार मई को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा अंतिम वर्ष के नर्सिंग छात्रों के परिणाम घोषित किए गए। लेकिन परिणाम बहुत चौंकाने वाला है कि अधिकांश छात्र विभिन्न विषयों में फेल हुए है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि फेल किए गए छात्रों में अधिकतर छात्राएं वह है, जो स्कूल से लेकर नर्सिंग के पिछले सेमेस्टर तक टॉपर भी यह चुके हैं।
एसएफआई ने कहा कि पिछले एक वर्ष में एक ओर छात्रों की लॉकडाउन के चलते बहुत कम कक्षाएं हुई है, दूसरी ओर हास्पिटल के अंदर कोई प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी नहीं हुआ है, ऐसे में छात्राओं को ग्रेस माक्र्स देने के बजाय प्रशासन ने अधिकतर छात्राओं को ऐसे विषयों में फेल कर दिया है, जिसमें कोई गुंजाइश ही नहीं मानी जा सकती थी। एसएफआई ने मांग उठाई है कि प्रशासन शीघ्र नर्सिंग छात्राओं की ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड़ से रिअपीयर की परीक्षाएं आयोजित करें। ताकि प्लेसमेंट ले चुकी छात्राएं निरन्तर अपने हास्पिटल में सेवाएं दे सकें, अन्यथा उन्हें नौकरी से हाथ धोने पड़ेंगे। एसएफआई ने कहा कि रोजगार के साधन छिन जाने के कारण प्रदेश के आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बड़ा है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षण संस्थान द्वारा छात्रों को एकमुश्त पिछली फीस को चुकाने के लिए जिस तरह से प्रताडि़त किया जा रहा है, वह अमानवीय है, जिसकी एसएफआई कड़े शब्दों में निंदा करती है। एसएफआई राज्य कमेटी ने कहा कि पिछले एक वर्ष मे मात्र ऑनलाइन माध्यम से ही सभी शिक्षण संस्थानों ने कक्षाएं ली है। ऐसे में संस्थानों के बाकी खर्चे भी बहुत कम है। इसीलिए एसएफआई सरकार से मांग करती है कि छात्रों से अतिरिक्त फीस वसूलने के बजाय सरकार सभी छात्रों को सालाना फीस व होस्टल चार्जेज में छूट दें।
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एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल उच्च शिक्षा निदेशालय में छात्रों की समस्याओं को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक से मिला। इस दौरान मांग पत्र के माध्यम से एसएफआई ने छात्रों की समस्याओं को सरकार व प्रशासन के समक्ष रखा। एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर ने विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए बताया कि चार मई को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा अंतिम वर्ष के नर्सिंग छात्रों के परिणाम घोषित किए गए। लेकिन परिणाम बहुत चौंकाने वाला है कि अधिकांश छात्र विभिन्न विषयों में फेल हुए है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि फेल किए गए छात्रों में अधिकतर छात्राएं वह है, जो स्कूल से लेकर नर्सिंग के पिछले सेमेस्टर तक टॉपर भी यह चुके हैं। एसएफआई ने कहा कि पिछले एक वर्ष में एक ओर छात्रों की लॉकडाउन के चलते बहुत कम कक्षाएं हुई है, दूसरी ओर हास्पिटल के अंदर कोई प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी नहीं हुआ है, ऐसे में छात्राओं को ग्रेस माक्र्स देने के बजाय प्रशासन ने अधिकतर छात्राओं को ऐसे विषयों में फेल कर दिया है, जिसमें कोई गुंजाइश ही नहीं मानी जा सकती थी। एसएफआई ने मांग उठाई है कि प्रशासन शीघ्र नर्सिंग छात्राओं की ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड़ से रिअपीयर की परीक्षाएं आयोजित करें। ताकि प्लेसमेंट ले चुकी छात्राएं निरन्तर अपने हास्पिटल में सेवाएं दे सकें, अन्यथा उन्हें नौकरी से हाथ धोने पड़ेंगे। एसएफआई ने कहा कि रोजगार के साधन छिन जाने के कारण प्रदेश के आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बड़ा है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षण संस्थान द्वारा छात्रों को एकमुश्त पिछली फीस को चुकाने के लिए जिस तरह से प्रताडि़त किया जा रहा है, वह अमानवीय है, जिसकी एसएफआई कड़े शब्दों में निंदा करती है। एसएफआई राज्य कमेटी ने कहा कि पिछले एक वर्ष मे मात्र ऑनलाइन माध्यम से ही सभी शिक्षण संस्थानों ने कक्षाएं ली है। ऐसे में संस्थानों के बाकी खर्चे भी बहुत कम है। इसीलिए एसएफआई सरकार से मांग करती है कि छात्रों से अतिरिक्त फीस वसूलने के बजाय सरकार सभी छात्रों को सालाना फीस व होस्टल चार्जेज में छूट दें।
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दिल्ली पुलिस ने 4 साल के बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर बच्चे को सही-सलामत बरामद कर परिवार के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को 4 साल के बच्चे का अपहरण करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
नई दिल्ली, एएनआई। दिल्ली पुलिस ने 4 साल के बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर बच्चे को सही-सलामत बरामद कर परिवार को सुपुर्द कर दिया है।
पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को 4 साल के बच्चे के अपहरण करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। शुरुआती जांच में पता चलता कि बच्चा का अपहरण तब किया गया था, जब सोमवार को महिला दिल्ली के कैंट थाना क्षेत्र में अपने बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी।
इसी दौरान ऑटो ड्राइवर ने कथित तौर पर मासूम की मां से छेड़छाड़ की तो वह खुद को बचाने के लिए वहां से भाग गई थी। इसके बाद आरोपित घटनास्थल से बच्चे को अपने साथ लेकर फरार हो गया था।
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दिल्ली पुलिस ने चार साल के बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर बच्चे को सही-सलामत बरामद कर परिवार के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को चार साल के बच्चे का अपहरण करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। नई दिल्ली, एएनआई। दिल्ली पुलिस ने चार साल के बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर बच्चे को सही-सलामत बरामद कर परिवार को सुपुर्द कर दिया है। पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को चार साल के बच्चे के अपहरण करने वाले आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। शुरुआती जांच में पता चलता कि बच्चा का अपहरण तब किया गया था, जब सोमवार को महिला दिल्ली के कैंट थाना क्षेत्र में अपने बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी। इसी दौरान ऑटो ड्राइवर ने कथित तौर पर मासूम की मां से छेड़छाड़ की तो वह खुद को बचाने के लिए वहां से भाग गई थी। इसके बाद आरोपित घटनास्थल से बच्चे को अपने साथ लेकर फरार हो गया था।
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है और कुछ ही देर बाद मेडिकल टेस्ट के लिए लेकर जाएगी।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, मेडिकल टेस्ट शाम 5 बजे के आसपास होगा। रिया ने आज पहली बार ड्रग्स लेने की बात स्वीकार की है। वहीं ड्रग्स मामले में एनसीबी 25 बॉलीवुड सेलेब्स को समन करेगा।
वहीं रिया चक्रवर्ती की एफआईआर को रद्द करने के लिए सुशांत का परिवार मुंबई हाईकोर्ट का रुख कर सकता है। परिवार के वकील का कहना है कि रिया ने मुंबई पुलिस के साथ मिलकर गलत एफआईआर दर्ज कराई है।
सुशांत के परिवार को इस एफआईआर से आपत्ति है क्योंकि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है और कुछ ही देर बाद मेडिकल टेस्ट के लिए लेकर जाएगी। खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, मेडिकल टेस्ट शाम पाँच बजे के आसपास होगा। रिया ने आज पहली बार ड्रग्स लेने की बात स्वीकार की है। वहीं ड्रग्स मामले में एनसीबी पच्चीस बॉलीवुड सेलेब्स को समन करेगा। वहीं रिया चक्रवर्ती की एफआईआर को रद्द करने के लिए सुशांत का परिवार मुंबई हाईकोर्ट का रुख कर सकता है। परिवार के वकील का कहना है कि रिया ने मुंबई पुलिस के साथ मिलकर गलत एफआईआर दर्ज कराई है। सुशांत के परिवार को इस एफआईआर से आपत्ति है क्योंकि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
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