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भारत में कोरोना वायरस की चौथी लहर के सिग्नल मिल रहे हैं। कोविड-19 के मामलों में पिछले कुछ दिन से काफी तेज उछाल देखने को मिला है। जनवरी 2022 में तीसरी लहर के बाद पहली बार एक दिन में 7,000 से ज्यादा दर्ज किए गए। एक ही दिन के अंतर पर नए संक्रमितों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
सिर्फ 10 दिन के भीतर ही रोज आने वाले मामलों का सात दिनी औसत दोगुना हो गया है। बुधवार को 7,230 कोविड-19 केस मिले। टेस्ट पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 2. 3% पहुंच गया जो कि फरवरी 2015 के बाद सबसे ज्यादा है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के कोविड डेटाबेस के अनुसार, यह आंकड़ा 1 मार्च के बाद सर्वाधिक है। गुरुवार को 7,500 से ज्यादा केस आए।
कोरोना मामलों में सबसे चिंताजनक स्थिति महाराष्ट्र और केरल की है। बुधवार को देशभर से आए कोविड मामलों का करीब 70% इन्हीं दो राज्यों से था। आंकड़ों में सिल्वर लाइनिंग यह है कि मृत्यु-दर कम रही है। रविवार को खत्म हुए सप्ताह में 24 मृत्यु दर्ज हुईं और इस हफ्ते अभी तक 11 मरीजों ने दम तोड़ा है। इन आंकड़ों में पिछले दिनों का रीकंसिलिएशन डेटा शामिल नहीं है।
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भारत में कोरोना वायरस की चौथी लहर के सिग्नल मिल रहे हैं। कोविड-उन्नीस के मामलों में पिछले कुछ दिन से काफी तेज उछाल देखने को मिला है। जनवरी दो हज़ार बाईस में तीसरी लहर के बाद पहली बार एक दिन में सात,शून्य से ज्यादा दर्ज किए गए। एक ही दिन के अंतर पर नए संक्रमितों में करीब चालीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ दस दिन के भीतर ही रोज आने वाले मामलों का सात दिनी औसत दोगुना हो गया है। बुधवार को सात,दो सौ तीस कोविड-उन्नीस केस मिले। टेस्ट पॉजिटिविटी रेट बढ़कर दो. तीन% पहुंच गया जो कि फरवरी दो हज़ार पंद्रह के बाद सबसे ज्यादा है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के कोविड डेटाबेस के अनुसार, यह आंकड़ा एक मार्च के बाद सर्वाधिक है। गुरुवार को सात,पाँच सौ से ज्यादा केस आए। कोरोना मामलों में सबसे चिंताजनक स्थिति महाराष्ट्र और केरल की है। बुधवार को देशभर से आए कोविड मामलों का करीब सत्तर% इन्हीं दो राज्यों से था। आंकड़ों में सिल्वर लाइनिंग यह है कि मृत्यु-दर कम रही है। रविवार को खत्म हुए सप्ताह में चौबीस मृत्यु दर्ज हुईं और इस हफ्ते अभी तक ग्यारह मरीजों ने दम तोड़ा है। इन आंकड़ों में पिछले दिनों का रीकंसिलिएशन डेटा शामिल नहीं है।
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लेकिन जब साइनस का रास्ता रूक जाता है और उपचार के तीन महीने बाद तक भी स्थिति नहीं बदलती, तो यह साइनोसाइटिस की समस्या बन जाती है। जिसकी वजह से न केवल नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बल्कि इसकी वजह से या तो नाक हर समय बहती रहती है या फिर नाक भरी रहती है। यही नहीं साइनोसाइटिस की स्थिति गले की दिक्कत भी पैदा कर सकता है और आंख के आस पास भी सूजन आ सकती है।
योग और भारतीय आयुर्वेद के प्राचीन चिकित्सकों ने एक ऐसी तकनीक को इजाद किया है जो साइनस के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको बता दें कि हठयोग प्रदीपिका में जल नीति छह शुद्धिकरण तकनीकों में से एक है, जिसे षट्कर्म कहा जाता है। ज्ञात हो कि यह वाटर क्लीनिंग का एक संस्कृत शब्द है।
आप शायद न जानते हों इसलिए बता दें कि नैसेल कंजेशन और इरिटेशन से राहत पाने के लिए इरिगेशन एक बेहतरीन टेक्निक है। इस टेक्निक में सैलाइन सॉल्यूशन के जरिए नेजल पैसेज को साफ किया जाता है। आप यह किसी बोतल या नीति पोट के जरिए कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसके उपयोग से पहले और बाद में इन्हें साफ जरूर करे। इसके अलावा उबला हुआ पानी ठंडा होने के बाद ही इस्तेमाल में ले और बिना स्टरलाइज किए नल के पानी का उपयोग न करें। इस टेक्निक के लिए बाजार से सेलाइन वाटर खरीद सकते हैं, या फिर घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक चम्मच सी सॉल्ट और फिल्टर पानी एवं एक चुटकी बेकिंग सोडा की जरूरत होगी। इसे घोल कर मिला लें। इसके बाद इस्तेमाल में लें।
इस समस्या से राहत पाने के लिए कोशिश करें कि आप गर्म पेय पदार्थों या गर्म चीजों से परहेज न करें। इसके अलावा आप अपने घर में ह्यूमिडिफायर और वेपोराइजर का भी उपयोग कर सकते हैं। यह आपके आस पास नमी बनाए रखने काम करते हैं और नाक के अंदर रूखेपन से राहत दिलाते हैं। लेकिन ध्यान रहे ह्यूमिडिफायर पूरी तरह साफ हो यानी इसमें फंगस न लगी हो। आप घर में एक पोर्टेबल हुमिडिफिएर का उपयोग करें ताकि अन्य कमरों में भी इसे ले जाया जा सके।
जानकारों के मुताबिक चिकन सूप सर्द मौसम में बेहतर इम्युनिटी प्रदान कर सकता है। वहीं हार्वर्ड के चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक यह साइनोसाइटिस में लाभदायक है या नहीं इस पर अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इससे जुड़े हुए कोई भी प्रमाण मौजूद नहीं है, जो इस बात को साबित करें कि चिकन सूप साइनोसाइटिस में फायदेमंद हो सकता है। हालांकि चिकन सूप में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री जैसे गाजर, प्याज, अजवाइन इसे पोषक तत्वों से समृद्ध करता है। चिकन सूप में विटामिन सी, विटामिन ए, जिंक और कई एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो आपकी साइनोसाइटिस की स्थिति में सुधार ला सकते हैं। वहीं इसे पीने के लिए आपको डॉक्टर की राय की जरूरत नहीं है।
आप जानते ही होंगे कि स्टीम लेने से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट साफ होता है यह कंजेशन से राहत दिलाता है। इसके अलावा आपको बता दें कि बलगम को पतला कर साइनस से भी आराम दिलाने का काम करता है। ऐसे में अगर आप भी साइनस से राहत चाहते हैं तो बाजार में मौजूद किसी स्टीम मशीन का उपयोग कर स्टीम ले सकते हैं। अगर स्टीम मशीन नहीं ले सकते तो आप एक कटोरे में पानी को उबालकर और सिर पर तौलिया डालकर भी स्टीम ले सकते हैं। इससे आपको बहुत राहत मिलेगी। ध्यान रहे कि स्टीम में कोई भी दवा मिलाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले।
साइनस की स्थिति से राहत पाने के लिए आप चाहे तो ठंडे और गर्म सेक का उपयोग कर सकते हैं। इसमें आपको पहले तीन मिनट के लिए नाक, गाल और माथे पर हॉट कम्प्रेस रखना है। इसके बाद 30 सेकंड के लिए कोल्ड कम्प्रेस रखें। ऐसा करीब 10 से 15 मिनट तक करते रहें। साइनस से राहत पाने के लिए आप दिन में 4 से 6 बार दोहराए।
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लेकिन जब साइनस का रास्ता रूक जाता है और उपचार के तीन महीने बाद तक भी स्थिति नहीं बदलती, तो यह साइनोसाइटिस की समस्या बन जाती है। जिसकी वजह से न केवल नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बल्कि इसकी वजह से या तो नाक हर समय बहती रहती है या फिर नाक भरी रहती है। यही नहीं साइनोसाइटिस की स्थिति गले की दिक्कत भी पैदा कर सकता है और आंख के आस पास भी सूजन आ सकती है। योग और भारतीय आयुर्वेद के प्राचीन चिकित्सकों ने एक ऐसी तकनीक को इजाद किया है जो साइनस के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको बता दें कि हठयोग प्रदीपिका में जल नीति छह शुद्धिकरण तकनीकों में से एक है, जिसे षट्कर्म कहा जाता है। ज्ञात हो कि यह वाटर क्लीनिंग का एक संस्कृत शब्द है। आप शायद न जानते हों इसलिए बता दें कि नैसेल कंजेशन और इरिटेशन से राहत पाने के लिए इरिगेशन एक बेहतरीन टेक्निक है। इस टेक्निक में सैलाइन सॉल्यूशन के जरिए नेजल पैसेज को साफ किया जाता है। आप यह किसी बोतल या नीति पोट के जरिए कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसके उपयोग से पहले और बाद में इन्हें साफ जरूर करे। इसके अलावा उबला हुआ पानी ठंडा होने के बाद ही इस्तेमाल में ले और बिना स्टरलाइज किए नल के पानी का उपयोग न करें। इस टेक्निक के लिए बाजार से सेलाइन वाटर खरीद सकते हैं, या फिर घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक चम्मच सी सॉल्ट और फिल्टर पानी एवं एक चुटकी बेकिंग सोडा की जरूरत होगी। इसे घोल कर मिला लें। इसके बाद इस्तेमाल में लें। इस समस्या से राहत पाने के लिए कोशिश करें कि आप गर्म पेय पदार्थों या गर्म चीजों से परहेज न करें। इसके अलावा आप अपने घर में ह्यूमिडिफायर और वेपोराइजर का भी उपयोग कर सकते हैं। यह आपके आस पास नमी बनाए रखने काम करते हैं और नाक के अंदर रूखेपन से राहत दिलाते हैं। लेकिन ध्यान रहे ह्यूमिडिफायर पूरी तरह साफ हो यानी इसमें फंगस न लगी हो। आप घर में एक पोर्टेबल हुमिडिफिएर का उपयोग करें ताकि अन्य कमरों में भी इसे ले जाया जा सके। जानकारों के मुताबिक चिकन सूप सर्द मौसम में बेहतर इम्युनिटी प्रदान कर सकता है। वहीं हार्वर्ड के चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक यह साइनोसाइटिस में लाभदायक है या नहीं इस पर अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इससे जुड़े हुए कोई भी प्रमाण मौजूद नहीं है, जो इस बात को साबित करें कि चिकन सूप साइनोसाइटिस में फायदेमंद हो सकता है। हालांकि चिकन सूप में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री जैसे गाजर, प्याज, अजवाइन इसे पोषक तत्वों से समृद्ध करता है। चिकन सूप में विटामिन सी, विटामिन ए, जिंक और कई एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो आपकी साइनोसाइटिस की स्थिति में सुधार ला सकते हैं। वहीं इसे पीने के लिए आपको डॉक्टर की राय की जरूरत नहीं है। आप जानते ही होंगे कि स्टीम लेने से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट साफ होता है यह कंजेशन से राहत दिलाता है। इसके अलावा आपको बता दें कि बलगम को पतला कर साइनस से भी आराम दिलाने का काम करता है। ऐसे में अगर आप भी साइनस से राहत चाहते हैं तो बाजार में मौजूद किसी स्टीम मशीन का उपयोग कर स्टीम ले सकते हैं। अगर स्टीम मशीन नहीं ले सकते तो आप एक कटोरे में पानी को उबालकर और सिर पर तौलिया डालकर भी स्टीम ले सकते हैं। इससे आपको बहुत राहत मिलेगी। ध्यान रहे कि स्टीम में कोई भी दवा मिलाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले। साइनस की स्थिति से राहत पाने के लिए आप चाहे तो ठंडे और गर्म सेक का उपयोग कर सकते हैं। इसमें आपको पहले तीन मिनट के लिए नाक, गाल और माथे पर हॉट कम्प्रेस रखना है। इसके बाद तीस सेकंड के लिए कोल्ड कम्प्रेस रखें। ऐसा करीब दस से पंद्रह मिनट तक करते रहें। साइनस से राहत पाने के लिए आप दिन में चार से छः बार दोहराए।
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बॉलावुड डेस्क, मुबई. धड़क से अपनी अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस जान्हवी कपूर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना पसंद करती हैं. इसके अलावा वो अपने से साथ अपनी एक्टिविटीज भी काफी शेयर करती हैं और अपने फैन्स के साथ अपनी हॉट एंड सेक्सी फोटो और वीडियो शेयर करती रहती हैं. वहीं अक्सर का सेक्सी लुक इंटरनेट पर वायरल रहता हैं. वहीं हाल ही में जान्हवी कपूर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंटर पर अपनी कुछ बेहद ही सेक्सी फोटो शेयर की है. फोटो में जान्हवी कपूर पिंक कलर के पैंट सूट में काफा बोल्ड नजर आ रही हैं.
जान्हवी कपूर द्वारा शेयर की गई इस फोटो को फैन्स द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. फोटो पर काफी संख्या लाइक और कमेंट्स आ चुके हैं. इसके साथ ही इसी लुक में जान्हवी कपूर की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. वीडियो को कई बार देखी जा चुकी हैं. इसके साथ ही वीडियो में भी जान्हवी कपूर के इस अवातार को काफी पसंद किया जा रहा है.
बता दें कि जाह्नवी कपूर जल्द ही महिला पायलट गुंजन सक्सेना की बायोपिक में नजर आने वाली हैं. इससे पहले जाह्नवी कपूर की फोटो भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी, जिसमें जाह्नवी पायलट गुंजन के किरदार में नजर आ रही थी. गुंजन 1990 में हुए कारगिल युद्द् में घायल हो गई थी. इस फिल्म के अलावा गुंजन करण जौहर की अगली फिल्म तख्त में नजर आएंगी. जाह्नवी कपू जल्द ही फिल्म गुंजन सक्सेना की शूटिंग शुरू कर देंगी.
इसके अलावा जाह्नवी कपूर रुही अफजा फिल्म में डबल भूमिका में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में जाह्नवी कपूर और राजकुमार राव रोमांस करते हुए दिखाई देंगे. इसके अलावा जाह्नवी कपूर करण जौहर की फिल्म तख्त में दिखाई देंगी. इस फिल्म में रणवीर सिंह, करीना कपूर, आलिया भट्ट, विक्की कौशल, अनिल कपूर, भूमि पेडनेकर अहम भूमिका में नजर आने वाले हैं.
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बॉलावुड डेस्क, मुबई. धड़क से अपनी अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस जान्हवी कपूर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना पसंद करती हैं. इसके अलावा वो अपने से साथ अपनी एक्टिविटीज भी काफी शेयर करती हैं और अपने फैन्स के साथ अपनी हॉट एंड सेक्सी फोटो और वीडियो शेयर करती रहती हैं. वहीं अक्सर का सेक्सी लुक इंटरनेट पर वायरल रहता हैं. वहीं हाल ही में जान्हवी कपूर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंटर पर अपनी कुछ बेहद ही सेक्सी फोटो शेयर की है. फोटो में जान्हवी कपूर पिंक कलर के पैंट सूट में काफा बोल्ड नजर आ रही हैं. जान्हवी कपूर द्वारा शेयर की गई इस फोटो को फैन्स द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. फोटो पर काफी संख्या लाइक और कमेंट्स आ चुके हैं. इसके साथ ही इसी लुक में जान्हवी कपूर की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. वीडियो को कई बार देखी जा चुकी हैं. इसके साथ ही वीडियो में भी जान्हवी कपूर के इस अवातार को काफी पसंद किया जा रहा है. बता दें कि जाह्नवी कपूर जल्द ही महिला पायलट गुंजन सक्सेना की बायोपिक में नजर आने वाली हैं. इससे पहले जाह्नवी कपूर की फोटो भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी, जिसमें जाह्नवी पायलट गुंजन के किरदार में नजर आ रही थी. गुंजन एक हज़ार नौ सौ नब्बे में हुए कारगिल युद्द् में घायल हो गई थी. इस फिल्म के अलावा गुंजन करण जौहर की अगली फिल्म तख्त में नजर आएंगी. जाह्नवी कपू जल्द ही फिल्म गुंजन सक्सेना की शूटिंग शुरू कर देंगी. इसके अलावा जाह्नवी कपूर रुही अफजा फिल्म में डबल भूमिका में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में जाह्नवी कपूर और राजकुमार राव रोमांस करते हुए दिखाई देंगे. इसके अलावा जाह्नवी कपूर करण जौहर की फिल्म तख्त में दिखाई देंगी. इस फिल्म में रणवीर सिंह, करीना कपूर, आलिया भट्ट, विक्की कौशल, अनिल कपूर, भूमि पेडनेकर अहम भूमिका में नजर आने वाले हैं.
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बारां। जिला कलेक्टर डॉ. एस. पी. सिंह ने कहा कि आमजन सजग व जागरूक रहते हुए प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही पात्र व्यक्तियों को इन योजनाओं से जोडऩे में सहायक बन सकते हैं।
डॉ. सिंह पंचायत समिति शाहबाद की ग्राम पंचायत मुंडियर के अटल सेवा केन्द्र में शनिवार को आयोजित रात्रि चौपाल के तहत जनसुनवाई में ग्रामवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा वृद्ध, विशेष योग्यजन, विधवा, गर्भवती महिलाएं, विद्यार्थियों, कृषकों समेत विभिन्न वर्गों के लिए कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है, इन योजनाओं की जानकारी के अभाव में कई पात्र व्यक्ति उनका लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। अतः जागरूक होकर सरपंच, पटवारी, ग्राम सेवक, विकास अधिकारी व अन्य से लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका समुचित लाभ अवश्य लें। साथ ही उन्होंने कहा कि आमजन बिजली, पानी, सडक़, अतिक्रमण समेत अन्य किसी भी समस्या को अटल सेवा केन्द्र पर आकर लिखित में दर्ज करवाएं एवं उसकी रसीद भी लें, जिससे परिवादी की समस्या को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज कर उसके निस्तारण के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा सके। संपर्क पोर्टल पर दर्ज समस्या की जांच के बाद उसमें सत्यता पाई जाती है तो परिवादी को त्वरित राहत प्रदान की जाती है।
जनसुनवाई में बिजली, पानी, सडक़, खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोडऩे, बीपीएल सूची एवं प्रधानमंत्री आवास योजना में पंजीकृत करने समेत विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को निस्तारण के निर्देश प्रदान किए। कलेक्टर डॉ. सिंह ने इस मौके पर प्रत्येक ग्रामवासी को घर में शौचालय बनाने एवं उसका उपयोग करने की बात कही, जिससे गांव को स्वस्थ व स्वच्छ बनाया जा सके।
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बारां। जिला कलेक्टर डॉ. एस. पी. सिंह ने कहा कि आमजन सजग व जागरूक रहते हुए प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही पात्र व्यक्तियों को इन योजनाओं से जोडऩे में सहायक बन सकते हैं। डॉ. सिंह पंचायत समिति शाहबाद की ग्राम पंचायत मुंडियर के अटल सेवा केन्द्र में शनिवार को आयोजित रात्रि चौपाल के तहत जनसुनवाई में ग्रामवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा वृद्ध, विशेष योग्यजन, विधवा, गर्भवती महिलाएं, विद्यार्थियों, कृषकों समेत विभिन्न वर्गों के लिए कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है, इन योजनाओं की जानकारी के अभाव में कई पात्र व्यक्ति उनका लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। अतः जागरूक होकर सरपंच, पटवारी, ग्राम सेवक, विकास अधिकारी व अन्य से लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका समुचित लाभ अवश्य लें। साथ ही उन्होंने कहा कि आमजन बिजली, पानी, सडक़, अतिक्रमण समेत अन्य किसी भी समस्या को अटल सेवा केन्द्र पर आकर लिखित में दर्ज करवाएं एवं उसकी रसीद भी लें, जिससे परिवादी की समस्या को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज कर उसके निस्तारण के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा सके। संपर्क पोर्टल पर दर्ज समस्या की जांच के बाद उसमें सत्यता पाई जाती है तो परिवादी को त्वरित राहत प्रदान की जाती है। जनसुनवाई में बिजली, पानी, सडक़, खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोडऩे, बीपीएल सूची एवं प्रधानमंत्री आवास योजना में पंजीकृत करने समेत विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को निस्तारण के निर्देश प्रदान किए। कलेक्टर डॉ. सिंह ने इस मौके पर प्रत्येक ग्रामवासी को घर में शौचालय बनाने एवं उसका उपयोग करने की बात कही, जिससे गांव को स्वस्थ व स्वच्छ बनाया जा सके।
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धमर्पुर (मंडी). धर्मपुर की धवाली पंचायत के गांव चंजयार शनिवार को एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर झूलने से मौत हो गई थी. इसे लेकर मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना की आड़ में हत्या करने का आरोप लगाया है. वही ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है.
पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर सरकाघाट अस्पताल में बकायदा पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया था. परिवार ने शनिवार को ही देर शाम को मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया था. अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने मृतका के पति को श्मशान घाट से ही हिरासत में ले लिया था.
रविवार को पुलिस ने मृतका के मायके वालों के बयान दर्ज किए वहीं पर मृतका के पति को सरकाघाट कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. डीएसपी सरकाघाट कर्ण गुलेरिया ने बताया कि मृतका के पति को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे तीन दिन का पुलिस रिमांड मिला है. अब उससे पूछताछ करके व पोस्टमार्टम की बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
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धमर्पुर . धर्मपुर की धवाली पंचायत के गांव चंजयार शनिवार को एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर झूलने से मौत हो गई थी. इसे लेकर मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना की आड़ में हत्या करने का आरोप लगाया है. वही ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर सरकाघाट अस्पताल में बकायदा पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया था. परिवार ने शनिवार को ही देर शाम को मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया था. अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने मृतका के पति को श्मशान घाट से ही हिरासत में ले लिया था. रविवार को पुलिस ने मृतका के मायके वालों के बयान दर्ज किए वहीं पर मृतका के पति को सरकाघाट कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. डीएसपी सरकाघाट कर्ण गुलेरिया ने बताया कि मृतका के पति को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे तीन दिन का पुलिस रिमांड मिला है. अब उससे पूछताछ करके व पोस्टमार्टम की बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
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लखनऊ। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रेप मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा में फैली हिंसा की आग दिल्ली पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में सात जगहों पर हिंसा की खबर है। वहां धारा 144 लगा दी गई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की।दिल्ली के सभी एसएचओ, एसीपी, डीसीपी और ज्वाइंट सीपी अपने इलाकों में पेट्रोलिंग कर रहे हैं. ताकि किसी भी तरह की हिंसा न भड़के। गृह सचिव ने हरियाणा, पंजाब के डीजीपी और सीएस से बात करने के साथ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से भी बात की।
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लखनऊ। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रेप मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा में फैली हिंसा की आग दिल्ली पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में सात जगहों पर हिंसा की खबर है। वहां धारा एक सौ चौंतालीस लगा दी गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की।दिल्ली के सभी एसएचओ, एसीपी, डीसीपी और ज्वाइंट सीपी अपने इलाकों में पेट्रोलिंग कर रहे हैं. ताकि किसी भी तरह की हिंसा न भड़के। गृह सचिव ने हरियाणा, पंजाब के डीजीपी और सीएस से बात करने के साथ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से भी बात की।
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क्या आप जानते हैं कि इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए मिलने वाली जिन नौकरियों के लिए देश के करोड़ों युवा लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, उन पर सैलरी कितनी मिलती है? इस भर्ती के लिए किन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है? आरआरबी एनटीपीसी के जरिए किन पदों पर नौकरी मिलती है? शैक्षणिक योग्यता क्या मांगी जाती है? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको यहां बता रहे हैं।
इस भर्ती के जरिए रेलवे के विभिन्न विभागों में कई अलग-अलग पद भरे जाते हैं। इसके लिए ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट दोनों के लिए पद निकाले जाते हैं। यानी अगर आप ग्रेजुएशन पूरा कर चुके हैं या फिर अभी ग्रेजुएशन कर रहे हैं, या फिर 12वीं पास हैं. . तो आरआरबी एनटीपीसी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके लिए उम्र सीमा न्यूनतम 18 साल से लेकर अलग-अलग पदों के लिए अधिकतम अलग-अलग निर्धारित की जाती है। आरक्षण के आधार पर छूट का लाभ भी मिलता है।
पहला चरण कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा (Tier 1 CBT) होता है। दूसरा चरण भी कंप्टूयर बेस्ड परीक्षा (Tier 2 CBT) होता है। तीसरे चरण में टाइपिंक स्किल टेस्ट / कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट (जैसा एप्लीकेबल हो) लिया जाता है। इन तीनों चरणों में सफल उम्मीदवारों को फिर दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाता है। उसके बाद निर्धारित पदों पर नियुक्ति दी जाती है।
यहां हम आपको पदों के अनुसार उनके इनीशियल पे (Initial Pay / Basic Pay) के बारे में बता रहे हैं। इनीशियल पे के अलावा सभी पदों पर अभ्यर्थियों को क्षेत्रों के अनुसार, हाउस रेंट (HRA), महंगाई भत्ता (DA), परिवहन भत्ता (TA), पेंशन स्कीम, मेडिकल व अन्य भत्तों का लाभ दिया जता है।
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क्या आप जानते हैं कि इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए मिलने वाली जिन नौकरियों के लिए देश के करोड़ों युवा लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, उन पर सैलरी कितनी मिलती है? इस भर्ती के लिए किन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है? आरआरबी एनटीपीसी के जरिए किन पदों पर नौकरी मिलती है? शैक्षणिक योग्यता क्या मांगी जाती है? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको यहां बता रहे हैं। इस भर्ती के जरिए रेलवे के विभिन्न विभागों में कई अलग-अलग पद भरे जाते हैं। इसके लिए ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट दोनों के लिए पद निकाले जाते हैं। यानी अगर आप ग्रेजुएशन पूरा कर चुके हैं या फिर अभी ग्रेजुएशन कर रहे हैं, या फिर बारहवीं पास हैं. . तो आरआरबी एनटीपीसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उम्र सीमा न्यूनतम अट्ठारह साल से लेकर अलग-अलग पदों के लिए अधिकतम अलग-अलग निर्धारित की जाती है। आरक्षण के आधार पर छूट का लाभ भी मिलता है। पहला चरण कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा होता है। दूसरा चरण भी कंप्टूयर बेस्ड परीक्षा होता है। तीसरे चरण में टाइपिंक स्किल टेस्ट / कंप्यूटर बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट लिया जाता है। इन तीनों चरणों में सफल उम्मीदवारों को फिर दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाता है। उसके बाद निर्धारित पदों पर नियुक्ति दी जाती है। यहां हम आपको पदों के अनुसार उनके इनीशियल पे के बारे में बता रहे हैं। इनीशियल पे के अलावा सभी पदों पर अभ्यर्थियों को क्षेत्रों के अनुसार, हाउस रेंट , महंगाई भत्ता , परिवहन भत्ता , पेंशन स्कीम, मेडिकल व अन्य भत्तों का लाभ दिया जता है।
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टी20 इंटरनेशनल में राशिद खान ने एक ऐसी अनोखी सेंचुरी बनाई है, जिसके बारे में सोचना ही मुश्किल है। जिस फॉर्मेट में बिना बाउंड्री खाए एक ओवर मुश्किल होता है, वहां राशिद 100 से ज्यादा गेंदें ऐसी फेंकी।
टी20 इंटरनेशनल एक ऐसा फॉर्मेट है, जहां गेंदबाजों पर हमेशा दबाव बना रहता है। एक ओवर बिना बाउंड्री खाए करना मुश्किल होता है, ऐसे में सोचिए जरा किसी गेंदबाज ने 100 से ज्यादा ऐसी लगातार गेंदें फेंकी हों, जिस पर बाउंड्री ना लगी हो। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड के बारे में सोचना ही मुश्किल है, लेकिन अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर और कप्तान राशिद खान के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। पाकिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच के दौरान राशिद ने यह उपलब्धि हासिल की।
राशिद खान की 106वीं गेंद पर यह रिकॉर्ड टूटा, जब पाकिस्तान के सैम अयूब ने उन्हें छक्का लगाया। पाकिस्तान ने सीरीज पहले ही गंवा दी थी, लेकिन तीसरा मैच 66 रनों से जीतकर क्लीन स्वीप से खुद को बचा लिया। राशिद खान के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो उन्होंने 80 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 14. 16 की औसत और 14. 16 के स्ट्राइक रेट से कुल 129 विकेट लिए हैं। राशिद ने इस दौरान महज 6. 18 के इकॉनमी रेट से रन खर्चे हैं।
टी20 इंटरनेशनल में दो बार राशिद खान पांच विकेट भी ले चुके हैं। खैर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच की बात करें तो पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर में सात विकेट पर 182 रन बनाए। जवाब में अफगानिस्तान की टीम 18. 4 ओवर में 116 रनों पर ही सिमट गई।
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टीबीस इंटरनेशनल में राशिद खान ने एक ऐसी अनोखी सेंचुरी बनाई है, जिसके बारे में सोचना ही मुश्किल है। जिस फॉर्मेट में बिना बाउंड्री खाए एक ओवर मुश्किल होता है, वहां राशिद एक सौ से ज्यादा गेंदें ऐसी फेंकी। टीबीस इंटरनेशनल एक ऐसा फॉर्मेट है, जहां गेंदबाजों पर हमेशा दबाव बना रहता है। एक ओवर बिना बाउंड्री खाए करना मुश्किल होता है, ऐसे में सोचिए जरा किसी गेंदबाज ने एक सौ से ज्यादा ऐसी लगातार गेंदें फेंकी हों, जिस पर बाउंड्री ना लगी हो। टीबीस इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड के बारे में सोचना ही मुश्किल है, लेकिन अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर और कप्तान राशिद खान के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। पाकिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के आखिरी टीबीस इंटरनेशनल मैच के दौरान राशिद ने यह उपलब्धि हासिल की। राशिद खान की एक सौ छःवीं गेंद पर यह रिकॉर्ड टूटा, जब पाकिस्तान के सैम अयूब ने उन्हें छक्का लगाया। पाकिस्तान ने सीरीज पहले ही गंवा दी थी, लेकिन तीसरा मैच छयासठ रनों से जीतकर क्लीन स्वीप से खुद को बचा लिया। राशिद खान के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो उन्होंने अस्सी टीबीस इंटरनेशनल मैचों में चौदह. सोलह की औसत और चौदह. सोलह के स्ट्राइक रेट से कुल एक सौ उनतीस विकेट लिए हैं। राशिद ने इस दौरान महज छः. अट्ठारह के इकॉनमी रेट से रन खर्चे हैं। टीबीस इंटरनेशनल में दो बार राशिद खान पांच विकेट भी ले चुके हैं। खैर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आखिरी टीबीस इंटरनेशनल मैच की बात करें तो पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए बीस ओवर में सात विकेट पर एक सौ बयासी रन बनाए। जवाब में अफगानिस्तान की टीम अट्ठारह. चार ओवर में एक सौ सोलह रनों पर ही सिमट गई।
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ऐसी जानवार घटनाओं, विचारों और भावनाओं से हो मुझे अपनी पुस्तक को हमारत हो करनी है। परम्परागत प्रवार शतो मे उसवा निर्माण होना चाहिए, साथ ही यह भी जत्रो है कि वह माधुनिक हो । घर ऐसा होना चाहिए कि परिवार भो उसमे छुश रहे और मेहमान को भी सुख मिले। घर ऐसा होना चाहिए कि उसमे मध्चों के लिए शो का सामान हो, जवानों के लिए प्यार को सुविधा और बुजुर्गों के लिए धन भाधार हो ।
मेरो विताय है - मेरा दाविस्तान । सो रूप रेवायें ह मेरे सामने उसकी ? दिससे तुलना करता हूँ म उसकी ? पख फलावर उडते हुए उताव से ? मगर उहाय को तो इसानो हाथों ने नहीं बनाया और हमारे विचारा
उसमे कुछ भी भाग नहीं है । तो शायद हवाई जहाज से उसको तुलना मोजाये ? मगर हवाई जहाज तो जमीन से बहुत से अधिक ऊंचाई पर उड़ता है और जय शमीन पर होता है, तो हवाई अड्डे के दृश्य में लिया उसके इदर्शगद और कुछ भी नजर नहीं आता। धरतो को जब ऊंचाई से देखा जाता है और ऊचाई से हो उसको चर्चा की जाती है तो मुझे अच्छा नहीं लगता । नहीं, म ऐसे यत्रको रूप रेखा देख रहा हूँ, जो हवाई जहाज को तरह उड़ता है. रेलगाडी को तरह दौड़ता है और जहाज की तरह सरता
। मे हो उसका हवाबाज, ड्राइवर और खेवनहार हूँ । हमारा प्रस्थान स्थान - हमारा हवाई भट्टा हमारा घाट, हमारा स्टेशन है हजारों सालो की उम्रवाला अमर दाग्रिस्तान। यहां से हम हवाई जहाज, रेलगाड़ी और जहाज द्वारा दुनिया के किसी भी छोर पर जा सकते है। यहां, जहां म हो प्राया हू या यहां, जहां कम से कम मेरो कल्पना हो भाई है। हम रेलगाडी मे जाते है, हवाई जहाज मे उड़ते हैं, जहाज मे तरते हैं। हमे खिड़कियों से नजर भात ह यप ढवे सफेद पहाड, रसोलो, हरो चरागाहे, चौड़ी नदियां और तटहीन महासागर। हमारी खिडकियों के सामने से गुजरते हे उमग भरा वसत, विनम्र पतझर वडाके का जाडा और झुलसती गर्यो । और मुसाफिर तो कितने अधिक ह मेरे इदगिद । यहींह शामिल के पट्टिया बधे मुरीद, जिनको पट्टियो मे से खून रिस रहा है। यहाँ हूँ पहाडी छापा मार और विभिन्न पेशो के मेरे समकालीन । मेरे इदगिद वे सभी है, मने कभी देखा है। जिनसे मेरी मुलाक़ात हुई है, जिनसे मने कभी बातचीत को और जो मुझे याद रह गये हैं।
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ऐसी जानवार घटनाओं, विचारों और भावनाओं से हो मुझे अपनी पुस्तक को हमारत हो करनी है। परम्परागत प्रवार शतो मे उसवा निर्माण होना चाहिए, साथ ही यह भी जत्रो है कि वह माधुनिक हो । घर ऐसा होना चाहिए कि परिवार भो उसमे छुश रहे और मेहमान को भी सुख मिले। घर ऐसा होना चाहिए कि उसमे मध्चों के लिए शो का सामान हो, जवानों के लिए प्यार को सुविधा और बुजुर्गों के लिए धन भाधार हो । मेरो विताय है - मेरा दाविस्तान । सो रूप रेवायें ह मेरे सामने उसकी ? दिससे तुलना करता हूँ म उसकी ? पख फलावर उडते हुए उताव से ? मगर उहाय को तो इसानो हाथों ने नहीं बनाया और हमारे विचारा उसमे कुछ भी भाग नहीं है । तो शायद हवाई जहाज से उसको तुलना मोजाये ? मगर हवाई जहाज तो जमीन से बहुत से अधिक ऊंचाई पर उड़ता है और जय शमीन पर होता है, तो हवाई अड्डे के दृश्य में लिया उसके इदर्शगद और कुछ भी नजर नहीं आता। धरतो को जब ऊंचाई से देखा जाता है और ऊचाई से हो उसको चर्चा की जाती है तो मुझे अच्छा नहीं लगता । नहीं, म ऐसे यत्रको रूप रेखा देख रहा हूँ, जो हवाई जहाज को तरह उड़ता है. रेलगाडी को तरह दौड़ता है और जहाज की तरह सरता । मे हो उसका हवाबाज, ड्राइवर और खेवनहार हूँ । हमारा प्रस्थान स्थान - हमारा हवाई भट्टा हमारा घाट, हमारा स्टेशन है हजारों सालो की उम्रवाला अमर दाग्रिस्तान। यहां से हम हवाई जहाज, रेलगाड़ी और जहाज द्वारा दुनिया के किसी भी छोर पर जा सकते है। यहां, जहां म हो प्राया हू या यहां, जहां कम से कम मेरो कल्पना हो भाई है। हम रेलगाडी मे जाते है, हवाई जहाज मे उड़ते हैं, जहाज मे तरते हैं। हमे खिड़कियों से नजर भात ह यप ढवे सफेद पहाड, रसोलो, हरो चरागाहे, चौड़ी नदियां और तटहीन महासागर। हमारी खिडकियों के सामने से गुजरते हे उमग भरा वसत, विनम्र पतझर वडाके का जाडा और झुलसती गर्यो । और मुसाफिर तो कितने अधिक ह मेरे इदगिद । यहींह शामिल के पट्टिया बधे मुरीद, जिनको पट्टियो मे से खून रिस रहा है। यहाँ हूँ पहाडी छापा मार और विभिन्न पेशो के मेरे समकालीन । मेरे इदगिद वे सभी है, मने कभी देखा है। जिनसे मेरी मुलाक़ात हुई है, जिनसे मने कभी बातचीत को और जो मुझे याद रह गये हैं।
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RANCHI: ख्9 जून को परीक्षा ड्यूटी में तैनात दिव्यांग पीएचडी स्कॉलर को हार्ट अटैक व उसके बाद इलाज खर्च यूनिवर्सिटी द्वारा वहन नहीं करने के खिलाफ सभी पीएचडी स्कॉलर्स में नाराजगी है। ये लोग आरयू में एग्जाम डयूटी का विरोध कर रहे हैं। कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी अपना रवैया बदले, वरना मामले की शिकायत गवर्नर से लेकर यूजीसी तक की जाएगी। जब एग्जाम डयूटी में स्कॉलर्स को लगाया जा रहा है, तो उस दौरान होने वाले हादसे के लिए भी यूनिवर्सिटी ही जिम्मेवारी होनी चाहिए। लेकिन, ऐसा रांची यूनिवर्सिटी में नहीं हो रहा है। एग्जाम डयूटी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्कॉलर्स ने बताया कि वीक्षक की जिम्मेवारी मिलने पर सारा काम हम लोग ही करते हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी उस समय आश्वासन देती है, लेकिन बाद में मुकर जाती है।
ख्फ् जून को बहुउद्देशीय परीक्षा भवन में आयोजित परीक्षा में गार्डिग के दौरान ट्राइबल व रीजनल लैंग्वेज डिपार्टमेंट के रिसर्चर दिव्यांग विरेंद्र महतो को हर्ट अटैक आ गया। आनन-फानन में परीक्षा हॉल से उन्हें मेडिका हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। इस दौरान वीसी ने विरेंद्र महतो को इलाज का खर्च देने का मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन बाद में वह मुकर गए। हालांकि अपने खर्च से विरेंद्र महतो ने मेडिका हॉस्पिटल में बायपास सर्जरी करवाई। फिलहाल वह स्वस्थ हैं।
बताया गया कि यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार, परीक्षा से संबंधित सभी कार्य रेगुलर स्टाफ से कराना है, लेकिन मानदेय कम होने की वजह से प्रोफेसर, लेक्चरर इस कार्य को करने से कतराते हैं, लिहाजा विवि के पास परीक्षा से संबंधित कार्य कराने के लिए रिसर्च स्कॉलर्स की सहायता लेनी पड़ती है।
विरेंद्र के साथ बहुत ही गलत हुआ है। विवि के एमबीबीएस पीजी छात्रों की परीक्षा के दौरान उन्हें हर्ट अटैक आया था। वीसी को इस मामले को लेकर पुनर्विचार करना चाहिए।
वीसी इस मामले में विचार करें, वरना राज्यपाल से शिकायत करेंगे। किसी भी हाल में रिसर्चर को ड्यूटी के दौरान हुई क्षतिपूर्ति का मुआवजा देना ही चाहिए।
मामला गंभीर है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अभी विरेंद्र के साथ जो हुआ है, बाद में हमलोगों के साथ होगा। विरेंद्र के इलाज में हुए खर्च का वहन यूनिवर्सिटी को करना चाहिए।
विवि जब रिसर्चर्स से काम करवाता है, तो कार्यावधि के दौरान उनके साथ हुई घटना की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। विरेंद्र के साथ विवि ने जो व्यवहार किया है, उसके संकेत अच्छे नहीं है।
हमें विवि के निजी कार्यो का बहिष्कार करना पर बाध्य होना होगा। एग्जाम ड्यूटी से हमारा शोध कार्य भी बाधित होता है। यूजीसी को लेटर लिखकर हम इस घटना की जानकारी देंगे।
विवि के परीक्षा भवन और अन्य कॉलेजों में एग्जाम के दौरान रिसर्च स्कॉलर्स को ड्यूटी दी जाती है। रेगुलर शिक्षकों को इस दौरान क्यों नहीं लगाया जाता है। जब ड्यूटी के दौरान कोई हादसा हो जाता है, तो विवि प्रशासन मदद से मुकर जाता है। जैसा मेरे साथ हुआ है। विवि प्रशासन का कहना है कि रिसर्च स्कॉलर हमारा परमानेंट स्टाफ नहीं है। ऐसे में नियम के अनुसार, तो रेगुलर स्टाफ को ही एग्जाम ड्यूटी करनी है, लेकिन 90 रुपए के मानदेय पर एक लाख रुपए पाने वाले टीचर्स कैसे अपनी इज्जत नीलाम कर सकते हैं।
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RANCHI: ख्नौ जून को परीक्षा ड्यूटी में तैनात दिव्यांग पीएचडी स्कॉलर को हार्ट अटैक व उसके बाद इलाज खर्च यूनिवर्सिटी द्वारा वहन नहीं करने के खिलाफ सभी पीएचडी स्कॉलर्स में नाराजगी है। ये लोग आरयू में एग्जाम डयूटी का विरोध कर रहे हैं। कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी अपना रवैया बदले, वरना मामले की शिकायत गवर्नर से लेकर यूजीसी तक की जाएगी। जब एग्जाम डयूटी में स्कॉलर्स को लगाया जा रहा है, तो उस दौरान होने वाले हादसे के लिए भी यूनिवर्सिटी ही जिम्मेवारी होनी चाहिए। लेकिन, ऐसा रांची यूनिवर्सिटी में नहीं हो रहा है। एग्जाम डयूटी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्कॉलर्स ने बताया कि वीक्षक की जिम्मेवारी मिलने पर सारा काम हम लोग ही करते हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी उस समय आश्वासन देती है, लेकिन बाद में मुकर जाती है। ख्फ् जून को बहुउद्देशीय परीक्षा भवन में आयोजित परीक्षा में गार्डिग के दौरान ट्राइबल व रीजनल लैंग्वेज डिपार्टमेंट के रिसर्चर दिव्यांग विरेंद्र महतो को हर्ट अटैक आ गया। आनन-फानन में परीक्षा हॉल से उन्हें मेडिका हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। इस दौरान वीसी ने विरेंद्र महतो को इलाज का खर्च देने का मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन बाद में वह मुकर गए। हालांकि अपने खर्च से विरेंद्र महतो ने मेडिका हॉस्पिटल में बायपास सर्जरी करवाई। फिलहाल वह स्वस्थ हैं। बताया गया कि यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार, परीक्षा से संबंधित सभी कार्य रेगुलर स्टाफ से कराना है, लेकिन मानदेय कम होने की वजह से प्रोफेसर, लेक्चरर इस कार्य को करने से कतराते हैं, लिहाजा विवि के पास परीक्षा से संबंधित कार्य कराने के लिए रिसर्च स्कॉलर्स की सहायता लेनी पड़ती है। विरेंद्र के साथ बहुत ही गलत हुआ है। विवि के एमबीबीएस पीजी छात्रों की परीक्षा के दौरान उन्हें हर्ट अटैक आया था। वीसी को इस मामले को लेकर पुनर्विचार करना चाहिए। वीसी इस मामले में विचार करें, वरना राज्यपाल से शिकायत करेंगे। किसी भी हाल में रिसर्चर को ड्यूटी के दौरान हुई क्षतिपूर्ति का मुआवजा देना ही चाहिए। मामला गंभीर है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अभी विरेंद्र के साथ जो हुआ है, बाद में हमलोगों के साथ होगा। विरेंद्र के इलाज में हुए खर्च का वहन यूनिवर्सिटी को करना चाहिए। विवि जब रिसर्चर्स से काम करवाता है, तो कार्यावधि के दौरान उनके साथ हुई घटना की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। विरेंद्र के साथ विवि ने जो व्यवहार किया है, उसके संकेत अच्छे नहीं है। हमें विवि के निजी कार्यो का बहिष्कार करना पर बाध्य होना होगा। एग्जाम ड्यूटी से हमारा शोध कार्य भी बाधित होता है। यूजीसी को लेटर लिखकर हम इस घटना की जानकारी देंगे। विवि के परीक्षा भवन और अन्य कॉलेजों में एग्जाम के दौरान रिसर्च स्कॉलर्स को ड्यूटी दी जाती है। रेगुलर शिक्षकों को इस दौरान क्यों नहीं लगाया जाता है। जब ड्यूटी के दौरान कोई हादसा हो जाता है, तो विवि प्रशासन मदद से मुकर जाता है। जैसा मेरे साथ हुआ है। विवि प्रशासन का कहना है कि रिसर्च स्कॉलर हमारा परमानेंट स्टाफ नहीं है। ऐसे में नियम के अनुसार, तो रेगुलर स्टाफ को ही एग्जाम ड्यूटी करनी है, लेकिन नब्बे रुपयापए के मानदेय पर एक लाख रुपए पाने वाले टीचर्स कैसे अपनी इज्जत नीलाम कर सकते हैं।
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Fukrey 3 First Look Out : हिंदी सिनेमा जगत में Fukrey ने लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। साल 2013 में रिलीज हुई इसकी पहली सिक्वल ने लोगों को इस कदर हंसने पर मजबूर कर दिया था कि लोगों ने इसके अलगे पार्ट की मांग की। जिसके बाद साल 2017 में एक बार फिर इसका दूसरा पार्ट रिलीज किया गया जो कि लोगों द्वारा काफी ज्यादा पसंद की गई थी। वहीं, एक बार फिर Fukrey 3 के फैंस का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है क्योंकि आज फिल्म का पहला लुक आउट हो चुका है। दरअसल, फिल्म निर्देशक ने फुकरे 3 के दो पोस्टर सोशल मीडिया पर रिलीज किए हैं। आइए विस्तार से जानें आखिर किस दिन बड़े पर्दे पर फिल्म को रिलीज किया जाएगा। साथ ही, इससे जुड़ी और भी दिलचस्प बातें।
यह फिल्म इस साल 7 सितंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। दोस्तों सबसे पहले हम आपको बता दें कि यह एक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें दोस्तों की जिगरी यारी दिखाई गई है। यह फिल्म मृगदीप सिंह लांबा द्वारा निर्देशित होगी और रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस की जाएगी। इस फिल्म में "चूँचा" का किरदार सबसे ज्यादा पसंदीदा रहा है। जिसे वरुण शर्मा ने निभाया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, पुलकित सम्राट, ऋचा चड्ढा, मनजोत सिंह नजर आएंगे। वहीं, अली फजल के दर्शकों को बड़ा झटका लगने वाला है क्योंकि इस बार वो मूवी में नजर नहीं आने वाले हैं। इसके पीछे की वजह उनका बिजी शेड्यूल है। जिसके कारण इस मूवी में काम नहीं करेंगे।
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Fukrey तीन First Look Out : हिंदी सिनेमा जगत में Fukrey ने लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। साल दो हज़ार तेरह में रिलीज हुई इसकी पहली सिक्वल ने लोगों को इस कदर हंसने पर मजबूर कर दिया था कि लोगों ने इसके अलगे पार्ट की मांग की। जिसके बाद साल दो हज़ार सत्रह में एक बार फिर इसका दूसरा पार्ट रिलीज किया गया जो कि लोगों द्वारा काफी ज्यादा पसंद की गई थी। वहीं, एक बार फिर Fukrey तीन के फैंस का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है क्योंकि आज फिल्म का पहला लुक आउट हो चुका है। दरअसल, फिल्म निर्देशक ने फुकरे तीन के दो पोस्टर सोशल मीडिया पर रिलीज किए हैं। आइए विस्तार से जानें आखिर किस दिन बड़े पर्दे पर फिल्म को रिलीज किया जाएगा। साथ ही, इससे जुड़ी और भी दिलचस्प बातें। यह फिल्म इस साल सात सितंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी। दोस्तों सबसे पहले हम आपको बता दें कि यह एक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें दोस्तों की जिगरी यारी दिखाई गई है। यह फिल्म मृगदीप सिंह लांबा द्वारा निर्देशित होगी और रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस की जाएगी। इस फिल्म में "चूँचा" का किरदार सबसे ज्यादा पसंदीदा रहा है। जिसे वरुण शर्मा ने निभाया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, पुलकित सम्राट, ऋचा चड्ढा, मनजोत सिंह नजर आएंगे। वहीं, अली फजल के दर्शकों को बड़ा झटका लगने वाला है क्योंकि इस बार वो मूवी में नजर नहीं आने वाले हैं। इसके पीछे की वजह उनका बिजी शेड्यूल है। जिसके कारण इस मूवी में काम नहीं करेंगे।
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जिस पर उक्त मामले में रिटर्निग आफिसर के समक्ष भाजपा व रालोद पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपना अपना पक्ष रखा। आरओ ने दोनों पक्षों की बहस का सुना और उसके बाद उन दोनों की एक दूसरे के खिलाफ दर्ज आपत्तियों को खारिज कर दिया। जिसके चलते अब खतौली विधानसभा उपचुनाव में भाजपा, रालोद सहित 14 प्रत्याशी ताल ठोकेंगे।
खतौली विधानसभा सीट से रालोद प्रत्याशी मदन भैया के नामांकन पर हुई आपत्ति को रिटर्निंग आफिसर ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। गुरूवार को भाजपा शिवराज त्यागी एडवोकेट ने रिटर्निंग अधिकारी जीत सिंह राय को आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया था कि मदन भैया ने खतौली विधानसभा सीट के उप चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। उसमें प्रारूप-26, नियम 4क, जो संलग्न किया है वह विधि सम्मत नोटरी द्वारा सत्यापित नहीं है। उसमें बहुत खामियां हैं।
प्रारूप-26 में नोटरी के द्वारा पेज पर किसी भी तिथि का उल्लेख नहीं है। पेज नंबर भी नहीं पड़े हैं। शपथ पत्र में जो सारणी मुकदमे के बारे में मांगी गई है, जैसे कि संबंधित पुलिस थाने के नाम व पते के साथ प्रथम इत्तला रिपोर्ट संख्या का कालम है, जिसमें रिपोर्ट संख्या होनी चाहिए थी, जबकि मुकदमा संख्या लिख दी गई है। दोनों बातें अलग-अलग है।
उनका कहना है कि अन्य कमियां भी हैं। जिसके चलते नामांकन निरस्त किया जाए। शुक्रवार को रिटर्निंग आफिसर ने दोनों पक्षों की बहस सुनी। रालोद प्रत्याशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने बहस की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पर की गई आपत्ति को खारिज कर दिया।
उधर, रालोद प्रत्याशी के अधिवक्ता ओमवीर मलिक ने भी भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी के नामांकन में त्रुटिया निकालते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। रिटर्निंग आफिसर ने उक्त आपत्ति को भी खारिज कर दिया। रालोद और भाजपा प्रत्याशी समेत मैदान में अब 14 प्रत्याशी ताल ठोकेंगे। सोमवार को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आंवटित किए जाएंगे।
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जिस पर उक्त मामले में रिटर्निग आफिसर के समक्ष भाजपा व रालोद पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपना अपना पक्ष रखा। आरओ ने दोनों पक्षों की बहस का सुना और उसके बाद उन दोनों की एक दूसरे के खिलाफ दर्ज आपत्तियों को खारिज कर दिया। जिसके चलते अब खतौली विधानसभा उपचुनाव में भाजपा, रालोद सहित चौदह प्रत्याशी ताल ठोकेंगे। खतौली विधानसभा सीट से रालोद प्रत्याशी मदन भैया के नामांकन पर हुई आपत्ति को रिटर्निंग आफिसर ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। गुरूवार को भाजपा शिवराज त्यागी एडवोकेट ने रिटर्निंग अधिकारी जीत सिंह राय को आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया था कि मदन भैया ने खतौली विधानसभा सीट के उप चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। उसमें प्रारूप-छब्बीस, नियम चारक, जो संलग्न किया है वह विधि सम्मत नोटरी द्वारा सत्यापित नहीं है। उसमें बहुत खामियां हैं। प्रारूप-छब्बीस में नोटरी के द्वारा पेज पर किसी भी तिथि का उल्लेख नहीं है। पेज नंबर भी नहीं पड़े हैं। शपथ पत्र में जो सारणी मुकदमे के बारे में मांगी गई है, जैसे कि संबंधित पुलिस थाने के नाम व पते के साथ प्रथम इत्तला रिपोर्ट संख्या का कालम है, जिसमें रिपोर्ट संख्या होनी चाहिए थी, जबकि मुकदमा संख्या लिख दी गई है। दोनों बातें अलग-अलग है। उनका कहना है कि अन्य कमियां भी हैं। जिसके चलते नामांकन निरस्त किया जाए। शुक्रवार को रिटर्निंग आफिसर ने दोनों पक्षों की बहस सुनी। रालोद प्रत्याशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने बहस की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पर की गई आपत्ति को खारिज कर दिया। उधर, रालोद प्रत्याशी के अधिवक्ता ओमवीर मलिक ने भी भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी के नामांकन में त्रुटिया निकालते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। रिटर्निंग आफिसर ने उक्त आपत्ति को भी खारिज कर दिया। रालोद और भाजपा प्रत्याशी समेत मैदान में अब चौदह प्रत्याशी ताल ठोकेंगे। सोमवार को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आंवटित किए जाएंगे।
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BAREILLY:
BAREILLY:
एक महीने में चार बार या कहें हर बार बीएसएनएल की ओएफसी (ऑप्टीकल फाइबर केबल) कटने से कस्टमर को जबरदस्त परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। लिहाजा, बीएसएनएल के तमाम कस्टमर भी फॉल्ट के चलते उससे दूर जा रहे हैं। ऐसे में, बीएसएनएल ने टेलीकॉम कंपनी के खिलाफ तहरीर दिया है। बाद में, टेलीकॉम कंपनी ने बीएसएनएल को तार कटने का हर्जाना दे दिया। लिहाजा, हर्जाना मिलने से मामला ठंडा पड़ गया था, लेकिन इस महीने बार-बार ओएफसी कटने से बीएसएनएल एक बार फिर सकते में है।
कॉम्पिटीशन के इस दौरान में टेलीकॉम कंपनियों में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बीट करने की जबर्दस्त होड़ मची है। बरेली में बीएसएनएल के कस्टमर अन्य प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों की अपेक्षा ज्यादा हैं। विभागीय आंकड़े के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट में बीएसएनएल के ही केवल तीन लाख मोबाइल यूजर्स हैं। इसलिए बीएसएनएल को लगता है कि प्राइवेट कंपनिया उनके कस्टमर तोड़ना चाहती हैं। यही वजह है कि आए दिन उनकी उनकी ओएफसी लाइन काटी जा रही है। ताकि उसके कस्टमर टूट जाएं।
बता दें कि इन दिनों बिजली विभाग की तरफ से अंडर ग्राउंड बिछाए जा रहे बंच कंडक्टर वॉयर को केईआई कंपनी बिछा रही है। केईआई कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते एक महीने में सीबीगंज, कोहाड़ापीर, प्रभा टॉकीज और अब अक्षर विहार में ओएफसी लाइन कट गई है। इससे सर्विस बेपटरी हो चुकी है। इसके चलते अभी तक बीएसएनएल को अब तक एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जबकि करीब डेढ़ लाख कस्टमर प्रभावित रहे हैं। वहीं पिछले महीने भी राजेंद्र नगर और पीलीभीत बाईपास के पास एक टेलीकॉम कंपनी के वर्क के चलते ओएफसी कट चुकी है। तब बीएसएनएल ने तहरीर दी थी तो कंपनी ने मुआवजा अदा किया था।
बार-बार सर्विस बाधित होने से इसका बीएसएनल को इसका नुकसान सहना पड़ रहा है। विभाग के लैंडलाइन कस्टमर की संख्या कुछ समय पहले जहां एक लाख से ऊपर थी, वह घटकर अब क्9 हजार सिमट गई है। कुछ ऐसा ही हाल बीएसएनएल के मोबाइल यूजर्स का भी है। पिछले कुछ समय से तीन लाख से ऊपर मोबाइल यूजर्स की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। जबकि संख्या में कटौती हो रही है। अच्छी सर्विस न मिल पाने के कारण हर महीने के बीएसएनएल के ब्0 से भ्0 कस्टमर दूसरी कंपनी में अपना नंबर पोर्ट करवा रहे हैं।
नियम के मुताबिक जिस भी कंपनी को अपना केबल बिछाना है तो उसे यह कन्फर्म करना चाहिए कि किसी दूसरी कंपनी का तार तो वहां नहीं बिछा है। यदि बिछा है तो उससे इजाजत लेना चाहिए ताकि उस कंपनी के कर्मचारी यह बता सकें कि उनका तार जमीन से कितना नीचे है। ताकि उस कंपनी की सर्विस पर कोई असर न पड़े लेकिन जितनी बार भी बीएसएनएल ओएफसी कटी है। इसकी जानकारी उसे नहीं दी गई।
ओएफसी कटने से आर्मी का रेजिडेंस एरिया की सर्विस बंद है। फॉल्ट ट्रेस नहीं हो सका है। डीएम और कमिश्नर को इस संबंध में एक लेटर लिखा है।
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BAREILLY: BAREILLY: एक महीने में चार बार या कहें हर बार बीएसएनएल की ओएफसी कटने से कस्टमर को जबरदस्त परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। लिहाजा, बीएसएनएल के तमाम कस्टमर भी फॉल्ट के चलते उससे दूर जा रहे हैं। ऐसे में, बीएसएनएल ने टेलीकॉम कंपनी के खिलाफ तहरीर दिया है। बाद में, टेलीकॉम कंपनी ने बीएसएनएल को तार कटने का हर्जाना दे दिया। लिहाजा, हर्जाना मिलने से मामला ठंडा पड़ गया था, लेकिन इस महीने बार-बार ओएफसी कटने से बीएसएनएल एक बार फिर सकते में है। कॉम्पिटीशन के इस दौरान में टेलीकॉम कंपनियों में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बीट करने की जबर्दस्त होड़ मची है। बरेली में बीएसएनएल के कस्टमर अन्य प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों की अपेक्षा ज्यादा हैं। विभागीय आंकड़े के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट में बीएसएनएल के ही केवल तीन लाख मोबाइल यूजर्स हैं। इसलिए बीएसएनएल को लगता है कि प्राइवेट कंपनिया उनके कस्टमर तोड़ना चाहती हैं। यही वजह है कि आए दिन उनकी उनकी ओएफसी लाइन काटी जा रही है। ताकि उसके कस्टमर टूट जाएं। बता दें कि इन दिनों बिजली विभाग की तरफ से अंडर ग्राउंड बिछाए जा रहे बंच कंडक्टर वॉयर को केईआई कंपनी बिछा रही है। केईआई कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते एक महीने में सीबीगंज, कोहाड़ापीर, प्रभा टॉकीज और अब अक्षर विहार में ओएफसी लाइन कट गई है। इससे सर्विस बेपटरी हो चुकी है। इसके चलते अभी तक बीएसएनएल को अब तक एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जबकि करीब डेढ़ लाख कस्टमर प्रभावित रहे हैं। वहीं पिछले महीने भी राजेंद्र नगर और पीलीभीत बाईपास के पास एक टेलीकॉम कंपनी के वर्क के चलते ओएफसी कट चुकी है। तब बीएसएनएल ने तहरीर दी थी तो कंपनी ने मुआवजा अदा किया था। बार-बार सर्विस बाधित होने से इसका बीएसएनल को इसका नुकसान सहना पड़ रहा है। विभाग के लैंडलाइन कस्टमर की संख्या कुछ समय पहले जहां एक लाख से ऊपर थी, वह घटकर अब क्नौ हजार सिमट गई है। कुछ ऐसा ही हाल बीएसएनएल के मोबाइल यूजर्स का भी है। पिछले कुछ समय से तीन लाख से ऊपर मोबाइल यूजर्स की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। जबकि संख्या में कटौती हो रही है। अच्छी सर्विस न मिल पाने के कारण हर महीने के बीएसएनएल के ब्शून्य से भ्शून्य कस्टमर दूसरी कंपनी में अपना नंबर पोर्ट करवा रहे हैं। नियम के मुताबिक जिस भी कंपनी को अपना केबल बिछाना है तो उसे यह कन्फर्म करना चाहिए कि किसी दूसरी कंपनी का तार तो वहां नहीं बिछा है। यदि बिछा है तो उससे इजाजत लेना चाहिए ताकि उस कंपनी के कर्मचारी यह बता सकें कि उनका तार जमीन से कितना नीचे है। ताकि उस कंपनी की सर्विस पर कोई असर न पड़े लेकिन जितनी बार भी बीएसएनएल ओएफसी कटी है। इसकी जानकारी उसे नहीं दी गई। ओएफसी कटने से आर्मी का रेजिडेंस एरिया की सर्विस बंद है। फॉल्ट ट्रेस नहीं हो सका है। डीएम और कमिश्नर को इस संबंध में एक लेटर लिखा है।
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- कल्पना सरोज कमानी स्टील्स, केएस क्रिएशंस, कल्पना बिल्डर एंड डेवलपर्स, कल्पना एसोसिएट्स जैसी दर्जनों कंपनियों की मालकिन हैं।
- समाजसेवा और उद्यमिता के लिए कल्पना को पद्मश्री और राजीव गांधी रत्न के अलावा देश-विदेश में दर्जनों पुरस्कार मिल चुके हैं।
- कभी दो रुपए रोज कमाने वाली कल्पना आज 700 करोड़ के साम्राज्य पर राज कर रही हैं।
- कल्पना का जन्म सूखे का शिकार रह चुके महाराष्ट्र के 'विदर्भ' में हुआ था।
- घर के हालात खराब थे और इसी के चलते कल्पना गोबर के उपले बनाकर बेचा करती थीं।
- 12 साल की उम्र में ही कल्पना की शादी उससे 10 साल बड़े आदमी से कर दी गई।
- कल्पना विदर्भ से मुंबई की झोंपड़पट्टी में आ पहुंची।
- उनकी पढ़ाई रुक चुकी थी। ससुराल में घरेलू कामकाज में जरा सी चूक पर कल्पना रोज पिटतीं।
- शरीर पर जख्म पड़ चुके थे और जीने की ताकत खत्म हो चुकी थी। एक रोज इस नर्क से भागकर कल्पना अपने घर जा पहुंचीं।
- ससुराल पहुंचने की सजा कल्पना के साथ-साथ उसके परिवार को मिली।
- पंचायत ने परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया। हुक्का-पानी के साथ कल्पना को जिंदगी के सभी रास्ते भी बंद नजर आने लगे।
- कल्पना के पास जीने का कोई मकसद नहीं बचा था । उन्होंने तीन बोतल कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश की लेकिन रिश्ते की एक महिला ने उसे बचा लिया।
- कल्पना बताती हैं कि जान देने की कोशिश उसकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ लेकर आई। 'मैंने सोचा कि मैं क्यों जान दे रही हूं, किसके लिए? क्यों न मैं अपने लिए जिऊं, कुछ बड़ा पाने की सोचूं, कम से कम कोशिश तो कर ही सकती हूं। '
- 16 साल की उम्र में कल्पना फिर मुंबई लौट आई। लेकिन इस बार एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए।
- मुंबई पहुंची कल्पना को हुनर के नाम पर कपड़े सिलने आते थे और उसी के बल पर उन्होंने एक गारमेंट कंपनी में नौकरी कर ली।
- यहां एक दिन में 2 रुपए की मजदूरी मिलती थी जो बेहद कम थी। कल्पना ने निजी तौर पर ब्लाउज सिलने का काम शरू किया।
- एक ब्लाउज के 10 रुपए मिलते थे। इसी दौरान कल्पना की बीमार बहन की मौत हो गई। कल्पना बुरी तरह टूट गई।
- उन्होंने सोचा कि अगर रोज चार ब्लाउज सिले तो 40 रुपए मिलेंगे और घर की मदद भी होगी। उन्होंने ज्यादा मेहनत की, दिन में 16 घंटे काम करके कल्पना ने पैसे जोड़े और घरवालों की मदद की।
- इसी दौरान कल्पना ने देखा कि सिलाई और बुटीक के काम में काफी स्कोप है और उन्होंने इसे एक बिजनेस के तौर पर समझने की कोशिश की।
- दलितों को मिलने वाला 50,000 का सरकारी लोन लेकर एक सिलाई मशीन और कुछ अन्य सामान खरीदा और एक बुटीक शॉप खोल ली। दिन रात की मेहनत से बुटीक शॉप चल निकली तो कल्पना अपने परिवार वालों को भी पैसे भेजने लगी।
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- कल्पना सरोज कमानी स्टील्स, केएस क्रिएशंस, कल्पना बिल्डर एंड डेवलपर्स, कल्पना एसोसिएट्स जैसी दर्जनों कंपनियों की मालकिन हैं। - समाजसेवा और उद्यमिता के लिए कल्पना को पद्मश्री और राजीव गांधी रत्न के अलावा देश-विदेश में दर्जनों पुरस्कार मिल चुके हैं। - कभी दो रुपए रोज कमाने वाली कल्पना आज सात सौ करोड़ के साम्राज्य पर राज कर रही हैं। - कल्पना का जन्म सूखे का शिकार रह चुके महाराष्ट्र के 'विदर्भ' में हुआ था। - घर के हालात खराब थे और इसी के चलते कल्पना गोबर के उपले बनाकर बेचा करती थीं। - बारह साल की उम्र में ही कल्पना की शादी उससे दस साल बड़े आदमी से कर दी गई। - कल्पना विदर्भ से मुंबई की झोंपड़पट्टी में आ पहुंची। - उनकी पढ़ाई रुक चुकी थी। ससुराल में घरेलू कामकाज में जरा सी चूक पर कल्पना रोज पिटतीं। - शरीर पर जख्म पड़ चुके थे और जीने की ताकत खत्म हो चुकी थी। एक रोज इस नर्क से भागकर कल्पना अपने घर जा पहुंचीं। - ससुराल पहुंचने की सजा कल्पना के साथ-साथ उसके परिवार को मिली। - पंचायत ने परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया। हुक्का-पानी के साथ कल्पना को जिंदगी के सभी रास्ते भी बंद नजर आने लगे। - कल्पना के पास जीने का कोई मकसद नहीं बचा था । उन्होंने तीन बोतल कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश की लेकिन रिश्ते की एक महिला ने उसे बचा लिया। - कल्पना बताती हैं कि जान देने की कोशिश उसकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ लेकर आई। 'मैंने सोचा कि मैं क्यों जान दे रही हूं, किसके लिए? क्यों न मैं अपने लिए जिऊं, कुछ बड़ा पाने की सोचूं, कम से कम कोशिश तो कर ही सकती हूं। ' - सोलह साल की उम्र में कल्पना फिर मुंबई लौट आई। लेकिन इस बार एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए। - मुंबई पहुंची कल्पना को हुनर के नाम पर कपड़े सिलने आते थे और उसी के बल पर उन्होंने एक गारमेंट कंपनी में नौकरी कर ली। - यहां एक दिन में दो रुपयापए की मजदूरी मिलती थी जो बेहद कम थी। कल्पना ने निजी तौर पर ब्लाउज सिलने का काम शरू किया। - एक ब्लाउज के दस रुपयापए मिलते थे। इसी दौरान कल्पना की बीमार बहन की मौत हो गई। कल्पना बुरी तरह टूट गई। - उन्होंने सोचा कि अगर रोज चार ब्लाउज सिले तो चालीस रुपयापए मिलेंगे और घर की मदद भी होगी। उन्होंने ज्यादा मेहनत की, दिन में सोलह घंटाटे काम करके कल्पना ने पैसे जोड़े और घरवालों की मदद की। - इसी दौरान कल्पना ने देखा कि सिलाई और बुटीक के काम में काफी स्कोप है और उन्होंने इसे एक बिजनेस के तौर पर समझने की कोशिश की। - दलितों को मिलने वाला पचास,शून्य का सरकारी लोन लेकर एक सिलाई मशीन और कुछ अन्य सामान खरीदा और एक बुटीक शॉप खोल ली। दिन रात की मेहनत से बुटीक शॉप चल निकली तो कल्पना अपने परिवार वालों को भी पैसे भेजने लगी।
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इस्लामिक आतंकी दल ISIS के बाद एक और खूंखार आतंकी दल ने अपनी दस्तक से दुनिया में खलबली मचा दी है. खबर के मुताबिक़, यमन में आतंकी दल हूती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि उसने एक बड़े हमले को अंजाम देते हुए सऊदी अरब के कम से कम 500 सैनिकों को मार डाला है.
साथ ही सऊदी अरब की सेना के 3 ब्रिगेड ने सरेंडर भी किया है, जिनमें हजारों सैनिक शामिल हैं. अपने इस दावे के समर्थन में विद्रोहियों ने वीडियो और तसवीरें भी जारी किया, हालांकि उससे उनके दावे की पुष्टि कर पाना मुश्किल है.
बता दें कि आतंकी दल हूती से जुड़े लोग खुद को आतंकी नहीं बल्कि विद्रोही कहते हैं जो यमन की सत्ता तथा सैनिकों के खिलाफ नरसंहार कर रहे हैं. हूती के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि सऊदी हमलों के जवाब में किया गया यह हमारा अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था. दुश्मनों को भारी नुकसान हुआ है. हमने एक बड़े इलाके को कुछ ही दिनों में उनके कब्जे से आजाद करा लिया है. सलाम ने दावा किया कि जंग के मैदान में अभी भी सऊदी के कई सैनिकों की लाशें पड़ी हैं, और वहां कुछ सैनिक घायल भी हुए हैं.
हूती के प्रवक्ता सलाम ने कहा कि सऊदी अरब के पास जंग से पीछे हटने के सिवाय और कोई चारा नहीं है. सलाम ने कहा कि यदि सऊदी पीछे हटते हैं तो हूती विद्रोही अपने हमले रोक देंगे. हूती द्वारा जारी किए गए वीडियो में कई बख्तरबंद गाड़ियों को जलते हुए दिखाया गया है. इसके साथ ही वीडियो में भारी मात्रा में हथियार भी नजर आते हैं जो विद्रोहियों के दावे के मुताबिक सऊदी सैनिकों से कब्जे में लिए गए हैं. बता दें कि यमन में साल 2015 से संघर्ष जारी है. तब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी को देश छोड़कर भागना पड़ा था.
हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के ज़्यादातर हिस्से पर कब्जा है. सऊदी अरब राष्ट्रपति हादी के समर्थन में है. सऊदी अरब के अगुवाई वाले गठबंधन ने साल 2015 में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ हवाई हमले शुरू किए थे. ये गठबंधन आज भी लगभग हर दिन हवाई हमले कर रहा है. हूती विद्रोही भी सऊदी अरब पर मिसाइल हमले करते रहे हैं. गृह युद्ध की वजह से यमन गहरे मानवीय संकट में फंस गया है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के इस संघर्ष की वजह से अब तक 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. करीब एक करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर हैं.
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इस्लामिक आतंकी दल ISIS के बाद एक और खूंखार आतंकी दल ने अपनी दस्तक से दुनिया में खलबली मचा दी है. खबर के मुताबिक़, यमन में आतंकी दल हूती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि उसने एक बड़े हमले को अंजाम देते हुए सऊदी अरब के कम से कम पाँच सौ सैनिकों को मार डाला है. साथ ही सऊदी अरब की सेना के तीन ब्रिगेड ने सरेंडर भी किया है, जिनमें हजारों सैनिक शामिल हैं. अपने इस दावे के समर्थन में विद्रोहियों ने वीडियो और तसवीरें भी जारी किया, हालांकि उससे उनके दावे की पुष्टि कर पाना मुश्किल है. बता दें कि आतंकी दल हूती से जुड़े लोग खुद को आतंकी नहीं बल्कि विद्रोही कहते हैं जो यमन की सत्ता तथा सैनिकों के खिलाफ नरसंहार कर रहे हैं. हूती के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि सऊदी हमलों के जवाब में किया गया यह हमारा अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था. दुश्मनों को भारी नुकसान हुआ है. हमने एक बड़े इलाके को कुछ ही दिनों में उनके कब्जे से आजाद करा लिया है. सलाम ने दावा किया कि जंग के मैदान में अभी भी सऊदी के कई सैनिकों की लाशें पड़ी हैं, और वहां कुछ सैनिक घायल भी हुए हैं. हूती के प्रवक्ता सलाम ने कहा कि सऊदी अरब के पास जंग से पीछे हटने के सिवाय और कोई चारा नहीं है. सलाम ने कहा कि यदि सऊदी पीछे हटते हैं तो हूती विद्रोही अपने हमले रोक देंगे. हूती द्वारा जारी किए गए वीडियो में कई बख्तरबंद गाड़ियों को जलते हुए दिखाया गया है. इसके साथ ही वीडियो में भारी मात्रा में हथियार भी नजर आते हैं जो विद्रोहियों के दावे के मुताबिक सऊदी सैनिकों से कब्जे में लिए गए हैं. बता दें कि यमन में साल दो हज़ार पंद्रह से संघर्ष जारी है. तब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी को देश छोड़कर भागना पड़ा था. हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के ज़्यादातर हिस्से पर कब्जा है. सऊदी अरब राष्ट्रपति हादी के समर्थन में है. सऊदी अरब के अगुवाई वाले गठबंधन ने साल दो हज़ार पंद्रह में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ हवाई हमले शुरू किए थे. ये गठबंधन आज भी लगभग हर दिन हवाई हमले कर रहा है. हूती विद्रोही भी सऊदी अरब पर मिसाइल हमले करते रहे हैं. गृह युद्ध की वजह से यमन गहरे मानवीय संकट में फंस गया है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के इस संघर्ष की वजह से अब तक सत्तर हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. करीब एक करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर हैं.
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एलएंडटी कंपनी के आरसीएम अबूताहिर को अगवा कर लूटपाट व वसूली करने के मामले में सीआईए-3 ने संदीप बड़वासनी गैंग के सरगना रूपेंद्र उर्फ नन्हा पुत्र कृष्ण को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। सोनीपत के भरोणा गांव निवासी रूपेंद्र दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था। सीआईए उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है। वारदात के मास्टरमाइंड सतपाल राठी सहित 22 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया चुका है।
संदीप बड़वासनी की मौत के बाद रूपेंद्र ही गैंग का लीड कर रहा है। 2016 में गन्नौर में हुई विकास दूधिया और 2017 में सतपाल मलिक की हत्या में रूपेंद्र जेल जा चुका है। वह जमानत पर था, तब आरसीएम के साथ वारदात हुई थी। उसने अपने गुर्गे वारदात के लिए भेजे थे।
2020 में गुड़गांव में सतपाल मलिक के भतीजे इंस्पेक्टर सोनू मलिक पर गोली चलाई थी, तब सोनू बच गया था। तब डीजीपी ने उसके ऊपर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। नवंबर 2020 को दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ में दोनों पैर में गोली मारकर रूपेंद्र को गिरफ्तार किया था। रुपेंद्र पर हत्या, लूट, डकैती के करीब 7 केस दर्ज हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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एलएंडटी कंपनी के आरसीएम अबूताहिर को अगवा कर लूटपाट व वसूली करने के मामले में सीआईए-तीन ने संदीप बड़वासनी गैंग के सरगना रूपेंद्र उर्फ नन्हा पुत्र कृष्ण को पाँच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। सोनीपत के भरोणा गांव निवासी रूपेंद्र दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था। सीआईए उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है। वारदात के मास्टरमाइंड सतपाल राठी सहित बाईस आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया चुका है। संदीप बड़वासनी की मौत के बाद रूपेंद्र ही गैंग का लीड कर रहा है। दो हज़ार सोलह में गन्नौर में हुई विकास दूधिया और दो हज़ार सत्रह में सतपाल मलिक की हत्या में रूपेंद्र जेल जा चुका है। वह जमानत पर था, तब आरसीएम के साथ वारदात हुई थी। उसने अपने गुर्गे वारदात के लिए भेजे थे। दो हज़ार बीस में गुड़गांव में सतपाल मलिक के भतीजे इंस्पेक्टर सोनू मलिक पर गोली चलाई थी, तब सोनू बच गया था। तब डीजीपी ने उसके ऊपर दो लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। नवंबर दो हज़ार बीस को दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ में दोनों पैर में गोली मारकर रूपेंद्र को गिरफ्तार किया था। रुपेंद्र पर हत्या, लूट, डकैती के करीब सात केस दर्ज हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बता दे की बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार अभिनेत्री आलिया भट्ट जो कि हमे अपनी आगामी फिल्म 'उड़ता पंजाब' में एक बिहारी युवती के किरदार में नजर आने वाली है. व अब सुनने में आया है कि बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट अब तक के अपने फिल्मी करियर में कई तरह की भूमिकाएं निभा चुकी हैं और अपनी इस फिल्म के बारे में कहना है कि उन्होंने फिल्म उड़ता पंजाब में इसलिए काम किया क्योंकि वह अपनी एक अलग तरह की भूमिका को दर्शकों के सामने लाकर उन्हें आश्चर्यचकित करना चाहती थीं। आलिया ने कहा कि फिल्म से इतना विवाद जुड़ चुका था कि मैं टेंशन में आ गई थी, पता नहीं फिल्म 17 जून को रिलीज होगी भी या नहीं.
यदि रिलीज नहीं होती है तो क्या नुकसान होगा. भगवान की शुक्रगुजार हूं कि फिल्म के साथ यह सब नहीं हुआ. अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने बयान में कहा कि फिल्म देखने के बाद मुझे बॉलीवुड के दिग्गज महानायक अमिताभ बच्चन जी का लेटर आया है. जिस प्रकार से पूरी दुनिया अमिताभ बच्चन की दीवानी है ठीक वैसे ही मैं भी उनकी बहुत बड़ी प्रशंसक हूं.
फिल्म देखने के बाद जब अमिताभ जी का लेटर मुझे मिला तो में फूली नहीं समाई और उनसे लेटर मिलना मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्पिलिमेंट था. उनके अप्रीसिएशन और एनकरेजिंग वर्ड्स मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं. बता दे की फिल्म उड़ता पंजाब में अभिनेत्री आलिया भट्ट ने एक बिहारी लड़की की भूमिका निभाई है. जिसे की सभी ने बहुत सराहा है.
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बता दे की बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार अभिनेत्री आलिया भट्ट जो कि हमे अपनी आगामी फिल्म 'उड़ता पंजाब' में एक बिहारी युवती के किरदार में नजर आने वाली है. व अब सुनने में आया है कि बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट अब तक के अपने फिल्मी करियर में कई तरह की भूमिकाएं निभा चुकी हैं और अपनी इस फिल्म के बारे में कहना है कि उन्होंने फिल्म उड़ता पंजाब में इसलिए काम किया क्योंकि वह अपनी एक अलग तरह की भूमिका को दर्शकों के सामने लाकर उन्हें आश्चर्यचकित करना चाहती थीं। आलिया ने कहा कि फिल्म से इतना विवाद जुड़ चुका था कि मैं टेंशन में आ गई थी, पता नहीं फिल्म सत्रह जून को रिलीज होगी भी या नहीं. यदि रिलीज नहीं होती है तो क्या नुकसान होगा. भगवान की शुक्रगुजार हूं कि फिल्म के साथ यह सब नहीं हुआ. अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने बयान में कहा कि फिल्म देखने के बाद मुझे बॉलीवुड के दिग्गज महानायक अमिताभ बच्चन जी का लेटर आया है. जिस प्रकार से पूरी दुनिया अमिताभ बच्चन की दीवानी है ठीक वैसे ही मैं भी उनकी बहुत बड़ी प्रशंसक हूं. फिल्म देखने के बाद जब अमिताभ जी का लेटर मुझे मिला तो में फूली नहीं समाई और उनसे लेटर मिलना मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्पिलिमेंट था. उनके अप्रीसिएशन और एनकरेजिंग वर्ड्स मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं. बता दे की फिल्म उड़ता पंजाब में अभिनेत्री आलिया भट्ट ने एक बिहारी लड़की की भूमिका निभाई है. जिसे की सभी ने बहुत सराहा है.
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बारिश से प्रभावित पांचवें एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच श्रीलंका ने इंग्लैंड को डकवर्थ लुईस पद्धति से 219 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया। सलामी बल्लेबाज निरोशन डिकवेला के 95 रन और कप्तान दिनेश चांदीमल की 80 रन की पारियों के बाद गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन से श्रीलंका ने सीरीज का अंत सांत्वना जीत के साथ किया। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में रनों के अंतर से यह इंग्लैंड की सबसे बड़ी हार है। पांच मैचों की इस श्रृंखला को इंग्लैंड ने पहले ही अपने नाम कर लिया था। ऐसे में इस मैच के परिणाम का असर श्रृंखला के नतीजे पर नहीं पड़ा जो 3-1 से इंग्लैंड के पक्ष में रहा। श्रीलंका के लिए अकिला धनंजय ने चार और दुशमंता चमीरा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई।
श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में छह विकेट पर 366 रन का विशाल स्कोर खड़ा कियां उसके बाद इंग्लैंड की पारी को 26. 1 ओवर में नौ विकेट पर 132 रन पर रोक दिया। इसके बाद तेज बारिश ने मैच में खलल डाला और जीत-हार का फैसला डकवर्थ लुईस नियम से किया गया। लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरूआत बेहद की खराब रही और दूसरे ओवर तक चार रन के अंदर ही उसने अपने तीन विकेट गंवा दिए थे। टीम ने 28 रन पर चौथा विकेट भी गंवा दिया। इसके बाद बेन स्टोक्स (67) और मोईन अली (37) ने श्रीलंकाई गेंदबाजों का थोड़ा डटकर सामना किया। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 79 रन की साझेदारी के टूटते ही इंग्लैंड की पारी एक बार फिर लड़खड़ा गई।
England 132/9 (26. 1 ov) Akila Dananjaya 4/19, Chameera 3/20, Dhananjaya 1/18, K Rajitha 1/21 vs SL 366/6.
टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के लिए निरोशन डिकवेला ने सदीरा समरविक्रम (54) के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 137 रन जोड़े। बाएं हाथ के बल्लेबाज डिकवेला ने अपनी 97 गेंद की पारी के दौरान 12 चौके जड़े। वह आॅफ स्पिनर मोईन अली का शिकार बने जिन्होंने दो विकेट चटकाए। इसके बाद चांदीमल ने लय आगे बढ़ाते हुए कुसाल मेंडिस के साथ तीसरे विकेट के लिए 101 रन की भागीदारी निभाई। कुसाल ने 33 गेंद में 56 रन बनाए। तेज गेंदबाज टॉम कुरेन ने चांदीमल को आउट किया जिनका कैच डीप मिडविकेट पर जेसन रॉय ने लपका। चांदीमल ने 73 गेंद की पारी के दौरान छह चौके और दो छक्के जमाए। कुरेन ने अगली ही गेंद पर तिसारा परेरा को आउट किया लेकिन अकीला धनंजय (नाबाद 18) ने उन्हें हैट्रिक नहीं बनाने दी।
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बारिश से प्रभावित पांचवें एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच श्रीलंका ने इंग्लैंड को डकवर्थ लुईस पद्धति से दो सौ उन्नीस रनों के बड़े अंतर से हरा दिया। सलामी बल्लेबाज निरोशन डिकवेला के पचानवे रन और कप्तान दिनेश चांदीमल की अस्सी रन की पारियों के बाद गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन से श्रीलंका ने सीरीज का अंत सांत्वना जीत के साथ किया। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में रनों के अंतर से यह इंग्लैंड की सबसे बड़ी हार है। पांच मैचों की इस श्रृंखला को इंग्लैंड ने पहले ही अपने नाम कर लिया था। ऐसे में इस मैच के परिणाम का असर श्रृंखला के नतीजे पर नहीं पड़ा जो तीन-एक से इंग्लैंड के पक्ष में रहा। श्रीलंका के लिए अकिला धनंजय ने चार और दुशमंता चमीरा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित पचास ओवर में छह विकेट पर तीन सौ छयासठ रन का विशाल स्कोर खड़ा कियां उसके बाद इंग्लैंड की पारी को छब्बीस. एक ओवर में नौ विकेट पर एक सौ बत्तीस रन पर रोक दिया। इसके बाद तेज बारिश ने मैच में खलल डाला और जीत-हार का फैसला डकवर्थ लुईस नियम से किया गया। लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरूआत बेहद की खराब रही और दूसरे ओवर तक चार रन के अंदर ही उसने अपने तीन विकेट गंवा दिए थे। टीम ने अट्ठाईस रन पर चौथा विकेट भी गंवा दिया। इसके बाद बेन स्टोक्स और मोईन अली ने श्रीलंकाई गेंदबाजों का थोड़ा डटकर सामना किया। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए उन्यासी रन की साझेदारी के टूटते ही इंग्लैंड की पारी एक बार फिर लड़खड़ा गई। England एक सौ बत्तीस/नौ Akila Dananjaya चार/उन्नीस, Chameera तीन/बीस, Dhananjaya एक/अट्ठारह, K Rajitha एक/इक्कीस vs SL तीन सौ छयासठ/छः. टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के लिए निरोशन डिकवेला ने सदीरा समरविक्रम के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए एक सौ सैंतीस रन जोड़े। बाएं हाथ के बल्लेबाज डिकवेला ने अपनी सत्तानवे गेंद की पारी के दौरान बारह चौके जड़े। वह आॅफ स्पिनर मोईन अली का शिकार बने जिन्होंने दो विकेट चटकाए। इसके बाद चांदीमल ने लय आगे बढ़ाते हुए कुसाल मेंडिस के साथ तीसरे विकेट के लिए एक सौ एक रन की भागीदारी निभाई। कुसाल ने तैंतीस गेंद में छप्पन रन बनाए। तेज गेंदबाज टॉम कुरेन ने चांदीमल को आउट किया जिनका कैच डीप मिडविकेट पर जेसन रॉय ने लपका। चांदीमल ने तिहत्तर गेंद की पारी के दौरान छह चौके और दो छक्के जमाए। कुरेन ने अगली ही गेंद पर तिसारा परेरा को आउट किया लेकिन अकीला धनंजय ने उन्हें हैट्रिक नहीं बनाने दी।
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इंदौर। शुक्रवार को इंदौर नगर पालिका निगम के बजट पर सदन में चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत ही हंगामे से हुई और हंगामा लगातार चलता रहा। बैकफुट पर चल रहे विपक्ष की उस समय बांछे खिल गई, जब एक भाजपा पार्षद ने ही भाजपा परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भरी सदन में माइक पर बोला कि यह क्या बात हुई कि केवल भाजपा की ओर से महापौर परिषद सदस्य ही अपनी बात रखेंगे। पार्षद भी चुने हुए हैं, उन्हें बोलने का मौका दिया जाए।
यह मोर्चा भाजपा के ही पाषर्द लालबहादुर वर्मा ने खोलते हुए कहा कि मैं कोई नया पार्षद नहीं हूं, चार बार, दो बार मेरी बहन और दो बार मैं स्वयं पार्षद हूं। इसके बाद भी मेरे वार्ड में गंदे पानी की समस्या है, जिसका निवारण नहीं हो रहा है। मैं सभापति को भी इसके बारे में बता जा चुका।
इतना सुनते ही कांग्रेसी पार्षद कुर्सी से खड़े हो गए और शैम-शैम के नारे लगाने लगे। उनका कहना था कि अमृत योजना के तहत किस तरह काम हो रहा है, इसकी पोल खुल गई। इसी को लेकर पूर्व नेताप्रतिपक्ष फौजिया अलीम ने सदन में पार्षदों को चैलेंज दिया कि कोई भी पार्षद यह कह नहीं सकता कि उनके वार्ड में गंदा पानी नहीं आता। न ही वार्ड में टैंकर की जरूरत पड़ती है। भाजपा पार्षद लालबहुदर वर्मा को बयान को लेकर काफी देर तक सदन में हंगामा चलता रहा।
नेता प्रतिपक्ष ने सदन में अपनी बात शुरू करने के पूर्व गुरुवार को सदन में जो सभापति का अपमान किया था, उसको लेकर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मैं जो भी कह रहा हूं। यदि इसमें कुछ भी झूठ होगा, तो मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांगूगा। मांफी मांगने से कोई छोटा नहीं होता, कर्म से बड़ा होता। इस पर विपक्षी पार्षदों ने कहा कि अच्छे कर्म ही होते, तो माफी नहीं मांगना पड़ती है। इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया। इस पर श्री चौकसे ने कहा कि बीच में बोलना बंद कर दो मैं शाम भी हो जाए, तो अपनी बात रखूंगा। सच्चाई छुप नहीं सकती झूठी बातों से, खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से। महापौर ने जो बजट पेश किया है, वो कुछ इसी तरह का है।
महापौर ने कागज के फूलों से खुशबू लाने की कोशिश की है। 2050 के नाम पर सब्ज बाग दिखाए, जैसे निर्वाचित होने के बाद 100 की कार्ययोजना के नाम पर दिखाए थे। निर्वाचन के बाद तीन प्राथमिकता दी थी, राजबाड़ा, गोपाल मंदिर को पूरा करने की थी, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। बडग़णपति से श्रीकृष्ण छत्री तक सड़क बनाने की बात कही थी, लेकिन यह सड़क नहीं बनी। सड़क बनी भी तो घटिया सड़क बनी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। शहर की प्रमुख सड़कों का काम तीन माह में पूरा हो जाएगा, इस बजट में इन सड़कों का प्रावधान रखा गया है। हर वार्ड में हॉकर जोन बनाया जाएगा, आज हालत सबके सामने है। एलईडी लाइट को लेकर घोषणा की थी हर वार्ड में संजीवनी क्लीनिक खुल जाएगा। आज वार्ड 15 में भी नहीं खुला है। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक सिस्टम का भी यही हाल है। आज यातायात की हालत बदतर है। 100 की कार्ययोजना में 104 उद्यानों को विकसित करने की बात कही थी, लेकिन कागजों में सिमटा हुआ है। शहर को क मुक्त की बात थी, आज भिक्षुक केंद्र बंद है।
सोलर सिटी कैसे बनेगी, इसको लेकर बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया है। डिजिटल सिटी के लिए 60 करोड़ का प्रावधान है। 150 केंद्रों पर वाईफाई देने पर क्या इंदौर डिजिटल हो जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कहा गया था कि स्मार्ट सड़कें बनेगी। सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, फ्री वायफाय होगा। आज ऐसा कुछ नहीं है। केवल फ्री का वाईफाई इंदौर को डिजिटल नहीं बना सकता। क्लीन सिटी की बात कही, 6 वर्ष से इंदौर क्लीन सिटी है। नए काम क्या होंगे। इसकी कोई कार्यजोना नहीं रखी। कचरे से बिजली बनाने की कार्य योजना नहीं रखी। हर वार्ड में योग सेंटर बनाने की बात कही, लेिकन क्या एक केंद्र पर पूरा वार्ड इसमें योगा कर लेगा।
नगर निगम की प्राथमिकता सफाई, सड़क, पानी का है, जो इंदौर शहर को गंदे पानी के रूप में पानी मिल रहा है, बड़ी समस्या है। ग्रीन सिटी की बात करें, तो पेड़ों की कटाई आयुक्त की अनुमति के बिना की जा रही है। ग्रीन सिटी के लिए क्या करेंगे। नहीं बताया। पौधारोपण हर साल हो रहा, ऐेसे में ग्रीन सिटी कैसे बनेगी। यातायात को बेहतर करने के लिए कोई कार्यजोना पेश नहीं की गई है। सेवन आई बताए गए, लेकिन इस दिशा में काम की मोहताज है। इनोवेशन स्वच्छता के क्षेत्र में किया, उसकी सभी ने तारिफ की। नाला टेपिंग में क्या हुआ, पूरे शहर को मालूम है। करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी गंदा पानी बह रहा है। इसमें ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत है। इसे सबके सामने लाना होगा। देवी अहिल्या लोक निर्माण की बात बजट में कही गई है, लेकिन में क्या होगा, कैसे होगा, इसकी बात बजट में नहीं कही गई है। पिछले वर्ष के बजट में भी अमृत योजना के लिए रखा. कोविड आया, मीटिंग की। इसको लेकर विरोध शुरू हो गया।
भाजपा पार्षदों का कहना था कि हम लोगों के बीच में थे न कि मीटिंग कर रहे था. आप लोग मीटिंग कर रहे होगे। इस पर कांग्रेसी पार्षदों ने कहना शुरू कर दिया कि कोराना के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कहां गायब थे। सत्ता के सहयोग से मदद कर रहे थे, लेकिन हम तो व्यक्तिगत रूप से काम कर रहे थे। इस पर किसी कांग्रेसी पार्षद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मीटिंग के लिए बुलाया था। इस पर भाजपा के पार्षदों का कहना था कि कमलनाथजी ने बुलाया होगा। इस बात को लेकर जो हंगामा शुरू हुआ, तो कोविड काल के दौरान हुई मौत, अव्यवस्थाओं आदि के मुद्दे उठने लगे। कांग्रेसी पार्षदों ने कहा कि जब कोविड काल था, तब सरकार खरीद-फरोख्त में लगी थी। हंगामा बढ़ते देख महापौर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दे। इसके बाद मामला शांत हुआ।
अमृत योजना के नाम से तीन वर्ष से अमृत 2 योजना के नाम से छलावा कर रहे हैं। ऐसा कौन पार्षद है, जो कसम खाकर कह दे कि उनके वार्ड में गंदा पानी आएगा। हम कह रहे लोगों से अमृत आएगी, अमृत आमृत आएगी, लेकिन कब आएगी। अब तक न डीपीआर बना है और न कुछ हुआ है। कब तक हम जनता से झूठ बोले। आज की कंडिशन में हमारे पास पानी पर्याप्त है। अभी राहत देने के लिए प्राथमिकता होना चाहिए, यह मेरा महापौर से आग्रह है। स्वच्छ भारत मिशन में 121 करोड़ के बजट में कचरा वाहन खरीदी के लिए कोई प्रावधान नहीं दिया गया। मेरे खुद के वार्ड में 15 दिन से समय पर श्याम नगर, वीणा नगर में कचरा नहीं उठ रहा है।
श्री चौकसे ने कहा कि सफाई कर्मचारी पर बंदूक तानी जा रही है और निगम के अधिकारी ने कोई एफआईआर नहीं कराई। इससे कर्मचारियों को मनोबल कम होता है। विनियमित के स्थान पर नियमित किया जाए। किसी अधिकारी का दिमाग खराब हुआ सस्पेंड किया जाए। सीवरेज तंत्र के लिए 1451 करोड़ का प्रावधान है। 2008-15 बिजलपुर से कबीटखेड़ी तक 80 करोड़ का व्यवस्थित काम हुआ। फिर क्या जरूरी था कि सरवटे बस से राजकुमार तक 50 करोड़ तक नई लाइन डालने का काम शुरू किया। पिछला काम सही नहीं था, तो ठेकेदार को कोई नोटिस दिया गया।
न हिन्दू खतरे में न मुसलमान खतरे में है।
धर्म का चश्मा उतारकर देख हिंदुस्तान खतरे में। ।
सदन में फौजिया अलीम द्वारा अंत में पढ़े गए शेर को लेकर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति ली। उनको कहना था कि यह हिंदुस्तान का अपमान है। फौजिया शेख बताएं कि हिंदुस्तान कैसे खतरे में है? इसके लिए माफी मांगे। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने सभापति को घेरा और कहा की हिंदुस्तान हमारी शान है। फौजिया इसके लिए माफी मांगे। इस पर शेख ने कहा कि भाजपा मुखबिरों की पार्टी है। गांधी के हत्यारे गोडसे की पार्टी है। शेख ने कहा कि जितना हिंदुस्तान तुम्हारा है, उतना हमारा भी है। जितने बलिदान तुमने दिए हैं, उतने ही बलिदान हमने भी दिए हैं। आप बता दो कि राहुल गांधी के साथ जो हुआ, जो हो रहा है, उससे देश और संविधान खतरे में है या नहीं है। इसके बाद भाजपा पार्षद हिंदुस्तान जिंदाबाद, भारत माता की जय, जय श्री राम के नारे लगाने लगे।
कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की भाषण के बीच भी हंगामा हो गया। उन्होंने जीते जी गाय माता की तो कद्र की जाती है, लेकिन मरने के बाद वो माता नहीं रहती। खादी ग्राम उद्योग को शव ले जाने के लिए ठेका दिया है। वो शव ले जाते चमड़े निकाल लेते हैं। हड्डी निकालकर बेच जाते हैं। भाजपा के पार्षद श्री कुलवाड़े ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि गाय को लेकर आपके मन में दुर्भवना है। आप गलत बात का उपयोग कर रहे हैं। गाय के बारे में आपकी भावना अच्छी नहीं है। इस पर अनवर कादरी ने कहा कि मैं गाय माता के अंतिम संस्कार की बात कर रहा हूं। मेरे किसी बात से तकलीफ पहुंची हो तो माफी मांगता हूं, मैं आपका दिल दुखाना नहीं चाहते हैं। उन्होंने श्वानों को लेकर जो टेंडर दिया वो एनजीओ काम नहीं कर रहे हैं। शहर के चारों ओर आवारा श्वन के लिए शेल्टर बनाए जाएं, ताकि लोगों को आवारा कुत्तों ने निजात मिले और कुत्तों को भी शेल्टर में भोजन और रहना की जगह मिले।
कांग्रेस पार्षद यशस्वी पटेल एक मात्र ऐसी पार्षद थी, जिन्होंने हिंगिल्श यानि अंग्रेजी और हिन्दी को मिलाकर अपना भाषण दिया। उन्होंने कहा कि शहर में पानी के वितरण में भेदभाव हो रहा है। पलासिया क्षेत्र में पर पर्सन 400-500 लीटर है, वहीं कुछ क्षेत्रों में पर पर्सन कुछ ग्लास वॉटर मिल रहा है। यशस्वी पटेल के हिन्दी-इंग्लिश में दिए गए बजट को लेकर जब भाजपा पार्षदों ने कह दिया कि हमारे आधे पार्षदों को अंग्रेजी के कारण उनका भाषण समझ में नहीं आया। वो तो सोनिया गांधी की सीसी हैं। इस पर कांग्रेसी पार्षद रुबीना इकबाल और अन्य ने विरोध शुरू कर दिया और हंगामा हो गया।
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इंदौर। शुक्रवार को इंदौर नगर पालिका निगम के बजट पर सदन में चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत ही हंगामे से हुई और हंगामा लगातार चलता रहा। बैकफुट पर चल रहे विपक्ष की उस समय बांछे खिल गई, जब एक भाजपा पार्षद ने ही भाजपा परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भरी सदन में माइक पर बोला कि यह क्या बात हुई कि केवल भाजपा की ओर से महापौर परिषद सदस्य ही अपनी बात रखेंगे। पार्षद भी चुने हुए हैं, उन्हें बोलने का मौका दिया जाए। यह मोर्चा भाजपा के ही पाषर्द लालबहादुर वर्मा ने खोलते हुए कहा कि मैं कोई नया पार्षद नहीं हूं, चार बार, दो बार मेरी बहन और दो बार मैं स्वयं पार्षद हूं। इसके बाद भी मेरे वार्ड में गंदे पानी की समस्या है, जिसका निवारण नहीं हो रहा है। मैं सभापति को भी इसके बारे में बता जा चुका। इतना सुनते ही कांग्रेसी पार्षद कुर्सी से खड़े हो गए और शैम-शैम के नारे लगाने लगे। उनका कहना था कि अमृत योजना के तहत किस तरह काम हो रहा है, इसकी पोल खुल गई। इसी को लेकर पूर्व नेताप्रतिपक्ष फौजिया अलीम ने सदन में पार्षदों को चैलेंज दिया कि कोई भी पार्षद यह कह नहीं सकता कि उनके वार्ड में गंदा पानी नहीं आता। न ही वार्ड में टैंकर की जरूरत पड़ती है। भाजपा पार्षद लालबहुदर वर्मा को बयान को लेकर काफी देर तक सदन में हंगामा चलता रहा। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में अपनी बात शुरू करने के पूर्व गुरुवार को सदन में जो सभापति का अपमान किया था, उसको लेकर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मैं जो भी कह रहा हूं। यदि इसमें कुछ भी झूठ होगा, तो मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांगूगा। मांफी मांगने से कोई छोटा नहीं होता, कर्म से बड़ा होता। इस पर विपक्षी पार्षदों ने कहा कि अच्छे कर्म ही होते, तो माफी नहीं मांगना पड़ती है। इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया। इस पर श्री चौकसे ने कहा कि बीच में बोलना बंद कर दो मैं शाम भी हो जाए, तो अपनी बात रखूंगा। सच्चाई छुप नहीं सकती झूठी बातों से, खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से। महापौर ने जो बजट पेश किया है, वो कुछ इसी तरह का है। महापौर ने कागज के फूलों से खुशबू लाने की कोशिश की है। दो हज़ार पचास के नाम पर सब्ज बाग दिखाए, जैसे निर्वाचित होने के बाद एक सौ की कार्ययोजना के नाम पर दिखाए थे। निर्वाचन के बाद तीन प्राथमिकता दी थी, राजबाड़ा, गोपाल मंदिर को पूरा करने की थी, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। बडग़णपति से श्रीकृष्ण छत्री तक सड़क बनाने की बात कही थी, लेकिन यह सड़क नहीं बनी। सड़क बनी भी तो घटिया सड़क बनी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। शहर की प्रमुख सड़कों का काम तीन माह में पूरा हो जाएगा, इस बजट में इन सड़कों का प्रावधान रखा गया है। हर वार्ड में हॉकर जोन बनाया जाएगा, आज हालत सबके सामने है। एलईडी लाइट को लेकर घोषणा की थी हर वार्ड में संजीवनी क्लीनिक खुल जाएगा। आज वार्ड पंद्रह में भी नहीं खुला है। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक सिस्टम का भी यही हाल है। आज यातायात की हालत बदतर है। एक सौ की कार्ययोजना में एक सौ चार उद्यानों को विकसित करने की बात कही थी, लेकिन कागजों में सिमटा हुआ है। शहर को क मुक्त की बात थी, आज भिक्षुक केंद्र बंद है। सोलर सिटी कैसे बनेगी, इसको लेकर बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया है। डिजिटल सिटी के लिए साठ करोड़ का प्रावधान है। एक सौ पचास केंद्रों पर वाईफाई देने पर क्या इंदौर डिजिटल हो जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कहा गया था कि स्मार्ट सड़कें बनेगी। सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, फ्री वायफाय होगा। आज ऐसा कुछ नहीं है। केवल फ्री का वाईफाई इंदौर को डिजिटल नहीं बना सकता। क्लीन सिटी की बात कही, छः वर्ष से इंदौर क्लीन सिटी है। नए काम क्या होंगे। इसकी कोई कार्यजोना नहीं रखी। कचरे से बिजली बनाने की कार्य योजना नहीं रखी। हर वार्ड में योग सेंटर बनाने की बात कही, लेिकन क्या एक केंद्र पर पूरा वार्ड इसमें योगा कर लेगा। नगर निगम की प्राथमिकता सफाई, सड़क, पानी का है, जो इंदौर शहर को गंदे पानी के रूप में पानी मिल रहा है, बड़ी समस्या है। ग्रीन सिटी की बात करें, तो पेड़ों की कटाई आयुक्त की अनुमति के बिना की जा रही है। ग्रीन सिटी के लिए क्या करेंगे। नहीं बताया। पौधारोपण हर साल हो रहा, ऐेसे में ग्रीन सिटी कैसे बनेगी। यातायात को बेहतर करने के लिए कोई कार्यजोना पेश नहीं की गई है। सेवन आई बताए गए, लेकिन इस दिशा में काम की मोहताज है। इनोवेशन स्वच्छता के क्षेत्र में किया, उसकी सभी ने तारिफ की। नाला टेपिंग में क्या हुआ, पूरे शहर को मालूम है। करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी गंदा पानी बह रहा है। इसमें ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत है। इसे सबके सामने लाना होगा। देवी अहिल्या लोक निर्माण की बात बजट में कही गई है, लेकिन में क्या होगा, कैसे होगा, इसकी बात बजट में नहीं कही गई है। पिछले वर्ष के बजट में भी अमृत योजना के लिए रखा. कोविड आया, मीटिंग की। इसको लेकर विरोध शुरू हो गया। भाजपा पार्षदों का कहना था कि हम लोगों के बीच में थे न कि मीटिंग कर रहे था. आप लोग मीटिंग कर रहे होगे। इस पर कांग्रेसी पार्षदों ने कहना शुरू कर दिया कि कोराना के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कहां गायब थे। सत्ता के सहयोग से मदद कर रहे थे, लेकिन हम तो व्यक्तिगत रूप से काम कर रहे थे। इस पर किसी कांग्रेसी पार्षद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मीटिंग के लिए बुलाया था। इस पर भाजपा के पार्षदों का कहना था कि कमलनाथजी ने बुलाया होगा। इस बात को लेकर जो हंगामा शुरू हुआ, तो कोविड काल के दौरान हुई मौत, अव्यवस्थाओं आदि के मुद्दे उठने लगे। कांग्रेसी पार्षदों ने कहा कि जब कोविड काल था, तब सरकार खरीद-फरोख्त में लगी थी। हंगामा बढ़ते देख महापौर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दे। इसके बाद मामला शांत हुआ। अमृत योजना के नाम से तीन वर्ष से अमृत दो योजना के नाम से छलावा कर रहे हैं। ऐसा कौन पार्षद है, जो कसम खाकर कह दे कि उनके वार्ड में गंदा पानी आएगा। हम कह रहे लोगों से अमृत आएगी, अमृत आमृत आएगी, लेकिन कब आएगी। अब तक न डीपीआर बना है और न कुछ हुआ है। कब तक हम जनता से झूठ बोले। आज की कंडिशन में हमारे पास पानी पर्याप्त है। अभी राहत देने के लिए प्राथमिकता होना चाहिए, यह मेरा महापौर से आग्रह है। स्वच्छ भारत मिशन में एक सौ इक्कीस करोड़ के बजट में कचरा वाहन खरीदी के लिए कोई प्रावधान नहीं दिया गया। मेरे खुद के वार्ड में पंद्रह दिन से समय पर श्याम नगर, वीणा नगर में कचरा नहीं उठ रहा है। श्री चौकसे ने कहा कि सफाई कर्मचारी पर बंदूक तानी जा रही है और निगम के अधिकारी ने कोई एफआईआर नहीं कराई। इससे कर्मचारियों को मनोबल कम होता है। विनियमित के स्थान पर नियमित किया जाए। किसी अधिकारी का दिमाग खराब हुआ सस्पेंड किया जाए। सीवरेज तंत्र के लिए एक हज़ार चार सौ इक्यावन करोड़ का प्रावधान है। दो हज़ार आठ-पंद्रह बिजलपुर से कबीटखेड़ी तक अस्सी करोड़ का व्यवस्थित काम हुआ। फिर क्या जरूरी था कि सरवटे बस से राजकुमार तक पचास करोड़ तक नई लाइन डालने का काम शुरू किया। पिछला काम सही नहीं था, तो ठेकेदार को कोई नोटिस दिया गया। न हिन्दू खतरे में न मुसलमान खतरे में है। धर्म का चश्मा उतारकर देख हिंदुस्तान खतरे में। । सदन में फौजिया अलीम द्वारा अंत में पढ़े गए शेर को लेकर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति ली। उनको कहना था कि यह हिंदुस्तान का अपमान है। फौजिया शेख बताएं कि हिंदुस्तान कैसे खतरे में है? इसके लिए माफी मांगे। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने सभापति को घेरा और कहा की हिंदुस्तान हमारी शान है। फौजिया इसके लिए माफी मांगे। इस पर शेख ने कहा कि भाजपा मुखबिरों की पार्टी है। गांधी के हत्यारे गोडसे की पार्टी है। शेख ने कहा कि जितना हिंदुस्तान तुम्हारा है, उतना हमारा भी है। जितने बलिदान तुमने दिए हैं, उतने ही बलिदान हमने भी दिए हैं। आप बता दो कि राहुल गांधी के साथ जो हुआ, जो हो रहा है, उससे देश और संविधान खतरे में है या नहीं है। इसके बाद भाजपा पार्षद हिंदुस्तान जिंदाबाद, भारत माता की जय, जय श्री राम के नारे लगाने लगे। कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की भाषण के बीच भी हंगामा हो गया। उन्होंने जीते जी गाय माता की तो कद्र की जाती है, लेकिन मरने के बाद वो माता नहीं रहती। खादी ग्राम उद्योग को शव ले जाने के लिए ठेका दिया है। वो शव ले जाते चमड़े निकाल लेते हैं। हड्डी निकालकर बेच जाते हैं। भाजपा के पार्षद श्री कुलवाड़े ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि गाय को लेकर आपके मन में दुर्भवना है। आप गलत बात का उपयोग कर रहे हैं। गाय के बारे में आपकी भावना अच्छी नहीं है। इस पर अनवर कादरी ने कहा कि मैं गाय माता के अंतिम संस्कार की बात कर रहा हूं। मेरे किसी बात से तकलीफ पहुंची हो तो माफी मांगता हूं, मैं आपका दिल दुखाना नहीं चाहते हैं। उन्होंने श्वानों को लेकर जो टेंडर दिया वो एनजीओ काम नहीं कर रहे हैं। शहर के चारों ओर आवारा श्वन के लिए शेल्टर बनाए जाएं, ताकि लोगों को आवारा कुत्तों ने निजात मिले और कुत्तों को भी शेल्टर में भोजन और रहना की जगह मिले। कांग्रेस पार्षद यशस्वी पटेल एक मात्र ऐसी पार्षद थी, जिन्होंने हिंगिल्श यानि अंग्रेजी और हिन्दी को मिलाकर अपना भाषण दिया। उन्होंने कहा कि शहर में पानी के वितरण में भेदभाव हो रहा है। पलासिया क्षेत्र में पर पर्सन चार सौ-पाँच सौ लीटरटर है, वहीं कुछ क्षेत्रों में पर पर्सन कुछ ग्लास वॉटर मिल रहा है। यशस्वी पटेल के हिन्दी-इंग्लिश में दिए गए बजट को लेकर जब भाजपा पार्षदों ने कह दिया कि हमारे आधे पार्षदों को अंग्रेजी के कारण उनका भाषण समझ में नहीं आया। वो तो सोनिया गांधी की सीसी हैं। इस पर कांग्रेसी पार्षद रुबीना इकबाल और अन्य ने विरोध शुरू कर दिया और हंगामा हो गया। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट में चार चांद लगाने के लिए अब देश के पास एक ऐसा स्टेडियम है जिसकी वजह से दुनिया भर में भारतीय क्रिकेट प्रेमी गर्व कर सकेंगे। गुजरात के नए मोटेरा स्टेडियम में काम अब पूरा हो चुका है और ये स्टेडियम अब मैचों के लिए तैयार है। स्टेडियम के पुनर्निर्माण का काम फरवरी 2020 में पूरा हो गया था लेकिन कुछ चीजें होनी बाकी थीं, इसी स्टेडियम में 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए नमस्ते ट्रम्प नाम का कार्यक्रम कराया गया था। अब स्टेडियम पूरी तरह से तैयार होने के बाद बीसीसीआई सचिव जय शाह ने इसकी शानदार तस्वीर शेयर की है।
बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने रविवार को नए मोटेरा स्टेडियम की फोटो शेयर की जिसका आधिकारिक नाम सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम है। शाह ने स्टेडियम फोटो के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, 'भव्य मोटेरा, सरदार पटेल स्टेडियम। '
इस स्टेडियम में 1,10,000 दर्शक बैठ सकते हैं। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टेडियम का दर्जा भी इसे प्राप्त है। इस स्टेडियम ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थिति मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम होने का रुतबा हासिल किया है। मोटेरा के अलावा भारत में एक और विशाल क्रिकेट स्टेडियम बनने जा रहा है। यह स्टेडियम राजस्थान के जयपुर में बनेगा।
इंग्लैंड और भारत के बीच होगा मुकाबला !
खबरों के मुताबिक इस नए स्टेडियम में पहला मुकाबला अगले साल भारत और मेहमान इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा। अगले साल इंग्लिश टीम को भारत का दौरा करना है जिस दौरान पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है। इस सीरीज में एक डे-नाइट टेस्ट भी निर्धारित है, जिसको मोटेरा में कराने की योजना है।
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट में चार चांद लगाने के लिए अब देश के पास एक ऐसा स्टेडियम है जिसकी वजह से दुनिया भर में भारतीय क्रिकेट प्रेमी गर्व कर सकेंगे। गुजरात के नए मोटेरा स्टेडियम में काम अब पूरा हो चुका है और ये स्टेडियम अब मैचों के लिए तैयार है। स्टेडियम के पुनर्निर्माण का काम फरवरी दो हज़ार बीस में पूरा हो गया था लेकिन कुछ चीजें होनी बाकी थीं, इसी स्टेडियम में चौबीस फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए नमस्ते ट्रम्प नाम का कार्यक्रम कराया गया था। अब स्टेडियम पूरी तरह से तैयार होने के बाद बीसीसीआई सचिव जय शाह ने इसकी शानदार तस्वीर शेयर की है। बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने रविवार को नए मोटेरा स्टेडियम की फोटो शेयर की जिसका आधिकारिक नाम सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम है। शाह ने स्टेडियम फोटो के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, 'भव्य मोटेरा, सरदार पटेल स्टेडियम। ' इस स्टेडियम में एक,दस,शून्य दर्शक बैठ सकते हैं। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टेडियम का दर्जा भी इसे प्राप्त है। इस स्टेडियम ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थिति मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम होने का रुतबा हासिल किया है। मोटेरा के अलावा भारत में एक और विशाल क्रिकेट स्टेडियम बनने जा रहा है। यह स्टेडियम राजस्थान के जयपुर में बनेगा। इंग्लैंड और भारत के बीच होगा मुकाबला ! खबरों के मुताबिक इस नए स्टेडियम में पहला मुकाबला अगले साल भारत और मेहमान इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा। अगले साल इंग्लिश टीम को भारत का दौरा करना है जिस दौरान पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है। इस सीरीज में एक डे-नाइट टेस्ट भी निर्धारित है, जिसको मोटेरा में कराने की योजना है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की डायमंड जुबली कार्यक्रम का उद्घाटन किया। साथ ही पीएम ने शिलांग, पुणे और नागपुर में CBI के नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नए कार्यालयों का शुभारंभ CBI को कार्य करने में और सहायता प्रदान करेगा।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भारत की प्राथमिक जांच एजेंसी है, जिसे 1 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के एक संकल्प द्वारा स्थापित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि CBI की जांच की मांग के लिए तो आंदोलन तक किए जाते हैं, लोग कहते हैं कि मामले को CBI को दे दें। न्याय, इंसाफ के ब्रैंड के तौर CBI का नाम सबकी जुबान पर है। जिन्होंने भी CBI में योगदान दिया वे बधाई के पात्र हैं।
CBI के डायमंड जुबली कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पता है कि जिन लोगों के खिलाफ आप कार्रवाई कर रहे हैं, वे बहुत शक्तिशाली हैं। वे सालों से सरकार और व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। कुछ राज्यों में आज भी वे सत्ता में हैं, लेकिन सीबीआई को अपने काम पर ध्यान देना है, किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पीएम ने कहा आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है। आपको कहीं भी हिचकने, कहीं रूकने की जरूरत नहीं है।
इस दौरान पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से CBI की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार से देश को मुक्त करने की है। भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं होता। भ्रष्टाचार, गरीब से उसका हक छीनता है, अनेक अपराधों को जन्म देता है। भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा होता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 10 साल पहले ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार करने की होड़ लगी थी। उस दौरान बड़े-बड़े घोटाले हुए, लेकिन आरोपी डरे नहीं क्योंकि सिस्टम उनके साथ खड़ा था। 2014 के बाद हमने भ्रष्टाचार, कालेधन के खिलाफ मिशन मोड में काम किया है। भ्रष्टाचारियों ने देश का खजाना लूटने का एक और तरीका बना रखा था जो दशकों से चला आ रहा था। ये सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से लूट थी। आज जनधन, आधार, मोबाइल की ट्रिनिटी से हर लाभार्थी को उसका पूरा हक मिल रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि जहां भ्रष्टाचार होता है, वहां युवाओं को उचित अवसर नहीं मिलते। वहां सिर्फ एक विशेष (Ecosystem) ही फलता-फूलता है। भ्रष्टाचार प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन होता है और यहीं से भाई-भतीजावाद, परिवारवाद को बल मिलता है। उन्होंने कहा जब भाई-भतीजावाद और परिवारवाद बढ़ता है, तो समाज का, राष्ट्र का सामर्थ्य कम होता है। जब राष्ट्र का सामर्थ्य कम होता है तो विकास प्रभावित होता है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश की प्रीमियम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के रूप में 60 साल का सफर CBI ने पूरा किया है। ये 6 दशक निश्चित रूप से अनेक उपलब्धियों के रहे हैं। आज यहां CBI के मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट का संग्रह भी जारी किया गया है। ये CBI के बीते वर्षों के सफर को दिखाता है। पीएम ने कहा लोग आंदोलन करते हैं कि केस उनसे लेकर CBI को दे दो। यहां तक कि पंचातय स्तर पर भी कोई मामला आता है तो लोग कहते हैं कि इसे CBI को दे देना चाहिए। न्याय के इंसाफ के एक ब्रांड के रूप में CBI हर जुबान पर है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय जांच एजेंसी की डायमंड जुबली कार्यक्रम का उद्घाटन किया। साथ ही पीएम ने शिलांग, पुणे और नागपुर में CBI के नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नए कार्यालयों का शुभारंभ CBI को कार्य करने में और सहायता प्रदान करेगा। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो भारत की प्राथमिक जांच एजेंसी है, जिसे एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के एक संकल्प द्वारा स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि CBI की जांच की मांग के लिए तो आंदोलन तक किए जाते हैं, लोग कहते हैं कि मामले को CBI को दे दें। न्याय, इंसाफ के ब्रैंड के तौर CBI का नाम सबकी जुबान पर है। जिन्होंने भी CBI में योगदान दिया वे बधाई के पात्र हैं। CBI के डायमंड जुबली कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पता है कि जिन लोगों के खिलाफ आप कार्रवाई कर रहे हैं, वे बहुत शक्तिशाली हैं। वे सालों से सरकार और व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। कुछ राज्यों में आज भी वे सत्ता में हैं, लेकिन सीबीआई को अपने काम पर ध्यान देना है, किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पीएम ने कहा आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है। आपको कहीं भी हिचकने, कहीं रूकने की जरूरत नहीं है। इस दौरान पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से CBI की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार से देश को मुक्त करने की है। भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं होता। भ्रष्टाचार, गरीब से उसका हक छीनता है, अनेक अपराधों को जन्म देता है। भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दस साल पहले ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार करने की होड़ लगी थी। उस दौरान बड़े-बड़े घोटाले हुए, लेकिन आरोपी डरे नहीं क्योंकि सिस्टम उनके साथ खड़ा था। दो हज़ार चौदह के बाद हमने भ्रष्टाचार, कालेधन के खिलाफ मिशन मोड में काम किया है। भ्रष्टाचारियों ने देश का खजाना लूटने का एक और तरीका बना रखा था जो दशकों से चला आ रहा था। ये सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से लूट थी। आज जनधन, आधार, मोबाइल की ट्रिनिटी से हर लाभार्थी को उसका पूरा हक मिल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि जहां भ्रष्टाचार होता है, वहां युवाओं को उचित अवसर नहीं मिलते। वहां सिर्फ एक विशेष ही फलता-फूलता है। भ्रष्टाचार प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन होता है और यहीं से भाई-भतीजावाद, परिवारवाद को बल मिलता है। उन्होंने कहा जब भाई-भतीजावाद और परिवारवाद बढ़ता है, तो समाज का, राष्ट्र का सामर्थ्य कम होता है। जब राष्ट्र का सामर्थ्य कम होता है तो विकास प्रभावित होता है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश की प्रीमियम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के रूप में साठ साल का सफर CBI ने पूरा किया है। ये छः दशक निश्चित रूप से अनेक उपलब्धियों के रहे हैं। आज यहां CBI के मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट का संग्रह भी जारी किया गया है। ये CBI के बीते वर्षों के सफर को दिखाता है। पीएम ने कहा लोग आंदोलन करते हैं कि केस उनसे लेकर CBI को दे दो। यहां तक कि पंचातय स्तर पर भी कोई मामला आता है तो लोग कहते हैं कि इसे CBI को दे देना चाहिए। न्याय के इंसाफ के एक ब्रांड के रूप में CBI हर जुबान पर है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम, जबलपुर ने तैयब अली से घंटाघर तक स्मार्ट रोड के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने के मामले में अभिवचन दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की युगलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की है। हाई कोर्ट ने समान मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका भी इसके साथ संलग्न कर दी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. सतीश चंद्र बटालिया ने याचिका दायर कर बताया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर निगम ने उनकी संपत्ति से सात फुट जगह अधिग्रहण करने के लिए नोटिस भेजा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी कि नियम के अनुरूप नगर निगम को पहले मार्केट रेट पर मुअावजा देना चाहिए। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता का पूरा भवन बकायदा नक्शा स्वीकृत कर बनाया गया है। निगम ने तर्क दिया है कि यह लीज की जमीन है, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर असगर अली एवं निलोफर अली ने भी याचिका प्रस्तुत की है। मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करने के निर्देश दिए।
जिला बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष आरके सिंह सैनी व सचिव राजेश तिवारी ने जिला अदालत, जबलपुर में सुरक्षा को सख्त करने पर बल दिया है। यहां अपराधी खतरा बने रहते हैं। वे जब चाहे तब आतंक मचा देते हैं। पूर्व में ऐसा हो चुका है। इसके बावजूद प्रत्येक गेट पर ठीक से सुरक्षा बल तैनात नहीं है। इससे वकील व पक्षकार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। इस सिलसिले में पुलिस अधीक्षक को शीघ्र ही पत्र सौंपा जाएगा। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इसे लेकर रणनीति निर्धारित की जा रही है। शीघ्र ही कार्यकारिणी की बैठक आहूत की जाएगी।
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जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम, जबलपुर ने तैयब अली से घंटाघर तक स्मार्ट रोड के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने के मामले में अभिवचन दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की युगलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई बीस अप्रैल को निर्धारित की है। हाई कोर्ट ने समान मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका भी इसके साथ संलग्न कर दी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. सतीश चंद्र बटालिया ने याचिका दायर कर बताया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर निगम ने उनकी संपत्ति से सात फुट जगह अधिग्रहण करने के लिए नोटिस भेजा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी कि नियम के अनुरूप नगर निगम को पहले मार्केट रेट पर मुअावजा देना चाहिए। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता का पूरा भवन बकायदा नक्शा स्वीकृत कर बनाया गया है। निगम ने तर्क दिया है कि यह लीज की जमीन है, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर असगर अली एवं निलोफर अली ने भी याचिका प्रस्तुत की है। मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करने के निर्देश दिए। जिला बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष आरके सिंह सैनी व सचिव राजेश तिवारी ने जिला अदालत, जबलपुर में सुरक्षा को सख्त करने पर बल दिया है। यहां अपराधी खतरा बने रहते हैं। वे जब चाहे तब आतंक मचा देते हैं। पूर्व में ऐसा हो चुका है। इसके बावजूद प्रत्येक गेट पर ठीक से सुरक्षा बल तैनात नहीं है। इससे वकील व पक्षकार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। इस सिलसिले में पुलिस अधीक्षक को शीघ्र ही पत्र सौंपा जाएगा। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इसे लेकर रणनीति निर्धारित की जा रही है। शीघ्र ही कार्यकारिणी की बैठक आहूत की जाएगी।
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एक दिन में कोविड-19 के सबसे अधिक 542 नए मामले सामने आने के साथ ही राज्य में शुक्रवार तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 16,190 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटे में राज्य में 10 लोग की कोविड-19 से मौत हुई है जिनमें से आठ को अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं।
बुलेटिन के अनुसार, चार लोग की मौत हावड़ा में हुई है वहीं कोलकाता में तीन और हुगली, दार्जिलिंग और दक्षिण 24 परगना जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। उसमें कहा गया है कि अभी तक कुल 10,535 लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हुए हैं। राज्य में फिलहाल 5,039 लोग ऐसे हैं जिनका कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है।
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एक दिन में कोविड-उन्नीस के सबसे अधिक पाँच सौ बयालीस नए मामले सामने आने के साथ ही राज्य में शुक्रवार तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर सोलह,एक सौ नब्बे हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, पिछले चौबीस घंटाटे में राज्य में दस लोग की कोविड-उन्नीस से मौत हुई है जिनमें से आठ को अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं। बुलेटिन के अनुसार, चार लोग की मौत हावड़ा में हुई है वहीं कोलकाता में तीन और हुगली, दार्जिलिंग और दक्षिण चौबीस परगना जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। उसमें कहा गया है कि अभी तक कुल दस,पाँच सौ पैंतीस लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हुए हैं। राज्य में फिलहाल पाँच,उनतालीस लोग ऐसे हैं जिनका कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है।
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- #UjjainSawan 2023: प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल, कहां कैसी रहेगी व्यवस्था, जानिए?
उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र की विधानसभा उज्जैन दक्षिण के मक्सी रोड स्थित रघुनन्दन गार्डन में लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें शामिल हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, देवास रोड नागझिरी स्थित एवं इन्दौर रोड निनौरा के समीप नवाखेड़ा में कारखाने खुलने से लगभग 11 हजार महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
इसी के साथ उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा की, राज्य सरकार द्वारा गरीबों एवं माता-बहनों के लिये अनेक योजनाएं लागू कर लाभांवित किया है। इसमें लाड़ली लक्ष्मी योजना और हाल ही में लागू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महत्वाकांक्षी योजना से करोड़ों बहनों को प्रदेश में लाभ मिला है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, पहले सिंहस्थ आने पर शहर का विकास होता था, परन्तु अब सालभर शहर में विकास के कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़नगर की एक बेटी सीए की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये विदेश गई और सरकार ने उसकी फीस भरी, जिससे आज उसको अच्छा पैकेज मिला है। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार ने गरीबों के दुःख-दर्द को समझकर कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कर उनका सफलतम क्रियान्वयन किया है और करोड़ों हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया है।
नगर निगम सभापति कलावती यादव ने भी इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि बहनों के लिये सरकार बेहतर काम कर उन्हें लाभांवित किया जा रहा है। महाकाल लोक के बनने से उज्जैन शहर में श्रद्धालुओ की भीड़ में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे शहर के हजारों लोगों को रोजगार मिला है। शहर का चहुंमुखी विकास भी निरन्तर जारी है। विवेक जोशी ने भी अपने विचार व्यक्त कर कहा कि, सरकार गरीबों के हित में बेहतर काम कर उन्हें लाभांवित कर रही है, यही सरकार का उद्देश्य है। कार्यक्रम के अन्त में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपस्थित सैंकड़ों महिलाओं से कहा कि वे अपने-अपने मोबाइल की टॉर्च दिखाकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ढेरों योजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं लाभ पहुंचाने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया।
ये भी पढ़े- Khargone को करोड़ों के विकासकार्यों सौगात देंगे CM Shivraj, क्या कुछ रहेगा खास, जानिए?
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- #UjjainSawan दो हज़ार तेईस: प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल, कहां कैसी रहेगी व्यवस्था, जानिए? उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र की विधानसभा उज्जैन दक्षिण के मक्सी रोड स्थित रघुनन्दन गार्डन में लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें शामिल हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, देवास रोड नागझिरी स्थित एवं इन्दौर रोड निनौरा के समीप नवाखेड़ा में कारखाने खुलने से लगभग ग्यारह हजार महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इसी के साथ उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा की, राज्य सरकार द्वारा गरीबों एवं माता-बहनों के लिये अनेक योजनाएं लागू कर लाभांवित किया है। इसमें लाड़ली लक्ष्मी योजना और हाल ही में लागू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महत्वाकांक्षी योजना से करोड़ों बहनों को प्रदेश में लाभ मिला है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, पहले सिंहस्थ आने पर शहर का विकास होता था, परन्तु अब सालभर शहर में विकास के कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़नगर की एक बेटी सीए की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये विदेश गई और सरकार ने उसकी फीस भरी, जिससे आज उसको अच्छा पैकेज मिला है। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार ने गरीबों के दुःख-दर्द को समझकर कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कर उनका सफलतम क्रियान्वयन किया है और करोड़ों हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया है। नगर निगम सभापति कलावती यादव ने भी इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि बहनों के लिये सरकार बेहतर काम कर उन्हें लाभांवित किया जा रहा है। महाकाल लोक के बनने से उज्जैन शहर में श्रद्धालुओ की भीड़ में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे शहर के हजारों लोगों को रोजगार मिला है। शहर का चहुंमुखी विकास भी निरन्तर जारी है। विवेक जोशी ने भी अपने विचार व्यक्त कर कहा कि, सरकार गरीबों के हित में बेहतर काम कर उन्हें लाभांवित कर रही है, यही सरकार का उद्देश्य है। कार्यक्रम के अन्त में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपस्थित सैंकड़ों महिलाओं से कहा कि वे अपने-अपने मोबाइल की टॉर्च दिखाकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ढेरों योजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं लाभ पहुंचाने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया। ये भी पढ़े- Khargone को करोड़ों के विकासकार्यों सौगात देंगे CM Shivraj, क्या कुछ रहेगा खास, जानिए?
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आज सेंसेक्स के टॉप-30 में 14 शेयर तेजी के साथ और 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. पावरग्रिड, एचसीएल टेक्नोलॉजी और इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल रहा. रिलायंस, नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.
शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार (Share Market Updates) पर भारी दबाव दिखा. आज सुबह सेंसेक्स 917 अंकों तक फिसला और 54 हजार के नीचे जा पहुंचा. हालांकि, कुछ सलेक्टिव आईटी और ऑटो स्टॉक में सुधार के कारण गिरावट का फासला कम हुआ. आज सेंसेक्स 364 अंकों की गिरावट के साथ 54470 अंकों पर और निफ्टी 109 अंकों की गिरावट के साथ 16301 के स्तर पर बंद हुआ. आज सेंसेक्स के टॉप-30 में 14 शेयर तेजी के साथ और 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. पावरग्रिड, एचसीएल टेक्नोलॉजी और इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल रहा. रिलायंस, नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.
आज डॉलर के मुकाबले रुपया नए रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया. कारोबार समाप्त होने पर रुपया 57 पैसे की गिरावट के साथ 77.47 के स्तर पर बंद हुआ जो नया रिकॉर्ड लो क्लोजिंग है. कारोबार के दौरान यह 77.58 के स्तर तक फिसला था. डॉलर पूरी दुनिया में मजबूत हो रहा है. फेडरल रिजर्व ने इंट्रेस्ट रेट में आधे फीसदी की बढ़ोतरी की. आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी होगी. इसके कारण डॉलर इंडेक्स 20 सालों के उच्चतम स्तर पर है जो दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले रुपए की मजबूती और कमजोरी को बतलाता है.
बाजार के फ्यूचर सेंटिमेंट को लेकर कोटक सिक्यॉरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि शॉर्ट टर्म के लिए बाजार अभी भी बियरिश यानी गिरावट का ट्रेंड दिखा रहा है. बाजार में बहुत ज्यादा बिकवाली हो चुकी है, ऐसे में बायर्स के हावी होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है. इस स्तर पर बायर्स कभी भी हावी हो सकते हैं.
टेक्निकल आधार पर अगर निफ्टी 16200 के ऊपर और सेंसेक्स 54150 के ऊपर बना रहता है तो बायर्स के हावी होने पर निफ्टी 16450-16550 के स्तर तक वापसी कर सकता है. उसी तरह सेंसेक्स 55000-55300 के स्तर तक वापसी कर सकता है. हालांकि, बाजार का सेटिमेंट बियरिश है. अगर बाजार में और गिरावट होती है तो निफ्टी के लिए 16100 और सेंसेक्स के लिए 53900 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है.
पिछले छह कारोबारी सत्रों से रिलायंस का शेयर लगातार गिरावट के साथ बंद हो रहा है. आज यह शेयर करीब 4 फीसदी की गिरावट के साथ 2518 रुपए के स्तर पर बंद हुआ. इन छह कारोबारी सत्रों में रिलायंस का शेयर 11 फीसदी से ज्याद फिसल चुका है. दरअसल रिलायंस का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बाजार के अनुरीप नहीं रहा जिसके कारण इस शेयर पर दबाव है. अलग-अलग ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए 2500 रुपए से लेकर 3250 रुपए तक का टार्गेट प्राइस रखा है.
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आज सेंसेक्स के टॉप-तीस में चौदह शेयर तेजी के साथ और सोलह शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. पावरग्रिड, एचसीएल टेक्नोलॉजी और इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल रहा. रिलायंस, नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर भारी दबाव दिखा. आज सुबह सेंसेक्स नौ सौ सत्रह अंकों तक फिसला और चौवन हजार के नीचे जा पहुंचा. हालांकि, कुछ सलेक्टिव आईटी और ऑटो स्टॉक में सुधार के कारण गिरावट का फासला कम हुआ. आज सेंसेक्स तीन सौ चौंसठ अंकों की गिरावट के साथ चौवन हज़ार चार सौ सत्तर अंकों पर और निफ्टी एक सौ नौ अंकों की गिरावट के साथ सोलह हज़ार तीन सौ एक के स्तर पर बंद हुआ. आज सेंसेक्स के टॉप-तीस में चौदह शेयर तेजी के साथ और सोलह शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. पावरग्रिड, एचसीएल टेक्नोलॉजी और इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल रहा. रिलायंस, नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. आज डॉलर के मुकाबले रुपया नए रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया. कारोबार समाप्त होने पर रुपया सत्तावन पैसे की गिरावट के साथ सतहत्तर.सैंतालीस के स्तर पर बंद हुआ जो नया रिकॉर्ड लो क्लोजिंग है. कारोबार के दौरान यह सतहत्तर.अट्ठावन के स्तर तक फिसला था. डॉलर पूरी दुनिया में मजबूत हो रहा है. फेडरल रिजर्व ने इंट्रेस्ट रेट में आधे फीसदी की बढ़ोतरी की. आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी होगी. इसके कारण डॉलर इंडेक्स बीस सालों के उच्चतम स्तर पर है जो दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले रुपए की मजबूती और कमजोरी को बतलाता है. बाजार के फ्यूचर सेंटिमेंट को लेकर कोटक सिक्यॉरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि शॉर्ट टर्म के लिए बाजार अभी भी बियरिश यानी गिरावट का ट्रेंड दिखा रहा है. बाजार में बहुत ज्यादा बिकवाली हो चुकी है, ऐसे में बायर्स के हावी होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है. इस स्तर पर बायर्स कभी भी हावी हो सकते हैं. टेक्निकल आधार पर अगर निफ्टी सोलह हज़ार दो सौ के ऊपर और सेंसेक्स चौवन हज़ार एक सौ पचास के ऊपर बना रहता है तो बायर्स के हावी होने पर निफ्टी सोलह हज़ार चार सौ पचास-सोलह हज़ार पाँच सौ पचास के स्तर तक वापसी कर सकता है. उसी तरह सेंसेक्स पचपन हज़ार-पचपन हज़ार तीन सौ के स्तर तक वापसी कर सकता है. हालांकि, बाजार का सेटिमेंट बियरिश है. अगर बाजार में और गिरावट होती है तो निफ्टी के लिए सोलह हज़ार एक सौ और सेंसेक्स के लिए तिरेपन हज़ार नौ सौ एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है. पिछले छह कारोबारी सत्रों से रिलायंस का शेयर लगातार गिरावट के साथ बंद हो रहा है. आज यह शेयर करीब चार फीसदी की गिरावट के साथ दो हज़ार पाँच सौ अट्ठारह रुपयापए के स्तर पर बंद हुआ. इन छह कारोबारी सत्रों में रिलायंस का शेयर ग्यारह फीसदी से ज्याद फिसल चुका है. दरअसल रिलायंस का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बाजार के अनुरीप नहीं रहा जिसके कारण इस शेयर पर दबाव है. अलग-अलग ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए दो हज़ार पाँच सौ रुपयापए से लेकर तीन हज़ार दो सौ पचास रुपयापए तक का टार्गेट प्राइस रखा है.
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डेथ और ब्लैक वारंट... एक दस्तावेज के दो नाम...क्या है इसकी पूरी कहानी, फांसी फरमान पर किसके दस्तखत?
एक ही दस्तावेज के दो अलग नाम क्यों है. आइए जानते हैं इन वारंट को लेकर कानूनी दस्तावेजों में मौजूद 'काला-सफेद सच'.
लाल किले पर अब से करीब 23 साल पहले हुए आतंकवादी हमले का जिन्न सोमवार को फिर सिर उठाने लगा, जब पता चला कि उस हमले के मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी, मोहम्मद आरिफ उर्फ मोहम्मद अशफाक का 'डेथ वारंट' हासिल करने को तिहाड़ जेल प्रशासन संबंधित कोर्ट की देहरी पहुंचा है. इस खबर के साथ ही फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या 'डेथ वारंट' और 'ब्लैक वारंट' एक ही कानूनी दस्तावेज है या फिर अलग-अलग?
आइए जानते हैं इन वारंट को लेकर कानूनी दस्तावेजों में मौजूद 'काला-सफेद सच'. कहानी के शुरुआत में ही बता देना जरूरी है कि, हिंदुस्तानी कानून के किसी भी दस्तावेज में कहीं भी 'डेथ वारंट' और 'ब्लैक वारंट' तो लिखा ही नहीं है.
डेथ वारंट या ब्लैक वारंट आए कहां से?
ऐसे में अब यह सवाल जेहन में आना लाजिमी है कि आखिर यह डेथ वारंट या ब्लैक वारंट निकले कहां से कैसे और कब? दरअसल, यह सब पुलिसिया, जेल और कोर्ट कचहरी की आम बोलचाल की भाषा के शब्दकोष से तैयार अल्फाज हैं. जो उस कदर के प्रचलित हो चुके हैं कि अब इन्हें डेथ और ब्लैक वारंट के नाम से ही हर कोई जानता पहचानता और समझता है. भले ही फांसी के लिए अंतिम दस्तावेज माने जाने वाले आदेश को ऊपर, कहीं भी इन दोनों ही शब्दों का कभी कोई भी उल्लेख मौजूद ही न मिलता हो.
कह सकते हैं कि भारत से विशाल लोकतांत्रिक देश में ब्लैक या फिर डेथ वारंट, की बारीकी भले ही कोई अधिकांश लोग न जानते हों. बहुतायत ने तो इस अहम कानूनी दस्तावेज के जिंदगी में एक बार भी दर्शन तक न किए हों, मगर ब्लैक और डेथ वारंट ऐसे लोग भी समझ जाते हैं, क्योंकि वे इस दस्तावेज को अपने हिसाब से सिर्फ और सिर्फ, किसी सजायाफ्ता मुजरिम की मौत का अंतिम 'कानूनी दस्तावेज' मानते-जानते हैं.
'ब्लैक-वारंट' जैसी चर्चित किताब के लेखक और तिहाड़ जेल के पूर्व कानूनी सलाहकार सुनील गुप्ता ने, टीवी9 भारतवर्ष से विशेष बातचीत में कहा, "डेथ और ब्लैक वारंट एक ही कानून दस्तावेज के दो अलग-अलग नाम हैं. दोनों की अहमियत और काम कानून की नजर में बराबर हैं. आमजन को अपने जेहन से यह निकालना होगा कि, डेथ और ब्लैक वारंट दो अलग अलग दस्तावेज हैं." टीवी9 भारतवर्ष के पाठकों की जिज्ञासा को और भी ज्यादा तह तक में जाकर शांत करने की उम्मीद में सुनील गुप्ता कहते हैं, सच पूछिए तो डेथ वारंट ही सबकुछ है. न कि ब्लैक वारंट नाम का कोई कानूनी दस्तावेज कहीं हिंदुस्तानी कोर्ट कचहरी में मौजूद है.
दो अलग-अलग नाम क्यों?
ऐसे में किसी के भी जेहन में सवाल कौंधना लाजिमी है कि अगर, दोनों अलग-अलग नहीं है या दोनों की अहमियत और काम अलग-अलग नहीं हैं तो फिर नाम दो अलग अलग क्यों? पूछने पर तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी कहते हैं, "दरअसल ब्लैक वारंट कुछ अलग या विशेष किस्म का कोई मौत का फरमान या फिर कानूनी दस्तावेज कतई नहीं है. हां ये सही है कि ब्लैक वारंट अगर कोई कहता है तो वो भी अनुचित नहीं है. हां, डेथ वारंट को तो 'ब्लैक वारंट' आम बोलचाल की भाषा में कहा जा सकता है, मगर ब्लैक वारंट को डेथ वारंट कहकर नहीं बुलाया जा सकता है. क्योंकि असल में कानूनी दस्तावेज के रूप में तैयार तो डेथ वारंट ही जारी होता है. न कि ब्लैक वारंट.
कैसा होता है ये डेथ वारंट?
अब सबके बाद सवाल जेहन में आता है कि डेथ या ब्लैक वारंट होता कैसा है? कैसे बनता है? मौत का अंतिम फरमान होने के चलते डेथ-वारंट की भाषा रंग-रूप क्या है. क्या ये अन्य तमाम कानूनी दस्तावेजों से देखने में कुछ अलग या डरावने किस्म के होते हैं? क्या डेथ वारंट को अलग से पहचान पाना संभव है? दरअसल डेथ वारंट एक विशेष किस्म के कागज पर ही लिखा जाता है. उस कागज पर जिसके बस हासिये (कागज के चारों कोने और साइड में छूटी हुई जगह) का रंग जरूर काला होता है. इन तमाम जानकारियों के बाद जेहन में सवाल उठना लाजिमी है कि, डेथ-ब्लैक वारंट का आखिर मजमून लिखता कौन है और मजमून होता क्या है?
डेथ वारंट का मजमून हमेशा सजा सुनाने वाला जज (ट्रायल कोर्ट जहां से मुलजिम को 'मुजरिम' करार देकर सजा-ए मौत- पहली बार मुकर्रर होती है) ही खुद लिखता है. कई साल पहले तक जज अपने कलम (हैंड राइटिंग) में मौत का ये फरमान यानि डेथ वारंट लिखते थे. आधुनिक तकनीकी युग में वक्त के साथ, हिंदुस्तानी अदालतों में रोजमर्रा के कामकाज का तौर-तरीका भी बदल गया है. लिहाजा अब पहले से तयशुदा एक मैटर कागज पर (डेथ या ब्लैक वारंट पर) टाइप कर दिया जाता है. उसके नीचे सजा सुनाने वाले जज अपने हस्ताक्षर कर देते समय मुहर और तारीख और समय लिख देता है.
डेथ वारंट में कब लिखी जाती है समय, दिन और तारीख?
बात जब डेथ या फिर ब्लैक वारंट जारी होने की हो, तो उसे जारी करने के वक्त यानि समय-दिन-तारीख का भी सवाल जेहन में आना लाजिमी है. इसके लिए सबसे पहले ट्रायल कोर्ट (सेशन कोर्ट) दोष-सिद्ध होने पर मुलजिम को मुजरिम करार देता है. फिर मुजरिम को सजा सुनाई जाती है. सजा अगर फांसी की है तो फिर ये मामला हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, राज्यपाल, राष्ट्रपति की देहरी तक पहुंचता है. यह काम सजायाफ्ता मुजरिम की ओर से अपनी जिंदगी बचाने के लिए किया जाता है.
भारत के राष्ट्रपति जब दया-याचिका खारिज कर देते हैं, तब जिस जेल में मौत की सजा पाए मुजरिम को बंद करके रखा गया है, उस जेल का जेल सुपरिटेंडेंट राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई दया याचिका संबंधी लिखित सूचना लेकर, ट्रायल कोर्ट यानि जिस कोर्ट ने मुलजिम को मुजरिम करार देकर सबसे पहले सजा-ए-मौत मुकर्रर की होती है वहां पहुंचता है. जैसा की अब इस वक्त तिहाड़ जेल के जेलर ने लाल किला कांड के मुख्य षडयंत्रकारी मोहम्मद अशफाक उर्फ मोहम्मद आरिफ के मामले में कदम उठाया है संबंधित कोर्ट में उसका डेथ वारंट जारी करने की अर्जी दाखिल करके.
जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा पेश इसी अर्जी पर संबंधित कोर्ट के जज अपने स्तर से पता करवाते हैं कि, क्या वास्तव में मुजरिम की दया याचिका हर देहरी से खारिज हो चुकी है? इसके साथ ही सभी दया याचिकाएं खारिज होने संबंधी आदेशों को डेथ वारंट जारी करने से पहले, ट्रायल कोर्ट जज (मौत की सजा सुनाने वाला जज) फाइल पर ON RECORD लाता है, . उसके बाद वो मुजरिम का डेथ वारंट (ब्लैक वारंट) जारी करता है. ये डेथ वारंट सीलबंद लिफाफे में संबंधित कोर्ट द्वारा जेल सुपरिंटेंडेंट के हवाले किया जाता है. जज द्वारा जारी डेथ वारंट उस हद तक का अति-गोपनीय होता है कि जिसमें लिखा मजमून (फांसी लगाने वाली जेल, जगह, तारीख स्थान आदि), डेथ वारंट लिखने वाले जज के अलावा शायद ही किसी दूसरे को पता होता है. जज ने मुजरिम को फांसी का वक्त तारीख स्थान जेल क्या और कहां तय किया है? इन सवालों का जवाब भी डेथ वारंट पढ़ने के बाद ही उस जेल सुपरिंटेंडेंट को भी पता चलता है जो, डेथ वारंट जारी कराने की अर्जी कोर्ट में लेकर पहुंचता है.
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डेथ और ब्लैक वारंट... एक दस्तावेज के दो नाम...क्या है इसकी पूरी कहानी, फांसी फरमान पर किसके दस्तखत? एक ही दस्तावेज के दो अलग नाम क्यों है. आइए जानते हैं इन वारंट को लेकर कानूनी दस्तावेजों में मौजूद 'काला-सफेद सच'. लाल किले पर अब से करीब तेईस साल पहले हुए आतंकवादी हमले का जिन्न सोमवार को फिर सिर उठाने लगा, जब पता चला कि उस हमले के मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी, मोहम्मद आरिफ उर्फ मोहम्मद अशफाक का 'डेथ वारंट' हासिल करने को तिहाड़ जेल प्रशासन संबंधित कोर्ट की देहरी पहुंचा है. इस खबर के साथ ही फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या 'डेथ वारंट' और 'ब्लैक वारंट' एक ही कानूनी दस्तावेज है या फिर अलग-अलग? आइए जानते हैं इन वारंट को लेकर कानूनी दस्तावेजों में मौजूद 'काला-सफेद सच'. कहानी के शुरुआत में ही बता देना जरूरी है कि, हिंदुस्तानी कानून के किसी भी दस्तावेज में कहीं भी 'डेथ वारंट' और 'ब्लैक वारंट' तो लिखा ही नहीं है. डेथ वारंट या ब्लैक वारंट आए कहां से? ऐसे में अब यह सवाल जेहन में आना लाजिमी है कि आखिर यह डेथ वारंट या ब्लैक वारंट निकले कहां से कैसे और कब? दरअसल, यह सब पुलिसिया, जेल और कोर्ट कचहरी की आम बोलचाल की भाषा के शब्दकोष से तैयार अल्फाज हैं. जो उस कदर के प्रचलित हो चुके हैं कि अब इन्हें डेथ और ब्लैक वारंट के नाम से ही हर कोई जानता पहचानता और समझता है. भले ही फांसी के लिए अंतिम दस्तावेज माने जाने वाले आदेश को ऊपर, कहीं भी इन दोनों ही शब्दों का कभी कोई भी उल्लेख मौजूद ही न मिलता हो. कह सकते हैं कि भारत से विशाल लोकतांत्रिक देश में ब्लैक या फिर डेथ वारंट, की बारीकी भले ही कोई अधिकांश लोग न जानते हों. बहुतायत ने तो इस अहम कानूनी दस्तावेज के जिंदगी में एक बार भी दर्शन तक न किए हों, मगर ब्लैक और डेथ वारंट ऐसे लोग भी समझ जाते हैं, क्योंकि वे इस दस्तावेज को अपने हिसाब से सिर्फ और सिर्फ, किसी सजायाफ्ता मुजरिम की मौत का अंतिम 'कानूनी दस्तावेज' मानते-जानते हैं. 'ब्लैक-वारंट' जैसी चर्चित किताब के लेखक और तिहाड़ जेल के पूर्व कानूनी सलाहकार सुनील गुप्ता ने, टीवीनौ भारतवर्ष से विशेष बातचीत में कहा, "डेथ और ब्लैक वारंट एक ही कानून दस्तावेज के दो अलग-अलग नाम हैं. दोनों की अहमियत और काम कानून की नजर में बराबर हैं. आमजन को अपने जेहन से यह निकालना होगा कि, डेथ और ब्लैक वारंट दो अलग अलग दस्तावेज हैं." टीवीनौ भारतवर्ष के पाठकों की जिज्ञासा को और भी ज्यादा तह तक में जाकर शांत करने की उम्मीद में सुनील गुप्ता कहते हैं, सच पूछिए तो डेथ वारंट ही सबकुछ है. न कि ब्लैक वारंट नाम का कोई कानूनी दस्तावेज कहीं हिंदुस्तानी कोर्ट कचहरी में मौजूद है. दो अलग-अलग नाम क्यों? ऐसे में किसी के भी जेहन में सवाल कौंधना लाजिमी है कि अगर, दोनों अलग-अलग नहीं है या दोनों की अहमियत और काम अलग-अलग नहीं हैं तो फिर नाम दो अलग अलग क्यों? पूछने पर तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी कहते हैं, "दरअसल ब्लैक वारंट कुछ अलग या विशेष किस्म का कोई मौत का फरमान या फिर कानूनी दस्तावेज कतई नहीं है. हां ये सही है कि ब्लैक वारंट अगर कोई कहता है तो वो भी अनुचित नहीं है. हां, डेथ वारंट को तो 'ब्लैक वारंट' आम बोलचाल की भाषा में कहा जा सकता है, मगर ब्लैक वारंट को डेथ वारंट कहकर नहीं बुलाया जा सकता है. क्योंकि असल में कानूनी दस्तावेज के रूप में तैयार तो डेथ वारंट ही जारी होता है. न कि ब्लैक वारंट. कैसा होता है ये डेथ वारंट? अब सबके बाद सवाल जेहन में आता है कि डेथ या ब्लैक वारंट होता कैसा है? कैसे बनता है? मौत का अंतिम फरमान होने के चलते डेथ-वारंट की भाषा रंग-रूप क्या है. क्या ये अन्य तमाम कानूनी दस्तावेजों से देखने में कुछ अलग या डरावने किस्म के होते हैं? क्या डेथ वारंट को अलग से पहचान पाना संभव है? दरअसल डेथ वारंट एक विशेष किस्म के कागज पर ही लिखा जाता है. उस कागज पर जिसके बस हासिये का रंग जरूर काला होता है. इन तमाम जानकारियों के बाद जेहन में सवाल उठना लाजिमी है कि, डेथ-ब्लैक वारंट का आखिर मजमून लिखता कौन है और मजमून होता क्या है? डेथ वारंट का मजमून हमेशा सजा सुनाने वाला जज ही खुद लिखता है. कई साल पहले तक जज अपने कलम में मौत का ये फरमान यानि डेथ वारंट लिखते थे. आधुनिक तकनीकी युग में वक्त के साथ, हिंदुस्तानी अदालतों में रोजमर्रा के कामकाज का तौर-तरीका भी बदल गया है. लिहाजा अब पहले से तयशुदा एक मैटर कागज पर टाइप कर दिया जाता है. उसके नीचे सजा सुनाने वाले जज अपने हस्ताक्षर कर देते समय मुहर और तारीख और समय लिख देता है. डेथ वारंट में कब लिखी जाती है समय, दिन और तारीख? बात जब डेथ या फिर ब्लैक वारंट जारी होने की हो, तो उसे जारी करने के वक्त यानि समय-दिन-तारीख का भी सवाल जेहन में आना लाजिमी है. इसके लिए सबसे पहले ट्रायल कोर्ट दोष-सिद्ध होने पर मुलजिम को मुजरिम करार देता है. फिर मुजरिम को सजा सुनाई जाती है. सजा अगर फांसी की है तो फिर ये मामला हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, राज्यपाल, राष्ट्रपति की देहरी तक पहुंचता है. यह काम सजायाफ्ता मुजरिम की ओर से अपनी जिंदगी बचाने के लिए किया जाता है. भारत के राष्ट्रपति जब दया-याचिका खारिज कर देते हैं, तब जिस जेल में मौत की सजा पाए मुजरिम को बंद करके रखा गया है, उस जेल का जेल सुपरिटेंडेंट राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई दया याचिका संबंधी लिखित सूचना लेकर, ट्रायल कोर्ट यानि जिस कोर्ट ने मुलजिम को मुजरिम करार देकर सबसे पहले सजा-ए-मौत मुकर्रर की होती है वहां पहुंचता है. जैसा की अब इस वक्त तिहाड़ जेल के जेलर ने लाल किला कांड के मुख्य षडयंत्रकारी मोहम्मद अशफाक उर्फ मोहम्मद आरिफ के मामले में कदम उठाया है संबंधित कोर्ट में उसका डेथ वारंट जारी करने की अर्जी दाखिल करके. जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा पेश इसी अर्जी पर संबंधित कोर्ट के जज अपने स्तर से पता करवाते हैं कि, क्या वास्तव में मुजरिम की दया याचिका हर देहरी से खारिज हो चुकी है? इसके साथ ही सभी दया याचिकाएं खारिज होने संबंधी आदेशों को डेथ वारंट जारी करने से पहले, ट्रायल कोर्ट जज फाइल पर ON RECORD लाता है, . उसके बाद वो मुजरिम का डेथ वारंट जारी करता है. ये डेथ वारंट सीलबंद लिफाफे में संबंधित कोर्ट द्वारा जेल सुपरिंटेंडेंट के हवाले किया जाता है. जज द्वारा जारी डेथ वारंट उस हद तक का अति-गोपनीय होता है कि जिसमें लिखा मजमून , डेथ वारंट लिखने वाले जज के अलावा शायद ही किसी दूसरे को पता होता है. जज ने मुजरिम को फांसी का वक्त तारीख स्थान जेल क्या और कहां तय किया है? इन सवालों का जवाब भी डेथ वारंट पढ़ने के बाद ही उस जेल सुपरिंटेंडेंट को भी पता चलता है जो, डेथ वारंट जारी कराने की अर्जी कोर्ट में लेकर पहुंचता है.
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गुरुग्राम, 30 मई (निस)
विधायक सुधीर सिंगला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा यहां 2711 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों की जो घोषणाएं की गई हैं, उनसे निश्चित ही गुरुग्राम का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि लंबे अर्से बाद मुख्यमंत्री की इतनी बड़ी रैली जिला में आयोजित की गई है। विधायक सुधीर सिंगला ने कहा कि हरियाणा प्रगति रैली हकीकत में ही हरियाणा की प्रगति को पंख लगा रही है। जिलावार रैलियों की श्रृंखला में मुख्यमंत्री सौगात बांट रहे हैं। कई प्रोजेक्टों पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इनके शुरू होने के बाद गुरुग्राम में कई और समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में दूसरे राजकीय महिला महाविद्यालय का उद्घाटन कर दिया है। अब गुरुग्राम की बेटियों को यहां से बाहर पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, बस अड्डा और मेडिकल कॉले भी जल्द मिल जाएगा। उन्होंने गुरुग्राम में मुख्य बस स्टैंड के स्थान पर 5 एकड़ जमीन पर सिटी बस स्टैंड बनाने अंतर्राज्यीय मुख्य बस अड्डा गांव सिही में 15 एकड़ भूमि पर बनवाए जाने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि खेलों के लिए 68 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। लोक निर्माण विभाग की 458 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 60 अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने की घोषणा भी सीएम ने की हैं। इससे इन कालोनियों में हजारों निवासियों को लाभ मिलेगा।
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गुरुग्राम, तीस मई विधायक सुधीर सिंगला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा यहां दो हज़ार सात सौ ग्यारह करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों की जो घोषणाएं की गई हैं, उनसे निश्चित ही गुरुग्राम का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि लंबे अर्से बाद मुख्यमंत्री की इतनी बड़ी रैली जिला में आयोजित की गई है। विधायक सुधीर सिंगला ने कहा कि हरियाणा प्रगति रैली हकीकत में ही हरियाणा की प्रगति को पंख लगा रही है। जिलावार रैलियों की श्रृंखला में मुख्यमंत्री सौगात बांट रहे हैं। कई प्रोजेक्टों पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इनके शुरू होने के बाद गुरुग्राम में कई और समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में दूसरे राजकीय महिला महाविद्यालय का उद्घाटन कर दिया है। अब गुरुग्राम की बेटियों को यहां से बाहर पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, बस अड्डा और मेडिकल कॉले भी जल्द मिल जाएगा। उन्होंने गुरुग्राम में मुख्य बस स्टैंड के स्थान पर पाँच एकड़ जमीन पर सिटी बस स्टैंड बनाने अंतर्राज्यीय मुख्य बस अड्डा गांव सिही में पंद्रह एकड़ भूमि पर बनवाए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि खेलों के लिए अड़सठ करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। लोक निर्माण विभाग की चार सौ अट्ठावन करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि साठ अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने की घोषणा भी सीएम ने की हैं। इससे इन कालोनियों में हजारों निवासियों को लाभ मिलेगा।
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आर्णी. आर्णी शहर में होली की रात हुई आतिष ढोले हत्या मामलें के तीनों आरोपीयों की पुलिस कस्टडी समाप्त होने के बाद उनकी जेल में रवानगी की गयी है. बता दें की डीजे पर नाचने को लेकर हुए विवाद में 19 मार्च की रात आतिष की चंदन सोयाम के साथ हुए विवाद के बाद रोहन, सोयाम और संदिप पेंदोर ने मिलीभगत कर चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी.
जिसके बाद इन तीनों आरोपीयों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. पकडे गए आरोपीयों कों दुसरे दिन न्यायालय में पेश करने पर उन्हे 3 दिनों तक पुलिस कस्टडी में रखने के आदेश दिए गए थे. इस दौरान पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकु भी बरामद कर लिया. पीसीआर के दौरान आरोपीयों ने आतिष की हत्या की कुबूली दी.
जिसके बाद उनका एक दिन और पीसीआर बढा था. इसी बीच मंगलवार को तीनों आरोपीयों की पुलिस रिमांड समाप्त होने पर उन्हे न्यायालय में पेश किया गया, जहां पर उन्हे न्यायालयीन कस्टडी में रखने के आदेश दिए गए, जिसके बाद तीनों ही आरोपीयों को यवतमाल स्थित कारागार में रवाना किया गया.
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आर्णी. आर्णी शहर में होली की रात हुई आतिष ढोले हत्या मामलें के तीनों आरोपीयों की पुलिस कस्टडी समाप्त होने के बाद उनकी जेल में रवानगी की गयी है. बता दें की डीजे पर नाचने को लेकर हुए विवाद में उन्नीस मार्च की रात आतिष की चंदन सोयाम के साथ हुए विवाद के बाद रोहन, सोयाम और संदिप पेंदोर ने मिलीभगत कर चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी. जिसके बाद इन तीनों आरोपीयों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. पकडे गए आरोपीयों कों दुसरे दिन न्यायालय में पेश करने पर उन्हे तीन दिनों तक पुलिस कस्टडी में रखने के आदेश दिए गए थे. इस दौरान पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकु भी बरामद कर लिया. पीसीआर के दौरान आरोपीयों ने आतिष की हत्या की कुबूली दी. जिसके बाद उनका एक दिन और पीसीआर बढा था. इसी बीच मंगलवार को तीनों आरोपीयों की पुलिस रिमांड समाप्त होने पर उन्हे न्यायालय में पेश किया गया, जहां पर उन्हे न्यायालयीन कस्टडी में रखने के आदेश दिए गए, जिसके बाद तीनों ही आरोपीयों को यवतमाल स्थित कारागार में रवाना किया गया.
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इस्लामी देशों के भारत विरोध का उत्तर देने के लिए हिन्दू राष्ट्र आवश्यक !
गोवा में गत 10 वर्षाें से होनेवाले 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' के कारण देश में हिन्दू राष्ट्र की चर्चा प्रारंभ हुई । उसके पश्चात हिन्दू राष्ट्र का ध्येय सामने रखकर विविध क्षेत्रों में कार्य करना प्रारंभ हुआ है । नुपूर शर्मा भाजपा की प्रवक्ता थीं, तब उन्होंने इस्लाम के संदर्भ में विधान किया था । उस विधान पर विश्व के अनेक इस्लामी राष्ट्र एकत्रित आकर भारत का विरोध कर रहे हैं । अल कायदा ने तो सीधे भारत पर आक्रमण की धमकी दी है; किंतु शिवलिंग को 'फुहारा' कहकर अथवा 'हिन्दू गुप्तांग की (शिवलिंग की) पूजा क्यों करते हैं ? ' ऐसा हेतुतः बोलकर हिन्दुओं की धर्मभावनाओं को आहत करनेवालों के विरुद्ध कोई भी विरोध प्रकट करते हुए दिखाई नहीं देता । इससे ध्यान में आता है कि विश्व में एक तो हिन्दुओं का राष्ट्र होना क्यों आवश्यक है ? हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य को गति देने के लिए इस वर्ष 12 से 18 जून 2022 की अवधि में 'श्री रामनाथ देवस्थान', फोंडा, गोवा में दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' आयोजित किया गया है, ऐसी जानकारी हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ. ) चारुदत्त पिंगळेजी ने पत्रकार परिषद में दी । पणजी गोवा में आयोजित पत्रकार परिषद में 'भारत माता की जय संगठन' के गोवा राज्य संघचालक श्री. सुभाष वेलिंगकर, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे और सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस यह उपस्थित थे ।
इस वर्ष के हिन्दू अधिवेशन की विशेषता - 'हिन्दू राष्ट्र संसद'!
सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने कहा कि, केंद्र में तथा अनेक राज्यों में हिन्दुत्वनिष्ठ दल की सरकार आने के कारण राममंदिर निर्माण, लव जिहाद और धर्मांतरण के विरोध में कानून लागू होना और अनुच्छेद 370 हटाना आदि सकारात्मक कार्य हुआ है, तथापि काशी-मथुरा सहित हिन्दुओं के अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की मुक्ति होना शेष है । ओवैसी कह रहे हैं, 'ज्ञानवापी मस्जिद नहीं लेने देंगे । ' मिशनरियों द्वारा बलपूर्वक होनेवाले धर्मांतरण के कारण 'लावण्या' जैसी हिन्दू लडकी को आत्महत्या करनी पड रही है । कश्मीरी हिन्दुओं के वंशविच्छेद को 32 वर्ष होकर भी कश्मीरी हिन्दुओं की हत्या आज भी नहीं रुकी हैं । हिन्दू पलायन कर रहे है । इसलिए हिन्दुओं को संवैधानिक अधिकारों के लिए संगठित होना आवश्यक हो गया है । हिन्दुओं के व्यापक संगठन के लिए यह अधिवेशन दिशादर्शक सिद्ध होगा ।
इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि, इस अधिवेशन में अमेरिका, इंग्लैंड, हांगकांग, सिंगापुर, फिजी, नेपाल आदि देशों सहित भारत के 26 राज्यों के 350 से अधिक हिन्दू संगठनों के 1000 से अधिक प्रतिनिधियों को निमंत्रित किया गया है । इस अधिवेशन में प्रमुखता से 'काशी की ज्ञानवापी मस्जिद', 'मथुरा मुक्ति आंदोलन', 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट', 'कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार', 'मस्जिदों पर लगे भोंपुओं का ध्वनि प्रदूषण', 'हिजाब आंदोलन', 'हलाल सर्टिफिकेट एक आर्थिक जिहाद', 'हिन्दुओं की सुरक्षा', 'मंदिर-संस्कृति-इतिहास की रक्षा', 'धर्मांतरण', 'गढ-किलों पर इस्लामी अतिक्रमण' आदि विविध विषयों पर चर्चा की जानेवाली है ।
इस अधिवेशन में प्रमुखता से 'सी. बी. आई. ' के भूतपूर्व संचालक श्री. नागेश्वर राव, काशी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के विरुद्ध न्यायालयीन संघर्ष करनेवाले अधिवक्ता (पू. ) हरिशंकर जैन और उनके सुपुत्र 'हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस' के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, भाजपा के तेलंगाना के प्रख्यात विधायक टी. राजासिंह, 'पनून काश्मीर' के श्री. राहुल कौल, अरुणाचल प्रदेश के श्री कुरु थाई, 'भारत रक्षा मंच' के राष्ट्रीय सचिव श्री. अनिल धीर सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता, उद्योगपति, विचारक, लेखक, पत्रकार, मंदिर न्यासी तथा अनेक समवैचारिक सामाजिक, राष्ट्रीय और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहनेवाले हैं । 'भारत सेवाश्रम संघ' के स्वामी सयुंक्तानंदजी महाराज, 'इंटरनेशनल वेदांत सोसायटी' के स्वामी निर्गुणानंदगिरीजी महाराज आदी संतों की वंदनीय उपस्थिति भी इस अधिवेशन को मिलनेवाली है ।
इस अधिवेशन को अभी तक देशभर के 58 से अधिक हिन्दू संगठन, संप्रदाय, विश्वविद्यालय, अधिवक्ता संगठन, पत्रकार, उद्योगपति आदि ने समर्थन पत्र दिए हैं । दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' का सीधा प्रक्षेपण हिन्दू जनजागृति समिति के जालस्थल द्वारा तथा समिति के 'HinduJagruti' इस 'यू-ट्यूब' चैनल के द्वारा भी किया जानेवाला है । संसारभर के हिन्दू इसका लाभ उठाएं, ऐसा आवाहन भी इस समय किया गया ।
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इस्लामी देशों के भारत विरोध का उत्तर देने के लिए हिन्दू राष्ट्र आवश्यक ! गोवा में गत दस वर्षाें से होनेवाले 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' के कारण देश में हिन्दू राष्ट्र की चर्चा प्रारंभ हुई । उसके पश्चात हिन्दू राष्ट्र का ध्येय सामने रखकर विविध क्षेत्रों में कार्य करना प्रारंभ हुआ है । नुपूर शर्मा भाजपा की प्रवक्ता थीं, तब उन्होंने इस्लाम के संदर्भ में विधान किया था । उस विधान पर विश्व के अनेक इस्लामी राष्ट्र एकत्रित आकर भारत का विरोध कर रहे हैं । अल कायदा ने तो सीधे भारत पर आक्रमण की धमकी दी है; किंतु शिवलिंग को 'फुहारा' कहकर अथवा 'हिन्दू गुप्तांग की पूजा क्यों करते हैं ? ' ऐसा हेतुतः बोलकर हिन्दुओं की धर्मभावनाओं को आहत करनेवालों के विरुद्ध कोई भी विरोध प्रकट करते हुए दिखाई नहीं देता । इससे ध्यान में आता है कि विश्व में एक तो हिन्दुओं का राष्ट्र होना क्यों आवश्यक है ? हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य को गति देने के लिए इस वर्ष बारह से अट्ठारह जून दो हज़ार बाईस की अवधि में 'श्री रामनाथ देवस्थान', फोंडा, गोवा में दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' आयोजित किया गया है, ऐसी जानकारी हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु चारुदत्त पिंगळेजी ने पत्रकार परिषद में दी । पणजी गोवा में आयोजित पत्रकार परिषद में 'भारत माता की जय संगठन' के गोवा राज्य संघचालक श्री. सुभाष वेलिंगकर, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे और सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस यह उपस्थित थे । इस वर्ष के हिन्दू अधिवेशन की विशेषता - 'हिन्दू राष्ट्र संसद'! सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने कहा कि, केंद्र में तथा अनेक राज्यों में हिन्दुत्वनिष्ठ दल की सरकार आने के कारण राममंदिर निर्माण, लव जिहाद और धर्मांतरण के विरोध में कानून लागू होना और अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाना आदि सकारात्मक कार्य हुआ है, तथापि काशी-मथुरा सहित हिन्दुओं के अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की मुक्ति होना शेष है । ओवैसी कह रहे हैं, 'ज्ञानवापी मस्जिद नहीं लेने देंगे । ' मिशनरियों द्वारा बलपूर्वक होनेवाले धर्मांतरण के कारण 'लावण्या' जैसी हिन्दू लडकी को आत्महत्या करनी पड रही है । कश्मीरी हिन्दुओं के वंशविच्छेद को बत्तीस वर्ष होकर भी कश्मीरी हिन्दुओं की हत्या आज भी नहीं रुकी हैं । हिन्दू पलायन कर रहे है । इसलिए हिन्दुओं को संवैधानिक अधिकारों के लिए संगठित होना आवश्यक हो गया है । हिन्दुओं के व्यापक संगठन के लिए यह अधिवेशन दिशादर्शक सिद्ध होगा । इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि, इस अधिवेशन में अमेरिका, इंग्लैंड, हांगकांग, सिंगापुर, फिजी, नेपाल आदि देशों सहित भारत के छब्बीस राज्यों के तीन सौ पचास से अधिक हिन्दू संगठनों के एक हज़ार से अधिक प्रतिनिधियों को निमंत्रित किया गया है । इस अधिवेशन में प्रमुखता से 'काशी की ज्ञानवापी मस्जिद', 'मथुरा मुक्ति आंदोलन', 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट', 'कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार', 'मस्जिदों पर लगे भोंपुओं का ध्वनि प्रदूषण', 'हिजाब आंदोलन', 'हलाल सर्टिफिकेट एक आर्थिक जिहाद', 'हिन्दुओं की सुरक्षा', 'मंदिर-संस्कृति-इतिहास की रक्षा', 'धर्मांतरण', 'गढ-किलों पर इस्लामी अतिक्रमण' आदि विविध विषयों पर चर्चा की जानेवाली है । इस अधिवेशन में प्रमुखता से 'सी. बी. आई. ' के भूतपूर्व संचालक श्री. नागेश्वर राव, काशी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के विरुद्ध न्यायालयीन संघर्ष करनेवाले अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके सुपुत्र 'हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस' के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, भाजपा के तेलंगाना के प्रख्यात विधायक टी. राजासिंह, 'पनून काश्मीर' के श्री. राहुल कौल, अरुणाचल प्रदेश के श्री कुरु थाई, 'भारत रक्षा मंच' के राष्ट्रीय सचिव श्री. अनिल धीर सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता, उद्योगपति, विचारक, लेखक, पत्रकार, मंदिर न्यासी तथा अनेक समवैचारिक सामाजिक, राष्ट्रीय और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहनेवाले हैं । 'भारत सेवाश्रम संघ' के स्वामी सयुंक्तानंदजी महाराज, 'इंटरनेशनल वेदांत सोसायटी' के स्वामी निर्गुणानंदगिरीजी महाराज आदी संतों की वंदनीय उपस्थिति भी इस अधिवेशन को मिलनेवाली है । इस अधिवेशन को अभी तक देशभर के अट्ठावन से अधिक हिन्दू संगठन, संप्रदाय, विश्वविद्यालय, अधिवक्ता संगठन, पत्रकार, उद्योगपति आदि ने समर्थन पत्र दिए हैं । दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' का सीधा प्रक्षेपण हिन्दू जनजागृति समिति के जालस्थल द्वारा तथा समिति के 'HinduJagruti' इस 'यू-ट्यूब' चैनल के द्वारा भी किया जानेवाला है । संसारभर के हिन्दू इसका लाभ उठाएं, ऐसा आवाहन भी इस समय किया गया ।
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केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ किसानों द्वारा छह फरवरी यानी आज चक्का जाम के आह्वान पर एक टीवी डिबेट में भाजपा और कांग्रेस नेता आपस में भिड़ गए। रिपब्लिक भारत के डिबेट शो 'पूछता है भारत' में भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कृषि बिलों के विरोध में कुछ दिन पहले पंजाब में किसी कंपनी के मोबाइल टावर उखाड़े गए। बेंगलुरु की किसी कंपनी में भी खूब बवाल हुआ।
डिबेट में सुधांशु त्रिवेदी ने लालकिले की घटना का मुख्य चेहरा बने और भाजपा नेताओं संग नजर आ रहे दीप सिद्धू पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तस्वीर की बात है और कोई भी किसी के साथ नजर आ सकता है। इसके बाद उन्होंने लालकिले की घटना में नजर आ रहे एक शख्स की तस्वीर दिखाई। अगली तस्वीर में बिना पगड़ी शख्स की तस्वीर कांग्रेस के कई नेताओं के साथ दिखाई।
त्रिवेदी ने कहा कि एक तस्वीर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उसके सिर पर हाथ रखा है। शख्स का नाम भी विक्की थॉमस है। उन्होंने पूछा कि सिखों में कौन सी बिरादरी आ गई जिसमें सरनेम थॉमस होने लगा। त्रिवेदी ने पॉप सिंगर रिहाना के ट्वीट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रिहाना एक गाना बनाया और पंजाब के मशहूर सिंगर ने 16 घंटे में गाना बना दिया। पहले से प्लानिंग के बगैर इतनी जल्दी होना संभव नहीं लगता है।
एमएसपी के सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि सरकार लिखित में देने को तैयार है कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा। जवाब में कांग्रेस के दुष्यंत नागर सवाल दागा कि सरकार इसपर कानून बनाने से पीछे क्यों हट रही है? उन्होंने कहा कि सरकार बना दे, लिखित में नहीं चलेगा। सरकार को कानून बनाना ही पड़ेगा। भाजपा नेता ने कहा कि वो बचकानी बता कर कर रहे हैं।
मालूम हो कि केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज चक्का जाम का आह्वान किया है। 26 जनवरी के तरह स्थिति हिंसक ना हो इसके लिए प्रशासन ने भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की है। किसान संगठन देशभर में आज दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चक्का जाम कर रहे हैं।
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केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ किसानों द्वारा छह फरवरी यानी आज चक्का जाम के आह्वान पर एक टीवी डिबेट में भाजपा और कांग्रेस नेता आपस में भिड़ गए। रिपब्लिक भारत के डिबेट शो 'पूछता है भारत' में भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कृषि बिलों के विरोध में कुछ दिन पहले पंजाब में किसी कंपनी के मोबाइल टावर उखाड़े गए। बेंगलुरु की किसी कंपनी में भी खूब बवाल हुआ। डिबेट में सुधांशु त्रिवेदी ने लालकिले की घटना का मुख्य चेहरा बने और भाजपा नेताओं संग नजर आ रहे दीप सिद्धू पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तस्वीर की बात है और कोई भी किसी के साथ नजर आ सकता है। इसके बाद उन्होंने लालकिले की घटना में नजर आ रहे एक शख्स की तस्वीर दिखाई। अगली तस्वीर में बिना पगड़ी शख्स की तस्वीर कांग्रेस के कई नेताओं के साथ दिखाई। त्रिवेदी ने कहा कि एक तस्वीर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उसके सिर पर हाथ रखा है। शख्स का नाम भी विक्की थॉमस है। उन्होंने पूछा कि सिखों में कौन सी बिरादरी आ गई जिसमें सरनेम थॉमस होने लगा। त्रिवेदी ने पॉप सिंगर रिहाना के ट्वीट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रिहाना एक गाना बनाया और पंजाब के मशहूर सिंगर ने सोलह घंटाटे में गाना बना दिया। पहले से प्लानिंग के बगैर इतनी जल्दी होना संभव नहीं लगता है। एमएसपी के सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि सरकार लिखित में देने को तैयार है कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा। जवाब में कांग्रेस के दुष्यंत नागर सवाल दागा कि सरकार इसपर कानून बनाने से पीछे क्यों हट रही है? उन्होंने कहा कि सरकार बना दे, लिखित में नहीं चलेगा। सरकार को कानून बनाना ही पड़ेगा। भाजपा नेता ने कहा कि वो बचकानी बता कर कर रहे हैं। मालूम हो कि केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज चक्का जाम का आह्वान किया है। छब्बीस जनवरी के तरह स्थिति हिंसक ना हो इसके लिए प्रशासन ने भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की है। किसान संगठन देशभर में आज दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक चक्का जाम कर रहे हैं।
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इस विज्ञान के शैक्षणिक, अनुसंधान तथा चिकित्सा कार्यों को सम्पादित किया जा रहा है। प्रधुना जल, विद्यत, श्राहार, स्नान, मृत्तिका वर्ण, सूर्य प्रकाश, वायु, उपवास प्रभृति पर आधारित कई ऐसी चिकित्सा पद्धतियाँ बन गयी हैं, जो प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान की उपशाखाओं के रूप में स्वतन्त्रतः प्रयोग में लायी जा रही हैं और विशेषतः भारत में प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान के कतिपय संस्थानों तथा संगठन के माध्यम से अनेक योगदानकर्त्ता उपलब्ध होते हैं । सामान्य सिद्धान्त
प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान के आधारभूत मौलिक सिद्धान्तों में रोग तथा उसके उपचार विषयक महत्वपूर्ण पक्षों का उद्घाटन कर, पद्धति का सैद्धांतिक मार्ग व्यवस्थित किया है ऐसे तथ्यों को मारांश रूपेण प्रस्तुत किया जा सकता है -
१. सर्व व्याधियों का निदान तथा उपचारात्मक एकत्व ।
२. रोग का प्रकीटाणु हेतुत्व ३. रोग का मित्र रूपत्व
४. प्रकृति का चिकित्सक स्वरूपत्व
५. सम्पूर्ण दशरीर का उपचारवाद ९. नैदानिक अविशेषत्व
७. जीर्ण रोगोपचार में पर्याप्त अवधियवयता
८. रोग के गुप्न रूप का उद्घाटनन्त
6. अनुत्तेजक घोषधि प्रयोगवाद
१०. मन, शरीर तथा आत्मा का संयुक्त उचारत्व
इस प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा उक्त आधारों के दृष्टिकोण से शरीरस्य विविध रोगों का उपचार करती है और जीवनयापन में सुख व स्वास्थ्य के उद्देश्य को सर्वप्रथम सरलता से विकृति चिकित्सा के उपचार के पूर्व सम्पन्न करती है। ऐसी आरोग्यकारक दृष्टिकोण से स्वाभाविकतया प्रकृति और उसके साधनों से निकटतम सम्पर्क रखकर, जो आरोग्य उपलब्ध होता है, वह निश्चय ही विशेष सहज तथा स्थायी प्रकार का होता है और इसी कारणः एक दृष्टिकोण यह भी है कि प्राकृतिक उपचार विज्ञान, चिकित्सा पद्धति (Medical science) नहीं, अपितु जीवनकता (Art of living ) है ।
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इस विज्ञान के शैक्षणिक, अनुसंधान तथा चिकित्सा कार्यों को सम्पादित किया जा रहा है। प्रधुना जल, विद्यत, श्राहार, स्नान, मृत्तिका वर्ण, सूर्य प्रकाश, वायु, उपवास प्रभृति पर आधारित कई ऐसी चिकित्सा पद्धतियाँ बन गयी हैं, जो प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान की उपशाखाओं के रूप में स्वतन्त्रतः प्रयोग में लायी जा रही हैं और विशेषतः भारत में प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान के कतिपय संस्थानों तथा संगठन के माध्यम से अनेक योगदानकर्त्ता उपलब्ध होते हैं । सामान्य सिद्धान्त प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान के आधारभूत मौलिक सिद्धान्तों में रोग तथा उसके उपचार विषयक महत्वपूर्ण पक्षों का उद्घाटन कर, पद्धति का सैद्धांतिक मार्ग व्यवस्थित किया है ऐसे तथ्यों को मारांश रूपेण प्रस्तुत किया जा सकता है - एक. सर्व व्याधियों का निदान तथा उपचारात्मक एकत्व । दो. रोग का प्रकीटाणु हेतुत्व तीन. रोग का मित्र रूपत्व चार. प्रकृति का चिकित्सक स्वरूपत्व पाँच. सम्पूर्ण दशरीर का उपचारवाद नौ. नैदानिक अविशेषत्व सात. जीर्ण रोगोपचार में पर्याप्त अवधियवयता आठ. रोग के गुप्न रूप का उद्घाटनन्त छः. अनुत्तेजक घोषधि प्रयोगवाद दस. मन, शरीर तथा आत्मा का संयुक्त उचारत्व इस प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा उक्त आधारों के दृष्टिकोण से शरीरस्य विविध रोगों का उपचार करती है और जीवनयापन में सुख व स्वास्थ्य के उद्देश्य को सर्वप्रथम सरलता से विकृति चिकित्सा के उपचार के पूर्व सम्पन्न करती है। ऐसी आरोग्यकारक दृष्टिकोण से स्वाभाविकतया प्रकृति और उसके साधनों से निकटतम सम्पर्क रखकर, जो आरोग्य उपलब्ध होता है, वह निश्चय ही विशेष सहज तथा स्थायी प्रकार का होता है और इसी कारणः एक दृष्टिकोण यह भी है कि प्राकृतिक उपचार विज्ञान, चिकित्सा पद्धति नहीं, अपितु जीवनकता है ।
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छोटे बच्चों का खानपान काफी सावधानी पूर्वक करना चाहिए। खासकर, नमक या सोडियम की मात्रा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। सोडियम, बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है पर इसकी मात्रा को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। अगर आवश्यकता से जरा भी ज्यादा नमक बच्चे को शरीर में पहुंच गया तो वह किडनी के रोग के साथ-साथ मोटापा आदि जैसी समस्या का कारण बन सकता है।
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छोटे बच्चों का खानपान काफी सावधानी पूर्वक करना चाहिए। खासकर, नमक या सोडियम की मात्रा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। सोडियम, बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है पर इसकी मात्रा को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। अगर आवश्यकता से जरा भी ज्यादा नमक बच्चे को शरीर में पहुंच गया तो वह किडनी के रोग के साथ-साथ मोटापा आदि जैसी समस्या का कारण बन सकता है।
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जिस इलाके में राहुल गांधी की चुनावी रैली हो वहां कुछ घंटे पहले किसी आम कार्यकर्ता का मोबाइल बज उठता है। विधानसभा चुनाव रण में मुकाबले के लिए कांग्रेस ने नया अभियान शुरू किया है। उस पर दूसरी तरफ से सीधे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मुखातिब होते हैं। वे कार्यकर्ता का हालचाल पूछने के बाद रैली में उसके आने और चुनावी तैयारी के बारे में पूछ लेते हैं। यह सब कुछ किसी पार्टी कार्यकर्ता के लिए खास हो जाता है।
पिछले दो महीने में डाटा टीम ने टैगिंग के सहारे हर क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं के मोबाइल नंबर को टैग किया है। राहुल गांधी किसी भी क्षेत्र में जाने से पहले अपने मोबाइल में संबंधित क्षेत्र की तलाश कर कई कार्यकर्ताओं से सीधे बात करते हैं। कई कार्यकर्ताओं को तो यह सपने जैसा लगता है कि राहुल गांधी ने उन्हें सीधा फोन किया है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अलग अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचार करने जा रहे हैं। इस दौरान वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। ये सब कुछ संभव बनाया है कांग्रेस के आईटी सेल के 'विद्या' साफ्टवेयर ने। कांग्रेस के दिल्ली स्थित अकबर रोड मुख्यालय में चुनावी राज्यों के सभी विधान सभा क्षेत्र के बूथ लेवल कार्यकर्ताओं के नाम मोबाइल नंबर जैसे डाटा संग्रहित किए गए हैं। इसकी मदद से कांग्रेस अध्यक्ष अपने दौरे में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करते हैं। इसके पीछे पार्टी के डाटा एनालिसिस विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती का दिमाग है। वे चुनावी राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना के हर बूथ से जुड़े कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में हैं। इन बूथों की संख्या 1. 72 लाख के करीब है।
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर भाजपा ने भी हर बूथ पर एक सेल फोन प्रमुख बनाया है। उसे एक स्मार्ट फोन दिया गया है। वह प्रमुख सभी इलाके के कार्यकर्ताओं को ह्वाट्सएप पर पार्टी से जुड़े संदेश भेजता रहता है।
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जिस इलाके में राहुल गांधी की चुनावी रैली हो वहां कुछ घंटे पहले किसी आम कार्यकर्ता का मोबाइल बज उठता है। विधानसभा चुनाव रण में मुकाबले के लिए कांग्रेस ने नया अभियान शुरू किया है। उस पर दूसरी तरफ से सीधे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मुखातिब होते हैं। वे कार्यकर्ता का हालचाल पूछने के बाद रैली में उसके आने और चुनावी तैयारी के बारे में पूछ लेते हैं। यह सब कुछ किसी पार्टी कार्यकर्ता के लिए खास हो जाता है। पिछले दो महीने में डाटा टीम ने टैगिंग के सहारे हर क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं के मोबाइल नंबर को टैग किया है। राहुल गांधी किसी भी क्षेत्र में जाने से पहले अपने मोबाइल में संबंधित क्षेत्र की तलाश कर कई कार्यकर्ताओं से सीधे बात करते हैं। कई कार्यकर्ताओं को तो यह सपने जैसा लगता है कि राहुल गांधी ने उन्हें सीधा फोन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अलग अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचार करने जा रहे हैं। इस दौरान वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। ये सब कुछ संभव बनाया है कांग्रेस के आईटी सेल के 'विद्या' साफ्टवेयर ने। कांग्रेस के दिल्ली स्थित अकबर रोड मुख्यालय में चुनावी राज्यों के सभी विधान सभा क्षेत्र के बूथ लेवल कार्यकर्ताओं के नाम मोबाइल नंबर जैसे डाटा संग्रहित किए गए हैं। इसकी मदद से कांग्रेस अध्यक्ष अपने दौरे में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करते हैं। इसके पीछे पार्टी के डाटा एनालिसिस विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती का दिमाग है। वे चुनावी राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना के हर बूथ से जुड़े कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में हैं। इन बूथों की संख्या एक. बहत्तर लाख के करीब है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर भाजपा ने भी हर बूथ पर एक सेल फोन प्रमुख बनाया है। उसे एक स्मार्ट फोन दिया गया है। वह प्रमुख सभी इलाके के कार्यकर्ताओं को ह्वाट्सएप पर पार्टी से जुड़े संदेश भेजता रहता है।
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी क्ख् मई को बनारस आ रहे हैं। वह बीएचयू में स्टूडेंट्स व टीचर्स को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति क्ख् मई की रात को बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में विश्राम भी करेंगे। राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर जोरदार तैयारियां चल रही हैं।
एलडी गेस्ट हाउस को अंदर से बाहर तक रंग-पेंटकर चमकाया जा रहा है। दर्जनों की संख्या में मजदूर गेस्ट हाउस की व्यवस्था सुधारने में लगे हैं।
गेस्ट हाउस के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गेस्ट हाउस के रूम नंबर में विश्राम कर सकते हैं। इसके पूर्व में भी रूम नंबर एक में ठहर चुके हैं। हालांकि रूम नंबर एक से ही लगे रूम नम्बर दो को भी बेहतर बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति इसमें भी ठहर सकते हैं। वे पहली बार एलडी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेगे। उधर स्वतंत्रता भवन को रंग-रोगन कर चमकाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। राष्ट्रपति को जिन सड़कों से होकर गुजरना है उनको भी दुरुस्त करने के लिए दर्जनों की संख्या में मजदूर लगाये गये हैं।
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी क्ख् मई को बनारस आ रहे हैं। वह बीएचयू में स्टूडेंट्स व टीचर्स को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति क्ख् मई की रात को बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में विश्राम भी करेंगे। राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर जोरदार तैयारियां चल रही हैं। एलडी गेस्ट हाउस को अंदर से बाहर तक रंग-पेंटकर चमकाया जा रहा है। दर्जनों की संख्या में मजदूर गेस्ट हाउस की व्यवस्था सुधारने में लगे हैं। गेस्ट हाउस के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गेस्ट हाउस के रूम नंबर में विश्राम कर सकते हैं। इसके पूर्व में भी रूम नंबर एक में ठहर चुके हैं। हालांकि रूम नंबर एक से ही लगे रूम नम्बर दो को भी बेहतर बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति इसमें भी ठहर सकते हैं। वे पहली बार एलडी गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेगे। उधर स्वतंत्रता भवन को रंग-रोगन कर चमकाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। राष्ट्रपति को जिन सड़कों से होकर गुजरना है उनको भी दुरुस्त करने के लिए दर्जनों की संख्या में मजदूर लगाये गये हैं।
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- 22 min ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल!
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अभिनेत्री असिन ने सलमान से अफेयर होने की बात को ठुकराया है उनका कहना है कि सलमान के साथ उनके रिश्ते केवल व्यावसयिक है।
असिन ने बेडरूम में सलमान के फोटो होने की बात भी अस्वीकार करते हुए कहा कि मेरे बेडरूम को किसी को जाने की इजाजत नही है तो फिर कैसे किसी को पता चल गया कि मेरे बेडरूम में किसकी फोटो है, यह खबर एकदम बेबुनियाद है।
फिल्म लंदन ड्रीम्स में असिन और सलमान एक साथ काम कर रहे है। फिल्म की शुटिंग के दौरान से ही दोनों की दोस्ती के चर्चे हवा में है। लेकिन असिन ने सलमान के प्रति किसी भी लगाव से इंकार किया है।
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- बाईस मिनट ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! अभिनेत्री असिन ने सलमान से अफेयर होने की बात को ठुकराया है उनका कहना है कि सलमान के साथ उनके रिश्ते केवल व्यावसयिक है। असिन ने बेडरूम में सलमान के फोटो होने की बात भी अस्वीकार करते हुए कहा कि मेरे बेडरूम को किसी को जाने की इजाजत नही है तो फिर कैसे किसी को पता चल गया कि मेरे बेडरूम में किसकी फोटो है, यह खबर एकदम बेबुनियाद है। फिल्म लंदन ड्रीम्स में असिन और सलमान एक साथ काम कर रहे है। फिल्म की शुटिंग के दौरान से ही दोनों की दोस्ती के चर्चे हवा में है। लेकिन असिन ने सलमान के प्रति किसी भी लगाव से इंकार किया है।
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मूत्र चिकित्सा एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा जिसमें कई रोगों के निदान के लिए मानव मूत्र को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। मूत्र थेरेपी को यूरोथेरेपी या यूरिनोथेरेपी अथवा यूरोपैथी के रूप में भी संदर्भित किया जाता है। मूत्र को औषधि के रूप में विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है मसलन इस इलाज में स्वयं के मूत्र का सेवन किया जाता है या शारीरिक सुन्दरता बढ़ाने या त्वचा सम्बन्धी विकारों को दूर करने हेतु अपनी त्वचा पर अपने मूत्र की मालिश की जाती है। हालांकि मूत्र चिकित्सा विभिन्न रोगों के उपचार के लिए बहुत हीं कारगर माना जाता है फिर भी चिकित्सीय उपयोग के लिए इसे वैज्ञानिक रूप में पुष्टि नहीं हुई है। मूत्र में पानी की 95%, यूरिया की 2.5% मात्रा होती हैं और शेष 2.5%, खनिज लवण, हार्मोन और एंजाइम का मिश्रण होता है। केवल यूरिया, जो मूत्र का नाम है, जहरीला हो सकता है जो रक्त में उपस्थित हो। http://www.universal-tao.com/article/urine_therapy.html.
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मूत्र चिकित्सा एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा जिसमें कई रोगों के निदान के लिए मानव मूत्र को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। मूत्र थेरेपी को यूरोथेरेपी या यूरिनोथेरेपी अथवा यूरोपैथी के रूप में भी संदर्भित किया जाता है। मूत्र को औषधि के रूप में विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है मसलन इस इलाज में स्वयं के मूत्र का सेवन किया जाता है या शारीरिक सुन्दरता बढ़ाने या त्वचा सम्बन्धी विकारों को दूर करने हेतु अपनी त्वचा पर अपने मूत्र की मालिश की जाती है। हालांकि मूत्र चिकित्सा विभिन्न रोगों के उपचार के लिए बहुत हीं कारगर माना जाता है फिर भी चिकित्सीय उपयोग के लिए इसे वैज्ञानिक रूप में पुष्टि नहीं हुई है। मूत्र में पानी की पचानवे%, यूरिया की दो.पाँच% मात्रा होती हैं और शेष दो.पाँच%, खनिज लवण, हार्मोन और एंजाइम का मिश्रण होता है। केवल यूरिया, जो मूत्र का नाम है, जहरीला हो सकता है जो रक्त में उपस्थित हो। http://www.universal-tao.com/article/urine_therapy.html. शून्य संबंधों।
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हमारे सामने आती है, वहीं मधुर सुसज्जित या सुन्दर रूप में, कहीं रूखे बेडौल या कर्कश रूप में, कहीं मत्त, विशाल या विचित्र रूप में, कहीं उग्र, कराल या भयंकर रूप में । अतएव काव्य में प्रकृति चित्रण की विविध प्रणालियाँ प्रचलित हैं और समीक्षक प्रकृति चित्रण की विविध प्रणालियों का उल्लेख करते समय उनकी चार से लेकर ग्यारह बारह तक संख्या मानते हैं पर हम प्रकृति चित्रण की केवल निम्नलिखित प्रणालियाँ मानने के पक्ष में हैं. आलम्बन, उद्दीपन, अलंकार या अलंकृत रूप, रहस्य भावना की अभिव्यक्ति, मानवीकरण, नीति और उपदेश का माध्यम तथा प्रतीक । हम यहां यह स्पष्ट कर देना उचित समझते हैं कि उक्त प्रणालियाँ एक दूसरे से सर्वथा पृथक नहीं हैं और उनमें से किसी एक रूप में किए जाने वाले प्रकृति चित्रण में दूसरे रूप या रूपों से भी सहायता ली जा सकती है। उदाहरणार्थ, आलम्बन रूप में देखा जाने वाला कोई पदार्थ रहस्य भावना के लिए भी पथ प्रशस्त कर सकता है । साथ ही यहाँ यह भी स्मरणीय है कि प्रयोगवादी कवियों ने नूतन सौंदर्य- बोध के कारण प्रकृति चित्रण की उक्त प्रणालियों को मान्यता नहीं दी है पर श्री गिरिजाकुमार माथुर की कृतियों में अवश्य इनमें से कुछ प्रणालियों का प्रयोग हुआ है जिनका परिचय यहाँ दिया जा रहा है ।
सामान्यतया कवि माथुर की कृतियों में प्रकृति चित्रण की आलम्बन प्रणाली को सर्वाधिक अपनाया गया है और आलम्बन रूप में प्रकृति-चित्रण करते समय प्रकृति बहुधा साधन न बनकर साध्य बन जाती है और कवि अर्थग्रहण की अपेक्षा बिम्ब ग्रहण पर अधिक जोर देता है तथा अपनी सूक्ष्म प्रकृति पर्यवेक्षणी शक्ति द्वारा प्रकृति के सूक्ष्म तिसूक्ष्म तत्वों के प्रति आकृष्ट हो प्राकृतिक वस्तुओं के अंग प्रत्यंग, वर्ण आकृति तथा अस पास की परिस्थितियों का परस्पर संश्लिष्ट वर्णन करता है । इस प्रकार आलम्बन रूप में प्रकृति चित्रण करते समय प्रकृति का यथातथ्य चित्रण ही किया जाता है और कवि माथुर की काव्य कृतियों में अनेक स्थलों पर प्रकृति का आलम्बन रूप में अत्यंत हृदयग्राही चित्रण किया भी गया है। यहाँ 'धूप के धान' काव्य संग्रह की प्रसिद्ध रचना 'ढाकवनी' का कुछ अंश उदाहरणार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है -
सनसनाती साँझ सूनी, वायु का कठला खनकता झींगुरों की खंजड़ी पर झाँझ सा बोहड़ झनकत कंटकित बेरी करोंदे महकते हैं सागौन वन के सुत्र हैं सागौन वन के कान जैसे पात चौड़े ढूह, टोले, टौरियों पर धूप सूखी घास भूरी हाड़ टूटे देह कुबड़ी चुप पड़ी है गेल बूढ़ी ताड़ तेंदू नीम रेंजर चित्र लिखीं खजूर पातें छाँह मंदी डाल जिन पर ऊगती है शुक्ल सातें बीच सूने में बनैले ताल का फैला अतल जल
इस प्रकार कवि ने प्रकृति-चित्रण में पूर्ण तन्मयता दिखाई है और उसकी उक्तियों में प्रकृति अत्यन्त ही चेतन हो उठी है तथा उसका एक-एक उपकरण सजीव प्रतीत होता है । यहाँ यह स्मरणीय है कि उक्त पंक्तियों में कवि ने सांध्यकालीन वातावरण का मनोरम वर्णन किया है और वह रमणीय प्रकृति के साथ-साथ भयावते चित्र भी अंकित करता है.
पूर्व से उठ चाँद आधा स्याह जल में चमचमाता
बन चमेली की जड़ों से नाग कसकर लिपट जाता
इसी प्रकार कवि ने कहीं-कहीं प्रकृति वर्णन को अधिकाधिक वायवीयता भी प्रदान की है; जैसेचांदनी की रैन चिड़िया, गंध फलियों पर उतरतो मूंद लेती नंन गोरे, पाँख धीरे बंद करती गंघ घोड़े पर चढ़ी दुलकी चली आती हवाएँ टाप हल्के पड़े जल में गोल लहरें उछल आएँ कवि ने प्रकृति की नैसर्गिक शोभा का चित्रण मात्र ही नहीं किया
बल्कि उसने वहाँ के निवासियों के घर, बर्तन आदि का भी उल्लेख किया हैं क्योंकि उनके बिना उक्त चित्रण अधूरा ही जान पड़ता । इस प्रकार कवि कहता हैबीच पेड़ों की कटन में हैं पड़े दो-चार छप्पर हाँडियाँ, मचिया कठौते, लट्ठ, गूदड़ बैल बक्खर
राख, गोबर, घरी औंगन, तेल, रस्सी, हल कुल्हाड़ी सूत की मोटी फतोई, चका, हँसिया और गाड़ी
वस्तुतः कवि माथुर का दृष्टिकोण हमेशा व्यापक रहा है और वह डाकबनी की प्राकृतिक सुषमा पर जितना अधिक विभोर हुए थे उतनी हो तीव्र प्रतिक्रिया उन्होंने उस वन प्रदेश की जनता के जन-जीवन की गर्हित दशा पर व्यक्त की हैयहाँ की जिन्दगी पर शाप नल का स्याह भारी भूख की मनहुस छाया जबकि भोजन सामने हो आदमी हो ठीकरे सा जबकि साधन सामने हो धन बनस्पति भरे जंगल और यह जीवन भिखारी
अन्त में कवि ने यह आशा भी प्रकट की है कि 'ढाकबनी' की वर्तमान दशा में पुनः चमक आयेगी और निष्क्रियता समाप्त होगी तथा फिर
लाल पत्थर, लाल मिट्टी, लाल कंकड़, लाल बजरी
फिर खिलेंगे ढाक के बन, फिर उठेगी फाग कजरी
माथुर जी की कृतियों में प्रकृति चित्रण की उद्दीपन नामक प्रणाली का भी कई स्थलों पर सफल प्रयोग हुआ है और यहाँ यह स्मरणीय कि 'आलम्बन रूप में प्रकृति चित्रण करते समय कवि अपनी भावस्थिति में प्रकृति के समक्ष रहता है पर पर काव्य का विस्तार तो भावाभिव्यक्ति में ही है और प्रकृति द्वारा ही कवियों को भावोद्दीपन की प्रेरणा होती है । इस प्रकार स्वाभाविक ही कवियों ने अपनी कृतियों में प्रकृति के उद्दीपन रूप का ही अधिक चित्रण किया है और हिन्दी साहित्य में उद्दीपन रूप में प्रकृति का वर्णन प्राचीनकाल से ही बहुतायत से होता रहा है तथा रीतिकाल में तो यह परिपाटी सबसे अधिक प्रचलित रही है। इस प्रकार उमड़ते हुए मेघों को देखकर वियोगिनी को उनकी गरज में प्रिय की आकुल पुकार सुनाई देने लगती है और पपीहे की पुकार आधी रात में उसके विरह व्यथित हृदय पर एक टीस सी उत्पन्न करने लगी तथा बैशाख में पलाश के फूले हुए पुष्प उसके हृदय को कचोटने लगे। अतएव नायिकाओं के विरह और मिलन
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हमारे सामने आती है, वहीं मधुर सुसज्जित या सुन्दर रूप में, कहीं रूखे बेडौल या कर्कश रूप में, कहीं मत्त, विशाल या विचित्र रूप में, कहीं उग्र, कराल या भयंकर रूप में । अतएव काव्य में प्रकृति चित्रण की विविध प्रणालियाँ प्रचलित हैं और समीक्षक प्रकृति चित्रण की विविध प्रणालियों का उल्लेख करते समय उनकी चार से लेकर ग्यारह बारह तक संख्या मानते हैं पर हम प्रकृति चित्रण की केवल निम्नलिखित प्रणालियाँ मानने के पक्ष में हैं. आलम्बन, उद्दीपन, अलंकार या अलंकृत रूप, रहस्य भावना की अभिव्यक्ति, मानवीकरण, नीति और उपदेश का माध्यम तथा प्रतीक । हम यहां यह स्पष्ट कर देना उचित समझते हैं कि उक्त प्रणालियाँ एक दूसरे से सर्वथा पृथक नहीं हैं और उनमें से किसी एक रूप में किए जाने वाले प्रकृति चित्रण में दूसरे रूप या रूपों से भी सहायता ली जा सकती है। उदाहरणार्थ, आलम्बन रूप में देखा जाने वाला कोई पदार्थ रहस्य भावना के लिए भी पथ प्रशस्त कर सकता है । साथ ही यहाँ यह भी स्मरणीय है कि प्रयोगवादी कवियों ने नूतन सौंदर्य- बोध के कारण प्रकृति चित्रण की उक्त प्रणालियों को मान्यता नहीं दी है पर श्री गिरिजाकुमार माथुर की कृतियों में अवश्य इनमें से कुछ प्रणालियों का प्रयोग हुआ है जिनका परिचय यहाँ दिया जा रहा है । सामान्यतया कवि माथुर की कृतियों में प्रकृति चित्रण की आलम्बन प्रणाली को सर्वाधिक अपनाया गया है और आलम्बन रूप में प्रकृति-चित्रण करते समय प्रकृति बहुधा साधन न बनकर साध्य बन जाती है और कवि अर्थग्रहण की अपेक्षा बिम्ब ग्रहण पर अधिक जोर देता है तथा अपनी सूक्ष्म प्रकृति पर्यवेक्षणी शक्ति द्वारा प्रकृति के सूक्ष्म तिसूक्ष्म तत्वों के प्रति आकृष्ट हो प्राकृतिक वस्तुओं के अंग प्रत्यंग, वर्ण आकृति तथा अस पास की परिस्थितियों का परस्पर संश्लिष्ट वर्णन करता है । इस प्रकार आलम्बन रूप में प्रकृति चित्रण करते समय प्रकृति का यथातथ्य चित्रण ही किया जाता है और कवि माथुर की काव्य कृतियों में अनेक स्थलों पर प्रकृति का आलम्बन रूप में अत्यंत हृदयग्राही चित्रण किया भी गया है। यहाँ 'धूप के धान' काव्य संग्रह की प्रसिद्ध रचना 'ढाकवनी' का कुछ अंश उदाहरणार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है - सनसनाती साँझ सूनी, वायु का कठला खनकता झींगुरों की खंजड़ी पर झाँझ सा बोहड़ झनकत कंटकित बेरी करोंदे महकते हैं सागौन वन के सुत्र हैं सागौन वन के कान जैसे पात चौड़े ढूह, टोले, टौरियों पर धूप सूखी घास भूरी हाड़ टूटे देह कुबड़ी चुप पड़ी है गेल बूढ़ी ताड़ तेंदू नीम रेंजर चित्र लिखीं खजूर पातें छाँह मंदी डाल जिन पर ऊगती है शुक्ल सातें बीच सूने में बनैले ताल का फैला अतल जल इस प्रकार कवि ने प्रकृति-चित्रण में पूर्ण तन्मयता दिखाई है और उसकी उक्तियों में प्रकृति अत्यन्त ही चेतन हो उठी है तथा उसका एक-एक उपकरण सजीव प्रतीत होता है । यहाँ यह स्मरणीय है कि उक्त पंक्तियों में कवि ने सांध्यकालीन वातावरण का मनोरम वर्णन किया है और वह रमणीय प्रकृति के साथ-साथ भयावते चित्र भी अंकित करता है. पूर्व से उठ चाँद आधा स्याह जल में चमचमाता बन चमेली की जड़ों से नाग कसकर लिपट जाता इसी प्रकार कवि ने कहीं-कहीं प्रकृति वर्णन को अधिकाधिक वायवीयता भी प्रदान की है; जैसेचांदनी की रैन चिड़िया, गंध फलियों पर उतरतो मूंद लेती नंन गोरे, पाँख धीरे बंद करती गंघ घोड़े पर चढ़ी दुलकी चली आती हवाएँ टाप हल्के पड़े जल में गोल लहरें उछल आएँ कवि ने प्रकृति की नैसर्गिक शोभा का चित्रण मात्र ही नहीं किया बल्कि उसने वहाँ के निवासियों के घर, बर्तन आदि का भी उल्लेख किया हैं क्योंकि उनके बिना उक्त चित्रण अधूरा ही जान पड़ता । इस प्रकार कवि कहता हैबीच पेड़ों की कटन में हैं पड़े दो-चार छप्पर हाँडियाँ, मचिया कठौते, लट्ठ, गूदड़ बैल बक्खर राख, गोबर, घरी औंगन, तेल, रस्सी, हल कुल्हाड़ी सूत की मोटी फतोई, चका, हँसिया और गाड़ी वस्तुतः कवि माथुर का दृष्टिकोण हमेशा व्यापक रहा है और वह डाकबनी की प्राकृतिक सुषमा पर जितना अधिक विभोर हुए थे उतनी हो तीव्र प्रतिक्रिया उन्होंने उस वन प्रदेश की जनता के जन-जीवन की गर्हित दशा पर व्यक्त की हैयहाँ की जिन्दगी पर शाप नल का स्याह भारी भूख की मनहुस छाया जबकि भोजन सामने हो आदमी हो ठीकरे सा जबकि साधन सामने हो धन बनस्पति भरे जंगल और यह जीवन भिखारी अन्त में कवि ने यह आशा भी प्रकट की है कि 'ढाकबनी' की वर्तमान दशा में पुनः चमक आयेगी और निष्क्रियता समाप्त होगी तथा फिर लाल पत्थर, लाल मिट्टी, लाल कंकड़, लाल बजरी फिर खिलेंगे ढाक के बन, फिर उठेगी फाग कजरी माथुर जी की कृतियों में प्रकृति चित्रण की उद्दीपन नामक प्रणाली का भी कई स्थलों पर सफल प्रयोग हुआ है और यहाँ यह स्मरणीय कि 'आलम्बन रूप में प्रकृति चित्रण करते समय कवि अपनी भावस्थिति में प्रकृति के समक्ष रहता है पर पर काव्य का विस्तार तो भावाभिव्यक्ति में ही है और प्रकृति द्वारा ही कवियों को भावोद्दीपन की प्रेरणा होती है । इस प्रकार स्वाभाविक ही कवियों ने अपनी कृतियों में प्रकृति के उद्दीपन रूप का ही अधिक चित्रण किया है और हिन्दी साहित्य में उद्दीपन रूप में प्रकृति का वर्णन प्राचीनकाल से ही बहुतायत से होता रहा है तथा रीतिकाल में तो यह परिपाटी सबसे अधिक प्रचलित रही है। इस प्रकार उमड़ते हुए मेघों को देखकर वियोगिनी को उनकी गरज में प्रिय की आकुल पुकार सुनाई देने लगती है और पपीहे की पुकार आधी रात में उसके विरह व्यथित हृदय पर एक टीस सी उत्पन्न करने लगी तथा बैशाख में पलाश के फूले हुए पुष्प उसके हृदय को कचोटने लगे। अतएव नायिकाओं के विरह और मिलन
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आरती करते हैं, तब चेतन और हरि नाम चिन्तन युक्त हृदय वाले गुरुदेव की आरती तो बारम्बार करनी चाहिये ।
शिला सँवारी राज नें, ताहि नवें सब कोय ।
रज्जब शिष सद्गुरु गड़े, सो पूजा किन होय ।१७१।
१७१ में गुरुदेव की पूजा करने की प्रेरणा कर रहे हैं - राज जब साधारण शिला की मूर्ति बना देता है तब सब उसको प्रणाम करते हुये उसकी पूजा करते हैं, फिर सद्गुरु तो अपने उपदेश द्वारा शिष्यों को ठीक करके परमात्मा से मिला देते हैं, वे पूजा के पात्र क्यों न होंगे ? सद्गुरु की पूजा अवश्य करनी चाहिये ।
इति श्री रज्जब गिरार्थ प्रकाशिका सहित गुरुदेव का अंग ३ समाप्तः । सा० १८३ ।
अथ गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग ४
गुरुदेव के अंग के अनन्तर योग्य गुरु और अयोग्य शिष्यों का परिचय देने के लिये गुरु-शिष्य निर्गुरग का अंग कह रहे हैं -
गुरु शिष भूखे मिले अभागी, दीक्षा नहि मानहु दौ' लागी । संतोष नीर नाहीं सो नीरा, तृष्णा अग्नि बुझावे बीरा' । १ ।
गुरु प्रतिष्ठा का भूखा और शिष्य विषयों का भूखा दोनों भाग्यहीन मिल जाते हैं तब गुरु द्वारा शिष्य को जो दीक्षा मिलती है सो दीक्षा न होकर मानो दावाग्नि' लगा है, ऐसा ज्ञात होता है । जैसे समीप जल न हो तो वन का अग्नि नहीं बुझता वैसे ही इनके मन के समीप संतोष न होने से इनकी उक्त तृष्णा नष्ट नहीं होती, सदा तृष्णा से जलते ही रहते हैं ।
भूखे गुरु शिष यूं मिलें, ज्यों वैशाखे बँस डार । जन रज्जब बोलत घसत, दोऊ जर बर छार । २ ।
तृष्णा रूप भूख से युक्त गुरु-शिष्यों का मिलन वैशाख मास में बाँस की डालों के घिसने के समान होता है । वैशाख में बाँस की डालें वायु वेग से घिसती हैं तब अग्नि प्रकट होकर बाँस जल जाते हैं, वैसे ही गुरुशिष्य अपनी पस की बोल-चाल द्वारा क्रोधाग्नि प्रकट होने से जल-जल कर मरते रहते हैं ।
चेला चकमक गुरु गति गार, ' गोष्टी ठणकार । मिलत महातम जलन सुहोय, ऐसे दैई न मेली दोय । ३। चकमक का आघात पत्थर' पर लगता है तब किंचित् अग्नि निकल कर बहुत हो जाता है, सूत्र, पट, काष्ठादि को जलाता है । यह चकमक
गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग ४
और पत्थर के मिलन का ही माहात्म्य है । वैसे ही शिष्य और गुरु की बातों से क्रोधाग्नि चमक आता है और दोनों के हृदयों को जलाता है, यही उन के मिलन का माहात्म्य है । ईश्वर ऐसे गुरु-शिष्य न मिलावे ।
सद्गुरु सोझ्या पोरसा, शिष शाखों शिर भाग ।
रज्जब पूरे पीर बिन, ठाहर उभय भाग ४ । सद्गुरु अपने को सिद्ध पौरषा ( सिद्धि युक्त सुवर्ण के पुतले) के समान बताते हुये शिष्य-प्रशिष्यादि शाखाओं का भार शिर पर खड़ा करता है और कहता है तुम्हारे अच्छे भाग्य थे तभी तो मेरे शिष्य हो सके हो, भाग्य बिना हमारे समान गुरु कहाँ मिलते हैं । शिष्य भी उन कपटी गुरुओं की कपट पूर्ण बातों से उन पर मुग्ध होते हुये तथा गुरु की प्रसंशा के पुल बाँधते हुये संसार के सरल प्रारिण को धोखा देते हैं जब तक पूर्णावस्था को प्राप्त सिद्ध गुरु प्राप्त नहीं होते तब तक उक्त प्रकार के गुरु और शिष्य दोनों ही के हृदय स्थान में उक्त प्रकार का दंभ रहता है और यह उनके भाग्यहीनता का ही चिह्न है ।
रज्जब चेला चक्षु बिन, गुरु मिल्या जाचंध' । कूप मयी यहु कुंभिनी क्यों पावें प्रभु पंध ५
जैसे कोई नेत्रहीन मनुष्य आवाज देकर के कहे- कोई मुझे अमुकग्राम को पहुँचा दे तो मैं उसे अमुक पुरस्कार दूंगा । उसे कोई जन्मांध ' - चल में पहुँचा दूंगा, तो वे दोनों मार्ग छूट जाने से कूप में ही पड़े गे । वैसे ही ज्ञानहीन स्वार्थी शिष्य-गुरु मिल जाते हैं तब उनके लिये यह संपूर्ण पृथ्वी ही कूप रूप है अर्थात् वे दोनों संसार कूप में ही पड़ते हैं, परब्रह्म प्राप्ति का मार्ग उन्हें नहीं मिलता ।
गुरु के अंग' हुं गुरु नहीं, शिष्य न ले ही सीख । रज्जब सौदा ना बण्याँ, पेट भरहु कर भीख ।६। गुरु के लक्षण ' गुरु में नहीं है और शिष्य भी शिक्षा धारण नहीं करता, तब परब्रह्म प्राप्ति रूप व्यापार तो बनता नहीं, केवल भिक्षा करके पेट भरने का मार्ग खुल जाता है ।
रज्जब राम न रहम कर, अक्षर लिखे न भाल ।
तायें सद्गुरु ना मिल्या, गुरु शिष रहे कंगाल ॥७॥
राम के दया न करने से विधाता ने मुक्ति प्राप्ति के अंक ललाट में नहीं लिखे अर्थात् गुरु प्राप्त होने का प्रारब्ध नहीं बना, इसी से सद्गुरु नहीं मिले । सद्गुरु के अभाव से गुरु और शिष्य दोनों ही आत्म ज्ञान न होने से सांसारिक प्रशाओं द्वारा कंगाल ही रहे ।
गुरु घर धन ह्वै पाइये, शिष्य सुलक्षण ले हि । उभय अभागी एकठे, कहा लेय कहा देहि ।८।
गरु के अन्तःकरण रूप घर में ज्ञान-धन हो तो शिष्य को प्राप्त हो और शिष्य भी शिष्यपने के सुन्दर लक्षणों से युक्त हो तो ज्ञान-धन ले सके किन्तु जब दोनों ही भाग्यहीन मिल जायँ तब गुरु क्या दे और शिष्य क्या ले ।
बैयर' सौं बैयर मिल्यों, कहो पूत क्यों होय । त्यों रज्जब सद्गुरु बिना, सब खोजों की जोय' ।६।
कहो ? नारी' से नारी मिले तब पुत्र कैसे होगा ? वैसे ही सद्गुरु बिना सभी शिष्य नपुंसकों की नारियों के समान हैं। जैसे नपुंसक की नारी के संतान नहीं होती वैसे ही सद्गुरु बिना शिष्यों को ज्ञान नहीं होता ।
जा' कंठ कुच पय नहीं, क्या पीवे दुहि ग्वाल ।
त्यों रज्जब शिष सूम गति, गुरु भूखा बेहाल । १० ।
बकरी' के गले के स्तनों में दूध नहीं होता, वे तो देखने मात्र के वे ही होते हैं । उनको ग्वाल दुह करके पीना चाहे तो क्या पीयेगा ? वैसे हो यदि शिष्य सूम मिल जाय और गुरु आशा द्वारा भूखा मिल जाय तो, उक्त जागलस्तन और ग्वाल की-सी ही दुखद गति उनकी होगी ।
घर घर दीक्षा देहि गुरु, शिष्य न सुलझे कोय । जन रज्जब सब लालची, तायें भला न होय ॥ ११ ॥
स्वार्थी गुरु घर २ पर जाकर दीक्षा देते हैं किन्तु उनके उपदेश से कोई भी शिष्य अज्ञान बन्धन से नहीं निकलता, कारण - गुरु और शिष्य दोनों ही सांसारिक विषयों के लोभी हैं, इसीलिये दोनों का ही मुक्ति रूप भला नहीं होता ।
शिष सारे गुरु को गिलें, गुरु सेवक सब खाय ।
रज्जब दोनों यूं मिले, हरि में कौन समाय । १२ ।
शिष्य तो सभी गुरु के धनादि को खाना चाहते हैं और गुरु सभी सेवकों का खाना चाहता है इस प्रकार दोनों ही सांसारिक आशानों से घिरे हुये हैं तब दोनों में से हरि में कौन समायेगा ? अर्थात् दोनों ही मुक्त न हो सकेंगे ।
गुरु-शिष्य निदान निरर्णय का अंग ५
कुल चेले चीणा भये, गुरु को यह गम' नाँहि । रज्जब पैठा प्रीति कर, बूडि मुवा यूं माँहि ॥१३॥
चीरणा नामक अनाज चपटा और चिकना होता है, उसकी राशि पर कोई कूद पड़े तो उसमें डूब जाता है । वैसे ही शिष्य तो सब चीरगा के समान हैं, किन्तु गुरु को यह ज्ञान नहीं कि- यह मुझे ही दबा लेंगे, वह तो प्रेम से उनमें प्रवेश करता है परन्तु अन्त में उनके जाल से उन्हीं में समाप्त हो जाता है अर्थात् गुरु का सर्वस्व वे ही खा जाते हैं । इति श्री रज्जब गिरार्थं प्रकाशिका सहित गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग ४ समाप्त । सा० १६६ ।
अथ गुरु शिष्य निदान निर्णय का अंग ५
गुरु-शिष्य निरर्णय-अंग के अन्तर गुरु-शिष्यपने में हेतु निर्णय का विचार करने के लिये गुरु-शिष्य निदान निर्णय का अंग कह रहे हैं - सद्गुरु सोध रु कीजिए, साहिब सौं साचा । रज्जब परसे पार ६, सुन मनसा वाचा । १ ।
१-३ में परीक्षा करके गुरु
बनाने की प्रेरणा कर रहे हैं - जो
ईश्वर की आज्ञानुसार रह कर ईश्वर के आगे सच्चा रहता हो, ऐसी परीक्षा कर के ही गुरु बनाना चाहिये, ऐसे गुरु का उपदेश श्रवरण करके मन वचन द्वारा उसके अनुसार व्यवहार करता है वह संसार से पार होकर परब्रह्म को प्राप्त होता है ।
सद्गुरु सोध रु कीजिये, साहिब सौं पूरा । रज्जब रहता राखिले, गुरु जीवन मूरा ।२।
ईश्वर की आज्ञा मानने में जो ईश्वर के आगे पूरा हो ऐसी जांच करके ही गुरु बनाना चाहिये । जो गुरण विकारों से रहित होता है वही गुरु संसार प्रवाह में बहते हुये प्रारणी को जीवन के मूल परब्रह्म में स्थिर रख सकता है ।
सत जत सुमिरण हिरदै साँच, सो सद्गुरु शिष ह्वौ मन राच । रज्जब कहै परख गुरुदेव सेवक हो कीजे ता सेव । ३ । जो सत्य, संयम, ईश्वर स्मरणादि साधनों में हृदय से सच्चा हो वही सद्गुरु है, उसी का शिष्य होकर उसी में मन से प्रेम करो । हम तो यही कहते हैं कि - प्रथम परीक्षा करके ही गुरु बनाओ और सच्चे सद्गुरु के सेवक बन कर सेवा करो ।
सद्गुरु मृतक' जहाज गति, शिष सब जीवित माँहि । जन रज्जब जोल्यूं गई, भव जल बूड़े नाँहि ॥४॥
४-६ में सच्चे सद्गुरु की शरण में हानि नहीं होती यह कहते हैं- - सद्गुरु शुष्क' काष्ठ से बने हुये जहाज के समान है और शिष्य उसमें बैठने वाले जीवित प्राणियों के समान हैं, जैसे जहाज में बैठने वाले जल में नहीं डूबते उनका डूबने का भय ' चला जाता है । वैसे ही जीन्मुक्त' सद्गुरु की शरण में जाने से संसार दशा रूप जीवन वाले प्राणियों का संसार भय चला जाता है, वे संसार सागर में नहीं डूबते ।
रज्जब काचा सूत शिष, लिपट्या सद्गुरु हाथ । काल कसौटी देय दिव्य, जले न साँचे साथ । ५।
पूर्वकाल में कच्चा सूत हथेली पर लिपेट के उस पर दिव्य ( न्यायालय की सत्यासत्य परीक्षार्थं हाथ पर रक्खा जाने वाला लोह का गोला ) रखते थे । तब सच्चे का हाथ नहीं जलता था और झूठे का जल जाता था । वैसे ही सच्चे सद्गुरु के संग रहने से शिष्य काल-दंड रूप परीक्षा से व्यथित नहीं होता
महापुरुष मुहुरे बँधे, तालिब काचे तार । रज्जब जल हि न युगल वे, अन्तक अग्नि मझार । ६ । जैसे मोहरे ( मोर पंखों से निकले हुये तामे के मरिणये) में कच्चा तार बँधा हो तो, वह अग्नि में नहीं जलता वैसे ही महापुरुष सद्गुरु की शरण में जाने पर शिष्य कालाग्नि में नहीं जलता ।
कोयल अंडे काक गृह, सुत निपजे पर सेव । त्यों रज्जब शिष भाव को, प्रति पाले गुरु देव ॥७॥
में गुरु से ही शिष्य की रक्षा होती है यह कहते हैं- कोयल के अंडे काक के घर में रहते हैं और अपने से अन्य काकों की सेवा से बड़े होते हैं किन्तु कोयल उनका भाव से ही पालन करती है और बड़े होने पर ले जाती है, वैसे ही शिष्य संसार में रहते हैं किन्तु गुरु उनका भाव से ही पालन करते हैं और वैराग्य होने पर ले जाते हैं । कोयल अपने अंडे कांक के आलम में छोड़ आती है। काक उनको अपने जानकर पालते हैं कुछ बड़े होने पर कोयल उनके पास जाकर अपनी बोली सुनाती रहती है और जब वे उड़ने लगते हैं तब काक के न होने के समय उन्हें साथ ले जाती है ।
गुरु संतोषी चन्द्र मय, शिष नक्षत्र निरोहाय' ।
जन रज्जब तिहि सभा को, देख दृष्टि बलि जाय ।८।
यं में योग्य गुरु शिष्य धन्य हैं, यह कह रहे हैं जैसे बिना ही इच्छा चन्द्रमा को नक्षत्र मंडल घेरे रहता है, वैसे ही संतोषी गुरु को विरक्त '
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आरती करते हैं, तब चेतन और हरि नाम चिन्तन युक्त हृदय वाले गुरुदेव की आरती तो बारम्बार करनी चाहिये । शिला सँवारी राज नें, ताहि नवें सब कोय । रज्जब शिष सद्गुरु गड़े, सो पूजा किन होय ।एक सौ इकहत्तर। एक सौ इकहत्तर में गुरुदेव की पूजा करने की प्रेरणा कर रहे हैं - राज जब साधारण शिला की मूर्ति बना देता है तब सब उसको प्रणाम करते हुये उसकी पूजा करते हैं, फिर सद्गुरु तो अपने उपदेश द्वारा शिष्यों को ठीक करके परमात्मा से मिला देते हैं, वे पूजा के पात्र क्यों न होंगे ? सद्गुरु की पूजा अवश्य करनी चाहिये । इति श्री रज्जब गिरार्थ प्रकाशिका सहित गुरुदेव का अंग तीन समाप्तः । साशून्य एक सौ तिरासी । अथ गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग चार गुरुदेव के अंग के अनन्तर योग्य गुरु और अयोग्य शिष्यों का परिचय देने के लिये गुरु-शिष्य निर्गुरग का अंग कह रहे हैं - गुरु शिष भूखे मिले अभागी, दीक्षा नहि मानहु दौ' लागी । संतोष नीर नाहीं सो नीरा, तृष्णा अग्नि बुझावे बीरा' । एक । गुरु प्रतिष्ठा का भूखा और शिष्य विषयों का भूखा दोनों भाग्यहीन मिल जाते हैं तब गुरु द्वारा शिष्य को जो दीक्षा मिलती है सो दीक्षा न होकर मानो दावाग्नि' लगा है, ऐसा ज्ञात होता है । जैसे समीप जल न हो तो वन का अग्नि नहीं बुझता वैसे ही इनके मन के समीप संतोष न होने से इनकी उक्त तृष्णा नष्ट नहीं होती, सदा तृष्णा से जलते ही रहते हैं । भूखे गुरु शिष यूं मिलें, ज्यों वैशाखे बँस डार । जन रज्जब बोलत घसत, दोऊ जर बर छार । दो । तृष्णा रूप भूख से युक्त गुरु-शिष्यों का मिलन वैशाख मास में बाँस की डालों के घिसने के समान होता है । वैशाख में बाँस की डालें वायु वेग से घिसती हैं तब अग्नि प्रकट होकर बाँस जल जाते हैं, वैसे ही गुरुशिष्य अपनी पस की बोल-चाल द्वारा क्रोधाग्नि प्रकट होने से जल-जल कर मरते रहते हैं । चेला चकमक गुरु गति गार, ' गोष्टी ठणकार । मिलत महातम जलन सुहोय, ऐसे दैई न मेली दोय । तीन। चकमक का आघात पत्थर' पर लगता है तब किंचित् अग्नि निकल कर बहुत हो जाता है, सूत्र, पट, काष्ठादि को जलाता है । यह चकमक गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग चार और पत्थर के मिलन का ही माहात्म्य है । वैसे ही शिष्य और गुरु की बातों से क्रोधाग्नि चमक आता है और दोनों के हृदयों को जलाता है, यही उन के मिलन का माहात्म्य है । ईश्वर ऐसे गुरु-शिष्य न मिलावे । सद्गुरु सोझ्या पोरसा, शिष शाखों शिर भाग । रज्जब पूरे पीर बिन, ठाहर उभय भाग चार । सद्गुरु अपने को सिद्ध पौरषा के समान बताते हुये शिष्य-प्रशिष्यादि शाखाओं का भार शिर पर खड़ा करता है और कहता है तुम्हारे अच्छे भाग्य थे तभी तो मेरे शिष्य हो सके हो, भाग्य बिना हमारे समान गुरु कहाँ मिलते हैं । शिष्य भी उन कपटी गुरुओं की कपट पूर्ण बातों से उन पर मुग्ध होते हुये तथा गुरु की प्रसंशा के पुल बाँधते हुये संसार के सरल प्रारिण को धोखा देते हैं जब तक पूर्णावस्था को प्राप्त सिद्ध गुरु प्राप्त नहीं होते तब तक उक्त प्रकार के गुरु और शिष्य दोनों ही के हृदय स्थान में उक्त प्रकार का दंभ रहता है और यह उनके भाग्यहीनता का ही चिह्न है । रज्जब चेला चक्षु बिन, गुरु मिल्या जाचंध' । कूप मयी यहु कुंभिनी क्यों पावें प्रभु पंध पाँच जैसे कोई नेत्रहीन मनुष्य आवाज देकर के कहे- कोई मुझे अमुकग्राम को पहुँचा दे तो मैं उसे अमुक पुरस्कार दूंगा । उसे कोई जन्मांध ' - चल में पहुँचा दूंगा, तो वे दोनों मार्ग छूट जाने से कूप में ही पड़े गे । वैसे ही ज्ञानहीन स्वार्थी शिष्य-गुरु मिल जाते हैं तब उनके लिये यह संपूर्ण पृथ्वी ही कूप रूप है अर्थात् वे दोनों संसार कूप में ही पड़ते हैं, परब्रह्म प्राप्ति का मार्ग उन्हें नहीं मिलता । गुरु के अंग' हुं गुरु नहीं, शिष्य न ले ही सीख । रज्जब सौदा ना बण्याँ, पेट भरहु कर भीख ।छः। गुरु के लक्षण ' गुरु में नहीं है और शिष्य भी शिक्षा धारण नहीं करता, तब परब्रह्म प्राप्ति रूप व्यापार तो बनता नहीं, केवल भिक्षा करके पेट भरने का मार्ग खुल जाता है । रज्जब राम न रहम कर, अक्षर लिखे न भाल । तायें सद्गुरु ना मिल्या, गुरु शिष रहे कंगाल ॥सात॥ राम के दया न करने से विधाता ने मुक्ति प्राप्ति के अंक ललाट में नहीं लिखे अर्थात् गुरु प्राप्त होने का प्रारब्ध नहीं बना, इसी से सद्गुरु नहीं मिले । सद्गुरु के अभाव से गुरु और शिष्य दोनों ही आत्म ज्ञान न होने से सांसारिक प्रशाओं द्वारा कंगाल ही रहे । गुरु घर धन ह्वै पाइये, शिष्य सुलक्षण ले हि । उभय अभागी एकठे, कहा लेय कहा देहि ।आठ। गरु के अन्तःकरण रूप घर में ज्ञान-धन हो तो शिष्य को प्राप्त हो और शिष्य भी शिष्यपने के सुन्दर लक्षणों से युक्त हो तो ज्ञान-धन ले सके किन्तु जब दोनों ही भाग्यहीन मिल जायँ तब गुरु क्या दे और शिष्य क्या ले । बैयर' सौं बैयर मिल्यों, कहो पूत क्यों होय । त्यों रज्जब सद्गुरु बिना, सब खोजों की जोय' ।छः। कहो ? नारी' से नारी मिले तब पुत्र कैसे होगा ? वैसे ही सद्गुरु बिना सभी शिष्य नपुंसकों की नारियों के समान हैं। जैसे नपुंसक की नारी के संतान नहीं होती वैसे ही सद्गुरु बिना शिष्यों को ज्ञान नहीं होता । जा' कंठ कुच पय नहीं, क्या पीवे दुहि ग्वाल । त्यों रज्जब शिष सूम गति, गुरु भूखा बेहाल । दस । बकरी' के गले के स्तनों में दूध नहीं होता, वे तो देखने मात्र के वे ही होते हैं । उनको ग्वाल दुह करके पीना चाहे तो क्या पीयेगा ? वैसे हो यदि शिष्य सूम मिल जाय और गुरु आशा द्वारा भूखा मिल जाय तो, उक्त जागलस्तन और ग्वाल की-सी ही दुखद गति उनकी होगी । घर घर दीक्षा देहि गुरु, शिष्य न सुलझे कोय । जन रज्जब सब लालची, तायें भला न होय ॥ ग्यारह ॥ स्वार्थी गुरु घर दो पर जाकर दीक्षा देते हैं किन्तु उनके उपदेश से कोई भी शिष्य अज्ञान बन्धन से नहीं निकलता, कारण - गुरु और शिष्य दोनों ही सांसारिक विषयों के लोभी हैं, इसीलिये दोनों का ही मुक्ति रूप भला नहीं होता । शिष सारे गुरु को गिलें, गुरु सेवक सब खाय । रज्जब दोनों यूं मिले, हरि में कौन समाय । बारह । शिष्य तो सभी गुरु के धनादि को खाना चाहते हैं और गुरु सभी सेवकों का खाना चाहता है इस प्रकार दोनों ही सांसारिक आशानों से घिरे हुये हैं तब दोनों में से हरि में कौन समायेगा ? अर्थात् दोनों ही मुक्त न हो सकेंगे । गुरु-शिष्य निदान निरर्णय का अंग पाँच कुल चेले चीणा भये, गुरु को यह गम' नाँहि । रज्जब पैठा प्रीति कर, बूडि मुवा यूं माँहि ॥तेरह॥ चीरणा नामक अनाज चपटा और चिकना होता है, उसकी राशि पर कोई कूद पड़े तो उसमें डूब जाता है । वैसे ही शिष्य तो सब चीरगा के समान हैं, किन्तु गुरु को यह ज्ञान नहीं कि- यह मुझे ही दबा लेंगे, वह तो प्रेम से उनमें प्रवेश करता है परन्तु अन्त में उनके जाल से उन्हीं में समाप्त हो जाता है अर्थात् गुरु का सर्वस्व वे ही खा जाते हैं । इति श्री रज्जब गिरार्थं प्रकाशिका सहित गुरु-शिष्य निर्गुण का अंग चार समाप्त । साशून्य एक सौ छयासठ । अथ गुरु शिष्य निदान निर्णय का अंग पाँच गुरु-शिष्य निरर्णय-अंग के अन्तर गुरु-शिष्यपने में हेतु निर्णय का विचार करने के लिये गुरु-शिष्य निदान निर्णय का अंग कह रहे हैं - सद्गुरु सोध रु कीजिए, साहिब सौं साचा । रज्जब परसे पार छः, सुन मनसा वाचा । एक । एक-तीन में परीक्षा करके गुरु बनाने की प्रेरणा कर रहे हैं - जो ईश्वर की आज्ञानुसार रह कर ईश्वर के आगे सच्चा रहता हो, ऐसी परीक्षा कर के ही गुरु बनाना चाहिये, ऐसे गुरु का उपदेश श्रवरण करके मन वचन द्वारा उसके अनुसार व्यवहार करता है वह संसार से पार होकर परब्रह्म को प्राप्त होता है । सद्गुरु सोध रु कीजिये, साहिब सौं पूरा । रज्जब रहता राखिले, गुरु जीवन मूरा ।दो। ईश्वर की आज्ञा मानने में जो ईश्वर के आगे पूरा हो ऐसी जांच करके ही गुरु बनाना चाहिये । जो गुरण विकारों से रहित होता है वही गुरु संसार प्रवाह में बहते हुये प्रारणी को जीवन के मूल परब्रह्म में स्थिर रख सकता है । सत जत सुमिरण हिरदै साँच, सो सद्गुरु शिष ह्वौ मन राच । रज्जब कहै परख गुरुदेव सेवक हो कीजे ता सेव । तीन । जो सत्य, संयम, ईश्वर स्मरणादि साधनों में हृदय से सच्चा हो वही सद्गुरु है, उसी का शिष्य होकर उसी में मन से प्रेम करो । हम तो यही कहते हैं कि - प्रथम परीक्षा करके ही गुरु बनाओ और सच्चे सद्गुरु के सेवक बन कर सेवा करो । सद्गुरु मृतक' जहाज गति, शिष सब जीवित माँहि । जन रज्जब जोल्यूं गई, भव जल बूड़े नाँहि ॥चार॥ चार-छः में सच्चे सद्गुरु की शरण में हानि नहीं होती यह कहते हैं- - सद्गुरु शुष्क' काष्ठ से बने हुये जहाज के समान है और शिष्य उसमें बैठने वाले जीवित प्राणियों के समान हैं, जैसे जहाज में बैठने वाले जल में नहीं डूबते उनका डूबने का भय ' चला जाता है । वैसे ही जीन्मुक्त' सद्गुरु की शरण में जाने से संसार दशा रूप जीवन वाले प्राणियों का संसार भय चला जाता है, वे संसार सागर में नहीं डूबते । रज्जब काचा सूत शिष, लिपट्या सद्गुरु हाथ । काल कसौटी देय दिव्य, जले न साँचे साथ । पाँच। पूर्वकाल में कच्चा सूत हथेली पर लिपेट के उस पर दिव्य रखते थे । तब सच्चे का हाथ नहीं जलता था और झूठे का जल जाता था । वैसे ही सच्चे सद्गुरु के संग रहने से शिष्य काल-दंड रूप परीक्षा से व्यथित नहीं होता महापुरुष मुहुरे बँधे, तालिब काचे तार । रज्जब जल हि न युगल वे, अन्तक अग्नि मझार । छः । जैसे मोहरे में कच्चा तार बँधा हो तो, वह अग्नि में नहीं जलता वैसे ही महापुरुष सद्गुरु की शरण में जाने पर शिष्य कालाग्नि में नहीं जलता । कोयल अंडे काक गृह, सुत निपजे पर सेव । त्यों रज्जब शिष भाव को, प्रति पाले गुरु देव ॥सात॥ में गुरु से ही शिष्य की रक्षा होती है यह कहते हैं- कोयल के अंडे काक के घर में रहते हैं और अपने से अन्य काकों की सेवा से बड़े होते हैं किन्तु कोयल उनका भाव से ही पालन करती है और बड़े होने पर ले जाती है, वैसे ही शिष्य संसार में रहते हैं किन्तु गुरु उनका भाव से ही पालन करते हैं और वैराग्य होने पर ले जाते हैं । कोयल अपने अंडे कांक के आलम में छोड़ आती है। काक उनको अपने जानकर पालते हैं कुछ बड़े होने पर कोयल उनके पास जाकर अपनी बोली सुनाती रहती है और जब वे उड़ने लगते हैं तब काक के न होने के समय उन्हें साथ ले जाती है । गुरु संतोषी चन्द्र मय, शिष नक्षत्र निरोहाय' । जन रज्जब तिहि सभा को, देख दृष्टि बलि जाय ।आठ। यं में योग्य गुरु शिष्य धन्य हैं, यह कह रहे हैं जैसे बिना ही इच्छा चन्द्रमा को नक्षत्र मंडल घेरे रहता है, वैसे ही संतोषी गुरु को विरक्त '
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Meerut : सिटी के यूथ का लाइफ स्टाइल भले ही चेंज हुआ है, लेकिन लाइफ स्टाइल के साथ ही सभ्यता भी कायम है। फिल्मी दुनिया में कदम रख चुके मेरठ जेल रोड निवासी प्रियांशु को अपने मेरठ से बेहद ही प्यार है। प्रियांशु का मानना है कि मेरठ के युवाओं के रहन-सहन व पहनावे में भले ही काफी बड़ा बदलाव आया है, मगर उनकी सभ्यता भी कायम है। मेरठ में विभिन्न तरह के मॉल बनना व खूबसूरत सिनेमा खुलना बेहद बड़े बदलाव हैं। वहीं बदलते मेरठ के साथ ही यहां के लोगों का लाइफ स्टाइल भी काफी बदल चुका है। यही कारण है कि आज मेरठ अपने आप में ही एक बड़ा शहर है।
प्रियांशु कौशल ने अपने करियर की शुरुआत ख्009 में न्यूयार्क के फिल्म मेकिंग इंस्टीट्यूट से ट्रेंनिग लेकर की। इसके बाद प्रियांशु ने मेरठ के आईआईएफटी इंस्टीट्यूट से ख्0क्क् में एक्टिंग ट्रेनिंग ली। प्रियांशु ने बताया उसे डीडी नेशनल चैनल पर आने वाले मंजिल सीरियल में ख्0क्ख् में एक्टिंग का पहला चांस मिला था, जिसके बाद ख्0क्फ् में डीडी उर्दू चैनल पर आने वाले फिजा सीरियल में एक्टिंग करने का मौका मिला। सीरियल के बाद प्रियांशु कौशल को फिल्मों में भी चांस मिलना शुरू हो गया है। हाल फिलहाल में वह क्7 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म ये है तीन खुराफाती में लीड रोल अदा कर रहे हैं। यह फिल्म इंडिया के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म यूथ से संबंधित है। प्रियांशु ने बताया कि फिल्म देखने में यूथ को काफी मजा आने वाला है। प्रियांशु ने बताया वह एक अन्य फिल्म में भी काम कर रहे हैं, जिसकी शूटिंग शुरू हो गई है। आने वाले दो तीन महीने में वह फिल्म भी रिलीज होने वाली है।
प्रियांशु का कहना है कि हम अगर जींस और टीशर्ट में रहते हैं, तो हमें कुर्ता पहनना भी पसंद आता है। आज कल यूथ में कुर्ता पहनने का काफी क्रेज हो गया है। खासियत तो यह है कि आज यूथ पुराने कपड़ों को ही कुछ स्टाइलिश लुक देकर पहनने लगे हैं।
इसके अलावा आज कल इंटरनेट टेक्नोलॉजी का प्रयोग काफी तेजी से होने लगा है। जहां हम केवल एसएमएस व फेसबुक पर ही सीमित थे। आज काफी सारे एप्स के जरिए हम चंद मिनटों में वीडियो कॉल, ऑडियो रिकॉर्डिग, पिक्चर्स व चैट काफी सारे सहूलियत का लाभ उठा सकते हैं। इतना ही नहीं इन एप्स के जरिए स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई में और बिजनेसमैन अपने बिजनेस में भी काफी मदद ले रहे हैं। बदलाव ही नियति का नियम है, क्योकि बदलाव के साथ ही हमारे करियर में तरक्की होती है।
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Meerut : सिटी के यूथ का लाइफ स्टाइल भले ही चेंज हुआ है, लेकिन लाइफ स्टाइल के साथ ही सभ्यता भी कायम है। फिल्मी दुनिया में कदम रख चुके मेरठ जेल रोड निवासी प्रियांशु को अपने मेरठ से बेहद ही प्यार है। प्रियांशु का मानना है कि मेरठ के युवाओं के रहन-सहन व पहनावे में भले ही काफी बड़ा बदलाव आया है, मगर उनकी सभ्यता भी कायम है। मेरठ में विभिन्न तरह के मॉल बनना व खूबसूरत सिनेमा खुलना बेहद बड़े बदलाव हैं। वहीं बदलते मेरठ के साथ ही यहां के लोगों का लाइफ स्टाइल भी काफी बदल चुका है। यही कारण है कि आज मेरठ अपने आप में ही एक बड़ा शहर है। प्रियांशु कौशल ने अपने करियर की शुरुआत ख्नौ में न्यूयार्क के फिल्म मेकिंग इंस्टीट्यूट से ट्रेंनिग लेकर की। इसके बाद प्रियांशु ने मेरठ के आईआईएफटी इंस्टीट्यूट से ख्शून्यक्क् में एक्टिंग ट्रेनिंग ली। प्रियांशु ने बताया उसे डीडी नेशनल चैनल पर आने वाले मंजिल सीरियल में ख्शून्यक्ख् में एक्टिंग का पहला चांस मिला था, जिसके बाद ख्शून्यक्फ् में डीडी उर्दू चैनल पर आने वाले फिजा सीरियल में एक्टिंग करने का मौका मिला। सीरियल के बाद प्रियांशु कौशल को फिल्मों में भी चांस मिलना शुरू हो गया है। हाल फिलहाल में वह क्सात अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म ये है तीन खुराफाती में लीड रोल अदा कर रहे हैं। यह फिल्म इंडिया के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म यूथ से संबंधित है। प्रियांशु ने बताया कि फिल्म देखने में यूथ को काफी मजा आने वाला है। प्रियांशु ने बताया वह एक अन्य फिल्म में भी काम कर रहे हैं, जिसकी शूटिंग शुरू हो गई है। आने वाले दो तीन महीने में वह फिल्म भी रिलीज होने वाली है। प्रियांशु का कहना है कि हम अगर जींस और टीशर्ट में रहते हैं, तो हमें कुर्ता पहनना भी पसंद आता है। आज कल यूथ में कुर्ता पहनने का काफी क्रेज हो गया है। खासियत तो यह है कि आज यूथ पुराने कपड़ों को ही कुछ स्टाइलिश लुक देकर पहनने लगे हैं। इसके अलावा आज कल इंटरनेट टेक्नोलॉजी का प्रयोग काफी तेजी से होने लगा है। जहां हम केवल एसएमएस व फेसबुक पर ही सीमित थे। आज काफी सारे एप्स के जरिए हम चंद मिनटों में वीडियो कॉल, ऑडियो रिकॉर्डिग, पिक्चर्स व चैट काफी सारे सहूलियत का लाभ उठा सकते हैं। इतना ही नहीं इन एप्स के जरिए स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई में और बिजनेसमैन अपने बिजनेस में भी काफी मदद ले रहे हैं। बदलाव ही नियति का नियम है, क्योकि बदलाव के साथ ही हमारे करियर में तरक्की होती है।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट 2018 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहाकि, मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश का हर नौजवान स्मार्ट नौजवान बने।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने आज कहा कि उनका समूह उत्तर प्रदेश की सरकार और जनता का 'भरोसेमंद साझेदार' बनेगा। अंबानी ने यहां उत्तर प्रदेश निवेशक शिखर सम्मेलन 2018 के उद्घाटन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, रिलायंस उत्तर प्रदेश की जनता और सरकार का भरोसेमंद साझेदार बनेगा।
मुकेश अंबानी ने उत्तर प्रदेश में अपने समूह की योजनाओं पर चर्चा करते हुए ऐलान किया कि जियो अगले तीन साल के दौरान उत्तर प्रदेश में 10 हजार करोड रुपए का निवेश करेगी। अंबानी ने कहा, मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश का हर नौजवान स्मार्ट नौजवान बने इसलिए हमने जियो फोन शुरू किया जो भारत का खुद का स्मार्टफोन है। यह केवल 1500 रुपए में उपलब्ध है और यह राशि भी तीन साल बाद रिफंडेबल (लौटाई जा सकने वाली) है ... वस्तुतः मुफ्त है ।"
उन्होंने यह ऐलान भी किया कि जियो उत्तर प्रदेश में अगले दो महीने में दो करोड़ फोन तरजीही आधार पर उपलब्ध कराएगा। अंबानी ने कहा कि गंगा नदी हम सबकी माता है और हम सबके लिए पवत्रि है। 'नमामि गंगे' मिशन गति पकड़ रहा है। रिलायंस फाउण्डेशन इस मिशन की सफलता के लिए काम करेगा।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट दो हज़ार अट्ठारह में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहाकि, मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश का हर नौजवान स्मार्ट नौजवान बने। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने आज कहा कि उनका समूह उत्तर प्रदेश की सरकार और जनता का 'भरोसेमंद साझेदार' बनेगा। अंबानी ने यहां उत्तर प्रदेश निवेशक शिखर सम्मेलन दो हज़ार अट्ठारह के उद्घाटन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, रिलायंस उत्तर प्रदेश की जनता और सरकार का भरोसेमंद साझेदार बनेगा। मुकेश अंबानी ने उत्तर प्रदेश में अपने समूह की योजनाओं पर चर्चा करते हुए ऐलान किया कि जियो अगले तीन साल के दौरान उत्तर प्रदेश में दस हजार करोड रुपए का निवेश करेगी। अंबानी ने कहा, मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश का हर नौजवान स्मार्ट नौजवान बने इसलिए हमने जियो फोन शुरू किया जो भारत का खुद का स्मार्टफोन है। यह केवल एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए में उपलब्ध है और यह राशि भी तीन साल बाद रिफंडेबल है ... वस्तुतः मुफ्त है ।" उन्होंने यह ऐलान भी किया कि जियो उत्तर प्रदेश में अगले दो महीने में दो करोड़ फोन तरजीही आधार पर उपलब्ध कराएगा। अंबानी ने कहा कि गंगा नदी हम सबकी माता है और हम सबके लिए पवत्रि है। 'नमामि गंगे' मिशन गति पकड़ रहा है। रिलायंस फाउण्डेशन इस मिशन की सफलता के लिए काम करेगा। फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
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रूसी रक्षा मंत्रालय 4 के लाखों लोगों को नष्ट कर देगा "चड्डी"
रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय ने एक अप्रचलित राइफल की चार मिलियन इकाइयों को नष्ट करने का निर्णय लिया हथियारों। इन हथियारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कलाश्निकोव हैं।
लाखों मशीन गन, पिस्तौल और राइफल के लगभग 16 वर्तमान में सैन्य शस्त्रागार में संग्रहीत हैं, और उनमें से लाखों 6,5 एक विकसित संसाधन के साथ हैं। यह सैन्य-औद्योगिक परिसर के एक स्रोत से ज्ञात हुआ। इस सब के साथ, इस तरह के हथियारों (tsarist सेना के बंदूकों के विपरीत) को बेचना असंभव है। सेंटर फॉर इंटरनेशनल आर्म्स ट्रेड के निदेशक इगोर कोरोटचेंको के अनुसार, खरीदार नए हथियारों में रुचि रखते हैं, न कि शेयरों में। इसके अलावा, परिवहन, सुरक्षा और अन्य प्रक्रियाओं की लागत के कारण पुराने छोटे हथियारों की बिक्री लाभहीन है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व को केवल तीन या चार मिलियन "ट्रंक" रक्षा मंत्रालय की आवश्यकता होती है। कॉन्स्टेंटिन माकिंको, जो सेंटर फॉर द एनालिटिक्स ऑफ़ स्ट्रेटेजीज़ एंड टेक्नोलॉजीज़ के उप निदेशक हैं, ने कहा कि रूस में शारीरिक रूप से ऐसे लोग नहीं होंगे, जो सैन्य संघर्ष की स्थिति में तीन मिलियन से अधिक मशीन गन ले सकें। हां, और सैन्य कार्रवाइयों के विकास के आधुनिक परिदृश्यों के लिए अब बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मुख्य जोर उच्च-सटीक हथियारों और पेशेवर सेना पर है।
इन गणनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, 2020 के बाद, लगभग छह मिलियन आग्नेयास्त्रों के निपटान के लिए प्रक्रिया का खुलासा करने की योजना बनाई गई है। उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने निर्दिष्ट किया कि हथियारों के विनाश की प्रक्रिया को उन कारखानों पर किए जाने की योजना है जहां उनका उत्पादन हुआ। इससे न केवल उद्यमों को खुद को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें आधुनिक बनाने में भी मदद मिलेगी।
इज़माश प्लांट, जो कलाश्निकोव असाल्ट राइफल का उत्पादन करता है, ने अप्रचलित हथियारों को 2011 में काटना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया की मंदी नौकरशाही देरी के कारण है। उदाहरण के लिए, निपटान शुरू होने के कुछ महीने बाद ही, उत्पाद संख्याओं का वीडियो निर्धारण दिखाई दिया। इस दौरान कितनी मशीनें बंद हुईं, कोई नहीं जानता।
यह यूडीमर्ट पेंशनर से जुड़े हालिया घोटाले की व्याख्या कर सकता है, जिन्होंने किंडल के लिए बक्से खरीदे और उनमें एक्सएनयूएमएक्स मशीनों की खोज की, जिससे अनजाने में "गन बैरन" बन गया। इस आपातकाल के परिणामस्वरूप, एक आपराधिक मामला खोला गया था, और निपटान प्रक्रिया को निलंबित कर दिया गया था और आज तक शुरू नहीं किया गया है।
सितंबर 2011 में, ऐसी खबरें थीं कि रक्षा मंत्रालय अब कलाश्निकोव हमला राइफलें नहीं खरीदेगा। सैन्य विभाग ने इस तरह के निर्णय को इस तथ्य से समझाया कि सैन्य इकाइयों में इस प्रकार के हथियारों के विशाल भंडार हैं। इसके जवाब में, इस साल के फरवरी में इज़ेव्स्क आर्म्स प्लांट के डिज़ाइन ब्यूरो ने एक नई कलाश्निकोव असॉल्ट राइफल, एके-एक्सएनयूएमएक्स, जिसका नाम "एक-हाथ के लिए हथियार" है, पेश किया। आलोचकों ने इसे मशीन कहा है, क्योंकि इसके साथ सभी ऑपरेशन एक हाथ से किए जाते हैं, जो कि इसका निस्संदेह लाभ है।
हालांकि, सेना ने इस मशीन को खारिज कर दिया। इसलिए, जनरल स्टाफ के अनुसार, नई AK मशीन गन में AK-47 संशोधन से कोई बुनियादी अंतर नहीं है, जिसका अर्थ है कि नए हथियार में वही दोष होंगे जो इसके प्रोटोटाइप में हैं। इसके तुरंत बाद, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस साल सैन्य विभाग इज़माश से कुछ भी नहीं खरीदेगा, यह कहते हुए कि नई मशीन गन एक झपकी थी।
रूसी सरकार के उप-प्रमुख दिमित्री रोगोज़िन नए कलाश्निकोव की रक्षा करने के लिए खड़े हुए थे। इज़माश की अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने कहा कि रूसी मशीनगन के गुणों को अमेरिकी सेना द्वारा भी मान्यता दी गई थी। हां, और रूसी संघ के आंतरिक मामलों के मंत्रालय काफी AK-12 बने रहे और परीक्षण संचालन के लिए इस हथियार का अनुरोध किया।
यूक्रेन में बड़े पैमाने पर छोटे हथियारों का विनाश अपेक्षित है। इस प्रकार, यूक्रेनी सरकार सशस्त्र बलों के भंडार में 366 हजारों हथियारों को नष्ट करने का इरादा रखती है। इस प्रकार, सरकार ने रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का संचालन करने के लिए रक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके अलावा, रीसाइक्लिंग यूक्रेन और नाटो के मंत्रियों के मंत्रिमंडल के बीच समझौते के कार्यान्वयन के ढांचे के भीतर होगा।
विशेष रूप से, AKM, AKS-74, AK-74 असॉल्ट राइफलें, TT और PM पिस्तौल, रिवाल्वर, PKK मशीन गन, ग्रेनेड लॉन्चर, राइफल, कार्बाइन को नष्ट करने का निर्णय लिया गया।
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रूसी रक्षा मंत्रालय चार के लाखों लोगों को नष्ट कर देगा "चड्डी" रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय ने एक अप्रचलित राइफल की चार मिलियन इकाइयों को नष्ट करने का निर्णय लिया हथियारों। इन हथियारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कलाश्निकोव हैं। लाखों मशीन गन, पिस्तौल और राइफल के लगभग सोलह वर्तमान में सैन्य शस्त्रागार में संग्रहीत हैं, और उनमें से लाखों छः,पाँच एक विकसित संसाधन के साथ हैं। यह सैन्य-औद्योगिक परिसर के एक स्रोत से ज्ञात हुआ। इस सब के साथ, इस तरह के हथियारों को बेचना असंभव है। सेंटर फॉर इंटरनेशनल आर्म्स ट्रेड के निदेशक इगोर कोरोटचेंको के अनुसार, खरीदार नए हथियारों में रुचि रखते हैं, न कि शेयरों में। इसके अलावा, परिवहन, सुरक्षा और अन्य प्रक्रियाओं की लागत के कारण पुराने छोटे हथियारों की बिक्री लाभहीन है। विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व को केवल तीन या चार मिलियन "ट्रंक" रक्षा मंत्रालय की आवश्यकता होती है। कॉन्स्टेंटिन माकिंको, जो सेंटर फॉर द एनालिटिक्स ऑफ़ स्ट्रेटेजीज़ एंड टेक्नोलॉजीज़ के उप निदेशक हैं, ने कहा कि रूस में शारीरिक रूप से ऐसे लोग नहीं होंगे, जो सैन्य संघर्ष की स्थिति में तीन मिलियन से अधिक मशीन गन ले सकें। हां, और सैन्य कार्रवाइयों के विकास के आधुनिक परिदृश्यों के लिए अब बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मुख्य जोर उच्च-सटीक हथियारों और पेशेवर सेना पर है। इन गणनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए, दो हज़ार बीस के बाद, लगभग छह मिलियन आग्नेयास्त्रों के निपटान के लिए प्रक्रिया का खुलासा करने की योजना बनाई गई है। उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने निर्दिष्ट किया कि हथियारों के विनाश की प्रक्रिया को उन कारखानों पर किए जाने की योजना है जहां उनका उत्पादन हुआ। इससे न केवल उद्यमों को खुद को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें आधुनिक बनाने में भी मदद मिलेगी। इज़माश प्लांट, जो कलाश्निकोव असाल्ट राइफल का उत्पादन करता है, ने अप्रचलित हथियारों को दो हज़ार ग्यारह में काटना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया की मंदी नौकरशाही देरी के कारण है। उदाहरण के लिए, निपटान शुरू होने के कुछ महीने बाद ही, उत्पाद संख्याओं का वीडियो निर्धारण दिखाई दिया। इस दौरान कितनी मशीनें बंद हुईं, कोई नहीं जानता। यह यूडीमर्ट पेंशनर से जुड़े हालिया घोटाले की व्याख्या कर सकता है, जिन्होंने किंडल के लिए बक्से खरीदे और उनमें एक्सएनयूएमएक्स मशीनों की खोज की, जिससे अनजाने में "गन बैरन" बन गया। इस आपातकाल के परिणामस्वरूप, एक आपराधिक मामला खोला गया था, और निपटान प्रक्रिया को निलंबित कर दिया गया था और आज तक शुरू नहीं किया गया है। सितंबर दो हज़ार ग्यारह में, ऐसी खबरें थीं कि रक्षा मंत्रालय अब कलाश्निकोव हमला राइफलें नहीं खरीदेगा। सैन्य विभाग ने इस तरह के निर्णय को इस तथ्य से समझाया कि सैन्य इकाइयों में इस प्रकार के हथियारों के विशाल भंडार हैं। इसके जवाब में, इस साल के फरवरी में इज़ेव्स्क आर्म्स प्लांट के डिज़ाइन ब्यूरो ने एक नई कलाश्निकोव असॉल्ट राइफल, एके-एक्सएनयूएमएक्स, जिसका नाम "एक-हाथ के लिए हथियार" है, पेश किया। आलोचकों ने इसे मशीन कहा है, क्योंकि इसके साथ सभी ऑपरेशन एक हाथ से किए जाते हैं, जो कि इसका निस्संदेह लाभ है। हालांकि, सेना ने इस मशीन को खारिज कर दिया। इसलिए, जनरल स्टाफ के अनुसार, नई AK मशीन गन में AK-सैंतालीस संशोधन से कोई बुनियादी अंतर नहीं है, जिसका अर्थ है कि नए हथियार में वही दोष होंगे जो इसके प्रोटोटाइप में हैं। इसके तुरंत बाद, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस साल सैन्य विभाग इज़माश से कुछ भी नहीं खरीदेगा, यह कहते हुए कि नई मशीन गन एक झपकी थी। रूसी सरकार के उप-प्रमुख दिमित्री रोगोज़िन नए कलाश्निकोव की रक्षा करने के लिए खड़े हुए थे। इज़माश की अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने कहा कि रूसी मशीनगन के गुणों को अमेरिकी सेना द्वारा भी मान्यता दी गई थी। हां, और रूसी संघ के आंतरिक मामलों के मंत्रालय काफी AK-बारह बने रहे और परीक्षण संचालन के लिए इस हथियार का अनुरोध किया। यूक्रेन में बड़े पैमाने पर छोटे हथियारों का विनाश अपेक्षित है। इस प्रकार, यूक्रेनी सरकार सशस्त्र बलों के भंडार में तीन सौ छयासठ हजारों हथियारों को नष्ट करने का इरादा रखती है। इस प्रकार, सरकार ने रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का संचालन करने के लिए रक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके अलावा, रीसाइक्लिंग यूक्रेन और नाटो के मंत्रियों के मंत्रिमंडल के बीच समझौते के कार्यान्वयन के ढांचे के भीतर होगा। विशेष रूप से, AKM, AKS-चौहत्तर, AK-चौहत्तर असॉल्ट राइफलें, TT और PM पिस्तौल, रिवाल्वर, PKK मशीन गन, ग्रेनेड लॉन्चर, राइफल, कार्बाइन को नष्ट करने का निर्णय लिया गया।
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उपस्थित रहसे है, परन्तु क्षमता स्थायी वनामे में बमका स्थाम गौष माना जाता है। रोगनिवृत्ति होने के पश्चात् तृमेत रोपों में वाइकों को छोड़कर सभ्य सद रोगों के शरीर से जीवाणु मोट हो जाते है। विपाशु चमिठ रोगों में रोगनिवृधि होने पर भी वे शरीर में निवास करते है ऐसा तो का मत है और स्थायी क्षमता उनके निवास के कारण होती है ऐसा माना जाता है। इसका सास्पय यह है कि जोधाणुजमिस्र रोगों के लिये जिस प्रकार क्षमता शरीर रसाप्रवि
( Humoral ) होती है पैसो विपाणुजनित रोगों के लिये म वह सेठामि (Cellulur, विषाणु सह्यामयि होने के कारण ) होसी है। ये शरीर की सेखों में रहनेवासे विषाणु शरीर के साथ से भी होते रहते है और इसपेठ रोगों के वाहक भी होते ( कर संक्रमण देखो ) है। (३) रोगी के शरीर में जो प्रतियोगो पदार्थ बनते है ये विषाणुजनित रोगों में तृवाणुजनित रोगों के समाम एक में प्रकट नहीं होते। इसका कारण यह माना जाता है कि विषाणु मेलामपि होने के कारण जिनके ऊपर आक्रमण कर सकते है ऊपर पे प्रतियोगी चिपककर ( Adsorh बमको विपाणुओं के लिये मध्य पमा देते है और इसलिये रक्तरस में नहीं मिलते (७) सक्रिय क्षमता उत्पन्न कम्मे के लिये इनक भी पैश्मी होते हैं, परन्तु तृष्णाणु मृतावस्था में जैसो बड़िया क्षमता उत्पन्न कर सध् वैस ये महीं कर सकते । इनके पैरसीम कुछ विशिष्ट सरकारों से पा कार्योकिदिरामायनिक दम्पोंस ममुप्र ( Altenuated ) बनाये हुए परन्तु सग्रीम विपाणुओं के दोन है। (५) मिरिक क्षमता
करने के लिये इसकी भी सम ससिकार होतो है, परन्तु मे मनुष्येत्तर प्राणियों में कृत्रिम तौर यमापी हुई म होकर मैसर्गिक रीस्यामनुष्यों में उत्पन्न हुए रोगों से बचे हुए उपयों की मर्याद रोग ' मितों की सिका ( Conralseent Serom ) दावी छ । (६) वृणाणु क्षतष्ठमिका तृणाणु या इनक विप स परस्पर मिस्रक मोर
इमको सेमिष और विविप यमाकर शरीर की रक्षा करती है। पिपाणुझमरुमिका विषाणुओं के साथ परस्परपरन्तु शरीर की जिम सेम्हों के ऊपर विधालुओं का आक्रमण या भाकपण होता है उसकती है और उनको मष्य यमाकर यह शरीर की रक्षा करती है। इसलिये यदि विपाणुओं का भाव होने से पहले मरक के समय क्षमलसिका का उपयोग किया जाय तो शरीर की नाम्पसले विपाशुओं के लिये मध्य होने के कारण मनुष्यों की रक्षा महोती है । (७) तृणामुमनित प्रतियोगी पदार्थों क्षमता पम्म करने के लिये पूरक ( Compliment ) या श्येतकणों की आवश्यकता होती है। विपाणुयमित प्रतियोगी पदाप बिना इसके स्वत प्रथया क्षमता कर सकते हैं, क्योंकि इनकी क्षमता में प्रतियोग (Antigen ) और प्रतियोगी ( Antibov ) दोनों का संयोग नहीं होता ।
चिकित्सा- इनक प्रतिपेव के लिए वैक्सीन का उपयोग होता है-जैसे, मसूरिका और अमंग्राम को टीका । पति के लिये रोग निस की समिका का उपयोग होता है और पनि प्रारंभ में प्रयुक्त को जाय वा चिकित्सा में भी काम होता है। रोम-रोमाि शैशवीय बंगपास और पीतस्थर की छमिका का उपयोग । इनके रोगों कीटाणु रोग के समान को मोष औषधि नहीं है ।
प्रायोगिक मिदान-विषाणु कार्य मय होने तबाबमक प्रति योगी पदार्थ हसिका में नदी के पराबर होने में विदाम में प्रायोगिक पतियों का बहुत कम उपयोग होता है। ममूरिका या रोगों में मूस पिन्डों (२९)
मिदान किया जाता है
योग परिपाटी के तौर पर के निदान के लिये प्रायोगिक
नहीं किया जाता है का
होता है।
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उपस्थित रहसे है, परन्तु क्षमता स्थायी वनामे में बमका स्थाम गौष माना जाता है। रोगनिवृत्ति होने के पश्चात् तृमेत रोपों में वाइकों को छोड़कर सभ्य सद रोगों के शरीर से जीवाणु मोट हो जाते है। विपाशु चमिठ रोगों में रोगनिवृधि होने पर भी वे शरीर में निवास करते है ऐसा तो का मत है और स्थायी क्षमता उनके निवास के कारण होती है ऐसा माना जाता है। इसका सास्पय यह है कि जोधाणुजमिस्र रोगों के लिये जिस प्रकार क्षमता शरीर रसाप्रवि होती है पैसो विपाणुजनित रोगों के लिये म वह सेठामि होसी है। ये शरीर की सेखों में रहनेवासे विषाणु शरीर के साथ से भी होते रहते है और इसपेठ रोगों के वाहक भी होते है। रोगी के शरीर में जो प्रतियोगो पदार्थ बनते है ये विषाणुजनित रोगों में तृवाणुजनित रोगों के समाम एक में प्रकट नहीं होते। इसका कारण यह माना जाता है कि विषाणु मेलामपि होने के कारण जिनके ऊपर आक्रमण कर सकते है ऊपर पे प्रतियोगी चिपककर सक्रिय क्षमता उत्पन्न कम्मे के लिये इनक भी पैश्मी होते हैं, परन्तु तृष्णाणु मृतावस्था में जैसो बड़िया क्षमता उत्पन्न कर सध् वैस ये महीं कर सकते । इनके पैरसीम कुछ विशिष्ट सरकारों से पा कार्योकिदिरामायनिक दम्पोंस ममुप्र बनाये हुए परन्तु सग्रीम विपाणुओं के दोन है। मिरिक क्षमता करने के लिये इसकी भी सम ससिकार होतो है, परन्तु मे मनुष्येत्तर प्राणियों में कृत्रिम तौर यमापी हुई म होकर मैसर्गिक रीस्यामनुष्यों में उत्पन्न हुए रोगों से बचे हुए उपयों की मर्याद रोग ' मितों की सिका दावी छ । वृणाणु क्षतष्ठमिका तृणाणु या इनक विप स परस्पर मिस्रक मोर इमको सेमिष और विविप यमाकर शरीर की रक्षा करती है। पिपाणुझमरुमिका विषाणुओं के साथ परस्परपरन्तु शरीर की जिम सेम्हों के ऊपर विधालुओं का आक्रमण या भाकपण होता है उसकती है और उनको मष्य यमाकर यह शरीर की रक्षा करती है। इसलिये यदि विपाणुओं का भाव होने से पहले मरक के समय क्षमलसिका का उपयोग किया जाय तो शरीर की नाम्पसले विपाशुओं के लिये मध्य होने के कारण मनुष्यों की रक्षा महोती है । तृणामुमनित प्रतियोगी पदार्थों क्षमता पम्म करने के लिये पूरक या श्येतकणों की आवश्यकता होती है। विपाणुयमित प्रतियोगी पदाप बिना इसके स्वत प्रथया क्षमता कर सकते हैं, क्योंकि इनकी क्षमता में प्रतियोग और प्रतियोगी दोनों का संयोग नहीं होता । चिकित्सा- इनक प्रतिपेव के लिए वैक्सीन का उपयोग होता है-जैसे, मसूरिका और अमंग्राम को टीका । पति के लिये रोग निस की समिका का उपयोग होता है और पनि प्रारंभ में प्रयुक्त को जाय वा चिकित्सा में भी काम होता है। रोम-रोमाि शैशवीय बंगपास और पीतस्थर की छमिका का उपयोग । इनके रोगों कीटाणु रोग के समान को मोष औषधि नहीं है । प्रायोगिक मिदान-विषाणु कार्य मय होने तबाबमक प्रति योगी पदार्थ हसिका में नदी के पराबर होने में विदाम में प्रायोगिक पतियों का बहुत कम उपयोग होता है। ममूरिका या रोगों में मूस पिन्डों मिदान किया जाता है योग परिपाटी के तौर पर के निदान के लिये प्रायोगिक नहीं किया जाता है का होता है।
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डलहौजी। पर्यटन नगरी डलहौजी में बर्फबारी के बाद सोमवार को चटक धूप खिलने से लोगों ने ठंड से राहत महसूस की है। लोगों ने चटक धूप सेंकने का जमकर लुत्फ उठाया। सोमवार को मौसम साफ होने के चलते लोगों व पर्यटकों के बाजार का रुख करने से खासी रौनक देखने को मिली, जिससे पर्यटन नगरी में कारोबार पटरी पर लौटता दिखा। सोमवार को डलहौजी में करीब तीन दिन के बाद सूर्यदेव ने लालिमा बिखरेते हुए ठंडे मौसम में गरमाहट ला दी। मौसम खुलते ही ठंड से राहत पाने के लिए लोग खुली जगह धूप सेंकते नजर आए। इसी बीच बर्फ देखने की चाहत में डलहौजी पहंुचे पर्यटकों ने स्नो प्वाइंटों में दिन भर बर्फ में अठखेलियां करने का लुत्फ उठाया। डलहौजी घूमने आए पर्यटकों का कहना है कि बर्फबारी ने शहर की सुंदरता को चार चांद लगाकर रख दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे बर्फ देखने की हसरत लेकर डलहौजी पहंुचे थे, जिसे प्रकृति ने पूरा कर दिया। पहली बार बर्फबारी होता देखना और उसमें अठखेलियां करने का रोमांच ही कुछ अलग रहा। बर्फबारी के बाद मागांर्े पर कोरा पड़ने से सड़कों में अभी भी फिसलन भरी हुई है, जिसके चलते उपमंडलीय प्रशासन से वाहन चालकों से सुबह-शाम ड्राइविंग करते वक्त विशेष एहतियात बरतने का अलर्ट जारी कर रखा है। बहरहाल, सोमवार को पर्यटन नगरी डलहौजी में मौसम के करवट बदलने के बाद धूप खिलने से लोगों के कुछ हद तक ठंड से पिंड छूटते नजर आए।
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डलहौजी। पर्यटन नगरी डलहौजी में बर्फबारी के बाद सोमवार को चटक धूप खिलने से लोगों ने ठंड से राहत महसूस की है। लोगों ने चटक धूप सेंकने का जमकर लुत्फ उठाया। सोमवार को मौसम साफ होने के चलते लोगों व पर्यटकों के बाजार का रुख करने से खासी रौनक देखने को मिली, जिससे पर्यटन नगरी में कारोबार पटरी पर लौटता दिखा। सोमवार को डलहौजी में करीब तीन दिन के बाद सूर्यदेव ने लालिमा बिखरेते हुए ठंडे मौसम में गरमाहट ला दी। मौसम खुलते ही ठंड से राहत पाने के लिए लोग खुली जगह धूप सेंकते नजर आए। इसी बीच बर्फ देखने की चाहत में डलहौजी पहंुचे पर्यटकों ने स्नो प्वाइंटों में दिन भर बर्फ में अठखेलियां करने का लुत्फ उठाया। डलहौजी घूमने आए पर्यटकों का कहना है कि बर्फबारी ने शहर की सुंदरता को चार चांद लगाकर रख दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे बर्फ देखने की हसरत लेकर डलहौजी पहंुचे थे, जिसे प्रकृति ने पूरा कर दिया। पहली बार बर्फबारी होता देखना और उसमें अठखेलियां करने का रोमांच ही कुछ अलग रहा। बर्फबारी के बाद मागांर्े पर कोरा पड़ने से सड़कों में अभी भी फिसलन भरी हुई है, जिसके चलते उपमंडलीय प्रशासन से वाहन चालकों से सुबह-शाम ड्राइविंग करते वक्त विशेष एहतियात बरतने का अलर्ट जारी कर रखा है। बहरहाल, सोमवार को पर्यटन नगरी डलहौजी में मौसम के करवट बदलने के बाद धूप खिलने से लोगों के कुछ हद तक ठंड से पिंड छूटते नजर आए।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पुदुच्चेरी शहर पुदुच्चेरी केन्द्र-शासित प्रदेश की राजधानी है। . पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (२० सितम्बर १९११ - ०२ जून १९९०) भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे जिन्होने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना की। उनने अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। .
पुदुच्चेरी शहर और राम शर्मा आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
पुदुच्चेरी शहर 1 संबंध नहीं है और राम शर्मा 19 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (1 + 19)।
यह लेख पुदुच्चेरी शहर और राम शर्मा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पुदुच्चेरी शहर पुदुच्चेरी केन्द्र-शासित प्रदेश की राजधानी है। . पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे जिन्होने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना की। उनने अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। . पुदुच्चेरी शहर और राम शर्मा आम में शून्य बातें हैं । पुदुच्चेरी शहर एक संबंध नहीं है और राम शर्मा उन्नीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख पुदुच्चेरी शहर और राम शर्मा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में 100 रनों से हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाज पूरी तरह से फ्लॉप रहे। खासकर ऋषभ पंत तो अपना खाता तक खोलने में नाकाम रहे। लगातार सफेद गेंद क्रिकेट में पंत की खराब फॉर्म पर सवाल उठ रहे हैं और ऐसे में उनको अगले मैच में टीम से ड्रॉप किया जाना तय है। पंत की जगह रोहित शर्मा एक दूसरे घातक विकेटकीपर को टीम में शामिल कर सकते हैं।
टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पंत पिछले कुछ सालों से टीम इंडिया के सबसे बड़े मैच विनर बनकर सामने आए हैं, लेकिन जब भी बात वनडे और टी20 क्रिकेट की आती है तो पंत का बल्ला खामोश रहता है। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में पंत बिना खाता खोले वापस लौट गए। पंत के जल्द आउट होने से टीम का मिडिल ऑर्डर पूरी तरह से हिल गया और टीम के लगातार विकेट गिरते रहे। पंत को अब तीसरे वनडे से बाहर किया जा सकता है।
इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को ऋषभ पंत की जगह टीम में शामिल किया जा सकता है। किशन ने पिछले कुछ समय से वाइट बॉल क्रिकेट में कमाल का प्रदर्शन किया है। खासकर इस साल आईपीएल में भी उन्होंने कमाल की बल्लेबाजी की। ऐसे में अगर भारतीय टीम को अपने मिडिल ऑर्डर को तगड़ा बनाना है तो पंत की जगह मिडिल ऑर्डर में ईशान किशन को शामिल किया जा सकता है। किशन तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करने में माहिर हैं।
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में एक सौ रनों से हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाज पूरी तरह से फ्लॉप रहे। खासकर ऋषभ पंत तो अपना खाता तक खोलने में नाकाम रहे। लगातार सफेद गेंद क्रिकेट में पंत की खराब फॉर्म पर सवाल उठ रहे हैं और ऐसे में उनको अगले मैच में टीम से ड्रॉप किया जाना तय है। पंत की जगह रोहित शर्मा एक दूसरे घातक विकेटकीपर को टीम में शामिल कर सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पंत पिछले कुछ सालों से टीम इंडिया के सबसे बड़े मैच विनर बनकर सामने आए हैं, लेकिन जब भी बात वनडे और टीबीस क्रिकेट की आती है तो पंत का बल्ला खामोश रहता है। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में पंत बिना खाता खोले वापस लौट गए। पंत के जल्द आउट होने से टीम का मिडिल ऑर्डर पूरी तरह से हिल गया और टीम के लगातार विकेट गिरते रहे। पंत को अब तीसरे वनडे से बाहर किया जा सकता है। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को ऋषभ पंत की जगह टीम में शामिल किया जा सकता है। किशन ने पिछले कुछ समय से वाइट बॉल क्रिकेट में कमाल का प्रदर्शन किया है। खासकर इस साल आईपीएल में भी उन्होंने कमाल की बल्लेबाजी की। ऐसे में अगर भारतीय टीम को अपने मिडिल ऑर्डर को तगड़ा बनाना है तो पंत की जगह मिडिल ऑर्डर में ईशान किशन को शामिल किया जा सकता है। किशन तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करने में माहिर हैं।
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26 जनवरी को भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही दिन के तापमान में कमी आएगी। मौसम विभाग ने कहा राजधानी के ऊपर बने चक्रवाती दबाव के कारण आसपास के क्षेत्रों में मध्यम से हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।
इसका प्रभाव सिर्फ 26 को ही नही बल्कि 25 की शाम से 27 तारीख तक देखने को मिल सकता है। इसी के साथ निजी मौसम भविष्यवक्ता स्काईमेट के निदेशक महेश पलवत ने कहा, 'इससे बुधवार और शुक्रवार को बूदां-बांदी हो सकती है और बारिश आने की सम्भावना 26 जनवरी को सबसे अधिक है. ' इसी अवसर पर होने वाली परेड में इस बार 23 झांकियां होंगी जिनमे 17 राज्यों की और छह मंत्रालय और विभाग की होंगी।
इस 26 जनवरी झंडा वंदन से पहले जाने, क्यों मनाया जाता है ये राष्ट्रीय त्यौहार ?
यहाँ आपको गोवा की शहर झांकियां भी देखने को मिलेंगी। यहाँ सिर्फ गोवा की ही नही बल्कि देशभर संस्कृति झांकिया देखने को मिलेंगी।
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छब्बीस जनवरी को भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही दिन के तापमान में कमी आएगी। मौसम विभाग ने कहा राजधानी के ऊपर बने चक्रवाती दबाव के कारण आसपास के क्षेत्रों में मध्यम से हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इसका प्रभाव सिर्फ छब्बीस को ही नही बल्कि पच्चीस की शाम से सत्ताईस तारीख तक देखने को मिल सकता है। इसी के साथ निजी मौसम भविष्यवक्ता स्काईमेट के निदेशक महेश पलवत ने कहा, 'इससे बुधवार और शुक्रवार को बूदां-बांदी हो सकती है और बारिश आने की सम्भावना छब्बीस जनवरी को सबसे अधिक है. ' इसी अवसर पर होने वाली परेड में इस बार तेईस झांकियां होंगी जिनमे सत्रह राज्यों की और छह मंत्रालय और विभाग की होंगी। इस छब्बीस जनवरी झंडा वंदन से पहले जाने, क्यों मनाया जाता है ये राष्ट्रीय त्यौहार ? यहाँ आपको गोवा की शहर झांकियां भी देखने को मिलेंगी। यहाँ सिर्फ गोवा की ही नही बल्कि देशभर संस्कृति झांकिया देखने को मिलेंगी।
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मुज़फ्फरनगर जिले में रविवार को वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक इनामी बदमाश को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है. 25 हजार इनामी बदमाश की शिनाख्त अरशद के रूप में हुई है. इस दौरान एक बदमाश पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहा. हालांकि पुलिस फरार बदमाश की तलाश में घंटों जंगल में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका.
रिपोर्ट के मुताबिक मंसूरपुर थाना क्षेत्र की नेशनल हाईवे 58 स्थित बेगराजपुर चौकी पर वाहन चेकिंग के दौरान बाइक सवार दो संदिग्धों को पुलिस ने रूकने का इशारा किया तो दोनों पुलिस पर फायरिंग करते हुए भागने लगे, लेकिन पुलिस की जबावी फायरिंग में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने दबोच लिया जबकि उसका साथी फरार होने में कामयाब हो गया.
घायल इनामी बदमाश अरशद के पास से पुलिस ने एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस के साथ एक बाइक बरामद की है. घटना स्थल पर पहुंचे एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार बदमाश अरशद बेहद ही शातिर किस्म का डकैत है, जिस पर लूट, डकैती और चोरी के डेढ़ दर्जन मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज है. फिलहाल, पुलिस अरशद के साथी सलीम को पकड़ने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है.
(रिपोर्ट-बिनेश पंवार, मुजफ्फरनगर)
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मुज़फ्फरनगर जिले में रविवार को वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक इनामी बदमाश को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है. पच्चीस हजार इनामी बदमाश की शिनाख्त अरशद के रूप में हुई है. इस दौरान एक बदमाश पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहा. हालांकि पुलिस फरार बदमाश की तलाश में घंटों जंगल में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका. रिपोर्ट के मुताबिक मंसूरपुर थाना क्षेत्र की नेशनल हाईवे अट्ठावन स्थित बेगराजपुर चौकी पर वाहन चेकिंग के दौरान बाइक सवार दो संदिग्धों को पुलिस ने रूकने का इशारा किया तो दोनों पुलिस पर फायरिंग करते हुए भागने लगे, लेकिन पुलिस की जबावी फायरिंग में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने दबोच लिया जबकि उसका साथी फरार होने में कामयाब हो गया. घायल इनामी बदमाश अरशद के पास से पुलिस ने एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस के साथ एक बाइक बरामद की है. घटना स्थल पर पहुंचे एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार बदमाश अरशद बेहद ही शातिर किस्म का डकैत है, जिस पर लूट, डकैती और चोरी के डेढ़ दर्जन मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज है. फिलहाल, पुलिस अरशद के साथी सलीम को पकड़ने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है. .
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अमरावती/ दि. 11- अ. भा. मराठी नाट्य परिषद मध्यवर्ती शाखा के अप्रैल में होने जा रहे चुनाव हेतु विदर्भ की 6 सीटों के वास्ते 26 सदस्यों ने नामांकन दाखिल किए हैं. किंतु अमरावती से चुने जानेवाले एकमात्र पद के लिए एड. प्रशांत देशपांडे का ही आवेदन रहने से उनका चयन अविरोध हो गया है. अब 6 स्थानों हेतु नागपुर, अकोला और वाशिम में चुनाव होंगे.
नागपुर से 3 स्थानों हेतु 13 नामांकन दाखिल हुए हैं. उनमें दिलीप देवरणकर, सलीम शेख, प्रफुल्ल फरकसे, संजय रहाटे, नरेश गडेकर, आसावरी गडेकर, स्वप्निल येनगंटीवार, प्रमोद भुसारी, नितिन पात्रीकर, कुणाल गडेकर, शेख सलीम फकीरा, गौरव खोंड, दिलीप ठाणेकर का समावेश है. अकोला में एकमात्र स्थान हेतु मधुकर जाधव , गीताबाली उजवणे और सचिन गिरी ने नामांकन दाखिल किया है. वाशिम में 2 सीटों हेतु 10 नामांकन प्राप्त हुए है. जिसमें उज्वल देशमुख, श्रीकांत भाके, यशवंत पदम गिरवार, अश्विन जगताप, सुदाम तायडे, नितीन पगार, सदानंद दाभाडकर, नंदकिशोर कव्हलकर, राजू जोगदंड, किरण पदमगिरवार शामिल है.
विदर्भ मध्यवर्ती शाखा में पदाधिकारी के खिलाफ नया गट तैयार होने से रोमांचक होने का दावा किया जा रहा है. 16 अप्रैल को मतदान होगा. विजयी उम्मीदवारों के नाम 19 अप्रैल को घोषित होेंगे.
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अमरावती/ दि. ग्यारह- अ. भा. मराठी नाट्य परिषद मध्यवर्ती शाखा के अप्रैल में होने जा रहे चुनाव हेतु विदर्भ की छः सीटों के वास्ते छब्बीस सदस्यों ने नामांकन दाखिल किए हैं. किंतु अमरावती से चुने जानेवाले एकमात्र पद के लिए एड. प्रशांत देशपांडे का ही आवेदन रहने से उनका चयन अविरोध हो गया है. अब छः स्थानों हेतु नागपुर, अकोला और वाशिम में चुनाव होंगे. नागपुर से तीन स्थानों हेतु तेरह नामांकन दाखिल हुए हैं. उनमें दिलीप देवरणकर, सलीम शेख, प्रफुल्ल फरकसे, संजय रहाटे, नरेश गडेकर, आसावरी गडेकर, स्वप्निल येनगंटीवार, प्रमोद भुसारी, नितिन पात्रीकर, कुणाल गडेकर, शेख सलीम फकीरा, गौरव खोंड, दिलीप ठाणेकर का समावेश है. अकोला में एकमात्र स्थान हेतु मधुकर जाधव , गीताबाली उजवणे और सचिन गिरी ने नामांकन दाखिल किया है. वाशिम में दो सीटों हेतु दस नामांकन प्राप्त हुए है. जिसमें उज्वल देशमुख, श्रीकांत भाके, यशवंत पदम गिरवार, अश्विन जगताप, सुदाम तायडे, नितीन पगार, सदानंद दाभाडकर, नंदकिशोर कव्हलकर, राजू जोगदंड, किरण पदमगिरवार शामिल है. विदर्भ मध्यवर्ती शाखा में पदाधिकारी के खिलाफ नया गट तैयार होने से रोमांचक होने का दावा किया जा रहा है. सोलह अप्रैल को मतदान होगा. विजयी उम्मीदवारों के नाम उन्नीस अप्रैल को घोषित होेंगे.
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समस्तीपुरः समस्तीपुर एएसपी में चोरो ने घुस कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया है. जिसके बाद घटना से पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है. एएसपी कार्यालय के कर्मी ने नगर थाने में चोरी की घटना के बारे में आवेदन दिया है.
जानकारी के अनुसार, चोरों ने एलसीडी के अलावा दो पेन ड्राइव व यूपीएस के अलावा अन्य सामान चुराया है. एएसपी आमिर जावेद ने चोरी की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि चोर एलसीडी चुरा कर ले गये हैं. समाहरणालय के दूसरे तल्ले स्थित एसपी कार्यालय से सटे एएसपी आमिर जावेद का कार्यालय है.
चोरों ने उनके कमरे का ताला तोड़कर एक टीवी व कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क के अलावा दो पेन ड्राइव, यूपीएस व तौलिया चुरा लिया. अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में हुई चोरी की इस घटना की जानकारी सुबह कार्यालय खुलने के बाद पुलिस कर्मियों को मिली. सदर डीएसपी मो. तनवीर अहमद ने बताया कि मामले की छानबीन तेजी से की जा रही है. पुलिस इसे सुलझाने के करीब भी पहुंच चुकी है. लेकिन जब तक पूरे मामले का खुलासा नहीं हो जाता तब तक कुछ कहना उचित नहीं है.
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समस्तीपुरः समस्तीपुर एएसपी में चोरो ने घुस कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया है. जिसके बाद घटना से पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है. एएसपी कार्यालय के कर्मी ने नगर थाने में चोरी की घटना के बारे में आवेदन दिया है. जानकारी के अनुसार, चोरों ने एलसीडी के अलावा दो पेन ड्राइव व यूपीएस के अलावा अन्य सामान चुराया है. एएसपी आमिर जावेद ने चोरी की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि चोर एलसीडी चुरा कर ले गये हैं. समाहरणालय के दूसरे तल्ले स्थित एसपी कार्यालय से सटे एएसपी आमिर जावेद का कार्यालय है. चोरों ने उनके कमरे का ताला तोड़कर एक टीवी व कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क के अलावा दो पेन ड्राइव, यूपीएस व तौलिया चुरा लिया. अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में हुई चोरी की इस घटना की जानकारी सुबह कार्यालय खुलने के बाद पुलिस कर्मियों को मिली. सदर डीएसपी मो. तनवीर अहमद ने बताया कि मामले की छानबीन तेजी से की जा रही है. पुलिस इसे सुलझाने के करीब भी पहुंच चुकी है. लेकिन जब तक पूरे मामले का खुलासा नहीं हो जाता तब तक कुछ कहना उचित नहीं है.
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Rishabh Pant vs Urvashi Rautela: IPL 2023 में मंगलवार को दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) के बीच खेला गया IPL मैच उस वक्त चर्चा में आ गया, जब भारत के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) एक्सीडेंट से बुरी तरह पीड़ित होने के बावजूद स्टेडियम में आईपीएल मैच देखने पहुंचे और अपनी टीम को सपोर्ट किया. ऋषभ पंत इस दौरान दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के मालिक और बीसीसीआई के बड़े अधिकारियों के साथ मैच देखते हुए नजर आए.
दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच इस मैच के दौरान ऋषभ पंत की एक फैन ने ऐसी हरकत कर दी, जिसकी वजह से बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला नाराज हो गईं और उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर नाराजगी जाहिर की है. दरअसल, इस मैच के दौरान कैमरे में एक लड़की की हरकत कैद हो गई, जिसके हाथ में एक प्लेकार्ड था. प्लेकार्ड पर लिखा था, 'ईश्वर का शुक्र है कि उर्वशी यहां नहीं है. ' बस फिर क्या था, उर्वशी को ये बात पसंद नहीं आई.
दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच मैच के दौरान ऋषभ पंत की इस फैन की ऐसी हरकत देखकर बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला आग बबूला हो गईं और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, 'क्यों? ' उर्वशी रौतेला की इस पोस्ट पर एक फैन ने जवाब देते हुए लिखा, 'ऋषभ भैया को नजर लग जाती ना. ' वहीं, एक दूसरे फैन ने लिखा, 'टेक इट इजी उर्वशी. '
दरअसल, इससे पहले मीडिया में खबरें आईं थी कि उर्वशी रौतेला और ऋषभ पंत दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं और दोनों अपने रिश्ते को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं. लेकिन उर्वशी रौतेला के एक इंटरव्यू ने बवाल मचा दिया. उर्वशी रौतेला ने ऋषभ पंत का बिना नाम लिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह होटल की लॉबी में रात भर उनका इंतजार करते रहे. इस पर ऋषभ पंत ने नाराज होते हुए कहा था कि उर्वशी रौतेला पब्लिसिटी पाने के लिए कुछ भी कह सकती हैं. उर्वशी रौतेला और ऋषभ पंत के बीच इसके बाद सोशल मीडिया पर काफी दिन तक बहस भी देखने को मिली थी.
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Rishabh Pant vs Urvashi Rautela: IPL दो हज़ार तेईस में मंगलवार को दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच खेला गया IPL मैच उस वक्त चर्चा में आ गया, जब भारत के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत एक्सीडेंट से बुरी तरह पीड़ित होने के बावजूद स्टेडियम में आईपीएल मैच देखने पहुंचे और अपनी टीम को सपोर्ट किया. ऋषभ पंत इस दौरान दिल्ली कैपिटल्स के मालिक और बीसीसीआई के बड़े अधिकारियों के साथ मैच देखते हुए नजर आए. दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच इस मैच के दौरान ऋषभ पंत की एक फैन ने ऐसी हरकत कर दी, जिसकी वजह से बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला नाराज हो गईं और उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर नाराजगी जाहिर की है. दरअसल, इस मैच के दौरान कैमरे में एक लड़की की हरकत कैद हो गई, जिसके हाथ में एक प्लेकार्ड था. प्लेकार्ड पर लिखा था, 'ईश्वर का शुक्र है कि उर्वशी यहां नहीं है. ' बस फिर क्या था, उर्वशी को ये बात पसंद नहीं आई. दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच मैच के दौरान ऋषभ पंत की इस फैन की ऐसी हरकत देखकर बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला आग बबूला हो गईं और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, 'क्यों? ' उर्वशी रौतेला की इस पोस्ट पर एक फैन ने जवाब देते हुए लिखा, 'ऋषभ भैया को नजर लग जाती ना. ' वहीं, एक दूसरे फैन ने लिखा, 'टेक इट इजी उर्वशी. ' दरअसल, इससे पहले मीडिया में खबरें आईं थी कि उर्वशी रौतेला और ऋषभ पंत दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं और दोनों अपने रिश्ते को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं. लेकिन उर्वशी रौतेला के एक इंटरव्यू ने बवाल मचा दिया. उर्वशी रौतेला ने ऋषभ पंत का बिना नाम लिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह होटल की लॉबी में रात भर उनका इंतजार करते रहे. इस पर ऋषभ पंत ने नाराज होते हुए कहा था कि उर्वशी रौतेला पब्लिसिटी पाने के लिए कुछ भी कह सकती हैं. उर्वशी रौतेला और ऋषभ पंत के बीच इसके बाद सोशल मीडिया पर काफी दिन तक बहस भी देखने को मिली थी.
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Don't Miss!
एक तरफ सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान रिलीज हुई और उसके कुछ ही घंटों पहले बादशाह शाहरुख खान ने अपनी अपकमिंग फिल्म रईस का टीजर रिलीज कर दिया। जब सलमान अपने फैंस को ईदी दे रहे हैं तो भला शाहरुख खान कैसे पीछे रहते। उन्होंने भी रईस फिल्म के टीजर के साथ अपने फैंस को ईद की शुभकामनाएं दीं।
शाहरुख खान की निर्माण कंपनी रेड चिलीज की तरफ से स्टेटमेंट जारी किया गया "रमदान का पाक महीना लगभग पूरा हो चुका है और हर कोई ईद के जश्न की तैयारी में है। हमारी तरफ से ईद पर ये है नजराना। "
ठीक इसी समय शाहरुख खान ने ट्विटर पर अपनी फिल्म रईस के दो पोस्टर रिलीज किये और लिखा- केम छो मजामा? एक्सेल और रेड चिलीज की फिल्म रईस के पोस्टर। निर्देशक राहुल ढोलकिया। उम्मीद है कि आपको पसंद आएगी।
रईस के पोस्टर की टैगलाइन है 'बनिये का दिमाग और मियाभाईज की डेयरिंग' तो आइये आप भी देखिये रईस फिल्म का बेहतरीन टीजर।
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बरेलीः उत्तर प्रदेश केे बरेली में मजहब के ठेकेदारों को एक महिला द्वारा दूसरों की मदद करना इतना नागवार गुजरा कि उसे उसके मज़हब से ही बेदखल कर दिया. महिला का गुनाह ये था कि वह समाज की पीड़ित महिलाओं की मदद करती थी.
दरअसल बरेली की रहने वाली निदा खान मुस्लिम समाज में तीन तलाक, हलाला से पीड़ित महिलाओं की मदद करने का काम करती थी. निदा कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थी जिसमें सेवा धर्म का काम होता था. निदा के ये सामाजिक काम कट्टपंथी मौलानाओं को नागवार गुजरे और निदा को दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से फ़तवे का फरमान सुना दिया गया.
क्या है इस फ़तवे में?
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बरेलीः उत्तर प्रदेश केे बरेली में मजहब के ठेकेदारों को एक महिला द्वारा दूसरों की मदद करना इतना नागवार गुजरा कि उसे उसके मज़हब से ही बेदखल कर दिया. महिला का गुनाह ये था कि वह समाज की पीड़ित महिलाओं की मदद करती थी. दरअसल बरेली की रहने वाली निदा खान मुस्लिम समाज में तीन तलाक, हलाला से पीड़ित महिलाओं की मदद करने का काम करती थी. निदा कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थी जिसमें सेवा धर्म का काम होता था. निदा के ये सामाजिक काम कट्टपंथी मौलानाओं को नागवार गुजरे और निदा को दरगाह आला हजरत के दारुल इफ्ता से फ़तवे का फरमान सुना दिया गया. क्या है इस फ़तवे में? This website uses cookies.
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वाशिंगटन, (भाषा)। अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने आज कहा कि आतंकवादी संग"न अलकायदा अभी भी उस सबसे बड़े खतरे का प्रतिनिधित्व करता है जिसका सामना देश पूरे विश्व में करता है। पनेटा ने सीएनएन से कहा, हमनें देश पर 11 सितम्बर जैसा हमला करने के लिए जरूरी कमान, नियंत्रण एवं योजना बनाने की उनकी क्षमता काफी कमजोर कर दी है। इसके बावजूद वह हमारे देश के लिए खतरा बना हुआ है। मेरा मानना है कि वह सबसे बड़े खतरे का प्रतिनिधित्व करता है जिसका हमारा देश विश्व में सामना करता है। अफगानिस्तान में अपनी अघोषित यात्रा समाप्त करने वाले पनेटा ने कहा कि अमेरिका अलकायदा और उसके नेटवर्क को निशाना बनाना जारी रखेगा। हमें अलकायदा का पीछा करना जारी रखना होगा चाहे वह कहीं भी क्यों नहीं हो। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें छुपने के लिए कोई स्थान नहीं मिले। ऐसा इसलिए कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अलकायदा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका पर हमला करना है हम ऐसा दोबारा नहीं होने देंगे। यदि हम उन्हें ऐसा नहीं करने देना चाहते हैं तो हमें उनका यमन, सोमालिया और हां जरूरी होने पर माली में भी पीछा करना होगा।
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वाशिंगटन, । अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने आज कहा कि आतंकवादी संग"न अलकायदा अभी भी उस सबसे बड़े खतरे का प्रतिनिधित्व करता है जिसका सामना देश पूरे विश्व में करता है। पनेटा ने सीएनएन से कहा, हमनें देश पर ग्यारह सितम्बर जैसा हमला करने के लिए जरूरी कमान, नियंत्रण एवं योजना बनाने की उनकी क्षमता काफी कमजोर कर दी है। इसके बावजूद वह हमारे देश के लिए खतरा बना हुआ है। मेरा मानना है कि वह सबसे बड़े खतरे का प्रतिनिधित्व करता है जिसका हमारा देश विश्व में सामना करता है। अफगानिस्तान में अपनी अघोषित यात्रा समाप्त करने वाले पनेटा ने कहा कि अमेरिका अलकायदा और उसके नेटवर्क को निशाना बनाना जारी रखेगा। हमें अलकायदा का पीछा करना जारी रखना होगा चाहे वह कहीं भी क्यों नहीं हो। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें छुपने के लिए कोई स्थान नहीं मिले। ऐसा इसलिए कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अलकायदा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका पर हमला करना है हम ऐसा दोबारा नहीं होने देंगे। यदि हम उन्हें ऐसा नहीं करने देना चाहते हैं तो हमें उनका यमन, सोमालिया और हां जरूरी होने पर माली में भी पीछा करना होगा।
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बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रैस रति अग्निहोत्री का 10 दिसंबर को जन्मदिन था। रति अग्निहोत्री इस 10 दिंसबर को 57 साल की हो चुकी हैं। रति अग्निहोत्री ने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'कुली' में काम कर चुकीं हैं।
रति अग्निहोत्री का जन्म 10 दिसंबर, 1960 में बरेली में हुआ था लेकिन उनका बचपन चेन्नई में बीता था। रति सिर्फ 10 साल की थी तभी उन्होंने मॉडलिंग शुरू कर दी थी।
ऐसा कहा जाता है कि रति को एक्ट्रैस बनाने का पूरा श्रेय तमिल के डायरेक्टर भारती राजा को जाता है। उन्होंने रति को 16 साल की ही उम्र में अपनी फिल्म 'पुदिया वरपुकल' में ब्रेक दे दिया था।
रति ने अपने एक इंटरव्यू में यह कहा था कि वो बेटे तनुज की खातिर 30 साल तक पति के जुल्मों को सहती रहीं थीं। रति ने अपने पति पर यह आरोप भी लगाया था कि उन्होंने उनपर चाकू से मारने का आरोप भी लगाया था।
बता दें कि रति अग्निहोत्री ने अपने पति आर्किटेक्ट अनिल वीरवानी के खिलाफ 2015 में चाकू से मारने और धमकाने का आरोप भी लगाया था। रति अग्निहोत्री ने इससे पहले भी कई बार अपने पति के खिलाफ प्रताड़ति करने, मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज करा चुकी हैं।
रति ने साल 2015 में एक इंटरव्यू दिया था और उसमें यह कहा था कि वह बहुत लंबे समय तक पति के जुल्मों को सहती रहीं थी। लेकिन अब तो सारी ही हदें पार हो चुकी हैं। रति ने कहा था कि वह अपने बेटे तनुज की खातिर चुप रहीं क्योंकि वो उसे झगड़े से दूर रखना चाहती थीं।
रति ने बिजनेसमैन अनिल विरवानी से 9 फरवरी, 1985 में शादी की थी। दरअसल रति और उनके पति शादी के 30 साल बाद अलग हुए थे दोनों ने 2015 में तलाक ले लिया था। रति और अनिल का एक बेटा है तनुज विरवानी उसका जन्म 1986 में हुआ था।
रति ने साउथ की कई सारी फिल्में करने के बाद ही बॉलीवुड की फिल्में करनी शुरू की थी। रति ने फिल्म 'एक दूजे के लिए' से बॉलीवुड में डेब्यू की थी। यह फिल्म काफी सुपरहिट साबित हुई थी। रति ने बॉलीवुड की फिल्में जैसे 'फर्ज और कानून', 'कुली', 'तवायफ', 'हुकूमत' इन सभी फिल्मों में काम किया था।
रति 16 साल तक फिल्मों से दूर रहीं थी उसके बाद उन्होंने 2001 में फिल्मों में वापसी की थी। रति ने फिल्म 'कुछ खट्टी कुछ मीठी में काजोल की ग्लैमरस मां का रोल किया था। इसके बाद उन्होंने 'यादें' और 'देव' में भी काम किया था।
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बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रैस रति अग्निहोत्री का दस दिसंबर को जन्मदिन था। रति अग्निहोत्री इस दस दिंसबर को सत्तावन साल की हो चुकी हैं। रति अग्निहोत्री ने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'कुली' में काम कर चुकीं हैं। रति अग्निहोत्री का जन्म दस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ साठ में बरेली में हुआ था लेकिन उनका बचपन चेन्नई में बीता था। रति सिर्फ दस साल की थी तभी उन्होंने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। ऐसा कहा जाता है कि रति को एक्ट्रैस बनाने का पूरा श्रेय तमिल के डायरेक्टर भारती राजा को जाता है। उन्होंने रति को सोलह साल की ही उम्र में अपनी फिल्म 'पुदिया वरपुकल' में ब्रेक दे दिया था। रति ने अपने एक इंटरव्यू में यह कहा था कि वो बेटे तनुज की खातिर तीस साल तक पति के जुल्मों को सहती रहीं थीं। रति ने अपने पति पर यह आरोप भी लगाया था कि उन्होंने उनपर चाकू से मारने का आरोप भी लगाया था। बता दें कि रति अग्निहोत्री ने अपने पति आर्किटेक्ट अनिल वीरवानी के खिलाफ दो हज़ार पंद्रह में चाकू से मारने और धमकाने का आरोप भी लगाया था। रति अग्निहोत्री ने इससे पहले भी कई बार अपने पति के खिलाफ प्रताड़ति करने, मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज करा चुकी हैं। रति ने साल दो हज़ार पंद्रह में एक इंटरव्यू दिया था और उसमें यह कहा था कि वह बहुत लंबे समय तक पति के जुल्मों को सहती रहीं थी। लेकिन अब तो सारी ही हदें पार हो चुकी हैं। रति ने कहा था कि वह अपने बेटे तनुज की खातिर चुप रहीं क्योंकि वो उसे झगड़े से दूर रखना चाहती थीं। रति ने बिजनेसमैन अनिल विरवानी से नौ फरवरी, एक हज़ार नौ सौ पचासी में शादी की थी। दरअसल रति और उनके पति शादी के तीस साल बाद अलग हुए थे दोनों ने दो हज़ार पंद्रह में तलाक ले लिया था। रति और अनिल का एक बेटा है तनुज विरवानी उसका जन्म एक हज़ार नौ सौ छियासी में हुआ था। रति ने साउथ की कई सारी फिल्में करने के बाद ही बॉलीवुड की फिल्में करनी शुरू की थी। रति ने फिल्म 'एक दूजे के लिए' से बॉलीवुड में डेब्यू की थी। यह फिल्म काफी सुपरहिट साबित हुई थी। रति ने बॉलीवुड की फिल्में जैसे 'फर्ज और कानून', 'कुली', 'तवायफ', 'हुकूमत' इन सभी फिल्मों में काम किया था। रति सोलह साल तक फिल्मों से दूर रहीं थी उसके बाद उन्होंने दो हज़ार एक में फिल्मों में वापसी की थी। रति ने फिल्म 'कुछ खट्टी कुछ मीठी में काजोल की ग्लैमरस मां का रोल किया था। इसके बाद उन्होंने 'यादें' और 'देव' में भी काम किया था।
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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव चरम पर है. गलवान घाटी और पेंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सेना के मंसूबे फेल हो चुके हैं इसलिए अब चीन एक बार फिर नई साजिश रचने में जुट गया है. चीन LAC के बाद अब भारत के खिलाफ LOC पर भी मोर्चा खोलने का षड्यंत्र रच रहा है. उसकी इस साजिश में बराबर का साझेदार है - भारत का सदाबहार दुश्मन पाकिस्तान.
पेंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना द्वारा करारा जवाब देने और ब्लैक टॉप पर कब्जा कर लेने से चीन पूरी तरह बौखलाया हुआ है. इसलिए अब उसके दिमाग में 1962 वाला युद्ध घूम रहा है. तब चीन ने LOC पर पाकिस्तानी सेना को खड़ा करके, भारत के खिलाफ एक साथ युद्ध के दो मोर्चे खोल दिये थे.
अब एक बार फिर चीन उसी रास्ते पर चल पड़ा है इसलिए LAC से लेकर LOC तक, चीन और पाकिस्तान की डबल अटैक वाली साजिश का पर्दाफाश हो गया है. पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान के आतंकवादियों को मोहरा बनाकर चीन, भारत के खिलाफ एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध छेड़ने की प्लानिंग कर रहा है.
पाकिस्तान को इसमें अपना फायदा नजर आ रहा है. भारत के खिलाफ LOC पर सेना की तैनाती बढ़ाने के बदले में चीन ने पाकिस्तान के साथ एक डील भी की है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से पता चला है कि चीन, पाकिस्तान को हथियार और नई तकनीक देने में जुटा है. जानकारी के मुताबिक चीन अपने VT-4 टैंक की नई तकनीक पाकिस्तान को दे रहा है . VT-4 मेन बैटल टैंक है, जिसका इस्तेमाल चीन की सेना करती है.
इसके अलावा चीन, पाकिस्तान के लिए 120 अल खालिद-1 टैंक बनाने में भी मदद कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक चीन, पाकिस्तान के लिए सिर्फ टैंक अपग्रेडेशन में ही मदद नहीं कर रहा बल्कि आर्टिलरी को बेहतर बनाने के लिए भी मदद कर रहा है.
पाकिस्तान चीन की SH-15 ट्रैक माउंटेड गन को खरीदने की फिराक में है जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना, पीओके में कई जगह भारत के खिलाफ कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक चीन, पाकिस्तान को A-100 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर की एक खेप दे चुका है. इतना ही नहीं पाकिस्तान, चीन की मदद से VOIP यानी Voice Over Internet Protocol के जरिये खुफिया मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करना चाहता है ताकि भारत पर नजर रखी जा सके.
अब चीन और पाकिस्तान मिलकर, भारत के साथ युद्ध के सपने देख रहे हैं लेकिन भारतीय सेना भी अब दो मोर्चों पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत पहले ही बता चुके हैं की भारतीय सेना दो मोर्चों पर लड़ने के लिए तैयार है.
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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव चरम पर है. गलवान घाटी और पेंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सेना के मंसूबे फेल हो चुके हैं इसलिए अब चीन एक बार फिर नई साजिश रचने में जुट गया है. चीन LAC के बाद अब भारत के खिलाफ LOC पर भी मोर्चा खोलने का षड्यंत्र रच रहा है. उसकी इस साजिश में बराबर का साझेदार है - भारत का सदाबहार दुश्मन पाकिस्तान. पेंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना द्वारा करारा जवाब देने और ब्लैक टॉप पर कब्जा कर लेने से चीन पूरी तरह बौखलाया हुआ है. इसलिए अब उसके दिमाग में एक हज़ार नौ सौ बासठ वाला युद्ध घूम रहा है. तब चीन ने LOC पर पाकिस्तानी सेना को खड़ा करके, भारत के खिलाफ एक साथ युद्ध के दो मोर्चे खोल दिये थे. अब एक बार फिर चीन उसी रास्ते पर चल पड़ा है इसलिए LAC से लेकर LOC तक, चीन और पाकिस्तान की डबल अटैक वाली साजिश का पर्दाफाश हो गया है. पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान के आतंकवादियों को मोहरा बनाकर चीन, भारत के खिलाफ एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध छेड़ने की प्लानिंग कर रहा है. पाकिस्तान को इसमें अपना फायदा नजर आ रहा है. भारत के खिलाफ LOC पर सेना की तैनाती बढ़ाने के बदले में चीन ने पाकिस्तान के साथ एक डील भी की है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से पता चला है कि चीन, पाकिस्तान को हथियार और नई तकनीक देने में जुटा है. जानकारी के मुताबिक चीन अपने VT-चार टैंक की नई तकनीक पाकिस्तान को दे रहा है . VT-चार मेन बैटल टैंक है, जिसका इस्तेमाल चीन की सेना करती है. इसके अलावा चीन, पाकिस्तान के लिए एक सौ बीस अल खालिद-एक टैंक बनाने में भी मदद कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक चीन, पाकिस्तान के लिए सिर्फ टैंक अपग्रेडेशन में ही मदद नहीं कर रहा बल्कि आर्टिलरी को बेहतर बनाने के लिए भी मदद कर रहा है. पाकिस्तान चीन की SH-पंद्रह ट्रैक माउंटेड गन को खरीदने की फिराक में है जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना, पीओके में कई जगह भारत के खिलाफ कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक चीन, पाकिस्तान को A-एक सौ मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर की एक खेप दे चुका है. इतना ही नहीं पाकिस्तान, चीन की मदद से VOIP यानी Voice Over Internet Protocol के जरिये खुफिया मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करना चाहता है ताकि भारत पर नजर रखी जा सके. अब चीन और पाकिस्तान मिलकर, भारत के साथ युद्ध के सपने देख रहे हैं लेकिन भारतीय सेना भी अब दो मोर्चों पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत पहले ही बता चुके हैं की भारतीय सेना दो मोर्चों पर लड़ने के लिए तैयार है.
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बॉलीवुड और साउथ के टॉप एक्ट्रेस के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप इन पंजाबी हसीनाओं के बारे में जानते हैं। इस लेख में हम आपको पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस के बारे में बताएंगे।
बॉलीवुड इंडस्ट्री में जिस प्रकार आलिया, दीपिका और प्रियंका चोपड़ा जैसी टॉप की हीरोइनें अपना जलवा दिखाती हैं, वैसे ही पंजाबी फिल्मों में राज करने वाली इन टॉप हीरोइनों का दबदबा है। पंजाबी गाने तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन क्या आपने पंजाबी फिल्में देखी हैं। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की कुछ ऐसी हसिनाएं हैं जो अपने फैंस के दिलों में राज करती हैं। ये एक्ट्रेस पंजाबी फिल्मों में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी खूबसूरती और एक्टिंग के लिए मशहूर हैं आइए जानते हैं इसके बारे में।
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में फैंस के दिलों में राज करने वाली इस हसीना का नाम है सोनम बाजवा। इनकी पॉपुलैरिटी पंजाबी फिल्मों के अलावा साउथ इंडस्ट्री में भी है। सोनम ने साल 2012 में मिस इंडिया कॉम्पिटिशन में भाग लिया था।
हसीन और खूबसूरत अदाकारा में से एक सिमी चहल पंजाबी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से फैंस के दिलों पर राज करती हैं। उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट होती हैं।
पंजाबी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस में से एक सरगुन मेहता पंजाबी फिल्मों के अलावा रियलिटी शो में भी नजर आ चुकी हैं। उन्होंने किस्मत और किस्मत 2 जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया है। पंजाबी फिल्मों के अलावा पंजाबी एल्बम में भी सरगुन काम चुकी हैं।
सुरवीन पंजाबी फिल्मों के अलावा हिंदी, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हेट स्टोरी 2 में भी सुरवीन चावला अपनी एक्टिंग की जादू बिखेर चुकी हैं। (साउथ इंडियन फिल्म)
हिमांशी खुराना जिसे पंजाबी इंडस्ट्री की खूबसूरत एक्ट्रेस में इनका नाम शामिल है। इन्होंने साल 2019 में हुए बिग बॉस 13 में भाग लिया था। बिग बॉस के बाद उनकी फैन फॉलोविंग भी काफी बढ़ी थी। (हिमांशी खुराना लुक्स)
मनदीप कौर टाखर जिन्हें मैंडी टाखर के नाम से पंजाबी सिनेमा में जाना जाता है। ये पंजाबी फिल्म की लोकप्रिय एक्ट्रेस में से एक हैं। इनकी खूबसूरती और एक्टिंग के चलते फिल्मों में उनकी खूब डिमांड है। फिल्मों के अलावा मनदीप कई टीवी कमर्शियल में काम कर चुकी हैं। मैंडी के फैंस उन्हें डिप्पी कहते हैं।
शहनाज गिल पंजाबी फिल्मों के अलावा बॉलीवुड में भी काम कर चुकीं है। इन्हें भी बिग बॉस 13 में देखा गया था। शहनाज फेमस एक्ट्रेस होने के अलावा काफी अच्छी सिंगर भी हैं। शहनाज गिल अभी-अभी सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' में नजर आई हैं।
उम्मीद है पंजाबी फिल्मों का मशहूर अदाकाराओं से जुड़ी ये जानकारी आपको अच्छी लगी हो। इस लेख को लाइक और शेयर जरूर करें और कमेंट कर हमें बताएं कि आपकी फेवरेट एक्ट्रेस कौन हैं।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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बॉलीवुड और साउथ के टॉप एक्ट्रेस के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप इन पंजाबी हसीनाओं के बारे में जानते हैं। इस लेख में हम आपको पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस के बारे में बताएंगे। बॉलीवुड इंडस्ट्री में जिस प्रकार आलिया, दीपिका और प्रियंका चोपड़ा जैसी टॉप की हीरोइनें अपना जलवा दिखाती हैं, वैसे ही पंजाबी फिल्मों में राज करने वाली इन टॉप हीरोइनों का दबदबा है। पंजाबी गाने तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन क्या आपने पंजाबी फिल्में देखी हैं। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की कुछ ऐसी हसिनाएं हैं जो अपने फैंस के दिलों में राज करती हैं। ये एक्ट्रेस पंजाबी फिल्मों में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी खूबसूरती और एक्टिंग के लिए मशहूर हैं आइए जानते हैं इसके बारे में। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में फैंस के दिलों में राज करने वाली इस हसीना का नाम है सोनम बाजवा। इनकी पॉपुलैरिटी पंजाबी फिल्मों के अलावा साउथ इंडस्ट्री में भी है। सोनम ने साल दो हज़ार बारह में मिस इंडिया कॉम्पिटिशन में भाग लिया था। हसीन और खूबसूरत अदाकारा में से एक सिमी चहल पंजाबी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से फैंस के दिलों पर राज करती हैं। उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट होती हैं। पंजाबी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस में से एक सरगुन मेहता पंजाबी फिल्मों के अलावा रियलिटी शो में भी नजर आ चुकी हैं। उन्होंने किस्मत और किस्मत दो जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया है। पंजाबी फिल्मों के अलावा पंजाबी एल्बम में भी सरगुन काम चुकी हैं। सुरवीन पंजाबी फिल्मों के अलावा हिंदी, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में काम कर चुकी हैं। हेट स्टोरी दो में भी सुरवीन चावला अपनी एक्टिंग की जादू बिखेर चुकी हैं। हिमांशी खुराना जिसे पंजाबी इंडस्ट्री की खूबसूरत एक्ट्रेस में इनका नाम शामिल है। इन्होंने साल दो हज़ार उन्नीस में हुए बिग बॉस तेरह में भाग लिया था। बिग बॉस के बाद उनकी फैन फॉलोविंग भी काफी बढ़ी थी। मनदीप कौर टाखर जिन्हें मैंडी टाखर के नाम से पंजाबी सिनेमा में जाना जाता है। ये पंजाबी फिल्म की लोकप्रिय एक्ट्रेस में से एक हैं। इनकी खूबसूरती और एक्टिंग के चलते फिल्मों में उनकी खूब डिमांड है। फिल्मों के अलावा मनदीप कई टीवी कमर्शियल में काम कर चुकी हैं। मैंडी के फैंस उन्हें डिप्पी कहते हैं। शहनाज गिल पंजाबी फिल्मों के अलावा बॉलीवुड में भी काम कर चुकीं है। इन्हें भी बिग बॉस तेरह में देखा गया था। शहनाज फेमस एक्ट्रेस होने के अलावा काफी अच्छी सिंगर भी हैं। शहनाज गिल अभी-अभी सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' में नजर आई हैं। उम्मीद है पंजाबी फिल्मों का मशहूर अदाकाराओं से जुड़ी ये जानकारी आपको अच्छी लगी हो। इस लेख को लाइक और शेयर जरूर करें और कमेंट कर हमें बताएं कि आपकी फेवरेट एक्ट्रेस कौन हैं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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नई दिल्ली। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी इनफोकस ने गुरुवार को भारतीय बाजार में 'विजन 3 प्रो' लांच किया, जो फेस अनलॉक फीचर से लैस है और इसकी कीमत 10,999 रुपये रखी गई है।
इस डिवाइस में एक विशेष कैमरा फीचर 'ड्यूअल्फी' है, जो यूजर्स को अगला और पिछला कैमरा एक साथ प्रयोग करने में सक्षम बनाती है। इस स्मार्टफोन में 13 मेगापिक्सल और 8 मेगापिक्सल का वाइड एंगल ड्यूअल पिछला कैमरा है, जो फेज डिटेक्शन ऑटो फोकस (पीडीएएफ) से लैस है।
यह डिवाइस मीडियाटेक एमटी6750 प्रोसेसर से संचालित होता है, जिसके साथ 4 जीबी रैम और 64 जीबी इंटरनल मेमोरी दिया गया है, जिसे मेमोरी कार्ड के जरिए 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है।
'विजन 3 प्रो' का स्क्रीन 5. 7 इंच का है, जिसका एक्सपैक्ट रेसियो 18. 9 है और यह एचडी डिस्प्ले है। यह स्मार्टफोन एंड्रायड 7. 0 ओएस पर आधारित है और इसमें 4,000 एमएएच की बैटरी लगी है।
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नई दिल्ली। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी इनफोकस ने गुरुवार को भारतीय बाजार में 'विजन तीन प्रो' लांच किया, जो फेस अनलॉक फीचर से लैस है और इसकी कीमत दस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये रखी गई है। इस डिवाइस में एक विशेष कैमरा फीचर 'ड्यूअल्फी' है, जो यूजर्स को अगला और पिछला कैमरा एक साथ प्रयोग करने में सक्षम बनाती है। इस स्मार्टफोन में तेरह मेगापिक्सल और आठ मेगापिक्सल का वाइड एंगल ड्यूअल पिछला कैमरा है, जो फेज डिटेक्शन ऑटो फोकस से लैस है। यह डिवाइस मीडियाटेक एमटीछः हज़ार सात सौ पचास प्रोसेसर से संचालित होता है, जिसके साथ चार जीबी रैम और चौंसठ जीबी इंटरनल मेमोरी दिया गया है, जिसे मेमोरी कार्ड के जरिए एक सौ अट्ठाईस जीबी तक बढ़ाया जा सकता है। 'विजन तीन प्रो' का स्क्रीन पाँच. सात इंच का है, जिसका एक्सपैक्ट रेसियो अट्ठारह. नौ है और यह एचडी डिस्प्ले है। यह स्मार्टफोन एंड्रायड सात. शून्य ओएस पर आधारित है और इसमें चार,शून्य एमएएच की बैटरी लगी है।
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मानव अधिकारों की सामान्य अवधारणा का अर्थ हैसबसे पहले, प्राकृतिक के एक निश्चित परिसर के प्रत्येक व्यक्ति के अस्तित्व, अर्थात, प्रकृति से डेटा, अधिकार और गुण हैं। लेकिन एक व्यक्ति के कर्तव्यों का अधिकार पहले से ही अधिकारों और स्वतंत्रता की स्थापना की संस्था का परिणाम है। यह तथ्य कि एक व्यक्ति मौजूद है, पैदा हुआ और इस दुनिया में रहता है, अधिकारों के उभरने के लिए पर्याप्त है। और उनके विकास के उच्चतम स्तर पर देशों ने गारंटी दी है कि अधिकार और स्वतंत्रता का सम्मान और संरक्षित किया जाएगा।
बुनियादी मानव अधिकार हैंलंबे समय से पहले, और उन्हें "प्राकृतिक अधिकार" कहा जाता था लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि एक ही समय में, प्राकृतिक वातावरण में, एक व्यक्ति भाग्य की दया के लिए छोड़ दिया जाता है और आत्मरक्षा के बिल्कुल कुछ भी नहीं है। मानवाधिकार, स्वतंत्रता और कर्तव्यों का उद्भव, या कहने में बेहतर होता है, केवल तब ही पैदा हो सकता है जब कोई संगठन या समुदाय हो। समाज के संरक्षण के बिना, एक जंगली माहौल में, एक व्यक्ति अपने स्वयं के जीवन से शुरुआत में स्वतंत्र रूप से अपने प्राकृतिक अधिकार के हर मिनट की रक्षा के लिए बाध्य है। यह इस मुख्य लक्ष्य के लिए था कि एक समाज ने ऐतिहासिक रूप से निर्माण शुरू किया शायद यह हमेशा नहीं, हर जगह नहीं है और पूरी तरह से इस मुख्य कार्य को पूरा नहीं करता है, लेकिन मानवता की तारीख अभी तक किसी अन्य प्रभावी संस्था के साथ नहीं आई है। इसलिए, राज्य से कुछ प्राप्त करना, अर्थात् इसकी सुरक्षा, एक व्यक्ति, बदले में, बदले में कुछ देना होगा। यह प्रभाव है और इस तरह की अवधारणा के आधार पर उस देश के सामने "मनुष्य और नागरिक के मूल कर्तव्यों" का गठन किया है जो उसकी सुरक्षा की गारंटी देता है।
अगर हम सामान्य और बिना जटिल परिभाषाओं में दिखते हैं,हमारे बुनियादी अधिकारों - कि वास्तव में क्या हम दूर नहीं ले जा सकते हैं या जहाँ से आप मना नहीं कर सकती। हम में से गैर सामग्री हिस्सा इस तरह की केवल खुद को हम मनुष्य जन्म लेते हैं क्योंकि। कैसे और कौन इस वास्तविकता का उपयोग करता है - एक और सवाल है। राज्य और उसकी संस्थाओं के कार्य - प्राकृतिक और प्रत्येक गृहीत में निहित रक्षा के लिए। संवैधानिक अधिकार, स्वतंत्रता और आदमी के कर्तव्यों सिर्फ नियमों का एक यादृच्छिक सेट, और अनाकार मिश्रण नहीं हैं, और एक सुसंगत प्रणाली है, जो जीवन और मानव गतिविधियों के सभी सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक पहलुओं की अपनी नियामक प्रभाव को शामिल किया गया के रूप में। यह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, साथ ही व्यक्तिगत शारीरिक और आध्यात्मिक गुणों के दायरे में शामिल हैं।
एक लोकतांत्रिक शांति के लिए जीवन का अधिकार हैपहला और सबसे महत्वपूर्ण मानवाधिकार किसी भी परिस्थिति में दुनिया में कोई भी दूसरे व्यक्ति का जीवन नहीं ले सकता है एकमात्र अपवाद तब तक माना जा सकता है जब हमले में आत्मरक्षा नहीं होती, क्योंकि इस मामले में यह जीवन के अपने व्यक्तिगत मुख्य अधिकार की सुरक्षा है। और फिर आपको इच्छा शक्ति और स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है, अगर खतरे वास्तव में असली हैं, और जीवन पर एक प्रयास किया गया था, और किसी और पर नहीं। अन्य सभी मामलों में, जिम्मेदारी लगाई जाती है और सजा का उपाय निर्धारित होता है। जीवन के अधिकार के बाद सभी के लिए कई अन्य व्यक्तिगत और असहनीय अधिकार हैं। मानव अधिकार और कर्तव्यों किसी भी राज्य के मूल कानून में निहित हैं वे केवल व्यक्तिगत, या प्राकृतिक, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक, साथ ही सामाजिक-आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों और स्वतंत्रताएं ही नहीं हैं।
इसलिए, एक व्यक्ति को राज्य की सुरक्षा मिलती है और कर सकते हैंअपने जीवन का सामना किए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने और कई अन्य अवसरों को प्राप्त करने के लिए लेकिन एक में आजादी होने पर, ऐसा हुआ, हम जरूरी स्वयं पर दूसरे का उल्लंघन करते हैं। दूसरे शब्दों में, राज्य से प्राप्त हर अधिकार और इसकी सुरक्षा से किसी व्यक्ति पर एक निश्चित शुल्क लगाने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, एक व्यक्ति के अधिकार और कर्तव्यों को लगातार intertwined हैं एक अर्थ में, अपने स्वयं के बचाव के साथ राज्य को चार्ज करके, एक व्यक्ति इस राज्य के साथ गठबंधन के लिए सहमत है और उसके नागरिक बन जाता है। और अब नागरिक अपने देश के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें राज्य के मामलों में सहायता और प्रत्यक्ष भागीदारी शामिल है। उदाहरण के लिए, अनिवार्य करों का भुगतान, सशस्त्र बलों में सेवा आदि।
इसके साथ सीधा लिंक की प्रकृति को देखते हुएराज्य, अपने नागरिकों के संरक्षित अधिकारों में भी विशिष्टताएं हैं जैसा कि आप जानते हैं, हम में से प्रत्येक की खुशी हमारी चारों ओर से भरी हुई हर चीज की भलाई और सफलता पर निर्भर करती है। इसमें पूरे राज्य पर लागू होता है देश की स्वतंत्रता और समृद्धि उसके नागरिकों की भलाई और प्रत्येक व्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता पर जोर देती है। केवल उस देश में जहां अधिकांश इसके नागरिक बहुतायत में रहते हैं, और गरीबी के कगार पर नहीं समृद्ध होगा। अन्यथा, ऐसे देश लंबे समय तक अस्तित्व में नहीं रख सकते हैं और इतिहास बहुत स्पष्ट रूप से इस प्रवृत्ति को दर्शाता है राज्य के साथ मनुष्य का संबंध जन्म के साथ उठता है। नागरिकता बदलने की संभावना मौजूद है, लेकिन यह सार्वजनिक नहीं है और पूरी प्रक्रिया और कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुपालन की आवश्यकता है। नागरिकता संस्थान एक जटिल जटिल तंत्र है, और इसके लिए अनुसंधान के लिए एक अलग विषय की आवश्यकता है।
अक्सर अक्सर वे अधिकारों के बारे में बात करते हैं, लेकिनकिसी कारण के लिए, विवरण अक्सर विवरण में नहीं बताया जाता है। लेकिन आप स्वीकार करते हैं चाहिए, यह हर नागरिक के अपने कर्तव्य का प्रदर्शन अन्य व्यक्तियों के अधिकारों की गैर उल्लंघन सुनिश्चित करने के लिए एक ही रास्ता है। हाल ही में, हर जगह से, केवल नारे सुनाए गए हैं कि "हर कोई सही है"। लेकिन कहीं न कहीं इन अधिकारों, समाप्त होना चाहिए अन्यथा एक तराजू गिर जाएगी, और समाज की शेष राशि का सूक्ष्म सद्भाव विभाजित कर दिया जाएगा। और मानवाधिकारों का अंत जहां उनके साथी नागरिकों के अधिकार शुरू होते हैं और यह पता चला है कि बड़ा समुदाय, कुछ के लिए कम स्वतंत्रता व्यक्तिगत स्थान व्यक्तिगत पर बंद होता है लेकिन जिम्मेदारियों का सम्मान करना दूसरों के अधिकारों, के साथ ही उनके नागरिक कर्तव्यों की पूर्ति एक बड़े राज्य के विकास में तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि जिस तरह से यह अब पता चला है कि रूस मानव जिम्मेदारियों लोग अपने स्वयं के जीवन के बारे में शिकायत करते हैं, लेकिन लग रहा है देश प्रत्येक अपने हितों और बुनियादी जरूरतों की रक्षा के बारे में परवाह है कि, किसी भी तरह धीरे-धीरे कम हो। कभी कभी देशभक्ति की लहर इस भावना को समाप्त, लेकिन यह जीवन के लिए फिर से अधिक से अधिक सवाल खड़े होते हैं।
एक व्यक्ति के संवैधानिक कर्तव्यों का एक उपाय हैन केवल आवश्यक है, लेकिन अनिवार्य व्यवहार और नागरिक समाज में, जहां नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का संचालन किया जाता है, इस समिति के प्रत्येक सदस्य को इस समाज के अन्य अभिनेताओं के सामान्य कामकाज की खातिर उनकी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। और मानव अधिकारों के संबंध में, किसी व्यक्ति के कर्तव्यों के अधिकार और स्वतंत्रता के तर्कसंगत और बाध्यकारी अनुरूपता जो अलग-अलग हैं इसलिए, दूसरे शब्दों में, अगर किसी को व्यक्तिगत आत्म-प्राप्ति का अधिकार मिल गया है, तो वही दूसरों के लिए सच है और इन सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है यह सिद्धांत नैतिक कानून के समान है - अन्य लोगों के साथ हमेशा से कार्य करें जिस तरह आप अपने साथ व्यवहार करना चाहते हैं। इस कानून का अनुपालन करने में विफलता कई कठिनाइयों और यहां तक कि दुर्घटनाओं के उद्भव की ओर जाता है, जो कि हम दैनिक, न केवल समाचार में, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी देख सकते हैं।
अधिकार और जिम्मेदारियों का दायराप्रत्येक कई कारकों पर निर्भर करता है उदाहरण के लिए, नागरिकता की उपलब्धता पर, किसी व्यक्ति की आयु और लिंग, उसके स्वास्थ्य की विशेषताओं और कामकाजी परिस्थितियां रूस के नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को यहां अपवाद नहीं होना चाहिए। एक व्यक्ति के लिए और अधिक की आवश्यकता होती है, वह जितना अधिक होता है और समाज में उसकी स्थिति अधिक होती है। इस प्रकार, नागरिक समाज के अधिकारी हमेशा सामान्य नागरिकों की तुलना में अधिक जिम्मेदार होते हैं। लेकिन एक नागरिक नौकर के अधिकार और अवसरों में एक साधारण व्यक्ति से काफी कम है। यह स्वतंत्र आंदोलन, भौतिक मूल्यों के अधिकार का अधिकार है और इतने पर। अर्थात्, यह सिद्धांत भी इस तरह से व्यक्त किया जा सकता है कि एक सरल व्यक्ति वह सब कुछ कर सकता है जो इस राज्य में सीधे कानून द्वारा निषिद्ध नहीं है। लेकिन आधिकारिक को ऐसा करने का अधिकार नहीं है जो कानून में सीधे उसके लिए निर्धारित नहीं है। इस सिद्धांत का अनुपालन करने में विफलता हमेशा भ्रष्टाचार में वृद्धि, शक्ति का हड़पने, कानूनों का उल्लंघन और सामान्य नागरिकों के अधिकारों पर जोर देता है।
यहां दिए गए विषय में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदुएक व्यक्ति के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए तंत्र है यह प्रासंगिक राज्य निकाय के साथ अधिकारों और स्वतंत्रता के वाहक के संपर्क के लिए एक कानूनी तंत्र है। चूंकि विकसित राज्य का मुख्य लक्ष्य आज अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा तंत्र राज्य सरकार की एक पूरी प्रणाली है जिसका कार्य केवल अनुपालन ही नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी ऐसी सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार है, साथ ही हर किसी के अधिकार के अनुसार सुरक्षा। रूसी संघ के संविधान के लेख में मौलिक अधिकारों और आम स्वतंत्रता की गारंटी देता है की एक पूरी प्रणाली है, दोनों सार्वभौमिक और नागरिक यह सब मानदंडों, सिद्धांतों, शर्तों और आवश्यकताओं की एक प्रणाली है, जो उनके समग्रता में भाग लेने वाले व्यक्तियों के अधिकारों, स्वतंत्रताओं और वैध हितों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
लेकिन अभी तक ये सिर्फ शब्द थे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन शब्दों को एक सभ्य दुनिया में अनुवाद करने की आवश्यकता महसूस हुई। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, समझौतों और करारों को अपनाने, स्थापित किए गए नियमों की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के उद्भव, नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता के संरक्षण के व्यावहारिक कार्यान्वयन के लिए नींव रखे।
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मानव अधिकारों की सामान्य अवधारणा का अर्थ हैसबसे पहले, प्राकृतिक के एक निश्चित परिसर के प्रत्येक व्यक्ति के अस्तित्व, अर्थात, प्रकृति से डेटा, अधिकार और गुण हैं। लेकिन एक व्यक्ति के कर्तव्यों का अधिकार पहले से ही अधिकारों और स्वतंत्रता की स्थापना की संस्था का परिणाम है। यह तथ्य कि एक व्यक्ति मौजूद है, पैदा हुआ और इस दुनिया में रहता है, अधिकारों के उभरने के लिए पर्याप्त है। और उनके विकास के उच्चतम स्तर पर देशों ने गारंटी दी है कि अधिकार और स्वतंत्रता का सम्मान और संरक्षित किया जाएगा। बुनियादी मानव अधिकार हैंलंबे समय से पहले, और उन्हें "प्राकृतिक अधिकार" कहा जाता था लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि एक ही समय में, प्राकृतिक वातावरण में, एक व्यक्ति भाग्य की दया के लिए छोड़ दिया जाता है और आत्मरक्षा के बिल्कुल कुछ भी नहीं है। मानवाधिकार, स्वतंत्रता और कर्तव्यों का उद्भव, या कहने में बेहतर होता है, केवल तब ही पैदा हो सकता है जब कोई संगठन या समुदाय हो। समाज के संरक्षण के बिना, एक जंगली माहौल में, एक व्यक्ति अपने स्वयं के जीवन से शुरुआत में स्वतंत्र रूप से अपने प्राकृतिक अधिकार के हर मिनट की रक्षा के लिए बाध्य है। यह इस मुख्य लक्ष्य के लिए था कि एक समाज ने ऐतिहासिक रूप से निर्माण शुरू किया शायद यह हमेशा नहीं, हर जगह नहीं है और पूरी तरह से इस मुख्य कार्य को पूरा नहीं करता है, लेकिन मानवता की तारीख अभी तक किसी अन्य प्रभावी संस्था के साथ नहीं आई है। इसलिए, राज्य से कुछ प्राप्त करना, अर्थात् इसकी सुरक्षा, एक व्यक्ति, बदले में, बदले में कुछ देना होगा। यह प्रभाव है और इस तरह की अवधारणा के आधार पर उस देश के सामने "मनुष्य और नागरिक के मूल कर्तव्यों" का गठन किया है जो उसकी सुरक्षा की गारंटी देता है। अगर हम सामान्य और बिना जटिल परिभाषाओं में दिखते हैं,हमारे बुनियादी अधिकारों - कि वास्तव में क्या हम दूर नहीं ले जा सकते हैं या जहाँ से आप मना नहीं कर सकती। हम में से गैर सामग्री हिस्सा इस तरह की केवल खुद को हम मनुष्य जन्म लेते हैं क्योंकि। कैसे और कौन इस वास्तविकता का उपयोग करता है - एक और सवाल है। राज्य और उसकी संस्थाओं के कार्य - प्राकृतिक और प्रत्येक गृहीत में निहित रक्षा के लिए। संवैधानिक अधिकार, स्वतंत्रता और आदमी के कर्तव्यों सिर्फ नियमों का एक यादृच्छिक सेट, और अनाकार मिश्रण नहीं हैं, और एक सुसंगत प्रणाली है, जो जीवन और मानव गतिविधियों के सभी सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक पहलुओं की अपनी नियामक प्रभाव को शामिल किया गया के रूप में। यह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, साथ ही व्यक्तिगत शारीरिक और आध्यात्मिक गुणों के दायरे में शामिल हैं। एक लोकतांत्रिक शांति के लिए जीवन का अधिकार हैपहला और सबसे महत्वपूर्ण मानवाधिकार किसी भी परिस्थिति में दुनिया में कोई भी दूसरे व्यक्ति का जीवन नहीं ले सकता है एकमात्र अपवाद तब तक माना जा सकता है जब हमले में आत्मरक्षा नहीं होती, क्योंकि इस मामले में यह जीवन के अपने व्यक्तिगत मुख्य अधिकार की सुरक्षा है। और फिर आपको इच्छा शक्ति और स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है, अगर खतरे वास्तव में असली हैं, और जीवन पर एक प्रयास किया गया था, और किसी और पर नहीं। अन्य सभी मामलों में, जिम्मेदारी लगाई जाती है और सजा का उपाय निर्धारित होता है। जीवन के अधिकार के बाद सभी के लिए कई अन्य व्यक्तिगत और असहनीय अधिकार हैं। मानव अधिकार और कर्तव्यों किसी भी राज्य के मूल कानून में निहित हैं वे केवल व्यक्तिगत, या प्राकृतिक, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक, साथ ही सामाजिक-आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों और स्वतंत्रताएं ही नहीं हैं। इसलिए, एक व्यक्ति को राज्य की सुरक्षा मिलती है और कर सकते हैंअपने जीवन का सामना किए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने और कई अन्य अवसरों को प्राप्त करने के लिए लेकिन एक में आजादी होने पर, ऐसा हुआ, हम जरूरी स्वयं पर दूसरे का उल्लंघन करते हैं। दूसरे शब्दों में, राज्य से प्राप्त हर अधिकार और इसकी सुरक्षा से किसी व्यक्ति पर एक निश्चित शुल्क लगाने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, एक व्यक्ति के अधिकार और कर्तव्यों को लगातार intertwined हैं एक अर्थ में, अपने स्वयं के बचाव के साथ राज्य को चार्ज करके, एक व्यक्ति इस राज्य के साथ गठबंधन के लिए सहमत है और उसके नागरिक बन जाता है। और अब नागरिक अपने देश के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें राज्य के मामलों में सहायता और प्रत्यक्ष भागीदारी शामिल है। उदाहरण के लिए, अनिवार्य करों का भुगतान, सशस्त्र बलों में सेवा आदि। इसके साथ सीधा लिंक की प्रकृति को देखते हुएराज्य, अपने नागरिकों के संरक्षित अधिकारों में भी विशिष्टताएं हैं जैसा कि आप जानते हैं, हम में से प्रत्येक की खुशी हमारी चारों ओर से भरी हुई हर चीज की भलाई और सफलता पर निर्भर करती है। इसमें पूरे राज्य पर लागू होता है देश की स्वतंत्रता और समृद्धि उसके नागरिकों की भलाई और प्रत्येक व्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता पर जोर देती है। केवल उस देश में जहां अधिकांश इसके नागरिक बहुतायत में रहते हैं, और गरीबी के कगार पर नहीं समृद्ध होगा। अन्यथा, ऐसे देश लंबे समय तक अस्तित्व में नहीं रख सकते हैं और इतिहास बहुत स्पष्ट रूप से इस प्रवृत्ति को दर्शाता है राज्य के साथ मनुष्य का संबंध जन्म के साथ उठता है। नागरिकता बदलने की संभावना मौजूद है, लेकिन यह सार्वजनिक नहीं है और पूरी प्रक्रिया और कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुपालन की आवश्यकता है। नागरिकता संस्थान एक जटिल जटिल तंत्र है, और इसके लिए अनुसंधान के लिए एक अलग विषय की आवश्यकता है। अक्सर अक्सर वे अधिकारों के बारे में बात करते हैं, लेकिनकिसी कारण के लिए, विवरण अक्सर विवरण में नहीं बताया जाता है। लेकिन आप स्वीकार करते हैं चाहिए, यह हर नागरिक के अपने कर्तव्य का प्रदर्शन अन्य व्यक्तियों के अधिकारों की गैर उल्लंघन सुनिश्चित करने के लिए एक ही रास्ता है। हाल ही में, हर जगह से, केवल नारे सुनाए गए हैं कि "हर कोई सही है"। लेकिन कहीं न कहीं इन अधिकारों, समाप्त होना चाहिए अन्यथा एक तराजू गिर जाएगी, और समाज की शेष राशि का सूक्ष्म सद्भाव विभाजित कर दिया जाएगा। और मानवाधिकारों का अंत जहां उनके साथी नागरिकों के अधिकार शुरू होते हैं और यह पता चला है कि बड़ा समुदाय, कुछ के लिए कम स्वतंत्रता व्यक्तिगत स्थान व्यक्तिगत पर बंद होता है लेकिन जिम्मेदारियों का सम्मान करना दूसरों के अधिकारों, के साथ ही उनके नागरिक कर्तव्यों की पूर्ति एक बड़े राज्य के विकास में तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि जिस तरह से यह अब पता चला है कि रूस मानव जिम्मेदारियों लोग अपने स्वयं के जीवन के बारे में शिकायत करते हैं, लेकिन लग रहा है देश प्रत्येक अपने हितों और बुनियादी जरूरतों की रक्षा के बारे में परवाह है कि, किसी भी तरह धीरे-धीरे कम हो। कभी कभी देशभक्ति की लहर इस भावना को समाप्त, लेकिन यह जीवन के लिए फिर से अधिक से अधिक सवाल खड़े होते हैं। एक व्यक्ति के संवैधानिक कर्तव्यों का एक उपाय हैन केवल आवश्यक है, लेकिन अनिवार्य व्यवहार और नागरिक समाज में, जहां नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का संचालन किया जाता है, इस समिति के प्रत्येक सदस्य को इस समाज के अन्य अभिनेताओं के सामान्य कामकाज की खातिर उनकी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। और मानव अधिकारों के संबंध में, किसी व्यक्ति के कर्तव्यों के अधिकार और स्वतंत्रता के तर्कसंगत और बाध्यकारी अनुरूपता जो अलग-अलग हैं इसलिए, दूसरे शब्दों में, अगर किसी को व्यक्तिगत आत्म-प्राप्ति का अधिकार मिल गया है, तो वही दूसरों के लिए सच है और इन सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है यह सिद्धांत नैतिक कानून के समान है - अन्य लोगों के साथ हमेशा से कार्य करें जिस तरह आप अपने साथ व्यवहार करना चाहते हैं। इस कानून का अनुपालन करने में विफलता कई कठिनाइयों और यहां तक कि दुर्घटनाओं के उद्भव की ओर जाता है, जो कि हम दैनिक, न केवल समाचार में, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी देख सकते हैं। अधिकार और जिम्मेदारियों का दायराप्रत्येक कई कारकों पर निर्भर करता है उदाहरण के लिए, नागरिकता की उपलब्धता पर, किसी व्यक्ति की आयु और लिंग, उसके स्वास्थ्य की विशेषताओं और कामकाजी परिस्थितियां रूस के नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को यहां अपवाद नहीं होना चाहिए। एक व्यक्ति के लिए और अधिक की आवश्यकता होती है, वह जितना अधिक होता है और समाज में उसकी स्थिति अधिक होती है। इस प्रकार, नागरिक समाज के अधिकारी हमेशा सामान्य नागरिकों की तुलना में अधिक जिम्मेदार होते हैं। लेकिन एक नागरिक नौकर के अधिकार और अवसरों में एक साधारण व्यक्ति से काफी कम है। यह स्वतंत्र आंदोलन, भौतिक मूल्यों के अधिकार का अधिकार है और इतने पर। अर्थात्, यह सिद्धांत भी इस तरह से व्यक्त किया जा सकता है कि एक सरल व्यक्ति वह सब कुछ कर सकता है जो इस राज्य में सीधे कानून द्वारा निषिद्ध नहीं है। लेकिन आधिकारिक को ऐसा करने का अधिकार नहीं है जो कानून में सीधे उसके लिए निर्धारित नहीं है। इस सिद्धांत का अनुपालन करने में विफलता हमेशा भ्रष्टाचार में वृद्धि, शक्ति का हड़पने, कानूनों का उल्लंघन और सामान्य नागरिकों के अधिकारों पर जोर देता है। यहां दिए गए विषय में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदुएक व्यक्ति के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए तंत्र है यह प्रासंगिक राज्य निकाय के साथ अधिकारों और स्वतंत्रता के वाहक के संपर्क के लिए एक कानूनी तंत्र है। चूंकि विकसित राज्य का मुख्य लक्ष्य आज अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा तंत्र राज्य सरकार की एक पूरी प्रणाली है जिसका कार्य केवल अनुपालन ही नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी ऐसी सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार है, साथ ही हर किसी के अधिकार के अनुसार सुरक्षा। रूसी संघ के संविधान के लेख में मौलिक अधिकारों और आम स्वतंत्रता की गारंटी देता है की एक पूरी प्रणाली है, दोनों सार्वभौमिक और नागरिक यह सब मानदंडों, सिद्धांतों, शर्तों और आवश्यकताओं की एक प्रणाली है, जो उनके समग्रता में भाग लेने वाले व्यक्तियों के अधिकारों, स्वतंत्रताओं और वैध हितों का पालन सुनिश्चित करते हैं। लेकिन अभी तक ये सिर्फ शब्द थे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन शब्दों को एक सभ्य दुनिया में अनुवाद करने की आवश्यकता महसूस हुई। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, समझौतों और करारों को अपनाने, स्थापित किए गए नियमों की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के उद्भव, नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता के संरक्षण के व्यावहारिक कार्यान्वयन के लिए नींव रखे।
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Aaj Ka Rashifal In Hindi 28 January 2020 : आज माघ शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और दिन मंगलवार है। हम आपको बता रहे हैं आज 28 जनवरी का मेष, वृषभ, सिंह, कर्क, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल (Horoscope in Hindi)। जानिए कैसा रहेगा आपका दिन और कैसा रहेगा बिजनेस। जानिये अपना राशिफल (28 January 2020 Ka Rashifal):
मेषः आज आपका दिन शानदार रहेगा। कोई जरूरी काम आसानी से पूरा हो सकता है। पुराने मित्रों से मिलने का मौका मिलेगा। कहीं घूमने की प्लानिंग कर सकते हैं। आप खुद को फिट महसूस करेंगे। परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी। भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र की स्थिति में सुधार होगा।
वृषः अस्थिरता आपके व्यवसाय में बाधा उत्पन्न करेगी। चीजें आपकी अपेक्षा के अनुसार काम नहीं कर रही हैं। पैसे से संबंधित मुद्दों के प्रति सावधान रहें। विदेशी व्यापार से लाभ होने के मजबूत संकेत हैं। आपका अपने जीवन साथी के साथ विवाद हो सकता है। अजनबियों के साथ अधिक मित्रता न दिखाएं।
मिथुनः आज का दिन बेहतरीन रहेगा। माता-पिता के साथ समय बीतेगा। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। भागदौड़ रहेगी। गुस्सा ज्यादा रहेगा। आज आप किसी भी तरह के कलह से बचें। जोखिम भरे कार्यों को टाल दें।
कर्कः परिवार में सदस्यों के साथ उग्र वाद-विवाद होगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद रहेगी। कारोबार में मेहनत का फल मिलेगा। समाज में मानहानि न हो उसका ध्यान रखें। स्त्री वर्ग से कोई मुसीबत खड़ी होने की संभावना है। पैसे खर्च होंगे। समय से भोजन नहीं मिलेगा। अनिद्रा का शिकार हो सकते हैं।
सिंहः आज किस्मत आपके साथ रहेगी। आज बनाई गई कुछ योजनाएँ पूरी हो सकती है। व्यापार में अचानक धन लाभ हो सकता है। आर्थिक पक्ष पहले की अपेक्षा मजबूत रहेगा। तरक्की के नये रास्ते खुलेंगे। अतिरिक्त आमदनी होने के आसार बन रहे हैं। पूरे दिन शरीर स्वस्थ रहेगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे।
कन्याः किस्मत आज आप पर मुस्कुरा रही है। अपनी निष्ठा से आप कुछ भी हासिल करने में सक्षम रहेंगे। आज एक नयी ताजगी का एहसास आपके तन और मन को भर देगा। सभी तनाव और परेशानियाँ आज समाप्त हो जाएंगी। आपको नई जिम्मेदारियां मिलेंगी जो आप के लिए फायदेमंद साबित होंगी। आपके प्रयासों के माध्यम से धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं।
तुलाः आज आपका दिन सामान्य रहने वाला है। किसी पर तुरंत भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। आज फिजूल खर्ची पर रोक लगाने की जरूरत है। अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करना चाह रहे हैं तो उसके लिये आज का दिन अच्छा है। बच्चों की सफलता से आज खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे।
वृश्चिकः आज आपका दिन अच्छा रहेगा। आप धार्मिक कार्यो में रुचि लेंगे। आपके सपनों को आज नयी उड़ान मिलेगी। भरोसेमंद दोस्तों की सलाह आपके बहुत काम आयेगी। जो लोग नौकरी चेंज करना चाहते हैं उनके लिये आज का दिन उत्तम है। आज टूट चुके संबंधो को दुबारा से जोड़ने का दिन है। दूसरों की भलाई करने में आनंद मिलेगा।
धनुः किसी बात की चिंता के कारण मन में परेशानी और असंतोष की भावना बनी रह सकती है। अपने आप को स्थिर और संयम बनाएं रखें। किसी भी काम को इतना गंभीरता से न लें की वह बोझ बन जाए। किसी नई परियोजना के लिए पैसा जमा कर सकते है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताएंगे। तीर्थ यात्रा का योग बन सकता है।
मकरः युवाओं को करियर के अच्छे विकल्प मिल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन मिल सकता है। काम समय से पूरे हो जाएंगे। यदि कोई प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं तो अच्छी तरह जांच कर के ही कोई निर्णय लें। भौतिक सुख साधनों में बढ़ोतरी होगी। शारीरिक कमजोरी महसूस करेंगे।
कुंभः आज का दिन सामान्य रहेगा। किसी बात को लेकर चिंता बनी हुई है। उसका जल्द ही हल मिलेगा। आपका आज काम में फोकस बहुत अच्छा बना हुआ है। अविवाहितों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकते हैं। व्यापार में पैसा सोच-समझकर ही लगाएं। पत्नी का प्रेम व सहयोग प्राप्त होगा।
मीनः कुल मिलाकर आपका दिन अच्छा रहेगा। आप अपनी कामयाबी को लेकर आश्वस्त रहेंगे। नौकरीपेशा लोग खूब तरक्की करेंगे। आपको व्यापार में मुनाफा होने की उम्मीद है। परिवार वालों के साथ धार्मिक यात्रा की योजना बनायेंगे। स्वास्थ्य पहले की अपेक्षा बेहतर रहेगा। दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
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Aaj Ka Rashifal In Hindi अट्ठाईस जनवरीuary दो हज़ार बीस : आज माघ शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और दिन मंगलवार है। हम आपको बता रहे हैं आज अट्ठाईस जनवरी का मेष, वृषभ, सिंह, कर्क, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल । जानिए कैसा रहेगा आपका दिन और कैसा रहेगा बिजनेस। जानिये अपना राशिफल : मेषः आज आपका दिन शानदार रहेगा। कोई जरूरी काम आसानी से पूरा हो सकता है। पुराने मित्रों से मिलने का मौका मिलेगा। कहीं घूमने की प्लानिंग कर सकते हैं। आप खुद को फिट महसूस करेंगे। परिवार का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी। भौतिक सुखों में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र की स्थिति में सुधार होगा। वृषः अस्थिरता आपके व्यवसाय में बाधा उत्पन्न करेगी। चीजें आपकी अपेक्षा के अनुसार काम नहीं कर रही हैं। पैसे से संबंधित मुद्दों के प्रति सावधान रहें। विदेशी व्यापार से लाभ होने के मजबूत संकेत हैं। आपका अपने जीवन साथी के साथ विवाद हो सकता है। अजनबियों के साथ अधिक मित्रता न दिखाएं। मिथुनः आज का दिन बेहतरीन रहेगा। माता-पिता के साथ समय बीतेगा। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। भागदौड़ रहेगी। गुस्सा ज्यादा रहेगा। आज आप किसी भी तरह के कलह से बचें। जोखिम भरे कार्यों को टाल दें। कर्कः परिवार में सदस्यों के साथ उग्र वाद-विवाद होगा। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद रहेगी। कारोबार में मेहनत का फल मिलेगा। समाज में मानहानि न हो उसका ध्यान रखें। स्त्री वर्ग से कोई मुसीबत खड़ी होने की संभावना है। पैसे खर्च होंगे। समय से भोजन नहीं मिलेगा। अनिद्रा का शिकार हो सकते हैं। सिंहः आज किस्मत आपके साथ रहेगी। आज बनाई गई कुछ योजनाएँ पूरी हो सकती है। व्यापार में अचानक धन लाभ हो सकता है। आर्थिक पक्ष पहले की अपेक्षा मजबूत रहेगा। तरक्की के नये रास्ते खुलेंगे। अतिरिक्त आमदनी होने के आसार बन रहे हैं। पूरे दिन शरीर स्वस्थ रहेगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे। कन्याः किस्मत आज आप पर मुस्कुरा रही है। अपनी निष्ठा से आप कुछ भी हासिल करने में सक्षम रहेंगे। आज एक नयी ताजगी का एहसास आपके तन और मन को भर देगा। सभी तनाव और परेशानियाँ आज समाप्त हो जाएंगी। आपको नई जिम्मेदारियां मिलेंगी जो आप के लिए फायदेमंद साबित होंगी। आपके प्रयासों के माध्यम से धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं। तुलाः आज आपका दिन सामान्य रहने वाला है। किसी पर तुरंत भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। आज फिजूल खर्ची पर रोक लगाने की जरूरत है। अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करना चाह रहे हैं तो उसके लिये आज का दिन अच्छा है। बच्चों की सफलता से आज खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे। वृश्चिकः आज आपका दिन अच्छा रहेगा। आप धार्मिक कार्यो में रुचि लेंगे। आपके सपनों को आज नयी उड़ान मिलेगी। भरोसेमंद दोस्तों की सलाह आपके बहुत काम आयेगी। जो लोग नौकरी चेंज करना चाहते हैं उनके लिये आज का दिन उत्तम है। आज टूट चुके संबंधो को दुबारा से जोड़ने का दिन है। दूसरों की भलाई करने में आनंद मिलेगा। धनुः किसी बात की चिंता के कारण मन में परेशानी और असंतोष की भावना बनी रह सकती है। अपने आप को स्थिर और संयम बनाएं रखें। किसी भी काम को इतना गंभीरता से न लें की वह बोझ बन जाए। किसी नई परियोजना के लिए पैसा जमा कर सकते है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताएंगे। तीर्थ यात्रा का योग बन सकता है। मकरः युवाओं को करियर के अच्छे विकल्प मिल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन मिल सकता है। काम समय से पूरे हो जाएंगे। यदि कोई प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं तो अच्छी तरह जांच कर के ही कोई निर्णय लें। भौतिक सुख साधनों में बढ़ोतरी होगी। शारीरिक कमजोरी महसूस करेंगे। कुंभः आज का दिन सामान्य रहेगा। किसी बात को लेकर चिंता बनी हुई है। उसका जल्द ही हल मिलेगा। आपका आज काम में फोकस बहुत अच्छा बना हुआ है। अविवाहितों को वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकते हैं। व्यापार में पैसा सोच-समझकर ही लगाएं। पत्नी का प्रेम व सहयोग प्राप्त होगा। मीनः कुल मिलाकर आपका दिन अच्छा रहेगा। आप अपनी कामयाबी को लेकर आश्वस्त रहेंगे। नौकरीपेशा लोग खूब तरक्की करेंगे। आपको व्यापार में मुनाफा होने की उम्मीद है। परिवार वालों के साथ धार्मिक यात्रा की योजना बनायेंगे। स्वास्थ्य पहले की अपेक्षा बेहतर रहेगा। दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।
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भोपाल। रेलवे की ओर से कोविड काल के दौरान सीनियर सिटीजन,पत्रकार,डॉक्टर आदि श्रेणी सहित करीब 188 प्रकार की मिलने वाली छूट को बंद कर दिया था। अब रेलवे ने एक ओर फैसला लेते हुए करंट बुकिंग टिकट पर मिलने वाली दस फीसदी छूट भी खत्म कर दी।
रेलवे ने वर्ष 2016 से दी जा रही फर्स्ट चार्ट बनने के बाद बची हुई सीटों के लिए करंट बुकिंग पर 10 फीसदी छूट को भी खत्म कर दिया है। यानि अब करंट बुकिंग वाली टिकट पर यात्रियों को पूरा किराया देना होगा। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (पीएम) विपुल सिंघल ने पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी जोनल रेलवेज को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
कोरोना से पहले ट्रेनों में यात्रियों को टिकट पर 303 तरह की रियायत दी जा रही थी। लेकिन सीनियर सिटीजन, पत्रकार, पुलिस सहित अन्य रियायतों को बंद कर फिलहाल 115 तरह की रियायत दी जा रही हैं। सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद और विधायक को रेल यात्रा मुफ्त में कराई जा रही है। ये सुविधा ना सिर्फ वर्तमान बल्कि पूर्व सांसद को भी दी जाती है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 में रेलवे बोर्ड ने आदेश दिया था कि ट्रेन चलने से चार घंटे पहले बनने वाले चार्ट के बाद अगर ट्रेन में किसी भी क्लास में सीटें खाली रह जाती हैं और इसके बाद भी अगर कोई यात्री करंट में रिजर्वेशन कराता है, तो उसे रिजर्वेशन कराने पर किराए में 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। उदाहरण के लिए अगर भोपाल से दिल्ली जाने का स्लीपर का किराया करीब 415 है, तो यही किराया चार्ट बन जाने के बाद करंट बुकिंग में टिकट लेने पर करीब 375 में यात्रियों को मिलता था। लेकिन अब रेलवे द्वारा दी जा रही ये रियायत से बंद कर दी गई है। इसके चलते यात्रियों को पूरा किराया देना होगा।
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भोपाल। रेलवे की ओर से कोविड काल के दौरान सीनियर सिटीजन,पत्रकार,डॉक्टर आदि श्रेणी सहित करीब एक सौ अठासी प्रकार की मिलने वाली छूट को बंद कर दिया था। अब रेलवे ने एक ओर फैसला लेते हुए करंट बुकिंग टिकट पर मिलने वाली दस फीसदी छूट भी खत्म कर दी। रेलवे ने वर्ष दो हज़ार सोलह से दी जा रही फर्स्ट चार्ट बनने के बाद बची हुई सीटों के लिए करंट बुकिंग पर दस फीसदी छूट को भी खत्म कर दिया है। यानि अब करंट बुकिंग वाली टिकट पर यात्रियों को पूरा किराया देना होगा। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर विपुल सिंघल ने पश्चिम मध्य रेलवे सहित सभी जोनल रेलवेज को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। कोरोना से पहले ट्रेनों में यात्रियों को टिकट पर तीन सौ तीन तरह की रियायत दी जा रही थी। लेकिन सीनियर सिटीजन, पत्रकार, पुलिस सहित अन्य रियायतों को बंद कर फिलहाल एक सौ पंद्रह तरह की रियायत दी जा रही हैं। सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद और विधायक को रेल यात्रा मुफ्त में कराई जा रही है। ये सुविधा ना सिर्फ वर्तमान बल्कि पूर्व सांसद को भी दी जाती है। रेलवे सूत्रों के अनुसार वर्ष दो हज़ार सोलह में रेलवे बोर्ड ने आदेश दिया था कि ट्रेन चलने से चार घंटे पहले बनने वाले चार्ट के बाद अगर ट्रेन में किसी भी क्लास में सीटें खाली रह जाती हैं और इसके बाद भी अगर कोई यात्री करंट में रिजर्वेशन कराता है, तो उसे रिजर्वेशन कराने पर किराए में दस फीसदी की छूट दी जाएगी। उदाहरण के लिए अगर भोपाल से दिल्ली जाने का स्लीपर का किराया करीब चार सौ पंद्रह है, तो यही किराया चार्ट बन जाने के बाद करंट बुकिंग में टिकट लेने पर करीब तीन सौ पचहत्तर में यात्रियों को मिलता था। लेकिन अब रेलवे द्वारा दी जा रही ये रियायत से बंद कर दी गई है। इसके चलते यात्रियों को पूरा किराया देना होगा।
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ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में छह देशों के सुझाए गए प्रस्ताव पर विचार करेगा.
लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान अपना परमाणु संवर्द्धन का काम रोक देगा.
पिछले दिनों इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देशों और जर्मनी ने मिलकर तैयार किया है.
इसके तहत ईरान के यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने की स्थिति में एक वैकल्पिक व्यवस्था सुझाई गई है. हालांकि प्रस्ताव में दिए गए सुझावों को सार्वजनिक नहीं किया गया है.
'राष्ट्रीय हित'
राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने उनसे फ़ोन पर संपर्क किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के इस प्रस्ताव पर गौर करने को कहा.
इस बारे में यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख हाविए सोलाना अगले दो दिनों के लिए इस मसले पर बातचीत के लिए ईरान में होंगे.
उधर ईरान के राष्ट्रपति ने साफ़ कर दिया है कि ईरान कोई भी फ़ैसला अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लेगा.
तेहरान से बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि इस बार ईरान के राष्ट्रपति के तेवर बदले हुए नज़र आए.
ग़ौरतलब है कि ईरान अमरीका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई अन्य देशों के दबाव के बावजूद अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की बात कहता रहा है.
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ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में छह देशों के सुझाए गए प्रस्ताव पर विचार करेगा. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान अपना परमाणु संवर्द्धन का काम रोक देगा. पिछले दिनों इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देशों और जर्मनी ने मिलकर तैयार किया है. इसके तहत ईरान के यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने की स्थिति में एक वैकल्पिक व्यवस्था सुझाई गई है. हालांकि प्रस्ताव में दिए गए सुझावों को सार्वजनिक नहीं किया गया है. 'राष्ट्रीय हित' राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने उनसे फ़ोन पर संपर्क किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के इस प्रस्ताव पर गौर करने को कहा. इस बारे में यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख हाविए सोलाना अगले दो दिनों के लिए इस मसले पर बातचीत के लिए ईरान में होंगे. उधर ईरान के राष्ट्रपति ने साफ़ कर दिया है कि ईरान कोई भी फ़ैसला अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लेगा. तेहरान से बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि इस बार ईरान के राष्ट्रपति के तेवर बदले हुए नज़र आए. ग़ौरतलब है कि ईरान अमरीका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई अन्य देशों के दबाव के बावजूद अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की बात कहता रहा है.
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फिल्म बिल्कुल पुरानी फिल्मों की तरह हैं जब ये माना जाता था कि ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए कुछ चीज़ें काफी है - हीरो, हीरोइन, गाने, विलेन, फाइट और हैप्पी एंडिंग। लेकिन राजामौली ने फिर भी इसे इतनी खूबसूरत तरीके से बनाया है कि कभी भी आप फिल्म से निराश नहीं होंगे। आप बस आंखें फाड़ फाड़ कर फिल्म देखेंगे।
थोड़े कन्फ्यूज़ करने वाले फ्लैशबैक, खराब ग्राफिक्स और राणा दग्गुबाती की ओवरएक्टिंग बाहुबली को हल्का बनाती है। लेकिन फिल्म को संभालता है प्रभास और तमन्ना का शानदार काम। एमएम कीरवानी का संगीत इतना शानदार है कि गाने अच्छे लगते हैं, भले ही वो कामुक हैं। वहीं सेंथिल के कैमरा से जंगल और रेगिस्तान भी इतना शानदार लगता है कि बस देखते रहने का मन करता है।
फिल्म को कुर्नूल, केरल और रामोजी फिल्म सिटी में शूट किया गया है और फिल्म को देखने में मज़ा आता है। कुछ सीन और फाइट शानदार है। आर्ट डायरेक्शन आपका ध्यान रोक देता है। भले ही फिल्म में कुछ खास नहीं है पर फिर भी राजामौली का निर्देशन इसे बहुत खास बनाता है।
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Don't Miss! FirstReview: बाहुबली दो, एक ही फिल्म दो बार क्यों बनाना...वो भी धोखा देकर? बाहुबली दो इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में लगने वाली है लेकिन विदेशी समीक्षकों ने फिल्म को देख भी लिया है और फिल्म का पहला रिव्यू भी दे दिया है। अब आप फिल्म तो कैसे भी देखेंगे पर पढ़ लीजिए ये रिव्यू! बाहुबली दो को विदेशी समीक्षकों ने फिल्म देख ली है और इसका रिव्यू भी दे दिया है। और आपका दिल टूट जाएगा लेकिन ये रिव्यू बहुत मिला जुला है। कुछ लोगों को फिल्म बहुत पसंद आई तो कुछ को फिल्म ठीक ठाक लगी है। फिल्म बिल्कुल पुरानी फिल्मों की तरह हैं जब ये माना जाता था कि ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए कुछ चीज़ें काफी है - हीरो, हीरोइन, गाने, विलेन, फाइट और हैप्पी एंडिंग। लेकिन राजामौली ने फिर भी इसे इतनी खूबसूरत तरीके से बनाया है कि कभी भी आप फिल्म से निराश नहीं होंगे। आप बस आंखें फाड़ फाड़ कर फिल्म देखेंगे। थोड़े कन्फ्यूज़ करने वाले फ्लैशबैक, खराब ग्राफिक्स और राणा दग्गुबाती की ओवरएक्टिंग बाहुबली को हल्का बनाती है। लेकिन फिल्म को संभालता है प्रभास और तमन्ना का शानदार काम। एमएम कीरवानी का संगीत इतना शानदार है कि गाने अच्छे लगते हैं, भले ही वो कामुक हैं। वहीं सेंथिल के कैमरा से जंगल और रेगिस्तान भी इतना शानदार लगता है कि बस देखते रहने का मन करता है। फिल्म को कुर्नूल, केरल और रामोजी फिल्म सिटी में शूट किया गया है और फिल्म को देखने में मज़ा आता है। कुछ सीन और फाइट शानदार है। आर्ट डायरेक्शन आपका ध्यान रोक देता है। भले ही फिल्म में कुछ खास नहीं है पर फिर भी राजामौली का निर्देशन इसे बहुत खास बनाता है।
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रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से 10 दिसम्बर,सोमवार को इस्तीफ़ा दे दिया। कुछ समय से केंद्र सरकार और उर्जित के बीच में कई मुद्दों पर मतभेद चल रहा था और अब यह निर्णय सामने आते ही शक की सुई सीधे केंद्र सरकार की ओर जाती है। पर इस्तीफ़ा देते ही पटेल ने अपने बयान में कहा कि उनका अपने पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय केवल निजी कारणों की वजह से है। उर्जित पटेल ने कहा,"रिज़र्व बैंक के अलग-अलग पदों पर काम करना मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात रही है। बैंक के कर्मचारियों का सहयोग और उनके काम के प्रति निष्ठा मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण था। मैं इस अवसर पर अपने सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूँ और भविष्य के लिए सभी को शुभकामनाएं भी देता हूँ। ऐसा कहा जा रहा था कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट के सेक्शन 7 के अन्दर सरकार ने अपने विशेषाधिकार को लागू कर दिया है।
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रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से दस दिसम्बर,सोमवार को इस्तीफ़ा दे दिया। कुछ समय से केंद्र सरकार और उर्जित के बीच में कई मुद्दों पर मतभेद चल रहा था और अब यह निर्णय सामने आते ही शक की सुई सीधे केंद्र सरकार की ओर जाती है। पर इस्तीफ़ा देते ही पटेल ने अपने बयान में कहा कि उनका अपने पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय केवल निजी कारणों की वजह से है। उर्जित पटेल ने कहा,"रिज़र्व बैंक के अलग-अलग पदों पर काम करना मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात रही है। बैंक के कर्मचारियों का सहयोग और उनके काम के प्रति निष्ठा मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण था। मैं इस अवसर पर अपने सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूँ और भविष्य के लिए सभी को शुभकामनाएं भी देता हूँ। ऐसा कहा जा रहा था कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट के सेक्शन सात के अन्दर सरकार ने अपने विशेषाधिकार को लागू कर दिया है।
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प्रीलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency- BEE) ने अपने स्थापना दिवस पर डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर (Deep Freezer and Light Commercial Air Conditioners- LCAC) हेतु स्टार रेटिंग कार्यक्रम शुरू किया है।
मुख्य बिंदुः
- केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) के अंतर्गत स्थापित BEE ने अपने 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर ऊर्जा कुशल भारत के निर्माण के लिये एक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु कार्यक्रम का आयोजन किया।
- इस अवसर पर ऊर्जा दक्षता इनफॉर्मेशन टूल (Urja Dakshata Information Tool- UDIT) की भी शुरुआत की गई।
- BEE द्वारा 'वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट' (World Resources Institute-WRI) के सहयोग से बनाए गए इस पोर्टल के ज़रिये विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के बारे में जानकारी और आँकड़े हासिल किये जा सकेंगे।
- उदित एक उपयोगकर्त्ता अनुकूलित मंच है जो उद्योग, उपकरण, भवन, परिवहन, नगरपालिका और कृषि क्षेत्रों में भारत के ऊर्जा दक्षता परिदृश्य की व्याख्या करता है।
- उदित, ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में वृद्धि के लिये सरकार द्वारा उठाए गए क्षमता निर्माण संबंधी नई पहलों की भी प्रदर्शित करेगा।
क्या है डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर हेतु स्टार रेटिंग कार्यक्रम?
- स्टार लेबलिंग कार्यक्रम ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत एक अधिदेश के रूप में BEE द्वारा प्रारंभ किया गया है।
- इस कार्यक्रम के माध्यम से डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर को स्टार लेबलिंग अर्थात् स्टार रेटिंग कार्यक्रम के दायरे में लाया गया है।
स्टार लेबलिंगः
- स्टार लेबलिंग के माध्यम से उपकरण विनिर्माता यह बताता है कि उसका कोई उपकरण बिजली खर्च के हिसाब से कितना किफायती है।
- डीप फ्रीज़र के लिये स्टार लेबलिंग कार्यक्रम स्वैच्छिक आधार पर शुरू किया गया है और ऊर्जा खपत मानदंड 31 दिसंबर, 2021 तक प्रभावी होगा। वहीं हल्के वाणिज्यिक एयर कंडीशनर के लिये यह 2 मार्च, 2020 से 31 दिसंबर, 2021 तक स्वैच्छिक होगा।
डीप फ्रीज़र तथा लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनरः
- डीप फ्रीज़र का उपयोग खाने-पीने का सामान, फल, सब्जी जैसे पदार्थों को लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिये होता है। वहीं हल्के वाणिज्यिक एयर कंडीशनर के तहत 3 टन से 5 टन तक की क्षमता के एसी आते हैं।
- इस कार्यक्रम के तहत BEE ने अब तक 24 उपकरणों को कवर किया है, जिसमें 10 उपकरण अनिवार्य स्टार लेबलिंग के अधीन हैं।
- स्वैच्छिक स्टार लेबलिंग के तहत इन दो नए उपकरणों के लॉन्च होने से अब इस कार्यक्रम में 26 उपकरण शामिल हो गए हैं।
- डीप फ्रीज़र्स की वार्षिक ऊर्जा खपत का ऊर्जा खपत मानक (किलोवाट.घंटा/वर्ष) पर आधारित है।
- डीप फ्रीज़र्स का उपयोग मुख्य रूप से वाणिज्यिक प्रशीतन क्षेत्र में किया जाता है और अगले दशक तक इनके 2 गुना हो जाने की संभावना है जिससे बिजली की खपत के बढ़ने की भी संभावना है।
- वित्तीय वर्ष 2017-18 में चेस्ट और अपराइट डीप फ्रीज़र सेगमेंट (Chest and Upright type Deep Freezer Segment) के कुल संगठित बाज़ार का आकार लगभग 5-6 लाख यूनिट था। इसका बाज़ार पिछले 3 वर्षों में 28% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ दोगुना से अधिक हो गया है तथा इसके और बढ़ने की भी उम्मीद है। चेस्ट प्रकार के फ्रीजर का हिस्सा बाज़ार में लगभग 99% है, जबकि अपराइट प्रकार के फ्रीज़र्स का बाज़ार में हिस्सा लगभग 1% है।
- लगभग 3.72 लाख डीप फ्रीज़र यूनिटस का विदेश से आयात किया गया है जबकि शेष स्वदेशी तौर पर निर्मित हैं।
- डीप फ्रीज़र को स्टार रेटिंग कार्यक्रम में लाने से वर्ष 2030 तक 6.2 अरब यूनिट बिजली की बचत होगी जो कार्बन डाइऑक्साइड के 5.3 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस की कमी के बराबर है। वहीं लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर के मामले में 2.8 अरब यूनिट बिजली बचत का अनुमान है अर्थात् कुल मिलाकर इससे 9 अरब यूनिट बिजली की बचत होगी जो कार्बन डाइऑक्साइड के 2.4 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस की कमी के बराबर है।
ऊर्जा कुशल भारत के विकास के लिये हितधारकों के साथ परामर्शः
- भारत के ऊर्जा क्षेत्र का निर्धारण सरकार की विभिन्न विकास संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं से निर्धारित होगा, जैसे- वर्ष 2022 तक अक्षय ऊर्जा की 175 गीगावाट क्षमता स्थापित करना, सभी के लिये 24X7 पॉवर, सभी के लिये वर्ष 2022 तक आवास, 100 स्मार्ट सिटी मिशन, ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना, रेलवे सेक्टर का विद्युतीकरण, घरों का 100% विद्युतीकरण, कृषि पंप सेटों का सोलराइजेशन, और खाना पकाने की स्वच्छ विधियों को बढ़ावा देना।
- भारत महत्त्वाकांक्षी ऊर्जा दक्षता नीतियों के कार्यान्वयन से वर्ष 2040 तक 300 GW बिजली की बचत होगी।
- वर्ष 2017-18के दौरान ऊर्जा दक्षता उपायों के सफल कार्यान्वयन से देश की कुल बिजली खपत में 7.14% की बचत और 108.28 मिलियन टन CO2 उत्सर्जन में कमी आई है।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरोः
- भारत सरकार ने इसकी स्थापना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के उपबंधों के अंतर्गत 1 मार्च, 2002 को की थी।
- ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के समग्र ढाँचे के अंदर स्व-विनियम और बाज़ार सिद्धांतों पर महत्त्व देते हुए ऐसी नीतियों और रणनीतियों का विकास करने में सहायता प्रदान करना है जिनका प्रमुख उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की गहनता को कम करना है।
प्रीलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने 2 मार्च, 2020 को राज्यसभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, 2019 पेश किया।
मुख्य बिंदुः
- इस विधेयक को 11 दिसंबर, 2019 को लोकसभा में पेश किया गया था तथा अगले दिन इसे पारित किया गया।
- इस विधेयक का उद्देश्य भारत के तीन डीम्ड विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बदलना है।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में परिवर्तित किये जाने वाले डीम्ड विश्वविद्यालयः
- राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (नई दिल्ली)
- लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (नई दिल्ली)
- राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (तिरुपति)
- प्रस्तावित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के कार्यः
- संस्कृत भाषा के ज्ञान का प्रसार करना और संस्कृत भाषा को और उन्नत बनाना।
- मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के एकीकृत पाठ्यक्रम के लिये विशेष प्रावधान करना।
- संस्कृत भाषा और उससे संबद्ध विषयों के समग्र विकास और संरक्षण के लिये लोगों को प्रशिक्षित करना।
- शक्तियाँः
- अध्ययन के पाठ्यक्रम का वर्णन करना और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करना।
- दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से सुविधाएँ प्रदान करना।
- एक कॉलेज या संस्थान को स्वायत्त स्थिति प्रदान करना।
- संस्कृत और संबद्ध विषयों में शिक्षा हेतु निर्देश प्रदान करना।
- विश्वविद्यालय के प्राधिकारः
- एक न्यायालय के रूप मेंः
- यह विश्वविद्यालय की नीतियों की समीक्षा करेगा और इसके विकास के लिये उपाय सुझाएगा।
- कार्यकारी परिषदः
- यह विश्वद्यालय का एक मुख्य कार्यकारी निकाय होगा।
- केंद्र द्वारा नियुक्त इस 15-सदस्यीय परिषद में कुलपति को भी शामिल किया जाएगा, जो इस बोर्ड का अध्यक्ष होगा।
- इस समिति में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव, और संस्कृत या संबद्ध विषयों के क्षेत्र से दो प्रतिष्ठित शिक्षाविद् शामिल होंगे।
- यह परिषद शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति का प्रावधान करेगी और विश्वविद्यालय के राजस्व और संपत्ति का प्रबंधन करेगी।
- एक अकादमिक और गतिविधि परिषद (Academic and Activity Council) होगी जो अकादमिक नीतियों की निगरानी करेगी।
- एक 'बोर्ड ऑफ स्टडीज़' होगा जो शोध के लिये विषयों को मंज़ूरी देगा और शिक्षण के मानकों में सुधार के उपायों की सिफारिश करेगा।
- एक न्यायालय के रूप मेंः
(Visitor of the universities):
- भारत का राष्ट्रपति सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों का विज़िटर होगा।
- वह विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा और निरीक्षण करने के लिये व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है।
- निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर कार्यकारी परिषद कार्रवाई कर सकती है।
प्रीलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (Land Ports Authority of India-LPAI) के 8वें स्थापना दिवस का आयोजन किया गया।
- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीमा पार व्यापार की सुविधा हेतु सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे के निर्माण और भारत की भूमि सीमाओं पर यात्रा हेतु किये गए उत्कृष्ट कार्य के लिये LPAI की सराहना की।
- ज्ञात हो कि भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर में यात्री टर्मिनल भवन के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित है और पाकिस्तान में भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 3-4 किमी. दूर है। यह भारत के गुरदासपुर ज़िले में डेरा बाबा नानक से लगभग 4 किमी. दूर है और पाकिस्तान के लाहौर से लगभग 120 किमी. उत्तर-पूर्व में है। कहा जाता है कि सिख समुदाय के पहले गुरु ने अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण वर्ष यहाँ गुज़ारे जिसके कारण यह स्थान सिख धर्म के अनुयायियों के लिये काफी महत्त्वपूर्ण है। भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के लिये करतारपुर साहिब की ओर जाने वाले गलियारे को खोलने की मांग भारत द्वारा कई अवसरों पर उठाई जाती रही है। इसके पश्चात् नवंबर 2018 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में भारतीय केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2019 में गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती मनाने का प्रस्ताव पारित किया और साथ ही गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर गलियारे के निर्माण और विकास को मंज़ूरी दी गई।
- इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भूमि पत्तन से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे- यात्रा और क्षेत्रीय संपर्क, एकीकृत चेक पोस्ट (ICPs) पर कार्गो संचालन में चुनौतियाँ और एकीकृत चेक पोस्ट के बुनियादी ढाँचे संबंधी आवश्यकताएँ आदि पर चर्चा की गई।
(Land Ports Authority of India)
- भारत की अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्याँमार, नेपाल और पाकिस्तान के साथ लगभग 15000 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। सीमा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर व्यक्तियों, माल और वाहनों के आवागमन के लिये कई निर्दिष्ट प्रवेश और निकास स्थान हैं।
- इस संबंध में विभिन्न सरकारी कार्यों जैसे- सुरक्षा, आव्रजन और सीमा शुल्क आदि के समन्वय तथा नियंत्रण हेतु 1 मार्च, 2012 को भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) की स्थापना की गई थी।
- भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) सीमा प्रबंधन विभाग, गृह मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक निकाय है।
- भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 11 के तहत LPAI को भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में निर्दिष्ट बिंदुओं पर यात्रियों और सामानों की सीमा पार आवाजाही के लिये सुविधाओं को विकसित एवं प्रबंधित करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
वर्ष 2003 में व्यक्तियों, वाहनों और सामानों की सीमा पार आवाजाही के लिये अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्तर की एक समिति ने भारत की भूमि सीमाओं के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर एकीकृत चेक पोस्ट (ICPs) स्थापित करने की सिफारिश की। इसके पश्चात् इस कार्य को करने के लिये एक स्वायत्त एजेंसी की संरचना की सिफारिश करने हेतु एक अंतर-मंत्रालयी कार्यदल का गठन किया गया। अंतर-मंत्रालयी कार्यदल ने विभिन्न विकल्पों पर विचार कर ICPs के निर्माण, प्रबंधन और रखरखाव के लिये एजेंसी हेतु सबसे उपयुक्त मॉडल के रूप में एक सांविधिक निकाय की सिफारिश की। इस प्रकार भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) का गठन किया गया।
भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 11 की उप-धारा (2) में भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण के विभिन्न कार्यों का उल्लेख किया गया हैः
- एकीकृत चेक पोस्ट पर राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और रेलवे के अतिरिक्त सड़कों, टर्मिनलों एवं सहायक भवनों की योजना, निर्माण तथा रखरखाव करना;
- एकीकृत चेक पोस्ट पर संचार, सुरक्षा, माल की हैंडलिंग और स्कैनिंग उपकरणों को खरीदना, स्थापित करना और उनका रखरखाव करना;
- एकीकृत चेक पोस्ट पर नियुक्त कर्मचारियों के लिये आवास की व्यवस्था करना;
- प्राधिकरण को सौंपे गए किसी भी कार्य के निर्वहन के लिये संयुक्त उपक्रम स्थापित करना।
प्रीलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने 11-12 अप्रैल को नई दिल्ली में 'सामाजिक सशक्तीकरण के लिये उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता-2020' (Responsible AI for Social Empowerment-2020) यानी रेज़-2020 (RAISE 2020) नामक एक वृहद् आयोजन की घोषणा की है।
- रेज़-2020 सरकार द्वारा उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के साथ साझेदारी में आयोजित किया जाने वाला भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिखर सम्मेलन है।
- इस शिखर सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सामाजिक सशक्तीकरण, समावेशन एवं परिवर्तन के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल करने के साथ-साथ एक पाठ्यक्रम की तैयारी हेतु विश्व भर के विशेषज्ञों द्वारा विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
- इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।
- केंद्र द्वारा घोषित इस शिखर सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य एक बेहतर भविष्य के लिये सामाजिक परिदृश्य को बदलने हेतु उत्तरदायी AI की क्षमता का उपयोग करने हेतु भारत के विज़न को रेखांकित करना है।
- यह शिखर सम्मेलन डिजिटल युग में AI को नैतिक रूप से विकसित करने की आवश्यकता को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिये विचारों के सुचारु आदान-प्रदान को सक्षम करेगा।
- रेज़-2020 कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत के विज़न और उत्तरदायी AI के माध्यम से सामाजिक सशक्तीकरण, समावेशन और परिवर्तन के लिये रोडमैप बनाने के उद्देश्य से अपनी तरह की पहली वैश्विक बैठक है।
- यह आयोजन एक स्टार्टअप चैलेंज - पिचफेस्ट के साथ शुरू होगा।
- भारत सरकार द्वारा आयोजित इस दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ-साथ विश्व भर की औद्योगिक हस्तियाँ, प्रमुख चिंतक, सरकार के प्रतिनिधि और शिक्षाविद् भाग लेंगे।
- नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने एवं बढ़ावा देने से वर्ष 2035 तक भारत की GDP में 957 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ ही भारत की वार्षिक वृद्धि दर 1.3 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।
- कृषि में अनुप्रयोग से यह किसानों की आय तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने और अपव्यय को कम करने में योगदान कर सकता है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में AI महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच को बढ़ा सकता है। इसकी मदद से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है एवं शिक्षा तक लोगों की पहुँच को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही प्रशासन में दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त व्यापार एवं वाणिज्य में इसका लाभ सिद्ध है।
(Artificial Intelligence)
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो कंप्यूटर के इंसानों की तरह व्यवहार करने की धारणा पर आधारित है।
- सरलतम शब्दों में कहें तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आरंभ 1950 के दशक में ही हो गया था, लेकिन इसकी महत्ता को पहली बार 1970 के दशक में पहचान मिली। जापान ने सबसे पहले इस ओर पहल की और 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर-कंप्यूटर के विकास के लिये 10-वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी।
- इसके पश्चात् अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया। ब्रिटेन ने इसके लिये 'एल्वी' नाम से एक परियोजना की शुरुआत की। यूरोपीय संघ के देशों ने भी 'एस्प्रिट' नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
प्रीलिम्स के लियेः
ब्लैक कार्बन, समतुल्य ब्लैक कार्बन (EBC)
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
वैज्ञानिक पत्रिका 'ऐटमोस्पियरिक एनवायरनमेंट' (Atmospheric Environment) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कृषि अपशिष्ट दहन और वनाग्नि से उत्पन्न 'ब्लैक कार्बन' (Black carbon) के कारण 'गंगोत्री हिमनद' के पिघलने की दर में वृद्धि हो सकती है।
मुख्य बिंदुः
- यह अध्ययन वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (Wadia Institute of Himalayan Geology- WIHG) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था। WIHG संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology- DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
- यह अध्ययन वर्ष 2016 में गंगोत्री हिमनद के पास चिरबासा स्टेशन पर किया गया था।
- पर्वतीय ढालों से घाटियों में रैखिक प्रवाह में बहते हिम संहति को हिमनद कहते हैं। भारत में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में ऐसे हिमनद पाए जाते हैं।
गंगोत्री हिमनदः
- भागीरथी नदी का उद्गम गंगोत्री हिमनद से है, जबकि अलकनंदा का उद्गम अलकनंदा हिमनद से है, देवप्रयाग के निकट दोनों के मिलने के बाद इन्हें गंगा के रूप में जाना जाता है।
शोध के मुख्य निष्कर्षः
- ग्रीष्मकाल में गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में ब्लैक कार्बन की सांद्रता में 400 गुना तक वृद्धि हो जाती है। 'समतुल्य ब्लैक कार्बन' (Equivalent Black Carbon- EBC) की मासिक औसत सांद्रता अगस्त माह में न्यूनतम और मई माह में अधिकतम पाई गई।
- EBC की मौसमी माध्य सांद्रता में मैसमी बदलाव आता है, जिससे यहाँ प्राचीन हिमनद स्रोत (Pristine Glacial Source) की उपस्थिति तथा क्षेत्र में EBC स्रोतों की अनुपस्थिति का पता चलता है।
- शोध के अनुसार, ब्लैक कार्बन की मौसमी चक्रीय परिवर्तनीयता के उत्तरदायी कारकों में कृषि अपशिष्ट दहन (देश के पश्चिमी भाग में) तथा ग्रीष्मकालीन वनाग्नि (हिमालय के कगारों पर) प्रमुख थे।
ब्लैक कार्बन (Black Carbon):
- ब्लैक कार्बन जीवाश्म एवं अन्य जैव ईंधनों के अपूर्ण दहन, ऑटोमोबाइल तथा कोयला आधारित ऊर्जा सयंत्रों से निकलने वाला एक पार्टिकुलेट मैटर है।
- यह एक अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक है जो उत्सर्जन के बाद कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक वायुमंडल में बना रहता है।
समतुल्य ब्लैक कार्बन (EBC):
- ब्लैक कार्बन अपने उत्पति स्रोत के आधार पर अलग-अलग प्रकार के होते हैं तथा वे प्रकाश के विशिष्ट तरंगदैर्ध्य का अवशोषण या परावर्तन करते हैं। इसका मापन ऐथेलोमीटर (Aethalometers) उपकरण द्वारा किया जाता है।
- ब्लैक कार्बन के इन मौलिक कणों को द्रव्यमान (Mass) इकाई में बदलने के लिये, इन उपकरणों का उपयोग किया जाता है तथा परिणाम को समतुल्य ब्लैक कार्बन (EBC) नाम दिया जाता है। यथा- यातायात के ब्लैक कार्बन द्रव्यमान को EBC-TR लिखा जाएगा।
ब्लैक कार्बन के स्रोतः
ब्लैक कार्बन के प्रभावः
- वायुमंडल में इसके अल्प स्थायित्व के बावजूद यह जलवायु, हिमनदों, कृषि, मानव स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव डालता है।
- वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा समतापमंडल (stratosphere) में 18 किमी. की ऊँचाई तक इन कणों के उपस्थित होने के साक्ष्य मौजूद हैं। इसका प्रभाव यह होता है कि ये ब्लैक कार्बन कण लंबे समय तक वातावरण में उपस्थित रहते हैं तथा 'ओज़ोन परत को नुकसान' पहुँचाने वाली अन्य रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिये एक बेहतर स्थिति प्रदान करते हैं।
- ब्लैक कार्बन जैसे वायु प्रदूषक में गर्भवती माँ के फेफड़ों के माध्यम से प्लेसेंटा में स्थापित होने की क्षमता होती है जिसके 'शिशु पर गंभीर स्वास्थ्य परिणाम' प्रदर्शित होते हैं।
हिमनद व परमाफ्रास्ट (Permafrost) पर प्रभावः
- वर्ष 2005 में प्रकाशित लारेंस रिपोर्ट के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में समस्त मृदा का लगभग 30% ब्लैक कार्बन भंडार है। वैश्विक तापन के कारण हिमनद तथा परमाफ्रास्ट लगातार पिघल रहा है तथा इसमें दबा हुआ ब्लैक कार्बन और मीथेन बाहर आ रही है जिससे जलवायु तापन में और तेज़ी आएगी।
- ब्लैक कार्बन के कारण 'हिमालयी ग्लेशियरों' पिघलने की गति भी बढ़ गई है।
आगे की राहः
- वनाग्नि को जलवायु परिवर्तन का एक महत्त्वपूर्ण आयाम मानते हुए इससे निपटने के लिये हमें वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण की आवश्यकता है, जो 'वनाग्नि और उससे संबंधित पहलुओं' को संबोधित करती हो।
- कृषि अपशिष्टों यथा- 'पराली' आदि का व्यावसायीकरण किया जाना चाहिये ताकि इनके दहन में कमी आ सके।
प्रीलिम्स के लियेः
इरावदी डॉल्फिन, चिल्का झील, भीतरकनिका व गहिरमाथा अभयारण्य (इनके अध्ययन के लिये मैप का उपयोग कीजिये)
मेन्स के लियेः
जलवायु परिवर्तन का जीवों पर प्रभाव, जीव संरक्षण व पर्यावरण प्रभाव आकलन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर-लेखन में इस प्रकार के बिंदुओं को संदर्भ अथवा उदाहरण (आवश्यकता) के तौर पर उपयोग किया जा सकता है।
चर्चा में क्यों?
19 जनवरी, 2020 को ओडिशा राज्य के वन विभाग द्वारा राज्य में भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान तथा उसमें स्थित गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में एक दिवसीय डॉल्फिन जनगणना का आयोजन किया गया जिसमें पिछली जनगणना के मुकाबले इस वर्ष डॉल्फिन की संख्या में कमी देखने को मिली।
मुख्य बिंदुः
- 24 फरवरी, 2020 को प्रकाशित डॉल्फिन जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में डॉल्फिन की कुल संख्या वर्ष 2020 में 233 दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2019 यह संख्या 259 तथा वर्ष 2015 में 270 थी।
- वर्ष 2020 में हुई डॉल्फिन जनगणना में केवल 62 डॉल्फिन्स को ही गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में देखा गया।
- वर्ष 2019 में गहिरमाथा में संपन्न डॉल्फिन जनगणना में जहाँ इनकी संख्या 126 आँकी गई थी, वहीं वर्ष 2015 की जनगणना में यह संख्या 307 थी।
- गहिरमाथा में हुई डॉल्फिन जनगणना में 60 इरावदी डॉल्फिन (Irrawaddy Dolphins) तथा 2 बोटल नोज़ डॉल्फिन (Bottle-nose Dolphins) ही गहिरमाथा में देखी गई हैं। जबकि वर्ष 2019 में हुई डॉल्फिन जनगणना में 14 इरावदी डॉल्फिन, 14 बोटल नोज़ डॉल्फिन तथा 98 हंपबैक डॉल्फिन (Humpback Dolphins) देखी गई।
- गहिरमाथा में प्रथम डॉल्फिन जनगणना वर्ष 2015 में संपन्न हुई जिसमें 58 इरावदी डाॅल्फिन, 23 बोटल नोज़ डॉल्फिन्स,123 सूसा चिनेंसिस डॉल्फिन (Sousa Chinensis Dolphins), 50 सोसा प्ल्म्बेरा डॉल्फिन (Sousa plumbera dolphins),15 पेनट्रोपिक स्पॉटेड डॉल्फिन (Pantropical Spotted Dolphins), 1 फिनलेस प्रपोईस डॉल्फिन (Finless Porpoise Dolphin) यानी वर्ष 2015 में डॉल्फिन की कुल संख्या 270 पाई गई थी।
- हालाँकि प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल डॉल्फिन की संख्या में गिरावट के बावजूद चिल्का झील में डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि देखी गई है जो वर्ष 2019 के 130 की तुलना में वर्ष 2020 में बढ़कर 146 हो गई हैं।
- वर्ष 2020 की गहिरमाथा डॉल्फिन जनगणना इस क्रम की चौथी डॉल्फिन जनगणना है।
- सर्वप्रथम गहिरमाथा में डॉल्फिन जनगणना वर्ष 2015 में संपन्न कराई गई उसके बाद वर्ष 2018 और वर्ष 2019 की जनगणना संपन्न की गई।
डॉल्फिन की संख्या में गिरावट के कारणः
- जलवायु परिवर्तन, प्रतिकूल मौसम, अवैध शिकार आदि कुछ मुख्य कारण हैं जिनके चलते राज्य में डॉल्फिन की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- इसके अलावा शिकार के दौरान जाल में फँसकर या फिर मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से टकराकर भी इनकी मृत्यु हो जाती है जिसके चलते इनकी संख्या में कमी दर्ज की गई है।
- जलवायु परिवर्तन एवं अत्यधिक वर्षा के कारण जल की लवणता कम होने की वजह से इस वर्ष कई इरावदी डॉल्फिन ने गहिरमाथा से चिल्का झील की तरफ तथा हंपबैक डॉल्फिन ने समुद्र की तरफ प्रवास किया है जिस कारण गहिरमाथा में इस वर्ष जनगणना के दौरान एक भी हमबैक डॉल्फिन को नहीं देखा गया।
- गहिरमाथा में डॉल्फिन की संख्या में हुई कमी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का सूचक नहीं है, यह गहिरमाथा में हुए पारिस्थितिकी बदलाव की तरफ इशारा करता है।
गहिरमाथा समुद्री अभयारण्यः
- गहिरमाथा ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है।
- यह ओडिशा का एकमात्र समुद्री अभयारण्य है।
- गहिरमाथा का समुद्री तट ओलिव रिडले कछुओं (Olive Ridleys Turtuls) का विश्व में सबसे बड़ा प्रजनन स्थल है।
चिल्का झील :
- यह ओडिशा राज्य के पूर्वी तट पर स्थित है जो पुरी (Puri), खुर्दा (Khurda), गंजम (Ganjam) ज़िलों में विस्तारित है।
- यह एशिया की सबसे बड़ी आंतरिक खारे पानी की लैगून झील है।
- वर्ष 1971 में इसे रामसर अभिसमय के तहत आर्द्रभूमि स्थल के रूप में शामिल किया गया है।
- यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों के लिये सबसे बड़ा शीतकालीन मैदान है।
- चिल्का झील के दक्षिण में स्थित सतपद (Satapada) इरावदी डॉल्फिन के लिये प्रसिद्ध है।
- विश्व में इरावदी डॉल्फिन की सर्वाधिक आबादी चिल्का झील में ही देखी जाती है।
- डॉल्फिन को भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनयम 1972 की अनुसूची 1 में शामिल किया गया है।
- यह लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय (Convention on International Trade in Endangered Species) के अनुबंध 1 तथा प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (Convention on Migratory Species) के अनुबंध II में शामिल है।
- प्रकृति संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Union for the Conservation of Nature- IUCN) की रेड लिस्ट में डाॅल्फिन को संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
3 मार्च, 2020 को दुनिया भर में विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस वन्यजीवों के संरक्षण के महत्त्व के बारे में जागरूकता के प्रसार हेतु प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है। 20 दिसंबर, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मार्च को विश्व वन्य जीव दिवस के रूप में मानने का निर्णय लिया था। ज्ञात हो कि 3 मार्च, 1973 में वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) को अंगीकृत किया गया था। वर्ष 2020 के लिये विश्व वन्यजीव दिवस की थीम "धरती पर सभी जीवों का संरक्षण (Sustaining all life on Earth) है। वर्ष 2020 को जैव विविधता का वर्ष माना गया है। भारत के लिये यह वर्ष मुख्य रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी वर्ष भारत ने जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध कार्रवाई के लिये संगठन CoP-13 की अध्यक्षता प्राप्त की है। इस अवसर पर देश में जागरूकता शिविर, फोटो प्रदर्शनी तथा छात्रों और आम जनता को वन्यजीवों के संरक्षण का महत्त्व बताने के लिये कई कार्यक्रम आयोजित किये गए हैं।
श्रम एवं रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल की डोरस्टेप डिलीवरी के लिये 'हमसफर' मोबाइल एप लॉन्च किया है। इस एप की सहायता से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होटल, अस्पताल और हाउसिंग सोसाइटी अपने घर पर डीज़ल की डिलीवरी की जाएगी। अभी यह सुविधा गुरुग्राम, गाज़ियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, हापुड, कुंडली, माणेसर और बहादुरगढ़ में उपलब्ध होगी। हमसफर के पास अभी 12 टैंकर हैं। इनकी क्षमता 4000 से 6000 लीटर की है। इन टैंकरों के अलावा हमसफर के पास 35 लोगों की एक अनुभवी टीम भी है।
देश भर में 1 मार्च से 7 मार्च, 2020 तक जन औषधि सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य जाँच शिविर, जन औषधि परिचर्चा और "जन औषधि का साथ" जैसी विभिन्न गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। सप्ताह के दौरान जन औषधि केंद्रों के माध्यम से देश भर में रक्तचाप, मधुमेह की जाँच, डाॅक्टरों द्वारा निशुल्क चिकित्सा जाँच और दवाओं का मुफ्त वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविरों में आने वाले लोगों को जन औषधि केंद्रों में बेची जा रही रही दवाओं की गुणवत्ता और उनकी कम कीमतों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह कुलार का 28 फरवरी, 2020 को निधन हो गया। हॉकी खिलाड़ी बलवीर सिंह का जन्म वर्ष 1942 में पंजाब के संसारपुर गाँव में हुआ था। बलबीर सिंह कुलार ने हॉकी की शुरुआत स्कूल में पढ़ाई के दौरान की थी। पढ़ाई के साथ-साथ अच्छा खेलने के कारण उन्हें पंजाब की हॉकी टीम में स्थान मिला। वर्ष 1962 में बलबीर सिंह कुलार को पंजाब सरकार ने पंजाब पुलिस में ASI के तौर पर नियुक्त किया। बलवीर सिंह कुलार ने वर्ष 1963 में भारतीय टीम की तरफ से अपना पहला इंटरनेशनल हॉकी मैच फ्रांँस में खेला था। ध्यातव्य है कि कुलार वर्ष 1966 में बैंकॉक एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक, वर्ष 1968 में मैक्सिको ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। बलबीर सिंह कुलार को वर्ष 1999 में अर्जुन अवार्ड और 2009 में पद्मश्री पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
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प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने अपने स्थापना दिवस पर डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर हेतु स्टार रेटिंग कार्यक्रम शुरू किया है। मुख्य बिंदुः - केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित BEE ने अपने उन्नीसवें स्थापना दिवस के अवसर पर ऊर्जा कुशल भारत के निर्माण के लिये एक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु कार्यक्रम का आयोजन किया। - इस अवसर पर ऊर्जा दक्षता इनफॉर्मेशन टूल की भी शुरुआत की गई। - BEE द्वारा 'वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट' के सहयोग से बनाए गए इस पोर्टल के ज़रिये विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के बारे में जानकारी और आँकड़े हासिल किये जा सकेंगे। - उदित एक उपयोगकर्त्ता अनुकूलित मंच है जो उद्योग, उपकरण, भवन, परिवहन, नगरपालिका और कृषि क्षेत्रों में भारत के ऊर्जा दक्षता परिदृश्य की व्याख्या करता है। - उदित, ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में वृद्धि के लिये सरकार द्वारा उठाए गए क्षमता निर्माण संबंधी नई पहलों की भी प्रदर्शित करेगा। क्या है डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर हेतु स्टार रेटिंग कार्यक्रम? - स्टार लेबलिंग कार्यक्रम ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार एक के तहत एक अधिदेश के रूप में BEE द्वारा प्रारंभ किया गया है। - इस कार्यक्रम के माध्यम से डीप फ्रीज़र और लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर को स्टार लेबलिंग अर्थात् स्टार रेटिंग कार्यक्रम के दायरे में लाया गया है। स्टार लेबलिंगः - स्टार लेबलिंग के माध्यम से उपकरण विनिर्माता यह बताता है कि उसका कोई उपकरण बिजली खर्च के हिसाब से कितना किफायती है। - डीप फ्रीज़र के लिये स्टार लेबलिंग कार्यक्रम स्वैच्छिक आधार पर शुरू किया गया है और ऊर्जा खपत मानदंड इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस तक प्रभावी होगा। वहीं हल्के वाणिज्यिक एयर कंडीशनर के लिये यह दो मार्च, दो हज़ार बीस से इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस तक स्वैच्छिक होगा। डीप फ्रीज़र तथा लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनरः - डीप फ्रीज़र का उपयोग खाने-पीने का सामान, फल, सब्जी जैसे पदार्थों को लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिये होता है। वहीं हल्के वाणिज्यिक एयर कंडीशनर के तहत तीन टन से पाँच टन तक की क्षमता के एसी आते हैं। - इस कार्यक्रम के तहत BEE ने अब तक चौबीस उपकरणों को कवर किया है, जिसमें दस उपकरण अनिवार्य स्टार लेबलिंग के अधीन हैं। - स्वैच्छिक स्टार लेबलिंग के तहत इन दो नए उपकरणों के लॉन्च होने से अब इस कार्यक्रम में छब्बीस उपकरण शामिल हो गए हैं। - डीप फ्रीज़र्स की वार्षिक ऊर्जा खपत का ऊर्जा खपत मानक पर आधारित है। - डीप फ्रीज़र्स का उपयोग मुख्य रूप से वाणिज्यिक प्रशीतन क्षेत्र में किया जाता है और अगले दशक तक इनके दो गुना हो जाने की संभावना है जिससे बिजली की खपत के बढ़ने की भी संभावना है। - वित्तीय वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में चेस्ट और अपराइट डीप फ्रीज़र सेगमेंट के कुल संगठित बाज़ार का आकार लगभग पाँच-छः लाख यूनिट था। इसका बाज़ार पिछले तीन वर्षों में अट्ठाईस% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ दोगुना से अधिक हो गया है तथा इसके और बढ़ने की भी उम्मीद है। चेस्ट प्रकार के फ्रीजर का हिस्सा बाज़ार में लगभग निन्यानवे% है, जबकि अपराइट प्रकार के फ्रीज़र्स का बाज़ार में हिस्सा लगभग एक% है। - लगभग तीन.बहत्तर लाख डीप फ्रीज़र यूनिटस का विदेश से आयात किया गया है जबकि शेष स्वदेशी तौर पर निर्मित हैं। - डीप फ्रीज़र को स्टार रेटिंग कार्यक्रम में लाने से वर्ष दो हज़ार तीस तक छः.दो अरब यूनिट बिजली की बचत होगी जो कार्बन डाइऑक्साइड के पाँच.तीन मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस की कमी के बराबर है। वहीं लाइट कमर्शियल एयर कंडीशनर के मामले में दो.आठ अरब यूनिट बिजली बचत का अनुमान है अर्थात् कुल मिलाकर इससे नौ अरब यूनिट बिजली की बचत होगी जो कार्बन डाइऑक्साइड के दो.चार मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस की कमी के बराबर है। ऊर्जा कुशल भारत के विकास के लिये हितधारकों के साथ परामर्शः - भारत के ऊर्जा क्षेत्र का निर्धारण सरकार की विभिन्न विकास संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं से निर्धारित होगा, जैसे- वर्ष दो हज़ार बाईस तक अक्षय ऊर्जा की एक सौ पचहत्तर गीगावाट क्षमता स्थापित करना, सभी के लिये चौबीसXसात पॉवर, सभी के लिये वर्ष दो हज़ार बाईस तक आवास, एक सौ स्मार्ट सिटी मिशन, ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना, रेलवे सेक्टर का विद्युतीकरण, घरों का एक सौ% विद्युतीकरण, कृषि पंप सेटों का सोलराइजेशन, और खाना पकाने की स्वच्छ विधियों को बढ़ावा देना। - भारत महत्त्वाकांक्षी ऊर्जा दक्षता नीतियों के कार्यान्वयन से वर्ष दो हज़ार चालीस तक तीन सौ GW बिजली की बचत होगी। - वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारहके दौरान ऊर्जा दक्षता उपायों के सफल कार्यान्वयन से देश की कुल बिजली खपत में सात.चौदह% की बचत और एक सौ आठ.अट्ठाईस मिलियन टन COदो उत्सर्जन में कमी आई है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरोः - भारत सरकार ने इसकी स्थापना ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार एक के उपबंधों के अंतर्गत एक मार्च, दो हज़ार दो को की थी। - ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार एक के समग्र ढाँचे के अंदर स्व-विनियम और बाज़ार सिद्धांतों पर महत्त्व देते हुए ऐसी नीतियों और रणनीतियों का विकास करने में सहायता प्रदान करना है जिनका प्रमुख उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की गहनता को कम करना है। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने दो मार्च, दो हज़ार बीस को राज्यसभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, दो हज़ार उन्नीस पेश किया। मुख्य बिंदुः - इस विधेयक को ग्यारह दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को लोकसभा में पेश किया गया था तथा अगले दिन इसे पारित किया गया। - इस विधेयक का उद्देश्य भारत के तीन डीम्ड विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बदलना है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में परिवर्तित किये जाने वाले डीम्ड विश्वविद्यालयः - राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान - लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ - राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ - प्रस्तावित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के कार्यः - संस्कृत भाषा के ज्ञान का प्रसार करना और संस्कृत भाषा को और उन्नत बनाना। - मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के एकीकृत पाठ्यक्रम के लिये विशेष प्रावधान करना। - संस्कृत भाषा और उससे संबद्ध विषयों के समग्र विकास और संरक्षण के लिये लोगों को प्रशिक्षित करना। - शक्तियाँः - अध्ययन के पाठ्यक्रम का वर्णन करना और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना। - डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करना। - दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से सुविधाएँ प्रदान करना। - एक कॉलेज या संस्थान को स्वायत्त स्थिति प्रदान करना। - संस्कृत और संबद्ध विषयों में शिक्षा हेतु निर्देश प्रदान करना। - विश्वविद्यालय के प्राधिकारः - एक न्यायालय के रूप मेंः - यह विश्वविद्यालय की नीतियों की समीक्षा करेगा और इसके विकास के लिये उपाय सुझाएगा। - कार्यकारी परिषदः - यह विश्वद्यालय का एक मुख्य कार्यकारी निकाय होगा। - केंद्र द्वारा नियुक्त इस पंद्रह-सदस्यीय परिषद में कुलपति को भी शामिल किया जाएगा, जो इस बोर्ड का अध्यक्ष होगा। - इस समिति में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव, और संस्कृत या संबद्ध विषयों के क्षेत्र से दो प्रतिष्ठित शिक्षाविद् शामिल होंगे। - यह परिषद शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति का प्रावधान करेगी और विश्वविद्यालय के राजस्व और संपत्ति का प्रबंधन करेगी। - एक अकादमिक और गतिविधि परिषद होगी जो अकादमिक नीतियों की निगरानी करेगी। - एक 'बोर्ड ऑफ स्टडीज़' होगा जो शोध के लिये विषयों को मंज़ूरी देगा और शिक्षण के मानकों में सुधार के उपायों की सिफारिश करेगा। - एक न्यायालय के रूप मेंः : - भारत का राष्ट्रपति सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों का विज़िटर होगा। - वह विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा और निरीक्षण करने के लिये व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है। - निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर कार्यकारी परिषद कार्रवाई कर सकती है। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण के आठवें स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। - केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीमा पार व्यापार की सुविधा हेतु सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे के निर्माण और भारत की भूमि सीमाओं पर यात्रा हेतु किये गए उत्कृष्ट कार्य के लिये LPAI की सराहना की। - ज्ञात हो कि भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर में यात्री टर्मिनल भवन के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित है और पाकिस्तान में भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग तीन-चार किमी. दूर है। यह भारत के गुरदासपुर ज़िले में डेरा बाबा नानक से लगभग चार किमी. दूर है और पाकिस्तान के लाहौर से लगभग एक सौ बीस किमी. उत्तर-पूर्व में है। कहा जाता है कि सिख समुदाय के पहले गुरु ने अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण वर्ष यहाँ गुज़ारे जिसके कारण यह स्थान सिख धर्म के अनुयायियों के लिये काफी महत्त्वपूर्ण है। भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के लिये करतारपुर साहिब की ओर जाने वाले गलियारे को खोलने की मांग भारत द्वारा कई अवसरों पर उठाई जाती रही है। इसके पश्चात् नवंबर दो हज़ार अट्ठारह में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में भारतीय केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष दो हज़ार उन्नीस में गुरु नानक देव जी की पाँच सौ पचासवीं जयंती मनाने का प्रस्ताव पारित किया और साथ ही गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर गलियारे के निर्माण और विकास को मंज़ूरी दी गई। - इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भूमि पत्तन से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे- यात्रा और क्षेत्रीय संपर्क, एकीकृत चेक पोस्ट पर कार्गो संचालन में चुनौतियाँ और एकीकृत चेक पोस्ट के बुनियादी ढाँचे संबंधी आवश्यकताएँ आदि पर चर्चा की गई। - भारत की अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्याँमार, नेपाल और पाकिस्तान के साथ लगभग पंद्रह हज़ार किलोग्राममीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। सीमा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर व्यक्तियों, माल और वाहनों के आवागमन के लिये कई निर्दिष्ट प्रवेश और निकास स्थान हैं। - इस संबंध में विभिन्न सरकारी कार्यों जैसे- सुरक्षा, आव्रजन और सीमा शुल्क आदि के समन्वय तथा नियंत्रण हेतु एक मार्च, दो हज़ार बारह को भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण की स्थापना की गई थी। - भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण सीमा प्रबंधन विभाग, गृह मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक निकाय है। - भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, दो हज़ार दस की धारा ग्यारह के तहत LPAI को भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में निर्दिष्ट बिंदुओं पर यात्रियों और सामानों की सीमा पार आवाजाही के लिये सुविधाओं को विकसित एवं प्रबंधित करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। वर्ष दो हज़ार तीन में व्यक्तियों, वाहनों और सामानों की सीमा पार आवाजाही के लिये अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्तर की एक समिति ने भारत की भूमि सीमाओं के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर एकीकृत चेक पोस्ट स्थापित करने की सिफारिश की। इसके पश्चात् इस कार्य को करने के लिये एक स्वायत्त एजेंसी की संरचना की सिफारिश करने हेतु एक अंतर-मंत्रालयी कार्यदल का गठन किया गया। अंतर-मंत्रालयी कार्यदल ने विभिन्न विकल्पों पर विचार कर ICPs के निर्माण, प्रबंधन और रखरखाव के लिये एजेंसी हेतु सबसे उपयुक्त मॉडल के रूप में एक सांविधिक निकाय की सिफारिश की। इस प्रकार भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण का गठन किया गया। भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, दो हज़ार दस की धारा ग्यारह की उप-धारा में भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण के विभिन्न कार्यों का उल्लेख किया गया हैः - एकीकृत चेक पोस्ट पर राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और रेलवे के अतिरिक्त सड़कों, टर्मिनलों एवं सहायक भवनों की योजना, निर्माण तथा रखरखाव करना; - एकीकृत चेक पोस्ट पर संचार, सुरक्षा, माल की हैंडलिंग और स्कैनिंग उपकरणों को खरीदना, स्थापित करना और उनका रखरखाव करना; - एकीकृत चेक पोस्ट पर नियुक्त कर्मचारियों के लिये आवास की व्यवस्था करना; - प्राधिकरण को सौंपे गए किसी भी कार्य के निर्वहन के लिये संयुक्त उपक्रम स्थापित करना। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? केंद्र सरकार ने ग्यारह-बारह अप्रैल को नई दिल्ली में 'सामाजिक सशक्तीकरण के लिये उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता-दो हज़ार बीस' यानी रेज़-दो हज़ार बीस नामक एक वृहद् आयोजन की घोषणा की है। - रेज़-दो हज़ार बीस सरकार द्वारा उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के साथ साझेदारी में आयोजित किया जाने वाला भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन है। - इस शिखर सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सामाजिक सशक्तीकरण, समावेशन एवं परिवर्तन के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने के साथ-साथ एक पाठ्यक्रम की तैयारी हेतु विश्व भर के विशेषज्ञों द्वारा विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। - इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। - केंद्र द्वारा घोषित इस शिखर सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य एक बेहतर भविष्य के लिये सामाजिक परिदृश्य को बदलने हेतु उत्तरदायी AI की क्षमता का उपयोग करने हेतु भारत के विज़न को रेखांकित करना है। - यह शिखर सम्मेलन डिजिटल युग में AI को नैतिक रूप से विकसित करने की आवश्यकता को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिये विचारों के सुचारु आदान-प्रदान को सक्षम करेगा। - रेज़-दो हज़ार बीस कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत के विज़न और उत्तरदायी AI के माध्यम से सामाजिक सशक्तीकरण, समावेशन और परिवर्तन के लिये रोडमैप बनाने के उद्देश्य से अपनी तरह की पहली वैश्विक बैठक है। - यह आयोजन एक स्टार्टअप चैलेंज - पिचफेस्ट के साथ शुरू होगा। - भारत सरकार द्वारा आयोजित इस दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ-साथ विश्व भर की औद्योगिक हस्तियाँ, प्रमुख चिंतक, सरकार के प्रतिनिधि और शिक्षाविद् भाग लेंगे। - नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने एवं बढ़ावा देने से वर्ष दो हज़ार पैंतीस तक भारत की GDP में नौ सौ सत्तावन बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ ही भारत की वार्षिक वृद्धि दर एक.तीन प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। - कृषि में अनुप्रयोग से यह किसानों की आय तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने और अपव्यय को कम करने में योगदान कर सकता है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष दो हज़ार चौबीस-पच्चीस तक भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में AI महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। - कृत्रिम बुद्धिमत्ता गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच को बढ़ा सकता है। इसकी मदद से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है एवं शिक्षा तक लोगों की पहुँच को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही प्रशासन में दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त व्यापार एवं वाणिज्य में इसका लाभ सिद्ध है। - कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो कंप्यूटर के इंसानों की तरह व्यवहार करने की धारणा पर आधारित है। - सरलतम शब्दों में कहें तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है। - कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आरंभ एक हज़ार नौ सौ पचास के दशक में ही हो गया था, लेकिन इसकी महत्ता को पहली बार एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में पहचान मिली। जापान ने सबसे पहले इस ओर पहल की और एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर-कंप्यूटर के विकास के लिये दस-वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। - इसके पश्चात् अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया। ब्रिटेन ने इसके लिये 'एल्वी' नाम से एक परियोजना की शुरुआत की। यूरोपीय संघ के देशों ने भी 'एस्प्रिट' नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की थी। प्रीलिम्स के लियेः ब्लैक कार्बन, समतुल्य ब्लैक कार्बन मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? वैज्ञानिक पत्रिका 'ऐटमोस्पियरिक एनवायरनमेंट' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कृषि अपशिष्ट दहन और वनाग्नि से उत्पन्न 'ब्लैक कार्बन' के कारण 'गंगोत्री हिमनद' के पिघलने की दर में वृद्धि हो सकती है। मुख्य बिंदुः - यह अध्ययन वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था। WIHG संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। - यह अध्ययन वर्ष दो हज़ार सोलह में गंगोत्री हिमनद के पास चिरबासा स्टेशन पर किया गया था। - पर्वतीय ढालों से घाटियों में रैखिक प्रवाह में बहते हिम संहति को हिमनद कहते हैं। भारत में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में ऐसे हिमनद पाए जाते हैं। गंगोत्री हिमनदः - भागीरथी नदी का उद्गम गंगोत्री हिमनद से है, जबकि अलकनंदा का उद्गम अलकनंदा हिमनद से है, देवप्रयाग के निकट दोनों के मिलने के बाद इन्हें गंगा के रूप में जाना जाता है। शोध के मुख्य निष्कर्षः - ग्रीष्मकाल में गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में ब्लैक कार्बन की सांद्रता में चार सौ गुना तक वृद्धि हो जाती है। 'समतुल्य ब्लैक कार्बन' की मासिक औसत सांद्रता अगस्त माह में न्यूनतम और मई माह में अधिकतम पाई गई। - EBC की मौसमी माध्य सांद्रता में मैसमी बदलाव आता है, जिससे यहाँ प्राचीन हिमनद स्रोत की उपस्थिति तथा क्षेत्र में EBC स्रोतों की अनुपस्थिति का पता चलता है। - शोध के अनुसार, ब्लैक कार्बन की मौसमी चक्रीय परिवर्तनीयता के उत्तरदायी कारकों में कृषि अपशिष्ट दहन तथा ग्रीष्मकालीन वनाग्नि प्रमुख थे। ब्लैक कार्बन : - ब्लैक कार्बन जीवाश्म एवं अन्य जैव ईंधनों के अपूर्ण दहन, ऑटोमोबाइल तथा कोयला आधारित ऊर्जा सयंत्रों से निकलने वाला एक पार्टिकुलेट मैटर है। - यह एक अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक है जो उत्सर्जन के बाद कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक वायुमंडल में बना रहता है। समतुल्य ब्लैक कार्बन : - ब्लैक कार्बन अपने उत्पति स्रोत के आधार पर अलग-अलग प्रकार के होते हैं तथा वे प्रकाश के विशिष्ट तरंगदैर्ध्य का अवशोषण या परावर्तन करते हैं। इसका मापन ऐथेलोमीटर उपकरण द्वारा किया जाता है। - ब्लैक कार्बन के इन मौलिक कणों को द्रव्यमान इकाई में बदलने के लिये, इन उपकरणों का उपयोग किया जाता है तथा परिणाम को समतुल्य ब्लैक कार्बन नाम दिया जाता है। यथा- यातायात के ब्लैक कार्बन द्रव्यमान को EBC-TR लिखा जाएगा। ब्लैक कार्बन के स्रोतः ब्लैक कार्बन के प्रभावः - वायुमंडल में इसके अल्प स्थायित्व के बावजूद यह जलवायु, हिमनदों, कृषि, मानव स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव डालता है। - वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा समतापमंडल में अट्ठारह किमी. की ऊँचाई तक इन कणों के उपस्थित होने के साक्ष्य मौजूद हैं। इसका प्रभाव यह होता है कि ये ब्लैक कार्बन कण लंबे समय तक वातावरण में उपस्थित रहते हैं तथा 'ओज़ोन परत को नुकसान' पहुँचाने वाली अन्य रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिये एक बेहतर स्थिति प्रदान करते हैं। - ब्लैक कार्बन जैसे वायु प्रदूषक में गर्भवती माँ के फेफड़ों के माध्यम से प्लेसेंटा में स्थापित होने की क्षमता होती है जिसके 'शिशु पर गंभीर स्वास्थ्य परिणाम' प्रदर्शित होते हैं। हिमनद व परमाफ्रास्ट पर प्रभावः - वर्ष दो हज़ार पाँच में प्रकाशित लारेंस रिपोर्ट के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में समस्त मृदा का लगभग तीस% ब्लैक कार्बन भंडार है। वैश्विक तापन के कारण हिमनद तथा परमाफ्रास्ट लगातार पिघल रहा है तथा इसमें दबा हुआ ब्लैक कार्बन और मीथेन बाहर आ रही है जिससे जलवायु तापन में और तेज़ी आएगी। - ब्लैक कार्बन के कारण 'हिमालयी ग्लेशियरों' पिघलने की गति भी बढ़ गई है। आगे की राहः - वनाग्नि को जलवायु परिवर्तन का एक महत्त्वपूर्ण आयाम मानते हुए इससे निपटने के लिये हमें वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण की आवश्यकता है, जो 'वनाग्नि और उससे संबंधित पहलुओं' को संबोधित करती हो। - कृषि अपशिष्टों यथा- 'पराली' आदि का व्यावसायीकरण किया जाना चाहिये ताकि इनके दहन में कमी आ सके। प्रीलिम्स के लियेः इरावदी डॉल्फिन, चिल्का झील, भीतरकनिका व गहिरमाथा अभयारण्य मेन्स के लियेः जलवायु परिवर्तन का जीवों पर प्रभाव, जीव संरक्षण व पर्यावरण प्रभाव आकलन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर-लेखन में इस प्रकार के बिंदुओं को संदर्भ अथवा उदाहरण के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। चर्चा में क्यों? उन्नीस जनवरी, दो हज़ार बीस को ओडिशा राज्य के वन विभाग द्वारा राज्य में भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान तथा उसमें स्थित गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में एक दिवसीय डॉल्फिन जनगणना का आयोजन किया गया जिसमें पिछली जनगणना के मुकाबले इस वर्ष डॉल्फिन की संख्या में कमी देखने को मिली। मुख्य बिंदुः - चौबीस फरवरी, दो हज़ार बीस को प्रकाशित डॉल्फिन जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में डॉल्फिन की कुल संख्या वर्ष दो हज़ार बीस में दो सौ तैंतीस दर्ज की गई, जबकि वर्ष दो हज़ार उन्नीस यह संख्या दो सौ उनसठ तथा वर्ष दो हज़ार पंद्रह में दो सौ सत्तर थी। - वर्ष दो हज़ार बीस में हुई डॉल्फिन जनगणना में केवल बासठ डॉल्फिन्स को ही गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में देखा गया। - वर्ष दो हज़ार उन्नीस में गहिरमाथा में संपन्न डॉल्फिन जनगणना में जहाँ इनकी संख्या एक सौ छब्बीस आँकी गई थी, वहीं वर्ष दो हज़ार पंद्रह की जनगणना में यह संख्या तीन सौ सात थी। - गहिरमाथा में हुई डॉल्फिन जनगणना में साठ इरावदी डॉल्फिन तथा दो बोटल नोज़ डॉल्फिन ही गहिरमाथा में देखी गई हैं। जबकि वर्ष दो हज़ार उन्नीस में हुई डॉल्फिन जनगणना में चौदह इरावदी डॉल्फिन, चौदह बोटल नोज़ डॉल्फिन तथा अट्ठानवे हंपबैक डॉल्फिन देखी गई। - गहिरमाथा में प्रथम डॉल्फिन जनगणना वर्ष दो हज़ार पंद्रह में संपन्न हुई जिसमें अट्ठावन इरावदी डाॅल्फिन, तेईस बोटल नोज़ डॉल्फिन्स,एक सौ तेईस सूसा चिनेंसिस डॉल्फिन , पचास सोसा प्ल्म्बेरा डॉल्फिन ,पंद्रह पेनट्रोपिक स्पॉटेड डॉल्फिन , एक फिनलेस प्रपोईस डॉल्फिन यानी वर्ष दो हज़ार पंद्रह में डॉल्फिन की कुल संख्या दो सौ सत्तर पाई गई थी। - हालाँकि प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल डॉल्फिन की संख्या में गिरावट के बावजूद चिल्का झील में डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि देखी गई है जो वर्ष दो हज़ार उन्नीस के एक सौ तीस की तुलना में वर्ष दो हज़ार बीस में बढ़कर एक सौ छियालीस हो गई हैं। - वर्ष दो हज़ार बीस की गहिरमाथा डॉल्फिन जनगणना इस क्रम की चौथी डॉल्फिन जनगणना है। - सर्वप्रथम गहिरमाथा में डॉल्फिन जनगणना वर्ष दो हज़ार पंद्रह में संपन्न कराई गई उसके बाद वर्ष दो हज़ार अट्ठारह और वर्ष दो हज़ार उन्नीस की जनगणना संपन्न की गई। डॉल्फिन की संख्या में गिरावट के कारणः - जलवायु परिवर्तन, प्रतिकूल मौसम, अवैध शिकार आदि कुछ मुख्य कारण हैं जिनके चलते राज्य में डॉल्फिन की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। - इसके अलावा शिकार के दौरान जाल में फँसकर या फिर मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से टकराकर भी इनकी मृत्यु हो जाती है जिसके चलते इनकी संख्या में कमी दर्ज की गई है। - जलवायु परिवर्तन एवं अत्यधिक वर्षा के कारण जल की लवणता कम होने की वजह से इस वर्ष कई इरावदी डॉल्फिन ने गहिरमाथा से चिल्का झील की तरफ तथा हंपबैक डॉल्फिन ने समुद्र की तरफ प्रवास किया है जिस कारण गहिरमाथा में इस वर्ष जनगणना के दौरान एक भी हमबैक डॉल्फिन को नहीं देखा गया। - गहिरमाथा में डॉल्फिन की संख्या में हुई कमी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का सूचक नहीं है, यह गहिरमाथा में हुए पारिस्थितिकी बदलाव की तरफ इशारा करता है। गहिरमाथा समुद्री अभयारण्यः - गहिरमाथा ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है। - यह ओडिशा का एकमात्र समुद्री अभयारण्य है। - गहिरमाथा का समुद्री तट ओलिव रिडले कछुओं का विश्व में सबसे बड़ा प्रजनन स्थल है। चिल्का झील : - यह ओडिशा राज्य के पूर्वी तट पर स्थित है जो पुरी , खुर्दा , गंजम ज़िलों में विस्तारित है। - यह एशिया की सबसे बड़ी आंतरिक खारे पानी की लैगून झील है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में इसे रामसर अभिसमय के तहत आर्द्रभूमि स्थल के रूप में शामिल किया गया है। - यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों के लिये सबसे बड़ा शीतकालीन मैदान है। - चिल्का झील के दक्षिण में स्थित सतपद इरावदी डॉल्फिन के लिये प्रसिद्ध है। - विश्व में इरावदी डॉल्फिन की सर्वाधिक आबादी चिल्का झील में ही देखी जाती है। - डॉल्फिन को भारतीय वन्यजीव अधिनयम एक हज़ार नौ सौ बहत्तर की अनुसूची एक में शामिल किया गया है। - यह लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय के अनुबंध एक तथा प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय के अनुबंध II में शामिल है। - प्रकृति संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय संघ की रेड लिस्ट में डाॅल्फिन को संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में शामिल किया गया है। तीन मार्च, दो हज़ार बीस को दुनिया भर में विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस वन्यजीवों के संरक्षण के महत्त्व के बारे में जागरूकता के प्रसार हेतु प्रत्येक वर्ष तीन मार्च को मनाया जाता है। बीस दिसंबर, दो हज़ार तेरह को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने तीन मार्च को विश्व वन्य जीव दिवस के रूप में मानने का निर्णय लिया था। ज्ञात हो कि तीन मार्च, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन को अंगीकृत किया गया था। वर्ष दो हज़ार बीस के लिये विश्व वन्यजीव दिवस की थीम "धरती पर सभी जीवों का संरक्षण है। वर्ष दो हज़ार बीस को जैव विविधता का वर्ष माना गया है। भारत के लिये यह वर्ष मुख्य रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी वर्ष भारत ने जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध कार्रवाई के लिये संगठन CoP-तेरह की अध्यक्षता प्राप्त की है। इस अवसर पर देश में जागरूकता शिविर, फोटो प्रदर्शनी तथा छात्रों और आम जनता को वन्यजीवों के संरक्षण का महत्त्व बताने के लिये कई कार्यक्रम आयोजित किये गए हैं। श्रम एवं रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल की डोरस्टेप डिलीवरी के लिये 'हमसफर' मोबाइल एप लॉन्च किया है। इस एप की सहायता से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होटल, अस्पताल और हाउसिंग सोसाइटी अपने घर पर डीज़ल की डिलीवरी की जाएगी। अभी यह सुविधा गुरुग्राम, गाज़ियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, हापुड, कुंडली, माणेसर और बहादुरगढ़ में उपलब्ध होगी। हमसफर के पास अभी बारह टैंकर हैं। इनकी क्षमता चार हज़ार से छः हज़ार लीटरटर की है। इन टैंकरों के अलावा हमसफर के पास पैंतीस लोगों की एक अनुभवी टीम भी है। देश भर में एक मार्च से सात मार्च, दो हज़ार बीस तक जन औषधि सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य जाँच शिविर, जन औषधि परिचर्चा और "जन औषधि का साथ" जैसी विभिन्न गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। सप्ताह के दौरान जन औषधि केंद्रों के माध्यम से देश भर में रक्तचाप, मधुमेह की जाँच, डाॅक्टरों द्वारा निशुल्क चिकित्सा जाँच और दवाओं का मुफ्त वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविरों में आने वाले लोगों को जन औषधि केंद्रों में बेची जा रही रही दवाओं की गुणवत्ता और उनकी कम कीमतों के बारे में जानकारी दी जा रही है। पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह कुलार का अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार बीस को निधन हो गया। हॉकी खिलाड़ी बलवीर सिंह का जन्म वर्ष एक हज़ार नौ सौ बयालीस में पंजाब के संसारपुर गाँव में हुआ था। बलबीर सिंह कुलार ने हॉकी की शुरुआत स्कूल में पढ़ाई के दौरान की थी। पढ़ाई के साथ-साथ अच्छा खेलने के कारण उन्हें पंजाब की हॉकी टीम में स्थान मिला। वर्ष एक हज़ार नौ सौ बासठ में बलबीर सिंह कुलार को पंजाब सरकार ने पंजाब पुलिस में ASI के तौर पर नियुक्त किया। बलवीर सिंह कुलार ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में भारतीय टीम की तरफ से अपना पहला इंटरनेशनल हॉकी मैच फ्रांँस में खेला था। ध्यातव्य है कि कुलार वर्ष एक हज़ार नौ सौ छयासठ में बैंकॉक एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक, वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में मैक्सिको ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे। बलबीर सिंह कुलार को वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में अर्जुन अवार्ड और दो हज़ार नौ में पद्मश्री पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
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बड़े निर्वाचक दल में, मेरा उस महदूद निर्वाचक दल के मुक़ाबले में ज्यादा यकीन है, जो कि हंसियत या शिक्षा की बुनियाद पर तैयार किया जाता है। हँसियत का आधार हर हालत में बुरा है। जहां तक तालीम का प्राधार है, यह जाहिर है कि तालीम अच्छी और जरूरी चीज़ है । लेकिन हरूफ पहिचान लेने वाले या थोड़े पढे प्रादमी में मैंने कोई ऐसी बात नहीं पाई है जिससे उसकी राय को, एक अनपढ़ मगर ग्राम समझ रखने वाले किसान की राय पर तरजीह दी जाय । हर हालत में, जब कि खास सवाल किसानों से ताल्लुक रखते है, तब उसकी राय ज्यादा महत्त्व की होगी। मेरा यकीन है कि सभी बालिगों को, वह मर्द हों या औरत, चुनने के अख्तियार होने चाहिए प्रौर भगर्चे में समझता हूं कि इस रास्ते में दिक्कतें है, फिर भी मुझे यकीन है कि इसके खिलाफ़ हिंदुस्तान में जो श्रावाज बुलंद की जाती है, उसमे ज्यादा दम नहीं और इसके पीछे उन लोगों का खौफ है जिन्हें कि खास हक हासिल है ।
१९३७ का, सूबे की असेम्बलियों के लिए चुनाव, इस महदूद निर्वाचनक्षेत्र की बिना पर हुआ था और आम जनता के कुल १२ फीसदी लोगो को चुनाव का अधिकार मिला था। लेकिन इसे भी पिछले चुनावों के मुकाबले में बड़ी तरक्की समझना चाहिए और रियासतों को अलग कर दिया जाय, तो ३ करोड़ लोगों को मत देने का हक हासिल था। इन चुनावों का क्षेत्र बहुत बड़ा था और रियासतों को छोड़कर सारे हिंदुस्तान में फैला था । हर एक सूबे को अपनी असेम्बली या धारा-सभा के लिए चुनाव करना था और ज्यादातर सूबों मे दो वारा-सभाएं थी, इसलिए दोहरे चुनाव होते थे। उम्मीदवारों की तादाद कई हज़ार तक पहुच गई थी ।
इन चुनावों की तरफ मेरा और कुछ हद तक ज्यादातर कांग्रेस वालों का नजरिया ग्राम नजरिये से जुदा था। मै शख़्सी तौर पर उम्मीदवारों की फिक्र नहीं करता था, बल्कि सारे मुल्क में ऐसी फ़िज़ा करना चाहता था जो कि हमारे प्राज़ादी के इस कौमी आंदोलन के माफिक हो, जिसकी कि कांग्रेस प्रतिनिधि थी और उस कार्यक्रम की तरफदारी में हो जिसको कि हमारे चुनाव के ऐलानों में बताया गया था। मैने अनुभव किया कि अगर हम इस काम में कामयाब हुए तो सभी बाते खुद-ब-खुद ठीक होकर रहेंगी और अगर नाकामयाब हुए तो इससे कुछ खास फर्क नहीं पैदा होता कि कोई खास उम्मीदवार हारा या जीता।
मेरा मकसद लोगों में एक खास तरह के विचार पैदा करना था। उम्मीदवारों का में शायद ही चर्चा करता रहा हूं, सिवाय इस रूप में कि वह हमारे उद्देश्यों के घलमबरदार हैं। उनमें से में बहुतों को जानता था, लेकिन बहुतों को में जाती तौर पर बिलकुल नहीं जानता था और इसकी जरूरत नहीं
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बड़े निर्वाचक दल में, मेरा उस महदूद निर्वाचक दल के मुक़ाबले में ज्यादा यकीन है, जो कि हंसियत या शिक्षा की बुनियाद पर तैयार किया जाता है। हँसियत का आधार हर हालत में बुरा है। जहां तक तालीम का प्राधार है, यह जाहिर है कि तालीम अच्छी और जरूरी चीज़ है । लेकिन हरूफ पहिचान लेने वाले या थोड़े पढे प्रादमी में मैंने कोई ऐसी बात नहीं पाई है जिससे उसकी राय को, एक अनपढ़ मगर ग्राम समझ रखने वाले किसान की राय पर तरजीह दी जाय । हर हालत में, जब कि खास सवाल किसानों से ताल्लुक रखते है, तब उसकी राय ज्यादा महत्त्व की होगी। मेरा यकीन है कि सभी बालिगों को, वह मर्द हों या औरत, चुनने के अख्तियार होने चाहिए प्रौर भगर्चे में समझता हूं कि इस रास्ते में दिक्कतें है, फिर भी मुझे यकीन है कि इसके खिलाफ़ हिंदुस्तान में जो श्रावाज बुलंद की जाती है, उसमे ज्यादा दम नहीं और इसके पीछे उन लोगों का खौफ है जिन्हें कि खास हक हासिल है । एक हज़ार नौ सौ सैंतीस का, सूबे की असेम्बलियों के लिए चुनाव, इस महदूद निर्वाचनक्षेत्र की बिना पर हुआ था और आम जनता के कुल बारह फीसदी लोगो को चुनाव का अधिकार मिला था। लेकिन इसे भी पिछले चुनावों के मुकाबले में बड़ी तरक्की समझना चाहिए और रियासतों को अलग कर दिया जाय, तो तीन करोड़ लोगों को मत देने का हक हासिल था। इन चुनावों का क्षेत्र बहुत बड़ा था और रियासतों को छोड़कर सारे हिंदुस्तान में फैला था । हर एक सूबे को अपनी असेम्बली या धारा-सभा के लिए चुनाव करना था और ज्यादातर सूबों मे दो वारा-सभाएं थी, इसलिए दोहरे चुनाव होते थे। उम्मीदवारों की तादाद कई हज़ार तक पहुच गई थी । इन चुनावों की तरफ मेरा और कुछ हद तक ज्यादातर कांग्रेस वालों का नजरिया ग्राम नजरिये से जुदा था। मै शख़्सी तौर पर उम्मीदवारों की फिक्र नहीं करता था, बल्कि सारे मुल्क में ऐसी फ़िज़ा करना चाहता था जो कि हमारे प्राज़ादी के इस कौमी आंदोलन के माफिक हो, जिसकी कि कांग्रेस प्रतिनिधि थी और उस कार्यक्रम की तरफदारी में हो जिसको कि हमारे चुनाव के ऐलानों में बताया गया था। मैने अनुभव किया कि अगर हम इस काम में कामयाब हुए तो सभी बाते खुद-ब-खुद ठीक होकर रहेंगी और अगर नाकामयाब हुए तो इससे कुछ खास फर्क नहीं पैदा होता कि कोई खास उम्मीदवार हारा या जीता। मेरा मकसद लोगों में एक खास तरह के विचार पैदा करना था। उम्मीदवारों का में शायद ही चर्चा करता रहा हूं, सिवाय इस रूप में कि वह हमारे उद्देश्यों के घलमबरदार हैं। उनमें से में बहुतों को जानता था, लेकिन बहुतों को में जाती तौर पर बिलकुल नहीं जानता था और इसकी जरूरत नहीं
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आकाशवाणी द्वारा देश भर में आयोजित जी-20 में भारत की अध्यक्षता के उत्सव के अन्तर्गत आज जयपुर मे सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के मशहूर कलाकारों की संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शको को मनमोहित किया। कार्यक्रम की शुरूआत आकाशवाणी के क्लस्टर हैड उप महानिदेशक मंयक कुमार, कार्यक्रम प्रमुख अर्चना सिन्हा और समाचार प्रमुख नीलेश कालमोर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
कार्यक्रम के दौरान केन्द्र प्रमुख मयंक कुमार ने सभी आगन्तुक विशिष्ट कलाकारों और अतिथियों का स्वागत किया। आकाशवाणी जयपुर की कार्यक्रम प्रमुख डा. अर्चना सिन्हा ने भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलने के महत्व को रेखाकिंत किया और इस कम में आयोजित होने वाले विभिन्न आयोजनों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत मे मशहूर गायक सौरव कुमार ने राग श्री बड़े ख्याल विलम्बित तीन ताल-तेरो छब न्यारा धेनु चरावत आवत प्यारा से की। इस प्रस्तुति मे उनका साथ तबले पर उस्ताद ज़फर मोहम्मद एवं हारमोनियम पर राजेन्द्र बेनर्जी ने दिया।
विश्वविख्यात मोहन वीना वादक पदम भूषण पण्डित विश्वमोहन भटट और सात्विक वीना वादक पण्डित सलिल भटट ने राग मारू बिहाग से प्रस्तुति आरम्भ की। विलंबित रचना के बाद द्रुत रचना पेश की। फिर राग मेघ मल्हार की नायाब प्रस्तुति दी। देश के जाने-माने तबला वादक पण्डित रामकुमार मिश्र ने इनको संगति दी। कार्यक्रम के समापन पर समाचार प्रमुख नीलेश कालभोर ने आगन्तुको का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन सुषमा नरूला ने किया।
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Posted On: आकाशवाणी द्वारा देश भर में आयोजित जी-बीस में भारत की अध्यक्षता के उत्सव के अन्तर्गत आज जयपुर मे सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के मशहूर कलाकारों की संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शको को मनमोहित किया। कार्यक्रम की शुरूआत आकाशवाणी के क्लस्टर हैड उप महानिदेशक मंयक कुमार, कार्यक्रम प्रमुख अर्चना सिन्हा और समाचार प्रमुख नीलेश कालमोर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कार्यक्रम के दौरान केन्द्र प्रमुख मयंक कुमार ने सभी आगन्तुक विशिष्ट कलाकारों और अतिथियों का स्वागत किया। आकाशवाणी जयपुर की कार्यक्रम प्रमुख डा. अर्चना सिन्हा ने भारत को जी-बीस की अध्यक्षता मिलने के महत्व को रेखाकिंत किया और इस कम में आयोजित होने वाले विभिन्न आयोजनों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत मे मशहूर गायक सौरव कुमार ने राग श्री बड़े ख्याल विलम्बित तीन ताल-तेरो छब न्यारा धेनु चरावत आवत प्यारा से की। इस प्रस्तुति मे उनका साथ तबले पर उस्ताद ज़फर मोहम्मद एवं हारमोनियम पर राजेन्द्र बेनर्जी ने दिया। विश्वविख्यात मोहन वीना वादक पदम भूषण पण्डित विश्वमोहन भटट और सात्विक वीना वादक पण्डित सलिल भटट ने राग मारू बिहाग से प्रस्तुति आरम्भ की। विलंबित रचना के बाद द्रुत रचना पेश की। फिर राग मेघ मल्हार की नायाब प्रस्तुति दी। देश के जाने-माने तबला वादक पण्डित रामकुमार मिश्र ने इनको संगति दी। कार्यक्रम के समापन पर समाचार प्रमुख नीलेश कालभोर ने आगन्तुको का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन सुषमा नरूला ने किया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर जहां जो बाइडन के लिए यह नाटो बैठक पहली रही वहीं जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस साल चुनाव न लड़ने के कारण उनकी यह बैठक अंतिम रही। यह अहम बैठक चीन से पेश आ रही गंभीर सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित रही। बाइडन ने चीन को गंभीर खतरे के रूप में पेश करते हुए निपटने के उपाय रखे। नाटो नेताओं ने भी कहा कि चीन की चुनौती वास्तविक है।
शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ से यूरोप की रक्षा करने के लिए बनाए गए नाटो गठबंधन के रवैये में यह एक बड़ा बदलाव है, कि अब वह चीन को अपनी मुख्य चुनौती मान रहा है। शिखर वार्ता के बाद जारी किए गए विस्तृत बयान में चीन के रवैये की ही आलोचना की गई है। नाटो नेताओं ने कहा, चीन की जगजाहिर महत्वाकांक्षाओं व दबंग रवैया अपनाने के चलते नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और गठजोड़ से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए वास्वितक खतरा हैं।
एक दिन पहले ही जी-7 ने भी अपने बयान में चीन पर हमला बोला था और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर उसकी तीखी आलोचना की थी। नाटो बैठक में बाइडन ने एक-दूसरे की रक्षा के समझौते को पवित्र जिम्मेदारी बताया जबकि मर्केल ने राष्ट्रपति बाइडन के आगमन को एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने नपेतुले शब्दों में चीन के खतरे को लेकर गंभीरता जताई।
नाटो देशों के चीन विरोधी रवैये से बीजिंग बौखला गया है। यूरोपीय संघ (ईयू) में चीन के मिशन ने बीजिंग को 'सुरक्षा चुनौती' बताने वाले नाटो के बयान की मंगलवार को निंदा की और कहा कि चीन तो वास्तव में शांति के लिए काम करने वाली ताकत है, जो खतरा आने पर स्वयं की रक्षा करेगा। चीन ने कहा, नाटो का बयान चीन के शांतिपूर्ण विकास को बदनाम करने वाला, वैश्विक हालात व स्वयं नाटो की भूमिका का गलत आकलन करने वाला है। यह बयान शीतयुद्ध की सोच तथा संगठनात्मक राजनीतिक मनोवृत्ति को दर्शाने वाला है।
नाटो के सदस्य देशों ने सामूहिक रक्षा प्रावधान 'सबके लिए एक, एक के लिए सब' को और व्यापक करते हुए इसमें अंतरिक्ष में होने वाले हमलों के खिलाफ भी मिलकर लड़ने का आह्वान भी किया। नाटो समझौते के अनुच्छेद-5 के मुताबिक, गठबंधन के 30 में से किसी भी सहयोगी पर हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। अब तक यह केवल परंपरागत जल, थल और वायु हमलों से संबंधित था। हाल ही में इसमें साइबर हमलों को भी जोड़ा गया था। नाटो के नेताओं ने कहा कि अंतरिक्ष में, अंतरिक्ष से और अंतरिक्ष पर हमला नाटो के लिए चुनौती हो सकता है। ऐसे में भी अनुच्छेद-5 प्रभावी माना जाएगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर जहां जो बाइडन के लिए यह नाटो बैठक पहली रही वहीं जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने इस साल चुनाव न लड़ने के कारण उनकी यह बैठक अंतिम रही। यह अहम बैठक चीन से पेश आ रही गंभीर सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित रही। बाइडन ने चीन को गंभीर खतरे के रूप में पेश करते हुए निपटने के उपाय रखे। नाटो नेताओं ने भी कहा कि चीन की चुनौती वास्तविक है। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ से यूरोप की रक्षा करने के लिए बनाए गए नाटो गठबंधन के रवैये में यह एक बड़ा बदलाव है, कि अब वह चीन को अपनी मुख्य चुनौती मान रहा है। शिखर वार्ता के बाद जारी किए गए विस्तृत बयान में चीन के रवैये की ही आलोचना की गई है। नाटो नेताओं ने कहा, चीन की जगजाहिर महत्वाकांक्षाओं व दबंग रवैया अपनाने के चलते नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और गठजोड़ से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए वास्वितक खतरा हैं। एक दिन पहले ही जी-सात ने भी अपने बयान में चीन पर हमला बोला था और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर उसकी तीखी आलोचना की थी। नाटो बैठक में बाइडन ने एक-दूसरे की रक्षा के समझौते को पवित्र जिम्मेदारी बताया जबकि मर्केल ने राष्ट्रपति बाइडन के आगमन को एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने नपेतुले शब्दों में चीन के खतरे को लेकर गंभीरता जताई। नाटो देशों के चीन विरोधी रवैये से बीजिंग बौखला गया है। यूरोपीय संघ में चीन के मिशन ने बीजिंग को 'सुरक्षा चुनौती' बताने वाले नाटो के बयान की मंगलवार को निंदा की और कहा कि चीन तो वास्तव में शांति के लिए काम करने वाली ताकत है, जो खतरा आने पर स्वयं की रक्षा करेगा। चीन ने कहा, नाटो का बयान चीन के शांतिपूर्ण विकास को बदनाम करने वाला, वैश्विक हालात व स्वयं नाटो की भूमिका का गलत आकलन करने वाला है। यह बयान शीतयुद्ध की सोच तथा संगठनात्मक राजनीतिक मनोवृत्ति को दर्शाने वाला है। नाटो के सदस्य देशों ने सामूहिक रक्षा प्रावधान 'सबके लिए एक, एक के लिए सब' को और व्यापक करते हुए इसमें अंतरिक्ष में होने वाले हमलों के खिलाफ भी मिलकर लड़ने का आह्वान भी किया। नाटो समझौते के अनुच्छेद-पाँच के मुताबिक, गठबंधन के तीस में से किसी भी सहयोगी पर हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। अब तक यह केवल परंपरागत जल, थल और वायु हमलों से संबंधित था। हाल ही में इसमें साइबर हमलों को भी जोड़ा गया था। नाटो के नेताओं ने कहा कि अंतरिक्ष में, अंतरिक्ष से और अंतरिक्ष पर हमला नाटो के लिए चुनौती हो सकता है। ऐसे में भी अनुच्छेद-पाँच प्रभावी माना जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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(प्रतीकात्मक फोटो, Abp Live)
Bihar Politics: कांग्रेस ने बिहार के नव नियुक्त जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है उनमें करीब पचास प्रतिशत ब्राह्मण और भूमिहार जाति से हैं. कुल 39 जिलाध्यक्षों में से करीब 66 प्रतिशत अगड़ी जातियों से हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार कांग्रेस के 39 जिलाध्यक्षों को नियुक्त किया है. इनमें से 11 भूमिहार, 8 ब्राह्मण, 6 राजपूत, 5 मुस्लिम, 4 यादव, 3 दलित, 1 कुशवाहा और 1 कायस्थ जाति से हैं.
बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह और विधायक दल के नेता अजीत शर्मा भी भूमिहार जाति से ही हैं. हालांकि नीतीश सरकार में कांग्रेस कोटे के दो मंत्रियों में से एक दलित एक मुस्लिम है. कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में कांग्रेस की रणनीति भूमिहार और ब्राह्मण समाज को अपने पाले में करने की है जिन्हें बीजेपी का वोटर माना जाता है.
रायपुर अधिवेशन को भुला दिया?
बीते कुछ समय से बीजेपी बिहार में पिछड़ा वोटर को लुभाने में लगी है ऐसे में कांग्रेस बीजेपी के वोट में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. वैसे भी नीतीश और लालू के साथ गठबंधन के कारण कांग्रेस को दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट मिलने का भरोसा है.
हालांकि बिहार में अगड़ा समीकरण साधने के चक्कर में कांग्रेस ने अपने रायपुर अधिवेशन के उस अहम एलान को भुला दिया जिसमें ब्लॉक से लेकर सीडब्ल्यूसी तक 50 प्रतिशत पद ओबीसी, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित करने की बात कही गई थी.
कांग्रेस ने पश्चिमी चंपारण में भारत भूषण पांडेय, पूर्वी चंपारण में शशि भूषण राय, मुजफ्फरपुर में अरविंद मुकुल, सीतामढ़ी में कमलेश कुमार सिंह, गोपालगंज में ओम प्रकाश गर्ग, मधुबनी में मनोज मिश्रा, दरभंगा में सीता राम चौधरी, समस्तीपुर में अबू तमीन और सहरसा में मुकेश झा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है.
इसके अलावा पार्टी ने सुपौल से विमल यादव, मधेपुरा से सतेंद्र कुमार यादव, अररिया से जाकिर हुसैन, पूर्णिया से नीरज सिंह, किशनगंज से इमाम अली, कटिहार से सुनील यादव, भागलपुर से परवेज जमाल, बांका से कंचन सिंह, लखीसराय से अमरीश कुमार अनीस, शेखपुरा से सत्यजीत सिंह, जमुई से राजेंद्र सिंह, बेगुसराय से अभय कुमार, नालंदा से रवि ज्योति को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
वहीं पटना महानगर से शशि रंजन, पटना ग्रामीण 1 से सुमित कुमार सनी, पटना ग्रामीण 2 से रघुनंदन पासवान, भोजपुर से अशोक राम, बक्सर से मनोज कुमार पांडेय, रोहतास से कन्हैया सिंह, कैमूर से सुनील कुशवाहा और गया से गगन कुमार मिश्रा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही पार्टी ने जहानाबाद से गोपाल शर्मा, अरवल से धनंजय शर्मा, औरंगाबाद से राकेश कुमार सिंह, नवादा से सतीश कुमार, सारन से अजय कुमार सिंह, वैशाली से मनोज शुक्ला, सिवान से बिधुभूषण पांडेय और सिहोरा से नूरी बेगम को जिलाध्यक्ष बनाया गया है.
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Bihar Politics: कांग्रेस ने बिहार के नव नियुक्त जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है उनमें करीब पचास प्रतिशत ब्राह्मण और भूमिहार जाति से हैं. कुल उनतालीस जिलाध्यक्षों में से करीब छयासठ प्रतिशत अगड़ी जातियों से हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार कांग्रेस के उनतालीस जिलाध्यक्षों को नियुक्त किया है. इनमें से ग्यारह भूमिहार, आठ ब्राह्मण, छः राजपूत, पाँच मुस्लिम, चार यादव, तीन दलित, एक कुशवाहा और एक कायस्थ जाति से हैं. बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह और विधायक दल के नेता अजीत शर्मा भी भूमिहार जाति से ही हैं. हालांकि नीतीश सरकार में कांग्रेस कोटे के दो मंत्रियों में से एक दलित एक मुस्लिम है. कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में कांग्रेस की रणनीति भूमिहार और ब्राह्मण समाज को अपने पाले में करने की है जिन्हें बीजेपी का वोटर माना जाता है. रायपुर अधिवेशन को भुला दिया? बीते कुछ समय से बीजेपी बिहार में पिछड़ा वोटर को लुभाने में लगी है ऐसे में कांग्रेस बीजेपी के वोट में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. वैसे भी नीतीश और लालू के साथ गठबंधन के कारण कांग्रेस को दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट मिलने का भरोसा है. हालांकि बिहार में अगड़ा समीकरण साधने के चक्कर में कांग्रेस ने अपने रायपुर अधिवेशन के उस अहम एलान को भुला दिया जिसमें ब्लॉक से लेकर सीडब्ल्यूसी तक पचास प्रतिशत पद ओबीसी, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित करने की बात कही गई थी. कांग्रेस ने पश्चिमी चंपारण में भारत भूषण पांडेय, पूर्वी चंपारण में शशि भूषण राय, मुजफ्फरपुर में अरविंद मुकुल, सीतामढ़ी में कमलेश कुमार सिंह, गोपालगंज में ओम प्रकाश गर्ग, मधुबनी में मनोज मिश्रा, दरभंगा में सीता राम चौधरी, समस्तीपुर में अबू तमीन और सहरसा में मुकेश झा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा पार्टी ने सुपौल से विमल यादव, मधेपुरा से सतेंद्र कुमार यादव, अररिया से जाकिर हुसैन, पूर्णिया से नीरज सिंह, किशनगंज से इमाम अली, कटिहार से सुनील यादव, भागलपुर से परवेज जमाल, बांका से कंचन सिंह, लखीसराय से अमरीश कुमार अनीस, शेखपुरा से सत्यजीत सिंह, जमुई से राजेंद्र सिंह, बेगुसराय से अभय कुमार, नालंदा से रवि ज्योति को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. वहीं पटना महानगर से शशि रंजन, पटना ग्रामीण एक से सुमित कुमार सनी, पटना ग्रामीण दो से रघुनंदन पासवान, भोजपुर से अशोक राम, बक्सर से मनोज कुमार पांडेय, रोहतास से कन्हैया सिंह, कैमूर से सुनील कुशवाहा और गया से गगन कुमार मिश्रा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही पार्टी ने जहानाबाद से गोपाल शर्मा, अरवल से धनंजय शर्मा, औरंगाबाद से राकेश कुमार सिंह, नवादा से सतीश कुमार, सारन से अजय कुमार सिंह, वैशाली से मनोज शुक्ला, सिवान से बिधुभूषण पांडेय और सिहोरा से नूरी बेगम को जिलाध्यक्ष बनाया गया है.
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प्रोटीन की जरूरत से ज्यादा मात्रा लेने से शिुश की अपरिपक्व गुर्दो पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। मनुष्य के शरीर में अतिरिक्त प्रोटीन जमा नहीं होता है, बल्कि शरीर इसे तोड़कर बाई-प्रोडक्ट बनाता है, जिसका मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकलना जरूरी होता है। किडनी तेजी से काम करना शुरू करता है और सिस्टम में जमा होने वाले कीटोन्स को बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे बच्चे की किडनी पर काफी दबाव पड़ता है। अत्यधिक प्रोटीन खून में यूरिया, हाइड्रोजन आयन एवं अमीनो एसिड (फिनाईलेलेनाइन, ट्रायोसाइन) की मात्रा बढ़ाता है, जिससे मेटाबॉलिक एसिडोसिस होती है। मेटाबॉलिक अनियमितताओं का यह संयोग विकसित होते दिमाग पर बुरा प्रभाव डालता है।
पिंडी देवरिया । राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन द्वारा सलेमपुर लोक सभा के पिंडी क्षेत्र के परमहंस बबुआ जी इण्टर कॉलेज में लगाये गए दो दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के अंतिम दिन रविवार को इलाज व जांच कराने के लिए मरीजो का हुजूम उमड़ पड़ा। सारे पिछले कैम्प के रिकॉर्ड टूट गये। सुबह 8 बजे से ही लम्बी क़तारें लग गयी।
भीड़ को देखते हुए रजिस्ट्रेशन के लिए 6 काउंटर लगाए गए थे जिसमें 4 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने अपना इलाज कराया। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में आये मरीजो ने लखनऊ के सुप्रसिद्ध चन्दन अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज कराने व निःशुल्क दवा मिलने पर ख़ुशी ज़ाहिर की।
बहुत से मरीज़ों ने पिछले कैंपों से मिले इलाज से हुए लाभ की व्याख्या करते हुए कहा कि उनके अरसे पुराने मर्ज़ से उन्हें निजात प्राप्त हुई है ।
मीडिया द्वारा पूछे सवालों में पिंडी की जनता ने अपना दुख व्यक्त करते हुए आस पास दूर दूर तक कोई अच्छा औषधि केंद्र ना होने की भी बात कही साथ ही राजेश सिंह से लगातार इस तरह के शिविर लगाने का अनुरोध किया ।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में लखनऊ के चन्दन अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट, आर्थोपेडिक, बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्ररोग विशेषज्ञ, स्त्रीरोग विशेषज्ञयो द्वारा मरीजो का जांचकर दवा दिया गया।
राजेश सिंह दयाल ने टीम के डॉक्टर, स्टाफ़ और स्वास्थ्य शिविर में विशेष सहयोग करने वाले अरविंद सिंह, राजीव राम, श्रीधर, सुनील शाह, स्वराज सिंह,पंकज शाही को धन्यवाद दिया।
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प्रोटीन की जरूरत से ज्यादा मात्रा लेने से शिुश की अपरिपक्व गुर्दो पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। मनुष्य के शरीर में अतिरिक्त प्रोटीन जमा नहीं होता है, बल्कि शरीर इसे तोड़कर बाई-प्रोडक्ट बनाता है, जिसका मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकलना जरूरी होता है। किडनी तेजी से काम करना शुरू करता है और सिस्टम में जमा होने वाले कीटोन्स को बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे बच्चे की किडनी पर काफी दबाव पड़ता है। अत्यधिक प्रोटीन खून में यूरिया, हाइड्रोजन आयन एवं अमीनो एसिड की मात्रा बढ़ाता है, जिससे मेटाबॉलिक एसिडोसिस होती है। मेटाबॉलिक अनियमितताओं का यह संयोग विकसित होते दिमाग पर बुरा प्रभाव डालता है। पिंडी देवरिया । राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन द्वारा सलेमपुर लोक सभा के पिंडी क्षेत्र के परमहंस बबुआ जी इण्टर कॉलेज में लगाये गए दो दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के अंतिम दिन रविवार को इलाज व जांच कराने के लिए मरीजो का हुजूम उमड़ पड़ा। सारे पिछले कैम्प के रिकॉर्ड टूट गये। सुबह आठ बजे से ही लम्बी क़तारें लग गयी। भीड़ को देखते हुए रजिस्ट्रेशन के लिए छः काउंटर लगाए गए थे जिसमें चार हज़ार से ज़्यादा लोगों ने अपना इलाज कराया। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में आये मरीजो ने लखनऊ के सुप्रसिद्ध चन्दन अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज कराने व निःशुल्क दवा मिलने पर ख़ुशी ज़ाहिर की। बहुत से मरीज़ों ने पिछले कैंपों से मिले इलाज से हुए लाभ की व्याख्या करते हुए कहा कि उनके अरसे पुराने मर्ज़ से उन्हें निजात प्राप्त हुई है । मीडिया द्वारा पूछे सवालों में पिंडी की जनता ने अपना दुख व्यक्त करते हुए आस पास दूर दूर तक कोई अच्छा औषधि केंद्र ना होने की भी बात कही साथ ही राजेश सिंह से लगातार इस तरह के शिविर लगाने का अनुरोध किया । निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में लखनऊ के चन्दन अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट, आर्थोपेडिक, बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्ररोग विशेषज्ञ, स्त्रीरोग विशेषज्ञयो द्वारा मरीजो का जांचकर दवा दिया गया। राजेश सिंह दयाल ने टीम के डॉक्टर, स्टाफ़ और स्वास्थ्य शिविर में विशेष सहयोग करने वाले अरविंद सिंह, राजीव राम, श्रीधर, सुनील शाह, स्वराज सिंह,पंकज शाही को धन्यवाद दिया।
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चंडीगढ़। किसान आंदोलन चल रहा है। आंदोलन जितना ज्यादा समय के खिच रहा है। किसानों में दिनांे दिन आक्रोश बढता जा रहा है। हालत यह है कि महापंचायत में राकेश टिकैत की एक अपील के बाद पंजाब तथा हरियाणा के कई किसान अपनी खडी गेहूं की फसल नष्ट कर रहे हैं। वही बाद में समझाइस के बाद रोका गया।
जानकारी के अनुसार मुक्तसर के किसान गुरप्रीत सिंह ने 6 एकड़ गेहूं की फसल बोई है। गुरप्रीत ने अपनी 3 एकड की गेहूं की फसल़ पर ट्रैक्टर चला कर नष्ट कर दिया हैं। वही रोहतक के किसान मंदीप सिंह ने भी अपनी फसल को नष्ट किया है। किसानों का कहना है कि मैं विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ सदैव से हूं और रहूंगा।
कुछ दिन पहले महापंचायत में किसानों से अपील करते हुए राकेश टिकैत ने एक फसल की कुर्बानी देने जैसी अपील की थी। इस पर पंजब तथा हरियाण के कई किसानों ने अमल करना शुरू कर दिया और खडी गेहूं की फसल पर टैक्टर चला रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के नेता गुलाब सिंह ने बताया कि किसानों द्वारा फसल नष्ट करने की जानकारी जैसे ही हुई वह मौके पर पहुंचे और किसानो से बात कर उन्हे समझाया। बाद में किसान मान भी गयंे।
किसान नेता गुलाब सिंह का कहना था कि किसान अपनी फसल नष्ट न करें। फसल किसान के लिए बच्चे के समान होता है। हर पिता का धर्म होता है कि वह अपने बच्चों को पालन पोषण करे और उन्हे तैयार करें।
उन्होने कहा कि किसी भी सूरत में किसानों को अपनी फसल नष्ट नहीं करना है। किसान अगर मंडी में फसल नहीं बेचना चाहते तेा वह अपनी फसल आंदोलन को दान दे। किसी जरूरत मंद को दान करें। लेकिन किसान फसल नष्ट न करंे।
उनका कहना था कि अभी आंदेालन चल रहा है। यह अंतिम दौर की लडाई होगी अभी इसका समय नहीं आया है। उन्होने कहा कि किसानों को हिम्मत हारे बिना लडाई को जारी रखाना है लेकिन फसल पर कोई नुक्सान न पहुंचाए।
वही किसानों द्वारा फसल नष्ट करने की जानकारी होते ही जैसे ही किसान नेता राकेश टिकैत को हुई उन्होने भी किसानों से अपील करते हुए कहा कि अभी वह समय नहीं आया है कि किसान अपनी फसल अपने ही हांथों से नष्ट करें। कोई भी किसान फसलों को नष्ट नहीं करेगा।
राकेश टिकैत के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि किसान अब इस तरह का कदम नही उठाएंगें। लेकिन किसानो में कृषि बिल को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
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चंडीगढ़। किसान आंदोलन चल रहा है। आंदोलन जितना ज्यादा समय के खिच रहा है। किसानों में दिनांे दिन आक्रोश बढता जा रहा है। हालत यह है कि महापंचायत में राकेश टिकैत की एक अपील के बाद पंजाब तथा हरियाणा के कई किसान अपनी खडी गेहूं की फसल नष्ट कर रहे हैं। वही बाद में समझाइस के बाद रोका गया। जानकारी के अनुसार मुक्तसर के किसान गुरप्रीत सिंह ने छः एकड़ गेहूं की फसल बोई है। गुरप्रीत ने अपनी तीन एकड की गेहूं की फसल़ पर ट्रैक्टर चला कर नष्ट कर दिया हैं। वही रोहतक के किसान मंदीप सिंह ने भी अपनी फसल को नष्ट किया है। किसानों का कहना है कि मैं विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ सदैव से हूं और रहूंगा। कुछ दिन पहले महापंचायत में किसानों से अपील करते हुए राकेश टिकैत ने एक फसल की कुर्बानी देने जैसी अपील की थी। इस पर पंजब तथा हरियाण के कई किसानों ने अमल करना शुरू कर दिया और खडी गेहूं की फसल पर टैक्टर चला रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता गुलाब सिंह ने बताया कि किसानों द्वारा फसल नष्ट करने की जानकारी जैसे ही हुई वह मौके पर पहुंचे और किसानो से बात कर उन्हे समझाया। बाद में किसान मान भी गयंे। किसान नेता गुलाब सिंह का कहना था कि किसान अपनी फसल नष्ट न करें। फसल किसान के लिए बच्चे के समान होता है। हर पिता का धर्म होता है कि वह अपने बच्चों को पालन पोषण करे और उन्हे तैयार करें। उन्होने कहा कि किसी भी सूरत में किसानों को अपनी फसल नष्ट नहीं करना है। किसान अगर मंडी में फसल नहीं बेचना चाहते तेा वह अपनी फसल आंदोलन को दान दे। किसी जरूरत मंद को दान करें। लेकिन किसान फसल नष्ट न करंे। उनका कहना था कि अभी आंदेालन चल रहा है। यह अंतिम दौर की लडाई होगी अभी इसका समय नहीं आया है। उन्होने कहा कि किसानों को हिम्मत हारे बिना लडाई को जारी रखाना है लेकिन फसल पर कोई नुक्सान न पहुंचाए। वही किसानों द्वारा फसल नष्ट करने की जानकारी होते ही जैसे ही किसान नेता राकेश टिकैत को हुई उन्होने भी किसानों से अपील करते हुए कहा कि अभी वह समय नहीं आया है कि किसान अपनी फसल अपने ही हांथों से नष्ट करें। कोई भी किसान फसलों को नष्ट नहीं करेगा। राकेश टिकैत के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि किसान अब इस तरह का कदम नही उठाएंगें। लेकिन किसानो में कृषि बिल को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
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बरेली : बच्चों को वाहनों पर बैठाकर सड़कों पर सैर सपाटा करने वालों के लिए यह खबर काम की है। पिछले साल जहां मार्च से कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया था इस दौरान बुजुर्ग, युवाओं कोरोना संक्रमित अधिक मिल रहे थे। लेकिन अब जब दोबारा कोरोना के केसेज बढ़े हैं तो इनमें मासूम और किशोर भी इसकी जद में तेजी से आ रहे हैं। इसकी मेन वजह है कि पेरेंट्स ठीक प्रकार से बच्चों को कोरोना से बचाव की गाइड लाइन फॉलो नहीं करा रहे हैं।
कोरोना संक्रमण का असर जिले में तेजी से बढ़ने लगा है। फ्राईडे को पिछले साल दिसंबर महीने के बाद सर्वाधिक 73 कोविड पॉजिटिव जिले में सामने आए हैं। फरवरी महीने तक के केस में जहां अधिकांश मामलों में युवा या इससे ऊपर का उम्र वर्ग कोरोना संक्रमण का शिकार था। वहींए मार्च के आखिरी महीने और अप्रैल में भी कोविड. 19 यानी सार्स. 2 वायरस मासूमों और किशोरों को भी अपना शिकार बना रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही दर्जन भर से ज्यादा बच्चे कोविड संक्त्रमण का शिकार हो चुके हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्त्रमण के बदलते असर और एसिम्टोमेटिक केस होने की वजह से संक्त्रमण का असर बच्चों तक पहुंच रहा है।
पिछले छह दिनों में जिले में मिले कोरोना संक्त्रमितों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तीन से छह साल की उम्र के दर्जन भर बच्चे संक्रमित मिले। इसके अलावा कई किशोर भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की वजह पूछने पर विशेषज्ञ कई वजह बताते हैं। सबसे खास वजह है कि कई मामलों में बच्चों के माता. पिता एसिम्टोमेटिक होते हैं। कोरोना संक्रमण के लक्षण न होने की वजह से वो लगातार मासूम के संपर्क में रहते हैं और इससे बच्चा भी संक्रमित हो जाता है।
बाहर से आने पर अब होती है लापरवाही विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर आने के बाद जब लाकडाउन हटाए तब भी लोग ज्यादा सावधानी बरतते थे। जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलते थे। समय-समय पर सेनेटाइजेशन करते या हाथ धोते थे। वापस आने पर पहले बाहर की कपड़े और खुद को संक्रमित करते थे. लेकिन अब लोग एहतियात नहीं बरत रहे हैं।
बच्चों को बेहद जरूरी होने पर ही बाहर लेकर जाएं। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का ध्यान रखें. वहीं, खुद भी बाहर से आकर पहले पूर्व की तरह कोरोना बचाव की गाइड लाइन का पालन करें।
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बरेली : बच्चों को वाहनों पर बैठाकर सड़कों पर सैर सपाटा करने वालों के लिए यह खबर काम की है। पिछले साल जहां मार्च से कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया था इस दौरान बुजुर्ग, युवाओं कोरोना संक्रमित अधिक मिल रहे थे। लेकिन अब जब दोबारा कोरोना के केसेज बढ़े हैं तो इनमें मासूम और किशोर भी इसकी जद में तेजी से आ रहे हैं। इसकी मेन वजह है कि पेरेंट्स ठीक प्रकार से बच्चों को कोरोना से बचाव की गाइड लाइन फॉलो नहीं करा रहे हैं। कोरोना संक्रमण का असर जिले में तेजी से बढ़ने लगा है। फ्राईडे को पिछले साल दिसंबर महीने के बाद सर्वाधिक तिहत्तर कोविड पॉजिटिव जिले में सामने आए हैं। फरवरी महीने तक के केस में जहां अधिकांश मामलों में युवा या इससे ऊपर का उम्र वर्ग कोरोना संक्रमण का शिकार था। वहींए मार्च के आखिरी महीने और अप्रैल में भी कोविड. उन्नीस यानी सार्स. दो वायरस मासूमों और किशोरों को भी अपना शिकार बना रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही दर्जन भर से ज्यादा बच्चे कोविड संक्त्रमण का शिकार हो चुके हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्त्रमण के बदलते असर और एसिम्टोमेटिक केस होने की वजह से संक्त्रमण का असर बच्चों तक पहुंच रहा है। पिछले छह दिनों में जिले में मिले कोरोना संक्त्रमितों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तीन से छह साल की उम्र के दर्जन भर बच्चे संक्रमित मिले। इसके अलावा कई किशोर भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की वजह पूछने पर विशेषज्ञ कई वजह बताते हैं। सबसे खास वजह है कि कई मामलों में बच्चों के माता. पिता एसिम्टोमेटिक होते हैं। कोरोना संक्रमण के लक्षण न होने की वजह से वो लगातार मासूम के संपर्क में रहते हैं और इससे बच्चा भी संक्रमित हो जाता है। बाहर से आने पर अब होती है लापरवाही विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर आने के बाद जब लाकडाउन हटाए तब भी लोग ज्यादा सावधानी बरतते थे। जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलते थे। समय-समय पर सेनेटाइजेशन करते या हाथ धोते थे। वापस आने पर पहले बाहर की कपड़े और खुद को संक्रमित करते थे. लेकिन अब लोग एहतियात नहीं बरत रहे हैं। बच्चों को बेहद जरूरी होने पर ही बाहर लेकर जाएं। इस दौरान कोविड गाइडलाइन का ध्यान रखें. वहीं, खुद भी बाहर से आकर पहले पूर्व की तरह कोरोना बचाव की गाइड लाइन का पालन करें।
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Paayal Jain और Tena Jaiin ने क्या कहा अपने Youtube की Journey के बारे में ? कब और कैसे आया Youtube Channel Start करने का Idea ? कितने कठिनाईयोॆ का सामना करना पड़ा उन्हें ? किस Type की Content बनाना चाहती है ? जानिए सबकुछ इस Exclusive Interview में.
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Paayal Jain और Tena Jaiin ने क्या कहा अपने Youtube की Journey के बारे में ? कब और कैसे आया Youtube Channel Start करने का Idea ? कितने कठिनाईयोॆ का सामना करना पड़ा उन्हें ? किस Type की Content बनाना चाहती है ? जानिए सबकुछ इस Exclusive Interview में.
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रेसलर्स और बृज भूषण के बीच चल रहे टकराव में रविवार को सोनीपत के गांव मुंडलाना में सर्व समाज की पंचायत आयोजित की जाएगी. भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के आह्वान पर हो रही सर्व समाज की बैठक में पहवान, पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक और हरियाणा सहिल अन्य प्रदेशों से लोग पहुंचेंगे. इस पंचायत में खिलाड़ी आगे की रणनीति बनाते हुए निर्णय लेंगे.
पंचायत के आध्यम से गवर्नमेंट पर दबाव बनाने का कोशिश किया जाएगा. इससे पहले दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान 4 गवाह भी मिले हैं. वहीं 2 एफआइआर आई सामने जो बृज भूषण के विरूद्ध दर्ज करवाई गई थी. इधर, नाबालिग के पिता भी बार-बार गुहार लगाकर अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे हैं.
नाबालिग के पिता ने बताया कि जब पहली बार पहलवान धरने पर बैठे तो यह मामला उनके सामने आया. वे भी कुश्ती से जुड़े हुए हैं, एक-दो कैंप अटेंड किए हैं. परिवार को अधिक जानकारी नहीं होती, क्योंकि जो कठिनाई होती है वह बच्चों को होती है. घर पर 18 जनवरी टीवी पर पहलवानों का प्रदर्शन देख रहे थे तो बच्ची डिस्टर्ब हो गई. पूछा तो बोला कोई बात नहीं.
अगले दिन जब फिर से पहलवानों का प्रदर्शन देख रहते थे तो उसकी बेटी रोने लगी. जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी से पूछा तो नाबालिग ने बताया कि पापा उन पलवानों का तो पता नहीं मेरे साथ भी कुछ चीज गलत हुई हैं. उस समय कुछ चीज शब्द सुना था. कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि शरीर में जान ही नहीं हैं. कुछ समय बाद होश में आकर पूछताछ की.
बच्ची ने कुछ ऐसी चीज बताई, तो चकित हो गए कि आधुनिक युग में भी ऐसी बात हो सकती हैं. उस समय इतना गुस्सा आया कि बृज भूषण की मर्डर तक कर दूं. कोई भी शुभ काम होता है तो बेटी को आगे रखते हैं. घर की लक्ष्मी के साथ ऐसा होता है तो बच भी क्या गया. ऐसी सोच थी कि बृज भूषण को हाथों से मार दूं, चाहें इसके लिए फांसी चढ़ा दें.
जब बेटी ने इस घटना के बारे में बताया तो अंदर बहुत भूकंप आया. यदि भूकंप बाहर निकल जाए तो पूरा इण्डिया मर सकता था. जब इसके बारे में पता लगा तो उसके बाद घर पर वार्ता की. वहीं एक बार तो लगा कि अकेला क्या किया जा सकता है. वहीं पहलवानों का भी धरना बंद हो गया. जिसके कारण मामला रफा-दफा हो गया. इसके बाद बच्ची भी डिप्रेशन में चली गई थी.
उन्होंने बताया कि नेशनल कैंप राची में उसकी बेटी के साथ गलत हुआ. फाइनल कुश्ती बेटी को जान बूझकर हरा दिया गया. उससे पहले बेटी की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था और डॉक्टरों ने घर के काम करने से भी इन्कार कर दिया था, लेकिन बेटी ने हौसला नहीं हारी और कुश्ती में भी कड़ा अभ्यास करके अच्छा मुकाम हासिल किया.
जिस आदमी ने प्रेस कॉफ्रेंस की वह चाचा नहीं सगा ताऊ है. इस पत्रकार वार्ता के बाद बच्ची डिप्रेशन में हैं और बच्ची कहती है कि अब वह किस मुंह से अभ्यास करने जाएं. जो डॉक्यूमेंट्स दिखाएं, उन पर बोला कि यह कहीं भी नहीं लिखा कि जो रोहतक में पैदा हुआ वह रोहतक में ही मरेगा.
उन्होंने बोला कि साल 2004 में उनकी बेटी पैदा हुई है. नवंबर-दिसंबर में पंजाब गए थे, उस समय अपनी पत्नी को भी साथ ले गए. वे बस में गए, जिसके कारण बच्ची को ठंड लग गई और उनकी निमोनिया होने के कारण मृत्यु हो गई. काफी दिन तक तो उनकी पत्नी भी डिप्रेशन में चली गई थी. ढाई के बाद डिलीवरी के दौरान फिर प्रेग्नेंट थी और 22 दिसंबर 2006 को वे कार्यक्रम में दिल्ली गई थी. वहां नाच-गाने के दौरान उनकी पत्नी को डिलीवरी हुई और दोस्त के घर बेटी ने जन्म लिया.
उन्होंने बताया कि अपनी पहली बेटी के नाम पर भी छोटी बेटी का नाम रखा. पिछले 7-8 वर्ष से दोनों का आना-जाना नहीं हैं. यदि वह मेरी बेटी को अपनी बेटी मानता तो वह घर पर आकर भी समझा सकता है. रोहतक के किसी भी थाने में चले जाएं, वहां उसके भाई का नाम आपराधिक वारदात में जरूर पाएगा.
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रेसलर्स और बृज भूषण के बीच चल रहे टकराव में रविवार को सोनीपत के गांव मुंडलाना में सर्व समाज की पंचायत आयोजित की जाएगी. भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के आह्वान पर हो रही सर्व समाज की बैठक में पहवान, पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक और हरियाणा सहिल अन्य प्रदेशों से लोग पहुंचेंगे. इस पंचायत में खिलाड़ी आगे की रणनीति बनाते हुए निर्णय लेंगे. पंचायत के आध्यम से गवर्नमेंट पर दबाव बनाने का कोशिश किया जाएगा. इससे पहले दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान चार गवाह भी मिले हैं. वहीं दो एफआइआर आई सामने जो बृज भूषण के विरूद्ध दर्ज करवाई गई थी. इधर, नाबालिग के पिता भी बार-बार गुहार लगाकर अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे हैं. नाबालिग के पिता ने बताया कि जब पहली बार पहलवान धरने पर बैठे तो यह मामला उनके सामने आया. वे भी कुश्ती से जुड़े हुए हैं, एक-दो कैंप अटेंड किए हैं. परिवार को अधिक जानकारी नहीं होती, क्योंकि जो कठिनाई होती है वह बच्चों को होती है. घर पर अट्ठारह जनवरी टीवी पर पहलवानों का प्रदर्शन देख रहे थे तो बच्ची डिस्टर्ब हो गई. पूछा तो बोला कोई बात नहीं. अगले दिन जब फिर से पहलवानों का प्रदर्शन देख रहते थे तो उसकी बेटी रोने लगी. जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी से पूछा तो नाबालिग ने बताया कि पापा उन पलवानों का तो पता नहीं मेरे साथ भी कुछ चीज गलत हुई हैं. उस समय कुछ चीज शब्द सुना था. कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि शरीर में जान ही नहीं हैं. कुछ समय बाद होश में आकर पूछताछ की. बच्ची ने कुछ ऐसी चीज बताई, तो चकित हो गए कि आधुनिक युग में भी ऐसी बात हो सकती हैं. उस समय इतना गुस्सा आया कि बृज भूषण की मर्डर तक कर दूं. कोई भी शुभ काम होता है तो बेटी को आगे रखते हैं. घर की लक्ष्मी के साथ ऐसा होता है तो बच भी क्या गया. ऐसी सोच थी कि बृज भूषण को हाथों से मार दूं, चाहें इसके लिए फांसी चढ़ा दें. जब बेटी ने इस घटना के बारे में बताया तो अंदर बहुत भूकंप आया. यदि भूकंप बाहर निकल जाए तो पूरा इण्डिया मर सकता था. जब इसके बारे में पता लगा तो उसके बाद घर पर वार्ता की. वहीं एक बार तो लगा कि अकेला क्या किया जा सकता है. वहीं पहलवानों का भी धरना बंद हो गया. जिसके कारण मामला रफा-दफा हो गया. इसके बाद बच्ची भी डिप्रेशन में चली गई थी. उन्होंने बताया कि नेशनल कैंप राची में उसकी बेटी के साथ गलत हुआ. फाइनल कुश्ती बेटी को जान बूझकर हरा दिया गया. उससे पहले बेटी की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन हुआ था और डॉक्टरों ने घर के काम करने से भी इन्कार कर दिया था, लेकिन बेटी ने हौसला नहीं हारी और कुश्ती में भी कड़ा अभ्यास करके अच्छा मुकाम हासिल किया. जिस आदमी ने प्रेस कॉफ्रेंस की वह चाचा नहीं सगा ताऊ है. इस पत्रकार वार्ता के बाद बच्ची डिप्रेशन में हैं और बच्ची कहती है कि अब वह किस मुंह से अभ्यास करने जाएं. जो डॉक्यूमेंट्स दिखाएं, उन पर बोला कि यह कहीं भी नहीं लिखा कि जो रोहतक में पैदा हुआ वह रोहतक में ही मरेगा. उन्होंने बोला कि साल दो हज़ार चार में उनकी बेटी पैदा हुई है. नवंबर-दिसंबर में पंजाब गए थे, उस समय अपनी पत्नी को भी साथ ले गए. वे बस में गए, जिसके कारण बच्ची को ठंड लग गई और उनकी निमोनिया होने के कारण मृत्यु हो गई. काफी दिन तक तो उनकी पत्नी भी डिप्रेशन में चली गई थी. ढाई के बाद डिलीवरी के दौरान फिर प्रेग्नेंट थी और बाईस दिसंबर दो हज़ार छः को वे कार्यक्रम में दिल्ली गई थी. वहां नाच-गाने के दौरान उनकी पत्नी को डिलीवरी हुई और दोस्त के घर बेटी ने जन्म लिया. उन्होंने बताया कि अपनी पहली बेटी के नाम पर भी छोटी बेटी का नाम रखा. पिछले सात-आठ वर्ष से दोनों का आना-जाना नहीं हैं. यदि वह मेरी बेटी को अपनी बेटी मानता तो वह घर पर आकर भी समझा सकता है. रोहतक के किसी भी थाने में चले जाएं, वहां उसके भाई का नाम आपराधिक वारदात में जरूर पाएगा.
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दरअसल बीजिंग के विरोध के बावजूद ताईवान के राष्ट्रपति साई इंग वेन सप्ताहांत पर अमेरिका के दौरे पर गए थे। चीन ताईवान को अपना ही हिस्सा मानता है और उस पर आधिपत्य जमाना चाहता है। साई और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले महीने हुई बातचीत से सुलगे चीन ने द्वीप के नजदीक सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी।
अमेरिका और ताईवान के बीच आधिकारिक संबंध नहीं हैं लेकिन अमेरिका ताईवान का सबसे शक्तिशाली सहयोगी और हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। लायोनिंग प्रशांत क्षेत्र में पहला अभ्यास कर रहा है और पिछले महीने ताईवान के दक्षिण इलाके से गुजर चुका है। स्थानीय समयानुसार चीनी विमान वाहक लायोनिंग आज सुबह सात बजे ताईवान के वायु रक्षा अभिनिर्धारण जोन में घुसा ।
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दरअसल बीजिंग के विरोध के बावजूद ताईवान के राष्ट्रपति साई इंग वेन सप्ताहांत पर अमेरिका के दौरे पर गए थे। चीन ताईवान को अपना ही हिस्सा मानता है और उस पर आधिपत्य जमाना चाहता है। साई और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले महीने हुई बातचीत से सुलगे चीन ने द्वीप के नजदीक सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी। अमेरिका और ताईवान के बीच आधिकारिक संबंध नहीं हैं लेकिन अमेरिका ताईवान का सबसे शक्तिशाली सहयोगी और हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। लायोनिंग प्रशांत क्षेत्र में पहला अभ्यास कर रहा है और पिछले महीने ताईवान के दक्षिण इलाके से गुजर चुका है। स्थानीय समयानुसार चीनी विमान वाहक लायोनिंग आज सुबह सात बजे ताईवान के वायु रक्षा अभिनिर्धारण जोन में घुसा ।
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र Vidhan Sabha Winter Session 2020 को लेकर आज सर्वदलीय बैठक होगी, लेकिन सत्र से पहले 38 विधानसभा कर्मचारियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने पर हड़कंप मचा हुआ है।
विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बंसल न्यूज से बातचीत में कहा है कि सत्र को लेकर कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। सत्र के दौरान तमाम गाइडलाइंस का ध्यान रखा जाएगा, बिना कोविड-19 रिपोर्ट के विधायकों को विधानसभा में एंट्री नहीं मिलेगी। सदस्यों के निजी स्टाफ और अन्य लोगों की एंट्री पर भी रोक रहेगी। विधानसभा में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ विधायक बैठेंगे। विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विधायक विश्रामगृह को सैनिटाइज कराया जा रहा है।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अविनाश लवानिया ने धारा 144 के अंतर्गत संशोधित आदेश जारी MP Vidhan Sabha कर भोपाल नगर निगम सीमा में रहने वाले सर्वसाधारण को आदेशित किया है कि विधानसभा का सत्र 28 दिसंबर से 30 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान विधानसभा की 5 किलोमीटर की परिधि में भारी वाहन जैसे ट्रक, ट्रैक्टर ट्राली, डंफर एवं धीमी गति से चल यातायात बाधित करने वाले तांगा, टूक्का, बैलगाड़ी इत्यादि के आवागमन पर प्रवेश निषेध किया है। जिला मजिस्ट्रेट लवानिया द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी आदेश की शेष कंडिकाएं यथावत रहेंगी।
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र Vidhan Sabha Winter Session दो हज़ार बीस को लेकर आज सर्वदलीय बैठक होगी, लेकिन सत्र से पहले अड़तीस विधानसभा कर्मचारियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने पर हड़कंप मचा हुआ है। विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बंसल न्यूज से बातचीत में कहा है कि सत्र को लेकर कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। सत्र के दौरान तमाम गाइडलाइंस का ध्यान रखा जाएगा, बिना कोविड-उन्नीस रिपोर्ट के विधायकों को विधानसभा में एंट्री नहीं मिलेगी। सदस्यों के निजी स्टाफ और अन्य लोगों की एंट्री पर भी रोक रहेगी। विधानसभा में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ विधायक बैठेंगे। विधानसभा प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विधायक विश्रामगृह को सैनिटाइज कराया जा रहा है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अविनाश लवानिया ने धारा एक सौ चौंतालीस के अंतर्गत संशोधित आदेश जारी MP Vidhan Sabha कर भोपाल नगर निगम सीमा में रहने वाले सर्वसाधारण को आदेशित किया है कि विधानसभा का सत्र अट्ठाईस दिसंबर से तीस दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान विधानसभा की पाँच किलोग्राममीटर की परिधि में भारी वाहन जैसे ट्रक, ट्रैक्टर ट्राली, डंफर एवं धीमी गति से चल यातायात बाधित करने वाले तांगा, टूक्का, बैलगाड़ी इत्यादि के आवागमन पर प्रवेश निषेध किया है। जिला मजिस्ट्रेट लवानिया द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी आदेश की शेष कंडिकाएं यथावत रहेंगी।
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जब आप "जीटीए" श्रृंखला के किसी भी गेम को खेलते हैं, तो आपपरिवहन का उपयोग करने के लिए असीमित संभावनाएं दी गई हैं। आप किसी भी कार को चोरी कर सकते हैं, अधिकतम गति से ड्राइव कर सकते हैं, अन्य कारों को दुर्घटनाग्रस्त कर सकते हैं, लाल बत्ती से उड़ सकते हैं, पैदल चलने वालों को नीचे गोली मार सकते हैं और इतने पर। सामान्य तौर पर, आपको सड़क पर अराजकता पूरी करने के लिए पहुंच प्रदान की जाती है, लेकिन हर कोई खुद से अपराधी नहीं बनाना चाहता है। अपनी खुद की खुशी के लिए कई गेमर्स सड़कों पर जाने की कोशिश करते हैं, सड़क के सभी आवश्यक नियम देख रहे हैं। दुर्भाग्य से, गेम की कार्यक्षमता आपको इसके लिए सभी आवश्यक विशेषताओं के साथ नहीं प्रदान करती है, इसलिए कई खिलाड़ी सोच रहे हैं कि कैसे "जीटीए 4" में चालू संकेतों को चालू करें जैसा कि आप समझते हैं, मूल खेल यह नहीं दर्शाता है कि आप यह कर सकते हैं, क्योंकि आप कहीं और कहीं भी चालू कर सकते हैं।
वास्तव में, आप के बारे में कोई प्रश्न होने की संभावना नहीं है"जीटीए 4" में टर्न सिग्नल को कैसे बदलना है, क्योंकि यह प्रक्रिया बहुत आसानी से तैयार की गई है आपको केवल दो चाबियाँ याद रखने की जरूरत है - दाएं तीर और बाईं ओर तीर। जब आप किसी गाड़ी में चलाते हैं, तो इन चाबियों का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए संशोधन सही और बाएं मोड़ संकेतों को तदनुसार ठीक करता है। इस प्रकार, आप अब शहर की सड़कों पर जा सकते हैं, खेल "जीटीए 4" में सड़क के सभी आवश्यक नियम देख सकते हैं। टर्न सिग्नल को चालू करने के लिए, आप पहले से ही जानते हैं, लेकिन इस स्क्रिप्ट परियोजना में कई अन्य कार्यों को जोड़ता है।
"जीटीए 4" के लिए टर्नर किसी विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंभूमिका, लेकिन अगर यह आपके लिए महत्वपूर्ण है, तो आप संशोधन ऊपर वर्णित सेट कर सकते हैं। आप पहले से ही इसके साथ अपनी बारी निरूपित करने के लिए सीखा है, लेकिन इन सभी चमकती रोशनी के बाद सिर्फ इस उद्देश्य के लिए नहीं हैं। आप यू कुंजी दबाते हैं, जबकि कार में, जब अलार्म चालू। इसका मतलब यह है कि सभी बारी संकेत - आगे और पीछे - नियमित अंतराल पर ब्लिंक करेगा। तथ्य यह है कि यह एक सरल स्क्रिप्ट है कि अपने वाहन संकेतों के केवल आपरेशन को बदल देता है को देखते हुए, एक उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि अन्य कारों क्या आप चालू करने के लिए जा रहे हैं करने के लिए प्रतिक्रिया होगी, या क्या आप एक टूटने की वजह से सड़क के बीच में बंद कर दिया जाता है, ताकि शामिल अलार्म।
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जब आप "जीटीए" श्रृंखला के किसी भी गेम को खेलते हैं, तो आपपरिवहन का उपयोग करने के लिए असीमित संभावनाएं दी गई हैं। आप किसी भी कार को चोरी कर सकते हैं, अधिकतम गति से ड्राइव कर सकते हैं, अन्य कारों को दुर्घटनाग्रस्त कर सकते हैं, लाल बत्ती से उड़ सकते हैं, पैदल चलने वालों को नीचे गोली मार सकते हैं और इतने पर। सामान्य तौर पर, आपको सड़क पर अराजकता पूरी करने के लिए पहुंच प्रदान की जाती है, लेकिन हर कोई खुद से अपराधी नहीं बनाना चाहता है। अपनी खुद की खुशी के लिए कई गेमर्स सड़कों पर जाने की कोशिश करते हैं, सड़क के सभी आवश्यक नियम देख रहे हैं। दुर्भाग्य से, गेम की कार्यक्षमता आपको इसके लिए सभी आवश्यक विशेषताओं के साथ नहीं प्रदान करती है, इसलिए कई खिलाड़ी सोच रहे हैं कि कैसे "जीटीए चार" में चालू संकेतों को चालू करें जैसा कि आप समझते हैं, मूल खेल यह नहीं दर्शाता है कि आप यह कर सकते हैं, क्योंकि आप कहीं और कहीं भी चालू कर सकते हैं। वास्तव में, आप के बारे में कोई प्रश्न होने की संभावना नहीं है"जीटीए चार" में टर्न सिग्नल को कैसे बदलना है, क्योंकि यह प्रक्रिया बहुत आसानी से तैयार की गई है आपको केवल दो चाबियाँ याद रखने की जरूरत है - दाएं तीर और बाईं ओर तीर। जब आप किसी गाड़ी में चलाते हैं, तो इन चाबियों का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए संशोधन सही और बाएं मोड़ संकेतों को तदनुसार ठीक करता है। इस प्रकार, आप अब शहर की सड़कों पर जा सकते हैं, खेल "जीटीए चार" में सड़क के सभी आवश्यक नियम देख सकते हैं। टर्न सिग्नल को चालू करने के लिए, आप पहले से ही जानते हैं, लेकिन इस स्क्रिप्ट परियोजना में कई अन्य कार्यों को जोड़ता है। "जीटीए चार" के लिए टर्नर किसी विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंभूमिका, लेकिन अगर यह आपके लिए महत्वपूर्ण है, तो आप संशोधन ऊपर वर्णित सेट कर सकते हैं। आप पहले से ही इसके साथ अपनी बारी निरूपित करने के लिए सीखा है, लेकिन इन सभी चमकती रोशनी के बाद सिर्फ इस उद्देश्य के लिए नहीं हैं। आप यू कुंजी दबाते हैं, जबकि कार में, जब अलार्म चालू। इसका मतलब यह है कि सभी बारी संकेत - आगे और पीछे - नियमित अंतराल पर ब्लिंक करेगा। तथ्य यह है कि यह एक सरल स्क्रिप्ट है कि अपने वाहन संकेतों के केवल आपरेशन को बदल देता है को देखते हुए, एक उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि अन्य कारों क्या आप चालू करने के लिए जा रहे हैं करने के लिए प्रतिक्रिया होगी, या क्या आप एक टूटने की वजह से सड़क के बीच में बंद कर दिया जाता है, ताकि शामिल अलार्म।
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शास्त्रप्रवृत्तिभेदाः ]
लक्षणमुपपद्यते न वेति विचारः परीक्षा । तेनैते लक्षणपरीक्षे प्रमाणादीनां तत्त्वज्ञानाथ कर्तव्ये ।
गौ के अतिरिक्त अन्य किसी प्राणी के नहीं होती। अतएव यह गौ का असाधारण धर्म या लक्षण है। ] ३ जिसका लक्षण किया गया है वह उसका ठीक लक्षण है या नहीं इस विचार का नाम परीक्षा है। इसलिए [ उद्देश के प्रथम सूत्र में ही हो जाने के बाद अब शेष ग्रन्थ में ] प्रमाणादि के तत्वज्ञान के लिए [ उनकी ] यह लक्षण और परीक्षा करनी चाहिए ।
शास्त्र प्रवृत्ति के भेदयहाँ ग्रन्थकार ने 'त्रिविधा चास्य शास्त्रस्य प्रवृत्तिः- उद्देशो लक्षणं परीक्षा चेति' इस वात्स्यायन भाष्य को उद्धृत करते न्याय शास्त्र की त्रिविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इस त्रिविध प्रवृत्ति का प्रतिपादन सर्वप्रथम भाग्यकार वात्स्यायन ने ही किया है। और वह मुख्यतः न्याय शास्त्र में ही लागू होता
। अन्य सव शास्त्रों में लागू नहीं होता। न्याय के 'समान-तंत्र' कहलाने वाले वैशेषिक में भी त्रिविध नहीं अपितु परीक्षा को छोड़ कर केवल उद्देश और लक्षण रूप द्विविध प्रवृत्ति का ही वर्णन है। और कहीं कहीं अत्यन्त श्रद्धाप्रधान [बौद्ध - जैनादिकों के धर्मसंग्रह आदि] ग्रन्थों में केवल उद्देश रूप एकविध प्रवृत्ति भी पाई जाती है। द्विविध प्रवृत्ति का वर्णन करते हुए वैशेषिक दर्शन के प्रशस्तपाद भाष्य पर 'कन्दली' टीका के लेखक श्रीधराचार्य लिखते हैं"अनुद्दिष्टेषु पदार्थेषु न तेषां लक्षणानि प्रवर्तन्ते निर्विषयत्वात् । अलक्षितेषु च तत्त्वप्रतीत्यभावः कारणाभावात् । अतः पदार्थव्युत्पादनाय प्रवृत्तस्य शास्त्रस्योभयथा प्रवृत्तिः । उद्देशो लक्षणं च परीक्षायास्तु न नियमः ।
यत्राभिहिते लक्षणे प्रवादान्तरव्याक्षेपात् तत्त्वनिश्चयो न भवति तन्त्र परपब्युदासार्थं परीक्षाविधिरधिक्रियते । यत्र तु लक्षणाभिधानसामर्थ्यादेव तत्वनिश्चयः स्यात् तत्रायं व्यर्थो नार्थ्यते । योऽपि त्रिविधां शास्त्रस्य प्रवृत्तिमिच्छति तस्यापि प्रयोजनादीनां नास्ति परीक्षा । तत् कस्य हेतोर्लक्षणमात्रादेव ते प्रतीयन्त इति । एवं चेदर्थप्रतीत्यनुरोधात् शास्त्रस्य प्रवृत्तिर्न त्रिविधैव नामधेयेन पदार्थानामभिधानमुद्देशः । उद्दिष्टस्य स्वपरजातीयव्यावर्तको धर्मो लक्षणम् । लक्षितस्य यथालक्षणं विचारः परीक्षा "" ।
१ 'न्यायकन्दली' पृष्ठ २६ ।
[ विभागान्तर्भावः
इसका अभिप्राय यह है कि, "पदार्थों का उद्देश [ नाममात्र से कथन ] न करने पर उनके लक्षण नहीं हो सकते हैं क्योंकि लक्षण का कोई विषय उपस्थित नहीं है जिसका लक्षण किया जाय। [ अतएव उद्देश करना आवश्यक है ] यदि पदार्थों के लक्षण न किए जायँ तो [ तत्त्वज्ञान का ] कारण न होने से तत्वज्ञान नहीं होगा। इस लिए पदार्थ बोधन के लिए प्रवृत्त शास्त्र के उद्देश और लक्षण रूप दोनों प्रकार की प्रवृत्ति आवश्यक है। परन्तु परीक्षा का कोई नियम नहीं है।"
"जहाँ लक्षण कर देने पर भी दूसरे मर्तों के आक्षेप के कारण तत्वनिर्णय नहीं हो पाता है वहाँ परपक्ष के खण्डन के लिये परीक्षा विधि का अवलम्बन किया जाता है। और जहाँ लक्षण कथन मात्र से ही तत्व का निश्चय हो जाता है वहाँ परीक्षा विधि के व्यर्थ होने से उसका अवलम्बन नहीं किया जाता। और जो [भाष्यकार वात्स्यायन] त्रिविध शास्त्र प्रवृत्ति मानते हैं उनके यहां भी प्रयोजन आदि की परीक्षा नहीं की गई है। यह क्यों है? इसलिए कि लक्षणमात्र से ही उनकी प्रतीति हो जाती है। जब ऐसा है तब अर्थ की प्रतीति के अनुसार प्रवृत्ति होती है न कि तीन ही प्रकार की यह कहना चाहिए" ।
इस प्रकार न्याय के भाष्यकार वात्स्यायन ने त्रिविध प्रवृत्ति का प्रतिपादन किया है और वैशेषिक दर्शन के टीकाकार श्रीधराचार्य ने द्विविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इसका कारण यह है कि न्याय दर्शन के अधिकांश विषयों के विवेचन में सूत्रकार ने ही परीक्षा विधि का भी अवलम्बन किया है। प्रयोजन आदि के वर्णन में यद्यपि परीक्षा विधि का प्रयोग न्यायसूत्रों में नहीं मिलता है फिर भी अधिकांश भाग में परीक्षा भी पाई जाती है इसलिए न्याय के भाष्यकार ने सामान्य रूप से त्रिविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इसके विपरीत वैशेषिक दर्शन में सूत्रकार ने परीक्षा विधि का अवलम्बन नहीं किया है। केवल उद्देश और लक्षण ही अधिकतर किए गए हैं। अतएव वैशेषिक दर्शन के टीकाकार श्रीधराचार्य ने परीक्षा को छोड़ कर केवल द्विविध शास्त्र प्रवृत्ति का वर्णन किया है।
न्याय की इस त्रिविध प्रवृत्ति के अतिरिक्त 'न्यायवार्तिककार' श्री उद्योतकराचार्य तथा 'न्यायमञ्जरीकार' जयन्त भट्ट ने शास्त्र प्रवृत्ति के चतुर्थ प्रकार 'विभाग' का प्रश्न उठाकर और अन्त में उसका उद्देश में ही समावेश दिखा कर त्रिविध प्रवृत्ति का ही समर्थन किया है। उन्होंने लिखा है :लक्षणलक्षणम् ]
'त्रिविधा चास्य शास्त्रस्य प्रवृत्तिरित्युक्तम् । उद्दिष्टविभागश्च न त्रिविधायां शास्त्रप्रवृत्तावन्तर्भवति । तस्मादुद्दिष्टविभागो युक्तः । न उद्दिष्टविभागस्योदेश एवान्तर्भावात् । कस्मात् ? लक्षणसामान्यात् । समानं लक्षणं नामधेयेन पदार्थाभिधानमुद्देश इति"" ।
अर्थात् शास्त्र की विविध प्रवृत्ति होती है यह कहा गया है परन्तु उस त्रिविध प्रवृत्ति में उद्दिष्ट के 'विभाग' का अन्तर्भाव नहीं होता है इसलिए उद्दिष्ट के 'विभाग' को भी चौथा प्रकार मानना उचित है। [ यह प्रश्न है इसका उत्तर करते हैं ] नहीं, उद्दिष्ट के विभाग का अन्तर्भाव उद्देश में ही हो जाता है। क्योंकि दोनों का लक्षण समान है। नाममात्र से पदार्थों के कथन को ही उद्देश कहते हैं और 'विभाग' में विभक्त पदार्थों के नाममात्र का कथन ही होता है अतः विभाग का अन्तर्भाव उद्देश में ही हो सकता है। अतः उसके अलग परिगणन की आवश्यकता नहीं है 1
लक्षण का लक्षणइन तीनों विभागों में से उद्देश और परीक्षा का लक्षण सीधा है। और जो यहां ग्रन्थकार ने दिया है वही 'वात्स्यायन भाष्य' और 'न्यायकन्दली' आदि अन्य ग्रन्थों में भी दिया है। परन्तु 'लक्षण' का 'लक्षण' थोड़ा समझने योग्य है। यहाँ तर्कभाषाकार ने 'लक्षणन्त्वसाधारणधर्मवचनम्' अर्थात् असाधारण धर्म को लक्षण कहते हैं। जैसे गौ का लक्षण सास्नादिमत्व है। यह लक्षण की व्याख्या की है। असाधारण धर्म या विशेष धर्म वह कहलाता है जो केवल लक्ष्य [ जैसे गौ ] में रहे। जो धर्म लक्ष्य से भिन्न अलचय महिष आदि में भी पाया जाय वह लक्षण नहीं कहलाता है क्योंकि उसमें 'अतिव्याप्ति' दोष होता है । 'अलचयवृत्तित्वमतिव्याप्तिः' जो धर्मं अलक्ष्य अर्थात् लक्ष्य से भिन्न में रहे वह 'अतिव्याप्ति' दोषग्रस्त होने से लक्षण नहीं होता। जैसे शृङ्गित्व सींग होनेको गौ का लक्षण नहीं कहा जा सकता है क्योंकि लक्ष्य गौ से भिन्न अर्थात् अलक्ष्य महिपादि में भी शृङ्गित्व धर्म पाया जाता है। अर्थात् सींग भैंस आदि के भी होते हैं, इसलिए 'श्रङ्गित्व' गौ का लक्षण नहीं है ।
इसी प्रकार 'लक्ष्यैकदेशावृत्तित्वमव्याप्तिः' जो धर्म लक्ष्य के एक अंश में न पाया जाय वह 'अव्याप्ति' दोष ग्रस्त होने से लक्षण नहीं कहा जाता। जैसे १ न्या० वा० १, १, ३, । न्यायमञ्जरी पृ० १२ ।
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शास्त्रप्रवृत्तिभेदाः ] लक्षणमुपपद्यते न वेति विचारः परीक्षा । तेनैते लक्षणपरीक्षे प्रमाणादीनां तत्त्वज्ञानाथ कर्तव्ये । गौ के अतिरिक्त अन्य किसी प्राणी के नहीं होती। अतएव यह गौ का असाधारण धर्म या लक्षण है। ] तीन जिसका लक्षण किया गया है वह उसका ठीक लक्षण है या नहीं इस विचार का नाम परीक्षा है। इसलिए [ उद्देश के प्रथम सूत्र में ही हो जाने के बाद अब शेष ग्रन्थ में ] प्रमाणादि के तत्वज्ञान के लिए [ उनकी ] यह लक्षण और परीक्षा करनी चाहिए । शास्त्र प्रवृत्ति के भेदयहाँ ग्रन्थकार ने 'त्रिविधा चास्य शास्त्रस्य प्रवृत्तिः- उद्देशो लक्षणं परीक्षा चेति' इस वात्स्यायन भाष्य को उद्धृत करते न्याय शास्त्र की त्रिविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इस त्रिविध प्रवृत्ति का प्रतिपादन सर्वप्रथम भाग्यकार वात्स्यायन ने ही किया है। और वह मुख्यतः न्याय शास्त्र में ही लागू होता । अन्य सव शास्त्रों में लागू नहीं होता। न्याय के 'समान-तंत्र' कहलाने वाले वैशेषिक में भी त्रिविध नहीं अपितु परीक्षा को छोड़ कर केवल उद्देश और लक्षण रूप द्विविध प्रवृत्ति का ही वर्णन है। और कहीं कहीं अत्यन्त श्रद्धाप्रधान [बौद्ध - जैनादिकों के धर्मसंग्रह आदि] ग्रन्थों में केवल उद्देश रूप एकविध प्रवृत्ति भी पाई जाती है। द्विविध प्रवृत्ति का वर्णन करते हुए वैशेषिक दर्शन के प्रशस्तपाद भाष्य पर 'कन्दली' टीका के लेखक श्रीधराचार्य लिखते हैं"अनुद्दिष्टेषु पदार्थेषु न तेषां लक्षणानि प्रवर्तन्ते निर्विषयत्वात् । अलक्षितेषु च तत्त्वप्रतीत्यभावः कारणाभावात् । अतः पदार्थव्युत्पादनाय प्रवृत्तस्य शास्त्रस्योभयथा प्रवृत्तिः । उद्देशो लक्षणं च परीक्षायास्तु न नियमः । यत्राभिहिते लक्षणे प्रवादान्तरव्याक्षेपात् तत्त्वनिश्चयो न भवति तन्त्र परपब्युदासार्थं परीक्षाविधिरधिक्रियते । यत्र तु लक्षणाभिधानसामर्थ्यादेव तत्वनिश्चयः स्यात् तत्रायं व्यर्थो नार्थ्यते । योऽपि त्रिविधां शास्त्रस्य प्रवृत्तिमिच्छति तस्यापि प्रयोजनादीनां नास्ति परीक्षा । तत् कस्य हेतोर्लक्षणमात्रादेव ते प्रतीयन्त इति । एवं चेदर्थप्रतीत्यनुरोधात् शास्त्रस्य प्रवृत्तिर्न त्रिविधैव नामधेयेन पदार्थानामभिधानमुद्देशः । उद्दिष्टस्य स्वपरजातीयव्यावर्तको धर्मो लक्षणम् । लक्षितस्य यथालक्षणं विचारः परीक्षा "" । एक 'न्यायकन्दली' पृष्ठ छब्बीस । [ विभागान्तर्भावः इसका अभिप्राय यह है कि, "पदार्थों का उद्देश [ नाममात्र से कथन ] न करने पर उनके लक्षण नहीं हो सकते हैं क्योंकि लक्षण का कोई विषय उपस्थित नहीं है जिसका लक्षण किया जाय। [ अतएव उद्देश करना आवश्यक है ] यदि पदार्थों के लक्षण न किए जायँ तो [ तत्त्वज्ञान का ] कारण न होने से तत्वज्ञान नहीं होगा। इस लिए पदार्थ बोधन के लिए प्रवृत्त शास्त्र के उद्देश और लक्षण रूप दोनों प्रकार की प्रवृत्ति आवश्यक है। परन्तु परीक्षा का कोई नियम नहीं है।" "जहाँ लक्षण कर देने पर भी दूसरे मर्तों के आक्षेप के कारण तत्वनिर्णय नहीं हो पाता है वहाँ परपक्ष के खण्डन के लिये परीक्षा विधि का अवलम्बन किया जाता है। और जहाँ लक्षण कथन मात्र से ही तत्व का निश्चय हो जाता है वहाँ परीक्षा विधि के व्यर्थ होने से उसका अवलम्बन नहीं किया जाता। और जो [भाष्यकार वात्स्यायन] त्रिविध शास्त्र प्रवृत्ति मानते हैं उनके यहां भी प्रयोजन आदि की परीक्षा नहीं की गई है। यह क्यों है? इसलिए कि लक्षणमात्र से ही उनकी प्रतीति हो जाती है। जब ऐसा है तब अर्थ की प्रतीति के अनुसार प्रवृत्ति होती है न कि तीन ही प्रकार की यह कहना चाहिए" । इस प्रकार न्याय के भाष्यकार वात्स्यायन ने त्रिविध प्रवृत्ति का प्रतिपादन किया है और वैशेषिक दर्शन के टीकाकार श्रीधराचार्य ने द्विविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इसका कारण यह है कि न्याय दर्शन के अधिकांश विषयों के विवेचन में सूत्रकार ने ही परीक्षा विधि का भी अवलम्बन किया है। प्रयोजन आदि के वर्णन में यद्यपि परीक्षा विधि का प्रयोग न्यायसूत्रों में नहीं मिलता है फिर भी अधिकांश भाग में परीक्षा भी पाई जाती है इसलिए न्याय के भाष्यकार ने सामान्य रूप से त्रिविध प्रवृत्ति का वर्णन किया है। इसके विपरीत वैशेषिक दर्शन में सूत्रकार ने परीक्षा विधि का अवलम्बन नहीं किया है। केवल उद्देश और लक्षण ही अधिकतर किए गए हैं। अतएव वैशेषिक दर्शन के टीकाकार श्रीधराचार्य ने परीक्षा को छोड़ कर केवल द्विविध शास्त्र प्रवृत्ति का वर्णन किया है। न्याय की इस त्रिविध प्रवृत्ति के अतिरिक्त 'न्यायवार्तिककार' श्री उद्योतकराचार्य तथा 'न्यायमञ्जरीकार' जयन्त भट्ट ने शास्त्र प्रवृत्ति के चतुर्थ प्रकार 'विभाग' का प्रश्न उठाकर और अन्त में उसका उद्देश में ही समावेश दिखा कर त्रिविध प्रवृत्ति का ही समर्थन किया है। उन्होंने लिखा है :लक्षणलक्षणम् ] 'त्रिविधा चास्य शास्त्रस्य प्रवृत्तिरित्युक्तम् । उद्दिष्टविभागश्च न त्रिविधायां शास्त्रप्रवृत्तावन्तर्भवति । तस्मादुद्दिष्टविभागो युक्तः । न उद्दिष्टविभागस्योदेश एवान्तर्भावात् । कस्मात् ? लक्षणसामान्यात् । समानं लक्षणं नामधेयेन पदार्थाभिधानमुद्देश इति"" । अर्थात् शास्त्र की विविध प्रवृत्ति होती है यह कहा गया है परन्तु उस त्रिविध प्रवृत्ति में उद्दिष्ट के 'विभाग' का अन्तर्भाव नहीं होता है इसलिए उद्दिष्ट के 'विभाग' को भी चौथा प्रकार मानना उचित है। [ यह प्रश्न है इसका उत्तर करते हैं ] नहीं, उद्दिष्ट के विभाग का अन्तर्भाव उद्देश में ही हो जाता है। क्योंकि दोनों का लक्षण समान है। नाममात्र से पदार्थों के कथन को ही उद्देश कहते हैं और 'विभाग' में विभक्त पदार्थों के नाममात्र का कथन ही होता है अतः विभाग का अन्तर्भाव उद्देश में ही हो सकता है। अतः उसके अलग परिगणन की आवश्यकता नहीं है एक लक्षण का लक्षणइन तीनों विभागों में से उद्देश और परीक्षा का लक्षण सीधा है। और जो यहां ग्रन्थकार ने दिया है वही 'वात्स्यायन भाष्य' और 'न्यायकन्दली' आदि अन्य ग्रन्थों में भी दिया है। परन्तु 'लक्षण' का 'लक्षण' थोड़ा समझने योग्य है। यहाँ तर्कभाषाकार ने 'लक्षणन्त्वसाधारणधर्मवचनम्' अर्थात् असाधारण धर्म को लक्षण कहते हैं। जैसे गौ का लक्षण सास्नादिमत्व है। यह लक्षण की व्याख्या की है। असाधारण धर्म या विशेष धर्म वह कहलाता है जो केवल लक्ष्य [ जैसे गौ ] में रहे। जो धर्म लक्ष्य से भिन्न अलचय महिष आदि में भी पाया जाय वह लक्षण नहीं कहलाता है क्योंकि उसमें 'अतिव्याप्ति' दोष होता है । 'अलचयवृत्तित्वमतिव्याप्तिः' जो धर्मं अलक्ष्य अर्थात् लक्ष्य से भिन्न में रहे वह 'अतिव्याप्ति' दोषग्रस्त होने से लक्षण नहीं होता। जैसे शृङ्गित्व सींग होनेको गौ का लक्षण नहीं कहा जा सकता है क्योंकि लक्ष्य गौ से भिन्न अर्थात् अलक्ष्य महिपादि में भी शृङ्गित्व धर्म पाया जाता है। अर्थात् सींग भैंस आदि के भी होते हैं, इसलिए 'श्रङ्गित्व' गौ का लक्षण नहीं है । इसी प्रकार 'लक्ष्यैकदेशावृत्तित्वमव्याप्तिः' जो धर्म लक्ष्य के एक अंश में न पाया जाय वह 'अव्याप्ति' दोष ग्रस्त होने से लक्षण नहीं कहा जाता। जैसे एक न्याशून्य वाशून्य एक, एक, तीन, । न्यायमञ्जरी पृशून्य बारह ।
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उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में विचाराधीन मुकदमों की संख्या 1000 से भी कम है। यह प्राधिकरण सिर्फ भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं।
लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की मंशा परवान चढ़ी तो भूमि अधिग्रहण के पुराने कानून से जुड़े वर्षों से लंबित मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण तेजी से हो सकेगा। इसके लिए सरकार भूमि अधिग्रहण के पुराने कानून से जुड़े मुकदमों की सुनवाई भूमि अर्जन के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा) में कराने पर विचार कर रही है।
भूमि अर्जन का नया कानून लाने के लिए केंद्र सरकार ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 बनाया था। नया कानून वर्ष 2014 से लागू है। भूमि अर्जन के नए कानून के लागू होने के बाद जमीन के अधिग्रहण से जुड़े मुकदमों की सुनवाई नए अधिनियम के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में ही करने की व्यवस्था है। प्रदेश में फिलहाल 13 ऐसे प्राधिकरण गठित हैं। वहीं वर्ष 2014 से पहले दर्ज हुए जमीन के अधिग्रहण के मुकदमों की सुनवाई भूमि अर्जन के पुराने कानून (भूमि अध्याप्ति अधिनियम, 1894) के तहत जिला जज के न्यायालय में होती है।
पुराने कानून के तहत तहत उत्तर प्रदेश में जिला जजों के न्यायालयों में लगभग 6600 मुकदमे लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मुकदमे भी हैं जो 30-40 वर्षों से लटके हैं। उधर, भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में विचाराधीन मुकदमों की संख्या 1000 से भी कम है। यह प्राधिकरण सिर्फ भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं।
भूमि अर्जन के नए कानून में आपसी समझौते के आधार पर भी जमीन खरीदने की व्यवस्था है। इसलिए इसमें विवाद की गुंजायश कम है। वहीं जिला जजों के न्यायालय अन्य प्रकार के मुकदमों के बोझ से भी दबे हुए हैं। इसलिए शासन स्तर पर विचार विमर्श के बाद यह सहमति बनी है कि भूमि अर्जन के पुराने कानून के तहत दर्ज मुकदमों की तेजी से सुनवाई कराकर उनका निस्तारण कराने के लिए इन्हें भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकरण में ट्रांसफर किया जाए।
इसकी एक और वजह यह है कि पुराने कानून के तहत वर्षों से लंबित मुकदमें जितना लंबा और खिचेंगे और यदि उनमें फैसला खिलाफ हुआ तो सरकार को ब्याज समेत बड़ी रकम का भुगतान करना पड़ेगा। सरकार इसके लिए भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 में संशोधन कर उसे केंद्र सरकार की सहमति के लिए भेजेगी। अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगवाने की तैयारी की जा रही है।
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उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में विचाराधीन मुकदमों की संख्या एक हज़ार से भी कम है। यह प्राधिकरण सिर्फ भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं। लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की मंशा परवान चढ़ी तो भूमि अधिग्रहण के पुराने कानून से जुड़े वर्षों से लंबित मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण तेजी से हो सकेगा। इसके लिए सरकार भूमि अधिग्रहण के पुराने कानून से जुड़े मुकदमों की सुनवाई भूमि अर्जन के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में कराने पर विचार कर रही है। भूमि अर्जन का नया कानून लाने के लिए केंद्र सरकार ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, दो हज़ार तेरह बनाया था। नया कानून वर्ष दो हज़ार चौदह से लागू है। भूमि अर्जन के नए कानून के लागू होने के बाद जमीन के अधिग्रहण से जुड़े मुकदमों की सुनवाई नए अधिनियम के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में ही करने की व्यवस्था है। प्रदेश में फिलहाल तेरह ऐसे प्राधिकरण गठित हैं। वहीं वर्ष दो हज़ार चौदह से पहले दर्ज हुए जमीन के अधिग्रहण के मुकदमों की सुनवाई भूमि अर्जन के पुराने कानून के तहत जिला जज के न्यायालय में होती है। पुराने कानून के तहत तहत उत्तर प्रदेश में जिला जजों के न्यायालयों में लगभग छः हज़ार छः सौ मुकदमे लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मुकदमे भी हैं जो तीस-चालीस वर्षों से लटके हैं। उधर, भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत गठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में विचाराधीन मुकदमों की संख्या एक हज़ार से भी कम है। यह प्राधिकरण सिर्फ भूमि अधिग्रहण के नए कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं। भूमि अर्जन के नए कानून में आपसी समझौते के आधार पर भी जमीन खरीदने की व्यवस्था है। इसलिए इसमें विवाद की गुंजायश कम है। वहीं जिला जजों के न्यायालय अन्य प्रकार के मुकदमों के बोझ से भी दबे हुए हैं। इसलिए शासन स्तर पर विचार विमर्श के बाद यह सहमति बनी है कि भूमि अर्जन के पुराने कानून के तहत दर्ज मुकदमों की तेजी से सुनवाई कराकर उनका निस्तारण कराने के लिए इन्हें भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकरण में ट्रांसफर किया जाए। इसकी एक और वजह यह है कि पुराने कानून के तहत वर्षों से लंबित मुकदमें जितना लंबा और खिचेंगे और यदि उनमें फैसला खिलाफ हुआ तो सरकार को ब्याज समेत बड़ी रकम का भुगतान करना पड़ेगा। सरकार इसके लिए भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, दो हज़ार तेरह में संशोधन कर उसे केंद्र सरकार की सहमति के लिए भेजेगी। अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगवाने की तैयारी की जा रही है।
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Ranchi: मुंबई से गुरुवार को एलटीटी हटिया सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन अहले सुबह हटिया पहुंची. इस ट्रेन से उतरे यात्रियों के संक्रमण की जांच कई यात्री वहां लगी दूसरी ट्रेन से निकल गए. यह सभी यात्री स्टेशन में लगी हटिया-पुर्णिया कोर्ट स्पेशल में सवार होकर यहां से रवाना हो गए.
इस ट्रेन से रांची उतरे यात्रियों की स्टेशन पर कोरोना जांच की व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की गई थी. समय पर आयी इस ट्रेन में करीब 1,126 यात्रियों की कोरोना टेस्ट की गईं. इसके लिए स्टेशन परिसर में ही यात्रियों की जांच की व्यवस्था की गई थी. ट्रेन के रूकने के बाद क्रमवार बोगियों से यात्रियों को कतारबद्ध कर जांच की गई. इसमें कई यात्री रांची से बाहर अन्य जिलों के थे. लेकिन प्लेटफॉर्म से उतरकर बाहर कतार में निकलते ही टर्मिनस में जेनरल काउंटर देख यात्रियों ने वहां से टिकट लिए और वापस सुबह छह बजे हटिया से खुलनेवाली पुर्णियां कोर्ट में सवार हो गए.
इनमें झारखंड के विभिन्न स्टेशनों के करीब 100 यात्री शामिल थे. इसमें मुरी, बोकारो, गोमो, पारसनाथ, कोडरमा, हजारीबाग आदि के यात्री ट्रेन में सवार होकर निकल गए. जबकि 25 से 30 यात्री बिहार के लिए रवाना हो गए. इन स्थानों के यात्री अपने मनमुताबिक स्टेशनों के लिए रवाना हो गए. रेल अधिकारियों के अनुसार ट्रेन में मुंबई से 1,650 से भी ज्यादा यात्री रवाना हुए थे. इसमें से तीन सौ से अधिक यात्री हटिया से पहले के बड़े स्टेशनों पर उतर गए थे.
ट्रेन के अहले सुबह आने को लेकर जिला प्रशासन चिंतित था. हालांकि एक दिन पहले उसने रेलवे से आग्रह किया था कि वह सुबह होने के बाद ही ट्रेन का हटिया स्टेशन आने दे. इस आग्रह को लेकर ट्रेन के आने के समय को लेकर कुछ गलतफहमी हो गई थी. प्रशासन ने रांची आनेवाले यात्रियों की कोविड-19 की जांच में सहूलियत होने के कारण इसे सुबह होने तक विलंब करने का आग्रह किया था. लेकिन ट्रेन 3. 45 बजे हटिया स्टेशन पर लग गई.
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Ranchi: मुंबई से गुरुवार को एलटीटी हटिया सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन अहले सुबह हटिया पहुंची. इस ट्रेन से उतरे यात्रियों के संक्रमण की जांच कई यात्री वहां लगी दूसरी ट्रेन से निकल गए. यह सभी यात्री स्टेशन में लगी हटिया-पुर्णिया कोर्ट स्पेशल में सवार होकर यहां से रवाना हो गए. इस ट्रेन से रांची उतरे यात्रियों की स्टेशन पर कोरोना जांच की व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की गई थी. समय पर आयी इस ट्रेन में करीब एक,एक सौ छब्बीस यात्रियों की कोरोना टेस्ट की गईं. इसके लिए स्टेशन परिसर में ही यात्रियों की जांच की व्यवस्था की गई थी. ट्रेन के रूकने के बाद क्रमवार बोगियों से यात्रियों को कतारबद्ध कर जांच की गई. इसमें कई यात्री रांची से बाहर अन्य जिलों के थे. लेकिन प्लेटफॉर्म से उतरकर बाहर कतार में निकलते ही टर्मिनस में जेनरल काउंटर देख यात्रियों ने वहां से टिकट लिए और वापस सुबह छह बजे हटिया से खुलनेवाली पुर्णियां कोर्ट में सवार हो गए. इनमें झारखंड के विभिन्न स्टेशनों के करीब एक सौ यात्री शामिल थे. इसमें मुरी, बोकारो, गोमो, पारसनाथ, कोडरमा, हजारीबाग आदि के यात्री ट्रेन में सवार होकर निकल गए. जबकि पच्चीस से तीस यात्री बिहार के लिए रवाना हो गए. इन स्थानों के यात्री अपने मनमुताबिक स्टेशनों के लिए रवाना हो गए. रेल अधिकारियों के अनुसार ट्रेन में मुंबई से एक,छः सौ पचास से भी ज्यादा यात्री रवाना हुए थे. इसमें से तीन सौ से अधिक यात्री हटिया से पहले के बड़े स्टेशनों पर उतर गए थे. ट्रेन के अहले सुबह आने को लेकर जिला प्रशासन चिंतित था. हालांकि एक दिन पहले उसने रेलवे से आग्रह किया था कि वह सुबह होने के बाद ही ट्रेन का हटिया स्टेशन आने दे. इस आग्रह को लेकर ट्रेन के आने के समय को लेकर कुछ गलतफहमी हो गई थी. प्रशासन ने रांची आनेवाले यात्रियों की कोविड-उन्नीस की जांच में सहूलियत होने के कारण इसे सुबह होने तक विलंब करने का आग्रह किया था. लेकिन ट्रेन तीन. पैंतालीस बजे हटिया स्टेशन पर लग गई.
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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को नये डॉक्टर मिल गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 73 नए चिकित्सा अधिकारियों (एमबीबीएस) की पदस्थापना का आदेश जारी किया गया है। इन नव नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, मातृ एवं शिशु अस्पतालों तथा जिला चिकित्सालयों में तैनात किया गया है।
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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को नये डॉक्टर मिल गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा तिहत्तर नए चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना का आदेश जारी किया गया है। इन नव नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, मातृ एवं शिशु अस्पतालों तथा जिला चिकित्सालयों में तैनात किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लंबे समय तक वीडियो उपकरण बाजार में पैनासोनिक कंपनी उपयोगकर्ता के अनुरोधों को पूरा करने, प्रमुख और बजट मॉडल जारी करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, कभी-कभी उन्हें ऐसे डिवाइस मिलते हैं जो एक निश्चित श्रेणी में विशेषता के लिए मुश्किल होते हैं। हाल ही में एक - पैनासोनिक एचसी वी 500 मॉडल लगभग प्रमुख मापदंडों और बजटीय लागत को जोड़ता है बाह्य रूप से, इसकी कीमत की तुलना में अधिक महंगा लग रहा है, जो खरीदारी करने के लिए आकर्षित होता है। एक पैनासोनिक एचसी वी 500 और खामियां हैं, जिन्हें आप नीचे देखेंगे।
कंपनी के लिए सामान्य तरीके से एक वीडियो कैमरा डिलीवर किया जाता हैबॉक्स यह मॉडल और इसके कुछ विशेषताओं को दिखाता है अंदर सब कुछ मानक हैः एक कैमरा, तारों का एक सेट, आवश्यक ड्राइवरों और मैनुअल। बंडल को उदार नहीं कहा जा सकता, लेकिन डिवाइस के पूर्ण संचालन के लिए आपको कुछ भी खरीदने की ज़रूरत नहीं है।
बैटरी आपको 150 मिनट तक शूट करने की अनुमति देती है। बेशक, रिकॉर्डिंग की गुणवत्ता काम की अवधि को प्रभावित करती है। औसत उपयोगकर्ता के लिए, इस बैटरी की क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए। अन्यथा, आप अलग-अलग बैटरी खरीद सकते हैं जो आपको लंबे समय तक शूट करने की अनुमति देते हैं। बैटरी को 2.5 घंटे तक पूरी तरह से चार्ज करता है। इस वर्ग के एक उपकरण के लिए, ऐसी स्वायत्तता स्वीकार्य है।
कैमरा ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक अधिग्रहण कियास्थिरीकरण, जो सामान्य रूप से आश्चर्यजनक नहीं है। आज, ऐसा एक सेट प्रत्येक कम या कम उपयुक्त उपकरण में मौजूद है। एक बार हम बताएंगे कि रिकॉर्ड की उत्कृष्ट गुणवत्ता पर गिनना जरूरी नहीं है, जैसे कि अधिक महंगी वीडियो कैमरे में। डेवलपर ने मैट्रिक्स पर सहेजा, जिसे काफी छोटा कार्य क्षेत्र मिला। हाइब्रिड स्थिरीकरण आपको रोलर्स को चिकनी बनाने की अनुमति देता है, लेकिन वे उसी पैनासोनिक से शीर्ष कैमरे पर प्राप्त किए गए लोगों की तुलना में काफी खराब हैं।
एक ऑप्टिकल और डिजिटल ज़ूम (38x / 100x) है। आपको दूरस्थ वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है। सच है, एक स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करना बहुत मुश्किल है जो टहलने नहीं करेगा। यह आंशिक रूप से एक तिपाई का उपयोग कर शूटिंग द्वारा हल किया जाता है।
रात में, कैमरा आत्मविश्वास से राहत देता है। व्यावहारिक रूप से कोई शोर नहीं है, जो पहले ही उत्साहजनक है। हालांकि, विवरण निम्न स्तर पर है। प्रकाश जोड़ने से फिल्म की स्पष्टता बढ़ जाती है, लेकिन यह समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर सकती है।
"ईमानदार" फुलएचडी कैमरा देता है कैमरा काम नहीं करता है। कारण यह है कि मैट्रिक्स का वही छोटा आकार। ऐसा होता है कि निचले संकल्प में शूटिंग करते समय भी आप कुछ वस्तुओं की अस्पष्ट रूपरेखा देख सकते हैं। यह विशेष रूप से दूरस्थ आंकड़ों में ध्यान देने योग्य है।
वही समस्याएं पीड़ित हैं और तस्वीरें। आप कई संकल्पों में चित्र ले सकते हैं। इसके बाद, फुटेज वीडियो कैमरे के सॉफ़्टवेयर द्वारा फैलाया जाता है, जो तस्वीर की गुणवत्ता को काफी कम करता है।
सामान्य रूप से, कैमरे को वर्णित किया जा सकता हैपरिवार की छुट्टियों और अन्य घटनाओं को शूटिंग के लिए एक अच्छा शौकिया डिवाइस। गंभीर वीडियो शूटिंग के लिए, मॉडल फिट होने की संभावना नहीं है, भले ही आप वास्तव में चाहते हैं।
कैमरा सॉफ्टवेयर वही प्राप्त हुआ,साथ ही साथ अन्य पैनासोनिक डिवाइस, जिन्हें 2012 में रिलीज़ किया गया था। इंटरफ़ेस सरल और सीधा है, यहां तक कि एक शुरुआत भी समझ जाएगा। तत्व आकार में बड़े हैं, इसलिए उंगली से चूकना लगभग असंभव है। मेनू को तार्किक और संगठित किया गया है ताकि उपयोगकर्ता उलझन में न हो। किट में लाइसेंस प्राप्त उपयोगिताओं के साथ एक डिस्क है।
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लंबे समय तक वीडियो उपकरण बाजार में पैनासोनिक कंपनी उपयोगकर्ता के अनुरोधों को पूरा करने, प्रमुख और बजट मॉडल जारी करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, कभी-कभी उन्हें ऐसे डिवाइस मिलते हैं जो एक निश्चित श्रेणी में विशेषता के लिए मुश्किल होते हैं। हाल ही में एक - पैनासोनिक एचसी वी पाँच सौ मॉडल लगभग प्रमुख मापदंडों और बजटीय लागत को जोड़ता है बाह्य रूप से, इसकी कीमत की तुलना में अधिक महंगा लग रहा है, जो खरीदारी करने के लिए आकर्षित होता है। एक पैनासोनिक एचसी वी पाँच सौ और खामियां हैं, जिन्हें आप नीचे देखेंगे। कंपनी के लिए सामान्य तरीके से एक वीडियो कैमरा डिलीवर किया जाता हैबॉक्स यह मॉडल और इसके कुछ विशेषताओं को दिखाता है अंदर सब कुछ मानक हैः एक कैमरा, तारों का एक सेट, आवश्यक ड्राइवरों और मैनुअल। बंडल को उदार नहीं कहा जा सकता, लेकिन डिवाइस के पूर्ण संचालन के लिए आपको कुछ भी खरीदने की ज़रूरत नहीं है। बैटरी आपको एक सौ पचास मिनट तक शूट करने की अनुमति देती है। बेशक, रिकॉर्डिंग की गुणवत्ता काम की अवधि को प्रभावित करती है। औसत उपयोगकर्ता के लिए, इस बैटरी की क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए। अन्यथा, आप अलग-अलग बैटरी खरीद सकते हैं जो आपको लंबे समय तक शूट करने की अनुमति देते हैं। बैटरी को दो दशमलव पाँच घंटाटे तक पूरी तरह से चार्ज करता है। इस वर्ग के एक उपकरण के लिए, ऐसी स्वायत्तता स्वीकार्य है। कैमरा ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक अधिग्रहण कियास्थिरीकरण, जो सामान्य रूप से आश्चर्यजनक नहीं है। आज, ऐसा एक सेट प्रत्येक कम या कम उपयुक्त उपकरण में मौजूद है। एक बार हम बताएंगे कि रिकॉर्ड की उत्कृष्ट गुणवत्ता पर गिनना जरूरी नहीं है, जैसे कि अधिक महंगी वीडियो कैमरे में। डेवलपर ने मैट्रिक्स पर सहेजा, जिसे काफी छोटा कार्य क्षेत्र मिला। हाइब्रिड स्थिरीकरण आपको रोलर्स को चिकनी बनाने की अनुमति देता है, लेकिन वे उसी पैनासोनिक से शीर्ष कैमरे पर प्राप्त किए गए लोगों की तुलना में काफी खराब हैं। एक ऑप्टिकल और डिजिटल ज़ूम है। आपको दूरस्थ वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है। सच है, एक स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करना बहुत मुश्किल है जो टहलने नहीं करेगा। यह आंशिक रूप से एक तिपाई का उपयोग कर शूटिंग द्वारा हल किया जाता है। रात में, कैमरा आत्मविश्वास से राहत देता है। व्यावहारिक रूप से कोई शोर नहीं है, जो पहले ही उत्साहजनक है। हालांकि, विवरण निम्न स्तर पर है। प्रकाश जोड़ने से फिल्म की स्पष्टता बढ़ जाती है, लेकिन यह समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर सकती है। "ईमानदार" फुलएचडी कैमरा देता है कैमरा काम नहीं करता है। कारण यह है कि मैट्रिक्स का वही छोटा आकार। ऐसा होता है कि निचले संकल्प में शूटिंग करते समय भी आप कुछ वस्तुओं की अस्पष्ट रूपरेखा देख सकते हैं। यह विशेष रूप से दूरस्थ आंकड़ों में ध्यान देने योग्य है। वही समस्याएं पीड़ित हैं और तस्वीरें। आप कई संकल्पों में चित्र ले सकते हैं। इसके बाद, फुटेज वीडियो कैमरे के सॉफ़्टवेयर द्वारा फैलाया जाता है, जो तस्वीर की गुणवत्ता को काफी कम करता है। सामान्य रूप से, कैमरे को वर्णित किया जा सकता हैपरिवार की छुट्टियों और अन्य घटनाओं को शूटिंग के लिए एक अच्छा शौकिया डिवाइस। गंभीर वीडियो शूटिंग के लिए, मॉडल फिट होने की संभावना नहीं है, भले ही आप वास्तव में चाहते हैं। कैमरा सॉफ्टवेयर वही प्राप्त हुआ,साथ ही साथ अन्य पैनासोनिक डिवाइस, जिन्हें दो हज़ार बारह में रिलीज़ किया गया था। इंटरफ़ेस सरल और सीधा है, यहां तक कि एक शुरुआत भी समझ जाएगा। तत्व आकार में बड़े हैं, इसलिए उंगली से चूकना लगभग असंभव है। मेनू को तार्किक और संगठित किया गया है ताकि उपयोगकर्ता उलझन में न हो। किट में लाइसेंस प्राप्त उपयोगिताओं के साथ एक डिस्क है।
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- #Uttar-pradeshSDM Jyoti Maurya: अब मुश्किल में मनीष दुबे, DIG ने DG को सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब क्या होगा?
लखनऊ, 5 अक्टूबरः उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अब प्राइवेट अस्पतालों की नकेल कसने का फैसला किया है। इसको लेकर यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि निजी अस्पतालों को अब यह बताना होगा कि उनके यहां कौन कौन से डॉक्टर तैनात हैं और उनके पास किस स्तर की डिग्री है। दरअसल सरकार के पास ऐसी सूचना आ रही है कि निजी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर अयोग्य डॉक्टरों को तैनात कर उनसे काम लिया जा रहा है। इसके बाद सरकार ने ये आदेश जारी किया है।
राज्य की राजधानी के निजी अस्पतालों को अपने साथ काम करने वाले डॉक्टरों के नाम दिखाने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को लखनऊ के सभी निजी अस्पतालों को एक पत्र जारी कर सभी डॉक्टरों के नाम और उनकी विशेषता को ऐसी जगह पर प्रदर्शित करने के लिए कहा जहां पर परिचारक उन्हें स्पष्ट रूप से देख सकें।
ओपीडी करने वालों के साथ आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों, रात्रि ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों के नाम प्रदर्शित करने की आवश्यकता है। अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ, डॉ एपी सिंह ने कहा, "इससे मरीजों को इलाज करने वाले डॉक्टरों की योग्यता जानने में मदद मिलेगी। "
एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स के महासचिव डॉ अभिषेक शुक्ला ने कहा कि, "जब एक अस्पताल शुरू किया जाता है, तो अस्पताल को मरीजों को देखने के लिए लाइसेंस जारी करने से पहले डॉक्टरों के नाम मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा किए जाते हैं। अस्पताल के लिए काम कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल टीम के बारे में मरीजों को बताने में कोई हर्ज नहीं है। यह अस्पताल और उसके रोगियों के बीच विश्वास का निर्माण करेगा। "
स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम पिछले दो महीने में औचक निरीक्षण के दौरान दो अस्पतालों में अयोग्य डॉक्टरों के काम करते पाए जाने के बाद यह कदम उठाया है। इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लगातार सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं जिससे खलबली मची है। इसी तरह सरकारी के अलावा अब प्राइवेट अस्पतालों को सुधारने की कवायद की जा रही है।
राज्य में डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से अनुबंध के आधार पर सेवानिवृत्त डॉक्टरों को नियुक्त करने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टरों की कमी से मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
पाठक ने कहा, "जिन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, उन्हें उन विभागों को सूचीबद्ध करना चाहिए। डॉक्टरों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से अनुबंध के आधार पर तैनात किया जा सकता है। " उन्होंने कहा कि अस्पतालों में जो दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अस्पतालों से स्थानीय स्तर पर खरीदकर ही खरीदा जाना चाहिए।
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- #Uttar-pradeshSDM Jyoti Maurya: अब मुश्किल में मनीष दुबे, DIG ने DG को सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब क्या होगा? लखनऊ, पाँच अक्टूबरः उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अब प्राइवेट अस्पतालों की नकेल कसने का फैसला किया है। इसको लेकर यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि निजी अस्पतालों को अब यह बताना होगा कि उनके यहां कौन कौन से डॉक्टर तैनात हैं और उनके पास किस स्तर की डिग्री है। दरअसल सरकार के पास ऐसी सूचना आ रही है कि निजी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर अयोग्य डॉक्टरों को तैनात कर उनसे काम लिया जा रहा है। इसके बाद सरकार ने ये आदेश जारी किया है। राज्य की राजधानी के निजी अस्पतालों को अपने साथ काम करने वाले डॉक्टरों के नाम दिखाने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को लखनऊ के सभी निजी अस्पतालों को एक पत्र जारी कर सभी डॉक्टरों के नाम और उनकी विशेषता को ऐसी जगह पर प्रदर्शित करने के लिए कहा जहां पर परिचारक उन्हें स्पष्ट रूप से देख सकें। ओपीडी करने वालों के साथ आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों, रात्रि ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों के नाम प्रदर्शित करने की आवश्यकता है। अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ, डॉ एपी सिंह ने कहा, "इससे मरीजों को इलाज करने वाले डॉक्टरों की योग्यता जानने में मदद मिलेगी। " एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल डॉक्टर्स के महासचिव डॉ अभिषेक शुक्ला ने कहा कि, "जब एक अस्पताल शुरू किया जाता है, तो अस्पताल को मरीजों को देखने के लिए लाइसेंस जारी करने से पहले डॉक्टरों के नाम मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा किए जाते हैं। अस्पताल के लिए काम कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल टीम के बारे में मरीजों को बताने में कोई हर्ज नहीं है। यह अस्पताल और उसके रोगियों के बीच विश्वास का निर्माण करेगा। " स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम पिछले दो महीने में औचक निरीक्षण के दौरान दो अस्पतालों में अयोग्य डॉक्टरों के काम करते पाए जाने के बाद यह कदम उठाया है। इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लगातार सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं जिससे खलबली मची है। इसी तरह सरकारी के अलावा अब प्राइवेट अस्पतालों को सुधारने की कवायद की जा रही है। राज्य में डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से अनुबंध के आधार पर सेवानिवृत्त डॉक्टरों को नियुक्त करने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टरों की कमी से मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। पाठक ने कहा, "जिन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, उन्हें उन विभागों को सूचीबद्ध करना चाहिए। डॉक्टरों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से अनुबंध के आधार पर तैनात किया जा सकता है। " उन्होंने कहा कि अस्पतालों में जो दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अस्पतालों से स्थानीय स्तर पर खरीदकर ही खरीदा जाना चाहिए।
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Hyundai Stargazer - अगर आप एक 7 सीटर, किफायती रेंज और आकर्षक लुक के साथ, बेहतरीन फीचर्स वाली एक कार लेने की सोच रहे हैं तो हुंडई मोटर्स की आगामी MPV-Hyundai Stargazer आपके लिए एक बेहतरीन कार साबित हो सकती है. खबरों की मानें तो इस कार की लंबे समय से टेस्टिंग विदेशों में चल रही है और यह भी खबर सामने आ रही है कि इसके लुक को अगस्त 2022 तक रिलीज कर दिया जाएगा. दिलचस्पी की बात यह है कि इसे सबसे पहले कंपनी इंडोनेशिया में लॉन्च करने की सोच रही है, इसी के साथ अनुमान लगाया जा सकता है कि इसे भारतीय बाजार में भी जल्द ही कंपनी पेश करेगी. यह एमपीवी कार महिंद्रा एक्सयूवी, अपकमिंग टोयोटा अवांजा, किआ कारेन्स और मारुति सुजुकी अर्टिगा को बराबरी की टक्कर देती नजर आयेगी.
भारत में आपको फिलहाल 6 सीटर विकल्प के साथ हुंडई मोटर्स की अल्काजार कार देखने को मिलती है. हुंडई Stargazer के लुक के बारे में बात करें तो इसको किआ कारेन्स के जैसे ही SP2 प्लेटफार्म पर विकसित किए जाने की बात कही जा रही है. इस नई MPV Stargazer में आपको स्प्लिट हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, स्लोपिंग रूफलाइन और न्यू ग्रिल के साथ शार्क फिन एंटीना जैसे आकर्षक एक्सटीरियर डिजाइन प्रदान की जाएगी. इस एमपीवी की लंबाई 4. 5 मीटर होगी और इसका व्हीलबेस 2. 7 मीटर का देखने को मिलेगा. एमपीवी सेगमेंट की अन्य कारों की तुलना में यह कार काफी किफायती और बेहतरीन फीचर्स वाली होगी.
लेटेस्ट फीचर्स से साथ दमदार इंजन- हुंडई की आगामी MPV Stargazer में आपको 1. 5 लीटर का 4 सिलेंडर नेचुरल एस्पिरेटर पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो 113 bhp की पावर और 145 Nm का टॉर्क जनरेट करेगा. वहीं Stargazer में आपको 1. 5 लीटर टर्बो डीजल इंजन भी देखने को मिल सकता है, जिसमें 113 bhp की पावर और 250 Nm का टॉर्क जनरेट करने की क्षमता होगी.
यह कार 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ ही सीवीटी ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के विकल्प में भी देखने को मिल सकती है. Stargazer के फीचर्स के बारे में आपको बताएं तो इस कार में आपको एमपीवी में एंड्राइड ऑटो और एप्पल कार प्ले सपोर्ट वाला टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, एडवांस ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम, मल्टीपल एयर बैग्स और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे तमाम लेटेस्ट फीचर्स और साथ ही सेफ्टी फीचर्स भी देखने को मिलते हैं.
Car loan Information:
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Hyundai Stargazer - अगर आप एक सात सीटर, किफायती रेंज और आकर्षक लुक के साथ, बेहतरीन फीचर्स वाली एक कार लेने की सोच रहे हैं तो हुंडई मोटर्स की आगामी MPV-Hyundai Stargazer आपके लिए एक बेहतरीन कार साबित हो सकती है. खबरों की मानें तो इस कार की लंबे समय से टेस्टिंग विदेशों में चल रही है और यह भी खबर सामने आ रही है कि इसके लुक को अगस्त दो हज़ार बाईस तक रिलीज कर दिया जाएगा. दिलचस्पी की बात यह है कि इसे सबसे पहले कंपनी इंडोनेशिया में लॉन्च करने की सोच रही है, इसी के साथ अनुमान लगाया जा सकता है कि इसे भारतीय बाजार में भी जल्द ही कंपनी पेश करेगी. यह एमपीवी कार महिंद्रा एक्सयूवी, अपकमिंग टोयोटा अवांजा, किआ कारेन्स और मारुति सुजुकी अर्टिगा को बराबरी की टक्कर देती नजर आयेगी. भारत में आपको फिलहाल छः सीटर विकल्प के साथ हुंडई मोटर्स की अल्काजार कार देखने को मिलती है. हुंडई Stargazer के लुक के बारे में बात करें तो इसको किआ कारेन्स के जैसे ही SPदो प्लेटफार्म पर विकसित किए जाने की बात कही जा रही है. इस नई MPV Stargazer में आपको स्प्लिट हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, स्लोपिंग रूफलाइन और न्यू ग्रिल के साथ शार्क फिन एंटीना जैसे आकर्षक एक्सटीरियर डिजाइन प्रदान की जाएगी. इस एमपीवी की लंबाई चार. पाँच मीटर होगी और इसका व्हीलबेस दो. सात मीटर का देखने को मिलेगा. एमपीवी सेगमेंट की अन्य कारों की तुलना में यह कार काफी किफायती और बेहतरीन फीचर्स वाली होगी. लेटेस्ट फीचर्स से साथ दमदार इंजन- हुंडई की आगामी MPV Stargazer में आपको एक. पाँच लीटरटर का चार सिलेंडर नेचुरल एस्पिरेटर पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो एक सौ तेरह bhp की पावर और एक सौ पैंतालीस Nm का टॉर्क जनरेट करेगा. वहीं Stargazer में आपको एक. पाँच लीटरटर टर्बो डीजल इंजन भी देखने को मिल सकता है, जिसमें एक सौ तेरह bhp की पावर और दो सौ पचास Nm का टॉर्क जनरेट करने की क्षमता होगी. यह कार छः स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ ही सीवीटी ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के विकल्प में भी देखने को मिल सकती है. Stargazer के फीचर्स के बारे में आपको बताएं तो इस कार में आपको एमपीवी में एंड्राइड ऑटो और एप्पल कार प्ले सपोर्ट वाला टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, एडवांस ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम, मल्टीपल एयर बैग्स और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे तमाम लेटेस्ट फीचर्स और साथ ही सेफ्टी फीचर्स भी देखने को मिलते हैं. Car loan Information:
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छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली कंपनी ने अडाणी एंटरप्राइजेज के साथ किए गए एक कोयला ब्लॉक कॉन्ट्रैक्ट के संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया था. सूचना आयोग ने कंपनी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए ये फैसला दिया है.
पहली घटना उत्तर प्रदेश के संभल की है, जहां पुलिसकर्मियों की वैन पर हमला कर बदमाश तीन कैदियों को छुड़ा ले गए और दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी. दूसरी घटना में सोनभद्र ज़िले में ज़मीन विवाद में तीन महिलाओं समेत नौ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में यह जानकारी दी. 26 फरवरी को भारत द्वारा सीमा पार बालाकोट में आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने के लिए की गई 'एयर स्ट्राइक' के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायु सीमा बंद कर दी थी.
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी.
मामला उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले का है. सैयदराजा से भाजपा विधायक सुशील सिंह ने वहां के नेशनल इंटर कॉलेज के छात्रों को भाजपा का पट्टा पहनाकर शपथ दिलाई.
वीडियोः जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सज़ा पर अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने रोक लगा दी. इस मुद्दे पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.
सोनभद्र पुलिस ने बताया कि घटना घोरावल के उभा गांव की है. ग्राम प्रधान ने दो साल पहले 90 बीघा ज़मीन ख़रीदी थी. वह अपने कुछ सहयोगियों के साथ जमीन पर कब्जा करने गया था. इसका गांव वालों ने विरोध किया. इस पर प्रधान और उसके लोगों ने गांववालों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. घटना में 19 लोग घायल हो गए हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि देश की इंच-इंच ज़मीन पर जो अवैध प्रवासी रहते हैं, हम उनकी पहचान करेंगे तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उन्हें निर्वासित करेंगे.
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए है और मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबी को ख़त्म करना है. गरीबी दूर करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है.
केरल में भारी बारिश की संभावना. राज्य के छह ज़िलों में रेड अलर्ट जारी. असम का काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का 90 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न.
25 सप्ताह की गर्भवती महिला को गर्भपात की अनुमति देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि असामान्य भ्रूण का गर्भपात कराने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि गर्भावस्था 20 सप्ताह से अधिक की है.
वीडियोः उत्तर प्रदेश के बरेली से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने की बेटी साक्षी मिश्रा ने दलित युवक अजितेश से शादी करने के बाद पिता से अपनी जान का ख़तरा बताया था. इस मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.
पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिनमें से एक मुश्ताक नाम के व्यक्ति के खिलाफ है और दूसरी मदरसे में तोड़-फोड़ के लिए 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है.
बांग्लादेश में तस्करी की जा रहीं इन गायों को बीएसएफ ने ज़ब्त किया था. गोशाला की प्रभारी जोशीन एंटनी ने कहा कि गोशाला में कम से कम 700 गाय हैं. हम गायों की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से हमें कोई सहायता नहीं मिली है.
यह मामला बनासकांठा जिले के दांतीवाड़ा तालुका का है. अविवाहित महिलाएं मोबाइल फोन के साथ पकड़ी जाएंगी तो उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. अगर लड़की अंतरजातीय विवाह करेगी तो डेढ़ लाख रुपये और अगर लड़का अंतरजातीय विवाह करेगा तो दो लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा.
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छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली कंपनी ने अडाणी एंटरप्राइजेज के साथ किए गए एक कोयला ब्लॉक कॉन्ट्रैक्ट के संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया था. सूचना आयोग ने कंपनी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए ये फैसला दिया है. पहली घटना उत्तर प्रदेश के संभल की है, जहां पुलिसकर्मियों की वैन पर हमला कर बदमाश तीन कैदियों को छुड़ा ले गए और दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी. दूसरी घटना में सोनभद्र ज़िले में ज़मीन विवाद में तीन महिलाओं समेत नौ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में यह जानकारी दी. छब्बीस फरवरी को भारत द्वारा सीमा पार बालाकोट में आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने के लिए की गई 'एयर स्ट्राइक' के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायु सीमा बंद कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी. मामला उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले का है. सैयदराजा से भाजपा विधायक सुशील सिंह ने वहां के नेशनल इंटर कॉलेज के छात्रों को भाजपा का पट्टा पहनाकर शपथ दिलाई. वीडियोः जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सज़ा पर अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने रोक लगा दी. इस मुद्दे पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत. सोनभद्र पुलिस ने बताया कि घटना घोरावल के उभा गांव की है. ग्राम प्रधान ने दो साल पहले नब्बे बीघा ज़मीन ख़रीदी थी. वह अपने कुछ सहयोगियों के साथ जमीन पर कब्जा करने गया था. इसका गांव वालों ने विरोध किया. इस पर प्रधान और उसके लोगों ने गांववालों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. घटना में उन्नीस लोग घायल हो गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि देश की इंच-इंच ज़मीन पर जो अवैध प्रवासी रहते हैं, हम उनकी पहचान करेंगे तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उन्हें निर्वासित करेंगे. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए है और मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबी को ख़त्म करना है. गरीबी दूर करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है. केरल में भारी बारिश की संभावना. राज्य के छह ज़िलों में रेड अलर्ट जारी. असम का काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का नब्बे प्रतिशत हिस्सा जलमग्न. पच्चीस सप्ताह की गर्भवती महिला को गर्भपात की अनुमति देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि असामान्य भ्रूण का गर्भपात कराने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि गर्भावस्था बीस सप्ताह से अधिक की है. वीडियोः उत्तर प्रदेश के बरेली से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने की बेटी साक्षी मिश्रा ने दलित युवक अजितेश से शादी करने के बाद पिता से अपनी जान का ख़तरा बताया था. इस मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं आरफ़ा ख़ानम शेरवानी. पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिनमें से एक मुश्ताक नाम के व्यक्ति के खिलाफ है और दूसरी मदरसे में तोड़-फोड़ के लिए साठ अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है. बांग्लादेश में तस्करी की जा रहीं इन गायों को बीएसएफ ने ज़ब्त किया था. गोशाला की प्रभारी जोशीन एंटनी ने कहा कि गोशाला में कम से कम सात सौ गाय हैं. हम गायों की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से हमें कोई सहायता नहीं मिली है. यह मामला बनासकांठा जिले के दांतीवाड़ा तालुका का है. अविवाहित महिलाएं मोबाइल फोन के साथ पकड़ी जाएंगी तो उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. अगर लड़की अंतरजातीय विवाह करेगी तो डेढ़ लाख रुपये और अगर लड़का अंतरजातीय विवाह करेगा तो दो लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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8वां वेतन आयोगः पिछले कुछ दिनों से 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा चल रही है. आठवां वेतन आयोग लागू होगा या नहीं इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
मोदी सरकार ने इस बारे में अहम जानकारी दी है और जानकारी के मुताबिक सरकार ने साफ किया है कि आठवां वेतन आयोग नहीं आएगा.
केंद्र सरकार ने अब इस दावे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए इसे निराधार बताया है। यानी केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए सरकार 8वां केंद्रीय वेतन आयोग लाने की योजना नहीं बना रही है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।
चौधरी से सदन में पूछा गया कि क्या यह सच है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में सुधार के लिए सरकार 8वां वेतन आयोग लागू करने की योजना बना रही है।
इसका जवाब दिया गया है कि सरकार की ओर से ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है.
यह बदलेगा नियम!
दूसरी ओर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने कर्मचारियों के वेतन और पदोन्नति के संबंध में कहा कि समय-समय पर वेतन मैट्रिक्स में बदलाव करने का सुझाव दिया गया है और आगे वेतन की कोई आवश्यकता नहीं है.
ऐसे में कर्मचारियों की जरूरत के हिसाब से फैसला लिया जाना चाहिए, जिसके आधार पर एक्रोयड फॉर्मूले की समीक्षा और संशोधन किया जा सके. यानी सरकार प्रमोशन के नियमों में बदलाव कर सकती है.
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आठवां वेतन आयोगः पिछले कुछ दिनों से आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा चल रही है. आठवां वेतन आयोग लागू होगा या नहीं इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। मोदी सरकार ने इस बारे में अहम जानकारी दी है और जानकारी के मुताबिक सरकार ने साफ किया है कि आठवां वेतन आयोग नहीं आएगा. केंद्र सरकार ने अब इस दावे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए इसे निराधार बताया है। यानी केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए सरकार आठवां केंद्रीय वेतन आयोग लाने की योजना नहीं बना रही है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। चौधरी से सदन में पूछा गया कि क्या यह सच है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में सुधार के लिए सरकार आठवां वेतन आयोग लागू करने की योजना बना रही है। इसका जवाब दिया गया है कि सरकार की ओर से ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है. यह बदलेगा नियम! दूसरी ओर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने कर्मचारियों के वेतन और पदोन्नति के संबंध में कहा कि समय-समय पर वेतन मैट्रिक्स में बदलाव करने का सुझाव दिया गया है और आगे वेतन की कोई आवश्यकता नहीं है. ऐसे में कर्मचारियों की जरूरत के हिसाब से फैसला लिया जाना चाहिए, जिसके आधार पर एक्रोयड फॉर्मूले की समीक्षा और संशोधन किया जा सके. यानी सरकार प्रमोशन के नियमों में बदलाव कर सकती है.
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मनमोहन कुमार आर्य,
द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव 4 जून से आरम्भ हुआ है जो 6 जून 2018 को समाप्त होगा। हमें आज इस गुरुकुल के उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। हमारे पहुंचने से पूर्व गुरुकुल की 7 ब्रह्मचारिणियों का समावर्तन संस्कार सम्पन्न हो चुका था और उसके बाद विद्वानों द्वारा उनको भावी जीवन में कर्तव्यों आदि के विषय में प्रेरित किया जा रहा था। मंच पर आर्यजगत के अनेक विद्वान, नेता व संन्यासी उपस्थित थे। प्रमुख लोग स्वामी आशुतोष परिव्राजक जी, डा. प्रियंवदा वेद-शास्त्री, आचार्य आशीष दर्शनाचार्य, सार्वदेशिक सभा के नेता श्री सुरेश चन्द्र अग्रवाल जी, ठाकुर विक्रम सिंह जी, डा. अन्नपूर्णा जी सहित पं. सत्यपाल पथिक एवं उनके सुपुत्र भजन गायक श्री दिनेश पथिक जी उपस्थित थे। हम जब पहुचें तो वहां श्री दिनेश पथिक जी अपने पिता की एक बहुत ही भावपूर्ण रचना सुना रहे थे जिसके बोल थे 'प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो और गगन से विशाल हो। मैं मिसाल दूं तुम्हें कौन सी दुनियां में तुम बेमिसाल हो। । ' यह भजन उन्होंने गिट्टार बजा कर सुनाया जो बहुत आनन्ददायक लग रहा था। कार्यक्रम का संचालन गुरुकुल की आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी कर रही थीं। भजन के बाद गुरुकुल की 6 छात्राओं ने संस्कृत भाषा का एक स्वागत गीत सुनाया। डा. अन्नपूर्णा जी ने सूचना दी की कुछ समय पूर्व 6 छात्राओं का समावर्तन संस्कार पूर्ण हुआ है। यह सभी छात्रायें मंच के सम्मुख प्रथम पंक्ति में बैठी हुईं थीं। हमने इनका एक चित्र लिया जिसे हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। स्नातक छात्रा दीप्ति ने गुरुकुल पर एक गीत रचा है जिसे सभी स्नातिकाओं ने गा कर सुनाया। गीत की पहली पंक्ति थी 'ऋणी हम तुम्हारे हैं गुरुकुल की भूमि। ' इसकी एक अन्य पंक्ति थी 'आंगन से तेरे हम जुदा हो रहे हैं। 'आयोजन में आचार्य आशीष दर्शनाचार्य जी भी उपस्थित थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि स्नातिकाओं ने 15 वर्ष तक इस गुरुकुल में तप किया है। मंच पर उपस्थित आचार्या प्रियंवदा जी का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन बहिनों को देख कर मन में प्रसन्नता का भाव आता है। छात्राओं के निर्माण के लिए इन दोनों बहिनों ने अपना जीवन समर्पित किया है। आचार्य जी ने कहा कि आज स्नातिकाओं को विद्या दान देकर डा. अन्नपूर्णा जी को सन्तोष हो रहा होगा। स्नातिकाओं को उन्होंने कहा कि आप सब गुरुकुल परम्परा, आर्यसमाज और वैदिक धर्म की प्रतिनिधि हैं। आचार्य जी ने आचार्य का अपने शिष्यों को उपदेश 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्याय मा प्रमदः' का उल्लेख किया। छात्राओं को उन्होंने कहा कि आपने आचार्या जी से यह उपदेश सुना होगा। आप सत्यं वद का अर्थ जानती हैं। हम ऋषि दयानन्द के अनुयायी समाज में सत्यं वद का समर्थन करने वाले हैं। हम जीवन में असत्य न बोले। उन्होंने कहा कि अब आपको समाज में जाकर काम करना है। सम्पत्ति, सुविधाओं व साधनों, कार एवं गोठी आदि के आकर्षण से आपको बचना है। अपने बारे में उन्होंने कहा कि मेरे पास बाहर के साधन सम्पन्न लोग आये और उन्होंने मुझे सभी प्रकार की सुविधायें देने का प्रलोभन दिया। आपको प्रलोभनों को त्याग कर सत्य मार्ग पर ही चलना है। बड़े लोगों के प्रभाव व सुविधाओं से आपको बचना है और उन्हें स्वीकार नहीं करना है। स्नातक बनी छात्रओ को उन्होंने कहा कि यदि आप सत्य पर स्थिर रहती हैं तो आपके गुरुकुल की छोटी बहिनों को प्रेरणा प्राप्त होगी। यदि आपने सत्य के विपरीत व्यवहार किया तो गुरुकुल की छोटी बहिनें भी वैसी ही हो जायेंगी।
आचार्य आशीष जी ने स्नातक छात्राओं को कहा कि आपने सत्य सिद्धान्तों के साथ किसी प्रकार से समझौता नहीं करना है तथा उन पर अडिग रहना है। अपना स्वभाव आपने विनम्र रखना है। जीवन में आपसे बड़ी चूक न हो जाये, इसके लिए सावधान रहना है। परिश्रम करने वाला व्यक्ति यदि अपने लक्ष्य को भूल जाये तो यह उसके लिए विडम्बना बन जाती है। जीवन में पूर्णता को प्राप्त करें। हमें हमेशा यह स्मरण रहना चाहिये कि हमारा लक्ष्य क्या है। अपने जीवन के उद्देश्य को नहीं भूलना है। अध्ययन के क्षेत्र में आपकी जो प्रवीणता बनी है उसके साथ आपको ध्यान के क्षेत्र में भी कुशल बनाना है। जीवन के सत्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आपको ध्यान से जुड़ना पड़ेगा। आपको ध्यान से जुड़े रहना है। आप अपने सभी कर्तव्यों को करते हुए ध्यानी बने रहें। जीवन में अच्छे काम करें। आचार्य जी ने पुनः सत्यं वद का उल्लेख कर कहा कि हमें सत्य से समझौता नहीं करना है। मनुष्य कई बार सांसारिक आकर्षणों में फंस कर समझौता कर बैठता है। दूसरी बात यह है कि आपको कभी जीवन के लक्ष्य से भटकना नहीं है। आचार्य जी ने स्नातक सभी छात्राओं को अपनी शुभकामनायें दी। डा. अन्नपूर्णा जी ने आचार्य जी का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमें सत्य व आध्यात्मिक मार्ग को नहीं छोड़ना है। स्नातिका दीप्ति ने कहा कि मेरे पास अनुभव नहीं है। अनुभव जीवन में सबसे बड़ी किताब होती है। मेरी सफलता में मेरी आचार्या और, गुरुकुल के संस्थापक तथा पिता जी के नाम से प्रसिद्ध, पिता जी का हाथ है। आचार्या जी का मेरे जीवन में योगदान है। वह मेरी मां भी हैं और आचार्या भी हैं। दीप्ति ने आचार्या जी के जीवन व चरित्र की प्रशंसा की। अपनी जूनियर छात्राओं को दीप्ति जी ने कहा कि आपको गुरुकुल की मर्यादाओं की रक्षा करनी है। अपने संस्कारों को आप हमेशा ऊंचा रखना। मैं कोशिश करुंगी की मैं अपनी आचार्या जी के दिये हुए संस्कारों को कभी न भूलूं।
ठाकुर विक्रम सिंह जी ने कहा कि समय के अनुसार चलें। स्नातक कन्याओं को उन्होंने आचार्या बनने की सलाह दी। अपने बारे में उन्होंने कहा कि मैं तीन उपदेशक विद्यालयों में पढ़ा हूं। वैदिक साधन आश्रम तपोवन में मैं महात्मा आनन्द स्वामी जी से पढ़ा। हिसार दयानन्द ब्राह्म विद्यालय में पढ़ा और हापुड़ में स्वामी अमर स्वामी जी से पढ़ा। मैंने एम. ए. किया परन्तु मुझे इसका कोई महत्व प्रतीत नहीं होता। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, धर्म पर चलना एवं स्वाध्याय करने में प्रमाद न करना सुन्दर उपदेश है। जो इन्हें न मानता हो उसके लिए यह आदेश है। सबको इसे मानना ही होगा। ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि उपदेश ब्राह्मण का होता है और आदेश क्षत्रिय करता है। ब्राह्म एवं क्षात्र शक्तियों के मिलने से देश उन्नति करता है। ठाकुर विक्रम सिंह जी ने कहा कि पं. रामचन्द्र देहलवी एवं स्वामी अमर स्वामी जी आर्यसमाज के महाधन थे। यह दोनों कुरआन के विद्वान थे। उन्होंने बताया की पं. रामचन्द्र देहलवी जी ने चादंनी चौक के फव्वारे पर 15 वर्ष तक लगातार वेद और आर्यसमाज पर व्याख्यान दिये। विद्वान वक्ता ने पाखण्डों का खण्डन करने की सलाह दी। ठाकुर विक्रम सिंह जी ने अपने व्याख्यान को विराम देते हुए गुरुकुल को सहयोग का आश्वासन दिया।
पं. सत्यपाल पथिक जी ने कहा कि मुझे समावर्तन संस्कार को देखकर प्रसन्नता हो रही है। मैं स्नातक छात्राओं की योग्यताओं से आश्वस्त हूं। उन्होंने प्रियंवदा जी के गुरुकुल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मैं उनके गुरुकुल के समावर्तन संस्कार को कभी नहीं भूलूंगा। पथिक जी ने आचार्या और शिष्या के भावनात्मक संबंधों पर प्रकाश डाला। स्नातक छात्राओं को उन्होंने अपनी शुभकामनायें दी। उन्होंने स्नातक छात्राओं को वैदिक धर्म का पालन और प्रचार करने की सलाह दी और अपना आशीर्वाद भी दिया।
वेद विदुषी आचार्या डा. प्रियंवदा वेदशास्त्री ने कहा कि वर्षों पहले डा. वेद प्रकाश गुप्ता जी से उनकी दिल्ली में भेंट हुई थी। तब उन्होंने गुरुकुल खोलने में सहयेग करने का प्रस्ताव किया था। उन्होंने कहा कि विद्या रूपी जल में स्नान की हुई छात्राओं को स्नातिका कहते हैं। गुरु का अर्थ आचार्य होता है। मनुस्मृति के अनुसार जो वेद और उपनिषद् का अध्ययन कराता है उसे आचार्या कहते हैं। स्वामी दयानन्द जी की कृपा से आपको उपनयन का अधिकार मिला है। हमें वेद का अध्ययन करना है और वेद की बातों को प्रमाण मानना है। स्वामी दयानन्द ने वेद के आधार पर नारियों को वेदाध्ययन एवं अन्य अधिकार प्रदान किये। समाज को उत्तम ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य चाहिये तो नारियों को वैदिक शिक्षा के द्वारा पढ़ाना चाहिये। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख कर विस्तार से बताया कि उसमें कहा गया कि यदि राजा और वेद स्नातक कहीं जा रहे हों और एक को पहले रास्ता देना हो तो किसे दें? उन्होंने कहा कि इसके लिए स्नातक को पहले रास्ता देने का विधान है। उन्होंने कहा कि यह प्राचीन काल में गुरुकुल के ब्रह्मचारी के सम्मान का प्रतीक था। आचार्या जी ने कहा कि समावर्तन का अर्थ है कि अपने घर को पुनः लौटना। आचार्या जी ने कहा कि विद्या के आरम्भ से विद्या की समाप्ति तक ब्रह्मचारी व ब्रह्चारिणी को गुरुकुल में ही रहना होता था। ऐसा ब्रह्मचारी जब घर लौटता था तो उसके ग्राम व नगर के लोग मिलकर उसका अभिनन्दन करते थे। आचार्या जी ने कहा कि गुरु के द्वारा दी गई दृष्टि दीक्षा है। इसका ध्यान रखते हुए पालन करना है। उन्होंने सभी स्नातक छात्राओं को अपनी शुभकामनायें दी।
स्वामी आशुतोष परिव्राजक जी ने कहा कि हम आत्मा हैं। हमारे जीवन का आधार परमात्मा है। हम देह नहीं है। आत्मा का गुण विद्या, ज्ञान व चेतना है। हम सभी आत्मायें परमात्मा में डूबे हुए हैं। वही परमात्मा अनन्त काल तक हमारा आधार रहेगा। परमात्मा को मन व आत्मा से प्रणाम करें। हम सुनते व बोलते हैं। थोड़ा बोलो और बहुत सारा काम करो। ओ३म् क्रतो स्मर। परमात्मा को स्मरण करना ही हमारा पहला धर्म है। स्वामी जी ने वर्तमान समय में भोगवाद की प्रवृत्ति में वृद्धि की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सबको सुख की खोज है। हमें अपनी आत्मा का ज्ञान व पहचान नहीं है तो हमें सुख कहां से मिलेगा। परमात्मा हमारे अन्दर है। अविद्या से हमें अपने भीतर विद्यमान परमात्मा की झलक नहीं मिलती। हम आत्म विद नहीं हैं। परमात्मा हम से दूर है। अनुभव में दूरी बनी हुई है। परमात्मा दूर से दूर व निकट से निकट है। परमात्मा पर विश्वास रखें। आत्मा रूप, रस, गन्ध, शब्द आदि विषय नहीं है। परमात्मा भी अरुप तथा विषयों से रहित है। हमें आत्मा व परमात्मा को समझना है। हम समाज में आदर्श व्यक्ति बने। ऐसा होने पर आप तृप्त होंगे। स्वाध्याय करना अच्छा काम है। हमें यम व नियमों को जानना व समझना है। यम व नियमों को धारण करने से परिवार व समाज बनेगा। वैदिक जीवन आदर्श जीवन है। मनुष्य स्वयं को पहचाने। आत्मा का भोजन आनन्द है। देव बनने पर आपको सुख मिलेगा।
सार्वदेशिक सभा के नेता श्री सुरेश चन्द्र अग्रवाल ने कहा कि स्नातिकाओं का चौथा समूह आज यहां से विदा ले रहा है। उनके पुरुषार्थ का यह परिणाम है। स्नातिकाओं को गुरुकुल में जो संस्कार मिले हैं वह उनके भावी जीवन में सहायक होंगे। आप अपनी पूर्व स्नातिकाओं के जीवन की जानकारी प्राप्त करें। इससे आपको अपने जीवन का मार्ग चुनने में सहायता व प्ररेणा मिलेगी। वर्ष में एक या दो बार आप यहां गुरुकुल में अवश्य आयें। आप ऐसा करेंगी तो छोटी छात्राओं को अच्छा लगेगा। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने कहा कि आपका जीवन साथी आर्य विचारों का होना चाहिये। यह बहुत आवश्यक है। तभी आप आर्य विचारधारा को बढ़ा पायेंगी। आप भारत की वेद व वैदिक संस्कृति की संवाहक हैं। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने कहा कि वर्तमान मे वैदिक धर्म एवं संस्कृति का संक्रमण काल चल रहा है। इस धर्म व संस्कृति को विलुप्त करने के षड़यन्त्र हो रहे हैं। वैदिक धर्म व संस्कृति हमारे गुरुकुलों में जीवित है। हमें गुरुकुलों को सहयोग करना चाहिये। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने अपनी ओर एक लाख ग्यारह हजार रुपये गुरुकुल को दान करने की घोषणा की। डा. अन्नपूर्णा जी ने इस उदारता के लिए उनका धन्यवाद किया।
गुरुकुल की आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी ने कहा कि कोई मनुष्य कितना रूपवान हो यदि उसमें गुण नहीं है तो उसका रूप व्यर्थ है। किसी का खानदान कितना बड़ा हो पर यदि वह व्यक्ति चरित्रवान् नहीं है तो वह बेकार है। विद्वान का आचरण यदि पढ़ी विद्या के अनुकूल नहीं है तो उसकी विद्या व्यर्थ है। किसी के पास धन है परन्तु वह उसका सदुपयोग नहीं करता तो उसके पास धन का होना व्यर्थ है। आचार्या जी ने छात्राओं को कहा कि अपनी विद्या को सार्थक करो। सभा को आचार्य डा. सूर्य मोहन, श्री वीरेन्द्र शास्त्री, श्री अशोक आर्य गाजियाबाद/डबवाली, ब्र. नन्द किशोर, गोस्वामी जी और गुरुकुल के संस्थापक डा. वेद प्रकाश गुप्ता जी ने भी सम्बोधित किया। शान्ति पाठ के साथ लगभग 2. 15 बजे अपरान्ह सत्संग समाप्त हुआ।
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मनमोहन कुमार आर्य, द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल महाविद्यालय का वार्षिकोत्सव चार जून से आरम्भ हुआ है जो छः जून दो हज़ार अट्ठारह को समाप्त होगा। हमें आज इस गुरुकुल के उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। हमारे पहुंचने से पूर्व गुरुकुल की सात ब्रह्मचारिणियों का समावर्तन संस्कार सम्पन्न हो चुका था और उसके बाद विद्वानों द्वारा उनको भावी जीवन में कर्तव्यों आदि के विषय में प्रेरित किया जा रहा था। मंच पर आर्यजगत के अनेक विद्वान, नेता व संन्यासी उपस्थित थे। प्रमुख लोग स्वामी आशुतोष परिव्राजक जी, डा. प्रियंवदा वेद-शास्त्री, आचार्य आशीष दर्शनाचार्य, सार्वदेशिक सभा के नेता श्री सुरेश चन्द्र अग्रवाल जी, ठाकुर विक्रम सिंह जी, डा. अन्नपूर्णा जी सहित पं. सत्यपाल पथिक एवं उनके सुपुत्र भजन गायक श्री दिनेश पथिक जी उपस्थित थे। हम जब पहुचें तो वहां श्री दिनेश पथिक जी अपने पिता की एक बहुत ही भावपूर्ण रचना सुना रहे थे जिसके बोल थे 'प्रभु तुम अणु से भी सूक्ष्म हो और गगन से विशाल हो। मैं मिसाल दूं तुम्हें कौन सी दुनियां में तुम बेमिसाल हो। । ' यह भजन उन्होंने गिट्टार बजा कर सुनाया जो बहुत आनन्ददायक लग रहा था। कार्यक्रम का संचालन गुरुकुल की आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी कर रही थीं। भजन के बाद गुरुकुल की छः छात्राओं ने संस्कृत भाषा का एक स्वागत गीत सुनाया। डा. अन्नपूर्णा जी ने सूचना दी की कुछ समय पूर्व छः छात्राओं का समावर्तन संस्कार पूर्ण हुआ है। यह सभी छात्रायें मंच के सम्मुख प्रथम पंक्ति में बैठी हुईं थीं। हमने इनका एक चित्र लिया जिसे हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। स्नातक छात्रा दीप्ति ने गुरुकुल पर एक गीत रचा है जिसे सभी स्नातिकाओं ने गा कर सुनाया। गीत की पहली पंक्ति थी 'ऋणी हम तुम्हारे हैं गुरुकुल की भूमि। ' इसकी एक अन्य पंक्ति थी 'आंगन से तेरे हम जुदा हो रहे हैं। 'आयोजन में आचार्य आशीष दर्शनाचार्य जी भी उपस्थित थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि स्नातिकाओं ने पंद्रह वर्ष तक इस गुरुकुल में तप किया है। मंच पर उपस्थित आचार्या प्रियंवदा जी का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन बहिनों को देख कर मन में प्रसन्नता का भाव आता है। छात्राओं के निर्माण के लिए इन दोनों बहिनों ने अपना जीवन समर्पित किया है। आचार्य जी ने कहा कि आज स्नातिकाओं को विद्या दान देकर डा. अन्नपूर्णा जी को सन्तोष हो रहा होगा। स्नातिकाओं को उन्होंने कहा कि आप सब गुरुकुल परम्परा, आर्यसमाज और वैदिक धर्म की प्रतिनिधि हैं। आचार्य जी ने आचार्य का अपने शिष्यों को उपदेश 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्याय मा प्रमदः' का उल्लेख किया। छात्राओं को उन्होंने कहा कि आपने आचार्या जी से यह उपदेश सुना होगा। आप सत्यं वद का अर्थ जानती हैं। हम ऋषि दयानन्द के अनुयायी समाज में सत्यं वद का समर्थन करने वाले हैं। हम जीवन में असत्य न बोले। उन्होंने कहा कि अब आपको समाज में जाकर काम करना है। सम्पत्ति, सुविधाओं व साधनों, कार एवं गोठी आदि के आकर्षण से आपको बचना है। अपने बारे में उन्होंने कहा कि मेरे पास बाहर के साधन सम्पन्न लोग आये और उन्होंने मुझे सभी प्रकार की सुविधायें देने का प्रलोभन दिया। आपको प्रलोभनों को त्याग कर सत्य मार्ग पर ही चलना है। बड़े लोगों के प्रभाव व सुविधाओं से आपको बचना है और उन्हें स्वीकार नहीं करना है। स्नातक बनी छात्रओ को उन्होंने कहा कि यदि आप सत्य पर स्थिर रहती हैं तो आपके गुरुकुल की छोटी बहिनों को प्रेरणा प्राप्त होगी। यदि आपने सत्य के विपरीत व्यवहार किया तो गुरुकुल की छोटी बहिनें भी वैसी ही हो जायेंगी। आचार्य आशीष जी ने स्नातक छात्राओं को कहा कि आपने सत्य सिद्धान्तों के साथ किसी प्रकार से समझौता नहीं करना है तथा उन पर अडिग रहना है। अपना स्वभाव आपने विनम्र रखना है। जीवन में आपसे बड़ी चूक न हो जाये, इसके लिए सावधान रहना है। परिश्रम करने वाला व्यक्ति यदि अपने लक्ष्य को भूल जाये तो यह उसके लिए विडम्बना बन जाती है। जीवन में पूर्णता को प्राप्त करें। हमें हमेशा यह स्मरण रहना चाहिये कि हमारा लक्ष्य क्या है। अपने जीवन के उद्देश्य को नहीं भूलना है। अध्ययन के क्षेत्र में आपकी जो प्रवीणता बनी है उसके साथ आपको ध्यान के क्षेत्र में भी कुशल बनाना है। जीवन के सत्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आपको ध्यान से जुड़ना पड़ेगा। आपको ध्यान से जुड़े रहना है। आप अपने सभी कर्तव्यों को करते हुए ध्यानी बने रहें। जीवन में अच्छे काम करें। आचार्य जी ने पुनः सत्यं वद का उल्लेख कर कहा कि हमें सत्य से समझौता नहीं करना है। मनुष्य कई बार सांसारिक आकर्षणों में फंस कर समझौता कर बैठता है। दूसरी बात यह है कि आपको कभी जीवन के लक्ष्य से भटकना नहीं है। आचार्य जी ने स्नातक सभी छात्राओं को अपनी शुभकामनायें दी। डा. अन्नपूर्णा जी ने आचार्य जी का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमें सत्य व आध्यात्मिक मार्ग को नहीं छोड़ना है। स्नातिका दीप्ति ने कहा कि मेरे पास अनुभव नहीं है। अनुभव जीवन में सबसे बड़ी किताब होती है। मेरी सफलता में मेरी आचार्या और, गुरुकुल के संस्थापक तथा पिता जी के नाम से प्रसिद्ध, पिता जी का हाथ है। आचार्या जी का मेरे जीवन में योगदान है। वह मेरी मां भी हैं और आचार्या भी हैं। दीप्ति ने आचार्या जी के जीवन व चरित्र की प्रशंसा की। अपनी जूनियर छात्राओं को दीप्ति जी ने कहा कि आपको गुरुकुल की मर्यादाओं की रक्षा करनी है। अपने संस्कारों को आप हमेशा ऊंचा रखना। मैं कोशिश करुंगी की मैं अपनी आचार्या जी के दिये हुए संस्कारों को कभी न भूलूं। ठाकुर विक्रम सिंह जी ने कहा कि समय के अनुसार चलें। स्नातक कन्याओं को उन्होंने आचार्या बनने की सलाह दी। अपने बारे में उन्होंने कहा कि मैं तीन उपदेशक विद्यालयों में पढ़ा हूं। वैदिक साधन आश्रम तपोवन में मैं महात्मा आनन्द स्वामी जी से पढ़ा। हिसार दयानन्द ब्राह्म विद्यालय में पढ़ा और हापुड़ में स्वामी अमर स्वामी जी से पढ़ा। मैंने एम. ए. किया परन्तु मुझे इसका कोई महत्व प्रतीत नहीं होता। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, धर्म पर चलना एवं स्वाध्याय करने में प्रमाद न करना सुन्दर उपदेश है। जो इन्हें न मानता हो उसके लिए यह आदेश है। सबको इसे मानना ही होगा। ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि उपदेश ब्राह्मण का होता है और आदेश क्षत्रिय करता है। ब्राह्म एवं क्षात्र शक्तियों के मिलने से देश उन्नति करता है। ठाकुर विक्रम सिंह जी ने कहा कि पं. रामचन्द्र देहलवी एवं स्वामी अमर स्वामी जी आर्यसमाज के महाधन थे। यह दोनों कुरआन के विद्वान थे। उन्होंने बताया की पं. रामचन्द्र देहलवी जी ने चादंनी चौक के फव्वारे पर पंद्रह वर्ष तक लगातार वेद और आर्यसमाज पर व्याख्यान दिये। विद्वान वक्ता ने पाखण्डों का खण्डन करने की सलाह दी। ठाकुर विक्रम सिंह जी ने अपने व्याख्यान को विराम देते हुए गुरुकुल को सहयोग का आश्वासन दिया। पं. सत्यपाल पथिक जी ने कहा कि मुझे समावर्तन संस्कार को देखकर प्रसन्नता हो रही है। मैं स्नातक छात्राओं की योग्यताओं से आश्वस्त हूं। उन्होंने प्रियंवदा जी के गुरुकुल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मैं उनके गुरुकुल के समावर्तन संस्कार को कभी नहीं भूलूंगा। पथिक जी ने आचार्या और शिष्या के भावनात्मक संबंधों पर प्रकाश डाला। स्नातक छात्राओं को उन्होंने अपनी शुभकामनायें दी। उन्होंने स्नातक छात्राओं को वैदिक धर्म का पालन और प्रचार करने की सलाह दी और अपना आशीर्वाद भी दिया। वेद विदुषी आचार्या डा. प्रियंवदा वेदशास्त्री ने कहा कि वर्षों पहले डा. वेद प्रकाश गुप्ता जी से उनकी दिल्ली में भेंट हुई थी। तब उन्होंने गुरुकुल खोलने में सहयेग करने का प्रस्ताव किया था। उन्होंने कहा कि विद्या रूपी जल में स्नान की हुई छात्राओं को स्नातिका कहते हैं। गुरु का अर्थ आचार्य होता है। मनुस्मृति के अनुसार जो वेद और उपनिषद् का अध्ययन कराता है उसे आचार्या कहते हैं। स्वामी दयानन्द जी की कृपा से आपको उपनयन का अधिकार मिला है। हमें वेद का अध्ययन करना है और वेद की बातों को प्रमाण मानना है। स्वामी दयानन्द ने वेद के आधार पर नारियों को वेदाध्ययन एवं अन्य अधिकार प्रदान किये। समाज को उत्तम ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य चाहिये तो नारियों को वैदिक शिक्षा के द्वारा पढ़ाना चाहिये। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख कर विस्तार से बताया कि उसमें कहा गया कि यदि राजा और वेद स्नातक कहीं जा रहे हों और एक को पहले रास्ता देना हो तो किसे दें? उन्होंने कहा कि इसके लिए स्नातक को पहले रास्ता देने का विधान है। उन्होंने कहा कि यह प्राचीन काल में गुरुकुल के ब्रह्मचारी के सम्मान का प्रतीक था। आचार्या जी ने कहा कि समावर्तन का अर्थ है कि अपने घर को पुनः लौटना। आचार्या जी ने कहा कि विद्या के आरम्भ से विद्या की समाप्ति तक ब्रह्मचारी व ब्रह्चारिणी को गुरुकुल में ही रहना होता था। ऐसा ब्रह्मचारी जब घर लौटता था तो उसके ग्राम व नगर के लोग मिलकर उसका अभिनन्दन करते थे। आचार्या जी ने कहा कि गुरु के द्वारा दी गई दृष्टि दीक्षा है। इसका ध्यान रखते हुए पालन करना है। उन्होंने सभी स्नातक छात्राओं को अपनी शुभकामनायें दी। स्वामी आशुतोष परिव्राजक जी ने कहा कि हम आत्मा हैं। हमारे जीवन का आधार परमात्मा है। हम देह नहीं है। आत्मा का गुण विद्या, ज्ञान व चेतना है। हम सभी आत्मायें परमात्मा में डूबे हुए हैं। वही परमात्मा अनन्त काल तक हमारा आधार रहेगा। परमात्मा को मन व आत्मा से प्रणाम करें। हम सुनते व बोलते हैं। थोड़ा बोलो और बहुत सारा काम करो। ओतीनम् क्रतो स्मर। परमात्मा को स्मरण करना ही हमारा पहला धर्म है। स्वामी जी ने वर्तमान समय में भोगवाद की प्रवृत्ति में वृद्धि की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सबको सुख की खोज है। हमें अपनी आत्मा का ज्ञान व पहचान नहीं है तो हमें सुख कहां से मिलेगा। परमात्मा हमारे अन्दर है। अविद्या से हमें अपने भीतर विद्यमान परमात्मा की झलक नहीं मिलती। हम आत्म विद नहीं हैं। परमात्मा हम से दूर है। अनुभव में दूरी बनी हुई है। परमात्मा दूर से दूर व निकट से निकट है। परमात्मा पर विश्वास रखें। आत्मा रूप, रस, गन्ध, शब्द आदि विषय नहीं है। परमात्मा भी अरुप तथा विषयों से रहित है। हमें आत्मा व परमात्मा को समझना है। हम समाज में आदर्श व्यक्ति बने। ऐसा होने पर आप तृप्त होंगे। स्वाध्याय करना अच्छा काम है। हमें यम व नियमों को जानना व समझना है। यम व नियमों को धारण करने से परिवार व समाज बनेगा। वैदिक जीवन आदर्श जीवन है। मनुष्य स्वयं को पहचाने। आत्मा का भोजन आनन्द है। देव बनने पर आपको सुख मिलेगा। सार्वदेशिक सभा के नेता श्री सुरेश चन्द्र अग्रवाल ने कहा कि स्नातिकाओं का चौथा समूह आज यहां से विदा ले रहा है। उनके पुरुषार्थ का यह परिणाम है। स्नातिकाओं को गुरुकुल में जो संस्कार मिले हैं वह उनके भावी जीवन में सहायक होंगे। आप अपनी पूर्व स्नातिकाओं के जीवन की जानकारी प्राप्त करें। इससे आपको अपने जीवन का मार्ग चुनने में सहायता व प्ररेणा मिलेगी। वर्ष में एक या दो बार आप यहां गुरुकुल में अवश्य आयें। आप ऐसा करेंगी तो छोटी छात्राओं को अच्छा लगेगा। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने कहा कि आपका जीवन साथी आर्य विचारों का होना चाहिये। यह बहुत आवश्यक है। तभी आप आर्य विचारधारा को बढ़ा पायेंगी। आप भारत की वेद व वैदिक संस्कृति की संवाहक हैं। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने कहा कि वर्तमान मे वैदिक धर्म एवं संस्कृति का संक्रमण काल चल रहा है। इस धर्म व संस्कृति को विलुप्त करने के षड़यन्त्र हो रहे हैं। वैदिक धर्म व संस्कृति हमारे गुरुकुलों में जीवित है। हमें गुरुकुलों को सहयोग करना चाहिये। श्री सुरेश अग्रवाल जी ने अपनी ओर एक लाख ग्यारह हजार रुपये गुरुकुल को दान करने की घोषणा की। डा. अन्नपूर्णा जी ने इस उदारता के लिए उनका धन्यवाद किया। गुरुकुल की आचार्या डा. अन्नपूर्णा जी ने कहा कि कोई मनुष्य कितना रूपवान हो यदि उसमें गुण नहीं है तो उसका रूप व्यर्थ है। किसी का खानदान कितना बड़ा हो पर यदि वह व्यक्ति चरित्रवान् नहीं है तो वह बेकार है। विद्वान का आचरण यदि पढ़ी विद्या के अनुकूल नहीं है तो उसकी विद्या व्यर्थ है। किसी के पास धन है परन्तु वह उसका सदुपयोग नहीं करता तो उसके पास धन का होना व्यर्थ है। आचार्या जी ने छात्राओं को कहा कि अपनी विद्या को सार्थक करो। सभा को आचार्य डा. सूर्य मोहन, श्री वीरेन्द्र शास्त्री, श्री अशोक आर्य गाजियाबाद/डबवाली, ब्र. नन्द किशोर, गोस्वामी जी और गुरुकुल के संस्थापक डा. वेद प्रकाश गुप्ता जी ने भी सम्बोधित किया। शान्ति पाठ के साथ लगभग दो. पंद्रह बजे अपरान्ह सत्संग समाप्त हुआ।
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सांसद सैनी यहां रेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने नवंबर में होने वाली रैली को लेकर भी कार्यकर्ताओं से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछले चार साल में तीन-तीन बार सेना बुलानी पड़ी और मुट्ठी भर लोगों ने 50 से 60 प्रतिशत नौकरियों पर कब्जा किया है, यह बात समझने की। सांसद ने कहा कि चुनावी दौर में कर्मचारियों का आंदोलन होना स्वाभाविक है। पहले बीजेपी के लोग कर्मचारियों का समर्थन करते थे, अब कांग्रेस के लोग कर्मचारियों का समर्थन करते हैं। कर्मचारियों को समझना चाहिए कि यह सब वोटों के लिए हो रहा है।
एक सवाल के जवाब में सैनी ने कहा कि एक कर्मचारी व अधिकारी को दो लाख वेतन देने के बजाय वह रोजगार 10 लोगों में बांटना चाहिए। एक तो कर्मचारियों की कमी पूरी होगी और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इनेलो के परिवार में चल रही गुटबाजी के बारे में सैनी कहा कि पहले ओमप्रकाश चौटाला ने अपने पिता व भाइयों को एक साइड में किया था। उन्होंने परिवार के लोगों के साथ ऐसा किया था तो अब उनके साथ भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि इनेलो के पास परिवार के वोट हैं, वह भी सड़कों पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्टी अब काम थोड़ा रैलियां ज्यादा कर रही है।
राफेल घोटले पर सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लोग अपने घोटले छुपाने व उनका हिसाब बराकर करने के लिए भाजपा पर इस तरह के आरोप लगा रही है। राम मंदिर चुनावी मुद्दा है, समय के साथ-साथ स्थितियां बदली जाती हैं। भाजपा हाईकमान द्वारा उनको अनुशासहीनता का नोटिस भेजे जाने के सवाल पर सांसद ने कहा कि जो लोग खुद अनुशासनहीन हों, वे मुझे क्या अनुशासनहीनता का नोटिस देंगे। इस मौके पर उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
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सांसद सैनी यहां रेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने नवंबर में होने वाली रैली को लेकर भी कार्यकर्ताओं से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछले चार साल में तीन-तीन बार सेना बुलानी पड़ी और मुट्ठी भर लोगों ने पचास से साठ प्रतिशत नौकरियों पर कब्जा किया है, यह बात समझने की। सांसद ने कहा कि चुनावी दौर में कर्मचारियों का आंदोलन होना स्वाभाविक है। पहले बीजेपी के लोग कर्मचारियों का समर्थन करते थे, अब कांग्रेस के लोग कर्मचारियों का समर्थन करते हैं। कर्मचारियों को समझना चाहिए कि यह सब वोटों के लिए हो रहा है। एक सवाल के जवाब में सैनी ने कहा कि एक कर्मचारी व अधिकारी को दो लाख वेतन देने के बजाय वह रोजगार दस लोगों में बांटना चाहिए। एक तो कर्मचारियों की कमी पूरी होगी और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इनेलो के परिवार में चल रही गुटबाजी के बारे में सैनी कहा कि पहले ओमप्रकाश चौटाला ने अपने पिता व भाइयों को एक साइड में किया था। उन्होंने परिवार के लोगों के साथ ऐसा किया था तो अब उनके साथ भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि इनेलो के पास परिवार के वोट हैं, वह भी सड़कों पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्टी अब काम थोड़ा रैलियां ज्यादा कर रही है। राफेल घोटले पर सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लोग अपने घोटले छुपाने व उनका हिसाब बराकर करने के लिए भाजपा पर इस तरह के आरोप लगा रही है। राम मंदिर चुनावी मुद्दा है, समय के साथ-साथ स्थितियां बदली जाती हैं। भाजपा हाईकमान द्वारा उनको अनुशासहीनता का नोटिस भेजे जाने के सवाल पर सांसद ने कहा कि जो लोग खुद अनुशासनहीन हों, वे मुझे क्या अनुशासनहीनता का नोटिस देंगे। इस मौके पर उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को दो साल से अधिक समय हो चुका है हालांकि अब भी उनकी मौत को लेकर चर्चा होती रहती है. दो साल के बाद भी अक्सर फैंस सुशांत सिंह राजपूत को याद आते रहते हैं. बॉलीवुड में भी कई सेलेब्स ने उनके निधन पर बात की है.
कथित तौर पर सुशांत सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी लेकिन बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल खान ने सुशांत की मौत को हत्या बताया है. हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत का मर्डर हुआ था.
हाल ही में एक समाचार चैनल से बात करते हुए फैसल खान ने बताया कि, "मैं तो जानता हूं कि उनका मर्डर हुआ है. कब केस खुलेगा या नहीं खुलेगा, ये तो आगे समय ही बताएगा. कई एजेंसियां लगी हुई हैं. जांच चल रही है. कई बार सच्चाई बाहर भी नहीं आ पाती है. मैं दुआ करता हूं कि सच बाहर आए, ताकि सबको पता चले".
फैसल ने साक्षात्कार में अपने परिवार और अपने भाई आमिर खान को लेकर भी चर्चा की. फैसल ने आमिर खान की सच्चाई दुनिया के सामने बता दी. उन्होंने पहले भी भाई आमिर की पोल पट्टी खोली है. आमिर पर फैसल ने कई गंभीर आरोप लगाए. आमिर अपने भाई के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर चुके हैं.
साक्षात्कार में फैसल खान ने कहा कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से इसलिए दूरी बनाई क्योंकि वे पारिवारिक वाद विवाद में उलझकर रह गए थे. आमिर पर निशाना साधते हुए फैसल ने कहा कि परिवार वालों ने बोला कि वे पागल हो गए हैं. आमिर ने गार्ड लगवा दिए. उनका फोन छीन लिया गया. दुनिया से कट ऑफ कर के उन्हें कैद कर दिया गया. दवाईयां भी दी गईं. काफी समय तक उन्होंने यह सब कुछ झेला.
फैसल का साफ-साफ कहना है कि उन्हें कुछ नहीं हुआ था. वे बिलकुल ठीक थे. इसके बावजूद झूठ बोलकर पागल बनाए जाने की कोशिश की गई. उन्हें दबाव में रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि अपनों से लड़ना बहुत मुश्किल होता है. दुनिया से तो हर कोई लड़ लेता है. फैसल ने अपने दिल का दर्द एक बार फिर से दुनिया के सामने रखा.
फैसल ने अपने परिवार पर केस कर दिया था. इस केस में उनकी जीत हुई. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ़-साफ़ कहा कि फैसल बिलकुल स्वस्थ और ठीक है. वे पागल नहीं है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि फैसल साल 2000 में आई फिल्म 'मेला' में नजर आए थे. इसमें आमिर खान और ट्विंकल खन्ना ने भी काम किया था.
हाल ही में खबरें आई थी कि फैसल खान को टीवी के चर्चित और विवादित रियलिटी शो 'बिग बॉस' का ऑफर भी मिला था लेकिन फैसल ने यह ऑफर ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि अब वह लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहते हैं और आजादी से अपना जीवन जीना चाहते हैं.
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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को दो साल से अधिक समय हो चुका है हालांकि अब भी उनकी मौत को लेकर चर्चा होती रहती है. दो साल के बाद भी अक्सर फैंस सुशांत सिंह राजपूत को याद आते रहते हैं. बॉलीवुड में भी कई सेलेब्स ने उनके निधन पर बात की है. कथित तौर पर सुशांत सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी लेकिन बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल खान ने सुशांत की मौत को हत्या बताया है. हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत का मर्डर हुआ था. हाल ही में एक समाचार चैनल से बात करते हुए फैसल खान ने बताया कि, "मैं तो जानता हूं कि उनका मर्डर हुआ है. कब केस खुलेगा या नहीं खुलेगा, ये तो आगे समय ही बताएगा. कई एजेंसियां लगी हुई हैं. जांच चल रही है. कई बार सच्चाई बाहर भी नहीं आ पाती है. मैं दुआ करता हूं कि सच बाहर आए, ताकि सबको पता चले". फैसल ने साक्षात्कार में अपने परिवार और अपने भाई आमिर खान को लेकर भी चर्चा की. फैसल ने आमिर खान की सच्चाई दुनिया के सामने बता दी. उन्होंने पहले भी भाई आमिर की पोल पट्टी खोली है. आमिर पर फैसल ने कई गंभीर आरोप लगाए. आमिर अपने भाई के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर चुके हैं. साक्षात्कार में फैसल खान ने कहा कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से इसलिए दूरी बनाई क्योंकि वे पारिवारिक वाद विवाद में उलझकर रह गए थे. आमिर पर निशाना साधते हुए फैसल ने कहा कि परिवार वालों ने बोला कि वे पागल हो गए हैं. आमिर ने गार्ड लगवा दिए. उनका फोन छीन लिया गया. दुनिया से कट ऑफ कर के उन्हें कैद कर दिया गया. दवाईयां भी दी गईं. काफी समय तक उन्होंने यह सब कुछ झेला. फैसल का साफ-साफ कहना है कि उन्हें कुछ नहीं हुआ था. वे बिलकुल ठीक थे. इसके बावजूद झूठ बोलकर पागल बनाए जाने की कोशिश की गई. उन्हें दबाव में रहना पड़ा. उन्होंने कहा कि अपनों से लड़ना बहुत मुश्किल होता है. दुनिया से तो हर कोई लड़ लेता है. फैसल ने अपने दिल का दर्द एक बार फिर से दुनिया के सामने रखा. फैसल ने अपने परिवार पर केस कर दिया था. इस केस में उनकी जीत हुई. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ़-साफ़ कहा कि फैसल बिलकुल स्वस्थ और ठीक है. वे पागल नहीं है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि फैसल साल दो हज़ार में आई फिल्म 'मेला' में नजर आए थे. इसमें आमिर खान और ट्विंकल खन्ना ने भी काम किया था. हाल ही में खबरें आई थी कि फैसल खान को टीवी के चर्चित और विवादित रियलिटी शो 'बिग बॉस' का ऑफर भी मिला था लेकिन फैसल ने यह ऑफर ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि अब वह लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहते हैं और आजादी से अपना जीवन जीना चाहते हैं.
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफसोस जताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को ब्रिटेन में चिकित्सा उपचार के लिए देश छोड़ने की अनुमति देना एक 'गलती' थी और उनकी सरकार को इस फैसले पर 'पछतावा' हो रहा है।
70 साल के पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ को लाहौर हाई कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में इलाज के लिए लंदन जाने को चार सप्ताह की अनुमति दी थी जो दिसंबर में खत्म हो गई थी, लेकिन अब तक नहीं लौटे।
तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि जैसे ही डॉक्टर की ओर से उन्हें यात्रा करने की सलाह दी जाएगी वो स्वदेश लौट आएंगे।
मई में, अपने परिवार के साथ लंदन के एक कैफे में शरीफ की चाय पीते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तस्वीर में, उन्हें अपनी पोतियों के साथ सड़क के किनारे एक कैफे में बैठे देखा गया था। उन्होंने एक नीले रंग की कमीज और टोपी पहन रखी थी और जाहिर तौर पर वह बेहतर स्वास्थ्य में दिख रहे थे।
सरकार उस समय आलोचनाओं के घेरे में आ गई जब पिछले हफ्ते शरीफ की तस्वीरें सामने आईं, जिसमें वह सड़क पर टहलते हुए दिख रहे हैं जिससे सत्ता पक्ष के भीतर से उन्हें वापस बुलाने की मांग जोर पकड़ने लगी।
पीएम इमरान खान ने कहा कि शरीफ के इम्यून सिस्टम में खराबी होने का पता चला और उनकी बीमारी पर मंत्रिमंडल में चर्चा की गई थी और उन्हें इलाज के लिए बाहर भेजे जाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी देखा है कि अगर शरीफ के साथ कुछ हुआ तो सरकार जिम्मेदार होगी।
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफसोस जताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को ब्रिटेन में चिकित्सा उपचार के लिए देश छोड़ने की अनुमति देना एक 'गलती' थी और उनकी सरकार को इस फैसले पर 'पछतावा' हो रहा है। सत्तर साल के पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ को लाहौर हाई कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में इलाज के लिए लंदन जाने को चार सप्ताह की अनुमति दी थी जो दिसंबर में खत्म हो गई थी, लेकिन अब तक नहीं लौटे। तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि जैसे ही डॉक्टर की ओर से उन्हें यात्रा करने की सलाह दी जाएगी वो स्वदेश लौट आएंगे। मई में, अपने परिवार के साथ लंदन के एक कैफे में शरीफ की चाय पीते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तस्वीर में, उन्हें अपनी पोतियों के साथ सड़क के किनारे एक कैफे में बैठे देखा गया था। उन्होंने एक नीले रंग की कमीज और टोपी पहन रखी थी और जाहिर तौर पर वह बेहतर स्वास्थ्य में दिख रहे थे। सरकार उस समय आलोचनाओं के घेरे में आ गई जब पिछले हफ्ते शरीफ की तस्वीरें सामने आईं, जिसमें वह सड़क पर टहलते हुए दिख रहे हैं जिससे सत्ता पक्ष के भीतर से उन्हें वापस बुलाने की मांग जोर पकड़ने लगी। पीएम इमरान खान ने कहा कि शरीफ के इम्यून सिस्टम में खराबी होने का पता चला और उनकी बीमारी पर मंत्रिमंडल में चर्चा की गई थी और उन्हें इलाज के लिए बाहर भेजे जाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी देखा है कि अगर शरीफ के साथ कुछ हुआ तो सरकार जिम्मेदार होगी।
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Quick links:
Hyderabad Airport News : हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक करोड़ रुपये मूल्य के सोने की तस्करी के आरोप में सीमाशुल्क अधिकारियों ने दो यात्रियों को गिरफ्तार किया है। एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीती रात हैदराबाद सीमा शुल्क की इकाई के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार दुबई से यहां आए दो पुरुष यात्रियों को रोका।
यात्रियों की तलाशी के दौरान पता चला कि उन्होंने अपने गुप्तांगों के पास काले टेप से सोने के लेप वाले कुल छह कैप्सूल छिपा रखे थे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीमा शुल्क विभाग ने भारतीय सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के तहत गिरफ्तार किए गए दोनों यात्रियों के पास से 1,05,21,701 रुपये मूल्य का कुल 1,705.3 ग्राम सोना जब्त किया है और मामले की जांच जारी है।
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Quick links: Hyderabad Airport News : हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक करोड़ रुपये मूल्य के सोने की तस्करी के आरोप में सीमाशुल्क अधिकारियों ने दो यात्रियों को गिरफ्तार किया है। एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीती रात हैदराबाद सीमा शुल्क की इकाई के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार दुबई से यहां आए दो पुरुष यात्रियों को रोका। यात्रियों की तलाशी के दौरान पता चला कि उन्होंने अपने गुप्तांगों के पास काले टेप से सोने के लेप वाले कुल छह कैप्सूल छिपा रखे थे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीमा शुल्क विभाग ने भारतीय सीमा शुल्क अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बासठ के तहत गिरफ्तार किए गए दोनों यात्रियों के पास से एक,पाँच,इक्कीस,सात सौ एक रुपयापये मूल्य का कुल एक,सात सौ पाँच दशमलव तीन ग्राम सोना जब्त किया है और मामले की जांच जारी है।
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देश में मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के अंतर्गत ताजा दौर की बोली में पेश आठ तेल एवं गैस ब्लॉकों के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों समेत कुल चार ने 10 बोलियां लगायी हैं. हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) के अनुसार, आठ ब्लॉक में से छह के लिये एक-एक बोली मिली है. जबकि अन्य क्षेत्रों के लिये दो बोलीदाता हैं. डीजीएच ने ओएएलपी के सातवें दौर में प्राप्त बोलियों की जानकारी देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने आठ ब्लॉक (Oil and Gas Block) में से पांच के लिये बोलियां लगाईं. वहीं ऑयल इंडिया दो ब्लॉक के लिये एकमात्र बोलीदाता है गेल राजस्थान के एक ब्लॉक के लिये अकेली बोलीदाता है. ओएनजीसी तीन ब्लॉक में एकमात्र बोलीदाता है. जबकि दो अन्य में उसकी सन पेट्रोकेमिकल्स प्राइवेट लि. के साथ प्रतिस्पर्धा है.
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देश में मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति के अंतर्गत ताजा दौर की बोली में पेश आठ तेल एवं गैस ब्लॉकों के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों समेत कुल चार ने दस बोलियां लगायी हैं. हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के अनुसार, आठ ब्लॉक में से छह के लिये एक-एक बोली मिली है. जबकि अन्य क्षेत्रों के लिये दो बोलीदाता हैं. डीजीएच ने ओएएलपी के सातवें दौर में प्राप्त बोलियों की जानकारी देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन ने आठ ब्लॉक में से पांच के लिये बोलियां लगाईं. वहीं ऑयल इंडिया दो ब्लॉक के लिये एकमात्र बोलीदाता है गेल राजस्थान के एक ब्लॉक के लिये अकेली बोलीदाता है. ओएनजीसी तीन ब्लॉक में एकमात्र बोलीदाता है. जबकि दो अन्य में उसकी सन पेट्रोकेमिकल्स प्राइवेट लि. के साथ प्रतिस्पर्धा है.
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के साथ पाप कर्म मौजूद ही हैऔर पुण्यकर्म करके यदि उत्तम फल प्राणी प्रकिया करता है तो पाप कर्म करके उसके फल से किस प्रकार बच सकता है। मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है यह स्वतन्त्रता उसका जन्म सिद्ध अधिकार है । परन्तु चोरी और इसी प्रकार के दुष्ट वर्म करके उसे जेलखाने जाना पड़ता है जहां उसकी स्वतन्त्रता छिन जाती है। क्या तुम नहीं देखते कि स्वतन्त्रता प्राप्त प्राणी दुष्ट कर्मो से बन्धन में श्राकर स्वतन्त्रता खो बैठता है ?
वसन्तीदेवी - यह तो देखा हो जाता है ।
आत्मवत्ता तो फिर यदि ह्रास शून्य विकास ही का नियम दुनिया में काम करता होता तो स्वतन्त्रता प्राप्त मनुष्य परतन्त्र कैसे हा जाता ? भूल यह है कि तुम कर्म सिद्धान्त को भूलकर केवल विकास रूप मृगतृष्णा से प्यास बुझाने की इच्छा में हो, प्राणी कर्म फल ही से मनुष्य बनता है और कर्म फल ही से प्राप्त मनुष्यता को खो भी देता है ।
बसन्ती देवी-बन्दी होना रूप परतन्त्रता तो श्रस्थायिनी होती हैं परन्तु निम्न योनियों में जाना तो उससे भिन्न बात है।
आत्मवत्ता - बन्दी होकर बन्दी गृह में जाना और निम्न योनियों को प्राप्त होना इनमें नाम मात्र की विभिन्नता है मनुष्य योनि ही एक योनि है जिसमें भोग के साथ प्राणी स्वतन्त्रता से कर्म कर सकता है। बाकी जितनी योनियां हैं वे सभी भोकव्य योनियां जेलखाने के सदृश हैं। मनुष्य जितनी अवधि के लिये इन योनियों में जाता है उसे समाप्त करके
PONTA ALLES RENNE
फिर जेलखाने से वापिस होने के सदृश मनुष्य योनि लौटता है ।
देवप्रिय - प्राणी इन योनियों में आखिर जाता क्यों है ? आवागमन मनुष्य सुधार के लिये है ] आत्मवत्ताप्राणी स्वयमेव अपनी इच्छानुसार इन नीचे की योगियों में नहीं जाता किन्तु बन्दी होकर जेलखाने में भेजे जाने की सदश ही, इन निम्न योनियों रूप जेलखानों में भी, सर्वोच्च न्यायाधीश को आज्ञानुसार, दण्ड भोगने के लिये, किन्तु सुधार के उद्देश्य से, भेजा जाता है।
देवप्रिय - वहाँ सुधार किस प्रकार होता है ? आत्मवत्ता - मनुष्य का पाप यही है कि वह अपनी इन्द्रियों को पापकर्म करने का बनाकर स्वयमेव उनके बन्धन में फंस जाता है । तब दयालु न्यायाधीश अपनी दयापूर्ण न्यायव्यवस्था से उसे ऐसी किसी योनि में भेज देता है जहां उसकी वही इन्द्रिय छिन जाती है । कल्पना करो कि एक मनुष्य ने आंखों को पापमय बना लिया है तो वह किन्ही ने ऐसी योनियों में भेज दिया जायगा जो चक्षु हीन हैं। करने से करने का और न करने से न करने का अभ्यास हुआ करता है । इस लिये आंखों के गोलकों के न होने से आंखों का काम बन्द होगया और काम बन्द हो जाने से आँखों का बुरा और पाप करने का अभ्यास छूट जावेगा। ज्यों हो यह अभ्यास छूट जाता है-त्यों हो वह फिर मनुष्य योनि में लौटा दिया जाता है जहां के वन्धन से स्वतन्त्र है अब आँखों इसी प्रकार आवागमन के द्वारा प्राणियों का सुधार हुआ
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के साथ पाप कर्म मौजूद ही हैऔर पुण्यकर्म करके यदि उत्तम फल प्राणी प्रकिया करता है तो पाप कर्म करके उसके फल से किस प्रकार बच सकता है। मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है यह स्वतन्त्रता उसका जन्म सिद्ध अधिकार है । परन्तु चोरी और इसी प्रकार के दुष्ट वर्म करके उसे जेलखाने जाना पड़ता है जहां उसकी स्वतन्त्रता छिन जाती है। क्या तुम नहीं देखते कि स्वतन्त्रता प्राप्त प्राणी दुष्ट कर्मो से बन्धन में श्राकर स्वतन्त्रता खो बैठता है ? वसन्तीदेवी - यह तो देखा हो जाता है । आत्मवत्ता तो फिर यदि ह्रास शून्य विकास ही का नियम दुनिया में काम करता होता तो स्वतन्त्रता प्राप्त मनुष्य परतन्त्र कैसे हा जाता ? भूल यह है कि तुम कर्म सिद्धान्त को भूलकर केवल विकास रूप मृगतृष्णा से प्यास बुझाने की इच्छा में हो, प्राणी कर्म फल ही से मनुष्य बनता है और कर्म फल ही से प्राप्त मनुष्यता को खो भी देता है । बसन्ती देवी-बन्दी होना रूप परतन्त्रता तो श्रस्थायिनी होती हैं परन्तु निम्न योनियों में जाना तो उससे भिन्न बात है। आत्मवत्ता - बन्दी होकर बन्दी गृह में जाना और निम्न योनियों को प्राप्त होना इनमें नाम मात्र की विभिन्नता है मनुष्य योनि ही एक योनि है जिसमें भोग के साथ प्राणी स्वतन्त्रता से कर्म कर सकता है। बाकी जितनी योनियां हैं वे सभी भोकव्य योनियां जेलखाने के सदृश हैं। मनुष्य जितनी अवधि के लिये इन योनियों में जाता है उसे समाप्त करके PONTA ALLES RENNE फिर जेलखाने से वापिस होने के सदृश मनुष्य योनि लौटता है । देवप्रिय - प्राणी इन योनियों में आखिर जाता क्यों है ? आवागमन मनुष्य सुधार के लिये है ] आत्मवत्ताप्राणी स्वयमेव अपनी इच्छानुसार इन नीचे की योगियों में नहीं जाता किन्तु बन्दी होकर जेलखाने में भेजे जाने की सदश ही, इन निम्न योनियों रूप जेलखानों में भी, सर्वोच्च न्यायाधीश को आज्ञानुसार, दण्ड भोगने के लिये, किन्तु सुधार के उद्देश्य से, भेजा जाता है। देवप्रिय - वहाँ सुधार किस प्रकार होता है ? आत्मवत्ता - मनुष्य का पाप यही है कि वह अपनी इन्द्रियों को पापकर्म करने का बनाकर स्वयमेव उनके बन्धन में फंस जाता है । तब दयालु न्यायाधीश अपनी दयापूर्ण न्यायव्यवस्था से उसे ऐसी किसी योनि में भेज देता है जहां उसकी वही इन्द्रिय छिन जाती है । कल्पना करो कि एक मनुष्य ने आंखों को पापमय बना लिया है तो वह किन्ही ने ऐसी योनियों में भेज दिया जायगा जो चक्षु हीन हैं। करने से करने का और न करने से न करने का अभ्यास हुआ करता है । इस लिये आंखों के गोलकों के न होने से आंखों का काम बन्द होगया और काम बन्द हो जाने से आँखों का बुरा और पाप करने का अभ्यास छूट जावेगा। ज्यों हो यह अभ्यास छूट जाता है-त्यों हो वह फिर मनुष्य योनि में लौटा दिया जाता है जहां के वन्धन से स्वतन्त्र है अब आँखों इसी प्रकार आवागमन के द्वारा प्राणियों का सुधार हुआ
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इस फिल्म ने Satish Kaushik की उड़ा दी रातों की नींद, एक्टर को आते थे सुसाइड के ख्याल, जानें क्यों?
Satish Kaushik Birthday Special: बॉलीवुड के दिवगंत अभिनेता और मशहूर डायरेक्टर सतीश कौशिक का 9 मार्च को हार्ट अटैक की वजह से मौत हो गई। इस खबर से बॉलीवुड इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा था। अगर एक्टर आज जिंदा होते तो 13 अप्रैल को वह अपना 67वां जन्मदिन सेलिब्रेट करते।
सतीश कौशिक भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन वह अपने पीछे तमाम किस्से और कहानियां छोड़ गए। आज उनके जन्मदिन के मौके पर एक्टर से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों से रूबरू कराएंगे जिससे आप अब तक अंजान हैं। बता दें कि, एक बार एक्टर को सुसाइड का ख्याल आया था वह अपनी फिल्मों से खुश नहीं थे।
सतीश कौशिक ने बतौर एक्टर अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की थी। लेकिन बाद में वह एक एक्टर के साथ-साथ बड़े फिल्ममेकर के नाम से भी जानने लगे। जब एक्टर ने अपनी दो फिल्मों से डायरेक्शन में कदम रखा तो उन फिल्मों का ऐसा हाल हुआ जिससे सतीश कौशिक बुरी तरह टूट गए। इतना ही नहीं उन्हें सुसाइड करने के भी ख्याल आने लगे।
जानकारी के मुताबिक, सतीश कौशिक को बोनी कपूर की फिल्म 'रूप की रानी, चोरों का राजा' में बतौर निर्देशक काम मिला। ये दोनों बड़े बजट की फिल्में थीं। हालांकि इसके बावजूद ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिटी। सतीश कौशिक ने बताया कि फिल्म के प्रीमियर पर उनको रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। खैर एक्टर के लिए वह समय बहुत मुश्किल दौर से गुजरा।
ये फिल्म 9 करोड़ के बजट से बनी थी। फिल्म के फ्लॉप होने की वजह से बोनी कपूर कर्जदार हो गए थे। खैर इस असफलता के बाद एक्टर ने एक से बढ़कर एक फिल्में दी। सतीश कौशिक ने अपने फिल्मी करियर में कई ऐसे किरदार किए लेकिन उनके कॉमेडी रोल को सबसे ज्यादा आज भी याद किया जाता है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग डिलिवरी में कोई तोड़ नहीं था। खैर वह हमारे बीच नहीं रहे लेकिन वह फैंस के दिलों में हमेशा राज करेंगे।
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आज देशभर में ईद हर्षोउल्लास मनाई जा रही है। हालाँकि कहीं-कहीं जैसे कश्मीर में नमाज के बाद पत्थर बाज सक्रीय हो गए। वहीं यूपी के मुजफ्फरनगर जो अक्सर कभी तनाव पूर्ण स्थितियों की वजह से चर्चा में रहता था आज ईद-उल-फितर के दिन एक नजारा ऐसा भी दिखा जो आज तक संभवतः पहले नहीं देखा गया।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार अमन के प्रतीक रूप में राष्ट्रीय ध्वज के साथ भाजपा का झंडा भी नमाजियों के बीच ईद के मौके पर लहराता हुआ दिखाई दिया। जिससे कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति भी बन गई और इसे देखकर सभी आश्चर्यचकित भी हुए। इस झंडे को फहराने पर कुछ आपत्ति हो सकती थी किंतु आज जब नमाज के दौरान झंडे को कुछ मुस्लिम बच्चों द्वारा लहराया गया तो सबने इसे खुशी से स्वीकार किया और माहौल अमन और सद्भाव भरा बना रहा।
जबकि नमाज के दौरान वहाँ कोई भी भाजपा नेता या जनप्रतिनिधि ईदगाह पर मौजूद नहीं था। हालाँकि इस बार प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में सभी नमाजियों को ईद की मुबारकबाद दी गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर ईदगाह पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे एसएसपी सुधीर कुमार सिंह के अलावा नगर पालिका परिषद की चेयरमैन अंजू अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद रही।
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आज देशभर में ईद हर्षोउल्लास मनाई जा रही है। हालाँकि कहीं-कहीं जैसे कश्मीर में नमाज के बाद पत्थर बाज सक्रीय हो गए। वहीं यूपी के मुजफ्फरनगर जो अक्सर कभी तनाव पूर्ण स्थितियों की वजह से चर्चा में रहता था आज ईद-उल-फितर के दिन एक नजारा ऐसा भी दिखा जो आज तक संभवतः पहले नहीं देखा गया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार अमन के प्रतीक रूप में राष्ट्रीय ध्वज के साथ भाजपा का झंडा भी नमाजियों के बीच ईद के मौके पर लहराता हुआ दिखाई दिया। जिससे कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति भी बन गई और इसे देखकर सभी आश्चर्यचकित भी हुए। इस झंडे को फहराने पर कुछ आपत्ति हो सकती थी किंतु आज जब नमाज के दौरान झंडे को कुछ मुस्लिम बच्चों द्वारा लहराया गया तो सबने इसे खुशी से स्वीकार किया और माहौल अमन और सद्भाव भरा बना रहा। जबकि नमाज के दौरान वहाँ कोई भी भाजपा नेता या जनप्रतिनिधि ईदगाह पर मौजूद नहीं था। हालाँकि इस बार प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में सभी नमाजियों को ईद की मुबारकबाद दी गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर ईदगाह पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे एसएसपी सुधीर कुमार सिंह के अलावा नगर पालिका परिषद की चेयरमैन अंजू अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद रही।
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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नामांकन प्रकिया की वीडियोग्राफी करायी जायेगी. विपक्षी दलों की शिकायतों को सुनने के लिए 13 जून को कोलकाता में राज्य निर्वाचन आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलायी है. वहीं, मुर्शिदाबाद जिले में सॉकेट बम से भरा बैग मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात के बाद कहा है कि वह पंचायत चुनाव के लिए नामांकन का समय बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं. दूसरी तरफ, पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से बंगाल में हिंसा जारी है.
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने बंगाल में जारी हिंसा के बीच पंचायत चुनाव के लिए चल रही नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिये हैं. राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि राज्य में भयमुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव कराना उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए ही नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिये गये हैं.
इससे पहले, राज्य निर्वाचन आयोग ने 13 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की, जिसमें राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर चर्चा की जायेगी. साथ ही पंचायत चुनाव के सिलसिले में शिकायतों को सुना जायेगा. एक अधिकारी ने बताया कि राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा की अध्यक्षता में यह बैठक होगी. इसमें सभी राजनीतिक दलों को बुलाया गया है.
पश्चिम बंगाल के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 जून होने के कारण यह बैठक बेमतलब होगी. चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले बैठक होनी चाहिए थी. वरिष्ठ माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी यही बात कही. हालांकि, निर्वाचन आयोग की घोषणा का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है.
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दूसरे दिन शनिवार को हिंसा जारी रही. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं और 'गुंडों' ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका.
टीएमसी कार्यकर्ता लिटन हक (30) शनिवार शाम को कूचबिहार जिले के दिनहाटा इलाके में एक झड़प में गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके परिवार ने आरोप लगाया कि उसे प्रतिद्वंद्वी गुट के सदस्यों ने गोली मारी, जबकि पुलिस का दावा है कि संपत्ति विवाद में झड़प हुई और उसी दौरान लिटन हक को पीटा गया. उसे गोली नहीं मारी गयी.
लिटन हक के चचेरे भाई और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बप्पा हक ने कहा है कि लिटन को पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के कार्यकर्ताओं ने गोली मारी, क्योंकि उसने स्थानीय ग्राम पंचायत सीट के लिए उनके रिश्तेदार बाबला हक की उम्मीदवारी का विरोध किया था. हालांकि, टीएमसी नेता पार्थ प्रतिम रॉय ने कहा कि लिटन हक संपत्ति विवाद में घायल हुए थे, राजनीतिक संघर्ष में नहीं.
इस बीच, दक्षिण 24 परगना जिले में भीड़ ने प्रखंड विकास कार्यालय में घुसकर कथित रूप से विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र वितरित करने की वजह से एक कर्मचारी पर हमला कर दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता को मुर्शिदाबाद जिले में एक हैंडगन के साथ पकड़ा गया.
राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा है कि जो भी रिपोर्ट मिली है, उस पर कार्रवाई की गयी है. राज्यभर में नामांकन प्रक्रिया सुचारू ढंग से चल रही है. उन्होंने कहा कि पहले दिन राज्यभर में 1360 नामांकन पत्र जमा किये गये और कुछ क्षेत्रों में हुई 'छिटपुट घटनाओं' को छोड़कर यह प्रक्रिया सुचारू है.
बता दें कि शुक्रवार को मुर्शिदाबाद जिले में एक कांग्रेस नेता की कथित तौर पर टीएमसी के गुंडों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. नामांकन के दूसरे दिन बांकुड़ा, पूर्व बर्दवान, पश्चिम बर्दवान, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जैसे कई जिलों से सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबरें हैं.
पश्चिम बंगाल के राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की तारीख बढ़ाने की मांग पर आयोग के रुख तथा नॉमिशन के दौरान हो रही हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में बताने के लिए शनिवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस से भेंट की. राज्यपाल ने उनसे पूछा था कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया के प्रबंधन के लिए केंद्रीय बलों की मांग करने पर विचार किया है.
शुक्रवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा था कि 8 जुलाई को होने वाले पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाने पर वह गौर कर सकता है. उससे पहले, तारीख बढ़ाने की मांग संबंधी विपक्षी नेताओं की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था कि 'अदालत का मत है कि अधिसूचना में तय की गयी समय सीमा अपर्याप्त है. ' बता दें कि बंगाल में इस साल 8 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग होगी, जबकि रिजल्ट 11 जुलाई को आयेंगे.
जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठकें करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 5 जिलों उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, बीरभूम, जलपाईगुड़ी और पूर्वी मेदिनीपुर पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है, क्योंकि ये जिले 'संवेदनशील' नजर आते हैं. बता दें कि वर्ष 2018 के पंचायत चुनावों में कई जिलों में जमकर हिंसा और कदाचार की घटनाएं हुईं थीं. गैर-सत्ताधारी दल के कई निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी थी. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नामांकन प्रकिया की वीडियोग्राफी करायी जायेगी. विपक्षी दलों की शिकायतों को सुनने के लिए तेरह जून को कोलकाता में राज्य निर्वाचन आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलायी है. वहीं, मुर्शिदाबाद जिले में सॉकेट बम से भरा बैग मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात के बाद कहा है कि वह पंचायत चुनाव के लिए नामांकन का समय बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं. दूसरी तरफ, पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से बंगाल में हिंसा जारी है. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने बंगाल में जारी हिंसा के बीच पंचायत चुनाव के लिए चल रही नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिये हैं. राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि राज्य में भयमुक्त एवं निष्पक्ष चुनाव कराना उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए ही नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिये गये हैं. इससे पहले, राज्य निर्वाचन आयोग ने तेरह जून को सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की, जिसमें राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर चर्चा की जायेगी. साथ ही पंचायत चुनाव के सिलसिले में शिकायतों को सुना जायेगा. एक अधिकारी ने बताया कि राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा की अध्यक्षता में यह बैठक होगी. इसमें सभी राजनीतिक दलों को बुलाया गया है. पश्चिम बंगाल के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख पंद्रह जून होने के कारण यह बैठक बेमतलब होगी. चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले बैठक होनी चाहिए थी. वरिष्ठ माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी यही बात कही. हालांकि, निर्वाचन आयोग की घोषणा का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है. पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दूसरे दिन शनिवार को हिंसा जारी रही. भारतीय जनता पार्टी , कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और 'गुंडों' ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका. टीएमसी कार्यकर्ता लिटन हक शनिवार शाम को कूचबिहार जिले के दिनहाटा इलाके में एक झड़प में गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके परिवार ने आरोप लगाया कि उसे प्रतिद्वंद्वी गुट के सदस्यों ने गोली मारी, जबकि पुलिस का दावा है कि संपत्ति विवाद में झड़प हुई और उसी दौरान लिटन हक को पीटा गया. उसे गोली नहीं मारी गयी. लिटन हक के चचेरे भाई और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बप्पा हक ने कहा है कि लिटन को पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के कार्यकर्ताओं ने गोली मारी, क्योंकि उसने स्थानीय ग्राम पंचायत सीट के लिए उनके रिश्तेदार बाबला हक की उम्मीदवारी का विरोध किया था. हालांकि, टीएमसी नेता पार्थ प्रतिम रॉय ने कहा कि लिटन हक संपत्ति विवाद में घायल हुए थे, राजनीतिक संघर्ष में नहीं. इस बीच, दक्षिण चौबीस परगना जिले में भीड़ ने प्रखंड विकास कार्यालय में घुसकर कथित रूप से विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र वितरित करने की वजह से एक कर्मचारी पर हमला कर दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता को मुर्शिदाबाद जिले में एक हैंडगन के साथ पकड़ा गया. राज्य चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा है कि जो भी रिपोर्ट मिली है, उस पर कार्रवाई की गयी है. राज्यभर में नामांकन प्रक्रिया सुचारू ढंग से चल रही है. उन्होंने कहा कि पहले दिन राज्यभर में एक हज़ार तीन सौ साठ नामांकन पत्र जमा किये गये और कुछ क्षेत्रों में हुई 'छिटपुट घटनाओं' को छोड़कर यह प्रक्रिया सुचारू है. बता दें कि शुक्रवार को मुर्शिदाबाद जिले में एक कांग्रेस नेता की कथित तौर पर टीएमसी के गुंडों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. नामांकन के दूसरे दिन बांकुड़ा, पूर्व बर्दवान, पश्चिम बर्दवान, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जैसे कई जिलों से सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबरें हैं. पश्चिम बंगाल के राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की तारीख बढ़ाने की मांग पर आयोग के रुख तथा नॉमिशन के दौरान हो रही हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में बताने के लिए शनिवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस से भेंट की. राज्यपाल ने उनसे पूछा था कि क्या राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया के प्रबंधन के लिए केंद्रीय बलों की मांग करने पर विचार किया है. शुक्रवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा था कि आठ जुलाई को होने वाले पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाने पर वह गौर कर सकता है. उससे पहले, तारीख बढ़ाने की मांग संबंधी विपक्षी नेताओं की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था कि 'अदालत का मत है कि अधिसूचना में तय की गयी समय सीमा अपर्याप्त है. ' बता दें कि बंगाल में इस साल आठ जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग होगी, जबकि रिजल्ट ग्यारह जुलाई को आयेंगे. जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठकें करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पाँच जिलों उत्तर चौबीस परगना, दक्षिण चौबीस परगना, बीरभूम, जलपाईगुड़ी और पूर्वी मेदिनीपुर पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है, क्योंकि ये जिले 'संवेदनशील' नजर आते हैं. बता दें कि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह के पंचायत चुनावों में कई जिलों में जमकर हिंसा और कदाचार की घटनाएं हुईं थीं. गैर-सत्ताधारी दल के कई निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी थी.
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बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने हाल ही में वैभव रेखी संग शादी रचाई। दीया मिर्जा की शादी कई वजहों से खास है। उनकी वेडिंग सेरिमनीज महिला पुजारी ने करवाई थीं। हालांकि इस शादी में और क्या खास बातें थीं, इस बात का खुलासा अब दीया मिर्जा ने किया है।
दीया मिर्जा ने इंस्टाग्राम पर लंबा पोस्ट लिखकर फैन्स और करीबियों से साझा किया है कि उन्होंने इस शादी को कैसे स्पेशल बनाया। दीया ने बताया कि कैसे उन्होंने यह बात सुनिश्चित की कि उनकी शादी में कोई भी बर्बादी ना हो।
एक्ट्रेस ने लिखा, पिछले 19 सालों से हर सुबह मैं जिस बगीचे में रहती थी, वह एक बिल्कुल जादुई सेटिंग थी और हमारे सरल भावपूर्ण शादी समारोह के लिए सबसे अंतरंग जगह। हम प्लास्टिक या किसी कचरे के बिना पूरी तरह से स्थाई समारोह आयोजित करने पर गर्व करते हैं। न्यूनतम सजावट के लिए जिन चीजों का हम उपयोग करते थे, वह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल और प्राकृतिक थीं।
दीया मिर्जा ने आगे बताया कि एक महिला पुजारी ने हमारी शादी की रस्में करवाईं। इतना ही नहीं, दीया ने यह भी लिखा कि उन्होंने कन्यादान और बिदाई को ना कहा क्योंकि बदलाव की शुरुआत इसी तरह से किसी के चुनाव करने से शुरू होती है।
दीया के पोस्ट के एक हिस्से में लिखा था, 'शादी करना एक सौभाग्य और खुशी की बात है। हम अपने पूरे दिल से आशा करते हैं कि कई और कपल इस विकल्प को चुनें। प्यार, आश्चर्य, विश्वास किसी महिला की आत्मा में होते हैं। साथ ही जादुई ऊर्जा, कोमलता और जीवन के लिए गहरी सहानुभूति भी।
उन्होंने आगे लिखा, यह महिलाओं के लिए अपनी खुद की एजेंसी, उनकी दिव्यता, उनकी शक्ति और जो कुछ पुराना है, उसे नया रूप देते हुए फिर से परिभाषित करने का समय है। मैं अभी भी इस एक पल के जादू से अभिभूत हूं। इसके अलावा, हमने 'कन्यादान' और 'बिदाई' को ना कहा क्योंकि बदलाव पसंद के साथ शुरू होता है ना?
बता दें कि दीया मिर्जा ने 15 फरवरी को मुंबई बेस्ड बिजनसमैन वैभव रेखी से शादी की है। इससे पहले दीया अपनी सुंदर और सामान्य दुल्हन की पोशाक के लिए सुर्खियों में रही हैं। भारी लहंगे को छोड़कर अभिनेत्री ने लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनने का विकल्प चुना। साथ ही ज्वैलरी के साथ अपने लुक को पूरा किया।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने हाल ही में वैभव रेखी संग शादी रचाई। दीया मिर्जा की शादी कई वजहों से खास है। उनकी वेडिंग सेरिमनीज महिला पुजारी ने करवाई थीं। हालांकि इस शादी में और क्या खास बातें थीं, इस बात का खुलासा अब दीया मिर्जा ने किया है। दीया मिर्जा ने इंस्टाग्राम पर लंबा पोस्ट लिखकर फैन्स और करीबियों से साझा किया है कि उन्होंने इस शादी को कैसे स्पेशल बनाया। दीया ने बताया कि कैसे उन्होंने यह बात सुनिश्चित की कि उनकी शादी में कोई भी बर्बादी ना हो। एक्ट्रेस ने लिखा, पिछले उन्नीस सालों से हर सुबह मैं जिस बगीचे में रहती थी, वह एक बिल्कुल जादुई सेटिंग थी और हमारे सरल भावपूर्ण शादी समारोह के लिए सबसे अंतरंग जगह। हम प्लास्टिक या किसी कचरे के बिना पूरी तरह से स्थाई समारोह आयोजित करने पर गर्व करते हैं। न्यूनतम सजावट के लिए जिन चीजों का हम उपयोग करते थे, वह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल और प्राकृतिक थीं। दीया मिर्जा ने आगे बताया कि एक महिला पुजारी ने हमारी शादी की रस्में करवाईं। इतना ही नहीं, दीया ने यह भी लिखा कि उन्होंने कन्यादान और बिदाई को ना कहा क्योंकि बदलाव की शुरुआत इसी तरह से किसी के चुनाव करने से शुरू होती है। दीया के पोस्ट के एक हिस्से में लिखा था, 'शादी करना एक सौभाग्य और खुशी की बात है। हम अपने पूरे दिल से आशा करते हैं कि कई और कपल इस विकल्प को चुनें। प्यार, आश्चर्य, विश्वास किसी महिला की आत्मा में होते हैं। साथ ही जादुई ऊर्जा, कोमलता और जीवन के लिए गहरी सहानुभूति भी। उन्होंने आगे लिखा, यह महिलाओं के लिए अपनी खुद की एजेंसी, उनकी दिव्यता, उनकी शक्ति और जो कुछ पुराना है, उसे नया रूप देते हुए फिर से परिभाषित करने का समय है। मैं अभी भी इस एक पल के जादू से अभिभूत हूं। इसके अलावा, हमने 'कन्यादान' और 'बिदाई' को ना कहा क्योंकि बदलाव पसंद के साथ शुरू होता है ना? बता दें कि दीया मिर्जा ने पंद्रह फरवरी को मुंबई बेस्ड बिजनसमैन वैभव रेखी से शादी की है। इससे पहले दीया अपनी सुंदर और सामान्य दुल्हन की पोशाक के लिए सुर्खियों में रही हैं। भारी लहंगे को छोड़कर अभिनेत्री ने लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनने का विकल्प चुना। साथ ही ज्वैलरी के साथ अपने लुक को पूरा किया।
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सत्यपाल राजपूत, रायपुर। लॉकडाउन के बीच शिक्षकों की भर्ती के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने एक आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक, नवीन 119 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ठ अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी. एक स्कूल में कम से कम 30 अलग-अलग पदों में भर्ती होगी.
बता दें कि स्वीकृत पदों में प्रतिनियुक्ति संविदा नियुक्ति के लिए 2021-22 के बजट में प्रावधान किया गया है. पूर्व में भी 52 स्कूलों में भर्ती के लिए आदेश जारी किया गया था.
लोक शिक्षण संचालनालय से सभी ज़िला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में कहा गया है कि 2021-22 के लिए नवीन 119 स्वामी ने आत्मानंद उत्कृष्ठ अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों के लिए बजट में प्रावधान किया गया है. पूर्व में 52 स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय प्रारंभ किए गए थे.
प्रतिनियुक्ति एवं संविदा भर्ती के लिए जो दिशा निर्देश जारी किए गए थे, उसी प्रक्रिया का पालन करते हुए पूर्व तैयारी कर लें, ताकि शासन से विद्यालय को समिति को सौंपे जाने संबंधी आदेश मिलने के बाद तत्काल प्रारंभ की जा सके.
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सत्यपाल राजपूत, रायपुर। लॉकडाउन के बीच शिक्षकों की भर्ती के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने एक आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक, नवीन एक सौ उन्नीस स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ठ अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी. एक स्कूल में कम से कम तीस अलग-अलग पदों में भर्ती होगी. बता दें कि स्वीकृत पदों में प्रतिनियुक्ति संविदा नियुक्ति के लिए दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट में प्रावधान किया गया है. पूर्व में भी बावन स्कूलों में भर्ती के लिए आदेश जारी किया गया था. लोक शिक्षण संचालनालय से सभी ज़िला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में कहा गया है कि दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए नवीन एक सौ उन्नीस स्वामी ने आत्मानंद उत्कृष्ठ अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों के लिए बजट में प्रावधान किया गया है. पूर्व में बावन स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय प्रारंभ किए गए थे. प्रतिनियुक्ति एवं संविदा भर्ती के लिए जो दिशा निर्देश जारी किए गए थे, उसी प्रक्रिया का पालन करते हुए पूर्व तैयारी कर लें, ताकि शासन से विद्यालय को समिति को सौंपे जाने संबंधी आदेश मिलने के बाद तत्काल प्रारंभ की जा सके.
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किं योगेः किं विरागेश्च जपैरन्यैः किमर्चनैः । यन्त्रेर्मन्त्रेस्तथा तन्त्रैः किमन्येरुप्रकर्मभिः ॥ स्मरणात्कीर्तनाच्चैव श्रवणाल्लेखनादपि । दर्शनाडारणदेव रामनामाखिनेष्टदम् ॥
तीर्थों और व्रतों से तथा होम और तप से क्या होता है ? यज्ञ दान और ध्यान तथा ज्ञान, विज्ञान और समाधि से क्या होता है ? योग, वैराग्य, जप, पूजन, यंत्र, मंत्र तथा तंत्रों से और उग्र क्मों से क्या होता है ? रामनाम के स्मरण करने से, कीर्तन से, श्रवण से लिखने से, दर्शन से ही सब इष्टफलों की प्राप्ति होती है। गुरुजी का न ठीक है - विना नाम के जपे कोई परमेश्वर को कदापि ध्यारा नहीं हो सका है।
५० -- इस लोक और परलोक के जो विषय भोग हैं उनकी प्राप्ति साधनों ही से होती है या विना साधनों के भी १ उ० । मू० - जेती सृष्ट उपाई वेषांविणकर्मा किमिलेलई । टी० - इस जगत् में ईश्वर की उत्पन्न की हुई जितनी सृष्टि तुम देखते हो उसमें से किसी को भी विणकर्मा, त्रिना कर्मों के क्या कुछ भी मिलता है ? कुछ भी नहीं मिलता । अर्थात् सत्र सांसारिक भोग जन्मान्तर के कर्मों के अधीन ही है । जिसने पूर्व जन्म में जैसे कर्म किये हैं, उन्हें उनके अनुसार ही दूसरे जन्म में फल मिलता है । विना कर्म के कुछ भी नहीं मिलता है । एक दृष्टांत भी है - एक राजा की दो कन्याएँ थीं । जिस समय राजा अपने घर में जाता, तो छोटी कन्या कहती - - राजन् ! तुम्हारी सदा जय हो। आप ही के मताप से हम सब लोग जीते हैं। दूसरी जो बडी कन्या थी वह कहती राजन् ! जन्मान्तर के पुण्य-कर्मों के फल को भोगो । प्रतिदिन छोटी और बडी दोनों ऊपरवाली बातों को कहतीं । एक दिन राजा को वडी क्न्या के ऊपर क्रोध थाया । बजीर को बुलाकर राजा ने कहा किसी गरीब और दुःखी लड़के के साथ इस बढी कन्या की शादी करके इस देश से दोनों को
निकाल दो । वजीर राजा की आज्ञा सुनकर बाजार में लड़के की खोज में निकला । आगे एक दूसरे राजा के घर एक लड़का पैदा हु था । जब वह वड़ा हुआ, तो उसको एक वडा रोग लग गया। वह रोग अनेक उपायों से भी जब दूर न हुआ तब वह लड़का दुःखी होकर अपने देश से रात्रि में फकीर वनकर इस नगर में भाग थाया था । उसी लड़के को वजीर ने देखा । यतेि दुबला, पतला और चलने में असमर्थ । अति मलिन वस्त्रों को पहरे हुए बाजार में भीख माँग रहा है। वजीर ने उस लड़के को पकड़कर उसके साथ राजा की बड़ी लड़की की शादी कर दोनों को अपने देश से निकाल दिया। वह कन्या उस लड़के को साथ लेकर दूसरे देश में चली गई । एक दिन सवेरे चलते-चलते जब दोनों थक गए तब एक ग्राम के बाहर एक कूप के पास जाकर दोनों बैठ गए। थोड़ी देर के बाद उस लड़के को वहाँ पर बिठाकर कन्या ग्राम में भिक्षा माँगने गई । वह लड़का वहीं सो • गया । उसके भीतर एक पतला और लंबा सांप घुसा हुआ था । वही उसका रोग था । वह साँप उसके मुख से श्राधा निकलकर, वहाँ पर एक बिल थी। उस बिल में भी एक साँप रहता था, उस विलपर सिर घरकर, विलवाले साँप से बातें करने लगा। बिलवाले साँप ने उससे कहा तुम क्यों गरीब को दुःख देते हो ? यदि कोई काँजी या खट्टी या इस लड़के को पिलावे, तो तुम टुकड़े-टुकड़े होकर इसके मुख से बाहर आजायोगे । बिलवाले से उसने भी कहा कि यदि कोई तुझार गरम पानी डाले तब तुम भी मर जाओ और जिस द्रव्यपर तुम बैठे हो उसके हाथ लग जाय । इतने में कन्या आ गई और उसने दोनों की बातों को सुना । सुनकर तुरंत फिर ग्राम में चली गई और किसी के घर से कॉजी मॉग लाई और उसे उस लड़के को पिला दी । तुरंत ही लड़के के उदर में से साँप टुकड़े-टुकड़े होकर मुख द्वारा गिर पड़ा और लड़के का रूप बड़ा सुंदर हो गया । शरीर निरोग्य होगया । फिर कन्या ने पानी गरम करके उस बिलवाले सांप पर डाल दिया । वह भी मर गया । उसके द्रव्य को भी कन्या ने निकाल लिया और दोनों लड़के के देश में जाकर राज्य
भोगने लगे। जिसके कर्मों में सुख होता है उसको वह हर तरह से मिलता है । जिसके नहीं होना उनको किसी तरह से भी नहीं मिलता।
दृष्टांत - एक बनिया बड़ा कृपण था । उसने अपने सव धन का स्वर्ण खरीद कर उसकी उन सबको दीवार में गाड़ दीं । उसके पड़ोसी को स्वप्न याया कि दीवार में स्वर्ण की बहुत सी रोणीयें गड़ी हैं उनको तुम निकाल लो। दोनों के घरों में वह दीवार एक ही थी । उसने अपनी तरफ से उसे खोदकर सब निकालकर खाने खिलाने लगा । तब वनिये ने पूछा तुमको द्रव्य कहाँ से मिला। उसने सत्र हाल कह दिया । चनिया ने राजा के पास जाकर फरयाद की । राजा ने बनिये से कहा तुम्हारे कर्मों में यह नहीं था । इसी के कर्म में था । इसको मिला । विना कर्मों के किसी को भी कुछ नहीं मिलता है। गुरुजी का कथन ठीक है कि बिना कर्मों से कुछ नहीं मिलता । जीव को उचित हैं कि कर्मों को करता ही रहे । श्रुतिस्मृति भी कर्मों के करने का ही उपदेश करती है ।
श्रुतिः -- कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छ तथं समाः । कमों को करता हुआ ही सौ वरस जीने की इच्छा करे । स्मृतिःश्रौतं चापि तथा स्मार्त कर्मालम्व्य वसेद्विजः । तद्विहीनः पतत्येव ह्यानम्वरहितान्धवत् ।। श्रुतिप्रतिपाद्य तथा स्मृति प्रतिपाद्य कर्मों को संसार में रहे । कर्मों से हीन हुआ अंधे की तरह आश्रय से रहित "होकर पतित हो जाता है । तात्पर्य यह है कि बिना कर्मों के ईश्वर भी कुछ फल नहीं देता । जब तक जीने कर्मों को करे । लिखा भी है-गवां सर्पिः शरीरस्थं न करोति हि पोषणम् । तदेव कर्मरचितं पुनस्तस्यैव भेषजम् ॥ एवं स्वस्त्रशरीरस्थं सर्पिर्वत्परमेश्वरम् । विना चोपासनामेव न करोति हितं नृणाम् ॥
गौ के शरीर में घृत रहता है, परंतु उसके शरीर की पुष्टि नहीं करता । वही घृत उसके दूध से निकाल कर मोषधी बनाकर जब उस को दिया जाता है तब उसके शरीर की पुष्टि करता है। इसी प्रकार घृत की तरह सबके शरीरों में परमेश्वर रहता है, परंतु विना उपासना करने के कुछ भी फल नहीं देता है। गुरुजी ने कहा भी है कि विना कमों के कुछ भी नहीं मिलता है ।
म० - - कर्म का स्वरूप क्या है १ कर्म कितने प्रकार के हैं ? उ० - - कर्म अनेक प्रकार के हैं। कर्म नाम क्रिया का है । क्रिया शरीर, मन, वाणी और इंद्रियों से होती है । अच्छे बुरे संकल्पों का फुरना मन की क्रिया है । अच्छे संकल्प का नाम शुभ कर्म है । बुरे संकल्पों का नाम अशुभ कर्म हैं । मन से जो शुभ अशुभ कर्म किए जाते हैं उसका फल भी मन से ही भोगा जाता है । किसी की स्तुति करनी, मिय भाषण, सत्य भाषण करना, राम राम कहना इत्यादि वारणी के शुभ कर्म हैं। किसी की चुगुली करनी, निंदा करनी, झूठ बोलना इत्यादि वाणी के अशुभ कर्म हैं । इन दोनों का फल वाणी द्वारा ही भोगा जाता है । किसी दुःखी की सेवा करनी, हाथ से अधिकारी को देना, खिनाना, इस तरह के शारीरिक शुभ कर्म हैं । परस्त्री गमन करना, जीव की हिंसा करनी, इस तरह के अशुभ कर्म शारीरिक कर्म हैं। उनका शुभ अशुभ फल शरीर द्वारा ही भोगा जाता है। कर्म यद्यपि अनेक हैं तथापि वह शरीर, मन, वाणी से ही होते है । भक्ति तथा उपासना भी मन की वृत्तिरूप क्रियाएँ हैं । ये भी कर्म के ही अंतर्भूत हो सके हैं । विना कर्म करने के संसार में कोई जीव भी नहीं रह सक्का । इस वास्ते सदैव शुभ चिंतन करना सबको उचित है; क्योंकि विना शुभ चिंतन के दोनों लोकों में सुख कदापि नहीं मिलता है। इसी वास्ते गुरुजी ने कहा है कि बिना कर्मों के कुछ भी नहीं मिलता है ।
- आपने कहा है कि बिना उपासना के और भक्ति के परमेश्वर पुरुषों के हित को नहीं करता है पर शरीर में रहता है सो वह समग्र
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किं योगेः किं विरागेश्च जपैरन्यैः किमर्चनैः । यन्त्रेर्मन्त्रेस्तथा तन्त्रैः किमन्येरुप्रकर्मभिः ॥ स्मरणात्कीर्तनाच्चैव श्रवणाल्लेखनादपि । दर्शनाडारणदेव रामनामाखिनेष्टदम् ॥ तीर्थों और व्रतों से तथा होम और तप से क्या होता है ? यज्ञ दान और ध्यान तथा ज्ञान, विज्ञान और समाधि से क्या होता है ? योग, वैराग्य, जप, पूजन, यंत्र, मंत्र तथा तंत्रों से और उग्र क्मों से क्या होता है ? रामनाम के स्मरण करने से, कीर्तन से, श्रवण से लिखने से, दर्शन से ही सब इष्टफलों की प्राप्ति होती है। गुरुजी का न ठीक है - विना नाम के जपे कोई परमेश्वर को कदापि ध्यारा नहीं हो सका है। पचास -- इस लोक और परलोक के जो विषय भोग हैं उनकी प्राप्ति साधनों ही से होती है या विना साधनों के भी एक उशून्य । मूशून्य - जेती सृष्ट उपाई वेषांविणकर्मा किमिलेलई । टीशून्य - इस जगत् में ईश्वर की उत्पन्न की हुई जितनी सृष्टि तुम देखते हो उसमें से किसी को भी विणकर्मा, त्रिना कर्मों के क्या कुछ भी मिलता है ? कुछ भी नहीं मिलता । अर्थात् सत्र सांसारिक भोग जन्मान्तर के कर्मों के अधीन ही है । जिसने पूर्व जन्म में जैसे कर्म किये हैं, उन्हें उनके अनुसार ही दूसरे जन्म में फल मिलता है । विना कर्म के कुछ भी नहीं मिलता है । एक दृष्टांत भी है - एक राजा की दो कन्याएँ थीं । जिस समय राजा अपने घर में जाता, तो छोटी कन्या कहती - - राजन् ! तुम्हारी सदा जय हो। आप ही के मताप से हम सब लोग जीते हैं। दूसरी जो बडी कन्या थी वह कहती राजन् ! जन्मान्तर के पुण्य-कर्मों के फल को भोगो । प्रतिदिन छोटी और बडी दोनों ऊपरवाली बातों को कहतीं । एक दिन राजा को वडी क्न्या के ऊपर क्रोध थाया । बजीर को बुलाकर राजा ने कहा किसी गरीब और दुःखी लड़के के साथ इस बढी कन्या की शादी करके इस देश से दोनों को निकाल दो । वजीर राजा की आज्ञा सुनकर बाजार में लड़के की खोज में निकला । आगे एक दूसरे राजा के घर एक लड़का पैदा हु था । जब वह वड़ा हुआ, तो उसको एक वडा रोग लग गया। वह रोग अनेक उपायों से भी जब दूर न हुआ तब वह लड़का दुःखी होकर अपने देश से रात्रि में फकीर वनकर इस नगर में भाग थाया था । उसी लड़के को वजीर ने देखा । यतेि दुबला, पतला और चलने में असमर्थ । अति मलिन वस्त्रों को पहरे हुए बाजार में भीख माँग रहा है। वजीर ने उस लड़के को पकड़कर उसके साथ राजा की बड़ी लड़की की शादी कर दोनों को अपने देश से निकाल दिया। वह कन्या उस लड़के को साथ लेकर दूसरे देश में चली गई । एक दिन सवेरे चलते-चलते जब दोनों थक गए तब एक ग्राम के बाहर एक कूप के पास जाकर दोनों बैठ गए। थोड़ी देर के बाद उस लड़के को वहाँ पर बिठाकर कन्या ग्राम में भिक्षा माँगने गई । वह लड़का वहीं सो • गया । उसके भीतर एक पतला और लंबा सांप घुसा हुआ था । वही उसका रोग था । वह साँप उसके मुख से श्राधा निकलकर, वहाँ पर एक बिल थी। उस बिल में भी एक साँप रहता था, उस विलपर सिर घरकर, विलवाले साँप से बातें करने लगा। बिलवाले साँप ने उससे कहा तुम क्यों गरीब को दुःख देते हो ? यदि कोई काँजी या खट्टी या इस लड़के को पिलावे, तो तुम टुकड़े-टुकड़े होकर इसके मुख से बाहर आजायोगे । बिलवाले से उसने भी कहा कि यदि कोई तुझार गरम पानी डाले तब तुम भी मर जाओ और जिस द्रव्यपर तुम बैठे हो उसके हाथ लग जाय । इतने में कन्या आ गई और उसने दोनों की बातों को सुना । सुनकर तुरंत फिर ग्राम में चली गई और किसी के घर से कॉजी मॉग लाई और उसे उस लड़के को पिला दी । तुरंत ही लड़के के उदर में से साँप टुकड़े-टुकड़े होकर मुख द्वारा गिर पड़ा और लड़के का रूप बड़ा सुंदर हो गया । शरीर निरोग्य होगया । फिर कन्या ने पानी गरम करके उस बिलवाले सांप पर डाल दिया । वह भी मर गया । उसके द्रव्य को भी कन्या ने निकाल लिया और दोनों लड़के के देश में जाकर राज्य भोगने लगे। जिसके कर्मों में सुख होता है उसको वह हर तरह से मिलता है । जिसके नहीं होना उनको किसी तरह से भी नहीं मिलता। दृष्टांत - एक बनिया बड़ा कृपण था । उसने अपने सव धन का स्वर्ण खरीद कर उसकी उन सबको दीवार में गाड़ दीं । उसके पड़ोसी को स्वप्न याया कि दीवार में स्वर्ण की बहुत सी रोणीयें गड़ी हैं उनको तुम निकाल लो। दोनों के घरों में वह दीवार एक ही थी । उसने अपनी तरफ से उसे खोदकर सब निकालकर खाने खिलाने लगा । तब वनिये ने पूछा तुमको द्रव्य कहाँ से मिला। उसने सत्र हाल कह दिया । चनिया ने राजा के पास जाकर फरयाद की । राजा ने बनिये से कहा तुम्हारे कर्मों में यह नहीं था । इसी के कर्म में था । इसको मिला । विना कर्मों के किसी को भी कुछ नहीं मिलता है। गुरुजी का कथन ठीक है कि बिना कर्मों से कुछ नहीं मिलता । जीव को उचित हैं कि कर्मों को करता ही रहे । श्रुतिस्मृति भी कर्मों के करने का ही उपदेश करती है । श्रुतिः -- कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छ तथं समाः । कमों को करता हुआ ही सौ वरस जीने की इच्छा करे । स्मृतिःश्रौतं चापि तथा स्मार्त कर्मालम्व्य वसेद्विजः । तद्विहीनः पतत्येव ह्यानम्वरहितान्धवत् ।। श्रुतिप्रतिपाद्य तथा स्मृति प्रतिपाद्य कर्मों को संसार में रहे । कर्मों से हीन हुआ अंधे की तरह आश्रय से रहित "होकर पतित हो जाता है । तात्पर्य यह है कि बिना कर्मों के ईश्वर भी कुछ फल नहीं देता । जब तक जीने कर्मों को करे । लिखा भी है-गवां सर्पिः शरीरस्थं न करोति हि पोषणम् । तदेव कर्मरचितं पुनस्तस्यैव भेषजम् ॥ एवं स्वस्त्रशरीरस्थं सर्पिर्वत्परमेश्वरम् । विना चोपासनामेव न करोति हितं नृणाम् ॥ गौ के शरीर में घृत रहता है, परंतु उसके शरीर की पुष्टि नहीं करता । वही घृत उसके दूध से निकाल कर मोषधी बनाकर जब उस को दिया जाता है तब उसके शरीर की पुष्टि करता है। इसी प्रकार घृत की तरह सबके शरीरों में परमेश्वर रहता है, परंतु विना उपासना करने के कुछ भी फल नहीं देता है। गुरुजी ने कहा भी है कि विना कमों के कुछ भी नहीं मिलता है । मशून्य - - कर्म का स्वरूप क्या है एक कर्म कितने प्रकार के हैं ? उशून्य - - कर्म अनेक प्रकार के हैं। कर्म नाम क्रिया का है । क्रिया शरीर, मन, वाणी और इंद्रियों से होती है । अच्छे बुरे संकल्पों का फुरना मन की क्रिया है । अच्छे संकल्प का नाम शुभ कर्म है । बुरे संकल्पों का नाम अशुभ कर्म हैं । मन से जो शुभ अशुभ कर्म किए जाते हैं उसका फल भी मन से ही भोगा जाता है । किसी की स्तुति करनी, मिय भाषण, सत्य भाषण करना, राम राम कहना इत्यादि वारणी के शुभ कर्म हैं। किसी की चुगुली करनी, निंदा करनी, झूठ बोलना इत्यादि वाणी के अशुभ कर्म हैं । इन दोनों का फल वाणी द्वारा ही भोगा जाता है । किसी दुःखी की सेवा करनी, हाथ से अधिकारी को देना, खिनाना, इस तरह के शारीरिक शुभ कर्म हैं । परस्त्री गमन करना, जीव की हिंसा करनी, इस तरह के अशुभ कर्म शारीरिक कर्म हैं। उनका शुभ अशुभ फल शरीर द्वारा ही भोगा जाता है। कर्म यद्यपि अनेक हैं तथापि वह शरीर, मन, वाणी से ही होते है । भक्ति तथा उपासना भी मन की वृत्तिरूप क्रियाएँ हैं । ये भी कर्म के ही अंतर्भूत हो सके हैं । विना कर्म करने के संसार में कोई जीव भी नहीं रह सक्का । इस वास्ते सदैव शुभ चिंतन करना सबको उचित है; क्योंकि विना शुभ चिंतन के दोनों लोकों में सुख कदापि नहीं मिलता है। इसी वास्ते गुरुजी ने कहा है कि बिना कर्मों के कुछ भी नहीं मिलता है । - आपने कहा है कि बिना उपासना के और भक्ति के परमेश्वर पुरुषों के हित को नहीं करता है पर शरीर में रहता है सो वह समग्र
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