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प्रकरण हाईवे के 500 मीटर दायरे में शराब बेचने और परोसने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से जुड़ा है। कई रेस्त्रां और शराब ठेकों के मालिकों ने दलील दी थी कि महाराष्ट्र सरकार ने मनमाने ढंग से यह आदेश लागू किया है। उनकी दलील थी कि हाईवे के 500 मीटर दायरे में शराब की बिक्री बंद करने के साथ-साथ सरकार ने स्टेट रोड या मेन वेज पर स्थित दुकानें भी बंद करवा दीं। इनका दावा है कि यह मेनवेज राज्य में बहुत कम महत्व वाली सड़के हैं। राज्य के सड़क विकास कार्यक्रम में ऐसी 250-300 सड़कें हैं और इनकी स्टेट हाईवे से तुलना नहीं कर सकते। हालांकि, राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं है। इसके चलते एक लाख से ज्यादा शराब की दुकानें बंद करवा दीं। इस पर सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेट हाईवे का वर्गीकरण करने वाला नोटिफिकेशन मांगा था।
प्रकरण हाईवे के पाँच सौ मीटर दायरे में शराब बेचने और परोसने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से जुड़ा है। कई रेस्त्रां और शराब ठेकों के मालिकों ने दलील दी थी कि महाराष्ट्र सरकार ने मनमाने ढंग से यह आदेश लागू किया है। उनकी दलील थी कि हाईवे के पाँच सौ मीटर दायरे में शराब की बिक्री बंद करने के साथ-साथ सरकार ने स्टेट रोड या मेन वेज पर स्थित दुकानें भी बंद करवा दीं। इनका दावा है कि यह मेनवेज राज्य में बहुत कम महत्व वाली सड़के हैं। राज्य के सड़क विकास कार्यक्रम में ऐसी दो सौ पचास-तीन सौ सड़कें हैं और इनकी स्टेट हाईवे से तुलना नहीं कर सकते। हालांकि, राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं है। इसके चलते एक लाख से ज्यादा शराब की दुकानें बंद करवा दीं। इस पर सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेट हाईवे का वर्गीकरण करने वाला नोटिफिकेशन मांगा था।
रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की मोस्ट अवेटेड फिल्म का इंतजार फैंस काफी लंबे वक्त से कर रहे हैं। अब निर्माताओं ने ब्रह्मास्त्र का प्रमोशन शुरू कर दिया है। मंगलवार को निर्देशक अयान मुखर्जी और अभिनेता रणबीर सिंह फिल्म का प्रमोशन करने के लिए विशाखापट्टनम पहुंचे हैं। अब जानकारी का रही है कि विशाखापट्टनम ने एक कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर की रिलीज डेट का एलान कर दिया है। आलिया और रणबीर कपूर अभिनीत इस फिल्म का ट्रेलर 15 जून को रिलीज होगा। अयान मुखर्जी ने अपनी साई-फाई फिल्म ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर की रिलीज एलान फिल्मनिर्माता ने एक टीजर वीडियो शेयर कर किया है। इस टीजर में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ-साथ अमिताभ बच्चन नागार्जुन की भी झलक दिख रही हैं। जबकि मौनी रॉय बेहद ही क्रूर अंदाज में नजर आ रही हैं। इस टीजर में मौनी रॉय और रणबीर कपूर के बीच जबरदस्त जंग होती हुई दिख रही हैं। वहीं, रणबीर कपूर की विशाखापट्टनम से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अभिनेता विशाखापट्टनम हवाई अड्डे से एसएस राजामौली और आयन मुखर्जी के साथ बाहर निकलते हुए नजर आ रहे हैं, तभी फैंस उनके ऊपर फूलों को वर्षा करने लगाते हैं। लेकिन अगेल ही सेकेंड में वहां मौजूद एक फैंस रणबीर कपूर के गुलाब का फूल देना के लिए भीड़ से आगे जा हैं, तभी सुरक्षा कर्मी फैन को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन अभिनेता फैन से फूल लेकर उसका अभिवादन भी करते हैं। अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस सुपरनैचुरल साई-फाई फिल्म में रणबीर कपूर सुपर पावर शिवा के मुख्य किरदार में नजर आने वाले हैं, तो आलिया भट्ट ईशा की भूमिका में नजर आने वाली हैं। ब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, नागार्जुन और मौनी रॉय भी अहम किरदार में नजर आने वाली हैं। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ये फिल्म 09 सितंबर, 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की मोस्ट अवेटेड फिल्म का इंतजार फैंस काफी लंबे वक्त से कर रहे हैं। अब निर्माताओं ने ब्रह्मास्त्र का प्रमोशन शुरू कर दिया है। मंगलवार को निर्देशक अयान मुखर्जी और अभिनेता रणबीर सिंह फिल्म का प्रमोशन करने के लिए विशाखापट्टनम पहुंचे हैं। अब जानकारी का रही है कि विशाखापट्टनम ने एक कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर की रिलीज डेट का एलान कर दिया है। आलिया और रणबीर कपूर अभिनीत इस फिल्म का ट्रेलर पंद्रह जून को रिलीज होगा। अयान मुखर्जी ने अपनी साई-फाई फिल्म ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर की रिलीज एलान फिल्मनिर्माता ने एक टीजर वीडियो शेयर कर किया है। इस टीजर में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ-साथ अमिताभ बच्चन नागार्जुन की भी झलक दिख रही हैं। जबकि मौनी रॉय बेहद ही क्रूर अंदाज में नजर आ रही हैं। इस टीजर में मौनी रॉय और रणबीर कपूर के बीच जबरदस्त जंग होती हुई दिख रही हैं। वहीं, रणबीर कपूर की विशाखापट्टनम से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अभिनेता विशाखापट्टनम हवाई अड्डे से एसएस राजामौली और आयन मुखर्जी के साथ बाहर निकलते हुए नजर आ रहे हैं, तभी फैंस उनके ऊपर फूलों को वर्षा करने लगाते हैं। लेकिन अगेल ही सेकेंड में वहां मौजूद एक फैंस रणबीर कपूर के गुलाब का फूल देना के लिए भीड़ से आगे जा हैं, तभी सुरक्षा कर्मी फैन को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन अभिनेता फैन से फूल लेकर उसका अभिवादन भी करते हैं। अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस सुपरनैचुरल साई-फाई फिल्म में रणबीर कपूर सुपर पावर शिवा के मुख्य किरदार में नजर आने वाले हैं, तो आलिया भट्ट ईशा की भूमिका में नजर आने वाली हैं। ब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, नागार्जुन और मौनी रॉय भी अहम किरदार में नजर आने वाली हैं। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ये फिल्म नौ सितंबर, दो हज़ार बाईस को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
सुबह 9 बजे, सूखे नाबदान को खोलने के बाद, दिमाग में तेल के बजाय किसी तरह के लोहे के टुकड़े का एक सेट मिलता है। 9:30 बजे एक प्रमुख की भागीदारी के साथ एक दिमागी, एक टर्नर और एक लोहार से "चिकित्सा परामर्श" इकट्ठा किया जाता है . . . ।
सुबह नौ बजे, सूखे नाबदान को खोलने के बाद, दिमाग में तेल के बजाय किसी तरह के लोहे के टुकड़े का एक सेट मिलता है। नौ:तीस बजे एक प्रमुख की भागीदारी के साथ एक दिमागी, एक टर्नर और एक लोहार से "चिकित्सा परामर्श" इकट्ठा किया जाता है . . . ।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा कि विनोद आर तांती के अलावा कार्यकारी निदेशक के पद पर गिरीश आर तांती और निदेशक के तौर पर प्रणव आर तांती की नियुक्ति पर भी शेयरधारकों की मंजूरी लेने का फैसला लिया गया है। निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। शेयरधारकों से डाक मतों के जरिये इन पदों पर नियुक्ति से जुड़ी मंजूरी ली जाएगी। कंपनी के संस्थापक चेयरमैन तुलसी तांती का गत एक अक्टूबर को निधन होने के बाद ये नियुक्तियां की गई थीं। इसे कंपनी की उत्तराधिकार योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा कि विनोद आर तांती के अलावा कार्यकारी निदेशक के पद पर गिरीश आर तांती और निदेशक के तौर पर प्रणव आर तांती की नियुक्ति पर भी शेयरधारकों की मंजूरी लेने का फैसला लिया गया है। निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। शेयरधारकों से डाक मतों के जरिये इन पदों पर नियुक्ति से जुड़ी मंजूरी ली जाएगी। कंपनी के संस्थापक चेयरमैन तुलसी तांती का गत एक अक्टूबर को निधन होने के बाद ये नियुक्तियां की गई थीं। इसे कंपनी की उत्तराधिकार योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।
जौनपुर। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष का शुभारंभ मोहर्रम माह से चंद्र दर्शन के अनुसार होता है। चांद रात 19 जुलाई को है जबकि मुहर्रम की पहली तारीख 20 जुलाई से शुरू होगी। आशूरा दसवीं मुहर्रम 29 जुलाई को पड़ेगा। गौरतलब हो कि शिया समुदाय के लिए यह महीना गम का महीना होता है। यह महीना पैगम्बर हज़रत मोहम्मद स.अ.व. के नवासे हजरत इमाम हुसैन अ.स. व उनके 71 साथियों द्वारा इराक के कर्बला के मैदान में 10 मुहर्रम को हुई जंग में दी गई शहादत के लिए जाना जाता है। इसमें चांद रात से ही महिलाएं अपने सुहाग की निशानी चूडि़यों को इमाम चौक पर तोड़ देती हैं और साज श्रृंगार के गहनों को उतार कर काले वस्त्र धारण कर लेती हैं। पहली मुहर्रम से लोगों के घरों व इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू हो जाता है जिसका सिलसिला सवा दो माह तक चलता है। इसी संदर्भ में नगर मजिस्ट्रेट को तहसीन शाहिद सभासद एवं जिलाध्यक्ष ऑल इंडिया शिया महासभा के संयुक्त नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक इंतेज़ामिया कमेटी के सदस्यों ने विभिन्न मांगो से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कमेटी ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि मुहर्रम के मौके पर विद्युत आपूर्ति सायंकाल 6 से प्रातः काल 6 बजे तक निर्बाध रूप से दी जाये, सड़क मरम्मत, लाइट मरम्मत जनरेटर, पानी, साफ सफाई की व्यवस्था पहली मोहर्रम से ही सुनिश्चित की जाए, बड़े जुलूसों के पीछे अत्याधुनिक एंबुलेंस एवं कोतवाली पर दमकल गाड़ी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, इमामबाड़ा एवं दरगाह जुलूस मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरु स्त की जाए, यदि कहीं विवादित मामला हो तो दोनों पक्षों से मिलकर पुलिस व जिला प्रशासन के आला अधिकारी समय से पहले ही निरीक्षण कर ले ताकि कोई विवाद उत्पन्न ना हो, मोहर्रम कमेटियों एवं कावड़ समितियों के पदाधिकारियों की एक समन्यवय समिति प्रशासन की देखरेख में बना दिया जाए जिससे दोनों पर्व को सकुशल संपन्न कराने में सहयोग समय-समय पर लिया जा सके। इस अवसर पर इसरार हुसैन एडवोकेट, सैयद परवेज हसन, मुन्ना अकेला, नजमी, इब्ने हसन शहजादे, मोहम्मद उमर, सैयद जीशान हैदर, सैयद लाडले जैदी, मिर्जा नदीम, मिर्जा हातिम हुसैन, हसीन अहमद, मोहम्मद रज़ा उर्फ मजनू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
जौनपुर। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष का शुभारंभ मोहर्रम माह से चंद्र दर्शन के अनुसार होता है। चांद रात उन्नीस जुलाई को है जबकि मुहर्रम की पहली तारीख बीस जुलाई से शुरू होगी। आशूरा दसवीं मुहर्रम उनतीस जुलाई को पड़ेगा। गौरतलब हो कि शिया समुदाय के लिए यह महीना गम का महीना होता है। यह महीना पैगम्बर हज़रत मोहम्मद स.अ.व. के नवासे हजरत इमाम हुसैन अ.स. व उनके इकहत्तर साथियों द्वारा इराक के कर्बला के मैदान में दस मुहर्रम को हुई जंग में दी गई शहादत के लिए जाना जाता है। इसमें चांद रात से ही महिलाएं अपने सुहाग की निशानी चूडि़यों को इमाम चौक पर तोड़ देती हैं और साज श्रृंगार के गहनों को उतार कर काले वस्त्र धारण कर लेती हैं। पहली मुहर्रम से लोगों के घरों व इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू हो जाता है जिसका सिलसिला सवा दो माह तक चलता है। इसी संदर्भ में नगर मजिस्ट्रेट को तहसीन शाहिद सभासद एवं जिलाध्यक्ष ऑल इंडिया शिया महासभा के संयुक्त नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक इंतेज़ामिया कमेटी के सदस्यों ने विभिन्न मांगो से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कमेटी ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि मुहर्रम के मौके पर विद्युत आपूर्ति सायंकाल छः से प्रातः काल छः बजे तक निर्बाध रूप से दी जाये, सड़क मरम्मत, लाइट मरम्मत जनरेटर, पानी, साफ सफाई की व्यवस्था पहली मोहर्रम से ही सुनिश्चित की जाए, बड़े जुलूसों के पीछे अत्याधुनिक एंबुलेंस एवं कोतवाली पर दमकल गाड़ी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, इमामबाड़ा एवं दरगाह जुलूस मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरु स्त की जाए, यदि कहीं विवादित मामला हो तो दोनों पक्षों से मिलकर पुलिस व जिला प्रशासन के आला अधिकारी समय से पहले ही निरीक्षण कर ले ताकि कोई विवाद उत्पन्न ना हो, मोहर्रम कमेटियों एवं कावड़ समितियों के पदाधिकारियों की एक समन्यवय समिति प्रशासन की देखरेख में बना दिया जाए जिससे दोनों पर्व को सकुशल संपन्न कराने में सहयोग समय-समय पर लिया जा सके। इस अवसर पर इसरार हुसैन एडवोकेट, सैयद परवेज हसन, मुन्ना अकेला, नजमी, इब्ने हसन शहजादे, मोहम्मद उमर, सैयद जीशान हैदर, सैयद लाडले जैदी, मिर्जा नदीम, मिर्जा हातिम हुसैन, हसीन अहमद, मोहम्मद रज़ा उर्फ मजनू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! कुछ लोगों को बात-बात गाली देने या अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आदत पड़ जाती है। पुरुष और महिलाएं दोनों मजाक-मजाक गाली देने और अपशब्द बोलने की आदत पड़ जाती है। लेकिन जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होता है, तो वह ये चीजें समझने लगता है। ऐसे में बच्चा या तो खुद भी गलत शब्द बोलने लगता है या फिर उसे अपने पेरेंट्स की आदतों से काफी ज्यादा बुरा लगने लगता है और डिप्रेशन में चला जाता है। इसलिए आपके लिए बहुत जरूरी है कि आप बच्चे के सामने ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल न करें। कुछ पेरेंट्स की आदत ऐसी होती है कि वे दूसरे बच्चों को देखकर अपने बच्चे से भी उम्मीदें लगाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में कई बार बच्चा उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाता है और ऐसे में पेरेंट्स उन्हें ब्लेम करना शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपका बच्चा परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है और उसके लिए आप बच्चे को ही जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ऐसे में वह डिप्रेशन में जा सकता है। कई बार बच्चा अपने पेरेंट्स की किसी समस्या के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं। उदाहरण के लिए पापा के बिजनेस में नुकसान या जॉब छूटने जैसी स्थितियों में भी बच्चे को डिप्रेशन हो सकता है। ऐसी किसी स्थिति में अगर आप अपनी टेंशन बच्चे को बताएंगे तो वह भी डिप्रेशन में जा सकता है। बच्चे की फीलिंग्स समझना भी बहुत जरूरी है और कई पेरेंट्स यही गलती कर जाते हैं। ऐसे में बच्चे को लगने लगता है कि वह अकेला है और ऐसे में डिप्रेशन में चला जाता है। आपको अपने बच्चे का ध्यान रखना है कि वह कैसा महसूस कर रहा है और अगर आपको लगता है कि बच्चा अच्छा महसूस नहीं कर रहा है, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! कुछ लोगों को बात-बात गाली देने या अपशब्दों का इस्तेमाल करने की आदत पड़ जाती है। पुरुष और महिलाएं दोनों मजाक-मजाक गाली देने और अपशब्द बोलने की आदत पड़ जाती है। लेकिन जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होता है, तो वह ये चीजें समझने लगता है। ऐसे में बच्चा या तो खुद भी गलत शब्द बोलने लगता है या फिर उसे अपने पेरेंट्स की आदतों से काफी ज्यादा बुरा लगने लगता है और डिप्रेशन में चला जाता है। इसलिए आपके लिए बहुत जरूरी है कि आप बच्चे के सामने ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल न करें। कुछ पेरेंट्स की आदत ऐसी होती है कि वे दूसरे बच्चों को देखकर अपने बच्चे से भी उम्मीदें लगाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में कई बार बच्चा उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाता है और ऐसे में पेरेंट्स उन्हें ब्लेम करना शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपका बच्चा परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है और उसके लिए आप बच्चे को ही जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ऐसे में वह डिप्रेशन में जा सकता है। कई बार बच्चा अपने पेरेंट्स की किसी समस्या के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं। उदाहरण के लिए पापा के बिजनेस में नुकसान या जॉब छूटने जैसी स्थितियों में भी बच्चे को डिप्रेशन हो सकता है। ऐसी किसी स्थिति में अगर आप अपनी टेंशन बच्चे को बताएंगे तो वह भी डिप्रेशन में जा सकता है। बच्चे की फीलिंग्स समझना भी बहुत जरूरी है और कई पेरेंट्स यही गलती कर जाते हैं। ऐसे में बच्चे को लगने लगता है कि वह अकेला है और ऐसे में डिप्रेशन में चला जाता है। आपको अपने बच्चे का ध्यान रखना है कि वह कैसा महसूस कर रहा है और अगर आपको लगता है कि बच्चा अच्छा महसूस नहीं कर रहा है, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
हाल ही में अलग-अलग क्षेत्रों में इनोवेशन करने वाले छात्रों की 23 टीमों को 'विश्वकर्मा' अवार्ड से सम्मानित किया गया, इन 23 टीमों को 8 अलग-अलग उप-श्रेणियों के तहत पुरस्कार के लिये चुना गया और प्रत्येक उप-श्रेणी में शीर्ष तीन टीमों को प्रशंसा प्रमाण पत्र और नकद धनराशि (51,000 रुपए, 31,000 और 21,000 रुपए) दी गई। इन टीमों के नवाचारों का उपयोग ऐसी परियोजनाएँ बनाने में किया जाएगा जो आम आदमी के जीवन की समस्याओं को हल करती हो। इस पुरस्कार की शुरुआत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा वर्ष 2017 में की गई थी। 'विश्वकर्मा' अवार्ड के 2019 के संस्करण के लिये इंडियन सोसाइटी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ISTE) और नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने भी AICTE के साथ सहयोग किया था। कट, कॉपी, पेस्ट, फाइंड और रिप्लेस कमांड के आविष्कारक और मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक लैरी टेस्लर (Larry Tesler) का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वर्ष 1945 में न्यूयॉर्क में जन्मे और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट लैरी ने वर्ष 1973 में जेरॉक्स पालो अल्टो रिसर्च सेंटर से कैरियर की शुरुआत की थी। टेस्लर को ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन में विशेषज्ञता प्राप्त थी तथा उन्होंने अमेज़न, एप्पल, याहू जैसी संस्थाओं में भी काम किया था। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को गति देने तथा इनके समाधान तलाशने के उद्देश्य से असम के गुवाहाटी में पूर्वोत्तर सतत् विकास लक्ष्य सम्मेलन-2020 का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन पूर्वोत्तर विकास परिषद, असम सरकार तथा टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर नीति आयोग द्वारा किया जा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी, सहयोग और विकास पर आधारित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र के बाद सतत् विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण, आर्थिक समृद्धि और सतत् आजीविका, जलवायु के अनुकूल कृषि, स्वास्थ्य और पोषण आदि विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किये जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा के नए सत्र की शुरुआत के साथ ही शाहदरा से निर्वाचित विधायक राम निवास गोयल को एक बार पुनः सदन का अध्यक्ष चुना गया है। इसी के साथ राम निवास गोयल लगातार दूसरी बार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। पिछले पाँच वर्ष में उन्होंने विधानसभा में बहुत से कार्य करवाए हैं। राम निवास गोयल के कार्यकाल में ही क्रांतिकारियों की गैलरी बनवाई गई और शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं को लगवाने का कार्य किया गया। इसके अलावा दिल्ली विधानसभा में रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को कुल 70 विधानसभा सीटों में से 62 सीटों पर विजय मिली है। हाल ही में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने राजनीतिक कारणों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ध्यातव्य है कि 94 वर्ष के महातिर मोहम्मद दुनिया के सबसे बूढ़े प्रधानमंत्री के तौर पर जाने जाते थे। वे 1981 से 2003 तक लगातार मलेशिया के प्रधानमंत्री रहे, इसके बाद 2018 में इन्होंने नजीब रज्ज़ाक को हराकर सत्ता में वापसी की थी। महातिर मोहम्मद का जन्म 10 जुलाई, 1925 को मलेशिया में हुआ था। ज्ञात हो कि महातिर मोहम्मद ने अनुच्छेद-370 को निलंबित किये जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा कश्मीर पर 'आक्रमण करने और कब्ज़ा' करने के आरोप लगाए थे। इसके पश्चात् भारत ने मलेशिया से धीरे-धीरे पाम आयल का आयात कम कर दिया। इसका मलेशिया के पाम आयल बाज़ार पर काफी अधिक प्रभाव पड़ा है।
हाल ही में अलग-अलग क्षेत्रों में इनोवेशन करने वाले छात्रों की तेईस टीमों को 'विश्वकर्मा' अवार्ड से सम्मानित किया गया, इन तेईस टीमों को आठ अलग-अलग उप-श्रेणियों के तहत पुरस्कार के लिये चुना गया और प्रत्येक उप-श्रेणी में शीर्ष तीन टीमों को प्रशंसा प्रमाण पत्र और नकद धनराशि दी गई। इन टीमों के नवाचारों का उपयोग ऐसी परियोजनाएँ बनाने में किया जाएगा जो आम आदमी के जीवन की समस्याओं को हल करती हो। इस पुरस्कार की शुरुआत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा वर्ष दो हज़ार सत्रह में की गई थी। 'विश्वकर्मा' अवार्ड के दो हज़ार उन्नीस के संस्करण के लिये इंडियन सोसाइटी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन और नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने भी AICTE के साथ सहयोग किया था। कट, कॉपी, पेस्ट, फाइंड और रिप्लेस कमांड के आविष्कारक और मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक लैरी टेस्लर का चौहत्तर वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में न्यूयॉर्क में जन्मे और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट लैरी ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में जेरॉक्स पालो अल्टो रिसर्च सेंटर से कैरियर की शुरुआत की थी। टेस्लर को ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन में विशेषज्ञता प्राप्त थी तथा उन्होंने अमेज़न, एप्पल, याहू जैसी संस्थाओं में भी काम किया था। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को गति देने तथा इनके समाधान तलाशने के उद्देश्य से असम के गुवाहाटी में पूर्वोत्तर सतत् विकास लक्ष्य सम्मेलन-दो हज़ार बीस का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन पूर्वोत्तर विकास परिषद, असम सरकार तथा टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर नीति आयोग द्वारा किया जा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी, सहयोग और विकास पर आधारित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र के बाद सतत् विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण, आर्थिक समृद्धि और सतत् आजीविका, जलवायु के अनुकूल कृषि, स्वास्थ्य और पोषण आदि विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किये जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा के नए सत्र की शुरुआत के साथ ही शाहदरा से निर्वाचित विधायक राम निवास गोयल को एक बार पुनः सदन का अध्यक्ष चुना गया है। इसी के साथ राम निवास गोयल लगातार दूसरी बार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। पिछले पाँच वर्ष में उन्होंने विधानसभा में बहुत से कार्य करवाए हैं। राम निवास गोयल के कार्यकाल में ही क्रांतिकारियों की गैलरी बनवाई गई और शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं को लगवाने का कार्य किया गया। इसके अलावा दिल्ली विधानसभा में रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को कुल सत्तर विधानसभा सीटों में से बासठ सीटों पर विजय मिली है। हाल ही में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने राजनीतिक कारणों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ध्यातव्य है कि चौरानवे वर्ष के महातिर मोहम्मद दुनिया के सबसे बूढ़े प्रधानमंत्री के तौर पर जाने जाते थे। वे एक हज़ार नौ सौ इक्यासी से दो हज़ार तीन तक लगातार मलेशिया के प्रधानमंत्री रहे, इसके बाद दो हज़ार अट्ठारह में इन्होंने नजीब रज्ज़ाक को हराकर सत्ता में वापसी की थी। महातिर मोहम्मद का जन्म दस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ पच्चीस को मलेशिया में हुआ था। ज्ञात हो कि महातिर मोहम्मद ने अनुच्छेद-तीन सौ सत्तर को निलंबित किये जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा कश्मीर पर 'आक्रमण करने और कब्ज़ा' करने के आरोप लगाए थे। इसके पश्चात् भारत ने मलेशिया से धीरे-धीरे पाम आयल का आयात कम कर दिया। इसका मलेशिया के पाम आयल बाज़ार पर काफी अधिक प्रभाव पड़ा है।
मलाइका अरोड़ा इनदिनों अपने शो मूविंग इन विद मलाइका को लेकर चर्चा में हैं. वो लगातार प्रशंसकों और फॉलोवर्स से अपने बारे में पहले से अनजान चीजों का खुलासा कर रही हैं. हालिया एपिसोड में उनके डिजाइनर दोस्त विक्रम फड़नीस ने शो की शोभा बढ़ाई और दोनों के बीच कई तरह की बातचीत हुई. वो 25 सालों से एक्ट्रेस को जानते हैं और उन्होंने अभी तक यह महसूस नहीं किया है कि वह पर्सनल हैं. वो कहते हैं कि मलाइका अरोड़ा को अपने चारों ओर का शोर पसंद है. विक्रम कहते हैं, 'आपके बारे में काफी शोर है. आप बिल्डिंग से बाहर निकलती हैं, जिस तरह से आप चलती हैं, वह शोर है. आप एक सेरेमनी में शामिल होते हैं, आपका पहनावा, शोर है. या तो आप उस शोर से प्यार करते हैं, या आप इसे खुद बना रहे हैं क्योंकि आप जानते हैं कि यह प्रासंगिक है. मलाइका इसके जवाब में कहती हैं, "मैं कुछ भी ऐसा नहीं कर रही हूं जिससे कुछ भी हो जाए. मैं उस तरह का कुछ भी नहीं करती, मैं एक ऐसी शख्स हूं जिसने कभी किसी का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश नहीं की, और आप यह जानते हैं. मैंने ऐसा कभी नहीं किया है. " मलाइका अरोड़ा के बेटे अरहान खान और उनकी बहन अमृता अरोड़ा भी एक एपिसोड में पहुंचे थे. अरहान ने खुलासा किया था कि उनकी मौसी अमृता उनकी दूसरी मां हैं. लेकिन मुझे लगता है कि वह आपकी जगह लेने के लिए प्रमोशन कर रही हैं. वह टॉप जगह के लिए जोर लगा रही हैं. अरहान ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह तो मजाक कर रहे थे. मलाइका ने चुटकी लेते हुए कहा था कि यह उन्हें परेशान करने और उनसे प्रतिक्रिया पाने का उनका तरीका है. गौरतलब है कि मलाइका अरोड़ा सोशल मीडिया पर भी खासा एक्टिव रहती हैं. उनके इंस्टाग्राम पर 17 मिलियन से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. वो बड़े पर्दे से पिछले कुछ समय से दूर हैं. हालांकि वो अक्सर लाइमलाइट में छाई रहती हैं.
मलाइका अरोड़ा इनदिनों अपने शो मूविंग इन विद मलाइका को लेकर चर्चा में हैं. वो लगातार प्रशंसकों और फॉलोवर्स से अपने बारे में पहले से अनजान चीजों का खुलासा कर रही हैं. हालिया एपिसोड में उनके डिजाइनर दोस्त विक्रम फड़नीस ने शो की शोभा बढ़ाई और दोनों के बीच कई तरह की बातचीत हुई. वो पच्चीस सालों से एक्ट्रेस को जानते हैं और उन्होंने अभी तक यह महसूस नहीं किया है कि वह पर्सनल हैं. वो कहते हैं कि मलाइका अरोड़ा को अपने चारों ओर का शोर पसंद है. विक्रम कहते हैं, 'आपके बारे में काफी शोर है. आप बिल्डिंग से बाहर निकलती हैं, जिस तरह से आप चलती हैं, वह शोर है. आप एक सेरेमनी में शामिल होते हैं, आपका पहनावा, शोर है. या तो आप उस शोर से प्यार करते हैं, या आप इसे खुद बना रहे हैं क्योंकि आप जानते हैं कि यह प्रासंगिक है. मलाइका इसके जवाब में कहती हैं, "मैं कुछ भी ऐसा नहीं कर रही हूं जिससे कुछ भी हो जाए. मैं उस तरह का कुछ भी नहीं करती, मैं एक ऐसी शख्स हूं जिसने कभी किसी का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश नहीं की, और आप यह जानते हैं. मैंने ऐसा कभी नहीं किया है. " मलाइका अरोड़ा के बेटे अरहान खान और उनकी बहन अमृता अरोड़ा भी एक एपिसोड में पहुंचे थे. अरहान ने खुलासा किया था कि उनकी मौसी अमृता उनकी दूसरी मां हैं. लेकिन मुझे लगता है कि वह आपकी जगह लेने के लिए प्रमोशन कर रही हैं. वह टॉप जगह के लिए जोर लगा रही हैं. अरहान ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह तो मजाक कर रहे थे. मलाइका ने चुटकी लेते हुए कहा था कि यह उन्हें परेशान करने और उनसे प्रतिक्रिया पाने का उनका तरीका है. गौरतलब है कि मलाइका अरोड़ा सोशल मीडिया पर भी खासा एक्टिव रहती हैं. उनके इंस्टाग्राम पर सत्रह मिलियन से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. वो बड़े पर्दे से पिछले कुछ समय से दूर हैं. हालांकि वो अक्सर लाइमलाइट में छाई रहती हैं.
वेलेंटाइन डे सभी के लिए बहुत ख़ास होता है वेलेंटाइन डे सभी की ज़िंदगी का सबसे ख़ास दिन माना जाता है हर कपल ये चाहता है कि उसका वेलेंटाइन डे प्यार से ही बीते और प्यार से ही इस वेलेंटाइन डे को मनाया जाए। ऐसे में वेलेंटाइन डे को ख़ास बनाने के लिए कई टिप्स भी अपना सकते है जो आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहें है। 1. गुलाब का गुलदस्ता - आप वेलेंटाइन डे पर अपने पार्टनर से मिलने जा रहें है तो उसके लिए बहुत ही सुंदर गुलाब का गुलदस्ता लेकर जाए जो उसे खुशबुओं से महका देगा और उसके दिन को लाजवाब बना देगा। 2. कार्ड और गुलदस्ता - गुलाब के गुलदस्ते के साथ आप एक प्यारभरा कार्ड भी रख सकते है जिसमे आपकी फीलिंग लिखी हो और उसे पढ़ते हां आपके पार्टनर के दिल का सारा प्यार आप पर न्यौछावर हो जाए। 3. पार्क में ले जाना - आप वेलेंटाइन वाले दिन अपने पार्टनर को एक पार्क में ले जाए वहां पर कई सबके सामने घुटनो पर बैठकर उसे एक रिंग के साथ प्रपोज करे यह उसके लिए सबसे यादगार होगा। 4. पुरानी तस्वीरों का एल्बम - आप अपने पार्टनर को वेलेंटाइन पर पुरानी तस्वीरों का एक अल्बम दे सकते है जिसे देखकर वो ख़ुशी से पागल हो जाए। 5. बाहर जाए - कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बनाकर उसे बहुत ही खूबसूरत वादियों में ले जा सकते है और अपनी दिल की बात उसे वहीँ किसी नए अंदाज से बता सकते है। 6. घर पर दे ऐसे सरप्राइज - आप अपने पार्टनर को घर पर दिल के आकर का केक या कुकीज़ बनाकर उसे सरप्राइज़ दे सकते है। 7. केंडल लाइट डिनर - अपने वेलेंटाइन को ख़ास बनाने के लिए कहीं बहुत ही खूबसूरत जगह केंडल लाइट डिनर पर जा सकते है। रितेश-जेनेलिया ने वैलेंटाइन्स डे पर कुछ ऐसा वीडियो किया शेयर. .
वेलेंटाइन डे सभी के लिए बहुत ख़ास होता है वेलेंटाइन डे सभी की ज़िंदगी का सबसे ख़ास दिन माना जाता है हर कपल ये चाहता है कि उसका वेलेंटाइन डे प्यार से ही बीते और प्यार से ही इस वेलेंटाइन डे को मनाया जाए। ऐसे में वेलेंटाइन डे को ख़ास बनाने के लिए कई टिप्स भी अपना सकते है जो आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहें है। एक. गुलाब का गुलदस्ता - आप वेलेंटाइन डे पर अपने पार्टनर से मिलने जा रहें है तो उसके लिए बहुत ही सुंदर गुलाब का गुलदस्ता लेकर जाए जो उसे खुशबुओं से महका देगा और उसके दिन को लाजवाब बना देगा। दो. कार्ड और गुलदस्ता - गुलाब के गुलदस्ते के साथ आप एक प्यारभरा कार्ड भी रख सकते है जिसमे आपकी फीलिंग लिखी हो और उसे पढ़ते हां आपके पार्टनर के दिल का सारा प्यार आप पर न्यौछावर हो जाए। तीन. पार्क में ले जाना - आप वेलेंटाइन वाले दिन अपने पार्टनर को एक पार्क में ले जाए वहां पर कई सबके सामने घुटनो पर बैठकर उसे एक रिंग के साथ प्रपोज करे यह उसके लिए सबसे यादगार होगा। चार. पुरानी तस्वीरों का एल्बम - आप अपने पार्टनर को वेलेंटाइन पर पुरानी तस्वीरों का एक अल्बम दे सकते है जिसे देखकर वो ख़ुशी से पागल हो जाए। पाँच. बाहर जाए - कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बनाकर उसे बहुत ही खूबसूरत वादियों में ले जा सकते है और अपनी दिल की बात उसे वहीँ किसी नए अंदाज से बता सकते है। छः. घर पर दे ऐसे सरप्राइज - आप अपने पार्टनर को घर पर दिल के आकर का केक या कुकीज़ बनाकर उसे सरप्राइज़ दे सकते है। सात. केंडल लाइट डिनर - अपने वेलेंटाइन को ख़ास बनाने के लिए कहीं बहुत ही खूबसूरत जगह केंडल लाइट डिनर पर जा सकते है। रितेश-जेनेलिया ने वैलेंटाइन्स डे पर कुछ ऐसा वीडियो किया शेयर. .
Kangana Ranaut: रिंकू हत्याकांड(Rinku Murder) को लेकर दिल्ली पुलिस(Delhi Police) के डीसीपी एस. धामा ने कहा कि 25 वर्षीय रिंकू की 10 फरवरी को मंगोलपुरी में जन्मदिन की पार्टी में चाकू मार दिया गया था। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में 25 साल के रिंकू शर्मा की हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद रिंकू के परिवार वालों का आरोप है कि, राम मंदिर निर्माण के लिए रिंकू चंदा जुटा रहा था, जिसकी वजह से दूसरे समुदाय के लोगों ने उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर इंसाफ दिलाने की बात छिड़ी हुई है। हालांकि परिवार वाले भले ये कह रहे हों कि रिंकू की हत्या चंदे को लेकर हुई है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस दावे को खारिज किया है। बता दें कि ट्विटर पर #JusticeForRinkuSharma ट्रेंड कर रहा है। इस हैशटैग पर लोग रिंकू शर्मा का न्याय दिलाने के लिए अपनी बात रख रहे हैं। वहीं तमाम मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखने वाली फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी एक ट्वीट के जरिए अपनी भड़ास निकाली है। बता दें कि रिंकू हत्याकांड को लेकर दिल्ली पुलिस के डीसीपी एस. धामा ने कहा कि 25 वर्षीय रिंकू की 10 फरवरी को मंगोलपुरी में जन्मदिन की पार्टी में चाकू मार दिया गया था। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस का कहना है कि रिंकू शर्मा का झगड़ा रेस्तरां को बंद करने पर शुरू हुआ था जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गयी। इस घटना में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं कंगना के ट्वीट पर देखिए लोगों ने किस तरह के रिएक्शन दिए हैं. . क्यों इस देश में हिंदी बोलने वले को नीचे देखा जाता है? हिंदुस्तानी कलाकार को कम और विदेशी कलाकारों को बड़ा क्यों समझा जाता है? जय श्री राम बोलते समय हमें क्यों दो बार सोचना पड़ता है? राष्ट्रवादी आवाज को गवार क्यों कहा जाता है? विदेशी सोच रखने वाले डफर देश के हित में कब सोचेंगे? Extremely disheartened to see this! ! There is no hue nd cry from saboot , liberus gang ! ! Stop Lynching Hindus. . ! No placard Bwood activist to talk abt a Hindu?
Kangana Ranaut: रिंकू हत्याकांड को लेकर दिल्ली पुलिस के डीसीपी एस. धामा ने कहा कि पच्चीस वर्षीय रिंकू की दस फरवरी को मंगोलपुरी में जन्मदिन की पार्टी में चाकू मार दिया गया था। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में पच्चीस साल के रिंकू शर्मा की हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद रिंकू के परिवार वालों का आरोप है कि, राम मंदिर निर्माण के लिए रिंकू चंदा जुटा रहा था, जिसकी वजह से दूसरे समुदाय के लोगों ने उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर इंसाफ दिलाने की बात छिड़ी हुई है। हालांकि परिवार वाले भले ये कह रहे हों कि रिंकू की हत्या चंदे को लेकर हुई है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस दावे को खारिज किया है। बता दें कि ट्विटर पर #JusticeForRinkuSharma ट्रेंड कर रहा है। इस हैशटैग पर लोग रिंकू शर्मा का न्याय दिलाने के लिए अपनी बात रख रहे हैं। वहीं तमाम मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखने वाली फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी एक ट्वीट के जरिए अपनी भड़ास निकाली है। बता दें कि रिंकू हत्याकांड को लेकर दिल्ली पुलिस के डीसीपी एस. धामा ने कहा कि पच्चीस वर्षीय रिंकू की दस फरवरी को मंगोलपुरी में जन्मदिन की पार्टी में चाकू मार दिया गया था। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस का कहना है कि रिंकू शर्मा का झगड़ा रेस्तरां को बंद करने पर शुरू हुआ था जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गयी। इस घटना में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं कंगना के ट्वीट पर देखिए लोगों ने किस तरह के रिएक्शन दिए हैं. . क्यों इस देश में हिंदी बोलने वले को नीचे देखा जाता है? हिंदुस्तानी कलाकार को कम और विदेशी कलाकारों को बड़ा क्यों समझा जाता है? जय श्री राम बोलते समय हमें क्यों दो बार सोचना पड़ता है? राष्ट्रवादी आवाज को गवार क्यों कहा जाता है? विदेशी सोच रखने वाले डफर देश के हित में कब सोचेंगे? Extremely disheartened to see this! ! There is no hue nd cry from saboot , liberus gang ! ! Stop Lynching Hindus. . ! No placard Bwood activist to talk abt a Hindu?
करता है उसके यह हे तु हैं। जो पुरुष किसीभी कर्मके करनेमें अहंकार नहकिंरता और उस कीबुद्धि आत्माको कर्ता नहीं मानती ऐसी निष्ठाकाज्ञानी समस्त जगतकोसी मारडाले तौभी उसे मारडालनेका पापनहींलगता ज्ञा न और जाननेयोग्य वस्तु वे जाननेयोग्य कर्म की प्रेरणा तीन भांतिका है करा कर्म कर्त्ता यह तीन प्रकार के कारक हैं। हे अर्जुन ! सां ख्य शास्त्रमें ज्ञान कर्म कर्त्ता तीन प्रकार के कहे गये हैं उनको भी जानलीजिये। समस्त जगत में एक खण्ड ब्रह्मको प्रकाश जो देख ता है और सब प्रकार के जीवों को एकाकार जानता है उसको सतोगुण युक्त ज्ञानी कह तेहैं और जो अलग अनेक प्रकार का जो ज्ञान सर्व वस्तु में जानता है सो राजसीज्ञान है। जो एक मूर्ति की पूर्ण की भांति व्यर्थ ही निश्चय कर्ता है उस अग्यानी पुरुष की बुद्धि को तामसीज्ञान कहते हैं। अभिमान रहित राग द्वेप को छोड़कर जो विना प्रयोजन क में किये जाँय वह सतोगुणी कर्म कहाते हैं जो कामना पूर्णहोने की आशा सेयुक्त अहंकार सहित आतक्लेश और दुःखसे जो कर्म किया जाय वह राजस कहाता है जो कर्म करने के पीछे बंधन का हेतू होवै हानिकारक और दूसरे को दुःखदाई सामर्थ्य के विचार को छो ड़कर अस और अग्यानसे कियाजाय वह क र्म तामसी कहाता है। फलकी इच्छाको छो डकरनस भावसे युक्त धैर्य और उत्साहसमत कार्य पूरा होवें या अधूराही रहजाय परन्तु उससे सुख दुःख को न मानै ऐसा कार्य कर्ता संतोगुणी कहता है इन्द्रियों के विषय में प्रीति रखनेवाला कर्मके फलको चाहने वाला लालची और स्वभावसे दुःखदाई भी तर और शहर से अशुद्ध हर्ष और शोक से परिपूर्ण हुआ ऐसा कर्त्ता राजस कहाता है। धर्म के श्रद्धा से रहित विषय में लगा हुआ कर्म फलकी श्रद्धासे होनसक्ति रहित मृर्ख अहंकारी धोखा देनेवाला आलसी संदेह युक्त कर्ता तामसी कहलाता है। बुद्धि श्री र धारणाशक्तिके भी गुणों के अनुकूलती१२ गोन भांतिकी है उनको सुनिये । हे अर्जुन स्वध र्म में रहना और अधर्मको त्याग करना कर ने योग्य और न करने योग्य कर्मका विचार करना भय अभय बंधन मोक्षको जो जाने उसी पुरुष की वृद्धि सतोगुणी है। जिस बद से धर्म अधर्म कार्य अकार्य का विचार न कि याजाय हे अर्जुन ! वह बुद्धि राजसी है। त मोगुणसे युक्त बुद्धिवाले सदैव अधर्म को धर्म मानते हैं और सदैव सभी बातोंको उलटाही समझते हैं उसको तामसी बुद्धिकहते हैं। जिस धारणाशक्ति से मन प्रागण इन्द्रिय क्रिया चित्त की वृत्ति आदिको जारोकसक्का है कि किसी कुमार्ग में न लगजावे हे पार्थ! उसी पुरुप की धारणाशक्ति सतोगुणी है । जिस धमशक्ति से धर्म काम अर्थ को धारणा करके अहंकार पूर्वक फल चाहते हैं वह रजो
करता है उसके यह हे तु हैं। जो पुरुष किसीभी कर्मके करनेमें अहंकार नहकिंरता और उस कीबुद्धि आत्माको कर्ता नहीं मानती ऐसी निष्ठाकाज्ञानी समस्त जगतकोसी मारडाले तौभी उसे मारडालनेका पापनहींलगता ज्ञा न और जाननेयोग्य वस्तु वे जाननेयोग्य कर्म की प्रेरणा तीन भांतिका है करा कर्म कर्त्ता यह तीन प्रकार के कारक हैं। हे अर्जुन ! सां ख्य शास्त्रमें ज्ञान कर्म कर्त्ता तीन प्रकार के कहे गये हैं उनको भी जानलीजिये। समस्त जगत में एक खण्ड ब्रह्मको प्रकाश जो देख ता है और सब प्रकार के जीवों को एकाकार जानता है उसको सतोगुण युक्त ज्ञानी कह तेहैं और जो अलग अनेक प्रकार का जो ज्ञान सर्व वस्तु में जानता है सो राजसीज्ञान है। जो एक मूर्ति की पूर्ण की भांति व्यर्थ ही निश्चय कर्ता है उस अग्यानी पुरुष की बुद्धि को तामसीज्ञान कहते हैं। अभिमान रहित राग द्वेप को छोड़कर जो विना प्रयोजन क में किये जाँय वह सतोगुणी कर्म कहाते हैं जो कामना पूर्णहोने की आशा सेयुक्त अहंकार सहित आतक्लेश और दुःखसे जो कर्म किया जाय वह राजस कहाता है जो कर्म करने के पीछे बंधन का हेतू होवै हानिकारक और दूसरे को दुःखदाई सामर्थ्य के विचार को छो ड़कर अस और अग्यानसे कियाजाय वह क र्म तामसी कहाता है। फलकी इच्छाको छो डकरनस भावसे युक्त धैर्य और उत्साहसमत कार्य पूरा होवें या अधूराही रहजाय परन्तु उससे सुख दुःख को न मानै ऐसा कार्य कर्ता संतोगुणी कहता है इन्द्रियों के विषय में प्रीति रखनेवाला कर्मके फलको चाहने वाला लालची और स्वभावसे दुःखदाई भी तर और शहर से अशुद्ध हर्ष और शोक से परिपूर्ण हुआ ऐसा कर्त्ता राजस कहाता है। धर्म के श्रद्धा से रहित विषय में लगा हुआ कर्म फलकी श्रद्धासे होनसक्ति रहित मृर्ख अहंकारी धोखा देनेवाला आलसी संदेह युक्त कर्ता तामसी कहलाता है। बुद्धि श्री र धारणाशक्तिके भी गुणों के अनुकूलतीबारह गोन भांतिकी है उनको सुनिये । हे अर्जुन स्वध र्म में रहना और अधर्मको त्याग करना कर ने योग्य और न करने योग्य कर्मका विचार करना भय अभय बंधन मोक्षको जो जाने उसी पुरुष की वृद्धि सतोगुणी है। जिस बद से धर्म अधर्म कार्य अकार्य का विचार न कि याजाय हे अर्जुन ! वह बुद्धि राजसी है। त मोगुणसे युक्त बुद्धिवाले सदैव अधर्म को धर्म मानते हैं और सदैव सभी बातोंको उलटाही समझते हैं उसको तामसी बुद्धिकहते हैं। जिस धारणाशक्ति से मन प्रागण इन्द्रिय क्रिया चित्त की वृत्ति आदिको जारोकसक्का है कि किसी कुमार्ग में न लगजावे हे पार्थ! उसी पुरुप की धारणाशक्ति सतोगुणी है । जिस धमशक्ति से धर्म काम अर्थ को धारणा करके अहंकार पूर्वक फल चाहते हैं वह रजो
ॐ श्रीपरमात्मने नमः [ श्रीमद्भगवद्गीताके वारहवें और पंद्रहवें अध्यायोंकी विस्तृत व्याख्या ] नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥ वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ अथ द्वादशोऽध्यायः सम्बन्धश्रीभगवान्ने चौथे अध्यायके तैंतीसवें और चौंतीसवें श्लोकोंमें ज्ञानयोगकी श्रेष्ठता वतलाते हुए ज्ञानप्राप्तिके लिये प्रेरणा की । फिर ज्ञानकी महिमाका वर्णन किया । तत्पश्चात् पाँचवें अध्यायके सत्रहवेंसे छब्बीसवें इलोकतक निर्गुण-निराकारकी उपासना, छठे अध्यायके चौबीसवेंसे उनतीसवें श्लोकतक परमात्माके अचिन्त्य स्वरूप की उपासना और आठवें अध्यायके ग्यारहवेंसे तेरहवें श्लोकतक अव्यक्त अक्षरकी उपासनाका महत्व बतलाया । छठे अध्यायके सैंतालीसवें श्लोकमें अनन्यभक्तिका लक्ष्य रखकर चलनेवाले साधक भक्तको महिमा बतलायी और सातवें गी० भ० १-२गीताका भक्तियोग अध्यायसे ग्यारहवें अध्यायतक स्थान-स्थानपर 'अहम्', 'माम्'आदि पदों द्वारा विशेषरूपसे सगुण-साकार एवं सगुण-निराकार उपासनाकी महत्ता बतलायी तथा अन्तमें ग्यारहवें अध्यायके चौवनवें और पचपनवें श्लोकोंर्मे अनन्यभक्तिको महिमा एवं फलसहित उसके स्वरूपका वर्णन किया । उपर्युक्त वर्णनसे अर्जुनके मनमें यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि निर्गुण ब्रह्म और सगुण भगवान्की उपासना करनेवाले दोनों उपासकोंमें कौन-से उपासक श्रेष्ठ हैं। इसी जिज्ञासाको लेकर अर्जुन प्रश्न करते हैंश्लोकअर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ १ ॥ भावार्थजो भगवत्प्राप्तिका उद्देश्य रखकर भगवान् के सगुण साकार रूपकी श्रेष्टभावसे उपासना करनेवाले ( प्रारम्भिक साधनासे लेकर भगवत्प्राप्तिके अत्यन्त समीपतक पहुँचे हुए सत्र साधक) हैं, और जो उन्हींके समकक्ष ( उसी मात्राके विवेक, वैराग्य, इन्द्रियसंयम आदि साधन-सम्पत्तिवाले ) निर्गुण-निराकार ब्रह्मकी ही उपासना करनेवाले हैं, उन दोनों प्रकारके उपासकोंमें कौन-से उपासक श्रेष्ठ हैं ? छठे अध्यायसे ग्यारहवें अध्यायतक साकार भगवान् के उपासकोंका वर्णन जिन इलोकोंमें जिन पदोंके द्वारा हुआ है, उनका परिचय इस प्रकार है-
ॐ श्रीपरमात्मने नमः [ श्रीमद्भगवद्गीताके वारहवें और पंद्रहवें अध्यायोंकी विस्तृत व्याख्या ] नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥ वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ अथ द्वादशोऽध्यायः सम्बन्धश्रीभगवान्ने चौथे अध्यायके तैंतीसवें और चौंतीसवें श्लोकोंमें ज्ञानयोगकी श्रेष्ठता वतलाते हुए ज्ञानप्राप्तिके लिये प्रेरणा की । फिर ज्ञानकी महिमाका वर्णन किया । तत्पश्चात् पाँचवें अध्यायके सत्रहवेंसे छब्बीसवें इलोकतक निर्गुण-निराकारकी उपासना, छठे अध्यायके चौबीसवेंसे उनतीसवें श्लोकतक परमात्माके अचिन्त्य स्वरूप की उपासना और आठवें अध्यायके ग्यारहवेंसे तेरहवें श्लोकतक अव्यक्त अक्षरकी उपासनाका महत्व बतलाया । छठे अध्यायके सैंतालीसवें श्लोकमें अनन्यभक्तिका लक्ष्य रखकर चलनेवाले साधक भक्तको महिमा बतलायी और सातवें गीशून्य भशून्य एक-दोगीताका भक्तियोग अध्यायसे ग्यारहवें अध्यायतक स्थान-स्थानपर 'अहम्', 'माम्'आदि पदों द्वारा विशेषरूपसे सगुण-साकार एवं सगुण-निराकार उपासनाकी महत्ता बतलायी तथा अन्तमें ग्यारहवें अध्यायके चौवनवें और पचपनवें श्लोकोंर्मे अनन्यभक्तिको महिमा एवं फलसहित उसके स्वरूपका वर्णन किया । उपर्युक्त वर्णनसे अर्जुनके मनमें यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि निर्गुण ब्रह्म और सगुण भगवान्की उपासना करनेवाले दोनों उपासकोंमें कौन-से उपासक श्रेष्ठ हैं। इसी जिज्ञासाको लेकर अर्जुन प्रश्न करते हैंश्लोकअर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ एक ॥ भावार्थजो भगवत्प्राप्तिका उद्देश्य रखकर भगवान् के सगुण साकार रूपकी श्रेष्टभावसे उपासना करनेवाले हैं, और जो उन्हींके समकक्ष निर्गुण-निराकार ब्रह्मकी ही उपासना करनेवाले हैं, उन दोनों प्रकारके उपासकोंमें कौन-से उपासक श्रेष्ठ हैं ? छठे अध्यायसे ग्यारहवें अध्यायतक साकार भगवान् के उपासकोंका वर्णन जिन इलोकोंमें जिन पदोंके द्वारा हुआ है, उनका परिचय इस प्रकार है-
SA vs IND 2021-22: भारत साउथ अफ्रीका के बीच सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच केपटाउन में खेला जा रहा है। इस सीरीज में दोनों ही टीमों ने एक-दूसरे को शानदार टक्कर दी है। सीरीज में अब तक दोनों ही टीम्स ने काफी अच्छी फील्डिंग भी की है, लेकिन इसी बीच तीसरे टेस्ट के दौरान भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी चेतेश्वर पुजारा ने साउथ अफ्रीका के इन-फॉर्म बल्लेबाज टेम्बा बवुमा का स्लिप पर गलती से कैच छोड़ दिया, जिसके बाद भारतीय टीम को पेनेल्टी के पांच रन भी भरने पड़ गए। दरअसल, मैच के दूसरे दिन साउथ अफ्रीका की टीम 4 विकेटों के नुकसान पर 138 रन बना कर खेल रही थी। उस समय टीम के इन-फॉर्म बल्लेबाज टेम्बा बवुमा बल्लेबाजी करने नए-नए मैदान पर आए थे। ऐसे में शार्दुल ठाकुर ने आउट साईड ऑफ स्टंप की तरफ शॉट बॉल फेंकी, जिस पर बवुमा के बल्ले का किनारा लगा। लेकिन इसे स्लिप पर खड़े पुजारा लपक नहीं कर सके, जिसके बाद ये गेंद विकेटकीपर के पीछे रखे हेलमेट पर जा लगी। इसी कारण साउथ अफ्रीका की टीम को 5 रन की पेनल्टी मिल गई और उनके खाते में पांच रन बिना किसी मेहनत के जुड़ गए। बता दें कि भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, जिसके बाद पूरी टीम 223 रनों पर ही सिमट गई। भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा रन कप्तान विराट ने बनाए, उन्होंने 79 रनों की शानदारी पारी खेली। जिसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीका की टीम ने पहली पारी में भारतीय गेंदबाजी के सामने सिर्फ 210 रन बनाए, इस दौरान जसप्रीत बुमराह ने साउथ अफ्रीका के 5 खिलाड़ी का शिकार किया। भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका में आज तक कोई टेस्ट सीरीज जीत दर्ज नहीं की है। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। जो भी केपटाउन टेस्ट जीतेगा, वहीं सीरीज भी जीत जाएगा। भारतीय टीम के पास इस बार सीरीज जीत दर्ज करने का काफी अच्छा मौका है।
SA vs IND दो हज़ार इक्कीस-बाईस: भारत साउथ अफ्रीका के बीच सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच केपटाउन में खेला जा रहा है। इस सीरीज में दोनों ही टीमों ने एक-दूसरे को शानदार टक्कर दी है। सीरीज में अब तक दोनों ही टीम्स ने काफी अच्छी फील्डिंग भी की है, लेकिन इसी बीच तीसरे टेस्ट के दौरान भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी चेतेश्वर पुजारा ने साउथ अफ्रीका के इन-फॉर्म बल्लेबाज टेम्बा बवुमा का स्लिप पर गलती से कैच छोड़ दिया, जिसके बाद भारतीय टीम को पेनेल्टी के पांच रन भी भरने पड़ गए। दरअसल, मैच के दूसरे दिन साउथ अफ्रीका की टीम चार विकेटों के नुकसान पर एक सौ अड़तीस रन बना कर खेल रही थी। उस समय टीम के इन-फॉर्म बल्लेबाज टेम्बा बवुमा बल्लेबाजी करने नए-नए मैदान पर आए थे। ऐसे में शार्दुल ठाकुर ने आउट साईड ऑफ स्टंप की तरफ शॉट बॉल फेंकी, जिस पर बवुमा के बल्ले का किनारा लगा। लेकिन इसे स्लिप पर खड़े पुजारा लपक नहीं कर सके, जिसके बाद ये गेंद विकेटकीपर के पीछे रखे हेलमेट पर जा लगी। इसी कारण साउथ अफ्रीका की टीम को पाँच रन की पेनल्टी मिल गई और उनके खाते में पांच रन बिना किसी मेहनत के जुड़ गए। बता दें कि भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, जिसके बाद पूरी टीम दो सौ तेईस रनों पर ही सिमट गई। भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा रन कप्तान विराट ने बनाए, उन्होंने उन्यासी रनों की शानदारी पारी खेली। जिसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी साउथ अफ्रीका की टीम ने पहली पारी में भारतीय गेंदबाजी के सामने सिर्फ दो सौ दस रन बनाए, इस दौरान जसप्रीत बुमराह ने साउथ अफ्रीका के पाँच खिलाड़ी का शिकार किया। भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका में आज तक कोई टेस्ट सीरीज जीत दर्ज नहीं की है। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज एक-एक की बराबरी पर है। जो भी केपटाउन टेस्ट जीतेगा, वहीं सीरीज भी जीत जाएगा। भारतीय टीम के पास इस बार सीरीज जीत दर्ज करने का काफी अच्छा मौका है।
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह की फिल्म 83 सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म को फैंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और इस वजह से मेकर्स भी काफी खुश हैं. अब कई मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से फिल्म में कपिल देव उनकी 1983 वाली क्रिकेट टीम और रणवीर सिंह को कितनी फीस मिली है इसके बारे में कई खबरें सामने आ रही हैं. आज यहां आपको इसी बारे में हम बताने वाले हैं. बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कपिल देव को अपनी कहानी बोलने के लिए 5 करोड़ रुपये मिले हैं. वहीं दूसरे सूत्र ने बॉलीवुड हंगामा को बताया है कि फिल्म बनाने से पहले विषय के अधिकार और खिलाड़ियों की पर्सनल कहानियों को पर्दे पर दिखाने के लिए 1983 की विजेता टीम को लगभग 15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. इसमें सबसे ज्यादा फीस कपिल देव को दी गई है. फिल्म में कपिल देव के किरदार को निभाने वाले एक्टर रणवीर सिंह को भी मोटी फीस मिली है. कोईमोई. कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर सिंह को इस फिल्म के लिए उनके अब तक के फिल्मी करियर में उन्हें सबसे ज्यादा फीस मिली है. सूत्रों के मुताबिक, रणवीर सिंह को मेकर्स ने 20 करोड़ रुपये फीस के तौर पर दिए हैं. फिल्म में सुनील गावस्कर का किरदार ताहिर राज भसीन ने निभाया है. वहीं यशपाल शर्मा का किरदार जतिन सरना ने, मोहिंदर अमरनाथ का किरदार साकिब सलीम ने, रवि शास्त्री का किरदार धैर्य करवा ने, के श्रीकांत का किरदार जीवा ने, मदन लाल का किरदार पंजाबी सिंगर हार्डी संधू ने, बलविंदर सिंह का किरदार एमी विर्क ने, सैयद किरमानी का किरदार साहिल खट्टर ने, संदीप पाटिल का किरदार चिराग पाटिल ने, दिलीप वेंगसरकर का किरदार आदिनाथ कोठारे ने, कीर्ति आजाद का किरदार दिनकर शर्मा ने और रोजर बिन्नी का किरदार निशांत दहया ने निभाया है. वहीं बॉलीवुड के दिगग्ज अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने टीम के मैनेजर पीआर मान सिंह का किरदार निभाया है.
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह की फिल्म तिरासी सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म को फैंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और इस वजह से मेकर्स भी काफी खुश हैं. अब कई मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से फिल्म में कपिल देव उनकी एक हज़ार नौ सौ तिरासी वाली क्रिकेट टीम और रणवीर सिंह को कितनी फीस मिली है इसके बारे में कई खबरें सामने आ रही हैं. आज यहां आपको इसी बारे में हम बताने वाले हैं. बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कपिल देव को अपनी कहानी बोलने के लिए पाँच करोड़ रुपये मिले हैं. वहीं दूसरे सूत्र ने बॉलीवुड हंगामा को बताया है कि फिल्म बनाने से पहले विषय के अधिकार और खिलाड़ियों की पर्सनल कहानियों को पर्दे पर दिखाने के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरासी की विजेता टीम को लगभग पंद्रह करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. इसमें सबसे ज्यादा फीस कपिल देव को दी गई है. फिल्म में कपिल देव के किरदार को निभाने वाले एक्टर रणवीर सिंह को भी मोटी फीस मिली है. कोईमोई. कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर सिंह को इस फिल्म के लिए उनके अब तक के फिल्मी करियर में उन्हें सबसे ज्यादा फीस मिली है. सूत्रों के मुताबिक, रणवीर सिंह को मेकर्स ने बीस करोड़ रुपये फीस के तौर पर दिए हैं. फिल्म में सुनील गावस्कर का किरदार ताहिर राज भसीन ने निभाया है. वहीं यशपाल शर्मा का किरदार जतिन सरना ने, मोहिंदर अमरनाथ का किरदार साकिब सलीम ने, रवि शास्त्री का किरदार धैर्य करवा ने, के श्रीकांत का किरदार जीवा ने, मदन लाल का किरदार पंजाबी सिंगर हार्डी संधू ने, बलविंदर सिंह का किरदार एमी विर्क ने, सैयद किरमानी का किरदार साहिल खट्टर ने, संदीप पाटिल का किरदार चिराग पाटिल ने, दिलीप वेंगसरकर का किरदार आदिनाथ कोठारे ने, कीर्ति आजाद का किरदार दिनकर शर्मा ने और रोजर बिन्नी का किरदार निशांत दहया ने निभाया है. वहीं बॉलीवुड के दिगग्ज अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने टीम के मैनेजर पीआर मान सिंह का किरदार निभाया है.
कर्नाटक- बेंगलुरुः कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कांग्रेस पार्टी से अपनी पदयात्रा योजना को छोड़ने और राज्य में मामलों में वृद्धि के बाद "जिम्मेदारी से व्यवहार करने" के लिए कहा। ज्ञानेंद्र ने यह भी आग्रह किया कि मेकेदातु परियोजना को लागू किया जाए, और COVID-19 की तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए सरकार के साथ सहयोग किया जाए। कर्नाटक की कांग्रेस पार्टी ने 9 जनवरी को पदयात्रा शुरू करने की योजना बनाई है। ज्ञानेंद्र ने आगे कहा, "राजनीतिक कारणों से पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है, और कांग्रेस को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। सरकार वायरस को फैलने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। " मंत्री ने आगे कहा, "राज्य ने सप्ताहांत और रात के कर्फ्यू को लागू कर दिया है। लोगों को पुलिस का सहयोग करना चाहिए और देर रात बाहर जाने से बचना चाहिए। " कोरोना को लेकर सरकार पर फूटा HC का गुस्सा, कहा- जब लोग श्मशान पहुंच जाएंगे, तब जागोगे?
कर्नाटक- बेंगलुरुः कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कांग्रेस पार्टी से अपनी पदयात्रा योजना को छोड़ने और राज्य में मामलों में वृद्धि के बाद "जिम्मेदारी से व्यवहार करने" के लिए कहा। ज्ञानेंद्र ने यह भी आग्रह किया कि मेकेदातु परियोजना को लागू किया जाए, और COVID-उन्नीस की तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए सरकार के साथ सहयोग किया जाए। कर्नाटक की कांग्रेस पार्टी ने नौ जनवरी को पदयात्रा शुरू करने की योजना बनाई है। ज्ञानेंद्र ने आगे कहा, "राजनीतिक कारणों से पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है, और कांग्रेस को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। सरकार वायरस को फैलने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। " मंत्री ने आगे कहा, "राज्य ने सप्ताहांत और रात के कर्फ्यू को लागू कर दिया है। लोगों को पुलिस का सहयोग करना चाहिए और देर रात बाहर जाने से बचना चाहिए। " कोरोना को लेकर सरकार पर फूटा HC का गुस्सा, कहा- जब लोग श्मशान पहुंच जाएंगे, तब जागोगे?
ICC 2022 Men's T20 World Cup के 12वें वार्म-अप मुकाबले अफगानिस्तान ने बांग्लादेश को 62 रनों से हराकर बड़ी जीत हासिल की। अफगानिस्तान टीम ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 160/7 का स्कोर बनाया, जवाब में बांग्लादेश की टीम पूरे ओवर खेलते हुए 98/9 का स्कोर ही बना पाई। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए अफगानिस्तान को 19 के स्कोर पर हजरतुल्लाह ज़ज़ाई के रूप में पहला झटका लगा। ज़ज़ाई 16 गेंदों में 15 रन बनाकर चौथे ओवर में चलते बने। दूसरे ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज ने 19 गेंदों में 27 रन बनाये और उनका विकेट 62 के स्कोर पर गिरा। दरविश रसूली भी 12 गेंदों में 12 रन बनाकर तस्कीन अहमद का शिकार बने। नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने आये इब्राहिम जादरान ने अच्छी बल्लेबाजी की और 39 गेंदों में 42 रन बनाये। निचले क्रम में कप्तान मोहम्मद नबी ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए 17 गेंदों में पांच छक्के और एक चौके की मदद से नाबाद 41 रनों की पारी खेली। बांग्लादेश के लिए तस्कीन अहमद ने सबसे ज्यादा तीन सफलताएं हासिल की। लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने अपना पहला विकेट नजमुल हुसैन शंटो के रूप में गंवाया। वह 9 गेंदों में 12 रन बनाकर आउट हुए। सौम्य सरकार और कप्तान शाकिब अल हसन क्रमशः 1-1 रन बनाकर आउट हो गए। टीम के विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे और कोई भी बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं बना पाया। ओपनर मेहदी हसन मिराज भी 31 गेंदों में 16 रन बनाकर सातवें विकेट के रूप में आउट हुए। निचले क्रम में मोसद्देक होसैन ने 22 गेंदों में 29 रन बनाये और वह टीम के टॉप स्कोरर रहे। मुस्ताफ़िज़ुर रहमान 10 रन बनाकर नाबाद रहे। अफगानिस्तान के लिए फजल हक फारूकी ने 9 रन देकर तीन विकेट लिए।
ICC दो हज़ार बाईस Men's Tबीस World Cup के बारहवें वार्म-अप मुकाबले अफगानिस्तान ने बांग्लादेश को बासठ रनों से हराकर बड़ी जीत हासिल की। अफगानिस्तान टीम ने पहले खेलते हुए बीस ओवर में एक सौ साठ/सात का स्कोर बनाया, जवाब में बांग्लादेश की टीम पूरे ओवर खेलते हुए अट्ठानवे/नौ का स्कोर ही बना पाई। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए अफगानिस्तान को उन्नीस के स्कोर पर हजरतुल्लाह ज़ज़ाई के रूप में पहला झटका लगा। ज़ज़ाई सोलह गेंदों में पंद्रह रन बनाकर चौथे ओवर में चलते बने। दूसरे ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज ने उन्नीस गेंदों में सत्ताईस रन बनाये और उनका विकेट बासठ के स्कोर पर गिरा। दरविश रसूली भी बारह गेंदों में बारह रन बनाकर तस्कीन अहमद का शिकार बने। नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आये इब्राहिम जादरान ने अच्छी बल्लेबाजी की और उनतालीस गेंदों में बयालीस रन बनाये। निचले क्रम में कप्तान मोहम्मद नबी ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए सत्रह गेंदों में पांच छक्के और एक चौके की मदद से नाबाद इकतालीस रनों की पारी खेली। बांग्लादेश के लिए तस्कीन अहमद ने सबसे ज्यादा तीन सफलताएं हासिल की। लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश ने अपना पहला विकेट नजमुल हुसैन शंटो के रूप में गंवाया। वह नौ गेंदों में बारह रन बनाकर आउट हुए। सौम्य सरकार और कप्तान शाकिब अल हसन क्रमशः एक-एक रन बनाकर आउट हो गए। टीम के विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे और कोई भी बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं बना पाया। ओपनर मेहदी हसन मिराज भी इकतीस गेंदों में सोलह रन बनाकर सातवें विकेट के रूप में आउट हुए। निचले क्रम में मोसद्देक होसैन ने बाईस गेंदों में उनतीस रन बनाये और वह टीम के टॉप स्कोरर रहे। मुस्ताफ़िज़ुर रहमान दस रन बनाकर नाबाद रहे। अफगानिस्तान के लिए फजल हक फारूकी ने नौ रन देकर तीन विकेट लिए।
इससे पहले, त्रिभाषी फॉर्मूले पर तमिलनाडु में बड़ा विवाद पैदा हो गया। वहां की राजनीतिक पार्टियों ने नई शिक्षा नीति के मसौदे पर चेतावनी देते हुए इसे जबरदस्ती हिन्दी थोपने का 'प्रयास' करार दिया। जबकि, केन्द्र ने साफ किया कि उनका इरादा किसी के ऊपर भाषा थोपना नहीं है। हालांकि, जैसे ही इस पर बवाल बढ़ा केन्द्र इस मुद्दे पर लोगों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी भाषा को किसी पर थोपने का कोई कदम नहीं उठाया गया है।
इससे पहले, त्रिभाषी फॉर्मूले पर तमिलनाडु में बड़ा विवाद पैदा हो गया। वहां की राजनीतिक पार्टियों ने नई शिक्षा नीति के मसौदे पर चेतावनी देते हुए इसे जबरदस्ती हिन्दी थोपने का 'प्रयास' करार दिया। जबकि, केन्द्र ने साफ किया कि उनका इरादा किसी के ऊपर भाषा थोपना नहीं है। हालांकि, जैसे ही इस पर बवाल बढ़ा केन्द्र इस मुद्दे पर लोगों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी भाषा को किसी पर थोपने का कोई कदम नहीं उठाया गया है।
उन्नाव के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा गलाने वाली फैक्टरी मेसर्स जय जगदंबा मेटलाइज लिमिटेड में 30 जून 2021 को निरीक्षण कर प्रदूषण मानकों की जांच की थी। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में चेतावनी और नोटिस के बाद भी वायु प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी संसाधन न जुटाने पर लोहा फैक्टरी पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8. 56 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। संचालन के लिए दिए गए सहमति पत्र को निलंबित करने और फैक्टरी की बंदी के लिए प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भी भेजा गया है। उप्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी) की टीम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा गलाने वाली फैक्टरी मेसर्स जय जगदंबा मेटलाइज लिमिटेड में 30 जून 2021 को निरीक्षण कर प्रदूषण मानकों की जांच की थी। रिपोर्ट में फैक्टरी से निकलने वाली गैस में प्रदूषणकारी अवयवों की मात्रा अधिक थी। प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपकरणों की स्थिति भी ठीक नहीं मिली। बोर्ड ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। सात दिसंबर को बोर्ड के अधिकारियों ने फैक्टरी का दोबारा निरीक्षण किया। जांच के दौरान पता चला कि संचालक ने आवश्यक उपकरण नहीं लगवाए हैं। प्रदूषित गैसों को हवा में छोड़ा जा रहा था। इस पर अधिकारियों ने 30 जून से सात दिसंबर के बीच 137 दिनों तक नियमों का उल्लंघन करने पर प्रतिदिन 6250 रुपये की दर से 8 लाख 56 हजार 250 रुपये क्षतिपूर्ति तय करते हुए इसे तत्काल जमा करने का आदेश दिया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि संबंधित फैक्टरी पर जुर्माना लगाने के साथ ही उसे सशर्त दी गई विभागीय सहमति को निलंबित करने और फैक्टरी की बंदी का आदेश जारी करने के लिए प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भेजा गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
उन्नाव के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा गलाने वाली फैक्टरी मेसर्स जय जगदंबा मेटलाइज लिमिटेड में तीस जून दो हज़ार इक्कीस को निरीक्षण कर प्रदूषण मानकों की जांच की थी। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में चेतावनी और नोटिस के बाद भी वायु प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी संसाधन न जुटाने पर लोहा फैक्टरी पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आठ. छप्पन लाख रुपये जुर्माना लगाया है। संचालन के लिए दिए गए सहमति पत्र को निलंबित करने और फैक्टरी की बंदी के लिए प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भी भेजा गया है। उप्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की टीम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोहा गलाने वाली फैक्टरी मेसर्स जय जगदंबा मेटलाइज लिमिटेड में तीस जून दो हज़ार इक्कीस को निरीक्षण कर प्रदूषण मानकों की जांच की थी। रिपोर्ट में फैक्टरी से निकलने वाली गैस में प्रदूषणकारी अवयवों की मात्रा अधिक थी। प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपकरणों की स्थिति भी ठीक नहीं मिली। बोर्ड ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। सात दिसंबर को बोर्ड के अधिकारियों ने फैक्टरी का दोबारा निरीक्षण किया। जांच के दौरान पता चला कि संचालक ने आवश्यक उपकरण नहीं लगवाए हैं। प्रदूषित गैसों को हवा में छोड़ा जा रहा था। इस पर अधिकारियों ने तीस जून से सात दिसंबर के बीच एक सौ सैंतीस दिनों तक नियमों का उल्लंघन करने पर प्रतिदिन छः हज़ार दो सौ पचास रुपयापये की दर से आठ लाख छप्पन हजार दो सौ पचास रुपयापये क्षतिपूर्ति तय करते हुए इसे तत्काल जमा करने का आदेश दिया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि संबंधित फैक्टरी पर जुर्माना लगाने के साथ ही उसे सशर्त दी गई विभागीय सहमति को निलंबित करने और फैक्टरी की बंदी का आदेश जारी करने के लिए प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भेजा गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मान गए प्रीति, सबसे ज्यादा 9 खिलाड़ी खरीदे और 18 करोड़ भी बचा लिए! आईपीएल 2021 की नीलामी से पहले पंजाब के पास पर्स मतलब राशि का अभाव नहीं था तो उन्हें कंजूसी करने की ज्यादा जरुरत नहीं थी। मोहित बर्मन, नेस वाडिया, प्रीति जिंटा और करण पॉल की टीम के पास सर्वाधिक 53 करोड़ की राशि थी। यही नहीं जब नीलामी समाप्त हुई तब प्रीति के पर्स में सर्वाधिक 18 करोड़ की राशि बची हुई थी और वह पूरे 25 (रीटेन और खरीदे हुए) खिलाड़ियों का कोटा पूरा कर चुकी थी। यह अपने आप में होशियारी की बात है। पंजाब की टीम ने नीलामी में सर्वाधिक 9 खिलाड़ियों को खरीदा। वहीं दूसरे नंबर पर राजस्थान रॉयल्स की टीम रही जिसने नीलामी समाप्त होने पर करीब 13 करोड़ की राशि बचा ली लेकिन एक खिलाड़ी कम यानि 24 का कोटा ही पूरा कर पाए। राजस्थान की टीम ने कुल 8 खिलाड़ियों को खरीदा। सनराइजर्स हैदराबद के पास लगभग 7 करोड़ (6 करोड़ 95 लाख) की राशि बची थी जब नीलामी खत्म हुई, टीम ने पूरे 25 खिलाड़ियों का कोटा पूरा किया। सनराइजर्स हैदराबाद सिर्फ 3 खिलाड़ियो को ही खरीद पायी। नीलामी खत्म होने के बाद नीता अंबानी की मुंबई इंडियन्स के पास भी पूरा 25 खिलाड़ियों का कोटा उपयोग करने के बाद 3 करोड़ 65 लाख रुपए बचे थे। मुंबई इंडियन्स की टीम ने कुल 7 खिलाड़ी खरीदे जिसमें से 1 अर्जुन तेंदुलकर थे। कोलकाता नाइट राइडर्स के पास नीलामी खत्म होने के बाद 3 करोड़ 20 लाख रुपए बचे और उसने 25 खिलाड़ी अपने डगआउट में ले लिए थे। 10 करोड़ की राशि में भी कोलकाता नाइट राइडर्स ने 8 खिलाड़ी खरीदे। चेन्नई सुपर किंग्स के पास भी अंत में महज 2 करोड़ 55 लाख रुपए बच गए थे। अच्छी बात यह रही कि वह अपने 25 खिलाड़ियों का कोटा पूरा कर लिया था। चेन्नई सुपर किंग्स ने 6 खिलाड़ी खरीदे जिसमें से एक चेतेश्वर पुजारा थे। दिल्ली कैपिटल्स ने भी लगभग सारे पैसे खर्च कर दिए और 2 करोड़ 15 लाख ही पर्स में बचे। खिलाड़ियों की अधिकतम सीमा (25) दिल्ली ने भी पूरी कर ली। दिल्ली कैपिटल्स ने भी 8 खिलाड़ियों के खरीदा। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने इतना पैसा खर्च किया कि उसके पास सिर्फ 35 लाख रुपए बचे और सिर्फ 22 खिलाड़ी ही अपनी छत्री के अंदर ले सके। यानि 3 खिलाड़ियों का रिक्त स्थान बैंगलोर के पास रह गया। बैंगलोर ने नीलामी में कुल 8 खिलाड़ी खरीदे। गौरतलब है कि इस नीलामी में उतरने से पहले फ्रैंचाइजी के पर्स की स्थिती कुछ ऐसी थी।
मान गए प्रीति, सबसे ज्यादा नौ खिलाड़ी खरीदे और अट्ठारह करोड़ भी बचा लिए! आईपीएल दो हज़ार इक्कीस की नीलामी से पहले पंजाब के पास पर्स मतलब राशि का अभाव नहीं था तो उन्हें कंजूसी करने की ज्यादा जरुरत नहीं थी। मोहित बर्मन, नेस वाडिया, प्रीति जिंटा और करण पॉल की टीम के पास सर्वाधिक तिरेपन करोड़ की राशि थी। यही नहीं जब नीलामी समाप्त हुई तब प्रीति के पर्स में सर्वाधिक अट्ठारह करोड़ की राशि बची हुई थी और वह पूरे पच्चीस खिलाड़ियों का कोटा पूरा कर चुकी थी। यह अपने आप में होशियारी की बात है। पंजाब की टीम ने नीलामी में सर्वाधिक नौ खिलाड़ियों को खरीदा। वहीं दूसरे नंबर पर राजस्थान रॉयल्स की टीम रही जिसने नीलामी समाप्त होने पर करीब तेरह करोड़ की राशि बचा ली लेकिन एक खिलाड़ी कम यानि चौबीस का कोटा ही पूरा कर पाए। राजस्थान की टीम ने कुल आठ खिलाड़ियों को खरीदा। सनराइजर्स हैदराबद के पास लगभग सात करोड़ की राशि बची थी जब नीलामी खत्म हुई, टीम ने पूरे पच्चीस खिलाड़ियों का कोटा पूरा किया। सनराइजर्स हैदराबाद सिर्फ तीन खिलाड़ियो को ही खरीद पायी। नीलामी खत्म होने के बाद नीता अंबानी की मुंबई इंडियन्स के पास भी पूरा पच्चीस खिलाड़ियों का कोटा उपयोग करने के बाद तीन करोड़ पैंसठ लाख रुपए बचे थे। मुंबई इंडियन्स की टीम ने कुल सात खिलाड़ी खरीदे जिसमें से एक अर्जुन तेंदुलकर थे। कोलकाता नाइट राइडर्स के पास नीलामी खत्म होने के बाद तीन करोड़ बीस लाख रुपए बचे और उसने पच्चीस खिलाड़ी अपने डगआउट में ले लिए थे। दस करोड़ की राशि में भी कोलकाता नाइट राइडर्स ने आठ खिलाड़ी खरीदे। चेन्नई सुपर किंग्स के पास भी अंत में महज दो करोड़ पचपन लाख रुपए बच गए थे। अच्छी बात यह रही कि वह अपने पच्चीस खिलाड़ियों का कोटा पूरा कर लिया था। चेन्नई सुपर किंग्स ने छः खिलाड़ी खरीदे जिसमें से एक चेतेश्वर पुजारा थे। दिल्ली कैपिटल्स ने भी लगभग सारे पैसे खर्च कर दिए और दो करोड़ पंद्रह लाख ही पर्स में बचे। खिलाड़ियों की अधिकतम सीमा दिल्ली ने भी पूरी कर ली। दिल्ली कैपिटल्स ने भी आठ खिलाड़ियों के खरीदा। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने इतना पैसा खर्च किया कि उसके पास सिर्फ पैंतीस लाख रुपए बचे और सिर्फ बाईस खिलाड़ी ही अपनी छत्री के अंदर ले सके। यानि तीन खिलाड़ियों का रिक्त स्थान बैंगलोर के पास रह गया। बैंगलोर ने नीलामी में कुल आठ खिलाड़ी खरीदे। गौरतलब है कि इस नीलामी में उतरने से पहले फ्रैंचाइजी के पर्स की स्थिती कुछ ऐसी थी।
Coronavirus In Srinagar महिला कालेज श्रीनगर में करीब 512 सैंपल एकत्र किए गए। जांच करने पर तीन छात्राओं में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इस समाचार से कालेज में हड़कंप मच गया परंतु कालेज प्रबंधन ने अभी तक संस्थान को बंद करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। श्रीनगर, जेएनएन। महिला कालेज श्रीनगर में कोरोना प्रशिक्षण अभियान के दौरान तीन छात्र कोरोना पॉजिटिव पाई गई। हालांकि कालेज प्रबंधन ने छात्रों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी संस्थान को बंद करने का निर्णय नहीं लिया गया है। कालेज में कोरोना रोकथाम को लेकर जरूरी मापदंडों का पालन किया जा रहा है। संस्थान में पढ़ने वाली सभी छात्रों को भी इस बारे में जागरूक किया गया है। कालेज प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत कालेज में करीब 512 सैंपल एकत्र किए गए। जांच करने पर तीन छात्राओं में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इस समाचार से कालेज में हड़कंप मच गया परंतु कालेज प्रबंधन ने अभी तक संस्थान को बंद करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। आपको बता दें कि पिछले सप्ताह इस्लामिया कॉलेज ऑफ साइंस एंड कॉमर्स के प्रिंसिपल ने स्टाफ के दो सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद करीब एक सप्ताह के लिए प्रतिष्ठान को बंद करने का आदेश दिया था। लगभग ग्यारह महीने के अंतराल के बाद जम्मू और कश्मीर संभाग के शीतकालीन क्षेत्रों में कॉलेजों को 15 फरवरी को फिर से खोल दिया गया था। केंद्र से आई टीम ले रही है आयूष केंद्रों का जायजाः केंद्रीय आयूष मंत्रालय से एक टीम जम्मू-कश्मीर के चार दिवसीय दौरे पर सोमवार को जम्मू में पहुंची। इस दौरान टीम ने जम्मू जिले में स्थित आयूष अस्पतालों और अन्य केंद्रों का दौरा कर वहां पर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। टीम जम्मू के अलावा कठुआ ओर सांबा जिलों का भी दौरा करेगी। इसके अलावा दो दिनों तक कश्मीर में यूनानी स्वास्थ्य केंद्रों का भी निरीक्षण करेगी। यह टीम आयूष के हेल्थ और वेलनेस सेंटरों में भी जाएगी। सोमवार को अपने दोरे के पहले दिन टीम ने इंडियन सिस्टम आफ मेडिसीन के डायरेक्टर डा. मोहन सिंह से भी मुलाकात की और उन्हें विभिन्न योजनाओं पर बातचीत की। इसके बाद टीम ने कुछ आयूष केंद्रों का भी दौरा किया।
Coronavirus In Srinagar महिला कालेज श्रीनगर में करीब पाँच सौ बारह सैंपल एकत्र किए गए। जांच करने पर तीन छात्राओं में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इस समाचार से कालेज में हड़कंप मच गया परंतु कालेज प्रबंधन ने अभी तक संस्थान को बंद करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। श्रीनगर, जेएनएन। महिला कालेज श्रीनगर में कोरोना प्रशिक्षण अभियान के दौरान तीन छात्र कोरोना पॉजिटिव पाई गई। हालांकि कालेज प्रबंधन ने छात्रों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी संस्थान को बंद करने का निर्णय नहीं लिया गया है। कालेज में कोरोना रोकथाम को लेकर जरूरी मापदंडों का पालन किया जा रहा है। संस्थान में पढ़ने वाली सभी छात्रों को भी इस बारे में जागरूक किया गया है। कालेज प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत कालेज में करीब पाँच सौ बारह सैंपल एकत्र किए गए। जांच करने पर तीन छात्राओं में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इस समाचार से कालेज में हड़कंप मच गया परंतु कालेज प्रबंधन ने अभी तक संस्थान को बंद करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। आपको बता दें कि पिछले सप्ताह इस्लामिया कॉलेज ऑफ साइंस एंड कॉमर्स के प्रिंसिपल ने स्टाफ के दो सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद करीब एक सप्ताह के लिए प्रतिष्ठान को बंद करने का आदेश दिया था। लगभग ग्यारह महीने के अंतराल के बाद जम्मू और कश्मीर संभाग के शीतकालीन क्षेत्रों में कॉलेजों को पंद्रह फरवरी को फिर से खोल दिया गया था। केंद्र से आई टीम ले रही है आयूष केंद्रों का जायजाः केंद्रीय आयूष मंत्रालय से एक टीम जम्मू-कश्मीर के चार दिवसीय दौरे पर सोमवार को जम्मू में पहुंची। इस दौरान टीम ने जम्मू जिले में स्थित आयूष अस्पतालों और अन्य केंद्रों का दौरा कर वहां पर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। टीम जम्मू के अलावा कठुआ ओर सांबा जिलों का भी दौरा करेगी। इसके अलावा दो दिनों तक कश्मीर में यूनानी स्वास्थ्य केंद्रों का भी निरीक्षण करेगी। यह टीम आयूष के हेल्थ और वेलनेस सेंटरों में भी जाएगी। सोमवार को अपने दोरे के पहले दिन टीम ने इंडियन सिस्टम आफ मेडिसीन के डायरेक्टर डा. मोहन सिंह से भी मुलाकात की और उन्हें विभिन्न योजनाओं पर बातचीत की। इसके बाद टीम ने कुछ आयूष केंद्रों का भी दौरा किया।
किन्तु 'कल' भी जब 'आज' बन जायगा तब ? क्या समय नहीं स्थिर हो जायगा ? मुख्य स्थिति है द्रष्टाको आत्मस्थता, वही युग-युगका सारसङ्कलन कर जीवन और साहित्यको श्रीवृद्धि करती रहती है । पन्त आत्मस्थता है । जो आत्मस्य नहीं है, वह 'बिस्थापित' है । परिवर्तनशीलता ही प्रगतिशीलता है । केवल ऐतिहासिक भौतिकवादको दृष्टि से देखने पर प्रगतिशीलता में एक नयी गित जड़ना निश्चलता आ जाती है। कोई भी रोमँण्टिक कवि जागरूक अथवा चैतन्य रहकर ही चिन्तन और सञ्चयन करता है, इसीलिए उसके विचारोम व्यापकता आ जाती है । मलके विचारोंको भी किसी एक सीमामें बांधना सम्भव नहीं है। उनकी कवितायें उद्योग भी है, विज्ञान और मनोविज्ञान भी है, अध्यात्म भी है। एक शब्दमे सबका समन्वय है । पन्तका अध्यात्म रूढ अध्यात्म नहीं है, ससारकी ओरसे आँख मूंदकर ईश्वरका ध्यान करना नहीं है । 'सियाराम-मय सब जग जानी' को लोकसिद्ध करनेके लिए यह जैसे आँख खोलकर ईश्वरका ध्यान अथवा भगवत् सत्ताका साक्षात्कार करना है ।' 'आँख मुँदे जो जड़ वह आँस खुले पर चेतन जान पड़ता है । 'त्रिदम्बरा' के चरण-चिह्न में पत्तने अपने आध्यात्मिक अET आस्तिक जीवन दर्शनको समझने के लिए एक सरल सूत्र दे दिया है-- "भूजीवनको भगवत् जीवन बनाने के लिए हमे कहीं ऊपर नहीं खो जाना है, प्रत्युत जीवन आकाक्षाओंका पुनर्मूल्याकन कर विगत मूल्यको अधिक व्यापक बनाना है।" जिम अध्यात्मको अare rofen aeझा जाता था, पन्ने अपने समन्वयसे उस अध्यात्मको इहलौकिक और सामाजिक बना दिया । छायावाद-युगमें भाव और कलाकी दृष्टिसे रोमैण्टिक रिवाइवल हुमा था, 'युगान्त' के बाद विचार और संस्कृतिको दृष्टिसे रोमैण्टिक रिवाइवल हुआ । 'त्रिदम्बरा' के 'चरणचिह्न' में पन्तजीने निर्दिष्ट किया है --"मानववृत्त और विकास जीवनकी, युगोंके अन्धकार एवं नैतिक सङ्कीर्णताकी कलङ्क-कालिमामे सनी चेतनाकी चादरको --जिसे कबीर जतनसे ओढ़कर ज्योंकी त्यों रख गये थे -- नवीन प्रकाशके जलमे डुबोकर, उसे संस्कृतिके व्यापक मूल्योकी स्वच्छ शोभा प्रदानकर, हमे सबके ओढ़ने योग्य बनाना होगा ।" क्या पन्तका सांस्कृतिक प्रयास प्रलायन है ? प्रगतिशीलताके लिए गति ही नहीं, धृति भी चाहिए । युग-युगके परिवर्तनोमे वही ग्राहिकाशक्ति है, वही गतिकी चेतना है । गति तो यन्त्रमे भी होती है, किन्तु क्या वह सचेतन है ? संस्कृतिके रूपमे पन्तने प्रगतिको धृति ( धारणा शक्ति ) दी हैं, जड़ताको चेतना दी है, वर्तमानको चिरन्तनता दी है । कहा जाता है, पन्त जीवनके संघर्षसे दूर रहे । पन्तको जीवनका कम सर्प नहीं करना पड़ा है। उनके सुकोमल प्राणोंको कठोर आर्थिक कष्ट भी झेलना पड़ा है और दो बार बिकट अस्वस्थताका सामना भी करना पड़ा है, किन्तु व्यक्तिगत समस्या ( स्वार्थ ) के लिए उन्होंने वर्ग-संघर्ष नही किया, 'सर्वभूतेपु' मे आत्मविलय कर दिया, यही क्या उनका पलायन है ? आर्थिक विपन्नता और अस्वस्थताके कारण पन्तका वह कोमल कम नीय कवि-मुख असमय ही मुरझा गया। उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ सार्वजनिक परिस्थितियोंकी ही प्रतिच्छाया थी । 'वह्नि, बाढ़, झझाके भूपर' उनका भी 'कोमल मनुज कलेवर' युगकी तरह ही आक्रान्त हो गया । किन्तु अन्तश्चेतनाका कवि भीतरसे कैसे निष्प्राण हो सकता है ? वह तो अमृतपुत्र है । पन्तने मानव जीवनको केवल बाह्य संघर्ष और आन्दोलनके रूपमे नही देखा । वह तो 'पशु-जीवनके तममें जीवन-रूप मरण' है । संघर्षकीअपेक्षा मानस-मन्थन और आन्दोलनकी अपेक्षा अन्तःसञ्चरणमे जाग्रत अन्तःकरणकी सांस्कृतिक क्रियाशीलताका परिचय मिलता है । 'उत्तरा' - की प्रस्तावनामें कहा है --- "यह मात्र बाहरकी रोटीका युद्ध शीघ्र ही मनके रणक्षेत्र में नवीन मान्यताओंके देवासुर संघर्षका रूप धारण कर, एवं मानव-चेतना तथा अस्तित्व के अन्तरतम स्तरोंको आन्दोलित कर, मानवहृदयको स्वर्ग-शोणितसे स्नान- पूल तथा नवीन चेतनाके सौन्दर्य और नवीन मानवता की गरिमासे मण्डित कर देगा ।" - पन्तने जीवनके उद्वेलनोंका - इसी रूप में विश्लेषण और सरलेषण किया है । बिश्लेपण मन्थन है, सरलेपण सञ्चरण है । पन्तके रुख मुखमे क्रमशः कितना परिवर्तन हो गया है, यह पुस्तकोंमें मुद्रित उनके विविध चित्रोंने देखा जा सकता है। किन्तु चित्र मौन हैं, कविताएँ सशब्द है, के ही उनके मौतमुखको मुखरित करती है। केवल 'जन्मदिवस' और 'आत्मिका' ही नहीं, पन्तकी भारी कविताएँ ही उनकी अन्तर्व्यञ्जक आत्मकथाएँ हैं, विशेषतः उनके काव्यरूपक - 'रजत- शिखर', 'शिल्पी', 'सौवर्ण' । उनको आत्मकथा विश्वके मनोविकासकी कथा है । 'वीणा' की बालिका में तुतलाकर, 'पल्लव' के तारुण्यमे प्रस्फुटित होकर"चूम मौन कलियों का मान खिला मलिन मुख मे मुसकान गूढ़ स्नेह का-सा निश्वास पा कुसुमों से सौरभ दान" - उनकी सुललित कविता 'गुञ्जन' से प्रौढ़ताकी और चली गयी, परिपक्ववयकी अनुभूतियोंमें पग गयी; युगपथपर उत्तरोत्तर सांस्कृतिक चरण बढाती 'चिदम्बरा' हो गयी । 'गुञ्जन' मे पत्तने कहा था६४ क्या मेरी आत्मा का चिरधन ? मै रहता नित उन्मन-उन्मन ! लगता अपूर्ण मैं इच्छा से मानव जीवन उन्नन-उन्मन ! अपनी आत्माके चिरधनका अन्वेषण करते हुए उन्होंने 'युगान्त' मे कहा - सौन्दर्य, स्नेह, उल्लास मुझे मिल सका नहीं जग से बाहर । 'गुञ्जन' और 'ज्योत्स्ना' के अन्तर्मुख कविको 'युगान्त' के 'बापू' मे आत्ममादृश्य मिला--- "मङ्गल- शशि लोलुप मानव थे विस्मित ब्रह्माण्ड परिधि विलोक तुम केन्द्र खोजने आये तब सबमे व्यापक, गत राग-शोक ।" क्या 'बाहर' का संसार छूट गया ? वह 'युगवाणी' में व्यक्त हुआ । बाहरके नसारमे 'बापू' को छोड़कर पन्त मार्क्सके साथ हो गये । बापू और मार्क्ससे भी जब उनकी जिज्ञासाका समाधान नहीं मिला, मानवजीवन 'अपूर्ण' ही जान पड़ने लगा, तब 'स्वर्णकिरण' से वे अरबिन्दके अनुयायी हो गये । 'उत्तरा' की प्रस्तावनामे रवीन्द्र, विवेकानन्द, गान्धी, मार्क्सका आभार स्वीकार करते हुए पन्तजी लिखते है -- "इन सबमें जो एक परिपूर्ण एव सन्तुलित अन्तर्दृष्टिका अभाव खटकता था, उसकी पत्ति
किन्तु 'कल' भी जब 'आज' बन जायगा तब ? क्या समय नहीं स्थिर हो जायगा ? मुख्य स्थिति है द्रष्टाको आत्मस्थता, वही युग-युगका सारसङ्कलन कर जीवन और साहित्यको श्रीवृद्धि करती रहती है । पन्त आत्मस्थता है । जो आत्मस्य नहीं है, वह 'बिस्थापित' है । परिवर्तनशीलता ही प्रगतिशीलता है । केवल ऐतिहासिक भौतिकवादको दृष्टि से देखने पर प्रगतिशीलता में एक नयी गित जड़ना निश्चलता आ जाती है। कोई भी रोमँण्टिक कवि जागरूक अथवा चैतन्य रहकर ही चिन्तन और सञ्चयन करता है, इसीलिए उसके विचारोम व्यापकता आ जाती है । मलके विचारोंको भी किसी एक सीमामें बांधना सम्भव नहीं है। उनकी कवितायें उद्योग भी है, विज्ञान और मनोविज्ञान भी है, अध्यात्म भी है। एक शब्दमे सबका समन्वय है । पन्तका अध्यात्म रूढ अध्यात्म नहीं है, ससारकी ओरसे आँख मूंदकर ईश्वरका ध्यान करना नहीं है । 'सियाराम-मय सब जग जानी' को लोकसिद्ध करनेके लिए यह जैसे आँख खोलकर ईश्वरका ध्यान अथवा भगवत् सत्ताका साक्षात्कार करना है ।' 'आँख मुँदे जो जड़ वह आँस खुले पर चेतन जान पड़ता है । 'त्रिदम्बरा' के चरण-चिह्न में पत्तने अपने आध्यात्मिक अET आस्तिक जीवन दर्शनको समझने के लिए एक सरल सूत्र दे दिया है-- "भूजीवनको भगवत् जीवन बनाने के लिए हमे कहीं ऊपर नहीं खो जाना है, प्रत्युत जीवन आकाक्षाओंका पुनर्मूल्याकन कर विगत मूल्यको अधिक व्यापक बनाना है।" जिम अध्यात्मको अare rofen aeझा जाता था, पन्ने अपने समन्वयसे उस अध्यात्मको इहलौकिक और सामाजिक बना दिया । छायावाद-युगमें भाव और कलाकी दृष्टिसे रोमैण्टिक रिवाइवल हुमा था, 'युगान्त' के बाद विचार और संस्कृतिको दृष्टिसे रोमैण्टिक रिवाइवल हुआ । 'त्रिदम्बरा' के 'चरणचिह्न' में पन्तजीने निर्दिष्ट किया है --"मानववृत्त और विकास जीवनकी, युगोंके अन्धकार एवं नैतिक सङ्कीर्णताकी कलङ्क-कालिमामे सनी चेतनाकी चादरको --जिसे कबीर जतनसे ओढ़कर ज्योंकी त्यों रख गये थे -- नवीन प्रकाशके जलमे डुबोकर, उसे संस्कृतिके व्यापक मूल्योकी स्वच्छ शोभा प्रदानकर, हमे सबके ओढ़ने योग्य बनाना होगा ।" क्या पन्तका सांस्कृतिक प्रयास प्रलायन है ? प्रगतिशीलताके लिए गति ही नहीं, धृति भी चाहिए । युग-युगके परिवर्तनोमे वही ग्राहिकाशक्ति है, वही गतिकी चेतना है । गति तो यन्त्रमे भी होती है, किन्तु क्या वह सचेतन है ? संस्कृतिके रूपमे पन्तने प्रगतिको धृति दी हैं, जड़ताको चेतना दी है, वर्तमानको चिरन्तनता दी है । कहा जाता है, पन्त जीवनके संघर्षसे दूर रहे । पन्तको जीवनका कम सर्प नहीं करना पड़ा है। उनके सुकोमल प्राणोंको कठोर आर्थिक कष्ट भी झेलना पड़ा है और दो बार बिकट अस्वस्थताका सामना भी करना पड़ा है, किन्तु व्यक्तिगत समस्या के लिए उन्होंने वर्ग-संघर्ष नही किया, 'सर्वभूतेपु' मे आत्मविलय कर दिया, यही क्या उनका पलायन है ? आर्थिक विपन्नता और अस्वस्थताके कारण पन्तका वह कोमल कम नीय कवि-मुख असमय ही मुरझा गया। उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ सार्वजनिक परिस्थितियोंकी ही प्रतिच्छाया थी । 'वह्नि, बाढ़, झझाके भूपर' उनका भी 'कोमल मनुज कलेवर' युगकी तरह ही आक्रान्त हो गया । किन्तु अन्तश्चेतनाका कवि भीतरसे कैसे निष्प्राण हो सकता है ? वह तो अमृतपुत्र है । पन्तने मानव जीवनको केवल बाह्य संघर्ष और आन्दोलनके रूपमे नही देखा । वह तो 'पशु-जीवनके तममें जीवन-रूप मरण' है । संघर्षकीअपेक्षा मानस-मन्थन और आन्दोलनकी अपेक्षा अन्तःसञ्चरणमे जाग्रत अन्तःकरणकी सांस्कृतिक क्रियाशीलताका परिचय मिलता है । 'उत्तरा' - की प्रस्तावनामें कहा है --- "यह मात्र बाहरकी रोटीका युद्ध शीघ्र ही मनके रणक्षेत्र में नवीन मान्यताओंके देवासुर संघर्षका रूप धारण कर, एवं मानव-चेतना तथा अस्तित्व के अन्तरतम स्तरोंको आन्दोलित कर, मानवहृदयको स्वर्ग-शोणितसे स्नान- पूल तथा नवीन चेतनाके सौन्दर्य और नवीन मानवता की गरिमासे मण्डित कर देगा ।" - पन्तने जीवनके उद्वेलनोंका - इसी रूप में विश्लेषण और सरलेषण किया है । बिश्लेपण मन्थन है, सरलेपण सञ्चरण है । पन्तके रुख मुखमे क्रमशः कितना परिवर्तन हो गया है, यह पुस्तकोंमें मुद्रित उनके विविध चित्रोंने देखा जा सकता है। किन्तु चित्र मौन हैं, कविताएँ सशब्द है, के ही उनके मौतमुखको मुखरित करती है। केवल 'जन्मदिवस' और 'आत्मिका' ही नहीं, पन्तकी भारी कविताएँ ही उनकी अन्तर्व्यञ्जक आत्मकथाएँ हैं, विशेषतः उनके काव्यरूपक - 'रजत- शिखर', 'शिल्पी', 'सौवर्ण' । उनको आत्मकथा विश्वके मनोविकासकी कथा है । 'वीणा' की बालिका में तुतलाकर, 'पल्लव' के तारुण्यमे प्रस्फुटित होकर"चूम मौन कलियों का मान खिला मलिन मुख मे मुसकान गूढ़ स्नेह का-सा निश्वास पा कुसुमों से सौरभ दान" - उनकी सुललित कविता 'गुञ्जन' से प्रौढ़ताकी और चली गयी, परिपक्ववयकी अनुभूतियोंमें पग गयी; युगपथपर उत्तरोत्तर सांस्कृतिक चरण बढाती 'चिदम्बरा' हो गयी । 'गुञ्जन' मे पत्तने कहा थाचौंसठ क्या मेरी आत्मा का चिरधन ? मै रहता नित उन्मन-उन्मन ! लगता अपूर्ण मैं इच्छा से मानव जीवन उन्नन-उन्मन ! अपनी आत्माके चिरधनका अन्वेषण करते हुए उन्होंने 'युगान्त' मे कहा - सौन्दर्य, स्नेह, उल्लास मुझे मिल सका नहीं जग से बाहर । 'गुञ्जन' और 'ज्योत्स्ना' के अन्तर्मुख कविको 'युगान्त' के 'बापू' मे आत्ममादृश्य मिला--- "मङ्गल- शशि लोलुप मानव थे विस्मित ब्रह्माण्ड परिधि विलोक तुम केन्द्र खोजने आये तब सबमे व्यापक, गत राग-शोक ।" क्या 'बाहर' का संसार छूट गया ? वह 'युगवाणी' में व्यक्त हुआ । बाहरके नसारमे 'बापू' को छोड़कर पन्त मार्क्सके साथ हो गये । बापू और मार्क्ससे भी जब उनकी जिज्ञासाका समाधान नहीं मिला, मानवजीवन 'अपूर्ण' ही जान पड़ने लगा, तब 'स्वर्णकिरण' से वे अरबिन्दके अनुयायी हो गये । 'उत्तरा' की प्रस्तावनामे रवीन्द्र, विवेकानन्द, गान्धी, मार्क्सका आभार स्वीकार करते हुए पन्तजी लिखते है -- "इन सबमें जो एक परिपूर्ण एव सन्तुलित अन्तर्दृष्टिका अभाव खटकता था, उसकी पत्ति
दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक करने वाला पोस्ट शेयर है। जिसकी वीडियो दीप ढिल्लों ने सोशल मीडिया के जरिए शेयर की थी। वहीं पोस्ट सामने आते ही उनके फैंस ने कमैंट्स की बौछार लगा दी है। श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिए गए बयान पर बलवंत सिंह राजोआना ने सवाल उठाए हैं। कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जंग लड़ रहीं नवजोत कौर सिद्धू ने जोश से भरा एक पोस्ट शेयर किया है। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक करने वाला पोस्ट शेयर है। जिसकी वीडियो दीप ढिल्लों ने सोशल मीडिया के जरिए शेयर की थी। वहीं पोस्ट सामने आते ही उनके फैंस ने कमैंट्स की बौछार लगा दी है। श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिए गए बयान पर बलवंत सिंह राजोआना ने सवाल उठाए हैं। कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जंग लड़ रहीं नवजोत कौर सिद्धू ने जोश से भरा एक पोस्ट शेयर किया है। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
मां-बाप बनने के बाद पति-पत्नी की जिंदगी में थोडा़ बहुत बदलाव तो आ ही जाता है। वह एक दूसरे के साथ भावनात्मक रिश्ते से तो जुड़ें होते हैं लेकिन कहीं न कहीं शारीरिक सुख न पाने की कमी के कारण कटे-कटे से भी रहते हैं। उनको हमेशा यह डर लगा रहता है कि कहीं उनके वजह से बच्चे पर गलत असर न पड़े। बच्चे इंसान की पहली जिम्मेदारी है और उनकी देखभाल भी बहुत जरूरी है। जब बच्चे घर पर होते हैं तो पार्टनर को एक-दूसरे के करीब आने में भी परेशानी होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अपने पार्टनर के लिए जिम्मेदारी को भूल जाएं। अपने परिवार और बच्चों से थोड़ा समय निकाल कर पार्टनर को भी दें। बच्चा जब पास सो रहा होता है तो पति-पत्नी को डर लगा रहता है कहीं वो जाग न जाए। बच्चा अभी 3-4 महीना का ही है तो आप उसको सुला कर कुछ देर दूसरी जगह पर शिफ्ट होकर पार्टनर के साथ वक्त बिता सकते हैं। बच्चे खिलौनों के साथ खुश रहते हैं। ज्यादातर बच्चे तभी रोते हैं जब उनको भूख लगती है। ऐसे में बच्चे को पहले कुछ खिलाएं और दूध पिलाएं। उसके बाद उसको खिलौनों के साथ खेलने दें। आप दोनों कुछ देर के लिए ड्राइंग रूम में भी समय बिता सकते हैं। आपको बच्चा रात को देर से सोता है तो जाहिर सी बात है कि आपका पार्टनर हमेशा खराब मूड में ही रहेगा। इसके लिए बच्चे को जल्दी सोने की आदत डालें। दोपहर को बच्चे के साथ खूब मस्ती करें। उसकी अच्छे से देखभाल करें। रात को जल्दी सुला दें। इससे बच्चे की देखभाल भी हो जाएगी और पार्टनर के साथ बिताने के लिए टाइम भी मिल जाएगा। कभी-कभी पार्टनर के साथ अकेले में समय बिताने के लिए बाहर जाएं। बच्चों के दादा-दादी आपसे ज्यादा अच्छी तरह से उनकी देखभाल कर सकते हैं। ऐसे में महीने में 1 बार बच्चों को उनके पास छोड़ कर कुछ देर के लिए बाहर चलें जाएं।
मां-बाप बनने के बाद पति-पत्नी की जिंदगी में थोडा़ बहुत बदलाव तो आ ही जाता है। वह एक दूसरे के साथ भावनात्मक रिश्ते से तो जुड़ें होते हैं लेकिन कहीं न कहीं शारीरिक सुख न पाने की कमी के कारण कटे-कटे से भी रहते हैं। उनको हमेशा यह डर लगा रहता है कि कहीं उनके वजह से बच्चे पर गलत असर न पड़े। बच्चे इंसान की पहली जिम्मेदारी है और उनकी देखभाल भी बहुत जरूरी है। जब बच्चे घर पर होते हैं तो पार्टनर को एक-दूसरे के करीब आने में भी परेशानी होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अपने पार्टनर के लिए जिम्मेदारी को भूल जाएं। अपने परिवार और बच्चों से थोड़ा समय निकाल कर पार्टनर को भी दें। बच्चा जब पास सो रहा होता है तो पति-पत्नी को डर लगा रहता है कहीं वो जाग न जाए। बच्चा अभी तीन-चार महीना का ही है तो आप उसको सुला कर कुछ देर दूसरी जगह पर शिफ्ट होकर पार्टनर के साथ वक्त बिता सकते हैं। बच्चे खिलौनों के साथ खुश रहते हैं। ज्यादातर बच्चे तभी रोते हैं जब उनको भूख लगती है। ऐसे में बच्चे को पहले कुछ खिलाएं और दूध पिलाएं। उसके बाद उसको खिलौनों के साथ खेलने दें। आप दोनों कुछ देर के लिए ड्राइंग रूम में भी समय बिता सकते हैं। आपको बच्चा रात को देर से सोता है तो जाहिर सी बात है कि आपका पार्टनर हमेशा खराब मूड में ही रहेगा। इसके लिए बच्चे को जल्दी सोने की आदत डालें। दोपहर को बच्चे के साथ खूब मस्ती करें। उसकी अच्छे से देखभाल करें। रात को जल्दी सुला दें। इससे बच्चे की देखभाल भी हो जाएगी और पार्टनर के साथ बिताने के लिए टाइम भी मिल जाएगा। कभी-कभी पार्टनर के साथ अकेले में समय बिताने के लिए बाहर जाएं। बच्चों के दादा-दादी आपसे ज्यादा अच्छी तरह से उनकी देखभाल कर सकते हैं। ऐसे में महीने में एक बार बच्चों को उनके पास छोड़ कर कुछ देर के लिए बाहर चलें जाएं।
New Delhi: बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे पर 28 साल बाद सुनवाई (Babri Masjid Case) होने जा रही है। आज यानी बुधवार को सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा। इस फैसले का पूरे देश को इंतजार है। क्योंकि इस केस में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 32 लोगों का नाम सामने आया था। इन सभी को आज कोर्ट में शामिल होने को कहा गया था, लेकिन सुत्रों की माने तो यह सभी कोर्ट में अपनी पेशी नहीं देंगे, आखिर क्यों नहीं पहुंचेंगे कोर्ट इस बात का अभी खुलासा नहीं हुआ है। - सन् 1853 में पहली हिंसा हिंदू-मुस्लिम के बीच हुई थी। जब निर्मोही अखाड़ा ने ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि जिस जगह पर मस्जिद खड़ी है, वहां एक मंदिर हुआ करता था। जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया। जिसके बाद अगले 2 सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में हिंसा भड़कती रही। - सन् 1859 में आजादी के पहले आंदोलने की वजह से माहौल थोड़ा शांत होता दिखाई दिया, लेकिन ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी। परिसर के अंदर वाले हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई थी। - सन् 1885 में पहली बार यह मामला अदालत तक पहुंचा। हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील मंजूर नहीं की थी। इसके बाद से मामला गहराता गया और तारीखों का सिलसिला चलता रहा। - सन् 1934 की बात की जाए तो मस्जिद-मंदिर को लेकर दंगे भड़क गए। इन दंगों में मस्जिद के चारों तरफ की दीवार को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने इसका फिर से निर्माण किया था। - सन् 1949 ने हिंदुओं ने अपनी मर्जी से मूर्ति स्थापित कर दी, लेकिन सरकार ने मुर्ति पर ताला लगवा दिया। जिसके बाद भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में पाई गई। कहा जाता है कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति हिंदुओं ने रखवाई. मुसलमानों ने इस पर विरोध किया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। फिर दोनों पक्ष के लोगों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। इसके बाद सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवा दिया। - इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 25 सितंबर 1990 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष आडवाणी की रथ यात्रा बिहार को बिहार में रोक दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए। जिसकी वजह से गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए। - सन् 1991 में उत्त प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमे बीजेपी सरकार ने जीत हासिल की। मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार हार गई। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई। - सबसे बड़ा दंगा 1992 मे हुआ था। ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। अस्थाई राम मंदिर बना दिया गया। इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे फैल गए और इनमें करीब 2000 लोग मारे गए थे। देश और दुनिया से जुड़ी Hindi News की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें. Youtube Channel यहाँ सब्सक्राइब करें। सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें, Twitter पर फॉलो करें और Android App डाउनलोड करें.
New Delhi: बाबरी मस्जिद विवादित ढांचे पर अट्ठाईस साल बाद सुनवाई होने जा रही है। आज यानी बुधवार को सुबह ग्यारह बजे सुप्रीम कोर्ट में फैसला होगा। इस फैसले का पूरे देश को इंतजार है। क्योंकि इस केस में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित बत्तीस लोगों का नाम सामने आया था। इन सभी को आज कोर्ट में शामिल होने को कहा गया था, लेकिन सुत्रों की माने तो यह सभी कोर्ट में अपनी पेशी नहीं देंगे, आखिर क्यों नहीं पहुंचेंगे कोर्ट इस बात का अभी खुलासा नहीं हुआ है। - सन् एक हज़ार आठ सौ तिरेपन में पहली हिंसा हिंदू-मुस्लिम के बीच हुई थी। जब निर्मोही अखाड़ा ने ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि जिस जगह पर मस्जिद खड़ी है, वहां एक मंदिर हुआ करता था। जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया। जिसके बाद अगले दो सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में हिंसा भड़कती रही। - सन् एक हज़ार आठ सौ उनसठ में आजादी के पहले आंदोलने की वजह से माहौल थोड़ा शांत होता दिखाई दिया, लेकिन ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी। परिसर के अंदर वाले हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी गई थी। - सन् एक हज़ार आठ सौ पचासी में पहली बार यह मामला अदालत तक पहुंचा। हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील मंजूर नहीं की थी। इसके बाद से मामला गहराता गया और तारीखों का सिलसिला चलता रहा। - सन् एक हज़ार नौ सौ चौंतीस की बात की जाए तो मस्जिद-मंदिर को लेकर दंगे भड़क गए। इन दंगों में मस्जिद के चारों तरफ की दीवार को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने इसका फिर से निर्माण किया था। - सन् एक हज़ार नौ सौ उनचास ने हिंदुओं ने अपनी मर्जी से मूर्ति स्थापित कर दी, लेकिन सरकार ने मुर्ति पर ताला लगवा दिया। जिसके बाद भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में पाई गई। कहा जाता है कि मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति हिंदुओं ने रखवाई. मुसलमानों ने इस पर विरोध किया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। फिर दोनों पक्ष के लोगों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। इसके बाद सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवा दिया। - इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पच्चीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ नब्बे में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष आडवाणी की रथ यात्रा बिहार को बिहार में रोक दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हजारों कार सेवक अयोध्या में जमा हुए। जिसकी वजह से गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए। - सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में उत्त प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमे बीजेपी सरकार ने जीत हासिल की। मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार हार गई। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई। - सबसे बड़ा दंगा एक हज़ार नौ सौ बानवे मे हुआ था। ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। अस्थाई राम मंदिर बना दिया गया। इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे फैल गए और इनमें करीब दो हज़ार लोग मारे गए थे। देश और दुनिया से जुड़ी Hindi News की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें. Youtube Channel यहाँ सब्सक्राइब करें। सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें, Twitter पर फॉलो करें और Android App डाउनलोड करें.
स्याही से दाग से बाहर निकलने का सवाल कई लोगों में होता है, जो अपने पसंदीदा कपड़े या फर्नीचर पर उनकी लापरवाही या झुकाव में रंगीन तलाक रखते थे। तुरंत ऐसा लगता है कि चीज अपरिवर्तनीय रूप से खराब हो गई है, लेकिन यह नहीं है। आधुनिक स्याही सरल, सिद्ध तरीकों का उपयोग करके निकालना आसान है। स्याही दाग को कैसे हटाएं? जब कोई समस्या का पता चला है, तो तुरंत कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, क्योंकि बॉलपॉइंट कलम की स्याही से दाग को हटाने से यह ताजा होता है। ऐसा करने के लिए, कई सुधारित टूल का उपयोग करें जो कि दवा कैबिनेट में या घर में रसोईघर में ढूंढना आसान है। उपचार की विधि धुंधला हुआ ऊतक के प्रकार के आधार पर भिन्न होती है। दूषित चीज धोने से पहले आपको स्याही को हटाने की जरूरत है, ताकि वे सामग्री के साथ आगे फैल न जाएं। शुरू करने के लिए, ब्लॉट - स्टार्च, कुचल चाक, बेबी पाउडर पर एक शर्बत लगाया जाता है। कुछ मिनटों के बाद इसे हिलाया जा सकता है। सफेद कपड़े से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? सफेद कपड़े के कपड़ों से स्याही से दाग को हटाने का निर्णय लेते हुए, आप निम्न विधियों का उपयोग कर सकते हैंः - क्लोरीन युक्त एजेंट। आपको उत्पाद में संरचना (उदाहरण के लिए, श्वेतता) को लागू करने की आवश्यकता है और कार्य करने के लिए समय दें। कपड़े धोने के बाद। कुछ मामलों में, हाइड्रोजन पेरोक्साइड भी मदद कर सकता है, इसका हल्का विरंजन प्रभाव पड़ता है। इसे प्रदूषण के लिए एक ऊन के साथ लागू किया जाता है और यदि कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, तब तक ब्लॉट को गायब होने तक मिटा दें। - एक बर्फ-सफेद चीज के साथ, स्याही को निम्न तरीके से धोना आसान हैः 50 ग्राम पानी में, हाइड्रोपेराइट टैबलेट को फैलाएं, सिरका डालें और थोड़ा पोटेशियम परमैंगनेट को दूसरे कंटेनर में डालें। ब्लॉट्स पर पहली सूती तलछट को पोटेशियम परमैंगनेट का दूसरा बैंगनी मिश्रण लागू किया जाता है, दूसरा - हाइड्रोपेराइट का एक समाधान। तब उत्पाद को पानी की धारा के नीचे धोया जाना चाहिए, स्याही का कोई निशान नहीं होगा। - सफेद कपड़े को अमोनिया और हाइड्रोजन पेरोक्साइड (1: 1) के साथ साफ किया जा सकता है, जो एक गिलास पानी में पतला होता है। कपास के ऊन को एक उपकरण के साथ गीला करना और इसे एक दागदार जगह से जोड़ना जरूरी है, फिर धोने की बात है। रंगीन कपड़े से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? रंगीन कपड़े से बने कपड़ों से स्याही दाग को हटाने का निर्णय लेना, आपको सावधान रहना होगा कि सामग्री को शेड नहीं किया जाता है और प्रसंस्करण के कारण ब्लीच नहीं किया जाता है। सफाई के लिए, कोमल साधनों का उपयोग करना बेहतर है। एक रंगीन सामग्री से स्याही से दाग को कैसे निकालेंः - बराबर भागों में एसीटोन और अल्कोहल मिलाएं। दूषित क्षेत्र पर समाधान डालना, इसे रगड़ें और स्याही गायब होने तक प्रतीक्षा करें। शेष दागों का इलाज 10% अमोनिया समाधान के साथ किया जा सकता है, जिसमें पहले जांच की गई थी कि पेंट कितना प्रतिरोधी है। फिर उत्पाद धो लें। - आप दूध के साथ दाग को हटा सकते हैं। आपको उस चीज़ को पकड़ने की ज़रूरत है, इसे कुल्लाएं और धो लें। - अल्कोहल के पांच हिस्सों और दो ग्लिसरीन का समाधान करें। इसे दूषित करने के लिए लागू करें, इसे पकड़ो, इसे कुल्लाएं और धो लें। सामग्री पदार्थ के रंग को संरक्षित कर सकते हैं। - एक दिन के लिए रेशम के कपड़े पर सरसों से बने पेस्ट डालें, इसके बाद इसे ठंडा पानी में स्क्रैप और धोया जाना चाहिए। जीन्स से स्याही दाग को कैसे हटाएं? यदि कलम आपके पसंदीदा जींस के साथ मिट्टी में डाल दिया गया है, तो आपको तुरंत इसे बाहर फेंकने की जरूरत नहीं है। आप आसानी से सामग्री को साफ कर सकते हैं, और वे कई सालों तक चलेगा। डेनिम कपड़ों से एक स्याही दाग को कैसे हटाएंः - मसालेदार इलाके में थोड़ा शराब डालें या हेयरसप्रै स्प्रे करें। स्याही गायब हो जाने के बाद साफ पानी के साथ कुल्ला, एक साफ सूती तलछट के साथ इसे कुल्ला। - सिरका का एक समाधान और गर्म पानी 1: 1, स्याही पर 30 मिनट के लिए डालना। पानी और सोडा का पेस्ट बनाओ। इसे पुराने टूथब्रश के साथ दूषित करने में रगड़ें, जिसे सिरका समाधान में डुबोया जाना चाहिए। ठंडे पानी में जींस कुल्ला। एक शर्ट से एक स्याही दाग को कैसे हटाएं? जब स्याही स्याही के साथ दाग हो जाती है, तो समस्या को डिशवॉशिंग सहायता और सिरका के साथ हल किया जा सकता है। स्याही से दाग धोने के लिए कैसेः - शर्ट के नीचे एक सफेद कागज तौलिया रखो। - पानी के गंदे क्षेत्र पर स्प्रे, 5 मिनट के लिए छोड़ दें। - एक नैपकिन के साथ कई बार ब्लॉट स्याही जब तक यह उन्हें अवशोषित नहीं करता है। - 1 बड़ा चम्मच के कटोरे में मिलाएं। एल। dishwashing तरल, 2 चम्मच। सिरका और पानी का गिलास। - सफेद कपड़े गीला करें और इसे 20 मिनट तक स्याही पर छोड़ दें। - सख्त क्षेत्र पूरी तरह से स्याही हटाने के लिए रगड़ गया, उत्पाद एक टाइपराइटर में धोया जाता है। त्वचा से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? अगर कलम में गंदे चमड़े के जैकेट, बैग या सोफे हैं, तो समस्या को सिद्ध तरीकों की मदद से हल किया जा सकता है। त्वचा से स्याही से दाग को हटाने से पहले, एक अस्पष्ट क्षेत्र पर आपको सफाई एजेंट का परीक्षण करने की आवश्यकता होती है, और सुनिश्चित करें कि यह सामग्री का रंग नहीं बदलता है। ब्लॉट से छुटकारा पाने के लिए, निम्नलिखित व्यंजन स्वीकार्य हैंः - ऐसा करने के लिए, 1 चम्मच पतला करें। सोडा और 1 चम्मच। पानी के गिलास में अमोनिया। संरचना में कपड़े को धुंधला करें, जब पानी के साथ क्षेत्र को कुल्ला करने के लिए स्याही साफ हो जाती है तो प्रदूषण का इलाज करें। - कपड़ों से स्याही दाग को हटाने 1 टेस्पून की संरचना के साथ बनाया जाता है। एल। नमक और आधा गिलास पानी में पतला डिटर्जेंट की एक बूंद। मिश्रण ब्लॉट पर लागू होता है और सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। एक कपड़े के साथ गंदगी के अवशेष और सफाई यौगिक धोने के बाद। पुराने स्याही स्थान को कैसे हटाया जाए? कपड़ों से स्याही दाग को हटाने के लिए जितनी जल्दी हो सके शुरू किया जाना चाहिए, नए प्रदूषक बेहतर भंग कर सकते हैं। लेकिन सूखे अप तलाक से निपटना संभव है। स्याही से पुराने दाग को कैसे हटाएंः - अल्कोहल और एसीटोन (1: 1) का मिश्रण स्याही के साथ इलाज किया जाता है, जो साफ पेपर की चादर से ढका हुआ होता है और एक गर्म लोहे से लोहा होता है। फिर एक चीज मिटा दी जानी चाहिए। - आप एक और मजबूत मिश्रण बना सकते हैं - अल्कोहल और टर्पेनटाइन बराबर भागों में। धोने की एक चीज़ के बाद, ब्लॉट उपचार को कई बार किया जाना चाहिए, क्योंकि संरचना में अप्रिय गंध है। - पुरानी स्याही को बराबर खुराक में सिरका और एथिल अल्कोहल के मिश्रण से आसानी से हटा दिया जाता है। तब इलाज कपड़े बड़ी मात्रा में पानी से धोया जाता है। कपड़े पर स्याही दाग को धोने का निर्णय लेना, आप स्टोर से तैयार दाग हटाने के साथ काम कर सकते हैं। इसका उपयोग करना मुश्किल नहीं है, प्रदूषण को हटाने में केवल कुछ मिनट लगेंगे। दाग रिमूवर के रूप में उपलब्ध हैंः - पेंसिल। पसंद चौड़ा है, ये फेबेरिल, उडेलिक्स, हेटमैन हैं, वे ताजा स्याही और सूखे ब्लब्स से निपटते हैं। साधनों को उसी तरह से काम करें - सबसे पहले आपको गर्म पानी के साथ मिट्टी को गीला करना होगा, फिर फोम दिखाई देने तक इसे एक पेंसिल से रगड़ें, इसे 15 मिनट तक खड़े रहें। समय के अंत में, चीज धोया जा सकता है। पुराने ब्लॉट्स पर, एक्सपोजर समय 2 घंटे तक बढ़ जाता है। पेंसिल सभी प्रकार के कपड़ों के लिए उपयुक्त हैं, विशेष रूप से ठीक स्पंज को स्पंज का उपयोग करके संसाधित किया जा सकता है। - ऑक्सीजन ब्लीच, उदाहरण के लिए, पेस्ट को हटाने में अच्छे हैं। बेकमैन, एससी जेल। उनकी सहायता से स्याही, मार्कर, मार्कर, सिक्का बॉक्स के निशान, भित्तिचित्र से पेंट्स के ब्लब्स को हटा दें। उत्पाद खरीदने से पहले, आपको पैकेज पर पढ़ने की जरूरत है, किस प्रकार के प्रदूषण के लिए उपयुक्त है।
स्याही से दाग से बाहर निकलने का सवाल कई लोगों में होता है, जो अपने पसंदीदा कपड़े या फर्नीचर पर उनकी लापरवाही या झुकाव में रंगीन तलाक रखते थे। तुरंत ऐसा लगता है कि चीज अपरिवर्तनीय रूप से खराब हो गई है, लेकिन यह नहीं है। आधुनिक स्याही सरल, सिद्ध तरीकों का उपयोग करके निकालना आसान है। स्याही दाग को कैसे हटाएं? जब कोई समस्या का पता चला है, तो तुरंत कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, क्योंकि बॉलपॉइंट कलम की स्याही से दाग को हटाने से यह ताजा होता है। ऐसा करने के लिए, कई सुधारित टूल का उपयोग करें जो कि दवा कैबिनेट में या घर में रसोईघर में ढूंढना आसान है। उपचार की विधि धुंधला हुआ ऊतक के प्रकार के आधार पर भिन्न होती है। दूषित चीज धोने से पहले आपको स्याही को हटाने की जरूरत है, ताकि वे सामग्री के साथ आगे फैल न जाएं। शुरू करने के लिए, ब्लॉट - स्टार्च, कुचल चाक, बेबी पाउडर पर एक शर्बत लगाया जाता है। कुछ मिनटों के बाद इसे हिलाया जा सकता है। सफेद कपड़े से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? सफेद कपड़े के कपड़ों से स्याही से दाग को हटाने का निर्णय लेते हुए, आप निम्न विधियों का उपयोग कर सकते हैंः - क्लोरीन युक्त एजेंट। आपको उत्पाद में संरचना को लागू करने की आवश्यकता है और कार्य करने के लिए समय दें। कपड़े धोने के बाद। कुछ मामलों में, हाइड्रोजन पेरोक्साइड भी मदद कर सकता है, इसका हल्का विरंजन प्रभाव पड़ता है। इसे प्रदूषण के लिए एक ऊन के साथ लागू किया जाता है और यदि कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, तब तक ब्लॉट को गायब होने तक मिटा दें। - एक बर्फ-सफेद चीज के साथ, स्याही को निम्न तरीके से धोना आसान हैः पचास ग्राम पानी में, हाइड्रोपेराइट टैबलेट को फैलाएं, सिरका डालें और थोड़ा पोटेशियम परमैंगनेट को दूसरे कंटेनर में डालें। ब्लॉट्स पर पहली सूती तलछट को पोटेशियम परमैंगनेट का दूसरा बैंगनी मिश्रण लागू किया जाता है, दूसरा - हाइड्रोपेराइट का एक समाधान। तब उत्पाद को पानी की धारा के नीचे धोया जाना चाहिए, स्याही का कोई निशान नहीं होगा। - सफेद कपड़े को अमोनिया और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ साफ किया जा सकता है, जो एक गिलास पानी में पतला होता है। कपास के ऊन को एक उपकरण के साथ गीला करना और इसे एक दागदार जगह से जोड़ना जरूरी है, फिर धोने की बात है। रंगीन कपड़े से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? रंगीन कपड़े से बने कपड़ों से स्याही दाग को हटाने का निर्णय लेना, आपको सावधान रहना होगा कि सामग्री को शेड नहीं किया जाता है और प्रसंस्करण के कारण ब्लीच नहीं किया जाता है। सफाई के लिए, कोमल साधनों का उपयोग करना बेहतर है। एक रंगीन सामग्री से स्याही से दाग को कैसे निकालेंः - बराबर भागों में एसीटोन और अल्कोहल मिलाएं। दूषित क्षेत्र पर समाधान डालना, इसे रगड़ें और स्याही गायब होने तक प्रतीक्षा करें। शेष दागों का इलाज दस% अमोनिया समाधान के साथ किया जा सकता है, जिसमें पहले जांच की गई थी कि पेंट कितना प्रतिरोधी है। फिर उत्पाद धो लें। - आप दूध के साथ दाग को हटा सकते हैं। आपको उस चीज़ को पकड़ने की ज़रूरत है, इसे कुल्लाएं और धो लें। - अल्कोहल के पांच हिस्सों और दो ग्लिसरीन का समाधान करें। इसे दूषित करने के लिए लागू करें, इसे पकड़ो, इसे कुल्लाएं और धो लें। सामग्री पदार्थ के रंग को संरक्षित कर सकते हैं। - एक दिन के लिए रेशम के कपड़े पर सरसों से बने पेस्ट डालें, इसके बाद इसे ठंडा पानी में स्क्रैप और धोया जाना चाहिए। जीन्स से स्याही दाग को कैसे हटाएं? यदि कलम आपके पसंदीदा जींस के साथ मिट्टी में डाल दिया गया है, तो आपको तुरंत इसे बाहर फेंकने की जरूरत नहीं है। आप आसानी से सामग्री को साफ कर सकते हैं, और वे कई सालों तक चलेगा। डेनिम कपड़ों से एक स्याही दाग को कैसे हटाएंः - मसालेदार इलाके में थोड़ा शराब डालें या हेयरसप्रै स्प्रे करें। स्याही गायब हो जाने के बाद साफ पानी के साथ कुल्ला, एक साफ सूती तलछट के साथ इसे कुल्ला। - सिरका का एक समाधान और गर्म पानी एक: एक, स्याही पर तीस मिनट के लिए डालना। पानी और सोडा का पेस्ट बनाओ। इसे पुराने टूथब्रश के साथ दूषित करने में रगड़ें, जिसे सिरका समाधान में डुबोया जाना चाहिए। ठंडे पानी में जींस कुल्ला। एक शर्ट से एक स्याही दाग को कैसे हटाएं? जब स्याही स्याही के साथ दाग हो जाती है, तो समस्या को डिशवॉशिंग सहायता और सिरका के साथ हल किया जा सकता है। स्याही से दाग धोने के लिए कैसेः - शर्ट के नीचे एक सफेद कागज तौलिया रखो। - पानी के गंदे क्षेत्र पर स्प्रे, पाँच मिनट के लिए छोड़ दें। - एक नैपकिन के साथ कई बार ब्लॉट स्याही जब तक यह उन्हें अवशोषित नहीं करता है। - एक बड़ा चम्मच के कटोरे में मिलाएं। एल। dishwashing तरल, दो चम्मच। सिरका और पानी का गिलास। - सफेद कपड़े गीला करें और इसे बीस मिनट तक स्याही पर छोड़ दें। - सख्त क्षेत्र पूरी तरह से स्याही हटाने के लिए रगड़ गया, उत्पाद एक टाइपराइटर में धोया जाता है। त्वचा से स्याही दाग को कैसे हटाया जाए? अगर कलम में गंदे चमड़े के जैकेट, बैग या सोफे हैं, तो समस्या को सिद्ध तरीकों की मदद से हल किया जा सकता है। त्वचा से स्याही से दाग को हटाने से पहले, एक अस्पष्ट क्षेत्र पर आपको सफाई एजेंट का परीक्षण करने की आवश्यकता होती है, और सुनिश्चित करें कि यह सामग्री का रंग नहीं बदलता है। ब्लॉट से छुटकारा पाने के लिए, निम्नलिखित व्यंजन स्वीकार्य हैंः - ऐसा करने के लिए, एक चम्मच पतला करें। सोडा और एक चम्मच। पानी के गिलास में अमोनिया। संरचना में कपड़े को धुंधला करें, जब पानी के साथ क्षेत्र को कुल्ला करने के लिए स्याही साफ हो जाती है तो प्रदूषण का इलाज करें। - कपड़ों से स्याही दाग को हटाने एक टेस्पून की संरचना के साथ बनाया जाता है। एल। नमक और आधा गिलास पानी में पतला डिटर्जेंट की एक बूंद। मिश्रण ब्लॉट पर लागू होता है और सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। एक कपड़े के साथ गंदगी के अवशेष और सफाई यौगिक धोने के बाद। पुराने स्याही स्थान को कैसे हटाया जाए? कपड़ों से स्याही दाग को हटाने के लिए जितनी जल्दी हो सके शुरू किया जाना चाहिए, नए प्रदूषक बेहतर भंग कर सकते हैं। लेकिन सूखे अप तलाक से निपटना संभव है। स्याही से पुराने दाग को कैसे हटाएंः - अल्कोहल और एसीटोन का मिश्रण स्याही के साथ इलाज किया जाता है, जो साफ पेपर की चादर से ढका हुआ होता है और एक गर्म लोहे से लोहा होता है। फिर एक चीज मिटा दी जानी चाहिए। - आप एक और मजबूत मिश्रण बना सकते हैं - अल्कोहल और टर्पेनटाइन बराबर भागों में। धोने की एक चीज़ के बाद, ब्लॉट उपचार को कई बार किया जाना चाहिए, क्योंकि संरचना में अप्रिय गंध है। - पुरानी स्याही को बराबर खुराक में सिरका और एथिल अल्कोहल के मिश्रण से आसानी से हटा दिया जाता है। तब इलाज कपड़े बड़ी मात्रा में पानी से धोया जाता है। कपड़े पर स्याही दाग को धोने का निर्णय लेना, आप स्टोर से तैयार दाग हटाने के साथ काम कर सकते हैं। इसका उपयोग करना मुश्किल नहीं है, प्रदूषण को हटाने में केवल कुछ मिनट लगेंगे। दाग रिमूवर के रूप में उपलब्ध हैंः - पेंसिल। पसंद चौड़ा है, ये फेबेरिल, उडेलिक्स, हेटमैन हैं, वे ताजा स्याही और सूखे ब्लब्स से निपटते हैं। साधनों को उसी तरह से काम करें - सबसे पहले आपको गर्म पानी के साथ मिट्टी को गीला करना होगा, फिर फोम दिखाई देने तक इसे एक पेंसिल से रगड़ें, इसे पंद्रह मिनट तक खड़े रहें। समय के अंत में, चीज धोया जा सकता है। पुराने ब्लॉट्स पर, एक्सपोजर समय दो घंटाटे तक बढ़ जाता है। पेंसिल सभी प्रकार के कपड़ों के लिए उपयुक्त हैं, विशेष रूप से ठीक स्पंज को स्पंज का उपयोग करके संसाधित किया जा सकता है। - ऑक्सीजन ब्लीच, उदाहरण के लिए, पेस्ट को हटाने में अच्छे हैं। बेकमैन, एससी जेल। उनकी सहायता से स्याही, मार्कर, मार्कर, सिक्का बॉक्स के निशान, भित्तिचित्र से पेंट्स के ब्लब्स को हटा दें। उत्पाद खरीदने से पहले, आपको पैकेज पर पढ़ने की जरूरत है, किस प्रकार के प्रदूषण के लिए उपयुक्त है।
सीतामढ़ी जिले में अपराधिक घटनाएं काफी बढ़ है है। लगातार अपराधियों के द्वारा अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। मंगलवार के साम करीब 4:00 बजे एनएच 77 सिंहगरहिया के समीप पैसा वसूली करने जा रहे एक व्यवसाई को अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर घायल कर दिया। दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना की जानकारी मिलते ही सैकड़ों की संख्या में आसपास के लोग घटनास्थल पर जुट गए और घायल कोई इलाज के लिए सीतामढ़ी शहर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां से बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों ने मुजफ्फरपुर एसकेसीएमएच रेफर कर दिया। घटना के बाद अफरा तफरी का माहौल है। घटना की सूचना पर पहुंची स्थानीय थाना पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी नगर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 18 नोनिया टोला निवासी लालबाबू पासवान के पुत्र इंद्रजीत पासवान माचिस का व्यवसाय करता है। वही मंगलवार को व्यापारियों से पैसे वसूली को लेकर सोनबरसा थाना क्षेत्र के भूतही बाजार जा रहा था। इसी दौरान पूर्व से घात लगाए बाइक पर सवार अपराधियों ने इंद्रजीत पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इससे इंद्रजीत गंभीर रूप से घायल हो गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सीतामढ़ी जिले में अपराधिक घटनाएं काफी बढ़ है है। लगातार अपराधियों के द्वारा अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। मंगलवार के साम करीब चार:शून्य बजे एनएच सतहत्तर सिंहगरहिया के समीप पैसा वसूली करने जा रहे एक व्यवसाई को अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर घायल कर दिया। दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना की जानकारी मिलते ही सैकड़ों की संख्या में आसपास के लोग घटनास्थल पर जुट गए और घायल कोई इलाज के लिए सीतामढ़ी शहर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां से बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों ने मुजफ्फरपुर एसकेसीएमएच रेफर कर दिया। घटना के बाद अफरा तफरी का माहौल है। घटना की सूचना पर पहुंची स्थानीय थाना पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी नगर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर अट्ठारह नोनिया टोला निवासी लालबाबू पासवान के पुत्र इंद्रजीत पासवान माचिस का व्यवसाय करता है। वही मंगलवार को व्यापारियों से पैसे वसूली को लेकर सोनबरसा थाना क्षेत्र के भूतही बाजार जा रहा था। इसी दौरान पूर्व से घात लगाए बाइक पर सवार अपराधियों ने इंद्रजीत पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इससे इंद्रजीत गंभीर रूप से घायल हो गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने रत्नागिरी जिले में एक कारखाने में विस्फोट के कारण जान-माल के नुकसान पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, "रत्नागिरी जिले में एक कारखाने में विस्फोट के कारण जान-माल के नुकसान से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदना। घायलों के जल्द ठीक होने की उम्मीद करता हूं।"
प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने रत्नागिरी जिले में एक कारखाने में विस्फोट के कारण जान-माल के नुकसान पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, "रत्नागिरी जिले में एक कारखाने में विस्फोट के कारण जान-माल के नुकसान से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदना। घायलों के जल्द ठीक होने की उम्मीद करता हूं।"
टीवी की सुपरबोल्ड एक्ट्रेस निया शर्मा (Nia Sharma) को अच्छे से पता है कि उन्हें सुर्खियों में कैसे रहना है. हाल ही में एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर पोल डांस करते हुए वीडियो शेयर किया है जिसमें वो पोल डांस की प्रैक्टिस करते नजर आईं. इस वीडियो को एक्ट्रेस ने खुद शेयर किया है. इस वीडियो में निया पोल (Nia Sharma) डांस करती नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस ने काले रंग के शॉर्ट्स के साथ पिंक कलर की ब्रालेट पहनी हुई है. वीडियो में आप देखेंगे कि कमरे के बीच में एक स्टील का पोल है और निया इसी पोल पर पोल डांस की प्रैक्टिस करती नजर आ रही हैं. इससे पहने निया का एक वीडियो खूब चर्चा में रहा था. इस वीडियो में निया होटल की लॉबी में दौड़ती नजर आई थीं. वीडियो में निया रिवीलिंग ब्लैक कलर की ड्रेस पहने दिखीं. वीडियो में निया इस हॉट और बोल्ड ड्रेस को पहनकर होटल की लॉबी में दौड़ती दिखाई दीं. इस वीडियो को देखकर साफ लगा कि एक्ट्रेस ने ड्रेस के अंदर ब्रा नहीं पहनी. खास बात है कि निया इस ड्रेस में बला की खूबसूरत और ग्लैमरस लगीं.
टीवी की सुपरबोल्ड एक्ट्रेस निया शर्मा को अच्छे से पता है कि उन्हें सुर्खियों में कैसे रहना है. हाल ही में एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर पोल डांस करते हुए वीडियो शेयर किया है जिसमें वो पोल डांस की प्रैक्टिस करते नजर आईं. इस वीडियो को एक्ट्रेस ने खुद शेयर किया है. इस वीडियो में निया पोल डांस करती नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस ने काले रंग के शॉर्ट्स के साथ पिंक कलर की ब्रालेट पहनी हुई है. वीडियो में आप देखेंगे कि कमरे के बीच में एक स्टील का पोल है और निया इसी पोल पर पोल डांस की प्रैक्टिस करती नजर आ रही हैं. इससे पहने निया का एक वीडियो खूब चर्चा में रहा था. इस वीडियो में निया होटल की लॉबी में दौड़ती नजर आई थीं. वीडियो में निया रिवीलिंग ब्लैक कलर की ड्रेस पहने दिखीं. वीडियो में निया इस हॉट और बोल्ड ड्रेस को पहनकर होटल की लॉबी में दौड़ती दिखाई दीं. इस वीडियो को देखकर साफ लगा कि एक्ट्रेस ने ड्रेस के अंदर ब्रा नहीं पहनी. खास बात है कि निया इस ड्रेस में बला की खूबसूरत और ग्लैमरस लगीं.
वो कथित इस्लामिक स्टेट के एक चरमपंथी के प्यार में पड़ी और यहीं से शुरू हो गया उसका प्लान. लंदन की 18 साल की सफ़ा बुलर ब्रिटेन में दोषी ठहराई गईं सबसे युवा महिला हैं. कोर्ट ने सफ़ा को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम पर चरमपंथी हमले की साजिश रचने का दोषी ठहराया है. ब्रिटिश म्यूज़ियम में रोज़ाना बहुत से पर्यटक आते हैं, ऐसे में वहां हमला होने पर जान-माल का भारी नुक़सान हो सकता था. सफ़ा बुलर कथित इस्लामिक स्टेट की पहली महिला सेल की सदस्य हैं. उन्हें दो तरह के जुर्म के लिए दोषी ठहराया गया है. पहला चरमपंथी हमले की साज़िश रचने और दूसरे सीरिया जाने की कोशिश करते पकड़े जाने के लिए. बुलर जब 16 साल की थी तो उन्होंने सीरिया जाने की कोशिश की थी. उनपर आरोप था कि वो कथित इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने के लिए सीरिया जा रही थीं. बाद में जब सफ़ा के चरमपंथी मंगेतर की मौत हो गई तो उन्होंने लंदन में हमला करने का प्लान बनाया. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सफ़ा ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है. सिर्फ़ 16 साल की सफ़ा ने कैसे चरमपंथ का रास्ते पकड़ लिया? सफ़ा ने ये राह सोशल मीडिया के ज़रिए पकड़ी. इस सब की शुरुआत 2015 में पेरिस हमलों के बिल्कुल बाद हुई. उस वक्त सफ़ा 16 साल की थीं. तब सफ़ा इंस्टाग्राम के ज़रिए एक आईएस लड़ाके नवीद हुसैन के संपर्क में आई. नवीद, सफ़ा से लगभग दोगुनी उम्र के थे. कई महीनों तक बातों का सिलसिला चलता रहा और एक दिन सफ़ा ने इंटरनेट के ज़रिए ही नवीद से अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मैसेजिंग एप के ज़रिए दोनों ने शादी भी कर ली. कोर्ट को मिले सबूतों के मुताबिक हुसैन से मिलने के लिए सफ़ा सीरिया जाना चाहती थी, लेकिन ब्रिटिश सिक्योरिटी सर्विस के अधिकारियों ने सफ़ा को एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया. उनका पासपोर्ट और फोन भी जब्त कर लिया गया. बाद में सफ़ा को छोड़ दिया गया. लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने सफ़ा पर कड़ी नज़र रखी. पुलिस के सामने सफ़ा ने कबूला था कि वो नवीद से बात करती हैं और मिलने के लिए सीरिया जा रही थीं. लेकिन सफा ने पुलिस से शादी की बात छिपाई. इसके बाद एम-15 के अंडरकवर एजेंट्स ने हुसैन पर नज़र रखना शुरू किया. वो उसके बारे में और जानकारी जुटाना चाहते थे. अंडरकवर एजेंट्स ने ऑनलाइन आईडी बनाई और खुद को ब्रिटिश चरमपंथियों के तौर पर पेश किया. उन्होंने हुसैन से संपर्क किया और कहा कि वो ब्रिटेन में हमला करना चाहते हैं. अंडरकवर एजेंट्स ये पता करना चाहते थे कि हुसैन के साथ ब्रिटेन में और कौन-कौन जुड़ा है. हुसैन ने एजेंट्स को सलाह दी कि वो लंदन के ओ2 एरीना और ब्रिटिश म्यूज़ियम को निशाना बना सकते हैं. हुसैन ने उनसे कहा कि उनके पास ऐसे कुछ और लोग हैं जो ब्रिटेन में रहते हैं और हमला करने में मदद कर सकते हैं. हुसैन ने उनको सफ़ा के बारे में बताया और कहा कि वो ब्रिटेन में हमला करेगी. अनजाने में हुसैन ने अंडरकवर एजेंट्स को ये बता दिया था कि वो ब्रिटिश म्यूज़ियम को निशाना बनाने वाले हैं. सफ़ा ने कोर्ट के सामने माना था कि वो हुसैन के प्लान का हिस्सा थीं. कुछ दिन बाद हुसैन एक ड्रोन हमले में मारे गए. अंडरकवर एजेंट्स ने सफ़ा को चरमपंथी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. सफ़ा तो गिरफ्तार हो गई, लेकिन उसने अपनी मां और बहन को अपना मिशन को पूरा करने को कहा. इसके बाद सफ़ा की मां और बहन भी हमले की साजिश में शामिल हो गई. इसके बाद सफ़ा की मां और बहन ने हमले वाले इलाके की रेकी की. उन्होंने चाकू भी खरीदे. एक दिन बाद ही दोनों को गिरफ़्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक वो उसी दिन चरमपंथी हमला करने वाली थीं. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सफ़ा की बहन ने माना कि वो चाकू से हमले की तैयारी में थीं और इसमें उसकी मां ने मदद की. मां और बहन की सज़ा का ऐलान 15 जून को होगा. वहीं सफा की सज़ा करीब छह हफ्तों में तय की जाएगी. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
वो कथित इस्लामिक स्टेट के एक चरमपंथी के प्यार में पड़ी और यहीं से शुरू हो गया उसका प्लान. लंदन की अट्ठारह साल की सफ़ा बुलर ब्रिटेन में दोषी ठहराई गईं सबसे युवा महिला हैं. कोर्ट ने सफ़ा को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम पर चरमपंथी हमले की साजिश रचने का दोषी ठहराया है. ब्रिटिश म्यूज़ियम में रोज़ाना बहुत से पर्यटक आते हैं, ऐसे में वहां हमला होने पर जान-माल का भारी नुक़सान हो सकता था. सफ़ा बुलर कथित इस्लामिक स्टेट की पहली महिला सेल की सदस्य हैं. उन्हें दो तरह के जुर्म के लिए दोषी ठहराया गया है. पहला चरमपंथी हमले की साज़िश रचने और दूसरे सीरिया जाने की कोशिश करते पकड़े जाने के लिए. बुलर जब सोलह साल की थी तो उन्होंने सीरिया जाने की कोशिश की थी. उनपर आरोप था कि वो कथित इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने के लिए सीरिया जा रही थीं. बाद में जब सफ़ा के चरमपंथी मंगेतर की मौत हो गई तो उन्होंने लंदन में हमला करने का प्लान बनाया. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सफ़ा ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है. सिर्फ़ सोलह साल की सफ़ा ने कैसे चरमपंथ का रास्ते पकड़ लिया? सफ़ा ने ये राह सोशल मीडिया के ज़रिए पकड़ी. इस सब की शुरुआत दो हज़ार पंद्रह में पेरिस हमलों के बिल्कुल बाद हुई. उस वक्त सफ़ा सोलह साल की थीं. तब सफ़ा इंस्टाग्राम के ज़रिए एक आईएस लड़ाके नवीद हुसैन के संपर्क में आई. नवीद, सफ़ा से लगभग दोगुनी उम्र के थे. कई महीनों तक बातों का सिलसिला चलता रहा और एक दिन सफ़ा ने इंटरनेट के ज़रिए ही नवीद से अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मैसेजिंग एप के ज़रिए दोनों ने शादी भी कर ली. कोर्ट को मिले सबूतों के मुताबिक हुसैन से मिलने के लिए सफ़ा सीरिया जाना चाहती थी, लेकिन ब्रिटिश सिक्योरिटी सर्विस के अधिकारियों ने सफ़ा को एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया. उनका पासपोर्ट और फोन भी जब्त कर लिया गया. बाद में सफ़ा को छोड़ दिया गया. लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने सफ़ा पर कड़ी नज़र रखी. पुलिस के सामने सफ़ा ने कबूला था कि वो नवीद से बात करती हैं और मिलने के लिए सीरिया जा रही थीं. लेकिन सफा ने पुलिस से शादी की बात छिपाई. इसके बाद एम-पंद्रह के अंडरकवर एजेंट्स ने हुसैन पर नज़र रखना शुरू किया. वो उसके बारे में और जानकारी जुटाना चाहते थे. अंडरकवर एजेंट्स ने ऑनलाइन आईडी बनाई और खुद को ब्रिटिश चरमपंथियों के तौर पर पेश किया. उन्होंने हुसैन से संपर्क किया और कहा कि वो ब्रिटेन में हमला करना चाहते हैं. अंडरकवर एजेंट्स ये पता करना चाहते थे कि हुसैन के साथ ब्रिटेन में और कौन-कौन जुड़ा है. हुसैन ने एजेंट्स को सलाह दी कि वो लंदन के ओदो एरीना और ब्रिटिश म्यूज़ियम को निशाना बना सकते हैं. हुसैन ने उनसे कहा कि उनके पास ऐसे कुछ और लोग हैं जो ब्रिटेन में रहते हैं और हमला करने में मदद कर सकते हैं. हुसैन ने उनको सफ़ा के बारे में बताया और कहा कि वो ब्रिटेन में हमला करेगी. अनजाने में हुसैन ने अंडरकवर एजेंट्स को ये बता दिया था कि वो ब्रिटिश म्यूज़ियम को निशाना बनाने वाले हैं. सफ़ा ने कोर्ट के सामने माना था कि वो हुसैन के प्लान का हिस्सा थीं. कुछ दिन बाद हुसैन एक ड्रोन हमले में मारे गए. अंडरकवर एजेंट्स ने सफ़ा को चरमपंथी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. सफ़ा तो गिरफ्तार हो गई, लेकिन उसने अपनी मां और बहन को अपना मिशन को पूरा करने को कहा. इसके बाद सफ़ा की मां और बहन भी हमले की साजिश में शामिल हो गई. इसके बाद सफ़ा की मां और बहन ने हमले वाले इलाके की रेकी की. उन्होंने चाकू भी खरीदे. एक दिन बाद ही दोनों को गिरफ़्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक वो उसी दिन चरमपंथी हमला करने वाली थीं. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सफ़ा की बहन ने माना कि वो चाकू से हमले की तैयारी में थीं और इसमें उसकी मां ने मदद की. मां और बहन की सज़ा का ऐलान पंद्रह जून को होगा. वहीं सफा की सज़ा करीब छह हफ्तों में तय की जाएगी.
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पृथ्वी दिवस धरती को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के अपने संकल्प को दोहराने का मौका है। मोदी ने कहा, पृथ्वी दिवस धरती मां के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। प्रधानमंत्री ने कहा, हमारी जिम्मेदारी है कि हम धरती पर हमारे साथ मौजूद पेड़ पौधों, पशुओं और पक्षियों के साथ सौहार्द से रहें। यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। मोदी ने उम्मीद जताई कि इस साल के पर्यावरणीय और जलवायु साक्षरता की थीम से प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जागरुकता पैदा करने में मदद मिलेगी।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पृथ्वी दिवस धरती को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के अपने संकल्प को दोहराने का मौका है। मोदी ने कहा, पृथ्वी दिवस धरती मां के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। प्रधानमंत्री ने कहा, हमारी जिम्मेदारी है कि हम धरती पर हमारे साथ मौजूद पेड़ पौधों, पशुओं और पक्षियों के साथ सौहार्द से रहें। यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। मोदी ने उम्मीद जताई कि इस साल के पर्यावरणीय और जलवायु साक्षरता की थीम से प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जागरुकता पैदा करने में मदद मिलेगी।
सोई लोकाकास कहावै, तात परै अलोक रहावै । जामैं जीवादिक नहिं कोई, सुद्ध अकासरूप नभ होई ॥३८५ ॥ अब सुनि पुग्गल जीव कहानी, इनमैं गति थिति किरिया मानी। ताकै बाहिर कारन जानै धर्म अधर्म दुह परमानै ॥ ३८६ । जो कोइ धर्म अधर्महि खोवै, तो अलोक गति क्यों नहि हो । तातैं लोकालोक बढ़ाई, धर्म अधर्म देइ दिखराई ॥ ३८७ ॥ औ फुनि धर्माधर्म विचारै, गुन-परजै अस्तित्व निरारै । एक खेतकै दौनों वासी, एकमेक निःक्रिय अविनासी ॥३८८ ॥ पुग्गल जीव लोकमैं वरनै, क्रियावंत जित कित...... । धर्म अधर्म दोऊ सहकारी, तातैं लोकमात्र उपचारी ॥ ३८९ ॥ लोकालोक अनादि नभ, एक अखंड अपार । धर्म अधर्म अनादितैं, भया विभेद विचार ।। ३९० ॥ अथ धर्माधर्मयोर्गतिस्थिति हेतुत्वेऽत्यन्तौदासी न्यवर्णनं --गाथा । ण य गच्छदी धम्मत्थी गमणं ण करेदि अण्णदवियस्त । हवदि गती सप्पसरो जीवाणं पुग्गलाणं च ॥ ८८ ॥ दोहा । आप धरम चलता नहीं, औरहिं करहि न चाल । : पुगाल-जीव-सुभावकै, गति विस्तरै त्रिकाल ।। ३९१ ॥ जैसे वायु चले आप धुजाको चलावे और, तातैं धुजा हलनैका हेतु वायु कर्त्ता है।
सोई लोकाकास कहावै, तात परै अलोक रहावै । जामैं जीवादिक नहिं कोई, सुद्ध अकासरूप नभ होई ॥तीन सौ पचासी ॥ अब सुनि पुग्गल जीव कहानी, इनमैं गति थिति किरिया मानी। ताकै बाहिर कारन जानै धर्म अधर्म दुह परमानै ॥ तीन सौ छियासी । जो कोइ धर्म अधर्महि खोवै, तो अलोक गति क्यों नहि हो । तातैं लोकालोक बढ़ाई, धर्म अधर्म देइ दिखराई ॥ तीन सौ सत्तासी ॥ औ फुनि धर्माधर्म विचारै, गुन-परजै अस्तित्व निरारै । एक खेतकै दौनों वासी, एकमेक निःक्रिय अविनासी ॥तीन सौ अठासी ॥ पुग्गल जीव लोकमैं वरनै, क्रियावंत जित कित...... । धर्म अधर्म दोऊ सहकारी, तातैं लोकमात्र उपचारी ॥ तीन सौ नवासी ॥ लोकालोक अनादि नभ, एक अखंड अपार । धर्म अधर्म अनादितैं, भया विभेद विचार ।। तीन सौ नब्बे ॥ अथ धर्माधर्मयोर्गतिस्थिति हेतुत्वेऽत्यन्तौदासी न्यवर्णनं --गाथा । ण य गच्छदी धम्मत्थी गमणं ण करेदि अण्णदवियस्त । हवदि गती सप्पसरो जीवाणं पुग्गलाणं च ॥ अठासी ॥ दोहा । आप धरम चलता नहीं, औरहिं करहि न चाल । : पुगाल-जीव-सुभावकै, गति विस्तरै त्रिकाल ।। तीन सौ इक्यानवे ॥ जैसे वायु चले आप धुजाको चलावे और, तातैं धुजा हलनैका हेतु वायु कर्त्ता है।
Giridih : गिरिडीह (Giridih)- 12 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने गिरिडीह जिले के 15 हजार बीजेपी कार्यकर्ता देवघर जाएंगे. इसे लेकर बीजेपी की बैठक 8 जुलाई को विधायक केदार हाजरा के आवासीय कार्यालय में हुई. बैठक की अध्यक्षता पार्टी के जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने की. 12 जुलाई को पीएम देवघर में नवनिर्मित एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. बैठक में केदार हाजरा ने कहा कि पीएम के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ता उत्साहित हैं. पीएम के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं ने तैयारी शुरू कर दी है. महादेव दुबे ने कहा कि जिले में कुल 24 मंडल हैं. सभी 24 मंडलों के अध्यक्ष और महामंत्री दिन रात मेहनत कर रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं. तैयारी अंतिम चरण में है. बैठक में पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार, पूर्व जिलाध्यक्ष यदुनंदन पाठक समेत प्रणव वर्मा, अशोक उपाध्याय, दिलीप वर्मा, छोटेलाल यादव, प्रणव वर्मा, दिनेश यादव, विनय सिंह, प्रकाश सेठ मौजूद थे.
Giridih : गिरिडीह - बारह जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने गिरिडीह जिले के पंद्रह हजार बीजेपी कार्यकर्ता देवघर जाएंगे. इसे लेकर बीजेपी की बैठक आठ जुलाई को विधायक केदार हाजरा के आवासीय कार्यालय में हुई. बैठक की अध्यक्षता पार्टी के जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने की. बारह जुलाई को पीएम देवघर में नवनिर्मित एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. बैठक में केदार हाजरा ने कहा कि पीएम के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ता उत्साहित हैं. पीएम के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं ने तैयारी शुरू कर दी है. महादेव दुबे ने कहा कि जिले में कुल चौबीस मंडल हैं. सभी चौबीस मंडलों के अध्यक्ष और महामंत्री दिन रात मेहनत कर रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं. तैयारी अंतिम चरण में है. बैठक में पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार, पूर्व जिलाध्यक्ष यदुनंदन पाठक समेत प्रणव वर्मा, अशोक उपाध्याय, दिलीप वर्मा, छोटेलाल यादव, प्रणव वर्मा, दिनेश यादव, विनय सिंह, प्रकाश सेठ मौजूद थे.
के ऐश्वर्यादि छः गुण तिरोहित हो जाते हैं और तभी बन्ध और विपर्यय होता है । ऐश्वर्य के छिपने से दीनत्व और पराधीनता, वीर्य के तिरोभाव से अनेक दुःख, यश के तिरोधान से हीनत्व, श्री के तिरोधान से जन्म-मरण के अनेक दोष, ज्ञान के तिरोभाव से ग्रहं बुद्धि और सब पदार्थों में विपरीत ज्ञान होता है तथा वैराग्य के तिरोभाव से विषयों में सक्कि पैदा होती है। इस प्रकार जीव भ्रम में बँधकर संसार चक्र में घूमता है। भगवान् के भजन से विमुख जीव अनेक कष्ट उठाता है। विद्यारूपी दोष से छुटने के लिए भगवान् के भजन की आवश्यकता है। जिस जीव में उपर्युक्त छः धर्म और उसका आनन्दांश प्रकट हो जाता है, वह जीव संसार-दुःख से मुक्ति पाता है और भगवान् की कृपा से चार मुक्तियों का भागी होता है । जीव ज्योति-रूप है और प्राकृत कार से रहित है । जीव देह की प्राकृत इन्द्रियाँ उसके भगवदंश रूप का ज्ञान नहीं कर सकतीं। मन के नियंत्रण से इन्द्रिय-निग्रह का उपाय सभी भारतीय धर्मों ने बताया है । वल्लभाचार्य जी ने स्वरूप ज्ञान के लिए तीन निम्नलिखित मार्गों का कथन किया है, जो बहुधा भारतवर्ष में प्रचलित रहे हैं - १ - योग- सिद्धि का मार्ग । २ - दिव्यज्ञान का मार्ग । ३ - उस भगवद् कृपा-दृष्टि के लाभ का मार्ग जिससे प्रसन्न हो भगवान् अनन्दांश का लाभ देते हैं । वल्लभाचार्य जी ने निर्देश तो इन तीनों मार्गों का किया है, परन्तु सबसे उपयोगी और सरल मार्ग उन्होंने भगवद्भक्ति और भगवद्-अनुग्रहपुष्टि का ही बताया है । जीव और ब्रह्म के अणुभाष्य में २ अध्याय, ३ पाद के ४३ वें सूत्र में वल्लभ-सम्प्रदाय के अनुसार जीव मात्र है और उसका तेज प्रकाश की तरह अथवा १ - अस्य जीवस्यैश्वर्यादि तिरोहितम् । तस्माद् ईश्वरेच्छया जीवस्य भगवद्धर्मतिरोभावः । ऐश्वर्यतिरोभावाद्दीनत्वं, पराधीनत्वं, वीर्यतिरोभावात् सर्वदुःखसहनं, यशस्तिरोभावात् सर्वहीनत्वं, श्री तिरोभावाज्जन्मादिसर्वाप दिवषयत्वं, ज्ञानतिरोभावा देहादिष्वहंबुद्धिः सर्वविपरीतज्ञानं चापस्मारसहितस्येव, वैराग्यतिरोभावाद् विषयासक्तिः, बन्धश्चतुर्णा कार्यो विपर्ययो द्वयोस्तिरोभावादेवैवं नान्यथा ...... आनन्दांशस्तु पूर्वमेव तिरोहितो, येन जीवभावः अतएव काममयः । -अणुभाष्य, ३ अध्याय, २ पाद सूत्र, १ । २ - प्रकाशकं तच्चैतन्यं तेजोवत्तेन भासते । न प्राकृतेंद्रियैर्ग्राह्यं न प्रकाश्यं च केनचित् । २८ योगेन भगवद्द्दृष्ट्या दिव्यया वा प्रकाशते । आभासप्रतिबिंबत्वमेवं तस्य न चान्यथा । ६० । त० दी० नि०, शास्त्रार्थं प्रकरण, ज्ञान सागर, बम्बई १० १७३ तथा १७८ ।
के ऐश्वर्यादि छः गुण तिरोहित हो जाते हैं और तभी बन्ध और विपर्यय होता है । ऐश्वर्य के छिपने से दीनत्व और पराधीनता, वीर्य के तिरोभाव से अनेक दुःख, यश के तिरोधान से हीनत्व, श्री के तिरोधान से जन्म-मरण के अनेक दोष, ज्ञान के तिरोभाव से ग्रहं बुद्धि और सब पदार्थों में विपरीत ज्ञान होता है तथा वैराग्य के तिरोभाव से विषयों में सक्कि पैदा होती है। इस प्रकार जीव भ्रम में बँधकर संसार चक्र में घूमता है। भगवान् के भजन से विमुख जीव अनेक कष्ट उठाता है। विद्यारूपी दोष से छुटने के लिए भगवान् के भजन की आवश्यकता है। जिस जीव में उपर्युक्त छः धर्म और उसका आनन्दांश प्रकट हो जाता है, वह जीव संसार-दुःख से मुक्ति पाता है और भगवान् की कृपा से चार मुक्तियों का भागी होता है । जीव ज्योति-रूप है और प्राकृत कार से रहित है । जीव देह की प्राकृत इन्द्रियाँ उसके भगवदंश रूप का ज्ञान नहीं कर सकतीं। मन के नियंत्रण से इन्द्रिय-निग्रह का उपाय सभी भारतीय धर्मों ने बताया है । वल्लभाचार्य जी ने स्वरूप ज्ञान के लिए तीन निम्नलिखित मार्गों का कथन किया है, जो बहुधा भारतवर्ष में प्रचलित रहे हैं - एक - योग- सिद्धि का मार्ग । दो - दिव्यज्ञान का मार्ग । तीन - उस भगवद् कृपा-दृष्टि के लाभ का मार्ग जिससे प्रसन्न हो भगवान् अनन्दांश का लाभ देते हैं । वल्लभाचार्य जी ने निर्देश तो इन तीनों मार्गों का किया है, परन्तु सबसे उपयोगी और सरल मार्ग उन्होंने भगवद्भक्ति और भगवद्-अनुग्रहपुष्टि का ही बताया है । जीव और ब्रह्म के अणुभाष्य में दो अध्याय, तीन पाद के तैंतालीस वें सूत्र में वल्लभ-सम्प्रदाय के अनुसार जीव मात्र है और उसका तेज प्रकाश की तरह अथवा एक - अस्य जीवस्यैश्वर्यादि तिरोहितम् । तस्माद् ईश्वरेच्छया जीवस्य भगवद्धर्मतिरोभावः । ऐश्वर्यतिरोभावाद्दीनत्वं, पराधीनत्वं, वीर्यतिरोभावात् सर्वदुःखसहनं, यशस्तिरोभावात् सर्वहीनत्वं, श्री तिरोभावाज्जन्मादिसर्वाप दिवषयत्वं, ज्ञानतिरोभावा देहादिष्वहंबुद्धिः सर्वविपरीतज्ञानं चापस्मारसहितस्येव, वैराग्यतिरोभावाद् विषयासक्तिः, बन्धश्चतुर्णा कार्यो विपर्ययो द्वयोस्तिरोभावादेवैवं नान्यथा ...... आनन्दांशस्तु पूर्वमेव तिरोहितो, येन जीवभावः अतएव काममयः । -अणुभाष्य, तीन अध्याय, दो पाद सूत्र, एक । दो - प्रकाशकं तच्चैतन्यं तेजोवत्तेन भासते । न प्राकृतेंद्रियैर्ग्राह्यं न प्रकाश्यं च केनचित् । अट्ठाईस योगेन भगवद्द्दृष्ट्या दिव्यया वा प्रकाशते । आभासप्रतिबिंबत्वमेवं तस्य न चान्यथा । साठ । तशून्य दीशून्य निशून्य, शास्त्रार्थं प्रकरण, ज्ञान सागर, बम्बई दस एक सौ तिहत्तर तथा एक सौ अठहत्तर ।
बस के खाई में गिरने पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय पुलिस को जानकारी मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआरपीएफ के जवानों ने भी हाथ लगाया। गहरी खाई से लोगों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आज सुबह बड़ा हादसा हुआ है। अमृतसर से कटरा जा रही एक बस गहरी खाई में गिर गई। बस में 75 श्रद्धालु सवार थे। ये सभी लोग बिहार के बताए जा रहे हैं। ये सभी वैष्णों देवी के दर्शन करने जा रहे थे। खाई में बस गिरने से 10 लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। घायलों को जम्मू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक झज्जर कोटली के पास पहुंचने पर बस ड्राइवर का उससे नियंत्रण खत्म हो गया। बस लहराती हुई खाई की तरफ गई और उसमें गिर गई। बस के खाई में गिरने पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय पुलिस को जानकारी मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआरपीएफ के जवानों ने भी हाथ लगाया। गहरी खाई से लोगों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हादसे में घायल हुए कई बस यात्रियों की हालत गंभीर है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। जम्मू प्रशासन सभी घायलों को अच्छी से अच्छी चिकित्सा दिला रहा है। इस मामले में और जानकारी की प्रतीक्षा है।
बस के खाई में गिरने पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय पुलिस को जानकारी मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआरपीएफ के जवानों ने भी हाथ लगाया। गहरी खाई से लोगों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आज सुबह बड़ा हादसा हुआ है। अमृतसर से कटरा जा रही एक बस गहरी खाई में गिर गई। बस में पचहत्तर श्रद्धालु सवार थे। ये सभी लोग बिहार के बताए जा रहे हैं। ये सभी वैष्णों देवी के दर्शन करने जा रहे थे। खाई में बस गिरने से दस लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। घायलों को जम्मू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक झज्जर कोटली के पास पहुंचने पर बस ड्राइवर का उससे नियंत्रण खत्म हो गया। बस लहराती हुई खाई की तरफ गई और उसमें गिर गई। बस के खाई में गिरने पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय पुलिस को जानकारी मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआरपीएफ के जवानों ने भी हाथ लगाया। गहरी खाई से लोगों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हादसे में घायल हुए कई बस यात्रियों की हालत गंभीर है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। जम्मू प्रशासन सभी घायलों को अच्छी से अच्छी चिकित्सा दिला रहा है। इस मामले में और जानकारी की प्रतीक्षा है।
मत्त संगोल बोली नहीं समझता । खोदकार (स्वामी ? ) के कारण ही रण में जूझना था। कभी कच्चे मांस का ही भोजन करता था आँखें उसकी मदिरा रस से लाल थीं। आधे दिन में ही बीस योजन दौड़ जाए। बगल में रक्खी हुई रोटी से दिन काट दे । येल को काट कर कसान में जोड़ता था, पहाड़ के ऊपर घोड़े के साथ दौड़ कर चलता था। गो और ब्राह्मण के वध करने से पाप नहीं भोजता, वैरी के नगर की स्त्रियों को कैद कर लाता । मानन्दित होने पर जवान तुर्क सैकड़ों बातों में सहया ही जैसे रुण्ड हँसे वैसे हंसता था । और कैसे धड़ दिखाई देते थे-ऐसे जो गाय मार कर विस्मल्ला कर खा लेते थे। इस प्रकार बड़े बड़े धगाड़ फौज में शामिल थे, सिधर ही वह निकल जाते थे उधर ही के राजा के घर की युवतियाँ बाजार में विकने लगती थीं ।
मत्त संगोल बोली नहीं समझता । खोदकार के कारण ही रण में जूझना था। कभी कच्चे मांस का ही भोजन करता था आँखें उसकी मदिरा रस से लाल थीं। आधे दिन में ही बीस योजन दौड़ जाए। बगल में रक्खी हुई रोटी से दिन काट दे । येल को काट कर कसान में जोड़ता था, पहाड़ के ऊपर घोड़े के साथ दौड़ कर चलता था। गो और ब्राह्मण के वध करने से पाप नहीं भोजता, वैरी के नगर की स्त्रियों को कैद कर लाता । मानन्दित होने पर जवान तुर्क सैकड़ों बातों में सहया ही जैसे रुण्ड हँसे वैसे हंसता था । और कैसे धड़ दिखाई देते थे-ऐसे जो गाय मार कर विस्मल्ला कर खा लेते थे। इस प्रकार बड़े बड़े धगाड़ फौज में शामिल थे, सिधर ही वह निकल जाते थे उधर ही के राजा के घर की युवतियाँ बाजार में विकने लगती थीं ।
Bhopal / भोपाल। इस समय कांग्रेस के नेता सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे। बुधवार को एक ओर इंदौर में कांग्रेसी राजनैतिक रैली को छूट तो धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे थे। वही भोपाल में बढे बिजली के विरोध में कांग्रेसी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए ऊर्जा मंत्री तोमर के बंगले पर पहुंचे। युवक कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष नरेंद्र यादव के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया और भैंस के आगे बीन भी बजाई। युवक कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेशाध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश सरकार को गरीबो से कोई लेना देना नही है। वह अपनी तिजोरी भरने के लिए बेतहासा महंगाई बढ़ा रही है। बिजली के बिलों से व्यापारी, मजदूर, किसान के साथ आम नागरिक भी परेशान हैं। बिना रीडिंग के बिल जारी किया जा रहा है। उनका कहना था कि अगर सरकार बिजली के बढे रेट को कम नहीं करती तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। विरोध कर रहे कांग्रेस के नेता भैस के साथ ऊर्जा मंत्री के बंगले पर पहुंचे। लोगों ने विरोध करते हुए भैस के सामने बीन बजाई। वही भैस की पीठ पर बैनर टांग दिया था जिसमे लिखा था कि बढे हुए और गलत बिजली बिलों के विरोध में प्रदर्शन। प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष आकाश चौहान, लोकेंद्र शर्मा, चेतन साहू, फैज बेग, आतिफ अली, अशर खान, नरेंद्र बघेल, सिद्धार्थ झा, सुमित गुर्जर, रमीज खान आदि मौजूद थे।
Bhopal / भोपाल। इस समय कांग्रेस के नेता सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे। बुधवार को एक ओर इंदौर में कांग्रेसी राजनैतिक रैली को छूट तो धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे थे। वही भोपाल में बढे बिजली के विरोध में कांग्रेसी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए ऊर्जा मंत्री तोमर के बंगले पर पहुंचे। युवक कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष नरेंद्र यादव के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया और भैंस के आगे बीन भी बजाई। युवक कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेशाध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश सरकार को गरीबो से कोई लेना देना नही है। वह अपनी तिजोरी भरने के लिए बेतहासा महंगाई बढ़ा रही है। बिजली के बिलों से व्यापारी, मजदूर, किसान के साथ आम नागरिक भी परेशान हैं। बिना रीडिंग के बिल जारी किया जा रहा है। उनका कहना था कि अगर सरकार बिजली के बढे रेट को कम नहीं करती तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। विरोध कर रहे कांग्रेस के नेता भैस के साथ ऊर्जा मंत्री के बंगले पर पहुंचे। लोगों ने विरोध करते हुए भैस के सामने बीन बजाई। वही भैस की पीठ पर बैनर टांग दिया था जिसमे लिखा था कि बढे हुए और गलत बिजली बिलों के विरोध में प्रदर्शन। प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष आकाश चौहान, लोकेंद्र शर्मा, चेतन साहू, फैज बेग, आतिफ अली, अशर खान, नरेंद्र बघेल, सिद्धार्थ झा, सुमित गुर्जर, रमीज खान आदि मौजूद थे।
ऊर्जा (अंग्रेज़ीःEnergy) से तात्पर्य है कि- "किसी वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है, उसे वस्तु की 'ऊर्जा' कहते हैं। ऊर्जा एक अदिश राशि है और इसका मात्रक 'जूल' होता है। वस्तु में जिस कारण से कार्य करने की क्षमता आ जाती है, उसे ही ऊर्जा कहा जाता है। ऊर्जा सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए तथा किसी भी देश में मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। किसी भी देश की सम्पन्नता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस देश में ऊर्जा के स्रोत क्या-क्या हैं और उनका कितना उपयोग हो रहा है। कई प्रकार के उपायों द्वारा ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा की मात्रा सर्वदा एक ही रहती है। उसमें कमी नहीं होती। इसे ऊर्जा का अविनाशिता का सिद्धांत कहा जाता है। जैसा कि कहा गया है कि- "कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं", परंतु सारी ऊर्जा को कार्य में परिणत करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि "ऊर्जा वह है, जो उतनी ही घटती है, जितना कि कार्य किया जाता है।" इस कारण ऊर्जा को नापने के वे ही एकक होते हैं, जो कार्य को नापने के होते हैं। यदि एक किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाया जाता है तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध एक विशेष मात्रा में कार्य करना पड़ता है। यदि इसी भार को दो मीटर ऊँचा उठाया जाये अथवा दो किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाएँ तो दोनों दशाओं में पहले की अपेक्षा दुगुना कार्य करना पड़ता है। इससे प्रकट होता है कि कार्य का परिमाण उस बल के परिमाण पर, जिसके विरुद्ध कार्य किया जाए और उस दूरी के परिमाण पर, जिस दूरी द्वारा उस बल के विरुद्ध कार्य किया जाए, निर्भर रहता है और इन दोनों परिमाणों के गुणनफल के बराबर होता है। साधारणतः कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जब धनुष से शिकार करने वाला कोई शिकारी धनुष को झुकाता है तो धनुष में ऊर्जा आ जाती है, जिसका उपयोग बाण को शिकार तक चलाने में किया जाता है। बहते पानी में ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पनचक्की चलाने में अथवा किसी दूसरे काम के लिए किया जा सकता है। इसी तरह बारूद में भी ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पत्थर की शिलाएँ तोड़ने अथवा तोप से गोला दागने में हो सकता है। बिजली की धारा में ऊर्जा होती है, जिससे बिजली की मोटर चलाई जा सकती है। सूर्य के प्रकाश में भी ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग प्रकाश सेलों द्वारा बिजली की धारा उत्पन्न करने में किया जा सकता है। ऐसे ही अणु बम में 'नाभिकीय ऊर्जा' रहती है, जिसका उपयोग शत्रु का विध्वंस करने अथवा अन्य कार्यों में किया जाता है। झुके हुए धनुष में जो ऊर्जा होती है, उसे 'स्थितिज ऊर्जा' कहते हैं, बहते पानी की ऊर्जा 'गतिज ऊर्जा' है, बारूद की ऊर्जा 'रासायनिक ऊर्जा' है, बिजली की धारा की ऊर्जा 'वैद्युत ऊर्जा' है, सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को 'प्रकाश ऊर्जा' कहते हैं। सूर्य में जो ऊर्जा है, वह उसके ऊँचे ताप के कारण है। ऊर्जा की सरल परिभाषा देना कठिन है। ऊर्जा वस्तु नहीं है। इसको हम देख नहीं सकते, यह कोई जगह नहीं घेरती, न इसकी कोई छाया ही पड़ती है। संक्षेप में, अन्य वस्तुअें की भाँति यह द्रव्य नहीं है, यद्यापि बहुधा द्रव्य से इसका घनिष्ठ संबंध रहता है। फिर भी इसका अस्तित्व उतना ही वास्तविक है जितना किसी अन्य वस्तु का और इस कारण कि किसी पिंड समुदाय में, जिसके ऊपर किसी बाहरी बल का प्रभाव नहीं रहता, इसकी मात्रा में कमी बेशी नहीं होती। विज्ञान इसका महत्वपूर्ण स्थान है। साधारणतः कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जब धनुष से शिकार करनेवाला कोई शिकारी धनुष को झुकाता है तो धनुष में ऊर्जा आ जाती है जिसका उपयोग बाण को शिकार तक चलाने में किया जाता है। बहते पानी में ऊर्जा होती है जिसका उपयोग पनचक्की चलाने में अथवा किसी दूसरे काम के लिए किया जा सकता है। इसी तरह बारूद में ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पत्थर की शिलाएँ तोड़ने अथवा तोप से गोला दागने में हो सकता है। बिजली की धारा में ऊर्जा होती है जिससे बिजली की मोटर चलाई जा सकती है। सूर्य के प्रकाश में ऊर्जा होती है जिसका उपयोग प्रकाशसेलों द्वारा बिजली की धारा उत्पन्न करने में किया जा सकता है। ऐसे ही अणुबम में नाभिकीय ऊर्जा रहती है जिसका उपयोग शत्रु का विध्वंस करने अथवा अन्य कार्यों में किया जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि ऊर्जा कई रूपों में पाई जाती है। झुके हुए धनुष में जो ऊर्जा है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं, बहते पानी की ऊर्जा गतिज ऊर्जा है, बारूद की ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा है, बिजली की धारा की ऊर्जा वैद्युत ऊर्जा है, सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा कहते हैं। सूर्य में जो ऊर्जा है वह उसके ऊँचे ताप के कारण है। इसको उष्मा ऊर्जा कहते हैं। विभिन्न उपायों द्वारा ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा की मात्रा सर्वदा एक ही रहती है। उसमें कमी बेशी नहीं होती। इसे ऊर्जा-अविनाशिता-सिद्धांत कहते हैं। ऊपर कहा गया है कि कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। परंतु सारी ऊर्जा को कार्य में परिणत करना सर्वदा संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि ऊर्जा वह वस्तु है जो उतनी ही घटती है जितना कार्य होता है। इस कारण ऊर्जा को नापने के वे ही एकक होते हैं। जो कार्य को नापने के। यदि हम एक किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाते हैं तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध एक विशेष मात्रा में कार्य करना पड़ता है। यदि हम इसी भार को दो मीटर ऊँचा उठाएँ अथवा दो किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाएँ तो दोनों दशाओं में पहले की अपेक्षा दूना कार्य करना पड़ेगा। इससे प्रकट होता है कि कार्य का परिमाण उस बल के परिमाण पर, जिसके विरुद्ध कार्य किया जाए, और उस दूरी के परिमाण पर, जिस दूरी द्वारा उस बल के विरुद्ध कार्य किया जाए, निर्भर रहता है और इन दोनों परिमाणों के गुणनफल के बराबर होता है। कार्य की किसी भी मात्रा को हम कार्य का एकक मान सकते हैं। उदाहरणतः एक किलोग्राम भार को पृथ्वी के आकर्षण के विरुद्ध एक मीटर ऊँचा उठाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे एकक माना जा सकता है। परंतु पृथ्वी का आकर्षण सब जगह एक समान नहीं होता। इसका जो मान मद्रास में है वह दिल्ली में नहीं है। इसलिए यह एकक असुविधापूर्ण है। फिर भी बहुत से देशों में इंजीनियर ऐसे ही एकक का उपयोग करते हैं। जिसे फुट-पाउंड कहते हैं। यह उस कार्य की मात्रा है जो लंदन के अक्षांश में समुद्रतट पर एक पाउंड को एक दूसरे ही एकक का प्रयोग किया जाता है जो सेंटीमीटर-ग्राम-सेंकड के ऊपर निर्भर है। इसमें बल के एकक को 'डाइन' (Dyne) कहते हैं। डाइन बल का वह एकक है जो एक ग्राम के पिंड में एक सेकंड में एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड का वेग उत्पन्न कर सकता है। इस बल के क्रियाबिंदु को इसके विरुद्ध एक सें. मी. हटाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे वर्ग कहते हैं। परंतु व्यावहारिक दृष्टि से कार्य का यह एकक बहुत छोटा है। अतएव दैनिक व्यवहार में एक दूसरा एकक उपयोग में लाया जाता है। इसमें लंबाई का एकक सेंटीमीटर के स्थान पर मीटर है तथा द्रव्यमान का एकक ग्राम के स्थान पर किलोग्राम है। इसमें बल का एकक 'न्यूटन' है। न्यूटन बल का वह एकक है जो एक किलोग्राम के पिंड में एक सेकंड में एक मीटर प्रति सेकंड का वेग उत्पन्न कर सकता है। इस तरह न्यूटन 105 डाइन के बराबर होता है। इस बल के क्रियाबिंदु को उसके विरुद्ध एक मीटर तक हटाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे जूल कहते हैं। एक जूल 107 वर्गो के बराबर होता है। पेरिस के अक्षांश में न्यूटन लगभग 1/181 किलोग्राम को एक मीटर ऊँचा उठाने में किए गए कार्य के बराबर। ऊर्जा को भी इन्हीं एककों में नापा जाता है। परंतु कभी कभी विशेष स्थलों पर कुछ अन्य एककों का उपयोग होता है। इनमें एक इलेक्ट्रान वोल्ट है। वह ऊर्जा का वह एकक है जिसे इलेक्ट्रान का वोल्ट के विभवांतर (पोटेंशियल डिफ़रेंस) से गुजरने पर प्राप्त करता है। यह बहुत छोटा एकक है और केवल 1.60'10-12 अर्ग के बराबर होता है। इसके अतिरिक्त घरों में उपयोग में आनेवाली वैद्युत ऊर्जा को नापने के लिए एक दूसरे एकक का उपयोग होता है, जिसे किलोवाट-घंटा कहते हैं और जो 3.6'106 जूलों के बराबर होता है। यांत्रिक ऊर्जा - उन वस्तुओं की अपेक्षा, जिनके अस्तित्व का अनुमान हम केवल तर्क के आधार पर कर सकते हैं, हमें उन वस्तुओं का ज्ञान अधिक सुगमता से होता है जिन्हें हम स्थूल रूप से देख सकते हैं। मनुष्य के मस्तिष्क में ऊर्जा के उस रूप की भावना सबसे प्रथम उदय हुई जिसका संबंध बड़े बड़े पिंडों से है और जिसे यंत्रों की सहायता से कार्यरूप में परिणात होते हम स्पष्टतः देख सकते हैं। इस यांत्रिक ऊर्जा के दो रूप हैं : एक स्थितिज ऊर्जा एवं दूसरा गतिज ऊर्जा। इसके विपरीत उस ऊर्जा का ज्ञान जिसका संबंध अणुओं तथा परमाणुओं की गति से है, मनुष्य को बाद में हुआ। इस कारण यह कम आश्चर्य की बात नहीं है कि न्यूटन से भी पहले फ्रांसिस बेकन की यह धारणा थी कि उष्मा द्रव्य के कणों की गति के कारण है। ऊर्जा-अविनाशिता - सिद्धांत की ओर पहला पद प्रसिद्ध डच वैज्ञानिक क्रिश्चियन हाइगेंज़ ने उठाया जो न्यूटन का समकालीन था। अपनी एक पुस्तक में, जो हाइगेंज़ ने कहा कि जब दो पूर्णतः प्रत्यास्थ (इलैस्टिक) पिंड़ों में संघात (टक्कर) होता है तो उनके द्रव्यमानों और उनके वेगों के गुणनफलों का योग संघात के बाद भी उतना ही रहता है जितना टक्कर के पहले। कुछ लोगों का अनुमान है कि यांत्रिक ऊर्जा की अविनाशिता के सिद्धांत का पता न्यूटन को था। परंतु स्पष्ट शब्दों से सबसे पहले लाग्राँज़ ने इसे सन् 1788 ई. में व्यक्त किया। लाग्राँज़ के अनुसार ऐसे पिंडसमुदाय में जिसपर किसी बाहरी बल का प्रभाव न पड़ रहा हो, यांत्रिक ऊर्जा, अर्थात् स्थितिज ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा का योग, सर्वदा एक ही रहता है। स्थितिज ऊर्जा - एक किलोग्राम भार के एक पिंड को पृथ्वी के आकर्षण के विरुद्ध एक मीटर ऊँचा उठाने में जो कार्य करना पड़ता है उसे हम किलोग्राम-मीटर कह सकते हैं और यह लगभग 981 जूलों के बराबर होता है। यदि हम एक डोर लेकर ओर उसे एक घिरनी के ऊपर डालकर उसके दोनों सिरों से लगभग एक किलोग्राम के पिंड बाँधे और उन्हें ऐसी अवस्था में छोड़ें कि वे दोनों एक ही ऊँचाई पर न हों और ऊँचे पिंड को बहुत धीरे-से नीचे आने दें तो हम देखेंगे कि एक किलोग्राम के पिंड को एक मीटर ऊँचा उठा देगा। घिरनी में घर्षण जितना ही कम होगा दूसरा पिंड भार में उतना ही पहले पिंड के भार के बराबर रखा जा सकेगा। इसक अर्थ यह हुआ कि यदि हम किसी पिंड को पृथ्वी से ऊँचा बढ़ जाती है। एक किलोग्राम भार के पिंड को यदि 5 मीटर ऊँचा उठाया जाए तो उसमें 5 किलोग्राम-मीटर कार्य करने की क्षमता आ जाती है, एवं उसकी ऊर्जा पहले की अपेक्षा उसी परिमाण में बढ़ जाती है। यह ऊर्जा पृथ्वी तथा पिंड की आपेक्षिक स्थिति के कारण होती है और वस्तुतः पृथ्वी एवं पिंड द्वारा बने तंत्र (सिस्टम) की ऊर्जा होती है। इसीलिए इसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। जब कभी भी पिंडों के किसी समुदाय की पारस्परिक दूरी अथवा एक ही पिंड के विभिन्न भागों की स्वाभाविक स्थिति में अंतर उत्पन्न होता है तो स्थितिज ऊर्जा में भी अंतर आ जाता है। कमानी को दबाने से अथवा धनुष को झुकाने से उनमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। नदियों में बाँध बाँधकर पानी को अधिक ऊँचाई पर इकट्ठा किया जाए तो इस पानी में स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। गतिज ऊजार् - न्यूटन ने बल की यह परिभाषा दी कि बल संवेग (मोमेंटम) के परिवर्तन की दर के बराबर होता है। यदि द्र (m) किलोग्राम का कोई पिंड प्रारंभ में स्थिर हो और उसपर एक नियत बल स (t) सेंकड तक कार्य करके जो वेग उत्पन्न करे उसका मान वे (V)मीटर प्रति सेकंड हो तो बल का मान ब = द्र वे/स (F=mv/t) न्यूटन होगा। इसी समय में पिंड जो दूरी तै करे वह यदि दू (d) मीटर हो तो बल द्वारा किया गया कार्य ब दू (Fd) जूल के बराबर होगा। परंतु द ू= वेस/2 (d=vt/2)। अर्थात द्र (m) द्रव्यमानवालें पिंड का वेग यदि वे (v) हो तो उसकी ऊर्जा 1/2 द्रवे2 (mv2) होगी। यह ऊर्जा उस पिंड में उसकी गति के कारण होती है और गतिज ऊर्जा कहलाती है। जब हम धनुष को झुकाकर तीर छोड़ते हैं तो धनुष की स्थितिज ऊर्जा तीर की गतिज ऊर्जा मे परिवर्तन हो जाती है। स्थितिज ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा के पारस्परिक परिवर्तन का सबसे सुंदर उदाहरण सरल लोलक है। जब हम लोलक के गोलक को एक ओर खींचते हैं तो गोलक अपनी साधारण स्थिति से थोड़ा ऊँचा उठ जाता है और इसमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब हम गोलक को छोड़ते हैं तो गोलक इधर उधर झूलने लगता है। जब गोलक लटकने की साधारण स्थिति में आता है तो इसमें केवल गतिज ऊर्जा रहती है। संवेग के कारण गोलक दूसरी ओर चला जाता है और गतिज ऊर्जा पुनः स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। साधारणतः वायु के घर्षण के विरुद्ध कार्य करने से गोलक की ऊर्जा कम होती जाती है और इसकी गति कुछ देर में बंद हो जाती है। यदि घर्षण का बल न हो तो लोलक अनंत काल तक चलता रहेगा। उष्मा ऊर्जा - गति विज्ञान में ऊर्जा-अविनाशिता-सिद्धांत के प्रमाणित हो जाने के बाद भी इसके दूसरे स्वरूपों का ज्ञान न होने के कारण यह समझा जाता था कि कई स्थितियों में ऊर्जा नष्ट भी हो सकती है; जैसे, जब किसी पिंडसमुदाय के विभिन्न भागों में अपेक्षिक गति हो तो घर्षण के कारण स्थितिज और गतिज ऊर्जा कम हो जाती है। वस्तुतः ऐसी स्थितियों में ऊर्जा नष्ट नहीं होती वरन् उष्मा ऊर्जा में परिवर्तन हो जाती है। परंतु 18वीं शताब्दी तक उष्मा को ऊर्जा का ही एक स्वतंत्र स्वरूप नहीं समझा जाता था। उस समय तक यह धारणा थी कि उष्मा एक द्रव्य है। 19वीं शताब्दी में प्रयोगों द्वारा यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया गया कि उष्मा भी ऊर्जा का ही एक दूसरा रूप है। यों तो प्रागैतिहासिक काल में भी मनुष्य लकड़ियों को रगड़कर अग्नि उत्पन्न करता था, परंतु ऊर्जा एवं उष्मा के घनिष्ठ संबंध की ओर सबसे पहले बेंजामिन टामसन (काउंट रुमफर्ड) का ध्यान गया। यह संयुक्त राज्य (अमरीका) के मैसाचूसेट्स प्रदेश का रहनेवाला था। परंतु उस समय यह बवेरिया के राजा का युद्धमंत्री था। ढली हुई पीतल की तोप की नलियों को छेदते समय इसने देखा कि नली बहुत गर्म हो जाती है तथा उससे निकले बुरादे और भी गरम हो जाते हैं। एक प्रयोग में तोप की नाल के चारों ओर काठ की नाँद में पानी भरकर उसने देखा कि खरादने से जो उष्मा उत्पन्न होती है उससे ढाई घंटे में सारा पानी उबलने के ताप तक पहुँच गया। इस प्रयोग में उसका वास्तविक ध्येय यह सिद्ध करना था कि उष्मा कोई द्रव नहीं है जो पिंडों में होती है और दाब के कारण वैसे ही बाहर निकल आती है जैसे निचोड़ने से कपड़े में से पानी; क्योंकि यदि ऐसा होता तो किसी पिंड में यह द्रव एक सीमित मात्रा में ही होता, परंतु छेदनेवाले प्रयोग से ज्ञात होता है कि जितना ही अधिक कार्य किया जाए उतनी ही अधिक उष्मा उत्पन्न होगी। रुमफर्ड ने यह प्रयोग सन् 1798 ई. में किया। इसके 20 वर्ष पहले ही लाव्वाजिए तथा लाग्राँज़ ने यह देखा था कि जानवरों में भोजन से उतनी ही उष्मा उत्पन्न होती है जितनी रासायनिक क्रिया द्वारा उस भोजन से प्राप्त हो सकती है। सन् 1819 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक डयूलों ने देखा कि किसी गैस के संपीडन से उसमें उष्मा उसी अनुपात में उत्पन्न होती है जितना संपीडन में कार्य किया जाता है। सन् 1842 ई. में इसी भावना का उपयोग जूलियस राबर्ट मायर ने, जो उस समय केवल 28 वर्ष का था और जर्मनी के हाइलब्रॉन नगर में डॉक्टर था, इस बात की गणना के लिए किया कि एक कलरी उष्मा उत्पन्न करने के लिए कितना कार्य आवश्यक है। हम जानते हैं कि प्रत्येक गैस की दो विशिष्ट उष्माएँ होती है : एक नियत आयतन पर तथा दूसरी नियत दाब पर। पहली अवस्था में गैस कोई कार्य नहीं करती। दूसरी अवस्था में गैस को बाह्य दबाव के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है और दोनों विशिष्ट उष्माओं में जो अंतर होता है वह इसी कार्य के समतुल्य होता है। इस तरह मायर को उष्मा के यांत्रिक तुल्यांक का जो मान प्राप्त हुआ वह लगभग उतना ही था जितना काउंट रुमफ़ोर्ड को प्राप्त हुआ था। इसी समय इंग्लैंड में जेम्स प्रेसकाट जूल भी उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक निकालने में लगा हुआ था। इसके प्रयोग सन् 1842 ई. से सन् 1852 ई. तक चलते रहे। अपने प्रयोग में इसने एक ताँबे के उष्मामापी में पानी लिया और उसे एक मथनी से मथा। मथनी को दो घिरनियों पर से लटके हुए दो भारों पर चलाया जाता था। जिस डोर से ये भार लटके हुए थे वह इस मथनी के सिरे में लपेटी हुई थी और जब ये भार नीचे की ओर गिरते थे तो मथनी घूमती थी। जब ये भार नीचे गिरते थे तो इनकी स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती थी। इस कमी का कुछ भाग भारों की गतिज ऊर्जा में परिणत होता था और कुछ भाग मथनी को घुमाने में व्यय होता था। इस तरह यह ज्ञात किया जा सकता था कि मथनी को घुमने में कितना कार्य किया जा रहा था। उष्मामापी के पानी के ताप में जितनी वृद्धि हुई उससे यह ज्ञात हो सकता था कि कितनी उष्मा उत्पन्न हुई; और तब उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक ज्ञात किया जा सकता था। जूल ने ये प्रयोग पानी तथा पारा दोनों के साथ किए। सन् 1847 ई. में हरमान फान हेल्महोल्ट्स ने एक पुस्तक लिखी जिसमें उष्मा, चुंबक, बिजली, भौतिक रसायन आदि विभिन्न क्षेत्रों के उदाहरणों द्वारा उष्मा-अविनाशिता-सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया था। जूल ने प्रयोग द्वारा वैद्युत ऊर्जा तथा उष्मा-ऊर्जा की समानता सिद्ध की। जूल का यंत्र। बे मथनी का बेलन; की मथनी को धुरी से जोड़नेवाली कील; इ धुरी; भा भार; पे पेटी जिसमें उष्मामापी रखा है। वैद्युत घटों (सेलों) द्वारा रासायनिक ऊर्जा वैद्युत ऊर्जा में परिणत होती है। इस बिजली से हम प्रकाश पैदा कर सकते हैं। सूर्य के प्रकाश से प्रकाश-संश्लेषण क्रिया द्वारा प्रकाश-ऊर्जा पेड़ों की रासायनिक ऊर्जा में परिणत होती है। ऐसी क्रियाओं द्वारा यह स्पष्ट है कि विभिन्न परिवर्तनों में ऊर्जा का केवल रूप बदलता है। ऊर्जा के मान में कोई अंतर नहीं आता। उस कण का बढ़ा हुआ द्रव्यमान। इसका यह अर्थ है कि ऊर्जा का मान द्रव्यमान वृद्धि को प्रकाश के वेग के वर्ग से गुणा करने पर प्राप्त होता है। इस सिद्धांत की पुष्टि नाभिकीय विज्ञान के बहुत से प्रयोगों द्वारा होती है। सूर्य में भी ऊर्जा इसी तरह बनती है। सूर्य में एक श्रृंखल क्रिया होती है जिसका फल यह होता है कि हाइड्रोजन के चार नाभिकों के संयोग से हीलियम का नाभिक बन जाता है। हाइड्रोजन के चारों नाभिकों के द्रव्यमान का योगफल हीलियम के नाभिक से कुछ अधिक होता है। यह अंतर ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। परमाणु बम एवं हाइड्रोजन बम में भी इसी द्रव्यमान-ऊर्जा-समतुल्यता का उपयोग होता है। - ↑ सं.ग्रं.-लेनार्ड : ग्रेट मेन ऑव सांइस; वाइटमैन : द ग्रोथ ऑव सायंटिफ़िक आइडियाज़; टिंडल : होट ऐज़ ए मोड ऑव मोशन; माख़ : हिस्ट्री ऐंड द रूट ऑव द प्रिंसिपुल ऑव द कंज़र्वेशन ऑव एनर्जी।
ऊर्जा से तात्पर्य है कि- "किसी वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है, उसे वस्तु की 'ऊर्जा' कहते हैं। ऊर्जा एक अदिश राशि है और इसका मात्रक 'जूल' होता है। वस्तु में जिस कारण से कार्य करने की क्षमता आ जाती है, उसे ही ऊर्जा कहा जाता है। ऊर्जा सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए तथा किसी भी देश में मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। किसी भी देश की सम्पन्नता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस देश में ऊर्जा के स्रोत क्या-क्या हैं और उनका कितना उपयोग हो रहा है। कई प्रकार के उपायों द्वारा ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा की मात्रा सर्वदा एक ही रहती है। उसमें कमी नहीं होती। इसे ऊर्जा का अविनाशिता का सिद्धांत कहा जाता है। जैसा कि कहा गया है कि- "कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं", परंतु सारी ऊर्जा को कार्य में परिणत करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि "ऊर्जा वह है, जो उतनी ही घटती है, जितना कि कार्य किया जाता है।" इस कारण ऊर्जा को नापने के वे ही एकक होते हैं, जो कार्य को नापने के होते हैं। यदि एक किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाया जाता है तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध एक विशेष मात्रा में कार्य करना पड़ता है। यदि इसी भार को दो मीटर ऊँचा उठाया जाये अथवा दो किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाएँ तो दोनों दशाओं में पहले की अपेक्षा दुगुना कार्य करना पड़ता है। इससे प्रकट होता है कि कार्य का परिमाण उस बल के परिमाण पर, जिसके विरुद्ध कार्य किया जाए और उस दूरी के परिमाण पर, जिस दूरी द्वारा उस बल के विरुद्ध कार्य किया जाए, निर्भर रहता है और इन दोनों परिमाणों के गुणनफल के बराबर होता है। साधारणतः कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जब धनुष से शिकार करने वाला कोई शिकारी धनुष को झुकाता है तो धनुष में ऊर्जा आ जाती है, जिसका उपयोग बाण को शिकार तक चलाने में किया जाता है। बहते पानी में ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पनचक्की चलाने में अथवा किसी दूसरे काम के लिए किया जा सकता है। इसी तरह बारूद में भी ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पत्थर की शिलाएँ तोड़ने अथवा तोप से गोला दागने में हो सकता है। बिजली की धारा में ऊर्जा होती है, जिससे बिजली की मोटर चलाई जा सकती है। सूर्य के प्रकाश में भी ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग प्रकाश सेलों द्वारा बिजली की धारा उत्पन्न करने में किया जा सकता है। ऐसे ही अणु बम में 'नाभिकीय ऊर्जा' रहती है, जिसका उपयोग शत्रु का विध्वंस करने अथवा अन्य कार्यों में किया जाता है। झुके हुए धनुष में जो ऊर्जा होती है, उसे 'स्थितिज ऊर्जा' कहते हैं, बहते पानी की ऊर्जा 'गतिज ऊर्जा' है, बारूद की ऊर्जा 'रासायनिक ऊर्जा' है, बिजली की धारा की ऊर्जा 'वैद्युत ऊर्जा' है, सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को 'प्रकाश ऊर्जा' कहते हैं। सूर्य में जो ऊर्जा है, वह उसके ऊँचे ताप के कारण है। ऊर्जा की सरल परिभाषा देना कठिन है। ऊर्जा वस्तु नहीं है। इसको हम देख नहीं सकते, यह कोई जगह नहीं घेरती, न इसकी कोई छाया ही पड़ती है। संक्षेप में, अन्य वस्तुअें की भाँति यह द्रव्य नहीं है, यद्यापि बहुधा द्रव्य से इसका घनिष्ठ संबंध रहता है। फिर भी इसका अस्तित्व उतना ही वास्तविक है जितना किसी अन्य वस्तु का और इस कारण कि किसी पिंड समुदाय में, जिसके ऊपर किसी बाहरी बल का प्रभाव नहीं रहता, इसकी मात्रा में कमी बेशी नहीं होती। विज्ञान इसका महत्वपूर्ण स्थान है। साधारणतः कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जब धनुष से शिकार करनेवाला कोई शिकारी धनुष को झुकाता है तो धनुष में ऊर्जा आ जाती है जिसका उपयोग बाण को शिकार तक चलाने में किया जाता है। बहते पानी में ऊर्जा होती है जिसका उपयोग पनचक्की चलाने में अथवा किसी दूसरे काम के लिए किया जा सकता है। इसी तरह बारूद में ऊर्जा होती है, जिसका उपयोग पत्थर की शिलाएँ तोड़ने अथवा तोप से गोला दागने में हो सकता है। बिजली की धारा में ऊर्जा होती है जिससे बिजली की मोटर चलाई जा सकती है। सूर्य के प्रकाश में ऊर्जा होती है जिसका उपयोग प्रकाशसेलों द्वारा बिजली की धारा उत्पन्न करने में किया जा सकता है। ऐसे ही अणुबम में नाभिकीय ऊर्जा रहती है जिसका उपयोग शत्रु का विध्वंस करने अथवा अन्य कार्यों में किया जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि ऊर्जा कई रूपों में पाई जाती है। झुके हुए धनुष में जो ऊर्जा है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं, बहते पानी की ऊर्जा गतिज ऊर्जा है, बारूद की ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा है, बिजली की धारा की ऊर्जा वैद्युत ऊर्जा है, सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को प्रकाश ऊर्जा कहते हैं। सूर्य में जो ऊर्जा है वह उसके ऊँचे ताप के कारण है। इसको उष्मा ऊर्जा कहते हैं। विभिन्न उपायों द्वारा ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा की मात्रा सर्वदा एक ही रहती है। उसमें कमी बेशी नहीं होती। इसे ऊर्जा-अविनाशिता-सिद्धांत कहते हैं। ऊपर कहा गया है कि कार्य कर सकने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। परंतु सारी ऊर्जा को कार्य में परिणत करना सर्वदा संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि ऊर्जा वह वस्तु है जो उतनी ही घटती है जितना कार्य होता है। इस कारण ऊर्जा को नापने के वे ही एकक होते हैं। जो कार्य को नापने के। यदि हम एक किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाते हैं तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध एक विशेष मात्रा में कार्य करना पड़ता है। यदि हम इसी भार को दो मीटर ऊँचा उठाएँ अथवा दो किलोग्राम भार को एक मीटर ऊँचा उठाएँ तो दोनों दशाओं में पहले की अपेक्षा दूना कार्य करना पड़ेगा। इससे प्रकट होता है कि कार्य का परिमाण उस बल के परिमाण पर, जिसके विरुद्ध कार्य किया जाए, और उस दूरी के परिमाण पर, जिस दूरी द्वारा उस बल के विरुद्ध कार्य किया जाए, निर्भर रहता है और इन दोनों परिमाणों के गुणनफल के बराबर होता है। कार्य की किसी भी मात्रा को हम कार्य का एकक मान सकते हैं। उदाहरणतः एक किलोग्राम भार को पृथ्वी के आकर्षण के विरुद्ध एक मीटर ऊँचा उठाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे एकक माना जा सकता है। परंतु पृथ्वी का आकर्षण सब जगह एक समान नहीं होता। इसका जो मान मद्रास में है वह दिल्ली में नहीं है। इसलिए यह एकक असुविधापूर्ण है। फिर भी बहुत से देशों में इंजीनियर ऐसे ही एकक का उपयोग करते हैं। जिसे फुट-पाउंड कहते हैं। यह उस कार्य की मात्रा है जो लंदन के अक्षांश में समुद्रतट पर एक पाउंड को एक दूसरे ही एकक का प्रयोग किया जाता है जो सेंटीमीटर-ग्राम-सेंकड के ऊपर निर्भर है। इसमें बल के एकक को 'डाइन' कहते हैं। डाइन बल का वह एकक है जो एक ग्राम के पिंड में एक सेकंड में एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड का वेग उत्पन्न कर सकता है। इस बल के क्रियाबिंदु को इसके विरुद्ध एक सें. मी. हटाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे वर्ग कहते हैं। परंतु व्यावहारिक दृष्टि से कार्य का यह एकक बहुत छोटा है। अतएव दैनिक व्यवहार में एक दूसरा एकक उपयोग में लाया जाता है। इसमें लंबाई का एकक सेंटीमीटर के स्थान पर मीटर है तथा द्रव्यमान का एकक ग्राम के स्थान पर किलोग्राम है। इसमें बल का एकक 'न्यूटन' है। न्यूटन बल का वह एकक है जो एक किलोग्राम के पिंड में एक सेकंड में एक मीटर प्रति सेकंड का वेग उत्पन्न कर सकता है। इस तरह न्यूटन एक सौ पाँच डाइन के बराबर होता है। इस बल के क्रियाबिंदु को उसके विरुद्ध एक मीटर तक हटाने में जितना कार्य करना पड़ता है उसे जूल कहते हैं। एक जूल एक सौ सात वर्गो के बराबर होता है। पेरिस के अक्षांश में न्यूटन लगभग एक/एक सौ इक्यासी किलोग्रामग्राम को एक मीटर ऊँचा उठाने में किए गए कार्य के बराबर। ऊर्जा को भी इन्हीं एककों में नापा जाता है। परंतु कभी कभी विशेष स्थलों पर कुछ अन्य एककों का उपयोग होता है। इनमें एक इलेक्ट्रान वोल्ट है। वह ऊर्जा का वह एकक है जिसे इलेक्ट्रान का वोल्ट के विभवांतर से गुजरने पर प्राप्त करता है। यह बहुत छोटा एकक है और केवल एक.साठ'दस-बारह अर्ग के बराबर होता है। इसके अतिरिक्त घरों में उपयोग में आनेवाली वैद्युत ऊर्जा को नापने के लिए एक दूसरे एकक का उपयोग होता है, जिसे किलोवाट-घंटा कहते हैं और जो तीन.छः'एक सौ छः जूलों के बराबर होता है। यांत्रिक ऊर्जा - उन वस्तुओं की अपेक्षा, जिनके अस्तित्व का अनुमान हम केवल तर्क के आधार पर कर सकते हैं, हमें उन वस्तुओं का ज्ञान अधिक सुगमता से होता है जिन्हें हम स्थूल रूप से देख सकते हैं। मनुष्य के मस्तिष्क में ऊर्जा के उस रूप की भावना सबसे प्रथम उदय हुई जिसका संबंध बड़े बड़े पिंडों से है और जिसे यंत्रों की सहायता से कार्यरूप में परिणात होते हम स्पष्टतः देख सकते हैं। इस यांत्रिक ऊर्जा के दो रूप हैं : एक स्थितिज ऊर्जा एवं दूसरा गतिज ऊर्जा। इसके विपरीत उस ऊर्जा का ज्ञान जिसका संबंध अणुओं तथा परमाणुओं की गति से है, मनुष्य को बाद में हुआ। इस कारण यह कम आश्चर्य की बात नहीं है कि न्यूटन से भी पहले फ्रांसिस बेकन की यह धारणा थी कि उष्मा द्रव्य के कणों की गति के कारण है। ऊर्जा-अविनाशिता - सिद्धांत की ओर पहला पद प्रसिद्ध डच वैज्ञानिक क्रिश्चियन हाइगेंज़ ने उठाया जो न्यूटन का समकालीन था। अपनी एक पुस्तक में, जो हाइगेंज़ ने कहा कि जब दो पूर्णतः प्रत्यास्थ पिंड़ों में संघात होता है तो उनके द्रव्यमानों और उनके वेगों के गुणनफलों का योग संघात के बाद भी उतना ही रहता है जितना टक्कर के पहले। कुछ लोगों का अनुमान है कि यांत्रिक ऊर्जा की अविनाशिता के सिद्धांत का पता न्यूटन को था। परंतु स्पष्ट शब्दों से सबसे पहले लाग्राँज़ ने इसे सन् एक हज़ार सात सौ अठासी ई. में व्यक्त किया। लाग्राँज़ के अनुसार ऐसे पिंडसमुदाय में जिसपर किसी बाहरी बल का प्रभाव न पड़ रहा हो, यांत्रिक ऊर्जा, अर्थात् स्थितिज ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा का योग, सर्वदा एक ही रहता है। स्थितिज ऊर्जा - एक किलोग्राम भार के एक पिंड को पृथ्वी के आकर्षण के विरुद्ध एक मीटर ऊँचा उठाने में जो कार्य करना पड़ता है उसे हम किलोग्राम-मीटर कह सकते हैं और यह लगभग नौ सौ इक्यासी जूलों के बराबर होता है। यदि हम एक डोर लेकर ओर उसे एक घिरनी के ऊपर डालकर उसके दोनों सिरों से लगभग एक किलोग्राम के पिंड बाँधे और उन्हें ऐसी अवस्था में छोड़ें कि वे दोनों एक ही ऊँचाई पर न हों और ऊँचे पिंड को बहुत धीरे-से नीचे आने दें तो हम देखेंगे कि एक किलोग्राम के पिंड को एक मीटर ऊँचा उठा देगा। घिरनी में घर्षण जितना ही कम होगा दूसरा पिंड भार में उतना ही पहले पिंड के भार के बराबर रखा जा सकेगा। इसक अर्थ यह हुआ कि यदि हम किसी पिंड को पृथ्वी से ऊँचा बढ़ जाती है। एक किलोग्राम भार के पिंड को यदि पाँच मीटर ऊँचा उठाया जाए तो उसमें पाँच किलोग्रामग्राम-मीटर कार्य करने की क्षमता आ जाती है, एवं उसकी ऊर्जा पहले की अपेक्षा उसी परिमाण में बढ़ जाती है। यह ऊर्जा पृथ्वी तथा पिंड की आपेक्षिक स्थिति के कारण होती है और वस्तुतः पृथ्वी एवं पिंड द्वारा बने तंत्र की ऊर्जा होती है। इसीलिए इसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। जब कभी भी पिंडों के किसी समुदाय की पारस्परिक दूरी अथवा एक ही पिंड के विभिन्न भागों की स्वाभाविक स्थिति में अंतर उत्पन्न होता है तो स्थितिज ऊर्जा में भी अंतर आ जाता है। कमानी को दबाने से अथवा धनुष को झुकाने से उनमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। नदियों में बाँध बाँधकर पानी को अधिक ऊँचाई पर इकट्ठा किया जाए तो इस पानी में स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। गतिज ऊजार् - न्यूटन ने बल की यह परिभाषा दी कि बल संवेग के परिवर्तन की दर के बराबर होता है। यदि द्र किलोग्राम का कोई पिंड प्रारंभ में स्थिर हो और उसपर एक नियत बल स सेंकड तक कार्य करके जो वेग उत्पन्न करे उसका मान वे मीटर प्रति सेकंड हो तो बल का मान ब = द्र वे/स न्यूटन होगा। इसी समय में पिंड जो दूरी तै करे वह यदि दू मीटर हो तो बल द्वारा किया गया कार्य ब दू जूल के बराबर होगा। परंतु द ू= वेस/दो । अर्थात द्र द्रव्यमानवालें पिंड का वेग यदि वे हो तो उसकी ऊर्जा एक/दो द्रवेदो होगी। यह ऊर्जा उस पिंड में उसकी गति के कारण होती है और गतिज ऊर्जा कहलाती है। जब हम धनुष को झुकाकर तीर छोड़ते हैं तो धनुष की स्थितिज ऊर्जा तीर की गतिज ऊर्जा मे परिवर्तन हो जाती है। स्थितिज ऊर्जा एवं गतिज ऊर्जा के पारस्परिक परिवर्तन का सबसे सुंदर उदाहरण सरल लोलक है। जब हम लोलक के गोलक को एक ओर खींचते हैं तो गोलक अपनी साधारण स्थिति से थोड़ा ऊँचा उठ जाता है और इसमें स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब हम गोलक को छोड़ते हैं तो गोलक इधर उधर झूलने लगता है। जब गोलक लटकने की साधारण स्थिति में आता है तो इसमें केवल गतिज ऊर्जा रहती है। संवेग के कारण गोलक दूसरी ओर चला जाता है और गतिज ऊर्जा पुनः स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। साधारणतः वायु के घर्षण के विरुद्ध कार्य करने से गोलक की ऊर्जा कम होती जाती है और इसकी गति कुछ देर में बंद हो जाती है। यदि घर्षण का बल न हो तो लोलक अनंत काल तक चलता रहेगा। उष्मा ऊर्जा - गति विज्ञान में ऊर्जा-अविनाशिता-सिद्धांत के प्रमाणित हो जाने के बाद भी इसके दूसरे स्वरूपों का ज्ञान न होने के कारण यह समझा जाता था कि कई स्थितियों में ऊर्जा नष्ट भी हो सकती है; जैसे, जब किसी पिंडसमुदाय के विभिन्न भागों में अपेक्षिक गति हो तो घर्षण के कारण स्थितिज और गतिज ऊर्जा कम हो जाती है। वस्तुतः ऐसी स्थितियों में ऊर्जा नष्ट नहीं होती वरन् उष्मा ऊर्जा में परिवर्तन हो जाती है। परंतु अट्ठारहवीं शताब्दी तक उष्मा को ऊर्जा का ही एक स्वतंत्र स्वरूप नहीं समझा जाता था। उस समय तक यह धारणा थी कि उष्मा एक द्रव्य है। उन्नीसवीं शताब्दी में प्रयोगों द्वारा यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया गया कि उष्मा भी ऊर्जा का ही एक दूसरा रूप है। यों तो प्रागैतिहासिक काल में भी मनुष्य लकड़ियों को रगड़कर अग्नि उत्पन्न करता था, परंतु ऊर्जा एवं उष्मा के घनिष्ठ संबंध की ओर सबसे पहले बेंजामिन टामसन का ध्यान गया। यह संयुक्त राज्य के मैसाचूसेट्स प्रदेश का रहनेवाला था। परंतु उस समय यह बवेरिया के राजा का युद्धमंत्री था। ढली हुई पीतल की तोप की नलियों को छेदते समय इसने देखा कि नली बहुत गर्म हो जाती है तथा उससे निकले बुरादे और भी गरम हो जाते हैं। एक प्रयोग में तोप की नाल के चारों ओर काठ की नाँद में पानी भरकर उसने देखा कि खरादने से जो उष्मा उत्पन्न होती है उससे ढाई घंटे में सारा पानी उबलने के ताप तक पहुँच गया। इस प्रयोग में उसका वास्तविक ध्येय यह सिद्ध करना था कि उष्मा कोई द्रव नहीं है जो पिंडों में होती है और दाब के कारण वैसे ही बाहर निकल आती है जैसे निचोड़ने से कपड़े में से पानी; क्योंकि यदि ऐसा होता तो किसी पिंड में यह द्रव एक सीमित मात्रा में ही होता, परंतु छेदनेवाले प्रयोग से ज्ञात होता है कि जितना ही अधिक कार्य किया जाए उतनी ही अधिक उष्मा उत्पन्न होगी। रुमफर्ड ने यह प्रयोग सन् एक हज़ार सात सौ अट्ठानवे ई. में किया। इसके बीस वर्ष पहले ही लाव्वाजिए तथा लाग्राँज़ ने यह देखा था कि जानवरों में भोजन से उतनी ही उष्मा उत्पन्न होती है जितनी रासायनिक क्रिया द्वारा उस भोजन से प्राप्त हो सकती है। सन् एक हज़ार आठ सौ उन्नीस में फ्रांसीसी वैज्ञानिक डयूलों ने देखा कि किसी गैस के संपीडन से उसमें उष्मा उसी अनुपात में उत्पन्न होती है जितना संपीडन में कार्य किया जाता है। सन् एक हज़ार आठ सौ बयालीस ई. में इसी भावना का उपयोग जूलियस राबर्ट मायर ने, जो उस समय केवल अट्ठाईस वर्ष का था और जर्मनी के हाइलब्रॉन नगर में डॉक्टर था, इस बात की गणना के लिए किया कि एक कलरी उष्मा उत्पन्न करने के लिए कितना कार्य आवश्यक है। हम जानते हैं कि प्रत्येक गैस की दो विशिष्ट उष्माएँ होती है : एक नियत आयतन पर तथा दूसरी नियत दाब पर। पहली अवस्था में गैस कोई कार्य नहीं करती। दूसरी अवस्था में गैस को बाह्य दबाव के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है और दोनों विशिष्ट उष्माओं में जो अंतर होता है वह इसी कार्य के समतुल्य होता है। इस तरह मायर को उष्मा के यांत्रिक तुल्यांक का जो मान प्राप्त हुआ वह लगभग उतना ही था जितना काउंट रुमफ़ोर्ड को प्राप्त हुआ था। इसी समय इंग्लैंड में जेम्स प्रेसकाट जूल भी उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक निकालने में लगा हुआ था। इसके प्रयोग सन् एक हज़ार आठ सौ बयालीस ई. से सन् एक हज़ार आठ सौ बावन ई. तक चलते रहे। अपने प्रयोग में इसने एक ताँबे के उष्मामापी में पानी लिया और उसे एक मथनी से मथा। मथनी को दो घिरनियों पर से लटके हुए दो भारों पर चलाया जाता था। जिस डोर से ये भार लटके हुए थे वह इस मथनी के सिरे में लपेटी हुई थी और जब ये भार नीचे की ओर गिरते थे तो मथनी घूमती थी। जब ये भार नीचे गिरते थे तो इनकी स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती थी। इस कमी का कुछ भाग भारों की गतिज ऊर्जा में परिणत होता था और कुछ भाग मथनी को घुमाने में व्यय होता था। इस तरह यह ज्ञात किया जा सकता था कि मथनी को घुमने में कितना कार्य किया जा रहा था। उष्मामापी के पानी के ताप में जितनी वृद्धि हुई उससे यह ज्ञात हो सकता था कि कितनी उष्मा उत्पन्न हुई; और तब उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक ज्ञात किया जा सकता था। जूल ने ये प्रयोग पानी तथा पारा दोनों के साथ किए। सन् एक हज़ार आठ सौ सैंतालीस ई. में हरमान फान हेल्महोल्ट्स ने एक पुस्तक लिखी जिसमें उष्मा, चुंबक, बिजली, भौतिक रसायन आदि विभिन्न क्षेत्रों के उदाहरणों द्वारा उष्मा-अविनाशिता-सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया था। जूल ने प्रयोग द्वारा वैद्युत ऊर्जा तथा उष्मा-ऊर्जा की समानता सिद्ध की। जूल का यंत्र। बे मथनी का बेलन; की मथनी को धुरी से जोड़नेवाली कील; इ धुरी; भा भार; पे पेटी जिसमें उष्मामापी रखा है। वैद्युत घटों द्वारा रासायनिक ऊर्जा वैद्युत ऊर्जा में परिणत होती है। इस बिजली से हम प्रकाश पैदा कर सकते हैं। सूर्य के प्रकाश से प्रकाश-संश्लेषण क्रिया द्वारा प्रकाश-ऊर्जा पेड़ों की रासायनिक ऊर्जा में परिणत होती है। ऐसी क्रियाओं द्वारा यह स्पष्ट है कि विभिन्न परिवर्तनों में ऊर्जा का केवल रूप बदलता है। ऊर्जा के मान में कोई अंतर नहीं आता। उस कण का बढ़ा हुआ द्रव्यमान। इसका यह अर्थ है कि ऊर्जा का मान द्रव्यमान वृद्धि को प्रकाश के वेग के वर्ग से गुणा करने पर प्राप्त होता है। इस सिद्धांत की पुष्टि नाभिकीय विज्ञान के बहुत से प्रयोगों द्वारा होती है। सूर्य में भी ऊर्जा इसी तरह बनती है। सूर्य में एक श्रृंखल क्रिया होती है जिसका फल यह होता है कि हाइड्रोजन के चार नाभिकों के संयोग से हीलियम का नाभिक बन जाता है। हाइड्रोजन के चारों नाभिकों के द्रव्यमान का योगफल हीलियम के नाभिक से कुछ अधिक होता है। यह अंतर ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। परमाणु बम एवं हाइड्रोजन बम में भी इसी द्रव्यमान-ऊर्जा-समतुल्यता का उपयोग होता है। - ↑ सं.ग्रं.-लेनार्ड : ग्रेट मेन ऑव सांइस; वाइटमैन : द ग्रोथ ऑव सायंटिफ़िक आइडियाज़; टिंडल : होट ऐज़ ए मोड ऑव मोशन; माख़ : हिस्ट्री ऐंड द रूट ऑव द प्रिंसिपुल ऑव द कंज़र्वेशन ऑव एनर्जी।
पटनाः बिहार में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. सूबे में मंगलवार को अबतक के सबसे अधिक 130 कोरोना के संक्रमित मरीज मिले. जबकि पटना के में मंगलवार को 18 कोरोना के के मरीज मिले हैं. एक आईपीएस अधिकारी के बॉडीगार्ड को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आईपीएस और उनके परिवार के लोग समते 36 जवानों का कोरोना टेस्ट किया गया है. आईपीएस के परिवार में उनकी पत्नी और 2 बच्चे हैं. बीएमपी बैरक में रिटायर जवान के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है . बीएमपी के 19 जवान अबतक कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं. मंगलवार को बीएमपी के उन जवानों की रिपोर्ट आई जिनके सैंपल सोमवार को लि गए थे अभी 70 जवानों की रिपोर्ट आनी बाकी है.
पटनाः बिहार में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. सूबे में मंगलवार को अबतक के सबसे अधिक एक सौ तीस कोरोना के संक्रमित मरीज मिले. जबकि पटना के में मंगलवार को अट्ठारह कोरोना के के मरीज मिले हैं. एक आईपीएस अधिकारी के बॉडीगार्ड को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आईपीएस और उनके परिवार के लोग समते छत्तीस जवानों का कोरोना टेस्ट किया गया है. आईपीएस के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. बीएमपी बैरक में रिटायर जवान के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है . बीएमपी के उन्नीस जवान अबतक कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं. मंगलवार को बीएमपी के उन जवानों की रिपोर्ट आई जिनके सैंपल सोमवार को लि गए थे अभी सत्तर जवानों की रिपोर्ट आनी बाकी है.
तहाँ उसकी चर्चा करता फिरता है, यह उसका अभिमान है । क्रोध को तो तू पहिचानता ही है । और जिस प्रकार पत्थर पानी से पिचल नहीं सकता उसी तरह कठोर पुरुष के हृदय पर दूसरे को होने वाले दुःखों का असर नहीं हो सकता। यह सब आसुरी प्रकृति के लक्षण हैं ।" ।।४।। "रिपुसूदन, दैवी सम्पत्तियाँ चित्त को शुद्ध कर ग्रामस्थिति की पहुँचाने वाली और आसुरी सम्पत्ति चित्त को मलिन कर दिनों दिन अधोगति और संसृति में डालने वाली होती है।" यह सुनकर अर्जुन बोला - "यदुनाथ, अपने चित्त की खोज करने पर मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता, कि अपने जो प्रातुरी सम्पत्तियाँ बतलाई, उनका नुक्रमे प्रभाव है । मुझे तो ऐसा लगता है कि मुझमें दम्भ भी है, दर्प भी है, अभिमान और क्रोध तो हैं ही, और क्षात्र धर्म को तो कठोरता का ही दूसरा नाम कहा जाय तो भी अत्युक्ति न होगी। ॠाह ! जो धर्म पिता-पुत्र और गुरु शिष्य में परस्पर युद्ध करवावे, जो सर्पाकार वाणों, भयंकर गदाओं और विषैले शास्त्रों से मूत्र प्राणियों और मनुष्यों का वध करना सिखावे और जो शत्रु के नगर में श्राग फिच्वावे, इससे बढ़कर दूसरी और क्या कठोरता हो सकती है । इस युद्ध के श्रारम्भ होते ही इस धर्म-क्षेत्र का स्वरूप कैसा बदल जायगा, इसकी कल्पना करते ही यह अनुमान किया जा सकता हैं कि मुझमें कितनी कठोरता भरी हुई है। इससे वासुदेव, क्षात्रधर्म में रहने वाले मुझ जैसे प्राणी की प्रवृति दैवी गिनी जाय, तो फिर घासुरी प्रकृति भी कड़ी जायगी ?" इस पर श्रीकृष्ण बोले'पार्थ, अकारण शोक न कर स्वभाव के कतिपय दोषों के कारण और क्षात्रधर्म के कारण जो कठोर कर्म करने पड़ते हैं, उनसे तू अपने को श्रासुरी न समझ । तू दैवी प्रकृति युक्त हो जन्मा है। मैंने आसुरी प्रकृतियाँ का संक्षेप में ही वर्णन किया है, इससे तू इस प्रकार हताश हुआ है। इसलिए मैं अब आसुरी स्वभाव का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ । अर्जुन ने पूछा- "कंसारि, आप आसुरी स्वभाव का वर्णन करें । उससे पहिले मैं आपसे एक प्रश्न पूछ लेना चाहता हूँ । वह यह कि दैवी और आसुरी इस प्रकार दो प्रकार की प्रकृतियाँ होने का कारण क्या है । कितने ही अधोगति की ओर जाते हैं और कितने ही उन्नति की ओर प्रयाण करते हैं, यह किस प्रकार होता है ?" श्रीकृष्ण ने कहा --' पार्थ, तत्वचिन्तकों का मानना है कि दैवी और आसुरी दो प्रकार के सर्ग सृष्टि के प्रारम्भकाल से चले आते हैं और सदैव बने रहेंगे, सत्व, रज और तम ये तीन गुण अनादि, शाश्वत् और समशक्ति होने वाले होने के कारण विश्व में कहीं और किसी समय सत्वगुण की वृद्धि होती है, कहीं और किसी दूसरे समय रज-तम की वृद्धि होती है। इससे कुछ जीवों में उत्तरोत्तर सत्वगुण का बल बढ़ता है, तो कितनों ही में दूसरे दो गुणों में से एकाध का बल बढ़ाना सम्भव होता है। परन्तु सत्पुरुष यह श्रद्धा रखते हैं कि प्रत्येक जीव को किसी समय, जन्मजन्मान्तर में भी, सत्वगुणी होना सम्भव है ही, कारण कि जीव भले ही राजस और तामस भावों में कितना ही उतर पड़े । फिर भी उसमें सत्त्वगुण बीज रूप में अवश्य रहता है, वह किसी समय उदय होकर बलवान हो जाता है। किन्तु, कौन्तेय, इस सुयोग के अशक्त न होने पर भी, यह इतना अधिक दुर्लभ है कि व्यवहारिक दृष्टि से यह कहा जाय तो अत्युत्तम होगी कि आसुरी भाव वाले के लिए अधःपात ही निश्चित है। साधु पुरुष इस पर से ऐसा बोध देते हैं कि मानव देह का प्राप्त होना ही वह शुभ काल और शुभ योग है। यह शुभ योग प्राप्त करके भी जो जीव तुरी भाव का ही पोषण करता है उसके लिए यह कहा जायगा कि वह अनन्त कहे जा सकने योग्य दीर्घकाल तक अयोगति को प्राप्त होना ही पसन्द करता है। इसलिए विचारवान् पुरुष को मानव लन्म प्राप्त होने के सुध्रुवंसर का दैवी माव पोषित करने में लाभ उठा लेना चाहिए।" अर्जुन ने कहा- 'माघव, श्रव आतुरी प्रकृति का विस्तार के साथ वर्णन करो।" श्रीकृष्ण बोले-"धनञ्जय, चातुरी जनों में मुख्य कमी होती है विवेक का अभाव । कहाँ तो कर्म में प्रयत्न पूर्वक प्रवृत होना चाहिये, और कहाँ उतने ही प्रयत्न से उसे कम का त्याग करना चाहिये, यह बात वे नहीं समझते। उनमें यह भावना नहीं होती कि जीवन एक पवित्र वस्तु है । एक प्रकार का यज्ञ सा है। चित्त को पवित्र रखना चाहिए, शरीर द्वारा पवित्र हो प्राचार होने चाहिएँ, इस प्रकार की नीति-धर्म सम्बन्धी दृष्टि को वहम या पागलपन समझ कर उसका मज़ाक उड़ा देते हैं। इससे सत्य के प्रति भी उनके मन में आदर ही नहीं होता, तब उसके लिए श्राग्रह तो होगा ही कहाँ से ? सत्य नीति आदि को वे अपने हेतु अथवां उद्देश्यसिद्धि का साधन समझते हैं और हेतु-सिद्धि को ही मुख्य समझने के कारण व साधनों के शुद्ध होने को परवा नहीं करने । इसलिए यदि उन्हें नीति द्वारा अपना हेतु सिद्ध होना शक्य प्रतीत होता हो तो वे तत्काल उसका आश्रय ले लेते हैं । "फिर, पार्थ, वे जीवन को गर्भाधान से आरम्भ होकर मरणपर्यन्त ही टिकने वाली वस्तु समझते हैं । संसार को शून्य आकाश में निर्माण हुआ और अनेक कल्पों तक फिरते रहकर फिर शून्य हो जाने वाला मानते हैं। वे यह नहीं मानते कि यह कोई सुनांतन, अविनाशी नया
तहाँ उसकी चर्चा करता फिरता है, यह उसका अभिमान है । क्रोध को तो तू पहिचानता ही है । और जिस प्रकार पत्थर पानी से पिचल नहीं सकता उसी तरह कठोर पुरुष के हृदय पर दूसरे को होने वाले दुःखों का असर नहीं हो सकता। यह सब आसुरी प्रकृति के लक्षण हैं ।" ।।चार।। "रिपुसूदन, दैवी सम्पत्तियाँ चित्त को शुद्ध कर ग्रामस्थिति की पहुँचाने वाली और आसुरी सम्पत्ति चित्त को मलिन कर दिनों दिन अधोगति और संसृति में डालने वाली होती है।" यह सुनकर अर्जुन बोला - "यदुनाथ, अपने चित्त की खोज करने पर मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता, कि अपने जो प्रातुरी सम्पत्तियाँ बतलाई, उनका नुक्रमे प्रभाव है । मुझे तो ऐसा लगता है कि मुझमें दम्भ भी है, दर्प भी है, अभिमान और क्रोध तो हैं ही, और क्षात्र धर्म को तो कठोरता का ही दूसरा नाम कहा जाय तो भी अत्युक्ति न होगी। ॠाह ! जो धर्म पिता-पुत्र और गुरु शिष्य में परस्पर युद्ध करवावे, जो सर्पाकार वाणों, भयंकर गदाओं और विषैले शास्त्रों से मूत्र प्राणियों और मनुष्यों का वध करना सिखावे और जो शत्रु के नगर में श्राग फिच्वावे, इससे बढ़कर दूसरी और क्या कठोरता हो सकती है । इस युद्ध के श्रारम्भ होते ही इस धर्म-क्षेत्र का स्वरूप कैसा बदल जायगा, इसकी कल्पना करते ही यह अनुमान किया जा सकता हैं कि मुझमें कितनी कठोरता भरी हुई है। इससे वासुदेव, क्षात्रधर्म में रहने वाले मुझ जैसे प्राणी की प्रवृति दैवी गिनी जाय, तो फिर घासुरी प्रकृति भी कड़ी जायगी ?" इस पर श्रीकृष्ण बोले'पार्थ, अकारण शोक न कर स्वभाव के कतिपय दोषों के कारण और क्षात्रधर्म के कारण जो कठोर कर्म करने पड़ते हैं, उनसे तू अपने को श्रासुरी न समझ । तू दैवी प्रकृति युक्त हो जन्मा है। मैंने आसुरी प्रकृतियाँ का संक्षेप में ही वर्णन किया है, इससे तू इस प्रकार हताश हुआ है। इसलिए मैं अब आसुरी स्वभाव का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ । अर्जुन ने पूछा- "कंसारि, आप आसुरी स्वभाव का वर्णन करें । उससे पहिले मैं आपसे एक प्रश्न पूछ लेना चाहता हूँ । वह यह कि दैवी और आसुरी इस प्रकार दो प्रकार की प्रकृतियाँ होने का कारण क्या है । कितने ही अधोगति की ओर जाते हैं और कितने ही उन्नति की ओर प्रयाण करते हैं, यह किस प्रकार होता है ?" श्रीकृष्ण ने कहा --' पार्थ, तत्वचिन्तकों का मानना है कि दैवी और आसुरी दो प्रकार के सर्ग सृष्टि के प्रारम्भकाल से चले आते हैं और सदैव बने रहेंगे, सत्व, रज और तम ये तीन गुण अनादि, शाश्वत् और समशक्ति होने वाले होने के कारण विश्व में कहीं और किसी समय सत्वगुण की वृद्धि होती है, कहीं और किसी दूसरे समय रज-तम की वृद्धि होती है। इससे कुछ जीवों में उत्तरोत्तर सत्वगुण का बल बढ़ता है, तो कितनों ही में दूसरे दो गुणों में से एकाध का बल बढ़ाना सम्भव होता है। परन्तु सत्पुरुष यह श्रद्धा रखते हैं कि प्रत्येक जीव को किसी समय, जन्मजन्मान्तर में भी, सत्वगुणी होना सम्भव है ही, कारण कि जीव भले ही राजस और तामस भावों में कितना ही उतर पड़े । फिर भी उसमें सत्त्वगुण बीज रूप में अवश्य रहता है, वह किसी समय उदय होकर बलवान हो जाता है। किन्तु, कौन्तेय, इस सुयोग के अशक्त न होने पर भी, यह इतना अधिक दुर्लभ है कि व्यवहारिक दृष्टि से यह कहा जाय तो अत्युत्तम होगी कि आसुरी भाव वाले के लिए अधःपात ही निश्चित है। साधु पुरुष इस पर से ऐसा बोध देते हैं कि मानव देह का प्राप्त होना ही वह शुभ काल और शुभ योग है। यह शुभ योग प्राप्त करके भी जो जीव तुरी भाव का ही पोषण करता है उसके लिए यह कहा जायगा कि वह अनन्त कहे जा सकने योग्य दीर्घकाल तक अयोगति को प्राप्त होना ही पसन्द करता है। इसलिए विचारवान् पुरुष को मानव लन्म प्राप्त होने के सुध्रुवंसर का दैवी माव पोषित करने में लाभ उठा लेना चाहिए।" अर्जुन ने कहा- 'माघव, श्रव आतुरी प्रकृति का विस्तार के साथ वर्णन करो।" श्रीकृष्ण बोले-"धनञ्जय, चातुरी जनों में मुख्य कमी होती है विवेक का अभाव । कहाँ तो कर्म में प्रयत्न पूर्वक प्रवृत होना चाहिये, और कहाँ उतने ही प्रयत्न से उसे कम का त्याग करना चाहिये, यह बात वे नहीं समझते। उनमें यह भावना नहीं होती कि जीवन एक पवित्र वस्तु है । एक प्रकार का यज्ञ सा है। चित्त को पवित्र रखना चाहिए, शरीर द्वारा पवित्र हो प्राचार होने चाहिएँ, इस प्रकार की नीति-धर्म सम्बन्धी दृष्टि को वहम या पागलपन समझ कर उसका मज़ाक उड़ा देते हैं। इससे सत्य के प्रति भी उनके मन में आदर ही नहीं होता, तब उसके लिए श्राग्रह तो होगा ही कहाँ से ? सत्य नीति आदि को वे अपने हेतु अथवां उद्देश्यसिद्धि का साधन समझते हैं और हेतु-सिद्धि को ही मुख्य समझने के कारण व साधनों के शुद्ध होने को परवा नहीं करने । इसलिए यदि उन्हें नीति द्वारा अपना हेतु सिद्ध होना शक्य प्रतीत होता हो तो वे तत्काल उसका आश्रय ले लेते हैं । "फिर, पार्थ, वे जीवन को गर्भाधान से आरम्भ होकर मरणपर्यन्त ही टिकने वाली वस्तु समझते हैं । संसार को शून्य आकाश में निर्माण हुआ और अनेक कल्पों तक फिरते रहकर फिर शून्य हो जाने वाला मानते हैं। वे यह नहीं मानते कि यह कोई सुनांतन, अविनाशी नया
[caption id="attachment_17791" align="alignleft" width="71"]धर्मेन्द्र[/caption]पत्रकार धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने हिन्दुस्तान, दिल्ली से इस्तीफा दे दिया है. धर्मेन्द्र हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर थे. उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत अमर उजाला, लखनऊ से की है. धर्मेन्द्र ने अमर उजाला में डीएनई के पोस्ट पर ज्वाइन किया है. धर्मेन्द्र ने अपने करियर की शुरुआत दस साल पहले अमर उजाला, बनारस से की थी.
[caption id="attachment_सत्रह हज़ार सात सौ इक्यानवे" align="alignleft" width="इकहत्तर"]धर्मेन्द्र[/caption]पत्रकार धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने हिन्दुस्तान, दिल्ली से इस्तीफा दे दिया है. धर्मेन्द्र हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर थे. उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत अमर उजाला, लखनऊ से की है. धर्मेन्द्र ने अमर उजाला में डीएनई के पोस्ट पर ज्वाइन किया है. धर्मेन्द्र ने अपने करियर की शुरुआत दस साल पहले अमर उजाला, बनारस से की थी.
मुस्लिम फंड गोलमाल में रज्जाक सहित तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा. . पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर हुई कार्रवाई, जब्त होगी आरोपियों की संपत्ति. . विकास कुमार, हरिद्वारः ज्वालापुर के चर्चित मुस्लिम फंड प्रकरण में मास्टरमाइंड अब्दुल रज्जाक सहित तीनों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा की ओर से यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। पूरा मामला करोड़ों की धोखाधड़ी से जुड़ा है, इसलिए गैंगस्टर एक्ट में आरोपियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी। पिछले दिनों ज्वालापुर में कई दशक से मुस्लिम फंड चला रहा हाफिज अब्दुल रज्जाक अचानक भूमिगत हो गया था। जिसके बाद हजारों खातेदारों ने हंगामा करते हुए रकम दिलाने की मांग की थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और एसओजी की टीम ने कई दिन की मशक्कत कर मुख्य आरोपी अब्दुल रज्जाक सहित नसीम उर्फ मुन्ना व मसरूर निवासी ग्राम सराय को गिरफ्तार कर करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि अब्दुल रज्जाक ने लोगों की गाढ़ी कमाई को अपने लालच के चलते धन को दोगुना करने के लालच में गंवा दिया। हालांकि, रज्जाक व उसके साथियों को करोड़ों की चपत लगाने वाले उत्तर प्रदेश के संभल और मुंबई निवासी हम बाकी आरोपी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जबकि, काफी प्रयास के बावजूद जमानत नहीं मिलने के कारण रज्जाक व उसके दोनों साथी अभी भी रोशनाबाद जेल में बंद हैं। इस मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर प्रमोद उनियाल की तरफ से तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। गोलमाल आम लोगों के करोड़ों रुपयों से जुड़ा होने के चलते एसएसपी अजय सिंह ने गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा की ओर मास्टरमाइंड अब्दुल रज्जाक व उसके साथी नसीम उर्फ मुन्ना और मसरूर के खिलाफ ज्वालापुर कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मुकदमे के तहत जिलाधिकारी के आदेश पर आरोपियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अवैध रूप से धन अर्जित कर जुटाई गई संपत्तियों को जब्त करने के लिए मुस्लिम फंड प्रकरण के आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। अवैध धन से खरीदी गई संपत्तियां आरोपियों के रिश्तेदारों, साझेदारों के नाम पाई जाती हैं, तो उनकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
मुस्लिम फंड गोलमाल में रज्जाक सहित तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा. . पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर हुई कार्रवाई, जब्त होगी आरोपियों की संपत्ति. . विकास कुमार, हरिद्वारः ज्वालापुर के चर्चित मुस्लिम फंड प्रकरण में मास्टरमाइंड अब्दुल रज्जाक सहित तीनों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। पुलिस कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा की ओर से यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। पूरा मामला करोड़ों की धोखाधड़ी से जुड़ा है, इसलिए गैंगस्टर एक्ट में आरोपियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी। पिछले दिनों ज्वालापुर में कई दशक से मुस्लिम फंड चला रहा हाफिज अब्दुल रज्जाक अचानक भूमिगत हो गया था। जिसके बाद हजारों खातेदारों ने हंगामा करते हुए रकम दिलाने की मांग की थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और एसओजी की टीम ने कई दिन की मशक्कत कर मुख्य आरोपी अब्दुल रज्जाक सहित नसीम उर्फ मुन्ना व मसरूर निवासी ग्राम सराय को गिरफ्तार कर करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि अब्दुल रज्जाक ने लोगों की गाढ़ी कमाई को अपने लालच के चलते धन को दोगुना करने के लालच में गंवा दिया। हालांकि, रज्जाक व उसके साथियों को करोड़ों की चपत लगाने वाले उत्तर प्रदेश के संभल और मुंबई निवासी हम बाकी आरोपी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जबकि, काफी प्रयास के बावजूद जमानत नहीं मिलने के कारण रज्जाक व उसके दोनों साथी अभी भी रोशनाबाद जेल में बंद हैं। इस मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर प्रमोद उनियाल की तरफ से तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। गोलमाल आम लोगों के करोड़ों रुपयों से जुड़ा होने के चलते एसएसपी अजय सिंह ने गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा की ओर मास्टरमाइंड अब्दुल रज्जाक व उसके साथी नसीम उर्फ मुन्ना और मसरूर के खिलाफ ज्वालापुर कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मुकदमे के तहत जिलाधिकारी के आदेश पर आरोपियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अवैध रूप से धन अर्जित कर जुटाई गई संपत्तियों को जब्त करने के लिए मुस्लिम फंड प्रकरण के आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई है। अवैध धन से खरीदी गई संपत्तियां आरोपियों के रिश्तेदारों, साझेदारों के नाम पाई जाती हैं, तो उनकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शादी के बाद लड़कियां अपना नाम बदल लेती हैं। आमतौर पर ये अपने नाम के साथ अपने पति का नाम भी रखती हैं। फिर भी अन्य लोग केवल पति का अंतिम नाम रखते हैं। अब भी यह चलन बढ़ता ही जा रहा है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि उन्हें अपना नाम बदलने की जरूरत है। लेकिन नाम बदलने का तरीका पता नहीं है। तो शादी के बाद नाम बदलने से क्या फायदा? आइए जानते हैं इससे क्या-क्या फायदे होते हैं। क्या शादी के बाद अपने नाम के साथ पति का नाम जोड़ने में मजा नहीं आता? एक तरफ हम खुश हैं कि हमारे नाम के साथ एक नया नाम जुड़ जाएगा। दूसरी ओर हो सकता है कि अब आप अपने पति के परिवार के साथ पहचान न रख सकें। यदि आपके नाम के साथ पति का नाम भी है तो आपका मान सम्मान और बढ़ेगा। कभी-कभी हमें अपना नाम पसंद नहीं आ सकता है। या हमारी कुंडली से तुलना नहीं कर सकते। या हो सकता है कि किसी और को उस नाम से बुलाए जाने में कठिनाई हो रही हो। ऐसे में अगर हमें नाम बदलना पड़े तो कानून के हिसाब से काफी मुश्किल होगी। लेकिन आप शादी के बाद अपना नाम आसानी से बदल सकते हैं। विवाह के बाद आप अंतिम नाम जोड़कर पति के परिवार से अपनी पहचान करा सकती हैं। बाहरी लोग आपको उस परिवार से संबंधित के रूप में पहचानते हैं। साथ ही परिजनों के साथ भी आपके संबंध बेहतर होंगे। बच्चे होने के बाद वे बिना किसी भ्रम के अपने पति का सरनेम भी जोड़ सकती हैं। शादी के बाद नाम बदलने का सिलसिला बुनियादी दस्तावेजों से शुरू होता है। पहले उन सभी दस्तावेज़ों की सूची बनाएं जिनकी आपको अपना नाम अपडेट करने के लिए आवश्यकता है। अपने पास सही दस्तावेज रखें। अगर हमें शादी के बाद नाम बदलना है तो कुछ दस्तावेज हमारे पास होने चाहिए। सामाजिक सुरक्षा कार्ड, जन्म और विवाह प्रमाण पत्र, नागरिकता का प्रमाण आदि। सबसे पहले अपनी बैंक शाखा में जाएँ और वहाँ अपने दस्तावेज़ों को अपडेट करने के लिए कहें। अगर आपके पास पहले से ही आपके आधिकारिक दस्तावेज और अपडेटेड आईडी हैं तो बैंक में नाम अपडेट करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। तो आप वहां जाइए और बैंक से बात करके उन्हें कहिए कि आप अपना नाम अपडेट कराना चाहते हैं। आपको बैंक द्वारा पूरी तरह निर्देशित किया जाएगा। यदि आपने शादी करने के बाद अपना नाम बदल लिया है, तो आपको उस कंपनी को सूचित करना चाहिए जिसके लिए आप काम करते हैं। क्योंकि उन्हें आपके दस्तावेज़ों को अपडेट करने की आवश्यकता है। इस तथ्य का उल्लेख करें कि नाम बदल गया है क्योंकि आपकी कंपनी जानती है कि आप विवाहित हैं। कार्यालय दस्तावेज़ में नाम बदलें। आपको कंपनी को अपने नए नाम के साथ अपनी आईडी या दस्तावेजों की फोटोकॉपी जमा करनी होगी। अगर आप शादी करने के बाद आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदलते हैं, तो सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी अपना नाम बदलना जरूरी है। उनमें से ज्यादातर आपके सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दोस्त हैं। तो आपके नाम परिवर्तन के बारे में सभी को पता चल जाएगा।
शादी के बाद लड़कियां अपना नाम बदल लेती हैं। आमतौर पर ये अपने नाम के साथ अपने पति का नाम भी रखती हैं। फिर भी अन्य लोग केवल पति का अंतिम नाम रखते हैं। अब भी यह चलन बढ़ता ही जा रहा है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि उन्हें अपना नाम बदलने की जरूरत है। लेकिन नाम बदलने का तरीका पता नहीं है। तो शादी के बाद नाम बदलने से क्या फायदा? आइए जानते हैं इससे क्या-क्या फायदे होते हैं। क्या शादी के बाद अपने नाम के साथ पति का नाम जोड़ने में मजा नहीं आता? एक तरफ हम खुश हैं कि हमारे नाम के साथ एक नया नाम जुड़ जाएगा। दूसरी ओर हो सकता है कि अब आप अपने पति के परिवार के साथ पहचान न रख सकें। यदि आपके नाम के साथ पति का नाम भी है तो आपका मान सम्मान और बढ़ेगा। कभी-कभी हमें अपना नाम पसंद नहीं आ सकता है। या हमारी कुंडली से तुलना नहीं कर सकते। या हो सकता है कि किसी और को उस नाम से बुलाए जाने में कठिनाई हो रही हो। ऐसे में अगर हमें नाम बदलना पड़े तो कानून के हिसाब से काफी मुश्किल होगी। लेकिन आप शादी के बाद अपना नाम आसानी से बदल सकते हैं। विवाह के बाद आप अंतिम नाम जोड़कर पति के परिवार से अपनी पहचान करा सकती हैं। बाहरी लोग आपको उस परिवार से संबंधित के रूप में पहचानते हैं। साथ ही परिजनों के साथ भी आपके संबंध बेहतर होंगे। बच्चे होने के बाद वे बिना किसी भ्रम के अपने पति का सरनेम भी जोड़ सकती हैं। शादी के बाद नाम बदलने का सिलसिला बुनियादी दस्तावेजों से शुरू होता है। पहले उन सभी दस्तावेज़ों की सूची बनाएं जिनकी आपको अपना नाम अपडेट करने के लिए आवश्यकता है। अपने पास सही दस्तावेज रखें। अगर हमें शादी के बाद नाम बदलना है तो कुछ दस्तावेज हमारे पास होने चाहिए। सामाजिक सुरक्षा कार्ड, जन्म और विवाह प्रमाण पत्र, नागरिकता का प्रमाण आदि। सबसे पहले अपनी बैंक शाखा में जाएँ और वहाँ अपने दस्तावेज़ों को अपडेट करने के लिए कहें। अगर आपके पास पहले से ही आपके आधिकारिक दस्तावेज और अपडेटेड आईडी हैं तो बैंक में नाम अपडेट करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। तो आप वहां जाइए और बैंक से बात करके उन्हें कहिए कि आप अपना नाम अपडेट कराना चाहते हैं। आपको बैंक द्वारा पूरी तरह निर्देशित किया जाएगा। यदि आपने शादी करने के बाद अपना नाम बदल लिया है, तो आपको उस कंपनी को सूचित करना चाहिए जिसके लिए आप काम करते हैं। क्योंकि उन्हें आपके दस्तावेज़ों को अपडेट करने की आवश्यकता है। इस तथ्य का उल्लेख करें कि नाम बदल गया है क्योंकि आपकी कंपनी जानती है कि आप विवाहित हैं। कार्यालय दस्तावेज़ में नाम बदलें। आपको कंपनी को अपने नए नाम के साथ अपनी आईडी या दस्तावेजों की फोटोकॉपी जमा करनी होगी। अगर आप शादी करने के बाद आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदलते हैं, तो सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी अपना नाम बदलना जरूरी है। उनमें से ज्यादातर आपके सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दोस्त हैं। तो आपके नाम परिवर्तन के बारे में सभी को पता चल जाएगा।
यू. एस ब्यूरो। चीन से फैले कोरोना वायरस के वैश्विक कहर के बीच भारत में कोविड-19 के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद भी इसकी अवधि को बढ़ाने पर विचार-विमर्श चल रहा है। भारत में भले ही कोरोना वायरस पर अभी तक काबू नहीं पाया गया है और इसका संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन, दुनिया में एक देश ऐसा भी है जिसने भारत के साथ ही लॉकडाउन का ऐलान किया था और वहां के हालात यहां से काफी बेहतर होने लगे हैं। दरअसल, भारत और न्यूजीलैंड ने एक ही दिन कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में लॉकडाउन का ऐलान किया था। न्यूजीलैंड ने एक तरह से कोरोना वायरस पर काबू पा लिया है और इसके मामलों लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दूसरी ओर भारत है, जहां कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तीव्र गति से बढ़ती ही जा रही है। बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में हर दिन कोरोना के मरीजों की संख्या में 500 से अधिक का इजाफा हो रहा है, वहीं न्यूजीलैंड में लगातार चौथे दिन मामलों में गिरावट देखने को मिली है। गुरुवार को न्यूजीलैंड में महज 29 नए मामले सामने आए हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा 590 के करीब था। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने चार सप्ताह के लॉकडाउन का ऐलान किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च की रात आठ बजे देश के नाम संबोधन में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है। भारत की तरह न्यूजीलैंड में भी सब कुछ बंद है, राशन, सब्जी, दवा की दुकानों को छोड़कर। न्यूजीलैंड और भारत दोनों ही देश सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। दोनों देशों ने अपनी आबादी को घरों में कैद कर रखा है, ताकि कोरोना के प्रसार से बचा जाए, मगर बावजूद इसके भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या 6400 पार है, वहीं न्यूजीलैंड में 1200 के करीब। दरअसल, न्यूजीलैंड ने अगर भारत के मुकाबले कोरोना पर इतनी जल्दी काबू पा लिया है तो इसकी एक और सबसे बड़ी वजह है उसकी आबादी।
यू. एस ब्यूरो। चीन से फैले कोरोना वायरस के वैश्विक कहर के बीच भारत में कोविड-उन्नीस के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इक्कीस दिनों के लॉकडाउन के बाद भी इसकी अवधि को बढ़ाने पर विचार-विमर्श चल रहा है। भारत में भले ही कोरोना वायरस पर अभी तक काबू नहीं पाया गया है और इसका संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन, दुनिया में एक देश ऐसा भी है जिसने भारत के साथ ही लॉकडाउन का ऐलान किया था और वहां के हालात यहां से काफी बेहतर होने लगे हैं। दरअसल, भारत और न्यूजीलैंड ने एक ही दिन कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में लॉकडाउन का ऐलान किया था। न्यूजीलैंड ने एक तरह से कोरोना वायरस पर काबू पा लिया है और इसके मामलों लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दूसरी ओर भारत है, जहां कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तीव्र गति से बढ़ती ही जा रही है। बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में हर दिन कोरोना के मरीजों की संख्या में पाँच सौ से अधिक का इजाफा हो रहा है, वहीं न्यूजीलैंड में लगातार चौथे दिन मामलों में गिरावट देखने को मिली है। गुरुवार को न्यूजीलैंड में महज उनतीस नए मामले सामने आए हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा पाँच सौ नब्बे के करीब था। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने चार सप्ताह के लॉकडाउन का ऐलान किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौबीस मार्च की रात आठ बजे देश के नाम संबोधन में इक्कीस दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है। भारत की तरह न्यूजीलैंड में भी सब कुछ बंद है, राशन, सब्जी, दवा की दुकानों को छोड़कर। न्यूजीलैंड और भारत दोनों ही देश सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। दोनों देशों ने अपनी आबादी को घरों में कैद कर रखा है, ताकि कोरोना के प्रसार से बचा जाए, मगर बावजूद इसके भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या छः हज़ार चार सौ पार है, वहीं न्यूजीलैंड में एक हज़ार दो सौ के करीब। दरअसल, न्यूजीलैंड ने अगर भारत के मुकाबले कोरोना पर इतनी जल्दी काबू पा लिया है तो इसकी एक और सबसे बड़ी वजह है उसकी आबादी।
Ramgarh: आजसू छात्र संघ ने गुरुवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति और परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की. संघ ने सेमेस्टर 5 के परीक्षा फल को लेकर मुलाकात की. जिला कोषाध्यक्ष नीतीश निराला और रामगढ़ कॉलेज अध्यक्ष रोहित सोनी के संयुक्त नेतृत्व में विभावि के कुलपति मुकुल नारायण देव और परीक्षा नियंत्रक गौरी शंकर तिवारी से मुलाकात की. उन्होंने मुलाकात कर रामगढ़ कॉलेज रामगढ़ में सेमेस्टर 5 सत्र 2019-22 के हिंदी कोर पेपर के परिणाम को लेकर असंतुष्टि जाहिर की. रोहित सोनी ने बताया कि रामगढ़ कॉलेज छात्र संघ ने उत्तर पुस्तिका को सार्वजनिक करने की मांग की थी. क्योंकि कॉलेज का परिणाम आश्चर्यचकित करने वाला है. रोहित ने बताया कि कॉलेज के परिणाम में अधिकतर विद्यार्थी को फ़ेल व प्रमोट कर दिया गया है. इस पर विभावि के कुलपति मुकुल नारायण देव ने इस मामले पर संज्ञान में लेते हुए विभागीय कार्रवाई की बात कही. कहा कि दो दिनों अंदर विभागीय विशेषज्ञ से जांच करवा कर परीक्षा फल की जानकारी दे दी जाएगी.
Ramgarh: आजसू छात्र संघ ने गुरुवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति और परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की. संघ ने सेमेस्टर पाँच के परीक्षा फल को लेकर मुलाकात की. जिला कोषाध्यक्ष नीतीश निराला और रामगढ़ कॉलेज अध्यक्ष रोहित सोनी के संयुक्त नेतृत्व में विभावि के कुलपति मुकुल नारायण देव और परीक्षा नियंत्रक गौरी शंकर तिवारी से मुलाकात की. उन्होंने मुलाकात कर रामगढ़ कॉलेज रामगढ़ में सेमेस्टर पाँच सत्र दो हज़ार उन्नीस-बाईस के हिंदी कोर पेपर के परिणाम को लेकर असंतुष्टि जाहिर की. रोहित सोनी ने बताया कि रामगढ़ कॉलेज छात्र संघ ने उत्तर पुस्तिका को सार्वजनिक करने की मांग की थी. क्योंकि कॉलेज का परिणाम आश्चर्यचकित करने वाला है. रोहित ने बताया कि कॉलेज के परिणाम में अधिकतर विद्यार्थी को फ़ेल व प्रमोट कर दिया गया है. इस पर विभावि के कुलपति मुकुल नारायण देव ने इस मामले पर संज्ञान में लेते हुए विभागीय कार्रवाई की बात कही. कहा कि दो दिनों अंदर विभागीय विशेषज्ञ से जांच करवा कर परीक्षा फल की जानकारी दे दी जाएगी.
अगर आप अपने बच्चे का नाम उज्जलरीट रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि उज्जलरीट का मतलब जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं होता है। उज्जलरीट नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। शास्त्रों में उज्जलरीट नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं भी लोगों को बहुत पसंद आता है। उज्जलरीट नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। उज्जलरीट नाम के अर्थ यानी जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। आगे उज्जलरीट नाम की राशि, उज्जलरीट का लकी नंबर व इस नाम के जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं के बारे में संक्षेप में बताया है।
अगर आप अपने बच्चे का नाम उज्जलरीट रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि उज्जलरीट का मतलब जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं होता है। उज्जलरीट नाम रखने से आपका बच्चा भी इस नाम के मतलब की तरह व्यव्हार करने लगता है। शास्त्रों में उज्जलरीट नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं भी लोगों को बहुत पसंद आता है। उज्जलरीट नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। उज्जलरीट नाम के अर्थ यानी जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। आगे उज्जलरीट नाम की राशि, उज्जलरीट का लकी नंबर व इस नाम के जीवन का एक पवित्र रास्ता रहते हैं के बारे में संक्षेप में बताया है।
जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता। पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग। विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग। तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशीष मागे। गाहे तव जयगाथा। जन गण मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता। जय हे, जय हे, जय हे जय जय जय जय हे॥ – Rabindranath Tagore
जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता। पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग। विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग। तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशीष मागे। गाहे तव जयगाथा। जन गण मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता। जय हे, जय हे, जय हे जय जय जय जय हे॥ – Rabindranath Tagore
मंडला, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के बढ़ार पंचायत के ग्राम मछरिया में जहां वन मंत्री कुंवर विजय शाह एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर नवनिर्मित अमृत सरोवर का अवलोकन करने पहुंचे थे। यहां योजना के क्रियान्वयन के संबंध में मत्स्य अधिकारी से पूछे सवालों का संतुष्टिपूर्वक जवाब नहीं मिलने पर दोनों मंत्री नाराज हुए और उन्होंने मत्स्य अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने कलेक्टर को योजना का क्रियान्वयन ठीक ढंग से कराने के निर्देश दिए। निर्देशों का पालन नहीं होने पर होगी कार्रवाईः ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच है कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों का कर्तव्य है कि योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से हो। यदि क्रियान्वयन में ढिलाई होगी तो उसे सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को जरूरी निर्देश दिए हैं यदि उनका पालन नहीं होगा तो कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के अंतर्गत आयोजित शिविर में शामिल होने मंडला पहुंचे वन मंत्री कुंवर विजय शाह एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बढ़ार पंचायत के ग्राम मछरिया में नवनिर्मित अमृत सरोवर का अवलोकन किया। इस दौरान मंत्री द्वय द्वारा सरोवर में सांकेतिक रूप से मछली बीज भी छोड़े गए। कम लागत में उत्कृष्ट निर्माणः वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने कम लागत में उत्कृष्ट सरोवर निर्माण के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने अच्छी सोच के साथ प्रधानमंत्री की सोच को अमलीजामा पहना कर यहां दिखाया है। पौधरोपण कियाः मंत्रीगण द्वारा सरोवर के नजदीक पौधारोपण भी किया गया। साथ ही ऊर्जामंत्री द्वारा उपस्थित ग्रामीणों से चर्चा कर शासकीय योजनाओं का फीडबैक लिया। ये रहे उपस्थितः इस दौरान कलेक्टर हर्षिका सिंह, एसपी यशपाल सिंह राजपूत सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
मंडला, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के बढ़ार पंचायत के ग्राम मछरिया में जहां वन मंत्री कुंवर विजय शाह एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर नवनिर्मित अमृत सरोवर का अवलोकन करने पहुंचे थे। यहां योजना के क्रियान्वयन के संबंध में मत्स्य अधिकारी से पूछे सवालों का संतुष्टिपूर्वक जवाब नहीं मिलने पर दोनों मंत्री नाराज हुए और उन्होंने मत्स्य अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने कलेक्टर को योजना का क्रियान्वयन ठीक ढंग से कराने के निर्देश दिए। निर्देशों का पालन नहीं होने पर होगी कार्रवाईः ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच है कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों का कर्तव्य है कि योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से हो। यदि क्रियान्वयन में ढिलाई होगी तो उसे सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को जरूरी निर्देश दिए हैं यदि उनका पालन नहीं होगा तो कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के अंतर्गत आयोजित शिविर में शामिल होने मंडला पहुंचे वन मंत्री कुंवर विजय शाह एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बढ़ार पंचायत के ग्राम मछरिया में नवनिर्मित अमृत सरोवर का अवलोकन किया। इस दौरान मंत्री द्वय द्वारा सरोवर में सांकेतिक रूप से मछली बीज भी छोड़े गए। कम लागत में उत्कृष्ट निर्माणः वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने कम लागत में उत्कृष्ट सरोवर निर्माण के लिए जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने अच्छी सोच के साथ प्रधानमंत्री की सोच को अमलीजामा पहना कर यहां दिखाया है। पौधरोपण कियाः मंत्रीगण द्वारा सरोवर के नजदीक पौधारोपण भी किया गया। साथ ही ऊर्जामंत्री द्वारा उपस्थित ग्रामीणों से चर्चा कर शासकीय योजनाओं का फीडबैक लिया। ये रहे उपस्थितः इस दौरान कलेक्टर हर्षिका सिंह, एसपी यशपाल सिंह राजपूत सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
5. ज्योतिष के विद्वान बतातें हैं कि घड़े का जल ग्रहण करने से व्यक्ति के जीवन में बुध ग्रह और चंद्रमा का प्रभाव शुभ होता है। 6. अब तो वैज्ञानिक रूप से भी यह सिद्ध हो गया हैं कि मिट्टी के घड़े में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
पाँच. ज्योतिष के विद्वान बतातें हैं कि घड़े का जल ग्रहण करने से व्यक्ति के जीवन में बुध ग्रह और चंद्रमा का प्रभाव शुभ होता है। छः. अब तो वैज्ञानिक रूप से भी यह सिद्ध हो गया हैं कि मिट्टी के घड़े में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
प्रो कबड्डी सीजन 8 के 114वें मैच में बेंगलुरु बुल्स ने जयपुर पिंक पैंथर्स को 45-37 से हराया। बेंगलुरु बुल्स के लिए मैच का सर्वश्रेष्ठ रेडर भरत नरेश था। जयदीप ने उनका भरपूर समर्थन किया। आज रात अर्जुन देशवाल के प्रयास व्यर्थ गए। बेंगलुरू बुल्स जयपुर पिंक पैंथर्स के 26 के स्कोर पर 30 के स्कोर पर रेडिंग विभाग में हावी था। जब बेंगलुरु से निपटने की बात आई तो जयपुर पिंक पैंथर्स के 6 अंक के लिए बुल्स ने 10 अंक बनाए। उन्होंने विपक्ष को 2 ऑल-आउट कर दिया। और इससे सारा फर्क पड़ा। बेंगलुरु बुल्स के कप्तान पवन कुमार सहरावत ने 10 रन बनाए, जबकि जयपुर पिंक पैंथर्स के कप्तान दीपक निवास हुड्डा ने 8 रन बनाए। बेंगलुरु बुल्स का मुख्य आधार सौरभ नंदल 81% रेड तक मैट पर रहे। ।Arjun Deshwal (JP) ।अर्जुन देशवा पिछले कुछ समय से मयूर जगन्नाथ को निशाना बनारहे हैं और आखिरकार उसे एक स्मार्ट टो टच के साथ आउट कर दिया। ।Deepak Niwas Hooda (JP) ।सौरभ नंदल गलती करते हैं और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ता है और दीपक एन हुड्डा के लिए यह एक और बिंदु है। ।Arjun Deshwal (JP) ।Pawan Kumar Sehrawat (BB) ।संदीप ढुल, दीपक राजिंदर ने गलती की और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ा और पवन के सहरावत के लिए यह एक और बिंदु है। ।Arjun Deshwal (JP) ।अर्जुन देशवाल को अमन को बाहर निकालने के लिए एक और रेड पॉइंट मिलता है। ।Deepak Niwas Hooda (JP) ।दीपक एन हुड्डा जयदीप के साथ लॉक हॉर्न करते हैं, लेकिन लाइन पार करने में सफल होते हैं। ।Chandran Ranjit (BB) ।द्रन रंजीत द्वारा त्वरित बोनस प्राप्त करने पर कम जोखिम वाला कदम। ।Arjun Deshwal (JP) ।अर्जुन देशवाल ने सौरभ नंदल को हैंड टच से एलिमिनेट किया। ।Bharat Naresh (BB) ।विशाल, दीपक राजिंदर होशियार होने की कोशिश करते हैं, लेकिन भरत नरेश के आसानी से टच हो जाने और बात समझ में आने के कारण यह उल्टा हो जाता है। ।Bharat Naresh (BB) ।भरत नरेश बृजेंद्र सिंह चौधरी, संदीप ढुल के साथ लॉक हॉर्न करते हैं, लेकिन लाइन पार करने में सफल होते हैं। ।Pawan Kumar Sehrawat (BB) ।पवन के सेहरावत ने सफलतापूर्वकरेड किया और पवन टी आर को आउट किया। ।Nitin Rawal (JP) ।मयूर जगन्नाथ, पवन के सहरावत ट्रैप रेडर नितिन रावल, उन्होंने एक बोनस अंक पिंच करने के बाद। ।Bharat Naresh (BB) ।सुपर रेड! भरत नरेश ने रेड पर 3 अंक बटोरे। ।Pawan Kumar Sehrawat (BB) ।अर्जुन देशवाल, साहुल कुमार गलती करते हैं और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ता है और पवन के सहरावत के लिए यह एक और बिंदु है। ।Pawan Kumar Sehrawat (BB) ।पवन टी आर को पवन के सेहरावत को टच करते हैं। ।Nitin Rawal (JP) ।सौरभ नंदल, मोर जीबी, जयदीप, मयूर जगन्नाथ ट्रैप रेडर नितिन रावल, उन्होंने एक बोनस अंक पिंच करने के बाद। ।Arjun Deshwal (JP) ।सुपर टैकल बेंगलुरु बुल्स के लिए। अर्जुन देशवाल सौरभ नंदल, मोर जीबी पर छलांग लगाने की कोशिश करते हैं , जो अपनी टीम के लिए दो अंक जीतने के लिए रेडर के पैर पर लेट जाते हैं । अमूल्य! ।Dong Geon Lee (BB) ।Brijendra Singh Chaudhary has to leave as Dong Geon Lee gets a touch on him. ।Bharat Naresh (BB) ।बृजेंद्र सिंह चौधरी को जाना है क्योंकि डोंग जिओन ली ने उस पर टच किया है। रेड 79 बी बी 44 - 35 जेपी भरत नरेश (बीबी) भरत नरेश ने संदीप ढुल, दीपक राजिंदर को पीछे छोड़ दिया और खेल का मुद्दा उठाया।
प्रो कबड्डी सीजन आठ के एक सौ चौदहवें मैच में बेंगलुरु बुल्स ने जयपुर पिंक पैंथर्स को पैंतालीस-सैंतीस से हराया। बेंगलुरु बुल्स के लिए मैच का सर्वश्रेष्ठ रेडर भरत नरेश था। जयदीप ने उनका भरपूर समर्थन किया। आज रात अर्जुन देशवाल के प्रयास व्यर्थ गए। बेंगलुरू बुल्स जयपुर पिंक पैंथर्स के छब्बीस के स्कोर पर तीस के स्कोर पर रेडिंग विभाग में हावी था। जब बेंगलुरु से निपटने की बात आई तो जयपुर पिंक पैंथर्स के छः अंक के लिए बुल्स ने दस अंक बनाए। उन्होंने विपक्ष को दो ऑल-आउट कर दिया। और इससे सारा फर्क पड़ा। बेंगलुरु बुल्स के कप्तान पवन कुमार सहरावत ने दस रन बनाए, जबकि जयपुर पिंक पैंथर्स के कप्तान दीपक निवास हुड्डा ने आठ रन बनाए। बेंगलुरु बुल्स का मुख्य आधार सौरभ नंदल इक्यासी% रेड तक मैट पर रहे। ।Arjun Deshwal ।अर्जुन देशवा पिछले कुछ समय से मयूर जगन्नाथ को निशाना बनारहे हैं और आखिरकार उसे एक स्मार्ट टो टच के साथ आउट कर दिया। ।Deepak Niwas Hooda ।सौरभ नंदल गलती करते हैं और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ता है और दीपक एन हुड्डा के लिए यह एक और बिंदु है। ।Arjun Deshwal ।Pawan Kumar Sehrawat ।संदीप ढुल, दीपक राजिंदर ने गलती की और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ा और पवन के सहरावत के लिए यह एक और बिंदु है। ।Arjun Deshwal ।अर्जुन देशवाल को अमन को बाहर निकालने के लिए एक और रेड पॉइंट मिलता है। ।Deepak Niwas Hooda ।दीपक एन हुड्डा जयदीप के साथ लॉक हॉर्न करते हैं, लेकिन लाइन पार करने में सफल होते हैं। ।Chandran Ranjit ।द्रन रंजीत द्वारा त्वरित बोनस प्राप्त करने पर कम जोखिम वाला कदम। ।Arjun Deshwal ।अर्जुन देशवाल ने सौरभ नंदल को हैंड टच से एलिमिनेट किया। ।Bharat Naresh ।विशाल, दीपक राजिंदर होशियार होने की कोशिश करते हैं, लेकिन भरत नरेश के आसानी से टच हो जाने और बात समझ में आने के कारण यह उल्टा हो जाता है। ।Bharat Naresh ।भरत नरेश बृजेंद्र सिंह चौधरी, संदीप ढुल के साथ लॉक हॉर्न करते हैं, लेकिन लाइन पार करने में सफल होते हैं। ।Pawan Kumar Sehrawat ।पवन के सेहरावत ने सफलतापूर्वकरेड किया और पवन टी आर को आउट किया। ।Nitin Rawal ।मयूर जगन्नाथ, पवन के सहरावत ट्रैप रेडर नितिन रावल, उन्होंने एक बोनस अंक पिंच करने के बाद। ।Bharat Naresh ।सुपर रेड! भरत नरेश ने रेड पर तीन अंक बटोरे। ।Pawan Kumar Sehrawat ।अर्जुन देशवाल, साहुल कुमार गलती करते हैं और उन्हें बेंच पर वापस जाना पड़ता है और पवन के सहरावत के लिए यह एक और बिंदु है। ।Pawan Kumar Sehrawat ।पवन टी आर को पवन के सेहरावत को टच करते हैं। ।Nitin Rawal ।सौरभ नंदल, मोर जीबी, जयदीप, मयूर जगन्नाथ ट्रैप रेडर नितिन रावल, उन्होंने एक बोनस अंक पिंच करने के बाद। ।Arjun Deshwal ।सुपर टैकल बेंगलुरु बुल्स के लिए। अर्जुन देशवाल सौरभ नंदल, मोर जीबी पर छलांग लगाने की कोशिश करते हैं , जो अपनी टीम के लिए दो अंक जीतने के लिए रेडर के पैर पर लेट जाते हैं । अमूल्य! ।Dong Geon Lee ।Brijendra Singh Chaudhary has to leave as Dong Geon Lee gets a touch on him. ।Bharat Naresh ।बृजेंद्र सिंह चौधरी को जाना है क्योंकि डोंग जिओन ली ने उस पर टच किया है। रेड उन्यासी बी बी चौंतालीस - पैंतीस जेपी भरत नरेश भरत नरेश ने संदीप ढुल, दीपक राजिंदर को पीछे छोड़ दिया और खेल का मुद्दा उठाया।
राजस्थान चुनाव में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. ऐसे में नेताओं द्वारा बयानबाजी का दौर काफी तेज हो रहा है. बता दें, कांग्रेसी नेता अहमद पटेल ने मीडिया से बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा साल 1975 में लगाए गए इमरजेंसी को काला अध्याय बताया है. अहमद पटेल ने इस दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी हमला बोला. पटेल ने कहा कि 2014 के बाद से ही अघोषित इमरजेंसी लगी हुई है. क्या बोले अहमद पटेल' अहमद पटेल ने कहा, आजादी के बाद मुझे एक्सेप्ट करना चाहिए कि जो दो डार्क फेस जिसे कहते हैं एक तो इमरजेंसी और दूसरी 2014 के बाद अघोषित इमरजेंसी .. हमने तो मांफी मांग ली.. इंदिरा जी ने तो मांफी मांग ली ... और ये भी कमिटमेंट दिया की भविष्य में कभी भी ऐसी गलती नहीं की जाएगी. लेकिन ये जो अघोषित इमरजेंसी जो है उसका क्या किया जाए..' बता दें, अहमद पटेल, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं. पटेल फिलहाल गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. गौरतलब है कि राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजस्थान में काफी कड़ा मुकाबला है. जहां एक तरफ बीजेपी ने फिर से वसुंघरा राजे पर अपना दांव खेला है वहीं कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी, अशोक गहतोल और सचिन पायलट के नेतृत्व में चुनाव प्रचार कर रही है. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है. कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों ही चुनावी मैदान में हैं. तमाम सर्वे बता रहे हैं कि इस बार राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने वाली है. राज्य में वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी भी देखी जा रही है. खैर इस बार राजस्थान की सत्ता में कौन वापसी करेगा इसका पता तो आने वाले 11 दिसंबर को ही चलेगा.
राजस्थान चुनाव में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. ऐसे में नेताओं द्वारा बयानबाजी का दौर काफी तेज हो रहा है. बता दें, कांग्रेसी नेता अहमद पटेल ने मीडिया से बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा साल एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में लगाए गए इमरजेंसी को काला अध्याय बताया है. अहमद पटेल ने इस दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी हमला बोला. पटेल ने कहा कि दो हज़ार चौदह के बाद से ही अघोषित इमरजेंसी लगी हुई है. क्या बोले अहमद पटेल' अहमद पटेल ने कहा, आजादी के बाद मुझे एक्सेप्ट करना चाहिए कि जो दो डार्क फेस जिसे कहते हैं एक तो इमरजेंसी और दूसरी दो हज़ार चौदह के बाद अघोषित इमरजेंसी .. हमने तो मांफी मांग ली.. इंदिरा जी ने तो मांफी मांग ली ... और ये भी कमिटमेंट दिया की भविष्य में कभी भी ऐसी गलती नहीं की जाएगी. लेकिन ये जो अघोषित इमरजेंसी जो है उसका क्या किया जाए..' बता दें, अहमद पटेल, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं. पटेल फिलहाल गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. गौरतलब है कि राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजस्थान में काफी कड़ा मुकाबला है. जहां एक तरफ बीजेपी ने फिर से वसुंघरा राजे पर अपना दांव खेला है वहीं कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी, अशोक गहतोल और सचिन पायलट के नेतृत्व में चुनाव प्रचार कर रही है. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है. कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों ही चुनावी मैदान में हैं. तमाम सर्वे बता रहे हैं कि इस बार राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने वाली है. राज्य में वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी भी देखी जा रही है. खैर इस बार राजस्थान की सत्ता में कौन वापसी करेगा इसका पता तो आने वाले ग्यारह दिसंबर को ही चलेगा.
मनोज यादव, कोरबा। हवस की आग में रिश्ते का भी अहसास नहीं रहा. मवेशी चराने निकली 8 साल की मासूम भतीजी से 16 साल के नाबालिग चाचा ने दुष्कर्म को अंजाम दिया है. घटना की जानकारी होने पर पीड़िता को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है. घटना कोरबा जिले के बांगो थाना अंतर्गत ग्रामीण इलाके की है, जहां एक गांव में निवासरत तीसरी में पढ़ने वाली 8 साल की लड़की माता-पिता के खेत जाने के बाद मवेशी चराने जंगल गई हुई थी, जहां रिश्ते में चाचा लगने वाले नाबालिग युवक ने दुष्कर्म की घटोना को अंजाम दिया. लड़की जब घर वापस लौटी तो सुस्त थी, और निजी अंग से रक्तस्राव हो रहा था. खेत से वापस लौटे माता-पिता ने जब इस दृश्य को देखा तो कारण पूछा. इस पर डरी सहमी लड़की ने घटना की जानकारी दी.
मनोज यादव, कोरबा। हवस की आग में रिश्ते का भी अहसास नहीं रहा. मवेशी चराने निकली आठ साल की मासूम भतीजी से सोलह साल के नाबालिग चाचा ने दुष्कर्म को अंजाम दिया है. घटना की जानकारी होने पर पीड़िता को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है. घटना कोरबा जिले के बांगो थाना अंतर्गत ग्रामीण इलाके की है, जहां एक गांव में निवासरत तीसरी में पढ़ने वाली आठ साल की लड़की माता-पिता के खेत जाने के बाद मवेशी चराने जंगल गई हुई थी, जहां रिश्ते में चाचा लगने वाले नाबालिग युवक ने दुष्कर्म की घटोना को अंजाम दिया. लड़की जब घर वापस लौटी तो सुस्त थी, और निजी अंग से रक्तस्राव हो रहा था. खेत से वापस लौटे माता-पिता ने जब इस दृश्य को देखा तो कारण पूछा. इस पर डरी सहमी लड़की ने घटना की जानकारी दी.
भणइ, एवं निरवसेसं जाव सोहम्मे कप्पे अरुणकते कप्पे विमाणे उववन्ने । चत्तारि पलिओवमाई ठिई । महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ निक्खेवो ॥ १५७ ॥ ॥ सत्तमस्स अंगस्स उवासगदसाणं चउत्थं सुरादेवज्झयण समत्तं ॥ छाया-ततः खलु स सुरादेव. श्रमणोपासको धन्यां भार्यामेवमवादीत् - "एवं खलु देवानुप्रिये ! कोऽपि पुरषस्तथैव कथयति यथा चुलनीपिता ।" धन्यापि प्रतिभणति, यावत्कनीयांसं, "नो खलु देवानुप्रियाः ! युष्माक कोऽपि पुरुषः शरीरे यमक-समक षोडश रोगातङ्कान् प्रक्षिपति, एवं खलु कोऽपि पुरुषो युष्माकमुपसर्ग करोति", शेष यथा चुलनीपित्रे भद्रा भणति । एवं निरवशेष यावत्सौधर्मे कल्पेऽरुणकान्ते विमाने उपपन्न । चत्वारि पत्योपमानि स्थिति महाविदेहे वर्षे सेत्स्यति । निक्षेप । ।। सप्तमस्याङ्गस्योपासकदशानां चतुर्थ सुरादेव अध्ययन समाप्तम् ।। शब्दार्थ-तए णं तदनन्तर से सुरादेवे - वह सुरादेव, समणोवासए श्रमणोपासक, धन्नं भारियं - (अपनी) धन्या पत्नी से, एव वयासी - इस प्रकार बोला । एव खलु देवाणुप्पिए । - - हे देवानुप्रिय। इस प्रकार, के वि पुरिसे कोई पुरुष, तहेव कहेइ जहा चुलणीपिया - सब वृत्तान्त उसी प्रकार कहा जैसे चुलनीपिता ने कहा था, धन्ना वि पडिभणइ धन्या ने भी उसी प्रकार उत्तर दिया, (भद्रा के समान), जाव - यावत्, कणीयसं- कनिष्ठ पुत्रादि (सब घर पर कुशल है), नो खलु देवाणुप्पिया - - निश्चय ही हे देवानुप्रिय! केवि पुरिसे कोई पुरुष, तुभं तुम्हारे, सरीरंसि- शरीर मे, जमग समग एक साथ ही, सोलस रोगायके पक्खिवइ-सोलह रोगातड्डू डालता । (ऐसा कोई पुरुष नही है), एस ण के वि पुरिसे तुम यह किसी पुरुष ने तुम्हारे साथ, उवसग्ग करेइ - उपसर्ग किया है। सेसं जहा चुलणीपियस्स भद्दा भणइ -शेष जैसे चुलनीपिता को भाद्रा माता ने कहा था वैसे कहा, एव निरवसेस इस प्रकार निरविशेष, जाव यावत्, सोहम्मे कप्पे-सौधर्म कल्प में, अरुणकंते कप्पे- अरुणकात कल्प, विमाणे उववन्ने विमान में वह उत्पन्न हुआ, चत्तारि पालिओवमाई ठिई-वहा पर सुरादेव की चार पत्योपम स्थिति है, महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ-महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेकर सिद्ध होगा । निक्खेवो निक्षेप । भावार्थ- सुरादेव ने अपनी भार्या धन्या को कहा - हे देवानुप्रिय। निश्चय ही यहा कोई पुरुष आया। और सब वृत्तान्त उसी प्रकार कहा, जैसे चुलनीपिता ने अपनी भद्रा माता को कहा था । धन्ना भार्या ने भी सुरादेव को कहा कि तेरे कनिष्ठ पुत्रादि सब सकुशल है। तुम्हारे शरीर में एक साथ सोलह रोग डालने का किसी पुरुष ने उपसर्ग किया है। शेष चुलनीपिता को माता भद्रा के समान कहा। इस प्रकार यावत् सुरादेव भी सौधर्म-कल्प मे अरुणकान्त विमान में उत्पन्न हुआ। वहा पर इस की चार पल्योपम स्थिति है और वह भी महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेकर सिद्ध होगा। निक्षेप-पूर्ववत् जान लेना चाहिए। ॥ सप्तम अङ्ग उपासकदशा-सूत्र का चतुर्थ सुरादेव अध्ययन समाप्त ।। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६० / सुरादेव उपासक, चतुर्थ अध्ययन पंचम अध्ययन मूलम् - उक्खेवो पञ्चमस्स अज्झयणस्स, एवं खलु, जम्बू! तेणं कालेणं तेण समएणं आलभिया नामं नयरी । संखवणे उज्जाणे । जियसत्तू राया। चुल्लसए गाहावई अड्ढे जाव छ हिरण्ण-कोडीओ जाव छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएण । बहुला भारिया । सामी समोसढे । जहा आणन्दो तहा गिहि-धम्मं पडिवज्जइ । सेसं जहा कामदेवो जाव धम्मपण्णत्ति उवसंपज्जित्ताणं विहरइ ॥ १५८ ॥ छाया - उत्क्षेप पञ्चमस्याध्ययनस्य, एवं खलु जम्बूः । तस्मिन् काले तस्मिन् समये आलभिका नाम नगरी, शङ्खवनमुद्यानम् जितशत्रू राजा, चुल्लशतको गाथापतिरायो यावत् षड् हिरण्यकोट्यो यावत् षड् व्रजा दशगोसाहस्रिकेण व्रजेन । बहुला भार्या । स्वामी समवसृतः यथाऽऽनन्दस्तथा गृहिधर्मं प्रतिपद्यते। शेष यथा कामदेवो यावद् धर्मप्रज्ञप्तिमुपसम्पद्य विहरति । शब्दार्थ उक्खेवो पंचमस्स अज्झयणस्स-पाचवे चुल्लशतक अध्ययन का उपक्षेप जम्बूस्वामी ने प्रश्न किया और सुधर्मा स्वामी ने उत्तर देते हुए कहा - -एवं खलु जम्बू - हे जम्बू । इस प्रकार, तेणं कालेण तेण समएणं - - उस काल और समय, आलभिया नाम नयरी - आलभिका नाम की नगरी, संखवणे उज्जाणे शखवन उद्यान, जियसत्तू राया - जितशत्रु राजा, चुल्लसए गाहावई - और चुल्लशतक गाथापति था, अड्ढे जाव वह समृद्ध यावत् अपरिभूत था, छ हिरण्ण कोडीओ छ करोड सुवर्ण मुद्राए कोष मे थी, छः करोड़ व्यापार मे लगी हुई थी, और छ करोड़ घर तथा सामान मे लगी हुई थी। जाब छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएणं यावत् प्रत्येक व्रज में दस हजार गायो के गणित से छ व्रज अर्थात् ६० हजार गाए थी । बहुला भारिया - बहुला भार्या थी, सामी समोसढे-भगवान् महावीर समवसृत हुए, जहा आणंदो तहा गिहिधम्मं पडिवज्जइ-आनन्द के समान उसने भी गृहस्थ धर्म को स्वीकार किया, सेसं जहा कामदेवो-शेष कामदेव के समान है, जाव धम्मपण्णत्ति उवसंपज्जित्ताणं विहरइ - यावत् धर्मप्रज्ञप्ति को स्वीकार करके विचरने लगा । भावार्थ - सुधर्मा स्वामी ने जम्बू स्वामी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में इस प्रकार कहा - हे श्री उपासक दशांग सूत्रम् / २६१ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन जम्बू । उस काल उस समय आलभिका नाम की नगरी थी । वहा शखवन उद्यान था, जितशत्रु राजा राज्य करता था और चुल्लशतक नामक गाथापति था, वह अति समृद्ध यावत् अपरिभूत था। उसकी छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे थी, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई थी, और छ करोड़ घर तथा सामान मे। दस हजार गायों के प्रत्येक व्रज के गणित से छ व्रज अर्थात् ६० हजार पशु-धन था । बहुला भार्या थी। ग्रामानुग्राम विहार करते हुए भगवान् महावीर वहा आलभिका नगरी मे पधारे। आनन्द के समान उसने भी गृहस्थ धर्म को स्वीकार किया। यावत् कामदेव के समान धर्मप्रज्ञप्ति को स्वीकार करके विचरने लगा। पिशाच का उपद्रवमूलम् - तए ण तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स पुव्वरत्तावरत्त कालसमयंसि एगे देवे अंतिय जाव असि गहाय एवं वयासी- "हंभो! चुल्लसयगा । समणोवासया ! जाव न भंजसि तो ते अज्ज जेट्ठे पुत्त साओ गिहाओ नीणेमि । एव जहा चुलणीपिय, नवरं एक्के-क्के सत्त मससोल्लया जाव कणीयसं जाव आयचामि ॥ १५६ ॥ तए ण से चुल्लसयए समणोवासए जाव विहरइ ॥ १६० ॥ छाया - ततः खलु तस्य चुल्लशतकस्य श्रमणोपासकस्य पूर्वरात्रापरत्र कालसमये एको देवोऽन्तिक यावदसि गृहीत्वैवमवादीत्- "हभो चुल्लशतक! श्रमणोपासक यावन्न भनक्षि तर्हि तेऽद्य ज्येष्ठ पुत्र स्वस्माद् गृहान्नयामि एव यथा चुलनीपितर, नवरमेकैकस्मिन् सप्त मासशूल्यकानि यावत्कनीयांस यावदासिञ्चामि । तत खलु स चुल्लशतक श्रमणोपासको यावद्विहरति । शब्दार्थ-तए णं - तदनन्तर तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स अतिय - उस चुल्लशतक श्रमणोपसक के पास, पुव्वरत्तावरत्त कालसमयंसि- अर्धरात्रि में, एगे देवे-एक देवता, जाव असि गहाय यावत् तलवार ( हाथ में लेकर ), एवं वयासी- इस प्रकार बोला-ह भो चुल्लसयगा समणोवासया । - अरे चुल्लशतक श्रमणोपासक जाव न भजसि- यावत् तू यदि शीलादि व्रतो को नही छोड़ेगा, तो ते - तो तेरे, अज्ज जेट्टं पुत्त- आज तुम्हारे ज्येष्ठ पुत्र को, साओ गिहाओ-अपने घर से, नीणेमि-निकाल लाता हू, एवं जहा चुलणीपिय- इस प्रकार चुलनीपिता के समान (करता है), नवरं एक्के-क्के सत्त मंस सोल्लया विशेष यही है कि यहा एक-एक के सात-सात मास खड किए, जाव कणीयस जाव आयचामि - यावत् कनिष्ठ पुत्र के रुधिर और मास से छीटूंगा। चुल्लशतक श्रमणोपासक, जाव-यावत्, तए णं से चुल्लसयए समणोवासए - तदनन्तर विहरइ शान्त एव ध्यान में स्थिर रहा । श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६२ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन भावार्थ- चुल्लशतक श्रमणोपासक के पास अर्धरात्रि के समय एक देव हाथ में तलवार लेकर आया और कहने लगा - अरे चुल्लशतक श्रमणोपासक यदि तू शीलादि व्रतों को नहीं छोड़ेगा तो मै तेरे ज्येष्ठ पुत्र को घर से लाकर तेरे सामने मारूगा । इस प्रकार चुलनीपिता के समान कहा । विशेष यही है कि यहा पर एक-एक के सात-सात टुकड़े-मास खड करने को कहा यावत् कनिष्ठ के रुधिर और मास से छीटे दूंगा। चुल्लशतक फिर भी शान्त एव ध्यानावस्थित रहा। मूलम् - तए णं से देवे चुल्लसयग समणोवासय चउत्थ पि एवं वयासी-"हं भो! चुल्लसयगा समणोवासया ! जाव न भंजसि तो ते अज्ज जाओ इमाओ छ हिरण्ण-कोडीओ निहाण-पउत्ताओ, छ वुड्ढि -पउत्ताओ, छ पवित्थर पउत्ताओ, ताओ साओ गिहाओ नीणेमि, नीणेत्ता आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव पहेसु सव्वओ समंता विप्पइरामि, जहा णं तुमं अट्ट-दुहट्ट-वसट्टे अकाले चेव जीवियाओ ववरोविज्जसि" ॥ १६१ ॥ छाया - ततः खलु स देवश्चुल्लशतकं श्रमणोपासक चतुर्थमप्येवमवादीत् - "ह भो चुल्लशतक । श्रमणोपासक यावन्न भनक्षि तर्हि तेऽद्य या इमाः षड् हिरण्य-कोट्यो निधान प्रयुक्ता, षड् वृद्धि प्रयुक्ता षड् प्रविस्तर - प्रयुक्तास्ताः स्वस्माद् गृहान्नयामि, नीत्वाऽऽलभिकाया नगर्या शृंङ्गाटक यावत्पथेषु सर्वतः समन्ताद् विप्रकिरामि यथा खलु त्वमार्त्तो वशार्त्तोऽकाल एव जीविताद्व्यपरोपयिष्यसे । भावार्थ-तए ण से देवे - तदनन्तर वह देव, चुल्लसयग समणोवासयं- चुल्लशकत श्रमणोपासक को, चउत्थ पि-चुतर्थ बार भी, एव वयासी - इस प्रकार कहने लगा - ह भो चुल्लसयगा। समणोवासया- अरे चुल्लशतक ! श्रमणोपासक ! जाय न भजसि - यावत् यदि तू शीलादि व्रतो का त्याग नहीं करता, तो ते अज्ज तो तुम्हारी आज, जाओ इमाओ - जो यह, छ हिरण्ण कोडीओ निहाणपउत्ताओ, छ वुड्डिपउत्ताओ, छ पवित्थर पउत्ताओ - छ करोड़ मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी हुई है, ताओ साओ गिहाओ नीणेमि - - उनको घर से लाता हू, नीणेत्ता-लाकर, आलभियाए नयरीए-आलभिका नगरी मे, सिघाडग जाव पहेसु-शङ्गाटक तथा यावत् मार्गो मे, सव्वओ समंता विप्पइरामि- चारो ओर बिखेर दूगा । जहा णं तुमं - जिस से तू, अट्ट दुहट्ट चसट्टे अकाले चेव जीवियाओ - जिससे तू अत्यन्त चिन्तामग्न तथा विवश हो कर अकाल में ही जीवन से, ववरोविज्जसि- पृथक् हो जाएगा। भावार्थ-देव ने चुल्लशतक श्रमणोपासक को चौथी बार कहा - हे चुल्लशतक । यदि तू शीलादि व्रतों को भग नहीं करता है तो यह जो तेरे छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार मे श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६३ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन लगी हुई है तथा छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी है, उन सबको चौराहो पर बिखेर दूगा जिससे तू चिन्तामग्न तथा दुखी होकर अकाल मे ही मृत्यु को प्राप्त करेगा । मूलम् -तए णं से चुल्लसयए समणोवासए तेणं देवेणं एवं वुत्ते समाणे अभीए जाव विहरइ ॥ १६२ ॥ छाया - ततः खलु स चुल्लशतक श्रमणोपासकस्तेन देवेनैवमुक्त सन्नभीतो यावद्विहरति । शब्दार्थ-तए णं से चुल्लसयए समणोवासए - तदनन्तर वह चुल्लशतक श्रमणोपासक, तेण देवेणं एवं बुत्ते समाणे - उस देव के इस प्रकार कहने पर भी अभीए जाव विहरइ निर्भय यावत् ध्यान में स्थिर रहा। भावार्थ- चुल्लशतक देव द्वारा इस प्रकार कहने पर भी ध्यान में स्थिर रहा । मूलम् - तए णं से देवे चुल्लसयगं समणोवासय अभीय जाव पासित्ता दोच्चंपि तच्वंपि भणइ, जाव ववरोविज्जसि ॥ १६३ ॥ छाया - तत खलु स देवश्चुल्लशतक श्रमणोपासकमभीत यावद् दृष्ट्वा द्वितीयमपि तृतीयमपि तथैव भणति यावद्व्यपरोपयिष्यसे । शब्दार्थ-तए ण से देवे चुल्लसयगं समणोवासयं- तदनन्तर वह देव चुल्लशतक श्रमणोपासक को, अभीयं जाव पासित्ता-निर्भय यावत् देखकर, दोच्चं पि तच्चं पि तहेव भणइ - द्वितीय तथा तृतीय बार उसी तरह कहा, जाव ववरोविज्जसि-- यावत् मारा जाएगा । भावार्थ-देव ने चुल्लशतक को निर्भय यावत् ध्यान में स्थिर देखकर दूसरी तथा तीसरी बार उसी प्रकार कहा - यावत् मारा जाएगा। चुल्लशतक का विचलित होना और पत्नी द्वारा समाश्वासनमूलम् - तए णं तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स तेणं देवेणं दोच्चंपि तच्चपि एवं वुत्तस्स समाणस्स अयमेयारूवे अज्झस्थिए ४-"अहो ण इमे पुरिसे अणारिए जहा चुलणीपिया तहा चितेइ, जाव कणीयस जाव आयचइ, जाओ वि य ण इमाओ मम छ हिरण्ण-कोडीओ निहाण-पउत्ताओ छ वुढि-पउत्ताओ छ पवित्थर-पउत्ताओ, ताओ विय णं इच्छइ ममं साओ गिहाओ नीणेत्ता, आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव विप्पइरित्तए, तं सेयं खलु ममं एयं पुरिसं गिणिहत्तए" त्ति कट्टु उद्धाइए, जहा सुरादेवो । तहेव भारिया पुच्छइ, तहेव कहेइ ॥ १६४ ॥ छाया-तत खलु तस्य चुल्लशतकस्य श्रमणोपासकस्य तेन देवेन द्वितीयमपि श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६४ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन तृतीयमप्येवमुक्तस्य सतोऽयमेतद्रूप आध्यात्मिक ४ - "अहो! खन्वय पुरुषोऽनार्यो यथा चुलनीपिता तथा चिन्तयति, यावत्कनीयास यावदासिञ्चति, या अपि च खलु इमा मम षड् हिरण्यकोटयो निधानप्रयुक्ताः षड् वृद्धिप्रयुक्ता षड् प्रविस्तरप्रयुक्तास्ता अपि च खलु इच्छति मम स्वस्माद् गृहान्नीत्वाऽलभिकाया नगर्या. शृङ्गाटक यावद् विप्रकिरितु तच्छ्रेय खलु ममैत पुरुष ग्रहीतुमिति" कृत्वोथितो यथा सुरादेव । तथैव भार्या पृच्छति तथैव कथयति । शब्दार्थ-तए णं तस्स चुल्लसयस्स समणोवासयस्स- तदनन्तर उस चुल्लशतक श्रमणोपासक को, तेण देवेण दोच्चंपि तच्चंपि एव वुत्तस्स समाणस्स - उस देव द्वारा दूसरी तथा तीसरी बार इस प्रकार कहे जाने पर, अयमेयारूवे अज्झथिए- इस प्रकार के विचार उत्पन्न हुए - अहो णं इमे पुरिसे अणारिए - अहो । यह पुरुष अनार्य है, जहा चुलणीपिया तहा चितेइ - चुलनीपिता के समान वह भी विचार करने लगा, जाव कणीयस जाव आयंचइ - यावत् कनिष्ठ पुत्र के खून से भी मुझे सीचा, जाओ वि य ण - और जो यह, मम - मेरी, छ हिरण्णकोडीओ निहाणपउत्ताओ छ वुड्डिपउत्ताओ छ पवित्थर पउत्ताओ - छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी हुई है, ताओ वि य णं इच्छइ मम साओ गिहाओ नीणेत्ता उन सबका भी यह मेरे घर से निकालकर, आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव विपरित्तए-आलभिका नगरी मे चौराहो पर यावत् बिखेरना चाहता है, त सेयं खलु मम एयं पुरिसं गिरिहत्तए - तो मेरे लिए यही उचित है कि इस पुरुष को पकड़ लू, त्ति कट्टु - ऐसा विचार करके, उद्धाइए - उठा, जहा सुरादेवी-सुरादेव के समान ( उसके साथ भी हुआ), तहेव भारिया पुच्छइ उसी प्रकार से पत्नी ने पूछा, तहेव कहेइ-उसने भी उसी प्रकार उत्तर दिया। भावार्थ - चुल्लशतक देव द्वारा दूसरी तथा तीसरी बार कहे जाने पर सोचने लगा..." यावत् यह पुरुष अनार्य है। यावत् इसने मेरे कनिष्ठ पुत्र को मार कर मेरे शरीर को रुधिर और मास मे सीचा है। और अब मेरी जो छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ घर तथा सामान में लगी हुई है, आज यह उन्हें भी चौराहो पर बिखेरना चाहता है। अत इसको पकड़ लेना ही उचित है।" यह सोचकर उसने भी सुरादेव की भाति किया, उसकी भार्या ने उसी प्रकार उससे कोलाहल का कारण पूछा। उसने भी सब वृत्तान्त उसी प्रकार अपनी पत्नी को कहा । उपसहारमूलम् - सेस जहा चुलणीपियस्स जाव सोहम्मे कप्पे अरुणसिट्ठे विमाणे उववन्ने । चत्तारि पलिओवमाइ ठिई। सेसं तहेव जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहि । निक्खेवो ॥ १६२ ॥ ।। सत्तमस्स अङ्गस्स उवासगदसाणं पञ्चमं चुल्लसयगज्झयण समत्त ।। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६५ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन छाया - शेष यथा चुलनीपितुर्यावत्सौधर्मे कल्पेऽरुणश्रेष्ठे विमाने उत्पन्न । चत्वारि पल्योपमानि स्थितिः, शेष तथैव यावन्महाविदेहे वर्षे सेत्स्यति । निक्षेप । ॥ सप्तमस्याङ्गस्योपासकदशाना पचमं चुल्लशतकमध्ययनं समाप्तम् ॥ भावार्थ- सेसं जहा चुलणीपियस्स जाव सोहम्मे कप्पे-शेष सब चुलनीपिता के समान है यावत् सौधर्म-कल्प में, अरुणसिट्ठे विमाणे उववन्ने अरुणश्रेष्ठ नामक विमान में उत्पन्न हुआ, चत्तारि पलिओवमाई ठिई- ( वहा उसकी भी) चार पत्योपम स्थिति है, सेस तहेव - शेष पूर्ववत् है, जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ - यावत् महाविदेह क्षेत्र में जन्म लेकर सिद्ध होगा। शब्दार्थ - शेष सब चुलनीपिता के समान यावत् सौधर्म-कल्प के अरुणश्रेष्ठ विमान में वह उत्पन्न हुआ । वहा उसकी भी चार पल्योपम स्थिति है, महाविदेह मे जन्म लेकर सिद्ध होगा। निक्षेप पूर्ववत् समझे। ।। सप्तम अङ्ग उपासकदशा-सूत्र का पञ्चम् चुल्लशतक अध्ययन समाप्त ॥ श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६६ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन षष्ठम अध्ययन मूलम् - उक्खेवओ छट्ठस्स कुण्डकोलियस्स अज्झयणस्स, एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेणं तेणं समएणं कम्पिल्लपुरे नयरे, सहस्सम्बवणे उज्जाणे । जियसत्तू राया । कुण्डकोलिए गाहावई । पूसा भारिया । छ हिरण्ण-कोडीओ निहाणपउत्ताओ छ वुड्ढि-पउत्ताओ छ पवित्थर-पउत्ताओ, छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएण । सामी समोसढे, जहा कामदेवो तहा सावयधम्मं पडिवज्जइ । सच्चेव वत्तव्वया जाव पडिलाभेमाणे विहरइ ॥ १६६॥ छाया - उत्क्षेपक षष्ठस्य कुण्डकौलिकस्याध्ययनस्य, एव खलु जम्बूः ! तस्मिन् काले तस्मिन् समये काम्पिल्यपुरं नगर सहस्राप्रवनमुद्यानम्, जितशत्रू राजा । कुण्डकौलिको गाथापतिः । पूषा भार्या षड् हिरण्यकोट्यो निधान प्रयुक्ता, षड् वृद्धि प्रयुक्ताः, षड् प्रविस्तर प्रयुक्ताः, षड् व्रजा दशगोसाहस्त्रिकेण व्रजेन । स्वामी समवसृत । यथा कामदेवस्तथा श्रावकधर्मं प्रतिपद्यते । सा चैव वक्तव्यता यावत् प्रतिलाभयन् विहरति । शब्दार्थ-छट्टस कुण्डकोलियस्सअज्झयणस्स-छठे कुण्डकौलिक अध्ययन का, उक्खेवओउपक्षेप अर्थात् आरम्भ इस प्रकार है - एव खलु जम्बू! इस प्रकार हे शिष्य जम्बू!, तेणं कालेणं तेण समएण - उस काल उस समय मे, कम्पिल्लपुरे नयरे-काम्पिल्यपुर नगर, सहस्सम्बवणे उज्जाणे - सहस्राम्रवन उद्यान था, जियसत्तू राया - जितशत्रु राजा, कुण्डकोलिए गाहावई - और कुण्डकौलिक गाथापति था, पूसा भारिया - ( उसकी) पूषा नामक पत्नी थी, छ हिरण्णकोडीओ निहाणपउत्ताओ - छह करोड़ सुवर्ण मुद्राएं कोष मे थी, छ वुढिपउत्ताओ - छह करोड़ व्यापार मे लगी थी और, छ पवित्थरपउत्ताओ - -छह गृह तथा उपकरण में लगी हुई थी। छह वया दस-गोसाहस्सिएण वएण- प्रत्येक व्रज मे दस हजार गायो के हिसाब से छह व्रज अर्थात् पशु-धन था। सामी समोसढे- भगवान् पधारे। जहा कामदेवो तहा सावयधम्म पडिवज्जइ - कामदेव के समान उसने भी श्रावकधर्म अङ्गीकार किया। सच्चेव वत्तव्वया जाव पडिलाभेमाणे विहरइ सारी वक्तव्यता उसी प्रकार है यावत् श्रमण-निर्ग्रन्थो को भक्तपान प्रतिलाभ अर्थात् आहार-पानी आदि बहराता हुआ विचरने लगा। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६७ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन भावार्थ - उपक्षेप पूर्ववत् है । हे जम्बू उस काल और उस समय काम्पिल्यपुर नगर था। उस नगर के बाहर सहस्राम्रवन नामक रमणीय उद्यान था । वहा पर जितशत्रु राजा राज्य करता था। उस नगर मे कुण्डकौलिक नामक प्रसिद्ध गाथापति था। उस गाथापति की पूषा नामक धर्मपत्नी थी । कुण्डकौलिक के पास छह करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे सुरक्षित थी, छह करोड़ सुवर्ण मुद्राए व्यापार मे लगी हुई थी और छह करोड़ घर तथा गृहोपकरण में प्रयुक्त थी । उस गाथापति के पास छह व्रज पशु-धन था। उसी काल और समय में श्रमण भगवान् महावीर ग्रामानुग्राम धर्मोपदेश देते हुए काम्पिल्यपुर नगर के बाहर सहस्राम्रवन उद्यान मे पधारे। आनद गाथापति के समान कुण्डकौलिक भी भगवान् का धर्मोपदेश श्रवण करने के लिए गया । फलस्वरूप उसने भी द्वादश व्रतरूप गृहस्थधर्म अगीकार किया। यावत् श्रमण-निर्ग्रन्थो को आहार- पानी बहराते हुए सेवा- भक्ति से अपना जीवन यापन करने लगा । कुण्डकौलिक द्वारा अशोकवनिका मे धर्मानुष्ठानमूलम् - तए णं से कुण्डकोलिए समणोवासए अन्नया कयाइ पुव्वावरण्हकालसमयंसि जेणेव असोगवणिया, जेणेव पुढवि-सिला- पट्टए तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता नाम- मुद्दगं च उत्तरिज्जगं च पुढवि - सिला- पट्टए ठवेइ, ठवित्ता समणस्स भगवओ महावीरस्स अतियं धम्मपण्णत्ति उवसपज्जित्ताण विहरइ ॥ १६७ ॥ छाया - ततः खलु स कुण्डकौलिक श्रमणोपासकोऽन्यदा कदाचित्पूर्वापराह्नकालसमये येनैवाऽ शोकवनिका येनैव पृथिवी-शिला-पट्टकस्तेनैवोपागच्छति, उपागत्य नाममुद्रिका चोत्तरीयक च पृथिवी- शिला-पट्टके स्थापयति, स्थापयित्वा श्रमणस्य भगवतो महावीरस्याऽऽन्तिकीं धर्मप्रज्ञप्तिमुसम्पद्य विहरति । शब्दार्थ - तए ण से कुण्डकोलिए समणोवासए अन्नया कयाइ - तदनन्तर वह कुण्डकौलिक श्रमणोपासक अन्य किसी दिन, पुव्वावरण्हकालसमयंसि-मध्याह्नकाल के समय, जेणेव असोगवणिया - जहा अशोक वनिका थी, जेणेव पुढविसिलापट्टए- जहा पृथ्वी शिला-पट्ट था, तेणेव उवागच्छइ - वहा पर आया, उवागच्छित्ता - आकर, नाम मुद्दग च-नामाङ्कित मुद्रिका (अगूठी) तथा, उत्तरिज्जग च-उत्तरीय अर्थात् दुपट्टे को, पुढविसिलापट्टए ठवेइ - पृथ्वी शिला पट्ट पर रखा, ठवित्ता -- रख करके, समणस्स भगवओ महावीरस्स अतियं श्रमण भगवान् महावीर के पास स्वीकार की हुई, धम्मपण्णत्ति उवसपज्जित्ताण विहरइ धर्मप्रज्ञप्ति को अङ्गीकार करके विचरने लगा । भावार्थ-तत्पश्चात् किसी दिन कुण्डकौलिक श्रमणोपासक मध्याह्न के समय अशोकवनिका ( वाटिका) मे गया, वहा पृथ्वी शिला-पट्ट पर अपने नाम से अङ्कित हाथ की अंगूठी और ऊपर ओढ़ने श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६८ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन वाले उत्तरीय वस्त्र को रख दिया। तत्पश्चात् श्रमण भगवान से प्राप्त की हुई धर्म-प्रज्ञप्ति का आराधन करने लगा । देव का आगमनमूलम् - तए णं तस्स कुण्डकोलियस्स समणोवासयस्स एगे देवे अंतियं पाउब्भवित्था ।। १६८ ।। छाया - ततः खलु तस्य कुण्डकौलिकस्य श्रमणोपासकस्यैको देवोऽन्तिके प्रादुरभूत् । शब्दार्थ - तए णं-- तदनन्तर तस्स कुण्डकोलियस्स समणोवासयस - उस कुण्डकौलिक श्रमणोपासक के पास, एगे देवे अतियं पाउब्भवित्था - एक देव प्रकट हुआ। भावार्थ जिस समय कुण्डकौलिक श्रमणोपासक भगवान् महावीर के धर्म की आराधना कर रहा था उस समय वहा पर एक देव प्रकट हुआ। देव द्वारा नियतिवाद की प्रशंसामूलम् - तए ण से देवे नाममुद्दं च उत्तरिज्जं च पुढवि सिला- पट्टयाओ गेण्हइ, गिणिहत्ता सखिंखिणि अंतलिक्ख पडिवन्ने कुण्डकोलियं समणोवासय एवं वयासी- "हं भो कुण्डकोलिया । समणोवासया । सुन्दरी णं देवाणुप्पिया! गोसालस्स मंखलि-पुत्तस्स धम्म-पण्णत्ती, नस्थि उट्ठाणे इ वा कम्मे इ वा, बले इ वा, वीरिए इ वा, पुरिसक्कार - परक्कमे इवा, नियया सव्वभावा, मगुली ण समणस्स भगवओ महावीरस्स धम्म-पण्णत्ती, अत्थि उट्ठाणे इ वा, जाव परक्कमे इ वा, अणियया सव्वभावा" ॥ १६६ ॥ छाया- तत खलु स देवो नाममुद्रा चोत्तरीय च पृथिवी - शिला-पट्टकाद् गृह्णाति, गृहीत्वा सकिकिणिकः अंतरिक्षप्रतिपन्न कुण्डकौलिकं श्रमणोपासकमेवमवादीत् - "ह भो. कुण्डकौलिक / श्रमणोपासक । सुन्दरी खलु देवानुप्रिय । गोशालस्य मखलि पुत्रस्य धर्मप्रज्ञप्ति नास्ति उत्थानमिति वा कर्मेति वा, बलमिति वा, वीर्यमिति वा पुरुषकार - पराक्रमौ इति वा, नियता सर्वभावाः । मगुली खलु श्रमणस्य भगवतो महावीरस्य धर्मप्रज्ञप्तिः अस्ति उत्थानमिति वा, यावत्पराक्रम इति वा अनियता सर्वभावा । शब्दार्थ - तए ण से देवे- तदनन्तर उस देव ने, नाममुद्द च उत्तरिज्जं च-नाम-मुद्रिका और उत्तरीय को, पुढवि- सिला-पट्टयाओ गेण्हइ - पृथ्वी शिला - पट्टक से उठाया, गिणिहत्ता - उठाकर, सखिखिणि - घुघरु का शब्द करते हुए, अंतलिक्खपडिवन्ने - उडकर अन्तरिक्ष मे रुक गया, कुण्डकोलिय समणोवासयं एवं वयासी - -कुण्डकौलिक श्रावक को इस प्रकार कहने लगा-ह भो श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २६६ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन कुण्डकोलिया! समणोवासया !- हे कुण्डकौलिक ! श्रमणोपासक , सुन्दरी णं देवाणुप्पिया! गोसालस्स मखलिपुत्तस्स धम्मपण्णत्ती हे देवानुप्रिय। मखलिपुत्र गोशालक की धर्मप्रज्ञप्ति सुन्दर है, नत्थि उठाणे इ वा कम्मे इ वा बले इ वा - ( उसमे) उत्थान, कर्म, बल, (शारीरिक शक्ति), वीरिए इ वा पुरिसक्कारपरक्कमे इ वा-वीर्य, पुरुषकार तथा पराक्रम स्वीकार नहीं किया गया, नियया सव्वभावा- अर्थात् विश्व के समस्त परिवर्तन नियत अर्थात निश्चित है, मगुली णं समणस्स भगवओ महावीरस्स धम्मपणत्ती- श्रमण भगवान् महावीर की धर्मप्रज्ञप्ति मिथ्या है। अस्थि उट्ठाणे इ वा जाव परक्कमे इ वा - क्योंकि उसमे उत्थान और पराक्रमादि को स्वीकार किया गया है। अणियया सव्वभावा- वहा सब भाव अनियत है । भावार्थ - उस देव ने नामांकित मुद्रिका और उत्तरीय वस्त्र को शिलापट पर से उठा लिया और घुघरु बजाते हुए आकाश में उड़कर कुण्डकौलिक से कहने लगा - "हे कुण्डकौलिक श्रावक देवानुप्रिय मखलिपुत्र गोशालक की धर्मप्रज्ञप्ति सुन्दर है। उसमे उत्थान ( कर्म के लिए उद्यत होना ) कर्म (गमनादि क्रियाए) बल (शारीरिक बल) वीर्य (आत्मतेज ) पुरुषकार (पौरुष) तथा पराक्रम को स्वीकार नही किया गया । विश्व के समस्त परिवर्तन नियत है अर्थात् जो कुछ होना है होकर रहेगा । उसमे कोई परिवर्तन नही हो सकता । इसके विपरीत श्रमण भगवान् महावीर की धर्मप्रज्ञप्ति असुन्दर अथवा मिथ्या है। उसमे उत्थान पराक्रमादि को स्वीकार किया गया है तथा जगत के परिवर्तन अनियत है अर्थात् पुरुषार्थ आदि के द्वारा उनमे परिवर्तन किया जा सकता है। " टीका-पिछले पाच अध्ययनो की अपेक्षा प्रस्तुत कुण्डकौलिक अध्ययन भिन्न प्रकार का है। इसमे देवता उपसर्ग उपस्थित नहीं करता किन्तु कुण्डकौलिक के सामने भिन्न धार्मिक परम्परा का प्रतिपादन करता है, जो महावीर के समय अत्यन्त प्रचलित थी और उसके अनुयायियों की संख्या महावीर से भी अधिक थी । प्रस्तुत सूत्र में दोनो का परस्पर भेद दिखाया गया है। गोशालक नियतिवादी था । उसके मत में विश्व के समस्त परिवर्तन नियत अर्थात् निश्चित है। उन्हें कोई बदल नही सकता । प्रत्येक जीव को ८४ लाख योनियों में घूमना पड़ेगा और उसके पश्चात् अपने-आप मुक्ति प्राप्त हो जाएगी। इन योनियो मे जो सुख-दुख है वे भोगने ही पड़ेगे। कोई व्यक्ति अपने पुरुषार्थ, पराक्रम द्वारा उसमे परिवर्तन नहीं कर सकता। अत समस्त साधनाए, तपस्याएं तथा भाग-दौड़ व्यर्थ है। इस मत का दूसरा नाम आजीविक भी है और इसका उल्लेख अशोक की धर्मलिपियो मे मिलता है, तत्पश्चात् सम्प्रदाय के रूप में उल्लेख न मिलने पर भी भारतीय जीवन पर उसका प्रभाव अब भी अक्षुण्ण है। अब भी इस देश में पुरुषार्थ छोड़कर भाग्य के भरोसे बैठे रहने वालो की संख्या कम नही है । मलूकदास का नीचे लिखा दोहा साधु संन्यासी तथा फकीरो मे ही नहीं, गृहस्थो मे भी घर किए हुए है. श्री उपासक दशाग सूत्रम् / २७० / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन
भणइ, एवं निरवसेसं जाव सोहम्मे कप्पे अरुणकते कप्पे विमाणे उववन्ने । चत्तारि पलिओवमाई ठिई । महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ निक्खेवो ॥ एक सौ सत्तावन ॥ ॥ सत्तमस्स अंगस्स उवासगदसाणं चउत्थं सुरादेवज्झयण समत्तं ॥ छाया-ततः खलु स सुरादेव. श्रमणोपासको धन्यां भार्यामेवमवादीत् - "एवं खलु देवानुप्रिये ! कोऽपि पुरषस्तथैव कथयति यथा चुलनीपिता ।" धन्यापि प्रतिभणति, यावत्कनीयांसं, "नो खलु देवानुप्रियाः ! युष्माक कोऽपि पुरुषः शरीरे यमक-समक षोडश रोगातङ्कान् प्रक्षिपति, एवं खलु कोऽपि पुरुषो युष्माकमुपसर्ग करोति", शेष यथा चुलनीपित्रे भद्रा भणति । एवं निरवशेष यावत्सौधर्मे कल्पेऽरुणकान्ते विमाने उपपन्न । चत्वारि पत्योपमानि स्थिति महाविदेहे वर्षे सेत्स्यति । निक्षेप । ।। सप्तमस्याङ्गस्योपासकदशानां चतुर्थ सुरादेव अध्ययन समाप्तम् ।। शब्दार्थ-तए णं तदनन्तर से सुरादेवे - वह सुरादेव, समणोवासए श्रमणोपासक, धन्नं भारियं - धन्या पत्नी से, एव वयासी - इस प्रकार बोला । एव खलु देवाणुप्पिए । - - हे देवानुप्रिय। इस प्रकार, के वि पुरिसे कोई पुरुष, तहेव कहेइ जहा चुलणीपिया - सब वृत्तान्त उसी प्रकार कहा जैसे चुलनीपिता ने कहा था, धन्ना वि पडिभणइ धन्या ने भी उसी प्रकार उत्तर दिया, , जाव - यावत्, कणीयसं- कनिष्ठ पुत्रादि , नो खलु देवाणुप्पिया - - निश्चय ही हे देवानुप्रिय! केवि पुरिसे कोई पुरुष, तुभं तुम्हारे, सरीरंसि- शरीर मे, जमग समग एक साथ ही, सोलस रोगायके पक्खिवइ-सोलह रोगातड्डू डालता । , एस ण के वि पुरिसे तुम यह किसी पुरुष ने तुम्हारे साथ, उवसग्ग करेइ - उपसर्ग किया है। सेसं जहा चुलणीपियस्स भद्दा भणइ -शेष जैसे चुलनीपिता को भाद्रा माता ने कहा था वैसे कहा, एव निरवसेस इस प्रकार निरविशेष, जाव यावत्, सोहम्मे कप्पे-सौधर्म कल्प में, अरुणकंते कप्पे- अरुणकात कल्प, विमाणे उववन्ने विमान में वह उत्पन्न हुआ, चत्तारि पालिओवमाई ठिई-वहा पर सुरादेव की चार पत्योपम स्थिति है, महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ-महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेकर सिद्ध होगा । निक्खेवो निक्षेप । भावार्थ- सुरादेव ने अपनी भार्या धन्या को कहा - हे देवानुप्रिय। निश्चय ही यहा कोई पुरुष आया। और सब वृत्तान्त उसी प्रकार कहा, जैसे चुलनीपिता ने अपनी भद्रा माता को कहा था । धन्ना भार्या ने भी सुरादेव को कहा कि तेरे कनिष्ठ पुत्रादि सब सकुशल है। तुम्हारे शरीर में एक साथ सोलह रोग डालने का किसी पुरुष ने उपसर्ग किया है। शेष चुलनीपिता को माता भद्रा के समान कहा। इस प्रकार यावत् सुरादेव भी सौधर्म-कल्प मे अरुणकान्त विमान में उत्पन्न हुआ। वहा पर इस की चार पल्योपम स्थिति है और वह भी महाविदेह क्षेत्र मे जन्म लेकर सिद्ध होगा। निक्षेप-पूर्ववत् जान लेना चाहिए। ॥ सप्तम अङ्ग उपासकदशा-सूत्र का चतुर्थ सुरादेव अध्ययन समाप्त ।। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ साठ / सुरादेव उपासक, चतुर्थ अध्ययन पंचम अध्ययन मूलम् - उक्खेवो पञ्चमस्स अज्झयणस्स, एवं खलु, जम्बू! तेणं कालेणं तेण समएणं आलभिया नामं नयरी । संखवणे उज्जाणे । जियसत्तू राया। चुल्लसए गाहावई अड्ढे जाव छ हिरण्ण-कोडीओ जाव छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएण । बहुला भारिया । सामी समोसढे । जहा आणन्दो तहा गिहि-धम्मं पडिवज्जइ । सेसं जहा कामदेवो जाव धम्मपण्णत्ति उवसंपज्जित्ताणं विहरइ ॥ एक सौ अट्ठावन ॥ छाया - उत्क्षेप पञ्चमस्याध्ययनस्य, एवं खलु जम्बूः । तस्मिन् काले तस्मिन् समये आलभिका नाम नगरी, शङ्खवनमुद्यानम् जितशत्रू राजा, चुल्लशतको गाथापतिरायो यावत् षड् हिरण्यकोट्यो यावत् षड् व्रजा दशगोसाहस्रिकेण व्रजेन । बहुला भार्या । स्वामी समवसृतः यथाऽऽनन्दस्तथा गृहिधर्मं प्रतिपद्यते। शेष यथा कामदेवो यावद् धर्मप्रज्ञप्तिमुपसम्पद्य विहरति । शब्दार्थ उक्खेवो पंचमस्स अज्झयणस्स-पाचवे चुल्लशतक अध्ययन का उपक्षेप जम्बूस्वामी ने प्रश्न किया और सुधर्मा स्वामी ने उत्तर देते हुए कहा - -एवं खलु जम्बू - हे जम्बू । इस प्रकार, तेणं कालेण तेण समएणं - - उस काल और समय, आलभिया नाम नयरी - आलभिका नाम की नगरी, संखवणे उज्जाणे शखवन उद्यान, जियसत्तू राया - जितशत्रु राजा, चुल्लसए गाहावई - और चुल्लशतक गाथापति था, अड्ढे जाव वह समृद्ध यावत् अपरिभूत था, छ हिरण्ण कोडीओ छ करोड सुवर्ण मुद्राए कोष मे थी, छः करोड़ व्यापार मे लगी हुई थी, और छ करोड़ घर तथा सामान मे लगी हुई थी। जाब छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएणं यावत् प्रत्येक व्रज में दस हजार गायो के गणित से छ व्रज अर्थात् साठ हजार गाए थी । बहुला भारिया - बहुला भार्या थी, सामी समोसढे-भगवान् महावीर समवसृत हुए, जहा आणंदो तहा गिहिधम्मं पडिवज्जइ-आनन्द के समान उसने भी गृहस्थ धर्म को स्वीकार किया, सेसं जहा कामदेवो-शेष कामदेव के समान है, जाव धम्मपण्णत्ति उवसंपज्जित्ताणं विहरइ - यावत् धर्मप्रज्ञप्ति को स्वीकार करके विचरने लगा । भावार्थ - सुधर्मा स्वामी ने जम्बू स्वामी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में इस प्रकार कहा - हे श्री उपासक दशांग सूत्रम् / दो सौ इकसठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन जम्बू । उस काल उस समय आलभिका नाम की नगरी थी । वहा शखवन उद्यान था, जितशत्रु राजा राज्य करता था और चुल्लशतक नामक गाथापति था, वह अति समृद्ध यावत् अपरिभूत था। उसकी छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे थी, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई थी, और छ करोड़ घर तथा सामान मे। दस हजार गायों के प्रत्येक व्रज के गणित से छ व्रज अर्थात् साठ हजार पशु-धन था । बहुला भार्या थी। ग्रामानुग्राम विहार करते हुए भगवान् महावीर वहा आलभिका नगरी मे पधारे। आनन्द के समान उसने भी गृहस्थ धर्म को स्वीकार किया। यावत् कामदेव के समान धर्मप्रज्ञप्ति को स्वीकार करके विचरने लगा। पिशाच का उपद्रवमूलम् - तए ण तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स पुव्वरत्तावरत्त कालसमयंसि एगे देवे अंतिय जाव असि गहाय एवं वयासी- "हंभो! चुल्लसयगा । समणोवासया ! जाव न भंजसि तो ते अज्ज जेट्ठे पुत्त साओ गिहाओ नीणेमि । एव जहा चुलणीपिय, नवरं एक्के-क्के सत्त मससोल्लया जाव कणीयसं जाव आयचामि ॥ एक सौ छप्पन ॥ तए ण से चुल्लसयए समणोवासए जाव विहरइ ॥ एक सौ साठ ॥ छाया - ततः खलु तस्य चुल्लशतकस्य श्रमणोपासकस्य पूर्वरात्रापरत्र कालसमये एको देवोऽन्तिक यावदसि गृहीत्वैवमवादीत्- "हभो चुल्लशतक! श्रमणोपासक यावन्न भनक्षि तर्हि तेऽद्य ज्येष्ठ पुत्र स्वस्माद् गृहान्नयामि एव यथा चुलनीपितर, नवरमेकैकस्मिन् सप्त मासशूल्यकानि यावत्कनीयांस यावदासिञ्चामि । तत खलु स चुल्लशतक श्रमणोपासको यावद्विहरति । शब्दार्थ-तए णं - तदनन्तर तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स अतिय - उस चुल्लशतक श्रमणोपसक के पास, पुव्वरत्तावरत्त कालसमयंसि- अर्धरात्रि में, एगे देवे-एक देवता, जाव असि गहाय यावत् तलवार , एवं वयासी- इस प्रकार बोला-ह भो चुल्लसयगा समणोवासया । - अरे चुल्लशतक श्रमणोपासक जाव न भजसि- यावत् तू यदि शीलादि व्रतो को नही छोड़ेगा, तो ते - तो तेरे, अज्ज जेट्टं पुत्त- आज तुम्हारे ज्येष्ठ पुत्र को, साओ गिहाओ-अपने घर से, नीणेमि-निकाल लाता हू, एवं जहा चुलणीपिय- इस प्रकार चुलनीपिता के समान , नवरं एक्के-क्के सत्त मंस सोल्लया विशेष यही है कि यहा एक-एक के सात-सात मास खड किए, जाव कणीयस जाव आयचामि - यावत् कनिष्ठ पुत्र के रुधिर और मास से छीटूंगा। चुल्लशतक श्रमणोपासक, जाव-यावत्, तए णं से चुल्लसयए समणोवासए - तदनन्तर विहरइ शान्त एव ध्यान में स्थिर रहा । श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ बासठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन भावार्थ- चुल्लशतक श्रमणोपासक के पास अर्धरात्रि के समय एक देव हाथ में तलवार लेकर आया और कहने लगा - अरे चुल्लशतक श्रमणोपासक यदि तू शीलादि व्रतों को नहीं छोड़ेगा तो मै तेरे ज्येष्ठ पुत्र को घर से लाकर तेरे सामने मारूगा । इस प्रकार चुलनीपिता के समान कहा । विशेष यही है कि यहा पर एक-एक के सात-सात टुकड़े-मास खड करने को कहा यावत् कनिष्ठ के रुधिर और मास से छीटे दूंगा। चुल्लशतक फिर भी शान्त एव ध्यानावस्थित रहा। मूलम् - तए णं से देवे चुल्लसयग समणोवासय चउत्थ पि एवं वयासी-"हं भो! चुल्लसयगा समणोवासया ! जाव न भंजसि तो ते अज्ज जाओ इमाओ छ हिरण्ण-कोडीओ निहाण-पउत्ताओ, छ वुड्ढि -पउत्ताओ, छ पवित्थर पउत्ताओ, ताओ साओ गिहाओ नीणेमि, नीणेत्ता आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव पहेसु सव्वओ समंता विप्पइरामि, जहा णं तुमं अट्ट-दुहट्ट-वसट्टे अकाले चेव जीवियाओ ववरोविज्जसि" ॥ एक सौ इकसठ ॥ छाया - ततः खलु स देवश्चुल्लशतकं श्रमणोपासक चतुर्थमप्येवमवादीत् - "ह भो चुल्लशतक । श्रमणोपासक यावन्न भनक्षि तर्हि तेऽद्य या इमाः षड् हिरण्य-कोट्यो निधान प्रयुक्ता, षड् वृद्धि प्रयुक्ता षड् प्रविस्तर - प्रयुक्तास्ताः स्वस्माद् गृहान्नयामि, नीत्वाऽऽलभिकाया नगर्या शृंङ्गाटक यावत्पथेषु सर्वतः समन्ताद् विप्रकिरामि यथा खलु त्वमार्त्तो वशार्त्तोऽकाल एव जीविताद्व्यपरोपयिष्यसे । भावार्थ-तए ण से देवे - तदनन्तर वह देव, चुल्लसयग समणोवासयं- चुल्लशकत श्रमणोपासक को, चउत्थ पि-चुतर्थ बार भी, एव वयासी - इस प्रकार कहने लगा - ह भो चुल्लसयगा। समणोवासया- अरे चुल्लशतक ! श्रमणोपासक ! जाय न भजसि - यावत् यदि तू शीलादि व्रतो का त्याग नहीं करता, तो ते अज्ज तो तुम्हारी आज, जाओ इमाओ - जो यह, छ हिरण्ण कोडीओ निहाणपउत्ताओ, छ वुड्डिपउत्ताओ, छ पवित्थर पउत्ताओ - छ करोड़ मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी हुई है, ताओ साओ गिहाओ नीणेमि - - उनको घर से लाता हू, नीणेत्ता-लाकर, आलभियाए नयरीए-आलभिका नगरी मे, सिघाडग जाव पहेसु-शङ्गाटक तथा यावत् मार्गो मे, सव्वओ समंता विप्पइरामि- चारो ओर बिखेर दूगा । जहा णं तुमं - जिस से तू, अट्ट दुहट्ट चसट्टे अकाले चेव जीवियाओ - जिससे तू अत्यन्त चिन्तामग्न तथा विवश हो कर अकाल में ही जीवन से, ववरोविज्जसि- पृथक् हो जाएगा। भावार्थ-देव ने चुल्लशतक श्रमणोपासक को चौथी बार कहा - हे चुल्लशतक । यदि तू शीलादि व्रतों को भग नहीं करता है तो यह जो तेरे छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार मे श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ तिरेसठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन लगी हुई है तथा छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी है, उन सबको चौराहो पर बिखेर दूगा जिससे तू चिन्तामग्न तथा दुखी होकर अकाल मे ही मृत्यु को प्राप्त करेगा । मूलम् -तए णं से चुल्लसयए समणोवासए तेणं देवेणं एवं वुत्ते समाणे अभीए जाव विहरइ ॥ एक सौ बासठ ॥ छाया - ततः खलु स चुल्लशतक श्रमणोपासकस्तेन देवेनैवमुक्त सन्नभीतो यावद्विहरति । शब्दार्थ-तए णं से चुल्लसयए समणोवासए - तदनन्तर वह चुल्लशतक श्रमणोपासक, तेण देवेणं एवं बुत्ते समाणे - उस देव के इस प्रकार कहने पर भी अभीए जाव विहरइ निर्भय यावत् ध्यान में स्थिर रहा। भावार्थ- चुल्लशतक देव द्वारा इस प्रकार कहने पर भी ध्यान में स्थिर रहा । मूलम् - तए णं से देवे चुल्लसयगं समणोवासय अभीय जाव पासित्ता दोच्चंपि तच्वंपि भणइ, जाव ववरोविज्जसि ॥ एक सौ तिरेसठ ॥ छाया - तत खलु स देवश्चुल्लशतक श्रमणोपासकमभीत यावद् दृष्ट्वा द्वितीयमपि तृतीयमपि तथैव भणति यावद्व्यपरोपयिष्यसे । शब्दार्थ-तए ण से देवे चुल्लसयगं समणोवासयं- तदनन्तर वह देव चुल्लशतक श्रमणोपासक को, अभीयं जाव पासित्ता-निर्भय यावत् देखकर, दोच्चं पि तच्चं पि तहेव भणइ - द्वितीय तथा तृतीय बार उसी तरह कहा, जाव ववरोविज्जसि-- यावत् मारा जाएगा । भावार्थ-देव ने चुल्लशतक को निर्भय यावत् ध्यान में स्थिर देखकर दूसरी तथा तीसरी बार उसी प्रकार कहा - यावत् मारा जाएगा। चुल्लशतक का विचलित होना और पत्नी द्वारा समाश्वासनमूलम् - तए णं तस्स चुल्लसयगस्स समणोवासयस्स तेणं देवेणं दोच्चंपि तच्चपि एवं वुत्तस्स समाणस्स अयमेयारूवे अज्झस्थिए चार-"अहो ण इमे पुरिसे अणारिए जहा चुलणीपिया तहा चितेइ, जाव कणीयस जाव आयचइ, जाओ वि य ण इमाओ मम छ हिरण्ण-कोडीओ निहाण-पउत्ताओ छ वुढि-पउत्ताओ छ पवित्थर-पउत्ताओ, ताओ विय णं इच्छइ ममं साओ गिहाओ नीणेत्ता, आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव विप्पइरित्तए, तं सेयं खलु ममं एयं पुरिसं गिणिहत्तए" त्ति कट्टु उद्धाइए, जहा सुरादेवो । तहेव भारिया पुच्छइ, तहेव कहेइ ॥ एक सौ चौंसठ ॥ छाया-तत खलु तस्य चुल्लशतकस्य श्रमणोपासकस्य तेन देवेन द्वितीयमपि श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ चौंसठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन तृतीयमप्येवमुक्तस्य सतोऽयमेतद्रूप आध्यात्मिक चार - "अहो! खन्वय पुरुषोऽनार्यो यथा चुलनीपिता तथा चिन्तयति, यावत्कनीयास यावदासिञ्चति, या अपि च खलु इमा मम षड् हिरण्यकोटयो निधानप्रयुक्ताः षड् वृद्धिप्रयुक्ता षड् प्रविस्तरप्रयुक्तास्ता अपि च खलु इच्छति मम स्वस्माद् गृहान्नीत्वाऽलभिकाया नगर्या. शृङ्गाटक यावद् विप्रकिरितु तच्छ्रेय खलु ममैत पुरुष ग्रहीतुमिति" कृत्वोथितो यथा सुरादेव । तथैव भार्या पृच्छति तथैव कथयति । शब्दार्थ-तए णं तस्स चुल्लसयस्स समणोवासयस्स- तदनन्तर उस चुल्लशतक श्रमणोपासक को, तेण देवेण दोच्चंपि तच्चंपि एव वुत्तस्स समाणस्स - उस देव द्वारा दूसरी तथा तीसरी बार इस प्रकार कहे जाने पर, अयमेयारूवे अज्झथिए- इस प्रकार के विचार उत्पन्न हुए - अहो णं इमे पुरिसे अणारिए - अहो । यह पुरुष अनार्य है, जहा चुलणीपिया तहा चितेइ - चुलनीपिता के समान वह भी विचार करने लगा, जाव कणीयस जाव आयंचइ - यावत् कनिष्ठ पुत्र के खून से भी मुझे सीचा, जाओ वि य ण - और जो यह, मम - मेरी, छ हिरण्णकोडीओ निहाणपउत्ताओ छ वुड्डिपउत्ताओ छ पवित्थर पउत्ताओ - छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ गृह तथा उपकरणो मे लगी हुई है, ताओ वि य णं इच्छइ मम साओ गिहाओ नीणेत्ता उन सबका भी यह मेरे घर से निकालकर, आलभियाए नयरीए सिघाडग जाव विपरित्तए-आलभिका नगरी मे चौराहो पर यावत् बिखेरना चाहता है, त सेयं खलु मम एयं पुरिसं गिरिहत्तए - तो मेरे लिए यही उचित है कि इस पुरुष को पकड़ लू, त्ति कट्टु - ऐसा विचार करके, उद्धाइए - उठा, जहा सुरादेवी-सुरादेव के समान , तहेव भारिया पुच्छइ उसी प्रकार से पत्नी ने पूछा, तहेव कहेइ-उसने भी उसी प्रकार उत्तर दिया। भावार्थ - चुल्लशतक देव द्वारा दूसरी तथा तीसरी बार कहे जाने पर सोचने लगा..." यावत् यह पुरुष अनार्य है। यावत् इसने मेरे कनिष्ठ पुत्र को मार कर मेरे शरीर को रुधिर और मास मे सीचा है। और अब मेरी जो छ करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे है, छ करोड़ व्यापार में लगी हुई है और छ करोड़ घर तथा सामान में लगी हुई है, आज यह उन्हें भी चौराहो पर बिखेरना चाहता है। अत इसको पकड़ लेना ही उचित है।" यह सोचकर उसने भी सुरादेव की भाति किया, उसकी भार्या ने उसी प्रकार उससे कोलाहल का कारण पूछा। उसने भी सब वृत्तान्त उसी प्रकार अपनी पत्नी को कहा । उपसहारमूलम् - सेस जहा चुलणीपियस्स जाव सोहम्मे कप्पे अरुणसिट्ठे विमाणे उववन्ने । चत्तारि पलिओवमाइ ठिई। सेसं तहेव जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहि । निक्खेवो ॥ एक सौ बासठ ॥ ।। सत्तमस्स अङ्गस्स उवासगदसाणं पञ्चमं चुल्लसयगज्झयण समत्त ।। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ पैंसठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन छाया - शेष यथा चुलनीपितुर्यावत्सौधर्मे कल्पेऽरुणश्रेष्ठे विमाने उत्पन्न । चत्वारि पल्योपमानि स्थितिः, शेष तथैव यावन्महाविदेहे वर्षे सेत्स्यति । निक्षेप । ॥ सप्तमस्याङ्गस्योपासकदशाना पचमं चुल्लशतकमध्ययनं समाप्तम् ॥ भावार्थ- सेसं जहा चुलणीपियस्स जाव सोहम्मे कप्पे-शेष सब चुलनीपिता के समान है यावत् सौधर्म-कल्प में, अरुणसिट्ठे विमाणे उववन्ने अरुणश्रेष्ठ नामक विमान में उत्पन्न हुआ, चत्तारि पलिओवमाई ठिई- चार पत्योपम स्थिति है, सेस तहेव - शेष पूर्ववत् है, जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ - यावत् महाविदेह क्षेत्र में जन्म लेकर सिद्ध होगा। शब्दार्थ - शेष सब चुलनीपिता के समान यावत् सौधर्म-कल्प के अरुणश्रेष्ठ विमान में वह उत्पन्न हुआ । वहा उसकी भी चार पल्योपम स्थिति है, महाविदेह मे जन्म लेकर सिद्ध होगा। निक्षेप पूर्ववत् समझे। ।। सप्तम अङ्ग उपासकदशा-सूत्र का पञ्चम् चुल्लशतक अध्ययन समाप्त ॥ श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ छयासठ / चुल्लशतक उपासक, पञ्चम अध्ययन षष्ठम अध्ययन मूलम् - उक्खेवओ छट्ठस्स कुण्डकोलियस्स अज्झयणस्स, एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेणं तेणं समएणं कम्पिल्लपुरे नयरे, सहस्सम्बवणे उज्जाणे । जियसत्तू राया । कुण्डकोलिए गाहावई । पूसा भारिया । छ हिरण्ण-कोडीओ निहाणपउत्ताओ छ वुड्ढि-पउत्ताओ छ पवित्थर-पउत्ताओ, छ वया दसगोसाहस्सिएणं वएण । सामी समोसढे, जहा कामदेवो तहा सावयधम्मं पडिवज्जइ । सच्चेव वत्तव्वया जाव पडिलाभेमाणे विहरइ ॥ एक सौ छयासठ॥ छाया - उत्क्षेपक षष्ठस्य कुण्डकौलिकस्याध्ययनस्य, एव खलु जम्बूः ! तस्मिन् काले तस्मिन् समये काम्पिल्यपुरं नगर सहस्राप्रवनमुद्यानम्, जितशत्रू राजा । कुण्डकौलिको गाथापतिः । पूषा भार्या षड् हिरण्यकोट्यो निधान प्रयुक्ता, षड् वृद्धि प्रयुक्ताः, षड् प्रविस्तर प्रयुक्ताः, षड् व्रजा दशगोसाहस्त्रिकेण व्रजेन । स्वामी समवसृत । यथा कामदेवस्तथा श्रावकधर्मं प्रतिपद्यते । सा चैव वक्तव्यता यावत् प्रतिलाभयन् विहरति । शब्दार्थ-छट्टस कुण्डकोलियस्सअज्झयणस्स-छठे कुण्डकौलिक अध्ययन का, उक्खेवओउपक्षेप अर्थात् आरम्भ इस प्रकार है - एव खलु जम्बू! इस प्रकार हे शिष्य जम्बू!, तेणं कालेणं तेण समएण - उस काल उस समय मे, कम्पिल्लपुरे नयरे-काम्पिल्यपुर नगर, सहस्सम्बवणे उज्जाणे - सहस्राम्रवन उद्यान था, जियसत्तू राया - जितशत्रु राजा, कुण्डकोलिए गाहावई - और कुण्डकौलिक गाथापति था, पूसा भारिया - पूषा नामक पत्नी थी, छ हिरण्णकोडीओ निहाणपउत्ताओ - छह करोड़ सुवर्ण मुद्राएं कोष मे थी, छ वुढिपउत्ताओ - छह करोड़ व्यापार मे लगी थी और, छ पवित्थरपउत्ताओ - -छह गृह तथा उपकरण में लगी हुई थी। छह वया दस-गोसाहस्सिएण वएण- प्रत्येक व्रज मे दस हजार गायो के हिसाब से छह व्रज अर्थात् पशु-धन था। सामी समोसढे- भगवान् पधारे। जहा कामदेवो तहा सावयधम्म पडिवज्जइ - कामदेव के समान उसने भी श्रावकधर्म अङ्गीकार किया। सच्चेव वत्तव्वया जाव पडिलाभेमाणे विहरइ सारी वक्तव्यता उसी प्रकार है यावत् श्रमण-निर्ग्रन्थो को भक्तपान प्रतिलाभ अर्थात् आहार-पानी आदि बहराता हुआ विचरने लगा। श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ सरसठ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन भावार्थ - उपक्षेप पूर्ववत् है । हे जम्बू उस काल और उस समय काम्पिल्यपुर नगर था। उस नगर के बाहर सहस्राम्रवन नामक रमणीय उद्यान था । वहा पर जितशत्रु राजा राज्य करता था। उस नगर मे कुण्डकौलिक नामक प्रसिद्ध गाथापति था। उस गाथापति की पूषा नामक धर्मपत्नी थी । कुण्डकौलिक के पास छह करोड़ सुवर्ण मुद्राए कोष मे सुरक्षित थी, छह करोड़ सुवर्ण मुद्राए व्यापार मे लगी हुई थी और छह करोड़ घर तथा गृहोपकरण में प्रयुक्त थी । उस गाथापति के पास छह व्रज पशु-धन था। उसी काल और समय में श्रमण भगवान् महावीर ग्रामानुग्राम धर्मोपदेश देते हुए काम्पिल्यपुर नगर के बाहर सहस्राम्रवन उद्यान मे पधारे। आनद गाथापति के समान कुण्डकौलिक भी भगवान् का धर्मोपदेश श्रवण करने के लिए गया । फलस्वरूप उसने भी द्वादश व्रतरूप गृहस्थधर्म अगीकार किया। यावत् श्रमण-निर्ग्रन्थो को आहार- पानी बहराते हुए सेवा- भक्ति से अपना जीवन यापन करने लगा । कुण्डकौलिक द्वारा अशोकवनिका मे धर्मानुष्ठानमूलम् - तए णं से कुण्डकोलिए समणोवासए अन्नया कयाइ पुव्वावरण्हकालसमयंसि जेणेव असोगवणिया, जेणेव पुढवि-सिला- पट्टए तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता नाम- मुद्दगं च उत्तरिज्जगं च पुढवि - सिला- पट्टए ठवेइ, ठवित्ता समणस्स भगवओ महावीरस्स अतियं धम्मपण्णत्ति उवसपज्जित्ताण विहरइ ॥ एक सौ सरसठ ॥ छाया - ततः खलु स कुण्डकौलिक श्रमणोपासकोऽन्यदा कदाचित्पूर्वापराह्नकालसमये येनैवाऽ शोकवनिका येनैव पृथिवी-शिला-पट्टकस्तेनैवोपागच्छति, उपागत्य नाममुद्रिका चोत्तरीयक च पृथिवी- शिला-पट्टके स्थापयति, स्थापयित्वा श्रमणस्य भगवतो महावीरस्याऽऽन्तिकीं धर्मप्रज्ञप्तिमुसम्पद्य विहरति । शब्दार्थ - तए ण से कुण्डकोलिए समणोवासए अन्नया कयाइ - तदनन्तर वह कुण्डकौलिक श्रमणोपासक अन्य किसी दिन, पुव्वावरण्हकालसमयंसि-मध्याह्नकाल के समय, जेणेव असोगवणिया - जहा अशोक वनिका थी, जेणेव पुढविसिलापट्टए- जहा पृथ्वी शिला-पट्ट था, तेणेव उवागच्छइ - वहा पर आया, उवागच्छित्ता - आकर, नाम मुद्दग च-नामाङ्कित मुद्रिका तथा, उत्तरिज्जग च-उत्तरीय अर्थात् दुपट्टे को, पुढविसिलापट्टए ठवेइ - पृथ्वी शिला पट्ट पर रखा, ठवित्ता -- रख करके, समणस्स भगवओ महावीरस्स अतियं श्रमण भगवान् महावीर के पास स्वीकार की हुई, धम्मपण्णत्ति उवसपज्जित्ताण विहरइ धर्मप्रज्ञप्ति को अङ्गीकार करके विचरने लगा । भावार्थ-तत्पश्चात् किसी दिन कुण्डकौलिक श्रमणोपासक मध्याह्न के समय अशोकवनिका मे गया, वहा पृथ्वी शिला-पट्ट पर अपने नाम से अङ्कित हाथ की अंगूठी और ऊपर ओढ़ने श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ अड़सठ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन वाले उत्तरीय वस्त्र को रख दिया। तत्पश्चात् श्रमण भगवान से प्राप्त की हुई धर्म-प्रज्ञप्ति का आराधन करने लगा । देव का आगमनमूलम् - तए णं तस्स कुण्डकोलियस्स समणोवासयस्स एगे देवे अंतियं पाउब्भवित्था ।। एक सौ अड़सठ ।। छाया - ततः खलु तस्य कुण्डकौलिकस्य श्रमणोपासकस्यैको देवोऽन्तिके प्रादुरभूत् । शब्दार्थ - तए णं-- तदनन्तर तस्स कुण्डकोलियस्स समणोवासयस - उस कुण्डकौलिक श्रमणोपासक के पास, एगे देवे अतियं पाउब्भवित्था - एक देव प्रकट हुआ। भावार्थ जिस समय कुण्डकौलिक श्रमणोपासक भगवान् महावीर के धर्म की आराधना कर रहा था उस समय वहा पर एक देव प्रकट हुआ। देव द्वारा नियतिवाद की प्रशंसामूलम् - तए ण से देवे नाममुद्दं च उत्तरिज्जं च पुढवि सिला- पट्टयाओ गेण्हइ, गिणिहत्ता सखिंखिणि अंतलिक्ख पडिवन्ने कुण्डकोलियं समणोवासय एवं वयासी- "हं भो कुण्डकोलिया । समणोवासया । सुन्दरी णं देवाणुप्पिया! गोसालस्स मंखलि-पुत्तस्स धम्म-पण्णत्ती, नस्थि उट्ठाणे इ वा कम्मे इ वा, बले इ वा, वीरिए इ वा, पुरिसक्कार - परक्कमे इवा, नियया सव्वभावा, मगुली ण समणस्स भगवओ महावीरस्स धम्म-पण्णत्ती, अत्थि उट्ठाणे इ वा, जाव परक्कमे इ वा, अणियया सव्वभावा" ॥ एक सौ छयासठ ॥ छाया- तत खलु स देवो नाममुद्रा चोत्तरीय च पृथिवी - शिला-पट्टकाद् गृह्णाति, गृहीत्वा सकिकिणिकः अंतरिक्षप्रतिपन्न कुण्डकौलिकं श्रमणोपासकमेवमवादीत् - "ह भो. कुण्डकौलिक / श्रमणोपासक । सुन्दरी खलु देवानुप्रिय । गोशालस्य मखलि पुत्रस्य धर्मप्रज्ञप्ति नास्ति उत्थानमिति वा कर्मेति वा, बलमिति वा, वीर्यमिति वा पुरुषकार - पराक्रमौ इति वा, नियता सर्वभावाः । मगुली खलु श्रमणस्य भगवतो महावीरस्य धर्मप्रज्ञप्तिः अस्ति उत्थानमिति वा, यावत्पराक्रम इति वा अनियता सर्वभावा । शब्दार्थ - तए ण से देवे- तदनन्तर उस देव ने, नाममुद्द च उत्तरिज्जं च-नाम-मुद्रिका और उत्तरीय को, पुढवि- सिला-पट्टयाओ गेण्हइ - पृथ्वी शिला - पट्टक से उठाया, गिणिहत्ता - उठाकर, सखिखिणि - घुघरु का शब्द करते हुए, अंतलिक्खपडिवन्ने - उडकर अन्तरिक्ष मे रुक गया, कुण्डकोलिय समणोवासयं एवं वयासी - -कुण्डकौलिक श्रावक को इस प्रकार कहने लगा-ह भो श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ छयासठ / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन कुण्डकोलिया! समणोवासया !- हे कुण्डकौलिक ! श्रमणोपासक , सुन्दरी णं देवाणुप्पिया! गोसालस्स मखलिपुत्तस्स धम्मपण्णत्ती हे देवानुप्रिय। मखलिपुत्र गोशालक की धर्मप्रज्ञप्ति सुन्दर है, नत्थि उठाणे इ वा कम्मे इ वा बले इ वा - उत्थान, कर्म, बल, , वीरिए इ वा पुरिसक्कारपरक्कमे इ वा-वीर्य, पुरुषकार तथा पराक्रम स्वीकार नहीं किया गया, नियया सव्वभावा- अर्थात् विश्व के समस्त परिवर्तन नियत अर्थात निश्चित है, मगुली णं समणस्स भगवओ महावीरस्स धम्मपणत्ती- श्रमण भगवान् महावीर की धर्मप्रज्ञप्ति मिथ्या है। अस्थि उट्ठाणे इ वा जाव परक्कमे इ वा - क्योंकि उसमे उत्थान और पराक्रमादि को स्वीकार किया गया है। अणियया सव्वभावा- वहा सब भाव अनियत है । भावार्थ - उस देव ने नामांकित मुद्रिका और उत्तरीय वस्त्र को शिलापट पर से उठा लिया और घुघरु बजाते हुए आकाश में उड़कर कुण्डकौलिक से कहने लगा - "हे कुण्डकौलिक श्रावक देवानुप्रिय मखलिपुत्र गोशालक की धर्मप्रज्ञप्ति सुन्दर है। उसमे उत्थान कर्म बल वीर्य पुरुषकार तथा पराक्रम को स्वीकार नही किया गया । विश्व के समस्त परिवर्तन नियत है अर्थात् जो कुछ होना है होकर रहेगा । उसमे कोई परिवर्तन नही हो सकता । इसके विपरीत श्रमण भगवान् महावीर की धर्मप्रज्ञप्ति असुन्दर अथवा मिथ्या है। उसमे उत्थान पराक्रमादि को स्वीकार किया गया है तथा जगत के परिवर्तन अनियत है अर्थात् पुरुषार्थ आदि के द्वारा उनमे परिवर्तन किया जा सकता है। " टीका-पिछले पाच अध्ययनो की अपेक्षा प्रस्तुत कुण्डकौलिक अध्ययन भिन्न प्रकार का है। इसमे देवता उपसर्ग उपस्थित नहीं करता किन्तु कुण्डकौलिक के सामने भिन्न धार्मिक परम्परा का प्रतिपादन करता है, जो महावीर के समय अत्यन्त प्रचलित थी और उसके अनुयायियों की संख्या महावीर से भी अधिक थी । प्रस्तुत सूत्र में दोनो का परस्पर भेद दिखाया गया है। गोशालक नियतिवादी था । उसके मत में विश्व के समस्त परिवर्तन नियत अर्थात् निश्चित है। उन्हें कोई बदल नही सकता । प्रत्येक जीव को चौरासी लाख योनियों में घूमना पड़ेगा और उसके पश्चात् अपने-आप मुक्ति प्राप्त हो जाएगी। इन योनियो मे जो सुख-दुख है वे भोगने ही पड़ेगे। कोई व्यक्ति अपने पुरुषार्थ, पराक्रम द्वारा उसमे परिवर्तन नहीं कर सकता। अत समस्त साधनाए, तपस्याएं तथा भाग-दौड़ व्यर्थ है। इस मत का दूसरा नाम आजीविक भी है और इसका उल्लेख अशोक की धर्मलिपियो मे मिलता है, तत्पश्चात् सम्प्रदाय के रूप में उल्लेख न मिलने पर भी भारतीय जीवन पर उसका प्रभाव अब भी अक्षुण्ण है। अब भी इस देश में पुरुषार्थ छोड़कर भाग्य के भरोसे बैठे रहने वालो की संख्या कम नही है । मलूकदास का नीचे लिखा दोहा साधु संन्यासी तथा फकीरो मे ही नहीं, गृहस्थो मे भी घर किए हुए है. श्री उपासक दशाग सूत्रम् / दो सौ सत्तर / कुण्डकौलिक उपासक, षष्ठम अध्ययन
शोला अनिन्य को अकेला पाकर बोली, 'आहा, हमारे सामने तो समुराल को कितनी तारीफ हो रही है ! पीठ पीछे तो निन्दा ही करते होगे। छोटी दीदी को ताना देते होगे । हम सब जानते है ।' अनिन्द्य को अधिक देर रोका नहीं जा सका। व्यस्त प्रोफेसर है। दो शिफ्टो में पढ़ाते हैं। फिर होस्टल के लड़के उन्हो के जिम्मे है । समुराल में अधिक देर रुकने का समय कहां । पोडशो साली का अनुरोध भी उन्हें अस्वीकार करना पड़ता है। काम का ऐसा ही दबाव है, उन पर । जीजाजों में से शीला भनिन्छ को ही सबसे ज्यादा मानती है। बहुत आमोद-प्रिय और शौकीन हैं अनिन्ध। कही से एक सफेद हरिण लेकर सेवा में हाजिर हुए । दूसरी चार जाने कहां से एक जोडा विचित्र रंग-बिरंगी चीनी मुर्गी ले कर आये । किन्तु इस बार जो लाये वह है अतुलनीय गोरे रंग का यह नीली आंखो वाला प्राणी इन सबका सिरमौर है । अच्छा, मैम माने क्या हो सकता है ? कौन जाने, क्या होता है ? शीला ने कई बार लक्ष्य किया है, बहुत से नामो का कोई अर्थ ही समझ में नहीं आता। चाहे जगह का नाम हो, या मनुष्य का । नाम का जो माने तुम लगा लो, वही है । मैक्स शब्द का अर्थ शीला नहीं जानती। किन्तु उसे देखने के बाद से ही फूल भैया के श्वेत-मयूर की कहानी उसे याद आ रही है। फूल भंया के बचपन में उनकी एक मित्र ने शायद मयूरभंज के महाराज से सफेद रंग का एक मोर उपहार में पाया था। क्या पंख थे और क्या पूछ यो ! आकाश में काले बादल देखते ही वह अपनी पूछ पसार देता । उसको पाकर भैया की उस सखी को प्रसन्नता का पार न था। सफेद मोर गीला ने अपनी आंखो से नही देखा है। किन्तु दो बार सपने में देखा है। आश्चर्य, उन सुख-स्वनो के बाद मैक्स दिवा-स्वन की भांति आ उपस्थित मोर क्या सुख का वाहक है ? कम-से-कम फूल भैया को देख कर तो ऐसा हो लगता है । सवेरे तीन-चार घंटा रियाज करते है फूल भैया । मगर आज उनका रियाज कहा गया ? बैठक से फूल भैया मैक्स को घर के भीतर ले आये है। उसे फूलों के गमले दिखा रहे है। जिन गमलो में शीला रोज पानी देती है, मूखे पत्ते छांट कर अलग करती है । बड़े-बड़े गेंदा के फूल देख कर मैक्स कितना उच्छवसित हो रहा है। गेंदा के फूल उसके देश में होते नही । घूम-घूम कर कमरे और छत दिखा रहा है, फूल उमे दादा के जमाने का पुस्तकालय दिखा रहा है । थोड़ा-सा सितार का संगीत भी बीच में सुना रहा है। मैक्स देखता है, सुनता है, हंसता है, और शीला काम से जब इस उस कमरे में जाती है, सीढ़ी से तेज कदमो चढ़ती उतरती है, मैक्स उसे
शोला अनिन्य को अकेला पाकर बोली, 'आहा, हमारे सामने तो समुराल को कितनी तारीफ हो रही है ! पीठ पीछे तो निन्दा ही करते होगे। छोटी दीदी को ताना देते होगे । हम सब जानते है ।' अनिन्द्य को अधिक देर रोका नहीं जा सका। व्यस्त प्रोफेसर है। दो शिफ्टो में पढ़ाते हैं। फिर होस्टल के लड़के उन्हो के जिम्मे है । समुराल में अधिक देर रुकने का समय कहां । पोडशो साली का अनुरोध भी उन्हें अस्वीकार करना पड़ता है। काम का ऐसा ही दबाव है, उन पर । जीजाजों में से शीला भनिन्छ को ही सबसे ज्यादा मानती है। बहुत आमोद-प्रिय और शौकीन हैं अनिन्ध। कही से एक सफेद हरिण लेकर सेवा में हाजिर हुए । दूसरी चार जाने कहां से एक जोडा विचित्र रंग-बिरंगी चीनी मुर्गी ले कर आये । किन्तु इस बार जो लाये वह है अतुलनीय गोरे रंग का यह नीली आंखो वाला प्राणी इन सबका सिरमौर है । अच्छा, मैम माने क्या हो सकता है ? कौन जाने, क्या होता है ? शीला ने कई बार लक्ष्य किया है, बहुत से नामो का कोई अर्थ ही समझ में नहीं आता। चाहे जगह का नाम हो, या मनुष्य का । नाम का जो माने तुम लगा लो, वही है । मैक्स शब्द का अर्थ शीला नहीं जानती। किन्तु उसे देखने के बाद से ही फूल भैया के श्वेत-मयूर की कहानी उसे याद आ रही है। फूल भंया के बचपन में उनकी एक मित्र ने शायद मयूरभंज के महाराज से सफेद रंग का एक मोर उपहार में पाया था। क्या पंख थे और क्या पूछ यो ! आकाश में काले बादल देखते ही वह अपनी पूछ पसार देता । उसको पाकर भैया की उस सखी को प्रसन्नता का पार न था। सफेद मोर गीला ने अपनी आंखो से नही देखा है। किन्तु दो बार सपने में देखा है। आश्चर्य, उन सुख-स्वनो के बाद मैक्स दिवा-स्वन की भांति आ उपस्थित मोर क्या सुख का वाहक है ? कम-से-कम फूल भैया को देख कर तो ऐसा हो लगता है । सवेरे तीन-चार घंटा रियाज करते है फूल भैया । मगर आज उनका रियाज कहा गया ? बैठक से फूल भैया मैक्स को घर के भीतर ले आये है। उसे फूलों के गमले दिखा रहे है। जिन गमलो में शीला रोज पानी देती है, मूखे पत्ते छांट कर अलग करती है । बड़े-बड़े गेंदा के फूल देख कर मैक्स कितना उच्छवसित हो रहा है। गेंदा के फूल उसके देश में होते नही । घूम-घूम कर कमरे और छत दिखा रहा है, फूल उमे दादा के जमाने का पुस्तकालय दिखा रहा है । थोड़ा-सा सितार का संगीत भी बीच में सुना रहा है। मैक्स देखता है, सुनता है, हंसता है, और शीला काम से जब इस उस कमरे में जाती है, सीढ़ी से तेज कदमो चढ़ती उतरती है, मैक्स उसे
नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजो में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) को प्रचंड जीत मिली है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) को एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ट्वीट करते हुए आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को जीत की बधाई दी तो अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को शुक्रिया कहा है. केजरीवाल ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि आपका शुक्रिया सर. मैं केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए इच्छुक हूं. हम दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा पर काम करेंगे. दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के ट्वीट पर बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर ने भी एक ट्वीट कर उन्हें दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की बात भी याद दिलाई है. आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने पीएम मोदी को धन्यवाद कहते हुए अपने ट्वीट में लिखा, 'आपका शुक्रिया सर. मैं अपनी राजधानी को वास्तव में वर्ल्ड क्लास सिटी के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की आशा करता हूं.' अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट पर एक्ट्रेस सोनम कपूर ने लिखा, 'और प्रदूषण मुक्त भी..' सोनम कपूर का ये ट्वीट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया यूजर भी इस पर खूब रिएक्शन दे रहे हैं. बता दें किअरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) ने विधानसभा चुनाव में 62 सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि पार्टी ने पिछले चुनाव में 67 सीटें अपने नाम की थीं लेकिन इस चुनाव में बीजेपी के धुंआधार प्रचार के बावजूद आम आदमी पार्टी (AAP) इस प्रदर्शन को लेकर उत्साहित है. आम आदमी पार्टी (AAP) को दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम (Delhi Assembly Election) में अपार बहुमत मिलने के बाद आज पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल (Anil Baijal) से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.
नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजो में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को प्रचंड जीत मिली है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को जीत की बधाई दी तो अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को शुक्रिया कहा है. केजरीवाल ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि आपका शुक्रिया सर. मैं केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए इच्छुक हूं. हम दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा पर काम करेंगे. दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ट्वीट पर बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर ने भी एक ट्वीट कर उन्हें दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की बात भी याद दिलाई है. आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को धन्यवाद कहते हुए अपने ट्वीट में लिखा, 'आपका शुक्रिया सर. मैं अपनी राजधानी को वास्तव में वर्ल्ड क्लास सिटी के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की आशा करता हूं.' अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट पर एक्ट्रेस सोनम कपूर ने लिखा, 'और प्रदूषण मुक्त भी..' सोनम कपूर का ये ट्वीट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया यूजर भी इस पर खूब रिएक्शन दे रहे हैं. बता दें किअरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बासठ सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि पार्टी ने पिछले चुनाव में सरसठ सीटें अपने नाम की थीं लेकिन इस चुनाव में बीजेपी के धुंआधार प्रचार के बावजूद आम आदमी पार्टी इस प्रदर्शन को लेकर उत्साहित है. आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम में अपार बहुमत मिलने के बाद आज पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.
रूस में रॉकेट परीक्षण के दौरान धमाके में 5 वैज्ञानिकों की मौत, 9 लोग घायल। बिहार में निजी आईटीआई संस्थानों की मान्यता होगी रद्द, जानिए क्या वजह है. . अभी अभी : गंगा में नहाने गए युवक की डूबने से मौत हो गई. . Phone No.
रूस में रॉकेट परीक्षण के दौरान धमाके में पाँच वैज्ञानिकों की मौत, नौ लोग घायल। बिहार में निजी आईटीआई संस्थानों की मान्यता होगी रद्द, जानिए क्या वजह है. . अभी अभी : गंगा में नहाने गए युवक की डूबने से मौत हो गई. . Phone No.
नवभारत गोल्ड के ख़ास बुलेटिन स्पोर्ट्सकास्ट में। जानेंगे खेल जगत की सुर्खियां, इतिहास के पन्नों में दर्ज बड़ी घटना, लेकिन इससे पहले शुरुआत करते हैं हफ्ते के बड़े मुद्दे से। इस हफ्ते का बड़ा मुद्दा है वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए टीम इंडिया की राह कितनी मुश्किल? और इस पर विस्तृत जानकारी के साथ हमारे साथ हैं नवभारत टाइम्स के खेल संपादक संजीव कुमार, टीम इंडिया को दूसरे टेस्ट मैच में मिली हार ने अफ्रीका में पहली टेस्ट सीरीज जीतने की उम्मीदों पर तो असर डाला ही साथ ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के पॉइंट्स टेबल पर भी इसका असर दिखा। भारत के सामने जीत दर्जकर दक्षिण अफ्रीका ने पॉइंट्स टेबल में लंबी छलांग लगाई है। अब यहां से वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना टीम इंडिया के लिए थोड़ा मुश्किल हो गया है। जोहांसबर्ग में भारत को हराकर साउथ अफ्रीका ने इस साल की अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की। एक जीत और एक हार के बाद अब अफ्रीका के 12 अंक हैं। पाइंट्स टेबल में दक्षिण अफ्रीका, भारत के बाद पांचवें नंबर पर है। 36 अंक के साथ पहले नंबर पर है ऑस्ट्रेलिया। वहीं, दूसरे पर है श्रीलंका। श्रीलंका के 2 टेस्ट जीतने के बाद 24 अंक हैं। श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया ने एक भी मुकाबला नहीं गंवाया है अबतक। उधर, पाकिस्तान की टीम 3 जीत, 1 हार के साथ तीसरे नंबर पर है। टीम इंडिया मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की तीसरी सीरीज खेल रही है और अभी तक उसे इसमें 4 जीत, 2 हार मिली है जबकि दो मुकाबले ड्रॉ रहे। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद टीम इंडिया को धीमे ओवर रेट के चलते 3 अंकों का खामियाजा भी भुगतना पड़ा था, जिसके चलते उसके अंक घटकर 53 हो गए हैं। भारत फिलहाल पॉइंट्स टेबल में चौथे नंबर पर है। फाइनल में जगह बनाने के लिए टीम इंडिया को शीर्ष दो में शामिल रहना जरूरी है। जिसके लिए भारत को आगे की सीरीज में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। भारत के सामने अभी 3 मुकाबले और हैं। इन तीन में एक मुकाबला साउथ अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेला जाएगा। जबकि बाकी के 2 मुकाबले घरेलू जमीन पर श्रीलंका से होना है। भारत अगर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज जीत लेता है और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर क्लीन स्वीप करता है तो टीम इंडिया की दावेदारी मजबूत हो सकती है। अब चलते हैं इस हफ्ते की खेल की बड़ी ख़बरों की ओर : - 8 जनवरी को आयरलैंड और वेस्टइंडीज की बीच पहले वनडे मुकाबला खेला जाएगा। आयरलैंड वेस्टइंडीज के दौरे पर है। जहां उसे तीन वनडे और एक टी-20 मुकाबला खेलना है।
नवभारत गोल्ड के ख़ास बुलेटिन स्पोर्ट्सकास्ट में। जानेंगे खेल जगत की सुर्खियां, इतिहास के पन्नों में दर्ज बड़ी घटना, लेकिन इससे पहले शुरुआत करते हैं हफ्ते के बड़े मुद्दे से। इस हफ्ते का बड़ा मुद्दा है वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए टीम इंडिया की राह कितनी मुश्किल? और इस पर विस्तृत जानकारी के साथ हमारे साथ हैं नवभारत टाइम्स के खेल संपादक संजीव कुमार, टीम इंडिया को दूसरे टेस्ट मैच में मिली हार ने अफ्रीका में पहली टेस्ट सीरीज जीतने की उम्मीदों पर तो असर डाला ही साथ ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के पॉइंट्स टेबल पर भी इसका असर दिखा। भारत के सामने जीत दर्जकर दक्षिण अफ्रीका ने पॉइंट्स टेबल में लंबी छलांग लगाई है। अब यहां से वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना टीम इंडिया के लिए थोड़ा मुश्किल हो गया है। जोहांसबर्ग में भारत को हराकर साउथ अफ्रीका ने इस साल की अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की। एक जीत और एक हार के बाद अब अफ्रीका के बारह अंक हैं। पाइंट्स टेबल में दक्षिण अफ्रीका, भारत के बाद पांचवें नंबर पर है। छत्तीस अंक के साथ पहले नंबर पर है ऑस्ट्रेलिया। वहीं, दूसरे पर है श्रीलंका। श्रीलंका के दो टेस्ट जीतने के बाद चौबीस अंक हैं। श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया ने एक भी मुकाबला नहीं गंवाया है अबतक। उधर, पाकिस्तान की टीम तीन जीत, एक हार के साथ तीसरे नंबर पर है। टीम इंडिया मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की तीसरी सीरीज खेल रही है और अभी तक उसे इसमें चार जीत, दो हार मिली है जबकि दो मुकाबले ड्रॉ रहे। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद टीम इंडिया को धीमे ओवर रेट के चलते तीन अंकों का खामियाजा भी भुगतना पड़ा था, जिसके चलते उसके अंक घटकर तिरेपन हो गए हैं। भारत फिलहाल पॉइंट्स टेबल में चौथे नंबर पर है। फाइनल में जगह बनाने के लिए टीम इंडिया को शीर्ष दो में शामिल रहना जरूरी है। जिसके लिए भारत को आगे की सीरीज में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। भारत के सामने अभी तीन मुकाबले और हैं। इन तीन में एक मुकाबला साउथ अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेला जाएगा। जबकि बाकी के दो मुकाबले घरेलू जमीन पर श्रीलंका से होना है। भारत अगर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज जीत लेता है और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर क्लीन स्वीप करता है तो टीम इंडिया की दावेदारी मजबूत हो सकती है। अब चलते हैं इस हफ्ते की खेल की बड़ी ख़बरों की ओर : - आठ जनवरी को आयरलैंड और वेस्टइंडीज की बीच पहले वनडे मुकाबला खेला जाएगा। आयरलैंड वेस्टइंडीज के दौरे पर है। जहां उसे तीन वनडे और एक टी-बीस मुकाबला खेलना है।
मेरी शादी को 14 साल हो गए हैं और हमारा 9 साल का एक बेटा है. मेरी वाइफ बहुत केयरिंग है. हम मिडिल क्लास से हैं, लेकिन जब से मेरी पत्नी की फ्रैंड मुंबई से दिल्ली आई है तब से उस के तेवर बदल गए हैं. वह बिना बताए उस के साथ लेटनाइट पार्टीज अटैंड करती है व शराब पीती है. मुझे व बेटे को अकेला छोड़ कर चली जाती है. मेरा घर बिखर रहा है. मैं अपने घर को बिखरने से कैसे रोक सकता हूं? ये भी पढ़ें- पति मुझे छोड़कर चले गए हैं, मैं क्या करूं? आप की पत्नी अपनी फ्रैंड द्वारा दिखाए गए सपनों में जी रही है. उसे अपने घरपरिवार की चिंता नहीं है. ऐसे में आप पत्नी को वास्तविकता से परिचित करवाएं कि उस की घरपरिवार के प्रति जिम्मेदारी है जिसे उसे निभाना होगा. उसे यह भी समझाएं कि अगर वह इस तरह लेटनाइट पार्टीज में जा कर शराब पी कर घर लौटेगी तो बच्चे पर इस का बुरा प्रभाव पड़ेगा. इस तरह का व्यवहार कुछ दिन चलता है और बाद में इस से ऊब होने लगती है. हर औरत को अपना घर चाहिए होता है, न कि पार्टियां. ये भी पढ़ें- मेरे जीजाजी के मेरी छोटी बहन के साथ गलत संबंध बन गए हैं, मैं क्या करूं? ये भी पढ़ें- मैं खूबसूरत नहीं हूं जबकि मेरे पति काफी हैंडसम हैं. वे मुझे अपने साथ कहीं भी ले जाना पसंद नहीं करते, मैं क्या करूं ?
मेरी शादी को चौदह साल हो गए हैं और हमारा नौ साल का एक बेटा है. मेरी वाइफ बहुत केयरिंग है. हम मिडिल क्लास से हैं, लेकिन जब से मेरी पत्नी की फ्रैंड मुंबई से दिल्ली आई है तब से उस के तेवर बदल गए हैं. वह बिना बताए उस के साथ लेटनाइट पार्टीज अटैंड करती है व शराब पीती है. मुझे व बेटे को अकेला छोड़ कर चली जाती है. मेरा घर बिखर रहा है. मैं अपने घर को बिखरने से कैसे रोक सकता हूं? ये भी पढ़ें- पति मुझे छोड़कर चले गए हैं, मैं क्या करूं? आप की पत्नी अपनी फ्रैंड द्वारा दिखाए गए सपनों में जी रही है. उसे अपने घरपरिवार की चिंता नहीं है. ऐसे में आप पत्नी को वास्तविकता से परिचित करवाएं कि उस की घरपरिवार के प्रति जिम्मेदारी है जिसे उसे निभाना होगा. उसे यह भी समझाएं कि अगर वह इस तरह लेटनाइट पार्टीज में जा कर शराब पी कर घर लौटेगी तो बच्चे पर इस का बुरा प्रभाव पड़ेगा. इस तरह का व्यवहार कुछ दिन चलता है और बाद में इस से ऊब होने लगती है. हर औरत को अपना घर चाहिए होता है, न कि पार्टियां. ये भी पढ़ें- मेरे जीजाजी के मेरी छोटी बहन के साथ गलत संबंध बन गए हैं, मैं क्या करूं? ये भी पढ़ें- मैं खूबसूरत नहीं हूं जबकि मेरे पति काफी हैंडसम हैं. वे मुझे अपने साथ कहीं भी ले जाना पसंद नहीं करते, मैं क्या करूं ?
PUBG Mobile को भारत में बैन किया गया है। इसके चलते हर कोई नए गेम्स ट्राय कर रहा है। PUBG Mobile की गूगल प्ले स्टोर पर 4. 2 स्टार्स की रेटिंग्स है। इसकी तरह कई गेम्स है जिनकी रेटिंग्स भी काफी ज्यादा है। Call of Duty: Mobile पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस गेम में कई शानदार मैप्स है और इसके ग्राफिक्स भी अच्छे है। इस गेम की गूगल प्ले स्टोर पर 4. 5 स्टार्स की रेटिंग्स है। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इस गेम में PUBG Mobile की सर्वाइव करना पड़ता है। साथ ही आपको इसके लिए इंटरनेट की जरूरत भी नहीं है। इस गेम की गूगल प्ले स्टोर पर 4. 5 स्टार्स की रेटिंग्स है। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। PUBG Mobile की तरह इस गेम को जबरदस्त सफलता मिली है। कई लोग इसे खेलते हैं। ये अपने अलग ग्राफिक्स और कैरेक्टर्स के लिए फेमस है। गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम को 4. 3 स्टार्स की रेटिंग्स मिलेगी। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इस गेम को ऑफलाइन भी खेला जा सकता है। साथ ही इसमें कई शानदार मोड्स मौजूद है। इस गेम से आपको PUBG Mobile की तरह कई हथियार मिलेंगे। गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम को 4. 2 स्टार्स की रेटिंग्स मिलेगी। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं।
PUBG Mobile को भारत में बैन किया गया है। इसके चलते हर कोई नए गेम्स ट्राय कर रहा है। PUBG Mobile की गूगल प्ले स्टोर पर चार. दो स्टार्स की रेटिंग्स है। इसकी तरह कई गेम्स है जिनकी रेटिंग्स भी काफी ज्यादा है। Call of Duty: Mobile पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस गेम में कई शानदार मैप्स है और इसके ग्राफिक्स भी अच्छे है। इस गेम की गूगल प्ले स्टोर पर चार. पाँच स्टार्स की रेटिंग्स है। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इस गेम में PUBG Mobile की सर्वाइव करना पड़ता है। साथ ही आपको इसके लिए इंटरनेट की जरूरत भी नहीं है। इस गेम की गूगल प्ले स्टोर पर चार. पाँच स्टार्स की रेटिंग्स है। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। PUBG Mobile की तरह इस गेम को जबरदस्त सफलता मिली है। कई लोग इसे खेलते हैं। ये अपने अलग ग्राफिक्स और कैरेक्टर्स के लिए फेमस है। गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम को चार. तीन स्टार्स की रेटिंग्स मिलेगी। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इस गेम को ऑफलाइन भी खेला जा सकता है। साथ ही इसमें कई शानदार मोड्स मौजूद है। इस गेम से आपको PUBG Mobile की तरह कई हथियार मिलेंगे। गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम को चार. दो स्टार्स की रेटिंग्स मिलेगी। साथ ही आप यहां क्लिक करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं।
जम्मू। कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर में होने वाले ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव नहीं लड़ेगी, पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। बुधवार को कांग्रेस नेता जीए मीर ने बताया कि उनकी पार्टी ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव में भाग नहीं लेगी, उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए करवाए जा रहे हैं, ऐसे में उनके पास इन चुनावों का बहिष्कार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। जम्मू-कश्मीर में ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव पहली बार 24 अक्तूबर को होने जा रहे हैं। बुधवार को इन चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने आरोप लगाया कि राज्य में ऐसे हालात बनाए गए हैं कि भाजपा को छोड़ अन्य दलों के नेता अपने कार्यकर्ताओं के बीच जाकर प्रचार प्रसार नहीं कर सकते। जीए मीर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के कई नेता अभी भी नजरबंद हैं।
जम्मू। कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर में होने वाले ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव नहीं लड़ेगी, पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। बुधवार को कांग्रेस नेता जीए मीर ने बताया कि उनकी पार्टी ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव में भाग नहीं लेगी, उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए करवाए जा रहे हैं, ऐसे में उनके पास इन चुनावों का बहिष्कार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। जम्मू-कश्मीर में ब्लॉक डेवलप्मेंट काउंसिल चुनाव पहली बार चौबीस अक्तूबर को होने जा रहे हैं। बुधवार को इन चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर ने आरोप लगाया कि राज्य में ऐसे हालात बनाए गए हैं कि भाजपा को छोड़ अन्य दलों के नेता अपने कार्यकर्ताओं के बीच जाकर प्रचार प्रसार नहीं कर सकते। जीए मीर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के कई नेता अभी भी नजरबंद हैं।
BEST Places to Visit in Mirzapur: उत्तर प्रदेश का यह जिला ऐतिहासिक महत्व और अपनी सुन्दरता के लिए मिर्जापुर जिले को जाना जाता हैं। यहां पर पर्यटकों के घूमने के लिए कई सारी जगह हैं। इस जगह पर हिंदू का प्रसिद्ध मंदिर भी बना हुआ हैं। लोग गर्मी की छुट्टी को मनाने के लिए भी मिर्जापुर जाते हैं। BEST Places to Visit in Mirzapur: उत्तर प्रदेश की राजधानी से लगभग 650 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिर्ज़ापुर पर्यटकों के लिए आकर्षक शांत दृश्यों के साथ कालीन बनाने, मिट्टी और मिट्टी के बर्तन और खिलौने, पीतल के बर्तनों में बढ़िया काम का मिश्रण है। कई पहाड़ियों से घिरे होने के अलावा, यह मिर्जापुर जिले का मुख्यालय भी है। यह पवित्र मंदिर विंध्याचल, अष्टभुजा और काली खोह के लिए भी प्रमुख है और देवरहवा बाबा आश्रम के लिए भी जाना जाता है। मिर्जापुर कई प्राकृतिक स्थलों और झरनों से भी भरा हुआ है। सोनभद्र से विभाजन से पहले यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला हुआ करता था। 1)विंध्यवासिनी देवी मंदिरः यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक है। विंध्यवासिनी देवी को काजल देवी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर विशेष रूप से चैत्र और आश्विन के हिंदू महीनों में नवरात्रि के दौरान भारी संख्या में भीड़ को आकर्षित करता है। इस दौरान शादी के सीजन में काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। दुर्गा की चौकस नजर के तहत एक जोड़े को शादी करना शुभ माना जाता है। भारत में शिव पार्वती के मिलन को काफी महत्व दिया जाता है। उन्हें आदर्श युगल के रूप में देखा जाता है जिनकी कई बार अलग से पूजा भी नहीं की जा सकती। यह तथ्य अर्धनारीशिव की पूजा से स्पष्ट है, जो कि शिव और पार्वती का समामेलन है। 2)अष्टभुजा देवी मंदिरः विंध्य पर्वतमाला की चोटी पर स्थित इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है और अष्टभुजी देवी को समर्पित है जो देवी पार्वती की प्रतिमूर्ति भी हैं। मंदिर विंध्यवासिनी देवी मंदिर के पास है और मिर्जापुर से पहुंचना आसान है। 3)विंधम फ़ॉल्सः विन्धम फ़ॉल्स मिर्जापुर के निकट स्थित सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्थलों में से एक है। पथरीली सीढि़यों से बहता झरना। झरने का नाम ब्रिटिश कलेक्टर विंधम के नाम पर रखा गया है। यह जल धारा पास के एक लोकप्रिय सहूलियत बिंदु द्वारा भी बिंदीदार है जो घाटियों के पक्षी दृश्य को भी प्रदर्शित करता है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पूरी घाटी हरे रंग में रंगी हुई है। आसमान का नीलापन फूस में चार चांद लगाने लगता है। इसके अलावा, एक छोटा सा चिड़ियाघर और चिल्ड्रन पार्क भी है जो पिकनिक स्पॉट की सुंदरता को बढ़ाता है। पिकनिक स्पॉट पर अक्सर स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा रहता है और इस प्रकार सप्ताहांत में आपको यह जगह भारी भीड़ वाली मिल सकती है। हालांकि भारी भीड़ भी इस जगह की सुंदरता और आकर्षण को किसी भी तरह से कम नहीं करती है। 4) चुनार का क़िलाः यह स्थान ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालता है। सभी इतिहास प्रेमियों को चुनार का किला अवश्य जाना चाहिए। अच्छी तरह से बनाए रखने के अलावा, इसमें साफ-सुथरा परिसर भी है। किले से गंगा नदी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। महल के पीछे तेज नदी बहती है। कुछ हिस्सों में बहती हुई नदी के बहने की आवाज सुनी जा सकती है। यह भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है और स्थानीय लोगों द्वारा सुनाई गई किले से जुड़ी कहानियां इसमें और भी जोड़ती हैं। दीवारों के नीचे ब्रिटिश कब्रिस्तान भी निश्चित रूप से छूटने वाला नहीं है। यह प्राचीन कला का बेजोड़ उदाहरण है। 5) कालीकोह मंदिरः कालीकोह मंदिर एक प्रसिद्ध महाकाली मंदिर है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है। पहाड़ी बिंदु पर स्थित, इसमें देवी काली की एक मूर्ति है। एक हिंदू तीर्थस्थल होने के अलावा यह एक शांत, रचित, निर्मल दृष्टि भी देता है क्योंकि यह छोटी धाराओं और मोटी, हरी-भरी लकड़ियों के बीच स्थित है। यह न केवल चतुर भक्ति का स्थान है बल्कि निर्मल सौंदर्य का भी स्थान है। हरी-भरी घाटियां, झरते झरने, बहती नदियां, यह सब इस जगह को एक प्रकृति प्रेमी के लिए आनंदमय बना देता है। कहा जाता है कि देवी की पूजा करने वाले कई मंदिरों में कोई भी मनोकामना पूरी होती है। मिर्जापुर धार्मिक विरासत और प्राकृतिक वैभव का सही संगम दिखाता है। 6)टांडा फ़ॉल्सः मिर्जापुर में टांडा फ़ॉल्स इस क्षेत्र के सबसे सुंदर पिकनिक स्थलों में से एक है। प्राकृतिक जल धारा और जलाशय अपने शांतिपूर्ण वातावरण और सुंदरता के कारण प्रमुख पर्यटक आकर्षण हैं। टांडा फॉल सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है और मिर्जापुर के मुख्य शहर से लगभग 14 किमी दक्षिण में स्थित है। बरसात के मौसम में, प्राकृतिक वनस्पति और जीव अपने चरम पर होते हैं। फॉल्स शहर की हलचल से एक ताज़ा बदलाव पेश करते हैं। 7)मेजा डैमः मिर्जापुर में मेजा बांध अपने समृद्ध जीवों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल पक्षीप्रेमियों के बीच भी लोकप्रिय है जो प्रवासी और आवासीय पक्षियों की कई किस्मों का अध्ययन करने के लिए यहां आते हैं। मिर्जापुर से लगभग 50 किमी दूर स्थित, जलाशय सप्ताहांत की छुट्टी के लिए एक आदर्श स्थान है।
BEST Places to Visit in Mirzapur: उत्तर प्रदेश का यह जिला ऐतिहासिक महत्व और अपनी सुन्दरता के लिए मिर्जापुर जिले को जाना जाता हैं। यहां पर पर्यटकों के घूमने के लिए कई सारी जगह हैं। इस जगह पर हिंदू का प्रसिद्ध मंदिर भी बना हुआ हैं। लोग गर्मी की छुट्टी को मनाने के लिए भी मिर्जापुर जाते हैं। BEST Places to Visit in Mirzapur: उत्तर प्रदेश की राजधानी से लगभग छः सौ पचास किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित मिर्ज़ापुर पर्यटकों के लिए आकर्षक शांत दृश्यों के साथ कालीन बनाने, मिट्टी और मिट्टी के बर्तन और खिलौने, पीतल के बर्तनों में बढ़िया काम का मिश्रण है। कई पहाड़ियों से घिरे होने के अलावा, यह मिर्जापुर जिले का मुख्यालय भी है। यह पवित्र मंदिर विंध्याचल, अष्टभुजा और काली खोह के लिए भी प्रमुख है और देवरहवा बाबा आश्रम के लिए भी जाना जाता है। मिर्जापुर कई प्राकृतिक स्थलों और झरनों से भी भरा हुआ है। सोनभद्र से विभाजन से पहले यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला हुआ करता था। एक)विंध्यवासिनी देवी मंदिरः यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक है। विंध्यवासिनी देवी को काजल देवी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर विशेष रूप से चैत्र और आश्विन के हिंदू महीनों में नवरात्रि के दौरान भारी संख्या में भीड़ को आकर्षित करता है। इस दौरान शादी के सीजन में काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। दुर्गा की चौकस नजर के तहत एक जोड़े को शादी करना शुभ माना जाता है। भारत में शिव पार्वती के मिलन को काफी महत्व दिया जाता है। उन्हें आदर्श युगल के रूप में देखा जाता है जिनकी कई बार अलग से पूजा भी नहीं की जा सकती। यह तथ्य अर्धनारीशिव की पूजा से स्पष्ट है, जो कि शिव और पार्वती का समामेलन है। दो)अष्टभुजा देवी मंदिरः विंध्य पर्वतमाला की चोटी पर स्थित इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है और अष्टभुजी देवी को समर्पित है जो देवी पार्वती की प्रतिमूर्ति भी हैं। मंदिर विंध्यवासिनी देवी मंदिर के पास है और मिर्जापुर से पहुंचना आसान है। तीन)विंधम फ़ॉल्सः विन्धम फ़ॉल्स मिर्जापुर के निकट स्थित सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्थलों में से एक है। पथरीली सीढि़यों से बहता झरना। झरने का नाम ब्रिटिश कलेक्टर विंधम के नाम पर रखा गया है। यह जल धारा पास के एक लोकप्रिय सहूलियत बिंदु द्वारा भी बिंदीदार है जो घाटियों के पक्षी दृश्य को भी प्रदर्शित करता है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पूरी घाटी हरे रंग में रंगी हुई है। आसमान का नीलापन फूस में चार चांद लगाने लगता है। इसके अलावा, एक छोटा सा चिड़ियाघर और चिल्ड्रन पार्क भी है जो पिकनिक स्पॉट की सुंदरता को बढ़ाता है। पिकनिक स्पॉट पर अक्सर स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा रहता है और इस प्रकार सप्ताहांत में आपको यह जगह भारी भीड़ वाली मिल सकती है। हालांकि भारी भीड़ भी इस जगह की सुंदरता और आकर्षण को किसी भी तरह से कम नहीं करती है। चार) चुनार का क़िलाः यह स्थान ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालता है। सभी इतिहास प्रेमियों को चुनार का किला अवश्य जाना चाहिए। अच्छी तरह से बनाए रखने के अलावा, इसमें साफ-सुथरा परिसर भी है। किले से गंगा नदी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। महल के पीछे तेज नदी बहती है। कुछ हिस्सों में बहती हुई नदी के बहने की आवाज सुनी जा सकती है। यह भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है और स्थानीय लोगों द्वारा सुनाई गई किले से जुड़ी कहानियां इसमें और भी जोड़ती हैं। दीवारों के नीचे ब्रिटिश कब्रिस्तान भी निश्चित रूप से छूटने वाला नहीं है। यह प्राचीन कला का बेजोड़ उदाहरण है। पाँच) कालीकोह मंदिरः कालीकोह मंदिर एक प्रसिद्ध महाकाली मंदिर है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है। पहाड़ी बिंदु पर स्थित, इसमें देवी काली की एक मूर्ति है। एक हिंदू तीर्थस्थल होने के अलावा यह एक शांत, रचित, निर्मल दृष्टि भी देता है क्योंकि यह छोटी धाराओं और मोटी, हरी-भरी लकड़ियों के बीच स्थित है। यह न केवल चतुर भक्ति का स्थान है बल्कि निर्मल सौंदर्य का भी स्थान है। हरी-भरी घाटियां, झरते झरने, बहती नदियां, यह सब इस जगह को एक प्रकृति प्रेमी के लिए आनंदमय बना देता है। कहा जाता है कि देवी की पूजा करने वाले कई मंदिरों में कोई भी मनोकामना पूरी होती है। मिर्जापुर धार्मिक विरासत और प्राकृतिक वैभव का सही संगम दिखाता है। छः)टांडा फ़ॉल्सः मिर्जापुर में टांडा फ़ॉल्स इस क्षेत्र के सबसे सुंदर पिकनिक स्थलों में से एक है। प्राकृतिक जल धारा और जलाशय अपने शांतिपूर्ण वातावरण और सुंदरता के कारण प्रमुख पर्यटक आकर्षण हैं। टांडा फॉल सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है और मिर्जापुर के मुख्य शहर से लगभग चौदह किमी दक्षिण में स्थित है। बरसात के मौसम में, प्राकृतिक वनस्पति और जीव अपने चरम पर होते हैं। फॉल्स शहर की हलचल से एक ताज़ा बदलाव पेश करते हैं। सात)मेजा डैमः मिर्जापुर में मेजा बांध अपने समृद्ध जीवों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल पक्षीप्रेमियों के बीच भी लोकप्रिय है जो प्रवासी और आवासीय पक्षियों की कई किस्मों का अध्ययन करने के लिए यहां आते हैं। मिर्जापुर से लगभग पचास किमी दूर स्थित, जलाशय सप्ताहांत की छुट्टी के लिए एक आदर्श स्थान है।
या विप्रयेऽपि निष्ठत प्रिय वदति नाप्रियम् । न दीर्घरोपा च तथा क्लासु च विचक्षणा ।। शीनशोभाकुलाधिक्यै पुरपर्याच काम्यते । कुशला कामत त्रषु दक्षिणा रूपशालिनी ।। गृह्णाति कारणाद्रोप बिगतेय ब्रवीति च । व्यजक योजना ३०५ कार्यकाल विशेषज्ञा सुरूपा सा स्मृतोत्तमा ॥ ना० शा० २३-३६-३८ । मँपध पर दृष्टिपात करने से होता है कि दमयन्ती उपयुक्त सभी गुणो से युक्त थी । जैसे मधुगोष्ठी मे नन को जय स्त्रियों का मनोविनोद करता हुआ देखवर भी वह नल से जप्रिय भाषण नहीं करती (नँ, २०८०)। दैनिक विधियो से को सम्पन करने के लिए नल के चले जाने पर वह मन मरुध्द तोते जाती है परंतु नल के जनुनय विनय करने पर उसका जोध तत्काल ही शान्त भी हो जाता है (नं० २०-७-२५ ) । वह चित्र-क्ला तथा काव्य-कला में भी निपुण थी । अंत मान में वह तल का तथा अपना चिन बनाकर उसे देखती है (न० २०-७७ ) । इस उसकी श्लिप्ट वाणी का सुनकर उसे श्लेष आदि की उपाधि तक दे देता है । ( नं० ३-६६) । पृथ्वी का राजसमूह ही नही इद्रादि देवता तर उसको प्राप्त करने के लिए लालायित थे ( ० ५-३२, २४६ ) । नल के साथ समाग करते हुए वह दिसी विधि तथा स्थान को अभुक्त नहीं रहने देती (२०१८८४) । जब नल ईश्वराराधन करता था तब वह भी ईश्वराराधन करती थी, ल के भोजन कर चुक्ने के बाद वह भोजन करती थी तथा नल को आलिंगन करने के लिए उत्सुक देखकर वह उनकी गोद में जाकर बैठ जाती थी (० २१-१२१ ) । सौदर्य में वह पृथ्वी का आभूषण, बहुमूल्य रत्न तथा कामदेव के अमोध अस्त्र के समान थी ( नं० ५ - २६) । नल को जन्य स्त्रियो का मनोविनोद करता देखकर तथा उसे असमय मे ही स्मर-शर-व्यथा का निवेदन करता हुआ देखकर वह म्प्ट भी हो जाती है । ( नं० २०-८०, १५१) । दूत नल को अपने प्रिय नल के समान अप्रतिम सौन्दय-सपन्न मानते हुए भी उसके मन में ईर्ष्या नही उत्पन्न होती और वह उसके रूप की प्रशसा करने में सोच नही करती ( नै० ६-६६-६७) । स्वयंवर में पाच मलो को उपस्थित देखकर वह अवसर के अनुरूप समाधान खोज लेती है और आराधना के द्वारा देवताओं को प्रसन्न कर नल को पहचानने देशवाल के अनुरूप का उपनम करने लगती है । (नँ० १४-१)। सर्वव्यवहार विषयक उत्तमता-सूचक गुण तथादमयन्ती-प्रकृति सवव्यवहार-विषयक नायिका को उत्तमना के सूचक गुण अधोलिखित होते हैं, मृदुस्वभावा चाचपला स्मितभापिण्यनिष्ठुरा । गुरुणा वचने दक्षा सलज्जा विनयान्विता ।।
या विप्रयेऽपि निष्ठत प्रिय वदति नाप्रियम् । न दीर्घरोपा च तथा क्लासु च विचक्षणा ।। शीनशोभाकुलाधिक्यै पुरपर्याच काम्यते । कुशला कामत त्रषु दक्षिणा रूपशालिनी ।। गृह्णाति कारणाद्रोप बिगतेय ब्रवीति च । व्यजक योजना तीन सौ पाँच कार्यकाल विशेषज्ञा सुरूपा सा स्मृतोत्तमा ॥ नाशून्य शाशून्य तेईस छत्तीस अड़तीस । मँपध पर दृष्टिपात करने से होता है कि दमयन्ती उपयुक्त सभी गुणो से युक्त थी । जैसे मधुगोष्ठी मे नन को जय स्त्रियों का मनोविनोद करता हुआ देखवर भी वह नल से जप्रिय भाषण नहीं करती । दैनिक विधियो से को सम्पन करने के लिए नल के चले जाने पर वह मन मरुध्द तोते जाती है परंतु नल के जनुनय विनय करने पर उसका जोध तत्काल ही शान्त भी हो जाता है । वह चित्र-क्ला तथा काव्य-कला में भी निपुण थी । अंत मान में वह तल का तथा अपना चिन बनाकर उसे देखती है । इस उसकी श्लिप्ट वाणी का सुनकर उसे श्लेष आदि की उपाधि तक दे देता है । । पृथ्वी का राजसमूह ही नही इद्रादि देवता तर उसको प्राप्त करने के लिए लालायित थे । नल के साथ समाग करते हुए वह दिसी विधि तथा स्थान को अभुक्त नहीं रहने देती । जब नल ईश्वराराधन करता था तब वह भी ईश्वराराधन करती थी, ल के भोजन कर चुक्ने के बाद वह भोजन करती थी तथा नल को आलिंगन करने के लिए उत्सुक देखकर वह उनकी गोद में जाकर बैठ जाती थी । सौदर्य में वह पृथ्वी का आभूषण, बहुमूल्य रत्न तथा कामदेव के अमोध अस्त्र के समान थी । नल को जन्य स्त्रियो का मनोविनोद करता देखकर तथा उसे असमय मे ही स्मर-शर-व्यथा का निवेदन करता हुआ देखकर वह म्प्ट भी हो जाती है । । दूत नल को अपने प्रिय नल के समान अप्रतिम सौन्दय-सपन्न मानते हुए भी उसके मन में ईर्ष्या नही उत्पन्न होती और वह उसके रूप की प्रशसा करने में सोच नही करती । स्वयंवर में पाच मलो को उपस्थित देखकर वह अवसर के अनुरूप समाधान खोज लेती है और आराधना के द्वारा देवताओं को प्रसन्न कर नल को पहचानने देशवाल के अनुरूप का उपनम करने लगती है । । सर्वव्यवहार विषयक उत्तमता-सूचक गुण तथादमयन्ती-प्रकृति सवव्यवहार-विषयक नायिका को उत्तमना के सूचक गुण अधोलिखित होते हैं, मृदुस्वभावा चाचपला स्मितभापिण्यनिष्ठुरा । गुरुणा वचने दक्षा सलज्जा विनयान्विता ।।
बिहार में भी कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में टीकाकरण के प्रमाण पत्र पर पीएम मोदी की तस्वीर को लेकर सहयोगी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। हम पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी ने वैक्सीन के प्रमाण पत्र पर फोटो को लेकर एनडीए को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखी टिप्पणी भी की। गौरतलब है कि बिहार में लॉकडाउन लगाने पर भी मांझी ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन लगाने से पहले राज्य सरकार को गरीबों के लिए मुफ्त राशन और खाने-पीने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने तक 5 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने की मांग भी की थी। इसके अलावा राजद नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर भी जीतन राम मांझी ने खुलकर विरोध जताया था।
बिहार में भी कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में टीकाकरण के प्रमाण पत्र पर पीएम मोदी की तस्वीर को लेकर सहयोगी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। हम पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी ने वैक्सीन के प्रमाण पत्र पर फोटो को लेकर एनडीए को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखी टिप्पणी भी की। गौरतलब है कि बिहार में लॉकडाउन लगाने पर भी मांझी ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन लगाने से पहले राज्य सरकार को गरीबों के लिए मुफ्त राशन और खाने-पीने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने तक पाँच हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने की मांग भी की थी। इसके अलावा राजद नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर भी जीतन राम मांझी ने खुलकर विरोध जताया था।
Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को रोजगार मेले के तहत 70,126 नव-नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 70126 लोगों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि रोजगार मेले NDA और भाजपा सरकार की नई पहचान बन गए हैं। मुझे खुशी है कि बीजेपी के शासन वाली सररकारें भी लगातार इस तरह के रोजगार मेलों का आयोजन कर रही हैं। जो लोग इस समय सरकारी नौकरी में आ रहे हैं उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण समय है। आपके सामने अगले 25 साल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। भर्ती प्रक्रिया में पहले एक से डेढ़ साल का समय लग जाता था, अब यह पारदर्शिता के साथ कुछ महीने में पूरा हो जाता है। पूर्व रेल मंत्री लालू यादव पर हमला किया। पूर्व मंत्री जमीन लेकर नौकरी देते थे। पीएम ने कहा कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी और जनता-जनार्दन के धन का दुरुपयोग. . . पुरानी सरकारों में यही पहचान बन गई थी लेकिन आज भारत सरकार की पहचान उसके निर्णायक फैसलों से हो रही है। भारत एक दशक पहले की तुलना में आज अधिक स्थिर, सुरक्षित और मजबूत देश है। पिछली सरकारों की पहचान राजनीतिक भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग की बन गयी थी। मुद्रा योजना से करोड़ों युवाओं को मदद मिली है। स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ा है। सरकार से मदद पाने वाले ये नौजवान अब खुद अनेक युवाओं को नौकरी दे रहे हैं। हमारे जल जीवन मिशन पर 4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जब यह मिशन शुरू हुआ तो ग्रामीण इलाकों के 100 घरों में से 15 घरों में ही नल से जल आता था लेकिन आज इस मिशन के जरिए 100 में से 62 घरों में पाइप से पानी आने लगा है। आज देश के 130 जिलों में, सभी गांवों के प्रत्येक घर में नल से जल आता है। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रोजगार मेले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों की पहचान बन गए हैं। उन्होंने कहा कि आज निजी व सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर बन रहे हैं और जिस पैमाने पर युवाओं को नौकरी दी गई है, वह 'अभूतपूर्व' है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को लेकर जितना विश्वास और उसकी अर्थव्यवस्था पर जितना भरोसा आज है, वह पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी, कोरोना महामारी और यूक्रेन-रूस युद्ध के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को नयी ऊंचाई पर ले जा रहा है। उन्होंने कहा, "आज भारत बीते एक दशक की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी और जनता के धन का दुरुपयोग पुरानी सरकारों की पहचान थी लेकिन आज भारत को राजनीतिक स्थिरता, निर्णायक फैसलों और आर्थिक व प्रगतिशील सामाजिक सुधारों के लिए जाना जाता है। " रोजगार मेले का आयोजन देशभर में 43 जगहों पर हुआ। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में भी बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई हैं। नए कर्मचारियों को वित्तीय सेवा विभाग, डाक विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, रक्षा मंत्रालय, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, रेल मंत्रालय, लेखापरीक्षा और लेखा विभाग और गृह मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों में नियुक्त किया गया है। नव नियुक्त कर्मचारियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 'कर्मयोगी प्रारंभ' ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से खुद को प्रशिक्षित करने का अवसर भी मिल रहा है। यहां 400 से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम कहीं भी, किसी भी उपकरण पर अध्ययन के लिए उपलब्ध हैं।
Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को रोजगार मेले के तहत सत्तर,एक सौ छब्बीस नव-नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्तर हज़ार एक सौ छब्बीस लोगों को नियुक्ति पत्र बांटे जाने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि रोजगार मेले NDA और भाजपा सरकार की नई पहचान बन गए हैं। मुझे खुशी है कि बीजेपी के शासन वाली सररकारें भी लगातार इस तरह के रोजगार मेलों का आयोजन कर रही हैं। जो लोग इस समय सरकारी नौकरी में आ रहे हैं उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण समय है। आपके सामने अगले पच्चीस साल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। भर्ती प्रक्रिया में पहले एक से डेढ़ साल का समय लग जाता था, अब यह पारदर्शिता के साथ कुछ महीने में पूरा हो जाता है। पूर्व रेल मंत्री लालू यादव पर हमला किया। पूर्व मंत्री जमीन लेकर नौकरी देते थे। पीएम ने कहा कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी और जनता-जनार्दन के धन का दुरुपयोग. . . पुरानी सरकारों में यही पहचान बन गई थी लेकिन आज भारत सरकार की पहचान उसके निर्णायक फैसलों से हो रही है। भारत एक दशक पहले की तुलना में आज अधिक स्थिर, सुरक्षित और मजबूत देश है। पिछली सरकारों की पहचान राजनीतिक भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग की बन गयी थी। मुद्रा योजना से करोड़ों युवाओं को मदद मिली है। स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ा है। सरकार से मदद पाने वाले ये नौजवान अब खुद अनेक युवाओं को नौकरी दे रहे हैं। हमारे जल जीवन मिशन पर चार लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जब यह मिशन शुरू हुआ तो ग्रामीण इलाकों के एक सौ घरों में से पंद्रह घरों में ही नल से जल आता था लेकिन आज इस मिशन के जरिए एक सौ में से बासठ घरों में पाइप से पानी आने लगा है। आज देश के एक सौ तीस जिलों में, सभी गांवों के प्रत्येक घर में नल से जल आता है। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रोजगार मेले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों की पहचान बन गए हैं। उन्होंने कहा कि आज निजी व सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर बन रहे हैं और जिस पैमाने पर युवाओं को नौकरी दी गई है, वह 'अभूतपूर्व' है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को लेकर जितना विश्वास और उसकी अर्थव्यवस्था पर जितना भरोसा आज है, वह पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी, कोरोना महामारी और यूक्रेन-रूस युद्ध के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को नयी ऊंचाई पर ले जा रहा है। उन्होंने कहा, "आज भारत बीते एक दशक की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी और जनता के धन का दुरुपयोग पुरानी सरकारों की पहचान थी लेकिन आज भारत को राजनीतिक स्थिरता, निर्णायक फैसलों और आर्थिक व प्रगतिशील सामाजिक सुधारों के लिए जाना जाता है। " रोजगार मेले का आयोजन देशभर में तैंतालीस जगहों पर हुआ। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के साथ-साथ राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में भी बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई हैं। नए कर्मचारियों को वित्तीय सेवा विभाग, डाक विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, रक्षा मंत्रालय, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, रेल मंत्रालय, लेखापरीक्षा और लेखा विभाग और गृह मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों में नियुक्त किया गया है। नव नियुक्त कर्मचारियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 'कर्मयोगी प्रारंभ' ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से खुद को प्रशिक्षित करने का अवसर भी मिल रहा है। यहां चार सौ से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम कहीं भी, किसी भी उपकरण पर अध्ययन के लिए उपलब्ध हैं।
गोपालानंद नगर, बोटाद (गुजरात) में सौनी परियोजना के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री के गुजराती में दिए गए भाषण का हिन्दी रूपांतरण। मंच पर विराजमान गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान विजय रूपाणीजी, उप मुख्यमंत्री श्रीमान नीतिनभाई पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय आनंदीबेन, मंच पर विराजमान केन्द्र और राज्य के मंत्री श्री, सांसद सदस्य श्री, विधायक श्री और विशाल संख्या में उपस्थित बोटाद के भाईयों और बहनो। बोटाद की धरती भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के लिए एक प्रकार से तीर्थ यात्रा होती है। शायद बोटाद की जो नयी पीढ़ी है उनको यह सुनकर आश्चर्य होता होगा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के लिए बोटाद तीर्थक्षेत्र कैसे होगा? जिस जमाने में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अवतार में हम जनसंघ के तौर पर कार्य करते थे। उस समय निशान दिया था। हम दिया बनाते तब ऐसा लगता था की इस बार हमारी पार्टी जीतने ही वाली है। ऐसे वह दिन थे, जनसंघ की कोई पहचान नहीं थी। जनसंघ के नेता के नाम भी कोई जानता नहीं था, उस ज़माने में, 1967 में बोटाद में पहली जनसंघ की म्युनिसिपालीटी बनी थी और जनसंघ के जीवन में विजय इतना बड़ा था की समग्र देश में बोटाद...बोटाद...हो गया था। और पंडित दीनदयाल उपाध्याय केरल के अंदर जनसंघ के अधिवेशन में अध्यक्ष बने थे, उनको यह समाचार मिले, तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय खुद सीधे बोटाद आये थे, बोटाद की जनता का आभार व्यक्त करने। आज एक तरफ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म शताब्दी मनायी जा रही है, और दूसरी तरफ पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जो अर्थचिंतन था, उस अर्थ चिंतन में पंडित जी एक बात कहते थे, की देश की शकल बदलनी हो, देश को नई आर्थिक उंचाईयों पर ले जाना हो तो उनका सीधा सादा सूत्र था "हर हाथ को काम, हर खेत को पानी"। और जब पंडित दीनदयाल जी की शताब्दी मनाते हो और वह भी बोटाद की धरती पर, 400 किलोमीटर दूर से माता नर्मदा का पानी लेकर आते है वह हमारे लिए कितने आनंद के पल होंगे। बोटादवासियों के लिए कितने आनंद के पल होंगे। बहुत खुशी हो ऐसी यह घटना है। यह घटना को हम सबको मनानी है। पानी का मूल्य क्या है यह तो वही जानता है जिन्होंने सूखा कृष्णसागर तालाब देखा हो उनको पता होगा की पानी किसको कहते है। काठियावाड़ की धरती को पता चले की बिना पानी की धरती कैसी हो। काठियावाड़ के आदमी को पता हो की पानी के बगैर ज़िंदगी कैसी हो। आज जब माता नर्मदा हमारे यहां पधारे है तब यहां बैठे हुए सबको मेरी बिनती है कि हम लोग माता नर्मदा का स्वागत करें। आपकी जेब में मोबाईल फोन हो तो बाहर निकालो, मोबाईल की लाईट चालू करो और सब लोक एक साथ माता नर्मदा का स्वागत करो। आप सब मेरे साथ में बोलेंगे. नर्मदे....सर्व दे....नर्मदे..सर्व दे.. बहुत धन्यवाद साथियों...गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर आप लोगों ने जब मुझे सेवा का मौका दिया था और मैं जब देश की मीटिंग में जाता था और देश के लोग और अन्य मुख्यमंत्रियों को कहता था की हमारी आर्थिक ताकत, हमारे बजट का बड़ा हिस्सा पानी के पीछे खर्च होता है। किसी के गले यह बात नहीं उतरती थी। कई लोग मुझे कहते थे की मोदी जी आप इतने सारे रूपये पानी के पीछे खर्च कर रहे हो, आप कभी चुनाव जीतेंगे नहीं। लोगों को पसंद आये ऐसा कुछ करो। मैंने कहा भाई हम भारतीय जनता पार्टी के लोग अलग मिट्टी के है, मुझे चुनाव जीतने का कारोबार नहीं करना है, मुझे मेरे गुजरात के गांव को समृद्ध करना है। अगर एक बार मेरे गुजरात का गांव समृद्ध हो गया, तो गुजरात की प्रगति की यात्रा को कोई नहीं रोक पायेगा और गुजरात के गांव को पैसों का ढग सुख नहीं दे पायेगा, गुजरात के गांव को पानी ही सुख दे सकेगा। यह बात मेरे दिमाग में साफ थी। एक तरफ पैसों का ढग हो और दूसरी और पानी हो तो गुजरात का आदमी पानी के भरोसे पैसों से भी ज़्यादा सोना पका सके उतनी ताकत के साथ खड़ा रह सके और इसलिए हम पूरी ताकत पानी के लिए लगायी। कोई सरकार चुनाव से पहले हज़ार - दो हज़ार करोड़ की योजना गांव के नाम पर घोषित कर दे तो भी हमारे देश में वाह..वाह की हेडलाईन बनी होती और चुनाव भी जीता जा सके। कोई कल्पना कर सकता है पानी पहुंचाने के लिए सौनी योजना द्वारा 16000 करोड़ का बजट यह गुजरात सरकार खर्च कर रही है। आज यहां जो पानी पहुंचा है, 400 किलोमीटर दूर मां नर्मदा बैठे है, जिस मां नर्मदा को सिर पर पानी चढ़ाने के लिए बेटे श्रवण की तरह अपने मां-बाप को यात्रा पर ले जाये और नर्मदा पानी का आचमन कराके लाते थे और मां नर्मदा के दर्शन करके बेटे को आशीर्वाद देती थी, जो मां नर्मदा के दर्शन करने के लिए बेटा पैसे इकट्ठा करके गरीब मां को यात्रा कराता था आज खुद मां नर्मदा उनके संतानो को आशीर्वाद देने के लिए हमारे आंगन में आयी है। भाईयों-बहनों इससे बड़ा मिरेकल क्या हो सकता है? नहर में से पानी ले जाये तो खर्च कम होगा। पर मनुष्य का स्वभाव है, न आया हो तब तक बहुत ही अच्छी बातें करता है...वाह मोदी साहब, कमाल कर दिया आपने तो...और थोड़े ही दिनो में मैंने देखा बड़े बडे पम्प लगाकर पानी की चोरी करने लगे की जहां पानी पहुंचना चाहिये वहां पहुंचे ही नहीं और एक भय पैदा हुआ। हम लोगों ने तय किया कि भले ही खर्च हो पर पाईपलाईन से पानी ले जायेंगे तो ही आखिर के गांव तक के लोगों तक पानी पहुंचे नहीं तो बेफाम पानी की चोरी होगी, कोई रोक भी नहीं सकेगा। मेरी पूरे गुजरात से विनती है, इस गुजरात के गरीब से गरीब आदमी के पेट को काटकर यह पानी की पाईपलाइन डाली गई है। गरीब की जरूरत को रोक लगाकर पानी पहुंचाने का प्रयास हुआ है। वह पानी ईश्वर का प्रसाद है। एक बूंद पानी के बिगाड़ने का मुझे या आपको कोई हक़ नहीं है। 400 किलोमीटर दूर से मां नर्मदा आयी है और 400 फूट की ऊंचाइ पर पहुंचाया है। और आज जो दूसरी योजना की शुरूआत हुई, वह पानी जब पहुंचेगा तब मां नर्मदा 500 किलोमीटर दूर होगी और पानी की ऊंचाई पहुंची होगी 500 मीटर। पानी जहां नर्मदा मैया है वहां से 500 मीटर ऊंचा ले जाने का काम गुजरात का किसान सुखी हो इसलिए किया गया है। और शोर्टकट नहीं लीया है लंबे समय के हल लाने कि दिशा में काम किया है। परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम किया है। आज भी हम अगर राजस्थान और गुजरात के गांव में देखें की लाखा वणझाराने बावड़ी बनाई है। हरे गांव में लाखा वणझारा की बातें सुनाई देती है। उस जमाने के करोड़ों-करोड़ों रूपये के पत्थरों से छोटे तालाब बनाकर लोगों को पानी देने के प्रयास हुए थे। भाईयों-बहनों वह दिन दूर नहीं होगा, 50 - 100 साल बाद की पीढ़ी यह पाईपलाईन से पानी पहुंचने की बात समजेंगे तब उनको लगेगा कि हमारे पूर्वज थे वह हमारे लिए पानी का यह प्रबंध करके गये थे ऐसा काम आज गुजरात में सौनी योजना द्वारा हो रहा है। इतना सब कुछ करने के बाद भी पानी की जरूरत जो है वह पूरी करने के लिए काफी प्रयत्न करने की जरूरत है। मैं गुजरात के लोगों को विनती करता हूं, कि आप जरा देखो मध्यप्रदेश की सरकार क्या काम कर रही है। मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह की सरकार का गुजरात के हर एक किसान को आभार व्यक्त करना चाहिये। गुजरात के अखबारों का ध्यान भी नहीं पड़ा होगा, गुजरात के पानी निष्णात का भी ध्यान नहीं पड़ा होगा, नर्मदा एक ऐसी नदी है जो पर्वतों में से नहीं निकलती है। यह नदी की विशेषता है। बाकी तो नदियां पर्वत में से आती है। यह नदी जंगलों में से, घने पेड में से जो पानी रातभर गिरता रहता है वह सब मिलकर नर्मदा मैया आगे बढती है। उसका शुरूआती स्थान तो देखने जैसा है। अभी मध्यप्रदेश की सरकार ने गुजरात के गांव-गांव में पानी पहुंचे, गुजरात के किसान को 100 साल के बाद भी पानी के लिए तकलीफ ना हो इसके लिए मध्यप्रदेश की सरकार ने मध्य प्रदेश में नर्मदा के किनारे यात्रा निकाली है। पिछले 6 महीनों से यात्रा चल रही है। और वह यात्रा नर्मदा के किनारे के गांव के किसानो को जंगल बनाने की प्रेरणा देती है। नर्मदा के तट पर एक घना जंगल बनाने का अभियान चल रहा है। वह अभियान जिस तरह से चल रहा है भविष्य में कई लोग कहते है की नर्मदा का भविष्य कितना? अगर यह जंगल गये तो पानी कहां से आयेगा? उसकी फिक्र अभी से करके मध्यप्रदेश शिवराजसिंह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ऐसा जंगल तैयार कर रही है जिससे 100 साल बाद भी मां नर्मदा न सूखे उसके फिक्र भारतीय जनता पार्टी वहां कर रही है। भारी गरमी में वहां से रोज यात्रा निकलती है। हज़ारो ग्रामजन उसके साथ जुड़ते है। और उसका समापन 15 तारीख को है। एक दिन हमारे मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी भी वहां हो कर आये है। बोटाद में बैठे हुए आदमी को पता नहीं होगा की हमारे यहां पानी पहुंचाने के लीये 6 महिने से लोग पदयात्रा कर रहे है। पैड़ - पौधे लगा रहे है और उसका कारण है की मां नर्मदा में पानी एक बूंद भी कम न हो। अगर यह भाव रहा तो ही मां नर्मदा का पानी बचा पायेंगे और वह फिक्र हमें करनी पड़ेगी। वह जिम्मेदारी हमें लेनी पड़ेगी। और इसलिए टपक सिंचाई, स्प्रिंक्लर उनको जीवन का धर्म बनाना पड़ेगा। और अब टपक सिंचाई हो तो यह खेती हो सकती है यह नहीं वह सब चला गया है। हर एक प्रकार की फसल टपक सिंचाई और स्प्रिंक्लर से ली जा सकती है। हमारे पुरखों ने पानी बचाया इसलिए हमारे हिस्से में आया है। हम पानी बचायेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी पहुंचने वाला है। और कोई मां-बाप ऐसे नहीं होंगे की बच्चों के जीवन का जो होना हो वह होगा हम तो अपनी व्यवस्था कर लेंगे। ऐसे मां-बाप कहीं नहीं होंगे। और इसलिए मां नर्मदा जब आशीर्वाद देने आये है तब हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। 2022, भारत की आज़ादी के 75 साल पूरे हो रहे है। जो महापुरूषों ने सालों तक आजादी का आंदोलन चलाया है। सैंकडों लोग फांसी पर चढ़ गये। हज़ारों लोगों ने अपनी जवानी जेल में बिता दी। पीढि़यां हिन्दुस्तान आज़ाद हो उसके लिए पूरी हो गई। उस आज़ादी के 75 साल 2022 में आ रहे है। हमें आज़ादी के लिए देश के लिए मरने का सौभाग्य नहीं मीला। हमें आज़ादी के लिए मुश्किलें सहने का अवसर नहीं मिला। पर भले ही देश के लिए मरने का अवसर न मिला हो पर आज देश के लिए जीने का अवसर जरूर मीला है। 2022 देश की आज़ादी के दिवानो के सपनों के जैसा भारत बनाने की ज़िम्मेदारी हमारी है या नहीं? मैं बोटाद वालों से पूछता हूं 2022 तक आज़ादी के 75 साल में देश के लिए कुछ करने की ज़िम्मेदारी हर एक नागरिक की है या नहीं? हमें ज़िम्मेदारी उठानी चाहिये या नहीं? हमें कोई संकल्प करना चाहिये या नहीं? 2022 में एक ऐसा काम मै लूंगा जो मेरे देश, मेरे समाज को काम आये वह मैं कर के रहूंगा। यह निर्णय हिन्दुस्तान के एक-एक नागरिक को करना चाहिये या नहीं? मेरी आपसे विनती है गांव-गांव, हर घर में, यह बात पहुंचाये कि 2022 आज़ादी के दिवानों के सपनों के जैसा हिन्दुस्तान बनाना है। हमने भी कुछ सपने देखे है। भारत सरकार ने देश के सामने एक विषय रखा है। 2022 तक हिन्दुस्तान के जो किसान है वह किसानों की आय हमें दो गुना करनी है। उसमें किसानो का साथ चाहिये। आधुनिक टेक्नोलोजी का आविष्कार चाहिये। खेती की पद्धति उत्तम कैसे हो वह करनी चाहिये। खेती के साथ अन्य कौन से काम हो सके? दूध उत्पादन कैसे हो? खेत के चारों और ईमारती लकड़ी की खेती किस प्रकार हो। खेत में सोलर एनर्जी का किस तरह उपयोग हो सके? माता-बहनों को मधुमक्खी पालन का शिक्षण दे कर शहद का उत्पादन किस तरह से बढाया जाये? 2022 तक कितने किसान हो जो तय करे की आज मैं पांच थैला यूरिया इस्तेमाल करता हूं, 2022 तक मेरी खेती मै एसी करूंगा कि पांच थैले से मैं दो थैले तक आ जाऊंगा और यूरिया में कटौती करके यह भारत माता की सेवा करूंगा ऐसा संकल्प करने वाले कितने किसान निकलेंगे? कितने किसान निकलेंगे जो तय करे कि अब मेरे खेत में एक भी पानी की बूंद बिगड़ने नहीं दूंगा। और टपक सिंचाई से खेती करूंगा और नया इतिहास बनाने का काम मैं करके रहूंगा, मेरे देश की आज़ादी के 75 साल मुझे मनाने है। यह भाव कैसे बनेगा? यह भाव पैदा करने की आवश्यकता है। और एक बार सवा सो करोड़ देशवासी संकल्प कर ले, एक देशवासी का एक संकल्प, एक परिवार का एक संकल्प। हर एक नगर खुद का संकल्प तय करे, बोटाद तय करे की 2022 में बोटाद को यहां तक पहुंचाना है। हर एक गांव यह तय करे की 2022 तक हमारे गांव में किसी को गरीब रहने नहीं देना है कुछ न कुछ काम उसके लिए ढूंढ लेना है। कौन कहता है गरीबी से देश मुक्त नहीं हो सकता? कौन कहता है की दुनिया के सामने भारत आ कर के खड़ा नहीं रह सकता ? भाईयों-बहनों एक ज़माना था हमने हथियार रख दिये थे। बारिश आये तो ठीक और न आये तो भी ठीक। अगर आये तो साल अच्छा गया, न आये तो कुदरत की मेहरबानी। आज से 15 साल पहले कभी काठियावाड़ के आदमी ने सोचा नहीं था की सूखे में से भी हम बाहर आ सकते है। यह मानवी के पुरुषार्थ का कमाल है कि आज गुजरात सूखे में से बाहर आ गया और स्वप्रयत्न से आया, पुरुषार्थ से आया, योजना से आया। पानी जैसी बड़ी समस्या को अगर हम पार कर सकते है तो विकास की नयी उंचाईयों को क्यूं पार नहीं कर सकते? और इसलिए गुजरात ने कृषि के क्षेत्र में एक नयी ताकत के दर्शन करवाये है। उसको हम नयी उंचाईयों पर किस तरह से ले जाये उसके लिए प्रयास करें। हमारा एक प्रयास है पुरानी पद्धतियों से देश को बहार निकालना है। आधुनिक विज्ञान टेक्नोलोजी मनुष्य का स्वभाव बनाना है। यहां मैंने जब कहा कि आपके मोबाईल फोन की लाईट चालू करो, सबके हाथ में मोबाईल फोन था। भाईयों-बहनों आपके हाथ में जो मोबाईल है ना ऐसी स्थिती पैदा करनी है कि पूरी सरकार राज्य की हो या केन्द्र की वह आपके मोबाईल फोन में आ जाये ऐसी स्थिती मुझे पैदा करनी है। आपका मोबाईल फोन ही आपकी बैंक बन जाये। उस दिशा में देश को ले जाना है। एक भीम एप बनाई है। और मैं चाहता हूं की बोटाद के इस कार्यक्रम में आया हुआ हर एक व्यक्ति खुद के मोबाईल में भीम एप डाउनलोड करे। और अब कारोबार रोकड़ से नहीं, भीम एप से चलाये। मुझे गरीब लोगों की मदद करनी है। आज मध्यम वर्ग का सामान्य मानवी छोटी दुकान हो, थोड़ा माल खरीदे तो भविष्य में अच्छी आमदनी होने की आशा हो। तो वह क्या करेगा? ऊंचे ब्याज से पैसे लेकर आता है। बैंक उसको पैसे नहीं देगी। क्योंकि उसका कोई रोकड़ न हो, सब रोकड़ व्यवहार हो। बैंक वाला कहेगा किसके आधार पर तुझे पैसे दूं? अगर आप भीम एप से पैसे की लेन-देन करो, तो आपका हिसाब अपने आप बनता जायेगा। नाई की दुकान हो, सिलाई की दुकान हो उसकी लेन-देन इससे चले तो बैंक में हिसाब जायेगा कि इस भाई की महीने की 2000 की लेन-देन है तो 500-700 की लेन-देने में कोई दिक्कत नहीं होगी, उसको ऊंचे ब्याज पर पैसे लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और बैंक सामने से उसको पैसे देगी। हम एक ऐसी व्यवस्था करना चाहते है कि आपके कारोबार की माहिती भीम एप के जरीये जब बैंक के पास पहुंचे तो बैंक हिसाब देखें और बैंक आपको मेसेज भेजेगा की पिछले महिने आप 2000 की लोन लेने के हकदार थे पर अब आपका काम सुधर गया है तो आप 2500 की लोन के लिए हकदार है। छ महीने बाद कारोबार में सुधार आये तो फिर बैंक का ही मेसेज आये की पहले आप 2500 के हकदार थे अब आपका काम बढ़ा है और अब आप 5000 लेने के हकदार बन गये है। लेना न लेना वह आपके ऊपर है। पर एक बार आप यह व्यवस्था के साथ जुड़े, यह बैंक आपके घर आकर आपकी सेवा करे ऐसा परिवर्तन मुझे लाना है। वह तभी आयेगा जब आपका साथ-सहकार मुझे मिलेगा। जो नव-युवान है उनको इस वेकेशन में मुझे कमाते हुए देखना है। आजकल हिन्दुस्तान में भी वेकेशन में युवा लोग कुछ न कुछ करने का उत्साह दिखाते है। पहले हम पढ़ते थे कि अमेरिका में बच्चे पढ़े तो शनि-रवि ड्राईविंग करे, होटेल्स में काम करे और कमाई करे और वापस पांच दिन पढ़े। और हम कहते थे के बच्चे बहुत अच्छा करते है। आजकल हिन्दुस्तान के बच्चे भी करते है। वह लोग भी काम करने का उत्साह दिखाते है और महेनत करने में जरा भी संकोच नहीं करते है। उनको शर्म नहीं है अगर रिक्शा चलानी पड़े तो गर्व से चलाते है। और पेसेन्जर के साथ अंग्रेजी में बात करते है। तीन महीना वेकेशन है तो रिक्शा चलाते है। एक नया कल्चर पैदा हो रहा है। इन नव-युवको को इस वेकेशन में कमाने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत अच्छी योजना रखी है। आप आपके मोबाईल में भीम एप डाउनलोड करो और आप अन्य कोई एक को भीम एप डाउनलोड करना सीखाओ। भीम एप द्वारा तीन बार लेन-देन करना सीखाओ। तीन बार अगर वह इस्तेमाल करे तो आपके खाते में सरकार की और से यह काम करने के लिए 10 रूपये आपके खाते में जमा होंगे। एक दिन में ऐसे 20 लोगों को पकड़ो, तो शाम तक आपके मोबाईल के खाते में 200 रूपये आ जायेंगे। एक महीने में आपको पांच से छह हजार की कमाई होगी। इस तीन महीने के वेकेशन में 15 से 20 हजार कमाना, नवयुवाओं के लिए बांये हाथ का खेल है। और यही काम कोई दुकानवाला करे, व्यापारी करे और अगर वह अपनी दुकान पर कहे कि मैं तो भीम से ही पैसे लूंगा और भीम से ही दूंगा तो उसको एक ग्राहक के लिए अगर तीन बार लेन-देन हो तो उनको 25 रूपये देने का विचार सरकार ने किया है। शाम होते ही 10 ऐसे लोग आये तो 250 रोज की उसकी आय बढ़ जायेगी। गरीब आदमी भी कमा सके और देश का पूरा तंत्र बदल जाये उस दिशा में काम करने का बीड़ा उठाया है। मैं गुजरात के युवाओं को कहता हूं और गुजराती व्यापारी को बहुत अच्छे से पता होता है की इससे क्या होगा। उनको देर नहीं लगेगी। मैं आपको निमंत्रण देता हूं, खास करके मेरे युवकों को निमंत्रण देता हूं। इस वेकेशन में 25000 कमाने का संकल्प करो। भारत सरकार की योजना है और कोई युवान ऐसा नहीं होगा जिसको इस वेकेशन में 25000 नहीं कमाने हो। सरकार के पास योजना है। व्यापारीयों को मेरा आग्रह है की अगर आप चाहे तो आपकी दुकान में 50000 तक की आय बढ़ा सकते है। जो योजना रखी है उसको आप आगे बढ़ाईये।
गोपालानंद नगर, बोटाद में सौनी परियोजना के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री के गुजराती में दिए गए भाषण का हिन्दी रूपांतरण। मंच पर विराजमान गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान विजय रूपाणीजी, उप मुख्यमंत्री श्रीमान नीतिनभाई पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय आनंदीबेन, मंच पर विराजमान केन्द्र और राज्य के मंत्री श्री, सांसद सदस्य श्री, विधायक श्री और विशाल संख्या में उपस्थित बोटाद के भाईयों और बहनो। बोटाद की धरती भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के लिए एक प्रकार से तीर्थ यात्रा होती है। शायद बोटाद की जो नयी पीढ़ी है उनको यह सुनकर आश्चर्य होता होगा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के लिए बोटाद तीर्थक्षेत्र कैसे होगा? जिस जमाने में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अवतार में हम जनसंघ के तौर पर कार्य करते थे। उस समय निशान दिया था। हम दिया बनाते तब ऐसा लगता था की इस बार हमारी पार्टी जीतने ही वाली है। ऐसे वह दिन थे, जनसंघ की कोई पहचान नहीं थी। जनसंघ के नेता के नाम भी कोई जानता नहीं था, उस ज़माने में, एक हज़ार नौ सौ सरसठ में बोटाद में पहली जनसंघ की म्युनिसिपालीटी बनी थी और जनसंघ के जीवन में विजय इतना बड़ा था की समग्र देश में बोटाद...बोटाद...हो गया था। और पंडित दीनदयाल उपाध्याय केरल के अंदर जनसंघ के अधिवेशन में अध्यक्ष बने थे, उनको यह समाचार मिले, तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय खुद सीधे बोटाद आये थे, बोटाद की जनता का आभार व्यक्त करने। आज एक तरफ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म शताब्दी मनायी जा रही है, और दूसरी तरफ पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जो अर्थचिंतन था, उस अर्थ चिंतन में पंडित जी एक बात कहते थे, की देश की शकल बदलनी हो, देश को नई आर्थिक उंचाईयों पर ले जाना हो तो उनका सीधा सादा सूत्र था "हर हाथ को काम, हर खेत को पानी"। और जब पंडित दीनदयाल जी की शताब्दी मनाते हो और वह भी बोटाद की धरती पर, चार सौ किलोग्राममीटर दूर से माता नर्मदा का पानी लेकर आते है वह हमारे लिए कितने आनंद के पल होंगे। बोटादवासियों के लिए कितने आनंद के पल होंगे। बहुत खुशी हो ऐसी यह घटना है। यह घटना को हम सबको मनानी है। पानी का मूल्य क्या है यह तो वही जानता है जिन्होंने सूखा कृष्णसागर तालाब देखा हो उनको पता होगा की पानी किसको कहते है। काठियावाड़ की धरती को पता चले की बिना पानी की धरती कैसी हो। काठियावाड़ के आदमी को पता हो की पानी के बगैर ज़िंदगी कैसी हो। आज जब माता नर्मदा हमारे यहां पधारे है तब यहां बैठे हुए सबको मेरी बिनती है कि हम लोग माता नर्मदा का स्वागत करें। आपकी जेब में मोबाईल फोन हो तो बाहर निकालो, मोबाईल की लाईट चालू करो और सब लोक एक साथ माता नर्मदा का स्वागत करो। आप सब मेरे साथ में बोलेंगे. नर्मदे....सर्व दे....नर्मदे..सर्व दे.. बहुत धन्यवाद साथियों...गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर आप लोगों ने जब मुझे सेवा का मौका दिया था और मैं जब देश की मीटिंग में जाता था और देश के लोग और अन्य मुख्यमंत्रियों को कहता था की हमारी आर्थिक ताकत, हमारे बजट का बड़ा हिस्सा पानी के पीछे खर्च होता है। किसी के गले यह बात नहीं उतरती थी। कई लोग मुझे कहते थे की मोदी जी आप इतने सारे रूपये पानी के पीछे खर्च कर रहे हो, आप कभी चुनाव जीतेंगे नहीं। लोगों को पसंद आये ऐसा कुछ करो। मैंने कहा भाई हम भारतीय जनता पार्टी के लोग अलग मिट्टी के है, मुझे चुनाव जीतने का कारोबार नहीं करना है, मुझे मेरे गुजरात के गांव को समृद्ध करना है। अगर एक बार मेरे गुजरात का गांव समृद्ध हो गया, तो गुजरात की प्रगति की यात्रा को कोई नहीं रोक पायेगा और गुजरात के गांव को पैसों का ढग सुख नहीं दे पायेगा, गुजरात के गांव को पानी ही सुख दे सकेगा। यह बात मेरे दिमाग में साफ थी। एक तरफ पैसों का ढग हो और दूसरी और पानी हो तो गुजरात का आदमी पानी के भरोसे पैसों से भी ज़्यादा सोना पका सके उतनी ताकत के साथ खड़ा रह सके और इसलिए हम पूरी ताकत पानी के लिए लगायी। कोई सरकार चुनाव से पहले हज़ार - दो हज़ार करोड़ की योजना गांव के नाम पर घोषित कर दे तो भी हमारे देश में वाह..वाह की हेडलाईन बनी होती और चुनाव भी जीता जा सके। कोई कल्पना कर सकता है पानी पहुंचाने के लिए सौनी योजना द्वारा सोलह हज़ार करोड़ का बजट यह गुजरात सरकार खर्च कर रही है। आज यहां जो पानी पहुंचा है, चार सौ किलोग्राममीटर दूर मां नर्मदा बैठे है, जिस मां नर्मदा को सिर पर पानी चढ़ाने के लिए बेटे श्रवण की तरह अपने मां-बाप को यात्रा पर ले जाये और नर्मदा पानी का आचमन कराके लाते थे और मां नर्मदा के दर्शन करके बेटे को आशीर्वाद देती थी, जो मां नर्मदा के दर्शन करने के लिए बेटा पैसे इकट्ठा करके गरीब मां को यात्रा कराता था आज खुद मां नर्मदा उनके संतानो को आशीर्वाद देने के लिए हमारे आंगन में आयी है। भाईयों-बहनों इससे बड़ा मिरेकल क्या हो सकता है? नहर में से पानी ले जाये तो खर्च कम होगा। पर मनुष्य का स्वभाव है, न आया हो तब तक बहुत ही अच्छी बातें करता है...वाह मोदी साहब, कमाल कर दिया आपने तो...और थोड़े ही दिनो में मैंने देखा बड़े बडे पम्प लगाकर पानी की चोरी करने लगे की जहां पानी पहुंचना चाहिये वहां पहुंचे ही नहीं और एक भय पैदा हुआ। हम लोगों ने तय किया कि भले ही खर्च हो पर पाईपलाईन से पानी ले जायेंगे तो ही आखिर के गांव तक के लोगों तक पानी पहुंचे नहीं तो बेफाम पानी की चोरी होगी, कोई रोक भी नहीं सकेगा। मेरी पूरे गुजरात से विनती है, इस गुजरात के गरीब से गरीब आदमी के पेट को काटकर यह पानी की पाईपलाइन डाली गई है। गरीब की जरूरत को रोक लगाकर पानी पहुंचाने का प्रयास हुआ है। वह पानी ईश्वर का प्रसाद है। एक बूंद पानी के बिगाड़ने का मुझे या आपको कोई हक़ नहीं है। चार सौ किलोग्राममीटर दूर से मां नर्मदा आयी है और चार सौ फूट की ऊंचाइ पर पहुंचाया है। और आज जो दूसरी योजना की शुरूआत हुई, वह पानी जब पहुंचेगा तब मां नर्मदा पाँच सौ किलोग्राममीटर दूर होगी और पानी की ऊंचाई पहुंची होगी पाँच सौ मीटर। पानी जहां नर्मदा मैया है वहां से पाँच सौ मीटर ऊंचा ले जाने का काम गुजरात का किसान सुखी हो इसलिए किया गया है। और शोर्टकट नहीं लीया है लंबे समय के हल लाने कि दिशा में काम किया है। परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम किया है। आज भी हम अगर राजस्थान और गुजरात के गांव में देखें की लाखा वणझाराने बावड़ी बनाई है। हरे गांव में लाखा वणझारा की बातें सुनाई देती है। उस जमाने के करोड़ों-करोड़ों रूपये के पत्थरों से छोटे तालाब बनाकर लोगों को पानी देने के प्रयास हुए थे। भाईयों-बहनों वह दिन दूर नहीं होगा, पचास - एक सौ साल बाद की पीढ़ी यह पाईपलाईन से पानी पहुंचने की बात समजेंगे तब उनको लगेगा कि हमारे पूर्वज थे वह हमारे लिए पानी का यह प्रबंध करके गये थे ऐसा काम आज गुजरात में सौनी योजना द्वारा हो रहा है। इतना सब कुछ करने के बाद भी पानी की जरूरत जो है वह पूरी करने के लिए काफी प्रयत्न करने की जरूरत है। मैं गुजरात के लोगों को विनती करता हूं, कि आप जरा देखो मध्यप्रदेश की सरकार क्या काम कर रही है। मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह की सरकार का गुजरात के हर एक किसान को आभार व्यक्त करना चाहिये। गुजरात के अखबारों का ध्यान भी नहीं पड़ा होगा, गुजरात के पानी निष्णात का भी ध्यान नहीं पड़ा होगा, नर्मदा एक ऐसी नदी है जो पर्वतों में से नहीं निकलती है। यह नदी की विशेषता है। बाकी तो नदियां पर्वत में से आती है। यह नदी जंगलों में से, घने पेड में से जो पानी रातभर गिरता रहता है वह सब मिलकर नर्मदा मैया आगे बढती है। उसका शुरूआती स्थान तो देखने जैसा है। अभी मध्यप्रदेश की सरकार ने गुजरात के गांव-गांव में पानी पहुंचे, गुजरात के किसान को एक सौ साल के बाद भी पानी के लिए तकलीफ ना हो इसके लिए मध्यप्रदेश की सरकार ने मध्य प्रदेश में नर्मदा के किनारे यात्रा निकाली है। पिछले छः महीनों से यात्रा चल रही है। और वह यात्रा नर्मदा के किनारे के गांव के किसानो को जंगल बनाने की प्रेरणा देती है। नर्मदा के तट पर एक घना जंगल बनाने का अभियान चल रहा है। वह अभियान जिस तरह से चल रहा है भविष्य में कई लोग कहते है की नर्मदा का भविष्य कितना? अगर यह जंगल गये तो पानी कहां से आयेगा? उसकी फिक्र अभी से करके मध्यप्रदेश शिवराजसिंह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ऐसा जंगल तैयार कर रही है जिससे एक सौ साल बाद भी मां नर्मदा न सूखे उसके फिक्र भारतीय जनता पार्टी वहां कर रही है। भारी गरमी में वहां से रोज यात्रा निकलती है। हज़ारो ग्रामजन उसके साथ जुड़ते है। और उसका समापन पंद्रह तारीख को है। एक दिन हमारे मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी भी वहां हो कर आये है। बोटाद में बैठे हुए आदमी को पता नहीं होगा की हमारे यहां पानी पहुंचाने के लीये छः महिने से लोग पदयात्रा कर रहे है। पैड़ - पौधे लगा रहे है और उसका कारण है की मां नर्मदा में पानी एक बूंद भी कम न हो। अगर यह भाव रहा तो ही मां नर्मदा का पानी बचा पायेंगे और वह फिक्र हमें करनी पड़ेगी। वह जिम्मेदारी हमें लेनी पड़ेगी। और इसलिए टपक सिंचाई, स्प्रिंक्लर उनको जीवन का धर्म बनाना पड़ेगा। और अब टपक सिंचाई हो तो यह खेती हो सकती है यह नहीं वह सब चला गया है। हर एक प्रकार की फसल टपक सिंचाई और स्प्रिंक्लर से ली जा सकती है। हमारे पुरखों ने पानी बचाया इसलिए हमारे हिस्से में आया है। हम पानी बचायेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी पहुंचने वाला है। और कोई मां-बाप ऐसे नहीं होंगे की बच्चों के जीवन का जो होना हो वह होगा हम तो अपनी व्यवस्था कर लेंगे। ऐसे मां-बाप कहीं नहीं होंगे। और इसलिए मां नर्मदा जब आशीर्वाद देने आये है तब हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। दो हज़ार बाईस, भारत की आज़ादी के पचहत्तर साल पूरे हो रहे है। जो महापुरूषों ने सालों तक आजादी का आंदोलन चलाया है। सैंकडों लोग फांसी पर चढ़ गये। हज़ारों लोगों ने अपनी जवानी जेल में बिता दी। पीढि़यां हिन्दुस्तान आज़ाद हो उसके लिए पूरी हो गई। उस आज़ादी के पचहत्तर साल दो हज़ार बाईस में आ रहे है। हमें आज़ादी के लिए देश के लिए मरने का सौभाग्य नहीं मीला। हमें आज़ादी के लिए मुश्किलें सहने का अवसर नहीं मिला। पर भले ही देश के लिए मरने का अवसर न मिला हो पर आज देश के लिए जीने का अवसर जरूर मीला है। दो हज़ार बाईस देश की आज़ादी के दिवानो के सपनों के जैसा भारत बनाने की ज़िम्मेदारी हमारी है या नहीं? मैं बोटाद वालों से पूछता हूं दो हज़ार बाईस तक आज़ादी के पचहत्तर साल में देश के लिए कुछ करने की ज़िम्मेदारी हर एक नागरिक की है या नहीं? हमें ज़िम्मेदारी उठानी चाहिये या नहीं? हमें कोई संकल्प करना चाहिये या नहीं? दो हज़ार बाईस में एक ऐसा काम मै लूंगा जो मेरे देश, मेरे समाज को काम आये वह मैं कर के रहूंगा। यह निर्णय हिन्दुस्तान के एक-एक नागरिक को करना चाहिये या नहीं? मेरी आपसे विनती है गांव-गांव, हर घर में, यह बात पहुंचाये कि दो हज़ार बाईस आज़ादी के दिवानों के सपनों के जैसा हिन्दुस्तान बनाना है। हमने भी कुछ सपने देखे है। भारत सरकार ने देश के सामने एक विषय रखा है। दो हज़ार बाईस तक हिन्दुस्तान के जो किसान है वह किसानों की आय हमें दो गुना करनी है। उसमें किसानो का साथ चाहिये। आधुनिक टेक्नोलोजी का आविष्कार चाहिये। खेती की पद्धति उत्तम कैसे हो वह करनी चाहिये। खेती के साथ अन्य कौन से काम हो सके? दूध उत्पादन कैसे हो? खेत के चारों और ईमारती लकड़ी की खेती किस प्रकार हो। खेत में सोलर एनर्जी का किस तरह उपयोग हो सके? माता-बहनों को मधुमक्खी पालन का शिक्षण दे कर शहद का उत्पादन किस तरह से बढाया जाये? दो हज़ार बाईस तक कितने किसान हो जो तय करे की आज मैं पांच थैला यूरिया इस्तेमाल करता हूं, दो हज़ार बाईस तक मेरी खेती मै एसी करूंगा कि पांच थैले से मैं दो थैले तक आ जाऊंगा और यूरिया में कटौती करके यह भारत माता की सेवा करूंगा ऐसा संकल्प करने वाले कितने किसान निकलेंगे? कितने किसान निकलेंगे जो तय करे कि अब मेरे खेत में एक भी पानी की बूंद बिगड़ने नहीं दूंगा। और टपक सिंचाई से खेती करूंगा और नया इतिहास बनाने का काम मैं करके रहूंगा, मेरे देश की आज़ादी के पचहत्तर साल मुझे मनाने है। यह भाव कैसे बनेगा? यह भाव पैदा करने की आवश्यकता है। और एक बार सवा सो करोड़ देशवासी संकल्प कर ले, एक देशवासी का एक संकल्प, एक परिवार का एक संकल्प। हर एक नगर खुद का संकल्प तय करे, बोटाद तय करे की दो हज़ार बाईस में बोटाद को यहां तक पहुंचाना है। हर एक गांव यह तय करे की दो हज़ार बाईस तक हमारे गांव में किसी को गरीब रहने नहीं देना है कुछ न कुछ काम उसके लिए ढूंढ लेना है। कौन कहता है गरीबी से देश मुक्त नहीं हो सकता? कौन कहता है की दुनिया के सामने भारत आ कर के खड़ा नहीं रह सकता ? भाईयों-बहनों एक ज़माना था हमने हथियार रख दिये थे। बारिश आये तो ठीक और न आये तो भी ठीक। अगर आये तो साल अच्छा गया, न आये तो कुदरत की मेहरबानी। आज से पंद्रह साल पहले कभी काठियावाड़ के आदमी ने सोचा नहीं था की सूखे में से भी हम बाहर आ सकते है। यह मानवी के पुरुषार्थ का कमाल है कि आज गुजरात सूखे में से बाहर आ गया और स्वप्रयत्न से आया, पुरुषार्थ से आया, योजना से आया। पानी जैसी बड़ी समस्या को अगर हम पार कर सकते है तो विकास की नयी उंचाईयों को क्यूं पार नहीं कर सकते? और इसलिए गुजरात ने कृषि के क्षेत्र में एक नयी ताकत के दर्शन करवाये है। उसको हम नयी उंचाईयों पर किस तरह से ले जाये उसके लिए प्रयास करें। हमारा एक प्रयास है पुरानी पद्धतियों से देश को बहार निकालना है। आधुनिक विज्ञान टेक्नोलोजी मनुष्य का स्वभाव बनाना है। यहां मैंने जब कहा कि आपके मोबाईल फोन की लाईट चालू करो, सबके हाथ में मोबाईल फोन था। भाईयों-बहनों आपके हाथ में जो मोबाईल है ना ऐसी स्थिती पैदा करनी है कि पूरी सरकार राज्य की हो या केन्द्र की वह आपके मोबाईल फोन में आ जाये ऐसी स्थिती मुझे पैदा करनी है। आपका मोबाईल फोन ही आपकी बैंक बन जाये। उस दिशा में देश को ले जाना है। एक भीम एप बनाई है। और मैं चाहता हूं की बोटाद के इस कार्यक्रम में आया हुआ हर एक व्यक्ति खुद के मोबाईल में भीम एप डाउनलोड करे। और अब कारोबार रोकड़ से नहीं, भीम एप से चलाये। मुझे गरीब लोगों की मदद करनी है। आज मध्यम वर्ग का सामान्य मानवी छोटी दुकान हो, थोड़ा माल खरीदे तो भविष्य में अच्छी आमदनी होने की आशा हो। तो वह क्या करेगा? ऊंचे ब्याज से पैसे लेकर आता है। बैंक उसको पैसे नहीं देगी। क्योंकि उसका कोई रोकड़ न हो, सब रोकड़ व्यवहार हो। बैंक वाला कहेगा किसके आधार पर तुझे पैसे दूं? अगर आप भीम एप से पैसे की लेन-देन करो, तो आपका हिसाब अपने आप बनता जायेगा। नाई की दुकान हो, सिलाई की दुकान हो उसकी लेन-देन इससे चले तो बैंक में हिसाब जायेगा कि इस भाई की महीने की दो हज़ार की लेन-देन है तो पाँच सौ-सात सौ की लेन-देने में कोई दिक्कत नहीं होगी, उसको ऊंचे ब्याज पर पैसे लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और बैंक सामने से उसको पैसे देगी। हम एक ऐसी व्यवस्था करना चाहते है कि आपके कारोबार की माहिती भीम एप के जरीये जब बैंक के पास पहुंचे तो बैंक हिसाब देखें और बैंक आपको मेसेज भेजेगा की पिछले महिने आप दो हज़ार की लोन लेने के हकदार थे पर अब आपका काम सुधर गया है तो आप दो हज़ार पाँच सौ की लोन के लिए हकदार है। छ महीने बाद कारोबार में सुधार आये तो फिर बैंक का ही मेसेज आये की पहले आप दो हज़ार पाँच सौ के हकदार थे अब आपका काम बढ़ा है और अब आप पाँच हज़ार लेने के हकदार बन गये है। लेना न लेना वह आपके ऊपर है। पर एक बार आप यह व्यवस्था के साथ जुड़े, यह बैंक आपके घर आकर आपकी सेवा करे ऐसा परिवर्तन मुझे लाना है। वह तभी आयेगा जब आपका साथ-सहकार मुझे मिलेगा। जो नव-युवान है उनको इस वेकेशन में मुझे कमाते हुए देखना है। आजकल हिन्दुस्तान में भी वेकेशन में युवा लोग कुछ न कुछ करने का उत्साह दिखाते है। पहले हम पढ़ते थे कि अमेरिका में बच्चे पढ़े तो शनि-रवि ड्राईविंग करे, होटेल्स में काम करे और कमाई करे और वापस पांच दिन पढ़े। और हम कहते थे के बच्चे बहुत अच्छा करते है। आजकल हिन्दुस्तान के बच्चे भी करते है। वह लोग भी काम करने का उत्साह दिखाते है और महेनत करने में जरा भी संकोच नहीं करते है। उनको शर्म नहीं है अगर रिक्शा चलानी पड़े तो गर्व से चलाते है। और पेसेन्जर के साथ अंग्रेजी में बात करते है। तीन महीना वेकेशन है तो रिक्शा चलाते है। एक नया कल्चर पैदा हो रहा है। इन नव-युवको को इस वेकेशन में कमाने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत अच्छी योजना रखी है। आप आपके मोबाईल में भीम एप डाउनलोड करो और आप अन्य कोई एक को भीम एप डाउनलोड करना सीखाओ। भीम एप द्वारा तीन बार लेन-देन करना सीखाओ। तीन बार अगर वह इस्तेमाल करे तो आपके खाते में सरकार की और से यह काम करने के लिए दस रूपये आपके खाते में जमा होंगे। एक दिन में ऐसे बीस लोगों को पकड़ो, तो शाम तक आपके मोबाईल के खाते में दो सौ रूपये आ जायेंगे। एक महीने में आपको पांच से छह हजार की कमाई होगी। इस तीन महीने के वेकेशन में पंद्रह से बीस हजार कमाना, नवयुवाओं के लिए बांये हाथ का खेल है। और यही काम कोई दुकानवाला करे, व्यापारी करे और अगर वह अपनी दुकान पर कहे कि मैं तो भीम से ही पैसे लूंगा और भीम से ही दूंगा तो उसको एक ग्राहक के लिए अगर तीन बार लेन-देन हो तो उनको पच्चीस रूपये देने का विचार सरकार ने किया है। शाम होते ही दस ऐसे लोग आये तो दो सौ पचास रोज की उसकी आय बढ़ जायेगी। गरीब आदमी भी कमा सके और देश का पूरा तंत्र बदल जाये उस दिशा में काम करने का बीड़ा उठाया है। मैं गुजरात के युवाओं को कहता हूं और गुजराती व्यापारी को बहुत अच्छे से पता होता है की इससे क्या होगा। उनको देर नहीं लगेगी। मैं आपको निमंत्रण देता हूं, खास करके मेरे युवकों को निमंत्रण देता हूं। इस वेकेशन में पच्चीस हज़ार कमाने का संकल्प करो। भारत सरकार की योजना है और कोई युवान ऐसा नहीं होगा जिसको इस वेकेशन में पच्चीस हज़ार नहीं कमाने हो। सरकार के पास योजना है। व्यापारीयों को मेरा आग्रह है की अगर आप चाहे तो आपकी दुकान में पचास हज़ार तक की आय बढ़ा सकते है। जो योजना रखी है उसको आप आगे बढ़ाईये।
इंदौरः ऑनलाइन गेम (online games) की लत के चलते एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मामला इंदौर के छत्रीपुरा थाना क्षेत्र का है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जांच अधिकारी वसंतराव के मुताबिक, मोहम्मद मिर्जान नाम के युवक का शव उसके घर पर फंदे से लटका हुआ मिला था. परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि मिर्जान को ऑनलाइन गेम खेलने का शौक था और इसी शौक ने उसकी जान ले ली. मिर्जान काफी देर तक ऑनलाइन गेम खेलता था और उसका ज्यादातर समय इसी में गुजरता था. रविवार के दिन जब सब घर में नीचे की मंजिल पर थे तब मिर्जान ने चौथे फ्लोर पर बने कमरे में जाकर फांसी लगा ली. परिजन युवक का शव फंदे से उतारकर अस्पताल में इलाज के लिए लेकर पहुंचे लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी. ऑनलाइन गेमिंग में अपने बेटे को गंवाने के बाद अब मृतक के परिजनों ने सभी अभिभावकों से गुहार लगाई है कि अपने बच्चों को ऑनलाइन गेम से दूर रखें ताकि उनका हंसता खेलता जीवन इस इसकी लालसा में खराब ना हो जाए. फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिवार के लोगों का बयान लेने के साथ ही मृतक का फोन पुलिस ने जब्त कर जांच के लिए भेज दिया है.
इंदौरः ऑनलाइन गेम की लत के चलते एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मामला इंदौर के छत्रीपुरा थाना क्षेत्र का है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जांच अधिकारी वसंतराव के मुताबिक, मोहम्मद मिर्जान नाम के युवक का शव उसके घर पर फंदे से लटका हुआ मिला था. परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि मिर्जान को ऑनलाइन गेम खेलने का शौक था और इसी शौक ने उसकी जान ले ली. मिर्जान काफी देर तक ऑनलाइन गेम खेलता था और उसका ज्यादातर समय इसी में गुजरता था. रविवार के दिन जब सब घर में नीचे की मंजिल पर थे तब मिर्जान ने चौथे फ्लोर पर बने कमरे में जाकर फांसी लगा ली. परिजन युवक का शव फंदे से उतारकर अस्पताल में इलाज के लिए लेकर पहुंचे लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी. ऑनलाइन गेमिंग में अपने बेटे को गंवाने के बाद अब मृतक के परिजनों ने सभी अभिभावकों से गुहार लगाई है कि अपने बच्चों को ऑनलाइन गेम से दूर रखें ताकि उनका हंसता खेलता जीवन इस इसकी लालसा में खराब ना हो जाए. फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिवार के लोगों का बयान लेने के साथ ही मृतक का फोन पुलिस ने जब्त कर जांच के लिए भेज दिया है.
भारतीय टीम (Indian Cricket Team) ने टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) से पहले वॉर्म-अप मैच में बेहतरीन तरीके से जीत हासिल की। हालांकि इस मैच में टीम इंडिया की तरफ से विराट कोहली और केएल राहुल नहीं खेले। इन दोनों ही दिग्गज बल्लेबाजों ने मैच के बाद प्रैक्टिस किया। वहीं अश्विन से जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विराट कोहली के प्लेइंग इलेवन में ना होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद ही मजेदार जवाब दिया। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में अपने पहले वॉर्म-अप मैच में 13 रनों से जीत हासिल की। प्रैक्टिस मैच के बाद विराट कोहली बल्ला लेकर मैदान में आ गए और थ्रो डाउन के जरिए बल्लेबाजी का अभ्यास किया। उनके साथ दूसरे छोर पर सलामी बल्लेबाज केएल राहुल भी मौजूद रहे। विराट कोहली के लिए ये टी20 वर्ल्ड कप काफी अहम होने वाला है। इसी वजह से वो अपनी तैयारियों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। वहीं केएल राहुल भी चाहते हैं कि इस बार वर्ल्ड कप में वो अच्छा करें। टीम का उप कप्तान होने के नाते उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। मैदान में इन दोनों ही बल्लेबाजों को जमकर प्रैक्टिस करते हुए देखा गया। हालांकि विराट कोहली और केएल राहुल वॉर्म-अप मैच के प्लेइंग इलेवन में नहीं थे। मैच के बाद अश्विन से इसको लेकर सवाल पूछा गया। रविचंद्रन अश्विन ने कहा 'मैं चाहता हूं कि एक दिन राहुल द्रविड़ की तरह कोच बनूं और इन सारे सवालों के जवाब दे पाऊं लेकिन अभी आपके जितना मेरा भी अनुमान है। ' आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं जिनमें भारतीय टीम के खिलाड़ियों को अभ्यास करते हुए देखा जा सकता है। कुछ समय पहले ही युजवेंद्र चहल की भी प्रैक्टिस करते हुए एक वीडियो वायरल हुई थी। वहीं अश्विन, दिनेश कार्तिक और कुछ अन्य भारतीय खिलाड़ियों को अभ्यास से समय निकालकर ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड टी20 मैच का लुत्फ उठाते भी देखा गया था।
भारतीय टीम ने टीबीस वर्ल्ड कप से पहले वॉर्म-अप मैच में बेहतरीन तरीके से जीत हासिल की। हालांकि इस मैच में टीम इंडिया की तरफ से विराट कोहली और केएल राहुल नहीं खेले। इन दोनों ही दिग्गज बल्लेबाजों ने मैच के बाद प्रैक्टिस किया। वहीं अश्विन से जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विराट कोहली के प्लेइंग इलेवन में ना होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद ही मजेदार जवाब दिया। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में अपने पहले वॉर्म-अप मैच में तेरह रनों से जीत हासिल की। प्रैक्टिस मैच के बाद विराट कोहली बल्ला लेकर मैदान में आ गए और थ्रो डाउन के जरिए बल्लेबाजी का अभ्यास किया। उनके साथ दूसरे छोर पर सलामी बल्लेबाज केएल राहुल भी मौजूद रहे। विराट कोहली के लिए ये टीबीस वर्ल्ड कप काफी अहम होने वाला है। इसी वजह से वो अपनी तैयारियों में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। वहीं केएल राहुल भी चाहते हैं कि इस बार वर्ल्ड कप में वो अच्छा करें। टीम का उप कप्तान होने के नाते उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। मैदान में इन दोनों ही बल्लेबाजों को जमकर प्रैक्टिस करते हुए देखा गया। हालांकि विराट कोहली और केएल राहुल वॉर्म-अप मैच के प्लेइंग इलेवन में नहीं थे। मैच के बाद अश्विन से इसको लेकर सवाल पूछा गया। रविचंद्रन अश्विन ने कहा 'मैं चाहता हूं कि एक दिन राहुल द्रविड़ की तरह कोच बनूं और इन सारे सवालों के जवाब दे पाऊं लेकिन अभी आपके जितना मेरा भी अनुमान है। ' आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं जिनमें भारतीय टीम के खिलाड़ियों को अभ्यास करते हुए देखा जा सकता है। कुछ समय पहले ही युजवेंद्र चहल की भी प्रैक्टिस करते हुए एक वीडियो वायरल हुई थी। वहीं अश्विन, दिनेश कार्तिक और कुछ अन्य भारतीय खिलाड़ियों को अभ्यास से समय निकालकर ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड टीबीस मैच का लुत्फ उठाते भी देखा गया था।
पाकिस्तान की सीमा हैदर पबजी खेलते हुए भारत के सचिन के प्यार मेंं पड़ कर कई देशों की सीमाएं लांघते हुए भारत आ गई। यकीनन, सीमा हैदर की करतूत से उसके परिजनों और पाकिस्तान के लोगों मेंं गुस्सा है लेकिन दुख का विषय है कि इसका बदला पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों को नुक्सान पहुंचा कर लिया जा रहा है। कल पाकिस्तान में सिंध के काशमोर में एक हिंदू मंदिर पर रॉकेट लांचर से हमला किया गया। हमलावरों ने मंदिर और आसपास बसे हिंदू समुदाय के घरों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक हमलावर फरार हो गए। पाकिस्तान में दो दिन में हिंदू मंदिर में तोडफ़ोड़ की यह दूसरी वारदात है। इससे पूर्व कराची में रात को डेढ़ शताब्दी पुराने हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। जब से पाकिस्तान की नींव पड़ी है, तब से वहां पर हिंदू मंदिर कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। दो कारणों से मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा है। एक, ये पुराने मंदिर जिन जगहों पर बने हैं, वे अब बेशकीमती हो गई हैं। इसलिए मंदिरों को तोड़ कर वहां पर होटल, दुकानें आदि बनाई जा रही हैं। दूसरा कारण, भारत से किसी भी नाराजगी का प्रतिशोध मंदिरों को ध्वस्त करके लिया जाता है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद वहां अनेक मंदिर ढहा दिए गए थे। हालत यह है कि दुनिया में कहीं कुछ भी हो, पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू मंदिर आ जाते हैं। बड़ा सवाल यह है कि जमाने भर की बातों का बदला हिंदू मंदिरों से क्यों लिया जा रहा है और ऐसा करके क्या हासिल होने वाला है? पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के जुल्म-ओ-सितम की वजह से हिंदू वहां से भागने पर मजबूर हैं। हिंदू लड़कियों से दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन के कारण पिछले तीन दशक में सैंकड़ों हिंदू भारत आए लेकिन लौटकर नहीं गए। यह सिलसिला अब भी चल रहा है। पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमैंट के आंकड़ों से पता चलता है कि 1947 में भारत विभाजन के समय पाकिस्तान में 428 प्रमुख मंदिर थे, इनमें से 408 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया है। इन सभी मंदिरों के स्थानों पर मदरसे, स्कूल, होटल और रैस्टोरैंट खड़े कर दिए गए हैं। समय-समय पर जो मीडिया रिपोर्टें आई हैं, उनके मुताबिक पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान में कालीबाड़ी मंदिर को ढहाकर ताजमहल होटल बनाया गया है। कोहाट के शिव मंदिर के स्थान पर अब एक स्कूल है। पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर मिठाई का शोरूम बना दिया गया। पाकिस्तान में अब बमुश्किल दो दर्जन मंदिर ही शेष बचे हैं। इन मंदिरों को संरक्षण की दरकार है।
पाकिस्तान की सीमा हैदर पबजी खेलते हुए भारत के सचिन के प्यार मेंं पड़ कर कई देशों की सीमाएं लांघते हुए भारत आ गई। यकीनन, सीमा हैदर की करतूत से उसके परिजनों और पाकिस्तान के लोगों मेंं गुस्सा है लेकिन दुख का विषय है कि इसका बदला पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों को नुक्सान पहुंचा कर लिया जा रहा है। कल पाकिस्तान में सिंध के काशमोर में एक हिंदू मंदिर पर रॉकेट लांचर से हमला किया गया। हमलावरों ने मंदिर और आसपास बसे हिंदू समुदाय के घरों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक हमलावर फरार हो गए। पाकिस्तान में दो दिन में हिंदू मंदिर में तोडफ़ोड़ की यह दूसरी वारदात है। इससे पूर्व कराची में रात को डेढ़ शताब्दी पुराने हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। जब से पाकिस्तान की नींव पड़ी है, तब से वहां पर हिंदू मंदिर कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। दो कारणों से मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा है। एक, ये पुराने मंदिर जिन जगहों पर बने हैं, वे अब बेशकीमती हो गई हैं। इसलिए मंदिरों को तोड़ कर वहां पर होटल, दुकानें आदि बनाई जा रही हैं। दूसरा कारण, भारत से किसी भी नाराजगी का प्रतिशोध मंदिरों को ध्वस्त करके लिया जाता है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद वहां अनेक मंदिर ढहा दिए गए थे। हालत यह है कि दुनिया में कहीं कुछ भी हो, पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू मंदिर आ जाते हैं। बड़ा सवाल यह है कि जमाने भर की बातों का बदला हिंदू मंदिरों से क्यों लिया जा रहा है और ऐसा करके क्या हासिल होने वाला है? पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के जुल्म-ओ-सितम की वजह से हिंदू वहां से भागने पर मजबूर हैं। हिंदू लड़कियों से दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन के कारण पिछले तीन दशक में सैंकड़ों हिंदू भारत आए लेकिन लौटकर नहीं गए। यह सिलसिला अब भी चल रहा है। पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमैंट के आंकड़ों से पता चलता है कि एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत विभाजन के समय पाकिस्तान में चार सौ अट्ठाईस प्रमुख मंदिर थे, इनमें से चार सौ आठ मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया है। इन सभी मंदिरों के स्थानों पर मदरसे, स्कूल, होटल और रैस्टोरैंट खड़े कर दिए गए हैं। समय-समय पर जो मीडिया रिपोर्टें आई हैं, उनके मुताबिक पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान में कालीबाड़ी मंदिर को ढहाकर ताजमहल होटल बनाया गया है। कोहाट के शिव मंदिर के स्थान पर अब एक स्कूल है। पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर मिठाई का शोरूम बना दिया गया। पाकिस्तान में अब बमुश्किल दो दर्जन मंदिर ही शेष बचे हैं। इन मंदिरों को संरक्षण की दरकार है।
देहरादूनः छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल की हाल ही में ब्राह्मणों के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तारी कई वर्षों से उनके विवादों में बने रहने की श्रृंखला में एक नई कड़ी है. 86 वर्षीय नंद कुमार को उत्तर प्रदेश के आगरा से मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें ब्राह्मणों को विदेशी कहने और उनका बहिष्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी के बाद नंद कुमार बघेल को रायपुर की अदालत में पेश किया गया और 21 सितंबर तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनके वकील के मुताबिक नंद कुमार ने जमानत के लिए भी आवेदन नहीं किया. नंद कुमार बघेल द्वारा 30 अगस्त को लखनऊ में दिए गए वक्तव्य से ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने के बाद 4 सितंबर की रात को राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाने में उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को भी अगले दिन सफाई देनी पड़ी थी. भूपेश बघेल ने कहा था कि कानून अपना काम करेगा. बता दें कि नंद कुमार बघेल के लिए यह कोई नई बात नहीं है, सीएम को पूर्व में भी नंद कुमार बघेल के बयानों पर सफाई देनी पड़ी है और बघेल परिवार के करीबी लोगों के अनुसार आपसी वैचारिक मतभेद के चलते ही पिता पुत्र के मनमुटाव निरंतर बना रहता है. बघेल परिवार को जानने वालों ने दिप्रिंट को बताया कि पिता और पुत्र 20 साल से अधिक समय से एक साथ नहीं रह रहे हैं और इन वर्षों में उन्होंने कभी सार्वजनिक मंच साझा नहीं किया. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुरुद-डी गांव के मूल निवासी नंद कुमार हिंदू समुदाय में हमेशा से जातिवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं. अपने करीबी लोगों द्वारा एक प्रगतिशील किसान माने जाने वाले, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों के लिए वकालत करना 86 वर्षीय के लिए जीवन का एक तरीका रहा है. जाती प्रथा और हिंदुत्व के खिलाफ बोलना उनका स्वाभिक गुण रहा है लेकिन सुर्खियों में सबसे पहले 2001 में आए जब उन्होंने 'ब्राह्मण कुमार रावन को मत मारो' नामक पुस्तक लिखी थी. पुस्तक में दशहरा में रावण का पुतला दहन को समाप्त करने का आह्वान किया था जिसके बाद उनके खिलाफ जनाक्रोश बढ़ा. इस पुस्तक के सार्वजनिक विरोध के चलते अजीत जोगी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार को इसे प्रतिबंधित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. नंद कुमार ने की पुस्तक वाल्मीकि रामायण, पेरियार की सच्ची रामायण, रामचरित मानस और मनु स्मृति के मिश्रण का एक नया स्वरूप है. बघेल ने प्रतिबंध के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील भी की लेकिन 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने 2017 में उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने पुस्तक हिन्दू धर्म की मान्यताओं के विपरीत है और समाज पर नकारात्मक असर डालने वाली सामग्री करार दिया था. 1970 के दशक में बौद्ध धर्म अपनाने के बाद बघेल का जाति-विरोधी रुख और भी कट्टर हो गया बघेल परिवार के करीबी और स्थानीय पत्रकार लखन वर्मा के अनुसार, 'हम कह सकते हैं कि जातिवाद और हिंदुत्व के खिलाफ उनके बयान बौद्ध धर्म अपनाने के बाद और अधिक कठोर हो गए. ' वर्मा ने कहा, 'उन्होंने बहुत सारी धार्मिक किताबें पढ़ीं और उनके सामाजिक-धार्मिक विचारों को पिछले 20 वर्षों में ही प्रमुखता मिली. ' गौरतलब है कि नंद कुमार ने कभी भी राजनीति में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया, केवल 1980 के दशक में एक बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में दुर्ग लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. बघेल परिवार के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री समय-समय पर अपने पिता को अवांछित और भड़काऊ बयान न देने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन उनके प्रयास का कोई फायदा नहीं हुआ. कुरुद-डी के एक ग्रामीण का जो मुख्यमंत्री के परिवार को अच्छी तरह से जानता है ने दिप्रिंट को बताया, 'मुख्यमंत्री ने अपने पिता से कई बार बात करने की कोशिश की और उन्हें कई मौकों पर राजी किया लेकिन नंद कुमार बघेल ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. नंद कुमार बघेल ने भूपेश से साफ कहा कि वह वही कहते हैं जिसे वह सच मानते हैं. यह दोनों के बीच मतभेद का मूल कारण है. ' नतीजतन, बघेल को अक्सर अपने पिता के बयानों पर एक कद्दावर नेता होने के नाते अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा है. नंद कुमार ने 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखा था, और उनसे पार्टी के करीब 85 प्रतिशत टिकट एससी-एसटी-ओबीसी उम्मीदवारों को देने के लिए कहा था, न कि ब्राह्मणों, ठाकुरों और बनियों को. नंद कुमार बघेल ने कांग्रेस नेतृत्व को कहा था कि चुनाव जीतने के लिए पार्टी को ऐसा करना पड़ेगा. भूपेश बघेल उस समय पीसीसी अध्यक्ष थे और उन्हें यह स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी करना पड़ा कि उनके पिता पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं थे और इसलिए, केंद्रीय नेतृत्व को उनका पत्र लिखना अर्थहीन था. पिता-पुत्र की जोड़ी के बीच की दरार उनकी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं तक भी फैली हुई थी. वर्मा ने उल्लेख किया कि 2019 में, जब नंद कुमार बघेल की पत्नी का निधन हो गया, तो वह बौद्ध धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन सीएम ने आपत्ति जताई और उनकी मां का अंतिम संस्कार हिंदू मान्यताओं के अनुसार ही कराया. हालांकि, दोनों के बीच बहुत स्पष्ट विवादों के बावजूद, नंद कुमार अपने फेसबुक प्रोफाइल में खुद को भूपेश बघेल का 'गर्वित पिता' कहते हैं.
देहरादूनः छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल की हाल ही में ब्राह्मणों के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तारी कई वर्षों से उनके विवादों में बने रहने की श्रृंखला में एक नई कड़ी है. छियासी वर्षीय नंद कुमार को उत्तर प्रदेश के आगरा से मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें ब्राह्मणों को विदेशी कहने और उनका बहिष्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी के बाद नंद कुमार बघेल को रायपुर की अदालत में पेश किया गया और इक्कीस सितंबर तक चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनके वकील के मुताबिक नंद कुमार ने जमानत के लिए भी आवेदन नहीं किया. नंद कुमार बघेल द्वारा तीस अगस्त को लखनऊ में दिए गए वक्तव्य से ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने के बाद चार सितंबर की रात को राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाने में उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को भी अगले दिन सफाई देनी पड़ी थी. भूपेश बघेल ने कहा था कि कानून अपना काम करेगा. बता दें कि नंद कुमार बघेल के लिए यह कोई नई बात नहीं है, सीएम को पूर्व में भी नंद कुमार बघेल के बयानों पर सफाई देनी पड़ी है और बघेल परिवार के करीबी लोगों के अनुसार आपसी वैचारिक मतभेद के चलते ही पिता पुत्र के मनमुटाव निरंतर बना रहता है. बघेल परिवार को जानने वालों ने दिप्रिंट को बताया कि पिता और पुत्र बीस साल से अधिक समय से एक साथ नहीं रह रहे हैं और इन वर्षों में उन्होंने कभी सार्वजनिक मंच साझा नहीं किया. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुरुद-डी गांव के मूल निवासी नंद कुमार हिंदू समुदाय में हमेशा से जातिवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं. अपने करीबी लोगों द्वारा एक प्रगतिशील किसान माने जाने वाले, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों के लिए वकालत करना छियासी वर्षीय के लिए जीवन का एक तरीका रहा है. जाती प्रथा और हिंदुत्व के खिलाफ बोलना उनका स्वाभिक गुण रहा है लेकिन सुर्खियों में सबसे पहले दो हज़ार एक में आए जब उन्होंने 'ब्राह्मण कुमार रावन को मत मारो' नामक पुस्तक लिखी थी. पुस्तक में दशहरा में रावण का पुतला दहन को समाप्त करने का आह्वान किया था जिसके बाद उनके खिलाफ जनाक्रोश बढ़ा. इस पुस्तक के सार्वजनिक विरोध के चलते अजीत जोगी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार को इसे प्रतिबंधित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. नंद कुमार ने की पुस्तक वाल्मीकि रामायण, पेरियार की सच्ची रामायण, रामचरित मानस और मनु स्मृति के मिश्रण का एक नया स्वरूप है. बघेल ने प्रतिबंध के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील भी की लेकिन सत्रह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने दो हज़ार सत्रह में उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने पुस्तक हिन्दू धर्म की मान्यताओं के विपरीत है और समाज पर नकारात्मक असर डालने वाली सामग्री करार दिया था. एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में बौद्ध धर्म अपनाने के बाद बघेल का जाति-विरोधी रुख और भी कट्टर हो गया बघेल परिवार के करीबी और स्थानीय पत्रकार लखन वर्मा के अनुसार, 'हम कह सकते हैं कि जातिवाद और हिंदुत्व के खिलाफ उनके बयान बौद्ध धर्म अपनाने के बाद और अधिक कठोर हो गए. ' वर्मा ने कहा, 'उन्होंने बहुत सारी धार्मिक किताबें पढ़ीं और उनके सामाजिक-धार्मिक विचारों को पिछले बीस वर्षों में ही प्रमुखता मिली. ' गौरतलब है कि नंद कुमार ने कभी भी राजनीति में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया, केवल एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक में एक बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में दुर्ग लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. बघेल परिवार के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री समय-समय पर अपने पिता को अवांछित और भड़काऊ बयान न देने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन उनके प्रयास का कोई फायदा नहीं हुआ. कुरुद-डी के एक ग्रामीण का जो मुख्यमंत्री के परिवार को अच्छी तरह से जानता है ने दिप्रिंट को बताया, 'मुख्यमंत्री ने अपने पिता से कई बार बात करने की कोशिश की और उन्हें कई मौकों पर राजी किया लेकिन नंद कुमार बघेल ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. नंद कुमार बघेल ने भूपेश से साफ कहा कि वह वही कहते हैं जिसे वह सच मानते हैं. यह दोनों के बीच मतभेद का मूल कारण है. ' नतीजतन, बघेल को अक्सर अपने पिता के बयानों पर एक कद्दावर नेता होने के नाते अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा है. नंद कुमार ने दो हज़ार अट्ठारह में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखा था, और उनसे पार्टी के करीब पचासी प्रतिशत टिकट एससी-एसटी-ओबीसी उम्मीदवारों को देने के लिए कहा था, न कि ब्राह्मणों, ठाकुरों और बनियों को. नंद कुमार बघेल ने कांग्रेस नेतृत्व को कहा था कि चुनाव जीतने के लिए पार्टी को ऐसा करना पड़ेगा. भूपेश बघेल उस समय पीसीसी अध्यक्ष थे और उन्हें यह स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी करना पड़ा कि उनके पिता पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं थे और इसलिए, केंद्रीय नेतृत्व को उनका पत्र लिखना अर्थहीन था. पिता-पुत्र की जोड़ी के बीच की दरार उनकी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं तक भी फैली हुई थी. वर्मा ने उल्लेख किया कि दो हज़ार उन्नीस में, जब नंद कुमार बघेल की पत्नी का निधन हो गया, तो वह बौद्ध धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन सीएम ने आपत्ति जताई और उनकी मां का अंतिम संस्कार हिंदू मान्यताओं के अनुसार ही कराया. हालांकि, दोनों के बीच बहुत स्पष्ट विवादों के बावजूद, नंद कुमार अपने फेसबुक प्रोफाइल में खुद को भूपेश बघेल का 'गर्वित पिता' कहते हैं.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री चौधरी अजीत सिंह ने कहा है कि भारत और अमरीका के बीच 2005 से चल रही पूरी तरह स्वतंत्र नीति (ओपन स्काई पॉलिसी) से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क, कनेक्टिविटी, व्यापार तथा पर्यटन में सुधार हुआ है। चौधरी अजीत सिंह ने यह बात नई दिल्ली में आज अमरीका के वाणिज्य सचिव श्री जॉन ई. ब्रेसन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में कही। नागरिक उड्डयन मंत्री के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में नागरिक उड्डयन सचिव, नागरिक उड्डयन महानिदेशक, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित थे। अमरीका के प्रतिनिधिमंडल में अमरीका वाणिज्य विभाग,राज्य विभाग तथा विभिन्न अमरीकी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री ने भारत और अमरीका के बीच नागरिक उड्डयन क्षेत्र में मज़बूत हुए रिश्तों की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के बीच मुख्य समझौते से प्रबंधकीय कार्य-प्रणाली के विकास तथा आधुनिकीकरण में निभाई गई भूमिका को बताया । उन्होंने उन क्षेत्रों का भी उल्लेख किया जिसे भारत अमरीका उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह द्वारा भारत में निवेश और व्यापार हेतु सहयोग बढ़ाने के लिए चिन्हित किया गया है। श्री ब्रेसन ने कहा कि अमरीका ने हमेशा ही उड्डयन क्षेत्र में भारत के सहयोग को ऊंचा दर्जा दिया है तथा तदनुसार परस्पर हितों के क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने पर कार्य किया है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री चौधरी अजीत सिंह ने कहा है कि भारत और अमरीका के बीच दो हज़ार पाँच से चल रही पूरी तरह स्वतंत्र नीति से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क, कनेक्टिविटी, व्यापार तथा पर्यटन में सुधार हुआ है। चौधरी अजीत सिंह ने यह बात नई दिल्ली में आज अमरीका के वाणिज्य सचिव श्री जॉन ई. ब्रेसन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में कही। नागरिक उड्डयन मंत्री के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में नागरिक उड्डयन सचिव, नागरिक उड्डयन महानिदेशक, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित थे। अमरीका के प्रतिनिधिमंडल में अमरीका वाणिज्य विभाग,राज्य विभाग तथा विभिन्न अमरीकी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री ने भारत और अमरीका के बीच नागरिक उड्डयन क्षेत्र में मज़बूत हुए रिश्तों की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के बीच मुख्य समझौते से प्रबंधकीय कार्य-प्रणाली के विकास तथा आधुनिकीकरण में निभाई गई भूमिका को बताया । उन्होंने उन क्षेत्रों का भी उल्लेख किया जिसे भारत अमरीका उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह द्वारा भारत में निवेश और व्यापार हेतु सहयोग बढ़ाने के लिए चिन्हित किया गया है। श्री ब्रेसन ने कहा कि अमरीका ने हमेशा ही उड्डयन क्षेत्र में भारत के सहयोग को ऊंचा दर्जा दिया है तथा तदनुसार परस्पर हितों के क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने पर कार्य किया है।
जबलपुर, यशभारत। पीडब्ल्यूडी विभाग का कोई धनी-धोरी नहीं है, काम करने वाले विभाग के अधिकारी आराम फरमा रहे हैं जबकि सड़क-नाली बनाने वाले विभाग को ब्रिज बनाने का काम सौंपा गया है। जानकर हैरानी होगी कि ब्रिज बनाने वाले अधिकारियों का कहना है कि ब्रिज कोई भी बनाए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, काम होना चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों के इस बयान के बाद तय हो गया कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी काम नहीं करना चाहते है। भोपाल से लेकर जबलपुर तक में अधिकारी सिर्फ आराम फरमाना चाहते हैं। मालूम हो कि लंबी कवायद, चार टेण्डर प्रक्रिया के बाद दमोह नाका-मदन महल फ्लाईओवर का निर्माण आरंभ तो गया पर इसके निर्माण की गति बताती है कि तय समय सीमा में इसका बन पाना बेहद कठिन होगा। अभी निर्माण जहाँ चल रहा है, वहाँ पिलर तो दिखने लगे और काम होता भी दिख रहा है, पर पूरी ऊर्जा के साथ और जरूरी हिस्सों में पहले प्राथमिकता से काम हो ऐसा कतई नजर नहीं आ रहा है। इस उपयोगी संरचना का निर्माण टारगेट 36 माह है इनमेें से कुछ माह गुजर गए हैं। लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-2 का काम सड़क नाली बनाने का है लेकिन बाबजूद यह विभाग फ्लाईओवर निर्माण कर रहा है। वहीं संभाग क्रमांक-3 विभाग के पास फ्लाईओवर निर्माण कराने का दायित्व है। फ्लाईओवर निर्माण के रास्ते में 400 विद्युत पोल शिफ्ट होने हैं। सीवर लाइन, पेयजल पाइप को भी किनारे के हिस्से में शिफ्ट किया जाना है। इसी तरह जो चिन्हित अतिक्रमण हैं उनको अलग करने के लिए मुआवजा भी दिया जाना है। करीब 100 करोड़ के करीब यह मुआवजा राज्य शासन को देना है और इसको लेकर प्रक्रिया अब भी प्रोसेस में बताई जा रही है। जब तक मुआवजा नहीं मिलता, तब तक अतिक्रमण भी अलग नहीं हो सकते। इसी के साथ रानीताल गढ़ा मार्ग में पीएण्डटी की दीवार अलग होनी है। फ्लाईओवर से जहाँ सड़क उतरनी है वहाँ पर भी कई तरह के कब्जे अलग किए जाने हैं। कई तरह की परेशानियाँ सामने हैं जिनका समाधान हुए बिना इसका निर्माण जल्द होता नहीं दिख रहा है। निर्माण की लागत है -749 करोड़। फ्लाईओवर का निर्माण एरिया -5. 6 किमी। ऊपर के हिस्से में सड़क होगी -36 फीट। नीचे के हिस्से में दोनों ओर सड़क 36-36 फीट। कुल पिलर बनाए जाने हैं -182। मदन महल स्टेशन के ऊपर 192 मीटर का केबल स्टे ब्रिज। चार प्वाइंट्स से सड़क फ्लाईओवर से नीचे उतरनी है। ब्रिज बनाने का काम तो हमारा है लेकिन दूसरा विभाग बना रहा कोई परेशानी नहीं है। काम तो हम भी कर रहे हैं।
जबलपुर, यशभारत। पीडब्ल्यूडी विभाग का कोई धनी-धोरी नहीं है, काम करने वाले विभाग के अधिकारी आराम फरमा रहे हैं जबकि सड़क-नाली बनाने वाले विभाग को ब्रिज बनाने का काम सौंपा गया है। जानकर हैरानी होगी कि ब्रिज बनाने वाले अधिकारियों का कहना है कि ब्रिज कोई भी बनाए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, काम होना चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों के इस बयान के बाद तय हो गया कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी काम नहीं करना चाहते है। भोपाल से लेकर जबलपुर तक में अधिकारी सिर्फ आराम फरमाना चाहते हैं। मालूम हो कि लंबी कवायद, चार टेण्डर प्रक्रिया के बाद दमोह नाका-मदन महल फ्लाईओवर का निर्माण आरंभ तो गया पर इसके निर्माण की गति बताती है कि तय समय सीमा में इसका बन पाना बेहद कठिन होगा। अभी निर्माण जहाँ चल रहा है, वहाँ पिलर तो दिखने लगे और काम होता भी दिख रहा है, पर पूरी ऊर्जा के साथ और जरूरी हिस्सों में पहले प्राथमिकता से काम हो ऐसा कतई नजर नहीं आ रहा है। इस उपयोगी संरचना का निर्माण टारगेट छत्तीस माह है इनमेें से कुछ माह गुजर गए हैं। लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-दो का काम सड़क नाली बनाने का है लेकिन बाबजूद यह विभाग फ्लाईओवर निर्माण कर रहा है। वहीं संभाग क्रमांक-तीन विभाग के पास फ्लाईओवर निर्माण कराने का दायित्व है। फ्लाईओवर निर्माण के रास्ते में चार सौ विद्युत पोल शिफ्ट होने हैं। सीवर लाइन, पेयजल पाइप को भी किनारे के हिस्से में शिफ्ट किया जाना है। इसी तरह जो चिन्हित अतिक्रमण हैं उनको अलग करने के लिए मुआवजा भी दिया जाना है। करीब एक सौ करोड़ के करीब यह मुआवजा राज्य शासन को देना है और इसको लेकर प्रक्रिया अब भी प्रोसेस में बताई जा रही है। जब तक मुआवजा नहीं मिलता, तब तक अतिक्रमण भी अलग नहीं हो सकते। इसी के साथ रानीताल गढ़ा मार्ग में पीएण्डटी की दीवार अलग होनी है। फ्लाईओवर से जहाँ सड़क उतरनी है वहाँ पर भी कई तरह के कब्जे अलग किए जाने हैं। कई तरह की परेशानियाँ सामने हैं जिनका समाधान हुए बिना इसका निर्माण जल्द होता नहीं दिख रहा है। निर्माण की लागत है -सात सौ उनचास करोड़। फ्लाईओवर का निर्माण एरिया -पाँच. छः किमी। ऊपर के हिस्से में सड़क होगी -छत्तीस फीट। नीचे के हिस्से में दोनों ओर सड़क छत्तीस-छत्तीस फीट। कुल पिलर बनाए जाने हैं -एक सौ बयासी। मदन महल स्टेशन के ऊपर एक सौ बानवे मीटर का केबल स्टे ब्रिज। चार प्वाइंट्स से सड़क फ्लाईओवर से नीचे उतरनी है। ब्रिज बनाने का काम तो हमारा है लेकिन दूसरा विभाग बना रहा कोई परेशानी नहीं है। काम तो हम भी कर रहे हैं।
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक वकील के शव मिलने पर सनसनी फैल गई। दरगाह शरीफ थाना इलाके में रविवार की सुबह एक वकील का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। पुलिस के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। इस बीच अधिवक्ता की पत्नी ने अज्ञात व्यक्ति पर पति की हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार थाना दरगाह शरीफ अंतर्गत जमील कॉलोनी में रह रहे 40 वर्षीय अधिवक्ता इंतजार उल हक का शव सुबह संदिग्ध हालत में मिला। पुलिस अधीक्षक (एसपी) केशव कुमार चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि थाना दरगाह शरीफ अंतर्गत मोहल्ला सलारगंज स्थित जमील कॉलोनी निवासी एक महिला ने इस घटना की सूचना दी। चौधरी के मुताबिक महिला ने कहा है कि किसी व्यक्ति ने उसके पति की हत्या कर दी है। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतक व्यक्ति पेशे से वकील था। उन्होंने बताया कि महिला की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए टीमों का गठन कर मृतक के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। यूपी के मिर्जापुर में नहर के किनारे एक युवक का शव मिला था। शव के पास मिले आईकार्ड से उसकी पहचान अकोढ़ी गांव के रहने वाले अमितेश कुमार सिंह के रूप में हुई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मामला विंध्याचल थाना क्षेत्र का है। उसके पास मिले आईकार्ड और मोबाइल के जरिए मृतक की पहचान हुई थी। इसके बाद पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी। मौके पहुंचे परिजनों ने बताया कि अमितेश अकोढ़ी गांव से बुधवार को विंध्याचल रेलवे स्टेशन ट्रेन पकड़ने गया था। वहां से उसको धनबाद जाना था। अमितेश की लाश विंध्याचल से 25 किलोमीटर दूर नहर के किनारे मिला था। परिजनों ने बताया कि उन्हें पता नहीं कि अमितेश यहां कैसे पहुंचा। परिजनों ने तहरीर देते हुए जल्द हत्या का खुलासा करने की मांग की है।
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक वकील के शव मिलने पर सनसनी फैल गई। दरगाह शरीफ थाना इलाके में रविवार की सुबह एक वकील का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। पुलिस के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। इस बीच अधिवक्ता की पत्नी ने अज्ञात व्यक्ति पर पति की हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार थाना दरगाह शरीफ अंतर्गत जमील कॉलोनी में रह रहे चालीस वर्षीय अधिवक्ता इंतजार उल हक का शव सुबह संदिग्ध हालत में मिला। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि थाना दरगाह शरीफ अंतर्गत मोहल्ला सलारगंज स्थित जमील कॉलोनी निवासी एक महिला ने इस घटना की सूचना दी। चौधरी के मुताबिक महिला ने कहा है कि किसी व्यक्ति ने उसके पति की हत्या कर दी है। घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतक व्यक्ति पेशे से वकील था। उन्होंने बताया कि महिला की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए टीमों का गठन कर मृतक के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। यूपी के मिर्जापुर में नहर के किनारे एक युवक का शव मिला था। शव के पास मिले आईकार्ड से उसकी पहचान अकोढ़ी गांव के रहने वाले अमितेश कुमार सिंह के रूप में हुई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मामला विंध्याचल थाना क्षेत्र का है। उसके पास मिले आईकार्ड और मोबाइल के जरिए मृतक की पहचान हुई थी। इसके बाद पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी। मौके पहुंचे परिजनों ने बताया कि अमितेश अकोढ़ी गांव से बुधवार को विंध्याचल रेलवे स्टेशन ट्रेन पकड़ने गया था। वहां से उसको धनबाद जाना था। अमितेश की लाश विंध्याचल से पच्चीस किलोग्राममीटर दूर नहर के किनारे मिला था। परिजनों ने बताया कि उन्हें पता नहीं कि अमितेश यहां कैसे पहुंचा। परिजनों ने तहरीर देते हुए जल्द हत्या का खुलासा करने की मांग की है।
गले और लंग्स में अक्सर इंफेक्शन होना तनाव का कारण है। अगर आपको बार-बार गले में इंफेक्शन होता है, तो यह आपके तनाव में रहने का संकेत है। स्ट्रेस शब्द आजकल सबसे अधिक सुनने को मिलता है, क्योंकि आजकल की तेज लाइफ में हर दूसरा इंसान इसका शिकार हो रहा है। बदलती लाइफस्टाइल, काम के तनाव और हेल्थ की चिंता लोगों को आसानी से तनावग्रस्त कर देती है, खासतौर पर महिलाओं को। इसका सीधा कारण यही है कि महिलाओं को घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है। ज्यादा तनाव आपकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक होता है। लेकिन अक्सर लोग यह जान नहीं पाते हैं कि उन्हें तनाव है। लेकिन तनाव के कारण और इसे दूर करने के उपायों को जानना बेहद जरूरी है। आइए जानें तनाव के लक्षण। तनावग्रस्त रहने से मसूड़ों में खून आने जैसी दिक्कतें आती है। दरअसल ऐसा बॉडी में विटामिन-सी की कमी से ऐसा होता है। यह बॉडी में तनावरोधी हार्मोन इंटरफेरोन बनाने में हेल्प करता है। इसलिए इस समस्या से बचने के लिए अपनी डाइट में विटामिन सी युक्त आहार को जरूर शामिल करें। रसीले फल, हरी सब्जियां, ब्रोकली, आम, प्याज, पपीता, पाइनएप्पल जैसी चीजों में यह विटामिन भरपूर मात्रा में होता है। अगर आपको अक्सर कब्ज की शिकायत बनी रहती है तो यह तनाव का लक्षण हो सकता है। शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण ऐसा होता है। मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा से दिमाग और मसल्स में होने वाले तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। सोयाबीन, हरी सब्जियों, गाजर, मटर, शकरकंद और सूरज मुखी के बीज में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। गले और लंग्स में अक्सर इंफेक्शन होना तनाव का कारण है। अगर आपको बार-बार गले में इंफेक्शन होता है, तो यह आपके तनाव में रहने का संकेत है। इसका मुख्य कारण शरीर में विटामिन-ए की कमी होती है। विटामिन-ए फिश ऑयल, लाल नारंगी, पीले रंग वाले सब्जियों और फलों में पाया जाता है। यूं तो होंठ सर्दियों में फटते ही हैं लेकिन अगर आपके होंठ हर मौसम में फटते हैं तो इसका कारण तनाव है। शरीर में विटामिन बी-6 की कमी के चलते ऐसा होता है। विटामिन बी-6 ट्रैक सिस्टम को ठीक रखने के साथ कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन से एनर्जी पैदा करने के काम भी आता है। विटामिन बी-6 गाजर, अंडे, मीट, मटर, पालक, केला, बींस और ब्राउन राइस जैसी चीजों में पाया जाता है। आपने देखा होगा कि कुछ लोग तनाव या गुस्से में अपने दांत पीसने लगते हैं। यहां तक कि कुछ लोग रात को सोते समय भी अपने दांतों को पीसते हैं। इसके अलावा कुछ लोग अपने नाखून चबाने लगते हें। अगर कोई महिला अक्सर अपने दांतों को पीसती हुए या नाखून चबाती हुई दिखे तो यह तनाव में होने का संकेत हैं। यह बॉडी में विटामिन बी-5 की कमी के कारण होता है। विटामिन बी-5 आपको अंडों, ताजी सब्जियों, मशरूम, बादाम और अखरोट में भरपूर मात्रा में मिल जाएगा।
गले और लंग्स में अक्सर इंफेक्शन होना तनाव का कारण है। अगर आपको बार-बार गले में इंफेक्शन होता है, तो यह आपके तनाव में रहने का संकेत है। स्ट्रेस शब्द आजकल सबसे अधिक सुनने को मिलता है, क्योंकि आजकल की तेज लाइफ में हर दूसरा इंसान इसका शिकार हो रहा है। बदलती लाइफस्टाइल, काम के तनाव और हेल्थ की चिंता लोगों को आसानी से तनावग्रस्त कर देती है, खासतौर पर महिलाओं को। इसका सीधा कारण यही है कि महिलाओं को घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है। ज्यादा तनाव आपकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक होता है। लेकिन अक्सर लोग यह जान नहीं पाते हैं कि उन्हें तनाव है। लेकिन तनाव के कारण और इसे दूर करने के उपायों को जानना बेहद जरूरी है। आइए जानें तनाव के लक्षण। तनावग्रस्त रहने से मसूड़ों में खून आने जैसी दिक्कतें आती है। दरअसल ऐसा बॉडी में विटामिन-सी की कमी से ऐसा होता है। यह बॉडी में तनावरोधी हार्मोन इंटरफेरोन बनाने में हेल्प करता है। इसलिए इस समस्या से बचने के लिए अपनी डाइट में विटामिन सी युक्त आहार को जरूर शामिल करें। रसीले फल, हरी सब्जियां, ब्रोकली, आम, प्याज, पपीता, पाइनएप्पल जैसी चीजों में यह विटामिन भरपूर मात्रा में होता है। अगर आपको अक्सर कब्ज की शिकायत बनी रहती है तो यह तनाव का लक्षण हो सकता है। शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण ऐसा होता है। मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा से दिमाग और मसल्स में होने वाले तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। सोयाबीन, हरी सब्जियों, गाजर, मटर, शकरकंद और सूरज मुखी के बीज में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। गले और लंग्स में अक्सर इंफेक्शन होना तनाव का कारण है। अगर आपको बार-बार गले में इंफेक्शन होता है, तो यह आपके तनाव में रहने का संकेत है। इसका मुख्य कारण शरीर में विटामिन-ए की कमी होती है। विटामिन-ए फिश ऑयल, लाल नारंगी, पीले रंग वाले सब्जियों और फलों में पाया जाता है। यूं तो होंठ सर्दियों में फटते ही हैं लेकिन अगर आपके होंठ हर मौसम में फटते हैं तो इसका कारण तनाव है। शरीर में विटामिन बी-छः की कमी के चलते ऐसा होता है। विटामिन बी-छः ट्रैक सिस्टम को ठीक रखने के साथ कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन से एनर्जी पैदा करने के काम भी आता है। विटामिन बी-छः गाजर, अंडे, मीट, मटर, पालक, केला, बींस और ब्राउन राइस जैसी चीजों में पाया जाता है। आपने देखा होगा कि कुछ लोग तनाव या गुस्से में अपने दांत पीसने लगते हैं। यहां तक कि कुछ लोग रात को सोते समय भी अपने दांतों को पीसते हैं। इसके अलावा कुछ लोग अपने नाखून चबाने लगते हें। अगर कोई महिला अक्सर अपने दांतों को पीसती हुए या नाखून चबाती हुई दिखे तो यह तनाव में होने का संकेत हैं। यह बॉडी में विटामिन बी-पाँच की कमी के कारण होता है। विटामिन बी-पाँच आपको अंडों, ताजी सब्जियों, मशरूम, बादाम और अखरोट में भरपूर मात्रा में मिल जाएगा।
नई दिल्ली। टीम डिजिटल। चौकीदारी व पार्ट टाईम ड्राईवर की नौकरी करने की आड़ में साथी के साथ वाहन चोरी करने वाले एक शातिर बदमाश को उसके साथी के साथ राजपार्क पुलिस ने ऑपरेशन सतर्क के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान प्रदीप उर्फ टाइगर और आशिष उर्फ आशू के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से एक इक्को वैन और ई रिक्शा जब्त किया है। पुलिस आरोपियों से जानने की कोशिश कर रही है। दोनों वाहनों को कहां और किसको बेचते। जिससे चोरी के वाहन खरीदने वालों को भी पकड़ा जा सके। आरोपियों के पकड़े जाने के बाद दो वारदातों का भी खुलासा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एसएचओ ललित कुमार के निर्देशन में पुलिस टीम इलाके में ऑपरेशन सतर्क के तहत संदिगधों पर निगाह रखे हुए हैं। कांस्टेबल सन्नी जब एरिया पेट्रोलिंग के वक्त मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-एक में पहुंचा। पकड़े गए दोनों आरोपियों को एक संदिगध ई रिक्शा में घूमते हुए देखा था। शक होने पर दोनों को मौके पर रोका। दोनों संदिग्धों से पूछताछ की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दोनों को पकड़ लिया गया। शक होने पर उसने जिप नेट के जरिए ई रिक्शा की डिटेल चेक की। ई रिक्शा शाहाबाद डयरी इलाके से चोरी था। पूछताछ करने पर उनकी निशानदेही पर ऑयल मार्केट, मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज- एक से एक ईक्को कार भी जब्त की। जो सुल्तानपुरी इलाके से चोरी की थी। आरोपी प्रदीप उर्फ टाइगर पहले भी कई वारदातों में शामिल रहा है। वह बुरी संगत के कारण उसने शराब लेना शुरू कर दिया और छोटे-मोटे अपराध और चोरी करना शुरू कर दिया। वह पार्ट टाइम चौकीदार और पार्ट टाइम ड्राइवर के रूप में भी काम कर रहा है। वह पहले भी नौ वारदातों में शामिल रहा है।
नई दिल्ली। टीम डिजिटल। चौकीदारी व पार्ट टाईम ड्राईवर की नौकरी करने की आड़ में साथी के साथ वाहन चोरी करने वाले एक शातिर बदमाश को उसके साथी के साथ राजपार्क पुलिस ने ऑपरेशन सतर्क के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान प्रदीप उर्फ टाइगर और आशिष उर्फ आशू के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से एक इक्को वैन और ई रिक्शा जब्त किया है। पुलिस आरोपियों से जानने की कोशिश कर रही है। दोनों वाहनों को कहां और किसको बेचते। जिससे चोरी के वाहन खरीदने वालों को भी पकड़ा जा सके। आरोपियों के पकड़े जाने के बाद दो वारदातों का भी खुलासा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एसएचओ ललित कुमार के निर्देशन में पुलिस टीम इलाके में ऑपरेशन सतर्क के तहत संदिगधों पर निगाह रखे हुए हैं। कांस्टेबल सन्नी जब एरिया पेट्रोलिंग के वक्त मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-एक में पहुंचा। पकड़े गए दोनों आरोपियों को एक संदिगध ई रिक्शा में घूमते हुए देखा था। शक होने पर दोनों को मौके पर रोका। दोनों संदिग्धों से पूछताछ की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दोनों को पकड़ लिया गया। शक होने पर उसने जिप नेट के जरिए ई रिक्शा की डिटेल चेक की। ई रिक्शा शाहाबाद डयरी इलाके से चोरी था। पूछताछ करने पर उनकी निशानदेही पर ऑयल मार्केट, मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज- एक से एक ईक्को कार भी जब्त की। जो सुल्तानपुरी इलाके से चोरी की थी। आरोपी प्रदीप उर्फ टाइगर पहले भी कई वारदातों में शामिल रहा है। वह बुरी संगत के कारण उसने शराब लेना शुरू कर दिया और छोटे-मोटे अपराध और चोरी करना शुरू कर दिया। वह पार्ट टाइम चौकीदार और पार्ट टाइम ड्राइवर के रूप में भी काम कर रहा है। वह पहले भी नौ वारदातों में शामिल रहा है।
न केवल सुंदर के लिए स्वस्थ दांतों की आवश्यकता होती हैमुस्कान, लेकिन पेट के सामान्य संचालन के लिए भी। उन्हें न केवल ठीक करने की आवश्यकता होती है, बल्कि ब्लीच भी होती है, और कुछ मामलों में, प्रोस्थेटिक्स के लिए। स्वाभाविक रूप से, इन प्रक्रियाओं में से प्रत्येक से पहले, मौखिक गुहा तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए, जीवाइवल रिट्रेक्शन का उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया क्या है? से मुलायम ऊतकों के इस विशिष्ट हटानेकुछ तकनीकों की मदद से दांत। गिंगिवल पीछे हटाना एक अस्थायी घटना है। प्रक्रिया डॉक्टर की गवाही के अनुसार की जाती है। उपचार के बाद, ऊतक उनके स्थान पर लौटते हैं। हालांकि, हर कोई इस विधि का उपयोग नहीं कर सकता है। वापस लेने के लिए रिसॉर्ट करने के लिए, डॉक्टर फैसला करता है। प्रक्रिया 200 rubles की औसत लागत है। हालांकि, यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि गम उपचार के कौन से तरीके मौजूद हैं। गम का पीछे हटना ऑर्थोपेडिक्स में एक व्यापक घटना है। प्रक्रिया जटिल नहीं है, हालांकि, जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, सभी रोगियों की अनुमति नहीं है। यह ऐसे मामलों में दिखाया गया हैः - यदि दांतों के उपचार के साथ-साथ जीवाइवल तरल पदार्थ के दौरान चोटों से गम की रक्षा करना आवश्यक है। - तामचीनी से प्लाक और टार्टार के अधिक प्रभावी हटाने के लिए। - यदि आवश्यक हो, तो दांत (कैरीज़) के गर्भाशय ग्रीवा रोगों का उपचार। - मुलायम ऊतकों की बहुत अधिक वृद्धि के साथ। - प्रोस्थेटिक्स के लिए (इंप्रेशन को हटाते समय)। यह विधि आपको डिज़ाइन को अधिक सटीक और सटीक बनाने की अनुमति देती है। - यदि आवश्यक हो, तो जीवाश्म रक्तस्राव को खत्म करें। सिद्धांत रूप में, इस प्रक्रिया की कहीं और आवश्यकता नहीं है। यह अक्सर प्रयोग किया जाता है। असामान्य वृद्धि के मामले में मुलायम ऊतक की अत्यधिक मात्रा को खत्म करना आवश्यक है। स्थानीय हस्तक्षेप का उपयोग करके ऐसा हस्तक्षेप किया जाता है। सर्जनों को काम करने के लिए या तो लेजर या दंत स्केलपेल का उपयोग करें। पहली विधि कम दर्दनाक और सुरक्षित है। इस तरह के गम को सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। विशेष पेस्ट, जैल या तरल समाधान का उपयोग करने की प्रक्रिया के लिए जो ब्रश के साथ लागू होते हैं। उत्पाद को नरम कपड़े पर ही लागू किया जाना चाहिए। फिर यह दांतों और मसूड़ों के बीच प्रवेश करता है, इसे थोड़ा दूर ले जाता है। रसायन पूरा होने के बाद, नरम ऊतक अपनी जगह पर लौट आता है। हालाँकि, इस प्रसंस्करण विधि में कुछ हैकमियों। उदाहरण के लिए, जैल केवल 5 मिनट तक रहता है, इसलिए उपचार के लिए उनका उपयोग करने से काम नहीं चलेगा - बहुत कम समय। इसलिए, अधिक बार ऐसी विधियों का उपयोग कृत्रिम अंग के लिए डाली को हटाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, अतीत की रचना जो उत्पादन करती हैगम प्रत्यावर्तन, एड्रेनालाईन शामिल हो सकते हैं। यह दवा काफी मजबूत है और हृदय रोग, उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए दंत उपयोग के लिए अनुशंसित नहीं है। इसके अलावा, कुछ दवाएं दंत ऊतकों को एक अलग रंग में दाग सकती हैं, इसलिए यह विधि सौंदर्यवादी दंत चिकित्सा के लिए अवांछनीय है। धातु के स्टेपल या एक विशेष धागे का उपयोग करके इस तरह के गोंद को वापस किया जाता है। यह बुना हुआ है (एक ट्यूब के रूप में), कपास और एंटीएलर्जिक (संसेचन के बिना)। यह विधि सबसे आम है, हालांकि, और इसमें कुछ कमियां हैंः - नरम ऊतकों को संभावित चोट। - बहाली प्रक्रिया में धागे के तत्वों को प्राप्त करना। - प्रोस्थेसिस की स्थापना के लिए मुकुट की तैयारी के दौरान सीमांत मसूड़ों की बहुत उच्च गुणवत्ता वाली सुरक्षा नहीं। निम्नलिखित योजना के अनुसार गम प्रत्यावर्तन किया जाता हैः - के साथ शुरू करने के लिए, डॉक्टर को मसूड़े के सल्कस की गहराई को मापना चाहिए। इससे यह गणना करना संभव होगा कि थ्रेड को कितना गहरा स्थापित करना होगा। - अगला, आवश्यक स्थान को संवेदनाहारी के साथ इलाज किया जाना चाहिए। - अब धागे को एक विशेष समाधान के साथ गीला किया जाना चाहिए जिसमें प्रत्येक विशिष्ट मामले में आवश्यक गुण हैंः हेमोस्टैटिक, एनाल्जेसिक, एंटीसेप्टिक। - धागे को पूर्व निर्धारित गहराई पर सेट करना। - सभी आवश्यक चिकित्सीय उपायों को करना। - धागा निकालना। एक थ्रेड के साथ मसूड़ों की वापसी (उपचार प्रक्रियाओं के समय तक उपयोग का अधिकतम समय सीमित है) कई तरीकों से किया जाता हैः - एक धागे में। यह विधि न्यूनतम दर्दनाक है। हालांकि, इसका उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब मसूड़े पूरी तरह से स्वस्थ हों। यह प्रक्रिया नरम ऊतक को 0.5 मिमी से स्थानांतरित करना संभव बनाती है। - दो धागों में। यदि आपको गहरा प्रभाव डालने की आवश्यकता है तो इस विधि का उपयोग किया जाता है। चिकित्सक विभिन्न मोटाई के साथ थ्रेड की एक जोड़ी का उपयोग करता है। इस विधि का सहारा लिया जाता है, भले ही मसूड़ों को सूजन हो। यह अक्सर आर्थोपेडिक्स में उपयोग किया जाता है। क्या दवाओं का उपयोग किया जाता है और प्रक्रिया के बाद क्या करना है? गम थ्रेड की वापसी (प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया हो सकती हैअलग-अलग खोजें, लेकिन लगभग सभी इस बात से सहमत हैं कि यह प्रक्रिया, यद्यपि बहुत सुखद नहीं है, लेकिन काफी सहनीय है) को अक्सर दवाओं और रसायनों के उपयोग के साथ पूरा किया जाता हैः - "एपिनेफ्रीन"। यह दवा रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण करती है, जिससे उनकी मात्रा को कम करना संभव हो जाता है। इस उपकरण के साथ लगाए गए थ्रेड्स का उपयोग हृदय की स्थिति वाले लोगों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। - फेरस सल्फेट। इस पदार्थ में हेमोस्टैटिक और वासोकोन्स्ट्रिक्टर गुण होते हैं। हालांकि, इसका उपयोग पूर्वकाल के दांतों के इलाज के लिए नहीं किया जाता है, क्योंकि इसमें कठोर ऊतकों को दागने की क्षमता होती है। - एल्युमिनियम सल्फेट। यह उपकरण एक पानी से बचाने वाली क्रीम और कसैले प्रभाव देता है। - एल्यूमीनियम क्लोराइड। यह सबसे अधिक बार उपयोग किया जाता है अगर मसूड़ों को नुकसान होता है या सूजन होती है। - डबल एल्यूमीनियम सल्फेट। इसका उपयोग तब किया जाता है जब धागे के लिए एक कसैले, हेमोस्टैटिक और वासोकोनिस्ट्रिक्टर प्रभाव होना आवश्यक होता है। - जिंक क्लोराइड। इस पदार्थ का एक मजबूत कसैला प्रभाव भी है। यदि आप एक सूखे धागे का उपयोग करते हैं, तो गिंगिवल साइनस में दंत चिकित्सक के काम को सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसी दवाएं रख सकते हैंः एक्सपासिल, रेट्रा, रेट्रागेल। प्रक्रिया के बाद, एक स्वस्थ गम कर सकते हैंबदनाम हो जाना। इससे बचने के लिए उसे विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, आप विरोधी भड़काऊ उपचार जैल "मेट्रोगिल डेंट", "कामिस्टड", "डेंटल" का उपयोग कर सकते हैं। जटिलताओं की रोकथाम के लिए अनावश्यक नहीं होगालोक उपचार। उदाहरण के लिए, कैमोमाइल, ओक की छाल, कैलेंडुला के काढ़े के साथ मुंह गुहा को कुल्ला करने की अनुमति है। अच्छा प्रभाव औषधीय टूथपेस्ट है। पुनर्प्राप्ति अवधि के दौरान आपको बहुत ठंडा या बहुत गर्म भोजन नहीं खाना चाहिए। इससे अतिरिक्त असुविधा होगी।
न केवल सुंदर के लिए स्वस्थ दांतों की आवश्यकता होती हैमुस्कान, लेकिन पेट के सामान्य संचालन के लिए भी। उन्हें न केवल ठीक करने की आवश्यकता होती है, बल्कि ब्लीच भी होती है, और कुछ मामलों में, प्रोस्थेटिक्स के लिए। स्वाभाविक रूप से, इन प्रक्रियाओं में से प्रत्येक से पहले, मौखिक गुहा तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए, जीवाइवल रिट्रेक्शन का उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया क्या है? से मुलायम ऊतकों के इस विशिष्ट हटानेकुछ तकनीकों की मदद से दांत। गिंगिवल पीछे हटाना एक अस्थायी घटना है। प्रक्रिया डॉक्टर की गवाही के अनुसार की जाती है। उपचार के बाद, ऊतक उनके स्थान पर लौटते हैं। हालांकि, हर कोई इस विधि का उपयोग नहीं कर सकता है। वापस लेने के लिए रिसॉर्ट करने के लिए, डॉक्टर फैसला करता है। प्रक्रिया दो सौ rubles की औसत लागत है। हालांकि, यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि गम उपचार के कौन से तरीके मौजूद हैं। गम का पीछे हटना ऑर्थोपेडिक्स में एक व्यापक घटना है। प्रक्रिया जटिल नहीं है, हालांकि, जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, सभी रोगियों की अनुमति नहीं है। यह ऐसे मामलों में दिखाया गया हैः - यदि दांतों के उपचार के साथ-साथ जीवाइवल तरल पदार्थ के दौरान चोटों से गम की रक्षा करना आवश्यक है। - तामचीनी से प्लाक और टार्टार के अधिक प्रभावी हटाने के लिए। - यदि आवश्यक हो, तो दांत के गर्भाशय ग्रीवा रोगों का उपचार। - मुलायम ऊतकों की बहुत अधिक वृद्धि के साथ। - प्रोस्थेटिक्स के लिए । यह विधि आपको डिज़ाइन को अधिक सटीक और सटीक बनाने की अनुमति देती है। - यदि आवश्यक हो, तो जीवाश्म रक्तस्राव को खत्म करें। सिद्धांत रूप में, इस प्रक्रिया की कहीं और आवश्यकता नहीं है। यह अक्सर प्रयोग किया जाता है। असामान्य वृद्धि के मामले में मुलायम ऊतक की अत्यधिक मात्रा को खत्म करना आवश्यक है। स्थानीय हस्तक्षेप का उपयोग करके ऐसा हस्तक्षेप किया जाता है। सर्जनों को काम करने के लिए या तो लेजर या दंत स्केलपेल का उपयोग करें। पहली विधि कम दर्दनाक और सुरक्षित है। इस तरह के गम को सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। विशेष पेस्ट, जैल या तरल समाधान का उपयोग करने की प्रक्रिया के लिए जो ब्रश के साथ लागू होते हैं। उत्पाद को नरम कपड़े पर ही लागू किया जाना चाहिए। फिर यह दांतों और मसूड़ों के बीच प्रवेश करता है, इसे थोड़ा दूर ले जाता है। रसायन पूरा होने के बाद, नरम ऊतक अपनी जगह पर लौट आता है। हालाँकि, इस प्रसंस्करण विधि में कुछ हैकमियों। उदाहरण के लिए, जैल केवल पाँच मिनट तक रहता है, इसलिए उपचार के लिए उनका उपयोग करने से काम नहीं चलेगा - बहुत कम समय। इसलिए, अधिक बार ऐसी विधियों का उपयोग कृत्रिम अंग के लिए डाली को हटाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, अतीत की रचना जो उत्पादन करती हैगम प्रत्यावर्तन, एड्रेनालाईन शामिल हो सकते हैं। यह दवा काफी मजबूत है और हृदय रोग, उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए दंत उपयोग के लिए अनुशंसित नहीं है। इसके अलावा, कुछ दवाएं दंत ऊतकों को एक अलग रंग में दाग सकती हैं, इसलिए यह विधि सौंदर्यवादी दंत चिकित्सा के लिए अवांछनीय है। धातु के स्टेपल या एक विशेष धागे का उपयोग करके इस तरह के गोंद को वापस किया जाता है। यह बुना हुआ है , कपास और एंटीएलर्जिक । यह विधि सबसे आम है, हालांकि, और इसमें कुछ कमियां हैंः - नरम ऊतकों को संभावित चोट। - बहाली प्रक्रिया में धागे के तत्वों को प्राप्त करना। - प्रोस्थेसिस की स्थापना के लिए मुकुट की तैयारी के दौरान सीमांत मसूड़ों की बहुत उच्च गुणवत्ता वाली सुरक्षा नहीं। निम्नलिखित योजना के अनुसार गम प्रत्यावर्तन किया जाता हैः - के साथ शुरू करने के लिए, डॉक्टर को मसूड़े के सल्कस की गहराई को मापना चाहिए। इससे यह गणना करना संभव होगा कि थ्रेड को कितना गहरा स्थापित करना होगा। - अगला, आवश्यक स्थान को संवेदनाहारी के साथ इलाज किया जाना चाहिए। - अब धागे को एक विशेष समाधान के साथ गीला किया जाना चाहिए जिसमें प्रत्येक विशिष्ट मामले में आवश्यक गुण हैंः हेमोस्टैटिक, एनाल्जेसिक, एंटीसेप्टिक। - धागे को पूर्व निर्धारित गहराई पर सेट करना। - सभी आवश्यक चिकित्सीय उपायों को करना। - धागा निकालना। एक थ्रेड के साथ मसूड़ों की वापसी कई तरीकों से किया जाता हैः - एक धागे में। यह विधि न्यूनतम दर्दनाक है। हालांकि, इसका उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब मसूड़े पूरी तरह से स्वस्थ हों। यह प्रक्रिया नरम ऊतक को शून्य.पाँच मिमी से स्थानांतरित करना संभव बनाती है। - दो धागों में। यदि आपको गहरा प्रभाव डालने की आवश्यकता है तो इस विधि का उपयोग किया जाता है। चिकित्सक विभिन्न मोटाई के साथ थ्रेड की एक जोड़ी का उपयोग करता है। इस विधि का सहारा लिया जाता है, भले ही मसूड़ों को सूजन हो। यह अक्सर आर्थोपेडिक्स में उपयोग किया जाता है। क्या दवाओं का उपयोग किया जाता है और प्रक्रिया के बाद क्या करना है? गम थ्रेड की वापसी को अक्सर दवाओं और रसायनों के उपयोग के साथ पूरा किया जाता हैः - "एपिनेफ्रीन"। यह दवा रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण करती है, जिससे उनकी मात्रा को कम करना संभव हो जाता है। इस उपकरण के साथ लगाए गए थ्रेड्स का उपयोग हृदय की स्थिति वाले लोगों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। - फेरस सल्फेट। इस पदार्थ में हेमोस्टैटिक और वासोकोन्स्ट्रिक्टर गुण होते हैं। हालांकि, इसका उपयोग पूर्वकाल के दांतों के इलाज के लिए नहीं किया जाता है, क्योंकि इसमें कठोर ऊतकों को दागने की क्षमता होती है। - एल्युमिनियम सल्फेट। यह उपकरण एक पानी से बचाने वाली क्रीम और कसैले प्रभाव देता है। - एल्यूमीनियम क्लोराइड। यह सबसे अधिक बार उपयोग किया जाता है अगर मसूड़ों को नुकसान होता है या सूजन होती है। - डबल एल्यूमीनियम सल्फेट। इसका उपयोग तब किया जाता है जब धागे के लिए एक कसैले, हेमोस्टैटिक और वासोकोनिस्ट्रिक्टर प्रभाव होना आवश्यक होता है। - जिंक क्लोराइड। इस पदार्थ का एक मजबूत कसैला प्रभाव भी है। यदि आप एक सूखे धागे का उपयोग करते हैं, तो गिंगिवल साइनस में दंत चिकित्सक के काम को सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसी दवाएं रख सकते हैंः एक्सपासिल, रेट्रा, रेट्रागेल। प्रक्रिया के बाद, एक स्वस्थ गम कर सकते हैंबदनाम हो जाना। इससे बचने के लिए उसे विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, आप विरोधी भड़काऊ उपचार जैल "मेट्रोगिल डेंट", "कामिस्टड", "डेंटल" का उपयोग कर सकते हैं। जटिलताओं की रोकथाम के लिए अनावश्यक नहीं होगालोक उपचार। उदाहरण के लिए, कैमोमाइल, ओक की छाल, कैलेंडुला के काढ़े के साथ मुंह गुहा को कुल्ला करने की अनुमति है। अच्छा प्रभाव औषधीय टूथपेस्ट है। पुनर्प्राप्ति अवधि के दौरान आपको बहुत ठंडा या बहुत गर्म भोजन नहीं खाना चाहिए। इससे अतिरिक्त असुविधा होगी।
प्रकट रूप में दूसरों के समक्ष या एकान्त में ज्ञानी जनों के विपरीत उनके आदर्शों के प्रतिकूल कदापि वाणी या कर्म द्वारा आचरण न करे -यह सावक का कर्तव्य है। यदि प्राकट्य मे या एकान्त में पाप-कृत्य करते हो, अथवा करोगे-भविष्य में वैसा करने का मनःसंकल्प लिये हो, तो यह उचित नहीं है, ऐसा कभी मत करो। स्वल्प के लिए बहुत को मत गंवाओ बोड़े लाभ के लिए जो बहुत लाभ को गंवा देता है, उसे बुद्धिमान नहीं कहा जाता। सासारिक भोगों को प्राप्ति एक बहुत थोड़ा, होन कोटि का लाभ कहा जा सकता है । मोक्ष या निर्वाण जीवन का परम, सर्वोच्च, सर्वातिशायी लाभ हैं। भोगो में मोहासवत बन ऐसे लाभ से वंचित रहना जीवन की सबसे बड़ी भूल है। मोक्ष मार्ग का तिरस्कार - उपेक्षा न करते हुए स्वल्प के लिए नगप्प, तुच्छ कामभोगो के लिए मोक्ष के आनन्द को, जो अपरिमित है, अनन्त है, मत गँवाओ जरा से-तुच्छ से वैपयिक सुख के लिए विपुल - अत्यधिक निर्वाण सुख को मत छोड़ो, मत गँवालो । वमन को कौन खाए ? कुलीन पुरुष जिसका त्याग कर देते हैं, वह उनके लिए उगले गये वमन के तुल्य अग्राह्य है। वे वमन को, जो अत्यन्त जुगुप्स्य है, खाजाने की अपेक्षा अपने प्राण त्याग देना कहीं अधिक श्रेयस्कर समझते हैं। जैन तथा बौद्ध दोनों परम्पराओं में यह तथ्य उजागर हुआ है। कथानको में यद्यपि मिन्नता है, किन्तु, सारभूत कय्य अभिन्न है। उत्तराध्ययन : सम्बद्ध घटना उत्तराज्ययन सूत्र के बाईसवें अध्ययन में बाईसवें तीर्थंकर भगवान् अरिष्टनेमि, राजकुमारी राजीमती तथा रथनेमि का कथानक है। राजीमती को व्याहने हेतु उद्यत अरिष्टनेमि वरातियों के आमिष भोजन के निमित्त बाड़े में बँधे पशुओं को देखकर संसार से विरक्त हो जाते हैं, यमण-जीवन स्वीकार कर १. पडिणीयं म बुदाणं, वाया बदुव कम्मुणा । आवी वा जइ वा रहस्ते, णेन मुज्जा कयाइ वि ॥ -उत्तराध्ययन सूत्र १.१७ २. घेरीगाया २४७ ३. मा एवं अवमन्नंता अप्पेगं तुम्पहा बहुं । -आचारोग सूत्र १.३.४.७ ४. मा मप्पकस्स हेतु काम सुखस्स विपुलं जहि सुखं । -ऐरगाया ५०८
प्रकट रूप में दूसरों के समक्ष या एकान्त में ज्ञानी जनों के विपरीत उनके आदर्शों के प्रतिकूल कदापि वाणी या कर्म द्वारा आचरण न करे -यह सावक का कर्तव्य है। यदि प्राकट्य मे या एकान्त में पाप-कृत्य करते हो, अथवा करोगे-भविष्य में वैसा करने का मनःसंकल्प लिये हो, तो यह उचित नहीं है, ऐसा कभी मत करो। स्वल्प के लिए बहुत को मत गंवाओ बोड़े लाभ के लिए जो बहुत लाभ को गंवा देता है, उसे बुद्धिमान नहीं कहा जाता। सासारिक भोगों को प्राप्ति एक बहुत थोड़ा, होन कोटि का लाभ कहा जा सकता है । मोक्ष या निर्वाण जीवन का परम, सर्वोच्च, सर्वातिशायी लाभ हैं। भोगो में मोहासवत बन ऐसे लाभ से वंचित रहना जीवन की सबसे बड़ी भूल है। मोक्ष मार्ग का तिरस्कार - उपेक्षा न करते हुए स्वल्प के लिए नगप्प, तुच्छ कामभोगो के लिए मोक्ष के आनन्द को, जो अपरिमित है, अनन्त है, मत गँवाओ जरा से-तुच्छ से वैपयिक सुख के लिए विपुल - अत्यधिक निर्वाण सुख को मत छोड़ो, मत गँवालो । वमन को कौन खाए ? कुलीन पुरुष जिसका त्याग कर देते हैं, वह उनके लिए उगले गये वमन के तुल्य अग्राह्य है। वे वमन को, जो अत्यन्त जुगुप्स्य है, खाजाने की अपेक्षा अपने प्राण त्याग देना कहीं अधिक श्रेयस्कर समझते हैं। जैन तथा बौद्ध दोनों परम्पराओं में यह तथ्य उजागर हुआ है। कथानको में यद्यपि मिन्नता है, किन्तु, सारभूत कय्य अभिन्न है। उत्तराध्ययन : सम्बद्ध घटना उत्तराज्ययन सूत्र के बाईसवें अध्ययन में बाईसवें तीर्थंकर भगवान् अरिष्टनेमि, राजकुमारी राजीमती तथा रथनेमि का कथानक है। राजीमती को व्याहने हेतु उद्यत अरिष्टनेमि वरातियों के आमिष भोजन के निमित्त बाड़े में बँधे पशुओं को देखकर संसार से विरक्त हो जाते हैं, यमण-जीवन स्वीकार कर एक. पडिणीयं म बुदाणं, वाया बदुव कम्मुणा । आवी वा जइ वा रहस्ते, णेन मुज्जा कयाइ वि ॥ -उत्तराध्ययन सूत्र एक.सत्रह दो. घेरीगाया दो सौ सैंतालीस तीन. मा एवं अवमन्नंता अप्पेगं तुम्पहा बहुं । -आचारोग सूत्र एक.तीन.चार.सात चार. मा मप्पकस्स हेतु काम सुखस्स विपुलं जहि सुखं । -ऐरगाया पाँच सौ आठ
लगभग सभी लोगों को चावल खाना बहुत पसंद होता है. पर क्या आपको पता है कि चावल आपका स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ आपकी खूबसूरती को भी निखारने का काम करता है. चेहरे पर चावल का फेस पैक लगाने से सनबर्न, ब्लैकहेड्स और टैनिंग जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है. इसके अलावा चावल का फेस पैक लगाने से चेहरे में निखार आता है. आज हम आपको चावल का फेस पैक बनाने और लगाने के सही तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं. चावल का फेस पैक बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप चावल को पानी में डालकर छोड़ दें. जब ये भीग जाये तो इसे पानी से छानकर पीस लें. अब इसमें थोड़ा सा नारियल का तेल डालकर अच्छे से मिलाएं. अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें. सूख जाने पर अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. अगर आप हफ्ते में दो से तीन बार इस पेस्ट का इस्तेमाल करती हैं तो आपके चेहरे में निखार आ जाएगा.
लगभग सभी लोगों को चावल खाना बहुत पसंद होता है. पर क्या आपको पता है कि चावल आपका स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ आपकी खूबसूरती को भी निखारने का काम करता है. चेहरे पर चावल का फेस पैक लगाने से सनबर्न, ब्लैकहेड्स और टैनिंग जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है. इसके अलावा चावल का फेस पैक लगाने से चेहरे में निखार आता है. आज हम आपको चावल का फेस पैक बनाने और लगाने के सही तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं. चावल का फेस पैक बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप चावल को पानी में डालकर छोड़ दें. जब ये भीग जाये तो इसे पानी से छानकर पीस लें. अब इसमें थोड़ा सा नारियल का तेल डालकर अच्छे से मिलाएं. अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें. सूख जाने पर अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. अगर आप हफ्ते में दो से तीन बार इस पेस्ट का इस्तेमाल करती हैं तो आपके चेहरे में निखार आ जाएगा.
वर्ल्ड कप के पूल ए में दूसरा स्थान हासिल करने के लिए कल सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया की टीम आमने - सामने होगी। 7 मार्च/सिडनी (CRICKETNMORE) । वर्ल्ड कप के पूल ए में दूसरा स्थान हासिल करने के लिए कल सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया की टीम आमने - सामने होगी। न्यूजीलैंड 4 मैचों मे चार जीत के साथ पहले ही क्वार्टरफाइनल में पहुंच गया है और उसका नंबर एक पायदान पर बना रहना तय है। ऐसे में ये दोनों टीमें अपने लिए किसी भी हाल में जीत हासिल कर पॉइंट टेबल में नंबर 2 पर काबिज होना चाहेगी और क्वार्टर फाइनल में साउथ अफ्रीका से भिड़ने से बचना चाहेगी। इस समय चार मैचों में से तीन में जीत हासिल कर के श्रीलंका की टीम इस समय दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 2 मैच जीते हैं और 1 मैच में हार का मुंह देखना पड़ा है। जबकि बांग्लादेश के खिलाफ हुआ मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था। ऑस्ट्रेलिया ने अपने पिछले मुकाबले में अफगानिस्तान को 275 रन रौंदकर वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल करी थी। वहीं श्रीलंका की टीम ने भी पिछले मैच में श्रीलंका के खिलाफ जबरदस्त जीत हासिल की थी। 310 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम ने 47वें ओवर में ही 9 विकेट से जीत हासिल कर ली थी। श्रीलंका की तरफ से अनुभवी कुमार संगाकारा और लहीरू थिरिमाने शानदार फॉर्म में हैं। दोनों ने ही पिछले मुकाबले में शानदार शतक जड़ा था। संगाकार इस वर्ल्ड कप में अब तक दो शतक लगा चुके हैं। सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान भी अच्छे फॉर्म में हैं। गेंदबाजी में श्रीलंकन टीम को चोटिल रंगाना हेराथ की कमी जरूर खलेगी। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज डेविड वॉर्नर, स्टीवन स्मिथ और ग्लैन मैक्सवैल शानदार फॉर्म में हैं लेकिन शेन वॉटसन का खराब फॉर्म कप्तान क्लार्क के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गेंदबाजी में मिचेल स्टार्क बेहतरीन फॉर्म में हैं लेकिन जॉनसन अभी पूरे रंग में नहीं आए हैं। पीठ में चोट से झूझ रहे पैट कमिंस की जगह टीम में आए जोश हैजलवुड ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया। ऑस्ट्रेलियाः डेविड वार्नर, आरोन फिंच, स्टीव स्मिथ, माइकल क्लार्क (कप्तान), ग्लेन मैक्सवेल, मिशेल मार्श / शेन वाटसन, जेम्स फॉल्कनर, ब्रैड हैडिन (विकेटकीपर), मिशेल जॉनसन, मिशेल स्टार्क, जोश हैजलवुड। श्रीलंकाः लहीरू थिरिम्माने, तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगाकारा (विकेटकीपर), महेला जयवर्धने, एंजेलो मैथ्यूज (कप्तान), दिनेश चांदीमल, थिसारा परेरा, सिकुग्गे प्रसन्ना, सचित्रा सेनानायके, लसिथ मलिंगा, सुरंग लकमल।
वर्ल्ड कप के पूल ए में दूसरा स्थान हासिल करने के लिए कल सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया की टीम आमने - सामने होगी। सात मार्च/सिडनी । वर्ल्ड कप के पूल ए में दूसरा स्थान हासिल करने के लिए कल सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया की टीम आमने - सामने होगी। न्यूजीलैंड चार मैचों मे चार जीत के साथ पहले ही क्वार्टरफाइनल में पहुंच गया है और उसका नंबर एक पायदान पर बना रहना तय है। ऐसे में ये दोनों टीमें अपने लिए किसी भी हाल में जीत हासिल कर पॉइंट टेबल में नंबर दो पर काबिज होना चाहेगी और क्वार्टर फाइनल में साउथ अफ्रीका से भिड़ने से बचना चाहेगी। इस समय चार मैचों में से तीन में जीत हासिल कर के श्रीलंका की टीम इस समय दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया ने दो मैच जीते हैं और एक मैच में हार का मुंह देखना पड़ा है। जबकि बांग्लादेश के खिलाफ हुआ मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था। ऑस्ट्रेलिया ने अपने पिछले मुकाबले में अफगानिस्तान को दो सौ पचहत्तर रन रौंदकर वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल करी थी। वहीं श्रीलंका की टीम ने भी पिछले मैच में श्रीलंका के खिलाफ जबरदस्त जीत हासिल की थी। तीन सौ दस रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम ने सैंतालीसवें ओवर में ही नौ विकेट से जीत हासिल कर ली थी। श्रीलंका की तरफ से अनुभवी कुमार संगाकारा और लहीरू थिरिमाने शानदार फॉर्म में हैं। दोनों ने ही पिछले मुकाबले में शानदार शतक जड़ा था। संगाकार इस वर्ल्ड कप में अब तक दो शतक लगा चुके हैं। सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान भी अच्छे फॉर्म में हैं। गेंदबाजी में श्रीलंकन टीम को चोटिल रंगाना हेराथ की कमी जरूर खलेगी। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज डेविड वॉर्नर, स्टीवन स्मिथ और ग्लैन मैक्सवैल शानदार फॉर्म में हैं लेकिन शेन वॉटसन का खराब फॉर्म कप्तान क्लार्क के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गेंदबाजी में मिचेल स्टार्क बेहतरीन फॉर्म में हैं लेकिन जॉनसन अभी पूरे रंग में नहीं आए हैं। पीठ में चोट से झूझ रहे पैट कमिंस की जगह टीम में आए जोश हैजलवुड ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया। ऑस्ट्रेलियाः डेविड वार्नर, आरोन फिंच, स्टीव स्मिथ, माइकल क्लार्क , ग्लेन मैक्सवेल, मिशेल मार्श / शेन वाटसन, जेम्स फॉल्कनर, ब्रैड हैडिन , मिशेल जॉनसन, मिशेल स्टार्क, जोश हैजलवुड। श्रीलंकाः लहीरू थिरिम्माने, तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगाकारा , महेला जयवर्धने, एंजेलो मैथ्यूज , दिनेश चांदीमल, थिसारा परेरा, सिकुग्गे प्रसन्ना, सचित्रा सेनानायके, लसिथ मलिंगा, सुरंग लकमल।
- सनी देओल और अमीषा पटेल की गदर का ट्रेलर हुआ रिलीज, 22 साल बाद फिर से सकीना के लिए पूरे पाकिस्तान से भिड़ता दिखेगा तारा सिंहBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।शुक्रवार मई 26, 2023 04:47 PM ISTसनी देओल और अमीषा पटेल की आइकॉनिक फिल्म 'गदर एक प्रेम कथा' एक बार फिर से बड़े पर्दे पर दर्शकों के दिलों की जीतने वाली है. इस साल अगस्त में इस फिल्म का दूसरा पार्ट गदर-2 रिलीज होने वाला है. ऐसे में इसकी रिलीज से पहले फिल्म के मेकर्स ने 'गदर एक प्रेम कथा' को पर्दे पर रिलीज करने का फैसला किया है. - 22 साल बाद फिर से सिनेमाघरों में हैंडपंप उखाड़ता नजर आएगा तारा सिंह, इस दिन दोबारा रिलीज होगी सनी देओल की 'गदर'Bollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।शुक्रवार मई 19, 2023 03:00 PM ISTसनी देओल और अमीषा पटेल की मोस्ट अवेटेड पिक्चर गदर टू के रिलीज से पहले पूरे देश में गदर एक प्रेम कथा का पहला पार्ट रिलीज किया जाएगा. आइए आपको बताते हैं कि गदर का पहला पार्ट कब रिलीज होगा. - घुंघराले बाल वाला ये लड़का बॉलीवुड में मचा चुका है गदर, मासूम से चेहरे वाले तारा सिंह को आपने पहचाना क्या ? Bollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।रविवार अप्रैल 2, 2023 09:01 PM ISTबॉलीवुड इंडस्ट्री के कई एक्टर ऐसे हैं जो फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी खूब एक्टिव हैं. इसमें हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर जया बच्चन तक का नाम तक शामिल है. - Bollywood । Written by: आनंद कश्यप ।गुरुवार मार्च 16, 2023 06:07 PM ISTGadar 2: सनी देओल के फैंस और गदर 2 का इंतजार कर रहे फैंस की एक्साइटमेंट को बढ़ा दिया है. अब इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए एक और अच्छी खबर है. फिल्म गदर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है. - Bollywood । Written by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार मार्च 7, 2023 05:08 PM ISTईद पर सलमान खान की किसी का भाई किसी की जान, जून में शाहरुख खान की जवान और अगस्त में सनी देओल की गदर 2 रिलीज होंगी. जानें इन फिल्मों को लेकर फैन्स में किस तरह का रुझान है. - Gadar 2 की शूटिंग के दौरान सनी देओल के साथ हुआ मजेदार वाकया, बैलगाड़ीवाले ने पूछा- आप सनी जैसे लग रहे हैंBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।सोमवार मार्च 6, 2023 11:19 AM ISTअभिनेता ने सोशल मीडिया पर अपने एक फैन का वीडियो और तस्वीर शेयर की है. जिसमें वह सनी देओल से मिलकर हैरान होता नजर आ रहा है. सनी देओल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. - Bollywood । Edited by: शिखा यादव ।मंगलवार फ़रवरी 28, 2023 11:44 AM ISTसाल 2001 में रिलीज हुई फिल्म गदर ने बॉक्स ऑफिस पर सच में गदर मचा दिया था. अनिल शर्मा की इस फिल्म की सफलता को देखते हुए फिल्म का पार्ट 2 यानी गदर 2 इस साल रिलीज को तैयार है. - डीजे पर बजा 'मैं निकला गड्डी लेके' गाना तो खुद को रोक न पाया बुर्जुग, किया ऐसा डांस सनी देओल को भी कर दिया फेलBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।रविवार फ़रवरी 19, 2023 02:42 PM ISTबहुत जल्द फिल्म गदर का दूसरा सीक्वल रिलीज होने वाला है. जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. फिल्म गदर 2 की रिलीज से पहले एक बार फिर से फैंस के बीच 'मैं निकला गड्डी लेके' का क्रेज देखने को मिल रहा है. - Gadar 2 में 'तारा और सकीना' की दिखेगी जोड़ी, 'वैलेंटाइन डे' पर सामने आया सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म का मोशन पोस्टरBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।बुधवार फ़रवरी 15, 2023 05:50 AM ISTसाल 2001 में आई फिल्म गदर के तारा और सकीना तो आज भी आपको याद होंगे. दोनों की प्रेम कहानी आज भी फैंस के दिलों पर राज करती है. इसी बीच गदर 2 भी फैंस के बीच जल्द दस्तक देने वाली है, जिसका मेकर्स ने पोस्टर पहले रिलीज कर दिया था. - गदर 2 में हैंडपंप नहीं सनी देओल चलाएंगे हथौड़ा, वायरल हुए मीम्स, लोग बोले- 'ना पठान ना भाईजान अब. . . 'Bollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार जनवरी 26, 2023 03:15 PM ISTआज गणतंत्र दिवस है और इस मौके पर सनी देओल ने अपनी फिल्म का नया पोस्टर रिलीज कर दिया है. इस पोस्टर में सनी देओल तारा सिंह के अवतार में हाथ में बड़ा सा हथौड़ा लिए नजर आ रहे हैं.
- सनी देओल और अमीषा पटेल की गदर का ट्रेलर हुआ रिलीज, बाईस साल बाद फिर से सकीना के लिए पूरे पाकिस्तान से भिड़ता दिखेगा तारा सिंहBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।शुक्रवार मई छब्बीस, दो हज़ार तेईस चार:सैंतालीस PM ISTसनी देओल और अमीषा पटेल की आइकॉनिक फिल्म 'गदर एक प्रेम कथा' एक बार फिर से बड़े पर्दे पर दर्शकों के दिलों की जीतने वाली है. इस साल अगस्त में इस फिल्म का दूसरा पार्ट गदर-दो रिलीज होने वाला है. ऐसे में इसकी रिलीज से पहले फिल्म के मेकर्स ने 'गदर एक प्रेम कथा' को पर्दे पर रिलीज करने का फैसला किया है. - बाईस साल बाद फिर से सिनेमाघरों में हैंडपंप उखाड़ता नजर आएगा तारा सिंह, इस दिन दोबारा रिलीज होगी सनी देओल की 'गदर'Bollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।शुक्रवार मई उन्नीस, दो हज़ार तेईस तीन:शून्य PM ISTसनी देओल और अमीषा पटेल की मोस्ट अवेटेड पिक्चर गदर टू के रिलीज से पहले पूरे देश में गदर एक प्रेम कथा का पहला पार्ट रिलीज किया जाएगा. आइए आपको बताते हैं कि गदर का पहला पार्ट कब रिलीज होगा. - घुंघराले बाल वाला ये लड़का बॉलीवुड में मचा चुका है गदर, मासूम से चेहरे वाले तारा सिंह को आपने पहचाना क्या ? Bollywood । Edited by: आनंद कश्यप ।रविवार अप्रैल दो, दो हज़ार तेईस नौ:एक PM ISTबॉलीवुड इंडस्ट्री के कई एक्टर ऐसे हैं जो फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी खूब एक्टिव हैं. इसमें हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर जया बच्चन तक का नाम तक शामिल है. - Bollywood । Written by: आनंद कश्यप ।गुरुवार मार्च सोलह, दो हज़ार तेईस छः:सात PM ISTGadar दो: सनी देओल के फैंस और गदर दो का इंतजार कर रहे फैंस की एक्साइटमेंट को बढ़ा दिया है. अब इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए एक और अच्छी खबर है. फिल्म गदर दो की शूटिंग पूरी हो चुकी है. - Bollywood । Written by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार मार्च सात, दो हज़ार तेईस पाँच:आठ PM ISTईद पर सलमान खान की किसी का भाई किसी की जान, जून में शाहरुख खान की जवान और अगस्त में सनी देओल की गदर दो रिलीज होंगी. जानें इन फिल्मों को लेकर फैन्स में किस तरह का रुझान है. - Gadar दो की शूटिंग के दौरान सनी देओल के साथ हुआ मजेदार वाकया, बैलगाड़ीवाले ने पूछा- आप सनी जैसे लग रहे हैंBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।सोमवार मार्च छः, दो हज़ार तेईस ग्यारह:उन्नीस AM ISTअभिनेता ने सोशल मीडिया पर अपने एक फैन का वीडियो और तस्वीर शेयर की है. जिसमें वह सनी देओल से मिलकर हैरान होता नजर आ रहा है. सनी देओल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. - Bollywood । Edited by: शिखा यादव ।मंगलवार फ़रवरी अट्ठाईस, दो हज़ार तेईस ग्यारह:चौंतालीस AM ISTसाल दो हज़ार एक में रिलीज हुई फिल्म गदर ने बॉक्स ऑफिस पर सच में गदर मचा दिया था. अनिल शर्मा की इस फिल्म की सफलता को देखते हुए फिल्म का पार्ट दो यानी गदर दो इस साल रिलीज को तैयार है. - डीजे पर बजा 'मैं निकला गड्डी लेके' गाना तो खुद को रोक न पाया बुर्जुग, किया ऐसा डांस सनी देओल को भी कर दिया फेलBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।रविवार फ़रवरी उन्नीस, दो हज़ार तेईस दो:बयालीस PM ISTबहुत जल्द फिल्म गदर का दूसरा सीक्वल रिलीज होने वाला है. जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. फिल्म गदर दो की रिलीज से पहले एक बार फिर से फैंस के बीच 'मैं निकला गड्डी लेके' का क्रेज देखने को मिल रहा है. - Gadar दो में 'तारा और सकीना' की दिखेगी जोड़ी, 'वैलेंटाइन डे' पर सामने आया सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म का मोशन पोस्टरBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।बुधवार फ़रवरी पंद्रह, दो हज़ार तेईस पाँच:पचास AM ISTसाल दो हज़ार एक में आई फिल्म गदर के तारा और सकीना तो आज भी आपको याद होंगे. दोनों की प्रेम कहानी आज भी फैंस के दिलों पर राज करती है. इसी बीच गदर दो भी फैंस के बीच जल्द दस्तक देने वाली है, जिसका मेकर्स ने पोस्टर पहले रिलीज कर दिया था. - गदर दो में हैंडपंप नहीं सनी देओल चलाएंगे हथौड़ा, वायरल हुए मीम्स, लोग बोले- 'ना पठान ना भाईजान अब. . . 'Bollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार जनवरी छब्बीस, दो हज़ार तेईस तीन:पंद्रह PM ISTआज गणतंत्र दिवस है और इस मौके पर सनी देओल ने अपनी फिल्म का नया पोस्टर रिलीज कर दिया है. इस पोस्टर में सनी देओल तारा सिंह के अवतार में हाथ में बड़ा सा हथौड़ा लिए नजर आ रहे हैं.
कुल्लू - जिला कुल्लू के हर विधानसभा क्षेत्र में खोले गए पोलिंग बूथ भी लोगों को खासे भाए हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह आदर्श पोलिंग बूथ पर मतदाताओं को सुविधाएं दी गई हैं। उसी प्रकार की सुविधाएं मतदाताओं को हर पोलिंग बूथ पर दी जानी चाहिएं। कुल्लू विधानसभा क्षेत्र में भी दो आदर्श पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। एक पोलिंग बूथ राजकीय छात्र स्कूल कुल्लू और दूसरा पोलिंग बूथ डिग्री कालेज कुल्लू में बनाया गया है। इन पोलिंग बूथों पर महिला कर्मचारी ही सेवाएं दे रही हैं और मतदाताओं के लिए वेटिंग लॉज समेत शौचालय की उचित व्यवस्था की गई है। कुल्लू निवासी प्रोमिला का कहना है कि आदर्श पोलिंग बूथ उन्हें बहुत अच्छा लगा। कुल्लू निवासी सुभाष का कहना है कि इस तरह के पोलिंग बूथ जिला में अन्य स्थानों पर भी खोले जाने चाहिए।
कुल्लू - जिला कुल्लू के हर विधानसभा क्षेत्र में खोले गए पोलिंग बूथ भी लोगों को खासे भाए हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह आदर्श पोलिंग बूथ पर मतदाताओं को सुविधाएं दी गई हैं। उसी प्रकार की सुविधाएं मतदाताओं को हर पोलिंग बूथ पर दी जानी चाहिएं। कुल्लू विधानसभा क्षेत्र में भी दो आदर्श पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। एक पोलिंग बूथ राजकीय छात्र स्कूल कुल्लू और दूसरा पोलिंग बूथ डिग्री कालेज कुल्लू में बनाया गया है। इन पोलिंग बूथों पर महिला कर्मचारी ही सेवाएं दे रही हैं और मतदाताओं के लिए वेटिंग लॉज समेत शौचालय की उचित व्यवस्था की गई है। कुल्लू निवासी प्रोमिला का कहना है कि आदर्श पोलिंग बूथ उन्हें बहुत अच्छा लगा। कुल्लू निवासी सुभाष का कहना है कि इस तरह के पोलिंग बूथ जिला में अन्य स्थानों पर भी खोले जाने चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उज्जैन आने वाले हैं। जी हाँ, अब इन सभी के बीच आज बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन का जन्मदिन है। ऐसे में उनके 80वें जन्मदिन पर PM मोदी ने मुबराकबाद दी है। जी हाँ और इसी के साथ उन्होंने उनके स्वस्थ जीवन की कामना की। जी दरअसल, बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन आज 80 साल के हो चुके हैं और इस अवसर पर हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है। इस बीच महानायक अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर ट्विट कर बधाई दी है। आप देख सकते हैं उन्होंने अपने बधाई संदेश में लिखा कि, "अमिताभ बच्चन जी को 80वें जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई। वह भारत की सबसे उल्लेखनीय फिल्मी हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने पीढ़ियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध और मनोरंजन किया है। वे लंबा और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें। " इसी के साथ कई सेलेब्स ने भी अमिताभ बच्चन को जन्मदिन विश किया है। PM मोदी के अलावा अजय देवगन ने भी अमिताभ बच्चन को खास अंदाज में जन्मदिन की बधाई दी। जी दरअसल उन्होंने वीडियो शेयर कर अमित जी के साथ अपने कुछ अनोखा पल साझा किया। आप देख सकते है वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, "80वां जन्मदिन मुबारक हो @amitabhbachchan! आपको आगे एक शानदार वर्ष की शुभकामनाएं सर। आप वास्तव में हम सभी से बहुत आगे हैं और हम केवल सर्वश्रेष्ठ - आप तक जीने का प्रयास कर रहे हैं। " वहीँ अजय देवगन के अलावा अभिषेक बच्चन ने भी पिता को जन्मदिन विश किया है। उन्होंने एक वीडियो के साथ लिखा, 'इसे ठीक करने के लिए बहुत सी गोपनीयता, बहुत सारी योजनाएं, बहुत मेहनत और बहुत सारी रिहर्सल करनी पड़ी। लेकिन फिर, वह कम का हकदार नहीं है! पिताजी को सरप्राइज देने और अपना 80वां जन्मदिन उस जगह पर मनाने में सक्षम होना बहुत भावुक था, जहां वे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, उनका कार्यस्थल। ऐसा करने में मेरी मदद करने और आज रात के एपिसोड को मेरे पिता के लिए इतना खास बनाने के लिए मैं सोनी और कौन बनेगा करोड़पति की पूरी टीम का आभार व्यक्त करता हूं। कोशिश करें और हो सके तो देखें। केबीसी 11 अक्टूबर को रात 9 बजे IST सिर्फ सोनी टीवी पर। '
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उज्जैन आने वाले हैं। जी हाँ, अब इन सभी के बीच आज बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन का जन्मदिन है। ऐसे में उनके अस्सीवें जन्मदिन पर PM मोदी ने मुबराकबाद दी है। जी हाँ और इसी के साथ उन्होंने उनके स्वस्थ जीवन की कामना की। जी दरअसल, बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन आज अस्सी साल के हो चुके हैं और इस अवसर पर हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है। इस बीच महानायक अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर ट्विट कर बधाई दी है। आप देख सकते हैं उन्होंने अपने बधाई संदेश में लिखा कि, "अमिताभ बच्चन जी को अस्सीवें जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई। वह भारत की सबसे उल्लेखनीय फिल्मी हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने पीढ़ियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध और मनोरंजन किया है। वे लंबा और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें। " इसी के साथ कई सेलेब्स ने भी अमिताभ बच्चन को जन्मदिन विश किया है। PM मोदी के अलावा अजय देवगन ने भी अमिताभ बच्चन को खास अंदाज में जन्मदिन की बधाई दी। जी दरअसल उन्होंने वीडियो शेयर कर अमित जी के साथ अपने कुछ अनोखा पल साझा किया। आप देख सकते है वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, "अस्सीवां जन्मदिन मुबारक हो @amitabhbachchan! आपको आगे एक शानदार वर्ष की शुभकामनाएं सर। आप वास्तव में हम सभी से बहुत आगे हैं और हम केवल सर्वश्रेष्ठ - आप तक जीने का प्रयास कर रहे हैं। " वहीँ अजय देवगन के अलावा अभिषेक बच्चन ने भी पिता को जन्मदिन विश किया है। उन्होंने एक वीडियो के साथ लिखा, 'इसे ठीक करने के लिए बहुत सी गोपनीयता, बहुत सारी योजनाएं, बहुत मेहनत और बहुत सारी रिहर्सल करनी पड़ी। लेकिन फिर, वह कम का हकदार नहीं है! पिताजी को सरप्राइज देने और अपना अस्सीवां जन्मदिन उस जगह पर मनाने में सक्षम होना बहुत भावुक था, जहां वे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, उनका कार्यस्थल। ऐसा करने में मेरी मदद करने और आज रात के एपिसोड को मेरे पिता के लिए इतना खास बनाने के लिए मैं सोनी और कौन बनेगा करोड़पति की पूरी टीम का आभार व्यक्त करता हूं। कोशिश करें और हो सके तो देखें। केबीसी ग्यारह अक्टूबर को रात नौ बजे IST सिर्फ सोनी टीवी पर। '
Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय पर दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई अब चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में की जायेगी. विदित हो कि जमशेदपुर के सीजेएम की न्यायालय में दायर मामले को आज चाईबासा गठित विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. वहीं, आज इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता सीजेएम की न्यायालय में उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाने पहुंचे थे. जिसे न्यायालय ने अस्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में होनी है. इसलिए बयान दर्ज करवाने व अन्य प्रक्रियाएं विशेष न्यायालय में ही पूरी की जाएगी. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग जिलों में विशेष अदालतों का गठन किया गया है. चूंकि मानहानि से जुड़ा यह मामला दो जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है, इसलिए अदालत में इस मामले को कोल्हान के जनप्रतिनिधियों के लिए चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री के अधिवक्ता संजय मिश्रा ने बताया कि शिकायत वाद किसी भी न्यायालय में दायर किया जा सकता है. शिकायत वाद की प्रकृति व जनप्रतिनिधि से जुड़ा मामला होने के कारण अदालत ने इसे विशेष न्यायालय में सुनवाई के लिए अग्रसारित कर दिया है. जमशेदपुर सीजेएम की न्यायालय में बयान दर्ज करवाने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कोर्ट परिसर में जमशेदपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाला अजीत कुमार अम्बास्त, पूर्व पीपी जयप्रकाश सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं से शिष्टाचार मुलाकात की व उनका हालचाल जाना. मालूम हो कि कोविड प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले में विधायक सरयू राय के खुलासे व आरोप के बाद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने इसे अपनी मानहानि बताते हुए बीते 25 अप्रैल को जमशेदपुर के न्यायालय में मानहानि का शिकायत वाद दायर किया था.
Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय पर दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई अब चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में की जायेगी. विदित हो कि जमशेदपुर के सीजेएम की न्यायालय में दायर मामले को आज चाईबासा गठित विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. वहीं, आज इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता सीजेएम की न्यायालय में उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाने पहुंचे थे. जिसे न्यायालय ने अस्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में होनी है. इसलिए बयान दर्ज करवाने व अन्य प्रक्रियाएं विशेष न्यायालय में ही पूरी की जाएगी. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग जिलों में विशेष अदालतों का गठन किया गया है. चूंकि मानहानि से जुड़ा यह मामला दो जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है, इसलिए अदालत में इस मामले को कोल्हान के जनप्रतिनिधियों के लिए चाईबासा में गठित विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री के अधिवक्ता संजय मिश्रा ने बताया कि शिकायत वाद किसी भी न्यायालय में दायर किया जा सकता है. शिकायत वाद की प्रकृति व जनप्रतिनिधि से जुड़ा मामला होने के कारण अदालत ने इसे विशेष न्यायालय में सुनवाई के लिए अग्रसारित कर दिया है. जमशेदपुर सीजेएम की न्यायालय में बयान दर्ज करवाने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कोर्ट परिसर में जमशेदपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाला अजीत कुमार अम्बास्त, पूर्व पीपी जयप्रकाश सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं से शिष्टाचार मुलाकात की व उनका हालचाल जाना. मालूम हो कि कोविड प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले में विधायक सरयू राय के खुलासे व आरोप के बाद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने इसे अपनी मानहानि बताते हुए बीते पच्चीस अप्रैल को जमशेदपुर के न्यायालय में मानहानि का शिकायत वाद दायर किया था.
एक-एक पल अमूल्य है और जो लोग इस बात को जानते हैं, वे व्यर्थ कामों में समय बर्बाद नहीं करते हैं। अधिकतर लोग समय का महत्व तब समझते हैं, जब उनके पास कुछ करने के लिए बहुत कम समय होता है। ये बात सिर्फ हमारे नियंत्रण में है कि हम अपने समय को कहां और कैसे खर्च करते हैं। इसलिए सिर्फ सही कामों पर ध्यान लगाएं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
एक-एक पल अमूल्य है और जो लोग इस बात को जानते हैं, वे व्यर्थ कामों में समय बर्बाद नहीं करते हैं। अधिकतर लोग समय का महत्व तब समझते हैं, जब उनके पास कुछ करने के लिए बहुत कम समय होता है। ये बात सिर्फ हमारे नियंत्रण में है कि हम अपने समय को कहां और कैसे खर्च करते हैं। इसलिए सिर्फ सही कामों पर ध्यान लगाएं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Don't Miss! #Alert: शाहरूख की ये तस्वीर हो रही है वायरल...अगली फिल्म का #FirstLook? शाहरूख खान की अगली फिल्म की पहली तस्वीर वायरल हो रही है और लोग इस फिल्म के लिए बहुत ही ज़्यादा एक्साइटेड हो जाएंगे। शाहरूख खान की रईस सक्सेस पार्टी शानदार थी लेकिन इस पार्टी से एक तस्वीर वायरल हो रही है। और हर कोई इसे उनकी अगली बौने वाली फिल्म का पहला लुक कह रहा है। हालांकि ऐसा कुछ है नहीं। अब ये तो सभी को पता है कि शाहरूख खान की बौने वाली फिल्म सबके आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और वजह बहुत ही छोटी सी है। ये फिल्म पहले सलमान कर रहे थे और उन्होंने छोड़ दी और फिल्म का हीरो एक बौना आदमी है। शाहरूख खान और आनंद एल राय की ये तस्वीर रेड चिलीज़ इंटरटेनमेंट ने भी शेयर की और लिखा कि बौना तैयार हो रहा है। गौरतलब है कि फिल्म में शाहरूक खान पर काफी मेहनत की जा रही है। खासतौर से उनके मेकअप पर। फिल्म का वीएफएक्स का काम शुरू हो चुका है। शाहरूख बौना बनकर कैसे चलेंगे, कैसे हंसेंगे, कैसे बोलेंगे हर चीज़ पर ध्यान दिया जा रहा है। फिल्म अगले साल क्रिस्मस पर रिलीज़ होनी है।
Don't Miss! #Alert: शाहरूख की ये तस्वीर हो रही है वायरल...अगली फिल्म का #FirstLook? शाहरूख खान की अगली फिल्म की पहली तस्वीर वायरल हो रही है और लोग इस फिल्म के लिए बहुत ही ज़्यादा एक्साइटेड हो जाएंगे। शाहरूख खान की रईस सक्सेस पार्टी शानदार थी लेकिन इस पार्टी से एक तस्वीर वायरल हो रही है। और हर कोई इसे उनकी अगली बौने वाली फिल्म का पहला लुक कह रहा है। हालांकि ऐसा कुछ है नहीं। अब ये तो सभी को पता है कि शाहरूख खान की बौने वाली फिल्म सबके आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और वजह बहुत ही छोटी सी है। ये फिल्म पहले सलमान कर रहे थे और उन्होंने छोड़ दी और फिल्म का हीरो एक बौना आदमी है। शाहरूख खान और आनंद एल राय की ये तस्वीर रेड चिलीज़ इंटरटेनमेंट ने भी शेयर की और लिखा कि बौना तैयार हो रहा है। गौरतलब है कि फिल्म में शाहरूक खान पर काफी मेहनत की जा रही है। खासतौर से उनके मेकअप पर। फिल्म का वीएफएक्स का काम शुरू हो चुका है। शाहरूख बौना बनकर कैसे चलेंगे, कैसे हंसेंगे, कैसे बोलेंगे हर चीज़ पर ध्यान दिया जा रहा है। फिल्म अगले साल क्रिस्मस पर रिलीज़ होनी है।
अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की घटना को लेकर विपक्षी पार्टियां सरकार को घेरने में जुटी हैं. इस मसले पर जमकर सियासत हो रही है. इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि गलवान के समय भी देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि न कोई घुसा है और न कोई घुसेगा. उन्होंने अपने बयानों से देश को गुमराह किया था. एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि 9 दिसंबर को घटना होती है और सरकार 12 दिसंबर को संसद में बयान देती है. एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि लाइन ऑफ कंट्रोल के ऊपर चीन गांव बसा रहा है. उन्होंने कहा कि डेपसांग में चीन की सेना बैठी हुई है. सैटेलाइट इमेज से ये पता चलता है. उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सेना मजबूत है, लेकिन सरकार कमजोर है. सरकार चीन मसले पर सबकुछ छिपा रही है. असदुद्दीन ओवैसी ने ये भी दावा किया कि चीन की सरकार ने बफर जोन बनाया है, जिससे हमारी सेना पेट्रोलिंग नहीं कर पाती है. उन्होंने कहा कि चीन को लेकर सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए. चीन हमसे जमीन छीन रहा है. मोदी की सरकार की चीन के बारे में झूठ बोलती है. सरकार को संसद में चीन पर चर्चा करना चाहिए. ओवैसी ने ये भी आरोप लगाया कि संसद में सरकार चर्चा से भाग रही है. 56 इंच का सीना अब क्या हुआ है. चीन के मसले को सरकार गंभीरता से ले. सरकार को अपनी इच्छा शक्ति दिखानी चाहिए.
अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की घटना को लेकर विपक्षी पार्टियां सरकार को घेरने में जुटी हैं. इस मसले पर जमकर सियासत हो रही है. इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि गलवान के समय भी देश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि न कोई घुसा है और न कोई घुसेगा. उन्होंने अपने बयानों से देश को गुमराह किया था. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि नौ दिसंबर को घटना होती है और सरकार बारह दिसंबर को संसद में बयान देती है. एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि लाइन ऑफ कंट्रोल के ऊपर चीन गांव बसा रहा है. उन्होंने कहा कि डेपसांग में चीन की सेना बैठी हुई है. सैटेलाइट इमेज से ये पता चलता है. उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सेना मजबूत है, लेकिन सरकार कमजोर है. सरकार चीन मसले पर सबकुछ छिपा रही है. असदुद्दीन ओवैसी ने ये भी दावा किया कि चीन की सरकार ने बफर जोन बनाया है, जिससे हमारी सेना पेट्रोलिंग नहीं कर पाती है. उन्होंने कहा कि चीन को लेकर सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए. चीन हमसे जमीन छीन रहा है. मोदी की सरकार की चीन के बारे में झूठ बोलती है. सरकार को संसद में चीन पर चर्चा करना चाहिए. ओवैसी ने ये भी आरोप लगाया कि संसद में सरकार चर्चा से भाग रही है. छप्पन इंच का सीना अब क्या हुआ है. चीन के मसले को सरकार गंभीरता से ले. सरकार को अपनी इच्छा शक्ति दिखानी चाहिए.
Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha) : पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय भवन के प्रथम तल पर उपायुक्त अनन्य मित्तल ने ई-गवर्नेंस सोसायटी के तहत क्रियान्वित जन सहायता कोषांग के कार्यालय सोमवार को शुभारंभ किया. उल्लेखनीय है कि पूर्व से क्रियाशील जन सहायता कोषांग के प्रभावी संचालन हेतु पिरामल स्वास्थ्य संगठन के संग जिला प्रशासन के द्वारा विगत अप्रैल माह में एमओयू किया गया था. जिले में संचालित इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए आमजन लैंडलाइन नंबर- 06582-256301 अथवा व्हाट्सएप नंबर- 9279452376 अथवा ईमेल आईडी- [email protected] का प्रयोग कर सकते हैं. इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि भौगोलिक दृष्टिकोण से जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां के व्यक्तियों को अपनी समस्या बताने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि समाहरणालय में जन समस्याओं के निराकरण के लिए जनता मिलन हेतु दो दिवस निर्धारित है. परंतु दूर दराज में रहने वाले लोग मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाते. अब ऐसे लोग मोबाइल मैसेज, व्हाट्सएप, ईमेल आदि के माध्यम से अपनी बातों को प्रशासन तक पहुंचा सकंगे. इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर जन सहायता कोषांग का गठन किया गया है. उन्होंने बताया कि इस पोर्टल पर दर्ज होने वाले प्रत्येक शिकायतों को विभिन्न विभागों के सामंजस्य से हल करते हुए उक्त व्यक्ति को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करवाया जाएगा.
Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय भवन के प्रथम तल पर उपायुक्त अनन्य मित्तल ने ई-गवर्नेंस सोसायटी के तहत क्रियान्वित जन सहायता कोषांग के कार्यालय सोमवार को शुभारंभ किया. उल्लेखनीय है कि पूर्व से क्रियाशील जन सहायता कोषांग के प्रभावी संचालन हेतु पिरामल स्वास्थ्य संगठन के संग जिला प्रशासन के द्वारा विगत अप्रैल माह में एमओयू किया गया था. जिले में संचालित इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए आमजन लैंडलाइन नंबर- छः हज़ार पाँच सौ बयासी-दो लाख छप्पन हज़ार तीन सौ एक अथवा व्हाट्सएप नंबर- नौ दो सात नौ चार पाँच दो तीन सात छः अथवा ईमेल आईडी- [email protected] का प्रयोग कर सकते हैं. इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि भौगोलिक दृष्टिकोण से जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां के व्यक्तियों को अपनी समस्या बताने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि समाहरणालय में जन समस्याओं के निराकरण के लिए जनता मिलन हेतु दो दिवस निर्धारित है. परंतु दूर दराज में रहने वाले लोग मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाते. अब ऐसे लोग मोबाइल मैसेज, व्हाट्सएप, ईमेल आदि के माध्यम से अपनी बातों को प्रशासन तक पहुंचा सकंगे. इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर जन सहायता कोषांग का गठन किया गया है. उन्होंने बताया कि इस पोर्टल पर दर्ज होने वाले प्रत्येक शिकायतों को विभिन्न विभागों के सामंजस्य से हल करते हुए उक्त व्यक्ति को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करवाया जाएगा.
Shani gochar 2022 : शनि ग्रह 29 अप्रैल से ही कुंभ राशि में गोचर कर रहा है जहां रहकर वह 5 जून 2022 को वक्री हुआ। इसके बाद अब शनि 12 जुलाई, 2022 की सुबह 10:28 बजे स्वराशि मकर में वक्री चाल चलेगा। आओ जानते हैं मकर में गोचर से किसे मिलेगी ढैया से मुक्ति और कौन होगा ढैया का शिकार। इस वर्ष अर्थात 29 अप्रैल 2022 को शनि मकर से निकलकर जब कुंभ राशि में भ्रमण करना प्रारंभ किया था तब मीन, कुंभ और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती तथा कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या लगी थी। लेकिन अब 64 दिनों बाद शनि पुनः पुनः मकर में वक्री ही गोचर कर रहे हैं जिसके चलते कर्क और वृश्चिक राशि वालों को ढैया से कुछ समय के लिए राहत मिलेगी। ढैया का असर नहीं होगा लेकिन शनि के मकर में गोचर का असर होगा। दूसरी ओर मिथुन और तुला राशि वालों पर ये फिर से शुरू हो जाएगी ढैय्या। कर्क और वृश्चिक को मिलेगी मुक्ति : 1. कर्क राशि : आपकी राशि के सातवें भाव में शनि का वक्री गोचर होगा। विवाह नहीं हुआ है तो प्रस्ताव मिलेंगे। वैवाहिक जीवन में थोड़ा बहुत तनाव रहेगा। साझेदारी के व्यापार में सतर्क रहना होगा। हालांकि खुद के व्यापार में लाभ होगा। नौकरी में उन्नति होगी। सेहत का ध्यान रखना होगा। 2. वृश्चिक राशि : आपकी राशि के तीसरे भाव में शनि का वक्री गोचर होगा। भाई बहनों से संबंध में खटास आ सकती है। नौकरी में बदलाव की संभावना है। व्यापारियों को उनके पिछले कार्यों में लाभ मिल सकता है। योजना बनाकर काम करें। मिथुन और तुला को लगेगी ढैयाः मिथुन राशि : आपकी राशि के आठवें में शनि का वक्री गोचर होगा। इस दौरान अचानक लाभ या हानि होने की संभावन रहेगी। घटना और दुर्घटना बढ़ सकती है। अध्यात्म की ओर आपका झुकाव रहेगा। यह ढैया आपके जीवन में बढ़ा परिवर्तन ला सकती है। आर्थिक उथल पुथल भी रहेगी। हालांकि कर्ज से मुक्त होने के योग भी बनेंगे। तुला राशि : आपकी राशि के चौथे भाव में वक्री शनि का मकर में गोचर हो रहा है। भूमि या भवन खरीदने के योग बनेंगे। नौकरी और करियर में लाभ होगा। माता की सेहत का ध्यान रखना। व्यापार में भी लाभ की संभावना है। नौकरी में पदोन्नति हो सकती है।
Shani gochar दो हज़ार बाईस : शनि ग्रह उनतीस अप्रैल से ही कुंभ राशि में गोचर कर रहा है जहां रहकर वह पाँच जून दो हज़ार बाईस को वक्री हुआ। इसके बाद अब शनि बारह जुलाई, दो हज़ार बाईस की सुबह दस:अट्ठाईस बजे स्वराशि मकर में वक्री चाल चलेगा। आओ जानते हैं मकर में गोचर से किसे मिलेगी ढैया से मुक्ति और कौन होगा ढैया का शिकार। इस वर्ष अर्थात उनतीस अप्रैल दो हज़ार बाईस को शनि मकर से निकलकर जब कुंभ राशि में भ्रमण करना प्रारंभ किया था तब मीन, कुंभ और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती तथा कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या लगी थी। लेकिन अब चौंसठ दिनों बाद शनि पुनः पुनः मकर में वक्री ही गोचर कर रहे हैं जिसके चलते कर्क और वृश्चिक राशि वालों को ढैया से कुछ समय के लिए राहत मिलेगी। ढैया का असर नहीं होगा लेकिन शनि के मकर में गोचर का असर होगा। दूसरी ओर मिथुन और तुला राशि वालों पर ये फिर से शुरू हो जाएगी ढैय्या। कर्क और वृश्चिक को मिलेगी मुक्ति : एक. कर्क राशि : आपकी राशि के सातवें भाव में शनि का वक्री गोचर होगा। विवाह नहीं हुआ है तो प्रस्ताव मिलेंगे। वैवाहिक जीवन में थोड़ा बहुत तनाव रहेगा। साझेदारी के व्यापार में सतर्क रहना होगा। हालांकि खुद के व्यापार में लाभ होगा। नौकरी में उन्नति होगी। सेहत का ध्यान रखना होगा। दो. वृश्चिक राशि : आपकी राशि के तीसरे भाव में शनि का वक्री गोचर होगा। भाई बहनों से संबंध में खटास आ सकती है। नौकरी में बदलाव की संभावना है। व्यापारियों को उनके पिछले कार्यों में लाभ मिल सकता है। योजना बनाकर काम करें। मिथुन और तुला को लगेगी ढैयाः मिथुन राशि : आपकी राशि के आठवें में शनि का वक्री गोचर होगा। इस दौरान अचानक लाभ या हानि होने की संभावन रहेगी। घटना और दुर्घटना बढ़ सकती है। अध्यात्म की ओर आपका झुकाव रहेगा। यह ढैया आपके जीवन में बढ़ा परिवर्तन ला सकती है। आर्थिक उथल पुथल भी रहेगी। हालांकि कर्ज से मुक्त होने के योग भी बनेंगे। तुला राशि : आपकी राशि के चौथे भाव में वक्री शनि का मकर में गोचर हो रहा है। भूमि या भवन खरीदने के योग बनेंगे। नौकरी और करियर में लाभ होगा। माता की सेहत का ध्यान रखना। व्यापार में भी लाभ की संभावना है। नौकरी में पदोन्नति हो सकती है।
इलैक्ट्रॉनिक प्राइवेट स्वचालित एक्सचेंज (ई.पी.ए. एक्स) से त्वरित और सक्षम आंतरिक संचार सुविधा प्राप्त होती है और इससे व्यक्तियों और मिसिलों का कार्यालय के भीतर बार-बार आना-जाना कम हो जाता है। कंप्यूटरीकृत कार्यालय में स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क ( एल. ए. एन) त्वरित आंतरिक संचार का एक और साधन है। बाह्रय संचार सुविधाएँ :इंटरनेट के माध्यम से कार्य करने वाली इलैक्ट्रॉनिक मेल (ईमेल) सुविधा तथा टेलीफोन लाइनों के जरिए कार्य करने वाली सुविधाएं त्वरित और विश्वसनीय संचार सेवा प्रदान करती हैं तथा लिखा-पढ़ी के काम को कम करने के साथ-साथ डाक संचार में होने वाले विलंब को कम करने में सहायता करती हैं। कागजातों को संभालने के उपकरणःकागज समानुक्रमित्र (पेपर कोलेटर) कटाई और सिलाई मशीनें तथा जिल्दसाजी की मशीनें कुछ ऐसे उपकरण हैं जिनसे सेट बनाने, मिसिलों और रिपोर्टों की सिलाई जैसे कार्यों में लगने वाले समय और श्रम की बचत की जा सकती है। दस्तावेज श्रेडर :यह एक ऐसी मशीन है जिसकी श्रेडिंग द्वारा अवांछित रिकार्डों को निपटाया जा सकता है। रिसोग्राफ :इसका उपयोग उस समय किया जा सकता है जब अधिक सामग्री की प्रतिलिपियाँ तैयार की जानी हों तथा आउटपुट की गुणता साइक्लोस्टाइल से बेहतर अपेक्षित हो । सिरोपरि प्रोजेक्टर, स्लाइड प्रोजेक्टर, एल. सी. डी. प्रोजेक्टर, वीडियो प्रोजेक्सन प्रणाली :- इन मशीनों का उपयोग बड़े समूह के सामने प्रस्तुतीकरण के लिए किया जाता है। वीडियो सम्मेलन उपकरण :- इस मशीन का उपयोग आई एम डी एन लाइनों के द्वारा ऐसा सम्मेलन करने के लिए किया जाता है जिसमें भाग लेने वाले अलगअलग भौगोलिक स्थानों पर स्थित हों ।
इलैक्ट्रॉनिक प्राइवेट स्वचालित एक्सचेंज से त्वरित और सक्षम आंतरिक संचार सुविधा प्राप्त होती है और इससे व्यक्तियों और मिसिलों का कार्यालय के भीतर बार-बार आना-जाना कम हो जाता है। कंप्यूटरीकृत कार्यालय में स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क त्वरित आंतरिक संचार का एक और साधन है। बाह्रय संचार सुविधाएँ :इंटरनेट के माध्यम से कार्य करने वाली इलैक्ट्रॉनिक मेल सुविधा तथा टेलीफोन लाइनों के जरिए कार्य करने वाली सुविधाएं त्वरित और विश्वसनीय संचार सेवा प्रदान करती हैं तथा लिखा-पढ़ी के काम को कम करने के साथ-साथ डाक संचार में होने वाले विलंब को कम करने में सहायता करती हैं। कागजातों को संभालने के उपकरणःकागज समानुक्रमित्र कटाई और सिलाई मशीनें तथा जिल्दसाजी की मशीनें कुछ ऐसे उपकरण हैं जिनसे सेट बनाने, मिसिलों और रिपोर्टों की सिलाई जैसे कार्यों में लगने वाले समय और श्रम की बचत की जा सकती है। दस्तावेज श्रेडर :यह एक ऐसी मशीन है जिसकी श्रेडिंग द्वारा अवांछित रिकार्डों को निपटाया जा सकता है। रिसोग्राफ :इसका उपयोग उस समय किया जा सकता है जब अधिक सामग्री की प्रतिलिपियाँ तैयार की जानी हों तथा आउटपुट की गुणता साइक्लोस्टाइल से बेहतर अपेक्षित हो । सिरोपरि प्रोजेक्टर, स्लाइड प्रोजेक्टर, एल. सी. डी. प्रोजेक्टर, वीडियो प्रोजेक्सन प्रणाली :- इन मशीनों का उपयोग बड़े समूह के सामने प्रस्तुतीकरण के लिए किया जाता है। वीडियो सम्मेलन उपकरण :- इस मशीन का उपयोग आई एम डी एन लाइनों के द्वारा ऐसा सम्मेलन करने के लिए किया जाता है जिसमें भाग लेने वाले अलगअलग भौगोलिक स्थानों पर स्थित हों ।
कामकाजी महिलाओं को घर और दफ्तर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक ओर जहां उन्हें घर को लेकर चिंता लगी रहती है तो साथ दफ्तर के काम का बोझ भी उठाना पड़ता है। पुणे की महिला स्वाति चितलकर की फेसबुक पोस्ट से ऐसा ही एक वाकया दुनिया के सामने आया है। स्वाति के बेटे को बुखार था। लेकिन दफ्तर में काम के चलते वे घर पर बेटे की देखभाल के लिए रूक नहीं पाई। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट की। यह तुरंत वायरल हो गई। उनकी पोस्ट के बाद कुछ लोगों ने स्वाति की तारीफ की। वहीं कुछ ने राजनेताओं पर निशाना साधने के संदर्भ में इसे पढ़ा। इस पर चितलकर ने सफाई दी, "मैं यह कहना चाहती हूं यदि हम सभी साधारण लोग, यदि सभी राजनेता और ऊपर के लोग विनम्रता से काम करें तो हमारे भविष्य का भारत कितना शानदार और सौहार्द्र भरा होगा। " इस पोस्ट को 20 हजार के करीब शेयर किया जा चुका है। खुद स्वाति भी इस पोस्ट के वायरल होने से हैरान रह गई।
कामकाजी महिलाओं को घर और दफ्तर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक ओर जहां उन्हें घर को लेकर चिंता लगी रहती है तो साथ दफ्तर के काम का बोझ भी उठाना पड़ता है। पुणे की महिला स्वाति चितलकर की फेसबुक पोस्ट से ऐसा ही एक वाकया दुनिया के सामने आया है। स्वाति के बेटे को बुखार था। लेकिन दफ्तर में काम के चलते वे घर पर बेटे की देखभाल के लिए रूक नहीं पाई। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट की। यह तुरंत वायरल हो गई। उनकी पोस्ट के बाद कुछ लोगों ने स्वाति की तारीफ की। वहीं कुछ ने राजनेताओं पर निशाना साधने के संदर्भ में इसे पढ़ा। इस पर चितलकर ने सफाई दी, "मैं यह कहना चाहती हूं यदि हम सभी साधारण लोग, यदि सभी राजनेता और ऊपर के लोग विनम्रता से काम करें तो हमारे भविष्य का भारत कितना शानदार और सौहार्द्र भरा होगा। " इस पोस्ट को बीस हजार के करीब शेयर किया जा चुका है। खुद स्वाति भी इस पोस्ट के वायरल होने से हैरान रह गई।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
उपाध्याय पं. इस्तिमलजी म. सा. पं रत्न श्री हस्तिमलजी म. सा. ने प्रार्थना के बाद दो शब्द कहते हुए फरमाया कि जैतारन के आस प.स जैन प्रकाश व तरुण जैन द्वांरा, मालूम हुआ कि वयोवृद्ध प. मंत्री मुनि श्री किसनलालजी म. सा. का स्वर्गवास ता. ३-१-६१ को हो गया है, जानकर मन को बड़ा खेद हुआ । मंत्री मुनि श्री पूज्य धर्मदासजी म. को सम्प्रदाय के वयोवृद्ध एवं शास्त्रज्ञ अनुभवी सन्त थे । आपने दूर दूर तक बिहार कर जिन शासन की प्रभावना को आपके स्वर्गवास से स्था. जैन साधू समाज में बड़ी क्षति पहुँची है। आप बाल्यकाल से ही दीक्षित होकर संयम धर्म पालन करते हुए स्थविर पद पा चुके थे । मरुभूमि में विचरने वाले साधु साध्वी जो पू. भूधरजो म. के परिवार में है अपने मूल पुरुष पू. धर्मदासजी म. की शाखा में होने से स्वर्गीय मंत्रो मुनि श्री के अवसान को विशेष रूप से खटकने लायक समझ रहे हैं । पं. रत्न मुनि सौभाग्य मुनिजी म. आदि मुनिवरों के साथ समवेदना प्रकट करते हुए म. श्री ने श्रावक संघ को निर्वाण कायोत्सर्ग करने को फरमाया। तदनसार चतुर्विध सघ ने लोगस्स का ध्यान कर स्वर्गीय मुनि श्री के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित को । १९-१-६१ पं. रत्न श्री वासीलालजी म. की ओर से यहां पं. रत्न श्री घासीलालजी म. आदि ठा. विराजित हैं उन्हें पंडित रत्न मुनि श्री किशनलालजी म. के स्वर्गवास से बहुत खेद हुआ वे समाज के एक महान् रत्न थे उनका वियोग समाज के लिये बहुत दुःखद हैं। नये रत्न तैयार होते नहीं हैं और पुराने अपने हाथ से चले जाते हैं। कल उनकी स्मृति में उपवास आदि किये गये और शोक प्रस्ताव पास किया गया । यह संदेश पंडित वक्ता श्री सौभाग्यमलजी म. की सेवा में पहुंचा दें। हिम्मतलाल सरसपुर
उपाध्याय पं. इस्तिमलजी म. सा. पं रत्न श्री हस्तिमलजी म. सा. ने प्रार्थना के बाद दो शब्द कहते हुए फरमाया कि जैतारन के आस प.स जैन प्रकाश व तरुण जैन द्वांरा, मालूम हुआ कि वयोवृद्ध प. मंत्री मुनि श्री किसनलालजी म. सा. का स्वर्गवास ता. तीन जनवरी इकसठ को हो गया है, जानकर मन को बड़ा खेद हुआ । मंत्री मुनि श्री पूज्य धर्मदासजी म. को सम्प्रदाय के वयोवृद्ध एवं शास्त्रज्ञ अनुभवी सन्त थे । आपने दूर दूर तक बिहार कर जिन शासन की प्रभावना को आपके स्वर्गवास से स्था. जैन साधू समाज में बड़ी क्षति पहुँची है। आप बाल्यकाल से ही दीक्षित होकर संयम धर्म पालन करते हुए स्थविर पद पा चुके थे । मरुभूमि में विचरने वाले साधु साध्वी जो पू. भूधरजो म. के परिवार में है अपने मूल पुरुष पू. धर्मदासजी म. की शाखा में होने से स्वर्गीय मंत्रो मुनि श्री के अवसान को विशेष रूप से खटकने लायक समझ रहे हैं । पं. रत्न मुनि सौभाग्य मुनिजी म. आदि मुनिवरों के साथ समवेदना प्रकट करते हुए म. श्री ने श्रावक संघ को निर्वाण कायोत्सर्ग करने को फरमाया। तदनसार चतुर्विध सघ ने लोगस्स का ध्यान कर स्वर्गीय मुनि श्री के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित को । उन्नीस जनवरी इकसठ पं. रत्न श्री वासीलालजी म. की ओर से यहां पं. रत्न श्री घासीलालजी म. आदि ठा. विराजित हैं उन्हें पंडित रत्न मुनि श्री किशनलालजी म. के स्वर्गवास से बहुत खेद हुआ वे समाज के एक महान् रत्न थे उनका वियोग समाज के लिये बहुत दुःखद हैं। नये रत्न तैयार होते नहीं हैं और पुराने अपने हाथ से चले जाते हैं। कल उनकी स्मृति में उपवास आदि किये गये और शोक प्रस्ताव पास किया गया । यह संदेश पंडित वक्ता श्री सौभाग्यमलजी म. की सेवा में पहुंचा दें। हिम्मतलाल सरसपुर
बूँद अघात सहहिं गिरि कैंसें । खल के बचन संत सह जैसें ॥ छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई । जस थोरेहु धन खल इतराई ॥ भूमि परत भा ढाबर पानी । जनु जीवहि माया लपटानी ॥ सिमिटि सिमिटि जल भरहिं तलावा । जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा ॥ सरिता-जल जलनिधि महुँ जाई । होई अचल जिमि जिव हरि पाई ॥ हरित भूमि तृन-संकुल समुझि परहिं नहिं पंथ । जिमि पाखंड-बाद तें गुप्त होहिं सदग्रंथ ॥ 16 ।। दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई । बेद पढ़हिं जनु बटु- समुदाई ।। नव पल्लव भए बिटप अनेका । साधक मन जस मिलें बिबेका ॥ आक जबास पात बिनु भयेऊ । जस सुराज खल उद्यम गयऊ ॥ खोजत कतहुँ मिलै नहिं धूरी । करै क्रोध जिमि धर्महि दूरी ॥ ससि-संपन्न सोह महि कैसी । उपकारी कै संपति जैसी ॥ निसि तम घन खद्योत बिराजा । जनु दंभिन कर मिला समाजा ॥ महाबृष्टि चलि फूटि किआरी । जिमि सुतंत्र भए बिगरहिं नारी ॥
बूँद अघात सहहिं गिरि कैंसें । खल के बचन संत सह जैसें ॥ छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई । जस थोरेहु धन खल इतराई ॥ भूमि परत भा ढाबर पानी । जनु जीवहि माया लपटानी ॥ सिमिटि सिमिटि जल भरहिं तलावा । जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा ॥ सरिता-जल जलनिधि महुँ जाई । होई अचल जिमि जिव हरि पाई ॥ हरित भूमि तृन-संकुल समुझि परहिं नहिं पंथ । जिमि पाखंड-बाद तें गुप्त होहिं सदग्रंथ ॥ सोलह ।। दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई । बेद पढ़हिं जनु बटु- समुदाई ।। नव पल्लव भए बिटप अनेका । साधक मन जस मिलें बिबेका ॥ आक जबास पात बिनु भयेऊ । जस सुराज खल उद्यम गयऊ ॥ खोजत कतहुँ मिलै नहिं धूरी । करै क्रोध जिमि धर्महि दूरी ॥ ससि-संपन्न सोह महि कैसी । उपकारी कै संपति जैसी ॥ निसि तम घन खद्योत बिराजा । जनु दंभिन कर मिला समाजा ॥ महाबृष्टि चलि फूटि किआरी । जिमि सुतंत्र भए बिगरहिं नारी ॥
विकारी शब्द -- १ सज्ञा, २. सर्वनाम, ३. विशेषण, ४ क्रिया । अविकारी शब्द - १ क्रियाविशेषण, २ सम्बन्धसूचक, - ३ समुच्चयबोधक, ४ विस्मयादिवोधक । आइनपर विचार किया जायगा । साथ ही, विकारी शब्दो का विकार या परिवर्तन लिंग, वचन, कारक तथा काल आदि के कारण होता है, प्रत इनका भी विवेचन किया जायगा । 'सज्ञा' किसी प्राणी, चीज, गुण, काम या भाव आदि के नाम को कहते है। राम, घोडा, चीटी किसी प्राणी या जीव के नाम है, कुर्सी, आटा, दही चीज के नाम है, भलाई, सचाई गुण के नाम है, खाना, लडाई तथा दौडना काम या क्रिया के नाम है, और वचपन, खटाई, मित्रता भाव के नाम है । ये सभी सज्ञा है । दूसरे शब्दो मे इस परिभाषा को और व्यापक बनाते हुए कहा जा सकता है कि 'किसी के भी नाम को सज्ञा कहते है सज्ञा के तीन भेद हैं१ व्यक्तिवाचक संज्ञा -- जो किसी एक का बोध कराए । जैसे राम, चेतक, दिल्ली, यमुना आदि । यहाँ हम देखते है कि 'राम' किसी एक व्यक्ति ( दशरथ के पुत्र या कोई अन्य ) का नाम है, सभी मनुष्यों का नही । इसी प्रकार 'चेतक' राणा प्रताप के घोडे का नाम है, 'दिल्ली' एक नगर का नाम है और 'यमुना' एक नदी का नाम है। २ जातिवाचक सज्ञा - जो किसी एक पूरी जाति का बोध कराए । ऊपर के उदाहरणो मे हमने देखा कि राम, चेतक,
विकारी शब्द -- एक सज्ञा, दो. सर्वनाम, तीन. विशेषण, चार क्रिया । अविकारी शब्द - एक क्रियाविशेषण, दो सम्बन्धसूचक, - तीन समुच्चयबोधक, चार विस्मयादिवोधक । आइनपर विचार किया जायगा । साथ ही, विकारी शब्दो का विकार या परिवर्तन लिंग, वचन, कारक तथा काल आदि के कारण होता है, प्रत इनका भी विवेचन किया जायगा । 'सज्ञा' किसी प्राणी, चीज, गुण, काम या भाव आदि के नाम को कहते है। राम, घोडा, चीटी किसी प्राणी या जीव के नाम है, कुर्सी, आटा, दही चीज के नाम है, भलाई, सचाई गुण के नाम है, खाना, लडाई तथा दौडना काम या क्रिया के नाम है, और वचपन, खटाई, मित्रता भाव के नाम है । ये सभी सज्ञा है । दूसरे शब्दो मे इस परिभाषा को और व्यापक बनाते हुए कहा जा सकता है कि 'किसी के भी नाम को सज्ञा कहते है सज्ञा के तीन भेद हैंएक व्यक्तिवाचक संज्ञा -- जो किसी एक का बोध कराए । जैसे राम, चेतक, दिल्ली, यमुना आदि । यहाँ हम देखते है कि 'राम' किसी एक व्यक्ति का नाम है, सभी मनुष्यों का नही । इसी प्रकार 'चेतक' राणा प्रताप के घोडे का नाम है, 'दिल्ली' एक नगर का नाम है और 'यमुना' एक नदी का नाम है। दो जातिवाचक सज्ञा - जो किसी एक पूरी जाति का बोध कराए । ऊपर के उदाहरणो मे हमने देखा कि राम, चेतक,
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नैना देवी में श्रद्धालुओं से भरा एक टैंपो अनियंत्रित होकर पहाड़ी से टकरा गया, जिसमें सवार लगभग 20 श्रद्धालु बुरी तरह से घायल हो गए. बता दें कि सभी श्रद्धालु माता जी के दर्शन करके वापस लौट रहे थे. जानकारी के मुताबिक टैंपो में सवार सभी श्रद्धालु हरियाणा से आए थे और नीचे उतराई के दौरान ये हादसा हो गया. बता दें टैंपों में ज्यादा श्रद्धालु होने के कारण टैंपों अचानक अनियंत्रित हो गया और टेंपो पहाड़ी से जाकर टकरा गया, जिससे टेंपो में सवार 20 श्रद्धालु जख्मी हो गए. .
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नैना देवी में श्रद्धालुओं से भरा एक टैंपो अनियंत्रित होकर पहाड़ी से टकरा गया, जिसमें सवार लगभग बीस श्रद्धालु बुरी तरह से घायल हो गए. बता दें कि सभी श्रद्धालु माता जी के दर्शन करके वापस लौट रहे थे. जानकारी के मुताबिक टैंपो में सवार सभी श्रद्धालु हरियाणा से आए थे और नीचे उतराई के दौरान ये हादसा हो गया. बता दें टैंपों में ज्यादा श्रद्धालु होने के कारण टैंपों अचानक अनियंत्रित हो गया और टेंपो पहाड़ी से जाकर टकरा गया, जिससे टेंपो में सवार बीस श्रद्धालु जख्मी हो गए. .
बीते दो दिनों में डीजल 40 पैसे सस्ता हुआ है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली और मुंबई में डीजल की कीमत में 20 पैसे की राहत दी गई है। मुंबई में डीजल की नई कीमत 97. 04 रुपए प्रति लीटर है और दिल्ली में यह 89. 47 रुपए प्रति लीटर है। चेन्नई में डीजल की कीमत में 18 पैसे की कटौती की गई, जिससे नई दरें 94. 02 रुपए प्रति लीटर हो गईं। कोलकाता की बात करें तो डीजल 25 पैसे सस्ता हुआ है। अब एक लीटर डीजल की कीमत 92. 57 रुपए प्रति लीटर हो गई है। बता दें कि बुधवार को भी डीजल की कीमत में 20 पैसे की कटौती दर्ज की गई थी। पेट्रोल में बदलाव नहींः हालांकि, पेट्रोल की कीमतों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। बीते 32 दिनों से पेट्रोल के दाम स्थिर हैं। 17 जुलाई से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की खुदरा कीमत 101. 84 रुपए प्रति लीटर है। मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमत क्रमशः 107. 83 रुपए, 99. 47 रुपए और 102. 08 रुपए प्रति लीटर है। बता दें कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर हैं। बीते दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत ज्यादा राहत की संभावनाओं से इनकार कर दिया था। उन्होंने बताया था कि हम एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की स्थिति में नहीं हैं, हमारे हाथ बंधे हुए हैं। वित्त मंत्री ने बताया था कि राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर इस पर कोई रास्ता निकालना होगा। निर्मला सीतारमण के मुताबिक ऑयल बॉन्ड की वजह से राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। पिछले पांच सालों में सरकार ने सिर्फ ऑयल बॉन्ड के ब्याज के रूप में 70,195. 72 करोड़ रुपए भुगतान किया है।
बीते दो दिनों में डीजल चालीस पैसे सस्ता हुआ है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली और मुंबई में डीजल की कीमत में बीस पैसे की राहत दी गई है। मुंबई में डीजल की नई कीमत सत्तानवे. चार रुपयापए प्रति लीटर है और दिल्ली में यह नवासी. सैंतालीस रुपयापए प्रति लीटर है। चेन्नई में डीजल की कीमत में अट्ठारह पैसे की कटौती की गई, जिससे नई दरें चौरानवे. दो रुपयापए प्रति लीटर हो गईं। कोलकाता की बात करें तो डीजल पच्चीस पैसे सस्ता हुआ है। अब एक लीटर डीजल की कीमत बानवे. सत्तावन रुपयापए प्रति लीटर हो गई है। बता दें कि बुधवार को भी डीजल की कीमत में बीस पैसे की कटौती दर्ज की गई थी। पेट्रोल में बदलाव नहींः हालांकि, पेट्रोल की कीमतों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। बीते बत्तीस दिनों से पेट्रोल के दाम स्थिर हैं। सत्रह जुलाई से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की खुदरा कीमत एक सौ एक. चौरासी रुपयापए प्रति लीटर है। मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में पेट्रोल की कीमत क्रमशः एक सौ सात. तिरासी रुपयापए, निन्यानवे. सैंतालीस रुपयापए और एक सौ दो. आठ रुपयापए प्रति लीटर है। बता दें कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर हैं। बीते दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत ज्यादा राहत की संभावनाओं से इनकार कर दिया था। उन्होंने बताया था कि हम एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की स्थिति में नहीं हैं, हमारे हाथ बंधे हुए हैं। वित्त मंत्री ने बताया था कि राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर इस पर कोई रास्ता निकालना होगा। निर्मला सीतारमण के मुताबिक ऑयल बॉन्ड की वजह से राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। पिछले पांच सालों में सरकार ने सिर्फ ऑयल बॉन्ड के ब्याज के रूप में सत्तर,एक सौ पचानवे. बहत्तर करोड़ रुपए भुगतान किया है।
इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें संस्करण यानी आईपीएल 2020 की शुरूआत से पहले दिल्ली कैपिटल्स की टीम को बड़ा झटका लगा है. इंग्लैंड के विस्फोटक बल्लेबाज जेसन रॉय ने यूएई में खेले जाने वाले आईपीएल के 13वें सीजन से अपना नाम वापस ले लिया है. दिल्ली कैपिटल्स ने उनकी जगह ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज डैनियल सैम्स को टीम में शामिल किया है. इससे पहले भी दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने क्रिस वोक्स के नाम वापस लेने के बाद, साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज एनरिच नॉर्टजे को अपने साथ जोड़ा था. बता दें कि जेशन रॉय बुधवार (26 अगस्त) को प्रैक्टिस के दौरान चोटिल होने के कारण पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से बाहर हो गए थे. बता दें जेसन रॉय की मांसपेशियों में खिंचाव है और उन्होंने खुद आईपीएल से अपना नाम वापस ले लिया है. दिल्ली कैपिटल्स ने जेसन रॉय की जगह ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर डेनियल सैम्स को अपनी टीम में जगह दी है. वहीं अगर जेसन रॉय के आईपीएल करियर की बात करें तो रॉय ने आईपीएल में अब तक केवल 8 मैच खेले हैं. इनमें उन्होंने 29. 8 की औसत से 179 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक शामिल है. रॉय इंग्लैंड और दिल्ली कैपिटल्स के दूसरे खिलाड़ी हैं ,जिन्होंन आईपीएल 2020 से अपना नाम वापस लिया है. इससे पहले अप्रैल में क्रिस वोक्स ने निजी कारणों के चलते अपना नाम वापस लिया था. हाल ही में उनकी जगह उनकी जगह साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे को दिल्ली कैपिटल्स ने अपने साथ जोड़ा था. बता दें कि आईपीएल 2020 के लिए पिछले साल दिसंबर में हुई नीलामी में दिल्ली ने रॉय को उनके बेस प्राइस 1. 50 करोड़ में खरीदा था. म्स ने 5 फर्स्ट क्लास, 11 लिस्ट ए और 37 टी20 मैच खेले हैं. सैम्स पहली बार आईपीएल में खेलते हुए नजर आएंगे. सैम्स इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी-20 और वनडे सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया की 21 सदस्यीय टीम का हिस्सा है.
इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें संस्करण यानी आईपीएल दो हज़ार बीस की शुरूआत से पहले दिल्ली कैपिटल्स की टीम को बड़ा झटका लगा है. इंग्लैंड के विस्फोटक बल्लेबाज जेसन रॉय ने यूएई में खेले जाने वाले आईपीएल के तेरहवें सीजन से अपना नाम वापस ले लिया है. दिल्ली कैपिटल्स ने उनकी जगह ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज डैनियल सैम्स को टीम में शामिल किया है. इससे पहले भी दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने क्रिस वोक्स के नाम वापस लेने के बाद, साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज एनरिच नॉर्टजे को अपने साथ जोड़ा था. बता दें कि जेशन रॉय बुधवार को प्रैक्टिस के दौरान चोटिल होने के कारण पाकिस्तान के खिलाफ टी-बीस सीरीज से बाहर हो गए थे. बता दें जेसन रॉय की मांसपेशियों में खिंचाव है और उन्होंने खुद आईपीएल से अपना नाम वापस ले लिया है. दिल्ली कैपिटल्स ने जेसन रॉय की जगह ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर डेनियल सैम्स को अपनी टीम में जगह दी है. वहीं अगर जेसन रॉय के आईपीएल करियर की बात करें तो रॉय ने आईपीएल में अब तक केवल आठ मैच खेले हैं. इनमें उन्होंने उनतीस. आठ की औसत से एक सौ उन्यासी रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक शामिल है. रॉय इंग्लैंड और दिल्ली कैपिटल्स के दूसरे खिलाड़ी हैं ,जिन्होंन आईपीएल दो हज़ार बीस से अपना नाम वापस लिया है. इससे पहले अप्रैल में क्रिस वोक्स ने निजी कारणों के चलते अपना नाम वापस लिया था. हाल ही में उनकी जगह उनकी जगह साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे को दिल्ली कैपिटल्स ने अपने साथ जोड़ा था. बता दें कि आईपीएल दो हज़ार बीस के लिए पिछले साल दिसंबर में हुई नीलामी में दिल्ली ने रॉय को उनके बेस प्राइस एक. पचास करोड़ में खरीदा था. म्स ने पाँच फर्स्ट क्लास, ग्यारह लिस्ट ए और सैंतीस टीबीस मैच खेले हैं. सैम्स पहली बार आईपीएल में खेलते हुए नजर आएंगे. सैम्स इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी-बीस और वनडे सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया की इक्कीस सदस्यीय टीम का हिस्सा है.
बिहार के अरवल जिले के एसपी राजीव रंजन ने थानों में जब्त अवैध हथियारों को गलाकर खेती के लिए औजार बनवाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है. फिलहाल 30 पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई है. अरवलः बिहार के थानों में जब्त अवैध हथियारों को गलाकर अब पुलिस खेती के लिए औजार बनवाएगी. इसकी शुरुआत राज्य के अरवल जिले से होने जा रही है. जिले के एसपी राजीव रंजन ने इसके लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है. पहले जब्त किए गए अवैध हथियारों को नष्ट कर दिया जाता था. इसके लिए पुलिस को अलग से खर्च करना पड़ता था. लेकिन अब थानों में जब्त अवैध हथियारों के सदुपयोग की अनूठी पहल की गई है. एसपी राजीव रंजन ने कहा कि शुरुआत में तीस पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से आदेश मांगा गया है. आदेश आने पर आगे अन्य मामलों में जब्त हथियारों को भी गलाने की प्रकिया शुरू की जाएगी. जिले के थाने और चौकियों के मालखानों में जमा अवैध हथियारों को गलाकर खुरपी, कुदाल, हसिया, खेती बनाने की तैयारी पुलिस काफी समय से कर रही है. जिला पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों और चौकियों से अवैध हथियारों की रिपोर्ट मांगी है. एसपी ने बताया कि फिलहाल 30 पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई है. जिले के थानों में अपराधियों से जब्त हथियार मालखाने में दशकों से बंद पड़े हैं. अदालत से मुकदमे का फैसला आने के बाद भी इन्हें नष्ट नहीं किया जा सका है. एसपी ने बताया कि इसे न तो नीलाम किया जा सकता न ही किसी को लौटाया जा सकता है. अब ऐसे हथियारों के रचनात्मक कार्य में उपयोग के लिए कृषि उपकरण निर्माण की सोच बनी है. ऐसे हथियारों को कोर्ट से अनुमति लेने के बाद पुलिस की निगरानी में गलाकर खेती के औजार बनाए जाएंगे. अनुमति के बाद मालखाने से निकालकर पुलिस निगरानी में लोहार की भट्ठी में गलाकर लोहा अलग कर लिया जाएगा. इससे खेती के औजार तैयार किए जाएंगे.
बिहार के अरवल जिले के एसपी राजीव रंजन ने थानों में जब्त अवैध हथियारों को गलाकर खेती के लिए औजार बनवाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है. फिलहाल तीस पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई है. अरवलः बिहार के थानों में जब्त अवैध हथियारों को गलाकर अब पुलिस खेती के लिए औजार बनवाएगी. इसकी शुरुआत राज्य के अरवल जिले से होने जा रही है. जिले के एसपी राजीव रंजन ने इसके लिए कोर्ट से अनुमति मांगी है. पहले जब्त किए गए अवैध हथियारों को नष्ट कर दिया जाता था. इसके लिए पुलिस को अलग से खर्च करना पड़ता था. लेकिन अब थानों में जब्त अवैध हथियारों के सदुपयोग की अनूठी पहल की गई है. एसपी राजीव रंजन ने कहा कि शुरुआत में तीस पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से आदेश मांगा गया है. आदेश आने पर आगे अन्य मामलों में जब्त हथियारों को भी गलाने की प्रकिया शुरू की जाएगी. जिले के थाने और चौकियों के मालखानों में जमा अवैध हथियारों को गलाकर खुरपी, कुदाल, हसिया, खेती बनाने की तैयारी पुलिस काफी समय से कर रही है. जिला पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों और चौकियों से अवैध हथियारों की रिपोर्ट मांगी है. एसपी ने बताया कि फिलहाल तीस पुराने मामलों में जब्त हथियारों को गलाने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी गई है. जिले के थानों में अपराधियों से जब्त हथियार मालखाने में दशकों से बंद पड़े हैं. अदालत से मुकदमे का फैसला आने के बाद भी इन्हें नष्ट नहीं किया जा सका है. एसपी ने बताया कि इसे न तो नीलाम किया जा सकता न ही किसी को लौटाया जा सकता है. अब ऐसे हथियारों के रचनात्मक कार्य में उपयोग के लिए कृषि उपकरण निर्माण की सोच बनी है. ऐसे हथियारों को कोर्ट से अनुमति लेने के बाद पुलिस की निगरानी में गलाकर खेती के औजार बनाए जाएंगे. अनुमति के बाद मालखाने से निकालकर पुलिस निगरानी में लोहार की भट्ठी में गलाकर लोहा अलग कर लिया जाएगा. इससे खेती के औजार तैयार किए जाएंगे.
टाइम मशीन की कहानियां तो आपने फिल्मों में और टीवी सिरियल में बहुत देखी होंगी। यही नहीं कई शोध संस्थान दशकों से समय में आगे पीछे जाने पर रीसर्च कर रहे है। अब अमेरिका में एक शख्स ने दावा किया है कि वह इस समय का नहीं साल 2671 से आया है। यही नहीं उसने तमाम दावे किए हैं। उसने बताया है कि विश्व युद्ध कब होगा, एलियन धरती पर कब अटैक करेंगे और ऐसी तमाम बातों की उसने भविष्यवाणी। इस शख्स का नाम एनो एलारिक नाम के इस शख्स का कहना है कि वह साल दो हजार छह सौ इकहत्तर से लौटा है। उसने बताया इन सैकड़ों सालों में दुनिया में क्या क्या और कब कब हो चुका है। उसका दावा है कि उसे एक एक घटना के बारे में सटीक जानकारी है। उसे पता है कि तीसरा विश्वयुद्ध कब होगा। इन सब बातों पर वैज्ञानिक चिंता ही कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर एलोनिक टाइम ट्रेवल नाम से अकाउंट भी बना रखा है। उसकी भविष्यवाणियों ने तमाम लोगों का ध्यान खींचा है और सोशल मीडिया पर उसके हजारों फॉलोअर्स है। उसने दावा किया तीसरा विश्वयुद्ध अगले 2 साल बाद होगा। युवक ने दावा किया कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति रॉन्ग डिसएंटेज बनेंगे।
टाइम मशीन की कहानियां तो आपने फिल्मों में और टीवी सिरियल में बहुत देखी होंगी। यही नहीं कई शोध संस्थान दशकों से समय में आगे पीछे जाने पर रीसर्च कर रहे है। अब अमेरिका में एक शख्स ने दावा किया है कि वह इस समय का नहीं साल दो हज़ार छः सौ इकहत्तर से आया है। यही नहीं उसने तमाम दावे किए हैं। उसने बताया है कि विश्व युद्ध कब होगा, एलियन धरती पर कब अटैक करेंगे और ऐसी तमाम बातों की उसने भविष्यवाणी। इस शख्स का नाम एनो एलारिक नाम के इस शख्स का कहना है कि वह साल दो हजार छह सौ इकहत्तर से लौटा है। उसने बताया इन सैकड़ों सालों में दुनिया में क्या क्या और कब कब हो चुका है। उसका दावा है कि उसे एक एक घटना के बारे में सटीक जानकारी है। उसे पता है कि तीसरा विश्वयुद्ध कब होगा। इन सब बातों पर वैज्ञानिक चिंता ही कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर एलोनिक टाइम ट्रेवल नाम से अकाउंट भी बना रखा है। उसकी भविष्यवाणियों ने तमाम लोगों का ध्यान खींचा है और सोशल मीडिया पर उसके हजारों फॉलोअर्स है। उसने दावा किया तीसरा विश्वयुद्ध अगले दो साल बाद होगा। युवक ने दावा किया कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति रॉन्ग डिसएंटेज बनेंगे।
बखरी के डरहा स्थित चंद्रभागा नदी सहित कई चौर और तालाब के पानी से सिंघाड़े की खेती प्रमुखता से होती है। घर की महिलाएं भी पुरुष के साथ मिलकर सिंघाड़ा की खेती करते हैं। पानी से निकालने के बाद पुरुष और महिला दोनों मिलकर बाहरी व्यापारियों के हाथ बेचने के साथ-साथ परिहारा, बगरस, बखरी बाजारों आदि जगहों पर खुद ठेला या टोकरी में रखकर बेचते हैं। इनके खुद मार्केटिंग करने पर प्रतिकिलो 80 रुपए तक के भाव मिल जाते हैं। वहीं, अच्छी उपज के समय सिंघाड़ों को पकने के बाद सुखा देते हैं। सूखने के बाद सिंघाड़े एक सौ रुपए प्रतिकिलो के भाव तक बिकते हैं। उक्त फल का व्यवसाय करने वाले किसान गोढ़ियारी निवासी कैलाश सहनी ने बताया कि बखरी में बारिश से पहले अंकुरित पौधे रोपे जाते हैं। पानी भरने तक सिंघाड़े की बेल ऊपरी सतह पर फैल जाती है। बेल पर निपजे सिंघाड़ों को तोड़ने के लिए छोटी नाव पर बैठकर जाना पड़ता है। वह भी नाव में एक ही व्यक्ति सवार होता है। तोड़ते समय काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि नदी में करीब 20 फीट पानी भरा रहता है। जिसके कारण इसे तोड़कर पानी से निकालना जोखिम भरा काम है। पानी में पैदा होने वाला तिकोने आकार के फल सिंघाड़ा के दो हिस्से में सींग की तरह दो कांटे छिलके के साथ होते हैं। तालाबों तथा रुके हुए पानी में पैदा होने वाले सिंघाड़े के फूल अगस्त में आकर सितम्बर-अक्तूबर में फल का रूप ले लेता है। सिंघाड़ा अपने पोषक तत्वों, कुरकुरेपन और अनूठे स्वाद की वजह से खूब पसंद किया जाता है। व्रत-उपवास में सिंघाड़े को फलाहार में शामिल किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर और पीसकर बनाए गए आटे का सेवन किया जाता है। असल में एक फल होने के कारण इसे अनाज नहीं मान कर फलाहार का दर्जा दिया गया है। सिंघाड़ा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-बी एवं सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स, रायबोफ्लेबिन जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़ा में भैंस के दूध की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे अमृत तुल्य बताते हुए पौष्टिक तत्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव करता है। इसके अलावा थायरॉयड और घेंघा रोग, गले की खरास, टॉन्सिल, बाल झड़ने की समस्या, फटी एड़ियों, बुखार और घबराहट में फायदेमंद होने के साथ वजन बढ़ाने का भी रामवाण उपाय है। गर्भाशय की दुर्बलता व पित्त की अधिकता से गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही जिन स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है, उन्हें सिंघाड़ा खाने से लाभ होता है। इसके सेवन से भ्रूण को पोषण मिलता है और वह स्थिर रहता है। सात महीने की गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है। सिंघाड़े के नियमित और उपयुक्त मात्र में सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ और सुंदर होता है।
बखरी के डरहा स्थित चंद्रभागा नदी सहित कई चौर और तालाब के पानी से सिंघाड़े की खेती प्रमुखता से होती है। घर की महिलाएं भी पुरुष के साथ मिलकर सिंघाड़ा की खेती करते हैं। पानी से निकालने के बाद पुरुष और महिला दोनों मिलकर बाहरी व्यापारियों के हाथ बेचने के साथ-साथ परिहारा, बगरस, बखरी बाजारों आदि जगहों पर खुद ठेला या टोकरी में रखकर बेचते हैं। इनके खुद मार्केटिंग करने पर प्रतिकिलो अस्सी रुपयापए तक के भाव मिल जाते हैं। वहीं, अच्छी उपज के समय सिंघाड़ों को पकने के बाद सुखा देते हैं। सूखने के बाद सिंघाड़े एक सौ रुपए प्रतिकिलो के भाव तक बिकते हैं। उक्त फल का व्यवसाय करने वाले किसान गोढ़ियारी निवासी कैलाश सहनी ने बताया कि बखरी में बारिश से पहले अंकुरित पौधे रोपे जाते हैं। पानी भरने तक सिंघाड़े की बेल ऊपरी सतह पर फैल जाती है। बेल पर निपजे सिंघाड़ों को तोड़ने के लिए छोटी नाव पर बैठकर जाना पड़ता है। वह भी नाव में एक ही व्यक्ति सवार होता है। तोड़ते समय काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि नदी में करीब बीस फीट पानी भरा रहता है। जिसके कारण इसे तोड़कर पानी से निकालना जोखिम भरा काम है। पानी में पैदा होने वाला तिकोने आकार के फल सिंघाड़ा के दो हिस्से में सींग की तरह दो कांटे छिलके के साथ होते हैं। तालाबों तथा रुके हुए पानी में पैदा होने वाले सिंघाड़े के फूल अगस्त में आकर सितम्बर-अक्तूबर में फल का रूप ले लेता है। सिंघाड़ा अपने पोषक तत्वों, कुरकुरेपन और अनूठे स्वाद की वजह से खूब पसंद किया जाता है। व्रत-उपवास में सिंघाड़े को फलाहार में शामिल किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर और पीसकर बनाए गए आटे का सेवन किया जाता है। असल में एक फल होने के कारण इसे अनाज नहीं मान कर फलाहार का दर्जा दिया गया है। सिंघाड़ा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-बी एवं सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स, रायबोफ्लेबिन जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़ा में भैंस के दूध की तुलना में बाईस प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे अमृत तुल्य बताते हुए पौष्टिक तत्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव करता है। इसके अलावा थायरॉयड और घेंघा रोग, गले की खरास, टॉन्सिल, बाल झड़ने की समस्या, फटी एड़ियों, बुखार और घबराहट में फायदेमंद होने के साथ वजन बढ़ाने का भी रामवाण उपाय है। गर्भाशय की दुर्बलता व पित्त की अधिकता से गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही जिन स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है, उन्हें सिंघाड़ा खाने से लाभ होता है। इसके सेवन से भ्रूण को पोषण मिलता है और वह स्थिर रहता है। सात महीने की गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है। सिंघाड़े के नियमित और उपयुक्त मात्र में सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ और सुंदर होता है।
हमारे कर्तृत्वके कारण हमारा अहंकार वढा हो, तो हमें देखना चाहिये कि हमारा कर्तृत्व सचमुच हमारा अपना महं' की मर्यादा है या नहीं। हमारा शरीर विश्वके व्यापारमें अंक निमित्तमात्र वस्तु है, असमें कुछ भरा जाता है मिसलिये वह वडता है और असमें से कुछ न कुछ रोज विश्वमें फेंका भी जाता है, मिस व्यवहारमें शरीर वीचमें केवल अंक मचेतन कोठी जैसा लगता है । चेतनाके कारण यह कोठी कुछ समय तक वढती है और फिर क्षीण होकर सपूर्ण नाशको प्राप्त हो जाती है। समें वीचमें जो अपनापन लगता है वह नाममात्रका है, असलमें तो वह विश्वप्रकृतिका अंक खेल है । जिसी तरह हमारे चित्त, चेतन, प्राण, सकल्प, ज्ञान, विवेक, भाव, मस्कार, गुण, विचार वगैरा विशेष रूपसे अनुभवमें आनेवाले सव गुण हमें विश्वसे ही प्राप्त हुये है । वे हम तक मानवजातिकी विरासतसे आ पहुचे है । और अन सवका पोषण वर्वन भी विश्वके अन्हीं तत्त्वोसे होकर हमारे द्वारा सुनका अधिक स्पष्ट दशामें प्रकटीकरण होता है। विश्वके कुल मिलाकर अपरंपार व्यापारको तुलनामें यह विलकुल तुच्छ वात है। परन्तु अपने 'अह' के कारण हमारा कर्तव्य हमे जितना महान और भव्य लगता है कि जुमके आगे विश्वका अगाव कर्तृत्व हमे दिखाली नही देता । सच पूछा जाय तो विश्वके कर्तृत्वके सामने हमारा यह और कर्तृत्व अणुके वरावर भी होगा या नहीं, जिसमें शका होती है। हमारे प्राण, सकल्प, ज्ञान वगैरा अपर बतायी हुली सभी वात हमें विरासत में मिलती है, जिसलिये जैसा अहंकार रखना बुचित नहीं कि वे सब हमारी ही कमाली है । जिसी तरह हममें होनेवाला अनका दर्वन या विकास भी केवल हमारा ही कर्तृत्व है, जैसा भी हम नहीं कह सकते। फेंफड़ोकी खराव हवा बाहर निकालकर बाहरकी अच्छी हवा लेकर ही हम जीते हैं। जिसके लिये चाहर अच्छी हवाका होना जरूरी है। किसी प्रकार विश्वमे भी अच्छे तत्त्व हो तो ही वे हममें प्रविष्ट होकर हमारे द्वारा प्रगट हो सकते है। हमारे शरीरमें चेतन, चित्त, प्राण और सकल्पकी केवल स्पष्ट दशा है । परन्तु अनका सचय हमारे पास बहुत थोडा है। जैसे शरीरको रोज अच्छे अनुकूल द्रव्योका पोषण न मिले तो वह कायम नही रह सकता, वैसे ही हमारे चेतन, चित्त, प्राण वगैराको भी बाहरसे पोषण न मिले तो अनकी स्थिति भी कायम नही रहेगी । हममें दिखाओ देनेवाले ये सारे स्पष्ट तत्त्व विश्वमे हमेशा अस्पष्ट दशामे अपरपार मौजूद ही रहते है । ये तत्त्व दृष्टिको दीखनेवाले या किसी भी अिन्द्रियगोचर व्यक्त पदार्थमे अव्यक्त रूपमे रहते है। पदार्थोमे कितने विलक्षण गुण- वर्म अव्यक्त रूपमे निवास करते है, यह वनस्पति और औषविका थोडासा अध्ययन करने पर मालूम हो जाता है। वायरलेस, रेडियो या ध्वनिशास्त्रसे अब हमे यकीन हो गया है कि ध्वनिकी तरगें हजारो मील दूर तक जाती है, और बिजलीकी तथा विशेष यत्रोकी मददसे वे हमे गोचर हो सकती है। जिससे साबित हो जाता है कि हमे गोचर न होनेवाली अव्यक्त तरगोके अपार आन्दोलन पृथ्वी पर सतत जारी रहते है । अिसी प्रकार विश्वमे सर्वत्र प्राणतत्त्व, मनतत्त्व, बुद्धितत्त्व, चेतन, सकल्प, सस्कार, ज्ञान, विचार - मिन सबकी तरगोके आन्दोलन भी सतत जारी रहते है। ये आन्दोलन अच्छेचुरे दोनो प्रकारके होते है। सृष्टिमे जैसे सुगध और दुर्गध है, वैसे ही सत्सकल्प औौर असत्सकल्प, सद्विचार और दुविचार, सद्गुण और दुर्गुण, सत्कर्म और असत्कर्म, अिन सबके आन्दोलन हमेशा होते रहते है। विश्वमें ही अत्पत्ति, स्थिति और लयका धर्म होनेसे असमें सदा सक्रमण होता ही रहता है । विश्वका यही धर्म चित्त और चैतन्यमे अलग-अलग सत्-असत् कर्म, विचार और सकल्पके रूपमे मानवजगतर्फे प्रगट रूपसे दिखाओ देता है। विश्वमें सतत होनेवाले सक्रमणोके अव्यक्त आन्दोलन, मनुष्य तथा अन्य चेतन जगत् द्वारा होनेवाले भिन्न-भिन्न कर्म, सकल्प, विचार और सस्कारके असंख्य आन्दोलत और जिन सबकी अनत प्रकारकी तरगें विश्वमे सतत जारी ही रहती है । जैसी कल्पनातीत असल्य तरगोमें से हरनेक जीव अपनी अपनी जीवदशाके अनुसार अनुकूल तर अपनेमें धारण करके अपने चित्त, चेतन, प्राण और सकल्पका पोषण करता है । यह क्रिया असके द्वारा ज्ञानपूर्वक न भी होती हो तो जैसे पेड़ कुदरतसे - मिट्टी, पानी, हवा वगैरासे अपने अनुकूल तत्त्व कुदरतके नियमानुसार खीच लेता है और अपनी वृद्धि करता है, या जैसे गर्भ माताके गुरीरमें से अपने लिये जरूरी तत्त्व, सस्कार, दूसरे गुण-वर्म और मानवजातिका अत्तराविकार अनजाने लेता है और अपनी विशेषता वढाता है, असी तरह दूसरे जीव या मनुष्य भी बाहरके आन्दोलनोमे से मजातीय तर खीचकर अन तत्त्वीको आत्मसात् करता है । भिन्न-भिन्न स्वाद और गुण-धर्मवाली वनसति अंक ही जमीन और पानीमें से अपने अनुकूल द्रव्य खोचकर अपने-अपने स्वाद और गुण-धर्मका पोषण करती है । मनुष्यके प्राण, चित्त, चेतन, सकल्प, विचार आदिको भी जरूरी अनुरूप तत्त्व विश्वमें होनेवाले कल्पनातीत आन्दोलनो और तरंगोसे मिलते है । हम शुद्ध चरित्र होनेका सकल्प कर ले, तो विश्वमें आन्दोलित होनेवाली खुसी किस्मकी तरंगें हमारे चित्तकी ओर मुड़ेंगी, हममें लेकरम होगी और हमारे मूल सकल्पको वल पहुचायेंगी। और हमारे सकल्प, विचार, हेतु अशुद्ध और हीन होगे, तो विश्वकी अपवित्र तरंगे हमारे चित्तको दृढ़ती आयेंगी और हममें घुलमिलकर हमें अधिक हीन वना ढंगो । विश्वके बिसी नियमके अनुसार हमारे शुद्धअशुद्ध विचारो और संकल्पोकी तरगे भी सतत बाहर फैलती रहती हूँ और विश्वके शुद्ध अशुद्ध आन्दोलनों और तरगोमें वृद्धि करती है। जिस पर विचार करनेसे स्पष्ट हो जाता है कि शुद्ध या अशुद्ध विचार और सकल्प धारण करनेवाला और कर्म करनेवाला मनुष्य स्वय शुद्ध या अशुद्ध होता रहता है, और विश्व भी अनी प्रकारके आन्दोलनो और तरगोकी वृद्धि करता है। विश्वका यह नियम है। सृष्टिका यह धर्म है। परमेश्वरका यह कानून है । अिस दृष्टिसे देखते हुये विश्वमे सदैव होनेवाले आन्दोलनोमे से ही शुद्ध या अशुद्ध तरगें हममे आती है और वहा अधिक स्पष्ट रूप धारण करके हमारे द्वारा बाहर निकलती है। जिस समय, अिस क्षण मेरे द्वारा प्रकट होनेवाले ये विचार केवल मेरे ही है, यह मै नही कह सकता । असख्य लोगोके अस्पष्ट सकल्पो और विचारोकी तरगे विश्वके आन्दोलनोमें से कुदरती तौर पर मुझ तक आकर शायद मेरे द्वारा अधिक स्पष्ट रूपमे वाहर निकलती होगी । परन्तु यह कार्य मेरे हृदयमे कोओ न कोभी शुभेच्छा हो तो ही विश्व के नियमानुसार अिस ढगसे होगा । सत तुकारामने कहा है किः आपुलिया वळे नाही मी बोलत । सखा कृपावत वाचा त्याची । काय म्या पामरे वोलावी अत्तरे । परि त्या विश्वभरे बोलविले ।। ( मै अपनी खुदकी ताकतसे नही बोलता । मेरा सखा कृपालु हरि है, असीकी यह वाणी है। मेरे जैसा पामर क्या बोल बोले ? परन्तु अस विश्वभर प्रभुने मुझसे कहलवाये है । ) जिन अनुभवपूर्ण मुद्गारोमें विश्वका यही नियम परमेश्वरका यही कानून - दिखाओ देता है । विश्वके व्यापारमें हम केवल निमित्तमात्र हो, तो भी अस विश्वशक्तिमे से हमारे चित्त चैतन्यमे कुछ विशेष शक्तिया आजी है। वे शक्तिया है विवेक, सकल्प, सयम और निग्रह । हममे रहनेवाले 'अह' के कारण अिन विशेष शक्तियोका हमें भान होता है । अिन विशेष शक्तियोका पोषण विश्वके अन्ही अव्यक्त तत्त्वोसे होता हो, तो भी हम किसी हद तक अपनी अिच्छानुसार जिनका उपयोग कर सकते हैं -- जितनी छूट और स्वतंत्रता हमें विश्वशक्तिके किसी निश्चित नियमसे ही मिली हुआ है । अगर हम असका अपयोग करके अपना चित्त शुद्ध रखनेका प्रयत्न करते रहें, तो हमारे हृदय में विश्वकी शुद्ध तरंगें दाखिल होकर हमसे सत्कर्म करानेमें सहायक होगी। विश्वकी अवस्थामें सदैव सक्रमण और मुसीसे विकास होते होते हमे मानव स्वरूप प्राप्त हुआ है। यह स्वरूप जुस विश्वका केवल आवर्त या आविर्भाव नही है। जिस स्वरूपकी निमितिका कोजी निश्चित क्रम है। विशेष परम्परासे वह जिस स्थितिको पहुचा है। असके पीछे विश्वका कोजी अटल नियम है । जिससे जिस प्रकार निर्माण होनेवाले मानवके चित्त-चैतन्यमें कोजी विशेष सामर्थ्य आया है। और अस सामर्थ्यको काममें लेनेकी असे थोडी स्वतंत्रता है । वह सामर्थ्य और वह स्वतंत्रता मिस विश्व व्यापारका विशेष परिणाम है । विश्वके गुण-धर्मोसे ही अन सामर्थ्यका पोषण होता है। सस्कारोके अनुसार विचार पैदा होनेका स्पष्ट वर्म मानव-चित्तमे दिखाओी देता है । मुनमें से किसी विचारको सकल्पका रूप प्राप्त होने पर दृढतासे अस पर डटे रहने की शक्ति भी असमें जा गभी है । अस शक्ति के साथ ही विवेक, सयम वगैरा अपनी दूसरी शक्तियोका अपयोग करके अपनी मानवताका पोपण करते रहना विश्वके नियमानुसार मानवका सहज वर्म वन गया है। हम अपने चित्तको सदा सत्मकल्पमय रखे और सत्कर्मरत रहे, तो विश्वके बुसी प्रकारके शुद्ध आन्दोलनोकी तर ग्रहण करनेके लिये वह हमेशा तैयार और योग्य बना रहेगा । विश्वके नियमानुसार यह असका वर्म हो जायगा । बुस अवस्थामें मशुद्ध सक्ल्प या अशुद्ध कर्म हमारे चित्तको स्पर्ग भी नहीं कर सकेगा । जैने कम्तूरी, केसर वगैरा पदार्थ विश्वके जुन जुन परमाणुओंके नित्तर्ग-नियममे जमा होनेके फलस्वरूप दने हुये घनरूप है, बँने ही अपना चित्त शुद्ध रखनेका हमारा सकल्प हो, तो हमारी ग्रहणशीलता और विश्वके आन्दोलनोंके व्यापारके कारण विश्वके केवल अच्छे सकल्प और सत्कर्मकी तरगें हमारे चित्तमे प्रवेश पायेंगी और प्रकट होगी तथा हममें से भी बिनी विन्मको वर्गे वाहर निकलती रहेगी । सृष्टिके अमुक सुगंधित तत्त्व कस्तूरीके रूपमे अकत्र हो जाते है और असमे से फिर वे सृष्टिमें फैलते रहते हैं । यही हाल हमारे शुद्ध सकल्पसे हमारे चित्त - चैतन्यका होगा । मानव-चित्तमे विशेष रूपमें रहनेवाली सकल्प-शक्तिका अपयोग मनुष्य विवेकपूर्वक करे, तो असमे मानवोचित तत्त्व आते रहेगे और असके द्वारा अनका शुद्ध प्रकटीकरण होता रहेगा । पिचकारीमें जैसी योजना होती है कि कोभी भी पतला या प्रवाही पदार्थ खिचकर अन्दर आ जाता है। परन्तु यह हमे विवेकपूर्वक फैसला करना पड़ता है कि असके द्वारा कौनसा प्रवाही पदार्थ अन्दर खीचा जाय । पिचकारीसे स्वच्छ और अस्वच्छ दोनो तरहका पानी खीचा जा सकता है और दुनिया में दोनो तरहका पानी है । साधारणत हमारी सकल्प-शक्तिमें पिचकारी जैसा ही गुणधर्म है। अिसलिओ मानवताकी दृष्टिसे हममे केवल सकल्पकी दृढताका होना ही काफी नही है । परन्तु असके साथ ही विश्व - शक्तिकी शुद्ध तरगोको खीचनेमें हमें अपनी सकल्प-शक्तिका अपयोग करना चाहिये । मिस प्रकार हमें हमेशा मानवोचित गुणोको अपनाकर अपनेमें और दुनिया में अनकी वृद्धि करनी चाहिये । हमारा असा सकल्प और हेतु हो, तो विश्वके नियम और गुण-धर्म हमे सदा सहायता देते रहेगे । हम अपनी मानवता बढाते रहें और अन्नतिका प्रयत्न करते रहे, तो दुनियामें अंक तरफ प्रत्यक्ष मानवता बढती रहेगी विश्वशक्तिके सुप्त गुणो और धर्मोका असके द्वारा प्रकटीकरण होता रहेगा और दूसरी तरफ हमारे शुद्ध सकल्पो और सत्कर्मों के कारण विश्वके शुद्ध आन्दोलनोमें वृद्धि होकर अन्हे गति मिलती रहेगी । और अन सबका परिणाम हम सबके लिये शुभदायक होगा । जिसमे शक नहीं कि विश्वमें अशुद्ध संकल्पो और अशुद्ध कर्मोकी तरगो और आन्दोलनोका जोर बहुत है । भितने पर भी जिस जिसको अपनी मानवता गौरवरूप लगती हो, जिन्हे यह महसूस होता हो कि विश्वके अनत सर्जन-विसर्जनमें से मानव अंक विशेष सामर्थ्य - शील प्राणी निर्माण हुआ है, अन सबको विश्वमें मानवता बढानेका वि - ९ व्यक्त अव्यक्त विचार सतत प्रयत्न करना चाहिये। जिन विश्वमें हमारा अकेलेका अलग कर्म नहीं है। विश्व सबके कर्म, सबके संकल्प, सबके लिये - लेक दूसरेके लिये सुखद या दुखद, अन्नतिकारक या अवनतिकारक होते है । तत्त्वत किसीका कर्म अलग नहीं । हम सब विश्वशक्ति पैदा जे है । वृसीसे हम सबके शरीर पायी जाते और बढ़ते हैं। और अन्तमें असीमें ये सब मिल जायेंगे । हम सबको विसी विश्वशक्तिके चेतन, प्राण, चित्त, मन वगैरा सुप्त तत्त्वाने से ये तत्त्व मिलते है । और हमारे द्वारा लूनका स्पष्ट प्रकटीकरण होता है। हमारे तमाम गुण वर्म जिसी विश्वशक्तिके स्पष्ट स्वरूप है। जो विश्वमे है वही हममे प्रगट रूपये दिखामी देता और जो कुछ हममें है सो सब विश्वमें गुप्त दशा है । हमारा और विश्वकी अनत शक्तिका अन्योन्य सम्बन्व है। जिसमें मानवकी विशेषता जितनी ही है कि अनमें विश्वके कुछ नियम जानने लायक ज्ञानशक्ति प्रकट हो गयी है । वह अपनी अपूर्णता नून विश्वशक्तिकी बारावना, श्रद्धा, भक्ति और बुनके प्रति निफासे दूर कर सकता है। जिन श्रद्धा-भक्ति और सूत्र हमारी संकल्प-शक्तिमे है। बिन संकल्प व्यक्तिको मददमे मनुष्य अपने लिये आवश्यक तत्त्व, आवश्यक गुण-धर्म विश्वनें से अपनेमें ला सकता है, यह भी अनकी विशेषता है । जो तत्त्व हमारे लिये आवश्यक है जुन नवका अपार संचय अन्त शक्ति भरा हुआ है। अनमें से जो भी चाहिये सो लेकर हमें सबके दुखका नाम करके सबकी मानवताकी वृद्धि करनी है। विश्वका क्रम और वर्म हमारे अनुकूल है। जिन वर्मको मददमे यह सब हमारे सक्ल्पके अनुसार होगा । जिन नवमें हम केवल निमित्तमात्र है। यह ज्ञान केन्द्र मनुष्यको ही हो सकता है। जिसलिये जिनने हमें जिन ज्ञान, शक्ति, मनि, गुण, वर्म वगैराकी प्राप्ति होती है और जिसने हमीनिमिति हुआ है, जुन विश्वशक्तिके प्रति परमयक्निके प्रनि सदा कृतज्ञ और भक्तिपूर्ण रहना, थुम पर निष्ठा रखना हमारा मुख्य कर्तव्य है। जिस निष्ठामे कल्पनातीत सामर्थ्य है । जिसी निष्ठामे अनत शक्तिके साथ समरस होकर असके गुणोका हमारे द्वारा प्रकटीकरण करनेका सामर्थ्य है। जिस शक्तिमे से चित्त और चेतन स्पष्ट दशामें आये और आज सारी जलस्थल सृष्टि असख्य मानवो और मानवेतर छोटे-बडे प्राणियोसे भरी दिखाओ दे रही है और अन सवका भरण-पोषण होता है, जिस शक्तिमे से चित्त और चेतनके अधिकाधिक विकसित होते होते मानव पैदा हुआ और आजकी स्थितिमें आ पहुचा है, जो सबकी तमाम शक्तियोका पोषण करनेवाली और अनकी नियामक है, जिस शक्तिके कारण मानवके चित्त चैतन्यका प्रभाव अधिकाधिक विशाल क्षेत्र पर पडता जा रहा है, वह शक्ति जड है या चेतन ? असमें ज्ञान, गुण, भाव और कर्तृत्व है या नहीं ? जिसका फैसला करना मनुष्यकी नम्रता, कृतज्ञता, प्रेम, भक्ति और निष्ठा वगैरा पर अवलवित है। मातृभक्त और पितृभक्त पुत्र मातापितासे कितना ही अधिक ज्ञानी और पुरुषार्थवाला हो जाय, तो भी अनके साथ नम्रताका बरताव करके अनके प्रति कृतज्ञ और निष्ठावान रहता है, और जैसेको ही हम आदरणीय मानते है । विश्वकी अनत शक्ति और हमारे बीचके सम्बन्धमे मातापिता और पुत्रके सम्बन्धसे अनत गुना फर्क है, कारण विश्वशक्तिके साथ हमारा सम्बन्ध अनसे ज्यादा गहरा, ओकरस और जीवनव्यापी है । अंसी हालतमे अस परमशक्तिके लिओ परमात्माके लिओ - हमारे हृदय में कृतज्ञता, नम्रता और पूज्यताके भाव रहे तो जिसमें हमने अधिक क्या किया ?
हमारे कर्तृत्वके कारण हमारा अहंकार वढा हो, तो हमें देखना चाहिये कि हमारा कर्तृत्व सचमुच हमारा अपना महं' की मर्यादा है या नहीं। हमारा शरीर विश्वके व्यापारमें अंक निमित्तमात्र वस्तु है, असमें कुछ भरा जाता है मिसलिये वह वडता है और असमें से कुछ न कुछ रोज विश्वमें फेंका भी जाता है, मिस व्यवहारमें शरीर वीचमें केवल अंक मचेतन कोठी जैसा लगता है । चेतनाके कारण यह कोठी कुछ समय तक वढती है और फिर क्षीण होकर सपूर्ण नाशको प्राप्त हो जाती है। समें वीचमें जो अपनापन लगता है वह नाममात्रका है, असलमें तो वह विश्वप्रकृतिका अंक खेल है । जिसी तरह हमारे चित्त, चेतन, प्राण, सकल्प, ज्ञान, विवेक, भाव, मस्कार, गुण, विचार वगैरा विशेष रूपसे अनुभवमें आनेवाले सव गुण हमें विश्वसे ही प्राप्त हुये है । वे हम तक मानवजातिकी विरासतसे आ पहुचे है । और अन सवका पोषण वर्वन भी विश्वके अन्हीं तत्त्वोसे होकर हमारे द्वारा सुनका अधिक स्पष्ट दशामें प्रकटीकरण होता है। विश्वके कुल मिलाकर अपरंपार व्यापारको तुलनामें यह विलकुल तुच्छ वात है। परन्तु अपने 'अह' के कारण हमारा कर्तव्य हमे जितना महान और भव्य लगता है कि जुमके आगे विश्वका अगाव कर्तृत्व हमे दिखाली नही देता । सच पूछा जाय तो विश्वके कर्तृत्वके सामने हमारा यह और कर्तृत्व अणुके वरावर भी होगा या नहीं, जिसमें शका होती है। हमारे प्राण, सकल्प, ज्ञान वगैरा अपर बतायी हुली सभी वात हमें विरासत में मिलती है, जिसलिये जैसा अहंकार रखना बुचित नहीं कि वे सब हमारी ही कमाली है । जिसी तरह हममें होनेवाला अनका दर्वन या विकास भी केवल हमारा ही कर्तृत्व है, जैसा भी हम नहीं कह सकते। फेंफड़ोकी खराव हवा बाहर निकालकर बाहरकी अच्छी हवा लेकर ही हम जीते हैं। जिसके लिये चाहर अच्छी हवाका होना जरूरी है। किसी प्रकार विश्वमे भी अच्छे तत्त्व हो तो ही वे हममें प्रविष्ट होकर हमारे द्वारा प्रगट हो सकते है। हमारे शरीरमें चेतन, चित्त, प्राण और सकल्पकी केवल स्पष्ट दशा है । परन्तु अनका सचय हमारे पास बहुत थोडा है। जैसे शरीरको रोज अच्छे अनुकूल द्रव्योका पोषण न मिले तो वह कायम नही रह सकता, वैसे ही हमारे चेतन, चित्त, प्राण वगैराको भी बाहरसे पोषण न मिले तो अनकी स्थिति भी कायम नही रहेगी । हममें दिखाओ देनेवाले ये सारे स्पष्ट तत्त्व विश्वमे हमेशा अस्पष्ट दशामे अपरपार मौजूद ही रहते है । ये तत्त्व दृष्टिको दीखनेवाले या किसी भी अिन्द्रियगोचर व्यक्त पदार्थमे अव्यक्त रूपमे रहते है। पदार्थोमे कितने विलक्षण गुण- वर्म अव्यक्त रूपमे निवास करते है, यह वनस्पति और औषविका थोडासा अध्ययन करने पर मालूम हो जाता है। वायरलेस, रेडियो या ध्वनिशास्त्रसे अब हमे यकीन हो गया है कि ध्वनिकी तरगें हजारो मील दूर तक जाती है, और बिजलीकी तथा विशेष यत्रोकी मददसे वे हमे गोचर हो सकती है। जिससे साबित हो जाता है कि हमे गोचर न होनेवाली अव्यक्त तरगोके अपार आन्दोलन पृथ्वी पर सतत जारी रहते है । अिसी प्रकार विश्वमे सर्वत्र प्राणतत्त्व, मनतत्त्व, बुद्धितत्त्व, चेतन, सकल्प, सस्कार, ज्ञान, विचार - मिन सबकी तरगोके आन्दोलन भी सतत जारी रहते है। ये आन्दोलन अच्छेचुरे दोनो प्रकारके होते है। सृष्टिमे जैसे सुगध और दुर्गध है, वैसे ही सत्सकल्प औौर असत्सकल्प, सद्विचार और दुविचार, सद्गुण और दुर्गुण, सत्कर्म और असत्कर्म, अिन सबके आन्दोलन हमेशा होते रहते है। विश्वमें ही अत्पत्ति, स्थिति और लयका धर्म होनेसे असमें सदा सक्रमण होता ही रहता है । विश्वका यही धर्म चित्त और चैतन्यमे अलग-अलग सत्-असत् कर्म, विचार और सकल्पके रूपमे मानवजगतर्फे प्रगट रूपसे दिखाओ देता है। विश्वमें सतत होनेवाले सक्रमणोके अव्यक्त आन्दोलन, मनुष्य तथा अन्य चेतन जगत् द्वारा होनेवाले भिन्न-भिन्न कर्म, सकल्प, विचार और सस्कारके असंख्य आन्दोलत और जिन सबकी अनत प्रकारकी तरगें विश्वमे सतत जारी ही रहती है । जैसी कल्पनातीत असल्य तरगोमें से हरनेक जीव अपनी अपनी जीवदशाके अनुसार अनुकूल तर अपनेमें धारण करके अपने चित्त, चेतन, प्राण और सकल्पका पोषण करता है । यह क्रिया असके द्वारा ज्ञानपूर्वक न भी होती हो तो जैसे पेड़ कुदरतसे - मिट्टी, पानी, हवा वगैरासे अपने अनुकूल तत्त्व कुदरतके नियमानुसार खीच लेता है और अपनी वृद्धि करता है, या जैसे गर्भ माताके गुरीरमें से अपने लिये जरूरी तत्त्व, सस्कार, दूसरे गुण-वर्म और मानवजातिका अत्तराविकार अनजाने लेता है और अपनी विशेषता वढाता है, असी तरह दूसरे जीव या मनुष्य भी बाहरके आन्दोलनोमे से मजातीय तर खीचकर अन तत्त्वीको आत्मसात् करता है । भिन्न-भिन्न स्वाद और गुण-धर्मवाली वनसति अंक ही जमीन और पानीमें से अपने अनुकूल द्रव्य खोचकर अपने-अपने स्वाद और गुण-धर्मका पोषण करती है । मनुष्यके प्राण, चित्त, चेतन, सकल्प, विचार आदिको भी जरूरी अनुरूप तत्त्व विश्वमें होनेवाले कल्पनातीत आन्दोलनो और तरंगोसे मिलते है । हम शुद्ध चरित्र होनेका सकल्प कर ले, तो विश्वमें आन्दोलित होनेवाली खुसी किस्मकी तरंगें हमारे चित्तकी ओर मुड़ेंगी, हममें लेकरम होगी और हमारे मूल सकल्पको वल पहुचायेंगी। और हमारे सकल्प, विचार, हेतु अशुद्ध और हीन होगे, तो विश्वकी अपवित्र तरंगे हमारे चित्तको दृढ़ती आयेंगी और हममें घुलमिलकर हमें अधिक हीन वना ढंगो । विश्वके बिसी नियमके अनुसार हमारे शुद्धअशुद्ध विचारो और संकल्पोकी तरगे भी सतत बाहर फैलती रहती हूँ और विश्वके शुद्ध अशुद्ध आन्दोलनों और तरगोमें वृद्धि करती है। जिस पर विचार करनेसे स्पष्ट हो जाता है कि शुद्ध या अशुद्ध विचार और सकल्प धारण करनेवाला और कर्म करनेवाला मनुष्य स्वय शुद्ध या अशुद्ध होता रहता है, और विश्व भी अनी प्रकारके आन्दोलनो और तरगोकी वृद्धि करता है। विश्वका यह नियम है। सृष्टिका यह धर्म है। परमेश्वरका यह कानून है । अिस दृष्टिसे देखते हुये विश्वमे सदैव होनेवाले आन्दोलनोमे से ही शुद्ध या अशुद्ध तरगें हममे आती है और वहा अधिक स्पष्ट रूप धारण करके हमारे द्वारा बाहर निकलती है। जिस समय, अिस क्षण मेरे द्वारा प्रकट होनेवाले ये विचार केवल मेरे ही है, यह मै नही कह सकता । असख्य लोगोके अस्पष्ट सकल्पो और विचारोकी तरगे विश्वके आन्दोलनोमें से कुदरती तौर पर मुझ तक आकर शायद मेरे द्वारा अधिक स्पष्ट रूपमे वाहर निकलती होगी । परन्तु यह कार्य मेरे हृदयमे कोओ न कोभी शुभेच्छा हो तो ही विश्व के नियमानुसार अिस ढगसे होगा । सत तुकारामने कहा है किः आपुलिया वळे नाही मी बोलत । सखा कृपावत वाचा त्याची । काय म्या पामरे वोलावी अत्तरे । परि त्या विश्वभरे बोलविले ।। जिन अनुभवपूर्ण मुद्गारोमें विश्वका यही नियम परमेश्वरका यही कानून - दिखाओ देता है । विश्वके व्यापारमें हम केवल निमित्तमात्र हो, तो भी अस विश्वशक्तिमे से हमारे चित्त चैतन्यमे कुछ विशेष शक्तिया आजी है। वे शक्तिया है विवेक, सकल्प, सयम और निग्रह । हममे रहनेवाले 'अह' के कारण अिन विशेष शक्तियोका हमें भान होता है । अिन विशेष शक्तियोका पोषण विश्वके अन्ही अव्यक्त तत्त्वोसे होता हो, तो भी हम किसी हद तक अपनी अिच्छानुसार जिनका उपयोग कर सकते हैं -- जितनी छूट और स्वतंत्रता हमें विश्वशक्तिके किसी निश्चित नियमसे ही मिली हुआ है । अगर हम असका अपयोग करके अपना चित्त शुद्ध रखनेका प्रयत्न करते रहें, तो हमारे हृदय में विश्वकी शुद्ध तरंगें दाखिल होकर हमसे सत्कर्म करानेमें सहायक होगी। विश्वकी अवस्थामें सदैव सक्रमण और मुसीसे विकास होते होते हमे मानव स्वरूप प्राप्त हुआ है। यह स्वरूप जुस विश्वका केवल आवर्त या आविर्भाव नही है। जिस स्वरूपकी निमितिका कोजी निश्चित क्रम है। विशेष परम्परासे वह जिस स्थितिको पहुचा है। असके पीछे विश्वका कोजी अटल नियम है । जिससे जिस प्रकार निर्माण होनेवाले मानवके चित्त-चैतन्यमें कोजी विशेष सामर्थ्य आया है। और अस सामर्थ्यको काममें लेनेकी असे थोडी स्वतंत्रता है । वह सामर्थ्य और वह स्वतंत्रता मिस विश्व व्यापारका विशेष परिणाम है । विश्वके गुण-धर्मोसे ही अन सामर्थ्यका पोषण होता है। सस्कारोके अनुसार विचार पैदा होनेका स्पष्ट वर्म मानव-चित्तमे दिखाओी देता है । मुनमें से किसी विचारको सकल्पका रूप प्राप्त होने पर दृढतासे अस पर डटे रहने की शक्ति भी असमें जा गभी है । अस शक्ति के साथ ही विवेक, सयम वगैरा अपनी दूसरी शक्तियोका अपयोग करके अपनी मानवताका पोपण करते रहना विश्वके नियमानुसार मानवका सहज वर्म वन गया है। हम अपने चित्तको सदा सत्मकल्पमय रखे और सत्कर्मरत रहे, तो विश्वके बुसी प्रकारके शुद्ध आन्दोलनोकी तर ग्रहण करनेके लिये वह हमेशा तैयार और योग्य बना रहेगा । विश्वके नियमानुसार यह असका वर्म हो जायगा । बुस अवस्थामें मशुद्ध सक्ल्प या अशुद्ध कर्म हमारे चित्तको स्पर्ग भी नहीं कर सकेगा । जैने कम्तूरी, केसर वगैरा पदार्थ विश्वके जुन जुन परमाणुओंके नित्तर्ग-नियममे जमा होनेके फलस्वरूप दने हुये घनरूप है, बँने ही अपना चित्त शुद्ध रखनेका हमारा सकल्प हो, तो हमारी ग्रहणशीलता और विश्वके आन्दोलनोंके व्यापारके कारण विश्वके केवल अच्छे सकल्प और सत्कर्मकी तरगें हमारे चित्तमे प्रवेश पायेंगी और प्रकट होगी तथा हममें से भी बिनी विन्मको वर्गे वाहर निकलती रहेगी । सृष्टिके अमुक सुगंधित तत्त्व कस्तूरीके रूपमे अकत्र हो जाते है और असमे से फिर वे सृष्टिमें फैलते रहते हैं । यही हाल हमारे शुद्ध सकल्पसे हमारे चित्त - चैतन्यका होगा । मानव-चित्तमे विशेष रूपमें रहनेवाली सकल्प-शक्तिका अपयोग मनुष्य विवेकपूर्वक करे, तो असमे मानवोचित तत्त्व आते रहेगे और असके द्वारा अनका शुद्ध प्रकटीकरण होता रहेगा । पिचकारीमें जैसी योजना होती है कि कोभी भी पतला या प्रवाही पदार्थ खिचकर अन्दर आ जाता है। परन्तु यह हमे विवेकपूर्वक फैसला करना पड़ता है कि असके द्वारा कौनसा प्रवाही पदार्थ अन्दर खीचा जाय । पिचकारीसे स्वच्छ और अस्वच्छ दोनो तरहका पानी खीचा जा सकता है और दुनिया में दोनो तरहका पानी है । साधारणत हमारी सकल्प-शक्तिमें पिचकारी जैसा ही गुणधर्म है। अिसलिओ मानवताकी दृष्टिसे हममे केवल सकल्पकी दृढताका होना ही काफी नही है । परन्तु असके साथ ही विश्व - शक्तिकी शुद्ध तरगोको खीचनेमें हमें अपनी सकल्प-शक्तिका अपयोग करना चाहिये । मिस प्रकार हमें हमेशा मानवोचित गुणोको अपनाकर अपनेमें और दुनिया में अनकी वृद्धि करनी चाहिये । हमारा असा सकल्प और हेतु हो, तो विश्वके नियम और गुण-धर्म हमे सदा सहायता देते रहेगे । हम अपनी मानवता बढाते रहें और अन्नतिका प्रयत्न करते रहे, तो दुनियामें अंक तरफ प्रत्यक्ष मानवता बढती रहेगी विश्वशक्तिके सुप्त गुणो और धर्मोका असके द्वारा प्रकटीकरण होता रहेगा और दूसरी तरफ हमारे शुद्ध सकल्पो और सत्कर्मों के कारण विश्वके शुद्ध आन्दोलनोमें वृद्धि होकर अन्हे गति मिलती रहेगी । और अन सबका परिणाम हम सबके लिये शुभदायक होगा । जिसमे शक नहीं कि विश्वमें अशुद्ध संकल्पो और अशुद्ध कर्मोकी तरगो और आन्दोलनोका जोर बहुत है । भितने पर भी जिस जिसको अपनी मानवता गौरवरूप लगती हो, जिन्हे यह महसूस होता हो कि विश्वके अनत सर्जन-विसर्जनमें से मानव अंक विशेष सामर्थ्य - शील प्राणी निर्माण हुआ है, अन सबको विश्वमें मानवता बढानेका वि - नौ व्यक्त अव्यक्त विचार सतत प्रयत्न करना चाहिये। जिन विश्वमें हमारा अकेलेका अलग कर्म नहीं है। विश्व सबके कर्म, सबके संकल्प, सबके लिये - लेक दूसरेके लिये सुखद या दुखद, अन्नतिकारक या अवनतिकारक होते है । तत्त्वत किसीका कर्म अलग नहीं । हम सब विश्वशक्ति पैदा जे है । वृसीसे हम सबके शरीर पायी जाते और बढ़ते हैं। और अन्तमें असीमें ये सब मिल जायेंगे । हम सबको विसी विश्वशक्तिके चेतन, प्राण, चित्त, मन वगैरा सुप्त तत्त्वाने से ये तत्त्व मिलते है । और हमारे द्वारा लूनका स्पष्ट प्रकटीकरण होता है। हमारे तमाम गुण वर्म जिसी विश्वशक्तिके स्पष्ट स्वरूप है। जो विश्वमे है वही हममे प्रगट रूपये दिखामी देता और जो कुछ हममें है सो सब विश्वमें गुप्त दशा है । हमारा और विश्वकी अनत शक्तिका अन्योन्य सम्बन्व है। जिसमें मानवकी विशेषता जितनी ही है कि अनमें विश्वके कुछ नियम जानने लायक ज्ञानशक्ति प्रकट हो गयी है । वह अपनी अपूर्णता नून विश्वशक्तिकी बारावना, श्रद्धा, भक्ति और बुनके प्रति निफासे दूर कर सकता है। जिन श्रद्धा-भक्ति और सूत्र हमारी संकल्प-शक्तिमे है। बिन संकल्प व्यक्तिको मददमे मनुष्य अपने लिये आवश्यक तत्त्व, आवश्यक गुण-धर्म विश्वनें से अपनेमें ला सकता है, यह भी अनकी विशेषता है । जो तत्त्व हमारे लिये आवश्यक है जुन नवका अपार संचय अन्त शक्ति भरा हुआ है। अनमें से जो भी चाहिये सो लेकर हमें सबके दुखका नाम करके सबकी मानवताकी वृद्धि करनी है। विश्वका क्रम और वर्म हमारे अनुकूल है। जिन वर्मको मददमे यह सब हमारे सक्ल्पके अनुसार होगा । जिन नवमें हम केवल निमित्तमात्र है। यह ज्ञान केन्द्र मनुष्यको ही हो सकता है। जिसलिये जिनने हमें जिन ज्ञान, शक्ति, मनि, गुण, वर्म वगैराकी प्राप्ति होती है और जिसने हमीनिमिति हुआ है, जुन विश्वशक्तिके प्रति परमयक्निके प्रनि सदा कृतज्ञ और भक्तिपूर्ण रहना, थुम पर निष्ठा रखना हमारा मुख्य कर्तव्य है। जिस निष्ठामे कल्पनातीत सामर्थ्य है । जिसी निष्ठामे अनत शक्तिके साथ समरस होकर असके गुणोका हमारे द्वारा प्रकटीकरण करनेका सामर्थ्य है। जिस शक्तिमे से चित्त और चेतन स्पष्ट दशामें आये और आज सारी जलस्थल सृष्टि असख्य मानवो और मानवेतर छोटे-बडे प्राणियोसे भरी दिखाओ दे रही है और अन सवका भरण-पोषण होता है, जिस शक्तिमे से चित्त और चेतनके अधिकाधिक विकसित होते होते मानव पैदा हुआ और आजकी स्थितिमें आ पहुचा है, जो सबकी तमाम शक्तियोका पोषण करनेवाली और अनकी नियामक है, जिस शक्तिके कारण मानवके चित्त चैतन्यका प्रभाव अधिकाधिक विशाल क्षेत्र पर पडता जा रहा है, वह शक्ति जड है या चेतन ? असमें ज्ञान, गुण, भाव और कर्तृत्व है या नहीं ? जिसका फैसला करना मनुष्यकी नम्रता, कृतज्ञता, प्रेम, भक्ति और निष्ठा वगैरा पर अवलवित है। मातृभक्त और पितृभक्त पुत्र मातापितासे कितना ही अधिक ज्ञानी और पुरुषार्थवाला हो जाय, तो भी अनके साथ नम्रताका बरताव करके अनके प्रति कृतज्ञ और निष्ठावान रहता है, और जैसेको ही हम आदरणीय मानते है । विश्वकी अनत शक्ति और हमारे बीचके सम्बन्धमे मातापिता और पुत्रके सम्बन्धसे अनत गुना फर्क है, कारण विश्वशक्तिके साथ हमारा सम्बन्ध अनसे ज्यादा गहरा, ओकरस और जीवनव्यापी है । अंसी हालतमे अस परमशक्तिके लिओ परमात्माके लिओ - हमारे हृदय में कृतज्ञता, नम्रता और पूज्यताके भाव रहे तो जिसमें हमने अधिक क्या किया ?