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Prayagraj News Today: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी की पहली पुण्यतिथि पर आज मठ बाघंबरी गद्दी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
Prayagraj News: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (All India Akhara Parishad) के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) की पहली पुण्यतिथि (death anniversary) पर आज मठ बाघंबरी गद्दी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महराज और अखाड़ा परिषद के सचिव व जून अखाड़े के संरक्षक महंत हरी गिरी शामिल हुए।
इस दौरान महंत नरेंद्र गिरी की समाधि पर पुष्प अर्पित साधु संतो ने उन्हें याद किया, समाधि स्थल पर ही बटुको द्वारा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर सनातन परंपरा के सभी तेरह अखाड़ों के साधु संत और मठ मंदिरों के पीठाधीश्वर भी मौजूद रहे।
दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी के उत्तराधिकारी मठ बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर बलबीर गिरी महराज ने बताया कि पूज्य महंत नरेंद्र गिरी की याद को संजोने के लिए उनकी सभी वस्तुओं को एक स्थान पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। मठ बाघंबरी गद्दी परिसर में ही एक संग्रहालय का निर्माण कराया जाएगा। जिसमे उनकी सभी यादों को संजोया जाएगा। इसके साथ ही दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी की समाधि स्थल पर एक भव्य मंदिर का भी निर्माण किया जाएगा, जिसमें दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी की मूर्ति की भी स्थापना की जाएगी। आपको बता दें पूरे देश के कई जिलों से साधु संतों की टोली प्रयागराज पहुंची है और आज पुण्यतिथि के मौके पर नरेंद्र गिरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है।
बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि पिछले साल 20 सितंबर की शाम अल्लापुर स्थित श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के अतिथि कक्ष में मृत मिले थे। उनका शव पंखे में रस्सी के फंदे से लटका मिला था। सेवादारों ने धक्का देकर दरवाजा खोलने के बाद रस्सी काटकर उनका शरीर फंदे से उतारा था। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों को दोषी मानते हुए केस दर्ज किया था। वहीं जब मामला बढ़ा तो सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया था।
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Prayagraj News Today: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी की पहली पुण्यतिथि पर आज मठ बाघंबरी गद्दी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। Prayagraj News: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी की पहली पुण्यतिथि पर आज मठ बाघंबरी गद्दी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महराज और अखाड़ा परिषद के सचिव व जून अखाड़े के संरक्षक महंत हरी गिरी शामिल हुए। इस दौरान महंत नरेंद्र गिरी की समाधि पर पुष्प अर्पित साधु संतो ने उन्हें याद किया, समाधि स्थल पर ही बटुको द्वारा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर सनातन परंपरा के सभी तेरह अखाड़ों के साधु संत और मठ मंदिरों के पीठाधीश्वर भी मौजूद रहे। दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी के उत्तराधिकारी मठ बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर बलबीर गिरी महराज ने बताया कि पूज्य महंत नरेंद्र गिरी की याद को संजोने के लिए उनकी सभी वस्तुओं को एक स्थान पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। मठ बाघंबरी गद्दी परिसर में ही एक संग्रहालय का निर्माण कराया जाएगा। जिसमे उनकी सभी यादों को संजोया जाएगा। इसके साथ ही दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी की समाधि स्थल पर एक भव्य मंदिर का भी निर्माण किया जाएगा, जिसमें दिवंगत महंत नरेंद्र गिरी की मूर्ति की भी स्थापना की जाएगी। आपको बता दें पूरे देश के कई जिलों से साधु संतों की टोली प्रयागराज पहुंची है और आज पुण्यतिथि के मौके पर नरेंद्र गिरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि पिछले साल बीस सितंबर की शाम अल्लापुर स्थित श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के अतिथि कक्ष में मृत मिले थे। उनका शव पंखे में रस्सी के फंदे से लटका मिला था। सेवादारों ने धक्का देकर दरवाजा खोलने के बाद रस्सी काटकर उनका शरीर फंदे से उतारा था। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों को दोषी मानते हुए केस दर्ज किया था। वहीं जब मामला बढ़ा तो सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया था।
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भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात चुनाव के लिए शुक्रवार को अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। पार्टी ने 70 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रुपाणी राजकोट पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे, जबकि डिप्टी सीएम नितिन पटेल मेहसाणा से चुनाव लड़ेंगे। गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतूभाई वघानी भावनगर पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे।
BJP उम्मीदवारों की लिस्ट में खास बात यह है कि इन चुनावों में पाटीदार समुदाय के 15 नेताओं को पार्टी की तरफ से टिकट दिया गया है। इसके साथ ही कांग्रेस छोड़कर आए 5 नेताओं को भी BJP ने टिकट दिया है।
गुजरात में 182 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके तहत पहले चरण में 89 सीटों पर नौ दिसंबर और दूसरे चरण में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों के मतदान के बाद 18 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए बीते बुधवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं ने गहन मंथन किया था। भाजपा मुख्यालय में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की इस बैठक में प्रत्याशियों के नामों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया था। दरअसल, इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा इस बार भी राज्य की सत्ता में खुद को बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वहीं, कांग्रेस 22 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए जी-तोड़ कवायद में जुटी है।
राज्य में चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से दोनों चरणों के मतदान के लिए कुल 50,128 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इन पर राज्य के 4.33 करोड़ मतदाता वीवीपेट युक्त ईवीएम के जरिये मतदान कर सकेंगे। आयोग द्वारा राज्य में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित 182 मतदान केंद्र भी बनाए जाएंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में इस तरह का एक पोलिंग बूथ होगा।
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भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात चुनाव के लिए शुक्रवार को अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। पार्टी ने सत्तर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रुपाणी राजकोट पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे, जबकि डिप्टी सीएम नितिन पटेल मेहसाणा से चुनाव लड़ेंगे। गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतूभाई वघानी भावनगर पश्चिम से चुनाव लड़ेंगे। BJP उम्मीदवारों की लिस्ट में खास बात यह है कि इन चुनावों में पाटीदार समुदाय के पंद्रह नेताओं को पार्टी की तरफ से टिकट दिया गया है। इसके साथ ही कांग्रेस छोड़कर आए पाँच नेताओं को भी BJP ने टिकट दिया है। गुजरात में एक सौ बयासी सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके तहत पहले चरण में नवासी सीटों पर नौ दिसंबर और दूसरे चरण में तिरानवे सीटों पर चौदह दिसंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों के मतदान के बाद अट्ठारह दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए बीते बुधवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं ने गहन मंथन किया था। भाजपा मुख्यालय में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की इस बैठक में प्रत्याशियों के नामों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया था। दरअसल, इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा इस बार भी राज्य की सत्ता में खुद को बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वहीं, कांग्रेस बाईस साल बाद सत्ता में वापसी के लिए जी-तोड़ कवायद में जुटी है। राज्य में चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से दोनों चरणों के मतदान के लिए कुल पचास,एक सौ अट्ठाईस मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इन पर राज्य के चार.तैंतीस करोड़ मतदाता वीवीपेट युक्त ईवीएम के जरिये मतदान कर सकेंगे। आयोग द्वारा राज्य में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित एक सौ बयासी मतदान केंद्र भी बनाए जाएंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में इस तरह का एक पोलिंग बूथ होगा।
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निर्माय नूतनमुदाहरणानुरूप
काव्य मयात्र विहित न परस्य किन्चित् ।
कि सेव्यते सुमनसा मनसापि गन्ध
कस्तूरिकाजननशक्तिभृता मृगेण ।।
इतना सब कुछ होते हुए भी पण्डितराज की शैली मे कुछ न्यूनताये भी हैं। किसी एक भी आलड्कारिक को सर्वत्र प्रामाणिक नहीं माना। समकालीन आलड्कारिको के खण्डन के समय जो मम्मट प्रामाणिक आचार्य थे वही कुछ क्षण पश्चात् ही प्रतिवादी के रूप में सम्मुख आते हैं और उनका कोई भी सिद्धान्त प्रमाणस्वरूप नहीं रहता है। जैसा कि काव्य लक्षण के प्रसग मे प्रतिवादी मानकर किस तरह मम्मटाचार्य का खण्डन किया गया है यह देखने लायक हैविमतवाक्यत्वश्रद्वेयमेव ।
साराश तो यह है कि रूय्यक या अपप्य दीक्षित के मत का खण्डन करते समय काव्यावतार मम्मट व आनन्दवर्धनाचार्य इत्यादि प्रामाणिक आलंकारिक हो जाते हैं तथा उनके ही मत को खण्डित करते समय वह नितान्त अप्रामाणिक हो जाते है। अत ये प्राचीनो मे अनुमन्ता है कि आधुनिकों के यह कह पाना बडा ही कठिन है।
इनकी एक कमी यह भी है कि उन्होनें अपने मत को कभी-कभी स्पष्ट न कहकर घुमा-फिराकर कहा हैं। कभी-कभी ऐसा भी हुआ है कि परमत को अपनी भाषा मे कहते हुए उन्होने अपनी ओर से उसमें सशोधन भी कर दिया है। अत उनके मत से मिश्रित
काव्यमुच्चैः पठ्यते, काव्यादर्थोव्यग्यते, काव्यश्रुतमर्यो न ज्ञात ....
रस गंगाधर पृ० ३
रस गंगाधर पृ० २२ - २३
परमत एक व्यामिश्र मत हो जाता है और दोनों को अलग-अलग करने में कठिनाई होती है । अत स्पष्टता का अभाव इनकी एक सबसे बडी कमी हैं। जबकि नैयायिक होने के नाते इसे स्पष्ट करना इनका सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए। पण्डितराज की अपनी ही मान्यताओ मे विरोध दिखाई देता है और कहीं विषय की सूक्ष्मता को भेदो का आधार माना गया है तो कहीं उसी को बाधक माना गया है। उदाहरणार्थ- अलङ्कारो के प्रकारों के प्रदर्शन की बात आयी तो कहा कि यदि प्रत्येक उक्तिवैचित्र्य के सूक्ष्म भेद को लेकर नवीन अलङ्कार माना जायेगा तो अलड्कार अनन्त हो जायेंगे क्योकि वाग्मड्गी अनन्त हैं। उसी सूक्ष्मता का प्रसग जब काव्य के भेद करते समय आया तो कह दिया गया कि यदि शब्दार्थालङ्कार मे होने वाले वयग्यार्थ के चमत्कार के सूक्ष्म भेद को न माने और केवल अलङ्कारत्व के आधार पर दोनो को अधम काव्य कहा जाये तो ध्वनि और गुणीभूत व्यग्य के सूक्ष्म भेद को भी नही मानना चाहिए । इसी प्रकार कई स्थल हैं। एक विषय का इन्होनें कई कई बार कथन किया है । अत पिष्ट-पेषण खटकता है। इनकी एक कमी यह भी है कि एक विषय का निरूपण एक स्थान पर न करके कई जगहो पर थोडा थोडा करके किया है। पण्डित्य के कारण दुराग्रह की झाकी हमे अप्पय दीक्षित के खण्डन मे दिखाई पड़ता हैं। वस्तुत अप्पय दीक्षित का जो मत हैं उसे ठीक ढग से न कहकर अपने खण्डन के अनुरूप बनाकर खण्डित करना पण्डितराज का वैशिष्ट्य रहा है। विशेषकर वहा जहां दीक्षित ने स्वय व्याख्या नही की है वहा ये पूर्णरूपेण स्वतन्त्र होकर विचरण करते है। दीक्षित का खण्डन तो कहीं केवल विशेष पद व्याकरण की दृष्टि से असंगत है कहकर यह उदाहरण दुष्ट है यथा.
"यदपि तेनैवादोहतम् - यक्ष्याशया हि मन्जूषां.
इति पदकाक्षितया न्यूनपदम् ।।"
रसगंगाधर पृ० ४४७
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निर्माय नूतनमुदाहरणानुरूप काव्य मयात्र विहित न परस्य किन्चित् । कि सेव्यते सुमनसा मनसापि गन्ध कस्तूरिकाजननशक्तिभृता मृगेण ।। इतना सब कुछ होते हुए भी पण्डितराज की शैली मे कुछ न्यूनताये भी हैं। किसी एक भी आलड्कारिक को सर्वत्र प्रामाणिक नहीं माना। समकालीन आलड्कारिको के खण्डन के समय जो मम्मट प्रामाणिक आचार्य थे वही कुछ क्षण पश्चात् ही प्रतिवादी के रूप में सम्मुख आते हैं और उनका कोई भी सिद्धान्त प्रमाणस्वरूप नहीं रहता है। जैसा कि काव्य लक्षण के प्रसग मे प्रतिवादी मानकर किस तरह मम्मटाचार्य का खण्डन किया गया है यह देखने लायक हैविमतवाक्यत्वश्रद्वेयमेव । साराश तो यह है कि रूय्यक या अपप्य दीक्षित के मत का खण्डन करते समय काव्यावतार मम्मट व आनन्दवर्धनाचार्य इत्यादि प्रामाणिक आलंकारिक हो जाते हैं तथा उनके ही मत को खण्डित करते समय वह नितान्त अप्रामाणिक हो जाते है। अत ये प्राचीनो मे अनुमन्ता है कि आधुनिकों के यह कह पाना बडा ही कठिन है। इनकी एक कमी यह भी है कि उन्होनें अपने मत को कभी-कभी स्पष्ट न कहकर घुमा-फिराकर कहा हैं। कभी-कभी ऐसा भी हुआ है कि परमत को अपनी भाषा मे कहते हुए उन्होने अपनी ओर से उसमें सशोधन भी कर दिया है। अत उनके मत से मिश्रित काव्यमुच्चैः पठ्यते, काव्यादर्थोव्यग्यते, काव्यश्रुतमर्यो न ज्ञात .... रस गंगाधर पृशून्य तीन रस गंगाधर पृशून्य बाईस - तेईस परमत एक व्यामिश्र मत हो जाता है और दोनों को अलग-अलग करने में कठिनाई होती है । अत स्पष्टता का अभाव इनकी एक सबसे बडी कमी हैं। जबकि नैयायिक होने के नाते इसे स्पष्ट करना इनका सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए। पण्डितराज की अपनी ही मान्यताओ मे विरोध दिखाई देता है और कहीं विषय की सूक्ष्मता को भेदो का आधार माना गया है तो कहीं उसी को बाधक माना गया है। उदाहरणार्थ- अलङ्कारो के प्रकारों के प्रदर्शन की बात आयी तो कहा कि यदि प्रत्येक उक्तिवैचित्र्य के सूक्ष्म भेद को लेकर नवीन अलङ्कार माना जायेगा तो अलड्कार अनन्त हो जायेंगे क्योकि वाग्मड्गी अनन्त हैं। उसी सूक्ष्मता का प्रसग जब काव्य के भेद करते समय आया तो कह दिया गया कि यदि शब्दार्थालङ्कार मे होने वाले वयग्यार्थ के चमत्कार के सूक्ष्म भेद को न माने और केवल अलङ्कारत्व के आधार पर दोनो को अधम काव्य कहा जाये तो ध्वनि और गुणीभूत व्यग्य के सूक्ष्म भेद को भी नही मानना चाहिए । इसी प्रकार कई स्थल हैं। एक विषय का इन्होनें कई कई बार कथन किया है । अत पिष्ट-पेषण खटकता है। इनकी एक कमी यह भी है कि एक विषय का निरूपण एक स्थान पर न करके कई जगहो पर थोडा थोडा करके किया है। पण्डित्य के कारण दुराग्रह की झाकी हमे अप्पय दीक्षित के खण्डन मे दिखाई पड़ता हैं। वस्तुत अप्पय दीक्षित का जो मत हैं उसे ठीक ढग से न कहकर अपने खण्डन के अनुरूप बनाकर खण्डित करना पण्डितराज का वैशिष्ट्य रहा है। विशेषकर वहा जहां दीक्षित ने स्वय व्याख्या नही की है वहा ये पूर्णरूपेण स्वतन्त्र होकर विचरण करते है। दीक्षित का खण्डन तो कहीं केवल विशेष पद व्याकरण की दृष्टि से असंगत है कहकर यह उदाहरण दुष्ट है यथा. "यदपि तेनैवादोहतम् - यक्ष्याशया हि मन्जूषां. इति पदकाक्षितया न्यूनपदम् ।।" रसगंगाधर पृशून्य चार सौ सैंतालीस
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 5 सितंबर को लखनऊ में लेवाना सूट होटल में आग लगने की घटना में कथित ढिलाई बरतने के आरोप में 15 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही चार सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. यह कदम लखनऊ के उस होटल के कामकाज के संबंध में कथित 'सांठगांठ' की उच्चस्तरीय जांच के बाद उठाया गया है. साथ ही अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं.
जानकारी के मुताबिक सुशील यादव, तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी, योगेंद्र प्रसाद यादव, अग्निशमन अधिकारी (द्वितीय), मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक (विद्युत सुरक्षा) विजय कुमार राव, सहायक अभियंता आशीष कुमार मिश्रा और अनुमंडल अधिकारी राजेश कुमार मिश्रा, महेंद्र कुमार मिश्रा पीसीएस (तत्कालीन सक्षम प्राधिकारी) लखनऊ विकास प्राधिकरण को निलंबित कर दिया गया है. अब इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी.
जानकारी के मुताबिक पुलिस आयुक्त एस. बी. शिरोडकर और लखनऊ के संभागीय आयुक्त रोशन जैकब ने संयुक्त रूप से घटना की उच्चस्तरीय जांच की. मुख्यमंत्री ने ही घटना के तुरंत बाद शिरोडकर और जैकब को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया था. जिन पांच विभागों को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, उनमें गृह, ऊर्जा, नियुक्ति, आवास और शहरी नियोजन (लखनऊ विकास प्राधिकरण) और आबकारी विभाग शामिल हैं.
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पाँच सितंबर को लखनऊ में लेवाना सूट होटल में आग लगने की घटना में कथित ढिलाई बरतने के आरोप में पंद्रह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही चार सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. यह कदम लखनऊ के उस होटल के कामकाज के संबंध में कथित 'सांठगांठ' की उच्चस्तरीय जांच के बाद उठाया गया है. साथ ही अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जानकारी के मुताबिक सुशील यादव, तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी, योगेंद्र प्रसाद यादव, अग्निशमन अधिकारी , मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक विजय कुमार राव, सहायक अभियंता आशीष कुमार मिश्रा और अनुमंडल अधिकारी राजेश कुमार मिश्रा, महेंद्र कुमार मिश्रा पीसीएस लखनऊ विकास प्राधिकरण को निलंबित कर दिया गया है. अब इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी. जानकारी के मुताबिक पुलिस आयुक्त एस. बी. शिरोडकर और लखनऊ के संभागीय आयुक्त रोशन जैकब ने संयुक्त रूप से घटना की उच्चस्तरीय जांच की. मुख्यमंत्री ने ही घटना के तुरंत बाद शिरोडकर और जैकब को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया था. जिन पांच विभागों को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, उनमें गृह, ऊर्जा, नियुक्ति, आवास और शहरी नियोजन और आबकारी विभाग शामिल हैं. इसे भी पढ़ें :
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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उन्होंने कहा कि यह फैसला नयी पीढ़ी को सेनानियों की वीरता और बलिदान के बारे में शिक्षित करने के लिए लिया गया है।
भारतीय सेना द्वारा कश्मीर से पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां एक समारोह को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि कश्मीर में 'पाकिस्तान की बर्बरता' की कहानियां अनकही रह गई हैं।
उन्होंने कहा, "लोगों को पाकिस्तान के बुरे कामों के बारे में क्यों नहीं बताया गया? मकबूल शेरवानी, मेजर सोमनाथ, ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह और लेफ्टिनेंट कर्नल डी आर राय की कहानियां स्कूलों में छात्रों को क्यों नहीं सुनाई जातीं? "
सिन्हा ने कहा, "मैं आज आपको बताना चाहता हूं कि ये कहानियां अगले साल से स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगी। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन बहादुरों की कहानियां हर छात्र तक पहुंचाएं। "
उन्होंने मकबूल शेरवानी, परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा और महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल डी आर राय को श्रद्धांजलि दी।
उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहास को सही करने और लोगों को 27 अक्टूबर, 1947 के आक्रमण के बारे में और बताने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि यह फैसला नयी पीढ़ी को सेनानियों की वीरता और बलिदान के बारे में शिक्षित करने के लिए लिया गया है। भारतीय सेना द्वारा कश्मीर से पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ने के पचहत्तर वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां एक समारोह को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि कश्मीर में 'पाकिस्तान की बर्बरता' की कहानियां अनकही रह गई हैं। उन्होंने कहा, "लोगों को पाकिस्तान के बुरे कामों के बारे में क्यों नहीं बताया गया? मकबूल शेरवानी, मेजर सोमनाथ, ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह और लेफ्टिनेंट कर्नल डी आर राय की कहानियां स्कूलों में छात्रों को क्यों नहीं सुनाई जातीं? " सिन्हा ने कहा, "मैं आज आपको बताना चाहता हूं कि ये कहानियां अगले साल से स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगी। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन बहादुरों की कहानियां हर छात्र तक पहुंचाएं। " उन्होंने मकबूल शेरवानी, परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा और महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल डी आर राय को श्रद्धांजलि दी। उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहास को सही करने और लोगों को सत्ताईस अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के आक्रमण के बारे में और बताने की जरूरत है।
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शीघ्र लांच होने वाले धार्मिक चैनल वरदान से ग्यारह लोगों ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है. सबसे ज्यादा झटका सुदर्शन चैनल को लगा है. सुदर्शन से रोहित कुमार, अखिलेश पांडेय, महेश चतुर्वेदी, राजकुमार सिंह, राकेश तिवारी, मनोज चौहान, मोहनचंद्र और सिंकदर ने इस्तीफा देकर वरदान ज्वाइन किया है.
रोहित ने प्रोग्रामिंग डाइरेक्टर, अखिलेश पाण्डेय ने एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, महेश चतुर्वेदी ने सीनियर प्रोड्यूसर, राजकुमार सिंह ने कैमरामैन, राकेश तिवारी ने सीनियर एडिटर, मनोज चौहान ने एडिटर, मोहनच्रद तथा मो. सिकन्दर ने टेक्नीशियन के रूप में ज्वाइन किया है. स्पेश टीवी में एंकर कम प्रोड्यूसर के पोस्ट पर काम कर रही पूजा शर्मा, ए2जेड की प्रोड्यूसर विशाखा शर्मा, ए2जेड से ही टेक्नीशियन पवन कुमार शर्मा इस्तीफा देकर वरदान टीवी के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. इनलोगों ने सेम पोस्ट पर ज्वाइन किया है.
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शीघ्र लांच होने वाले धार्मिक चैनल वरदान से ग्यारह लोगों ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है. सबसे ज्यादा झटका सुदर्शन चैनल को लगा है. सुदर्शन से रोहित कुमार, अखिलेश पांडेय, महेश चतुर्वेदी, राजकुमार सिंह, राकेश तिवारी, मनोज चौहान, मोहनचंद्र और सिंकदर ने इस्तीफा देकर वरदान ज्वाइन किया है. रोहित ने प्रोग्रामिंग डाइरेक्टर, अखिलेश पाण्डेय ने एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, महेश चतुर्वेदी ने सीनियर प्रोड्यूसर, राजकुमार सिंह ने कैमरामैन, राकेश तिवारी ने सीनियर एडिटर, मनोज चौहान ने एडिटर, मोहनच्रद तथा मो. सिकन्दर ने टेक्नीशियन के रूप में ज्वाइन किया है. स्पेश टीवी में एंकर कम प्रोड्यूसर के पोस्ट पर काम कर रही पूजा शर्मा, एदोजेड की प्रोड्यूसर विशाखा शर्मा, एदोजेड से ही टेक्नीशियन पवन कुमार शर्मा इस्तीफा देकर वरदान टीवी के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. इनलोगों ने सेम पोस्ट पर ज्वाइन किया है.
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पटना के प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पूर्व सांसद संजय निरुपम ने कहा कि अब हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी का भाजपा नेता के साथ फोटोग्राफ्स सामने आया है.
पटनाः मुंबई महानगर कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सांसद संजय निरुपम आज पटना में भाजपा पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि भाजपा का आतंकवाद से क्या नाता है? भाजपा ने हमेशा खुद को आतंकवाद का विरोधी बताकर जनता को ठगा है.
निरुपम ने कहा कि मोहम्मद रियाज अंसारी, जिसने कन्हैया लाल की हत्या की थी. मोहमद रियाज नूपुर शर्मा के समर्थन करने पर उसकी हत्या की थी. पटना के प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में उन्होंने कहा कि अब हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी का भाजपा नेता के साथ फोटोग्राफ्स सामने आया है.
निरुपम ने कहा एनआईए जांच में हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी से भाजपा नेता के संबंध का खुलासा करे. राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार है. वहां अगले साल चुनाव होने वाला है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या आने वाले चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया है.
निरुपम ने कहा कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस तरह का हथकंडा भाजपा अपना सकती है. कांग्रेस जांच की भी मांग नहीं कर सकती है क्योंकि जांच एजेंसी इनके अंदर है. कांग्रेस के पूर्व सांसद ने मां काली विवाद पर कहा कि यह गलत परिपाटी शुरू हो रही है. कभी पैगंबर मोहम्मद का अपमान होता है तो कभी मां काली का अपमान किया जाता है. जो नहीं होनी चाहिए. यह बिल्कुल गलत है.
निरुपम ने कहा कि देश में हर धर्म का सम्मान होना चाहिए. देवी देवताओं के प्रति अपमानजनक बातें गलत है. इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए और ना ही इस पर राजनीति होनी चाहिए. निरुपम ने अमरनाथ में आई प्राकृतिक आपदा से 16 लोगों की हुई मौत पर दुख प्रकट किया. मृतकों के आत्म की शांति की प्रार्थना की. वही जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की शिंजो आबे की हत्या पर दुख जताया और श्रद्धांजलि दी.
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पटना के प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पूर्व सांसद संजय निरुपम ने कहा कि अब हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी का भाजपा नेता के साथ फोटोग्राफ्स सामने आया है. पटनाः मुंबई महानगर कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सांसद संजय निरुपम आज पटना में भाजपा पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि भाजपा का आतंकवाद से क्या नाता है? भाजपा ने हमेशा खुद को आतंकवाद का विरोधी बताकर जनता को ठगा है. निरुपम ने कहा कि मोहम्मद रियाज अंसारी, जिसने कन्हैया लाल की हत्या की थी. मोहमद रियाज नूपुर शर्मा के समर्थन करने पर उसकी हत्या की थी. पटना के प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में उन्होंने कहा कि अब हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी का भाजपा नेता के साथ फोटोग्राफ्स सामने आया है. निरुपम ने कहा एनआईए जांच में हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अंसारी से भाजपा नेता के संबंध का खुलासा करे. राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार है. वहां अगले साल चुनाव होने वाला है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या आने वाले चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया है. निरुपम ने कहा कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस तरह का हथकंडा भाजपा अपना सकती है. कांग्रेस जांच की भी मांग नहीं कर सकती है क्योंकि जांच एजेंसी इनके अंदर है. कांग्रेस के पूर्व सांसद ने मां काली विवाद पर कहा कि यह गलत परिपाटी शुरू हो रही है. कभी पैगंबर मोहम्मद का अपमान होता है तो कभी मां काली का अपमान किया जाता है. जो नहीं होनी चाहिए. यह बिल्कुल गलत है. निरुपम ने कहा कि देश में हर धर्म का सम्मान होना चाहिए. देवी देवताओं के प्रति अपमानजनक बातें गलत है. इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए और ना ही इस पर राजनीति होनी चाहिए. निरुपम ने अमरनाथ में आई प्राकृतिक आपदा से सोलह लोगों की हुई मौत पर दुख प्रकट किया. मृतकों के आत्म की शांति की प्रार्थना की. वही जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की शिंजो आबे की हत्या पर दुख जताया और श्रद्धांजलि दी.
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की अधिकता, रत्न तथा धातुओं की खाने, जमे हिम पर चलने की असुविधा, भूर्जपत्र, चमरीगाय, गगा आदि सबका यथार्थ वर्णन किया गया है। शिशुपालवघ महाकाव्य मे रैवतक पर्वत के वर्णन की तरह उसमे अनेक कल्पित पदार्थों की भरती नही की गई। तीसरे सर्ग मे वसन्त ऋतु तथा उसके उन्मादक प्रभाव का वर्णन भी कवि ने बड़े सुन्दर ढंग से किया है। कोई भी बात देश तथा काल के विरुद्ध होकर रसभग का कारण न बने इसके लिए वह सदा सतर्क रहता है ।
कालिदास की कविता की एक बड़ी विशेषता उसकी सरसता है। कुमारसभव मे मुख्य रस शृंगार है किन्तु स्थान-स्थान पर
(ग) उद्वेजयत्यङ्ग लिपाष्णिभागान्मार्गे शिलीभूतहिमेऽपि यत्र । न दुर्वहश्रोणिपयोधरार्ता भिन्दन्ति मन्दा गतिमश्वमुख्य ।।
कुमार० सर्ग १, पद्य ११ ।।
(घ) न्यस्ताक्षरा धातुरसेन यत्र भूर्जत्वच कुञ्जरबिन्दुगोणा । व्रजन्ति विद्याधरसुन्दरीणामनङ्गलेखक्रिपयोपयोगम् ॥
कुमार० सर्ग १, पद्य ७
(ड) लाङ्ग लविक्षेपविर्मापशोभैरितस्ततश्चन्द्रमरीचिगौरै । यस्यार्थयुक्त गिरिराजशब्द कुर्वति बालव्यजनैश्चमर्य' ।।
कुमार० सर्ग १, पद्य १३
(च) कपोलकण्ड करिभिविनेतु विघट्टिताना सरलद्रुमाणाम् । यत्र तक्षीरतया प्रसूत सानूनि गन्ध सुरभी करोति ॥
कुमार० सर्ग १, पद्य ९ ॥
१ बालेन्दुवक्रायविकासभावाद्वभु पलाशान्यतिलोहितानि । सद्यो वसन्तेन समागताना नखक्षतानीव वनस्थलीनाम् ।।
कुमार० सर्ग ३, पद्य २९ ।।
२. पर्याप्तपुष्पस्तबकस्तनाभ्य स्फुरत्प्रवालौष्ठमनोहराभ्य ।
लतावधूभ्यस्तरवोऽप्यवापुविनम्रशाखाभुजबन्धनानि ।।
कुमार० सर्ग ३, पद्य ३९ ॥
३ ( क ) हरस्तु किचित्परिलुप्त धैर्यश्चन्द्रोदयारम्भ इवाम्बुराशि । उमामुग्वे बिम्बफलाघरोष्ठे व्यापारयामास विलोचनानि ।। (ख) विवृण्वती शैलसुतापि भाव म. स्फुरद्बालकदम्बकल्पै । साचीकृता चारुतरेण तस्थौ मुखेन पर्यस्तविलोचनेन ।।
कुमार० सर्ग ३, पद्य ६७, ६८ ।
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की अधिकता, रत्न तथा धातुओं की खाने, जमे हिम पर चलने की असुविधा, भूर्जपत्र, चमरीगाय, गगा आदि सबका यथार्थ वर्णन किया गया है। शिशुपालवघ महाकाव्य मे रैवतक पर्वत के वर्णन की तरह उसमे अनेक कल्पित पदार्थों की भरती नही की गई। तीसरे सर्ग मे वसन्त ऋतु तथा उसके उन्मादक प्रभाव का वर्णन भी कवि ने बड़े सुन्दर ढंग से किया है। कोई भी बात देश तथा काल के विरुद्ध होकर रसभग का कारण न बने इसके लिए वह सदा सतर्क रहता है । कालिदास की कविता की एक बड़ी विशेषता उसकी सरसता है। कुमारसभव मे मुख्य रस शृंगार है किन्तु स्थान-स्थान पर उद्वेजयत्यङ्ग लिपाष्णिभागान्मार्गे शिलीभूतहिमेऽपि यत्र । न दुर्वहश्रोणिपयोधरार्ता भिन्दन्ति मन्दा गतिमश्वमुख्य ।। कुमारशून्य सर्ग एक, पद्य ग्यारह ।। न्यस्ताक्षरा धातुरसेन यत्र भूर्जत्वच कुञ्जरबिन्दुगोणा । व्रजन्ति विद्याधरसुन्दरीणामनङ्गलेखक्रिपयोपयोगम् ॥ कुमारशून्य सर्ग एक, पद्य सात लाङ्ग लविक्षेपविर्मापशोभैरितस्ततश्चन्द्रमरीचिगौरै । यस्यार्थयुक्त गिरिराजशब्द कुर्वति बालव्यजनैश्चमर्य' ।। कुमारशून्य सर्ग एक, पद्य तेरह कपोलकण्ड करिभिविनेतु विघट्टिताना सरलद्रुमाणाम् । यत्र तक्षीरतया प्रसूत सानूनि गन्ध सुरभी करोति ॥ कुमारशून्य सर्ग एक, पद्य नौ ॥ एक बालेन्दुवक्रायविकासभावाद्वभु पलाशान्यतिलोहितानि । सद्यो वसन्तेन समागताना नखक्षतानीव वनस्थलीनाम् ।। कुमारशून्य सर्ग तीन, पद्य उनतीस ।। दो. पर्याप्तपुष्पस्तबकस्तनाभ्य स्फुरत्प्रवालौष्ठमनोहराभ्य । लतावधूभ्यस्तरवोऽप्यवापुविनम्रशाखाभुजबन्धनानि ।। कुमारशून्य सर्ग तीन, पद्य उनतालीस ॥ तीन हरस्तु किचित्परिलुप्त धैर्यश्चन्द्रोदयारम्भ इवाम्बुराशि । उमामुग्वे बिम्बफलाघरोष्ठे व्यापारयामास विलोचनानि ।। विवृण्वती शैलसुतापि भाव म. स्फुरद्बालकदम्बकल्पै । साचीकृता चारुतरेण तस्थौ मुखेन पर्यस्तविलोचनेन ।। कुमारशून्य सर्ग तीन, पद्य सरसठ, अड़सठ ।
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Ranchi : रिम्स में फोर्थ ग्रेड पर नियुक्ति से संबंधित रिट याचिका और रिम्स में अन्य नियुक्तियों से संबंधित याचिका की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रिम्स के अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह से मौखिक कहा कि चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के विज्ञापन में रिम्स ने कैसे लिखा है कि झारखंड के नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं. नागरिक देश का होता है, राज्य का नहीं. ऐसे में विज्ञापन के तहत जितनी भी नियुक्तियां होंगी वह निरस्त हो जायेंगी. विज्ञापन में ऐसी बातें लिखना बीमार व्यक्ति का व्यवहार है, स्वस्थ व्यक्ति का ऐसा व्यवहार नहीं होता है. कोर्ट ने मामले में निर्देश दिया कि रिम्स में प्रशासनिक पदों की स्वीकृति के संबंध में जो राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है उस पर सरकार प्रतिशपथ पत्र दाखिल करे. वहीं रिम्स के कुछ शिक्षकों ने नयी नियुक्ति की वैधता को चुनौती दी है. इस पर कोर्ट ने रिम्स को प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि निर्धारित की है. खंडपीठ ने 4 नवंबर को रिम्स निदेशक को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है. साथ ही रिम्स में स्वीकृत रिक्त पदों पर नियुक्ति के संबंध में उन्हें जवाब देने को कहा है. बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिया है कि रिम्स में फोर्थ ग्रेड सहित अन्य के लिए किये गये नये विज्ञापन के आधार पर जो परीक्षा होगी और उसमें जो चयनित होंगे उनकी नियुक्ति इस रिट याचिका में पारित आदेश से प्रभावित होगा. दरअसल, रिम्स में फोर्थ ग्रेड की नियुक्ति के लिए 8 मार्च 2019 को विज्ञापन निकाला गया था. इसमें लैब अटेंडेंट तथा वार्ड अटेंडेंट के करीब 169 पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला था. जिसके आधार पर अभ्यर्थियों का चयन भी हो गया था, लेकिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था. इसके खिलाफ प्राथियों की ओर से झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर नियुक्ति पत्र निर्गत कराने का आग्रह किया गया था. हालांकि बाद में रिम्स ने इस विज्ञापन को रद्द कर दिया था. एक पीआइएल के आदेश के अनुपालन में रिम्स की ओर से 20 मई 2022 को लैब अटेंडेंट, वार्ड अटेंडेंट सहित अन्य पदों के लिए एक नया विज्ञापन निकाला गया. प्राथियों ने इस विज्ञापन को भी हाइकोर्ट में चुनौती दी है.
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Ranchi : रिम्स में फोर्थ ग्रेड पर नियुक्ति से संबंधित रिट याचिका और रिम्स में अन्य नियुक्तियों से संबंधित याचिका की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रिम्स के अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह से मौखिक कहा कि चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के विज्ञापन में रिम्स ने कैसे लिखा है कि झारखंड के नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं. नागरिक देश का होता है, राज्य का नहीं. ऐसे में विज्ञापन के तहत जितनी भी नियुक्तियां होंगी वह निरस्त हो जायेंगी. विज्ञापन में ऐसी बातें लिखना बीमार व्यक्ति का व्यवहार है, स्वस्थ व्यक्ति का ऐसा व्यवहार नहीं होता है. कोर्ट ने मामले में निर्देश दिया कि रिम्स में प्रशासनिक पदों की स्वीकृति के संबंध में जो राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है उस पर सरकार प्रतिशपथ पत्र दाखिल करे. वहीं रिम्स के कुछ शिक्षकों ने नयी नियुक्ति की वैधता को चुनौती दी है. इस पर कोर्ट ने रिम्स को प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई के लिए सोमवार की तिथि निर्धारित की है. खंडपीठ ने चार नवंबर को रिम्स निदेशक को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है. साथ ही रिम्स में स्वीकृत रिक्त पदों पर नियुक्ति के संबंध में उन्हें जवाब देने को कहा है. बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिया है कि रिम्स में फोर्थ ग्रेड सहित अन्य के लिए किये गये नये विज्ञापन के आधार पर जो परीक्षा होगी और उसमें जो चयनित होंगे उनकी नियुक्ति इस रिट याचिका में पारित आदेश से प्रभावित होगा. दरअसल, रिम्स में फोर्थ ग्रेड की नियुक्ति के लिए आठ मार्च दो हज़ार उन्नीस को विज्ञापन निकाला गया था. इसमें लैब अटेंडेंट तथा वार्ड अटेंडेंट के करीब एक सौ उनहत्तर पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला था. जिसके आधार पर अभ्यर्थियों का चयन भी हो गया था, लेकिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था. इसके खिलाफ प्राथियों की ओर से झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर नियुक्ति पत्र निर्गत कराने का आग्रह किया गया था. हालांकि बाद में रिम्स ने इस विज्ञापन को रद्द कर दिया था. एक पीआइएल के आदेश के अनुपालन में रिम्स की ओर से बीस मई दो हज़ार बाईस को लैब अटेंडेंट, वार्ड अटेंडेंट सहित अन्य पदों के लिए एक नया विज्ञापन निकाला गया. प्राथियों ने इस विज्ञापन को भी हाइकोर्ट में चुनौती दी है.
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माँ बनाना हर औरत के लिए सौभाग्य की बात होती है. लेकिन कई बार बच्चे को जन्म देने के बाद भी उन्हें जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. हाल ही में 10 महीने बाद दूसरी बार मां बनी मशहूर टीवी एक्ट्रेस छवि मित्तल ने बेटे के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी.
बेटे के जन्म के तीन दिन बाद भी छवि अस्पताल में भर्ती हैं. इस वजह का खुलासा टीवी एक्ट्रेस ने हाल ही में पोस्ट करके किया. छवि ने बताया कि बेटे के जन्म के बाद उन्हें एक कान से सुनाई देना बंद हो गया है. छवि ने लंबा पोस्ट लिखा और अपने दर्द को फैंस के साथ साझा किया.
आपको बता दें, 35 साल की छवि ने साल 2005 में टीवी डायरेक्टर मोहित हुसैन से शादी की थी. प्रेग्नेंट होने के दौरान छवि अपना एक्सपीरियंस, डाइट और फीलिंग शेयर कर सोशल मीडिया पर शेयर करती रहीं. छवि ने इस बच्चे को 9 नहीं 10 महीने में जन्म दिया है.
10वां महीना लगने पर छवि ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी. आमतौर पर बच्चे की डिलीवरी 9 महीने में हो जाती है. जब छवि ने ये पोस्ट डाली तो यूजर को लगा कि छवि ने गलती से 9 को 10 लिख दिया है. लेकिन छवि ने कंफर्म किया कि ये 10 ही है.
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माँ बनाना हर औरत के लिए सौभाग्य की बात होती है. लेकिन कई बार बच्चे को जन्म देने के बाद भी उन्हें जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. हाल ही में दस महीने बाद दूसरी बार मां बनी मशहूर टीवी एक्ट्रेस छवि मित्तल ने बेटे के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी. बेटे के जन्म के तीन दिन बाद भी छवि अस्पताल में भर्ती हैं. इस वजह का खुलासा टीवी एक्ट्रेस ने हाल ही में पोस्ट करके किया. छवि ने बताया कि बेटे के जन्म के बाद उन्हें एक कान से सुनाई देना बंद हो गया है. छवि ने लंबा पोस्ट लिखा और अपने दर्द को फैंस के साथ साझा किया. आपको बता दें, पैंतीस साल की छवि ने साल दो हज़ार पाँच में टीवी डायरेक्टर मोहित हुसैन से शादी की थी. प्रेग्नेंट होने के दौरान छवि अपना एक्सपीरियंस, डाइट और फीलिंग शेयर कर सोशल मीडिया पर शेयर करती रहीं. छवि ने इस बच्चे को नौ नहीं दस महीने में जन्म दिया है. दसवां महीना लगने पर छवि ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी. आमतौर पर बच्चे की डिलीवरी नौ महीने में हो जाती है. जब छवि ने ये पोस्ट डाली तो यूजर को लगा कि छवि ने गलती से नौ को दस लिख दिया है. लेकिन छवि ने कंफर्म किया कि ये दस ही है.
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तुमने कुछ नहीं कहा,
पर प्यार हो गया।"
तुमने कुछ नहीं कहा,
पर प्यार हो गया।"
भेंट से मन थोड़ा आश्वस्त हो जाता था और संतुष्टि का भाव आ जाता था। जब क्वार्टर में पहुँचता तो गीता दिख जाती।और मैं अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयत्न करने लगता। मैंने बचपन में एक कहानी सुनी थी कि राजा शान्तनु जब धीवर कन्या सत्यवती से मिले थे तो उसके सौन्दर्य में खो गये थे। सत्यवती ने जो शर्तें उनके सामने रखीं उन्हें वे मान नहीं पा रहे थे। तो बुझे-बुझे मन से राजमहल लौट आये। और बिमार पड़ गये तथा राजकाज में रुचि लेना छोड़ दिया। उनके पुत्र भीष्म के प्रणों से उनकी बिमारी का उपचार हो सका था।
बीच-बीच में मैं पत्र को संपादित करता रहता था और इस क्रम में वह छोटा होता चला गया था। जाड़ों में कोट की जेब में और गर्मी में पेंट की जेब में रख कर वह मुझे अव्यक्त उष्मा प्रदान करता रहता था। गीता मेरा मार्ग दर्शन करती रहती थी।
एक समय ऐसा भी आया कि पत्र संपादित करते-करते मात्र एक वाक्य में बदल गया। यह वाक्य वही था जो लगभग चौवालीस साल बाद मेरी चार साल की नातिन घर से बाहर जाते समय मुझे बोलती है," बाबू जी, मैं तुमसे प्यार करती हूँ।" फिर शीघ्रता से बोलती है," ये नहीं बोलना चाहिए, ना।" उसकी माँ बोलती है," बाबू जी को बोल सकते हैं।" तो वह कहती है," ओह, बाबू जी को बोल सकते हैं!" वह फिर बोलती है," बाबू जी, मैं तुमसे प्यार करती हूँ।" मैं कहता हूँ," हाँ, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।" वह हाथ हिलाते हुए बाहर चली जाती है और मैं दूर अतीत में खो जाता हूँ।
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तुमने कुछ नहीं कहा, पर प्यार हो गया।" तुमने कुछ नहीं कहा, पर प्यार हो गया।" भेंट से मन थोड़ा आश्वस्त हो जाता था और संतुष्टि का भाव आ जाता था। जब क्वार्टर में पहुँचता तो गीता दिख जाती।और मैं अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयत्न करने लगता। मैंने बचपन में एक कहानी सुनी थी कि राजा शान्तनु जब धीवर कन्या सत्यवती से मिले थे तो उसके सौन्दर्य में खो गये थे। सत्यवती ने जो शर्तें उनके सामने रखीं उन्हें वे मान नहीं पा रहे थे। तो बुझे-बुझे मन से राजमहल लौट आये। और बिमार पड़ गये तथा राजकाज में रुचि लेना छोड़ दिया। उनके पुत्र भीष्म के प्रणों से उनकी बिमारी का उपचार हो सका था। बीच-बीच में मैं पत्र को संपादित करता रहता था और इस क्रम में वह छोटा होता चला गया था। जाड़ों में कोट की जेब में और गर्मी में पेंट की जेब में रख कर वह मुझे अव्यक्त उष्मा प्रदान करता रहता था। गीता मेरा मार्ग दर्शन करती रहती थी। एक समय ऐसा भी आया कि पत्र संपादित करते-करते मात्र एक वाक्य में बदल गया। यह वाक्य वही था जो लगभग चौवालीस साल बाद मेरी चार साल की नातिन घर से बाहर जाते समय मुझे बोलती है," बाबू जी, मैं तुमसे प्यार करती हूँ।" फिर शीघ्रता से बोलती है," ये नहीं बोलना चाहिए, ना।" उसकी माँ बोलती है," बाबू जी को बोल सकते हैं।" तो वह कहती है," ओह, बाबू जी को बोल सकते हैं!" वह फिर बोलती है," बाबू जी, मैं तुमसे प्यार करती हूँ।" मैं कहता हूँ," हाँ, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।" वह हाथ हिलाते हुए बाहर चली जाती है और मैं दूर अतीत में खो जाता हूँ।
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बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने ट्वीट किया कि वह इतने युवा और सक्रिय राजनीतिक नेता के जीवन के जल्द समाप्ति से बहुत दुखी हैं - उनके पास देश के विकास में योगदान देने के लिए बहुत कुछ था। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन पर भारतीय उद्योग जगत ने शनिवार को गहरा दुःख जताया। देश के शीर्ष उद्यमियों ने जेटली को अपनी श्रद्धांजलि में उन्हें एक महान राजनेता और सच्चा सुधारवादी बताया।
भारती एयरटेल के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने कहा कि भारत का एक प्रखर नेता और विधि विशेष दुनिया से चला गया। उन्होंने कहा कि जेटली किसी बात को अपने खास अंदाज से देखते थे। इसी करण कई बार दूसरे पक्ष के लोग भी सलाह के लिए उनकी ओर आकर्षित होते थे।
एचडीएफसी लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक पारेख ने कहा कि देश ने एक बड़ी शख्सियत को खो दिया है। हाल के समय में भारत के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक (जीएसटी की शुरुआत) के लिए देश हमेशा उनको याद करेगा।
वेदांत के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह एक अपूरणीय क्षति है, यह क्षति न केवल उनकी पार्टी के लिए है, बल्कि पूरे देश की है। बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने ट्वीट किया कि वह इतने युवा और सक्रिय राजनीतिक नेता के जीवन के जल्द समाप्ति से बहुत दुखी हैं - उनके पास देश के विकास में योगदान देने के लिए बहुत कुछ था। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
उद्योगमंडल एसोचेम के अध्यक्ष बीके गोयनका ने कहा कि अरुण जेटली के निधन से उन्हें गहरा दुःख हुआ। वह एक राष्ट्रीय नेता थे, जिन्होंने समाज के सभी वर्गों का काफी सम्मान मिला। जेटली ने एक व्यवहारिक और प्रगतिशील नेता के रूप में अमिट छाप छोड़ी है। वह मूल रूप से सुधारवादी थे और 'एसोचेम' के अच्छे मित्र थे।
सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम कर्लोस्कर ने जेटली को ' सच्चा सुधारवादी और आर्थिक उदारवाद का सशक्त प्रवक्ता बताया। ' पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजीव तलवार ने जेटली को सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री बताया, जिन्होंने देश को राजकोषीय विवेक और उत्कृष्ट वित्तीय सुगठन प्रदान किया तथा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया।
माल एवं सेवा कर, दिवाला और दिवालियापन संहिता जैसे ऐतिहासिक सुधारों को अंजाम देने का एक बड़ा श्रेय जेटली को जायेगा। जेएसडब्ल्यू समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सज्जन जिन्दल ने ट्वीट किया कि जेटली एक अद्भुत इंसान, एक अच्छे मित्र और एक संपूर्ण पेशेवर थे। वह देश को बारीकी से समझते थे और उन्हें हमेशा आदर के साथ याद किया जाएगा और उनकी कमी खलेगी।
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बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने ट्वीट किया कि वह इतने युवा और सक्रिय राजनीतिक नेता के जीवन के जल्द समाप्ति से बहुत दुखी हैं - उनके पास देश के विकास में योगदान देने के लिए बहुत कुछ था। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन पर भारतीय उद्योग जगत ने शनिवार को गहरा दुःख जताया। देश के शीर्ष उद्यमियों ने जेटली को अपनी श्रद्धांजलि में उन्हें एक महान राजनेता और सच्चा सुधारवादी बताया। भारती एयरटेल के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने कहा कि भारत का एक प्रखर नेता और विधि विशेष दुनिया से चला गया। उन्होंने कहा कि जेटली किसी बात को अपने खास अंदाज से देखते थे। इसी करण कई बार दूसरे पक्ष के लोग भी सलाह के लिए उनकी ओर आकर्षित होते थे। एचडीएफसी लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक पारेख ने कहा कि देश ने एक बड़ी शख्सियत को खो दिया है। हाल के समय में भारत के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक के लिए देश हमेशा उनको याद करेगा। वेदांत के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह एक अपूरणीय क्षति है, यह क्षति न केवल उनकी पार्टी के लिए है, बल्कि पूरे देश की है। बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने ट्वीट किया कि वह इतने युवा और सक्रिय राजनीतिक नेता के जीवन के जल्द समाप्ति से बहुत दुखी हैं - उनके पास देश के विकास में योगदान देने के लिए बहुत कुछ था। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। उद्योगमंडल एसोचेम के अध्यक्ष बीके गोयनका ने कहा कि अरुण जेटली के निधन से उन्हें गहरा दुःख हुआ। वह एक राष्ट्रीय नेता थे, जिन्होंने समाज के सभी वर्गों का काफी सम्मान मिला। जेटली ने एक व्यवहारिक और प्रगतिशील नेता के रूप में अमिट छाप छोड़ी है। वह मूल रूप से सुधारवादी थे और 'एसोचेम' के अच्छे मित्र थे। सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम कर्लोस्कर ने जेटली को ' सच्चा सुधारवादी और आर्थिक उदारवाद का सशक्त प्रवक्ता बताया। ' पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजीव तलवार ने जेटली को सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री बताया, जिन्होंने देश को राजकोषीय विवेक और उत्कृष्ट वित्तीय सुगठन प्रदान किया तथा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया। माल एवं सेवा कर, दिवाला और दिवालियापन संहिता जैसे ऐतिहासिक सुधारों को अंजाम देने का एक बड़ा श्रेय जेटली को जायेगा। जेएसडब्ल्यू समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सज्जन जिन्दल ने ट्वीट किया कि जेटली एक अद्भुत इंसान, एक अच्छे मित्र और एक संपूर्ण पेशेवर थे। वह देश को बारीकी से समझते थे और उन्हें हमेशा आदर के साथ याद किया जाएगा और उनकी कमी खलेगी।
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नई दिल्लीः
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला और कहा कि चुनाव में लड़ाई विकास और जातिवाद के बीच है, और विकास हमेशा जातिवाद से दो कदम आगे होता है, इसलिए बीजेपीको जीत मिलेगी. शाह ने इंदौर, रतलाम, झाबुआ में कार्यकर्ता सम्मेलन, किसान सम्मेलन, जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "कांग्रेस की आदत जातिवाद के जरिए समाज को उलझाने की है. गुजरात चुनाव में उन्होंने यही किया, अब मध्य प्रदेश में भी यही होगा, मगर कांग्रेस नेता कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह यह नहीं जानते कि जातिवाद और विकास की लड़ाई में विकास आगे होता है. बीजेपीविकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और जनता का साथ उसे मिलेगा. "
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए शाह ने कहा, "देश के पास चमत्कारिक नेतृत्व है. दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है, बीते दिनों उन्हें अर्थ अवार्ड दिया गया, ऐसा व्यक्तित्व बार-बार नहीं मिलता. उनके नेतृत्व पर हमें गर्व होता है. "
शाह विशेष विमान से इंदौर पहुंचे और दशहरा मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कहा, "बीजेपीके लिए देश सवरेपरि है, इसलिए दुश्मन देश की कोई हरकत बर्दाश्त नहीं की जा रही है. इतना ही नहीं इस देश में एक भी घुसपैठिये को नहीं रहने देंगे. "
उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया, "वे राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों का समर्थन करते हैं, मगर बीजेपीके लिए देश से बढ़कर कोई नहीं है. इसलिए देश के विभिन्न राज्यों में बसे घुसपैठियों को निकाला जाएगा, देश में आने वाले समय में एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. "
शाह ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा, "मोदी सरकार से चार साल का हिसाब मांगने वालों को चार पीढ़ी का हिसाब देना चाहिए. साथ ही राहुल गांधी को बताना चाहिए कि घुसपैठियों को लेकर उनकी क्या राय है. "
बीजेपीअध्यक्ष ने यहां कांग्रेस के शासन काल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, "बीते चार साल में मोदी सरकार ने समाज के हर वर्ग को सुविधाएं देने का काम किया है, योजनाएं बनाई है, मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों के लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिला है. किसानों के हित में फैसले लिए गए हैं. "
शाह ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोलते हुए कहा कि राजा-महाराजा और उद्योगपति क्या जानेंगे किसानों के दर्द को.
उन्होंने रतलाम जिले में सभा को संबोधित करते हुए कहा, "राजा-महाराजा और उद्योगपति किसान के दर्द को नहीं समझ सकते. उन्हें तो यह भी पता नहीं होगा कि सरसों खरीफ की फसल है या रबी की. शिवराज गरीब किसान के बेटे हैं, इसलिए वह किसानों का दर्द समझते हैं. "
बीजेपीअध्यक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का ब्यौरा दिया. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां किसानों को उपज का दाम बढ़ाकर दिया जा रहा है, वहीं सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है और बिजली उत्पादन भी बढ़ा है.
इससे पहले विशेष विमान से इंदौर पहुंचे शाह की बीजेपीनेताओं ने अगवानी की. उन्होंने देवी अहिल्या बाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद राजवाड़ा क्षेत्र स्थित महालक्ष्मी मंदिर में पूजा की. उसके बाद उन्होंने महाजनसंपर्क अभियान की शुरुआत की.
इस बीच, एससीएसटी अधिनियम के विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. प्रदर्शनकारियों में करणी सेना और सवर्ण समाज के लोग शामिल थे. ये लोग सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को संसद में बदले जाने का विरोध कर रहे थे. प्रदेश के अन्य हिस्सों में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन का दौर जारी है.
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नई दिल्लीः बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला और कहा कि चुनाव में लड़ाई विकास और जातिवाद के बीच है, और विकास हमेशा जातिवाद से दो कदम आगे होता है, इसलिए बीजेपीको जीत मिलेगी. शाह ने इंदौर, रतलाम, झाबुआ में कार्यकर्ता सम्मेलन, किसान सम्मेलन, जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "कांग्रेस की आदत जातिवाद के जरिए समाज को उलझाने की है. गुजरात चुनाव में उन्होंने यही किया, अब मध्य प्रदेश में भी यही होगा, मगर कांग्रेस नेता कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह यह नहीं जानते कि जातिवाद और विकास की लड़ाई में विकास आगे होता है. बीजेपीविकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और जनता का साथ उसे मिलेगा. " प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए शाह ने कहा, "देश के पास चमत्कारिक नेतृत्व है. दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है, बीते दिनों उन्हें अर्थ अवार्ड दिया गया, ऐसा व्यक्तित्व बार-बार नहीं मिलता. उनके नेतृत्व पर हमें गर्व होता है. " शाह विशेष विमान से इंदौर पहुंचे और दशहरा मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कहा, "बीजेपीके लिए देश सवरेपरि है, इसलिए दुश्मन देश की कोई हरकत बर्दाश्त नहीं की जा रही है. इतना ही नहीं इस देश में एक भी घुसपैठिये को नहीं रहने देंगे. " उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया, "वे राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों का समर्थन करते हैं, मगर बीजेपीके लिए देश से बढ़कर कोई नहीं है. इसलिए देश के विभिन्न राज्यों में बसे घुसपैठियों को निकाला जाएगा, देश में आने वाले समय में एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा. " शाह ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा, "मोदी सरकार से चार साल का हिसाब मांगने वालों को चार पीढ़ी का हिसाब देना चाहिए. साथ ही राहुल गांधी को बताना चाहिए कि घुसपैठियों को लेकर उनकी क्या राय है. " बीजेपीअध्यक्ष ने यहां कांग्रेस के शासन काल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, "बीते चार साल में मोदी सरकार ने समाज के हर वर्ग को सुविधाएं देने का काम किया है, योजनाएं बनाई है, मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों के लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिला है. किसानों के हित में फैसले लिए गए हैं. " शाह ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोलते हुए कहा कि राजा-महाराजा और उद्योगपति क्या जानेंगे किसानों के दर्द को. उन्होंने रतलाम जिले में सभा को संबोधित करते हुए कहा, "राजा-महाराजा और उद्योगपति किसान के दर्द को नहीं समझ सकते. उन्हें तो यह भी पता नहीं होगा कि सरसों खरीफ की फसल है या रबी की. शिवराज गरीब किसान के बेटे हैं, इसलिए वह किसानों का दर्द समझते हैं. " बीजेपीअध्यक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का ब्यौरा दिया. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां किसानों को उपज का दाम बढ़ाकर दिया जा रहा है, वहीं सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है और बिजली उत्पादन भी बढ़ा है. इससे पहले विशेष विमान से इंदौर पहुंचे शाह की बीजेपीनेताओं ने अगवानी की. उन्होंने देवी अहिल्या बाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद राजवाड़ा क्षेत्र स्थित महालक्ष्मी मंदिर में पूजा की. उसके बाद उन्होंने महाजनसंपर्क अभियान की शुरुआत की. इस बीच, एससीएसटी अधिनियम के विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. प्रदर्शनकारियों में करणी सेना और सवर्ण समाज के लोग शामिल थे. ये लोग सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को संसद में बदले जाने का विरोध कर रहे थे. प्रदेश के अन्य हिस्सों में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन का दौर जारी है.
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पत्नीः अब सुबह के सात बजे किसलिए आए हो?
पतिः नाश्ता करने के लिए!
एक आदमी हमेशा अपने काम इस तरह व्यस्त रहता मानो घर से उसे कोई मतलब ही न हो. एक दिन उसकी पत्नी ने उसे सबक सिखाने की ठानी. .
पत्नीः पता है, हमारा मुन्ना चलने लगा है?
पति (जो उस वक्त भी काम में व्यस्त था): कब से?
पत्नीः अजी 2012 से.
पतिः ओह! तब तो वह 2013 में चला गया होगा.
किसी महिला ने पहली बार नाटक में झगड़ालू पत्नी का अभिनय किया और लोगों ने उसे बहुत पसंद किया.
पत्रकार (महिला से): पहली बार में ही इतने अच्छे अभिनय का रहस्य क्या है?
महिलाः इसमें कोई खास बात नहीं. मंच पर अपने कलाकार साथी के साथ बोलते समय मैंने मन में यही सोच लिया था वास्तव में अपने पति से बात कर रही हूं.
साइकिल के बदले पत्नी क्यों नहीं!
पत्नीः सुनो जी, अखबार में खबर है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को बेच डाला?
पतिः ओह! कितने में?
पत्नीः एक साइकिल के बदले में, कहीं तुम भी तो ऐसा नहीं करोगे?
पतिः मैं इतना मूर्ख थोड़े ही हूं, तुम्हारे बदले में तो कार आ सकती है.
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पत्नीः अब सुबह के सात बजे किसलिए आए हो? पतिः नाश्ता करने के लिए! एक आदमी हमेशा अपने काम इस तरह व्यस्त रहता मानो घर से उसे कोई मतलब ही न हो. एक दिन उसकी पत्नी ने उसे सबक सिखाने की ठानी. . पत्नीः पता है, हमारा मुन्ना चलने लगा है? पति : कब से? पत्नीः अजी दो हज़ार बारह से. पतिः ओह! तब तो वह दो हज़ार तेरह में चला गया होगा. किसी महिला ने पहली बार नाटक में झगड़ालू पत्नी का अभिनय किया और लोगों ने उसे बहुत पसंद किया. पत्रकार : पहली बार में ही इतने अच्छे अभिनय का रहस्य क्या है? महिलाः इसमें कोई खास बात नहीं. मंच पर अपने कलाकार साथी के साथ बोलते समय मैंने मन में यही सोच लिया था वास्तव में अपने पति से बात कर रही हूं. साइकिल के बदले पत्नी क्यों नहीं! पत्नीः सुनो जी, अखबार में खबर है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को बेच डाला? पतिः ओह! कितने में? पत्नीः एक साइकिल के बदले में, कहीं तुम भी तो ऐसा नहीं करोगे? पतिः मैं इतना मूर्ख थोड़े ही हूं, तुम्हारे बदले में तो कार आ सकती है.
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35 अवैध शराब के डब्बे बरामद, हरियाणा से शराब लाकर यूपी और दिल्ली के डीलरों को ही रही थी सप्लाई वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। हरियाणा से शराब लाकर यूपी और दिल्ली में सप्लाई करने वाले दो सप्लायरों को शाहबाद डेयरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सोनीपत के बलराज और बवाना गांव के अमित को गिरफ्तार करके 22 डब्बे क्वार्टर और 13 डब्बे हाफ हरियाणा शराब के बरामद करके सप्लाई में इस्तेमाल की जाने वाल सेट्रो कार बरामद की है। दोनों को थानाध्यक्ष fिदनेश कुमार के निर्देशन में गठित टीम ने होलंबी कला रेलवे कासिंग के पास चैकिंग के दौरान पकड़ा बलराज भवानी इलाके में एक मामले में शामिल रहा है। वहीं अमित भी अली पुर के इसी तरह के मामले में शामिल रहा है। वह पहले एक ठेकेदार पर सेल्समैन रह चुका है। ये इस धंधे में यूपी व दिल्ली में सप्लाई करके काफी पैसा कमाते थे।
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पैंतीस अवैध शराब के डब्बे बरामद, हरियाणा से शराब लाकर यूपी और दिल्ली के डीलरों को ही रही थी सप्लाई वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। हरियाणा से शराब लाकर यूपी और दिल्ली में सप्लाई करने वाले दो सप्लायरों को शाहबाद डेयरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सोनीपत के बलराज और बवाना गांव के अमित को गिरफ्तार करके बाईस डब्बे क्वार्टर और तेरह डब्बे हाफ हरियाणा शराब के बरामद करके सप्लाई में इस्तेमाल की जाने वाल सेट्रो कार बरामद की है। दोनों को थानाध्यक्ष fिदनेश कुमार के निर्देशन में गठित टीम ने होलंबी कला रेलवे कासिंग के पास चैकिंग के दौरान पकड़ा बलराज भवानी इलाके में एक मामले में शामिल रहा है। वहीं अमित भी अली पुर के इसी तरह के मामले में शामिल रहा है। वह पहले एक ठेकेदार पर सेल्समैन रह चुका है। ये इस धंधे में यूपी व दिल्ली में सप्लाई करके काफी पैसा कमाते थे।
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में दो बातें और कहनी हैं। कुछ काव्य ऐसे होते हैं, जिनमें केवल भावों का ही प्रदर्शन या चित्रण होता है। आचार्य शुक्ल इन्हें { आलंबन का आरोप भाव-प्रदर्शक' काव्य कहते हैं। आधुनिक युग के प्रगीत और इसका महत्व मुक्तक ( लोरिक्स ) इस प्रकार के काव्य के अच्छे उदाहरण हैं, जिनमें प्रायः भाव की ही व्यंजना की जाती है, विभाव
का श्वित्रण' बहुत ही कम रहता है। ऐसे काव्य का अध्ययन करते समय, आचार्य शुक्ल कहते है, श्रोता वा पाठक अपनी ओर से आलबन का आरोप कर लेता है । कहना न होगा कि श्रोता था पाठक द्वारा आलंबन का आरोप अपनीअपनी रुचि के अनुकूल व्यक्ति रूप में ही होगा। कभी-कभी होता यह है कि "पोटक या श्रोता की मनोवृत्ति या संस्कार के कारण वर्णित व्यक्ति विशेष के स्थान पर कल्पना में उसी के समान धर्मवाली कोई मूर्ति विशेष आ जाती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि वह कल्पित मूर्ति भी विशेष ही होगीव्यक्ति की ही होगी।" - ( चिन्तामणि, पु० ३१२ ) । इस प्रकार हम देखते हैं कि आचार्य शुक्ल का काव्य को लेकर विवग्रहणवाला सिद्धान्त रस-निरूपण में भी पूर्णतः घटित होता है । इस विवेचन से एक और बात लक्षित होती है, वह यह कि रस के अवयवों की नियोजना में आलम्बन का बड़ा महत्व है । आचार्य शुक्ल की भी इस विषय मे यही धारणा है, वे केवल इसी के चित्रण द्वारा भी रसानुभूति मानने को तैयार हैं। उनका कहना है - "मैं आलम्बनं मात्र के विशुद्ध वर्णन को श्रोता में रसानुभव ( भावानुभव सही ) उत्पन्न करने में पूर्ण समर्थ मानता हूँ ।"~~( काव्य में प्राकृतिक दृश्य ) ।
रस के सभी प्रधान अवयवों पर विचार करने के पश्चात् अब विचार इस पर करना है कि इनके द्वारा रसानुभूति का रहस्य क्या है। रसानुभूति के साधक के रूप में ये क्यों और कैसे उपस्थित होते हैं, अर्थात् रस की प्रक्रिया क्या है । रस-निष्पत्ति वा अनुभूति की प्रक्रिया के विषय में मुनिवर भरत ने केवल इतना ही कहा है कि विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से इसकी सृष्टि होती है। इतने से ही विषय का परिपूर्ण उद्घाटन न होने के कारण उनके
पश्चात् कई आचार्यो नै, जिनकी संख्या ग्यारह है, अपनी-अपनी धारणाओं के अनुकूल इस पर विचार किया। इन ग्यारह आचार्यों में से चार भट्ट लोल्लट, शक, भट्ट नायक और अभिनय गुरुपादाचार्य-के मत विचारणीन है। महलेल्ट की दृष्टि से रस की स्थिति अनुकार्य वा पात्र में होती है, जिसके रूप रंग, वेश भूषा, कार्यकलाप की वर्णिया ( रोल ) में अभिनेता रंग मच पर उपस्थित होता है। दर्शक अनुकार्य का अनुकरणवर्ता अभिनेता में उसके ( अनुकार्य के ) रूप व्यापार की नियोजन देख कर उसे (अभिनेता ची ) ही जनुकाय के रूप में ग्रहण करता है। इस प्रकार अनुकार्य के भार्ती की 'उत्पत्ति' अभिनेता म हो जाती है । दर्शक इस अवस्था में चमकृत हो जाता है, मिस की स्थिति जनुकाय म होती है, जो अभिनेता के रूप में उपस्थित रहता है । भट्ट लेव्ल्ट का यह मत 'उत्पत्तिनाद के नाम से प्रचलित है । इस मत का यह पत्र कि श्रोता, दशक या पाठक में रस की स्थिति नहीं है, ठीक नहीं । भारतीय तथा अभारतीय सभी शिष्ट साहित्य मीमासको की यह मा यता है कि रसानुभन दर्शकको होता है। पर उत्पत्तिवाद द्वारा यह अवश्य अनगत होता है कि दशक को हुदा है और वह चमत्कार रूप में ही सहीजाय्वन रूप अभिनेता द्वारा कुछ न कुछ प्रभावित अवश्य होता है । 'रस की स्थिति अनुकार मे होती है, अभिनेता जिसका प्रतिनिधि है - इस अर्थ यदि यह लिया जान कि अभिनन के समय अनुकार्य के रूप, गुण, शील, नित्याकप आदि की जवनारणा ( उत्पत्ति ) अभिनेता की पडतान उसमे ( अभिनेता मे ) स्वत हो जाती है, और स्त हो जाती है, और वह अनुमाय के रूप मे - ( दृश्य ) काव्य में वर्णित आपके रूप में उपस्थित होता है, जिसे देख दर्शन चमत्कृत होकर अपने हृदय का रजन करता है, और 'रजन' से 'रमना' का जय गीत हो, तो इस मृत में विशेष आपत्ति की सम्भावना नहीं प्रतीत होती । इस स्थिति म 'रस की स्थिति जनुकाय में है' का तालन यह होगा कि वह उस का कारण है।
जाचाय शबुक ने भी रस निष्पत्ति के विषय में अपना मत स्थापित किया और यह 'अनुमितिवाद' कहलाया । उन्होंने भी यह प्रतिपादित किया कि रख
की स्थिति अनुकार्य में ही होती है, पर अभिनेता द्वारा उसके आचार्य शुक्ल का अनुकरण से रस की 'उत्पत्ति' नट में नहीं होती, प्रत्युत अनुमान से दर्शक उसे ( अभिनेता को ) ही नायक वा
अनुकार्य मानकर चमत्कृत हो आनन्दित होता है । भट्ट लोल्लट और शंकुक के मत में अंतर यहीं प्रतीत होता है कि एक रस की उत्पत्ति अभिनेता में मानते हैं और दूसरे 'अनुमिति'- से अभिनेता को नायक के रूप में ग्रहण करते हैं । दोनों ही रस की स्थिति अनुकार्य में प्रतिपादित करते है । दर्शक में रस की स्थिति दोनों ही नहीं स्वीकार करते । दर्शक के पक्ष में दोनों की धारणाएँ समान हैं । अनुमित्तिवाद के विषय में विचार करने पर विदित होगा कि इसमें दर्शक का पक्ष कुछ अधिक आया, उसमें अनुमान करने को शक्ति मानी गई और तत्पश्चात् चमत्कृत और आनंदित होते की । पर बाघा यह उपस्थित होती है कि रस की स्थिति उसमें नहीं मानी गई, क्योंकि कुशल दर्शक अनुमान से भी रस कोटि के कुछ निकट पहुँच सकता है । इस वाद के अनुकार्य-पक्ष पर विचार करने से ज्ञात होता है कि उत्पत्तिवाद की भाँति रस का मूल वही ( अनुकार्य ही) है, अंतर केवल इतना ही है कि नट की कला द्वारा अनुकार्य के भाव आदि की अवतारणा (उत्पचि) उसमें (नट में ) होती है और इस बाद में उसके (कला के) प्रदर्शन पर अनुकार्य का उसमें (नट में ) अनुमान । उत्पत्ति की प्रक्रिया लघु और अनुमिति की विस्तृत प्रतीत होती है । पर सूक्ष्मतः दोनों का लक्ष्य प्रस्थान-भेद होते हुए भी एक ही.. निर्धारित किया जा सकता है । दोनों का लक्ष्य आलंबन-रूप अनुकार्य को अनुकर्ता में स्थापित करके दर्शक में चमत्कार द्वारा आनंद की अनुभूति का प्रतिपादन करना है । रसवाद के यथार्थ स्वरूप की स्थापना इनके पश्चात् के दोनों आचार्यों भट्ट नायक और अभिनव गुप्तपादाचार्य - ने की । इन्होंने यह स्थापित किया कि रस की स्थिति अनुकार्य में नहीं दर्शक, श्रोता वा पाटक में होती है, जो बुद्धि संगत तथ्य है । यह तो स्पष्ट है कि सभी रस-मीमांसकों के समुख लक्ष्य रूप में दृश्यकाव्य था । भट्ट नायक ने रस-निष्पत्ति वा रसानुभूति की प्रक्रिया की पूर्णता के लिए तीन वृत्तियाँ वा शक्तियाँ मानीं, जिनके
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में दो बातें और कहनी हैं। कुछ काव्य ऐसे होते हैं, जिनमें केवल भावों का ही प्रदर्शन या चित्रण होता है। आचार्य शुक्ल इन्हें { आलंबन का आरोप भाव-प्रदर्शक' काव्य कहते हैं। आधुनिक युग के प्रगीत और इसका महत्व मुक्तक इस प्रकार के काव्य के अच्छे उदाहरण हैं, जिनमें प्रायः भाव की ही व्यंजना की जाती है, विभाव का श्वित्रण' बहुत ही कम रहता है। ऐसे काव्य का अध्ययन करते समय, आचार्य शुक्ल कहते है, श्रोता वा पाठक अपनी ओर से आलबन का आरोप कर लेता है । कहना न होगा कि श्रोता था पाठक द्वारा आलंबन का आरोप अपनीअपनी रुचि के अनुकूल व्यक्ति रूप में ही होगा। कभी-कभी होता यह है कि "पोटक या श्रोता की मनोवृत्ति या संस्कार के कारण वर्णित व्यक्ति विशेष के स्थान पर कल्पना में उसी के समान धर्मवाली कोई मूर्ति विशेष आ जाती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि वह कल्पित मूर्ति भी विशेष ही होगीव्यक्ति की ही होगी।" - । इस प्रकार हम देखते हैं कि आचार्य शुक्ल का काव्य को लेकर विवग्रहणवाला सिद्धान्त रस-निरूपण में भी पूर्णतः घटित होता है । इस विवेचन से एक और बात लक्षित होती है, वह यह कि रस के अवयवों की नियोजना में आलम्बन का बड़ा महत्व है । आचार्य शुक्ल की भी इस विषय मे यही धारणा है, वे केवल इसी के चित्रण द्वारा भी रसानुभूति मानने को तैयार हैं। उनका कहना है - "मैं आलम्बनं मात्र के विशुद्ध वर्णन को श्रोता में रसानुभव उत्पन्न करने में पूर्ण समर्थ मानता हूँ ।"~~ । रस के सभी प्रधान अवयवों पर विचार करने के पश्चात् अब विचार इस पर करना है कि इनके द्वारा रसानुभूति का रहस्य क्या है। रसानुभूति के साधक के रूप में ये क्यों और कैसे उपस्थित होते हैं, अर्थात् रस की प्रक्रिया क्या है । रस-निष्पत्ति वा अनुभूति की प्रक्रिया के विषय में मुनिवर भरत ने केवल इतना ही कहा है कि विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से इसकी सृष्टि होती है। इतने से ही विषय का परिपूर्ण उद्घाटन न होने के कारण उनके पश्चात् कई आचार्यो नै, जिनकी संख्या ग्यारह है, अपनी-अपनी धारणाओं के अनुकूल इस पर विचार किया। इन ग्यारह आचार्यों में से चार भट्ट लोल्लट, शक, भट्ट नायक और अभिनय गुरुपादाचार्य-के मत विचारणीन है। महलेल्ट की दृष्टि से रस की स्थिति अनुकार्य वा पात्र में होती है, जिसके रूप रंग, वेश भूषा, कार्यकलाप की वर्णिया में अभिनेता रंग मच पर उपस्थित होता है। दर्शक अनुकार्य का अनुकरणवर्ता अभिनेता में उसके रूप व्यापार की नियोजन देख कर उसे ही जनुकाय के रूप में ग्रहण करता है। इस प्रकार अनुकार्य के भार्ती की 'उत्पत्ति' अभिनेता म हो जाती है । दर्शक इस अवस्था में चमकृत हो जाता है, मिस की स्थिति जनुकाय म होती है, जो अभिनेता के रूप में उपस्थित रहता है । भट्ट लेव्ल्ट का यह मत 'उत्पत्तिनाद के नाम से प्रचलित है । इस मत का यह पत्र कि श्रोता, दशक या पाठक में रस की स्थिति नहीं है, ठीक नहीं । भारतीय तथा अभारतीय सभी शिष्ट साहित्य मीमासको की यह मा यता है कि रसानुभन दर्शकको होता है। पर उत्पत्तिवाद द्वारा यह अवश्य अनगत होता है कि दशक को हुदा है और वह चमत्कार रूप में ही सहीजाय्वन रूप अभिनेता द्वारा कुछ न कुछ प्रभावित अवश्य होता है । 'रस की स्थिति अनुकार मे होती है, अभिनेता जिसका प्रतिनिधि है - इस अर्थ यदि यह लिया जान कि अभिनन के समय अनुकार्य के रूप, गुण, शील, नित्याकप आदि की जवनारणा अभिनेता की पडतान उसमे स्वत हो जाती है, और स्त हो जाती है, और वह अनुमाय के रूप मे - काव्य में वर्णित आपके रूप में उपस्थित होता है, जिसे देख दर्शन चमत्कृत होकर अपने हृदय का रजन करता है, और 'रजन' से 'रमना' का जय गीत हो, तो इस मृत में विशेष आपत्ति की सम्भावना नहीं प्रतीत होती । इस स्थिति म 'रस की स्थिति जनुकाय में है' का तालन यह होगा कि वह उस का कारण है। जाचाय शबुक ने भी रस निष्पत्ति के विषय में अपना मत स्थापित किया और यह 'अनुमितिवाद' कहलाया । उन्होंने भी यह प्रतिपादित किया कि रख की स्थिति अनुकार्य में ही होती है, पर अभिनेता द्वारा उसके आचार्य शुक्ल का अनुकरण से रस की 'उत्पत्ति' नट में नहीं होती, प्रत्युत अनुमान से दर्शक उसे ही नायक वा अनुकार्य मानकर चमत्कृत हो आनन्दित होता है । भट्ट लोल्लट और शंकुक के मत में अंतर यहीं प्रतीत होता है कि एक रस की उत्पत्ति अभिनेता में मानते हैं और दूसरे 'अनुमिति'- से अभिनेता को नायक के रूप में ग्रहण करते हैं । दोनों ही रस की स्थिति अनुकार्य में प्रतिपादित करते है । दर्शक में रस की स्थिति दोनों ही नहीं स्वीकार करते । दर्शक के पक्ष में दोनों की धारणाएँ समान हैं । अनुमित्तिवाद के विषय में विचार करने पर विदित होगा कि इसमें दर्शक का पक्ष कुछ अधिक आया, उसमें अनुमान करने को शक्ति मानी गई और तत्पश्चात् चमत्कृत और आनंदित होते की । पर बाघा यह उपस्थित होती है कि रस की स्थिति उसमें नहीं मानी गई, क्योंकि कुशल दर्शक अनुमान से भी रस कोटि के कुछ निकट पहुँच सकता है । इस वाद के अनुकार्य-पक्ष पर विचार करने से ज्ञात होता है कि उत्पत्तिवाद की भाँति रस का मूल वही है, अंतर केवल इतना ही है कि नट की कला द्वारा अनुकार्य के भाव आदि की अवतारणा उसमें होती है और इस बाद में उसके प्रदर्शन पर अनुकार्य का उसमें अनुमान । उत्पत्ति की प्रक्रिया लघु और अनुमिति की विस्तृत प्रतीत होती है । पर सूक्ष्मतः दोनों का लक्ष्य प्रस्थान-भेद होते हुए भी एक ही.. निर्धारित किया जा सकता है । दोनों का लक्ष्य आलंबन-रूप अनुकार्य को अनुकर्ता में स्थापित करके दर्शक में चमत्कार द्वारा आनंद की अनुभूति का प्रतिपादन करना है । रसवाद के यथार्थ स्वरूप की स्थापना इनके पश्चात् के दोनों आचार्यों भट्ट नायक और अभिनव गुप्तपादाचार्य - ने की । इन्होंने यह स्थापित किया कि रस की स्थिति अनुकार्य में नहीं दर्शक, श्रोता वा पाटक में होती है, जो बुद्धि संगत तथ्य है । यह तो स्पष्ट है कि सभी रस-मीमांसकों के समुख लक्ष्य रूप में दृश्यकाव्य था । भट्ट नायक ने रस-निष्पत्ति वा रसानुभूति की प्रक्रिया की पूर्णता के लिए तीन वृत्तियाँ वा शक्तियाँ मानीं, जिनके
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धुलंडी के अगले दिन ये वही पुलिस है जब हम सब होली मना रहे थे और पुलिस खाकी वर्दी में ड्यूटी पर तैनात थी। ताकि सब जगह सकुशल होली मन सके। अब अगले दिन शनिवार को पुलिस की होली मनाने की बारी आई। जैसा हर बार होता है। वैसे ही इस बार भी पुलिस के थानों से लेकर पुलिस लाइन तक खूब रंग व गुलाल उड़ाया गया।
अलवर पुलिस लाइन में डीजे लगाकर पुलिसकर्मियों ने खूब डांस कर मस्ती की। जिस तरह धुलंडी के दिन आमजन ने रंगोत्सव को सेलिब्रेशन किया। ठीक उसी तरह पुलिस भी अपने कैंपस व थानों में एक-दूसरे से होली खेलते नजर आए। किसी ने गुलाल लगा गले लगा बधाई दी तो कुछ डीजे की धुन पर कई घंटे तक थिरकते रहे।
होली खेलते पुलिस लाइन व थानों के बीच वहीं के अफसर नजर आए। बड़े अफसर एक जगह होली खेलते कम दिखे। लेकिन हर जगह के थानों में पुलिसकर्मियों ने जमकर गुलाल व रंग लगा कर होली सेलेब्रेट की।
धुलंडी के दिन जिले में कई जगहों पर बड़े एक्सीडेंट हुए। वहं पहुंच कर पुलिस ने ही घायलों को अस्पताल भिजवाया। जिनकी मौत हुई उनके शव भी अस्पताल लेकर आए। फिर पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सुपुर्द किया गया।
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धुलंडी के अगले दिन ये वही पुलिस है जब हम सब होली मना रहे थे और पुलिस खाकी वर्दी में ड्यूटी पर तैनात थी। ताकि सब जगह सकुशल होली मन सके। अब अगले दिन शनिवार को पुलिस की होली मनाने की बारी आई। जैसा हर बार होता है। वैसे ही इस बार भी पुलिस के थानों से लेकर पुलिस लाइन तक खूब रंग व गुलाल उड़ाया गया। अलवर पुलिस लाइन में डीजे लगाकर पुलिसकर्मियों ने खूब डांस कर मस्ती की। जिस तरह धुलंडी के दिन आमजन ने रंगोत्सव को सेलिब्रेशन किया। ठीक उसी तरह पुलिस भी अपने कैंपस व थानों में एक-दूसरे से होली खेलते नजर आए। किसी ने गुलाल लगा गले लगा बधाई दी तो कुछ डीजे की धुन पर कई घंटे तक थिरकते रहे। होली खेलते पुलिस लाइन व थानों के बीच वहीं के अफसर नजर आए। बड़े अफसर एक जगह होली खेलते कम दिखे। लेकिन हर जगह के थानों में पुलिसकर्मियों ने जमकर गुलाल व रंग लगा कर होली सेलेब्रेट की। धुलंडी के दिन जिले में कई जगहों पर बड़े एक्सीडेंट हुए। वहं पहुंच कर पुलिस ने ही घायलों को अस्पताल भिजवाया। जिनकी मौत हुई उनके शव भी अस्पताल लेकर आए। फिर पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सुपुर्द किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दिल्ली के कंझावला केस में पुलिस ने गुरुवार को बड़ा खुलासा किया. पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि मामले में 5 नहीं कुल 7 आरोपी हैं. पुलिस के मुताबिक, दो और आरोपियों की तलाश की जा रही है. दीपक ने पूछताछ में बताया था कि वह कार चला रहा था. लेकिन जांच में पता चला है कि कार दीपक नहीं अमित चला रहा था.
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कंझावला मामले में पुलिस की 18 टीमें काम कर रही हैं. सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है. क्राइम सीन पर विजिट हो गया है. पोस्टमार्टम हो गया है. 5 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं. आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में जो बताया, उसमें विरोधाभास है.
दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी और पूछताछ से पता चला है कि इसमें दो आरोपी और शामिल हैं. उनकी तलाश की जा रही है. दीपक ने अपने आप को ड्राइवर बताया था. लेकिन अमित गाड़ी चला था. इसके हमारे पास सबूत हैं. केस में दो और लोगों आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपी बनाया गया है. पुलिस के मुताबिक, अमित पर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. ऐसे में उसके भाई ने दीपक से कहा कि वह पुलिस के सामने बताए कि वह कार चला रहा था. पुलिस ने बताया कि जो नए आरोपी बनाए गए हैं, उनमें एक अमित का भाई है.
- आरोपी और पीड़िता का कोई पुराना कनेक्शन नहीं है. कॉल डिटेल और जांच में ऐसा कुछ पता नहीं चला.
- पीड़िता की सहेली और आरोपियों में भी कोई संबंध नहीं मिला है.
- जांच के सभी पहलुओं को जल्द सुलझाने की कोशिश की जा रही है.
- आज आरोपियों को पेश किया जाएगा और उनकी हिरासत मांगी है.
- दो आरोपियों की तलाश की जा रही है.
- पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल करेगी. ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले.
- किसी भी टेस्ट की जरूरत पड़ेगी, वो कदम उठाएंगे.
- पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा कि पीड़िता नशे में थी या नहीं.
इससे पहले पुलिस को एक और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है. इस फुटेज में सभी 5 आरोपी कार छोड़कर ऑटो से भागते नजर आए.
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दिल्ली के कंझावला केस में पुलिस ने गुरुवार को बड़ा खुलासा किया. पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि मामले में पाँच नहीं कुल सात आरोपी हैं. पुलिस के मुताबिक, दो और आरोपियों की तलाश की जा रही है. दीपक ने पूछताछ में बताया था कि वह कार चला रहा था. लेकिन जांच में पता चला है कि कार दीपक नहीं अमित चला रहा था. दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कंझावला मामले में पुलिस की अट्ठारह टीमें काम कर रही हैं. सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है. क्राइम सीन पर विजिट हो गया है. पोस्टमार्टम हो गया है. पाँच आरोपी पुलिस हिरासत में हैं. आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में जो बताया, उसमें विरोधाभास है. दिल्ली पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी और पूछताछ से पता चला है कि इसमें दो आरोपी और शामिल हैं. उनकी तलाश की जा रही है. दीपक ने अपने आप को ड्राइवर बताया था. लेकिन अमित गाड़ी चला था. इसके हमारे पास सबूत हैं. केस में दो और लोगों आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपी बनाया गया है. पुलिस के मुताबिक, अमित पर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. ऐसे में उसके भाई ने दीपक से कहा कि वह पुलिस के सामने बताए कि वह कार चला रहा था. पुलिस ने बताया कि जो नए आरोपी बनाए गए हैं, उनमें एक अमित का भाई है. - आरोपी और पीड़िता का कोई पुराना कनेक्शन नहीं है. कॉल डिटेल और जांच में ऐसा कुछ पता नहीं चला. - पीड़िता की सहेली और आरोपियों में भी कोई संबंध नहीं मिला है. - जांच के सभी पहलुओं को जल्द सुलझाने की कोशिश की जा रही है. - आज आरोपियों को पेश किया जाएगा और उनकी हिरासत मांगी है. - दो आरोपियों की तलाश की जा रही है. - पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल करेगी. ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले. - किसी भी टेस्ट की जरूरत पड़ेगी, वो कदम उठाएंगे. - पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा कि पीड़िता नशे में थी या नहीं. इससे पहले पुलिस को एक और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है. इस फुटेज में सभी पाँच आरोपी कार छोड़कर ऑटो से भागते नजर आए.
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Ramgarh : रामगढ़ फुटबॉल एशोसिएशन के तत्वावधान में चल रहे फुटबॉल लीग का फाइनल मैच गुरूवार को खेला गया. भदानीनगर के आईएजी फुटबॉल मैदान में बालक-बालिका का फाइनल मैच खेला गया. इसमें बालक वर्ग में राइजिंग एफसी लपंगा ने हेसाबेड़ा कुजू की टीम को 4-3 से हराकर चैंपियन बना वहीं बालिका वर्ग में सुगिया गर्ल्स एफसी की टीम ने सांडी गर्ल्स एफसी को 6-5 से हराकर खिताब पर कब्जा जमाया.
फाइनल मैच का उद्घाटन मुख्य अतिथि भदानीनगर ओपी प्रभारी दुर्गा शंकर मंडल, डीएसओ रूपरानी तिर्की, रामगढ़ जिला फुटबॉल संघ के सचिव मुस्तफा आजाद, मो. कमरूदीन, आजाद अंसारी ने किया. मौके पर विजेता व उपविजेता टीम को विनर व रनर ट्रॉफी दी गई. इस मौके पर ओपी प्रभारी दुर्गा शंकर मंडल ने कहा कि आज हारने वाला ही कल जीतता है. खेल में हार से निराश नहीं होना चाहिए. हार और जीत खेल का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन कर कई युवा खेल के जरिये भी अपना करियर बना सकते हैं. टूर्नामेंट को सफल बनाने में जबीर अंसारी, बलदेव बेदिया, कमलेश बेदिया, सूरज बेदिया, गौतम बेदिया, दिलीप बेदिया सहित कई लोगो ने अपनी भूमिका निभाया.
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Ramgarh : रामगढ़ फुटबॉल एशोसिएशन के तत्वावधान में चल रहे फुटबॉल लीग का फाइनल मैच गुरूवार को खेला गया. भदानीनगर के आईएजी फुटबॉल मैदान में बालक-बालिका का फाइनल मैच खेला गया. इसमें बालक वर्ग में राइजिंग एफसी लपंगा ने हेसाबेड़ा कुजू की टीम को चार-तीन से हराकर चैंपियन बना वहीं बालिका वर्ग में सुगिया गर्ल्स एफसी की टीम ने सांडी गर्ल्स एफसी को छः-पाँच से हराकर खिताब पर कब्जा जमाया. फाइनल मैच का उद्घाटन मुख्य अतिथि भदानीनगर ओपी प्रभारी दुर्गा शंकर मंडल, डीएसओ रूपरानी तिर्की, रामगढ़ जिला फुटबॉल संघ के सचिव मुस्तफा आजाद, मो. कमरूदीन, आजाद अंसारी ने किया. मौके पर विजेता व उपविजेता टीम को विनर व रनर ट्रॉफी दी गई. इस मौके पर ओपी प्रभारी दुर्गा शंकर मंडल ने कहा कि आज हारने वाला ही कल जीतता है. खेल में हार से निराश नहीं होना चाहिए. हार और जीत खेल का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन कर कई युवा खेल के जरिये भी अपना करियर बना सकते हैं. टूर्नामेंट को सफल बनाने में जबीर अंसारी, बलदेव बेदिया, कमलेश बेदिया, सूरज बेदिया, गौतम बेदिया, दिलीप बेदिया सहित कई लोगो ने अपनी भूमिका निभाया.
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"इस तरह अधोलोक, तिर्यगलोकौर ऊर्ध्व लोकसे विभा जित समय लाकके मध्य भागमें चौदह राजलोक प्रमाण ऊर्ध्वं अघो लगी त्रस नाडी है, और लंबाई चौड़ाई में एक राजलोक प्रमाण है। इस नस नाड़ों में स्थावर और त्रस दोनों तरह के जीव हैं और इससे बाहर केवल स्थापरही है। कुल विस्तार इस तरह है - नीचे मातलोक प्रमाण, मध्यमे तिर्यगलोक में एक राज लोक प्रमाण, नमदेवलोक में पाच राजलोक प्रमाण और सिद्धशिला तक पक रामलोक प्रमाण है। अच्छी तरह प्रतिष्ठित हुई श्रकृतिवाले इम लोकको न किसीने बनाया है और न किसी ने धारणही किया है। वह स्वयंसिद्ध है और आभयरहित आकाशमें टिका हुआ है। ( ७६७-८०० )
"अशुभ ध्यानको रोकनेका कारण ऐसे इस सारे लोकका अथवा उसके जुदा जुदा विभागोंका नो बुद्धिमान विचार करता है उसको धर्मध्यान से संबंध रखनेवाली क्षायोपशमकादि भावकी प्राप्ति होती है और पीत लेश्या, पद्म लेश्या तथा शुक्ल लेश्या अनुमसे शुद्ध शुद्धसर शुद्धतम होती हैं। अधिक वैराग्यके मंगसे तरंगित धर्मध्यानके द्वारा प्राणियोंको स्वयंही समझ सके ऐसा ( स्वसंवेद्य) श्रद्रय सुग्म उत्पन्न होता है। जो योगी निमंग (यानी निसार्थ) होकर धर्मध्यान के द्वारा इस शरीरको छोड़ते ने मंयकादि स्वर्ग में उत्तम देवता होते हैं। यहाँ वे महा महिमानाले, सौभाग्य युक्त, शरद ऋतुके चद्रके समान प्रभावशाली और पुष्पमालाओं तथा वबाल कारों से विभूषित शरीरको प्राप्त करते हैं। विशिष्ट बीर्य बोधान्य ( यानी असा. मान्य ज्ञान व शक्तिके घारक ), फामार्ति स्वर रहित ( पानी
३७२ ] त्रिपष्टि शलाका पुरुष चरित्रः पर्व २. सर्ग ३. जिनको काम पीड़ा नहीं सताती ऐसे) और अंतराय रहित अतुल्य सुखका चिरकाल तक सेवन करनेवाले होते हैं । इच्छानुसार मिले हुए सबसे मनोहर रूप मृतका उपभोग विघ्नरहित करते रहनेमें उन्हें यह भी पता नहीं लगता कि उन की आयु कैसे बीतती जा रही है ? ऐसे दिव्य भोग भोगने के बाद में वे च्यवकर मनुष्यलोकमें उत्तम शरीरधारी मनुष्य जन्मते हैं। मनुष्यलोकमें भी वे दिव्य वंशमें उत्पन्न होते हैं; उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं; वे नित्य उत्सव मनाते हैं और मनको आनद देनेवाले विविध प्रकारके भोगका उपभोग करते हैं। फिर विवेकका आश्रय ले, सभी भोगोंका त्याग कर शुभध्यान द्वारा वे सभी कमका नाशकर अव्ययपद (यानी मोक्ष ) पाते हैं।" (८०१-८१० )
इस तरह सब जीवोंके हितकारी श्री अजितनाथ प्रभुने तीन जगतरूपी कुमुद्दोंको आनदित करनेवाली कौमुदीरूपी धर्मदेशना दी। स्वामीकी देशना सुनकर हजारों नर-नारियोंने ज्ञान पाया और मोक्षकी मातारूप दीक्षा ग्रहण की। (८११८१२)
उस समय सगर चक्रवर्ती के पिता वसुमित्रने - जो तबतक भाव यति बनकर घरहीमें रहते थे भी प्रभु के पास से दीक्षा प्रण की। फिर अजितनाथ स्वामीने गणधर नामकर्मवाले और अच्छी युद्धिवाले सिंहसेन इत्यादि पंचानवे मुनियोंको, व्याकरण के प्रत्याहारों के समान उत्पत्ति, निगम और प्रौव्यरूप' त्रिपदी सुनाई। रेखाओं के आधारसे जैसे चित्र बनाया जाता है वैसेही,
१८यावश्यमेच' आदि प्रत्यय
विनाश ।
३८ स्थिति ।
त्रिपदी के आधारसे गणधरोंने चौदह पूर्व सहित द्वादशागीकी रचना की। फिर इद्र अपनी जगहस उठ चूर्णसे (यानी बासक्षेरसे) पूर्ण थालको ले, देवताओं के समूहके साथ, स्वामीके चरणकमलों के पास था सड़ा हुआ। जगतपति अजितनाथ स्वामीने सडे होकर गणधरोंके मस्तकपर वासक्षेप डाला और अनुक्रमसे सूत्रसे, अर्थसे व उन दोनोंसे इसी तरह द्रव्यसे, गुणसे, पर्यायसे और नय से अनुयोगका तथा गएको अनुज्ञा दी। उसके बाद देवोंने मनुष्यों और स्त्रियोंने दुंदुभि को ध्वनिके साथ गणघरोंपर वासक्षेप डाला। फिर गणधर भी हाथ जोड़कर अमृतके निर्भरको जैसी प्रभुकी वाणी सुननेको तत्पर हुए। इसलिए पूर्वी तरफ मुसवाले सिंहासन पर बैठकर प्रभुने उनको अनुशिष्टिमय देशना दी। प्रथम पौरुपी (पद्दर) के समाप्त होनेपर भगवानने धर्मदेशना पूरी को । उस समय सगर राजाके द्वारा तैयार कराया हुआ और बडे थालमें रखा हुआ घार प्रस्थ' प्रमाणका 'बलि' पूर्व द्वारसे समवसरण में लाया गया। (८११-८२३३)
यह मलि शुद्ध और कमलके समान सुगंधीवाले चावलों
१ - तर, कुनकर, चक्रवर्ती इत्यादिश अधिकार जिस में बताया गया है उस दृष्टिवादका एक विभाग । २- श्रादेश, श्राशा ।
- गच्छ या समान मियाएँ करनेवाले साधुक्रोश समुदाय । ४ - उपदेशोंसे पूर्ण । ५ - प्रस्थ शब्दका अर्थ 'सेर' दिया गया है, मगर जान पड़ता है कि उस जमानेका 'सेए वजन, इस जमाने के सेरसे बहुत अधिक डागा ।
६७४ ] त्रियष्टि शलाका पुरुष- चरित्रः पर्व २. सर्न ३.
का, अच्छी तरहसे बनाया गया था। देवताओं के द्वारा डाली गई गंधमुष्टियोंसे उसकी सुगंध फैल रही थी। श्रेष्ठ पुरुषोंने उसको उठाया था, साथ में चलते हुए नगारोंकी आवाजों से दिशाओं के मुख प्रतिध्वनित हो रहे थे। स्त्रियाँ गीत गाती हुई उसके पीछे चल रही थीं और भौंरोंसे जैसे कमलकोश घिर जाता है वैसेही नगरके लोगोंसे वह घिरा हुआ था। फिर उन सय लोगोंने प्रभुती प्रदक्षिणा करके, देवताओंने जैसे पुष्पवृष्टि की थी वैसेही, बलि प्रभु के सामने उछाला। अधा भाग ऊपरहीमे, जमीनमें न गिरने देकर देवताओंने ले लिया । पृथ्वीपर गिरे हुए भाग में से आधा भाग सगर राजाने लिया और बाकी बचा हुआ भाग दूसरे लोगोंने लिया। उस पलिके प्रभाषसे पुगने रोग नष्ट होते हैं और छह महीने तक नवीन रोग नहीं होते। (८२४-८३० )
मोक्षमार्ग के नेता प्रभु सिंहामनसे उठ उत्तर द्वारके मार्गसे निकले और मध्यगदके बीच ईशान दिशा में बनाए हुए देवछदपर उन्होंने विश्राम लिया। फिर सगर राजाके बनवाए हुए सिंहासनपर बैठकर सिंड्सेन नामके मुख्य गणधर धर्मदेशना देने लगे। भगवान के स्थान के प्रभाव से गणधरने, जिन्होंने पूछा उनको उनके असंख्य भव घता दिए । प्रभुकी सभामें संदेशका नाश करनेवाले गणधरों को किसीने-सिवा केवलियोंके'समय' नहीं समझा। गुरुके श्रमका नाश, दोनोंका समान विश्वास और गुरुशिष्यका क्रम- ये गुण गाधरकी देशनाके है। दूसरी पौदपी समाप्त हुई सय गणधरने देशनासे इसी धरह
१-मुट्टियाँ भर मरकर डाली गई सुगधियों से ।
विराम लिया जैसे पथिक पलनेसे विराम लेता है। देशना समाप्त होने पर सभी देवता प्रभुको प्रणाम करके अपने अपने स्थानोंको जाने के लिए रवाना हुए। मार्गमें उन्होंने नहीश्वर द्वीप पर जाकर अंजनाचल दिकके ऊपर शाश्वत अहंतकी प्रतिमाओं का अट्ठाई महोत्सव किया। फिर यों बोलते हुए कि "हमें ऐसी यात्रा करनेका चार पार अवसर मिले" वे अपने अपने स्थानों पर जैसे आप वैसेही गए । (८३१८४० )
सगर चक्रवर्ती भी भगवानको नमस्कार कर लक्ष्मीके संकेतस्थानरूप अपनी अयोध्या नगरीमें गया। महायज्ञ नामफा चतुर्मुख यक्ष अजितनाथ के तीर्थका अधिष्ठायक हुआ । उसका वर्ण श्याम और बाइन हाथी था। उसकी दाहिनी तरफके चार हाथोंमें घरव, मुदूगर, अक्षसूत्र और पाशिन' थे और बाई तरफके चार हार्थो में योजोरा, अभय, अंकुश और शक्ति थे। प्रभुके शासनकी अजितबला नामकी चार दार्थोवाली देवी अधिष्ठायिका हुई। उसका वर्ण सोने के जैसा है। हमके दाहिने हाथों में परद तथा पाशिन है और बाएं हाथों में बीजोरा तथा भरा है। मह लोहासनपर बैठी है। (८४१८४६)
चौतीस अतिशयोंसे सुशोभित भगवान सिंहसेनादि गए. परों सहित पृथ्वीमें विहार करने लगे। प्रत्येक गाँव, शहर और आकरमें विहार करते हुए और भव्य प्राणियोंको उपदेश देते हुए इपासागर प्रभु एक बार कोशांची नगरीफे समीप पहुॅचे। कोशांबीके ईशान कोण में एक योजनमात्रके क्षेत्र में देवताओं
१ - सुर्य पुष्प । २ - द्राक्ष की माला । ३ - सा
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"इस तरह अधोलोक, तिर्यगलोकौर ऊर्ध्व लोकसे विभा जित समय लाकके मध्य भागमें चौदह राजलोक प्रमाण ऊर्ध्वं अघो लगी त्रस नाडी है, और लंबाई चौड़ाई में एक राजलोक प्रमाण है। इस नस नाड़ों में स्थावर और त्रस दोनों तरह के जीव हैं और इससे बाहर केवल स्थापरही है। कुल विस्तार इस तरह है - नीचे मातलोक प्रमाण, मध्यमे तिर्यगलोक में एक राज लोक प्रमाण, नमदेवलोक में पाच राजलोक प्रमाण और सिद्धशिला तक पक रामलोक प्रमाण है। अच्छी तरह प्रतिष्ठित हुई श्रकृतिवाले इम लोकको न किसीने बनाया है और न किसी ने धारणही किया है। वह स्वयंसिद्ध है और आभयरहित आकाशमें टिका हुआ है। "अशुभ ध्यानको रोकनेका कारण ऐसे इस सारे लोकका अथवा उसके जुदा जुदा विभागोंका नो बुद्धिमान विचार करता है उसको धर्मध्यान से संबंध रखनेवाली क्षायोपशमकादि भावकी प्राप्ति होती है और पीत लेश्या, पद्म लेश्या तथा शुक्ल लेश्या अनुमसे शुद्ध शुद्धसर शुद्धतम होती हैं। अधिक वैराग्यके मंगसे तरंगित धर्मध्यानके द्वारा प्राणियोंको स्वयंही समझ सके ऐसा श्रद्रय सुग्म उत्पन्न होता है। जो योगी निमंग होकर धर्मध्यान के द्वारा इस शरीरको छोड़ते ने मंयकादि स्वर्ग में उत्तम देवता होते हैं। यहाँ वे महा महिमानाले, सौभाग्य युक्त, शरद ऋतुके चद्रके समान प्रभावशाली और पुष्पमालाओं तथा वबाल कारों से विभूषित शरीरको प्राप्त करते हैं। विशिष्ट बीर्य बोधान्य , फामार्ति स्वर रहित और अंतराय रहित अतुल्य सुखका चिरकाल तक सेवन करनेवाले होते हैं । इच्छानुसार मिले हुए सबसे मनोहर रूप मृतका उपभोग विघ्नरहित करते रहनेमें उन्हें यह भी पता नहीं लगता कि उन की आयु कैसे बीतती जा रही है ? ऐसे दिव्य भोग भोगने के बाद में वे च्यवकर मनुष्यलोकमें उत्तम शरीरधारी मनुष्य जन्मते हैं। मनुष्यलोकमें भी वे दिव्य वंशमें उत्पन्न होते हैं; उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं; वे नित्य उत्सव मनाते हैं और मनको आनद देनेवाले विविध प्रकारके भोगका उपभोग करते हैं। फिर विवेकका आश्रय ले, सभी भोगोंका त्याग कर शुभध्यान द्वारा वे सभी कमका नाशकर अव्ययपद पाते हैं।" इस तरह सब जीवोंके हितकारी श्री अजितनाथ प्रभुने तीन जगतरूपी कुमुद्दोंको आनदित करनेवाली कौमुदीरूपी धर्मदेशना दी। स्वामीकी देशना सुनकर हजारों नर-नारियोंने ज्ञान पाया और मोक्षकी मातारूप दीक्षा ग्रहण की। उस समय सगर चक्रवर्ती के पिता वसुमित्रने - जो तबतक भाव यति बनकर घरहीमें रहते थे भी प्रभु के पास से दीक्षा प्रण की। फिर अजितनाथ स्वामीने गणधर नामकर्मवाले और अच्छी युद्धिवाले सिंहसेन इत्यादि पंचानवे मुनियोंको, व्याकरण के प्रत्याहारों के समान उत्पत्ति, निगम और प्रौव्यरूप' त्रिपदी सुनाई। रेखाओं के आधारसे जैसे चित्र बनाया जाता है वैसेही, अट्ठारहयावश्यमेच' आदि प्रत्यय विनाश । अड़तीस स्थिति । त्रिपदी के आधारसे गणधरोंने चौदह पूर्व सहित द्वादशागीकी रचना की। फिर इद्र अपनी जगहस उठ चूर्णसे पूर्ण थालको ले, देवताओं के समूहके साथ, स्वामीके चरणकमलों के पास था सड़ा हुआ। जगतपति अजितनाथ स्वामीने सडे होकर गणधरोंके मस्तकपर वासक्षेप डाला और अनुक्रमसे सूत्रसे, अर्थसे व उन दोनोंसे इसी तरह द्रव्यसे, गुणसे, पर्यायसे और नय से अनुयोगका तथा गएको अनुज्ञा दी। उसके बाद देवोंने मनुष्यों और स्त्रियोंने दुंदुभि को ध्वनिके साथ गणघरोंपर वासक्षेप डाला। फिर गणधर भी हाथ जोड़कर अमृतके निर्भरको जैसी प्रभुकी वाणी सुननेको तत्पर हुए। इसलिए पूर्वी तरफ मुसवाले सिंहासन पर बैठकर प्रभुने उनको अनुशिष्टिमय देशना दी। प्रथम पौरुपी के समाप्त होनेपर भगवानने धर्मदेशना पूरी को । उस समय सगर राजाके द्वारा तैयार कराया हुआ और बडे थालमें रखा हुआ घार प्रस्थ' प्रमाणका 'बलि' पूर्व द्वारसे समवसरण में लाया गया। यह मलि शुद्ध और कमलके समान सुगंधीवाले चावलों एक - तर, कुनकर, चक्रवर्ती इत्यादिश अधिकार जिस में बताया गया है उस दृष्टिवादका एक विभाग । दो- श्रादेश, श्राशा । - गच्छ या समान मियाएँ करनेवाले साधुक्रोश समुदाय । चार - उपदेशोंसे पूर्ण । पाँच - प्रस्थ शब्दका अर्थ 'सेर' दिया गया है, मगर जान पड़ता है कि उस जमानेका 'सेए वजन, इस जमाने के सेरसे बहुत अधिक डागा । छः सौ चौहत्तर ] त्रियष्टि शलाका पुरुष- चरित्रः पर्व दो. सर्न तीन. का, अच्छी तरहसे बनाया गया था। देवताओं के द्वारा डाली गई गंधमुष्टियोंसे उसकी सुगंध फैल रही थी। श्रेष्ठ पुरुषोंने उसको उठाया था, साथ में चलते हुए नगारोंकी आवाजों से दिशाओं के मुख प्रतिध्वनित हो रहे थे। स्त्रियाँ गीत गाती हुई उसके पीछे चल रही थीं और भौंरोंसे जैसे कमलकोश घिर जाता है वैसेही नगरके लोगोंसे वह घिरा हुआ था। फिर उन सय लोगोंने प्रभुती प्रदक्षिणा करके, देवताओंने जैसे पुष्पवृष्टि की थी वैसेही, बलि प्रभु के सामने उछाला। अधा भाग ऊपरहीमे, जमीनमें न गिरने देकर देवताओंने ले लिया । पृथ्वीपर गिरे हुए भाग में से आधा भाग सगर राजाने लिया और बाकी बचा हुआ भाग दूसरे लोगोंने लिया। उस पलिके प्रभाषसे पुगने रोग नष्ट होते हैं और छह महीने तक नवीन रोग नहीं होते। मोक्षमार्ग के नेता प्रभु सिंहामनसे उठ उत्तर द्वारके मार्गसे निकले और मध्यगदके बीच ईशान दिशा में बनाए हुए देवछदपर उन्होंने विश्राम लिया। फिर सगर राजाके बनवाए हुए सिंहासनपर बैठकर सिंड्सेन नामके मुख्य गणधर धर्मदेशना देने लगे। भगवान के स्थान के प्रभाव से गणधरने, जिन्होंने पूछा उनको उनके असंख्य भव घता दिए । प्रभुकी सभामें संदेशका नाश करनेवाले गणधरों को किसीने-सिवा केवलियोंके'समय' नहीं समझा। गुरुके श्रमका नाश, दोनोंका समान विश्वास और गुरुशिष्यका क्रम- ये गुण गाधरकी देशनाके है। दूसरी पौदपी समाप्त हुई सय गणधरने देशनासे इसी धरह एक-मुट्टियाँ भर मरकर डाली गई सुगधियों से । विराम लिया जैसे पथिक पलनेसे विराम लेता है। देशना समाप्त होने पर सभी देवता प्रभुको प्रणाम करके अपने अपने स्थानोंको जाने के लिए रवाना हुए। मार्गमें उन्होंने नहीश्वर द्वीप पर जाकर अंजनाचल दिकके ऊपर शाश्वत अहंतकी प्रतिमाओं का अट्ठाई महोत्सव किया। फिर यों बोलते हुए कि "हमें ऐसी यात्रा करनेका चार पार अवसर मिले" वे अपने अपने स्थानों पर जैसे आप वैसेही गए । सगर चक्रवर्ती भी भगवानको नमस्कार कर लक्ष्मीके संकेतस्थानरूप अपनी अयोध्या नगरीमें गया। महायज्ञ नामफा चतुर्मुख यक्ष अजितनाथ के तीर्थका अधिष्ठायक हुआ । उसका वर्ण श्याम और बाइन हाथी था। उसकी दाहिनी तरफके चार हाथोंमें घरव, मुदूगर, अक्षसूत्र और पाशिन' थे और बाई तरफके चार हार्थो में योजोरा, अभय, अंकुश और शक्ति थे। प्रभुके शासनकी अजितबला नामकी चार दार्थोवाली देवी अधिष्ठायिका हुई। उसका वर्ण सोने के जैसा है। हमके दाहिने हाथों में परद तथा पाशिन है और बाएं हाथों में बीजोरा तथा भरा है। मह लोहासनपर बैठी है। चौतीस अतिशयोंसे सुशोभित भगवान सिंहसेनादि गए. परों सहित पृथ्वीमें विहार करने लगे। प्रत्येक गाँव, शहर और आकरमें विहार करते हुए और भव्य प्राणियोंको उपदेश देते हुए इपासागर प्रभु एक बार कोशांची नगरीफे समीप पहुॅचे। कोशांबीके ईशान कोण में एक योजनमात्रके क्षेत्र में देवताओं एक - सुर्य पुष्प । दो - द्राक्ष की माला । तीन - सा
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रायपुर, छह नवंबर छत्तीसगढ़ में वर्ष 2013 में हुए झीरम घाटी हमले की जांच कर रहे आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल अनुसुईया उइके को सौंप दी है। राजभवन के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट आयोग के सचिव और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) संतोष कुमार तिवारी ने सौंपी।
अधिकारियों ने बताया कि यह रिपेार्ट 10 खंडों और 4,184 पन्नों में तैयार की गई है। जांच आयोग छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा के अध्यक्षता में गठित की गई थी। मिश्रा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी थे तथा वर्तमान में आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में स्थित झीरम घाटी में 25 मई वर्ष 2013 को नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था। इस हमले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद तब की रमन सिंह की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया था। घटना की जांच के लिए आयोग का गठन 28 मई वर्ष 2013 को किया गया था। वहीं राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने भी मामले की जांच शुरू की थी।
झीरम घाटी नक्सली हमला आजाद भारत के इतिहास में किसी राजनीतिक पार्टी के काफिले पर सबसे बड़ा हमला माना जाता है। घटना के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने एनआईए की जांच को पर्याप्त नहीं माना और कहा था कि एनआईए ने जांच में षड़यंत्र को शामिल नहीं किया है।
राज्य में वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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रायपुर, छह नवंबर छत्तीसगढ़ में वर्ष दो हज़ार तेरह में हुए झीरम घाटी हमले की जांच कर रहे आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल अनुसुईया उइके को सौंप दी है। राजभवन के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट आयोग के सचिव और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार संतोष कुमार तिवारी ने सौंपी। अधिकारियों ने बताया कि यह रिपेार्ट दस खंडों और चार,एक सौ चौरासी पन्नों में तैयार की गई है। जांच आयोग छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा के अध्यक्षता में गठित की गई थी। मिश्रा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी थे तथा वर्तमान में आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में स्थित झीरम घाटी में पच्चीस मई वर्ष दो हज़ार तेरह को नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था। इस हमले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत उनतीस लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद तब की रमन सिंह की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया था। घटना की जांच के लिए आयोग का गठन अट्ठाईस मई वर्ष दो हज़ार तेरह को किया गया था। वहीं राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने भी मामले की जांच शुरू की थी। झीरम घाटी नक्सली हमला आजाद भारत के इतिहास में किसी राजनीतिक पार्टी के काफिले पर सबसे बड़ा हमला माना जाता है। घटना के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने एनआईए की जांच को पर्याप्त नहीं माना और कहा था कि एनआईए ने जांच में षड़यंत्र को शामिल नहीं किया है। राज्य में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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लास्ट तीन सालों से लगातार सलमान खान की वांटेड, बॉडी गार्ड और एक था टाइगर जैसी फिल्में रिलीज हो कर बाक्स ऑफिस पर हंगामा करती रही हैं। इस बार भी यह उम्मीद की जा रही थी कि उनकी एक फिल्म इस मौके पर जरूर रिलीज होगी और शाहरुख खान के साथ उनका क्लैश भी होगा क्योंकि शाहरुख की चेन्नई एक्सप्रेस इसी दिन रिलीज हो रही है। लेकिन अचानक दबंग ने अपने पांव पीछे खींच लिए और अपनी फिल्म की रिलीज डेट को फिलहाल पर्दे में रखा है।
उनके इस कदम के बाद हर कोई यही कह रहा है कि शाहरुख ने बाजी मार ली है और सलमान मौका चूक गए। लेकिन क्या वाकई ऐसा ही है या सलमान एक नए खेल का बैक ग्राउंड ढूंढ रहे हैं। क्योंकि अगर सही मायने में देखा जाए तो प्रोफेशनल फील्ड में सलमान इन दिनों शाहरुख से कही आगे हैं। उनकी फिल्में शाहरुख से बेहतर बिजनेस कर रही हैं, उनको बेस्ट एंर्डोसर ऑफ द इयर डिक्लेयर किया जा चुका है और उनके अवार्ड शो की होस्टिंग भी हिट हैं।
इन दिनों सलमान जिसे छू रहे हैं वो सोना हो जाता है ऐसे में अब फिल्म रिलीज जैसी छोटी बात पर उलझने के मूड में सलमान नहीं दिखते जबकि रेडी और दबंग 2 के रिलीज के बाद वो ये भी जानते हैं कि ईद के बिना भी वो सुपर हिट हो सकते हैं। ऐसे में ये तय है कि सलमान का निशाना कहीं और है। अगर हम सही समझ रहे हैं तो पिछले दिनों खबर आयी थी कि सनी देयोल की फिल्मे भी ईद पर रिलीज हो रही है और देयोल फेमिली से सलमान के रिलेशन बहुत अच्छे हैं अब अपना पांव पीछे खींच कर वो अपने रिलेशन तो बचा ही लेंगे शाहरुख को अजय देवगन के बाद अब दूसरी फिल्म फेमली के सामने कंपटीशन के लिए खड़ा कर देंगे।
सलमान इन दिनों तेजी के साथ इंडस्ट्री में अपने फ्रेंडस का नंबर बढ़ाते जा रहे हैं और शाहरुख को अकेला करने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे में उनका फिल्म रिलीज ना करने का डिसीजन एक स्मार्ट मूव प्रूव हो सकता है और बिना फिल्म रिलीज किए भी वो चर्चा में रहेंगे साथ्क ही उनकी नयी फिल्म का ऑटोमेटिक प्रमोशन भी हो जाएगा जो इन फिलमों के तुरंत बाद रिलीज होगी।
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लास्ट तीन सालों से लगातार सलमान खान की वांटेड, बॉडी गार्ड और एक था टाइगर जैसी फिल्में रिलीज हो कर बाक्स ऑफिस पर हंगामा करती रही हैं। इस बार भी यह उम्मीद की जा रही थी कि उनकी एक फिल्म इस मौके पर जरूर रिलीज होगी और शाहरुख खान के साथ उनका क्लैश भी होगा क्योंकि शाहरुख की चेन्नई एक्सप्रेस इसी दिन रिलीज हो रही है। लेकिन अचानक दबंग ने अपने पांव पीछे खींच लिए और अपनी फिल्म की रिलीज डेट को फिलहाल पर्दे में रखा है। उनके इस कदम के बाद हर कोई यही कह रहा है कि शाहरुख ने बाजी मार ली है और सलमान मौका चूक गए। लेकिन क्या वाकई ऐसा ही है या सलमान एक नए खेल का बैक ग्राउंड ढूंढ रहे हैं। क्योंकि अगर सही मायने में देखा जाए तो प्रोफेशनल फील्ड में सलमान इन दिनों शाहरुख से कही आगे हैं। उनकी फिल्में शाहरुख से बेहतर बिजनेस कर रही हैं, उनको बेस्ट एंर्डोसर ऑफ द इयर डिक्लेयर किया जा चुका है और उनके अवार्ड शो की होस्टिंग भी हिट हैं। इन दिनों सलमान जिसे छू रहे हैं वो सोना हो जाता है ऐसे में अब फिल्म रिलीज जैसी छोटी बात पर उलझने के मूड में सलमान नहीं दिखते जबकि रेडी और दबंग दो के रिलीज के बाद वो ये भी जानते हैं कि ईद के बिना भी वो सुपर हिट हो सकते हैं। ऐसे में ये तय है कि सलमान का निशाना कहीं और है। अगर हम सही समझ रहे हैं तो पिछले दिनों खबर आयी थी कि सनी देयोल की फिल्मे भी ईद पर रिलीज हो रही है और देयोल फेमिली से सलमान के रिलेशन बहुत अच्छे हैं अब अपना पांव पीछे खींच कर वो अपने रिलेशन तो बचा ही लेंगे शाहरुख को अजय देवगन के बाद अब दूसरी फिल्म फेमली के सामने कंपटीशन के लिए खड़ा कर देंगे। सलमान इन दिनों तेजी के साथ इंडस्ट्री में अपने फ्रेंडस का नंबर बढ़ाते जा रहे हैं और शाहरुख को अकेला करने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे में उनका फिल्म रिलीज ना करने का डिसीजन एक स्मार्ट मूव प्रूव हो सकता है और बिना फिल्म रिलीज किए भी वो चर्चा में रहेंगे साथ्क ही उनकी नयी फिल्म का ऑटोमेटिक प्रमोशन भी हो जाएगा जो इन फिलमों के तुरंत बाद रिलीज होगी।
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15 हजार की आवादी वाली बदार घाटी इन दिनों काले पानी जैसी स्थिति जीने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा कारण व्यास नदी में आई बाढ़ है। जहां पंडोह में भारी तबाही मचाई। वहीं द्रंग विधानसभा क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोडऩे वाले ऐतिहासिक लाल पुल को भी अपने साथ बहा ले गई। चार विधानसभाओं सदर, द्रंग, सराज व नाचन को जोडऩे वाला लालपुल भी इस बाढ़ की भेंट चढ गया। यह पुल 100 वर्ष पुराना अंग्रेजी हुकूमत द्वारा निर्मित किया पुल था, जो बहुत ही बेहतरीन तकनीक के साथ निर्मित किया गया था। पुल के पिलर जो पत्थर से तैयार किए गए थे, आज भी जस के तस हैं।
पुल के रस्ते खुल जाने से पानी में समाया है। आज इस पुल के टूट जाने से जहां 15 पंचायतों के लोग प्रभावित हो रहे हैं। वही ग्राम पंचायत शिवा, देवरी नागधार, हटोन, मास्ड के लगभग 10 हजार लोग सीधे रूप से प्रभावित हुए हैं। इन लोगों को अब अपने घर जाने या घर से पंडोह मंडी की ओर आने के लिए 8 किलोमीटर का अतिरिक्त सफ र तय करना पड़ रहा है। अब इन्हें पंडोह डैम के कैंची मोड से होकर पंडोह पहुंचना पड़ रहा है। जिससे लोग बहुत परेशान है। इन में वे लोग ज्यादा परेशान हैं, जो रोज अपने कारोबार के लिए पैदल चलकर लालपुल से पंडोह पहुंचते थे। आवाजाही के लिए उन्हें लालपुल बहुत ही सहायक था। अब पैदल चलना लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है। और यदि वह टैक्सी करते हैं तो इनकी आर्थिक स्थिति इस की इजाजत नहीं देती। लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है। लोग प्रदेश मजदूरों किसानों भगवानों के लिए समस्या विकराल होती जा रही है। सरकार से मांग कर रहे हैं कि लाल पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर अति शीघ्र किया जाए।
हटोन की प्रधान रोशनी देवी ने कहा कि उनकी पंचायत के 900 लोगों को लाल पुल कनेक्टिविटी का सबसे महत्वपूर्ण साधन था। नागदार के प्रधान रमेश का कहना है कि लाल पुल बदार घाटी की शान था। आवाजाही का सबसे प्रमुख पुल था। उन्होंने पुल के निर्माण की मांग करते हुए कहा कि उनके गांव थट्टा, देवरी, जैसे गांव के लोगों को अब 9 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है, जो अब केवल गाड़ी के द्वारा ही संभव है। मासड़ के प्रधान लोकपाल ने कहा कि उनका गांव मुख्यधारा से टूट गया है। एक तरफ लाल पुल का टूटना दूसरी तरफ से स्प्रेई गांव के लिए ट्रांजिट कैंप के पास बने फु टपाथ ब्रिज का बह जाना उनके गांव के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। ग्राम पंचायत देवरी के प्रधान का कहना है कि लालपुल हमारी शान था और हमारी अर्थव्यवस्था का परिचायक था। इस पुल का फिर से निर्माण जल्द से जल्द होना बहुत जरूरी है।
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पंद्रह हजार की आवादी वाली बदार घाटी इन दिनों काले पानी जैसी स्थिति जीने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा कारण व्यास नदी में आई बाढ़ है। जहां पंडोह में भारी तबाही मचाई। वहीं द्रंग विधानसभा क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोडऩे वाले ऐतिहासिक लाल पुल को भी अपने साथ बहा ले गई। चार विधानसभाओं सदर, द्रंग, सराज व नाचन को जोडऩे वाला लालपुल भी इस बाढ़ की भेंट चढ गया। यह पुल एक सौ वर्ष पुराना अंग्रेजी हुकूमत द्वारा निर्मित किया पुल था, जो बहुत ही बेहतरीन तकनीक के साथ निर्मित किया गया था। पुल के पिलर जो पत्थर से तैयार किए गए थे, आज भी जस के तस हैं। पुल के रस्ते खुल जाने से पानी में समाया है। आज इस पुल के टूट जाने से जहां पंद्रह पंचायतों के लोग प्रभावित हो रहे हैं। वही ग्राम पंचायत शिवा, देवरी नागधार, हटोन, मास्ड के लगभग दस हजार लोग सीधे रूप से प्रभावित हुए हैं। इन लोगों को अब अपने घर जाने या घर से पंडोह मंडी की ओर आने के लिए आठ किलोग्राममीटर का अतिरिक्त सफ र तय करना पड़ रहा है। अब इन्हें पंडोह डैम के कैंची मोड से होकर पंडोह पहुंचना पड़ रहा है। जिससे लोग बहुत परेशान है। इन में वे लोग ज्यादा परेशान हैं, जो रोज अपने कारोबार के लिए पैदल चलकर लालपुल से पंडोह पहुंचते थे। आवाजाही के लिए उन्हें लालपुल बहुत ही सहायक था। अब पैदल चलना लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है। और यदि वह टैक्सी करते हैं तो इनकी आर्थिक स्थिति इस की इजाजत नहीं देती। लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है। लोग प्रदेश मजदूरों किसानों भगवानों के लिए समस्या विकराल होती जा रही है। सरकार से मांग कर रहे हैं कि लाल पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर अति शीघ्र किया जाए। हटोन की प्रधान रोशनी देवी ने कहा कि उनकी पंचायत के नौ सौ लोगों को लाल पुल कनेक्टिविटी का सबसे महत्वपूर्ण साधन था। नागदार के प्रधान रमेश का कहना है कि लाल पुल बदार घाटी की शान था। आवाजाही का सबसे प्रमुख पुल था। उन्होंने पुल के निर्माण की मांग करते हुए कहा कि उनके गांव थट्टा, देवरी, जैसे गांव के लोगों को अब नौ किलोग्राममीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है, जो अब केवल गाड़ी के द्वारा ही संभव है। मासड़ के प्रधान लोकपाल ने कहा कि उनका गांव मुख्यधारा से टूट गया है। एक तरफ लाल पुल का टूटना दूसरी तरफ से स्प्रेई गांव के लिए ट्रांजिट कैंप के पास बने फु टपाथ ब्रिज का बह जाना उनके गांव के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। ग्राम पंचायत देवरी के प्रधान का कहना है कि लालपुल हमारी शान था और हमारी अर्थव्यवस्था का परिचायक था। इस पुल का फिर से निर्माण जल्द से जल्द होना बहुत जरूरी है।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कुछ महिलाओं (women) की स्किन (skin) काफी सेंसिटिव होती है, जिस कारण से बाजार से खरीदे गए केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स (beauty products) उनकी स्किन को सूट नहीं करते और मुंहासे या अन्य समस्याओं का कारण बन जाते हैं।
इसके अलावा इन्हें खरीदने में पैसे भी बहुत खर्च होते हैं। वहीं पार्लर या महंगे प्रोडक्ट इस्तेमाल किए बिना ही ग्लोइंग और बेदाग त्वचा पा लेना भी एक कला है। यदि आप भी गॉर्जियस लुक पाना चाहती हैं, परंतु ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर बहुत ज्यादा पैसा या समय खर्च करना नहीं चाहती हैं तो आप कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट को आसानी से घर पर ही बना सकते हैं।
ऐसे बनाएं 'लिप स्क्रब' (lip scrub)
अगर आपके होंठ ड्राई और परतदार हैं तो पेट्रोलियम जेली और चीनी को अच्छी तरह से मिक्स करके आप घर पर ही अपना लिप स्क्रब बना सकती हैं। यह होंठों को स्मूद करने में हेल्प करेगा। पेट्रोलियम जैली ड्राई होंठों के लिए बहुत अच्छी होती है। यही नहीं यह आपकी होंठों को हाईड्रेटेड और मॉइस्चराइज रखने में मदद करेगी और आपके होंठों को एक नेचुरल रूप भी देगी।
ऐसे बनाएं 'बीबी क्रीम' (bb cream)
यदि आप अपने चेहरे पर बहुत ज्यादा मेकअप न करके बस हल्का-सा मेकअप बेस ही चाहती हैं, तो आप घर पर अपनी खुद की 'बीबी क्रीम' बना सकती हैं। इसके लिए आप केवल लिक्विड या पाउडर फाउंडेशन के साथ थोड़ा सा मॉइस्चराइजर मिला सकती हैं। आपकी 'बीबी क्रीम' तैयार है और आप इसे बड़े आराम से इस्तेमाल कर सकती हैं।
ऐसे बनाएं 'ब्रो पाउडर'
यदि आपके पास आई शैडो पैलेट है तो 'ब्रो पाउडर' में पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप अपनी आई ब्रो को भरने और आकार देने के लिए हमेशा गहरी भूरे और ग्रे कलर को भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
खूबसूरत दिखने के लिये ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान!
ऐसे बनाएं 'ब्रश क्लीनजर' (brush cleanser)
यदि आप सॉल्यूशन पर पैसे खर्च किए बिना अपनी मेकअप ब्रश को साफ करना चाहती हैं, आप अपने रेगुलर शैंपू को भी इस्तेमाल कर सकती हैं इसके लिए आप एक कटोरी गर्म पानी लें और उसमें कुछ बूंदे शैंपू की मिला लें। यह सॉल्यूशन आपके सभी मेकअप ब्रश को गहराई से साफ करने के लिए एकदम सही है।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कुछ महिलाओं की स्किन काफी सेंसिटिव होती है, जिस कारण से बाजार से खरीदे गए केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स उनकी स्किन को सूट नहीं करते और मुंहासे या अन्य समस्याओं का कारण बन जाते हैं। इसके अलावा इन्हें खरीदने में पैसे भी बहुत खर्च होते हैं। वहीं पार्लर या महंगे प्रोडक्ट इस्तेमाल किए बिना ही ग्लोइंग और बेदाग त्वचा पा लेना भी एक कला है। यदि आप भी गॉर्जियस लुक पाना चाहती हैं, परंतु ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर बहुत ज्यादा पैसा या समय खर्च करना नहीं चाहती हैं तो आप कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट को आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। ऐसे बनाएं 'लिप स्क्रब' अगर आपके होंठ ड्राई और परतदार हैं तो पेट्रोलियम जेली और चीनी को अच्छी तरह से मिक्स करके आप घर पर ही अपना लिप स्क्रब बना सकती हैं। यह होंठों को स्मूद करने में हेल्प करेगा। पेट्रोलियम जैली ड्राई होंठों के लिए बहुत अच्छी होती है। यही नहीं यह आपकी होंठों को हाईड्रेटेड और मॉइस्चराइज रखने में मदद करेगी और आपके होंठों को एक नेचुरल रूप भी देगी। ऐसे बनाएं 'बीबी क्रीम' यदि आप अपने चेहरे पर बहुत ज्यादा मेकअप न करके बस हल्का-सा मेकअप बेस ही चाहती हैं, तो आप घर पर अपनी खुद की 'बीबी क्रीम' बना सकती हैं। इसके लिए आप केवल लिक्विड या पाउडर फाउंडेशन के साथ थोड़ा सा मॉइस्चराइजर मिला सकती हैं। आपकी 'बीबी क्रीम' तैयार है और आप इसे बड़े आराम से इस्तेमाल कर सकती हैं। ऐसे बनाएं 'ब्रो पाउडर' यदि आपके पास आई शैडो पैलेट है तो 'ब्रो पाउडर' में पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप अपनी आई ब्रो को भरने और आकार देने के लिए हमेशा गहरी भूरे और ग्रे कलर को भी इस्तेमाल कर सकती हैं। खूबसूरत दिखने के लिये ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान! ऐसे बनाएं 'ब्रश क्लीनजर' यदि आप सॉल्यूशन पर पैसे खर्च किए बिना अपनी मेकअप ब्रश को साफ करना चाहती हैं, आप अपने रेगुलर शैंपू को भी इस्तेमाल कर सकती हैं इसके लिए आप एक कटोरी गर्म पानी लें और उसमें कुछ बूंदे शैंपू की मिला लें। यह सॉल्यूशन आपके सभी मेकअप ब्रश को गहराई से साफ करने के लिए एकदम सही है।
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नई दिल्ली PM Kisan Scheme: अगर आप किसान हैं तो ये खबर आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। आपको बता दें 13वीं किस्त के ट्रांसफर होने के बाद किसान 14वीं किस्त के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 14वीं किस्त बहुत ही जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर की जा सकती है। यान कि जून में किसानों के खाते में किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। फिलहाल के लिए सरकार की तरफ से कोई ऑफशिल ऐलान नहीं किया गया है।
आपको बता दें पीएम किसान स्कीम के जरिए सरकार किसानों को आर्थिक रुप से मदद करती है। इस स्कीम के तहत सरकार किसानों को सालना 6 हजार रुपये की तीन किस्तें ट्रांसफर करती है। इसके जरिए किसानों के खाते में चार महीने के अंतराल में 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तें ट्रांसफर की जाती हैं।
इस स्कीम के तहत अब 14वीं किस्त किसानों के खाते में भेजी जानी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस किस्त की राशि जून के तीसरे सप्ताह में किसानों को जारी की जा सकती है। जबकि इस मामले में केंद्र सरकार ने कोई अपडेट या फिर ऑफिशियल अनाउंसमेंट अभी तक नहीं दिया है।
इससे पहले सरकार ने पीएम किसान की 13वीं किस्त को फरवरी में किसानों के खाते में डाला गया था। इस लिहाज से देखा जाए तो केंद्र सरकार के पास अगली किस्त जारी करने का समय जुलाई है। ऐसे में जून से लेकर जुलाई के बीच में कभी भी 14 वीं किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है।
अगर आप पीएम किसान स्कीम के लाभार्थी हैं, लेकिन अब इस स्कीम के तहत EKYC नहीं कराया है और जमीन का सत्यापन नहीं कराया है तो आप करा सकते हैं। नहीं तो आपकी आने वाली किस्त की रकम अटक सकती है। इसके लिए आपको कृषि डिपार्टमेंट में जाना होगा।
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नई दिल्ली PM Kisan Scheme: अगर आप किसान हैं तो ये खबर आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। आपको बता दें तेरहवीं किस्त के ट्रांसफर होने के बाद किसान चौदहवीं किस्त के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चौदहवीं किस्त बहुत ही जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर की जा सकती है। यान कि जून में किसानों के खाते में किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। फिलहाल के लिए सरकार की तरफ से कोई ऑफशिल ऐलान नहीं किया गया है। आपको बता दें पीएम किसान स्कीम के जरिए सरकार किसानों को आर्थिक रुप से मदद करती है। इस स्कीम के तहत सरकार किसानों को सालना छः हजार रुपये की तीन किस्तें ट्रांसफर करती है। इसके जरिए किसानों के खाते में चार महीने के अंतराल में दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तें ट्रांसफर की जाती हैं। इस स्कीम के तहत अब चौदहवीं किस्त किसानों के खाते में भेजी जानी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस किस्त की राशि जून के तीसरे सप्ताह में किसानों को जारी की जा सकती है। जबकि इस मामले में केंद्र सरकार ने कोई अपडेट या फिर ऑफिशियल अनाउंसमेंट अभी तक नहीं दिया है। इससे पहले सरकार ने पीएम किसान की तेरहवीं किस्त को फरवरी में किसानों के खाते में डाला गया था। इस लिहाज से देखा जाए तो केंद्र सरकार के पास अगली किस्त जारी करने का समय जुलाई है। ऐसे में जून से लेकर जुलाई के बीच में कभी भी चौदह वीं किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। अगर आप पीएम किसान स्कीम के लाभार्थी हैं, लेकिन अब इस स्कीम के तहत EKYC नहीं कराया है और जमीन का सत्यापन नहीं कराया है तो आप करा सकते हैं। नहीं तो आपकी आने वाली किस्त की रकम अटक सकती है। इसके लिए आपको कृषि डिपार्टमेंट में जाना होगा।
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कोलंबो, आठ सितंबर (भाषा) भारतीय तटरक्षक दल के एक विमान ने श्रीलंका के तट से थोड़ी दूर समुद्र में एक विशाल तेल टैंकर के समीप फैले डीजल पर विशेष रसायन का छिड़काव किया। टैंकर पर लगी आग को एक बार बुझा दिया गया था लेकिन दिन दिन बाद यह फिर भड़क गई थी और अग्निशमन कर्मी उसे बुझाने में जुटे हैं। नौसेना ने यह जानकारी दी।
एमटी न्यू डायमंड टैंकर करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले कर भारत जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जहाज से रिसाव होता है या विस्फोट होता है तो श्रीलंका के तट पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन इंडिका डिसिल्वा ने बताया कि दुबारा से आग सोमवार शाम को लगी और वह पहली लगी आग जितनी भयावह हो गयी। अग्निशमन कर्मियों ने उस पर नियंत्रण तो पा लिया है लेकिन लपटें अब भी उठ रही हैं।
नौसेना ने कहा कि तेज हवा, जहाज पर बहुत अधिक तापमान और निकलती चिंगारियों ने फिर आग भड़का दी। अबतक कच्चे तेल के रिसाव या आग के तेल भंडारण क्षेत्र तक पहुंचने का जोखिम नहीं है।
नौसेना ने कहा कि प्रारंभिक आग इंजन रूम बॉइलर में लगी लेकिन वह तेल भंडारण क्षेत्र तक नहीं पहुंची।
उसने कहा कि लेकिन जहाज से करीब एक किलोमीटर दूर डीजल की परत बन गयी है और यह डीजल जहाज से निकला होगा।
नौसेना ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल को एक जहाज ने समुद्री पर्यावरण को नुकसान को कम से कम करने के लिए इस परत पर रसायन का छिड़काव किया।
(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है। )
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कोलंबो, आठ सितंबर भारतीय तटरक्षक दल के एक विमान ने श्रीलंका के तट से थोड़ी दूर समुद्र में एक विशाल तेल टैंकर के समीप फैले डीजल पर विशेष रसायन का छिड़काव किया। टैंकर पर लगी आग को एक बार बुझा दिया गया था लेकिन दिन दिन बाद यह फिर भड़क गई थी और अग्निशमन कर्मी उसे बुझाने में जुटे हैं। नौसेना ने यह जानकारी दी। एमटी न्यू डायमंड टैंकर करीब बीस लाख बैरल कच्चा तेल ले कर भारत जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जहाज से रिसाव होता है या विस्फोट होता है तो श्रीलंका के तट पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच सकता है। नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन इंडिका डिसिल्वा ने बताया कि दुबारा से आग सोमवार शाम को लगी और वह पहली लगी आग जितनी भयावह हो गयी। अग्निशमन कर्मियों ने उस पर नियंत्रण तो पा लिया है लेकिन लपटें अब भी उठ रही हैं। नौसेना ने कहा कि तेज हवा, जहाज पर बहुत अधिक तापमान और निकलती चिंगारियों ने फिर आग भड़का दी। अबतक कच्चे तेल के रिसाव या आग के तेल भंडारण क्षेत्र तक पहुंचने का जोखिम नहीं है। नौसेना ने कहा कि प्रारंभिक आग इंजन रूम बॉइलर में लगी लेकिन वह तेल भंडारण क्षेत्र तक नहीं पहुंची। उसने कहा कि लेकिन जहाज से करीब एक किलोमीटर दूर डीजल की परत बन गयी है और यह डीजल जहाज से निकला होगा। नौसेना ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल को एक जहाज ने समुद्री पर्यावरण को नुकसान को कम से कम करने के लिए इस परत पर रसायन का छिड़काव किया।
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ला कर सकार को रुँत्व तथा रेफ को विसर्ग आदेश करने पर -- 'हरित्रातः' प्रयोग सिद्ध हो जाता है । समासाभाव में स्वपदविग्रहवाक्य भी रहेगा ।
करणकारक में तृतीयान्त का उदाहरण यथा --
लौकिक विग्रह -- नखैभिन्नो नखभिन्नः ( नाखूनों से चीरा गया ) । अलौकिकविग्रह - नख भिस् + भिन्न सुँ । यहां भेदनक्रिया में नख करण है और अनभिहित भी, अतः इस में कर्तृ करणयोस्तृतीया (८६५) सूत्रद्वारा तृतीयाविभक्ति हुई है। इधर भिदिर् विदारणे ( रुधा० उ० ) धातु से कर्म में कृत्संज्ञक क्तप्रत्यय कर रदाभ्यां निष्ठातो नः पूर्वस्य च दः ( ८१६ ) सूत्रद्वारा निष्ठा के तकार तथा धातु के दकार दोनों के स्थान पर नकार आदेश करने से 'भिन्न' यह कृदन्त रूप निष्पन्न होता है । अब यहां अलौकिक विग्रह में 'नख भिस्' इस करणतृतीयान्त का 'भिन्न सुँ' इस कृदन्त सुबन्त के साथ प्रकृत कर्तृ करणे कृता बहुलम् (९२६) सूत्र से बहुल कर तत्पुरुषसमास हो जाता है। पूर्ववत् तृतीयान्त की उपसर्जनसञ्ज्ञा, उपसर्जन का पूर्वनिपात, समास की प्रातिपदिकसंज्ञा तथा प्रातिपदिक के अवयव सुँपों ( भिस् और सुँ) का लुक कर विभक्ति लाने से प्रथमा के एकवचन में 'नखभिन्नः प्रयोग सिद्ध हो जाता है ।
इसीप्रकार - अहिना हतोऽह्ह्तिः । देवेन त्रातो देवत्रातः । दैवेन रक्षितो दैवरक्षितः' । परैभृतः परभृतः । अन्यैः पुष्टा अन्यपुष्टा ( अन्यों द्वारा पाली गईकोकिला ) । वृकेण हतो वृकहतः । प्रज्ञया हीनः प्रज्ञाहीनः । विद्यया रहितो विद्यारहितः इत्यादियों में कर्तृ तृतीयान्त का कृदन्त के साथ समास होता है । परशुना छिन्नः परशुछिन्नः । बलिभिः पुष्टो बलिपुष्टः । दात्त्रेण लूनो दात्त्रलूनः इत्यादियों में करणतृतीयान्त का कृदन्त के साथ समास होता है ।
इस सूत्र में 'विभाषा' को अनुवृत्ति सुलभ होने पर भी 'बहुलम्' का प्रयोग प्रयोजनवशात् किया गया है। 'बहुलम्' की चार विधाएं पीछे कृत्यल्युटो बहुसम् ( ७७२) सूत्र पर इस व्याख्या में स्पष्ट कर चुके हैं । ( १ ) क्वचित्प्रवृत्तिः ( कहीं प्रवृत्त हो जाना); (२) क्वचिदप्रवृत्तिः ( कहीं प्रवृत्त न होना ); (३) क्वचिद् विभाषा ( कहीं विकल्प से प्रवृत्त होना); (४) क्वचिदन्यदेव ( कही विधान से विपरीत कुछ और ही हो जाना ) । यहां 'बहुलम्' के तृतीय अर्थ का आश्रय ले कर मूलोक्त उपर्युक्त दोनों उदाहरण दिये गये हैं। 'बहुलम्' के द्वितीय अर्थ 'क्वचिदप्रवृत्तिः' के कारण करणतृतीया का क्तवतुं शतृ शानच् आदि कुछ कृत्प्रत्ययान्तों के साथ समास नहीं होता । यथा - दात्त्रेण लूनवान्; परशुना छिन्नवान्; हस्तेन कुर्वन्; हस्तेन भुञ्जान आदि में यह समास प्रवृत्त नहीं होता । 'बहुलम्' के चतुर्थ अर्थ 'क्वचिदन्यदेव' का भी यहां आश्रय लिया जाता है । इस से शिष्टप्रयोगानुसार पादहारकः, गलेचोपकः आदियों में तृतीया१. अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितं सुरक्षितं दैवहतं विनश्यति ( पञ्चतन्त्र १.२०) ।
भिन्न विभक्तियों का भी कृदन्तों के साथ समास सिद्ध हो जाता है' ।
'कर्त करणे' कहने से कर्ता और करण में होने वाली तृतीया का ही कृदन्त के साथ समास होता है अन्य तृतीया का नहीं । यथा - 'भिक्षाभिरुषितः' (भिक्षा के हेतु निवास किया) यहां 'भिक्षाभिः' में हेतौ (२.३.२३) सूत्रद्वारा हेतु में की गई तृतीया का 'उषित : ' इस कृदन्त के साथ समास नहीं होता ।
'कृता' इसलिये कहा है कि करणतृतीया का तद्धितान्त के साथ समास न हो जाये । यथा - काष्ठैः पचतितराम् ( लकड़ियों से वह अतिशय या अच्छा पकाता है) । यहां 'काष्ठैः' में करणतृतीया का तद्धितान्त 'पचतितराम्' से समास नहीं होता । इसीप्रकार - 'काष्ठैः पचतिरूपम्, काष्ठैः पचतिदेश्यम्, हस्तेन कृतपूर्वी, दध्ना भुक्तपूर्वी, 'घृतेन इष्टी' इत्यादियों में तद्धितान्तों के साथ तृतीया का समास नहीं होता ।
इस शास्त्र में येन विधिस्तदन्तस्य (१.१.७१) सूत्रद्वारा विशेषण से तदन्त विधि का विधान किया गया है। यथा - अचो यत् ( ७७३) यहां 'अचः' यह अनुवर्त्यमान 'धातोः' का विशेषण है, अतः इस से तदन्तविधि हो कर 'अजन्ताद् धातोर्यत्' ऐसा अर्थ हो जाता है। परन्तु समासविधान में तदन्तविधि का वात्तिककार ने निषेध कहा हैसमास-प्रत्ययविधौ प्रतिषेधः (वा० ) । अतः द्वितीया श्रितातीतपतितगतात्यस्त प्राप्तापन्नैः (१२४) यहां 'समर्थैः' इस अनुवर्त्यमान का विशेषण होने पर भी श्रित आदियों से तदन्तविधि नहीं होती। इस से द्वितीयान्त सुँबन्त का श्रित आदि सुँबन्तों के साथ तो समास हो जाता है (यथा - कष्टं श्रितः कष्टश्रितः) परन्तु श्रित आदि जिस के अन्त में हों ऐसे समर्थ सुँबन्तों के साथ समास नहीं होता। यथा - 'कष्टं परमश्रितः' यहां
पादाभ्यां ह्रियत इति पादहारकः ( पैरों से जो अलग किया जाता है)। यहां 'पादाभ्याम्' पञ्चम्यन्त है, अपादान में पञ्चमी हुई है । न यहां कर्त्ता अर्थ में तृतीया है और न करण अर्थ में, हां 'हारकः' यह कृदन्त अवश्य है, इस में कृत्यल्यूटो बहुलम् (७७२) द्वारा 'बहुलम्' ग्रहण के कारण कर्म में ण्वुल् प्रत्यय हुआ है जो कृत्संज्ञक है । इसीप्रकार - गले चोप्यते इति गलेचोपकः । यहां चुप मन्दायां गतौ ( भ्वा०प० ) धातु से हेतुमण्णिच् कर कर्म में ण्वुल् करने से 'चोपकः' बना है । 'गले' इस सप्तम्यन्त के साथ बाहुलकात् 'चोपकः' का समास हुआ है । समास में सप्तमी का अमूर्धमस्तकात् स्वाङ्गादकामे (६.३.११) से अलुक् हुआ है । जो गले में चुपके से धारण किया जाता है उसे 'गलेचोपकः' कहते हैं । साहित्य में इन दोनों के प्रयोग अन्वेष्टव्य हैं ।
२. 'अतिशायने' और 'तिङश्च' की अनुवृत्ति आ कर द्विवचनविभज्योपपदे तरबीयसुँनी ( १२२२ ) सूत्रद्वारा 'पचति' इस तिङन्त से तरप् प्रत्यय हो कर किमेत्तिङ व्ययधादाम्वद्रव्यप्रकर्ये (१२२१) सूत्र से आमुँ ( आम्) तद्धित प्रत्यय करने से 'पचतितराम्' यह तद्धितान्त प्रयोग सिद्ध होता है । द्वाविमो पचतः, अयमनयोरतिशयेन पचतीति पचतितराम् । तद्वितश्चाऽसर्वविभक्तिः ( ३६८ ) मे आम्प्रत्ययान्त की अव्ययसंज्ञा हो जाती है ।
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ला कर सकार को रुँत्व तथा रेफ को विसर्ग आदेश करने पर -- 'हरित्रातः' प्रयोग सिद्ध हो जाता है । समासाभाव में स्वपदविग्रहवाक्य भी रहेगा । करणकारक में तृतीयान्त का उदाहरण यथा -- लौकिक विग्रह -- नखैभिन्नो नखभिन्नः । अलौकिकविग्रह - नख भिस् + भिन्न सुँ । यहां भेदनक्रिया में नख करण है और अनभिहित भी, अतः इस में कर्तृ करणयोस्तृतीया सूत्रद्वारा तृतीयाविभक्ति हुई है। इधर भिदिर् विदारणे धातु से कर्म में कृत्संज्ञक क्तप्रत्यय कर रदाभ्यां निष्ठातो नः पूर्वस्य च दः सूत्रद्वारा निष्ठा के तकार तथा धातु के दकार दोनों के स्थान पर नकार आदेश करने से 'भिन्न' यह कृदन्त रूप निष्पन्न होता है । अब यहां अलौकिक विग्रह में 'नख भिस्' इस करणतृतीयान्त का 'भिन्न सुँ' इस कृदन्त सुबन्त के साथ प्रकृत कर्तृ करणे कृता बहुलम् सूत्र से बहुल कर तत्पुरुषसमास हो जाता है। पूर्ववत् तृतीयान्त की उपसर्जनसञ्ज्ञा, उपसर्जन का पूर्वनिपात, समास की प्रातिपदिकसंज्ञा तथा प्रातिपदिक के अवयव सुँपों का लुक कर विभक्ति लाने से प्रथमा के एकवचन में 'नखभिन्नः प्रयोग सिद्ध हो जाता है । इसीप्रकार - अहिना हतोऽह्ह्तिः । देवेन त्रातो देवत्रातः । दैवेन रक्षितो दैवरक्षितः' । परैभृतः परभृतः । अन्यैः पुष्टा अन्यपुष्टा । वृकेण हतो वृकहतः । प्रज्ञया हीनः प्रज्ञाहीनः । विद्यया रहितो विद्यारहितः इत्यादियों में कर्तृ तृतीयान्त का कृदन्त के साथ समास होता है । परशुना छिन्नः परशुछिन्नः । बलिभिः पुष्टो बलिपुष्टः । दात्त्रेण लूनो दात्त्रलूनः इत्यादियों में करणतृतीयान्त का कृदन्त के साथ समास होता है । इस सूत्र में 'विभाषा' को अनुवृत्ति सुलभ होने पर भी 'बहुलम्' का प्रयोग प्रयोजनवशात् किया गया है। 'बहुलम्' की चार विधाएं पीछे कृत्यल्युटो बहुसम् सूत्र पर इस व्याख्या में स्पष्ट कर चुके हैं । क्वचित्प्रवृत्तिः ; क्वचिदप्रवृत्तिः ; क्वचिद् विभाषा ; क्वचिदन्यदेव । यहां 'बहुलम्' के तृतीय अर्थ का आश्रय ले कर मूलोक्त उपर्युक्त दोनों उदाहरण दिये गये हैं। 'बहुलम्' के द्वितीय अर्थ 'क्वचिदप्रवृत्तिः' के कारण करणतृतीया का क्तवतुं शतृ शानच् आदि कुछ कृत्प्रत्ययान्तों के साथ समास नहीं होता । यथा - दात्त्रेण लूनवान्; परशुना छिन्नवान्; हस्तेन कुर्वन्; हस्तेन भुञ्जान आदि में यह समास प्रवृत्त नहीं होता । 'बहुलम्' के चतुर्थ अर्थ 'क्वचिदन्यदेव' का भी यहां आश्रय लिया जाता है । इस से शिष्टप्रयोगानुसार पादहारकः, गलेचोपकः आदियों में तृतीयाएक. अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितं सुरक्षितं दैवहतं विनश्यति । भिन्न विभक्तियों का भी कृदन्तों के साथ समास सिद्ध हो जाता है' । 'कर्त करणे' कहने से कर्ता और करण में होने वाली तृतीया का ही कृदन्त के साथ समास होता है अन्य तृतीया का नहीं । यथा - 'भिक्षाभिरुषितः' यहां 'भिक्षाभिः' में हेतौ सूत्रद्वारा हेतु में की गई तृतीया का 'उषित : ' इस कृदन्त के साथ समास नहीं होता । 'कृता' इसलिये कहा है कि करणतृतीया का तद्धितान्त के साथ समास न हो जाये । यथा - काष्ठैः पचतितराम् । यहां 'काष्ठैः' में करणतृतीया का तद्धितान्त 'पचतितराम्' से समास नहीं होता । इसीप्रकार - 'काष्ठैः पचतिरूपम्, काष्ठैः पचतिदेश्यम्, हस्तेन कृतपूर्वी, दध्ना भुक्तपूर्वी, 'घृतेन इष्टी' इत्यादियों में तद्धितान्तों के साथ तृतीया का समास नहीं होता । इस शास्त्र में येन विधिस्तदन्तस्य सूत्रद्वारा विशेषण से तदन्त विधि का विधान किया गया है। यथा - अचो यत् यहां 'अचः' यह अनुवर्त्यमान 'धातोः' का विशेषण है, अतः इस से तदन्तविधि हो कर 'अजन्ताद् धातोर्यत्' ऐसा अर्थ हो जाता है। परन्तु समासविधान में तदन्तविधि का वात्तिककार ने निषेध कहा हैसमास-प्रत्ययविधौ प्रतिषेधः । अतः द्वितीया श्रितातीतपतितगतात्यस्त प्राप्तापन्नैः यहां 'समर्थैः' इस अनुवर्त्यमान का विशेषण होने पर भी श्रित आदियों से तदन्तविधि नहीं होती। इस से द्वितीयान्त सुँबन्त का श्रित आदि सुँबन्तों के साथ तो समास हो जाता है परन्तु श्रित आदि जिस के अन्त में हों ऐसे समर्थ सुँबन्तों के साथ समास नहीं होता। यथा - 'कष्टं परमश्रितः' यहां पादाभ्यां ह्रियत इति पादहारकः । यहां 'पादाभ्याम्' पञ्चम्यन्त है, अपादान में पञ्चमी हुई है । न यहां कर्त्ता अर्थ में तृतीया है और न करण अर्थ में, हां 'हारकः' यह कृदन्त अवश्य है, इस में कृत्यल्यूटो बहुलम् द्वारा 'बहुलम्' ग्रहण के कारण कर्म में ण्वुल् प्रत्यय हुआ है जो कृत्संज्ञक है । इसीप्रकार - गले चोप्यते इति गलेचोपकः । यहां चुप मन्दायां गतौ धातु से हेतुमण्णिच् कर कर्म में ण्वुल् करने से 'चोपकः' बना है । 'गले' इस सप्तम्यन्त के साथ बाहुलकात् 'चोपकः' का समास हुआ है । समास में सप्तमी का अमूर्धमस्तकात् स्वाङ्गादकामे से अलुक् हुआ है । जो गले में चुपके से धारण किया जाता है उसे 'गलेचोपकः' कहते हैं । साहित्य में इन दोनों के प्रयोग अन्वेष्टव्य हैं । दो. 'अतिशायने' और 'तिङश्च' की अनुवृत्ति आ कर द्विवचनविभज्योपपदे तरबीयसुँनी सूत्रद्वारा 'पचति' इस तिङन्त से तरप् प्रत्यय हो कर किमेत्तिङ व्ययधादाम्वद्रव्यप्रकर्ये सूत्र से आमुँ तद्धित प्रत्यय करने से 'पचतितराम्' यह तद्धितान्त प्रयोग सिद्ध होता है । द्वाविमो पचतः, अयमनयोरतिशयेन पचतीति पचतितराम् । तद्वितश्चाऽसर्वविभक्तिः मे आम्प्रत्ययान्त की अव्ययसंज्ञा हो जाती है ।
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चीन की स्मार्टफोन मेकर कंपनी Xiaomi ने भारत में दो नए स्मार्टफोन लांच किये हैं। इसका इंतजार लोगों को लंबे समय से था।
चीन की स्मार्टफोन मेकर कंपनी Xiaomi ने भारत में दो नए स्मार्टफोन लांच किये हैं। इसका इंतजार लोगों को लंबे समय से था। रेडमी नोट 5 स्मार्टफोन नोट 4 का ही अपग्रेड वर्जन है, लेकिन रेडमी 5 प्रो को ऐपल आइफोन एक्स की तर्ज पर बनाया गया है।
रेडमी नोट 5 प्रो की टक्कर एचटीसी U11 प्लस जैसे फोन्स से होगी। रेडमी नोट 5 की टक्कर हॉनर 7X जैसे फोन्स से होगी। दमदार स्पेसिफिकेशंस से लैस इन दोनों स्मार्टफोन्स को 22 फरवरी से Mi. com, Mi Home और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकता है।
कंपनी का कहना है कि जल्द ही इन फोन्स को ऑफलाइन भी खरीदा जा सकेगा। इन दोनों स्मार्टफोन्स की खरीद पर जियो यूजर्स 2,200 रुपए का कैशबैक दिया जा रहा है. इसके अलावा, जियो यूजर्स को हर रिचार्ज पर 100 फीसदी एक्स्ट्रा डेटा भी मिलेगा।
इन हैंडसेट्स की सबसे बड़ी खूबियों में 18:9 ऐस्पेक्ट रेशियो वाला 5. 99 इंच का डिस्प्ले, सेल्फी लाइट मॉड्यूल और 4000 एमएएच की बैटरी शामिल है। रेडमी नोट 5 सीरीज के दोनों स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन लगभग एक जैसे हैं। बस, रेडमी नोट 5 प्रो में डुअल रियर कैमरा दिया गया है और इसके साथ फ्रंट कैमरा भी ज्यादा दमदार है।
आइए जानें इन स्मार्टफोन के अन्य फीचर्स के बारे में. .
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चीन की स्मार्टफोन मेकर कंपनी Xiaomi ने भारत में दो नए स्मार्टफोन लांच किये हैं। इसका इंतजार लोगों को लंबे समय से था। चीन की स्मार्टफोन मेकर कंपनी Xiaomi ने भारत में दो नए स्मार्टफोन लांच किये हैं। इसका इंतजार लोगों को लंबे समय से था। रेडमी नोट पाँच स्मार्टफोन नोट चार का ही अपग्रेड वर्जन है, लेकिन रेडमी पाँच प्रो को ऐपल आइफोन एक्स की तर्ज पर बनाया गया है। रेडमी नोट पाँच प्रो की टक्कर एचटीसी Uग्यारह प्लस जैसे फोन्स से होगी। रेडमी नोट पाँच की टक्कर हॉनर सातX जैसे फोन्स से होगी। दमदार स्पेसिफिकेशंस से लैस इन दोनों स्मार्टफोन्स को बाईस फरवरी से Mi. com, Mi Home और फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकता है। कंपनी का कहना है कि जल्द ही इन फोन्स को ऑफलाइन भी खरीदा जा सकेगा। इन दोनों स्मार्टफोन्स की खरीद पर जियो यूजर्स दो,दो सौ रुपयापए का कैशबैक दिया जा रहा है. इसके अलावा, जियो यूजर्स को हर रिचार्ज पर एक सौ फीसदी एक्स्ट्रा डेटा भी मिलेगा। इन हैंडसेट्स की सबसे बड़ी खूबियों में अट्ठारह:नौ ऐस्पेक्ट रेशियो वाला पाँच. निन्यानवे इंच का डिस्प्ले, सेल्फी लाइट मॉड्यूल और चार हज़ार एमएएच की बैटरी शामिल है। रेडमी नोट पाँच सीरीज के दोनों स्मार्टफोन के स्पेसिफिकेशन लगभग एक जैसे हैं। बस, रेडमी नोट पाँच प्रो में डुअल रियर कैमरा दिया गया है और इसके साथ फ्रंट कैमरा भी ज्यादा दमदार है। आइए जानें इन स्मार्टफोन के अन्य फीचर्स के बारे में. .
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ऊपर हमने उन बारह कृतियों का पर्यालोचन किया जिनके आधार पर प्राचार्य शुक्ल वीरगाथाफाल का प्रासाद खड़ा किया है। हम देख चुके है कि इनमें से केवल विद्यापति की कृतियों को छोड़कर बाकी सभी कृतियाँ प्रामाणिक या अर्द्धप्रामाणिक है । इन कृतियों की प्रामाणिकता प्रामाणिकता का प्रश्न हिंदी साहित्य के इतिहास के लिये एक समस्या बना हुआ है। संभवतः इसीलिये डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी को कुँझलाकर यह कहना पड़ा था कि 'इस प्रकार साहित्यिक कोटि में आनेवाले ये ग्रंथ बहुत संदिग्ध है। कुछ तो निश्चित रूप से परवर्ती हैं, कुछ के अस्तित्व का ही ठिकाना नहीं और कुछ का अस्तित्व केवल अनुमान से मान लिया गया है। आदिकाल के इतिहास लेखकों ने इन ग्रथों की ऐतिहासिकता के पक्ष-विपक्ष में बहुत सी व्यर्थ की दलीलें पेश की है जो निरर्थक ही नहीं है साहित्य के विद्यार्थी के ऊपर बोझ के समान है और शुद्ध साहित्यिक आलोचना की गति को रुद्ध करने का कार्य करती हैं' । '
जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं इन कृतियों से इतर कई कृतियाँ ऐसी है, जो इस काल की प्रामाणिक रचनाएँ मानी जानी चाहिएँ । इन कृतियों में एक श्रोर जैन कवियों के चर्चरी, रास तथा फाग काव्य है, दूसरी ओर प्राकृतपैंगलम् के फुटकर मुक्तक पद्य । इनके अतिरिक्त कुछ ऐसी भी कृतियाँ हैं जो भाषा की दृष्टि से चाहे प्रामाणिक न भी हों, विषय की दृष्टि से निःसदेह प्रामाणिक हैं। इनमें एक ओर ढोला मारू रा दोहा की शृंगारी काव्यपरपरा है, दूसरी ओर नाथसिद्धों की काव्यपरपरा । इनके अतिरिक्त प्रारंभिक हिंदी के गद्य का स्वरूप जानने के लिये हम उक्तिव्यक्तिप्रकरण, वर्णरत्नाकर तथा श्री अगरचद नाहटा द्वारा सकेतित जैन लेखकों के गद्य को ले सकते हैं ।
५. जैन काव्य
हिंदी साहित्य के श्रादिकाल की कई जैन काव्यकृतियाँ क्रमशः प्रकाश में ती जा रही है । यद्यपि ये कृतियॉ जैन धर्मोपदेश की प्रवृत्ति से संवलित है तथापि यह तथ्य इनके काव्यत्व को क्षुरण नहीं करता । इस काल में दो प्रकार की जैन फाव्यकृतियाँ पाई जाती है - कुछ ऐसी हैं जो परिनिष्ठित अपभ्रंश में लिखी गई है और अन्य ऐसी जिनमें यद्यपि श्रपभ्रंशाभास पाया जाता है तथापि कवि ने देशभाषा के समीप की काव्यशैली अपनाई है। इस काल में लिखे गए पुराणों एवं चरितफाव्यों की शैली प्रायः शुद्ध परिनिष्ठित अपभ्रंश है, किंतु चर्चरी, रास तथा फागु कार्यों की भाषा में इस परिनिष्ठितता की पाबंदी नहीं पाई जाती । इसका कारण
१ डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी ६ि० सा०, पृ० ५५-५६ ।
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ऊपर हमने उन बारह कृतियों का पर्यालोचन किया जिनके आधार पर प्राचार्य शुक्ल वीरगाथाफाल का प्रासाद खड़ा किया है। हम देख चुके है कि इनमें से केवल विद्यापति की कृतियों को छोड़कर बाकी सभी कृतियाँ प्रामाणिक या अर्द्धप्रामाणिक है । इन कृतियों की प्रामाणिकता प्रामाणिकता का प्रश्न हिंदी साहित्य के इतिहास के लिये एक समस्या बना हुआ है। संभवतः इसीलिये डाशून्य हजारीप्रसाद द्विवेदी को कुँझलाकर यह कहना पड़ा था कि 'इस प्रकार साहित्यिक कोटि में आनेवाले ये ग्रंथ बहुत संदिग्ध है। कुछ तो निश्चित रूप से परवर्ती हैं, कुछ के अस्तित्व का ही ठिकाना नहीं और कुछ का अस्तित्व केवल अनुमान से मान लिया गया है। आदिकाल के इतिहास लेखकों ने इन ग्रथों की ऐतिहासिकता के पक्ष-विपक्ष में बहुत सी व्यर्थ की दलीलें पेश की है जो निरर्थक ही नहीं है साहित्य के विद्यार्थी के ऊपर बोझ के समान है और शुद्ध साहित्यिक आलोचना की गति को रुद्ध करने का कार्य करती हैं' । ' जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं इन कृतियों से इतर कई कृतियाँ ऐसी है, जो इस काल की प्रामाणिक रचनाएँ मानी जानी चाहिएँ । इन कृतियों में एक श्रोर जैन कवियों के चर्चरी, रास तथा फाग काव्य है, दूसरी ओर प्राकृतपैंगलम् के फुटकर मुक्तक पद्य । इनके अतिरिक्त कुछ ऐसी भी कृतियाँ हैं जो भाषा की दृष्टि से चाहे प्रामाणिक न भी हों, विषय की दृष्टि से निःसदेह प्रामाणिक हैं। इनमें एक ओर ढोला मारू रा दोहा की शृंगारी काव्यपरपरा है, दूसरी ओर नाथसिद्धों की काव्यपरपरा । इनके अतिरिक्त प्रारंभिक हिंदी के गद्य का स्वरूप जानने के लिये हम उक्तिव्यक्तिप्रकरण, वर्णरत्नाकर तथा श्री अगरचद नाहटा द्वारा सकेतित जैन लेखकों के गद्य को ले सकते हैं । पाँच. जैन काव्य हिंदी साहित्य के श्रादिकाल की कई जैन काव्यकृतियाँ क्रमशः प्रकाश में ती जा रही है । यद्यपि ये कृतियॉ जैन धर्मोपदेश की प्रवृत्ति से संवलित है तथापि यह तथ्य इनके काव्यत्व को क्षुरण नहीं करता । इस काल में दो प्रकार की जैन फाव्यकृतियाँ पाई जाती है - कुछ ऐसी हैं जो परिनिष्ठित अपभ्रंश में लिखी गई है और अन्य ऐसी जिनमें यद्यपि श्रपभ्रंशाभास पाया जाता है तथापि कवि ने देशभाषा के समीप की काव्यशैली अपनाई है। इस काल में लिखे गए पुराणों एवं चरितफाव्यों की शैली प्रायः शुद्ध परिनिष्ठित अपभ्रंश है, किंतु चर्चरी, रास तथा फागु कार्यों की भाषा में इस परिनिष्ठितता की पाबंदी नहीं पाई जाती । इसका कारण एक डाशून्य हजारीप्रसाद द्विवेदी छःिशून्य साशून्य, पृशून्य पचपन-छप्पन ।
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शुक्र उदय के बाद से आप प्रेम संबंधों के बारे में अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। शुक्र उदय कई राशियों के जातकों के जीवन में बहुत बड़े- बड़े बदलाव लेकर आने वाला है।
21 नंवबर से शुक्र उदय होने जा रहा है। जो आपके निजी जीवन को प्रभावित कर सकता है। शुक्र उदय के बाद से आप प्रेम संबंधों के बारे में अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। अगर आप किसी बंधन में पहले से बंधे हुए हैं तो उसके बारे आप और अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। पहले आप रिश्तों के बारे में उतनी गंभीरता से विचार नहीं कर रहे थर। लेकिन इस विषय पर अब गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है।
किसी भी रिश्ते में सुरक्षा और स्थिरता की भावना आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी होती है। लोगों की गतिविधियां कई बार आपको मन में उनके लिए शंका पैदा कर देती है। जो व्यक्ति आपकी भावनाओं के साथ खेलने की कोशिश करता है। वह स्वयं अपने बनाए हुए जाल में फंस जाता है।
आप अपनी अंतरात्मा की आवाज को ध्यान से सुनते हैं। जिसकी वजह से आप सभी पक्षों का सही विश्लेषण करने के बाद ही कोई फैसला लेते हैं। मुखौटे के पीछे छिपे चेहरे और उसके स्वभाव को आप अच्छी तरह से समझने की काबिलियत रखते हैं। जिसकी मदद से आप करीबी दोस्त या पार्टनर की जरूरतों का और भी अच्छे से ख्याल रख सकते हैं।
किसी चीज को गोपनीय बनाएं रखने की आपकी कोशिश, खुद को खुलकर प्रकट नहीं होने देती।
वृश्चिक की ताकत और शक्ति, शुक्र के साथ मिल जाती है जो पूरे माहौल को रहस्यमयी बना देती है। अगर आप अनमैरिड है और प्यार की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं तो आप बहुत से विवाह प्रस्तावक का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं। वफादार और विश्वासपात्र लगने के बाद आप अपने पार्टनर का चुनाव कर सकते हैं।
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शुक्र उदय के बाद से आप प्रेम संबंधों के बारे में अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। शुक्र उदय कई राशियों के जातकों के जीवन में बहुत बड़े- बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। इक्कीस नंवबर से शुक्र उदय होने जा रहा है। जो आपके निजी जीवन को प्रभावित कर सकता है। शुक्र उदय के बाद से आप प्रेम संबंधों के बारे में अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। अगर आप किसी बंधन में पहले से बंधे हुए हैं तो उसके बारे आप और अधिक गंभीरता के साथ विचार करना शुरू कर देंगे। पहले आप रिश्तों के बारे में उतनी गंभीरता से विचार नहीं कर रहे थर। लेकिन इस विषय पर अब गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। किसी भी रिश्ते में सुरक्षा और स्थिरता की भावना आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी होती है। लोगों की गतिविधियां कई बार आपको मन में उनके लिए शंका पैदा कर देती है। जो व्यक्ति आपकी भावनाओं के साथ खेलने की कोशिश करता है। वह स्वयं अपने बनाए हुए जाल में फंस जाता है। आप अपनी अंतरात्मा की आवाज को ध्यान से सुनते हैं। जिसकी वजह से आप सभी पक्षों का सही विश्लेषण करने के बाद ही कोई फैसला लेते हैं। मुखौटे के पीछे छिपे चेहरे और उसके स्वभाव को आप अच्छी तरह से समझने की काबिलियत रखते हैं। जिसकी मदद से आप करीबी दोस्त या पार्टनर की जरूरतों का और भी अच्छे से ख्याल रख सकते हैं। किसी चीज को गोपनीय बनाएं रखने की आपकी कोशिश, खुद को खुलकर प्रकट नहीं होने देती। वृश्चिक की ताकत और शक्ति, शुक्र के साथ मिल जाती है जो पूरे माहौल को रहस्यमयी बना देती है। अगर आप अनमैरिड है और प्यार की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं तो आप बहुत से विवाह प्रस्तावक का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं। वफादार और विश्वासपात्र लगने के बाद आप अपने पार्टनर का चुनाव कर सकते हैं।
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गई है । इसी आधार पर - 'अनुविद्धमिव ज्ञानं - सर्व शब्देन भासते । न ह्यशब्दमिवास्ति' इत्यादि सिद्धान्त स्थापित हुए हैं। परमुखोच्चरित शब्द - उपदेश - प्रलोभन आदि आदि को ही अपने स्वरूप का मापदण्ड मानने की भ्रान्ति कर बैठना हीं 'भावुकता' की मुख्य परिभाषा है। इसी से कालान्तर में भावुक मानव स्वस्वरूप से तो होजाता है पराङ मुख, एवं परस्वरूप को मान बैठता है - अपना स्वरूप । इसी दोष से भारतीय मानव अपनी संस्कृति, अपने धर्म्म, अपने आदर्श आचार एवं अपनी जीवनपद्धति से तो होता गया है उत्तरोत्तर पराङ मुख, एवं परसभ्यता- परमत- पर भूताचार - पर भूतजीवनपद्धति ही बनते गए हैं इसके आराध्य और परिणाम अन्ततोगत्त्वा यह हुआ है इस परासक्तिमूलक व्यामोहन का कि, आज उन परों के समतुलन में यह अपने भावों की उनके कथनानुसार असभ्य-आदिमानव की मूर्खतापूर्णा- रूढ़िवादों के साथ तुलना करने लग पड़ा है। और इसी तुलनात्मक तत्त्वशोध ? रिसर्च १ जैसे महा भ्व के अनुग्रह से आज तो इस की वह मान्यता इस आस्था में हीं परिणत हो गई है कि, "मानवता का वास्तविक स्वरूप तो इसे आज के युग में इन भूतवैज्ञानिकों के अनुग्रह से ही उपलब्ध हुआ है । शिष्टाचार-जीवनपद्धति - जीवन का सुख - आदि आदि का वास्तविक मर्म्म तो उन्हीं से इसे उपलब्ध या भावुकत हुआ है"। अहो ! महतीयं प्रवञ्चना सर्वनाशप्रवर्तिकया- भावुकतया - भारतराष्ट्रस्य ।
१०३- श्रोकःसारी-प्रज्ञानेन्द्र के द्वारा मानवीय मन की भावुकता का बलवर्द्धनभावुकता परदर्शन को ही क्यों आधार बनाती है ?, प्रश्न का उत्तर है- ऐन्द्रियक- प्रज्ञान- मन । इन्द्रियों का प्रवाह बहिम्मुख माना गया है। सभी इन्द्रियाँ इसी लिए अतीन्द्रियाँ हीं मानी गई है, जैसा कि'सर्वारणीन्द्रियाणि अतीन्द्रियाणि इत्यादि श्र तिवचन से स्पष्ट है । जो इन्द्रियाँ बहिर्जगत् के बाह्य रूपरस - गन्ध - स्पर्श - शब्दादि भौतिक विषयों का प्रत्यक्ष करतीं रहतीं हैं, वे ही अपने अन्तर्जगत् के भूतों का प्रत्यक्ष करने में असमर्थ हैं। 'तस्मात् पराङ पश्यति-नान्तरात्मन्' * । परदर्शनकुशल इन्द्रियवर्ग का अध्यक्ष इन्द्रियमनोमय-चान्द्रसोमात्मक 'प्रज्ञान' नामक 'मन' है, जो अपने स्नेहगुणात्मक सोमधर्म से 'ओोकःसारी' बना हुआ है। जिस इन्द्रिय के द्वारा मन जिस विषय के साथ भावना - वासना - रूप से कुछसमय पर्य्यन्त सम्पर्क कर लेता है, बार-बार उसी विषय की ओर वह अनुधावन करने लग पड़ता है । और यही संस्कारात्मिका पुनः पुनः अनुधावनवृत्ति मन को कालान्तर में - 'ओकः सारी' बना देती हैजिसका अर्थ है-"तद्विषय को ही अपना घर-(ओक) मान बैठना" । मन की इसी ओकः सरिता का दिग्दर्शन कराते हुए प्रज्ञाप्राणमूर्ति- सोमप्रिय प्रज्ञानेन्द्र को लक्ष्य बना कर श्रुति ने कहा है'प्रोकः सारी वा इन्द्रः ( प्रज्ञानेन्द्रः- मनोरूपः ) । यत्र वा एष इन्द्रः- पूर्व
गच्छति, ऐव तत्रापरं गच्छति" ।
-कौषीतक्युपनिषत् ।
-पराशि खानियस्तरमा पराङ पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैचदा वृस चक्षुरमृतवमिच्छन् ।
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गई है । इसी आधार पर - 'अनुविद्धमिव ज्ञानं - सर्व शब्देन भासते । न ह्यशब्दमिवास्ति' इत्यादि सिद्धान्त स्थापित हुए हैं। परमुखोच्चरित शब्द - उपदेश - प्रलोभन आदि आदि को ही अपने स्वरूप का मापदण्ड मानने की भ्रान्ति कर बैठना हीं 'भावुकता' की मुख्य परिभाषा है। इसी से कालान्तर में भावुक मानव स्वस्वरूप से तो होजाता है पराङ मुख, एवं परस्वरूप को मान बैठता है - अपना स्वरूप । इसी दोष से भारतीय मानव अपनी संस्कृति, अपने धर्म्म, अपने आदर्श आचार एवं अपनी जीवनपद्धति से तो होता गया है उत्तरोत्तर पराङ मुख, एवं परसभ्यता- परमत- पर भूताचार - पर भूतजीवनपद्धति ही बनते गए हैं इसके आराध्य और परिणाम अन्ततोगत्त्वा यह हुआ है इस परासक्तिमूलक व्यामोहन का कि, आज उन परों के समतुलन में यह अपने भावों की उनके कथनानुसार असभ्य-आदिमानव की मूर्खतापूर्णा- रूढ़िवादों के साथ तुलना करने लग पड़ा है। और इसी तुलनात्मक तत्त्वशोध ? रिसर्च एक जैसे महा भ्व के अनुग्रह से आज तो इस की वह मान्यता इस आस्था में हीं परिणत हो गई है कि, "मानवता का वास्तविक स्वरूप तो इसे आज के युग में इन भूतवैज्ञानिकों के अनुग्रह से ही उपलब्ध हुआ है । शिष्टाचार-जीवनपद्धति - जीवन का सुख - आदि आदि का वास्तविक मर्म्म तो उन्हीं से इसे उपलब्ध या भावुकत हुआ है"। अहो ! महतीयं प्रवञ्चना सर्वनाशप्रवर्तिकया- भावुकतया - भारतराष्ट्रस्य । एक सौ तीन- श्रोकःसारी-प्रज्ञानेन्द्र के द्वारा मानवीय मन की भावुकता का बलवर्द्धनभावुकता परदर्शन को ही क्यों आधार बनाती है ?, प्रश्न का उत्तर है- ऐन्द्रियक- प्रज्ञान- मन । इन्द्रियों का प्रवाह बहिम्मुख माना गया है। सभी इन्द्रियाँ इसी लिए अतीन्द्रियाँ हीं मानी गई है, जैसा कि'सर्वारणीन्द्रियाणि अतीन्द्रियाणि इत्यादि श्र तिवचन से स्पष्ट है । जो इन्द्रियाँ बहिर्जगत् के बाह्य रूपरस - गन्ध - स्पर्श - शब्दादि भौतिक विषयों का प्रत्यक्ष करतीं रहतीं हैं, वे ही अपने अन्तर्जगत् के भूतों का प्रत्यक्ष करने में असमर्थ हैं। 'तस्मात् पराङ पश्यति-नान्तरात्मन्' * । परदर्शनकुशल इन्द्रियवर्ग का अध्यक्ष इन्द्रियमनोमय-चान्द्रसोमात्मक 'प्रज्ञान' नामक 'मन' है, जो अपने स्नेहगुणात्मक सोमधर्म से 'ओोकःसारी' बना हुआ है। जिस इन्द्रिय के द्वारा मन जिस विषय के साथ भावना - वासना - रूप से कुछसमय पर्य्यन्त सम्पर्क कर लेता है, बार-बार उसी विषय की ओर वह अनुधावन करने लग पड़ता है । और यही संस्कारात्मिका पुनः पुनः अनुधावनवृत्ति मन को कालान्तर में - 'ओकः सारी' बना देती हैजिसका अर्थ है-"तद्विषय को ही अपना घर- मान बैठना" । मन की इसी ओकः सरिता का दिग्दर्शन कराते हुए प्रज्ञाप्राणमूर्ति- सोमप्रिय प्रज्ञानेन्द्र को लक्ष्य बना कर श्रुति ने कहा है'प्रोकः सारी वा इन्द्रः । यत्र वा एष इन्द्रः- पूर्व गच्छति, ऐव तत्रापरं गच्छति" । -कौषीतक्युपनिषत् । -पराशि खानियस्तरमा पराङ पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैचदा वृस चक्षुरमृतवमिच्छन् ।
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कर्नाटक के तुमकुर में एक सेल्समैन ने एक किसान की हैसियत उसके कपड़ों से आंकने की गलती कर दी। उसके बाद किसान ने जो किया, वह हर किसी के लिए एक सबक है। किसी को भी केवल देखकर जज कर लेना बेवकूफी है।
नई दिल्लीः 'डोंट जज ए बुक बाई इट्स कवर'. . . अंग्रेजी की यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी। यह कहावत कर्नाटक के तुमकुर में हकीकत में उस वक्त तब्दील हो गई, जब एक शोरूम में कार सेल्समैन ने एक किसान को नीचा दिखाने की कोशिश की (Car Salesman and Farmer Dispute)। लेकिन किसान ने भी बता दिया कि किसी को कम आंकना बेवकूफी है।
सोशल मीडिया पर इस वाकए का एक वीडियो वायरल है। वाकया कुछ यूं है कि चिक्कासांद्रा हुबली में रामनपाल्या का केम्पेगौड़ा आरएल (kempe gowda RL) नाम का एक किसान एक गाड़ी खरीदने के लिए अपने दोस्तों के साथ तुमकुर में महिन्द्रा कंपनी के शोरूम पहुंचा। लेकिन एक सेल्समैन ने उसके कपड़ों से उसकी हैसियत आंकने की गलती कर दी। सेल्समैन ने कह दिया '10 लाख रुपये तो दूर, तुम्हारी जेब में 10 रुपये भी नहीं होंगे। ' इसके बाद शोरूम छोड़ने से पहले किसान और उसके दोस्तों ने कहा कि अगर वे कैश ले आते हैं तो क्या डिलीवरी आज ही हो जाएगी। इस पर शोरूम एग्जीक्यूटिव राजी हो गए और किसान ने 30 मिनट के अंदर 10 लाख रुपये का बंदोबस्त कर लिया। दस लाख रुपये कैश लेकर अपनी ड्रीम कार खरीदने लौटा।
क्या करते हैं केंपेगौड़ा केंपेगौड़ा वैसे तो सुपारी की खेती करते हैं। लेकिन वह जैस्मिन और क्रॉसेंड्रा भी उगाते हैं। बता दें कि दुनिया में सुपारी का सबसे ज्यादा प्रॉडक्शन भारत में ही होता है। इतना ही नहीं भारत में इसकी खपत भी सबसे ज्यादा है। भारत में सुपारी उत्पादन में 40 फीसदी से ज्यादा योगदान कर्नाटक का है। इसके बाद केरल का 25 फीसदी, असम का 20 फीसदी योगदान है। इसके बाद तमिलनाडु, मेघालय और पश्चिम बंगाल आते हैं।
शोरूमकर्मी से लिखित में माफी की मांग शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद उसी दिन कार की डिलीवरी नहीं हो सकी। शनिवार और रविवार को सरकारी अवकाश होने के कारण कर्मचारियों ने बेबसी जाहिर की। इससे केम्पेगौड़ा और उसके दोस्त नाराज हो गए। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस को बुलाया। किसानों ने शोरूम घेर लिया और वहां से हटने को राजी नहीं थे। पुलिसवालों ने उन्हें घर जाने के लिए राजी किया।
केम्पेगौड़ा का कहना था, 'मैंने सेल्स एक्जीक्यूटिव और शोरूम अधिकारियों से कहा है कि वह मुझसे और मेरे दोस्तों को अपमानित करने के लिए लिखित में माफी मांगे। . . . अब, मुझे गाड़ी नहीं चाहिए। '
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कर्नाटक के तुमकुर में एक सेल्समैन ने एक किसान की हैसियत उसके कपड़ों से आंकने की गलती कर दी। उसके बाद किसान ने जो किया, वह हर किसी के लिए एक सबक है। किसी को भी केवल देखकर जज कर लेना बेवकूफी है। नई दिल्लीः 'डोंट जज ए बुक बाई इट्स कवर'. . . अंग्रेजी की यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी। यह कहावत कर्नाटक के तुमकुर में हकीकत में उस वक्त तब्दील हो गई, जब एक शोरूम में कार सेल्समैन ने एक किसान को नीचा दिखाने की कोशिश की । लेकिन किसान ने भी बता दिया कि किसी को कम आंकना बेवकूफी है। सोशल मीडिया पर इस वाकए का एक वीडियो वायरल है। वाकया कुछ यूं है कि चिक्कासांद्रा हुबली में रामनपाल्या का केम्पेगौड़ा आरएल नाम का एक किसान एक गाड़ी खरीदने के लिए अपने दोस्तों के साथ तुमकुर में महिन्द्रा कंपनी के शोरूम पहुंचा। लेकिन एक सेल्समैन ने उसके कपड़ों से उसकी हैसियत आंकने की गलती कर दी। सेल्समैन ने कह दिया 'दस लाख रुपये तो दूर, तुम्हारी जेब में दस रुपयापये भी नहीं होंगे। ' इसके बाद शोरूम छोड़ने से पहले किसान और उसके दोस्तों ने कहा कि अगर वे कैश ले आते हैं तो क्या डिलीवरी आज ही हो जाएगी। इस पर शोरूम एग्जीक्यूटिव राजी हो गए और किसान ने तीस मिनट के अंदर दस लाख रुपये का बंदोबस्त कर लिया। दस लाख रुपये कैश लेकर अपनी ड्रीम कार खरीदने लौटा। क्या करते हैं केंपेगौड़ा केंपेगौड़ा वैसे तो सुपारी की खेती करते हैं। लेकिन वह जैस्मिन और क्रॉसेंड्रा भी उगाते हैं। बता दें कि दुनिया में सुपारी का सबसे ज्यादा प्रॉडक्शन भारत में ही होता है। इतना ही नहीं भारत में इसकी खपत भी सबसे ज्यादा है। भारत में सुपारी उत्पादन में चालीस फीसदी से ज्यादा योगदान कर्नाटक का है। इसके बाद केरल का पच्चीस फीसदी, असम का बीस फीसदी योगदान है। इसके बाद तमिलनाडु, मेघालय और पश्चिम बंगाल आते हैं। शोरूमकर्मी से लिखित में माफी की मांग शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद उसी दिन कार की डिलीवरी नहीं हो सकी। शनिवार और रविवार को सरकारी अवकाश होने के कारण कर्मचारियों ने बेबसी जाहिर की। इससे केम्पेगौड़ा और उसके दोस्त नाराज हो गए। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस को बुलाया। किसानों ने शोरूम घेर लिया और वहां से हटने को राजी नहीं थे। पुलिसवालों ने उन्हें घर जाने के लिए राजी किया। केम्पेगौड़ा का कहना था, 'मैंने सेल्स एक्जीक्यूटिव और शोरूम अधिकारियों से कहा है कि वह मुझसे और मेरे दोस्तों को अपमानित करने के लिए लिखित में माफी मांगे। . . . अब, मुझे गाड़ी नहीं चाहिए। '
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RANCHI: रिम्स में डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक दर्जन डॉक्टरों को रंगे हाथ प्रैक्टिस करते पकड़े जाने पर हेल्थ डिपार्टमेंट ने कार्रवाई को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके बाद रिम्स में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर रेस हो गए हैं। वहीं एक दर्जन डॉक्टरों ने वीआरएस देने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को रिम्स में हुई बैठक में इस पर डॉक्टरों ने सहमति दे दी है। इतना ही नहीं, वीआरएस का फार्मेट भी रेडी है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो एक-दो दिनों में रिम्स के 12 सीनियर डॉक्टर वीआरएस दे देंगे। बताते चलें कि पहले भी रिम्स के चार डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन दिया था।
रिम्स में ड्यूटी करने वाले दर्जनों डॉक्टर सरकार से एनपीए लेते रहे और प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते रहे। जिससे कि उन डॉक्टरों ने बंपर कमाई कर ली। लेकिन अब ऐसे डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने इंस्पेक्शन के बाद सोमवार को अपनी रिपोर्ट हेल्थ सेक्रेटरी को सौंप दी। वहीं डॉक्टरों पर एक्शन लेने की अनुशंसा कर दी गई है। इतना ही नहीं, टीम ने इसे वित्तीय अनियमितता व गबन का मामला बताया है। जांच के दौरान मेंबर्स ने उनका ऑडियो और वीडियो क्लिप भी बना कर रिपोर्ट में अटैच कर दिया है।
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RANCHI: रिम्स में डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक दर्जन डॉक्टरों को रंगे हाथ प्रैक्टिस करते पकड़े जाने पर हेल्थ डिपार्टमेंट ने कार्रवाई को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके बाद रिम्स में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर रेस हो गए हैं। वहीं एक दर्जन डॉक्टरों ने वीआरएस देने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को रिम्स में हुई बैठक में इस पर डॉक्टरों ने सहमति दे दी है। इतना ही नहीं, वीआरएस का फार्मेट भी रेडी है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो एक-दो दिनों में रिम्स के बारह सीनियर डॉक्टर वीआरएस दे देंगे। बताते चलें कि पहले भी रिम्स के चार डॉक्टरों ने वीआरएस के लिए आवेदन दिया था। रिम्स में ड्यूटी करने वाले दर्जनों डॉक्टर सरकार से एनपीए लेते रहे और प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते रहे। जिससे कि उन डॉक्टरों ने बंपर कमाई कर ली। लेकिन अब ऐसे डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने इंस्पेक्शन के बाद सोमवार को अपनी रिपोर्ट हेल्थ सेक्रेटरी को सौंप दी। वहीं डॉक्टरों पर एक्शन लेने की अनुशंसा कर दी गई है। इतना ही नहीं, टीम ने इसे वित्तीय अनियमितता व गबन का मामला बताया है। जांच के दौरान मेंबर्स ने उनका ऑडियो और वीडियो क्लिप भी बना कर रिपोर्ट में अटैच कर दिया है।
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मापने की सफलता मुश्किल है, क्योंकि इसका मतलब प्रत्येक व्यक्ति के लिए कुछ अलग हो सकता है। एक बास्केटबाल भावना में, सफलता को सबसे अच्छा खिलाड़ी होने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसका मतलब जूनियर हाई स्कूल टीम पर खेलना, हाईस्कूल टीम में खेलना, कॉलेज बॉल खेलना, पेशेवर खेलना है। या बस ग्रीष्मकालीन लीग में एक अच्छा खिलाड़ी होने के नाते। प्रत्येक व्यक्ति को कितना सुधार करना है।
सबसे पहले, खेल के लिए एक जुनून जरूरी है। क्यूं कर? चूंकि बास्केटबॉल एक बेहद जटिल और शामिल गेम है जो काम करने के लिए घंटों तक काम करता है। खेल में वास्तव में सफल होने के लिए आपको बस "शूट करें" से ज्यादा कुछ करना है। उचित काम करने के लिए खेल का प्यार जरूरी है। बास्केट बॉल, जो इसे गंभीरता से लेते हैं, एक वर्षभर खेल है।
जितना हो सके उतना खेलें; कहीं भी और जब भी आप कर सकते हैं। बास्केट बॉल एक महान खेल है। मज़े करो। अपने आस-पास के खिलाड़ियों से सीखें। देखो वे क्या करते हैं। अभ्यास करने और अपने विरोधियों के जितना अच्छा बनने के लिए आप क्या कर सकते हैं? क्या अन्य खिलाड़ियों के पास कदम है जो आपके लिए प्रभावी होंगे? सभी महान खिलाड़ी दूसरों से सीखते हैं।
साथ ही, जागरूक रहें कि आप क्या करते हैं। उन चीजों का अक्सर अभ्यास करें। आपके पास एक ताकत लें और इसे और भी मजबूत बनाएं। यदि आप एक उचित शूटर हैं , तो अधिक शूट करें और एक अच्छा शूटर बनें। यदि आप एक अच्छे शूटर हैं, तो और भी शूट करें और एक महान शूटर बनें।
जितनी चीजें आप कर सकते हैं उतनी ही खेलें और उन चीजों पर सुधार करें जो आप सबसे अच्छा करते हैं, जबकि उन चीजों पर भी काम करते हैं जो आप काफी कुछ नहीं कर सकते हैं।
जानें कि आपको किसमें सुधार करने की आवश्यकता है। उन कौशल में सक्षम बनने का अभ्यास करें जो आप कमज़ोर हैं। एक अच्छा, चारों ओर खेल के विकास पर काम करें।
शिविर, लीग, क्लीनिक, इंट्रामरल, और कई अन्य जगहें आप खेल सकते हैं।
ये सभी अवसरों के रूप में कार्य करते हैं। इन प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल हों और मज़े करें, और हमेशा सीखने का प्रयास करें। उन लोगों को सुनो जो सफल होते हैं और पता लगाते हैं कि उन्हें क्या सफल बना दिया गया। उन व्यवहारों को मॉडल करने का प्रयास करें।
जितना अधिक आप अभ्यास करेंगे उतना ही बेहतर आप खेलेंगे। जब आप अभ्यास करते हैं, एक उद्देश्य के साथ अभ्यास करें। गेम को उस कौशल में विभाजित करें जिसमें आपको सुधार करने की आवश्यकता है और जिस कौशल पर आप अच्छे हैं। जैसा कि मैंने कहा, वास्तव में उन कौशल को बनाने में अपनी कमजोरियों और काम को सुधारने पर काम करें जो आप मजबूत हैं।
एक अभ्यास कार्यक्रम बनाओ और इसका पालन करें। प्रत्येक ड्रिल का समय और शेड्यूल पर रहें। प्रत्येक अभ्यास सत्र के लिए लक्ष्य रखें और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करें। एक दोस्त के साथ काम करें ताकि आप एक दूसरे की मदद कर सकें और एक दूसरे को मजबूती दे सकें।
बास्केटबाल में सीखा जाने वाली आदतें जीवन के सभी पहलुओं में अनुवाद कर सकती हैं। एक खिलाड़ी के रूप में विकसित होने वाली कार्य आदतों से आपको बेहतर छात्र, बेहतर कार्यकर्ता, बेहतर टीममेट और बेहतर समग्र व्यक्ति बनने में भी मदद मिलेगी।
एक बेहतर खिलाड़ी बनने के लिए क्या लगता है?
• और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेल से प्यार करें! जुनून महानता बनाता है।
यहां काम करने के लिए कुछ सामान्य बास्केटबॉल कौशल दिए गए हैंः
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मापने की सफलता मुश्किल है, क्योंकि इसका मतलब प्रत्येक व्यक्ति के लिए कुछ अलग हो सकता है। एक बास्केटबाल भावना में, सफलता को सबसे अच्छा खिलाड़ी होने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसका मतलब जूनियर हाई स्कूल टीम पर खेलना, हाईस्कूल टीम में खेलना, कॉलेज बॉल खेलना, पेशेवर खेलना है। या बस ग्रीष्मकालीन लीग में एक अच्छा खिलाड़ी होने के नाते। प्रत्येक व्यक्ति को कितना सुधार करना है। सबसे पहले, खेल के लिए एक जुनून जरूरी है। क्यूं कर? चूंकि बास्केटबॉल एक बेहद जटिल और शामिल गेम है जो काम करने के लिए घंटों तक काम करता है। खेल में वास्तव में सफल होने के लिए आपको बस "शूट करें" से ज्यादा कुछ करना है। उचित काम करने के लिए खेल का प्यार जरूरी है। बास्केट बॉल, जो इसे गंभीरता से लेते हैं, एक वर्षभर खेल है। जितना हो सके उतना खेलें; कहीं भी और जब भी आप कर सकते हैं। बास्केट बॉल एक महान खेल है। मज़े करो। अपने आस-पास के खिलाड़ियों से सीखें। देखो वे क्या करते हैं। अभ्यास करने और अपने विरोधियों के जितना अच्छा बनने के लिए आप क्या कर सकते हैं? क्या अन्य खिलाड़ियों के पास कदम है जो आपके लिए प्रभावी होंगे? सभी महान खिलाड़ी दूसरों से सीखते हैं। साथ ही, जागरूक रहें कि आप क्या करते हैं। उन चीजों का अक्सर अभ्यास करें। आपके पास एक ताकत लें और इसे और भी मजबूत बनाएं। यदि आप एक उचित शूटर हैं , तो अधिक शूट करें और एक अच्छा शूटर बनें। यदि आप एक अच्छे शूटर हैं, तो और भी शूट करें और एक महान शूटर बनें। जितनी चीजें आप कर सकते हैं उतनी ही खेलें और उन चीजों पर सुधार करें जो आप सबसे अच्छा करते हैं, जबकि उन चीजों पर भी काम करते हैं जो आप काफी कुछ नहीं कर सकते हैं। जानें कि आपको किसमें सुधार करने की आवश्यकता है। उन कौशल में सक्षम बनने का अभ्यास करें जो आप कमज़ोर हैं। एक अच्छा, चारों ओर खेल के विकास पर काम करें। शिविर, लीग, क्लीनिक, इंट्रामरल, और कई अन्य जगहें आप खेल सकते हैं। ये सभी अवसरों के रूप में कार्य करते हैं। इन प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल हों और मज़े करें, और हमेशा सीखने का प्रयास करें। उन लोगों को सुनो जो सफल होते हैं और पता लगाते हैं कि उन्हें क्या सफल बना दिया गया। उन व्यवहारों को मॉडल करने का प्रयास करें। जितना अधिक आप अभ्यास करेंगे उतना ही बेहतर आप खेलेंगे। जब आप अभ्यास करते हैं, एक उद्देश्य के साथ अभ्यास करें। गेम को उस कौशल में विभाजित करें जिसमें आपको सुधार करने की आवश्यकता है और जिस कौशल पर आप अच्छे हैं। जैसा कि मैंने कहा, वास्तव में उन कौशल को बनाने में अपनी कमजोरियों और काम को सुधारने पर काम करें जो आप मजबूत हैं। एक अभ्यास कार्यक्रम बनाओ और इसका पालन करें। प्रत्येक ड्रिल का समय और शेड्यूल पर रहें। प्रत्येक अभ्यास सत्र के लिए लक्ष्य रखें और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करें। एक दोस्त के साथ काम करें ताकि आप एक दूसरे की मदद कर सकें और एक दूसरे को मजबूती दे सकें। बास्केटबाल में सीखा जाने वाली आदतें जीवन के सभी पहलुओं में अनुवाद कर सकती हैं। एक खिलाड़ी के रूप में विकसित होने वाली कार्य आदतों से आपको बेहतर छात्र, बेहतर कार्यकर्ता, बेहतर टीममेट और बेहतर समग्र व्यक्ति बनने में भी मदद मिलेगी। एक बेहतर खिलाड़ी बनने के लिए क्या लगता है? • और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेल से प्यार करें! जुनून महानता बनाता है। यहां काम करने के लिए कुछ सामान्य बास्केटबॉल कौशल दिए गए हैंः
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देहरादून, 14 दिसंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को एलईडी लाईट निर्माण में लगे सभी महिला स्वयं सहायता समूहों को 50-50 हजार रुपये का सतत कोष देने की घोषणा की ।
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वरोजगार से जुड़कर महिलाओं का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। उनका यह सफर अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक है ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धि केंद्र स्वरोजगार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और परिधान (रेडीमेड गारमेंट) के क्षेत्र में भी इनकी अपार सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल ड्रेस, डॉक्टर्स-नर्स आदि के लिए ड्रेस तैयार करने पर भी फोकस किया जाना चाहिए।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल ने जिलाधिकारी स्तर पर पांच लाख तक की खरीद में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार, उत्तराखण्ड में मंदिरों के कपाट खुलने व बंद होने, व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में सजावटी कार्यों के लिए स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस अवसर पर रावत ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत उत्तरकाशी के 11 उद्यमियों को 'परियोजना आवंटन पत्र' वितरित किए तथा एलईडी ग्राम लाईट योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऊर्जा योद्धा (एनर्जी वॉरियर्स) के रूप में सम्मानित किया।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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देहरादून, चौदह दिसंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को एलईडी लाईट निर्माण में लगे सभी महिला स्वयं सहायता समूहों को पचास-पचास हजार रुपये का सतत कोष देने की घोषणा की । राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की । मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वरोजगार से जुड़कर महिलाओं का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है। उनका यह सफर अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक है । मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धि केंद्र स्वरोजगार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और परिधान के क्षेत्र में भी इनकी अपार सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल ड्रेस, डॉक्टर्स-नर्स आदि के लिए ड्रेस तैयार करने पर भी फोकस किया जाना चाहिए। यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल ने जिलाधिकारी स्तर पर पांच लाख तक की खरीद में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार, उत्तराखण्ड में मंदिरों के कपाट खुलने व बंद होने, व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में सजावटी कार्यों के लिए स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस अवसर पर रावत ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत उत्तरकाशी के ग्यारह उद्यमियों को 'परियोजना आवंटन पत्र' वितरित किए तथा एलईडी ग्राम लाईट योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऊर्जा योद्धा के रूप में सम्मानित किया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पटनाः इस साल के मॉनसून ने पटना के लोगों को फिर से 2019 की बाढ़ याद दिला दी। हालांकि हालात फिलहाल काबू में हैं लेकिन शुक्रवार से हो रही बरसात ने शहर के इलाकों को पानी-पानी कर दिया। बिहार विधानसभा के इस वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि मेन गेट से लेकर अंदर तक जलजमाव है। बात अगर शहर के बाकी हिस्सों की करें तो पाटलिपुत्र कॉलोनी, पाटलिपुत्रा गोलम्बर, बोरिंग रोड, नागेश्वर कॉलोनी तक में जलजमाव है। मुख्य सड़कों के साथ साथ गलियों में घुटनों तक पानी भर गया है। जाहिर है कि एक बार फिर से बरसात नगर निगम के दावों की धज्जियां उड़ा गई है।
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पटनाः इस साल के मॉनसून ने पटना के लोगों को फिर से दो हज़ार उन्नीस की बाढ़ याद दिला दी। हालांकि हालात फिलहाल काबू में हैं लेकिन शुक्रवार से हो रही बरसात ने शहर के इलाकों को पानी-पानी कर दिया। बिहार विधानसभा के इस वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि मेन गेट से लेकर अंदर तक जलजमाव है। बात अगर शहर के बाकी हिस्सों की करें तो पाटलिपुत्र कॉलोनी, पाटलिपुत्रा गोलम्बर, बोरिंग रोड, नागेश्वर कॉलोनी तक में जलजमाव है। मुख्य सड़कों के साथ साथ गलियों में घुटनों तक पानी भर गया है। जाहिर है कि एक बार फिर से बरसात नगर निगम के दावों की धज्जियां उड़ा गई है।
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भोपाल. भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1 के पास एक जिम ट्रेनर ने पुलिसकर्मी की पत्नी से सरेराह छेड़छाड़ कर दी। आरोपी ने विरोध करने पर महिला के छोटे भाई को भी जमकर पीटा। उसने महिला को धमकाते हुए पांच हजार रुपए महीने में नहीं देने पर महिला को उसके निजी फोटो वायरल करने की धमकी दी। आरोपी वारदात के बाद से ही फरार है।
भोपाल निवासी 30 वर्षीय महिला गृहिणी हैं। बजरिया पुलिस के अनुसार महिला के पति पुलिस विभाग में है। एसआई बजरिया निगार खान ने बताया कि महिला गुरुवार दोपहर अपने छोटे भाई के साथ भोपाल रेलवे स्टेशन आई थी। भाई सिकंदरिया सराय में प्राइवेट काउंटर से गंजबासौदा का टिकट लेने चला गया। इसी बीच महिला के पति का परिचित अमित गुर्जर उसके पास आया। वह महिला को पकड़कर जबरन अपने साथ कोने में ले गया, जहां उसने उससे छेड़छाड़ करते हुए मारपीट कर दी।
अमित ने अड़ीबाजी करते हुए कि उसके पास महिला के कुछ निजी फोटो हैं। अगर उसने पांच हजार अभी और फिर महीने में देना शुरू नहीं किया तो वह उसके फोटो वायरल कर देगा। इस बीच महिला का छोटा भाई उसे खोजते हुए वहां पहुंच गया। विरोध करने पर अमित ने उससे भी मारपीट की। एसआई निगार खान के अनुसार आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अड़ीबाजी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। वह एक जिम में ट्रेनर बताया जाता है। उसकी तलाश कर रहे हैं।
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भोपाल. भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-एक के पास एक जिम ट्रेनर ने पुलिसकर्मी की पत्नी से सरेराह छेड़छाड़ कर दी। आरोपी ने विरोध करने पर महिला के छोटे भाई को भी जमकर पीटा। उसने महिला को धमकाते हुए पांच हजार रुपए महीने में नहीं देने पर महिला को उसके निजी फोटो वायरल करने की धमकी दी। आरोपी वारदात के बाद से ही फरार है। भोपाल निवासी तीस वर्षीय महिला गृहिणी हैं। बजरिया पुलिस के अनुसार महिला के पति पुलिस विभाग में है। एसआई बजरिया निगार खान ने बताया कि महिला गुरुवार दोपहर अपने छोटे भाई के साथ भोपाल रेलवे स्टेशन आई थी। भाई सिकंदरिया सराय में प्राइवेट काउंटर से गंजबासौदा का टिकट लेने चला गया। इसी बीच महिला के पति का परिचित अमित गुर्जर उसके पास आया। वह महिला को पकड़कर जबरन अपने साथ कोने में ले गया, जहां उसने उससे छेड़छाड़ करते हुए मारपीट कर दी। अमित ने अड़ीबाजी करते हुए कि उसके पास महिला के कुछ निजी फोटो हैं। अगर उसने पांच हजार अभी और फिर महीने में देना शुरू नहीं किया तो वह उसके फोटो वायरल कर देगा। इस बीच महिला का छोटा भाई उसे खोजते हुए वहां पहुंच गया। विरोध करने पर अमित ने उससे भी मारपीट की। एसआई निगार खान के अनुसार आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अड़ीबाजी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। वह एक जिम में ट्रेनर बताया जाता है। उसकी तलाश कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान आज एक दिवसीय दौरे पर हरिद्वार पहुंचे हैं। सुबह वे देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनसे शिष्टाचार भेंट की।
वहीं, शांतिकुंज की स्वर्ण जयंती वर्ष व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण, राष्ट्र का नव निर्माण सही दिशा में करना होगा।
यहां वे राष्ट्रीय संगोष्ठी 'वैश्विक चुनौतियों का सनातन, समाधान-एकात्म बोध' में भाग लेंगे। इस दौरान उनके साथ योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहेंगे ।
एक सवाल के जवाब में सीएम धामी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड को भंग किए जाने का फैसला जनता के सुझावों और उनकी अपील से किया गया है।
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मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान आज एक दिवसीय दौरे पर हरिद्वार पहुंचे हैं। सुबह वे देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनसे शिष्टाचार भेंट की। वहीं, शांतिकुंज की स्वर्ण जयंती वर्ष व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण, राष्ट्र का नव निर्माण सही दिशा में करना होगा। यहां वे राष्ट्रीय संगोष्ठी 'वैश्विक चुनौतियों का सनातन, समाधान-एकात्म बोध' में भाग लेंगे। इस दौरान उनके साथ योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहेंगे । एक सवाल के जवाब में सीएम धामी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड को भंग किए जाने का फैसला जनता के सुझावों और उनकी अपील से किया गया है।
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साथ उतरेंगे.
गया.
उसने सिरीज़ में वापसी की.
स्पिन खेलने में दिग्गज माने जाने वाली भारतीय बैटिंग लाइनअप की धज्जियां उड़ा दीं.
ख़त्म हो गया.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि अवैध प्रवासियों को ब्रिटेन पहुंचने से रोकना सरकार की पहली प्राथमिकता है. ब्रितानी संसद में बुधवार को अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर चर्चा हुई.
ब्रिटेन ने मंगलवार को एक नए क़ानून का प्रस्ताव पेश किया है जिसके अनुसार अवैध तरीक़े से ब्रिटेन आने वालों के यहां एक तरह से शरण पर रोक लग जाएगी.
इस क़ानून के तहत ऐसे लोग जो अवैध रास्तों से ब्रिटेन आए हैं वो भविष्य में कभी ब्रिटेन नहीं आ सकेंगे और ब्रितानी नागरिकता के लिए आवेदन भी नहीं कर सकेंगे.
इस क़ानून के तहत जिन लोगों को एक बार यूके से बाहर डिपोर्ट किया जाएगा वो फिर से यूके नहीं जा पाएंगे और न ही यूके की नागरिकता के लिए आवेदन कर पाएंगे. अवैध रास्तों से यूके आने वालों को हिरासत में लिया जाएगा और हिरासत के पहले 28 दिन उन्हें न तो जमानत मिलेगी और न ही वो न्यायिक जांच की मांग कर सकेंगे.
ब्रिटेन की संसद सालाना तौर पर ये तय करेगी कि कितने लोगों को देश में शरणार्थी के तौर पर पनाह दी दाए. बशर्ते ये शरणार्थी सुरक्षित और वैध रास्तों से आए हों.
इस क़ानून के तहत गृह मंत्री को अधिकार होगा कि देश में अवैध तरीकों से प्रवेश करने वाले को वो हिरासत में लें, उन्हें रवांडा या फिर किसी और देश में डिपोर्ट करें. शरण का आवेदन करने की दलील क़ानून के आड़े नहीं आएगी.
सरकार के मुताबिक 18 साल से कम आयु के लोगों, मेडिकली अनफिट लोग या देश को नुक़सान पहुंचाने की आशंका वालों को डिपोर्ट करने में देरी हो सकती है. डिपोर्ट करने के बाद आपके शरण के आवेदन पर विचार होगा.
ब्रिटेन में अवैध तरीक़े से आने वाले लोगों की तादाद में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. 2018 में इस रास्ते यूके आने वालों की संख्या 300 के आसपास थी. वहीं, ये आंकड़ा 2022 में बढ़ कर 45 हज़ार हो गया था.
ब्रिटेन अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या से चिंतित है. ब्रिटेन और फ्रांस के बीच इंगलिश चैनल है जो क़रीब 40-50 मील चौड़ा है.
दुनिया के विभिन्न देशों से प्रवासी अलग-अलग रास्ते अपनाते हुए पहले फ्रांस पहुंचते हैं और फिर इंगलिश चैनल के रास्ते नावों के ज़रिए ब्रिटेन पहुंचते हैं.
ब्रिटेन की गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने इस बारे में बताया है कि इस रास्ते आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या 500 फ़ीसदी तक बढ़ी है. सुएला ने कहा है कि प्रवासी तब तक यहां आना बंद नहीं करेंगे जब तक ब्रिटेन ये स्पष्ट नहीं करेगा कि अवैध तरीके से ब्रिटेन आने पर तुरंत हिरासत में लिया जाएगा और वापस भेज दिया जाएगा.
लेकिन इस प्रस्तावित क़ानून को लेकर ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी ने कहा है कि सरकार ने इस मुद्दे को अराजक बना दिया गया.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने भी इस नए प्रस्तावित क़ानून पर पर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने कहा है कि ये ब्रिटेन के मानवाधिकार के सम्मान करने वाली परंपरा को तोड़ना तो होगा ही साथ ही संयुक्त राष्ट्र की रीफ्यूजी कन्वेन्शन की भी अवमानना होगी.
थाईलैंड में एक व्यक्ति को राजशाही पर अशोभनीय टिप्पणी के आरोप में दो साल की सज़ा दी गई है.
ये व्यक्ति कैलेंडर बेच रहा था जिस पर शाही पोशाक़ पहने बतख़ की तस्वीर थी.
अभियोजकों का कहना है कि इस व्यक्ति ने देश के शाही परिवार का अपमान किया है.
26 वर्षीय नाराथॉर्न चोटमानकोंगसिन को थाईलैंड के राजा का अपमान करने का दोषी पाया गया है.
साल 2020 के बाद से थाईलैंड में 200 लोगों को ले मेजेस्टेस (राजशाही के सम्मान से जुड़े क़ानून) के तहत गिरफ़्तार किया गया है.
थाईलैंड में रबड़ की बनी बतख की आकृति लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों का प्रतीक है.
थाईलैंड में कार्यकर्ता लोकतंत्र की मांग करने वाले प्रदर्शनों के दौरान इस प्रतीक का इस्तेमाल करते रहे हैं.
नाराथॉर्न साल 2020 में लोकतंत्र समर्थक फ़ेसबुक पेज पर ये कैलेंडर बेच रहे थे. उन्हें दिसंबर 2020 में गिरफ़्तार कर लिया गया था.
इस कैलेंडर पर विवादित टिप्पणी भी थी.
मंगलवार को थाईलैंड की एक अदालत ने उन्हें दोषी पाते हुए तीन साल की सज़ा दी थी. बाद में इसे बदलकर दो साल कर दिया गया.
बिहार पुलिस ने तमिलनाडु में मज़दूरों के साथ मारपीट के 'फ़ेक वीडियो' का संज्ञान लेते हुए एक और यूट्यूबर पर केस दर्ज किया है.
बिहार पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि प्रसारित किए गए वीडियो की जांच की गई तो इसे 'फ़ेक' पाया गया.
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है.
बिहार पुलिस ने ऐसे 30 वीडियो की पहचान की हैं जो भ्रामक हैं. पुलिस ने एफ़आईआर में आईटी एक्ट की धाराओं को भी शामिल किया है.
पुलिस के मुताबिक जांच के बाद चार लोगों को अभियुक्त बनाया गया. इनमें जमुई ज़िले के अमन कुमार, प्रयास न्यूज़ के राकेश तिवारी और ट्विटर यूज़र युवराज सिंह राजपूत शामिल हैं.
पुलिस ने यूट्यूबर मनीष कश्यप को भी अभियुक्त बनाया है. मनीष पर आरोप है कि उन्होंने फ़र्ज़ी वीडियो प्रसारित किए.
सुशील कुमार के मुताबिक, नोटिस जारी करके मनीष कश्यप को पुलिस के समक्ष अपने आप को पेश करने और स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था लेकिन वो हाज़िर नहीं हुए.
अमन कुमार नाम के युवक को इस संबंध में पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पुलिस का कहना है कि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी मनीष कश्यप भड़काऊ वीडियो पोस्ट कर रहे हैं.
हाल के दिनों में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच हिंसा बढ़ गई है.
26 फ़रवरी को हवारा गांव में दो यहूदी भाइयों की हत्या के बाद गांव पर इसराइली लोगों ने हमला किया था.
इस दौरान सैकड़ों घरों और गाड़ियों को आग लगा दी गई थी. इस हमले में क़रीब चार सौ फ़लस्तीनी घायल हुए थे.
जॉर्जिया में एक विवादित विधेयक को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं.
बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारियों ने राजधानी तिब्लिसी में प्रदर्शन किया है.
जॉर्जिया की संसद ने एक विवादित क़ानून पास किया है. आलोचकों का कहना है कि ये क़ानून प्रेस और नागरिक समाज के अधिकारों को सीमित कर देगा.
संसद के बाहर से प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.
कई प्रदर्शनकारी इस दौरान ज़मीन पर गिर गए. प्रदर्शनकारी जॉर्जिया और यूरोपीय संघ का झंडा फ़हरा रहे थे.
पुलिस ने इस दौरान 66 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है जिनमें विपक्ष के नेता ज़ुराब जापारिद्ज़े भी शामिल हैं.
जॉर्जिया की संसद में पारित हुए इस नए विधेयक की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हो रही है.
इस विधेयक के तहत जॉर्जिया में काम कर रहे विदेशी मीडिया संस्थानों और ग़ैर सरकारी संगठनों को विदेश से बीस प्रतिशत से अधिक फंड लेने पर अपने आप को 'विदेशी एजेंट' घोषित करना पड़ेगा.
ऐसा ना करने पर भारी ज़ुर्माने और जेल तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है.
विरोधियों का कहना है कि ये क़ानून जॉर्जिया को रूस की तरह अधिनायकवाद की तरफ़ ले जाएगा और इससे जॉर्जिया के यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने में भी दिक्कतें आएंगी.
जैसा पहले मनाया करते थे.
हैं.
के' की शूटिंग के दौरान हैदराबाद में घायल हो गए थे.
लेने पर निराश जताई.
पार्टियों को याद किया और लिखे कि समय कभी लौटकर नहीं आता.
करने की सलाह दी है. इसी अस्पताल में अमिताभ का सीटी स्कैन हुआ था.
उसका पूरी तरह और तत्परापूर्वक पालन किया जा रहा है. "
होंगे. "
दिनभरः स्टॉप द बोट्सः सुनक की मुहिम क्या होगी कामयाब?
रोकने के लिए ब्रितानी सरकार ने दिया नए क़ानून का प्रस्ताव. .
संगठनों ने कहा ये शरण मागने वालों को सज़ा देने के समान. .
कर ब्रिटेन बन सकता है दूसरों के लिए उदाहरण ?
अल्बनीज़ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मिलेंगे और फिर पीएम मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात करेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी के साथ वे भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों पर बैठक भी करेंगे.
दोनों नेताओं के बीच आपसी, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होगी.
पीएम अल्बनीज़ के साथ ऑस्ट्रेलिया मंत्रियों और कारोबारियों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है.
माना जा रहा है कि इस दौरे पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ग्रीन एनर्जी को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है.
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने कहा है कि उनके देश में शरण लेने वाले रोहिंग्याओं के वापस लौटने के मुद्दे पर म्यांमार की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिला है.
क़तर दौरे पर अल-जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में शेख़ हसीना ने कहा कि बांग्लादेश ने म्यांमार में उत्पीड़न, हत्या और बलात्कार के पीड़ित रोहिंग्याओं को मानवीय आधार पर शरण दी.
हाल ही में कॉक्स बाज़ार में लगी भीषण आग से जुड़े सवाल पर शेख़ हसीना ने इंटरव्यू में कहा, "जब म्यांमार में रोहिंग्याओं का उत्पीड़न हुआ तब उनके साथ हत्या, बलात्कार जैसे मामले सामने आए. . . हमें रोहिंग्याओं के लिए बुरा लगा. . . इसके बाद हमने अपनी सीमाएं खोली. . . हमने उन्हें आने दिया. इसके अलावा हमने उन्हें रहने की जगह दी, सबकुछ मानवीय आधार पर किया. "
उन्होंने कहा, "हमने म्यांमार के साथ बातचीत शुरू की. हमने उनसे कहा कि रोहिंग्या आपने देश के नागरिक हैं और उन्हें वापस अपने देश जाने दिया जाना चाहिए. दुर्भाग्य से वो (म्यांमार) सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहे. मुझे लगता है कि इन लोगों को अपने घर और देश वापस जाना चाहिए. "
कॉक्स बाज़ार में रहने वाले रोहिंग्याओं की स्थिति पर शेख़ हसीना ने कहा कि वहां की स्थितियां कुछ ख़ास नहीं है.
शेख़ हसीना ने कहा, "रोहिंग्या अब ख़ुद एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. वो ड्रग्स, हथियार और मानव तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. इसके साथ ही उन लोगों के आपस में भी बहुत विवाद हैं. "
समेत नकदी और कई अन्य कीमती समान चुरा लिए हैं.
इक़बाल की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है.
दीवार फांद कर घुसे. तब यह घर बंद था और परिवार के सदस्य इस्लामाबाद में थे.
दर्ज करवाया किया चोर घर से विदेशी मुद्रा और अन्य कीमती सामान भी ले गए.
सीसीटीवी फ़ुटेज मौजूद है.
पाकिस्तान के लाहौर में धारा 144 लगाए जाने के बावजूद इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ता इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे हैं.
पुलिस ने सख़्त बैरीकेडिंग की है और कई जगह कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया है.
रिपोर्टों के मुताबिक कई जगह पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थरबाज़ी भी की है.
इमरान ख़ान की प्रस्तावित बैठक के मद्देनज़र पंजाब प्रांत की पुलिस ने लाहौर में पहले से ही धारा 144 लगा दी थी. इसी के साथ जुलूसों और रैलियों पर भी रोक लगा दी थी.
धारा 144 का उल्लंघन करने पर पुलिस इमरान ख़ान की पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी ले रही है.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लाहौर पुलिस ने ज़मान पार्क की तरफ़ जाने वाली सड़क को बंद कर दिया है और कनाल रोड पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है.
उत्तेजित कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का इस्तेमाल भी करना पड़ रहा है. इमरान ख़ान ने आज लाहौर में रैली निकालने का एलान किया था.
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि जेल में बंद मनीष सिसोदिया को खूंख़ार अपराधियों के बीच रखा गया है और उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि उन्हें आशंका है कि जेल में मनीष सिसोदिया को नुक़सान पहुंचाया जा सकता है.
वहीं तिहाड़ जेल प्रशासन ने एक बयान जारी कर आम आदमी पार्टी के आरोपों को ख़ारिज किया है.
संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार देश के मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है बल्कि सिर्फ़ विपक्ष को निशाना बनाने का काम कर रही है.
संजय सिंह ने कहा, "गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों के पास सीबीआई को भेजा जा रहा है. लालू यादव जी से सीबीआई से पूछताछ कर रही है. लेकिन भाजपा के विधायक के घर आठ करोड़ रुपये मिले, वहां न सीबीआई गई और ना ही ईडी गई. "
संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को अगले संसद सत्र में ऐसा क़ानून लाना चाहिए जो ईडी और सीबीआई को मुर्दों से भी पूछताछ करने का अधिकार दे.
मनीष सिसोदिया पर ख़तरे की आशंका ज़ाहिर करते हुए संजय सिंह ने कहा, "जानकारी मिली है कि मनीष सिसौदिया को देश के सबसे खूंखार अपराधियों के सेल में रखा गया है. इसमें जेल प्रशासन के लोगों को हम आगाह करना चाहता है कि भाजपा के हथकंडे में न फंसों, कोई घटना हो गई तो जवाब तुम्हें भी देना पड़ेगा. "
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साथ उतरेंगे. गया. उसने सिरीज़ में वापसी की. स्पिन खेलने में दिग्गज माने जाने वाली भारतीय बैटिंग लाइनअप की धज्जियां उड़ा दीं. ख़त्म हो गया. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि अवैध प्रवासियों को ब्रिटेन पहुंचने से रोकना सरकार की पहली प्राथमिकता है. ब्रितानी संसद में बुधवार को अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर चर्चा हुई. ब्रिटेन ने मंगलवार को एक नए क़ानून का प्रस्ताव पेश किया है जिसके अनुसार अवैध तरीक़े से ब्रिटेन आने वालों के यहां एक तरह से शरण पर रोक लग जाएगी. इस क़ानून के तहत ऐसे लोग जो अवैध रास्तों से ब्रिटेन आए हैं वो भविष्य में कभी ब्रिटेन नहीं आ सकेंगे और ब्रितानी नागरिकता के लिए आवेदन भी नहीं कर सकेंगे. इस क़ानून के तहत जिन लोगों को एक बार यूके से बाहर डिपोर्ट किया जाएगा वो फिर से यूके नहीं जा पाएंगे और न ही यूके की नागरिकता के लिए आवेदन कर पाएंगे. अवैध रास्तों से यूके आने वालों को हिरासत में लिया जाएगा और हिरासत के पहले अट्ठाईस दिन उन्हें न तो जमानत मिलेगी और न ही वो न्यायिक जांच की मांग कर सकेंगे. ब्रिटेन की संसद सालाना तौर पर ये तय करेगी कि कितने लोगों को देश में शरणार्थी के तौर पर पनाह दी दाए. बशर्ते ये शरणार्थी सुरक्षित और वैध रास्तों से आए हों. इस क़ानून के तहत गृह मंत्री को अधिकार होगा कि देश में अवैध तरीकों से प्रवेश करने वाले को वो हिरासत में लें, उन्हें रवांडा या फिर किसी और देश में डिपोर्ट करें. शरण का आवेदन करने की दलील क़ानून के आड़े नहीं आएगी. सरकार के मुताबिक अट्ठारह साल से कम आयु के लोगों, मेडिकली अनफिट लोग या देश को नुक़सान पहुंचाने की आशंका वालों को डिपोर्ट करने में देरी हो सकती है. डिपोर्ट करने के बाद आपके शरण के आवेदन पर विचार होगा. ब्रिटेन में अवैध तरीक़े से आने वाले लोगों की तादाद में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. दो हज़ार अट्ठारह में इस रास्ते यूके आने वालों की संख्या तीन सौ के आसपास थी. वहीं, ये आंकड़ा दो हज़ार बाईस में बढ़ कर पैंतालीस हज़ार हो गया था. ब्रिटेन अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या से चिंतित है. ब्रिटेन और फ्रांस के बीच इंगलिश चैनल है जो क़रीब चालीस-पचास मील चौड़ा है. दुनिया के विभिन्न देशों से प्रवासी अलग-अलग रास्ते अपनाते हुए पहले फ्रांस पहुंचते हैं और फिर इंगलिश चैनल के रास्ते नावों के ज़रिए ब्रिटेन पहुंचते हैं. ब्रिटेन की गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने इस बारे में बताया है कि इस रास्ते आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या पाँच सौ फ़ीसदी तक बढ़ी है. सुएला ने कहा है कि प्रवासी तब तक यहां आना बंद नहीं करेंगे जब तक ब्रिटेन ये स्पष्ट नहीं करेगा कि अवैध तरीके से ब्रिटेन आने पर तुरंत हिरासत में लिया जाएगा और वापस भेज दिया जाएगा. लेकिन इस प्रस्तावित क़ानून को लेकर ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी ने कहा है कि सरकार ने इस मुद्दे को अराजक बना दिया गया. वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने भी इस नए प्रस्तावित क़ानून पर पर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने कहा है कि ये ब्रिटेन के मानवाधिकार के सम्मान करने वाली परंपरा को तोड़ना तो होगा ही साथ ही संयुक्त राष्ट्र की रीफ्यूजी कन्वेन्शन की भी अवमानना होगी. थाईलैंड में एक व्यक्ति को राजशाही पर अशोभनीय टिप्पणी के आरोप में दो साल की सज़ा दी गई है. ये व्यक्ति कैलेंडर बेच रहा था जिस पर शाही पोशाक़ पहने बतख़ की तस्वीर थी. अभियोजकों का कहना है कि इस व्यक्ति ने देश के शाही परिवार का अपमान किया है. छब्बीस वर्षीय नाराथॉर्न चोटमानकोंगसिन को थाईलैंड के राजा का अपमान करने का दोषी पाया गया है. साल दो हज़ार बीस के बाद से थाईलैंड में दो सौ लोगों को ले मेजेस्टेस के तहत गिरफ़्तार किया गया है. थाईलैंड में रबड़ की बनी बतख की आकृति लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों का प्रतीक है. थाईलैंड में कार्यकर्ता लोकतंत्र की मांग करने वाले प्रदर्शनों के दौरान इस प्रतीक का इस्तेमाल करते रहे हैं. नाराथॉर्न साल दो हज़ार बीस में लोकतंत्र समर्थक फ़ेसबुक पेज पर ये कैलेंडर बेच रहे थे. उन्हें दिसंबर दो हज़ार बीस में गिरफ़्तार कर लिया गया था. इस कैलेंडर पर विवादित टिप्पणी भी थी. मंगलवार को थाईलैंड की एक अदालत ने उन्हें दोषी पाते हुए तीन साल की सज़ा दी थी. बाद में इसे बदलकर दो साल कर दिया गया. बिहार पुलिस ने तमिलनाडु में मज़दूरों के साथ मारपीट के 'फ़ेक वीडियो' का संज्ञान लेते हुए एक और यूट्यूबर पर केस दर्ज किया है. बिहार पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि प्रसारित किए गए वीडियो की जांच की गई तो इसे 'फ़ेक' पाया गया. बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है. बिहार पुलिस ने ऐसे तीस वीडियो की पहचान की हैं जो भ्रामक हैं. पुलिस ने एफ़आईआर में आईटी एक्ट की धाराओं को भी शामिल किया है. पुलिस के मुताबिक जांच के बाद चार लोगों को अभियुक्त बनाया गया. इनमें जमुई ज़िले के अमन कुमार, प्रयास न्यूज़ के राकेश तिवारी और ट्विटर यूज़र युवराज सिंह राजपूत शामिल हैं. पुलिस ने यूट्यूबर मनीष कश्यप को भी अभियुक्त बनाया है. मनीष पर आरोप है कि उन्होंने फ़र्ज़ी वीडियो प्रसारित किए. सुशील कुमार के मुताबिक, नोटिस जारी करके मनीष कश्यप को पुलिस के समक्ष अपने आप को पेश करने और स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था लेकिन वो हाज़िर नहीं हुए. अमन कुमार नाम के युवक को इस संबंध में पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया है. पुलिस का कहना है कि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी मनीष कश्यप भड़काऊ वीडियो पोस्ट कर रहे हैं. हाल के दिनों में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच हिंसा बढ़ गई है. छब्बीस फ़रवरी को हवारा गांव में दो यहूदी भाइयों की हत्या के बाद गांव पर इसराइली लोगों ने हमला किया था. इस दौरान सैकड़ों घरों और गाड़ियों को आग लगा दी गई थी. इस हमले में क़रीब चार सौ फ़लस्तीनी घायल हुए थे. जॉर्जिया में एक विवादित विधेयक को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं. बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारियों ने राजधानी तिब्लिसी में प्रदर्शन किया है. जॉर्जिया की संसद ने एक विवादित क़ानून पास किया है. आलोचकों का कहना है कि ये क़ानून प्रेस और नागरिक समाज के अधिकारों को सीमित कर देगा. संसद के बाहर से प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. कई प्रदर्शनकारी इस दौरान ज़मीन पर गिर गए. प्रदर्शनकारी जॉर्जिया और यूरोपीय संघ का झंडा फ़हरा रहे थे. पुलिस ने इस दौरान छयासठ लोगों को गिरफ़्तार भी किया है जिनमें विपक्ष के नेता ज़ुराब जापारिद्ज़े भी शामिल हैं. जॉर्जिया की संसद में पारित हुए इस नए विधेयक की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हो रही है. इस विधेयक के तहत जॉर्जिया में काम कर रहे विदेशी मीडिया संस्थानों और ग़ैर सरकारी संगठनों को विदेश से बीस प्रतिशत से अधिक फंड लेने पर अपने आप को 'विदेशी एजेंट' घोषित करना पड़ेगा. ऐसा ना करने पर भारी ज़ुर्माने और जेल तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है. विरोधियों का कहना है कि ये क़ानून जॉर्जिया को रूस की तरह अधिनायकवाद की तरफ़ ले जाएगा और इससे जॉर्जिया के यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने में भी दिक्कतें आएंगी. जैसा पहले मनाया करते थे. हैं. के' की शूटिंग के दौरान हैदराबाद में घायल हो गए थे. लेने पर निराश जताई. पार्टियों को याद किया और लिखे कि समय कभी लौटकर नहीं आता. करने की सलाह दी है. इसी अस्पताल में अमिताभ का सीटी स्कैन हुआ था. उसका पूरी तरह और तत्परापूर्वक पालन किया जा रहा है. " होंगे. " दिनभरः स्टॉप द बोट्सः सुनक की मुहिम क्या होगी कामयाब? रोकने के लिए ब्रितानी सरकार ने दिया नए क़ानून का प्रस्ताव. . संगठनों ने कहा ये शरण मागने वालों को सज़ा देने के समान. . कर ब्रिटेन बन सकता है दूसरों के लिए उदाहरण ? अल्बनीज़ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मिलेंगे और फिर पीएम मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी के साथ वे भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों पर बैठक भी करेंगे. दोनों नेताओं के बीच आपसी, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होगी. पीएम अल्बनीज़ के साथ ऑस्ट्रेलिया मंत्रियों और कारोबारियों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है. माना जा रहा है कि इस दौरे पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ग्रीन एनर्जी को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने कहा है कि उनके देश में शरण लेने वाले रोहिंग्याओं के वापस लौटने के मुद्दे पर म्यांमार की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिला है. क़तर दौरे पर अल-जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में शेख़ हसीना ने कहा कि बांग्लादेश ने म्यांमार में उत्पीड़न, हत्या और बलात्कार के पीड़ित रोहिंग्याओं को मानवीय आधार पर शरण दी. हाल ही में कॉक्स बाज़ार में लगी भीषण आग से जुड़े सवाल पर शेख़ हसीना ने इंटरव्यू में कहा, "जब म्यांमार में रोहिंग्याओं का उत्पीड़न हुआ तब उनके साथ हत्या, बलात्कार जैसे मामले सामने आए. . . हमें रोहिंग्याओं के लिए बुरा लगा. . . इसके बाद हमने अपनी सीमाएं खोली. . . हमने उन्हें आने दिया. इसके अलावा हमने उन्हें रहने की जगह दी, सबकुछ मानवीय आधार पर किया. " उन्होंने कहा, "हमने म्यांमार के साथ बातचीत शुरू की. हमने उनसे कहा कि रोहिंग्या आपने देश के नागरिक हैं और उन्हें वापस अपने देश जाने दिया जाना चाहिए. दुर्भाग्य से वो सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहे. मुझे लगता है कि इन लोगों को अपने घर और देश वापस जाना चाहिए. " कॉक्स बाज़ार में रहने वाले रोहिंग्याओं की स्थिति पर शेख़ हसीना ने कहा कि वहां की स्थितियां कुछ ख़ास नहीं है. शेख़ हसीना ने कहा, "रोहिंग्या अब ख़ुद एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. वो ड्रग्स, हथियार और मानव तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. इसके साथ ही उन लोगों के आपस में भी बहुत विवाद हैं. " समेत नकदी और कई अन्य कीमती समान चुरा लिए हैं. इक़बाल की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है. दीवार फांद कर घुसे. तब यह घर बंद था और परिवार के सदस्य इस्लामाबाद में थे. दर्ज करवाया किया चोर घर से विदेशी मुद्रा और अन्य कीमती सामान भी ले गए. सीसीटीवी फ़ुटेज मौजूद है. पाकिस्तान के लाहौर में धारा एक सौ चौंतालीस लगाए जाने के बावजूद इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ता इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस ने सख़्त बैरीकेडिंग की है और कई जगह कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया है. रिपोर्टों के मुताबिक कई जगह पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थरबाज़ी भी की है. इमरान ख़ान की प्रस्तावित बैठक के मद्देनज़र पंजाब प्रांत की पुलिस ने लाहौर में पहले से ही धारा एक सौ चौंतालीस लगा दी थी. इसी के साथ जुलूसों और रैलियों पर भी रोक लगा दी थी. धारा एक सौ चौंतालीस का उल्लंघन करने पर पुलिस इमरान ख़ान की पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी ले रही है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लाहौर पुलिस ने ज़मान पार्क की तरफ़ जाने वाली सड़क को बंद कर दिया है और कनाल रोड पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है. उत्तेजित कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस को पानी की बौछारों का इस्तेमाल भी करना पड़ रहा है. इमरान ख़ान ने आज लाहौर में रैली निकालने का एलान किया था. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि जेल में बंद मनीष सिसोदिया को खूंख़ार अपराधियों के बीच रखा गया है और उनकी जान को ख़तरा हो सकता है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि उन्हें आशंका है कि जेल में मनीष सिसोदिया को नुक़सान पहुंचाया जा सकता है. वहीं तिहाड़ जेल प्रशासन ने एक बयान जारी कर आम आदमी पार्टी के आरोपों को ख़ारिज किया है. संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार देश के मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है बल्कि सिर्फ़ विपक्ष को निशाना बनाने का काम कर रही है. संजय सिंह ने कहा, "गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों के पास सीबीआई को भेजा जा रहा है. लालू यादव जी से सीबीआई से पूछताछ कर रही है. लेकिन भाजपा के विधायक के घर आठ करोड़ रुपये मिले, वहां न सीबीआई गई और ना ही ईडी गई. " संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को अगले संसद सत्र में ऐसा क़ानून लाना चाहिए जो ईडी और सीबीआई को मुर्दों से भी पूछताछ करने का अधिकार दे. मनीष सिसोदिया पर ख़तरे की आशंका ज़ाहिर करते हुए संजय सिंह ने कहा, "जानकारी मिली है कि मनीष सिसौदिया को देश के सबसे खूंखार अपराधियों के सेल में रखा गया है. इसमें जेल प्रशासन के लोगों को हम आगाह करना चाहता है कि भाजपा के हथकंडे में न फंसों, कोई घटना हो गई तो जवाब तुम्हें भी देना पड़ेगा. "
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इस तरह पात्र-वर्गीकरण के अनन्तर हम मूल प्रश्न की ओर आते हैं किप्रसाद साहित्य में प्रदर्श-पात्रों की स्थापना किस सीमा तक हो पाई है। प्रसाद साहित्य पूर्णतः आदर्श साहित्य है - प्रत्येक पात्र श्रादर्श का पक्षपाती है । काव्य, नाटक, कथा, एवं उपन्यासों के पात्र जीवन में संघर्षशील रहते हुए अपनी उदात्त भावनाओं की प्रमिट मुद्रा अंकित किये बिना नहीं रह पाते हैं। आदर्शपात्रों के प्रस्तुतीकरण के लिए हम प्रसाद साहित्य को तीन भागों में विभक्त कर लेते हैं१. नाट्य-साहित्य के आदर्श पात्र
कथा-साहित्य के प्रादर्श पात्र
पद्य-साहित्य के आदर्श पात्र
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इस तरह पात्र-वर्गीकरण के अनन्तर हम मूल प्रश्न की ओर आते हैं किप्रसाद साहित्य में प्रदर्श-पात्रों की स्थापना किस सीमा तक हो पाई है। प्रसाद साहित्य पूर्णतः आदर्श साहित्य है - प्रत्येक पात्र श्रादर्श का पक्षपाती है । काव्य, नाटक, कथा, एवं उपन्यासों के पात्र जीवन में संघर्षशील रहते हुए अपनी उदात्त भावनाओं की प्रमिट मुद्रा अंकित किये बिना नहीं रह पाते हैं। आदर्शपात्रों के प्रस्तुतीकरण के लिए हम प्रसाद साहित्य को तीन भागों में विभक्त कर लेते हैंएक. नाट्य-साहित्य के आदर्श पात्र कथा-साहित्य के प्रादर्श पात्र पद्य-साहित्य के आदर्श पात्र
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Vivo ने खुद IPL 2020 से करार किया खत्म, BCCI की बढ़ी मुश्किलें!
IPL 2020 : आईपीएल 2020 के स्पॉन्सरशिप के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन खाली स्टेडियम में होने जा रहे इस टूर्नामेंट के लिए उसी कॉन्ट्रैक्ट पर समझौता होना मुश्किल हो सकता है।
खबर आ रही है कि आईपीएल 2020 के लिए वीवो कंपनी ने स्पॉन्सरशिप टाइटल से अपना नाम वापस ले लिया है। वीवो सिर्फ इस वर्ष के लिए आईपीएल 2020 के स्पॉन्सरशिप टाइटल से हटा है। खबर आई थी कि आईपीएल 2020 की सभी फ्रेंचाइजी ने भी वीवो को हटाए जाने की बात कही थी।
वीवो कंपनी को स्पॉन्सरशिप टाइटल के लिए इस वर्ष 440 करोड़ देने थे। अगर वीवो के स्पॉन्सरशिप से हटने की बात सही निकली तो बीसीसीआई के सामने नए टाइटल स्पॉन्सरशिप को ढूंढना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि कई बड़ी कंपनियां आईपीएल 2020 के स्पॉन्सरशिप के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन खाली स्टेडियम में होने जा रहे इस टूर्नामेंट के लिए उसी कॉन्ट्रैक्ट पर समझौता होना मुश्किल हो सकता है।
बीसीसीआई के सामने मुश्किल यह हैं कि उसे आयोजन से करीब 45 दिन पहले नए स्पॉन्सरशिप को उसी डील में तैयार करना, कई कंपनियां इसके लिए तैयार भी हो सकती है लेकिन उसमे दोनों के बीच समझौता महत्वपूर्ण होगा। बीसीसीआई ने इससे पहले कन्फर्म किया था कि आईपीएल में वही स्पॉन्सरशिप बने रहेंगे जो तय थे, इसके बाद सोशल मीडिया पर चाइनीज प्रीमियर लीग हैशटैग के साथ ट्रेंड शुरू हो गया था जिसमे लोग इस बात को लेकर नाराज थे कि बोर्ड चाइनीज कंपनी को स्पॉन्सरशिप बनाए रखना चाहता है।
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Vivo ने खुद IPL दो हज़ार बीस से करार किया खत्म, BCCI की बढ़ी मुश्किलें! IPL दो हज़ार बीस : आईपीएल दो हज़ार बीस के स्पॉन्सरशिप के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन खाली स्टेडियम में होने जा रहे इस टूर्नामेंट के लिए उसी कॉन्ट्रैक्ट पर समझौता होना मुश्किल हो सकता है। खबर आ रही है कि आईपीएल दो हज़ार बीस के लिए वीवो कंपनी ने स्पॉन्सरशिप टाइटल से अपना नाम वापस ले लिया है। वीवो सिर्फ इस वर्ष के लिए आईपीएल दो हज़ार बीस के स्पॉन्सरशिप टाइटल से हटा है। खबर आई थी कि आईपीएल दो हज़ार बीस की सभी फ्रेंचाइजी ने भी वीवो को हटाए जाने की बात कही थी। वीवो कंपनी को स्पॉन्सरशिप टाइटल के लिए इस वर्ष चार सौ चालीस करोड़ देने थे। अगर वीवो के स्पॉन्सरशिप से हटने की बात सही निकली तो बीसीसीआई के सामने नए टाइटल स्पॉन्सरशिप को ढूंढना मुश्किल हो सकता है। हालांकि कई बड़ी कंपनियां आईपीएल दो हज़ार बीस के स्पॉन्सरशिप के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन खाली स्टेडियम में होने जा रहे इस टूर्नामेंट के लिए उसी कॉन्ट्रैक्ट पर समझौता होना मुश्किल हो सकता है। बीसीसीआई के सामने मुश्किल यह हैं कि उसे आयोजन से करीब पैंतालीस दिन पहले नए स्पॉन्सरशिप को उसी डील में तैयार करना, कई कंपनियां इसके लिए तैयार भी हो सकती है लेकिन उसमे दोनों के बीच समझौता महत्वपूर्ण होगा। बीसीसीआई ने इससे पहले कन्फर्म किया था कि आईपीएल में वही स्पॉन्सरशिप बने रहेंगे जो तय थे, इसके बाद सोशल मीडिया पर चाइनीज प्रीमियर लीग हैशटैग के साथ ट्रेंड शुरू हो गया था जिसमे लोग इस बात को लेकर नाराज थे कि बोर्ड चाइनीज कंपनी को स्पॉन्सरशिप बनाए रखना चाहता है।
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फलों-सब्जियों को धोने के टिप्सः हम रोजाना घर में फल और सब्जियां लेकर आते हैं। लेकिन आज भी कई लोगों को इन्हें धोने का सही तरीका नहीं पता होता है। कई बार आपको पता भी नहीं चलता और आप बिना ठीक से धोए फल और सब्जियां खाने से बीमार हो जाते हैं। कुछ लोग फलों को पानी में अलग-अलग चीजें मिलाकर भी धोते हैं। जबकि यह तरीका पूरी तरह से गलत है। सब्जियां और फल खाने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। लेकिन अगर इन्हें ठीक से साफ या धोया नहीं जाए तो इन्हें खाने से इंफेक्शन भी हो सकता है।
कटाई या तैयारी के दौरान फल और सब्जियां दूषित हो सकती हैं। वे दूषित मिट्टी, पानी या जानवरों के संपर्क में आ सकते हैं या पैकिंग, हैंडलिंग के दौरान दूषित सतहों के संपर्क में आ सकते हैं। भारत में भी हम आमतौर पर बाजार से फल और सब्जियां खरीदते हैं जो मुख्य रूप से बहुत उपयोगी होते हैं।
फल और सब्जी विक्रेताओं के पास आम तौर पर व्यक्तिगत और घरेलू स्वच्छता के निम्न स्तर होते हैं, साथ ही सार्वजनिक स्थान जहां वे बेचते हैं, अच्छी तरह से साफ नहीं होते हैं। यह खराब स्वच्छता फलों और सब्जियों के साथ-साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में भी संदूषण का कारण बनती है। इसलिए हमें फलों और सब्जियों को काटने और खाने से पहले धोना जरूरी हो जाता है। गंदगी साफ करने के अलावा उन्हें धोने के लिए और भी बहुत कुछ है।
फलों और सब्जियों को संभालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धो लें।
छीलने से पहले उन्हें धो लें, भले ही आप छिलका नहीं खाना चाहते हों।
क्रूसीफेरस और पत्तेदार साग : एक से दो मिनट के लिए ठंडे पानी की एक बड़ी कटोरी में पत्तियों या फ्लोरेट्स को अलग करें और भिगोएँ, पत्तियों को एक छलनी में डालें और एक साफ तौलिये से थपथपाकर सुखाएँ। ठंडे पानी की भारी धारा के नीचे रखते हुए अपने हाथों से स्क्रब करें और यदि आवश्यक हो तो एक छलनी में सुखाएं।
नाजुक फल और सब्जियां (जामुन) : ठंडे पानी की एक कोमल धारा के नीचे अपने हाथों में धीरे से रगड़ें और सूखने के लिए एक साफ तौलिये पर फैला दें।
जड़ें और कंदः एक सब्जी ब्रश का उपयोग करके, ठंडे पानी की एक भारी धारा के नीचे साफ़ करें और एक साफ तौलिये का उपयोग करके सुखाएं।
मशरूमः ठंडे पानी की तेज धार के साथ छिड़काव करते हुए छलनी में छान लें और साफ तौलिये पर सूखने के लिए रख दें।
ध्यान दें कि फलों और सब्जियों को धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह आपको बीमार कर सकता है। साथ ही वेजिटेबल वॉश या विनेगर का उपयोग करना बेकार है क्योंकि ये पानी से धोने से अधिक प्रभावी नहीं हैं।
हम फलों और सब्जियों को धोने के बाद कैसे स्टोर करते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, सब्जियों को काटने या छीलने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कटिंग बोर्ड, चाकू और अन्य बर्तन साफ और स्वच्छ होने चाहिए ताकि उन पर मौजूद किसी भी बैक्टीरिया को हटाया जा सके। साथ ही, फलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए अच्छी तरह से संग्रहित किया जाना चाहिए। इन सावधानियों को अपनाकर आप बीमारी के जोखिम को कम कर सकते हैं और फलों और सब्जियों से भरपूर आहार के स्वास्थ्य लाभों का आनंद उठा सकते हैं।
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फलों-सब्जियों को धोने के टिप्सः हम रोजाना घर में फल और सब्जियां लेकर आते हैं। लेकिन आज भी कई लोगों को इन्हें धोने का सही तरीका नहीं पता होता है। कई बार आपको पता भी नहीं चलता और आप बिना ठीक से धोए फल और सब्जियां खाने से बीमार हो जाते हैं। कुछ लोग फलों को पानी में अलग-अलग चीजें मिलाकर भी धोते हैं। जबकि यह तरीका पूरी तरह से गलत है। सब्जियां और फल खाने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। लेकिन अगर इन्हें ठीक से साफ या धोया नहीं जाए तो इन्हें खाने से इंफेक्शन भी हो सकता है। कटाई या तैयारी के दौरान फल और सब्जियां दूषित हो सकती हैं। वे दूषित मिट्टी, पानी या जानवरों के संपर्क में आ सकते हैं या पैकिंग, हैंडलिंग के दौरान दूषित सतहों के संपर्क में आ सकते हैं। भारत में भी हम आमतौर पर बाजार से फल और सब्जियां खरीदते हैं जो मुख्य रूप से बहुत उपयोगी होते हैं। फल और सब्जी विक्रेताओं के पास आम तौर पर व्यक्तिगत और घरेलू स्वच्छता के निम्न स्तर होते हैं, साथ ही सार्वजनिक स्थान जहां वे बेचते हैं, अच्छी तरह से साफ नहीं होते हैं। यह खराब स्वच्छता फलों और सब्जियों के साथ-साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में भी संदूषण का कारण बनती है। इसलिए हमें फलों और सब्जियों को काटने और खाने से पहले धोना जरूरी हो जाता है। गंदगी साफ करने के अलावा उन्हें धोने के लिए और भी बहुत कुछ है। फलों और सब्जियों को संभालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धो लें। छीलने से पहले उन्हें धो लें, भले ही आप छिलका नहीं खाना चाहते हों। क्रूसीफेरस और पत्तेदार साग : एक से दो मिनट के लिए ठंडे पानी की एक बड़ी कटोरी में पत्तियों या फ्लोरेट्स को अलग करें और भिगोएँ, पत्तियों को एक छलनी में डालें और एक साफ तौलिये से थपथपाकर सुखाएँ। ठंडे पानी की भारी धारा के नीचे रखते हुए अपने हाथों से स्क्रब करें और यदि आवश्यक हो तो एक छलनी में सुखाएं। नाजुक फल और सब्जियां : ठंडे पानी की एक कोमल धारा के नीचे अपने हाथों में धीरे से रगड़ें और सूखने के लिए एक साफ तौलिये पर फैला दें। जड़ें और कंदः एक सब्जी ब्रश का उपयोग करके, ठंडे पानी की एक भारी धारा के नीचे साफ़ करें और एक साफ तौलिये का उपयोग करके सुखाएं। मशरूमः ठंडे पानी की तेज धार के साथ छिड़काव करते हुए छलनी में छान लें और साफ तौलिये पर सूखने के लिए रख दें। ध्यान दें कि फलों और सब्जियों को धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह आपको बीमार कर सकता है। साथ ही वेजिटेबल वॉश या विनेगर का उपयोग करना बेकार है क्योंकि ये पानी से धोने से अधिक प्रभावी नहीं हैं। हम फलों और सब्जियों को धोने के बाद कैसे स्टोर करते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, सब्जियों को काटने या छीलने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कटिंग बोर्ड, चाकू और अन्य बर्तन साफ और स्वच्छ होने चाहिए ताकि उन पर मौजूद किसी भी बैक्टीरिया को हटाया जा सके। साथ ही, फलों और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए अच्छी तरह से संग्रहित किया जाना चाहिए। इन सावधानियों को अपनाकर आप बीमारी के जोखिम को कम कर सकते हैं और फलों और सब्जियों से भरपूर आहार के स्वास्थ्य लाभों का आनंद उठा सकते हैं।
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गहरी निद्रा ली, जो हरेक जन्मनेवालेको कभी-न-कभी लेनी ही है । मृत्यु हरेकका परम मित्र है, वह अपने कर्मके मुताबिक आवेगा हो । भले ही कोई यह बता दे कि अनुकका जन्म अमुक समय होगा, पर मौत की यह कोई भी आजतक नहीं बता पाया है । चकैयाके किस्से में हमने यही देखा ।
मैंने इसमें इतना समय लिया, इसलिए मैं क्षमा चाहता हूं । कल रात मेरे पास तार आया कि चार-पांच दिन इतनी लंबी-लंबी बातें बनाई कि हम एक इंच भी पाकिस्तान मजबूरीसे देना नहीं चाहते-बुद्धिसे हृदयको जाग्रत करके भले ही जो चाहें सो लें, लेकिन वह तो बन गया। इसके खिलाफ अनशन क्यों नहीं
करते ?'
और वे पूछते हैं कि तब आपने ऐसी बातें क्यों कही थीं और अव आप ठंडे क्यों बने हैं ? कांग्रेस वागी क्यों नहीं बनते और उसके गुलाम क्यों बनते हैं ? आप उसके खादिम कैसे रह सकते हैं ? अनशन करके मर क्यों नहीं जाते ?
ऐसा कहनेका उनका हक है । पर मुझको उस भाईपर गुस्सा करनेका हक नहीं है । गुस्सा करनेका मतलब है थोड़ा पागल होना । अंग्रेजी में कहा है --- 'ऐंगर इज़ शार्ट मैडनेस और गीतामें भी कहा है-- 'क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः' तो मैं गीता सीखा हुआ आदमी गुस्सा कैसे करूं ?
किसीके कहने पर अनशन कैसे करूं ? मैं मानता हूं कि मेरे जीवनमें एक और उपवास लिखा है। आगा खां महलके उपवासके बादसे ही मेरे दिलमें यह बात जमी हुई है कि वह उपवास नहीं था । एक और उपवास मुझे करना होगा, लेकिन वह किसी के कहनेपर में नहीं करूंगा । खु़दा जब कहेगा, करूंगा ।
मैंने कह दिया है कि मैं जिन्ना साहनका साक्षी बन गया हूं । वे चाहते हैं, देशमें शांति हो और मैं भी यह चाहता हूं। फिर भी अगर जगहजगह दंगा चलता ही रहता है और सारा हिंदुस्तान डांवाडोल हो जाता है और ईश्वर मुझसे कहता है - यानी मेरा दिल मुझसे कहता है कि अव
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गहरी निद्रा ली, जो हरेक जन्मनेवालेको कभी-न-कभी लेनी ही है । मृत्यु हरेकका परम मित्र है, वह अपने कर्मके मुताबिक आवेगा हो । भले ही कोई यह बता दे कि अनुकका जन्म अमुक समय होगा, पर मौत की यह कोई भी आजतक नहीं बता पाया है । चकैयाके किस्से में हमने यही देखा । मैंने इसमें इतना समय लिया, इसलिए मैं क्षमा चाहता हूं । कल रात मेरे पास तार आया कि चार-पांच दिन इतनी लंबी-लंबी बातें बनाई कि हम एक इंच भी पाकिस्तान मजबूरीसे देना नहीं चाहते-बुद्धिसे हृदयको जाग्रत करके भले ही जो चाहें सो लें, लेकिन वह तो बन गया। इसके खिलाफ अनशन क्यों नहीं करते ?' और वे पूछते हैं कि तब आपने ऐसी बातें क्यों कही थीं और अव आप ठंडे क्यों बने हैं ? कांग्रेस वागी क्यों नहीं बनते और उसके गुलाम क्यों बनते हैं ? आप उसके खादिम कैसे रह सकते हैं ? अनशन करके मर क्यों नहीं जाते ? ऐसा कहनेका उनका हक है । पर मुझको उस भाईपर गुस्सा करनेका हक नहीं है । गुस्सा करनेका मतलब है थोड़ा पागल होना । अंग्रेजी में कहा है --- 'ऐंगर इज़ शार्ट मैडनेस और गीतामें भी कहा है-- 'क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः' तो मैं गीता सीखा हुआ आदमी गुस्सा कैसे करूं ? किसीके कहने पर अनशन कैसे करूं ? मैं मानता हूं कि मेरे जीवनमें एक और उपवास लिखा है। आगा खां महलके उपवासके बादसे ही मेरे दिलमें यह बात जमी हुई है कि वह उपवास नहीं था । एक और उपवास मुझे करना होगा, लेकिन वह किसी के कहनेपर में नहीं करूंगा । खु़दा जब कहेगा, करूंगा । मैंने कह दिया है कि मैं जिन्ना साहनका साक्षी बन गया हूं । वे चाहते हैं, देशमें शांति हो और मैं भी यह चाहता हूं। फिर भी अगर जगहजगह दंगा चलता ही रहता है और सारा हिंदुस्तान डांवाडोल हो जाता है और ईश्वर मुझसे कहता है - यानी मेरा दिल मुझसे कहता है कि अव
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश में जिला पंचायतों द्वारा हाट मिक्स से बनने वाली 1825 सड़कों का शिलान्यास रविवार को किया। इनमें गोरखपुर की भी 21 सड़कें शामिल हैं। 26. 48 किलोमीटर लंबाई की इन सड़कों पर 3. 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कार्यक्रम के दौरान जिले की पीएमजीएसवाई की दो सड़कों का भी शिलान्यास किया गया।
शिलान्यास कार्यक्रम वर्चुअल हुआ। सीएम योगी लखनऊ से इसमें शामिल हुए। विभिन्न जिलों में सांसद, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सेंटर पर मौजूद रहे। गोरखपुर के जिला पंचायत परिसर में मुख्य रूप से सांसद रवि किशन, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक संत प्रसाद, विधायक महेंद्र पाल सिंह, विधायक विपिन सिंह और विधायक शीतल पांडेय मौजदू रहे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश में जिला पंचायतों द्वारा हाट मिक्स से बनने वाली एक हज़ार आठ सौ पच्चीस सड़कों का शिलान्यास रविवार को किया। इनमें गोरखपुर की भी इक्कीस सड़कें शामिल हैं। छब्बीस. अड़तालीस किलोग्राममीटर लंबाई की इन सड़कों पर तीन. पंद्रह करोड़ रुपये खर्च होंगे। कार्यक्रम के दौरान जिले की पीएमजीएसवाई की दो सड़कों का भी शिलान्यास किया गया। शिलान्यास कार्यक्रम वर्चुअल हुआ। सीएम योगी लखनऊ से इसमें शामिल हुए। विभिन्न जिलों में सांसद, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सेंटर पर मौजूद रहे। गोरखपुर के जिला पंचायत परिसर में मुख्य रूप से सांसद रवि किशन, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक संत प्रसाद, विधायक महेंद्र पाल सिंह, विधायक विपिन सिंह और विधायक शीतल पांडेय मौजदू रहे।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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आदेशों के अनुसार परीक्षा के चलते जिले में ध्वनि प्रसारण विस्तारक यंत्रों के बजाने पर पूर्णतया रोक रहेगी। परीक्षा अवधि के दौरान कोई भी ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायत मिलती है, तो संबंधित थाना अधिकारी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
हरिभूमि न्यूज. सोनीपत : कॉलेजों व स्कूलों में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के बीच लाउड स्पीकर से ध्वनि प्रदूषण होता है। ऐसे में डीसीपी ने शहर व गांवों में लाउड स्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए धारा 144 के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इनके बजाने पर रोक लगा दी है।
आदेशों के अनुसार परीक्षा के चलते जिले में ध्वनि प्रसारण विस्तारक यंत्रों के बजाने पर पूर्णतया रोक रहेगी। परीक्षा अवधि के दौरान कोई भी ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायत मिलती है, तो संबंधित थाना अधिकारी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों की तरफ से रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर व डीजे के प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रात्रि 10 बजे के बाद अगर कोई ध्वनि यंत्रों का प्रयोग होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के अधिकारी की होगी। आदेश 5 अप्रैल तक लागू किए गए हैं। नोटिस की प्रति जिला अदालत, डीसीपी, एसीपी कार्यालय, पुलिस थानों, सिक्योरिटी ब्रांच, नगर निगम, पंचायत, तहसील, बीडीपीओ, स्कूल भवन व बस स्टैंड पर चस्पाने के आदेश दिए गए हैं।
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आदेशों के अनुसार परीक्षा के चलते जिले में ध्वनि प्रसारण विस्तारक यंत्रों के बजाने पर पूर्णतया रोक रहेगी। परीक्षा अवधि के दौरान कोई भी ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायत मिलती है, तो संबंधित थाना अधिकारी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। हरिभूमि न्यूज. सोनीपत : कॉलेजों व स्कूलों में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के बीच लाउड स्पीकर से ध्वनि प्रदूषण होता है। ऐसे में डीसीपी ने शहर व गांवों में लाउड स्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए धारा एक सौ चौंतालीस के तहत रात दस बजे से सुबह छः बजे तक इनके बजाने पर रोक लगा दी है। आदेशों के अनुसार परीक्षा के चलते जिले में ध्वनि प्रसारण विस्तारक यंत्रों के बजाने पर पूर्णतया रोक रहेगी। परीक्षा अवधि के दौरान कोई भी ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायत मिलती है, तो संबंधित थाना अधिकारी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों की तरफ से रात दस से सुबह छः बजे तक लाउडस्पीकर व डीजे के प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रात्रि दस बजे के बाद अगर कोई ध्वनि यंत्रों का प्रयोग होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के अधिकारी की होगी। आदेश पाँच अप्रैल तक लागू किए गए हैं। नोटिस की प्रति जिला अदालत, डीसीपी, एसीपी कार्यालय, पुलिस थानों, सिक्योरिटी ब्रांच, नगर निगम, पंचायत, तहसील, बीडीपीओ, स्कूल भवन व बस स्टैंड पर चस्पाने के आदेश दिए गए हैं।
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दिल्ली के नज़फ़गढ़ और आसपास के इलाकों में अपना गिरोह चलाने वाला दो लाख का इनामी गैंगस्टर कपिल सांगवान कई स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच टीमों के निशाने पर था. वह मकोका के तहत भी वह वांटेड था.
नई दिल्लीः दिल्ली के नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में अपना गिरोह चलाने वाला गैंगस्टर कपिल सांगवान के देश के फरार होने की आशंका जताई जा रही है. उस पर हत्या और वसूली जैसे अनेक केस दर्ज थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी दस्तावेज जमा करके सांगवान ने उत्तर प्रदेश के बरेली से फर्जी पासपोर्ट हासिल किया और थाईलैंड के रास्ते दुबई भाग गया.
दो लाख रुपये का इनामी गैंगस्टर कपिल सांगवान कई स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच टीमों के निशाने पर था. इसके साथ ही संगठित अपराध अधिनियम का महाराष्ट्र नियंत्रण (मकोका) के तहत भी वह वांटेड था.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में राजस्थान पुलिस ने सांगवान को जयपुर के पास फागी गांव से गिरफ्तार किया था. उसे 24 जनवरी, 2019 को कुछ जरूरी निजी काम के लिए एक महीने की पैरोल मिल गई थी.
इसके बाद उसके गैंग के सदस्यों ने नजफगढ़ में एक फॉर्महाउस पर पार्टी आयोजित की थी, जिसमें राजधानी के अन्य हिस्सों के अपराधी भी शामिल हुए थे. हालांकि, उसके पहुंचने से पहले वहां क्राइम ब्रांच की एक टीम पहुंच गई और कम से कम 22 गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर लिया, जिसमें कपिल के करीबी सहयोगी विनीत और विक्की डागर भी शामिल थे. इन दोनों के खिलाफ भी हत्या की कोशिश, हत्या और धन उगाही के अनेक मामले दर्ज हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, पैरोल की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी सांगवान छिपा रहा. सांगवान गैंग पिछले साल उस समय कुख्यात हुआ जब वे दक्षिण-पश्चिम और बाहरी दिल्ली में होने वाली गैंग-संबंधित हर गतिविधि में शामिल थे. इसके साथ ही वे विरोधी मंजीत महल के गैंग का भी खात्मा करने की योजना बना रहे थे.
खबरों के अनुसार, नंदू गैंग के सदस्य पिछले साल मई में नजफगढ़ में टिकटॉक सेलिब्रिटी मोहित मोर की हत्या में शामिल थे. गैंग का एक सदस्य गिरीराज तोमर पिछले साल ही द्वारका सेक्टर-12 में एक 30 वर्षीय महिला पर गोलीबारी करने से जुड़ा था. हालांकि, जनवरी, 2019 में उसे पैरोल मिल गई थी.
इस साल 31 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने कपिल के भाई ज्योति सांगवान को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया था. ज्योति हरियाणा की एक अदालत से पैरोल पाने के बाद अगस्त, 2019 से फरार था.
रिपोर्ट के अनुसार, पासपोर्ट के लिए सांगवान ने स्थानीय एजेंट को 4. 5 लाख रुपये दिए थे. उसने अपने भाई ज्योति और जूनागढ़ के रहने वाले एक सहयोगी धीरेन करिया को भी इसी तरह पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा था.
करिया के खिलाफ न केवल कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, बल्कि पिछले साल उसने जूनागढ़ लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी दाखिल किया था.
जहां सांगवान के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है, वहीं पुलिस ने ज्योति और करिया के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर लिया है और जल्द ही दिल्ली की अदालत में दाखिल करने वाली है.
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दिल्ली के नज़फ़गढ़ और आसपास के इलाकों में अपना गिरोह चलाने वाला दो लाख का इनामी गैंगस्टर कपिल सांगवान कई स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच टीमों के निशाने पर था. वह मकोका के तहत भी वह वांटेड था. नई दिल्लीः दिल्ली के नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में अपना गिरोह चलाने वाला गैंगस्टर कपिल सांगवान के देश के फरार होने की आशंका जताई जा रही है. उस पर हत्या और वसूली जैसे अनेक केस दर्ज थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी दस्तावेज जमा करके सांगवान ने उत्तर प्रदेश के बरेली से फर्जी पासपोर्ट हासिल किया और थाईलैंड के रास्ते दुबई भाग गया. दो लाख रुपये का इनामी गैंगस्टर कपिल सांगवान कई स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच टीमों के निशाने पर था. इसके साथ ही संगठित अपराध अधिनियम का महाराष्ट्र नियंत्रण के तहत भी वह वांटेड था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, साल दो हज़ार सोलह में राजस्थान पुलिस ने सांगवान को जयपुर के पास फागी गांव से गिरफ्तार किया था. उसे चौबीस जनवरी, दो हज़ार उन्नीस को कुछ जरूरी निजी काम के लिए एक महीने की पैरोल मिल गई थी. इसके बाद उसके गैंग के सदस्यों ने नजफगढ़ में एक फॉर्महाउस पर पार्टी आयोजित की थी, जिसमें राजधानी के अन्य हिस्सों के अपराधी भी शामिल हुए थे. हालांकि, उसके पहुंचने से पहले वहां क्राइम ब्रांच की एक टीम पहुंच गई और कम से कम बाईस गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर लिया, जिसमें कपिल के करीबी सहयोगी विनीत और विक्की डागर भी शामिल थे. इन दोनों के खिलाफ भी हत्या की कोशिश, हत्या और धन उगाही के अनेक मामले दर्ज हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पैरोल की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी सांगवान छिपा रहा. सांगवान गैंग पिछले साल उस समय कुख्यात हुआ जब वे दक्षिण-पश्चिम और बाहरी दिल्ली में होने वाली गैंग-संबंधित हर गतिविधि में शामिल थे. इसके साथ ही वे विरोधी मंजीत महल के गैंग का भी खात्मा करने की योजना बना रहे थे. खबरों के अनुसार, नंदू गैंग के सदस्य पिछले साल मई में नजफगढ़ में टिकटॉक सेलिब्रिटी मोहित मोर की हत्या में शामिल थे. गैंग का एक सदस्य गिरीराज तोमर पिछले साल ही द्वारका सेक्टर-बारह में एक तीस वर्षीय महिला पर गोलीबारी करने से जुड़ा था. हालांकि, जनवरी, दो हज़ार उन्नीस में उसे पैरोल मिल गई थी. इस साल इकतीस जुलाई को दिल्ली पुलिस ने कपिल के भाई ज्योति सांगवान को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया था. ज्योति हरियाणा की एक अदालत से पैरोल पाने के बाद अगस्त, दो हज़ार उन्नीस से फरार था. रिपोर्ट के अनुसार, पासपोर्ट के लिए सांगवान ने स्थानीय एजेंट को चार. पाँच लाख रुपये दिए थे. उसने अपने भाई ज्योति और जूनागढ़ के रहने वाले एक सहयोगी धीरेन करिया को भी इसी तरह पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा था. करिया के खिलाफ न केवल कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, बल्कि पिछले साल उसने जूनागढ़ लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी दाखिल किया था. जहां सांगवान के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है, वहीं पुलिस ने ज्योति और करिया के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर लिया है और जल्द ही दिल्ली की अदालत में दाखिल करने वाली है.
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18 February 2023 Ka Kanya Rashifal आज का कन्या राशिफल :आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक शारीरिक और मानसिक बीमारी की जड़ दुःख हो सकता है। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। बच्चों से असहमति के चलते वाद-विवाद हो सकता है और यह झुंझलाहट भरा साबित होगा। आप महसूस करेंगे कि प्यार में बहुत गहराई है और आपका प्रिय आपको सदा बहुत प्यार करेगा। अपने व्यक्तित्व और रंग-रूप को बेहतर बनाने का कोशिश संतोषजनक साबित होगी। आपके और आपके जीवन साथी के बीच विश्वास की कमी रह सकती है। जिससे आज वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है। संभव है कि आज आपकी जीभ को भरपूर मज़ा मिले - किसी उम्दा रेस्तराँ में जाना मुमकिन है और लज़ीज़ खाने का लुत्फ़ उठा सकते हैं।
- कन्या राशि धन-संपत्ति ( Money) कन्या राशि वाले जातक बड़ा निवेश करने से बचें, साथ ही पैसों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता ना करें।
- कन्या राशि सेहत ( Health )कन्या राशि के जातक आज सेहत पर ध्यान दें।
- कन्या राशि करियर (Career) कन्या राशि वाले आज धार्मिक स्थल की यात्रा होगी और भाग्योदय के योग भी बनेंगे।
- कन्या राशि प्यार (Love) कन्या राशि वाले आज निजी संबंधों में टकराव संभव है।
- कन्या राशि परिवार ( Family) कन्या राशि वाले आज जातक घर में संतान के आने की खुशी से माहौल खुशनुमा रहेगा।
- कन्या राशि का उपाय ( Remedy) कन्या राशि के जातकश्वेत कमल, पुष्प और दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिवाष्टक पढ़ें।
- कन्या राशि पूर्वाभास (Forecast)कन्या राशि वाले आज जातक किसी कीमती वस्तु खरीदने में पैसा खर्च करेंगे।
कल का कन्या राशिफल 19 फरवरी 2023 ( Virgo Horoscope Tomorrow) 19 फरवरी 2023 की भविष्यवाणी के अनुसार कन्या राशिफल जातक जमीन, मकान तथा वाहन की खरीदारी या उसके दस्तावेज करने के लिए अनुकूल समय नहीं है। बिना विचारे काम न करें। भावनात्मक सम्बंध स्थापित होंगे। भाई- बहनों के साथ मेल जोल रहेगा।
क्या राशिफल सही होता है?
हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं।
राशिफल क्या होता है?
ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर 12 राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये 12 राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं।
क्या राशिफल नाम के अनुसार है ?
न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं।
राशिफल की गणना किस पर आधारित है?
जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने के लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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अट्ठारह फ़रवरीruary दो हज़ार तेईस Ka Kanya Rashifal आज का कन्या राशिफल :आज का राशिफल बताता है कि इस राशि के जातक शारीरिक और मानसिक बीमारी की जड़ दुःख हो सकता है। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। बच्चों से असहमति के चलते वाद-विवाद हो सकता है और यह झुंझलाहट भरा साबित होगा। आप महसूस करेंगे कि प्यार में बहुत गहराई है और आपका प्रिय आपको सदा बहुत प्यार करेगा। अपने व्यक्तित्व और रंग-रूप को बेहतर बनाने का कोशिश संतोषजनक साबित होगी। आपके और आपके जीवन साथी के बीच विश्वास की कमी रह सकती है। जिससे आज वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है। संभव है कि आज आपकी जीभ को भरपूर मज़ा मिले - किसी उम्दा रेस्तराँ में जाना मुमकिन है और लज़ीज़ खाने का लुत्फ़ उठा सकते हैं। - कन्या राशि धन-संपत्ति कन्या राशि वाले जातक बड़ा निवेश करने से बचें, साथ ही पैसों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता ना करें। - कन्या राशि सेहत कन्या राशि के जातक आज सेहत पर ध्यान दें। - कन्या राशि करियर कन्या राशि वाले आज धार्मिक स्थल की यात्रा होगी और भाग्योदय के योग भी बनेंगे। - कन्या राशि प्यार कन्या राशि वाले आज निजी संबंधों में टकराव संभव है। - कन्या राशि परिवार कन्या राशि वाले आज जातक घर में संतान के आने की खुशी से माहौल खुशनुमा रहेगा। - कन्या राशि का उपाय कन्या राशि के जातकश्वेत कमल, पुष्प और दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिवाष्टक पढ़ें। - कन्या राशि पूर्वाभास कन्या राशि वाले आज जातक किसी कीमती वस्तु खरीदने में पैसा खर्च करेंगे। कल का कन्या राशिफल उन्नीस फरवरी दो हज़ार तेईस उन्नीस फरवरी दो हज़ार तेईस की भविष्यवाणी के अनुसार कन्या राशिफल जातक जमीन, मकान तथा वाहन की खरीदारी या उसके दस्तावेज करने के लिए अनुकूल समय नहीं है। बिना विचारे काम न करें। भावनात्मक सम्बंध स्थापित होंगे। भाई- बहनों के साथ मेल जोल रहेगा। क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं। राशिफल क्या होता है? ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन नौ ग्रहों और सत्ताईस नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर बारह राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये बारह राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ? न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं। राशिफल की गणना किस पर आधारित है? जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा। दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने के लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नें हाल ही में एक रैली में कहा कि भारत से उन्हें फोन आया है और भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाना चाहता है।
आपको बता दें कि कुछ समय पहले ट्रम्प प्रशासन नें भारत पर व्यापार को लेकर कई प्रतिबन्ध लगाये थे। ट्रम्प का मानना था कि भारत अमेरिका में बहुत तरह के सामान बेचता है, लेकिन अमेरिकी चीजों पर भारी टैक्स वसूलता है। ट्रम्प नें इसपर कहा था कि भारत अमेरिका से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा है और बदले में कुछ नहीं कर रहा है।
भारत के अलावा ट्रम्प नें चीन पर भी कई व्यापारिक प्रतिबन्ध लगाये थे। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका भी एक विकसित होता हुआ देश है और वह इतना बड़ा नुकसान नहीं झेल सकता है।
ट्रम्प नें भारत पर आरोप लगाया था कि भारत कई अमेरिकी चीजों पर 100 फीसदी से भी ज्यादा टैक्स लगाता है।
ट्रम्प नें इस दौरान बराक ओबामा पर भी निशाना साधा और कहा कि ओबामा की सरकार नें विदेशों में जिस प्रकार के व्यापारिक रिश्ते स्थापित किये थे, उनसे अमेरिका को बहुत नुकसान पहुंचा है।
ट्रम्प नें कहा कि उन्होनें अपने मंत्रालय के कुछ लोगों की न्युक्ति इस कार्य के लिए है, जिससे अमेरिका का व्यापार मजबूत हो सके।
ट्रम्प नें अपने भाषण में भारत का नाम काफी बार लिया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए ट्रम्प नें कहा कि मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं और मैं उनकी इज्जत करता हूँ। लेकिन भारत हमारा फायदा उठा रहा है। उन्होनें कहा कि भारत जिस प्रकार से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, अमेरिका को भी उस गति से आगे बढ़ने की जरूरत है।
ट्रम्प नें इसके अलावा कहा कि भारत और चीन अमेरिका का बहुत फायदा उठा रहे हैं। जहाँ चीन और भारत 7-8 फीसदी की दर से आगे बढ़ रहे हैं, अमेरिका 1-2 फीसदी प्रति साल की दर से विकास कर रहा है।
ट्रम्प नें कहा कि इतने बड़े देश होने के बावजूद भी भारत और चीन काफी तेजी से विकास कर रहे हैं और वे अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं।
ट्रम्प नें इसके अलावा कहा कि वे अपने कार्यकाल में अमेरिका को सबसे मजबूत और शक्तिशाली देश बनाना चाहते हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नें हाल ही में एक रैली में कहा कि भारत से उन्हें फोन आया है और भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाना चाहता है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले ट्रम्प प्रशासन नें भारत पर व्यापार को लेकर कई प्रतिबन्ध लगाये थे। ट्रम्प का मानना था कि भारत अमेरिका में बहुत तरह के सामान बेचता है, लेकिन अमेरिकी चीजों पर भारी टैक्स वसूलता है। ट्रम्प नें इसपर कहा था कि भारत अमेरिका से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा है और बदले में कुछ नहीं कर रहा है। भारत के अलावा ट्रम्प नें चीन पर भी कई व्यापारिक प्रतिबन्ध लगाये थे। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका भी एक विकसित होता हुआ देश है और वह इतना बड़ा नुकसान नहीं झेल सकता है। ट्रम्प नें भारत पर आरोप लगाया था कि भारत कई अमेरिकी चीजों पर एक सौ फीसदी से भी ज्यादा टैक्स लगाता है। ट्रम्प नें इस दौरान बराक ओबामा पर भी निशाना साधा और कहा कि ओबामा की सरकार नें विदेशों में जिस प्रकार के व्यापारिक रिश्ते स्थापित किये थे, उनसे अमेरिका को बहुत नुकसान पहुंचा है। ट्रम्प नें कहा कि उन्होनें अपने मंत्रालय के कुछ लोगों की न्युक्ति इस कार्य के लिए है, जिससे अमेरिका का व्यापार मजबूत हो सके। ट्रम्प नें अपने भाषण में भारत का नाम काफी बार लिया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए ट्रम्प नें कहा कि मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं और मैं उनकी इज्जत करता हूँ। लेकिन भारत हमारा फायदा उठा रहा है। उन्होनें कहा कि भारत जिस प्रकार से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, अमेरिका को भी उस गति से आगे बढ़ने की जरूरत है। ट्रम्प नें इसके अलावा कहा कि भारत और चीन अमेरिका का बहुत फायदा उठा रहे हैं। जहाँ चीन और भारत सात-आठ फीसदी की दर से आगे बढ़ रहे हैं, अमेरिका एक-दो फीसदी प्रति साल की दर से विकास कर रहा है। ट्रम्प नें कहा कि इतने बड़े देश होने के बावजूद भी भारत और चीन काफी तेजी से विकास कर रहे हैं और वे अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं। ट्रम्प नें इसके अलावा कहा कि वे अपने कार्यकाल में अमेरिका को सबसे मजबूत और शक्तिशाली देश बनाना चाहते हैं।
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Lok Sabha Election 2019 हिमाचल भाजपा अध्यक्ष सत्ती ने कहा कि परिवारवाद से कांग्रेस में वर्चस्व की लडाई तेज हो गई है।
शिमला, राज्य ब्यूरो। कांग्रेस की लड़ाई सिर-फुटौव्वल से भी बढ़कर अब एक दूसरे के वजूद को खत्म करने तक पहुंच गई है। एक ओर कांगड़ा में सुधीर शर्मा, जीएस बाली और पवन काजल, वहीं विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा में घमासान चल रहा है। इन नेताओं की आपसी लड़ाई कांग्रेस को खत्म कर देगी। परिवारवाद से कांग्रेस में वर्चस्व की लडाई तेज हो गई है। यह बात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने रविवार को जारी बयान में कही है।
केंद्रीय सहायता न मिलने के कांग्रेस नेताओं के बयानों की उन्होंने खिल्ली उड़ाई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने केंद्रीय सहायता को 32 से 42 फीसद किया है। प्रदेश के विशेष राज्य के दर्जे की बहाली, राष्ट्रीय राजमार्गों में वृद्धि, रेलवे के विस्तारीकरण व एम्स जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया है। कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश विकास की दौड़ में 20 वर्ष पीछे चला गया। हालत यहां तक खराब हो चुके थे कि औद्योगिक विकास में प्रदेश दूसरे से फिसलकर 17वें स्थान पर पहुंच गया था।
आए दिन महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध बढ़ने से हिमाचल का नाम बदनाम हो रहा था। सरकारी अधिकारियों की गाड़ियों से ड्रग्स मिल रही थी। सत्ती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के संभावित परिणाम से घबराए कांग्रेस नेता मैदान छोड़ रहे हैं। नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी इस बात से दुखी हैं कि उनका केंद्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक भ्रष्टाचार के आरोपों में जमानत पर है।
जनता यह समझ चुकी है कि वर्तमान परिस्थितियों में एकमात्र विकल्प नरेंद्र मोदी ही हैं। प्रदेश की जनता 2014 का इतिहास फिर दोहराएगी।
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Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस हिमाचल भाजपा अध्यक्ष सत्ती ने कहा कि परिवारवाद से कांग्रेस में वर्चस्व की लडाई तेज हो गई है। शिमला, राज्य ब्यूरो। कांग्रेस की लड़ाई सिर-फुटौव्वल से भी बढ़कर अब एक दूसरे के वजूद को खत्म करने तक पहुंच गई है। एक ओर कांगड़ा में सुधीर शर्मा, जीएस बाली और पवन काजल, वहीं विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा में घमासान चल रहा है। इन नेताओं की आपसी लड़ाई कांग्रेस को खत्म कर देगी। परिवारवाद से कांग्रेस में वर्चस्व की लडाई तेज हो गई है। यह बात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने रविवार को जारी बयान में कही है। केंद्रीय सहायता न मिलने के कांग्रेस नेताओं के बयानों की उन्होंने खिल्ली उड़ाई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने केंद्रीय सहायता को बत्तीस से बयालीस फीसद किया है। प्रदेश के विशेष राज्य के दर्जे की बहाली, राष्ट्रीय राजमार्गों में वृद्धि, रेलवे के विस्तारीकरण व एम्स जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया है। कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश विकास की दौड़ में बीस वर्ष पीछे चला गया। हालत यहां तक खराब हो चुके थे कि औद्योगिक विकास में प्रदेश दूसरे से फिसलकर सत्रहवें स्थान पर पहुंच गया था। आए दिन महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध बढ़ने से हिमाचल का नाम बदनाम हो रहा था। सरकारी अधिकारियों की गाड़ियों से ड्रग्स मिल रही थी। सत्ती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के संभावित परिणाम से घबराए कांग्रेस नेता मैदान छोड़ रहे हैं। नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी इस बात से दुखी हैं कि उनका केंद्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक भ्रष्टाचार के आरोपों में जमानत पर है। जनता यह समझ चुकी है कि वर्तमान परिस्थितियों में एकमात्र विकल्प नरेंद्र मोदी ही हैं। प्रदेश की जनता दो हज़ार चौदह का इतिहास फिर दोहराएगी।
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Pakistan Mosquito Net: पाकिस्तान में अभी तक बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा था। अब बाढ़ के बाद मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। मच्छरों से निपटने के लिए अब पाकिस्तान ने भारत से मदद मांगी है। पाकिस्तान ने भारत से 60 लाख मच्छरदानी खरीदने का फैसला किया है। पाकिस्तान में जनवरी 2023 तक मलेरिया के मामले 27 लाख हो सकते हैं।
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Pakistan Mosquito Net: पाकिस्तान में अभी तक बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा था। अब बाढ़ के बाद मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। मच्छरों से निपटने के लिए अब पाकिस्तान ने भारत से मदद मांगी है। पाकिस्तान ने भारत से साठ लाख मच्छरदानी खरीदने का फैसला किया है। पाकिस्तान में जनवरी दो हज़ार तेईस तक मलेरिया के मामले सत्ताईस लाख हो सकते हैं।
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TS ECET 2022 Counseling Schedule: तेलंगाना स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन, TSCHE ने TS ECET 2022 काउंसलिंग शेड्यूल जारी कर दिया है। पूरा काउंसलिंग शेड्यूल TS ECET की आधिकारिक साइट tsecet. nic. in पर उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध है।
उम्मीदवार ध्यान दें कि TS ECET 2022 काउंसलिंग 7 सितंबर, 2022 से शुरू होगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस का भुगतान, और स्लॉट बुकिंग और वेरिफिकेशन, सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित होने की तिथि और समय 11 सितंबर, 2022 तक आयोजित किया जाएगा।
सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन 7 सितंबर से 9 सितंबर पहले से ही स्लॉट बुक किए गए उम्मीदवारों के लिए सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन 9 सितंबर से 12 सितंबर सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के बाद एक्सरसाइज विकल्प 9 सितंबर से 14 सितंबर के लिए विकल्प 14-सितंबर सीटों का अनंतिम अलॉटमेंट 17 सितंबर से 22 सितंबर तक वेबसाइट के माध्यम से ट्यूशन शुल्क और सेल्फ रिपोर्टिंग का भुगतान कर सकते हैं।
-TSCHE की आधिकारिक वेबसाइट tsecet. nic. in पर जाएं।
-फिर TS ECET 2022 डिटेल्ड नोटिफिकेशन क्लिक करें।
-नोटिफिकेशन के माध्यम से जाओ।
-डाउनलोड करें और अपने संदर्भ के लिए एक प्रति रखें।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भ्रम से बचने के लिए काउंसलिंग शुरू होने से पहले पूरे कार्यक्रम को पढ़ लें। निर्देश भी दिए गए हैं ताकि सभी इसके माध्यम से जा सकें।
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TS ECET दो हज़ार बाईस Counseling Schedule: तेलंगाना स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन, TSCHE ने TS ECET दो हज़ार बाईस काउंसलिंग शेड्यूल जारी कर दिया है। पूरा काउंसलिंग शेड्यूल TS ECET की आधिकारिक साइट tsecet. nic. in पर उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध है। उम्मीदवार ध्यान दें कि TS ECET दो हज़ार बाईस काउंसलिंग सात सितंबर, दो हज़ार बाईस से शुरू होगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस का भुगतान, और स्लॉट बुकिंग और वेरिफिकेशन, सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित होने की तिथि और समय ग्यारह सितंबर, दो हज़ार बाईस तक आयोजित किया जाएगा। सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन सात सितंबर से नौ सितंबर पहले से ही स्लॉट बुक किए गए उम्मीदवारों के लिए सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन नौ सितंबर से बारह सितंबर सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के बाद एक्सरसाइज विकल्प नौ सितंबर से चौदह सितंबर के लिए विकल्प चौदह-सितंबर सीटों का अनंतिम अलॉटमेंट सत्रह सितंबर से बाईस सितंबर तक वेबसाइट के माध्यम से ट्यूशन शुल्क और सेल्फ रिपोर्टिंग का भुगतान कर सकते हैं। -TSCHE की आधिकारिक वेबसाइट tsecet. nic. in पर जाएं। -फिर TS ECET दो हज़ार बाईस डिटेल्ड नोटिफिकेशन क्लिक करें। -नोटिफिकेशन के माध्यम से जाओ। -डाउनलोड करें और अपने संदर्भ के लिए एक प्रति रखें। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भ्रम से बचने के लिए काउंसलिंग शुरू होने से पहले पूरे कार्यक्रम को पढ़ लें। निर्देश भी दिए गए हैं ताकि सभी इसके माध्यम से जा सकें।
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भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) सोमवार को शेयर बाजार में शानदार तेजी के बाद भारत में शीर्ष-100 मूल्यवान कंपनियों की सूची में शामिल हो गई। यह शेयर सोमवार को 6 प्रतिशत चढ़ गया और उसने बीएसई पर दिन के कारोबार में 3,041 रुपये का सर्वाधिक ऊंचा स्तर बनाया। शेयर आखिरकार 4. 8 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,009. 5 रुपये पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 0. 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
इस साल अब तक (वाईटीडी) आधार पर बीएसई पर यह शेयर कैलेंडर वर्ष 2021 में अब तक 109. 4 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि पिछले दो महीनों में इसमें 39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एसीई इक्विटी के आंकड़े के अनुसार, तुलनात्मक तौर पर, सेंसेक्स में वाईटीडी आधार पर करीब 22 प्रतिशत और पिछले दो महीनों के दौरान 10 प्रतिशत की तेजी आई है। बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में, आईआरसीटीसी 48,152 करोड़ रुपये के बाजार पूंजकरण के साथ कुल रैंकिंग में 92वें स्थान पर था। सरकार के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने सोमवार को बाजार पूंजीकरण रैंकिंग के संदर्भ मे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, बजाज होल्डिंग्स, गुजरात गैस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस कंपनी, एसीसी, कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) और बंधन बैंक को पीछे छोड़ा।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में तेजी बरकरार रह सकती है, क्योंकि टीकाकरण अभियान से भविष्य में तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इस क्षेत्र में इस कंपनी का दबदबा और सरकारी मदद भी वृद्घि के मजबूत कारक हैं।
कैपिटलविला ग्लोबल रिसर्च में वरिष्ठï शोध विश्लेषक लिखिता चेपा का मानना है कि निवेशक अब आकर्षक मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए शेयरों पर ध्यान दे रहे हैं। आईआरसीटीसी रेलवे को खानपान सेवा मुहैया कराने, ऑनलाइन रेल टिकट और स्टेशनों और रेलगाडिय़ों में डिब्बाबंद पेयजल मुहैया कराने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा अधिकृत एकमात्र कंपनी है। करीब 73 प्रतिशत और 45 प्रतिशत बाजार भागीदारी के साथ कंपनी का ऑनलाइन रेल बुकिंग और डिब्बाबंद पेयजल खंड में दबदबा है। इसके अ लावा, आईआरसीटीसी होटलों, बसों, उड़ानों के लिए भी बुकिंग सेवाएं मुहैया कराती है और जल्द ही वह मुंबई से गोवा, दियू, लक्ष्यदीप और कोच्चि के लिए क्रूज बुकिंग शुरू करेगी।
साथ ही इस शेयर को आईआरसीटीसी की शेयर स्पिलिट योजना से भी दम मिला है। पूंजी बाजार में तरलता बढ़ाने और छोटे निवेशकों को यह शेयर किफायती बनाने के लिए कंपनी ने 1:5 के अनुपात में शेयर स्पिलिट की घोषणा की है।
आईडीबीआई कैपिटल के प्रभाकर का मानना है कि शेयर में भारी तेजी के बावजूद नए निवेशकों को हरेक गिरावट पर इस शेयर को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए, जबकि पुराने निवेशकों को इसे बनाए रखना चाहिए।
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भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम सोमवार को शेयर बाजार में शानदार तेजी के बाद भारत में शीर्ष-एक सौ मूल्यवान कंपनियों की सूची में शामिल हो गई। यह शेयर सोमवार को छः प्रतिशत चढ़ गया और उसने बीएसई पर दिन के कारोबार में तीन,इकतालीस रुपयापये का सर्वाधिक ऊंचा स्तर बनाया। शेयर आखिरकार चार. आठ प्रतिशत की तेजी के साथ तीन,नौ. पाँच रुपयापये पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में शून्य. तीन प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इस साल अब तक आधार पर बीएसई पर यह शेयर कैलेंडर वर्ष दो हज़ार इक्कीस में अब तक एक सौ नौ. चार प्रतिशत चढ़ा है, जबकि पिछले दो महीनों में इसमें उनतालीस प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एसीई इक्विटी के आंकड़े के अनुसार, तुलनात्मक तौर पर, सेंसेक्स में वाईटीडी आधार पर करीब बाईस प्रतिशत और पिछले दो महीनों के दौरान दस प्रतिशत की तेजी आई है। बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में, आईआरसीटीसी अड़तालीस,एक सौ बावन करोड़ रुपये के बाजार पूंजकरण के साथ कुल रैंकिंग में बानवेवें स्थान पर था। सरकार के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने सोमवार को बाजार पूंजीकरण रैंकिंग के संदर्भ मे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, बजाज होल्डिंग्स, गुजरात गैस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस कंपनी, एसीसी, कोलगेट-पामोलिव और बंधन बैंक को पीछे छोड़ा। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में तेजी बरकरार रह सकती है, क्योंकि टीकाकरण अभियान से भविष्य में तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इस क्षेत्र में इस कंपनी का दबदबा और सरकारी मदद भी वृद्घि के मजबूत कारक हैं। कैपिटलविला ग्लोबल रिसर्च में वरिष्ठï शोध विश्लेषक लिखिता चेपा का मानना है कि निवेशक अब आकर्षक मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए शेयरों पर ध्यान दे रहे हैं। आईआरसीटीसी रेलवे को खानपान सेवा मुहैया कराने, ऑनलाइन रेल टिकट और स्टेशनों और रेलगाडिय़ों में डिब्बाबंद पेयजल मुहैया कराने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा अधिकृत एकमात्र कंपनी है। करीब तिहत्तर प्रतिशत और पैंतालीस प्रतिशत बाजार भागीदारी के साथ कंपनी का ऑनलाइन रेल बुकिंग और डिब्बाबंद पेयजल खंड में दबदबा है। इसके अ लावा, आईआरसीटीसी होटलों, बसों, उड़ानों के लिए भी बुकिंग सेवाएं मुहैया कराती है और जल्द ही वह मुंबई से गोवा, दियू, लक्ष्यदीप और कोच्चि के लिए क्रूज बुकिंग शुरू करेगी। साथ ही इस शेयर को आईआरसीटीसी की शेयर स्पिलिट योजना से भी दम मिला है। पूंजी बाजार में तरलता बढ़ाने और छोटे निवेशकों को यह शेयर किफायती बनाने के लिए कंपनी ने एक:पाँच के अनुपात में शेयर स्पिलिट की घोषणा की है। आईडीबीआई कैपिटल के प्रभाकर का मानना है कि शेयर में भारी तेजी के बावजूद नए निवेशकों को हरेक गिरावट पर इस शेयर को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए, जबकि पुराने निवेशकों को इसे बनाए रखना चाहिए।
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Surya Grahan 2022: इस साल का आखिरी आंशिक सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगने जा रहा है। बता दें, हिंदू पंचांग के अनुसार आंशिक सूर्यग्रहण दोपहर 2:28 से शाम 6:32 तक रहेगा। इस ग्रहण की समय अवधि 4 घंटे की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि ये भारत के कईं हिस्सों में इस अनोखे खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा। दिवाली (Diwali 2022) के ठीक 1 दिन बाद सूर्य ग्रहण से सभी राशियों पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ेगा।
साथ ही बता दें कि सूर्य ग्रहण के बाद सूतक काल लग जाता है, जिस दौरान किसी भी तरह की जरुरी चीजें नहीं की जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिष शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान जातकों के शुभ ग्रहों की चाल बदल जाती है और इसका उनके जीवन पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में ग्रहण के इन प्रभावों से बचने के लिए कुछ आसान उपाय भी बताए गए हैं। आइए आचार्य श्याम चंद्र मिश्र ने बताया हैं कि सूर्य ग्रहण के प्रभाव को किस तरह कम किया जा सकता है।
- आचार्य मिश्र बताते हैं कि सूर्यग्रहण के दौरान व्यक्ति को हमेशा देवी-देवताओं का स्मरण करना चाहिए और उनसे अपने जीवन की कुशलता की कामना करनी चाहिए।
- सूर्य ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं के बीज मंत्र और चालीसा का पाठ करने से ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि मंत्रों का जाप मन में किया जाए। ये ध्यान रखें कि आप भगवान की प्रतिमा का स्पर्श बिल्कुल ना करें।
- सूतक काल के बाद स्नान सबसे जरूरी है। इसलिए ग्रहण के बाद सबसे पहले स्नान करें और फिर देवी-देवताओं की मूर्तियों को, अन्न को और घर के हिस्सों को गंगाजल से सिक्त कर दें। ऐसा करने से ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है।
- इसके साथ शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि ग्रहण के दौरान दीपक जलाकर गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। ये आपकी कई तरह की समस्याओं से दूर रखता है।
- इसके साथ आचार्य जी बता रहे हैं कि सूतक लगने के बाद भोजन खाना, पकाना, नहाना इत्यादि से दूर रहना चाहिए साथ ही इस दौरान सोना भी नहीं चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
- इसके साथ सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी के पौधे को बिल्कुल हाथ ना लगाएं। बल्कि ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते को बचे हुए खाने या फ्रिज में रख दें। ऐसा करने से भोजन पर भी ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।
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Surya Grahan दो हज़ार बाईस: इस साल का आखिरी आंशिक सूर्य ग्रहण पच्चीस अक्टूबर को लगने जा रहा है। बता दें, हिंदू पंचांग के अनुसार आंशिक सूर्यग्रहण दोपहर दो:अट्ठाईस से शाम छः:बत्तीस तक रहेगा। इस ग्रहण की समय अवधि चार घंटाटे की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि ये भारत के कईं हिस्सों में इस अनोखे खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा। दिवाली के ठीक एक दिन बाद सूर्य ग्रहण से सभी राशियों पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही बता दें कि सूर्य ग्रहण के बाद सूतक काल लग जाता है, जिस दौरान किसी भी तरह की जरुरी चीजें नहीं की जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिष शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान जातकों के शुभ ग्रहों की चाल बदल जाती है और इसका उनके जीवन पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में ग्रहण के इन प्रभावों से बचने के लिए कुछ आसान उपाय भी बताए गए हैं। आइए आचार्य श्याम चंद्र मिश्र ने बताया हैं कि सूर्य ग्रहण के प्रभाव को किस तरह कम किया जा सकता है। - आचार्य मिश्र बताते हैं कि सूर्यग्रहण के दौरान व्यक्ति को हमेशा देवी-देवताओं का स्मरण करना चाहिए और उनसे अपने जीवन की कुशलता की कामना करनी चाहिए। - सूर्य ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं के बीज मंत्र और चालीसा का पाठ करने से ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि मंत्रों का जाप मन में किया जाए। ये ध्यान रखें कि आप भगवान की प्रतिमा का स्पर्श बिल्कुल ना करें। - सूतक काल के बाद स्नान सबसे जरूरी है। इसलिए ग्रहण के बाद सबसे पहले स्नान करें और फिर देवी-देवताओं की मूर्तियों को, अन्न को और घर के हिस्सों को गंगाजल से सिक्त कर दें। ऐसा करने से ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है। - इसके साथ शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि ग्रहण के दौरान दीपक जलाकर गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। ये आपकी कई तरह की समस्याओं से दूर रखता है। - इसके साथ आचार्य जी बता रहे हैं कि सूतक लगने के बाद भोजन खाना, पकाना, नहाना इत्यादि से दूर रहना चाहिए साथ ही इस दौरान सोना भी नहीं चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। - इसके साथ सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी के पौधे को बिल्कुल हाथ ना लगाएं। बल्कि ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते को बचे हुए खाने या फ्रिज में रख दें। ऐसा करने से भोजन पर भी ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।
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कोलकाता : 1 जुलाई से राज्य सरकार ने 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ बसें उतारने की अनुमति दे दी है बावजूद इसके भारी संख्या में बसें रास्तों से नदारद है। इसका मुख्य कारण बस भाड़ा है। बस संगठन किराये वृद्धि की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार ने अभी तक हरी झंडी नहीं दी है। आज सोमवार को इस संबंध में परिवहन विभाग के साथ विभिन्न बस संगठनों की बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम व विभागीय वरिष्ठ अधिकारी बैठक में रहेंगे। वहीं बस संगठनों ने बताया कि अभी तक इस बैठक को लेकर उनके पास कोई अधिकारिक रूप से सूचना नहीं आयी है। अगर उन्हें बुलाया जाता है तो वे जरूर इस बैठक में जायेंगे।
ऑल बंगाल बस मिनी बस समन्वाय समिति के जनरल सेक्रेटरी राहुल चटर्जी ने कहा कि अभी कई जगहों पर भाड़े के नाम पर तोलाबाजी चल रही है। 170 रु. जो किराया है उसके बदले 500 रु. तक लिये जा रहा है। खासकर दीघा, कंटाई, हावड़ा स्टेशन, धर्मतल्ला से ऐसी शिकायतें आ रही है। वहीं जो बसें उतरी हैं वे पहले से ज्यादा किराया यात्रियों से ले रहे हैं और यात्री दे भी रहे हैं, ऐसे में इसे ही सरकार क्यों नहीं रेगुलाइज कर दे रही है? पिछले साल परिवहन विभाग द्वारा भाड़ा को लेकर एक लिखित रूप से देने की बात थी जो कि अभी तक नहीं दी गयी। उन्होंने कहा कि अगर बैठक में बुलाया जाता है तो जरूर जायेंगे। ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन कुमार बनर्जी ने कहा कि बैठक में निश्चित रूप से बस भाड़ा वृद्धि की मांग को फिर से उठायेंगे। वेस्ट बंगाल बस एंड मिनी बस आनर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि अभी तक बैठक में आने के लिए कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।
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कोलकाता : एक जुलाई से राज्य सरकार ने पचास प्रतिशत यात्रियों के साथ बसें उतारने की अनुमति दे दी है बावजूद इसके भारी संख्या में बसें रास्तों से नदारद है। इसका मुख्य कारण बस भाड़ा है। बस संगठन किराये वृद्धि की मांग कर रहे हैं जबकि सरकार ने अभी तक हरी झंडी नहीं दी है। आज सोमवार को इस संबंध में परिवहन विभाग के साथ विभिन्न बस संगठनों की बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम व विभागीय वरिष्ठ अधिकारी बैठक में रहेंगे। वहीं बस संगठनों ने बताया कि अभी तक इस बैठक को लेकर उनके पास कोई अधिकारिक रूप से सूचना नहीं आयी है। अगर उन्हें बुलाया जाता है तो वे जरूर इस बैठक में जायेंगे। ऑल बंगाल बस मिनी बस समन्वाय समिति के जनरल सेक्रेटरी राहुल चटर्जी ने कहा कि अभी कई जगहों पर भाड़े के नाम पर तोलाबाजी चल रही है। एक सौ सत्तर रुपया. जो किराया है उसके बदले पाँच सौ रुपया. तक लिये जा रहा है। खासकर दीघा, कंटाई, हावड़ा स्टेशन, धर्मतल्ला से ऐसी शिकायतें आ रही है। वहीं जो बसें उतरी हैं वे पहले से ज्यादा किराया यात्रियों से ले रहे हैं और यात्री दे भी रहे हैं, ऐसे में इसे ही सरकार क्यों नहीं रेगुलाइज कर दे रही है? पिछले साल परिवहन विभाग द्वारा भाड़ा को लेकर एक लिखित रूप से देने की बात थी जो कि अभी तक नहीं दी गयी। उन्होंने कहा कि अगर बैठक में बुलाया जाता है तो जरूर जायेंगे। ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट के महासचिव तपन कुमार बनर्जी ने कहा कि बैठक में निश्चित रूप से बस भाड़ा वृद्धि की मांग को फिर से उठायेंगे। वेस्ट बंगाल बस एंड मिनी बस आनर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि अभी तक बैठक में आने के लिए कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।
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Ajwain Benefits: रसोई में रखे मसाले सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते हैं बल्कि सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी माने जाते हैं। हर एक मसाले का अपना एक अलग महत्व होता है।
किचन में यूं तो कई तरह के मसाले होते हैं, जिनमें से एक हैं 'अजवाइन'। देखने में अजवाइन के दाने बेहद छोटे होते हैं, लेकिन ये छोटे से दाने बड़ा कमाल करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं अजवाइन की, जो शरीर के लिए बहुत लाभकारी होती है।
अजवाइन के सेवन से गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों में मदद मिलती है। अजवाइन में मौजूद गामा-टेरपीनिन पेप्टिक अल्सर, डायबिटीज, ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
स्किन के लिए भी अजवाइन को फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटी फंगल गुण होते हैं, जो त्वचा के लिए लाभकारी होते हैं। इसके इस्तेमाल से मुंहासे, एक्जिमा और फंगल संक्रमण से निजात मिलती है।
अजवाइन के सेवन से वजन को भी कम किया जा सकता है। ये मेटाबोलिज्म को बढ़ाने के साथ पाचन में सुधार करता है। साथ ही इससे वजन कम होने में मदद मिलती है। गैस की समस्या को कम करने के लिए अजवाइन और पानी का मिश्रण फायदेमंद होता है।
अजवाइन ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करने में सहायक होता है। इसमें फाइबर और पोटैशियम की मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जिससे ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही ये दिल से जुड़ी बीमारियों को भी कम करने में सहायक होता है।
पेट की सेहत के लिए भी अजवाइन को बहुत अच्छा माना जाता है। इसके सेवन से पेट से जुड़ी परेशानियों से निजात मिलती है। साथ ही ये अपच, सूजन, गैस आदि समस्याओं को दूर करता है।
Disclaimer: संबंधित लेख पाठक की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए है। न्यूज24 इस लेख में प्रदत्त जानकारी और सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि इसके बारे में चिकित्सीय सलाह जरूर लें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
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Ajwain Benefits: रसोई में रखे मसाले सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते हैं बल्कि सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी माने जाते हैं। हर एक मसाले का अपना एक अलग महत्व होता है। किचन में यूं तो कई तरह के मसाले होते हैं, जिनमें से एक हैं 'अजवाइन'। देखने में अजवाइन के दाने बेहद छोटे होते हैं, लेकिन ये छोटे से दाने बड़ा कमाल करते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं अजवाइन की, जो शरीर के लिए बहुत लाभकारी होती है। अजवाइन के सेवन से गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों में मदद मिलती है। अजवाइन में मौजूद गामा-टेरपीनिन पेप्टिक अल्सर, डायबिटीज, ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। स्किन के लिए भी अजवाइन को फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटी फंगल गुण होते हैं, जो त्वचा के लिए लाभकारी होते हैं। इसके इस्तेमाल से मुंहासे, एक्जिमा और फंगल संक्रमण से निजात मिलती है। अजवाइन के सेवन से वजन को भी कम किया जा सकता है। ये मेटाबोलिज्म को बढ़ाने के साथ पाचन में सुधार करता है। साथ ही इससे वजन कम होने में मदद मिलती है। गैस की समस्या को कम करने के लिए अजवाइन और पानी का मिश्रण फायदेमंद होता है। अजवाइन ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करने में सहायक होता है। इसमें फाइबर और पोटैशियम की मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जिससे ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही ये दिल से जुड़ी बीमारियों को भी कम करने में सहायक होता है। पेट की सेहत के लिए भी अजवाइन को बहुत अच्छा माना जाता है। इसके सेवन से पेट से जुड़ी परेशानियों से निजात मिलती है। साथ ही ये अपच, सूजन, गैस आदि समस्याओं को दूर करता है। Disclaimer: संबंधित लेख पाठक की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए है। न्यूजचौबीस इस लेख में प्रदत्त जानकारी और सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि इसके बारे में चिकित्सीय सलाह जरूर लें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और मिस्र के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है।
इस एमओयू के तहत सहयोग के क्षेत्रों में फसल (विशेष तौर पर गेहूं और मक्का), कृषि जैव प्रौद्योगिकी, नेनो टेक्नोलॉजी, जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रौद्यागिकी सहित सिंचाई एवं जल प्रबंधन तकनीक, ऊर्जा उत्पादन के लिए कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य संरक्षण, सुरक्षा एवं गुणवत्ता, बागवानी, जैविक कृषि, पशुपालन डेरी, मत्स्य पालन, चारा उत्पादन, कृषि उत्पाद एवं मूल्यवर्धन, पादप एवं पशु उत्पादों के व्यापार से संबंधित स्वच्छता मामलों, कृषि औजारों एवं उपकरणों, कृषि कारोबार एवं विपणन, कटाई से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण, कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि विस्तार एवं ग्रामीण विकास, कृषि व्यापार एवं निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारसंबंधी मुद्दों, बीज के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं मानव संसाधन और पारस्परिक हित वाले अन्य सहमति के मुद्दे शामिल हैं।
शोध वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, कृषि संबंधी सूचनाओं एवं विज्ञान संबंधी प्रकाशनों (पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों, बुलेटिन, कृषि एवं सहायक क्षेत्र के सांख्यिकीय आंकड़े), जर्मप्लाज्म एवं कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सेमीनारों, कार्यशालाओं एवं अन्य गतिविधियों के जरिए सहयोग को प्रभावी बनाया जाएगा।
इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया जाएगा ताकि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत सहित पारपरिक हित वाले अन्य मुद्दों पर सहयोग को बेहतर किया जा सके। शुरूआती दो वर्षों के दौरान संयुक्त कार्य समूह की बैठक कम से कम साल में एक बार (भारत और मिस्र में) जरूर होगी। इसके तहत संयुक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करने, सुविधा एवं परामर्श मुहैया कराने और खास मुद्दों के संदर्भ में अतिरिक्त सहयोग आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और मिस्र के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है। इस एमओयू के तहत सहयोग के क्षेत्रों में फसल , कृषि जैव प्रौद्योगिकी, नेनो टेक्नोलॉजी, जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रौद्यागिकी सहित सिंचाई एवं जल प्रबंधन तकनीक, ऊर्जा उत्पादन के लिए कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य संरक्षण, सुरक्षा एवं गुणवत्ता, बागवानी, जैविक कृषि, पशुपालन डेरी, मत्स्य पालन, चारा उत्पादन, कृषि उत्पाद एवं मूल्यवर्धन, पादप एवं पशु उत्पादों के व्यापार से संबंधित स्वच्छता मामलों, कृषि औजारों एवं उपकरणों, कृषि कारोबार एवं विपणन, कटाई से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण, कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि विस्तार एवं ग्रामीण विकास, कृषि व्यापार एवं निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारसंबंधी मुद्दों, बीज के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं मानव संसाधन और पारस्परिक हित वाले अन्य सहमति के मुद्दे शामिल हैं। शोध वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, कृषि संबंधी सूचनाओं एवं विज्ञान संबंधी प्रकाशनों , जर्मप्लाज्म एवं कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सेमीनारों, कार्यशालाओं एवं अन्य गतिविधियों के जरिए सहयोग को प्रभावी बनाया जाएगा। इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा ताकि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत सहित पारपरिक हित वाले अन्य मुद्दों पर सहयोग को बेहतर किया जा सके। शुरूआती दो वर्षों के दौरान संयुक्त कार्य समूह की बैठक कम से कम साल में एक बार जरूर होगी। इसके तहत संयुक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करने, सुविधा एवं परामर्श मुहैया कराने और खास मुद्दों के संदर्भ में अतिरिक्त सहयोग आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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मेहता लखमसी ने रूपसी से लेखन हेतु आवश्यक धनराशि ली स्थान पर रमों के लिखने एवं लिखवाने का कार्य प्रारम्भ किया। उन्होंने अहर्निश अथक् परिश्रम कर बड़ी ही तन्मयता के साथ बत्तीसों आगमों को लिखा और उनकी अनेक प्रतियां तैयार करवाईं । लेखन कार्य के सम्पन्न होते ही बत्तीसों आगमों की एक-एक प्रति एवं मूल उन्होंने नन्दविमलसूरि को उनकी पोशाल में समर्पित की और ३२ आगमों की शेष सभी प्रतियां नगर श्रेष्ठ रूपसी के समक्ष प्रस्तुत कीं । बत्तीसों सूत्रों की उन प्रतियों को देखकर रूपसी ने मेहता लखमसी से कहा - "हे भव्यात्मन् ! और भी कोई गम लिखना अवशिष्ट हो तो उसे प्राप लिखिये ।"
मेहता लखमसी ने उत्तर दिया "श्रेष्ठिवर ! अब कोई गम लिखना अवशिष्ट नहीं रहा है । इन ३२ आगमों में ही दयाधर्म प्रतिपादित किया गया है । इन वत्तीसों ही ग्रामों की प्रतियां लिख लीं एवं लिखवा ली गई हैं । सच कहता हूं, अव मुझे लाभ ही लाभ दृष्टिगोचर हो रहा है ।'
यह सुन कर रूपसी ने लखमसी से कहा - "मेहताजी ! आगम शास्त्र तो सव लिख लिये लेकिन इन गमों के अर्थ से हम अभी भली-भांति भिज्ञ नहीं हैं अतः हमें सबसे पहले गमों का भली-भांति अध्ययन करना चाहिये ।" इस प्रकार विचार कर नगर श्रेष्ठ रूपसी अपने साथ मेहता लखमसी को लेकर आनन्दविमलसूरि के पास गये । रूपसी ने आनन्द विमलसूरि से आगमों का अर्थ बताने को कहा । रूपसी की प्रार्थना पर आनन्द विमलसूरि ने एकान्त में बैठकर उन दोनों को कावताना प्रारम्भ किया। मेहता लखमसी और श्रेष्ठ रूपसी ने अनुक्रमशः वत्तीसों का अध्ययन कर लिया। सूत्रों का अर्थ सुन कर वे दोनों विचार करने लगे कि आगमानुसारी धर्म की स्थापना किस प्रकार की जाय । विचार-विनिमय के अन्तर मेहता लखमसी ने त्रिपोलिया पर बैठकर भव्य जीवों को धर्म का उपदेश देना प्रारम्भ किया । मेहता लखमसी के प्रथम उपदेश से ही पाटण नगर के ७०० घर शास्त्रों में सर्वज्ञ-सर्वदर्शी भगवान महावीर द्वारा प्ररूपित शुद्ध दया धर्म के अनुयायी वने और उन्होंने शुद्ध सम्यक्त व धारण किया । १
एम सुगी ने बूझ्या रूपसी, धार्यो समकित दृड्ढ ......... द्रव्य दीधो बहु रूपसी, करो तमे उत्तम काम ......... द्रव्य लही महतो लखमसी, बेहट्ठा लखवा काज । ये दसमीकालक श्रादे दई, सूत्र बत्तीसे उतार ॥ १३ ॥ सूत्र लसी मानन्दविमन ना, पाला तेहुने दोध । आप सख्या मेहते नग्नमसी, सेठ रूपसी ने दी ।
(शेषपृष्ठ ७३३ पर)
इस प्रकार मेहता लखमसी प्रतिदिन आगमों का उपदेश देने लगे । उनके उपदेशों से अनेक भव्यों को सर्वज्ञ-सर्वदर्शी प्रभु महावीर द्वारा संसार के कल्याण के लिए प्रकाशित जिनधर्म के वास्तविक सच्चे स्वरूप का प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में उपदेश श्रवणार्थ आये हुए लोगों को बोध होने लगा और प्रतिदिन विशाल नरनारी समूह शास्त्र में निर्दिष्ट दया-धर्म के अनुयायी बनने लगे । जिनधर्म का चारों और उद्योत होने लगा ।
इस प्रकार लोंकाशाह के उपदेशों से जैनधर्म के सच्चे स्वरूप का जिन दिनों प्रचार-प्रसार हो रहा था, उन्हीं दिनों दिल्ली से एक संघ अनेक तीर्थस्थानों की यात्रा करता हुआ हिलपुरपत्तन नगर में आया । उस संघ के अग्रणी और खजान्ची शाह भामा, भारमल, खेतसी, शाह जगरूप, शाह डूंगर और शाह मेघराज लोक में विश्रुत मेहता लखमसी (मेहता लोंकाशाह ) की सच्चे धर्म के उपदेशक के रूप में प्रसिद्धि सुनकर उनके पास आये । मेहता लखमसी ने उन्हें आगमों के आधार । पर आगमिक गाथाओं के उल्लेखपूर्वक मुक्तिप्रदायी धर्म का उपदेश दिया । तीर्थाटन के लिये निकले हुए उन संघ मुख्यों को मुक्तिप्रदायी दयामूलक सच्चे धर्म का बोध हुआ । उन्होंने लखमसी मेहता ( लोंका मेहता ) के पास सम्यक्त व ग्रहण कर उसे दृढ़ किया । शाह भामा और शाह भारमल ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और स्वरूप पंच महाव्रतों की दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प किया । वे संघ मुख्य तीर्थयात्रा का विचार छोड़ मेहता लखमसी के पास शास्त्रों का ज्ञान अर्जन करने लगे ।
(टिप्परगी पृष्ठ ७३२ से आगे )
उन्हीं दिनों सूरत का एक विशाल संघ अहिलपुरपत्तन में आया। उसमें अश्व, गज, उष्ट्र, शकट, पोठिये ( प्रतिदिन आवश्यक जीवनोपयोगी सामग्री को ढोने वाले बैल, परिचारक, पाचक, रजक आदि संभवतः सभी मिला कर ) चार लाख का साथ था । संघपति शाह जीवराज ने इस विशाल संघ का डेरा पाटन नगर के बाहर एक विशाल मैदान में डाला । संघवी शाह जीवराज ने संघ के सदस्यों के
रूपसी लखम साथै लई, गया आनन्द विमल ने पास । दसमीकालक आदे दई, अर्थ पाठ कहिय ।
केम धर्म को रे थापिये, बोले रूपसी पास.... ॥२०॥
त्रिपोलिया पर बैस ने, करे उपदेश अपार ।
प्रथम वारगी भाखी तिहां, सात से घर श्रावक धार ।।२१।।
- एकपातरिया (पोतियावन्ध) पट्टावली हस्तलिखित ।
साथ सर्वप्रथम पंचासरा पार्श्वनाथ के दर्शन किये और तदनन्तर उन्होंने बड़े ही हर्षोल्लास के साथ पोशालधारी आचार्यश्री आनन्दविमलसूरि को वन्दन नमन किया 19
देवाधिदेव प्रभु पार्श्वनाथ और गुरु आनन्द विमलसूरि को वन्दन नमन कर चुकने के पश्चात् संघपति जीवराज को लोंकागच्छ के कतिपय श्रावक मिले । कुशलक्षेम की पृच्छा कर लोंकागच्छ के श्रावकों ने संघपति श्री जीवराज से पूछा"आपने यहां किस देव की पूजा की और किस गुरु को वन्दन किया ?" संघपति ने भगवान् पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चा और आनन्द विमलसूरि को वन्दन - नमन की बात कही । इस पर लोंकागच्छ के श्रावकों ने कहा - "संघवी जी ! बड़े आश्चर्य की बात है कि जिस महापुरुष को देखना था, उन्हें तो आपने देखा ही नहीं । हमारे इस नगर में मेहता लखमसी सच्चे शुद्ध धर्म का उपदेश देते हैं, उनके उपदेश आप अवश्य सुनिये ।"
संघपति जीवराज ने व्यग्रता भरी उत्कट अभिलाषा व्यक्त करते कहा - "वन्धुवरों ! मेहता लखमसी को तो मुझे अवश्य दिखाओ ।" संघपति जीवराज की प्रबल उत्कण्ठा देख लोंकागच्छीय श्रावक तत्काल उन्हें मेहता लखमसी के पास ले गये । आगमिक आधार पर मेहता लखमसी के उपदेश को सुनकर संघवी
एम करि धर्म परूपियो, बूझा केई नरनार ।
एहवा अवसर में प्रकटऊ, दिल्ली संघ गुर्जर मझार । श्ररिणयलपुर पाटरण विपे, निकल्या मारग सार ।।२३।।त० ।। लखमसी साह ने त्यां मल्या, दयाधर्म सुणेह ।।२५।। सांभली वयरण लखमसी तरणां, समकित सहु सुध कीध । प्रथम भामोसा भारमल्ल, सुगिय लखमसी वैरण ।।२६।।त० ।। संजम सु मन रियू, दयाधर्म प्रसिद्ध ।
सुध समकित दृढ़ त्यां थई, करता उत्तम काम । एहवा अवसर ने विपे, सूरत संघ तब प्राय ।।२८।।।। संघपति साथै सही, साह जीवराज ए नाम । चारलाख संघ साथ सू आव्यो पाटण सहर ।।२६।। संघपति बाहरे उतर्या, साये मनुष्य अपार । देव गुरु ने पूजवा, गया शहर मभार ।।३०॥०॥ प्रथम जाया तेणे करो, पंचासरियो पारसनाय । मानन्दविमलने वांदवा, चाल्या तिह मन उल्लास ।।३१।।३० ॥
- एकपातरिया (पोतिया बन्ध) गच्छ-पट्टावली (हस्तलिखित)
श्री जीवराज को अनिर्वचनीय आनन्द की अनुभूति हुई । उन्होंने अहिंसामूल- दया - परक धर्म के सच्चे स्वरूप को समझकर मेहता लखमसी के समक्ष शुद्ध सम्यक्त व ग्रहण किया । अति विनम्र स्वर में उन्होंने मेहता लखमसी से कहा - "महात्मन् ! मेरे अन्तर्मन में संसार से विरक्ति उत्पन्न हो गई है। मेरी आन्तरिक इच्छा है कि मैं शीघ्रातिशीघ्र संयम ग्रहण कर लूं किन्तु इतने विशाल संघ को लेकर आया हूं । यदि संघ को पूरी यात्रा कराये बिना बीच ही में छोड़ दूंगा तो लोग मन-मानी बातें घड़ कर मेरी प्रकीति फैलायेंगे । कोई कहेगा खर्चे से डर गया, कोई कहेगा - "मैं तो पहले ही कहता था कि यह महा मूंजी है, यह क्या संघ को आखिर तक निबाहेगा ।" इस भांति लोग मुझे अनेक प्रकार से बुरा बता कर कोसेंगे । इस कारण मैं संघ की यात्रा पूर्ण करवाने के पश्चात् अपने घर जा स्वजनों की अनुमति प्राप्त कर पुनः यहां उपस्थित हो संयम ग्रहण करूंगा ।"
तदनन्तर संघ के पूर्व निश्चयानुसार यात्रा पूर्ण कर संघवी जीवराज संघ के साथ सूरत लौटे । वहां हरिपुरा के अपने आवास में पहुंच कर उन्होंने संघ को सप्रेम विदा दी । १
संघ को विदा करने के पश्चात् जीवराजजी ने अपने घर में जाकर स्त्रीपुत्र आदि परिवार को एकत्रित कर उनसे कहा - "मैं अब इस क्षरणभंगुर असार संसार के बन्धनों को तोड़कर श्रमरण धर्म अंगीकार करूंगा । मेरा यह दृढ़ संकल्प है । मुझे अपने इस संकल्प से संसार की कोई शक्ति रंचमात्र भी विचलित नहीं कर
देव गुरु ने वांद ने जी संघ ने, मांहे तब तांस ।
लोकागच्छ श्रावक मल्या, शाह जीवराज ने पास ।।३२।। त० ।। कोईक कोतक तुम्हें सांभलो, अरियलपुर ने मांहि । मेहतो लखमसी इहां बसे सुद्ध धरम से धीर रे ।।३५।। ।।
एह्ह्वा वचन श्रावक तरगां, सुरग ने साह जीवराज । वलतो श्रावक ने कहे ए पुरुष मुझ ने देखाड़ । श्रावक लोंकागच्छ नो, लेई ने संघ ने साथ । लखमसी मेहता पासे गया, सीझ्या वंछित काज ॥३७॥
संघपति जीवराज ने, दया धरम सुरगाय । एहवा वचन सांभली, हषित हुवो अपार ॥३८॥ समकित तां तेरणे आदर्यो, संजम लेहवा नो भाव । इहां जो दीक्षा हूं लऊं, तो मोहे ठुउगे लोग ।।३६।। ।।
- एकपातरिया (पोतियावन्ध ) गच्छ पट्टावली - (हस्तलिखित ) ।
सकती । इसलिये आप सब सहर्ष मुझे दीक्षित होने की अनुमति प्रदान कर दीजिये ।"
-भाग ४
इस प्रकार अपने परिवार की अनुज्ञा प्राप्त कर श्रेष्ठिवर जीवराजजी ने सात पत्नियों और देवकुमारों के समान परम सुन्दर आज्ञाकारी पांच पुत्रों के मोह को क्षरण भर में ही एक और झटक कर पाटण की ओर प्रयारण किया । अहिलपुर पत्तन में वे शाह रूपसी के पास पहुंचे। जीवराजजी और रूपसी में परस्पर साले बहनोई का सम्बन्ध था । जीवराजजी बहनोई थे और शाह रूपसी उनके साले । जीवराजजी ने अपने साले रूपसी से कहा - "मैं आपकी वहिन और आपके भानजों आदि अपने सब परिवार की अनुज्ञा प्राप्त कर श्रमरण धर्म में दीक्षित होने के उद्देश्य से यहां आया हूं।" अपने बहनोई शाह जीवराजजी के दृढ़ संकल्प को सुनकर शाह रूपसी ने उनसे कहा - "मैंने भी आपके साथ ही दीक्षित होने का निश्चय कर लिया है । "
मेहता लखमसी के व्याख्यान का समय होने वाला है, यह विचार कर शाह जीवराजजी और शाह रूपसी तत्काल व्याख्यान स्थल पर पहुंचे । मेहता लखमसी का व्याख्यान सुनने के लिये व्याख्यान स्थल पर विशाल जनसमूह एकत्रित था । शाह जीवराजजी और शाह रूपसी भी मेहता लखमसी के क्रान्तिकारी उपदेशों को सुनने के लिये व्याख्यानस्थल पर यथास्थान बैठ गये । मेहता लखमसी ने सर्वज्ञप्रणीत शास्त्रों के मूल सूत्रों की विशद व्याख्या करते हुए व्याख्यान प्रारम्भ किया । "जन्म, जरा, मृत्यु, रोग, शोक, अनिष्ट संयोग, इष्टवियोग आदि अपार दारुण दुःखों से प्रोत-प्रोत संसार सागर में डूबते हुए प्राणियों को केवल सर्वज्ञ सर्वदर्शी तीर्थंकर भगवान् द्वारा प्ररूपित "अहिंसा, संयम, तप स्वरूप दया धर्म ही भवसागर से पार उतारने वाला है". '- इस आध्यात्मिक विषय पर मेहता लखमसी के मर्मस्पर्शी व्याख्यान को सुनकर ( शाह जीवराजजी ) शाह रूपसी, शाह भामा, शाह भारमल आदि ४५ मुमुक्षुओं ने वैराग्य के प्रगाढ़ रंग में रंगित हो पंच महाव्रत स्वरूप श्रमण धर्म की दीक्षा अंगीकार की। इन ४५ मुमुक्षु आत्माओं ने विक्रम संवत् १५३१ की वैशाख शुक्ला एकादशी गुरुवार के दिन द्वितीय प्रहर में अनुराधा नक्षत्र का योग होने पर ग्रष्टम शुभ मुहूर्त में श्रमण धर्म की दीक्षा ग्रहण की । इस प्रकार पांच समिति, तीन गुप्ति, नव वाड़ युक्त ब्रह्मचर्य, दशविध यतिधर्म, पांच संवर श्रीर ३६ गुणों से सुशोभित पांच महाव्रतधारी ४५ मुनि अठारह पापों, शल्य, मिथ्यात्व और पांच प्रकार के प्रावों से विनिर्मुक्त हो विभिन्न क्षेत्रों के अनेक ग्रामों और नगरों में अप्रतिहत विहार क्रम से धर्म का उद्योत एवं धर्मतीर्थ का अभ्युदयोत्कर्ष करते हुए विचरण करने लगे। रूपसी को लोकागच्छ के प्रथम पट्टवर आचार्य के पद पर प्रविष्ठित किया गया। मुनिश्री भारमल और भुजराज (भोजराज वा भामाजी) को स्थविर पद पर प्रविष्ठित किया गया । भारमलजी के दो शिष्य हुए केशवजी और धनराजजी । लोंकागच्छ के पहले पट्टधर श्री रूपसीजी
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मेहता लखमसी ने रूपसी से लेखन हेतु आवश्यक धनराशि ली स्थान पर रमों के लिखने एवं लिखवाने का कार्य प्रारम्भ किया। उन्होंने अहर्निश अथक् परिश्रम कर बड़ी ही तन्मयता के साथ बत्तीसों आगमों को लिखा और उनकी अनेक प्रतियां तैयार करवाईं । लेखन कार्य के सम्पन्न होते ही बत्तीसों आगमों की एक-एक प्रति एवं मूल उन्होंने नन्दविमलसूरि को उनकी पोशाल में समर्पित की और बत्तीस आगमों की शेष सभी प्रतियां नगर श्रेष्ठ रूपसी के समक्ष प्रस्तुत कीं । बत्तीसों सूत्रों की उन प्रतियों को देखकर रूपसी ने मेहता लखमसी से कहा - "हे भव्यात्मन् ! और भी कोई गम लिखना अवशिष्ट हो तो उसे प्राप लिखिये ।" मेहता लखमसी ने उत्तर दिया "श्रेष्ठिवर ! अब कोई गम लिखना अवशिष्ट नहीं रहा है । इन बत्तीस आगमों में ही दयाधर्म प्रतिपादित किया गया है । इन वत्तीसों ही ग्रामों की प्रतियां लिख लीं एवं लिखवा ली गई हैं । सच कहता हूं, अव मुझे लाभ ही लाभ दृष्टिगोचर हो रहा है ।' यह सुन कर रूपसी ने लखमसी से कहा - "मेहताजी ! आगम शास्त्र तो सव लिख लिये लेकिन इन गमों के अर्थ से हम अभी भली-भांति भिज्ञ नहीं हैं अतः हमें सबसे पहले गमों का भली-भांति अध्ययन करना चाहिये ।" इस प्रकार विचार कर नगर श्रेष्ठ रूपसी अपने साथ मेहता लखमसी को लेकर आनन्दविमलसूरि के पास गये । रूपसी ने आनन्द विमलसूरि से आगमों का अर्थ बताने को कहा । रूपसी की प्रार्थना पर आनन्द विमलसूरि ने एकान्त में बैठकर उन दोनों को कावताना प्रारम्भ किया। मेहता लखमसी और श्रेष्ठ रूपसी ने अनुक्रमशः वत्तीसों का अध्ययन कर लिया। सूत्रों का अर्थ सुन कर वे दोनों विचार करने लगे कि आगमानुसारी धर्म की स्थापना किस प्रकार की जाय । विचार-विनिमय के अन्तर मेहता लखमसी ने त्रिपोलिया पर बैठकर भव्य जीवों को धर्म का उपदेश देना प्रारम्भ किया । मेहता लखमसी के प्रथम उपदेश से ही पाटण नगर के सात सौ घर शास्त्रों में सर्वज्ञ-सर्वदर्शी भगवान महावीर द्वारा प्ररूपित शुद्ध दया धर्म के अनुयायी वने और उन्होंने शुद्ध सम्यक्त व धारण किया । एक एम सुगी ने बूझ्या रूपसी, धार्यो समकित दृड्ढ ......... द्रव्य दीधो बहु रूपसी, करो तमे उत्तम काम ......... द्रव्य लही महतो लखमसी, बेहट्ठा लखवा काज । ये दसमीकालक श्रादे दई, सूत्र बत्तीसे उतार ॥ तेरह ॥ सूत्र लसी मानन्दविमन ना, पाला तेहुने दोध । आप सख्या मेहते नग्नमसी, सेठ रूपसी ने दी । इस प्रकार मेहता लखमसी प्रतिदिन आगमों का उपदेश देने लगे । उनके उपदेशों से अनेक भव्यों को सर्वज्ञ-सर्वदर्शी प्रभु महावीर द्वारा संसार के कल्याण के लिए प्रकाशित जिनधर्म के वास्तविक सच्चे स्वरूप का प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में उपदेश श्रवणार्थ आये हुए लोगों को बोध होने लगा और प्रतिदिन विशाल नरनारी समूह शास्त्र में निर्दिष्ट दया-धर्म के अनुयायी बनने लगे । जिनधर्म का चारों और उद्योत होने लगा । इस प्रकार लोंकाशाह के उपदेशों से जैनधर्म के सच्चे स्वरूप का जिन दिनों प्रचार-प्रसार हो रहा था, उन्हीं दिनों दिल्ली से एक संघ अनेक तीर्थस्थानों की यात्रा करता हुआ हिलपुरपत्तन नगर में आया । उस संघ के अग्रणी और खजान्ची शाह भामा, भारमल, खेतसी, शाह जगरूप, शाह डूंगर और शाह मेघराज लोक में विश्रुत मेहता लखमसी की सच्चे धर्म के उपदेशक के रूप में प्रसिद्धि सुनकर उनके पास आये । मेहता लखमसी ने उन्हें आगमों के आधार । पर आगमिक गाथाओं के उल्लेखपूर्वक मुक्तिप्रदायी धर्म का उपदेश दिया । तीर्थाटन के लिये निकले हुए उन संघ मुख्यों को मुक्तिप्रदायी दयामूलक सच्चे धर्म का बोध हुआ । उन्होंने लखमसी मेहता के पास सम्यक्त व ग्रहण कर उसे दृढ़ किया । शाह भामा और शाह भारमल ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और स्वरूप पंच महाव्रतों की दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प किया । वे संघ मुख्य तीर्थयात्रा का विचार छोड़ मेहता लखमसी के पास शास्त्रों का ज्ञान अर्जन करने लगे । उन्हीं दिनों सूरत का एक विशाल संघ अहिलपुरपत्तन में आया। उसमें अश्व, गज, उष्ट्र, शकट, पोठिये चार लाख का साथ था । संघपति शाह जीवराज ने इस विशाल संघ का डेरा पाटन नगर के बाहर एक विशाल मैदान में डाला । संघवी शाह जीवराज ने संघ के सदस्यों के रूपसी लखम साथै लई, गया आनन्द विमल ने पास । दसमीकालक आदे दई, अर्थ पाठ कहिय । केम धर्म को रे थापिये, बोले रूपसी पास.... ॥बीस॥ त्रिपोलिया पर बैस ने, करे उपदेश अपार । प्रथम वारगी भाखी तिहां, सात से घर श्रावक धार ।।इक्कीस।। - एकपातरिया पट्टावली हस्तलिखित । साथ सर्वप्रथम पंचासरा पार्श्वनाथ के दर्शन किये और तदनन्तर उन्होंने बड़े ही हर्षोल्लास के साथ पोशालधारी आचार्यश्री आनन्दविमलसूरि को वन्दन नमन किया उन्नीस देवाधिदेव प्रभु पार्श्वनाथ और गुरु आनन्द विमलसूरि को वन्दन नमन कर चुकने के पश्चात् संघपति जीवराज को लोंकागच्छ के कतिपय श्रावक मिले । कुशलक्षेम की पृच्छा कर लोंकागच्छ के श्रावकों ने संघपति श्री जीवराज से पूछा"आपने यहां किस देव की पूजा की और किस गुरु को वन्दन किया ?" संघपति ने भगवान् पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चा और आनन्द विमलसूरि को वन्दन - नमन की बात कही । इस पर लोंकागच्छ के श्रावकों ने कहा - "संघवी जी ! बड़े आश्चर्य की बात है कि जिस महापुरुष को देखना था, उन्हें तो आपने देखा ही नहीं । हमारे इस नगर में मेहता लखमसी सच्चे शुद्ध धर्म का उपदेश देते हैं, उनके उपदेश आप अवश्य सुनिये ।" संघपति जीवराज ने व्यग्रता भरी उत्कट अभिलाषा व्यक्त करते कहा - "वन्धुवरों ! मेहता लखमसी को तो मुझे अवश्य दिखाओ ।" संघपति जीवराज की प्रबल उत्कण्ठा देख लोंकागच्छीय श्रावक तत्काल उन्हें मेहता लखमसी के पास ले गये । आगमिक आधार पर मेहता लखमसी के उपदेश को सुनकर संघवी एम करि धर्म परूपियो, बूझा केई नरनार । एहवा अवसर में प्रकटऊ, दिल्ली संघ गुर्जर मझार । श्ररिणयलपुर पाटरण विपे, निकल्या मारग सार ।।तेईस।।तशून्य ।। लखमसी साह ने त्यां मल्या, दयाधर्म सुणेह ।।पच्चीस।। सांभली वयरण लखमसी तरणां, समकित सहु सुध कीध । प्रथम भामोसा भारमल्ल, सुगिय लखमसी वैरण ।।छब्बीस।।तशून्य ।। संजम सु मन रियू, दयाधर्म प्रसिद्ध । सुध समकित दृढ़ त्यां थई, करता उत्तम काम । एहवा अवसर ने विपे, सूरत संघ तब प्राय ।।अट्ठाईस।।।। संघपति साथै सही, साह जीवराज ए नाम । चारलाख संघ साथ सू आव्यो पाटण सहर ।।छब्बीस।। संघपति बाहरे उतर्या, साये मनुष्य अपार । देव गुरु ने पूजवा, गया शहर मभार ।।तीस॥शून्य॥ प्रथम जाया तेणे करो, पंचासरियो पारसनाय । मानन्दविमलने वांदवा, चाल्या तिह मन उल्लास ।।इकतीस।।तीस ॥ - एकपातरिया गच्छ-पट्टावली श्री जीवराज को अनिर्वचनीय आनन्द की अनुभूति हुई । उन्होंने अहिंसामूल- दया - परक धर्म के सच्चे स्वरूप को समझकर मेहता लखमसी के समक्ष शुद्ध सम्यक्त व ग्रहण किया । अति विनम्र स्वर में उन्होंने मेहता लखमसी से कहा - "महात्मन् ! मेरे अन्तर्मन में संसार से विरक्ति उत्पन्न हो गई है। मेरी आन्तरिक इच्छा है कि मैं शीघ्रातिशीघ्र संयम ग्रहण कर लूं किन्तु इतने विशाल संघ को लेकर आया हूं । यदि संघ को पूरी यात्रा कराये बिना बीच ही में छोड़ दूंगा तो लोग मन-मानी बातें घड़ कर मेरी प्रकीति फैलायेंगे । कोई कहेगा खर्चे से डर गया, कोई कहेगा - "मैं तो पहले ही कहता था कि यह महा मूंजी है, यह क्या संघ को आखिर तक निबाहेगा ।" इस भांति लोग मुझे अनेक प्रकार से बुरा बता कर कोसेंगे । इस कारण मैं संघ की यात्रा पूर्ण करवाने के पश्चात् अपने घर जा स्वजनों की अनुमति प्राप्त कर पुनः यहां उपस्थित हो संयम ग्रहण करूंगा ।" तदनन्तर संघ के पूर्व निश्चयानुसार यात्रा पूर्ण कर संघवी जीवराज संघ के साथ सूरत लौटे । वहां हरिपुरा के अपने आवास में पहुंच कर उन्होंने संघ को सप्रेम विदा दी । एक संघ को विदा करने के पश्चात् जीवराजजी ने अपने घर में जाकर स्त्रीपुत्र आदि परिवार को एकत्रित कर उनसे कहा - "मैं अब इस क्षरणभंगुर असार संसार के बन्धनों को तोड़कर श्रमरण धर्म अंगीकार करूंगा । मेरा यह दृढ़ संकल्प है । मुझे अपने इस संकल्प से संसार की कोई शक्ति रंचमात्र भी विचलित नहीं कर देव गुरु ने वांद ने जी संघ ने, मांहे तब तांस । लोकागच्छ श्रावक मल्या, शाह जीवराज ने पास ।।बत्तीस।। तशून्य ।। कोईक कोतक तुम्हें सांभलो, अरियलपुर ने मांहि । मेहतो लखमसी इहां बसे सुद्ध धरम से धीर रे ।।पैंतीस।। ।। एह्ह्वा वचन श्रावक तरगां, सुरग ने साह जीवराज । वलतो श्रावक ने कहे ए पुरुष मुझ ने देखाड़ । श्रावक लोंकागच्छ नो, लेई ने संघ ने साथ । लखमसी मेहता पासे गया, सीझ्या वंछित काज ॥सैंतीस॥ संघपति जीवराज ने, दया धरम सुरगाय । एहवा वचन सांभली, हषित हुवो अपार ॥अड़तीस॥ समकित तां तेरणे आदर्यो, संजम लेहवा नो भाव । इहां जो दीक्षा हूं लऊं, तो मोहे ठुउगे लोग ।।छत्तीस।। ।। - एकपातरिया गच्छ पट्टावली - । सकती । इसलिये आप सब सहर्ष मुझे दीक्षित होने की अनुमति प्रदान कर दीजिये ।" -भाग चार इस प्रकार अपने परिवार की अनुज्ञा प्राप्त कर श्रेष्ठिवर जीवराजजी ने सात पत्नियों और देवकुमारों के समान परम सुन्दर आज्ञाकारी पांच पुत्रों के मोह को क्षरण भर में ही एक और झटक कर पाटण की ओर प्रयारण किया । अहिलपुर पत्तन में वे शाह रूपसी के पास पहुंचे। जीवराजजी और रूपसी में परस्पर साले बहनोई का सम्बन्ध था । जीवराजजी बहनोई थे और शाह रूपसी उनके साले । जीवराजजी ने अपने साले रूपसी से कहा - "मैं आपकी वहिन और आपके भानजों आदि अपने सब परिवार की अनुज्ञा प्राप्त कर श्रमरण धर्म में दीक्षित होने के उद्देश्य से यहां आया हूं।" अपने बहनोई शाह जीवराजजी के दृढ़ संकल्प को सुनकर शाह रूपसी ने उनसे कहा - "मैंने भी आपके साथ ही दीक्षित होने का निश्चय कर लिया है । " मेहता लखमसी के व्याख्यान का समय होने वाला है, यह विचार कर शाह जीवराजजी और शाह रूपसी तत्काल व्याख्यान स्थल पर पहुंचे । मेहता लखमसी का व्याख्यान सुनने के लिये व्याख्यान स्थल पर विशाल जनसमूह एकत्रित था । शाह जीवराजजी और शाह रूपसी भी मेहता लखमसी के क्रान्तिकारी उपदेशों को सुनने के लिये व्याख्यानस्थल पर यथास्थान बैठ गये । मेहता लखमसी ने सर्वज्ञप्रणीत शास्त्रों के मूल सूत्रों की विशद व्याख्या करते हुए व्याख्यान प्रारम्भ किया । "जन्म, जरा, मृत्यु, रोग, शोक, अनिष्ट संयोग, इष्टवियोग आदि अपार दारुण दुःखों से प्रोत-प्रोत संसार सागर में डूबते हुए प्राणियों को केवल सर्वज्ञ सर्वदर्शी तीर्थंकर भगवान् द्वारा प्ररूपित "अहिंसा, संयम, तप स्वरूप दया धर्म ही भवसागर से पार उतारने वाला है". '- इस आध्यात्मिक विषय पर मेहता लखमसी के मर्मस्पर्शी व्याख्यान को सुनकर शाह रूपसी, शाह भामा, शाह भारमल आदि पैंतालीस मुमुक्षुओं ने वैराग्य के प्रगाढ़ रंग में रंगित हो पंच महाव्रत स्वरूप श्रमण धर्म की दीक्षा अंगीकार की। इन पैंतालीस मुमुक्षु आत्माओं ने विक्रम संवत् एक हज़ार पाँच सौ इकतीस की वैशाख शुक्ला एकादशी गुरुवार के दिन द्वितीय प्रहर में अनुराधा नक्षत्र का योग होने पर ग्रष्टम शुभ मुहूर्त में श्रमण धर्म की दीक्षा ग्रहण की । इस प्रकार पांच समिति, तीन गुप्ति, नव वाड़ युक्त ब्रह्मचर्य, दशविध यतिधर्म, पांच संवर श्रीर छत्तीस गुणों से सुशोभित पांच महाव्रतधारी पैंतालीस मुनि अठारह पापों, शल्य, मिथ्यात्व और पांच प्रकार के प्रावों से विनिर्मुक्त हो विभिन्न क्षेत्रों के अनेक ग्रामों और नगरों में अप्रतिहत विहार क्रम से धर्म का उद्योत एवं धर्मतीर्थ का अभ्युदयोत्कर्ष करते हुए विचरण करने लगे। रूपसी को लोकागच्छ के प्रथम पट्टवर आचार्य के पद पर प्रविष्ठित किया गया। मुनिश्री भारमल और भुजराज को स्थविर पद पर प्रविष्ठित किया गया । भारमलजी के दो शिष्य हुए केशवजी और धनराजजी । लोंकागच्छ के पहले पट्टधर श्री रूपसीजी
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पिछले महीने मेगास्टार अमिताभ बच्चन के फैंस उस समय हैरान परेशान हो गए थे जब उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला था। बिग बी के घर में उन्हें मिलाकर घर के तीन और सदस्य (अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और आराध्या) कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। हालांकि अब उनका पूरा परिवार ठीक है। वहीं कोरोना से ठीक होने के बाद अमिताभ बच्चन पहली बार अपने घर जलसा से बाहर दिखे हैं।
अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहते हैं। वह रोजाना फैंस के लिए खास तस्वीरें और पोस्ट साझा करते रहते हैं। इस बार बिग बी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में वह अपने दूसरे घर प्रतीक्षा के बगीचे में लगे गुलमोहर के पेड़ के साथ तस्वीरें खींचवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने एक कैप्शन भी लिखा है।
अपने पोस्ट में अमिताभ बच्चन ने गुलमोहर के उस पेड़ के बारे में लिखा जो उन्होंने 44 साल पहले अपने घर प्रतीक्षा के बगीचे में लगाया था। साथ ही उन्होंने अपनी मां के जन्मदिन पर एक नया पेड़ लगाया। इस बारे में भी अमिताभ बच्चन ने पोस्ट में बताया है। अमिताभ बच्चन ने इस पोस्ट के साथ पिता और मशहूर कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविता भी लिखी है।
अमिताभ बच्चन ने कैप्शन में लिखा, 'यह बड़ा सा गुलमोहर का पेड़ मैंने जब लगाता था जब हमने साल 1976 में अपना पहला घर प्रतीक्षा लिया था। हाल ही में आए तूफान ने उसको झुका दिया, लेकिन कल मैंने अपनी मां के जन्मदिन 12 अगस्त को नया गुलमोहर का पेड़ उनके नाम पर लगाया है। उसकी जगह जहां पुराना वाला पेड़ था। '
इस पोस्ट के साथ अमिताभ बच्चन ने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता की पंक्तियां लिखी- ". . जो बसे हैं वे उजड़ते हैं , प्रकृति के जड़ नियम से ;पर किसी उजड़े हुए को , फिर बसाना कब मना है ? . . है अन्धेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? " सोशल मीडिया पर बिग बी का यह पोस्ट वायरल हो रहा है। उनके फैंस इस पोस्ट को खूब पसंद कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
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पिछले महीने मेगास्टार अमिताभ बच्चन के फैंस उस समय हैरान परेशान हो गए थे जब उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला था। बिग बी के घर में उन्हें मिलाकर घर के तीन और सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। हालांकि अब उनका पूरा परिवार ठीक है। वहीं कोरोना से ठीक होने के बाद अमिताभ बच्चन पहली बार अपने घर जलसा से बाहर दिखे हैं। अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहते हैं। वह रोजाना फैंस के लिए खास तस्वीरें और पोस्ट साझा करते रहते हैं। इस बार बिग बी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में वह अपने दूसरे घर प्रतीक्षा के बगीचे में लगे गुलमोहर के पेड़ के साथ तस्वीरें खींचवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने एक कैप्शन भी लिखा है। अपने पोस्ट में अमिताभ बच्चन ने गुलमोहर के उस पेड़ के बारे में लिखा जो उन्होंने चौंतालीस साल पहले अपने घर प्रतीक्षा के बगीचे में लगाया था। साथ ही उन्होंने अपनी मां के जन्मदिन पर एक नया पेड़ लगाया। इस बारे में भी अमिताभ बच्चन ने पोस्ट में बताया है। अमिताभ बच्चन ने इस पोस्ट के साथ पिता और मशहूर कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविता भी लिखी है। अमिताभ बच्चन ने कैप्शन में लिखा, 'यह बड़ा सा गुलमोहर का पेड़ मैंने जब लगाता था जब हमने साल एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में अपना पहला घर प्रतीक्षा लिया था। हाल ही में आए तूफान ने उसको झुका दिया, लेकिन कल मैंने अपनी मां के जन्मदिन बारह अगस्त को नया गुलमोहर का पेड़ उनके नाम पर लगाया है। उसकी जगह जहां पुराना वाला पेड़ था। ' इस पोस्ट के साथ अमिताभ बच्चन ने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता की पंक्तियां लिखी- ". . जो बसे हैं वे उजड़ते हैं , प्रकृति के जड़ नियम से ;पर किसी उजड़े हुए को , फिर बसाना कब मना है ? . . है अन्धेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? " सोशल मीडिया पर बिग बी का यह पोस्ट वायरल हो रहा है। उनके फैंस इस पोस्ट को खूब पसंद कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
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(वर्षा काल का एक प्रभात । बादल घिरे हुए हैं। एक शानदार बंगला। दरवाजों पर जाली लोट के परदे पड़े हुए हैं! उमा एक कमरे में पलंग पर पड़ी है। एक औरत उसके सिर में तेल डाल रही है। उमा का मुख पीला पड़ गया है । देह सूख गई है। कमरे के पीछे की तरफ दो खिड़कियाँ हैं जो बाग में खुलती हैं ।
(आईने की ओर देखकर ) यौवन इतना अस्थिर है, इसकी मैंने कल्पना भी न की थी । मानो एक स्वप्न था कि आँख खुलते ही गायब हो गया ! मगर कितना मधुर स्वप्न था! मैं स्वर्ग की अप्सरा की भाँति विमान पर बैठी आकाश में विहार करती थी । अब वह न वह विमान है, न स्वर्ग। मैं अपनी सारी निधि खोकर दया की भिक्षा पर पड़ी हुई हूँ। क्यों चम्पा, तू भी कुछ देखती है बाबूजी के स्वभाव में कितना परिवर्तन हो गया है। मुझे ऐसा जान पड़ता है कि अब उन्हें मेरे समीप बैठने में आनन्द नहीं
आता ।
चम्पा नहीं बहूजी, ऐसा न कहें। बाबूजी को मैंने कई बार आपके सिरहाने खड़े रोते देखा है। मुझे देखते ही उन्होंने रूमाल
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यौवन इतना अस्थिर है, इसकी मैंने कल्पना भी न की थी । मानो एक स्वप्न था कि आँख खुलते ही गायब हो गया ! मगर कितना मधुर स्वप्न था! मैं स्वर्ग की अप्सरा की भाँति विमान पर बैठी आकाश में विहार करती थी । अब वह न वह विमान है, न स्वर्ग। मैं अपनी सारी निधि खोकर दया की भिक्षा पर पड़ी हुई हूँ। क्यों चम्पा, तू भी कुछ देखती है बाबूजी के स्वभाव में कितना परिवर्तन हो गया है। मुझे ऐसा जान पड़ता है कि अब उन्हें मेरे समीप बैठने में आनन्द नहीं आता । चम्पा नहीं बहूजी, ऐसा न कहें। बाबूजी को मैंने कई बार आपके सिरहाने खड़े रोते देखा है। मुझे देखते ही उन्होंने रूमाल
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। उाढांद के केन्दीय अध्यक्ष त्रिवेन्द सिंह पंवार ने एक बार फिर से दिवाकर गुट पर अपना नजला निकालते हुये उनके गुट को पूरी तरह से असंवैधानिक "हराया है। पंवार ने कहा है कि उाढांद का पत्येक कार्यकर्ता पूरे राज्य में गांव-गांव व गली मौहल्ले जाकर सदस्यता अभियान चला रहा है। और आगामी विधानसभा चुनाव 2012 के लिये अपनी सभी चुनावी तैयारियों में जुट गया है। त्रिवेन्द पंवार ने कहा है कि उत्तराखण्ड ाढांिन्त दल का जनाधार राज्य भर में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और विरोधियों द्वारा दल का बाल भी बांका नहीं किया जा सकता है। उन्होने कहा कि राज्य के सभी 70 विधानसभा सीटों पर इस बार उाढांद अपनी पूरी ताकत- बाहुबल के साथ चुनाव लड़ेगा जिसके लिये सभी तैयारियां अभी से पारम्भ कर दी गई है। दल के सभी कार्यकर्ताओं का पदेशभर में आहवान किया गया है कि वे जनता जनार्धन के बीच जाकर उाढांद की पारदर्शी छवी व उसकी नितियों से लोगों को अवगत कराये। यही नहीं जनता को दल का पत्येक कार्यकर्ता अपने अपने जनपदों, ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पदेश भाजपा सरकार व अन्य राष्ट्रीय दलों की धोखेबाज नीतियों से भी अवगत करायें ताकि पदेश की जनता को राज्य के राष्ट्रीय दलों की असलियत पता चल सके। मैगा मार्ट के डकैतों पर गैंगस्टर की कार्रवाई देहरादून। दीपावली से एक रात पूर्व विशाल मेगा मार्ट में डकैती डालने वाले गिरोह के सदस्यें पर पुलिस ने गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की है। अध्कांश आरोपी जेल के पीछे भेजे जा चुके हैं। हालांकि लूटा गयी रकम का अभी भी पूरी तरह से पता नहीं लग पाया है। मालूम हो कि ध्नतेरस की रात राजपुर रोड स्थित विशाल मेगा मार्ट में लाखों रूपए की लूट को अंजाम दिया गया था। लूट में मार्ट के ही एक पबंध्क का हाथ होना सामने आया था।
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। उाढांद के केन्दीय अध्यक्ष त्रिवेन्द सिंह पंवार ने एक बार फिर से दिवाकर गुट पर अपना नजला निकालते हुये उनके गुट को पूरी तरह से असंवैधानिक "हराया है। पंवार ने कहा है कि उाढांद का पत्येक कार्यकर्ता पूरे राज्य में गांव-गांव व गली मौहल्ले जाकर सदस्यता अभियान चला रहा है। और आगामी विधानसभा चुनाव दो हज़ार बारह के लिये अपनी सभी चुनावी तैयारियों में जुट गया है। त्रिवेन्द पंवार ने कहा है कि उत्तराखण्ड ाढांिन्त दल का जनाधार राज्य भर में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और विरोधियों द्वारा दल का बाल भी बांका नहीं किया जा सकता है। उन्होने कहा कि राज्य के सभी सत्तर विधानसभा सीटों पर इस बार उाढांद अपनी पूरी ताकत- बाहुबल के साथ चुनाव लड़ेगा जिसके लिये सभी तैयारियां अभी से पारम्भ कर दी गई है। दल के सभी कार्यकर्ताओं का पदेशभर में आहवान किया गया है कि वे जनता जनार्धन के बीच जाकर उाढांद की पारदर्शी छवी व उसकी नितियों से लोगों को अवगत कराये। यही नहीं जनता को दल का पत्येक कार्यकर्ता अपने अपने जनपदों, ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पदेश भाजपा सरकार व अन्य राष्ट्रीय दलों की धोखेबाज नीतियों से भी अवगत करायें ताकि पदेश की जनता को राज्य के राष्ट्रीय दलों की असलियत पता चल सके। मैगा मार्ट के डकैतों पर गैंगस्टर की कार्रवाई देहरादून। दीपावली से एक रात पूर्व विशाल मेगा मार्ट में डकैती डालने वाले गिरोह के सदस्यें पर पुलिस ने गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की है। अध्कांश आरोपी जेल के पीछे भेजे जा चुके हैं। हालांकि लूटा गयी रकम का अभी भी पूरी तरह से पता नहीं लग पाया है। मालूम हो कि ध्नतेरस की रात राजपुर रोड स्थित विशाल मेगा मार्ट में लाखों रूपए की लूट को अंजाम दिया गया था। लूट में मार्ट के ही एक पबंध्क का हाथ होना सामने आया था।
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Trent Boult: IPL 2023 में इस समय आरसीबी और राजस्थान राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबला खेला जा रहा है. इस मैच में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय किया है. इस मैच में ट्रेंट बोल्ट ने कमाल का प्रदर्शन किया है. उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का दिल जीत लिया. बेहतरीन गेंदबाजी से उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. आइए जानते हैं, इसके बारे में.
ट्रेंट बोल्ट ने आरसीबी के विरूद्ध पहली ही गेंद पर विराट कोहली को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद उन्होंने शाहबाज अहमद को भी आउट किया. कोहली का विकेट झटकते ही उनके आईपीएल में 100 विकेट पूरे हो गए हैं. बोल्ट पारी की आरंभ में ही घातक गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं. उनके पास वह काबिलियत है कि वो किसी भी बल्लेबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकते हैं. वह आईपीएल में सबसे तेज 100 विकेट पूरे करने के मुद्दे में 8वें गेंदबाज बने हैं.
आईपीएल में सबसे तेज 100 विकेट पूरे करने वाले गेंदबाजः
ट्रेंट बोल्ट वर्ष 2015 से ही आईपीएल में खेल रहे हैं. वह आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद, कोलकाता नाइट राइडर्स, दिल्ली कैपिटल्स, मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेल चुके हैं. उन्होंने आईपीएल के 84 मैचों में 101 विकेट हासिल किए हैं. 18 रन देकर 4 विकेट हासिल करना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है.
ट्रेंट बोल्ट पहले ओवर में विकेट चटकाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अभी तक पहले ओवर में 21 विकेट अपने नाम किए हैं. वह दूसरे नंबर पर हैं. वहीं, भुवनेश्वर कुमार ने 22 विकेट अपने नाम किए हैं. वह पहले नंबर पर पहुंच गए हैं.
IPL के पहले ओवर में सबसे अधिक विकेट हासिल करने वाले गेंदबाजः
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Trent Boult: IPL दो हज़ार तेईस में इस समय आरसीबी और राजस्थान राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबला खेला जा रहा है. इस मैच में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय किया है. इस मैच में ट्रेंट बोल्ट ने कमाल का प्रदर्शन किया है. उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का दिल जीत लिया. बेहतरीन गेंदबाजी से उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. आइए जानते हैं, इसके बारे में. ट्रेंट बोल्ट ने आरसीबी के विरूद्ध पहली ही गेंद पर विराट कोहली को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद उन्होंने शाहबाज अहमद को भी आउट किया. कोहली का विकेट झटकते ही उनके आईपीएल में एक सौ विकेट पूरे हो गए हैं. बोल्ट पारी की आरंभ में ही घातक गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं. उनके पास वह काबिलियत है कि वो किसी भी बल्लेबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकते हैं. वह आईपीएल में सबसे तेज एक सौ विकेट पूरे करने के मुद्दे में आठवें गेंदबाज बने हैं. आईपीएल में सबसे तेज एक सौ विकेट पूरे करने वाले गेंदबाजः ट्रेंट बोल्ट वर्ष दो हज़ार पंद्रह से ही आईपीएल में खेल रहे हैं. वह आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद, कोलकाता नाइट राइडर्स, दिल्ली कैपिटल्स, मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेल चुके हैं. उन्होंने आईपीएल के चौरासी मैचों में एक सौ एक विकेट हासिल किए हैं. अट्ठारह रन देकर चार विकेट हासिल करना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है. ट्रेंट बोल्ट पहले ओवर में विकेट चटकाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अभी तक पहले ओवर में इक्कीस विकेट अपने नाम किए हैं. वह दूसरे नंबर पर हैं. वहीं, भुवनेश्वर कुमार ने बाईस विकेट अपने नाम किए हैं. वह पहले नंबर पर पहुंच गए हैं. IPL के पहले ओवर में सबसे अधिक विकेट हासिल करने वाले गेंदबाजः
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आज हमारे ध्यान घुमक्कड़ Wiejar Nicolla 2 1 में प्रस्तुत किया जाएगा इस उत्पाद को रुचि माता पिता। अपने आप में बच्चे को गाड़ी के चयन के बाद इतना आसान नहीं है। तो अगर आप कई मॉडल, विकल्प और विन्यास के लिए ध्यान देना चाहिए। क्या Wiejar Nicolla के बारे में? इस क्रम में इसे खरीदने के लिए उत्पादों के योग्य है? खरीदारों की आपकी राय क्या हुआ है? के बारे में व्हीलचेयर Wiejar Nicolla सभी अपने ध्यान में प्रस्तुत किया जाएगा। और केवल आप सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं के एक अध्ययन के बाद एक निष्कर्ष कर सकते हैंः यह एक अच्छा डिजाइन है या नहीं।
क्या पहली बार में देखा? बेशक, सिर्फ घुमक्कड़ की उपस्थिति। मैं एक उत्पाद है कि भयानक, बदसूरत लगेगा खरीदने के लिए नहीं करना चाहती। तो इस सुविधा पर ध्यान दें। सबसे महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन यह होती है। इस संबंध में, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla (2 1 में) अपने ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करता है। आप तामझाम के बिना एक सस्ती, स्टाइलिश डिजाइन, लेकिन क्षमता ध्यान आकर्षित करने के खरीद सकते हैं। कोई ज़रूरत से ज़्यादा विवरण, कुछ भी नहीं असाधारण। केवल अतिसूक्ष्मवाद, जिनके साथ हाल ही में buggies का विमोचन किया।
अगर हम प्रस्तावित रंग के बारे में बात करते हैं, वरीयता प्राकृतिक, मुलायम पैलेट को दिया जाता है। आप एक की जरूरत है एक लड़के के लिए घुमक्कड़? हो सकता है कि लड़कियों के लिए? या फिर आप सार्वभौमिक करना चाहते हैं? यह सब Wiejar Nicolla के लिए एक समस्या नहीं है। आप हर स्वाद के लिए विकल्प मिल सकता है। और यह निर्णय कई प्रसन्न। कोई समस्या नहीं है माल है, जो "सवारी" बच्चों की कुछ पीढ़ियों में सक्षम हो जाएगा लेने जाएगा!
बेशक, बच्चों के सहायक यदि अन्य विशेषताओं कई वर्षों के लिए डिजाइन के उपयोग की अनुमति भी दस साल सेवा कर सकते हैं। किसी भी व्हीलचेयर पहियों खेलने में काफी महत्व की। सब के बाद, उनमें से कीमत पर प्रत्यक्ष आंदोलन प्रदान करता है। 1 में व्हीलचेयर Wiejar Nicolla 2 चार बड़े गैर घूर्णन योग्य पहियों है। वे inflatable, रबर हैं। इसी समय, निर्माता का आश्वासन दिया, वे पूरी तरह से हटा दिया जाता है। और, फिर, उस स्थिति में, की जगह उन्हें मुश्किल नहीं होगा। बहुत अच्छा प्रदर्शन।
उत्पाद की समीक्षा के लिए पहियों सकारात्मक रहे हैं। सामान्य तौर पर, ग्राहकों को संतुष्ट कर रहे हैं। वे उच्च गुणवत्ता वाले टायर कि ठंड के मौसम में दरार नहीं है और समय-समय पर तोड़ने नहीं होगा मिलता है। आंदोलन चिकनी प्राप्त और समन्वित है। न तो टक्कर नवजात परेशान नहीं करेगा। आप की जरूरत क्या!
हम ध्यान और सामान्य घटकों भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, चेसिस और फ्रेम पर। लड़का या लड़की के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता घुमक्कड़ - अभी भी मुख्य विशेषताएं एक समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चेसिस और फ्रेम एक अपवाद नहीं है। इस मामले में, ग्राहक समीक्षाओं अलग होती है। क्यों? Wiejar Nicolla एक धातु फ्रेम, तंत्र पुस्तक से सुसज्जित है। लेकिन अब उसकी प्लास्टिक खत्म। बल्कि है कि क्या की तुलना में यह तापमान चरम सीमाओं से दरार जाएगाः यह आपको आश्चर्य बनाता है? तो कुछ माता पिता फ्रेम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
वास्तव में, यह गुणवत्ता से अधिक है। प्रैम Wiejar Nicolla तापमान, कोई सूरज, कोई ठंढ या नमी से डरते नहीं हैं। और यह प्रसन्न। चेसिस के नीचे स्थित केवल यहां खरीदारी के लिए एक विशेष टोकरी है। उसके प्रैम के दौरान सबसे अच्छा समीक्षा नहीं हैं। सब के बाद, हम एक धातु टोकरी के साथ काम कर रहे हैं। सबसे माता पिता के लिए भी सुविधाजनक नहीं है। केवल यहां खरीदारी की टोकरी बहुत महत्वपूर्ण सुविधा नहीं है। यह के कारण, यह सामान्य रूप में व्हीलचेयर की खरीद का परित्याग करने के लिए आवश्यक नहीं है।
कहीं अधिक महत्वपूर्ण सीधे ब्लॉकों की पेशकश कर रहे। उन्हें के कारण बच्चे के आराम और निर्माण में सुरक्षा द्वारा प्रदान किया जाएगा। Wiejar Nicolla की समीक्षा करता है इस क्षेत्र में अच्छा कमाता है। सर्वश्रेष्ठ नहीं है, लेकिन वे minuses की तुलना में अधिक प्लस को दर्शाते हैं।
Wiejar Nicolla पर पालना (2 1 में), बड़े बड़े और हल्के। यह भी बच्चा छह महीने पुरानी फिट बैठता है। इस तरह के एक लाभ का दावा कर सकते हैं, नहीं सभी निर्माताओं। आप चिंता नहीं करनी चाहिए तो, कि पालने असहज में एक बच्चे होने के लिए बहुत बड़ा है।
लेकिन सैर पर के रूप में ग्राहकों से अलग राय का विकास किया। क्यों? किसी का कहना है कि यह बहुत अच्छा है। आप प्रदर्शन को देखें, तो जिस तरह से यह है। यहां भी एक समायोज्य backrest (4 पदों), और बच्चे के लिए एक पांच सूत्री सुरक्षा पट्टियों, और बच्चे के सामने क्रॉसबार, जो आसानी से हटाया जा सकता है और संलग्न है। लेकिन उस बच्चे के लिए एक पूरी नहीं बहुत आरामदायक इस ब्लॉक में बैठने के लिए है। माता पिता बच्चों के आसपास uneasily जल्दी से मैदान में ले जाकर, बेल्ट का कहना है। इस मॉडल के लिए एक बड़ा बच्चा - यह सब परेशानी है। हालांकि, कुछ का दावा है कि घुमक्कड़ Wiejar Nicolla, 2 1 में, नवजात शिशुओं के लिए एकदम सही है, और सयाना बच्चों के लिए। किसे विश्वास करने के लिए? यह आप पर निर्भर है। किसी भी मामले में, यह ध्यान दिया जाता है कि पैदल दूरी पर वास्तव में बहुत सुविधाजनक नहीं है। यह करने के लिए अनुकूलित और आप आदत हो सकता है, लेकिन मैं करना चाहिए?
क्या एक व्हीलचेयर में है - यह भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है। सब के बाद, आप हमेशा डिवाइस खरीदना चाहते हैं न केवल बहुमुखी, लेकिन यह भी एक पूरा सेट है। जरूरत घटकों का उपयोग कर सकता है के मामले में। विशेष रूप से इस सवाल का 1, 2 में 3 मॉडल में 1 और ट्रांसफॉर्मर के बारे में है।
इस क्षेत्र में, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla 2 1 मिश्रित समीक्षा हो जाता है। बात कोई बच्चों के परिवहन है कि यहाँ नहीं है। यदि आपके पास एक नवजात शिशु कठिनाई होगा। लेकिन वहाँ एक बरसाती, मां के लिए बैग, पैरों पर एक केप, मच्छरदानी और एक विशेष सूरज छाया है। सिद्धांत रूप में, उत्पाद के बारे में माता-पिता की राय पर अधिक प्रभाव नहीं ले जाने की कमी है।
लेकिन अगर आप एक अधूरी पूरा सेट मिल गया है, सकारात्मक राय इस उत्पाद पर नहीं पाया जा सकता। सौभाग्य से, निर्माताओं इस मामले में काफी व्यावहारिक हैं। यह वास्तव में माता-पिता सभी मूलभूत आवश्यकताओं की एक लगभग पूरा सेट देता है। के अपवाद के साथ एक नवजात शिशु के लिए ले जा रहा।
यह भी एक अच्छा विचार रखरखाव और माल के भंडारण में आसानी मूल्यांकन करना है। यह सबसे स्ट्रॉलर और बच्चे के रूप में महत्वपूर्ण नहीं है के रूप में माता-पिता के लिए एक मजबूत तर्क है। मैं सावधानी से पीड़ित हैं या जहां बच्चे के साथ टहलने के बाद व्हीलचेयर डाल करने के बारे में सोचने के लिए लंबी करने के लिए नहीं चाहता!
इस अर्थ में, Wiejar Nicolla वास्तव में अच्छा। यह ध्यान दिया जाता है कि ब्लॉक में घटकों हटाया नहीं जा सकता। इस तरह के एक निर्णय माता-पिता शुरू में बंद कर दिया। बस अपना समय ले! सबसे पहले समझने के लिए निम्न प्रयास करेंः एक साधारण कपड़े (गीला) आप बिना किसी समस्या के कपड़े संरचना साफ कर सकते हैं का उपयोग कर। इस पूरी देखभाल और सीमित। पहियों, के रूप में कहा गया है, आसानी से हटाया और धोया जा सकता है। इस प्रकार, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla 2 1 में - माता पिता जो भारी देखभाल करने के लिए डिजाइन नहीं करना चाहते के लिए एकदम सही समाधान।
और भंडारण स्थिति की दृष्टि से सबसे साथियों के रूप में ही है। आप गाड़ी disassembled (स्थानों लेता है एक बिट) या तो व्यक्तिगत रूप ब्लॉकों को अलग कर एक दूसरे से चेसिस स्टोर कर सकते हैं। और फिर वहाँ में डाल करने के लिए है, जहां यह सुविधाजनक है। भंडारण के साथ कोई समस्या नहीं है, या तो परिवहन के साथ! किसी भी माता-पिता के लिए मनभावन क्षणों!
हमारे वर्तमान उत्पाद का मुख्य लाभ - यह है कि यह सार्वभौमिक है। इसके अलावा, हर अर्थ में। हम बच्चों की उम्र और मौसम के बारे में बात कर रहे हैं। मल्टी मॉड्यूलर घुमक्कड़ Wiejar Nicolla - माता पिता जो बच्चों के वाहन की पसंद से अधिक लंबे समय तक सोचने के लिए नहीं करना चाहते हैं के लिए सही उपहार।
आप चेसिस पालना करने के लिए संलग्न करने के लिए सक्षम हो जाएगा - और यहाँ एक है एक नवजात शिशु के लिए घुमक्कड़! तो फिर "सैर" के संस्करण के लिए बदल - एक सार्वभौमिक डिजाइन, चलने के लिए अनुकूलित है। यदि आप चाहते हैं, कार की सीट देते हैं। एक नवजात शिशु के लिए एक अच्छा प्रतिस्थापन घुमक्कड़ सीट प्राप्त करें। और नहीं लगता कि छह महीने बाद आप एक नए डिजाइन चुनना है कि है। Wiejar Nicolla एक बच्चे के जीवन के पहले 4 साल में आविष्कार किया!
मौसम के बारे में और हम बात नहीं कर रहे। बाद कपड़े ब्लॉक के साथ कवर किया जाता है, पूरी तरह से ठंड के मौसम में गर्मी बरकरार रखती है, और गर्मियों में एक सुखद ठंडक प्रदान करता है। यही कारण है कि, तो बस शीर्ष पर है तापमान शासन! प्रत्यक्षता व्हीलचेयर Wiejar Nicolla भी महान। वे कोई बर्फ, कोई बर्फ, कोई देश, कोई गंदगी या नमी से डरते नहीं हैं। और बड़े रबर पहियों और inflatable को यह सब धन्यवाद!
Wiejar निकोला प्राइस में, किसी भी घुमक्कड़ की तरह, भी, लोकप्रियता और मांग मॉडल पर अपनी छाप छोड़ देता है। हमारे मामले में, ग्राहकों को और अधिक संतुष्ट हैं। बाद माल एक बजट विकल्प बच्चों के लिए सार्वभौमिक व्हीलचेयर माना जाता है। बस तथ्य यह है कि इतने सारे माता-पिता की तलाश कर रहे! निर्माण 20-22 हजार rubles के एक औसत खर्च होंगे। एक सार्वभौमिक घुमक्कड़ है कि साल के किसी भी समय किया जा सकता है के लिए बहुत महंगा नहीं है। और यह जाहिर है, प्रसन्न। हम कह सकते हैं कि इन सस्ती घुमक्कड़ - हमारे समय में एक दुर्लभ वस्तु। विशेष रूप से गुणवत्ता पर विचार!
क्या पूर्वगामी निष्कर्ष से खींचा जा सकता है? माता-पिता को आम तौर पर Wiejar Nicolla संतुष्ट हैं। और उस के लिए आप संरचना पर ध्यान देना कर सकते हैं। और अगर आप सस्ते स्ट्रॉलर है, जो बच्चे की किसी भी उम्र है, तो इस उत्पाद के लिए उपयुक्त हैं में रुचि रखते हैं - कोई वास्तविक गिफ्ट। निश्चित रूप से, यह ध्यान के योग्य है।
इस घुमक्कड़ आप निराश नहीं होंगे। वैसे भी, ताकि खरीदार के बहुमत कहते हैं। इकट्ठे बहुत भारी (15 किलो) के डिजाइन, लेकिन यह इसके लायक है। आप अपनी सुविधाओं के सभी देख सकते हैं के रूप में वास्तव में अच्छा। इसकी खामियों के साथ, लेकिन वे सभी सुलभ होता है।
तो अगर आप कई वर्षों के लिए एक बहुमुखी उत्पाद के लिए देख रहे हैं, Wiejar Nicolla पर एक नज़र डालें। सस्ती बजट "रोवर" आप उदासीन नहीं छोड़ देंगे!
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आज हमारे ध्यान घुमक्कड़ Wiejar Nicolla दो एक में प्रस्तुत किया जाएगा इस उत्पाद को रुचि माता पिता। अपने आप में बच्चे को गाड़ी के चयन के बाद इतना आसान नहीं है। तो अगर आप कई मॉडल, विकल्प और विन्यास के लिए ध्यान देना चाहिए। क्या Wiejar Nicolla के बारे में? इस क्रम में इसे खरीदने के लिए उत्पादों के योग्य है? खरीदारों की आपकी राय क्या हुआ है? के बारे में व्हीलचेयर Wiejar Nicolla सभी अपने ध्यान में प्रस्तुत किया जाएगा। और केवल आप सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं के एक अध्ययन के बाद एक निष्कर्ष कर सकते हैंः यह एक अच्छा डिजाइन है या नहीं। क्या पहली बार में देखा? बेशक, सिर्फ घुमक्कड़ की उपस्थिति। मैं एक उत्पाद है कि भयानक, बदसूरत लगेगा खरीदने के लिए नहीं करना चाहती। तो इस सुविधा पर ध्यान दें। सबसे महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन यह होती है। इस संबंध में, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla अपने ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करता है। आप तामझाम के बिना एक सस्ती, स्टाइलिश डिजाइन, लेकिन क्षमता ध्यान आकर्षित करने के खरीद सकते हैं। कोई ज़रूरत से ज़्यादा विवरण, कुछ भी नहीं असाधारण। केवल अतिसूक्ष्मवाद, जिनके साथ हाल ही में buggies का विमोचन किया। अगर हम प्रस्तावित रंग के बारे में बात करते हैं, वरीयता प्राकृतिक, मुलायम पैलेट को दिया जाता है। आप एक की जरूरत है एक लड़के के लिए घुमक्कड़? हो सकता है कि लड़कियों के लिए? या फिर आप सार्वभौमिक करना चाहते हैं? यह सब Wiejar Nicolla के लिए एक समस्या नहीं है। आप हर स्वाद के लिए विकल्प मिल सकता है। और यह निर्णय कई प्रसन्न। कोई समस्या नहीं है माल है, जो "सवारी" बच्चों की कुछ पीढ़ियों में सक्षम हो जाएगा लेने जाएगा! बेशक, बच्चों के सहायक यदि अन्य विशेषताओं कई वर्षों के लिए डिजाइन के उपयोग की अनुमति भी दस साल सेवा कर सकते हैं। किसी भी व्हीलचेयर पहियों खेलने में काफी महत्व की। सब के बाद, उनमें से कीमत पर प्रत्यक्ष आंदोलन प्रदान करता है। एक में व्हीलचेयर Wiejar Nicolla दो चार बड़े गैर घूर्णन योग्य पहियों है। वे inflatable, रबर हैं। इसी समय, निर्माता का आश्वासन दिया, वे पूरी तरह से हटा दिया जाता है। और, फिर, उस स्थिति में, की जगह उन्हें मुश्किल नहीं होगा। बहुत अच्छा प्रदर्शन। उत्पाद की समीक्षा के लिए पहियों सकारात्मक रहे हैं। सामान्य तौर पर, ग्राहकों को संतुष्ट कर रहे हैं। वे उच्च गुणवत्ता वाले टायर कि ठंड के मौसम में दरार नहीं है और समय-समय पर तोड़ने नहीं होगा मिलता है। आंदोलन चिकनी प्राप्त और समन्वित है। न तो टक्कर नवजात परेशान नहीं करेगा। आप की जरूरत क्या! हम ध्यान और सामान्य घटकों भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, चेसिस और फ्रेम पर। लड़का या लड़की के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता घुमक्कड़ - अभी भी मुख्य विशेषताएं एक समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चेसिस और फ्रेम एक अपवाद नहीं है। इस मामले में, ग्राहक समीक्षाओं अलग होती है। क्यों? Wiejar Nicolla एक धातु फ्रेम, तंत्र पुस्तक से सुसज्जित है। लेकिन अब उसकी प्लास्टिक खत्म। बल्कि है कि क्या की तुलना में यह तापमान चरम सीमाओं से दरार जाएगाः यह आपको आश्चर्य बनाता है? तो कुछ माता पिता फ्रेम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। वास्तव में, यह गुणवत्ता से अधिक है। प्रैम Wiejar Nicolla तापमान, कोई सूरज, कोई ठंढ या नमी से डरते नहीं हैं। और यह प्रसन्न। चेसिस के नीचे स्थित केवल यहां खरीदारी के लिए एक विशेष टोकरी है। उसके प्रैम के दौरान सबसे अच्छा समीक्षा नहीं हैं। सब के बाद, हम एक धातु टोकरी के साथ काम कर रहे हैं। सबसे माता पिता के लिए भी सुविधाजनक नहीं है। केवल यहां खरीदारी की टोकरी बहुत महत्वपूर्ण सुविधा नहीं है। यह के कारण, यह सामान्य रूप में व्हीलचेयर की खरीद का परित्याग करने के लिए आवश्यक नहीं है। कहीं अधिक महत्वपूर्ण सीधे ब्लॉकों की पेशकश कर रहे। उन्हें के कारण बच्चे के आराम और निर्माण में सुरक्षा द्वारा प्रदान किया जाएगा। Wiejar Nicolla की समीक्षा करता है इस क्षेत्र में अच्छा कमाता है। सर्वश्रेष्ठ नहीं है, लेकिन वे minuses की तुलना में अधिक प्लस को दर्शाते हैं। Wiejar Nicolla पर पालना , बड़े बड़े और हल्के। यह भी बच्चा छह महीने पुरानी फिट बैठता है। इस तरह के एक लाभ का दावा कर सकते हैं, नहीं सभी निर्माताओं। आप चिंता नहीं करनी चाहिए तो, कि पालने असहज में एक बच्चे होने के लिए बहुत बड़ा है। लेकिन सैर पर के रूप में ग्राहकों से अलग राय का विकास किया। क्यों? किसी का कहना है कि यह बहुत अच्छा है। आप प्रदर्शन को देखें, तो जिस तरह से यह है। यहां भी एक समायोज्य backrest , और बच्चे के लिए एक पांच सूत्री सुरक्षा पट्टियों, और बच्चे के सामने क्रॉसबार, जो आसानी से हटाया जा सकता है और संलग्न है। लेकिन उस बच्चे के लिए एक पूरी नहीं बहुत आरामदायक इस ब्लॉक में बैठने के लिए है। माता पिता बच्चों के आसपास uneasily जल्दी से मैदान में ले जाकर, बेल्ट का कहना है। इस मॉडल के लिए एक बड़ा बच्चा - यह सब परेशानी है। हालांकि, कुछ का दावा है कि घुमक्कड़ Wiejar Nicolla, दो एक में, नवजात शिशुओं के लिए एकदम सही है, और सयाना बच्चों के लिए। किसे विश्वास करने के लिए? यह आप पर निर्भर है। किसी भी मामले में, यह ध्यान दिया जाता है कि पैदल दूरी पर वास्तव में बहुत सुविधाजनक नहीं है। यह करने के लिए अनुकूलित और आप आदत हो सकता है, लेकिन मैं करना चाहिए? क्या एक व्हीलचेयर में है - यह भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है। सब के बाद, आप हमेशा डिवाइस खरीदना चाहते हैं न केवल बहुमुखी, लेकिन यह भी एक पूरा सेट है। जरूरत घटकों का उपयोग कर सकता है के मामले में। विशेष रूप से इस सवाल का एक, दो में तीन मॉडल में एक और ट्रांसफॉर्मर के बारे में है। इस क्षेत्र में, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla दो एक मिश्रित समीक्षा हो जाता है। बात कोई बच्चों के परिवहन है कि यहाँ नहीं है। यदि आपके पास एक नवजात शिशु कठिनाई होगा। लेकिन वहाँ एक बरसाती, मां के लिए बैग, पैरों पर एक केप, मच्छरदानी और एक विशेष सूरज छाया है। सिद्धांत रूप में, उत्पाद के बारे में माता-पिता की राय पर अधिक प्रभाव नहीं ले जाने की कमी है। लेकिन अगर आप एक अधूरी पूरा सेट मिल गया है, सकारात्मक राय इस उत्पाद पर नहीं पाया जा सकता। सौभाग्य से, निर्माताओं इस मामले में काफी व्यावहारिक हैं। यह वास्तव में माता-पिता सभी मूलभूत आवश्यकताओं की एक लगभग पूरा सेट देता है। के अपवाद के साथ एक नवजात शिशु के लिए ले जा रहा। यह भी एक अच्छा विचार रखरखाव और माल के भंडारण में आसानी मूल्यांकन करना है। यह सबसे स्ट्रॉलर और बच्चे के रूप में महत्वपूर्ण नहीं है के रूप में माता-पिता के लिए एक मजबूत तर्क है। मैं सावधानी से पीड़ित हैं या जहां बच्चे के साथ टहलने के बाद व्हीलचेयर डाल करने के बारे में सोचने के लिए लंबी करने के लिए नहीं चाहता! इस अर्थ में, Wiejar Nicolla वास्तव में अच्छा। यह ध्यान दिया जाता है कि ब्लॉक में घटकों हटाया नहीं जा सकता। इस तरह के एक निर्णय माता-पिता शुरू में बंद कर दिया। बस अपना समय ले! सबसे पहले समझने के लिए निम्न प्रयास करेंः एक साधारण कपड़े आप बिना किसी समस्या के कपड़े संरचना साफ कर सकते हैं का उपयोग कर। इस पूरी देखभाल और सीमित। पहियों, के रूप में कहा गया है, आसानी से हटाया और धोया जा सकता है। इस प्रकार, घुमक्कड़ Wiejar Nicolla दो एक में - माता पिता जो भारी देखभाल करने के लिए डिजाइन नहीं करना चाहते के लिए एकदम सही समाधान। और भंडारण स्थिति की दृष्टि से सबसे साथियों के रूप में ही है। आप गाड़ी disassembled या तो व्यक्तिगत रूप ब्लॉकों को अलग कर एक दूसरे से चेसिस स्टोर कर सकते हैं। और फिर वहाँ में डाल करने के लिए है, जहां यह सुविधाजनक है। भंडारण के साथ कोई समस्या नहीं है, या तो परिवहन के साथ! किसी भी माता-पिता के लिए मनभावन क्षणों! हमारे वर्तमान उत्पाद का मुख्य लाभ - यह है कि यह सार्वभौमिक है। इसके अलावा, हर अर्थ में। हम बच्चों की उम्र और मौसम के बारे में बात कर रहे हैं। मल्टी मॉड्यूलर घुमक्कड़ Wiejar Nicolla - माता पिता जो बच्चों के वाहन की पसंद से अधिक लंबे समय तक सोचने के लिए नहीं करना चाहते हैं के लिए सही उपहार। आप चेसिस पालना करने के लिए संलग्न करने के लिए सक्षम हो जाएगा - और यहाँ एक है एक नवजात शिशु के लिए घुमक्कड़! तो फिर "सैर" के संस्करण के लिए बदल - एक सार्वभौमिक डिजाइन, चलने के लिए अनुकूलित है। यदि आप चाहते हैं, कार की सीट देते हैं। एक नवजात शिशु के लिए एक अच्छा प्रतिस्थापन घुमक्कड़ सीट प्राप्त करें। और नहीं लगता कि छह महीने बाद आप एक नए डिजाइन चुनना है कि है। Wiejar Nicolla एक बच्चे के जीवन के पहले चार साल में आविष्कार किया! मौसम के बारे में और हम बात नहीं कर रहे। बाद कपड़े ब्लॉक के साथ कवर किया जाता है, पूरी तरह से ठंड के मौसम में गर्मी बरकरार रखती है, और गर्मियों में एक सुखद ठंडक प्रदान करता है। यही कारण है कि, तो बस शीर्ष पर है तापमान शासन! प्रत्यक्षता व्हीलचेयर Wiejar Nicolla भी महान। वे कोई बर्फ, कोई बर्फ, कोई देश, कोई गंदगी या नमी से डरते नहीं हैं। और बड़े रबर पहियों और inflatable को यह सब धन्यवाद! 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पदों के नाम चीफ रिस्क ऑफिसर, मैनेजर (लीगल), इकोनॉमिक्स और स्ट्रेट्रेजी समेत अन्य पद न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतक आयु 35, 45, 50 व 62 वर्ष पदों के अनुसार अलग अलग है।
कैंडिडेट्स का सेलेक्शन शॉटलिस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। पदों के अनुसार अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। नोटिफिकेशन देखें।
राष्ट्रीय आवास बैंक में अनेक पदों पर भर्तियां चल रही हैं। NHB ने चीफ रिस्क ऑफिसर, मैनेजर (लीगल), इकोनॉमिक्स और स्ट्रेट्रेजी समेत अन्य पद के रिक्त पदों पर आवेदन मांगे हैं।
इन पदों पर अप्लाई करने के लिए लास्ट डेट 28 अगस्त, 2020 निर्धारित की गई है। आइए जानते हैं इन पदों पर आवेदन करने के लिए लास्ट डेट।
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पदों के नाम चीफ रिस्क ऑफिसर, मैनेजर , इकोनॉमिक्स और स्ट्रेट्रेजी समेत अन्य पद न्यूनतम आयु तेईस वर्ष और अधिकतक आयु पैंतीस, पैंतालीस, पचास व बासठ वर्ष पदों के अनुसार अलग अलग है। कैंडिडेट्स का सेलेक्शन शॉटलिस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। पदों के अनुसार अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। नोटिफिकेशन देखें। राष्ट्रीय आवास बैंक में अनेक पदों पर भर्तियां चल रही हैं। NHB ने चीफ रिस्क ऑफिसर, मैनेजर , इकोनॉमिक्स और स्ट्रेट्रेजी समेत अन्य पद के रिक्त पदों पर आवेदन मांगे हैं। इन पदों पर अप्लाई करने के लिए लास्ट डेट अट्ठाईस अगस्त, दो हज़ार बीस निर्धारित की गई है। आइए जानते हैं इन पदों पर आवेदन करने के लिए लास्ट डेट।
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बारां। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रव्यापी आन्दोलन "चलो केरला अभियान" के तहत गुरूवार को राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय बाराँ में केरल चलो अभियान के संयोजक बृजेश यदुवंशी व विभाग संयोजक रोहित नागर के सानिध्य में केरल चलो अभियान के पोस्टर का विमोचन किया गया।
केरल चलो अभियान के सहसंयोजक निशांत तिवारी ने बताया कि आज बाराँ शहर के हाॅस्टलों में पहुँच कर केरल में मार्क्सवादी सरकार द्वारा प्रायोजित नरसंहार के बारे में छात्र-छात्राओं को बताया। वहीं अभाविप के जिला सह संयोजक कोमल मीणा ने बताया केरल की माकपा सरकार की शह पर चल रहे ऐसे दुष्कृत्यों तथा नरसंहारी माकपाई गुंड़ों द्वारा लोकतंत्र व मानवाधिकारों के ऐसे हनन की जितनी कडी़ निंदा की जाए, कम है। हिंसा की इन घटनाओं को न केवल तत्काल रोकने की जरूरत है, बल्कि इन घटनाओं को अंजाम देने वाले ऐसे अपराधी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की आवश्यकता भी है। इस दौरान नगरमंत्री देवेन्द्र सिंह हाड़ा, नगर एस. एफ. डी. संयोजक योगेश शर्मा, जितेन्द्र मीणा, पवन मीणा, कृश्णा पाँचाल समेत कई काॅलेज विद्यार्थी मौजूद रहे।
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बारां। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रव्यापी आन्दोलन "चलो केरला अभियान" के तहत गुरूवार को राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय बाराँ में केरल चलो अभियान के संयोजक बृजेश यदुवंशी व विभाग संयोजक रोहित नागर के सानिध्य में केरल चलो अभियान के पोस्टर का विमोचन किया गया। केरल चलो अभियान के सहसंयोजक निशांत तिवारी ने बताया कि आज बाराँ शहर के हाॅस्टलों में पहुँच कर केरल में मार्क्सवादी सरकार द्वारा प्रायोजित नरसंहार के बारे में छात्र-छात्राओं को बताया। वहीं अभाविप के जिला सह संयोजक कोमल मीणा ने बताया केरल की माकपा सरकार की शह पर चल रहे ऐसे दुष्कृत्यों तथा नरसंहारी माकपाई गुंड़ों द्वारा लोकतंत्र व मानवाधिकारों के ऐसे हनन की जितनी कडी़ निंदा की जाए, कम है। हिंसा की इन घटनाओं को न केवल तत्काल रोकने की जरूरत है, बल्कि इन घटनाओं को अंजाम देने वाले ऐसे अपराधी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की आवश्यकता भी है। इस दौरान नगरमंत्री देवेन्द्र सिंह हाड़ा, नगर एस. एफ. डी. संयोजक योगेश शर्मा, जितेन्द्र मीणा, पवन मीणा, कृश्णा पाँचाल समेत कई काॅलेज विद्यार्थी मौजूद रहे।
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Imlie spoiler alert: पॉपुलर डेलीसोप इमली में हर रोज नए मोड़ आ रहे हैं। कभी मालिनी की चाल सब पर भारी पड़ती नजर आती है। तो कभी इमली और आदित्य नई मुसीबतों में घिर जाते हैं। जल्द ही दोनों के सामने एक और बड़ी परेशानी आने वाली है। दरअसल इमली को आदित्य की नजरों में गिराने के लिए मालिनी एक बड़ी चाल चलेगी। जिससे आदित्य और इमली के रिश्ते में खटास आ सकती है।
आने वाले एपिसोड में दर्शक देखेंगे कि आदित्य एक सुनसान जगह पर जाता है, जहां उसे स्मगलर्स का गैंग नजर आता है। वे एक बड़ी डील कर रहे होते हैं, जो आदित्य देख लेता है। वह इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करता है और वहां से भागने की कोशिश करता है। तभी गुंडे उसे देख लेते हैं। आदित्य किसी तरह वहां से बचकर निकलेगा। वह रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में करेगा। वह इस सबूत को इमली को छुपाने के लिए देगा।
इमली आदित्य का भरोसा कायम रखने के लिए पेन ड्राइव को छुपा देती है। मगर इसका पता मालिनी को चल जाएगा। वह एक चाल चलेगी और ड्राइव चुरा लेगी। एमएल अनु से कहेगा कि वह मालिनी से वीडियो लेकर उसे दे। मालिनी इस वीडियो का फायदा उठाते हुए आदित्य और इमली के रिश्ते में दरार डालने की कोशिश करेगी।
ऐसे में आने वाले एपिसोड में जबरदस्त उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ये देखना दिलचस्प होगा कि मालिनी की चाल को इमली कैसे मात देगी। साथ ही आदित्य के टूटते भरोसे और अपने रिश्ते को कैसे सलामत रखेगी।
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Imlie spoiler alert: पॉपुलर डेलीसोप इमली में हर रोज नए मोड़ आ रहे हैं। कभी मालिनी की चाल सब पर भारी पड़ती नजर आती है। तो कभी इमली और आदित्य नई मुसीबतों में घिर जाते हैं। जल्द ही दोनों के सामने एक और बड़ी परेशानी आने वाली है। दरअसल इमली को आदित्य की नजरों में गिराने के लिए मालिनी एक बड़ी चाल चलेगी। जिससे आदित्य और इमली के रिश्ते में खटास आ सकती है। आने वाले एपिसोड में दर्शक देखेंगे कि आदित्य एक सुनसान जगह पर जाता है, जहां उसे स्मगलर्स का गैंग नजर आता है। वे एक बड़ी डील कर रहे होते हैं, जो आदित्य देख लेता है। वह इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करता है और वहां से भागने की कोशिश करता है। तभी गुंडे उसे देख लेते हैं। आदित्य किसी तरह वहां से बचकर निकलेगा। वह रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में करेगा। वह इस सबूत को इमली को छुपाने के लिए देगा। इमली आदित्य का भरोसा कायम रखने के लिए पेन ड्राइव को छुपा देती है। मगर इसका पता मालिनी को चल जाएगा। वह एक चाल चलेगी और ड्राइव चुरा लेगी। एमएल अनु से कहेगा कि वह मालिनी से वीडियो लेकर उसे दे। मालिनी इस वीडियो का फायदा उठाते हुए आदित्य और इमली के रिश्ते में दरार डालने की कोशिश करेगी। ऐसे में आने वाले एपिसोड में जबरदस्त उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ये देखना दिलचस्प होगा कि मालिनी की चाल को इमली कैसे मात देगी। साथ ही आदित्य के टूटते भरोसे और अपने रिश्ते को कैसे सलामत रखेगी।
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एथेरियमः समर्थन या प्रतिरोध, कौन सा स्तर पहले टूटेगा?
अस्वीकरणः प्रस्तुत की गई जानकारी में वित्तीय, निवेश, व्यापार या अन्य प्रकार की सलाह शामिल नहीं है और केवल लेखक की राय है।
- कम समय सीमा पर ETH का चलन उच्च समय सीमा पर बाजार संरचना से भिन्न होता है।
- विनिमय आपूर्ति में भारी गिरावट से तेजड़ियों को प्रमुख प्रतिरोध को पार करने का मौका मिल सकता है।
Ethereum [ETH] अलग-अलग ऑन-चार्ट आख्यानों के साथ निवेशकों को प्रस्तुत करना जारी रखा। 12-घंटे और दैनिक जैसे उच्च समय सीमा पर, ETH की बाजार संरचना में तेजी बनी रही, क्योंकि ऊपर की ओर रुझान बरकरार रहा। हालांकि, छह घंटे और चार घंटे जैसे कम समय सीमा पर, भालू ने $ 2,128 प्रतिरोध स्तर पर मूल्य अस्वीकृति के कारण बोलबाला किया।
इसने एथेरियम को एक महीने से अधिक समय के लिए एक सीमा में अटका दिया है, क्योंकि इसकी कीमत कार्रवाई के साथ निकटता से मेल खाती है बिटकॉइन का [BTC].
$2,128 प्रतिरोध स्तर पर मूल्य अस्वीकृति ने 12 मई को एथेरियम को $1,774 समर्थन स्तर पर गिरा दिया, जिससे कम समय सीमा पर मंदी की प्रवृत्ति शुरू हो गई। इसने बाद में ETH को $ 1,774 समर्थन और $ 1,924 प्रतिरोध स्तरों के बीच दोलन देखा, जिसमें न तो भालू और न ही बैल दोनों स्तरों को तोड़ने के लिए आवश्यक गति रखते थे।
बाजार की मौजूदा स्थितियों और प्रेस समय के अनुसार $1,848 की मध्य-सीमा पर मूल्य व्यापार के कारण ETH की रेंजिंग गतिविधि जारी रह सकती है। ऑन-चार्ट संकेतक तटस्थता दिखाते हैं, क्योंकि खरीदार और विक्रेता अपनी स्थिति का मूल्यांकन करना जारी रखते हैं।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 6 जून से न्यूट्रल 50 मार्क के ऊपर और नीचे मंडरा रहा है। बाजार की तटस्थ स्थिति को उजागर करने के लिए प्रेस समय के रूप में यह 47 पर खड़ा था। ऑन-बैलेंस वॉल्यूम (OBV) ने अपनी रैखिक गति को बनाए रखा, जबकि चैकिन मनी फ्लो (CMF) +0.03 की थोड़ी सकारात्मक रीडिंग के साथ शून्य अंक के ठीक ऊपर मंडराया।
सपोर्ट या रेजिस्टेंस लेवल में से किसी एक को फिर से टेस्ट करने से बियर्स या बुल्स के लिए महत्वपूर्ण परिणाम मिल सकते हैं, क्योंकि दोनों स्तरों का कई बार परीक्षण किया जा चुका है। $ 1,774 के नीचे एक ब्रेक भालू को $ 1,718 के लिए धक्का देगा। दूसरी तरफ, $ 1,924 के ऊपर एक ब्रेक प्रमुख $ 2,000 के स्तर के लिए बैल को धक्का देगा।
कितना हैं आज के लायक 1,10,100 ईटीएच?
से डेटा भावना ने दिखाया कि 1 मई के बाद से एक्सचेंजों पर ईटीएच की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। इसने बिकवाली के दबाव को कम किया जो सांडों को रैली करने का अवसर दे सकता है।
इसके विपरीत, सक्रिय पतों में वृद्धि ने बढ़ती तेजी की भावना को प्रतिध्वनित किया। इथेरियम पर सक्रिय पते 23 मई को 5.3M से बढ़कर प्रेस समय के अनुसार 5.77M हो गए। फंडिंग दर सकारात्मक रहने के साथ, एक महत्वपूर्ण तेजी का आरोप क्षितिज पर हो सकता है।
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एथेरियमः समर्थन या प्रतिरोध, कौन सा स्तर पहले टूटेगा? अस्वीकरणः प्रस्तुत की गई जानकारी में वित्तीय, निवेश, व्यापार या अन्य प्रकार की सलाह शामिल नहीं है और केवल लेखक की राय है। - कम समय सीमा पर ETH का चलन उच्च समय सीमा पर बाजार संरचना से भिन्न होता है। - विनिमय आपूर्ति में भारी गिरावट से तेजड़ियों को प्रमुख प्रतिरोध को पार करने का मौका मिल सकता है। Ethereum [ETH] अलग-अलग ऑन-चार्ट आख्यानों के साथ निवेशकों को प्रस्तुत करना जारी रखा। बारह-घंटे और दैनिक जैसे उच्च समय सीमा पर, ETH की बाजार संरचना में तेजी बनी रही, क्योंकि ऊपर की ओर रुझान बरकरार रहा। हालांकि, छह घंटे और चार घंटे जैसे कम समय सीमा पर, भालू ने दो डॉलर,एक सौ अट्ठाईस प्रतिरोध स्तर पर मूल्य अस्वीकृति के कारण बोलबाला किया। इसने एथेरियम को एक महीने से अधिक समय के लिए एक सीमा में अटका दिया है, क्योंकि इसकी कीमत कार्रवाई के साथ निकटता से मेल खाती है बिटकॉइन का [BTC]. दो डॉलर,एक सौ अट्ठाईस प्रतिरोध स्तर पर मूल्य अस्वीकृति ने बारह मई को एथेरियम को एक डॉलर,सात सौ चौहत्तर समर्थन स्तर पर गिरा दिया, जिससे कम समय सीमा पर मंदी की प्रवृत्ति शुरू हो गई। इसने बाद में ETH को एक डॉलर,सात सौ चौहत्तर समर्थन और एक डॉलर,नौ सौ चौबीस प्रतिरोध स्तरों के बीच दोलन देखा, जिसमें न तो भालू और न ही बैल दोनों स्तरों को तोड़ने के लिए आवश्यक गति रखते थे। बाजार की मौजूदा स्थितियों और प्रेस समय के अनुसार एक डॉलर,आठ सौ अड़तालीस की मध्य-सीमा पर मूल्य व्यापार के कारण ETH की रेंजिंग गतिविधि जारी रह सकती है। ऑन-चार्ट संकेतक तटस्थता दिखाते हैं, क्योंकि खरीदार और विक्रेता अपनी स्थिति का मूल्यांकन करना जारी रखते हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स छः जून से न्यूट्रल पचास मार्क के ऊपर और नीचे मंडरा रहा है। बाजार की तटस्थ स्थिति को उजागर करने के लिए प्रेस समय के रूप में यह सैंतालीस पर खड़ा था। ऑन-बैलेंस वॉल्यूम ने अपनी रैखिक गति को बनाए रखा, जबकि चैकिन मनी फ्लो +शून्य.तीन की थोड़ी सकारात्मक रीडिंग के साथ शून्य अंक के ठीक ऊपर मंडराया। सपोर्ट या रेजिस्टेंस लेवल में से किसी एक को फिर से टेस्ट करने से बियर्स या बुल्स के लिए महत्वपूर्ण परिणाम मिल सकते हैं, क्योंकि दोनों स्तरों का कई बार परीक्षण किया जा चुका है। एक डॉलर,सात सौ चौहत्तर के नीचे एक ब्रेक भालू को एक डॉलर,सात सौ अट्ठारह के लिए धक्का देगा। दूसरी तरफ, एक डॉलर,नौ सौ चौबीस के ऊपर एक ब्रेक प्रमुख दो डॉलर,शून्य के स्तर के लिए बैल को धक्का देगा। कितना हैं आज के लायक एक,दस,एक सौ ईटीएच? से डेटा भावना ने दिखाया कि एक मई के बाद से एक्सचेंजों पर ईटीएच की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। इसने बिकवाली के दबाव को कम किया जो सांडों को रैली करने का अवसर दे सकता है। इसके विपरीत, सक्रिय पतों में वृद्धि ने बढ़ती तेजी की भावना को प्रतिध्वनित किया। इथेरियम पर सक्रिय पते तेईस मई को पाँच.तीनM से बढ़कर प्रेस समय के अनुसार पाँच.सतहत्तरM हो गए। फंडिंग दर सकारात्मक रहने के साथ, एक महत्वपूर्ण तेजी का आरोप क्षितिज पर हो सकता है।
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शनि को रहस्यमयी ग्रह कहा जाता है। ये ग्रह ही मानव जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करता है। जब ये ग्रह किसी राशि पर टेढ़ी नजर रखता है तो उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं और वहीं जब ये किसी राशि पर प्रसन्न होता है तो उसके वारे-न्यारे कर देता है।
इस राशि के लिए वक्री शनि शुभ फल देने वाला रहेगा। कोर्ट-कचहरी के मामले आपके पक्ष में आ सकते हैं। बिजनेस के लिए की गई यात्राएं सफल और फायदेमंद साबित होंगी। इस समय भावनाओं में आकर कोई निर्णय न लें। गुप्त शत्रु परास्त होंगे। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।
इस राशि के लोग नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो समय उत्तम है। नौकरी में मनचाहा परिवर्तन होने से प्रसन्न बनी रहेगी। इस राशि के लोग धार्मिक कामों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली रहेगी। संतान की सफलता से मन प्रसन्न रहेगा। यात्रा भी सुखमय रहेगी।
इस राशि के लोग बिजनेस से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय इस समय ले सकते हैं, जिससे इनका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सरकारी नौकरी के लिए दिया गया आवेदन स्वीकार हो सकता है। धर्म और आध्यात्म की रूचि बढ़ेगी। विवाद की स्थिति बनने से पहले अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।
इस राशि वालों के लिए शनि का राशि परिवर्तन कई कामों में सफलता दिला सकता है। ये शनि के स्वामित्व की ही राशि है, इसलिए इनके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी। सामाजिक कार्यों से चलते मान-सम्मान भी मिलेगा। ये अच्छे संकेत है इनके भविष्य के लिए। धन लाभ की स्थिति बनती नजर आ रही है।
इस राशि वालों को बिजनेस में मुनाफा होने के योग बन रहे हैं। काफी समय से अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के संकेत बन रहे हैं। यात्रा में भी सफलता मिल सकती है। इस राशि के लोगों के लिए आने वाला समय शुभ फल देने वाला रहेगा।
शनिदेव के मकर राशि में प्रवेश करने से इस राशि के लोगों के जीवन में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इन्हें बिजनेस में मंदी का सामना करना पड़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों का जीवन सामान्य रहेगा, लेकिन इस दौरान बड़े अधिकारियों से वाद-विवाद की स्थिति न बनने दें। व्यापार में नई डील करते समय कागजात अच्छे से पढ़ लें।
वक्री शनि इस राशि के लिए मिला-जुला फल देने वाला रहेगा। इन लोगों की रूचि धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ेगी। इस समय आपके निर्णय भविष्य के लिए सही साबित होंगे। लेकिन अपनी गुप्त योजनाओं के बारे में किसी को न बताएं, नहीं तो बात लीक हो सकती है। परिवार में किसी से विवाद की स्थिति बन सकती है।
आठवें भाव का शनि इस राशि वालों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इन लोगों के सेहत के प्रति सावधान रहना होगा। कोर्ट-कचहरी के मामले बाहर ही सुलझा लें तो बेहतर रहेगा। पैतृक संपत्ति का विवाद गहरा सकता है। क्रोध में आकर कोई गलत निर्णय न लें। हर काम सोच-समझकर करें।
शनि के राशि परिवर्तन से इस राशि वालों को थोड़ी राहत मिल सकती है। बिजनेस में काम पहले से बेहतर होगा, लेकिन पार्टनरशिप करने से बचें। अगर किसी सरकारी काम के लिए टेंडर डाला है तो वो आपको मिल सकता है। दुश्मन आपके विरुद्ध कोई षड़यंत्र रच सकते हैं। इसलिए सावधान रहें।
इस राशि के विद्यार्थियों के लिए शनि का राशि परिवर्तन थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। इनके सामने कोई नई चुनौती आ सकती है। इन्हें अपना लक्ष्य पाने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी। प्रेम संबंधों में भी परेशानी आ सकती है। अधिकारियों की बात मानना ठीक रहेगा। संतान संबंधी चिंता परेशान कर सकती है।
शनि के राशि परिवर्तन से इस राशि वालों को कई क्षेत्रों में सफलता मिलेगी, लेकिन किसी कारण से पारिवारिक कलह और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ेगा। कोई अप्रिय समाचार भी इस दौरान मिल सकता है। परिवार में किसी की सेहत के लेकर दौड़-भाग करनी पड़ सकती है।
इस राशि के लोगों को अत्यधिक खर्च के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उधार दिया पैसा वापस मिलने से थोड़ी राहत मिल सकती है। परिवार में किसी बात पर विवाद की स्थिति बनती नजर आ रही है। सेहत को लेकर भी सावधान रहें। संतान की पढ़ाई परेशानी का कारण बन सकती है।
Sawan 2022: जानिए सावन के सोमवार और मंगला गौरी व्रत की पूरी जानकारी, कब मनाएंगे रक्षाबंधन?
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शनि को रहस्यमयी ग्रह कहा जाता है। ये ग्रह ही मानव जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करता है। जब ये ग्रह किसी राशि पर टेढ़ी नजर रखता है तो उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं और वहीं जब ये किसी राशि पर प्रसन्न होता है तो उसके वारे-न्यारे कर देता है। इस राशि के लिए वक्री शनि शुभ फल देने वाला रहेगा। कोर्ट-कचहरी के मामले आपके पक्ष में आ सकते हैं। बिजनेस के लिए की गई यात्राएं सफल और फायदेमंद साबित होंगी। इस समय भावनाओं में आकर कोई निर्णय न लें। गुप्त शत्रु परास्त होंगे। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। इस राशि के लोग नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो समय उत्तम है। नौकरी में मनचाहा परिवर्तन होने से प्रसन्न बनी रहेगी। इस राशि के लोग धार्मिक कामों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली रहेगी। संतान की सफलता से मन प्रसन्न रहेगा। यात्रा भी सुखमय रहेगी। इस राशि के लोग बिजनेस से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय इस समय ले सकते हैं, जिससे इनका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। सरकारी नौकरी के लिए दिया गया आवेदन स्वीकार हो सकता है। धर्म और आध्यात्म की रूचि बढ़ेगी। विवाद की स्थिति बनने से पहले अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें। इस राशि वालों के लिए शनि का राशि परिवर्तन कई कामों में सफलता दिला सकता है। ये शनि के स्वामित्व की ही राशि है, इसलिए इनके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी। सामाजिक कार्यों से चलते मान-सम्मान भी मिलेगा। ये अच्छे संकेत है इनके भविष्य के लिए। धन लाभ की स्थिति बनती नजर आ रही है। इस राशि वालों को बिजनेस में मुनाफा होने के योग बन रहे हैं। काफी समय से अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के संकेत बन रहे हैं। यात्रा में भी सफलता मिल सकती है। इस राशि के लोगों के लिए आने वाला समय शुभ फल देने वाला रहेगा। शनिदेव के मकर राशि में प्रवेश करने से इस राशि के लोगों के जीवन में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इन्हें बिजनेस में मंदी का सामना करना पड़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों का जीवन सामान्य रहेगा, लेकिन इस दौरान बड़े अधिकारियों से वाद-विवाद की स्थिति न बनने दें। व्यापार में नई डील करते समय कागजात अच्छे से पढ़ लें। वक्री शनि इस राशि के लिए मिला-जुला फल देने वाला रहेगा। इन लोगों की रूचि धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ेगी। इस समय आपके निर्णय भविष्य के लिए सही साबित होंगे। लेकिन अपनी गुप्त योजनाओं के बारे में किसी को न बताएं, नहीं तो बात लीक हो सकती है। परिवार में किसी से विवाद की स्थिति बन सकती है। आठवें भाव का शनि इस राशि वालों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इन लोगों के सेहत के प्रति सावधान रहना होगा। कोर्ट-कचहरी के मामले बाहर ही सुलझा लें तो बेहतर रहेगा। पैतृक संपत्ति का विवाद गहरा सकता है। क्रोध में आकर कोई गलत निर्णय न लें। हर काम सोच-समझकर करें। शनि के राशि परिवर्तन से इस राशि वालों को थोड़ी राहत मिल सकती है। बिजनेस में काम पहले से बेहतर होगा, लेकिन पार्टनरशिप करने से बचें। अगर किसी सरकारी काम के लिए टेंडर डाला है तो वो आपको मिल सकता है। दुश्मन आपके विरुद्ध कोई षड़यंत्र रच सकते हैं। इसलिए सावधान रहें। इस राशि के विद्यार्थियों के लिए शनि का राशि परिवर्तन थोड़ा चिंताजनक हो सकता है। इनके सामने कोई नई चुनौती आ सकती है। इन्हें अपना लक्ष्य पाने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी। प्रेम संबंधों में भी परेशानी आ सकती है। अधिकारियों की बात मानना ठीक रहेगा। संतान संबंधी चिंता परेशान कर सकती है। शनि के राशि परिवर्तन से इस राशि वालों को कई क्षेत्रों में सफलता मिलेगी, लेकिन किसी कारण से पारिवारिक कलह और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ेगा। कोई अप्रिय समाचार भी इस दौरान मिल सकता है। परिवार में किसी की सेहत के लेकर दौड़-भाग करनी पड़ सकती है। इस राशि के लोगों को अत्यधिक खर्च के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उधार दिया पैसा वापस मिलने से थोड़ी राहत मिल सकती है। परिवार में किसी बात पर विवाद की स्थिति बनती नजर आ रही है। सेहत को लेकर भी सावधान रहें। संतान की पढ़ाई परेशानी का कारण बन सकती है। Sawan दो हज़ार बाईस: जानिए सावन के सोमवार और मंगला गौरी व्रत की पूरी जानकारी, कब मनाएंगे रक्षाबंधन? Sawan दो हज़ार बाईस: कितने दिनों का होगा सावन, कब से कब तक रहेगा, चार सोमवार को कौन-कौन से शुभ योग बनेंगे?
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रोधी (Suppressive) चिकित्सा कहते हैं । (ख) क्लोरोकीन (Chloroquine diphosphate nivaquin M, B, Resochin 'Br') की ग्रा. ००१५ की ३ गोली प्रति सप्ताह दी जाती है । ( ग ) कीनीन ( 9 ) ग्रे. १ ए. याद्वि. प्र. दि. देना चाहिये । (घ ) पैलुड्रीन ( Paludrin ) ग्रा. ० १ की १ गो. प्र. दि. या द्वि. प्र. स. या ग्रा. ० ३ की गो. १ प्र. स. दी जाती है । (ड) प्लास्मोकीन ( Plasmoquine ) अत्यधिक विषाक्त है और इस कार्य के लिये प्रयोग नहीं करना चाहिये । पामाकीन ( Pamaquin ) ग्रॅ. े - 3 प्र. दि. दी जाती है ।
हृ उ
(३) विषम ज्वर के जीवाणु (M.P.) नष्ट करने के लिये तथा उनका स्वस्थ मनुष्यके शरीरमे प्रवेश रोकनेके लिये रोगी तथा संवाहक ( Carriers ) को पृथक कर मसहरीमे सुलाना चाहिये । औषधि द्वारा इनकी उपयुक्त चिकित्सा करनी चाहिये तथा इनके शरीर मे जीवाणुग्रो का नाश करना चाहिये । इसके लिये पामाकीन ( Pamaquine ), पैलू ड्रीन (Paludrin ) तथा •प्लास्मोकीन (Plasmoquine ) का प्रयोग करना चाहिये । विषम ज्वर से पीड़ित जनसमुदाय मे रोग की स्थिति जानने के लिये बालको की प्लीहावृद्धि का पता लगाया जाता है । इसको प्लैहिक देपणा ( Splenic index ) कहते हैं । इसी प्रकार मलेरिया के जीवाणु का प्रकोप समझने के लिये प्रत्येक व्यक्ति की रक्त परीक्षा की जाती है, इसको परोपजीवी देषणा (Parasite index ) कहते है । मच्छरो की लालाग्रथि (Salivary glands ) मे विषम उवर के जीवाणु का पता लगाया जाता है । इसको जीवाणु देशणा (Sporozoite index ) कहते हैं । इन तीनो परीक्षाओं के ज्ञान से मरक की वास्तविक स्थिति का ज्ञान होता है और पता चलता है कि शहर के किस भाग मे मलेरिया का प्रकोप अधिक है । जिस भाग मे रोग का प्रकोप अधिक हो उस भाग के लोगो को बराबर मलेरिया के जीवाणुओं को नाश करने वाली औौषधियों देना चाहिये । इसी प्रकार जब किसी मलेरिया से ग्राकान्त स्थान मे अधिक संख्या में नवागन्तुको को कुछ मास निवास करना हो तब नवागन्तुको को बराबर ये औौषधियाँ देते रहना चाहिये । इस विधि का प्रयोग विशेष कर युद्ध के समय सैनिकों मे तथा नवनिर्माण के लिये एकत्रित मजदूरो मे किया जाता है । नागरिको के आर्थिक स्तर में उन्नति करना भी लाभप्रद है ।
( ख ) चिकित्सा :- मलेरिया के रोगी की चिकित्सा मे क्कोनीन (Q )
का सर्व प्रथम स्थान है । इस रोग की यह सर्वोत्तम औषधि है। उपयुक्त मात्रा में ५ दिन इस श्रौपाध का प्रयोग करने से सब प्रकार के मलेरिया का शमन होना अनिवार्य है। विषम ज्वर की संभावना रहने पर रोग की विशिष्ट श्रौषधि प्रारम्भ कर देनी चाहिये । औषधि प्रारम्भ करने के लिये ज्वर का प्राकृत होना आवश्यक नहीं है । रोग की साधारण अवस्था में क्वीनीन का मुख मार्ग से प्रयोग करना चाहिये । यदि वमन, सन्यास
( Coma ) ग्रादि के कारण रोगी मुख से औषधि न ले सके या रोगी की गभीर हो तब पेशीमार्ग ( I. M. ) से इन्जेक्शन लगा सकते हैं अन्यथा इन्जेक्शन का विशेष महत्व नहीं है और यह मार्ग सर्वदा हानिकारक होता है । सिरामार्ग से इंजेक्शन अत्यन्त हानिकारक हो सकता है और । यथासभव इस मार्ग का प्रयोग नहीं करना चाहिए । गभीर अवस्था मे ही सिरामार्ग का प्रयोग करना चाहिये । हृत्पेशोशोथ (Myocarditis) मे क्वीनीन का इन्जेक्शन विशेषरूप से हानिकर है। गर्भावस्था तथा रोगी की प्रत्यात्मक प्रकृति ( Idiosyncrasy ) में कीनीन का प्रयोग निषिद्ध है । इसकी विषाक्तता ( Cinchonism ) के कारण सिर में दर्द, चक्कर कान मे ग्रावाज, वमन, विस्फोट (Rash), पतले दस्त, श्वास लेने मे कष्ट, आदि लक्षण होते है । मध्यकर्ण ( Middle ear ) में विकृति रहने पर रोगी बहरा हो सकता है। देखनेम भी विकृति हो सकती है। यह
ग्रे. ६ की मात्रा मे त्रि. प्र. दि. दी जाती है । इससे अधिक मात्रा मे देने से औषधि के प्रभाव में वृद्धि नही होती । साधारणतः ज्वर उतरते समय या चढने मे के पूर्व इसको देना है । क्वीनीन की मात्रा ( यो ४ ) देने के एक घटा पूर्व क्षारीय घोल ( यो. १ ) देना अच्छा है । रोग के पुनरावर्तन (Relapse) पर कीनीन का विशेष प्रभाव है । प्रारम्भ मे इसको सात दिन देकर सात दिन के लिये चन्द कर देना चाहिये । लगातार कानान देने से रोगी के शरीर में रोगक्षमता ( Immunity ) नहीं बन पाती और औषधि बन्द करने पर ज्वर के पुनरागमन की संभावना रहती है। राग की तो अवस्था में इसको अकेला ही देना अच्छा है देना अच्छा है । ज्वर के समय तथा ज्वर प्राकृत होने के दो दिन पश्चात तक इसको त्रि. प्र. दि. देना चाहिये, तत्पश्चात् द्वि.प्र. दि. भो.प. देना चाहिये । इस प्रकार ७ दिन श्रौपाध देने के पश्चात् ७ दि. बन्द रखना चाहिये तत्पश्चात पुनः ७ दिन तक द्वि. प्र. दि. भो. प. औषधि देकर एक सप्ताह बन्द
कर देना चाहिये तदुपरात एक सप्ताह तक सोने के पूर्व एक बार प्र. दि. औषधि देना चाहिये । इस औषधि की गालियों का प्रायः प्रचूपण नहीं होता और वे मल द्वारा शरीर से निकल जाती हैं। कैप्सूल में रखकर औषधि देने से उसका प्रचूपण भी होता है और पधि का स्वाद भी प्रतीत नहीं होता । साधारणतः कीनीनखल्फ का ही प्रयोग किया जाता है परन्तु क्वीनीन बर्दास्त न होने पर क्वीनीनहाइड्रोब्रोम (Q. hydrobrom) देना चाहिये। क्वीनीन देने के पूर्व कैलसियम, ( Cal), ब्रोमाइड तथा चेलाडोना आदि ( यो. ६ ) देने से क्वीनीन की विषाक्तता के लक्षण होने की संभावना कम रहती है । क्वीनीन की विषाक्तता के लक्षण होने पर भी ये ग्रोपधियाँ ( यो ६ ) दी जाती हैं । कैफीन साइट्स ( यो. ५१ ) प्र. ४ घ. देने से विषाक्तता में कमी होती है । वमन की वस्था मे भी क्वीनीन देना संभव है । इसके लिये किनीन देने के रेघ पूर्व व. एड्रीनलीन ( Adrenalin ) १ : १००० मि. १० मुख से देना चाहिये । कीनान का दुस्वाद कम करने के लिये भागदार घोल ( यो. २) प्रयोग करना चाहिये । जैतून का तेल ( Ol. Olive), लिक्विड पैरफिन ( Liq: paraffin ), मुलहठी का तग्लसत्य ( Ext:glycyrrhiza liq ), ग्जिसरीन (Glycerine) तथा दुग्ध यादि के साथ भी कीनीन देने से उसका दुसाद कम किया जा सकता है। कितीन पेशोमार्ग ( I. M. ) से प्रयोग क ने के पूर्व पिचकारी ( Syringe ) तथा सूई को अच्छी तरह उबाल कर जावाणुरहित कर लेना चाहिये अन्यथा विद्रधि ( Abscess ), धनुर्वात ( Tetanus ) ग्रादि उपद्रवो की सभावना रहती है। इस मार्ग का उपयोग तभी करना चाहिये जब वमन या दस्त के कारण रोगी किनीन को पचा न सके या रोगी वेहोश हो अथवा उसकी अवस्था त गंभीर हो । इस विधि से विनीन देने पर प्रति ८ घटे पर तबतक इजेक्शन लगाना पडता है जबतक रोगी मुख से ग्रौषधि न ले सके । मुग्ब से औौपधि ले सकने की अवस्था हो जाने पर यौपधि मुख से ही देना अच्छा है । पेशीमार्ग ( I. M ) से इन्जेक्शन लगाने के लिये क्विनीन बाडहाइड्रोक्लोर ( Q: bihydrochlor ) या बाइहाइड्रोब्रोमाइड (Q. bihydrobromide ) की ग्रे ६ की २ सी. सी. की मात्रा को पहले ५ या १० सी सी. प. स. मे मिला लेना चाहिये । यह बात ध्यान रखने योग्य है कि मुख मार्गसे प्रायः विनीन की सम्पूर्ण मात्रा का प्रचूपण होता है और इंजेक्शन द्वारा प्र. दि. श्रौषधि की उतनी ही मात्रा की आवश्यकता
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रोधी चिकित्सा कहते हैं । क्लोरोकीन की ग्रा. पंद्रह की तीन गोली प्रति सप्ताह दी जाती है । कीनीन ग्रे. एक ए. याद्वि. प्र. दि. देना चाहिये । पैलुड्रीन ग्रा. शून्य एक की एक गो. प्र. दि. या द्वि. प्र. स. या ग्रा. शून्य तीन की गो. एक प्र. स. दी जाती है । प्लास्मोकीन अत्यधिक विषाक्त है और इस कार्य के लिये प्रयोग नहीं करना चाहिये । पामाकीन ग्रॅ. े - तीन प्र. दि. दी जाती है । हृ उ विषम ज्वर के जीवाणु नष्ट करने के लिये तथा उनका स्वस्थ मनुष्यके शरीरमे प्रवेश रोकनेके लिये रोगी तथा संवाहक को पृथक कर मसहरीमे सुलाना चाहिये । औषधि द्वारा इनकी उपयुक्त चिकित्सा करनी चाहिये तथा इनके शरीर मे जीवाणुग्रो का नाश करना चाहिये । इसके लिये पामाकीन , पैलू ड्रीन तथा •प्लास्मोकीन का प्रयोग करना चाहिये । विषम ज्वर से पीड़ित जनसमुदाय मे रोग की स्थिति जानने के लिये बालको की प्लीहावृद्धि का पता लगाया जाता है । इसको प्लैहिक देपणा कहते हैं । इसी प्रकार मलेरिया के जीवाणु का प्रकोप समझने के लिये प्रत्येक व्यक्ति की रक्त परीक्षा की जाती है, इसको परोपजीवी देषणा कहते है । मच्छरो की लालाग्रथि मे विषम उवर के जीवाणु का पता लगाया जाता है । इसको जीवाणु देशणा कहते हैं । इन तीनो परीक्षाओं के ज्ञान से मरक की वास्तविक स्थिति का ज्ञान होता है और पता चलता है कि शहर के किस भाग मे मलेरिया का प्रकोप अधिक है । जिस भाग मे रोग का प्रकोप अधिक हो उस भाग के लोगो को बराबर मलेरिया के जीवाणुओं को नाश करने वाली औौषधियों देना चाहिये । इसी प्रकार जब किसी मलेरिया से ग्राकान्त स्थान मे अधिक संख्या में नवागन्तुको को कुछ मास निवास करना हो तब नवागन्तुको को बराबर ये औौषधियाँ देते रहना चाहिये । इस विधि का प्रयोग विशेष कर युद्ध के समय सैनिकों मे तथा नवनिर्माण के लिये एकत्रित मजदूरो मे किया जाता है । नागरिको के आर्थिक स्तर में उन्नति करना भी लाभप्रद है । चिकित्सा :- मलेरिया के रोगी की चिकित्सा मे क्कोनीन का सर्व प्रथम स्थान है । इस रोग की यह सर्वोत्तम औषधि है। उपयुक्त मात्रा में पाँच दिन इस श्रौपाध का प्रयोग करने से सब प्रकार के मलेरिया का शमन होना अनिवार्य है। विषम ज्वर की संभावना रहने पर रोग की विशिष्ट श्रौषधि प्रारम्भ कर देनी चाहिये । औषधि प्रारम्भ करने के लिये ज्वर का प्राकृत होना आवश्यक नहीं है । रोग की साधारण अवस्था में क्वीनीन का मुख मार्ग से प्रयोग करना चाहिये । यदि वमन, सन्यास ग्रादि के कारण रोगी मुख से औषधि न ले सके या रोगी की गभीर हो तब पेशीमार्ग से इन्जेक्शन लगा सकते हैं अन्यथा इन्जेक्शन का विशेष महत्व नहीं है और यह मार्ग सर्वदा हानिकारक होता है । सिरामार्ग से इंजेक्शन अत्यन्त हानिकारक हो सकता है और । यथासभव इस मार्ग का प्रयोग नहीं करना चाहिए । गभीर अवस्था मे ही सिरामार्ग का प्रयोग करना चाहिये । हृत्पेशोशोथ मे क्वीनीन का इन्जेक्शन विशेषरूप से हानिकर है। गर्भावस्था तथा रोगी की प्रत्यात्मक प्रकृति में कीनीन का प्रयोग निषिद्ध है । इसकी विषाक्तता के कारण सिर में दर्द, चक्कर कान मे ग्रावाज, वमन, विस्फोट , पतले दस्त, श्वास लेने मे कष्ट, आदि लक्षण होते है । मध्यकर्ण में विकृति रहने पर रोगी बहरा हो सकता है। देखनेम भी विकृति हो सकती है। यह ग्रे. छः की मात्रा मे त्रि. प्र. दि. दी जाती है । इससे अधिक मात्रा मे देने से औषधि के प्रभाव में वृद्धि नही होती । साधारणतः ज्वर उतरते समय या चढने मे के पूर्व इसको देना है । क्वीनीन की मात्रा देने के एक घटा पूर्व क्षारीय घोल देना अच्छा है । रोग के पुनरावर्तन पर कीनीन का विशेष प्रभाव है । प्रारम्भ मे इसको सात दिन देकर सात दिन के लिये चन्द कर देना चाहिये । लगातार कानान देने से रोगी के शरीर में रोगक्षमता नहीं बन पाती और औषधि बन्द करने पर ज्वर के पुनरागमन की संभावना रहती है। राग की तो अवस्था में इसको अकेला ही देना अच्छा है देना अच्छा है । ज्वर के समय तथा ज्वर प्राकृत होने के दो दिन पश्चात तक इसको त्रि. प्र. दि. देना चाहिये, तत्पश्चात् द्वि.प्र. दि. भो.प. देना चाहिये । इस प्रकार सात दिन श्रौपाध देने के पश्चात् सात दि. बन्द रखना चाहिये तत्पश्चात पुनः सात दिन तक द्वि. प्र. दि. भो. प. औषधि देकर एक सप्ताह बन्द कर देना चाहिये तदुपरात एक सप्ताह तक सोने के पूर्व एक बार प्र. दि. औषधि देना चाहिये । इस औषधि की गालियों का प्रायः प्रचूपण नहीं होता और वे मल द्वारा शरीर से निकल जाती हैं। कैप्सूल में रखकर औषधि देने से उसका प्रचूपण भी होता है और पधि का स्वाद भी प्रतीत नहीं होता । साधारणतः कीनीनखल्फ का ही प्रयोग किया जाता है परन्तु क्वीनीन बर्दास्त न होने पर क्वीनीनहाइड्रोब्रोम देना चाहिये। क्वीनीन देने के पूर्व कैलसियम, , ब्रोमाइड तथा चेलाडोना आदि देने से क्वीनीन की विषाक्तता के लक्षण होने की संभावना कम रहती है । क्वीनीन की विषाक्तता के लक्षण होने पर भी ये ग्रोपधियाँ दी जाती हैं । कैफीन साइट्स प्र. चार घ. देने से विषाक्तता में कमी होती है । वमन की वस्था मे भी क्वीनीन देना संभव है । इसके लिये किनीन देने के रेघ पूर्व व. एड्रीनलीन एक : एक हज़ार मि. दस मुख से देना चाहिये । कीनान का दुस्वाद कम करने के लिये भागदार घोल प्रयोग करना चाहिये । जैतून का तेल , लिक्विड पैरफिन , मुलहठी का तग्लसत्य , ग्जिसरीन तथा दुग्ध यादि के साथ भी कीनीन देने से उसका दुसाद कम किया जा सकता है। कितीन पेशोमार्ग से प्रयोग क ने के पूर्व पिचकारी तथा सूई को अच्छी तरह उबाल कर जावाणुरहित कर लेना चाहिये अन्यथा विद्रधि , धनुर्वात ग्रादि उपद्रवो की सभावना रहती है। इस मार्ग का उपयोग तभी करना चाहिये जब वमन या दस्त के कारण रोगी किनीन को पचा न सके या रोगी वेहोश हो अथवा उसकी अवस्था त गंभीर हो । इस विधि से विनीन देने पर प्रति आठ घटे पर तबतक इजेक्शन लगाना पडता है जबतक रोगी मुख से ग्रौषधि न ले सके । मुग्ब से औौपधि ले सकने की अवस्था हो जाने पर यौपधि मुख से ही देना अच्छा है । पेशीमार्ग से इन्जेक्शन लगाने के लिये क्विनीन बाडहाइड्रोक्लोर या बाइहाइड्रोब्रोमाइड की ग्रे छः की दो सी. सी. की मात्रा को पहले पाँच या दस सी सी. प. स. मे मिला लेना चाहिये । यह बात ध्यान रखने योग्य है कि मुख मार्गसे प्रायः विनीन की सम्पूर्ण मात्रा का प्रचूपण होता है और इंजेक्शन द्वारा प्र. दि. श्रौषधि की उतनी ही मात्रा की आवश्यकता
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नैनीताल पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान जंगल में कांबिंग कर शराब की भट्टी तोड़ी गई। वहीं, एक रेस्टोरेंट स्वामी को शराब परोसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
रामनगर में पिरुमदारा चौकी प्रभारी भगवान सिंह महर ने गुलजारपुर के जंगलों में कांबिंग की। इस दौरान शराब बनाने के आरोप में एक व्यक्ति निवासी खरमासा कॉलोनी कुंडेश्वरी थाना काशीपुर उधम सिंह नगर को गिरफ्तार किया गया। मौके पर कच्ची शराब बनाने के उपकरण, 35 लीटर कच्ची शराब व एक मोटरसाइकिल बिना नंबर के बरामद की गई।
थाना चोरगलिया पुलिस ने ग्राम बीचुवा थाना नानकमत्ता जिला उधम सिंह नगर निवासी एक व्यक्ति को 10 लीटर कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया। मुखानी पुलिस ने चेकिंग के दौरान फतेहपुर स्थित हिल्स विव रेस्टोरेंट्स के स्वामी निवासी स्नो व्यू वार्ड नंबर एक मल्लीताल नैनीताल को रेस्टोरेंट में शराब परोसने व पिलाने के अपराध में मोके से गिरफ्तार किया।
मुखानी पुलिस ने ही छडैल चौक से एक व्यक्ति निवासी सैनिक कालोनी थाना मुखानी को 62 पव्वे देशी शराब के साथ गिरफ्तार किया। वहीं, काठगोदाम पुलिस ने एक व्यक्ति निवासी कुंवरपुर देवला तल्ला काठगोदाम को देशी शराब के 54 पव्वों के साथ गिरफ्तार किया। वह स्कूटी से शराब लेकर जा रहा था।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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नैनीताल पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान जंगल में कांबिंग कर शराब की भट्टी तोड़ी गई। वहीं, एक रेस्टोरेंट स्वामी को शराब परोसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। रामनगर में पिरुमदारा चौकी प्रभारी भगवान सिंह महर ने गुलजारपुर के जंगलों में कांबिंग की। इस दौरान शराब बनाने के आरोप में एक व्यक्ति निवासी खरमासा कॉलोनी कुंडेश्वरी थाना काशीपुर उधम सिंह नगर को गिरफ्तार किया गया। मौके पर कच्ची शराब बनाने के उपकरण, पैंतीस लीटरटर कच्ची शराब व एक मोटरसाइकिल बिना नंबर के बरामद की गई। थाना चोरगलिया पुलिस ने ग्राम बीचुवा थाना नानकमत्ता जिला उधम सिंह नगर निवासी एक व्यक्ति को दस लीटरटर कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया। मुखानी पुलिस ने चेकिंग के दौरान फतेहपुर स्थित हिल्स विव रेस्टोरेंट्स के स्वामी निवासी स्नो व्यू वार्ड नंबर एक मल्लीताल नैनीताल को रेस्टोरेंट में शराब परोसने व पिलाने के अपराध में मोके से गिरफ्तार किया। मुखानी पुलिस ने ही छडैल चौक से एक व्यक्ति निवासी सैनिक कालोनी थाना मुखानी को बासठ पव्वे देशी शराब के साथ गिरफ्तार किया। वहीं, काठगोदाम पुलिस ने एक व्यक्ति निवासी कुंवरपुर देवला तल्ला काठगोदाम को देशी शराब के चौवन पव्वों के साथ गिरफ्तार किया। वह स्कूटी से शराब लेकर जा रहा था। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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- राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री उस समय की स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्या हो रहा था, इसे नहीं समझते हैं।
- कांग्रेस नेता ने 'हिजाब' को लेकर देश-दुनिया चल रहे विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पणजीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पर्यावरण और रोजगार जैसे वास्तविक मुद्दों से गोवा के लोगों का ध्यान भटकाने का शुक्रवार को आरोप लगाया। गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते तो गोवा को 1947 में 'कुछ ही घंटों के भीतर' आजाद कराया जा सकता था। गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री उस समय की स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्या हो रहा था, इसे नहीं समझते हैं।
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- राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री उस समय की स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्या हो रहा था, इसे नहीं समझते हैं। - कांग्रेस नेता ने 'हिजाब' को लेकर देश-दुनिया चल रहे विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पणजीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पर्यावरण और रोजगार जैसे वास्तविक मुद्दों से गोवा के लोगों का ध्यान भटकाने का शुक्रवार को आरोप लगाया। गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते तो गोवा को एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में 'कुछ ही घंटों के भीतर' आजाद कराया जा सकता था। गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री उस समय की स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्या हो रहा था, इसे नहीं समझते हैं।
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(केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी) ( Image Source : PTI )
Hardeep Puri On BJP-SAD Alliance: पंजाब (Punjab) में जालंधर उपचुनाव (Jalandhar Bypoll) के प्रचार के लिए पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि राज्य में बीजेपी और अकाली दल में कोई गठबंधन नहीं होगा. अकाली दल ने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया. 13 महीने पहले जो चुनाव हुआ, इसमें सबको नुकसान हुआ और वोटर ने सभी को जवाब दिया. हम अकाली दल के साथ थे तो हमारा भी नुकसान हुआ. इस दौरान उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी हमला बोला.
हरदीप सिंह पुरी ने कहा, "पंजाब में आपने देखा किस तरह से मंत्री इनके क्या-क्या काम कर रहे हैं, जो पहले नशे का काम था, वो और बढ़ चुका है. दिल्ली के दो पूर्व मंत्री जेल के अंदर हैं और लालचंद कटारिया का मामला आपको पता है जिस तरीके से इनका रोड शो हुआ, उसमें लोग नहीं गए, इससे आपको समझ लग जाएगी, क्योंकि 13 महीने कैसे रहे हैं, अब वोटर को एक चीज समझ लग चुकी है, अगर नशा मुक्ति चाहते हो तो केवल बीजेपी कर सकती है. "
'हम अपने पांव पर खड़े हो रहे हैं'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह तो केवल ट्रेलर है 2024 के लिए और 2027 के लिए, इसको हम जीते, अब हम अपने पांव पर खड़े हो रहे हैं. हम गांव में जा रहे हैं. हमारा स्वागत हो रहा है और गठबंधन का जो नुकसान हुआ था, उसकी हमने भरपाई की है. पीएम मोदी का जो विजन है, देश के लिए उसको लोग पसंद कर रहे हैं, जो पंजाब पहले दूसरे-चौथे नंबर पर होता था, वह आज इतना पीछे जा चुका है कि अब और पीछे जाने के लिए कोई राज्य बचा नहीं और बिल्कुल आखिरी कतार में आज पंजाब खड़ा नजर आ रहा है.
'नशे और दूसरी प्रॉब्लम में खोया हुआ पंजाब'
पुरी ने कहा कि पंजाब के लोग मेहनती हैं. पंजाब के लोगों ने हमेशा मेहनत करके राज्य को आगे लेकर गए हैं, लेकिन इन्होंने उसका कदर नहीं किया. पंजाब नशे और दूसरी प्रॉब्लम में खोया हुआ है, जिससे निकलना जरूरी है, जिस तरीके से देश आगे बढ़ रहा है लेकिन पंजाब वैसे आगे नहीं बढ़ रहा है, जहां अगर बीजेपी की सरकार आती है तो यहां सब कुछ सही किया जाएगा.
हरदीप पुरी ने आगे कहा कि बीजेपी में बहुत से लोग आ रहे हैं जो बीजेपी की धारा को पसंद करते हैं. आज अलग-अलग पार्टियों से लोग बीजेपी में आ रहे हैं लेकिन बीजेपी से कोई किसी और पार्टी में नहीं जा रहा है, क्योंकि लोगों को लग रहा है कि बीजेपी ही एक अच्छा विकल्प है. जब भी कोई बीजेपी में आता है तो वह बीजेपी के अनुसार ही काम करता है वैसे ही चलता है. हमारे पास तो कितने लोगों की लाइन लगी हुई है. कांग्रेसी के बड़े-बड़े लीडर हमारी पार्टी में आए हैं, बीजेपी ऐसी पार्टी है जिस को लगता है कि आगे बढ़ रही है.
'अकाली दल ने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया'
उन्होंने कहा कि जब हमारा अकाली दल के साथ अलायंस था तो उन्होंने हमें सिर्फ 23 सीटें दीं, जबकि 50 सीटें देना जरूरी था. हमको केवल शहरी सीटें देती थीं, इसलिए लोगों को लगता था कि यह केवल शहरी पार्टी है लेकिन अब आप देखना हमारा गांव में भी अच्छा आधार है क्योंकि जब हम गांव में जाते हैं तो हमारा स्वागत होता है, इन्होंने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया.
मंत्री पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार की ऐसी बहुत सी स्कीम है, जिनका लाभ स्टेट सरकार नहीं उठा रही है. केवल केंद्र इसमें कुछ नहीं कर सकता. स्टेट गवर्नमेंट को हमारे साथ मिलकर चलना होता है, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट हमारी स्कीम का लाभ उठाने में नाकामयाब रही है और यही एक वजह है कि जालंधर का विकास नहीं हो पाया. कांग्रेस के समय जब पेट्रोल सस्ती की बात करते हैं तो इन्होंने बहुत से बॉन्ड पेट्रोल के किए थे, जिनकी वजह से आज हमको वह कर्ज वापस करना पड़ रहा है. दोगुना कर्ज हो चुका है जो हमको वापस करना पड़ रहा है. यह वही बात है कि दादा ने कर्ज लिया और पोते को वापस करना पड़ रहा है जो हमारे लिए एक बड़ा मुश्किल से काम हो रहा है.
केंद्रीय मंत्री ने और क्या कहा?
हरदीप पुरी ने यहा भी कहा कि जो लोग कहते हैं उस समय पेट्रोल सस्ता था, वह गलत बयानबाजी करते हैं. इन्होंने देश का नुकसान किया लेकिन आज बिल्कुल सही तरीके से देश चल रहा है और हमने केंद्र की ओर से एससाइज के रेट कम किए, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट में एकसाइज के रेट कम नहीं किए. दिल्ली में जो पहलवानों का धरना चल रहा है उनकी जो मांग थी एफआईआर दर्ज की जाए, वह हो चुकी है लेकिन अब इस धरने में बहुत से राजनीतिक लोग हो चुके हैं और यही एक कारण है जिसकी वजह से यह मामला उठ नहीं रहा.
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Hardeep Puri On BJP-SAD Alliance: पंजाब में जालंधर उपचुनाव के प्रचार के लिए पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि राज्य में बीजेपी और अकाली दल में कोई गठबंधन नहीं होगा. अकाली दल ने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया. तेरह महीने पहले जो चुनाव हुआ, इसमें सबको नुकसान हुआ और वोटर ने सभी को जवाब दिया. हम अकाली दल के साथ थे तो हमारा भी नुकसान हुआ. इस दौरान उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी हमला बोला. हरदीप सिंह पुरी ने कहा, "पंजाब में आपने देखा किस तरह से मंत्री इनके क्या-क्या काम कर रहे हैं, जो पहले नशे का काम था, वो और बढ़ चुका है. दिल्ली के दो पूर्व मंत्री जेल के अंदर हैं और लालचंद कटारिया का मामला आपको पता है जिस तरीके से इनका रोड शो हुआ, उसमें लोग नहीं गए, इससे आपको समझ लग जाएगी, क्योंकि तेरह महीने कैसे रहे हैं, अब वोटर को एक चीज समझ लग चुकी है, अगर नशा मुक्ति चाहते हो तो केवल बीजेपी कर सकती है. " 'हम अपने पांव पर खड़े हो रहे हैं' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह तो केवल ट्रेलर है दो हज़ार चौबीस के लिए और दो हज़ार सत्ताईस के लिए, इसको हम जीते, अब हम अपने पांव पर खड़े हो रहे हैं. हम गांव में जा रहे हैं. हमारा स्वागत हो रहा है और गठबंधन का जो नुकसान हुआ था, उसकी हमने भरपाई की है. पीएम मोदी का जो विजन है, देश के लिए उसको लोग पसंद कर रहे हैं, जो पंजाब पहले दूसरे-चौथे नंबर पर होता था, वह आज इतना पीछे जा चुका है कि अब और पीछे जाने के लिए कोई राज्य बचा नहीं और बिल्कुल आखिरी कतार में आज पंजाब खड़ा नजर आ रहा है. 'नशे और दूसरी प्रॉब्लम में खोया हुआ पंजाब' पुरी ने कहा कि पंजाब के लोग मेहनती हैं. पंजाब के लोगों ने हमेशा मेहनत करके राज्य को आगे लेकर गए हैं, लेकिन इन्होंने उसका कदर नहीं किया. पंजाब नशे और दूसरी प्रॉब्लम में खोया हुआ है, जिससे निकलना जरूरी है, जिस तरीके से देश आगे बढ़ रहा है लेकिन पंजाब वैसे आगे नहीं बढ़ रहा है, जहां अगर बीजेपी की सरकार आती है तो यहां सब कुछ सही किया जाएगा. हरदीप पुरी ने आगे कहा कि बीजेपी में बहुत से लोग आ रहे हैं जो बीजेपी की धारा को पसंद करते हैं. आज अलग-अलग पार्टियों से लोग बीजेपी में आ रहे हैं लेकिन बीजेपी से कोई किसी और पार्टी में नहीं जा रहा है, क्योंकि लोगों को लग रहा है कि बीजेपी ही एक अच्छा विकल्प है. जब भी कोई बीजेपी में आता है तो वह बीजेपी के अनुसार ही काम करता है वैसे ही चलता है. हमारे पास तो कितने लोगों की लाइन लगी हुई है. कांग्रेसी के बड़े-बड़े लीडर हमारी पार्टी में आए हैं, बीजेपी ऐसी पार्टी है जिस को लगता है कि आगे बढ़ रही है. 'अकाली दल ने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया' उन्होंने कहा कि जब हमारा अकाली दल के साथ अलायंस था तो उन्होंने हमें सिर्फ तेईस सीटें दीं, जबकि पचास सीटें देना जरूरी था. हमको केवल शहरी सीटें देती थीं, इसलिए लोगों को लगता था कि यह केवल शहरी पार्टी है लेकिन अब आप देखना हमारा गांव में भी अच्छा आधार है क्योंकि जब हम गांव में जाते हैं तो हमारा स्वागत होता है, इन्होंने हमारे किसी लीडर को खड़े नही होने दिया. मंत्री पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार की ऐसी बहुत सी स्कीम है, जिनका लाभ स्टेट सरकार नहीं उठा रही है. केवल केंद्र इसमें कुछ नहीं कर सकता. स्टेट गवर्नमेंट को हमारे साथ मिलकर चलना होता है, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट हमारी स्कीम का लाभ उठाने में नाकामयाब रही है और यही एक वजह है कि जालंधर का विकास नहीं हो पाया. कांग्रेस के समय जब पेट्रोल सस्ती की बात करते हैं तो इन्होंने बहुत से बॉन्ड पेट्रोल के किए थे, जिनकी वजह से आज हमको वह कर्ज वापस करना पड़ रहा है. दोगुना कर्ज हो चुका है जो हमको वापस करना पड़ रहा है. यह वही बात है कि दादा ने कर्ज लिया और पोते को वापस करना पड़ रहा है जो हमारे लिए एक बड़ा मुश्किल से काम हो रहा है. केंद्रीय मंत्री ने और क्या कहा? हरदीप पुरी ने यहा भी कहा कि जो लोग कहते हैं उस समय पेट्रोल सस्ता था, वह गलत बयानबाजी करते हैं. इन्होंने देश का नुकसान किया लेकिन आज बिल्कुल सही तरीके से देश चल रहा है और हमने केंद्र की ओर से एससाइज के रेट कम किए, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट में एकसाइज के रेट कम नहीं किए. दिल्ली में जो पहलवानों का धरना चल रहा है उनकी जो मांग थी एफआईआर दर्ज की जाए, वह हो चुकी है लेकिन अब इस धरने में बहुत से राजनीतिक लोग हो चुके हैं और यही एक कारण है जिसकी वजह से यह मामला उठ नहीं रहा.
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मुंबईः क्या आप इन्हें पहचान पाए? नहीं. . . कोई बात नहीं हम बता देते हैं। तस्वीर में दिख रही ये दो बहनें कोई और नहीं बल्कि तब्बू और उनकी बड़ी बहन फरहा नाज हैं। फरहा और तब्बू दोनों ही बॉलीवुड का जाना पहचाना नाम हैं। हाल ही में फरहा फिल्म 'सैटेलाइट शंकर' की स्क्रीनिंग पर पहुंची थीं। सालों बाद फरहा काफी बदल गईं, हालांकि खूबसूरत वो आज भी हैं। फरहा यहां अपने हस्बैंड सुमित सहगल के साथ पहुंची थीं। आपको बता दें फरहा ने ऋषि कपूर के साथ फिल्म 'नसीब अपना अपना' में काम किया था। इसके अलावा वे संजय दत्त के साथ 'ईमानदार', सनी देओल के साथ 'यतीम' आमिर खान के साथ 'जवानी जिंदाबाद' जैसी 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं।
ये फरहा नाज के बेटे फतेह फरहा हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें फरहा और तब्बू मशहूर एक्ट्रेस शबाना आजमी की भतीजी हैं।
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मुंबईः क्या आप इन्हें पहचान पाए? नहीं. . . कोई बात नहीं हम बता देते हैं। तस्वीर में दिख रही ये दो बहनें कोई और नहीं बल्कि तब्बू और उनकी बड़ी बहन फरहा नाज हैं। फरहा और तब्बू दोनों ही बॉलीवुड का जाना पहचाना नाम हैं। हाल ही में फरहा फिल्म 'सैटेलाइट शंकर' की स्क्रीनिंग पर पहुंची थीं। सालों बाद फरहा काफी बदल गईं, हालांकि खूबसूरत वो आज भी हैं। फरहा यहां अपने हस्बैंड सुमित सहगल के साथ पहुंची थीं। आपको बता दें फरहा ने ऋषि कपूर के साथ फिल्म 'नसीब अपना अपना' में काम किया था। इसके अलावा वे संजय दत्त के साथ 'ईमानदार', सनी देओल के साथ 'यतीम' आमिर खान के साथ 'जवानी जिंदाबाद' जैसी पचास से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं। ये फरहा नाज के बेटे फतेह फरहा हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें फरहा और तब्बू मशहूर एक्ट्रेस शबाना आजमी की भतीजी हैं।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से हुए नुकसान में राहत के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि "हमारे किसानों व जनता को इस संकट की घड़ी में सहायता की सख्त जरुरत है"। पत्र में उन्होंने लिखा है कि जैसा कि आपको विदित है कि मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। मैंने प्रदेश के 10 से अधिक बाढ़ एवं अतिवृष्टि प्रभावित जिलों का दौरा किया। अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रदेश की फसलें लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। स्कूल, आंगनवाड़ी, बिजली के खंभों, शासकीय भवनों आदि को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
सिंधिया ने पत्र में लिखा, "बाढ़ और वर्षा से प्रदेश में 596 लोगों की मृत्यु हुई है। 1761 पशु मारे गये हैं, 67,033 मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं, 13,61,773 कृषक प्रभावित हुए हैं तथा लगभग 14 लाख एकड़ में फैली फसल बर्बाद हो गई है। आरंभिक अनुमान के अनुसार प्रदेश में लगभग 10 से 15 हजार करोड़ रुपये की क्षति हुई है। " कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता कहा कि केन्द्रीय सर्वे दल द्वारा प्रदेश का प्रारंभिक दौरा किया गया है और नुकसान की जानकारी ली गई है।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से हुए नुकसान में राहत के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि "हमारे किसानों व जनता को इस संकट की घड़ी में सहायता की सख्त जरुरत है"। पत्र में उन्होंने लिखा है कि जैसा कि आपको विदित है कि मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। मैंने प्रदेश के दस से अधिक बाढ़ एवं अतिवृष्टि प्रभावित जिलों का दौरा किया। अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रदेश की फसलें लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। स्कूल, आंगनवाड़ी, बिजली के खंभों, शासकीय भवनों आदि को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सिंधिया ने पत्र में लिखा, "बाढ़ और वर्षा से प्रदेश में पाँच सौ छियानवे लोगों की मृत्यु हुई है। एक हज़ार सात सौ इकसठ पशु मारे गये हैं, सरसठ,तैंतीस मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं, तेरह,इकसठ,सात सौ तिहत्तर कृषक प्रभावित हुए हैं तथा लगभग चौदह लाख एकड़ में फैली फसल बर्बाद हो गई है। आरंभिक अनुमान के अनुसार प्रदेश में लगभग दस से पंद्रह हजार करोड़ रुपये की क्षति हुई है। " कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता कहा कि केन्द्रीय सर्वे दल द्वारा प्रदेश का प्रारंभिक दौरा किया गया है और नुकसान की जानकारी ली गई है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
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सलिन इतिहास)
हमारे देश की भांति जापान का इतिहास भी पौराणिक तथा कल्पित कक्षाओं के साथ आरम्भ होता है। आदि काल के इतिहास में देवताओं और गंधर्वो का वर्णन आता है । ऐनो जापान के आदि निवासी बताए जाते हैं। ईमा से १५ सौ वर्ष पूर्व एशिया से मंगोल जाति जापान में गई और उसने ऐनोस जाति को दबा कर अपना अधिकार जमाया । ६६० वर्ष ईसा के पूर्व जिम्मो का आक्रमण जापान पर हुआ। ५५२ ई० में बौद्ध भिक्षु कोरिया से जापान गये । बौद्ध लोगों ने जापान में पुस्तकों का संचार किया और वहां सम्बत ( वर्ष तथा तिथि ) का आरम्भ भी हुआ। कुछ समय पश्चात् ही बाँद्ध धर्म जापान का राज्य धर्म होगया सातवीं सदी तक मिकाडो ( जापान के सम्राट ) की शक्ति राज्य दरबार के कार्य कर्ताओं के हाथ चली गई । बारहवीं सदी में तैग और पिनामोंटो वंश आपस में राज्य के लिये लड़ते रहे। यह बड़ी लड़ाई बहुत समय तक चलती रही और जारानी इतिहास में जेञ्जी और रीके के युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। इस युद्ध पर लेखकों ने बड़ी बड़ी पुस्तकें लिखी हैं और कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
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सलिन इतिहास) हमारे देश की भांति जापान का इतिहास भी पौराणिक तथा कल्पित कक्षाओं के साथ आरम्भ होता है। आदि काल के इतिहास में देवताओं और गंधर्वो का वर्णन आता है । ऐनो जापान के आदि निवासी बताए जाते हैं। ईमा से पंद्रह सौ वर्ष पूर्व एशिया से मंगोल जाति जापान में गई और उसने ऐनोस जाति को दबा कर अपना अधिकार जमाया । छः सौ साठ वर्ष ईसा के पूर्व जिम्मो का आक्रमण जापान पर हुआ। पाँच सौ बावन ईशून्य में बौद्ध भिक्षु कोरिया से जापान गये । बौद्ध लोगों ने जापान में पुस्तकों का संचार किया और वहां सम्बत का आरम्भ भी हुआ। कुछ समय पश्चात् ही बाँद्ध धर्म जापान का राज्य धर्म होगया सातवीं सदी तक मिकाडो की शक्ति राज्य दरबार के कार्य कर्ताओं के हाथ चली गई । बारहवीं सदी में तैग और पिनामोंटो वंश आपस में राज्य के लिये लड़ते रहे। यह बड़ी लड़ाई बहुत समय तक चलती रही और जारानी इतिहास में जेञ्जी और रीके के युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। इस युद्ध पर लेखकों ने बड़ी बड़ी पुस्तकें लिखी हैं और कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
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सीरिया में एक ओर सेना और प्रतिरोध बल की सफलता जारी है तो दूसरी ओर सीरिया के पश्चिमोत्तरी प्रांत इदलिब में अमरीका समर्थित दो सशस्त्र गुटों के बीच झड़प के समाचार हैं।
यह झड़प सीरिया के कुर्द डेमोक्रेटिक संघ के तत्वों और विरोधी गुट अलग़द के तत्वों के बीच उस वक़्त हुयी जब कुर्द डेमोक्रेटिक संघ ने अलग़द गुट की नुख़बा फ़ोर्स से अपने हथियार रखने की मांग की।
नुख़बा के आतंकियों को अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन हासिल है और उन्होंने जॉर्डन में ट्रेनिंग ली है। इस फ़ोर्स ने इससे पहले सीरिया के कुर्द डेमोक्रेटिक संघ की फ़ोर्स में विलय का विरोध किया था। सीरिया में विभिन्न मोर्चों पर आतंकियों को मिल रही निरंतर पराजय और सीरियाई सेना और प्रतिरोध बल को मिल रही लगातार सफलता के कारण इन गुटों के सरग़नाओं के बीच मतभेद बढ़ गए हैं।
दूसरी ओर जैशुल इस्लाम नामक आतंकवादी गुट के कार्यालय के प्रमुख मोहम्मद अल्लूश ने भी इस गुट की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। मोहम्मद अल्लूश ने ऐसी हालत में इस्तीफ़ा दिया है कि जैशुल इस्लाम नामक आतंकवादी गुट को अप्रैल में पूर्वी ग़ूता में अपने तत्वों के आत्मसमर्पण करने की वजह से सीरियाई सेना की इस शर्त को मानना पड़ा कि वह दूमा शहर और पूर्वी क़लमून को छोड़ दे और हथियार व सैन्य उपकरण हवाले करके अपने तत्वों को उत्तरी सीरिया के हलब प्रांत के जराबलस और इदलिब प्रांत ले जाए।
सीरिया में आतंकियों की अपने राजनैतिक व सैन्य लक्ष्यों की प्राप्ति में नाकामी, इन गुटों के बीच आपस में झड़प तेज़ होने और राजनैतिक फूट बढ़ने का कारण बनी है और इन हालात को देख कर लगता है कि क्षेत्र में उनके पूरी तरह ख़त्म होने की प्रक्रिया तेज़ हो गयी है। (MAQ/T)
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सीरिया में एक ओर सेना और प्रतिरोध बल की सफलता जारी है तो दूसरी ओर सीरिया के पश्चिमोत्तरी प्रांत इदलिब में अमरीका समर्थित दो सशस्त्र गुटों के बीच झड़प के समाचार हैं। यह झड़प सीरिया के कुर्द डेमोक्रेटिक संघ के तत्वों और विरोधी गुट अलग़द के तत्वों के बीच उस वक़्त हुयी जब कुर्द डेमोक्रेटिक संघ ने अलग़द गुट की नुख़बा फ़ोर्स से अपने हथियार रखने की मांग की। नुख़बा के आतंकियों को अमरीका और ब्रिटेन का समर्थन हासिल है और उन्होंने जॉर्डन में ट्रेनिंग ली है। इस फ़ोर्स ने इससे पहले सीरिया के कुर्द डेमोक्रेटिक संघ की फ़ोर्स में विलय का विरोध किया था। सीरिया में विभिन्न मोर्चों पर आतंकियों को मिल रही निरंतर पराजय और सीरियाई सेना और प्रतिरोध बल को मिल रही लगातार सफलता के कारण इन गुटों के सरग़नाओं के बीच मतभेद बढ़ गए हैं। दूसरी ओर जैशुल इस्लाम नामक आतंकवादी गुट के कार्यालय के प्रमुख मोहम्मद अल्लूश ने भी इस गुट की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। मोहम्मद अल्लूश ने ऐसी हालत में इस्तीफ़ा दिया है कि जैशुल इस्लाम नामक आतंकवादी गुट को अप्रैल में पूर्वी ग़ूता में अपने तत्वों के आत्मसमर्पण करने की वजह से सीरियाई सेना की इस शर्त को मानना पड़ा कि वह दूमा शहर और पूर्वी क़लमून को छोड़ दे और हथियार व सैन्य उपकरण हवाले करके अपने तत्वों को उत्तरी सीरिया के हलब प्रांत के जराबलस और इदलिब प्रांत ले जाए। सीरिया में आतंकियों की अपने राजनैतिक व सैन्य लक्ष्यों की प्राप्ति में नाकामी, इन गुटों के बीच आपस में झड़प तेज़ होने और राजनैतिक फूट बढ़ने का कारण बनी है और इन हालात को देख कर लगता है कि क्षेत्र में उनके पूरी तरह ख़त्म होने की प्रक्रिया तेज़ हो गयी है।
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गरमा-गरम पराठे खाने का शौकीन हर कोई होता है। पराठे के नाम से ही मुंह में पानी आना तो स्वाभाविक है। हिंदुस्तान स्वाद के लिए तो विश्व विख्यात है। आपने तरह-तरह के पराठों का स्वाद चखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा पराठा खाया है जिसका वजन 2 किलो हो, अगर नहीं तो आज हम आपको ऐसी ही जगह के बारे में बताने वाले हैं। जहां इस तरह का किंग पराठा मिलता है।
अपने स्वाद और पराठों के आकार के लिए मुरथल का ढाबा पूरे देश में मशहूर है और इन्हीं ढाबों में से एक है रॉयल मुरथल ढाबा। इसके मालिक का कहना है कि उनका पराठा सबसे बड़ा पराठा होता है तथा जिसका स्वाद भी लाजवाब होता है। इस ढाबे के मालिक ने अपने ग्राहकों के लिए बड़ा ही खास ईनाम रखा है।
ढाबे के मालिक का कहना है कि जो भी शख्स इस एक पराठे को 15 मिनट में खाकर खत्म कर देगा। उसे एक लाख रुपये का ईनाम और लाइफ टाइम के लिए रॉयल ढाबे में खाना फ्री मिलेगा।
इस बात को सुनकर यदि आपको लग रहा है कि आप इसे आराम से खा जाएंगे तो आप गलत सोच रहे हैं। हम आपको बता दें कि यह एक पराठा किसी एक का नहीं बल्कि पूरी फैमिली का पेट भर सकता है।
यह एक पराठा पूरे 15 पराठों के बराबर होता है। इस तरह का पराठा बनाने के लिए 2 किलो आटा, आधा किलो प्याज और आलू लगते हैं। इसे शुद्ध देसी घी से बनाया जाता है। इस पराठे का डाईमीटर तकरीबन 2 फीट यानी 24 इंच का होता है।
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गरमा-गरम पराठे खाने का शौकीन हर कोई होता है। पराठे के नाम से ही मुंह में पानी आना तो स्वाभाविक है। हिंदुस्तान स्वाद के लिए तो विश्व विख्यात है। आपने तरह-तरह के पराठों का स्वाद चखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा पराठा खाया है जिसका वजन दो किलो हो, अगर नहीं तो आज हम आपको ऐसी ही जगह के बारे में बताने वाले हैं। जहां इस तरह का किंग पराठा मिलता है। अपने स्वाद और पराठों के आकार के लिए मुरथल का ढाबा पूरे देश में मशहूर है और इन्हीं ढाबों में से एक है रॉयल मुरथल ढाबा। इसके मालिक का कहना है कि उनका पराठा सबसे बड़ा पराठा होता है तथा जिसका स्वाद भी लाजवाब होता है। इस ढाबे के मालिक ने अपने ग्राहकों के लिए बड़ा ही खास ईनाम रखा है। ढाबे के मालिक का कहना है कि जो भी शख्स इस एक पराठे को पंद्रह मिनट में खाकर खत्म कर देगा। उसे एक लाख रुपये का ईनाम और लाइफ टाइम के लिए रॉयल ढाबे में खाना फ्री मिलेगा। इस बात को सुनकर यदि आपको लग रहा है कि आप इसे आराम से खा जाएंगे तो आप गलत सोच रहे हैं। हम आपको बता दें कि यह एक पराठा किसी एक का नहीं बल्कि पूरी फैमिली का पेट भर सकता है। यह एक पराठा पूरे पंद्रह पराठों के बराबर होता है। इस तरह का पराठा बनाने के लिए दो किलो आटा, आधा किलो प्याज और आलू लगते हैं। इसे शुद्ध देसी घी से बनाया जाता है। इस पराठे का डाईमीटर तकरीबन दो फीट यानी चौबीस इंच का होता है।
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बिहार में इन दिनों जनता दरबार का दौर शुरू है. आपको बता दें कि सीएम नीतीश कुमार दोबारा जनता दरबार का कार्यक्रम शुरू कर दिये हैं. इससे पहले भी जब बिहार में सीएम नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे उस समय भी उन्होंने जनता दरबार कार्यक्रम की शुरुआत की थी. उस समय पूरे देश में नीतीश कुमार के नाम की चर्चा थी. अब एक बार फिर से शुरू हुए जनता दरबार के बाद से बिहार में राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जनता दरबार कार्यक्रम की शरुआत हो गई है. राजनीतिक पार्टियों की तरफ से बीजेपी ने सबसे पहले शुरू किया था अब जदयू की तरफ से भी जनता दरबार लगाने कीबात कही जा रही है.
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की माने तो जदयू के मंत्री सप्ताह में मंगलवार से शुक्रवार तक सुनवाई करेंगे. इसकी लिस्ट पूरी तरह से तैयार हो गई है इसमें यह भी तय हो गया है कि कौन से मंत्री कब और किस दिन जनता दरबार लगाएँगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मंत्रियों द्वारा लगाए गए जनता दरबार 11. 30 बजे शुरू होगा. इसके लिए जदयू कोटे के सभी मंत्रियों को सूचित कर दिया गया है. आपको बता दें कि बीजेपी के मंत्री सहयोग कार्यक्रम के तहत सोमवार से शनिवार तक लोगों की समस्याओं को सुनते हैं.
- शुक्रवार को भवन निर्माण मंत्री अशौक चौधरी के साथ ही जल संसाधन व सूचना जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा और विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह लोगों की समस्याओं को सुनेंगे.
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बिहार में इन दिनों जनता दरबार का दौर शुरू है. आपको बता दें कि सीएम नीतीश कुमार दोबारा जनता दरबार का कार्यक्रम शुरू कर दिये हैं. इससे पहले भी जब बिहार में सीएम नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे उस समय भी उन्होंने जनता दरबार कार्यक्रम की शुरुआत की थी. उस समय पूरे देश में नीतीश कुमार के नाम की चर्चा थी. अब एक बार फिर से शुरू हुए जनता दरबार के बाद से बिहार में राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जनता दरबार कार्यक्रम की शरुआत हो गई है. राजनीतिक पार्टियों की तरफ से बीजेपी ने सबसे पहले शुरू किया था अब जदयू की तरफ से भी जनता दरबार लगाने कीबात कही जा रही है. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की माने तो जदयू के मंत्री सप्ताह में मंगलवार से शुक्रवार तक सुनवाई करेंगे. इसकी लिस्ट पूरी तरह से तैयार हो गई है इसमें यह भी तय हो गया है कि कौन से मंत्री कब और किस दिन जनता दरबार लगाएँगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मंत्रियों द्वारा लगाए गए जनता दरबार ग्यारह. तीस बजे शुरू होगा. इसके लिए जदयू कोटे के सभी मंत्रियों को सूचित कर दिया गया है. आपको बता दें कि बीजेपी के मंत्री सहयोग कार्यक्रम के तहत सोमवार से शनिवार तक लोगों की समस्याओं को सुनते हैं. - शुक्रवार को भवन निर्माण मंत्री अशौक चौधरी के साथ ही जल संसाधन व सूचना जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा और विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह लोगों की समस्याओं को सुनेंगे.
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को अपनी पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए "पांच गारंटी" दी। इनमें प्रत्येक गृहिणी को हर महीने 2,000 रुपये देने और संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को निष्प्रभावी करने के लिए कानून लाना शामिल है।
पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए राहुल ने कहा कि उनकी पार्टी असम के विचार (आईडिया) की हिफाजत करेगी, जिस पर भाजपा और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) हमले कर रही है। उन्होंने कहा, "हालांकि, इस दस्तावेज में कांग्रेस का निशान (चुनाव चिह्न) है, लेकिन असल में यह लोगों का घोषणापत्र है।
इसमें असम के लोगों की आकांक्षाएं समाहित हैं। " कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पांच लाख सरकारी नौकरियां देने और सभी को हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है। इसके अलावा, चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर 365 रुपये करने का भी वादा किया गया है।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को अपनी पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए "पांच गारंटी" दी। इनमें प्रत्येक गृहिणी को हर महीने दो,शून्य रुपयापये देने और संशोधित नागरिकता अधिनियम को निष्प्रभावी करने के लिए कानून लाना शामिल है। पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए राहुल ने कहा कि उनकी पार्टी असम के विचार की हिफाजत करेगी, जिस पर भाजपा और आरएसएस हमले कर रही है। उन्होंने कहा, "हालांकि, इस दस्तावेज में कांग्रेस का निशान है, लेकिन असल में यह लोगों का घोषणापत्र है। इसमें असम के लोगों की आकांक्षाएं समाहित हैं। " कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पांच लाख सरकारी नौकरियां देने और सभी को हर महीने दो सौ यूनिट मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है। इसके अलावा, चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर तीन सौ पैंसठ रुपयापये करने का भी वादा किया गया है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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कानपुर नगर। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तत्वावधान में मंगलवार को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता गोष्ठी एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। बिधनू ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित कैंप में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी डॉ. महेश कुमार ने कहा कि मानसिक विकार से ग्रसित व्यक्ति को झाड़-फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क कर इलाज कराना चाहिए। इलाज कराने से ही मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। शिविर में 30 से अधिक मानसिक विकारों से ग्रसित मरीजों का परीक्षण कर दवाएं और परामर्श दिया गया।
डॉ कुमार ने कहा कि तनाव की स्थिति में रहने या लगातार शराब समेत अन्य नशीले पदार्थ का सेवन करने से इसका सीधा असर मस्तिष्क पर पड़ता है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित हो सकता है। उन्होंने शिविर में मानसिक रोग के लक्षण और उससे बचाव के बारे में जानकारी दी। शिविर में गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों के हाव-भाव, दैनिक गतिविधियों, पारिवारिक वातावरण समेत अन्य गतिविधियों की जानकारी लेने के बाद उनका इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि मानसिक रोग से ग्रसित बहुत से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे। मानसिक रोगों का इलाज किया जा सकता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसपी यादव ने कहा कि शिविर के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी दी गयी। इसके साथ ही मानसिक रोगियों की पहचान कर उनका निशुल्क इलाज भी किया जा रहा है। शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में यह जागरूकता लाना है कि मानसिक रोग भी अन्य रोगों के ही समान है। नींद न आना, तनाव, घबराहट, जीवन के प्रति निराशा, डर लगना, व्यवहार में अचानक तेजी आना आदि मानसिक रोग की देन हो सकता है। इनका चेकअप कराकर इलाज कराएं।
शिविर में मुख्यालय से आये मनोचिकित्सक डॉ चिरंजीवी प्रसाद, मनोवैज्ञानिक डॉ सुधांशु मिश्रा द्वारा मनोरोगियों को उपचारित किया गया और काउंसिलिंग की गयी। मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्यकर्ता संदीप ने बताया कि शिविर में 355 मरीजों की जांच की गई। इसमें 30 मानसिक रोगी चिहिन्त किए गए। इस मौके पर मानसिक स्वास्थ्य विभाग से सुनील कुमार, अकन कुमार, पवन कुमार, अखंड प्रताप सहित बीपीएम ज्योति, बीसीपीएम मिनाक्षी, प्रिया वर्मा, मोहिनी, पवन गुप्ता और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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कानपुर नगर। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तत्वावधान में मंगलवार को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता गोष्ठी एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। बिधनू ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित कैंप में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी डॉ. महेश कुमार ने कहा कि मानसिक विकार से ग्रसित व्यक्ति को झाड़-फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क कर इलाज कराना चाहिए। इलाज कराने से ही मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। शिविर में तीस से अधिक मानसिक विकारों से ग्रसित मरीजों का परीक्षण कर दवाएं और परामर्श दिया गया। डॉ कुमार ने कहा कि तनाव की स्थिति में रहने या लगातार शराब समेत अन्य नशीले पदार्थ का सेवन करने से इसका सीधा असर मस्तिष्क पर पड़ता है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित हो सकता है। उन्होंने शिविर में मानसिक रोग के लक्षण और उससे बचाव के बारे में जानकारी दी। शिविर में गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों के हाव-भाव, दैनिक गतिविधियों, पारिवारिक वातावरण समेत अन्य गतिविधियों की जानकारी लेने के बाद उनका इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि मानसिक रोग से ग्रसित बहुत से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे। मानसिक रोगों का इलाज किया जा सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ एसपी यादव ने कहा कि शिविर के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी दी गयी। इसके साथ ही मानसिक रोगियों की पहचान कर उनका निशुल्क इलाज भी किया जा रहा है। शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में यह जागरूकता लाना है कि मानसिक रोग भी अन्य रोगों के ही समान है। नींद न आना, तनाव, घबराहट, जीवन के प्रति निराशा, डर लगना, व्यवहार में अचानक तेजी आना आदि मानसिक रोग की देन हो सकता है। इनका चेकअप कराकर इलाज कराएं। शिविर में मुख्यालय से आये मनोचिकित्सक डॉ चिरंजीवी प्रसाद, मनोवैज्ञानिक डॉ सुधांशु मिश्रा द्वारा मनोरोगियों को उपचारित किया गया और काउंसिलिंग की गयी। मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्यकर्ता संदीप ने बताया कि शिविर में तीन सौ पचपन मरीजों की जांच की गई। इसमें तीस मानसिक रोगी चिहिन्त किए गए। इस मौके पर मानसिक स्वास्थ्य विभाग से सुनील कुमार, अकन कुमार, पवन कुमार, अखंड प्रताप सहित बीपीएम ज्योति, बीसीपीएम मिनाक्षी, प्रिया वर्मा, मोहिनी, पवन गुप्ता और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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[ भाग II - खण्ड 3 (i) ]
संदर्भ सं.:
कोई अन्य रकम
एकीकृत कर
प्ररुप जीएसटी एडीटी -04 [नियम 102(2) देखें]
विशेष लेखा परीक्षा पर निष्कर्ष की सूचना
वित्तीय वर्ष.
..के लिए आपकी लेखा और अभिलेखों पुस्तकों का परीक्षण (चार्टर्ड आकाऊन्टेंट /लागत लेखाकार),
. द्वारा किया
गया है और आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी/दिए गए दस्तावेजों के आधार पर यह लेखा परीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई है और निष्कर्ष विसंगति निम्नलिखित है :
कम संदाय का
केन्द्रीय कर
राज्य/यू टी कर
[लेखा परीक्षा अवलोकन अंतर्विष्ट पी डी एफ फाइल अपलोड)
आपको निदेशित किया जाता है कि अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार इस संबंध में आप अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करें, जिसके न हो सकने पर अधीनियम के उपबंधों के अधीन आपके विरुद्ध कार्यवाहियां शुरू की गई समझी जा सकेगी।
हस्ताक्षर. नाम.. पदनाम.
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[ भाग II - खण्ड तीन ] संदर्भ सं.: कोई अन्य रकम एकीकृत कर प्ररुप जीएसटी एडीटी -चार [नियम एक सौ दो देखें] विशेष लेखा परीक्षा पर निष्कर्ष की सूचना वित्तीय वर्ष. ..के लिए आपकी लेखा और अभिलेखों पुस्तकों का परीक्षण , . द्वारा किया गया है और आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी/दिए गए दस्तावेजों के आधार पर यह लेखा परीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई है और निष्कर्ष विसंगति निम्नलिखित है : कम संदाय का केन्द्रीय कर राज्य/यू टी कर [लेखा परीक्षा अवलोकन अंतर्विष्ट पी डी एफ फाइल अपलोड) आपको निदेशित किया जाता है कि अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार इस संबंध में आप अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करें, जिसके न हो सकने पर अधीनियम के उपबंधों के अधीन आपके विरुद्ध कार्यवाहियां शुरू की गई समझी जा सकेगी। हस्ताक्षर. नाम.. पदनाम.
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अगर शादी में आ रही बाधा को दूर करने का उपाय तलाश रही हैं, तो एक बार यह आर्टिकल जरूर पढ़ें।
बेटियों के बड़े होते ही माता-पिता को उनके लिए एक अच्छा वर तलाशने की चिंता सताने लग जाती है। हालांकि, आजकल लवमैरिज का ट्रेंड है और लड़कियां खुद ही अपनी मर्जी के मुताबिक अपने वर की तलाश कर लेती हैं। मगर आज भी शादी से पहले कुंडली का मिलान और शादी के लिए शुभ मुहूर्त निकालने की परंपरा है।
इस परंपरा के तहत लव मैरिज हो या फिर अरेंज मैरिज हो, शादी की तारीख के लिए शुभ मुहूर्त जरूर तलाशा जाता है। कई बार सब कुछ सही होता फिर भी शादी पक्की होने के बाद भी टूट जाती है। ऐसे में परेशान होने की जगह आप कुछ सरल ज्योतिष उपाय अपनाकर इस समस्या से बाहर निकल सकती हैं।
अगर आपकी बेटी की शादी में भी अड़चन आ रही है या फिर शादी पक्की होने के बाद टूट रही है, तो आप घर पर मौजूद कपूर से कुछ उपाय कर सकती हैं।
इस विषय में उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा कहते हैं, 'महिलाओं का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और यदि कन्या की शादी में अड़चन आ रही है, तो उसे कपूर का उपाय जरूर करना चाहिए। '
शुक्रवार के दिन देवी पार्वती को आप यदि 7 कपूर और 7 गुलाब के फूल अर्पित करेंगी तो आपके विवाह में आ रही अड़चन दूर हो जाएगी। दरअसल, देवी पार्वती को सफेद रंग और गुलाब का फूल अति प्रिय है।
नियम- इस उपाय के लिए आपको ताजे गुलाब ही प्रयोग करने चाहिए और गुलाब का रंग लाल ही होना चाहिए।
कपूर का दीपक आपको नियमित देवी दुर्गा के आगे जलाना चाहिए। शाम के वक्त अगर आप देवी दुर्गा(देवी दुर्गा की परिक्रमा ) के आगे 7 या 11 कपूर का दिया जलाती हैं, तो आपको इससे बहुत फायदा मिलेगा। कपूर का दीपक आप भगवान विष्णु के आगे भी जला सकती हैं। यदि आपको मनपसंद वर नहीं मिल रहा है, तो आपकी यह समस्या भी दूर हो जाएगी और जल्द ही आप जैसा वर चाहती हैं, वैसा आपको मिल जाएगा।
नियम- कपूर जिस दीपक में जलाएं, वह हमेशा मिट्टी का ही होना चाहिए।
जब आपकी बेटी से लड़का और लड़के पक्ष के लोग मिलने आएं, तब बेटी की मुट्ठी में 1 कपूर की गोली पकड़ा दें। इससे कपूर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का असर आपकी बेटी के स्वभाव और वातावरण में नजर आने लग जाएगा। कई बार स्वभाव ठीक न लगने और घर का वातावरण उचित न लगने पर भी रिश्ता पक्का होने में अड़चन आती है। ऐसे में कपूर की गोली हाथ में थाम लेने भर से सब ठीक हो जाता है।
नियम- हमेशा बाईं मुट्ठी में ही कपूर को रखें।
एक लोटे में कपूर डालें और उस जल को शुक्र देवता को अर्पित करें। ऐसा करने से आपको बहुत लाभ होंगे। ऐसा करने से सबसे पहला लाभ होगा कि शुक्र सुंदरता का कारक होता है, तो आपकी खूबसूरती भी बढ़ेगी। इतना ही नहीं, ऐसा करने से कुंडली में मौजूद शुक्र ग्रह मजबूत होगा, जिससे शादि में आ रही अड़चन कम होगी।
नियम- कपूर की गोली पानी में हमेशा 1, 3 या 5 यानि विषम संख्या में ही डालें।
कई बार नजरदोष के कारण भी ऐसा होता है। ऐसे में कपूर और लौंग मुट्ठी में लेकर सूर्यास्त के बाद आप बेटी की 7 बार नजर उतारें और बाद में कपूर को चौराहे पर फेंक दें। फेंके हुए कपूर को दोबारा पलट कर नहीं देखें।
नियम- कपूर और लौंग को फेंकने के स्थान पर आप उसे जला भी सकती हैं।
अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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अगर शादी में आ रही बाधा को दूर करने का उपाय तलाश रही हैं, तो एक बार यह आर्टिकल जरूर पढ़ें। बेटियों के बड़े होते ही माता-पिता को उनके लिए एक अच्छा वर तलाशने की चिंता सताने लग जाती है। हालांकि, आजकल लवमैरिज का ट्रेंड है और लड़कियां खुद ही अपनी मर्जी के मुताबिक अपने वर की तलाश कर लेती हैं। मगर आज भी शादी से पहले कुंडली का मिलान और शादी के लिए शुभ मुहूर्त निकालने की परंपरा है। इस परंपरा के तहत लव मैरिज हो या फिर अरेंज मैरिज हो, शादी की तारीख के लिए शुभ मुहूर्त जरूर तलाशा जाता है। कई बार सब कुछ सही होता फिर भी शादी पक्की होने के बाद भी टूट जाती है। ऐसे में परेशान होने की जगह आप कुछ सरल ज्योतिष उपाय अपनाकर इस समस्या से बाहर निकल सकती हैं। अगर आपकी बेटी की शादी में भी अड़चन आ रही है या फिर शादी पक्की होने के बाद टूट रही है, तो आप घर पर मौजूद कपूर से कुछ उपाय कर सकती हैं। इस विषय में उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा कहते हैं, 'महिलाओं का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और यदि कन्या की शादी में अड़चन आ रही है, तो उसे कपूर का उपाय जरूर करना चाहिए। ' शुक्रवार के दिन देवी पार्वती को आप यदि सात कपूर और सात गुलाब के फूल अर्पित करेंगी तो आपके विवाह में आ रही अड़चन दूर हो जाएगी। दरअसल, देवी पार्वती को सफेद रंग और गुलाब का फूल अति प्रिय है। नियम- इस उपाय के लिए आपको ताजे गुलाब ही प्रयोग करने चाहिए और गुलाब का रंग लाल ही होना चाहिए। कपूर का दीपक आपको नियमित देवी दुर्गा के आगे जलाना चाहिए। शाम के वक्त अगर आप देवी दुर्गा के आगे सात या ग्यारह कपूर का दिया जलाती हैं, तो आपको इससे बहुत फायदा मिलेगा। कपूर का दीपक आप भगवान विष्णु के आगे भी जला सकती हैं। यदि आपको मनपसंद वर नहीं मिल रहा है, तो आपकी यह समस्या भी दूर हो जाएगी और जल्द ही आप जैसा वर चाहती हैं, वैसा आपको मिल जाएगा। नियम- कपूर जिस दीपक में जलाएं, वह हमेशा मिट्टी का ही होना चाहिए। जब आपकी बेटी से लड़का और लड़के पक्ष के लोग मिलने आएं, तब बेटी की मुट्ठी में एक कपूर की गोली पकड़ा दें। इससे कपूर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का असर आपकी बेटी के स्वभाव और वातावरण में नजर आने लग जाएगा। कई बार स्वभाव ठीक न लगने और घर का वातावरण उचित न लगने पर भी रिश्ता पक्का होने में अड़चन आती है। ऐसे में कपूर की गोली हाथ में थाम लेने भर से सब ठीक हो जाता है। नियम- हमेशा बाईं मुट्ठी में ही कपूर को रखें। एक लोटे में कपूर डालें और उस जल को शुक्र देवता को अर्पित करें। ऐसा करने से आपको बहुत लाभ होंगे। ऐसा करने से सबसे पहला लाभ होगा कि शुक्र सुंदरता का कारक होता है, तो आपकी खूबसूरती भी बढ़ेगी। इतना ही नहीं, ऐसा करने से कुंडली में मौजूद शुक्र ग्रह मजबूत होगा, जिससे शादि में आ रही अड़चन कम होगी। नियम- कपूर की गोली पानी में हमेशा एक, तीन या पाँच यानि विषम संख्या में ही डालें। कई बार नजरदोष के कारण भी ऐसा होता है। ऐसे में कपूर और लौंग मुट्ठी में लेकर सूर्यास्त के बाद आप बेटी की सात बार नजर उतारें और बाद में कपूर को चौराहे पर फेंक दें। फेंके हुए कपूर को दोबारा पलट कर नहीं देखें। नियम- कपूर और लौंग को फेंकने के स्थान पर आप उसे जला भी सकती हैं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को वह प्रस्ताव मंज़ूर नहीं जिसमें कश्मीर की सीमा में बदलाव की बात कही गई है.
उन्होंने ये भी कहा कि धर्म के आधार पर भारत का दोबारा विभाजन नहीं होगा.
इसे पर्यवेक्षक पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की कश्मीर पर दिए अनौपचारिक सुझावों का जवाब मान रहे हैं जिसके तहत उन्होंने कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों को स्वायत्तता दिए जाने या फिर संयुक्त राष्ट्र के अधीन प्रशासित करने का ज़िक्र किया था.
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर राज्य की यात्रा पर पहुँचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आशा जताई कि कश्मीरी समृद्ध होंगे और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ विकास और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए 24 हज़ार करोड़ रुपयों की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य के ऐसे किसी भी गुट के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो हिंसा के ख़िलाफ़ हैं.
एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हालात सुधरे और सीमा पार से चरमपंथियों का आना का काबू में रहा तो वे सैनिकों की संख्या में और कटौती के बारे में विचार करेंगे.
उनके पहुँचने से पहले उनके सभा स्थल के पास ही सुरक्षा बलों का दो कथित चरमपंथियों के साथ मुक़ाबला हुआ.
अधिकारियों के अनुसार तीन घंटे की गोलीबारी के बाद दोनों चरमपंथियों की मौत हो गई.
उधर मनमोहन सिंह की घोषणा के मुताबिक़ बुधवार से जम्मू-कश्मीर राज्य के अनंतनाग ज़िले से सैनिकों की संख्या में कटौती शुरु हो गई.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि कश्मीर में अमन और ख़ुशहाली के पुराने दिन लौटें और लोग इज़्ज़त के साथ अपने राज्य में रह सकें.
उन्होंने बातचीत के लिए सभी गुटों को न्यौता देते हुए कहा, "हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं जिसे कश्मीर के अमन और ख़ुशहाली की चिंता हो. "
उन्होंने कहा, "मेरा दिल नए ख़यालात के लिए खुला है. "
मनमोहन सिंह ने कहा, " मैंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ से भी कहा है कि तमाम मसलों का हल निकाल सकते हैं बशर्ते हम दयानतदारी और हमदर्दी से काम लें. "
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि कश्मीर के लोगों ने जो कुछ भुगता है उसके लिए उन्हें गहरा अफ़सोस है.
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक सामान्य परिवार से हैं इसलिए वे समझते हैं कि शिक्षा का क्या महत्व है.
उनका कहना था कि शिक्षा से ताक़त आती है. उन्होंने महिलाओं को भी शिक्षा देने की बात कही.
उन्होंने कहा कि बेकारी और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ भी लड़ाई बेहद ज़रुरी है.
प्रधानंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब सरकारों को अपना काम करने का तरीक़ा बदलना होगा.
उन्होंने कहा, "लोग अब नालायक सियासतदानों से थक चुके हैं. अब कुनबापरस्ती को रोकना होगा. "
कश्मीरी जनता को आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि लोग चाहते हैं कि लाइन ऑफ़ कंट्रोल यानि नियंत्रण रेखा के पार जाना आसान हो ताकि वे अपने रिश्तेदारों से मिल सकें और व्यापार आदि आसान हो सके. उन्होंने कहा कि वे इस मसले पर भी पाकिस्तान से बात कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "आपने बहुत दुख सहे, हम पाकिस्तान के साथ बात कर रहे हैं ताकि बिना मतलब की हिंसा ख़त्म हो. "
उन्होंने कहा कि वे कश्मीर के लोगों से, वहाँ के राजनीतिक दलों से और वहाँ काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपनी राय दें ताकि नई मंज़िल पर पहुँचने में सफलता मिल सके.
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जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को वह प्रस्ताव मंज़ूर नहीं जिसमें कश्मीर की सीमा में बदलाव की बात कही गई है. उन्होंने ये भी कहा कि धर्म के आधार पर भारत का दोबारा विभाजन नहीं होगा. इसे पर्यवेक्षक पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की कश्मीर पर दिए अनौपचारिक सुझावों का जवाब मान रहे हैं जिसके तहत उन्होंने कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों को स्वायत्तता दिए जाने या फिर संयुक्त राष्ट्र के अधीन प्रशासित करने का ज़िक्र किया था. प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर राज्य की यात्रा पर पहुँचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आशा जताई कि कश्मीरी समृद्ध होंगे और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ विकास और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए चौबीस हज़ार करोड़ रुपयों की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की. उन्होंने कहा कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य के ऐसे किसी भी गुट के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो हिंसा के ख़िलाफ़ हैं. एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हालात सुधरे और सीमा पार से चरमपंथियों का आना का काबू में रहा तो वे सैनिकों की संख्या में और कटौती के बारे में विचार करेंगे. उनके पहुँचने से पहले उनके सभा स्थल के पास ही सुरक्षा बलों का दो कथित चरमपंथियों के साथ मुक़ाबला हुआ. अधिकारियों के अनुसार तीन घंटे की गोलीबारी के बाद दोनों चरमपंथियों की मौत हो गई. उधर मनमोहन सिंह की घोषणा के मुताबिक़ बुधवार से जम्मू-कश्मीर राज्य के अनंतनाग ज़िले से सैनिकों की संख्या में कटौती शुरु हो गई. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि कश्मीर में अमन और ख़ुशहाली के पुराने दिन लौटें और लोग इज़्ज़त के साथ अपने राज्य में रह सकें. उन्होंने बातचीत के लिए सभी गुटों को न्यौता देते हुए कहा, "हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं जिसे कश्मीर के अमन और ख़ुशहाली की चिंता हो. " उन्होंने कहा, "मेरा दिल नए ख़यालात के लिए खुला है. " मनमोहन सिंह ने कहा, " मैंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ से भी कहा है कि तमाम मसलों का हल निकाल सकते हैं बशर्ते हम दयानतदारी और हमदर्दी से काम लें. " उन्होंने अपने भाषण में कहा कि कश्मीर के लोगों ने जो कुछ भुगता है उसके लिए उन्हें गहरा अफ़सोस है. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक सामान्य परिवार से हैं इसलिए वे समझते हैं कि शिक्षा का क्या महत्व है. उनका कहना था कि शिक्षा से ताक़त आती है. उन्होंने महिलाओं को भी शिक्षा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि बेकारी और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ भी लड़ाई बेहद ज़रुरी है. प्रधानंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब सरकारों को अपना काम करने का तरीक़ा बदलना होगा. उन्होंने कहा, "लोग अब नालायक सियासतदानों से थक चुके हैं. अब कुनबापरस्ती को रोकना होगा. " कश्मीरी जनता को आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि लोग चाहते हैं कि लाइन ऑफ़ कंट्रोल यानि नियंत्रण रेखा के पार जाना आसान हो ताकि वे अपने रिश्तेदारों से मिल सकें और व्यापार आदि आसान हो सके. उन्होंने कहा कि वे इस मसले पर भी पाकिस्तान से बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आपने बहुत दुख सहे, हम पाकिस्तान के साथ बात कर रहे हैं ताकि बिना मतलब की हिंसा ख़त्म हो. " उन्होंने कहा कि वे कश्मीर के लोगों से, वहाँ के राजनीतिक दलों से और वहाँ काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपनी राय दें ताकि नई मंज़िल पर पहुँचने में सफलता मिल सके.
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जबलपुर के बरेला स्थित शारदा मंदिर के पीछे पहाड़ी पर भीषण आग लग गई। घटना सोमवार देर रात करीब 8 बजे की है। पहाड़ी में अचानक आग लगने से पहाड़ के नजदीक बने गांव में हड़कंप मच गया। पहाड़ी में आग इस तरह फैली कि देखते ही देखते आग पहाड़ के 2 किलोमीटर एरिया तक फैल गई। भीषण आग लगने के बाद ग्रामीणों ने आग लगने की सूचना फॉरेस्ट विभाग को दी।
इसके बाद फॉरेस्ट विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। हालांकि, पहाड़ी की चोटी पर अभी भी आग धधक रही है।
बरेला स्थित शारदा मंदिर के पीछे पहाड़ी पर भीषण आग लगने के बाद ग्रामीणों के साथ ही नेशनल हाईवे में आ और जा रहे राहगीरों ने घटनाक्रम का वीडियो बनाया है, जो अब सामने आया हैं। ग्रामीणों का कहना है पहाड़ी में लगी आग फॉरेस्ट विभाग की टीम के आने तक काफी फैल चुकी थी। जिसे काफी मशक्कत के बाद टीम ने जंगल की ओर जाने से पहले फैलने से रोक दिया गया। फिलहाल फॉरेस्ट विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया है।
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जबलपुर के बरेला स्थित शारदा मंदिर के पीछे पहाड़ी पर भीषण आग लग गई। घटना सोमवार देर रात करीब आठ बजे की है। पहाड़ी में अचानक आग लगने से पहाड़ के नजदीक बने गांव में हड़कंप मच गया। पहाड़ी में आग इस तरह फैली कि देखते ही देखते आग पहाड़ के दो किलोग्राममीटर एरिया तक फैल गई। भीषण आग लगने के बाद ग्रामीणों ने आग लगने की सूचना फॉरेस्ट विभाग को दी। इसके बाद फॉरेस्ट विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। हालांकि, पहाड़ी की चोटी पर अभी भी आग धधक रही है। बरेला स्थित शारदा मंदिर के पीछे पहाड़ी पर भीषण आग लगने के बाद ग्रामीणों के साथ ही नेशनल हाईवे में आ और जा रहे राहगीरों ने घटनाक्रम का वीडियो बनाया है, जो अब सामने आया हैं। ग्रामीणों का कहना है पहाड़ी में लगी आग फॉरेस्ट विभाग की टीम के आने तक काफी फैल चुकी थी। जिसे काफी मशक्कत के बाद टीम ने जंगल की ओर जाने से पहले फैलने से रोक दिया गया। फिलहाल फॉरेस्ट विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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-हजरत अमीर शरीयत ने मौलाना सज्जाद मेमोरियल हॉस्पिटल के रिनोवेटेड ओपीडी का उद्घाटन किया, फ्री मेगा हेल्थ कैंप भी लगाया गया , 2500 से ज्यादा मरीज लाभान्वित हुए.
फुलवारी शरीफ. सेहत अल्लाह तआला की बड़ी नेमत है, इस्लाम ने सेहत की हिफाजत के लिए इलाज का हुक्म दिया है. लोगों की सेहत का ख्याल रखना और बीमारों को इलाज मुहैया कराना बहुत बड़ा पुण्य का कार्य है. ये बातें अमीर शरीयत बिहार, ओड़ीशा और झारखंड मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने शनिवार को मौलाना सज्जाद मेमोरियल हॉस्पिटल के रिनोवेटेड ओपीडी का उदघाटन करते हुए कही.
इस अवसर पर निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें ढाई हजार से अधिक रोगी लाभान्वित हुए. मरीजों की निशुल्क जांच की गई उन्हें उपयोगी सलाह दी गई तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाइयां भी दी गईं. इस मौके पर हजरत अमीर शरीयत ने अस्पताल के सचिव मौलाना सोहेल अहमद नदवी और सभी डॉक्टरों, कर्मचारियों और सहायकों को शुभकामनाएं दीं. उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रशंसा और प्रोत्साहन के रूप में, उन सभी को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया. जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों को उनके अच्छे काम के लिए सर्टिफिकेट ऑफ अप्रीसिएशन से सम्मानित किया गया, उनमें डॉ. एस. निसार अहमद, डॉ. गुलाम मोहिउद्दीन अशरफी, डॉ. नजीर अहमद खान, डॉ. सैयद यासिर हबीब, डॉ. मुहम्मद तकी इमाम, एस. ए. ए. नौशाद, डॉ. अबू बक्र नजमी, डॉ. मुहम्मद नजीरुल हक, डॉ. शबाना परवीन, डॉ. मुहम्मद शादाब, डॉ. शाहीन जफर, डॉ. फौजिया शफी, डॉ. राणा शमीम, डॉ. रजिया शाहीन, डॉ. नाहिद फातिमा, डॉ. महबूब आलम, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. इकबाल हुसैन, डॉ. फहद नसीम, डॉ. सानिया खुर्शीद, डॉ. खुर्शीद परवीन, एजाज अहमद, फरीद अख्तर, मनवर इरशाद, आरिफ सिद्दीकी, फिरदौस आलम शामिल हैं.
हजरत मौलाना मुहम्मद शमशाद रहमानी कासमी साहिब नायब अमीर शरीयत बिहार ओडिशा एवं झारखंड ने भी पुनर्निर्मित ओपीडी के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इससे अस्पताल की लोकप्रियता में और वृद्धि होगी और जरूरतमंद रोगियों को लाभ पहुंचेगा . उन्होंने आशा व्यक्त की कि जल्द ही अन्य विभागों का भी नवीनीकरण किया जाएगा. इमारत शरिया के कार्यवाहक नाजिम हजरत मौलाना मुहम्मद शिबली अल-कासमी ने कहा कि हजरत अमीर शरियत ने एक साल के अंदर कई ऐसे काम किए हैं, जो इमारत शरिया के इतिहास का एक उज्ज्वल हिस्सा हैं. मौके पर काजी शरीयत मौलाना अंजार आलम कासमी , अस्पताल के सचिव मौलाना सोहैल अहमद नदवी , इरशादुल्ला अध्यक्ष बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड, मौलाना मुफ्ती वसी अहमद कासमी, मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सनाउल हुदा कासमी,
नायब नाजिम, मौलाना अहमद हुसैन कासमी सहायक नाजिम , अस्पताल के अध्यक्ष प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अहमद अब्दुल हई , शूरा सदस्य हाजी एहसानुल हक, मौलाना इजाज अहमद , पूर्व अध्यक्ष बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, एसएम शराफ पूर्व अध्यक्ष सुगरा वक्फ बोर्ड, मौलाना मिन्हाज आलम नदवी प्रभारी परियोजना प्रबंधन विभाग, मौलाना शमीम अकरम रहमानी, सहायक काजी शरीयत, हाफिज एहतेशाम आलम रहमानी, इमारत शरिया के शूरा सदस्य, मौलाना सैयद मुहम्मद आदिल फरीदी, सैयद जमाल साहिब उर्फ नन्हू, नैयर आजम साह, हुमायूं अशरफ, सैयद असगर हुसैन और अस्पताल के अन्य कर्मचारी और इमारत शरिया के कार्यकर्ता भी इस अवसर पर उपस्थित थे.
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-हजरत अमीर शरीयत ने मौलाना सज्जाद मेमोरियल हॉस्पिटल के रिनोवेटेड ओपीडी का उद्घाटन किया, फ्री मेगा हेल्थ कैंप भी लगाया गया , दो हज़ार पाँच सौ से ज्यादा मरीज लाभान्वित हुए. फुलवारी शरीफ. सेहत अल्लाह तआला की बड़ी नेमत है, इस्लाम ने सेहत की हिफाजत के लिए इलाज का हुक्म दिया है. लोगों की सेहत का ख्याल रखना और बीमारों को इलाज मुहैया कराना बहुत बड़ा पुण्य का कार्य है. ये बातें अमीर शरीयत बिहार, ओड़ीशा और झारखंड मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने शनिवार को मौलाना सज्जाद मेमोरियल हॉस्पिटल के रिनोवेटेड ओपीडी का उदघाटन करते हुए कही. इस अवसर पर निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें ढाई हजार से अधिक रोगी लाभान्वित हुए. मरीजों की निशुल्क जांच की गई उन्हें उपयोगी सलाह दी गई तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाइयां भी दी गईं. इस मौके पर हजरत अमीर शरीयत ने अस्पताल के सचिव मौलाना सोहेल अहमद नदवी और सभी डॉक्टरों, कर्मचारियों और सहायकों को शुभकामनाएं दीं. उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रशंसा और प्रोत्साहन के रूप में, उन सभी को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया. जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों को उनके अच्छे काम के लिए सर्टिफिकेट ऑफ अप्रीसिएशन से सम्मानित किया गया, उनमें डॉ. एस. निसार अहमद, डॉ. गुलाम मोहिउद्दीन अशरफी, डॉ. नजीर अहमद खान, डॉ. सैयद यासिर हबीब, डॉ. मुहम्मद तकी इमाम, एस. ए. ए. नौशाद, डॉ. अबू बक्र नजमी, डॉ. मुहम्मद नजीरुल हक, डॉ. शबाना परवीन, डॉ. मुहम्मद शादाब, डॉ. शाहीन जफर, डॉ. फौजिया शफी, डॉ. राणा शमीम, डॉ. रजिया शाहीन, डॉ. नाहिद फातिमा, डॉ. महबूब आलम, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. इकबाल हुसैन, डॉ. फहद नसीम, डॉ. सानिया खुर्शीद, डॉ. खुर्शीद परवीन, एजाज अहमद, फरीद अख्तर, मनवर इरशाद, आरिफ सिद्दीकी, फिरदौस आलम शामिल हैं. हजरत मौलाना मुहम्मद शमशाद रहमानी कासमी साहिब नायब अमीर शरीयत बिहार ओडिशा एवं झारखंड ने भी पुनर्निर्मित ओपीडी के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इससे अस्पताल की लोकप्रियता में और वृद्धि होगी और जरूरतमंद रोगियों को लाभ पहुंचेगा . उन्होंने आशा व्यक्त की कि जल्द ही अन्य विभागों का भी नवीनीकरण किया जाएगा. इमारत शरिया के कार्यवाहक नाजिम हजरत मौलाना मुहम्मद शिबली अल-कासमी ने कहा कि हजरत अमीर शरियत ने एक साल के अंदर कई ऐसे काम किए हैं, जो इमारत शरिया के इतिहास का एक उज्ज्वल हिस्सा हैं. मौके पर काजी शरीयत मौलाना अंजार आलम कासमी , अस्पताल के सचिव मौलाना सोहैल अहमद नदवी , इरशादुल्ला अध्यक्ष बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड, मौलाना मुफ्ती वसी अहमद कासमी, मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सनाउल हुदा कासमी, नायब नाजिम, मौलाना अहमद हुसैन कासमी सहायक नाजिम , अस्पताल के अध्यक्ष प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अहमद अब्दुल हई , शूरा सदस्य हाजी एहसानुल हक, मौलाना इजाज अहमद , पूर्व अध्यक्ष बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, एसएम शराफ पूर्व अध्यक्ष सुगरा वक्फ बोर्ड, मौलाना मिन्हाज आलम नदवी प्रभारी परियोजना प्रबंधन विभाग, मौलाना शमीम अकरम रहमानी, सहायक काजी शरीयत, हाफिज एहतेशाम आलम रहमानी, इमारत शरिया के शूरा सदस्य, मौलाना सैयद मुहम्मद आदिल फरीदी, सैयद जमाल साहिब उर्फ नन्हू, नैयर आजम साह, हुमायूं अशरफ, सैयद असगर हुसैन और अस्पताल के अन्य कर्मचारी और इमारत शरिया के कार्यकर्ता भी इस अवसर पर उपस्थित थे.
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सौशिकपर्व ।
अवस्था और वेदव्रतको पाकर १३ कृपाचार्य से सब अस्त्रों को पावेगा फिर परम को पाकर क्षत्रियव्रतमें नियत १४ धर्मात्मा साठ वर्षतक सृष्टिकी रक्षा करेगा इसके पीछे वह महाबाहु कौरवराज होगा १५ हे दुर्बुद्धे ! तेरे देखते परीक्षितनाम राजा होगा मैं उस शस्त्रकी अग्नि से भस्म हुये को अपने तेजसे जिलाऊंगा हे नीच ! मेरे सत्य और तपके बलको देखो १६ व्यासजी बोले जो तुमने हमको अनादर करके यह भयकारी कर्म किया और तुझ सत्पुरुष ब्राह्मण का ऐसा चलन हुआ इन दोनों कारणों से श्रीकृष्णजीने जो श्रेष्ठ वचन कहाहै निस्सन्देह वही दशा तेरी होनेवाली है तुम क्षत्रियधर्म में नियतहो १७ । १८ अश्वत्थामा बोले हे ब्राह्मण ! मैं इस लोकके मनुष्यों में आपके साथ नियत हूंगा यह भगवान् पुरुषोत्तम सत्यवक्ता हैं १६ वैशम्पायन बोले कि फिर उदास मन होकर अश्वत्थामा महात्मा पाण्डवों को मणि देकर उन सबके देखते हुये वनको गये २० और जिनके शत्रु मारेगये वह पाण्डव गोविन्दजी और व्यास जी महामुनि नारदजी को आगे करके २१ और अश्वत्थामा के शरीर के साथ उत्पन्न होनेवाली मणिको लेकर शीघ्रही उस मनस्विनी और शरीर त्यागने के निमित्त नियम करनेवाली द्रौपदी की ओर दौड़े २२ वैशम्पायन बोले कि इसके अनन्तर वह पुरुषोत्तम पाण्डव श्रीकृष्णजी समेत वायुके समान शीघ्रगामी उत्तम घोड़ों के द्वारा फिर डेरे को गये २३ आप पीड़ावान और शीघ्रता करने वाले महारथियों ने रथों से उतरकर प्रसन्नमनवाली द्रौपदी को पीड़ित देखा २४ वह पाण्डव केशवजी समेत उस अमसन्न और दुःखशोक से युक्त द्रौपदी पास जाकर उसको घेरकर बैठ गये २५ इसके पीछे राजा की आज्ञानुसार महाबली भीमसेन ने उस दिव्य मणिको दिया और मणि देकर यह वचन कहा २६ हे कल्याणिनि ! यह तेरी मणि है और वह तेरे पुत्रों का मारनेवाला विजय किया गया शोकको छोड़कर उठो और क्षत्रियधर्म को स्मरणकर २७ हे श्यामलोचने ! सन्धिके अर्थ वासुदेवजीके यात्रा करनेपर तुमने जो यह वचन उन श्रीकृष्णजी से कहे थे कि हे गोविन्दजी ! राजाको सन्धिका अभि लाषी होनेपर मेरे पति पुत्र भाई और तुम चारोंगें से कोई नहीं हो २८।२६ तुमने क्षत्रियधर्म के योग्य वीरताके वचन पुरुषोत्तमसे कहेथे उनके स्मरण क रनेको योग्य हो ३० राज्यका शत्रु पापी दुर्योधन मारा गया मैंने उस कटेहुये दुश्शासनका रुधिर पिया ३१ शत्रुतकी ऋता को पाया हम वार्तालाप
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सौशिकपर्व । अवस्था और वेदव्रतको पाकर तेरह कृपाचार्य से सब अस्त्रों को पावेगा फिर परम को पाकर क्षत्रियव्रतमें नियत चौदह धर्मात्मा साठ वर्षतक सृष्टिकी रक्षा करेगा इसके पीछे वह महाबाहु कौरवराज होगा पंद्रह हे दुर्बुद्धे ! तेरे देखते परीक्षितनाम राजा होगा मैं उस शस्त्रकी अग्नि से भस्म हुये को अपने तेजसे जिलाऊंगा हे नीच ! मेरे सत्य और तपके बलको देखो सोलह व्यासजी बोले जो तुमने हमको अनादर करके यह भयकारी कर्म किया और तुझ सत्पुरुष ब्राह्मण का ऐसा चलन हुआ इन दोनों कारणों से श्रीकृष्णजीने जो श्रेष्ठ वचन कहाहै निस्सन्देह वही दशा तेरी होनेवाली है तुम क्षत्रियधर्म में नियतहो सत्रह । अट्ठारह अश्वत्थामा बोले हे ब्राह्मण ! मैं इस लोकके मनुष्यों में आपके साथ नियत हूंगा यह भगवान् पुरुषोत्तम सत्यवक्ता हैं सोलह वैशम्पायन बोले कि फिर उदास मन होकर अश्वत्थामा महात्मा पाण्डवों को मणि देकर उन सबके देखते हुये वनको गये बीस और जिनके शत्रु मारेगये वह पाण्डव गोविन्दजी और व्यास जी महामुनि नारदजी को आगे करके इक्कीस और अश्वत्थामा के शरीर के साथ उत्पन्न होनेवाली मणिको लेकर शीघ्रही उस मनस्विनी और शरीर त्यागने के निमित्त नियम करनेवाली द्रौपदी की ओर दौड़े बाईस वैशम्पायन बोले कि इसके अनन्तर वह पुरुषोत्तम पाण्डव श्रीकृष्णजी समेत वायुके समान शीघ्रगामी उत्तम घोड़ों के द्वारा फिर डेरे को गये तेईस आप पीड़ावान और शीघ्रता करने वाले महारथियों ने रथों से उतरकर प्रसन्नमनवाली द्रौपदी को पीड़ित देखा चौबीस वह पाण्डव केशवजी समेत उस अमसन्न और दुःखशोक से युक्त द्रौपदी पास जाकर उसको घेरकर बैठ गये पच्चीस इसके पीछे राजा की आज्ञानुसार महाबली भीमसेन ने उस दिव्य मणिको दिया और मणि देकर यह वचन कहा छब्बीस हे कल्याणिनि ! यह तेरी मणि है और वह तेरे पुत्रों का मारनेवाला विजय किया गया शोकको छोड़कर उठो और क्षत्रियधर्म को स्मरणकर सत्ताईस हे श्यामलोचने ! सन्धिके अर्थ वासुदेवजीके यात्रा करनेपर तुमने जो यह वचन उन श्रीकृष्णजी से कहे थे कि हे गोविन्दजी ! राजाको सन्धिका अभि लाषी होनेपर मेरे पति पुत्र भाई और तुम चारोंगें से कोई नहीं हो अट्ठाईस।छब्बीस तुमने क्षत्रियधर्म के योग्य वीरताके वचन पुरुषोत्तमसे कहेथे उनके स्मरण क रनेको योग्य हो तीस राज्यका शत्रु पापी दुर्योधन मारा गया मैंने उस कटेहुये दुश्शासनका रुधिर पिया इकतीस शत्रुतकी ऋता को पाया हम वार्तालाप
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तब बीज मन्त्र के दोनों ओर कामबीज (क्लीं) लिखें। इसके बाद पाँचो बीजाक्षर फिर दुहराएँ । पुनः दशाक्षर मन्त्र से वेष्टित करें -
षडङ्गान्यग्निकोणादि कोणेष्ववक्रमाल्लिखेत् । । 11 ।। तथा कोणकपोलेषु ह्रीं श्रीं च विलिखेन्मुने । हुं बीजं प्रतिकोणाग्रं केसराग्रेषु च स्वरान् ।।12।। फिर अग्निकोण से प्रारम्भ कर कोणों में विपरीत क्रम से षडङ्गों को लिखें और कोणों के दोनों ओर 'ह्रीं' और 'श्रीं' लिखें। प्रत्येक कोण के अग्रभाग में 'हूं' बीज लिखें और केसर के अग्रभागों में स्वरों को लिखें ।
मालामन्त्रस्य वर्णाः स्युः चत्वारिंशच्च पञ्च च । वर्णाः सप्तदलेष्वेव षट् षट् पञ्चाष्टमेदले ।।13।। पूर्वतो वेष्टयेत् काद्यैः तत्सर्वं च तपोधन । बीजद्वयं च विलिखेत् नरसिंहवराहयोः ।।14 ।। दिग्विदिक्ष्वपि पूर्वस्मात् ' भूगृहे चतुरस्रके । यन्त्रेस्मिन् सम्यगाराध्य भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ।।15।।
मालामन्त्र में पैंतालीस वर्ण होते हैं, जिनमें सात दलों में छः छः वर्ण लिखें और आठवें में पाँच वर्ण लिखें । पूर्व से 'क' आदि से सबको वेष्टित करें और वराह एवं नरसिंह के बीज (क्षौं) चारो दिशाओं एवं चारो कोणों में वर्गाकर भूपुर पर लिखें। इस यन्त्र पर आराधना कर भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
यद्वा मध्ये लिखेत्तारं षट्सु कोणेष्वपि क्रमात् । मूलमन्त्राक्षराण्येव सन्धिष्वग्रं च मान्मथम् ।।16।। मायां गण्डेषु किंजल्के स्वराणां लेखने मतम् । मन्त्रेषु पूर्ववन्मालामन्त्रो लेख्यः क्रमेण हि ।।17।। दशाक्षरेण संवेष्ट्य कादीनि व्यञ्जनानि च ।
दिग्विदिक्षु लिखेद् बीजे नारसिंहवराहयोः ।।18।। अथवा मध्य में तथा छः कोणों में क्रम से तार (ऊँ कार) लिखें। इसके बाद मूल मन्त्र के अक्षर कोण की सन्धियों पर लिखकर उसके आगे कामबीज (क्लीं) लिखें। कोणों के दोनों बगल में तिरछी रेखा पर माया बीज (ह्रीं) तथा केसर पर 1. क. सर्वासु ।
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तब बीज मन्त्र के दोनों ओर कामबीज लिखें। इसके बाद पाँचो बीजाक्षर फिर दुहराएँ । पुनः दशाक्षर मन्त्र से वेष्टित करें - षडङ्गान्यग्निकोणादि कोणेष्ववक्रमाल्लिखेत् । । ग्यारह ।। तथा कोणकपोलेषु ह्रीं श्रीं च विलिखेन्मुने । हुं बीजं प्रतिकोणाग्रं केसराग्रेषु च स्वरान् ।।बारह।। फिर अग्निकोण से प्रारम्भ कर कोणों में विपरीत क्रम से षडङ्गों को लिखें और कोणों के दोनों ओर 'ह्रीं' और 'श्रीं' लिखें। प्रत्येक कोण के अग्रभाग में 'हूं' बीज लिखें और केसर के अग्रभागों में स्वरों को लिखें । मालामन्त्रस्य वर्णाः स्युः चत्वारिंशच्च पञ्च च । वर्णाः सप्तदलेष्वेव षट् षट् पञ्चाष्टमेदले ।।तेरह।। पूर्वतो वेष्टयेत् काद्यैः तत्सर्वं च तपोधन । बीजद्वयं च विलिखेत् नरसिंहवराहयोः ।।चौदह ।। दिग्विदिक्ष्वपि पूर्वस्मात् ' भूगृहे चतुरस्रके । यन्त्रेस्मिन् सम्यगाराध्य भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ।।पंद्रह।। मालामन्त्र में पैंतालीस वर्ण होते हैं, जिनमें सात दलों में छः छः वर्ण लिखें और आठवें में पाँच वर्ण लिखें । पूर्व से 'क' आदि से सबको वेष्टित करें और वराह एवं नरसिंह के बीज चारो दिशाओं एवं चारो कोणों में वर्गाकर भूपुर पर लिखें। इस यन्त्र पर आराधना कर भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। यद्वा मध्ये लिखेत्तारं षट्सु कोणेष्वपि क्रमात् । मूलमन्त्राक्षराण्येव सन्धिष्वग्रं च मान्मथम् ।।सोलह।। मायां गण्डेषु किंजल्के स्वराणां लेखने मतम् । मन्त्रेषु पूर्ववन्मालामन्त्रो लेख्यः क्रमेण हि ।।सत्रह।। दशाक्षरेण संवेष्ट्य कादीनि व्यञ्जनानि च । दिग्विदिक्षु लिखेद् बीजे नारसिंहवराहयोः ।।अट्ठारह।। अथवा मध्य में तथा छः कोणों में क्रम से तार लिखें। इसके बाद मूल मन्त्र के अक्षर कोण की सन्धियों पर लिखकर उसके आगे कामबीज लिखें। कोणों के दोनों बगल में तिरछी रेखा पर माया बीज तथा केसर पर एक. क. सर्वासु ।
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काह से आकर इसी नई खानकाह में दरबार खास होता था । बहुत बड़े बड़े विद्वान् और मौलवी आदि तथा कुछ थोड़े से चुने हुए मुसाहब वहाँ रहते थे। दरबारियों में से और किसी को वहाँ आने की आज्ञा नहीं थी । वहाँ केवल ईश्वर और धर्म संबंधी बातें होती थीं। रात को भी इसी प्रकार की सभाएँ होती थीं। उन दिनों अकबर परम निष्ठ और दीन हो रहा था । परंतु विद्वानों की मंडली भी कुछ विलक्षण ही हुआ करती है। वहाँ धार्मिक वाद-विवाद तो पीछे होंगे, पहले बैठने के स्थान के संबंध में ही झगड़े होने लगे कि अमुक मुझसे ऊपर क्यों बैठा और मैं उससे नीचे क्यों बैठाया गया । इसलिये इसका यह नियम बना कि अमीर लोग पूर्व की ओर, सैयद लोग पश्चिम की ओर, विद्वान् आदि दक्षिण की ओर और त्यागी तथा फकीर आदि उत्तर की ओर बैठें । संसार के लोग भी बड़े बिलक्षण होते हैं । इस इमारत के पास ही एक तालाब था । (इसका वर्णन आगे दिया गया है । ) वह रुपयों और अशर्फियों आदि से स रहता था । लोग आते थे और रुपए तथा अशफियाँ इस प्रकार ले जाते थे, जैसे घाट से लोग पानी भर ले जाते हैं !
प्रत्येक शुक्रवार की रात को इस सभा में बादशाह स्वयं जाता था । वह वहाँ के सभासदों से वार्तालाप करता था और नई नई बातों से अपना ज्ञान - भांडार बढ़ाता था । इन सभाओं को सजावट मानों अपने हाथ से सजाती थी, गुलदस्ते रखती थी, इत्र छिड़कती थी, फूल बरसाती थी और सुगंधित द्रव्य जलाती थी । उदारता रुपयों और अशफ़ियों की थैलियाँ लिए सेवा में उपस्थित रहती थी कि बस दो, और हिसाब न पूछो; क्योंकि उन्हीं लोगों की ओट में ऐसे दरिद्र भी आ पहुँचते थे, जिनको धन की आवश्यकता होती थी। गुजरात की लूट मे एतमाद खाँ गुजराती के पुस्तकालय की बहुत अच्छी अच्छी पुस्तकें हाथ आई थीं। उनकी प्रतियाँ अथवा प्रतिलिपियाँ भी विद्वानों में बँटती थीं । जमालखाँ कोरची ने एक दिन निवेदन किया कि यह सेवफ
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काह से आकर इसी नई खानकाह में दरबार खास होता था । बहुत बड़े बड़े विद्वान् और मौलवी आदि तथा कुछ थोड़े से चुने हुए मुसाहब वहाँ रहते थे। दरबारियों में से और किसी को वहाँ आने की आज्ञा नहीं थी । वहाँ केवल ईश्वर और धर्म संबंधी बातें होती थीं। रात को भी इसी प्रकार की सभाएँ होती थीं। उन दिनों अकबर परम निष्ठ और दीन हो रहा था । परंतु विद्वानों की मंडली भी कुछ विलक्षण ही हुआ करती है। वहाँ धार्मिक वाद-विवाद तो पीछे होंगे, पहले बैठने के स्थान के संबंध में ही झगड़े होने लगे कि अमुक मुझसे ऊपर क्यों बैठा और मैं उससे नीचे क्यों बैठाया गया । इसलिये इसका यह नियम बना कि अमीर लोग पूर्व की ओर, सैयद लोग पश्चिम की ओर, विद्वान् आदि दक्षिण की ओर और त्यागी तथा फकीर आदि उत्तर की ओर बैठें । संसार के लोग भी बड़े बिलक्षण होते हैं । इस इमारत के पास ही एक तालाब था । वह रुपयों और अशर्फियों आदि से स रहता था । लोग आते थे और रुपए तथा अशफियाँ इस प्रकार ले जाते थे, जैसे घाट से लोग पानी भर ले जाते हैं ! प्रत्येक शुक्रवार की रात को इस सभा में बादशाह स्वयं जाता था । वह वहाँ के सभासदों से वार्तालाप करता था और नई नई बातों से अपना ज्ञान - भांडार बढ़ाता था । इन सभाओं को सजावट मानों अपने हाथ से सजाती थी, गुलदस्ते रखती थी, इत्र छिड़कती थी, फूल बरसाती थी और सुगंधित द्रव्य जलाती थी । उदारता रुपयों और अशफ़ियों की थैलियाँ लिए सेवा में उपस्थित रहती थी कि बस दो, और हिसाब न पूछो; क्योंकि उन्हीं लोगों की ओट में ऐसे दरिद्र भी आ पहुँचते थे, जिनको धन की आवश्यकता होती थी। गुजरात की लूट मे एतमाद खाँ गुजराती के पुस्तकालय की बहुत अच्छी अच्छी पुस्तकें हाथ आई थीं। उनकी प्रतियाँ अथवा प्रतिलिपियाँ भी विद्वानों में बँटती थीं । जमालखाँ कोरची ने एक दिन निवेदन किया कि यह सेवफ
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लंदन से आई एक लड़की की वजह से नीतीश कुमार को काफी चिंता हो सकती है। जी हां, बिहार की राजनीति की एक नए सितारे का उदय हो गया है। ब्रिटेन में पढ़ाई करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने महिला दिवस पर ऐलान किया कि वो बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में सीएम नीतीश कुमार को टक्कर देने जा रही हैं। जेडीयू नेता नीतीश कुमार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बाद अब पुष्पम प्रिया तीसरी मुख्यमंत्री कैंडिडेट हैं।
पुष्पम प्रिया चौधरी ने रविवार को बिहार के सभी अखबारों में विज्ञापन देकर इस साल होने वाली चुनावी जंग में उतरने का ऐलान कर दिया है। पुष्पम ने 'प्लूरल्स' नाम से राजनीतिक दल बनाया है। पुष्पम इस पार्टी की अध्यक्ष हैं। पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में पढ़ाई की है और अब बिहार वापस आकर उसे बदलना चाहती हैं। पुष्पम ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस से लोक प्रशासन में एमए किया है। उन्होंने डिवेलेपमेंट स्टडी में एमए किया है।
पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपनी पार्टी के लिए एक नारा दिया है, 'जन गण सबका शासन। ' उन्होंने कहा, 'बिहार में अब सबका शासन होगा। मैं बिहार के अक्षम नेताओं को चुनौती दे रही हूं। मैं यह जंग जीतूंगी लेकिन आप इसे ऐतिहासिक बना सकते हैं। पटना से एमएलसी का चुनाव लड़ा बस एक शुरुआत है। बिहार चुनाव में हमारा गौरव वापस लाने के लिए हमसे जुड़ें। प्रियम ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सकारात्मक राजनीति करेगी।
प्रियम ने कहा कि अगर वह बिहार की सीएम बन जाती हैं तो वर्ष 2025 तक बिहार को देश का सबसे विकसित राज्य बना देंगी। यही नहीं वर्ष 2030 तक बिहार विकास के मामले में यूरोपीय देशों जैसा हो जाएगा। पुष्पम प्रिया चौधरी के बारे में बताया जाता है कि वह दरभंगा निवासी हैं और जेडीयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं। पुष्पम फिलहाल लंदन में ही रहती हैं। वह कहती हैं कि बिहार उनका पहला प्यार है और अब वह राज्य के लिए काम करना चाहती हैं। पुष्पम के पिता विनोद चौधरी नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने पूरी योजना बनाकर पुष्पम को चुनावी मैदान में उतारा है।
विनोद ने कहा कि उनकी बेटी पढ़ी लिखी है और सोच समझकर कर रही है। एक पिता होने के नाते मेरा पूरा आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि जो भी दिक्कत आएगी, हम उसका सामना करेंगे। मैं अभी जेडीयू में हूं और जब तक पार्टी उन्हें निकालेगी नहीं तब तक मैं पार्टी में रहूंगा। मैं अपनी बेटी को नैतिक समर्थन देता हूं। पुष्पम बिहार के लिए काम करना चाहती हैं। मैं अभी दरभंगा एमएलसी के चुनाव में लगा हूं। मेरा नीतीश कुमार के साथ पारिवारिक संबंध रहा है। आगे भी मैं उनका आदर करता रहूंगा।
विनोद चौधरी ने बताया कि उनकी बेटी को पढ़ाई करने के बाद भी कई बड़ी-बड़ी कंपनियों से ऑफर मिला था। लेकिन उसने काम करने की बजाय और कुछ बड़ा करने की सोची है। बताया जा रहा है कि पुष्पम के दादा दिवंगत उमाकांत चौधरी नीतीश कुमार के करीबी मित्र हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीने से पुष्पम बिहार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने राज्य का दौरा करके लोगों से काफी बात भी की है।
पुष्पम ने बिहार की जनता के नाम पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा है कि यह पत्र एक मुख्यमंत्री प्रत्याशी अपने साथी नागरिकों को लिख रही है। उन्होंने जनता से इसे संभाल कर रखने की अपील करते हुए लिखा कि यह उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की गारंटी है। पुष्पम ने लिखा, 'विगत वर्षों में बिहार की बहुसंख्यक आबादी के लिए प्रगति कर पाना कठिन हो गया है। सरकार सिर्फ़ उन लोगों की सुनती है जिनके ऊंचे सत्ताधारी लोगों से सम्पर्क हैं। राज्य के बाक़ी लोग पीछे छूट गए हैं। जीवन की गुणवत्ता अत्यंत दयनीय है और एक आम आदमी की ज़िंदगी का कोई मोल नहीं है। बड़ी संख्या में लोग मरते हैं, लापता हो जाते हैं, मार दिए जाते हैं या उनके साथ बलात्कार होता है, लेकिन वे समाचार की सुर्ख़ियां नहीं बन पाते। और अगर वह समाचार में आ भी जाते हैं तो सरकार अनसुना कर देती है। पूरी दुनियां काफ़ी तेज़ी से प्रगति कर रही है लेकिन बिहार सबसे पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है।
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लंदन से आई एक लड़की की वजह से नीतीश कुमार को काफी चिंता हो सकती है। जी हां, बिहार की राजनीति की एक नए सितारे का उदय हो गया है। ब्रिटेन में पढ़ाई करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने महिला दिवस पर ऐलान किया कि वो बिहार विधानसभा चुनाव दो हज़ार बीस में सीएम नीतीश कुमार को टक्कर देने जा रही हैं। जेडीयू नेता नीतीश कुमार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बाद अब पुष्पम प्रिया तीसरी मुख्यमंत्री कैंडिडेट हैं। पुष्पम प्रिया चौधरी ने रविवार को बिहार के सभी अखबारों में विज्ञापन देकर इस साल होने वाली चुनावी जंग में उतरने का ऐलान कर दिया है। पुष्पम ने 'प्लूरल्स' नाम से राजनीतिक दल बनाया है। पुष्पम इस पार्टी की अध्यक्ष हैं। पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में पढ़ाई की है और अब बिहार वापस आकर उसे बदलना चाहती हैं। पुष्पम ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस से लोक प्रशासन में एमए किया है। उन्होंने डिवेलेपमेंट स्टडी में एमए किया है। पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपनी पार्टी के लिए एक नारा दिया है, 'जन गण सबका शासन। ' उन्होंने कहा, 'बिहार में अब सबका शासन होगा। मैं बिहार के अक्षम नेताओं को चुनौती दे रही हूं। मैं यह जंग जीतूंगी लेकिन आप इसे ऐतिहासिक बना सकते हैं। पटना से एमएलसी का चुनाव लड़ा बस एक शुरुआत है। बिहार चुनाव में हमारा गौरव वापस लाने के लिए हमसे जुड़ें। प्रियम ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सकारात्मक राजनीति करेगी। प्रियम ने कहा कि अगर वह बिहार की सीएम बन जाती हैं तो वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक बिहार को देश का सबसे विकसित राज्य बना देंगी। यही नहीं वर्ष दो हज़ार तीस तक बिहार विकास के मामले में यूरोपीय देशों जैसा हो जाएगा। पुष्पम प्रिया चौधरी के बारे में बताया जाता है कि वह दरभंगा निवासी हैं और जेडीयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं। पुष्पम फिलहाल लंदन में ही रहती हैं। वह कहती हैं कि बिहार उनका पहला प्यार है और अब वह राज्य के लिए काम करना चाहती हैं। पुष्पम के पिता विनोद चौधरी नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने पूरी योजना बनाकर पुष्पम को चुनावी मैदान में उतारा है। विनोद ने कहा कि उनकी बेटी पढ़ी लिखी है और सोच समझकर कर रही है। एक पिता होने के नाते मेरा पूरा आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि जो भी दिक्कत आएगी, हम उसका सामना करेंगे। मैं अभी जेडीयू में हूं और जब तक पार्टी उन्हें निकालेगी नहीं तब तक मैं पार्टी में रहूंगा। मैं अपनी बेटी को नैतिक समर्थन देता हूं। पुष्पम बिहार के लिए काम करना चाहती हैं। मैं अभी दरभंगा एमएलसी के चुनाव में लगा हूं। मेरा नीतीश कुमार के साथ पारिवारिक संबंध रहा है। आगे भी मैं उनका आदर करता रहूंगा। विनोद चौधरी ने बताया कि उनकी बेटी को पढ़ाई करने के बाद भी कई बड़ी-बड़ी कंपनियों से ऑफर मिला था। लेकिन उसने काम करने की बजाय और कुछ बड़ा करने की सोची है। बताया जा रहा है कि पुष्पम के दादा दिवंगत उमाकांत चौधरी नीतीश कुमार के करीबी मित्र हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीने से पुष्पम बिहार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने राज्य का दौरा करके लोगों से काफी बात भी की है। पुष्पम ने बिहार की जनता के नाम पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा है कि यह पत्र एक मुख्यमंत्री प्रत्याशी अपने साथी नागरिकों को लिख रही है। उन्होंने जनता से इसे संभाल कर रखने की अपील करते हुए लिखा कि यह उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की गारंटी है। पुष्पम ने लिखा, 'विगत वर्षों में बिहार की बहुसंख्यक आबादी के लिए प्रगति कर पाना कठिन हो गया है। सरकार सिर्फ़ उन लोगों की सुनती है जिनके ऊंचे सत्ताधारी लोगों से सम्पर्क हैं। राज्य के बाक़ी लोग पीछे छूट गए हैं। जीवन की गुणवत्ता अत्यंत दयनीय है और एक आम आदमी की ज़िंदगी का कोई मोल नहीं है। बड़ी संख्या में लोग मरते हैं, लापता हो जाते हैं, मार दिए जाते हैं या उनके साथ बलात्कार होता है, लेकिन वे समाचार की सुर्ख़ियां नहीं बन पाते। और अगर वह समाचार में आ भी जाते हैं तो सरकार अनसुना कर देती है। पूरी दुनियां काफ़ी तेज़ी से प्रगति कर रही है लेकिन बिहार सबसे पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है।
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प्रवेश ; शिक्षा-स्थान - शन- तुङ्ग; चार्य - शन-यू और हुईहसी; अध्ययन काल से ही भिक्षु बनने की प्रवृत्ति ; श्राचार्य शन-यू की नृत्यु से गहरी चोट ; संसार और तत्सम्बन्धी साहित्य के प्रति उदासीनता; बुद्ध वचनात से तृप्ति ; चौदह वर्ष की उम्र में प्रव्रज्या; बौद्धधर्म-शास्त्र में तल्लीनता ; हुईहसी द्वारा दिये गये भगवान् बुद्ध के उपदेशों का इ-त्सिंग पर प्रभाव - बुद्ध के उपदेशों के भ्रामक अर्थों का पर्दाफाश ; उसकी गुरु-भक्ति ; बीस वर्ष की अवस्था में उपसम्पदा; उपसम्पदा के बाद ५ वर्षों तक विनय-ग्रन्थ का अध्ययन : फिर सूत्र-ग्रन्थों का अध्ययन ; १३ धूताङ्गों में से कुछ का अनुष्ठान ; चंगतेह-फू जाकर अभिधर्म-पिटक से सम्बन्ध रखने वाले प्रसङ्ग के दो शास्त्रों का अध्ययन करने का गुरु के द्वारा प्रोत्साहन ; इन ग्रन्थों का अध्ययन; फिर 'बुद्ध धर्म-तत्व' की खोज में सी अन् फू की यात्रा ; वसु-बन्धु कृत 'अभिधर्म कोश' और धर्मपाल - कृत 'विद्यामात्र सिद्धि' का अध्ययन ; सी-प्रन्-फू में होन-साङ्ग से भेंट ; होन-थसाङ्ग की मृत्यु र अन्त्येष्ठिक्रिया ।
भारत यात्रा का इत्सिंग का संकल्प ; यात्रा का उद्देश्य बौद्ध साहित्य का अध्ययन ।
२ - भारत की यात्रा
से चो-चोऊ ( जन्म स्थान ) वापस ; गुरु हुई- हसी से भारत जाने की आज्ञा ; इ-सिंग के संकल्प से हुई-हसी को हार्दिक प्रसन्नता ; मृत गुरु की समाधि पर पूजा;
इ-सिंग की यात्रा के साथी-सङ्कल्प निर्बल ; किसी ने अन्त तक साथ न दिया । राजदूत फेन हि सपासोचूअन की सहायता से वह क्वङ्गतुङ्ग ( कैण्टन ) पहुँचा; वहाँ से वह उक्त राजदूत के घर गया; वहाँ से फिर कङ्गतुङ्ग वापस ; यात्रा के ग्यारहवें मास में क्वगतुंग से ईरानी जहाजद्वारा दक्षिण-समुद्र की यात्रा ; समुद्र-यात्रा करने के बीसवें दिन भोज पहुँचा; भोज में छः मास रहकर वहाँ की भाषा, रहन-सहन, समाज, धर्म आदि का अध्ययन; संस्कृत का भी अध्ययन; भोज के राजा द्वारा सहायता ; भोज में दो बार संस्कृत, पाली एवं मूल बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन भोज की प्रशंसा : भोज और चीन के बीच व्यापार; भारत और भोज के बीच समुद्री यातायात ; भोज का समाज, भोज का समाज, धर्म - मूल सर्वास्तिवाद निकाय से सम्बन्ध रखनेवाले हीनयान मतवालों की संख्या अधिक - महायानमतावलम्बी भी ; भोज का रहनसहन, भाषा; उपज और प्रौद्योगिक उत्पादन; मुद्रा में चाँदी - सोने का प्रयोग ; ऋतु ; यहाँ के पड़ोस के विभिन्न स्थानों का एक साल तक निरीक्षण करने के बाद क-च से भोज-राज के जहाज पर भारत को रवाना ; जहाज १०-११ दिनों बाद नग्न रहनेवाले लोगों के देश में (इ-ल्लिंग इसे लो- जेन-कुप्रो कहता है ) पहुँचा ; वहाँ से पिन-लङ्ग ( पिनाङ्ग ) के सागर तट का दर्शन; लो-जैन-कुओ के सम्बन्ध में इत्सिंग का विवरण - पुरुष बिलकुल नग्न, स्त्रियों के साधारण आच्छादन पत्ते, उपज नारियल, सुपारी, बेंत, बाँस, कन्द, मूल, चावल कम, बेंत और बाँस के उद्योग और विषाल वाण चलाने में निपुण ;
दक्षिण सागर के इ-त्सिंग के कुछ द्वीपों के उल्लेखनीय नाम ; उन द्वीपों के आधुनिक नाम और स्थिति पर ऐतिहासिक विचार ।
पन्द्रह दिनों में वह ताम्रलिप्ति ( बंगाल के मेदिनीपुर जिले में तामलुक नामक स्थान ) पहुँचा ; ताम्रलिप्ति में होनथ्साङ्ग के शिष्य 'ता चेंगनेंग से भेंट ; इत्सिंग ने उससे संस्कृत भाषा सीखी और शब्द - विद्या का अभ्यास किया; ताम्रलिप्ति में एक वर्ष रहकर नये गुरु 'ता चेंगनेंग के साथ मध्यभारत की ओर प्रस्थान; साथ में एक सौ व्यापारी भी थे, रास्ते में कठिनाईक, सूखकर काँटा ; महाबोधी से आगे बढ़ने में अत्यन्त कष्ट, नालन्दा के रास्ते में बीमार; साथियों का साथ छूट गया; पहाड़ी लुटेरों से सामना; लुटेरों ने निर्वस्त्र कर दिया ; जीवन से निराश; लुटेरों से किसी तरह जान बची डाकुओं द्वारा गोरे विदेशियों की इष्टदेव को बलि चढ़ाने की जनश्रुति से भय ; भय से शरीर पर कीचड़ लगा लिया, पत्तों से शरीर ढँक लिया; आगे के गाँव में गुरु तेंग से भेंट ; उसकी दशा पर गुरु तेंग को खेद ।
उस गाँव से दोनों तीन-चार दिनों बाद नालन्दा पहुँचे ; नालन्दा पहुँचने से इत्सिंग को प्रसन्नता ; मूलगन्ध-कुटी जाकर पूजा; सुने हुए अन्यान्य दर्शनीय स्थानों का निरीक्षण गृधूकूट पर्वत की चढ़ाई; वस्त्र से जगह देखकर आश्चर्य ; गृधूकूट से महाबोधि विहार; बुद्ध की पूजा; महाबोधि विहार से चलकर वैशाली, कुशीनगर, काशी, कुक्कुटपदगिरि श्रादि स्थानों का पर्यटन करते हुए फिर नालन्दा वापस ; वैशाली में
उसने बुद्ध के सम-सामयिक विमलकीर्ति का फन-चंग ( दशहस्त वर्ग का घर ) ÷ भी देखा ; नालन्दा विश्व विद्यालय उन्नत अवस्था में ; इ-त्सिंग ने वहाँ १० वर्ष रहकर जयादत्त की लिखी सिद्धि-रचना पाणिनी-सूत्र की टीका, धातुपाट, अष्टधातु, वृत्ति सूत्र, भर्तृहरि कृत वाक्यपदीय, बेड़ावृत्ति, अश्ववोष - कृत सूत्रालंकार- शास्त्र, नागार्जुन-कृत सुहल्लेख, पातञ्जलि का महाभाष्य, शायण का सर्वदर्शन-संग्रह, भिन्न-भिन्न मतों के चार त्रिपिटक ग्रन्थों, मूलसवस्तिवाद निकाय का मूलांगोपांग, वैद्यक-ग्रन्थों तथा बौद्ध साहित्य की दूसरी कितनी पुस्तकों का अध्ययन किया ; भारत में उसने अधिक समय घूमने में नहीं, नालन्दा में पढ़ने में लगाया; काशी आदि नगरों में घूमने की बात ।
३ - इ-त्सिंग के समय का भारत
श्रीभोज से स्वदेश भेजे हुए 'भारत का बौद्ध धर्म के सन्देश से भारत का निदर्शन; जम्बूद्वीप आदि भारत के नाम ; हिन्दू शब्द उत्तर भारत में ही प्रचलित ; भारत का क्षेत्रफल ।
(क) इ-सिंग-काल के पूर्व के भारत के विद्वान् और उनकी रचना- बौद्ध एवं ब्राह्मण धर्मों में पृथक-पृथक उत्थान; बहुत अंशों में दोनों धर्मों में मेल और सम्मिश्रण; संस्कृत साहित्य का पुनस्थान; नये-नये दर्शनों की रचना; पतञ्जलि के महाभाष्य पर बड़ी-बड़ी टीकाएँ; इनमें भर्तृहरि की टीका प्रशंसनीय; सायण का सर्व-दर्शन-संग्रह लिखा जा
चुका था; भर्तृहरि के और भी कई ग्रन्थ, नागार्जुन, देव, अश्वघोष, वसु-बन्धु, प्रसंग, सङ्गभद्र, भवविवेक, जिन धर्मपाल, धर्मकीर्ति, शीलभद्र, सिंहचन्द्र, स्थिरमति, गुणमति, प्रज्ञागुप्त, गुणप्रभ, जिनप्रभ प्रभृति विद्वानों की रचनाएँ; विहारों में संग्रहालय और विद्यालय ; देशी और विदेशी लोगों के अध्ययन-अध्यापन का प्रबन्ध संग्रहालय की पुस्तकों की प्रतिलिपियाँ विदेशी ले गये ।
(ख) उसके समय के कुछ विद्वान् - इन विद्वानों के सम्पर्क से इ-सिंग को श्रानन्द ।
(ग) शिक्षा पद्धति - परमार्थ सत्य को खोजना, शिक्षा का उद्देश्य; दो प्रकार का सत्य - संवृति और परमार्थ; इ-सिंग द्वारा संस्कृत साहित्य और तत्सामयिक भारतीय शिक्षापद्धति की प्रशंसा ; काशिका प्रणाली की विशेष प्रशंसा; शब्द विद्या (व्याकरण) आदि पाँच विद्याओं का विवरण और चीन के शिहकिंग, शुकिंग, चि-किङ्ग, चु' न-चि' ऊ और लीकी के समान इनके पाँच ग्रन्थ ।
भारतीय बालकों का पठनारम्भ ; सिद्धिरस्तु अथवा सिद्धि-रचना ( सी-त'न चङ्ग) की वर्णमाला की पुस्तक ; सिद्धिरस्तु का अर्थ ; चीन में इसका अर्थ ; श्रद्यावधि मिथिला में सिद्धिरस्तु की परिपाटी ; चीन और जापान में सिद्धिरस्तु की : प्रणाली; सिद्ध के अष्टादश विमान नामक पुस्तक का उल्लेख सिद्ध-पिटक श्रथवा सिद्ध कोष ; श्रो३म् नमः सर्वज्ञाय सिद्धाम् से पुस्तक का प्रारम्भ ;
६ वर्ष की अवस्था में पठनारम्भ; वर्ण- परिचय छः मास वर्ण- परिचय की सबसे पहले शिव ने शिक्षा दी ( जनश्रुति ) ; सिद्धिरस्तु के बाद पाणिनि के सूत्र का अभ्यास, आठ-नौ मास में समाप्त ; पाणिनि, अपने समय का बड़ा विद्वान् ; दस वर्ष की अवस्था से तीन वर्षों में खिलग्रन्थ की समाप्ति; पन्द्रह वर्ष की अवस्था में काशिकावृत्ति एवं वृत्तिसूत्र का पठनारम्भ; काशिकावृत्ति के लेखक - जयानन्द और वामन ; इन ग्रन्थों की समाप्ति ५ वर्षों में; काशिकावृत्ति इ-ल्सिंग के लिए कठिन; इसे पढ़ने के लिए कन्फ्यूशस जैसा परिश्रमी चाहिए; काशिकावृत्ति के बाद गद्य-पद्य की रचना की शिक्षा ; साथ-साथ हेतुविद्या, अभिधर्म कोष, न्याय-द्वार, तारक - शास्त्र आदि न्याय और तर्कन्थों का अध्ययन; फिर जातकमाला का अध्ययन; इसके बाद पठन-पाठन कार्य साथ-साथ ; तदुपरान्त नालन्दा, ताम्रलिप्ति, वल्लभी के विहारों की विद्वानगोष्ठी में अत्यन्त गुह्य विषयों पर वाद-विवाद करके ज्ञान-वर्द्धन न; दो-तीन वर्षों तक इतस्ततः परिभ्रमण और फिर राज दरबार में अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन; इस पद्धत पर चलनेवाले प्रकाण्ड विद्वान् होते थे ।
कोई-कोई प्रौढ़ विद्यार्थी पातञ्जलि की चूर्णि, भर्तृहरि की वाक्यपदीय, बेड़ावृत्ति तथा दूसरे दर्शन-शास्त्र का अध्ययन करते थे; ब्राह्मणों में बड़े-बड़े विद्वान् ; इ-त्सिंग-द्वारा शिक्षापद्धति की भूरि-भूरि प्रशंसा ।
(घ) बौद्ध धर्म का प्रसार- बौद्ध धर्म और ब्राह्मण[ ८ ]
धर्म शान्त रूप से अपने-अपने
मार्ग पर; देश में धार्मिक
प्रशान्ति नहीं; दोनों धर्म बहुत अंशों में घुल-मिल गये थे ; इ-त्सिंग का बौद्ध धर्म पर विशद विवरण ।
सिद्धान्त - हीनयान और महासम्प्रदाय - श्रार्य महासांधिकश्रार्य-सम्मितीय-निकाय और आर्यमूल- सर्वास्तिवाद - निकाय ; इनके अन्तर्गत अष्टादश उपसम्प्रदाय अथवा उपनिकाय ; इन निकायों के अलग-अलग उपनिकाय और उनके पिटक-ग्रन्थ ; विभिन्न भूभागों में विभिन्न निकायों का प्रसार; आर्यमूल-सर्वास्तिवाद-निकाय की प्रधानता एवं व्यापकता ; इसके चार उपसम्प्रदाय - धर्मगुप्त निकाय, महीशासक- निकाय, मूल सर्वास्तिवाद-निकाय और काश्यपीयनिकाय ; मगध में इसी का प्रचार; उत्तर भारत में इसकी प्रधानता ; इस निकाय की प्राचीनता; मोग्गलीपुत्त तिस्स के कथावत्थु से इसका आरम्भ शोक के समय के स्थविरनिकाय से इसका अधिक मत-भेद नहीं; तिस्स के तीन प्रधान प्रश्न : परिहाति, रहा, अरहत्ताति आदि; सर्वास्तिवाद का आधारभूत ग्रन्थ - कात्यायनीपुत्र का ज्ञानप्रस्थान-शास्त्र वसुमित्र आदि की महाविभाषा नामक इस पर बृहत् टीका; वसुमित्र के भाग्य का वसु-बन्धु द्वारा खण्डन; किन्तु इस निकाय की उत्तरोत्तर अभिवृद्धि होती गई ।
(ङ) भारत का समाज और रहन-सहन - राज नीतिक स्थिति नाजुक होने पर भी समाज में शान्ति; समाज
सयुद्ध; धर्म के नाम पर सर्वस्त्र-त्याग की भावना ; आचरणा की पवित्रता श्लाघ्य; प्यास से छटपटाकर प्राण देना स्वीकार; किन्तु बिना छाने पानी पीना असह्य ; ब्राह्मण-धर्मावलम्बियों में वर्ण-व्यवस्था का प्रचार; ब्राह्मणों का समादर; हिंसा सर्वमान्य; चोरी महापाप ; समाज में स्वच्छता और और पवित्रता को विशद स्थान; दैनिक कार्य - दिनचर्या ; दन्तकाष्ठ; दन्तखोदनी ; दातुन करने की प्रणाली; दातुन करना समाप्त करने के पूर्व खाने का विधान ; भगवान् बुद्ध की विशेष रूप से चेतावनी; दातुन की लकड़ी ; दातुन से लाभ; कुल्ला करने की प्रणाली; भोजन करने का समय ; भोजन की स्वच्छता ; पीढ़े पर बैठकर खाने की परिपाटी : वेत्रासन : खाने के समय दूसरे के शरीर का स्पर्श नहीं; बिछौने पर खाने का निषेध; खाने के समय बैठने का ढंग ; उच्छिष्ट खाने का निषेध; भोजन के बाद हाथ-मुँह धोना; बरतन माँजना ; भारत में आये हुए मंगोल यात्री के अप
निन्दा ; जल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान ; पानी का बरतन; यात्रा में पानी ले जाने का कपड़े का विशेष ढंग का थैला ; जल की स्वच्छता की परीक्षा; परीक्षा के लिए खास तरह का काष्ठ-यन्त्र ; भोजन के बाद विश्राम ; सायंकाल विद्वान्-गोष्ठी में कथावार्ता ।
(च) वस्त्र और भोजन - पुरुष और स्त्रियों के अलगअलग परिच्छद - लंगोट, अन्तर्वास, संकक्षिका, प्रतिसंकक्षिका आदि वस्त्र ; कायप्रोङ्खन एवं मुखप्रोङ्खन ; सूती, ऊनी, रेशमी वस्त्र का उपयोग ; गहने पहनने की प्रथा
भोजन दो प्रकार के-पञ्चभोजनीयम्; पञ्चखादनीयम्; बौद्ध भिक्षु भी मांस खाते थे ।
(छ) आचार-व्यवहार - अवस्था में बड़ों का सम्मान; ब्राह्मणों, बौद्ध भिक्षुओं और विद्वानों में अवस्था का भेद नहीं; नतमस्तक हो और चरणस्पर्श करके प्रणाम करने की प्रणाली ; सामाजिक अनुशासन; हँसने, बोलने, चलने का ढंग ; घर में सबसे बड़ा परिवार का स्वामी; स्त्रियों का सम्मान; स्त्रियों में पर्दे की प्रथा न थी ; किन्तु उनके लिए विशेष नियम-बन्धन अवश्य थे ; स्त्रियों के लिए अकेले यात्रा करने, अकेले नदी पार करने, पर- पुरुष का शरीर स्पर्श करने का निषेध वे पुरुषों के सम्पर्क में नहीं थातीं; स्त्रियों का विवाह सम्बन्ध में न पड़ना, अपराध करने पर छिपाना नहीं, भूमि खोदने का निषेध, आदि-आदि; सामाजिक जीवन शान्तिपूर्ण ।
(ज) अतिथि- सेवा - महान् धर्म । द्वार पर आते ही स-सम्मान बैठाना, मुँह-हाथ धुलाकर घृत, मधु, चीनी अथवा कोई शर्बत बनाकर पीने को देना । घुल-मिलकर बातें करना, उपदेश सुनना; श्रद्धापूर्वक घर में ले जाकर भोजन कराना; सब तरह से उसकी सेवा में तत्पर रहना ।
(झ) रोग की सामाजिक चिकित्सा - जड़ी-बूटियों का अच्छा ज्ञान; आवश्यक चिकित्सा घर की स्त्रियाँ स्वयं करती थीं ; भारतीय चिकित्सा शास्त्र पर इ-सिंग का विवरण; उसके आठ प्रकार; उपवास चिकित्सा की महत्ता अधःपतित ; समाज में दूषित वस्तुओं की दवा ।
(ञ) मृत्यु - परिवार में शोक ; शोक में विनय और दर्शन भूल जाते थे; मृत शरीर को जलाने की प्रथा ; अन्त्येष्टि क्रिया; मृतकों के शव पर मन्दिर और स्तूप बनाने की प्रथा ; केश कटाने की प्रथा ; वैदिक क्रिया में विशेष नियम ; श्राद्धपद्धति; बौद्ध सात दिनों का उपवास करते थे ; उपवास शुद्धि के अभिप्राय से नहीं, शोक प्रदर्शनार्थ; किन्तु, इस उपवास का विनय में निषेध; निर्वाण-प्राप्ति में बाधा ।
(ट) समाज का पर्व - आनन्दोत्सव किसी किसी पर्व में कई दिन; बौद्धों का प्रवारण दिवस ( प्रायश्चित्त-दिवस ) ; यह ग्रीष्म एकान्त की समाप्ति के दिन होता था; महोपशथप्रक्रिया ; नागरमोथा हाथ या पाँव से रौंदने की प्रथा ; बौद्धों का दूसरा पर्व - उपवसथ बौद्ध भिक्षुओं और विद्वानों को विशेष रूप से निमन्त्रण देकर भोजन कराने की प्रथा ; खिलाने का विशेष प्रबन्ध; कैसे और किस समय खिलाया जाता; श्राँगन-घर की स्वच्छता, ग्रासन, आदि; भोजन परोसने की प्रणाली; माता हारिती के नाम थाली ; 'सम्प्रागतम् ; उच्छिष्ट छोड़ने का नियम नहीं ; भोजन के बाद - स्थविर के सामने प्रेतलोक को लाभ पहुँचाने की विधि ; भोजनोपरान्त दान करने का नियम ; विख्यात उपवसथपर्व का त्रिपिटक ग्रन्थों में उल्लेख प्रसेनजित का उपवसथ ; उपवसथ करने का इ-त्सिंग का विचार रोक दिया गया ।
(ठ) विहार-केवल भिक्षुओं के रहने का स्थान नहीं, विद्यालय भी; विहार विद्वानों से भरे होते थे ; सैकड़ों
विद्यार्थी; अपनी जमीन; बौद्ध राजाओं की सहायता ; शासन-प्रबन्ध भिक्षु-सभा द्वारा ; कोठरियाँ संकीर्ण ; आचार्य की कोठरी अच्छी; अतिथि सत्कार का सुन्दर प्रबन्ध; स्वच्छता पर विशेष ध्यान ; प्रधान की प्राज्ञा बिना कोई पानी भी नहीं छूता; बुद्ध कीर्त्तन का नियम ; हारिती, काला देवता नागमहामुचिलिन्द :- आदि की प्रतिमाएँ और उनकी पूजा; कुशीनगरान्तर्गत मुकुटबन्धन-विहार में महाकाल की प्रतिमा के सामने प्रचुर परिमाण में नैवेद्य देखकर इ-त्सिंग को
; इसकी कहानी ( रोचक ) ; महाबोधि-विहार में मुचिलिन्द की प्रतिमा में विशेष शक्लि; जल-घड़ी ; डंके की चोट देने और शंख बजाने का नियम ; नालन्दा विहार में समय बताने का प्रबन्ध; कर्मदान डंका बजाता ; महाबोधि और कुशीनगर की जल-वड़ियों की व्यवस्था भिन्न ।
(ड) भिक्षु और भिक्षुणी - लोक हित-साधन में लगा रहना ध्येय ; नये भिक्षु-भिक्षुणियों को संघ में लेने के नियम ; आचार्य के नेतृत्व में परीक्षा ; उपसम्पदा; उनके बारह नियम अनुष्ठान के अनुक्रम क्रम से उनकी कई श्रेणियाँः; वस्स; दस शीलों का पालन; दस वर्ष से अधिक की अवस्था वाले छात्र भी उपसम्पदा लेते थे; अनुशासन; समय की पाबन्दी; वस्त्र विशेष प्रकार के, रेशमी वस्त्र भी पहनते थे अपने निमित्त न मारे गये पशु-पक्षी का मांस खाने का विधान; छः परिष्कार ; भिक्षुणियों के पाँच प्रधान वस्त्र ; स्तन और कुक्षि के निर्बाध रखने का नियम ; युवावस्था में स्तन के उभड़ने पर कपड़े
बाँधने पड़ते थे ; नग्न-वस भिक्षुणी का लज्जा से किसी पुरुष के सामने न होना पाप ; भिक्षुणी अकेले नहीं रहती; भिक्षुगियों के रहन-सहन के नियम ; शील, शरण, कर्म और : धूतांग; एकान्तवासी भिक्षु के लिए बाहर का निमन्त्रण स्वीकार करना अपराध; प्रणाम करने के समय और स्था का विधान; बैठने और सोने का निषीदन; प्रतिमा की पूजा; नियमित व्यायाम करने का नियम; त्रिरत्न की पूजा; शुभ शकुन का जल ; तीसरे पहर में चैत्य-वन्दना; भिक्षु-भिक्षुणियों की और बाहर से आई सम्पत्ति संघ की ; चल सम्पत्ति; भिक्षु की प्रत्येष्टि क्रिया ; कुल ।
(ढ) विहार के गुरु और विद्यार्थी - सब तरह से गुरु की सेवा करना विद्यार्थी का धर्म; अध्यापन कार्य का महत्त्व ; पढ़ने-पढ़ाने का समय और नियम; गुरु का नियन्त्रण वात्सल्य पूर्ण ।
उस समय के भारत के प्रमुख विश्व विद्यालय - विभिन्न विषयों के केन्द्र विभिन्न विश्व विद्यालय शिक्षा निःशुल्क ; नालन्दा की श्रेष्ठता ।
(ग) तत्कालीन भारत की कला
(त) राजनीतिक अवस्था
(थ) उपज और व्यापारिक अवस्था
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प्रवेश ; शिक्षा-स्थान - शन- तुङ्ग; चार्य - शन-यू और हुईहसी; अध्ययन काल से ही भिक्षु बनने की प्रवृत्ति ; श्राचार्य शन-यू की नृत्यु से गहरी चोट ; संसार और तत्सम्बन्धी साहित्य के प्रति उदासीनता; बुद्ध वचनात से तृप्ति ; चौदह वर्ष की उम्र में प्रव्रज्या; बौद्धधर्म-शास्त्र में तल्लीनता ; हुईहसी द्वारा दिये गये भगवान् बुद्ध के उपदेशों का इ-त्सिंग पर प्रभाव - बुद्ध के उपदेशों के भ्रामक अर्थों का पर्दाफाश ; उसकी गुरु-भक्ति ; बीस वर्ष की अवस्था में उपसम्पदा; उपसम्पदा के बाद पाँच वर्षों तक विनय-ग्रन्थ का अध्ययन : फिर सूत्र-ग्रन्थों का अध्ययन ; तेरह धूताङ्गों में से कुछ का अनुष्ठान ; चंगतेह-फू जाकर अभिधर्म-पिटक से सम्बन्ध रखने वाले प्रसङ्ग के दो शास्त्रों का अध्ययन करने का गुरु के द्वारा प्रोत्साहन ; इन ग्रन्थों का अध्ययन; फिर 'बुद्ध धर्म-तत्व' की खोज में सी अन् फू की यात्रा ; वसु-बन्धु कृत 'अभिधर्म कोश' और धर्मपाल - कृत 'विद्यामात्र सिद्धि' का अध्ययन ; सी-प्रन्-फू में होन-साङ्ग से भेंट ; होन-थसाङ्ग की मृत्यु र अन्त्येष्ठिक्रिया । भारत यात्रा का इत्सिंग का संकल्प ; यात्रा का उद्देश्य बौद्ध साहित्य का अध्ययन । दो - भारत की यात्रा से चो-चोऊ वापस ; गुरु हुई- हसी से भारत जाने की आज्ञा ; इ-सिंग के संकल्प से हुई-हसी को हार्दिक प्रसन्नता ; मृत गुरु की समाधि पर पूजा; इ-सिंग की यात्रा के साथी-सङ्कल्प निर्बल ; किसी ने अन्त तक साथ न दिया । राजदूत फेन हि सपासोचूअन की सहायता से वह क्वङ्गतुङ्ग पहुँचा; वहाँ से वह उक्त राजदूत के घर गया; वहाँ से फिर कङ्गतुङ्ग वापस ; यात्रा के ग्यारहवें मास में क्वगतुंग से ईरानी जहाजद्वारा दक्षिण-समुद्र की यात्रा ; समुद्र-यात्रा करने के बीसवें दिन भोज पहुँचा; भोज में छः मास रहकर वहाँ की भाषा, रहन-सहन, समाज, धर्म आदि का अध्ययन; संस्कृत का भी अध्ययन; भोज के राजा द्वारा सहायता ; भोज में दो बार संस्कृत, पाली एवं मूल बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन भोज की प्रशंसा : भोज और चीन के बीच व्यापार; भारत और भोज के बीच समुद्री यातायात ; भोज का समाज, भोज का समाज, धर्म - मूल सर्वास्तिवाद निकाय से सम्बन्ध रखनेवाले हीनयान मतवालों की संख्या अधिक - महायानमतावलम्बी भी ; भोज का रहनसहन, भाषा; उपज और प्रौद्योगिक उत्पादन; मुद्रा में चाँदी - सोने का प्रयोग ; ऋतु ; यहाँ के पड़ोस के विभिन्न स्थानों का एक साल तक निरीक्षण करने के बाद क-च से भोज-राज के जहाज पर भारत को रवाना ; जहाज दस-ग्यारह दिनों बाद नग्न रहनेवाले लोगों के देश में पहुँचा ; वहाँ से पिन-लङ्ग के सागर तट का दर्शन; लो-जैन-कुओ के सम्बन्ध में इत्सिंग का विवरण - पुरुष बिलकुल नग्न, स्त्रियों के साधारण आच्छादन पत्ते, उपज नारियल, सुपारी, बेंत, बाँस, कन्द, मूल, चावल कम, बेंत और बाँस के उद्योग और विषाल वाण चलाने में निपुण ; दक्षिण सागर के इ-त्सिंग के कुछ द्वीपों के उल्लेखनीय नाम ; उन द्वीपों के आधुनिक नाम और स्थिति पर ऐतिहासिक विचार । पन्द्रह दिनों में वह ताम्रलिप्ति पहुँचा ; ताम्रलिप्ति में होनथ्साङ्ग के शिष्य 'ता चेंगनेंग से भेंट ; इत्सिंग ने उससे संस्कृत भाषा सीखी और शब्द - विद्या का अभ्यास किया; ताम्रलिप्ति में एक वर्ष रहकर नये गुरु 'ता चेंगनेंग के साथ मध्यभारत की ओर प्रस्थान; साथ में एक सौ व्यापारी भी थे, रास्ते में कठिनाईक, सूखकर काँटा ; महाबोधी से आगे बढ़ने में अत्यन्त कष्ट, नालन्दा के रास्ते में बीमार; साथियों का साथ छूट गया; पहाड़ी लुटेरों से सामना; लुटेरों ने निर्वस्त्र कर दिया ; जीवन से निराश; लुटेरों से किसी तरह जान बची डाकुओं द्वारा गोरे विदेशियों की इष्टदेव को बलि चढ़ाने की जनश्रुति से भय ; भय से शरीर पर कीचड़ लगा लिया, पत्तों से शरीर ढँक लिया; आगे के गाँव में गुरु तेंग से भेंट ; उसकी दशा पर गुरु तेंग को खेद । उस गाँव से दोनों तीन-चार दिनों बाद नालन्दा पहुँचे ; नालन्दा पहुँचने से इत्सिंग को प्रसन्नता ; मूलगन्ध-कुटी जाकर पूजा; सुने हुए अन्यान्य दर्शनीय स्थानों का निरीक्षण गृधूकूट पर्वत की चढ़ाई; वस्त्र से जगह देखकर आश्चर्य ; गृधूकूट से महाबोधि विहार; बुद्ध की पूजा; महाबोधि विहार से चलकर वैशाली, कुशीनगर, काशी, कुक्कुटपदगिरि श्रादि स्थानों का पर्यटन करते हुए फिर नालन्दा वापस ; वैशाली में उसने बुद्ध के सम-सामयिक विमलकीर्ति का फन-चंग ÷ भी देखा ; नालन्दा विश्व विद्यालय उन्नत अवस्था में ; इ-त्सिंग ने वहाँ दस वर्ष रहकर जयादत्त की लिखी सिद्धि-रचना पाणिनी-सूत्र की टीका, धातुपाट, अष्टधातु, वृत्ति सूत्र, भर्तृहरि कृत वाक्यपदीय, बेड़ावृत्ति, अश्ववोष - कृत सूत्रालंकार- शास्त्र, नागार्जुन-कृत सुहल्लेख, पातञ्जलि का महाभाष्य, शायण का सर्वदर्शन-संग्रह, भिन्न-भिन्न मतों के चार त्रिपिटक ग्रन्थों, मूलसवस्तिवाद निकाय का मूलांगोपांग, वैद्यक-ग्रन्थों तथा बौद्ध साहित्य की दूसरी कितनी पुस्तकों का अध्ययन किया ; भारत में उसने अधिक समय घूमने में नहीं, नालन्दा में पढ़ने में लगाया; काशी आदि नगरों में घूमने की बात । तीन - इ-त्सिंग के समय का भारत श्रीभोज से स्वदेश भेजे हुए 'भारत का बौद्ध धर्म के सन्देश से भारत का निदर्शन; जम्बूद्वीप आदि भारत के नाम ; हिन्दू शब्द उत्तर भारत में ही प्रचलित ; भारत का क्षेत्रफल । इ-सिंग-काल के पूर्व के भारत के विद्वान् और उनकी रचना- बौद्ध एवं ब्राह्मण धर्मों में पृथक-पृथक उत्थान; बहुत अंशों में दोनों धर्मों में मेल और सम्मिश्रण; संस्कृत साहित्य का पुनस्थान; नये-नये दर्शनों की रचना; पतञ्जलि के महाभाष्य पर बड़ी-बड़ी टीकाएँ; इनमें भर्तृहरि की टीका प्रशंसनीय; सायण का सर्व-दर्शन-संग्रह लिखा जा चुका था; भर्तृहरि के और भी कई ग्रन्थ, नागार्जुन, देव, अश्वघोष, वसु-बन्धु, प्रसंग, सङ्गभद्र, भवविवेक, जिन धर्मपाल, धर्मकीर्ति, शीलभद्र, सिंहचन्द्र, स्थिरमति, गुणमति, प्रज्ञागुप्त, गुणप्रभ, जिनप्रभ प्रभृति विद्वानों की रचनाएँ; विहारों में संग्रहालय और विद्यालय ; देशी और विदेशी लोगों के अध्ययन-अध्यापन का प्रबन्ध संग्रहालय की पुस्तकों की प्रतिलिपियाँ विदेशी ले गये । उसके समय के कुछ विद्वान् - इन विद्वानों के सम्पर्क से इ-सिंग को श्रानन्द । शिक्षा पद्धति - परमार्थ सत्य को खोजना, शिक्षा का उद्देश्य; दो प्रकार का सत्य - संवृति और परमार्थ; इ-सिंग द्वारा संस्कृत साहित्य और तत्सामयिक भारतीय शिक्षापद्धति की प्रशंसा ; काशिका प्रणाली की विशेष प्रशंसा; शब्द विद्या आदि पाँच विद्याओं का विवरण और चीन के शिहकिंग, शुकिंग, चि-किङ्ग, चु' न-चि' ऊ और लीकी के समान इनके पाँच ग्रन्थ । भारतीय बालकों का पठनारम्भ ; सिद्धिरस्तु अथवा सिद्धि-रचना की वर्णमाला की पुस्तक ; सिद्धिरस्तु का अर्थ ; चीन में इसका अर्थ ; श्रद्यावधि मिथिला में सिद्धिरस्तु की परिपाटी ; चीन और जापान में सिद्धिरस्तु की : प्रणाली; सिद्ध के अष्टादश विमान नामक पुस्तक का उल्लेख सिद्ध-पिटक श्रथवा सिद्ध कोष ; श्रोतीनम् नमः सर्वज्ञाय सिद्धाम् से पुस्तक का प्रारम्भ ; छः वर्ष की अवस्था में पठनारम्भ; वर्ण- परिचय छः मास वर्ण- परिचय की सबसे पहले शिव ने शिक्षा दी ; सिद्धिरस्तु के बाद पाणिनि के सूत्र का अभ्यास, आठ-नौ मास में समाप्त ; पाणिनि, अपने समय का बड़ा विद्वान् ; दस वर्ष की अवस्था से तीन वर्षों में खिलग्रन्थ की समाप्ति; पन्द्रह वर्ष की अवस्था में काशिकावृत्ति एवं वृत्तिसूत्र का पठनारम्भ; काशिकावृत्ति के लेखक - जयानन्द और वामन ; इन ग्रन्थों की समाप्ति पाँच वर्षों में; काशिकावृत्ति इ-ल्सिंग के लिए कठिन; इसे पढ़ने के लिए कन्फ्यूशस जैसा परिश्रमी चाहिए; काशिकावृत्ति के बाद गद्य-पद्य की रचना की शिक्षा ; साथ-साथ हेतुविद्या, अभिधर्म कोष, न्याय-द्वार, तारक - शास्त्र आदि न्याय और तर्कन्थों का अध्ययन; फिर जातकमाला का अध्ययन; इसके बाद पठन-पाठन कार्य साथ-साथ ; तदुपरान्त नालन्दा, ताम्रलिप्ति, वल्लभी के विहारों की विद्वानगोष्ठी में अत्यन्त गुह्य विषयों पर वाद-विवाद करके ज्ञान-वर्द्धन न; दो-तीन वर्षों तक इतस्ततः परिभ्रमण और फिर राज दरबार में अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन; इस पद्धत पर चलनेवाले प्रकाण्ड विद्वान् होते थे । कोई-कोई प्रौढ़ विद्यार्थी पातञ्जलि की चूर्णि, भर्तृहरि की वाक्यपदीय, बेड़ावृत्ति तथा दूसरे दर्शन-शास्त्र का अध्ययन करते थे; ब्राह्मणों में बड़े-बड़े विद्वान् ; इ-त्सिंग-द्वारा शिक्षापद्धति की भूरि-भूरि प्रशंसा । बौद्ध धर्म का प्रसार- बौद्ध धर्म और ब्राह्मण[ आठ ] धर्म शान्त रूप से अपने-अपने मार्ग पर; देश में धार्मिक प्रशान्ति नहीं; दोनों धर्म बहुत अंशों में घुल-मिल गये थे ; इ-त्सिंग का बौद्ध धर्म पर विशद विवरण । सिद्धान्त - हीनयान और महासम्प्रदाय - श्रार्य महासांधिकश्रार्य-सम्मितीय-निकाय और आर्यमूल- सर्वास्तिवाद - निकाय ; इनके अन्तर्गत अष्टादश उपसम्प्रदाय अथवा उपनिकाय ; इन निकायों के अलग-अलग उपनिकाय और उनके पिटक-ग्रन्थ ; विभिन्न भूभागों में विभिन्न निकायों का प्रसार; आर्यमूल-सर्वास्तिवाद-निकाय की प्रधानता एवं व्यापकता ; इसके चार उपसम्प्रदाय - धर्मगुप्त निकाय, महीशासक- निकाय, मूल सर्वास्तिवाद-निकाय और काश्यपीयनिकाय ; मगध में इसी का प्रचार; उत्तर भारत में इसकी प्रधानता ; इस निकाय की प्राचीनता; मोग्गलीपुत्त तिस्स के कथावत्थु से इसका आरम्भ शोक के समय के स्थविरनिकाय से इसका अधिक मत-भेद नहीं; तिस्स के तीन प्रधान प्रश्न : परिहाति, रहा, अरहत्ताति आदि; सर्वास्तिवाद का आधारभूत ग्रन्थ - कात्यायनीपुत्र का ज्ञानप्रस्थान-शास्त्र वसुमित्र आदि की महाविभाषा नामक इस पर बृहत् टीका; वसुमित्र के भाग्य का वसु-बन्धु द्वारा खण्डन; किन्तु इस निकाय की उत्तरोत्तर अभिवृद्धि होती गई । भारत का समाज और रहन-सहन - राज नीतिक स्थिति नाजुक होने पर भी समाज में शान्ति; समाज सयुद्ध; धर्म के नाम पर सर्वस्त्र-त्याग की भावना ; आचरणा की पवित्रता श्लाघ्य; प्यास से छटपटाकर प्राण देना स्वीकार; किन्तु बिना छाने पानी पीना असह्य ; ब्राह्मण-धर्मावलम्बियों में वर्ण-व्यवस्था का प्रचार; ब्राह्मणों का समादर; हिंसा सर्वमान्य; चोरी महापाप ; समाज में स्वच्छता और और पवित्रता को विशद स्थान; दैनिक कार्य - दिनचर्या ; दन्तकाष्ठ; दन्तखोदनी ; दातुन करने की प्रणाली; दातुन करना समाप्त करने के पूर्व खाने का विधान ; भगवान् बुद्ध की विशेष रूप से चेतावनी; दातुन की लकड़ी ; दातुन से लाभ; कुल्ला करने की प्रणाली; भोजन करने का समय ; भोजन की स्वच्छता ; पीढ़े पर बैठकर खाने की परिपाटी : वेत्रासन : खाने के समय दूसरे के शरीर का स्पर्श नहीं; बिछौने पर खाने का निषेध; खाने के समय बैठने का ढंग ; उच्छिष्ट खाने का निषेध; भोजन के बाद हाथ-मुँह धोना; बरतन माँजना ; भारत में आये हुए मंगोल यात्री के अप निन्दा ; जल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान ; पानी का बरतन; यात्रा में पानी ले जाने का कपड़े का विशेष ढंग का थैला ; जल की स्वच्छता की परीक्षा; परीक्षा के लिए खास तरह का काष्ठ-यन्त्र ; भोजन के बाद विश्राम ; सायंकाल विद्वान्-गोष्ठी में कथावार्ता । वस्त्र और भोजन - पुरुष और स्त्रियों के अलगअलग परिच्छद - लंगोट, अन्तर्वास, संकक्षिका, प्रतिसंकक्षिका आदि वस्त्र ; कायप्रोङ्खन एवं मुखप्रोङ्खन ; सूती, ऊनी, रेशमी वस्त्र का उपयोग ; गहने पहनने की प्रथा भोजन दो प्रकार के-पञ्चभोजनीयम्; पञ्चखादनीयम्; बौद्ध भिक्षु भी मांस खाते थे । आचार-व्यवहार - अवस्था में बड़ों का सम्मान; ब्राह्मणों, बौद्ध भिक्षुओं और विद्वानों में अवस्था का भेद नहीं; नतमस्तक हो और चरणस्पर्श करके प्रणाम करने की प्रणाली ; सामाजिक अनुशासन; हँसने, बोलने, चलने का ढंग ; घर में सबसे बड़ा परिवार का स्वामी; स्त्रियों का सम्मान; स्त्रियों में पर्दे की प्रथा न थी ; किन्तु उनके लिए विशेष नियम-बन्धन अवश्य थे ; स्त्रियों के लिए अकेले यात्रा करने, अकेले नदी पार करने, पर- पुरुष का शरीर स्पर्श करने का निषेध वे पुरुषों के सम्पर्क में नहीं थातीं; स्त्रियों का विवाह सम्बन्ध में न पड़ना, अपराध करने पर छिपाना नहीं, भूमि खोदने का निषेध, आदि-आदि; सामाजिक जीवन शान्तिपूर्ण । अतिथि- सेवा - महान् धर्म । द्वार पर आते ही स-सम्मान बैठाना, मुँह-हाथ धुलाकर घृत, मधु, चीनी अथवा कोई शर्बत बनाकर पीने को देना । घुल-मिलकर बातें करना, उपदेश सुनना; श्रद्धापूर्वक घर में ले जाकर भोजन कराना; सब तरह से उसकी सेवा में तत्पर रहना । रोग की सामाजिक चिकित्सा - जड़ी-बूटियों का अच्छा ज्ञान; आवश्यक चिकित्सा घर की स्त्रियाँ स्वयं करती थीं ; भारतीय चिकित्सा शास्त्र पर इ-सिंग का विवरण; उसके आठ प्रकार; उपवास चिकित्सा की महत्ता अधःपतित ; समाज में दूषित वस्तुओं की दवा । मृत्यु - परिवार में शोक ; शोक में विनय और दर्शन भूल जाते थे; मृत शरीर को जलाने की प्रथा ; अन्त्येष्टि क्रिया; मृतकों के शव पर मन्दिर और स्तूप बनाने की प्रथा ; केश कटाने की प्रथा ; वैदिक क्रिया में विशेष नियम ; श्राद्धपद्धति; बौद्ध सात दिनों का उपवास करते थे ; उपवास शुद्धि के अभिप्राय से नहीं, शोक प्रदर्शनार्थ; किन्तु, इस उपवास का विनय में निषेध; निर्वाण-प्राप्ति में बाधा । समाज का पर्व - आनन्दोत्सव किसी किसी पर्व में कई दिन; बौद्धों का प्रवारण दिवस ; यह ग्रीष्म एकान्त की समाप्ति के दिन होता था; महोपशथप्रक्रिया ; नागरमोथा हाथ या पाँव से रौंदने की प्रथा ; बौद्धों का दूसरा पर्व - उपवसथ बौद्ध भिक्षुओं और विद्वानों को विशेष रूप से निमन्त्रण देकर भोजन कराने की प्रथा ; खिलाने का विशेष प्रबन्ध; कैसे और किस समय खिलाया जाता; श्राँगन-घर की स्वच्छता, ग्रासन, आदि; भोजन परोसने की प्रणाली; माता हारिती के नाम थाली ; 'सम्प्रागतम् ; उच्छिष्ट छोड़ने का नियम नहीं ; भोजन के बाद - स्थविर के सामने प्रेतलोक को लाभ पहुँचाने की विधि ; भोजनोपरान्त दान करने का नियम ; विख्यात उपवसथपर्व का त्रिपिटक ग्रन्थों में उल्लेख प्रसेनजित का उपवसथ ; उपवसथ करने का इ-त्सिंग का विचार रोक दिया गया । विहार-केवल भिक्षुओं के रहने का स्थान नहीं, विद्यालय भी; विहार विद्वानों से भरे होते थे ; सैकड़ों विद्यार्थी; अपनी जमीन; बौद्ध राजाओं की सहायता ; शासन-प्रबन्ध भिक्षु-सभा द्वारा ; कोठरियाँ संकीर्ण ; आचार्य की कोठरी अच्छी; अतिथि सत्कार का सुन्दर प्रबन्ध; स्वच्छता पर विशेष ध्यान ; प्रधान की प्राज्ञा बिना कोई पानी भी नहीं छूता; बुद्ध कीर्त्तन का नियम ; हारिती, काला देवता नागमहामुचिलिन्द :- आदि की प्रतिमाएँ और उनकी पूजा; कुशीनगरान्तर्गत मुकुटबन्धन-विहार में महाकाल की प्रतिमा के सामने प्रचुर परिमाण में नैवेद्य देखकर इ-त्सिंग को ; इसकी कहानी ; महाबोधि-विहार में मुचिलिन्द की प्रतिमा में विशेष शक्लि; जल-घड़ी ; डंके की चोट देने और शंख बजाने का नियम ; नालन्दा विहार में समय बताने का प्रबन्ध; कर्मदान डंका बजाता ; महाबोधि और कुशीनगर की जल-वड़ियों की व्यवस्था भिन्न । भिक्षु और भिक्षुणी - लोक हित-साधन में लगा रहना ध्येय ; नये भिक्षु-भिक्षुणियों को संघ में लेने के नियम ; आचार्य के नेतृत्व में परीक्षा ; उपसम्पदा; उनके बारह नियम अनुष्ठान के अनुक्रम क्रम से उनकी कई श्रेणियाँः; वस्स; दस शीलों का पालन; दस वर्ष से अधिक की अवस्था वाले छात्र भी उपसम्पदा लेते थे; अनुशासन; समय की पाबन्दी; वस्त्र विशेष प्रकार के, रेशमी वस्त्र भी पहनते थे अपने निमित्त न मारे गये पशु-पक्षी का मांस खाने का विधान; छः परिष्कार ; भिक्षुणियों के पाँच प्रधान वस्त्र ; स्तन और कुक्षि के निर्बाध रखने का नियम ; युवावस्था में स्तन के उभड़ने पर कपड़े बाँधने पड़ते थे ; नग्न-वस भिक्षुणी का लज्जा से किसी पुरुष के सामने न होना पाप ; भिक्षुणी अकेले नहीं रहती; भिक्षुगियों के रहन-सहन के नियम ; शील, शरण, कर्म और : धूतांग; एकान्तवासी भिक्षु के लिए बाहर का निमन्त्रण स्वीकार करना अपराध; प्रणाम करने के समय और स्था का विधान; बैठने और सोने का निषीदन; प्रतिमा की पूजा; नियमित व्यायाम करने का नियम; त्रिरत्न की पूजा; शुभ शकुन का जल ; तीसरे पहर में चैत्य-वन्दना; भिक्षु-भिक्षुणियों की और बाहर से आई सम्पत्ति संघ की ; चल सम्पत्ति; भिक्षु की प्रत्येष्टि क्रिया ; कुल । विहार के गुरु और विद्यार्थी - सब तरह से गुरु की सेवा करना विद्यार्थी का धर्म; अध्यापन कार्य का महत्त्व ; पढ़ने-पढ़ाने का समय और नियम; गुरु का नियन्त्रण वात्सल्य पूर्ण । उस समय के भारत के प्रमुख विश्व विद्यालय - विभिन्न विषयों के केन्द्र विभिन्न विश्व विद्यालय शिक्षा निःशुल्क ; नालन्दा की श्रेष्ठता । तत्कालीन भारत की कला राजनीतिक अवस्था उपज और व्यापारिक अवस्था
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ग्रेटर नोएडा में रविवार को नेफोवा की वीमैंस टीम के द्वारा ग्रेटर नोएडा वेस्ट की झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं व लड़कियों के बीच सैनिटरी पैड बांटे गए। साथ ही वीमैंस टीम के द्वारा उन्हें स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया और जरूरी जानकारियां दी गई।
नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती ने कहा कि झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं व लड़कियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान उन्हें सैनिटरी पैड के प्रयोग के बारे में जानकारी दी गयी। इसके अलावा अन्य महिला स्वास्थ्य सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारियां नेफोवा वीमैंस टीम की सदस्यों द्वारा झुग्गी में रहने वाली महिलाओं को दी गयी ।
नेफोवा टीम द्वारा सैनिटरी पैड वितरण का कार्य आम्रपाली, लेजरवैली विला के पास स्थित झुग्गी में किया गया। इनमें ज्यादातर आसपास के घरों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाएं मौजूद रहीं। करीब सौ से अधिक महिलाएं व बच्चियां आज नेफोवा के इस कार्यक्रम से लाभ उठा सकीं।
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा कि नेफोवा की लगातार कोशिश रहेगी कि हर हफ्ते ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अलग अलग झुग्गियों में जाकर सैनिटरी पैड का वितरण व स्वास्थ्य व स्वच्छता को लेकर जागरूकता कैंप का आयोजन हो सके। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में रोहित कश्यप व जुली सिंह का विशेष योगदान रहा।
आज के कार्यक्रम में नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक कुमार, महासचिव श्वेता भारती के अलावा शुभ्रा सिंह, रंजना भारद्वाज, शिप्रा गुप्ता, अर्पिता, पल्लवी गुप्ता, अपराजिता गुप्ता, अनीता श्रीवास्तव, विनीता, सुप्रिया, नीतू गुप्ता, समीर भारद्वाज, मनीष कुमार इत्यादि शामिल रहे।
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ग्रेटर नोएडा में रविवार को नेफोवा की वीमैंस टीम के द्वारा ग्रेटर नोएडा वेस्ट की झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं व लड़कियों के बीच सैनिटरी पैड बांटे गए। साथ ही वीमैंस टीम के द्वारा उन्हें स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया और जरूरी जानकारियां दी गई। नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती ने कहा कि झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं व लड़कियों को स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान उन्हें सैनिटरी पैड के प्रयोग के बारे में जानकारी दी गयी। इसके अलावा अन्य महिला स्वास्थ्य सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारियां नेफोवा वीमैंस टीम की सदस्यों द्वारा झुग्गी में रहने वाली महिलाओं को दी गयी । नेफोवा टीम द्वारा सैनिटरी पैड वितरण का कार्य आम्रपाली, लेजरवैली विला के पास स्थित झुग्गी में किया गया। इनमें ज्यादातर आसपास के घरों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाएं मौजूद रहीं। करीब सौ से अधिक महिलाएं व बच्चियां आज नेफोवा के इस कार्यक्रम से लाभ उठा सकीं। नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा कि नेफोवा की लगातार कोशिश रहेगी कि हर हफ्ते ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अलग अलग झुग्गियों में जाकर सैनिटरी पैड का वितरण व स्वास्थ्य व स्वच्छता को लेकर जागरूकता कैंप का आयोजन हो सके। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में रोहित कश्यप व जुली सिंह का विशेष योगदान रहा। आज के कार्यक्रम में नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक कुमार, महासचिव श्वेता भारती के अलावा शुभ्रा सिंह, रंजना भारद्वाज, शिप्रा गुप्ता, अर्पिता, पल्लवी गुप्ता, अपराजिता गुप्ता, अनीता श्रीवास्तव, विनीता, सुप्रिया, नीतू गुप्ता, समीर भारद्वाज, मनीष कुमार इत्यादि शामिल रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
अमेरिका में स्थिति मिशिगन (Michigan) विशाल झीलें के इलाके पर संयुक्त राज्य के मध्य पश्चिम क्षेत्र में स्थित राज्य है। इसकी राजधानी लांसिंग है, और इसका सबसे बड़ा शहर डेट्रोइट है। मिशिगन एकमात्र राज्य है जिसमें दो प्रायद्वीप शामिल हैं। मिशिगन में दुनिया के किसी भी राजनीतिक उपखंड के मुकाबले सबसे बड़ा मीठे पानी का किनारा है। 17वीं शताब्दी में फ्रांसीसी खोजकर्ताओं द्वारा उपनिवेशित होने से पहले मिशिगन में कई मूल अमेरिकी जनजातियाँ निवास करती थी। 1762 में सप्तवर्षीय युद्ध में फ्रांस की हार के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आया। जिसने अमेरिकी क्रन्तिकारी युद्ध में हार के बाद यह क्षेत्र नए स्वतंत्र हुए संयुक्त राज्य को सौंप दिया गया। इसे 26वें राज्य के रूप में 26 जनवरी 1837 को संघ में भर्ती किया गया। हालांकि मिशिगन एक विविध अर्थव्यवस्था विकसित किये हुए हैं, लेकिन इसे व्यापक रूप से अमेरिकी मोटर वाहन उद्योग के केंद्र के रूप में जाना जाता है। यह देश की तीन प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों का घर है (जिन सबका मुख्यालय डेट्रोइट महानगरीय क्षेत्र के भीतर है)। 2016 के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या 99,28,300 है। जिससे इसका राज्यों में 10वां स्थान हुआ। 91% जनता अंग्रेज़ी बोलती हैं जो कानूनी तौर पर सरकारी भाषा नहीं है (वास्तव वो है)। . सप्तवर्षीय युद्ध (Seven Years' War) एक विश्वयुद्ध था जो 1754 तथा 1763 के बीच लड़ा गया। इसमें 1756 से 1763 तक की सात वर्ष अवधि में युद्ध की तीव्रता अधिक थी। इसमें उस समय की प्रमुख राजनीतिक तथा सामरिक रूप से शक्तिशाली देश शामिल थे। इसका प्रभाव योरप, उत्तरी अमेरिका, केंद्रीय अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीकी समुद्रतट, भारत तथा फिलीपींस पर पड़ा। भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में इसे तृतीय कर्नाटक युद्ध (Third Carnatic War / 1757-63) कहते हैं। विश्व के दूसरे क्षेत्रों में इसे 'द फ्रेंच ऐण्ड इण्डियन वार' (उत्तरी अमेरिका, 1754-63); मॉमेरियन वार (स्वीडेन तथा प्रुसिया, 1757-62); तृतीय सिलेसियन युद्ध (प्रुसिया तथा आस्ट्रिया, 1756-63) आदि के नाम से जाना जाता है। सप्तवर्षीय युद्ध के क्षेत्र एवं सम्बन्धित युद्धरत देश "'नीला"': ग्रेट ब्रिटेन, प्रुसिया, पुर्तगाल तथा मित्रदेश "'हरा"': फ्रांस, स्पेन, आस्ट्रिया, रूस, स्वीडेन तथा मित्रदेश श्रेणीःयुद्ध श्रेणीःयूरोप का इतिहास श्रेणीःउत्तर अमेरिका का इतिहास श्रेणीःभारत का इतिहास.
मिशिगन और सप्तवर्षीय युद्ध आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
मिशिगन 10 संबंध है और सप्तवर्षीय युद्ध 4 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (10 + 4)।
यह लेख मिशिगन और सप्तवर्षीय युद्ध के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अमेरिका में स्थिति मिशिगन विशाल झीलें के इलाके पर संयुक्त राज्य के मध्य पश्चिम क्षेत्र में स्थित राज्य है। इसकी राजधानी लांसिंग है, और इसका सबसे बड़ा शहर डेट्रोइट है। मिशिगन एकमात्र राज्य है जिसमें दो प्रायद्वीप शामिल हैं। मिशिगन में दुनिया के किसी भी राजनीतिक उपखंड के मुकाबले सबसे बड़ा मीठे पानी का किनारा है। सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी खोजकर्ताओं द्वारा उपनिवेशित होने से पहले मिशिगन में कई मूल अमेरिकी जनजातियाँ निवास करती थी। एक हज़ार सात सौ बासठ में सप्तवर्षीय युद्ध में फ्रांस की हार के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आया। जिसने अमेरिकी क्रन्तिकारी युद्ध में हार के बाद यह क्षेत्र नए स्वतंत्र हुए संयुक्त राज्य को सौंप दिया गया। इसे छब्बीसवें राज्य के रूप में छब्बीस जनवरी एक हज़ार आठ सौ सैंतीस को संघ में भर्ती किया गया। हालांकि मिशिगन एक विविध अर्थव्यवस्था विकसित किये हुए हैं, लेकिन इसे व्यापक रूप से अमेरिकी मोटर वाहन उद्योग के केंद्र के रूप में जाना जाता है। यह देश की तीन प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों का घर है । दो हज़ार सोलह के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या निन्यानवे,अट्ठाईस,तीन सौ है। जिससे इसका राज्यों में दसवां स्थान हुआ। इक्यानवे% जनता अंग्रेज़ी बोलती हैं जो कानूनी तौर पर सरकारी भाषा नहीं है । . सप्तवर्षीय युद्ध एक विश्वयुद्ध था जो एक हज़ार सात सौ चौवन तथा एक हज़ार सात सौ तिरेसठ के बीच लड़ा गया। इसमें एक हज़ार सात सौ छप्पन से एक हज़ार सात सौ तिरेसठ तक की सात वर्ष अवधि में युद्ध की तीव्रता अधिक थी। इसमें उस समय की प्रमुख राजनीतिक तथा सामरिक रूप से शक्तिशाली देश शामिल थे। इसका प्रभाव योरप, उत्तरी अमेरिका, केंद्रीय अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीकी समुद्रतट, भारत तथा फिलीपींस पर पड़ा। भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में इसे तृतीय कर्नाटक युद्ध कहते हैं। विश्व के दूसरे क्षेत्रों में इसे 'द फ्रेंच ऐण्ड इण्डियन वार' ; मॉमेरियन वार ; तृतीय सिलेसियन युद्ध आदि के नाम से जाना जाता है। सप्तवर्षीय युद्ध के क्षेत्र एवं सम्बन्धित युद्धरत देश "'नीला"': ग्रेट ब्रिटेन, प्रुसिया, पुर्तगाल तथा मित्रदेश "'हरा"': फ्रांस, स्पेन, आस्ट्रिया, रूस, स्वीडेन तथा मित्रदेश श्रेणीःयुद्ध श्रेणीःयूरोप का इतिहास श्रेणीःउत्तर अमेरिका का इतिहास श्रेणीःभारत का इतिहास. मिशिगन और सप्तवर्षीय युद्ध आम में शून्य बातें हैं । मिशिगन दस संबंध है और सप्तवर्षीय युद्ध चार है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख मिशिगन और सप्तवर्षीय युद्ध के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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वजन कम करने के लिए आजकल लोग क्या कुछ नहीं करते। खान-पान पर कंट्रोल करते हैं और घंटों जिम में एक्सरसाइज करते हैं और खाने में एक-एक कैलोरी की गिनती भी करते है फिर भी उन्हें मन चाही बॉडी नहीं मिलती। आज कल लोगों ने वजन कम करने के लिए डाइट में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल आमतौर पर लोग चाय,कॉफी, ड्रिंक्स और कॉफी को मीठा बनाने में करते है। अक्सर डायबिटीज के मरीज इस स्वीटनर्स का इस्तेमाल अपनी चाय और कॉफी में करते हैं। लोगों में ये स्वीटनर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उन लोगों में जो बॉडी से अतिरिक्त फैट को कम करना चाहते हैं। आप जानते हैं कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल आपकी सेहत पर ज़हर की तरह असर करता है। WHO के मुताबिक ये आर्टिफिशियल स्वीटनर कई क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।
WHO के मुताबिक मौजूदा सबूतों की एक वैज्ञानिक समीक्षा में पाया गया है कि इस तरह की मिठास का सेवन टाइप -2 डायबिटीज, दिल के रोगों और मृत्यु के जोखिम से भी जुड़ा था। एक डेटा के मुताबिक आर्टिफिशियल स्वीटनर के उपयोग से मूत्राशय कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है। अगर गर्भवती महिलाएं इस मिठास का सेवन करती हैं तो समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा बढ़ सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नेचुरल या सिंथेटिक,किसी भी आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल खाने पीने की चीजों में नहीं किया जाना चाहिए। वजन कम करने और बॉडी में कैलोरी की मात्रा कम करने के लिए नेचुरल फ्रूट स्वीटनर ज्यादा फायदेमंद है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक डायबिटीज के मरीज और मोटापा से पीड़ित लोग वजन कम करने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करने से बचें। नेचुरल फ्रूट्स स्वीटनर का इस्तेमाल सेहत के लिए फायदेमंद है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज के रिस्क को कम करता है जो एक गलत धारणा है।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का बॉडी पर कैसा असर पड़ता हैः
डब्ल्यूएचओ ने इस बात पर जोर दिया है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स नॉन शुगर स्वीटनर नहीं है, इसमें कोई पोषक तत्व मौजूद नहीं होता। अगर लोग भविष्य में अपनी हेल्थ को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो शुरुआत में ही अपनी डाइट में मीठा का सेवन करना कम कर दें।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के सेवन पर WHO ने क्या किसी खास समूह को दी है चेतावनी?
WHO ने आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सेवन नहीं करने की सलाह सिर्फ डायबिटीज के मरीजों को ही नहीं दी है बल्कि सभी लोगों को इसके साइड इफेक्ट से बचने के लिए सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ये कृत्रिम मिठास किसी भी तरह से वजन को कम करने में असरदार नहीं है। डायबिटीज के जो मरीज ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए इस आर्टिफिशियल शुगर का इस्तेमाल करते हैं तो वो शुगर कंट्रोल करने के किसी और विकल्प को चुनें। डायबिटीज के मरीज मीठा खाने की क्रेविंग को कंट्रोल करने के लिए मीठे फल, बिना चीनी वाली मिठाईयां और लिक्विड का सेवन करें।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से हो सकते हैं ये गंभीर रोगः
नेचर मेडिसिन में प्रकाशित क्लीवलैंड क्लिनिक के नए शोध से पता चला है कि एरिथ्रिटोल, एक लोकप्रिय कृत्रिम स्वीटनर है, जो दिल के दौरे और स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
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वजन कम करने के लिए आजकल लोग क्या कुछ नहीं करते। खान-पान पर कंट्रोल करते हैं और घंटों जिम में एक्सरसाइज करते हैं और खाने में एक-एक कैलोरी की गिनती भी करते है फिर भी उन्हें मन चाही बॉडी नहीं मिलती। आज कल लोगों ने वजन कम करने के लिए डाइट में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल आमतौर पर लोग चाय,कॉफी, ड्रिंक्स और कॉफी को मीठा बनाने में करते है। अक्सर डायबिटीज के मरीज इस स्वीटनर्स का इस्तेमाल अपनी चाय और कॉफी में करते हैं। लोगों में ये स्वीटनर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उन लोगों में जो बॉडी से अतिरिक्त फैट को कम करना चाहते हैं। आप जानते हैं कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल आपकी सेहत पर ज़हर की तरह असर करता है। WHO के मुताबिक ये आर्टिफिशियल स्वीटनर कई क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। WHO के मुताबिक मौजूदा सबूतों की एक वैज्ञानिक समीक्षा में पाया गया है कि इस तरह की मिठास का सेवन टाइप -दो डायबिटीज, दिल के रोगों और मृत्यु के जोखिम से भी जुड़ा था। एक डेटा के मुताबिक आर्टिफिशियल स्वीटनर के उपयोग से मूत्राशय कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है। अगर गर्भवती महिलाएं इस मिठास का सेवन करती हैं तो समय से पहले बच्चे के जन्म होने का खतरा बढ़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नेचुरल या सिंथेटिक,किसी भी आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल खाने पीने की चीजों में नहीं किया जाना चाहिए। वजन कम करने और बॉडी में कैलोरी की मात्रा कम करने के लिए नेचुरल फ्रूट स्वीटनर ज्यादा फायदेमंद है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक डायबिटीज के मरीज और मोटापा से पीड़ित लोग वजन कम करने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करने से बचें। नेचुरल फ्रूट्स स्वीटनर का इस्तेमाल सेहत के लिए फायदेमंद है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज के रिस्क को कम करता है जो एक गलत धारणा है। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का बॉडी पर कैसा असर पड़ता हैः डब्ल्यूएचओ ने इस बात पर जोर दिया है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स नॉन शुगर स्वीटनर नहीं है, इसमें कोई पोषक तत्व मौजूद नहीं होता। अगर लोग भविष्य में अपनी हेल्थ को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो शुरुआत में ही अपनी डाइट में मीठा का सेवन करना कम कर दें। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के सेवन पर WHO ने क्या किसी खास समूह को दी है चेतावनी? WHO ने आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सेवन नहीं करने की सलाह सिर्फ डायबिटीज के मरीजों को ही नहीं दी है बल्कि सभी लोगों को इसके साइड इफेक्ट से बचने के लिए सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ये कृत्रिम मिठास किसी भी तरह से वजन को कम करने में असरदार नहीं है। डायबिटीज के जो मरीज ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए इस आर्टिफिशियल शुगर का इस्तेमाल करते हैं तो वो शुगर कंट्रोल करने के किसी और विकल्प को चुनें। डायबिटीज के मरीज मीठा खाने की क्रेविंग को कंट्रोल करने के लिए मीठे फल, बिना चीनी वाली मिठाईयां और लिक्विड का सेवन करें। आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से हो सकते हैं ये गंभीर रोगः नेचर मेडिसिन में प्रकाशित क्लीवलैंड क्लिनिक के नए शोध से पता चला है कि एरिथ्रिटोल, एक लोकप्रिय कृत्रिम स्वीटनर है, जो दिल के दौरे और स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
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दिवंगत सुधीर फडके, ग. दि. माडगुळकर, तबलानवाज उस्ताद अल्लारखाँ तथा पु. ल. देशपांडे इनके जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर तथा 'सप्तक', नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में द्वारा "स्मृतिगंध" कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार दिनांक 21 से 24 दिसम्बर 2018 के दरम्यान प्रतिदिन शाम को 6:30 बजे से कविवर्य सुरेश भट सभागृह, रेशिमबाग, नागपुर में किया जा रहा है।
दिनांक 21 दिसम्बर 2018 को शाम 6:30 बजे दिवंगत गायक-संगीतकार सुधीर फडके उर्फ़ बाबुजी द्वारा संगीत एवं स्वरबद्ध "गीत रामायण" की प्रस्तुति श्याम देशपांडे एवं संस्कारभारती नागपुर के कलाकारों द्वारा गायन, वादन, नृत्य के साथ दी जाएगी।
दिनांक 22 दिसम्बर 2018 शाम 6:30 बजे को दिवंगत लेखक-कवी ग. दि. माडगुळकर पर आधारित कार्यक्रम "गदिमायन" की प्रस्तुति श्री. आनंद माडगुळकर एवं सहकारी (पुणे) प्रस्तुत करेंगे।
दिनांक 23 दिसम्बर 2018 को शाम 6:30 बजे दिवंगत तबलानवाज उस्ताद अल्लारखाँ की स्मृति में तालसाधना समूह, द्वारा प्रस्तुत अनोखे "तालशतक" नामक कार्यक्रम में नागपुर के 100 विद्यार्थी एकसाथ तबलावादन प्रस्तुत करेंगे। इसके उपरांत सुविख्यात महिला तबलावादक पंडिता अनुराधा पाल "तालस्मरण"...एक पुनरावलोकन" यह उस्ताद अल्लारखाँ साहब पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी।
दिनांक 24 दिसम्बर 2018 को शाम 6:30 बजे से दिवंगत साहित्यकार-कवी पु. ल. देशपांडे की स्मृति में विद्याधर रिसबूड, अवर कल्चर इवेंट्स, मुंबई एवं अतुल परचुरे, अरुण नलावडे, विघ्नेश जोशी अभिनीत "पुलकित" यह कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।
इस चार दिवसीय कार्यक्रम में प्रवेश हेतु देणगी प्रवेश शुल्क प्रतिव्यक्ति रुपये 200 / - (चार दिनों के लिए ) मात्र रखा गया है। यह प्रवेशिका दिनांक 15 दिसम्बर 2018 से द.म.क्षे.सां. केंद्र, नागपुर कार्यालय में उपलब्ध रहेगी। अतः कलाप्रेमी एवं रसिकजन "स्मृतिगंध" महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहकर इस अनूठे आयोजन का आनंद उठायें, ऐसा आवाहन द.म.क्षे.सां. केंद्र, नागपुर तथा 'सप्तक', नागपुर द्वारा किया जाता है।
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दिवंगत सुधीर फडके, ग. दि. माडगुळकर, तबलानवाज उस्ताद अल्लारखाँ तथा पु. ल. देशपांडे इनके जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर तथा 'सप्तक', नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में द्वारा "स्मृतिगंध" कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार दिनांक इक्कीस से चौबीस दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह के दरम्यान प्रतिदिन शाम को छः:तीस बजे से कविवर्य सुरेश भट सभागृह, रेशिमबाग, नागपुर में किया जा रहा है। दिनांक इक्कीस दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह को शाम छः:तीस बजे दिवंगत गायक-संगीतकार सुधीर फडके उर्फ़ बाबुजी द्वारा संगीत एवं स्वरबद्ध "गीत रामायण" की प्रस्तुति श्याम देशपांडे एवं संस्कारभारती नागपुर के कलाकारों द्वारा गायन, वादन, नृत्य के साथ दी जाएगी। दिनांक बाईस दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह शाम छः:तीस बजे को दिवंगत लेखक-कवी ग. दि. माडगुळकर पर आधारित कार्यक्रम "गदिमायन" की प्रस्तुति श्री. आनंद माडगुळकर एवं सहकारी प्रस्तुत करेंगे। दिनांक तेईस दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह को शाम छः:तीस बजे दिवंगत तबलानवाज उस्ताद अल्लारखाँ की स्मृति में तालसाधना समूह, द्वारा प्रस्तुत अनोखे "तालशतक" नामक कार्यक्रम में नागपुर के एक सौ विद्यार्थी एकसाथ तबलावादन प्रस्तुत करेंगे। इसके उपरांत सुविख्यात महिला तबलावादक पंडिता अनुराधा पाल "तालस्मरण"...एक पुनरावलोकन" यह उस्ताद अल्लारखाँ साहब पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी। दिनांक चौबीस दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह को शाम छः:तीस बजे से दिवंगत साहित्यकार-कवी पु. ल. देशपांडे की स्मृति में विद्याधर रिसबूड, अवर कल्चर इवेंट्स, मुंबई एवं अतुल परचुरे, अरुण नलावडे, विघ्नेश जोशी अभिनीत "पुलकित" यह कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में प्रवेश हेतु देणगी प्रवेश शुल्क प्रतिव्यक्ति दो सौ रुपया / - मात्र रखा गया है। यह प्रवेशिका दिनांक पंद्रह दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह से द.म.क्षे.सां. केंद्र, नागपुर कार्यालय में उपलब्ध रहेगी। अतः कलाप्रेमी एवं रसिकजन "स्मृतिगंध" महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहकर इस अनूठे आयोजन का आनंद उठायें, ऐसा आवाहन द.म.क्षे.सां. केंद्र, नागपुर तथा 'सप्तक', नागपुर द्वारा किया जाता है।
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देहरादून। उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से लगातार नए कोविड-19 मरीज़ सामने आ रहे हैं और कोविड-19 रोगियों की संख्या में वृद्धि होने लगा है। राज्य में कोविड-19 संक्रमण की रेट 7% तक करीब पहुंच गई है। स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कोविड-19 के सक्रिय रोगियों की संख्या 37 पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की संख्या सीमित है और प्रदेश में सिर्फ 300 जांचें ही प्रतिदिन हो पा रहीं हैं।
कोरोना के सक्रिय मुकदमा उत्तराखंड के साथ-साथ भिन्न-भिन्न राज्यों में भी अपने पैर पसार रहे हैं, जिसको लेकर हरियाणा गवर्नमेंट ने मास्क पहनना जरूरी कर दिया है। लेकिन, उत्तराखंड में गवर्नमेंट का मानना है कि अभी सक्रिय राष्ट्रों की संख्या कम है, और ऐसी अभी कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्री धन सिंह रावत का यह भी बोलना है कि प्रदेश में कोविड-19 की टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी, और हिंदुस्तान गवर्नमेंट की जो भी गाइडलाइन होगी, उसका पालन कराया जाएगा।
बढ़ते कोविड-19 के मामलो ने एक बार फिर स्वास्थ विभाग के साथ-साथ आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। डॉक्टर्स कोविड की जागरूकता के लिए कोविड गाइडलाइन का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने की राय आम लोगों को दे रहे हैं। बता दें कि 22 एवं 23 अप्रैल को गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलेंगे। वहीं, 25 अप्रैल को केदारनाथ और 27 अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा की वकायदा आरंभ हो जाएगी।
वहीं, बीते साल से पुल की स्थिति को देखते हुए इससे सिर्फ छोटे गाड़ी ही गुजरते हैं। ऐसे में इस साल प्रशासन बेलनी पुल की रिपेयरिंग में जुटा हुआ है। रिपेयरिंग के बाद बेलनी पुल से 22 सीटर गाड़ियां और एम्बुलेंस सरलता से गुजर सकते। एसपी रुद्रप्रयाग विशाखा अशोक भदाणे का बोलना है कि यात्रा से पहले बेलनी पुल की रिपेयरिंग का कार्य पूर्ण करवा लिया जाएगा।
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देहरादून। उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से लगातार नए कोविड-उन्नीस मरीज़ सामने आ रहे हैं और कोविड-उन्नीस रोगियों की संख्या में वृद्धि होने लगा है। राज्य में कोविड-उन्नीस संक्रमण की रेट सात% तक करीब पहुंच गई है। स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कोविड-उन्नीस के सक्रिय रोगियों की संख्या सैंतीस पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की संख्या सीमित है और प्रदेश में सिर्फ तीन सौ जांचें ही प्रतिदिन हो पा रहीं हैं। कोरोना के सक्रिय मुकदमा उत्तराखंड के साथ-साथ भिन्न-भिन्न राज्यों में भी अपने पैर पसार रहे हैं, जिसको लेकर हरियाणा गवर्नमेंट ने मास्क पहनना जरूरी कर दिया है। लेकिन, उत्तराखंड में गवर्नमेंट का मानना है कि अभी सक्रिय राष्ट्रों की संख्या कम है, और ऐसी अभी कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्री धन सिंह रावत का यह भी बोलना है कि प्रदेश में कोविड-उन्नीस की टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी, और हिंदुस्तान गवर्नमेंट की जो भी गाइडलाइन होगी, उसका पालन कराया जाएगा। बढ़ते कोविड-उन्नीस के मामलो ने एक बार फिर स्वास्थ विभाग के साथ-साथ आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। डॉक्टर्स कोविड की जागरूकता के लिए कोविड गाइडलाइन का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने की राय आम लोगों को दे रहे हैं। बता दें कि बाईस एवं तेईस अप्रैल को गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलेंगे। वहीं, पच्चीस अप्रैल को केदारनाथ और सत्ताईस अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा की वकायदा आरंभ हो जाएगी। वहीं, बीते साल से पुल की स्थिति को देखते हुए इससे सिर्फ छोटे गाड़ी ही गुजरते हैं। ऐसे में इस साल प्रशासन बेलनी पुल की रिपेयरिंग में जुटा हुआ है। रिपेयरिंग के बाद बेलनी पुल से बाईस सीटर गाड़ियां और एम्बुलेंस सरलता से गुजर सकते। एसपी रुद्रप्रयाग विशाखा अशोक भदाणे का बोलना है कि यात्रा से पहले बेलनी पुल की रिपेयरिंग का कार्य पूर्ण करवा लिया जाएगा।
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प्रदेश के पंचायत चौकीदारों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बजट में चौकीदारों के लिए नीति न बनाए जाने और वेतन में वृद्धि न होने से पंचायत चौकीदार नाराज चल रहे हैं। इसलिए प्रदेश पंचायत चौकीदार संघ ने आज मांगो को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। संघ ने सरकार पर अनदेखी के आरोप लगाए हैं।
पंचायत चौकीदार संघ के अध्यक्ष जगदीश चंद ने कहा कि जब से पंचायतों का गठन हुआ है चौकीदार तभी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन न तो उनके वेतन में वृद्धि हुई और न ही उनके लिए कोई नीति बनाई गई। उन्होंने कहा कि वह पंचायतों में नौ घण्टे से ज्यादा ड्यूटी देते हैं ओर उनसे अन्य सेवाएं भी ली जाती हैं। पिछले साल उनकी फ़ाइल कैबिनेट में गई थी लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। पंचायत चौकीदार दो दिन की हड़ताल पर हैं। अगर सरकार उनकी सुनवाई नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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प्रदेश के पंचायत चौकीदारों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बजट में चौकीदारों के लिए नीति न बनाए जाने और वेतन में वृद्धि न होने से पंचायत चौकीदार नाराज चल रहे हैं। इसलिए प्रदेश पंचायत चौकीदार संघ ने आज मांगो को लेकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। संघ ने सरकार पर अनदेखी के आरोप लगाए हैं। पंचायत चौकीदार संघ के अध्यक्ष जगदीश चंद ने कहा कि जब से पंचायतों का गठन हुआ है चौकीदार तभी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन न तो उनके वेतन में वृद्धि हुई और न ही उनके लिए कोई नीति बनाई गई। उन्होंने कहा कि वह पंचायतों में नौ घण्टे से ज्यादा ड्यूटी देते हैं ओर उनसे अन्य सेवाएं भी ली जाती हैं। पिछले साल उनकी फ़ाइल कैबिनेट में गई थी लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। पंचायत चौकीदार दो दिन की हड़ताल पर हैं। अगर सरकार उनकी सुनवाई नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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इसे उगने करने वाले विशेषज्ञों का दावा किया है कि काशी लालिमा भिंडी में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि, जिस तरह क्लोरोफिल के कारण आम भिंडी का रंग हरा होता है, उसी तरह एंथोसायनिन (Anthocyanin) नाम के पिगमेंट के कारण इस भिंडी का रंग लाल है. वैज्ञानिकों का दावा है कि लाल भिंडी (Red Lady Finger) हरी भिंडी के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक है.
इसे उगने करने वाले विशेषज्ञों का दावा किया है कि काशी लालिमा भिंडी में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की माने तो, इसे तैयार करने में वैज्ञानिकों को लगभग 23 साल लगे हैं. वैज्ञानिकों ने लाल भिंडी को उगाने की कोशिश 1995-96 से की थी.
इसमें हरी भिंडी के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व हैं. इसकी कीमत 100 से 500 रुपये किलो के बीच है. अब इसके बीज भी उपलब्ध होने के कारण इसे दूसरे राज्यों में भी उगाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में लाल भिंडी की खेती की जा रही है.
वैज्ञानिकों का कहना है, लाल भिंडी की खेती भी उसी तरह की जाती है जिस तरह हरी भिंडी की. देश के कई राज्यों के किसान लाल भिंडी को उगा रहे हैं और उसे 100 से 500 रुपये के बीच बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं.
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इसे उगने करने वाले विशेषज्ञों का दावा किया है कि काशी लालिमा भिंडी में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि, जिस तरह क्लोरोफिल के कारण आम भिंडी का रंग हरा होता है, उसी तरह एंथोसायनिन नाम के पिगमेंट के कारण इस भिंडी का रंग लाल है. वैज्ञानिकों का दावा है कि लाल भिंडी हरी भिंडी के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक है. इसे उगने करने वाले विशेषज्ञों का दावा किया है कि काशी लालिमा भिंडी में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की माने तो, इसे तैयार करने में वैज्ञानिकों को लगभग तेईस साल लगे हैं. वैज्ञानिकों ने लाल भिंडी को उगाने की कोशिश एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे से की थी. इसमें हरी भिंडी के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व हैं. इसकी कीमत एक सौ से पाँच सौ रुपयापये किलो के बीच है. अब इसके बीज भी उपलब्ध होने के कारण इसे दूसरे राज्यों में भी उगाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में लाल भिंडी की खेती की जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है, लाल भिंडी की खेती भी उसी तरह की जाती है जिस तरह हरी भिंडी की. देश के कई राज्यों के किसान लाल भिंडी को उगा रहे हैं और उसे एक सौ से पाँच सौ रुपयापये के बीच बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं.
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