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हिमाचल प्रदेश में हर रोज करीब 60 लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों को सस्ते लोन, बिजली के बिलों और फास्ट टैग के नाम पर ठग रहे हैं। वर्ष 2022 में शिमला रेज साइबर थाना में सबसे 2,100 शिकायतें दर्ज हुई हैं। नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो पोर्टल और टोल फ्री नंबर 1930 पर साइबर अपराध के शिकार लोग शिकायतें कर रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश में हर रोज करीब साठ लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों को सस्ते लोन, बिजली के बिलों और फास्ट टैग के नाम पर ठग रहे हैं। वर्ष दो हज़ार बाईस में शिमला रेज साइबर थाना में सबसे दो,एक सौ शिकायतें दर्ज हुई हैं। नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो पोर्टल और टोल फ्री नंबर एक हज़ार नौ सौ तीस पर साइबर अपराध के शिकार लोग शिकायतें कर रहे हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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लखनऊ। यूपी चुनाव से पहले बसपा की मुसीबत बढ़ गई है। 2017 के विधान सभा चुनाव में बसपा को सिर्फ 19 सीटें मिली थी मगर ज्यादातर विधायक अब मायावती का साथ छोड़ चुके हैं। पार्टी में अब सिर्फ चार विधायक रह गए हैं। ऐसे में यह चुनाव मायावती के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर सीट के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्ïडू जमाली के जाने के बाद बसपा में बस चार विधायक ही रह गए हैं।
इनमें से उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती ने नेता विधानमंडल घोषित किया है। चुनावी समर में एक तरफ जहां बाकी दलों में सियासतदां अपना राजनीतिक कैरियर तलाशने को शामिल हो रहे हैं तो दूसरी तरफ बसपा में दिग्गज लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। विधायक गुड्ïडू जमाली के भी किनारा कर लेने के बाद बसपा में केवल चार विधायक रह गए हैं। उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उमाशंकर सिंह को पार्टी का नेता विधानमंडल दल घोषित किया है। चार बार सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा इस समय संकट से जूझ रही है।
दरअसल, उसके सिपहसालार लगातार पार्टी छोडक़र दूसरे दलों में जा रहे हैं। यूपी विधान सभा चुनाव से ऐन पहले पार्टी में भगदड़ की स्थिति है। दस साल में ही पार्टी छोडऩे वाले महारथियों का सैकड़ा पार हो चुका है। गत दिवस पार्टी आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर सीट के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्ïडू जमाली ने भी त्यागपत्र दे दिया। गुड्ïडू पार्टी के विधान मंडल दल के नेता भी थे। उनके जाने के बाद पार्टी में बस चार विधायक ही रह गए हैं। श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन ही फिलहाल पार्टी में सक्रिय विधायक रह गए हैं। इनमें से उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती ने नेता विधान मंडल घोषित किया है। बलिया के रसड़ा विधान सभा क्षेत्र के विधायक उमाशंकर सिंह लगातार दो बार चुनाव जीते हैं। इनसे पहले पार्टी ने जिन दो विधायकों को नेता विधानबमंडल बनाया, वे दोनों ही बसपा छोड़ गए।
2017 के विधान सभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन खराब था। कुल 19 सीटें बसपा ने जीतीं थी और इसमें भी एक सीट अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में पार्टी हार गई थी। यानी पार्टी के पास विधायकों की संख्या 18 रह गई थी। पहले अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर 9 विधायकों को निलंबित किया गया। उसके बाद लालजी वर्मा और राम अचल राजभर का निष्कासन हुआ और दोनों ने ही सपा ज्वाइन कर ली। एक और विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का ऐलान कर चुकी है। उनके भाई और भतीजे ने सपा का दामन थामा तो मायावती ने यह कदम उठाया। विधायक सुखदेव राजभर का निधन हो चुका है। ऐसे में बसपा के पास बस चार विधायक ही रह गए हैं।
पार्टी ने जून में जमाली को विधानमंडल दल का नेता तब बनाया था, जब पार्टी के तत्कालीन विधान मंडल दल नेता लालजी वर्मा ने बसपा छोडक़र सपा का दामन थाम लिया था। उन्हें निष्कासित कर जमाली पर दांव लगाकर बसपा ने मुस्लिमों को साधने की कोशिश की थी, पर यह समीकरण छह माह भी नहीं चल पाया। जमाली प्रदेश में सबसे अधिक चल-अचल संपत्ति वाले विधायक हैं। एसोसिएशन फार डेमोके्रटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक जमाली के पास 118 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इसमें 1. 11 अरब की चल व 6. 92 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है।
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लखनऊ। यूपी चुनाव से पहले बसपा की मुसीबत बढ़ गई है। दो हज़ार सत्रह के विधान सभा चुनाव में बसपा को सिर्फ उन्नीस सीटें मिली थी मगर ज्यादातर विधायक अब मायावती का साथ छोड़ चुके हैं। पार्टी में अब सिर्फ चार विधायक रह गए हैं। ऐसे में यह चुनाव मायावती के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर सीट के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्ïडू जमाली के जाने के बाद बसपा में बस चार विधायक ही रह गए हैं। इनमें से उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती ने नेता विधानमंडल घोषित किया है। चुनावी समर में एक तरफ जहां बाकी दलों में सियासतदां अपना राजनीतिक कैरियर तलाशने को शामिल हो रहे हैं तो दूसरी तरफ बसपा में दिग्गज लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। विधायक गुड्ïडू जमाली के भी किनारा कर लेने के बाद बसपा में केवल चार विधायक रह गए हैं। उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उमाशंकर सिंह को पार्टी का नेता विधानमंडल दल घोषित किया है। चार बार सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा इस समय संकट से जूझ रही है। दरअसल, उसके सिपहसालार लगातार पार्टी छोडक़र दूसरे दलों में जा रहे हैं। यूपी विधान सभा चुनाव से ऐन पहले पार्टी में भगदड़ की स्थिति है। दस साल में ही पार्टी छोडऩे वाले महारथियों का सैकड़ा पार हो चुका है। गत दिवस पार्टी आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर सीट के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्ïडू जमाली ने भी त्यागपत्र दे दिया। गुड्ïडू पार्टी के विधान मंडल दल के नेता भी थे। उनके जाने के बाद पार्टी में बस चार विधायक ही रह गए हैं। श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन ही फिलहाल पार्टी में सक्रिय विधायक रह गए हैं। इनमें से उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती ने नेता विधान मंडल घोषित किया है। बलिया के रसड़ा विधान सभा क्षेत्र के विधायक उमाशंकर सिंह लगातार दो बार चुनाव जीते हैं। इनसे पहले पार्टी ने जिन दो विधायकों को नेता विधानबमंडल बनाया, वे दोनों ही बसपा छोड़ गए। दो हज़ार सत्रह के विधान सभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन खराब था। कुल उन्नीस सीटें बसपा ने जीतीं थी और इसमें भी एक सीट अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में पार्टी हार गई थी। यानी पार्टी के पास विधायकों की संख्या अट्ठारह रह गई थी। पहले अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर नौ विधायकों को निलंबित किया गया। उसके बाद लालजी वर्मा और राम अचल राजभर का निष्कासन हुआ और दोनों ने ही सपा ज्वाइन कर ली। एक और विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का ऐलान कर चुकी है। उनके भाई और भतीजे ने सपा का दामन थामा तो मायावती ने यह कदम उठाया। विधायक सुखदेव राजभर का निधन हो चुका है। ऐसे में बसपा के पास बस चार विधायक ही रह गए हैं। पार्टी ने जून में जमाली को विधानमंडल दल का नेता तब बनाया था, जब पार्टी के तत्कालीन विधान मंडल दल नेता लालजी वर्मा ने बसपा छोडक़र सपा का दामन थाम लिया था। उन्हें निष्कासित कर जमाली पर दांव लगाकर बसपा ने मुस्लिमों को साधने की कोशिश की थी, पर यह समीकरण छह माह भी नहीं चल पाया। जमाली प्रदेश में सबसे अधिक चल-अचल संपत्ति वाले विधायक हैं। एसोसिएशन फार डेमोके्रटिक रिफॉर्म की रिपोर्ट के मुताबिक जमाली के पास एक सौ अट्ठारह करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इसमें एक. ग्यारह अरब की चल व छः. बानवे करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है।
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Pirtand (Giridih) : पीरटांड़ प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शनिवार एक जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीएलटीएफ बैठक आयोजित की गई. बैठक में 2 जुलाई से शुरू हो रहे पल्स पोलियो अभियान को लेकर चर्चा की गई. बीपीएम सरिता कुमारी ने बताया कि पीरटांड़ प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रमोद कुमार, अंचलाधिकारी विनय प्रकाश तिग्गा सहित कई अधिकारी बैठक में शामिल हुए. बैठक में पल्स पोलियो का ड्राप अधिक से अधिक बच्चे को पिलाया जाए, इसके लिए व्यापक तैयारी की गई. कई टीमों का गठन किया गया है. प्रखंड क्षेत्र के सभी पोलियो बूथ पर जा कर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलानी है. इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालयों में पोलियों बूथ बनाया गया है. अभियान को लेकर जागरुकता रथ निकालकर लोगों को जागरूक किया गया है. बैठक में स्वास्थ्य विभाग से सम्बंधित कई अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे.
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Pirtand : पीरटांड़ प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शनिवार एक जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीएलटीएफ बैठक आयोजित की गई. बैठक में दो जुलाई से शुरू हो रहे पल्स पोलियो अभियान को लेकर चर्चा की गई. बीपीएम सरिता कुमारी ने बताया कि पीरटांड़ प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रमोद कुमार, अंचलाधिकारी विनय प्रकाश तिग्गा सहित कई अधिकारी बैठक में शामिल हुए. बैठक में पल्स पोलियो का ड्राप अधिक से अधिक बच्चे को पिलाया जाए, इसके लिए व्यापक तैयारी की गई. कई टीमों का गठन किया गया है. प्रखंड क्षेत्र के सभी पोलियो बूथ पर जा कर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलानी है. इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालयों में पोलियों बूथ बनाया गया है. अभियान को लेकर जागरुकता रथ निकालकर लोगों को जागरूक किया गया है. बैठक में स्वास्थ्य विभाग से सम्बंधित कई अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे.
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सपना चौधरी का प्राइवेट वीडियो हुआ वायरल, बंद कमरे में हो रहा था ये सबकुछ. .
अनुच्छेद 370 को लेकर, सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी से पूछा ये बड़ा सवाल, कहा- कैसे और क्यों?
वीडियोः BJP नेता का महिला के साथ इस हरकत का शर्मनाक वीडियो आया सामने, मचा हडकंप. .
अभी अभीः अमित शाह के लखनऊ पहुंचते ही अखिलेश को लगा करारा झटका! दो मुस्लिम एमएलसी ने दिया इस्तीफा! बीजेपी में होंगें शामिल!
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सपना चौधरी का प्राइवेट वीडियो हुआ वायरल, बंद कमरे में हो रहा था ये सबकुछ. . अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को लेकर, सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी से पूछा ये बड़ा सवाल, कहा- कैसे और क्यों? वीडियोः BJP नेता का महिला के साथ इस हरकत का शर्मनाक वीडियो आया सामने, मचा हडकंप. . अभी अभीः अमित शाह के लखनऊ पहुंचते ही अखिलेश को लगा करारा झटका! दो मुस्लिम एमएलसी ने दिया इस्तीफा! बीजेपी में होंगें शामिल!
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Magh Purnima 2022 : उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा बुधवार को आ रही है। इस दिन शिप्रा में पर्व स्नान का विशेष महत्व है। दान पुण्य तथा मांगलिक कार्यों में अनुष्ठान के लिए भी पूर्णिमा तिथि महाफलदायी मानी गई है। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार इस दिन हर प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। वहीं अगर विवाह आदि मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही है तो यह दिन खास है। कुछ उपायों से बाधाओं का निवारण किया जा सकता है।
ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार माघी पूर्णिमा बुधवार को अश्लेषा नक्षत्र, शोभन योग के साथ आ रही है। धर्मकर्म के कार्यों में इस योग व नक्षत्र का विशेष महत्व है। माघ मास में जो श्रद्धालु तीर्थ स्नान व दान पुण्य नहीं कर पाए हैं, वे पूर्णिमा तिथि का लाभ धार्मिक कार्यों के लिए ले सकते हैं। विशेष यह है कि पूर्णिमा पर स्नान, दान से पूरे माह का पुण्य फल प्राप्त होता है।
पं. व्यास के अनुसार 27 नक्षत्रों में आने वाला शोभन योग विशिष्ट श्रेणी में आता है। शोभन योग के स्वामी बृहस्पति हैं। बृहस्पति के स्वामित्व वाली यह पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु तथा भगवान बृहस्पति की आराधना के लिए विशेष है।
धर्म शास्त्र के जानकारों के अनुसार अगर कन्याओं के विवाह में परेशानी आ रही है, वे इस दिन व्रत रखकर भगवान बृहस्पति की पूजा अर्चना करें। संभव हो तो अनुष्ठान करें तो विवाह के शीघ्र योग बनेंगे। बृहस्पति को चने की दाल, पीला वस्त्र, खड़ी हल्दी की गांठ अर्पित करने से भी वे शीघ्र प्रसन्न् होते हैं तथा विवाह आदि मांगलिक कार्यों के योग बनाते हैं।
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Magh Purnima दो हज़ार बाईस : उज्जैन । माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा बुधवार को आ रही है। इस दिन शिप्रा में पर्व स्नान का विशेष महत्व है। दान पुण्य तथा मांगलिक कार्यों में अनुष्ठान के लिए भी पूर्णिमा तिथि महाफलदायी मानी गई है। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार इस दिन हर प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। वहीं अगर विवाह आदि मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही है तो यह दिन खास है। कुछ उपायों से बाधाओं का निवारण किया जा सकता है। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार माघी पूर्णिमा बुधवार को अश्लेषा नक्षत्र, शोभन योग के साथ आ रही है। धर्मकर्म के कार्यों में इस योग व नक्षत्र का विशेष महत्व है। माघ मास में जो श्रद्धालु तीर्थ स्नान व दान पुण्य नहीं कर पाए हैं, वे पूर्णिमा तिथि का लाभ धार्मिक कार्यों के लिए ले सकते हैं। विशेष यह है कि पूर्णिमा पर स्नान, दान से पूरे माह का पुण्य फल प्राप्त होता है। पं. व्यास के अनुसार सत्ताईस नक्षत्रों में आने वाला शोभन योग विशिष्ट श्रेणी में आता है। शोभन योग के स्वामी बृहस्पति हैं। बृहस्पति के स्वामित्व वाली यह पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु तथा भगवान बृहस्पति की आराधना के लिए विशेष है। धर्म शास्त्र के जानकारों के अनुसार अगर कन्याओं के विवाह में परेशानी आ रही है, वे इस दिन व्रत रखकर भगवान बृहस्पति की पूजा अर्चना करें। संभव हो तो अनुष्ठान करें तो विवाह के शीघ्र योग बनेंगे। बृहस्पति को चने की दाल, पीला वस्त्र, खड़ी हल्दी की गांठ अर्पित करने से भी वे शीघ्र प्रसन्न् होते हैं तथा विवाह आदि मांगलिक कार्यों के योग बनाते हैं।
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काले दाग धब्बे और किसी तरह के निशान फेस की सुंदरता को बिगाड़ देते है। चेहरे पर मुहासे निकलना दाग धब्बे और गड्ढे पड़ने का प्रमुख कारण होता है। काले दाग मिटाने के उपाय के लिए कोई क्रीम का उपयोग करता है तो कोई दाग का इलाज की दवा लगाता है। लोगो के तरह तरह के उपायों के बाद भी चेहरे पर मुहासे हो जाते है और यह समस्या आम तोर पर किशोरावस्था मे बहुत अधिक देखी जाती है दाग हटाने के लिए हम दवा और क्रीम के तरीके से इलाज कर के मुंहासे तो ठीक कर लेते है पर कई बार मुहासे के दाग रह जाते है। आइये आ हम बताते हैं आपको किस तरह इन दाग धब्बों से छुटकारा पाए।
* नींबू :
नींबू सबसे अच्छा ब्लीचिंग एजेंट होता है जो चेहरे मे निखार लाने मे बहुत मदद करता है। नींबू मे विटामिन सी होता है वा एंटीऑक्सीडेंट के रूप मे काम करते है और त्वचा मे दाग धब्बो को दूर करने मे मदद करते है। नींबू को आप दाग धब्बे मे लगाए और सुख जाए तो धो ले। ध्यान रहे नींबू का रस लगाने के बाद धूप मे ना जाए।
* शहद :
अगर दाग गहरे हो और दूर से देखने पर भी चेहरे पर काली छाया दिखती है तो ऐसे दाग हटाने के लिए एक से दो बूँद ग्लिसरीन, थोड़ा नींबू का रस और थोड़ा शहद मिलाकर एक मिश्रण त्यार कर ले और दाग धब्बे पर लगा कर कुछ देर हल्की मालिश करे और 30 मिनट बाद चेहरा धो ले। इस घरेलू उपाय को सही तरीके से और नियमित करने पर फेस के जटिल दाग भी धीरे धीरे गायब होने लगेंगे।
* बेकिंग सोडा :
बेकिंग सोडा त्वचा के रोम छिद्र को खोलता है। हफ्ते मे 1 या 2 बार एक चमच बेकिंग सोडा मे पानी मिलाकर मुहासों पर लगाये और पांच से दस मिनट तक सुखाने के बाद धो ले।
* पपीता :
कच्चे पपीता मे होता है papain enzyme जो डेड स्किन सेल्स जल्दी से हटा देता है और त्वचा का रंग सुधार देता है। कच्चे पपीता का रस निकले या पेस्ट बनाए या तो छिलका निकल के अंदर का भाग काले निशान पर घिसे थोड़े मिनिट्स के लिए।
* टमाटर :
पिम्पल्स का इलाज करने के लिए एक मध्यम आकार का टमाटर लीजिये, उसका रस को निकाल के उसमे एक चम्मच नीबू के रस को मिलाए। फिर अपने पूरे चेहरे पर लगाए और 20 मिनिट के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो ले। ये आपके चेहरे को निखारने में और काले धब्बे को दूर करने में आपकी मदद करेगा।
* गाजर का बीज :
गाजर के बीज मे बेताकारोटेने मिलेगा जो पवरफुल कम करता है त्यरोसिनसे पर और इस से मेलनिन का उत्पादन कम हो के त्वचा का रंग हल्का हो जाता है। गाजर का बीज भिगो के पेस्ट बना के लगाए काले निशान वाले जगह पर।
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काले दाग धब्बे और किसी तरह के निशान फेस की सुंदरता को बिगाड़ देते है। चेहरे पर मुहासे निकलना दाग धब्बे और गड्ढे पड़ने का प्रमुख कारण होता है। काले दाग मिटाने के उपाय के लिए कोई क्रीम का उपयोग करता है तो कोई दाग का इलाज की दवा लगाता है। लोगो के तरह तरह के उपायों के बाद भी चेहरे पर मुहासे हो जाते है और यह समस्या आम तोर पर किशोरावस्था मे बहुत अधिक देखी जाती है दाग हटाने के लिए हम दवा और क्रीम के तरीके से इलाज कर के मुंहासे तो ठीक कर लेते है पर कई बार मुहासे के दाग रह जाते है। आइये आ हम बताते हैं आपको किस तरह इन दाग धब्बों से छुटकारा पाए। * नींबू : नींबू सबसे अच्छा ब्लीचिंग एजेंट होता है जो चेहरे मे निखार लाने मे बहुत मदद करता है। नींबू मे विटामिन सी होता है वा एंटीऑक्सीडेंट के रूप मे काम करते है और त्वचा मे दाग धब्बो को दूर करने मे मदद करते है। नींबू को आप दाग धब्बे मे लगाए और सुख जाए तो धो ले। ध्यान रहे नींबू का रस लगाने के बाद धूप मे ना जाए। * शहद : अगर दाग गहरे हो और दूर से देखने पर भी चेहरे पर काली छाया दिखती है तो ऐसे दाग हटाने के लिए एक से दो बूँद ग्लिसरीन, थोड़ा नींबू का रस और थोड़ा शहद मिलाकर एक मिश्रण त्यार कर ले और दाग धब्बे पर लगा कर कुछ देर हल्की मालिश करे और तीस मिनट बाद चेहरा धो ले। इस घरेलू उपाय को सही तरीके से और नियमित करने पर फेस के जटिल दाग भी धीरे धीरे गायब होने लगेंगे। * बेकिंग सोडा : बेकिंग सोडा त्वचा के रोम छिद्र को खोलता है। हफ्ते मे एक या दो बार एक चमच बेकिंग सोडा मे पानी मिलाकर मुहासों पर लगाये और पांच से दस मिनट तक सुखाने के बाद धो ले। * पपीता : कच्चे पपीता मे होता है papain enzyme जो डेड स्किन सेल्स जल्दी से हटा देता है और त्वचा का रंग सुधार देता है। कच्चे पपीता का रस निकले या पेस्ट बनाए या तो छिलका निकल के अंदर का भाग काले निशान पर घिसे थोड़े मिनिट्स के लिए। * टमाटर : पिम्पल्स का इलाज करने के लिए एक मध्यम आकार का टमाटर लीजिये, उसका रस को निकाल के उसमे एक चम्मच नीबू के रस को मिलाए। फिर अपने पूरे चेहरे पर लगाए और बीस मिनिट के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो ले। ये आपके चेहरे को निखारने में और काले धब्बे को दूर करने में आपकी मदद करेगा। * गाजर का बीज : गाजर के बीज मे बेताकारोटेने मिलेगा जो पवरफुल कम करता है त्यरोसिनसे पर और इस से मेलनिन का उत्पादन कम हो के त्वचा का रंग हल्का हो जाता है। गाजर का बीज भिगो के पेस्ट बना के लगाए काले निशान वाले जगह पर।
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हिमाचल प्रदेश में लोगों को अभी तपती गर्मी से निजात मिलने के आसार नहीं है। प्रदेश में लगातार धूप खिलाने से तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है। रविवार को ऊना जिला में अधिकतम तापमान 44. 4 डिग्री दर्ज किया गया है। तो वहीं, कांगड़ा बिलासपुर और मंडी में भी अधिकतम तापमान 40 डिग्री पहुंच गया है। तपती गर्मी के बीच लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। आए दिन प्रदेश में गर्मी से रिकॉर्ड टूट रहे हैं।
धूप खिलने से पारा सामान्य से 5 से 6 डिग्री अधिक चल रहा है। सोमवार को भी प्रदेश में तेज धूप खिली है। मौसम विभाग ने आज के लिए प्रदेश के 6 जिलों ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, सिरमौर और सोलन में लू चलने को लेकर अलर्ट जारी किया है। ऐसे में लोगों को अभी इस गर्मी से निजात मिलने के आसार नहीं है।
मौसम विभाग शिमला के अनुसार प्रदेश में 8 जून तक मौसम साफ बना रहेगा। जबकि 9 जून से मौसम में बदलाव आने की संभावना है। विभाग के अनुसार 9 जून से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके चलते 3 दिन तक बारिश होने की संभावना है।
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हिमाचल प्रदेश में लोगों को अभी तपती गर्मी से निजात मिलने के आसार नहीं है। प्रदेश में लगातार धूप खिलाने से तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है। रविवार को ऊना जिला में अधिकतम तापमान चौंतालीस. चार डिग्री दर्ज किया गया है। तो वहीं, कांगड़ा बिलासपुर और मंडी में भी अधिकतम तापमान चालीस डिग्री पहुंच गया है। तपती गर्मी के बीच लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। आए दिन प्रदेश में गर्मी से रिकॉर्ड टूट रहे हैं। धूप खिलने से पारा सामान्य से पाँच से छः डिग्री अधिक चल रहा है। सोमवार को भी प्रदेश में तेज धूप खिली है। मौसम विभाग ने आज के लिए प्रदेश के छः जिलों ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, सिरमौर और सोलन में लू चलने को लेकर अलर्ट जारी किया है। ऐसे में लोगों को अभी इस गर्मी से निजात मिलने के आसार नहीं है। मौसम विभाग शिमला के अनुसार प्रदेश में आठ जून तक मौसम साफ बना रहेगा। जबकि नौ जून से मौसम में बदलाव आने की संभावना है। विभाग के अनुसार नौ जून से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके चलते तीन दिन तक बारिश होने की संभावना है।
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अनुकूल व्यापारका थोथा तर्क
अध्ययन करते हैं। इस कारण यहाँ अध्यापक महाशयको मैने जो उत्तर दिया था उसका साराश दे देना अनुचित नही होगा। मैने दलील देते हुए कहा कि मान लीजिए कि कोई देश ऐसे लोगोकी मिल्कियत है जो गुलामोके मालिक है और जो अपने गुलामोसे बेगार करवाकर अनाज और दुनियाके काम आनेवाली दूसरी कई चीजे पैदा करवाते है, जो गुलामोको इतनी थोडी मजदूरी देते है कि वे बेचारे मुश्किलसे अपना पेट भर पाते हैं, लेकिन खुद उन गुलामो द्वारा पैदा की गई चीजोसे देश-विदेशमे व्यापार करके खूब मुनाफा कमाते है, और यह भी मान लीजिए कि इस देशसे अनाज तथा अन्य वस्तुओका निर्यात देशमें आनेवाली वस्तुओके आयातसे ज्यादा है। ऐसी हालतमे ऊपर-ऊपरसे तो व्यापार देशके अनुकूल जान पडेगा, लेकिन यह अनुकूल व्यापार उस देशकी जनताकी आम खुशहालीका माप नही होगा । उस देशमें आयात निर्यात व्यापारकी अनुकूल स्थितिके साथ-साथ ही आम जनताकी बढ़ती हुई गरीबी और दर्दनाक पामाली भी रह सकती है। मैने अध्यापक महाशयसे कहा कि ऊपर हमने जिस गुलाम देशकी कल्पना की है, भारतकी हालत उससे भिन्न नही है । इस कारण मैने उनसे कहा कि इस लगातार अनुकूल व्यापारके भेदको समझने के लिए भारतके कुछ आम गाँवोकी अवस्थाका अध्ययन करना और गाँववालोकी हालतको अपनी आँखो देखना जरूरी है। मैंने फिर कहा कि भारतका अनुकूल व्यापार देहातके गरीबोके किस कामका है, जबकि वे उससे कोई लाभ नही उठा पाते और जैसा कि मैं कहता हूँ, उन्नति करनेके बदले उनकी दशा दिन - दिन गिरती जाती है ।
स्वर्गीय दादाभाई नौरोजीने प्रामाणिक आँकड़ो द्वारा यह बखूबी साबित कर दिखाया था कि किस तरह विदेशी शासकोके कारण भारतका धन हर साल विदेशोमे बहा चला जा रहा है । ये विदेशी शासक नाम मात्रके लिए अपने भौतिक शरीरसे भारत में भले ही रहते हो, इनका सच्चा राजसी जीवन तो भारतके बाहर विदेशोमें बडे मौजसे बीतता रहता है। भारतका अनुकूल व्यापार और कुछ नहीं, एक लगातार खून चूसनेवाली प्रक्रिया है, और एक ऐसे शासनको कायम रखनेका साधन है, जो जनताकी सहानुभूतिसे वचित है और इस कारण गैरमामूली तौरपर धन-व्यय करके जवर्दस्ती इस देश में बना हुआ है और इस घनका अधिकाश भाग भारतसे बाहर चला जाता है ।
स्वय अर्थशास्त्रियोने सच ही कहा है कि आँकड़ोके द्वारा दो परस्पर विरोधी बातें सही सिद्ध की जा सकती है। इस कारण जो बुद्धिमान पुरुष किन्ही पूर्व निश्चित प्रमेयोको केवल किसी तरह सिद्ध कर देनेकी दृष्टि नही रखता है, बल्कि जिसका एकमात्र ध्येय सत्यकी खोज करना है, उसका कर्त्तव्य है कि वह आँकड़ोकी तहमे जाये और उनसे सिद्ध होनेवाली बातोकी स्वतन्त्र रूपसे जाँच करे। बेशक किसी नदीकी औसत गहराई जान लेना अच्छा है, लेकिन जिस आदमीको तैरना नही मालूम है, वह अगर यह पता पाकर कि नदीकी औसत गहराई उसकी ऊँचाईसे कम है, उसे पैदल पार करने चले तो बहुत सम्भव है कि उसे जल-समाधि लेनी पड़े। इसी तरह जो आदमी कोरे दिखावटी आँकड़ोंपर विश्वास करता है, लोगोको
उसकी बुद्धिमत्तापर विश्वास नही रह जाता। जिस तरह नदीको पैदल पार करनेवाले आदमीको उसकी कमसे कम और ज्यादासे ज्यादा गहराई अच्छी तरह जान लेनी चाहिए उसी तरह ऑकडोका सही उपयोग करनेकी इच्छा रखनेवाले आदमीको आँकडोके इस सार-सक्षेपकी तहमे जो वास्तविक ऑकडे होते है उन्हें और उनके उपयोगके तरीकेको जान लेना चाहिए। लेकिन सामान्य आदमीके पास न तो इतना समय होता है और न इतनी योग्यता ही होती है कि वह आँकडोके गोरखधन्वेका अध्ययन कर सके । उसके लिए तो देशकी हालतको जाँचनेकी सच्ची कसौटी गाँवोका आँखो देखा अनुभव है। इस तरहके अनुभवको आँकड़ोकी कोई भी करामात झूठा नही साबित कर सकती।
भारतका आँखो देखा तजुर्बा रखनेवालोने, जिनमें ऐसे कई अग्रेज अधिकारी भी शामिल है, जिनका स्वार्थ ही इस बातमें है कि वे कोई विरोधी बात ढूंढ पाये तो अच्छा, इस बातको कबूल किया है कि ब्रिटिश शासनमे भारत दिन-दिन गरीब होता जा रहा है। आप देहातमे जाकर जरा देखिए, गाँववालोके चेहरोपर निराशा और दुखकी छाया ही आपको नजर आयेगी। वे और उनके मवेशी, दोनो पूरा भोजन नही पाते । मृत्युसख्या सपाटेसे बढ़ रही है। उनके शरीरमे रोगसे लडनेकी ताकत नही है । यह तो जानी हुई बात है कि मलेरिया कोई खतरनाक बीमारी नहीं है, बशर्ते कि मरीजको कुनैन और शुद्ध दूध पीनेको मिलता रहे। फिर भी हर साल हजारो देहाती मलेरियाकी भेट होते रहते है । कुनैन उनको भले ही दे दी जाती हो, लेकिन बीमारीकी कमजोरीसे छुटकारा पाने के लिए उन्हें दूध कही भी नहीं मिल सकता । उनकी कर्जदारी बराबर बढ़ रही है। यह कहना सत्यका जघन्य अपलाप है कि व्याह वगैरामे फिजूलखर्चीके कारण वे कर्जदार होते जा रहे है। ये कोई नये खर्च नही है जो कोई माज नये सिरेसे उनकी गरीबीको बढा रहे हो । धन जमा करने और चाँदीके सिक्कोके गहने बना लेनेकी कथाएँ तो कोरी कल्पनाएँ है । करोडो लोगोके पास सोने-चाँदीके गहने न कभी थे और न आज ही है। स्त्रियाँ लकडी और यहाँतक कि पत्थरकी भोडी चूड़ियाँ और अंगूठियाँ पहनती है और इन्हे पहननेसे उनको स्वच्छद अग-संचालनमे बाधा पड़ती है, यही नहीं उनकी तन्दुरुस्तीको भी नुकसान पहुँचता है। गांववालों निरक्षरता तो बढ़ती ही जा रही है। ये सब चीजे देशकी बढ़ती हुई समृद्धिके लक्षण कदापि नही है ।
आइए, अब हम देशके आयात-निर्यातकी हालतपर थोडा विचार करें। १९२७२८ मे देशसे ३०९ करोड रुपयोंका माल बाहर भेजा गया और २३१ करोडसे अधिक रुपयेका माल विदेशोसे देशमे आया। जो चीजे बाहर भेजी गईं उनमे कच्चा माल, जैसे, कपास, अनाज, तिल, मूंगफली वगैरा, कच्चा और कमाया हुआ चमडा, कच्ची और पक्की धातुएँ आदि मुख्य है । अगर हमारे पास इस कच्चे मालका उपयोग करनेके लिए आवश्यक हुनर होता और लगानेको पर्याप्त पूंजी होती अथवा हमारी अपनी एक सरकार होती जो इस तरहका हुनर और पूंजी हमारे लिए उपलब्ध करना अपना कर्तव्य समझती, तो यह कच्चा माल भारत में ही रहता । भारतके निर्यातकी
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अनुकूल व्यापारका थोथा तर्क अध्ययन करते हैं। इस कारण यहाँ अध्यापक महाशयको मैने जो उत्तर दिया था उसका साराश दे देना अनुचित नही होगा। मैने दलील देते हुए कहा कि मान लीजिए कि कोई देश ऐसे लोगोकी मिल्कियत है जो गुलामोके मालिक है और जो अपने गुलामोसे बेगार करवाकर अनाज और दुनियाके काम आनेवाली दूसरी कई चीजे पैदा करवाते है, जो गुलामोको इतनी थोडी मजदूरी देते है कि वे बेचारे मुश्किलसे अपना पेट भर पाते हैं, लेकिन खुद उन गुलामो द्वारा पैदा की गई चीजोसे देश-विदेशमे व्यापार करके खूब मुनाफा कमाते है, और यह भी मान लीजिए कि इस देशसे अनाज तथा अन्य वस्तुओका निर्यात देशमें आनेवाली वस्तुओके आयातसे ज्यादा है। ऐसी हालतमे ऊपर-ऊपरसे तो व्यापार देशके अनुकूल जान पडेगा, लेकिन यह अनुकूल व्यापार उस देशकी जनताकी आम खुशहालीका माप नही होगा । उस देशमें आयात निर्यात व्यापारकी अनुकूल स्थितिके साथ-साथ ही आम जनताकी बढ़ती हुई गरीबी और दर्दनाक पामाली भी रह सकती है। मैने अध्यापक महाशयसे कहा कि ऊपर हमने जिस गुलाम देशकी कल्पना की है, भारतकी हालत उससे भिन्न नही है । इस कारण मैने उनसे कहा कि इस लगातार अनुकूल व्यापारके भेदको समझने के लिए भारतके कुछ आम गाँवोकी अवस्थाका अध्ययन करना और गाँववालोकी हालतको अपनी आँखो देखना जरूरी है। मैंने फिर कहा कि भारतका अनुकूल व्यापार देहातके गरीबोके किस कामका है, जबकि वे उससे कोई लाभ नही उठा पाते और जैसा कि मैं कहता हूँ, उन्नति करनेके बदले उनकी दशा दिन - दिन गिरती जाती है । स्वर्गीय दादाभाई नौरोजीने प्रामाणिक आँकड़ो द्वारा यह बखूबी साबित कर दिखाया था कि किस तरह विदेशी शासकोके कारण भारतका धन हर साल विदेशोमे बहा चला जा रहा है । ये विदेशी शासक नाम मात्रके लिए अपने भौतिक शरीरसे भारत में भले ही रहते हो, इनका सच्चा राजसी जीवन तो भारतके बाहर विदेशोमें बडे मौजसे बीतता रहता है। भारतका अनुकूल व्यापार और कुछ नहीं, एक लगातार खून चूसनेवाली प्रक्रिया है, और एक ऐसे शासनको कायम रखनेका साधन है, जो जनताकी सहानुभूतिसे वचित है और इस कारण गैरमामूली तौरपर धन-व्यय करके जवर्दस्ती इस देश में बना हुआ है और इस घनका अधिकाश भाग भारतसे बाहर चला जाता है । स्वय अर्थशास्त्रियोने सच ही कहा है कि आँकड़ोके द्वारा दो परस्पर विरोधी बातें सही सिद्ध की जा सकती है। इस कारण जो बुद्धिमान पुरुष किन्ही पूर्व निश्चित प्रमेयोको केवल किसी तरह सिद्ध कर देनेकी दृष्टि नही रखता है, बल्कि जिसका एकमात्र ध्येय सत्यकी खोज करना है, उसका कर्त्तव्य है कि वह आँकड़ोकी तहमे जाये और उनसे सिद्ध होनेवाली बातोकी स्वतन्त्र रूपसे जाँच करे। बेशक किसी नदीकी औसत गहराई जान लेना अच्छा है, लेकिन जिस आदमीको तैरना नही मालूम है, वह अगर यह पता पाकर कि नदीकी औसत गहराई उसकी ऊँचाईसे कम है, उसे पैदल पार करने चले तो बहुत सम्भव है कि उसे जल-समाधि लेनी पड़े। इसी तरह जो आदमी कोरे दिखावटी आँकड़ोंपर विश्वास करता है, लोगोको उसकी बुद्धिमत्तापर विश्वास नही रह जाता। जिस तरह नदीको पैदल पार करनेवाले आदमीको उसकी कमसे कम और ज्यादासे ज्यादा गहराई अच्छी तरह जान लेनी चाहिए उसी तरह ऑकडोका सही उपयोग करनेकी इच्छा रखनेवाले आदमीको आँकडोके इस सार-सक्षेपकी तहमे जो वास्तविक ऑकडे होते है उन्हें और उनके उपयोगके तरीकेको जान लेना चाहिए। लेकिन सामान्य आदमीके पास न तो इतना समय होता है और न इतनी योग्यता ही होती है कि वह आँकडोके गोरखधन्वेका अध्ययन कर सके । उसके लिए तो देशकी हालतको जाँचनेकी सच्ची कसौटी गाँवोका आँखो देखा अनुभव है। इस तरहके अनुभवको आँकड़ोकी कोई भी करामात झूठा नही साबित कर सकती। भारतका आँखो देखा तजुर्बा रखनेवालोने, जिनमें ऐसे कई अग्रेज अधिकारी भी शामिल है, जिनका स्वार्थ ही इस बातमें है कि वे कोई विरोधी बात ढूंढ पाये तो अच्छा, इस बातको कबूल किया है कि ब्रिटिश शासनमे भारत दिन-दिन गरीब होता जा रहा है। आप देहातमे जाकर जरा देखिए, गाँववालोके चेहरोपर निराशा और दुखकी छाया ही आपको नजर आयेगी। वे और उनके मवेशी, दोनो पूरा भोजन नही पाते । मृत्युसख्या सपाटेसे बढ़ रही है। उनके शरीरमे रोगसे लडनेकी ताकत नही है । यह तो जानी हुई बात है कि मलेरिया कोई खतरनाक बीमारी नहीं है, बशर्ते कि मरीजको कुनैन और शुद्ध दूध पीनेको मिलता रहे। फिर भी हर साल हजारो देहाती मलेरियाकी भेट होते रहते है । कुनैन उनको भले ही दे दी जाती हो, लेकिन बीमारीकी कमजोरीसे छुटकारा पाने के लिए उन्हें दूध कही भी नहीं मिल सकता । उनकी कर्जदारी बराबर बढ़ रही है। यह कहना सत्यका जघन्य अपलाप है कि व्याह वगैरामे फिजूलखर्चीके कारण वे कर्जदार होते जा रहे है। ये कोई नये खर्च नही है जो कोई माज नये सिरेसे उनकी गरीबीको बढा रहे हो । धन जमा करने और चाँदीके सिक्कोके गहने बना लेनेकी कथाएँ तो कोरी कल्पनाएँ है । करोडो लोगोके पास सोने-चाँदीके गहने न कभी थे और न आज ही है। स्त्रियाँ लकडी और यहाँतक कि पत्थरकी भोडी चूड़ियाँ और अंगूठियाँ पहनती है और इन्हे पहननेसे उनको स्वच्छद अग-संचालनमे बाधा पड़ती है, यही नहीं उनकी तन्दुरुस्तीको भी नुकसान पहुँचता है। गांववालों निरक्षरता तो बढ़ती ही जा रही है। ये सब चीजे देशकी बढ़ती हुई समृद्धिके लक्षण कदापि नही है । आइए, अब हम देशके आयात-निर्यातकी हालतपर थोडा विचार करें। एक लाख बानवे हज़ार सात सौ अट्ठाईस मे देशसे तीन सौ नौ करोड रुपयोंका माल बाहर भेजा गया और दो सौ इकतीस करोडसे अधिक रुपयेका माल विदेशोसे देशमे आया। जो चीजे बाहर भेजी गईं उनमे कच्चा माल, जैसे, कपास, अनाज, तिल, मूंगफली वगैरा, कच्चा और कमाया हुआ चमडा, कच्ची और पक्की धातुएँ आदि मुख्य है । अगर हमारे पास इस कच्चे मालका उपयोग करनेके लिए आवश्यक हुनर होता और लगानेको पर्याप्त पूंजी होती अथवा हमारी अपनी एक सरकार होती जो इस तरहका हुनर और पूंजी हमारे लिए उपलब्ध करना अपना कर्तव्य समझती, तो यह कच्चा माल भारत में ही रहता । भारतके निर्यातकी
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विजिलेंस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है।
फरीदाबादः विजिलेंस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। इस दौरान ओल्ड फरीदाबाद थाने में तैनात हेड कांस्टेबल को 20 हजार रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने थाने में दर्ज एफआई के फेर-बदल के बारे रिश्वत मांगी थी।
बता दें कि हरियाणा विजिलेंस की टीम ने इस समय अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नई पहल चलाई है। इस दौरान पूरी सख्ती से किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में हेड कांस्टेबल ने रविंद्र नाम के शिकायतकर्ता से एफआईआर में फेरबदल करने के नाम पर 20 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। जिसकी सूचना विजिलेंस को मिल गई और वह कांस्टबेल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
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विजिलेंस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। फरीदाबादः विजिलेंस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। इस दौरान ओल्ड फरीदाबाद थाने में तैनात हेड कांस्टेबल को बीस हजार रिश्वत के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने थाने में दर्ज एफआई के फेर-बदल के बारे रिश्वत मांगी थी। बता दें कि हरियाणा विजिलेंस की टीम ने इस समय अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नई पहल चलाई है। इस दौरान पूरी सख्ती से किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में हेड कांस्टेबल ने रविंद्र नाम के शिकायतकर्ता से एफआईआर में फेरबदल करने के नाम पर बीस हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। जिसकी सूचना विजिलेंस को मिल गई और वह कांस्टबेल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
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Excitel : आज कल इंटरनेट का इस्तेमाल काफी ज्यादा बड़ गया है। मोबाइल का इंटरनेट अक्सर ही ख़त्म हो जाता है। इंटरनेट ख़त्म होने के बाद कई बार काफी समस्या का सामना करना पड़ जाता है। देश में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी Excitel ने अपने ग्राहकों को हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए एक नया प्लान लॉन्च किया है। जिसे लेने के बाद आप घर में इंटरनेट का लुफ्त उठा सकते है। Excitel के नए प्लान में 400Mbps स्पीड मिलेगी।
गौर करने वाली बात है कि आपको बता दें कि 400Mbps स्पीड वाला नया Excitel प्लान कंपनी की सर्विस जहां भी है वहां के लोग इस प्लान का लाभ उठा सकते है। इस प्लान को ऐक्टिवेट करने के लिए ग्राहकों को Exitel ऐप में जाना होगा या फिर अपग्रेड के लिए हेल्पलाइन नंबर पर रिक्वेस्ट भेजनी होगी।
400Mbps वाले प्लान को अगर ग्राहक 3 महीने के लिए एक साथ लेते हैं तो उन्हें कुल 833 रुपये, 6 महीने के लिए 699 रुपये, 9 महीने के लिए 659 रुपये और 12 महीने यानी एक साल के लिए लेते हैं तो 599 रुपये देने होंगे। ये ऑफर इंटरनेट ज्यादा उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।
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Excitel : आज कल इंटरनेट का इस्तेमाल काफी ज्यादा बड़ गया है। मोबाइल का इंटरनेट अक्सर ही ख़त्म हो जाता है। इंटरनेट ख़त्म होने के बाद कई बार काफी समस्या का सामना करना पड़ जाता है। देश में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी Excitel ने अपने ग्राहकों को हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए एक नया प्लान लॉन्च किया है। जिसे लेने के बाद आप घर में इंटरनेट का लुफ्त उठा सकते है। Excitel के नए प्लान में चार सौMbps स्पीड मिलेगी। गौर करने वाली बात है कि आपको बता दें कि चार सौMbps स्पीड वाला नया Excitel प्लान कंपनी की सर्विस जहां भी है वहां के लोग इस प्लान का लाभ उठा सकते है। इस प्लान को ऐक्टिवेट करने के लिए ग्राहकों को Exitel ऐप में जाना होगा या फिर अपग्रेड के लिए हेल्पलाइन नंबर पर रिक्वेस्ट भेजनी होगी। चार सौMbps वाले प्लान को अगर ग्राहक तीन महीने के लिए एक साथ लेते हैं तो उन्हें कुल आठ सौ तैंतीस रुपयापये, छः महीने के लिए छः सौ निन्यानवे रुपयापये, नौ महीने के लिए छः सौ उनसठ रुपयापये और बारह महीने यानी एक साल के लिए लेते हैं तो पाँच सौ निन्यानवे रुपयापये देने होंगे। ये ऑफर इंटरनेट ज्यादा उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।
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ईप्यो, द्वप, विपय तथा कषायादि से मन को विकृत न होने देकर उसे सरल, शुद्ध और दृढ बनाना चाहिये । शुद्ध मन मे ही शुद्ध सकल्प हो सकते है और मन के दृढ रहने पर वे स्थायी बन सकते है ।
अभी आपको बताया था कि "यद् मनसा ध्यायति, तद् वाचा वदति ।"
अर्थात् - मन मे जैसे विचार होते है वैसे ही वाणी के द्वारा बोले जाते है । वाणी ही मन का दर्पण है। वाणी के द्वारा ही मनुष्य के हृदयगत भावो की पहचान होती है । वाणी का प्रभाव सुनने वाले पर एकदम ही पड़ता है । मधुर वचनो को सुनकर मनुष्य आनन्दविभोर हो उठता है और कटु वचनो को सुनकर शोकाकुल । कहा जाता है
ससारकटुवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे । सुभाषित च सुस्वादु सगति सुजने जने ।।
अर्थात् - ससार रूपी कटु वृक्ष के अमृत के समान दो फल है, सरस प्रिय वचन और सज्जनो की सगति ।
बुद्धिमान् पुरुष अपने वचनो का अत्यत सावधानीपूर्वक प्रयोग करता है । वह ध्यान रखता है कि मेरे वचनो के द्वारा किसी भी प्राणी को खेद न हो, किसी का तिरस्कार न हो, किसी के दिल को चोट न पहुँचे । और ऐसे व्यक्ति के वचनो का प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर बड़ा आश्चर्यजनक प्रभाव पढता है ।
कहा जाता है कि जब सामनगढ़ का किला बन रहा था, महाराज शिवाजी एक दिन उसका निरीक्षण करने आए । वहाँ बहुत से मज़दूरो को काम करते देखकर उन्हें गर्व का अनुभव हुआ और वे सोचने लगे - 'मेरे कारण इतने लोगो की रोजी चल रही है।" इतने में ही गुरु श्री समर्थ वहाँ आए । उन्होंने शिवाजी के इस अह कार को जान लिया । वे बोले - 'वाह वाह । इतने व्यक्तियों का पालन तुम्हारे द्वारा ही हो रहा है ।' गुरु के मुख से भी इसी बात को सुनकर शिवाजी महाराज अपने को अधिक धन्य समझने लगे । बोले - भगवन् । यह सब आपके आशीर्वाद का ही फल है ।
इतने मे ही मार्ग में एक चट्टान देखकर गुरुजी ने कहा - यह चट्टान बीच मे क्यो छोड दी है ?
शिवाजी ने उत्तर दिया- 'रास्ता बन जाने पर इसे तुडवा दिया
तन्मे मन शिवसकल्पमस्तु
जाएगा । श्री समर्थ बोले- नही, नही, प्रत्येक काम को हाथो हाय होकरवाना चाहिये । जो काम रह जाता है वह बाद मे हो नहीं पाता ।
शिवाजी ने फौरन कारीगरो को बुलवाया और बात की बात मे चट्टान तोड डाली गई । उसके नीचे पानी से भरा एक गड्ढा निकला और गढ़े मे एक जीवित मेढक । सद्गुरु उस देखते ही बोले- शिवा धन्य हो तुम । इस शिला के अन्दर भी तुमने पानी रखवाकर इस मेढक को जीवित रखने का इतजाम कर दिया है ।
श्री समर्थ के इन वचनो का ऐसा आश्चर्यजनक प्रभाव पडा कि शिवाजी का हर क्षण भर मे ही विलुप्त हो गया और वे अपनी भूल समझ कर तुरन्त ही गुरुजी के चरणो मे गिर पड़े। उन्होंने अपने झूठे अहकार के लिए क्षमा मागी ।
कहने का तात्पर्य यही है कि निष्कपट और सदा दूसरो का हित चाहने वाले व्यक्ति के वचनो का प्रभाव अविलम्ब और आश्चर्यजनक रूप से पडता है । वह इस कथन को चरितार्थ करता है :मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर । द्वारा ह सचरे, साले सकल शरीर ॥ ह्व
वास्तव में मृदुता का दूसरा नाम ही मनुष्यता है और कटुता का पिशाचता । मृदुभाषी पुरुष के सभी मित्र होते है और कटु भाषी के सभी शत्रु । मृदुभाषी के लिए सब अपने और कटुभाषी के लिए सब पराये होते हैं ।
मृदुभाषी मनुष्य का मन अत्यन्त कोमल तथा शुभ संकल्पो से भरा हुआ होता है । उसके हृदय मे प्राणी मात्र के प्रति प्रेम और दया की भावना विद्यमान रहती है। तभी तो उसकी वाणी सुनने वाले के हृदय में अनिर्वचनीय मे माह्लाद उत्पन्न कर देती है अन्यथा जो चीज मन मे न हो वह वचनो मे कैसे आ सकती है ? मन की सरलता, निष्कपटता और शुद्ध सकल्प ही वाणी के द्वारा बाहर आते हैं । शुभ सकल्पो से भरा हुआ मन ही अपनी स्वर्गीय सम्पत्ति से अन्य इन्द्रियो को भी मृदुता से सम्पन्न बना देता है ।
जिसके हृदय मे शुभ विचार होते है उसके सन्मुख चाहे कोई भी भीषण विपत्ति आ जाए, प्रलय काल का पवन भी क्यो न चलने लगे, तब भी वह अशात नही होता । तनिक भी घबराहट उसके चेहरे पर नहीं आ सकती ।
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ईप्यो, द्वप, विपय तथा कषायादि से मन को विकृत न होने देकर उसे सरल, शुद्ध और दृढ बनाना चाहिये । शुद्ध मन मे ही शुद्ध सकल्प हो सकते है और मन के दृढ रहने पर वे स्थायी बन सकते है । अभी आपको बताया था कि "यद् मनसा ध्यायति, तद् वाचा वदति ।" अर्थात् - मन मे जैसे विचार होते है वैसे ही वाणी के द्वारा बोले जाते है । वाणी ही मन का दर्पण है। वाणी के द्वारा ही मनुष्य के हृदयगत भावो की पहचान होती है । वाणी का प्रभाव सुनने वाले पर एकदम ही पड़ता है । मधुर वचनो को सुनकर मनुष्य आनन्दविभोर हो उठता है और कटु वचनो को सुनकर शोकाकुल । कहा जाता है ससारकटुवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे । सुभाषित च सुस्वादु सगति सुजने जने ।। अर्थात् - ससार रूपी कटु वृक्ष के अमृत के समान दो फल है, सरस प्रिय वचन और सज्जनो की सगति । बुद्धिमान् पुरुष अपने वचनो का अत्यत सावधानीपूर्वक प्रयोग करता है । वह ध्यान रखता है कि मेरे वचनो के द्वारा किसी भी प्राणी को खेद न हो, किसी का तिरस्कार न हो, किसी के दिल को चोट न पहुँचे । और ऐसे व्यक्ति के वचनो का प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर बड़ा आश्चर्यजनक प्रभाव पढता है । कहा जाता है कि जब सामनगढ़ का किला बन रहा था, महाराज शिवाजी एक दिन उसका निरीक्षण करने आए । वहाँ बहुत से मज़दूरो को काम करते देखकर उन्हें गर्व का अनुभव हुआ और वे सोचने लगे - 'मेरे कारण इतने लोगो की रोजी चल रही है।" इतने में ही गुरु श्री समर्थ वहाँ आए । उन्होंने शिवाजी के इस अह कार को जान लिया । वे बोले - 'वाह वाह । इतने व्यक्तियों का पालन तुम्हारे द्वारा ही हो रहा है ।' गुरु के मुख से भी इसी बात को सुनकर शिवाजी महाराज अपने को अधिक धन्य समझने लगे । बोले - भगवन् । यह सब आपके आशीर्वाद का ही फल है । इतने मे ही मार्ग में एक चट्टान देखकर गुरुजी ने कहा - यह चट्टान बीच मे क्यो छोड दी है ? शिवाजी ने उत्तर दिया- 'रास्ता बन जाने पर इसे तुडवा दिया तन्मे मन शिवसकल्पमस्तु जाएगा । श्री समर्थ बोले- नही, नही, प्रत्येक काम को हाथो हाय होकरवाना चाहिये । जो काम रह जाता है वह बाद मे हो नहीं पाता । शिवाजी ने फौरन कारीगरो को बुलवाया और बात की बात मे चट्टान तोड डाली गई । उसके नीचे पानी से भरा एक गड्ढा निकला और गढ़े मे एक जीवित मेढक । सद्गुरु उस देखते ही बोले- शिवा धन्य हो तुम । इस शिला के अन्दर भी तुमने पानी रखवाकर इस मेढक को जीवित रखने का इतजाम कर दिया है । श्री समर्थ के इन वचनो का ऐसा आश्चर्यजनक प्रभाव पडा कि शिवाजी का हर क्षण भर मे ही विलुप्त हो गया और वे अपनी भूल समझ कर तुरन्त ही गुरुजी के चरणो मे गिर पड़े। उन्होंने अपने झूठे अहकार के लिए क्षमा मागी । कहने का तात्पर्य यही है कि निष्कपट और सदा दूसरो का हित चाहने वाले व्यक्ति के वचनो का प्रभाव अविलम्ब और आश्चर्यजनक रूप से पडता है । वह इस कथन को चरितार्थ करता है :मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर । द्वारा ह सचरे, साले सकल शरीर ॥ ह्व वास्तव में मृदुता का दूसरा नाम ही मनुष्यता है और कटुता का पिशाचता । मृदुभाषी पुरुष के सभी मित्र होते है और कटु भाषी के सभी शत्रु । मृदुभाषी के लिए सब अपने और कटुभाषी के लिए सब पराये होते हैं । मृदुभाषी मनुष्य का मन अत्यन्त कोमल तथा शुभ संकल्पो से भरा हुआ होता है । उसके हृदय मे प्राणी मात्र के प्रति प्रेम और दया की भावना विद्यमान रहती है। तभी तो उसकी वाणी सुनने वाले के हृदय में अनिर्वचनीय मे माह्लाद उत्पन्न कर देती है अन्यथा जो चीज मन मे न हो वह वचनो मे कैसे आ सकती है ? मन की सरलता, निष्कपटता और शुद्ध सकल्प ही वाणी के द्वारा बाहर आते हैं । शुभ सकल्पो से भरा हुआ मन ही अपनी स्वर्गीय सम्पत्ति से अन्य इन्द्रियो को भी मृदुता से सम्पन्न बना देता है । जिसके हृदय मे शुभ विचार होते है उसके सन्मुख चाहे कोई भी भीषण विपत्ति आ जाए, प्रलय काल का पवन भी क्यो न चलने लगे, तब भी वह अशात नही होता । तनिक भी घबराहट उसके चेहरे पर नहीं आ सकती ।
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को स्वर्ग मे या नरक में बिठा देता है। स्वर्ग या नरक में जाने की कुंजी भगवान् ने हमारे ही हाथ मे दे रखी है ? उसे सीधी या टेढ़ी घुमाना हमारे हाथ है। मनुष्य की सुगति व दुर्गति उसके भले बुरे संकल्पो, विचारो पर ही सर्वथा निर्भर है। पापमय विचारो से वह पापात्मा और पुण्यमयी विचारों से वह निःसदेह पुण्यात्मा बन जाता है। उच्च व पवित्र विचारो से, कितना ही पतित मनष्य क्यो न हो वह भी उच्चातिउच्च पवित्रात्मा वन सकता है। परन्तु भगवान् कहते हैं "उससे बुद्धि का निश्चय पूरा होना चाहिये।" अर्थात् ऐसा पुरुष फिर पाप कर्म नही कर सकता "विश्वासो फलदायकः, ।" यह भगवान का वचन है। जितना विश्वास अधिक होगा उतना उसका फल भी अधिक होता है । महापुरुषों का विश्वास इतना प्रवल और अनन्य होता है कि वे पानी का घी और वालू की चीनी तक बना सकते हैं। ऐसा ही अनन्य विश्वास हमारा भी होना चाहिये। "संशयात्मा विनश्यति ' - संशयी पुरुष का नाश होता है। अतः निःसंदेह भाव से संकल्प करने पर हमारा अवश्य ही उद्धार होगा, इसमे कोई आश्चर्य नही है। सच पूछिये तो कुकल्पना ही शैतान है। अतः जिसको तरना हो उसे चाहिये कि हठ पूर्वक कुबुद्धि को, कुविचारो को त्याग कर सुबुद्धि को धारण करे और आज ही से, इसी समय से पवित्र विचारो को शुरू कर दे । निःसन्देह अपरिमित कल्याण होगा । अतः निद्रा के पूर्व रोज पाव घण्टा अवश्य पवित्र संकल्प किया करो। इससे सब कुस्वप्नों का नाश होकर, तुममे एक अद्भुत दैवी शक्ति प्रकट होगी और तुम्हारे सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध होगे । "पुरुषप्रयत्नशीलस्य प्रसाध्यं नास्ति'" - मनुष्य के उचित प्रयत्न करने पर प्रसाध्य कुछ भी नही है । आज
सादी रहन सहन
भीतर सो मैलो हियो, बाहर रूप अनेक । नारायण तासों भलो, कौवा तन मन एक ।
खुद "न-खरा" शब्द ही मनुष्य की खोटी चाल को साबित कर रहा है। विशेष सज धज करना, ऊँचे ऊँचे और रङ्गबिरगे भड़कीले व कामोत्तेजक कपड़े पहनना, अपने हाथ अपने गले मे मालाये पहनना, श्रङ्गमे और बालो मे सुगन्धित तैल, इत्र आदि लगाना, नेक्टाई, कालर, रिस्टवाच से अपने को संवारना, बार बार शीशे में सूरत देखना, पान से मुँह लाल करना, ये सब ब्रह्मचर्य के लिये काल समान हैं। परन्तु शोक की बात है कि कई सयाने माता पिता खुद अपने ही हाथ से, अपने बच्चो का इन विषय प्रवृत्तिकर बातो मे फंसा रहे और इस प्रकार अपने बच्चो को बिगाड़ रहे है । भत्ता ऐसे लोग विषय को कैसे जीत सकते हैं ? "वहत कबीर सुनो भाई साघो ये क्या लड़ेंगे रण में ?" यदि हमारे इर्द गिर्द शृङ्गारपूर्ण सामग्री न हो तो आत्मसंयम के कामो में बहुत ही सहायता मिल सकती है और हम बड़ी आसानी से प्रात्मसंयम कर सकते हैं। पास में खाने के लिये होने पर जैसे बराबर झूठी ही भूख लगती है, वैसे ही विलासी वस्तुओं और व्यक्तियों से घिरे रहने पर मन में काम भी बराबर जाग उठता है। ऐसा करना प्रसंशयतः अपने भले मन को और भी बिगाड़ना है, श्राग मे तेल डालना है, और वास्तव में यह भी एक प्रकारका छिपा कुरूंग है। अतः इन सब भोग विलास को बातों से सदैव दूर रहो। सादी रहन-सहन अथवा भोग-विलास से विरक्ति ही ब्रह्मचर्य रक्षा का सहज उपाय है। सादगी हो
जीवन है और सजावट ही नाश है, यह तत्वपूर्ण रीति से ध्यान में रखो।
सत्संगत्वे निःसंगत्वं निःसंगत्वे निर्माहत्वम् । निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तः ॥ - श्रीमच्छङ्कराये ।
"सत्संग से निःऩग ( Non attachmont ) की प्राप्ति होती. है, निःसङ्ग से निर्माहत्व अर्थात् विषय से अप्रीति बढ़ती है, निर्मोह से सत्य का पूरा ज्ञान व निश्चय होता है और सत्तत्व निश्चल ज्ञान से मनुष्य जीवन्मुक्त होता है अर्थात् इस संसार से तर जाता है।"
नियम चौथावक्तव्य-संसार में 'आत्मोन्नति के लिये जितने साधन है इन सघ में सतसंग सच में श्रेष्ठ उपाय है। 'सत्सङ्ग यह शब्द अत्यन्त महत्व का है। सत्सङ्ग में संसार की तमाम उन्नतिकर बातो का समावेश होता है। जैसे पवित्र व ऊँचे विचार करना पवित्र स्वदेशी खद्दर पहनना आदि धनन्त वातो का समावेश होता है और 'कुसंग' में संसार की तमाम स्व-पर-नाशकारी बातों का समावेश होता है। सत्सङ्ग से मनुष्य देवता बनता है और कुसङ्ग से मनुष्य राक्षस बन जाता है। भक्त तुलसीदास जीपूछते " को न कुसङ्गति पाय नसाई ?" सच है, कुसङ्ग से आन
तक बड़े बड़े शीलवान् गुणवान, और होनहार वालक-बालिकाएँ तथा स्त्री पुरुष धूल में मिल गये हैं । कुसंङ्ग का प्लेग महान् भयानक होता है। जगली जानवर का या काले साँप का भी साथ बहुत अच्छा है, उससे मनुष्य की केवल मृत्यु ही होगी। परन्तु दुर्जन का संग महान दुर्गतिकर है, वह मनुष्य को नीच योनियों मे व नरक मे ही डालने वाला है । पन्डित विष्णुशर्मा कहते हैं"वर प्राणत्यागो न पुनरधमाना सुपगमः ।"
"प्राण त्याग देना अच्छा है परन्तु नीचों के पास जाना तक बुरा है।" "जैसा संग वैसा रंग" यही प्रकृति का कायदा है। ध्रुवां के संग से सफेद मकान भी काला पड़ जाता है। लता में का कीड़ा लता ही के तुल्य हरा बन जाता है। वैसे ही दुर्जन के साथ मनुष्य भी दुर्जन वन जाता है और सज्जन के साथ सज्जन "कामो के संग काम जागे" "कायर के सग शूर भागे पै भागेक "काजर की कोठरी मे कैसोहू समाने घुसो, एक रेखा काजर की लागे पै लागे ।" कवि का यह कथन अक्षरशः सत्य है। नीच पुरुष अपनेही तुल्य अपने मित्रों को भी नीच, पापी और दुरात्मा बना डालते हैं और सत्पुरुष अपने ही जैसे अपने मित्रों को भी पुन्यात्मा महात्मा बना देते हैं।
सत्संग की महिमा अपरम्पार है । सत्संग से मनुष्य को मोत की प्राप्ति होती है और कुसंग से नरक की प्राप्ति होती है। सत्संग की महिमा और कुसंग की अघमता किसी से छिपी नहीं है। कुसंग से मनुष्य जीते जी ही नरक का सा अनुभव करने लग जाते हैं । इसी कारण से
गोस्वामी जी कहते हैं- "बरु भव वास नरक कर ताता, दुष्ट संग जनि देहि विधाता ।" अतः कल्याण चाहने वालों को कुसंग को एकदम प्रतिज्ञापूर्वक त्याग देना चाहिए और सत्संग को प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करना चाहिए । कुमित्रों से मित्ररहित रहना ही लाख गुना श्रेष्ठ है, क्योकि कुसंग से धर्म, अर्थ काम और मोक्ष चारों मटियामेट हो जाते हैं और अन्त में महान् अधोगति होती है। परन्तु सत्संग से चारो पुरपार्थ अनायास सघ जाते हैं। याद रखो, राजपाट, गज, चाजि, धन, स्त्री, पुत्रादि सव कुछ मिलेंगे, परन्तु सत्संग मिलना परम दुर्लभ है। "बिन सत्संग विवेकन होई, राम कृपा विन सुलभ न सोई । "' - यह गोस्वामी जी का वचन अक्षरशः सत्य है ! मोक्ष के सव साधन एक तरफ और सत्संग एक तरफ, दोनो में सत्संग का ही दर्जा वहुत ऊँचा है।
"तात स्वर्ग अपवर्ग सुख, धरिय तुला इक अंग " तुलै न ताहि सकल मिलि, जो सुख लव सत्संग । सच है 'सठ सुधरहि सतसंगति पाई" कैसे ? तो कैसे "पारस परसि कुधातु सुदाई ।" यह नितान्त सत्य है कि 'सम्पूर्ण दुराचार और व्यभिचार की जड़ एकमात्र कुसंगति ही है। अतः ब्रह्मचारियों को तथा अभ्युदयेच्छुको को चाहिए कि कभी भी जीभ से बुरी बात न कहें, कान से बुरी बात न सुने (कैसे कजली, होली को गालियां व भद्दे भद्दे गीत आदि) श्रींख से बुरी चीज न देखें (जैसे नाटक, तमाशा सिनेमा, नाचवाली रामलीला, भद्दे चीज इत्यादि) पैर से बुरी जगह न जायें, हाथ से बुरी चीज न छुवें और मन से विषय-चिन्तन हरगिज न करें। बल्कि कुभावों को
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को स्वर्ग मे या नरक में बिठा देता है। स्वर्ग या नरक में जाने की कुंजी भगवान् ने हमारे ही हाथ मे दे रखी है ? उसे सीधी या टेढ़ी घुमाना हमारे हाथ है। मनुष्य की सुगति व दुर्गति उसके भले बुरे संकल्पो, विचारो पर ही सर्वथा निर्भर है। पापमय विचारो से वह पापात्मा और पुण्यमयी विचारों से वह निःसदेह पुण्यात्मा बन जाता है। उच्च व पवित्र विचारो से, कितना ही पतित मनष्य क्यो न हो वह भी उच्चातिउच्च पवित्रात्मा वन सकता है। परन्तु भगवान् कहते हैं "उससे बुद्धि का निश्चय पूरा होना चाहिये।" अर्थात् ऐसा पुरुष फिर पाप कर्म नही कर सकता "विश्वासो फलदायकः, ।" यह भगवान का वचन है। जितना विश्वास अधिक होगा उतना उसका फल भी अधिक होता है । महापुरुषों का विश्वास इतना प्रवल और अनन्य होता है कि वे पानी का घी और वालू की चीनी तक बना सकते हैं। ऐसा ही अनन्य विश्वास हमारा भी होना चाहिये। "संशयात्मा विनश्यति ' - संशयी पुरुष का नाश होता है। अतः निःसंदेह भाव से संकल्प करने पर हमारा अवश्य ही उद्धार होगा, इसमे कोई आश्चर्य नही है। सच पूछिये तो कुकल्पना ही शैतान है। अतः जिसको तरना हो उसे चाहिये कि हठ पूर्वक कुबुद्धि को, कुविचारो को त्याग कर सुबुद्धि को धारण करे और आज ही से, इसी समय से पवित्र विचारो को शुरू कर दे । निःसन्देह अपरिमित कल्याण होगा । अतः निद्रा के पूर्व रोज पाव घण्टा अवश्य पवित्र संकल्प किया करो। इससे सब कुस्वप्नों का नाश होकर, तुममे एक अद्भुत दैवी शक्ति प्रकट होगी और तुम्हारे सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध होगे । "पुरुषप्रयत्नशीलस्य प्रसाध्यं नास्ति'" - मनुष्य के उचित प्रयत्न करने पर प्रसाध्य कुछ भी नही है । आज सादी रहन सहन भीतर सो मैलो हियो, बाहर रूप अनेक । नारायण तासों भलो, कौवा तन मन एक । खुद "न-खरा" शब्द ही मनुष्य की खोटी चाल को साबित कर रहा है। विशेष सज धज करना, ऊँचे ऊँचे और रङ्गबिरगे भड़कीले व कामोत्तेजक कपड़े पहनना, अपने हाथ अपने गले मे मालाये पहनना, श्रङ्गमे और बालो मे सुगन्धित तैल, इत्र आदि लगाना, नेक्टाई, कालर, रिस्टवाच से अपने को संवारना, बार बार शीशे में सूरत देखना, पान से मुँह लाल करना, ये सब ब्रह्मचर्य के लिये काल समान हैं। परन्तु शोक की बात है कि कई सयाने माता पिता खुद अपने ही हाथ से, अपने बच्चो का इन विषय प्रवृत्तिकर बातो मे फंसा रहे और इस प्रकार अपने बच्चो को बिगाड़ रहे है । भत्ता ऐसे लोग विषय को कैसे जीत सकते हैं ? "वहत कबीर सुनो भाई साघो ये क्या लड़ेंगे रण में ?" यदि हमारे इर्द गिर्द शृङ्गारपूर्ण सामग्री न हो तो आत्मसंयम के कामो में बहुत ही सहायता मिल सकती है और हम बड़ी आसानी से प्रात्मसंयम कर सकते हैं। पास में खाने के लिये होने पर जैसे बराबर झूठी ही भूख लगती है, वैसे ही विलासी वस्तुओं और व्यक्तियों से घिरे रहने पर मन में काम भी बराबर जाग उठता है। ऐसा करना प्रसंशयतः अपने भले मन को और भी बिगाड़ना है, श्राग मे तेल डालना है, और वास्तव में यह भी एक प्रकारका छिपा कुरूंग है। अतः इन सब भोग विलास को बातों से सदैव दूर रहो। सादी रहन-सहन अथवा भोग-विलास से विरक्ति ही ब्रह्मचर्य रक्षा का सहज उपाय है। सादगी हो जीवन है और सजावट ही नाश है, यह तत्वपूर्ण रीति से ध्यान में रखो। सत्संगत्वे निःसंगत्वं निःसंगत्वे निर्माहत्वम् । निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तः ॥ - श्रीमच्छङ्कराये । "सत्संग से निःऩग की प्राप्ति होती. है, निःसङ्ग से निर्माहत्व अर्थात् विषय से अप्रीति बढ़ती है, निर्मोह से सत्य का पूरा ज्ञान व निश्चय होता है और सत्तत्व निश्चल ज्ञान से मनुष्य जीवन्मुक्त होता है अर्थात् इस संसार से तर जाता है।" नियम चौथावक्तव्य-संसार में 'आत्मोन्नति के लिये जितने साधन है इन सघ में सतसंग सच में श्रेष्ठ उपाय है। 'सत्सङ्ग यह शब्द अत्यन्त महत्व का है। सत्सङ्ग में संसार की तमाम उन्नतिकर बातो का समावेश होता है। जैसे पवित्र व ऊँचे विचार करना पवित्र स्वदेशी खद्दर पहनना आदि धनन्त वातो का समावेश होता है और 'कुसंग' में संसार की तमाम स्व-पर-नाशकारी बातों का समावेश होता है। सत्सङ्ग से मनुष्य देवता बनता है और कुसङ्ग से मनुष्य राक्षस बन जाता है। भक्त तुलसीदास जीपूछते " को न कुसङ्गति पाय नसाई ?" सच है, कुसङ्ग से आन तक बड़े बड़े शीलवान् गुणवान, और होनहार वालक-बालिकाएँ तथा स्त्री पुरुष धूल में मिल गये हैं । कुसंङ्ग का प्लेग महान् भयानक होता है। जगली जानवर का या काले साँप का भी साथ बहुत अच्छा है, उससे मनुष्य की केवल मृत्यु ही होगी। परन्तु दुर्जन का संग महान दुर्गतिकर है, वह मनुष्य को नीच योनियों मे व नरक मे ही डालने वाला है । पन्डित विष्णुशर्मा कहते हैं"वर प्राणत्यागो न पुनरधमाना सुपगमः ।" "प्राण त्याग देना अच्छा है परन्तु नीचों के पास जाना तक बुरा है।" "जैसा संग वैसा रंग" यही प्रकृति का कायदा है। ध्रुवां के संग से सफेद मकान भी काला पड़ जाता है। लता में का कीड़ा लता ही के तुल्य हरा बन जाता है। वैसे ही दुर्जन के साथ मनुष्य भी दुर्जन वन जाता है और सज्जन के साथ सज्जन "कामो के संग काम जागे" "कायर के सग शूर भागे पै भागेक "काजर की कोठरी मे कैसोहू समाने घुसो, एक रेखा काजर की लागे पै लागे ।" कवि का यह कथन अक्षरशः सत्य है। नीच पुरुष अपनेही तुल्य अपने मित्रों को भी नीच, पापी और दुरात्मा बना डालते हैं और सत्पुरुष अपने ही जैसे अपने मित्रों को भी पुन्यात्मा महात्मा बना देते हैं। सत्संग की महिमा अपरम्पार है । सत्संग से मनुष्य को मोत की प्राप्ति होती है और कुसंग से नरक की प्राप्ति होती है। सत्संग की महिमा और कुसंग की अघमता किसी से छिपी नहीं है। कुसंग से मनुष्य जीते जी ही नरक का सा अनुभव करने लग जाते हैं । इसी कारण से गोस्वामी जी कहते हैं- "बरु भव वास नरक कर ताता, दुष्ट संग जनि देहि विधाता ।" अतः कल्याण चाहने वालों को कुसंग को एकदम प्रतिज्ञापूर्वक त्याग देना चाहिए और सत्संग को प्रयत्नपूर्वक प्राप्त करना चाहिए । कुमित्रों से मित्ररहित रहना ही लाख गुना श्रेष्ठ है, क्योकि कुसंग से धर्म, अर्थ काम और मोक्ष चारों मटियामेट हो जाते हैं और अन्त में महान् अधोगति होती है। परन्तु सत्संग से चारो पुरपार्थ अनायास सघ जाते हैं। याद रखो, राजपाट, गज, चाजि, धन, स्त्री, पुत्रादि सव कुछ मिलेंगे, परन्तु सत्संग मिलना परम दुर्लभ है। "बिन सत्संग विवेकन होई, राम कृपा विन सुलभ न सोई । "' - यह गोस्वामी जी का वचन अक्षरशः सत्य है ! मोक्ष के सव साधन एक तरफ और सत्संग एक तरफ, दोनो में सत्संग का ही दर्जा वहुत ऊँचा है। "तात स्वर्ग अपवर्ग सुख, धरिय तुला इक अंग " तुलै न ताहि सकल मिलि, जो सुख लव सत्संग । सच है 'सठ सुधरहि सतसंगति पाई" कैसे ? तो कैसे "पारस परसि कुधातु सुदाई ।" यह नितान्त सत्य है कि 'सम्पूर्ण दुराचार और व्यभिचार की जड़ एकमात्र कुसंगति ही है। अतः ब्रह्मचारियों को तथा अभ्युदयेच्छुको को चाहिए कि कभी भी जीभ से बुरी बात न कहें, कान से बुरी बात न सुने श्रींख से बुरी चीज न देखें पैर से बुरी जगह न जायें, हाथ से बुरी चीज न छुवें और मन से विषय-चिन्तन हरगिज न करें। बल्कि कुभावों को
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज नई दिल्ली के प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित दौरा कार्यक्रम के तहत वे 20 अप्रैल को सुबह 9. 15 बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से विशेष विमान द्वारा प्रस्थान कर पूर्वान्ह 11 बजे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली पहुचेंगे। मुख्यमंत्री श्री बघेल वहां से प्रस्थान कर 11. 30 बजे छत्तीसगढ़ सदन पहुचेंगे.
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज नई दिल्ली के प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित दौरा कार्यक्रम के तहत वे बीस अप्रैल को सुबह नौ. पंद्रह बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से विशेष विमान द्वारा प्रस्थान कर पूर्वान्ह ग्यारह बजे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली पहुचेंगे। मुख्यमंत्री श्री बघेल वहां से प्रस्थान कर ग्यारह. तीस बजे छत्तीसगढ़ सदन पहुचेंगे.
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PATNA : पटना में पुलिस की तमाम चौकसी के बावजदू अपराधी बेख़ौफ़ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। गंभीर घटनाओं को अंजाम देकर अपराधी पुलिस को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।
इसी कड़ी में पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के रामकृष्णा पथ में सीआरपीएफ के जवान के घर अज्ञात चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। बताया जाता है कि सीआरपीएफ का जवान अपने पूरे परिवार के साथ 23 तारीख को अपने गांव आरा शादी में गया हुआ था।
इसी बीच अज्ञात चोरों ने ताला काटकर लाखों के गहने और गैस की चोरी कर ली। सीआरपीएफ के जवान राजीव रंजन के मुताबिक उन्होंने इस चोरी की घटना का शक अपने मकान मालिक के बेटे पर जाहिर की है।
राजीव रंजन ने बताया कि मकान मालिक का बेटा चरस और अफीम का सेवन करता हैं। कहीं ना कहीं इस चोरी की घटना में मकान मालिक का बेटा शामिल है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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PATNA : पटना में पुलिस की तमाम चौकसी के बावजदू अपराधी बेख़ौफ़ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। गंभीर घटनाओं को अंजाम देकर अपराधी पुलिस को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। इसी कड़ी में पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के रामकृष्णा पथ में सीआरपीएफ के जवान के घर अज्ञात चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। बताया जाता है कि सीआरपीएफ का जवान अपने पूरे परिवार के साथ तेईस तारीख को अपने गांव आरा शादी में गया हुआ था। इसी बीच अज्ञात चोरों ने ताला काटकर लाखों के गहने और गैस की चोरी कर ली। सीआरपीएफ के जवान राजीव रंजन के मुताबिक उन्होंने इस चोरी की घटना का शक अपने मकान मालिक के बेटे पर जाहिर की है। राजीव रंजन ने बताया कि मकान मालिक का बेटा चरस और अफीम का सेवन करता हैं। कहीं ना कहीं इस चोरी की घटना में मकान मालिक का बेटा शामिल है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर के सेवर थाना इलाके में एक ट्रक ने एक बाइक सवार व्यक्ति को कुचल दिया, ट्रक के पीछे का पहिया व्यक्ति के ऊपर चढ़ गया जिससे व्यक्ति के शव के टुकड़े सड़क पर बिखर गए। घटना के मौके पर ही लोगों ने ट्रक ड्राइवर को पकड़ लिया और ट्रक में बैठे दोनों लोगों की पिटाई कर दी, और नेशनल हाइवे लुधावई टोल के पास जाम लगा दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से समझाइश कर जाम को खुलवाया और शव को मोर्चरी में भिजवाया गया।
घटना लुधावई टोल प्लाजा के पास की है, गुड्डू उम्र 26 साल निवासी पार थाना सेवर, गुड्डू नाम का व्यक्ति अकेले बाइक से भरतपुर की तरफ आ रहा था। तभी सामने से आ रहे एक ट्रक ने गुड्डू की बाइक को टक्कर मार दी, टक्कर के बाद गुड्डू बाइक से उछलकर ट्रक के नीचे गिर गया और ट्रक के पीछे का पहिया गुड्डू के ऊपर चढ़ गया जिससे गुड्डू का शव के टुकड़े सड़क पर बिखर गए। मौके पर मौजूद लोगों ने ट्रक को वहीं पकड़ लिया और ट्रक से खलासी और ड्राइवर को उतारकर उसकी पिटाई करना शुरू कर दी, इस दौरान दोनों से मारपीट का वीडियो वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपने कैमरे में कैद कर लिया।
घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर जाम लगा दिया जिसके बाद सेवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से समझाइश कर जाम को खुलवाया गया। पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया है साथ ही ट्रक के ड्राइवर और खलासी को लोगों से छुड़ाया गया।
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भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर के सेवर थाना इलाके में एक ट्रक ने एक बाइक सवार व्यक्ति को कुचल दिया, ट्रक के पीछे का पहिया व्यक्ति के ऊपर चढ़ गया जिससे व्यक्ति के शव के टुकड़े सड़क पर बिखर गए। घटना के मौके पर ही लोगों ने ट्रक ड्राइवर को पकड़ लिया और ट्रक में बैठे दोनों लोगों की पिटाई कर दी, और नेशनल हाइवे लुधावई टोल के पास जाम लगा दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से समझाइश कर जाम को खुलवाया और शव को मोर्चरी में भिजवाया गया। घटना लुधावई टोल प्लाजा के पास की है, गुड्डू उम्र छब्बीस साल निवासी पार थाना सेवर, गुड्डू नाम का व्यक्ति अकेले बाइक से भरतपुर की तरफ आ रहा था। तभी सामने से आ रहे एक ट्रक ने गुड्डू की बाइक को टक्कर मार दी, टक्कर के बाद गुड्डू बाइक से उछलकर ट्रक के नीचे गिर गया और ट्रक के पीछे का पहिया गुड्डू के ऊपर चढ़ गया जिससे गुड्डू का शव के टुकड़े सड़क पर बिखर गए। मौके पर मौजूद लोगों ने ट्रक को वहीं पकड़ लिया और ट्रक से खलासी और ड्राइवर को उतारकर उसकी पिटाई करना शुरू कर दी, इस दौरान दोनों से मारपीट का वीडियो वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर जाम लगा दिया जिसके बाद सेवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से समझाइश कर जाम को खुलवाया गया। पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया है साथ ही ट्रक के ड्राइवर और खलासी को लोगों से छुड़ाया गया।
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Tinder Dating App: डेटिंग के लिए मशहूर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिंडर ने हाल ही में एक सर्वे किया है. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि रिलेशनशिप को लेकर नई जेनरेशन में बड़ा बदलाव आया है. आइए देखते हैं की नई पीढ़ी रिलेशनशिप को लेकर क्या राय रखती है.
नए लोगों से मिलने के लिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय डेटिंग ऐप Tinder ने हाल ही एक सर्वे किया. सर्वे में पता चला कि लोग रिलेशनशिप की जगह सिचुएशनशिपको ज्यादा चुन रहे हैं. इसके अलावा शारीरिक बनावट से ज्यादा लोगों के लिए अपने पार्टनर की नियत अहमियत रखती है. बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों में टिंडर ने यह सर्वे किया है. इसमें 18 से 30 साल की उम्र के 1,018 इंडियन युवाओं से सवाल पूछे गए.
'फ्यूचर ऑफ डेटिंग' स्टडी के अनुसार, बेंगलुरु टिंडर के 43% यूजर्स मौजूदा डेटिंग प्राथमिकता के तौर पर सिचुएशनशिप को चुनते हैं. सिचुएशनशिप शब्द का इस्तेमाल पहले से बिना किसी खास प्लान या एजेंडे से बने रिश्ते के लिए Gen Z द्वारा किया जाता है. इसमें पारदर्शिता यानी खुलेपन और आजादी पर जोर दिया जाता है.
बेंगलुरु के सर्वे में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हब के यूथ के बीच पनपे छह ट्रेंड की पहचान की गई है. टिंडर के मुताबिक, जेन जी को सबसे लचीली जेनरेशन माना जाता है. इसने पिछले सभी डेटिंग नियमों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. ये जेनरेशन ऐसा साथी नहीं चाहती जो मानसिक तौर पर ख्याल ना रख पाएं.
इन दिनों युवा अक्सर खुद को सबसे पहले रखते हैं और वे डेटिंग को खुद की खोज के एक तरीके के रूप में भी देखते हैं. टिंडर के सर्वे में नई जेनरेशन की सोच उन्हें पिछली जेनरेशन से बिलकुल अलग खड़ा करती है. यह पीढ़ी जो चाहती है उसे पाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में ज्यादा कंफर्टेबल है. सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा (52%) सिंगल युवा डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं.
किसी के साथ डेट पर जाने का फैसला लेते समय म्यूजिक में इंटरेस्ट शेयर करना टॉप फैक्टर्स में से एक है. 32% से ज्यादा लोग इस बात से सहमत हैं कि म्यूजिक का टेस्ट उन्हें पार्टनर की पर्सनैलिटी को पहचानने में मदद करता है. वहीं लगभग 54% युवा किसी भी सेक्सुअलिटी और आइडेंटिटी वाले व्यक्ति के साथ डेटिंग करने के लिए तैयार हैं. 39% लोग दूसरी नस्ल और कल्चर के लोगों के साथ डेट करने के लिए तैयार हैं.
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Tinder Dating App: डेटिंग के लिए मशहूर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिंडर ने हाल ही में एक सर्वे किया है. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि रिलेशनशिप को लेकर नई जेनरेशन में बड़ा बदलाव आया है. आइए देखते हैं की नई पीढ़ी रिलेशनशिप को लेकर क्या राय रखती है. नए लोगों से मिलने के लिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय डेटिंग ऐप Tinder ने हाल ही एक सर्वे किया. सर्वे में पता चला कि लोग रिलेशनशिप की जगह सिचुएशनशिपको ज्यादा चुन रहे हैं. इसके अलावा शारीरिक बनावट से ज्यादा लोगों के लिए अपने पार्टनर की नियत अहमियत रखती है. बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों में टिंडर ने यह सर्वे किया है. इसमें अट्ठारह से तीस साल की उम्र के एक,अट्ठारह इंडियन युवाओं से सवाल पूछे गए. 'फ्यूचर ऑफ डेटिंग' स्टडी के अनुसार, बेंगलुरु टिंडर के तैंतालीस% यूजर्स मौजूदा डेटिंग प्राथमिकता के तौर पर सिचुएशनशिप को चुनते हैं. सिचुएशनशिप शब्द का इस्तेमाल पहले से बिना किसी खास प्लान या एजेंडे से बने रिश्ते के लिए Gen Z द्वारा किया जाता है. इसमें पारदर्शिता यानी खुलेपन और आजादी पर जोर दिया जाता है. बेंगलुरु के सर्वे में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हब के यूथ के बीच पनपे छह ट्रेंड की पहचान की गई है. टिंडर के मुताबिक, जेन जी को सबसे लचीली जेनरेशन माना जाता है. इसने पिछले सभी डेटिंग नियमों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. ये जेनरेशन ऐसा साथी नहीं चाहती जो मानसिक तौर पर ख्याल ना रख पाएं. इन दिनों युवा अक्सर खुद को सबसे पहले रखते हैं और वे डेटिंग को खुद की खोज के एक तरीके के रूप में भी देखते हैं. टिंडर के सर्वे में नई जेनरेशन की सोच उन्हें पिछली जेनरेशन से बिलकुल अलग खड़ा करती है. यह पीढ़ी जो चाहती है उसे पाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में ज्यादा कंफर्टेबल है. सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा सिंगल युवा डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. किसी के साथ डेट पर जाने का फैसला लेते समय म्यूजिक में इंटरेस्ट शेयर करना टॉप फैक्टर्स में से एक है. बत्तीस% से ज्यादा लोग इस बात से सहमत हैं कि म्यूजिक का टेस्ट उन्हें पार्टनर की पर्सनैलिटी को पहचानने में मदद करता है. वहीं लगभग चौवन% युवा किसी भी सेक्सुअलिटी और आइडेंटिटी वाले व्यक्ति के साथ डेटिंग करने के लिए तैयार हैं. उनतालीस% लोग दूसरी नस्ल और कल्चर के लोगों के साथ डेट करने के लिए तैयार हैं.
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नाशिक : शहर के आडगांव (Adgaon) शिवार के 335 एकड़ जमीन (335 Acres of Land) पर आयटी पार्क (IT Park) बनाने के लिए तैयार किए गए प्रकल्प रिपोर्ट को लेकर कानूनी अभिप्राय लेने की फाइल पिछले एक महीने से वकील पैनल (Lawyers Panel) के पास धूल फांक रही है। साथ ही महानगरपालिका (Municipal Corporation) की आर्थिक स्थिति को देखे तो व्यवहार्यता और निधि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए काम-काज करने की सूचना पालकमंत्री छगन भुजबल (Guardian Minister Chhagan Bhujbal) ने दी। इसके चलते आयटी पार्क का भविष्य खतरे में पहुंच गया है। आगामी महानगरपालिका चुनाव की पार्श्वभूमी पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (Nationalist Congress) ने बीजेपी ( BJP) को झोर का झटका देने की चर्चा अब शुरू हो गई है।
गौरतलब है कि पूर्व महापौर सतीश कुलकर्णी (Former Mayor Satish Kulkarni) ने महापौर पद का कार्यकाल खत्म होने से पहले नाशिक महानगरपालिका की ओर से आडगांव शिवार (Adgaon Shivar) में आयटी पार्क बनाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना रखी। साथ ही नाशिक शहर, मुंबई, पुणे सहित अन्य महानगरों के आयटी कंपनियों को एक ही जगह पर लाने का प्रयास किया। पूर्व महापौर कुलकर्णी ने आयटी पार्क के लिए मूलभूत सुविधा देने के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया। साथ ही विभिन्न कंपनियों को नाशिक में आमंत्रित कर मंत्री नारायण राणे (Minister Narayan Rane) की प्रमुख उपस्थिती में आयटी परिषद आयोजित की, जिसमें 100 से अधिक बड़े कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रकल्प के लिए जगह मिलने के लिए प्रस्ताव मंगाए गए। इसके लिए शहर के कुछ विकासकों ने अनुमति देने से आयटी पार्क के लिए 335 एकड़ जगह कंपनी के लिए उपलब्ध होने की बात की। आयटी प्रकल्प का मॉडल तैयार करने के लिए विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया कार्यान्वित की गई। ठाणे के शहा नामक व्यक्ति ने एक रुपया लेकर विस्तृत प्रकल्प रिपोर्ट तैयार करने की बात की। परंतु कितने सस्ते में ठेकेदार प्रकल्प तैयार करने से इस बारे में कानूनी अभिप्राय मंगवाने का निर्णय महानगरपालिका प्रशासन ने लिया। साथ ही प्रकल्प के लिए आवश्यक जगह, जगह का उपयोग, शामिल होने वाली कंपनी और जगह मालिकों का किराया, अनुबंध, शर्तों का उल्लंघन होने पर क्या कार्रवाई होगी। ऐसे कई मुद्दों की जांच करने के लिए कानूनी अभिप्राय मंगवाने के लिए महानगरपालिका ने अपने वकील पैनल को फाइल भेजी है, लेकिन अभी तक अभिप्राया न मिलने से यह फाइल धूल फांक रही है। ऐसे में जिले के पालकमंत्री छगन भुजबल ने विकास कार्य और प्रकल्प की व्यवहार्यता जांच कर काम-काज करने की सूचना देने से आयटी पार्क प्रकल्प का भविष्य खतरे में आ गया है।
आयटी पार्क होने की चर्चा शुरू होते ही आडगांव सहित परिसर के जमीन के दाम आसमान छूने लगे। 25 से 30 लाख रुपए एकड़ दाम होने वाले बंजर जमीन (Barren Land) के दाम कुछ ही दिनों में 50 से 60 लाख रुपए एकड़ हो गए। परंतु अब आयटी पार्क पर सवालिया निशान लगने से जमीन के दाम कम होने वाले है।
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नाशिक : शहर के आडगांव शिवार के तीन सौ पैंतीस एकड़ जमीन पर आयटी पार्क बनाने के लिए तैयार किए गए प्रकल्प रिपोर्ट को लेकर कानूनी अभिप्राय लेने की फाइल पिछले एक महीने से वकील पैनल के पास धूल फांक रही है। साथ ही महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति को देखे तो व्यवहार्यता और निधि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए काम-काज करने की सूचना पालकमंत्री छगन भुजबल ने दी। इसके चलते आयटी पार्क का भविष्य खतरे में पहुंच गया है। आगामी महानगरपालिका चुनाव की पार्श्वभूमी पर राष्ट्रवादी कांग्रेस ने बीजेपी को झोर का झटका देने की चर्चा अब शुरू हो गई है। गौरतलब है कि पूर्व महापौर सतीश कुलकर्णी ने महापौर पद का कार्यकाल खत्म होने से पहले नाशिक महानगरपालिका की ओर से आडगांव शिवार में आयटी पार्क बनाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना रखी। साथ ही नाशिक शहर, मुंबई, पुणे सहित अन्य महानगरों के आयटी कंपनियों को एक ही जगह पर लाने का प्रयास किया। पूर्व महापौर कुलकर्णी ने आयटी पार्क के लिए मूलभूत सुविधा देने के लिए बीस करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया। साथ ही विभिन्न कंपनियों को नाशिक में आमंत्रित कर मंत्री नारायण राणे की प्रमुख उपस्थिती में आयटी परिषद आयोजित की, जिसमें एक सौ से अधिक बड़े कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रकल्प के लिए जगह मिलने के लिए प्रस्ताव मंगाए गए। इसके लिए शहर के कुछ विकासकों ने अनुमति देने से आयटी पार्क के लिए तीन सौ पैंतीस एकड़ जगह कंपनी के लिए उपलब्ध होने की बात की। आयटी प्रकल्प का मॉडल तैयार करने के लिए विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया कार्यान्वित की गई। ठाणे के शहा नामक व्यक्ति ने एक रुपया लेकर विस्तृत प्रकल्प रिपोर्ट तैयार करने की बात की। परंतु कितने सस्ते में ठेकेदार प्रकल्प तैयार करने से इस बारे में कानूनी अभिप्राय मंगवाने का निर्णय महानगरपालिका प्रशासन ने लिया। साथ ही प्रकल्प के लिए आवश्यक जगह, जगह का उपयोग, शामिल होने वाली कंपनी और जगह मालिकों का किराया, अनुबंध, शर्तों का उल्लंघन होने पर क्या कार्रवाई होगी। ऐसे कई मुद्दों की जांच करने के लिए कानूनी अभिप्राय मंगवाने के लिए महानगरपालिका ने अपने वकील पैनल को फाइल भेजी है, लेकिन अभी तक अभिप्राया न मिलने से यह फाइल धूल फांक रही है। ऐसे में जिले के पालकमंत्री छगन भुजबल ने विकास कार्य और प्रकल्प की व्यवहार्यता जांच कर काम-काज करने की सूचना देने से आयटी पार्क प्रकल्प का भविष्य खतरे में आ गया है। आयटी पार्क होने की चर्चा शुरू होते ही आडगांव सहित परिसर के जमीन के दाम आसमान छूने लगे। पच्चीस से तीस लाख रुपए एकड़ दाम होने वाले बंजर जमीन के दाम कुछ ही दिनों में पचास से साठ लाख रुपए एकड़ हो गए। परंतु अब आयटी पार्क पर सवालिया निशान लगने से जमीन के दाम कम होने वाले है।
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वर्ष २. किरण ८]
स्वरूप भी देखने में आते हैं। उदाहरण के लिये महान् ग्रंथकार हाकलंकदेवक'लधीयस्त्रय' और 'न्यायविनिश्वय'. जैसे कुछ ग्रंथोंको प्रमागामें पेश किया जा सकता है, जिनका पहला पय अनुप छन्दमें है जो प्रायः अनुष्टुप् छन्दमें ही लिंग्वे गये हैं; परन्तु उनमेमे प्रत्येक का दूसरा पद्य 'शार्दूलविक्रीडित छन्दमें है और वह कण्टकशुद्धिको लिये हुए ग्रंथका खास अंगस्वरूप है । सिद्धिविनिश्चय ग्रंथ में भी इसी पद्धतिका अनुसरण पाया जाता है। ऐसी हालतमं छन्दभेदके कारण उक्त दोनों पद्योंको प्रक्षिप्त नहीं कहा जामकता ।
ग्रंथ के प्रथम पद्यमं निष्कलात्मरूप सिद्ध परमात्माको और दूसरे पद्य मकलात्मरूप परमात्माको नमस्काररूप मंगलाचरण किया गया है --परमात्मा के ये ही दो मुख्य अवस्थाभेद हैं, जिन्हें इप्र समझकर स्मरण करते हुए यहाँ थोड़ा-सा व्यक्त भी किया गया है। इन दोनों पद्यों में ग्रंथ रचना सम्बन्धी कोई प्रतिज्ञा वाक्य नहीं है - ग्रंथ के अभिधेय-सम्बन्ध प्रयोजनादिको व्यक्त करता हुआ वह प्रतिज्ञा - वाक्य पद्य नं० ३ में दिया है; जैसा कि ऊपर उसके उल्लेग्बसे स्पष्ट है और इसलिये शुरू के ये तीनों पद्य परस्पर में बहुत ही सुसम्बद्ध है - उनमें से दो के प्रक्षित होनेकी कल्पना करना, उन्हें टीकाकार प्रभाचन्द्र के पद्य बतलाना और उनकी व्यवस्थित टीकाको किसीका टिप्पण कहकर यों ही ग्रंथमं घुमड जानकी बात करना बिल्कुल ही निराधार जान पड़ता है। डा० साहब प्रथम पद्यमे प्रयुक्त हुए "अयानन्तबोधाय तस्मै सिद्धात्मने नमः" - उस अक्षय अनन्त बोधस्वरूप परमात्माको नमस्कार - इस वाक्यकी मौजूदगीमें, तीसरे पद्यमे निर्दिष्ट हुए ग्रंथ के प्रयोजनको अप्रस्तुत स्थलका ( बेमौका ) बतलाते हुए उसे अनावश्यक तथा पुनरुक्त तक प्रकट करते हैं, जब कि प्रस्तुत स्थलता और
पुनरुक्तताकी वहां कोई गन्ध भी मालूम नहीं होती; परन्तु टीका के मगलाचरण पद्य में प्रयुक्त हुए "वचमे समाधिशतकं" में समाधिशतक की व्याख्या करता हूँ - इस प्रतिज्ञा वाक्यकी मौजूदगीमें तीसरे पद्यको टीकाकारका बतलाकर उसमें प्रयुक्त हुए प्रतिज्ञा वाक्यको प्रस्तुत स्थलका आवश्यक और पुनरुक्त समझते हैं, तथा दूसरे पद्यको भी टीकाकारका बतलाकर प्रतिज्ञा के अनन्तर पुनः मंगलाचरणको उपयुक्त समझते हैं यह सब अजीब सी ही बात जान पड़ती है !! मालूम होता है आपने इन प्रभाचन्द्र के किसी दूसरे टीका ग्रंथके साथ इस टीकाकी तुलना भी नहीं की है। यदि रत्नकरण्ड श्रीवकाचार की टीका के साथ ही इस टीकाकी तुलना की होती तो आपको टीकाकार के मंगलाचरणादि विषयक टाइपका-लेखनशैली का -- कितना ही पता चल गया होता और यह मालूम होगया होता कि यह टीकाकार अपनी ऐसी टीका के प्रारम्भ में मंगलाचरण तथा प्रतिज्ञाका एक ही पद्य देते हैं और इसी तरह टीका के अन्त में उपसंहारादि का भी प्रायः एकही पद्य रखते हैं; और तब आपको मूलग्रंथ के उक्त दोनों पद्य (नं० २, ३ ) को बलात् टीकाकारका बतलानेकी नौबत ही नती।
हां, एक बात यहाँ और भी प्रकट कर देनेकी है और वह यह कि, डा० साहब जब यह लिखते हैं कि "पूज्यपादांनी हा विषय श्रागम, युक्ति आणि अंतःकर गाची एकाग्रता करून त्यायोगे स्वानुभव संपन्न होऊन त्याच्या आधारे स्पष्ट आणि सुलभ रीतीने प्रतिपादला आहे", तब इस बातको भुला देते हैं कि यह श्रागम, युक्ति और अन्तः तःकरण की एकाग्रता द्वारा सम्पन्न स्वानुभव के आधार पर अंथरचनेकी बात पूज्यपादने ग्रंथके तीसरेंपद्यमे ही तो प्रकट की है वहीं से तो वह उपलब्ध होनी होती है; फिर उस पद्यको मूलग्रंथका माननेंस क्यों
इनकार किया जाता है और यदि यह बात उनकी खुदकी जाँच पड़ताल तथा अनुसंधान से सम्बन्ध रखती हुई होती तो वे आगे चलकर, कुछ तत्सम-ग्रन्थोंकी सामान्य तुलना का उल्लेख करते हुए, यह न लिखते कि 'उपनिषद् ग्रंथके कथनको यदि छोड़ दिया जाय तो परमात्मस्वरूपका तीन पदरूप वर्णन पूज्यपादने ही प्रथम किया है ऐसा कहने में कोई हरकत नहीं; क्योंकि पूज्यपादसे पहले कुन्दकुन्दके मोक्षप्राभूत (मोक्खपाहुड) ग्रन्थमं त्रिधात्माका बहुत स्पष्ट रूप से वर्णन पाया जाता है और पूज्यपादने उसे प्रायः उसी ग्रंथपरसे लिया है; जैसा कि नमूने के तौर पर दोनों ग्रंथों के निम्न दो पद्योंकी तुलनासे प्रकट है और जिससे यह स्पष्ट जाना जाता है कि समाधितंत्रका पद्य मोक्षप्राभूतकी गाथाका प्रायः अनुवाद
[ ज्येष्ठ वीर निर्वाण सं० २४६५ विषय और पूर्वपद्यों के साथ इनके प्रतिपाद्य विषयक श्रमम्बद्धता बतलाते हैं ----लिखते हैं "या दोन श्रीकांच्या प्रतिपाद्य विषयांशीं व पूर्व श्लोकांशी काहींच संवन्ध दिसत नाहीं ।" साथ ही, यह भी प्रकट करते हैं कि ये दोनों श्लोक कब, क्यों और कैसे इस ग्रंथमं प्रविष्ट ( प्रक्षिप्त ) हुए हैं उसे बतलानेके लिये वे
है। पिछली बात के अभाव में इन पद्योंकी प्रक्षि ताका दावा बहुत कमज़ोर होजाता है; क्योंकि सम्बद्ध ताकी ऐसी कोई भी बात इनमें देखनेको नहीं मिलती। टीकाकार प्रभाचन्द्रने अपने प्रस्तावना -वाक्योंके द्वारा पूर्व पद्यांके साथ इनके सम्बन्धको भने प्रकार घोषित किया है। वे प्रस्तावना वाक्य अपने अपने पद्यके साथ इस प्रकार हैंःतिपयारो सो अप्पा परमंतरबाहिरो हु दे हीणं । तत्थ परो भाइज्जइ अन्तोवाण चयहि बहिरप्पा ॥ - मोक्षप्राभृतः बहिरन्तः परश्चेति त्रिधात्मा सर्वदेहिषु । उपेयास्त्र परमं मध्योपायावहिस्त्यजेत् ॥ -समाधितंत्रम्
मालूम होता है मैंने अपने उक्त लेख में ग्रंथाधारकी जिस बातका उल्लेख करके प्रमाण ग्रन्थके पद्य नं० ३को उद्धृत किया था और जो ऊपर इस प्रस्तावना लेखमें भी पद्य नं० ३ के साथ ज्याँकी त्यों दी हुई है उसे डा० माहवने अनुवादरूप में अपना तो लिया परन्तु उन्हें यह खयाल नहीं आया कि ऐसा करनेसे उनके उस मन्तव्यका स्वयं विरोध होजाता है जिसके अनुसार पद्य नं. ३ को निश्चितरूपसे प्रक्षित कहा गया है। अस्तु ।
रही पद्यनं० १०३, १०४ की बात, इनकी प्रक्षितताका कारण डा० साहब ग्रन्थके प्रतिपाद्य
"ननु यद्यात्मा शरीरात्सर्वथा भिन्नस्तदा कथमात्मनि चलति नियमेन तञ्चलेन् तिष्टति तिष्टेदिति वदन्तं प्रत्याहप्रयतादात्मनो वायुरिच्छा द्वेषप्रवर्तितात् ।
वायोः शरीरयंत्राणि वर्तन्ते स्वेषु कर्मसु ॥ १०३ ॥ " "तेषां शरीरयन्त्राणामात्मन्यारोपाऽनारोपी कृत्वा जडविवेकिनौ किं कुर्वत इत्याहतान्यात्मनि समारोप्य साक्षाण्यास्ते सुखं जडः । व्यक्त्वाssरोपं पुनर्विद्वान् प्राप्नोति परमं पदम् ॥१०४॥"
इन प्रस्तावना-वाक्योंके साथ प्रस्तावित पद्योंके अर्थको देखकर कोई भी सावधान व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि इनका ग्रंथके विषय तथा पूर्व पद्योंके साथ कोई सम्बन्ध नहीं है - जिस मूलविषयको ग्रन्थमं अनेक प्रकार से पुनः पुनः स्पष्ट किया गया है उसीको इन पद्योंमें भी प्रकारान्तरसे और भी अधिक स्पष्ट किया गया है और उसमें पुनरुक्तता जैसी भी कोई बात नहीं है। इसके सिवाय, उपसंहारके पूर्व, ग्रंथकं विषयकी समाप्ति भी 'अदुःखभावितं' नाम के भावनात्मक पद्य नं० १०२ की अपेक्षा पद्य नं०
वर्ष २, किरण ८].'
१०४ के माथ ठीक जान पड़ती है; जिसके अन्त में साध्यकी मिद्धि के उल्लेखरूप प्राप्नोति परमं पदम्' वाक्य पड़ा हुआ है और जो इस ग्रन्थकं मुख्य प्रयोजन अथवा ग्रात्मा के अन्तिम ध्येयको स्पष्ट करता हुआ विषयको समाप्त करता है ।
अब में पद्य १०५ को भी लेता हूं, जिसे डाकटर साहवने सन्देह कोटि में रखा है। यह मंदिग्भ नहीं है बल्कि मूलग्रंथका अन्तिम उपसंहार पय है; जैसा कि मैंने इस प्रकरण के शुरूमं प्रकट किया है । पूज्यपादके दूसरे ग्रंथीमं भी, जिनका प्रारम्भ अनुप छन्दके पद्यों द्वारा होता है, ऐसे ही उपसंहारपद्य पाये जानें हैं जिनमें ग्रंथकथित विषयका संज्ञेपमं उल्लेख करते हुए ग्रंथका नामादिक भी दिया हुआ है । नमुनेके तौर पर 'टोपदेश' और 'सर्वार्थसिद्धि' ग्रंथोंके दो उपसंहारपद्यांको नीचे उद्धृत किया जाता है :।
इष्टोपदेशमिति सभ्यगधीत्य धीमान मानाऽपमानसमतां स्वमताद्वितन्य । मुक्ता ग्रहो विनिवसनसजने वने वा मुक्तिश्रियं निकमामुपयः ति भव्यः ॥ "
-इष्टोपदेशः ।
स्वर्गःपवर्गसुखमाप्त मनोभिरायें9
जैनेन्द्रशासनवरा मृतसारभृता । सर्वार्थसिद्धिरिति सद्भिरुपालनामा तस्वार्थवृत्तिरनिशं मनमा प्रधार्या ॥
· सर्वार्थसिद्धिः
इन पद्यपरमे पाठकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि ये दोनों पद्य भी रमी वसन्ततिलका छन्दमें लिखे गये हैं जिसमें कि समाधितंत्रका उक्त उपसंहार-पद्य पाया जाता है। तीनों ग्रंथोंके ये तीनों पद्य एक ही टाइपके है और वे अपने एक ही प्राचार्यद्वारा ग्चे जानेकी स्पष्ट
घोषणा करते हैं । इसलिये समाधिततंत्रका पद्म नं० १०५ पूज्यपादकृत ही है, इसमें सन्देह को ज़रा भी स्थान नहीं है ।
जब पद्य नं० १०५ श्रसन्दिग्धरूपसे पूज्यपादकृत है तब ग्रन्थका असली मूलनाम भी 'समाधितन्त्र' ही है; क्योंकि इसी नामका उक्त पद्य में निर्देश है, जिसे डा० सावने भी स्वयं स्वीकार किया है। और इसलिये 'समाधिशतक' नामकी कल्पना बादकी है-- उसका अधिक प्रचार टीकाकार प्रभाचन्द्र के बाद ही हुआ है। श्रवणबेल्गोल के जिस शिलालेख नं० ४० में इस नामका उल्लेख है वह विक्रमकी १३वीं शताब्दीका है और टीकाकार प्रभाचन्द्रका समय भी विक्रमी १३वीं शताब्दी है ।
इस तरह इस ग्रंथका मूलनाम 'समाधितंत्र' उत्तरनाम या उपनाम 'समाधिशतक' है और इसकी पद्यसंख्या १०५ है - उसमें पाँच पद्यांके प्रक्षित होनेकी जो कल्पना की जाती है वह निरी निर्मूल और निराधार है । ग्रंथकी हस्तलिखित मूल प्रतियों में भी यही १०५ पद्यसंख्या पाई जाती हैं । देहली आदि अनेक भण्डा रोमं मुझे इस मूलग्रंथकी हस्तलिखित प्रतियोंके देखने कार मिला है - देहली सेठके कुँचेके मन्दिर में तो एक जीर्ण-शीर्ण प्रति कईसौ वर्षकी पुरानी लिखी हुई जान पड़ती है। श्रारा जैन सिद्धान्त भवन के अध्यक्ष पं० के० भुजबलीजी शास्त्री से भी दर्याप्त करनेपर यही मालूम हुआ है कि वहाँ ताडपत्रादि पर जितनी भी मूलप्रतियाँ हैं उन सबमें इस ग्रन्थकी पद्मसंख्या १०५ ही दी है। और इसलिये डा० साहबका यह लिखना उचित प्रतीत नहीं होता कि 'इस टीकासे रहित मूलग्रंथकी हस्तलिखित प्रतियां उपलब्ध नहीं है । '
ऐसा मालूम होता है कि 'शतक' नामपरसे डा०
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वर्ष दो. किरण आठ] स्वरूप भी देखने में आते हैं। उदाहरण के लिये महान् ग्रंथकार हाकलंकदेवक'लधीयस्त्रय' और 'न्यायविनिश्वय'. जैसे कुछ ग्रंथोंको प्रमागामें पेश किया जा सकता है, जिनका पहला पय अनुप छन्दमें है जो प्रायः अनुष्टुप् छन्दमें ही लिंग्वे गये हैं; परन्तु उनमेमे प्रत्येक का दूसरा पद्य 'शार्दूलविक्रीडित छन्दमें है और वह कण्टकशुद्धिको लिये हुए ग्रंथका खास अंगस्वरूप है । सिद्धिविनिश्चय ग्रंथ में भी इसी पद्धतिका अनुसरण पाया जाता है। ऐसी हालतमं छन्दभेदके कारण उक्त दोनों पद्योंको प्रक्षिप्त नहीं कहा जामकता । ग्रंथ के प्रथम पद्यमं निष्कलात्मरूप सिद्ध परमात्माको और दूसरे पद्य मकलात्मरूप परमात्माको नमस्काररूप मंगलाचरण किया गया है --परमात्मा के ये ही दो मुख्य अवस्थाभेद हैं, जिन्हें इप्र समझकर स्मरण करते हुए यहाँ थोड़ा-सा व्यक्त भी किया गया है। इन दोनों पद्यों में ग्रंथ रचना सम्बन्धी कोई प्रतिज्ञा वाक्य नहीं है - ग्रंथ के अभिधेय-सम्बन्ध प्रयोजनादिको व्यक्त करता हुआ वह प्रतिज्ञा - वाक्य पद्य नंशून्य तीन में दिया है; जैसा कि ऊपर उसके उल्लेग्बसे स्पष्ट है और इसलिये शुरू के ये तीनों पद्य परस्पर में बहुत ही सुसम्बद्ध है - उनमें से दो के प्रक्षित होनेकी कल्पना करना, उन्हें टीकाकार प्रभाचन्द्र के पद्य बतलाना और उनकी व्यवस्थित टीकाको किसीका टिप्पण कहकर यों ही ग्रंथमं घुमड जानकी बात करना बिल्कुल ही निराधार जान पड़ता है। डाशून्य साहब प्रथम पद्यमे प्रयुक्त हुए "अयानन्तबोधाय तस्मै सिद्धात्मने नमः" - उस अक्षय अनन्त बोधस्वरूप परमात्माको नमस्कार - इस वाक्यकी मौजूदगीमें, तीसरे पद्यमे निर्दिष्ट हुए ग्रंथ के प्रयोजनको अप्रस्तुत स्थलका बतलाते हुए उसे अनावश्यक तथा पुनरुक्त तक प्रकट करते हैं, जब कि प्रस्तुत स्थलता और पुनरुक्तताकी वहां कोई गन्ध भी मालूम नहीं होती; परन्तु टीका के मगलाचरण पद्य में प्रयुक्त हुए "वचमे समाधिशतकं" में समाधिशतक की व्याख्या करता हूँ - इस प्रतिज्ञा वाक्यकी मौजूदगीमें तीसरे पद्यको टीकाकारका बतलाकर उसमें प्रयुक्त हुए प्रतिज्ञा वाक्यको प्रस्तुत स्थलका आवश्यक और पुनरुक्त समझते हैं, तथा दूसरे पद्यको भी टीकाकारका बतलाकर प्रतिज्ञा के अनन्तर पुनः मंगलाचरणको उपयुक्त समझते हैं यह सब अजीब सी ही बात जान पड़ती है !! मालूम होता है आपने इन प्रभाचन्द्र के किसी दूसरे टीका ग्रंथके साथ इस टीकाकी तुलना भी नहीं की है। यदि रत्नकरण्ड श्रीवकाचार की टीका के साथ ही इस टीकाकी तुलना की होती तो आपको टीकाकार के मंगलाचरणादि विषयक टाइपका-लेखनशैली का -- कितना ही पता चल गया होता और यह मालूम होगया होता कि यह टीकाकार अपनी ऐसी टीका के प्रारम्भ में मंगलाचरण तथा प्रतिज्ञाका एक ही पद्य देते हैं और इसी तरह टीका के अन्त में उपसंहारादि का भी प्रायः एकही पद्य रखते हैं; और तब आपको मूलग्रंथ के उक्त दोनों पद्य को बलात् टीकाकारका बतलानेकी नौबत ही नती। हां, एक बात यहाँ और भी प्रकट कर देनेकी है और वह यह कि, डाशून्य साहब जब यह लिखते हैं कि "पूज्यपादांनी हा विषय श्रागम, युक्ति आणि अंतःकर गाची एकाग्रता करून त्यायोगे स्वानुभव संपन्न होऊन त्याच्या आधारे स्पष्ट आणि सुलभ रीतीने प्रतिपादला आहे", तब इस बातको भुला देते हैं कि यह श्रागम, युक्ति और अन्तः तःकरण की एकाग्रता द्वारा सम्पन्न स्वानुभव के आधार पर अंथरचनेकी बात पूज्यपादने ग्रंथके तीसरेंपद्यमे ही तो प्रकट की है वहीं से तो वह उपलब्ध होनी होती है; फिर उस पद्यको मूलग्रंथका माननेंस क्यों इनकार किया जाता है और यदि यह बात उनकी खुदकी जाँच पड़ताल तथा अनुसंधान से सम्बन्ध रखती हुई होती तो वे आगे चलकर, कुछ तत्सम-ग्रन्थोंकी सामान्य तुलना का उल्लेख करते हुए, यह न लिखते कि 'उपनिषद् ग्रंथके कथनको यदि छोड़ दिया जाय तो परमात्मस्वरूपका तीन पदरूप वर्णन पूज्यपादने ही प्रथम किया है ऐसा कहने में कोई हरकत नहीं; क्योंकि पूज्यपादसे पहले कुन्दकुन्दके मोक्षप्राभूत ग्रन्थमं त्रिधात्माका बहुत स्पष्ट रूप से वर्णन पाया जाता है और पूज्यपादने उसे प्रायः उसी ग्रंथपरसे लिया है; जैसा कि नमूने के तौर पर दोनों ग्रंथों के निम्न दो पद्योंकी तुलनासे प्रकट है और जिससे यह स्पष्ट जाना जाता है कि समाधितंत्रका पद्य मोक्षप्राभूतकी गाथाका प्रायः अनुवाद [ ज्येष्ठ वीर निर्वाण संशून्य दो हज़ार चार सौ पैंसठ विषय और पूर्वपद्यों के साथ इनके प्रतिपाद्य विषयक श्रमम्बद्धता बतलाते हैं ----लिखते हैं "या दोन श्रीकांच्या प्रतिपाद्य विषयांशीं व पूर्व श्लोकांशी काहींच संवन्ध दिसत नाहीं ।" साथ ही, यह भी प्रकट करते हैं कि ये दोनों श्लोक कब, क्यों और कैसे इस ग्रंथमं प्रविष्ट हुए हैं उसे बतलानेके लिये वे है। पिछली बात के अभाव में इन पद्योंकी प्रक्षि ताका दावा बहुत कमज़ोर होजाता है; क्योंकि सम्बद्ध ताकी ऐसी कोई भी बात इनमें देखनेको नहीं मिलती। टीकाकार प्रभाचन्द्रने अपने प्रस्तावना -वाक्योंके द्वारा पूर्व पद्यांके साथ इनके सम्बन्धको भने प्रकार घोषित किया है। वे प्रस्तावना वाक्य अपने अपने पद्यके साथ इस प्रकार हैंःतिपयारो सो अप्पा परमंतरबाहिरो हु दे हीणं । तत्थ परो भाइज्जइ अन्तोवाण चयहि बहिरप्पा ॥ - मोक्षप्राभृतः बहिरन्तः परश्चेति त्रिधात्मा सर्वदेहिषु । उपेयास्त्र परमं मध्योपायावहिस्त्यजेत् ॥ -समाधितंत्रम् मालूम होता है मैंने अपने उक्त लेख में ग्रंथाधारकी जिस बातका उल्लेख करके प्रमाण ग्रन्थके पद्य नंशून्य तीनको उद्धृत किया था और जो ऊपर इस प्रस्तावना लेखमें भी पद्य नंशून्य तीन के साथ ज्याँकी त्यों दी हुई है उसे डाशून्य माहवने अनुवादरूप में अपना तो लिया परन्तु उन्हें यह खयाल नहीं आया कि ऐसा करनेसे उनके उस मन्तव्यका स्वयं विरोध होजाता है जिसके अनुसार पद्य नं. तीन को निश्चितरूपसे प्रक्षित कहा गया है। अस्तु । रही पद्यनंशून्य एक सौ तीन, एक सौ चार की बात, इनकी प्रक्षितताका कारण डाशून्य साहब ग्रन्थके प्रतिपाद्य "ननु यद्यात्मा शरीरात्सर्वथा भिन्नस्तदा कथमात्मनि चलति नियमेन तञ्चलेन् तिष्टति तिष्टेदिति वदन्तं प्रत्याहप्रयतादात्मनो वायुरिच्छा द्वेषप्रवर्तितात् । वायोः शरीरयंत्राणि वर्तन्ते स्वेषु कर्मसु ॥ एक सौ तीन ॥ " "तेषां शरीरयन्त्राणामात्मन्यारोपाऽनारोपी कृत्वा जडविवेकिनौ किं कुर्वत इत्याहतान्यात्मनि समारोप्य साक्षाण्यास्ते सुखं जडः । व्यक्त्वाssरोपं पुनर्विद्वान् प्राप्नोति परमं पदम् ॥एक सौ चार॥" इन प्रस्तावना-वाक्योंके साथ प्रस्तावित पद्योंके अर्थको देखकर कोई भी सावधान व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि इनका ग्रंथके विषय तथा पूर्व पद्योंके साथ कोई सम्बन्ध नहीं है - जिस मूलविषयको ग्रन्थमं अनेक प्रकार से पुनः पुनः स्पष्ट किया गया है उसीको इन पद्योंमें भी प्रकारान्तरसे और भी अधिक स्पष्ट किया गया है और उसमें पुनरुक्तता जैसी भी कोई बात नहीं है। इसके सिवाय, उपसंहारके पूर्व, ग्रंथकं विषयकी समाप्ति भी 'अदुःखभावितं' नाम के भावनात्मक पद्य नंशून्य एक सौ दो की अपेक्षा पद्य नंशून्य वर्ष दो, किरण आठ].' एक सौ चार के माथ ठीक जान पड़ती है; जिसके अन्त में साध्यकी मिद्धि के उल्लेखरूप प्राप्नोति परमं पदम्' वाक्य पड़ा हुआ है और जो इस ग्रन्थकं मुख्य प्रयोजन अथवा ग्रात्मा के अन्तिम ध्येयको स्पष्ट करता हुआ विषयको समाप्त करता है । अब में पद्य एक सौ पाँच को भी लेता हूं, जिसे डाकटर साहवने सन्देह कोटि में रखा है। यह मंदिग्भ नहीं है बल्कि मूलग्रंथका अन्तिम उपसंहार पय है; जैसा कि मैंने इस प्रकरण के शुरूमं प्रकट किया है । पूज्यपादके दूसरे ग्रंथीमं भी, जिनका प्रारम्भ अनुप छन्दके पद्यों द्वारा होता है, ऐसे ही उपसंहारपद्य पाये जानें हैं जिनमें ग्रंथकथित विषयका संज्ञेपमं उल्लेख करते हुए ग्रंथका नामादिक भी दिया हुआ है । नमुनेके तौर पर 'टोपदेश' और 'सर्वार्थसिद्धि' ग्रंथोंके दो उपसंहारपद्यांको नीचे उद्धृत किया जाता है :। इष्टोपदेशमिति सभ्यगधीत्य धीमान मानाऽपमानसमतां स्वमताद्वितन्य । मुक्ता ग्रहो विनिवसनसजने वने वा मुक्तिश्रियं निकमामुपयः ति भव्यः ॥ " -इष्टोपदेशः । स्वर्गःपवर्गसुखमाप्त मनोभिरायेंनौ जैनेन्द्रशासनवरा मृतसारभृता । सर्वार्थसिद्धिरिति सद्भिरुपालनामा तस्वार्थवृत्तिरनिशं मनमा प्रधार्या ॥ · सर्वार्थसिद्धिः इन पद्यपरमे पाठकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि ये दोनों पद्य भी रमी वसन्ततिलका छन्दमें लिखे गये हैं जिसमें कि समाधितंत्रका उक्त उपसंहार-पद्य पाया जाता है। तीनों ग्रंथोंके ये तीनों पद्य एक ही टाइपके है और वे अपने एक ही प्राचार्यद्वारा ग्चे जानेकी स्पष्ट घोषणा करते हैं । इसलिये समाधिततंत्रका पद्म नंशून्य एक सौ पाँच पूज्यपादकृत ही है, इसमें सन्देह को ज़रा भी स्थान नहीं है । जब पद्य नंशून्य एक सौ पाँच श्रसन्दिग्धरूपसे पूज्यपादकृत है तब ग्रन्थका असली मूलनाम भी 'समाधितन्त्र' ही है; क्योंकि इसी नामका उक्त पद्य में निर्देश है, जिसे डाशून्य सावने भी स्वयं स्वीकार किया है। और इसलिये 'समाधिशतक' नामकी कल्पना बादकी है-- उसका अधिक प्रचार टीकाकार प्रभाचन्द्र के बाद ही हुआ है। श्रवणबेल्गोल के जिस शिलालेख नंशून्य चालीस में इस नामका उल्लेख है वह विक्रमकी तेरहवीं शताब्दीका है और टीकाकार प्रभाचन्द्रका समय भी विक्रमी तेरहवीं शताब्दी है । इस तरह इस ग्रंथका मूलनाम 'समाधितंत्र' उत्तरनाम या उपनाम 'समाधिशतक' है और इसकी पद्यसंख्या एक सौ पाँच है - उसमें पाँच पद्यांके प्रक्षित होनेकी जो कल्पना की जाती है वह निरी निर्मूल और निराधार है । ग्रंथकी हस्तलिखित मूल प्रतियों में भी यही एक सौ पाँच पद्यसंख्या पाई जाती हैं । देहली आदि अनेक भण्डा रोमं मुझे इस मूलग्रंथकी हस्तलिखित प्रतियोंके देखने कार मिला है - देहली सेठके कुँचेके मन्दिर में तो एक जीर्ण-शीर्ण प्रति कईसौ वर्षकी पुरानी लिखी हुई जान पड़ती है। श्रारा जैन सिद्धान्त भवन के अध्यक्ष पंशून्य केशून्य भुजबलीजी शास्त्री से भी दर्याप्त करनेपर यही मालूम हुआ है कि वहाँ ताडपत्रादि पर जितनी भी मूलप्रतियाँ हैं उन सबमें इस ग्रन्थकी पद्मसंख्या एक सौ पाँच ही दी है। और इसलिये डाशून्य साहबका यह लिखना उचित प्रतीत नहीं होता कि 'इस टीकासे रहित मूलग्रंथकी हस्तलिखित प्रतियां उपलब्ध नहीं है । ' ऐसा मालूम होता है कि 'शतक' नामपरसे डाशून्य
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में दुल्हन ने शादी से महज इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि दूल्हे पक्ष वाले उसके लिए गले का हार लेकर नहीं लेकर आए थे. दुल्हन को काफी मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह शादी के लिए नहीं मानी.
Hardoi News: हरदोई जिले के बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के हांस बरौली गांव में जश्न का माहौल था. हर कोई केवड़े वाली खुशबू के साथ शेरवानी और मलमल का कुर्ता पहने, गिलौरी वाला पान मुंह में दबाए इधर से उधर टहल रहा था. लगभग पूरा गांव लखीमपुर से आ रही बारात के जश्न में मशगूल था. उधर, बड़ी-बड़ी हांड़ियों पर मुगलिया बादाम बिरयानी, कबाब कोरमा और सूखे मेवे बारात के स्वागत की राह तक रहे थे.
तभी अचानक जानकारी मिली कि बारात गांव के बाहर दस्तक दे चुकी है. बारात इस्तकबाल की पूरी तैयारियां पहले से ही थीं. बारातियों का स्वागत करते हुए उनके खाने-पीने की व्यवस्था से पहले नाश्ता कराया गया. आवा भगत और स्वागत के बाद बातों ही बातों में मेहर को लेकर चर्चा होने लगी.
बारात के खैर मकदम के बाद निकाह की रस्में शुरू हुईं. दूल्हे के पिता बबलू ने लड़की के लिए लाए गए जेवरातों को दुल्हन पक्ष को सुपुर्द कर दिया. थोड़ी ही देर के बाद में दुल्हन पक्ष की तरफ से औरतों की कानाफूसी तेज होने लगी, जिसमें जेवरातों में गले का हार यानी नेकलेस कम होना बताया जा रहा था. धीरे-धीरे यह बात दुल्हन को पता चल गई.
उपहार में नेकलेस कम होने के चलते दुल्हन ने स्पष्ट शब्दों में निकाह से इनकार कर दिया. यह सुन लखीमपुर खीरी से हांस बरौली गांव पहुंची बारात के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. कुछ लोग नाश्ता अधूरा छोड़कर एक जगह झुंड बनाकर जमा गए. पहले तो बारात में ही मान-मनौव्वल का प्रयास चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे पूरा दिन गुजरते-गुजरते मामला थाने तक पहुंच गया.
थाने पर पंचायत जुटी, लेकिन लड़की निकाह करने को राजी नहीं हुई और इस वजह से बिना दूल्हन लिए बारात को बैरंग वापस लौटना पड़ा. अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह ने बताया कि लड़की पक्ष की रजामंदी न होने के चलते बारात बैरंग वापस चली गई. किसी भी प्रकार का वाद किसी भी तरफ से दर्ज नहीं कराया गया है. माहौल न बिगड़े, इसलिए पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया था. गांव में माहौल बिल्कुल शांत है.
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में दुल्हन ने शादी से महज इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि दूल्हे पक्ष वाले उसके लिए गले का हार लेकर नहीं लेकर आए थे. दुल्हन को काफी मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह शादी के लिए नहीं मानी. Hardoi News: हरदोई जिले के बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के हांस बरौली गांव में जश्न का माहौल था. हर कोई केवड़े वाली खुशबू के साथ शेरवानी और मलमल का कुर्ता पहने, गिलौरी वाला पान मुंह में दबाए इधर से उधर टहल रहा था. लगभग पूरा गांव लखीमपुर से आ रही बारात के जश्न में मशगूल था. उधर, बड़ी-बड़ी हांड़ियों पर मुगलिया बादाम बिरयानी, कबाब कोरमा और सूखे मेवे बारात के स्वागत की राह तक रहे थे. तभी अचानक जानकारी मिली कि बारात गांव के बाहर दस्तक दे चुकी है. बारात इस्तकबाल की पूरी तैयारियां पहले से ही थीं. बारातियों का स्वागत करते हुए उनके खाने-पीने की व्यवस्था से पहले नाश्ता कराया गया. आवा भगत और स्वागत के बाद बातों ही बातों में मेहर को लेकर चर्चा होने लगी. बारात के खैर मकदम के बाद निकाह की रस्में शुरू हुईं. दूल्हे के पिता बबलू ने लड़की के लिए लाए गए जेवरातों को दुल्हन पक्ष को सुपुर्द कर दिया. थोड़ी ही देर के बाद में दुल्हन पक्ष की तरफ से औरतों की कानाफूसी तेज होने लगी, जिसमें जेवरातों में गले का हार यानी नेकलेस कम होना बताया जा रहा था. धीरे-धीरे यह बात दुल्हन को पता चल गई. उपहार में नेकलेस कम होने के चलते दुल्हन ने स्पष्ट शब्दों में निकाह से इनकार कर दिया. यह सुन लखीमपुर खीरी से हांस बरौली गांव पहुंची बारात के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. कुछ लोग नाश्ता अधूरा छोड़कर एक जगह झुंड बनाकर जमा गए. पहले तो बारात में ही मान-मनौव्वल का प्रयास चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे पूरा दिन गुजरते-गुजरते मामला थाने तक पहुंच गया. थाने पर पंचायत जुटी, लेकिन लड़की निकाह करने को राजी नहीं हुई और इस वजह से बिना दूल्हन लिए बारात को बैरंग वापस लौटना पड़ा. अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह ने बताया कि लड़की पक्ष की रजामंदी न होने के चलते बारात बैरंग वापस चली गई. किसी भी प्रकार का वाद किसी भी तरफ से दर्ज नहीं कराया गया है. माहौल न बिगड़े, इसलिए पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप किया था. गांव में माहौल बिल्कुल शांत है.
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नई दिल्ली : ई-कॉमर्स का बाजार देश में बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि दिन प्रतिदिन यहाँ नए नए ग्राहक देखने को मिल रहे है. इसके साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि देश में ई-कॉमर्स कम्पनियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. अब हाल ही में यह बात भी सामने आई है कि ई-कॉमर्स ट्रेड पर जल्द ही टैक्स भी लगाने का काम किया जा सकता है.
जी हाँ, हाल ही में इस मामले में ई-कॉमर्स ट्रेड पर बनाई गई एक सरकारी समिति के द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि 1 लाख रुपए से अधिक के सौदे पर इक्वलाइजेशन लेवी लगाई जाए. बता दे कि सरकार के इस कदम का सीधा असर ई-कॉमर्स बिजनेस पर पड़ने वाला है.
मामले में ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के द्वारा भी इस बिजनेस मॉडल की जांच, ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन से संबंधित डायरेक्ट टैक्स के मुद्दों की पहचान करने और इन मुद्दों से निबटने के तरीके सुझाने के लिए ई-कॉमर्स के टैक्सेशन पर एक समिति का गठन किया गया था. समिति का कहना है कि टैक्सेशन में असमानता का सीधा असर रिटेल बिजनेस पर पड़ता है. इस कारण इसे लगाये जाने का सुझाव पेश किया गया है.
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नई दिल्ली : ई-कॉमर्स का बाजार देश में बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि दिन प्रतिदिन यहाँ नए नए ग्राहक देखने को मिल रहे है. इसके साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि देश में ई-कॉमर्स कम्पनियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. अब हाल ही में यह बात भी सामने आई है कि ई-कॉमर्स ट्रेड पर जल्द ही टैक्स भी लगाने का काम किया जा सकता है. जी हाँ, हाल ही में इस मामले में ई-कॉमर्स ट्रेड पर बनाई गई एक सरकारी समिति के द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि एक लाख रुपए से अधिक के सौदे पर इक्वलाइजेशन लेवी लगाई जाए. बता दे कि सरकार के इस कदम का सीधा असर ई-कॉमर्स बिजनेस पर पड़ने वाला है. मामले में ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के द्वारा भी इस बिजनेस मॉडल की जांच, ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन से संबंधित डायरेक्ट टैक्स के मुद्दों की पहचान करने और इन मुद्दों से निबटने के तरीके सुझाने के लिए ई-कॉमर्स के टैक्सेशन पर एक समिति का गठन किया गया था. समिति का कहना है कि टैक्सेशन में असमानता का सीधा असर रिटेल बिजनेस पर पड़ता है. इस कारण इसे लगाये जाने का सुझाव पेश किया गया है.
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कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के लिए जिला प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन में आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने दावा किया कि संक्रमित व्यक्ति के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बना 52 स्थानों पर दंडाधिकारी व पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कंटेनमेंट जोन के अंदर या इससे बाहर किसी का भी आवागमन नहीं हो। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे जेल भी भेजा जाएगा। डीएम ने अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष और अनुमंडल पदाधिकारी को इसकी जवाबदेही दी है। उक्त क्षेत्र को सेनिटाईज करने का निर्देश भी दिया गया है। डीएम ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में सभी दुकानें बंद रहने की स्थिति में लोगों के घरों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जिम्मेवारी एसडीएम तथा मार्केटिंग पदाधिकारी की होगी। इस जोन के सभी परिवारों का गहन निरीक्षण किया जाएगा। संक्रमित व्यक्ति के परिवारजनों तथा उसके संपर्क में आए लोगों की जांच कराई जाएगी। डीएम ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोरोना पॉजिटिवों का डाटा बेस अपडेट रखें तथा उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं। अंचलाधिकारियों को कहा गया कि वे प्रचार-प्रसार करवाएं। ताकि कंटेनमेंट जोन से कोई बाहर नहीं निकलें। डीएम ने पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि कंटेनमेंट जोन में पानी की आपूर्ति बहाल रखी जाए।
शादी-विवाह तथा शादी विवाह के समारोह में 100 लोगों से अधिक की भीड़ जुटाने पर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि विवाह समारोह के दौरान मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेसिंग तथा सेनिटाईजेशन का भी खास ख्याल रखना होगा। तिलक या बारात में नाच-गाना के दौरान भीड़-भाड़ लगाया तो आपदा एक्ट और धारा 188 के तहत दंड के भागी होंगे। डीएम ने यह भी कहा कि इन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए लोग पहले से अनुमति लें और इसकी सूचना संबंधित थाने को भी उपलब्ध कराएं।
डीएम नवीन कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के सभी भंडारपालों को निर्देश दिया है कि दवा किट और उपकरण शेष रहते ही आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी कर लें। स्टोर में रखी 80 फीसदी मेडिकल सामग्री का जैसे ही खपत हो, उसे फिर से मंगा लिया जाए। डीएम ने भंडार में ऑक्सीजन की हमेशा पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन कंस्टे्रटर पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन, फिर भी इसे अपडेट रखें। सभी भंडार पाल और पीएचसी प्रभारी मेडिकल सामग्रियों की उपलब्धता और खपत का रिपोर्ट करें। डीएम ने कहा कि अगर किसी दवा या सामग्री की आवश्यकता हो तो उसे स्थानीय बाजार से तत्काल खरीदें। दवा व अन्य सामग्री की किसी भी हाल में कमी नहीं होनी चाहिए।
कैप्शन-कोरोना इलाज से जुड़ी दवाओं तथा उपकरणों की उपलब्धता के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते डीएम।
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कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के लिए जिला प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन में आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने दावा किया कि संक्रमित व्यक्ति के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बना बावन स्थानों पर दंडाधिकारी व पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कंटेनमेंट जोन के अंदर या इससे बाहर किसी का भी आवागमन नहीं हो। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे जेल भी भेजा जाएगा। डीएम ने अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष और अनुमंडल पदाधिकारी को इसकी जवाबदेही दी है। उक्त क्षेत्र को सेनिटाईज करने का निर्देश भी दिया गया है। डीएम ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में सभी दुकानें बंद रहने की स्थिति में लोगों के घरों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जिम्मेवारी एसडीएम तथा मार्केटिंग पदाधिकारी की होगी। इस जोन के सभी परिवारों का गहन निरीक्षण किया जाएगा। संक्रमित व्यक्ति के परिवारजनों तथा उसके संपर्क में आए लोगों की जांच कराई जाएगी। डीएम ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोरोना पॉजिटिवों का डाटा बेस अपडेट रखें तथा उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं। अंचलाधिकारियों को कहा गया कि वे प्रचार-प्रसार करवाएं। ताकि कंटेनमेंट जोन से कोई बाहर नहीं निकलें। डीएम ने पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि कंटेनमेंट जोन में पानी की आपूर्ति बहाल रखी जाए। शादी-विवाह तथा शादी विवाह के समारोह में एक सौ लोगों से अधिक की भीड़ जुटाने पर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि विवाह समारोह के दौरान मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टेसिंग तथा सेनिटाईजेशन का भी खास ख्याल रखना होगा। तिलक या बारात में नाच-गाना के दौरान भीड़-भाड़ लगाया तो आपदा एक्ट और धारा एक सौ अठासी के तहत दंड के भागी होंगे। डीएम ने यह भी कहा कि इन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए लोग पहले से अनुमति लें और इसकी सूचना संबंधित थाने को भी उपलब्ध कराएं। डीएम नवीन कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के सभी भंडारपालों को निर्देश दिया है कि दवा किट और उपकरण शेष रहते ही आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी कर लें। स्टोर में रखी अस्सी फीसदी मेडिकल सामग्री का जैसे ही खपत हो, उसे फिर से मंगा लिया जाए। डीएम ने भंडार में ऑक्सीजन की हमेशा पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन कंस्टे्रटर पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन, फिर भी इसे अपडेट रखें। सभी भंडार पाल और पीएचसी प्रभारी मेडिकल सामग्रियों की उपलब्धता और खपत का रिपोर्ट करें। डीएम ने कहा कि अगर किसी दवा या सामग्री की आवश्यकता हो तो उसे स्थानीय बाजार से तत्काल खरीदें। दवा व अन्य सामग्री की किसी भी हाल में कमी नहीं होनी चाहिए। कैप्शन-कोरोना इलाज से जुड़ी दवाओं तथा उपकरणों की उपलब्धता के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते डीएम।
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चौकोरी से 180कि. मी. दूर स्थित काठगोदाम, निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन नियमित रेलगाडि़यों के द्वारा बड़े शहरों जैसे लखनऊ, दिल्ली तथा कोलकाता से जुड़ा है। इस रेलवे स्टेशन से यात्री चौकोरी के लिए बसें अथवा टैक्सी ले सकते हैं।
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चौकोरी से एक सौ अस्सीकि. मी. दूर स्थित काठगोदाम, निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन नियमित रेलगाडि़यों के द्वारा बड़े शहरों जैसे लखनऊ, दिल्ली तथा कोलकाता से जुड़ा है। इस रेलवे स्टेशन से यात्री चौकोरी के लिए बसें अथवा टैक्सी ले सकते हैं।
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बिहार में विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार 10 नवंबर को आने वाला है। उससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन को लेकर जोरदार निशाना साधा है।
बिहार में विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार 10 नवंबर को आने वाला है। उससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन को लेकर जोरदार निशाना साधा है। संजय राउत ने कहा कि अमेरिका ने 4 साल में अपनी गलती को सुधार लिया है। अब बिहार में भी वैसे ही लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव पर एक आर्टिकल लिखा। जिसमें उन्होंने बीजेपी और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका के लोगों ने 4 साल पहले जो गलती की थी। उसे अब उन्होंने सुधार लिया है। ये ट्रंप पर जोरदार हमला था। वहीं उन्होंने कहा कि बिहार में भी उसी तरह की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। भारत अगर ट्रंप की हार से कुछ सीखता है तो ठीक होगा।
मुख्य पत्र सामना में शिवसेना ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका की जनता उनकी वानरचेष्टा और लफ्फाबाजी में नहीं आई। ट्रंप के बारे में जो गलती की। उन्होंने 4 साल में उसे सुधारा है। हमें उम्मीद है कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भी भारत के लोग 5 साल से पहले हुई गलती को सुधार लेंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि बीते शनिवार को बिहार में अंतिम चरण के लिए मतदान हुआ। जिसके बाद एग्जिट पोल में महागठबंधन को बहुमत दिखाया गया है। एग्जिट पोल में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने की सुगबुगाहट है। शिवसेना ने मुख्य पत्र सामना में लिखा कि पीएम मोदी समेत नीतीश कुमार आदि कई नेता युवा तेजस्वी यादव के सामने इस बार टिक नहीं पाएंगे। झूठ पर सच हावी होगा। बिहार में बदलाव की सुगबुगाहट नजर आ रही है।
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बिहार में विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार दस नवंबर को आने वाला है। उससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन को लेकर जोरदार निशाना साधा है। बिहार में विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार दस नवंबर को आने वाला है। उससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने बिहार में बीजेपी और जेडीयू गठबंधन को लेकर जोरदार निशाना साधा है। संजय राउत ने कहा कि अमेरिका ने चार साल में अपनी गलती को सुधार लिया है। अब बिहार में भी वैसे ही लक्षण दिखाई दे रहे हैं। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव पर एक आर्टिकल लिखा। जिसमें उन्होंने बीजेपी और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका के लोगों ने चार साल पहले जो गलती की थी। उसे अब उन्होंने सुधार लिया है। ये ट्रंप पर जोरदार हमला था। वहीं उन्होंने कहा कि बिहार में भी उसी तरह की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। भारत अगर ट्रंप की हार से कुछ सीखता है तो ठीक होगा। मुख्य पत्र सामना में शिवसेना ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका की जनता उनकी वानरचेष्टा और लफ्फाबाजी में नहीं आई। ट्रंप के बारे में जो गलती की। उन्होंने चार साल में उसे सुधारा है। हमें उम्मीद है कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भी भारत के लोग पाँच साल से पहले हुई गलती को सुधार लेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि बीते शनिवार को बिहार में अंतिम चरण के लिए मतदान हुआ। जिसके बाद एग्जिट पोल में महागठबंधन को बहुमत दिखाया गया है। एग्जिट पोल में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने की सुगबुगाहट है। शिवसेना ने मुख्य पत्र सामना में लिखा कि पीएम मोदी समेत नीतीश कुमार आदि कई नेता युवा तेजस्वी यादव के सामने इस बार टिक नहीं पाएंगे। झूठ पर सच हावी होगा। बिहार में बदलाव की सुगबुगाहट नजर आ रही है।
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टीवी इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय से धूम मचा चुकीं सनाया ईरानी एक बार फिर से बॉलीवुड में एंट्री को तैयार है और अब उनकी फिल्म का पहला लुक सामने आ चुके हैं. जी हाँ, वैसे उनकी फिल्म को विक्रम भट्ट ने निर्देशित किया है और वह बॉलीवुड उन कुछ चुने हुए निर्देशकों में से एक हैं जो की हॉरर फिल्मों बनाने के लिए मशहूर हैं. ऐसे में आप सभी को पता ही होगा कि विक्रम अपने निर्देशन में 'राज़', 'राज़ 2', और'1920' जैसी सुपरहिट हॉरर फिल्मों में साबित कर चुके है और अब एक बार फिर हमें डराने के लिए तैयार हैं अपनी आगामी फिल्म 'घोस्ट' से.
वहीं एक और पोस्टर शेयर कर सनाया ने लिखा है Be afraid. Be very afraid. Presenting the official poster of #GhostTheFilm , coming to send chills down your spine, from October 18! Happy Birthday to me @shivambhaargava @vikrampbhatt @pooja_ent @krishnavbhatt @zeemusiccompany. आप सभी को बता दें कि यह फिल्म, ब्रिटिश अख़बार के आर्टिकल से प्रेरित है जिसमे वहां की एक अदालत ने आत्माओं पर मुकदमा चलाने की इजाज़त दी थी. वहीं इस फिल्म में सनाया के साथ "शिवम् भार्गव" मुख्य किरदार में नज़र आएँगे और सनाया, करण की वकील, सिमरन सिंह के किरदार में नज़र आने वाली हैं.
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टीवी इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय से धूम मचा चुकीं सनाया ईरानी एक बार फिर से बॉलीवुड में एंट्री को तैयार है और अब उनकी फिल्म का पहला लुक सामने आ चुके हैं. जी हाँ, वैसे उनकी फिल्म को विक्रम भट्ट ने निर्देशित किया है और वह बॉलीवुड उन कुछ चुने हुए निर्देशकों में से एक हैं जो की हॉरर फिल्मों बनाने के लिए मशहूर हैं. ऐसे में आप सभी को पता ही होगा कि विक्रम अपने निर्देशन में 'राज़', 'राज़ दो', और'एक हज़ार नौ सौ बीस' जैसी सुपरहिट हॉरर फिल्मों में साबित कर चुके है और अब एक बार फिर हमें डराने के लिए तैयार हैं अपनी आगामी फिल्म 'घोस्ट' से. वहीं एक और पोस्टर शेयर कर सनाया ने लिखा है Be afraid. Be very afraid. Presenting the official poster of #GhostTheFilm , coming to send chills down your spine, from October अट्ठारह! Happy Birthday to me @shivambhaargava @vikrampbhatt @pooja_ent @krishnavbhatt @zeemusiccompany. आप सभी को बता दें कि यह फिल्म, ब्रिटिश अख़बार के आर्टिकल से प्रेरित है जिसमे वहां की एक अदालत ने आत्माओं पर मुकदमा चलाने की इजाज़त दी थी. वहीं इस फिल्म में सनाया के साथ "शिवम् भार्गव" मुख्य किरदार में नज़र आएँगे और सनाया, करण की वकील, सिमरन सिंह के किरदार में नज़र आने वाली हैं.
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नई दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि विकास के लिए एक बड़ी योजना लेकर आ रही है। पिछले कई सालों से कुदरती मार के कारण देश में खेती किसानी की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। किसानों की बढ़ती आत्महत्या इसका उदाहरण है। कृषि क्षेत्र में संकट के कारण रोजगार की समस्या और गंभीर हो गई है। सरकार ऐसी योजना पर काम कर रही है जिससे खेती संकट और रोजगार की समस्या दोनोे का निदान हो सके। सरकार ने देश में आने वाले दस सालों में 50 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का लक्ष्य रखा है।
इससे करीब 75 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। क्योंकि एक हेक्टेयर ज़मीन को खेती योग्य बनाने पर डेढ़ रोजगार का सृजन होता है। यह जानकारी केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी। दिल्ली स्थिति मीडिया सेंटर में बंजर धरती पर होने वाले संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन 'यूनाइटेड नेशंस कंवेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन' (सीसीडी कॉप-14) दो से नौ सितंबर तक सम्मेलन और 11 से 13 सिंतबर तक इससे संबधित कार्यक्रम होंगे। जिन पर इस सम्मेलन में चर्चा की जाएगी। इसमें तकनीकी प्रयोग से ग्लोबल वार्मिग और तेजी से फैल रहे बंजरपन को रोकने की कवायद होगी।
इसमें 200 देशों के प्रतिनिधि और वैज्ञानिक अपने अविष्कारों को प्रस्तुत करेंगे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया, इस सम्मेलन में दिल्ली डिक्लेरेशन भी होगा। इसमें पहली बार बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार यूनाइटेड नेशंस कंवेंशन के साथ समझौता भी करेगी। इसके अलावा देश के महत्वपूर्ण भाग जो दिल्ली, पंजाब-हरियाणा को बंजर होने से रोकता है यानि अरावली हिल को लेकर भी चर्चा और इसका समाधान निकाला जाएगा। देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा।
दुनिया में चालीस लाख हेक्टेयर बंजर जमीन है जिसका 29 प्रतिशत भारत में है, यानी देश में कुल 169 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन है। इसे खेती योग्य बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। ग्रेटर नोएडा में होने वाले आयोजन में तीन हजार वैज्ञानिक, विषय के विशेषज्ञ समेत देशों के प्रतिनिधि भी शिरकत करेंगे। बढ़ती आबादी के साथ जमीन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है ऐसे में जरूरी है कि सरकार बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाए।
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नई दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि विकास के लिए एक बड़ी योजना लेकर आ रही है। पिछले कई सालों से कुदरती मार के कारण देश में खेती किसानी की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। किसानों की बढ़ती आत्महत्या इसका उदाहरण है। कृषि क्षेत्र में संकट के कारण रोजगार की समस्या और गंभीर हो गई है। सरकार ऐसी योजना पर काम कर रही है जिससे खेती संकट और रोजगार की समस्या दोनोे का निदान हो सके। सरकार ने देश में आने वाले दस सालों में पचास लाख हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का लक्ष्य रखा है। इससे करीब पचहत्तर लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। क्योंकि एक हेक्टेयर ज़मीन को खेती योग्य बनाने पर डेढ़ रोजगार का सृजन होता है। यह जानकारी केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दी। दिल्ली स्थिति मीडिया सेंटर में बंजर धरती पर होने वाले संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन 'यूनाइटेड नेशंस कंवेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन' दो से नौ सितंबर तक सम्मेलन और ग्यारह से तेरह सिंतबर तक इससे संबधित कार्यक्रम होंगे। जिन पर इस सम्मेलन में चर्चा की जाएगी। इसमें तकनीकी प्रयोग से ग्लोबल वार्मिग और तेजी से फैल रहे बंजरपन को रोकने की कवायद होगी। इसमें दो सौ देशों के प्रतिनिधि और वैज्ञानिक अपने अविष्कारों को प्रस्तुत करेंगे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया, इस सम्मेलन में दिल्ली डिक्लेरेशन भी होगा। इसमें पहली बार बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार यूनाइटेड नेशंस कंवेंशन के साथ समझौता भी करेगी। इसके अलावा देश के महत्वपूर्ण भाग जो दिल्ली, पंजाब-हरियाणा को बंजर होने से रोकता है यानि अरावली हिल को लेकर भी चर्चा और इसका समाधान निकाला जाएगा। देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। दुनिया में चालीस लाख हेक्टेयर बंजर जमीन है जिसका उनतीस प्रतिशत भारत में है, यानी देश में कुल एक सौ उनहत्तर करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन है। इसे खेती योग्य बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। ग्रेटर नोएडा में होने वाले आयोजन में तीन हजार वैज्ञानिक, विषय के विशेषज्ञ समेत देशों के प्रतिनिधि भी शिरकत करेंगे। बढ़ती आबादी के साथ जमीन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है ऐसे में जरूरी है कि सरकार बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाए।
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वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि 2015 पेरिस समझौते से अमेरिका बाहर निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जो अमेरिकी हितों की रक्षा कर सके। सीएनएन के मुताबिक, यह फैसला उन प्रयासों को झटका है जिसके तहत अमेरिका के इस समझौते से जुड़े रहने पर ट्रंप से निरंतर आह्वान किया जा रहा था। दुनियाभर के 195 देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और यहां के नागरिकों को सुरक्षित रखने के अपने कर्तव्य को देखते हुए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलेगा लेकिन हम अमेरिकी हितों को देखते हुए नए समझौते पर बातचीत करेंगे। ' उन्होंने कहा, 'हम इस समझौते से बाहर निकल रहे हैं। '
अमेरिका के इस समझौते पर बने रहने के लिए कई विदेशी नेताओं, कारोबारियों और यहां तक की ट्रंप की बेटी ने भी उनसे अनुरोध किया था कि अमेरिका इस समझौते से जुड़ा रहे।
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वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि दो हज़ार पंद्रह पेरिस समझौते से अमेरिका बाहर निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जो अमेरिकी हितों की रक्षा कर सके। सीएनएन के मुताबिक, यह फैसला उन प्रयासों को झटका है जिसके तहत अमेरिका के इस समझौते से जुड़े रहने पर ट्रंप से निरंतर आह्वान किया जा रहा था। दुनियाभर के एक सौ पचानवे देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और यहां के नागरिकों को सुरक्षित रखने के अपने कर्तव्य को देखते हुए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलेगा लेकिन हम अमेरिकी हितों को देखते हुए नए समझौते पर बातचीत करेंगे। ' उन्होंने कहा, 'हम इस समझौते से बाहर निकल रहे हैं। ' अमेरिका के इस समझौते पर बने रहने के लिए कई विदेशी नेताओं, कारोबारियों और यहां तक की ट्रंप की बेटी ने भी उनसे अनुरोध किया था कि अमेरिका इस समझौते से जुड़ा रहे।
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Cyclone Biparjoy Live Tracking: आईएमडी के अनुसार, चक्रवात के 15 जून की शाम को 125-135 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के साथ जखाऊ बंदरगाह के पास कच्छ में मांडवी और पाकिस्तान के कराची के बीच टकराने की संभावना है. सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के तटीय हिस्सों, खासकर कच्छ, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में तेज हवाओं के साथ बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
दमन के डीसी जनरल/सब डीएम ने CrPC की धारा 144 के तहत समुद्र तटों, सैरगाहों और समुद्र तटों के पास स्थित अन्य स्थानों पर लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है.
गुजरात के भावनगर जिले में स्थित अलंग तट पर चक्रवात बिपरजॉय के कारण 6 से 7 फीट तक ऊंची लहरें उठ रही हैं. यहां 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने लगी हैं. इस तूफान के कारण भावनगर पोर्ट, अलंग, भावनगर के घोघा पोर्ट पर डिस्ट्रेस सिग्नल नंबर 3 जारी किया गया है.
गुजरात के कच्छ जिले के जखाऊ बंदरगाह के पास शक्तिशाली चक्रवात 'बिपरजॉय' की संभावित दस्तक से पहले अधिकारियों ने राज्य के तटीय इलाकों से अब तक लगभग 50 हजार लोगों को निकालकर अस्थायी आश्रय शिविरों में स्थानांतरित किया है.
इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को तीनों सेना प्रमुखों से बात की और चक्रवात 'बिपरजॉय' के प्रभाव से निपटने के लिए सशस्त्र बलों की तैयारियों की समीक्षा की. तैयारियों की समीक्षा करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि सशस्त्र बल चक्रवात के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने में हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार हैं.
चक्रवात बिपरजॉय को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने अपना तेलंगाना का दौरा रद्द कर दिया है. गृह मंत्री कल अपने मंत्रालय में ही रहकर राहत और बचाव कार्य के समन्वय की निगरानी करेंगे.
चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के खतरे को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई. इस बैठक में राज्य आपात अभियान केंद्र के प्रमुख सचिव समेत कई आला अफसर शामिल हुए. इस दौरान चक्रवान के संभावित खतरे और राहत एवं बचाव के कामों की समीक्षा की गई.
फिलहाल यह तूफान गुजरात के कच्छा स्थित जखऊ समुद्र तट से 275 KM दूर है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, यह तूफान 15 जून शाम 4 बजे के आसपास तट से टकरा सकता है. इस दौरान 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका है.
ऐसे में प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों से अब तक 47 हजार लोगों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. इसके साथ ही जिन इलाकों में तूफान का असर होने वाला है, वहां से तकरीबन 4000 होर्डिंग्स नीचे उतारे गए.
चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के मद्देनजर मछुआरों को समुद्र में जाने से मना किया गया है और इसलिए उन्होंने अपनी नावों को कच्छ में समंदर के किनारे रोक रखा है. मौसम विभाग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, चक्रवात अभी देवभूमि द्वारका से 290 किमी WSW और गुजरात के जखाऊ पोर्ट से 280 किमी WSW में स्थित है.
देवभूमि द्वारका, राजकोट, जामनगर, पोरबंदर और जूनागढ़ जिलों में अधिक मात्रा में बारिश रिकॉर्ड की गई. एसईओसी ने कहा कि देवभूमि द्वारका जिले के खंभालिया तालुका में सबसे अधिक 121 मिमी बारिश हुई, इसके बाद द्वारका (92 मिमी) और कल्याणपुर (70 मिमी) बारिश हुई.
मौसम विभाग ने बुधवार को बताया कि चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के गुजरात तट पर पहुंचने के साथ ही सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई. स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) ने एक विज्ञप्ति में कहा कि बुधवार सुबह समाप्त हुए 24 घंटों में, सौराष्ट्र और कच्छ जिलों के 54 तालुकों में 10 मिमी से अधिक बारिश हुई.
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) ने बताया कि चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के मद्देनजर एहतियात के तौर पर 69 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 33 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया है और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-ऑर्जिनेट किया गया है.
कच्छ जिले में मांडवी समुद्र तट पूरी तरह से सुनसान नजर आ रहा है क्योंकि चक्रवात बिपरजॉय के मद्देनजर समुद्र तट पर सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है. चक्रवात के कारण कांडला बंदरगाह पर सभी परिचालन बंद कर दिए गए हैं.
चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के मद्देनजर मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुजरात के तटीय जिलों सौराष्ट्र, द्वारका और कच्छ के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. आईएमडी ने कच्छ, देवभूमि, द्वारका और जामनगर के कुछ इलाकों में 15 जून को भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है. आईएमडी ने कहा कि तट के करीब सौराष्ट्र क्षेत्र के अन्य जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी, जबकि उत्तर गुजरात के जिलों में कुछ स्थानों पर भी भारी वर्षा होगी.
गुजरात की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान 'बिपारजॉय' की वजह से मुंबई के मरीन ड्राइव पर अरब सागर में हाई टाइड देखा गया.
15 जून को दोपहर 3 बजे गुजरात के जखाऊ तट से चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के टकराने की संभावना है. ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, साइक्लोन मूवमेंट में बहुत थोड़ा-सा डायरेक्शन चेंज देखा गया है, जिससे इस बात की संभावना है भारतीय तट जखाऊ से जो कि पहले की अनुमानित जगह थी, उससे थोड़ी दूर पाकिस्तान के डायरेक्शन के साइड यह साइक्लोन हिट कर सकता है. लगातार इस साइक्लोन के मूवमेंट पर एक संयुक्त टीम नजर रखे हुए है.
गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी समुद्र तट पर चक्रवात 'बिपरजॉय' के कारण तेज हवाएं और अरब सागर से उठती ऊंची लहरें देखने को मिल रही हैं.
सीएम भूपेंद्र पटेल ने चक्रवात 'बिपरजॉय' की तैयारियों को लेकर गांधीनगर में स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में समीक्षा बैठक की. देवभूमि द्वारका, राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, पोरबंदर, गिर सोमनाथ, मोरबी और वलसाड जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के 17 और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के 12 दल पूरी तरह से तैयार हैं.
गुजरात सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उन्होंने अब तक समुद्र तट के किनारे रह रहे 37,794 लोगों को निकाला है. सभी को अस्थायी तौर पर बनाए गए आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया गया है.
गुजरात के जूनागढ़ में चक्रवात 'बिपोरजॉय' के तेज होने के कारण तटीय क्षेत्रों के निवासियों को तेजी से आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जा रहा है.
एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की कई टीम तैयार हैं. इसके साथ ही, सेना के अधिकारियों ने नागरिक प्रशासन और एनडीआरएफ के साथ संयुक्त रूप से राहत कार्यों की योजना बनाई है. सेना ने रणनीतिक स्थानों पर बाढ़ राहत टुकड़ियों को तैयार रखा है.
चक्रवात के मद्देनजर तैयारियों का जायजा लेने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात सरकार से संवेदनशील स्थानों पर रहने वाले लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाने की व्यवस्था करने और बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य तथा पेयजल जैसी सभी आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करने को कहा. बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, दो केंद्रीय मंत्रियों, गुजरात के कई मंत्रियों और चक्रवात से प्रभावित होने की आशंका वाले आठ जिलों के सांसद, विधायक और अधिकारियों ने भाग लिया.
जुलाई में खरीदना है 25 हजार से कम में बेस्ट 5G स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
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Cyclone Biparjoy Live Tracking: आईएमडी के अनुसार, चक्रवात के पंद्रह जून की शाम को एक सौ पच्चीस-एक सौ पैंतीस किलोग्राममीटर प्रति घंटे से लेकर एक सौ पचास किलोग्राममीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के साथ जखाऊ बंदरगाह के पास कच्छ में मांडवी और पाकिस्तान के कराची के बीच टकराने की संभावना है. सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के तटीय हिस्सों, खासकर कच्छ, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में तेज हवाओं के साथ बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. दमन के डीसी जनरल/सब डीएम ने CrPC की धारा एक सौ चौंतालीस के तहत समुद्र तटों, सैरगाहों और समुद्र तटों के पास स्थित अन्य स्थानों पर लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. गुजरात के भावनगर जिले में स्थित अलंग तट पर चक्रवात बिपरजॉय के कारण छः से सात फीट तक ऊंची लहरें उठ रही हैं. यहां चालीस से पचास किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने लगी हैं. इस तूफान के कारण भावनगर पोर्ट, अलंग, भावनगर के घोघा पोर्ट पर डिस्ट्रेस सिग्नल नंबर तीन जारी किया गया है. गुजरात के कच्छ जिले के जखाऊ बंदरगाह के पास शक्तिशाली चक्रवात 'बिपरजॉय' की संभावित दस्तक से पहले अधिकारियों ने राज्य के तटीय इलाकों से अब तक लगभग पचास हजार लोगों को निकालकर अस्थायी आश्रय शिविरों में स्थानांतरित किया है. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को तीनों सेना प्रमुखों से बात की और चक्रवात 'बिपरजॉय' के प्रभाव से निपटने के लिए सशस्त्र बलों की तैयारियों की समीक्षा की. तैयारियों की समीक्षा करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि सशस्त्र बल चक्रवात के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने में हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार हैं. चक्रवात बिपरजॉय को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने अपना तेलंगाना का दौरा रद्द कर दिया है. गृह मंत्री कल अपने मंत्रालय में ही रहकर राहत और बचाव कार्य के समन्वय की निगरानी करेंगे. चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के खतरे को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई. इस बैठक में राज्य आपात अभियान केंद्र के प्रमुख सचिव समेत कई आला अफसर शामिल हुए. इस दौरान चक्रवान के संभावित खतरे और राहत एवं बचाव के कामों की समीक्षा की गई. फिलहाल यह तूफान गुजरात के कच्छा स्थित जखऊ समुद्र तट से दो सौ पचहत्तर KM दूर है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, यह तूफान पंद्रह जून शाम चार बजे के आसपास तट से टकरा सकता है. इस दौरान एक सौ पचास किलोग्राममीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका है. ऐसे में प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों से अब तक सैंतालीस हजार लोगों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. इसके साथ ही जिन इलाकों में तूफान का असर होने वाला है, वहां से तकरीबन चार हज़ार होर्डिंग्स नीचे उतारे गए. चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के मद्देनजर मछुआरों को समुद्र में जाने से मना किया गया है और इसलिए उन्होंने अपनी नावों को कच्छ में समंदर के किनारे रोक रखा है. मौसम विभाग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, चक्रवात अभी देवभूमि द्वारका से दो सौ नब्बे किमी WSW और गुजरात के जखाऊ पोर्ट से दो सौ अस्सी किमी WSW में स्थित है. देवभूमि द्वारका, राजकोट, जामनगर, पोरबंदर और जूनागढ़ जिलों में अधिक मात्रा में बारिश रिकॉर्ड की गई. एसईओसी ने कहा कि देवभूमि द्वारका जिले के खंभालिया तालुका में सबसे अधिक एक सौ इक्कीस मिमी बारिश हुई, इसके बाद द्वारका और कल्याणपुर बारिश हुई. मौसम विभाग ने बुधवार को बताया कि चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के गुजरात तट पर पहुंचने के साथ ही सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई. स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ने एक विज्ञप्ति में कहा कि बुधवार सुबह समाप्त हुए चौबीस घंटाटों में, सौराष्ट्र और कच्छ जिलों के चौवन तालुकों में दस मिमी से अधिक बारिश हुई. पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के मद्देनजर एहतियात के तौर पर उनहत्तर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि तैंतीस ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया है और सत्ताईस ट्रेनों को शॉर्ट-ऑर्जिनेट किया गया है. कच्छ जिले में मांडवी समुद्र तट पूरी तरह से सुनसान नजर आ रहा है क्योंकि चक्रवात बिपरजॉय के मद्देनजर समुद्र तट पर सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है. चक्रवात के कारण कांडला बंदरगाह पर सभी परिचालन बंद कर दिए गए हैं. चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के मद्देनजर मौसम विभाग ने गुजरात के तटीय जिलों सौराष्ट्र, द्वारका और कच्छ के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. आईएमडी ने कच्छ, देवभूमि, द्वारका और जामनगर के कुछ इलाकों में पंद्रह जून को भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है. आईएमडी ने कहा कि तट के करीब सौराष्ट्र क्षेत्र के अन्य जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी, जबकि उत्तर गुजरात के जिलों में कुछ स्थानों पर भी भारी वर्षा होगी. गुजरात की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान 'बिपारजॉय' की वजह से मुंबई के मरीन ड्राइव पर अरब सागर में हाई टाइड देखा गया. पंद्रह जून को दोपहर तीन बजे गुजरात के जखाऊ तट से चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' के टकराने की संभावना है. ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, साइक्लोन मूवमेंट में बहुत थोड़ा-सा डायरेक्शन चेंज देखा गया है, जिससे इस बात की संभावना है भारतीय तट जखाऊ से जो कि पहले की अनुमानित जगह थी, उससे थोड़ी दूर पाकिस्तान के डायरेक्शन के साइड यह साइक्लोन हिट कर सकता है. लगातार इस साइक्लोन के मूवमेंट पर एक संयुक्त टीम नजर रखे हुए है. गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी समुद्र तट पर चक्रवात 'बिपरजॉय' के कारण तेज हवाएं और अरब सागर से उठती ऊंची लहरें देखने को मिल रही हैं. सीएम भूपेंद्र पटेल ने चक्रवात 'बिपरजॉय' की तैयारियों को लेकर गांधीनगर में स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में समीक्षा बैठक की. देवभूमि द्वारका, राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, पोरबंदर, गिर सोमनाथ, मोरबी और वलसाड जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के सत्रह और राज्य आपदा मोचन बल के बारह दल पूरी तरह से तैयार हैं. गुजरात सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उन्होंने अब तक समुद्र तट के किनारे रह रहे सैंतीस,सात सौ चौरानवे लोगों को निकाला है. सभी को अस्थायी तौर पर बनाए गए आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया गया है. गुजरात के जूनागढ़ में चक्रवात 'बिपोरजॉय' के तेज होने के कारण तटीय क्षेत्रों के निवासियों को तेजी से आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जा रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की कई टीम तैयार हैं. इसके साथ ही, सेना के अधिकारियों ने नागरिक प्रशासन और एनडीआरएफ के साथ संयुक्त रूप से राहत कार्यों की योजना बनाई है. सेना ने रणनीतिक स्थानों पर बाढ़ राहत टुकड़ियों को तैयार रखा है. चक्रवात के मद्देनजर तैयारियों का जायजा लेने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात सरकार से संवेदनशील स्थानों पर रहने वाले लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में ले जाने की व्यवस्था करने और बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य तथा पेयजल जैसी सभी आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करने को कहा. बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, दो केंद्रीय मंत्रियों, गुजरात के कई मंत्रियों और चक्रवात से प्रभावित होने की आशंका वाले आठ जिलों के सांसद, विधायक और अधिकारियों ने भाग लिया. जुलाई में खरीदना है पच्चीस हजार से कम में बेस्ट पाँचG स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
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अमेरिका में जन्मदर 112 साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट में बताया गया है कि 1979 के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है। इसका प्रमुख कारण चिंता, घबराहट और महामारी के चलते आर्थिक स्थिति में गिरावट भी है।
महिलाएं महामारी के दौरान मां बनने से बच रही हैं। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी प्रशासन और विशेषज्ञ सकते में आ गए हैं। यहां जन्मदर 1,000 महिलाओं पर 56 हो गई है, जो अब तक की सबसे कम है। अमेरिका में कुछ समय पहले फर्टिलिटी रेट 2. 1 था, जो घटकर अब 1. 6 हो चुका है।
आर्थिक विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि अमेरिका को आर्थिक बढ़त हासिल करने के लिए जनसंख्या में भी बढ़त की जरूरत है। अमेरिका को बूढ़े होते संपन्न समाज के बजाय एक ऐसा राष्ट्र बनने की जरूरत है, जिसकी जनसंख्या 100 करोड़ के करीब हो। लेकिन ऐसा करने में दूसरी तरह की भी दिक्कत आ सकती है। बच्चे पैदा करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें भोजन कहां से मिलेगा। आज दुनिया में भूख सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है। और आने वाले दशकों में भुखमरी और कुपोषण की समस्या और बढ़ेगी।
जलवायु परिवर्तन के कारण सबके लिए भोजन उपलब्ध करवाना टेढ़ी खीर साबित होगी। माना जा रहा है कि 2060 तक विश्व की जनसंख्या 970 करोड़ तक पहुंच जाएगी और इतने लोगों को भोजन उपलब्ध करवा पाना मुश्किल काम होगा। खासकर तब, जब खुद अमेरिका महामारी के दौरान भोजन संकट का शिकार हुआ था। यहां कोविड के कारण खाद्य असुरक्षा दोगुनी हो गई है। फूड बैंक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगले 30 सालों में आबादी भी 200 कराेड़ और बढ़ जाएगी।
फसलाें की अच्छी पैदावार की अपेक्षा की जा रही है पर जलवायु परिवर्तन से हुए नुकसान के आंकड़े बताते हैं कि सूखा, बाढ़, तूफान और टिड्डियाें के आक्रमण जैसी घटनाओं से पैदावार घटी है। इसलिए कम लागत में अधिक पैदावार की नई तकनीक अपनानी हाेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में आबादी के साथ खाद्यान्न की सुरक्षा एक नए संकट को जन्म दे सकती है।
वाॅशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेल्यूएशन के मुताबिक 15 से 19 के आयु वर्ग में जन्मदर साल भर में 8% घटी है। यह 1991 के बाद से लगातार घट रही है। वहीं, एशियाई-अमेरिकी महिलाओं में जन्मदर 8%, हिस्पैनिक में 3% और श्वेत महिलाओं में 6% घटी है। वहीं सिजेरियन डिलीवरी 32% बढ़ी है। पिछले साल अमेरिका में करीब 36 लाख बच्चे पैदा हुए थे। 2019 में यह करीब 38 लाख थे। 2007 में यह आंकड़ा करीब 43 लाख था।
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अमेरिका में जन्मदर एक सौ बारह साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि एक हज़ार नौ सौ उन्यासी के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है। इसका प्रमुख कारण चिंता, घबराहट और महामारी के चलते आर्थिक स्थिति में गिरावट भी है। महिलाएं महामारी के दौरान मां बनने से बच रही हैं। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी प्रशासन और विशेषज्ञ सकते में आ गए हैं। यहां जन्मदर एक,शून्य महिलाओं पर छप्पन हो गई है, जो अब तक की सबसे कम है। अमेरिका में कुछ समय पहले फर्टिलिटी रेट दो. एक था, जो घटकर अब एक. छः हो चुका है। आर्थिक विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि अमेरिका को आर्थिक बढ़त हासिल करने के लिए जनसंख्या में भी बढ़त की जरूरत है। अमेरिका को बूढ़े होते संपन्न समाज के बजाय एक ऐसा राष्ट्र बनने की जरूरत है, जिसकी जनसंख्या एक सौ करोड़ के करीब हो। लेकिन ऐसा करने में दूसरी तरह की भी दिक्कत आ सकती है। बच्चे पैदा करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें भोजन कहां से मिलेगा। आज दुनिया में भूख सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है। और आने वाले दशकों में भुखमरी और कुपोषण की समस्या और बढ़ेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण सबके लिए भोजन उपलब्ध करवाना टेढ़ी खीर साबित होगी। माना जा रहा है कि दो हज़ार साठ तक विश्व की जनसंख्या नौ सौ सत्तर करोड़ तक पहुंच जाएगी और इतने लोगों को भोजन उपलब्ध करवा पाना मुश्किल काम होगा। खासकर तब, जब खुद अमेरिका महामारी के दौरान भोजन संकट का शिकार हुआ था। यहां कोविड के कारण खाद्य असुरक्षा दोगुनी हो गई है। फूड बैंक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगले तीस सालों में आबादी भी दो सौ कराेड़ और बढ़ जाएगी। फसलाें की अच्छी पैदावार की अपेक्षा की जा रही है पर जलवायु परिवर्तन से हुए नुकसान के आंकड़े बताते हैं कि सूखा, बाढ़, तूफान और टिड्डियाें के आक्रमण जैसी घटनाओं से पैदावार घटी है। इसलिए कम लागत में अधिक पैदावार की नई तकनीक अपनानी हाेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में आबादी के साथ खाद्यान्न की सुरक्षा एक नए संकट को जन्म दे सकती है। वाॅशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवेल्यूएशन के मुताबिक पंद्रह से उन्नीस के आयु वर्ग में जन्मदर साल भर में आठ% घटी है। यह एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाद से लगातार घट रही है। वहीं, एशियाई-अमेरिकी महिलाओं में जन्मदर आठ%, हिस्पैनिक में तीन% और श्वेत महिलाओं में छः% घटी है। वहीं सिजेरियन डिलीवरी बत्तीस% बढ़ी है। पिछले साल अमेरिका में करीब छत्तीस लाख बच्चे पैदा हुए थे। दो हज़ार उन्नीस में यह करीब अड़तीस लाख थे। दो हज़ार सात में यह आंकड़ा करीब तैंतालीस लाख था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखने जा रही हैं। उनकी फ़िल्म केदारनाथ 7 दिसम्बर को सिनेमाघरों में आ रही है। फ़िल्म की कहानी एक हिन्दू तीर्थयात्री के बारे में है जो एक मुस्लिम टूरिस्ट गाइड के प्यार में पड़ जाती है।
यह फ़िल्म 2013 उत्तराखंड बाढ़ हादसे पर आधारित है। उस हादसे में लगभग 5000 लोग मारे गए थे। सारा अली खान के साथ फ़िल्म में सुशांत सिंह राजपूत भी हैं।
फ़िल्म शुक्रवार को रिलीज़ होगी पर बॉलीवुड के लिए फ़िल्म निर्माता ने एक खास स्क्रीनिंग रखी थी जहां बॉलीवुड के कई बड़े सितारे उपस्थित रहे। जाह्नवी कपूर, ईशान खट्टर, अनन्या पाण्डेय, कार्तिक आर्यन, सोहेल खान, पूजा हेगड़े, शशांक खैतान, ख़ुशी कपूर, यामी गौतम, ईशान की माँ नीलिमा अज़ीम, सुजैन खान और उनके भाई ज़ायेद खान, जावेद अख्तर, आमिर खान की पत्नी किरण राव आदि ने भी शिरकत की।
तस्वीरें यहाँ देखेंः
'केदारनाथ' सारा की पहली फ़िल्म है और उनकी दूसरी फ़िल्म भी इसी महीने रिलीज़ होने वाली है। रोहित शेट्टी की फ़िल्म 'सिम्बा' में सारा अली खान के साथ रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं।
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सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखने जा रही हैं। उनकी फ़िल्म केदारनाथ सात दिसम्बर को सिनेमाघरों में आ रही है। फ़िल्म की कहानी एक हिन्दू तीर्थयात्री के बारे में है जो एक मुस्लिम टूरिस्ट गाइड के प्यार में पड़ जाती है। यह फ़िल्म दो हज़ार तेरह उत्तराखंड बाढ़ हादसे पर आधारित है। उस हादसे में लगभग पाँच हज़ार लोग मारे गए थे। सारा अली खान के साथ फ़िल्म में सुशांत सिंह राजपूत भी हैं। फ़िल्म शुक्रवार को रिलीज़ होगी पर बॉलीवुड के लिए फ़िल्म निर्माता ने एक खास स्क्रीनिंग रखी थी जहां बॉलीवुड के कई बड़े सितारे उपस्थित रहे। जाह्नवी कपूर, ईशान खट्टर, अनन्या पाण्डेय, कार्तिक आर्यन, सोहेल खान, पूजा हेगड़े, शशांक खैतान, ख़ुशी कपूर, यामी गौतम, ईशान की माँ नीलिमा अज़ीम, सुजैन खान और उनके भाई ज़ायेद खान, जावेद अख्तर, आमिर खान की पत्नी किरण राव आदि ने भी शिरकत की। तस्वीरें यहाँ देखेंः 'केदारनाथ' सारा की पहली फ़िल्म है और उनकी दूसरी फ़िल्म भी इसी महीने रिलीज़ होने वाली है। रोहित शेट्टी की फ़िल्म 'सिम्बा' में सारा अली खान के साथ रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं।
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Zoom Human Avatars: Zoom एक ऐसी ऐप है जिसका इस्तेमाल ऑफिस के कामों, मीटिंग को करने के लिए लॉकडाउन के समय में सबसे ज्यादा किया गया था और आज भी हो रहा है।
और अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म जूम ने अपने मीटिंग ऐप में नए मानव अवतारों का ऐलान किया है, जी हां वही अवतार जो अभी तक सिर्फ WhatsApp, Instagram और Snapchat पर देखे जा सकते थे। अब Zoom पर भी आप कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान खुद के कार्टून वाले वर्जन को पेश कर सकते है। मीटिंग्स को अधिक बढ़िया और मजेदार बनाने के लिए कंपनी ने अपने फिल्टर के बॉक्स में नए अवतार जोड़े हैं।
क्या है मीटिंग टेम्प्लेट?
मीटिंग टेम्प्लेट्स से कई प्रकार की मीटिंग्स के लिए सेटिंग्स चेंज करना आसान हो जाएगा। यूजर्स कस्टम मीटिंग टेम्प्लेट बना सकते हैं और सेव कर सकते हैं, उनमें से चुन सकते हैं। रिकॉर्डिंग और कैप्शन जैसी सुविधाओं के साथ बड़ी मीटिंग के लिए मीटिंग टेम्प्लेट, कॉर्पोरेट मीटिंग के लिए सेमिनार और पोल और क्विज़ सुविधाओं के साथ K-12 हैं।
यह सुविधा अभी सभी ज़ूम यूजर्स के लिए बीटा में उपलब्ध है। कंपनी ने कहा कि जैसे ही वे बीटा में आगे बढ़ेंगे, वे आपके मानव अवतार बनाते समय अतिरिक्त चेहरे की विशेषताओं, हेयर स्टाइल और अधिक विकल्पों पर ध्यान देंगे और इसको आगे अपडेट करेंगे। इस बीच, जूम ने मीटिंग टेम्प्लेट, थ्रेडेड मैसेज और इन-मीटिंग चैट अनुभव और अन्य सुविधाओं में मीटिंग में Q&Aकी भी घोषणा की। यूजर्स अपने जूम अकाउंट के लिए अभी अवतारों को लें सकते हैं। इन अवतारों का उपयोग मीटिंग के दौरान किया जा सकता है। साथ ही आपको बता दें अवतार यूजर्स के चेहरे के भावों की नकल करेंगे।
चैट अनुभव को बढ़ाने के लिए इन-मीटिंग चैट के लिए थ्रेड मैसेज और रिएक्शन भी पेश की जा रही हैं। यह फीचर लोगों को मैसेज थ्रेड्स बनाने और साथ ही इमोजी रिएक्शन देने की अनुमति देगा।
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Zoom Human Avatars: Zoom एक ऐसी ऐप है जिसका इस्तेमाल ऑफिस के कामों, मीटिंग को करने के लिए लॉकडाउन के समय में सबसे ज्यादा किया गया था और आज भी हो रहा है। और अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म जूम ने अपने मीटिंग ऐप में नए मानव अवतारों का ऐलान किया है, जी हां वही अवतार जो अभी तक सिर्फ WhatsApp, Instagram और Snapchat पर देखे जा सकते थे। अब Zoom पर भी आप कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान खुद के कार्टून वाले वर्जन को पेश कर सकते है। मीटिंग्स को अधिक बढ़िया और मजेदार बनाने के लिए कंपनी ने अपने फिल्टर के बॉक्स में नए अवतार जोड़े हैं। क्या है मीटिंग टेम्प्लेट? मीटिंग टेम्प्लेट्स से कई प्रकार की मीटिंग्स के लिए सेटिंग्स चेंज करना आसान हो जाएगा। यूजर्स कस्टम मीटिंग टेम्प्लेट बना सकते हैं और सेव कर सकते हैं, उनमें से चुन सकते हैं। रिकॉर्डिंग और कैप्शन जैसी सुविधाओं के साथ बड़ी मीटिंग के लिए मीटिंग टेम्प्लेट, कॉर्पोरेट मीटिंग के लिए सेमिनार और पोल और क्विज़ सुविधाओं के साथ K-बारह हैं। यह सुविधा अभी सभी ज़ूम यूजर्स के लिए बीटा में उपलब्ध है। कंपनी ने कहा कि जैसे ही वे बीटा में आगे बढ़ेंगे, वे आपके मानव अवतार बनाते समय अतिरिक्त चेहरे की विशेषताओं, हेयर स्टाइल और अधिक विकल्पों पर ध्यान देंगे और इसको आगे अपडेट करेंगे। इस बीच, जूम ने मीटिंग टेम्प्लेट, थ्रेडेड मैसेज और इन-मीटिंग चैट अनुभव और अन्य सुविधाओं में मीटिंग में Q&Aकी भी घोषणा की। यूजर्स अपने जूम अकाउंट के लिए अभी अवतारों को लें सकते हैं। इन अवतारों का उपयोग मीटिंग के दौरान किया जा सकता है। साथ ही आपको बता दें अवतार यूजर्स के चेहरे के भावों की नकल करेंगे। चैट अनुभव को बढ़ाने के लिए इन-मीटिंग चैट के लिए थ्रेड मैसेज और रिएक्शन भी पेश की जा रही हैं। यह फीचर लोगों को मैसेज थ्रेड्स बनाने और साथ ही इमोजी रिएक्शन देने की अनुमति देगा।
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खेल में चोट लगना आम बात है। चोट लगने पर चोटिल खिलाड़ी की एवज में स्थानापन्न के रूप में दूसरे खिलाड़ी के उतरने का नियम तो है, लेकिन विकेटकीपर के चोटिल होने पर उसकी बजाय दूसरा विकेटकीपर नहीं उतर सकता, ऐसे में अगर किसी विकेटकीपर को चोट लग जाये, तो टीम के प्लेइंग इलेवन में से ही किसी को ये भूमिका निभानी पड़ती है।
दरअसल ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट की शेफिल्ड शील्ड में विक्टोरिया के विकेटकीपर सैम हार्पर को विकेटकीपिंग करते समय बल्लेबाज के शॉट खेलने के दौरान बल्लेबाज का बल्ला उनके मुंह पर जा लगा, जिसके बाद हार्पर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस वाकये के बाद वेड ने कहा कि आईसीसी को विकेटकीपर के स्थानापन्न के नियम के बारे में सोचना चाहिए।
हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई टी-20 कोच जस्टिन लैंगर ने भी कहा था, कि क्रिकेट प्रशासको को चोटिल खिलाड़ी के तौर पर दूसरा खिलाड़ी देना चाहिए जो गेंद और बल्ले से भी अपना योगदान दे सके।
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खेल में चोट लगना आम बात है। चोट लगने पर चोटिल खिलाड़ी की एवज में स्थानापन्न के रूप में दूसरे खिलाड़ी के उतरने का नियम तो है, लेकिन विकेटकीपर के चोटिल होने पर उसकी बजाय दूसरा विकेटकीपर नहीं उतर सकता, ऐसे में अगर किसी विकेटकीपर को चोट लग जाये, तो टीम के प्लेइंग इलेवन में से ही किसी को ये भूमिका निभानी पड़ती है। दरअसल ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट की शेफिल्ड शील्ड में विक्टोरिया के विकेटकीपर सैम हार्पर को विकेटकीपिंग करते समय बल्लेबाज के शॉट खेलने के दौरान बल्लेबाज का बल्ला उनके मुंह पर जा लगा, जिसके बाद हार्पर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस वाकये के बाद वेड ने कहा कि आईसीसी को विकेटकीपर के स्थानापन्न के नियम के बारे में सोचना चाहिए। हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई टी-बीस कोच जस्टिन लैंगर ने भी कहा था, कि क्रिकेट प्रशासको को चोटिल खिलाड़ी के तौर पर दूसरा खिलाड़ी देना चाहिए जो गेंद और बल्ले से भी अपना योगदान दे सके।
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जिले में पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के बचाव के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने का भी काम इस अभियान के माध्यम से किया जा रहा है। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने महलई गांव में पहुंचकर स्वच्छता अभियान का निरीक्षण किया।
गांव में सफाई कर्मियों की टोली के माध्यम से सफाई कार्य चल रहा था। डीपीआरओ ने निर्देश दिए कि नियमित रूप से साफ सफाई होनी चाहिए। किसी भी तरह से जल जमाव न होने पाए। यहां की निगरानी समिति के सदस्यों से कहा कि घर घर जाकर खांसी, बुखार और जुखाम के मरीजों की पहचान करें और उन्हें मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। डीपीआरओ ने कहा कि ग्रामीण स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान दें। इस बीच विधायक सुनीलदत्त द्विवेदी ने भी निगरानी समिति की बैठक में हिस्सा लिया।
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जिले में पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। संगठन के बचाव के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने का भी काम इस अभियान के माध्यम से किया जा रहा है। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने महलई गांव में पहुंचकर स्वच्छता अभियान का निरीक्षण किया। गांव में सफाई कर्मियों की टोली के माध्यम से सफाई कार्य चल रहा था। डीपीआरओ ने निर्देश दिए कि नियमित रूप से साफ सफाई होनी चाहिए। किसी भी तरह से जल जमाव न होने पाए। यहां की निगरानी समिति के सदस्यों से कहा कि घर घर जाकर खांसी, बुखार और जुखाम के मरीजों की पहचान करें और उन्हें मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। डीपीआरओ ने कहा कि ग्रामीण स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान दें। इस बीच विधायक सुनीलदत्त द्विवेदी ने भी निगरानी समिति की बैठक में हिस्सा लिया।
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस सप्ताह के अंत में कम उम्मीदों के साथ बीजिंग के लिए उड़ान भरते हैं कि वह अमेरिका और चीन के बीच विवादों की लंबी सूची पर आगे बढ़ेंगे।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस सप्ताह के अंत में कम उम्मीदों के साथ बीजिंग के लिए उड़ान भरते हैं कि वह अमेरिका और चीन के बीच विवादों की लंबी सूची पर आगे बढ़ेंगे। लेकिन वह और उनके चीनी समकक्ष कम से कम एक चीज हासिल कर सकते हैं, विश्लेषकों का कहना है - यह दिखाएं कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध पटरी से उतरने वाला नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि ब्लिंकन 18-19 जून को चीन में बैठकें करेंगी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकती हैं। जनवरी 2021 में बाइडेन के पदभार ग्रहण करने के बाद से वह चीन का दौरा करने वाले सर्वोच्च पद के अमेरिकी सरकारी अधिकारी होंगे।
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस सप्ताह के अंत में कम उम्मीदों के साथ बीजिंग के लिए उड़ान भरते हैं कि वह अमेरिका और चीन के बीच विवादों की लंबी सूची पर आगे बढ़ेंगे। जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस सप्ताह के अंत में कम उम्मीदों के साथ बीजिंग के लिए उड़ान भरते हैं कि वह अमेरिका और चीन के बीच विवादों की लंबी सूची पर आगे बढ़ेंगे। लेकिन वह और उनके चीनी समकक्ष कम से कम एक चीज हासिल कर सकते हैं, विश्लेषकों का कहना है - यह दिखाएं कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध पटरी से उतरने वाला नहीं है। सूत्रों ने कहा कि ब्लिंकन अट्ठारह-उन्नीस जून को चीन में बैठकें करेंगी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकती हैं। जनवरी दो हज़ार इक्कीस में बाइडेन के पदभार ग्रहण करने के बाद से वह चीन का दौरा करने वाले सर्वोच्च पद के अमेरिकी सरकारी अधिकारी होंगे।
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सोशल मीडियाः इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जंगली छिपकली और तेंदुए की लड़ाई है. वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे छिपकली तेंदुए के हमले से अपना बचाव करने की जुगाड़ कर रही है. इसके लिए छिपकली तेंदुए को दूर भगाने का प्रयास करती है. तेंदुआ भी अपना शिकार करने के लिए हर हरबे अपनाता है मगर आखिर कब तक.
कहां का है वायरल वीडियो ?
2018 का ये वीडियो IFS ऑफिसर परवीन कासवान ने 5 जनवरी की सुबह ट्वीट किया. उसके बाद वीडियो देखने वालों की संख्या में लगातार इजाफा ही हो रहा है. लोग इस वीडियो को बड़े ही चाव और उत्सुकता से देख रहे हैं. एक विदेशी अखबार के मुताबिक, वीडियो फुटेज जाम्बिया के कैंगयू सफारी लॉज का है. जिसमें शावक तेंदुआ और मॉनिटर छिपकली के बीच जंग जैसा माहौल बन गया है. तेंदुआ शिकार करने के लिए छिपकली की तरफ आगे बढ़ता है. मगर उसके हमले से बचने के लिए छिपकली अपनी दुम को ढाल बना लेती है. हालांकि थोड़ी दूर पर एक अन्य तेंदुआ भी खड़ा लड़ाई का दिलचस्प मंजर देख रहा है. मगर दोनों के बीच में पड़ने के बजाय दूर खड़े रहकर ही तमाशा देखने में भलाई समझता है.
छिपकली और तेंदुए की जंग में कौन जीता ?
तेंदुआ जब छिपकली पर हमला करता है तो छिपकली उसे अपनी दुम से भगाती है. कई बार की कोशिश के बाद छिपकली की हिम्मत आखिरकार जवाब दे जाती है. अपने आगे शक्तिशाली तेंदुए के आगे अपने वजूद को बचाने की खातिर छिपकली संघर्ष करती है. मगर आखिरकार उसका संघर्ष बहुत देर तक नहीं चलता औऱ और तेंदुआ अपने शिकार को जंगल की ओर लेकर चल पड़ता है.
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सोशल मीडियाः इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जंगली छिपकली और तेंदुए की लड़ाई है. वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे छिपकली तेंदुए के हमले से अपना बचाव करने की जुगाड़ कर रही है. इसके लिए छिपकली तेंदुए को दूर भगाने का प्रयास करती है. तेंदुआ भी अपना शिकार करने के लिए हर हरबे अपनाता है मगर आखिर कब तक. कहां का है वायरल वीडियो ? दो हज़ार अट्ठारह का ये वीडियो IFS ऑफिसर परवीन कासवान ने पाँच जनवरी की सुबह ट्वीट किया. उसके बाद वीडियो देखने वालों की संख्या में लगातार इजाफा ही हो रहा है. लोग इस वीडियो को बड़े ही चाव और उत्सुकता से देख रहे हैं. एक विदेशी अखबार के मुताबिक, वीडियो फुटेज जाम्बिया के कैंगयू सफारी लॉज का है. जिसमें शावक तेंदुआ और मॉनिटर छिपकली के बीच जंग जैसा माहौल बन गया है. तेंदुआ शिकार करने के लिए छिपकली की तरफ आगे बढ़ता है. मगर उसके हमले से बचने के लिए छिपकली अपनी दुम को ढाल बना लेती है. हालांकि थोड़ी दूर पर एक अन्य तेंदुआ भी खड़ा लड़ाई का दिलचस्प मंजर देख रहा है. मगर दोनों के बीच में पड़ने के बजाय दूर खड़े रहकर ही तमाशा देखने में भलाई समझता है. छिपकली और तेंदुए की जंग में कौन जीता ? तेंदुआ जब छिपकली पर हमला करता है तो छिपकली उसे अपनी दुम से भगाती है. कई बार की कोशिश के बाद छिपकली की हिम्मत आखिरकार जवाब दे जाती है. अपने आगे शक्तिशाली तेंदुए के आगे अपने वजूद को बचाने की खातिर छिपकली संघर्ष करती है. मगर आखिरकार उसका संघर्ष बहुत देर तक नहीं चलता औऱ और तेंदुआ अपने शिकार को जंगल की ओर लेकर चल पड़ता है.
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बीबीसी के अध्यक्ष ने इस्तीफ़ा क्यों दिया, सरकार के लिए क्यों मुसीबत बना है यह मुद्दा?
ब्रिटेन की राजशाही व्यवस्था के अधीन काम करने वाली ब्रिटिश न्यूज़ संस्था ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन बीबीसी एक बार फिर अपने अध्यक्ष के इस्तीफ़े के बाद चर्चा में है।
बीबीसी के अध्यक्ष पर पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिए ऋण की व्यवस्था करने में नियमों को ताक़ पर रखने का दोषी पाया गया जिसके बाद बीबीसी के अध्यक्ष रिचर्ड शार्प ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफ़ा देने का एलान कर दिया थ।
फ़्रांसीसी समाचार एजेन्सी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार शार्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि अगर वह अपने कार्यकाल के अंत तक इस पद पर बने रहते तो यह मामला उनकी संस्था के अच्छे कामों से ध्यान भटकाने वाला हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि शार्प ने अपनी भागीदारी को सामने न लाकर सार्वजनिक नियुक्तियों के लिए शासन संहिता का उल्लंघन किया। शार्प ने दावा किया है कि यह उल्लंघन उनसे अनजाने में हुआ था।
बीबीसी के वर्तमान अध्यक्ष ने पहले स्वीकार किया था कि उन्होंने देश के सबसे वरिष्ठ सिविल सेवक, कैबिनेट सचिव साइमन केस और मिस्टर जॉनसन के दूर के चचेरे भाई सैम बेलीथ के बीच एक बैठक आयोजित कराई थी जिन्होंने 2020 के अंत में तत्कालीन पीएम को वित्तीय सहायता प्रदान करने की पेशकश की थी।
उस बैठक के समय शार्प ने पहले ही बीबीसी की नौकरी के लिए आवेदन कर दिया था। जांच में पाया गया कि वह दो संभावित हितों के टकराव को सामने लाने में विफल रहे हैं, पहला उस समय के मौजूदा प्रधानमंत्री जॉनसन को यह बताकर कि वह ऐसा करने से पहले बीबीसी की नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते थे, और दूसरा पीएम को बताकर उन्होंने मिस्टर ब्लीथ और मिस्टर केस के बीच एक बैठक आयोजित करने का इरादा किया। (AK)
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बीबीसी के अध्यक्ष ने इस्तीफ़ा क्यों दिया, सरकार के लिए क्यों मुसीबत बना है यह मुद्दा? ब्रिटेन की राजशाही व्यवस्था के अधीन काम करने वाली ब्रिटिश न्यूज़ संस्था ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन बीबीसी एक बार फिर अपने अध्यक्ष के इस्तीफ़े के बाद चर्चा में है। बीबीसी के अध्यक्ष पर पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिए ऋण की व्यवस्था करने में नियमों को ताक़ पर रखने का दोषी पाया गया जिसके बाद बीबीसी के अध्यक्ष रिचर्ड शार्प ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफ़ा देने का एलान कर दिया थ। फ़्रांसीसी समाचार एजेन्सी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार शार्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि अगर वह अपने कार्यकाल के अंत तक इस पद पर बने रहते तो यह मामला उनकी संस्था के अच्छे कामों से ध्यान भटकाने वाला हो सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शार्प ने अपनी भागीदारी को सामने न लाकर सार्वजनिक नियुक्तियों के लिए शासन संहिता का उल्लंघन किया। शार्प ने दावा किया है कि यह उल्लंघन उनसे अनजाने में हुआ था। बीबीसी के वर्तमान अध्यक्ष ने पहले स्वीकार किया था कि उन्होंने देश के सबसे वरिष्ठ सिविल सेवक, कैबिनेट सचिव साइमन केस और मिस्टर जॉनसन के दूर के चचेरे भाई सैम बेलीथ के बीच एक बैठक आयोजित कराई थी जिन्होंने दो हज़ार बीस के अंत में तत्कालीन पीएम को वित्तीय सहायता प्रदान करने की पेशकश की थी। उस बैठक के समय शार्प ने पहले ही बीबीसी की नौकरी के लिए आवेदन कर दिया था। जांच में पाया गया कि वह दो संभावित हितों के टकराव को सामने लाने में विफल रहे हैं, पहला उस समय के मौजूदा प्रधानमंत्री जॉनसन को यह बताकर कि वह ऐसा करने से पहले बीबीसी की नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते थे, और दूसरा पीएम को बताकर उन्होंने मिस्टर ब्लीथ और मिस्टर केस के बीच एक बैठक आयोजित करने का इरादा किया। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
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तापसी (29) का कहना है कि 73 वर्षीय अभिनेता अमिताभ के साथ काम करने से उन्हें एक नई ऊंचाई मिली है। 'पिंक' के बारे में बात करते हुए फिल्म 'बेबी' की अभिनेत्री का कहना है कि यह फिल्म दुष्कर्म के बारे में नहीं है। यह वास्तविक जीवन की घटनाओं और अनुसंधान पर आधारित है। अदालत में यौन छेड़छाड़ के कई मामले हैं, यह किसी खास मामले पर आधारित नहीं है। अनिरुद्ध रॉय चौधरी निर्देशित 'पिंक' दिल्ली की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में अमिताभ बच्चन वकील की भूमिका में हैं। शुजीत सरकार द्वारा सह-निर्मित यह फिल्म 16 सितंबर को रिलीज होने के लिए तैयार है।
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तापसी का कहना है कि तिहत्तर वर्षीय अभिनेता अमिताभ के साथ काम करने से उन्हें एक नई ऊंचाई मिली है। 'पिंक' के बारे में बात करते हुए फिल्म 'बेबी' की अभिनेत्री का कहना है कि यह फिल्म दुष्कर्म के बारे में नहीं है। यह वास्तविक जीवन की घटनाओं और अनुसंधान पर आधारित है। अदालत में यौन छेड़छाड़ के कई मामले हैं, यह किसी खास मामले पर आधारित नहीं है। अनिरुद्ध रॉय चौधरी निर्देशित 'पिंक' दिल्ली की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में अमिताभ बच्चन वकील की भूमिका में हैं। शुजीत सरकार द्वारा सह-निर्मित यह फिल्म सोलह सितंबर को रिलीज होने के लिए तैयार है।
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पुलिस अधीक्षक आर. पी. सिंह ने पुलिस लाइन में क्राइम मीटिंग के दौरान जिले के थानेदारों और पुलिस कर्मियों को सख्त हिदायत दी। एसपी ने कहा कि शासन की मंशा के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने थानेदारों को जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करने के भी निर्देश दिये।
महराजगंजः पुलिस अधीक्षक आर. पी. सिंह ने पुलिस लाइन में जिले के थानेदारों समेत अपने सभी मातहतों के साथ क्राइम मीटिंग में पुलिस कर्मियों को कई सख्त हिदायतें दीं। खचाखच भरे हाल में एसपी के कड़क तेवरों से थानेदारों के पसीने छुटने लगे। मीटिंग के दौरान एसपी ने कहा कि शासन की मंशा के खिलाफ काम करने वाले थानेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। कप्तान ने महिला थाने की थानेदार की कायदे से खबर ली। उन्होंने सभी थानेदारों को जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करने की भी हिदायत दी।
एक अच्छी बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक ने मीटिंग में सभी थानेदारों से उनकी परेशानियों को भी जाना उन्होंने कई लंबित मामलों में संबंधित थानेदारों से कार्य प्रगति की रिपोर्ट भी मांगी।
एसपी ने कहा कि त्योहारों के बाद सबके सामने निकाय चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी है। चुनाव को शांति पूर्वक और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराना सबकी पहली प्राथमिकता होगी। इस मीटिंग में सीओ सदर मुकेश प्रताप सिंह, एलआईयू इंस्पेक्टर ओपी सिंह समेत सभी थानेदार मौजूद रहे।
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पुलिस अधीक्षक आर. पी. सिंह ने पुलिस लाइन में क्राइम मीटिंग के दौरान जिले के थानेदारों और पुलिस कर्मियों को सख्त हिदायत दी। एसपी ने कहा कि शासन की मंशा के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने थानेदारों को जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करने के भी निर्देश दिये। महराजगंजः पुलिस अधीक्षक आर. पी. सिंह ने पुलिस लाइन में जिले के थानेदारों समेत अपने सभी मातहतों के साथ क्राइम मीटिंग में पुलिस कर्मियों को कई सख्त हिदायतें दीं। खचाखच भरे हाल में एसपी के कड़क तेवरों से थानेदारों के पसीने छुटने लगे। मीटिंग के दौरान एसपी ने कहा कि शासन की मंशा के खिलाफ काम करने वाले थानेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। कप्तान ने महिला थाने की थानेदार की कायदे से खबर ली। उन्होंने सभी थानेदारों को जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करने की भी हिदायत दी। एक अच्छी बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक ने मीटिंग में सभी थानेदारों से उनकी परेशानियों को भी जाना उन्होंने कई लंबित मामलों में संबंधित थानेदारों से कार्य प्रगति की रिपोर्ट भी मांगी। एसपी ने कहा कि त्योहारों के बाद सबके सामने निकाय चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी है। चुनाव को शांति पूर्वक और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराना सबकी पहली प्राथमिकता होगी। इस मीटिंग में सीओ सदर मुकेश प्रताप सिंह, एलआईयू इंस्पेक्टर ओपी सिंह समेत सभी थानेदार मौजूद रहे।
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हालाँकि, यह उल्लेख किया गया है कि इस जैव के कार्यान्वयन में निम्नलिखित दस नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
हैदराबादः तेलंगाना में सरकार ने व्यापारियों के लिए खुशखबरी दी है. राज्य में सभी दुकानों और व्यावसायिक परिसरों को 24 घंटे खुले रहने की अनुमति दी गई है। इसको लेकर श्रम विभाग की विशेष मुख्य सचिव रानी कुमुदिनी ने एक जियो जारी किया है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम 1988 में तदनुसार संशोधन किए गए हैं।
बताया जाता है कि दुकान को 24 घंटे खुला रखने के लिए सरकार को प्रति वर्ष 10 हजार रुपये शुल्क देना पड़ता है। श्रम विभाग के आयुक्त को इस संबंध में उचित उपाय करने का आदेश दिया गया है। हालाँकि, यह उल्लेख किया गया है कि इस जैव के कार्यान्वयन में निम्नलिखित दस नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
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हालाँकि, यह उल्लेख किया गया है कि इस जैव के कार्यान्वयन में निम्नलिखित दस नियमों का पालन किया जाना चाहिए। हैदराबादः तेलंगाना में सरकार ने व्यापारियों के लिए खुशखबरी दी है. राज्य में सभी दुकानों और व्यावसायिक परिसरों को चौबीस घंटाटे खुले रहने की अनुमति दी गई है। इसको लेकर श्रम विभाग की विशेष मुख्य सचिव रानी कुमुदिनी ने एक जियो जारी किया है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम एक हज़ार नौ सौ अठासी में तदनुसार संशोधन किए गए हैं। बताया जाता है कि दुकान को चौबीस घंटाटे खुला रखने के लिए सरकार को प्रति वर्ष दस हजार रुपये शुल्क देना पड़ता है। श्रम विभाग के आयुक्त को इस संबंध में उचित उपाय करने का आदेश दिया गया है। हालाँकि, यह उल्लेख किया गया है कि इस जैव के कार्यान्वयन में निम्नलिखित दस नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
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मुंबई, (आईएएनएस)। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' को लेकर मचे बवाल के बाद प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया है कि श्री राजपूत सभा के साथ इससे संबंधित गलतफहमी दूर कर ली गई है।
इस संबंध में जारी बयान के मुताबिक, "भंसाली प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की सीईओ शोभा संत और एसोसिएट प्रोड्यूसर चेतन देवलेकर सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर में श्री राजपूत सभा के तहत समाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट की।"
भंसाली प्रोडक्शंस की ओर जारी बयान के अनुसार, "फिल्म की सामग्री को लेकर उन्हें जो गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई रोमांटिक दृश्य, गाना या ड्रीम सीक्वेंस नहीं है।"
फिल्म में अभिनेता रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में हैं।उल्लेखनीय है कि श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पिछले सप्ताह फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया था और जयपुर के जयगढ़ किले में 'पद्मावती' की शूटिंग कर रही टीम के साथ अभद्रता की थी। इस दौरान फिल्मकार संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट भी हुई थी। करणी सेना के सदस्यों ने सेट पर कैमरा और फिल्म निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य उपकरणों को भी तोड़ दिया था।
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मुंबई, । संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' को लेकर मचे बवाल के बाद प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया है कि श्री राजपूत सभा के साथ इससे संबंधित गलतफहमी दूर कर ली गई है। इस संबंध में जारी बयान के मुताबिक, "भंसाली प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की सीईओ शोभा संत और एसोसिएट प्रोड्यूसर चेतन देवलेकर सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर में श्री राजपूत सभा के तहत समाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट की।" भंसाली प्रोडक्शंस की ओर जारी बयान के अनुसार, "फिल्म की सामग्री को लेकर उन्हें जो गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई रोमांटिक दृश्य, गाना या ड्रीम सीक्वेंस नहीं है।" फिल्म में अभिनेता रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में हैं।उल्लेखनीय है कि श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पिछले सप्ताह फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया था और जयपुर के जयगढ़ किले में 'पद्मावती' की शूटिंग कर रही टीम के साथ अभद्रता की थी। इस दौरान फिल्मकार संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट भी हुई थी। करणी सेना के सदस्यों ने सेट पर कैमरा और फिल्म निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य उपकरणों को भी तोड़ दिया था।
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सोनीपत, 21 जुलाई (निस)
कुंडली बॉर्डर पर धरनारत किसानों से एक तरफ का रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने आसपास के करीब 30 गांवों के सहयोग से पैदल मार्च निकाला। पुलिस ने रास्ते में ही पैदल मार्च को रोक दिया और आश्वासन देकर वापस लौटा दिया। मंच के सदस्यों ने सरकार व प्रशासन को अब एक माह का अल्टीमेटम दिया है। गुस्साए लोगों ने कहा कि पिछले आठ महीने से वो बेवजह फीस रहे हैं। उनकी रोजगार खत्म हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों से जल्द से जल्द रास्ता खोलने की मांग की। कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर किसान कुंडली व सिंघु बॉर्डर समेत दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। कुंडली बॉर्डर बंद होने से आसपास के करीब 30 से ज्यादा गांव प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में दिल्ली आवागमन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर एक तरफ का मार्ग खुलवाने की मांग को लेकर राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर रास्ता खुलवाने का अभियान छेड़ा हुआ है। पिछले दिनों महापंचायत से भी बात नहीं बनी तो 21 जुलाई को मंच ने सिंघु बॉर्डर तक पैदल मार्च का निर्णय लिया था। ग्रामीणों, प्रतिष्ठानों के संचालक और दुकानदारों ने राजीव गांधी एजुकेशन सिटी से लेकर केएमपी -केजीपी के जीरो प्वाइंट से पैदल मार्च शुरू किया और सिंघु बॉर्डर तक जाने की बात कही। वहीं भारी संख्या में कुंडली बॉर्डर से उठकर किसान भी केएमपी-केजीपी के जीरो प्वाइंट पर जुट गए। किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन पैदल मार्च को किसानों के धरने तक जाने से रोकने के लिए व्यापक प्रबंध किए थे। केएमपी से पहले 3 जगह बेरिकेड्स लगाए गए व आरएएफ के जवानों समेत भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। ऐसे में पुलिस ने पैदल मार्च को बीसवां मील से ठीक पहले ही रोक दिया और लोगों को वापस लौटा दिया।
राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के अध्यक्ष हेमंत नांदल ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कानून व्यवस्था एवं टकराव की स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन द्वारा पैदल मार्च में आने वाले लोगों पर सख्ती की गई, जिससे लोगों में डर पैदा किया गया। साथ ही पैदल मार्च को भारी पुलिस संख्या बल द्वारा बीसवां मील चौक से पहले ही रोक दिया गया। हेमंत नांदल ने कहा कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर वे वापस लौट रहे हैं। वे एक माह इंतजार करेंगे। यदि एक तरफ का रास्ता नहीं खुलवाया गया तो वे आसपास के सभी गांवों के मुख्य मार्ग बंद करने का निर्णय ले सकते हैं।
सिंघु बॉर्डर पिछले 8 महीने से बंद है। इसके चलते सोनीपत के 35 से अधिक गांव, उद्योग और दुकानें बंद पड़ी है। जिस कारण हजारों लोगों की रोजी रोटी पर असर पड़ रहा है। प्रभावित लोगों ने कहा कि उनके भूखे मरने की नौबत आ गई है। किसानों और सरकार की लड़ाई में वो बेवजह फीस रहे हैं।
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सोनीपत, इक्कीस जुलाई कुंडली बॉर्डर पर धरनारत किसानों से एक तरफ का रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने आसपास के करीब तीस गांवों के सहयोग से पैदल मार्च निकाला। पुलिस ने रास्ते में ही पैदल मार्च को रोक दिया और आश्वासन देकर वापस लौटा दिया। मंच के सदस्यों ने सरकार व प्रशासन को अब एक माह का अल्टीमेटम दिया है। गुस्साए लोगों ने कहा कि पिछले आठ महीने से वो बेवजह फीस रहे हैं। उनकी रोजगार खत्म हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों से जल्द से जल्द रास्ता खोलने की मांग की। कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर किसान कुंडली व सिंघु बॉर्डर समेत दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। कुंडली बॉर्डर बंद होने से आसपास के करीब तीस से ज्यादा गांव प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में दिल्ली आवागमन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-चौंतालीस पर एक तरफ का मार्ग खुलवाने की मांग को लेकर राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर रास्ता खुलवाने का अभियान छेड़ा हुआ है। पिछले दिनों महापंचायत से भी बात नहीं बनी तो इक्कीस जुलाई को मंच ने सिंघु बॉर्डर तक पैदल मार्च का निर्णय लिया था। ग्रामीणों, प्रतिष्ठानों के संचालक और दुकानदारों ने राजीव गांधी एजुकेशन सिटी से लेकर केएमपी -केजीपी के जीरो प्वाइंट से पैदल मार्च शुरू किया और सिंघु बॉर्डर तक जाने की बात कही। वहीं भारी संख्या में कुंडली बॉर्डर से उठकर किसान भी केएमपी-केजीपी के जीरो प्वाइंट पर जुट गए। किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन पैदल मार्च को किसानों के धरने तक जाने से रोकने के लिए व्यापक प्रबंध किए थे। केएमपी से पहले तीन जगह बेरिकेड्स लगाए गए व आरएएफ के जवानों समेत भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया। ऐसे में पुलिस ने पैदल मार्च को बीसवां मील से ठीक पहले ही रोक दिया और लोगों को वापस लौटा दिया। राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के अध्यक्ष हेमंत नांदल ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कानून व्यवस्था एवं टकराव की स्थिति का हवाला देते हुए प्रशासन द्वारा पैदल मार्च में आने वाले लोगों पर सख्ती की गई, जिससे लोगों में डर पैदा किया गया। साथ ही पैदल मार्च को भारी पुलिस संख्या बल द्वारा बीसवां मील चौक से पहले ही रोक दिया गया। हेमंत नांदल ने कहा कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर वे वापस लौट रहे हैं। वे एक माह इंतजार करेंगे। यदि एक तरफ का रास्ता नहीं खुलवाया गया तो वे आसपास के सभी गांवों के मुख्य मार्ग बंद करने का निर्णय ले सकते हैं। सिंघु बॉर्डर पिछले आठ महीने से बंद है। इसके चलते सोनीपत के पैंतीस से अधिक गांव, उद्योग और दुकानें बंद पड़ी है। जिस कारण हजारों लोगों की रोजी रोटी पर असर पड़ रहा है। प्रभावित लोगों ने कहा कि उनके भूखे मरने की नौबत आ गई है। किसानों और सरकार की लड़ाई में वो बेवजह फीस रहे हैं।
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मनेन्द्रगढ़, एसके मिनोचा। CG News बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत यदि कोई व्यस्क व्यक्ति बाल विवाह करता है, बाल विवाह में सहायक होता है या इसकी अनुमति देता है या प्रोत्साहित करता है तो उसे दो वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये का दंड या दोनों का प्रावधान है।
शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में बाल विवाह की जानकारी देते हुए व्यवहार न्यायाधीश भगवान दास पनिका ने बताया कि बाल विवाह गैरकानूनी तो है ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी हानिकारक है। शिविर में राजनीति विभाग के सहायक प्राध्यापक अतुल वर्मा ने कहा कि ग्रामीण समाज में अक्सर अंधविश्वास या द्वेष के कारण महिलाओं को टोनही घोषित कर प्रताड़ित किया जाता है।
इस लिए टोनही प्रताड़ना अधिनियम बनाया गया इसके अंतर्गत टोनही की पहचान करने वाले को तीन साल की सजा और आर्थिक दण्ड का प्रवाधान है। इसके अलावा वर्मा द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, दहेज़ प्रथा निवारण अधिनियम, लिंग परीक्षण प्रतिषेध अधिनियम तथा मोटरवाहन अधिनियम के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस दौरान महाविद्यालय की छात्रा निहारिका तिवारी द्वारा प्रश्न भी पूछे गये जिनका समाधान व्यवहार न्यायाधीश के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक अतुल कुमार वर्मा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ अवनीश कुमार वर्मा, हिंदी के सहायक प्राध्यापक महावीर पैकरा, वाणिज्य के सहायक प्राध्यापक बीएल सोनवानी, भूगोल के सहायक प्राध्यापक परमानन्द अतिथि, वनस्पति विज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ इफरा जूमी, व्याख्याता अर्थशास्त्र राजेश कुर्रे के साथ प्रयोगशाला तकनीशियन महरोज बेगम और कम्प्यूटर आपरेटर राजाराम सिंह परस्ते समेत बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
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मनेन्द्रगढ़, एसके मिनोचा। CG News बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत यदि कोई व्यस्क व्यक्ति बाल विवाह करता है, बाल विवाह में सहायक होता है या इसकी अनुमति देता है या प्रोत्साहित करता है तो उसे दो वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये का दंड या दोनों का प्रावधान है। शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में बाल विवाह की जानकारी देते हुए व्यवहार न्यायाधीश भगवान दास पनिका ने बताया कि बाल विवाह गैरकानूनी तो है ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी हानिकारक है। शिविर में राजनीति विभाग के सहायक प्राध्यापक अतुल वर्मा ने कहा कि ग्रामीण समाज में अक्सर अंधविश्वास या द्वेष के कारण महिलाओं को टोनही घोषित कर प्रताड़ित किया जाता है। इस लिए टोनही प्रताड़ना अधिनियम बनाया गया इसके अंतर्गत टोनही की पहचान करने वाले को तीन साल की सजा और आर्थिक दण्ड का प्रवाधान है। इसके अलावा वर्मा द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, दहेज़ प्रथा निवारण अधिनियम, लिंग परीक्षण प्रतिषेध अधिनियम तथा मोटरवाहन अधिनियम के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस दौरान महाविद्यालय की छात्रा निहारिका तिवारी द्वारा प्रश्न भी पूछे गये जिनका समाधान व्यवहार न्यायाधीश के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक अतुल कुमार वर्मा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रसायन विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ अवनीश कुमार वर्मा, हिंदी के सहायक प्राध्यापक महावीर पैकरा, वाणिज्य के सहायक प्राध्यापक बीएल सोनवानी, भूगोल के सहायक प्राध्यापक परमानन्द अतिथि, वनस्पति विज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ इफरा जूमी, व्याख्याता अर्थशास्त्र राजेश कुर्रे के साथ प्रयोगशाला तकनीशियन महरोज बेगम और कम्प्यूटर आपरेटर राजाराम सिंह परस्ते समेत बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
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आईपीएल के इस सीजन में उत्तर प्रदेश के 19 साल के युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी ने अपनी एक अलग ही छाप छोड़ी। भारतीय अंडर-19 के स्टार तेज गेंदबाज शिवम मावी को इस आईपीएल सीजन में शाहरूख खान की स्वामित्व वाली कोलकाता नाइट राईडर्स की टीम ने अपना हिस्सा बनाया था।
इस सीजन में शिवम मावी को दिनेश कार्तिक की कप्तानी में कई मैच खेलने का मौका मिला। शिवम ने इस सीजन में खेले 9 मैचों में 5 विकेट ही ले सके लेकि इन्होंने अपनी गेंदबाजी में खास प्रभाव छोड़ा। शिवम मावी ने इनयूथ डॉट कॉम के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की जिसमें उन्होंने अपने आईपीएल अनुभव को साझा किया।
सवाल- आपका आईपीएल एक्सपिरिएंस कैसा रहा?
जवाब- मेरे लिए ये एक शानदार रहा। एक ऑलराउंडर होने के नाते मैंने अपने सीनियर खिलाड़ियों से और अनुभवी खिलाड़ियों जैसे मेरे कोच जैक कालिस, मिचेल जॉनसन, और दूसरों से बहुत कुछ सीखा।
सवाल- आपके डेब्यू पर 15वां ओवर किसने दिया और क्यों?
जवाब- सनराईजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच से पहले टीम मीटिंग में ये फैसला हुआ था, कि मैं पहला ओवर करूंगा, फिर बीच में कहीं भी और बाकी बचे दो ओवर अंत में करूंगा। मैं इसके लिए तैयार था। लेकिन मैं योजना को अनुसार नहीं जा सका। मुझे 15वां ओवर दिया गया। उस समय मैं बहुत नर्वस था। एक या दो गेंद बाद मैंने खुद को ठंडा कर दिया। मेरे पहले ओवर के बाद मैं आत्मविश्वास में आ गया। मैं एक और कर सकता था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
सवाल- दूसरे आईपीएल मैच में गौतम गंभीर को बोल्ड आउट करना। कैसी प्रतिक्रिया रही?
जवाब- ये अद्भुत था। (हंसते हुए) वास्तव में टी-20 क्रिकेट में आप बल्लेबाजों की कमजोरी पर काम करते हैं और हमारी योजना भी उसी अनुसार रहती है। और मैं गेंद उसी तरह योजना के अनुसार गेंदबाजी की और मुझे विकेट मिली।
सवाल- दिनेश कार्तिक कप्तान के तौर पर कैसे हैं?
जवाब- ये पहली बार है जब वो आईपीएल में किसी टीम की कप्तानी कर रहे थे और ये मेरा भी पहला सीजन था। मैंने उनके अंडर में खेलने का आनंद उठाया। मुझे उम्मीद है कि अगले सीजन में वो कुछ अद्भुत कप्तानी योजना के साथ आएंगे।
सवाल- आपकी पहली बार टीम के मालिक शाहरूख खान से मुलाकात कैसे हुई?
जवाब- मैं उनसे(SRK) मेरे आईपीएल डेब्यू पर मिला था। वो बहुत ही शांत हैं। जब मैं स्टेडियम से जा रहा था तब वो मुझे मिले और मुझे शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अपना अच्छा करो और कोई दबाव नहीं लेना है।
अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
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आईपीएल के इस सीजन में उत्तर प्रदेश के उन्नीस साल के युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी ने अपनी एक अलग ही छाप छोड़ी। भारतीय अंडर-उन्नीस के स्टार तेज गेंदबाज शिवम मावी को इस आईपीएल सीजन में शाहरूख खान की स्वामित्व वाली कोलकाता नाइट राईडर्स की टीम ने अपना हिस्सा बनाया था। इस सीजन में शिवम मावी को दिनेश कार्तिक की कप्तानी में कई मैच खेलने का मौका मिला। शिवम ने इस सीजन में खेले नौ मैचों में पाँच विकेट ही ले सके लेकि इन्होंने अपनी गेंदबाजी में खास प्रभाव छोड़ा। शिवम मावी ने इनयूथ डॉट कॉम के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की जिसमें उन्होंने अपने आईपीएल अनुभव को साझा किया। सवाल- आपका आईपीएल एक्सपिरिएंस कैसा रहा? जवाब- मेरे लिए ये एक शानदार रहा। एक ऑलराउंडर होने के नाते मैंने अपने सीनियर खिलाड़ियों से और अनुभवी खिलाड़ियों जैसे मेरे कोच जैक कालिस, मिचेल जॉनसन, और दूसरों से बहुत कुछ सीखा। सवाल- आपके डेब्यू पर पंद्रहवां ओवर किसने दिया और क्यों? जवाब- सनराईजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच से पहले टीम मीटिंग में ये फैसला हुआ था, कि मैं पहला ओवर करूंगा, फिर बीच में कहीं भी और बाकी बचे दो ओवर अंत में करूंगा। मैं इसके लिए तैयार था। लेकिन मैं योजना को अनुसार नहीं जा सका। मुझे पंद्रहवां ओवर दिया गया। उस समय मैं बहुत नर्वस था। एक या दो गेंद बाद मैंने खुद को ठंडा कर दिया। मेरे पहले ओवर के बाद मैं आत्मविश्वास में आ गया। मैं एक और कर सकता था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। सवाल- दूसरे आईपीएल मैच में गौतम गंभीर को बोल्ड आउट करना। कैसी प्रतिक्रिया रही? जवाब- ये अद्भुत था। वास्तव में टी-बीस क्रिकेट में आप बल्लेबाजों की कमजोरी पर काम करते हैं और हमारी योजना भी उसी अनुसार रहती है। और मैं गेंद उसी तरह योजना के अनुसार गेंदबाजी की और मुझे विकेट मिली। सवाल- दिनेश कार्तिक कप्तान के तौर पर कैसे हैं? जवाब- ये पहली बार है जब वो आईपीएल में किसी टीम की कप्तानी कर रहे थे और ये मेरा भी पहला सीजन था। मैंने उनके अंडर में खेलने का आनंद उठाया। मुझे उम्मीद है कि अगले सीजन में वो कुछ अद्भुत कप्तानी योजना के साथ आएंगे। सवाल- आपकी पहली बार टीम के मालिक शाहरूख खान से मुलाकात कैसे हुई? जवाब- मैं उनसे मेरे आईपीएल डेब्यू पर मिला था। वो बहुत ही शांत हैं। जब मैं स्टेडियम से जा रहा था तब वो मुझे मिले और मुझे शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अपना अच्छा करो और कोई दबाव नहीं लेना है। अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
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MP News: सरई तहसील अन्तर्गत राज्य सरकार आंध्र प्रदेश मिनरल्स कॉर्पोरेशन (एपीएमडीसी) की सुलियरी कोयला खदान को चालू रखने के लिए सैकड़ों की संख्या में स्थानीय निवासी रोड पर उतर आये। वहीं उनका प्रतिनिधि मंडल ने वैढ़न आकर सुलियरी खदान को बिना रूकावट चलवाने के लिए सिंगरौली जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
सुलियारी कोयला ब्लॉक के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग कुछ गैर-जिम्मेदार तत्वों से परेशान हैं जो एपीएमडीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन से उनकी शेष मांगों को पूरा करने के आश्वासन के बावजूद खदान संचालन का विरोध कर रहे हैं।
सुलियारी खदान ने एपीएमडीसी द्वारा समुदाय केंद्रित अनेक पहलों के अलावा स्थानीय लोगों के लिए लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। अब उन्हें खदान संचालन बंद करने के अनुचित विरोध के कारण उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का डर है।
गुरुवार के दिन अपने हाथों में सुलियरी कोल ब्लॉक के समर्थन में बैनर और तख्तियां लेकर स्थानीय लोग मांग करते दिखे कि किसी भी हालत में सुलियरी कोल ब्लॉक को चालू रखना है। इस वजह से सुलियरी प्रोजेक्ट को सही तरीके से संचालित करने में परेशानी हो रही है और उसका सीधा असर हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर हो रहा है।
ग्रामीणों मानते हैं कि खदान एवं बिजली संयंत्रों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ना सिर्फ गांव के युवाओं को रोजगार मिला बल्कि स्थानीय महिलाओं को भी स्वरोजगार के कई अवसर प्रदान किए गए हैं, जिससे कि महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
स्थानीय लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सुधार के अलावा उन्हें अस्पताल, विद्यालय, पेयजल, एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही है। सुलियरी खदान अकेले करीब 1200 बच्चों के लिए अद्यतन स्कूल और सैकड़ों परिवारों के लिए आधुनकि सुविधाओं से युक्त शानदार कॉलोनी निर्माणाधीन है।
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MP News: सरई तहसील अन्तर्गत राज्य सरकार आंध्र प्रदेश मिनरल्स कॉर्पोरेशन की सुलियरी कोयला खदान को चालू रखने के लिए सैकड़ों की संख्या में स्थानीय निवासी रोड पर उतर आये। वहीं उनका प्रतिनिधि मंडल ने वैढ़न आकर सुलियरी खदान को बिना रूकावट चलवाने के लिए सिंगरौली जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। सुलियारी कोयला ब्लॉक के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग कुछ गैर-जिम्मेदार तत्वों से परेशान हैं जो एपीएमडीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन से उनकी शेष मांगों को पूरा करने के आश्वासन के बावजूद खदान संचालन का विरोध कर रहे हैं। सुलियारी खदान ने एपीएमडीसी द्वारा समुदाय केंद्रित अनेक पहलों के अलावा स्थानीय लोगों के लिए लगभग पाँच,शून्य प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। अब उन्हें खदान संचालन बंद करने के अनुचित विरोध के कारण उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का डर है। गुरुवार के दिन अपने हाथों में सुलियरी कोल ब्लॉक के समर्थन में बैनर और तख्तियां लेकर स्थानीय लोग मांग करते दिखे कि किसी भी हालत में सुलियरी कोल ब्लॉक को चालू रखना है। इस वजह से सुलियरी प्रोजेक्ट को सही तरीके से संचालित करने में परेशानी हो रही है और उसका सीधा असर हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर हो रहा है। ग्रामीणों मानते हैं कि खदान एवं बिजली संयंत्रों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ना सिर्फ गांव के युवाओं को रोजगार मिला बल्कि स्थानीय महिलाओं को भी स्वरोजगार के कई अवसर प्रदान किए गए हैं, जिससे कि महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सुधार के अलावा उन्हें अस्पताल, विद्यालय, पेयजल, एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही है। सुलियरी खदान अकेले करीब एक हज़ार दो सौ बच्चों के लिए अद्यतन स्कूल और सैकड़ों परिवारों के लिए आधुनकि सुविधाओं से युक्त शानदार कॉलोनी निर्माणाधीन है। ये भी पढ़ेंः
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वर्ल्ड कप 2023 में भारत और पाकिस्तान का मैच कब होगा? ये लाखों क्रिकेट फैंस के लिए एक बड़ा सवाल बन चुका है। आईसीसी ने 27 जून को वर्ल्ड कप शेड्यूल का ऐलान किया जिसके मुताबिक भारत और पाकिस्तान का मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 15 अक्टूबर को होना है। लेकिन अब शेड्यूल के ऐलान के एक महीने बाद भारत-पाकिस्तान मैच की तारीख ही बदलने की चर्चा शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट्स हैं कि ये मैच अब 15 की बजाए 14 अक्टूबर को हो सकता है। क्या ऐसा होगा? इस मुद्दे पर दिल्ली में बीसीसीआई की बड़ी बैठक आज यानि गुरुवार को होने वाली है।
बीसीसीआई की इस मीटिंग में क्या-क्या होगा ये एक बड़ा सवाल है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसी मीटिंग में भारत-पाकिस्तान के मैच पर भी बातचीत हो सकती है और उसके बाद एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कि बीसीसीआई की इस मीटिंग में दरअसल होने क्या वाला है?
बता दें बीसीसीआई सचिव जय शाह ने ईमेल लिख सभी होस्ट एसोसिएशन की बैठक दिल्ली के ताज होटल में बुलाई है। मतलब जिन राज्यों में वर्ल्ड कप मैच होने वाले हैं वहां के बोर्ड के अधिकारी इस मीटिंग में शामिल होंगे। कुछ लोग इसमें वर्चुअल माध्यम से भी जुड़ेंगे। जय शाह ने ईमेल पर जो चिट्ठी होस्ट एसोसिएशन के अधिकारियों को भेजी है उसकी एक कॉपी टीवी9 के पास भी है। बता दें इस बैठक में भारत-पाकिस्तान के मैच की तारीख बदलने पर फैसला होगा। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर आईसीसी से मौखिक तौर पर चर्चा हो चुकी है हालांकि अभी लिखित कुछ भी नहीं हुआ है। भारत-पाकिस्तान का मैच 15 से 14 अक्टूबर को अगर शिफ्ट भी किया गया तो इसमें एक बड़ी समस्या ये है कि इस दिन पहले से ही दो मैच शेड्यूल हैं।
14 अक्टूबर को न्यूजीलैंड और बांग्लादेश, इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टक्कर भी होनी है। ऐसे में अगर भारत-पाकिस्तान का मैच भी 14 अक्टूबर को कर दिया गया था ब्रॉडकास्ट करने वाले चैनल को भी दिक्कत आ सकती है। इस मैच का शेड्यूल बदलने से लॉजिस्टिकली भी काफी बदलाव करने पड़ेंगे। मतलब खिलाड़ियों की होटल बुकिंग से लेकर फ्लाइट्स टिकट तक सबकुछ बदला जाएगा।
वैसे सिर्फ ब्रॉडकास्टर्स, खिलाड़ियों को ही प्रॉब्लम नहीं होगी बल्कि फैंस को भी इससे बड़ा झटका लगेगा। दरअसल हजारों फैंस ने वर्ल्ड कप शेड्यूल के ऐलान के साथ ही भारत-पाकिस्तान मैच के टिकट्स बुक करा लिए थे। साथ ही अहमदाबाद का हर होटल भी बुक हो चुका है। मतलब अब अगर मैच की डेट बदली तो कई फैंस का पैसा तो बर्बाद होगा ही साथ में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला देखने की तमन्ना भी अधूरी रह जाएगी। अब देखना ये है कि बीसीसीआई की बैठक में क्या फैसला लिया जाता है?
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वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस में भारत और पाकिस्तान का मैच कब होगा? ये लाखों क्रिकेट फैंस के लिए एक बड़ा सवाल बन चुका है। आईसीसी ने सत्ताईस जून को वर्ल्ड कप शेड्यूल का ऐलान किया जिसके मुताबिक भारत और पाकिस्तान का मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पंद्रह अक्टूबर को होना है। लेकिन अब शेड्यूल के ऐलान के एक महीने बाद भारत-पाकिस्तान मैच की तारीख ही बदलने की चर्चा शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट्स हैं कि ये मैच अब पंद्रह की बजाए चौदह अक्टूबर को हो सकता है। क्या ऐसा होगा? इस मुद्दे पर दिल्ली में बीसीसीआई की बड़ी बैठक आज यानि गुरुवार को होने वाली है। बीसीसीआई की इस मीटिंग में क्या-क्या होगा ये एक बड़ा सवाल है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसी मीटिंग में भारत-पाकिस्तान के मैच पर भी बातचीत हो सकती है और उसके बाद एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कि बीसीसीआई की इस मीटिंग में दरअसल होने क्या वाला है? बता दें बीसीसीआई सचिव जय शाह ने ईमेल लिख सभी होस्ट एसोसिएशन की बैठक दिल्ली के ताज होटल में बुलाई है। मतलब जिन राज्यों में वर्ल्ड कप मैच होने वाले हैं वहां के बोर्ड के अधिकारी इस मीटिंग में शामिल होंगे। कुछ लोग इसमें वर्चुअल माध्यम से भी जुड़ेंगे। जय शाह ने ईमेल पर जो चिट्ठी होस्ट एसोसिएशन के अधिकारियों को भेजी है उसकी एक कॉपी टीवीनौ के पास भी है। बता दें इस बैठक में भारत-पाकिस्तान के मैच की तारीख बदलने पर फैसला होगा। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर आईसीसी से मौखिक तौर पर चर्चा हो चुकी है हालांकि अभी लिखित कुछ भी नहीं हुआ है। भारत-पाकिस्तान का मैच पंद्रह से चौदह अक्टूबर को अगर शिफ्ट भी किया गया तो इसमें एक बड़ी समस्या ये है कि इस दिन पहले से ही दो मैच शेड्यूल हैं। चौदह अक्टूबर को न्यूजीलैंड और बांग्लादेश, इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टक्कर भी होनी है। ऐसे में अगर भारत-पाकिस्तान का मैच भी चौदह अक्टूबर को कर दिया गया था ब्रॉडकास्ट करने वाले चैनल को भी दिक्कत आ सकती है। इस मैच का शेड्यूल बदलने से लॉजिस्टिकली भी काफी बदलाव करने पड़ेंगे। मतलब खिलाड़ियों की होटल बुकिंग से लेकर फ्लाइट्स टिकट तक सबकुछ बदला जाएगा। वैसे सिर्फ ब्रॉडकास्टर्स, खिलाड़ियों को ही प्रॉब्लम नहीं होगी बल्कि फैंस को भी इससे बड़ा झटका लगेगा। दरअसल हजारों फैंस ने वर्ल्ड कप शेड्यूल के ऐलान के साथ ही भारत-पाकिस्तान मैच के टिकट्स बुक करा लिए थे। साथ ही अहमदाबाद का हर होटल भी बुक हो चुका है। मतलब अब अगर मैच की डेट बदली तो कई फैंस का पैसा तो बर्बाद होगा ही साथ में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला देखने की तमन्ना भी अधूरी रह जाएगी। अब देखना ये है कि बीसीसीआई की बैठक में क्या फैसला लिया जाता है?
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सभी लड़कियां शादी या पार्टी में जाने से पहले अपने हाथों की फिंगररिंग को लेकर काफी परेशान रहते हैं. आज हम आपको कुछ लेटेस्ट स्टाइल की फिंगर रिंग्स के डिजाइंस बताने जा रहे हैं जिन्हें पहनकर आपके हाथों की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे.
1- आजकल दो उंगलियों से कनेक्टेड रिंग का काफी ट्रेंड चल रहा है. इन दोनों रिंग्स को मोती की लड़ियों से जोड़ा जाता है. जो देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता है.
2- आजकल लड़कियां रिंकू स्टाइल रिंग्स काफी पसंद कर रहे हैं. इन्हें पहनकर आपको स्टाइलिश और खूबसूरत लुक मिलेगा.
3- आप चाहें तो अपने हाथों में गोल्ड डिजाइन की मोतियों से बने फिंगर रिंग्स भी कैरी कर सकती हैं. यह देखने में बहुत ही खूबसूरत लगती हैं इन्हें पहनने से आपके हाथों की खूबसूरती और भी बढ़ जाएगी.
4- आप अपने हाथों में ग्रीन, मैरून और सिल्वर स्टोन से बनी रिंग भी कैरी कर सकते हैं. यह देखने में बहुत ही खूबसूरत और स्टाइलिश लगते हैं.
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सभी लड़कियां शादी या पार्टी में जाने से पहले अपने हाथों की फिंगररिंग को लेकर काफी परेशान रहते हैं. आज हम आपको कुछ लेटेस्ट स्टाइल की फिंगर रिंग्स के डिजाइंस बताने जा रहे हैं जिन्हें पहनकर आपके हाथों की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे. एक- आजकल दो उंगलियों से कनेक्टेड रिंग का काफी ट्रेंड चल रहा है. इन दोनों रिंग्स को मोती की लड़ियों से जोड़ा जाता है. जो देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता है. दो- आजकल लड़कियां रिंकू स्टाइल रिंग्स काफी पसंद कर रहे हैं. इन्हें पहनकर आपको स्टाइलिश और खूबसूरत लुक मिलेगा. तीन- आप चाहें तो अपने हाथों में गोल्ड डिजाइन की मोतियों से बने फिंगर रिंग्स भी कैरी कर सकती हैं. यह देखने में बहुत ही खूबसूरत लगती हैं इन्हें पहनने से आपके हाथों की खूबसूरती और भी बढ़ जाएगी. चार- आप अपने हाथों में ग्रीन, मैरून और सिल्वर स्टोन से बनी रिंग भी कैरी कर सकते हैं. यह देखने में बहुत ही खूबसूरत और स्टाइलिश लगते हैं.
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श्रद्धा वॉकर की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. हर तरफ आरोपी आफताब के खिलाफ गुस्सा है। इस बीच, महाराष्ट्र के वसई में एक नवविवाहित हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी का रिसेप्शन शनिवार को रद्द कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, वसई में स्थानीय धार्मिक संगठनों के विरोध के बाद इस रिसेप्शन को रोक दिया गया था. पालघर के वसई की रहने वाली 27 वर्षीय श्रद्धा की आरोपियों ने हत्या कर 35 टुकड़े कर दिए।
रिसेप्शन का मामला तब तूल पकड़ गया जब एक निजी न्यूज चैनल के संपादक ने कार्यक्रम के आमंत्रण की फोटो ट्वीट की। इतना ही नहीं लव जिहाद और आतंकवाद अधिनियम का इस्तेमाल कर इसे श्रद्धा हत्याकांड से जोड़ दिया। संपादक ने ट्विटर पर हैशटैग-लवजिहाद ट्रेंड कराया.
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी का रिसेप्शन रविवार को एक सभागार में होना था. ट्वीट वायरल होने के बाद स्थानीय हिंदू और मुस्लिम संगठनों ने हॉल के मालिक को फोन कर रिसेप्शन बंद करने को कहा. पुलिस का मानना है कि उसने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए ऐसा किया है।
मानिकपुर पुलिस के मुताबिक, अगर इस रिसेप्शन को नहीं रोका गया तो वसई इलाके में अनहोनी की आशंका थी, इसलिए रिसेप्शन को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया.
पुलिस ने बताया कि हिंदू-मुस्लिम जोड़े ने 17 नवंबर को परिवार की रजामंदी से कोर्ट मैरिज की थी। 29 वर्षीय महिला हिंदू है जबकि उसका पति मुस्लिम है। दोनों एक दूसरे को पिछले 11 सालों से जानते हैं। दंपति के परिजन शनिवार को मानिकपुर थाने पहुंचे और बताया कि फिलहाल रिसेप्शन टाल दिया गया है.
आपको बता दें कि 28 वर्षीय आफताब ने 18 मई को श्रद्धा की हत्या कर दी और उसके 35 टुकड़े कर जंगल में फेंक दिया. दोनों 2019 से रिलेशनशिप में थे। आफताब ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि पहचान छिपाने के लिए उसने श्रद्धा का चेहरा जला दिया था।
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श्रद्धा वॉकर की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. हर तरफ आरोपी आफताब के खिलाफ गुस्सा है। इस बीच, महाराष्ट्र के वसई में एक नवविवाहित हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी का रिसेप्शन शनिवार को रद्द कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, वसई में स्थानीय धार्मिक संगठनों के विरोध के बाद इस रिसेप्शन को रोक दिया गया था. पालघर के वसई की रहने वाली सत्ताईस वर्षीय श्रद्धा की आरोपियों ने हत्या कर पैंतीस टुकड़े कर दिए। रिसेप्शन का मामला तब तूल पकड़ गया जब एक निजी न्यूज चैनल के संपादक ने कार्यक्रम के आमंत्रण की फोटो ट्वीट की। इतना ही नहीं लव जिहाद और आतंकवाद अधिनियम का इस्तेमाल कर इसे श्रद्धा हत्याकांड से जोड़ दिया। संपादक ने ट्विटर पर हैशटैग-लवजिहाद ट्रेंड कराया. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी का रिसेप्शन रविवार को एक सभागार में होना था. ट्वीट वायरल होने के बाद स्थानीय हिंदू और मुस्लिम संगठनों ने हॉल के मालिक को फोन कर रिसेप्शन बंद करने को कहा. पुलिस का मानना है कि उसने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए ऐसा किया है। मानिकपुर पुलिस के मुताबिक, अगर इस रिसेप्शन को नहीं रोका गया तो वसई इलाके में अनहोनी की आशंका थी, इसलिए रिसेप्शन को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया. पुलिस ने बताया कि हिंदू-मुस्लिम जोड़े ने सत्रह नवंबर को परिवार की रजामंदी से कोर्ट मैरिज की थी। उनतीस वर्षीय महिला हिंदू है जबकि उसका पति मुस्लिम है। दोनों एक दूसरे को पिछले ग्यारह सालों से जानते हैं। दंपति के परिजन शनिवार को मानिकपुर थाने पहुंचे और बताया कि फिलहाल रिसेप्शन टाल दिया गया है. आपको बता दें कि अट्ठाईस वर्षीय आफताब ने अट्ठारह मई को श्रद्धा की हत्या कर दी और उसके पैंतीस टुकड़े कर जंगल में फेंक दिया. दोनों दो हज़ार उन्नीस से रिलेशनशिप में थे। आफताब ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि पहचान छिपाने के लिए उसने श्रद्धा का चेहरा जला दिया था।
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काफी समय से हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' (India Daily Live) की लॉन्चिंग का इंतजार जल्द खत्म होने जा रहा है।
हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' की लॉन्चिंग का इंतजार जल्द खत्म होने जा रहा है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार शमशेर सिंह के नेतृत्व में लॉन्च होने जा रहे इस चैनल की लॉन्चिंग डेट तय हो गई है।
हिंदी न्यूज चैनल 'भारत एक्सप्रेस' (Bharat Express) ने 'ऑपरेशन सत्य' नाम से चलाए गए एक स्टिंग में बड़ा खुलासा किया है।
रुबिका लियाकत ने एक ट्वीट कर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका नया शो जल्द ही आने वाला है और उन्होंने दर्शकों से अपनी राय मांगी है।
'आजतक' के कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी ने प्रशंसकों के लिए अपने जन्मदिन के रिटर्न गिफ्ट के तौर पर माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म 'कू' (KOO) की प्रीमियम पेशकश पर एक विशेष चैनल लॉन्च किया है।
न्यूज एंकर रुबिका लियाकत 'भारत24' के हेड ऑफिस सोमवार दोपहर पहुंचीं जहां उनका स्वागत सीईओ और एडिटर-इन-चीफ डॉ. जगदीश चंद्रा ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश तिवारी ने 'टीवी9' (TV9) समूह में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब पौने पांच साल से इस समूह में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार शमशेर सिंह के नेतृत्व में नोएडा से नया नेशनल हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' (India Daily Live) जल्द लॉन्च होने जा रहा है।
सीनियर जर्नलिस्ट बरखा दत्त द्वारा संचालित यू-ट्यूब चैनल 'मोजो स्टोरी' को हैक किए जाने की खबर सामने आयी है।
इससे पहले समूह का हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' (AajTak) यूके के मार्केट में लॉन्च हो चुका है।
नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (New Delhi Television Ltd. ) यानी कि 'एनडीटीवी' विभिन्न भारतीय भाषाओं में 9 न्यूज चैनल शुरू करेगा।
अंग्रेजी न्यूज चैनल 'इंडिया अहेड' (India Ahead) के प्रबंधन ने दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले में अपने पूर्व एंप्लॉयी अरविंद कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद एक स्टेटमेंट जारी किया है।
'आजतक' में बतौर एडिटर काम कर रहे नीरज सिंह ने अब 'इंडिया डेली' (India Daily) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।
एक बड़े बिजनेस हाउस द्वारा लॉन्च किए जा रहे इस चैनल में लोगों के जुड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन भी बतौर कंसल्टिंग एडिटर कुछ दिनों पहले इससे जुड़ चुके हैं।
भावना किशोर पर दलित महिला को कार से टक्कर मारने और उसके साथ गाली गलौज करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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काफी समय से हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' की लॉन्चिंग का इंतजार जल्द खत्म होने जा रहा है। हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' की लॉन्चिंग का इंतजार जल्द खत्म होने जा रहा है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार शमशेर सिंह के नेतृत्व में लॉन्च होने जा रहे इस चैनल की लॉन्चिंग डेट तय हो गई है। हिंदी न्यूज चैनल 'भारत एक्सप्रेस' ने 'ऑपरेशन सत्य' नाम से चलाए गए एक स्टिंग में बड़ा खुलासा किया है। रुबिका लियाकत ने एक ट्वीट कर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका नया शो जल्द ही आने वाला है और उन्होंने दर्शकों से अपनी राय मांगी है। 'आजतक' के कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी ने प्रशंसकों के लिए अपने जन्मदिन के रिटर्न गिफ्ट के तौर पर माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म 'कू' की प्रीमियम पेशकश पर एक विशेष चैनल लॉन्च किया है। न्यूज एंकर रुबिका लियाकत 'भारतचौबीस' के हेड ऑफिस सोमवार दोपहर पहुंचीं जहां उनका स्वागत सीईओ और एडिटर-इन-चीफ डॉ. जगदीश चंद्रा ने किया। वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश तिवारी ने 'टीवीनौ' समूह में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब पौने पांच साल से इस समूह में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वरिष्ठ टीवी पत्रकार शमशेर सिंह के नेतृत्व में नोएडा से नया नेशनल हिंदी न्यूज चैनल 'इंडिया डेली लाइव' जल्द लॉन्च होने जा रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट बरखा दत्त द्वारा संचालित यू-ट्यूब चैनल 'मोजो स्टोरी' को हैक किए जाने की खबर सामने आयी है। इससे पहले समूह का हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' यूके के मार्केट में लॉन्च हो चुका है। नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड यानी कि 'एनडीटीवी' विभिन्न भारतीय भाषाओं में नौ न्यूज चैनल शुरू करेगा। अंग्रेजी न्यूज चैनल 'इंडिया अहेड' के प्रबंधन ने दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले में अपने पूर्व एंप्लॉयी अरविंद कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद एक स्टेटमेंट जारी किया है। 'आजतक' में बतौर एडिटर काम कर रहे नीरज सिंह ने अब 'इंडिया डेली' के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। एक बड़े बिजनेस हाउस द्वारा लॉन्च किए जा रहे इस चैनल में लोगों के जुड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन भी बतौर कंसल्टिंग एडिटर कुछ दिनों पहले इससे जुड़ चुके हैं। भावना किशोर पर दलित महिला को कार से टक्कर मारने और उसके साथ गाली गलौज करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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नई दिल्ली(एजेंसी): सरकार सोशल सिक्योरटी स्कीम का दायरा बढ़ाने के अपने लक्ष्य के तहत अब स्वरोजगार करने वालों को भी ईपीएफओ के दायरे में ला सकती है. यानी अब उन्हें भी पीएफ की सुविधा मिल सकती है. सरकार की इस योजना से अब तक सोशल सिक्योरिटी स्कीम से बाहर रह रहे 90 फीसदी कामगार इसके तहत आ जाएंगे.
स्वरोजगार करने वालों के अतिरिक्त वकील, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट भी ईपीएफओ के जरिये सरकार की पीएफ योजना में योगदान कर सकेंगे. अभी तक जो कर्मचारी किसी एंप्लॉयर की नौकरी करते हैं, वे ही प्रॉविडेंट फंड सब्सक्राइवर हो सकते है. फिलहाल ईपीएफओ छह करोड़ कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट मैनेज करता है. खबरों के मुताबिक सरकार की ओर से सोशल सिक्योरिटी कोड बिल पारित कराने के बाद स्वरोजगार करने वालों के लिए पीएफ सुविधा बहाल करने का नियम आ सकता है. पिलहाल सरकार आठ श्रम कानूनों को एक कानून में समाहित करने की कोशिश में है. इसके अलावा सभी सोशल सिक्योरिटी स्कीमों को एक छतरी के नीचे लाने की योजना है.
श्रम मामलों की संसदीय कमेटी ने सरकार को सारी योजनाओं को एक छतरी के तहत लाने की सिफारिश की थी. लिहाजा सरकार स्वरोजगार करने वालों के लिए भी पीएफ सुविधा बहाल करने की योजना को आगे बढ़ा सकती है. सरकार को यह सलाह दी गई है स्वरोजगार करने वालों की आय का 20 फीसदी पीएफ के तौर पर जमा कराया जाए. चूंकि स्वरोजगार करने वालों में कोई एंप्लॉयर और कर्मचारी नहीं होता है. इसलिए दोनों हिस्सा उसे ही देना होगा. साथ ही इसे मैनेज करने की लागत भी जुड़ी होगी. ऐसा हुआ तो असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को सोशल सिक्योरिटी स्कीम के दायरे में आ सकेंगे.
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नई दिल्ली: सरकार सोशल सिक्योरटी स्कीम का दायरा बढ़ाने के अपने लक्ष्य के तहत अब स्वरोजगार करने वालों को भी ईपीएफओ के दायरे में ला सकती है. यानी अब उन्हें भी पीएफ की सुविधा मिल सकती है. सरकार की इस योजना से अब तक सोशल सिक्योरिटी स्कीम से बाहर रह रहे नब्बे फीसदी कामगार इसके तहत आ जाएंगे. स्वरोजगार करने वालों के अतिरिक्त वकील, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट भी ईपीएफओ के जरिये सरकार की पीएफ योजना में योगदान कर सकेंगे. अभी तक जो कर्मचारी किसी एंप्लॉयर की नौकरी करते हैं, वे ही प्रॉविडेंट फंड सब्सक्राइवर हो सकते है. फिलहाल ईपीएफओ छह करोड़ कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट मैनेज करता है. खबरों के मुताबिक सरकार की ओर से सोशल सिक्योरिटी कोड बिल पारित कराने के बाद स्वरोजगार करने वालों के लिए पीएफ सुविधा बहाल करने का नियम आ सकता है. पिलहाल सरकार आठ श्रम कानूनों को एक कानून में समाहित करने की कोशिश में है. इसके अलावा सभी सोशल सिक्योरिटी स्कीमों को एक छतरी के नीचे लाने की योजना है. श्रम मामलों की संसदीय कमेटी ने सरकार को सारी योजनाओं को एक छतरी के तहत लाने की सिफारिश की थी. लिहाजा सरकार स्वरोजगार करने वालों के लिए भी पीएफ सुविधा बहाल करने की योजना को आगे बढ़ा सकती है. सरकार को यह सलाह दी गई है स्वरोजगार करने वालों की आय का बीस फीसदी पीएफ के तौर पर जमा कराया जाए. चूंकि स्वरोजगार करने वालों में कोई एंप्लॉयर और कर्मचारी नहीं होता है. इसलिए दोनों हिस्सा उसे ही देना होगा. साथ ही इसे मैनेज करने की लागत भी जुड़ी होगी. ऐसा हुआ तो असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को सोशल सिक्योरिटी स्कीम के दायरे में आ सकेंगे.
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान सरकार का पांचवां और अंतिम बजट पेश किया। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई लोक लुभावनी घोषणाएं की। बजट में चौमूं नगर पालिका को नगर परिषद बनाने की मांग पर कई दिनों से चल रही थी इसको बजट में पूरा करके चौमूंवासियों को सौगात दी गई है। इससे शहरवासियों में खुशी की लहर है। इसी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगरपालिका परिसर के बाहर पटाखे छोड़कर आतिशबाजी की और खुशी का इजहार किया गया। वहीं, शहरवासियों के लिए कई वर्षों से पेयजल को लेकर विकट स्थिति बनी हुई थी। इस बीसलपुर पेयजल योजना पर चौमूं के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं होने से लोगों को निराशा भी हुई है।
अब चौमूं शहर के विकास के लिए अधिक फंड मिलेगा, जिससे मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और पार्षदों के भत्ते में बढ़ोतरी होगी। चेयरमैन, आयुक्त की प्रशासनिक वित्तीय पावर बढ़ेगा। सभापति को करीब 25 लाख रुपए तक की फंड पावर बढ़ेगा और नगर परिषद में स्टाफ बढ़ेगा। चौमूं शहर के आसपास के शामिल होने वाले गांवों में जमीनों के भाव भी बढ़ जाएंगे। चौमूं शहर में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 64 हजार 417 थी, जो अब 1 लाख 10 हजार के बीच है। शहर में वर्तमान में 45 वार्ड नगर पालिका क्षेत्र में हैं और शहर का क्षेत्रफल करीब 27 किमी का है।
चौमूं शहरवासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पेयजल की थी। इसको लेकर चौमूं के लोगों को बीसलपुर योजना से इस बजट में जोड़ने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में पेयजल को लेकर कोई बड़ी सौगात नहीं मिलने से शहरवासियों को काफी निराशा हाथ लगी है। आने वाले गर्मी के मौसम में फिर लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा और ना ही सेटेलाइट अस्पताल की मांग पूरी हुई है।
राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर विधायक रामलाल शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट लोकलुभावना और चुनावी बजट है। यह बजट सिर्फ जनता को सपने दिखाने वाला है। इस बजट की क्रियान्वित धरातल पर एक प्रतिशत भी नहीं होने वाली है। किसानों का फसल खराबा और बेरोजगार युवाओं को निराश करने वाला बजट है। बजट में चौमूं विधानसभा की पूर्णत उपेक्षा की गई है। मेट्रो, बीसलपुर का पानी, सीवरेज अतिमहत्वपूर्ण आवश्यकता थी। इस बजट में उनके लिए एक शब्द भी नहीं लिया गया है। पिछले बजट में सामोद वीर हनुमान जी तक एक लग्ज़री बस चलाने की घोषणा की गई थी, जो घोषणा आज तक भी अधूरी है।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक भगवान सहाय सैनी ने कहा कि बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं, जिसमें मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना को 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक करने का ऐलान, चिरंजीवी दुर्घटना बीमा राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करना, 30 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती, उज्ज्वला योजना वाले 76 लाख परिवारों को 500 रुपए में गैस सिलेंडर, 100 यूनिट तक बिजली फ्री, पेंशन 500, 750 से बढ़ाकर 1000 रुपए करने की घोषणा, छात्राओं के साथ ही छात्रों को भी आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 1 से 12वीं क्लास तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने व संविदाकर्मी को नियमित करने की घोषणाएं है। चौमूं नगरपालिका को नगरपरिषद बनाने की घोषणा सराहनीय कदम हैं।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान सरकार का पांचवां और अंतिम बजट पेश किया। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई लोक लुभावनी घोषणाएं की। बजट में चौमूं नगर पालिका को नगर परिषद बनाने की मांग पर कई दिनों से चल रही थी इसको बजट में पूरा करके चौमूंवासियों को सौगात दी गई है। इससे शहरवासियों में खुशी की लहर है। इसी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगरपालिका परिसर के बाहर पटाखे छोड़कर आतिशबाजी की और खुशी का इजहार किया गया। वहीं, शहरवासियों के लिए कई वर्षों से पेयजल को लेकर विकट स्थिति बनी हुई थी। इस बीसलपुर पेयजल योजना पर चौमूं के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं होने से लोगों को निराशा भी हुई है। अब चौमूं शहर के विकास के लिए अधिक फंड मिलेगा, जिससे मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और पार्षदों के भत्ते में बढ़ोतरी होगी। चेयरमैन, आयुक्त की प्रशासनिक वित्तीय पावर बढ़ेगा। सभापति को करीब पच्चीस लाख रुपए तक की फंड पावर बढ़ेगा और नगर परिषद में स्टाफ बढ़ेगा। चौमूं शहर के आसपास के शामिल होने वाले गांवों में जमीनों के भाव भी बढ़ जाएंगे। चौमूं शहर में वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार जनसंख्या चौंसठ हजार चार सौ सत्रह थी, जो अब एक लाख दस हजार के बीच है। शहर में वर्तमान में पैंतालीस वार्ड नगर पालिका क्षेत्र में हैं और शहर का क्षेत्रफल करीब सत्ताईस किमी का है। चौमूं शहरवासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पेयजल की थी। इसको लेकर चौमूं के लोगों को बीसलपुर योजना से इस बजट में जोड़ने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में पेयजल को लेकर कोई बड़ी सौगात नहीं मिलने से शहरवासियों को काफी निराशा हाथ लगी है। आने वाले गर्मी के मौसम में फिर लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा और ना ही सेटेलाइट अस्पताल की मांग पूरी हुई है। राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर विधायक रामलाल शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट लोकलुभावना और चुनावी बजट है। यह बजट सिर्फ जनता को सपने दिखाने वाला है। इस बजट की क्रियान्वित धरातल पर एक प्रतिशत भी नहीं होने वाली है। किसानों का फसल खराबा और बेरोजगार युवाओं को निराश करने वाला बजट है। बजट में चौमूं विधानसभा की पूर्णत उपेक्षा की गई है। मेट्रो, बीसलपुर का पानी, सीवरेज अतिमहत्वपूर्ण आवश्यकता थी। इस बजट में उनके लिए एक शब्द भी नहीं लिया गया है। पिछले बजट में सामोद वीर हनुमान जी तक एक लग्ज़री बस चलाने की घोषणा की गई थी, जो घोषणा आज तक भी अधूरी है। बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक भगवान सहाय सैनी ने कहा कि बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं, जिसमें मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना को दस लाख से बढ़ाकर पच्चीस लाख तक करने का ऐलान, चिरंजीवी दुर्घटना बीमा राशि पाँच लाख से बढ़ाकर दस लाख करना, तीस हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती, उज्ज्वला योजना वाले छिहत्तर लाख परिवारों को पाँच सौ रुपयापए में गैस सिलेंडर, एक सौ यूनिट तक बिजली फ्री, पेंशन पाँच सौ, सात सौ पचास से बढ़ाकर एक हज़ार रुपयापए करने की घोषणा, छात्राओं के साथ ही छात्रों को भी आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में एक से बारहवीं क्लास तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने व संविदाकर्मी को नियमित करने की घोषणाएं है। चौमूं नगरपालिका को नगरपरिषद बनाने की घोषणा सराहनीय कदम हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मौनी रॉय स्लिम-ट्रिम फिगर की मालकिन हैं, जिसे फ्लॉन्ट करने का वह कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। इसके लिए ये अदाकारा ऐसे कपड़ों का चुनाव करती है, जो उनके फिगर को कॉम्प्लिमेंट करते नजर आते हैं। ऐसा है एक लुक फिर से देखने को मिला है। (फोटो साभारःयोगेन शाह)
मौनी रॉय को मुंबई स्थित टी-सीरीज के ऑफिस के बाहर स्पॉट किया गया। इस दौरान वह ब्लू अटायर में नजर आईं।
मौनी रॉय ने जो वन पीस ड्रेस पहनी थी, उसके ऊपर वर्टिकल स्ट्राइप्ड प्रिंट था। इस तरह की स्ट्राइप्स फिगर को लंबा और स्लिम दिखाने में मदद करती हैं।
आउफिट में बॉडीकॉन फिटिंग थी, जो मौनी के स्लिम फिगर को फ्लॉन्ट कर रही थी।
इस आउटफिट में अपर पोर्शन कॉर्सेट स्टाइल का था, जो अदाकारा के कर्व्स को हाइलाइट करने में ज्यादा मदद करता दिखा।
ये पूरी ड्रेस ही मौनी को हॉट लुक दे रही थी, लेकिन इसमें असली बोल्डनेस का तड़का नेकलाइन ने लगाया था, जो स्वीटहार्ट कट में थी।
मौनी ने अपनी इस आउटफिट को वाइट स्लिपऑन हील्स के साथ मैच किया था। वहीं सन प्रटेक्शन के लिए उन्होंने स्टाइलिश ब्लैक चश्मा लगाया था।
मौनी रॉय ने मेकअप को न्यूड टोन रखते हुए अपने शार्प फीचर्स को हाइलाइट किया था। वहीं उनके बाल मेसी वेव्स में स्टाइल किए गए थे। ये मिलकर अदाकारा के लुक को एकदम परफेक्ट बना रहे थे।
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मौनी रॉय स्लिम-ट्रिम फिगर की मालकिन हैं, जिसे फ्लॉन्ट करने का वह कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। इसके लिए ये अदाकारा ऐसे कपड़ों का चुनाव करती है, जो उनके फिगर को कॉम्प्लिमेंट करते नजर आते हैं। ऐसा है एक लुक फिर से देखने को मिला है। मौनी रॉय को मुंबई स्थित टी-सीरीज के ऑफिस के बाहर स्पॉट किया गया। इस दौरान वह ब्लू अटायर में नजर आईं। मौनी रॉय ने जो वन पीस ड्रेस पहनी थी, उसके ऊपर वर्टिकल स्ट्राइप्ड प्रिंट था। इस तरह की स्ट्राइप्स फिगर को लंबा और स्लिम दिखाने में मदद करती हैं। आउफिट में बॉडीकॉन फिटिंग थी, जो मौनी के स्लिम फिगर को फ्लॉन्ट कर रही थी। इस आउटफिट में अपर पोर्शन कॉर्सेट स्टाइल का था, जो अदाकारा के कर्व्स को हाइलाइट करने में ज्यादा मदद करता दिखा। ये पूरी ड्रेस ही मौनी को हॉट लुक दे रही थी, लेकिन इसमें असली बोल्डनेस का तड़का नेकलाइन ने लगाया था, जो स्वीटहार्ट कट में थी। मौनी ने अपनी इस आउटफिट को वाइट स्लिपऑन हील्स के साथ मैच किया था। वहीं सन प्रटेक्शन के लिए उन्होंने स्टाइलिश ब्लैक चश्मा लगाया था। मौनी रॉय ने मेकअप को न्यूड टोन रखते हुए अपने शार्प फीचर्स को हाइलाइट किया था। वहीं उनके बाल मेसी वेव्स में स्टाइल किए गए थे। ये मिलकर अदाकारा के लुक को एकदम परफेक्ट बना रहे थे।
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आपेक्षिकता का विशिष्ट सिद्धान्त
कुछ अर्थ दे सकना चाहिए : घटनाएं A और B एक ही क्षण पर घटीं। आइए हम आइंस्टीन का दिया हुआ एक उदाहरण लेंः जब हम कहते हैं कि प्लेटफ़ॉर्म पर एक रेलगाड़ी सात बजे आती है तो इसका क्या मतलब है? इस बात का यह मतलब है कि घड़ी की सुई का सात के अंक पर पहुँचना और रेलगाड़ी का प्लेटफ़ॉर्म पर आना दो घटनाएँ हैं जो एक साथ, एक ही क्षण पर घटती हैं ।
इस प्रकार, जब हम यह कहते हैं कि फलां घटनाएं किसी एक ख़ास समय पर घटीं तो दरअसल हम यह तय कर रहे होते हैं कि वे एक साथ घटी या नहीं। इसलिए किन्हीं दो घटनाओं के बारे में (उदाहरण के लिए, रेलगाड़ी का स्टेशन पर आना और घड़ी की सुई का सात पर पहुँचना) अगर सभी प्रेक्षक सहमत हों कि वे समकालिक (simultaneous) हैं, (यानी एक साथ एक ही क्षण पर घटी हैं) भले ही वे प्रेक्षक किसी भी बिंदु पर स्थित हों या किसी भी वेग से गतिमान हों, तो हम यक़ीनी तौर पर कह सकेंगे कि निरपेक्ष न्यूटनी काल पैमाने का वास्तव में अस्तित्व है। अगर आपको यह बात समझने में मुश्किल लगे तो इसे दो-तीन बार पढ़कर अच्छी तरह समझ कर ही आगे बढ़ें !
और अगर अलग-अलग जड़त्वीय प्रेक्षक दो घटनाओं के एक-साथ घटने (यानी समकालिक होने) के बारे में सहमत नहीं होते तो फिर हमारे पास एक निरपेक्ष काल पैमाने की बात करने का कोई तार्किक आधार नहीं रह जाएगा। यानी अगर एक जड़त्वीय प्रेक्षक यह कहे कि दो घटनाएं एक ही क्षण पर घटीं और उन्हीं घटनाओं के लिए दूसरा जड़त्वीय प्रेक्षक कहे कि वे दोनों एक ही क्षण पर नहीं घटीं तो हम निरपेक्ष काल पैमाने की बात नहीं कर पाएंगे। और ठीक ऐसा ही होता है जब हम प्रकाश की चाल के अचर होने के नियम को स्वीकार करते हैं। आइए इस बात को हम एक काल्पनिक प्रयोग की मदद से और बेहतर तरीक़े से समझें ।
हम एक रेलगाड़ी के डिब्बे का उदाहरण लेते हैं जो पृथ्वी पर विरामावस्था में स्थित एक प्रेक्षक ऽ के सापेक्ष दायीं ओर अचर वेग V से गतिमान है जिसका मान बहुत अधिक है (देखें चित्र 1.5)। इस डिब्बे के बीचोंबीच एक तेज़ गति से चलने वाला फ़्लैश बल्ब लगाया गया है। जब यह बल्ब फ़्लैश करता है तो यह अपने दायीं और बायीं ओर प्रकाश स्पंद उत्सर्जित करता है। डिब्बे के दोनों सिरों पर फोटो सैल रखे गए हैं ताकि डिब्बे में बैठा प्रेक्षक S' यह पता लगा सके कि प्रकाश के स्पंद उन सिरों पर कब पहुंचते हैं। अब माना कि किसी अभूतपूर्व तकनीक द्वारा पृथ्वी पर खड़ा प्रेक्षक S भी इन दोनों स्पंदों की गति का प्रेक्षण और मापन कर सकता है। मान लीजिए कि S और S" के मूल बिंदुओं की स्थितियाँ बल्ब की स्थिति से उस क्षण पर संपाती होती हैं, जब वह फ़्लैश करता है (चित्र 1.5 क) ।
अब यह फ़्लैश बल्ब डिब्बे में स्थित प्रेक्षक S' के सापेक्ष विरामावस्था में है। चूँकि यह डिब्बे के ठीक बीचोंबीच स्थित है इसलिए जब यह फ्लैश करता है तो S' के सापेक्ष प्रकाश के दो स्पंद डिब्बे के दोनों सिरों तक पहुँचने के लिए बराबर समय में बराबर दूरी तय करते हैं। इसलिए S' यह प्रेक्षण करता है कि डिब्बे के दोनों सिरों पर ये दोनों प्रकाश स्पंद एक ही क्षण पर पहुँचते हैं। क्या पृथ्वी पर स्थिर खड़ा प्रेक्षक S भी इसी नतीजे पर पहुँचता है? इसके जवाब के लिए देखें चित्र 1.5 (ख) और (ग)। प्रकाश के ये स्पंद S' के सापेक्ष, अपने दायीं और बायीं ओर बराबर समय में बराबर दूरी तय करते हैं। लेकिन ऽ के तंत्र में रेल का डिब्बा दायीं ओर चल रहा है। इसलिए S के तंत्र में, जिस बिंदु पर S बल्ब को फ़्लैश करते हुए देखता है, उस बिंदु और डिब्बे के बायें सिरे के बीच की दूरी, उसी बिंदु और डिब्बे के दाएं सिरे के बीच दूरी की तुलना में कम होती है। इसके नतीजतन ऽ यह मापता है कि डिब्बे के बायें सिरे पर प्रकाश का स्पंद, डिब्बे के दायें सिरे पर पहुँचने वाले प्रकाश के स्पंद की अपेक्षा, पहले पहुँचता है। इस तरह, S के निर्देश तंत्र में, ये दोनों प्रकाश के स्पंद डिब्बे के सिरों पर एक-साथ, एक ही क्षण पर नहीं पहुँचते ।
लेकिन, प्रकाश की चाल तो अचर है। इसलिए S के तंत्र में ये दोनों घटनाएं (कि प्रकाश के दोनों स्पंद डिब्बे के अलग-अलग सिरों तक पहुँचते हैं) एक ही क्षण पर नहीं घटतीं ।
चित्र 1.5: चलती रेलगाड़ी के डिब्बे में स्थित जड़त्वीय प्रेक्षक S" द्वारा की गई माप से बिल्कुल अलग, पृथ्वी पर स्थित अचल प्रेक्षक मापता है कि प्रकाश स्पंद डिब्बे के सिरों तक एक ही क्षण पर नहीं पहुँचते। ये चित्र जड़त्वीय प्रेक्षक S के सापेक्ष हैं।
अब अगर न्यूटनी यांत्रिकी सही होती तो ऽ के तंत्र में ये दोनों स्पंद एक-साथ दोनों सिरों पर पहुँचते : यह बात ऽ के तंत्र में प्रकाश की मापी गई भिन्न चालों के ज़रिए समझायी जा सकती थी । प्रेक्षक S बायीं ओर चलने वाले स्पंद की चाल (c - V) मापता क्योंकि वह स्पंद रेलगाड़ी की गति के विपरीत दिशा में गतिमान है। दायीं ओर चलने वाला स्पंद ज़्यादा दूरी चलेगा लेकिन उसकी चाल भी ज़्यादा होगी जोकि (c + V ) के बराबर है। इस तरह ऽ दोनों ही समयांतरालों का एक ही मान मापेगा और इस निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि दोनों ही स्पंद डिब्बे के सिरों पर एक ही क्षण पहुँचते हैं।
यह बात निरपेक्ष काल की क्लासिकी अवधारणा से मूलभूत रूप से भिन्न हैं, क्योंकि इसके अनुसार अलग-अलग प्रेक्षक इस बात पर सहमत नहीं होते कि एक ही क्षण का क्या मतलब है। हाँ, यहाँ यह ज़रूर याद रखिए कि इस परिणाम को उन घटनाओं के लिए निकाला गया है जो अलग-अलग स्थितियों पर घट रही हैं। उदाहरण के लिए, डिब्बे के दो सिरे। अगली इकाई में हम इस बात पर फिर से चर्चा करेंगे और तब उन घटनाओं को भी लेंगे जो आकाश के एक ही बिंदु पर एक क्षण पर घटती हैं।
विशिष्ट आपेक्षिकता का उदय
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आपेक्षिकता का विशिष्ट सिद्धान्त कुछ अर्थ दे सकना चाहिए : घटनाएं A और B एक ही क्षण पर घटीं। आइए हम आइंस्टीन का दिया हुआ एक उदाहरण लेंः जब हम कहते हैं कि प्लेटफ़ॉर्म पर एक रेलगाड़ी सात बजे आती है तो इसका क्या मतलब है? इस बात का यह मतलब है कि घड़ी की सुई का सात के अंक पर पहुँचना और रेलगाड़ी का प्लेटफ़ॉर्म पर आना दो घटनाएँ हैं जो एक साथ, एक ही क्षण पर घटती हैं । इस प्रकार, जब हम यह कहते हैं कि फलां घटनाएं किसी एक ख़ास समय पर घटीं तो दरअसल हम यह तय कर रहे होते हैं कि वे एक साथ घटी या नहीं। इसलिए किन्हीं दो घटनाओं के बारे में अगर सभी प्रेक्षक सहमत हों कि वे समकालिक हैं, भले ही वे प्रेक्षक किसी भी बिंदु पर स्थित हों या किसी भी वेग से गतिमान हों, तो हम यक़ीनी तौर पर कह सकेंगे कि निरपेक्ष न्यूटनी काल पैमाने का वास्तव में अस्तित्व है। अगर आपको यह बात समझने में मुश्किल लगे तो इसे दो-तीन बार पढ़कर अच्छी तरह समझ कर ही आगे बढ़ें ! और अगर अलग-अलग जड़त्वीय प्रेक्षक दो घटनाओं के एक-साथ घटने के बारे में सहमत नहीं होते तो फिर हमारे पास एक निरपेक्ष काल पैमाने की बात करने का कोई तार्किक आधार नहीं रह जाएगा। यानी अगर एक जड़त्वीय प्रेक्षक यह कहे कि दो घटनाएं एक ही क्षण पर घटीं और उन्हीं घटनाओं के लिए दूसरा जड़त्वीय प्रेक्षक कहे कि वे दोनों एक ही क्षण पर नहीं घटीं तो हम निरपेक्ष काल पैमाने की बात नहीं कर पाएंगे। और ठीक ऐसा ही होता है जब हम प्रकाश की चाल के अचर होने के नियम को स्वीकार करते हैं। आइए इस बात को हम एक काल्पनिक प्रयोग की मदद से और बेहतर तरीक़े से समझें । हम एक रेलगाड़ी के डिब्बे का उदाहरण लेते हैं जो पृथ्वी पर विरामावस्था में स्थित एक प्रेक्षक ऽ के सापेक्ष दायीं ओर अचर वेग V से गतिमान है जिसका मान बहुत अधिक है । इस डिब्बे के बीचोंबीच एक तेज़ गति से चलने वाला फ़्लैश बल्ब लगाया गया है। जब यह बल्ब फ़्लैश करता है तो यह अपने दायीं और बायीं ओर प्रकाश स्पंद उत्सर्जित करता है। डिब्बे के दोनों सिरों पर फोटो सैल रखे गए हैं ताकि डिब्बे में बैठा प्रेक्षक S' यह पता लगा सके कि प्रकाश के स्पंद उन सिरों पर कब पहुंचते हैं। अब माना कि किसी अभूतपूर्व तकनीक द्वारा पृथ्वी पर खड़ा प्रेक्षक S भी इन दोनों स्पंदों की गति का प्रेक्षण और मापन कर सकता है। मान लीजिए कि S और S" के मूल बिंदुओं की स्थितियाँ बल्ब की स्थिति से उस क्षण पर संपाती होती हैं, जब वह फ़्लैश करता है । अब यह फ़्लैश बल्ब डिब्बे में स्थित प्रेक्षक S' के सापेक्ष विरामावस्था में है। चूँकि यह डिब्बे के ठीक बीचोंबीच स्थित है इसलिए जब यह फ्लैश करता है तो S' के सापेक्ष प्रकाश के दो स्पंद डिब्बे के दोनों सिरों तक पहुँचने के लिए बराबर समय में बराबर दूरी तय करते हैं। इसलिए S' यह प्रेक्षण करता है कि डिब्बे के दोनों सिरों पर ये दोनों प्रकाश स्पंद एक ही क्षण पर पहुँचते हैं। क्या पृथ्वी पर स्थिर खड़ा प्रेक्षक S भी इसी नतीजे पर पहुँचता है? इसके जवाब के लिए देखें चित्र एक.पाँच और । प्रकाश के ये स्पंद S' के सापेक्ष, अपने दायीं और बायीं ओर बराबर समय में बराबर दूरी तय करते हैं। लेकिन ऽ के तंत्र में रेल का डिब्बा दायीं ओर चल रहा है। इसलिए S के तंत्र में, जिस बिंदु पर S बल्ब को फ़्लैश करते हुए देखता है, उस बिंदु और डिब्बे के बायें सिरे के बीच की दूरी, उसी बिंदु और डिब्बे के दाएं सिरे के बीच दूरी की तुलना में कम होती है। इसके नतीजतन ऽ यह मापता है कि डिब्बे के बायें सिरे पर प्रकाश का स्पंद, डिब्बे के दायें सिरे पर पहुँचने वाले प्रकाश के स्पंद की अपेक्षा, पहले पहुँचता है। इस तरह, S के निर्देश तंत्र में, ये दोनों प्रकाश के स्पंद डिब्बे के सिरों पर एक-साथ, एक ही क्षण पर नहीं पहुँचते । लेकिन, प्रकाश की चाल तो अचर है। इसलिए S के तंत्र में ये दोनों घटनाएं एक ही क्षण पर नहीं घटतीं । चित्र एक.पाँच: चलती रेलगाड़ी के डिब्बे में स्थित जड़त्वीय प्रेक्षक S" द्वारा की गई माप से बिल्कुल अलग, पृथ्वी पर स्थित अचल प्रेक्षक मापता है कि प्रकाश स्पंद डिब्बे के सिरों तक एक ही क्षण पर नहीं पहुँचते। ये चित्र जड़त्वीय प्रेक्षक S के सापेक्ष हैं। अब अगर न्यूटनी यांत्रिकी सही होती तो ऽ के तंत्र में ये दोनों स्पंद एक-साथ दोनों सिरों पर पहुँचते : यह बात ऽ के तंत्र में प्रकाश की मापी गई भिन्न चालों के ज़रिए समझायी जा सकती थी । प्रेक्षक S बायीं ओर चलने वाले स्पंद की चाल मापता क्योंकि वह स्पंद रेलगाड़ी की गति के विपरीत दिशा में गतिमान है। दायीं ओर चलने वाला स्पंद ज़्यादा दूरी चलेगा लेकिन उसकी चाल भी ज़्यादा होगी जोकि के बराबर है। इस तरह ऽ दोनों ही समयांतरालों का एक ही मान मापेगा और इस निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि दोनों ही स्पंद डिब्बे के सिरों पर एक ही क्षण पहुँचते हैं। यह बात निरपेक्ष काल की क्लासिकी अवधारणा से मूलभूत रूप से भिन्न हैं, क्योंकि इसके अनुसार अलग-अलग प्रेक्षक इस बात पर सहमत नहीं होते कि एक ही क्षण का क्या मतलब है। हाँ, यहाँ यह ज़रूर याद रखिए कि इस परिणाम को उन घटनाओं के लिए निकाला गया है जो अलग-अलग स्थितियों पर घट रही हैं। उदाहरण के लिए, डिब्बे के दो सिरे। अगली इकाई में हम इस बात पर फिर से चर्चा करेंगे और तब उन घटनाओं को भी लेंगे जो आकाश के एक ही बिंदु पर एक क्षण पर घटती हैं। विशिष्ट आपेक्षिकता का उदय
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समाजवादी पार्टी रविवार को अखिलेश यादव अपने दल का घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। घोषणा पत्र के वादों-इरादों पर वोटरों के साथ विपक्ष की भी निगाहें हैं।
लखनऊ (जेएनएन)। समाजवादी पार्टी रविवार को अखिलेश यादव अपने दल का घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। उनके घोषणा पत्र के वादों और इरादों पर वोटरों के साथ विपक्ष की भी निगाहें हैं। समझा जाता है कि इस बार समाजवादी घोषणा पत्र में विकासवादी सोच नजर आएगी। बिजली, पानी, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, मुफ्त फोन, नदी सफाई और माडर्न शहरों के वादे से जनता को लुभाने का प्रयास हो सकता है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रणनीतिकारों में शुमार राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि सपा 22 जनवरी को अपना घोषणा पत्र जारी करेगी। सूत्रों के मुताबिक घोषणा पत्र में यमुना नदी सफाई व उसके विकास का मुद्दा अहम रहेगा। गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर आगरा और मथुरा में यमुना रिवर फ्रंट का वादा हो सकता है। आगरा को दुनिया भर की सुविधाओं से लैस शहर बनाने का वादा हो सकता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तरह, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गन्ना पट्टी की ओर से जाने वाले रूहेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण का वादा भी दिख सकता है। आधा दर्जन शहरों में मेट्रो चलाने का वादा किया जाएगा।
सपा के घोषणापत्र में किसानों के लिए बड़े वादे होने की संभावना है। सिंचाई व्यवस्था के लिए अलग विद्युत फीडर के साथ एक सीमा तक मुफ्त बिजली का एलान हो सकता है। गांव को 24 घंटे बिजली का वादा भी होगा। खाद, बीज और गन्ना किसानों को उचित मूल्य दिलाने का वादा होने के भी आसार हैं। आलू किसानों और इत्र व्यापारियों के लिए भी लुभावने वादे हो सकते हैं। आचार संहिता से ठीक पहले 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव पास करने के बाद अब चुनाव घोषणा पत्र में इन जातियों के विकास के लिए विशेष पैकेज का वादा नजर आ सकता है। बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा खत्म करने व जैविक खेती को बढ़ावा के लिए विशेष पैकेज का वादा किए जाने की उम्मीद है।
अखिलेश यादव ने मुफ्त स्मार्ट फोन योजना का रजिस्ट्रेशन शुरू करते ही इसे गेंम चेंजर कहा था। फोन का वादा होने के साथ मेधावी बच्चों को लैपटाप वितरण की योजना जारी रखने का वादा भी किया जा सकता है। आसरा योजना के तहत राज्य सरकार गरीबों को एक कमरे का घर मुहैया कराती है। इस बार गरीबों को दो कमरों का घर देने का वादा किया जाएगा। सपा के घोषणापत्र में उच्च गुणवत्ता का मिड डे मील वितरित करने का वादा होगा। स्कूली बच्चों को फल, दूध का वादा भी किया जा सकता है। प्राथमिक स्कूलों में बेहतर फर्नीचर, बिजली, पंखा और साफ पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का वादा भी हो सकता है।
घोषणा पत्र में कानून व्यवस्था पर खास फोकस किया जाएगा। पुलिस में एक लाख जवानों की भर्ती, पीएसी को उच्चीकृत करने, थानों को मार्डन बनाने और डायल-यूपी-100 के विस्तार का वादा होगा। दंगा रोधी दल गठित करने का वादा हो सकता है। पुलिसकर्मियों की आवासीय सुविधा बेहतर करने का वादा भी इस घोषणा पत्र में दिख सकता है।
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समाजवादी पार्टी रविवार को अखिलेश यादव अपने दल का घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। घोषणा पत्र के वादों-इरादों पर वोटरों के साथ विपक्ष की भी निगाहें हैं। लखनऊ । समाजवादी पार्टी रविवार को अखिलेश यादव अपने दल का घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। उनके घोषणा पत्र के वादों और इरादों पर वोटरों के साथ विपक्ष की भी निगाहें हैं। समझा जाता है कि इस बार समाजवादी घोषणा पत्र में विकासवादी सोच नजर आएगी। बिजली, पानी, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, मुफ्त फोन, नदी सफाई और माडर्न शहरों के वादे से जनता को लुभाने का प्रयास हो सकता है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रणनीतिकारों में शुमार राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि सपा बाईस जनवरी को अपना घोषणा पत्र जारी करेगी। सूत्रों के मुताबिक घोषणा पत्र में यमुना नदी सफाई व उसके विकास का मुद्दा अहम रहेगा। गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर आगरा और मथुरा में यमुना रिवर फ्रंट का वादा हो सकता है। आगरा को दुनिया भर की सुविधाओं से लैस शहर बनाने का वादा हो सकता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तरह, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गन्ना पट्टी की ओर से जाने वाले रूहेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण का वादा भी दिख सकता है। आधा दर्जन शहरों में मेट्रो चलाने का वादा किया जाएगा। सपा के घोषणापत्र में किसानों के लिए बड़े वादे होने की संभावना है। सिंचाई व्यवस्था के लिए अलग विद्युत फीडर के साथ एक सीमा तक मुफ्त बिजली का एलान हो सकता है। गांव को चौबीस घंटाटे बिजली का वादा भी होगा। खाद, बीज और गन्ना किसानों को उचित मूल्य दिलाने का वादा होने के भी आसार हैं। आलू किसानों और इत्र व्यापारियों के लिए भी लुभावने वादे हो सकते हैं। आचार संहिता से ठीक पहले सत्रह अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव पास करने के बाद अब चुनाव घोषणा पत्र में इन जातियों के विकास के लिए विशेष पैकेज का वादा नजर आ सकता है। बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा खत्म करने व जैविक खेती को बढ़ावा के लिए विशेष पैकेज का वादा किए जाने की उम्मीद है। अखिलेश यादव ने मुफ्त स्मार्ट फोन योजना का रजिस्ट्रेशन शुरू करते ही इसे गेंम चेंजर कहा था। फोन का वादा होने के साथ मेधावी बच्चों को लैपटाप वितरण की योजना जारी रखने का वादा भी किया जा सकता है। आसरा योजना के तहत राज्य सरकार गरीबों को एक कमरे का घर मुहैया कराती है। इस बार गरीबों को दो कमरों का घर देने का वादा किया जाएगा। सपा के घोषणापत्र में उच्च गुणवत्ता का मिड डे मील वितरित करने का वादा होगा। स्कूली बच्चों को फल, दूध का वादा भी किया जा सकता है। प्राथमिक स्कूलों में बेहतर फर्नीचर, बिजली, पंखा और साफ पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का वादा भी हो सकता है। घोषणा पत्र में कानून व्यवस्था पर खास फोकस किया जाएगा। पुलिस में एक लाख जवानों की भर्ती, पीएसी को उच्चीकृत करने, थानों को मार्डन बनाने और डायल-यूपी-एक सौ के विस्तार का वादा होगा। दंगा रोधी दल गठित करने का वादा हो सकता है। पुलिसकर्मियों की आवासीय सुविधा बेहतर करने का वादा भी इस घोषणा पत्र में दिख सकता है।
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Poonam Pandey ने सिजलिंग ग्रीन बिकनी पहन खुद को बताया हल्क का फैन, एक्ट्रेस की हॉट तस्वीरों ने यूजर्स को किया घायल (View Pics)
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लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ः Poonam Pandey ने सिजलिंग ग्रीन बिकनी पहन खुद को बताया हल्क का फैन, एक्ट्रेस की हॉट तस्वीरों ने यूजर्स को किया घायल Poonam Pandey ने सिजलिंग ग्रीन बिकनी पहन खुद को बताया हल्क का फैन, एक्ट्रेस की हॉट तस्वीरों ने यूजर्स को किया घायल भोजपुरी अदाकारा Monalisa ने सेक्सी पिंक आउटफिट पहन मटकाई कमरिया, एक्ट्रेस का ठुमके देख यूजर्स का मचला दिल Godhra Teaser: 'गोधरा' का दिल दहला देने वाला टीजर हुआ रिलीज, यह फिल्म विवादास्पद गोधरा कांड की करेगी पड़ताल Gandi Baat फेम Anveshi Jain ने मोनोकिनी पहन समंदर किनारे लगाई आग, एक्ट्रेस की तस्वीरों ने सोशल मीडिया का तापमान Bride Stuck In Lift: विवाह स्थल के लिए जा रही दुल्हन लिफ्ट में फंसी, काफी मशक्कत के बाद निकाला गया बाहर Odisha: ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, दो आरपीएफ अधिकारियों ने ऐसे बचाई जान दादी ने 'मोनिका ओ माय डार्लिंग' पर धमाकेदार अंदाज में किया डांस, लटके-झटके देख उड़े लोगों के होश Vishnu Sahashtranam दो हज़ार इक्कीस: विष्णु सहस्त्रनाम में शिव का नाम क्यों? गुरूवार को इसका जाप करने से होती है हर मनोकामना पूरी! शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के बीच हुई लड़ाई, नारद बन बेटे वियान ने शुरू करवाया महाभारत महाभारत में द्रौपदी का चीर हरण देख हिल गए दर्शक, ट्विटर पर पूछा- क्या आज के दौर में आयेंगे कोई कृष्ण? Citadel दो: Priyanka Chopra और Richard Maiden स्टारर स्पाई थ्रिलर 'सिटाडेल' के दूसरे सीजन का हुआ ऐलान, जो रूसो आगामी सभी एपिसोड का करेंगे निर्देशन Bank Holidays in June दो हज़ार तेईस: जून में इतने दिन रहेंगे बैंक बंद! दो हज़ार के नोट बदलवाने वाले देखें बैंक-बंदी की सूची!
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PUEDESSER VENEMEN
वाइलगाइबिबेकनकोबहुशोधककोक हिवाधक जोतो। औरकोकेशवलूटतोजन्मअनेकनकेतपसानकोयोतो । तौममलोकसबैजगजातोजोकामबड़ोबटपारनहोतो ॥ ११ ॥ टी० - यामें यौवनकृत दुःख कहत हैं वेद पुराणनको प्रथम तौ सुनत नहीं औ सुनत है तो समुझत नहीं औ समुझत है तो त्रसत कहे डरत नहीं और वेद वचनही को निंदाकरि हॅसत है वानरसम विलसत कहि या जनायो कि पशुसम बुद्धि जाति है ॥ १० ॥ यामें काम व्यौहारकृत पीडा कहत है साधक प्राणायामादि एतो कहे जहाज पचीसयें प्रकाशमें यकतालिसयें दोहामें रामचन्द्र कह्यो है मोहि न हतो जानाईबे सबहीं जान्यों आज यासों या जानौं रामचन्द्र ईश्वरत्वको छपाये रहे हैं औ यामें ममलोक सबै जग जातो या उक्तिसों ईश्वरत्व प्रगट होत है तहां कविको भ्रम जानब अथवा तौ ममलोक कहे ममताविशिष्ठ जे लोक मर्त्य लोकादि हैं तिनसों सबै जग कहे सब जगतके जीव आपने स्थानको ब्रह्मपदको इतिशेषः जातो प्राप्त होतो ॥ ११ ॥
मूमकरंदविजयाछंद । कॅपैबरवानीडगेउरडीठितुचातिकुचैसकुचैमतिबेली । नवैनवग्रीवथकैगतिकेशवबालकते सँगहीसँगखेली ।। लियेसब आधिनव्याधिनसंगजराजबआवैज्वराकीसहेली । भगैसबदेहदशाजियसाथरहैदुरिदौरिदुराशाअकेली ॥ १२ ॥
टी० - यामें वृद्धताको व्यवहार कहत हैं पुत्रादिके कटुवचनादिसों जनित जो आधि कहे मानसी व्यथा औ व्याधि शरीर व्यथा ( ज्वरादि ) तिनके संगमें लिये ज्वरा जो मृत्यु है ताकी सहेली सखी जो जरा ( वृद्धता ) है सो जबदेहमें आवति है तब ताके उरसों बाणी कांपै लागति है अर्थ मुखसों व्यक्त वचन नहीं कढत औ डीठि डंगै कहे डगमगाति है औ त्वचा कहे चर्म अति कुचै कहे बहुत सिकुरि जाति है औ मति ( बुद्धि ) रूपी जो बेली ( लता ) है सो सकुचै कहे संकोचको प्राप्त होति है अर्थ बुद्धि हीन होति जाति है औ नव कहे नवीन प्रकारसों ग्रीवा नवै कहे नत होति है नवपद यासों कयौ कि और जो कोऊ काहूको नवत है अर्थ प्रणाम करत है सो नयोई नहीं रहत ग्रीवा जबसों नवति है तबसों नईही रहति है उठति ही नहीं अथवा भयसों अनित्यको छोंडि नत होति
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PUEDESSER VENEMEN वाइलगाइबिबेकनकोबहुशोधककोक हिवाधक जोतो। औरकोकेशवलूटतोजन्मअनेकनकेतपसानकोयोतो । तौममलोकसबैजगजातोजोकामबड़ोबटपारनहोतो ॥ ग्यारह ॥ टीशून्य - यामें यौवनकृत दुःख कहत हैं वेद पुराणनको प्रथम तौ सुनत नहीं औ सुनत है तो समुझत नहीं औ समुझत है तो त्रसत कहे डरत नहीं और वेद वचनही को निंदाकरि हॅसत है वानरसम विलसत कहि या जनायो कि पशुसम बुद्धि जाति है ॥ दस ॥ यामें काम व्यौहारकृत पीडा कहत है साधक प्राणायामादि एतो कहे जहाज पचीसयें प्रकाशमें यकतालिसयें दोहामें रामचन्द्र कह्यो है मोहि न हतो जानाईबे सबहीं जान्यों आज यासों या जानौं रामचन्द्र ईश्वरत्वको छपाये रहे हैं औ यामें ममलोक सबै जग जातो या उक्तिसों ईश्वरत्व प्रगट होत है तहां कविको भ्रम जानब अथवा तौ ममलोक कहे ममताविशिष्ठ जे लोक मर्त्य लोकादि हैं तिनसों सबै जग कहे सब जगतके जीव आपने स्थानको ब्रह्मपदको इतिशेषः जातो प्राप्त होतो ॥ ग्यारह ॥ मूमकरंदविजयाछंद । कॅपैबरवानीडगेउरडीठितुचातिकुचैसकुचैमतिबेली । नवैनवग्रीवथकैगतिकेशवबालकते सँगहीसँगखेली ।। लियेसब आधिनव्याधिनसंगजराजबआवैज्वराकीसहेली । भगैसबदेहदशाजियसाथरहैदुरिदौरिदुराशाअकेली ॥ बारह ॥ टीशून्य - यामें वृद्धताको व्यवहार कहत हैं पुत्रादिके कटुवचनादिसों जनित जो आधि कहे मानसी व्यथा औ व्याधि शरीर व्यथा तिनके संगमें लिये ज्वरा जो मृत्यु है ताकी सहेली सखी जो जरा है सो जबदेहमें आवति है तब ताके उरसों बाणी कांपै लागति है अर्थ मुखसों व्यक्त वचन नहीं कढत औ डीठि डंगै कहे डगमगाति है औ त्वचा कहे चर्म अति कुचै कहे बहुत सिकुरि जाति है औ मति रूपी जो बेली है सो सकुचै कहे संकोचको प्राप्त होति है अर्थ बुद्धि हीन होति जाति है औ नव कहे नवीन प्रकारसों ग्रीवा नवै कहे नत होति है नवपद यासों कयौ कि और जो कोऊ काहूको नवत है अर्थ प्रणाम करत है सो नयोई नहीं रहत ग्रीवा जबसों नवति है तबसों नईही रहति है उठति ही नहीं अथवा भयसों अनित्यको छोंडि नत होति
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हरिद्वारः कोरोना काल के बाद हर तरफ आर्थिक मंदी की मार है। चोर भी इससे अछूते नहीं है। मंदी का शिकार चोरों को सोने-चांदी के जेवरात नहीं मिले तो तारकोल से भरे ड्रमों पर ही हाथ साफ कर दिया। मामला दक्षनगरी कनखल में सामने आया है। शाकुंभरी ट्रेडिंग के नाम से फर्म चलाने वाले ईश्वरीपाल ने पुलिस को बताया कि जगजतीपुर में लक्सर रोड़ पर तारकोल के ड्रम रखने के लिए प्लॉट लिया हुआ है। हाल ही में उन्होंने 50 ड्रम मंगाए थे। ईश्वरी पाल का कहना है कि वह रक्षाबंधन मनाने गया हुआ था, वापस लौटा तो 30 ड्रम गायब मिले। एसएचओ कनखल कमल कुमार लुंठी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर चोरों की तलाश शुरू कर दी गई है।
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हरिद्वारः कोरोना काल के बाद हर तरफ आर्थिक मंदी की मार है। चोर भी इससे अछूते नहीं है। मंदी का शिकार चोरों को सोने-चांदी के जेवरात नहीं मिले तो तारकोल से भरे ड्रमों पर ही हाथ साफ कर दिया। मामला दक्षनगरी कनखल में सामने आया है। शाकुंभरी ट्रेडिंग के नाम से फर्म चलाने वाले ईश्वरीपाल ने पुलिस को बताया कि जगजतीपुर में लक्सर रोड़ पर तारकोल के ड्रम रखने के लिए प्लॉट लिया हुआ है। हाल ही में उन्होंने पचास ड्रम मंगाए थे। ईश्वरी पाल का कहना है कि वह रक्षाबंधन मनाने गया हुआ था, वापस लौटा तो तीस ड्रम गायब मिले। एसएचओ कनखल कमल कुमार लुंठी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर चोरों की तलाश शुरू कर दी गई है।
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बिहार में लूट को अंजाम देने वाले बदमाशों से घूस लेकर उन्हें जेल से छोड़ने का मामला सामने आया है। इस मामले में पांच पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। मामला बिहार के पटना के नौबतपुर थाना क्षेत्र का है। डीआईजी सेंट्रल रेंज आर कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि पांच पुलिकर्मियों ने पिछले सप्ताह नौबतपुर में 18 लाख की लूट को अंजाम देने वाले अपराधियों को घूस लेकर छोड़ दिया।
इस मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और आगे जांच की जा रही है। डीआईजी आर कुमार ने बताया कि बेऊर थाना पुलिस ने सिक्कों से भरा एक पिकअप वाहन बरामद किया था जिसे लूट लिया गया था, यह घटना सिक्का कांड के नाम से चर्चित हुआ था। एसआईटी की जांच के बाद यह सामने आया कि अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे डेढ़ लाख रुपए लेकर उन्हें छोड़ दिया। जांच के दौरान मनेर निवासी विट्टू और पिंटू को दानापुर इलाके से गिरफ्तार किया और दो लाख रुपये के सिक्के बरामद किए।
पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि पांच पुलिसकर्मियों ने घूस लेकर अपराधियों को छोड़ दिया। इस मामले में बेऊर थाने के थानाध्यक्ष प्रवेश कुमार भारती, एसआई सुनील चौधरी और विनोद राय, होमगार्ड विनोद शर्मा और कृष्ण मुरारी तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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बिहार में लूट को अंजाम देने वाले बदमाशों से घूस लेकर उन्हें जेल से छोड़ने का मामला सामने आया है। इस मामले में पांच पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। मामला बिहार के पटना के नौबतपुर थाना क्षेत्र का है। डीआईजी सेंट्रल रेंज आर कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि पांच पुलिकर्मियों ने पिछले सप्ताह नौबतपुर में अट्ठारह लाख की लूट को अंजाम देने वाले अपराधियों को घूस लेकर छोड़ दिया। इस मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और आगे जांच की जा रही है। डीआईजी आर कुमार ने बताया कि बेऊर थाना पुलिस ने सिक्कों से भरा एक पिकअप वाहन बरामद किया था जिसे लूट लिया गया था, यह घटना सिक्का कांड के नाम से चर्चित हुआ था। एसआईटी की जांच के बाद यह सामने आया कि अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे डेढ़ लाख रुपए लेकर उन्हें छोड़ दिया। जांच के दौरान मनेर निवासी विट्टू और पिंटू को दानापुर इलाके से गिरफ्तार किया और दो लाख रुपये के सिक्के बरामद किए। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई कि पांच पुलिसकर्मियों ने घूस लेकर अपराधियों को छोड़ दिया। इस मामले में बेऊर थाने के थानाध्यक्ष प्रवेश कुमार भारती, एसआई सुनील चौधरी और विनोद राय, होमगार्ड विनोद शर्मा और कृष्ण मुरारी तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। इंदौर (Indore) से हाल ही में हनी ट्रेप (Honey Trap) का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक मां और बेटी ने मिल कर कई लोगों को ब्लैकमेल किया साथ ही शिकायत दर्ज कर पैसों की भी मांग की। दरअसल, महिला ने पति और बेटी के साथ मिल कर करीब तीन थानों में 8 फर्जी केस लगाए। जिसमें मयूर वर्मा, आकाश वर्मा, आशीष चौहान, विनोद राठौर, अंकित, प्रताप बघेल, सोनू मौर्य के साथ एक अन्य को भी इस मामले में फंसाया और उनके खिलाफ थाने में झूठी शिकायत भी दर्ज करवाई।
ये मामला इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र का है। यहां पुलिस ने महिला और बेटी को एक जाल बिछा कर अपनी गिरफ्त में ले लिया। ये मां बेटी दूसरों को झूठे दुष्कर्म के आरोप में फंसाती थी, उसके बाद शिकायत दर्ज करवा कर पैसों की मांग करती थी। ऐसे में जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस द्वारा इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं अब पुलिस इस मामले में साथ देने वाले अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। दरअसल, महिला और बेटी के द्वारा तीन थानों में आठ प्रकरण दर्ज करवाए गए है। अभी भी ये महिला 6 लोगों के खिलाफ शिकायत लेकर थाने के चक्कर लगा रही थी।
इस मामले को लेकर डीसीपी जोन-2 संपत उपाध्याय ने बताया कि गिरफ्तार महिला श्रीनाथ सिटी ढाबली की रहने वाली है। वह पैसों के लिए दूसरों को फंसाती थी, उसके बाद झूठे आरोप लगा कर पैसों की मांग करती थी। इस महिला ने अब तक मयूर वर्मा, आकाश वर्मा, आशीष चौहान, विनोद राठौर, अंकित प्रताप बघेल, सोनू मौर्य के साथ अन्य लोगों को फंसा कर उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया। महिला ने ये आरोप लगाया है कि साल 2018 में मयूर ने साईं सिटी कालोनी में जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था। ऐसे में महिला ने ये आरोप लगाया कि मयूर ने नशे की चीज पीला कर उसके साथ रैप किया। उसके बाद वीडियो भी बनाया और धमकी देकर फिर से दुष्कर्म किया।
इसके अलावा महिला ने ये भी कहा कि मयूर, आकाश और विनोद ने वीडियो वायरल करने और बदनाम करने की धमकी दी साथ ही मुझसे 60 लाख रुपए भी लिए। इतना ही नहीं सोनू, आशीष, अंकित भी मुझसे अब तक 30 लाख रुपए ले चुके हैं। इन लोगों के पास मेरा वीडियो है। ये वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहे हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं। उसने कहा कि अगर किसी ने ज्यादा परेशान किया तो वह सुसाइड कर लेगी।
इस शिकायत के बाद पुलिस ने सभी को बुला कर उनसे पूछताछ की तो लोगों ने बताया कि महिला धमकी देती है और उसका पति भी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हुआ था। उस समय महिला की मनीष ने आर्थिक मदद की थी। लेकिन बाद में महिला ने ही धमकी देना शुरू कर दिया और पैसों की मांग करने लग गई। इतना ही नहीं महिला ने फांसी लगते हुए वीडियो भेजी और दुष्कर्म में फंसाने की धमकी दी। अब पुलिस ने महिला और बेटी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। महिला से पूछताछ की जा रही है।
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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। इंदौर से हाल ही में हनी ट्रेप का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक मां और बेटी ने मिल कर कई लोगों को ब्लैकमेल किया साथ ही शिकायत दर्ज कर पैसों की भी मांग की। दरअसल, महिला ने पति और बेटी के साथ मिल कर करीब तीन थानों में आठ फर्जी केस लगाए। जिसमें मयूर वर्मा, आकाश वर्मा, आशीष चौहान, विनोद राठौर, अंकित, प्रताप बघेल, सोनू मौर्य के साथ एक अन्य को भी इस मामले में फंसाया और उनके खिलाफ थाने में झूठी शिकायत भी दर्ज करवाई। ये मामला इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र का है। यहां पुलिस ने महिला और बेटी को एक जाल बिछा कर अपनी गिरफ्त में ले लिया। ये मां बेटी दूसरों को झूठे दुष्कर्म के आरोप में फंसाती थी, उसके बाद शिकायत दर्ज करवा कर पैसों की मांग करती थी। ऐसे में जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस द्वारा इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं अब पुलिस इस मामले में साथ देने वाले अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। दरअसल, महिला और बेटी के द्वारा तीन थानों में आठ प्रकरण दर्ज करवाए गए है। अभी भी ये महिला छः लोगों के खिलाफ शिकायत लेकर थाने के चक्कर लगा रही थी। इस मामले को लेकर डीसीपी जोन-दो संपत उपाध्याय ने बताया कि गिरफ्तार महिला श्रीनाथ सिटी ढाबली की रहने वाली है। वह पैसों के लिए दूसरों को फंसाती थी, उसके बाद झूठे आरोप लगा कर पैसों की मांग करती थी। इस महिला ने अब तक मयूर वर्मा, आकाश वर्मा, आशीष चौहान, विनोद राठौर, अंकित प्रताप बघेल, सोनू मौर्य के साथ अन्य लोगों को फंसा कर उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया। महिला ने ये आरोप लगाया है कि साल दो हज़ार अट्ठारह में मयूर ने साईं सिटी कालोनी में जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था। ऐसे में महिला ने ये आरोप लगाया कि मयूर ने नशे की चीज पीला कर उसके साथ रैप किया। उसके बाद वीडियो भी बनाया और धमकी देकर फिर से दुष्कर्म किया। इसके अलावा महिला ने ये भी कहा कि मयूर, आकाश और विनोद ने वीडियो वायरल करने और बदनाम करने की धमकी दी साथ ही मुझसे साठ लाख रुपए भी लिए। इतना ही नहीं सोनू, आशीष, अंकित भी मुझसे अब तक तीस लाख रुपए ले चुके हैं। इन लोगों के पास मेरा वीडियो है। ये वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहे हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं। उसने कहा कि अगर किसी ने ज्यादा परेशान किया तो वह सुसाइड कर लेगी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने सभी को बुला कर उनसे पूछताछ की तो लोगों ने बताया कि महिला धमकी देती है और उसका पति भी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हुआ था। उस समय महिला की मनीष ने आर्थिक मदद की थी। लेकिन बाद में महिला ने ही धमकी देना शुरू कर दिया और पैसों की मांग करने लग गई। इतना ही नहीं महिला ने फांसी लगते हुए वीडियो भेजी और दुष्कर्म में फंसाने की धमकी दी। अब पुलिस ने महिला और बेटी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। महिला से पूछताछ की जा रही है।
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पेंटागन के एक शीर्ष जनरल ने कहा है कि अमेरिका को सबसे बड़ा खतरा रूस से है और चीन उसके लिए दूसरे नंबर का सबसे खतरनाक देश है। अमेरिका के एक जाने-माने सांसद ने भी ऐसी ही राय रखी है।
हेतन ने कहा कि रूस और चीन पिछले 20 साल में अपनी तुलना अमेरिका की उस शक्तिशाली और पारंपरिक सेना से करते रहे हैं, जो दुनिया के किसी भी युद्धक्षेत्र को जीत सकती है। दोनों देशों ने अमेरिका से सीख ली है और क्षमता निर्माण शुरू कर दिया है।
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पेंटागन के एक शीर्ष जनरल ने कहा है कि अमेरिका को सबसे बड़ा खतरा रूस से है और चीन उसके लिए दूसरे नंबर का सबसे खतरनाक देश है। अमेरिका के एक जाने-माने सांसद ने भी ऐसी ही राय रखी है। हेतन ने कहा कि रूस और चीन पिछले बीस साल में अपनी तुलना अमेरिका की उस शक्तिशाली और पारंपरिक सेना से करते रहे हैं, जो दुनिया के किसी भी युद्धक्षेत्र को जीत सकती है। दोनों देशों ने अमेरिका से सीख ली है और क्षमता निर्माण शुरू कर दिया है।
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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और वैक्सीनेशन पर सरकारी आंकड़ों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झूठ बताया है। राहुल गांधी ने एक चार्ट ट्वीट किया है जिसमें दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा भारत में बेहद कम वैक्सीनेशन ग्राफ है। राहुल ने इसे ट्वीट कर लिखा है कि भारत को वैक्सीन चाहिए, Mr. Lying machine।
नई दिल्ली। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और वैक्सीनेशन पर सरकारी आंकड़ों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झूठ बताया है। राहुल गांधी ने एक चार्ट ट्वीट किया है जिसमें दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा भारत में बेहद कम वैक्सीनेशन ग्राफ है। राहुल ने इसे ट्वीट कर लिखा है कि भारत को वैक्सीन चाहिए, Mr. Lying machine।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ट्वीट किए गए चार्ट पर खूब ट्रोलिंग हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर पर राहुल गांधी को गलत बताया जा रहा।
एक यूजर शहजाद जयहिंद राहुल गांधी को जवाब देते हुए ट्वीट किए हैं कि यू आर लाइंग मशीन सर. . . भारत में 13 करोड़ से अधिक वैक्सीनेशन हो चुका है। पिछले 95 दिनों में वैक्सीनेशन का यह रिकार्ड है। इतना वैक्सीनेशन के लिए अमेरिका ने 101 दिन और चीन ने 109 दिन लगाए। यह आंकड़ा करीब दस प्रतिशत है न कि 1. 4 प्रतिशत। उन्होंने ट्वीट किया है कि कृपया कोराना से लड़े न कि नरेंद्र मोदी से।
एक दूसरे यूजर ने ट्वीट किया है कि वह नहीं जान रहे कि राहुल ने कौन सा डेटा इस्तेमाल किया है। उनको असली डेटा देखना चाहिए।
एक यूजर ने उनकी जानकारी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि कहा कि महादेव आपको सद्बुद्धि दें।
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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और वैक्सीनेशन पर सरकारी आंकड़ों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झूठ बताया है। राहुल गांधी ने एक चार्ट ट्वीट किया है जिसमें दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा भारत में बेहद कम वैक्सीनेशन ग्राफ है। राहुल ने इसे ट्वीट कर लिखा है कि भारत को वैक्सीन चाहिए, Mr. Lying machine। नई दिल्ली। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और वैक्सीनेशन पर सरकारी आंकड़ों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने झूठ बताया है। राहुल गांधी ने एक चार्ट ट्वीट किया है जिसमें दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा भारत में बेहद कम वैक्सीनेशन ग्राफ है। राहुल ने इसे ट्वीट कर लिखा है कि भारत को वैक्सीन चाहिए, Mr. Lying machine। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ट्वीट किए गए चार्ट पर खूब ट्रोलिंग हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर पर राहुल गांधी को गलत बताया जा रहा। एक यूजर शहजाद जयहिंद राहुल गांधी को जवाब देते हुए ट्वीट किए हैं कि यू आर लाइंग मशीन सर. . . भारत में तेरह करोड़ से अधिक वैक्सीनेशन हो चुका है। पिछले पचानवे दिनों में वैक्सीनेशन का यह रिकार्ड है। इतना वैक्सीनेशन के लिए अमेरिका ने एक सौ एक दिन और चीन ने एक सौ नौ दिन लगाए। यह आंकड़ा करीब दस प्रतिशत है न कि एक. चार प्रतिशत। उन्होंने ट्वीट किया है कि कृपया कोराना से लड़े न कि नरेंद्र मोदी से। एक दूसरे यूजर ने ट्वीट किया है कि वह नहीं जान रहे कि राहुल ने कौन सा डेटा इस्तेमाल किया है। उनको असली डेटा देखना चाहिए। एक यूजर ने उनकी जानकारी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि कहा कि महादेव आपको सद्बुद्धि दें।
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कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को आंदोलन करते हुए आज 34 दिन होने जा रहे हैं। कल सरकार और किसानों के बीच कृषि कानून को लेकर, किसानों के प्रस्ताव पर बैठक होने वाली है। सरकार के साथ कल की बैठक के बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि किसान आंदोलन खत्म कर देगें।
आंदोलन कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि कल की बैठक में अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हम प्रदर्शन करते रहेंगे, हम पीछे नहीं हटने वाले है। सरकार को काले कानून वापस लेने होंगे, कानूनों की वापसी होगी तो हम घर जाएंगे वरना नहीं जाएंगे। किसानों ने आगे यह भी कहा कि अगर सरकार हमें हमारा हक देती है तो हम अभी चले जाएंगे, नहीं तो हम नहीं जाएंगे। हमारा साथ देने के लिए पीछे 700 ट्रोलियां और तैयार हैं।
आपको बता दें, कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों को लिखे एक पत्र के जरिए उन्हें दिल्ली के विज्ञान भवन में 30 दिसंबर को दोपहर दो बजे बातचीत करने का न्योता दिया है। पिछली औपचारिक बैठक पांच दिसंबर को हुई थी, जिसमें किसान संगठनों के नेताओं ने तीनों कानूनों को निरस्त करने की अपनी मुख्य मांग पर सरकार से स्पष्ट रूप से जवाब देने को कहा था।
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कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को आंदोलन करते हुए आज चौंतीस दिन होने जा रहे हैं। कल सरकार और किसानों के बीच कृषि कानून को लेकर, किसानों के प्रस्ताव पर बैठक होने वाली है। सरकार के साथ कल की बैठक के बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि किसान आंदोलन खत्म कर देगें। आंदोलन कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि कल की बैठक में अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हम प्रदर्शन करते रहेंगे, हम पीछे नहीं हटने वाले है। सरकार को काले कानून वापस लेने होंगे, कानूनों की वापसी होगी तो हम घर जाएंगे वरना नहीं जाएंगे। किसानों ने आगे यह भी कहा कि अगर सरकार हमें हमारा हक देती है तो हम अभी चले जाएंगे, नहीं तो हम नहीं जाएंगे। हमारा साथ देने के लिए पीछे सात सौ ट्रोलियां और तैयार हैं। आपको बता दें, कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों को लिखे एक पत्र के जरिए उन्हें दिल्ली के विज्ञान भवन में तीस दिसंबर को दोपहर दो बजे बातचीत करने का न्योता दिया है। पिछली औपचारिक बैठक पांच दिसंबर को हुई थी, जिसमें किसान संगठनों के नेताओं ने तीनों कानूनों को निरस्त करने की अपनी मुख्य मांग पर सरकार से स्पष्ट रूप से जवाब देने को कहा था।
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नई दिल्लीः भारत के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बादल छाए रहने से जगह-जगह बारिश देखने को मिली, जिससे तापमान काफी नीचे लुढ़क गया। दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत के तमाम हिस्सों में सुबह से बादलों की लुकाछिपी का दौर जारी रहा, जिससे उमस भरी गर्मी से भी कुछ राहत रही। पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में सुबह बारिश होने से तापमान काफी नीचे लुढ़क गया, जिससे हर कोई काफी परेशान होता नजर आया।
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हर सुबह और दोपहर बारिश होने से जगह-जगह किच-किच हो गई। इतना ही नहीं यहां सड़कों पर पानी भरने से लोगों का जीना हराम हो गया। इस बीच भारतीय मौसम विभाग(आईएमडी) ने देश के कई राज्यों में बादलों की गरज और चमक के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी जारी कर दी है।
आईएमडी के मुताबिक देश के कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई है। बिहार, झारखंड और सब हिमालयी में बिजली की चमक के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी जारी कर दी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में भी बिजली की गरज और चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर जारी रह सकता है।
इसके साथ ही मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों, दक्षिणी गुजरात, कोंकण के तमाम हिस्सों में भी बिजली की चमक और गरज का अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं, 25 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम में तेज बारिश होने की संभावना जताई है।
दक्षिण भारत में तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक और तमिलनाडु में झमाझम बारिश का दौर जारी रह सकते है। तेलंगाना, दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक, तमिलनाडु में भी भारी बारिश होने की उम्मीद जताई गई है। इससे जगह-जगह बारिश का दौर जारी रह सकता है।
आईएमडी के अनुसार, दिल्ली से सटे हरियाणा, पंजाब में आगामी 12 घंटे तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद जताई है। इसके अलावा पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा और मराठवाड़ा में बारिश लोगों की आफत बन सकती है। इसके साथ ही गुजरात में 28 सितंबर तक भारी बारिश होने की उम्मीद जताई है।
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नई दिल्लीः भारत के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बादल छाए रहने से जगह-जगह बारिश देखने को मिली, जिससे तापमान काफी नीचे लुढ़क गया। दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत के तमाम हिस्सों में सुबह से बादलों की लुकाछिपी का दौर जारी रहा, जिससे उमस भरी गर्मी से भी कुछ राहत रही। पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में सुबह बारिश होने से तापमान काफी नीचे लुढ़क गया, जिससे हर कोई काफी परेशान होता नजर आया। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हर सुबह और दोपहर बारिश होने से जगह-जगह किच-किच हो गई। इतना ही नहीं यहां सड़कों पर पानी भरने से लोगों का जीना हराम हो गया। इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में बादलों की गरज और चमक के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी जारी कर दी है। आईएमडी के मुताबिक देश के कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई है। बिहार, झारखंड और सब हिमालयी में बिजली की चमक के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी जारी कर दी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में भी बिजली की गरज और चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके साथ ही मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों, दक्षिणी गुजरात, कोंकण के तमाम हिस्सों में भी बिजली की चमक और गरज का अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं, पच्चीस सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम में तेज बारिश होने की संभावना जताई है। दक्षिण भारत में तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक और तमिलनाडु में झमाझम बारिश का दौर जारी रह सकते है। तेलंगाना, दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक, तमिलनाडु में भी भारी बारिश होने की उम्मीद जताई गई है। इससे जगह-जगह बारिश का दौर जारी रह सकता है। आईएमडी के अनुसार, दिल्ली से सटे हरियाणा, पंजाब में आगामी बारह घंटाटे तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद जताई है। इसके अलावा पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा और मराठवाड़ा में बारिश लोगों की आफत बन सकती है। इसके साथ ही गुजरात में अट्ठाईस सितंबर तक भारी बारिश होने की उम्मीद जताई है। - बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
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शायद, किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढना मुश्किल है जो स्वयं द्वारा बनाए गए खिलौने से उदासीन रहे। एक बच्चे के लिए, एक आत्मा के साथ बनाया गया खिलौना हमेशा सबसे मूल्यवान होगा, वयस्क व्यक्ति के लिए यह एक अद्भुत स्मारिका बन जाएगा जो प्यार, गर्मी और आराम को विकृत करता है। मुलायम प्राकृतिक कपड़े से बने खिलौने, एक बच्चे या एक अच्छे दोस्त के लिए एक पसंदीदा तकिया बन सकता है जिसके साथ वह खुशी से अपने बिस्तर में सो जाएगा।
अपने हाथों से मुलायम खिलौना बनाने के लिए, हमें निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगीः
- कपड़े गैबार्डिन सफेद, कॉफी या बेज, इससे हम एक बिल्ली का शरीर बना देंगे;
- सूती कपड़े किसी भी, पैंटी के लिए अधिमानतः उज्ज्वल रंग;
- एक तितली, रंग काला, गहरा भूरा, या उदाहरण के रूप में दिखाया गया है, सफेद मटर में काला के लिए एक साटन रिबन;
- सिलाई बिल्ली हैंडल के लिए छोटे प्रकाश बटन;
- एक्रिलिक कपड़े रंग काले, भूरा और सफेद;
- ब्राउन शहतूत का धागा;
- कृत्रिम फूलों का एक गुलदस्ता;
- खिलौनों के लिए भराव, हम सिंटपोन का इस्तेमाल किया।
हमें जो भी चाहिए, उसे तैयार करने के बाद, हम एक खिलौना बनायेंगे।
बिल्ली के खिलौने को अपने हाथों से कैसे सीवन करें?
सिलाई नरम खिलौनों पर एक विस्तृत मास्टर-क्लास है।
- सबसे पहले, खिलौने को सीवन करने के लिए, हमें पैटर्न बनाने की जरूरत है - हम बिल्ली के शरीर के दो विवरण, जाँघिया के दो विवरण और पेन के चार विवरण देंगे। इसे बड़े शीट पर प्रिंट करके पैटर्न का आकार बढ़ाया जा सकता है।
- अब हम कपड़े पर पैटर्न का अनुवाद करते हैं और मशीन सिलाई निष्पादित करते हैं, जिससे भरने के लिए एक छोटी सी गैर-सीवन जगह छोड़ दी जाती है।
- इसके बाद, हमने सिलाई के समोच्च के साथ बिल्ली के बछड़े के विवरण काट दिया, भत्ता के रूप में कुछ मिलीमीटर को पीछे हटाना।
- अब हम सामने के तरफ बिल्ली के शरीर को बदल देते हैं। सबसे पहले, हम बिल्ली के कानों के साथ सिंटपोन भरते हैं, हम उन्हें बहुत कसकर नहीं पहनने की कोशिश करते हैं। फिर तुरंत कान के सामने की तरफ खर्च करें और गाँठ पर बांधकर ध्यान से धागे को काट लें।
- अब हम बिल्ली के बछड़े के शेष हिस्सों के साथ सिंटपोन भरते हैं, हम ध्यान से हाथ से छोड़े गए छेद को सीवन करते हैं। बिल्ली का शरीर तैयार है।
- अब हम बिल्ली के लिए जाँघिया बनाने जा रहे हैं। रंगीन कपड़े का कट लो।
- कपड़े के किनारों को दो बार और सिलाई करें। अगर मशीन में एक ओवरलैक फ़ंक्शन है, तो किनारों को एक बार हटाया जा सकता है और एक बार टकराया जा सकता है।
- अब हम अपने खिलौने को पैंटी के लिए कपड़े पर रख देते हैं और अपनी चौड़ाई मापते हैं, एक साधारण पेंसिल के साथ अंक बनाते हैं, गैलोशेस के बीच एक छोटा त्रिकोण खींचते हैं।
- अब अतिरिक्त कटौती और समोच्च पर जाँघिया सिलाई। हमें खिलौने के लिए कपड़े क्या हैं।
- अगला, एक साधारण पेंसिल के साथ, हम बिल्ली के नाभि के लिए जगह चिह्नित करते हैं।
- अब नाभि बनाओ। धागे पर हम एक गाँठ बांध देंगे, कपड़े को नाभि के निशान से नीचे कुछ सेंटीमीटर छेद करेंगे, जो दूरी लेनी चाहिए भविष्य के खिलौने के आकार पर निर्भर करता है, किसी भी मामले में इस जगह को जाँघिया के नीचे छिपाना चाहिए। हम नाभि के निशान की जगह सुई को हटा देते हैं, फिर सुई को एक मिलीमीटर या दो ऊंची शुरू करते हैं और इसे नोड के पास लाते हैं, फिर स्ट्रिंग को बांधते हैं। नाभि तैयार है।
- अब हम बटन की मदद से बिल्ली के हैंडल को सीवन करते हैं, यह आंकड़ा दिखाता है कि इसे सही तरीके से कैसे किया जाए।
- हम एक धागे पर एक पैंट पैर की सुई के साथ एक थ्रेड पर इकट्ठा करेंगे।
- अब सटीक रूप से हम एक फर मुहर पर जाँघिया डाल देंगे और अनिवार्य रूप से हम उन्हें प्रत्येक तरफ खिलौने के लिए सीवन करेंगे।
- खिलौने के सभी विवरण तैयार और सिलवाए गए हैं। हम उसका चेहरा पर कब्जा करेंगे। सबसे पहले, एक साधारण पेंसिल के साथ, आंखों और ऊन के रूपों को खींचें।
- अब ऊन के लिए चिह्नित स्थानों को भूरे रंग के रंग से चित्रित किया जाएगा, जिससे सफेद धारियां शीर्ष पर होंगी।
- हम खिलौने की आंखें बनाते हैं और काले रंग के साथ दो बिंदुओं की उपस्थिति बनाते हैं।
- जब थूथन तैयार होता है, तो हम मुहर के लिए एक गुलदस्ता से निपटेंगे। कपड़े के फ्लेप्स में लपेटकर कृत्रिम फूलों का एक समूह, रंगों के लिए उपयुक्त रंगों में, और एक रिबन से बंधे हैं। हम बिल्ली के हैंडल के लिए एक ऊतक गुलदस्ता सीवन ।
- और अब हम अपने सज्जन के लिए हमारी गर्दन के चारों ओर एक तितली बना देंगे। साटन रिबन का एक छोटा सा टुकड़ा लें और बीच में अपने किनारों को सीवन करें।
- हम कपड़े और सोशीम के एक और कट के साथ बीच को घेर लेंगे।
- इसके बाद, तितली को खिलौने की गर्दन में संलग्न करें, यह थर्मो बंदूक के साथ सबसे अच्छा किया जाता है, लेकिन आप इसे सिलाई कर सकते हैं।
- फिर हम पैर के फूलों का एक गुच्छा सीते हैं।
- अब मुलिना धागा, हम एक बिल्ली के चेहरे को सीवन करेंगे - एक नाक, एक मुस्कुराहट और एक बदमाश।
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शायद, किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढना मुश्किल है जो स्वयं द्वारा बनाए गए खिलौने से उदासीन रहे। एक बच्चे के लिए, एक आत्मा के साथ बनाया गया खिलौना हमेशा सबसे मूल्यवान होगा, वयस्क व्यक्ति के लिए यह एक अद्भुत स्मारिका बन जाएगा जो प्यार, गर्मी और आराम को विकृत करता है। मुलायम प्राकृतिक कपड़े से बने खिलौने, एक बच्चे या एक अच्छे दोस्त के लिए एक पसंदीदा तकिया बन सकता है जिसके साथ वह खुशी से अपने बिस्तर में सो जाएगा। अपने हाथों से मुलायम खिलौना बनाने के लिए, हमें निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगीः - कपड़े गैबार्डिन सफेद, कॉफी या बेज, इससे हम एक बिल्ली का शरीर बना देंगे; - सूती कपड़े किसी भी, पैंटी के लिए अधिमानतः उज्ज्वल रंग; - एक तितली, रंग काला, गहरा भूरा, या उदाहरण के रूप में दिखाया गया है, सफेद मटर में काला के लिए एक साटन रिबन; - सिलाई बिल्ली हैंडल के लिए छोटे प्रकाश बटन; - एक्रिलिक कपड़े रंग काले, भूरा और सफेद; - ब्राउन शहतूत का धागा; - कृत्रिम फूलों का एक गुलदस्ता; - खिलौनों के लिए भराव, हम सिंटपोन का इस्तेमाल किया। हमें जो भी चाहिए, उसे तैयार करने के बाद, हम एक खिलौना बनायेंगे। बिल्ली के खिलौने को अपने हाथों से कैसे सीवन करें? सिलाई नरम खिलौनों पर एक विस्तृत मास्टर-क्लास है। - सबसे पहले, खिलौने को सीवन करने के लिए, हमें पैटर्न बनाने की जरूरत है - हम बिल्ली के शरीर के दो विवरण, जाँघिया के दो विवरण और पेन के चार विवरण देंगे। इसे बड़े शीट पर प्रिंट करके पैटर्न का आकार बढ़ाया जा सकता है। - अब हम कपड़े पर पैटर्न का अनुवाद करते हैं और मशीन सिलाई निष्पादित करते हैं, जिससे भरने के लिए एक छोटी सी गैर-सीवन जगह छोड़ दी जाती है। - इसके बाद, हमने सिलाई के समोच्च के साथ बिल्ली के बछड़े के विवरण काट दिया, भत्ता के रूप में कुछ मिलीमीटर को पीछे हटाना। - अब हम सामने के तरफ बिल्ली के शरीर को बदल देते हैं। सबसे पहले, हम बिल्ली के कानों के साथ सिंटपोन भरते हैं, हम उन्हें बहुत कसकर नहीं पहनने की कोशिश करते हैं। फिर तुरंत कान के सामने की तरफ खर्च करें और गाँठ पर बांधकर ध्यान से धागे को काट लें। - अब हम बिल्ली के बछड़े के शेष हिस्सों के साथ सिंटपोन भरते हैं, हम ध्यान से हाथ से छोड़े गए छेद को सीवन करते हैं। बिल्ली का शरीर तैयार है। - अब हम बिल्ली के लिए जाँघिया बनाने जा रहे हैं। रंगीन कपड़े का कट लो। - कपड़े के किनारों को दो बार और सिलाई करें। अगर मशीन में एक ओवरलैक फ़ंक्शन है, तो किनारों को एक बार हटाया जा सकता है और एक बार टकराया जा सकता है। - अब हम अपने खिलौने को पैंटी के लिए कपड़े पर रख देते हैं और अपनी चौड़ाई मापते हैं, एक साधारण पेंसिल के साथ अंक बनाते हैं, गैलोशेस के बीच एक छोटा त्रिकोण खींचते हैं। - अब अतिरिक्त कटौती और समोच्च पर जाँघिया सिलाई। हमें खिलौने के लिए कपड़े क्या हैं। - अगला, एक साधारण पेंसिल के साथ, हम बिल्ली के नाभि के लिए जगह चिह्नित करते हैं। - अब नाभि बनाओ। धागे पर हम एक गाँठ बांध देंगे, कपड़े को नाभि के निशान से नीचे कुछ सेंटीमीटर छेद करेंगे, जो दूरी लेनी चाहिए भविष्य के खिलौने के आकार पर निर्भर करता है, किसी भी मामले में इस जगह को जाँघिया के नीचे छिपाना चाहिए। हम नाभि के निशान की जगह सुई को हटा देते हैं, फिर सुई को एक मिलीमीटर या दो ऊंची शुरू करते हैं और इसे नोड के पास लाते हैं, फिर स्ट्रिंग को बांधते हैं। नाभि तैयार है। - अब हम बटन की मदद से बिल्ली के हैंडल को सीवन करते हैं, यह आंकड़ा दिखाता है कि इसे सही तरीके से कैसे किया जाए। - हम एक धागे पर एक पैंट पैर की सुई के साथ एक थ्रेड पर इकट्ठा करेंगे। - अब सटीक रूप से हम एक फर मुहर पर जाँघिया डाल देंगे और अनिवार्य रूप से हम उन्हें प्रत्येक तरफ खिलौने के लिए सीवन करेंगे। - खिलौने के सभी विवरण तैयार और सिलवाए गए हैं। हम उसका चेहरा पर कब्जा करेंगे। सबसे पहले, एक साधारण पेंसिल के साथ, आंखों और ऊन के रूपों को खींचें। - अब ऊन के लिए चिह्नित स्थानों को भूरे रंग के रंग से चित्रित किया जाएगा, जिससे सफेद धारियां शीर्ष पर होंगी। - हम खिलौने की आंखें बनाते हैं और काले रंग के साथ दो बिंदुओं की उपस्थिति बनाते हैं। - जब थूथन तैयार होता है, तो हम मुहर के लिए एक गुलदस्ता से निपटेंगे। कपड़े के फ्लेप्स में लपेटकर कृत्रिम फूलों का एक समूह, रंगों के लिए उपयुक्त रंगों में, और एक रिबन से बंधे हैं। हम बिल्ली के हैंडल के लिए एक ऊतक गुलदस्ता सीवन । - और अब हम अपने सज्जन के लिए हमारी गर्दन के चारों ओर एक तितली बना देंगे। साटन रिबन का एक छोटा सा टुकड़ा लें और बीच में अपने किनारों को सीवन करें। - हम कपड़े और सोशीम के एक और कट के साथ बीच को घेर लेंगे। - इसके बाद, तितली को खिलौने की गर्दन में संलग्न करें, यह थर्मो बंदूक के साथ सबसे अच्छा किया जाता है, लेकिन आप इसे सिलाई कर सकते हैं। - फिर हम पैर के फूलों का एक गुच्छा सीते हैं। - अब मुलिना धागा, हम एक बिल्ली के चेहरे को सीवन करेंगे - एक नाक, एक मुस्कुराहट और एक बदमाश।
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डलमऊ/रायबरेली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते तीन महीने में तीसरी बार नहर की पटरी कटने से क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों बीघे कृषि भूमि सिचाई से वंचित रह गई और वही बेशकीमती प्राकृतिक संपदा अर्थात पानी गेहूं की फसल की सिंचाई करने के बदले नालों में बह रहा है। बताते चलें कि गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे थे। जिसके लिए क्षेत्रीय किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व तहसील के अधिकारियों से नहर में पानी छोड़ने के लिए मांग की थी। जिससे अधिकारियों द्वारा गंग नहर डलमऊ जल पंप से नहर में पानी छोड़ने का आदेश दिया गया था।
अभी मात्र दो-तीन दिन ही नहर में पानी आए हुए बीते थे कि मखदुमपुर व पूरे लालता गांव के बीच नहर की पटरी नहर में जलभराव के कारण कट गई। पुरवा ब्रांच गंग नहर के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते डलमऊ क्षेत्र के मखदुमपुर व पूरे लालता के बीच अक्टूबर माह से दिसंबर माह के बीच नहर में जलभराव के कारण तीसरी बार नहर की पटरी कट चुकी है। जिससे नहर के पानी से गेहूं की फसल की सिंचाई होने के बजाय नाले से बह रहा है। और वही किसानों की गेहूं की फसल सिंचाई ना होने के कारण बर्बाद हो रही है।
वही इस बाबत उप जिलाअधिकारी डलमऊ सविता यादव ने बताया कि नहर कटने की सूचना प्राप्त हुई है। मौके पर नहर विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दिया गया है। व लेखपाल को मौके पर भेज कर नुकसान का आकलन लिया जा रहा है। वही नहर विभाग के अधिकारियों को आदेशित किया गया है। कि तत्काल नहर की पटरी को बनवाने का काम करें ताकि किसानों के सिंचाई के लिए असुविधा ना हो सके।
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डलमऊ/रायबरेली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते तीन महीने में तीसरी बार नहर की पटरी कटने से क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों बीघे कृषि भूमि सिचाई से वंचित रह गई और वही बेशकीमती प्राकृतिक संपदा अर्थात पानी गेहूं की फसल की सिंचाई करने के बदले नालों में बह रहा है। बताते चलें कि गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे थे। जिसके लिए क्षेत्रीय किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों व तहसील के अधिकारियों से नहर में पानी छोड़ने के लिए मांग की थी। जिससे अधिकारियों द्वारा गंग नहर डलमऊ जल पंप से नहर में पानी छोड़ने का आदेश दिया गया था। अभी मात्र दो-तीन दिन ही नहर में पानी आए हुए बीते थे कि मखदुमपुर व पूरे लालता गांव के बीच नहर की पटरी नहर में जलभराव के कारण कट गई। पुरवा ब्रांच गंग नहर के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते डलमऊ क्षेत्र के मखदुमपुर व पूरे लालता के बीच अक्टूबर माह से दिसंबर माह के बीच नहर में जलभराव के कारण तीसरी बार नहर की पटरी कट चुकी है। जिससे नहर के पानी से गेहूं की फसल की सिंचाई होने के बजाय नाले से बह रहा है। और वही किसानों की गेहूं की फसल सिंचाई ना होने के कारण बर्बाद हो रही है। वही इस बाबत उप जिलाअधिकारी डलमऊ सविता यादव ने बताया कि नहर कटने की सूचना प्राप्त हुई है। मौके पर नहर विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दिया गया है। व लेखपाल को मौके पर भेज कर नुकसान का आकलन लिया जा रहा है। वही नहर विभाग के अधिकारियों को आदेशित किया गया है। कि तत्काल नहर की पटरी को बनवाने का काम करें ताकि किसानों के सिंचाई के लिए असुविधा ना हो सके।
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मनोज वर्मा, कैथलः
Aam Aadmi Party: कैथल के प्यौदा रोड पर आयोजित एक समारोह में आम आदमी पार्टी का सदस्यता कार्यक्रम का आयोजन संदीप कोयल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री सुखवीर चहल व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह कार्यक्रम में पहुंचे।
सैकड़ों लोगों ने दूसरे दलों को अलविदा कहकर आम आदमी पार्टी की सदस्यता लीः( Aam Aadmi Party)
पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि, मैंने आम जनमानस के हितों के लिए तीन पैंशन को छोड़ा है, ताकि केजरीवाल की नीतियों को जमीनी स्तर पर साकार किया जा सके। भलाई के काम घर से ही शुरुआत करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी लगातार हरियाणा प्रदेश में बड़े स्तर पर आम जनमानस का समर्थन मिल रहा है और लगातार आम आदमी पार्टी का परिवार पड़ रहा है। संगठन मंत्री सुखबीर चहल ने कहा कि, आम आदमी पार्टी में लोग केजरीवाल की नीतियों से प्रभावित होकर शामिल हो रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री सुखवीर चहल व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ( Aam Aadmi Party)
सुखबीर चहल ने कहा कि, आम आदमी पार्टी देश की पहली पार्टी है जो शिक्षा स्वास्थ्य, सडक़, पानी, और सुरक्षा के ऊपर काम कर रही है और जनता की आवाज बनकर जनहितैषी फैसले लेने का काम कर रही है। पंजाब और दिल्ली में जो काम हुए, वही हरियाणा की जनता चाहती है। सुरजेवाला के ऊपर जुबानी हमला बोलते हुए संगठन मंत्री सुखबीर चहल ने कहा कि, पहले सुरजेवाला दस जनपथ को छोड़ें, फिर जनहितैषी सोच पर बात करें। कोरोना मे आम आदमी पार्टी हरियाणा की जनता के बीच में रही हरियाणा की जनता की आवाज बनकर काम किया और मजबूत सुरक्षाचक्र बनाते हुए कोरोना को हराने का काम किया।
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मनोज वर्मा, कैथलः Aam Aadmi Party: कैथल के प्यौदा रोड पर आयोजित एक समारोह में आम आदमी पार्टी का सदस्यता कार्यक्रम का आयोजन संदीप कोयल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री सुखवीर चहल व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह कार्यक्रम में पहुंचे। सैकड़ों लोगों ने दूसरे दलों को अलविदा कहकर आम आदमी पार्टी की सदस्यता लीः पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने कहा कि, मैंने आम जनमानस के हितों के लिए तीन पैंशन को छोड़ा है, ताकि केजरीवाल की नीतियों को जमीनी स्तर पर साकार किया जा सके। भलाई के काम घर से ही शुरुआत करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी लगातार हरियाणा प्रदेश में बड़े स्तर पर आम जनमानस का समर्थन मिल रहा है और लगातार आम आदमी पार्टी का परिवार पड़ रहा है। संगठन मंत्री सुखबीर चहल ने कहा कि, आम आदमी पार्टी में लोग केजरीवाल की नीतियों से प्रभावित होकर शामिल हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी के संगठन मंत्री सुखवीर चहल व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह सुखबीर चहल ने कहा कि, आम आदमी पार्टी देश की पहली पार्टी है जो शिक्षा स्वास्थ्य, सडक़, पानी, और सुरक्षा के ऊपर काम कर रही है और जनता की आवाज बनकर जनहितैषी फैसले लेने का काम कर रही है। पंजाब और दिल्ली में जो काम हुए, वही हरियाणा की जनता चाहती है। सुरजेवाला के ऊपर जुबानी हमला बोलते हुए संगठन मंत्री सुखबीर चहल ने कहा कि, पहले सुरजेवाला दस जनपथ को छोड़ें, फिर जनहितैषी सोच पर बात करें। कोरोना मे आम आदमी पार्टी हरियाणा की जनता के बीच में रही हरियाणा की जनता की आवाज बनकर काम किया और मजबूत सुरक्षाचक्र बनाते हुए कोरोना को हराने का काम किया।
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NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश गोगू ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल छतराड़ी में स्टाफ की कमी को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से शिमला में मुलाकात की। अविनाश गोगू ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल छतरड़ी में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए शिक्षा मंत्री से गुहार लगाई। इस दौरान इस संबंध में शिक्षा मंत्री को मांग पत्र भी सौंपा।
अपने ज्ञापन में उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत छतराड़ी का सीनियर सेकेंडरी स्कूल सबसे पुराना है, लेकिन यहां पर स्टाफ न होने की वजह से यहां के छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाका होने के कारण लोगों की इनकम भी कम है। लिहाजा वह अपने बच्चों को शहर के स्कूलों में किराए के कमरे लेकर नहीं पढ़ा सकते। यहां सेंक्शन 31 में से 11 पद खाली चल रहे हैं।
यहां पर प्राध्यापकों के भी 6 पद खाली पड़े हुए हैं। लिहाजा बच्चों की पढ़ाई पर यहां बहुत ही विपरीत असर पड़ रहा है। यहां पर स्टाफ व अन्य अध्यापकों के 11 पद रिक्त चले हुए हैं। लिहाजा यहां के बच्चों को मनपसंद विषय पढ़ने के लिए 50 से 60 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिसके लिए उनके अभिभावकों को अपनी जेब खूब ढीली करनी पड़ रही है।
उनकी इस मांग पर शिक्षा मंत्री ने कहा है कि जल्दी ही यहां पर रिक्त पड़े पदों को भर दिया जाएगा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश गोगू ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल छतराड़ी में स्टाफ की कमी को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से शिमला में मुलाकात की। अविनाश गोगू ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल छतरड़ी में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए शिक्षा मंत्री से गुहार लगाई। इस दौरान इस संबंध में शिक्षा मंत्री को मांग पत्र भी सौंपा। अपने ज्ञापन में उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत छतराड़ी का सीनियर सेकेंडरी स्कूल सबसे पुराना है, लेकिन यहां पर स्टाफ न होने की वजह से यहां के छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाका होने के कारण लोगों की इनकम भी कम है। लिहाजा वह अपने बच्चों को शहर के स्कूलों में किराए के कमरे लेकर नहीं पढ़ा सकते। यहां सेंक्शन इकतीस में से ग्यारह पद खाली चल रहे हैं। यहां पर प्राध्यापकों के भी छः पद खाली पड़े हुए हैं। लिहाजा बच्चों की पढ़ाई पर यहां बहुत ही विपरीत असर पड़ रहा है। यहां पर स्टाफ व अन्य अध्यापकों के ग्यारह पद रिक्त चले हुए हैं। लिहाजा यहां के बच्चों को मनपसंद विषय पढ़ने के लिए पचास से साठ किलोग्राममीटर दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिसके लिए उनके अभिभावकों को अपनी जेब खूब ढीली करनी पड़ रही है। उनकी इस मांग पर शिक्षा मंत्री ने कहा है कि जल्दी ही यहां पर रिक्त पड़े पदों को भर दिया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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वर्ष 2021 में नोएडा सेक्टर 134 के रहने वाले डाक्टर गंधर्व गोयल ने दोनों भाई बहनों के खिलाफ धोखाधड़ी शिकायत की थी। बताया गया कि दोनों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से उनके शेयर को नौ सौ रुपये में खरीद लिया और उसे 16 करोड़ रुपये में बेच दिया।
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi Police News: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)ने 16 करोड़ की धोखाधड़ी में भाई-बहन को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार भाई एम्स से डाक्टर की पढ़ाई कर चुका है, जबकि बहन साफ्टवेयर इंजीनियर और आइआइएम से एमबीए किया हुआ है।
दोनों ने एक एप आधारित कारोबार शुरू किया और फर्जीवाड़ा कर अपनी कंपनी के निदेशक के शेयर को कम दाम में बेचकर उन्हें कंपनी से निकाल दिया। इससे निकाले गए निदेशक को 16 करोड़ का नुकसान हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में पंचशील एन्क्लेव के चेरियन और बेंगलुरु की मीनाक्षी है।
ईओडब्ल्यू के विशेष पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंह यादव के अनुसार, वर्ष 2021 में नोएडा सेक्टर 134 के रहने वाले डाक्टर गंधर्व गोयल ने दोनों भाई बहनों के खिलाफ धोखाधड़ी शिकायत की थी। बताया गया कि दोनों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से उनके शेयर को नौ सौ रुपये में खरीद लिया और बाद में उसे 16 करोड़ रुपये में नए निवेशकों को बेच दिया। जिससे उन्हें 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
उन्होंने बताया कि वह और चेरियन एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। दोनों ने मिलकर सिनैप्सिका टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। चेरियन की बहन मीनाक्षी सिंह भी साफ्टवेयर विकसित करने की दृष्टि से कंपनी में शामिल हुई।
साफ्टवेयर का काम बिना रेडियोलाजिस्ट डाक्टर के सीटी स्कैन, एक्स-रे और एमआरआइ का रिपोर्ट तैयार करना था। मीनाक्षी भी उक्त कंपनी में निदेशक और शेयरधारक बन गई। दिसंबर 2019 में कंपनी वाइ-काम्बिनेटर में चयनित हो गई और निवेशकों ने कंपनी में पांच करोड़ रुपये का निवेश किया।
अमेरिका में कंपनी का कारोबार बढ़ाने के लिए सिनैप्सिका हेल्थकेयर इंक के नाम से एक और कंपनी शामिल की गई। जांच में पता चला कि डा चेरियन और मीनाक्षी ने अपनी में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए यूएस में सिनैप्सिका हेल्थकेयर इंक कंपनी बनाई थी।
बाद में इसी कंपनी के जरिए डा गंधर्व गोयल के सिनैप्सिका टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयर को एक एप के जरिये जाली हस्ताक्षर लेकर खरीद लिया। इसके बाद उसी शेयर को निवेशकों को 16 करोड़ में बेच दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित दोनों भाई-बहन को तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित वाइल्ड राक रिजार्ट से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पता चला कि दोनों भाई बहन गंधर्व गोयल के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर संरचित ऐप आधारित व्यवसाय शुरू किया। जब कंपनी में निवेश फला-फूला, तो दोनों ने जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर गंधर्व गोयल को कंपनी से बाहर कर दिया। आरोपित डाक्टर चेरियन ने एम्स दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, मीनाक्षी ने बीई (कंप्यूटर साइंस) और आइआइएम से एमबीए किया हुआ है।
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वर्ष दो हज़ार इक्कीस में नोएडा सेक्टर एक सौ चौंतीस के रहने वाले डाक्टर गंधर्व गोयल ने दोनों भाई बहनों के खिलाफ धोखाधड़ी शिकायत की थी। बताया गया कि दोनों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से उनके शेयर को नौ सौ रुपये में खरीद लिया और उसे सोलह करोड़ रुपये में बेच दिया। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi Police News: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सोलह करोड़ की धोखाधड़ी में भाई-बहन को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार भाई एम्स से डाक्टर की पढ़ाई कर चुका है, जबकि बहन साफ्टवेयर इंजीनियर और आइआइएम से एमबीए किया हुआ है। दोनों ने एक एप आधारित कारोबार शुरू किया और फर्जीवाड़ा कर अपनी कंपनी के निदेशक के शेयर को कम दाम में बेचकर उन्हें कंपनी से निकाल दिया। इससे निकाले गए निदेशक को सोलह करोड़ का नुकसान हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में पंचशील एन्क्लेव के चेरियन और बेंगलुरु की मीनाक्षी है। ईओडब्ल्यू के विशेष पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंह यादव के अनुसार, वर्ष दो हज़ार इक्कीस में नोएडा सेक्टर एक सौ चौंतीस के रहने वाले डाक्टर गंधर्व गोयल ने दोनों भाई बहनों के खिलाफ धोखाधड़ी शिकायत की थी। बताया गया कि दोनों ने उनके फर्जी हस्ताक्षर से उनके शेयर को नौ सौ रुपये में खरीद लिया और बाद में उसे सोलह करोड़ रुपये में नए निवेशकों को बेच दिया। जिससे उन्हें सोलह करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि वह और चेरियन एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। दोनों ने मिलकर सिनैप्सिका टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। चेरियन की बहन मीनाक्षी सिंह भी साफ्टवेयर विकसित करने की दृष्टि से कंपनी में शामिल हुई। साफ्टवेयर का काम बिना रेडियोलाजिस्ट डाक्टर के सीटी स्कैन, एक्स-रे और एमआरआइ का रिपोर्ट तैयार करना था। मीनाक्षी भी उक्त कंपनी में निदेशक और शेयरधारक बन गई। दिसंबर दो हज़ार उन्नीस में कंपनी वाइ-काम्बिनेटर में चयनित हो गई और निवेशकों ने कंपनी में पांच करोड़ रुपये का निवेश किया। अमेरिका में कंपनी का कारोबार बढ़ाने के लिए सिनैप्सिका हेल्थकेयर इंक के नाम से एक और कंपनी शामिल की गई। जांच में पता चला कि डा चेरियन और मीनाक्षी ने अपनी में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए यूएस में सिनैप्सिका हेल्थकेयर इंक कंपनी बनाई थी। बाद में इसी कंपनी के जरिए डा गंधर्व गोयल के सिनैप्सिका टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयर को एक एप के जरिये जाली हस्ताक्षर लेकर खरीद लिया। इसके बाद उसी शेयर को निवेशकों को सोलह करोड़ में बेच दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित दोनों भाई-बहन को तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित वाइल्ड राक रिजार्ट से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि दोनों भाई बहन गंधर्व गोयल के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संरचित ऐप आधारित व्यवसाय शुरू किया। जब कंपनी में निवेश फला-फूला, तो दोनों ने जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर गंधर्व गोयल को कंपनी से बाहर कर दिया। आरोपित डाक्टर चेरियन ने एम्स दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, मीनाक्षी ने बीई और आइआइएम से एमबीए किया हुआ है।
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अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने कल यानी 25 फरवरी को अपना 26वां जन्मदिन मनाया। जन्मदिन पर खुद को विश करते हुए उर्वशी रौतेला ने सोशल मीडिया पर हॉट तस्वीर शेयर की है। वह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे रही है। वह लिखती है - 'आज सूरज सिर्फ मेरे लिए थोड़ा अधिक चमकें। इस धरती पर सबसे बेहतरीन इंसान को जन्मदिन की बधाई, जो कि मैं हूं। जन्मदिन पर आपके खास शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, इसने मुझे आप सभी की बेहद चहेती होने का एहसास कराया। मेरे जन्मदिन पर छुट्टी होनी चाहिए। '
बर्थडे हो और पार्टी ना हो तो जन्मदिन मनाया गया है ऐसा लगता नहीं है। उर्वशी रौतेला ने भी अपना 26वां जन्मदिन धूमधाम सेम मनाया। बर्थडे सेलिब्रेशन में उर्वशी रेड कलर एक ड्रेस पहना था और वह बहुत खूबसूरत लग रह थी।
उर्वशी रौतेला पॉपुलर सेलिब्रिटीयों में से एक है। उनके काफी फैंस फॉलोवर्स भी है। वह आये दिन अपने हॉट फोटोज सोशल मीडिया शेयर करती रहती है। उन में से ये एक तस्वीर भी जिनमें उर्वशी बेहद सुन्दर दिख रही है। वह कैप्शन में लिखती है- 'I'm thinkin about changing my last name 💍'
उर्वशी रौतेला अपनी अदाओं से लोगों को दिवाना बना देती है। उनकी ख़ूबसूरती के सभी कायल है। उर्वशी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 23. 2 फॉलोवर्स है।
वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी आने वाले समय में सुपरहिट तमिल फिल्म 'थिरुत्तु प्याले 2' की हिंदी रीमेक में विनीत कुमार और अक्षय ओबेरॉय संग नजर आएंगी। इसके अलावा वो हिंदी फिल्म 'मिस मैच इंडिया' में भी दिखाई देंगी।
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अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने कल यानी पच्चीस फरवरी को अपना छब्बीसवां जन्मदिन मनाया। जन्मदिन पर खुद को विश करते हुए उर्वशी रौतेला ने सोशल मीडिया पर हॉट तस्वीर शेयर की है। वह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे रही है। वह लिखती है - 'आज सूरज सिर्फ मेरे लिए थोड़ा अधिक चमकें। इस धरती पर सबसे बेहतरीन इंसान को जन्मदिन की बधाई, जो कि मैं हूं। जन्मदिन पर आपके खास शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, इसने मुझे आप सभी की बेहद चहेती होने का एहसास कराया। मेरे जन्मदिन पर छुट्टी होनी चाहिए। ' बर्थडे हो और पार्टी ना हो तो जन्मदिन मनाया गया है ऐसा लगता नहीं है। उर्वशी रौतेला ने भी अपना छब्बीसवां जन्मदिन धूमधाम सेम मनाया। बर्थडे सेलिब्रेशन में उर्वशी रेड कलर एक ड्रेस पहना था और वह बहुत खूबसूरत लग रह थी। उर्वशी रौतेला पॉपुलर सेलिब्रिटीयों में से एक है। उनके काफी फैंस फॉलोवर्स भी है। वह आये दिन अपने हॉट फोटोज सोशल मीडिया शेयर करती रहती है। उन में से ये एक तस्वीर भी जिनमें उर्वशी बेहद सुन्दर दिख रही है। वह कैप्शन में लिखती है- 'I'm thinkin about changing my last name 💍' उर्वशी रौतेला अपनी अदाओं से लोगों को दिवाना बना देती है। उनकी ख़ूबसूरती के सभी कायल है। उर्वशी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर तेईस. दो फॉलोवर्स है। वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी आने वाले समय में सुपरहिट तमिल फिल्म 'थिरुत्तु प्याले दो' की हिंदी रीमेक में विनीत कुमार और अक्षय ओबेरॉय संग नजर आएंगी। इसके अलावा वो हिंदी फिल्म 'मिस मैच इंडिया' में भी दिखाई देंगी।
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मंडी,01 अप्रैल। शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष तौर पर फोकस किया जाए ताकि विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर हो सके । यह उदगार सांसद प्रतिभा सिंह ने सरदार पटेल विवि के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय में शोध कार्य में नवाचार की ओर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे विश्वविद्यालय को नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। वहां केवल शिक्षा की बात होनी चाहिए। उन्होंने विवि के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर विवि के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ को शुभकामनाओं देते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के एक वर्ष के दौरान शानदार काम किया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में स्कूल खोले हैं ताकि लड़कियों को भी उनके घर के नजदीक शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिले। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक साल के थोडे से अर्से मंेे ही इस विवि ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यह विवि और नई ऊंचाईयों को छुएगा। विद्यार्थी जो सपने लेकर यहां आते हैं यह विवि उनके सपनों को जरूर पूरा करेगा।
सांसद प्रतिभा सिंह ने बताया कि इस समय विवि में मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा और लाहौल और स्पिति जिलों के मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के 34,342 छात्र पंजीकृत हैं। विवि के कुलपति आचार्य देव दत्त शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा विवि द्वारा एक वर्ष के अन्दर अर्जित उपलब्धियों के बारे में बताया।
कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह ने बताया कि विवि के सभी विभागों में पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं। विवि में पीजी पाठ्यक्रम के लिए 305 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इस अवधि के दौरान तीन पेटेंट प्रकाशित हो चुके हैं जबकि पांच पेटेंटस फैकल्टी सदस्यों द्वारा दाखिल किए जा चुके हैं। विवि के विद्यार्थियों ने इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य चंपा ठाकुर, विवि के रजिस्ट्रार मदन कुमार, चेतराम ठाकुर, पुष्पराज शर्मा, राजेन्द्र मोहन, विवि के डीन विकास परिषद डॉ. राजेश शर्मा, एसोसिएट डीन शोध डॉ. अक्षय कुमार, इतिहास विभाग के समन्वयक राकेश शर्मा, डॉ. चेतन चौहान, संयोजन वनस्पति डॉ. जगदीप वर्मा, विभिन्न विभागों के आचार्य, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
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मंडी,एक अप्रैल। शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष तौर पर फोकस किया जाए ताकि विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर हो सके । यह उदगार सांसद प्रतिभा सिंह ने सरदार पटेल विवि के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय में शोध कार्य में नवाचार की ओर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे विश्वविद्यालय को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। वहां केवल शिक्षा की बात होनी चाहिए। उन्होंने विवि के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर विवि के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ को शुभकामनाओं देते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के एक वर्ष के दौरान शानदार काम किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में स्कूल खोले हैं ताकि लड़कियों को भी उनके घर के नजदीक शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिले। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक साल के थोडे से अर्से मंेे ही इस विवि ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यह विवि और नई ऊंचाईयों को छुएगा। विद्यार्थी जो सपने लेकर यहां आते हैं यह विवि उनके सपनों को जरूर पूरा करेगा। सांसद प्रतिभा सिंह ने बताया कि इस समय विवि में मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा और लाहौल और स्पिति जिलों के मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के चौंतीस,तीन सौ बयालीस छात्र पंजीकृत हैं। विवि के कुलपति आचार्य देव दत्त शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा विवि द्वारा एक वर्ष के अन्दर अर्जित उपलब्धियों के बारे में बताया। कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह ने बताया कि विवि के सभी विभागों में पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं। विवि में पीजी पाठ्यक्रम के लिए तीन सौ पाँच विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इस अवधि के दौरान तीन पेटेंट प्रकाशित हो चुके हैं जबकि पांच पेटेंटस फैकल्टी सदस्यों द्वारा दाखिल किए जा चुके हैं। विवि के विद्यार्थियों ने इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य चंपा ठाकुर, विवि के रजिस्ट्रार मदन कुमार, चेतराम ठाकुर, पुष्पराज शर्मा, राजेन्द्र मोहन, विवि के डीन विकास परिषद डॉ. राजेश शर्मा, एसोसिएट डीन शोध डॉ. अक्षय कुमार, इतिहास विभाग के समन्वयक राकेश शर्मा, डॉ. चेतन चौहान, संयोजन वनस्पति डॉ. जगदीप वर्मा, विभिन्न विभागों के आचार्य, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
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दिल्ली का सीलमपुर इलाका मुस्लिम बहुल इलाका है. यहां पर पोलिंग बूथ के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए हैं. सुबह 5:00 बजे से पहले ही ईवीएम मशीन पहुंची. यहां पर दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, बीजेपी के मनोज तिवारी और आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडे के बीच मुकाबला है. कैसे हैं यहां के हालात इसका जायजा लिया हमारे संवाददाता चिराग ने.
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दिल्ली का सीलमपुर इलाका मुस्लिम बहुल इलाका है. यहां पर पोलिंग बूथ के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए हैं. सुबह पाँच:शून्य बजे से पहले ही ईवीएम मशीन पहुंची. यहां पर दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, बीजेपी के मनोज तिवारी और आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडे के बीच मुकाबला है. कैसे हैं यहां के हालात इसका जायजा लिया हमारे संवाददाता चिराग ने.
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एक करोड़ चालीस लाख बावन हज़ार बीस प्रादेशिक समाचार 1950बजे मुख्य समाचार प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज को लेकर उठाए जाने वाले कदमों की कड़ी में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने की नौ घोषणाएं मुख्यमंत्री ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए उचित प्रबंधन का किया आह्वान
को हर राज्य सरकार ने सउदी अरब में कोरोना पॉज़िटिव पाए गए प्रदेश के युवक संभव मदद का दिया आश्वासन
जनजातीय जिला लाहौलस्पीति की ऊंची चोटियों पर हिमपात मनालीलेह मार्ग बहाल करने का कार्य बाधित
सीतारामन केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित बीस लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज के सिलसिले में उठाए जाने वाले कदमों की कड़ी में नौ घोषणाएं की हैं
नई दिल्ली में आज एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इन कदमों से प्रवासी मजदूरों फेरी लगाने वालों जनजातीय लोगों छोटे व्यापारियों छोटे किसानों और आवास निर्माण के क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को लाभ होगा
उन्होंने कहा कि तीन करोड़ छोटे किसानों को कर्ज के भुगतान में रियायतें दी जाएंगी
निर्मला सीतारामन ने कहा कि पच्चीस लाख किसान क्रेडिट कार्डों को मंजूरी दी जाएगी
वित्त मंत्री ने कहा कि बिना राशन कार्ड वालों को भी राशन देने की व्यवस्था की जा रही है
मजदूरों को राशन के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है
उन्होंने बताया कि एक देशएक राशनकार्ड योजना इसी वर्ष अगस्त से लागू की जाएगी
इसके तहत राशनकार्ड धारक देश में किसी भी स्थान पर महीने का राशन का कोटा ले सकेंगे
केन्द्रीय वित्त व कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी इस दौरान मौजूद रहे
जयराम इस बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज की घोषणा का स्वागत किया है
उन्होंने कहा कि इस पैकेज से एमएसएमई सहित व्यवसायों के लिए तीन लाख करोड़ रूपए की आपातकालीन कार्यशील पूंजी की सुविधा मिलेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जून से अगस्त माह के वेतन के लिए व्यावसायिक और संगठित कामगारों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संबंधी सहायता तीन माह और बढ़ाई गई है जिससे बहत्तर लाख से अधिक कर्मचारियों को करीब दो हजार पाँच सौ करोड़ रूपए का लाभ मिलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक पैकेज के माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा किया है
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में कैम्पा निधि से पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के माध्यम से रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने और इससे निपटने के लिए उचित प्रबंधन करने का आह्वान किया है
वे आज शिमला में कुल्लू और मण्डी जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत में बोल रहे थे
जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रधानों से अपनेअपने क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से करने का भी आह्वान किया
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विकास को गति मिलेगी बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे
इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कोरोना वायरस की जांच के लिए राज्य सरकार को सहयोग देने के लिए पंचायत प्रधानों का आभार जताया
शुभारम्भ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में आज विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के तहत ईउद्यान पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारम्भ किया
इसके माध्यम से उद्यान विभाग की विभिन्न सेवाओं के लिए मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम तैयार किया गया है
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोर्टल में बागवानी संबंधी योजनाओं की जानकारी किसानों व अन्य हितधारकों को आसानी से मिलेगी
उन्होंने कहा कि यह पोर्टल विभाग के अधिकारियों के लिए भी ऑनलाइन प्रोसेसिंग की सुविधा देगा जिससे बागवानों को समय पर सेवाएं देने में सुविधा होगी
बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने परियोजना की विशेषताओं से मुख्यमंत्री का अवगत कराया
बिक्रम ठाकुर उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यम के लिए की गई घोषणाओं से प्रदेश को काफी लाभ होगा और औद्योगिक उत्पादन भी बढ़ेगा
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में इस तरह की करीब पचपन हजार औद्योगिक इकाईयां हैं और इनकी रोजगार सृजन में लगभग तिरानवे फीसदी भागीदारी है
उन्होंने कहा कि ईमार्किट लिंक की उपलब्धता से इन इकाईयों को अपने उत्पाद की बिक्री में सुविधा मिलेगी
बरागटा वरिष्ठ भाजपा नेता व मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा ने आगामी सेब सीज़न को देखते हुए बागवानों की समस्याओं को लेकर आज शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भेंट की
उन्होंने कहा कि बागवानी कार्यों में नेपाली मजदूरों की कमी से कोई असुविधा न हो इसके लिए केन्द्र सरकार से चर्चा कर मजदूरों को प्रदेश में लाने का आग्रह किया जाना चाहिए
नरेन्द्र बरागटा ने कार्टन और ट्रे की उपलब्धता पर भी सुझाव दिए
| वीरेन्द्र कंवर ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा है कि कोरोना काल में राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अधिक से अधिक राहत देने का प्रयास कर रही है
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तीन लाख परिवारों को सस्ता राशन उपलब्ध करवाएगी
इनमें से डेढ़ लाख नए परिवार हैं जिन्हें इस सुविधा से जोड़ा जाएगा
आग्रह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केन्द्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से सउदी अरब के रियाद में फंसे मण्डी जिले के धर्मपुर क्षेत्र के मनोज कुमार को भारतीय दूतावास के माध्यम से हर संभव मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है
केन्द्रीय मंत्री से दूरभाष के माध्यम से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि ये युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है और संकट के इस दौर में उसे आवश्यक भोजन और दवाई उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है
इससे पहले मुख्यमंत्री ने मनोज कुमार से वीडियो कॉल कर बातचीत की और केन्द्र सरकार के माध्यम से हर संवभ सहायता देने का आश्वासन दिया
अंशदान प्रदेश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए जहां एक ओर विभिन्न संगठन और समाज सेवी कोविड फंड में अंशदान देकर सरकार को सहयोग कर रहे हैं वहीं प्रदेश की बुजुर्ग महिलाएं भी इस कार्य में पीछे नहीं है
मंडी जिले की बुजुर्ग महिलाओं ने एक धार्मिक आयोजन करवाने के लिए एकत्रित की गई एक लाख एक हजार रुपये की राशि कोविड फंड में दान कर मानव धर्म की मिसाल पेश की है
मंडी जिले की करीब तीस बुजुर्ग महिलाओं ने लॉकडाउन से पूर्व रामायण पाठ करवाने के लिए एक लाख एक हजार रुपये की राशि एकत्रित की थी लेकिन लॉकडाउन लागू होने से वे ये आयोजन नहीं करवा पाईं
तब इन बुजुर्ग महिलाओं ने इस धनराशि को जिला प्रशासन के माध्यम से कोविड फंड में जमा करवाने का निर्णय लिया
रामायण पार्टी की बिंता देवी विंध्यावासिनी बहल पदमा और निर्मला गुप्ता का कहना है कि रामायण पाठ धर्म से जुड़ा हुआ कार्य है लेकिन कोरोना संकट मानव समाज के लिए आज एक बड़ा खतरा बन गया है जिससे निपटना भी ज़रूरी है
बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि संकट की इस घड़ी में यदि ये धन मानव कल्याण के काम आता है तो इससे बड़ा धर्म कुछ और नहीं हो सकता
मंडी से मुनीश सूद के साथ रितेश कपूर आकाशवाणी समाचार शिमला | एपीएमसी एपीएमसी हमीरपुर के अध्यक्ष अजय शर्मा ने प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा किसानों के हित में नए एपीएमसी एक्ट को लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है
इस फैसले से किसानों को अपने उत्पाद सीधे मंडियों में बेचने की उचित सुविधा मिल सकेगी और किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी
उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आर्थिक पैकेज का ऐलान भारत के युवा वर्ग के लिए वरदान सिद्ध होगा
कोरोना अपडेट प्रदेश में कोरोना की जांच के लिए आज एक हजार अड़सठ लोगों के सैंपल लिए गए जिनमें से दो सौ नौ की रिपोर्ट नैगिटिव आई है और आठ सौ उनसठ लोगों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है
राज्य में अब तक सत्तर लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें से उनतीस मरीज़ अस्पतालों में उपचाराधीन हैं
प्रदेश में कोरोना संक्रमण के आज सिरमौर जिले के पांवटा साहिब से दो जबकि कांगड़ा जिले से एक नया मामला सामने आया है
मौसम प्रदेश की ऊंची चोटियों पर आज दिन के समय हल्का हिमपात और निचले इलाकों में कुछ स्थानों पर वर्षा हुई है
हमारे लाहौलस्पीति ज़िला संवाददाता कुंदन लाल के अनुसार जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हुए हिमपात से मनालीलेह मार्ग को बहाल करने का कार्य प्रभावित हुआ है
इसके अलावा बर्फबारी से बारालाचा दर्रे में भी बर्फ हटाने का कार्य बाधित हुआ है
इसी तरह चम्बा बिलासपुर मण्डी हमीरपुर और कांगड़ा ज़िलों के कुछ स्थानों पर तेज़ हवाओं के साथ वर्षा का भी समाचार है
मौसम के इस बदले मिजाज़ से तापमान में गिरावट आई है
मौसम विभाग ने अगले चौबिस घंटों में भी कुछ स्थानों पर वर्षा जबकि ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना जताई है
रेलगाड़ी लॉकडाउन के चलते गोवा में फंसे हिमाचल के लोगों को लेकर एक विशेष रेलगाड़ी कल ऊना पहुंचेगी
उपायुक्त संदीप कुमार ने बताया कि सभी लोगों को प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच के बाद पथ परिवहन निगम की बसों के माध्यम से विभिन्न जिलों में उनके गंतव्य के लिए रवाना किया जाएगा
नमस्कार
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एक करोड़ चालीस लाख बावन हज़ार बीस प्रादेशिक समाचार एक हज़ार नौ सौ पचासबजे मुख्य समाचार प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज को लेकर उठाए जाने वाले कदमों की कड़ी में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने की नौ घोषणाएं मुख्यमंत्री ने किया स्वागत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए उचित प्रबंधन का किया आह्वान को हर राज्य सरकार ने सउदी अरब में कोरोना पॉज़िटिव पाए गए प्रदेश के युवक संभव मदद का दिया आश्वासन जनजातीय जिला लाहौलस्पीति की ऊंची चोटियों पर हिमपात मनालीलेह मार्ग बहाल करने का कार्य बाधित सीतारामन केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित बीस लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज के सिलसिले में उठाए जाने वाले कदमों की कड़ी में नौ घोषणाएं की हैं नई दिल्ली में आज एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इन कदमों से प्रवासी मजदूरों फेरी लगाने वालों जनजातीय लोगों छोटे व्यापारियों छोटे किसानों और आवास निर्माण के क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को लाभ होगा उन्होंने कहा कि तीन करोड़ छोटे किसानों को कर्ज के भुगतान में रियायतें दी जाएंगी निर्मला सीतारामन ने कहा कि पच्चीस लाख किसान क्रेडिट कार्डों को मंजूरी दी जाएगी वित्त मंत्री ने कहा कि बिना राशन कार्ड वालों को भी राशन देने की व्यवस्था की जा रही है मजदूरों को राशन के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है उन्होंने बताया कि एक देशएक राशनकार्ड योजना इसी वर्ष अगस्त से लागू की जाएगी इसके तहत राशनकार्ड धारक देश में किसी भी स्थान पर महीने का राशन का कोटा ले सकेंगे केन्द्रीय वित्त व कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी इस दौरान मौजूद रहे जयराम इस बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज की घोषणा का स्वागत किया है उन्होंने कहा कि इस पैकेज से एमएसएमई सहित व्यवसायों के लिए तीन लाख करोड़ रूपए की आपातकालीन कार्यशील पूंजी की सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री ने कहा कि जून से अगस्त माह के वेतन के लिए व्यावसायिक और संगठित कामगारों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संबंधी सहायता तीन माह और बढ़ाई गई है जिससे बहत्तर लाख से अधिक कर्मचारियों को करीब दो हजार पाँच सौ करोड़ रूपए का लाभ मिलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक पैकेज के माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा किया है उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में कैम्पा निधि से पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के माध्यम से रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने और इससे निपटने के लिए उचित प्रबंधन करने का आह्वान किया है वे आज शिमला में कुल्लू और मण्डी जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत में बोल रहे थे जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रधानों से अपनेअपने क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से करने का भी आह्वान किया उन्होंने कहा कि इससे न केवल विकास को गति मिलेगी बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कोरोना वायरस की जांच के लिए राज्य सरकार को सहयोग देने के लिए पंचायत प्रधानों का आभार जताया शुभारम्भ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में आज विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के तहत ईउद्यान पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारम्भ किया इसके माध्यम से उद्यान विभाग की विभिन्न सेवाओं के लिए मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम तैयार किया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि पोर्टल में बागवानी संबंधी योजनाओं की जानकारी किसानों व अन्य हितधारकों को आसानी से मिलेगी उन्होंने कहा कि यह पोर्टल विभाग के अधिकारियों के लिए भी ऑनलाइन प्रोसेसिंग की सुविधा देगा जिससे बागवानों को समय पर सेवाएं देने में सुविधा होगी बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने परियोजना की विशेषताओं से मुख्यमंत्री का अवगत कराया बिक्रम ठाकुर उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यम के लिए की गई घोषणाओं से प्रदेश को काफी लाभ होगा और औद्योगिक उत्पादन भी बढ़ेगा उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में इस तरह की करीब पचपन हजार औद्योगिक इकाईयां हैं और इनकी रोजगार सृजन में लगभग तिरानवे फीसदी भागीदारी है उन्होंने कहा कि ईमार्किट लिंक की उपलब्धता से इन इकाईयों को अपने उत्पाद की बिक्री में सुविधा मिलेगी बरागटा वरिष्ठ भाजपा नेता व मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा ने आगामी सेब सीज़न को देखते हुए बागवानों की समस्याओं को लेकर आज शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भेंट की उन्होंने कहा कि बागवानी कार्यों में नेपाली मजदूरों की कमी से कोई असुविधा न हो इसके लिए केन्द्र सरकार से चर्चा कर मजदूरों को प्रदेश में लाने का आग्रह किया जाना चाहिए नरेन्द्र बरागटा ने कार्टन और ट्रे की उपलब्धता पर भी सुझाव दिए | वीरेन्द्र कंवर ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा है कि कोरोना काल में राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अधिक से अधिक राहत देने का प्रयास कर रही है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तीन लाख परिवारों को सस्ता राशन उपलब्ध करवाएगी इनमें से डेढ़ लाख नए परिवार हैं जिन्हें इस सुविधा से जोड़ा जाएगा आग्रह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केन्द्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से सउदी अरब के रियाद में फंसे मण्डी जिले के धर्मपुर क्षेत्र के मनोज कुमार को भारतीय दूतावास के माध्यम से हर संभव मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है केन्द्रीय मंत्री से दूरभाष के माध्यम से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि ये युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है और संकट के इस दौर में उसे आवश्यक भोजन और दवाई उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है इससे पहले मुख्यमंत्री ने मनोज कुमार से वीडियो कॉल कर बातचीत की और केन्द्र सरकार के माध्यम से हर संवभ सहायता देने का आश्वासन दिया अंशदान प्रदेश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए जहां एक ओर विभिन्न संगठन और समाज सेवी कोविड फंड में अंशदान देकर सरकार को सहयोग कर रहे हैं वहीं प्रदेश की बुजुर्ग महिलाएं भी इस कार्य में पीछे नहीं है मंडी जिले की बुजुर्ग महिलाओं ने एक धार्मिक आयोजन करवाने के लिए एकत्रित की गई एक लाख एक हजार रुपये की राशि कोविड फंड में दान कर मानव धर्म की मिसाल पेश की है मंडी जिले की करीब तीस बुजुर्ग महिलाओं ने लॉकडाउन से पूर्व रामायण पाठ करवाने के लिए एक लाख एक हजार रुपये की राशि एकत्रित की थी लेकिन लॉकडाउन लागू होने से वे ये आयोजन नहीं करवा पाईं तब इन बुजुर्ग महिलाओं ने इस धनराशि को जिला प्रशासन के माध्यम से कोविड फंड में जमा करवाने का निर्णय लिया रामायण पार्टी की बिंता देवी विंध्यावासिनी बहल पदमा और निर्मला गुप्ता का कहना है कि रामायण पाठ धर्म से जुड़ा हुआ कार्य है लेकिन कोरोना संकट मानव समाज के लिए आज एक बड़ा खतरा बन गया है जिससे निपटना भी ज़रूरी है बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि संकट की इस घड़ी में यदि ये धन मानव कल्याण के काम आता है तो इससे बड़ा धर्म कुछ और नहीं हो सकता मंडी से मुनीश सूद के साथ रितेश कपूर आकाशवाणी समाचार शिमला | एपीएमसी एपीएमसी हमीरपुर के अध्यक्ष अजय शर्मा ने प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा किसानों के हित में नए एपीएमसी एक्ट को लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है इस फैसले से किसानों को अपने उत्पाद सीधे मंडियों में बेचने की उचित सुविधा मिल सकेगी और किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आर्थिक पैकेज का ऐलान भारत के युवा वर्ग के लिए वरदान सिद्ध होगा कोरोना अपडेट प्रदेश में कोरोना की जांच के लिए आज एक हजार अड़सठ लोगों के सैंपल लिए गए जिनमें से दो सौ नौ की रिपोर्ट नैगिटिव आई है और आठ सौ उनसठ लोगों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है राज्य में अब तक सत्तर लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें से उनतीस मरीज़ अस्पतालों में उपचाराधीन हैं प्रदेश में कोरोना संक्रमण के आज सिरमौर जिले के पांवटा साहिब से दो जबकि कांगड़ा जिले से एक नया मामला सामने आया है मौसम प्रदेश की ऊंची चोटियों पर आज दिन के समय हल्का हिमपात और निचले इलाकों में कुछ स्थानों पर वर्षा हुई है हमारे लाहौलस्पीति ज़िला संवाददाता कुंदन लाल के अनुसार जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हुए हिमपात से मनालीलेह मार्ग को बहाल करने का कार्य प्रभावित हुआ है इसके अलावा बर्फबारी से बारालाचा दर्रे में भी बर्फ हटाने का कार्य बाधित हुआ है इसी तरह चम्बा बिलासपुर मण्डी हमीरपुर और कांगड़ा ज़िलों के कुछ स्थानों पर तेज़ हवाओं के साथ वर्षा का भी समाचार है मौसम के इस बदले मिजाज़ से तापमान में गिरावट आई है मौसम विभाग ने अगले चौबिस घंटों में भी कुछ स्थानों पर वर्षा जबकि ऊंची चोटियों पर हिमपात की संभावना जताई है रेलगाड़ी लॉकडाउन के चलते गोवा में फंसे हिमाचल के लोगों को लेकर एक विशेष रेलगाड़ी कल ऊना पहुंचेगी उपायुक्त संदीप कुमार ने बताया कि सभी लोगों को प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच के बाद पथ परिवहन निगम की बसों के माध्यम से विभिन्न जिलों में उनके गंतव्य के लिए रवाना किया जाएगा नमस्कार
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जब कोई व्यवसाय अपने उत्पादों को निर्यात या आयात करने का निर्णय लेता है तो उन्हें जल्द ही एहसास होता है कि उन्हें अंत में ग्राहक को उत्पाद भेजने के लिए कई बाधाओं से निपटना होगा।
कई मामलों में, एक व्यवसाय एक विशेषज्ञ को देखेगा, जिसे फ्रेट फॉरवर्डर कहा जाता है, जो इन बाधाओं का प्रबंधन कर सकता है।
एक फ्रेट फॉरवर्डर की सेवाएं अलग-अलग कंपनियों के बीच भिन्न हो सकती हैं लेकिन फ्रेट फॉरवर्डर का मुख्य कार्य उन ग्राहकों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करना है जो उन्हें भर्ती कर रहे हैं और विभिन्न परिवहन सेवाओं जो ग्राहकों को विदेश में उत्पाद प्राप्त करने में शामिल हैं, वाहक समेत , सीमा शुल्क और हैंडलर।
अंतिम गंतव्य और भेजे गए सामानों की प्रकृति के आधार पर, आपूर्तिकर्ता से ग्राहक तक वस्तुओं के आंदोलन में शामिल कई परिवहन कंपनियां हो सकती हैं।
फ्रेट फॉरवर्डर को कई निर्यात और आयात मुद्दों से निपटना पड़ सकता है जो माल के आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
फ्रेट फॉरवर्डर को किराए पर लिया जाता हैः
फ्रेट फॉरवर्डर यह सुनिश्चित करने के लिए ग्राहक बीमा सेवाएं प्रदान करेगा कि यदि आइटम क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो उन्हें प्रतिपूर्ति की जाएगी और नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
एक फ्रेट फॉरवर्डर को ग्राहक को निर्यात के लिए अपने उत्पादों को पैकेज करने के तरीके को सहायता प्रदान करनी चाहिए। पैकेजिंग जो आम तौर पर यूएस के भीतर शिपिंग के लिए उपयोग की जाती है, विस्तारित परिवहन के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है, जहां आइटम को कंटेनर में लोड किया जा सकता है या मार्ग के साथ कई बार लोड और अनलोड किया जा सकता है।
आइटम को उन वातावरणों में संग्रहीत करने की अनुमति दी जा सकती है जहां अत्यधिक तापमान या मौसम का अनुभव किया जा सकता है। यदि किसी वस्तु को हवा के माध्यम से भेज दिया जाता है, तो फ्रेट फॉरवर्डर पैकेजिंग का सुझाव दे सकता है जो शिपिंग लागत को कम से कम रखने के लिए सामान्य से हल्का है।
फ्रेट फॉरवर्डर्स अपने ग्राहकों को उनकी वस्तुओं के लिए आवश्यक सही लेबलिंग प्रदान करने में सहायता करेंगे।
दिखाने के लिए सही लेबल की आवश्यकता होगीः
विदेश में किसी आइटम के शिपमेंट के लिए दस्तावेज़ीकरण महत्वपूर्ण है। ऐसे कई दस्तावेज हैं जिन्हें फ्रेट फॉरवर्डर को शिपमेंट के लिए तैयार करने की आवश्यकता है जिसके लिए विशेषज्ञ ज्ञान की आवश्यकता होती है।
- बिल ऑफ लडिंग ( बीओएल ) - बीओएल माल और वाहक के मालिक के बीच एक अनुबंध है। दो प्रकार के बीओएल हैं; सबसे पहले लदान का एक सीधा बिल जो गैर-विचारणीय है और दूसरी बात, एक परक्राम्य या शिपर का ऑर्डर बिल लदान का है। जब सामान पारगमन में होता है तो परक्राम्य बीओएल खरीदा, बेचा या व्यापार किया जा सकता है। माल को कब्जा करने के लिए ग्राहक को स्वामित्व के सबूत के रूप में मूल रूप से मूल की आवश्यकता होगी।
- वाणिज्यिक चालान - चालान विक्रेता से सामान के लिए खरीदार को बिल है। इसका उपयोग सीमा शुल्क की मात्रा का आकलन करते समय माल के वास्तविक मूल्य को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है।
- उत्पत्ति प्रमाणपत्र (सीओओ) - सीओओ एक हस्ताक्षरित बयान है जो निर्यात वस्तु की उत्पत्ति की पहचान करता है।
- निरीक्षण प्रमाणपत्र - ग्राहक द्वारा इस दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए ग्राहक द्वारा जांच की जा सकती है या परीक्षण किया जा सकता है और माल की गुणवत्ता स्वीकार्य है।
- निर्यात लाइसेंस - यह लाइसेंस एक सरकारी दस्तावेज है जो विशिष्ट मात्रा में माल के निर्यात को एक विशिष्ट गंतव्य तक अधिकृत करता है।
- शिपर का निर्यात घोषणा (एसईडी) - निर्यात आंकड़ों के लिए एसईडी का उपयोग किया जाता है। यह यूएस डाक सेवा (यूएसपीएस) के माध्यम से तैयार किया जाता है जब शिपमेंट $ 500 से अधिक है।
- निर्यात पैकिंग सूची - यह एक विस्तृत पैकिंग सूची है जो शिपमेंट में प्रत्येक आइटम को आइटम करती है, किस प्रकार के पैकेजिंग कंटेनर का उपयोग किया जाता है, सकल वजन और पैकेज माप।
वस्तुओं को निर्यात करने की तलाश करने वाली कंपनियां फ्रेट फॉरवर्डर्स का उपयोग न केवल समय और प्रयास को बचाने के लिए कर सकती हैं बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामान समय पर और घटना के बिना ग्राहक की साइट पर पहुंचें।
एक फ्रेट फॉरवर्डर सभी आवश्यक दस्तावेज के साथ निर्यातक को प्रदान कर सकता है साथ ही ग्राहकों को सामान प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिवहन कंपनियों के साथ संपर्क कर सकता है।
गैरी मैरियन, रसद और आपूर्ति श्रृंखला विशेषज्ञ द्वारा अद्यतन आलेख।
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जब कोई व्यवसाय अपने उत्पादों को निर्यात या आयात करने का निर्णय लेता है तो उन्हें जल्द ही एहसास होता है कि उन्हें अंत में ग्राहक को उत्पाद भेजने के लिए कई बाधाओं से निपटना होगा। कई मामलों में, एक व्यवसाय एक विशेषज्ञ को देखेगा, जिसे फ्रेट फॉरवर्डर कहा जाता है, जो इन बाधाओं का प्रबंधन कर सकता है। एक फ्रेट फॉरवर्डर की सेवाएं अलग-अलग कंपनियों के बीच भिन्न हो सकती हैं लेकिन फ्रेट फॉरवर्डर का मुख्य कार्य उन ग्राहकों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करना है जो उन्हें भर्ती कर रहे हैं और विभिन्न परिवहन सेवाओं जो ग्राहकों को विदेश में उत्पाद प्राप्त करने में शामिल हैं, वाहक समेत , सीमा शुल्क और हैंडलर। अंतिम गंतव्य और भेजे गए सामानों की प्रकृति के आधार पर, आपूर्तिकर्ता से ग्राहक तक वस्तुओं के आंदोलन में शामिल कई परिवहन कंपनियां हो सकती हैं। फ्रेट फॉरवर्डर को कई निर्यात और आयात मुद्दों से निपटना पड़ सकता है जो माल के आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। फ्रेट फॉरवर्डर को किराए पर लिया जाता हैः फ्रेट फॉरवर्डर यह सुनिश्चित करने के लिए ग्राहक बीमा सेवाएं प्रदान करेगा कि यदि आइटम क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो उन्हें प्रतिपूर्ति की जाएगी और नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। एक फ्रेट फॉरवर्डर को ग्राहक को निर्यात के लिए अपने उत्पादों को पैकेज करने के तरीके को सहायता प्रदान करनी चाहिए। पैकेजिंग जो आम तौर पर यूएस के भीतर शिपिंग के लिए उपयोग की जाती है, विस्तारित परिवहन के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है, जहां आइटम को कंटेनर में लोड किया जा सकता है या मार्ग के साथ कई बार लोड और अनलोड किया जा सकता है। आइटम को उन वातावरणों में संग्रहीत करने की अनुमति दी जा सकती है जहां अत्यधिक तापमान या मौसम का अनुभव किया जा सकता है। यदि किसी वस्तु को हवा के माध्यम से भेज दिया जाता है, तो फ्रेट फॉरवर्डर पैकेजिंग का सुझाव दे सकता है जो शिपिंग लागत को कम से कम रखने के लिए सामान्य से हल्का है। फ्रेट फॉरवर्डर्स अपने ग्राहकों को उनकी वस्तुओं के लिए आवश्यक सही लेबलिंग प्रदान करने में सहायता करेंगे। दिखाने के लिए सही लेबल की आवश्यकता होगीः विदेश में किसी आइटम के शिपमेंट के लिए दस्तावेज़ीकरण महत्वपूर्ण है। ऐसे कई दस्तावेज हैं जिन्हें फ्रेट फॉरवर्डर को शिपमेंट के लिए तैयार करने की आवश्यकता है जिसके लिए विशेषज्ञ ज्ञान की आवश्यकता होती है। - बिल ऑफ लडिंग - बीओएल माल और वाहक के मालिक के बीच एक अनुबंध है। दो प्रकार के बीओएल हैं; सबसे पहले लदान का एक सीधा बिल जो गैर-विचारणीय है और दूसरी बात, एक परक्राम्य या शिपर का ऑर्डर बिल लदान का है। जब सामान पारगमन में होता है तो परक्राम्य बीओएल खरीदा, बेचा या व्यापार किया जा सकता है। माल को कब्जा करने के लिए ग्राहक को स्वामित्व के सबूत के रूप में मूल रूप से मूल की आवश्यकता होगी। - वाणिज्यिक चालान - चालान विक्रेता से सामान के लिए खरीदार को बिल है। इसका उपयोग सीमा शुल्क की मात्रा का आकलन करते समय माल के वास्तविक मूल्य को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है। - उत्पत्ति प्रमाणपत्र - सीओओ एक हस्ताक्षरित बयान है जो निर्यात वस्तु की उत्पत्ति की पहचान करता है। - निरीक्षण प्रमाणपत्र - ग्राहक द्वारा इस दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए ग्राहक द्वारा जांच की जा सकती है या परीक्षण किया जा सकता है और माल की गुणवत्ता स्वीकार्य है। - निर्यात लाइसेंस - यह लाइसेंस एक सरकारी दस्तावेज है जो विशिष्ट मात्रा में माल के निर्यात को एक विशिष्ट गंतव्य तक अधिकृत करता है। - शिपर का निर्यात घोषणा - निर्यात आंकड़ों के लिए एसईडी का उपयोग किया जाता है। यह यूएस डाक सेवा के माध्यम से तैयार किया जाता है जब शिपमेंट पाँच सौ डॉलर से अधिक है। - निर्यात पैकिंग सूची - यह एक विस्तृत पैकिंग सूची है जो शिपमेंट में प्रत्येक आइटम को आइटम करती है, किस प्रकार के पैकेजिंग कंटेनर का उपयोग किया जाता है, सकल वजन और पैकेज माप। वस्तुओं को निर्यात करने की तलाश करने वाली कंपनियां फ्रेट फॉरवर्डर्स का उपयोग न केवल समय और प्रयास को बचाने के लिए कर सकती हैं बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामान समय पर और घटना के बिना ग्राहक की साइट पर पहुंचें। एक फ्रेट फॉरवर्डर सभी आवश्यक दस्तावेज के साथ निर्यातक को प्रदान कर सकता है साथ ही ग्राहकों को सामान प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिवहन कंपनियों के साथ संपर्क कर सकता है। गैरी मैरियन, रसद और आपूर्ति श्रृंखला विशेषज्ञ द्वारा अद्यतन आलेख।
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यहां तक कि यदि आपके पास अपना बगीचा नहीं है, तो निश्चित रूप से आपको गर्मी में हल्के से नमकीन खीरे पकाएं। यह उन लोगों के लिए अचार के लिए एक अच्छा विकल्प है जो निर्जलीकरण डिब्बे पर समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं।
उदाहरण के लिए, आप हल्के नमकीन खीरे बना सकते हैं2 घंटे के लिए लहसुन और डिल के साथ पैकेज। उनके स्वाद को एक ही समय में ताज़ा और सौम्य के रूप में वर्णित किया जा सकता है। खस्ता खीरे किसी भी भोजन के लिए एक उत्कृष्ट पक्ष पकवान हैं। इस नुस्खा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही मात्रा में डिल और लहसुन निर्धारित करना है।
हल्के नमकीन खीरे को स्वादिष्ट नहीं बनाया जा सकता हैउपरोक्त सीजनिंग के बिना। हालांकि, किसी भी नुस्खा में सभी अवयवों के अनुपात का सटीक संकेत नहीं होता है। यह बहुत व्यक्तिगत है, क्योंकि इस नुस्खा के लिए कोई सटीक माप नहीं है। सब कुछ आपके स्वाद और वरीयताओं पर आधारित है। आप जितना चाहें उतना कम या कम डिल, लहसुन, नमक और काली मिर्च जोड़ सकते हैं। इस नुस्खा का मुख्य उद्देश्य खीरे की तैयारी की विधि साझा करना है।
कई गृहिणियों का उपयोग करने का विरोध करते हैंताजा लहसुन, मुख्य रूप से इसकी तेज गंध की वजह से। इसलिए, आप पाक विधि का उपयोग कर सकते हैं, जो इस मसाले के गैर-प्रेमियों के लिए एक आदर्श समाधान है। बहुत सारे कटा हुआ कच्चे लहसुन के साथ खीरे छिड़कने के बजाय, आपको केवल कुछ लौंग जोड़ने की जरूरत होती है, जो पहले एक कुचल के साथ कुचल और कुचल दिया जाता है। इस मामले में लहसुन एक हल्की सुगंध के साथ, बहुत हल्का स्वाद देता है। ताजा डिल के साथ संयोजन में, ये खीरे नाजुक नाश्ता बन जाते हैं।
इस स्नैक्स के लिए अपने क्लासिक रूप में नुस्खा निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता हैः
प्लास्टिक के थैले में सभी अवयवों को मिलाएं,मसालों को समान रूप से वितरित करने के लिए मिश्रण। 15-30 मिनट की अवधि के लिए एक गर्म कमरे में एक पैकेज में लहसुन और डिल के साथ खीरे रखें और फिर रेफ्रिजरेटर में स्थानांतरित करें। जितना अधिक वे संग्रहीत होते हैं, नरम वे बन जाते हैं। उन्हें ठंडा टेबल पर परोसें।
इसके अलावा, लहसुन और डिल के साथ सरल खीरेपैकेज स्वाद के लिए विभिन्न अन्य अवयवों के साथ पूरक किया जा सकता है। जब मसालों की बात आती है तो आप कल्पना कर सकते हैं, फंतासी की कोई सीमा नहीं है।
आप मानक तेजी से सीमित कर सकते हैंनमकीन और सरसों के बीज, काली मिर्च, आदि जैसे अतिरिक्त मसालों का उपयोग करें। एक प्रकार का क्लासिक काला currant या चेरी पत्तियां, horseradish, मिठाई काली मिर्च, जीरा है। वे सभी लहसुन और जड़ी बूटी के साथ अच्छी तरह से गठबंधन।
हालांकि, कोई चालाकी दिखा सकता है औरमैक्सिकन शैली के पैकेज में लहसुन और डिल के साथ खीरे उठाओ, उदाहरण के लिए। ऐसा करने के लिए, थोड़ा जलापेनोस, सफेद प्याज और गाजर जोड़ें। इसके अलावा, आप कटा हुआ लाल मिर्च और तेज कोरियाई seasonings, हरे लहसुन तीर और इतने पर डाल सकते हैं। कुछ यहां तक कि मसालेदार अदरक भी जोड़ना पसंद करते हैं।
हालांकि, यह उस व्यक्ति को याद किया जाना चाहिएमसाले खीरे को नरम बना सकते हैं (उदाहरण के लिए, लाल मिर्च)। अपने अचार को कुरकुरा रखने के लिए, पिकलिंग करते समय इस मसाले की बहुत छोटी मात्रा जोड़ें, और उसके बाद इसे तैयार किए गए स्नैक पर रिपोर्ट करें। बदले में, फल फसलों की पत्तियां और ओक अधिनियम की छाल विपरीत तरीके से होती है और खीरे घने और कुरकुरा कर सकती हैं।
यदि आप गलती से खीरे से ऊपर निकलते हैं, तो आप उन्हें कई घंटों तक साफ, ठंडे पानी में डाल सकते हैं - इससे अतिरिक्त नमक से छुटकारा पड़ेगा।
लहसुन के एक बैग में खीरे बनाने के लिएऔर डिल कुरकुरा, आपको नमकीन के लिए सही सब्जियां चुनने की जरूरत है। उपयुक्त छोटी छोटी प्रतियां। औसतन, ककड़ी का आकार आपके अंगूठे के आकार से दो गुना अधिक नहीं होना चाहिए। सलाद के लिए उपयुक्त मोटी सब्जियों का उपयोग न करें।
इसके अलावा, ताजगी एक बड़ी भूमिका निभाती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लहसुन और डिल के साथ पैकेज में नमकीन खीरे अच्छी तरह से निकल गए हैं, आपको हाल ही में सब्जियां लेने की जरूरत है जिन्हें हाल ही में बिस्तर से फटकारा गया है। बेशक, एक आम आदमी के लिए 13 दिन के ककड़ी से तीन दिन के ककड़ी को अलग करना मुश्किल है, लेकिन अभी भी उपलब्ध विधियां उपलब्ध हैं। तो, खीरे में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिएः
कभी नहीं लगता कि खीरे,एक बड़े बैच द्वारा बिक्री के लिए ऑफ़र किया गया, एक स्थान पर और एक समय में इकट्ठा किया गया। यह विक्रेताओं का पुराना स्वागत हैः बेकार सामानों को एक नए के साथ मिलाएं। यदि आप सलाद के लिए सब्जियां खरीदते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यदि आप लहसुन और डिल के पैकेज में मसालेदार खीरे पकाएंगे, तो आपको उन्हें मैन्युअल रूप से चुनना होगा।
अगर हल्के से नमकीन खीरे का उपयोग किया जाता हैसैंडविच, छोटे ब्रूसोची की बजाय लंबे अंडाकार बनाने के लिए उन्हें कोण पर बड़े पतले स्लाइस की तरह टुकड़ा करें। यदि आप उन्हें एक अलग स्नैक्स के रूप में उपयोग करना चाहते हैं, तो क्वार्टर के साथ कटौती करें (यह पैकेज में लहसुन और डिल के साथ खीरे खीरे का क्लासिक संस्करण है) या बस कुछ टुकड़े भरें।
सब्जियों को काटने का फैसला करने के बावजूद,आपको उनकी युक्तियों को काटना होगा। सबसे पहले, यह एक तैयार किए गए स्नैक्स में कड़वाहट के स्वाद से बच जाएगा। दूसरा, नाइट्रेट अक्सर खीरे की युक्तियों के करीब जमा होते हैं। त्वचा से सब्जियां साफ़ करना बिल्कुल जरूरी नहीं है।
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यहां तक कि यदि आपके पास अपना बगीचा नहीं है, तो निश्चित रूप से आपको गर्मी में हल्के से नमकीन खीरे पकाएं। यह उन लोगों के लिए अचार के लिए एक अच्छा विकल्प है जो निर्जलीकरण डिब्बे पर समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, आप हल्के नमकीन खीरे बना सकते हैंदो घंटाटे के लिए लहसुन और डिल के साथ पैकेज। उनके स्वाद को एक ही समय में ताज़ा और सौम्य के रूप में वर्णित किया जा सकता है। खस्ता खीरे किसी भी भोजन के लिए एक उत्कृष्ट पक्ष पकवान हैं। इस नुस्खा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही मात्रा में डिल और लहसुन निर्धारित करना है। हल्के नमकीन खीरे को स्वादिष्ट नहीं बनाया जा सकता हैउपरोक्त सीजनिंग के बिना। हालांकि, किसी भी नुस्खा में सभी अवयवों के अनुपात का सटीक संकेत नहीं होता है। यह बहुत व्यक्तिगत है, क्योंकि इस नुस्खा के लिए कोई सटीक माप नहीं है। सब कुछ आपके स्वाद और वरीयताओं पर आधारित है। आप जितना चाहें उतना कम या कम डिल, लहसुन, नमक और काली मिर्च जोड़ सकते हैं। इस नुस्खा का मुख्य उद्देश्य खीरे की तैयारी की विधि साझा करना है। कई गृहिणियों का उपयोग करने का विरोध करते हैंताजा लहसुन, मुख्य रूप से इसकी तेज गंध की वजह से। इसलिए, आप पाक विधि का उपयोग कर सकते हैं, जो इस मसाले के गैर-प्रेमियों के लिए एक आदर्श समाधान है। बहुत सारे कटा हुआ कच्चे लहसुन के साथ खीरे छिड़कने के बजाय, आपको केवल कुछ लौंग जोड़ने की जरूरत होती है, जो पहले एक कुचल के साथ कुचल और कुचल दिया जाता है। इस मामले में लहसुन एक हल्की सुगंध के साथ, बहुत हल्का स्वाद देता है। ताजा डिल के साथ संयोजन में, ये खीरे नाजुक नाश्ता बन जाते हैं। इस स्नैक्स के लिए अपने क्लासिक रूप में नुस्खा निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता हैः प्लास्टिक के थैले में सभी अवयवों को मिलाएं,मसालों को समान रूप से वितरित करने के लिए मिश्रण। पंद्रह-तीस मिनट की अवधि के लिए एक गर्म कमरे में एक पैकेज में लहसुन और डिल के साथ खीरे रखें और फिर रेफ्रिजरेटर में स्थानांतरित करें। जितना अधिक वे संग्रहीत होते हैं, नरम वे बन जाते हैं। उन्हें ठंडा टेबल पर परोसें। इसके अलावा, लहसुन और डिल के साथ सरल खीरेपैकेज स्वाद के लिए विभिन्न अन्य अवयवों के साथ पूरक किया जा सकता है। जब मसालों की बात आती है तो आप कल्पना कर सकते हैं, फंतासी की कोई सीमा नहीं है। आप मानक तेजी से सीमित कर सकते हैंनमकीन और सरसों के बीज, काली मिर्च, आदि जैसे अतिरिक्त मसालों का उपयोग करें। एक प्रकार का क्लासिक काला currant या चेरी पत्तियां, horseradish, मिठाई काली मिर्च, जीरा है। वे सभी लहसुन और जड़ी बूटी के साथ अच्छी तरह से गठबंधन। हालांकि, कोई चालाकी दिखा सकता है औरमैक्सिकन शैली के पैकेज में लहसुन और डिल के साथ खीरे उठाओ, उदाहरण के लिए। ऐसा करने के लिए, थोड़ा जलापेनोस, सफेद प्याज और गाजर जोड़ें। इसके अलावा, आप कटा हुआ लाल मिर्च और तेज कोरियाई seasonings, हरे लहसुन तीर और इतने पर डाल सकते हैं। कुछ यहां तक कि मसालेदार अदरक भी जोड़ना पसंद करते हैं। हालांकि, यह उस व्यक्ति को याद किया जाना चाहिएमसाले खीरे को नरम बना सकते हैं । अपने अचार को कुरकुरा रखने के लिए, पिकलिंग करते समय इस मसाले की बहुत छोटी मात्रा जोड़ें, और उसके बाद इसे तैयार किए गए स्नैक पर रिपोर्ट करें। बदले में, फल फसलों की पत्तियां और ओक अधिनियम की छाल विपरीत तरीके से होती है और खीरे घने और कुरकुरा कर सकती हैं। यदि आप गलती से खीरे से ऊपर निकलते हैं, तो आप उन्हें कई घंटों तक साफ, ठंडे पानी में डाल सकते हैं - इससे अतिरिक्त नमक से छुटकारा पड़ेगा। लहसुन के एक बैग में खीरे बनाने के लिएऔर डिल कुरकुरा, आपको नमकीन के लिए सही सब्जियां चुनने की जरूरत है। उपयुक्त छोटी छोटी प्रतियां। औसतन, ककड़ी का आकार आपके अंगूठे के आकार से दो गुना अधिक नहीं होना चाहिए। सलाद के लिए उपयुक्त मोटी सब्जियों का उपयोग न करें। इसके अलावा, ताजगी एक बड़ी भूमिका निभाती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लहसुन और डिल के साथ पैकेज में नमकीन खीरे अच्छी तरह से निकल गए हैं, आपको हाल ही में सब्जियां लेने की जरूरत है जिन्हें हाल ही में बिस्तर से फटकारा गया है। बेशक, एक आम आदमी के लिए तेरह दिन के ककड़ी से तीन दिन के ककड़ी को अलग करना मुश्किल है, लेकिन अभी भी उपलब्ध विधियां उपलब्ध हैं। तो, खीरे में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिएः कभी नहीं लगता कि खीरे,एक बड़े बैच द्वारा बिक्री के लिए ऑफ़र किया गया, एक स्थान पर और एक समय में इकट्ठा किया गया। यह विक्रेताओं का पुराना स्वागत हैः बेकार सामानों को एक नए के साथ मिलाएं। यदि आप सलाद के लिए सब्जियां खरीदते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यदि आप लहसुन और डिल के पैकेज में मसालेदार खीरे पकाएंगे, तो आपको उन्हें मैन्युअल रूप से चुनना होगा। अगर हल्के से नमकीन खीरे का उपयोग किया जाता हैसैंडविच, छोटे ब्रूसोची की बजाय लंबे अंडाकार बनाने के लिए उन्हें कोण पर बड़े पतले स्लाइस की तरह टुकड़ा करें। यदि आप उन्हें एक अलग स्नैक्स के रूप में उपयोग करना चाहते हैं, तो क्वार्टर के साथ कटौती करें या बस कुछ टुकड़े भरें। सब्जियों को काटने का फैसला करने के बावजूद,आपको उनकी युक्तियों को काटना होगा। सबसे पहले, यह एक तैयार किए गए स्नैक्स में कड़वाहट के स्वाद से बच जाएगा। दूसरा, नाइट्रेट अक्सर खीरे की युक्तियों के करीब जमा होते हैं। त्वचा से सब्जियां साफ़ करना बिल्कुल जरूरी नहीं है।
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एडवांस टैक्स पेमेंट (PC- Freepik. com)
PAN- Aadhaar Linking: मार्च के अंत तक कई काम को पूरा करने की डेडलाइन समाप्त हो रही है, जिसमें पैन आधार लिंकिंग से लेकर एडवांस टैक्स तक का भुगतान शामिल है. अगर इन कामों को समय से पहले पूरा नहीं किया जाता है तो आपको कई समस्याओं से होकर गुजरना होगा.
डेडलाइन पर काम पूरा नही करने पर ज्यादा पैसों का भुगतान से लेकर पैन जैसे दस्तावेज के निष्क्रिय होने की संभावना है. यहां उन सभी चीजों की लिस्ट दी गई है, जिसे मार्च के दौरान आपको पूरा कर लेना चाहिए. आइए जानते हैं कौन कौन से ये काम हैं.
इनकम टैक्स विभाग ने पैन होल्डर्स के लिए इस साल मार्च के अंत तक इसे आधार से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है. अगर ये काम नहीं किया जाता है तो आपका पैन कार्ड किसी भी काम का नहीं रह जाएगा यानी कि यह निष्क्रिय हो जाएगा. इसकी डेडलाइन 31 मार्च, 2023 तक है. आयकर रिटर्न और टीडीएस आदि जैसे काम भी नहीं कर पाएंगे. पैन और आधार को लिंक करने के लिए 1,000 रुपये का विलंब शुल्क लागू है.
आयकर विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए एडवांस टैक्स भुगतान की अंतिम किस्त का भुगतान करने की अंतिम डेट 15 मार्च, 2023 है. इस तारीख तक करदाताओं को 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स का भुगतान करना होगा. आयकर अधिनियम की धारा 208 के मुताबिक हर व्यक्ति को जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित टैक्स देयता 10,000 रुपये या अधिक के एडवांस टैक्स का पेमेंट करना होगा. हालांकि एक सीनियर सिटीजन को, जिन्हें बिजनेस को कोई आय नहीं है, उसे छूट दी गई है. एडवांस टैक्स उन लोगों को भुगतान करना होगा, जिनके वेतन के अलावा अन्य आय के सोर्स हैं. यह टैक्स शेयरों से पूंजीगत लाभ, सावधि जमा, लॉटरी जीतने आदि पर लागू होता है.
फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए अपडेट आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय सीमा 31 मार्च, 2023 है. वे टैक्सपेयर्स, जो वित्त वर्ष 2019-20 के लिए इसे दाखिल करने से चूक गए हैं या किसी आय की सूचना देने से चूक गए हैं, वे एक अपडेट आईटीआर या आईटीआर यू फाइल कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) 2019 में शुरू की गई थी. ये स्कीम सीनियर सिटीजन को एक नियमित आय देती है. इसमें निवेश करने की आखिरी तारीख 31 मार्च, 2023 है. 60 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इस योजना में भाग ले सकता है. यह योजना सालाना 7. 4 प्रतिशत की ब्याज देती है.
FY2022-23 के लिए टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट की डेडलाइन 31 मार्च, 2023 को खत्म होगी. यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनते हैं. टैक्सपेयर्स पुरानी टैक्स रिजिम के तहत अपने निवेश के लिए कई छूट का क्लेम कर सकते हैं.
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एडवांस टैक्स पेमेंट PAN- Aadhaar Linking: मार्च के अंत तक कई काम को पूरा करने की डेडलाइन समाप्त हो रही है, जिसमें पैन आधार लिंकिंग से लेकर एडवांस टैक्स तक का भुगतान शामिल है. अगर इन कामों को समय से पहले पूरा नहीं किया जाता है तो आपको कई समस्याओं से होकर गुजरना होगा. डेडलाइन पर काम पूरा नही करने पर ज्यादा पैसों का भुगतान से लेकर पैन जैसे दस्तावेज के निष्क्रिय होने की संभावना है. यहां उन सभी चीजों की लिस्ट दी गई है, जिसे मार्च के दौरान आपको पूरा कर लेना चाहिए. आइए जानते हैं कौन कौन से ये काम हैं. इनकम टैक्स विभाग ने पैन होल्डर्स के लिए इस साल मार्च के अंत तक इसे आधार से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है. अगर ये काम नहीं किया जाता है तो आपका पैन कार्ड किसी भी काम का नहीं रह जाएगा यानी कि यह निष्क्रिय हो जाएगा. इसकी डेडलाइन इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस तक है. आयकर रिटर्न और टीडीएस आदि जैसे काम भी नहीं कर पाएंगे. पैन और आधार को लिंक करने के लिए एक,शून्य रुपयापये का विलंब शुल्क लागू है. आयकर विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस-दो हज़ार तेईस के लिए एडवांस टैक्स भुगतान की अंतिम किस्त का भुगतान करने की अंतिम डेट पंद्रह मार्च, दो हज़ार तेईस है. इस तारीख तक करदाताओं को एक सौ प्रतिशत एडवांस टैक्स का भुगतान करना होगा. आयकर अधिनियम की धारा दो सौ आठ के मुताबिक हर व्यक्ति को जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित टैक्स देयता दस,शून्य रुपयापये या अधिक के एडवांस टैक्स का पेमेंट करना होगा. हालांकि एक सीनियर सिटीजन को, जिन्हें बिजनेस को कोई आय नहीं है, उसे छूट दी गई है. एडवांस टैक्स उन लोगों को भुगतान करना होगा, जिनके वेतन के अलावा अन्य आय के सोर्स हैं. यह टैक्स शेयरों से पूंजीगत लाभ, सावधि जमा, लॉटरी जीतने आदि पर लागू होता है. फाइनेंशियल ईयर दो हज़ार उन्नीस-बीस के लिए अपडेट आयकर रिटर्न फाइल करने की समय सीमा इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस है. वे टैक्सपेयर्स, जो वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के लिए इसे दाखिल करने से चूक गए हैं या किसी आय की सूचना देने से चूक गए हैं, वे एक अपडेट आईटीआर या आईटीआर यू फाइल कर सकते हैं. प्रधानमंत्री वय वंदना योजना दो हज़ार उन्नीस में शुरू की गई थी. ये स्कीम सीनियर सिटीजन को एक नियमित आय देती है. इसमें निवेश करने की आखिरी तारीख इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस है. साठ वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इस योजना में भाग ले सकता है. यह योजना सालाना सात. चार प्रतिशत की ब्याज देती है. FYदो हज़ार बाईस-तेईस के लिए टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट की डेडलाइन इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस को खत्म होगी. यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुनते हैं. टैक्सपेयर्स पुरानी टैक्स रिजिम के तहत अपने निवेश के लिए कई छूट का क्लेम कर सकते हैं.
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- "हमारे साथ छेड़छाड़ करेगा, तो हम उसका जवाब देंगे"
PM Narendra Modi govt 8 years: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज इंडिया टीवी संवाद के मंच पर चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने सीमा पर छेड़छाड़ करने या बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की कोई कोशिश की तो भारत मुंह तोड़ जवाब देगा। इंडिया टीवी संवाद कॉन्क्लेव में रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "हमारी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने की कोशिश करेंगे, तो भारत उसका मुंह-तोड़ जवाब देगा। हमारे साथ छेड़छाड़ करेगा, तो हम उसका जवाब देंगे। "
"भारत किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता लेकिन. . . "
इस दौरान रक्षा मंत्री ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "भारत किसी भी देश को अपना दुश्मन नहीं मानता है, लेकिन अगर कोई देश हमारे स्वाभिमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, या हमारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो हम 'मुंह-तोड़ जवाब' देंगे। जो कुछ भी हुआ (एलएसी पर) उसके लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। चीन को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, लेकिन मैं जानता हूं कि वह आत्मनिरीक्षण नहीं करेगा, क्योंकि उसकी मानसिकता विस्तारवादी है। हम चीन के मंसूबे को पूरा नहीं होने देंगे। "
"पहली बार भारत ने चीन के खिलाफ स्टैंड लिया"
राजनाथ सिंह ने कहा, "रक्षा मंत्री के रूप में मुझे पता है कि एलएसी पर चीन के खिलाफ गतिरोध के दौरान हमारे अधिकारियों और जवानों ने कैसे दृढ़ विश्वास और साहस दिखाया। हमारे देश में ज्यादातर लोग यह जानते तक नहीं हैं। रक्षा मंत्री के तौर पर मैं जानता हूं कि क्या हुआ, कब हुआ और कैसे हुआ। जिस तरह से हमारी सेना, वायुसेना और नौसेना ने अपनी तैयारियां कीं, वह अप्रत्याशित था। विपक्ष के नेता चाहे कुछ भी कहें, यह पहली बार है कि भारत ने चीन के खिलाफ स्टैंड लिया है। चीन ने जो भी बुनियादी ढांचा विकसित किया वह एलएसी के पार उनकी तरफ था। "
पाकिस्तान के मुद्दे पर क्या बोले रक्षा मंत्री?
यह पूछे जाने पर कि भारत की ओर से सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान के रुख में सुधार क्यों नहीं हुआ, राजनाथ सिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "पाकिस्तान में सुधार नहीं हुआ है, लेकिन उसे पूरी तरह से एहसास हो गया है। भारत ने साबित कर दिया है कि वह पारंपरिक लड़ाई के साथ-साथ आधुनिक लड़ाई में भी जीत हासिल कर सकता है। "
"रूस-यूक्रेन युद्ध में PM की भूमिका की सराहना"
यूक्रेन संकट पर राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत चाहता है कि यूक्रेन की लड़ाई जल्द से जल्द खत्म हो। उन्होंने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध में प्रधानमंत्री की भूमिका की सराहना देश के विपक्ष एवं दुनिया के कई देशों ने भी की है। जब मैं विदेश मंत्री के साथ वॉशिंगटन गया था, तो मुझे लगता था कि अमेरिकी नेता भारत के रुख पर प्रतिकूल टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन किसी ने भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। हमारे प्रधानमंत्री एकमात्र वैश्विक नेता हैं जो अमेरिका और रूस दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से बात कर सकते हैं, और हमारे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति से भी बात कर सकते हैं। "
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- "हमारे साथ छेड़छाड़ करेगा, तो हम उसका जवाब देंगे" PM Narendra Modi govt आठ years: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज इंडिया टीवी संवाद के मंच पर चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने सीमा पर छेड़छाड़ करने या बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की कोई कोशिश की तो भारत मुंह तोड़ जवाब देगा। इंडिया टीवी संवाद कॉन्क्लेव में रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "हमारी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने की कोशिश करेंगे, तो भारत उसका मुंह-तोड़ जवाब देगा। हमारे साथ छेड़छाड़ करेगा, तो हम उसका जवाब देंगे। " "भारत किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता लेकिन. . . " इस दौरान रक्षा मंत्री ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "भारत किसी भी देश को अपना दुश्मन नहीं मानता है, लेकिन अगर कोई देश हमारे स्वाभिमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, या हमारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो हम 'मुंह-तोड़ जवाब' देंगे। जो कुछ भी हुआ उसके लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। चीन को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, लेकिन मैं जानता हूं कि वह आत्मनिरीक्षण नहीं करेगा, क्योंकि उसकी मानसिकता विस्तारवादी है। हम चीन के मंसूबे को पूरा नहीं होने देंगे। " "पहली बार भारत ने चीन के खिलाफ स्टैंड लिया" राजनाथ सिंह ने कहा, "रक्षा मंत्री के रूप में मुझे पता है कि एलएसी पर चीन के खिलाफ गतिरोध के दौरान हमारे अधिकारियों और जवानों ने कैसे दृढ़ विश्वास और साहस दिखाया। हमारे देश में ज्यादातर लोग यह जानते तक नहीं हैं। रक्षा मंत्री के तौर पर मैं जानता हूं कि क्या हुआ, कब हुआ और कैसे हुआ। जिस तरह से हमारी सेना, वायुसेना और नौसेना ने अपनी तैयारियां कीं, वह अप्रत्याशित था। विपक्ष के नेता चाहे कुछ भी कहें, यह पहली बार है कि भारत ने चीन के खिलाफ स्टैंड लिया है। चीन ने जो भी बुनियादी ढांचा विकसित किया वह एलएसी के पार उनकी तरफ था। " पाकिस्तान के मुद्दे पर क्या बोले रक्षा मंत्री? यह पूछे जाने पर कि भारत की ओर से सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान के रुख में सुधार क्यों नहीं हुआ, राजनाथ सिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "पाकिस्तान में सुधार नहीं हुआ है, लेकिन उसे पूरी तरह से एहसास हो गया है। भारत ने साबित कर दिया है कि वह पारंपरिक लड़ाई के साथ-साथ आधुनिक लड़ाई में भी जीत हासिल कर सकता है। " "रूस-यूक्रेन युद्ध में PM की भूमिका की सराहना" यूक्रेन संकट पर राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत चाहता है कि यूक्रेन की लड़ाई जल्द से जल्द खत्म हो। उन्होंने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध में प्रधानमंत्री की भूमिका की सराहना देश के विपक्ष एवं दुनिया के कई देशों ने भी की है। जब मैं विदेश मंत्री के साथ वॉशिंगटन गया था, तो मुझे लगता था कि अमेरिकी नेता भारत के रुख पर प्रतिकूल टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन किसी ने भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। हमारे प्रधानमंत्री एकमात्र वैश्विक नेता हैं जो अमेरिका और रूस दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से बात कर सकते हैं, और हमारे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति से भी बात कर सकते हैं। "
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साल 2019 का आखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को पड़ने जा रहा है. 26 दिसंबर को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा.
यहां वलयाकार से मतलब ये है कि ग्रहण के दौरान सूर्य आग से भरी एक अंगूठी की तरह नजर आएगा. इस सूर्य ग्रहण की खास बात यह है कि इसे भारत में भी देखा जा सकेगा. सूर्य ग्रहण की घटना अमावस्या के दिन ही घटित होती है ।
सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को सुबह 8 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और 10 बजकर 57 मिनट पर खत्म होगा. यानी सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 40 मिनट 6 सेकेंड होगी. वहीं ग्रहण का सूतक काल 25 दिसंबर 2019 को शाम 5 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा. वहीं शाम 10 बजकर 57 मिनट पर खत्म होगा।
भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।
ग्रहण प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो अभूतपूर्व अनोखा, विचित्र ज्योतिष ज्ञान, ग्रह और उपग्रहों की गतिविधियाँ एवं उनका स्वरूप स्पष्ट करता है। सूर्य ग्रहण (सूर्योपराग) तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा आवृ्त (व्यवधान / बाधा) हो जाए। इस प्रकार के ग्रहण के लिए चन्दमा का पृथ्वी और सूर्य के बीच आना आवश्यक है। इससे पृ्थ्वी पर रहने वाले लोगों को सूर्य का आवृ्त भाग नहीं दिखाई देता है।
सूर्यग्रहण होने के लिए निम्न शर्ते पूरी होनी आवश्यक है।
- अमावस्या होनी चाहिये।
- चन्दमा का रेखांश राहू या केतु के पास होना चाहिये।
- चन्द्रमा का अक्षांश शून्य के निकट होना चाहिए।
उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली रेखाओं को रेखांश कहा जाता है तथा भूमध्य रेखा के चारो वृ्ताकार में जाने वाली रेखाओं को अंक्षाश के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण सदैव अमावस्या को ही होता है। जब चन्द्रमा क्षीणतम हो और सूर्य पूर्ण क्षमता संपन्न तथा दीप्त हों। चन्द्र और राहू या केतु के रेखांश बहुत निकट होने चाहिए।
चन्द्र का अक्षांश लगभग शून्य होना चाहिये और यह तब होगा जब चंद्र रविमार्ग पर या रविमार्ग के निकट हों, सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्र के कोणीय व्यास एक समान होते हैं। इस कारण चन्द सूर्य को केवल कुछ मिनट तक ही अपनी छाया में ले पाता है। सूर्य ग्रहण के समय जो क्षेत्र ढक जाता है उसे पूर्ण छाया क्षेत्र कहते हैं।
भारतीय समय के मुताबिक सूर्य ग्रहण सुबह 8 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और 10 बजकर 57 मिनट पर खत्म हो जाएगा. इस खण्डग्रास सूर्य ग्रहण की अवधि लगभग 2 घंटे 40 मिनट की होगी सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इसके साथ ही इस दौरान शुभ कार्यों को करने की भी मनाही होती है. यह भारत के राज्य केरला मे देखा जा सकेगा ।
भारत के अलावा 26 दिसंबर 2019 को पड़ने वाला ये सूर्य ग्रहण मंगोलिया, चीन, रूस, जापान, आस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र, तुर्की, पूर्वी अफ्रीका, पूर्वी अरब, हिंद महासागर, इंडोनेशिया, नेपाल, जापान, कोरिया आदि में देखा जा सकेगा. ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है. सूर्य ग्रहण हर राशि के जातकों पर कुछ न कुछ बुरा प्रभाव डालता है. कई राशियों के लिए यह विनाशकारी भी साबित हो सकता है.
ग्रहण के समय मंत्र जाप करना चाहिए। इस दौरान पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। इससे खाने पर ग्रहण की नकारात्मक किरणों का असर नहीं होता है।
अमावस्या तिथि पर घर के पितर देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर इनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।
पौराणिक मान्यतानुसार पुराने समय में समुद्र मंथन हुआ था। इसमें देवताओं और दानवों ने भागय लिया था। जब समुद्र मंथन से अमृत निकला तो इसके लिए देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय राहु नाम का असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया था। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया।
विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया, क्योंकि राहु ने भी अमृत पी लिया था इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। इस घटना के बाद राहु चंद्र और सूर्य से शत्रुता रखता है और समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।
- जहां भारत में सूर्य और चंद्र ग्रहण को लेकर ये मान्यताएं हैं, तो वहीं वियतनाम में इसे लेकर अलग ही बातें कही जाती हैं।
- वियतनाम में लोगों का मानना है कि सूर्य ग्रहण इसलिए होता है क्योंकि एक बड़ा मेंढक उसे निगल लेता है।
- प्राचीन काल में, ग्रीक के लोगों का मानना था कि सूर्य ग्रहण नाराज देवताओं का संकेत था और यह आपदा और विनाश की शुरुआत थी।
- अफ्रीका में पूर्वोत्तर टोगो के बाटाम्मालिबा लोग मानते हैं कि सूर्य और चंद्रमा ग्रहण के दौरान लड़ाई करते हैं।
- कई लोगों को लगता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान करने से उनपर बुराई का प्रभाव नहीं पड़ेगा। माना जाता है कि गंगा में डुबकी लेना या इसका पानी खुदपर छिड़कना बुरी बलों के प्रभाव को कम करता है।
- सूर्य ग्रहण के दौरान खाना भी नहीं पकाया जाता। सूर्य की रौशनी कम होने के कारण कहा जाता है कि इससे खाने में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। इसलिए बचा हुआ खाना भी ग्रहण से पहले खत्म कर लिया जाता है।
- गर्भवती महिलाओं के लिए भी सूर्य ग्रहण हानिकारक माना जाता है। इन महिलाओं को बुरी ताकतों के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में उन्हें पैरों को क्रॉस कर के बैठने की भी अनुमति नहीं होती है।
सूर्य ग्रहण के दौरान लोग सोने, यौन संबंध और टॉयलेट जाने से भी बचते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो सूर्य ग्रहण के दौरान सोते हैं उन्हें बीमारियों हो सकती हैं, जबकि संभोग करने वाले लोग सूअरों के रूप में पुनर्जन्म ले सकते हैं। * कुछ जगहों पर यह भी माना जाता है कि सूर्य ग्रहण को देखा नहीं जा सकता है। माना जाता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को देखकर एक व्यक्ति ब्रह्मांड के साथ अपना संतुलन बिगाड़ सकता है, जिससे जीवन में बाद में समस्याएं आती हैं।
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साल दो हज़ार उन्नीस का आखिरी सूर्य ग्रहण छब्बीस दिसंबर को पड़ने जा रहा है. छब्बीस दिसंबर को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा. यहां वलयाकार से मतलब ये है कि ग्रहण के दौरान सूर्य आग से भरी एक अंगूठी की तरह नजर आएगा. इस सूर्य ग्रहण की खास बात यह है कि इसे भारत में भी देखा जा सकेगा. सूर्य ग्रहण की घटना अमावस्या के दिन ही घटित होती है । सूर्य ग्रहण छब्बीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को सुबह आठ बजकर सत्रह मिनट से शुरू होगा और दस बजकर सत्तावन मिनट पर खत्म होगा. यानी सूर्य ग्रहण की कुल अवधि दो घंटाटे चालीस मिनट छः सेकेंड होगी. वहीं ग्रहण का सूतक काल पच्चीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को शाम पाँच बजकर इकतीस मिनट से शुरू होगा. वहीं शाम दस बजकर सत्तावन मिनट पर खत्म होगा। भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है। ग्रहण प्रकृ्ति का एक अद्भुत चमत्कार है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो अभूतपूर्व अनोखा, विचित्र ज्योतिष ज्ञान, ग्रह और उपग्रहों की गतिविधियाँ एवं उनका स्वरूप स्पष्ट करता है। सूर्य ग्रहण तब होता है, जब सूर्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से चन्द्रमा द्वारा आवृ्त हो जाए। इस प्रकार के ग्रहण के लिए चन्दमा का पृथ्वी और सूर्य के बीच आना आवश्यक है। इससे पृ्थ्वी पर रहने वाले लोगों को सूर्य का आवृ्त भाग नहीं दिखाई देता है। सूर्यग्रहण होने के लिए निम्न शर्ते पूरी होनी आवश्यक है। - अमावस्या होनी चाहिये। - चन्दमा का रेखांश राहू या केतु के पास होना चाहिये। - चन्द्रमा का अक्षांश शून्य के निकट होना चाहिए। उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाने वाली रेखाओं को रेखांश कहा जाता है तथा भूमध्य रेखा के चारो वृ्ताकार में जाने वाली रेखाओं को अंक्षाश के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण सदैव अमावस्या को ही होता है। जब चन्द्रमा क्षीणतम हो और सूर्य पूर्ण क्षमता संपन्न तथा दीप्त हों। चन्द्र और राहू या केतु के रेखांश बहुत निकट होने चाहिए। चन्द्र का अक्षांश लगभग शून्य होना चाहिये और यह तब होगा जब चंद्र रविमार्ग पर या रविमार्ग के निकट हों, सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्र के कोणीय व्यास एक समान होते हैं। इस कारण चन्द सूर्य को केवल कुछ मिनट तक ही अपनी छाया में ले पाता है। सूर्य ग्रहण के समय जो क्षेत्र ढक जाता है उसे पूर्ण छाया क्षेत्र कहते हैं। भारतीय समय के मुताबिक सूर्य ग्रहण सुबह आठ बजकर सत्रह मिनट से शुरू होगा और दस बजकर सत्तावन मिनट पर खत्म हो जाएगा. इस खण्डग्रास सूर्य ग्रहण की अवधि लगभग दो घंटाटे चालीस मिनट की होगी सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इसके साथ ही इस दौरान शुभ कार्यों को करने की भी मनाही होती है. यह भारत के राज्य केरला मे देखा जा सकेगा । भारत के अलावा छब्बीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को पड़ने वाला ये सूर्य ग्रहण मंगोलिया, चीन, रूस, जापान, आस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र, तुर्की, पूर्वी अफ्रीका, पूर्वी अरब, हिंद महासागर, इंडोनेशिया, नेपाल, जापान, कोरिया आदि में देखा जा सकेगा. ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है. सूर्य ग्रहण हर राशि के जातकों पर कुछ न कुछ बुरा प्रभाव डालता है. कई राशियों के लिए यह विनाशकारी भी साबित हो सकता है. ग्रहण के समय मंत्र जाप करना चाहिए। इस दौरान पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। इससे खाने पर ग्रहण की नकारात्मक किरणों का असर नहीं होता है। अमावस्या तिथि पर घर के पितर देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर इनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। पौराणिक मान्यतानुसार पुराने समय में समुद्र मंथन हुआ था। इसमें देवताओं और दानवों ने भागय लिया था। जब समुद्र मंथन से अमृत निकला तो इसके लिए देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय राहु नाम का असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया था। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया, क्योंकि राहु ने भी अमृत पी लिया था इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। इस घटना के बाद राहु चंद्र और सूर्य से शत्रुता रखता है और समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं। - जहां भारत में सूर्य और चंद्र ग्रहण को लेकर ये मान्यताएं हैं, तो वहीं वियतनाम में इसे लेकर अलग ही बातें कही जाती हैं। - वियतनाम में लोगों का मानना है कि सूर्य ग्रहण इसलिए होता है क्योंकि एक बड़ा मेंढक उसे निगल लेता है। - प्राचीन काल में, ग्रीक के लोगों का मानना था कि सूर्य ग्रहण नाराज देवताओं का संकेत था और यह आपदा और विनाश की शुरुआत थी। - अफ्रीका में पूर्वोत्तर टोगो के बाटाम्मालिबा लोग मानते हैं कि सूर्य और चंद्रमा ग्रहण के दौरान लड़ाई करते हैं। - कई लोगों को लगता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान करने से उनपर बुराई का प्रभाव नहीं पड़ेगा। माना जाता है कि गंगा में डुबकी लेना या इसका पानी खुदपर छिड़कना बुरी बलों के प्रभाव को कम करता है। - सूर्य ग्रहण के दौरान खाना भी नहीं पकाया जाता। सूर्य की रौशनी कम होने के कारण कहा जाता है कि इससे खाने में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। इसलिए बचा हुआ खाना भी ग्रहण से पहले खत्म कर लिया जाता है। - गर्भवती महिलाओं के लिए भी सूर्य ग्रहण हानिकारक माना जाता है। इन महिलाओं को बुरी ताकतों के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में उन्हें पैरों को क्रॉस कर के बैठने की भी अनुमति नहीं होती है। सूर्य ग्रहण के दौरान लोग सोने, यौन संबंध और टॉयलेट जाने से भी बचते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो सूर्य ग्रहण के दौरान सोते हैं उन्हें बीमारियों हो सकती हैं, जबकि संभोग करने वाले लोग सूअरों के रूप में पुनर्जन्म ले सकते हैं। * कुछ जगहों पर यह भी माना जाता है कि सूर्य ग्रहण को देखा नहीं जा सकता है। माना जाता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को देखकर एक व्यक्ति ब्रह्मांड के साथ अपना संतुलन बिगाड़ सकता है, जिससे जीवन में बाद में समस्याएं आती हैं।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। श्रीलंकाई अधिकारियों ने गिरजाघरों तथा होटलों में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के मामले में सोमवार को कथित तौर पर मुस्लिम चरमपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 24 हो गई है।
द्वीप राष्ट्र में हुए इन घातक हमलों में अभी तक 290 लोगों की जान जा चुकी है। लिट्टे के साथ लंबे चले संघर्ष के खत्म होने के बाद करीब एक दशक से श्रीलंका में शांति कायम थी जो इस घटना से भंग हो गयी। श्रीलंका में हुए अब तक के सबसे खतरनाक हमलों में से एक है।
ये विस्फोट स्थानीय समयानुसार सुबह पौने नौ बजे के करीब ईस्टर प्रार्थना सभा के दौरान कोलंबो के सेंट एंथनी गिरजाघर, पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर और बट्टिकलोवा के जियोन गिरजाघर में हुए। वहीं तीन पांच सितारा होटलों - शांगरी ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी को भी निशाना बनाया गया।
वहीं पुलिस अधिकारी ने गुप्त रूप से बताया कि सभी संदिग्ध अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों होटलों पर हमला करने के लिए जिस वैन में विस्फोटक ले जाया गया था उसके मुस्लिम चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
हमलावर हमले की तैयारी करने के लिए जिस घर में तीन महीने तक रहे उसकी पहचान भी दक्षिण कोलंबो उपनगर पानादुरा में कर ली गई है। इस बीच, श्रीलंकाई वायु सेना ने कोलंबो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से रविवार देर रात के मुख्य र्टिमनल की ओर जाने वाली सड़क से एक देशी बम बरामद किया, जिस समय पर निष्क्रिय कर दिया गया।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। श्रीलंकाई अधिकारियों ने गिरजाघरों तथा होटलों में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के मामले में सोमवार को कथित तौर पर मुस्लिम चरमपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात के ग्यारह सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या चौबीस हो गई है। द्वीप राष्ट्र में हुए इन घातक हमलों में अभी तक दो सौ नब्बे लोगों की जान जा चुकी है। लिट्टे के साथ लंबे चले संघर्ष के खत्म होने के बाद करीब एक दशक से श्रीलंका में शांति कायम थी जो इस घटना से भंग हो गयी। श्रीलंका में हुए अब तक के सबसे खतरनाक हमलों में से एक है। ये विस्फोट स्थानीय समयानुसार सुबह पौने नौ बजे के करीब ईस्टर प्रार्थना सभा के दौरान कोलंबो के सेंट एंथनी गिरजाघर, पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर और बट्टिकलोवा के जियोन गिरजाघर में हुए। वहीं तीन पांच सितारा होटलों - शांगरी ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी को भी निशाना बनाया गया। वहीं पुलिस अधिकारी ने गुप्त रूप से बताया कि सभी संदिग्ध अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों होटलों पर हमला करने के लिए जिस वैन में विस्फोटक ले जाया गया था उसके मुस्लिम चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। हमलावर हमले की तैयारी करने के लिए जिस घर में तीन महीने तक रहे उसकी पहचान भी दक्षिण कोलंबो उपनगर पानादुरा में कर ली गई है। इस बीच, श्रीलंकाई वायु सेना ने कोलंबो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से रविवार देर रात के मुख्य र्टिमनल की ओर जाने वाली सड़क से एक देशी बम बरामद किया, जिस समय पर निष्क्रिय कर दिया गया। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
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मालिनी अवस्थी। वसंत तरुणाई है। यह प्रतीक्षा करना नहीं जानता और इसका उत्कर्ष है होली। वसंत ऋतु और होली का पर्व कवियों-कलाकारों ही नहीं, क्रांतिकारियों को भी प्रिय है। घनी अमराई में कोयल की कूक, गुलाब गेंदा, चंपा, चमेली पर मंडराते भंवरों का गुंजन, चारों ओर पियरी ओढ़े सरसों के खेत, गेहूं की झूमती-पकती बालियां. . . इसी वासंती मौसम में होली, धमार, काफी, जोगीरा, चौताल और चैता की स्वरलहरियां सुनाई पड़ने लगती हैं। आकाश अबीर-गुलाल सा दिखने लगता है, उत्साह का कोई ओर-छोर नहीं रहता. . . मन भीगने लगता है और तन भीगना चाहता है किसी अपने के प्रेम से। वसंत और फागुन की यह दहक टेसू-पलाश के दहकते केसरिया रंग में भीग कर ही शांत होती है।
वसंत यौवन है, तरुणाई है, उल्लास है। वसंत नवागत का स्वागत है। वसंत जीवन का उत्सव है, वसंत बिखरने-बिखेरने का मौसम है। वसंत अधीर है। यह प्रतीक्षा करना नहीं जानता और इसका उत्कर्ष है होली। वर्ष प्रति वर्ष, वसंत के उल्लास का चरम फागुन में रंगों से जब भीजता है तो ही पूरा होता है उमंग का यह अनुष्ठान। इन दो महीनों में मनुष्य एक जीवन जी लेता है। कामदेव ने ऐसी व्यवस्था ही रच रखी है। शिव ने अनंग को यह विशेष वरदान दिया है। वह निराकार होकर भी साकार हैं। सच है, जीवन वही जो सार्थक जिया जाए, आयु उतनी यथेष्ट जिसमें जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो जाए। संभवतः यही कारण है कि वसंत ऋतु और होली का पर्व कवियों, कलाकारों, चित्रकारों का ही नही, क्रांतिकारियों का भी सबसे प्रिय मौसम है।
क्रांति का रंग वासंतिक है, केसरिया है, अदम्य साहस, शौर्य और अध्यात्मिक ऊर्जा का है। वीरों का वसंत ऐसा ही होना चाहिए। साहस और ऊर्जा से भरपूर। प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता जब पहली बार सुनी थी, तब से मेरे लिए वीरता और वसंत एक-दूसरे में गुंथ से गए।
वीरों का कैसा हो वसंत,
आ रही हिमालय से पुकार,
है उदधि गरजता बार बार,
प्राची पश्चिम भू नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत।
फूली सरसों ने दिया रंग,
मधु लेकर आ पहुंचा अनंग,
वधु वसुधा पुलकित अंग अंग,
है वीर देश में किंतु कंत,
वीरों का कैसा हो वसंत।
कह दे अतीत अब मौन त्याग,
लंके तुझमें क्यों लगी आग,
ऐ कुरुक्षेत्र अब जाग जाग,
बतला अपने अनुभव अनंत,
वीरों का कैसा हो वसंत।
हल्दीघाटी के शिलाखंड,
ऐ दुर्ग सिंहगढ़ के प्रचंड,
राणा ताना का कर घमंड,
दो जगा आज स्मृतियां ज्वलंत,
वीरों का कैसा हो वसंत।
देश की रक्षा के लिए तत्पर भारत मां के लाडलों ने हंसते-हंसते अपने रक्त से भारत माता का तिलक किया है। अंग्रेजों व देश के शत्रुओं से खून की होली खेली है और मुस्कुराते हुए अपना बसंती चोला देश पर न्योछावर कर दिया है।
मेरा रंग दे बसंती चोला,
मेरा रंग दे बसंती चोला।
यह गीत 'भगत सिंह का अंतिम गान' शीर्षक के रूप में वर्ष 1931 के साप्ताहिक 'अभ्युदय' के अंक में प्रकाशित हुआ था। भगत सिंह ने अंतिम समय में यह गीत गाया या नहीं इसके साक्ष्य उपलब्ध नहीं है किंतु निस्संदेह यह गीत भगत सिंह को पसंद था और वह जेल में किताबें पढ़ते-पढ़ते कई बार इस गीत को गाने लगते थे। उनके आसपास के अन्य बंदी क्रांतिकारी भी इस गीत को एक साथ गाते थे, इस बात के अनेक प्रमाण हैं।
स्वाधीनता की लड़ाई में देश के कोने-कोने में क्रांतिकारी एकजुट हो रहे थे। रामप्रसाद बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक थे। इस संस्था के द्वारा ही चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, अशफाक उल्ला खान, राजगुरु, प्रेम किशन खन्ना, ठाकुर रोशन सिंह और भगवतीचरण व्होरा जैसे क्रांतिकारी एक दूसरे के संपर्क में आए। भगत सिंह बिस्मिल से अत्यधिक प्रभावित थे। हालांकि एक समय में वे महात्मा गांधी से भी बहुत प्रभावित थे किंतु गांधी जी के असहयोग आंदोलन रद कर देने के कारण उनमें थोड़ा रोष उत्पन्न हुआ तो उन्होंने अहिंसात्मक आंदोलन की जगह क्रांति का मार्ग अपनाना उचित समझा। उनके दल के प्रमुख क्रांतिकारियों में आजाद, सुखदेव और राजगुरु इत्यादि थे। काकोरी ट्रेन एक्शन में चार क्रांतिकारियों, जिनमें बिस्मिल और अशफाक भी शामिल थे, की फांसी और कारावास की सजा से भगत सिंह इतने उद्विग्न हुए कि उन्होंने अपनी पार्टी नौजवान भारत सभा का हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में विलय कर दिया और एक नया नाम दिया- हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए प्रदर्शन हुए और इन प्रदर्शनों में भाग लेने वालों पर अंग्रेजी शासन ने लाठीचार्ज किया। जिसमें लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने योजना बनाकर 17 दिसंबर, 1928 को एसपी सांडर्स को गोली मार दी। आठ अप्रैल, 1929 को केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने के जुर्म में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। भगत सिंह चाहते तो भाग सकते थे पर उन्होंने पहले ही सोच लिया था कि उन्हें दंड स्वीकार है। विस्फोट होने के बाद उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद का नारा लगाया। आप कल्पना कर सकते हैं कि एक हुकूमत, जिसका दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर शासन था और जिसके बारे में कहा जाता था कि उसके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, ऐसी ताकतवर हुकूमत 23 साल के एक युवक से भयभीत हो गई थी।
स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारी साहित्य का इतिहास भाग -दो में उल्लिखित है कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा में दिए गए दिशानिर्देश का भगत सिंह ने अक्षरशः पालन किया और अंग्रेजी सरकार से फांसी के बजाय गोली से उड़ा दिए जाने की मांग की। 23 मार्च, 1931 की शाम भगत सिंह तथा उनके दो साथियों सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई।
यही वह विचारभूमि थी जिसके आधार पर निराला जी ने 'खून की होली जो खेली' लिखी थी। यह कविता गया से प्रकाशित साप्ताहिक 'उषा' के होलिकांक में मार्च 1946 में प्रकाशित हुई।
युवकजनों की है जान,
खून की होली जो खेली,
पाया है लोगों में मान,
खून की होली जो खेली।
रंग गए जैसे पलाश,
कुसुम किंशुक के, सुहाए,
कोकनद के पाए प्राण,
खून की होली जो खेली।
निकले क्या कोंपल लाल,
फाग की आग लगी है,
फागुन की टेढ़ी तान,
खून की होली जो खेली।
खुल गई गीतों की रात,
किरन उतरी है प्रातः की,
हाथ कुसुम-वरदान,
खून की होली जो खेली।
आई सुवेश बहार,
आम-लीची की मंजरी,
कटहल की अरघान,
खून की होली जो खेली।
विकच हुए कचनार,
हार पड़े अमलतास के,
पाटल-होठों मुसकान,
खून की होली जो खेली। ।
यहां पर मैं अपनी एक प्रिय रचना का जिक्र अवश्य करना चाहूंगी। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर शायर भी थे। उनके जीवनकाल में उनकी आंखों के सामने धीरे-धीरे हिंदुस्तान पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया। इस संघर्ष में भारत ने खून की कैसी होली खेली, इसका बड़ा मार्मिक, सारगर्भित और साहित्यिक वर्णन मिलता है।
ंहद में कैसो फाग मचो री जोरा जोरी,
फूल का तख्र्ता ंहद बना था,
केसर की सी क्यारी,
कैसे फूटे भाग हमारे,
लुट गई बगिया हमारी,
जल गई सब फुलवारी,
हिंद में कैसो फाग मचो री।
गोलिन का ही गुलाल बनायो,
तोपन की पिचकारी,
आप रही सिगरे मुख ऊपर,
हिंद में कैसो फाग मचो री। ।
वसंत में चहुंओर छिटकी पियरी सरसों वातावरण में नई ऊर्जा, नई आशा लाती दिखाई पड़ती है तो फागुन में खिले टेसू, पलाश, कचनार का केसरिया रंग प्रकृति को एक अलग आध्यात्मिक आभा देते हैं। केसरिया रंग भक्ति व समर्पण का रंग है। भारतीय धर्म में केसरिया रंग को साधुता, पवित्रता, शुचिता, स्वच्छता और परिष्कार का वैसे ही द्योतक माना गया है जैसे आग में तपकर वस्तुएं निखर उठती हैं। भारत के ध्वज में पहला रंग केसरिया ही है जो शुभ संकल्प, ज्ञान, तप, संयम और वैराग्य का रंग है। एक पारंपरिक ग्राम गीत में एक पारंपरिक ग्राम गीत में होली गाती हुई ग्राम बाला को किसी और रंग की नहीं, केसरिया चुनरी ही पसंद है।
मोरे बांके सांवरिया,
मोहे ला दे केसरिया चुनरिया,
ओ रंगरेजवा न धानी गुलाबी,
मोरी रंग दे चुनरिया केसरिया।
बुंदेलखंड की अनेक फागों में युद्ध का, क्रांति का, वीरता का रंग दिखता है। एक फाग की चौकड़ी देखिए, जिसमें कहा जा रहा है कि अब तो पानी सिर से ऊपर हो गया है अर्थात अब सहन नही होता। ऐसा न हो कि यहां कौवे बोलने लगे अर्थात सब कुछ कहीं उजड़ न जाए। कवि श्याम का कहना है कि- सावधान हो जाओ हमें लड़ने के लिए बैरी ललकार रहा है, अपने को कमजोर न मानकर उनसे संघर्ष करने को सदैव तैयार रहो।
पानी हो गव मूड डुबऊवा बोलन लगे न कौआ।
रोजैं मर रए इतै आदमी, जैसे चौपे चउवा।
आतंकी हमलन कौ घुस गव लोगन के मन हउवा।
चैतो स्याम हमे ललकारे, बैरी बीर लड़उवा। ।
वीरता के लिए साहस चाहिए और साहस भी अज्ञात के साथ प्रेम प्रसंग ही है। प्रेम करने के लिए भी तो साहस चाहिए न और इसीलिए वसंत वीर की कामना करता है।
(लेखिका प्रख्यात लोकगायिका हैं)
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मालिनी अवस्थी। वसंत तरुणाई है। यह प्रतीक्षा करना नहीं जानता और इसका उत्कर्ष है होली। वसंत ऋतु और होली का पर्व कवियों-कलाकारों ही नहीं, क्रांतिकारियों को भी प्रिय है। घनी अमराई में कोयल की कूक, गुलाब गेंदा, चंपा, चमेली पर मंडराते भंवरों का गुंजन, चारों ओर पियरी ओढ़े सरसों के खेत, गेहूं की झूमती-पकती बालियां. . . इसी वासंती मौसम में होली, धमार, काफी, जोगीरा, चौताल और चैता की स्वरलहरियां सुनाई पड़ने लगती हैं। आकाश अबीर-गुलाल सा दिखने लगता है, उत्साह का कोई ओर-छोर नहीं रहता. . . मन भीगने लगता है और तन भीगना चाहता है किसी अपने के प्रेम से। वसंत और फागुन की यह दहक टेसू-पलाश के दहकते केसरिया रंग में भीग कर ही शांत होती है। वसंत यौवन है, तरुणाई है, उल्लास है। वसंत नवागत का स्वागत है। वसंत जीवन का उत्सव है, वसंत बिखरने-बिखेरने का मौसम है। वसंत अधीर है। यह प्रतीक्षा करना नहीं जानता और इसका उत्कर्ष है होली। वर्ष प्रति वर्ष, वसंत के उल्लास का चरम फागुन में रंगों से जब भीजता है तो ही पूरा होता है उमंग का यह अनुष्ठान। इन दो महीनों में मनुष्य एक जीवन जी लेता है। कामदेव ने ऐसी व्यवस्था ही रच रखी है। शिव ने अनंग को यह विशेष वरदान दिया है। वह निराकार होकर भी साकार हैं। सच है, जीवन वही जो सार्थक जिया जाए, आयु उतनी यथेष्ट जिसमें जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो जाए। संभवतः यही कारण है कि वसंत ऋतु और होली का पर्व कवियों, कलाकारों, चित्रकारों का ही नही, क्रांतिकारियों का भी सबसे प्रिय मौसम है। क्रांति का रंग वासंतिक है, केसरिया है, अदम्य साहस, शौर्य और अध्यात्मिक ऊर्जा का है। वीरों का वसंत ऐसा ही होना चाहिए। साहस और ऊर्जा से भरपूर। प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता जब पहली बार सुनी थी, तब से मेरे लिए वीरता और वसंत एक-दूसरे में गुंथ से गए। वीरों का कैसा हो वसंत, आ रही हिमालय से पुकार, है उदधि गरजता बार बार, प्राची पश्चिम भू नभ अपार, सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत, वीरों का कैसा हो वसंत। फूली सरसों ने दिया रंग, मधु लेकर आ पहुंचा अनंग, वधु वसुधा पुलकित अंग अंग, है वीर देश में किंतु कंत, वीरों का कैसा हो वसंत। कह दे अतीत अब मौन त्याग, लंके तुझमें क्यों लगी आग, ऐ कुरुक्षेत्र अब जाग जाग, बतला अपने अनुभव अनंत, वीरों का कैसा हो वसंत। हल्दीघाटी के शिलाखंड, ऐ दुर्ग सिंहगढ़ के प्रचंड, राणा ताना का कर घमंड, दो जगा आज स्मृतियां ज्वलंत, वीरों का कैसा हो वसंत। देश की रक्षा के लिए तत्पर भारत मां के लाडलों ने हंसते-हंसते अपने रक्त से भारत माता का तिलक किया है। अंग्रेजों व देश के शत्रुओं से खून की होली खेली है और मुस्कुराते हुए अपना बसंती चोला देश पर न्योछावर कर दिया है। मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे बसंती चोला। यह गीत 'भगत सिंह का अंतिम गान' शीर्षक के रूप में वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकतीस के साप्ताहिक 'अभ्युदय' के अंक में प्रकाशित हुआ था। भगत सिंह ने अंतिम समय में यह गीत गाया या नहीं इसके साक्ष्य उपलब्ध नहीं है किंतु निस्संदेह यह गीत भगत सिंह को पसंद था और वह जेल में किताबें पढ़ते-पढ़ते कई बार इस गीत को गाने लगते थे। उनके आसपास के अन्य बंदी क्रांतिकारी भी इस गीत को एक साथ गाते थे, इस बात के अनेक प्रमाण हैं। स्वाधीनता की लड़ाई में देश के कोने-कोने में क्रांतिकारी एकजुट हो रहे थे। रामप्रसाद बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में से एक थे। इस संस्था के द्वारा ही चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, अशफाक उल्ला खान, राजगुरु, प्रेम किशन खन्ना, ठाकुर रोशन सिंह और भगवतीचरण व्होरा जैसे क्रांतिकारी एक दूसरे के संपर्क में आए। भगत सिंह बिस्मिल से अत्यधिक प्रभावित थे। हालांकि एक समय में वे महात्मा गांधी से भी बहुत प्रभावित थे किंतु गांधी जी के असहयोग आंदोलन रद कर देने के कारण उनमें थोड़ा रोष उत्पन्न हुआ तो उन्होंने अहिंसात्मक आंदोलन की जगह क्रांति का मार्ग अपनाना उचित समझा। उनके दल के प्रमुख क्रांतिकारियों में आजाद, सुखदेव और राजगुरु इत्यादि थे। काकोरी ट्रेन एक्शन में चार क्रांतिकारियों, जिनमें बिस्मिल और अशफाक भी शामिल थे, की फांसी और कारावास की सजा से भगत सिंह इतने उद्विग्न हुए कि उन्होंने अपनी पार्टी नौजवान भारत सभा का हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में विलय कर दिया और एक नया नाम दिया- हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए प्रदर्शन हुए और इन प्रदर्शनों में भाग लेने वालों पर अंग्रेजी शासन ने लाठीचार्ज किया। जिसमें लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने योजना बनाकर सत्रह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस को एसपी सांडर्स को गोली मार दी। आठ अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ उनतीस को केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने के जुर्म में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। भगत सिंह चाहते तो भाग सकते थे पर उन्होंने पहले ही सोच लिया था कि उन्हें दंड स्वीकार है। विस्फोट होने के बाद उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद का नारा लगाया। आप कल्पना कर सकते हैं कि एक हुकूमत, जिसका दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर शासन था और जिसके बारे में कहा जाता था कि उसके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, ऐसी ताकतवर हुकूमत तेईस साल के एक युवक से भयभीत हो गई थी। स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारी साहित्य का इतिहास भाग -दो में उल्लिखित है कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा में दिए गए दिशानिर्देश का भगत सिंह ने अक्षरशः पालन किया और अंग्रेजी सरकार से फांसी के बजाय गोली से उड़ा दिए जाने की मांग की। तेईस मार्च, एक हज़ार नौ सौ इकतीस की शाम भगत सिंह तथा उनके दो साथियों सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई। यही वह विचारभूमि थी जिसके आधार पर निराला जी ने 'खून की होली जो खेली' लिखी थी। यह कविता गया से प्रकाशित साप्ताहिक 'उषा' के होलिकांक में मार्च एक हज़ार नौ सौ छियालीस में प्रकाशित हुई। युवकजनों की है जान, खून की होली जो खेली, पाया है लोगों में मान, खून की होली जो खेली। रंग गए जैसे पलाश, कुसुम किंशुक के, सुहाए, कोकनद के पाए प्राण, खून की होली जो खेली। निकले क्या कोंपल लाल, फाग की आग लगी है, फागुन की टेढ़ी तान, खून की होली जो खेली। खुल गई गीतों की रात, किरन उतरी है प्रातः की, हाथ कुसुम-वरदान, खून की होली जो खेली। आई सुवेश बहार, आम-लीची की मंजरी, कटहल की अरघान, खून की होली जो खेली। विकच हुए कचनार, हार पड़े अमलतास के, पाटल-होठों मुसकान, खून की होली जो खेली। । यहां पर मैं अपनी एक प्रिय रचना का जिक्र अवश्य करना चाहूंगी। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर शायर भी थे। उनके जीवनकाल में उनकी आंखों के सामने धीरे-धीरे हिंदुस्तान पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया। इस संघर्ष में भारत ने खून की कैसी होली खेली, इसका बड़ा मार्मिक, सारगर्भित और साहित्यिक वर्णन मिलता है। ंहद में कैसो फाग मचो री जोरा जोरी, फूल का तख्र्ता ंहद बना था, केसर की सी क्यारी, कैसे फूटे भाग हमारे, लुट गई बगिया हमारी, जल गई सब फुलवारी, हिंद में कैसो फाग मचो री। गोलिन का ही गुलाल बनायो, तोपन की पिचकारी, आप रही सिगरे मुख ऊपर, हिंद में कैसो फाग मचो री। । वसंत में चहुंओर छिटकी पियरी सरसों वातावरण में नई ऊर्जा, नई आशा लाती दिखाई पड़ती है तो फागुन में खिले टेसू, पलाश, कचनार का केसरिया रंग प्रकृति को एक अलग आध्यात्मिक आभा देते हैं। केसरिया रंग भक्ति व समर्पण का रंग है। भारतीय धर्म में केसरिया रंग को साधुता, पवित्रता, शुचिता, स्वच्छता और परिष्कार का वैसे ही द्योतक माना गया है जैसे आग में तपकर वस्तुएं निखर उठती हैं। भारत के ध्वज में पहला रंग केसरिया ही है जो शुभ संकल्प, ज्ञान, तप, संयम और वैराग्य का रंग है। एक पारंपरिक ग्राम गीत में एक पारंपरिक ग्राम गीत में होली गाती हुई ग्राम बाला को किसी और रंग की नहीं, केसरिया चुनरी ही पसंद है। मोरे बांके सांवरिया, मोहे ला दे केसरिया चुनरिया, ओ रंगरेजवा न धानी गुलाबी, मोरी रंग दे चुनरिया केसरिया। बुंदेलखंड की अनेक फागों में युद्ध का, क्रांति का, वीरता का रंग दिखता है। एक फाग की चौकड़ी देखिए, जिसमें कहा जा रहा है कि अब तो पानी सिर से ऊपर हो गया है अर्थात अब सहन नही होता। ऐसा न हो कि यहां कौवे बोलने लगे अर्थात सब कुछ कहीं उजड़ न जाए। कवि श्याम का कहना है कि- सावधान हो जाओ हमें लड़ने के लिए बैरी ललकार रहा है, अपने को कमजोर न मानकर उनसे संघर्ष करने को सदैव तैयार रहो। पानी हो गव मूड डुबऊवा बोलन लगे न कौआ। रोजैं मर रए इतै आदमी, जैसे चौपे चउवा। आतंकी हमलन कौ घुस गव लोगन के मन हउवा। चैतो स्याम हमे ललकारे, बैरी बीर लड़उवा। । वीरता के लिए साहस चाहिए और साहस भी अज्ञात के साथ प्रेम प्रसंग ही है। प्रेम करने के लिए भी तो साहस चाहिए न और इसीलिए वसंत वीर की कामना करता है।
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नई दिल्ली। टीवी एक्टर आलोक नाथ पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वालीं प्रोड्यूसर विनता नंदा ने 'आज तक' से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि महिलाओं का चुप रहना खतरनाक है. विनता ने कहा, "सालों बाद अपनी बात सुनाकर मैं खुद को फ्री महसूस कर रही हूं. चुप्पी खतरनाक है. सभी महिलाएं चुप्पी तोड़ें और इसके खिलाफ आगे आएं. " तनुश्री को अपनी प्रेरणा मानने वालीं विनता आलोक नाथ के साथ काम कर चुकी हैं.
विनता ने 'तारा' जैसे शो के लिए काम किया. सोमवार रात फेसबुक पर लंबी पोस्ट में आलोक नाथ का नाम लिए बिना संगीन आरोप लगाए थे. बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि जिस संस्कारी शख्स के बारे में वह बात कर रही थीं वो आलोक नाथ ही थे. इंडिया टुडे द्वारा एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विनता ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
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नई दिल्ली। टीवी एक्टर आलोक नाथ पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वालीं प्रोड्यूसर विनता नंदा ने 'आज तक' से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि महिलाओं का चुप रहना खतरनाक है. विनता ने कहा, "सालों बाद अपनी बात सुनाकर मैं खुद को फ्री महसूस कर रही हूं. चुप्पी खतरनाक है. सभी महिलाएं चुप्पी तोड़ें और इसके खिलाफ आगे आएं. " तनुश्री को अपनी प्रेरणा मानने वालीं विनता आलोक नाथ के साथ काम कर चुकी हैं. विनता ने 'तारा' जैसे शो के लिए काम किया. सोमवार रात फेसबुक पर लंबी पोस्ट में आलोक नाथ का नाम लिए बिना संगीन आरोप लगाए थे. बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि जिस संस्कारी शख्स के बारे में वह बात कर रही थीं वो आलोक नाथ ही थे. इंडिया टुडे द्वारा एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विनता ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
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जयपुर : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। राष्ट्रपति ने 2023 के लिए पद्म विभूषण,पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान के विजेताओं की घोषण की है। पद्म पुरस्कार पाने वालों में राजस्थान के भी कला और समाजसेवा से जुड़े लोगों का नाम शामिल है। पद्म पुरस्कार पाने वाले की लिस्ट में राजस्थान की तीन शख्सियतों भी शामिल है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले मशहूर गजल गायक अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा है। इसके अलावा लक्ष्मण सिंह और मूलचंद लोढ़ा को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा।
साल 2000 में मिला हुसैन बंधुओं को संगीत नाटक अकदमी अवॉर्डक्लासिक गजल गायकी में देश- दुनिया में परचम लहराने वाले जयपुर के हुसैन बंधु ने संगीत की शिक्षा अपने पिता उस्ताद अफजल हुसैन से ली। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार दोनों भाइयों की गजलों की लगभग 65 एल्बम मार्केट में आ चुके हैं। हुसैन बंधुओं ने 1958 में अपने गायकी के सफर की शुरुआत की थी। 'मैं हवा हूं कहां वतन मेरा' और 'सावन के सुहाने मौसम में' जैसी गजलों ने कई लोगों को उनका फैन बना दिया। साल 2000 में उन्हें संगीत नाटक अकदमी अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
डूंगरपुर के रहने वाले हैं मूलचंद लोढ़ारिपोटर्स के अनुसार समाज सेवा में अपनी खास पहचान बनाने वाले मूलचंद लोढ़ा ने आपातकाल में लोगों की आंखों की पीड़ा को समझकर नेत्र हॉस्पिटल खोला। इसके जरिए उन्होंने 15 हजार लोगों को आंखों में रोशनी दिलवाई। हजारों लोगों की मदद करने वाले लोढ़ा डूंगरपुर के रहने वाले हैं। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में संघ के प्रचारक के तौर पर भी उन्होंने काफी काम किया है। यहां मझोला में उन्होंने छात्रावास भी खोला है, जिसके जरिए भी समाज सेवा के काम में जुटे हैं।
जयपुर के लक्ष्मण सिंह का शिक्षा में विशेष योगदानशिक्षा क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले लक्ष्मण सिंह खुद पांचवीं कक्षा तक पढ़े हैं। लगभग 40 से 50 स्कूल खोलकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है। इसके बाद उन्होंने राजस्थान में पेयजल संकट को दूर करने के लिए तालाबों का निर्माण भी करवाया है। जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर लापोड़िया गांव में रहने वाले लक्ष्मण सिंह कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।
Pathaan फिल्म को लेकर पक्ष में उतरी Jaya Prada, Film इंडस्ट्री को लेकर जानिए क्या कहा ?
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जयपुर : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। राष्ट्रपति ने दो हज़ार तेईस के लिए पद्म विभूषण,पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान के विजेताओं की घोषण की है। पद्म पुरस्कार पाने वालों में राजस्थान के भी कला और समाजसेवा से जुड़े लोगों का नाम शामिल है। पद्म पुरस्कार पाने वाले की लिस्ट में राजस्थान की तीन शख्सियतों भी शामिल है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले मशहूर गजल गायक अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा है। इसके अलावा लक्ष्मण सिंह और मूलचंद लोढ़ा को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। साल दो हज़ार में मिला हुसैन बंधुओं को संगीत नाटक अकदमी अवॉर्डक्लासिक गजल गायकी में देश- दुनिया में परचम लहराने वाले जयपुर के हुसैन बंधु ने संगीत की शिक्षा अपने पिता उस्ताद अफजल हुसैन से ली। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार दोनों भाइयों की गजलों की लगभग पैंसठ एल्बम मार्केट में आ चुके हैं। हुसैन बंधुओं ने एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में अपने गायकी के सफर की शुरुआत की थी। 'मैं हवा हूं कहां वतन मेरा' और 'सावन के सुहाने मौसम में' जैसी गजलों ने कई लोगों को उनका फैन बना दिया। साल दो हज़ार में उन्हें संगीत नाटक अकदमी अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। डूंगरपुर के रहने वाले हैं मूलचंद लोढ़ारिपोटर्स के अनुसार समाज सेवा में अपनी खास पहचान बनाने वाले मूलचंद लोढ़ा ने आपातकाल में लोगों की आंखों की पीड़ा को समझकर नेत्र हॉस्पिटल खोला। इसके जरिए उन्होंने पंद्रह हजार लोगों को आंखों में रोशनी दिलवाई। हजारों लोगों की मदद करने वाले लोढ़ा डूंगरपुर के रहने वाले हैं। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में संघ के प्रचारक के तौर पर भी उन्होंने काफी काम किया है। यहां मझोला में उन्होंने छात्रावास भी खोला है, जिसके जरिए भी समाज सेवा के काम में जुटे हैं। जयपुर के लक्ष्मण सिंह का शिक्षा में विशेष योगदानशिक्षा क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले लक्ष्मण सिंह खुद पांचवीं कक्षा तक पढ़े हैं। लगभग चालीस से पचास स्कूल खोलकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है। इसके बाद उन्होंने राजस्थान में पेयजल संकट को दूर करने के लिए तालाबों का निर्माण भी करवाया है। जयपुर से लगभग अस्सी किलोग्राममीटर दूर लापोड़िया गांव में रहने वाले लक्ष्मण सिंह कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। Pathaan फिल्म को लेकर पक्ष में उतरी Jaya Prada, Film इंडस्ट्री को लेकर जानिए क्या कहा ?
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Rain Water Harvesting System: इंदौर। भू-जल संरक्षण अभियान को दृष्टिगत रखते हुए, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हेतु सीटी बस आफिस में मंगलवार को आयुक्त हर्षिका सिंह द्वारा समीक्षा बैठक ली गई। बैठक में आयुक्त ने पूर्व में नगर निगम इंदौर द्वारा शहर में 1 लाख से अधिक रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शहरवासियो के सहयोग से करने लगाने की प्रशंसा करते हुए, आगामी 1 माह में क्षेत्रीय जोनल अधिकारी को अपने जोन क्षेत्र के रहवासी संगठन, होटल, रेस्टोरेन्ट, मॉल, व्यवसायिक संस्थान व अन्य स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिये बैठक कर प्रेरित किए जाने के निर्देश दिए।
साथ ही क्षेत्रीय अधिकारी संबंधितो को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये तकनीकी व अन्य सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जोनल अधिकारी अपने अधीनस्थ को दिए गए लक्ष्यानुसार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये प्रेरित भी करेगे। बैठक में आयुक्त ने कहा कि रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भू जल संरक्षण के लिए आवश्यक है, यह शहरहित का विषय है। इसके लिए संपत्ति कर में किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।
आयुक्त हर्षिका सिंह द्वारा भू-जल संरक्षण अभियान को दृष्टिगत रखते हुए, शहर के भू-जल स्तर को बढाने के उददेश्य से नागरिको को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिये प्रेरित करने के लिये विभिन्न रहवासी संगठन व अन्य व्यवसायिक संगठनों के साथ बैठक कर प्रेरित करने के भी जोनल अधिकारी व अन्य को निर्देशित किया गया। साथ ही आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना नैतिकता के साथ ही शहर हित का काम है, इसे लगाने पर निगम द्वारा संपत्ति कर में किसी भी प्रकार की कोई छूट प्रदान नहींं कि जाएगी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये निगम द्वारा तकनीकी सलाह व संबंधित एजेंंसी से समन्वय कराया जाएगा, ताकि रहवासी को रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में कोई परेशानी ना हो।
इसके साथ ही आयुक्त द्वारा समस्त जोनल अधिकारी व पीएचई के अधिकारियों को निदेशित किया कि ग्रीष्मकाल के दौरान किन-किन वार्डों में जलप्रदाय की समस्या आ रही है, किन-किन क्षेत्रो में वॉटर टैंकर पर जलप्रदाय का अत्यधिक दबाव है, ऐसे क्षेत्रो को चिंहित करें। साथ ही इन स्थान पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये अधिक से अधिक नागरिकों व संगठनो को प्रेरित करे। साथ ही जोन क्षेत्रांतर्गत स्थित वॉटर बॉडीस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण हैं तो उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कर, ऐसे जल स्त्रोत को संरक्षित करे, ताकि वर्षाकाल के दौरान जल संग्रहण कर उपयोग किया जा सके। आयुक्त द्वारा विगत वर्षा में शहर में बनाए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की समीक्षा करते हुए, समस्त जोनल अधिकारी के साथ ही भवन अधिकारी-भवन निरीक्षक को निर्देशित किया कि आपके जोन/वार्ड क्षेत्र में स्थित रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की पीट चलायमान हो, इसका वार्षिक संधारण कार्य किया जाना है, इसके लिये संबंधित को प्रेरित कर, पीट का संधारण कार्य कराएं, ताकि वर्षाकाल के दौरान उक्त पिट चलायमान होकर, वर्षाजल संग्रहण हो सके।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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Rain Water Harvesting System: इंदौर। भू-जल संरक्षण अभियान को दृष्टिगत रखते हुए, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हेतु सीटी बस आफिस में मंगलवार को आयुक्त हर्षिका सिंह द्वारा समीक्षा बैठक ली गई। बैठक में आयुक्त ने पूर्व में नगर निगम इंदौर द्वारा शहर में एक लाख से अधिक रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शहरवासियो के सहयोग से करने लगाने की प्रशंसा करते हुए, आगामी एक माह में क्षेत्रीय जोनल अधिकारी को अपने जोन क्षेत्र के रहवासी संगठन, होटल, रेस्टोरेन्ट, मॉल, व्यवसायिक संस्थान व अन्य स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिये बैठक कर प्रेरित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही क्षेत्रीय अधिकारी संबंधितो को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये तकनीकी व अन्य सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जोनल अधिकारी अपने अधीनस्थ को दिए गए लक्ष्यानुसार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये प्रेरित भी करेगे। बैठक में आयुक्त ने कहा कि रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भू जल संरक्षण के लिए आवश्यक है, यह शहरहित का विषय है। इसके लिए संपत्ति कर में किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। आयुक्त हर्षिका सिंह द्वारा भू-जल संरक्षण अभियान को दृष्टिगत रखते हुए, शहर के भू-जल स्तर को बढाने के उददेश्य से नागरिको को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिये प्रेरित करने के लिये विभिन्न रहवासी संगठन व अन्य व्यवसायिक संगठनों के साथ बैठक कर प्रेरित करने के भी जोनल अधिकारी व अन्य को निर्देशित किया गया। साथ ही आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना नैतिकता के साथ ही शहर हित का काम है, इसे लगाने पर निगम द्वारा संपत्ति कर में किसी भी प्रकार की कोई छूट प्रदान नहींं कि जाएगी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये निगम द्वारा तकनीकी सलाह व संबंधित एजेंंसी से समन्वय कराया जाएगा, ताकि रहवासी को रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में कोई परेशानी ना हो। इसके साथ ही आयुक्त द्वारा समस्त जोनल अधिकारी व पीएचई के अधिकारियों को निदेशित किया कि ग्रीष्मकाल के दौरान किन-किन वार्डों में जलप्रदाय की समस्या आ रही है, किन-किन क्षेत्रो में वॉटर टैंकर पर जलप्रदाय का अत्यधिक दबाव है, ऐसे क्षेत्रो को चिंहित करें। साथ ही इन स्थान पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाने के लिये अधिक से अधिक नागरिकों व संगठनो को प्रेरित करे। साथ ही जोन क्षेत्रांतर्गत स्थित वॉटर बॉडीस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण हैं तो उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कर, ऐसे जल स्त्रोत को संरक्षित करे, ताकि वर्षाकाल के दौरान जल संग्रहण कर उपयोग किया जा सके। आयुक्त द्वारा विगत वर्षा में शहर में बनाए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की समीक्षा करते हुए, समस्त जोनल अधिकारी के साथ ही भवन अधिकारी-भवन निरीक्षक को निर्देशित किया कि आपके जोन/वार्ड क्षेत्र में स्थित रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की पीट चलायमान हो, इसका वार्षिक संधारण कार्य किया जाना है, इसके लिये संबंधित को प्रेरित कर, पीट का संधारण कार्य कराएं, ताकि वर्षाकाल के दौरान उक्त पिट चलायमान होकर, वर्षाजल संग्रहण हो सके। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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Quick links:
मोबाइल पर PUBG खेलकर कथित तौर पर सचिन के प्यार में पाकिस्तान छोड़ चार बच्चों के साथ हिंदुस्तान आने वाली सीमा हैदर की कहानी में हर रोज नए मोड़ आ रहे हैं। सीमा के बार-बार बदलते बयानों को लेकर उस पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। देश में कुछ लोग सीमा को पाकिस्तान भेजने की मांग कर रहे हैं तो कुछ सीमा को सचिन के साथ भारत में ही रहने देने की वकालत कर रहे हैं।
पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर को लेकर देवबंदी उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने कड़ा एतराज जताते हुए भारत सरकार से मांग की है कि इसकी जांच होनी चाहिए और सीमा पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से चोरी-छिपे घुसपैठियों की तरह भारत में दाखिल हुई है, हो सकता है यह पाकिस्तान और ISI की एजेंट हो और हमारे देश की जानकारी वहां देना चाहती हो इसके खिलाफ जांच होनी चाहिए।
बता दें कि देश में सीमा हैदर चर्चा की विषय बनी हुई हैं। हर कोई सीमा के बारे में जानना चाहता है। सीमा को लेकर हर रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं। सीमा कभी कलमा पढ़ने के सवाल पर फंसती हैं तो कभी नमाज के सवाल पर। हर बार सीमा के बयानों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
रिपब्लिक से बातचीत के दौरान जब सीमा हैदर से पूछा गया कि आपने इतने मोबाईल और पासपोर्ट कहां से लिए तो वो थोड़ी घबराती दिखीं। वो परेशान हो गईं और फिर जवाब देते हुए कहा कि मेरे पास सिर्फ 5 पासपोर्ट थे। एक मेरा, चार बच्चों का और एक मेरा पासपोर्ट जो रद्द हो चुका था। मैंने कानून को सबकुछ सच बता दिया है।
इसे भी पढ़ेंः सचिन से शादी, गुलाम से 'आजादी', भारत में अवैध एंट्री और....सीमा की PUBG वाली Love Story में बहुत कुछ है!
पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ कर आई सीमा हैदर का भेद खुल गया है। सीमा ने भारत में छिपने के लिए सचिन को प्यार के जाल में फांसकर मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। लेकिन कोर्ट मैरिज के लिए हायर किए गए वकील की सजगता से सारा राज खुल गया। सचिन को मोहरा बनाकर सीमा जितना छिपने की कोशिश कर रही थी, उसके राज अब उतनी ही तेजी से खुल रहे है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग शातिर सीमा को मासूम बताकर महिमामंडन में जुटे है।
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Quick links: मोबाइल पर PUBG खेलकर कथित तौर पर सचिन के प्यार में पाकिस्तान छोड़ चार बच्चों के साथ हिंदुस्तान आने वाली सीमा हैदर की कहानी में हर रोज नए मोड़ आ रहे हैं। सीमा के बार-बार बदलते बयानों को लेकर उस पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। देश में कुछ लोग सीमा को पाकिस्तान भेजने की मांग कर रहे हैं तो कुछ सीमा को सचिन के साथ भारत में ही रहने देने की वकालत कर रहे हैं। पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर को लेकर देवबंदी उलेमा मुफ्ती असद कासमी ने कड़ा एतराज जताते हुए भारत सरकार से मांग की है कि इसकी जांच होनी चाहिए और सीमा पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से चोरी-छिपे घुसपैठियों की तरह भारत में दाखिल हुई है, हो सकता है यह पाकिस्तान और ISI की एजेंट हो और हमारे देश की जानकारी वहां देना चाहती हो इसके खिलाफ जांच होनी चाहिए। बता दें कि देश में सीमा हैदर चर्चा की विषय बनी हुई हैं। हर कोई सीमा के बारे में जानना चाहता है। सीमा को लेकर हर रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं। सीमा कभी कलमा पढ़ने के सवाल पर फंसती हैं तो कभी नमाज के सवाल पर। हर बार सीमा के बयानों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। रिपब्लिक से बातचीत के दौरान जब सीमा हैदर से पूछा गया कि आपने इतने मोबाईल और पासपोर्ट कहां से लिए तो वो थोड़ी घबराती दिखीं। वो परेशान हो गईं और फिर जवाब देते हुए कहा कि मेरे पास सिर्फ पाँच पासपोर्ट थे। एक मेरा, चार बच्चों का और एक मेरा पासपोर्ट जो रद्द हो चुका था। मैंने कानून को सबकुछ सच बता दिया है। इसे भी पढ़ेंः सचिन से शादी, गुलाम से 'आजादी', भारत में अवैध एंट्री और....सीमा की PUBG वाली Love Story में बहुत कुछ है! पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ कर आई सीमा हैदर का भेद खुल गया है। सीमा ने भारत में छिपने के लिए सचिन को प्यार के जाल में फांसकर मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। लेकिन कोर्ट मैरिज के लिए हायर किए गए वकील की सजगता से सारा राज खुल गया। सचिन को मोहरा बनाकर सीमा जितना छिपने की कोशिश कर रही थी, उसके राज अब उतनी ही तेजी से खुल रहे है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग शातिर सीमा को मासूम बताकर महिमामंडन में जुटे है।
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Jamshedpur : मानगो स्थित जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में केयू के उप कुलपति डॉ. गंगाधर पांडा ने पुस्तक का विमोचन किया. पुस्तक में कोविड काल के दौरान शिक्षा क्षेत्र में आई कठनाइयों और उससे लड़ने के दौरान हुई परेशानियों का उल्लेख किया गया है. कॉलेज में विभिन्न विभागों के एचओडी व प्रोफेसर ने इस पुस्तक में अपना योगदान दिया. इस दौरान उप कुलपति डॉ गंगाधर पांडा ने कहा कि कोविड काल सभी के लिए मुश्किल भरा रहा. इस मुश्किल वक्त में शिक्षा का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा. अपने कम तकनीकी विशेषज्ञता के बावजूद कोल्हान विश्वविद्यालय ने इसपर जीत हासिल की. ऑफलाइन कक्षाओं की जगह ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जाने लगा. विद्यार्थियों के लिए 150 से अधिक वेबिनार का आयोजन किया. विद्यार्थियों को सिखाने के लिए कई प्रयास किए गए.
इस पुस्तक में भी कोविड से लड़ते शिक्षा विभाग और उसपर जीत की चर्चा की गई है, जो पठनीय और सराहनीय है. यह किताब दो वर्षों के हमारे संघर्ष की कहानी है. इसमें वर्कर्स कॉलेज के सभी शिक्षकों ने अपना योगदान दिया. पुस्तक के संपादन में चीफ एडिटर की भूमिका में प्रिंसिपल सत्यप्रिय महालिक और अशोक कुमार महापात्रा ने मुख्य भूमिका निभाई. इस दौरान प्रिंसिपल सत्यप्रिय महालिक ने कहा कि यह किताब कोविड काल के दौरान शिक्षा क्षेत्र के संघर्ष की कहानी है, जिसमें यह भी बताया गया है कि हमने आखिरकार इसपर जीत हासिल कर ली. मौके पर कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे.
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Jamshedpur : मानगो स्थित जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में केयू के उप कुलपति डॉ. गंगाधर पांडा ने पुस्तक का विमोचन किया. पुस्तक में कोविड काल के दौरान शिक्षा क्षेत्र में आई कठनाइयों और उससे लड़ने के दौरान हुई परेशानियों का उल्लेख किया गया है. कॉलेज में विभिन्न विभागों के एचओडी व प्रोफेसर ने इस पुस्तक में अपना योगदान दिया. इस दौरान उप कुलपति डॉ गंगाधर पांडा ने कहा कि कोविड काल सभी के लिए मुश्किल भरा रहा. इस मुश्किल वक्त में शिक्षा का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा. अपने कम तकनीकी विशेषज्ञता के बावजूद कोल्हान विश्वविद्यालय ने इसपर जीत हासिल की. ऑफलाइन कक्षाओं की जगह ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जाने लगा. विद्यार्थियों के लिए एक सौ पचास से अधिक वेबिनार का आयोजन किया. विद्यार्थियों को सिखाने के लिए कई प्रयास किए गए. इस पुस्तक में भी कोविड से लड़ते शिक्षा विभाग और उसपर जीत की चर्चा की गई है, जो पठनीय और सराहनीय है. यह किताब दो वर्षों के हमारे संघर्ष की कहानी है. इसमें वर्कर्स कॉलेज के सभी शिक्षकों ने अपना योगदान दिया. पुस्तक के संपादन में चीफ एडिटर की भूमिका में प्रिंसिपल सत्यप्रिय महालिक और अशोक कुमार महापात्रा ने मुख्य भूमिका निभाई. इस दौरान प्रिंसिपल सत्यप्रिय महालिक ने कहा कि यह किताब कोविड काल के दौरान शिक्षा क्षेत्र के संघर्ष की कहानी है, जिसमें यह भी बताया गया है कि हमने आखिरकार इसपर जीत हासिल कर ली. मौके पर कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे.
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न्यायसूत्रकार के समक्ष ईश्वर विवेच्य विषय नहीं था, अपितु उपास्य के रूप में वह प्रसिद्ध था। ईश्वर के अस्तित्व में किसी को सन्देह नहीं था अत सूत्रकार ने इस पर अपना मन्तव्य प्रस्तुत नहीं किया है। अन्यथा ऋषि की दृष्टि से इसका ओझल होना असंभव है। प्रावादुकों के मत के प्रसंग में जो ईश्वर के विषय में तीन सूत्र उपलब्ध होते हैं, वे तो निराकरणीय मतों के मध्य विद्यमान है। अतः उनका महत्त्व अधिक नहीं माना जा सकता है। उसका आशय तो कुछ भिन्न ही प्रतीत होता है। वार्त्तिक एवं तात्पर्य टीका में यहाँ मतभेद है। एक केवल ईश्वर कारणतावाद को पूर्वपक्ष के रूप में लेता है तो ईश्वर में अभिन्न निमित्त उपादान कारणतावाद को पूर्वपक्ष रूप में स्वीकार करता है। यह मतभेद प्रमाणित करता है कि सम्प्रदाय में ईश्वरवाद प्रचलित नहीं था। किन्तु पूर्वपक्षी के रूप में बौद्ध, मीमांसक एवं अन्य दार्शनिकों के खड़ा होने पर आचार्य उदयन ने उनके मुखविधान हेतु एक विशाल प्रकरण ग्रन्थ भी प्रस्तुत किया, व्याख्यामुखेन इसका उपपादन तो किया ही। वही प्रकरण ग्रन्थ है न्यायकुसुमांजलि, जिसकी व्याख्या एवं उपव्याख्याएँ इस वर्तमान शताब्दी में भी लिखी जा रही हैं। सबसे पहले ईश्वर के विषय में भाष्यकार के समक्ष बौद्ध आदि की ओर से समस्या आयी होगी। अतः इन्होंने इसका समाधान किया है।
कार्यायोजनधृत्यादेः पदात् प्रत्ययतः श्रुतेः।
और इनकी दो प्रकारों से व्याख्या हुई है। पहली व्याख्या से बौद्धों के द्वारा किये गये आक्षेपों का परिहार हुआ है और दूसरी व्याख्या मीमांसकों के आक्षेपों का समाधान करता है। आचार्य उदयन के इन आठों ईश्वर साधक हेतु उद्योतकराचार्य तथा वाचस्पति के द्वारा निर्दिष्ट उपर्युक्त तीन हेतुओं का ही पल्लवन है। अतः संसार का कर्तृत्व, अदृष्ट का अधिष्ठातृत्व और वेद का निर्मातृत्व हेतुओं से ईश्वर अवश्य सिद्ध होता है।
न्यायभाष्यकार ने बुद्धि आदि आत्म-विशेष गुणों से युक्त आत्म-विशेष को ईश्वर कहा है[1] वह अधर्म, मिथ्या ज्ञान तथा प्रमाद आदि जीव सुलभ गुणों से रहित है, अतः जीव से भिन्न है। साथ ही ज्ञान (सम्यज्ञान, विवेकज्ञान तथा नित्यज्ञान) (धर्मरूप प्रवृत्ति, क्लेशरहित प्रवृत्ति) तथा समाधिरूप सम्पत्ति से युक्त है वह, जो अन्य आत्मा में सर्वथा असम्भव है। धर्म तथा समाधि के फलस्वरूप अणिमा आदि अष्टविध ऐश्वर्य ईश्वर में सदा विद्यमान रहते हैं।[2] अतः संसारी तथा मुक्त दोनों प्रकार के जीव से भिन्न ईश्वर अपने प्रकार का एक स्वयं वही है। यह ईश्वर किसी भी प्रकार के कर्म का अनुष्ठान किये बिना केवल संकल्प से सब कुछ करता रहता है। ईश्वर का संकल्पजन्य यह धर्म प्रत्येक जीव में समवेत धर्माधर्म रूप अदृष्ट को और पृथिवी आदि महाभूतों को सृष्टि के लिए प्रवृत्त करता है। यद्यपि कर्म के अभाव में धर्म का अस्तित्व ईश्वर में संभव नहीं है तथापि संकल्पात्मक आन्तरिक कर्म करते रहने के कारण नित्य धर्म का आश्रय वह माना गया है। ईश्वर का स्वभाव भी संकल्पात्मक है तथा उनके स्वकृत कर्म (संकल्प) का फल संसार के निर्माण में तत्परता है। संकल्प मात्र से वह संसार की रचना करता है।
ईश्वर हम लोगों का आप्त भी है। अतः उसके वचन समूह वेद विश्वसनीय हैं। जैसे पिता पुत्र के लिए आप्त होता है, इसी तरह ईश्वर भी सभी प्राणियों के लिए आप्त है।[3] भाष्यकार ने यहाँ जीव तथा ईश्वर के सम्बन्ध के बीच केवल आप्तता के विषय में ही पिता-पुत्र का दृष्टान्त माना है। यह नहीं समझना चाहिये कि जैसे पुत्र का उत्पादक पिता होता है या पिता का अंश पुत्र होता है, इस तरह जीव का उत्पादक ईश्वर है या ईश्वर का अंश है जीव। भाष्यकार ने अपने वक्तव्य के उपसंहार में कहा है कि बुद्धि आदि गुणों के आश्रय होने से आत्मा ही ईश्वर है। यदि ईश्वर आत्मलिंग बुद्धि आदि से रहित होता तो वह हनिरुपाख्य हो जाता है। उसका विध्यात्मक वर्णन संभव नहीं होता है। फलतः बुद्धि आदि आत्म विशेष गुणों से युक्त आत्म विशेष रूप सगुण ईश्वर सिद्ध होता है।
- ↑ अधर्ममिथ्या ज्ञानप्रमादहान्या धर्मज्ञानसमाधिसम्पदा च विशिष्टमात्मान्तरमीश्वरः। तस्य च समाधिफलमष्टविधमैश्वर्यम्।
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न्यायसूत्रकार के समक्ष ईश्वर विवेच्य विषय नहीं था, अपितु उपास्य के रूप में वह प्रसिद्ध था। ईश्वर के अस्तित्व में किसी को सन्देह नहीं था अत सूत्रकार ने इस पर अपना मन्तव्य प्रस्तुत नहीं किया है। अन्यथा ऋषि की दृष्टि से इसका ओझल होना असंभव है। प्रावादुकों के मत के प्रसंग में जो ईश्वर के विषय में तीन सूत्र उपलब्ध होते हैं, वे तो निराकरणीय मतों के मध्य विद्यमान है। अतः उनका महत्त्व अधिक नहीं माना जा सकता है। उसका आशय तो कुछ भिन्न ही प्रतीत होता है। वार्त्तिक एवं तात्पर्य टीका में यहाँ मतभेद है। एक केवल ईश्वर कारणतावाद को पूर्वपक्ष के रूप में लेता है तो ईश्वर में अभिन्न निमित्त उपादान कारणतावाद को पूर्वपक्ष रूप में स्वीकार करता है। यह मतभेद प्रमाणित करता है कि सम्प्रदाय में ईश्वरवाद प्रचलित नहीं था। किन्तु पूर्वपक्षी के रूप में बौद्ध, मीमांसक एवं अन्य दार्शनिकों के खड़ा होने पर आचार्य उदयन ने उनके मुखविधान हेतु एक विशाल प्रकरण ग्रन्थ भी प्रस्तुत किया, व्याख्यामुखेन इसका उपपादन तो किया ही। वही प्रकरण ग्रन्थ है न्यायकुसुमांजलि, जिसकी व्याख्या एवं उपव्याख्याएँ इस वर्तमान शताब्दी में भी लिखी जा रही हैं। सबसे पहले ईश्वर के विषय में भाष्यकार के समक्ष बौद्ध आदि की ओर से समस्या आयी होगी। अतः इन्होंने इसका समाधान किया है। कार्यायोजनधृत्यादेः पदात् प्रत्ययतः श्रुतेः। और इनकी दो प्रकारों से व्याख्या हुई है। पहली व्याख्या से बौद्धों के द्वारा किये गये आक्षेपों का परिहार हुआ है और दूसरी व्याख्या मीमांसकों के आक्षेपों का समाधान करता है। आचार्य उदयन के इन आठों ईश्वर साधक हेतु उद्योतकराचार्य तथा वाचस्पति के द्वारा निर्दिष्ट उपर्युक्त तीन हेतुओं का ही पल्लवन है। अतः संसार का कर्तृत्व, अदृष्ट का अधिष्ठातृत्व और वेद का निर्मातृत्व हेतुओं से ईश्वर अवश्य सिद्ध होता है। न्यायभाष्यकार ने बुद्धि आदि आत्म-विशेष गुणों से युक्त आत्म-विशेष को ईश्वर कहा है[एक] वह अधर्म, मिथ्या ज्ञान तथा प्रमाद आदि जीव सुलभ गुणों से रहित है, अतः जीव से भिन्न है। साथ ही ज्ञान तथा समाधिरूप सम्पत्ति से युक्त है वह, जो अन्य आत्मा में सर्वथा असम्भव है। धर्म तथा समाधि के फलस्वरूप अणिमा आदि अष्टविध ऐश्वर्य ईश्वर में सदा विद्यमान रहते हैं।[दो] अतः संसारी तथा मुक्त दोनों प्रकार के जीव से भिन्न ईश्वर अपने प्रकार का एक स्वयं वही है। यह ईश्वर किसी भी प्रकार के कर्म का अनुष्ठान किये बिना केवल संकल्प से सब कुछ करता रहता है। ईश्वर का संकल्पजन्य यह धर्म प्रत्येक जीव में समवेत धर्माधर्म रूप अदृष्ट को और पृथिवी आदि महाभूतों को सृष्टि के लिए प्रवृत्त करता है। यद्यपि कर्म के अभाव में धर्म का अस्तित्व ईश्वर में संभव नहीं है तथापि संकल्पात्मक आन्तरिक कर्म करते रहने के कारण नित्य धर्म का आश्रय वह माना गया है। ईश्वर का स्वभाव भी संकल्पात्मक है तथा उनके स्वकृत कर्म का फल संसार के निर्माण में तत्परता है। संकल्प मात्र से वह संसार की रचना करता है। ईश्वर हम लोगों का आप्त भी है। अतः उसके वचन समूह वेद विश्वसनीय हैं। जैसे पिता पुत्र के लिए आप्त होता है, इसी तरह ईश्वर भी सभी प्राणियों के लिए आप्त है।[तीन] भाष्यकार ने यहाँ जीव तथा ईश्वर के सम्बन्ध के बीच केवल आप्तता के विषय में ही पिता-पुत्र का दृष्टान्त माना है। यह नहीं समझना चाहिये कि जैसे पुत्र का उत्पादक पिता होता है या पिता का अंश पुत्र होता है, इस तरह जीव का उत्पादक ईश्वर है या ईश्वर का अंश है जीव। भाष्यकार ने अपने वक्तव्य के उपसंहार में कहा है कि बुद्धि आदि गुणों के आश्रय होने से आत्मा ही ईश्वर है। यदि ईश्वर आत्मलिंग बुद्धि आदि से रहित होता तो वह हनिरुपाख्य हो जाता है। उसका विध्यात्मक वर्णन संभव नहीं होता है। फलतः बुद्धि आदि आत्म विशेष गुणों से युक्त आत्म विशेष रूप सगुण ईश्वर सिद्ध होता है। - ↑ अधर्ममिथ्या ज्ञानप्रमादहान्या धर्मज्ञानसमाधिसम्पदा च विशिष्टमात्मान्तरमीश्वरः। तस्य च समाधिफलमष्टविधमैश्वर्यम्।
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पटनाः बिहार के पटना एयरपोर्ट (Patna Airport) पर एक बड़ा हादसा बच गया. यहां पर गोएयर के विमान से एक पक्षा टकरा गया. फिलहाल सभी यात्री सुरक्षित हैं. जानकारी के अनुसार, मंगलवार को गोएयर की प्लाइट बैंगलुरु से पटना आ रही थी.
इस दौरान विमान के पंखों से एक पक्षी टकरा गया. 11 बजकर 35 मिनट विमान आने का समय था. लेकिन लैंडिंग से पहले ही बर्ड हिट हुआ. हालांकि, पायलट की सूझबूझ के कारण बड़ा हादसा टल गया और विमान को सुरक्षित लैंडिंग हुई. बताया जा रहा है कि विमान के पंखों में थोड़ी खराबी आई है, जिसे ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है.
फिलहाल, विमान रनवे पर खड़ा है. तकनीकी अधिकारियों ने विमाना का मुआयना किया है. विमान पूरी तरह से यात्रियों से भरा था और 170 से अधिक यात्री विमान में सवार थे. ठीक होने पर वापस भेजा जाएगा. वहीं, यात्रियों को दूसरे विमान से भेजने का प्रबंध किया गया है.
बताते चलें कि पटना एयरपोर्ट पर फिलहाल 40 जोड़े विमानों का परिचालन हो रहा है. हालांकि, मौजूदा समय में घने कुहासे के कारण विमानों का परिचालन काफी प्रभावित हो रहा है. विजिबिलिटी कम होने के कारण रोजाना विमान लेट हो रहे हैं. खास कर सुबह और देर शाम को आनेवाले विमान काफी प्रभावित हुई हैं. Share:
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पटनाः बिहार के पटना एयरपोर्ट पर एक बड़ा हादसा बच गया. यहां पर गोएयर के विमान से एक पक्षा टकरा गया. फिलहाल सभी यात्री सुरक्षित हैं. जानकारी के अनुसार, मंगलवार को गोएयर की प्लाइट बैंगलुरु से पटना आ रही थी. इस दौरान विमान के पंखों से एक पक्षी टकरा गया. ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट विमान आने का समय था. लेकिन लैंडिंग से पहले ही बर्ड हिट हुआ. हालांकि, पायलट की सूझबूझ के कारण बड़ा हादसा टल गया और विमान को सुरक्षित लैंडिंग हुई. बताया जा रहा है कि विमान के पंखों में थोड़ी खराबी आई है, जिसे ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल, विमान रनवे पर खड़ा है. तकनीकी अधिकारियों ने विमाना का मुआयना किया है. विमान पूरी तरह से यात्रियों से भरा था और एक सौ सत्तर से अधिक यात्री विमान में सवार थे. ठीक होने पर वापस भेजा जाएगा. वहीं, यात्रियों को दूसरे विमान से भेजने का प्रबंध किया गया है. बताते चलें कि पटना एयरपोर्ट पर फिलहाल चालीस जोड़े विमानों का परिचालन हो रहा है. हालांकि, मौजूदा समय में घने कुहासे के कारण विमानों का परिचालन काफी प्रभावित हो रहा है. विजिबिलिटी कम होने के कारण रोजाना विमान लेट हो रहे हैं. खास कर सुबह और देर शाम को आनेवाले विमान काफी प्रभावित हुई हैं. Share:
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नरीमन पॉईंट - मंत्रालय के समाज कल्याण विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से 10 लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके इस युवक की मुलाकात शिक्षण के दौरान हनुमंत धायगुडे से हुई थी। जिसने अजित बेडगे के साथ मिलकर पीड़ित युवक को समाज कल्याण विभाग में निरीक्षक पद पर नौकरी दिलाने का लालच दिया और बदले में 10 लाख रुपए मांगे। दोनों ने 7 अगस्त को युवक से 5 लाख 20 हजार रुपए लेकर मंत्रालय परिसर में बुलाया और समाज कल्याण विभाग के सचिव के फर्जी मुहर वाला लेटर दिया। बाद में पूरे पैसे देने के बाद भी जब युवक को नौकरी नहीं मिली तो उसने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत की। पुलिस मामला दर्ज करके जांच कर रही है।
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नरीमन पॉईंट - मंत्रालय के समाज कल्याण विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से दस लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके इस युवक की मुलाकात शिक्षण के दौरान हनुमंत धायगुडे से हुई थी। जिसने अजित बेडगे के साथ मिलकर पीड़ित युवक को समाज कल्याण विभाग में निरीक्षक पद पर नौकरी दिलाने का लालच दिया और बदले में दस लाख रुपए मांगे। दोनों ने सात अगस्त को युवक से पाँच लाख बीस हजार रुपए लेकर मंत्रालय परिसर में बुलाया और समाज कल्याण विभाग के सचिव के फर्जी मुहर वाला लेटर दिया। बाद में पूरे पैसे देने के बाद भी जब युवक को नौकरी नहीं मिली तो उसने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत की। पुलिस मामला दर्ज करके जांच कर रही है।
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली/इस्लामाबाद. अफगानिस्तान (Afghanistan) की सेना में प्रवेश के साथ-साथ खुफिया जानकारी प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान (Pakistan) अब वहां की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करना चाहता है. गुरुवार को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के लिए अपनी आर्थिक योजनाओं की घोषणा की. पाकिस्तान ने तालिबान (Taliban) के साथ पाकिस्तानी रुपये (Pak Currency) में द्विपक्षीय व्यापार करने का फैसला किया है.
पाकिस्तान के केंद्रीय वित्त मंत्री शौकत तारिन ने गुरुवार को बताया कि उनकी सरकार ने अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तानी मुद्रा में व्यापार करने का फैसला किया है. तारिन ने कहा कि अफगानिस्तान के पास डॉलर्स की कमी है. इसलिए पाकिस्तान अपनी मुद्रा में ही व्यापार करेगा.
शौकत ने कहा, 'अफगानिस्तान की स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है. पाकिस्तान अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करने के लिए वहां एक टीम भी भेज सकता है. ' बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत कई संस्थाओं ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली फंडिंग पर रोक लगा दी है और उसकी संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया है. ऐसे में सरकार बनाने के बाद भी तालिबान की हालत कंगाल जैसी है. पाकिस्तान से पहले चीन ने तालिबान सरकार के लिए 310 लाख डॉलर की मदद का ऐलान किया है.
इससे पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में था. अफगान मुद्रा शक्तिशाली थी. लेकिन पाकिस्तान के इस कदम से पाकिस्तानी करेंसी का अफगान व्यापारियों और व्यापारिक समुदाय पर कब्जा हो जाएगा.
तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान अभी अफरा-तफरी और अस्थिरता के माहौल से जूझ रहा है. नई सरकार को किसी भी कीमत पर आर्थिक मंदी से बच है. शायद इसलिए तालिबान को भी ये फैसला मंजूर हो. अफगानिस्तान के बजट का 80 फीसदी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आता है, जो बंद हो चुकी है. जिसकी वजह से हाल के महीनों में एक लंबे समय से चल रहा आर्थिक संकट और बढ़ गया है. तालिबान शायद ही ये अलगाव बर्दाश्त कर सके.
ये भी पढ़ेः Ind vs Eng: क्या आईपीएल है मैनचेस्टर टेस्ट रद्द होने के लिए जिम्मेदार?
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली/इस्लामाबाद. अफगानिस्तान की सेना में प्रवेश के साथ-साथ खुफिया जानकारी प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान अब वहां की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करना चाहता है. गुरुवार को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के लिए अपनी आर्थिक योजनाओं की घोषणा की. पाकिस्तान ने तालिबान के साथ पाकिस्तानी रुपये में द्विपक्षीय व्यापार करने का फैसला किया है. पाकिस्तान के केंद्रीय वित्त मंत्री शौकत तारिन ने गुरुवार को बताया कि उनकी सरकार ने अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तानी मुद्रा में व्यापार करने का फैसला किया है. तारिन ने कहा कि अफगानिस्तान के पास डॉलर्स की कमी है. इसलिए पाकिस्तान अपनी मुद्रा में ही व्यापार करेगा. शौकत ने कहा, 'अफगानिस्तान की स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है. पाकिस्तान अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करने के लिए वहां एक टीम भी भेज सकता है. ' बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत कई संस्थाओं ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली फंडिंग पर रोक लगा दी है और उसकी संपत्तियों को भी फ्रीज कर दिया है. ऐसे में सरकार बनाने के बाद भी तालिबान की हालत कंगाल जैसी है. पाकिस्तान से पहले चीन ने तालिबान सरकार के लिए तीन सौ दस लाख डॉलर की मदद का ऐलान किया है. इससे पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में था. अफगान मुद्रा शक्तिशाली थी. लेकिन पाकिस्तान के इस कदम से पाकिस्तानी करेंसी का अफगान व्यापारियों और व्यापारिक समुदाय पर कब्जा हो जाएगा. तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान अभी अफरा-तफरी और अस्थिरता के माहौल से जूझ रहा है. नई सरकार को किसी भी कीमत पर आर्थिक मंदी से बच है. शायद इसलिए तालिबान को भी ये फैसला मंजूर हो. अफगानिस्तान के बजट का अस्सी फीसदी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आता है, जो बंद हो चुकी है. जिसकी वजह से हाल के महीनों में एक लंबे समय से चल रहा आर्थिक संकट और बढ़ गया है. तालिबान शायद ही ये अलगाव बर्दाश्त कर सके. ये भी पढ़ेः Ind vs Eng: क्या आईपीएल है मैनचेस्टर टेस्ट रद्द होने के लिए जिम्मेदार?
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यद्यपि संयुक्त रूसी-बेलारूसी अभ्यास "पश्चिम-2021" सितंबर में समाप्त हो गया और रूस ने पहले ही बेलारूस के क्षेत्र से अपनी पूरी सैन्य टुकड़ी वापस ले ली है, पश्चिम जोर देकर कहता है कि रूसी सैनिकों का कुछ हिस्सा गणतंत्र में बना रहा। ब्रेकिंग डिफेंस के अमेरिकी संस्करण के अनुसार, नाटो बेलारूस में रूसी सेना की संभावित तैनाती को लेकर बहुत चिंतित है।
अमेरिकी प्रकाशन का दावा है कि नाटो को डर है कि रूस ने अपने सैन्य दल की पूरी वापसी के बारे में रूसी रक्षा मंत्रालय के बयानों के बावजूद बेलारूस में कुछ बलों को छोड़ दिया है। प्रकाशन के अनुसार, रूस S-400 वायु रक्षा प्रणाली, Su-30SM सेनानियों, साथ ही बेलारूस में भारी बख्तरबंद वाहनों को छोड़ सकता था।
ब्रेकिंग डिफेंस के अनुसार, ब्रुसेल्स को बस डर है कि किसी समय रूस बेलारूस में प्रवेश करेगा और वापस नहीं आएगा। और उसी पोलैंड या लिथुआनिया पर हमले के मूल परिदृश्य के लिए, अमेरिकी सेना "विशेषज्ञों" के आश्वासन के अनुसार, रूस को एक ब्रिजहेड की जरूरत है, जो बेलारूस के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।
समाचार पत्र ने आश्वासन दिया है कि बेलारूस के क्षेत्र में रूसी सेना की तैनाती से क्षेत्र में "गंभीर परिणाम" होंगे। सबसे पहले, यह यूक्रेन को प्रभावित करेगा, जो तीन तरफ से रूसी सेना से घिरा होगा। इसके अलावा, पोलैंड, "फ्रंट-लाइन" नाटो राज्य, साथ ही लिथुआनिया के लिए एक सीधा खतरा होगा।
डिफेंस 24 के अनुसार, रूस ने पहले ही पश्चिम-2021 अभ्यास के हिस्से के रूप में नाटो के "दाहिने हिस्से" पर हमला पूरा कर लिया है।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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यद्यपि संयुक्त रूसी-बेलारूसी अभ्यास "पश्चिम-दो हज़ार इक्कीस" सितंबर में समाप्त हो गया और रूस ने पहले ही बेलारूस के क्षेत्र से अपनी पूरी सैन्य टुकड़ी वापस ले ली है, पश्चिम जोर देकर कहता है कि रूसी सैनिकों का कुछ हिस्सा गणतंत्र में बना रहा। ब्रेकिंग डिफेंस के अमेरिकी संस्करण के अनुसार, नाटो बेलारूस में रूसी सेना की संभावित तैनाती को लेकर बहुत चिंतित है। अमेरिकी प्रकाशन का दावा है कि नाटो को डर है कि रूस ने अपने सैन्य दल की पूरी वापसी के बारे में रूसी रक्षा मंत्रालय के बयानों के बावजूद बेलारूस में कुछ बलों को छोड़ दिया है। प्रकाशन के अनुसार, रूस S-चार सौ वायु रक्षा प्रणाली, Su-तीसSM सेनानियों, साथ ही बेलारूस में भारी बख्तरबंद वाहनों को छोड़ सकता था। ब्रेकिंग डिफेंस के अनुसार, ब्रुसेल्स को बस डर है कि किसी समय रूस बेलारूस में प्रवेश करेगा और वापस नहीं आएगा। और उसी पोलैंड या लिथुआनिया पर हमले के मूल परिदृश्य के लिए, अमेरिकी सेना "विशेषज्ञों" के आश्वासन के अनुसार, रूस को एक ब्रिजहेड की जरूरत है, जो बेलारूस के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। समाचार पत्र ने आश्वासन दिया है कि बेलारूस के क्षेत्र में रूसी सेना की तैनाती से क्षेत्र में "गंभीर परिणाम" होंगे। सबसे पहले, यह यूक्रेन को प्रभावित करेगा, जो तीन तरफ से रूसी सेना से घिरा होगा। इसके अलावा, पोलैंड, "फ्रंट-लाइन" नाटो राज्य, साथ ही लिथुआनिया के लिए एक सीधा खतरा होगा। डिफेंस चौबीस के अनुसार, रूस ने पहले ही पश्चिम-दो हज़ार इक्कीस अभ्यास के हिस्से के रूप में नाटो के "दाहिने हिस्से" पर हमला पूरा कर लिया है। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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उत्तराखंड डेस्कः नदी किनारे मिले ई रिक्शा चालक की मौत के पीछे खतरनाक साजिश निकलकर सामने आई है। अवैध संबंधों के कारण चालक की पत्नी शीबा व उसके प्रेमी साबिर ने दो लाख रुपये की सुपारी देकर कत्ल कराया था। मामला राजधानी देहरादून का है। पुलिस ने कॉल डिटेल की मदद से अगले ही मर्डर की गुत्थी सुलझाते हुए चालक की पत्नी, प्रेमी व सुपारी किलर को गिरफ्तार कर लिया है। देहरादून के पुलिस कप्तान दलीप सिंह कुंवर ने बताया कि 30 नवम्बर को गुच्चू पानी पिकनिक स्पॉट की पार्किंग के निकट एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। उसकी पहचान मोहसिन निवासी तेलपुर मेहूवाला के रूप में हुई थी।
गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की। कॉल डिटेल निकालने पर पता चला कि 28 नवंबर को मोहसिन के मोबाइल पर एक संदिग्ध नंबर से पांच बार कॉल आई। यह मोबाइल नंबर अरशद निवासी नौ राजपुर गुज्जर बागपत जिला बागपत यूपी का निकला। पुलिस ने अरशद के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर उसे बल्लूपुर चौक से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पहले तो उसने गुमराह करने का प्रयास किया, बाद में हत्याकांड का सच कुबूल करते हुए पूरी कहानी बताई।
आठ साल पहले हुई थी शादी.... .
पुलिस के मुताबिक, आठ साल पहले मोहसिन की शादी शीबा उर्फ सीमा से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। मोहसिन शराब पीने का आदी था और इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था। तीन साल पहले शीबा के उसके पड़ोस में रहने वाले साबिर अली के साथ अवैध संबंध बन गए। मोहसिन को इसकी भनक लग गई थी। इसलिए दोनों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
साबिर के कहने पर रईस ने बुना जाल.... .
पुलिस की पूछताछ अरशद ने बताया कि ग्राम कंडेरा रामाला जिला बागपत निवासी रईस खान के कहने पर उसने अपने दो अन्य साथियों शाहरुख व रवि के साथ मिलकर मोहसिन की हत्या की थी। इसके लिए रईस खान ने दो लाख की सुपारी दी थी। पुलिस ने साबिर अली निवासी तेलपुर चौक मेहूवाला, मोहसिन की पत्नी शीबा उर्फ सीमा निवासी तेलपुर चौक, अरशद निवासी राजपुर गुज्जर जिला बागपत उत्तर प्रदेश, शाहरुख व रवि निवासीगण रमाला जिला बागपत उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि रईस खान निवासी ग्राम कंडेरा रामाला जिला बागपत यूपी अभी फरार चल रहा है। एसपी सिटी सरिता डोबाल ने बताया कि उसकी तलाश में पुलिस टीम दबिशें दे रही हैं, जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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उत्तराखंड डेस्कः नदी किनारे मिले ई रिक्शा चालक की मौत के पीछे खतरनाक साजिश निकलकर सामने आई है। अवैध संबंधों के कारण चालक की पत्नी शीबा व उसके प्रेमी साबिर ने दो लाख रुपये की सुपारी देकर कत्ल कराया था। मामला राजधानी देहरादून का है। पुलिस ने कॉल डिटेल की मदद से अगले ही मर्डर की गुत्थी सुलझाते हुए चालक की पत्नी, प्रेमी व सुपारी किलर को गिरफ्तार कर लिया है। देहरादून के पुलिस कप्तान दलीप सिंह कुंवर ने बताया कि तीस नवम्बर को गुच्चू पानी पिकनिक स्पॉट की पार्किंग के निकट एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। उसकी पहचान मोहसिन निवासी तेलपुर मेहूवाला के रूप में हुई थी। गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की। कॉल डिटेल निकालने पर पता चला कि अट्ठाईस नवंबर को मोहसिन के मोबाइल पर एक संदिग्ध नंबर से पांच बार कॉल आई। यह मोबाइल नंबर अरशद निवासी नौ राजपुर गुज्जर बागपत जिला बागपत यूपी का निकला। पुलिस ने अरशद के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर उसे बल्लूपुर चौक से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पहले तो उसने गुमराह करने का प्रयास किया, बाद में हत्याकांड का सच कुबूल करते हुए पूरी कहानी बताई। आठ साल पहले हुई थी शादी.... . पुलिस के मुताबिक, आठ साल पहले मोहसिन की शादी शीबा उर्फ सीमा से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। मोहसिन शराब पीने का आदी था और इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था। तीन साल पहले शीबा के उसके पड़ोस में रहने वाले साबिर अली के साथ अवैध संबंध बन गए। मोहसिन को इसकी भनक लग गई थी। इसलिए दोनों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई। साबिर के कहने पर रईस ने बुना जाल.... . पुलिस की पूछताछ अरशद ने बताया कि ग्राम कंडेरा रामाला जिला बागपत निवासी रईस खान के कहने पर उसने अपने दो अन्य साथियों शाहरुख व रवि के साथ मिलकर मोहसिन की हत्या की थी। इसके लिए रईस खान ने दो लाख की सुपारी दी थी। पुलिस ने साबिर अली निवासी तेलपुर चौक मेहूवाला, मोहसिन की पत्नी शीबा उर्फ सीमा निवासी तेलपुर चौक, अरशद निवासी राजपुर गुज्जर जिला बागपत उत्तर प्रदेश, शाहरुख व रवि निवासीगण रमाला जिला बागपत उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि रईस खान निवासी ग्राम कंडेरा रामाला जिला बागपत यूपी अभी फरार चल रहा है। एसपी सिटी सरिता डोबाल ने बताया कि उसकी तलाश में पुलिस टीम दबिशें दे रही हैं, जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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आरोप का खण्डन किया गया कि "नेहरू अमरीकी साम्राज्यवाद के क्रियावादियों के नेता हैं और भारत सरकार के विस्तारवादी हैं -सहायता प्राप्त करने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद के उपकरण के रहे हैं।" इस प्रस्ताव के पास होने के शीघ्र वाद वासु, सुन्दरैया, और सुरजीत ने सचिवालय से त्यागपत्र दे दिया क्योंकि जैसा कि मद्रास के समाचारपत्र दि हिन्दू ने लिखा, "वे सीधे चीन को दोषी ठहराने के विरोधी थे ।" उनका यह सिद्धान्त था कि कोई भी समाजवादी देश कभी किसी पर आक्रमण नहीं करता।
जिन दिनों चीन-भारतसीमासंघर्ष हुआ, उन्हीं दिनों सोवियत संघ और अमरीका में "क्यूबा का प्रक्षेपणास्त्र - संकट" उत्पन्न हुआ । अतः सोवियत संघ ने पहले तो तटस्थता का रुख अपनाया और दोनों पक्षों से परस्पर वार्ता द्वारा झगड़ा निपटाने का आग्रह किया, पर क्यूबा संकट समाप्त होते ही उसने अपनी चाल बदल दी। 12 दिसम्बर, 1962 को न श्चेव ने चीन द्वारा युद्धविराम करने और अपनी सेनाओं को वापस बुलाने के चीन के आदेश की सराहना की, पर साथ ही यह भी कहा कि, "अच्छा तो यह होता कि चीनी अपनी स्थिति से आगे ही न बढ़ते ।" ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने यह रवैया इसलिए अपनाया कि स्वयं उनके देश का चीन से सीमा विवाद हो गया था और वे चाहते थे कि चीन ऐसे झगड़े करना छोड़ दे। चीनी नेहरू की सरकार की अधिकाधिक कटु आलोचना करने लगे पर रूसी उसके अनन्य समर्थक बन गए । सी० पी० आई० ने, जिस पर 'दक्षिणपंथी' गुट का अधिकार था, सोवियत नीति का भरपूर समर्थन किया ।
(घ) विश्व साम्यवादी आन्दोलन में विग्रह ( Split within the World
Communist Movement)
ठीक उसी समय जब चीन-भारतसीमाविवाद बढ़ रहा था दोनों विशाल समाजवादी देशों, सोवियत संघ और साम्यवादी चीन में भी गम्भीर मतभेद उत्पन्न हो रहे थे । यह मतभेद निम्नलिखित मुद्दों पर थे :
(1) सोवियत संघ का साम्यवादी दल ख्र श्चेव द्वारा अक्तूबर 1956 में बीसवें अधिवेशन में प्रस्तुत इस दृष्टिकोण का समर्थक था कि लेनिन का पूंजीवाद के अ "युद्ध की अनिवार्यता" का सिद्धान्त अब लागू नहीं होता । दूसरी ओर चीन का साम्यवादी दल यह विश्वास करता था कि यह समझना कि पूंजीवाद समाप्त किए विना युद्ध से बचा जा सकता है "कोरा भोलापन है ।"
( 2 ) सोवियत साम्यवादी दल इस बात पर जोर देता था कि परमाणु द्ध सभी के लिए समान रूप से विनाशकारी सिद्ध होगा और इस तर्क का, विभिन्न सामाजिक पद्धतियों वाले देशों में भी "शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व " के पक्ष में प्रयोग करता था। किन्तु चीनी साम्यवादी दल का विश्वास या कि चीन परमाणु युद्ध के बाद भी जीवित रह सकता है और एक तीसरे विश्व युद्ध से साम्यवाद को और अधिक विजय प्राप्त
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आरोप का खण्डन किया गया कि "नेहरू अमरीकी साम्राज्यवाद के क्रियावादियों के नेता हैं और भारत सरकार के विस्तारवादी हैं -सहायता प्राप्त करने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद के उपकरण के रहे हैं।" इस प्रस्ताव के पास होने के शीघ्र वाद वासु, सुन्दरैया, और सुरजीत ने सचिवालय से त्यागपत्र दे दिया क्योंकि जैसा कि मद्रास के समाचारपत्र दि हिन्दू ने लिखा, "वे सीधे चीन को दोषी ठहराने के विरोधी थे ।" उनका यह सिद्धान्त था कि कोई भी समाजवादी देश कभी किसी पर आक्रमण नहीं करता। जिन दिनों चीन-भारतसीमासंघर्ष हुआ, उन्हीं दिनों सोवियत संघ और अमरीका में "क्यूबा का प्रक्षेपणास्त्र - संकट" उत्पन्न हुआ । अतः सोवियत संघ ने पहले तो तटस्थता का रुख अपनाया और दोनों पक्षों से परस्पर वार्ता द्वारा झगड़ा निपटाने का आग्रह किया, पर क्यूबा संकट समाप्त होते ही उसने अपनी चाल बदल दी। बारह दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ बासठ को न श्चेव ने चीन द्वारा युद्धविराम करने और अपनी सेनाओं को वापस बुलाने के चीन के आदेश की सराहना की, पर साथ ही यह भी कहा कि, "अच्छा तो यह होता कि चीनी अपनी स्थिति से आगे ही न बढ़ते ।" ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने यह रवैया इसलिए अपनाया कि स्वयं उनके देश का चीन से सीमा विवाद हो गया था और वे चाहते थे कि चीन ऐसे झगड़े करना छोड़ दे। चीनी नेहरू की सरकार की अधिकाधिक कटु आलोचना करने लगे पर रूसी उसके अनन्य समर्थक बन गए । सीशून्य पीशून्य आईशून्य ने, जिस पर 'दक्षिणपंथी' गुट का अधिकार था, सोवियत नीति का भरपूर समर्थन किया । विश्व साम्यवादी आन्दोलन में विग्रह ठीक उसी समय जब चीन-भारतसीमाविवाद बढ़ रहा था दोनों विशाल समाजवादी देशों, सोवियत संघ और साम्यवादी चीन में भी गम्भीर मतभेद उत्पन्न हो रहे थे । यह मतभेद निम्नलिखित मुद्दों पर थे : सोवियत संघ का साम्यवादी दल ख्र श्चेव द्वारा अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन में बीसवें अधिवेशन में प्रस्तुत इस दृष्टिकोण का समर्थक था कि लेनिन का पूंजीवाद के अ "युद्ध की अनिवार्यता" का सिद्धान्त अब लागू नहीं होता । दूसरी ओर चीन का साम्यवादी दल यह विश्वास करता था कि यह समझना कि पूंजीवाद समाप्त किए विना युद्ध से बचा जा सकता है "कोरा भोलापन है ।" सोवियत साम्यवादी दल इस बात पर जोर देता था कि परमाणु द्ध सभी के लिए समान रूप से विनाशकारी सिद्ध होगा और इस तर्क का, विभिन्न सामाजिक पद्धतियों वाले देशों में भी "शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व " के पक्ष में प्रयोग करता था। किन्तु चीनी साम्यवादी दल का विश्वास या कि चीन परमाणु युद्ध के बाद भी जीवित रह सकता है और एक तीसरे विश्व युद्ध से साम्यवाद को और अधिक विजय प्राप्त
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संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा कि गैंगस्टर संस्कृति को खत्म करना और नशीली दवाओं के खतरे को नियंत्रित करना राज्य पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने गुरुवार सुबह अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। उन्होंने गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया और प्रसाद लेकर सूचना केंद्र पहुंचे। जहां एसजीपीसी अधिकारियों ने उनको सम्मानित किया। यादव ने कहा कि उनके लिए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने का एकमात्र कारण पंजाब में शांति और सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना करना था।
यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक है। पंजाब पुलिस पंजाबियों के लिए कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखती है और कानून-व्यवस्था को मजबूत करती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार पंजाब राज्य को नशा तस्करों, अपराधियों और गैंगस्टरों से मुक्त करना है। यह बहुत ही कम समय में संभव होगा।
डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस लोगों के प्रति मैत्रीपूर्ण रवैया रखेगी और हमेशा की तरह पंजाब के लोगों की सेवा में रहेगी । पुलिस पेशेवर तरीके से काम करेगी। उल्लेखनीय है कि गौरव यादव ने डीजीपी बनने के बाद पिछले कुछ दिनों में अचानक मोहाली और पटियाला का दौरा किया था और पूरे पंजाब का दौरा करने की बात भी कही थी। यादव खुद पंजाब के अलग अलग शहरों का दौरा कर रहे हैं। डीजीपी बनने के बाद यादव पहली बार श्री हरमंदिर साहिब माथा टेकने आए हैं।
पर्यावरणविद व राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गुरुवार को श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वह पहली बार वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करने पहुंचे थे। संत सीचेवाल ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मुलाकात नहीं की बल्कि गुरु का आशीर्वाद लिया।
संत सीचेवाल ने कहा कि प्रदेश में नदियां काफी प्रदूषित हैं, इसलिए पंजाब में बड़े पैमाने पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं ताकि पंजाब के पानी को दूषित होने से बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिसे रोकने के लिए उच्च स्तर पर कदम उठाने चाहिए। इस मामले में मुख्यमंत्री से चर्चा भी हो चुकी है। संत सीचेवाल ने कहा कि जहां पेड़ लगाने की जरूरत है वहां हम वह भी कर रहे हैं। इस समय पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। इसलिए दुनिया भर के लोगों को पेड़ लगाने की जरूरत है।
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संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा कि गैंगस्टर संस्कृति को खत्म करना और नशीली दवाओं के खतरे को नियंत्रित करना राज्य पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने गुरुवार सुबह अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। उन्होंने गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया और प्रसाद लेकर सूचना केंद्र पहुंचे। जहां एसजीपीसी अधिकारियों ने उनको सम्मानित किया। यादव ने कहा कि उनके लिए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने का एकमात्र कारण पंजाब में शांति और सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना करना था। यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक है। पंजाब पुलिस पंजाबियों के लिए कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखती है और कानून-व्यवस्था को मजबूत करती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार पंजाब राज्य को नशा तस्करों, अपराधियों और गैंगस्टरों से मुक्त करना है। यह बहुत ही कम समय में संभव होगा। डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस लोगों के प्रति मैत्रीपूर्ण रवैया रखेगी और हमेशा की तरह पंजाब के लोगों की सेवा में रहेगी । पुलिस पेशेवर तरीके से काम करेगी। उल्लेखनीय है कि गौरव यादव ने डीजीपी बनने के बाद पिछले कुछ दिनों में अचानक मोहाली और पटियाला का दौरा किया था और पूरे पंजाब का दौरा करने की बात भी कही थी। यादव खुद पंजाब के अलग अलग शहरों का दौरा कर रहे हैं। डीजीपी बनने के बाद यादव पहली बार श्री हरमंदिर साहिब माथा टेकने आए हैं। पर्यावरणविद व राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गुरुवार को श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वह पहली बार वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करने पहुंचे थे। संत सीचेवाल ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मुलाकात नहीं की बल्कि गुरु का आशीर्वाद लिया। संत सीचेवाल ने कहा कि प्रदेश में नदियां काफी प्रदूषित हैं, इसलिए पंजाब में बड़े पैमाने पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं ताकि पंजाब के पानी को दूषित होने से बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिसे रोकने के लिए उच्च स्तर पर कदम उठाने चाहिए। इस मामले में मुख्यमंत्री से चर्चा भी हो चुकी है। संत सीचेवाल ने कहा कि जहां पेड़ लगाने की जरूरत है वहां हम वह भी कर रहे हैं। इस समय पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। इसलिए दुनिया भर के लोगों को पेड़ लगाने की जरूरत है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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क्रिसमस का फेस्टिवल आ चुका है। चारों तरफ आपको क्रिसमस ट्री, फेयरी लाइट्स, गिफ्ट्स, मस्ती करते बच्चे, पार्टी करते लोग नजर आएंगे यानी कुल मिलाकर देखें तो फन, मस्ती और सेलिब्रेशन का पूरा मूड बन चुका है। क्रिसमस एक ऐसा मौका होता है जब हम बच्चों को सैंटा क्लॉज की स्टोरीज सुनाते हैं और उन्हें गिफ्ट्स के बारे में बताते हैं। ऐसे में खेल-खेल में ही आप बच्चों को कैसे लाइफ से जुड़ी अहम बातें सिखा सकते हैं, उसके बारे में यहां जानें।
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क्रिसमस का फेस्टिवल आ चुका है। चारों तरफ आपको क्रिसमस ट्री, फेयरी लाइट्स, गिफ्ट्स, मस्ती करते बच्चे, पार्टी करते लोग नजर आएंगे यानी कुल मिलाकर देखें तो फन, मस्ती और सेलिब्रेशन का पूरा मूड बन चुका है। क्रिसमस एक ऐसा मौका होता है जब हम बच्चों को सैंटा क्लॉज की स्टोरीज सुनाते हैं और उन्हें गिफ्ट्स के बारे में बताते हैं। ऐसे में खेल-खेल में ही आप बच्चों को कैसे लाइफ से जुड़ी अहम बातें सिखा सकते हैं, उसके बारे में यहां जानें।
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Japan Shrinking Population: जापान पर घटती जनसंख्या का गंभीर संकट मंडरा रहा है. देश में जन्म दर में कमी के कारण जापान सरकार लंबे समय से इस समस्या से निपटने के उपाय करती आ रही है. जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने हाल ही में जनसंख्या संकट के खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की.
जापान इन दिनों देश में अपनी घटती जनसंख्या से खासा परेशान चल रहा है. इस दिशा में, जापान ने देश में घटती जन्मदर को उलटने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए हैं. प्रस्तावों में बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए उच्च सब्सिडी और युवा श्रमिकों को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वेतन वृद्धि शामिल है. मतलब अब अधिक बच्चा पैदा करने वाले लोगों को अन्य के मुकाबले अधिक वेतन वृद्धि दी जाएगी. (AP)
जापान की वर्तमान जनसंख्या लगभग 12. 5 करोड़ है. जनसंख्या में अगले 15 वर्षों तक गिरावट जारी रहेगी और 2060 तक लगभग 9 करोड़ तक गिरने का अनुमान है. सिकुड़ती और उम्र बढ़ने वाली आबादी का देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी प्रभाव पड़ने की संभावना है. इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के मद्देनजर जापानी सरकार इस समस्या के बारे में अधिक चिंतित है. (File Photo)
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जापान के बाल नीति मंत्री मसानोबु ओगुरा ने कहा कि अगले कुछ साल संभवतः देश के लिए अपनी गिरती जन्म दर को उलटने का "आखिरी मौका" होगा. यदि वर्तमान दर पर जन्म की संख्या में गिरावट जारी रहती है, तो युवा आबादी 2030 के दशक में वर्तमान गति से दोगुनी गति से सिकुड़ जाएगी. (File Photo)
जनसख्या संकट को दूर करने के लिए, सरकार ने वित्तीय सहायता में वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण के लिए अधिक नकद सब्सिडी, उच्च शिक्षा के लिए अधिक उदार छात्र ऋण और चाइल्डकैअर सेवाओं तक आसान पहुंच शामिल है. जापान कंपनियों को अधिक सरकारी सहायता भी दे सकता है ताकि फर्म अधिक से अधिक पुरुष कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश लेने के लिए प्रोत्साहित करें. (AP)
पिछले साल, जापान में पैदा हुए लोगों की तुलना में लगभग दोगुने लोगों की मृत्यु हुई, 800,000 से कम जन्म और लगभग 1. 58 मिलियन मौतें हुईं. जनसंख्या 2008 में 128 (12. 8 करोड़) मिलियन के शिखर से गिरकर 124. 6 मिलियन (12. 4 करोड़) हो गई है, और गिरावट की गति बढ़ रही है. (Image: Canva)
जापान इन दिनों देश में अपनी घटती जनसंख्या से खासा परेशान चल रहा है. इस दिशा में, जापान ने देश में घटती जन्मदर को उलटने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए हैं. प्रस्तावों में बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए उच्च सब्सिडी और युवा श्रमिकों को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वेतन वृद्धि शामिल है. मतलब अब अधिक बच्चा पैदा करने वाले लोगों को अन्य के मुकाबले अधिक वेतन वृद्धि दी जाएगी. (AP)
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Japan Shrinking Population: जापान पर घटती जनसंख्या का गंभीर संकट मंडरा रहा है. देश में जन्म दर में कमी के कारण जापान सरकार लंबे समय से इस समस्या से निपटने के उपाय करती आ रही है. जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने हाल ही में जनसंख्या संकट के खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की. जापान इन दिनों देश में अपनी घटती जनसंख्या से खासा परेशान चल रहा है. इस दिशा में, जापान ने देश में घटती जन्मदर को उलटने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए हैं. प्रस्तावों में बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए उच्च सब्सिडी और युवा श्रमिकों को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वेतन वृद्धि शामिल है. मतलब अब अधिक बच्चा पैदा करने वाले लोगों को अन्य के मुकाबले अधिक वेतन वृद्धि दी जाएगी. जापान की वर्तमान जनसंख्या लगभग बारह. पाँच करोड़ है. जनसंख्या में अगले पंद्रह वर्षों तक गिरावट जारी रहेगी और दो हज़ार साठ तक लगभग नौ करोड़ तक गिरने का अनुमान है. सिकुड़ती और उम्र बढ़ने वाली आबादी का देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी प्रभाव पड़ने की संभावना है. इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के मद्देनजर जापानी सरकार इस समस्या के बारे में अधिक चिंतित है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जापान के बाल नीति मंत्री मसानोबु ओगुरा ने कहा कि अगले कुछ साल संभवतः देश के लिए अपनी गिरती जन्म दर को उलटने का "आखिरी मौका" होगा. यदि वर्तमान दर पर जन्म की संख्या में गिरावट जारी रहती है, तो युवा आबादी दो हज़ार तीस के दशक में वर्तमान गति से दोगुनी गति से सिकुड़ जाएगी. जनसख्या संकट को दूर करने के लिए, सरकार ने वित्तीय सहायता में वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण के लिए अधिक नकद सब्सिडी, उच्च शिक्षा के लिए अधिक उदार छात्र ऋण और चाइल्डकैअर सेवाओं तक आसान पहुंच शामिल है. जापान कंपनियों को अधिक सरकारी सहायता भी दे सकता है ताकि फर्म अधिक से अधिक पुरुष कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश लेने के लिए प्रोत्साहित करें. पिछले साल, जापान में पैदा हुए लोगों की तुलना में लगभग दोगुने लोगों की मृत्यु हुई, आठ सौ,शून्य से कम जन्म और लगभग एक. अट्ठावन मिलियन मौतें हुईं. जनसंख्या दो हज़ार आठ में एक सौ अट्ठाईस मिलियन के शिखर से गिरकर एक सौ चौबीस. छः मिलियन हो गई है, और गिरावट की गति बढ़ रही है. जापान इन दिनों देश में अपनी घटती जनसंख्या से खासा परेशान चल रहा है. इस दिशा में, जापान ने देश में घटती जन्मदर को उलटने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए हैं. प्रस्तावों में बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए उच्च सब्सिडी और युवा श्रमिकों को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वेतन वृद्धि शामिल है. मतलब अब अधिक बच्चा पैदा करने वाले लोगों को अन्य के मुकाबले अधिक वेतन वृद्धि दी जाएगी.
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पणजीः गोवा के विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के खराब स्वास्थ्य से उत्पन्न स्थिति को लेकर रविवार को यहां राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिले. राज्यपाल सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र को साढ़े ग्यारह बजे संबोधित करेंगी. राज्यपाल से मुलाकात के बाद सावंत ने कहा कि सत्र सोमवार से शुरू होगा. मुख्यमंत्री सत्र के पहले दिन मौजूद नहीं रह पाएंगे.
पर्रिकर पेट की बीमारी को लेकर 15 फरवरी से लीलावती अस्पताल में इलाज चल रहा है. सावंत से जब पूछा गया कि कौन बजट पेश करेगा क्योंकि पर्रिकर के पास वित्त विभाग भी हैं, इस पर उन्होंने कह कि उन्हें इस पर फैसला करने से पहले पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में नवीनतम स्थिति का इंतजार है.
उपमुख्यमंत्री माइकल लोबो ने कहा कि विधानसभा का सत्र संक्षिप्त कर दिया जाएगा जिस दोरान बजट पेश किया जाएगा और लेखानुदान पारित कराया जाएगा. बीजेपी विधायक दल सोमवार को सुबह एक विशेष बैठक कर यह तय करेगा कि पर्रिकर की अनुपस्थिति में सदन में उसका नेता कौन होगा. वहीं रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने के लिए लीलावती अस्पताल पहुंचे.
मुंबई में लीलावती अस्पताल में भर्ती कराए गए गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पर इलाज का अच्छा असर हो रहा है. अस्पताल ने रविवार को एक बयान में यह बताया. अग्नाशय में परेशानी के बाद पर्रिकर को 15 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल ने रविवार शाम एक बयान में कहा कि हमारे ध्यान में आया है कि उनके स्वास्थ्य के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक / प्रिंट मीडिया में भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें आ रही है. अस्पताल के उपाध्यक्ष अजयकुमार पांडे ने बयान में कहा कि हम फिर से कह रहे कि गोवा के मुख्यमंत्री का इलाज हो रहा है और इलाज का उनपर अच्छा असर हो रहा है.
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पणजीः गोवा के विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के खराब स्वास्थ्य से उत्पन्न स्थिति को लेकर रविवार को यहां राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिले. राज्यपाल सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र को साढ़े ग्यारह बजे संबोधित करेंगी. राज्यपाल से मुलाकात के बाद सावंत ने कहा कि सत्र सोमवार से शुरू होगा. मुख्यमंत्री सत्र के पहले दिन मौजूद नहीं रह पाएंगे. पर्रिकर पेट की बीमारी को लेकर पंद्रह फरवरी से लीलावती अस्पताल में इलाज चल रहा है. सावंत से जब पूछा गया कि कौन बजट पेश करेगा क्योंकि पर्रिकर के पास वित्त विभाग भी हैं, इस पर उन्होंने कह कि उन्हें इस पर फैसला करने से पहले पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में नवीनतम स्थिति का इंतजार है. उपमुख्यमंत्री माइकल लोबो ने कहा कि विधानसभा का सत्र संक्षिप्त कर दिया जाएगा जिस दोरान बजट पेश किया जाएगा और लेखानुदान पारित कराया जाएगा. बीजेपी विधायक दल सोमवार को सुबह एक विशेष बैठक कर यह तय करेगा कि पर्रिकर की अनुपस्थिति में सदन में उसका नेता कौन होगा. वहीं रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने के लिए लीलावती अस्पताल पहुंचे. मुंबई में लीलावती अस्पताल में भर्ती कराए गए गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पर इलाज का अच्छा असर हो रहा है. अस्पताल ने रविवार को एक बयान में यह बताया. अग्नाशय में परेशानी के बाद पर्रिकर को पंद्रह फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल ने रविवार शाम एक बयान में कहा कि हमारे ध्यान में आया है कि उनके स्वास्थ्य के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक / प्रिंट मीडिया में भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें आ रही है. अस्पताल के उपाध्यक्ष अजयकुमार पांडे ने बयान में कहा कि हम फिर से कह रहे कि गोवा के मुख्यमंत्री का इलाज हो रहा है और इलाज का उनपर अच्छा असर हो रहा है.
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नामकरण एक पृथक विषय है किन्तु यह तथ्य विचारणीय है कि समस्त साधकों व ज्ञानियों ने इन तीन चक्रों के निकट तीन ग्रन्थियों (सूक्ष्म नाड़ियों की एक गांठ सी) को पाया है और महसूस किया है। उनका भेदन कर कुण्डलिनी शक्ति को आगे बढ़ाने में विशेष बल व साधना का उपयोग करना पड़ा है। यही बात पाठकों के मार्गदर्शन के लिए उपयोगी है। नामकरण के भेद में पड़कर उलझन पैदा होगी। अतः इस विषय पर चर्चा नहीं करेंगे। इस भेद के बहुत से कारण निज अनुभूतियों के आधार पर सम्भव हैं। इसकी छानबीन अनावश्यक, अवरोधक, विशेष श्रम व समय को खंपाने वाली और परिणाम में मामूली-सा लाभ देने वाली ही सिद्ध होगी। प्रबुद्ध पाठक अवश्य ही इस तथ्य से सहमत होंगे । अतः हम इस चर्चा को यहीं पर समाप्त कर अगले और अत्यधिक महत्त्वपूर्ण चक्र की ओर आते हैं, जिसका नाम 'आज्ञा चक्र' है ।
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नामकरण एक पृथक विषय है किन्तु यह तथ्य विचारणीय है कि समस्त साधकों व ज्ञानियों ने इन तीन चक्रों के निकट तीन ग्रन्थियों को पाया है और महसूस किया है। उनका भेदन कर कुण्डलिनी शक्ति को आगे बढ़ाने में विशेष बल व साधना का उपयोग करना पड़ा है। यही बात पाठकों के मार्गदर्शन के लिए उपयोगी है। नामकरण के भेद में पड़कर उलझन पैदा होगी। अतः इस विषय पर चर्चा नहीं करेंगे। इस भेद के बहुत से कारण निज अनुभूतियों के आधार पर सम्भव हैं। इसकी छानबीन अनावश्यक, अवरोधक, विशेष श्रम व समय को खंपाने वाली और परिणाम में मामूली-सा लाभ देने वाली ही सिद्ध होगी। प्रबुद्ध पाठक अवश्य ही इस तथ्य से सहमत होंगे । अतः हम इस चर्चा को यहीं पर समाप्त कर अगले और अत्यधिक महत्त्वपूर्ण चक्र की ओर आते हैं, जिसका नाम 'आज्ञा चक्र' है ।
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बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना असंभव हैट्रक जो सामान को पृथ्वी के सबसे दूरदराज के कोनों तक ले जा सकते हैं। बेशक, हवा की डिलीवरी के साथ इस पद्धति की तुलना करना कठिन है, क्योंकि इस तरह से आप गाड़ी पास नहीं कर सकते हैं। ट्रक द्वारा परिवहन का लाभ काफी बचत है, क्योंकि इस पद्धति का उपयोग वायु परिवहन से बहुत कम होगा।
ट्रक "डीएएफ" यूरोप और सीआईएस के विशाल सामानों के वितरण के लिए सबसे सामान्य वाहनों में से एक है। वर्षों से, यह अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता दिखाया है।
यूरोपीय नेताओं में से एक बनने से पहलेट्रकों के उत्पादन के क्षेत्र में, कंपनी यात्री और हल्की ड्यूटी वाहनों के उत्पादन में लगी हुई थी। बेशक, वे बहुत लोकप्रिय नहीं थे। जब डिजाइनरों ने पहले ट्रकों का विकास और उत्पादन शुरू किया, तो कंपनी की असली कहानी शुरू हुई।
हर साल इस की लोकप्रियता और बिक्रीमॉडल बढ़ रहे हैं सीआईएस में, पहला ट्रक "डीएपी" 1994 में प्रदर्शित हुआ। उपभोक्ता अप्रचलित "कामज़" और "मैज" के लिए एक विश्वसनीय प्रतिस्थापन की तलाश कर रहे थे, पौधों ने उस समय का सर्वोत्तम अनुभव नहीं किया था। बाद सोवियत अंतरिक्ष के विस्तार पर कागो परिवहन का एक नया युग शुरू हो गया है।
सभी प्रकार के गंतव्यों के लिए मौजूद हैविभिन्न प्रकार के व्हीलबेस चल रही विशेषताओं को विस्मित करनाः स्थापित सदमे अवशोषक के अलावा, एक सवारी ऊंचाई समायोजन प्रणाली है, जो ट्रेलर या शरीर को भारी भरने में मदद करता है। ब्रेक सिस्टम की नवीनतम पीढ़ी, जो नए डीएएफ -105 पर स्थापित है, आपको सड़क की सतह के साथ कार को जल्दी से रोक देती है, चाहे वह सूखा या फिसलन हो।
केबिन के इंटीरियर अंतरिक्ष की अनुमति देता हैकेवल एक वाहन चलाने के लिए सुविधाजनक है, लेकिन आराम के आराम से भी। इसके लिए, चालक की सीट में सो रही जगहें हैं, जो एक या दो हो सकती हैं यह महान दूरी पर भी आराम और सहजता सुनिश्चित करता है।
ट्रकों "डीएएफ" कई नियुक्तियों और संशोधनों को प्राप्त किया मान लीजिए, डेवलपर्स डीएएफ पर क्या उद्देश्य और भिन्न रूप बदल गए हैंः
- माध्यम की। इन ट्रकों की क्षमता 5 से 10 टन है। इंटरसिटी परिवहन के लिए उनका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- टन भार। ये ट्रक ट्रैक्टर हैं, जो कि सेमीट्रायलर या ट्राल के साथ 40 टन तक लोड खींचने में सक्षम हैं।
यह अलग से उल्लेखनीय है कि डीएएफ ट्रक निम्न प्रकारों में निर्माता के कन्वेयर बेल्ट से निर्मित होता हैः
- ट्रक डंप;
- मिक्सर;
- गैसोलीन ट्रक;
सीआईएस के खुले स्थान में ट्रक ट्रैक्टर और मिक्सर द्वारा सबसे बड़ी लोकप्रियता प्राप्त हुई थी।
कई विशेषज्ञ सहमत हैं कि ट्रक"डीएपी" ने खुद को अच्छी तरह से साबित कर दिया है। तकनीकी गुणों और विशेषताओं को सोचा गया है कि मशीन, कक्षा के आधार पर, उच्च गति पर बड़ी बोझ ले सकती है।
मरम्मत कार्य जो कि किया जाता है,लंबे समय तक ऑपरेशन के बाद भी ट्रक को बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। नियमित रखरखाव केवल यही बात है कि यह कार की जरूरत है।
सुरक्षा प्रणाली, विशेषज्ञों के मुताबिक,यूरोप में संचालित होने वाले सभी मानकों को पूरा करता है एक सड़क दुर्घटना में दुर्घटना की स्थिति में परीक्षणों पर, डीएपी ट्रक ने उच्च दक्षता दिखाया - जो कि चालक के कारण हो सकता है नुकसान नगण्य है। यह एक कारण है कि कारों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से उच्चतम अंक प्राप्त हुए, और निर्यात और फ्रेट परिवहन और रसद पुरस्कार से "सर्वश्रेष्ठ ट्रक का वर्ष" पुरस्कार प्राप्त हुआ।
यह देखते हुए कि कार तेजी से बढ़ रही हैलोकप्रियता, यह अक्सर चर्चा की जाती है। ट्रक "डीएएफ" द्वारा वाहन चालकों का क्या अनुमान प्राप्त हुआ था? मालिकों से प्रतिक्रिया ज्यादातर उत्साहजनक है। उनका दावा है कि यह एक विश्वसनीय ट्रक है, जो इसमें निवेश किए गए धन के लायक है।
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बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना असंभव हैट्रक जो सामान को पृथ्वी के सबसे दूरदराज के कोनों तक ले जा सकते हैं। बेशक, हवा की डिलीवरी के साथ इस पद्धति की तुलना करना कठिन है, क्योंकि इस तरह से आप गाड़ी पास नहीं कर सकते हैं। ट्रक द्वारा परिवहन का लाभ काफी बचत है, क्योंकि इस पद्धति का उपयोग वायु परिवहन से बहुत कम होगा। ट्रक "डीएएफ" यूरोप और सीआईएस के विशाल सामानों के वितरण के लिए सबसे सामान्य वाहनों में से एक है। वर्षों से, यह अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता दिखाया है। यूरोपीय नेताओं में से एक बनने से पहलेट्रकों के उत्पादन के क्षेत्र में, कंपनी यात्री और हल्की ड्यूटी वाहनों के उत्पादन में लगी हुई थी। बेशक, वे बहुत लोकप्रिय नहीं थे। जब डिजाइनरों ने पहले ट्रकों का विकास और उत्पादन शुरू किया, तो कंपनी की असली कहानी शुरू हुई। हर साल इस की लोकप्रियता और बिक्रीमॉडल बढ़ रहे हैं सीआईएस में, पहला ट्रक "डीएपी" एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में प्रदर्शित हुआ। उपभोक्ता अप्रचलित "कामज़" और "मैज" के लिए एक विश्वसनीय प्रतिस्थापन की तलाश कर रहे थे, पौधों ने उस समय का सर्वोत्तम अनुभव नहीं किया था। बाद सोवियत अंतरिक्ष के विस्तार पर कागो परिवहन का एक नया युग शुरू हो गया है। सभी प्रकार के गंतव्यों के लिए मौजूद हैविभिन्न प्रकार के व्हीलबेस चल रही विशेषताओं को विस्मित करनाः स्थापित सदमे अवशोषक के अलावा, एक सवारी ऊंचाई समायोजन प्रणाली है, जो ट्रेलर या शरीर को भारी भरने में मदद करता है। ब्रेक सिस्टम की नवीनतम पीढ़ी, जो नए डीएएफ -एक सौ पाँच पर स्थापित है, आपको सड़क की सतह के साथ कार को जल्दी से रोक देती है, चाहे वह सूखा या फिसलन हो। केबिन के इंटीरियर अंतरिक्ष की अनुमति देता हैकेवल एक वाहन चलाने के लिए सुविधाजनक है, लेकिन आराम के आराम से भी। इसके लिए, चालक की सीट में सो रही जगहें हैं, जो एक या दो हो सकती हैं यह महान दूरी पर भी आराम और सहजता सुनिश्चित करता है। ट्रकों "डीएएफ" कई नियुक्तियों और संशोधनों को प्राप्त किया मान लीजिए, डेवलपर्स डीएएफ पर क्या उद्देश्य और भिन्न रूप बदल गए हैंः - माध्यम की। इन ट्रकों की क्षमता पाँच से दस टन है। इंटरसिटी परिवहन के लिए उनका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। - टन भार। ये ट्रक ट्रैक्टर हैं, जो कि सेमीट्रायलर या ट्राल के साथ चालीस टन तक लोड खींचने में सक्षम हैं। यह अलग से उल्लेखनीय है कि डीएएफ ट्रक निम्न प्रकारों में निर्माता के कन्वेयर बेल्ट से निर्मित होता हैः - ट्रक डंप; - मिक्सर; - गैसोलीन ट्रक; सीआईएस के खुले स्थान में ट्रक ट्रैक्टर और मिक्सर द्वारा सबसे बड़ी लोकप्रियता प्राप्त हुई थी। कई विशेषज्ञ सहमत हैं कि ट्रक"डीएपी" ने खुद को अच्छी तरह से साबित कर दिया है। तकनीकी गुणों और विशेषताओं को सोचा गया है कि मशीन, कक्षा के आधार पर, उच्च गति पर बड़ी बोझ ले सकती है। मरम्मत कार्य जो कि किया जाता है,लंबे समय तक ऑपरेशन के बाद भी ट्रक को बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। नियमित रखरखाव केवल यही बात है कि यह कार की जरूरत है। सुरक्षा प्रणाली, विशेषज्ञों के मुताबिक,यूरोप में संचालित होने वाले सभी मानकों को पूरा करता है एक सड़क दुर्घटना में दुर्घटना की स्थिति में परीक्षणों पर, डीएपी ट्रक ने उच्च दक्षता दिखाया - जो कि चालक के कारण हो सकता है नुकसान नगण्य है। यह एक कारण है कि कारों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से उच्चतम अंक प्राप्त हुए, और निर्यात और फ्रेट परिवहन और रसद पुरस्कार से "सर्वश्रेष्ठ ट्रक का वर्ष" पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह देखते हुए कि कार तेजी से बढ़ रही हैलोकप्रियता, यह अक्सर चर्चा की जाती है। ट्रक "डीएएफ" द्वारा वाहन चालकों का क्या अनुमान प्राप्त हुआ था? मालिकों से प्रतिक्रिया ज्यादातर उत्साहजनक है। उनका दावा है कि यह एक विश्वसनीय ट्रक है, जो इसमें निवेश किए गए धन के लायक है।
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दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक यूक्रेन में उच्च स्तर के तनाव और अनिश्चितता के माहौल के मद्देनजर उन सभी भारतीय नागरिकों जिनकी उपस्थिति जरूरी नहीं है और सभी भारतीय छात्रों को अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी जाती है।
नई दिल्ली, प्रेट्र। रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के बीच कीव स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को एक बार फिर भारतीय नागरिकों और छात्रों को देश छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर उनका रुकना जरूरी नहीं है तो वे अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़कर चले जाएं।
दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 'यूक्रेन में उच्च स्तर के तनाव और अनिश्चितता के माहौल के मद्देनजर उन सभी भारतीय नागरिकों जिनकी उपस्थिति जरूरी नहीं है और सभी भारतीय छात्रों को अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी जाती है। '
दूतावास ने कहा कि यूक्रेन से क्रमबद्ध और समयबद्ध रवानगी के लिए उपलब्ध वाणिज्यिक और चार्टर्ड उड़ानों से यात्रा की जा सकती है।
बयान के मुताबिक, 'भारतीय छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे चार्टर्ड उड़ानों की नवीनतम जानकारियों के लिए संबंधित स्टूडेंट कांट्रैक्टरों के संपर्क में भी रहें। साथ ही किसी भी नवीनतम जानकारी के लिए दूतावास की वेबसाइट, फेसबुक अकाउंट और ट्विटर अकाउंट भी देखते रहें। '
याद दिला दें कि भारतीय दूतावास ने हफ्ते की शुरुआत में भी यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए ऐसी ही एडवाइजरी जारी की थी। मालूम हो कि 2020 के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक यूक्रेन में छोटा, लेकिन जिंदादिल भारतीय समुदाय है। साथ ही वहां लगभग 18 हजार भारतीय छात्र अध्ययनरत हैं।
वहीं, एक परामर्श में भारत ने अपने नागरिकों से भी अनुरोध किया कि वे दूतावास को अपनी उपस्थिति की स्थिति के बारे में सूचित रखें ताकि जहां आवश्यक हो वहां तक पहुंच सके।
इस बीच, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूर्वी यूरोपीय देश से भारतीयों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए द्विपक्षीय एयर बबल व्यवस्था के तहत भारत और यूक्रेन के बीच संचालित की जा सकने वाली उड़ानों की संख्या पर प्रतिबंध हटा दिया है। हाल ही में एयर इंडिया ने घोषणा की है कि वह अगले सप्ताह 22, 24 और 26 फरवरी को भारत-यूक्रेन के बीच तीन उड़ानें संचालित करेगी।
यूक्रेन के बारिस्पिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू होंगी और बुकिंग एयर इंडिया के बुकिंग कार्यालयों, वेबसाइट, कॉल सेंटर और अधिकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से खुली हैं।
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दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक यूक्रेन में उच्च स्तर के तनाव और अनिश्चितता के माहौल के मद्देनजर उन सभी भारतीय नागरिकों जिनकी उपस्थिति जरूरी नहीं है और सभी भारतीय छात्रों को अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी जाती है। नई दिल्ली, प्रेट्र। रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के बीच कीव स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को एक बार फिर भारतीय नागरिकों और छात्रों को देश छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर उनका रुकना जरूरी नहीं है तो वे अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़कर चले जाएं। दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 'यूक्रेन में उच्च स्तर के तनाव और अनिश्चितता के माहौल के मद्देनजर उन सभी भारतीय नागरिकों जिनकी उपस्थिति जरूरी नहीं है और सभी भारतीय छात्रों को अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी जाती है। ' दूतावास ने कहा कि यूक्रेन से क्रमबद्ध और समयबद्ध रवानगी के लिए उपलब्ध वाणिज्यिक और चार्टर्ड उड़ानों से यात्रा की जा सकती है। बयान के मुताबिक, 'भारतीय छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे चार्टर्ड उड़ानों की नवीनतम जानकारियों के लिए संबंधित स्टूडेंट कांट्रैक्टरों के संपर्क में भी रहें। साथ ही किसी भी नवीनतम जानकारी के लिए दूतावास की वेबसाइट, फेसबुक अकाउंट और ट्विटर अकाउंट भी देखते रहें। ' याद दिला दें कि भारतीय दूतावास ने हफ्ते की शुरुआत में भी यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए ऐसी ही एडवाइजरी जारी की थी। मालूम हो कि दो हज़ार बीस के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक यूक्रेन में छोटा, लेकिन जिंदादिल भारतीय समुदाय है। साथ ही वहां लगभग अट्ठारह हजार भारतीय छात्र अध्ययनरत हैं। वहीं, एक परामर्श में भारत ने अपने नागरिकों से भी अनुरोध किया कि वे दूतावास को अपनी उपस्थिति की स्थिति के बारे में सूचित रखें ताकि जहां आवश्यक हो वहां तक पहुंच सके। इस बीच, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पूर्वी यूरोपीय देश से भारतीयों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए द्विपक्षीय एयर बबल व्यवस्था के तहत भारत और यूक्रेन के बीच संचालित की जा सकने वाली उड़ानों की संख्या पर प्रतिबंध हटा दिया है। हाल ही में एयर इंडिया ने घोषणा की है कि वह अगले सप्ताह बाईस, चौबीस और छब्बीस फरवरी को भारत-यूक्रेन के बीच तीन उड़ानें संचालित करेगी। यूक्रेन के बारिस्पिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू होंगी और बुकिंग एयर इंडिया के बुकिंग कार्यालयों, वेबसाइट, कॉल सेंटर और अधिकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से खुली हैं।
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UP Election 2022: 3 फरवरी को असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की कार पर पश्चिमी यूपी के हापुड़ जिले के छजरसी टोल प्लाजा पर फायरिंग की गई। AIMIM चीफ मेरठ से चुनाव प्रचार के बाद दिल्ली लौट रहे थे। जिसके बाद से देश में सियासी बयानबाजी जारी है। अब इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ गोडसे के वंशज हैं। वे उसी मानसिकता के हैं, जिस मानसिकता के लोगों ने गांधी की हत्या की थी। वे वही लोग हैं जो आंबेडकर के संविधान का अनादर करना चाहते हैं। वे कानून के शासन पर भरोसा नहीं करते हैं। वे मतपत्रों की जगह गोलियों पर भरोसा करते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले AIMIM चीफ संभल में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि उन्होंने सभी अपराध समाप्त कर दिए हैं और अपराधी और माफिया राज्य से भाग गए हैं। फिर कौन थे जिन्होंने मुझ पर गोलियां चलाईं? गृह मंत्री और प्रधान मंत्री का दावा है कि माफिया को जेल भेज दिया गया है।
फिर गोलियां चलाने वाले कौन थे? हमलावरों में से एक, सचिन शर्मा ने एक स्वीकारोक्ति वीडियो में कहा कि वह 2014 में एआईएमआईएम अध्यक्ष के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए एक विशेष बयान से "आहत" थे। शर्मा ने पहले कहा था कि उन्होंने तीन रैलियों में असदुद्दीन ओवैसी को मारने का प्रयास किया क्योंकि उन्हें सांसद के बयान "भारत विरोधी" लगे।
बता दें कि केंद्र ने हमले के बाद AIMIM नेता को 'जेड श्रेणी' की सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा सरकार आम आदमी की रक्षा नहीं कर सकती है तो मुझे जेड सुरक्षा प्रदान करना कितना तर्कसंगत है? बंदूकें मुझे रोक नहीं सकतीं। मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए, मुझे एक हिस्सा चाहिए। ओवैसी ने कहा कि भारत के मुसलमानों और गरीबों को ए श्रेणी का नागरिक बनाएं। हैदराबाद के सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की थी।
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UP Election दो हज़ार बाईस: तीन फरवरी को असदुद्दीन ओवैसी की कार पर पश्चिमी यूपी के हापुड़ जिले के छजरसी टोल प्लाजा पर फायरिंग की गई। AIMIM चीफ मेरठ से चुनाव प्रचार के बाद दिल्ली लौट रहे थे। जिसके बाद से देश में सियासी बयानबाजी जारी है। अब इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ गोडसे के वंशज हैं। वे उसी मानसिकता के हैं, जिस मानसिकता के लोगों ने गांधी की हत्या की थी। वे वही लोग हैं जो आंबेडकर के संविधान का अनादर करना चाहते हैं। वे कानून के शासन पर भरोसा नहीं करते हैं। वे मतपत्रों की जगह गोलियों पर भरोसा करते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले AIMIM चीफ संभल में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि उन्होंने सभी अपराध समाप्त कर दिए हैं और अपराधी और माफिया राज्य से भाग गए हैं। फिर कौन थे जिन्होंने मुझ पर गोलियां चलाईं? गृह मंत्री और प्रधान मंत्री का दावा है कि माफिया को जेल भेज दिया गया है। फिर गोलियां चलाने वाले कौन थे? हमलावरों में से एक, सचिन शर्मा ने एक स्वीकारोक्ति वीडियो में कहा कि वह दो हज़ार चौदह में एआईएमआईएम अध्यक्ष के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए एक विशेष बयान से "आहत" थे। शर्मा ने पहले कहा था कि उन्होंने तीन रैलियों में असदुद्दीन ओवैसी को मारने का प्रयास किया क्योंकि उन्हें सांसद के बयान "भारत विरोधी" लगे। बता दें कि केंद्र ने हमले के बाद AIMIM नेता को 'जेड श्रेणी' की सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा सरकार आम आदमी की रक्षा नहीं कर सकती है तो मुझे जेड सुरक्षा प्रदान करना कितना तर्कसंगत है? बंदूकें मुझे रोक नहीं सकतीं। मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए, मुझे एक हिस्सा चाहिए। ओवैसी ने कहा कि भारत के मुसलमानों और गरीबों को ए श्रेणी का नागरिक बनाएं। हैदराबाद के सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की थी। संबंधित खबरेंः
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नई दिल्ली, 29 दिसंबर (CRICKETNMORE) । ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली के विराट रुप पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि इस तरह की आक्रामकता ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट क्रिकेट मैच में उलटी भी पड़ सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक 326 रन की बड़ी बढ़त हासिल कर ली है और वह कल जीत दर्ज करके श्रृंखला में अजेय बढ़त हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा, "इससे भले ही उसमें जोश भरा और उसने शतक जमाया लेकिन इससे बाकी टीम पर कैसा प्रभाव पड़ा। क्या आप यह जता रहे हो कि सचिन, द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण में जोश नहीं था। वे भी कड़ी क्रिकेट खेलते थे। " गावस्कर ने कहा कि कोहली को जब उकसाया जाता है तो उन्हें उसका जवाब देने का अधिकार है लेकिन भारतीय उप कप्तान को ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ बहस की शुरूआत नहीं करनी चाहिए।
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नई दिल्ली, उनतीस दिसंबर । ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली के विराट रुप पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि इस तरह की आक्रामकता ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट क्रिकेट मैच में उलटी भी पड़ सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक तीन सौ छब्बीस रन की बड़ी बढ़त हासिल कर ली है और वह कल जीत दर्ज करके श्रृंखला में अजेय बढ़त हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा, "इससे भले ही उसमें जोश भरा और उसने शतक जमाया लेकिन इससे बाकी टीम पर कैसा प्रभाव पड़ा। क्या आप यह जता रहे हो कि सचिन, द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण में जोश नहीं था। वे भी कड़ी क्रिकेट खेलते थे। " गावस्कर ने कहा कि कोहली को जब उकसाया जाता है तो उन्हें उसका जवाब देने का अधिकार है लेकिन भारतीय उप कप्तान को ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ बहस की शुरूआत नहीं करनी चाहिए।
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आर्यन खान को एनसीबी (NCB) ने क्रूज पर ड्रग्स पार्टी में छापेमारी के बाद 3 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया था। तभी से शाहरुख और गौरी खान ने बेटे के लिए दिन-रात एक कर दिए थे। एनसीबी से पूछताछ के दौरान जब आर्यन रोने लगे थे तो तब शाहरुख ने उनसे बात करके हिम्मत दी थी। उधर गौरी भी आर्यन के लिए एनसीबी की कस्टडी में खाना लेकर पहुंची थीं।
आर्यन खान समेत 8 आरोपियों को मुंबई की किला कोर्ट ने गुरुवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके तुरंत बाद ही आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे ने जमानत की अर्जी लगा दी थी। उम्मीद लगाई जा रही थी आर्यन को न्यायिक हिरासत से जमानत मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उधर गौरी और शाहरुख खान को हर कोई दिलासा दे रहा है। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोग उनके सपॉर्ट में उतर आए हैं। फैन्स अभी भी उम्मीद लगाए हैं कि गौरी खान को शायद आज भगवान उनके बेटे से मिला दे। बेटा रिहा हो जाए और उन्हें उनका बेस्ट बर्थडे गिफ्ट मिल जाए।
फराह खान ने भी गौरी को उनके बर्थडे पर हौसला देते हुए एक स्पेशल पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने गौरी खान को एक मजबूत महिला और मां बताया और कहा कि एक एक मां की दुआ पहाड़ को भी चीर सकती है।
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आर्यन खान को एनसीबी ने क्रूज पर ड्रग्स पार्टी में छापेमारी के बाद तीन अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया था। तभी से शाहरुख और गौरी खान ने बेटे के लिए दिन-रात एक कर दिए थे। एनसीबी से पूछताछ के दौरान जब आर्यन रोने लगे थे तो तब शाहरुख ने उनसे बात करके हिम्मत दी थी। उधर गौरी भी आर्यन के लिए एनसीबी की कस्टडी में खाना लेकर पहुंची थीं। आर्यन खान समेत आठ आरोपियों को मुंबई की किला कोर्ट ने गुरुवार को चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके तुरंत बाद ही आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे ने जमानत की अर्जी लगा दी थी। उम्मीद लगाई जा रही थी आर्यन को न्यायिक हिरासत से जमानत मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उधर गौरी और शाहरुख खान को हर कोई दिलासा दे रहा है। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोग उनके सपॉर्ट में उतर आए हैं। फैन्स अभी भी उम्मीद लगाए हैं कि गौरी खान को शायद आज भगवान उनके बेटे से मिला दे। बेटा रिहा हो जाए और उन्हें उनका बेस्ट बर्थडे गिफ्ट मिल जाए। फराह खान ने भी गौरी को उनके बर्थडे पर हौसला देते हुए एक स्पेशल पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने गौरी खान को एक मजबूत महिला और मां बताया और कहा कि एक एक मां की दुआ पहाड़ को भी चीर सकती है।
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यह साइट सामाजिक नेटवर्क की एक झलक लागू करता है, ताकि आप व्यवसायियों के साथ सीधे बातचीत के लिए किकस्टाटर का उपयोग कर सकें।
इससे पहले, पहले से ही परियोजनाओं के समर्थन के लिए सेवाएं थीं, लेकिन यह किकस्टार्टर के साथ थी कि उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी।
किकस्टार्ट-एनालॉग्स ने पहले से ही पैसा जुटाने में मदद कीलाखों उपयोगकर्ता उदाहरण के लिए, किवा वेबसाइट ने पूरी दुनिया में से 760,000 उद्यमियों को सफलतापूर्वक अपनी परियोजना शुरू करने में मदद की है। किवारा के माध्यम से पारित राशि की कुल राशि पहले से ही तीन सौ मिलियन डॉलर से अधिक है साइट का मुख्य विशेषज्ञता विकासशील देशों से उद्यमियों है, जहां परियोजना की शुरुआत में पैसा मिलना लगभग असंभव है। उपयोगकर्ता को कम से कम पच्चीस डालर का निवेश करना चाहिए, जो एक छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए जाएंगे।
किकस्टार्टर का एक और एनालॉग जिडिशा फंड है,जो उधारकर्ताओं को दुनिया भर के सत्तर से अधिक देशों में निवेशकों के साथ बातचीत करने की अनुमति देता है। दो वर्षों के लिए, 750 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक वित्त पोषित किया गया है। फंड को उसी किकस्टार्टर की पृष्ठभूमि के खिलाफ लाभदायक कॉल करना मुश्किल है। यह अमेरिका में पंजीकृत है, और मुख्य गणना सिस्टम पेपैल में की जाती है। जिदिश के अपने प्रतिस्पर्धियों से बहुत अंतर हैः कम से कम एक सफलतापूर्वक चुकाए गए ऋण के बिना पैसे कमाने के लिए संभव नहीं होगा। सफलतापूर्वक चुकाए गए ऋण का हिस्सा 97 प्रतिशत के स्तर पर है।
किकस्टार्टर के सबसे लोकप्रिय अनुरूपों में से एकविदेश में इंडिगोगो मंच है। इस भीड़-होस्टिंग प्लेटफॉर्म का काम क्रियाओं की अधिकतम पारदर्शिता पर आधारित है। उपयोगकर्ता किसी भी इंडीगोगो को किसी भी परियोजना में जोड़ सकता है, जो मुख्य प्रतिद्वंद्वी से सबसे बड़ा अंतर है। परियोजना का प्रकार पूरी तरह से अलग हो सकता है। यह एक उपकरण हो सकता है (यह एक कामकाजी प्रोटोटाइप नहीं होना चाहिए), मनोरंजन, शिक्षा या दान। लेकिन सबसे दिलचस्प यह है कि उपयोगकर्ता अपनी जरूरतों के लिए भी धन इकट्ठा कर सकता है। इंडिगोगो के लिए वित्तपोषण मॉडल बहुत लचीला है। भौगोलिक प्रतिबंध मौजूद नहीं हैंः उपयोगकर्ता दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं। वास्तव में, इस मंच के साथ काम करने के लिए आवश्यक एकमात्र चीज एक वैध कानूनी बैंक खाता है।
भीड़ और ध्वज मंच का उपयोग कर रूसीबिना किसी प्रतिबंध के कर सकते हैं, लेकिन, दुर्भाग्य से, रूसी में किकस्टाटर काम नहीं करता है। आरामदायक काम के लिए, आपको कम से कम मध्यवर्ती स्तर पर अंग्रेजी के ज्ञान की आवश्यकता है। यह बहुत ही प्रसन्नतापूर्ण है कि रूस में ऐसी सेवाएं मौजूद हैं, लेकिन हाल ही में उनमें से अधिकतर युवा संगीत समूहों के प्रचार के उद्देश्य से थे। हालांकि, अब स्थिति धीरे-धीरे बेहतर के लिए बदल रही है, लेकिन फिर भी, रूसी किकस्टार्टर बनाने के लिए अभी तक संभव नहीं हुआ है।
ऐसी एक परियोजना बूमस्टाटर वेबसाइट है। यहां, कोई भी व्यक्ति एक परियोजना प्रकाशित कर सकता है जिसके लिए निवेश की आवश्यकता है। यह एक छोटा सा व्यवसाय या संगीत समूह हो सकता है। व्यावहारिक रूप से कोई प्रतिबंध नहीं हैं। बहुत सुविधाजनक, क्योंकि हाल ही में, रूस में किकस्टाटर काम नहीं किया था।
धन उगाहने के बाद, परियोजना के लेखक को करना होगाअंत में क्या हुआ उसके निवेशकों के साथ साझा करें। उदाहरण के लिए, यदि यह एक संगीत बैंड है, तो लेखक संगीत कार्यक्रम में टिकट भेजता है। यदि उत्पाद, तो यह स्वयं ही भेजा जाता है या खरीद पर छूट दी जाती है।
इसलिए, सभी परियोजनाओं को सख्त नियंत्रण से गुजरना पड़ता हैप्रकाशन से पहले, आपको सिस्टम के नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि आवश्यक अवधि निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक राशि एकत्र नहीं की गई है, तो प्रायोजक को अपना पैसा वापस प्राप्त करने की गारंटी है। यह किकस्टार्टर पर भी लागू किया गया है।
विदेशी क्रॉसिंग सिस्टम के रूसी एनालॉगअनुमान लगाने की अनुमति देगा, जनसंख्या द्वारा आपके प्रोजेक्ट पर कितना दावा किया जाएगा। यदि धन का संग्रह सफल या असफल होता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इस दिशा में काम करना जारी रखना आवश्यक है या नहीं। कई उपयोगकर्ताओं ने पहले से ही अपने व्यापार के साथ काम करना शुरू कर दिया है, और कुछ को अपनी प्रतिभा की दिशा बदलनी है।
लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि रूसी के लिए धनकिकस्टार्टर के अनुरूप विदेशों से एकत्र करना अधिक कठिन होता है। शायद मामला अविश्वास में है, और शायद अधिकांश उपयोगकर्ताओं के पास मुफ्त में पैसा नहीं है जो वे एक परियोजना में निवेश कर सकते हैं।
एक समय में बड़ी संख्या मेंवेबसाइटों है कि उनके डिजाइनरों रूस से कम कुछ नहीं कहा जाता था। "" किक "लेकिन इसे बाहर तो गुलाबी के रूप में यह विदेशी kraudfandingovyh प्लेटफार्मों में क्या होता है नहीं बदल जाता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, स्टार्टअप, सबसे महत्वपूर्ण बात, समय की एक बहुत ही कम समय में एक बड़ी राशि एकत्र कर सकते हैं लोगों की रुचि जगाने के हैं । रूस हकीकत में, यह अभी तक काम नहीं किया है।
बूमस्टाटर आज सबसे सफल हैरूस में किकस्टार्टर जैसी साइट। यहां शुरू होने वाली परियोजनाओं की विशाल बहुमत कला से कम या कम चीजें हैं। कुछ लोग वीडियो शूट करने के लिए धन जुटाने की कोशिश करते हैं, दूसरों को संगीत रिकॉर्ड करने के लिए। फिर भी कला कला परियोजना में रुचि रखते हैं। और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के बारे में क्या?
अगर उन पर विदेशी प्लेटफॉर्म परऊपर वर्णित, बड़ी संख्या में तकनीकी परियोजनाएं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत से लोग जिन्होंने सफलतापूर्वक आवश्यक धन एकत्रित किया है और पहले ही सक्रिय रूप से बिक्री कर रहे हैं, फिर रूस में स्थिति सभी किकस्टार्टर के मुकाबले अलग है। इस भीड़फंडिंग प्लेटफॉर्म के रूसी एनालॉग - बूमस्टाटर - में पच्चीस या उससे कम सफल कला परियोजनाओं के लिए केवल एक तकनीकी परियोजना है। उनमें से एक आईफोन के लिए ज़ूम है, जिसे फोकलिटी कहा जाता है। उन्होंने 31 हजार रूबल से थोड़ा अधिक एकत्र किया, जो विनिमय दर में बदलाव से पहले एक हज़ार डॉलर के अनुरूप था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह अभी भी अस्पष्ट है कि यह पैसा किस उद्देश्य से चला गया। यह कल्पना करना मुश्किल है कि आप किसी भी तरह के उत्पादन को इतनी छोटी राशि के साथ कैसे व्यवस्थित कर सकते हैं।
उन दो परियोजनाओं पर विचार करें जिनके पास सही धनराशि एकत्र करने का समय नहीं थाः
तस्वीर कुछ हद तक दुखी है, और यह अभी तक समय नहीं हैकहें कि स्टार्ट-अप के लिए रूसी साइट किकस्टार्टर के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है। विदेशी भीड़ और फ्रेमिंग प्लेटफार्मों का रूसी एनालॉग अभी तक एक सभ्य वापसी प्रदान करने में सक्षम नहीं है। किसी भी तकनीक से जुड़ी एक सफल साइट का उदाहरण देना बेहद मुश्किल होगा। ऐसी परियोजनाएं जो कला के उद्देश्य से हैं, धन इकट्ठा करने के कार्य के साथ मुकाबला करना बेहतर है, लेकिन एक सौ हजार रूबल और उससे अधिक की राशि बढ़ाएं और यहां लगभग असंभव है। 25 सफल स्टार्ट-अप में से केवल 5 ने उस राशि पर स्विंग करने का फैसला किया। साथ ही, इस तरह की कई परियोजनाओं ने शो बिजनेस के प्रसिद्ध प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ धन इकट्ठा किया। और यह पहले से ही एक बेईमान प्रतिस्पर्धा की तरह दिखता है।
इसके बावजूद, रूस में धीरे-धीरे क्रॉसिंगउसके पैरों पर उगता है। वर्तमान में, यह दिशा काफी कच्ची है, और, सबसे अधिक संभावना है, यदि आपके पास एक प्रसिद्ध सहायक नहीं है, तो धन इकट्ठा करने में कोई समझ नहीं होगी। आखिरकार, आप इस बात से सहमत होंगे कि रूस में कोई भी पूरी तरह से कंप्यूटर गेम बनाने के लिए पर्याप्त धन जुटाने में सक्षम नहीं है। और, उदाहरण के लिए, वास्टलैंड 2 की बढ़ती लोकप्रियता के डेवलपर्स ने किकस्टार्टर क्रूडफैंडिंग प्लेटफार्म के लिए धन्यवाद के विकास के लिए धन अर्जित किया है।
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यह साइट सामाजिक नेटवर्क की एक झलक लागू करता है, ताकि आप व्यवसायियों के साथ सीधे बातचीत के लिए किकस्टाटर का उपयोग कर सकें। इससे पहले, पहले से ही परियोजनाओं के समर्थन के लिए सेवाएं थीं, लेकिन यह किकस्टार्टर के साथ थी कि उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। किकस्टार्ट-एनालॉग्स ने पहले से ही पैसा जुटाने में मदद कीलाखों उपयोगकर्ता उदाहरण के लिए, किवा वेबसाइट ने पूरी दुनिया में से सात सौ साठ,शून्य उद्यमियों को सफलतापूर्वक अपनी परियोजना शुरू करने में मदद की है। किवारा के माध्यम से पारित राशि की कुल राशि पहले से ही तीन सौ मिलियन डॉलर से अधिक है साइट का मुख्य विशेषज्ञता विकासशील देशों से उद्यमियों है, जहां परियोजना की शुरुआत में पैसा मिलना लगभग असंभव है। उपयोगकर्ता को कम से कम पच्चीस डालर का निवेश करना चाहिए, जो एक छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए जाएंगे। किकस्टार्टर का एक और एनालॉग जिडिशा फंड है,जो उधारकर्ताओं को दुनिया भर के सत्तर से अधिक देशों में निवेशकों के साथ बातचीत करने की अनुमति देता है। दो वर्षों के लिए, सात सौ पचास परियोजनाओं को सफलतापूर्वक वित्त पोषित किया गया है। फंड को उसी किकस्टार्टर की पृष्ठभूमि के खिलाफ लाभदायक कॉल करना मुश्किल है। यह अमेरिका में पंजीकृत है, और मुख्य गणना सिस्टम पेपैल में की जाती है। जिदिश के अपने प्रतिस्पर्धियों से बहुत अंतर हैः कम से कम एक सफलतापूर्वक चुकाए गए ऋण के बिना पैसे कमाने के लिए संभव नहीं होगा। सफलतापूर्वक चुकाए गए ऋण का हिस्सा सत्तानवे प्रतिशत के स्तर पर है। किकस्टार्टर के सबसे लोकप्रिय अनुरूपों में से एकविदेश में इंडिगोगो मंच है। इस भीड़-होस्टिंग प्लेटफॉर्म का काम क्रियाओं की अधिकतम पारदर्शिता पर आधारित है। उपयोगकर्ता किसी भी इंडीगोगो को किसी भी परियोजना में जोड़ सकता है, जो मुख्य प्रतिद्वंद्वी से सबसे बड़ा अंतर है। परियोजना का प्रकार पूरी तरह से अलग हो सकता है। यह एक उपकरण हो सकता है , मनोरंजन, शिक्षा या दान। लेकिन सबसे दिलचस्प यह है कि उपयोगकर्ता अपनी जरूरतों के लिए भी धन इकट्ठा कर सकता है। इंडिगोगो के लिए वित्तपोषण मॉडल बहुत लचीला है। भौगोलिक प्रतिबंध मौजूद नहीं हैंः उपयोगकर्ता दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं। वास्तव में, इस मंच के साथ काम करने के लिए आवश्यक एकमात्र चीज एक वैध कानूनी बैंक खाता है। भीड़ और ध्वज मंच का उपयोग कर रूसीबिना किसी प्रतिबंध के कर सकते हैं, लेकिन, दुर्भाग्य से, रूसी में किकस्टाटर काम नहीं करता है। आरामदायक काम के लिए, आपको कम से कम मध्यवर्ती स्तर पर अंग्रेजी के ज्ञान की आवश्यकता है। यह बहुत ही प्रसन्नतापूर्ण है कि रूस में ऐसी सेवाएं मौजूद हैं, लेकिन हाल ही में उनमें से अधिकतर युवा संगीत समूहों के प्रचार के उद्देश्य से थे। हालांकि, अब स्थिति धीरे-धीरे बेहतर के लिए बदल रही है, लेकिन फिर भी, रूसी किकस्टार्टर बनाने के लिए अभी तक संभव नहीं हुआ है। ऐसी एक परियोजना बूमस्टाटर वेबसाइट है। यहां, कोई भी व्यक्ति एक परियोजना प्रकाशित कर सकता है जिसके लिए निवेश की आवश्यकता है। यह एक छोटा सा व्यवसाय या संगीत समूह हो सकता है। व्यावहारिक रूप से कोई प्रतिबंध नहीं हैं। बहुत सुविधाजनक, क्योंकि हाल ही में, रूस में किकस्टाटर काम नहीं किया था। धन उगाहने के बाद, परियोजना के लेखक को करना होगाअंत में क्या हुआ उसके निवेशकों के साथ साझा करें। उदाहरण के लिए, यदि यह एक संगीत बैंड है, तो लेखक संगीत कार्यक्रम में टिकट भेजता है। यदि उत्पाद, तो यह स्वयं ही भेजा जाता है या खरीद पर छूट दी जाती है। इसलिए, सभी परियोजनाओं को सख्त नियंत्रण से गुजरना पड़ता हैप्रकाशन से पहले, आपको सिस्टम के नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि आवश्यक अवधि निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक राशि एकत्र नहीं की गई है, तो प्रायोजक को अपना पैसा वापस प्राप्त करने की गारंटी है। यह किकस्टार्टर पर भी लागू किया गया है। विदेशी क्रॉसिंग सिस्टम के रूसी एनालॉगअनुमान लगाने की अनुमति देगा, जनसंख्या द्वारा आपके प्रोजेक्ट पर कितना दावा किया जाएगा। यदि धन का संग्रह सफल या असफल होता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इस दिशा में काम करना जारी रखना आवश्यक है या नहीं। कई उपयोगकर्ताओं ने पहले से ही अपने व्यापार के साथ काम करना शुरू कर दिया है, और कुछ को अपनी प्रतिभा की दिशा बदलनी है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि रूसी के लिए धनकिकस्टार्टर के अनुरूप विदेशों से एकत्र करना अधिक कठिन होता है। शायद मामला अविश्वास में है, और शायद अधिकांश उपयोगकर्ताओं के पास मुफ्त में पैसा नहीं है जो वे एक परियोजना में निवेश कर सकते हैं। एक समय में बड़ी संख्या मेंवेबसाइटों है कि उनके डिजाइनरों रूस से कम कुछ नहीं कहा जाता था। "" किक "लेकिन इसे बाहर तो गुलाबी के रूप में यह विदेशी kraudfandingovyh प्लेटफार्मों में क्या होता है नहीं बदल जाता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, स्टार्टअप, सबसे महत्वपूर्ण बात, समय की एक बहुत ही कम समय में एक बड़ी राशि एकत्र कर सकते हैं लोगों की रुचि जगाने के हैं । रूस हकीकत में, यह अभी तक काम नहीं किया है। बूमस्टाटर आज सबसे सफल हैरूस में किकस्टार्टर जैसी साइट। यहां शुरू होने वाली परियोजनाओं की विशाल बहुमत कला से कम या कम चीजें हैं। कुछ लोग वीडियो शूट करने के लिए धन जुटाने की कोशिश करते हैं, दूसरों को संगीत रिकॉर्ड करने के लिए। फिर भी कला कला परियोजना में रुचि रखते हैं। और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के बारे में क्या? अगर उन पर विदेशी प्लेटफॉर्म परऊपर वर्णित, बड़ी संख्या में तकनीकी परियोजनाएं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत से लोग जिन्होंने सफलतापूर्वक आवश्यक धन एकत्रित किया है और पहले ही सक्रिय रूप से बिक्री कर रहे हैं, फिर रूस में स्थिति सभी किकस्टार्टर के मुकाबले अलग है। इस भीड़फंडिंग प्लेटफॉर्म के रूसी एनालॉग - बूमस्टाटर - में पच्चीस या उससे कम सफल कला परियोजनाओं के लिए केवल एक तकनीकी परियोजना है। उनमें से एक आईफोन के लिए ज़ूम है, जिसे फोकलिटी कहा जाता है। उन्होंने इकतीस हजार रूबल से थोड़ा अधिक एकत्र किया, जो विनिमय दर में बदलाव से पहले एक हज़ार डॉलर के अनुरूप था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह अभी भी अस्पष्ट है कि यह पैसा किस उद्देश्य से चला गया। यह कल्पना करना मुश्किल है कि आप किसी भी तरह के उत्पादन को इतनी छोटी राशि के साथ कैसे व्यवस्थित कर सकते हैं। उन दो परियोजनाओं पर विचार करें जिनके पास सही धनराशि एकत्र करने का समय नहीं थाः तस्वीर कुछ हद तक दुखी है, और यह अभी तक समय नहीं हैकहें कि स्टार्ट-अप के लिए रूसी साइट किकस्टार्टर के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है। विदेशी भीड़ और फ्रेमिंग प्लेटफार्मों का रूसी एनालॉग अभी तक एक सभ्य वापसी प्रदान करने में सक्षम नहीं है। किसी भी तकनीक से जुड़ी एक सफल साइट का उदाहरण देना बेहद मुश्किल होगा। ऐसी परियोजनाएं जो कला के उद्देश्य से हैं, धन इकट्ठा करने के कार्य के साथ मुकाबला करना बेहतर है, लेकिन एक सौ हजार रूबल और उससे अधिक की राशि बढ़ाएं और यहां लगभग असंभव है। पच्चीस सफल स्टार्ट-अप में से केवल पाँच ने उस राशि पर स्विंग करने का फैसला किया। साथ ही, इस तरह की कई परियोजनाओं ने शो बिजनेस के प्रसिद्ध प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ धन इकट्ठा किया। और यह पहले से ही एक बेईमान प्रतिस्पर्धा की तरह दिखता है। इसके बावजूद, रूस में धीरे-धीरे क्रॉसिंगउसके पैरों पर उगता है। वर्तमान में, यह दिशा काफी कच्ची है, और, सबसे अधिक संभावना है, यदि आपके पास एक प्रसिद्ध सहायक नहीं है, तो धन इकट्ठा करने में कोई समझ नहीं होगी। आखिरकार, आप इस बात से सहमत होंगे कि रूस में कोई भी पूरी तरह से कंप्यूटर गेम बनाने के लिए पर्याप्त धन जुटाने में सक्षम नहीं है। और, उदाहरण के लिए, वास्टलैंड दो की बढ़ती लोकप्रियता के डेवलपर्स ने किकस्टार्टर क्रूडफैंडिंग प्लेटफार्म के लिए धन्यवाद के विकास के लिए धन अर्जित किया है।
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