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पिछले साल की अपेक्षा इस बार संक्रमितों की संख्या भी कम हो गई है। लेकिन स्थितियां अचानक से बदली। अप्रैल महीने में महामारी ने हाहाकार मचा दिया। स्थितियां इतनी नाजुक हुईं कि नेशनल इमरजेंसी जैसी स्थिति हो गई। दरअसल, दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से शुरू हुई मौतों ने एक ऐसा माहौल बना दिया कि देश में कोविड को लेकर फैक्ट्स और सारे तर्क बेमानी हो गए। 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने काॅलम में एस. गुरुमूर्ति ने बताया है कि ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में हुई मौतों से ऐसा माहौल बना कि फैक्ट्स पर बात नहीं हुई और कोरोना को लेकर लोगों में गलत फैक्ट्स प्रसारित हुए और इसी आधार पर धारणाएं बनती गईं। गुरुमूर्ति ने अपने काॅलम में एक-एक प्वाइंट्स को विस्तृत तरीके से समझाया है।
नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण की स्थितियों की समीक्षा करते हुए करीब दो महीने पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन ने कहा था कि भारत ने कोविड के ग्राफ को नियंत्रित कर लिया है। 15 फरवरी को उन्होंने बताया था कि 146 जिले ऐसे हैं जहां एक भी कोरोना के केस रिपोर्ट नहीं हुए। पिछले साल की अपेक्षा इस बार संक्रमितों की संख्या भी कम हो गई है।
लेकिन स्थितियां अचानक से बदली। अप्रैल महीने में महामारी ने हाहाकार मचा दिया। स्थितियां इतनी नाजुक हुईं कि नेशनल इमरजेंसी जैसी स्थिति हो गई। दरअसल, दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से शुरू हुई मौतों ने एक ऐसा माहौल बना दिया कि देश में कोविड को लेकर फैक्ट्स और सारे तर्क बेमानी हो गए। 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने काॅलम में एस. गुरुमूर्ति ने बताया है कि ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में हुई मौतों से ऐसा माहौल बना कि फैक्ट्स पर बात नहीं हुई और कोरोना को लेकर लोगों में गलत फैक्ट्स प्रसारित हुए और इसी आधार पर धारणाएं बनती गईं। गुरुमूर्ति ने अपने काॅलम में एक-एक प्वाइंट्स को विस्तृत तरीके से समझाया है।
ऑक्सीजन की कमी से जो मौतें हुई हैं, वह सबसे पहले दिल्ली के काॅरपोरेट अस्पतालों में रिपोर्ट की गई है। पिछले साल भी इन अस्पतालों ने काफी अधिक मुनाफा कमाया और इस साल भी कमा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अगर किसी को कोरोना हो गया तो दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों ने प्रतिदिन 25 हजार रुपये से लेकर 12 लाख रुपये प्रतिदिन के रेट से कम से कम दो हफ्ते तक मरीज से चार्ज किया। इसके अलावा इन्होंने पीपीई किट, दवाइयां व अन्य इक्वीपमेंट्स के नाम पर लाखों रुपये चार्ज किए। इसके अलावा होम ट्रीटमेंट के नाम पर 5700 से 21900 रुपये प्रतिदिन प्लस विभिन्न टेस्ट्स का चार्ज अलग से लिया।
लेकिन इस लूट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई। रिट याचिका दाखिल होते ही एसोसिएशन आफ हेल्क केयर प्रोवाइडर्स ने सेल्फ रेगुलेशन से फीस तय करने की बात कही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फीस कितनी तय की गई। जनरल वार्ड का प्रतिदिन का रेट 15 हजार रुपये और पांच हजार ऑक्सीजन के लिए अलग से। आईसीयू 25 हजार प्रतिदिन और दस हजार वेंटीलेटर के लिए अलग से।
अब सवाल उठता है कि ऑक्सीजन के नाम पर मरीजों से भारी कीमत लेने वाले इन अस्पतालों ने आखिर अपना ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं स्थापित किया।
एक रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन का प्रोडक्शन, व्यापार, भंडारण और इस्तेमाल. . . सब प्राइवेटाइज्ड है। मेडिकल ऑक्सीजन का व्यापार देश में कंट्रोल या रेगुलेट नहीं किया जाता है। हालांकि, इसकी कीमतें नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथारिटी, एनपीपीए- जो केमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री की एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तय की जाती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इन अस्पतालों ने इमरजेंसी को देखते हुए कोई प्लान पहले क्यों नहीं बनाया। पहले से ही इनको ऑक्सीजन मैन्युफैक्चरर से बात करनी चाहिए थी, एक एस्टीमेट बनाकर पहले से आर्डर देना चाहिए था ताकि पहले से तैयारी रहती। लेकिन किसी भी अस्पताल ने मुनाफा की चकाचैंध में ऐसा नहीं किया।
रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हम 1,00,000 टन ऑक्सीजन प्रतिदिन प्रोड्यूस करते हैं। अकेले गुजरात की एक कंपनी इसका पांचवां हिस्सा बनाती है। हालांकि, यह सच है कि ऑक्सीजन का भंडारण काफी महंगा होता है। जिस ट्रक से लिक्विड ऑक्सीजन का ट्रांसपोर्ट होता है उसकी कीमत 45 लाख रुपये है। 300 रुपये का ऑक्सीजन रखने के लिए दस हजार रुपये का सिलेंडर आता है। ऑक्सीजन की सप्लाई, भंडारण सामान्य दिनों में भी बहुत बड़ी समस्या है। इसके लिए पहले से प्लांनिग होना चाहिए था न कि मौतों का सिलसिला शुरू होने के बाद इसको मंगाने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
कोविड की पहली लहर के बाद दिल्ली के अस्पतालों को अपना स्वयं का ऑक्सीजन प्लांट लगाना चाहिए था। प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार सामान्य दिनों में 240 बेड वाले अस्पताल जिसमें 40 बेड का आईसीयू बेड हो वह पांच लाख रुपये मंथली का ऑक्सीजन खर्च करता है। एक पीएसए ऑक्सीजन प्लांट को लगाने में 50 लाख रुपये खर्च आता है। कोई भी अस्पताल इस कास्ट को 18 महीने में रिकवर कर सकता है। दिल्ली का हर अस्पताल इसको अफोर्ड कर सकता है। लेकिन अपना कीमती जगह इसके लिए देने की बजाय अस्पताल हजारों किलोमीटर दूर से ऑक्सीजन मंगाने पर ही विश्वास करते हैं। पिछले साल ही देश के तीन एक्सपर्ट्स चेरिस पाल, जान पाल और अखिल बाबू की एक रिपोर्ट इंडियन जर्नल आफ रेस्पीरेअरी केयर में छपी थी। इसमें आगाह किया गया था कि सभी अस्पताल कुछ प्लांट्स पर ही निर्भर हैं और दूरी इतनी है कि इमरजेंसी में हाहाकार मच सकता है। अगर दिल्ली के संदर्भ में बात करें तो उनकी यह रिपोर्ट बिल्कुल सही साबित हुई। दिल्ली के अस्पतालों ने ऐसा कुछ नहीं किया जो पहले से प्लान्ड वे में किया जाना चाहिए था। और जब महामारी में वे फेल हुए तो कोर्ट जाकर लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए संविधान की दुहाई देने लगे।
वर्तमान संकट के इतर कुछ और तथ्य हैं जो जानने और समझने लायक है। मोदी सरकार ने दो सौ करोड़ की लागत से 162 पीएसए प्लांट की मंजूरी दी थी। इससे 80500 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट बनाया जाता। लेकिन केवल 33 का ही इंस्टालेशन हो सका। आखिर कौन जिम्मेदारी लेगा इसकी।
एक फैक्ट यह भी है कि वर्तमान की कोविड सूनामी पिछले वाले कोविड से अलग है। इस बार मार्च से प्रारंभ हुआ कोविड अचानक से अप्रैल में जिस तरह पीक पर पहुंचने लगा वह पुराने वाले वायरस की वजह से नहीं बल्कि नए म्यूटेट की वजह से है। बिहार में पिछले सात सप्ताह के भीतर 522 गुना तेजी से फैला, जबकि यूपी में 399 गुना, आंध्र में 186 गुना, दिल्ली और झारखं डमें 150 गुना तेजी से यह वायरस फैल रहा। इसी तरह पश्चिम बंगाल में 142 गुना और राजस्थान में 123 गुना तेजी से कोविड संक्रमण फैल रहा।
कोविड सूनामी से मुकाबला करने के लिए सबको साथ आना होगा। मिलकर, एक दूसरे की जिम्मेदारी व जवाबदेही तय करके इसको नियंत्रित किया जा सकता है। वैक्सीनेशन जब शुरू हुआ तो विपक्ष ने एक ही सुर में इसकी खिलाफत शुरू कर दी। इसके बारे में दुष्प्रचार किया। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग वैक्सीनेशन से घबराने लगे, संकोच करने लगे। इस वजह से हम कई महीने तक वैक्सीनेशन में तेजी नहीं ला सके।
(एस. गुरुमूर्ति का यह लेख सबसे पहले न्यू इंडियन एक्सप्रेस में 27 अप्रैल को प्रकाशित हुआ था। )
जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे।
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पिछले साल की अपेक्षा इस बार संक्रमितों की संख्या भी कम हो गई है। लेकिन स्थितियां अचानक से बदली। अप्रैल महीने में महामारी ने हाहाकार मचा दिया। स्थितियां इतनी नाजुक हुईं कि नेशनल इमरजेंसी जैसी स्थिति हो गई। दरअसल, दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से शुरू हुई मौतों ने एक ऐसा माहौल बना दिया कि देश में कोविड को लेकर फैक्ट्स और सारे तर्क बेमानी हो गए। 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने काॅलम में एस. गुरुमूर्ति ने बताया है कि ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में हुई मौतों से ऐसा माहौल बना कि फैक्ट्स पर बात नहीं हुई और कोरोना को लेकर लोगों में गलत फैक्ट्स प्रसारित हुए और इसी आधार पर धारणाएं बनती गईं। गुरुमूर्ति ने अपने काॅलम में एक-एक प्वाइंट्स को विस्तृत तरीके से समझाया है। नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण की स्थितियों की समीक्षा करते हुए करीब दो महीने पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन ने कहा था कि भारत ने कोविड के ग्राफ को नियंत्रित कर लिया है। पंद्रह फरवरी को उन्होंने बताया था कि एक सौ छियालीस जिले ऐसे हैं जहां एक भी कोरोना के केस रिपोर्ट नहीं हुए। पिछले साल की अपेक्षा इस बार संक्रमितों की संख्या भी कम हो गई है। लेकिन स्थितियां अचानक से बदली। अप्रैल महीने में महामारी ने हाहाकार मचा दिया। स्थितियां इतनी नाजुक हुईं कि नेशनल इमरजेंसी जैसी स्थिति हो गई। दरअसल, दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से शुरू हुई मौतों ने एक ऐसा माहौल बना दिया कि देश में कोविड को लेकर फैक्ट्स और सारे तर्क बेमानी हो गए। 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने काॅलम में एस. गुरुमूर्ति ने बताया है कि ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में हुई मौतों से ऐसा माहौल बना कि फैक्ट्स पर बात नहीं हुई और कोरोना को लेकर लोगों में गलत फैक्ट्स प्रसारित हुए और इसी आधार पर धारणाएं बनती गईं। गुरुमूर्ति ने अपने काॅलम में एक-एक प्वाइंट्स को विस्तृत तरीके से समझाया है। ऑक्सीजन की कमी से जो मौतें हुई हैं, वह सबसे पहले दिल्ली के काॅरपोरेट अस्पतालों में रिपोर्ट की गई है। पिछले साल भी इन अस्पतालों ने काफी अधिक मुनाफा कमाया और इस साल भी कमा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अगर किसी को कोरोना हो गया तो दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों ने प्रतिदिन पच्चीस हजार रुपये से लेकर बारह लाख रुपये प्रतिदिन के रेट से कम से कम दो हफ्ते तक मरीज से चार्ज किया। इसके अलावा इन्होंने पीपीई किट, दवाइयां व अन्य इक्वीपमेंट्स के नाम पर लाखों रुपये चार्ज किए। इसके अलावा होम ट्रीटमेंट के नाम पर पाँच हज़ार सात सौ से इक्कीस हज़ार नौ सौ रुपयापये प्रतिदिन प्लस विभिन्न टेस्ट्स का चार्ज अलग से लिया। लेकिन इस लूट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई। रिट याचिका दाखिल होते ही एसोसिएशन आफ हेल्क केयर प्रोवाइडर्स ने सेल्फ रेगुलेशन से फीस तय करने की बात कही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फीस कितनी तय की गई। जनरल वार्ड का प्रतिदिन का रेट पंद्रह हजार रुपये और पांच हजार ऑक्सीजन के लिए अलग से। आईसीयू पच्चीस हजार प्रतिदिन और दस हजार वेंटीलेटर के लिए अलग से। अब सवाल उठता है कि ऑक्सीजन के नाम पर मरीजों से भारी कीमत लेने वाले इन अस्पतालों ने आखिर अपना ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं स्थापित किया। एक रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन का प्रोडक्शन, व्यापार, भंडारण और इस्तेमाल. . . सब प्राइवेटाइज्ड है। मेडिकल ऑक्सीजन का व्यापार देश में कंट्रोल या रेगुलेट नहीं किया जाता है। हालांकि, इसकी कीमतें नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथारिटी, एनपीपीए- जो केमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री की एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तय की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन अस्पतालों ने इमरजेंसी को देखते हुए कोई प्लान पहले क्यों नहीं बनाया। पहले से ही इनको ऑक्सीजन मैन्युफैक्चरर से बात करनी चाहिए थी, एक एस्टीमेट बनाकर पहले से आर्डर देना चाहिए था ताकि पहले से तैयारी रहती। लेकिन किसी भी अस्पताल ने मुनाफा की चकाचैंध में ऐसा नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हम एक,शून्य,शून्य टन ऑक्सीजन प्रतिदिन प्रोड्यूस करते हैं। अकेले गुजरात की एक कंपनी इसका पांचवां हिस्सा बनाती है। हालांकि, यह सच है कि ऑक्सीजन का भंडारण काफी महंगा होता है। जिस ट्रक से लिक्विड ऑक्सीजन का ट्रांसपोर्ट होता है उसकी कीमत पैंतालीस लाख रुपये है। तीन सौ रुपयापये का ऑक्सीजन रखने के लिए दस हजार रुपये का सिलेंडर आता है। ऑक्सीजन की सप्लाई, भंडारण सामान्य दिनों में भी बहुत बड़ी समस्या है। इसके लिए पहले से प्लांनिग होना चाहिए था न कि मौतों का सिलसिला शुरू होने के बाद इसको मंगाने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। कोविड की पहली लहर के बाद दिल्ली के अस्पतालों को अपना स्वयं का ऑक्सीजन प्लांट लगाना चाहिए था। प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार सामान्य दिनों में दो सौ चालीस बेड वाले अस्पताल जिसमें चालीस बेड का आईसीयू बेड हो वह पांच लाख रुपये मंथली का ऑक्सीजन खर्च करता है। एक पीएसए ऑक्सीजन प्लांट को लगाने में पचास लाख रुपये खर्च आता है। कोई भी अस्पताल इस कास्ट को अट्ठारह महीने में रिकवर कर सकता है। दिल्ली का हर अस्पताल इसको अफोर्ड कर सकता है। लेकिन अपना कीमती जगह इसके लिए देने की बजाय अस्पताल हजारों किलोमीटर दूर से ऑक्सीजन मंगाने पर ही विश्वास करते हैं। पिछले साल ही देश के तीन एक्सपर्ट्स चेरिस पाल, जान पाल और अखिल बाबू की एक रिपोर्ट इंडियन जर्नल आफ रेस्पीरेअरी केयर में छपी थी। इसमें आगाह किया गया था कि सभी अस्पताल कुछ प्लांट्स पर ही निर्भर हैं और दूरी इतनी है कि इमरजेंसी में हाहाकार मच सकता है। अगर दिल्ली के संदर्भ में बात करें तो उनकी यह रिपोर्ट बिल्कुल सही साबित हुई। दिल्ली के अस्पतालों ने ऐसा कुछ नहीं किया जो पहले से प्लान्ड वे में किया जाना चाहिए था। और जब महामारी में वे फेल हुए तो कोर्ट जाकर लोगों की जिंदगियों को बचाने के लिए संविधान की दुहाई देने लगे। वर्तमान संकट के इतर कुछ और तथ्य हैं जो जानने और समझने लायक है। मोदी सरकार ने दो सौ करोड़ की लागत से एक सौ बासठ पीएसए प्लांट की मंजूरी दी थी। इससे अस्सी हज़ार पाँच सौ लीटरटर ऑक्सीजन प्रति मिनट बनाया जाता। लेकिन केवल तैंतीस का ही इंस्टालेशन हो सका। आखिर कौन जिम्मेदारी लेगा इसकी। एक फैक्ट यह भी है कि वर्तमान की कोविड सूनामी पिछले वाले कोविड से अलग है। इस बार मार्च से प्रारंभ हुआ कोविड अचानक से अप्रैल में जिस तरह पीक पर पहुंचने लगा वह पुराने वाले वायरस की वजह से नहीं बल्कि नए म्यूटेट की वजह से है। बिहार में पिछले सात सप्ताह के भीतर पाँच सौ बाईस गुना तेजी से फैला, जबकि यूपी में तीन सौ निन्यानवे गुना, आंध्र में एक सौ छियासी गुना, दिल्ली और झारखं डमें एक सौ पचास गुना तेजी से यह वायरस फैल रहा। इसी तरह पश्चिम बंगाल में एक सौ बयालीस गुना और राजस्थान में एक सौ तेईस गुना तेजी से कोविड संक्रमण फैल रहा। कोविड सूनामी से मुकाबला करने के लिए सबको साथ आना होगा। मिलकर, एक दूसरे की जिम्मेदारी व जवाबदेही तय करके इसको नियंत्रित किया जा सकता है। वैक्सीनेशन जब शुरू हुआ तो विपक्ष ने एक ही सुर में इसकी खिलाफत शुरू कर दी। इसके बारे में दुष्प्रचार किया। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग वैक्सीनेशन से घबराने लगे, संकोच करने लगे। इस वजह से हम कई महीने तक वैक्सीनेशन में तेजी नहीं ला सके। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे।
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नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्र ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति आरडी धानुका की नियुक्ति को अधिसूचित किया। वह 30 मई को सेवानिवृत्त होंगे और इस प्रकार मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल केवल चार दिनों का होगा। केंद्र ने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बॉम्बे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. वी. गंगापुरवाला की नियुक्ति को भी अधिसूचित किया।
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 19 अप्रैल को उच्च न्यायालयों के प्रमुख के रूप में न्यायमूर्ति धानुका और न्यायमूर्ति गंगापुरवाला के नामों की सिफारिश की थी।
मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी. राजा 24 मई को सेवानिवृत्त हुए। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने 19 अप्रैल को न्यायमूर्ति राजा को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश को दोहराया था, हालांकि केंद्र द्वारा इसे मंजूरी नहीं दी गई थी।
न्याय विभाग ने एक अधिसूचना में कहाः भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति रमेश देवकीनंदन धानुका को बॉम्बे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करते हैं। उनकी नियुक्ति प्रभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी।
1961 में जन्मे न्यायमूर्ति धानुका ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई में पूरी की। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से वाणिज्य और कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वह पिछले कई वर्षों से ग्रेटर मुंबई नगर निगम के वरिष्ठ वकील पैनल में थे और बड़ी संख्या में बॉम्बे उच्च न्यायालय में नगर निगम का प्रतिनिधित्व करने वाले मामलों में पेश हुए हैं।
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नई दिल्ली । केंद्र ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति आरडी धानुका की नियुक्ति को अधिसूचित किया। वह तीस मई को सेवानिवृत्त होंगे और इस प्रकार मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल केवल चार दिनों का होगा। केंद्र ने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बॉम्बे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. वी. गंगापुरवाला की नियुक्ति को भी अधिसूचित किया। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उन्नीस अप्रैल को उच्च न्यायालयों के प्रमुख के रूप में न्यायमूर्ति धानुका और न्यायमूर्ति गंगापुरवाला के नामों की सिफारिश की थी। मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी. राजा चौबीस मई को सेवानिवृत्त हुए। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने उन्नीस अप्रैल को न्यायमूर्ति राजा को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश को दोहराया था, हालांकि केंद्र द्वारा इसे मंजूरी नहीं दी गई थी। न्याय विभाग ने एक अधिसूचना में कहाः भारत के संविधान के अनुच्छेद दो सौ सत्रह के खंड द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति रमेश देवकीनंदन धानुका को बॉम्बे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करते हैं। उनकी नियुक्ति प्रभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी। एक हज़ार नौ सौ इकसठ में जन्मे न्यायमूर्ति धानुका ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई में पूरी की। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से वाणिज्य और कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वह पिछले कई वर्षों से ग्रेटर मुंबई नगर निगम के वरिष्ठ वकील पैनल में थे और बड़ी संख्या में बॉम्बे उच्च न्यायालय में नगर निगम का प्रतिनिधित्व करने वाले मामलों में पेश हुए हैं।
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सड़क मारने से पहले आराम करो। नींद पर लापता होने से आपको एक नींद वाला ड्राइवर बन जाता है-भले ही आप थके हुए महसूस न करें, पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से एक नया अध्ययन पाता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में 6 घंटे या उससे कम समय के लोग 7 घंटे के स्लीपरों की तुलना में पहिया के पीछे लगभग तीन गुना अधिक होने की संभावना रखते थे, जिसमें सुझाव दिया गया था कि 1 घंटा सभी अंतर कर सकता है।
अध्ययन के लेखक माइकल ग्रैंडनर, पीएच.डी. कहते हैं कि निष्कर्ष बताते हैं कि लोग बहुत अच्छे न्यायाधीश नहीं हैं कि वे ड्राइव करने में बहुत अक्षम हैं या नहीं। उनका कहना है कि नींद ड्राइविंग नशे में ड्राइविंग की तुलना में एक बड़ा सार्वजनिक सुरक्षा मुद्दा हो सकता है, क्योंकि अगर आपके पास पर्याप्त नींद आती है तो न्याय करने के लिए कोई सांस लेने वाला नहीं है। द नेशनल हाईवे ट्रैफिक एंड सेफ्टी एसोसिएशन के अनुसार, सालाना 40,000 से ज्यादा चोटें और 1,550 मौतें नींद वाली ड्राइविंग के कारण होती हैं।
यदि आप शॉर्ट पर कम चल रहे हैं तो आपको यात्रा करनी होगी, इसे डेलाइट घंटों के दौरान करें। ड्राइव करने का सबसे खतरनाक समय 1 से 6 एएम के बीच है, ग्रैंडनर कहते हैं, क्योंकि आपकी सर्कडियन प्रणाली (या आंतरिक घड़ी) आपको जागने के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर रही है।
जब आप सड़क पर हों, तो अपनी एकाग्रता बढ़ाने के लिए हर घंटे कम से कम 8 औंस पानी पीएं। शोधकर्ताओं का कहना है कि (यहां तक कि मामूली निर्जलीकरण भी आपकी सतर्कता को कम करता है, फ्रांसीसी अध्ययन के मुताबिक।) और यदि आपको खींचने की ज़रूरत है, तो 15 मिनट की बिजली की झपकी के लिए अपने फोन पर अलार्म सेट करें, क्योंकि लंबे समय से स्नूज़ से ठीक होना मुश्किल है।
अगर आपको यह कहानी पसंद है, तो आप इनसे प्यार करेंगेः
- सबसे खराब ड्राइवर्स कौन बनाता है?
- आगे लंबी ड्राइव? उठो!
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सड़क मारने से पहले आराम करो। नींद पर लापता होने से आपको एक नींद वाला ड्राइवर बन जाता है-भले ही आप थके हुए महसूस न करें, पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से एक नया अध्ययन पाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में छः घंटाटे या उससे कम समय के लोग सात घंटाटे के स्लीपरों की तुलना में पहिया के पीछे लगभग तीन गुना अधिक होने की संभावना रखते थे, जिसमें सुझाव दिया गया था कि एक घंटाटा सभी अंतर कर सकता है। अध्ययन के लेखक माइकल ग्रैंडनर, पीएच.डी. कहते हैं कि निष्कर्ष बताते हैं कि लोग बहुत अच्छे न्यायाधीश नहीं हैं कि वे ड्राइव करने में बहुत अक्षम हैं या नहीं। उनका कहना है कि नींद ड्राइविंग नशे में ड्राइविंग की तुलना में एक बड़ा सार्वजनिक सुरक्षा मुद्दा हो सकता है, क्योंकि अगर आपके पास पर्याप्त नींद आती है तो न्याय करने के लिए कोई सांस लेने वाला नहीं है। द नेशनल हाईवे ट्रैफिक एंड सेफ्टी एसोसिएशन के अनुसार, सालाना चालीस,शून्य से ज्यादा चोटें और एक,पाँच सौ पचास मौतें नींद वाली ड्राइविंग के कारण होती हैं। यदि आप शॉर्ट पर कम चल रहे हैं तो आपको यात्रा करनी होगी, इसे डेलाइट घंटों के दौरान करें। ड्राइव करने का सबसे खतरनाक समय एक से छः एएम के बीच है, ग्रैंडनर कहते हैं, क्योंकि आपकी सर्कडियन प्रणाली आपको जागने के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर रही है। जब आप सड़क पर हों, तो अपनी एकाग्रता बढ़ाने के लिए हर घंटे कम से कम आठ औंस पानी पीएं। शोधकर्ताओं का कहना है कि और यदि आपको खींचने की ज़रूरत है, तो पंद्रह मिनट की बिजली की झपकी के लिए अपने फोन पर अलार्म सेट करें, क्योंकि लंबे समय से स्नूज़ से ठीक होना मुश्किल है। अगर आपको यह कहानी पसंद है, तो आप इनसे प्यार करेंगेः - सबसे खराब ड्राइवर्स कौन बनाता है? - आगे लंबी ड्राइव? उठो!
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शिवराज सरकार के तीन मंत्रियों और विधायकों के बीच चल रहा सियासी घमासान बुधवार को थमता नजर आया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के दखल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आपत्ति के बाद मंत्री भूपेंद्र सिंह का विरोध कर रहे नेता फिलहाल शांत हो गए। इसी बीच पीडब्ल्यूडी मंत्री और सीनियर नेता गोपाल भार्गव ने बयान जारी कर कहा कि सब एक हैं। मुट्ठी की तरह।
मंगलवार को नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह के कामकाज की शिकायत सीएम से की गई थी। सीएम से मिलने वालों में पीडब्ल्यूडी मंत्री भार्गव, राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायक शैलेंद्र जैन व प्रदीप लारिया और जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया शामिल थे। सभी ने इस्तीफे तक की बात कह दी थी। इसी के बाद देर रात मुख्यमंत्री ने संगठन से चर्चा की। सुबह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ निवास पर पूरे मामले पर बात की। फिर दोनों ने नाराज गुट से चर्चा की।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि संघ ने नाराज नेताओं के रुख और बयानबाजी पर आपत्ति की। इसी के बाद सियासी घटनाक्रम बदला। इस मामले में जब भूपेंद्र सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई तो दोनों ने टिप्पणी से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि पार्टी एक है और 2023 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल करेगी।
पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव ने वीडियो जारी कर कहा, मेरी मंगलवार को सीएम और संगठन के लोगों से मुलाकात हुई। इस दौरान संगठनात्मक चर्चा के साथ आकांक्षी विधानसभा कैसे जीतें, इसकी चर्चा हुई। 1980 से पार्टी की मां की तरह सेवा कर रहा हूं। भाजपा के विधायक और मंत्री सब एक हैं। मुट्ठी की तरह बंधे हुए हैं।
राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कैबिनेट बैठक के बाद सीएम से मुलाकात हुई। मैंने सीएम जनसेवा अभियान के कार्यक्रम और प्रभार के जिलों के कामकाज पर बात की। इस दौरान सागर के अन्य लोग भी थे, जिन्होंने पहले से सीएम से समय लिया हुआ था। अलग-अलग उन्होंने अपनी बात रखी।
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शिवराज सरकार के तीन मंत्रियों और विधायकों के बीच चल रहा सियासी घमासान बुधवार को थमता नजर आया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के दखल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आपत्ति के बाद मंत्री भूपेंद्र सिंह का विरोध कर रहे नेता फिलहाल शांत हो गए। इसी बीच पीडब्ल्यूडी मंत्री और सीनियर नेता गोपाल भार्गव ने बयान जारी कर कहा कि सब एक हैं। मुट्ठी की तरह। मंगलवार को नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह के कामकाज की शिकायत सीएम से की गई थी। सीएम से मिलने वालों में पीडब्ल्यूडी मंत्री भार्गव, राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायक शैलेंद्र जैन व प्रदीप लारिया और जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया शामिल थे। सभी ने इस्तीफे तक की बात कह दी थी। इसी के बाद देर रात मुख्यमंत्री ने संगठन से चर्चा की। सुबह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ निवास पर पूरे मामले पर बात की। फिर दोनों ने नाराज गुट से चर्चा की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संघ ने नाराज नेताओं के रुख और बयानबाजी पर आपत्ति की। इसी के बाद सियासी घटनाक्रम बदला। इस मामले में जब भूपेंद्र सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई तो दोनों ने टिप्पणी से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि पार्टी एक है और दो हज़ार तेईस के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल करेगी। पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव ने वीडियो जारी कर कहा, मेरी मंगलवार को सीएम और संगठन के लोगों से मुलाकात हुई। इस दौरान संगठनात्मक चर्चा के साथ आकांक्षी विधानसभा कैसे जीतें, इसकी चर्चा हुई। एक हज़ार नौ सौ अस्सी से पार्टी की मां की तरह सेवा कर रहा हूं। भाजपा के विधायक और मंत्री सब एक हैं। मुट्ठी की तरह बंधे हुए हैं। राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कैबिनेट बैठक के बाद सीएम से मुलाकात हुई। मैंने सीएम जनसेवा अभियान के कार्यक्रम और प्रभार के जिलों के कामकाज पर बात की। इस दौरान सागर के अन्य लोग भी थे, जिन्होंने पहले से सीएम से समय लिया हुआ था। अलग-अलग उन्होंने अपनी बात रखी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने हरियाणा में एक दलित परिवार के सदस्यों को जिंदा जलाए जाने को लेकर बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है.
नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'बिहार में है जंगलराज और हरियाणा में दलित बच्चे जिंदा जला दिए गए, वो है मंगलराज? '
नीतीश ने कहा, 'हरियाणा में लोगों ने बीजेपी को वोट दिया और इनकी सरकार बन गई, पर फिर क्या हुआ? दलित बच्चे को जिंदा जला दिया गया. '
नीतीश ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की विवादास्पद टिप्पणी के बारे में कहा, 'एक केंद्रीय मंत्री ने बयान दे दिया कि अगर कोई कुत्ता को ढेला मार देगा, तो उसके लिए सरकार जवाबदेह थोड़े ही है. दलित बच्चे को जलाकर मार देने की तुलना उन्होंने कुत्ते को ढेला मारने से की. आप कल्पना कर सकते हैं ये किस मानसिकता के लोग हैं? '
गौरतलब है कि हरियाणा के सुनपेड गांव में दलित परिवार के चार लोगों को जिंदा जला दिया गया था, जिससे 2 बच्चों की मौत हो गई. हंगामा बढ़ने के बाद हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की.
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बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने हरियाणा में एक दलित परिवार के सदस्यों को जिंदा जलाए जाने को लेकर बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है. नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'बिहार में है जंगलराज और हरियाणा में दलित बच्चे जिंदा जला दिए गए, वो है मंगलराज? ' नीतीश ने कहा, 'हरियाणा में लोगों ने बीजेपी को वोट दिया और इनकी सरकार बन गई, पर फिर क्या हुआ? दलित बच्चे को जिंदा जला दिया गया. ' नीतीश ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की विवादास्पद टिप्पणी के बारे में कहा, 'एक केंद्रीय मंत्री ने बयान दे दिया कि अगर कोई कुत्ता को ढेला मार देगा, तो उसके लिए सरकार जवाबदेह थोड़े ही है. दलित बच्चे को जलाकर मार देने की तुलना उन्होंने कुत्ते को ढेला मारने से की. आप कल्पना कर सकते हैं ये किस मानसिकता के लोग हैं? ' गौरतलब है कि हरियाणा के सुनपेड गांव में दलित परिवार के चार लोगों को जिंदा जला दिया गया था, जिससे दो बच्चों की मौत हो गई. हंगामा बढ़ने के बाद हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की.
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मेरठ के जली कोठी क्षेत्र में हॉटस्पॉट सील करने पहुंची पुलिस पर पथराव की घटना के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा के हाथ में ईंट से चोट लगी है।
मेरठ। कोरोनावायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया पस्त हो चुकी है। मगर भारत में कोरोना के खिलाफ जंग में कुछ अपने ही लोग साथ नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोग कभी स्वास्थ्यकर्मियों तो कभी पुलिस विभाग के साथ अभद्रता कर रहे हैं। बेशक ये कोरोना योद्धा आम जनता को इस नए खतरे से बचाने के लिए अपने परिवारों से बेहद दूर तैनात हैं मगर फिर भी लोग इनका सम्मान करने की बजाय इनके साथ कभी मारपीट तो कभी पथराव तक कर रहे हैं।
ऐसी ही एक घटना हाल ही में मेरठ से सामने आई है जहां मेरठ के जली कोठी क्षेत्र में हॉटस्पॉट सील करने पहुंची पुलिस पर पथराव किया गया है और पुलिस की टीम पर लोगों ने जोरदार हमला किया है। इस पथराव की घटना के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा के हाथ में ईंट से चोट भी लगी है। पुलिस की टीम इस इलाके को सील करने पहुंची थी क्योंकि यहां से कल इलाके के तीन जमाती कोविड-19 पॉजिटिव मिले थे।
इसके बाद एहतियातन पुलिस इलाका सील करने पहुंची तो लोगों ने विरोध कर दिया। लोग जब पथराव करने लगे तो कई थानों की पुलिस फोर्स ने पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा। इस घटना में एक इमाम समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और सभी पर रासुका की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर में भी स्वास्थ्य कर्मचारियों पर कुछ लोगों ने पथराव किया था। जिसके बाद उन लोगों पर भी कार्रवाई की गई थी।
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मेरठ के जली कोठी क्षेत्र में हॉटस्पॉट सील करने पहुंची पुलिस पर पथराव की घटना के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा के हाथ में ईंट से चोट लगी है। मेरठ। कोरोनावायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया पस्त हो चुकी है। मगर भारत में कोरोना के खिलाफ जंग में कुछ अपने ही लोग साथ नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोग कभी स्वास्थ्यकर्मियों तो कभी पुलिस विभाग के साथ अभद्रता कर रहे हैं। बेशक ये कोरोना योद्धा आम जनता को इस नए खतरे से बचाने के लिए अपने परिवारों से बेहद दूर तैनात हैं मगर फिर भी लोग इनका सम्मान करने की बजाय इनके साथ कभी मारपीट तो कभी पथराव तक कर रहे हैं। ऐसी ही एक घटना हाल ही में मेरठ से सामने आई है जहां मेरठ के जली कोठी क्षेत्र में हॉटस्पॉट सील करने पहुंची पुलिस पर पथराव किया गया है और पुलिस की टीम पर लोगों ने जोरदार हमला किया है। इस पथराव की घटना के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा के हाथ में ईंट से चोट भी लगी है। पुलिस की टीम इस इलाके को सील करने पहुंची थी क्योंकि यहां से कल इलाके के तीन जमाती कोविड-उन्नीस पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद एहतियातन पुलिस इलाका सील करने पहुंची तो लोगों ने विरोध कर दिया। लोग जब पथराव करने लगे तो कई थानों की पुलिस फोर्स ने पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा। इस घटना में एक इमाम समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और सभी पर रासुका की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर में भी स्वास्थ्य कर्मचारियों पर कुछ लोगों ने पथराव किया था। जिसके बाद उन लोगों पर भी कार्रवाई की गई थी।
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मूवी देखने गए हो और पॉपकॉर्न की याद ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। पॉपकॉर्न खाना हर उम्र के व्यक्ति को खूब भाता है। लेकिन क्या आपको पता है पॉपकॉर्न मूवी देखते-देखते समय काटने के लिए ही नहीं बल्कि हमारी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पॉपकॉर्न के सेवन से कौन सी बीमारियां दूर भागती हैं।
आजकल के लाइफस्टाइल के कारण काफी लोगों को कब्ज की समस्या हो गई है। इस समस्या में व्यक्ति का पेट फूलता है,पेट में बार-बार दर्द महसूस होता है। पॉपकॉर्न में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो मोटापा कम करने के साथ-साथ कब्ज की समस्या से भी छुटकारा दिला देता है। फाइबर हमारे शरीर की आंत पर चिपके मल को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर आपकी कब्ज की समस्या बढ़ती जा रही है तो आपको फाइबर युक्त पॉपकॉर्न का सेवन जरूर करना चाहिए।
पॉपकॉर्न में विटामिन और खनिज की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जिससे भूख जल्दी शांत हो जाती है। इतना ही नहीं यह खाना वजन को कम करने में भी मदद करता है।
पॉपकॉर्न को कैंसररोधी भी माना जाता है। इसे खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव किया जा सकता है। पॉपकॉर्न में मौजूद फाइबर और पालीफिनाइल कैंसर जैसे रोगों के खतरों को कम करते हैं।
हमेशा कोशिश करें कि पॉपकॉर्न में नमक की मात्रा कम रखें। साथ ही पॉपकॉर्न को हमेशा काली मिर्च पाउडर और लहसुन के साथ ही खाएं ऐसा करने से दिल से जुड़ी समस्याओं का नाथ होता है। नमक कम लगाकर खाने से रक्तचाप भी ठीक रहता है साथ ही पॉपकॉर्न का टेस्ट भी मिलता है।
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मूवी देखने गए हो और पॉपकॉर्न की याद ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। पॉपकॉर्न खाना हर उम्र के व्यक्ति को खूब भाता है। लेकिन क्या आपको पता है पॉपकॉर्न मूवी देखते-देखते समय काटने के लिए ही नहीं बल्कि हमारी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पॉपकॉर्न के सेवन से कौन सी बीमारियां दूर भागती हैं। आजकल के लाइफस्टाइल के कारण काफी लोगों को कब्ज की समस्या हो गई है। इस समस्या में व्यक्ति का पेट फूलता है,पेट में बार-बार दर्द महसूस होता है। पॉपकॉर्न में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो मोटापा कम करने के साथ-साथ कब्ज की समस्या से भी छुटकारा दिला देता है। फाइबर हमारे शरीर की आंत पर चिपके मल को बाहर निकालने में मदद करता है। अगर आपकी कब्ज की समस्या बढ़ती जा रही है तो आपको फाइबर युक्त पॉपकॉर्न का सेवन जरूर करना चाहिए। पॉपकॉर्न में विटामिन और खनिज की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जिससे भूख जल्दी शांत हो जाती है। इतना ही नहीं यह खाना वजन को कम करने में भी मदद करता है। पॉपकॉर्न को कैंसररोधी भी माना जाता है। इसे खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव किया जा सकता है। पॉपकॉर्न में मौजूद फाइबर और पालीफिनाइल कैंसर जैसे रोगों के खतरों को कम करते हैं। हमेशा कोशिश करें कि पॉपकॉर्न में नमक की मात्रा कम रखें। साथ ही पॉपकॉर्न को हमेशा काली मिर्च पाउडर और लहसुन के साथ ही खाएं ऐसा करने से दिल से जुड़ी समस्याओं का नाथ होता है। नमक कम लगाकर खाने से रक्तचाप भी ठीक रहता है साथ ही पॉपकॉर्न का टेस्ट भी मिलता है।
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कोई भी कलाकृति तभी मौजूद होती है जब तीन स्थितियाँ होंः लेखक, नायक और दर्शक। और अगर लेखक (स्टोन) और नायक (पुतिन) एक आम भाषा खोजने में कामयाब रहे, तो दर्शकों का क्या होगा? क्या उसने फिल्म को समझा, उसके साथ एक आम भाषा पाई? और, सबसे महत्वपूर्ण बात, आप वास्तव में कैसे समझे?
यहां हमें तुरंत एक आरक्षण करना चाहिए कि अब हम उन पेशेवर आलोचकों पर ध्यान केंद्रित न करें जिनकी राय मुख्य संपादक और मीडिया मालिकों की इच्छाओं के अनुसार पूर्ण रूप से बदल जाती है। और क्या, अंत में, सामान्य लोग सोचते हैं, कम पक्षपाती हैं?
मैं अंग्रेजी बोलने वाले ट्विटर से कुछ संक्षिप्त राय उद्धृत करूंगा, और मैं उनमें से दो से शुरुआत करूंगा।
"पुतिन के साथ साक्षात्कार को देखने के बाद, कोई यह समझ सकता है कि यह आदमी इतना डरता क्यों है और दुनिया में सबसे शक्तिशाली नेता क्यों है। "
और क्यों? लेकिन क्यों!
"पुतिन अपने लोगों के करिश्माई, वाक्पटु, मजाकिया और समझदार नेता हैं। किसी भी नवीनतम अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में क्या कहना मुश्किल है। दुर्भाग्य से। "
अपने आप में चतुर, इन दो शोधों की तुलना काफी है, लेकिन फिर भी मैं इस विषय को अधिक गहराई से प्रकट करना चाहता हूं।
वास्तव में, पुतिन के बारे में एक फिल्म बनाते हुए, ओलिवर स्टोन एक गोल सेट करें? महिमा? आगे की कई पीढ़ियों के लिए स्टोन पर्याप्त है। पैसा? मुझे संदेह है कि उनकी पिछली फिल्म परियोजनाओं को शायद ही शुद्ध रूप से व्यावसायिक कहा जा सकता है। यदि आप उसे अपना मानते हैं, तोः "मुझे दुनिया से प्यार है। मैं दुनिया में राज करना चाहता हूं। मेरा मानना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस महान भागीदार बन सकते हैं . . . इस तरह की डिग्री के लिए सब कुछ क्यों खराब हो गया है? "लॉस एंजिल्स टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में स्टोन ने कहा। "
और अब विद्रोही निर्देशक ने एक "राष्ट्रीय राजनयिक" के कार्य को लेने का फैसला कियाः "कला की जादुई शक्ति" पर भरोसा करते हुए, पुतिन के "भयानक" दुनिया को दिखाने के लिए कि वह क्या रहता है और योजना बना रहा है, पहले-हाथ को दिखाने के लिए "कला की जादुई शक्ति" पर निर्भर है। और सबसे अप्रत्याशित प्रभाव हासिल किया! अचानक यह पता चला कि वह, शायद, "पूरी दुनिया में शांति" के कारण चोट लगी है। यही है, एक तरफ, निश्चित रूप से, इससे मदद मिली - सैकड़ों लाखों लोग पुतिन पर अधिक उद्देश्यपूर्ण नज़र डाल सकते थे, और दूसरी ओर, उन्होंने निश्चित रूप से नुकसान पहुंचाया, क्योंकि लोगों ने इसकी तुलना की . . . और विश्व शांति पर निर्भर लोगों की यह तुलना उन पर निर्भर करती है। और क्रोधित हो गया। पुतिन, निश्चित रूप से, यह भविष्यवाणी करते हैं, जब उन्होंने स्टोन की भविष्यवाणी की कि वह विशेष रूप से अपने मूल फिलिस्तीन में फिल्म प्राप्त करेंगे।
सबसे "भयानक" जिसने फिल्म दिखाई (निर्देशक से बहुत इरादे के बिना - बस दिखाया गया है, और सभी) - यह स्केल, पर्याप्तता और सिद्धांत है। यह वही है जो उनके नेता में किसी भी सामान्य व्यक्ति द्वारा सहज रूप से मूल्यवान है, लेकिन एक ही समय में, शायद ही कभी इस तरह के एक विजेता संयोजन में पाया जाता है। पर्याप्तता के बिना पैमाने हिटलर है। और सिद्धांत के बिना पर्याप्तता का दावा सस्ता, फेसलेस लोकलुभावन है।
इसलिए, ऐसा लगता था कि एक राजनीतिक नेता के ये कट्टरपंथी गुण, अचानक, जब - पुतिन हैं। एक व्यक्ति जो ध्यान से बोलता है, सत्यापित करता है, लेकिन ईमानदारी से। जो तीव्र विषयों को दरकिनार नहीं करता है, लेकिन टकराव के लिए नहीं जाता है। जो जिम्मेदारी से डरता नहीं है, लेकिन विकल्पों की सावधानीपूर्वक गणना करता है। जुबान पर तेज, इरुडेट। यह कौन था या वहाँ था? पाखंडी मम्मी ओबामा? साइको बुश? मलबे क्लिंटन? या फेसलेस हॉलैंड, कैमरन और अन्य रिफ़्राफ़ की मेजबानी? ट्रम्प, दुर्भाग्य से, अभी तक शोमैन की प्रतिष्ठा को नहीं छोड़ पाए हैं।
मैं बस, अपने शब्दों को स्पष्ट करते हुए, फिल्म के कुछ उद्धरण दूंगाः
"क्या आपको लगता है कि हमारा लक्ष्य यह है कि हमें किसी को कुछ साबित करना है? " हमारा लक्ष्य अपने देश को मजबूत करना है। हम किसी चीज का बहाना नहीं बना रहे हैं। रूस एक हजार साल के लिए विकसित हुआ है "- कोई अंतर्ज्ञान, अभिजात वर्ग की गरिमा," पहाड़ी पर चमकते शहर "के संबंध में लंबे समय तक एक अभूतपूर्व स्वर, संयुक्त राज्य अमेरिका।
"स्नोडेन हमें कुछ जानकारी नहीं देने वाले थे। उन्होंने संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया। और जब यह पता चला कि हम अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो मैं शायद बहुतों को निराश करूंगा, शायद आप - मैंने कहा कि यह हमारे लिए नहीं है। हमारे पहले से ही संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जटिल संबंध हैं, हमें अतिरिक्त जटिलताओं की आवश्यकता नहीं है "- एक ही समय में, चीजों के बारे में एक शांत दृष्टिकोण, शांत व्यावहारिकता।
"एकमात्र विश्व शक्ति के रूप में स्वयं के बारे में जागरूकता, लाखों लोगों के सिर पर अपनी विशिष्टता के बारे में विचारों के साथ ड्राइविंग करना समाज में ऐसी शाही सोच को बढ़ावा देता है। और इसके बदले में एक उपयुक्त विदेश नीति की आवश्यकता होती है, जो समाज से अपेक्षा करता है। और देश के नेतृत्व को इस तरह के तर्क में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन व्यवहार में यह पता चलता है कि यह संयुक्त राज्य के लोगों के हितों को पूरा नहीं करता है, जैसा कि मैं कल्पना करता हूं, "मुझे यकीन है कि दसियों और लाखों अमेरिकी, जो ट्रम्प निर्वाचित हुए हैं, इस दृष्टिकोण से सहमत होंगे। लेकिन अभी के लिए, हालांकि, वे उससे अधिक निराश हैं . . . यह आवश्यक है, चिपक जाता है, पुतिन के साथ अनिच्छा से सहमत होता है।
और पुतिन ने विरोधी सेमाइट्स के साथ रसोफोब्स की उपयुक्त तुलना की; स्टालिन, क्रॉमवेल और नेपोलियन के बीच आकर्षित समानताएं; उन्होंने आशा व्यक्त की कि Ukrainians और रूसियों की भावी पीढ़ी आम अच्छे के लिए अपने प्रयासों को संयोजित करने में सक्षम होगी; परिवार के बारे में बात की - और यह सब सामान्य था। नहीं "भयानक", "हैरान", "बेवजह" - अर्थात्, यह सामान्य हैः एक बुद्धिमान व्यक्ति ने अपनी बात व्यक्त की, और एक अन्य बुद्धिमान व्यक्ति ने बहस करके सवालों में मदद की। भगवान, बस कुछ की पर्याप्तता का उत्सव!
इसलिए, आश्चर्य की बात यह है कि फिल्म के दर्शकों में से एक ने लिखाः "ओलिवर स्टोन अमेरिका को फिर से महान बनाता है": महानता सिर्फ पर्याप्तता में है और इसके बिना असंभव है।
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कोई भी कलाकृति तभी मौजूद होती है जब तीन स्थितियाँ होंः लेखक, नायक और दर्शक। और अगर लेखक और नायक एक आम भाषा खोजने में कामयाब रहे, तो दर्शकों का क्या होगा? क्या उसने फिल्म को समझा, उसके साथ एक आम भाषा पाई? और, सबसे महत्वपूर्ण बात, आप वास्तव में कैसे समझे? यहां हमें तुरंत एक आरक्षण करना चाहिए कि अब हम उन पेशेवर आलोचकों पर ध्यान केंद्रित न करें जिनकी राय मुख्य संपादक और मीडिया मालिकों की इच्छाओं के अनुसार पूर्ण रूप से बदल जाती है। और क्या, अंत में, सामान्य लोग सोचते हैं, कम पक्षपाती हैं? मैं अंग्रेजी बोलने वाले ट्विटर से कुछ संक्षिप्त राय उद्धृत करूंगा, और मैं उनमें से दो से शुरुआत करूंगा। "पुतिन के साथ साक्षात्कार को देखने के बाद, कोई यह समझ सकता है कि यह आदमी इतना डरता क्यों है और दुनिया में सबसे शक्तिशाली नेता क्यों है। " और क्यों? लेकिन क्यों! "पुतिन अपने लोगों के करिश्माई, वाक्पटु, मजाकिया और समझदार नेता हैं। किसी भी नवीनतम अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में क्या कहना मुश्किल है। दुर्भाग्य से। " अपने आप में चतुर, इन दो शोधों की तुलना काफी है, लेकिन फिर भी मैं इस विषय को अधिक गहराई से प्रकट करना चाहता हूं। वास्तव में, पुतिन के बारे में एक फिल्म बनाते हुए, ओलिवर स्टोन एक गोल सेट करें? महिमा? आगे की कई पीढ़ियों के लिए स्टोन पर्याप्त है। पैसा? मुझे संदेह है कि उनकी पिछली फिल्म परियोजनाओं को शायद ही शुद्ध रूप से व्यावसायिक कहा जा सकता है। यदि आप उसे अपना मानते हैं, तोः "मुझे दुनिया से प्यार है। मैं दुनिया में राज करना चाहता हूं। मेरा मानना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस महान भागीदार बन सकते हैं . . . इस तरह की डिग्री के लिए सब कुछ क्यों खराब हो गया है? "लॉस एंजिल्स टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में स्टोन ने कहा। " और अब विद्रोही निर्देशक ने एक "राष्ट्रीय राजनयिक" के कार्य को लेने का फैसला कियाः "कला की जादुई शक्ति" पर भरोसा करते हुए, पुतिन के "भयानक" दुनिया को दिखाने के लिए कि वह क्या रहता है और योजना बना रहा है, पहले-हाथ को दिखाने के लिए "कला की जादुई शक्ति" पर निर्भर है। और सबसे अप्रत्याशित प्रभाव हासिल किया! अचानक यह पता चला कि वह, शायद, "पूरी दुनिया में शांति" के कारण चोट लगी है। यही है, एक तरफ, निश्चित रूप से, इससे मदद मिली - सैकड़ों लाखों लोग पुतिन पर अधिक उद्देश्यपूर्ण नज़र डाल सकते थे, और दूसरी ओर, उन्होंने निश्चित रूप से नुकसान पहुंचाया, क्योंकि लोगों ने इसकी तुलना की . . . और विश्व शांति पर निर्भर लोगों की यह तुलना उन पर निर्भर करती है। और क्रोधित हो गया। पुतिन, निश्चित रूप से, यह भविष्यवाणी करते हैं, जब उन्होंने स्टोन की भविष्यवाणी की कि वह विशेष रूप से अपने मूल फिलिस्तीन में फिल्म प्राप्त करेंगे। सबसे "भयानक" जिसने फिल्म दिखाई - यह स्केल, पर्याप्तता और सिद्धांत है। यह वही है जो उनके नेता में किसी भी सामान्य व्यक्ति द्वारा सहज रूप से मूल्यवान है, लेकिन एक ही समय में, शायद ही कभी इस तरह के एक विजेता संयोजन में पाया जाता है। पर्याप्तता के बिना पैमाने हिटलर है। और सिद्धांत के बिना पर्याप्तता का दावा सस्ता, फेसलेस लोकलुभावन है। इसलिए, ऐसा लगता था कि एक राजनीतिक नेता के ये कट्टरपंथी गुण, अचानक, जब - पुतिन हैं। एक व्यक्ति जो ध्यान से बोलता है, सत्यापित करता है, लेकिन ईमानदारी से। जो तीव्र विषयों को दरकिनार नहीं करता है, लेकिन टकराव के लिए नहीं जाता है। जो जिम्मेदारी से डरता नहीं है, लेकिन विकल्पों की सावधानीपूर्वक गणना करता है। जुबान पर तेज, इरुडेट। यह कौन था या वहाँ था? पाखंडी मम्मी ओबामा? साइको बुश? मलबे क्लिंटन? या फेसलेस हॉलैंड, कैमरन और अन्य रिफ़्राफ़ की मेजबानी? ट्रम्प, दुर्भाग्य से, अभी तक शोमैन की प्रतिष्ठा को नहीं छोड़ पाए हैं। मैं बस, अपने शब्दों को स्पष्ट करते हुए, फिल्म के कुछ उद्धरण दूंगाः "क्या आपको लगता है कि हमारा लक्ष्य यह है कि हमें किसी को कुछ साबित करना है? " हमारा लक्ष्य अपने देश को मजबूत करना है। हम किसी चीज का बहाना नहीं बना रहे हैं। रूस एक हजार साल के लिए विकसित हुआ है "- कोई अंतर्ज्ञान, अभिजात वर्ग की गरिमा," पहाड़ी पर चमकते शहर "के संबंध में लंबे समय तक एक अभूतपूर्व स्वर, संयुक्त राज्य अमेरिका। "स्नोडेन हमें कुछ जानकारी नहीं देने वाले थे। उन्होंने संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया। और जब यह पता चला कि हम अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो मैं शायद बहुतों को निराश करूंगा, शायद आप - मैंने कहा कि यह हमारे लिए नहीं है। हमारे पहले से ही संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जटिल संबंध हैं, हमें अतिरिक्त जटिलताओं की आवश्यकता नहीं है "- एक ही समय में, चीजों के बारे में एक शांत दृष्टिकोण, शांत व्यावहारिकता। "एकमात्र विश्व शक्ति के रूप में स्वयं के बारे में जागरूकता, लाखों लोगों के सिर पर अपनी विशिष्टता के बारे में विचारों के साथ ड्राइविंग करना समाज में ऐसी शाही सोच को बढ़ावा देता है। और इसके बदले में एक उपयुक्त विदेश नीति की आवश्यकता होती है, जो समाज से अपेक्षा करता है। और देश के नेतृत्व को इस तरह के तर्क में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन व्यवहार में यह पता चलता है कि यह संयुक्त राज्य के लोगों के हितों को पूरा नहीं करता है, जैसा कि मैं कल्पना करता हूं, "मुझे यकीन है कि दसियों और लाखों अमेरिकी, जो ट्रम्प निर्वाचित हुए हैं, इस दृष्टिकोण से सहमत होंगे। लेकिन अभी के लिए, हालांकि, वे उससे अधिक निराश हैं . . . यह आवश्यक है, चिपक जाता है, पुतिन के साथ अनिच्छा से सहमत होता है। और पुतिन ने विरोधी सेमाइट्स के साथ रसोफोब्स की उपयुक्त तुलना की; स्टालिन, क्रॉमवेल और नेपोलियन के बीच आकर्षित समानताएं; उन्होंने आशा व्यक्त की कि Ukrainians और रूसियों की भावी पीढ़ी आम अच्छे के लिए अपने प्रयासों को संयोजित करने में सक्षम होगी; परिवार के बारे में बात की - और यह सब सामान्य था। नहीं "भयानक", "हैरान", "बेवजह" - अर्थात्, यह सामान्य हैः एक बुद्धिमान व्यक्ति ने अपनी बात व्यक्त की, और एक अन्य बुद्धिमान व्यक्ति ने बहस करके सवालों में मदद की। भगवान, बस कुछ की पर्याप्तता का उत्सव! इसलिए, आश्चर्य की बात यह है कि फिल्म के दर्शकों में से एक ने लिखाः "ओलिवर स्टोन अमेरिका को फिर से महान बनाता है": महानता सिर्फ पर्याप्तता में है और इसके बिना असंभव है।
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ब्यूरो पीलीभीत/गजरौला।
पुलिस ने होली से पूर्व बालिका के साथ दुराचार करने के संदिग्ध आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई बालिका के होश में आने के बाद आरोपी के बताए गए हुलिए के आधार पर की है।
गजरौला थाना क्षेत्र के एक गांव में बुधवार की शाम खेत में खेल रही पांच साल की एक मासूम के साथ एक वहशी ने दुराचार किया था। दुष्कर्म के बाद बच्ची को लहुलुहान हालात में छोड़कर फरार हो गया था। सूचना पर घर वालों ने पुलिस को सूचना देकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बच्ची के बेहोश होने के कारण आरोपी की जानकारी नहीं मिल पाई थी। जिसपर पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था। इलाज के बाद होश में आने पर बालिका ने आरोपी के हुलिए के बारे में पुलिस को बताया। इसके आधार पर पुलिस ने गांव के ही एक कथित बाबा को हिरासत में लिया है। महिला एसओ अनुपम सिंह ने बताया कि बच्ची की हालत में सुधार है और उसने आरोपी के बारे में जो जानकारी दी है उससे गजरौला पुलिस को अवगत कराया दिया गया है। इस बाबत एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया बच्ची के बयानों पर आधार पर गांव के ही एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। जांच में यदि आरोपी की पहचान सही पाई गई तो उसे जेल भेज जाएगा।
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ब्यूरो पीलीभीत/गजरौला। पुलिस ने होली से पूर्व बालिका के साथ दुराचार करने के संदिग्ध आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई बालिका के होश में आने के बाद आरोपी के बताए गए हुलिए के आधार पर की है। गजरौला थाना क्षेत्र के एक गांव में बुधवार की शाम खेत में खेल रही पांच साल की एक मासूम के साथ एक वहशी ने दुराचार किया था। दुष्कर्म के बाद बच्ची को लहुलुहान हालात में छोड़कर फरार हो गया था। सूचना पर घर वालों ने पुलिस को सूचना देकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बच्ची के बेहोश होने के कारण आरोपी की जानकारी नहीं मिल पाई थी। जिसपर पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था। इलाज के बाद होश में आने पर बालिका ने आरोपी के हुलिए के बारे में पुलिस को बताया। इसके आधार पर पुलिस ने गांव के ही एक कथित बाबा को हिरासत में लिया है। महिला एसओ अनुपम सिंह ने बताया कि बच्ची की हालत में सुधार है और उसने आरोपी के बारे में जो जानकारी दी है उससे गजरौला पुलिस को अवगत कराया दिया गया है। इस बाबत एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया बच्ची के बयानों पर आधार पर गांव के ही एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। जांच में यदि आरोपी की पहचान सही पाई गई तो उसे जेल भेज जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सलमान खान क्या कर रहे हैं? इन तस्वीरों में इस सवाल का जवाब छुपा है। (तस्वीरः दि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप)
हाईकोर्ट से राहत के बाद सलमान खान अपने मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी आपार्टमेंट में ही कैद हो गए हैं। (तस्वीरः दि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप)
सलमान इन दिनों में अपने घर में ही आराम फरमा रहे हैं। ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो अपने बगीचे में थे। (तस्वीरः दि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप)
यहां सलमान सलमान को कॉफी पीते देखा गया। साथ ही वो अपने पालतू जानवरों के साथ खेलते भी नजर आए।
आजकल सलमान अपने बगीचे में ही लोगों से मिलना भी पसंद करते हैं।
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बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सलमान खान क्या कर रहे हैं? इन तस्वीरों में इस सवाल का जवाब छुपा है। हाईकोर्ट से राहत के बाद सलमान खान अपने मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी आपार्टमेंट में ही कैद हो गए हैं। सलमान इन दिनों में अपने घर में ही आराम फरमा रहे हैं। ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो अपने बगीचे में थे। यहां सलमान सलमान को कॉफी पीते देखा गया। साथ ही वो अपने पालतू जानवरों के साथ खेलते भी नजर आए। आजकल सलमान अपने बगीचे में ही लोगों से मिलना भी पसंद करते हैं।
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यदि आप नौकरी पाने का निर्णय लेते हैं या बसनए परिचितों को बनाने, एक अच्छी पहली छाप बनाने में सक्षम होने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है अपने आसपास के लोगों को खुश करने की कोशिश करें, और फिर आप शायद अपना स्थान प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, नए पड़ोसियों का पता लगाने के लिए, आप अपने दरवाजे पर दस्तक दे सकते हैं और कुछ दे सकते हैं, अपार्टमेंट के पूर्व किरायेदारों के बारे में कुछ मजेदार कहानियों को बता सकते हैं। यह जानने के लिए एक महान अभ्यास होगा कि लोगों को अपने आप में कैसे रखना चाहिए।
ओह, हमारे नाम की आवाज कितनी मिठाई है! यह अच्छा है, जब आपको नाम से बुलाया जाता है, आखिरी नाम से नहीं। मुझे याद है जब मैं स्कूल में था, मैं इस अंतर को समझ नहीं सका। अब मैं समझता हूं उदाहरण के लिए, जब शिक्षक ने मुझे नाम से फोन किया, ऐसा लग रहा था कि उसने अपना सम्मान और निकट स्थान दिखाया था। वर्षों से यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक इस तरह से व्यवहार करता है, क्योंकि वह जानता था कि लोगों को अपने आप में कैसे रखना चाहिए, जिसमें मुझे शामिल है यदि आप जानना चाहते हैं कि कैसे वार्ताकार को व्यवस्थित करना है, तो इसे नाम के नाम से सम्मान दिखाएं। एक और महत्वपूर्ण तथ्यः आंखें- यह हमारी आत्मा का दर्पण है जब किसी व्यक्ति से व्यवहार करते हैं, तो उसकी आंखों की जांच करें, उसमें से प्रत्येक शब्द को ध्यान से सुनो। और अगर वह आपकी आंखों में आपकी रुचि को देखता है, तो सफलता का आश्वासन दिया जाता है!
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यदि आप नौकरी पाने का निर्णय लेते हैं या बसनए परिचितों को बनाने, एक अच्छी पहली छाप बनाने में सक्षम होने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है अपने आसपास के लोगों को खुश करने की कोशिश करें, और फिर आप शायद अपना स्थान प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, नए पड़ोसियों का पता लगाने के लिए, आप अपने दरवाजे पर दस्तक दे सकते हैं और कुछ दे सकते हैं, अपार्टमेंट के पूर्व किरायेदारों के बारे में कुछ मजेदार कहानियों को बता सकते हैं। यह जानने के लिए एक महान अभ्यास होगा कि लोगों को अपने आप में कैसे रखना चाहिए। ओह, हमारे नाम की आवाज कितनी मिठाई है! यह अच्छा है, जब आपको नाम से बुलाया जाता है, आखिरी नाम से नहीं। मुझे याद है जब मैं स्कूल में था, मैं इस अंतर को समझ नहीं सका। अब मैं समझता हूं उदाहरण के लिए, जब शिक्षक ने मुझे नाम से फोन किया, ऐसा लग रहा था कि उसने अपना सम्मान और निकट स्थान दिखाया था। वर्षों से यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक इस तरह से व्यवहार करता है, क्योंकि वह जानता था कि लोगों को अपने आप में कैसे रखना चाहिए, जिसमें मुझे शामिल है यदि आप जानना चाहते हैं कि कैसे वार्ताकार को व्यवस्थित करना है, तो इसे नाम के नाम से सम्मान दिखाएं। एक और महत्वपूर्ण तथ्यः आंखें- यह हमारी आत्मा का दर्पण है जब किसी व्यक्ति से व्यवहार करते हैं, तो उसकी आंखों की जांच करें, उसमें से प्रत्येक शब्द को ध्यान से सुनो। और अगर वह आपकी आंखों में आपकी रुचि को देखता है, तो सफलता का आश्वासन दिया जाता है!
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अर्जुन कपूर अक्सर अपनी बहनों की वजह से चर्चा में रहते हैं। वो कभी अंशुला तो कभी जाह्नवी कपूर का हौसला बढ़ाते नजर आते हैं। अभी हाल ही में वो अपनी बहन सोनम के काम की तारीफ करते हुए नजर आए। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है वह ऐसे भाई हैं जो हर मोड़ पर अपनी बहनों के साथ खड़े होते हैं। अर्जुन कपूर ने सोनम के साथ अपने बचपन की तस्वीर शेयर करके लिखा कि भाई-बहन का रिश्ता तो होता ही है प्यार, शरारतों और ढेर सारे इमोशंस वाला। आमतौर पर इन इमोशन को शब्दों ढाल पाना उतना ही मुश्किल लगता है जैसे किसी बड़े से पहाड़ पर चढ़ना लेकिन जब भी कोई भाई या बहन इन इमोशन को शब्दों में ढालता है तो पढ़ने वाला हर इंसान भावुक हो जाता है। ये इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तस्वीरों में अर्जुन और सोनम दोनों ही बड़े क्यूट लग रहे हैं।
हर मां अपने बेटे की अच्छी सेहत चाहती है और इसके लिए नसीहतें भी देती रहती हैं। ऐसी ही कुछ नसीहत अनुपम खेर को उनकी मां से मिली है। मां से अपने बातचीत के वीडियो को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर भी किया है। अनुपम खेर ने अपनी मां के साथ बातचीत करते हुए एक वीडियो शेयर किया जिसमें उनकी मां कह रही हैं, कि वो सुस्त लग रहे हैं ये बात भले तुम्हें नहीं पता चल रही है लेकिन मुझे ऐसा लगता है। अब वो अपना वजन कम न करें, वो अब बहुत अच्छे लग रहे हैं। उनसे ज्यादा मोटे तो अनिल कपूर हैं। फिर वो हंसते हुए आगे कह रही हैं, अनिल कपूर भी अच्छा है और मेरा बेटा है। लेकिन अब वो वजन न कम करें।
राजस्थान पुलिस ने रणवीर सिंह के लिए हाल ही में एक ट्वीट किया। रणवीर सिंह ने राजस्थान पुलिस की तारीफ में एक ट्वीट किया था, उसी ट्वीट पर राजस्थान पुलिस ने रिप्लाई किया। लोगों को ये ट्वीट खूब पसंद आ रहा है। राजस्थान पुलिस ने ट्वीट में लिखा - आप एक गली बॉय की तरह आए पर आप तो उससे ज्यादा बाजीराव मस्तानी निकले और आखिर में सुपर कॉप सिंबा बन गए। आपसे मिलकर हमें खुशी हुई। अगली बार जब आप दीपिका पादुकोण के साथ राजस्थान आएंगे तो लोग आपसे बैंड बाजा बारात के साथ मिलने आएंगे।
कुम्भ क्षेत्र में हुई कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने देशभक्ति से भरपूर फिल्म 'उरी द सर्जिकल स्ट्राइक' को टैक्स फ्री कर दिया है। देशभक्ति से भरपूर फिल्म की हर जगह हो रही तारीफ को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म पर स्टेट जीएसटी न लगाने का निर्णय लिया है। सच्ची घटना पर आधारित आर्मी ड्रामा को राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की और अब इससे फिल्म उरी को फायदा मिलेगा।
अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी सलमान खान की फिल्म 'भारत' का टीजर रिलीज हो गया है। भारत फिल्म इसी साल ईद के मौक पर रिलीज की जाएगी। 1 मिनट 26 सेकेंड के टीजर में सलमान खान ने एक डायलॉग से खुद को इंट्रेड्यूस किया है। फिल्म में सलमान खान के किरदार का नाम भारत होगा और इसके बाद सरनेम किस वजह से नहीं लगाया, इस बारे में उन्होंने पूरी तरह से डिस्क्राइब किया।
खाली पन्नों पर जब अपनी कलम चलाओ तो उसे इतिहास का हिस्सा बनाओं। पर आज का जमाना डेस्कटॉप, लैपटॉप, आईपैड और मोबाइल पर लिख कर छा जाने का है। ठाकरे फिल्म के संवाद और गाने लिखने वाले मनोज यादव की ख़ुद की कहानी हर मोड़ से गुज़री है। ठाकरे मूवी देखने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मनोज की तारीफ करते हुए कहा कि हम तुम्हारें शब्दों में बाबा को देख सकते हैं। मनोज खुद कहते हैं कि उद्धव ठाकरे जी की इस तारीफ से खुश हैं और लिखते हैं कि कोई भी अवॉर्ड इन शब्दों की जगह नहीं ले सकता है।यूपी के आजमगढ़ के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र भरौली निवासी मनोज ने मन की उलझनों और जिंदगी के अनुभवों को पन्नों से लेकर मोबाइल तक पर ऐसा उकेरा है कि वो इतिहास के सुनहरे पन्ने पर अपना नाम दर्ज करवाते जा रहे हैं। 70 एमएम के पर्दे पर आपने पीकू, रईस, गब्बर इज बैक, निल बट्टे सन्नाटा, वेस्ट इस वेस्ट, अज़हर, बॉस, धनक समेत कई फिल्मों के गाने लिख चुके हैं। मनोज यादव ने मराठी फिल्मों में मराठी भाषा में भी गीत लिखे हैं और फिल्म वेंटिलेटर के "बाबा" गीत के लिए मटा सम्मान से प्रस्कृत भी किया गया है, आज उनके गाने लोग गुनगुनाते हैं। जिस साल भारत ने विश्व कप 2011 को जीता उस साल उन्होंने उस विश्व कप का थीम सांग भी लिख दिया..."दे घुमा के" और भारत ने इस साल विश्व कप भी जीत लिया।मनोज यादव ने टीम इंडिया वेव के साथ ठाकरे फिल्म को लेकर विस्तार से चर्चा की।
हमारे देश में लड़कियों को लड़कों के बराबर प्यार और अधिकार दिलाने के लिए दशकों से मुहिम चली रही हैं। धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव भी आ रहा है। अब पहले के मुकाबले समाज में लड़कियों की स्थिति बेहतर हुई। कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह के मामलों में भी कमी आई है। शहर ही नहीं गांव के भी लोगों ने अपनी बेटियों को पढ़ाना शुरू कर दिया है, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत काम होना है और लोग लड़कियों के हक के लिए लड़ते रहें, उन्हें यही याद दिलाने के लिए हर साल देश में 24 जनवरी को नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया जाता है।
सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी आदित्य धर के निर्देशन वाली उरी फिल्म बड़े पर्दे पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। सोमवार को अपनी रिलीज के 11वें दिन उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक ने कमाई का दौर जारी रखा है। फिल्म को लेकर सोमवार को आए कमाई के आंकड़े पर निगाह डालें तो उरी अभी तक 115.87 करोड़ रुपये कमा चुकी है। सोमवार को इसने 6.80 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित है, जिसमें विक्की कौशल और यामी गौतम ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
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अर्जुन कपूर अक्सर अपनी बहनों की वजह से चर्चा में रहते हैं। वो कभी अंशुला तो कभी जाह्नवी कपूर का हौसला बढ़ाते नजर आते हैं। अभी हाल ही में वो अपनी बहन सोनम के काम की तारीफ करते हुए नजर आए। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है वह ऐसे भाई हैं जो हर मोड़ पर अपनी बहनों के साथ खड़े होते हैं। अर्जुन कपूर ने सोनम के साथ अपने बचपन की तस्वीर शेयर करके लिखा कि भाई-बहन का रिश्ता तो होता ही है प्यार, शरारतों और ढेर सारे इमोशंस वाला। आमतौर पर इन इमोशन को शब्दों ढाल पाना उतना ही मुश्किल लगता है जैसे किसी बड़े से पहाड़ पर चढ़ना लेकिन जब भी कोई भाई या बहन इन इमोशन को शब्दों में ढालता है तो पढ़ने वाला हर इंसान भावुक हो जाता है। ये इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तस्वीरों में अर्जुन और सोनम दोनों ही बड़े क्यूट लग रहे हैं। हर मां अपने बेटे की अच्छी सेहत चाहती है और इसके लिए नसीहतें भी देती रहती हैं। ऐसी ही कुछ नसीहत अनुपम खेर को उनकी मां से मिली है। मां से अपने बातचीत के वीडियो को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर भी किया है। अनुपम खेर ने अपनी मां के साथ बातचीत करते हुए एक वीडियो शेयर किया जिसमें उनकी मां कह रही हैं, कि वो सुस्त लग रहे हैं ये बात भले तुम्हें नहीं पता चल रही है लेकिन मुझे ऐसा लगता है। अब वो अपना वजन कम न करें, वो अब बहुत अच्छे लग रहे हैं। उनसे ज्यादा मोटे तो अनिल कपूर हैं। फिर वो हंसते हुए आगे कह रही हैं, अनिल कपूर भी अच्छा है और मेरा बेटा है। लेकिन अब वो वजन न कम करें। राजस्थान पुलिस ने रणवीर सिंह के लिए हाल ही में एक ट्वीट किया। रणवीर सिंह ने राजस्थान पुलिस की तारीफ में एक ट्वीट किया था, उसी ट्वीट पर राजस्थान पुलिस ने रिप्लाई किया। लोगों को ये ट्वीट खूब पसंद आ रहा है। राजस्थान पुलिस ने ट्वीट में लिखा - आप एक गली बॉय की तरह आए पर आप तो उससे ज्यादा बाजीराव मस्तानी निकले और आखिर में सुपर कॉप सिंबा बन गए। आपसे मिलकर हमें खुशी हुई। अगली बार जब आप दीपिका पादुकोण के साथ राजस्थान आएंगे तो लोग आपसे बैंड बाजा बारात के साथ मिलने आएंगे। कुम्भ क्षेत्र में हुई कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने देशभक्ति से भरपूर फिल्म 'उरी द सर्जिकल स्ट्राइक' को टैक्स फ्री कर दिया है। देशभक्ति से भरपूर फिल्म की हर जगह हो रही तारीफ को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म पर स्टेट जीएसटी न लगाने का निर्णय लिया है। सच्ची घटना पर आधारित आर्मी ड्रामा को राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की और अब इससे फिल्म उरी को फायदा मिलेगा। अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी सलमान खान की फिल्म 'भारत' का टीजर रिलीज हो गया है। भारत फिल्म इसी साल ईद के मौक पर रिलीज की जाएगी। एक मिनट छब्बीस सेकेंड के टीजर में सलमान खान ने एक डायलॉग से खुद को इंट्रेड्यूस किया है। फिल्म में सलमान खान के किरदार का नाम भारत होगा और इसके बाद सरनेम किस वजह से नहीं लगाया, इस बारे में उन्होंने पूरी तरह से डिस्क्राइब किया। खाली पन्नों पर जब अपनी कलम चलाओ तो उसे इतिहास का हिस्सा बनाओं। पर आज का जमाना डेस्कटॉप, लैपटॉप, आईपैड और मोबाइल पर लिख कर छा जाने का है। ठाकरे फिल्म के संवाद और गाने लिखने वाले मनोज यादव की ख़ुद की कहानी हर मोड़ से गुज़री है। ठाकरे मूवी देखने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मनोज की तारीफ करते हुए कहा कि हम तुम्हारें शब्दों में बाबा को देख सकते हैं। मनोज खुद कहते हैं कि उद्धव ठाकरे जी की इस तारीफ से खुश हैं और लिखते हैं कि कोई भी अवॉर्ड इन शब्दों की जगह नहीं ले सकता है।यूपी के आजमगढ़ के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र भरौली निवासी मनोज ने मन की उलझनों और जिंदगी के अनुभवों को पन्नों से लेकर मोबाइल तक पर ऐसा उकेरा है कि वो इतिहास के सुनहरे पन्ने पर अपना नाम दर्ज करवाते जा रहे हैं। सत्तर एमएम के पर्दे पर आपने पीकू, रईस, गब्बर इज बैक, निल बट्टे सन्नाटा, वेस्ट इस वेस्ट, अज़हर, बॉस, धनक समेत कई फिल्मों के गाने लिख चुके हैं। मनोज यादव ने मराठी फिल्मों में मराठी भाषा में भी गीत लिखे हैं और फिल्म वेंटिलेटर के "बाबा" गीत के लिए मटा सम्मान से प्रस्कृत भी किया गया है, आज उनके गाने लोग गुनगुनाते हैं। जिस साल भारत ने विश्व कप दो हज़ार ग्यारह को जीता उस साल उन्होंने उस विश्व कप का थीम सांग भी लिख दिया..."दे घुमा के" और भारत ने इस साल विश्व कप भी जीत लिया।मनोज यादव ने टीम इंडिया वेव के साथ ठाकरे फिल्म को लेकर विस्तार से चर्चा की। हमारे देश में लड़कियों को लड़कों के बराबर प्यार और अधिकार दिलाने के लिए दशकों से मुहिम चली रही हैं। धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव भी आ रहा है। अब पहले के मुकाबले समाज में लड़कियों की स्थिति बेहतर हुई। कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह के मामलों में भी कमी आई है। शहर ही नहीं गांव के भी लोगों ने अपनी बेटियों को पढ़ाना शुरू कर दिया है, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत काम होना है और लोग लड़कियों के हक के लिए लड़ते रहें, उन्हें यही याद दिलाने के लिए हर साल देश में चौबीस जनवरी को नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी आदित्य धर के निर्देशन वाली उरी फिल्म बड़े पर्दे पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। सोमवार को अपनी रिलीज के ग्यारहवें दिन उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक ने कमाई का दौर जारी रखा है। फिल्म को लेकर सोमवार को आए कमाई के आंकड़े पर निगाह डालें तो उरी अभी तक एक सौ पंद्रह.सत्तासी करोड़ रुपये कमा चुकी है। सोमवार को इसने छः.अस्सी करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित है, जिसमें विक्की कौशल और यामी गौतम ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
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ब्रिटेन के सांसदों की एक प्रभावशाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमरीका के नेतृत्व में इराक़ में युद्ध के बाद की स्थिति के बारे में बनाई गई योजना में कई ग़लतियां की गईं और यह योजना पर्याप्त नहीं थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ के पुनर्निर्माण और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था, जो नहीं दिया गया.
हालाँकि रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में युद्ध के बाद के कई लक्ष्यों को पूरा किया गया है.
रिपोर्ट में आगे स्वीकार किया गया है कि इराक़ में संघर्ष ख़त्म होने के बाद चरमपंथी गतिविधियों स्थिति को कम करके आँका गया, सुरक्षा सुधारों और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन का कार्य ठीक से नहीं किया गया.
रिपोर्ट में ब्रितानी सैनिकों के काम की प्रशंसा की गई है लेकिन यह भी माना गया कि इराक़ के दक्षिण में परिस्थितियाँ बेहतर हैं जहाँ ब्रिटेन के सैनिक तैनात हैं.
इराक़ में मौजूद सैनिकों में सबसे अधिक अमरीकी सैनिक हैं और दूसरे नंबर पर ब्रिटेन के सैनिक आते हैं.
रिपोर्ट की दूसरी महत्वपूर्ण बात है इराक़ में 2006 तक ब्रिटिश सैनिकों को तैनात रखने पर सहमति. जहाँ दूसरे देश इराक़ से अपने सैनिक हटा रहे हैं या फिर हटाने की बात कर रहे हैं, ब्रिटेन अपने सैनिकों की वर्तमान संख्या अगले साल तक रखना चाहता है.
रिपोर्ट के बारे में लेबर पार्टी के एक सांसद मोहम्मद सरवर का कहना था कि रिपोर्ट दर्शाती है कि अब किसी भी देश के ख़िलाफ़ युद्ध के फैसले का संसद शायद ही समर्थन करे.
अब प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को ऐसा कोई भी फैसला करने से पहले बहुत सोच विचार करना होगा.
इस रिपोर्ट पर विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता माइकल एंक्राम कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस रिपोर्ट एक तरह से यह मानती है कि ग़लतियाँ हुई हैं. ज्वाइंट इंटलीजेंस कमेटी में स्थिति एक हद तक राजनीतिक है. इसकी बैठकों के कोई नोट्स नहीं लिए गए. मेरा ये कहना है कि हमें ऐसी स्थिति पैदा होने ही नहीं देनी चाहिए थी. "
इराक़ युद्ध का विरोध करने वाली लिबरल डेमोक्रेट पार्टी ने भी रिपोर्ट का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पता चलता है कि इराक़ युद्ध में ग़लतियां हुई हैं.
जुलाई 2004 में लॉर्ड बटलर की रिपोर्ट आई थी जिसमें ख़ुफिया जानकारी के इस्तेमाल के तरीक़ों पर चिंता व्यक्त की गई थी.
इस रिपोर्ट को इससे जोड़कर देखा जा सकता है जिसमें गुप्तचर एजेंसियों की रिपोर्टों पर नज़र रखने और इससे जुड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही गई है.
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ब्रिटेन के सांसदों की एक प्रभावशाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमरीका के नेतृत्व में इराक़ में युद्ध के बाद की स्थिति के बारे में बनाई गई योजना में कई ग़लतियां की गईं और यह योजना पर्याप्त नहीं थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ के पुनर्निर्माण और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था, जो नहीं दिया गया. हालाँकि रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में युद्ध के बाद के कई लक्ष्यों को पूरा किया गया है. रिपोर्ट में आगे स्वीकार किया गया है कि इराक़ में संघर्ष ख़त्म होने के बाद चरमपंथी गतिविधियों स्थिति को कम करके आँका गया, सुरक्षा सुधारों और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन का कार्य ठीक से नहीं किया गया. रिपोर्ट में ब्रितानी सैनिकों के काम की प्रशंसा की गई है लेकिन यह भी माना गया कि इराक़ के दक्षिण में परिस्थितियाँ बेहतर हैं जहाँ ब्रिटेन के सैनिक तैनात हैं. इराक़ में मौजूद सैनिकों में सबसे अधिक अमरीकी सैनिक हैं और दूसरे नंबर पर ब्रिटेन के सैनिक आते हैं. रिपोर्ट की दूसरी महत्वपूर्ण बात है इराक़ में दो हज़ार छः तक ब्रिटिश सैनिकों को तैनात रखने पर सहमति. जहाँ दूसरे देश इराक़ से अपने सैनिक हटा रहे हैं या फिर हटाने की बात कर रहे हैं, ब्रिटेन अपने सैनिकों की वर्तमान संख्या अगले साल तक रखना चाहता है. रिपोर्ट के बारे में लेबर पार्टी के एक सांसद मोहम्मद सरवर का कहना था कि रिपोर्ट दर्शाती है कि अब किसी भी देश के ख़िलाफ़ युद्ध के फैसले का संसद शायद ही समर्थन करे. अब प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को ऐसा कोई भी फैसला करने से पहले बहुत सोच विचार करना होगा. इस रिपोर्ट पर विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता माइकल एंक्राम कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस रिपोर्ट एक तरह से यह मानती है कि ग़लतियाँ हुई हैं. ज्वाइंट इंटलीजेंस कमेटी में स्थिति एक हद तक राजनीतिक है. इसकी बैठकों के कोई नोट्स नहीं लिए गए. मेरा ये कहना है कि हमें ऐसी स्थिति पैदा होने ही नहीं देनी चाहिए थी. " इराक़ युद्ध का विरोध करने वाली लिबरल डेमोक्रेट पार्टी ने भी रिपोर्ट का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पता चलता है कि इराक़ युद्ध में ग़लतियां हुई हैं. जुलाई दो हज़ार चार में लॉर्ड बटलर की रिपोर्ट आई थी जिसमें ख़ुफिया जानकारी के इस्तेमाल के तरीक़ों पर चिंता व्यक्त की गई थी. इस रिपोर्ट को इससे जोड़कर देखा जा सकता है जिसमें गुप्तचर एजेंसियों की रिपोर्टों पर नज़र रखने और इससे जुड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही गई है.
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अमेजन प्राइम वीडियो पर जल्द ही वेब सीरीज मॉर्डन लव हैदराबाद रिलीज होने जा रही है। इस सीरीज को 8 जुलाई को ग्लोबली लॉन्च करने की तैयारी है। अमेजन की पहली तेलुगू ओरिजनल सीरीज में प्यार से भरी छह कहानियों को दिखाया जाएगा। फेमस फिल्ममेकर नागेश कुकुनूर इस सीरीज के न केवल लेखक हैं बल्कि उन्होंने छह में तीन एपिसोड को अपनी मातृभाषा तेलुगू में निर्देशित भी किया है। नागेश को फिल्म हैदराबाद ब्लूज, रॉकफोर्ड, इकबाल और डोर जैसी शानदार फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है। हाल ही में वह अपनी पहली तेलुगू फीचर फिल्म, गुड लक सखी बना चुके हैं।
तेलुगू भाषा के अपने कंटेंट पर बात करते हुए उन्होंने कहा, 'वर्षों से मुझसे पूछा जाता था कि क्या मैं तेलुगू में फिल्में बनाने जा रहा हूं और मैं हमेशा लोगों से कहता था कि जब मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो जाउंगा तब जरूर बनाऊंगा। यह महज संयोग था कि मैंने मॉडर्न लव से थोड़ा पहले इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी वरना तेलुगू भाषा में मेरा पहला प्रयास मॉडर्न लव हैदराबाद ही होता। इस सीरीज ने मुझे लेखन रचनात्मक होने का पूरा मौका दिया है। '
उन्होंने आगे बताया कि प्राइम वीडियो सीरीज के साथ वह क्रिएटिविटी एंजॉय कर रहे हैं। नागेश ने कहा कि एक टिपिकल फीचर का निर्देशन करते समय एक कहानी पर टिके रहना चाहिए और देखना चाहिए कि यह दर्शकों के लिए काम कर रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, 'मॉडर्न लव हैदराबाद के साथ ऐसा नहीं था। यहां, मेरे पास पूरी स्वतंत्रता थी। इसलिए, तेलुगू स्पेस में आना मेरे लिए अधिक रोमांचक था। अब इसे शूट करने के बाद, मैं अपनी मातृभाषा में काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। शो के कारण और कई अभिनेताओं के साथ काम करने के बाद मेरा आत्मविश्वास अब दस गुना बढ़ गया है। इसलिए मुझे लगता है कि मैं इस तेलुगू स्पेस में और अधिक काम कर सकता हूं। '
मॉडर्न लव हैदराबाद में नागेश ने तीन कहानियों का निर्देशन किया है जिनमें सुहासिनी मणिरत्नम-नरेश अगस्त्य की 'व्हाई डिड शी लीव मी देयर', रितु वर्मा और आधी पिनिसेटी की 'फजी, पर्पल एंड फुल ऑफ थॉर्न्स' और नित्या मेनन-रेवती स्टारर 'माई अनलाइक पैनडेमिक ड्रीम पार्टनर' शामिल हैं। बता दें कि मॉडर्न लव हैदराबाद में दिल छू लेने वाले छह एपिसोड देखने को मिलेंगे। नागेश के अलावा बाकी के एपिसोड को वेंकटेश महा, उदय गुरराला और देविका बुहाधनम ने निर्देशित किया है। सीरीज की इन कहानियों में अभिजीत दुड्डाला, मालविका नायर, उल्का गुप्ता, नरेश और कोमली प्रसाद सहित एक जानेमाने कलाकार नजर आएंगे।
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अमेजन प्राइम वीडियो पर जल्द ही वेब सीरीज मॉर्डन लव हैदराबाद रिलीज होने जा रही है। इस सीरीज को आठ जुलाई को ग्लोबली लॉन्च करने की तैयारी है। अमेजन की पहली तेलुगू ओरिजनल सीरीज में प्यार से भरी छह कहानियों को दिखाया जाएगा। फेमस फिल्ममेकर नागेश कुकुनूर इस सीरीज के न केवल लेखक हैं बल्कि उन्होंने छह में तीन एपिसोड को अपनी मातृभाषा तेलुगू में निर्देशित भी किया है। नागेश को फिल्म हैदराबाद ब्लूज, रॉकफोर्ड, इकबाल और डोर जैसी शानदार फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है। हाल ही में वह अपनी पहली तेलुगू फीचर फिल्म, गुड लक सखी बना चुके हैं। तेलुगू भाषा के अपने कंटेंट पर बात करते हुए उन्होंने कहा, 'वर्षों से मुझसे पूछा जाता था कि क्या मैं तेलुगू में फिल्में बनाने जा रहा हूं और मैं हमेशा लोगों से कहता था कि जब मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो जाउंगा तब जरूर बनाऊंगा। यह महज संयोग था कि मैंने मॉडर्न लव से थोड़ा पहले इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी वरना तेलुगू भाषा में मेरा पहला प्रयास मॉडर्न लव हैदराबाद ही होता। इस सीरीज ने मुझे लेखन रचनात्मक होने का पूरा मौका दिया है। ' उन्होंने आगे बताया कि प्राइम वीडियो सीरीज के साथ वह क्रिएटिविटी एंजॉय कर रहे हैं। नागेश ने कहा कि एक टिपिकल फीचर का निर्देशन करते समय एक कहानी पर टिके रहना चाहिए और देखना चाहिए कि यह दर्शकों के लिए काम कर रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, 'मॉडर्न लव हैदराबाद के साथ ऐसा नहीं था। यहां, मेरे पास पूरी स्वतंत्रता थी। इसलिए, तेलुगू स्पेस में आना मेरे लिए अधिक रोमांचक था। अब इसे शूट करने के बाद, मैं अपनी मातृभाषा में काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। शो के कारण और कई अभिनेताओं के साथ काम करने के बाद मेरा आत्मविश्वास अब दस गुना बढ़ गया है। इसलिए मुझे लगता है कि मैं इस तेलुगू स्पेस में और अधिक काम कर सकता हूं। ' मॉडर्न लव हैदराबाद में नागेश ने तीन कहानियों का निर्देशन किया है जिनमें सुहासिनी मणिरत्नम-नरेश अगस्त्य की 'व्हाई डिड शी लीव मी देयर', रितु वर्मा और आधी पिनिसेटी की 'फजी, पर्पल एंड फुल ऑफ थॉर्न्स' और नित्या मेनन-रेवती स्टारर 'माई अनलाइक पैनडेमिक ड्रीम पार्टनर' शामिल हैं। बता दें कि मॉडर्न लव हैदराबाद में दिल छू लेने वाले छह एपिसोड देखने को मिलेंगे। नागेश के अलावा बाकी के एपिसोड को वेंकटेश महा, उदय गुरराला और देविका बुहाधनम ने निर्देशित किया है। सीरीज की इन कहानियों में अभिजीत दुड्डाला, मालविका नायर, उल्का गुप्ता, नरेश और कोमली प्रसाद सहित एक जानेमाने कलाकार नजर आएंगे।
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टीम इंडिया के ओपनर रोहित शर्मा और केएल राहुल दोनों ही लम्बे समय से यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. दोनों ही खिलाड़ियों की तकनीक बेहतरीन है. लेफ्ट और राईट हैण्ड का कॉम्बिनेशन भी बेहतर है लेकिन दोनों ही खिलाड़ी एक अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने में कामयाब हो रहे हैं. यही हाल कोहली का भी दिखाई दे रहा है.
विराट कोहली ने भले ही एशिया कप में शतक लगाया हो लेकिन टूर्नामेंट जीतने में भारतीय टीम सफल नहीं हुई जिसका एक कारण खराब शुरुआत भी कही जा सकती है. ऐसे में अगर रोहित-राहुल और कोहली जल्दबाजी में अपना विकेट गवां देते है तो वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2022) जीतना काफी मुश्किल नज़र आता है. ऐसे में देखने वाली बात होगी की कैसे भारत का टॉप आर्डर अपनी इस कमी में सुधार लाता है.
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टीम इंडिया के ओपनर रोहित शर्मा और केएल राहुल दोनों ही लम्बे समय से यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. दोनों ही खिलाड़ियों की तकनीक बेहतरीन है. लेफ्ट और राईट हैण्ड का कॉम्बिनेशन भी बेहतर है लेकिन दोनों ही खिलाड़ी एक अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने में कामयाब हो रहे हैं. यही हाल कोहली का भी दिखाई दे रहा है. विराट कोहली ने भले ही एशिया कप में शतक लगाया हो लेकिन टूर्नामेंट जीतने में भारतीय टीम सफल नहीं हुई जिसका एक कारण खराब शुरुआत भी कही जा सकती है. ऐसे में अगर रोहित-राहुल और कोहली जल्दबाजी में अपना विकेट गवां देते है तो वर्ल्ड कप जीतना काफी मुश्किल नज़र आता है. ऐसे में देखने वाली बात होगी की कैसे भारत का टॉप आर्डर अपनी इस कमी में सुधार लाता है.
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भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व डॉ. रमन सिंह को लगातार पीछे ढकेल रहा है और नये लोगों को सामने ला रहे हैं। उन्हें राजनीतिक भविष्य बचाने राज्यपाल बन जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 58% आरक्षण रिवर्ट करने के बाद से भाजपा-कांग्रेस में जमकर जुबानी जंग चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सहित भाजपा नेताओं ने भूपेश सरकार पर बढ़े आरक्षण को बचाने वकील नहीं खड़ा करने का आरोप लगाया। सीएम भूपेश बघेल और कांग्रेसियों का कहना कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देना चाहती है। इस पर काम भी कर रहे हैं। भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व डॉ. रमन सिंह को लगातार पीछे ढकेल रहा है और नये लोगों को सामने ला रहे हैं। रमन सिंह का यहीं रहना हमारे लिए लाभदायक है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर कहें तो उन्हें राजनीतिक भविष्य के लिए राज्यपाल बन जाना चाहिए।
भूपेश बघेल ने रायपुर में कहा कि 2005 में भारत सरकार का आदेश आ गया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए। डॉ. रमन सिंह सरकार ने 2011 तक इस पर रोक लगाकर रखा। 2011 में जब आंदोलन हुआ तो 2012 में एक नोटिफिकेशन जारी किया। उसके बाद लोग कोर्ट गए, राज्य सरकार ने स्टे लिया। उसके बाद 2018 तक उनके पास मौका था, लेकिन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी उसकी रिपोर्ट कोर्ट में नहीं रख पाए। ननकीराम कंवर की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी उस रिपोर्ट को भी कोर्ट में सबमिट नहीं किया। 6 छह सालों में रमन सिंह सरकार ने आखिर किया क्या?
सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की बात कही है। जिसका जितना हक है वह मिलना चाहिए। उसके लिए हम प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों के पास मुद्दा नहीं है। वो सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में स्थानीय निवासियों का 100% आरक्षण खत्म होने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोर्ट ने अधिसूचना को रद्द किया है। सरकार बस्तर और सरगुजा संभागों में आदिवासियों का ख्याल रखेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले दिनों प्रदेश सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए आरक्षण रद्द कर दिया है।
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भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व डॉ. रमन सिंह को लगातार पीछे ढकेल रहा है और नये लोगों को सामने ला रहे हैं। उन्हें राजनीतिक भविष्य बचाने राज्यपाल बन जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अट्ठावन% आरक्षण रिवर्ट करने के बाद से भाजपा-कांग्रेस में जमकर जुबानी जंग चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सहित भाजपा नेताओं ने भूपेश सरकार पर बढ़े आरक्षण को बचाने वकील नहीं खड़ा करने का आरोप लगाया। सीएम भूपेश बघेल और कांग्रेसियों का कहना कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देना चाहती है। इस पर काम भी कर रहे हैं। भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व डॉ. रमन सिंह को लगातार पीछे ढकेल रहा है और नये लोगों को सामने ला रहे हैं। रमन सिंह का यहीं रहना हमारे लिए लाभदायक है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर कहें तो उन्हें राजनीतिक भविष्य के लिए राज्यपाल बन जाना चाहिए। भूपेश बघेल ने रायपुर में कहा कि दो हज़ार पाँच में भारत सरकार का आदेश आ गया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए। डॉ. रमन सिंह सरकार ने दो हज़ार ग्यारह तक इस पर रोक लगाकर रखा। दो हज़ार ग्यारह में जब आंदोलन हुआ तो दो हज़ार बारह में एक नोटिफिकेशन जारी किया। उसके बाद लोग कोर्ट गए, राज्य सरकार ने स्टे लिया। उसके बाद दो हज़ार अट्ठारह तक उनके पास मौका था, लेकिन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी उसकी रिपोर्ट कोर्ट में नहीं रख पाए। ननकीराम कंवर की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी उस रिपोर्ट को भी कोर्ट में सबमिट नहीं किया। छः छह सालों में रमन सिंह सरकार ने आखिर किया क्या? सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की बात कही है। जिसका जितना हक है वह मिलना चाहिए। उसके लिए हम प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों के पास मुद्दा नहीं है। वो सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में स्थानीय निवासियों का एक सौ% आरक्षण खत्म होने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोर्ट ने अधिसूचना को रद्द किया है। सरकार बस्तर और सरगुजा संभागों में आदिवासियों का ख्याल रखेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले दिनों प्रदेश सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए आरक्षण रद्द कर दिया है।
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करवा चौथ की बहुत शुभकामनाएं!
आज तुम इतने खुश क्यों हो,
फूलों ने कहा मुस्कुराते हुए,
आज प्यारा सा करवा चौथ है.
पूरा दिन आज हमारा है उपवास,
पति आए जल्दी यही है आस,
ना तोड़ना हमारी ये आस,
जीवन को नया रंग दिया है.
आप पे भगवान की असीम कृपा हो.
करवा चौथ पर्व की हार्दिक बधाई!
जब तक न देखें चेहरा आपका,
न सफल हो ये त्योहार हमारा,
आपके बिना अधूरा है जीवन हमारा,
जल्दी आओ, दिखाओ अपनी सूरत. .
और कर दो करवा चौथ सफल हमारा.
अपने हाथों में चूड़ियां सजाए,
माथे पर अपने सिंदूर लगाए,
निकले हर सुहागन जब चांद के इंतजार में,
रब उनकी हर मनोकामना पूरी कर जाएं.
जनहित में जारी आज ये फरमान है,
दिल से निकला हुआ हमारा ये अरमान है,
जिस पर फिदा हमारी जान है.
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करवा चौथ की बहुत शुभकामनाएं! आज तुम इतने खुश क्यों हो, फूलों ने कहा मुस्कुराते हुए, आज प्यारा सा करवा चौथ है. पूरा दिन आज हमारा है उपवास, पति आए जल्दी यही है आस, ना तोड़ना हमारी ये आस, जीवन को नया रंग दिया है. आप पे भगवान की असीम कृपा हो. करवा चौथ पर्व की हार्दिक बधाई! जब तक न देखें चेहरा आपका, न सफल हो ये त्योहार हमारा, आपके बिना अधूरा है जीवन हमारा, जल्दी आओ, दिखाओ अपनी सूरत. . और कर दो करवा चौथ सफल हमारा. अपने हाथों में चूड़ियां सजाए, माथे पर अपने सिंदूर लगाए, निकले हर सुहागन जब चांद के इंतजार में, रब उनकी हर मनोकामना पूरी कर जाएं. जनहित में जारी आज ये फरमान है, दिल से निकला हुआ हमारा ये अरमान है, जिस पर फिदा हमारी जान है.
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मुंबई, दो मई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता उद्धव ठाकरे शिवसेना के भीतर असंतोष को शांत करने में नाकाम रहे और उन्होंने बिना संघर्ष किए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
पवार ने अपनी आत्मकथा के संशोधित संस्करण में कहा कि उन्होंने और अन्य लोगों ने भी ठाकरे में राजनीतिक कौशल की कमी महसूस की, जिसकी एक मुख्यमंत्री को जरूरत होती है। इस पुस्तक का विमोचन मंगलवार को किया गया।
पवार ने अपनी पुस्तक में लिखा कि कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना के बीच महा विकास आघाडी (एमवीए) का गठन केवल "सत्ता का खेल" नहीं था, बल्कि यह अन्य राजनीतिक दलों के महत्व को किसी भी तरह समाप्त करने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवृत्ति का भी कड़ा जवाब था।
उन्होंने कहा कि ऐसी आशंका थी कि एमवीए सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन "हमने यह अनुमान नहीं लगाया था कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के कारण शिवसेना के भीतर ही तूफान आ जाएगा। " नेता ने लिखा, "शिवसेना का नेतृत्व इस असंतोष को शांत करने में विफल रहा। "उन्होंने कहा, "उद्धव ने (जून 2022 में एकनाथ शिंदे और शिवसेना के अन्य विधायकों द्वारा उनके खिलाफ बगावत किए जाने के बाद) बिना संघर्ष किए इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण एमवीए सत्ता से बाहर हो गई। " उन्होंने कहा कि ठाकरे का स्वास्थ्य उनके लिए एक बाधा बन गया है। राकांपा नेता ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को "राजनीतिक कौशल" की आवश्यकता होती है और उसे राजनीतिक गतिविधियों के बारे में पूरी तरह अवगत रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम सभी ने महसूस किया कि इन चीजों की कमी थी। "उन्होंने इसके लिए ठाकरे की अनुभवहीनता को जिम्मेदार ठहराया।
पवार ने लिखा कि मध्यम वर्ग ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान फेसबुक लाइव के माध्यम से लोगों के साथ ठाकरे की बातचीत को पसंद किया, लेकिन यह यह समझ पाना मुश्किल है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में केवल दो ही बार सरकार के मुख्यालय- मंत्रालय का दौरा क्यों किया।
यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
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मुंबई, दो मई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे शिवसेना के भीतर असंतोष को शांत करने में नाकाम रहे और उन्होंने बिना संघर्ष किए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पवार ने अपनी आत्मकथा के संशोधित संस्करण में कहा कि उन्होंने और अन्य लोगों ने भी ठाकरे में राजनीतिक कौशल की कमी महसूस की, जिसकी एक मुख्यमंत्री को जरूरत होती है। इस पुस्तक का विमोचन मंगलवार को किया गया। पवार ने अपनी पुस्तक में लिखा कि कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना के बीच महा विकास आघाडी का गठन केवल "सत्ता का खेल" नहीं था, बल्कि यह अन्य राजनीतिक दलों के महत्व को किसी भी तरह समाप्त करने की भारतीय जनता पार्टी की प्रवृत्ति का भी कड़ा जवाब था। उन्होंने कहा कि ऐसी आशंका थी कि एमवीए सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन "हमने यह अनुमान नहीं लगाया था कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के कारण शिवसेना के भीतर ही तूफान आ जाएगा। " नेता ने लिखा, "शिवसेना का नेतृत्व इस असंतोष को शांत करने में विफल रहा। "उन्होंने कहा, "उद्धव ने बिना संघर्ष किए इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण एमवीए सत्ता से बाहर हो गई। " उन्होंने कहा कि ठाकरे का स्वास्थ्य उनके लिए एक बाधा बन गया है। राकांपा नेता ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को "राजनीतिक कौशल" की आवश्यकता होती है और उसे राजनीतिक गतिविधियों के बारे में पूरी तरह अवगत रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम सभी ने महसूस किया कि इन चीजों की कमी थी। "उन्होंने इसके लिए ठाकरे की अनुभवहीनता को जिम्मेदार ठहराया। पवार ने लिखा कि मध्यम वर्ग ने कोविड-उन्नीस वैश्विक महामारी के दौरान फेसबुक लाइव के माध्यम से लोगों के साथ ठाकरे की बातचीत को पसंद किया, लेकिन यह यह समझ पाना मुश्किल है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में केवल दो ही बार सरकार के मुख्यालय- मंत्रालय का दौरा क्यों किया। यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
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भाजपा के घोषणा पत्र लेकर हर चीज में शामिल रहने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल अब सभी सुरक्षा कार्यालयों में नजर आएंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक आदेश जारी किया है कि सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ समेत केन्द्रीय सुरक्षा बलों के कार्यालयों में सरदार पटेल की तस्वीर लगी रहे। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और एकता सुनिश्चित करने के संकल्प से सरदार पटेल की तस्वीर सभी कार्यालयों में लगाई जाएं। गृह मंत्री के आदेश के बाद अधिकारियों ने सभी कार्यालयों को यह जानकारी दे दी है।
यही नहीं, सरदार पटेल की तस्वीर उनकी जयंती से पहले सभी कार्यालयों में लगाई जाए। गृह मंत्रालय से कहा गया है कि सभी केन्द्रीय सुरक्षा बलों को 'भारत की सुरक्षा और एकता को हम अक्षुण रखेंगे' संदेश के साथ पटेल की तस्वीर लगाने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि सरदार पटेल भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 560 से अधिक रियासतों के भारतीय संघ में विलय का श्रेय दिया जाता है। बता दें उनका जन्म गुजरात के नडियाद में हुआ था। वह पाटीदार जातिथे। उन्होंने लंदन में जाकर बैरिस्टर की पढाई की थी और अहमदाबाद वापस आकर यही पर वकालत करने लगे। वह महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे और उन्होंने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया।
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भाजपा के घोषणा पत्र लेकर हर चीज में शामिल रहने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल अब सभी सुरक्षा कार्यालयों में नजर आएंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक आदेश जारी किया है कि सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ समेत केन्द्रीय सुरक्षा बलों के कार्यालयों में सरदार पटेल की तस्वीर लगी रहे। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और एकता सुनिश्चित करने के संकल्प से सरदार पटेल की तस्वीर सभी कार्यालयों में लगाई जाएं। गृह मंत्री के आदेश के बाद अधिकारियों ने सभी कार्यालयों को यह जानकारी दे दी है। यही नहीं, सरदार पटेल की तस्वीर उनकी जयंती से पहले सभी कार्यालयों में लगाई जाए। गृह मंत्रालय से कहा गया है कि सभी केन्द्रीय सुरक्षा बलों को 'भारत की सुरक्षा और एकता को हम अक्षुण रखेंगे' संदेश के साथ पटेल की तस्वीर लगाने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि सरदार पटेल भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री थे। उन्होंने पाँच सौ साठ से अधिक रियासतों के भारतीय संघ में विलय का श्रेय दिया जाता है। बता दें उनका जन्म गुजरात के नडियाद में हुआ था। वह पाटीदार जातिथे। उन्होंने लंदन में जाकर बैरिस्टर की पढाई की थी और अहमदाबाद वापस आकर यही पर वकालत करने लगे। वह महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे और उन्होंने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया।
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देश की बात डॉ. मीना शर्मा के साथ देखिए तह तक में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पानी को लेकर तनाव पर रिपोर्ट. महानदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के नेता एक दूसरे पर जुबानी हमला कर रहे हैं और इस झगड़े को केंद्र भी नहीं सुलझा पा रहा.
अकेले चुनाव लड़ेगी सपा, गठबंधन पर मुलायम-अखिलेश में 'मतभेद'
'मुसलमान ही जेल से क्यों भागते हैं? '
अपनों से हारते नेताजी!
धुल कर रहेगी क्रिकेट की कालिख!
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देश की बात डॉ. मीना शर्मा के साथ देखिए तह तक में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पानी को लेकर तनाव पर रिपोर्ट. महानदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के नेता एक दूसरे पर जुबानी हमला कर रहे हैं और इस झगड़े को केंद्र भी नहीं सुलझा पा रहा. अकेले चुनाव लड़ेगी सपा, गठबंधन पर मुलायम-अखिलेश में 'मतभेद' 'मुसलमान ही जेल से क्यों भागते हैं? ' अपनों से हारते नेताजी! धुल कर रहेगी क्रिकेट की कालिख!
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बहुचर्चित गोल्ड स्मगलिंग केस में आरोपी स्वप्ना सुरेश ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का नाम दबाव में लिया था. पुलिस ने ये दावा किया है कि स्वप्ना पर पिनराई विजयन का नाम लेने का दबाव बनाया गया था. केरल विधानसभा चुनाव के बीच यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है.
दरअसल कस्टम डिपार्टमेंट ने पिछले हफ्ते ही कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल कर ये कहा था कि मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने सोने की तस्करी के मामले में केरल के मुख्यमंत्री के नाम का खुलासा किया है. वहीं पिनराई विजयन ने इसे एक राजनीतिक साजिश के तहत की गई कार्रवाई करार दिया था. लेकिन अब एक महिला पुलिस अधिकारी ने इस पूरे मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है.
इस महिला पुलिस अधिकारी को स्वप्ना सुरेश के लिए प्रोटेक्टिव डिटेल के लिए नियुक्त किया गया था. महिला अधिकारी ने एक लिखित बयान में कहा कि स्वप्ना को पूछताछ के दौरान ईडी ने पिनराई विजयन का नाम लेने के लिए मजबूर किया था. ये महिला पुलिस अधिकारी उन पुलिस कर्मियों के ग्रुप का हिस्सा थी, जो स्वप्ना सुरेश के साथ थे.
केरल में डॉलर स्मगलिंग केस में जांच कर रहे कस्टम विभाग ने राज्य के विधानसभा स्पीकर पी श्रीरामाकृष्णन को समन किया है और 12 मार्च को पेश होने को कहा है. विधानसभा स्पीकर को ऐसे में समन किया गया है जब राज्य में चुनाव होने को हैं, इसके अलावा कस्टम विभाग ने दावा किया है कि डॉलर स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने राज्य के सीएम पिनराई विजयन को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.
कस्टम विभाग ने कई बार विधानसभा स्पीकर का बयान लेने की कोशिश की थी. कस्टम ने विदेश दौरे और उनसे जुड़ी कई अन्य जानकारियों के बारे में जवाब मांगा था. जिसके बाद अब उन्हें नोटिस दिया गया है. स्मगलिंग केस में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया है कि डॉलर स्मगलिंग मामले में मुख्यमंत्री विजयन, विधानसभा स्पीकर पी. श्रीरामकृष्णन और कुछ मंत्री के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वाणिज्य दूतावास के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने डॉलर स्मलिंग केस में अपना नाम आने के बाद केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा है. उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों पर केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से जांच की गतिविधियां बढ़ गई हैं.
उन्होंने कहा कि ED का KIIFB के खिलाफ जाना और कस्टम विभाग का हाईकोर्ट में बयान इसका उदाहरण है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां बीजेपी और कांग्रेस की KIIFB को खत्म करने की मंशा पर काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि KIIFB केरल और देश के लिए विकास का मॉडल रहा है. विजयन ने कहा कि अब कस्टम भी ऐसे ही काम कर रही है. कस्टम कमिश्नर का हाईकोर्ट में दिया गया बयान इस बात का सबूत है.
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बहुचर्चित गोल्ड स्मगलिंग केस में आरोपी स्वप्ना सुरेश ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का नाम दबाव में लिया था. पुलिस ने ये दावा किया है कि स्वप्ना पर पिनराई विजयन का नाम लेने का दबाव बनाया गया था. केरल विधानसभा चुनाव के बीच यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल कस्टम डिपार्टमेंट ने पिछले हफ्ते ही कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल कर ये कहा था कि मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने सोने की तस्करी के मामले में केरल के मुख्यमंत्री के नाम का खुलासा किया है. वहीं पिनराई विजयन ने इसे एक राजनीतिक साजिश के तहत की गई कार्रवाई करार दिया था. लेकिन अब एक महिला पुलिस अधिकारी ने इस पूरे मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है. इस महिला पुलिस अधिकारी को स्वप्ना सुरेश के लिए प्रोटेक्टिव डिटेल के लिए नियुक्त किया गया था. महिला अधिकारी ने एक लिखित बयान में कहा कि स्वप्ना को पूछताछ के दौरान ईडी ने पिनराई विजयन का नाम लेने के लिए मजबूर किया था. ये महिला पुलिस अधिकारी उन पुलिस कर्मियों के ग्रुप का हिस्सा थी, जो स्वप्ना सुरेश के साथ थे. केरल में डॉलर स्मगलिंग केस में जांच कर रहे कस्टम विभाग ने राज्य के विधानसभा स्पीकर पी श्रीरामाकृष्णन को समन किया है और बारह मार्च को पेश होने को कहा है. विधानसभा स्पीकर को ऐसे में समन किया गया है जब राज्य में चुनाव होने को हैं, इसके अलावा कस्टम विभाग ने दावा किया है कि डॉलर स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने राज्य के सीएम पिनराई विजयन को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. कस्टम विभाग ने कई बार विधानसभा स्पीकर का बयान लेने की कोशिश की थी. कस्टम ने विदेश दौरे और उनसे जुड़ी कई अन्य जानकारियों के बारे में जवाब मांगा था. जिसके बाद अब उन्हें नोटिस दिया गया है. स्मगलिंग केस में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया है कि डॉलर स्मगलिंग मामले में मुख्यमंत्री विजयन, विधानसभा स्पीकर पी. श्रीरामकृष्णन और कुछ मंत्री के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने डॉलर स्मलिंग केस में अपना नाम आने के बाद केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा है. उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों पर केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से जांच की गतिविधियां बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा कि ED का KIIFB के खिलाफ जाना और कस्टम विभाग का हाईकोर्ट में बयान इसका उदाहरण है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां बीजेपी और कांग्रेस की KIIFB को खत्म करने की मंशा पर काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि KIIFB केरल और देश के लिए विकास का मॉडल रहा है. विजयन ने कहा कि अब कस्टम भी ऐसे ही काम कर रही है. कस्टम कमिश्नर का हाईकोर्ट में दिया गया बयान इस बात का सबूत है.
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कैंसर को विशेष रूप से रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, कुछ उपायों के साथ आप अपने लिए कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं! चेक-अप के लिए नियमित नियुक्तियों का लाभ उठाएं।
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कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में अधिकः
कैंसर के खिलाफ कोई निश्चित सावधानी नहीं है। हमारे शरीर की कोशिकाओं को लगातार हानिकारक प्रभावों से अवगत कराया जाता है। उम्र के साथ नुकसान जमा होता है विरासत पर। चाहे महत्वपूर्ण जीन प्रभावित हों और यदि ऐसा है, तो कौन सा एक संयोग है। कैंसर के जोखिम कारकों को शायद ही कभी सख्ती से बचाया जा सकता है - उदाहरण के लिए, हम लगातार कुछ हद तक और प्राकृतिक रेडियोधर्मी विकिरण के लिए सूर्य की रोशनी के संपर्क में आते हैं। हालांकि, कई मामलों में, आप ऐसे हानिकारक प्रभाव को कम कर सकते हैं और स्वस्थ जीवनशैली का विरोध कर सकते हैं।
इनमें से कुछ सुझाव कैंसर को रोकने में मदद करते हैंः
• छोड़ दो धूम्रपान!
• आनंद लें शराब केवल संयम में।
• सुनिश्चित करें कि आपके पास स्वस्थ और उच्च फाइबर आहार है भोजन.
• पर्याप्त रूप से ले जाएं और इससे बचें अधिक वजन.
• यदि संभव हो तो सूर्य स्नान और सनबाथिंग का उपयोग करने से बचें। उचित कपड़े और उच्च का प्रयोग करें एसपीएफ़ कारकजब सूर्य के संपर्क में आते हैं।
• यदि आवश्यक हो, तो अपनी टीका सुरक्षा को ताज़ा करें। अपने डॉक्टर से पूछें कि टीकाकरण (जैसे हेपेटाइटिस, एचपीवी) आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।
• कार्यस्थल पर सभी सुरक्षा उपायों को लें, जैसे कि सुरक्षात्मक कपड़े धूल उत्पन्न करने वाले काम के दौरान प्रयोगशाला या श्वसन सुरक्षा में।
• रानिड तेल और नट्स का निपटान भी करें खोटा.
• जितना संभव हो सके जला, दृढ़ता से नमकीन और उपभोग करें ठीक व्यंजन।
• के लिए जांच का प्रयोग करें कैंसर स्क्रीनिंग.
कैंसर के खिलाफ एक व्यापक सुरक्षा संभव नहीं है। कुछ मामलों में, स्तन कैंसर के कुछ मामलों में कैंसर का पूर्वाग्रह परिवार में होता है। इसलिए कैंसर स्क्रीनिंग और चेक-अप के लिए नियुक्तियों का उपयोग करने के साथ-साथ शरीर में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है।
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कैंसर को विशेष रूप से रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, कुछ उपायों के साथ आप अपने लिए कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं! चेक-अप के लिए नियमित नियुक्तियों का लाभ उठाएं। - कैंसर के संबंध में महत्वपूर्णः चेक-अप। कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में अधिकः कैंसर के खिलाफ कोई निश्चित सावधानी नहीं है। हमारे शरीर की कोशिकाओं को लगातार हानिकारक प्रभावों से अवगत कराया जाता है। उम्र के साथ नुकसान जमा होता है विरासत पर। चाहे महत्वपूर्ण जीन प्रभावित हों और यदि ऐसा है, तो कौन सा एक संयोग है। कैंसर के जोखिम कारकों को शायद ही कभी सख्ती से बचाया जा सकता है - उदाहरण के लिए, हम लगातार कुछ हद तक और प्राकृतिक रेडियोधर्मी विकिरण के लिए सूर्य की रोशनी के संपर्क में आते हैं। हालांकि, कई मामलों में, आप ऐसे हानिकारक प्रभाव को कम कर सकते हैं और स्वस्थ जीवनशैली का विरोध कर सकते हैं। इनमें से कुछ सुझाव कैंसर को रोकने में मदद करते हैंः • छोड़ दो धूम्रपान! • आनंद लें शराब केवल संयम में। • सुनिश्चित करें कि आपके पास स्वस्थ और उच्च फाइबर आहार है भोजन. • पर्याप्त रूप से ले जाएं और इससे बचें अधिक वजन. • यदि संभव हो तो सूर्य स्नान और सनबाथिंग का उपयोग करने से बचें। उचित कपड़े और उच्च का प्रयोग करें एसपीएफ़ कारकजब सूर्य के संपर्क में आते हैं। • यदि आवश्यक हो, तो अपनी टीका सुरक्षा को ताज़ा करें। अपने डॉक्टर से पूछें कि टीकाकरण आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। • कार्यस्थल पर सभी सुरक्षा उपायों को लें, जैसे कि सुरक्षात्मक कपड़े धूल उत्पन्न करने वाले काम के दौरान प्रयोगशाला या श्वसन सुरक्षा में। • रानिड तेल और नट्स का निपटान भी करें खोटा. • जितना संभव हो सके जला, दृढ़ता से नमकीन और उपभोग करें ठीक व्यंजन। • के लिए जांच का प्रयोग करें कैंसर स्क्रीनिंग. कैंसर के खिलाफ एक व्यापक सुरक्षा संभव नहीं है। कुछ मामलों में, स्तन कैंसर के कुछ मामलों में कैंसर का पूर्वाग्रह परिवार में होता है। इसलिए कैंसर स्क्रीनिंग और चेक-अप के लिए नियुक्तियों का उपयोग करने के साथ-साथ शरीर में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है।
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अमित शाह के गृहमंत्री का पद संभालते ही एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की नीति केंद्र में आ गई है। शाह ने गत दिवस सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की और आतंकियों के बारे में नई रणनीति बनाई। इस दौरान 10 आतंकवादियों की लिस्ट तैयार की गई है, जो अब सुरक्षा एजेंसियों का सबसे अहम निशाना होंगे।
जम्मू कश्मीर में आतंकियों का आतंक किसी भी तरह से कम होता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुछ आतंकियों ने एक घर में घुसकर एक नागरिक की हत्या कर दी।
अमरनाथा यात्रा शुरू होने के बाद आज जम्मू से अमरनाथ यात्रियों का दूसरा जत्था पहलगाम और बालटाल के लिए चल दिया है। जो की कल बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए रवाना होगा। लेकिन पहलगाम के नुंवान कैंप में खराब मौसम होने के चलते फिलहाल आज के लिए यात्रा को रोक दिया गया है।
वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में बुधवार को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हो गया है। अभी तक देशभर से लगभग 2 लाख श्रद्धालुओं ने दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए पंजीकरण करवाया है।
दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिलेके द्रबगाम इलाके में सोमवार को सेना ने एनकाउंटर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के 'पोस्टर ब्वॉय' समीर अहमद भट्ट उर्फ समीर टाइगर और उसके साथी को मार गिराया।
अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र मन्नान बसीर वानी के आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल होने से हड़कंप मच गया है। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ही नहीं, मन्नान के पढ़ा-लिखा परिवार भी हैरान-परेशान है।
बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी का छात्र आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। इस छात्र की पहचान इसा के रूप में की गई है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सबजार अहमद भट्ट के एनकाउंटर के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन ने आतंकी हमाद खान को कश्मीर में नया कमांडर बनाया है।
भारतीय सेना के लैफ्टिनैंट उमर फयाज के हत्यारों को पकडऩे के लिए पुलिस और सेना ने मुहिम तेज कर दी है और उनके पोस्टर जारी किए हैं।
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अमित शाह के गृहमंत्री का पद संभालते ही एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की नीति केंद्र में आ गई है। शाह ने गत दिवस सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की और आतंकियों के बारे में नई रणनीति बनाई। इस दौरान दस आतंकवादियों की लिस्ट तैयार की गई है, जो अब सुरक्षा एजेंसियों का सबसे अहम निशाना होंगे। जम्मू कश्मीर में आतंकियों का आतंक किसी भी तरह से कम होता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुछ आतंकियों ने एक घर में घुसकर एक नागरिक की हत्या कर दी। अमरनाथा यात्रा शुरू होने के बाद आज जम्मू से अमरनाथ यात्रियों का दूसरा जत्था पहलगाम और बालटाल के लिए चल दिया है। जो की कल बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए रवाना होगा। लेकिन पहलगाम के नुंवान कैंप में खराब मौसम होने के चलते फिलहाल आज के लिए यात्रा को रोक दिया गया है। वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में बुधवार को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हो गया है। अभी तक देशभर से लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए पंजीकरण करवाया है। दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिलेके द्रबगाम इलाके में सोमवार को सेना ने एनकाउंटर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के 'पोस्टर ब्वॉय' समीर अहमद भट्ट उर्फ समीर टाइगर और उसके साथी को मार गिराया। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र मन्नान बसीर वानी के आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल होने से हड़कंप मच गया है। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ही नहीं, मन्नान के पढ़ा-लिखा परिवार भी हैरान-परेशान है। बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी का छात्र आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। इस छात्र की पहचान इसा के रूप में की गई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सबजार अहमद भट्ट के एनकाउंटर के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन ने आतंकी हमाद खान को कश्मीर में नया कमांडर बनाया है। भारतीय सेना के लैफ्टिनैंट उमर फयाज के हत्यारों को पकडऩे के लिए पुलिस और सेना ने मुहिम तेज कर दी है और उनके पोस्टर जारी किए हैं।
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दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया। दरअसल, टेक-ऑफ के लिए तैयार इंडिगो की फ्लाइट के नीचे एक कार आ गई। हालांकि, कार प्लेन के पहिए से टकराने से बच गई और इस तरह एक बड़ा हादसा टल गया। इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, विमानन कंपनी 'गो फर्स्ट' की एक कार दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को इंडिगो के ए320नियो विमान के नीचे आ गई, हालांकि उसके नोज व्हील से टकराने से बाल-बाल बच गई। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय पूरे मामले की जांच करेगा। वहीं, डीजीसीए की तरफ से कहा गया कि विमान को कोई नुकसान नहीं हुआ और न किसी यात्री को चोट आई है। विमान निर्धारित समय के अनुसार रवाना हुआ। इस मामले में आगे की जांच डीएएस-एनआर द्वारा की जा रही है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इंडिगो का विमान मंगलवार सुबह पटना के लिए रवाना होने के लिए तैयार था, तभी विमानन कंपनी गो फर्स्ट की एक कार उसके नीचे आ गई, जिसके बाद अफरातफरी मच गई। हालांकि, वह नोज व्हील से टकराने से बाल-बाल बच गई। अधिकारी कार ड्राइवर से पूछताछ कर रहे हैं कि वह गाड़ी लेकर वहां क्यों पहुंच गया। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि विमान के अगले पहिए के ठीक नीचे कार है।
यह हादसा एयरपोर्ट के टर्मिनल T2 के स्टैंड नंबर 201 पर हुआ। इस हादसे में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि इस दौरान विमान में यात्री सवार थे और इस घटना के बाद इंडिगो के विमान ने पटना के लिए उड़ान भरी।
जानकारी के मुताबिक, इस घटना के बाद कार ड्राइवर का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। ये टेस्ट इसलिए कराया गया ताकि पता चल सके कि कहीं ड्राइवर ने शराब तो नहीं पी रखी थी। हालांकि, ड्राइवर का टेस्ट नेगेटिव पाया गया है। वहीं, इस मामले में गो फर्स्ट और इंडिगो की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है।
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दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया। दरअसल, टेक-ऑफ के लिए तैयार इंडिगो की फ्लाइट के नीचे एक कार आ गई। हालांकि, कार प्लेन के पहिए से टकराने से बच गई और इस तरह एक बड़ा हादसा टल गया। इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, विमानन कंपनी 'गो फर्स्ट' की एक कार दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को इंडिगो के एतीन सौ बीसनियो विमान के नीचे आ गई, हालांकि उसके नोज व्हील से टकराने से बाल-बाल बच गई। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय पूरे मामले की जांच करेगा। वहीं, डीजीसीए की तरफ से कहा गया कि विमान को कोई नुकसान नहीं हुआ और न किसी यात्री को चोट आई है। विमान निर्धारित समय के अनुसार रवाना हुआ। इस मामले में आगे की जांच डीएएस-एनआर द्वारा की जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इंडिगो का विमान मंगलवार सुबह पटना के लिए रवाना होने के लिए तैयार था, तभी विमानन कंपनी गो फर्स्ट की एक कार उसके नीचे आ गई, जिसके बाद अफरातफरी मच गई। हालांकि, वह नोज व्हील से टकराने से बाल-बाल बच गई। अधिकारी कार ड्राइवर से पूछताछ कर रहे हैं कि वह गाड़ी लेकर वहां क्यों पहुंच गया। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि विमान के अगले पहिए के ठीक नीचे कार है। यह हादसा एयरपोर्ट के टर्मिनल Tदो के स्टैंड नंबर दो सौ एक पर हुआ। इस हादसे में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि इस दौरान विमान में यात्री सवार थे और इस घटना के बाद इंडिगो के विमान ने पटना के लिए उड़ान भरी। जानकारी के मुताबिक, इस घटना के बाद कार ड्राइवर का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। ये टेस्ट इसलिए कराया गया ताकि पता चल सके कि कहीं ड्राइवर ने शराब तो नहीं पी रखी थी। हालांकि, ड्राइवर का टेस्ट नेगेटिव पाया गया है। वहीं, इस मामले में गो फर्स्ट और इंडिगो की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है।
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इलाहाबादः इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 150 वर्ष पूर्ण होने पर साल भर से चल रहे कार्यक्रम के आज होने जा रहे समापन समारोह में नरेन्द्र मोदी और कई अन्य हस्तियां हुई।
इस कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी एक साथ मंच पर हैं। इसी के साथ मंच पर चीफ जस्टिस जे. एस खेहर, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, यूपी के राज्यपाल राम नाईक और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद हैं।
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इलाहाबादः इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक सौ पचास वर्ष पूर्ण होने पर साल भर से चल रहे कार्यक्रम के आज होने जा रहे समापन समारोह में नरेन्द्र मोदी और कई अन्य हस्तियां हुई। इस कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी एक साथ मंच पर हैं। इसी के साथ मंच पर चीफ जस्टिस जे. एस खेहर, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, यूपी के राज्यपाल राम नाईक और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद हैं।
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टीवी के जाने माने मशहूर एक्टर्स में से एक कुशाल टंडन ने अपने करियर की शुरुआत साल 2011 में शुरू हुए टीवी सीरियल 'एक हजारों में मेरी बहना है' से की थी। फिलहाल कुशाल अपने शोज की वजह से नहीं बल्कि अपने अफेयर्स के कारण चर्चा में रहे हैं। अभी हाल ही में कुशाल टंडन ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम एक साथ कई तस्वीरें पोस्ट करते हुए अपने प्यार का इजहार कर दिया है। इस फोटो में उनके साथ टीवी की दुनिया के लेकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुकीं एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर नजर दिखाई दे रही हैं। तस्वीर साझा करते हुए कुशाल टंडन ने मृणाल ठाकुर को टैग करने के बाद अपने दिल की बात कहते हुए कैप्शन में लिखा है "मृणाल ठाकुर मेरे जीवन का प्यारः वे कहते हैं कि आपकी सोलमेट ही आपका प्यार होती हैं, परन्तु वो गलत है. . . . . . सोलमेट आपकी दोस्त भी हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की सुल्लू इस जीवन और अनंत काल तक तुम हमेशा मेरी सोलमेट रहेगी। वहीं "कुशाल टंडन के इस पोस्ट पर मृणाल ठाकुर ने कमेंट करते हुए लिखा है " कोई ऐसा व्यक्ति जो मुझे हमेशा मुझे तंग करता रहता है और जो मेरी जरा भी कद्र ना करता हो ऐसे इंसान को पाना सच में सौभाग्य है। फिर भी मैं आपसे प्यार करती हूं। " इसके साथ ही अगर इस फोटो की बात की जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों की जोड़ी एक दूसरे के साथ एकदम परफेक्ट लग रही हैं। वहीं दोनों स्टार्स की इन तस्वीरों को देखने के बाद सोशल मीडिया पर ज्यादातर फैन्स उनके खूब तारीफ कर रहे हैं। इसके साथ ही वर्क फ्रंट की बात करें तो कुशाल टंडन को आखिरी बार ऑल्ट बालाजी की वेब सीरीज 'हम' (Hum) में देखा गया था। वहीं खुशाल जल्द ही जी5 की अपकमिंग वेब सीरीज 'अनलॉकः द हॉन्टेड ऐप' में नजर आएंगे।
इस सीरीज में उनके साथ लीड रोल में टीवी की मशहूर अदाकारा हिना खान दिखाई देंगी। मृणाल ठाकुर ही से पहले कुशाल टंडन का नाम टीवी की मशहूर एक्ट्रेस और बिग बॉस 7 की विनर रहीं गौहर खान के साथ जोड़ा जा चूका है। दोनों एक दूसरे के करीब सलमान खान के चर्चित शो 'बिग बॉस' के दौरान ही आये थे। फिलहाल दोनों का ये रिश्ता ज्यादा दिनों नहीं टिक पाया और बाद में दोनों अलग हो गए। मृणाल ठाकुर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'जर्सी' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। इस फिल्म में उनके साथ शहीद कपूर लीड रोल में दिखाई दे सकते है ।
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टीवी के जाने माने मशहूर एक्टर्स में से एक कुशाल टंडन ने अपने करियर की शुरुआत साल दो हज़ार ग्यारह में शुरू हुए टीवी सीरियल 'एक हजारों में मेरी बहना है' से की थी। फिलहाल कुशाल अपने शोज की वजह से नहीं बल्कि अपने अफेयर्स के कारण चर्चा में रहे हैं। अभी हाल ही में कुशाल टंडन ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम एक साथ कई तस्वीरें पोस्ट करते हुए अपने प्यार का इजहार कर दिया है। इस फोटो में उनके साथ टीवी की दुनिया के लेकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुकीं एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर नजर दिखाई दे रही हैं। तस्वीर साझा करते हुए कुशाल टंडन ने मृणाल ठाकुर को टैग करने के बाद अपने दिल की बात कहते हुए कैप्शन में लिखा है "मृणाल ठाकुर मेरे जीवन का प्यारः वे कहते हैं कि आपकी सोलमेट ही आपका प्यार होती हैं, परन्तु वो गलत है. . . . . . सोलमेट आपकी दोस्त भी हो सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की सुल्लू इस जीवन और अनंत काल तक तुम हमेशा मेरी सोलमेट रहेगी। वहीं "कुशाल टंडन के इस पोस्ट पर मृणाल ठाकुर ने कमेंट करते हुए लिखा है " कोई ऐसा व्यक्ति जो मुझे हमेशा मुझे तंग करता रहता है और जो मेरी जरा भी कद्र ना करता हो ऐसे इंसान को पाना सच में सौभाग्य है। फिर भी मैं आपसे प्यार करती हूं। " इसके साथ ही अगर इस फोटो की बात की जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों की जोड़ी एक दूसरे के साथ एकदम परफेक्ट लग रही हैं। वहीं दोनों स्टार्स की इन तस्वीरों को देखने के बाद सोशल मीडिया पर ज्यादातर फैन्स उनके खूब तारीफ कर रहे हैं। इसके साथ ही वर्क फ्रंट की बात करें तो कुशाल टंडन को आखिरी बार ऑल्ट बालाजी की वेब सीरीज 'हम' में देखा गया था। वहीं खुशाल जल्द ही जीपाँच की अपकमिंग वेब सीरीज 'अनलॉकः द हॉन्टेड ऐप' में नजर आएंगे। इस सीरीज में उनके साथ लीड रोल में टीवी की मशहूर अदाकारा हिना खान दिखाई देंगी। मृणाल ठाकुर ही से पहले कुशाल टंडन का नाम टीवी की मशहूर एक्ट्रेस और बिग बॉस सात की विनर रहीं गौहर खान के साथ जोड़ा जा चूका है। दोनों एक दूसरे के करीब सलमान खान के चर्चित शो 'बिग बॉस' के दौरान ही आये थे। फिलहाल दोनों का ये रिश्ता ज्यादा दिनों नहीं टिक पाया और बाद में दोनों अलग हो गए। मृणाल ठाकुर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'जर्सी' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। इस फिल्म में उनके साथ शहीद कपूर लीड रोल में दिखाई दे सकते है ।
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किसी भी प्रक्रिया के लिए, आप जानते हैं कि इसमें एक अवरोध शामिल है। अब इस मामले में, ये एनन्शियोमर हैं, तो उनकी ऊर्जा समान होगी। लेकिन इस प्रतिपन प्रक्रिया में एक अवरोध होगा । अब नाइट्रोजन के मामले में यह अवरोध ऐसा है कि यह कमरे के तापमान पर होता है। इसलिए अगर प्रतिपन कमरे के तापमान पर होता है, तो इसका मतलब है कि एक एनन्शियोमर को अन्य एनन्शियोमर में कमरे के तापमान पर बदल दिया गया है ।
तो जिस क्षण आप इसे अलग करने की कोशिश करेंगे, तब यह होगा कि इसका 50 प्रतिशत अन्य एनन्शियोमर के 50 प्रतिशत में बदल जाता है। इसलिए नाइट्रोजन के मामले में इन एनन्शियोमर को अलग करना संभव नहीं है। अब इस प्रतिपन का इस आरेख द्वारा खूबसूरती से वर्णन किया जा सकता है। मान लीजिए कि आपके पास एक इस तरह की उल्टी छतरी है और स्पिन प्रतिपन में क्या होता है की वह दूसरे उल्टे छत्र में चला जाता है जो इस तरह दिखेगा, आइए स्लाइड्स के माध्यम से इस प्रतिपन प्रक्रिया का फिर से निरीक्षण करते हैं। (स्लाइड समय देखेंः 7:17)
Nitrogen chirality center
नाइट्रोजन को एक sp3 संकरित नाइट्रोजन के रूप में शुरू करते हैं लेकिन प्रतिपन प्रक्रिया के दौरान मध्यवर्ती चरण में, यह sp2 बन जाता है जहां ये तीन समूह, R1, R2, R3, यहां उनको अलग-अलग रंगों से दिखाया गया है।
एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म सबसे ऊपर है। अगर यह नीचे जाने की कोशिश करता है, मध्यवर्ती से गुजरना पड़ता है जहाँ यह नाइट्रोजन sp2 संकरित हो जाता है और अब यह एक शुद्ध p ऑर्बिटल है। तो अब यह सभी तीन समूह एक तलीय अभिविन्यास में आ जाते है। इसका मतलब है कि अब इस विन्यास में नाइट्रोजन की किरैलता खो गई है। इसने किरैलता को खो दिया है, लेकिन यह फिर से संकरण SP3 में बदलकर किरैलता प्राप्त करता है लेकिन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को विपरीत दिशा में रखना है।
इसलिए अब एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म सबसे निचले वाले ऑर्बिटल पर कब्जा कर रहा है । इससे पहले, यह शीर्ष पर था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रतिपन प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती शामिल है जहां नाइट्रोजन sp2 संकरित है और इसने किरैलता को खो दिया है। तो वास्तव में, आप बाद में यह जानेंगे की जब एक एनन्शियोमर से दूसरे एनन्शियोमर में परिवर्तन अर्थात प्रतिपन होता है, तो आप प्लेनर अणु के माध्यम से जाते है और फिर किरैलता को वापस लाने के लिए नॉन-प्लेनर अणु पर जाते हैं।
नॉन-प्लानर अणु में जाने के दौरान, आपके पास दो विकल्प होते हैं या तो आप प्रारंभिक बिंदु से जाते हैं अथवा उत्पाद बिंदु पर जाते हैं। तो यहां क्या होता है। तो प्रारंभिक बिंदु यह नॉनप्लेनर है
किरैल है। फिर आप एक प्लेनर सिस्टम पर जाते हैं जो कि अकिरैल है और फिर मेरे पास वापस पीछे जाने का या आगे विपरीत एनन्शियोमरिक की ओर जाने का विकल्प है । तो यह प्रक्रिया जैसा कि मैंने कहा कि कमरे के तापमान पर होती है।
प्रतिपन अवरोध अलग-अलग एल्किल समूहों के आकार पर निर्भर करता है। तो प्रतिपन अवरोध भिन्न हो सकते हैं। तो यह लगभग 6 किलो कैलोरी प्रति मोल के आसपास है जब R एक एल्किल समूह के बराबर है, एक छोटे एल्किल समूह, माना मिथाइल । अब सवाल यह है कि नाइट्रोजन में प्रतिपन अवरोध इतना कम क्यों होता है और जो वास्तव में हमें नाइट्रोजन के 2 एनन्शियोमर्स को अलग करने से रोकता है। (स्लाइड समय देखेंः 10:27 )
4 danl
सिर्फ उल्लेख करने के लिए कि यदि आप नाइट्रोजन समूह के साथ आवर्त सारणी में अगले तत्व पर जाते हैं, आप फास्फोरस देखेंगे और फास्फोरस में, प्रतिपन अवरोध काफी अधिक है और यह इतना अधिक होता है की जिसके कारण फास्फोरस यौगिकों, किरैल फास्फोरस त्रि- एल्किल यौगिकों को कमरे के तापमान पर अलग करना संभव है।
तो अब सवाल यह है कि प्रतिपन अवरोध फॉस्फोरस में उच्च और नाइट्रोजन में कम क्यों है । तो यह प्रतिपन प्रभाव है। अब, एक बात स्पष्ट है जो पहले भी दर्शाई गई थी। कि इस से इस तक जाते समय, नाइट्रोजन को एक पिरामिड आकार से गुजरना पड़ता है। मतलब समूहों को पिरामिडल होना पड़ता है। और यह कक्ष, शुद्ध p कक्ष अब एकाकी इलेक्ट्रान युग्म में है।
और नाइट्रोजन जिसे आप कह सकते हैं कि यह एक त्रिकोणीय बाईपीरामिड़ संरचना है जिसमें एकाकी इलेक्ट्रान युग्म शामिल है इसलिए मूल रूप से आप एक sp3 संकर कक्ष का P ऑर्बिटल के माध्यम से रूपांतरण मानते है ठीक है? नाइट्रोजन 2p कक्षीय है। नाइट्रोजन में, आप जानते हैं कि ये कोण 109 डिग्री 28 मिनट पर कभी नहीं बनाए रखा जाता है।
यह इस एकाकी इलेक्ट्रान युग्म और बंध युग्म के प्रतिकर्षण के कारण थोड़ा कम है और जब वे एक मान पर संतुलित हो जाते हैं तो कोण 107 से 105 डिग्री के बीच में होता है, जो एल्काइल समूह की प्रकृति के साथ बदलता है। तो यह अपेक्षित मान 109.5 डिग्री से थोड़ा कम है । अब अगर आप इन विभिन्न संकरण अवस्थाओं को देखें, sp3, sp2 और sp, तो क्या होता है? यहाँ बंध कोण, सही बंध कोण, अगर यह शुद्धsp3 है, तो 109.5 है, यहाँ यह 120 है और यहाँ यह 180 है।
तो हम जो देखते हैं कि जैसे जैसे P गुण बढ़ता है, कोण नीचे जाता है। तो इसका मतलब है, नाइट्रोजन में क्योंकि कोण 109.5 डिग्री से कम है इसलिए P गुण का प्रतिशत, तो इसे कम करने के लिए इन संकर कक्ष का बंध बनाना अधिक ठीक होगा। तो अब P गुण कितना अधिक होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की वास्तविक बंध कोण से कितना विचलन है
तो अब यह शुद्ध sp3 नहीं है। तो यह इसी तरह कुछ अतिरिक्त S गुण है, लेकिन अगर आप फास्फोरस के मामले में देखते हैं तो ये कोण 90 डिग्री के करीब हैं। और अगर यह 90 डिग्री के करीब है, तो इसका मतलब है कि इनको P गुण अधिक मिला है
मान लीजिए कि यह x प्रतिशत अतिरिक्त S गुण है और यह y प्रतिशत है तो आप क्या कह सकते हैं कि y, X की तुलना में बहुत अधिक है। तो इसे S गुण अधिक मिला है। अब का
मतलब है ऑर्बिटल को यहाँ से sp2 ऑर्बिटल तक जाना होता है। तो ऑर्बिटल जिसके पास पहले से ही S गुण अधिक हैं, उस ऑर्बिटल के लिए शुद्ध p ऑर्बिटल में जाने के लिए उस ऑर्बिटल की तुलना में अधिक कठिन होगा जो sp3 संकरित ऑर्बिटल के करीब है, लेकिन S गुण sp3 से बहुत अलग नहीं है क्योंकि कोण है केवल 107 से 105 डिग्री है।
तो फिर से, मैं इस बात को दोहराती हूं कि क्योंकि ट्राय एल्काइल फॉस्फीन में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म इन ऑर्बिटल में S गुण, नाइट्रोजन की तुलना में बहुत अधिक है इसलिए इसके लिए शुद्ध P में परिवर्तित होना अधिक कठिन होगा और इसीलिए आपके पास नाइट्रोजन की तुलना में प्रतिपन के लिए अधिक अवरोध है ।
अब यह एक तर्क है। अन्य तर्क भी हैं जिन्हें आप आगे रख सकते हैं और वैज्ञानिकों किया भी है (स्लाइड समय देखेंः 16:53 )
ने यह
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किसी भी प्रक्रिया के लिए, आप जानते हैं कि इसमें एक अवरोध शामिल है। अब इस मामले में, ये एनन्शियोमर हैं, तो उनकी ऊर्जा समान होगी। लेकिन इस प्रतिपन प्रक्रिया में एक अवरोध होगा । अब नाइट्रोजन के मामले में यह अवरोध ऐसा है कि यह कमरे के तापमान पर होता है। इसलिए अगर प्रतिपन कमरे के तापमान पर होता है, तो इसका मतलब है कि एक एनन्शियोमर को अन्य एनन्शियोमर में कमरे के तापमान पर बदल दिया गया है । तो जिस क्षण आप इसे अलग करने की कोशिश करेंगे, तब यह होगा कि इसका पचास प्रतिशत अन्य एनन्शियोमर के पचास प्रतिशत में बदल जाता है। इसलिए नाइट्रोजन के मामले में इन एनन्शियोमर को अलग करना संभव नहीं है। अब इस प्रतिपन का इस आरेख द्वारा खूबसूरती से वर्णन किया जा सकता है। मान लीजिए कि आपके पास एक इस तरह की उल्टी छतरी है और स्पिन प्रतिपन में क्या होता है की वह दूसरे उल्टे छत्र में चला जाता है जो इस तरह दिखेगा, आइए स्लाइड्स के माध्यम से इस प्रतिपन प्रक्रिया का फिर से निरीक्षण करते हैं। Nitrogen chirality center नाइट्रोजन को एक spतीन संकरित नाइट्रोजन के रूप में शुरू करते हैं लेकिन प्रतिपन प्रक्रिया के दौरान मध्यवर्ती चरण में, यह spदो बन जाता है जहां ये तीन समूह, Rएक, Rदो, Rतीन, यहां उनको अलग-अलग रंगों से दिखाया गया है। एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म सबसे ऊपर है। अगर यह नीचे जाने की कोशिश करता है, मध्यवर्ती से गुजरना पड़ता है जहाँ यह नाइट्रोजन spदो संकरित हो जाता है और अब यह एक शुद्ध p ऑर्बिटल है। तो अब यह सभी तीन समूह एक तलीय अभिविन्यास में आ जाते है। इसका मतलब है कि अब इस विन्यास में नाइट्रोजन की किरैलता खो गई है। इसने किरैलता को खो दिया है, लेकिन यह फिर से संकरण SPतीन में बदलकर किरैलता प्राप्त करता है लेकिन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को विपरीत दिशा में रखना है। इसलिए अब एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म सबसे निचले वाले ऑर्बिटल पर कब्जा कर रहा है । इससे पहले, यह शीर्ष पर था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रतिपन प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती शामिल है जहां नाइट्रोजन spदो संकरित है और इसने किरैलता को खो दिया है। तो वास्तव में, आप बाद में यह जानेंगे की जब एक एनन्शियोमर से दूसरे एनन्शियोमर में परिवर्तन अर्थात प्रतिपन होता है, तो आप प्लेनर अणु के माध्यम से जाते है और फिर किरैलता को वापस लाने के लिए नॉन-प्लेनर अणु पर जाते हैं। नॉन-प्लानर अणु में जाने के दौरान, आपके पास दो विकल्प होते हैं या तो आप प्रारंभिक बिंदु से जाते हैं अथवा उत्पाद बिंदु पर जाते हैं। तो यहां क्या होता है। तो प्रारंभिक बिंदु यह नॉनप्लेनर है किरैल है। फिर आप एक प्लेनर सिस्टम पर जाते हैं जो कि अकिरैल है और फिर मेरे पास वापस पीछे जाने का या आगे विपरीत एनन्शियोमरिक की ओर जाने का विकल्प है । तो यह प्रक्रिया जैसा कि मैंने कहा कि कमरे के तापमान पर होती है। प्रतिपन अवरोध अलग-अलग एल्किल समूहों के आकार पर निर्भर करता है। तो प्रतिपन अवरोध भिन्न हो सकते हैं। तो यह लगभग छः किलो कैलोरी प्रति मोल के आसपास है जब R एक एल्किल समूह के बराबर है, एक छोटे एल्किल समूह, माना मिथाइल । अब सवाल यह है कि नाइट्रोजन में प्रतिपन अवरोध इतना कम क्यों होता है और जो वास्तव में हमें नाइट्रोजन के दो एनन्शियोमर्स को अलग करने से रोकता है। चार danl सिर्फ उल्लेख करने के लिए कि यदि आप नाइट्रोजन समूह के साथ आवर्त सारणी में अगले तत्व पर जाते हैं, आप फास्फोरस देखेंगे और फास्फोरस में, प्रतिपन अवरोध काफी अधिक है और यह इतना अधिक होता है की जिसके कारण फास्फोरस यौगिकों, किरैल फास्फोरस त्रि- एल्किल यौगिकों को कमरे के तापमान पर अलग करना संभव है। तो अब सवाल यह है कि प्रतिपन अवरोध फॉस्फोरस में उच्च और नाइट्रोजन में कम क्यों है । तो यह प्रतिपन प्रभाव है। अब, एक बात स्पष्ट है जो पहले भी दर्शाई गई थी। कि इस से इस तक जाते समय, नाइट्रोजन को एक पिरामिड आकार से गुजरना पड़ता है। मतलब समूहों को पिरामिडल होना पड़ता है। और यह कक्ष, शुद्ध p कक्ष अब एकाकी इलेक्ट्रान युग्म में है। और नाइट्रोजन जिसे आप कह सकते हैं कि यह एक त्रिकोणीय बाईपीरामिड़ संरचना है जिसमें एकाकी इलेक्ट्रान युग्म शामिल है इसलिए मूल रूप से आप एक spतीन संकर कक्ष का P ऑर्बिटल के माध्यम से रूपांतरण मानते है ठीक है? नाइट्रोजन दोp कक्षीय है। नाइट्रोजन में, आप जानते हैं कि ये कोण एक सौ नौ डिग्री अट्ठाईस मिनट पर कभी नहीं बनाए रखा जाता है। यह इस एकाकी इलेक्ट्रान युग्म और बंध युग्म के प्रतिकर्षण के कारण थोड़ा कम है और जब वे एक मान पर संतुलित हो जाते हैं तो कोण एक सौ सात से एक सौ पाँच डिग्री के बीच में होता है, जो एल्काइल समूह की प्रकृति के साथ बदलता है। तो यह अपेक्षित मान एक सौ नौ.पाँच डिग्री से थोड़ा कम है । अब अगर आप इन विभिन्न संकरण अवस्थाओं को देखें, spतीन, spदो और sp, तो क्या होता है? यहाँ बंध कोण, सही बंध कोण, अगर यह शुद्धspतीन है, तो एक सौ नौ.पाँच है, यहाँ यह एक सौ बीस है और यहाँ यह एक सौ अस्सी है। तो हम जो देखते हैं कि जैसे जैसे P गुण बढ़ता है, कोण नीचे जाता है। तो इसका मतलब है, नाइट्रोजन में क्योंकि कोण एक सौ नौ.पाँच डिग्री से कम है इसलिए P गुण का प्रतिशत, तो इसे कम करने के लिए इन संकर कक्ष का बंध बनाना अधिक ठीक होगा। तो अब P गुण कितना अधिक होगा यह इस बात पर निर्भर करता है की वास्तविक बंध कोण से कितना विचलन है तो अब यह शुद्ध spतीन नहीं है। तो यह इसी तरह कुछ अतिरिक्त S गुण है, लेकिन अगर आप फास्फोरस के मामले में देखते हैं तो ये कोण नब्बे डिग्री के करीब हैं। और अगर यह नब्बे डिग्री के करीब है, तो इसका मतलब है कि इनको P गुण अधिक मिला है मान लीजिए कि यह x प्रतिशत अतिरिक्त S गुण है और यह y प्रतिशत है तो आप क्या कह सकते हैं कि y, X की तुलना में बहुत अधिक है। तो इसे S गुण अधिक मिला है। अब का मतलब है ऑर्बिटल को यहाँ से spदो ऑर्बिटल तक जाना होता है। तो ऑर्बिटल जिसके पास पहले से ही S गुण अधिक हैं, उस ऑर्बिटल के लिए शुद्ध p ऑर्बिटल में जाने के लिए उस ऑर्बिटल की तुलना में अधिक कठिन होगा जो spतीन संकरित ऑर्बिटल के करीब है, लेकिन S गुण spतीन से बहुत अलग नहीं है क्योंकि कोण है केवल एक सौ सात से एक सौ पाँच डिग्री है। तो फिर से, मैं इस बात को दोहराती हूं कि क्योंकि ट्राय एल्काइल फॉस्फीन में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म इन ऑर्बिटल में S गुण, नाइट्रोजन की तुलना में बहुत अधिक है इसलिए इसके लिए शुद्ध P में परिवर्तित होना अधिक कठिन होगा और इसीलिए आपके पास नाइट्रोजन की तुलना में प्रतिपन के लिए अधिक अवरोध है । अब यह एक तर्क है। अन्य तर्क भी हैं जिन्हें आप आगे रख सकते हैं और वैज्ञानिकों किया भी है ने यह
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एवं कर्म के पथ की समाप्ति ही समाधि है। " आत्मा एवं परमात्मा की अवधारणा के बारे में उनका कहना था, "देखो, यह एक वृक्ष और उसकी छाया की तरह है। यदि तुम ध्यानपूर्वक वृक्ष की तरफ देखोगे तो छाया नहीं देख पाओगे । यदि तुम्हारा लक्ष्य पूर्ण है तो यह पाओगे कि वहां मात्र एक आत्मा ही है; छाया वृक्ष की है और कुछ भी नहीं।"
कविराजजी ने सन् 1935 में माँ से अपने गुरु परमहंस विशुद्धानन्दजी से मिलने का अनुरोध किया जो उस समय के एक विख्यात योगी थे। वे उन्हें वाराणसी के मलदहिया क्षेत्र में स्थित विशुद्धानन्दजी के आश्रम में ले गए। उस समय उनकी आयु काफी हो चुकी थी और वे 'गंध बाबा' के नाम से विख्यात थे। वे सौर ऊर्जा का उपयोग कर एक वस्तु को दूसरी वस्तु में परिवर्तित करने का रहस्य जानते थे। वे माँ की पवित्र उपस्थिति के कारण बहुत आनन्दित हुए। उन्होंने एकान्त में माँ के साथ आध्यात्मिक विषयों पर लम्बी चर्चा की। श्री माँ के अनुरोध पर उन्होंने एक पुष्प को सूर्य की किरणों से स्फटिक में परिवर्तित कर दिखाया और एक रूमाल से गुलाब की सुंगध पैदा कर दी। जब माँ ने उन्हें यह बताया कि वे यह जानती हैं कि इन सब को कैसे किया जाता है तो उन्होंने माँ की ओर विनम्र भावों से देखा और कहा, "बेटी, तेरी शक्ति से ही तो यह सब कर लेता हूं।" माँ ने वहां उपस्थित भक्तों से कहा, "बाबा ने इन चीजों से तुम्हें भुला रखा है। बाबा से असल वस्तु न लेने का गलती न करना। " माँ से भेंट होने के कुछ ही दिनों बाद स्वामी विशुद्धानन्दजी का वाराणसी में देहांत हो गया।
प्रख्यात दार्शनिक डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कई बार कविराजजी के निवास पर आकर उनसे मिले । कविराजजी को भारत के राष्ट्रपति से 'पद्म विभूषण' सम्मान मिला था। वे साधना के लिए अपने जीवन के अंतिम एक दशक तक वाराणसी में माँ के आश्रम में रहे थे एवं उन्होंने उच्च आध्यात्मिक स्तर को प्राप्त किया। वर्ष 1977 में वहीं उनका देहान्त हुआ। माँ ने कहा था कि वर्तमान युग में ऐसा विद्वान व्यक्ति देखने को नहीं मिलता।
माँ के सम्पर्क में आए महात्मागण
अनुभूति सम्पन्न शीर्ष महात्मागणों ने माँ की किशोरावस्था से ही उन्हें आध्यात्मिक जगत के शीर्ष स्थान पर आसीन अनुभव किया । भोला
गिरि आश्रम के दिवंगत महामण्डलेश्वर स्वामी देवानन्द सरस्वती जी ने लिखा है कि श्री माँ आध्यात्म जगत की एक विस्मयकर व्यतिकम थीं। माँ जन्म से ही पूर्णतया अनुभूति सम्पन्न थीं और इसलिए उनका समस्त जीवन ही विस्मयकर एवं समझ से परे है।
इलाहाबाद में झूसी के प्रख्यात संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारीजी ने पहली बार माँ का परिचय साधु समुदाय से करवाया। प्रारंभ में पुरुष साधु उनसे दूरी बनाये रखते थे क्योंकि वे श्वेत परिधान पहने एक महिला संत को स्वीकार नहीं कर पाते थे। बहरहाल, धीरे-धीरे यह अड़चन भी समाप्त हो गई और वे उनके आध्यात्मिक एवं आनन्दमय व्यक्तित्व से आकर्षित हो गए। शनैः शनैः जब अन्य विख्यात उन्नत महात्मागण उनके सम्पर्क में आए तथा आध्यात्मिक साम्राज्य में उनकी अकल्पनीय उच्च स्थिति को अनुभव किया तो साधु समाज में भी उन्हें विश्व जननी के रूप में मान्यता मिली। उनमें से कई माँ के समक्ष अपनी समस्याएं रखते थे और अपनी साधना के पथ पर आगे बढ़ने के लिए उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते थे।
जिस किसी ने भी अपने पूर्व या वर्तमान जन्म में थोड़ी-सी तपस्या की हो, माँ ने प्रायः उन पर अपनी कृपा वर्षा की या उन्हें अपने दर्शन दिए । कई बार उन्होंने ऐसे लोगों के पास सूक्ष्म रूप में जाकर दर्शन दिए अथवा वे स्वयं चलकर उनके पास पहुंचे। कई अनुभूति सम्पन्न संतों ने अपने इष्ट या गुरु का संदेश प्राप्त करने के बाद माँ से सम्पर्क किया। माँ के सम्पर्क में आने वाले कुछ प्रख्यात महात्माओं का विवरण निम्नानुसार है : -
शंकर भारती जी वाराणसी के एक प्रख्यात सिद्ध संत थे जो पिछली शताब्दी में चौथे दशक के प्रारम्भिक वर्षों में साधु समुदाय में एक उन्नत, त्यागी विद्वान पुरुष के रूप में प्रसिद्ध थे। वे वाराणसी के विख्यात अन्नपूर्णा मंदिर के समीप रहते थे। वे केवल उबली हुए शाक-सब्जी ही खाते थे जो सब्जी मण्डी में दुकानदारों के चले जाने के बाद पड़ी हुई या छांटी गई सब्जी में से मिल जाती थी।
एक बार वे अत्यधिक बीमार पड़ गए। उस समय उनका परिचारक भी उनके समीप नहीं था। इसलिए न तो उनकी देखभाल हो पा रही थी और न ही उन्हें भोजन मिल पा रहा था । उपवास हालत में निस्सहाय भारतीजी माँ अन्नापूर्णा मंदिर गए और उन्हीं से प्रश्न किया कि जो देवी
सभी के लिए अन्न उपलब्ध कराती हैं उनके क्षेत्र के इतने समीप रहनेवाला कोई व्यक्ति बिना भोजन के कैसे रह सकता है? यह कहकर वे वापस चले आये। श्री माँ उस समय अपने वाराणसी आश्रम में थीं जो भारतीजी के स्थान से काफी दूर था। माँ में अचानक प्रतिक्रिया दिखाई दी और उन्होंने एक ब्रह्मचारी को बुलवाकर विभिन्न भोजन सामग्री भारतीजी के पास स्वतः के भिजवा दी। इससे भारतीजी बड़े आश्चर्य में पड़ गए।
एक बार प्रार्थना के समय भारतीजी को अपनी इष्ट देवी त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन हुए। देवी ने उनसे माँ आनन्दमयी के समीप जाकर मिलने का निर्देश दिया और कहा कि उनके पवित्र शरीर में वे सदैव निवास करती हैं। इसके तुरंत बाद भारतीजी पैदल चलकर माँ के पास पहुंचे तथा उन्हें एक बड़ा सा पुष्पहार अर्पित कर साष्टांग प्रणाम किया। जब यह बात फैली तो साधु समाज के लिए यह एक समाचार बन गई क्योंकि भारतीजी कहीं जाकर किसी से नहीं मिलते थे तथा किसी महिला से तो वे कभी नही मिलते थे। परिणामस्वरूप अन्य साधु भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए माँ के पास आने लगे। भारतीजी के अनुसार, "माँ मूर्तिमान चिदानन्द स्वरूप हैं। उनके दैवी शरीर की उपस्थिति विश्व पर एक कृपा है ।"
सेवादासी माताजी पश्चिम बंगाल के नवद्वीप की प्रख्यात महात्मा थीं जो 'गोविन्दजी' की भक्त थीं। वे सदा राधा भाव में रहती थीं और गोपी वेश धारण करती थीं। उनका गोविन्दजी से सीधा वार्तालाप होता था। उन्होंने आश्चर्यजनक ढंग से दो दशक से अधिक समय से कुछ भी नहीं खाया और पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की थी । फलतः उनके शरीर को मल-मूत्र के लिए जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। गोविन्दजी की अनुमति के बिना वे आश्रम परिसर के बाहर कभी नहीं जाती थीं। माँ जब सन् 1937 में नवद्वीप गईं तो एक दिन सेवादासी माताजी उनके पास आईं। उन्होंने बताया कि उनके इष्ट गोविन्दजी ने उन्हें माँ के पास जाने का निर्देश दिया है और कहा है कि उनके पवित्र शरीर में वे सदा निवास करते हैं। वे माँ को अपने आश्रम में ले गईं तथा उनसे कहा, "आप मनुष्य रूप में भगवान कृष्ण ही हो।" उनके अनुसार माँ के भीतर बचपन से ही गोविन्दजी विराजमान हैं।
हरिबाबा एक उच्च कोटि के संत थे और उनका सम्बन्ध पंजाब के होशियारपुर से था। उन्होंने देहरादून के सहस्रधारा में पहली बार माँ का
तब दर्शन किया जब इलाहाबाद के प्रसिद्ध संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी ने वहां भागवत सप्ताह का आयोजन किया था तथा उसमें माँ को भी आमंत्रित किया था। हरिबाबा का सम्बन्ध सिख समुदाय से था किन्तु वह चैतन्य महाप्रभु के बड़े भक्त थे। हरिबाबा के गुरु भी एक अनुभूति सम्पन्न संत थे और उन्होंने बताया था कि माँ स्वयम् ही निष्ठावान साधकों को मोक्ष प्रदान करती हैं। इसके बाद अपने गुरु के निर्देश के अनुसार हरिबाबा माँ के सम्पर्क में आये। उसके बाद से हरिबाबा ने माँ के प्रति असीम भक्ति और श्रद्धा प्रदर्शित की। माँ भी उन्हें बहुत स्नेह और सम्मान की दृष्टि से देखती थीं तथा उन्होंने कहा था कि वर्तमान युग में ऐसा महात्मा दुर्लभ है।
वर्ष 1955 में हरिबाबा गंभीर रूप से बीमार पड़ गए तथा दिल्ली एक नर्सिंग होम में उनका ऑपरेशन किया गया। एक दिन जब उनकी शारीरिक स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई तो माँ उन्हें देखने के लिए आईं। हरिबाबा के कमरे के प्रवेश द्वार पर उनके दिवंगत गुरुदेव सूक्ष्म रूप में आए तथा माँ से अपने शिष्य की प्राण रक्षा की विनय की। माँ की कृपा से उस बार हरिबाबा पर यह संकट टल गया। इसके बाद से वे अधिकतर समय माँ के पास ही रहे। माँ प्रायः अपना कार्यक्रम इस प्रकार वनाती थी जिससे उनको सुभीता रहे।
जनवरी 1970 में माँ हरिबाबा को देखने के लिए दिल्ली गईं जहां वे गंभीर रूप से बीमार थे। माँ जब वाराणसी लौट रही थीं तो हरिबाबा किसी शिशु की तरह माँ के ही साथ जाने के लिए बुरी तरह जिद करने लगे तथा उन्होंने अपने शिष्यों की सलाह को भी पूरी तरह नकार दिया। उनकी खराब तबीयत को देखते हुए उनके शिष्य नहीं चाहते थे कि वे कहीं जाएं। बहरहाल, माँ की सलाह पर दिल्ली के प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ एवं माँ के परम भक्त डॉक्टर दुर्गादास सेनगुप्ता रेलयात्रा में हरिबाबा के साथ गए। वाराणसी आने के कुछ ही दिनों बाद आश्रम में हरिबाबा का देहांत हो गया और उस समय उनके सिराहने पर माँ एवं गिरिजी उपस्थित थीं। इस तरह एक सिद्ध महात्मा और माँ के करीबी भक्त का देहान्त उसी तरह हुआ, जैसा कि वे चाहते थे।
उड़िया बाबा वृंदावन के एक अलौकिक शक्तिसम्पन्न महान संत थे जिनका उत्तर भारत में काफी प्रचार था । हरिबाबा वृंदावन में प्रायः उड़िया
बाबा के आश्रम में ही रुकते थे। वयोवृद्ध उड़िया बाबा भी माँ के प्रति विशेष स्नेह एवं सम्मान का भाव रखते थे।
एक बार बड़े-बड़े महात्माओं की उपस्थिति में उड़िया बाबा ने माँ का हाथ पकड़कर तथा भावाविष्ट होकर रुंधे हुए स्वरों में कहा था, "माँ, मैं आपको पहचान नहीं पाया। " माँ उनके आश्रम में होने वाले सत्संग में भाग लेने और रासलीला देखने के लिए प्रायः वहां जाया करती थीं। वृंदावन में जब उड़िया बाबा बीमार थे तो वे माँ को जाने नहीं दे रहे थे और उनका इस बात पर जोर था कि माँ उनके सिराहने के पास रहें। दोनों ने पिता एवं छोटी बच्ची की तरह कई दिन बिताए । माँ ने गुरुप्रिया दीदी को संकेत दिया था कि उड़िया बाबा का सहसा भावविह्वल होना, उनकी जीवनलीला पूर्ण होने का संकेत हो सकता है। इसके कुछ समय बाद ही आश्रम में हुए एक दुखद हादसे में उड़िया बाबा का देहांत हो गया। माँ बाबाजी के भण्डारे तथा महाप्रयाण से जुड़े अन्य क्रियाकर्मों में पूरे समय उपस्थित रही थीं।
त्रिवेणी पुरीजी पंजाब के विख्यात एवं अनुभूति सम्पन्न संत थे जिन्हें आमतौर पर " खन्ना बाबा" के रूप में जाना जाता था। वह परम वेदान्ती थे। उनसे एक भक्त ने प्रश्न किया था कि क्या माँ अवतार हैं, इस पर उन्होंने कहा, अवतार तो छोटी चीज है। माँ वह हैं जहां से अवतार अवतरित होते हैं।" उन्होंने यह भी कहा था - " जैसे कि नदियों के समुद्र मे मिलने से उसके जलस्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, उसी प्रकार सभी धार्मिक भाव माँ की ओर ही जाते हैं तथा माँ सभी परिस्थितियों में समान रहती हैं। जिस प्रकार सागर की कोई सीमा नहीं होती, उसी तरह माँ को भी सीमाओं में आबद्ध नहीं किया जा सकता।'
स्वामी शिवानन्दजी महाराज भी एक विख्यात अनुभूति सम्पन्न संत थे जिन्होंने ऋषिकेश के 'दिव्य जीवन संघ' की स्थापना की थी। इस वयोवृद्ध संत को देखने उनके आश्रम गईं थीं। बाद में स्वामी शिवानन्द जी ने माँ के बारे में कहा था कि वे "भारत का सबसे अधिक पूर्ण प्रस्फुटित पुष्प हैं।" उनके विश्वस्त शिष्य एवं अनुभूति सम्पन्न संत स्वामी चिदानन्दजी तथा आश्रम के अन्य लोग प्रायः माँ के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते रहते थे।
परमहंस योगानन्द भी एक प्रख्यात सिद्ध संत थे जिन्होंने भारत में
'वर्ल्ड योगदा सतसंग फाउंडेशन' और अमेरिका में 'सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप' की स्थापना की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी' (हिन्दी में 'योगी कथामृत') में लिखा है कि उन्हें भारत में कई ऐसे संत मिले जिन्होंने भगवान के दर्शन किए किन्तु उन्हें पहले कभी श्री माँ जैसी आध्यात्मिक रूप से उच्चतम संत से मिलने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने एक बार माँ से अनुरोध किया कि वे अपने बारे में कुछ बोलें। माँ ने विनम्रता से कहा, "बाबा कहने को क्या है? मेरी चेतना कभी इस अस्थायी देह से सम्बद्ध नहीं हुई। इस पृथ्वी पर आने से पहले मैं वही थी। एक छोटी बच्ची की उम्र में भी मैं वही थी। मैं बढ़कर महिला हो गई किन्तु मैं वही रही । जिस परिवार में मैं जन्मी थी उसने इस शरीर के विवाह के लिए सारे प्रबंध किए। मैं फिर भी वही थी । आपके सामने खड़ी मैं वही हूं। बाद में भी मेरे आसपास भले ही सृष्टि का खेल चलता रहे, मैं वही रहूंगी।" इस प्रकार माँ ने स्वामीजी को अपने दिव्य स्वरूप के बारे में समझाया। परमहंस योगानन्द जी से माँ के बारे में सुनकर उनकी प्रधान शिष्या सिस्टर दया एवं उनके साथ कुछ भक्त कई बार माँ का दर्शन करने अमेरिका से आये।
मोहनानन्द ब्रह्मचारीजी भी ईश्वर दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके एक संत थे। वे देवघर के प्रख्यात संत बालानन्द ब्रह्मचारी के योग्य शिष्य थे। उनकी भेंट माँ से अपने गुरु के आश्रम में हुई। उस समय वे गहरी साधना में लीन थे। एक बार देर रात जब वे भोजन ग्रहण करने जा रहे थे तभी उनके मन में एक विचित्र इच्छा उठी । वह चाहते थे कि भोजन में से माँ को कुछ खिलाने के बाद ही वे स्वयं भोजन करें किन्तु इतनी रात में वह माँ को परेशान करने से संकोच कर रहे थे। उसी क्षण किसी ने उनका दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खोलते ही उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि सामने माँ अकेले खड़ी थीं। उन्होंने माँ को कुछ फल खिलाए और इसके बाद माँ लौट गईं। वर्ष 1948 में बीमार मोहनानन्दजी उस समय आनन्द से भर उठे जब उन्हें देखने के लिए माँ स्वयं उनके सिराहने के पास आ खड़ी हुईं। उन्होंने बताया कि रुग्णावस्था में वे व्याकुल होकर माँ का स्मरण कर रहे थे। माँ का शरीर जाने के बाद भी वे माँ के आश्रम में बराबर आते रहे।
स्वामी शरणानन्दजी भी ईश्वर दर्शन लाभ कर चुके महात्मा थे जिन्होंने वृंदावन में 'मानव सेवा संघ' की स्थापना की थी। वे माँ की उपस्थिति में माँ के आश्रमों में आयोजित विशेष कार्यक्रमों में भाग लिया में करते थे। बताया जाता है कि स्वामीजी के प्रारंभिक जीवन में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन होने के बाद उनकी दृष्टि जीवनभर के लिए चली गई और इस प्रकार जागतिक दृश्यों को देखना बन्द हो गया। उन्होंने कहा था कि माँ स्वयं ही 'पुरुषोत्तम' हैं। मंच पर आसीन महात्माओं के बीच जब माँ उन्हें मीठे आवाज से 'बाबा' कहकर पुकारते थीं तो वे छोटे शिशु जैसे आनन्द से खिल जाते थे और जोर से 'माँ' कहकर आभार प्रकट करते थे। उनका वृंदावन का आश्रम माँ के आश्रम के बगल में है जिसका उद्घाटन वर्ष 1953 में श्री माँ की पवित्र उपस्थिति में हुआ था ।
सीताराम बाबा ओंकारनाथजी एक अनुभूति सम्पन्न उच्च कोटि के महात्मा थे जिनका सम्बंध बंगाल से था। उन्होंने करीब सौ वर्ष की आयु पाई थी और माँ के प्रति उनका विशेष स्नेह था। वे कई बार माँ के दर्शन के लिए आए थे। उन्होंने माँ को एक पत्र लिखा था जिसमें माँ के स्वरूप को संक्षेप में वर्णित किया गया था। उन्होंने लिखा था- "माँ आप अपनी लीला स्वयं सबमें प्रकाशित होकर कर रही हैं। सृष्टि से पहले आप ही एकमात्र थीं । आपके भीतर कई होने की इच्छा जगी। आपने जन्म लिया। आपने अपने को 'अहंकार-पंचतन्मात्रा-पंचभूत' में परिवर्तित किया और आप अनंत ब्रह्माण्ड बन गईं। आपको एवं आपकी लीला को कोटि-कोटि प्रणाम।" उन्होंने माँ के बारे में कहा था, "ये स्वयं माँ भवतारिणी हैं, दक्षिणेश्वर की भैरवी हैं जिसकी ठाकुर श्री रामकृष्ण परमहंसदेव पूजा करते थे।"
स्वामी गिरिधर नारायण पुरीजी हरिद्वार के निर्वाणी अखाड़े के प्रख्यात महंत थे और माँ से काफी जुड़े हुए थे। एक दिन उन्होंने देवी दुर्गा स्वरूप शाकम्भरी देवी के मंदिर में पूजा के लिए विस्तृत प्रबंध किए। पूजा के एक रात पहले उन्हें स्वप्न में शाकम्भरी देवी का दर्शन हुआ एवं उन्हें ज्ञान हुआ कि माँ में ही वह देवी प्रकाशित हैं। इसलिए अगली सुबह वह सीधे आश्रम पहुंच गए और उन्होंने उन सारी सामग्रियों से माँ की विधिवत् पूजा की जिन्हें वे शाकम्भरी देवी मन्दिर में अर्पित करने जा रहे थे। गिरिजी के महाप्रयाण के पश्चात माँ ने उन्हें इस बात के लिए अधिकृत किया था
कि यदि आश्रम का कोई ब्रह्मचारी संन्यास ग्रहण करना चाहता है तो वे उसे संन्यास मंत्र प्रदान कर सकते हैं।
गोपाल ठाकुर इलाहाबाद में उच्चस्तर के एक गृहस्थ संत थे । वह अलौकिक शक्ति सम्पन्न महात्मा सत्यदेव ठाकुर के शिष्य थे। वर्ष 1944 में दुर्गापूजा के समय माँ साधक गोपाल ठाकुर के आश्रम, स्वतः गईं थीं। माँ की अप्रत्याशित आगमन से वह आनन्द मग्न हो गए। उन्होंने कहा कि माँ, मेरा कितना सौभाग्य है कि आप आई हैं, अपनी स्वयं की हो रही पूजा को देखने के लिए। उनके लिए माँ स्वयं ही माँदुर्गा एवं जीवन्त गीता थीं। उनके यहां उनकी निर्देशन में अत्यन्त भाव के साथ माँदुर्गा की समवेत पूजा होती थी। पूजा के दौरान उन्होंने माँ से पूछ ही लिया कि क्या इस मृण्मयी मूर्ति में सचमुच माँदुर्गा आती हैं? माँ तुरन्त उठ खड़ी हुई एवं माँदुर्गा के मूर्ति को सिर से पैर तक स्पर्श करने के बाद गोपाल ठाकुर से देवी के वक्षस्थल पर अपना कान रखने को कहा। गोपाल ठाकुर को देवी का हृदय स्पन्दन स्पष्ट सुनाई दिया। वह अत्यन्त भावमग्न होकर रोने लगे एवं ये कहकर क्षमा याचना करने लगे कि उन्होंने माँदुर्गा की दिव्य उपस्थिति पर सन्देह किया
धीरे-धीरे कई अन्य महात्मा माँ के सम्पर्क में आए। उनमें से कई शंकराचार्य, अखाड़ों के महंत, महामण्डलेश्वर तथा विभिन्न धर्मों एवं धार्मिक संगठनों के उच्चतम पद पर आसीन ऐसे साधु थे जिनके अपने शिष्यों की खासी बड़ी संख्या थी। माँ सदैव ऐसे महापुरुषों का अति विनम्रता और सम्मान के साथ स्वागत करती थीं। वे भी समय निकालकर माँ के पास आना पसंद करते थे ताकि उनका मातृवत स्नेह मिल सके। अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए माँ से मार्गदर्शन और आशीर्वाद भी प्राप्त करते थे। इनमें से अधिकतर माँ की उपस्थिति में आश्रम के विशेष उत्सवों में सम्मिलित होते थे।
श्री अरविन्द और रमण महर्षि जैसे प्रख्यात अनुभूति सम्पन्न आध्यात्मिक विभूतियों से माँ की कभी मुलाकात नहीं हुई जब कि वे माँ के जीवनकाल में सशरीर उपस्थित थे । सम्भवतः माँ से उनका सूक्ष्मरूप से गहरा सम्बन्ध था। वे आध्यात्मिक जगत में दुर्लभ शीर्ष स्थान में माँ की स्थिति मानते थे। इन दोनों आध्यात्मिक विभूतियों के शरीर त्यागने के
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एवं कर्म के पथ की समाप्ति ही समाधि है। " आत्मा एवं परमात्मा की अवधारणा के बारे में उनका कहना था, "देखो, यह एक वृक्ष और उसकी छाया की तरह है। यदि तुम ध्यानपूर्वक वृक्ष की तरफ देखोगे तो छाया नहीं देख पाओगे । यदि तुम्हारा लक्ष्य पूर्ण है तो यह पाओगे कि वहां मात्र एक आत्मा ही है; छाया वृक्ष की है और कुछ भी नहीं।" कविराजजी ने सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में माँ से अपने गुरु परमहंस विशुद्धानन्दजी से मिलने का अनुरोध किया जो उस समय के एक विख्यात योगी थे। वे उन्हें वाराणसी के मलदहिया क्षेत्र में स्थित विशुद्धानन्दजी के आश्रम में ले गए। उस समय उनकी आयु काफी हो चुकी थी और वे 'गंध बाबा' के नाम से विख्यात थे। वे सौर ऊर्जा का उपयोग कर एक वस्तु को दूसरी वस्तु में परिवर्तित करने का रहस्य जानते थे। वे माँ की पवित्र उपस्थिति के कारण बहुत आनन्दित हुए। उन्होंने एकान्त में माँ के साथ आध्यात्मिक विषयों पर लम्बी चर्चा की। श्री माँ के अनुरोध पर उन्होंने एक पुष्प को सूर्य की किरणों से स्फटिक में परिवर्तित कर दिखाया और एक रूमाल से गुलाब की सुंगध पैदा कर दी। जब माँ ने उन्हें यह बताया कि वे यह जानती हैं कि इन सब को कैसे किया जाता है तो उन्होंने माँ की ओर विनम्र भावों से देखा और कहा, "बेटी, तेरी शक्ति से ही तो यह सब कर लेता हूं।" माँ ने वहां उपस्थित भक्तों से कहा, "बाबा ने इन चीजों से तुम्हें भुला रखा है। बाबा से असल वस्तु न लेने का गलती न करना। " माँ से भेंट होने के कुछ ही दिनों बाद स्वामी विशुद्धानन्दजी का वाराणसी में देहांत हो गया। प्रख्यात दार्शनिक डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन कई बार कविराजजी के निवास पर आकर उनसे मिले । कविराजजी को भारत के राष्ट्रपति से 'पद्म विभूषण' सम्मान मिला था। वे साधना के लिए अपने जीवन के अंतिम एक दशक तक वाराणसी में माँ के आश्रम में रहे थे एवं उन्होंने उच्च आध्यात्मिक स्तर को प्राप्त किया। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में वहीं उनका देहान्त हुआ। माँ ने कहा था कि वर्तमान युग में ऐसा विद्वान व्यक्ति देखने को नहीं मिलता। माँ के सम्पर्क में आए महात्मागण अनुभूति सम्पन्न शीर्ष महात्मागणों ने माँ की किशोरावस्था से ही उन्हें आध्यात्मिक जगत के शीर्ष स्थान पर आसीन अनुभव किया । भोला गिरि आश्रम के दिवंगत महामण्डलेश्वर स्वामी देवानन्द सरस्वती जी ने लिखा है कि श्री माँ आध्यात्म जगत की एक विस्मयकर व्यतिकम थीं। माँ जन्म से ही पूर्णतया अनुभूति सम्पन्न थीं और इसलिए उनका समस्त जीवन ही विस्मयकर एवं समझ से परे है। इलाहाबाद में झूसी के प्रख्यात संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारीजी ने पहली बार माँ का परिचय साधु समुदाय से करवाया। प्रारंभ में पुरुष साधु उनसे दूरी बनाये रखते थे क्योंकि वे श्वेत परिधान पहने एक महिला संत को स्वीकार नहीं कर पाते थे। बहरहाल, धीरे-धीरे यह अड़चन भी समाप्त हो गई और वे उनके आध्यात्मिक एवं आनन्दमय व्यक्तित्व से आकर्षित हो गए। शनैः शनैः जब अन्य विख्यात उन्नत महात्मागण उनके सम्पर्क में आए तथा आध्यात्मिक साम्राज्य में उनकी अकल्पनीय उच्च स्थिति को अनुभव किया तो साधु समाज में भी उन्हें विश्व जननी के रूप में मान्यता मिली। उनमें से कई माँ के समक्ष अपनी समस्याएं रखते थे और अपनी साधना के पथ पर आगे बढ़ने के लिए उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। जिस किसी ने भी अपने पूर्व या वर्तमान जन्म में थोड़ी-सी तपस्या की हो, माँ ने प्रायः उन पर अपनी कृपा वर्षा की या उन्हें अपने दर्शन दिए । कई बार उन्होंने ऐसे लोगों के पास सूक्ष्म रूप में जाकर दर्शन दिए अथवा वे स्वयं चलकर उनके पास पहुंचे। कई अनुभूति सम्पन्न संतों ने अपने इष्ट या गुरु का संदेश प्राप्त करने के बाद माँ से सम्पर्क किया। माँ के सम्पर्क में आने वाले कुछ प्रख्यात महात्माओं का विवरण निम्नानुसार है : - शंकर भारती जी वाराणसी के एक प्रख्यात सिद्ध संत थे जो पिछली शताब्दी में चौथे दशक के प्रारम्भिक वर्षों में साधु समुदाय में एक उन्नत, त्यागी विद्वान पुरुष के रूप में प्रसिद्ध थे। वे वाराणसी के विख्यात अन्नपूर्णा मंदिर के समीप रहते थे। वे केवल उबली हुए शाक-सब्जी ही खाते थे जो सब्जी मण्डी में दुकानदारों के चले जाने के बाद पड़ी हुई या छांटी गई सब्जी में से मिल जाती थी। एक बार वे अत्यधिक बीमार पड़ गए। उस समय उनका परिचारक भी उनके समीप नहीं था। इसलिए न तो उनकी देखभाल हो पा रही थी और न ही उन्हें भोजन मिल पा रहा था । उपवास हालत में निस्सहाय भारतीजी माँ अन्नापूर्णा मंदिर गए और उन्हीं से प्रश्न किया कि जो देवी सभी के लिए अन्न उपलब्ध कराती हैं उनके क्षेत्र के इतने समीप रहनेवाला कोई व्यक्ति बिना भोजन के कैसे रह सकता है? यह कहकर वे वापस चले आये। श्री माँ उस समय अपने वाराणसी आश्रम में थीं जो भारतीजी के स्थान से काफी दूर था। माँ में अचानक प्रतिक्रिया दिखाई दी और उन्होंने एक ब्रह्मचारी को बुलवाकर विभिन्न भोजन सामग्री भारतीजी के पास स्वतः के भिजवा दी। इससे भारतीजी बड़े आश्चर्य में पड़ गए। एक बार प्रार्थना के समय भारतीजी को अपनी इष्ट देवी त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन हुए। देवी ने उनसे माँ आनन्दमयी के समीप जाकर मिलने का निर्देश दिया और कहा कि उनके पवित्र शरीर में वे सदैव निवास करती हैं। इसके तुरंत बाद भारतीजी पैदल चलकर माँ के पास पहुंचे तथा उन्हें एक बड़ा सा पुष्पहार अर्पित कर साष्टांग प्रणाम किया। जब यह बात फैली तो साधु समाज के लिए यह एक समाचार बन गई क्योंकि भारतीजी कहीं जाकर किसी से नहीं मिलते थे तथा किसी महिला से तो वे कभी नही मिलते थे। परिणामस्वरूप अन्य साधु भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए माँ के पास आने लगे। भारतीजी के अनुसार, "माँ मूर्तिमान चिदानन्द स्वरूप हैं। उनके दैवी शरीर की उपस्थिति विश्व पर एक कृपा है ।" सेवादासी माताजी पश्चिम बंगाल के नवद्वीप की प्रख्यात महात्मा थीं जो 'गोविन्दजी' की भक्त थीं। वे सदा राधा भाव में रहती थीं और गोपी वेश धारण करती थीं। उनका गोविन्दजी से सीधा वार्तालाप होता था। उन्होंने आश्चर्यजनक ढंग से दो दशक से अधिक समय से कुछ भी नहीं खाया और पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की थी । फलतः उनके शरीर को मल-मूत्र के लिए जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। गोविन्दजी की अनुमति के बिना वे आश्रम परिसर के बाहर कभी नहीं जाती थीं। माँ जब सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में नवद्वीप गईं तो एक दिन सेवादासी माताजी उनके पास आईं। उन्होंने बताया कि उनके इष्ट गोविन्दजी ने उन्हें माँ के पास जाने का निर्देश दिया है और कहा है कि उनके पवित्र शरीर में वे सदा निवास करते हैं। वे माँ को अपने आश्रम में ले गईं तथा उनसे कहा, "आप मनुष्य रूप में भगवान कृष्ण ही हो।" उनके अनुसार माँ के भीतर बचपन से ही गोविन्दजी विराजमान हैं। हरिबाबा एक उच्च कोटि के संत थे और उनका सम्बन्ध पंजाब के होशियारपुर से था। उन्होंने देहरादून के सहस्रधारा में पहली बार माँ का तब दर्शन किया जब इलाहाबाद के प्रसिद्ध संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी ने वहां भागवत सप्ताह का आयोजन किया था तथा उसमें माँ को भी आमंत्रित किया था। हरिबाबा का सम्बन्ध सिख समुदाय से था किन्तु वह चैतन्य महाप्रभु के बड़े भक्त थे। हरिबाबा के गुरु भी एक अनुभूति सम्पन्न संत थे और उन्होंने बताया था कि माँ स्वयम् ही निष्ठावान साधकों को मोक्ष प्रदान करती हैं। इसके बाद अपने गुरु के निर्देश के अनुसार हरिबाबा माँ के सम्पर्क में आये। उसके बाद से हरिबाबा ने माँ के प्रति असीम भक्ति और श्रद्धा प्रदर्शित की। माँ भी उन्हें बहुत स्नेह और सम्मान की दृष्टि से देखती थीं तथा उन्होंने कहा था कि वर्तमान युग में ऐसा महात्मा दुर्लभ है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचपन में हरिबाबा गंभीर रूप से बीमार पड़ गए तथा दिल्ली एक नर्सिंग होम में उनका ऑपरेशन किया गया। एक दिन जब उनकी शारीरिक स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई तो माँ उन्हें देखने के लिए आईं। हरिबाबा के कमरे के प्रवेश द्वार पर उनके दिवंगत गुरुदेव सूक्ष्म रूप में आए तथा माँ से अपने शिष्य की प्राण रक्षा की विनय की। माँ की कृपा से उस बार हरिबाबा पर यह संकट टल गया। इसके बाद से वे अधिकतर समय माँ के पास ही रहे। माँ प्रायः अपना कार्यक्रम इस प्रकार वनाती थी जिससे उनको सुभीता रहे। जनवरी एक हज़ार नौ सौ सत्तर में माँ हरिबाबा को देखने के लिए दिल्ली गईं जहां वे गंभीर रूप से बीमार थे। माँ जब वाराणसी लौट रही थीं तो हरिबाबा किसी शिशु की तरह माँ के ही साथ जाने के लिए बुरी तरह जिद करने लगे तथा उन्होंने अपने शिष्यों की सलाह को भी पूरी तरह नकार दिया। उनकी खराब तबीयत को देखते हुए उनके शिष्य नहीं चाहते थे कि वे कहीं जाएं। बहरहाल, माँ की सलाह पर दिल्ली के प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ एवं माँ के परम भक्त डॉक्टर दुर्गादास सेनगुप्ता रेलयात्रा में हरिबाबा के साथ गए। वाराणसी आने के कुछ ही दिनों बाद आश्रम में हरिबाबा का देहांत हो गया और उस समय उनके सिराहने पर माँ एवं गिरिजी उपस्थित थीं। इस तरह एक सिद्ध महात्मा और माँ के करीबी भक्त का देहान्त उसी तरह हुआ, जैसा कि वे चाहते थे। उड़िया बाबा वृंदावन के एक अलौकिक शक्तिसम्पन्न महान संत थे जिनका उत्तर भारत में काफी प्रचार था । हरिबाबा वृंदावन में प्रायः उड़िया बाबा के आश्रम में ही रुकते थे। वयोवृद्ध उड़िया बाबा भी माँ के प्रति विशेष स्नेह एवं सम्मान का भाव रखते थे। एक बार बड़े-बड़े महात्माओं की उपस्थिति में उड़िया बाबा ने माँ का हाथ पकड़कर तथा भावाविष्ट होकर रुंधे हुए स्वरों में कहा था, "माँ, मैं आपको पहचान नहीं पाया। " माँ उनके आश्रम में होने वाले सत्संग में भाग लेने और रासलीला देखने के लिए प्रायः वहां जाया करती थीं। वृंदावन में जब उड़िया बाबा बीमार थे तो वे माँ को जाने नहीं दे रहे थे और उनका इस बात पर जोर था कि माँ उनके सिराहने के पास रहें। दोनों ने पिता एवं छोटी बच्ची की तरह कई दिन बिताए । माँ ने गुरुप्रिया दीदी को संकेत दिया था कि उड़िया बाबा का सहसा भावविह्वल होना, उनकी जीवनलीला पूर्ण होने का संकेत हो सकता है। इसके कुछ समय बाद ही आश्रम में हुए एक दुखद हादसे में उड़िया बाबा का देहांत हो गया। माँ बाबाजी के भण्डारे तथा महाप्रयाण से जुड़े अन्य क्रियाकर्मों में पूरे समय उपस्थित रही थीं। त्रिवेणी पुरीजी पंजाब के विख्यात एवं अनुभूति सम्पन्न संत थे जिन्हें आमतौर पर " खन्ना बाबा" के रूप में जाना जाता था। वह परम वेदान्ती थे। उनसे एक भक्त ने प्रश्न किया था कि क्या माँ अवतार हैं, इस पर उन्होंने कहा, अवतार तो छोटी चीज है। माँ वह हैं जहां से अवतार अवतरित होते हैं।" उन्होंने यह भी कहा था - " जैसे कि नदियों के समुद्र मे मिलने से उसके जलस्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, उसी प्रकार सभी धार्मिक भाव माँ की ओर ही जाते हैं तथा माँ सभी परिस्थितियों में समान रहती हैं। जिस प्रकार सागर की कोई सीमा नहीं होती, उसी तरह माँ को भी सीमाओं में आबद्ध नहीं किया जा सकता।' स्वामी शिवानन्दजी महाराज भी एक विख्यात अनुभूति सम्पन्न संत थे जिन्होंने ऋषिकेश के 'दिव्य जीवन संघ' की स्थापना की थी। इस वयोवृद्ध संत को देखने उनके आश्रम गईं थीं। बाद में स्वामी शिवानन्द जी ने माँ के बारे में कहा था कि वे "भारत का सबसे अधिक पूर्ण प्रस्फुटित पुष्प हैं।" उनके विश्वस्त शिष्य एवं अनुभूति सम्पन्न संत स्वामी चिदानन्दजी तथा आश्रम के अन्य लोग प्रायः माँ के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते रहते थे। परमहंस योगानन्द भी एक प्रख्यात सिद्ध संत थे जिन्होंने भारत में 'वर्ल्ड योगदा सतसंग फाउंडेशन' और अमेरिका में 'सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप' की स्थापना की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी' में लिखा है कि उन्हें भारत में कई ऐसे संत मिले जिन्होंने भगवान के दर्शन किए किन्तु उन्हें पहले कभी श्री माँ जैसी आध्यात्मिक रूप से उच्चतम संत से मिलने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने एक बार माँ से अनुरोध किया कि वे अपने बारे में कुछ बोलें। माँ ने विनम्रता से कहा, "बाबा कहने को क्या है? मेरी चेतना कभी इस अस्थायी देह से सम्बद्ध नहीं हुई। इस पृथ्वी पर आने से पहले मैं वही थी। एक छोटी बच्ची की उम्र में भी मैं वही थी। मैं बढ़कर महिला हो गई किन्तु मैं वही रही । जिस परिवार में मैं जन्मी थी उसने इस शरीर के विवाह के लिए सारे प्रबंध किए। मैं फिर भी वही थी । आपके सामने खड़ी मैं वही हूं। बाद में भी मेरे आसपास भले ही सृष्टि का खेल चलता रहे, मैं वही रहूंगी।" इस प्रकार माँ ने स्वामीजी को अपने दिव्य स्वरूप के बारे में समझाया। परमहंस योगानन्द जी से माँ के बारे में सुनकर उनकी प्रधान शिष्या सिस्टर दया एवं उनके साथ कुछ भक्त कई बार माँ का दर्शन करने अमेरिका से आये। मोहनानन्द ब्रह्मचारीजी भी ईश्वर दर्शन का लाभ प्राप्त कर चुके एक संत थे। वे देवघर के प्रख्यात संत बालानन्द ब्रह्मचारी के योग्य शिष्य थे। उनकी भेंट माँ से अपने गुरु के आश्रम में हुई। उस समय वे गहरी साधना में लीन थे। एक बार देर रात जब वे भोजन ग्रहण करने जा रहे थे तभी उनके मन में एक विचित्र इच्छा उठी । वह चाहते थे कि भोजन में से माँ को कुछ खिलाने के बाद ही वे स्वयं भोजन करें किन्तु इतनी रात में वह माँ को परेशान करने से संकोच कर रहे थे। उसी क्षण किसी ने उनका दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खोलते ही उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा क्योंकि सामने माँ अकेले खड़ी थीं। उन्होंने माँ को कुछ फल खिलाए और इसके बाद माँ लौट गईं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में बीमार मोहनानन्दजी उस समय आनन्द से भर उठे जब उन्हें देखने के लिए माँ स्वयं उनके सिराहने के पास आ खड़ी हुईं। उन्होंने बताया कि रुग्णावस्था में वे व्याकुल होकर माँ का स्मरण कर रहे थे। माँ का शरीर जाने के बाद भी वे माँ के आश्रम में बराबर आते रहे। स्वामी शरणानन्दजी भी ईश्वर दर्शन लाभ कर चुके महात्मा थे जिन्होंने वृंदावन में 'मानव सेवा संघ' की स्थापना की थी। वे माँ की उपस्थिति में माँ के आश्रमों में आयोजित विशेष कार्यक्रमों में भाग लिया में करते थे। बताया जाता है कि स्वामीजी के प्रारंभिक जीवन में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन होने के बाद उनकी दृष्टि जीवनभर के लिए चली गई और इस प्रकार जागतिक दृश्यों को देखना बन्द हो गया। उन्होंने कहा था कि माँ स्वयं ही 'पुरुषोत्तम' हैं। मंच पर आसीन महात्माओं के बीच जब माँ उन्हें मीठे आवाज से 'बाबा' कहकर पुकारते थीं तो वे छोटे शिशु जैसे आनन्द से खिल जाते थे और जोर से 'माँ' कहकर आभार प्रकट करते थे। उनका वृंदावन का आश्रम माँ के आश्रम के बगल में है जिसका उद्घाटन वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में श्री माँ की पवित्र उपस्थिति में हुआ था । सीताराम बाबा ओंकारनाथजी एक अनुभूति सम्पन्न उच्च कोटि के महात्मा थे जिनका सम्बंध बंगाल से था। उन्होंने करीब सौ वर्ष की आयु पाई थी और माँ के प्रति उनका विशेष स्नेह था। वे कई बार माँ के दर्शन के लिए आए थे। उन्होंने माँ को एक पत्र लिखा था जिसमें माँ के स्वरूप को संक्षेप में वर्णित किया गया था। उन्होंने लिखा था- "माँ आप अपनी लीला स्वयं सबमें प्रकाशित होकर कर रही हैं। सृष्टि से पहले आप ही एकमात्र थीं । आपके भीतर कई होने की इच्छा जगी। आपने जन्म लिया। आपने अपने को 'अहंकार-पंचतन्मात्रा-पंचभूत' में परिवर्तित किया और आप अनंत ब्रह्माण्ड बन गईं। आपको एवं आपकी लीला को कोटि-कोटि प्रणाम।" उन्होंने माँ के बारे में कहा था, "ये स्वयं माँ भवतारिणी हैं, दक्षिणेश्वर की भैरवी हैं जिसकी ठाकुर श्री रामकृष्ण परमहंसदेव पूजा करते थे।" स्वामी गिरिधर नारायण पुरीजी हरिद्वार के निर्वाणी अखाड़े के प्रख्यात महंत थे और माँ से काफी जुड़े हुए थे। एक दिन उन्होंने देवी दुर्गा स्वरूप शाकम्भरी देवी के मंदिर में पूजा के लिए विस्तृत प्रबंध किए। पूजा के एक रात पहले उन्हें स्वप्न में शाकम्भरी देवी का दर्शन हुआ एवं उन्हें ज्ञान हुआ कि माँ में ही वह देवी प्रकाशित हैं। इसलिए अगली सुबह वह सीधे आश्रम पहुंच गए और उन्होंने उन सारी सामग्रियों से माँ की विधिवत् पूजा की जिन्हें वे शाकम्भरी देवी मन्दिर में अर्पित करने जा रहे थे। गिरिजी के महाप्रयाण के पश्चात माँ ने उन्हें इस बात के लिए अधिकृत किया था कि यदि आश्रम का कोई ब्रह्मचारी संन्यास ग्रहण करना चाहता है तो वे उसे संन्यास मंत्र प्रदान कर सकते हैं। गोपाल ठाकुर इलाहाबाद में उच्चस्तर के एक गृहस्थ संत थे । वह अलौकिक शक्ति सम्पन्न महात्मा सत्यदेव ठाकुर के शिष्य थे। वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में दुर्गापूजा के समय माँ साधक गोपाल ठाकुर के आश्रम, स्वतः गईं थीं। माँ की अप्रत्याशित आगमन से वह आनन्द मग्न हो गए। उन्होंने कहा कि माँ, मेरा कितना सौभाग्य है कि आप आई हैं, अपनी स्वयं की हो रही पूजा को देखने के लिए। उनके लिए माँ स्वयं ही माँदुर्गा एवं जीवन्त गीता थीं। उनके यहां उनकी निर्देशन में अत्यन्त भाव के साथ माँदुर्गा की समवेत पूजा होती थी। पूजा के दौरान उन्होंने माँ से पूछ ही लिया कि क्या इस मृण्मयी मूर्ति में सचमुच माँदुर्गा आती हैं? माँ तुरन्त उठ खड़ी हुई एवं माँदुर्गा के मूर्ति को सिर से पैर तक स्पर्श करने के बाद गोपाल ठाकुर से देवी के वक्षस्थल पर अपना कान रखने को कहा। गोपाल ठाकुर को देवी का हृदय स्पन्दन स्पष्ट सुनाई दिया। वह अत्यन्त भावमग्न होकर रोने लगे एवं ये कहकर क्षमा याचना करने लगे कि उन्होंने माँदुर्गा की दिव्य उपस्थिति पर सन्देह किया धीरे-धीरे कई अन्य महात्मा माँ के सम्पर्क में आए। उनमें से कई शंकराचार्य, अखाड़ों के महंत, महामण्डलेश्वर तथा विभिन्न धर्मों एवं धार्मिक संगठनों के उच्चतम पद पर आसीन ऐसे साधु थे जिनके अपने शिष्यों की खासी बड़ी संख्या थी। माँ सदैव ऐसे महापुरुषों का अति विनम्रता और सम्मान के साथ स्वागत करती थीं। वे भी समय निकालकर माँ के पास आना पसंद करते थे ताकि उनका मातृवत स्नेह मिल सके। अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए माँ से मार्गदर्शन और आशीर्वाद भी प्राप्त करते थे। इनमें से अधिकतर माँ की उपस्थिति में आश्रम के विशेष उत्सवों में सम्मिलित होते थे। श्री अरविन्द और रमण महर्षि जैसे प्रख्यात अनुभूति सम्पन्न आध्यात्मिक विभूतियों से माँ की कभी मुलाकात नहीं हुई जब कि वे माँ के जीवनकाल में सशरीर उपस्थित थे । सम्भवतः माँ से उनका सूक्ष्मरूप से गहरा सम्बन्ध था। वे आध्यात्मिक जगत में दुर्लभ शीर्ष स्थान में माँ की स्थिति मानते थे। इन दोनों आध्यात्मिक विभूतियों के शरीर त्यागने के
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Manoj Bajpayee : अभिनेता मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee ) बॅालीवुड इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम है जो अपनी शालीनता और बेस्ट एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। अपनी बेहतरीन अदाकारी से वो सभी के दिलों में राज करते है। अभी हाल ही में 28 अक्टूबर को उनकी फिल्म 'गली गुलियां' ओटीटी प्लेफॉर्म अमेजॉम प्राइम पर रिलीज हुई है। इस फिल्म को उनके फैंस काफी पसंद कर रहें है। बता दें, फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है, जो चार साल के बाद आज सफल हुआ है, इस बात की जानकारी खुद फिल्म के लीड अभिनेता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है, जिसके साथ उन्होंने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए जिसे जानकर सभी हैरान रह गए। आइए हम भी जानते है कि Manoj Bajpayee ने क्या-क्या बातें बताई।
बता दें कि मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) का ये लेटेस्ट पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में एक्टर ने फिल्म से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट में अपनी फिल्म 'गली गुलियां' के दो पोस्टर शेयर किए हैं। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि फिल्म ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे इस रोल के लिए उन्होंने खुद को प्रीपेयर किया।
मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने अपने पोस्ट में लिखा कि, "ये फिल्म ओटीटी पर आ चुकी है और इस रोल की तैयारी करने के दौरान मैं अपना मानसिक संतुलन खोने की कगार तक पहुंच गया था। ये दिक्कत इतनी बढ़ गई थी कि मुझे फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी। 'गली गुलियां', मेरा अब तक का सबसे चैलेंजिंग और एक्टर के तौर पर मेरे लिए एक फायदेमंद रोल है। आखिरकार ये फिल्म अमेज़ॉन प्राइम पर आ गई चुकी है। ये फिल्म देश और दुनियाभर के तमाम फिल्म फेस्टिवल्स में घूमी. खूब वाहवाही लूटी"।
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Manoj Bajpayee : अभिनेता मनोज बाजपेयी बॅालीवुड इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम है जो अपनी शालीनता और बेस्ट एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। अपनी बेहतरीन अदाकारी से वो सभी के दिलों में राज करते है। अभी हाल ही में अट्ठाईस अक्टूबर को उनकी फिल्म 'गली गुलियां' ओटीटी प्लेफॉर्म अमेजॉम प्राइम पर रिलीज हुई है। इस फिल्म को उनके फैंस काफी पसंद कर रहें है। बता दें, फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है, जो चार साल के बाद आज सफल हुआ है, इस बात की जानकारी खुद फिल्म के लीड अभिनेता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है, जिसके साथ उन्होंने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए जिसे जानकर सभी हैरान रह गए। आइए हम भी जानते है कि Manoj Bajpayee ने क्या-क्या बातें बताई। बता दें कि मनोज बाजपेयी का ये लेटेस्ट पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में एक्टर ने फिल्म से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट में अपनी फिल्म 'गली गुलियां' के दो पोस्टर शेयर किए हैं। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि फिल्म ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे इस रोल के लिए उन्होंने खुद को प्रीपेयर किया। मनोज बाजपेयी ने अपने पोस्ट में लिखा कि, "ये फिल्म ओटीटी पर आ चुकी है और इस रोल की तैयारी करने के दौरान मैं अपना मानसिक संतुलन खोने की कगार तक पहुंच गया था। ये दिक्कत इतनी बढ़ गई थी कि मुझे फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी। 'गली गुलियां', मेरा अब तक का सबसे चैलेंजिंग और एक्टर के तौर पर मेरे लिए एक फायदेमंद रोल है। आखिरकार ये फिल्म अमेज़ॉन प्राइम पर आ गई चुकी है। ये फिल्म देश और दुनियाभर के तमाम फिल्म फेस्टिवल्स में घूमी. खूब वाहवाही लूटी"।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय का औचक निरीक्षण। इस दौरान सीएम ने चिकित्सालय परिसर में फैली गंदगी पर नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियो को परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय का औचक निरीक्षण। इस दौरान सीएम ने चिकित्सालय परिसर में फैली गंदगी पर नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियो को परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के निर्देश दिए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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Chaibasa : राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देश के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त ने जानकारी दी है कि पश्चिमी सिंहभूम जिला के मझगांव प्रखंड के चार मतदान केन्द्रों पर 29 मई को पुनर्मतदान कराया जायेगा. मतदान सुबह 7 बजे से अपराह्न 3 बजे तक होगा. मझगांव के मतदान केन्द्र 63 प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय घोड़ाबांधा, मतदान केंद्र संख्या-66 मध्य विद्यालय-अधिकारी पूर्वी भाग, मतदान केंद्र संख्या-98 प्राथमिक विद्यालय-बुरुईकुटी पूर्वी भाग में वार्ड सदस्य के पद और मतदान केंद्र संख्या-100 उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पुरतीसाई (हेपेरबुरु) में पुनर्मतदान होगा. यहां जिला परिषद सदस्य और मुखिया के पद के लिए पुनर्मतदान कराया जायेगा.
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Chaibasa : राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देश के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त ने जानकारी दी है कि पश्चिमी सिंहभूम जिला के मझगांव प्रखंड के चार मतदान केन्द्रों पर उनतीस मई को पुनर्मतदान कराया जायेगा. मतदान सुबह सात बजे से अपराह्न तीन बजे तक होगा. मझगांव के मतदान केन्द्र तिरेसठ प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय घोड़ाबांधा, मतदान केंद्र संख्या-छयासठ मध्य विद्यालय-अधिकारी पूर्वी भाग, मतदान केंद्र संख्या-अट्ठानवे प्राथमिक विद्यालय-बुरुईकुटी पूर्वी भाग में वार्ड सदस्य के पद और मतदान केंद्र संख्या-एक सौ उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पुरतीसाई में पुनर्मतदान होगा. यहां जिला परिषद सदस्य और मुखिया के पद के लिए पुनर्मतदान कराया जायेगा.
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सपा सांसद ने कहा कि हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं की इस तरीके से जो लोग गैर इंसानी सुलूक कर रहे हैं. मुसलमानों के साथ ये जुल्म और ज्यादती हो रही है. अभी ह्यूमन राइट की रिपोर्ट में आई है. इसमें भी कहा गया है कि मुसलमानों के साथ इस तरह का सुलूक किया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश के संभल से सपा सांसद डॉक्टर शफीकुर्रहमान बर्क का एक बेहद भड़काऊ बयान सामने आया है. सपा सांसद मुरादाबाद के मुस्लिम व्यक्ति के साथ ट्रेन में हुई मारपीट प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. उन्होंने कहा कि ये देश सभी धर्म के मानने वाले लोगों का है. हाल ही में सामने आया कि ट्रेन में एक मुस्लिम व्यक्ति की दाढ़ी पकड़ कर पिटाई की गई, जिसका वीडियो भी है. ये सारी मुस्लिम कौम को चैलेंज है. अब क्या मुसलमान कौम के अंदर अब इतनी भी वो नही रही है? कि वो अपना बदला ले सकें.
साथ ही सपा सांसद ने कहा कि हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं की इस तरीके से जो लोग गैर इंसानी सुलूक कर रहे हैं. मुसलमानों के साथ ये जुल्म और ज्यादती हो रही है. अभी ह्यूमन राइट की रिपोर्ट में आई है. इसमें भी कहा गया है कि मुसलमानों के साथ इस तरह का सुलूक किया जा रहा है.
साथ ही उन्होंने कहा, " मैं मोदी जी से पूछना चाहता हूं कि आखिर हम यहां जिंदगी ऐसे किस तरह से गुजारें? हमें कोई तरीका बताइए जो, हमारे साथ ऐसा सुलूक हो रहा है. वो न हो. इन सब चीजों पर बीजेपी और आरएसएस की जिम्मेदारी है. यहां पर सबको इज्जत से जीने का हक हासिल है. अगर उसके साथ इस तरह का सलूक किया जाएगा. तो ये सही नहीं है. जबर्दस्ती जय श्री राम के नारे लगवाए जाएंगे, देश किस तरह से चलेगा? देश के टुकड़े तो आप खुद कर रहे हैं. आप देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं?" सपा सांसद ने आगे कहा कि जब एक मुसलमान शख्स के साथ ये हो रहा है तो समझो सारी मुसलमान कौम के साथ ही ऐसा हो रहा है. ये एक चैलेंज ही तो है.
दरअसल, मुस्लिम युवक के साथ ट्रेन में हुई छेड़छाड़ पर पिछले 3-4 दिनों से इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के लोग इस पर अपना-अपना पक्ष रखते हुए बयानबाजी कर रहे हैं. इस मामले में जीआरपी मुरादाबाद ने जांच के बाद कहा है कि मुस्लिम व्यक्ति ने ट्रेन में सवार किसी महिला के साथ छेड़खानी की थी. इसके बाद अन्य यात्रियों ने उसके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया था.
(इनपुट- मुजम्मिल दानिश)
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सपा सांसद ने कहा कि हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं की इस तरीके से जो लोग गैर इंसानी सुलूक कर रहे हैं. मुसलमानों के साथ ये जुल्म और ज्यादती हो रही है. अभी ह्यूमन राइट की रिपोर्ट में आई है. इसमें भी कहा गया है कि मुसलमानों के साथ इस तरह का सुलूक किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के संभल से सपा सांसद डॉक्टर शफीकुर्रहमान बर्क का एक बेहद भड़काऊ बयान सामने आया है. सपा सांसद मुरादाबाद के मुस्लिम व्यक्ति के साथ ट्रेन में हुई मारपीट प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. उन्होंने कहा कि ये देश सभी धर्म के मानने वाले लोगों का है. हाल ही में सामने आया कि ट्रेन में एक मुस्लिम व्यक्ति की दाढ़ी पकड़ कर पिटाई की गई, जिसका वीडियो भी है. ये सारी मुस्लिम कौम को चैलेंज है. अब क्या मुसलमान कौम के अंदर अब इतनी भी वो नही रही है? कि वो अपना बदला ले सकें. साथ ही सपा सांसद ने कहा कि हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं की इस तरीके से जो लोग गैर इंसानी सुलूक कर रहे हैं. मुसलमानों के साथ ये जुल्म और ज्यादती हो रही है. अभी ह्यूमन राइट की रिपोर्ट में आई है. इसमें भी कहा गया है कि मुसलमानों के साथ इस तरह का सुलूक किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कहा, " मैं मोदी जी से पूछना चाहता हूं कि आखिर हम यहां जिंदगी ऐसे किस तरह से गुजारें? हमें कोई तरीका बताइए जो, हमारे साथ ऐसा सुलूक हो रहा है. वो न हो. इन सब चीजों पर बीजेपी और आरएसएस की जिम्मेदारी है. यहां पर सबको इज्जत से जीने का हक हासिल है. अगर उसके साथ इस तरह का सलूक किया जाएगा. तो ये सही नहीं है. जबर्दस्ती जय श्री राम के नारे लगवाए जाएंगे, देश किस तरह से चलेगा? देश के टुकड़े तो आप खुद कर रहे हैं. आप देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं?" सपा सांसद ने आगे कहा कि जब एक मुसलमान शख्स के साथ ये हो रहा है तो समझो सारी मुसलमान कौम के साथ ही ऐसा हो रहा है. ये एक चैलेंज ही तो है. दरअसल, मुस्लिम युवक के साथ ट्रेन में हुई छेड़छाड़ पर पिछले तीन-चार दिनों से इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के लोग इस पर अपना-अपना पक्ष रखते हुए बयानबाजी कर रहे हैं. इस मामले में जीआरपी मुरादाबाद ने जांच के बाद कहा है कि मुस्लिम व्यक्ति ने ट्रेन में सवार किसी महिला के साथ छेड़खानी की थी. इसके बाद अन्य यात्रियों ने उसके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया था.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों।
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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बारहमासों में हम बारह भावना की अभिव्यक्ति प्रत्येक मास की प्राकृतिक सुपमा तथा अन्य सांसारिक आकर्षणों के आधार पर की गई है। फिर भी इन भावनाओं का सम्बन्ध जिन बारहमासों से है, उसका संक्षिप्त परिचय देना अनावश्यक नहीं है ।
नेमि - राजुल वैवाहिक अनुष्ठान के अवसर पर नेमिनाथ जी यकायक वैराग्य धारण करते हैं और राजुलदेवी प्रत्येक मास की प्रकृति के उल्लेख के साथ मानव शरीर और जीवन से उन प्रकृति के तत्त्वों के विचलित करने वाले प्रभाव की ओर संकेत कर उनसे विराग त्यागने का एवं घर पर रहने का आग्रह करती है । इधर प्रत्येक मास की प्रकृति के प्रभाव का समाधान नेमिनाथ जी एक-एक भावना द्वारा करते है । यह ग्रह वारहमासा में पाढ़ मास से प्रारम्भ हुआ है ।
राजुल देवी नेमिनाथ द्वारा वैराग्य धारण करने पर उनसे कहती है कि जब वैवाहिक अनुष्ठान में सम्मिलित हुए, साथ में अगणित प्रतिष्ठित वर यात्रियों के सम्मुख निशान आदि वाद्ययन्त्रों का उपयोग किया गया, फिर यकायक वैराग्य धारण करना क्या उपहास नहीं है ? और यदि वैराग्य धारण करना निश्चित ही है तो वे आगामी पाढ़ मास में वैराग्य विषयक विचार करने की प्रार्थना करती है ।७
राजुल के घर लौट चलने के आग्रह के दो आधार उक्त कथन में हैं - एक तो यह कि इतने बड़ेबड़े लोगों के सामने आपयों विरक्त होकर चले आए, इसमें कोई बड़ाई नहीं अपयश है । दूसरे यह कि विवाह के उपक्रम के साथ ही त्याग का उपक्रम, ठीक चढ़ती अवस्था में भोग का त्याग असमीचीन है । आपाढ़ में ही तो विरह प्रवल होता है । कालिदास के यक्ष को आपाढ़ में ही पत्नी-वियोग प्रतीत हुआ था 17
आषाढ़ से भी अधिक कठोर आक्रमण तपस्वी पर श्रावण का होता है । राजुल देवी कहती हैं कि इस मास की प्रकृति वैराग्य धारण करने के लिए उपयुक्त नहीं है। इस मास में चतुर्दिक मन को उद्दीप्त करने वाले व्यापार होते हैं । आकाश में घनघोर घटाएं आच्छादित हो जाती हैं। विद्युत चमकती है, कोयल और मयूरों की कूकें और कुहके उत्तेजना पैदा करती है ।" तप- भंग से अच्छा है कि घर ही लौट ६६ चलें । इन उक्तियों के लिए अशरण-भावना २ का उल्लेख नेमिनाथ जी करते हैं । यहां ऐसे आक्रमणों से कौन बच सकता है ? जब इस संसार में देवेन्द्र, नारायण, हर, ब्रह्मा आदि देवताओं तक को मृत्यु से बचने के लिए कोई शरण नहीं मिल सको तो ऐसे संसार में साधारण व्यक्ति किसकी शरण पा सकता है । अतः श्रावण मास की प्रकृति से भयभीत न होकर इस संसार को ही क्यों न त्याग दिया जाए ? जहां कोई शररग ही नहीं है
नेमिनाथ जी राजुल के इन दोनों ग्रहों को अनित्य भावना से काट देते हैं । वे राजुल देवी को समझाते हुए कहते हैं कि बड़ाई अथवा यश - प्रशंसा का क्या मूल्य, जव जीवन ही निशि- स्वप्न की भांति भंगुर है । भाई, पुत्र कलत्र आदि सभी स्वजन इस संसार में ही चार दिन के मेहमान हैं, फिर बरात के मेहमानों की क्या गिनती ? यह शरीर जल की बूंद की तरह क्षरिगक और अस्थिर है । क्या बड़ाई और क्या किसी की लज्जा ? अतः सिद्ध मार्ग ही श्रेष्ठ है । प्राषाढ़ से संलग्न विरह की तीव्रता के प्रारम्भ की ओर यों नेमिनाथ ने कोई उल्लेख नहीं किया पर जीवन और जगत् क्षरण भंगुर हैं, निशि- स्वप्न हैं तो यह व्यक्ति-व्यक्ति का विरह किस खेत की मूली है, यह ध्वनि से सकेतित है; इसलिए सिद्धों को जपने का संकल्प है कि यह विरह न सताए । १०
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बारहमासों में हम बारह भावना की अभिव्यक्ति प्रत्येक मास की प्राकृतिक सुपमा तथा अन्य सांसारिक आकर्षणों के आधार पर की गई है। फिर भी इन भावनाओं का सम्बन्ध जिन बारहमासों से है, उसका संक्षिप्त परिचय देना अनावश्यक नहीं है । नेमि - राजुल वैवाहिक अनुष्ठान के अवसर पर नेमिनाथ जी यकायक वैराग्य धारण करते हैं और राजुलदेवी प्रत्येक मास की प्रकृति के उल्लेख के साथ मानव शरीर और जीवन से उन प्रकृति के तत्त्वों के विचलित करने वाले प्रभाव की ओर संकेत कर उनसे विराग त्यागने का एवं घर पर रहने का आग्रह करती है । इधर प्रत्येक मास की प्रकृति के प्रभाव का समाधान नेमिनाथ जी एक-एक भावना द्वारा करते है । यह ग्रह वारहमासा में पाढ़ मास से प्रारम्भ हुआ है । राजुल देवी नेमिनाथ द्वारा वैराग्य धारण करने पर उनसे कहती है कि जब वैवाहिक अनुष्ठान में सम्मिलित हुए, साथ में अगणित प्रतिष्ठित वर यात्रियों के सम्मुख निशान आदि वाद्ययन्त्रों का उपयोग किया गया, फिर यकायक वैराग्य धारण करना क्या उपहास नहीं है ? और यदि वैराग्य धारण करना निश्चित ही है तो वे आगामी पाढ़ मास में वैराग्य विषयक विचार करने की प्रार्थना करती है ।सात राजुल के घर लौट चलने के आग्रह के दो आधार उक्त कथन में हैं - एक तो यह कि इतने बड़ेबड़े लोगों के सामने आपयों विरक्त होकर चले आए, इसमें कोई बड़ाई नहीं अपयश है । दूसरे यह कि विवाह के उपक्रम के साथ ही त्याग का उपक्रम, ठीक चढ़ती अवस्था में भोग का त्याग असमीचीन है । आपाढ़ में ही तो विरह प्रवल होता है । कालिदास के यक्ष को आपाढ़ में ही पत्नी-वियोग प्रतीत हुआ था सत्रह आषाढ़ से भी अधिक कठोर आक्रमण तपस्वी पर श्रावण का होता है । राजुल देवी कहती हैं कि इस मास की प्रकृति वैराग्य धारण करने के लिए उपयुक्त नहीं है। इस मास में चतुर्दिक मन को उद्दीप्त करने वाले व्यापार होते हैं । आकाश में घनघोर घटाएं आच्छादित हो जाती हैं। विद्युत चमकती है, कोयल और मयूरों की कूकें और कुहके उत्तेजना पैदा करती है ।" तप- भंग से अच्छा है कि घर ही लौट छयासठ चलें । इन उक्तियों के लिए अशरण-भावना दो का उल्लेख नेमिनाथ जी करते हैं । यहां ऐसे आक्रमणों से कौन बच सकता है ? जब इस संसार में देवेन्द्र, नारायण, हर, ब्रह्मा आदि देवताओं तक को मृत्यु से बचने के लिए कोई शरण नहीं मिल सको तो ऐसे संसार में साधारण व्यक्ति किसकी शरण पा सकता है । अतः श्रावण मास की प्रकृति से भयभीत न होकर इस संसार को ही क्यों न त्याग दिया जाए ? जहां कोई शररग ही नहीं है नेमिनाथ जी राजुल के इन दोनों ग्रहों को अनित्य भावना से काट देते हैं । वे राजुल देवी को समझाते हुए कहते हैं कि बड़ाई अथवा यश - प्रशंसा का क्या मूल्य, जव जीवन ही निशि- स्वप्न की भांति भंगुर है । भाई, पुत्र कलत्र आदि सभी स्वजन इस संसार में ही चार दिन के मेहमान हैं, फिर बरात के मेहमानों की क्या गिनती ? यह शरीर जल की बूंद की तरह क्षरिगक और अस्थिर है । क्या बड़ाई और क्या किसी की लज्जा ? अतः सिद्ध मार्ग ही श्रेष्ठ है । प्राषाढ़ से संलग्न विरह की तीव्रता के प्रारम्भ की ओर यों नेमिनाथ ने कोई उल्लेख नहीं किया पर जीवन और जगत् क्षरण भंगुर हैं, निशि- स्वप्न हैं तो यह व्यक्ति-व्यक्ति का विरह किस खेत की मूली है, यह ध्वनि से सकेतित है; इसलिए सिद्धों को जपने का संकल्प है कि यह विरह न सताए । दस
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चंबा -चमेरा तीन परियोजना प्रभावित पंचायतों के लोगों ने सोमवार को एलएडीएफ के तहत मिलने वाली एक फीसदी अतिरिक्त राशि का दो साल से भुगतान न होने के विरोध में डीसी आफिस के बाहर थाली पीटो आंदोलन के जरिए विरोध जताया। इससे पहले प्रभावित पंचायतों के लोगों ने जिला परिषद सदस्य ललित ठाकुर की अगवाई में शहर में रैली भी निकाली। इस मौके पर ललित ठाकुर ने कहा कि प्रभावितों को एलएडीएफ के तहत मिलने वाली एक प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान न होने के कारण थाली पीटो आंदोलन आरंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि गत दिनों उपायुक्त विवेक भटिया को इस संदर्भ में ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसी कारण उन्हें मजबूरन आंदोलन की राह अपनानी पड़ी। ललित ठाकुर ने कहा कि लंबे समय से प्रभावितों को इस राशि का इंतजार है लेकिन अब तक उन्हें पैसा नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को भी उन्होंने ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत करवाया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के खातों में एक प्रतिशत अतिरिक्त राशि डालने के एडीएम भरमौर को निर्देश दिए थे। फिर भी प्रभावितों के खातों में कोई पैसा नहीं डाला गया। उधर, दोपहर बाद उपायुक्त चंबा ने सभी प्रभावितों को आफिस बुलाकर उनका गुस्सा शांत करवाया। उन्होंने मौके पर ही आगामी एक सप्ताह के भीतर प्रभावितों को उनका हक दिलाने के आदेश भरमौर प्रशासन को जारी कर दिए हैं।
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चंबा -चमेरा तीन परियोजना प्रभावित पंचायतों के लोगों ने सोमवार को एलएडीएफ के तहत मिलने वाली एक फीसदी अतिरिक्त राशि का दो साल से भुगतान न होने के विरोध में डीसी आफिस के बाहर थाली पीटो आंदोलन के जरिए विरोध जताया। इससे पहले प्रभावित पंचायतों के लोगों ने जिला परिषद सदस्य ललित ठाकुर की अगवाई में शहर में रैली भी निकाली। इस मौके पर ललित ठाकुर ने कहा कि प्रभावितों को एलएडीएफ के तहत मिलने वाली एक प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान न होने के कारण थाली पीटो आंदोलन आरंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि गत दिनों उपायुक्त विवेक भटिया को इस संदर्भ में ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसी कारण उन्हें मजबूरन आंदोलन की राह अपनानी पड़ी। ललित ठाकुर ने कहा कि लंबे समय से प्रभावितों को इस राशि का इंतजार है लेकिन अब तक उन्हें पैसा नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि तेईस जुलाई को भी उन्होंने ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत करवाया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के खातों में एक प्रतिशत अतिरिक्त राशि डालने के एडीएम भरमौर को निर्देश दिए थे। फिर भी प्रभावितों के खातों में कोई पैसा नहीं डाला गया। उधर, दोपहर बाद उपायुक्त चंबा ने सभी प्रभावितों को आफिस बुलाकर उनका गुस्सा शांत करवाया। उन्होंने मौके पर ही आगामी एक सप्ताह के भीतर प्रभावितों को उनका हक दिलाने के आदेश भरमौर प्रशासन को जारी कर दिए हैं।
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देश आज 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत के लोगों को बधाई दी। उन्होंने यूके और भारत के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि, दोनों देशों के संबंध दशकों से चले आ रहे हैं, दोनों ही मुल्कों ने पीढ़ी दर पीढ़ी बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। मैं भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर यूके की ओर से भारत के लोगों और सभी ब्रिटिश भारतीयों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत के लोगों को बधाई दी। बोरिस जानसन ने भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा कोरोना वैक्सीन के संयुक्त निर्माण को भी याद किया।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा कोरोना वैक्सीन के संयुक्त निर्माण को भी याद किया। उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ वक्त से हमनें चुनौतियों का सामना किया है। दो विविध लोकतंत्रों के रूप में, मुझे हमारी मजबूत दोस्ती पर गर्व है। मैं हमारे रिश्तों को अगले 75 वर्षों और उससे आगे के लिए एक साथ समृद्ध होने के लिए और मजबूत करने के लिए तत्पर हूं।
दरअसल, बीते 13 जनवरी को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री ऐनी मेरी ट्रेवेलियन से वार्ता की थी। एफटीए से 2030 तक भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। जिसे दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मई 2021 में निर्धारित किया था। इस समझौते का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देने के अलावा, वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मानदंडों को उदार बनाना और सीमा शुल्क को कम करना है।
भारत की ओर से 2020-21 में ब्रिटेन को निर्यात 8. 15 अरब डॉलर रहा और ब्रिटेन से यहां पर आयात 4. 95 अरब डॉलर रहा है। मई 2021 में एस्ट्राजेनेका ने 1 मिलियन अमरीकी डालर का वादा किया था। भारत में राहत गतिविधियों का समर्थन करने के लिए मानवीय सहायता के साथ-साथ दुनिया भर के अन्य समुदायों में महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसमें भारत में उनके प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रत्यक्ष राहत के लिए 250,000 अमरीकी डालर का निवेश शामिल है, जिसमें आक्सीजन, दवाओं, अन्य आपूर्ति का वितरण शामिल है।
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देश आज तिहत्तरवां गणतंत्र दिवस मना रहा है। तिहत्तरवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत के लोगों को बधाई दी। उन्होंने यूके और भारत के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि, दोनों देशों के संबंध दशकों से चले आ रहे हैं, दोनों ही मुल्कों ने पीढ़ी दर पीढ़ी बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। मैं भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर यूके की ओर से भारत के लोगों और सभी ब्रिटिश भारतीयों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। तिहत्तरवें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत के लोगों को बधाई दी। बोरिस जानसन ने भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा कोरोना वैक्सीन के संयुक्त निर्माण को भी याद किया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा कोरोना वैक्सीन के संयुक्त निर्माण को भी याद किया। उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ वक्त से हमनें चुनौतियों का सामना किया है। दो विविध लोकतंत्रों के रूप में, मुझे हमारी मजबूत दोस्ती पर गर्व है। मैं हमारे रिश्तों को अगले पचहत्तर वर्षों और उससे आगे के लिए एक साथ समृद्ध होने के लिए और मजबूत करने के लिए तत्पर हूं। दरअसल, बीते तेरह जनवरी को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौते पर ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री ऐनी मेरी ट्रेवेलियन से वार्ता की थी। एफटीए से दो हज़ार तीस तक भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। जिसे दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मई दो हज़ार इक्कीस में निर्धारित किया था। इस समझौते का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देने के अलावा, वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मानदंडों को उदार बनाना और सीमा शुल्क को कम करना है। भारत की ओर से दो हज़ार बीस-इक्कीस में ब्रिटेन को निर्यात आठ. पंद्रह अरब डॉलर रहा और ब्रिटेन से यहां पर आयात चार. पचानवे अरब डॉलर रहा है। मई दो हज़ार इक्कीस में एस्ट्राजेनेका ने एक मिलियन अमरीकी डालर का वादा किया था। भारत में राहत गतिविधियों का समर्थन करने के लिए मानवीय सहायता के साथ-साथ दुनिया भर के अन्य समुदायों में महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसमें भारत में उनके प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रत्यक्ष राहत के लिए दो सौ पचास,शून्य अमरीकी डालर का निवेश शामिल है, जिसमें आक्सीजन, दवाओं, अन्य आपूर्ति का वितरण शामिल है।
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' इसीलिए समझता हूँ कि तुम्हारा इतना आकर्षण है ! सब धर्मावलम्बियों को तुम परम आत्मीय समझकर आलिंगन करते हो ! तुम्हारी भक्ति है । तुम सिर्फ देखते हो - अन्दर ईश्वर की भक्ति और प्रेम है या नहीं ? यदि ऐसा हो तो वह व्यक्ति तुम्हारा परम आत्मीय है - भक्तिमान यदि दिखाई पड़े तो वह जैसे तुम्हारा आत्मीय है । मुसलमान को भी यदि अल्लाह के ऊपर प्रेम हो, तो वह भी तुम्हारा अपना आदमी होगा; ईसाई को यदि ईसू के ऊपर भक्ति हो, तो वह तुम्हारा परम आत्मीय होगा । तुम कहते हो कि सब नदियाँ भिन्न-भिन्न दिशाओं से बहकर समुद्र में गिरती हैं। सब का गन्तव्य स्थान एक समुद्र ही है ।
सुना है, यह जगत् ब्रह्माण्ड महा चिदाकाश में आविर्भूत होता है, फिर कुछ समय के बाद उसी में लय हो जाता है - महा समुद्र में लहर उठती है फिर समय पाकर लय हो जाती है। आनन्द सिन्धु के जल में अनन्त-लीला तरंगें हैं। इन लीलाओं का आरम्भ कहाँ है ? अन्त कहाँ है ? उसे मुँह से कहने का अवसर नहीं है -- मन में सोचने का अवसर नहीं है। मनुष्य की क्या हकीकत - उसकी बुद्धि की ही क्या हकीकत ? सुनते हैं, महापुरुष समाधिस्थ होकर उसी नित्य परम पुरुष का दर्शन करते हैं - नित्य लीलामय हरि का साक्षात्कार करते हैं। अवश्य ही करते हैं, कारण, श्रीरामकृष्ण देव ऐसा कहते हैं । किन्तु चर्मचक्षुओं से नहीं - मालूम पड़ता है, दिव्य चक्षु जिसे कहते हैं उसके द्वारा, जिन नेत्रों को पाकर अर्जुन ने विश्व रूप का दर्शन किया था, जिन नेत्रों से ऋषियों ने आत्मा का साक्षात्कार किया था, जिस दिव्य चक्षु से ईस् अपने स्वर्गीय पिता का बराबर दर्शन करते थे ! वे नेत्र किसे होते हैं? श्रीरामकृष्ण देव के मुँह से सुना था, वह व्याकुलता के द्वारा होता है !
इस समय वह व्याकुलता किस प्रकार हो सकती है ? क्या संसार का त्याग करना होगा ? ऐसा भी तो उन्होंने आज नहीं कहा ! "
परिच्छेद ३० श्रीरामकृष्ण तथा ज्ञानयोग (१)
सन्यासी तथा संचय । पूर्ण ज्ञान तथा प्रेम के लक्षण ।
श्रीरामकृष्ण दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में विराजमान हैं। अपने कमरे में छोटी खाट पर पूर्व की ओर मुँह किए हुए बैठे हैं। भक्तगण फरी पर बैठे हैं। आज कार्तिक की कृष्णा सप्तमी है, ९ नवम्बर, १८८४ ।
दोपहर का समय है। श्रीयुत मास्टर आए, दूसरे भक्त भी धीरेधीरे आ रहे हैं। श्रीयुत विजयकृष्ण गोस्वामी के साथ कई ब्रह्म भक्त आए हुए हैं। पुजारी रामचक्रवर्ती भी आए हैं । क्रमशः महिमाचरण, नारायण और किशोरी भी आये । कुछ देर बाद और भी कई भक्त आए ।
जाड़ा पड़ने लगा है। श्रीरामकृष्ण को कुर्ते की ज़रूरत है । मास्टर से ले आने के लिए कहा था । वे नैनगिलाट के कुर्तों के सिवा एक और जीन का कुर्ता भी ले आए हैं; परन्तु इसके लिए श्रीरामकृष्ण ने नहीं कहा था ।
श्रीरामकृष्ण ( मास्टर से ) - तुम बल्कि इसे लेते जाओ । तुम्हीं पहनना । इसमें दोष नहीं है। अच्छा, तुमसे मैंने किस तरह के कुर्ती के लिए कहा था ?
भा. २ श्री. व. ३७
मास्टर - जी, आपने सादे सधे कुर्ती की बात कही थी । ज़ीन का कुर्ता ले आने के लिए नहीं कहा था ।
श्रीरामकृष्ण - तो जीन वाले को ही लौटा ले जाओ।
( विजय आदि से ) " देखो, द्वारका बाबू ने बनात दी थी, और पश्चिमी ढंङ्ग का कपड़ा भी ले आए थे। मैंने नहीं लिया । ( श्रीरामकृष्ण और भी कड़ना चाहते थे, उसी समय विजय बोल उठे । )
विजय - जी हाँ, ठीक तो है । जो कुछ चाहिए और जितना चाहिए, उतना ही ले लिया जाता है। किसी एक को तो देना ही होगा। आदमी को छोड़ और देगा भी कौन ?
श्रीरामकृष्ण - देने वाले वही ईश्वर हैं । सास ने कहा, बहू, सब की सेवा करने के लिए आदमी हैं, परन्तु तुम्हारे पैर दबाने वाला कोई नहीं है। कोई होता तो अच्छा होता । बहू ने कहा, अम्मा, मेरे पैर भगवान दबाएँगे, मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है। उसने भक्तिपूर्वक यह बात कही थी ।
एक फकीर अकबरशाह के पास कुछ भेंट लेने गया था । बादशाह उस समय नमाज पढ़ रहा था और कह रहा था, ऐ खुदा, मुझे दौलतमन्द कर दे। फकीर ने जब बादशाह की याचनाएँ सुनीं तो उठकर वापस जाना चाहा। परन्तु अकबर शाह ने उससे बैठने के लिए इशारा किया । नमाज खतम होने पर उन्होंने पूछा, तुम क्यों वापस जा रहे थे ? उसने कहा, आप खुद ही याचना कर रहे हैं, ऐ खुदा, मुझे
दौलतमन्द कर दे । इसीलिए मैंने सोचा, अगर माँगना ही है तो भिक्षुक से क्यों माँगू, खुदा से ही क्यों न माँगू ? "
विजय - गया में मैंने एक साधु देखा था। वह स्वयं कुछ प्रयत्न नहीं करते थे । एक दिन इच्छा हुई, भक्तों को खिलाऊँ । देखा न जान कहाँ से मैदा और घी आ गया । फलं भी आए ।
श्रीरामकृष्ण ( विजय आदि से ) - - - साधुओं के तीन दर्जे हैं, उत्तम, मध्यम और अधम । जो उत्तम हैं, वे भोजन की खोज में नहीं फिरते । मध्यम और अधम इण्डियों की तरह के होते हैं । मध्यम जो हैं, वे नमोनारायण करके खड़े हो जाते हैं । जो अधम हैं वे न देने पर तकरार करते हैं ।
( सच हँसे । )
उत्तम श्रेणी के साधु अजगर वृत्ति के होते हैं। उन्हें बैठे हुए ही आहार मिलता है । अजगर हिलता डुलता नहीं । एक छोकरा साधु था - बाल ब्रह्मचारी । वह कहीं भिक्षा लेने के लिए गया । एक लड़की ने आकर भिक्षा दी । उसके स्तन देखकर उसने सोचा, इसकी छाती पर फोड़ा हुआ है । जब उसने पूछा तो घर की पुरखिन ने आकर उसे समझाया । इसके पेट में बच्चा होगा, उसके पीने के लिए ईश्वर इनमें दूध भर दिया करेंगे, इसीलिए पहले से इसका बन्दोबस्त कर रखा से है । यह बात सुनकर उस साधु को बड़ा आश्चर्य हुआ । तब उसने. कहा, तो अब मुझे भिक्षा माँगने की क्या ज़रूरत है ? ईश्वर मेरे लिए भी भोजन तैयार कर दिया करेंगे ।
कुछ भक्त मन में सोचते हैं कि तब तो हम लोग भी यदि चेष्टा न करें, तो चल सकता है ।
" जिसके मन में यह है कि चेष्टा करनी चाहिए, उसे चेष्टाः करनी होगी ।"
विजय - भक्तमाल में एक बड़ी अच्छी कहानी है ।
श्रीरामकृष्ण - कहो, ज़रा सुनें तो ।
विजय -- आप कहिए ।
श्रीरामकृष्ण - नहीं, तुम्हीं कहो, मुझे पूरी याद नहीं है। पहले पहल सुनना चाहिए, इसीलिए मैं सुना करता था ।
"मेरी अब वह अवस्था नहीं है। हनुमान ने कहा था, बार, तिथि, नक्षत्र, इतना सब मैं नहीं जानता, मैं तो बस श्रीरामचन्द्र जी की चिन्ता किया करता हूँ ।
चातक को बस स्वाति के जल की चाह रहती है। मारे प्यास के जी निकल रहा है, परन्तु गला उठाए वह आकाश की बूँदों की ही प्रतीक्षा करता है । गङ्गा यमुना और सातों समुद्र इधर भरे हुए हैं, परन्तु वह पृथ्वी का पानी नहीं पीत। ।
राम और लक्ष्मण जब पंपा सरोवर पर गए तत्र लक्ष्मण ने देखा, एक कौआ व्याकुल होकर बार बार पानी पीने के लिए जा रहा था, परन्तु पीता न था । राम से पूछने पर उन्होंने कहा, भाई, यह कौआ, परम भक्त है। दिन रात यह रामनाम जब रहा है। इधर मारेः
स के छाती फटी जा रही है, परन्तु पानी पी नहीं सकता । सोचता है, पानी पीने लगूंगा तो जप छुट जायगा । मैंने पूर्णिमा के दिन हलधर से पूछा, दादा, आज क्या अमावस है ?
( सहास्य ) " हाँ यह सत्य है । ज्ञानी पुरुष की पहचान यह है कि पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं पाता । परन्तु हलधारी को इस विषय में कौन विश्वास दिला सकता है। उसने कहा, यह निश्चय ही कलिकाल है । वे ( श्री रामकृष्ण ) पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं जानते और फिर भी लोग उनका आइर करते हैं ! " ( इसी समय -महिमाचरण आगए । )
श्रीरामकृष्ण ( संभ्रम पूर्वक ) - आइए, आइए, बैठिए । (विजय आदि से ) इस अवस्था में दिन और तिथि का ख्याल नहीं रहता । उस दिन वेणीपाल के बगीचे में उत्सव था, - मुझे दिन भूल गया । ' अमुक दिन संक्रान्ति है, अच्छी तरह ईश्वर का नाम लूँगा,' यह अब याद नहीं रहता । ( कुछ देर विचार करने के बाद ) परन्तु अगर कोई आने को होता है तो उसकी याद रहती है ।
ईश्वर पर सोलहों आने मन जाने पर यह अवस्था होती है । राम ने पूछा, हनुमान, तुम सीता की खबर तो ले आए, अच्छा, तो उन्हें कैसा देखा; कहो, मेरी सुनने की इच्छा है। हनुमान ने कहा, राम, मैंने देखा, सीता का शरीर मात्र पड़ा हुआ है। उसमें मन, प्राण नहीं हैं । आपके ही पादपद्मों में उन्होंने वे समर्पण कर दिए हैं। इसलिए केवल
शरीर ही पड़ा हुआ है । और काल ( यमराज ) आ. रहा है; परन्तु वह करे क्या ? वहाँ तो शरीर ही है, मन और प्राण तो हैं ही नहीं ।
'जिसकी चिन्ता की जाती है, उसकी सत्ता आ जाती है। दिन रात ईश्वर की चिन्ता करते रहने पर ईश्वर की सत्ता आ जाती है क नमक का पुतला समुद्र की थाह लेने गया तो गलकर खुद वही हो गया । पुस्तकों या शास्त्रों का उद्देश क्या है ? ईश्वर लाभ । साधु की पोथी को एक को एक ने खोलकर देखा, उसमें सिर्फ राम नाम लिखा हुआ था, और कुछ भी नहीं ।
"ईश्वर पर प्रीति होने पर थोड़े ही में उद्दीपन हुआ करता है । तब एक बार रामनाम करने पर कोटि सन्ध्योपासन का फल होता है।
" मेघ देखकर मयूर को उद्दपिन होता है । आनन्द से पंख फैला - कर नृत्य करता है । श्रीमती राधा को भी ऐसा ही हुआ करता था । मेघ देखकर उन्हें कृष्ण की याद आती थी ।
" चैतन्यदेव मेड़गांव के पास ही से जा रहे थे। उन्होंने सुन इस गांव की मिट्टी से ढोल बनती है । बस भावावेश में विह्वल हो गए, - क्योंकि संकीर्तन के समय ढोल का ही वाय होता है।
उद्दपिन किसे होता है ? जिसकी विषय बुद्धि दूर हो गई हैं, जिसका विषयरस सूख जाता है, उसे ही थोड़े में उद्दीपन होता है । • दियासलाई भीगी हुई हो तो चाहे कितना ही क्यों न घिसो, वह जल
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' इसीलिए समझता हूँ कि तुम्हारा इतना आकर्षण है ! सब धर्मावलम्बियों को तुम परम आत्मीय समझकर आलिंगन करते हो ! तुम्हारी भक्ति है । तुम सिर्फ देखते हो - अन्दर ईश्वर की भक्ति और प्रेम है या नहीं ? यदि ऐसा हो तो वह व्यक्ति तुम्हारा परम आत्मीय है - भक्तिमान यदि दिखाई पड़े तो वह जैसे तुम्हारा आत्मीय है । मुसलमान को भी यदि अल्लाह के ऊपर प्रेम हो, तो वह भी तुम्हारा अपना आदमी होगा; ईसाई को यदि ईसू के ऊपर भक्ति हो, तो वह तुम्हारा परम आत्मीय होगा । तुम कहते हो कि सब नदियाँ भिन्न-भिन्न दिशाओं से बहकर समुद्र में गिरती हैं। सब का गन्तव्य स्थान एक समुद्र ही है । सुना है, यह जगत् ब्रह्माण्ड महा चिदाकाश में आविर्भूत होता है, फिर कुछ समय के बाद उसी में लय हो जाता है - महा समुद्र में लहर उठती है फिर समय पाकर लय हो जाती है। आनन्द सिन्धु के जल में अनन्त-लीला तरंगें हैं। इन लीलाओं का आरम्भ कहाँ है ? अन्त कहाँ है ? उसे मुँह से कहने का अवसर नहीं है -- मन में सोचने का अवसर नहीं है। मनुष्य की क्या हकीकत - उसकी बुद्धि की ही क्या हकीकत ? सुनते हैं, महापुरुष समाधिस्थ होकर उसी नित्य परम पुरुष का दर्शन करते हैं - नित्य लीलामय हरि का साक्षात्कार करते हैं। अवश्य ही करते हैं, कारण, श्रीरामकृष्ण देव ऐसा कहते हैं । किन्तु चर्मचक्षुओं से नहीं - मालूम पड़ता है, दिव्य चक्षु जिसे कहते हैं उसके द्वारा, जिन नेत्रों को पाकर अर्जुन ने विश्व रूप का दर्शन किया था, जिन नेत्रों से ऋषियों ने आत्मा का साक्षात्कार किया था, जिस दिव्य चक्षु से ईस् अपने स्वर्गीय पिता का बराबर दर्शन करते थे ! वे नेत्र किसे होते हैं? श्रीरामकृष्ण देव के मुँह से सुना था, वह व्याकुलता के द्वारा होता है ! इस समय वह व्याकुलता किस प्रकार हो सकती है ? क्या संसार का त्याग करना होगा ? ऐसा भी तो उन्होंने आज नहीं कहा ! " परिच्छेद तीस श्रीरामकृष्ण तथा ज्ञानयोग सन्यासी तथा संचय । पूर्ण ज्ञान तथा प्रेम के लक्षण । श्रीरामकृष्ण दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में विराजमान हैं। अपने कमरे में छोटी खाट पर पूर्व की ओर मुँह किए हुए बैठे हैं। भक्तगण फरी पर बैठे हैं। आज कार्तिक की कृष्णा सप्तमी है, नौ नवम्बर, एक हज़ार आठ सौ चौरासी । दोपहर का समय है। श्रीयुत मास्टर आए, दूसरे भक्त भी धीरेधीरे आ रहे हैं। श्रीयुत विजयकृष्ण गोस्वामी के साथ कई ब्रह्म भक्त आए हुए हैं। पुजारी रामचक्रवर्ती भी आए हैं । क्रमशः महिमाचरण, नारायण और किशोरी भी आये । कुछ देर बाद और भी कई भक्त आए । जाड़ा पड़ने लगा है। श्रीरामकृष्ण को कुर्ते की ज़रूरत है । मास्टर से ले आने के लिए कहा था । वे नैनगिलाट के कुर्तों के सिवा एक और जीन का कुर्ता भी ले आए हैं; परन्तु इसके लिए श्रीरामकृष्ण ने नहीं कहा था । श्रीरामकृष्ण - तुम बल्कि इसे लेते जाओ । तुम्हीं पहनना । इसमें दोष नहीं है। अच्छा, तुमसे मैंने किस तरह के कुर्ती के लिए कहा था ? भा. दो श्री. व. सैंतीस मास्टर - जी, आपने सादे सधे कुर्ती की बात कही थी । ज़ीन का कुर्ता ले आने के लिए नहीं कहा था । श्रीरामकृष्ण - तो जीन वाले को ही लौटा ले जाओ। " देखो, द्वारका बाबू ने बनात दी थी, और पश्चिमी ढंङ्ग का कपड़ा भी ले आए थे। मैंने नहीं लिया । विजय - जी हाँ, ठीक तो है । जो कुछ चाहिए और जितना चाहिए, उतना ही ले लिया जाता है। किसी एक को तो देना ही होगा। आदमी को छोड़ और देगा भी कौन ? श्रीरामकृष्ण - देने वाले वही ईश्वर हैं । सास ने कहा, बहू, सब की सेवा करने के लिए आदमी हैं, परन्तु तुम्हारे पैर दबाने वाला कोई नहीं है। कोई होता तो अच्छा होता । बहू ने कहा, अम्मा, मेरे पैर भगवान दबाएँगे, मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है। उसने भक्तिपूर्वक यह बात कही थी । एक फकीर अकबरशाह के पास कुछ भेंट लेने गया था । बादशाह उस समय नमाज पढ़ रहा था और कह रहा था, ऐ खुदा, मुझे दौलतमन्द कर दे। फकीर ने जब बादशाह की याचनाएँ सुनीं तो उठकर वापस जाना चाहा। परन्तु अकबर शाह ने उससे बैठने के लिए इशारा किया । नमाज खतम होने पर उन्होंने पूछा, तुम क्यों वापस जा रहे थे ? उसने कहा, आप खुद ही याचना कर रहे हैं, ऐ खुदा, मुझे दौलतमन्द कर दे । इसीलिए मैंने सोचा, अगर माँगना ही है तो भिक्षुक से क्यों माँगू, खुदा से ही क्यों न माँगू ? " विजय - गया में मैंने एक साधु देखा था। वह स्वयं कुछ प्रयत्न नहीं करते थे । एक दिन इच्छा हुई, भक्तों को खिलाऊँ । देखा न जान कहाँ से मैदा और घी आ गया । फलं भी आए । श्रीरामकृष्ण - - - साधुओं के तीन दर्जे हैं, उत्तम, मध्यम और अधम । जो उत्तम हैं, वे भोजन की खोज में नहीं फिरते । मध्यम और अधम इण्डियों की तरह के होते हैं । मध्यम जो हैं, वे नमोनारायण करके खड़े हो जाते हैं । जो अधम हैं वे न देने पर तकरार करते हैं । उत्तम श्रेणी के साधु अजगर वृत्ति के होते हैं। उन्हें बैठे हुए ही आहार मिलता है । अजगर हिलता डुलता नहीं । एक छोकरा साधु था - बाल ब्रह्मचारी । वह कहीं भिक्षा लेने के लिए गया । एक लड़की ने आकर भिक्षा दी । उसके स्तन देखकर उसने सोचा, इसकी छाती पर फोड़ा हुआ है । जब उसने पूछा तो घर की पुरखिन ने आकर उसे समझाया । इसके पेट में बच्चा होगा, उसके पीने के लिए ईश्वर इनमें दूध भर दिया करेंगे, इसीलिए पहले से इसका बन्दोबस्त कर रखा से है । यह बात सुनकर उस साधु को बड़ा आश्चर्य हुआ । तब उसने. कहा, तो अब मुझे भिक्षा माँगने की क्या ज़रूरत है ? ईश्वर मेरे लिए भी भोजन तैयार कर दिया करेंगे । कुछ भक्त मन में सोचते हैं कि तब तो हम लोग भी यदि चेष्टा न करें, तो चल सकता है । " जिसके मन में यह है कि चेष्टा करनी चाहिए, उसे चेष्टाः करनी होगी ।" विजय - भक्तमाल में एक बड़ी अच्छी कहानी है । श्रीरामकृष्ण - कहो, ज़रा सुनें तो । विजय -- आप कहिए । श्रीरामकृष्ण - नहीं, तुम्हीं कहो, मुझे पूरी याद नहीं है। पहले पहल सुनना चाहिए, इसीलिए मैं सुना करता था । "मेरी अब वह अवस्था नहीं है। हनुमान ने कहा था, बार, तिथि, नक्षत्र, इतना सब मैं नहीं जानता, मैं तो बस श्रीरामचन्द्र जी की चिन्ता किया करता हूँ । चातक को बस स्वाति के जल की चाह रहती है। मारे प्यास के जी निकल रहा है, परन्तु गला उठाए वह आकाश की बूँदों की ही प्रतीक्षा करता है । गङ्गा यमुना और सातों समुद्र इधर भरे हुए हैं, परन्तु वह पृथ्वी का पानी नहीं पीत। । राम और लक्ष्मण जब पंपा सरोवर पर गए तत्र लक्ष्मण ने देखा, एक कौआ व्याकुल होकर बार बार पानी पीने के लिए जा रहा था, परन्तु पीता न था । राम से पूछने पर उन्होंने कहा, भाई, यह कौआ, परम भक्त है। दिन रात यह रामनाम जब रहा है। इधर मारेः स के छाती फटी जा रही है, परन्तु पानी पी नहीं सकता । सोचता है, पानी पीने लगूंगा तो जप छुट जायगा । मैंने पूर्णिमा के दिन हलधर से पूछा, दादा, आज क्या अमावस है ? " हाँ यह सत्य है । ज्ञानी पुरुष की पहचान यह है कि पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं पाता । परन्तु हलधारी को इस विषय में कौन विश्वास दिला सकता है। उसने कहा, यह निश्चय ही कलिकाल है । वे पूर्णिमा और अमावस में भेद नहीं जानते और फिर भी लोग उनका आइर करते हैं ! " श्रीरामकृष्ण - आइए, आइए, बैठिए । इस अवस्था में दिन और तिथि का ख्याल नहीं रहता । उस दिन वेणीपाल के बगीचे में उत्सव था, - मुझे दिन भूल गया । ' अमुक दिन संक्रान्ति है, अच्छी तरह ईश्वर का नाम लूँगा,' यह अब याद नहीं रहता । परन्तु अगर कोई आने को होता है तो उसकी याद रहती है । ईश्वर पर सोलहों आने मन जाने पर यह अवस्था होती है । राम ने पूछा, हनुमान, तुम सीता की खबर तो ले आए, अच्छा, तो उन्हें कैसा देखा; कहो, मेरी सुनने की इच्छा है। हनुमान ने कहा, राम, मैंने देखा, सीता का शरीर मात्र पड़ा हुआ है। उसमें मन, प्राण नहीं हैं । आपके ही पादपद्मों में उन्होंने वे समर्पण कर दिए हैं। इसलिए केवल शरीर ही पड़ा हुआ है । और काल आ. रहा है; परन्तु वह करे क्या ? वहाँ तो शरीर ही है, मन और प्राण तो हैं ही नहीं । 'जिसकी चिन्ता की जाती है, उसकी सत्ता आ जाती है। दिन रात ईश्वर की चिन्ता करते रहने पर ईश्वर की सत्ता आ जाती है क नमक का पुतला समुद्र की थाह लेने गया तो गलकर खुद वही हो गया । पुस्तकों या शास्त्रों का उद्देश क्या है ? ईश्वर लाभ । साधु की पोथी को एक को एक ने खोलकर देखा, उसमें सिर्फ राम नाम लिखा हुआ था, और कुछ भी नहीं । "ईश्वर पर प्रीति होने पर थोड़े ही में उद्दीपन हुआ करता है । तब एक बार रामनाम करने पर कोटि सन्ध्योपासन का फल होता है। " मेघ देखकर मयूर को उद्दपिन होता है । आनन्द से पंख फैला - कर नृत्य करता है । श्रीमती राधा को भी ऐसा ही हुआ करता था । मेघ देखकर उन्हें कृष्ण की याद आती थी । " चैतन्यदेव मेड़गांव के पास ही से जा रहे थे। उन्होंने सुन इस गांव की मिट्टी से ढोल बनती है । बस भावावेश में विह्वल हो गए, - क्योंकि संकीर्तन के समय ढोल का ही वाय होता है। उद्दपिन किसे होता है ? जिसकी विषय बुद्धि दूर हो गई हैं, जिसका विषयरस सूख जाता है, उसे ही थोड़े में उद्दीपन होता है । • दियासलाई भीगी हुई हो तो चाहे कितना ही क्यों न घिसो, वह जल
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लाइफस्टाइल डेस्क. मंगल ग्रह पर जाने की इच्छा रखने वालों के लिए हॉलीडे वेबसाइट ट्रिप एडवाइजर ने धरती पर ही कृत्रिम ग्रह तैयार किया गया है। मंगल ग्रह जैसा दिखने वाला आर्टिफिशियल प्लेनेट उत्तरी स्पेन की गुफाओं में तैयार किया गया है। कंपनी ने पर्यटकों को यहां तीन दिन और रातें बिताने का ऑफर दिया है। इसके लिए 4. 80 लाख रुपए चुकाने होंगे।
कृत्रिम मंगल धरती से 196 फीट की ऊंचाई पर है और यहां 1. 4 किलोमीटर लंबी गुफा है। दावा है कि गुफा में बिल्कुल मंगल ग्रह जैसी स्थिति देखने को मिलेगी। यहां पहुंचने के बाद दुनिया और लोग आपकी पहुंच से दूर हो जाएंगे। इसका पहला ट्रायल हो चुका है। एजेंसी ने इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया है।
कंपनी का कहना है इस जगह पर आने के लिए पर्यटक को पहले 30 दिन के प्रोग्राम का हिस्सा बनना होगा। इसमें उन्हें तीन हफ्ते की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा पर्यटक को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 3 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्हें 3 दिन और रातों का टूर पर जाने की अनुमति मिलेगी। पर्यटकों को खास उपकरण पहनकर ही इस कृत्रिम मंगल पर जाना होगा।
कंपनी के मुताबिक, तीन दिन का किराया करीब 4,80,000 रुपए है। आप रोमांचक यात्रा पर जाना चाहते हैं तो यह सफर यादगार साबित होगा। इसे तैयार करने वाली कंपनी एस्ट्रोलैंड के सीईओ डेविड सेबलोस का कहना है हम ट्रिप एडवाइजर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। प्रोजेक्ट से जुड़कर काफी काफी खुश हूं क्योंकि स्पेस टेक्नोलॉजी में निवेश करना भी एक इनोवेशन की तरह है।
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लाइफस्टाइल डेस्क. मंगल ग्रह पर जाने की इच्छा रखने वालों के लिए हॉलीडे वेबसाइट ट्रिप एडवाइजर ने धरती पर ही कृत्रिम ग्रह तैयार किया गया है। मंगल ग्रह जैसा दिखने वाला आर्टिफिशियल प्लेनेट उत्तरी स्पेन की गुफाओं में तैयार किया गया है। कंपनी ने पर्यटकों को यहां तीन दिन और रातें बिताने का ऑफर दिया है। इसके लिए चार. अस्सी लाख रुपए चुकाने होंगे। कृत्रिम मंगल धरती से एक सौ छियानवे फीट की ऊंचाई पर है और यहां एक. चार किलोग्राममीटर लंबी गुफा है। दावा है कि गुफा में बिल्कुल मंगल ग्रह जैसी स्थिति देखने को मिलेगी। यहां पहुंचने के बाद दुनिया और लोग आपकी पहुंच से दूर हो जाएंगे। इसका पहला ट्रायल हो चुका है। एजेंसी ने इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया है। कंपनी का कहना है इस जगह पर आने के लिए पर्यटक को पहले तीस दिन के प्रोग्राम का हिस्सा बनना होगा। इसमें उन्हें तीन हफ्ते की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा पर्यटक को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाने के लिए तीन दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्हें तीन दिन और रातों का टूर पर जाने की अनुमति मिलेगी। पर्यटकों को खास उपकरण पहनकर ही इस कृत्रिम मंगल पर जाना होगा। कंपनी के मुताबिक, तीन दिन का किराया करीब चार,अस्सी,शून्य रुपयापए है। आप रोमांचक यात्रा पर जाना चाहते हैं तो यह सफर यादगार साबित होगा। इसे तैयार करने वाली कंपनी एस्ट्रोलैंड के सीईओ डेविड सेबलोस का कहना है हम ट्रिप एडवाइजर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। प्रोजेक्ट से जुड़कर काफी काफी खुश हूं क्योंकि स्पेस टेक्नोलॉजी में निवेश करना भी एक इनोवेशन की तरह है।
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कल्याण आयुर्वेद- अनार हमारे बेहतर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसका सेवन हर उम्र के लोगों को करना चाहिए. अनार के सेवन से शरीर में खून की कमी नहीं होती औऱ शरीर तमाम खतरनाक बीमारियों से दूर रहता है. लेकिन ये तो हो गई अनार खाने व उसके फायदे की बात. इन सबके बीच क्या आपको अनार के छिलके से जुड़े फायदे का कोई जानकारी है. अगर नहीं है तो हम आपको आज बताएंगे कि अनार का छिलका भी हमारे लिए बेहद फायदेमंद है.
लेकिन आज हम आपके लिए ऐसा उपाय लाए जिसके इस्तेमाल भर से आपके मुंह का बदबू दूर हो जाएगा. दरअसल हम अनार के छिलके को कूड़ा समझकर हमेशा कूड़ेदान में फेंक देते हैं. जबकि अनार का छिलका सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. अनार के छिलके का फायदा उठाने के लिए छिलकों को सुखाकर उसे पीस लें और उसका पाउडर बनाकर सुरक्षित रख लें.
1- बता दें कि गले में दर्द और खराश को दूर करने में अनार का छिलका बेहद कारगार साबित होता है. इसके इस्तेमाल की विधि है कि अनार के छिलके के पाउडर को थोड़े से पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें. इसके बाद इसे छानकर ठंडा करके गरारा करें. इस प्रक्रिया के तकरीबन 10 मिनट के अंदर आपको बहुत आराम मिलता है.
2- हृदय रोगों के लिए भी अनार का छिलका रामबाण से कम नहीं है. दिल संबंधी बीमारियों के लिए भी अनार के छिलके बहुत फायदेमंद होते हैं. अनार के छिलके में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल रहता है. इसके लिए गर्म पानी में एक चम्मच छिलके का पाउडर मिलाकर प्रतिदिन पीने से ह्रदय स्वस्थ रहता है.
3- मासिक धर्म के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग से बचने और काबू करने के क्रम में अनार का छिलका बेहद कारगर साबित होता है. जैसे की कुछ लोगों को मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है. इससे छुटकारा पाने के लिए अनार के छिलके के पाउडर को पानी के साथ प्रतिदिन पिएं. पीरियड्स की ब्लीडिंग कम हो जाएगी.
4- इसके अलावा कुछ लोगों के मुंह से बदबू आती है. इससे छुटकारा पाने के लिए एक गिलास पानी में अनार के छिलके के पाउडर को मिला लें और इससे दिन में दो- तीन बार कुल्ला करें. ऐसा करने से मुंह की बदबू बहुत जल्दी दूर हो जाएगी.
5- हड्डियों को मजबूत करने में भी अनार का छिलका बेहद फायदेमंद होता है. हड्डियों की मजबूती के लिए एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच अनार के छिलके का पावडर मिलाएं और इसे रात में सोने से पहले पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं.
6- बवासीर (अर्श) : 10 ग्राम अनार के छिलके का चूर्ण बनाकर इसमें 100 ग्राम दही मिलाकर खाने से बवासीर ठीक हो जाती है या अनार के छिलकों का चूर्ण 8 ग्राम, ताजे पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम प्रयोग करें या अनार के छिलकों का चूर्ण नागकेशर के साथ मिलाकर सेवन करने से बवासीर में खून का बहना बंद होता है. अनार का रस पीने से भी बवासीर में लाभ होता है.
7- अतिसार : 3-6 ग्राम अनार के जड़ की छाल या अनार के छिलके का चूर्ण शहद के साथ दिन में 3 बार देना चाहिए. इससे अतिसार नष्ट हो जाता है या अनार फल के छिलके के 2-3 ग्राम चूर्ण का सुबह-शाम ताजे पानी के साथ प्रयोग करने से अतिसार तथा अतिसार में लाभ होता है. या अनार का छिलका 20 ग्राम को 1 लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर रख लें, फिर इसी बने काढ़े को छानकर पीने से अतिसार (दस्त) में खून का आना बंद हो जाता है. या अनार के छिलके 50 ग्राम को लगभग 1. 2 मिलीलीटर दूध की मात्रा में डालकर धीमी आग पर रख दें, जब दूध 800 मिलीलीटर बच जाये इसे एक दिन में 3 से 4 बार खुराक के रूप में पीने से अतिसार यानी दस्त समाप्त हो जाते हैं.
8 . नकसीर : अनार के छिलके को छुहारे के पानी के साथ पीसकर लेप करने से सूजन में तथा इसके सूखे महीन चूर्ण को नाक में टपकाने से नकसीर में लाभ होता है.
9- बार बार पेशाब आना : सूखे अनार के छिलकों का चूर्ण दिन में 3-4 बार एक - एक चम्मच ताजा पानी के साथ सेवन करने से बार बार पेशाब आने की समस्या ठीक हो जाती है.
10- खांसी : खांसी में अनार के छिलके को मुँह में रखकर धीरे धीरे 3-4 बार चूसते रहने से लाभ मिलता है.
11- चेहरा चमकाए, त्वचा की झुर्रियाँ और लटकती त्वचा में कसाव : अनार के छिलकों के एक चम्मच चूर्ण को कच्चे दूध और गुलाब जल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा दमक उठता है. त्वचा की झुर्रियाँ समाप्त होती है और लटकती त्वचा में कसाव आता है. आधा चम्मच अनार के छिलकों के बारीक चूर्ण को शहद के साथ चाटने से लाभ होता है.
12- मुंहासे दूर करे : अनार के छिलकों में भी एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को मुंहासों व संक्रमण से दूर रखने में मदद करते हैं. इसके छिलके को सुखाकर तवे पर भून लें. ठंडा होने पर मिक्सर में पीसें और पैक की तरह चेहरे पर लगाएं. मुंहासे दूर होंगे.
13- त्वचा पर झुर्रियां : अनार के छिलके त्वचा में कोलाजन के नुकसान से बचाते हैं जिससे त्वचा पर झुर्रियां जल्दी नहीं पड़ती हैं. छिलके को सुखाकर पाउडर बनाएं और दूध व गुलाब जल में मिलाकर लगाएं.
14- त्वचा को नम बनाएँ : त्वचा के पीएच बैलेंस को बनाए रखने व नमीं पहुंचाने के लिहाज से यह फायदेमंद है. अनार के छिलकों का पाउडर बनाकर दही में मिलाएं और 10 मिनट तक पैक की तरह चेहरे पर लगाएं और साधारण पानी से साफ करें.
15- बाल झड़ने और रूसी का सफ़ाया : अनार के छिलकों का पाउडर तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से बाल झड़ने और रूसी जैसी समस्याओं से निजात देता है. शैंपू से दो घंटे पहले इससे सिर की मसाज करें.
नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नही है इसलिए किसी भी प्रयोग से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह लें.
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कल्याण आयुर्वेद- अनार हमारे बेहतर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसका सेवन हर उम्र के लोगों को करना चाहिए. अनार के सेवन से शरीर में खून की कमी नहीं होती औऱ शरीर तमाम खतरनाक बीमारियों से दूर रहता है. लेकिन ये तो हो गई अनार खाने व उसके फायदे की बात. इन सबके बीच क्या आपको अनार के छिलके से जुड़े फायदे का कोई जानकारी है. अगर नहीं है तो हम आपको आज बताएंगे कि अनार का छिलका भी हमारे लिए बेहद फायदेमंद है. लेकिन आज हम आपके लिए ऐसा उपाय लाए जिसके इस्तेमाल भर से आपके मुंह का बदबू दूर हो जाएगा. दरअसल हम अनार के छिलके को कूड़ा समझकर हमेशा कूड़ेदान में फेंक देते हैं. जबकि अनार का छिलका सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. अनार के छिलके का फायदा उठाने के लिए छिलकों को सुखाकर उसे पीस लें और उसका पाउडर बनाकर सुरक्षित रख लें. एक- बता दें कि गले में दर्द और खराश को दूर करने में अनार का छिलका बेहद कारगार साबित होता है. इसके इस्तेमाल की विधि है कि अनार के छिलके के पाउडर को थोड़े से पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें. इसके बाद इसे छानकर ठंडा करके गरारा करें. इस प्रक्रिया के तकरीबन दस मिनट के अंदर आपको बहुत आराम मिलता है. दो- हृदय रोगों के लिए भी अनार का छिलका रामबाण से कम नहीं है. दिल संबंधी बीमारियों के लिए भी अनार के छिलके बहुत फायदेमंद होते हैं. अनार के छिलके में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल रहता है. इसके लिए गर्म पानी में एक चम्मच छिलके का पाउडर मिलाकर प्रतिदिन पीने से ह्रदय स्वस्थ रहता है. तीन- मासिक धर्म के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग से बचने और काबू करने के क्रम में अनार का छिलका बेहद कारगर साबित होता है. जैसे की कुछ लोगों को मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है. इससे छुटकारा पाने के लिए अनार के छिलके के पाउडर को पानी के साथ प्रतिदिन पिएं. पीरियड्स की ब्लीडिंग कम हो जाएगी. चार- इसके अलावा कुछ लोगों के मुंह से बदबू आती है. इससे छुटकारा पाने के लिए एक गिलास पानी में अनार के छिलके के पाउडर को मिला लें और इससे दिन में दो- तीन बार कुल्ला करें. ऐसा करने से मुंह की बदबू बहुत जल्दी दूर हो जाएगी. पाँच- हड्डियों को मजबूत करने में भी अनार का छिलका बेहद फायदेमंद होता है. हड्डियों की मजबूती के लिए एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच अनार के छिलके का पावडर मिलाएं और इसे रात में सोने से पहले पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं. छः- बवासीर : दस ग्राम अनार के छिलके का चूर्ण बनाकर इसमें एक सौ ग्राम दही मिलाकर खाने से बवासीर ठीक हो जाती है या अनार के छिलकों का चूर्ण आठ ग्राम, ताजे पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम प्रयोग करें या अनार के छिलकों का चूर्ण नागकेशर के साथ मिलाकर सेवन करने से बवासीर में खून का बहना बंद होता है. अनार का रस पीने से भी बवासीर में लाभ होता है. सात- अतिसार : तीन-छः ग्राम अनार के जड़ की छाल या अनार के छिलके का चूर्ण शहद के साथ दिन में तीन बार देना चाहिए. इससे अतिसार नष्ट हो जाता है या अनार फल के छिलके के दो-तीन ग्राम चूर्ण का सुबह-शाम ताजे पानी के साथ प्रयोग करने से अतिसार तथा अतिसार में लाभ होता है. या अनार का छिलका बीस ग्राम को एक लीटरटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर रख लें, फिर इसी बने काढ़े को छानकर पीने से अतिसार में खून का आना बंद हो जाता है. या अनार के छिलके पचास ग्राम को लगभग एक. दो मिलीलीटर दूध की मात्रा में डालकर धीमी आग पर रख दें, जब दूध आठ सौ मिलीलीटर बच जाये इसे एक दिन में तीन से चार बार खुराक के रूप में पीने से अतिसार यानी दस्त समाप्त हो जाते हैं. आठ . नकसीर : अनार के छिलके को छुहारे के पानी के साथ पीसकर लेप करने से सूजन में तथा इसके सूखे महीन चूर्ण को नाक में टपकाने से नकसीर में लाभ होता है. नौ- बार बार पेशाब आना : सूखे अनार के छिलकों का चूर्ण दिन में तीन-चार बार एक - एक चम्मच ताजा पानी के साथ सेवन करने से बार बार पेशाब आने की समस्या ठीक हो जाती है. दस- खांसी : खांसी में अनार के छिलके को मुँह में रखकर धीरे धीरे तीन-चार बार चूसते रहने से लाभ मिलता है. ग्यारह- चेहरा चमकाए, त्वचा की झुर्रियाँ और लटकती त्वचा में कसाव : अनार के छिलकों के एक चम्मच चूर्ण को कच्चे दूध और गुलाब जल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा दमक उठता है. त्वचा की झुर्रियाँ समाप्त होती है और लटकती त्वचा में कसाव आता है. आधा चम्मच अनार के छिलकों के बारीक चूर्ण को शहद के साथ चाटने से लाभ होता है. बारह- मुंहासे दूर करे : अनार के छिलकों में भी एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को मुंहासों व संक्रमण से दूर रखने में मदद करते हैं. इसके छिलके को सुखाकर तवे पर भून लें. ठंडा होने पर मिक्सर में पीसें और पैक की तरह चेहरे पर लगाएं. मुंहासे दूर होंगे. तेरह- त्वचा पर झुर्रियां : अनार के छिलके त्वचा में कोलाजन के नुकसान से बचाते हैं जिससे त्वचा पर झुर्रियां जल्दी नहीं पड़ती हैं. छिलके को सुखाकर पाउडर बनाएं और दूध व गुलाब जल में मिलाकर लगाएं. चौदह- त्वचा को नम बनाएँ : त्वचा के पीएच बैलेंस को बनाए रखने व नमीं पहुंचाने के लिहाज से यह फायदेमंद है. अनार के छिलकों का पाउडर बनाकर दही में मिलाएं और दस मिनट तक पैक की तरह चेहरे पर लगाएं और साधारण पानी से साफ करें. पंद्रह- बाल झड़ने और रूसी का सफ़ाया : अनार के छिलकों का पाउडर तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से बाल झड़ने और रूसी जैसी समस्याओं से निजात देता है. शैंपू से दो घंटे पहले इससे सिर की मसाज करें. नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नही है इसलिए किसी भी प्रयोग से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह लें.
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। कमरतोड़ महंगाई में भी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा आटो, टैक्सी किराया, दूध, बिजली दर में वृद्धि करने तथा रेलवे में रिश्वत की सुपरफास्ट ट्रेन दौड़ाने के खिलाफ जनता दल (यू) दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष श्री गौरी शंकर शर्मा (अधिवक्ता) की अगुवाई में दयालपुर चौक से श्रीराम कालोनी, निकट खजूरी थाना तक विरोध यात्रा निकाली गई जिसमें नरेश कुमार सेन, डॉ. केके कर्ण, संगीता, मो. शहनवाज, परसुराम, सुबोध, हरीशंकर, विजय, सुरेश चंद्र ओझा, नीतिश कुमार, जेपी शर्मा, राजू यादव सहित सैकड़ों लोग विरोध यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान दयालपुर चौक और श्रीराम कालोनी में 2 जगह नुक्कड़सभा भी की गई जिसमें गौरी शंकर शर्मा ने कहा कि आज इस महंगाई और भ्रष्टाचार के माहौल में जनता एकदम बेहाल है। इन दोनों समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारीर जो देश, प्रदेश के शासनाध्यक्षों को है वे भी कार्यवाही करने के बजाय उन सभी को बढ़ावा देने में तुले हुए हैं। आखिरकार महंगाई की जो गाड़ी है उसको कहीं न कहीं रुकना चाहिए। इसको रोकने के लिए कौन-सा फरिश्ता उपर से टपकेगा। आटो-टैक्सी, दूध का दाम तथा बिजली की दर बढ़ाना जनता के उपर कोई उपकार नहीं है बल्कि उनके जेब से पैसे खींचने का एक साधन बनाना हो रहा है। जब जनप्रतिनिधि तथा नौकरशाहों को कई सौ यूनिट बिजली की छूट दी जाती है तो जनता के उपर ऐसा भार क्यों डाला जाता है। वह भी तो इसे देश के नागरिक हैं उनको भी तो जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों की तरह छूट पाने का हक है। जब कम्पनियों को घाटा हो रहा है तो वो क्यों बिजली की सप्लाई में लगी हुई है। घाटे के सौदे को कोई भी व्यापारी अपने गले नहीं लगाता बल्कि उससे पिंड छुड़ाता है। बिजली कम्पनियों के लिए विद्युत नियामक आयोग एक एजेंट के रूप में काम कर रहा है। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों सहित मुख्यमंत्री की भूमिका संदेह के घेरे में है। ये लोग सत्ता का दुरुपयोग करके जनता पर अत्याचार करते चले आ रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि रेलवे में रिश्वत का खुलासा कोई नई बात नहीं है। आज जो रेलवे का घाटा दिखाया जाता है वो इन्हीं रेलमंत्रियों, नौकरशाहों का परिणाम है। रेल मंत्री के भांजे की गिरफ्तारी के बानगी भर है अगर गहराई से छानबीन की जाए तो पवन बंसल द्वारा रेल की निजीकरण की जो नींव रखे हैं उसमें भी हजारों करोड़ रिश्वत का घोटाला पता चलेगा। निजीकरण घोटाले का बहुत बड़ा ज ड़ है चाहे वह बिजली का निजीकरण हो, पानी का निजीकरण हो, रेलवे का निजीकरण या राजग सरकार के समय में सरकारी सम्पत्तियों का निजीकरण का मामला हो सब में संबंधित मंत्रियों द्वारा हजारों करोड़ों का वारान्यारा किए हैं अगर कोई मंत्री इसको गलत बताता है तो उनके तथा उनके परिवार का भी वैज्ञानिक परीक्षण जैसे नार्को टेस्ट कराकर पता किया जाना चाहिए। रेल मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि इनके भी सम्पत्तियों की जांच होनी चाहिए।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। कमरतोड़ महंगाई में भी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा आटो, टैक्सी किराया, दूध, बिजली दर में वृद्धि करने तथा रेलवे में रिश्वत की सुपरफास्ट ट्रेन दौड़ाने के खिलाफ जनता दल दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष श्री गौरी शंकर शर्मा की अगुवाई में दयालपुर चौक से श्रीराम कालोनी, निकट खजूरी थाना तक विरोध यात्रा निकाली गई जिसमें नरेश कुमार सेन, डॉ. केके कर्ण, संगीता, मो. शहनवाज, परसुराम, सुबोध, हरीशंकर, विजय, सुरेश चंद्र ओझा, नीतिश कुमार, जेपी शर्मा, राजू यादव सहित सैकड़ों लोग विरोध यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान दयालपुर चौक और श्रीराम कालोनी में दो जगह नुक्कड़सभा भी की गई जिसमें गौरी शंकर शर्मा ने कहा कि आज इस महंगाई और भ्रष्टाचार के माहौल में जनता एकदम बेहाल है। इन दोनों समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारीर जो देश, प्रदेश के शासनाध्यक्षों को है वे भी कार्यवाही करने के बजाय उन सभी को बढ़ावा देने में तुले हुए हैं। आखिरकार महंगाई की जो गाड़ी है उसको कहीं न कहीं रुकना चाहिए। इसको रोकने के लिए कौन-सा फरिश्ता उपर से टपकेगा। आटो-टैक्सी, दूध का दाम तथा बिजली की दर बढ़ाना जनता के उपर कोई उपकार नहीं है बल्कि उनके जेब से पैसे खींचने का एक साधन बनाना हो रहा है। जब जनप्रतिनिधि तथा नौकरशाहों को कई सौ यूनिट बिजली की छूट दी जाती है तो जनता के उपर ऐसा भार क्यों डाला जाता है। वह भी तो इसे देश के नागरिक हैं उनको भी तो जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों की तरह छूट पाने का हक है। जब कम्पनियों को घाटा हो रहा है तो वो क्यों बिजली की सप्लाई में लगी हुई है। घाटे के सौदे को कोई भी व्यापारी अपने गले नहीं लगाता बल्कि उससे पिंड छुड़ाता है। बिजली कम्पनियों के लिए विद्युत नियामक आयोग एक एजेंट के रूप में काम कर रहा है। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों सहित मुख्यमंत्री की भूमिका संदेह के घेरे में है। ये लोग सत्ता का दुरुपयोग करके जनता पर अत्याचार करते चले आ रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि रेलवे में रिश्वत का खुलासा कोई नई बात नहीं है। आज जो रेलवे का घाटा दिखाया जाता है वो इन्हीं रेलमंत्रियों, नौकरशाहों का परिणाम है। रेल मंत्री के भांजे की गिरफ्तारी के बानगी भर है अगर गहराई से छानबीन की जाए तो पवन बंसल द्वारा रेल की निजीकरण की जो नींव रखे हैं उसमें भी हजारों करोड़ रिश्वत का घोटाला पता चलेगा। निजीकरण घोटाले का बहुत बड़ा ज ड़ है चाहे वह बिजली का निजीकरण हो, पानी का निजीकरण हो, रेलवे का निजीकरण या राजग सरकार के समय में सरकारी सम्पत्तियों का निजीकरण का मामला हो सब में संबंधित मंत्रियों द्वारा हजारों करोड़ों का वारान्यारा किए हैं अगर कोई मंत्री इसको गलत बताता है तो उनके तथा उनके परिवार का भी वैज्ञानिक परीक्षण जैसे नार्को टेस्ट कराकर पता किया जाना चाहिए। रेल मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है बल्कि इनके भी सम्पत्तियों की जांच होनी चाहिए।
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उपमान, उनकी उत्प्रेक्षाएँ, उनके रूपक सभी जीवन के हृश्यपक्ष के साथ संयुक्त होकर जगत् का मांसल चित्र प्रस्तुत करने वाले है । कृष्ण-भक्ति-काव्य का सौन्दर्य ब्रज के भक्ति सम्प्रदायों के कवियों में जितनी पूर्णता के साथ दृष्टिगत होता है उतना अन्य कवियों में नहीं है । गोस्वामी हितहरिवंश, व्यास, ध्रुवदास, श्रीभट्ट, स्वामी हरिदास, भगवत रसिक, सह्चरि सुख, हरिव्यासदेव आदि कवियों को वर्णन सामग्री इतनी समृद्ध है कि उसका अध्ययन भक्ति काव्य के अध्ययन में बड़ा सहायक सिद्ध होगा। लेखक ने प्रसिद्ध कवियों तक अपना अध्ययन सीमित रखा है अतः उपर्युक्त कवियों के काव्य-सौन्दर्य का पर्यवेक्षरण नहीं हो सका।
राम काव्य के अध्ययन में तुलसी और केशव को प्रतिनिधि कवि के रूप में स्थान दिया गया है । तुलसी के विशाल साहित्य से विपुल वर्णन-सामग्री एकत्र कर उसका सौन्दर्य सामने लाया गया है । लेखक ने तुलसी के वैवको ध्यान में रखकर सौन्दर्य के जो चित्र चयन किये है उनमें मानस और विनयपत्रिका का ही प्राधान्य है। केशवदास के अध्ययन में लेखक ने संस्कृत ग्रन्थों की छाया का आतिशय्य प्रदर्शित करके केशव के चमत्कार को एक तरह से समाप्त सा कर दिया है। केशव की प्राय. सभो सुन्दर सूक्तियों के पीछे संस्कृत छाया का संघान जहाँ एक ओर लेखक के अध्ययन का द्योतक है वहाँ दूसरी ओर केशव की पांडित्यपूर्ण अपहरण प्रवृत्ति का भी परिचय देता है । केशव की वर्णन-सामग्री में सामाजिक जीवन की गहरी छाप है । उनको वर्णनसामग्री उनके अपने चारों ओर के वातावरण से एकत्र को हुई भोग्य सामग्री है । रीतिकालीन काव्य को लेखक ने 'शृंगार काव्य का अभिधान देकर उसके स्वरूप का श्राख्यान शृगार की निम्न भावना के आधार पर किया है । इस काल के समस्त काव्य को निर्जीव कह देना भी लेखक की दृष्टि से अनुपयुक्त नहीं है। उनके मत में इस काव्य में शृंगार न होकर शृगार - रसाभास मात्र है। प्रेम, प्रीति या स्नेह के नाम पर नग्न कामाचार को लहरें हो इस काव्य का प्रारण है। कामुकता का यह काव्य क्षणिक जीवन को सुख संचय में बहलाने का जब बार-बार प्रयास करता है तब उस मद्यप का सहसा स्मरण हो श्राता है जो अपने हताश एवं परवश अस्तित्व को रंगीनी से चमकाकर वास्तविकता को भूलने में प्रयत्नशील हो । x x इस विलासी काव्य में जीवन को श्राद्यन्त प्रभावित करने की शक्ति नहीं थी इसलिए इसका प्रायने विखरे बिखरे बुदबुदों के रूप में ही हुआ।" लेखक ने इस युग के काव्य को अवसादपूर्ण विलास का जर्जर काव्य मानकर ही उसका मूल्यांकन किया है । लेखक की नैतिक भावना इतनी प्रबुद्ध प्रतीत होती है कि वह काव्य-सौन्दर्य विधायक कला का मूल्यांकन भी नैतिकता के मापदण्ड से ही करना उचित समझता है । तटस्य कला-समीक्षक के लिए नैतिकता का यह आरोप कला-समीक्षा में कहाँ तक समीचीन है इसका विश्लेषण न करते हुए में इतना ही कहना चाहता हूँ कि लेखक को भावना कुछ भी हो किन्तु उन्होंने ग्रगले पृष्ठो में जिस समृद्ध वर्णन-सामग्री का चयन किया है वह काव्य-सौन्दर्य और कला - समीक्षा दोनों दृष्टियों से अनुपम है। बिहारी की समृद्ध वर्णन-सामग्री को पढ़कर पाठक विस्मय विमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता । नागर और ग्राम्य चित्रो का जो
हिदी काव्य और उसका सौदर्य
चित्र लेखक में प्रस्तुत किया है वह सवथा नूतन है। घनाद की वशन-राामग्री में भा माघर चमत्कार की अनुपम छटा दृष्टिगत होती है।
क्षेत्र में हिन्दी काव्य और उसका सौदय" प्रत्य के प्रतिपाद्य विषय का परि वय देने के बाद में इस प्रध्ययन को उपादेयता के सम्बन्ध में दो शब्द बहतर इस भूमिका को समाप्त करता है । इस ग्रन्थ के निर्माण से विगत छह सौ वर्षको हिदी काव्यधारा के उस का वोध होता है जावस्त योजना अथवा वणन सामग्री द्वारा अध्यक्षका अभिन्न हुई है। लेखक ने केनेवर को ध्यान में रखपर केवल प्रतिनिधि कवियों के काव्य-मौन्दर पर ही विचार किया है किन्तु इस कारण काय सौ की समग्रता में कोई न्यूनना नहीं पाई। इसी प्रणाली पर यदि अप्रस्तुत योजना के पूरक पवन नलावा भी अध्ययन किया जाय तो हिंदी वाव्य या समस्त सौदय (क्लापप) उघाटित हो सक्गा । इस ग्रत्यको पद मेरी यह घारणा और अधिक पुष्ट हुई है कि हिन्दी वाव्य की वर्णन-सामग्री के प्राधार पर काव्यसोन्याहा बाघ नहीं होना वरन् हिन्दी भाषी प्रदा की तत्कालीन विविध परिस्थि नियों का भी चित्र आकार ग्रहण करता है। प्रस्तुत प्राथ में लखन ने जिस सामग्री का गवषणात्मक प्रगोलन किया है वह सम्मानिसम ब्रह्मविचार से लेकर स्थूलनम दनित्र जीवन की मोटी माटी घटनाग्रा मौर वस्तुमा को मूतमन्त करने में समय है। सौदय का एक पक्ष (वमन-सामग्री) जब इतना समद्ध और परिपुष्ट है तब उसके सभी पक्षों का उद्घाटन तो निश्चय ही सोय की निरविनय वभव सामग्री सामने लाने में समय होगा ।
डा० धोकान अनका विवेचनात्मक इतिहास और हिंदी काव्य के सौन्दय का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत कर हिन्दी माहित्य जगन में पना विशिष्ट स्थान बना दिया है। वे स्वाचिक के रूप में माहित्यिक जात में प्रवेश कर रहे है । उतिभा में नवा मे की मौलिकता के साथ स्वमन को व्यक्त करने का निर्माता है उनको में कृतित्व का निपुणता के साथ मध्ययन को गम्भीरता है । हिली जगत के समय इस वध को प्रस्तुत करत समय मुझे पूर्ण विश्वास है कि विद्वसमाज में इस ग्राथ वई सम्मान प्राप्त होगा मोर भविष्य में डा० भोपाजी को लेखनी से और भो प्रयरन हिन्दी जगत को उपमध होगे ।
-विजयेन्द्र स्नातक रोडर हिन्दी विभाग
विली विश्वविद्यालय
अपनी ओर से
'हिन्दी-अलंकार- साहित्य' की भूमिका में मैं लिख चुका हूँ कि 'थ्योरी एण्ड प्रैक्टिस श्रॉफ अलंकार्स इन हिन्दी' विषय पर लिखा हुआ मेरा थीसिस आगरा विश्वविद्यालय में 'हिन्दी साहित्य में अलंकार' नाम से पी-एच० डी० उपाधि के लिए स्वीकृत हुआ; थोसिस के दो भाग थे जिनको ५-६ वर्ष बाद परिवर्द्धन परिशोधन के अनन्तर 'हिन्दी-अलंकार-साहित्य' और 'हिन्दी काव्य और उसका सौन्दर्य' नाम से अधिकारी विद्वानों के समक्ष उपस्थित कर रहा हूँ ।
'हिन्दी - अलंकार - साहित्य' वैज्ञानिक अध्ययन था, इसलिए पर्याप्त परिवर्तन हो जाने पर भी उसकी टाइप की हुई प्रति में प्रकाशित रूप का पूर्वाभास सहज ही मिल जाता था; परन्तु प्रस्तुत प्रयत्न साहित्यिक अनुशीलन है, अतः लेखक के व्यक्तित्व के साथ-साथ इसके नवीन रूप में समुचित परिवर्तन आ गया है । साहित्य वस्तुपरक उतना नही जितना कि व्यक्तिपरका, इसलिए साहित्यिक कृति लेखक के व्यक्तित्व से अनिवार्यतः अंकित होती रहती है ।
मूल कृति में रासो-काव्यों से वर्तमान काव्य तक की ग्रालंकारिक सामग्री का अध्ययन था, इसलिए सन् १९५१ तक इसको 'हिन्दी साहित्य की प्रालंकारिक प्रवृत्तियां' नाम से प्रकाशित करने का मेरा विचार था । ( जिसका संकेत 'आलोचना की थोर, प्रथम संस्करण, पृष्ठ १५, कुटनोट में दिया गया था ) । पीछे यह सोचकर कि 'आलंकारिक सामग्रो' और 'लकारिक प्रवृत्तियों' पदों से अधिकतर पाठक 'अलंकार - शैली' का अर्थ लेकर यह समझ बैठते हैं कि इस कृति में भिन्न-भिन्न कवियों द्वारा प्रयुक्त अलंकार छोटे गये होगे, मैने प्रकाशन से कुछ दिन पूर्व इस पुस्तक को नया नाम दे दिया है। प्रस्तुत रूप में इसका क्षेत्र 'वीर-काव्य' से 'शृंगार-काव्य' तक ही है, आधुनिक काव्य पर किसी विश्वविद्यालय में स्वतन्त्र अनुसन्धान हो रहा है उसके स्वीकृत और प्रकाशित होने पर प्रस्तुत प्रयत्न आद्यन्त पूर्ण हो जायगा ।
यह स्वीकार करते हुए कि साहित्य कवि और समाज के समानान्तर रूप का प्रतिबिम्वक है, इस ग्रन्थ में मेरा प्रयत्न कवियों के व्यक्तित्व के सूक्ष्म अनुशीलन का रहा है, और मैने स्पष्टतर स्थूल प्रस्तुत सूत्रों का अनुगमन न करके कवि के व्यक्तित्व को समझने के लिए सूक्ष्म एवं घूगिल प्रस्तुत योजना का सहारा लिया श्र है । कवि के अनन्त अवचेतन में परिस्थिति की प्रतिच्छाया वनकर जो नीहारराशि व्याप्त रहती है वह अलोकसामान्य होने के कारण चर्म-चक्षुओं से ग्राह्य न हो सके, परन्तु सहृदयों की भावन-प्रक्रिया के लिए वह अस्पृश्य नहीं है । निर्भय होकर राज-पथ पर कवि के साथ विचरण करने के कारण समाज में ख्याति प्राप्त करनेवाले
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उपमान, उनकी उत्प्रेक्षाएँ, उनके रूपक सभी जीवन के हृश्यपक्ष के साथ संयुक्त होकर जगत् का मांसल चित्र प्रस्तुत करने वाले है । कृष्ण-भक्ति-काव्य का सौन्दर्य ब्रज के भक्ति सम्प्रदायों के कवियों में जितनी पूर्णता के साथ दृष्टिगत होता है उतना अन्य कवियों में नहीं है । गोस्वामी हितहरिवंश, व्यास, ध्रुवदास, श्रीभट्ट, स्वामी हरिदास, भगवत रसिक, सह्चरि सुख, हरिव्यासदेव आदि कवियों को वर्णन सामग्री इतनी समृद्ध है कि उसका अध्ययन भक्ति काव्य के अध्ययन में बड़ा सहायक सिद्ध होगा। लेखक ने प्रसिद्ध कवियों तक अपना अध्ययन सीमित रखा है अतः उपर्युक्त कवियों के काव्य-सौन्दर्य का पर्यवेक्षरण नहीं हो सका। राम काव्य के अध्ययन में तुलसी और केशव को प्रतिनिधि कवि के रूप में स्थान दिया गया है । तुलसी के विशाल साहित्य से विपुल वर्णन-सामग्री एकत्र कर उसका सौन्दर्य सामने लाया गया है । लेखक ने तुलसी के वैवको ध्यान में रखकर सौन्दर्य के जो चित्र चयन किये है उनमें मानस और विनयपत्रिका का ही प्राधान्य है। केशवदास के अध्ययन में लेखक ने संस्कृत ग्रन्थों की छाया का आतिशय्य प्रदर्शित करके केशव के चमत्कार को एक तरह से समाप्त सा कर दिया है। केशव की प्राय. सभो सुन्दर सूक्तियों के पीछे संस्कृत छाया का संघान जहाँ एक ओर लेखक के अध्ययन का द्योतक है वहाँ दूसरी ओर केशव की पांडित्यपूर्ण अपहरण प्रवृत्ति का भी परिचय देता है । केशव की वर्णन-सामग्री में सामाजिक जीवन की गहरी छाप है । उनको वर्णनसामग्री उनके अपने चारों ओर के वातावरण से एकत्र को हुई भोग्य सामग्री है । रीतिकालीन काव्य को लेखक ने 'शृंगार काव्य का अभिधान देकर उसके स्वरूप का श्राख्यान शृगार की निम्न भावना के आधार पर किया है । इस काल के समस्त काव्य को निर्जीव कह देना भी लेखक की दृष्टि से अनुपयुक्त नहीं है। उनके मत में इस काव्य में शृंगार न होकर शृगार - रसाभास मात्र है। प्रेम, प्रीति या स्नेह के नाम पर नग्न कामाचार को लहरें हो इस काव्य का प्रारण है। कामुकता का यह काव्य क्षणिक जीवन को सुख संचय में बहलाने का जब बार-बार प्रयास करता है तब उस मद्यप का सहसा स्मरण हो श्राता है जो अपने हताश एवं परवश अस्तित्व को रंगीनी से चमकाकर वास्तविकता को भूलने में प्रयत्नशील हो । x x इस विलासी काव्य में जीवन को श्राद्यन्त प्रभावित करने की शक्ति नहीं थी इसलिए इसका प्रायने विखरे बिखरे बुदबुदों के रूप में ही हुआ।" लेखक ने इस युग के काव्य को अवसादपूर्ण विलास का जर्जर काव्य मानकर ही उसका मूल्यांकन किया है । लेखक की नैतिक भावना इतनी प्रबुद्ध प्रतीत होती है कि वह काव्य-सौन्दर्य विधायक कला का मूल्यांकन भी नैतिकता के मापदण्ड से ही करना उचित समझता है । तटस्य कला-समीक्षक के लिए नैतिकता का यह आरोप कला-समीक्षा में कहाँ तक समीचीन है इसका विश्लेषण न करते हुए में इतना ही कहना चाहता हूँ कि लेखक को भावना कुछ भी हो किन्तु उन्होंने ग्रगले पृष्ठो में जिस समृद्ध वर्णन-सामग्री का चयन किया है वह काव्य-सौन्दर्य और कला - समीक्षा दोनों दृष्टियों से अनुपम है। बिहारी की समृद्ध वर्णन-सामग्री को पढ़कर पाठक विस्मय विमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता । नागर और ग्राम्य चित्रो का जो हिदी काव्य और उसका सौदर्य चित्र लेखक में प्रस्तुत किया है वह सवथा नूतन है। घनाद की वशन-राामग्री में भा माघर चमत्कार की अनुपम छटा दृष्टिगत होती है। क्षेत्र में हिन्दी काव्य और उसका सौदय" प्रत्य के प्रतिपाद्य विषय का परि वय देने के बाद में इस प्रध्ययन को उपादेयता के सम्बन्ध में दो शब्द बहतर इस भूमिका को समाप्त करता है । इस ग्रन्थ के निर्माण से विगत छह सौ वर्षको हिदी काव्यधारा के उस का वोध होता है जावस्त योजना अथवा वणन सामग्री द्वारा अध्यक्षका अभिन्न हुई है। लेखक ने केनेवर को ध्यान में रखपर केवल प्रतिनिधि कवियों के काव्य-मौन्दर पर ही विचार किया है किन्तु इस कारण काय सौ की समग्रता में कोई न्यूनना नहीं पाई। इसी प्रणाली पर यदि अप्रस्तुत योजना के पूरक पवन नलावा भी अध्ययन किया जाय तो हिंदी वाव्य या समस्त सौदय उघाटित हो सक्गा । इस ग्रत्यको पद मेरी यह घारणा और अधिक पुष्ट हुई है कि हिन्दी वाव्य की वर्णन-सामग्री के प्राधार पर काव्यसोन्याहा बाघ नहीं होना वरन् हिन्दी भाषी प्रदा की तत्कालीन विविध परिस्थि नियों का भी चित्र आकार ग्रहण करता है। प्रस्तुत प्राथ में लखन ने जिस सामग्री का गवषणात्मक प्रगोलन किया है वह सम्मानिसम ब्रह्मविचार से लेकर स्थूलनम दनित्र जीवन की मोटी माटी घटनाग्रा मौर वस्तुमा को मूतमन्त करने में समय है। सौदय का एक पक्ष जब इतना समद्ध और परिपुष्ट है तब उसके सभी पक्षों का उद्घाटन तो निश्चय ही सोय की निरविनय वभव सामग्री सामने लाने में समय होगा । डाशून्य धोकान अनका विवेचनात्मक इतिहास और हिंदी काव्य के सौन्दय का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत कर हिन्दी माहित्य जगन में पना विशिष्ट स्थान बना दिया है। वे स्वाचिक के रूप में माहित्यिक जात में प्रवेश कर रहे है । उतिभा में नवा मे की मौलिकता के साथ स्वमन को व्यक्त करने का निर्माता है उनको में कृतित्व का निपुणता के साथ मध्ययन को गम्भीरता है । हिली जगत के समय इस वध को प्रस्तुत करत समय मुझे पूर्ण विश्वास है कि विद्वसमाज में इस ग्राथ वई सम्मान प्राप्त होगा मोर भविष्य में डाशून्य भोपाजी को लेखनी से और भो प्रयरन हिन्दी जगत को उपमध होगे । -विजयेन्द्र स्नातक रोडर हिन्दी विभाग विली विश्वविद्यालय अपनी ओर से 'हिन्दी-अलंकार- साहित्य' की भूमिका में मैं लिख चुका हूँ कि 'थ्योरी एण्ड प्रैक्टिस श्रॉफ अलंकार्स इन हिन्दी' विषय पर लिखा हुआ मेरा थीसिस आगरा विश्वविद्यालय में 'हिन्दी साहित्य में अलंकार' नाम से पी-एचशून्य डीशून्य उपाधि के लिए स्वीकृत हुआ; थोसिस के दो भाग थे जिनको पाँच-छः वर्ष बाद परिवर्द्धन परिशोधन के अनन्तर 'हिन्दी-अलंकार-साहित्य' और 'हिन्दी काव्य और उसका सौन्दर्य' नाम से अधिकारी विद्वानों के समक्ष उपस्थित कर रहा हूँ । 'हिन्दी - अलंकार - साहित्य' वैज्ञानिक अध्ययन था, इसलिए पर्याप्त परिवर्तन हो जाने पर भी उसकी टाइप की हुई प्रति में प्रकाशित रूप का पूर्वाभास सहज ही मिल जाता था; परन्तु प्रस्तुत प्रयत्न साहित्यिक अनुशीलन है, अतः लेखक के व्यक्तित्व के साथ-साथ इसके नवीन रूप में समुचित परिवर्तन आ गया है । साहित्य वस्तुपरक उतना नही जितना कि व्यक्तिपरका, इसलिए साहित्यिक कृति लेखक के व्यक्तित्व से अनिवार्यतः अंकित होती रहती है । मूल कृति में रासो-काव्यों से वर्तमान काव्य तक की ग्रालंकारिक सामग्री का अध्ययन था, इसलिए सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यावन तक इसको 'हिन्दी साहित्य की प्रालंकारिक प्रवृत्तियां' नाम से प्रकाशित करने का मेरा विचार था । । पीछे यह सोचकर कि 'आलंकारिक सामग्रो' और 'लकारिक प्रवृत्तियों' पदों से अधिकतर पाठक 'अलंकार - शैली' का अर्थ लेकर यह समझ बैठते हैं कि इस कृति में भिन्न-भिन्न कवियों द्वारा प्रयुक्त अलंकार छोटे गये होगे, मैने प्रकाशन से कुछ दिन पूर्व इस पुस्तक को नया नाम दे दिया है। प्रस्तुत रूप में इसका क्षेत्र 'वीर-काव्य' से 'शृंगार-काव्य' तक ही है, आधुनिक काव्य पर किसी विश्वविद्यालय में स्वतन्त्र अनुसन्धान हो रहा है उसके स्वीकृत और प्रकाशित होने पर प्रस्तुत प्रयत्न आद्यन्त पूर्ण हो जायगा । यह स्वीकार करते हुए कि साहित्य कवि और समाज के समानान्तर रूप का प्रतिबिम्वक है, इस ग्रन्थ में मेरा प्रयत्न कवियों के व्यक्तित्व के सूक्ष्म अनुशीलन का रहा है, और मैने स्पष्टतर स्थूल प्रस्तुत सूत्रों का अनुगमन न करके कवि के व्यक्तित्व को समझने के लिए सूक्ष्म एवं घूगिल प्रस्तुत योजना का सहारा लिया श्र है । कवि के अनन्त अवचेतन में परिस्थिति की प्रतिच्छाया वनकर जो नीहारराशि व्याप्त रहती है वह अलोकसामान्य होने के कारण चर्म-चक्षुओं से ग्राह्य न हो सके, परन्तु सहृदयों की भावन-प्रक्रिया के लिए वह अस्पृश्य नहीं है । निर्भय होकर राज-पथ पर कवि के साथ विचरण करने के कारण समाज में ख्याति प्राप्त करनेवाले
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कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के विकास की गति में लगातार बाधा डाल रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंडीगढ़ का दौरा करने जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी ने पंजाब को नए अस्पताल, सड़कें और अन्य कई विकास के प्रोजैक्ट दिए हैं।
यहां इस स्कीम के कामकाज की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्कीम महत्वपूर्ण है।
ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने दफ्तर में ट्रैक्टर डीलर्ज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग में यह जानकारी दी।
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कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के विकास की गति में लगातार बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंडीगढ़ का दौरा करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी ने पंजाब को नए अस्पताल, सड़कें और अन्य कई विकास के प्रोजैक्ट दिए हैं। यहां इस स्कीम के कामकाज की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्कीम महत्वपूर्ण है। ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने दफ्तर में ट्रैक्टर डीलर्ज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग में यह जानकारी दी। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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नयी दिल्ली, राज्यसभा में हिंडेनबर्ग रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने शोरशराबा किया जिसके कारण शून्यकाल तथा प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
भोजनावकाश के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही शुरु करते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कराने का प्रयास किया तो कांग्रेस के जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह और पी. चिदंबरम अपनी सीटों पर खड़े गये और नियम 267 के तहत दिये गये नोटिस के बारे में पूछने लगे। कांग्रेस के अन्य सदस्य भी अपनी सीटों पर खड़े हो गये और जोर जोर से बाेलने लगे। विपक्ष अन्य सदस्यों ने भी कांग्रेास का साथ दिया और जोर जोर से बोलने लगे। श्री रमेश ने कहा कि सरकार के कार्यकाल में अमृतकाल घोटाला हो रहा है।
स्थिति को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के भीतर ही दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
इससे पहले सुबह भी नियम 267 के तहत दिये गये नोटिस को स्वीकार नहीं किये जाने को लेकर कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
श्री धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखे जाने के बाद कहा कि नियम 267 के तहत नौ सदस्यों ने नोटिस दिया था, जो नियमों के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने सभी नोटिसों को अस्वीकार किये जाने की घोषणा की।
इसके बाद कांग्रेस के सदस्य एक साथ अपनी सीट के निकट खड़े हो गये और शोरगुल करने लगे। इसे देखकर सभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले सभापति ने कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एलामरम करीम, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तेलंगाना राष्ट्र समिति के के केशव राव और द्रमुक के तिरुची शिवा नियम 267 के तहत नोटिस देने वालों में शामिल हैं। कांग्रेस सदस्यों ने हिंडनबर्ग की अडानी समूह के बारे आयी रिपोर्ट को लेकर हंगामा किया।
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नयी दिल्ली, राज्यसभा में हिंडेनबर्ग रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने शोरशराबा किया जिसके कारण शून्यकाल तथा प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। भोजनावकाश के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही शुरु करते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कराने का प्रयास किया तो कांग्रेस के जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह और पी. चिदंबरम अपनी सीटों पर खड़े गये और नियम दो सौ सरसठ के तहत दिये गये नोटिस के बारे में पूछने लगे। कांग्रेस के अन्य सदस्य भी अपनी सीटों पर खड़े हो गये और जोर जोर से बाेलने लगे। विपक्ष अन्य सदस्यों ने भी कांग्रेास का साथ दिया और जोर जोर से बोलने लगे। श्री रमेश ने कहा कि सरकार के कार्यकाल में अमृतकाल घोटाला हो रहा है। स्थिति को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के भीतर ही दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इससे पहले सुबह भी नियम दो सौ सरसठ के तहत दिये गये नोटिस को स्वीकार नहीं किये जाने को लेकर कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। श्री धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखे जाने के बाद कहा कि नियम दो सौ सरसठ के तहत नौ सदस्यों ने नोटिस दिया था, जो नियमों के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने सभी नोटिसों को अस्वीकार किये जाने की घोषणा की। इसके बाद कांग्रेस के सदस्य एक साथ अपनी सीट के निकट खड़े हो गये और शोरगुल करने लगे। इसे देखकर सभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सभापति ने कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एलामरम करीम, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तेलंगाना राष्ट्र समिति के के केशव राव और द्रमुक के तिरुची शिवा नियम दो सौ सरसठ के तहत नोटिस देने वालों में शामिल हैं। कांग्रेस सदस्यों ने हिंडनबर्ग की अडानी समूह के बारे आयी रिपोर्ट को लेकर हंगामा किया।
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अक्सर आपने अपने बचपन में स्कूल न जाने के लिए कई बहाने बनाये होंगे। कभी सिर दर्द बहाना तो कभी पेट दर्द का बहाना। ऐसा आपने बच्चों को भी करते देखा होगा। बच्चे स्कूल से रुकने के लिए कई हथकंडे आज़माते हैं , लेकिन उनके माता - पिता उनके इस चीज़ से बखूबी परिचित होते हैं।
अक्सर आपने अपने बचपन में स्कूल न जाने के लिए कई बहाने बनाये होंगे। कभी सिर दर्द बहाना तो कभी पेट दर्द का बहाना। ऐसा आपने बच्चों को भी करते देखा होगा। बच्चे स्कूल से रुकने के लिए कई हथकंडे आज़माते हैं , लेकिन उनके माता - पिता उनके इस चीज़ से बखूबी परिचित होते हैं। वह उन्हें स्कूल भेजकर ही मानते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वी़डियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
जिसमें एक बच्चे को उसकी माँ जबरदस्ती उसे स्कूटी पर बैठकर स्कूल छोड़ने ले जा रही है। लेकिन बच्चा अपना मुँह फुलाये इस अंदाज़ में स्कूटी पर बैठा है उसे देखकर आपकी भी हंसी निकल जाएँगी। साथ ही उसके बैठने के अंदाज़ से हैरानी भी होगी।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जिसमें एक बच्चे की माँ उसको तैयार करके स्कूल छोड़ने स्कूटी से ले जा रही है। बच्चे को देख ऐसा लगता है मानों वह स्कूल नहीं जाना चाहता है। लेकिन उसको जबर्दस्ती जाना पड़ रहा है। लेकिन रास्ते में इस खुराफाती बच्चे ने ऐसी हरकत कर दी जिसे देख राहगिर भी चौक गए। वीडियो में आगे आप देख सकेंगे की , बच्चा अपना मुँह फुलाये गुस्से में किस तरह से पालती मारकर स्कूटी पर सिर नीचे झुकाए बैठा हुआ है। उसने अपना स्कूल का बैग भी पीछे टांगा हुआ है। वह इस तरह से बैठा है , जो देखने से किसी को भी हंसी आ जाएगी, लेकिन साथ ही इस बात का खतरा भी होगा की यदि बच्चे का ज़रा सा भी बेंलेंस डगमगाया तो कहीं वह नीचे ना गिर जाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो को एक dasadlatif1212 नाम के इंस्टाग्राम यूज़र ने शेयर किया। जिसको देख सभी यूज़र्स हक्के - बक्के रह गए। इस वीडियो को देख सभी यूज़र्स ने हैरानगी जताई है। और काफी लोगों ने इसको शेयर भी किया है। अब तक इस वीडियो को 5 मिलियन से भी अधिक लोगों ने देख लिया है। और वही इसको 2 लाख से भी अधिक लोगों पसंद किया है। इस वीडियो को यूज़र्स देख घबरा गए हैं और अपनी - अपनी प्रतिक्रिया भी दिखा रहें हैं।
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अक्सर आपने अपने बचपन में स्कूल न जाने के लिए कई बहाने बनाये होंगे। कभी सिर दर्द बहाना तो कभी पेट दर्द का बहाना। ऐसा आपने बच्चों को भी करते देखा होगा। बच्चे स्कूल से रुकने के लिए कई हथकंडे आज़माते हैं , लेकिन उनके माता - पिता उनके इस चीज़ से बखूबी परिचित होते हैं। अक्सर आपने अपने बचपन में स्कूल न जाने के लिए कई बहाने बनाये होंगे। कभी सिर दर्द बहाना तो कभी पेट दर्द का बहाना। ऐसा आपने बच्चों को भी करते देखा होगा। बच्चे स्कूल से रुकने के लिए कई हथकंडे आज़माते हैं , लेकिन उनके माता - पिता उनके इस चीज़ से बखूबी परिचित होते हैं। वह उन्हें स्कूल भेजकर ही मानते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वी़डियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जिसमें एक बच्चे को उसकी माँ जबरदस्ती उसे स्कूटी पर बैठकर स्कूल छोड़ने ले जा रही है। लेकिन बच्चा अपना मुँह फुलाये इस अंदाज़ में स्कूटी पर बैठा है उसे देखकर आपकी भी हंसी निकल जाएँगी। साथ ही उसके बैठने के अंदाज़ से हैरानी भी होगी। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जिसमें एक बच्चे की माँ उसको तैयार करके स्कूल छोड़ने स्कूटी से ले जा रही है। बच्चे को देख ऐसा लगता है मानों वह स्कूल नहीं जाना चाहता है। लेकिन उसको जबर्दस्ती जाना पड़ रहा है। लेकिन रास्ते में इस खुराफाती बच्चे ने ऐसी हरकत कर दी जिसे देख राहगिर भी चौक गए। वीडियो में आगे आप देख सकेंगे की , बच्चा अपना मुँह फुलाये गुस्से में किस तरह से पालती मारकर स्कूटी पर सिर नीचे झुकाए बैठा हुआ है। उसने अपना स्कूल का बैग भी पीछे टांगा हुआ है। वह इस तरह से बैठा है , जो देखने से किसी को भी हंसी आ जाएगी, लेकिन साथ ही इस बात का खतरा भी होगा की यदि बच्चे का ज़रा सा भी बेंलेंस डगमगाया तो कहीं वह नीचे ना गिर जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो को एक dasadlatifएक हज़ार दो सौ बारह नाम के इंस्टाग्राम यूज़र ने शेयर किया। जिसको देख सभी यूज़र्स हक्के - बक्के रह गए। इस वीडियो को देख सभी यूज़र्स ने हैरानगी जताई है। और काफी लोगों ने इसको शेयर भी किया है। अब तक इस वीडियो को पाँच मिलियन से भी अधिक लोगों ने देख लिया है। और वही इसको दो लाख से भी अधिक लोगों पसंद किया है। इस वीडियो को यूज़र्स देख घबरा गए हैं और अपनी - अपनी प्रतिक्रिया भी दिखा रहें हैं।
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टोक्यो, 25 जुलाई (एजेंसी)
मनीष ने मैककारमैक के खिलाफ अच्छी शुरूआत की लेकिन अंतिम तीन मिनट में मुकाबला गंवा बैठे जबकि ब्रिटेन के मुक्केबाज ने आक्रामक होने के बजाय जवाबी हमले करने का फैसला किया। शुरूआती राउंड में मनीष ने मैककोरमाक के हमलों का बराबरी से जवाब दिया। दूसरे राउंड में भारतीय मुक्केबाज ने विपक्षी से ज्यादा अंक बनाये। इससे तीसरे राउंड से पहले दोनों मुक्केबाज बराबरी पर थे। लेकिन अंतिम तीन मिनट में ब्रिटेन के मुक्केबाज की मनीष को करीब लाकर सही जगह पर मुक्के जड़ने की रणनीति कारगर रही जिसके बाद सभी पांचों जजों ने मैककोरमाक के पक्ष में फैसला दिया।
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टोक्यो, पच्चीस जुलाई मनीष ने मैककारमैक के खिलाफ अच्छी शुरूआत की लेकिन अंतिम तीन मिनट में मुकाबला गंवा बैठे जबकि ब्रिटेन के मुक्केबाज ने आक्रामक होने के बजाय जवाबी हमले करने का फैसला किया। शुरूआती राउंड में मनीष ने मैककोरमाक के हमलों का बराबरी से जवाब दिया। दूसरे राउंड में भारतीय मुक्केबाज ने विपक्षी से ज्यादा अंक बनाये। इससे तीसरे राउंड से पहले दोनों मुक्केबाज बराबरी पर थे। लेकिन अंतिम तीन मिनट में ब्रिटेन के मुक्केबाज की मनीष को करीब लाकर सही जगह पर मुक्के जड़ने की रणनीति कारगर रही जिसके बाद सभी पांचों जजों ने मैककोरमाक के पक्ष में फैसला दिया।
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अभी वक़्त है चीन से सबक ले ले भारत, कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है!
भले ही दो साल हो गए हों लेकिन कोरोना वायरस का खतरा अभी टला नहीं है. जटिलताएं कैसी हैं हम चीन को देखकर समझ सकते हैं जहां फिर से लॉकडाउन की शुरुआत हुई है. लाखों लोग अपने अपने घर पर रहने को मजबूर हैं. सरकार बस यही चाहती है कि किसी भी सूरत में कोरोनोवायरस के मामले न बढ़ें.
चीन के राष्ट्रपति क्यों कह रहे हैं कि वो 'खूनखराबे' से भी नही चूकेंगे!
शी जिनपिंग समारोह में चीन के पहले कम्युनिस्ट राष्ट्रपति माओ त्से तुंग की तरह कपड़े पहनकर आए थे. चीन को लेकर ढेर सारी अच्छी बातों के बीच शी जिनपिंग के भाषण में एक अलग ही आक्रामकता नजर आई. उन्होंने दुनिया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि चीन को आंख दिखाने वालों का सिर कुचल दिया जाएगा और खून बहा दिया जाएगा.
कोरोना के बाद चीन से आई एक और डरावनी खबर!
चीन में कोरोना वायरस ने जन्म लिया है या उसे जन्म दिया गया है इस बात की जांच में दुनिया भर के वैज्ञानिक अपना दिमाग खपा रहे हैं. इसी बीच चीन में बर्ड फ्लू का मामला सामने आया है जोकि दुनिया भर में पहली दफा किसी इंसान के अंदर पाया गया है. अगर चीन वायरस को फैलाने का गढ़ बन चुका है तो क्या उसका वैश्विक बहिष्कार हो सकता है यह एक बड़ा सवाल है.
कोविड-19 की उत्पत्तिः चीन की वुहान लैब पर क्यों गहराता जा रहा है शक?
एक के बाद एक देश और ज्यादा से ज्यादा लोग कोविड-19 के प्राकृतिक रूप से पैदा होने के सिद्धांत पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. अब इस लिस्ट में ब्रिटेन का नाम भी जुड़ गया है. हालांकि, ब्रिटेन की ओर से यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है. लेकिन, ब्रिटेन की इंटेलीजेंस एजेंसियों ने कोरोना वायरस को लेकर शक और गहरा दिया है.
कोरोना के चीनी वेरिएंट का खबरों से गुम हो जाना, और चीन की कुटिल चुप्पी!
अब तक कोरोना संक्रमण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को WHO ने दुनिया के साथ साझा किया है. जिसमें कोरोना के देशवार म्यूटेंट के नाम शामिल हैं. हैरत की बात है कि वो इस महामारी के डेढ़ साल बीत जाने पर भी इसके स्रोत के बारे में कुछ निर्णायक नहीं कह पाया है.
PM Modi को चीन पर अब 'डिप्लोमैटिक सर्जिकल स्ट्राइक' करना होगा!
लद्दाख (Galwan Valley Ladakh) में चीनी फौज ने जो किया है वो उड़ी-पुलवामा से ज्यादा बड़ा अपराध है. चीन के खिलाफ कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) ही सही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के लिए अब तेजी से आगे बढ़ना जरूरी हो गया है.
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस (Coronavirus)फैलने के बाद से ही चीन (China) निशाने पर है. अमेरिका (America) और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump )बार बार इसी बात को दोहरा रहे हैं कि वो चीन ही था जिसने दुनिया को ये वायरस दिया इसलिए अब उसका बहिष्कार जरूरी हो गया है.
नया Coronavirus तो वाक़ई बहुत खतरनाक है. . . !
कोरोना (Coronavirus) से लड़ाई जारी है लेकिन चीन (China) ने फिर से दुनिया को एक खतरे से आगाह कर दिया है, भारत को कोरोना पर काबू पाना है तो इसके लिए लॅाकडाउन (Lockdown) बहुत ही ज़रूरी है, क्योंकि अभी तो जांच में तेज़ी आनी शुरू हुयी है.
China में आया Coronavirus 2. 0 यानी पिक्चर अभी बाकी है!
दो नयी मौतों और 63 मामलों के बाद एक बार फिर चीन (China) में कोरोना वायरस (Coronavirus) 2. 0 की शुरुआत हो गयी है. दुनिया डरी हुई है और दोबारा मामले आने के बाद ये साबित हो गया है कि कोरोना का आतंक अभी इतनी जल्दी समाप्त नहीं होने वाला.
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You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. अभी वक़्त है चीन से सबक ले ले भारत, कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है! भले ही दो साल हो गए हों लेकिन कोरोना वायरस का खतरा अभी टला नहीं है. जटिलताएं कैसी हैं हम चीन को देखकर समझ सकते हैं जहां फिर से लॉकडाउन की शुरुआत हुई है. लाखों लोग अपने अपने घर पर रहने को मजबूर हैं. सरकार बस यही चाहती है कि किसी भी सूरत में कोरोनोवायरस के मामले न बढ़ें. चीन के राष्ट्रपति क्यों कह रहे हैं कि वो 'खूनखराबे' से भी नही चूकेंगे! शी जिनपिंग समारोह में चीन के पहले कम्युनिस्ट राष्ट्रपति माओ त्से तुंग की तरह कपड़े पहनकर आए थे. चीन को लेकर ढेर सारी अच्छी बातों के बीच शी जिनपिंग के भाषण में एक अलग ही आक्रामकता नजर आई. उन्होंने दुनिया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि चीन को आंख दिखाने वालों का सिर कुचल दिया जाएगा और खून बहा दिया जाएगा. कोरोना के बाद चीन से आई एक और डरावनी खबर! चीन में कोरोना वायरस ने जन्म लिया है या उसे जन्म दिया गया है इस बात की जांच में दुनिया भर के वैज्ञानिक अपना दिमाग खपा रहे हैं. इसी बीच चीन में बर्ड फ्लू का मामला सामने आया है जोकि दुनिया भर में पहली दफा किसी इंसान के अंदर पाया गया है. अगर चीन वायरस को फैलाने का गढ़ बन चुका है तो क्या उसका वैश्विक बहिष्कार हो सकता है यह एक बड़ा सवाल है. कोविड-उन्नीस की उत्पत्तिः चीन की वुहान लैब पर क्यों गहराता जा रहा है शक? एक के बाद एक देश और ज्यादा से ज्यादा लोग कोविड-उन्नीस के प्राकृतिक रूप से पैदा होने के सिद्धांत पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. अब इस लिस्ट में ब्रिटेन का नाम भी जुड़ गया है. हालांकि, ब्रिटेन की ओर से यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है. लेकिन, ब्रिटेन की इंटेलीजेंस एजेंसियों ने कोरोना वायरस को लेकर शक और गहरा दिया है. कोरोना के चीनी वेरिएंट का खबरों से गुम हो जाना, और चीन की कुटिल चुप्पी! अब तक कोरोना संक्रमण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को WHO ने दुनिया के साथ साझा किया है. जिसमें कोरोना के देशवार म्यूटेंट के नाम शामिल हैं. हैरत की बात है कि वो इस महामारी के डेढ़ साल बीत जाने पर भी इसके स्रोत के बारे में कुछ निर्णायक नहीं कह पाया है. PM Modi को चीन पर अब 'डिप्लोमैटिक सर्जिकल स्ट्राइक' करना होगा! लद्दाख में चीनी फौज ने जो किया है वो उड़ी-पुलवामा से ज्यादा बड़ा अपराध है. चीन के खिलाफ कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक ही सही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तेजी से आगे बढ़ना जरूरी हो गया है. पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलने के बाद से ही चीन निशाने पर है. अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार बार इसी बात को दोहरा रहे हैं कि वो चीन ही था जिसने दुनिया को ये वायरस दिया इसलिए अब उसका बहिष्कार जरूरी हो गया है. नया Coronavirus तो वाक़ई बहुत खतरनाक है. . . ! कोरोना से लड़ाई जारी है लेकिन चीन ने फिर से दुनिया को एक खतरे से आगाह कर दिया है, भारत को कोरोना पर काबू पाना है तो इसके लिए लॅाकडाउन बहुत ही ज़रूरी है, क्योंकि अभी तो जांच में तेज़ी आनी शुरू हुयी है. China में आया Coronavirus दो. शून्य यानी पिक्चर अभी बाकी है! दो नयी मौतों और तिरेसठ मामलों के बाद एक बार फिर चीन में कोरोना वायरस दो. शून्य की शुरुआत हो गयी है. दुनिया डरी हुई है और दोबारा मामले आने के बाद ये साबित हो गया है कि कोरोना का आतंक अभी इतनी जल्दी समाप्त नहीं होने वाला.
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यूक्रेन के पूर्वी इलाके में स्थित डोनेट्स्क और लुहान्स्क सम्मिलित रूप से डोनबास क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। दोनबास इलाके में रूस के समर्थन वाले अलगाववादियों का कब्जा है। यूक्रेन के ये इलाके 2014 से ही यूक्रेनी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं और खुद को स्वतंत्र पीपुल्स रिपब्लिक घोषित किया हुआ है। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि इन इलाकों को रूस और बेलारूस ने ही मान्यता दी है। यूक्रेन की सरकार का आरोप है कि डोनबास क्षेत्र में जारी संघर्ष में अबतक 15000 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि रूस खुद को इस संघर्ष का एक पक्ष बताए जाने से इनकार करता रहा है।
रूस की सरकार दोनबास इलाके के लोगों की कई तरह से मदद करती है। इसमें गुप्त सैन्य सहायता, वित्तीय मदद, कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति और इस इलाके के 800000 लोगों को रूसी पासपोर्ट तक जारी किया गया है। इसके बावजूद रूस इन लोगों की सहायता से हमेशा से इनकार करता रहा है। डोनबास क्षेत्र में रूसी भाषी नागरिकों की संख्या ज्यादा है। ये लोग खुद को रूस के ज्यादा नजदीक मानते हैं, वहीं यूक्रेनी सरकार इन्हें अलगाववादियों के रूप में देखती है। रूस की सरकार का आरोप है कि यूक्रेनी सरकार इन इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा कर रही है।
खुद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनबास क्षेत्र में यूक्रेनी सेना की कार्रवाईयों को नरसंहार बता चुके हैं। पुतिन सरकार का आरोप है कि यूक्रेन में पश्चिम समर्थित तख्तापलट के कारण सत्ता में आई सरकार 2014 से स्व-घोषित डोनेट्स्क और लुगांस्क पीपुल्स रिपब्लिक के खिलाफ युद्ध छेड़ रही है। डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन के खिलाफ कई हिंसक प्रदर्शन भी हो चुके हैं। इन्हीं प्रदर्शनों को कुचलने के लिए यूक्रेन ने कई बार बल प्रयोग भी किया है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन डोनबास में रूसी भाषी लोगों पर अत्याचार कर रहा है, इस कारण वहां के लोग विद्रोह कर रहे हैं।
यूक्रेन 1990 के पहले तक सोवियत संघ का हिस्सा था। आज से 30 साल पहले सोवियत संघ के विघटन के समय यह वर्तमान रूस से अलग हुआ था। यूक्रेन के हिस्से में सोवियत संघ के जमाने के कई महत्वपूर्ण स्थल, बंदरगाह और सैन्य निर्माण ईकाईयां आईं थीं। हालांकि, आजादी के बाद यूक्रेन परंपरागत तौर पर रूस का हमदम बना रहा। साल 2014 तक विक्टर यानुकोविच के राष्ट्रपति पद से अपदस्थ होने तक दोनों देशों के रिश्ते काफी मजबूत थे। लेकिन, उनके हटते ही यूक्रेन में रूस विरोधी सरकार आ गई। इस कारण यूक्रेन के रूसी भाषी क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा होने लगी।
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यूक्रेन के पूर्वी इलाके में स्थित डोनेट्स्क और लुहान्स्क सम्मिलित रूप से डोनबास क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। दोनबास इलाके में रूस के समर्थन वाले अलगाववादियों का कब्जा है। यूक्रेन के ये इलाके दो हज़ार चौदह से ही यूक्रेनी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं और खुद को स्वतंत्र पीपुल्स रिपब्लिक घोषित किया हुआ है। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि इन इलाकों को रूस और बेलारूस ने ही मान्यता दी है। यूक्रेन की सरकार का आरोप है कि डोनबास क्षेत्र में जारी संघर्ष में अबतक पंद्रह हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि रूस खुद को इस संघर्ष का एक पक्ष बताए जाने से इनकार करता रहा है। रूस की सरकार दोनबास इलाके के लोगों की कई तरह से मदद करती है। इसमें गुप्त सैन्य सहायता, वित्तीय मदद, कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति और इस इलाके के आठ लाख लोगों को रूसी पासपोर्ट तक जारी किया गया है। इसके बावजूद रूस इन लोगों की सहायता से हमेशा से इनकार करता रहा है। डोनबास क्षेत्र में रूसी भाषी नागरिकों की संख्या ज्यादा है। ये लोग खुद को रूस के ज्यादा नजदीक मानते हैं, वहीं यूक्रेनी सरकार इन्हें अलगाववादियों के रूप में देखती है। रूस की सरकार का आरोप है कि यूक्रेनी सरकार इन इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा कर रही है। खुद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनबास क्षेत्र में यूक्रेनी सेना की कार्रवाईयों को नरसंहार बता चुके हैं। पुतिन सरकार का आरोप है कि यूक्रेन में पश्चिम समर्थित तख्तापलट के कारण सत्ता में आई सरकार दो हज़ार चौदह से स्व-घोषित डोनेट्स्क और लुगांस्क पीपुल्स रिपब्लिक के खिलाफ युद्ध छेड़ रही है। डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन के खिलाफ कई हिंसक प्रदर्शन भी हो चुके हैं। इन्हीं प्रदर्शनों को कुचलने के लिए यूक्रेन ने कई बार बल प्रयोग भी किया है। रूस का आरोप है कि यूक्रेन डोनबास में रूसी भाषी लोगों पर अत्याचार कर रहा है, इस कारण वहां के लोग विद्रोह कर रहे हैं। यूक्रेन एक हज़ार नौ सौ नब्बे के पहले तक सोवियत संघ का हिस्सा था। आज से तीस साल पहले सोवियत संघ के विघटन के समय यह वर्तमान रूस से अलग हुआ था। यूक्रेन के हिस्से में सोवियत संघ के जमाने के कई महत्वपूर्ण स्थल, बंदरगाह और सैन्य निर्माण ईकाईयां आईं थीं। हालांकि, आजादी के बाद यूक्रेन परंपरागत तौर पर रूस का हमदम बना रहा। साल दो हज़ार चौदह तक विक्टर यानुकोविच के राष्ट्रपति पद से अपदस्थ होने तक दोनों देशों के रिश्ते काफी मजबूत थे। लेकिन, उनके हटते ही यूक्रेन में रूस विरोधी सरकार आ गई। इस कारण यूक्रेन के रूसी भाषी क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा होने लगी।
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शिवपुरी/कोलारस। जिले के कोलारस क्षेत्रांतर्गत आने वाले मोरई मोहल्ला में बीते कुछ दिनों से एक प्लाट का विवाद गहराता जा रहा है। जहां दो पक्ष इस प्लाट पर अपना-अपना आधिपत्य जमाकर अपना बताते है। कुछ दिनों से हो रहे इस विवाद में गत दिवस एक महिला के साथ इस प्लाट को लेकर मारपीट भी हो गई। जिस पर महिला ने अपने साथ मारपीट की घटना व प्लाट में हो रहे विवाद की शिकायत पुलिस थाना कोलारस की। पुलिस ने आरोपी युवक के विरूद्ध धारा 323 के तहत मामला पंजीबद्ध करते हुए विवेचना शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोलारस के मोरई मोहल्ला निवासी भूरिया कुशवाह का प्लाट मोरई में ही स्थित है इसी से लगा हुआ एक और प्लाट हजारी राठौर का भी है। यहां इस प्लाट को लेकर भूरिया व हजारी के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। यह विवाद इतना बढ़ा कि इस प्लाट को लेकर हजारी ने महिला भूरिया के साथ मारपीट कर दी और मौके से भाग गया।
अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत को लेकर भूरिया पुलिस थाना कोलारस पहुंची और मारपीट के साथ-साथ उसके प्लाट की भी 3-4 फीट जगह को हरिया ने दबा लिया जबकि मुझे कोर्ट से स्टे भी मिल गया है,ऐसे आरोप पुलिस के समक्ष लगाए। पुलिस ने भूरिया की रिपोर्ट पर हजारी के विरूद्ध महिला से मारपीट करने के चलते धारा 323 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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शिवपुरी/कोलारस। जिले के कोलारस क्षेत्रांतर्गत आने वाले मोरई मोहल्ला में बीते कुछ दिनों से एक प्लाट का विवाद गहराता जा रहा है। जहां दो पक्ष इस प्लाट पर अपना-अपना आधिपत्य जमाकर अपना बताते है। कुछ दिनों से हो रहे इस विवाद में गत दिवस एक महिला के साथ इस प्लाट को लेकर मारपीट भी हो गई। जिस पर महिला ने अपने साथ मारपीट की घटना व प्लाट में हो रहे विवाद की शिकायत पुलिस थाना कोलारस की। पुलिस ने आरोपी युवक के विरूद्ध धारा तीन सौ तेईस के तहत मामला पंजीबद्ध करते हुए विवेचना शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोलारस के मोरई मोहल्ला निवासी भूरिया कुशवाह का प्लाट मोरई में ही स्थित है इसी से लगा हुआ एक और प्लाट हजारी राठौर का भी है। यहां इस प्लाट को लेकर भूरिया व हजारी के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। यह विवाद इतना बढ़ा कि इस प्लाट को लेकर हजारी ने महिला भूरिया के साथ मारपीट कर दी और मौके से भाग गया। अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत को लेकर भूरिया पुलिस थाना कोलारस पहुंची और मारपीट के साथ-साथ उसके प्लाट की भी तीन-चार फीट जगह को हरिया ने दबा लिया जबकि मुझे कोर्ट से स्टे भी मिल गया है,ऐसे आरोप पुलिस के समक्ष लगाए। पुलिस ने भूरिया की रिपोर्ट पर हजारी के विरूद्ध महिला से मारपीट करने के चलते धारा तीन सौ तेईस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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हैदराबाद : जसप्रीत बुमराह और राहुल चाहर की कसी हुई गेंदबाजी के बाद लेसिथ मलिंगा के आखिरी ओवर के कमाल से मुंबई इंडियन्स ने उतार चढ़ाव से भरे रोमांचक फाइनल में रविवार को यहां चेन्नई सुपरकिंग्स को एक रन से हराकर चौथी बार आईपीएल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। चेन्नई के सामने 150 रन का लक्ष्य था लेकिन उसकी टीम शेन वाटसन के 59 गेंदों पर 80 रन के बावजूद सात विकेट पर 148 रन ही बना पाया। चेन्नई को आखिरी ओवर में नौ रन चाहिए थे लेकिन इसमें उसने वाटसन का विकेट गंवाया।
मैच का परिणाम अंतिम गेंद पर निकला जिसमें चेन्नई को दो रन की दरकार थी लेकिन मलिंगा ने यार्कर पर शार्दुल ठाकुर को पगबाधा आउट कर दिया। इससे पहले मुंबई की टीम नियमित अंतराल में विकेट गंवाने के कारण क्विंटन डिकाक (17 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 29) से मिली अच्छी शुरुआत और कीरेन पोलार्ड (25 गेंदों पर नाबाद 41, 4X3, 6X3) के उपयोगी योगदान देने के बावजूद आठ विकेट पर 149 रन ही बना पाया। मुंबई और चेन्नई के बीच यह चौथा फाइनल था जिसमें मुंबई तीन बार चैंपियन बना है। इन दोनों टीमों के बीच हमेशा पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है और इस बार भी यह क्रम जारी रहा।
शायद यही सोचकर रोहित शर्मा ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। मुंबई ने इससे पहले 2013, 2015 और 2017 में खिताब जीते थे और इस तरह से उसने एक साल छोड़कर खिताब जीतने का क्रम जारी रखा। उसने 2013 और 2015 के फाइनल में भी चेन्नई को हराया था। मुंबई की जीत में उसके गेंदबाजों ने अहम भूमिका निभायी। बुमराह और चाहर ने अपने कोटे के चार चार ओवरों में 14-14 रन दिये और क्रमशः दो और एक विकेट हासिल किया। मिशेल मैकलेनगन ने भी चार ओवर में 24 रन दिये। मुंबई का क्षेत्ररक्षण हालांकि अच्छा नहीं रहा। अकेले वाटसन को ही तीन जीवनदान मिले। इससे पहले दीपक चाहर ने मुंबई को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया था।
उन्होंने 26 रन देकर तीन विकेट लेने में सफल रहे। उनके अलावा इमरान ताहिर (23 रन देकर दो) और शार्दुल ठाकुर (37 रन देकर दो) ने भी अच्छी गेंदबाजी की। मुंबई की तरह चेन्नई का शीर्ष क्रम भी लड़खड़ा गया। फाफ डुप्लेसिस (13 गेंदों पर 26 रन) ने जिस तरह से चौथे ओवर में क्रुणाल पंड्या की तीन गेंदों पर दो चौके और एक छक्का लगाया उससे मुंबई के समर्थक बैचेन थे लेकिन दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने इसी ओवर में अति उत्साही शॉट लगाने के प्रयास में अपना विकेट इनाम में दे दिया। वाटसन ने जमने में ज्यादा समय नहीं लगाया और लेसिथ मलिंगा पर दो चौके और छक्का जड़कर हाथ खोले, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरने से वह धीमे पड़ गये।
सुरेश रैना (14 गेंदों पर आठ रन) को दूसरी बार डीआरएस से जीवनदान नहीं मिला। बुमराह ने नये बल्लेबाज अंबाती रायुडु (एक) को आते ही विकेट के पीछे कैच करवा दिया लेकिन टर्निंग प्वाइंट तब आया जब महेंद्र सिंह धोनी (आठ गेंदों पर दो रन) ओवरथ्रो पर दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गये। पंद्रह ओवर के बाद चेन्नई चार विकेट पर 88 रन बनाकर संघर्ष कर रहा था। ऐसे मौके पर ड्वेन ब्रावो (15) ने मलिंगा के अगले ओवर में छक्का जबकि वाटसन ने तीन चौके लगाये। इस बीच राहुल चाहर ने वाटसन को तीसरा जीवनदान दिया और जब टीम को 18 गेंदों पर 38 रन की दरकार थी तब इस आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने क्रुणाल पर लगातार तीन छक्के लगाये।
लेकिन बुमराह ने ब्रावो को आउट करके मैच में फिर रोमांच भर दिया और मलिंगा आखिरी ओवर में नौ रन का बचाव करने में सफल रहे। इससे पहले डिकाक ने चाहर के दूसरे ओवर में तीन छक्कों की मदद से 20 रन बटोरे थे लेकिन इस तेज गेंदबाज ने बाकी तीन ओवर में केवल छह रन दिये। इनमें पारी का 19वां ओवर में भी शामिल है जिसमें उन्होंने चार रन दिये। मुंबई को पहले छह ओवर में रोहित शर्मा (14 गेंदों पर 15 रन) और डिकाक के विकेट गंवाये। शार्दुल ने डिकाक को जबकि चाहर ने रोहित को धोनी के हाथों कैच कराया। धोनी का यह आईपीएल में विकेटकीपर के रूप में 132वां शिकार था जो कि रिकार्ड है।
चाहर का यह ओवर मेडन रहा जिससे छह ओवर के बाद मुंबई का स्कोर दो विकेट पर 45 रन हो गया। सूर्यकुमार यादव (17 गेंदों पर 15) और इशान किशन (26 गेंदों पर 23) ने विकेट बचाने को तरजीह दी। बीच में चार ओवर में केवल 13 रन बने। धोनी ने 12वें ओवर में ताहिर को गेंद सौंपी और उन्होंने दूसरी गेंद पर ही सूर्यकुमार को बोल्ड कर दिया जबकि ठाकुर ने नये बल्लेबाज क्रुणाल पंड्या (सात) का अपनी ही गेंद पर दौड़ लगाकर लाजवाब कैच लिया।
पोलार्ड ने 15वें ओवर में ताहिर पर छक्का जड़कर टीम का स्कोर तिहरे अंक में पहुंचाया लेकिन दक्षिण अफ्रीकी लेग स्पिनर ने इसी ओवर में किशन को आउट करके आईपीएल 2019 में 'पर्पल कैप' अपने नाम पर तय की। यह ताहिर का 26वां विकेट था और उन्होंने हमवतन कैगिसो रबाडा (12 मैचों में 25) को पीछे छोड़ा। हार्दिक पंड्या (दस गेंदों पर 16) जब चार रन पर थे तब सुरेश रैना ने उनका कैच छोड़ दिया। ठाकुर के इस ओवर में पोलार्ड और हार्दिक ने एक एक छक्के की मदद से 16 रन बटोरे। चाहर ने हालांकि अगले ओवर में हार्दिक को पगबाधा आउट करके चेन्नई विशेषकर रैना को राहत पहुंचायी। मुंबई ने अंतिम दो ओवरों में केवल 13 रन बनाये और इस बीच तीन विकेट गंवाये।
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हैदराबाद : जसप्रीत बुमराह और राहुल चाहर की कसी हुई गेंदबाजी के बाद लेसिथ मलिंगा के आखिरी ओवर के कमाल से मुंबई इंडियन्स ने उतार चढ़ाव से भरे रोमांचक फाइनल में रविवार को यहां चेन्नई सुपरकिंग्स को एक रन से हराकर चौथी बार आईपीएल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। चेन्नई के सामने एक सौ पचास रन का लक्ष्य था लेकिन उसकी टीम शेन वाटसन के उनसठ गेंदों पर अस्सी रन के बावजूद सात विकेट पर एक सौ अड़तालीस रन ही बना पाया। चेन्नई को आखिरी ओवर में नौ रन चाहिए थे लेकिन इसमें उसने वाटसन का विकेट गंवाया। मैच का परिणाम अंतिम गेंद पर निकला जिसमें चेन्नई को दो रन की दरकार थी लेकिन मलिंगा ने यार्कर पर शार्दुल ठाकुर को पगबाधा आउट कर दिया। इससे पहले मुंबई की टीम नियमित अंतराल में विकेट गंवाने के कारण क्विंटन डिकाक से मिली अच्छी शुरुआत और कीरेन पोलार्ड के उपयोगी योगदान देने के बावजूद आठ विकेट पर एक सौ उनचास रन ही बना पाया। मुंबई और चेन्नई के बीच यह चौथा फाइनल था जिसमें मुंबई तीन बार चैंपियन बना है। इन दोनों टीमों के बीच हमेशा पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है और इस बार भी यह क्रम जारी रहा। शायद यही सोचकर रोहित शर्मा ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। मुंबई ने इससे पहले दो हज़ार तेरह, दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सत्रह में खिताब जीते थे और इस तरह से उसने एक साल छोड़कर खिताब जीतने का क्रम जारी रखा। उसने दो हज़ार तेरह और दो हज़ार पंद्रह के फाइनल में भी चेन्नई को हराया था। मुंबई की जीत में उसके गेंदबाजों ने अहम भूमिका निभायी। बुमराह और चाहर ने अपने कोटे के चार चार ओवरों में चौदह-चौदह रन दिये और क्रमशः दो और एक विकेट हासिल किया। मिशेल मैकलेनगन ने भी चार ओवर में चौबीस रन दिये। मुंबई का क्षेत्ररक्षण हालांकि अच्छा नहीं रहा। अकेले वाटसन को ही तीन जीवनदान मिले। इससे पहले दीपक चाहर ने मुंबई को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया था। उन्होंने छब्बीस रन देकर तीन विकेट लेने में सफल रहे। उनके अलावा इमरान ताहिर और शार्दुल ठाकुर ने भी अच्छी गेंदबाजी की। मुंबई की तरह चेन्नई का शीर्ष क्रम भी लड़खड़ा गया। फाफ डुप्लेसिस ने जिस तरह से चौथे ओवर में क्रुणाल पंड्या की तीन गेंदों पर दो चौके और एक छक्का लगाया उससे मुंबई के समर्थक बैचेन थे लेकिन दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने इसी ओवर में अति उत्साही शॉट लगाने के प्रयास में अपना विकेट इनाम में दे दिया। वाटसन ने जमने में ज्यादा समय नहीं लगाया और लेसिथ मलिंगा पर दो चौके और छक्का जड़कर हाथ खोले, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरने से वह धीमे पड़ गये। सुरेश रैना को दूसरी बार डीआरएस से जीवनदान नहीं मिला। बुमराह ने नये बल्लेबाज अंबाती रायुडु को आते ही विकेट के पीछे कैच करवा दिया लेकिन टर्निंग प्वाइंट तब आया जब महेंद्र सिंह धोनी ओवरथ्रो पर दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गये। पंद्रह ओवर के बाद चेन्नई चार विकेट पर अठासी रन बनाकर संघर्ष कर रहा था। ऐसे मौके पर ड्वेन ब्रावो ने मलिंगा के अगले ओवर में छक्का जबकि वाटसन ने तीन चौके लगाये। इस बीच राहुल चाहर ने वाटसन को तीसरा जीवनदान दिया और जब टीम को अट्ठारह गेंदों पर अड़तीस रन की दरकार थी तब इस आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने क्रुणाल पर लगातार तीन छक्के लगाये। लेकिन बुमराह ने ब्रावो को आउट करके मैच में फिर रोमांच भर दिया और मलिंगा आखिरी ओवर में नौ रन का बचाव करने में सफल रहे। इससे पहले डिकाक ने चाहर के दूसरे ओवर में तीन छक्कों की मदद से बीस रन बटोरे थे लेकिन इस तेज गेंदबाज ने बाकी तीन ओवर में केवल छह रन दिये। इनमें पारी का उन्नीसवां ओवर में भी शामिल है जिसमें उन्होंने चार रन दिये। मुंबई को पहले छह ओवर में रोहित शर्मा और डिकाक के विकेट गंवाये। शार्दुल ने डिकाक को जबकि चाहर ने रोहित को धोनी के हाथों कैच कराया। धोनी का यह आईपीएल में विकेटकीपर के रूप में एक सौ बत्तीसवां शिकार था जो कि रिकार्ड है। चाहर का यह ओवर मेडन रहा जिससे छह ओवर के बाद मुंबई का स्कोर दो विकेट पर पैंतालीस रन हो गया। सूर्यकुमार यादव और इशान किशन ने विकेट बचाने को तरजीह दी। बीच में चार ओवर में केवल तेरह रन बने। धोनी ने बारहवें ओवर में ताहिर को गेंद सौंपी और उन्होंने दूसरी गेंद पर ही सूर्यकुमार को बोल्ड कर दिया जबकि ठाकुर ने नये बल्लेबाज क्रुणाल पंड्या का अपनी ही गेंद पर दौड़ लगाकर लाजवाब कैच लिया। पोलार्ड ने पंद्रहवें ओवर में ताहिर पर छक्का जड़कर टीम का स्कोर तिहरे अंक में पहुंचाया लेकिन दक्षिण अफ्रीकी लेग स्पिनर ने इसी ओवर में किशन को आउट करके आईपीएल दो हज़ार उन्नीस में 'पर्पल कैप' अपने नाम पर तय की। यह ताहिर का छब्बीसवां विकेट था और उन्होंने हमवतन कैगिसो रबाडा को पीछे छोड़ा। हार्दिक पंड्या जब चार रन पर थे तब सुरेश रैना ने उनका कैच छोड़ दिया। ठाकुर के इस ओवर में पोलार्ड और हार्दिक ने एक एक छक्के की मदद से सोलह रन बटोरे। चाहर ने हालांकि अगले ओवर में हार्दिक को पगबाधा आउट करके चेन्नई विशेषकर रैना को राहत पहुंचायी। मुंबई ने अंतिम दो ओवरों में केवल तेरह रन बनाये और इस बीच तीन विकेट गंवाये।
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कि जम्बीर फल का गूदा वायु वर्ता है। और वायु इस रोग मे हानिकार है । लवग में वायु को शमन करने का गुण विद्यमान है। मान इतना हो नहीं किन्तु इस रोग के अनेक लक्षणो वा निदान भी है।
अत "मज्जारवहए" शब्द का अर्थ हुआ कि "विरालिका" नाम की वनस्पति से सस्कारित किया हुआ ।
अब "मज्जारवडए, कुक्कुडमभए" शब्दों का नीचे लिसा अय स्पष्ट हो जाता है -
"बापु', रक्तपित्त, पेचिश, अतिसार, दाह, पित्तज्वर आदि रोगों को ज्ञात करने के लिये, वरालक (लवग ) नामक वनस्पति से सस्कारित बीजारे ( जम्बीर ) फल के गूदे पापाक (मुरब्बा ) ।
(१२) भगवतीसूत्र के विवादास्पद सूनपाठ का वास्तविक
भगवतीसूत्र का मूल पाठ
त गच्छह ण तुम सोहा ! मॅडियगाम नगर रेवतोए गाहायतिणीए गि, तस्य ण रेवतोए गाहावइणीए मम अट्ठाए दुये क्योयसरीग उपक्सडिया तेहि नो भट्ठो, aft से अने पारिपासिए मज्जारबडए बुपकुडमसए तमाहराहि, एएन अट्ठो ।
इस उपर्युक्त सूत्रपाठ या वास्तविय स्पष्टाय यह है
" (श्रमण भगवान् महावीर ने अपने शिष्य सिंह मुनि से रहा ) हे सिंह । तुम मेठिष ग्राम नगर में गृहपतिको भार्या रेती ( धाविया) मे घर जाओ। उगने मेरे लिये दो छोटे
१- भगवाई महावीर को तीन प्रकार के तपित्त रोगों में में अयो सतपित्त रोग था। यह राग यायु प्रकोप से पिपित हार होग है । वायु करने से रमपित्त विरार दूर होता है। २यस वापर मौजूद थे सा भी जहथिय श्रमण से नहीं
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कि जम्बीर फल का गूदा वायु वर्ता है। और वायु इस रोग मे हानिकार है । लवग में वायु को शमन करने का गुण विद्यमान है। मान इतना हो नहीं किन्तु इस रोग के अनेक लक्षणो वा निदान भी है। अत "मज्जारवहए" शब्द का अर्थ हुआ कि "विरालिका" नाम की वनस्पति से सस्कारित किया हुआ । अब "मज्जारवडए, कुक्कुडमभए" शब्दों का नीचे लिसा अय स्पष्ट हो जाता है - "बापु', रक्तपित्त, पेचिश, अतिसार, दाह, पित्तज्वर आदि रोगों को ज्ञात करने के लिये, वरालक नामक वनस्पति से सस्कारित बीजारे फल के गूदे पापाक । भगवतीसूत्र के विवादास्पद सूनपाठ का वास्तविक भगवतीसूत्र का मूल पाठ त गच्छह ण तुम सोहा ! मॅडियगाम नगर रेवतोए गाहायतिणीए गि, तस्य ण रेवतोए गाहावइणीए मम अट्ठाए दुये क्योयसरीग उपक्सडिया तेहि नो भट्ठो, aft से अने पारिपासिए मज्जारबडए बुपकुडमसए तमाहराहि, एएन अट्ठो । इस उपर्युक्त सूत्रपाठ या वास्तविय स्पष्टाय यह है " हे सिंह । तुम मेठिष ग्राम नगर में गृहपतिको भार्या रेती मे घर जाओ। उगने मेरे लिये दो छोटे एक- भगवाई महावीर को तीन प्रकार के तपित्त रोगों में में अयो सतपित्त रोग था। यह राग यायु प्रकोप से पिपित हार होग है । वायु करने से रमपित्त विरार दूर होता है। दोयस वापर मौजूद थे सा भी जहथिय श्रमण से नहीं
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राम कपूर आजकल खासे उत्साहित नज़र आ रहे हैं। दरअसल वो देेवांग ढ़ोलकिया की अगली कॉमेडी फिल्म 'पटेल रैप' में सनी लियोन के साथ रोमांस करेंगे जिसे लेकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। हाल ही में फिल्म के निर्देशक की तबीयत थोड़ी खराब थी जिसके चलते फिल्म की शूटिंग टाल दी गई। यूनिट मलेशिया में शूटिंग करने वाली थी।
सूत्रों ने बताया, 'देवांग को पीलिया हो गया था लेकिन उन्हें अपनी बीमारी के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्हें डायबीटिज भी है। एक दिन प्री प्रोडक्शन का काम चल रहा था, तब वह गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और वह दो हफ्तो तक आईसीयू में रहे। '
सूत्रों ने आगे बताया, 'निर्देशक की तबियत अब पहले से बेहतर है लेकिन उन्हें पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी गई है। '
फिल्म 'पेटल रैप' में राम कपूर एक गुजराती कारोबारी का किरदार निभाएंगे। सनी एक स्टार के किरदार में होंगी।
राम ने कहा, 'ये सच है कि हमारे निर्देशक देवांग फिलहाल बीमार हैं। सनी और मैंने अपनी डेट्स बदल ली हैं। हम देवांग और उनकी टीम का पूरा सहयोग करते हैं। '
फिल्म के प्रवक्ता ने बताया, 'निर्देशक की सेहत को ध्यान में रखते हुए पटेल रैप की शूटिंग अब नवंबर में शुरू होगी। '
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राम कपूर आजकल खासे उत्साहित नज़र आ रहे हैं। दरअसल वो देेवांग ढ़ोलकिया की अगली कॉमेडी फिल्म 'पटेल रैप' में सनी लियोन के साथ रोमांस करेंगे जिसे लेकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। हाल ही में फिल्म के निर्देशक की तबीयत थोड़ी खराब थी जिसके चलते फिल्म की शूटिंग टाल दी गई। यूनिट मलेशिया में शूटिंग करने वाली थी। सूत्रों ने बताया, 'देवांग को पीलिया हो गया था लेकिन उन्हें अपनी बीमारी के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्हें डायबीटिज भी है। एक दिन प्री प्रोडक्शन का काम चल रहा था, तब वह गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और वह दो हफ्तो तक आईसीयू में रहे। ' सूत्रों ने आगे बताया, 'निर्देशक की तबियत अब पहले से बेहतर है लेकिन उन्हें पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी गई है। ' फिल्म 'पेटल रैप' में राम कपूर एक गुजराती कारोबारी का किरदार निभाएंगे। सनी एक स्टार के किरदार में होंगी। राम ने कहा, 'ये सच है कि हमारे निर्देशक देवांग फिलहाल बीमार हैं। सनी और मैंने अपनी डेट्स बदल ली हैं। हम देवांग और उनकी टीम का पूरा सहयोग करते हैं। ' फिल्म के प्रवक्ता ने बताया, 'निर्देशक की सेहत को ध्यान में रखते हुए पटेल रैप की शूटिंग अब नवंबर में शुरू होगी। '
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नई दिल्लीः
उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई गैंगरेप (Hathras Gangrape) की घटना पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने एक्ट्रेस कंगना रनौत को खरी-खोटी सुना दी. प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने अपने ट्वीट में कंगना का नाम लिए बिना ही इशारों-इशारों में ये बता दिया कि वो कंगना (Kangana Ranaut) के बारे में ही बात कर रही हैं. प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'दिन रात मुंबई पुलिस को कोसने के लिए जिनको Y+ सिक्युरिटी से नवाज़ा गया, जो 'महिलाओं' की 'बुलंद आवाज़' बनकर, मुख्यमंत्री और राज्य के बारे में आपत्तिजनक बयानबाज़ी कर रहीं थी, मीडिया की चहेती थी, उनके मुँह में दही जम गया है क्या? उनका कोई ट्वीट भी नहीं दिख रहा हाथरस के मुद्दे पर.'
वहीं एक दूसरे ट्वीट में शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने लिखा कि झांसी की वीर रानी और झांसों की इकलौती रानी में जो जमीन-आसमान का अंतर अब लोगों को समझ आ ही गया होगा.
झाँसों की इकलौती रानी में जो ज़मीन- आसमान का अंतर अब समझ आ ही गया होगा।
बता दें कि बीते दिनों कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच काफी ज्यादा विवाद हुआ. एक तरफ जहां बीएमसी ने कंगना के दफ्तर पर तोड़फोड़ की. वहीं दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना को लेकर एक इंटरव्यू में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था.
यह भी पढ़ेंः जानिए क्यों दीवाली पर नहीं रिलीज हो रही अक्षय कुमार की फिल्म 'सूर्यवंशी'
वहीं कंगना ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से हाथरस घटना पर एक ट्वीट करते हुए लिखा था, 'मुझे सीएम योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है. जैसे प्रियंका रेडी के आरोपियों को गोली से मारा गया था क्योंकि उन्होंने उसे जिंदा जला दिया था. अब ऐसा ही न्याय हाथरस मामले में भी चाहिए.'
बता दें कि हाथरस गैंगरेप का शिकार हुई बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए लोग सड़क पर आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर सेलेब्स भी अपने रिएक्शन दे रहे हैं. बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों ने इस मामले में पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट किए हैं. दूसरी तरफ कई सेलेब्स ऐसे भी हैं जिन्होंने इस घटना पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan), शाहरुख खान (Shah Rukh Khan), आमिर खान, सलमान खान ने इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई गैंगरेप की घटना पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्ट्रेस कंगना रनौत को खरी-खोटी सुना दी. प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में कंगना का नाम लिए बिना ही इशारों-इशारों में ये बता दिया कि वो कंगना के बारे में ही बात कर रही हैं. प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'दिन रात मुंबई पुलिस को कोसने के लिए जिनको Y+ सिक्युरिटी से नवाज़ा गया, जो 'महिलाओं' की 'बुलंद आवाज़' बनकर, मुख्यमंत्री और राज्य के बारे में आपत्तिजनक बयानबाज़ी कर रहीं थी, मीडिया की चहेती थी, उनके मुँह में दही जम गया है क्या? उनका कोई ट्वीट भी नहीं दिख रहा हाथरस के मुद्दे पर.' वहीं एक दूसरे ट्वीट में शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि झांसी की वीर रानी और झांसों की इकलौती रानी में जो जमीन-आसमान का अंतर अब लोगों को समझ आ ही गया होगा. झाँसों की इकलौती रानी में जो ज़मीन- आसमान का अंतर अब समझ आ ही गया होगा। बता दें कि बीते दिनों कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच काफी ज्यादा विवाद हुआ. एक तरफ जहां बीएमसी ने कंगना के दफ्तर पर तोड़फोड़ की. वहीं दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना को लेकर एक इंटरव्यू में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था. यह भी पढ़ेंः जानिए क्यों दीवाली पर नहीं रिलीज हो रही अक्षय कुमार की फिल्म 'सूर्यवंशी' वहीं कंगना ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से हाथरस घटना पर एक ट्वीट करते हुए लिखा था, 'मुझे सीएम योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है. जैसे प्रियंका रेडी के आरोपियों को गोली से मारा गया था क्योंकि उन्होंने उसे जिंदा जला दिया था. अब ऐसा ही न्याय हाथरस मामले में भी चाहिए.' बता दें कि हाथरस गैंगरेप का शिकार हुई बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए लोग सड़क पर आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर सेलेब्स भी अपने रिएक्शन दे रहे हैं. बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों ने इस मामले में पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट किए हैं. दूसरी तरफ कई सेलेब्स ऐसे भी हैं जिन्होंने इस घटना पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. अमिताभ बच्चन , शाहरुख खान , आमिर खान, सलमान खान ने इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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सेक्टर-39 पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर उसके ही जीजा हर्ष के खिलाफ शारीरिक छेड़छाड़ और पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
नाबालिग ने बताया कि आरोपी डडूमाजरा स्थित उसके सरकारी स्कूल के प्रवेश द्वार पर सुबह 7 बजे पहुंच गया और उसे अपने साथ ले जाने के लिए कहने लगा, लेकिन नाबालिग ने पहले इंकार कर दिया बाद में आरोपी जीजा ने उसकी बाजू पकड़ ली और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लग गया।
शिकातयकर्ता ने बताया कि आरोपी उसे मोटरसाइकिल पर बिठाकर अपनी पीयू स्थित घर पर ले आया। साली ने बताया कि जीजा उसे कहने लग गया कि वह उससे शादी कर लेगा और उसकी बहन को छोड़ देगा। इस दौरान लड़की के अभिभावक तलाश करते हुए आरोपी के घर पर पहुंच गए। सेक्टर-39 पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
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सेक्टर-उनतालीस पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर उसके ही जीजा हर्ष के खिलाफ शारीरिक छेड़छाड़ और पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। नाबालिग ने बताया कि आरोपी डडूमाजरा स्थित उसके सरकारी स्कूल के प्रवेश द्वार पर सुबह सात बजे पहुंच गया और उसे अपने साथ ले जाने के लिए कहने लगा, लेकिन नाबालिग ने पहले इंकार कर दिया बाद में आरोपी जीजा ने उसकी बाजू पकड़ ली और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लग गया। शिकातयकर्ता ने बताया कि आरोपी उसे मोटरसाइकिल पर बिठाकर अपनी पीयू स्थित घर पर ले आया। साली ने बताया कि जीजा उसे कहने लग गया कि वह उससे शादी कर लेगा और उसकी बहन को छोड़ देगा। इस दौरान लड़की के अभिभावक तलाश करते हुए आरोपी के घर पर पहुंच गए। सेक्टर-उनतालीस पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
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तीसरे अध्ययन में चुलनीपिता का प्रसग है। चुलनीपिता को भी ऐसे ही विघ्न का सामना करना पड़ा । पुत्रो की हत्या से तो वह अविचल रहा पर देव ने जब उसकी पूजनीया माँ की हत्या की धमकी दी तो वह विचलित हो गया। माँ के प्रति रही अपनी ममता वह जीत नही सका । वह तो अध्यात्म की ऊंची साधना में था, जहाँ ऐसी ममता बाधा नही बननी चाहिए, पर बनी । चुलनीपिता भूल का प्रायश्चित्त कर शुद्ध हुआ।
चौथे अध्ययन मे श्रमणोपासक सुरादेव का कथानक है। उसकी साधना में भी विघ्न आया । पुत्रों की हत्या से उपसर्गकारी देव ने जब उसे अप्रभावित देखा तो उसने उसके शरीर में भीषण सोलह रोग उत्पन्न कर देने की धमकी दी । मनुष्य मौत को स्वीकार कर सकता है, पर अत्यन्त भयानक रोगो से जर्जर देह उसके लिए मौत से कही अधिक भयावह बन जाती है, सुरादेव के साथ भी यही घटित हुआ । उसका व्रत भग्न हो गया। उसने प्रात्म-परिष्कार किया ।
पाचवं अध्ययन में चुल्लशतक सम्पत्ति नाश की धमकी से व्रत-च्युत हुआ । कुछ लोगो के लिए धन पुत्र, माता, प्राण-इन सबसे प्यारा होता है। वे और सब सह लेते हैं पर धन के विनाश की आशका उन्हे अत्यन्त आतुर तथा आकुल बना देती है। चुल्लशतक तीनो पुत्रो की हत्या तक चुप रहा पर प्रालभिका [नगरी] की गली-गली मे उसकी सम्पत्ति बिखेर देने की बात से वह काप गया ।
मातवें अध्ययन में सकडालपुत्र का कथानक है। यह भी पुत्रो की हत्या तक तो अविचल रहा पर उसकी पत्नी अग्निमित्रा जो न केवल गृहस्वामिनी थी, उसके धार्मिक जीवन मे अनन्य महयोगिनी भी थी, की हत्या की धमकी जब सामने आई तो वह हिम्मत छोड बैठा ।
यहाँ एक बात विशेष महत्वपूर्ण है। व्यक्ति अपने मन मे रही किसी दुर्बलता के कारण एक बार स्थानच्युत होकर पुन आत्मपरिष्कार कर, प्रायश्चित कर, शुद्ध होकर ध्येयनिष्ठ बन जाय तो वह भूल फिर नहीं रहती। भूल होना असभव नही है पर भूल हो जाने पर उसे समझ लेना, उसके लिए अन्तर्र खेद अनुभव करना, फिर अपने स्वीकृत साधना - पथ पर गतिमान् हो जाना - यह व्यक्तित्व की उच्चता का चिह्न है । छम्रो उपासको के भूल के प्रसग इसी प्रकार के हैं। जीवन मे अवशिष्ट रही ममता, आमक्ति आदि के कारण उनमें विचलन तो आया पर वह टिक नहीं पाया।
आठवे अध्ययन में श्रमणोपासक महाशतक के सामने एक विचित्र अनुकूल विघ्न भ्राता है । उसकी प्रमुख पत्नी रेवती, जो घोर मद्य-मास-लोलुप और कामुक थी, पोषधशाला मे पोषध और ध्यान में स्थित पति को विचलित करना चाहती है। एक ओर त्याग का तीव्र ज्योतिर्मय सूर्य था, दूसरी ओर पाप की कालिमामयी तमिस्रा । त्याग की ज्योति को ग्रसने के लिए कालिमा खूब झपटी पर वह सर्वथा प्रकृतकार्य रही । रेवती महाशतक को नही डिगा सकी । पर, एक छोटी सी भूल महाशतक से तब बनी । रेवती की दुश्चेष्टाश्रो से उसके मन मे क्रोध का भाव पैदा हुआ । उसे अवधिज्ञान प्राप्त था। रेवती की सात दिन के भीतर भीषण रोग, पोडा एव वेदना के साथ होने वाली मृत्यु की भविष्यवाणी उसने अपने अवधिज्ञान के सहारे कर दी । मृत्यु के भय से रेवती अत्यन्त मर्माहत और भयभीत हो गई । भविष्यवाणी यद्यपि सर्वथा सत्य थी पर सत्य भी सब स्थितियों में व्यक्त किया जाए, यह वाछनीय नही है । जो सत्य दूसरो के मन मे भय और आतक उत्पन्न कर दे, वक्ता को वह बोलने में विशेष विचार तथा सकोच करना होता है। इसलिए भगवान् महावीर ने
अपने प्रमुख अन्तेवासी गौतम को भेजकर महाशतक को सावधान किया। महाशतक पुनः प्रात्मस्य हुमा ।
छठे अध्ययन का चरितनायक कुण्डकौलिक एक तत्त्वनिष्णात श्रावक के रूप में चित्रित किया गया है। एक देव औौर कुण्डकौलिक के बीच नियतवाद तथा पुरुषार्थवाद पर चर्चा होती है। कुण्डकौलिक के न्यायपूर्ण और युक्तियुक्त प्रतिपादन से देव निरुत्तर हो जाता है। भगवान् महावीर विज्ञ कुण्डकौलिक का नाम श्रमण श्रमणियों के समक्ष एक उदाहरण के रूप में उपस्थित करते हैं । कुण्डकौलिक का जीवन श्रावक-श्राविकानो के लिए तत्त्वज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु एक प्रेरणास्पद उदाहरण है।
यथार्थ की ओर इशान
उपासकदशा के दसो अध्ययनों के चरितनायकी का लौकिक जीवन अत्यन्त सुखमय था । उन्हे सभी भौतिक सुख-सुविधाएँ प्रचुर और पर्याप्त रूप से प्राप्त थी । यदि यही जीवन का प्राप्य होता तो उनके लिए और कुछ करणीय रह ही नहीं जाता । क्यो वे अपने प्राप्त सुखों को घटातेघटाते बिलकुल मिटा देते ? पर वे विवेकशील थे । भौतिक सुखो की नश्वरता को जानते थे । अतः जीवन का यथार्थ प्राप्य, जिसे पाए बिना और सब कुछ पा लेना अन्तविडम्बना के अतिरिक्त और कुछ होना नही, को प्राप्त करने की मानव में जो एक अव्यक्त उत्कण्ठा होती है, वह उन सबमे तत्क्षण जाग उठती है, ज्यो ही उन्हे भगवान् महावीर का सान्निध्य प्राप्त होता है। जागरित उत्कण्ठा जब क्रियान्विति के मार्ग पर आगे बढी तो उत्तरोत्तर बढ़ती ही गई और उन साधकों के जीवन में एक ऐसा समय प्राया, जब वे देहसुख को मानो सर्वथा भूल गये । त्याग में, आत्मस्वरूप के अधिगम में अपने आपको उन्होने इतना खो दिया कि अत्यन्त कृश और क्षीण होते जाते अपने शरीर की भी उन्हें चिन्ता नही रही। भोग का त्याग मे यह सुखद पर्यवसान था । साधारणतया जीवन मे ऐसा सघ पाना बहुत कठिन लगता है । सुख-सुविधा और अनुकूलता के वातावरण में पला मानव उन्हे छोड़ने की बात सुनते ही घबरा उठता है। पर, यह दुर्बलचेता पुरुषो की बात है। उपनिषद् के ऋषि ने 'नायमात्मा बलहीनेन लभ्य' यह जो कहा है, बडा मार्मिक है। बलहीन - अन्तर्बलरहित व्यक्ति आत्मा को उपलब्ध नहीं कर सकता। पर, बलशील - अन्त पराक्रमशाली पुरुष वह सब सहज ही कर डालता है, जिससे दुर्बल जन कॉप उठते है ।
सामाजिक दायित्व से मुक्ति : अवकाश
मनुष्य जीवन भर अपने पारिवारिक, सामाजिक तथा लौकिक दायित्वों के निर्वाह में ही लगा रहे, भारतीय चिन्तनधारा में यह स्वीकृत नही है। वहाँ यह वाञ्छनीय है कि जब पुत्र घर का, परिवार का, सामाजिक सम्बन्धो का दायित्व निभाने योग्य हो जाएँ, व्यक्ति अपने जीवन का अन्तिम भाग आत्मा के चिन्तन, मनन, अनुशीलन आदि में लगाए । वैदिकधर्म में इसके लिए ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास - यो चार माश्रमों का क्रम है। ब्रह्मचर्याश्रम विद्याध्ययन और योग्यतासंपादन का काल है । गृहस्थाश्रम सासारिक उत्तरदायित्व निर्वाह का समय है । वानप्रस्थाश्रम गृहस्थ और सन्यास के बीच का काल है, जहाँ व्यक्ति लौकिक आसक्ति से क्रमशः दूर होता हुआ संन्यास के निकट पहुँचने का प्रयास करता है। 'ऋणानि त्रीण्यपाकृत्य मनो मोक्षे निवेशयेत्' ऐसा वैदिकधर्म
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तीसरे अध्ययन में चुलनीपिता का प्रसग है। चुलनीपिता को भी ऐसे ही विघ्न का सामना करना पड़ा । पुत्रो की हत्या से तो वह अविचल रहा पर देव ने जब उसकी पूजनीया माँ की हत्या की धमकी दी तो वह विचलित हो गया। माँ के प्रति रही अपनी ममता वह जीत नही सका । वह तो अध्यात्म की ऊंची साधना में था, जहाँ ऐसी ममता बाधा नही बननी चाहिए, पर बनी । चुलनीपिता भूल का प्रायश्चित्त कर शुद्ध हुआ। चौथे अध्ययन मे श्रमणोपासक सुरादेव का कथानक है। उसकी साधना में भी विघ्न आया । पुत्रों की हत्या से उपसर्गकारी देव ने जब उसे अप्रभावित देखा तो उसने उसके शरीर में भीषण सोलह रोग उत्पन्न कर देने की धमकी दी । मनुष्य मौत को स्वीकार कर सकता है, पर अत्यन्त भयानक रोगो से जर्जर देह उसके लिए मौत से कही अधिक भयावह बन जाती है, सुरादेव के साथ भी यही घटित हुआ । उसका व्रत भग्न हो गया। उसने प्रात्म-परिष्कार किया । पाचवं अध्ययन में चुल्लशतक सम्पत्ति नाश की धमकी से व्रत-च्युत हुआ । कुछ लोगो के लिए धन पुत्र, माता, प्राण-इन सबसे प्यारा होता है। वे और सब सह लेते हैं पर धन के विनाश की आशका उन्हे अत्यन्त आतुर तथा आकुल बना देती है। चुल्लशतक तीनो पुत्रो की हत्या तक चुप रहा पर प्रालभिका [नगरी] की गली-गली मे उसकी सम्पत्ति बिखेर देने की बात से वह काप गया । मातवें अध्ययन में सकडालपुत्र का कथानक है। यह भी पुत्रो की हत्या तक तो अविचल रहा पर उसकी पत्नी अग्निमित्रा जो न केवल गृहस्वामिनी थी, उसके धार्मिक जीवन मे अनन्य महयोगिनी भी थी, की हत्या की धमकी जब सामने आई तो वह हिम्मत छोड बैठा । यहाँ एक बात विशेष महत्वपूर्ण है। व्यक्ति अपने मन मे रही किसी दुर्बलता के कारण एक बार स्थानच्युत होकर पुन आत्मपरिष्कार कर, प्रायश्चित कर, शुद्ध होकर ध्येयनिष्ठ बन जाय तो वह भूल फिर नहीं रहती। भूल होना असभव नही है पर भूल हो जाने पर उसे समझ लेना, उसके लिए अन्तर्र खेद अनुभव करना, फिर अपने स्वीकृत साधना - पथ पर गतिमान् हो जाना - यह व्यक्तित्व की उच्चता का चिह्न है । छम्रो उपासको के भूल के प्रसग इसी प्रकार के हैं। जीवन मे अवशिष्ट रही ममता, आमक्ति आदि के कारण उनमें विचलन तो आया पर वह टिक नहीं पाया। आठवे अध्ययन में श्रमणोपासक महाशतक के सामने एक विचित्र अनुकूल विघ्न भ्राता है । उसकी प्रमुख पत्नी रेवती, जो घोर मद्य-मास-लोलुप और कामुक थी, पोषधशाला मे पोषध और ध्यान में स्थित पति को विचलित करना चाहती है। एक ओर त्याग का तीव्र ज्योतिर्मय सूर्य था, दूसरी ओर पाप की कालिमामयी तमिस्रा । त्याग की ज्योति को ग्रसने के लिए कालिमा खूब झपटी पर वह सर्वथा प्रकृतकार्य रही । रेवती महाशतक को नही डिगा सकी । पर, एक छोटी सी भूल महाशतक से तब बनी । रेवती की दुश्चेष्टाश्रो से उसके मन मे क्रोध का भाव पैदा हुआ । उसे अवधिज्ञान प्राप्त था। रेवती की सात दिन के भीतर भीषण रोग, पोडा एव वेदना के साथ होने वाली मृत्यु की भविष्यवाणी उसने अपने अवधिज्ञान के सहारे कर दी । मृत्यु के भय से रेवती अत्यन्त मर्माहत और भयभीत हो गई । भविष्यवाणी यद्यपि सर्वथा सत्य थी पर सत्य भी सब स्थितियों में व्यक्त किया जाए, यह वाछनीय नही है । जो सत्य दूसरो के मन मे भय और आतक उत्पन्न कर दे, वक्ता को वह बोलने में विशेष विचार तथा सकोच करना होता है। इसलिए भगवान् महावीर ने अपने प्रमुख अन्तेवासी गौतम को भेजकर महाशतक को सावधान किया। महाशतक पुनः प्रात्मस्य हुमा । छठे अध्ययन का चरितनायक कुण्डकौलिक एक तत्त्वनिष्णात श्रावक के रूप में चित्रित किया गया है। एक देव औौर कुण्डकौलिक के बीच नियतवाद तथा पुरुषार्थवाद पर चर्चा होती है। कुण्डकौलिक के न्यायपूर्ण और युक्तियुक्त प्रतिपादन से देव निरुत्तर हो जाता है। भगवान् महावीर विज्ञ कुण्डकौलिक का नाम श्रमण श्रमणियों के समक्ष एक उदाहरण के रूप में उपस्थित करते हैं । कुण्डकौलिक का जीवन श्रावक-श्राविकानो के लिए तत्त्वज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु एक प्रेरणास्पद उदाहरण है। यथार्थ की ओर इशान उपासकदशा के दसो अध्ययनों के चरितनायकी का लौकिक जीवन अत्यन्त सुखमय था । उन्हे सभी भौतिक सुख-सुविधाएँ प्रचुर और पर्याप्त रूप से प्राप्त थी । यदि यही जीवन का प्राप्य होता तो उनके लिए और कुछ करणीय रह ही नहीं जाता । क्यो वे अपने प्राप्त सुखों को घटातेघटाते बिलकुल मिटा देते ? पर वे विवेकशील थे । भौतिक सुखो की नश्वरता को जानते थे । अतः जीवन का यथार्थ प्राप्य, जिसे पाए बिना और सब कुछ पा लेना अन्तविडम्बना के अतिरिक्त और कुछ होना नही, को प्राप्त करने की मानव में जो एक अव्यक्त उत्कण्ठा होती है, वह उन सबमे तत्क्षण जाग उठती है, ज्यो ही उन्हे भगवान् महावीर का सान्निध्य प्राप्त होता है। जागरित उत्कण्ठा जब क्रियान्विति के मार्ग पर आगे बढी तो उत्तरोत्तर बढ़ती ही गई और उन साधकों के जीवन में एक ऐसा समय प्राया, जब वे देहसुख को मानो सर्वथा भूल गये । त्याग में, आत्मस्वरूप के अधिगम में अपने आपको उन्होने इतना खो दिया कि अत्यन्त कृश और क्षीण होते जाते अपने शरीर की भी उन्हें चिन्ता नही रही। भोग का त्याग मे यह सुखद पर्यवसान था । साधारणतया जीवन मे ऐसा सघ पाना बहुत कठिन लगता है । सुख-सुविधा और अनुकूलता के वातावरण में पला मानव उन्हे छोड़ने की बात सुनते ही घबरा उठता है। पर, यह दुर्बलचेता पुरुषो की बात है। उपनिषद् के ऋषि ने 'नायमात्मा बलहीनेन लभ्य' यह जो कहा है, बडा मार्मिक है। बलहीन - अन्तर्बलरहित व्यक्ति आत्मा को उपलब्ध नहीं कर सकता। पर, बलशील - अन्त पराक्रमशाली पुरुष वह सब सहज ही कर डालता है, जिससे दुर्बल जन कॉप उठते है । सामाजिक दायित्व से मुक्ति : अवकाश मनुष्य जीवन भर अपने पारिवारिक, सामाजिक तथा लौकिक दायित्वों के निर्वाह में ही लगा रहे, भारतीय चिन्तनधारा में यह स्वीकृत नही है। वहाँ यह वाञ्छनीय है कि जब पुत्र घर का, परिवार का, सामाजिक सम्बन्धो का दायित्व निभाने योग्य हो जाएँ, व्यक्ति अपने जीवन का अन्तिम भाग आत्मा के चिन्तन, मनन, अनुशीलन आदि में लगाए । वैदिकधर्म में इसके लिए ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास - यो चार माश्रमों का क्रम है। ब्रह्मचर्याश्रम विद्याध्ययन और योग्यतासंपादन का काल है । गृहस्थाश्रम सासारिक उत्तरदायित्व निर्वाह का समय है । वानप्रस्थाश्रम गृहस्थ और सन्यास के बीच का काल है, जहाँ व्यक्ति लौकिक आसक्ति से क्रमशः दूर होता हुआ संन्यास के निकट पहुँचने का प्रयास करता है। 'ऋणानि त्रीण्यपाकृत्य मनो मोक्षे निवेशयेत्' ऐसा वैदिकधर्म
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भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान आत्मघाती और ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहा है। इसी खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में जी-20 के सभी कार्यक्रम स्थलों पर एनएसजी को तैनात किया जाएगा। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने ऑल पार्टी हुर्रियत क्रॉन्फ्रेंस के नेता महमूद अहमद सागर के पत्र के आधार पर विदेश मंत्रालय को कार्रवाई करने के लिए कहा है। इस कथित पत्र में अल्वी ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप के लिए कहा था।
दरअसल, अलगाववादी संगठन हुर्रियत को डर सता रहा है कि जी-20 सम्मेलन अगर कश्मीर में होता है तो इससे उसकी और पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा की पोल खुल जाएगी। वहीं कश्मीर में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे माहौल का दुनिया को अहसास हो जाएगा। हुर्रियत चाहता है कि पाकिस्तान भारत के कश्मीर में जी-20 सम्मेलन कराने के मामले को संयुक्त राष्ट्र और अन्य क्षेत्रीय मंचों पर उठाए। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले में पूरा सहयोग करेगी।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से जहरीला बयान देते हुए दावा किया कि भारत ने जो कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किया है, वह मानवाधिकारों का पूरा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर संयुक्त राष्ट्र को इस पर नोटिस लेना चाहिए। खुद दुनिया से भीख मांग रहे पाकिस्तान के पीएम ने वादा किया है कि वह कश्मीरी जनता को समर्थन देते रहेंगे। पाकिस्तान की इसी चाल को फेल करने के लिए भारत एनएसजी के साथ मरीन कमांडो मार्कोस को भी तैनात करने जा रहा है। इन जवानों को झील और अन्य पानी वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा। जी-20 बैठक स्थल के आसपास सुरक्षा बहुत ही कड़ी रखी जा रही है।
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भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान आत्मघाती और ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहा है। इसी खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में जी-बीस के सभी कार्यक्रम स्थलों पर एनएसजी को तैनात किया जाएगा। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने ऑल पार्टी हुर्रियत क्रॉन्फ्रेंस के नेता महमूद अहमद सागर के पत्र के आधार पर विदेश मंत्रालय को कार्रवाई करने के लिए कहा है। इस कथित पत्र में अल्वी ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप के लिए कहा था। दरअसल, अलगाववादी संगठन हुर्रियत को डर सता रहा है कि जी-बीस सम्मेलन अगर कश्मीर में होता है तो इससे उसकी और पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा की पोल खुल जाएगी। वहीं कश्मीर में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे माहौल का दुनिया को अहसास हो जाएगा। हुर्रियत चाहता है कि पाकिस्तान भारत के कश्मीर में जी-बीस सम्मेलन कराने के मामले को संयुक्त राष्ट्र और अन्य क्षेत्रीय मंचों पर उठाए। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले में पूरा सहयोग करेगी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से जहरीला बयान देते हुए दावा किया कि भारत ने जो कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को खत्म किया है, वह मानवाधिकारों का पूरा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर संयुक्त राष्ट्र को इस पर नोटिस लेना चाहिए। खुद दुनिया से भीख मांग रहे पाकिस्तान के पीएम ने वादा किया है कि वह कश्मीरी जनता को समर्थन देते रहेंगे। पाकिस्तान की इसी चाल को फेल करने के लिए भारत एनएसजी के साथ मरीन कमांडो मार्कोस को भी तैनात करने जा रहा है। इन जवानों को झील और अन्य पानी वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा। जी-बीस बैठक स्थल के आसपास सुरक्षा बहुत ही कड़ी रखी जा रही है।
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Shaheen Bagh: राष्ट्रीय राजधानी के शाहीनबाग (Shaheen Bagh) में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ सड़क पर धरने पर बैठने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को टिप्पणी की कि लोगों के आने-जाने के अधिकार के साथ विरोध के अधिकार को संतुलित होना चाहिए।
दिल्ली (Delhi) में रेलवे लाइन के किनारे से झुग्गी हटाने के आदेश को वापस लेने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में रेल पटरियों के किनारे 48,000 झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा।
देश में जारी कोरोना महामारी (Corona Epidemic) को देखते हुए सीबीएसई (CBSE) की 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं (Compartment Exam) को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल की गई थी।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देशभर में सभी धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जो कोरोना महामारी (Novel Coronavirus) के मद्देनजर बंद हैं।
नीट परीक्षा (NEET Exam 2020) पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने मना कर दिया। अब नीट परीक्षा 13 सितंबर को ही होगी।
देश में कोरोना (Corona in India) के शुरुआती दौर में सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर डिसइंफेक्शन टनल (Disinfection Tunnel) को लगाया था। इससे पुरे शरीर पर छिड़काव होता है। हालांकि, अब केंद्र सरकार (Central Goverment) ने इसे नुकसानदेह बताया है और साथ ही इसके इस्तेमाल बंद करने की भी बात कही है।
केंद्र सरकार (Central Government) यह प्रस्ताव लेकर आई है कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान बुक किए गए टिकटों के लिए एयरलाइनों द्वारा 15 दिनों के भीतर पूरी राशि वापस दी जानी चाहिए, और यदि कोई एयरलाइन वित्तीय संकट में है और ऐसा करने में असमर्थ है तो उसे 31 मार्च, 2021 तक यात्रियों की पसंद की यात्रा क्रेडिट शेल प्रदान किया जाना चाहिए।
संत केशवानंद भारती (Seer Kesavananda Bharati) का रविवार को निधन हो गया। वे 79 साल के थे। बता दें कि भारतीय संविधान के मूल स्ट्रक्चर को स्थिर रखने मेंं केशवानंद भारती का योगदान अहम है।
जेईई (JEE Main) और नीट (NEET) परीक्षा को लेकर 6 राज्यों की ओर से दाखिल रिव्यू पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को 1984 सिख दंगे (Anti-Sikh Riots) के एक मामले में कांग्रेस (Congress) के पूर्व नेता सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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Shaheen Bagh: राष्ट्रीय राजधानी के शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ सड़क पर धरने पर बैठने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी की कि लोगों के आने-जाने के अधिकार के साथ विरोध के अधिकार को संतुलित होना चाहिए। दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे से झुग्गी हटाने के आदेश को वापस लेने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि फिलहाल दिल्ली में रेल पटरियों के किनारे अड़तालीस,शून्य झुग्गियों को नहीं हटाया जाएगा। देश में जारी कोरोना महामारी को देखते हुए सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सभी धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जो कोरोना महामारी के मद्देनजर बंद हैं। नीट परीक्षा पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया। अब नीट परीक्षा तेरह सितंबर को ही होगी। देश में कोरोना के शुरुआती दौर में सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर डिसइंफेक्शन टनल को लगाया था। इससे पुरे शरीर पर छिड़काव होता है। हालांकि, अब केंद्र सरकार ने इसे नुकसानदेह बताया है और साथ ही इसके इस्तेमाल बंद करने की भी बात कही है। केंद्र सरकार यह प्रस्ताव लेकर आई है कि लॉकडाउन के दौरान बुक किए गए टिकटों के लिए एयरलाइनों द्वारा पंद्रह दिनों के भीतर पूरी राशि वापस दी जानी चाहिए, और यदि कोई एयरलाइन वित्तीय संकट में है और ऐसा करने में असमर्थ है तो उसे इकतीस मार्च, दो हज़ार इक्कीस तक यात्रियों की पसंद की यात्रा क्रेडिट शेल प्रदान किया जाना चाहिए। संत केशवानंद भारती का रविवार को निधन हो गया। वे उन्यासी साल के थे। बता दें कि भारतीय संविधान के मूल स्ट्रक्चर को स्थिर रखने मेंं केशवानंद भारती का योगदान अहम है। जेईई और नीट परीक्षा को लेकर छः राज्यों की ओर से दाखिल रिव्यू पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक हज़ार नौ सौ चौरासी सिख दंगे के एक मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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Highlightsटी20 सीरीज में जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज की शुरुआत 9 अक्टूबर से हो रही है।
टी20 सीरीज में जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है और साउथ अफ्रीका के वनडे सीरीज से स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना बाहर हो गई हैं। स्मृति मंधाना को कुछ दिनों पहले अभ्यास सत्र के दौरान पैर की अंगुली में चोट लगी थी, जिस कारण वो टीम से बाहर हो गई हैं।
सूत्रो से पता चला है कि स्मृति मंधाना के पैर की अंगुली में फ्रैक्चर है और अब उन्हें कुछ दिनों तक टीम से बाहर रहना होगा। बता दें कि स्मृति मंधाना हार के समय में खराब फॉर्म से गुजर रही हैं और साउथ अफ्रीका के खिलाफ हाल ही खत्म हुई टी20 सीरीज की चार पारियों में सिर्फ 46 रन ही बना पाईं।
भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए स्मृति मंधाना के रिप्लेसमेंट के तौर पर एक खिलाड़ी को शामिल करना है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) सूत्र के हवाले से स्पोर्टस्टार ने बताया कि स्मृति की जगह पूजा वस्त्राकर को टीम में शामिल किया जा सकता है।
बता दें कि भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत बुधवार यानि 9 अक्टूबर से हो रही है। दोनों टीमों के बीच तीनों मैच वडोदरा में खेले जाएंगे। इससे पहले भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को 6 मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 से मात दी थी।
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Highlightsटीबीस सीरीज में जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज की शुरुआत नौ अक्टूबर से हो रही है। टीबीस सीरीज में जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है और साउथ अफ्रीका के वनडे सीरीज से स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना बाहर हो गई हैं। स्मृति मंधाना को कुछ दिनों पहले अभ्यास सत्र के दौरान पैर की अंगुली में चोट लगी थी, जिस कारण वो टीम से बाहर हो गई हैं। सूत्रो से पता चला है कि स्मृति मंधाना के पैर की अंगुली में फ्रैक्चर है और अब उन्हें कुछ दिनों तक टीम से बाहर रहना होगा। बता दें कि स्मृति मंधाना हार के समय में खराब फॉर्म से गुजर रही हैं और साउथ अफ्रीका के खिलाफ हाल ही खत्म हुई टीबीस सीरीज की चार पारियों में सिर्फ छियालीस रन ही बना पाईं। भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए स्मृति मंधाना के रिप्लेसमेंट के तौर पर एक खिलाड़ी को शामिल करना है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सूत्र के हवाले से स्पोर्टस्टार ने बताया कि स्मृति की जगह पूजा वस्त्राकर को टीम में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत बुधवार यानि नौ अक्टूबर से हो रही है। दोनों टीमों के बीच तीनों मैच वडोदरा में खेले जाएंगे। इससे पहले भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को छः मैचों की टीबीस सीरीज में तीन-एक से मात दी थी।
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बदमाशों के हाथों 11. 45 लाख रुपये गंवा बैठा।
शिमलापुरी के जनता नगर निवासी एक व्यक्ति धोखाधड़ी की योजना का शिकार हो गया और बदमाशों के हाथों 11. 45 लाख रुपये गंवा बैठा।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले को लेकर जेसीपी जेएस तेजा, एडिशनल डीसीपी सुहैल कासिम मीर, एसीपी संदीप वढेरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
एडीसीपी सुहैल ने द ट्रिब्यून को बताया कि पीड़ित भानु प्रताप से एक आरोपी गोपीचंद उर्फ मानव ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए बिजनेस लोन दिलाने के लिए संपर्क किया था।
ऋण प्रक्रिया में सहायता करने के बहाने मानव ने भानु को पंजाब नेशनल बैंक शाखा का प्रबंधक होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से मिलवाया। भानु को बैंक में एक चालू खाता खोलने और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भानु को मैसेज मिला कि उसके खाते में 97 लाख रुपये जमा हो गए हैं।
अचानक अप्रत्याशित लाभ से चिंतित होकर, भानु ने मानव से संपर्क किया, जिसने उसे आश्वासन दिया कि ऋण सफलतापूर्वक संसाधित हो गया है। अतिरिक्त डीसीपी सुहैल ने कहा, हालांकि, कुछ मोबाइल ऐप्स की मदद से भानु का मोबाइल नंबर मानव के नियंत्रण में आ गया, जो पीड़ित को धोखा देने के लिए कॉल को इंटरसेप्ट करता था और संचार में हेरफेर करता था।
भानु की कमजोरी का फायदा उठाते हुए, मानव ने उसे पुलिस में शामिल होने की धमकी दी और पुलिस और आयकर अधिकारियों को दूर रखने के लिए उसे नियमित भुगतान करने के लिए मजबूर किया। एडीसीपी सुहैल ने बताया कि धोखाधड़ी की गतिविधियां भानु के परिवार के सदस्यों तक फैली हुई थीं, जिन्हें आरोपियों से लगातार उत्पीड़न और धमकियां मिल रही थीं।
"भानु के बड़े भाई ने उन्हें आर्थिक रूप से समर्थन देने की कोशिश की। भानु और उसके परिवार के उत्तर प्रदेश चले जाने के बाद भी, मानव ने भानु से पैसे ऐंठना जारी रखा और उसे 11. 45 लाख रुपये का चूना लगाया, "एडीसीपी ने कहा।
गड़बड़ी का संदेह होने पर, भानु ने जांच की और मानव के साथ काम करने वाले एक अन्य व्यक्ति अमरीक सिंह की संलिप्तता का पता चला। यह पता चला कि अमरीक सिंह ने खुद को प्रॉपर्टी एजेंट बताकर धोखाधड़ी को अंजाम देने में मानव के साथ सहयोग किया था। एडीसीपी ने खुलासा किया कि दोनों ने पीड़ित को डराने और हेरफेर करने के लिए उच्च-रैंकिंग अधिकारियों का रूप धारण किया।
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बदमाशों के हाथों ग्यारह. पैंतालीस लाख रुपये गंवा बैठा। शिमलापुरी के जनता नगर निवासी एक व्यक्ति धोखाधड़ी की योजना का शिकार हो गया और बदमाशों के हाथों ग्यारह. पैंतालीस लाख रुपये गंवा बैठा। भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले को लेकर जेसीपी जेएस तेजा, एडिशनल डीसीपी सुहैल कासिम मीर, एसीपी संदीप वढेरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. एडीसीपी सुहैल ने द ट्रिब्यून को बताया कि पीड़ित भानु प्रताप से एक आरोपी गोपीचंद उर्फ मानव ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए बिजनेस लोन दिलाने के लिए संपर्क किया था। ऋण प्रक्रिया में सहायता करने के बहाने मानव ने भानु को पंजाब नेशनल बैंक शाखा का प्रबंधक होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से मिलवाया। भानु को बैंक में एक चालू खाता खोलने और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भानु को मैसेज मिला कि उसके खाते में सत्तानवे लाख रुपये जमा हो गए हैं। अचानक अप्रत्याशित लाभ से चिंतित होकर, भानु ने मानव से संपर्क किया, जिसने उसे आश्वासन दिया कि ऋण सफलतापूर्वक संसाधित हो गया है। अतिरिक्त डीसीपी सुहैल ने कहा, हालांकि, कुछ मोबाइल ऐप्स की मदद से भानु का मोबाइल नंबर मानव के नियंत्रण में आ गया, जो पीड़ित को धोखा देने के लिए कॉल को इंटरसेप्ट करता था और संचार में हेरफेर करता था। भानु की कमजोरी का फायदा उठाते हुए, मानव ने उसे पुलिस में शामिल होने की धमकी दी और पुलिस और आयकर अधिकारियों को दूर रखने के लिए उसे नियमित भुगतान करने के लिए मजबूर किया। एडीसीपी सुहैल ने बताया कि धोखाधड़ी की गतिविधियां भानु के परिवार के सदस्यों तक फैली हुई थीं, जिन्हें आरोपियों से लगातार उत्पीड़न और धमकियां मिल रही थीं। "भानु के बड़े भाई ने उन्हें आर्थिक रूप से समर्थन देने की कोशिश की। भानु और उसके परिवार के उत्तर प्रदेश चले जाने के बाद भी, मानव ने भानु से पैसे ऐंठना जारी रखा और उसे ग्यारह. पैंतालीस लाख रुपये का चूना लगाया, "एडीसीपी ने कहा। गड़बड़ी का संदेह होने पर, भानु ने जांच की और मानव के साथ काम करने वाले एक अन्य व्यक्ति अमरीक सिंह की संलिप्तता का पता चला। यह पता चला कि अमरीक सिंह ने खुद को प्रॉपर्टी एजेंट बताकर धोखाधड़ी को अंजाम देने में मानव के साथ सहयोग किया था। एडीसीपी ने खुलासा किया कि दोनों ने पीड़ित को डराने और हेरफेर करने के लिए उच्च-रैंकिंग अधिकारियों का रूप धारण किया।
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उन्नाव : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की यह खबर बेदर्दी की पराकाष्ठा है, जिसमें पहले तो युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया. जिसके दोनों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गए तो एक आरोपी का भाई पीड़िता और उसके परिजनों से समझौता करने का दबाव बनाने लगा. लेकिन जब वह इसमें कामयाब नहीं हुआ तो दुष्कर्म पीड़िता की आरोपी के भाई ने दाहिनी आंख निकाल ली. आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है.
मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित युवती 15 मई 2015 को मवेशी चराने खेत गई थी. आरोप है कि पड़ोसी गांव जोधाखेड़ा निवासी मुन्ना और मतई ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया. 10 जुलाई 2015 से दोनों अभी जेल में ही हैं. तभी से आरोपी मुन्ना का भाई पुत्तन, युवती और उसके परिवार पर सुलह का लगातार दबाव बना रहा था, लेकिन पीड़ित पक्ष ने दबाव को न मानते हुए अपनी पैरवी जारी रखने का फैसला किया.
बता दें कि इसी से नाराज होकर बुधवार को जब पीड़िता दोपहर में दैनिक क्रिया के लिए घर से 100 मीटर दूर बाग गई तो पुत्तन ने लाठी-डंडों से पीटा और उसकी आंखें फोड़ कर दाहिनी आंख निकाल ली. पीड़िता के पिता ने उस पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया है. पीड़िता की हालत गंभीर बताई जा रही है. उसे परिजन पहले जिला अस्पताल ले गए, जहां घटना के दो घंटे बाद पहुंचे दारोगा ने पीड़िता के पिता का बयान लिया. बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे कानपुर भेजा गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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उन्नाव : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की यह खबर बेदर्दी की पराकाष्ठा है, जिसमें पहले तो युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया. जिसके दोनों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गए तो एक आरोपी का भाई पीड़िता और उसके परिजनों से समझौता करने का दबाव बनाने लगा. लेकिन जब वह इसमें कामयाब नहीं हुआ तो दुष्कर्म पीड़िता की आरोपी के भाई ने दाहिनी आंख निकाल ली. आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है. मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित युवती पंद्रह मई दो हज़ार पंद्रह को मवेशी चराने खेत गई थी. आरोप है कि पड़ोसी गांव जोधाखेड़ा निवासी मुन्ना और मतई ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया. दस जुलाई दो हज़ार पंद्रह से दोनों अभी जेल में ही हैं. तभी से आरोपी मुन्ना का भाई पुत्तन, युवती और उसके परिवार पर सुलह का लगातार दबाव बना रहा था, लेकिन पीड़ित पक्ष ने दबाव को न मानते हुए अपनी पैरवी जारी रखने का फैसला किया. बता दें कि इसी से नाराज होकर बुधवार को जब पीड़िता दोपहर में दैनिक क्रिया के लिए घर से एक सौ मीटर दूर बाग गई तो पुत्तन ने लाठी-डंडों से पीटा और उसकी आंखें फोड़ कर दाहिनी आंख निकाल ली. पीड़िता के पिता ने उस पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया है. पीड़िता की हालत गंभीर बताई जा रही है. उसे परिजन पहले जिला अस्पताल ले गए, जहां घटना के दो घंटे बाद पहुंचे दारोगा ने पीड़िता के पिता का बयान लिया. बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे कानपुर भेजा गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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जम्मू : जम्मू - कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक चौकाने वाला खुलासा किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुूरू को फांसी दिए जाने की जानकारी उन्हें ऐन मौके पर ही मिली थी। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस तरह की बात कही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अब्दुल्ला ने कहा कि अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के निर्णय पर तत्कालीन सरकार में गृहमंत्री सुशील कुमार ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा कि मामले को लेकर कानून व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
अफजल गुरू की फांसी पर फैसला हो गया है और उसे सुबह तक फांसी दी जा सकती है। मामले में कानून व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही गई है। यही नहीं मामले में कहा गया है कि रिश्तेदारों के साथ भोजन किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार अफजल गुरू को लेकर फांसी का निर्णय ऐन समय पर नहीं बताया जाना चाहिए था।
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जम्मू : जम्मू - कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक चौकाने वाला खुलासा किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुूरू को फांसी दिए जाने की जानकारी उन्हें ऐन मौके पर ही मिली थी। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस तरह की बात कही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अब्दुल्ला ने कहा कि अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के निर्णय पर तत्कालीन सरकार में गृहमंत्री सुशील कुमार ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा कि मामले को लेकर कानून व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। अफजल गुरू की फांसी पर फैसला हो गया है और उसे सुबह तक फांसी दी जा सकती है। मामले में कानून व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही गई है। यही नहीं मामले में कहा गया है कि रिश्तेदारों के साथ भोजन किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार अफजल गुरू को लेकर फांसी का निर्णय ऐन समय पर नहीं बताया जाना चाहिए था।
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बस इंजिनियर साहब भी अंड़ गये और उन्हें भी कदम बढ़ाना मुश्किल हो गया। मजदूरोंके फाषड़ा, कुल्हाड़ी, गॅसी आदि सामान भी जहाँके सही अड़ गये, जमीनसे ऐसे चिपके कि कितने ही मयत्म करने पर न उठ सके । सब मजदूरोंने समझा कि यहाँ अवश्य कोई भूत है जिसने इंजिनियर वगैरह सबको पकड़ लिया है। बड़े सोच विचार के बाद इंजिनियरके दिमागमें खुम्बककी कल्पना आई उसने तुरन्त ही अपना पाँव जुर्तमेसे निकाला और चलने रूगां फिर उसने इसका रहस्य सबको घतलाया। इस उदाहरणसे यह बात मालूम होगी कि सुख सिद्धान्त तो ठीक है परन्तु इस परसे अनीश्वर चादी जो यह कहते हैं कि इस उदाहरण के अनुसार जो बातें सभी शास्त्र के द्वारा इस न हो सकी है, वस्तुके कार्य-कारण सम्बन्धका जो पूर्ण ज्ञान न हो सका है इसी लिये मनुष्य ईश्वरको कर्ता मानते है सो यह कहना ठीक नहीं है। वे कहते हैं कि मनुष्यको बनी वस्तुओंके कार्य-कारण संबंधा ही सिर्फ ज्ञान नहीं हुआ है बॉकी यह सब समझ गया है। अर्थाद काकी केवल फड़वाँही जानना बाँकी है नहीं तो सर्व श्रृंखलाका ज्ञान से हो ही गया है। परंतु अनीश्वरवादियोंका यह कहना ठीक नहीं है। आमनेकी मुख्य बात तो यही है कि सम्पूर्ण मंसा ही किस प्रकार बनी। और यही उन्हें मालूम नहीं है। उदाहरणार्थं भौतिक शाखवादी सताबके जन्मके संबंध में सिर्फ यही नहीं समझते कि माता पितारूपी कारणसे संतानजन्मस्मी कार्य कैसे हुआ ? बाँकी माता, पिता, बालक आदि सब समझते है। परंतु वस्तु स्थिति इससे विरुद्ध है। चालक क्यों हुआ और उसका व माता पिताका अन्म होने में क्या संबंध है इसका ज्ञान पहले और अवश्य होना चाहिये। शंकराचार्य के कहे अनुसार "कुत आयातः " कहाँसे आया ? के प्रसके · पहिले ' क्स्व ? " तुम कौन इसका ज्ञान होना उचित है। यद्यपि स्त्री पुरुष के संयोगसे भौतिक शास्त्री, बालकोंकी उत्पत्तिकी प्रक्रिया कह सकेंगे परंतु उस संयोगले लड़काही क्यों उत्पन्न हुआ है और उसका साध्य क्या है? इन अर्कोको वे हक नहीं कर सकते। एक दूसरे उदाहणपर विचार करें, माम कीजिये कि मैं सुतारके औजार लेकर लकड़ी की पेटी बनाने बैठा और एफडके टुकड़े काटने व कोईके सीले आदिके द्वारा जोड़ चैनेले पेटी बन की गई । अब इस कार्यको उत्पत्ति लकड़ी रूपी फोरंगसे हुई यह शिल्पशास्त्री सिद्ध करेगा परंतु यह यह नहीं बता सकेगा कि यह पेटी हो
अस्तित्व में क्यों भाई ? । क्योंकि शिल्पशास्त्र मेरी उस इच्छाशक्तिको नहीं जानता है जिसके कारण यह पेटी मैंने बनाई है। उसी तरह मातापिताके द्वारा लड़का उत्पन्न होनेमें जो एक बड़ी भारी इच्छाशक्ति कारणीभूत होती है, उसका हिसाब अनीश्वरवादी नहीं करते। इसी प्रकार कार्य कारण परंपरा हेड़ते ऍड़ते सय आयवस्वतक या पहुँचेंगे तब वह क्यों अस्तित्व में आया यह अन्न खड़ा ही रह जायगा और वहाँ फिर अपनेको मानवीय इच्छाशक्तिले अनेक गुनी बढ़ी इच्छाशकिकी कल्पना किये बिना गल्लतरही नहीं रहेगा। इस भूलकी इच्छाशकिसे लेकर अंतर्क परिणाम तक प्रत्येकके अस्तित्वका उत्तर भौतिकशास्त्री नहीं दे सकते। असपुन इस प्रकारकी इच्छाशकिकी कल्पना करना अनिवार्य है। एक और उदाहरणसे इसका स्पष्टीकरण करण उचित होगा। वर्तमान में बिजली के प्रवाहसे सोप छोड़ी जाती है। मित समय यह शास्त्रीय कल्पना लोगोंको विदित नहीं थी उस समय तो ऐस प्रक्रिया देखकर लोगोने यही समझा होगा कि इसमें भूतपिशाच ही की क करामात है। वर्तमानमें यह रहस्य प्रगट हो जानेपर भूतपिशाचण कल्पनाको स्थान नहीं रहा है। परंतु भौतिकशाखसे यह मालूम हो जानेपर में कि विधुव्यवाहसे तोप छूट सकती है, यह नहीं मालूम होता कि क्यों छूट है? क्योंकि छोड़नेवालेकी इच्छा शक्ति सम्पूर्ण मिस्र वस्तुओंका संबंध जोड़ती' और तोप छूटनेकी क्रियाका ज्ञान कराने में सहायता देती है। बिना उ आने तोप छूटने के चमत्कारका पूर्ण ज्ञान होना, नहीं कहा जा सकता साराश यह है कि कटकी विचार सरणीसे ही किसी न किसी श्रेष्ठशक्किम कल्पना करना ही पड़ती है। अंतर इतना ही रह जाता है कि कैंट ए होत ही पीछे से आकर छोड़ देता है और हम उसे ठेठव पहुंचा देते हैं। इसका अनीश्वरवादी शायद यह उत्तर देंगे कि जिस प्रक उत्तरोगर प्रगति करनेवाला भांतिकशास ठंडा उतरकर एफके बाद प कढ़ीकी गोज करता है उसी प्रकार अधिक शोध होनेपर यह उठतक पहुँ मफेगा। परंतु यह कहना भी ठीक नहीं। क्योंकि आधिमांतिकशास्त्रों से मोर होती है यह मूटियमरकारोंके नियमोंकी ही होती है, कारणका प नहीं लगता। ज्यों ज्यों गहरे जायेंगे त्यो स्यों अधिकाधिक नियमोंका श दो महंगा परंतु सम्पूर्ण धमाकारोंका आदि कारण जो इष्ठाशक्ति अप संख्यात्मक विज्ञान है उसका बोध नहीं हो सकेगा। अतएव अभी पार्टियों का यह दूसरा आक्षेप भी फल मित्र होता है। लोग आप
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बस इंजिनियर साहब भी अंड़ गये और उन्हें भी कदम बढ़ाना मुश्किल हो गया। मजदूरोंके फाषड़ा, कुल्हाड़ी, गॅसी आदि सामान भी जहाँके सही अड़ गये, जमीनसे ऐसे चिपके कि कितने ही मयत्म करने पर न उठ सके । सब मजदूरोंने समझा कि यहाँ अवश्य कोई भूत है जिसने इंजिनियर वगैरह सबको पकड़ लिया है। बड़े सोच विचार के बाद इंजिनियरके दिमागमें खुम्बककी कल्पना आई उसने तुरन्त ही अपना पाँव जुर्तमेसे निकाला और चलने रूगां फिर उसने इसका रहस्य सबको घतलाया। इस उदाहरणसे यह बात मालूम होगी कि सुख सिद्धान्त तो ठीक है परन्तु इस परसे अनीश्वर चादी जो यह कहते हैं कि इस उदाहरण के अनुसार जो बातें सभी शास्त्र के द्वारा इस न हो सकी है, वस्तुके कार्य-कारण सम्बन्धका जो पूर्ण ज्ञान न हो सका है इसी लिये मनुष्य ईश्वरको कर्ता मानते है सो यह कहना ठीक नहीं है। वे कहते हैं कि मनुष्यको बनी वस्तुओंके कार्य-कारण संबंधा ही सिर्फ ज्ञान नहीं हुआ है बॉकी यह सब समझ गया है। अर्थाद काकी केवल फड़वाँही जानना बाँकी है नहीं तो सर्व श्रृंखलाका ज्ञान से हो ही गया है। परंतु अनीश्वरवादियोंका यह कहना ठीक नहीं है। आमनेकी मुख्य बात तो यही है कि सम्पूर्ण मंसा ही किस प्रकार बनी। और यही उन्हें मालूम नहीं है। उदाहरणार्थं भौतिक शाखवादी सताबके जन्मके संबंध में सिर्फ यही नहीं समझते कि माता पितारूपी कारणसे संतानजन्मस्मी कार्य कैसे हुआ ? बाँकी माता, पिता, बालक आदि सब समझते है। परंतु वस्तु स्थिति इससे विरुद्ध है। चालक क्यों हुआ और उसका व माता पिताका अन्म होने में क्या संबंध है इसका ज्ञान पहले और अवश्य होना चाहिये। शंकराचार्य के कहे अनुसार "कुत आयातः " कहाँसे आया ? के प्रसके · पहिले ' क्स्व ? " तुम कौन इसका ज्ञान होना उचित है। यद्यपि स्त्री पुरुष के संयोगसे भौतिक शास्त्री, बालकोंकी उत्पत्तिकी प्रक्रिया कह सकेंगे परंतु उस संयोगले लड़काही क्यों उत्पन्न हुआ है और उसका साध्य क्या है? इन अर्कोको वे हक नहीं कर सकते। एक दूसरे उदाहणपर विचार करें, माम कीजिये कि मैं सुतारके औजार लेकर लकड़ी की पेटी बनाने बैठा और एफडके टुकड़े काटने व कोईके सीले आदिके द्वारा जोड़ चैनेले पेटी बन की गई । अब इस कार्यको उत्पत्ति लकड़ी रूपी फोरंगसे हुई यह शिल्पशास्त्री सिद्ध करेगा परंतु यह यह नहीं बता सकेगा कि यह पेटी हो अस्तित्व में क्यों भाई ? । क्योंकि शिल्पशास्त्र मेरी उस इच्छाशक्तिको नहीं जानता है जिसके कारण यह पेटी मैंने बनाई है। उसी तरह मातापिताके द्वारा लड़का उत्पन्न होनेमें जो एक बड़ी भारी इच्छाशक्ति कारणीभूत होती है, उसका हिसाब अनीश्वरवादी नहीं करते। इसी प्रकार कार्य कारण परंपरा हेड़ते ऍड़ते सय आयवस्वतक या पहुँचेंगे तब वह क्यों अस्तित्व में आया यह अन्न खड़ा ही रह जायगा और वहाँ फिर अपनेको मानवीय इच्छाशक्तिले अनेक गुनी बढ़ी इच्छाशकिकी कल्पना किये बिना गल्लतरही नहीं रहेगा। इस भूलकी इच्छाशकिसे लेकर अंतर्क परिणाम तक प्रत्येकके अस्तित्वका उत्तर भौतिकशास्त्री नहीं दे सकते। असपुन इस प्रकारकी इच्छाशकिकी कल्पना करना अनिवार्य है। एक और उदाहरणसे इसका स्पष्टीकरण करण उचित होगा। वर्तमान में बिजली के प्रवाहसे सोप छोड़ी जाती है। मित समय यह शास्त्रीय कल्पना लोगोंको विदित नहीं थी उस समय तो ऐस प्रक्रिया देखकर लोगोने यही समझा होगा कि इसमें भूतपिशाच ही की क करामात है। वर्तमानमें यह रहस्य प्रगट हो जानेपर भूतपिशाचण कल्पनाको स्थान नहीं रहा है। परंतु भौतिकशाखसे यह मालूम हो जानेपर में कि विधुव्यवाहसे तोप छूट सकती है, यह नहीं मालूम होता कि क्यों छूट है? क्योंकि छोड़नेवालेकी इच्छा शक्ति सम्पूर्ण मिस्र वस्तुओंका संबंध जोड़ती' और तोप छूटनेकी क्रियाका ज्ञान कराने में सहायता देती है। बिना उ आने तोप छूटने के चमत्कारका पूर्ण ज्ञान होना, नहीं कहा जा सकता साराश यह है कि कटकी विचार सरणीसे ही किसी न किसी श्रेष्ठशक्किम कल्पना करना ही पड़ती है। अंतर इतना ही रह जाता है कि कैंट ए होत ही पीछे से आकर छोड़ देता है और हम उसे ठेठव पहुंचा देते हैं। इसका अनीश्वरवादी शायद यह उत्तर देंगे कि जिस प्रक उत्तरोगर प्रगति करनेवाला भांतिकशास ठंडा उतरकर एफके बाद प कढ़ीकी गोज करता है उसी प्रकार अधिक शोध होनेपर यह उठतक पहुँ मफेगा। परंतु यह कहना भी ठीक नहीं। क्योंकि आधिमांतिकशास्त्रों से मोर होती है यह मूटियमरकारोंके नियमोंकी ही होती है, कारणका प नहीं लगता। ज्यों ज्यों गहरे जायेंगे त्यो स्यों अधिकाधिक नियमोंका श दो महंगा परंतु सम्पूर्ण धमाकारोंका आदि कारण जो इष्ठाशक्ति अप संख्यात्मक विज्ञान है उसका बोध नहीं हो सकेगा। अतएव अभी पार्टियों का यह दूसरा आक्षेप भी फल मित्र होता है। लोग आप
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शाहरुख खान की फिल्म 'पठान' के गाने 'बेशरम रंग' ने दिमाग के तार ढीले कर दिए हैं। बड़े और नामी एक्टर्स तक इसके खिलाफ हो गए हैं। जगह-जगह लोगों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। दीपिका पादुकोण की 'बिकिनी' पर मचे हंगामे के बीच बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख ने भी रिएक्ट किया है।
अपनी अदायगी और नजाकत के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस आशा पारेख के लाखों दीवाने हैं। उनकी खूबसूरती पर लोग फिदा थे। इसी साल उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी नवाजा गया। अब उन्होंने अपनी लाइफ पर बात करने के साथ-साथ पठान के विवाद पर भी बात की है। उन्होंने फिल्मों से गायब हो रही मेलोडी और प्यार का भी जिक्र किया।
आशा पारेश ने मौजूदा फिल्मों की हालत पर कहा कि जो एंटरटेनमेंट फिल्में होती हैं, उसमें बेचारी एक्ट्रेसेस को कुछ करने के लिए ही नहीं मिलता। हां कुछ विमेन ओरिएंटेड फिल्में हैं, जो काबिलेतारीफ हैं। लेकिन आज जो बड़ी-बड़ी फिल्में बन रही हैं, उनमें एक्ट्रेसेस का रोल बहुत छोटा हो गया है। उन्हें कम स्क्रीन स्पेस मिल रहा है। ये मेल डॉमिनेटेड इंडस्ट्री रही है इसलिए मैं इसमें बदलाव देखना चाहती हूं।
आशा पारेश ने कहा कि सिनेमा में अब प्यार और मेलोडी दोनों ही गायब हो गए हैं। कहानी मरती जा रही है। फिल्म की आत्मा ही नहीं है। अगर कंटेंट अच्छा न हो तो वो नहीं चलती हैं। मेरी फिल्म चिराग जिसमें मैंने अंधी का किरदार निभाया था, वह मूवी मुझे बहुत पसंद थी लेकिन दर्शकों को ये पसंद नहीं आई। लोगों का कहना था कि मुझे इसमें अंधा क्यों बना दिया गया है। उस समय भी दर्शकों के मन को समझ पाना बेहद मुश्किल था।
आशा पारेख ने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री मरती जा रही है। अब किसी एक्ट्रेस ने नारंगी रंग पहन लिया है या फिर नाम कुछ ऐसा रखा गया है तो उसे बैन कर रहे हैं। ये अच्छा नहीं लगता है। फिल्में चल ही नहीं रही हैं। स्थिति पहले से ही खराब है और ऊपर से अब बायकॉट और बैन आ गया, जिससे सिर्फ नुकसान हो रहा है। लोग वैसे ही थिएटर्स में नहीं जा रहे हैं। अगर ऐसे ही फिल्में पिटती रहीं तो दूसरी कैसे बनेंगी। ऐसे में तो इंडस्ट्री ही खत्म हो जाएगी।
आशा पारेख से 'पठान' के गाने पर मचे बवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यहां बवाल बिकिनी पर नहीं बल्कि उसके रंग पर था। लोग ऑरेंज बिकिनी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में उनका कहना है कि अब हमारा दिमाग बंद होता जा रहा है। हम बहुत ही छोटी सोच के होते जा रहे हैं जो कि गलत है। बॉलीवुड हमेशा से ही लोगों के लिए आसान टारगेट रहा है।
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शाहरुख खान की फिल्म 'पठान' के गाने 'बेशरम रंग' ने दिमाग के तार ढीले कर दिए हैं। बड़े और नामी एक्टर्स तक इसके खिलाफ हो गए हैं। जगह-जगह लोगों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। दीपिका पादुकोण की 'बिकिनी' पर मचे हंगामे के बीच बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख ने भी रिएक्ट किया है। अपनी अदायगी और नजाकत के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस आशा पारेख के लाखों दीवाने हैं। उनकी खूबसूरती पर लोग फिदा थे। इसी साल उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी नवाजा गया। अब उन्होंने अपनी लाइफ पर बात करने के साथ-साथ पठान के विवाद पर भी बात की है। उन्होंने फिल्मों से गायब हो रही मेलोडी और प्यार का भी जिक्र किया। आशा पारेश ने मौजूदा फिल्मों की हालत पर कहा कि जो एंटरटेनमेंट फिल्में होती हैं, उसमें बेचारी एक्ट्रेसेस को कुछ करने के लिए ही नहीं मिलता। हां कुछ विमेन ओरिएंटेड फिल्में हैं, जो काबिलेतारीफ हैं। लेकिन आज जो बड़ी-बड़ी फिल्में बन रही हैं, उनमें एक्ट्रेसेस का रोल बहुत छोटा हो गया है। उन्हें कम स्क्रीन स्पेस मिल रहा है। ये मेल डॉमिनेटेड इंडस्ट्री रही है इसलिए मैं इसमें बदलाव देखना चाहती हूं। आशा पारेश ने कहा कि सिनेमा में अब प्यार और मेलोडी दोनों ही गायब हो गए हैं। कहानी मरती जा रही है। फिल्म की आत्मा ही नहीं है। अगर कंटेंट अच्छा न हो तो वो नहीं चलती हैं। मेरी फिल्म चिराग जिसमें मैंने अंधी का किरदार निभाया था, वह मूवी मुझे बहुत पसंद थी लेकिन दर्शकों को ये पसंद नहीं आई। लोगों का कहना था कि मुझे इसमें अंधा क्यों बना दिया गया है। उस समय भी दर्शकों के मन को समझ पाना बेहद मुश्किल था। आशा पारेख ने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री मरती जा रही है। अब किसी एक्ट्रेस ने नारंगी रंग पहन लिया है या फिर नाम कुछ ऐसा रखा गया है तो उसे बैन कर रहे हैं। ये अच्छा नहीं लगता है। फिल्में चल ही नहीं रही हैं। स्थिति पहले से ही खराब है और ऊपर से अब बायकॉट और बैन आ गया, जिससे सिर्फ नुकसान हो रहा है। लोग वैसे ही थिएटर्स में नहीं जा रहे हैं। अगर ऐसे ही फिल्में पिटती रहीं तो दूसरी कैसे बनेंगी। ऐसे में तो इंडस्ट्री ही खत्म हो जाएगी। आशा पारेख से 'पठान' के गाने पर मचे बवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यहां बवाल बिकिनी पर नहीं बल्कि उसके रंग पर था। लोग ऑरेंज बिकिनी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में उनका कहना है कि अब हमारा दिमाग बंद होता जा रहा है। हम बहुत ही छोटी सोच के होते जा रहे हैं जो कि गलत है। बॉलीवुड हमेशा से ही लोगों के लिए आसान टारगेट रहा है।
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नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) शनिवार को भाषा की विभिन्न फाइल से दोपहर दो बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं :
आज बेंगलुरु (Bengaluru) में सिद्धारमैया कर्नाटक के नए सीएम पद की शपथ लेंगे। कई विपक्षी नेता इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे।
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नयी दिल्ली, बीस मई शनिवार को भाषा की विभिन्न फाइल से दोपहर दो बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं : आज बेंगलुरु में सिद्धारमैया कर्नाटक के नए सीएम पद की शपथ लेंगे। कई विपक्षी नेता इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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सभी लोग डॉक्टरों को समय पर नहीं बदलते हैं। कुछ लोगों को ऐसा अवसर नहीं है, जबकि अन्य ने परिचितों की सलाह के आधार पर बीमारियों से छुटकारा पाने का सबसे संदिग्ध तरीका चुना है - स्व-दवा।
अप्रिय खुजली का कारण हो सकता हैः
• अनुचित तरीके से चुने गए सनी के नुकसान। ज्यादातर अक्सर वे होते हैं जब कृत्रिम पहने हुए होते हैं, लेकिन बहुत बड़ी या छोटी सूती जाँघिया भी त्वचा को दबाए या रगड़ कर देते हैं और खुजली पैदा कर सकते हैं। इस क्षेत्र में पकड़े बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है।
• कभी-कभी यह प्रारंभिक से एक अंतरंग जगह में होता हैलापरवाही। दिन में कम से कम दो बार जननांगों को धोने के लिए आवश्यक है, और नियमों के अनुसार इसे करें। आवंटन और पसीना बैक्टीरिया के लिए एक अच्छा प्रजनन मैदान है।
• क्यों अंतरंग जगह खरोंच है? खुजली एक एलर्जी का संकेत हो सकती है यह गरीब या असंतुलित पोषण, खराब पारिस्थितिकी, गंदा जल निकायों में स्नान या नशीली दवाओं के उपचार की प्रतिक्रिया के कारण होता है। एलर्जी भी कंडोम, पानी, साबुन और अंतरंग स्वच्छता के लिए इस्तेमाल किया क्रीम पर स्नेहन का कारण हो सकता है।
• सबसे सामान्य सवाल यह क्यों हैएक अंतरंग स्थान, उन लोगों से पूछें जो नियमित रूप से बिकनी क्षेत्र का मिथ्या या एपिलेशन करते हैं। कभी-कभी, खासकर यदि आप रेजर का उपयोग करते हैं, तो त्वचा को त्वचा की सबसे पतली परत के साथ बाल निकाला जाता है। हीलिंग, यह खुजली का कारण बनता है इसके अलावा, नव बढ़ते बाल हमेशा खरोंच की एक अनूठा इच्छा पैदा करते हैं।
सभी सूचीबद्ध कारण न केवल सक्षम हैंगंभीर खुजली का कारण यदि प्रभावित त्वचा को संक्रमण हो जाता है, तो उसे बहुत लंबे समय तक इलाज करना होगा। हालांकि, यह सबसे बुरी बात नहीं है क्यों अंदर एक अंतरंग जगह है चोट लगी है? क्योंकि किसी व्यक्ति को एक रोमांटिक या संक्रामक रोग के साथ बीमार है मजबूत खुजली और सफेद निर्वहन चिड़िया के साथ दिखाई देते हैं। Colpitis, बैक्टीरियल vaginosis, trichomoniasis, क्लैमाइडिया, अधिक दर्जनों रोग भी सामान्य खुजली के साथ शुरू। और वे साथी संक्रमण, गंभीर सूजन रोगों और कभी-कभी बांझपन के साथ समाप्त होते हैं।
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सभी लोग डॉक्टरों को समय पर नहीं बदलते हैं। कुछ लोगों को ऐसा अवसर नहीं है, जबकि अन्य ने परिचितों की सलाह के आधार पर बीमारियों से छुटकारा पाने का सबसे संदिग्ध तरीका चुना है - स्व-दवा। अप्रिय खुजली का कारण हो सकता हैः • अनुचित तरीके से चुने गए सनी के नुकसान। ज्यादातर अक्सर वे होते हैं जब कृत्रिम पहने हुए होते हैं, लेकिन बहुत बड़ी या छोटी सूती जाँघिया भी त्वचा को दबाए या रगड़ कर देते हैं और खुजली पैदा कर सकते हैं। इस क्षेत्र में पकड़े बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है। • कभी-कभी यह प्रारंभिक से एक अंतरंग जगह में होता हैलापरवाही। दिन में कम से कम दो बार जननांगों को धोने के लिए आवश्यक है, और नियमों के अनुसार इसे करें। आवंटन और पसीना बैक्टीरिया के लिए एक अच्छा प्रजनन मैदान है। • क्यों अंतरंग जगह खरोंच है? खुजली एक एलर्जी का संकेत हो सकती है यह गरीब या असंतुलित पोषण, खराब पारिस्थितिकी, गंदा जल निकायों में स्नान या नशीली दवाओं के उपचार की प्रतिक्रिया के कारण होता है। एलर्जी भी कंडोम, पानी, साबुन और अंतरंग स्वच्छता के लिए इस्तेमाल किया क्रीम पर स्नेहन का कारण हो सकता है। • सबसे सामान्य सवाल यह क्यों हैएक अंतरंग स्थान, उन लोगों से पूछें जो नियमित रूप से बिकनी क्षेत्र का मिथ्या या एपिलेशन करते हैं। कभी-कभी, खासकर यदि आप रेजर का उपयोग करते हैं, तो त्वचा को त्वचा की सबसे पतली परत के साथ बाल निकाला जाता है। हीलिंग, यह खुजली का कारण बनता है इसके अलावा, नव बढ़ते बाल हमेशा खरोंच की एक अनूठा इच्छा पैदा करते हैं। सभी सूचीबद्ध कारण न केवल सक्षम हैंगंभीर खुजली का कारण यदि प्रभावित त्वचा को संक्रमण हो जाता है, तो उसे बहुत लंबे समय तक इलाज करना होगा। हालांकि, यह सबसे बुरी बात नहीं है क्यों अंदर एक अंतरंग जगह है चोट लगी है? क्योंकि किसी व्यक्ति को एक रोमांटिक या संक्रामक रोग के साथ बीमार है मजबूत खुजली और सफेद निर्वहन चिड़िया के साथ दिखाई देते हैं। Colpitis, बैक्टीरियल vaginosis, trichomoniasis, क्लैमाइडिया, अधिक दर्जनों रोग भी सामान्य खुजली के साथ शुरू। और वे साथी संक्रमण, गंभीर सूजन रोगों और कभी-कभी बांझपन के साथ समाप्त होते हैं।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे इन दिनों यूरोप में छुट्टियां बिता रही हैं और वहां से अपनी खूबसूरत तस्वीरें साझा कर रही हैं। अभिनेत्री हाल ही में 'लाइगर' में नजर आई थीं, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित नहीं हुई। इसके बाद अनन्या ब्रेक पर चली गई हैं। हाल ही में अनन्या ने गुलाबी आसमान के साथ अपनी तस्वीरें साझा की हैं।
अनन्या पांडे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई सारी तस्वीर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में वह व्हाइट ऑफ शोल्डर ड्रेस में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानों में बड़े इयररिंग्स पहने हुए हैं। अनन्या ने एक छोटी सी वीडियो भी शेयर की है, जिसमें वह विशिंग फाउंटेन में सिक्का डालकर विश मांगती नजर आ रही हैं। वहीं, गुलाबी आसमान के सामने पोज देती हुई अनन्या काफी खूबसूरत लग रही हैं। अनन्या ने कैप्शन में लिखा, 'पिंक स्काई और विशिंग फाउंटेन। '
अनन्या की इन तस्वीरों को उनके चाहने वाले काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं, तस्वीरों पर फैंस के साथ उनके दोस्त और सेलेब्स भी कमेंट कर रहे हैं। शनाया कपूर ने लिखा, 'तुम बहुत खूबसूरत हो', तो सुहाना ने लिखा, 'क्या तुमने मेरे वहां होने की विश मांगी। ' वहीं, भावना पांडे ने लिखा, 'आपकी सारी ख्वाहिश और सपने पूरे हो। ' इसके अलावा भी लोग अनन्या की तारीफ कर रहे हैं।
अनन्या पांडे के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह 'लाइगर' में विजय देवरकोंडा के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म से अनन्या ने साउथ में डेब्यू किया था, तो विजय ने बॉलीवुड में कदम रखा था। जगन्नाथ पुरी द्वारा निर्देशित फिल्म में अभिनेत्री राम्या कृष्णन भी नजर आईं थीं। लेकिन 25 अगस्त को रिलीज हुई ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे इन दिनों यूरोप में छुट्टियां बिता रही हैं और वहां से अपनी खूबसूरत तस्वीरें साझा कर रही हैं। अभिनेत्री हाल ही में 'लाइगर' में नजर आई थीं, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित नहीं हुई। इसके बाद अनन्या ब्रेक पर चली गई हैं। हाल ही में अनन्या ने गुलाबी आसमान के साथ अपनी तस्वीरें साझा की हैं। अनन्या पांडे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई सारी तस्वीर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में वह व्हाइट ऑफ शोल्डर ड्रेस में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानों में बड़े इयररिंग्स पहने हुए हैं। अनन्या ने एक छोटी सी वीडियो भी शेयर की है, जिसमें वह विशिंग फाउंटेन में सिक्का डालकर विश मांगती नजर आ रही हैं। वहीं, गुलाबी आसमान के सामने पोज देती हुई अनन्या काफी खूबसूरत लग रही हैं। अनन्या ने कैप्शन में लिखा, 'पिंक स्काई और विशिंग फाउंटेन। ' अनन्या की इन तस्वीरों को उनके चाहने वाले काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं, तस्वीरों पर फैंस के साथ उनके दोस्त और सेलेब्स भी कमेंट कर रहे हैं। शनाया कपूर ने लिखा, 'तुम बहुत खूबसूरत हो', तो सुहाना ने लिखा, 'क्या तुमने मेरे वहां होने की विश मांगी। ' वहीं, भावना पांडे ने लिखा, 'आपकी सारी ख्वाहिश और सपने पूरे हो। ' इसके अलावा भी लोग अनन्या की तारीफ कर रहे हैं। अनन्या पांडे के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह 'लाइगर' में विजय देवरकोंडा के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म से अनन्या ने साउथ में डेब्यू किया था, तो विजय ने बॉलीवुड में कदम रखा था। जगन्नाथ पुरी द्वारा निर्देशित फिल्म में अभिनेत्री राम्या कृष्णन भी नजर आईं थीं। लेकिन पच्चीस अगस्त को रिलीज हुई ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई।
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हैदराबाद : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य सचिवालय में एक मंदिर और मस्जिद गिराए जाने की घटना की निंदा की है। ओवैसी ने मंदिर और मस्जिद दोनों को दोबारा बनाने की मांग करते हुए इन्हें गिराने वाले ठेकेदार को गिरफ्तार किए जाने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि वह नए सचिवालय के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान मस्जिद और मंदिर को नहीं गिराया जाना चाहिए था।
समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में ओवैसी ने कहा, 'तेलंगाना में सचिवालय भवन को गिराने की प्रक्रिया के दौरान मंदिर और मस्जिद दोनों को तोड़ दिया गया। मंदिर और मस्जिद गिराने के लिए ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लोगों को यह पता चलना चाहिए कि हम इस घटना की निंदा करते हैं। ' ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक अकबरूद्दीन ओवैसी और मोअज्ज्म खान ने राज्य विधानसभा को इस मामले को देखने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा, 'हम नए सचिवालय के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम चाह रहे थे कि तोड़फोड़ की प्रक्रिया में इन दोनों ढांचो को गिराया न जाए। ' ओवैसी ने इन ढांचों का दोबारा निर्माण किए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया है। ओवैसी ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि मस्जिद को उसी जगह पर दोबारा बनाया जाएगा जहां वह पहले थी। हम उम्मीद करते हैं कि मुख्यमंत्री हमारे नुमाइंदों से बात करेंगे और मस्जिद को लेकर हमारी भावनाओं एवं उम्मीदों को समझेंगे। '
एआईएमआईएम नेता ने तेलंगाना के सरकारी अस्पतालों का दौरा कर मरीजों का हाल चाल जाना। उन्होंने लोगों से कोविड जांच को लेकर अफवाहों में न आने की अपील की। ओवैसी ने खुद की कोरोना जांच कराई। ओवैसी ने गुरुवार रात अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तेलंगाना में कोविड-19 सरकारी अस्पतालों को लेकर झूठी कहानियों से कई लोगों के दिमाग में इसकी एक बेहद खराब छवि बन रही है और इससे उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। '
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हैदराबाद : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य सचिवालय में एक मंदिर और मस्जिद गिराए जाने की घटना की निंदा की है। ओवैसी ने मंदिर और मस्जिद दोनों को दोबारा बनाने की मांग करते हुए इन्हें गिराने वाले ठेकेदार को गिरफ्तार किए जाने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि वह नए सचिवालय के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान मस्जिद और मंदिर को नहीं गिराया जाना चाहिए था। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में ओवैसी ने कहा, 'तेलंगाना में सचिवालय भवन को गिराने की प्रक्रिया के दौरान मंदिर और मस्जिद दोनों को तोड़ दिया गया। मंदिर और मस्जिद गिराने के लिए ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लोगों को यह पता चलना चाहिए कि हम इस घटना की निंदा करते हैं। ' ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक अकबरूद्दीन ओवैसी और मोअज्ज्म खान ने राज्य विधानसभा को इस मामले को देखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, 'हम नए सचिवालय के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम चाह रहे थे कि तोड़फोड़ की प्रक्रिया में इन दोनों ढांचो को गिराया न जाए। ' ओवैसी ने इन ढांचों का दोबारा निर्माण किए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया है। ओवैसी ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि मस्जिद को उसी जगह पर दोबारा बनाया जाएगा जहां वह पहले थी। हम उम्मीद करते हैं कि मुख्यमंत्री हमारे नुमाइंदों से बात करेंगे और मस्जिद को लेकर हमारी भावनाओं एवं उम्मीदों को समझेंगे। ' एआईएमआईएम नेता ने तेलंगाना के सरकारी अस्पतालों का दौरा कर मरीजों का हाल चाल जाना। उन्होंने लोगों से कोविड जांच को लेकर अफवाहों में न आने की अपील की। ओवैसी ने खुद की कोरोना जांच कराई। ओवैसी ने गुरुवार रात अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तेलंगाना में कोविड-उन्नीस सरकारी अस्पतालों को लेकर झूठी कहानियों से कई लोगों के दिमाग में इसकी एक बेहद खराब छवि बन रही है और इससे उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। '
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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि मौजूदा हालात में जैविक खेती के महत्व और उसके लाभ को ध्यान में रखकर भारत सरकार देश भर में जैविक कृषि को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के अंतर्गत परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए जैविक मूल्य श्रंखला विकास (ओवीसीडीएनईआर) योजनाओं की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि पहले जैविक खेती को बारानी, पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग बहुत कम है I कृषि मंत्री ये बात आज देहरादून में सेवा भारती द्वारा आयोजित जैविक खेती सम्मेलन में कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक कृषि न केवल वायु, जल एवं मृदा से अत्यधिक रसायनों को बाहर करते हुए पर्यावरण से विषाक्त भार कम करता है बल्कि यह लम्बी अवधि तक स्वस्थ मृदा को तैयार/पुनर्सृजन करने और जैव विविधता को बढ़ाने एवं संरक्षित करने में भी मदद करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 के दौरान जंगली फसल को छोड़कर जैविक प्रमाणन के तहत वर्तमान में जैविक कृषि में कुल क्षेत्र 14.90 लाख हैक्टेयर है। गरीब एवं सीमांत किसान उच्च लागत के कारण इसे अपना नहीं रहे हैं इसलिए घरेलू जैविक मंडी विकास के लिए पीजीएस-भारत कार्यक्रम की शुरूआत की गई है।
उन्होंने जानकारी दी कि परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) पहली व्यापक योजना है जिसे एक केन्द्रींय प्रायोजित कार्यक्रम (सीएसपी) के रूप में शुरू किया गया है। इस योजना का कार्यान्वयन प्रति 20 हैक्टेयर के कलस्टर आधार पर राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। कलस्टर के अंतर्गत किसानों को अधिकतम 1 हैक्टेयर तक की वित्तीय सहायता दी जाती है और सहायता की सीमा 3 वर्षों के रूपांतरण की अवधि के दौरान प्रति हैक्टेयर 50,000 रूपये है। 2 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 10,000 कलस्टरों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि मौजूदा हालात में जैविक खेती के महत्व और उसके लाभ को ध्यान में रखकर भारत सरकार देश भर में जैविक कृषि को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के अंतर्गत परंपरागत कृषि विकास योजना और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए जैविक मूल्य श्रंखला विकास योजनाओं की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि पहले जैविक खेती को बारानी, पहाड़ी एवं आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग बहुत कम है I कृषि मंत्री ये बात आज देहरादून में सेवा भारती द्वारा आयोजित जैविक खेती सम्मेलन में कही। कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक कृषि न केवल वायु, जल एवं मृदा से अत्यधिक रसायनों को बाहर करते हुए पर्यावरण से विषाक्त भार कम करता है बल्कि यह लम्बी अवधि तक स्वस्थ मृदा को तैयार/पुनर्सृजन करने और जैव विविधता को बढ़ाने एवं संरक्षित करने में भी मदद करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह के दौरान जंगली फसल को छोड़कर जैविक प्रमाणन के तहत वर्तमान में जैविक कृषि में कुल क्षेत्र चौदह.नब्बे लाख हैक्टेयर है। गरीब एवं सीमांत किसान उच्च लागत के कारण इसे अपना नहीं रहे हैं इसलिए घरेलू जैविक मंडी विकास के लिए पीजीएस-भारत कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि परंपरागत कृषि विकास योजना पहली व्यापक योजना है जिसे एक केन्द्रींय प्रायोजित कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया है। इस योजना का कार्यान्वयन प्रति बीस हैक्टेयर के कलस्टर आधार पर राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। कलस्टर के अंतर्गत किसानों को अधिकतम एक हैक्टेयर तक की वित्तीय सहायता दी जाती है और सहायता की सीमा तीन वर्षों के रूपांतरण की अवधि के दौरान प्रति हैक्टेयर पचास,शून्य रूपये है। दो लाख हैक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए दस,शून्य कलस्टरों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
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सिरमौरः राजगढ़ उपमंडल के तहत पड़ते नई नेटी के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई है। मृतक की पहचान गीताराम (53) पुत्र कांशीराम निवासी ग्राम नगाली बड़ोग तहसील जिला सोलन के तौर पर हुई है। हादसे गुरुवार रात 10 बजे के करीब पेस आया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ट्रक नंबर पीबी-65P-1988 में सवार चालक जब उपमंडल स्थित नई नेटी के पास पहुंचा तो अचानक ट्रक पर से अपना नियंत्रण खो दिया। इस वजह से ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। इस हादसे में ट्रक चलाक की मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही हादसे के संबंध में मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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सिरमौरः राजगढ़ उपमंडल के तहत पड़ते नई नेटी के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई है। मृतक की पहचान गीताराम पुत्र कांशीराम निवासी ग्राम नगाली बड़ोग तहसील जिला सोलन के तौर पर हुई है। हादसे गुरुवार रात दस बजे के करीब पेस आया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया है। जानकारी के मुताबिक ट्रक नंबर पीबी-पैंसठP-एक हज़ार नौ सौ अठासी में सवार चालक जब उपमंडल स्थित नई नेटी के पास पहुंचा तो अचानक ट्रक पर से अपना नियंत्रण खो दिया। इस वजह से ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। इस हादसे में ट्रक चलाक की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही हादसे के संबंध में मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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मान के चलन के बहुत से लाभ थे । इस सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि स्वर्णमान एक स्वतन्त्र मान है। यह स्वतन्त्र वातावरण में ही सफलतापूर्वक कार्य कर सकता है। प्रथम महायुद्ध के पूर्व स्वर्णमान को न्यूनाधिक स्वतन्त्र वातावरण में कार्य करने को मिला इसलिए वह सफलतापूर्वक कार्य करता रहा। लेकिन प्रथम युद्ध के समय में तथा इसके बाद परिस्थितियों में बड़ा परिवर्तन हो गया और विभिन्न देशों ने मन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं स्वर्ण के भावागमन पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए, जिससे वह पुनः स्थापित होने के बाद भी सन् १९३१ में पुन टूट गया। किन्तु विभिन्न देशों के मध्य समझौतों के अन्तर्गत स्वर्ण अन्तर्राष्ट्रीय हिसाब-किताब के निपटारे का माध्यम बना रहा यद्यपि उसे करंसी यूनिट के रूप में पदच्युत कर दिया गया था । किन्तु भनेक गुणों के होते हुए भी ये समझौते द्वितीय महायुद्ध के प्रारम्भ होते हो टूट गये, क्योंकि वे युद्ध द्वारा उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों का सामना नहीं कर सके ।
द्वितीय महायुद्ध को समाप्ति पर एक बार फिर से अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग प्राप्त करने की चेष्टा की गई । सन् १९४४ मे ब्रटनवुड्स में एक अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक सम्मेलन हुआ। इसमें घन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में मुद्रा सहयोग सम्बन्धी एक योजना तैयार की गई, जिसके अन्तर्गत एक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) तथा एक अन्तर्राष्ट्रीय पुर्ननिर्माण और विकास बैंक (International Bank for Reconstruction and Development ) का निर्माण हुआ ।
ब्रटनवुड्स योजना के उद्देश्य निम्नलिखित थे - (१) अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों में स्थिरता रखना, (२) विदेशी विनिमय की दर में स्थायित्व लाना, और (३) विभिन्न राष्ट्रों की आर्थिक प्रगति में सहायता देना ।
अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की योजना में स्वर्ण का स्थान
इस योजना को विशेषता यह है कि इसके द्वारा स्वर्णमान के सारे लाभ तो प्राप्त हो गये हैं किन्तु जो दोष ये उनका निवारण अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग से किया गया है। प्रत्येक राष्ट्र अपनी प्रान्तरिक मुद्रा प्रणाली को राष्ट्रीय हित का ध्यान रखकर संचालित कर सकता है। इस योजना में स्वर्ण को भी अधिक आवश्यक्ता नहीं रहती क्योंकि घरेलू चलन में तो कागजी मुद्रा व साकेतिक मुद्रा ही होती है और अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान मन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के द्वारा किए जाते हैं। इस प्रकार स्वर्णमान को स्थापना तो नहीं हुई है किन्तु स्वर्ण को अन्तरर्राष्ट्रीय मूल्य-स्तर तथा विनिमय दरों का आधार बना दिया गया है। नई व्यवस्था में स्वर्ण का स्थान इस प्रकार है :(१)
प्रत्येक सदस्य देश को अपने कोटे का २५% या अपने पास के सोने का १०% सोना कोप में जमा करना पड़ता है ।
(२) प्रत्येक देश के चलन का मूल्य सोने में परिभाषित होता है, जिसके प्राधार पर विदेशी विनिमय दरें निर्धारित होती हैं। इसमें आवश्यकतानुसार कोष की अनुमति से परिवर्तन भी किया जा सकता है ।
(३) यदि कोप को अपने पास किसी भी देश को करेंसी का अभाव प्रतीत हो, तो उसे सोना देकर खरीद सकता है ।
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मान के चलन के बहुत से लाभ थे । इस सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि स्वर्णमान एक स्वतन्त्र मान है। यह स्वतन्त्र वातावरण में ही सफलतापूर्वक कार्य कर सकता है। प्रथम महायुद्ध के पूर्व स्वर्णमान को न्यूनाधिक स्वतन्त्र वातावरण में कार्य करने को मिला इसलिए वह सफलतापूर्वक कार्य करता रहा। लेकिन प्रथम युद्ध के समय में तथा इसके बाद परिस्थितियों में बड़ा परिवर्तन हो गया और विभिन्न देशों ने मन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं स्वर्ण के भावागमन पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए, जिससे वह पुनः स्थापित होने के बाद भी सन् एक हज़ार नौ सौ इकतीस में पुन टूट गया। किन्तु विभिन्न देशों के मध्य समझौतों के अन्तर्गत स्वर्ण अन्तर्राष्ट्रीय हिसाब-किताब के निपटारे का माध्यम बना रहा यद्यपि उसे करंसी यूनिट के रूप में पदच्युत कर दिया गया था । किन्तु भनेक गुणों के होते हुए भी ये समझौते द्वितीय महायुद्ध के प्रारम्भ होते हो टूट गये, क्योंकि वे युद्ध द्वारा उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों का सामना नहीं कर सके । द्वितीय महायुद्ध को समाप्ति पर एक बार फिर से अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग प्राप्त करने की चेष्टा की गई । सन् एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस मे ब्रटनवुड्स में एक अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक सम्मेलन हुआ। इसमें घन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में मुद्रा सहयोग सम्बन्धी एक योजना तैयार की गई, जिसके अन्तर्गत एक अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा एक अन्तर्राष्ट्रीय पुर्ननिर्माण और विकास बैंक का निर्माण हुआ । ब्रटनवुड्स योजना के उद्देश्य निम्नलिखित थे - अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों में स्थिरता रखना, विदेशी विनिमय की दर में स्थायित्व लाना, और विभिन्न राष्ट्रों की आर्थिक प्रगति में सहायता देना । अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की योजना में स्वर्ण का स्थान इस योजना को विशेषता यह है कि इसके द्वारा स्वर्णमान के सारे लाभ तो प्राप्त हो गये हैं किन्तु जो दोष ये उनका निवारण अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग से किया गया है। प्रत्येक राष्ट्र अपनी प्रान्तरिक मुद्रा प्रणाली को राष्ट्रीय हित का ध्यान रखकर संचालित कर सकता है। इस योजना में स्वर्ण को भी अधिक आवश्यक्ता नहीं रहती क्योंकि घरेलू चलन में तो कागजी मुद्रा व साकेतिक मुद्रा ही होती है और अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान मन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के द्वारा किए जाते हैं। इस प्रकार स्वर्णमान को स्थापना तो नहीं हुई है किन्तु स्वर्ण को अन्तरर्राष्ट्रीय मूल्य-स्तर तथा विनिमय दरों का आधार बना दिया गया है। नई व्यवस्था में स्वर्ण का स्थान इस प्रकार है : प्रत्येक सदस्य देश को अपने कोटे का पच्चीस% या अपने पास के सोने का दस% सोना कोप में जमा करना पड़ता है । प्रत्येक देश के चलन का मूल्य सोने में परिभाषित होता है, जिसके प्राधार पर विदेशी विनिमय दरें निर्धारित होती हैं। इसमें आवश्यकतानुसार कोष की अनुमति से परिवर्तन भी किया जा सकता है । यदि कोप को अपने पास किसी भी देश को करेंसी का अभाव प्रतीत हो, तो उसे सोना देकर खरीद सकता है ।
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फिल्मी दुनिया चकाचौंध से भरी हुई है। खासकर हीरोइनों की बात करें तो वो हमेशा से बेदाग चेहरे वाली चमकती हुई गुड़िया सी नजर आती हैं। अक्सर हम सोचते हैं कि हीरोइनें असली जिन्दगी में भी वैसी ही होती हैं जैसी वो फिल्मों में नजर आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है इस बात में पूरी सच्चाई नहीं है। कुछ हीरोइनें तो मेकअप के बिना भी अच्छी वगती हैं लेकिन कुछ के चेहरे तो बिना मेकअप के पहचानने भी मुश्किल हो जाते हैं। हम आपको आज बॉलीवुड और टॉलीवुड की पांच हीरोइनों की फोटो को बिना मेकअप के दिखाते हैं और देखते हैं आपको वो बिना मेकअप के कैसी लगीं।
शाहरुख खान के साथ अपने करियर का आगाज करने वाली अनुष्का शर्मा किसी नाम की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में बुलंदी को हासिल कर लिया है। उनकी शादी विराट कोहली से हुई है जो बड़े क्रिकेटर हैं। दोनों की एक बेटी भी है। अनुष्का शर्मा मेकअप में तो काफी चमकती सी नजर आती हैं लेकिन देखिए बिना मेकअप उनका चेहरा भी किसी साधारण लड़की के जैसा ही है।
बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में कैटरीना कैफ का नाम भी आता है। वो सलमान खान की गर्लफ्रैंड भी रह चुकी हैं। अमिताभा के साथ करियर शुरू करने वाली कैट ने हाल ही में विकी कौशल से शादी की है जो खुद भी एक अभिनेता हैं। दोनों ने धूमधाम से शादी की थी। कैट की बिना मेकअप की फोटो देखकर भी वो प्यारी लगती हैं। हालांकि जो बात मेकअप वाली कैटरीना में नजर आती है, वो बात बिना मेकअप की कैट में नहीं दिखती है। उनके चेहरे पर वो चमक नहीं नजर आती है।
सैफ अली खान की पत्नी और दो बच्चों की मां करीना कपूर को सभी जानते होंगे। उनका फिल्मों में जो चेहरा है, वो मेकअप की वजह से काफी साफ और चमकदार दिखाई देता है। हालांकि असल जिन्दगी में उनके चेहरे पर लाल झाइयां नजर आती हैं। वो भी किसी साधारण सी त्वचा वाली लड़की ही दिखती हैं। वैसे करीना कपूर को अपना चेहरा छिपाने का शौक नहीं है। वो साधारण दिखना ही पसंद करती हैं। कपूर खानदान की चहेती अदाकारा अब फिल्मों में कम ही नजर आती है।
साउथ अभिनेत्री नयनतारा भी काफी मशहूर हैं। उनका नाम प्रभु देवा की शादीशुदा जिन्दगी में बवाल करवाने में सामने आया था। नयनतारा मेकअप में तो बहुत अच्छी लगती हैं लेकिन बिना मेकअप उनको पहचानना भी बड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि नयनतारा बिना मेकअप भी फैन्स के सामने आती हैं और उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। नयनतारा अभी कई फिल्मों में नजर आएंगी।
बाहुबली फेम एक्ट्रेस अनुष्का शेट्टी साउथ फिल्मों का बड़ा नाम हैं। उनका चेहरा भी मेकअप में काफी दमकता दिखता है लेकिन मेकअप हटने के बाद वो भी किसी साधारण सी लड़की ही नजर आती हैं। बिना मेकअप उनके चेहरे की चमक भी गायब हो जाती है। अनुष्का शेट्टी अपना वजन भी काफी बढ़ा लेती हैं जिसको लेकर वो काफी ट्रोल भी होती हैं।
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फिल्मी दुनिया चकाचौंध से भरी हुई है। खासकर हीरोइनों की बात करें तो वो हमेशा से बेदाग चेहरे वाली चमकती हुई गुड़िया सी नजर आती हैं। अक्सर हम सोचते हैं कि हीरोइनें असली जिन्दगी में भी वैसी ही होती हैं जैसी वो फिल्मों में नजर आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है इस बात में पूरी सच्चाई नहीं है। कुछ हीरोइनें तो मेकअप के बिना भी अच्छी वगती हैं लेकिन कुछ के चेहरे तो बिना मेकअप के पहचानने भी मुश्किल हो जाते हैं। हम आपको आज बॉलीवुड और टॉलीवुड की पांच हीरोइनों की फोटो को बिना मेकअप के दिखाते हैं और देखते हैं आपको वो बिना मेकअप के कैसी लगीं। शाहरुख खान के साथ अपने करियर का आगाज करने वाली अनुष्का शर्मा किसी नाम की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में बुलंदी को हासिल कर लिया है। उनकी शादी विराट कोहली से हुई है जो बड़े क्रिकेटर हैं। दोनों की एक बेटी भी है। अनुष्का शर्मा मेकअप में तो काफी चमकती सी नजर आती हैं लेकिन देखिए बिना मेकअप उनका चेहरा भी किसी साधारण लड़की के जैसा ही है। बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में कैटरीना कैफ का नाम भी आता है। वो सलमान खान की गर्लफ्रैंड भी रह चुकी हैं। अमिताभा के साथ करियर शुरू करने वाली कैट ने हाल ही में विकी कौशल से शादी की है जो खुद भी एक अभिनेता हैं। दोनों ने धूमधाम से शादी की थी। कैट की बिना मेकअप की फोटो देखकर भी वो प्यारी लगती हैं। हालांकि जो बात मेकअप वाली कैटरीना में नजर आती है, वो बात बिना मेकअप की कैट में नहीं दिखती है। उनके चेहरे पर वो चमक नहीं नजर आती है। सैफ अली खान की पत्नी और दो बच्चों की मां करीना कपूर को सभी जानते होंगे। उनका फिल्मों में जो चेहरा है, वो मेकअप की वजह से काफी साफ और चमकदार दिखाई देता है। हालांकि असल जिन्दगी में उनके चेहरे पर लाल झाइयां नजर आती हैं। वो भी किसी साधारण सी त्वचा वाली लड़की ही दिखती हैं। वैसे करीना कपूर को अपना चेहरा छिपाने का शौक नहीं है। वो साधारण दिखना ही पसंद करती हैं। कपूर खानदान की चहेती अदाकारा अब फिल्मों में कम ही नजर आती है। साउथ अभिनेत्री नयनतारा भी काफी मशहूर हैं। उनका नाम प्रभु देवा की शादीशुदा जिन्दगी में बवाल करवाने में सामने आया था। नयनतारा मेकअप में तो बहुत अच्छी लगती हैं लेकिन बिना मेकअप उनको पहचानना भी बड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि नयनतारा बिना मेकअप भी फैन्स के सामने आती हैं और उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। नयनतारा अभी कई फिल्मों में नजर आएंगी। बाहुबली फेम एक्ट्रेस अनुष्का शेट्टी साउथ फिल्मों का बड़ा नाम हैं। उनका चेहरा भी मेकअप में काफी दमकता दिखता है लेकिन मेकअप हटने के बाद वो भी किसी साधारण सी लड़की ही नजर आती हैं। बिना मेकअप उनके चेहरे की चमक भी गायब हो जाती है। अनुष्का शेट्टी अपना वजन भी काफी बढ़ा लेती हैं जिसको लेकर वो काफी ट्रोल भी होती हैं।
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पेरिसः WHO ने कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की है। WHO ने कहा है कि वर्तमान में कोई सबूत नहीं है कि रेमडेसिवीर संक्रमित रोगियों की सेहत में कोई सुधार करता है। WHO ने कहा कि संक्रमित मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होनें कहा कि वर्तमान में मौजूद डेटा से इस बात कोई सबूत नहीं मिलता है कि रेमडेसिवीर मरीज की सेहत में अहम सुधार करता है।
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पेरिसः WHO ने कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की है। WHO ने कहा है कि वर्तमान में कोई सबूत नहीं है कि रेमडेसिवीर संक्रमित रोगियों की सेहत में कोई सुधार करता है। WHO ने कहा कि संक्रमित मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होनें कहा कि वर्तमान में मौजूद डेटा से इस बात कोई सबूत नहीं मिलता है कि रेमडेसिवीर मरीज की सेहत में अहम सुधार करता है।
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दिल्ली पुलिस ने फरार गैंगस्टर कुलदीप उर्फ फज्जा को रोहिणी में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया है. कुलदीप 25 मार्च को जीटीबी अस्पताल से पुलिस हिरासत से फरार हो गया था.
रोहिणी के सेक्टर 14 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम के साथ हुए एनकाउंटर में फज्जा घायल हो गया था, जिसके बाद उसे अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
इससे पहले 25 मार्च को दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन कुलदीप उर्फ फज्जा को ओपीडी में इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंची थी, तभी दोपहर करीब साढ़े 12 बजे पांच लोगों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया और इसी में कुलदीप फरार हो गया था. एक हमलावर मौके पर मार गिराया गया था.
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दिल्ली पुलिस ने फरार गैंगस्टर कुलदीप उर्फ फज्जा को रोहिणी में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया है. कुलदीप पच्चीस मार्च को जीटीबी अस्पताल से पुलिस हिरासत से फरार हो गया था. रोहिणी के सेक्टर चौदह में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम के साथ हुए एनकाउंटर में फज्जा घायल हो गया था, जिसके बाद उसे अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. इससे पहले पच्चीस मार्च को दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन कुलदीप उर्फ फज्जा को ओपीडी में इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंची थी, तभी दोपहर करीब साढ़े बारह बजे पांच लोगों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया और इसी में कुलदीप फरार हो गया था. एक हमलावर मौके पर मार गिराया गया था.
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यह दिखाना चाहते थे कि अधिकारियोंकी सहायताके बिना वे अपने जानमालकी रक्षा नही कर सकते ।' दंगेके समय पुलिसका ऐसा रवैया सर्वथा निन्दनीय और अक्षम्य है । सभी श्रेणी और वर्गोके गवाहोंने एक स्वरसे यह बात स्वीकार की कि पुलिसने दंगेकी विभिन्न घटनाओके सम्बन्धमे तटस्थता और निष्क्रियता दिखायी, मानो उसे इन बातोसे कोई मतलब ही न था । इन गवाहोमें यूरोपियन व्यापारी, सभी मतो और विचारोके मुसलमान और हिन्दू सैनिक अधिकारी अपर इण्डियन चेम्बर आव कामर्सके मन्त्री, भारतीय ईसाई सम्प्रदायके प्रतिनिधि तथा भारतीय अधिकारीतक थे । गवाहीमें कही गयी बातोंमें इन सबकी एक स्वरसे कही गयी इस बातकी उपेक्षा करना असम्भव है ...... हमे इस बातमें भी लेशमात्र सन्देह नही कि दंगेके आरम्भिक तीन दिनोमे पुलिसने अपने कर्तव्यपालनमें वह तत्परता नही दिखायी जो उसे दिखानी चाहिये थी । ........ .. अनेक गवाहोने ऐसी भीषण घटनाओं के विवरण दिये है जो पुलिसकी आंखोके सम्मुख घट रही थी परन्तु पुलिस चुप बैठी तमाशा देख रही थी। अनेक गवाहोने हमें बताया है तथा जिला मजिस्ट्रेटने भी अपने बयानमे कहा है कि पुलिसकी तटस्थता और निष्क्रियताकी उस समय शिकायतें की गयी थीं । खेदकी बात है कि ऐसी शिकायतोंकी ओर कोई ध्यान नही दिया गया ।"
त्रिभुजके आधारकी वृद्धि
दिसम्बर १९२६ में कांग्रेसके गोहाटी अधिवेशनके ठीक पूर्व दिल्ली में एक धर्मान्ध मुसलमानने जाकर मुलाकातके बहाने रोगशय्यापर पड़े स्वामी
* के० बी कृष्णः 'दि प्राब्लेम आव माइनारिटीज', पृष्ठ २७२-२७३
श्रद्धानन्दकी निर्दयतापूर्वक हत्या कर डाली । इससे स्वभावतः सारे देशमें आतंककी एक लहर फैल गयी और यह बात महसूस करने लगे कि हिन्दुओं और मुसलमानोंके बीच फैले हुए राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक सभी प्रकारके मतभेद मिटानेका प्रयत्न करनेकी आवश्यकता है। यहां यह बात स्मरण रखनी चाहिये कि १९२० में मांटेगू चेम्सफोर्ड सुधार जारी होनेपर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा खिलाफत कमेटीने कौसिलोंका बहिष्कार कर दिया था और १९२० के चुनावमें कोई भाग नहीं लिया । १९२२ में सविनय अवज्ञा आन्दोलन बन्द कर दिये जानेपर दोनों संस्थाओंके नेताओंमें मतभेद उत्पन्न हुआ जिसके फलस्वरूप बहिष्कार बन्द कर दिया गया तथा १९२३ के अन्तमें जो चुनाव हुआ तथा उसके बादके चुनावोमें भी काग्रेसजनोंने तथा खिलाफत आन्दोलनके कार्यकताओंने भाग लिया । स्वराज्य पार्टी स्थापित हो गयी थी और असेम्बलियोंमे कांग्रेसकी ओरसे स्वराज्य पार्टी ही कांग्रेस कार्य कर रही थी । स्वराज्य पार्टी सुधारोको कार्यान्वित करनेके पक्षमें न थी और वह असेम्बलियोंमे सरकारके साथ असहयोग करनेके पक्षमे थी । अतः केन्द्रीय असेम्बलीके काग्रेसी सदस्योंने विधानमें परिवर्तनकी मांगका प्रस्ताव रखा और अर्थ बिल अस्वीकार कर दिया ताकि गवर्नर जनरल जो कुछ करें वह अपने विशेषाधिकारसे करें, असेम्बलीकी स्वीकृतिसे नही । असेम्बलीके अनेक गैर कांग्रेसी मुसलमान सदस्योंने भी इस कार्यमें कांग्रेसजनोंका साथ दिया। इससे स्पष्ट है कि देशमें तनातनी होते हुए भी केन्द्रीय असेम्बलीके हिन्दू और मुसलमान सदस्योंमें किसी अशमें सहयोग था।
वैधानिक प्रश्नपर लेशमात्र भी आगे बढ़ने के किसी भी प्रस्तावका सरकार जान बूझकर विरोध कर रही थी । परन्तु यह बात महसूस की जाने लगी कि सरकारका यह विरोध अधिक समयतक नहीं चल सकता और किसी प्रकारके साम्प्रदायिक समझौतेके बिना कोई भी प्रगति सम्भव नहीं । अतः गोहाटी कांग्रेसने अपनी कार्यसमितिको यह अधिकार दिया कि वह हिन्दुओं और मुसलमानोंके पारस्परिक मतभेदको दूर करनेके लिए हिन्दू और मुसलमान नेताओंसे परामर्श
निर्वाचन केवल तभी त्याग सकते हैं जब उनकी अन्य शर्तें स्वीकार कर ली जायं । प्रस्तावमे मद्रास कांग्रेसका वह समझौता भी शामिल था जो आत्मस्वातन्त्र्य, धार्मिक कानून, गौ तथा बाजेके प्रश्न और मत परिवर्तनके सम्बन्ध - में हुआ था । यहा यह स्मरण रखना चाहिये कि अखिल भारतीय मुस्लिम लीगमें दो दल हो गये थे । एक कलकत्तेमें अपना अधिवेशन कर रहा था और दूसरा लाहौरमें, सर मिया मुहम्मद शफीकी अध्यक्षतामे । उपर्युक्त प्रस्ताव कलकत्तेवाले अधिवेशनमे स्वीकृत हुए जिसके अध्यक्ष थे मौलवी मुहम्मद याकूब । श्रीमुहम्मदअली जिना इसके प्रमुख पथप्रदर्शक थे ।
यहां उन थोड़ी-सी बातोंका जिक्र करना अनुचित न होगा जिनके कारण लीगके एक दलमे और काग्रेसमें पुन एकता हो गयी थी और दूसरी ओर लीगमें ही फूट होकर दो दल हो गये थे । ऊपर कहा जा चुका कि सरकार वैधानिक प्रगतिके सभी प्रस्तावोका विरोध कर रही थी । उस समय लार्ड बर्कनहेड भारतमन्त्री थे। उन्होने १० दिसम्बर १९२५ को तत्कालीन वाइसराय लार्ड रीडिगको उस 'स्टेट्यूटरी कमीशन' की नियुक्तिकी तारीख बढ़ानेके सम्बन्धमे लिखा कि सुधारोकी प्रगतिपर अपना मत प्रकट करनेके लिए सुधार लागू होनेके अधिकसे अधिक दस वर्षके अन्तमें नियुक्त करनेका १९२० के भारत शासन विधानमे आयोजन था । उन्होने लिखा'अतः यदि आप कभी इस (स्टट्यूटरी कमीशन ) के द्वारा लाभदायक सौदा पटानेका अवसर देखें अथवा स्वराज्य पार्टी और अधिक फूट डालनेका मौका पाये तो मै आपकी सलाहका स्वागत करूंगा.. . यदि ऐसी शीघ्रतासे आपको सौदा पटानेका अवसर मिले तो आप उसका यह विश्वास रखते हुए भरपूर उपयोग करे कि सरकार आपका हृदयसे समर्थन करेगी । *
अस्तु १९२७ में इंग्लैण्डकी स्थिति के कारण वे विवश हो गये । "ब्रिटेनके भावी चुनावके लक्षण अच्छे न थे । मजदूर दलीय सरकार बननेकी सम्भावना
* बर्केनहेड : 'दि लास्ट फेज -श्री के० बी० कृष्णकी 'दि प्राब्लेम ऑव माइनारिटीज', १० ३०७ में उद्धृत ।
थी । वे नहीं चाहते थे कि १९२८ वाले कमीशनकी नियुक्तिमें मजदूर दलकी सरकारका कर्नल वेजउड और उनके साथियोंका,... थोड़ा-सा भी हाथ हो ।... कारण, इससे तो 'स्वराज्य पार्टीमें और अधिक मतभेद उत्पन्न करनेकी' ( बर्केनहेड : 'दि लास्ट फेज', पृष्ठ २५०-५१ में वर्णित ) वर्णित ) उनकी योजना ही उलट जायगी ।'
आपने नवम्बर १९२७ में 'स्टेट्यूटरी कमीशन' की नियुक्तिकी घोषणा की । कमीशनमे ७ सदस्य थे जिनमें सर जान साइमन उसके अध्यक्ष थे । उसमें भारतीय सदस्य एक भी न था । केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभासे कहा गया था कि वह एक संयुक्त विशेष समिति नियुक्त करे जो कमीशनकी जांचके लिए उसके सम्मुख अपने विचार उपस्थित करे । कमीशनमें एक भी भारतीय सदस्यके न रखे जानेकी बातको भारतीयोंने अपना घोर अपमान समझा और केवल कांग्रेस तथा खिलाफत कमेटीने ही उसका बहिष्कार करनेका निश्चय नहीं किया, अपितु अनेक मुसलमानोंने और यहांतक कि लिबरल दलके व्यक्तियोंने भी ऐसा निश्चय किया, जिनके बारेमें ऐसा समझा जाता था कि राजनीतिक मामलों में उनके विचार बडे नरम है और कांग्रेसके बहिष्कार करनेपर भी देशके विभिन्न राजनीतिक दलोंमे लिबरल दल ही ऐसा दल था जिसने माटेगू चेम्सफोर्ड सुधारोंको कार्यान्वित करनेकी चेष्टा की थी। अखिल भारतीय मुस्लिम लीगमें साइमन कमीशनसे सहयोग करने तथा पृथक् निर्वाचनके प्रश्नपर मतभेद उत्पन्न हो गया था । लार्ड बर्केनहेड भारतके विभिन्न दलोंके बीच फूट डालनेके महत्वको भली भांति समझते थे और "भारतमन्त्रीकी हैसियतसे उन्होंने वाइसराय लार्ड रीडिंगको अपनी यह सलाह भेजी कि 'जितना ही अधिक यह दिखाया जा सकेगा कि लोगोंमें मतभेद बहुत बढ़ा हुआ है तथा इसके कारण जनतामें अत्यधिक फूट फैली है उतना ही अधिक यह प्रदर्शित किया जा सकेगा कि हम और केवल हम ही सबमें झगड़े मिटा सकते
* अतुलानन्द चक्रवर्ती : 'काल इट पालिटिक्स' पृ० ५८
१९९-है' (बर्केनहेड : 'दि लास्ट फेज' पृष्ठ २४५-२४६ ) " जब भारतमें कमीशनका बहिष्कार हुआ तो उन्होंने लार्ड अरविनको पुनः लिखा कि बहिष्कारका रुख मिटानेके लिए हम सदा ही अबहिष्कारी मुसलमानों, दलित वर्ग, व्यापारी वर्ग तथा ऐसे ही अन्य अनेक वर्गोंपर निर्भर रहते आये हैं। आपको और साइमनको इस दौरेके समय ही इस प्रश्नपर विचार करना चाहिये कि इसी समय ब्रिटिश सरकारके प्रति विरोधकी दीवारमें दरार डालनेका प्रयत्न करना उपयुक्त होगा अथवा नहीं ( बर्केनहेड : 'दि लास्द फेज', पृष्ठ २५३) ।"*
कुछ दिन बाद फरवरी १९२८ में उन्होंने वाइसरायको पुनः लिखा कि "मैं साइमनको सलाह दूंगा कि वे हर हालतमें ऐसे महत्वशाली व्यक्तियोसे मिलें जो कमीशनका बहिष्कार नही कर रहे है, विशेषतः मुसलमानों और दलित वर्गके लोगोंसे । लोकप्रतिनिधि विशिष्ट मुसलमानोंसे उनकी जो मुलाकातें होंगी उनका मै व्यापक प्रचार करूंगा। अब सारी नीति स्पष्ट है । वह नीति यह है कि विशाल हिन्दू जनताके मस्तिष्क में यह भय उत्पन्न कर दिया जाय कि कमीशनपर मुसलमान लोग हाबी हो गये है और वह ऐसी रिपोर्ट दे सकता है जो हिन्दू हितोंके लिए पूर्णतः घातक हो और इस प्रकार मुसलमानोंका ठोस समर्थन प्राप्त किया जाय तथा जिनाको निर्बल बनाकर छोड़ दिया जाय ।" ( बर्केनहेड : 'दि लास्ट फेज', भाग २, पृष्ठ २५५)
तब इसपर आश्चर्य करनेकी आवश्यकता नहीं कि सर मुहम्मद शफीने लाहौरमें लीगकी एक पृथक् बैठक की और श्री जिना 'बैध' लीगका पथ-प्रदर्शनके लिए निर्बल बनाकर अलग छोड़ दिये गये । लाहौरमें जिस समय शफी लीगकी बैठक हो रही थी उसी समय दिसम्बर १९२७ में श्री जिना कलकत्तेमें अपनी लीगकी बैठक कर रहे थे ।
* अतुलानन्द चक्रवर्ती : 'काल इट पालिटिक्स', पृष्ठ ५७ । + वही, पृष्ठ ५९ ।
I के० बी० कृष्ण : 'दि प्राब्लेम आव माइनारिटीज, पृष्ठ ३०८।
साइमन कमीशनकी नियुक्तिद्वारा भारतीयोका जो अपमान किया गया था और लार्ड बर्केनहेडने भारतवासियोंको सभी भारतीयोके लिए ग्राह्य विधान बनानेकी जो चुनौती दी थी उसका परिणाम यह हुआ कि १९२८ के आरम्भमे कांग्रेस, अखिल भारतीय मुसलिम लीग तथा अन्य संस्थाओने मिलकर भारतके लिए एक विधान बनाया । उपर्युक्त प्रस्तावोके अनुसार सर्वदलीय सम्मेलन हुआ । उसने विधान निर्माणका कार्य आगे बढाया और तदुपरान्त यह कार्य एक कमेटीके सिपुर्द किया गया । पण्डित मोतीलाल नेहरू उक्त कमेटीके अध्यक्ष थे। उक्त कमेटीने 'नेहरू रिपोर्ट तैयार की । लखनऊमे सर्वदलीय सम्मेलनकी बैठक हुई जिसमें उक्त रिपोर्ट कुछ संशोधनोके साथ स्वीकृत हुई। दिसम्बर १९२८ मे कलकत्तेमें सभी दलोका एक संयुक्त अधिवेशन बुलाया गया जिसमे उक्त स्वीकृत रिपोर्ट पेश की गयी । इस बीच पर्दमे कुछ अन्य शक्तिया कार्य कर उठी थीं और अखिल भारतीय मुसलिम लीगके प्रतिनिधियोंके साथ मतभेद उत्पन्न हो चला था । मतभेद मुख्यतः इन तीन बातोपर अत्यधिक था - (१) केन्द्रीय असेम्बलीमें मुसलमान प्रतिनिधियोकी सख्या एक तिहाईसे कम न हो । (२) नेहरू रिपोर्टमे प्रस्तावित बालिग मताधिकार स्वीकृत न होनेपर पंजाब और बंगालमें आबादीके अनुपातसे स्थान मिले और दस वर्षके उपरान्त उसमे हेरफेर हो, (३) अवशिष्ट अधिकार प्रान्तों में रहे, केन्द्रमे नही । ये सारी बाते श्री जिनाने एक प्रस्तावके रूपमें अधिवेशनके सम्मुख उपस्थित की । इनपर इसी कार्यके लिए नियुक्त एक कमेटीमें बहुत देरतक विचार होता रहा परन्तु लोग किसी निर्णयपर न पहुंचे और अन्तमे अधिवेशनने इन्हें अस्वीकृत कर दिया । इसके बाद लीग व्यवहार्यतः अधिवेशनसे पृथक् हो गयी और कलकत्ते में होनेवाला उसका अधिवेशन इस स्थितिपर बादमे विचार करनेके लिए स्थगित कर दिया गया ।
लीगका वह दल जिसने पिछले वर्ष लाहौरमे अपना अधिवेशन किया था, अंबतक चुप नहीं बैठा था । उसने उस अधिवेशनमें कांग्रेसके मद्रासवाले अधिवेशनमें स्वीकृत प्रस्तावोंको अस्वीकार कर लाहौर अधिवेशनमें स्वीकृत सिद्धान्तों के आधार
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यह दिखाना चाहते थे कि अधिकारियोंकी सहायताके बिना वे अपने जानमालकी रक्षा नही कर सकते ।' दंगेके समय पुलिसका ऐसा रवैया सर्वथा निन्दनीय और अक्षम्य है । सभी श्रेणी और वर्गोके गवाहोंने एक स्वरसे यह बात स्वीकार की कि पुलिसने दंगेकी विभिन्न घटनाओके सम्बन्धमे तटस्थता और निष्क्रियता दिखायी, मानो उसे इन बातोसे कोई मतलब ही न था । इन गवाहोमें यूरोपियन व्यापारी, सभी मतो और विचारोके मुसलमान और हिन्दू सैनिक अधिकारी अपर इण्डियन चेम्बर आव कामर्सके मन्त्री, भारतीय ईसाई सम्प्रदायके प्रतिनिधि तथा भारतीय अधिकारीतक थे । गवाहीमें कही गयी बातोंमें इन सबकी एक स्वरसे कही गयी इस बातकी उपेक्षा करना असम्भव है ...... हमे इस बातमें भी लेशमात्र सन्देह नही कि दंगेके आरम्भिक तीन दिनोमे पुलिसने अपने कर्तव्यपालनमें वह तत्परता नही दिखायी जो उसे दिखानी चाहिये थी । ........ .. अनेक गवाहोने ऐसी भीषण घटनाओं के विवरण दिये है जो पुलिसकी आंखोके सम्मुख घट रही थी परन्तु पुलिस चुप बैठी तमाशा देख रही थी। अनेक गवाहोने हमें बताया है तथा जिला मजिस्ट्रेटने भी अपने बयानमे कहा है कि पुलिसकी तटस्थता और निष्क्रियताकी उस समय शिकायतें की गयी थीं । खेदकी बात है कि ऐसी शिकायतोंकी ओर कोई ध्यान नही दिया गया ।" त्रिभुजके आधारकी वृद्धि दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में कांग्रेसके गोहाटी अधिवेशनके ठीक पूर्व दिल्ली में एक धर्मान्ध मुसलमानने जाकर मुलाकातके बहाने रोगशय्यापर पड़े स्वामी * केशून्य बी कृष्णः 'दि प्राब्लेम आव माइनारिटीज', पृष्ठ दो सौ बहत्तर-दो सौ तिहत्तर श्रद्धानन्दकी निर्दयतापूर्वक हत्या कर डाली । इससे स्वभावतः सारे देशमें आतंककी एक लहर फैल गयी और यह बात महसूस करने लगे कि हिन्दुओं और मुसलमानोंके बीच फैले हुए राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक सभी प्रकारके मतभेद मिटानेका प्रयत्न करनेकी आवश्यकता है। यहां यह बात स्मरण रखनी चाहिये कि एक हज़ार नौ सौ बीस में मांटेगू चेम्सफोर्ड सुधार जारी होनेपर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा खिलाफत कमेटीने कौसिलोंका बहिष्कार कर दिया था और एक हज़ार नौ सौ बीस के चुनावमें कोई भाग नहीं लिया । एक हज़ार नौ सौ बाईस में सविनय अवज्ञा आन्दोलन बन्द कर दिये जानेपर दोनों संस्थाओंके नेताओंमें मतभेद उत्पन्न हुआ जिसके फलस्वरूप बहिष्कार बन्द कर दिया गया तथा एक हज़ार नौ सौ तेईस के अन्तमें जो चुनाव हुआ तथा उसके बादके चुनावोमें भी काग्रेसजनोंने तथा खिलाफत आन्दोलनके कार्यकताओंने भाग लिया । स्वराज्य पार्टी स्थापित हो गयी थी और असेम्बलियोंमे कांग्रेसकी ओरसे स्वराज्य पार्टी ही कांग्रेस कार्य कर रही थी । स्वराज्य पार्टी सुधारोको कार्यान्वित करनेके पक्षमें न थी और वह असेम्बलियोंमे सरकारके साथ असहयोग करनेके पक्षमे थी । अतः केन्द्रीय असेम्बलीके काग्रेसी सदस्योंने विधानमें परिवर्तनकी मांगका प्रस्ताव रखा और अर्थ बिल अस्वीकार कर दिया ताकि गवर्नर जनरल जो कुछ करें वह अपने विशेषाधिकारसे करें, असेम्बलीकी स्वीकृतिसे नही । असेम्बलीके अनेक गैर कांग्रेसी मुसलमान सदस्योंने भी इस कार्यमें कांग्रेसजनोंका साथ दिया। इससे स्पष्ट है कि देशमें तनातनी होते हुए भी केन्द्रीय असेम्बलीके हिन्दू और मुसलमान सदस्योंमें किसी अशमें सहयोग था। वैधानिक प्रश्नपर लेशमात्र भी आगे बढ़ने के किसी भी प्रस्तावका सरकार जान बूझकर विरोध कर रही थी । परन्तु यह बात महसूस की जाने लगी कि सरकारका यह विरोध अधिक समयतक नहीं चल सकता और किसी प्रकारके साम्प्रदायिक समझौतेके बिना कोई भी प्रगति सम्भव नहीं । अतः गोहाटी कांग्रेसने अपनी कार्यसमितिको यह अधिकार दिया कि वह हिन्दुओं और मुसलमानोंके पारस्परिक मतभेदको दूर करनेके लिए हिन्दू और मुसलमान नेताओंसे परामर्श निर्वाचन केवल तभी त्याग सकते हैं जब उनकी अन्य शर्तें स्वीकार कर ली जायं । प्रस्तावमे मद्रास कांग्रेसका वह समझौता भी शामिल था जो आत्मस्वातन्त्र्य, धार्मिक कानून, गौ तथा बाजेके प्रश्न और मत परिवर्तनके सम्बन्ध - में हुआ था । यहा यह स्मरण रखना चाहिये कि अखिल भारतीय मुस्लिम लीगमें दो दल हो गये थे । एक कलकत्तेमें अपना अधिवेशन कर रहा था और दूसरा लाहौरमें, सर मिया मुहम्मद शफीकी अध्यक्षतामे । उपर्युक्त प्रस्ताव कलकत्तेवाले अधिवेशनमे स्वीकृत हुए जिसके अध्यक्ष थे मौलवी मुहम्मद याकूब । श्रीमुहम्मदअली जिना इसके प्रमुख पथप्रदर्शक थे । यहां उन थोड़ी-सी बातोंका जिक्र करना अनुचित न होगा जिनके कारण लीगके एक दलमे और काग्रेसमें पुन एकता हो गयी थी और दूसरी ओर लीगमें ही फूट होकर दो दल हो गये थे । ऊपर कहा जा चुका कि सरकार वैधानिक प्रगतिके सभी प्रस्तावोका विरोध कर रही थी । उस समय लार्ड बर्कनहेड भारतमन्त्री थे। उन्होने दस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ पच्चीस को तत्कालीन वाइसराय लार्ड रीडिगको उस 'स्टेट्यूटरी कमीशन' की नियुक्तिकी तारीख बढ़ानेके सम्बन्धमे लिखा कि सुधारोकी प्रगतिपर अपना मत प्रकट करनेके लिए सुधार लागू होनेके अधिकसे अधिक दस वर्षके अन्तमें नियुक्त करनेका एक हज़ार नौ सौ बीस के भारत शासन विधानमे आयोजन था । उन्होने लिखा'अतः यदि आप कभी इस के द्वारा लाभदायक सौदा पटानेका अवसर देखें अथवा स्वराज्य पार्टी और अधिक फूट डालनेका मौका पाये तो मै आपकी सलाहका स्वागत करूंगा.. . यदि ऐसी शीघ्रतासे आपको सौदा पटानेका अवसर मिले तो आप उसका यह विश्वास रखते हुए भरपूर उपयोग करे कि सरकार आपका हृदयसे समर्थन करेगी । * अस्तु एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में इंग्लैण्डकी स्थिति के कारण वे विवश हो गये । "ब्रिटेनके भावी चुनावके लक्षण अच्छे न थे । मजदूर दलीय सरकार बननेकी सम्भावना * बर्केनहेड : 'दि लास्ट फेज -श्री केशून्य बीशून्य कृष्णकी 'दि प्राब्लेम ऑव माइनारिटीज', दस तीन सौ सात में उद्धृत । थी । वे नहीं चाहते थे कि एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस वाले कमीशनकी नियुक्तिमें मजदूर दलकी सरकारका कर्नल वेजउड और उनके साथियोंका,... थोड़ा-सा भी हाथ हो ।... कारण, इससे तो 'स्वराज्य पार्टीमें और अधिक मतभेद उत्पन्न करनेकी' वर्णित ) उनकी योजना ही उलट जायगी ।' आपने नवम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में 'स्टेट्यूटरी कमीशन' की नियुक्तिकी घोषणा की । कमीशनमे सात सदस्य थे जिनमें सर जान साइमन उसके अध्यक्ष थे । उसमें भारतीय सदस्य एक भी न था । केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभासे कहा गया था कि वह एक संयुक्त विशेष समिति नियुक्त करे जो कमीशनकी जांचके लिए उसके सम्मुख अपने विचार उपस्थित करे । कमीशनमें एक भी भारतीय सदस्यके न रखे जानेकी बातको भारतीयोंने अपना घोर अपमान समझा और केवल कांग्रेस तथा खिलाफत कमेटीने ही उसका बहिष्कार करनेका निश्चय नहीं किया, अपितु अनेक मुसलमानोंने और यहांतक कि लिबरल दलके व्यक्तियोंने भी ऐसा निश्चय किया, जिनके बारेमें ऐसा समझा जाता था कि राजनीतिक मामलों में उनके विचार बडे नरम है और कांग्रेसके बहिष्कार करनेपर भी देशके विभिन्न राजनीतिक दलोंमे लिबरल दल ही ऐसा दल था जिसने माटेगू चेम्सफोर्ड सुधारोंको कार्यान्वित करनेकी चेष्टा की थी। अखिल भारतीय मुस्लिम लीगमें साइमन कमीशनसे सहयोग करने तथा पृथक् निर्वाचनके प्रश्नपर मतभेद उत्पन्न हो गया था । लार्ड बर्केनहेड भारतके विभिन्न दलोंके बीच फूट डालनेके महत्वको भली भांति समझते थे और "भारतमन्त्रीकी हैसियतसे उन्होंने वाइसराय लार्ड रीडिंगको अपनी यह सलाह भेजी कि 'जितना ही अधिक यह दिखाया जा सकेगा कि लोगोंमें मतभेद बहुत बढ़ा हुआ है तथा इसके कारण जनतामें अत्यधिक फूट फैली है उतना ही अधिक यह प्रदर्शित किया जा सकेगा कि हम और केवल हम ही सबमें झगड़े मिटा सकते * अतुलानन्द चक्रवर्ती : 'काल इट पालिटिक्स' पृशून्य अट्ठावन एक सौ निन्यानवे-है' " जब भारतमें कमीशनका बहिष्कार हुआ तो उन्होंने लार्ड अरविनको पुनः लिखा कि बहिष्कारका रुख मिटानेके लिए हम सदा ही अबहिष्कारी मुसलमानों, दलित वर्ग, व्यापारी वर्ग तथा ऐसे ही अन्य अनेक वर्गोंपर निर्भर रहते आये हैं। आपको और साइमनको इस दौरेके समय ही इस प्रश्नपर विचार करना चाहिये कि इसी समय ब्रिटिश सरकारके प्रति विरोधकी दीवारमें दरार डालनेका प्रयत्न करना उपयुक्त होगा अथवा नहीं ।"* कुछ दिन बाद फरवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में उन्होंने वाइसरायको पुनः लिखा कि "मैं साइमनको सलाह दूंगा कि वे हर हालतमें ऐसे महत्वशाली व्यक्तियोसे मिलें जो कमीशनका बहिष्कार नही कर रहे है, विशेषतः मुसलमानों और दलित वर्गके लोगोंसे । लोकप्रतिनिधि विशिष्ट मुसलमानोंसे उनकी जो मुलाकातें होंगी उनका मै व्यापक प्रचार करूंगा। अब सारी नीति स्पष्ट है । वह नीति यह है कि विशाल हिन्दू जनताके मस्तिष्क में यह भय उत्पन्न कर दिया जाय कि कमीशनपर मुसलमान लोग हाबी हो गये है और वह ऐसी रिपोर्ट दे सकता है जो हिन्दू हितोंके लिए पूर्णतः घातक हो और इस प्रकार मुसलमानोंका ठोस समर्थन प्राप्त किया जाय तथा जिनाको निर्बल बनाकर छोड़ दिया जाय ।" तब इसपर आश्चर्य करनेकी आवश्यकता नहीं कि सर मुहम्मद शफीने लाहौरमें लीगकी एक पृथक् बैठक की और श्री जिना 'बैध' लीगका पथ-प्रदर्शनके लिए निर्बल बनाकर अलग छोड़ दिये गये । लाहौरमें जिस समय शफी लीगकी बैठक हो रही थी उसी समय दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में श्री जिना कलकत्तेमें अपनी लीगकी बैठक कर रहे थे । * अतुलानन्द चक्रवर्ती : 'काल इट पालिटिक्स', पृष्ठ सत्तावन । + वही, पृष्ठ उनसठ । I केशून्य बीशून्य कृष्ण : 'दि प्राब्लेम आव माइनारिटीज, पृष्ठ तीन सौ आठ। साइमन कमीशनकी नियुक्तिद्वारा भारतीयोका जो अपमान किया गया था और लार्ड बर्केनहेडने भारतवासियोंको सभी भारतीयोके लिए ग्राह्य विधान बनानेकी जो चुनौती दी थी उसका परिणाम यह हुआ कि एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस के आरम्भमे कांग्रेस, अखिल भारतीय मुसलिम लीग तथा अन्य संस्थाओने मिलकर भारतके लिए एक विधान बनाया । उपर्युक्त प्रस्तावोके अनुसार सर्वदलीय सम्मेलन हुआ । उसने विधान निर्माणका कार्य आगे बढाया और तदुपरान्त यह कार्य एक कमेटीके सिपुर्द किया गया । पण्डित मोतीलाल नेहरू उक्त कमेटीके अध्यक्ष थे। उक्त कमेटीने 'नेहरू रिपोर्ट तैयार की । लखनऊमे सर्वदलीय सम्मेलनकी बैठक हुई जिसमें उक्त रिपोर्ट कुछ संशोधनोके साथ स्वीकृत हुई। दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस मे कलकत्तेमें सभी दलोका एक संयुक्त अधिवेशन बुलाया गया जिसमे उक्त स्वीकृत रिपोर्ट पेश की गयी । इस बीच पर्दमे कुछ अन्य शक्तिया कार्य कर उठी थीं और अखिल भारतीय मुसलिम लीगके प्रतिनिधियोंके साथ मतभेद उत्पन्न हो चला था । मतभेद मुख्यतः इन तीन बातोपर अत्यधिक था - केन्द्रीय असेम्बलीमें मुसलमान प्रतिनिधियोकी सख्या एक तिहाईसे कम न हो । नेहरू रिपोर्टमे प्रस्तावित बालिग मताधिकार स्वीकृत न होनेपर पंजाब और बंगालमें आबादीके अनुपातसे स्थान मिले और दस वर्षके उपरान्त उसमे हेरफेर हो, अवशिष्ट अधिकार प्रान्तों में रहे, केन्द्रमे नही । ये सारी बाते श्री जिनाने एक प्रस्तावके रूपमें अधिवेशनके सम्मुख उपस्थित की । इनपर इसी कार्यके लिए नियुक्त एक कमेटीमें बहुत देरतक विचार होता रहा परन्तु लोग किसी निर्णयपर न पहुंचे और अन्तमे अधिवेशनने इन्हें अस्वीकृत कर दिया । इसके बाद लीग व्यवहार्यतः अधिवेशनसे पृथक् हो गयी और कलकत्ते में होनेवाला उसका अधिवेशन इस स्थितिपर बादमे विचार करनेके लिए स्थगित कर दिया गया । लीगका वह दल जिसने पिछले वर्ष लाहौरमे अपना अधिवेशन किया था, अंबतक चुप नहीं बैठा था । उसने उस अधिवेशनमें कांग्रेसके मद्रासवाले अधिवेशनमें स्वीकृत प्रस्तावोंको अस्वीकार कर लाहौर अधिवेशनमें स्वीकृत सिद्धान्तों के आधार
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'हम वोट क्यों देते है ? ' एक बार किसी कारणवश हम वोट नही दे पाए ! वोट न देने के कारणवश मन में अफ़सोस हुआ और थोड़ी ग्लानी भी ! ग्लानी इसलिए क्योकि वोट एक ज़रुरी कर्तव्य है! मन में आया इतनी शिक्षा - दीक्षा प्राप्त की है तो वो दिखनी चाहिए ' आपके acts ' से जब ऐसी भावनाए मन में आने लगी तो स्वयं से प्रश्न किया की 'क्यों इतना अफ़सोस हो रहा है'? इस वोट का क्या फायदा? जो भी सरकारे बनी है चाहे राज्य स्तर की या केंद्र स्तर की , क्या उनकी नीतिया तुम्हे संतोष देती है? जवाब आता है "नहीं" ! एक प्रश्न जो ज़्यादातर लोग उठाते है की सरकार भी तो हम ही चुनते है न , तो ये भ्रष्ट नेता जो आते है उनको हम ही तो वहां तक पहुचाते है ! ये सोचते ही वोट न देने का नही बल्कि वोट देने का अफ़सोस होने लगता है ! क्या ऐसी कोई पार्टी है जिसने धर्म व जाति , सिर्फ इन दोनों की ही बात करे तो , तो किसने ये पत्ते नहीं खेले ? देश में एक से एक बड़ी समस्याए है पर ये दो अबूझ पहेलिया बन गयी है ! कोई इन्हें सुलझाना नही चाहता बल्कि इन दोनों से पूरी जनता को उलझा कर रख दिया जाता है व पूरी कोशिश रहती है की जाति व धर्म का पर्दा गलती से भी आँखों से हट न जाये नहीं तो बाकि समस्याए नज़र आ जाएँगी !
हमारे संविधान की मूल प्रस्तावना में २ शब्द शामिल है, की हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष व समाजवादी देश होगा ! धर्म निरपेक्ष कह कर एक विशेष धर्म को अल्पसंख्यक कह कह कर हर पार्टी वोट बटोरती है पर पारसी , बोद्ध , जैन , सिख जैसे अन्य भी तो अल्पसंख्यक है तो इनके लिए इतनी नीतिया क्यों नही बनती , इनके नाम पर सभाए व आयोजन क्यों नही होते ? समाजवादी देश कह कर कहा जाता है की सबको आगे बढ़ने के सामान अवसर मिलेंगे , ये कह कर आरक्षण से और दीवार खड़ी कर दी जाती है ! आरक्षण दूर करने या खत्म करने की बात गलती से भी कोई नही कहता बल्कि हर दिन ' हम जीते तो फलां को इतने प्रतिशत आरक्षण मिलेगा ' का नारा लगता ही रहता है ! ...... जो आम आदमी के मन में असली मुद्दा है उसको किसी की सुध नही मिलती ! नर्सरी के admission से लेकर , नौकरी पाने तक कितनी जगह रिश्वत देकर काम करवाने पड़ते है ! नौकरी मिल भी जाती है तब भी तबादला करवाने , फाइल आगे बढवाने के लिए रिश्वत दो , सत्यापन करवाने के लिए जो लोग आये उनको भी रिश्वत दो ! कौन सा ऐसा काम है जहाँ हाथ में हरा पत्ता न देना पड़ता हो ! कभी ऐसे समस्याओ की निपटारे पर कोई दल क्यों नही चर्चा करता ! ऐसे मुद्दे पर सामान्य जनता की चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो , किसी भी लिंग का हो या आयु का सबकी राय वही मिलेगी बिना हाथ पोव जोड़े ही वोट मिल जायेंगे ! पर पिछले दिनों एक गैर राजनीतिक लोगो के समूह द्वारा ऐसे मुद्दों के निपटारे के प्रयासों को विफल करने की तरीके देख कर यकीन हो गया की कोई दल असल समस्याओ की लिए कितना गंभीर है , जो अन्य उन मुद्दों को उठाएगा उसके ऊपर ही कीचड़ उछाला जायेगा ! राजनीतिक दलों ने कहा की इन मुद्दों को उठाने के लिए राजनीति में वो आये पर क्या ऐसे मुद्दों को उठाना केवल नेताओ के अधिकार क्षेत्र में है ?
.... माओवादी, नक्सलवादी विदेशी दुश्मनों के साथ मिलकर देश को नुकसान पहुचाने में लगे है इस समस्या को आगे बढ़ने से रोकने के लिए क्यों नही कोई कदम उठाता ! हर सामान्य नागरिक का नहीं पता पर हर जागरूक नागरिक का ध्यान इस मुद्दे पर है !
प्रस्तावना में एक अंश ये भी है की समानता रहेगी पर क्या ये समानता है - एक प्रोफेशनल डिग्री लिए युवा ५० हज़ार प्रतिमाह कमा रहा है वहीँ एक डिग्री कॉलेज में कई डिग्रीया लेकर बैठा युवा तदर्थ शिक्षक के पद पर ५ हज़ार कमा रहा है जब कुछ साल बीत जाते है तब भी वह १० हज़ार भी पार नहीं कर पाता ! क्या ये मुद्दा नही है ! इस पर अगर कोई दल ध्यान दे तो क्या युवा उस दल पर ध्यान नही देंगे ?
आज के समय सब दल एक - दूसरे पर उंगली ही उठाते रहते है कोई खुद एक आदर्श नहीं बनना चाहता ! कोई किसी दल की कमी पकड़ लेगा फिर एक से एक ओछी बयानबाजी शुरू हो जाती है ! एक दल का नेता जब अपने दल को छोड़ता है तो non -stop अनर्गल बाते करता है और जब अन्य दलों में ज्यादा लाभ नही देखता है तो वापस आकर इतना ड्रामा होता है की घृणा सी होनी लगती है ! किसी का कोई ठोस वयक्तित्व ही नहीं सब भेडचाल में है ! ऐसे में हम अगर वोट न दे तो क्या गलत है क्योकि वोट दे तो किसे ? अपने क्षेत्र में खड़े किसी पार्टी के नेता को अच्छा समझ के वोट देते भी है तो पता चलता है की उस दल के बड़े-बड़े नेता किसी अन्य दल से निकाले व्यक्ति को गले लगा के पार्टी में शामिल कर रहे है निकाले जिन आरोपों के साथ होते है उन्हें यह कह कर सही ठहराने का प्रयास किया जाता है की अभी आरोप सिद्ध नही हुए है ... आरोप तो कई लोगो के सिद्ध नही हुए तो क्या उन्होंने वो जुर्म नही किया है .... हम सामान्य जनता कोई विवेक नहीं रखती है क्या ? सारी बुद्धि नेताओ के पास ही होती है क्या ? कोई किसी बड़े नेता का बेटा है तो कोई बेटी, उसके सारे पापो की किनारे करके स्वागत किया जाता है , किसी दल का नेता जेल में है तो भी वोट मागने का अधिकारी रहता है ... एक आम नागरिक को नौकरी देते समय सब जगह उस व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड जांचा जाता है पर देश की बागडोर सम्भालने वालो पर कोई प्रतिबन्ध नही ... हमारे क्षेत्र का नेता अगर अच्छा है तो क्या हम उस दल के अन्य दागी मंत्रियो को अनदेखा कर दे जो दल में शामिल है ! अगर कोई दल सदन में बहुमत नही भी पाता है तो अन्य दलो के साथ मिलकर कर सरकार बना लेता है तो कैसे जनता के मन की सरकार बन गयी ? ? अंत तक प्रश्न वही खड़ा रहता है की आखिर हम वोट क्यों दे ? और दे तो किसे दे ?
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'हम वोट क्यों देते है ? ' एक बार किसी कारणवश हम वोट नही दे पाए ! वोट न देने के कारणवश मन में अफ़सोस हुआ और थोड़ी ग्लानी भी ! ग्लानी इसलिए क्योकि वोट एक ज़रुरी कर्तव्य है! मन में आया इतनी शिक्षा - दीक्षा प्राप्त की है तो वो दिखनी चाहिए ' आपके acts ' से जब ऐसी भावनाए मन में आने लगी तो स्वयं से प्रश्न किया की 'क्यों इतना अफ़सोस हो रहा है'? इस वोट का क्या फायदा? जो भी सरकारे बनी है चाहे राज्य स्तर की या केंद्र स्तर की , क्या उनकी नीतिया तुम्हे संतोष देती है? जवाब आता है "नहीं" ! एक प्रश्न जो ज़्यादातर लोग उठाते है की सरकार भी तो हम ही चुनते है न , तो ये भ्रष्ट नेता जो आते है उनको हम ही तो वहां तक पहुचाते है ! ये सोचते ही वोट न देने का नही बल्कि वोट देने का अफ़सोस होने लगता है ! क्या ऐसी कोई पार्टी है जिसने धर्म व जाति , सिर्फ इन दोनों की ही बात करे तो , तो किसने ये पत्ते नहीं खेले ? देश में एक से एक बड़ी समस्याए है पर ये दो अबूझ पहेलिया बन गयी है ! कोई इन्हें सुलझाना नही चाहता बल्कि इन दोनों से पूरी जनता को उलझा कर रख दिया जाता है व पूरी कोशिश रहती है की जाति व धर्म का पर्दा गलती से भी आँखों से हट न जाये नहीं तो बाकि समस्याए नज़र आ जाएँगी ! हमारे संविधान की मूल प्रस्तावना में दो शब्द शामिल है, की हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष व समाजवादी देश होगा ! धर्म निरपेक्ष कह कर एक विशेष धर्म को अल्पसंख्यक कह कह कर हर पार्टी वोट बटोरती है पर पारसी , बोद्ध , जैन , सिख जैसे अन्य भी तो अल्पसंख्यक है तो इनके लिए इतनी नीतिया क्यों नही बनती , इनके नाम पर सभाए व आयोजन क्यों नही होते ? समाजवादी देश कह कर कहा जाता है की सबको आगे बढ़ने के सामान अवसर मिलेंगे , ये कह कर आरक्षण से और दीवार खड़ी कर दी जाती है ! आरक्षण दूर करने या खत्म करने की बात गलती से भी कोई नही कहता बल्कि हर दिन ' हम जीते तो फलां को इतने प्रतिशत आरक्षण मिलेगा ' का नारा लगता ही रहता है ! ...... जो आम आदमी के मन में असली मुद्दा है उसको किसी की सुध नही मिलती ! नर्सरी के admission से लेकर , नौकरी पाने तक कितनी जगह रिश्वत देकर काम करवाने पड़ते है ! नौकरी मिल भी जाती है तब भी तबादला करवाने , फाइल आगे बढवाने के लिए रिश्वत दो , सत्यापन करवाने के लिए जो लोग आये उनको भी रिश्वत दो ! कौन सा ऐसा काम है जहाँ हाथ में हरा पत्ता न देना पड़ता हो ! कभी ऐसे समस्याओ की निपटारे पर कोई दल क्यों नही चर्चा करता ! ऐसे मुद्दे पर सामान्य जनता की चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो , किसी भी लिंग का हो या आयु का सबकी राय वही मिलेगी बिना हाथ पोव जोड़े ही वोट मिल जायेंगे ! पर पिछले दिनों एक गैर राजनीतिक लोगो के समूह द्वारा ऐसे मुद्दों के निपटारे के प्रयासों को विफल करने की तरीके देख कर यकीन हो गया की कोई दल असल समस्याओ की लिए कितना गंभीर है , जो अन्य उन मुद्दों को उठाएगा उसके ऊपर ही कीचड़ उछाला जायेगा ! राजनीतिक दलों ने कहा की इन मुद्दों को उठाने के लिए राजनीति में वो आये पर क्या ऐसे मुद्दों को उठाना केवल नेताओ के अधिकार क्षेत्र में है ? .... माओवादी, नक्सलवादी विदेशी दुश्मनों के साथ मिलकर देश को नुकसान पहुचाने में लगे है इस समस्या को आगे बढ़ने से रोकने के लिए क्यों नही कोई कदम उठाता ! हर सामान्य नागरिक का नहीं पता पर हर जागरूक नागरिक का ध्यान इस मुद्दे पर है ! प्रस्तावना में एक अंश ये भी है की समानता रहेगी पर क्या ये समानता है - एक प्रोफेशनल डिग्री लिए युवा पचास हज़ार प्रतिमाह कमा रहा है वहीँ एक डिग्री कॉलेज में कई डिग्रीया लेकर बैठा युवा तदर्थ शिक्षक के पद पर पाँच हज़ार कमा रहा है जब कुछ साल बीत जाते है तब भी वह दस हज़ार भी पार नहीं कर पाता ! क्या ये मुद्दा नही है ! इस पर अगर कोई दल ध्यान दे तो क्या युवा उस दल पर ध्यान नही देंगे ? आज के समय सब दल एक - दूसरे पर उंगली ही उठाते रहते है कोई खुद एक आदर्श नहीं बनना चाहता ! कोई किसी दल की कमी पकड़ लेगा फिर एक से एक ओछी बयानबाजी शुरू हो जाती है ! एक दल का नेता जब अपने दल को छोड़ता है तो non -stop अनर्गल बाते करता है और जब अन्य दलों में ज्यादा लाभ नही देखता है तो वापस आकर इतना ड्रामा होता है की घृणा सी होनी लगती है ! किसी का कोई ठोस वयक्तित्व ही नहीं सब भेडचाल में है ! ऐसे में हम अगर वोट न दे तो क्या गलत है क्योकि वोट दे तो किसे ? अपने क्षेत्र में खड़े किसी पार्टी के नेता को अच्छा समझ के वोट देते भी है तो पता चलता है की उस दल के बड़े-बड़े नेता किसी अन्य दल से निकाले व्यक्ति को गले लगा के पार्टी में शामिल कर रहे है निकाले जिन आरोपों के साथ होते है उन्हें यह कह कर सही ठहराने का प्रयास किया जाता है की अभी आरोप सिद्ध नही हुए है ... आरोप तो कई लोगो के सिद्ध नही हुए तो क्या उन्होंने वो जुर्म नही किया है .... हम सामान्य जनता कोई विवेक नहीं रखती है क्या ? सारी बुद्धि नेताओ के पास ही होती है क्या ? कोई किसी बड़े नेता का बेटा है तो कोई बेटी, उसके सारे पापो की किनारे करके स्वागत किया जाता है , किसी दल का नेता जेल में है तो भी वोट मागने का अधिकारी रहता है ... एक आम नागरिक को नौकरी देते समय सब जगह उस व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड जांचा जाता है पर देश की बागडोर सम्भालने वालो पर कोई प्रतिबन्ध नही ... हमारे क्षेत्र का नेता अगर अच्छा है तो क्या हम उस दल के अन्य दागी मंत्रियो को अनदेखा कर दे जो दल में शामिल है ! अगर कोई दल सदन में बहुमत नही भी पाता है तो अन्य दलो के साथ मिलकर कर सरकार बना लेता है तो कैसे जनता के मन की सरकार बन गयी ? ? अंत तक प्रश्न वही खड़ा रहता है की आखिर हम वोट क्यों दे ? और दे तो किसे दे ? ....................................................
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कोविड-19 ने देश के प्रमुख उद्योगों की हालत बिगाड़ दी है। इस महामारी की वजह से श्रमिकों के पलायन और लॉकडाउन के कारण मई में आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिससे उस महीने में 8 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 23. 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अप्रैल की 36 प्रतिशत गिरावट के कारण मई में आंकड़ा कुछ बेहतर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का असर लंबे समय तक दिखेगा, जिससे आने वाले महीनों में कम ही सही गिरावट दिखती रहेगी। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक मई में देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में 35-45 प्रतिशत गिरावट आ सकती है, जो अप्रैल के 55. 5 प्रतिशत के मुकाबले कम रहेगी।
मंगलवार को वाणिज्य मंत्रालय से जारी आंकड़ों के अनुसार आठ प्रमुख क्षेत्रों में मई में भी गिरावट देखी गई। गिरावट धीमी रही मगर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उत्पादन सबसे कम रहा। इस्पात उत्पादन 48. 4 प्रतिशत तक फिसल गया। अप्रैल में भी इसमें 78. 7 प्रतिशत गिरावट आई थी। सीमेंट उत्पादन में गिरावट काफी थम गई और अप्रैल में 85. 3 घटने वाला उत्पादन मई में केवल 22. 2 प्रतिशत कम हुआ। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'सीमेंट और इस्पात उत्पादन में कमी की रफ्तार सुस्त पडऩा अच्छी खबर है और इससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां इन उद्योगों की मदद कर रही हैं। लेकिन इक्रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में सीमेंट की केवल 50 प्रतिशत उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल हो पाएगा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में 68 फीसदी क्षमता काम में ली गई थी। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में इस्पात की भी केवल 58 प्रतिशत उत्पादन क्षमता काम आने के आसार हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में 77 प्रतिशत क्षमता का इस्तेमाल हुआ था। ' उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में केंद्र एवं राज्य सरकारें बुनियादी क्षेत्र में व्यय टाल सकती हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष में सीमेंट की मांग तेजी से नहीं बढ़ सकती। निर्यात के लिहाज से अहम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में मई ने सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई। अप्रैल में 24. 2 प्रतिशत गिरावट के बाद मई में भी इनके उत्पादन में 21. 3 प्रतिशत कमी आई।
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कोविड-उन्नीस ने देश के प्रमुख उद्योगों की हालत बिगाड़ दी है। इस महामारी की वजह से श्रमिकों के पलायन और लॉकडाउन के कारण मई में आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिससे उस महीने में आठ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में तेईस. चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अप्रैल की छत्तीस प्रतिशत गिरावट के कारण मई में आंकड़ा कुछ बेहतर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का असर लंबे समय तक दिखेगा, जिससे आने वाले महीनों में कम ही सही गिरावट दिखती रहेगी। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक मई में देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में पैंतीस-पैंतालीस प्रतिशत गिरावट आ सकती है, जो अप्रैल के पचपन. पाँच प्रतिशत के मुकाबले कम रहेगी। मंगलवार को वाणिज्य मंत्रालय से जारी आंकड़ों के अनुसार आठ प्रमुख क्षेत्रों में मई में भी गिरावट देखी गई। गिरावट धीमी रही मगर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उत्पादन सबसे कम रहा। इस्पात उत्पादन अड़तालीस. चार प्रतिशत तक फिसल गया। अप्रैल में भी इसमें अठहत्तर. सात प्रतिशत गिरावट आई थी। सीमेंट उत्पादन में गिरावट काफी थम गई और अप्रैल में पचासी. तीन घटने वाला उत्पादन मई में केवल बाईस. दो प्रतिशत कम हुआ। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'सीमेंट और इस्पात उत्पादन में कमी की रफ्तार सुस्त पडऩा अच्छी खबर है और इससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां इन उद्योगों की मदद कर रही हैं। लेकिन इक्रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में सीमेंट की केवल पचास प्रतिशत उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल हो पाएगा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में अड़सठ फीसदी क्षमता काम में ली गई थी। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में इस्पात की भी केवल अट्ठावन प्रतिशत उत्पादन क्षमता काम आने के आसार हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में सतहत्तर प्रतिशत क्षमता का इस्तेमाल हुआ था। ' उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में केंद्र एवं राज्य सरकारें बुनियादी क्षेत्र में व्यय टाल सकती हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष में सीमेंट की मांग तेजी से नहीं बढ़ सकती। निर्यात के लिहाज से अहम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में मई ने सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई। अप्रैल में चौबीस. दो प्रतिशत गिरावट के बाद मई में भी इनके उत्पादन में इक्कीस. तीन प्रतिशत कमी आई।
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साउथैम्पटनः इंग्लैंड पर शानदार जीत दर्ज करने वाली कैरेबियाई क्रिकेट टीम के कप्तान जेसन होल्डर ने कहा है कि वह इस बात को लेकर काफी हैरान थे कि आखिरकार पहले टेस्ट के लिए स्टुअर्ट ब्रॉड को मौका क्यों नहीं दिया गया। कैरेबियाई टीम ने तीन मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में चार विकेट से जीत हासिल कर 1-0 की लीड ले ली है।
वेस्टइंडीज की पहली पारी के दौरान इंग्लैंड के लिए मार्क वुड और जोफ्रा आर्चर कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे लेकिन आर्चर ने दूसरी पारी में अपनी कहर बरपाती गेंदों से कैरेबियाई टीम को परेशान कर दिया था। उनकी घातक गेंदबाजी की बदौलत ही शुरुआत में वेस्टइंडीज का जीत के लिए 200 रन के लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा था। कैरेबियाई टीम ने महज 27 रन के स्कोर पर तीन विकेट गंवा दिए थे और ओपनर जॉन कैंपबेल चोटिल होकर पवेलियन लौट गए थे।
ऐसी स्थिति से वेस्टइंडीज की टीम ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम किया। सीरीज का दूसरा मैच गुरुवार 16 जुलाई से मैनचेस्टर के ओल्ट ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा। ऐसे में कैरेबियाई टीम की नजर लगातार दूसरे मैच में जीत हासिल कर विजडन ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखने पर होगी। कैरेबियाई टीम को ऐसा करने से रोकने की जिम्मेदारी इंग्लैंड के पेस अटैक पर होगी।
साउथैमप्टन टेस्ट में इंग्लैंड की एकादश में शामिल नहीं किए जाने की वजह से स्टुअर्ट ब्रॉड घरेलू सरजमीं पर लगातार 52वां टेस्ट खेलने से चूक गए। इसी के साथ ही उनका इंग्लैंड के लिए घरेलू सरजमीं पर लगातार 8 साल और 51टेस्ट मैच खेलने के बाद ये सिलसिला टूट गया। साल 2012 में एजबेस्टन में वेस्टइंडीज के खिलाफ ही टेस्ट मैच खेलने के बाद से वो घर पर खेले गए सभी टेस्ट मैच में इंग्लैंड की एकादश का हिस्सा रहे थे।
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साउथैम्पटनः इंग्लैंड पर शानदार जीत दर्ज करने वाली कैरेबियाई क्रिकेट टीम के कप्तान जेसन होल्डर ने कहा है कि वह इस बात को लेकर काफी हैरान थे कि आखिरकार पहले टेस्ट के लिए स्टुअर्ट ब्रॉड को मौका क्यों नहीं दिया गया। कैरेबियाई टीम ने तीन मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में चार विकेट से जीत हासिल कर एक-शून्य की लीड ले ली है। वेस्टइंडीज की पहली पारी के दौरान इंग्लैंड के लिए मार्क वुड और जोफ्रा आर्चर कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे लेकिन आर्चर ने दूसरी पारी में अपनी कहर बरपाती गेंदों से कैरेबियाई टीम को परेशान कर दिया था। उनकी घातक गेंदबाजी की बदौलत ही शुरुआत में वेस्टइंडीज का जीत के लिए दो सौ रन के लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा था। कैरेबियाई टीम ने महज सत्ताईस रन के स्कोर पर तीन विकेट गंवा दिए थे और ओपनर जॉन कैंपबेल चोटिल होकर पवेलियन लौट गए थे। ऐसी स्थिति से वेस्टइंडीज की टीम ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम किया। सीरीज का दूसरा मैच गुरुवार सोलह जुलाई से मैनचेस्टर के ओल्ट ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा। ऐसे में कैरेबियाई टीम की नजर लगातार दूसरे मैच में जीत हासिल कर विजडन ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखने पर होगी। कैरेबियाई टीम को ऐसा करने से रोकने की जिम्मेदारी इंग्लैंड के पेस अटैक पर होगी। साउथैमप्टन टेस्ट में इंग्लैंड की एकादश में शामिल नहीं किए जाने की वजह से स्टुअर्ट ब्रॉड घरेलू सरजमीं पर लगातार बावनवां टेस्ट खेलने से चूक गए। इसी के साथ ही उनका इंग्लैंड के लिए घरेलू सरजमीं पर लगातार आठ साल और इक्यावनटेस्ट मैच खेलने के बाद ये सिलसिला टूट गया। साल दो हज़ार बारह में एजबेस्टन में वेस्टइंडीज के खिलाफ ही टेस्ट मैच खेलने के बाद से वो घर पर खेले गए सभी टेस्ट मैच में इंग्लैंड की एकादश का हिस्सा रहे थे।
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विदग्धमुखमण्डन-ले. धर्मदाससूरि; ४ परिच्छेदों में विभाजित; विषय : प्रहेलिका और चित्रकाव्य; कई बार मुद्रित ( जैसे हैबरलिन्स संकलन में और निर्णय द्वारा ) ; रत्नापण (पृष्ठ १२२ ) तथा शार्ङ्गघरपद्धति में उल्लिखित ; समय ११वी शता. का पूर्वार्ध; प्रो. गोडे प्र. ग्रन्थ मे डॉ. राघवन का कथन है कि शृङ्गारप्रकाश में इनके नाम का उल्लेख है। टीकायें१. जिनप्रभसूरि विरचित टीका; ज्ञात जन्म और मृत्यु तिथिया १२९३ व १३०९ ई. ।
आत्माराम अथवा स्वात्माराम योगीन्द्र - विरचित टीका । विद्वन्मनोहरा -- ले. ताराचन्द्र ।
वीटिका - ले. गौरीकान्त भट्टाचार्य ।
श्रवणभूषण - ले. नरहरिभट्ट । सुबोधिनी - ले त्रिलोचन ।
शिवचन्द्र विरचित टीका ।
वासुदेव के पुत्र दुर्गादास विरचित टीका ।
अवचूर्ण ।
विद्याचक्रवर्ती -- मम्मट, रुय्यक, भरतसग्रह और सम्भवत रसमीमासा के टीकाकार; देखो एनल्स ऑफ भण्डार. भाग १६, पृष्ठ १४०; समय -- १४वी शता. के लगभग ।
विद्याधर एकावली के ले; ऊपर देखो पृष्ठ २९२-२९३; समय १२८५१३२५ ई. ।
विद्यानाथ - प्रतापरुद्रयशोभूषण के ले.; ऊपर देखो पृष्ठ २९३-२९५ ; समय १४वीं शता. का प्रथम चतुर्थांश ।
विद्याभूषण - काव्यप्रकाश कारिकाओ की साहित्यकौमुदी टीका के रचयिता । विद्याराम-रसदीर्घिका के ले ।
विद्वन्मनोहरा-ताराचन्द्र विरचित विदग्धमुखमण्डन की टीका ।
विनय चन्द्र --काव्यशिक्षा के ले ।
विर्माशनी-जयरथविरचित अलङ्कारसर्वस्व की टीका । विरूपाक्ष --चन्द्रालोक की शारदशर्वरी टीका के ले. ।
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विदग्धमुखमण्डन-ले. धर्मदाससूरि; चार परिच्छेदों में विभाजित; विषय : प्रहेलिका और चित्रकाव्य; कई बार मुद्रित ; रत्नापण तथा शार्ङ्गघरपद्धति में उल्लिखित ; समय ग्यारहवी शता. का पूर्वार्ध; प्रो. गोडे प्र. ग्रन्थ मे डॉ. राघवन का कथन है कि शृङ्गारप्रकाश में इनके नाम का उल्लेख है। टीकायेंएक. जिनप्रभसूरि विरचित टीका; ज्ञात जन्म और मृत्यु तिथिया एक हज़ार दो सौ तिरानवे व एक हज़ार तीन सौ नौ ई. । आत्माराम अथवा स्वात्माराम योगीन्द्र - विरचित टीका । विद्वन्मनोहरा -- ले. ताराचन्द्र । वीटिका - ले. गौरीकान्त भट्टाचार्य । श्रवणभूषण - ले. नरहरिभट्ट । सुबोधिनी - ले त्रिलोचन । शिवचन्द्र विरचित टीका । वासुदेव के पुत्र दुर्गादास विरचित टीका । अवचूर्ण । विद्याचक्रवर्ती -- मम्मट, रुय्यक, भरतसग्रह और सम्भवत रसमीमासा के टीकाकार; देखो एनल्स ऑफ भण्डार. भाग सोलह, पृष्ठ एक सौ चालीस; समय -- चौदहवी शता. के लगभग । विद्याधर एकावली के ले; ऊपर देखो पृष्ठ दो सौ बानवे-दो सौ तिरानवे; समय एक करोड़ अट्ठाईस लाख इक्यावन हज़ार तीन सौ पच्चीस ई. । विद्यानाथ - प्रतापरुद्रयशोभूषण के ले.; ऊपर देखो पृष्ठ दो सौ तिरानवे-दो सौ पचानवे ; समय चौदहवीं शता. का प्रथम चतुर्थांश । विद्याभूषण - काव्यप्रकाश कारिकाओ की साहित्यकौमुदी टीका के रचयिता । विद्याराम-रसदीर्घिका के ले । विद्वन्मनोहरा-ताराचन्द्र विरचित विदग्धमुखमण्डन की टीका । विनय चन्द्र --काव्यशिक्षा के ले । विर्माशनी-जयरथविरचित अलङ्कारसर्वस्व की टीका । विरूपाक्ष --चन्द्रालोक की शारदशर्वरी टीका के ले. ।
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पीठ ने द्रमुक नेता की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि भाषण को पूरा पढ़ने से पता चलता है कि यह दिवंगत न्यायमूर्ति वरदराजन (मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश) के लिए अपमानजनक नहीं था या उनका अनुसूचित जातियों के सदस्यों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था.
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने द्रमुक के राज्यसभा सांसद आरएस भारती (RS Bharathi) के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को सोमवार को रद्द कर दिया. उनके द्वारा 2020 में दिए गए एक भाषण को लेकर यह मामला दर्ज किया गया था.
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सांसद के खिलाफ आपराधिक मामले को यह कहते हुए बंद कर दिया कि उनके भाषण में उन अपराधों की ओर संकेत करने वाली कोई बात नहीं है जिनके लिए उन पर आरोप लगाया गया है. शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) और अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी (Amit Anand Tiwari) की दलीलों को स्वीकार किया कि सांसद के खिलाफ इस कठोर कानून के तहत अपराध का कोई ममाला नहीं बनता है.
पत्रकारों से बात करते हुए भारती ने कहा था कि उनका भाषण सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें किसी को संतुष्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है. राज्यसभा सांसद ने कहा था कि उन्होंने भ्रष्टाचार मामले में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम (O Panneerselvam) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.
पीठ ने द्रमुक नेता की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि भाषण को पूरा पढ़ने से पता चलता है कि यह दिवंगत न्यायमूर्ति वरदराजन (मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश) के लिए अपमानजनक नहीं था या उनका अनुसूचित जातियों के सदस्यों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था. सांसद के खिलाफ इस अधिनियम की धारा 3 (1) (यू) और (वी) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
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पीठ ने द्रमुक नेता की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि भाषण को पूरा पढ़ने से पता चलता है कि यह दिवंगत न्यायमूर्ति वरदराजन के लिए अपमानजनक नहीं था या उनका अनुसूचित जातियों के सदस्यों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने द्रमुक के राज्यसभा सांसद आरएस भारती के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को सोमवार को रद्द कर दिया. उनके द्वारा दो हज़ार बीस में दिए गए एक भाषण को लेकर यह मामला दर्ज किया गया था. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सांसद के खिलाफ आपराधिक मामले को यह कहते हुए बंद कर दिया कि उनके भाषण में उन अपराधों की ओर संकेत करने वाली कोई बात नहीं है जिनके लिए उन पर आरोप लगाया गया है. शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी की दलीलों को स्वीकार किया कि सांसद के खिलाफ इस कठोर कानून के तहत अपराध का कोई ममाला नहीं बनता है. पत्रकारों से बात करते हुए भारती ने कहा था कि उनका भाषण सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें किसी को संतुष्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है. राज्यसभा सांसद ने कहा था कि उन्होंने भ्रष्टाचार मामले में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पीठ ने द्रमुक नेता की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि भाषण को पूरा पढ़ने से पता चलता है कि यह दिवंगत न्यायमूर्ति वरदराजन के लिए अपमानजनक नहीं था या उनका अनुसूचित जातियों के सदस्यों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था. सांसद के खिलाफ इस अधिनियम की धारा तीन और के तहत मामला दर्ज किया गया था.
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आरएसएस से जुड़े और भाजपा के महासचिव राम माधव ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि साधु-संतों की इच्छाओं का सम्मान किया जाएगा। यह बात राम माधव ने कुंभ मेले में आने के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि शीघ्र ही राम मंदिर का सपना पूरा होगा। मीडिया के एक सवाल के जवाब में भाजपा महासचिव ने कहा कि साधु-संतों की इच्छाशक्ति के सामने सबको झुकना पड़ेगा। हम अदालत के आदेश के इंतजार में हैं। राम मंदिर अवश्य बनेगा।
संत-महात्माओं के साथ-साथ करोड़ों भारत के देशवासियों की भी इच्छा है कि भव्य राम मंदिर बने, वह सपना जरूर साकार होगा और शीघ्र ही होगा।
राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा की प्रतिबद्धता और मामले के सुप्रीम कोर्ट में होने का हवाला देते हुए राम माधव ने आगे कहा कि हम हमेशा राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और इस समय सुप्रीम कोर्ट के सामने यह विषय गया हुआ है, शीघ्र ही इसका एक समाधान होगा।
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आरएसएस से जुड़े और भाजपा के महासचिव राम माधव ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि साधु-संतों की इच्छाओं का सम्मान किया जाएगा। यह बात राम माधव ने कुंभ मेले में आने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही राम मंदिर का सपना पूरा होगा। मीडिया के एक सवाल के जवाब में भाजपा महासचिव ने कहा कि साधु-संतों की इच्छाशक्ति के सामने सबको झुकना पड़ेगा। हम अदालत के आदेश के इंतजार में हैं। राम मंदिर अवश्य बनेगा। संत-महात्माओं के साथ-साथ करोड़ों भारत के देशवासियों की भी इच्छा है कि भव्य राम मंदिर बने, वह सपना जरूर साकार होगा और शीघ्र ही होगा। राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा की प्रतिबद्धता और मामले के सुप्रीम कोर्ट में होने का हवाला देते हुए राम माधव ने आगे कहा कि हम हमेशा राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और इस समय सुप्रीम कोर्ट के सामने यह विषय गया हुआ है, शीघ्र ही इसका एक समाधान होगा।
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नई दिल्ली/दि. ६- आईपीएल 2020 के पहले क्वालीफायर में मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को 57 रनों से हराकर इस सीजन फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है. इस मुकाबले में गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने बेहतरीन बॉलिंग के दम पर मुंबई की जीत में अहम भूमिका अदा की. मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन मौजूदा आईपीएल में शानदार रहा है, अब तक खेले गए 15 मैचों में इस टीम ने 10 मैचों में जीत दर्ज की है और 5 मैचों में इसे हार का सामना करना पड़ा है. आईपीएल की 5वीं ट्रॉफी से मुंबई इंडियंस महज एक कदम दूर है.
रोहित शर्मा ने दिल्ली के खिलाफ मुकाबले में ओपनिंग करते हुए शून्य पर आाउट हो गए. इसके साथ ही उन्होंने एक शर्मनाक रिकॉर्ड को भी अपने नाम कर लिया. वो आईपीएल में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. रोहित 13वीं बार इस टूर्नामेंट में जीरो पर आउट हुए हैं. उनके साथ इस लिस्ट में पार्थिव पटेल (13) और हरभजन सिंह (13) भी मौजूद हैं.
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नई दिल्ली/दि. छः- आईपीएल दो हज़ार बीस के पहले क्वालीफायर में मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को सत्तावन रनों से हराकर इस सीजन फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है. इस मुकाबले में गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने बेहतरीन बॉलिंग के दम पर मुंबई की जीत में अहम भूमिका अदा की. मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन मौजूदा आईपीएल में शानदार रहा है, अब तक खेले गए पंद्रह मैचों में इस टीम ने दस मैचों में जीत दर्ज की है और पाँच मैचों में इसे हार का सामना करना पड़ा है. आईपीएल की पाँचवीं ट्रॉफी से मुंबई इंडियंस महज एक कदम दूर है. रोहित शर्मा ने दिल्ली के खिलाफ मुकाबले में ओपनिंग करते हुए शून्य पर आाउट हो गए. इसके साथ ही उन्होंने एक शर्मनाक रिकॉर्ड को भी अपने नाम कर लिया. वो आईपीएल में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. रोहित तेरहवीं बार इस टूर्नामेंट में जीरो पर आउट हुए हैं. उनके साथ इस लिस्ट में पार्थिव पटेल और हरभजन सिंह भी मौजूद हैं.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने अटलांटा के विश्व प्रसिद्ध सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एडं प्रिवेंशन (सीडीसी) में विशेषज्ञों के साथ चार घंटे लम्बी बैठक की। वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने जापानी बुखार और एक्यूट इनसेफलाइटिज सिंड्रोम (एईएस) की समस्या पर चर्चा की जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी जनजीवन का नुकसान हो रहा है।
डॉ. हर्षवर्धन ने शुरूआती चेतावनी को विकसित करने, महामारी से निपटने की तैयारियां, निदान किट और डेंगू वैक्सीन को विकसित करने में द्विपक्षीय सहयोग में सीडीसी द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी सहायता की संभावनाओं पर चर्चा की। मंत्री ने सीडीसी के इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर का भी दौरा किया। सीडीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. स्टीव मोनरो ने तेजी से बढ़ती हुर्इ छूत की बीमारियों पर प्रकाश डाला जो विश्व समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
वार्ता के दौरान टीबी से निपटने में भारत की समस्याओंं के मुद्दे को उठाया गया। सीडीसी के वैज्ञानिकों ने खराब स्वास्थ्य सुविधाएं, मल्टी ड्रग रजिस्टेंट पर अपर्याप्त आंकड़ें और अस्पताल के कर्मचारियों के संक्रमित होने को भारत में मुख्य समस्या की वजह माना। तम्बाकू नियंत्रण वातावरण और व्यावसायिक औषधि पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया। स्वास्थ्य मंत्री और सीडीसी के विशेषज्ञों ने मधुमेह, अत्यधिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता की संस्कृति को खत्म करने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के कार्यक्रमों पर अपने विचारों काे साझा किया।
डॉ. हर्षवर्धन ने डॉ. फ्रिडेन से सीडीसी द्वारा भारत में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम का मूल्यांकन किए जाने का निवेदन किया। सीडीसी के निदेशक ने यह सुझाव दिया कि भारत सरकार जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रमों के प्रबंधन को मजबूत करे। स्वास्थ्य मंत्री ने भारत में सभी सामाजिक अभियानों में स्वास्थ्य को मुख्य मुद्दा बनाने की अपनी इच्छा दोहराई । डॉ. फ्रिडेन ने कहा कि भारत में पल्स पोलियो अभियान के लिए बनाई गई बेहतरीन सामाजिक संरचना को खत्म नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसका इस्तेमाल प्रतिरोधक अभियान को और मजबूत बनाए जाने में किया जाना चाहिए।
सीडीसी प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ विभिन्न बीमारियों पर किए गए अनुसंधान की प्रगति पर सूचना साझा किए। भविष्य में भारत और इस प्रमुख संस्थान के बीच संबंध और मजबूत होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह घोषणा की कि भारत की परियोजनाओं पर बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए सीडीसी एक डॉक्टर की नियुक्ति करेगा, जो निदेशक और स्वास्थ्य मंत्री के बीच सेतु का काम करेगा।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने अटलांटा के विश्व प्रसिद्ध सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एडं प्रिवेंशन में विशेषज्ञों के साथ चार घंटे लम्बी बैठक की। वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने जापानी बुखार और एक्यूट इनसेफलाइटिज सिंड्रोम की समस्या पर चर्चा की जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी जनजीवन का नुकसान हो रहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने शुरूआती चेतावनी को विकसित करने, महामारी से निपटने की तैयारियां, निदान किट और डेंगू वैक्सीन को विकसित करने में द्विपक्षीय सहयोग में सीडीसी द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी सहायता की संभावनाओं पर चर्चा की। मंत्री ने सीडीसी के इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर का भी दौरा किया। सीडीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. स्टीव मोनरो ने तेजी से बढ़ती हुर्इ छूत की बीमारियों पर प्रकाश डाला जो विश्व समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वार्ता के दौरान टीबी से निपटने में भारत की समस्याओंं के मुद्दे को उठाया गया। सीडीसी के वैज्ञानिकों ने खराब स्वास्थ्य सुविधाएं, मल्टी ड्रग रजिस्टेंट पर अपर्याप्त आंकड़ें और अस्पताल के कर्मचारियों के संक्रमित होने को भारत में मुख्य समस्या की वजह माना। तम्बाकू नियंत्रण वातावरण और व्यावसायिक औषधि पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया। स्वास्थ्य मंत्री और सीडीसी के विशेषज्ञों ने मधुमेह, अत्यधिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता की संस्कृति को खत्म करने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के कार्यक्रमों पर अपने विचारों काे साझा किया। डॉ. हर्षवर्धन ने डॉ. फ्रिडेन से सीडीसी द्वारा भारत में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम का मूल्यांकन किए जाने का निवेदन किया। सीडीसी के निदेशक ने यह सुझाव दिया कि भारत सरकार जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रमों के प्रबंधन को मजबूत करे। स्वास्थ्य मंत्री ने भारत में सभी सामाजिक अभियानों में स्वास्थ्य को मुख्य मुद्दा बनाने की अपनी इच्छा दोहराई । डॉ. फ्रिडेन ने कहा कि भारत में पल्स पोलियो अभियान के लिए बनाई गई बेहतरीन सामाजिक संरचना को खत्म नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसका इस्तेमाल प्रतिरोधक अभियान को और मजबूत बनाए जाने में किया जाना चाहिए। सीडीसी प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ विभिन्न बीमारियों पर किए गए अनुसंधान की प्रगति पर सूचना साझा किए। भविष्य में भारत और इस प्रमुख संस्थान के बीच संबंध और मजबूत होंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने यह घोषणा की कि भारत की परियोजनाओं पर बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए सीडीसी एक डॉक्टर की नियुक्ति करेगा, जो निदेशक और स्वास्थ्य मंत्री के बीच सेतु का काम करेगा।
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जीवन मुझसे हरदम जीता ,
मै सदा सदा इससे हारा ,,
आकुल मन पिंजर बंद हुआ ,
कातर घायल यह बेचारा ,,
अति गहन तिमिर में व्याकुलमन,
विस्मृति से मुझे उबारे कौन,,
यह बुद्धि मनीषा किससे पूछे,
निर्जर भी सब हो गए मौन ,,
कुसुमित होता था कुसुम जहां ,
वह बगिया भी अब सूख गई ,,
निर्झरिणी बहती थी जहां सदा,
वह अमिय जाह्नवी सूख गई ,,
हा करुणा करुण विलाप करे ,
पर नेत्र नही हैं पनियाले ,,
तट बंध भ्रमित हो यह प्रश्न करे ,
कहाँ नीर है किसे संभाले ,,
और हाँ मुशायरे को व्यस्तता के कारण समय नही दे पाया :( लेकिन क्या करें मार्च है तो बस मार्च है और जब समय मिला तो पता चला यहाँ भी क्लोजिंग हो गई :)
अन्यमनस्कता नहीं बल्कि रीतापन. 'कुछ नहीं' नहीं बल्कि 'कुछ' के 'नहीं' होने का भाव. रचना में व्याप्त नैराश्य भय से कंपाता नहीं, व्यथित करता है. कहाँ गयी सुषमा.. प्रकृति-सुषमा ? कहाँ गया हमारा विस्तार.. भावनात्मक विस्तार ?
इन अन्तर्प्रवाहित सकारात्मक किन्तु कचोटती हुई भाव-पंक्तियों के लिये भाई अश्विनीजी को हार्दिक बधाइयाँ.
कहाँ नीर है किसी संभालें !
कविता की अंतिम पंक्ति पर पहुँचते-पहुँचते आपने मन को बिलकुल व्याकुल कर दिया। भावों के साथ शब्दों और सुरों की ये जुगलबंदी लाजवाब है। नजर न लगे भाई!
ADARNIYA ASHVINI JI SADAR,
कुसुमित होता था कुसुम जहां ,
वह बगिया भी अब सूख गई ,,
निर्झरिणी बहती थी जहां सदा,
वह अमिय जाह्नवी सूख गई ,,
BAHUT SUNDAR BHAV KE SATH SUNDAR PRASTUTI, BADHAI.
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जीवन मुझसे हरदम जीता , मै सदा सदा इससे हारा ,, आकुल मन पिंजर बंद हुआ , कातर घायल यह बेचारा ,, अति गहन तिमिर में व्याकुलमन, विस्मृति से मुझे उबारे कौन,, यह बुद्धि मनीषा किससे पूछे, निर्जर भी सब हो गए मौन ,, कुसुमित होता था कुसुम जहां , वह बगिया भी अब सूख गई ,, निर्झरिणी बहती थी जहां सदा, वह अमिय जाह्नवी सूख गई ,, हा करुणा करुण विलाप करे , पर नेत्र नही हैं पनियाले ,, तट बंध भ्रमित हो यह प्रश्न करे , कहाँ नीर है किसे संभाले ,, और हाँ मुशायरे को व्यस्तता के कारण समय नही दे पाया : अन्यमनस्कता नहीं बल्कि रीतापन. 'कुछ नहीं' नहीं बल्कि 'कुछ' के 'नहीं' होने का भाव. रचना में व्याप्त नैराश्य भय से कंपाता नहीं, व्यथित करता है. कहाँ गयी सुषमा.. प्रकृति-सुषमा ? कहाँ गया हमारा विस्तार.. भावनात्मक विस्तार ? इन अन्तर्प्रवाहित सकारात्मक किन्तु कचोटती हुई भाव-पंक्तियों के लिये भाई अश्विनीजी को हार्दिक बधाइयाँ. कहाँ नीर है किसी संभालें ! कविता की अंतिम पंक्ति पर पहुँचते-पहुँचते आपने मन को बिलकुल व्याकुल कर दिया। भावों के साथ शब्दों और सुरों की ये जुगलबंदी लाजवाब है। नजर न लगे भाई! ADARNIYA ASHVINI JI SADAR, कुसुमित होता था कुसुम जहां , वह बगिया भी अब सूख गई ,, निर्झरिणी बहती थी जहां सदा, वह अमिय जाह्नवी सूख गई ,, BAHUT SUNDAR BHAV KE SATH SUNDAR PRASTUTI, BADHAI.
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छपरा में मांझी थाना क्षेत्र के महम्मदपुर में शनिवार को एक आठ वर्षीय बालक की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। मृतक ताजपुर के छोटकी फुलवरिया गांव निवासी बीरेंद्र साहनी का पुत्र अंकित कुमार है। घटना के सम्बन्ध में बताया जाता है कि अंकित कुछ दिन पूर्व अपने ननिहाल तथा महम्मदपुर निवासी गुलाबी साहनी के घर आया था।
शनिवार को घर के सभी सदस्य खेत में काम करने चले गए। वापस लौटने के बाद अंकित को घर पर नही पाकर चिंतित परिजनों ने खोजबीन शुरू की। काफी देर तक कुछ भी पता नही चल सका। बाद में घर के बगल पोखरे में ढूंढा गया इसी क्रम में गड्ढे से बालक का शव बरामद किया गया। शव मिलते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही पहुंची मांझी थाना पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु छपरा भेज दिया।
घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि अंकित अपने परिवार का बड़ा लड़का था। ननिहाल में आया आंकित को छोड़ परिवार वाले घर से बाहर चले गए। वापस घर आने के दौरान अंकित घर से गायब था काफी खोजबीन के बाद किसी स्थानीय ने बताया कि उसको पोखर के तरफ देखा गया। काफी खोजबीन के बाद पोखर से शव बरामद हुआ। शव मिलते ही परिवार वालो में चीत्कार मच गया।
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छपरा में मांझी थाना क्षेत्र के महम्मदपुर में शनिवार को एक आठ वर्षीय बालक की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। मृतक ताजपुर के छोटकी फुलवरिया गांव निवासी बीरेंद्र साहनी का पुत्र अंकित कुमार है। घटना के सम्बन्ध में बताया जाता है कि अंकित कुछ दिन पूर्व अपने ननिहाल तथा महम्मदपुर निवासी गुलाबी साहनी के घर आया था। शनिवार को घर के सभी सदस्य खेत में काम करने चले गए। वापस लौटने के बाद अंकित को घर पर नही पाकर चिंतित परिजनों ने खोजबीन शुरू की। काफी देर तक कुछ भी पता नही चल सका। बाद में घर के बगल पोखरे में ढूंढा गया इसी क्रम में गड्ढे से बालक का शव बरामद किया गया। शव मिलते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही पहुंची मांझी थाना पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु छपरा भेज दिया। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि अंकित अपने परिवार का बड़ा लड़का था। ननिहाल में आया आंकित को छोड़ परिवार वाले घर से बाहर चले गए। वापस घर आने के दौरान अंकित घर से गायब था काफी खोजबीन के बाद किसी स्थानीय ने बताया कि उसको पोखर के तरफ देखा गया। काफी खोजबीन के बाद पोखर से शव बरामद हुआ। शव मिलते ही परिवार वालो में चीत्कार मच गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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न्यूज डेस्कः बिहार में कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा हैं। लॉकडाउन के बावजूद कुछ जिलों में कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा हैं। लोग खुद को डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक सरकार इन जिलों में स्पेशल टीम भेजने की तैयारी कर रही हैं।
खबर के अनुसार बिहार में जिस तरह के हालात हैं वो बड़ी महामारी का इसारा कर रहे हैं। जिससे सरकार की टेंशन बढ़ गई हैं। इस महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भी बिहार में टेस्टिंग को बढ़ाने का आदेश दिया हैं।
बिहार के 8 जिलों में कोरोना से हाहाकार।
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न्यूज डेस्कः बिहार में कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा हैं। लॉकडाउन के बावजूद कुछ जिलों में कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा हैं। लोग खुद को डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक सरकार इन जिलों में स्पेशल टीम भेजने की तैयारी कर रही हैं। खबर के अनुसार बिहार में जिस तरह के हालात हैं वो बड़ी महामारी का इसारा कर रहे हैं। जिससे सरकार की टेंशन बढ़ गई हैं। इस महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भी बिहार में टेस्टिंग को बढ़ाने का आदेश दिया हैं। बिहार के आठ जिलों में कोरोना से हाहाकार।
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अनुराग ठाकुर ने अरविंद केजरीवाल पर साधा निशाना, पूछा क्या है Mr. V से रिश्ता।
भाजपा के मंत्री अनुराग ठाकुर ने पुणे में अरविंद केजरीवाल व सम्पूर्ण आम आदमी पार्टी पर धावा बोल दिया है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है वा उनसे सीधा प्रश्न किया है की उनका विजय नायर से क्या खास रिश्ता है। विजय नायर का नाम शराब घोटाले में आने के बाद भी अरविंद केजरीवाल उसे स्वीकार नही कर रहे थे व इस बात पर मखौल बना रहे थे की ऐसा हो नहीं सकता। देखते ही देखते अब आम आदमी पार्टी के कई नेता ED की गिरफ्त में आते जा रहे है।
अनुराह ठाकुर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि विजय नायर एक्साइज पॉलिसी की मीटिंग्स का हिस्सा बनते थे और अगर बनते थे तो किस अधिकार से बनते थे?
अनुरह ठाकुर ने कहा की जब अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी इतनी साफ है तो उन्हें किस बात का डर है जांच एजेंसियों को अपना काम करने दे।
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अनुराग ठाकुर ने अरविंद केजरीवाल पर साधा निशाना, पूछा क्या है Mr. V से रिश्ता। भाजपा के मंत्री अनुराग ठाकुर ने पुणे में अरविंद केजरीवाल व सम्पूर्ण आम आदमी पार्टी पर धावा बोल दिया है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है वा उनसे सीधा प्रश्न किया है की उनका विजय नायर से क्या खास रिश्ता है। विजय नायर का नाम शराब घोटाले में आने के बाद भी अरविंद केजरीवाल उसे स्वीकार नही कर रहे थे व इस बात पर मखौल बना रहे थे की ऐसा हो नहीं सकता। देखते ही देखते अब आम आदमी पार्टी के कई नेता ED की गिरफ्त में आते जा रहे है। अनुराह ठाकुर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि विजय नायर एक्साइज पॉलिसी की मीटिंग्स का हिस्सा बनते थे और अगर बनते थे तो किस अधिकार से बनते थे? अनुरह ठाकुर ने कहा की जब अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी इतनी साफ है तो उन्हें किस बात का डर है जांच एजेंसियों को अपना काम करने दे।
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परन्तु सिराजके सामने क्या उसको चालाकी चल सकती थो ? वह भी उसके साथ ही साथ दर्पण के पास पहुँच गया और कहा "फ़ैज़ो ! क्या देखा ! क्या अपने रूप पर तुम आप हो मोहित नहीं होगई ? "
फैज़ी मृदु मन्द हँसो हँसकर बोली- "अपनी ही आँखोंसे अपना सौन्दर्य कैसे मालूम पड़े ? यदि वह बादशाह को आँखोंमें अच्छा लगे, तो उसका कारण यही प्रतीत होता है कि प्रणयो की आँखों में प्रणयिनी सदैव ही आलोक मुन्दरी ज्ञात होती है।"
बातों ही बातोंमें कहीं चित्तका भाव न खुलजावे, यह सोचकर सिराजने कहा कि "यही ठीक है । चलो, अब सोवें ; रात बहुत जाचुकी है।"
अब फैज़ी बची। और कोई बात न कहकर धीरे धीरे जाकर सो रही ।
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परन्तु सिराजके सामने क्या उसको चालाकी चल सकती थो ? वह भी उसके साथ ही साथ दर्पण के पास पहुँच गया और कहा "फ़ैज़ो ! क्या देखा ! क्या अपने रूप पर तुम आप हो मोहित नहीं होगई ? " फैज़ी मृदु मन्द हँसो हँसकर बोली- "अपनी ही आँखोंसे अपना सौन्दर्य कैसे मालूम पड़े ? यदि वह बादशाह को आँखोंमें अच्छा लगे, तो उसका कारण यही प्रतीत होता है कि प्रणयो की आँखों में प्रणयिनी सदैव ही आलोक मुन्दरी ज्ञात होती है।" बातों ही बातोंमें कहीं चित्तका भाव न खुलजावे, यह सोचकर सिराजने कहा कि "यही ठीक है । चलो, अब सोवें ; रात बहुत जाचुकी है।" अब फैज़ी बची। और कोई बात न कहकर धीरे धीरे जाकर सो रही ।
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अमृतांशी जोशी, भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव (MP Vidhan Sabha Chunav 2023) के लिए कुछ ही समय बचा हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी है। प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी समितियां जल्द ही गठित होंगी। सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के पदाधिकारियों के सामने दिग्गजों ने प्रस्ताव रखा था। चुनाव अभियान समिति और प्रचार अभियान समिति का जल्द गठन करने की मांग की है।
एमपी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह (Govind Singh) ने कहा कि हमने शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की है। जल्द से जल्द समितियों का गठन होगा तो संगठन में मजबूती और काम में तेजी आएगी। हारी हुई सीटों पर टिकट देने को लेकर केंद्रीय नेतृत्व फैसला करेगा। वहीं चुनावी अभियान में चेहरे को लेकर बोले गोविंद सिंह ने कहा कि हमारे पास चेहरों की कोई कमी नहीं है।
गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना (Mukhyamantri Sikho Kamao Yojana) को लेकर कहा कि सरकार ने प्रदेश का खजाना खाली कर दिया। युवाओं को 8 हजार कहां से देंगे। इन्होंने क्या कमाया जो लुटा रहे है। अंतिम समय में दान पुण्य करने से कुछ नहीं होगा। प्रदेश की जनता जबाव देने के तैयार बैठी है। दिसंबर में परिणाम सामने आ जाएगा। प्रदेश खजाना खोखला हो चुका है। लाखों करोड़ों का कर्ज चढ़ चुका हैं।
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अमृतांशी जोशी, भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय बचा हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी है। प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी समितियां जल्द ही गठित होंगी। सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के पदाधिकारियों के सामने दिग्गजों ने प्रस्ताव रखा था। चुनाव अभियान समिति और प्रचार अभियान समिति का जल्द गठन करने की मांग की है। एमपी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि हमने शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की है। जल्द से जल्द समितियों का गठन होगा तो संगठन में मजबूती और काम में तेजी आएगी। हारी हुई सीटों पर टिकट देने को लेकर केंद्रीय नेतृत्व फैसला करेगा। वहीं चुनावी अभियान में चेहरे को लेकर बोले गोविंद सिंह ने कहा कि हमारे पास चेहरों की कोई कमी नहीं है। गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना को लेकर कहा कि सरकार ने प्रदेश का खजाना खाली कर दिया। युवाओं को आठ हजार कहां से देंगे। इन्होंने क्या कमाया जो लुटा रहे है। अंतिम समय में दान पुण्य करने से कुछ नहीं होगा। प्रदेश की जनता जबाव देने के तैयार बैठी है। दिसंबर में परिणाम सामने आ जाएगा। प्रदेश खजाना खोखला हो चुका है। लाखों करोड़ों का कर्ज चढ़ चुका हैं।
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वित्त मंत्री अरण जेटली ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा देश में भुगतान बैंकों के लिये लाइसेंस देने का रिजर्व बैंक का निर्णय एक बड़ा कदम है, इससे बैंकिंग प्रणाली में और अधिक धन आयेगा तथा ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार होगा। जेटली ने यहां कहा, आरबीआई का भुगतान बैंकों के लिए लाइसेंस देना एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम है। भुगतान बैंक ग्रामीण इलाकों में लोगों तक पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बैंक ने 11 आवेदकों को भुगतान बैंक की सेवाएं शुरू करने की आज सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी। इनमें डाक विभाग, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आदित्य बिड़ला नूवो, वोडाफोन और एयरटेल भी शामिल हैं। आरबीआई ने कहा है कि भविष्य में ऐसे बैंकों के लिए कभी भी ओवदन किये जा सकते हैं। जेटली ने कहा, भुगतान बैंकों से बैंकिंग तंत्र में और धन आयेगा। स्टेट बैंक सहित कई बड़े बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढाना चाहते हैं। भुगतान बैंकों से उन्हें ऐसा करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री अरण जेटली ने रिजर्व बैंक के इस कदम पर टिप्पणी करते हुये कहा कि इससे बैंकिंग तंत्र में और धन आयेगा और दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र में लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, भारतीय स्टेट बैंक सहित कई बड़े बैंक ग्रामीण क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिये प्रयास कर रहे हैं, भुगतान बैंक इस काम में उनकी मदद करेंगे। देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रस्तावित भुगतान बैंक में 30 प्रतिशत तक हिस्सेदारी ले सकता है जबकि देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल अपने भुगतान बैंक में 19. 9 प्रतिशत हिस्सेदारी कोटक महिन्द्रा बैंक लिमिटेड को देने की योजना है।
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वित्त मंत्री अरण जेटली ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा देश में भुगतान बैंकों के लिये लाइसेंस देने का रिजर्व बैंक का निर्णय एक बड़ा कदम है, इससे बैंकिंग प्रणाली में और अधिक धन आयेगा तथा ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार होगा। जेटली ने यहां कहा, आरबीआई का भुगतान बैंकों के लिए लाइसेंस देना एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम है। भुगतान बैंक ग्रामीण इलाकों में लोगों तक पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बैंक ने ग्यारह आवेदकों को भुगतान बैंक की सेवाएं शुरू करने की आज सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी। इनमें डाक विभाग, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आदित्य बिड़ला नूवो, वोडाफोन और एयरटेल भी शामिल हैं। आरबीआई ने कहा है कि भविष्य में ऐसे बैंकों के लिए कभी भी ओवदन किये जा सकते हैं। जेटली ने कहा, भुगतान बैंकों से बैंकिंग तंत्र में और धन आयेगा। स्टेट बैंक सहित कई बड़े बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढाना चाहते हैं। भुगतान बैंकों से उन्हें ऐसा करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री अरण जेटली ने रिजर्व बैंक के इस कदम पर टिप्पणी करते हुये कहा कि इससे बैंकिंग तंत्र में और धन आयेगा और दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र में लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, भारतीय स्टेट बैंक सहित कई बड़े बैंक ग्रामीण क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिये प्रयास कर रहे हैं, भुगतान बैंक इस काम में उनकी मदद करेंगे। देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रस्तावित भुगतान बैंक में तीस प्रतिशत तक हिस्सेदारी ले सकता है जबकि देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल अपने भुगतान बैंक में उन्नीस. नौ प्रतिशत हिस्सेदारी कोटक महिन्द्रा बैंक लिमिटेड को देने की योजना है।
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सर छोटूराम कन्या महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को रेड रिबन कल्ब और यूथ रेडक्राॅस की तरफ से एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई।
सांपला। सर छोटूराम कन्या महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को रेड रिबन कल्ब और यूथ रेडक्राॅस की तरफ से एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई। इसके अलावा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में तन्नू प्रथम, शीतल द्वितीय और चिंकी तृतीय स्थान पर रही।
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ चंद्र शेखर ने छात्राओं को एचआईवी के प्रति जागरूक किया। कल्ब की संचालक प्रीति कुमारी ने बताया कि इस कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका डॉ. सुनील चौहान, डाॅ. पदमा दलाल, डॉ. प्रीतम डॉ. मीनाक्षी ने निभाई। इसके अलावा डॉ. रीतू, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. रेखा, नीलम का भी सहयोग रहा।
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सर छोटूराम कन्या महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को रेड रिबन कल्ब और यूथ रेडक्राॅस की तरफ से एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई। सांपला। सर छोटूराम कन्या महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को रेड रिबन कल्ब और यूथ रेडक्राॅस की तरफ से एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई। इसके अलावा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में तन्नू प्रथम, शीतल द्वितीय और चिंकी तृतीय स्थान पर रही। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ चंद्र शेखर ने छात्राओं को एचआईवी के प्रति जागरूक किया। कल्ब की संचालक प्रीति कुमारी ने बताया कि इस कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका डॉ. सुनील चौहान, डाॅ. पदमा दलाल, डॉ. प्रीतम डॉ. मीनाक्षी ने निभाई। इसके अलावा डॉ. रीतू, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. रेखा, नीलम का भी सहयोग रहा।
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Don't Miss!
फिल्म हेप्पी न्यू ईयर को लेकर अब शाहरुख खान का ओवर कॉन्फीडेंस बढ़ता जा रहा है। उनका दावा है कि यह फिल्म सुपर हिट होगी और सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। और यह सब होगा उनकी खुद की वजह से। शाहरुख ने कहा है कि वो जिस फिल्म में होते हैं, वह फिल्म अपने आप बड़ी हो जाती है।
दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाये हुए शाहरुख ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं कभी कोई चिंता नहीं करता। मैं एक अच्छा कारीगर हूं और जिस स्तर पर काम कर रहा हूं, वो भी सही है। मैं अपनी च्वाइस जानता हूं और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ ही देता हूं। मुझे हर रोज किसी भी प्रकार की चिंता नहीं होती, खास कर फिल्मों की, क्यांकि जिस फिल्म में मैं रहता हूं वो खुद बड़ी हो जाती है।"
शाहरुख ने कहा, "कलाकार को चिंता नहीं करनी चाहिये, अगर चिंता करते हैं तो वो कलाकार नहीं स्टार हैं। और मैं एक कलाकार हूं मेरा स्टारडम मेरी कला की वजह से ही है।"
शाहरुख को उम्मीद है कि 24 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म मैं हूं न और ओम शांति ओम। इस फिल्म में बमन इरानी, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, सोनू सूद और विवान शाह प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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Don't Miss! फिल्म हेप्पी न्यू ईयर को लेकर अब शाहरुख खान का ओवर कॉन्फीडेंस बढ़ता जा रहा है। उनका दावा है कि यह फिल्म सुपर हिट होगी और सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। और यह सब होगा उनकी खुद की वजह से। शाहरुख ने कहा है कि वो जिस फिल्म में होते हैं, वह फिल्म अपने आप बड़ी हो जाती है। दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाये हुए शाहरुख ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं कभी कोई चिंता नहीं करता। मैं एक अच्छा कारीगर हूं और जिस स्तर पर काम कर रहा हूं, वो भी सही है। मैं अपनी च्वाइस जानता हूं और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ ही देता हूं। मुझे हर रोज किसी भी प्रकार की चिंता नहीं होती, खास कर फिल्मों की, क्यांकि जिस फिल्म में मैं रहता हूं वो खुद बड़ी हो जाती है।" शाहरुख ने कहा, "कलाकार को चिंता नहीं करनी चाहिये, अगर चिंता करते हैं तो वो कलाकार नहीं स्टार हैं। और मैं एक कलाकार हूं मेरा स्टारडम मेरी कला की वजह से ही है।" शाहरुख को उम्मीद है कि चौबीस अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्म मैं हूं न और ओम शांति ओम। इस फिल्म में बमन इरानी, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, सोनू सूद और विवान शाह प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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आज इस लेख में हम एक भारतीय टीवी अभिनेत्री के बारे में बात कर रहे हैं जो अपनी सुंदरता और बोल्ड फिगर के कारण सुर्खियों में है। आइए जानते हैं कौन है वो अभिनेत्री। इस खूबसूरत भारतीय अभिनेत्री का नाम अंजलि आनंद है।
आपको बता दें कि अंजलि आनंद टीवी शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' में नजर आती हैं। अंजलि ने अब तक दो शो में काम किया है और दोनों शो में उनके अभिनय और उनकी बोल्डनेस के लिए उनकी प्रशंसा की जाती हैं।
अंजलि दिखने में बहुत ही बोल्ड हैं और शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' में भी उन्हें काफी पसंद किया जाता है। अधिक वजन होने के बावजूद, उनके सोशल मीडिया खातों में लाखों प्रशंसक और अनुयायी हैं। वह अपने सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि पर बहुत सक्रिय है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या है।
वह अक्सर अपनी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती हैं और उनकी तस्वीरें लोगों द्वारा बहुत पसंद की जाती हैं।
अपनी हॉटनेस ओर बोल्डनेस की वजह से छा गयी ये टीवी एक्ट्रेस Reviewed by News pari on February 21, 2020 Rating:
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आज इस लेख में हम एक भारतीय टीवी अभिनेत्री के बारे में बात कर रहे हैं जो अपनी सुंदरता और बोल्ड फिगर के कारण सुर्खियों में है। आइए जानते हैं कौन है वो अभिनेत्री। इस खूबसूरत भारतीय अभिनेत्री का नाम अंजलि आनंद है। आपको बता दें कि अंजलि आनंद टीवी शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' में नजर आती हैं। अंजलि ने अब तक दो शो में काम किया है और दोनों शो में उनके अभिनय और उनकी बोल्डनेस के लिए उनकी प्रशंसा की जाती हैं। अंजलि दिखने में बहुत ही बोल्ड हैं और शो 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' में भी उन्हें काफी पसंद किया जाता है। अधिक वजन होने के बावजूद, उनके सोशल मीडिया खातों में लाखों प्रशंसक और अनुयायी हैं। वह अपने सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि पर बहुत सक्रिय है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या है। वह अक्सर अपनी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती हैं और उनकी तस्वीरें लोगों द्वारा बहुत पसंद की जाती हैं। अपनी हॉटनेस ओर बोल्डनेस की वजह से छा गयी ये टीवी एक्ट्रेस Reviewed by News pari on February इक्कीस, दो हज़ार बीस Rating:
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शाहरुख खान (Shahrukh Khan) जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पठान' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उनके अलावा दीपिका पादुकोण, और जॉन अब्राहम जैसे सितारे भी नजर आएंगे.
शाहरुख खान (Shahrukh Khan) इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. उनकी कई फिल्में इन दिनों पाइपलाइन में हैं जो कि रिलीज होने वाली हैं. लेकिन वो अब एक दूसरी वजह से भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. दरअसल, शाहरुख खान अब महिला क्रिकेट टीम (Women's Cricket Team) के मालिक बन गए हैं. इस घोषणा के बाद उनकी क्रिकेट टीम और यूएसए एमएलसी टी 20 अप्रैल में ग्रेटर लॉस एंजिल्स में एक वर्ल्ड क्लास स्टेडियम बनाने के लिए आए आएंगे. सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई महिला क्रिकेट टीम इस साल होने वाली वीमेंस कैरेबियन प्रीमियर लीग (WCPL) के उद्घाटन के मौके पर शामिल होगी.
शाहरुख खान जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पठान' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उनके अलावा दीपिका पादुकोण, और जॉन अब्राहम जैसे सितारे भी नजर आएंगे. इस फिल्म को सिद्धार्थ आनंद ने डायरेक्ट किया है, इस फिल्म के अलावा वो 'जवान' में नजर आएंगे. इस फिल्म में उनके साथ सान्या मल्होत्रा और नयनतारा नजर आएंगी. इस फिल्म के एटली डायरेक्ट कर रहे हैं. इन दोनों फिल्मों के बाद शाहरुख खान राजकुमार हिरानी की 'डुंकी' में भी नजर आने वाले हैं.
शाहरुख खान की अगली फिल्म 'जवान' का टीजर भी हाल ही में रिलीज किया गया था जिसमें वो एक अलग ही रूप में नजर आ रहे थे. पूरे चेहरे पर पट्टी बांधते हुए उनका ये वीडियो उस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल भी हो रहा था. आपको ये भी बता दें कि, हाल ही में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज ड्रग्स केस में एनसीबी ने क्लीन चिट दी है जिसके बाद उनका गाना गाते हुए और गिटार बजाते हुए एक वीडियो भी सामने आया था.
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शाहरुख खान जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पठान' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उनके अलावा दीपिका पादुकोण, और जॉन अब्राहम जैसे सितारे भी नजर आएंगे. शाहरुख खान इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. उनकी कई फिल्में इन दिनों पाइपलाइन में हैं जो कि रिलीज होने वाली हैं. लेकिन वो अब एक दूसरी वजह से भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. दरअसल, शाहरुख खान अब महिला क्रिकेट टीम के मालिक बन गए हैं. इस घोषणा के बाद उनकी क्रिकेट टीम और यूएसए एमएलसी टी बीस अप्रैल में ग्रेटर लॉस एंजिल्स में एक वर्ल्ड क्लास स्टेडियम बनाने के लिए आए आएंगे. सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई महिला क्रिकेट टीम इस साल होने वाली वीमेंस कैरेबियन प्रीमियर लीग के उद्घाटन के मौके पर शामिल होगी. शाहरुख खान जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पठान' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उनके अलावा दीपिका पादुकोण, और जॉन अब्राहम जैसे सितारे भी नजर आएंगे. इस फिल्म को सिद्धार्थ आनंद ने डायरेक्ट किया है, इस फिल्म के अलावा वो 'जवान' में नजर आएंगे. इस फिल्म में उनके साथ सान्या मल्होत्रा और नयनतारा नजर आएंगी. इस फिल्म के एटली डायरेक्ट कर रहे हैं. इन दोनों फिल्मों के बाद शाहरुख खान राजकुमार हिरानी की 'डुंकी' में भी नजर आने वाले हैं. शाहरुख खान की अगली फिल्म 'जवान' का टीजर भी हाल ही में रिलीज किया गया था जिसमें वो एक अलग ही रूप में नजर आ रहे थे. पूरे चेहरे पर पट्टी बांधते हुए उनका ये वीडियो उस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल भी हो रहा था. आपको ये भी बता दें कि, हाल ही में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज ड्रग्स केस में एनसीबी ने क्लीन चिट दी है जिसके बाद उनका गाना गाते हुए और गिटार बजाते हुए एक वीडियो भी सामने आया था.
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साक्षी रावत, गुड़गांव कैंसर से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए अप्रैल में एशियन अंडर-14 लॉन टेनिस टूर्नमेंट आयोजित किया जाएगा। यह टूर्नमेंट 14 अप्रैल से वालियाबास स्थित वैन स्पोर्ट्स क्लब में होगा। 8 दिनों के इस टूर्नमेंट में कई देशों के 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। हर खिलाड़ी को रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। टूर्नमेंट के जरिए इकट्ठा हुई पूरी राशि कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के लिए एनजीओ को दी जाएगी।
वैन स्पोर्ट्स क्लब की डायरेक्टर मलिका रघुवंशी ने बताया कि कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यह प्रतियोगिता कराई जा रही है। इसके जरिए लोगों को बताया जाएगा कि ब्लड कैंसर से जूझ रहे बच्चे ठीक हो सकते हैं। वैन स्पोर्ट्स क्लब में एक साल में इस तरह के 30 नैशनल टूर्नमेंट आयोजित हो चुके हैं। अब एशियन चैंपियनशिप के माध्यम से कैंसर पीड़ितों की मदद की जाएगी। कैन किड्स संस्था की फाउंडर पूनम ने बताया कि यह एनजीओ कैंसर से पीड़ित बच्चों की पूरी मदद करता है। ऐसे में इस टूर्नमेंट के माध्यम से बच्चों के लिए फंड मिलेगा, जिससे कई बच्चों को मदद मिल पाएगी।
12 साल के कृषांग रघुवंशी को बनाया ब्रैंड ऐंबैसडर लॉन टेनिस खिलाड़ी कृषांग रघुवंशी को टूर्नमेंट के लिए ब्रैंड ऐंबैसडर बनाया गया है। 12 साल का कृषांग कैंसर सर्वाइवर है। उसे 3 साल की उम्र में कैंसर हुआ था। लंबे इलाज के बाद 8 साल की उम्र में वह पूरी तरह से ठीक हुआ। आज वह इंटरनैशनल लेवल का खिलाड़ी है। ऐसे में वह दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा है। कृषांग का कहना है कि वह इस बीमारी से उबरकर बेस्ट लॉन टेनिस प्लेयर बनने के लिए मेहनत कर रहा है।
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साक्षी रावत, गुड़गांव कैंसर से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए अप्रैल में एशियन अंडर-चौदह लॉन टेनिस टूर्नमेंट आयोजित किया जाएगा। यह टूर्नमेंट चौदह अप्रैल से वालियाबास स्थित वैन स्पोर्ट्स क्लब में होगा। आठ दिनों के इस टूर्नमेंट में कई देशों के एक सौ से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। हर खिलाड़ी को रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। टूर्नमेंट के जरिए इकट्ठा हुई पूरी राशि कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के लिए एनजीओ को दी जाएगी। वैन स्पोर्ट्स क्लब की डायरेक्टर मलिका रघुवंशी ने बताया कि कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यह प्रतियोगिता कराई जा रही है। इसके जरिए लोगों को बताया जाएगा कि ब्लड कैंसर से जूझ रहे बच्चे ठीक हो सकते हैं। वैन स्पोर्ट्स क्लब में एक साल में इस तरह के तीस नैशनल टूर्नमेंट आयोजित हो चुके हैं। अब एशियन चैंपियनशिप के माध्यम से कैंसर पीड़ितों की मदद की जाएगी। कैन किड्स संस्था की फाउंडर पूनम ने बताया कि यह एनजीओ कैंसर से पीड़ित बच्चों की पूरी मदद करता है। ऐसे में इस टूर्नमेंट के माध्यम से बच्चों के लिए फंड मिलेगा, जिससे कई बच्चों को मदद मिल पाएगी। बारह साल के कृषांग रघुवंशी को बनाया ब्रैंड ऐंबैसडर लॉन टेनिस खिलाड़ी कृषांग रघुवंशी को टूर्नमेंट के लिए ब्रैंड ऐंबैसडर बनाया गया है। बारह साल का कृषांग कैंसर सर्वाइवर है। उसे तीन साल की उम्र में कैंसर हुआ था। लंबे इलाज के बाद आठ साल की उम्र में वह पूरी तरह से ठीक हुआ। आज वह इंटरनैशनल लेवल का खिलाड़ी है। ऐसे में वह दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा है। कृषांग का कहना है कि वह इस बीमारी से उबरकर बेस्ट लॉन टेनिस प्लेयर बनने के लिए मेहनत कर रहा है।
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(निचली तरफ) से आये थे। और उर्वा, दोनों राहों से आते थे (कभी इस से और कभी उस से) और उर्वा अक्सर समय कुदा की तरफ (निचले हिस्सा) से दाख़िल होते थे। और यह सम्त (रुख) उन की मन्ज़िल से ज़्यादा क़रीब था ।
1869: - आइशा रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मक्का में दाख़िल होते तो उस की बालाई जानिब से तशरीफ़ लाते (उसी रास्ते में मक्का का मशहूर (कब्रस्तान है और उस तरफ से आने में आप को आसानी थी। और वापसी के लिये) निचले हिस्से की तरफ से निकलते थे (और यही राह है जिस में आज कल "जरवल" का स्थान आता है)
फाइदाः- आने जाने में राह बदलने में यह हिकमत होगी कि क़ियामत के दिन ज़्यादा से ज़्यादा रास्ते गवाही देंगे, जैसे औद वग़ैरह में) ।
बाब बैतुल्लाह को देख कर हाथ बुलन्द करना । }
1870 :- जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ि· से पूछा गया कि आदमी बैतुल्लाह को देख कर हाथ उठाए (या नहीं) उन्होंने कहाः मैं ने यहूदियों के अलावा किसी को ऐसा करते हुये नहीं देखा (वह लोग बैतुल मुक़द्दस को देख कर हाथ उठाते हैं) और हम ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ हज्ज किया था तो आप ने ऐसा नहीं किया था ।
फाइदा :- हाथ उठाने के संबन्ध में समस्त रिवायतें हद दर्जा जओफ़ हैं, इसलिये हाथ उठाना सहीह नहीं है।
1871 :- अबू हुरैरा रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मक्का में दाखिल हुये तो बैतुल्लाह का तवाफ़ किया और मुक़ामे- इब्राहीम के पीछे दो रक्अत पढ़ीं, यानी फुत्ह मक्का वाले दिन ।
1872 :- अबू हुरैरा रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाये और मक्का में प्रवेश किया, फिर हजरे-अस्वद के पास जा कर उसे बोसा दिया, फिर बैतुल्लाह का तवाफ़ किया, फिर सफा की तरफ आये और उस से ऊपर चढ़ गये जहाँ से बैतुल्लाह शरीफ़ नज़र आ रहा था, फिर आप ने अपने दोनों हाथों को उठा लिया और अल्लाह का ज़िक्र और दुआ करते रहे जितना अल्लह ने चाहा। उस समय अन्सार आप के साथ थे। हदीस के रावी हाशिम ने कहाः कि आप ने दुआ फरमायी, अल्लाह की हम्द की और जो चाहा दुआ की।
फाइदाः- सफा - मर्वा पर चढ़ कर बैतुल्लाह की तरफ मुँह कर के हाथ उठा कर दुआ करना सुन्नत है। यह हाथ उठाना बैतुल्लाह को देख कर नहीं, बल्कि दुआ के लिये है।
बाब {हजरे-अस्वद को बोसा देना । }
1873 : - उमर रज़ि• से रिवायत है कि वह हजरे अस्वद के पास आये और उस को चूमा, फिर कहाः मैं जानता हूँ कि तू केवल एक पत्थर है, न नफा दे सकता है और न नुक्सान पहुँचा सकता है। अगर मैं ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बोसा लेते न देखा होता तो मैं तुम्हारा
बोसा न लेता।
बाब बैतुल्लाह के कोनों को हाथ लगाने का बयान । }
1874 :- इब्ने उमर रज़ि० सेरिवायत है कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि आप बैतुल्लाह के केवल दो यमानी उर्कान ही को हाथ लगाते थे।
1875 : - इब्ने उमर रजि० को आइशा रज़ि० का यह बयान बताया गया कि हिज्र का कुछ हिस्सा बैतुल्लाह में से है, तो उन्होंने कहाः अल्लाह की कसम ! मेरा ख़याल है कि आइशा रज़ि· ने अगर यह बात नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनी है तो मैं समझता हूँ कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी शामी अर्कान को छूना केवल इसलिये तर्क फ़रमाया था कि यह बैतुल्लाह की अस्ल बुनियादों पर नहीं है । और लोग भी हिज्र (हतीम) के बाहर से इसी कारण तवाफ़ करते हैं।
फाइदा :- अगर हिज्र और हतीम के अन्दर की तरफ से तवाफ़ किया जाये तो पूरे बैतुल्लाह का तवाफ न होगा। इसलिये उस का तवाफ़ बाहर से करना ज़रूरी है।
1876 :- इब्ने उमर रज़ि· से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तवाफ़ के किसी चक्कर में भी रुकने यमानी और हजरे अस्वद का इस्तेलाम करना ( छूना) नहीं छोड़ते थे। इमाम नाफे ने कहा कि अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि· भी ऐसे ही किया करते थे ।
फाइदा :- हजरे अस्वद को चूमना, या हाथ लगा कर चूमना, या छड़ी से छू कर उसे चूमना चाहिये, या मज़ीद परेशानी में केवल हाथ का इशारा ही काफी हो जाता है। मगर रुकने यमानी को केवल हाथ लगाना सुन्नत है, ने कि हाथ चूमना ।
बाब { तवाफ़ वाजिब का बयान । }
1877 :- इब्ने अब्बास रज़ि· से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अन्तिम हज्ज में ऊँट पर सवार हो कर तवाफ़ किया । आप अपनी छड़ी से हज़रे अस्वद को छूते थे। 1878 :- अबू तुफ़ैल (आमिर बिन वासला) रज़ि० बयान करते हैं कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा आप अपनी सवारी पर सवार होकर बैतुल्लाह का तवाफ़ कर रहे थे। मुहममद बिन राफे ने मज़ीद कहाः फिर आप सफा-मर्वा की तरफ तशरीफ ले गये और अपनी सवारी पर उन के दर्मियान सात चक्कर लगाए ।
1880 :- जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ि ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अन्तिम हज्ज में अपनी सवारी पर सवार होकर बैतुल्लाह का तवाफ़ किया और सफ़ा-मर्वा की दौड़ लगाई ताकि लोग आप को देख लें और आप उन से ऊँचे रहें और वह आप से (मसइल) पूछ सकें। क्योंकि लोगों ने आप को घेर रखा था।
1881 : - इब्ने अब्बास रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व नम मक्का
तशरीफ़ लाये तो आप की तबीअत कुछ ख़राब थी, चुनान्चे आप ने अपनी सवारी पर (सवार होकर ) तवाफ़ किया। आप जब भी हजरे अस्वद के पास आते तो अपनी छड़ी से उस को छूते । फिर जब अपने तवाफ़ से निबट गये तो अपनी ऊँटनी को बैठा दिया और दो रक्अत नमाज़ अदा की।
1882 :- उम्मे सलमा रज़ि० से रिवायत है उन्होंने बयान किया कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहाः मेरी तबीअत ख़राब है। आप ने फरमायाः सवारी पर बैठ कर लोगों के पीछे तवाफ़ कर लो। उन्होंने बयान किया कि मैंने तवाफ़ कर लिया और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उस समय बैतुल्लाह के पहलू में नमाज़ पढ़ा रहे थे और आप सूरः तूर की किरात फरमा रहे थे।
बाब {तवाफ़ में चादर बदलना । }
1883 : - याला बिन उमय्या ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस हाल में तवाफ़ किया कि आप इज़तिबाअ किये हुये थे । और चादर हरे रन्ग की थी।
फाइदा :- तवाफ़ शुरु करते हुये अपने ऊपर की चादर को दायें बग़ल के नीचे से निकाल कर बाँए कन्धे पर डाल लेना "इज़तिबाअ" कहलाता है । यह अमल केवल तवाफ़े कुद्दूम में साबित है। 1884 : - इब्ने अब्बास रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आप के सहाबा ने जिईराना के स्थान से ( एहराम बाँध कर) उम्रा किया तो बैतुल्लाह में उन्होंने रमल किया और अपनी चादरों को अपनी बग़लों के नीचे से बाँए कन्धों पर डाल दिया।
फाइदाः- "जिईराना" ताइफ़ की तरफ से मीक़ात का स्थान है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह उम्रा सन 8 हि० में किया था ।
बाब {तवाफ़ में रमल का बयान । }
1885 :- अबू तुफैल रज़ि० बयान करते हैं कि मैंने इब्ने अब्बास रजि० से कहाः आप की कौम का है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बैतुल्लाह में रमल किया था, और यह कि यह रमल करना सुन्नत है । यह सुन कर वह बोलेः उन्होंने सच कहा है और कुछ ग़लत । मैंने कहाः (क्या मतलब ?) क्या सच कहा और क्या ग़लत? फरमायाः यह तो सच है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रम्ल किया था, मगर सुन्नत कहना ग़लत है। मामला यह है कि कुरैश ने हुदैबिया के ज़माने में कहा था कि मुहम्मद ( नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उन के सहाबा को छोड़ दो, वह खुद ही जानवरों की मौत मर जोयंगे (जैसे कि ऊँट की नाक में कीड़े पड़ जाते हैं और फिर वह मर जाता है) फिर जब उन्होंने आप से सुलह कर ली कि यह लोग अगले वर्ष आयें और मक्का में तीन दिन ठहरें। जब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाये तो मुश्रिक लोग अकआन पर्वत की ओर (से देख रहे) थे। तब आप ने अपने सहाबा से फरमायाः बैतुल्लाह के चारों तरफ तीन चक्कर रम्ल करो (यानी कन्धे हिला कर
आहिस्ता-आहिस्ता दौड़ो) और यह कोई सुन्नत नहीं है। मैंने कहाः आप की क़ौम का ख़याल है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सफा और मर्वा के दर्मियान दौड़ ऊँट पर सवार होकर लगाई थी और यह भी सुन्नत है। उन्होंने कहाः सच कहा है और कुछ ग़लत भी है। मैंने कहाः क्या सच है और क्या ग़लत? फ़रमायाः सच यह है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सफा और मर्वा की सओ ऊँट पर की थी, मगर यह सुन्नत हो ग़लत है। अस्ल में लोगों को नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दूर न किया जाता था और न हटाया जाता था (जबकि वह आप पर टूटे पड़ रहे थे) तो आप ने ऊँट पर सवार होकर सओ की ताकि वह आप की बात सुन सकें, और उन के हाथ आप तक न पहुँच पायें ।
फाइदाः- रमल को सुन्नत न कहना दुरुस्त नहीं । सुन्नत है लेकिन वाजिब सुन्नत नहीं बल्कि मुस्तहब है। छूट जाये जो हज्ज में कोई फर्क नहीं आयेगा। फिर यह अमल वक़्ती नहीं आज भी जारी है।
1886; - . इब्ने अब्बास रज़ि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में तश्रीफ़ लाये जबकि उन लोगों को यसरिब (मदीना) के बुख़ार ने कमज़ोर कर दिया था तो मुश्रिकों ने कहाः तुम्हारे पास एक ऐसी कौम आ रही है जिसे बुख़ार ने निढाल कर दिया है और उन्हें इस से बड़ी तक्लीफ पहुँची है। अल्लाह पाक ने मुश्रिकों की इस बात से जो उन्होंने कही अपने नबी को सूचित कर दिया, पस आप ने उन्हें आदेश किया कि तीन चक्करों में रमल करें और रुक्ने यमानी और हजरे अस्वद के दर्मियान आम रफ़्तार से चलें । तो जब उन्होंने रम्ल करते देखा (कि बड़ी फुती से तवाफ़ कर रहे हैं) तो कहने लगेः इन्हीं लोगों के बारे में तुम कहते हो कि उन को बुख़ार ने कमज़ोर कर दिया है, यह तो हम से अधिक ताकत वाले हैं।
इब्ने अब्बास रज़ि· ने कहा कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबा पर मेहरबानी करते हुये तवाफ़ के सभी चक्करों में रमल का आदेश नहीं दिया।
1887 :- अस्लम अदवी ने बयान किया कि मैंने उमर बिन ख़त्ताब रज़ि० को फरमाते सुना कि आज यह कन्धे हिला हिला कर दौड़ना और उन का नन्गा करना क्यों है ? (अब इस की कोई आवश्यक्ता तो नहीं है) हालाँकि अल्लाह पाक ने इस्लाम को क़वी और मज़बूत बना दिया है और कुफ़ व काफ़िर को यहाँ से निकाल बाहर किया है। इस के बावजूद हम यह काम (रम्ल करना) नहीं छोड़ सकते जो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय काल में किया करते थे । फाइदाः- नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में कुछ काम वक्ती तौर पर किये गये हों लेकिन हमें भी उन का करना अनिवार्य है चाहे सबब मौजूद हो या न हो।
1888: - आइशा रजि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः बैतुल्लाह का तवाफ़ सफा मर्वा के दर्मियान सओ और शैतान को कन्करियाँ मारना, यह सब अल्लाह की याद को काइम करने के लिये हैं ।
1889 : - इब्ने अब्बास रजि० से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी
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से आये थे। और उर्वा, दोनों राहों से आते थे और उर्वा अक्सर समय कुदा की तरफ से दाख़िल होते थे। और यह सम्त उन की मन्ज़िल से ज़्यादा क़रीब था । एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर: - आइशा रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मक्का में दाख़िल होते तो उस की बालाई जानिब से तशरीफ़ लाते निचले हिस्से की तरफ से निकलते थे फाइदाः- आने जाने में राह बदलने में यह हिकमत होगी कि क़ियामत के दिन ज़्यादा से ज़्यादा रास्ते गवाही देंगे, जैसे औद वग़ैरह में) । बाब बैतुल्लाह को देख कर हाथ बुलन्द करना । } एक हज़ार आठ सौ सत्तर :- जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ि· से पूछा गया कि आदमी बैतुल्लाह को देख कर हाथ उठाए उन्होंने कहाः मैं ने यहूदियों के अलावा किसी को ऐसा करते हुये नहीं देखा और हम ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ हज्ज किया था तो आप ने ऐसा नहीं किया था । फाइदा :- हाथ उठाने के संबन्ध में समस्त रिवायतें हद दर्जा जओफ़ हैं, इसलिये हाथ उठाना सहीह नहीं है। एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर :- अबू हुरैरा रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मक्का में दाखिल हुये तो बैतुल्लाह का तवाफ़ किया और मुक़ामे- इब्राहीम के पीछे दो रक्अत पढ़ीं, यानी फुत्ह मक्का वाले दिन । एक हज़ार आठ सौ बहत्तर :- अबू हुरैरा रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाये और मक्का में प्रवेश किया, फिर हजरे-अस्वद के पास जा कर उसे बोसा दिया, फिर बैतुल्लाह का तवाफ़ किया, फिर सफा की तरफ आये और उस से ऊपर चढ़ गये जहाँ से बैतुल्लाह शरीफ़ नज़र आ रहा था, फिर आप ने अपने दोनों हाथों को उठा लिया और अल्लाह का ज़िक्र और दुआ करते रहे जितना अल्लह ने चाहा। उस समय अन्सार आप के साथ थे। हदीस के रावी हाशिम ने कहाः कि आप ने दुआ फरमायी, अल्लाह की हम्द की और जो चाहा दुआ की। फाइदाः- सफा - मर्वा पर चढ़ कर बैतुल्लाह की तरफ मुँह कर के हाथ उठा कर दुआ करना सुन्नत है। यह हाथ उठाना बैतुल्लाह को देख कर नहीं, बल्कि दुआ के लिये है। बाब {हजरे-अस्वद को बोसा देना । } एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर : - उमर रज़ि• से रिवायत है कि वह हजरे अस्वद के पास आये और उस को चूमा, फिर कहाः मैं जानता हूँ कि तू केवल एक पत्थर है, न नफा दे सकता है और न नुक्सान पहुँचा सकता है। अगर मैं ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बोसा लेते न देखा होता तो मैं तुम्हारा बोसा न लेता। बाब बैतुल्लाह के कोनों को हाथ लगाने का बयान । } एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर :- इब्ने उमर रज़िशून्य सेरिवायत है कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा कि आप बैतुल्लाह के केवल दो यमानी उर्कान ही को हाथ लगाते थे। एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर : - इब्ने उमर रजिशून्य को आइशा रज़िशून्य का यह बयान बताया गया कि हिज्र का कुछ हिस्सा बैतुल्लाह में से है, तो उन्होंने कहाः अल्लाह की कसम ! मेरा ख़याल है कि आइशा रज़ि· ने अगर यह बात नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनी है तो मैं समझता हूँ कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी शामी अर्कान को छूना केवल इसलिये तर्क फ़रमाया था कि यह बैतुल्लाह की अस्ल बुनियादों पर नहीं है । और लोग भी हिज्र के बाहर से इसी कारण तवाफ़ करते हैं। फाइदा :- अगर हिज्र और हतीम के अन्दर की तरफ से तवाफ़ किया जाये तो पूरे बैतुल्लाह का तवाफ न होगा। इसलिये उस का तवाफ़ बाहर से करना ज़रूरी है। एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर :- इब्ने उमर रज़ि· से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तवाफ़ के किसी चक्कर में भी रुकने यमानी और हजरे अस्वद का इस्तेलाम करना नहीं छोड़ते थे। इमाम नाफे ने कहा कि अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि· भी ऐसे ही किया करते थे । फाइदा :- हजरे अस्वद को चूमना, या हाथ लगा कर चूमना, या छड़ी से छू कर उसे चूमना चाहिये, या मज़ीद परेशानी में केवल हाथ का इशारा ही काफी हो जाता है। मगर रुकने यमानी को केवल हाथ लगाना सुन्नत है, ने कि हाथ चूमना । बाब { तवाफ़ वाजिब का बयान । } एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर :- इब्ने अब्बास रज़ि· से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अन्तिम हज्ज में ऊँट पर सवार हो कर तवाफ़ किया । आप अपनी छड़ी से हज़रे अस्वद को छूते थे। एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर :- अबू तुफ़ैल रज़िशून्य बयान करते हैं कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा आप अपनी सवारी पर सवार होकर बैतुल्लाह का तवाफ़ कर रहे थे। मुहममद बिन राफे ने मज़ीद कहाः फिर आप सफा-मर्वा की तरफ तशरीफ ले गये और अपनी सवारी पर उन के दर्मियान सात चक्कर लगाए । एक हज़ार आठ सौ अस्सी :- जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ि ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अन्तिम हज्ज में अपनी सवारी पर सवार होकर बैतुल्लाह का तवाफ़ किया और सफ़ा-मर्वा की दौड़ लगाई ताकि लोग आप को देख लें और आप उन से ऊँचे रहें और वह आप से पूछ सकें। क्योंकि लोगों ने आप को घेर रखा था। एक हज़ार आठ सौ इक्यासी : - इब्ने अब्बास रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व नम मक्का तशरीफ़ लाये तो आप की तबीअत कुछ ख़राब थी, चुनान्चे आप ने अपनी सवारी पर तवाफ़ किया। आप जब भी हजरे अस्वद के पास आते तो अपनी छड़ी से उस को छूते । फिर जब अपने तवाफ़ से निबट गये तो अपनी ऊँटनी को बैठा दिया और दो रक्अत नमाज़ अदा की। एक हज़ार आठ सौ बयासी :- उम्मे सलमा रज़िशून्य से रिवायत है उन्होंने बयान किया कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहाः मेरी तबीअत ख़राब है। आप ने फरमायाः सवारी पर बैठ कर लोगों के पीछे तवाफ़ कर लो। उन्होंने बयान किया कि मैंने तवाफ़ कर लिया और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उस समय बैतुल्लाह के पहलू में नमाज़ पढ़ा रहे थे और आप सूरः तूर की किरात फरमा रहे थे। बाब {तवाफ़ में चादर बदलना । } एक हज़ार आठ सौ तिरासी : - याला बिन उमय्या ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस हाल में तवाफ़ किया कि आप इज़तिबाअ किये हुये थे । और चादर हरे रन्ग की थी। फाइदा :- तवाफ़ शुरु करते हुये अपने ऊपर की चादर को दायें बग़ल के नीचे से निकाल कर बाँए कन्धे पर डाल लेना "इज़तिबाअ" कहलाता है । यह अमल केवल तवाफ़े कुद्दूम में साबित है। एक हज़ार आठ सौ चौरासी : - इब्ने अब्बास रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आप के सहाबा ने जिईराना के स्थान से उम्रा किया तो बैतुल्लाह में उन्होंने रमल किया और अपनी चादरों को अपनी बग़लों के नीचे से बाँए कन्धों पर डाल दिया। फाइदाः- "जिईराना" ताइफ़ की तरफ से मीक़ात का स्थान है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह उम्रा सन आठ हिशून्य में किया था । बाब {तवाफ़ में रमल का बयान । } एक हज़ार आठ सौ पचासी :- अबू तुफैल रज़िशून्य बयान करते हैं कि मैंने इब्ने अब्बास रजिशून्य से कहाः आप की कौम का है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बैतुल्लाह में रमल किया था, और यह कि यह रमल करना सुन्नत है । यह सुन कर वह बोलेः उन्होंने सच कहा है और कुछ ग़लत । मैंने कहाः क्या सच कहा और क्या ग़लत? फरमायाः यह तो सच है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रम्ल किया था, मगर सुन्नत कहना ग़लत है। मामला यह है कि कुरैश ने हुदैबिया के ज़माने में कहा था कि मुहम्मद और उन के सहाबा को छोड़ दो, वह खुद ही जानवरों की मौत मर जोयंगे फिर जब उन्होंने आप से सुलह कर ली कि यह लोग अगले वर्ष आयें और मक्का में तीन दिन ठहरें। जब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाये तो मुश्रिक लोग अकआन पर्वत की ओर थे। तब आप ने अपने सहाबा से फरमायाः बैतुल्लाह के चारों तरफ तीन चक्कर रम्ल करो और यह कोई सुन्नत नहीं है। मैंने कहाः आप की क़ौम का ख़याल है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सफा और मर्वा के दर्मियान दौड़ ऊँट पर सवार होकर लगाई थी और यह भी सुन्नत है। उन्होंने कहाः सच कहा है और कुछ ग़लत भी है। मैंने कहाः क्या सच है और क्या ग़लत? फ़रमायाः सच यह है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सफा और मर्वा की सओ ऊँट पर की थी, मगर यह सुन्नत हो ग़लत है। अस्ल में लोगों को नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दूर न किया जाता था और न हटाया जाता था तो आप ने ऊँट पर सवार होकर सओ की ताकि वह आप की बात सुन सकें, और उन के हाथ आप तक न पहुँच पायें । फाइदाः- रमल को सुन्नत न कहना दुरुस्त नहीं । सुन्नत है लेकिन वाजिब सुन्नत नहीं बल्कि मुस्तहब है। छूट जाये जो हज्ज में कोई फर्क नहीं आयेगा। फिर यह अमल वक़्ती नहीं आज भी जारी है। एक हज़ार आठ सौ छियासी; - . इब्ने अब्बास रज़िशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में तश्रीफ़ लाये जबकि उन लोगों को यसरिब के बुख़ार ने कमज़ोर कर दिया था तो मुश्रिकों ने कहाः तुम्हारे पास एक ऐसी कौम आ रही है जिसे बुख़ार ने निढाल कर दिया है और उन्हें इस से बड़ी तक्लीफ पहुँची है। अल्लाह पाक ने मुश्रिकों की इस बात से जो उन्होंने कही अपने नबी को सूचित कर दिया, पस आप ने उन्हें आदेश किया कि तीन चक्करों में रमल करें और रुक्ने यमानी और हजरे अस्वद के दर्मियान आम रफ़्तार से चलें । तो जब उन्होंने रम्ल करते देखा तो कहने लगेः इन्हीं लोगों के बारे में तुम कहते हो कि उन को बुख़ार ने कमज़ोर कर दिया है, यह तो हम से अधिक ताकत वाले हैं। इब्ने अब्बास रज़ि· ने कहा कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबा पर मेहरबानी करते हुये तवाफ़ के सभी चक्करों में रमल का आदेश नहीं दिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तासी :- अस्लम अदवी ने बयान किया कि मैंने उमर बिन ख़त्ताब रज़िशून्य को फरमाते सुना कि आज यह कन्धे हिला हिला कर दौड़ना और उन का नन्गा करना क्यों है ? हालाँकि अल्लाह पाक ने इस्लाम को क़वी और मज़बूत बना दिया है और कुफ़ व काफ़िर को यहाँ से निकाल बाहर किया है। इस के बावजूद हम यह काम नहीं छोड़ सकते जो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय काल में किया करते थे । फाइदाः- नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में कुछ काम वक्ती तौर पर किये गये हों लेकिन हमें भी उन का करना अनिवार्य है चाहे सबब मौजूद हो या न हो। एक हज़ार आठ सौ अठासी: - आइशा रजिशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः बैतुल्लाह का तवाफ़ सफा मर्वा के दर्मियान सओ और शैतान को कन्करियाँ मारना, यह सब अल्लाह की याद को काइम करने के लिये हैं । एक हज़ार आठ सौ नवासी : - इब्ने अब्बास रजिशून्य से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी
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शुक्रवार, 29 मार्च की सुबह तकरीबन 12 बजे पंजाब के खरड़ में जोनल लाइसेंसिंग आथॉरिटी के पद पर तैनात महिला अधिकारी नेहा शौरी की ड्यूटी के दौरान उनके ही ऑफिस में गोली मारकर हत्या कर दी गई। नेहा शौरी को गोली मारने के बाद आरोपी ने पकड़े जाने के डर से खुद अपने आप को उसी समय गोली मार ली, और इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। नेहा के हत्यारे का नाम बलविंदर सिंह है। वह पंजाब के बठिंडा का निवास है। वह रोपड़ में कैमिस्ट शॉप चलाता था।
डॉ नेहा शौरी पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर के पोस्ट पर तैनात थीं। कुछ साल पहले उन्होंने कुछ फार्मेसी आउटलेट्स पर छापा मारा था और प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री के लिए बलविंदर सिंह का लाइसेंस रद्द कर दिए थे।
गौरतलब है कि पंजाब में ड्रग्स के नशे की चपेट में लगभग 90 प्रतिशत युवा आबादी बहुत बुरी तरह फंसी हुई है। दो साल पहले हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त भी ड्रग्स की नशाखोरी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनी थी और सूबे में सत्ता परिवर्तन हुआ था।
पंजाब पिछले कुछ सालों में नशीले पदार्थों का हब बनकर रह गया है। 2011 में लगभग 135 किलो, 2012 में 288.125 किलो, 2013 में 322.11 किलो, 2014 में लगभग 350 किलो ड्रग्स पकड़े गए थे। पांच साल में यहां से पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत 6000 करोड़ से ज्यादा है। अफीम, भुक्की से शुरू हुआ सिलसिला हेरोइन, स्मैक, कोकीन, सिंथेटिक ड्रग, आईस ड्रग जैसे महंगे नशे में तब्दील हो चुका है। हालात ये हैं कि नशे की वजह से कई घर उजड़ गए, कई बुजुर्गों ने अपने जवान बेटों की लाशों को कंधा दिया, नपुंसकता की वजह से कई घर टूट गए।
नेहा शौरी की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब पुलिस से निष्पक्ष जांच करने की मांग करते हुए पंजाब में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट किया कि इस मामले की तुरंत जांच हो और इंसाफ मिलना चाहिए पंजाब पुलिस।'
नेहा शौरी हत्याकांड पर आला पुलिस अधिकारी हरचरण सिंह भुल्लर कहते हैं, 'जांच में सामने आया है कि घटना 10 साल पुरानी रंजिश के कारण हुई है। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।'
नेहा शौरी की हत्या के बाद पंजाब में विपक्षी अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार का विरोध किया और आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। अधिकारी भी अपने ऑफिस के अंदर सुरक्षित नहीं हैं।
मारी गई ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी के भाई निशांत शौरी ने अपनी बहन की हत्या में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की आशंका जताई है। निशांत ने आरोप है कि जिस तरह से उनकी बहिन की हत्या की गई उससे ऐसा लगता है कि इस घटना में उनके डिपार्टमेंट के भी उच्चाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि 29 मार्च को नेहा ऑफिस में निर्धारित समय से काफी लेट गईं थीं। वह जैसे ही सीट पर बैठीं, उसके कुछ ही देर में हत्यारोपी उनके कैबिन में कैसे पहुंच गया और कुछ ही पलों में उसने उनपर ताबड़तोड़ फायर कैसे कर दिए।
नेहा के परिजन उनकी हत्या को इसलिए भी साजिश करार दे रहे हैं, क्योंकि हत्याकांड की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा था कि हत्यारोपी मानसिक तौर पर ठीक नहीं था। नेहा के पिता रिटायर्ड कैप्टन कैलाश शौरी का कहना है जब बलविंदर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी तो उसको प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रिवॉल्वर का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया।
नेहा के भाई निशांत का आरोप है कि नेहा के हत्यारे बलविंदर को तकरीबन 20 दिन पहले रिवॉल्वर लाइसेंस जारी किया गया, जबकि देश में आदर्श आचार चुनाव संहिता लागू हो चुकी है। ऐसे समय में तो पुलिस और प्रशासन जिनके पास हथियार हैं उन्हें भी जमा करवा लेती है, फिर हत्यारोपी को कैसे लाइसेंस दे दिया गया और उसके हथियार को क्यों नहीं जमा करवाया गया।
गौरतलब है कि पाकिस्तान से सटे इलाके तरनतारन, अमृतसर, फिरोजपुर, फाजिल्का से सबसे ज्यादा नशे के मामले आ रहे हैं। इसके अलावा बठिंडा, मानसा, संगरूर और मुक्तसर भी नशे से प्रभावित हैं। अफगानिस्तान से पाकिस्तान और फिर पंजाब से कनाडा, अमेरिका तक तस्करी में कई राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम भी सामने आए हैं।
इनमें सबसे ज्यादा चर्चित नाम उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले व कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया का रहा, जबकि 2013 में ड्रग रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद गिरफ्तार किए गए पूर्व एशियाड खिलाड़ी और अर्जुन अवार्डी जगदीश भोला ने कैबिनेट मंत्री मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाए। पूर्व अकाली जेल मंत्री सरवण सिंह फिल्लौर को तो इस्तीफा तक देना पड़ा था, क्योंकि उनके बेटे यूथ अकाली नेता दमनवीर सिंह पर तस्करों के साथ संबंधों का आरोप लगा था।
भाजपा नेता अविनाश चंद्र और कांग्रेस नेता राजा वड़िंग पर भी आरोप लगे। पंजाब पुलिस के आईजी परमराज सिंह उमरानंगल पर भी जांच चल रही है। कई मंत्री, विधायकों से ईडी भी पूछताछ कर चुकी है। दो साल से ईडी जांच चल रही है, लेकिन अभी तक रिजल्ट जीरो है। ईडी के एक असिस्टेंट डायरेक्टर निरंजन सिंह ने जब निष्पक्ष जांच शुरू की तो उनका ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद सरकार ने रोक लगा दी। 2013 से अब तक डेढ़ लाख युवा नशे का इलाज कराने ड्रग एडिक्शन सेंटर आ चुके हैं। इसमें दो फीसदी लड़कियां शामिल हैं जो 15 से 26 साल के बीच की हैं।
एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में करीब 8.6 लाख लोग ड्रग्स लेते हैं। जबकि 2.3 लाख लोगों को इसकी लत है। इनमें से 89% पढ़े-लिखी युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में हैं। भारी जनाक्रोश के चलते वर्ष 2013-14 में करीब 17 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जबकि 338 तस्करों की 80 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी वर्ष 2014 में जब्त की गई थी।
अकाली दल भाजपा सरकार के कृषि मंत्री तोतासिंह, जोकि धर्मकोट विधानसभा, गांव दोलेवाला चिट्टा (एक प्रकार का ड्रग्स) बेचने में बदनाम है। यहां 800 के करीब घर हैं और 890 के करीब नशा तस्करी की एफआईआर है। गांव के 31 लोग बड़े स्मगलर हैं, जिन पर 164 नशा तस्करी के केस हैं। 70 महिलाएं नशे के कारोबार में जेल जा चुकी हैं। शायद ही पंजाब की कोई जेल हो, जिसमें इस गांव के लोग नशे के केस में बंद न हों। यहां की महिला सरपंच गुरमीत कौर का पति निर्मल सिंह निम्मा खुद कुख्यात तस्कर है, और जेल में है। जबकि पूर्व सरपंच रणजीत सिंह भोला तक हेरोइन तस्करी में जेल काट रहा है।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सरहद पार पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी में बीएसएफ के हवलदार और इंस्पेक्टर रैंक के कई अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। पैसों के लालच में किसान भी तस्करी में शामिल होने लगे हैं। इन्हीं के माध्यम से हेरोइन भारत में पहुंचती है। फेंसिंग पार जमीन को कई किसान खेती कम और हेरोइन की तस्करी के लिए ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। बीएसएफ व पुलिस ने जितने भी हेरोइन तस्कर पकड़े हैं, ज्यादातर की आयु 20 से 23 साल के बीच है। नौजवान इस धंधे को इसलिए अपनाते हैं कि बॉर्डर क्षेत्र में सरकार ने औद्योगीकरण भी ध्यान नहीं दिया है। बेरोजगारी बहुत है। नौजवानों को आराम की जिंदगी जीने के लिए हेरोइन की तस्करी से आसान कोई धंधा नजर नहीं आता है।
कई किसानों ने फेंसिंग पार की जमीन खेती करने के नाम पर ली है, लेकिन इसकी आड़ में पाकिस्तान से हेरोइन, हथियार व जाली करेंसी की तस्करी करते हैं। इससे उन्हें ज्यादा मुनाफा होता है। हेरोइन को भारत में लाने के लिए किसान कई हथकंडे अपनाते हैं। सीमावर्ती गांव में अधिकतर किसान व ग्रामीण पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में हैं।
फिरोजपुर में छावनी की ग्वाल मंडी, लाल कुर्ती, बस्ती टैंकावाली, बस्ती शेखां वाली, बस्ती निजामद्दीन, भट्टियां वाली बस्ती में नशीले पदार्थ का धंधा चल रहा है। पुलिस यहां छापामारी नहीं करती है। ग्वाल मंडी में नशा, जुआ, सट्टा का धंधा चलता है। यहां पर एक नेता का समर्थन होने के कारण पुलिस छापामारी नहीं करती है। इसके अलावा गांव बजीदपुर में भी सरेआम नशा मिलता है। यहां के तस्करों को भी राजनीतिक समर्थन है। पुलिस यहां भी छापामारी नहीं करती है।
स्पष्ट जाहिर है ड्रग तस्करी के धंधे में नेता, पुलिस, सेना अर्द्धसैनिक बल सब इनवॉल्व हैं। ईमानदार अधिकारी के बतौर जानी जाने वाली ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी द्वारा सख्ती करने से सबकी दुकानें बंद हो गई थीं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं चूंकि चुनाव नजदीक है तो ऐसे में युवा मतदाताओं को मुफ्त ड्रग्स देकर प्रभावित करने और ड्रग्स के पासे का इस्तेमाल चुनाव में करने के लिए संभव है कि नेहा शौरी को रास्ते से हटाने के लिए ये हत्या करवाई गई हो।
समाज और देश के भविष्य को बचाने के लिए अपनी जान गंवाने वाली नेहा शौरी की बहादुरी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस बलों की। ये लोग देश को अंदर से सुरक्षित करते हैं। वे हमारे समाज, हमारे युवाओं, हमारे लोगों की रक्षा करते हैं।
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शुक्रवार, उनतीस मार्च की सुबह तकरीबन बारह बजे पंजाब के खरड़ में जोनल लाइसेंसिंग आथॉरिटी के पद पर तैनात महिला अधिकारी नेहा शौरी की ड्यूटी के दौरान उनके ही ऑफिस में गोली मारकर हत्या कर दी गई। नेहा शौरी को गोली मारने के बाद आरोपी ने पकड़े जाने के डर से खुद अपने आप को उसी समय गोली मार ली, और इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। नेहा के हत्यारे का नाम बलविंदर सिंह है। वह पंजाब के बठिंडा का निवास है। वह रोपड़ में कैमिस्ट शॉप चलाता था। डॉ नेहा शौरी पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर के पोस्ट पर तैनात थीं। कुछ साल पहले उन्होंने कुछ फार्मेसी आउटलेट्स पर छापा मारा था और प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री के लिए बलविंदर सिंह का लाइसेंस रद्द कर दिए थे। गौरतलब है कि पंजाब में ड्रग्स के नशे की चपेट में लगभग नब्बे प्रतिशत युवा आबादी बहुत बुरी तरह फंसी हुई है। दो साल पहले हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त भी ड्रग्स की नशाखोरी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनी थी और सूबे में सत्ता परिवर्तन हुआ था। पंजाब पिछले कुछ सालों में नशीले पदार्थों का हब बनकर रह गया है। दो हज़ार ग्यारह में लगभग एक सौ पैंतीस किलो, दो हज़ार बारह में दो सौ अठासी.एक सौ पच्चीस किलो, दो हज़ार तेरह में तीन सौ बाईस.ग्यारह किलो, दो हज़ार चौदह में लगभग तीन सौ पचास किलो ड्रग्स पकड़े गए थे। पांच साल में यहां से पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत छः हज़ार करोड़ से ज्यादा है। अफीम, भुक्की से शुरू हुआ सिलसिला हेरोइन, स्मैक, कोकीन, सिंथेटिक ड्रग, आईस ड्रग जैसे महंगे नशे में तब्दील हो चुका है। हालात ये हैं कि नशे की वजह से कई घर उजड़ गए, कई बुजुर्गों ने अपने जवान बेटों की लाशों को कंधा दिया, नपुंसकता की वजह से कई घर टूट गए। नेहा शौरी की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब पुलिस से निष्पक्ष जांच करने की मांग करते हुए पंजाब में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट किया कि इस मामले की तुरंत जांच हो और इंसाफ मिलना चाहिए पंजाब पुलिस।' नेहा शौरी हत्याकांड पर आला पुलिस अधिकारी हरचरण सिंह भुल्लर कहते हैं, 'जांच में सामने आया है कि घटना दस साल पुरानी रंजिश के कारण हुई है। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।' नेहा शौरी की हत्या के बाद पंजाब में विपक्षी अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार का विरोध किया और आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। अधिकारी भी अपने ऑफिस के अंदर सुरक्षित नहीं हैं। मारी गई ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी के भाई निशांत शौरी ने अपनी बहन की हत्या में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की आशंका जताई है। निशांत ने आरोप है कि जिस तरह से उनकी बहिन की हत्या की गई उससे ऐसा लगता है कि इस घटना में उनके डिपार्टमेंट के भी उच्चाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि उनतीस मार्च को नेहा ऑफिस में निर्धारित समय से काफी लेट गईं थीं। वह जैसे ही सीट पर बैठीं, उसके कुछ ही देर में हत्यारोपी उनके कैबिन में कैसे पहुंच गया और कुछ ही पलों में उसने उनपर ताबड़तोड़ फायर कैसे कर दिए। नेहा के परिजन उनकी हत्या को इसलिए भी साजिश करार दे रहे हैं, क्योंकि हत्याकांड की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा था कि हत्यारोपी मानसिक तौर पर ठीक नहीं था। नेहा के पिता रिटायर्ड कैप्टन कैलाश शौरी का कहना है जब बलविंदर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी तो उसको प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रिवॉल्वर का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया। नेहा के भाई निशांत का आरोप है कि नेहा के हत्यारे बलविंदर को तकरीबन बीस दिन पहले रिवॉल्वर लाइसेंस जारी किया गया, जबकि देश में आदर्श आचार चुनाव संहिता लागू हो चुकी है। ऐसे समय में तो पुलिस और प्रशासन जिनके पास हथियार हैं उन्हें भी जमा करवा लेती है, फिर हत्यारोपी को कैसे लाइसेंस दे दिया गया और उसके हथियार को क्यों नहीं जमा करवाया गया। गौरतलब है कि पाकिस्तान से सटे इलाके तरनतारन, अमृतसर, फिरोजपुर, फाजिल्का से सबसे ज्यादा नशे के मामले आ रहे हैं। इसके अलावा बठिंडा, मानसा, संगरूर और मुक्तसर भी नशे से प्रभावित हैं। अफगानिस्तान से पाकिस्तान और फिर पंजाब से कनाडा, अमेरिका तक तस्करी में कई राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चित नाम उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले व कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया का रहा, जबकि दो हज़ार तेरह में ड्रग रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद गिरफ्तार किए गए पूर्व एशियाड खिलाड़ी और अर्जुन अवार्डी जगदीश भोला ने कैबिनेट मंत्री मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाए। पूर्व अकाली जेल मंत्री सरवण सिंह फिल्लौर को तो इस्तीफा तक देना पड़ा था, क्योंकि उनके बेटे यूथ अकाली नेता दमनवीर सिंह पर तस्करों के साथ संबंधों का आरोप लगा था। भाजपा नेता अविनाश चंद्र और कांग्रेस नेता राजा वड़िंग पर भी आरोप लगे। पंजाब पुलिस के आईजी परमराज सिंह उमरानंगल पर भी जांच चल रही है। कई मंत्री, विधायकों से ईडी भी पूछताछ कर चुकी है। दो साल से ईडी जांच चल रही है, लेकिन अभी तक रिजल्ट जीरो है। ईडी के एक असिस्टेंट डायरेक्टर निरंजन सिंह ने जब निष्पक्ष जांच शुरू की तो उनका ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद सरकार ने रोक लगा दी। दो हज़ार तेरह से अब तक डेढ़ लाख युवा नशे का इलाज कराने ड्रग एडिक्शन सेंटर आ चुके हैं। इसमें दो फीसदी लड़कियां शामिल हैं जो पंद्रह से छब्बीस साल के बीच की हैं। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में करीब आठ.छः लाख लोग ड्रग्स लेते हैं। जबकि दो.तीन लाख लोगों को इसकी लत है। इनमें से नवासी% पढ़े-लिखी युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में हैं। भारी जनाक्रोश के चलते वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह में करीब सत्रह हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जबकि तीन सौ अड़तीस तस्करों की अस्सी करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी वर्ष दो हज़ार चौदह में जब्त की गई थी। अकाली दल भाजपा सरकार के कृषि मंत्री तोतासिंह, जोकि धर्मकोट विधानसभा, गांव दोलेवाला चिट्टा बेचने में बदनाम है। यहां आठ सौ के करीब घर हैं और आठ सौ नब्बे के करीब नशा तस्करी की एफआईआर है। गांव के इकतीस लोग बड़े स्मगलर हैं, जिन पर एक सौ चौंसठ नशा तस्करी के केस हैं। सत्तर महिलाएं नशे के कारोबार में जेल जा चुकी हैं। शायद ही पंजाब की कोई जेल हो, जिसमें इस गांव के लोग नशे के केस में बंद न हों। यहां की महिला सरपंच गुरमीत कौर का पति निर्मल सिंह निम्मा खुद कुख्यात तस्कर है, और जेल में है। जबकि पूर्व सरपंच रणजीत सिंह भोला तक हेरोइन तस्करी में जेल काट रहा है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सरहद पार पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी में बीएसएफ के हवलदार और इंस्पेक्टर रैंक के कई अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। पैसों के लालच में किसान भी तस्करी में शामिल होने लगे हैं। इन्हीं के माध्यम से हेरोइन भारत में पहुंचती है। फेंसिंग पार जमीन को कई किसान खेती कम और हेरोइन की तस्करी के लिए ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। बीएसएफ व पुलिस ने जितने भी हेरोइन तस्कर पकड़े हैं, ज्यादातर की आयु बीस से तेईस साल के बीच है। नौजवान इस धंधे को इसलिए अपनाते हैं कि बॉर्डर क्षेत्र में सरकार ने औद्योगीकरण भी ध्यान नहीं दिया है। बेरोजगारी बहुत है। नौजवानों को आराम की जिंदगी जीने के लिए हेरोइन की तस्करी से आसान कोई धंधा नजर नहीं आता है। कई किसानों ने फेंसिंग पार की जमीन खेती करने के नाम पर ली है, लेकिन इसकी आड़ में पाकिस्तान से हेरोइन, हथियार व जाली करेंसी की तस्करी करते हैं। इससे उन्हें ज्यादा मुनाफा होता है। हेरोइन को भारत में लाने के लिए किसान कई हथकंडे अपनाते हैं। सीमावर्ती गांव में अधिकतर किसान व ग्रामीण पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में हैं। फिरोजपुर में छावनी की ग्वाल मंडी, लाल कुर्ती, बस्ती टैंकावाली, बस्ती शेखां वाली, बस्ती निजामद्दीन, भट्टियां वाली बस्ती में नशीले पदार्थ का धंधा चल रहा है। पुलिस यहां छापामारी नहीं करती है। ग्वाल मंडी में नशा, जुआ, सट्टा का धंधा चलता है। यहां पर एक नेता का समर्थन होने के कारण पुलिस छापामारी नहीं करती है। इसके अलावा गांव बजीदपुर में भी सरेआम नशा मिलता है। यहां के तस्करों को भी राजनीतिक समर्थन है। पुलिस यहां भी छापामारी नहीं करती है। स्पष्ट जाहिर है ड्रग तस्करी के धंधे में नेता, पुलिस, सेना अर्द्धसैनिक बल सब इनवॉल्व हैं। ईमानदार अधिकारी के बतौर जानी जाने वाली ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी द्वारा सख्ती करने से सबकी दुकानें बंद हो गई थीं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं चूंकि चुनाव नजदीक है तो ऐसे में युवा मतदाताओं को मुफ्त ड्रग्स देकर प्रभावित करने और ड्रग्स के पासे का इस्तेमाल चुनाव में करने के लिए संभव है कि नेहा शौरी को रास्ते से हटाने के लिए ये हत्या करवाई गई हो। समाज और देश के भविष्य को बचाने के लिए अपनी जान गंवाने वाली नेहा शौरी की बहादुरी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस बलों की। ये लोग देश को अंदर से सुरक्षित करते हैं। वे हमारे समाज, हमारे युवाओं, हमारे लोगों की रक्षा करते हैं।
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ईपीएफ के केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड की 222वीं बैठक का आयोजन कल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुआ।
केंद्रीय बोर्ड ने ईपीएफ योजना में 68एचएच, 1952 को अंतर्वेशित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया जिसमें किसी सदस्य को फंड से अग्रिम का प्रावधान है, जो लगातार एक महीने से कम की नियमित अवधि तक रोजगार में नहीं रहा है। इस प्रस्ताव के तहत कोई सदस्य कुल फंड (कर्मचारी एवं नियोक्ता के अंश समेत) के 75 प्रतिशत तक लाभ उठा सकता है जो उस वक्त उस सदस्य के पास ब्याज के साथ है।
बोर्ड ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों ( एसबीआई एमएफ, यूटीआई एमएफ, सीपीएसई, भारत 22) में 47,431.24 करोड़ रुपये के निवेश एवं ईटीएफ निवेशों पर अनुमानित रिटर्न, जो अगस्त 2015 से 31 मई 2018 की अवधि के दौरान 16;07 प्रतिशत रहा।
केंद्रीय बोर्ड ने एक वर्ष की अवधि अर्थात 30.06.2019 तक के लिए ईपीएफओ द्वारा ईटीएफ में निवेश के लिए ईटीएफ मैन्यूफैक्चरर के रूप में एसबीआई एमएफ एवं यूटीआई एमएफ को जारी रखने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया।
केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष 2016-17 के लिए लेखा परीक्षण रिपोर्ट के साथ समेकित वार्षिक लेखा पर विचार किया एवं अंगीकृत किया।
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ईपीएफ के केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड की दो सौ बाईसवीं बैठक का आयोजन कल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुआ। केंद्रीय बोर्ड ने ईपीएफ योजना में अड़सठएचएच, एक हज़ार नौ सौ बावन को अंतर्वेशित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया जिसमें किसी सदस्य को फंड से अग्रिम का प्रावधान है, जो लगातार एक महीने से कम की नियमित अवधि तक रोजगार में नहीं रहा है। इस प्रस्ताव के तहत कोई सदस्य कुल फंड के पचहत्तर प्रतिशत तक लाभ उठा सकता है जो उस वक्त उस सदस्य के पास ब्याज के साथ है। बोर्ड ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में सैंतालीस,चार सौ इकतीस.चौबीस करोड़ रुपये के निवेश एवं ईटीएफ निवेशों पर अनुमानित रिटर्न, जो अगस्त दो हज़ार पंद्रह से इकतीस मई दो हज़ार अट्ठारह की अवधि के दौरान सोलह;सात प्रतिशत रहा। केंद्रीय बोर्ड ने एक वर्ष की अवधि अर्थात तीस.छः.दो हज़ार उन्नीस तक के लिए ईपीएफओ द्वारा ईटीएफ में निवेश के लिए ईटीएफ मैन्यूफैक्चरर के रूप में एसबीआई एमएफ एवं यूटीआई एमएफ को जारी रखने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया। केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष दो हज़ार सोलह-सत्रह के लिए लेखा परीक्षण रिपोर्ट के साथ समेकित वार्षिक लेखा पर विचार किया एवं अंगीकृत किया।
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