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HAJIPUR: बिहार में आए दिन लूट- पाट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बेखौफ लुटेरे कभी कोई बैंक लूट लेते हैं, तो कभी हथियार के बल पर बैंक से पैसे निकाल के जा रहें किसी व्यक्ति को। ऐसा लगता है जैसे अब इन लूटेरों को पुलिस थाना किसी का डर ना हो। एक ऐसी ही लूट की मामला बिहार के हाजीपुर से सामने आई है। इस लूट की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो हई है।
दरअसल, हाजीपुर में एक प्राइवेट बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र ( CSP ) से लूट की तस्वीर सामने आई है। यह घटना बरांटी OP थाना क्षेत्र के बिद्दूपुर स्टेशन के पास की है। जहां लुटेरे ने लूट की वारदात को अंजाम देने के दौरान कई राउंड फायरिंग भी की है। जिसके बाद लुटेरों ने बैंक से कैश लूट कर फरार हो गए । बताया जा रहा है कि, लूट की इस वारदात में लूटेरे भी हड़बड़ाहट और खौफ में दिखे और लूट के बाद जैसे तैसे भागते नजर आए। भागने के दौरान लूटेरों से आधे से ज्यादा नोटों के बण्डल रास्ते में ही गिर गए । यह पूरी वारदात और सड़क पर गिरते नोटों के बण्डल की तस्वीर CCTV में कैद हो गई है।
बता दें कि, व्यस्त बाजार में जैसे ही इस प्राइवेट बैंक ( फिनो बैंक ) के CSP सेंटर पर कामकाज शुरू हुआ । तभी 4 हथियारबंद लूटेरे बैंक में आ धमके और हथियार के सहारे बैंक से कैश लूट कर भागने लगे । जब लोगों ने पीछा किया , तो लूटेरे लूट की कैश की परवाह किये बिना भागने लगे। भागने के दौरान कैश और नोटों का बण्डल रास्ते में ही गिर गए। लोगों से अपनी जान बचा कर भागने के लिए लूटेरो कई राउंड फायरिंग की और वहां से फरार हो गए।
इस वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय बरांटी थाने की पुलिस के साथ महुआ SDPO पूनम केसरी मौके पर पहुंची । SDPO पूनम केसरी ने कहा कि इस मामले की पड़ताल की जा रही है। बैंक और CCTV की फूटेज की भी जांच की जा रही है। जल्द ही लूटेरों को पकड़ लिए जाएगा।
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HAJIPUR: बिहार में आए दिन लूट- पाट की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बेखौफ लुटेरे कभी कोई बैंक लूट लेते हैं, तो कभी हथियार के बल पर बैंक से पैसे निकाल के जा रहें किसी व्यक्ति को। ऐसा लगता है जैसे अब इन लूटेरों को पुलिस थाना किसी का डर ना हो। एक ऐसी ही लूट की मामला बिहार के हाजीपुर से सामने आई है। इस लूट की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो हई है। दरअसल, हाजीपुर में एक प्राइवेट बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से लूट की तस्वीर सामने आई है। यह घटना बरांटी OP थाना क्षेत्र के बिद्दूपुर स्टेशन के पास की है। जहां लुटेरे ने लूट की वारदात को अंजाम देने के दौरान कई राउंड फायरिंग भी की है। जिसके बाद लुटेरों ने बैंक से कैश लूट कर फरार हो गए । बताया जा रहा है कि, लूट की इस वारदात में लूटेरे भी हड़बड़ाहट और खौफ में दिखे और लूट के बाद जैसे तैसे भागते नजर आए। भागने के दौरान लूटेरों से आधे से ज्यादा नोटों के बण्डल रास्ते में ही गिर गए । यह पूरी वारदात और सड़क पर गिरते नोटों के बण्डल की तस्वीर CCTV में कैद हो गई है। बता दें कि, व्यस्त बाजार में जैसे ही इस प्राइवेट बैंक के CSP सेंटर पर कामकाज शुरू हुआ । तभी चार हथियारबंद लूटेरे बैंक में आ धमके और हथियार के सहारे बैंक से कैश लूट कर भागने लगे । जब लोगों ने पीछा किया , तो लूटेरे लूट की कैश की परवाह किये बिना भागने लगे। भागने के दौरान कैश और नोटों का बण्डल रास्ते में ही गिर गए। लोगों से अपनी जान बचा कर भागने के लिए लूटेरो कई राउंड फायरिंग की और वहां से फरार हो गए। इस वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय बरांटी थाने की पुलिस के साथ महुआ SDPO पूनम केसरी मौके पर पहुंची । SDPO पूनम केसरी ने कहा कि इस मामले की पड़ताल की जा रही है। बैंक और CCTV की फूटेज की भी जांच की जा रही है। जल्द ही लूटेरों को पकड़ लिए जाएगा।
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विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल 2018 का है। जिसे अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में सीएम योगी एक दरगाह में खड़े हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव जीतने के लिए सीएम योगी दरगाह पहुंच गए हैं। विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल 2018 का है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
फेसबुक यूजर Saleem Ghadiyali ने वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि चुनाव के वक्त कांग्रेस मंदिर मे जाये तो दिखावा और योगी दरगाह जाये तो.. सब का साथ सबका विकास..है।
वायरल पोस्टक के कंटेंट को यहां ज्योंक का त्यों लिखा गया है। पोस्ट के आर्काइव्ड वर्जन को यहां देखें। ट्विटर पर भी इस दावे को यूजर्स जमकर शेयर कर रहे हैं।
वायरल दावे का सच जानने के लिए हमने गूगल पर कुछ कीवर्ड्स के जरिए सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट NDTV की वेबसाइट पर 28 जून 2018 को प्रकाशित मिली। रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2018 में संत कबीर की 500वीं पुण्यतिथि पर पीएम मोदी और सीएम योगी यूपी के संत कबीर नगर के मगहर में स्थित कबीर की समाधि पर चादर और फूल चढ़ाने के लिए पहुंचे थे।
पड़ताल के दौरान हमें वायरल वीडियो ABP News के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 28 जून 2018 को अपलोड मिला। वीडियो में देखा जा सकता है कि सीएम योगी पहले समाधि के अंदर आते हैं, फिर कुछ देर बाद पीएम मोदी आते हैं। इसके बाद पीएम मोदी और सीएम योगी संत कबीर दास की समाधि पर पुष्प और चादर चढ़ाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए हमने भाजपा नेता विभ्राट चंद कौशिक से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल दावा गलत है। वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है, यह काफी पुराना है। लोग पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से शेयर कर रहे हैं। लोग मुख्यमंत्री जी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
पड़ताल के अंत में हमने इस पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग की। स्कैनिंग से हमें पता चला कि यूजर Saleem Ghadiyali को फेसबुक पर 500 से अधिक लोगों ने फॉलो किया हुआ है।
निष्कर्षः विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल 2018 का है। जिसे अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
- Claim Review : चुनाव के वक्त काँग्रेस मंदिर मे जाये तो दिखावा और योगी दरगाह जाये तो.. सब का साथ सबका विकास... हद्दपार कर दि भारतीय मीडिया ने दलाली की.. अब तो दलाली भी मीडिया से दलाली शिकणे जाती है..
कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
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विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल दो हज़ार अट्ठारह का है। जिसे अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में सीएम योगी एक दरगाह में खड़े हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव जीतने के लिए सीएम योगी दरगाह पहुंच गए हैं। विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल दो हज़ार अट्ठारह का है। क्या है वायरल पोस्ट में? फेसबुक यूजर Saleem Ghadiyali ने वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि चुनाव के वक्त कांग्रेस मंदिर मे जाये तो दिखावा और योगी दरगाह जाये तो.. सब का साथ सबका विकास..है। वायरल पोस्टक के कंटेंट को यहां ज्योंक का त्यों लिखा गया है। पोस्ट के आर्काइव्ड वर्जन को यहां देखें। ट्विटर पर भी इस दावे को यूजर्स जमकर शेयर कर रहे हैं। वायरल दावे का सच जानने के लिए हमने गूगल पर कुछ कीवर्ड्स के जरिए सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट NDTV की वेबसाइट पर अट्ठाईस जून दो हज़ार अट्ठारह को प्रकाशित मिली। रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, साल दो हज़ार अट्ठारह में संत कबीर की पाँच सौवीं पुण्यतिथि पर पीएम मोदी और सीएम योगी यूपी के संत कबीर नगर के मगहर में स्थित कबीर की समाधि पर चादर और फूल चढ़ाने के लिए पहुंचे थे। पड़ताल के दौरान हमें वायरल वीडियो ABP News के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अट्ठाईस जून दो हज़ार अट्ठारह को अपलोड मिला। वीडियो में देखा जा सकता है कि सीएम योगी पहले समाधि के अंदर आते हैं, फिर कुछ देर बाद पीएम मोदी आते हैं। इसके बाद पीएम मोदी और सीएम योगी संत कबीर दास की समाधि पर पुष्प और चादर चढ़ाते हैं। अधिक जानकारी के लिए हमने भाजपा नेता विभ्राट चंद कौशिक से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल दावा गलत है। वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है, यह काफी पुराना है। लोग पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से शेयर कर रहे हैं। लोग मुख्यमंत्री जी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। पड़ताल के अंत में हमने इस पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग की। स्कैनिंग से हमें पता चला कि यूजर Saleem Ghadiyali को फेसबुक पर पाँच सौ से अधिक लोगों ने फॉलो किया हुआ है। निष्कर्षः विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वायरल वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि साल दो हज़ार अट्ठारह का है। जिसे अब गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। - Claim Review : चुनाव के वक्त काँग्रेस मंदिर मे जाये तो दिखावा और योगी दरगाह जाये तो.. सब का साथ सबका विकास... हद्दपार कर दि भारतीय मीडिया ने दलाली की.. अब तो दलाली भी मीडिया से दलाली शिकणे जाती है.. कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
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केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को दोपहिया वाहन सवारों के पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य करने का आदेश दिया। इसमें चार साल से अधिक उम्र के बच्चे भी शामिल हैं।
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केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को दोपहिया वाहन सवारों के पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य करने का आदेश दिया। इसमें चार साल से अधिक उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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Russia Ukraine War: रूस ने कीव की राजधानी पर कब्जा करने की कोशिश तेज कर दी है। इस बीच रूस की सेना का मुकाबला करने के लिए अब यूक्रेन के आम से लेकर खास नागरिक भी सेना में शामिल होकर हथियार उठा रहे हैं। इस बीच एक ब्यूटी क्वीन और पूर्व मिस ग्रैंड यूक्रेन, अनास्तासिया लेना (Anastasiia Lenna) कथित तौर पर रूसी हमले के खिलाफ लड़ने के लिए यूक्रेनी सेना में शामिल हो गई हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लेना ने कहा कि उसने अपने घर की रक्षा के लिए हथियार उठा लिए हैं।
साल 2015 में मिस यूक्रेन का खिताब (Miss Grand Ukraine) जीत चुकीं अनास्तासिया की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं जिसमें वह बंदूक थामे तस्वीरें सामने आई हैं। शनिवार को अंग्रेजी में लिखी गई एक पोस्ट में सशस्त्र सैनिकों की एक तस्वीर के साथ सड़क मार्ग को अवरुद्ध करने की बात कहते हुए उन्होंने लिखा, 'कब्जे की नियत से जो कोई भी Ukraine Border में घुसेगा, मारा जाएगा। ' अनास्तासिया लेना ने इंस्टाग्राम पर हथियारों के साथ तस्वीरें भी शेयर की हैं।
ब्यूटी क्वीन Anastasiia Lenna सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके एक लाख 14 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं। उनकी बंदूक थामे फोटो पर 43 हजार से अधिक लाइक्स आ चुके हैं और हजारों की संख्या में लोग कमेंट भी कर रहे हैं। रूस से जंग के समय भी वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। यूक्रेन की सेना में शामिल होने से पहले वह तुर्की में पब्लिक रिलेशन मैनेजर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं।
इससे पहले यूक्रेन की युवा सांसद किरा रुडिक ने बंदूक पकड़े अपनी एक तस्वीर ट्वीटर पर साझा की थी। किरा रुडिक ने लिखा, 'मैं कलाश्निकोव का इस्तेमाल करना सीख रही हूं और हथियार उठाने की तैयारी करती हूं। यह असली लगता है, क्योंकि कुछ दिन पहले तक यह मेरे दिमाग में यह खयाल कभी नहीं आया था। हमारी महिलाएं हमारे पुरुषों की तरह ही हमारी मिट्टी की रक्षा करेंगी। ' खबर के मुताबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की भी यूक्रेन के सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में भाग ले रहे हैं।
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Russia Ukraine War: रूस ने कीव की राजधानी पर कब्जा करने की कोशिश तेज कर दी है। इस बीच रूस की सेना का मुकाबला करने के लिए अब यूक्रेन के आम से लेकर खास नागरिक भी सेना में शामिल होकर हथियार उठा रहे हैं। इस बीच एक ब्यूटी क्वीन और पूर्व मिस ग्रैंड यूक्रेन, अनास्तासिया लेना कथित तौर पर रूसी हमले के खिलाफ लड़ने के लिए यूक्रेनी सेना में शामिल हो गई हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लेना ने कहा कि उसने अपने घर की रक्षा के लिए हथियार उठा लिए हैं। साल दो हज़ार पंद्रह में मिस यूक्रेन का खिताब जीत चुकीं अनास्तासिया की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं जिसमें वह बंदूक थामे तस्वीरें सामने आई हैं। शनिवार को अंग्रेजी में लिखी गई एक पोस्ट में सशस्त्र सैनिकों की एक तस्वीर के साथ सड़क मार्ग को अवरुद्ध करने की बात कहते हुए उन्होंने लिखा, 'कब्जे की नियत से जो कोई भी Ukraine Border में घुसेगा, मारा जाएगा। ' अनास्तासिया लेना ने इंस्टाग्राम पर हथियारों के साथ तस्वीरें भी शेयर की हैं। ब्यूटी क्वीन Anastasiia Lenna सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके एक लाख चौदह हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं। उनकी बंदूक थामे फोटो पर तैंतालीस हजार से अधिक लाइक्स आ चुके हैं और हजारों की संख्या में लोग कमेंट भी कर रहे हैं। रूस से जंग के समय भी वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। यूक्रेन की सेना में शामिल होने से पहले वह तुर्की में पब्लिक रिलेशन मैनेजर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। इससे पहले यूक्रेन की युवा सांसद किरा रुडिक ने बंदूक पकड़े अपनी एक तस्वीर ट्वीटर पर साझा की थी। किरा रुडिक ने लिखा, 'मैं कलाश्निकोव का इस्तेमाल करना सीख रही हूं और हथियार उठाने की तैयारी करती हूं। यह असली लगता है, क्योंकि कुछ दिन पहले तक यह मेरे दिमाग में यह खयाल कभी नहीं आया था। हमारी महिलाएं हमारे पुरुषों की तरह ही हमारी मिट्टी की रक्षा करेंगी। ' खबर के मुताबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की भी यूक्रेन के सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में भाग ले रहे हैं।
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इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) 7 सितंबर से कन्याकुमारी से कश्मीर तक 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू होने जा रही है। यह यात्रा चंडीगढ़ से भी होकर गुजरेगी। चंडीगढ़ युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनोज लुबाना ने कहा कि 'भारत जोड़ो' समय की मांग है। 'महंगाई, GST, बेरोजगारी भारत को तोड़ रही है। धर्म, जाति, भाषा, भोजन, वस्त्र के नाम पर सामाजिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है।
लुबाना ने कहा कि पदयात्रा लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक आंदोलन है। यह एक जन आंदोलन है। युवाओं को आक्रामक होने की जरूरत है। पदयात्रा का उद्देश्य कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है और लोगों के पास जाने का अवसर प्राप्त करना है। एक तरह से यह 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी है।
IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के मुताबिक, भारत जोड़ो यात्रा 12 राज्यों से गुजरते हुए कन्याकुमारी से कश्मीर तक 3570 किमी की दूरी को कवर करेगी। अगर देश की युवा शक्ति का भविष्य बेहतर बनाना है तो कदम दर कदम काम करना जरूरी है। देश के सभी युवाओं को भारत जोड़ी यात्रा के माध्यम से जोड़ना जरूरी है।
श्रीनिवास बीवी ने कहा है कि यात्रा का उद्देश्य इस देश में फैले नफरत के माहौल, भारतीय संविधान के विपरीत काम कर रही व्यवस्था, महंगाई और बेरोजगारी को खत्म करना है। यात्रा में हर धर्म, हर जाति, हर समुदाय के लोग शामिल होने की कांग्रेस ने अपील की है। कांग्रेस का नारा 'नफरत छोड़ो, भारत से जुड़ो' रहेगा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इंडियन यूथ कांग्रेस सात सितंबर से कन्याकुमारी से कश्मीर तक 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू होने जा रही है। यह यात्रा चंडीगढ़ से भी होकर गुजरेगी। चंडीगढ़ युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनोज लुबाना ने कहा कि 'भारत जोड़ो' समय की मांग है। 'महंगाई, GST, बेरोजगारी भारत को तोड़ रही है। धर्म, जाति, भाषा, भोजन, वस्त्र के नाम पर सामाजिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है। लुबाना ने कहा कि पदयात्रा लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक आंदोलन है। यह एक जन आंदोलन है। युवाओं को आक्रामक होने की जरूरत है। पदयात्रा का उद्देश्य कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है और लोगों के पास जाने का अवसर प्राप्त करना है। एक तरह से यह दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव की तैयारी है। IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के मुताबिक, भारत जोड़ो यात्रा बारह राज्यों से गुजरते हुए कन्याकुमारी से कश्मीर तक तीन हज़ार पाँच सौ सत्तर किमी की दूरी को कवर करेगी। अगर देश की युवा शक्ति का भविष्य बेहतर बनाना है तो कदम दर कदम काम करना जरूरी है। देश के सभी युवाओं को भारत जोड़ी यात्रा के माध्यम से जोड़ना जरूरी है। श्रीनिवास बीवी ने कहा है कि यात्रा का उद्देश्य इस देश में फैले नफरत के माहौल, भारतीय संविधान के विपरीत काम कर रही व्यवस्था, महंगाई और बेरोजगारी को खत्म करना है। यात्रा में हर धर्म, हर जाति, हर समुदाय के लोग शामिल होने की कांग्रेस ने अपील की है। कांग्रेस का नारा 'नफरत छोड़ो, भारत से जुड़ो' रहेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का 50 सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में 100 ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में एक कॉलम लिखा है। संजय राउत ने दिल्ली हिंसा को कलेजा चीरने वाला बताया है। संजय राउत ने कहा है कि दिल्ली हिंसा में मौत का तंडव देखने के बाद तो यमराज भी इस्तीफा दे देते।
दंगों में हिंदू और मुसलमानों के मासूम बच्चे अनाथ हो गए। क्या हम अनाथों की एक नई दुनिया बना रहे हैं? मानवता खो चुकी राजनीति, उस राजनीति से निर्माण होने वाला निघृण धार्मिक उन्माद और उस उन्माद से पैदा किया गया नया राष्ट्रवाद देश के बचे-खुचे इंसानों को मार रहा है।
संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का 50 सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में 100 ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यदि लोग अभी भी हिंदू और मुस्लिम मानते हैं तो यह मानवता की मौत है।
आज दुनिया हिंदू-मुसलमान, क्रिश्चन-मुसलमान, हिंदुत्व, धर्मनिरपेक्ष के विवाद के कारण विनाश की दहलीज पर पहुंच गई है। देश में धर्म के नाम पर बचाओ! बचाओ! का आक्रोश किया जाता है। सहायता के लिए न तो भगवान, न अल्लाह और न ही येसु दौड़ते हैं। सरकार नामक माई-बाप भी ऐसे संकटों के समय दरवाजे, खिड़कियां बंद करके बैठ जाते हैं। दंगे, अकाल, बाढ़ में कितने लोग मरते हैं। इसके आंकड़े आते हैं, लेकिन इन दंगों में कितने बच्चे अनाथ और लावारिस हुए हैं इसके आंकड़े आने अभी बाकी हैं।
आगे लिखा कि एक बच्चा अपने खाक हुए घर से स्कूल की जली हुई किताब लेकर निकाल रहा है। ये पुस्तकें उर्दू में न होकर हिंदी में हैं। उस राख में तो हिंदू-मुसलमान मत ढूंढ़ो, लेकिन ऐसी खोज जारी ही है। यह राख मतलब राजनीतिज्ञों की रोजी-रोटी बन गई है।
आगे लिखा कि दिल्ली के शाहीनबाग में चल रहा आंदोलन विवाद का मुद्दा बन सकता है। किसी ने वहां भड़काऊ भाषण दिया, किसी ने आग लगाई। ये सब कौन लोग थे, जिन्होंने 50 से ज्यादा लोगों की जान ले ली? ऐसा सवाल कई निरपराध बच्चे और उनकी मां की आंखों से बहने वाले आंसू उठा रहे हैं। ऐसा ही सवाल आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मां, राहुल सोलंकी के पिता और मुदस्सर खान के मासूम बच्चे की आंखों से न रूकने वाले आंसू पूछ रहे हैं। खून का रंग और आंसुओं का रंग धर्म के मुताबिक नहीं होता है।
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संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का पचास सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में एक सौ ज्यादा लोगों की मौत हुई है। दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में एक कॉलम लिखा है। संजय राउत ने दिल्ली हिंसा को कलेजा चीरने वाला बताया है। संजय राउत ने कहा है कि दिल्ली हिंसा में मौत का तंडव देखने के बाद तो यमराज भी इस्तीफा दे देते। दंगों में हिंदू और मुसलमानों के मासूम बच्चे अनाथ हो गए। क्या हम अनाथों की एक नई दुनिया बना रहे हैं? मानवता खो चुकी राजनीति, उस राजनीति से निर्माण होने वाला निघृण धार्मिक उन्माद और उस उन्माद से पैदा किया गया नया राष्ट्रवाद देश के बचे-खुचे इंसानों को मार रहा है। संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का पचास सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में एक सौ ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यदि लोग अभी भी हिंदू और मुस्लिम मानते हैं तो यह मानवता की मौत है। आज दुनिया हिंदू-मुसलमान, क्रिश्चन-मुसलमान, हिंदुत्व, धर्मनिरपेक्ष के विवाद के कारण विनाश की दहलीज पर पहुंच गई है। देश में धर्म के नाम पर बचाओ! बचाओ! का आक्रोश किया जाता है। सहायता के लिए न तो भगवान, न अल्लाह और न ही येसु दौड़ते हैं। सरकार नामक माई-बाप भी ऐसे संकटों के समय दरवाजे, खिड़कियां बंद करके बैठ जाते हैं। दंगे, अकाल, बाढ़ में कितने लोग मरते हैं। इसके आंकड़े आते हैं, लेकिन इन दंगों में कितने बच्चे अनाथ और लावारिस हुए हैं इसके आंकड़े आने अभी बाकी हैं। आगे लिखा कि एक बच्चा अपने खाक हुए घर से स्कूल की जली हुई किताब लेकर निकाल रहा है। ये पुस्तकें उर्दू में न होकर हिंदी में हैं। उस राख में तो हिंदू-मुसलमान मत ढूंढ़ो, लेकिन ऐसी खोज जारी ही है। यह राख मतलब राजनीतिज्ञों की रोजी-रोटी बन गई है। आगे लिखा कि दिल्ली के शाहीनबाग में चल रहा आंदोलन विवाद का मुद्दा बन सकता है। किसी ने वहां भड़काऊ भाषण दिया, किसी ने आग लगाई। ये सब कौन लोग थे, जिन्होंने पचास से ज्यादा लोगों की जान ले ली? ऐसा सवाल कई निरपराध बच्चे और उनकी मां की आंखों से बहने वाले आंसू उठा रहे हैं। ऐसा ही सवाल आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मां, राहुल सोलंकी के पिता और मुदस्सर खान के मासूम बच्चे की आंखों से न रूकने वाले आंसू पूछ रहे हैं। खून का रंग और आंसुओं का रंग धर्म के मुताबिक नहीं होता है।
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में क़दम उठाया है उससे साफ है कि मौजूदा शासन के हाथों में संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संविधान हमें नागरिक के तौर पर अधिकारों एवं कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाने की सीख देता है.
उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को अपना इस्तीफा सौंप दिया. वहीं, देवेंद्र फड़णवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की घोषणा कर दी. फड़णवीस ने कहा कि बहुमत नहीं होने के कारण वह इस्तीफा दे रहे हैं.
पार्टी ने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा था कि चुनावी बॉन्ड को बिना किसी सीरियल नंबर या किसी पहचान के निशान के जारी किया जाना चाहिए, ताकि बाद में दानकर्ता का पता लगाने के लिए इसका इस्तेमाल न किया जा सके.
राज्यसभा में गृह मंत्रालय द्वारा बताया गया कि साल 2017 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम क़ानून (यूएपीए) के तहत सर्वाधिक गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश में हुईं.
केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि कॉरपोरेट कर में कटौती के ज़रिये दिए गए प्रोत्साहनों से अर्थव्यवस्था में जल्द प्रभाव होने का अनुमान है. भारत में नए निवेश से न केवल नई नौकरियां सृजित होने का अनुमान है बल्कि इससे आय में भी बढ़ोतरी होगी.
राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केवल 99वें संविधान संशोधन को असंवैधानिक करार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की 22 साल पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने वाले राष्ट्रीय न्यायिक आयोग कानून, 2014 को निरस्त कर दिया था.
भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' अभियान को उसके चार वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल, गणेश नाइक, बाबनराव पाचपुते और नारायण राणे चला रहे हैं. ये चारों नेता एनसीपी और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं.
यह प्रदर्शन कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हो रहा है. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है.
जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा अनजाने में पत्रकारों को भेजे गए ई-मेल में 'डीएनए फाइल' नाम से एक फाइल थी, जिसमें ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट थे, जो कि कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के संबंध में लिखे गए थे.
अगर कोई भ्रष्टाचारी है, लुटेरा है तो वो मुख्यमंत्री है, उप मुख्यमंत्री है. ऐसे राजनेताओं से हम जनता की भलाई की उम्मीद करते हैं. सचमुच जनता भोली है. 95,000 करोड़ के घोटाले के आरोपी को बीजेपी उप मुख्यमंत्री बना सकती है. इससे पता चलता है कि यह दौर उसी का है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि यह राज्य के लिए एक काला दिन है. भाजपा ने बेशर्मी की सभी सीमाएं लांघ दी हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुझे लगता है कि अब से चुनावों की घोषणा नहीं होनी चाहिए और 'मैं वापस लौटूंगा' कहने कि बजाय कुछ लोगों को फेविकोल का इस्तेमाल करके कुर्सी से चिपक जाना चाहिए.
मामला अलवर जिले का है, जहां गुरुवार को एसपी ने जिले में तैनात नौ पुलिसकर्मियों के दाढ़ी रखने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था. ये सभी नौ पुलिसकर्मी मुस्लिम समुदाय से थे.
कांग्रेस ने महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने को जनादेश के साथ विश्वासघात और लोकतंत्र की सुपारी देना करार दिया है.
एनसीपी विधायक दल की बैठक में महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने वाले अजित पवार की जगह जयंत पाटिल को विधायक दल का नेता चुना गया.
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में क़दम उठाया है उससे साफ है कि मौजूदा शासन के हाथों में संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संविधान हमें नागरिक के तौर पर अधिकारों एवं कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाने की सीख देता है. उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को अपना इस्तीफा सौंप दिया. वहीं, देवेंद्र फड़णवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की घोषणा कर दी. फड़णवीस ने कहा कि बहुमत नहीं होने के कारण वह इस्तीफा दे रहे हैं. पार्टी ने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा था कि चुनावी बॉन्ड को बिना किसी सीरियल नंबर या किसी पहचान के निशान के जारी किया जाना चाहिए, ताकि बाद में दानकर्ता का पता लगाने के लिए इसका इस्तेमाल न किया जा सके. राज्यसभा में गृह मंत्रालय द्वारा बताया गया कि साल दो हज़ार सत्रह में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम क़ानून के तहत सर्वाधिक गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश में हुईं. केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि कॉरपोरेट कर में कटौती के ज़रिये दिए गए प्रोत्साहनों से अर्थव्यवस्था में जल्द प्रभाव होने का अनुमान है. भारत में नए निवेश से न केवल नई नौकरियां सृजित होने का अनुमान है बल्कि इससे आय में भी बढ़ोतरी होगी. राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केवल निन्यानवेवें संविधान संशोधन को असंवैधानिक करार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह में जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की बाईस साल पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने वाले राष्ट्रीय न्यायिक आयोग कानून, दो हज़ार चौदह को निरस्त कर दिया था. भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' अभियान को उसके चार वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल, गणेश नाइक, बाबनराव पाचपुते और नारायण राणे चला रहे हैं. ये चारों नेता एनसीपी और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं. यह प्रदर्शन कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हो रहा है. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है. जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा अनजाने में पत्रकारों को भेजे गए ई-मेल में 'डीएनए फाइल' नाम से एक फाइल थी, जिसमें ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट थे, जो कि कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के संबंध में लिखे गए थे. अगर कोई भ्रष्टाचारी है, लुटेरा है तो वो मुख्यमंत्री है, उप मुख्यमंत्री है. ऐसे राजनेताओं से हम जनता की भलाई की उम्मीद करते हैं. सचमुच जनता भोली है. पचानवे,शून्य करोड़ के घोटाले के आरोपी को बीजेपी उप मुख्यमंत्री बना सकती है. इससे पता चलता है कि यह दौर उसी का है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि यह राज्य के लिए एक काला दिन है. भाजपा ने बेशर्मी की सभी सीमाएं लांघ दी हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुझे लगता है कि अब से चुनावों की घोषणा नहीं होनी चाहिए और 'मैं वापस लौटूंगा' कहने कि बजाय कुछ लोगों को फेविकोल का इस्तेमाल करके कुर्सी से चिपक जाना चाहिए. मामला अलवर जिले का है, जहां गुरुवार को एसपी ने जिले में तैनात नौ पुलिसकर्मियों के दाढ़ी रखने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था. ये सभी नौ पुलिसकर्मी मुस्लिम समुदाय से थे. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने को जनादेश के साथ विश्वासघात और लोकतंत्र की सुपारी देना करार दिया है. एनसीपी विधायक दल की बैठक में महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने वाले अजित पवार की जगह जयंत पाटिल को विधायक दल का नेता चुना गया.
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इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त संस्था से B. Tech/B. E, MBA/PGDM, M. Com, M. A, CA, ICWA, M. Phil/Ph. D, LLB, M. E/M. Tech, MBBS डिग्री पास होना ज़रूरी है.
इस पोस्ट के लिए उम्मीदवारों की 26 अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष रखी गई हैं.
लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के आधार पर.
इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाए और अधिसूचना डाउनलोड कर पढ़ें। समस्त जानकारी से अवगत होकर युवा वर्ग अपने सभी दस्तावेजो के साथ 3 सितंबर 2019 को The Under Secretary (Admn. lll), NITI Aayog, Room No. 430, NITI Bhavan, Sansad Marg, New Delhi-no 001 इस पते पर साक्षात्कार के लिए उपस्थित हो सकते हैं.
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इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त संस्था से B. Tech/B. E, MBA/PGDM, M. Com, M. A, CA, ICWA, M. Phil/Ph. D, LLB, M. E/M. Tech, MBBS डिग्री पास होना ज़रूरी है. इस पोस्ट के लिए उम्मीदवारों की छब्बीस अधिकतम आयु सीमा छप्पन वर्ष रखी गई हैं. लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के आधार पर. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाए और अधिसूचना डाउनलोड कर पढ़ें। समस्त जानकारी से अवगत होकर युवा वर्ग अपने सभी दस्तावेजो के साथ तीन सितंबर दो हज़ार उन्नीस को The Under Secretary , NITI Aayog, Room No. चार सौ तीस, NITI Bhavan, Sansad Marg, New Delhi-no एक इस पते पर साक्षात्कार के लिए उपस्थित हो सकते हैं.
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जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनने का प्रयास करने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया।
नेशनल डेस्कः जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनने का प्रयास करने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि घटना दक्षिण कश्मीर जिले के इमाम साहिब इलाके में पुलिस शिविर के पास हुई।
उन्होंने बताया कि आरोपी ने एक पुलिसकर्मी का सर्विस हथियार छीनने की कोशिश की लेकिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच गिरफ्तार कर लिया।
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जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनने का प्रयास करने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। नेशनल डेस्कः जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनने का प्रयास करने के बाद एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि घटना दक्षिण कश्मीर जिले के इमाम साहिब इलाके में पुलिस शिविर के पास हुई। उन्होंने बताया कि आरोपी ने एक पुलिसकर्मी का सर्विस हथियार छीनने की कोशिश की लेकिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच गिरफ्तार कर लिया।
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यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो बात उसके दिमाग में जाती है। लेकिन यदि आप उससे उसकी मातृ-भाषा में बात करते हैं, तो बात उसके दिल तक जाती है।
भारत में कोलोनियल शासन के चलते अंग्रेजी बोलने वाले लोगों को अक्सर अधिक शिक्षित और प्रिविलेज्ड लोगों के रूप में देखा जाता है, जबकि आज भी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को कम सॉफिस्टिकेटेड या अपमानजनक माना जाता है।
स्कूलों में छोटे बच्चों का एक-दूसरे को चिढ़ाते हुए 'हिंदी' का उपयोग 'चिन्दी' के रूप में किया जाना आम है। यह विश्वास इंग्लिश से जुड़े सोशल स्टेटस और लाइफ स्टाइल के कारण है, क्योंकि अंग्रेजी अक्सर हाई इनकम नौकरियों और शहरी जीवन से जुड़ी होती है।
लेकिन इससे मातृभाषा अर्थात भारत के सन्दर्भ में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का महत्व कम नहीं हो जाता। आज हम मातृभाषा के इसी पहलू पर नजर डालेंगे और देखेंगे कि स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए यह किस प्रकार उपयोगी है, उसमें क्या-क्या करिअर ऑप्शंस हैं, इत्यादि।
करिअर फंडा में स्वागत!
भाषा मानव संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग है। इसी से हम अपने विचारों और भावनाओं को कम्युनिकेट करते हैं। जैसा नेल्सन मंडेला के कथन से स्पष्ट है हमारी मातृभाषा हमारे दिल के सबसे करीब होती है और अक्सर हमारी सांस्कृतिक विरासत और पालन-पोषण से जुड़ी होती है। जबकि दुनिया ग्लोबलाइज हो चुकी है, और इंग्लिश कम्युनिकेशन की प्रमुख भाषा के रूप में उभरी है, हमारी मातृभाषा अभी भी हमारे करिअर और व्यवसायों को आकार देने में एक आवश्यक भूमिका निभाती है।
भारत में, जहां बहुभाषावाद जीवन का एक तरीका है, मातृभाषा का महत्व और भी अधिक स्पष्ट है। बॉलीवुड से लेकर रीजनल सिनेमा तक, साहित्य से लेकर जर्नलिज्म तक और विज्ञापन से लेकर जनसंपर्क तक, अपनी मातृभाषा का लाभ उठाने वाले व्यक्तियों ने सफलता और पहचान पाई है।
यहां कुछ ऐसे लोगों के उदाहरण दिए गए हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में सफल करिअर बनाया है।
1) कॉपीराइटर्स और ऐडमेकर्स (Copywriters and Admakers)
कॉपीराइटर विज्ञापन, ब्रोशर, वेबसाइट और अन्य मार्केटिंग सामग्री के लिए कंटेंट लिखते हैं। भारत में ऐसे कई सफल कॉपीराइटर हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में लिखकर अपना नाम बनाया है।
उदाहरण के लिए, पीयूष पांडे जिन्होंने भारत में कुछ सबसे यादगार विज्ञापन कैम्पेन किए हैं जैसे फेविकोल, मिले सुर मेरा तुम्हारा, वोडाफोन, SBI लाइफ इत्यादि। वे स्वयं नहीं लिखते, लेकिन अपने कैम्पेन्स में हिंदी का उपयोग करते हैं और कई पुरस्कार जीत चुके हैं। इसके अलावा 'ठंडा मतलब कोका कोला', 'क्लोरमिंट क्यों खाते हैं? दोबारा मत पूछना' जैसे पंचलाइन लिखने वाले प्रसून जोशी हैं।
2) गीतकार (Lyricist)
गीतों के शब्द लिखने की जिम्मेदारी गीतकारों की होती है। भारत में, फिल्म उद्योग गीतकारों का एक प्रमुख नियोक्ता है, और कई लोगों ने अपनी मातृभाषा में लिखकर सफलता पाई है। मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधयानवी से लेकर गुलज़ार और जावेद अख्तर तक सभी ने हिंदी में लिखा अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते और प्रसिद्धि कमाई। क्षेत्रीय भाषा के कई सफल गीतकारों में से एक वैरामुथु हैं, जो तमिल में लिखते हैं और तमिल फिल्म उद्योग में अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं।
3) गायक (Singer)
भारत में गाने हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में ही चलते हैं। उदाहरण के लिए, लता मंगेशकर एक प्रसिद्ध गायिका रही हैं, जिन्होंने हिंदी, मराठी और बंगाली सहित कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए। एक अन्य सफल गायक एस पी बालासुब्रह्मण्यम हैं, जिन्होंने तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया है। उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते और भारतीय सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध गायकों में से एक थे।
4) पत्रकार (Journalist)
जनता को समाचार और सूचना देने के लिए पत्रकार जिम्मेदार हैं। भारत में कई सफल पत्रकार हैं जिन्होंने सफलता पाने के लिए अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल किया है। रवीश कुमार से लेकर सौरभ द्विवेदी तक सभी ने हिंदी से नाम और धन कमाया है। उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली पत्रकारों में से एक माना जाता है।
5) लेखक (Authors)
लेखक किताबें और अन्य साहित्यिक कार्यों को लिखने के लिए जिम्मेदार हैं। भारत में ऐसे कई सफल लेखक हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में लिखा है। उदाहरण के लिए, महाश्वेता देवी एक प्रसिद्ध लेखिका हैं, जो बंगाली में लिखती हैं और उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। उन्हें अब तक के सबसे महान बंगाली लेखकों में से एक माना जाता है। एक अन्य सफल लेखक शिवाजी सावंत हैं, जो मराठी में लिखते हैं और अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्हें उनके उपन्यास 'मृत्युंजय' के लिए जाना जाता है, जिसे अब तक के सबसे महान मराठी उपन्यासों में से एक माना जाता है। आजकल चाहे देवदत्त पटनायक हों या फिर चेतन भगत सभी की किताबें हिंदी में ट्रांसलेट हो उपलब्ध हैं।
कहने का अर्थ यह कि यदि आप अपनी मातृभाषा में करिअर बनाना चाहते हैं तो कई अवसर उपलब्ध हैं।
आज का करिअर फंडा है कि मातृभाषा घर और बाजार की भाषा तो नैच्युरली होती है लेकिन उसे उसे कानून और विज्ञान की भाषा बनाए जाने की जरूरत है।
कर के दिखाएंगे!
इस कॉलम पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें।
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यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो बात उसके दिमाग में जाती है। लेकिन यदि आप उससे उसकी मातृ-भाषा में बात करते हैं, तो बात उसके दिल तक जाती है। भारत में कोलोनियल शासन के चलते अंग्रेजी बोलने वाले लोगों को अक्सर अधिक शिक्षित और प्रिविलेज्ड लोगों के रूप में देखा जाता है, जबकि आज भी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को कम सॉफिस्टिकेटेड या अपमानजनक माना जाता है। स्कूलों में छोटे बच्चों का एक-दूसरे को चिढ़ाते हुए 'हिंदी' का उपयोग 'चिन्दी' के रूप में किया जाना आम है। यह विश्वास इंग्लिश से जुड़े सोशल स्टेटस और लाइफ स्टाइल के कारण है, क्योंकि अंग्रेजी अक्सर हाई इनकम नौकरियों और शहरी जीवन से जुड़ी होती है। लेकिन इससे मातृभाषा अर्थात भारत के सन्दर्भ में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का महत्व कम नहीं हो जाता। आज हम मातृभाषा के इसी पहलू पर नजर डालेंगे और देखेंगे कि स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए यह किस प्रकार उपयोगी है, उसमें क्या-क्या करिअर ऑप्शंस हैं, इत्यादि। करिअर फंडा में स्वागत! भाषा मानव संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग है। इसी से हम अपने विचारों और भावनाओं को कम्युनिकेट करते हैं। जैसा नेल्सन मंडेला के कथन से स्पष्ट है हमारी मातृभाषा हमारे दिल के सबसे करीब होती है और अक्सर हमारी सांस्कृतिक विरासत और पालन-पोषण से जुड़ी होती है। जबकि दुनिया ग्लोबलाइज हो चुकी है, और इंग्लिश कम्युनिकेशन की प्रमुख भाषा के रूप में उभरी है, हमारी मातृभाषा अभी भी हमारे करिअर और व्यवसायों को आकार देने में एक आवश्यक भूमिका निभाती है। भारत में, जहां बहुभाषावाद जीवन का एक तरीका है, मातृभाषा का महत्व और भी अधिक स्पष्ट है। बॉलीवुड से लेकर रीजनल सिनेमा तक, साहित्य से लेकर जर्नलिज्म तक और विज्ञापन से लेकर जनसंपर्क तक, अपनी मातृभाषा का लाभ उठाने वाले व्यक्तियों ने सफलता और पहचान पाई है। यहां कुछ ऐसे लोगों के उदाहरण दिए गए हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में सफल करिअर बनाया है। एक) कॉपीराइटर्स और ऐडमेकर्स कॉपीराइटर विज्ञापन, ब्रोशर, वेबसाइट और अन्य मार्केटिंग सामग्री के लिए कंटेंट लिखते हैं। भारत में ऐसे कई सफल कॉपीराइटर हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में लिखकर अपना नाम बनाया है। उदाहरण के लिए, पीयूष पांडे जिन्होंने भारत में कुछ सबसे यादगार विज्ञापन कैम्पेन किए हैं जैसे फेविकोल, मिले सुर मेरा तुम्हारा, वोडाफोन, SBI लाइफ इत्यादि। वे स्वयं नहीं लिखते, लेकिन अपने कैम्पेन्स में हिंदी का उपयोग करते हैं और कई पुरस्कार जीत चुके हैं। इसके अलावा 'ठंडा मतलब कोका कोला', 'क्लोरमिंट क्यों खाते हैं? दोबारा मत पूछना' जैसे पंचलाइन लिखने वाले प्रसून जोशी हैं। दो) गीतकार गीतों के शब्द लिखने की जिम्मेदारी गीतकारों की होती है। भारत में, फिल्म उद्योग गीतकारों का एक प्रमुख नियोक्ता है, और कई लोगों ने अपनी मातृभाषा में लिखकर सफलता पाई है। मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधयानवी से लेकर गुलज़ार और जावेद अख्तर तक सभी ने हिंदी में लिखा अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते और प्रसिद्धि कमाई। क्षेत्रीय भाषा के कई सफल गीतकारों में से एक वैरामुथु हैं, जो तमिल में लिखते हैं और तमिल फिल्म उद्योग में अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। तीन) गायक भारत में गाने हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में ही चलते हैं। उदाहरण के लिए, लता मंगेशकर एक प्रसिद्ध गायिका रही हैं, जिन्होंने हिंदी, मराठी और बंगाली सहित कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए। एक अन्य सफल गायक एस पी बालासुब्रह्मण्यम हैं, जिन्होंने तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया है। उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते और भारतीय सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध गायकों में से एक थे। चार) पत्रकार जनता को समाचार और सूचना देने के लिए पत्रकार जिम्मेदार हैं। भारत में कई सफल पत्रकार हैं जिन्होंने सफलता पाने के लिए अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल किया है। रवीश कुमार से लेकर सौरभ द्विवेदी तक सभी ने हिंदी से नाम और धन कमाया है। उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली पत्रकारों में से एक माना जाता है। पाँच) लेखक लेखक किताबें और अन्य साहित्यिक कार्यों को लिखने के लिए जिम्मेदार हैं। भारत में ऐसे कई सफल लेखक हैं जिन्होंने अपनी मातृभाषा में लिखा है। उदाहरण के लिए, महाश्वेता देवी एक प्रसिद्ध लेखिका हैं, जो बंगाली में लिखती हैं और उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। उन्हें अब तक के सबसे महान बंगाली लेखकों में से एक माना जाता है। एक अन्य सफल लेखक शिवाजी सावंत हैं, जो मराठी में लिखते हैं और अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्हें उनके उपन्यास 'मृत्युंजय' के लिए जाना जाता है, जिसे अब तक के सबसे महान मराठी उपन्यासों में से एक माना जाता है। आजकल चाहे देवदत्त पटनायक हों या फिर चेतन भगत सभी की किताबें हिंदी में ट्रांसलेट हो उपलब्ध हैं। कहने का अर्थ यह कि यदि आप अपनी मातृभाषा में करिअर बनाना चाहते हैं तो कई अवसर उपलब्ध हैं। आज का करिअर फंडा है कि मातृभाषा घर और बाजार की भाषा तो नैच्युरली होती है लेकिन उसे उसे कानून और विज्ञान की भाषा बनाए जाने की जरूरत है। कर के दिखाएंगे! इस कॉलम पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सिलहट : शैफाली वर्मा की 42 रनों की पारी के बाद दीप्ति शर्मा के तीन विकेट से भारत ने सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में चल रहे महिला एशिया कप 2022 के सेमीफाइनल में थाईलैंड पर 74 रन की जीत दर्ज की। इस व्यापक जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने फाइनल में जगह बनाई। पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरा सेमीफाइनल गुरुवार को बाद में खेला जाएगा। भारत ने महिला एशिया कप इतिहास में लगातार 8वीं बार फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।
थाईलैंड के लिए नारुमोल चायवाई और नट्टया बूचथम दोनों ने क्रमशः 21 रन बनाए। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने तीन जबकि राजेश्वरी गायकवाड़ ने दो विकेट लिए। 149 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी थाईलैंड की शुरुआत खराब रही और दीप्ति शर्मा ने पारी के तीसरे ओवर में थाई ओपनर नन्नापत कोंचरोएनकाई को 5 रन पर आउट कर दिया। पारी के पांचवें ओवर में दीप्ति ने फिर से प्रहार किया और नत्थाकन चैंथम को पवेलियन भेजा क्योंकि थाई बल्लेबाज ने पूजा वस्त्राकर को डीप मिड विकेट पर आसान कैच थमाया।
दीप्ति ने अपने आखिरी ओवर में सोरनारिन टिप्पोच को 5 रन पर आउट कर पारी का तीसरा विकेट हासिल किया। उसके बाद रेणुका सिंह ने पारी के 8वें ओवर में चनिदा सुथिरुआंग को आउट कर थाई मिडिल ऑर्डर को तोड़ा। 15 ओवर के बाद थाईलैंड की टीम 50/4 के स्कोर पर संघर्ष करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। अच्छी तरह से सेट बल्लेबाज नट्टया बूचथम को एलबीडब्ल्यू आउट करके पवेलियन वापस भेज दिया गया।
राजेश्वरी गायकवाड़ ने तब थाईलैंड की टीम को लगातार दो झटके दिए कप्तान नारुमोल चाईवाई को 21 रन पर और फन्निता माया को शून्य पर आउट कर थाईलैंड को 72/8 पर आउट कर दिया। अंतिम दो ओवरों में भारत के गेंदबाजों ने थाई बल्लेबाजों को रन बनाने से रोक दिया और उन्हें 74-9 पर अपनी पारी समाप्त करने के लिए मजबूर किया और 74 रन से जीत हासिल की और महिला एशिया कप फाइनल में जगह बनाई।
इससे पहले शैफाली वर्मा और हरमनप्रीत कौर की शीर्ष पारियों ने भारत को थाईलैंड के खिलाफ कुल 148/6 के स्कोर तक पहुंचाया। भारत के लिए शैफाली ने 42 जबकि हरमनप्रीत ने 36 रन बनाए। थाईलैंड के लिए सोरनारिन टिप्पोच ने तीन जबकि थिपाचा पुथावोंग, फन्निता माया और नट्टाया बूचथम ने एक-एक विकेट हासिल किया। शैफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की सलामी जोड़ी ने मैदान के चारों ओर थाईलैंड के गेंदबाजों को चकमा देकर अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों ने 5 ओवर के अंदर 34 रन बनाए। मंधाना के 14 गेंदों में 13 रन बनाकर आउट होने के बाद यह धमाकेदार साझेदारी खत्म हुई।
शैफाली ने नियमित अंतराल पर स्ट्राइक रोटेट करते हुए थाई गेंदबाजों को मारना जारी रखा। जेमिमा रोड्रिग्स ने सलामी बल्लेबाज के साथ मिलकर मोमेंटम को जारी रखा। सोर्नारिन टिप्पोच ने भारत को एक बड़ा झटका दिया क्योंकि उसने शैफाली को 28 गेंद पर 42 रन पर 67/2 के स्कोर के साथ आउट किया। सलामी बल्लेबाज के विकेट ने कप्तान हरमनप्रीत कौर को क्रीज पर ला दिया। पारी के 11वें ओवर में रॉड्रिक्स और हरमनप्रीत ने गियर शिफ्ट किया और नंथिता बूनसुखम को 16 रन ठोके।
पारी के 14वें ओवर में थिपाचा पुथावोंग ने रॉड्रिक्स को 26 गेंदों पर 27 रन पर आउट कर दिया। इसके बाद ऋचा घोष बल्लेबाजी के लिए उतरीं लेकिन कुछ खास नहीं कर सकीं और सोर्नरिन टिप्पोच की गेंद पर सिर्फ दो रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। पारी के 18वें ओवर में टिप्पोच ने भारत को एक और झटका दिया और हरमनप्रीत का विकेट झटका जिसने 30 गेंदों पर 36 रन बनाए। इसके बाद दीप्ति शर्मा बल्लेबाजी के लिए उतरीं। पारी के आखिरी दो ओवरों में भारत 148/6 के स्कोर पर 16 रन बनाने में सफल रही।
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सिलहट : शैफाली वर्मा की बयालीस रनों की पारी के बाद दीप्ति शर्मा के तीन विकेट से भारत ने सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में चल रहे महिला एशिया कप दो हज़ार बाईस के सेमीफाइनल में थाईलैंड पर चौहत्तर रन की जीत दर्ज की। इस व्यापक जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने फाइनल में जगह बनाई। पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरा सेमीफाइनल गुरुवार को बाद में खेला जाएगा। भारत ने महिला एशिया कप इतिहास में लगातार आठवीं बार फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। थाईलैंड के लिए नारुमोल चायवाई और नट्टया बूचथम दोनों ने क्रमशः इक्कीस रन बनाए। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने तीन जबकि राजेश्वरी गायकवाड़ ने दो विकेट लिए। एक सौ उनचास रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी थाईलैंड की शुरुआत खराब रही और दीप्ति शर्मा ने पारी के तीसरे ओवर में थाई ओपनर नन्नापत कोंचरोएनकाई को पाँच रन पर आउट कर दिया। पारी के पांचवें ओवर में दीप्ति ने फिर से प्रहार किया और नत्थाकन चैंथम को पवेलियन भेजा क्योंकि थाई बल्लेबाज ने पूजा वस्त्राकर को डीप मिड विकेट पर आसान कैच थमाया। दीप्ति ने अपने आखिरी ओवर में सोरनारिन टिप्पोच को पाँच रन पर आउट कर पारी का तीसरा विकेट हासिल किया। उसके बाद रेणुका सिंह ने पारी के आठवें ओवर में चनिदा सुथिरुआंग को आउट कर थाई मिडिल ऑर्डर को तोड़ा। पंद्रह ओवर के बाद थाईलैंड की टीम पचास/चार के स्कोर पर संघर्ष करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। अच्छी तरह से सेट बल्लेबाज नट्टया बूचथम को एलबीडब्ल्यू आउट करके पवेलियन वापस भेज दिया गया। राजेश्वरी गायकवाड़ ने तब थाईलैंड की टीम को लगातार दो झटके दिए कप्तान नारुमोल चाईवाई को इक्कीस रन पर और फन्निता माया को शून्य पर आउट कर थाईलैंड को बहत्तर/आठ पर आउट कर दिया। अंतिम दो ओवरों में भारत के गेंदबाजों ने थाई बल्लेबाजों को रन बनाने से रोक दिया और उन्हें चौहत्तर-नौ पर अपनी पारी समाप्त करने के लिए मजबूर किया और चौहत्तर रन से जीत हासिल की और महिला एशिया कप फाइनल में जगह बनाई। इससे पहले शैफाली वर्मा और हरमनप्रीत कौर की शीर्ष पारियों ने भारत को थाईलैंड के खिलाफ कुल एक सौ अड़तालीस/छः के स्कोर तक पहुंचाया। भारत के लिए शैफाली ने बयालीस जबकि हरमनप्रीत ने छत्तीस रन बनाए। थाईलैंड के लिए सोरनारिन टिप्पोच ने तीन जबकि थिपाचा पुथावोंग, फन्निता माया और नट्टाया बूचथम ने एक-एक विकेट हासिल किया। शैफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की सलामी जोड़ी ने मैदान के चारों ओर थाईलैंड के गेंदबाजों को चकमा देकर अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों ने पाँच ओवर के अंदर चौंतीस रन बनाए। मंधाना के चौदह गेंदों में तेरह रन बनाकर आउट होने के बाद यह धमाकेदार साझेदारी खत्म हुई। शैफाली ने नियमित अंतराल पर स्ट्राइक रोटेट करते हुए थाई गेंदबाजों को मारना जारी रखा। जेमिमा रोड्रिग्स ने सलामी बल्लेबाज के साथ मिलकर मोमेंटम को जारी रखा। सोर्नारिन टिप्पोच ने भारत को एक बड़ा झटका दिया क्योंकि उसने शैफाली को अट्ठाईस गेंद पर बयालीस रन पर सरसठ/दो के स्कोर के साथ आउट किया। सलामी बल्लेबाज के विकेट ने कप्तान हरमनप्रीत कौर को क्रीज पर ला दिया। पारी के ग्यारहवें ओवर में रॉड्रिक्स और हरमनप्रीत ने गियर शिफ्ट किया और नंथिता बूनसुखम को सोलह रन ठोके। पारी के चौदहवें ओवर में थिपाचा पुथावोंग ने रॉड्रिक्स को छब्बीस गेंदों पर सत्ताईस रन पर आउट कर दिया। इसके बाद ऋचा घोष बल्लेबाजी के लिए उतरीं लेकिन कुछ खास नहीं कर सकीं और सोर्नरिन टिप्पोच की गेंद पर सिर्फ दो रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। पारी के अट्ठारहवें ओवर में टिप्पोच ने भारत को एक और झटका दिया और हरमनप्रीत का विकेट झटका जिसने तीस गेंदों पर छत्तीस रन बनाए। इसके बाद दीप्ति शर्मा बल्लेबाजी के लिए उतरीं। पारी के आखिरी दो ओवरों में भारत एक सौ अड़तालीस/छः के स्कोर पर सोलह रन बनाने में सफल रही।
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के बाद जनरल डॉन्किन की (दक्षिणी ) सेना को आज्ञा हुई कि वह मेवाड़ को शत्रुओं से शून्य कर दे और कुम्भलमेर के सुदृढ़ दुर्ग को अधिकृत करले, जिसका रक्षक दल अति दुर्दम्य था । पोलिटिकल एजेण्ट कर्नल टॉड को जब यह ज्ञात हुआ तो वह स्थिति स्थल पर आया और उसने आपसी बातचीत से प्रभाव डालने का निश्चय किया । जनरल के मना करने पर भी बृटिश थाने और गढ़ के बीच रास्ते आगे जाकर उसने अकेले ही सरदारों से मिलने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने भी स्वीकार कर लिया; चार सरदार उसके साथ एक चट्टान पर वैठे और आधे घण्टे में ही सब कुछ ठीक हो गया अर्थात् सेना को चढ़ा हुआ वेतन मिल जायगा और दूसरे ही दिन प्रातःकाल बृटिश दल को प्रथम द्वार पर अधिकार दे दिया जायगा । सूर्योदय होते ही कर्नल टॉड कर्नल केसमेण्ट की अध्यक्षता में सेना लेकर चल पड़ा । जो रुपया वसूल होना था वह ४०,००० (४,००० पौण्ड) था; कर्नल केसमैण्ट को जो मिला वह केवल ११,००० रु०. था; परन्तु, पोलिटिकल एजेन्ट अपने साथ एक स्थानीय साहूकार को लाया था. जिसने बाकी रकम की हुण्डी लिख दी और वह स्वीकार कर ली गई; ज्योंही एक इञ्जीनियर मैदान से २५००० फीट की ऊँचाई पर स्थित इस स्थान के घेरे की सम्भावना की रिपोर्ट लेकर पहुँचा तो किला तुरन्त खाली कर दिया गया; यह तीन ओर से आक्रमण के लिए खुला था और पुलिया का रास्ता भी सरल था और कोई शरण स्थान भी उपलब्ध नहीं था । इञ्जीनियर (मेजर मॅक्लिऑड Major Macleod ) ने बताया कि उसने छः सप्ताह तक एक भी बन्दूक मोर्चे पर नहीं लगाई ।
यह बताने के लिए, कि उसने जो प्रकार अपनाया था वह कितना सरल और पूर्ण था तथा यदि इनकी भावनाओं और पूर्वाग्रहों के माध्यम से व्यवहार किया जाय तो यहाँ के लोग कितने विनय हैं, उसने समझौते का विवरण लिखा है "विवाद का प्रारम्भ एक प्रतम्बद्ध विषय से हुआ क्योंकि मतभेद थोर वैमनस्य होने पर भी इन लोगों के सौजन्य में किसी प्रकार की कमी नहीं प्राती । मेरा पहला प्रश्न प्रत्येक सरदार के 'वतन' के बारे में था, जो प्रत्येकं मानवीय प्राणी के लिए रुचि का विषय है। वे सब मुसलिम थे और उनमें से दो रहेलखण्ड से प्राए थे; इन लोगों से मैंने इनके 'वतन', वहां के शहरों, जिनको में देख चुका था और और हाफ़ित रहमत के बारे में बातचीत की। दूसरे लोग सिंधिया की सेवा में रह चुके थे और हम लोग छावनी में मिल चुके थे । कोई दस मिनट इन बातों में लगे होंगे कि सहानुभूतिपूर्ण नैतिक बन्धनों ने हमारे बीच से अपरिचितता को दूर हटा दिया। जव प्रापस में विश्वास पैदा हो गया तो मुख्य वात पर विचार प्रारम्भ हुआ और मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि कुम्भलमेर को समर्पित कर देने में उनका हित ही होगा, अपयश नहीं। मैंने उनको स्थिति को फठिनाई बताते हुए यह भी कहा कि एक
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के बाद जनरल डॉन्किन की सेना को आज्ञा हुई कि वह मेवाड़ को शत्रुओं से शून्य कर दे और कुम्भलमेर के सुदृढ़ दुर्ग को अधिकृत करले, जिसका रक्षक दल अति दुर्दम्य था । पोलिटिकल एजेण्ट कर्नल टॉड को जब यह ज्ञात हुआ तो वह स्थिति स्थल पर आया और उसने आपसी बातचीत से प्रभाव डालने का निश्चय किया । जनरल के मना करने पर भी बृटिश थाने और गढ़ के बीच रास्ते आगे जाकर उसने अकेले ही सरदारों से मिलने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने भी स्वीकार कर लिया; चार सरदार उसके साथ एक चट्टान पर वैठे और आधे घण्टे में ही सब कुछ ठीक हो गया अर्थात् सेना को चढ़ा हुआ वेतन मिल जायगा और दूसरे ही दिन प्रातःकाल बृटिश दल को प्रथम द्वार पर अधिकार दे दिया जायगा । सूर्योदय होते ही कर्नल टॉड कर्नल केसमेण्ट की अध्यक्षता में सेना लेकर चल पड़ा । जो रुपया वसूल होना था वह चालीस,शून्य था; कर्नल केसमैण्ट को जो मिला वह केवल ग्यारह,शून्य रुपयाशून्य. था; परन्तु, पोलिटिकल एजेन्ट अपने साथ एक स्थानीय साहूकार को लाया था. जिसने बाकी रकम की हुण्डी लिख दी और वह स्वीकार कर ली गई; ज्योंही एक इञ्जीनियर मैदान से पच्चीस हज़ार फीट की ऊँचाई पर स्थित इस स्थान के घेरे की सम्भावना की रिपोर्ट लेकर पहुँचा तो किला तुरन्त खाली कर दिया गया; यह तीन ओर से आक्रमण के लिए खुला था और पुलिया का रास्ता भी सरल था और कोई शरण स्थान भी उपलब्ध नहीं था । इञ्जीनियर ने बताया कि उसने छः सप्ताह तक एक भी बन्दूक मोर्चे पर नहीं लगाई । यह बताने के लिए, कि उसने जो प्रकार अपनाया था वह कितना सरल और पूर्ण था तथा यदि इनकी भावनाओं और पूर्वाग्रहों के माध्यम से व्यवहार किया जाय तो यहाँ के लोग कितने विनय हैं, उसने समझौते का विवरण लिखा है "विवाद का प्रारम्भ एक प्रतम्बद्ध विषय से हुआ क्योंकि मतभेद थोर वैमनस्य होने पर भी इन लोगों के सौजन्य में किसी प्रकार की कमी नहीं प्राती । मेरा पहला प्रश्न प्रत्येक सरदार के 'वतन' के बारे में था, जो प्रत्येकं मानवीय प्राणी के लिए रुचि का विषय है। वे सब मुसलिम थे और उनमें से दो रहेलखण्ड से प्राए थे; इन लोगों से मैंने इनके 'वतन', वहां के शहरों, जिनको में देख चुका था और और हाफ़ित रहमत के बारे में बातचीत की। दूसरे लोग सिंधिया की सेवा में रह चुके थे और हम लोग छावनी में मिल चुके थे । कोई दस मिनट इन बातों में लगे होंगे कि सहानुभूतिपूर्ण नैतिक बन्धनों ने हमारे बीच से अपरिचितता को दूर हटा दिया। जव प्रापस में विश्वास पैदा हो गया तो मुख्य वात पर विचार प्रारम्भ हुआ और मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि कुम्भलमेर को समर्पित कर देने में उनका हित ही होगा, अपयश नहीं। मैंने उनको स्थिति को फठिनाई बताते हुए यह भी कहा कि एक
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मुंबईः पुष्पा फेम श्रीवल्ली उर्फ़ रश्मिका मंदाना अपने बॉलीवुड डेब्यू को लेकर खूब सुर्ख़ियों में है। जी हाँ! रश्मिका महानायक अमिताभ बच्चन के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाली है। इस फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है। ट्रेलर को दर्शकों का खूब प्यार मिला है। फिल्म में रश्मिका बिग बी की बेटी का किरदार निभा रही हैं। फैंस भी उनकी इस फिल्म के लिए उत्सुक है। अब रश्मिका को नेशनल क्रश तो कहा ही जाता है। अब हाल ही में फिल्म से उनका पार्टी सॉन्ग रिलीज किया गया था। गुडबाय का प्रमोशन एक्ट्रेस जोरों-शोरो से कर रही हैं। इस दौरान एक्ट्रेस एक बार फिर स्पॉट हुईं, लेकिन हमेशा फैंस की तारीफ बटोरने वाली रश्मिका ने इस बार भी अपने लुक से फैंस का दिल जीत लिया।
रश्मिका मंदाना अपनी अपकमिंग फिल्म गुड बाय के प्रमोशन के लिए जुहू पहुंचीं है। इस दौरान रश्मिका पिंक और व्हाइट कलर के चेक प्रिंट वाली ड्रेस में नजर आई। इस दौरान एक्ट्रेस बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। उनका ये लुक सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसे उन्होंने ऊपर से मैचिंग जैकेट से कवर किया है।
'गुडबाय' के सॉन्ग 'द हिक सॉन्ग' को शरवी यादव ने अपनी आवाज दी है। लिरिक्स विकास बहल व एटी ने लिखा है। इस गानें को अमित त्रिवेदी ने कंपोज किया है। 'द हिक सॉन्ग' को कोरियोग्राफ विजय गांगुली ने किया है। 'द हिक सॉन्ग' को रिलीज के कुछ घंटे के बाद ही 1. 5 मिलियन से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं।
2 मिनट 59 सेकंड का ये ट्रेलर पूरी तरह से आपको खुद से जोड़ने पर मजबूर कर देगा। क्योंकि शुरुआत से लेकर अंत तक आपको इस ट्रेलर में फैमिली वाइब्स फील होगी । अमिताभ बच्चन की पंचिंग लाइंस जहां दिल को छू लेती है, तो वहीं फिल्म में अमिताभ बच्चन और नीना गुप्ता की बेटी का किरदार निभा रही रश्मिका मंदाना का दुख भरी परिस्थिति में भी कूल अंदाज देखने को मिल रहा है। अमिताभ बच्चन और रश्मिका मंदाना के बीच ट्रेलर में खूब नोक-झोंक नजर आई तो वहीं नीना गुप्ता की कॉमेडी और अमिताभ बच्चन के साथ उनका रोमांटिक अंदाज आपको फिल्म देखने के लिए मजबूर कर देगा। इस पूरे ट्रेलर में फैमिली ड्रामा से लेकर कॉमेडी और इमोशंस हर चीज ऑडियंस को देखने को मिलेगी।
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मुंबईः पुष्पा फेम श्रीवल्ली उर्फ़ रश्मिका मंदाना अपने बॉलीवुड डेब्यू को लेकर खूब सुर्ख़ियों में है। जी हाँ! रश्मिका महानायक अमिताभ बच्चन के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाली है। इस फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है। ट्रेलर को दर्शकों का खूब प्यार मिला है। फिल्म में रश्मिका बिग बी की बेटी का किरदार निभा रही हैं। फैंस भी उनकी इस फिल्म के लिए उत्सुक है। अब रश्मिका को नेशनल क्रश तो कहा ही जाता है। अब हाल ही में फिल्म से उनका पार्टी सॉन्ग रिलीज किया गया था। गुडबाय का प्रमोशन एक्ट्रेस जोरों-शोरो से कर रही हैं। इस दौरान एक्ट्रेस एक बार फिर स्पॉट हुईं, लेकिन हमेशा फैंस की तारीफ बटोरने वाली रश्मिका ने इस बार भी अपने लुक से फैंस का दिल जीत लिया। रश्मिका मंदाना अपनी अपकमिंग फिल्म गुड बाय के प्रमोशन के लिए जुहू पहुंचीं है। इस दौरान रश्मिका पिंक और व्हाइट कलर के चेक प्रिंट वाली ड्रेस में नजर आई। इस दौरान एक्ट्रेस बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। उनका ये लुक सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसे उन्होंने ऊपर से मैचिंग जैकेट से कवर किया है। 'गुडबाय' के सॉन्ग 'द हिक सॉन्ग' को शरवी यादव ने अपनी आवाज दी है। लिरिक्स विकास बहल व एटी ने लिखा है। इस गानें को अमित त्रिवेदी ने कंपोज किया है। 'द हिक सॉन्ग' को कोरियोग्राफ विजय गांगुली ने किया है। 'द हिक सॉन्ग' को रिलीज के कुछ घंटे के बाद ही एक. पाँच मिलियन से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं। दो मिनट उनसठ सेकंड का ये ट्रेलर पूरी तरह से आपको खुद से जोड़ने पर मजबूर कर देगा। क्योंकि शुरुआत से लेकर अंत तक आपको इस ट्रेलर में फैमिली वाइब्स फील होगी । अमिताभ बच्चन की पंचिंग लाइंस जहां दिल को छू लेती है, तो वहीं फिल्म में अमिताभ बच्चन और नीना गुप्ता की बेटी का किरदार निभा रही रश्मिका मंदाना का दुख भरी परिस्थिति में भी कूल अंदाज देखने को मिल रहा है। अमिताभ बच्चन और रश्मिका मंदाना के बीच ट्रेलर में खूब नोक-झोंक नजर आई तो वहीं नीना गुप्ता की कॉमेडी और अमिताभ बच्चन के साथ उनका रोमांटिक अंदाज आपको फिल्म देखने के लिए मजबूर कर देगा। इस पूरे ट्रेलर में फैमिली ड्रामा से लेकर कॉमेडी और इमोशंस हर चीज ऑडियंस को देखने को मिलेगी।
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Lok Sabha Election 2024: अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना- काम करते तो बाहर से मंत्री नहीं बुलाना पड़ता!
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PATNA: बिहार कैबिनेट की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए। कुल क्ब् एजेंडे पास हुए। सीएम खुद बुधवार को प्रेस कांफ्रेस कर बैठक में लिए बड़े फैसले पर प्रेस कांफ्रेस करेंगे।
- संविदा पर नियुक्त कर्मियों के लिए बड़ा फैसला कैबिनेट ने लिया। इन्हें स्थायी करने के लिए कमेटी गठित की जाएगी। ये कमेटी चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में होगी, जिसमें फाइनांस, हेल्थ, एडुकेशन, जेनरल एडमिनिस्ट्रेशन, पीडब्लूडी, डब्लूआरडी आदि डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रहेंगे, यानी इस फैसले से सरकार खुद के प्रति उबल रहे गुस्से को शांत तो करेगी ही, साथ ही बड़े वोट बैंक को अपनी तरफ करते हुए विपक्ष को करारा झटका देगी।
- गरीब सवर्ण स्टूडेंट्स को भी सरकार दलित-अतिपिछड़ों व पिछड़ों के की तर्ज पर स्कॉलरशिप देगी। डेढ़ लाख से कम आय वाले सवर्ण अभिभावक की संतान इसका लाभ उठा सकेंगे। मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से पास स्टूडेंट्स को क्0 हजार का प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि 9-क्0 क्लास के बच्चों को क्भ्0 रुपए हर माह स्कॉलरशिप दिया जाएगा।
-बिहार जल संशाधन विभाग अवर अभियंत्रण संवर्ग नियमावली बनी।
-सहकारिता विभाग लिपिक संवर्ग नियमावली में संशोधन होगा।
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PATNA: बिहार कैबिनेट की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए। कुल क्ब् एजेंडे पास हुए। सीएम खुद बुधवार को प्रेस कांफ्रेस कर बैठक में लिए बड़े फैसले पर प्रेस कांफ्रेस करेंगे। - संविदा पर नियुक्त कर्मियों के लिए बड़ा फैसला कैबिनेट ने लिया। इन्हें स्थायी करने के लिए कमेटी गठित की जाएगी। ये कमेटी चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में होगी, जिसमें फाइनांस, हेल्थ, एडुकेशन, जेनरल एडमिनिस्ट्रेशन, पीडब्लूडी, डब्लूआरडी आदि डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रहेंगे, यानी इस फैसले से सरकार खुद के प्रति उबल रहे गुस्से को शांत तो करेगी ही, साथ ही बड़े वोट बैंक को अपनी तरफ करते हुए विपक्ष को करारा झटका देगी। - गरीब सवर्ण स्टूडेंट्स को भी सरकार दलित-अतिपिछड़ों व पिछड़ों के की तर्ज पर स्कॉलरशिप देगी। डेढ़ लाख से कम आय वाले सवर्ण अभिभावक की संतान इसका लाभ उठा सकेंगे। मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से पास स्टूडेंट्स को क्शून्य हजार का प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि नौ-क्शून्य क्लास के बच्चों को क्भ्शून्य रुपयापए हर माह स्कॉलरशिप दिया जाएगा। -बिहार जल संशाधन विभाग अवर अभियंत्रण संवर्ग नियमावली बनी। -सहकारिता विभाग लिपिक संवर्ग नियमावली में संशोधन होगा।
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Flipkart Electronics Sale 2021 का आज आखिरी दिन है। इस स्मार्टफोन सेल की शुरुआत 10 जुलाई से हुई थी। इस शानदार सेल में आसुस का गेमिंग स्मार्टफोन ROG Phone 5 उपलब्ध है। आइए जानते हैं इस फोन की कीमत और मिलने वाले ऑफर के बारे में।
नई दिल्ली, टेक डेस्क। फ्लिपकार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स सेल (Flipkart Electronics Sale 2021) का आज आखिरी दिन है। इस स्मार्टफोन सेल की शुरुआत 10 जुलाई से हुई थी। इस शानदार सेल में आसुस का गेमिंग स्मार्टफोन ROG Phone 5 उपलब्ध है। यदि आप इस फोन को खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके पास आखिरी मौका है। यहां हम आपको इस गेमिंग डिवाइस की कीमत और इस पर मिलने वाले ऑफर के बारे में विस्तार से बताएंगे।
Asus ROG Phone 5 स्मार्टफोन के 8GB रैम वेरिएंट की कीमत 49,999 रुपये है, जबकि इसके अपग्रेडेड वर्जन यानी 12GB रैम वेरिएंट की कीमत 57,999 रुपये रखी गई है। ऑफर की बात करें तो ROG Phone 5 की खरीदारी करने पर Axis बैंक की ओर से 10 प्रतिशत का डिस्काउंट दिया जा रहा है। इसके साथ ही डेबिट कार्ड होल्डर्स को फोन की खरीदी करने पर पांच प्रतिशत का कैशबैक मिलेगा। इसके अलावा डिवाइस को 15,300 रुपये के एक्सचेंज ऑफर और 1,983 रुपये प्रति माह की नो-कॉस्ट EMI पर खरीदा जा सकता है।
कंपनी ने गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone 5 में 6. 7 इंच का एमोलेड डिस्प्ले दिया है। इसका रिफ्रेश रेट 144Hz है। साथ ही स्क्रीन की सुरक्षा के लिए गोरिल्ला ग्लास Victus प्रोटेक्शन दिया गया है। इसके अलावा स्मार्टफोन में क्वालकॉम का Snapdragon 888 प्रोसेसर और Adreno 660 ग्राफिक कार्ड का सपोर्ट मिलेगा।
गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone 5 स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मौजूद है। इसमें पहला Sony IMX 686 का 64MP सेंसर, दूसरा 13MP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस और तीसरा मैक्रो लेंस है। जबकि इस स्मार्टफोन के फ्रंट में 24MP का कैमरा मिलेगा।
आसुस ने अपने शानदार गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone 5 में 3000mAh की ड्यूल बैटरी है। इसकी बैटरी को 65W फास्ट चार्जर के साथ चार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा स्मार्टफोन में कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई, जीपीएस, ब्लूटूथ और यूएसबी टाईप-सी पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
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Flipkart Electronics Sale दो हज़ार इक्कीस का आज आखिरी दिन है। इस स्मार्टफोन सेल की शुरुआत दस जुलाई से हुई थी। इस शानदार सेल में आसुस का गेमिंग स्मार्टफोन ROG Phone पाँच उपलब्ध है। आइए जानते हैं इस फोन की कीमत और मिलने वाले ऑफर के बारे में। नई दिल्ली, टेक डेस्क। फ्लिपकार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स सेल का आज आखिरी दिन है। इस स्मार्टफोन सेल की शुरुआत दस जुलाई से हुई थी। इस शानदार सेल में आसुस का गेमिंग स्मार्टफोन ROG Phone पाँच उपलब्ध है। यदि आप इस फोन को खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके पास आखिरी मौका है। यहां हम आपको इस गेमिंग डिवाइस की कीमत और इस पर मिलने वाले ऑफर के बारे में विस्तार से बताएंगे। Asus ROG Phone पाँच स्मार्टफोन के आठGB रैम वेरिएंट की कीमत उनचास,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है, जबकि इसके अपग्रेडेड वर्जन यानी बारहGB रैम वेरिएंट की कीमत सत्तावन,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये रखी गई है। ऑफर की बात करें तो ROG Phone पाँच की खरीदारी करने पर Axis बैंक की ओर से दस प्रतिशत का डिस्काउंट दिया जा रहा है। इसके साथ ही डेबिट कार्ड होल्डर्स को फोन की खरीदी करने पर पांच प्रतिशत का कैशबैक मिलेगा। इसके अलावा डिवाइस को पंद्रह,तीन सौ रुपयापये के एक्सचेंज ऑफर और एक,नौ सौ तिरासी रुपयापये प्रति माह की नो-कॉस्ट EMI पर खरीदा जा सकता है। कंपनी ने गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone पाँच में छः. सात इंच का एमोलेड डिस्प्ले दिया है। इसका रिफ्रेश रेट एक सौ चौंतालीस हर्ट्ज़ है। साथ ही स्क्रीन की सुरक्षा के लिए गोरिल्ला ग्लास Victus प्रोटेक्शन दिया गया है। इसके अलावा स्मार्टफोन में क्वालकॉम का Snapdragon आठ सौ अठासी प्रोसेसर और Adreno छः सौ साठ ग्राफिक कार्ड का सपोर्ट मिलेगा। गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone पाँच स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मौजूद है। इसमें पहला Sony IMX छः सौ छियासी का चौंसठMP सेंसर, दूसरा तेरहMP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस और तीसरा मैक्रो लेंस है। जबकि इस स्मार्टफोन के फ्रंट में चौबीसMP का कैमरा मिलेगा। आसुस ने अपने शानदार गेमिंग स्मार्टफोन Asus ROG Phone पाँच में तीन हज़ारmAh की ड्यूल बैटरी है। इसकी बैटरी को पैंसठ वाट फास्ट चार्जर के साथ चार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा स्मार्टफोन में कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई, जीपीएस, ब्लूटूथ और यूएसबी टाईप-सी पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
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अगर आप अपने स्मार्टफोन को अपग्रेड करने की सोच रहे हैं तो आप Apple iPhone की ओर जा सकते हैं. अभी Apple iPhone 12 को काफी कम कीमत पर बेचा जा रहा है. इसे कंपनी की ऑफिशियल रिसेलर IndiaiStore पर सस्ते में बेचा जा रहा है.
Apple iPhone 12 को अभी काफी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है. इसके लिए आपको अपफ्रंट छूट, बैंक डिस्काउंट, कैशबैक और एक्सचेंज ऑफर का लाभ उठाना होगा. इन सभी डिस्काउंट के साथ आप Apple iPhone 12 को केवल 37,900 रुपये में खरीद सकते हैं.
अभी Apple iPhone 12 को IndiaiStore पर 65,990 रुपये में उपलब्ध करवाया गया है. हालांकि, रिटेलर इस पर 5,000 रुपये का कैशबैक दे रहे हैं. ये कैशबैक Kotak Mahindra बैंक, ICICI Bank के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के अलावा SBI Bank के क्रेडिट कार्ड पर दिया जा रहा है.
इसके बाद कस्टमर्स अपने पुराने स्मार्टफोन को इस फोन के बदले एक्सचेंज कर सकते हैं. इस छूट के बाद Apple iPhone 12 पर बंपर डिस्काउंट मिलेगा. हालांकि, एक्सचेंज ऑफर में डिस्काउंट की वैल्यू आपके फोन की कंडीशन और मॉडल पर डिपेंड करती है.
आपको बता दें कि कस्टमर्स पुराने Apple iPhone XR 64GB के लिए 18,000 रुपये तक का एक्सचेंज ऑफर ले सकते हैं. IndiaiStore पार्टनर वेबसाइट जैसे Cashify. in या Servify पर ट्रेड इन का फायदा उठाया जा सकता है.
यानी iPhone 12 पर टोटल आप 28,000 रुपये का डिस्काउंट ले सकते हैं. इसे डिस्काउंट के बाद इसे 37,900 रुपये में खरीदा जा सकता है. iPhone 12 में A14 Bionic Chip थर्ड जेनरेशन न्यूरल इंजन के साथ दिया गया है.
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अगर आप अपने स्मार्टफोन को अपग्रेड करने की सोच रहे हैं तो आप Apple iPhone की ओर जा सकते हैं. अभी Apple iPhone बारह को काफी कम कीमत पर बेचा जा रहा है. इसे कंपनी की ऑफिशियल रिसेलर IndiaiStore पर सस्ते में बेचा जा रहा है. Apple iPhone बारह को अभी काफी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है. इसके लिए आपको अपफ्रंट छूट, बैंक डिस्काउंट, कैशबैक और एक्सचेंज ऑफर का लाभ उठाना होगा. इन सभी डिस्काउंट के साथ आप Apple iPhone बारह को केवल सैंतीस,नौ सौ रुपयापये में खरीद सकते हैं. अभी Apple iPhone बारह को IndiaiStore पर पैंसठ,नौ सौ नब्बे रुपयापये में उपलब्ध करवाया गया है. हालांकि, रिटेलर इस पर पाँच,शून्य रुपयापये का कैशबैक दे रहे हैं. ये कैशबैक Kotak Mahindra बैंक, ICICI Bank के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के अलावा SBI Bank के क्रेडिट कार्ड पर दिया जा रहा है. इसके बाद कस्टमर्स अपने पुराने स्मार्टफोन को इस फोन के बदले एक्सचेंज कर सकते हैं. इस छूट के बाद Apple iPhone बारह पर बंपर डिस्काउंट मिलेगा. हालांकि, एक्सचेंज ऑफर में डिस्काउंट की वैल्यू आपके फोन की कंडीशन और मॉडल पर डिपेंड करती है. आपको बता दें कि कस्टमर्स पुराने Apple iPhone XR चौंसठGB के लिए अट्ठारह,शून्य रुपयापये तक का एक्सचेंज ऑफर ले सकते हैं. IndiaiStore पार्टनर वेबसाइट जैसे Cashify. in या Servify पर ट्रेड इन का फायदा उठाया जा सकता है. यानी iPhone बारह पर टोटल आप अट्ठाईस,शून्य रुपयापये का डिस्काउंट ले सकते हैं. इसे डिस्काउंट के बाद इसे सैंतीस,नौ सौ रुपयापये में खरीदा जा सकता है. iPhone बारह में Aचौदह Bionic Chip थर्ड जेनरेशन न्यूरल इंजन के साथ दिया गया है.
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आमतौर पर अन्य देशों में लोगों को दफनाने के लिए जो ताबूत बनाए जाते हैं, वो बिल्कुल साधारण से किसी लंबे बक्से की तरह होते हैं, लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां एकदम अनोखे तरीके से या यूं कहें कि अजब-गजब ताबूत बनाए जाते हैं। ऐसे ताबूत, जैसा शायद ही आपने कहीं और देखा हो।
पश्चिम अफ्रीका में स्थित खूबसूरत देश घाना अपने अजब-गजब ताबूतों के लिए जाना जाता है। यहां ताबूतों को मरने वाले के कामकाज या स्टेटस से जोड़कर देखा जाता है और उसी हिसाब से बने ताबूतों ने उन्हें दफनाया जाता है।
बीबीसी के मुताबिक, माना जाता है कि इस तरह के ताबूतों को बनाने की परंपरा घाना के मछुआरों ने शुरू की थी। मछुआरे को मछली की तरह बने ताबूत में दफनाया जाता था।
घाना में व्यवसायियों को अक्सर लग्जरी मर्सिडिज कार की शक्ल में बने ताबूतों में दफनाया जाता है। इससे उनके स्टेटस का पता चलता है।
बीबीसी की खबर के मुताबिक, हवाई जहाज की तरह ताबूतों को बनाने की शुरुआत साल 1951 से हुई थी। दो कारपेंटर भाइयों ने अपनी 91 साल की मां के लिए हवाईजहाज की शक्ल वाला ताबूत बनाया था। दरअसल, वो कभी विमान में नहीं बैठी थीं, लेकिन कहती थीं कि वो अक्सर विमान में बैठने के सपने देखती हैं। इसलिए दोनों भाइयों ने अपनी मां का यह सपना पूरा किया था।
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आमतौर पर अन्य देशों में लोगों को दफनाने के लिए जो ताबूत बनाए जाते हैं, वो बिल्कुल साधारण से किसी लंबे बक्से की तरह होते हैं, लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां एकदम अनोखे तरीके से या यूं कहें कि अजब-गजब ताबूत बनाए जाते हैं। ऐसे ताबूत, जैसा शायद ही आपने कहीं और देखा हो। पश्चिम अफ्रीका में स्थित खूबसूरत देश घाना अपने अजब-गजब ताबूतों के लिए जाना जाता है। यहां ताबूतों को मरने वाले के कामकाज या स्टेटस से जोड़कर देखा जाता है और उसी हिसाब से बने ताबूतों ने उन्हें दफनाया जाता है। बीबीसी के मुताबिक, माना जाता है कि इस तरह के ताबूतों को बनाने की परंपरा घाना के मछुआरों ने शुरू की थी। मछुआरे को मछली की तरह बने ताबूत में दफनाया जाता था। घाना में व्यवसायियों को अक्सर लग्जरी मर्सिडिज कार की शक्ल में बने ताबूतों में दफनाया जाता है। इससे उनके स्टेटस का पता चलता है। बीबीसी की खबर के मुताबिक, हवाई जहाज की तरह ताबूतों को बनाने की शुरुआत साल एक हज़ार नौ सौ इक्यावन से हुई थी। दो कारपेंटर भाइयों ने अपनी इक्यानवे साल की मां के लिए हवाईजहाज की शक्ल वाला ताबूत बनाया था। दरअसल, वो कभी विमान में नहीं बैठी थीं, लेकिन कहती थीं कि वो अक्सर विमान में बैठने के सपने देखती हैं। इसलिए दोनों भाइयों ने अपनी मां का यह सपना पूरा किया था।
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PATNA : अवैध बालू के खनन मामले में रोहतास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार पर आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने शिकंजा कसा है. आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने मंगलवार सुबह छापेमारी शुरू कर दी है. एसडीपीओ के पटना और बक्सर आवास पर एक साथ तलाशी ली जा रही है. पटना के राजीवनगर थाना अंतर्गत आशियाना नगर के सूर्य विहार कालोनी-1 और बक्सर के मुरार थाना अंतर्गत बसंतपुर चौगाई गांव स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी की गई है.
बताते चलें कि एसडीपीओ संजय कुमार के खिलाफ ईओयू ने सात फरवरी को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था. संजय कुमार के खिलाफ पहले से ही विभागीय कार्रवाई चल रही है.
बता दें कि अवैध बालू खनन मामले में भ्रष्ट अफसरों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है. जुलाई में 41 अफसरों का निलंबन हुआ था. इसमें दो एसपी, 4 एसडीपीओ समेत पुलिस और प्रशासन के 41 अफसर शामिल थे. अभी तक इनके एक दर्जन से अधिक के ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है.
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PATNA : अवैध बालू के खनन मामले में रोहतास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार पर आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने शिकंजा कसा है. आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने मंगलवार सुबह छापेमारी शुरू कर दी है. एसडीपीओ के पटना और बक्सर आवास पर एक साथ तलाशी ली जा रही है. पटना के राजीवनगर थाना अंतर्गत आशियाना नगर के सूर्य विहार कालोनी-एक और बक्सर के मुरार थाना अंतर्गत बसंतपुर चौगाई गांव स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी की गई है. बताते चलें कि एसडीपीओ संजय कुमार के खिलाफ ईओयू ने सात फरवरी को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था. संजय कुमार के खिलाफ पहले से ही विभागीय कार्रवाई चल रही है. बता दें कि अवैध बालू खनन मामले में भ्रष्ट अफसरों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है. जुलाई में इकतालीस अफसरों का निलंबन हुआ था. इसमें दो एसपी, चार एसडीपीओ समेत पुलिस और प्रशासन के इकतालीस अफसर शामिल थे. अभी तक इनके एक दर्जन से अधिक के ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है.
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गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से प्लेज की खेती करने वाले लोगों को काफी नुकसान पहुंचा है। चूंकि प्लेज की अधिकांश खेती नदी के तट और टापुओं पर की जाती है। प्लेज की खेती करने वालों का कहना है कि उनकी खेती बर्बाद हो गई अब वे वापस लौट जाएंगे।
शुक्रवार को अचानक बढ़े गंगा नदी के जलस्तर को देखते हुए एडीएम प्रशासन ने गंगा तट पहुंचकर तटीय क्षेत्रों को खाली कराने के निर्देश दिए थे और टापुओं पर खेती करने वाले लोगों को बाहर निकाला था। शुक्रवार रात गंगा नदी में आया पानी उसकी सारी फसलों को अपने साथ बहाकर ले गया। प्लेज की खेती करने वाले रामकिशोर, अमित, मुस्तकीम आदि का कहना है कि खरबूजे और तरबूज की फसल उतार पर थी फिर भी पानी आने से उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। कई अन्य लोगों का कहना है कि अब तो उनकी खेती बर्बाद हो गई है वे अब वापस अपने गांव लौट जाएंगे।
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गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से प्लेज की खेती करने वाले लोगों को काफी नुकसान पहुंचा है। चूंकि प्लेज की अधिकांश खेती नदी के तट और टापुओं पर की जाती है। प्लेज की खेती करने वालों का कहना है कि उनकी खेती बर्बाद हो गई अब वे वापस लौट जाएंगे। शुक्रवार को अचानक बढ़े गंगा नदी के जलस्तर को देखते हुए एडीएम प्रशासन ने गंगा तट पहुंचकर तटीय क्षेत्रों को खाली कराने के निर्देश दिए थे और टापुओं पर खेती करने वाले लोगों को बाहर निकाला था। शुक्रवार रात गंगा नदी में आया पानी उसकी सारी फसलों को अपने साथ बहाकर ले गया। प्लेज की खेती करने वाले रामकिशोर, अमित, मुस्तकीम आदि का कहना है कि खरबूजे और तरबूज की फसल उतार पर थी फिर भी पानी आने से उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है। कई अन्य लोगों का कहना है कि अब तो उनकी खेती बर्बाद हो गई है वे अब वापस अपने गांव लौट जाएंगे।
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पीपुल्स रिपब्लिकन पार्टी के मुखिया जोगेन्द्र कावडे ने वंचित बहुजन आघाडी के लोकसभा उम्मीदवारों की जाति का उल्लेख करने पर दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की सोमवार को आलोचना की। जोगेन्द्र कावड़े ने कहा कि यह जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाले एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को धोखा देने के समान है।
भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने गत शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए 37 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी जो वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के बैनर तले लड़ेंगे। वीबीए दलितों और मुसलमानों का एक सामाजिक गठबंधन है जिसका गठन संयुक्त रूप से प्रकाश आंबेडकर और असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने किया है।
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पीपुल्स रिपब्लिकन पार्टी के मुखिया जोगेन्द्र कावडे ने वंचित बहुजन आघाडी के लोकसभा उम्मीदवारों की जाति का उल्लेख करने पर दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की सोमवार को आलोचना की। जोगेन्द्र कावड़े ने कहा कि यह जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाले एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को धोखा देने के समान है। भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने गत शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए सैंतीस उम्मीदवारों की सूची जारी की थी जो वंचित बहुजन आघाडी के बैनर तले लड़ेंगे। वीबीए दलितों और मुसलमानों का एक सामाजिक गठबंधन है जिसका गठन संयुक्त रूप से प्रकाश आंबेडकर और असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने किया है।
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश(Click to expand)
गोस्वामी तुलसीदास का जीवन-वृत्त ११ पहले कुछ छंदो को पढ़कर मेरी भी यही घारण बँध गई थी परंतु बाद की कुडलियाँ पढ़ने से मुझे उक्त ग्रंथ गोस्वामीजी-कृत नहीं जंचता । उसके क्रियापद, शब्द-प्रयोग तुलसीदासजी के नहीं जचते। परंतु ग्रंथ की पूर्ण समीक्षा बिना कोई सम्मति निश्चित नहीं की जा सकती। गोसाइजी-कृत बारह ग्रंथों का संज्ञिप्त परिचय नीचे दिया जाता है। 'दोहावली' गोसाइजी के उन दोहों का संग्रह है जो उन्होंने भिन्न भिन्न लौकिक स्वरूप तथा भगवान् के नाम के माहात्म्य अर धर्म आदि के ऊपर कहे हैं। इनकी संख्या ४७४ कही जाती है। इनमें से कुछ दोहे तो रामायण में से ज्यों के त्यों निकालकर रख दिए गए हैं। कुछ ऐसे हैं जिनका आशय सरलता से समझ में नहीं आता । चातक की न्योक्तियों मँ उनकी सच्ची लगन अंकित . है। इनमें से कुछ तो अत्यंत सुन्दर हैं; जेसे-- चातक तुलसी के मते, स्वातिहु पिये न पानि। पेम-तृसा बाढत भली; ष्टे घटेती आनि।॥ रटत रटत 'रसना लट, तसा सुखिगे अंग। तुलसी चातक-प्रेम को, नित नूतन रुचि रंग॥ बध्यो बधिकं परयो पुन्य जल, उलि उठाई चोच । तुलसी चातक-प्रेम-पठ, मरतहु लगी न खोच ॥ इंसमें कुछ दोहे ऐसे भी हैं जिनमे दाशनिक सिद्धांतों का प्रतिपादन हुआ है। अपने समय की शासन-प्रणाज्ञी के विषय में भी कुछ दोहे कहे हैं। गंगापुत्रों को दान देने की प्रणाली का भी विरोध किया गया हे। इस प्रकार तुलसीदासजी का यह ग्रंथ सभी विंषयों की विवेचना द्वारा अलंकृत है । अपने समय की दशा का संकेत करनेवाले गोसाइजी के कुछ दोहे नीचे दिए जाते हैं-- बादहिं सूद्र द्विजन सन, हम तुमते कुछ घाटि। जानहिं ब्रह्म सो विप्रवर, आ्रॉँख दिखावहिं डाँटि॥ १४३ ॥। साखी सबदी दोहरा, कहि किहनी उपखान। भगति निरूपहिं भगत कलि, निदर्हिं वेद पुरान ॥ ५५४ ।,
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लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश गोस्वामी तुलसीदास का जीवन-वृत्त ग्यारह पहले कुछ छंदो को पढ़कर मेरी भी यही घारण बँध गई थी परंतु बाद की कुडलियाँ पढ़ने से मुझे उक्त ग्रंथ गोस्वामीजी-कृत नहीं जंचता । उसके क्रियापद, शब्द-प्रयोग तुलसीदासजी के नहीं जचते। परंतु ग्रंथ की पूर्ण समीक्षा बिना कोई सम्मति निश्चित नहीं की जा सकती। गोसाइजी-कृत बारह ग्रंथों का संज्ञिप्त परिचय नीचे दिया जाता है। 'दोहावली' गोसाइजी के उन दोहों का संग्रह है जो उन्होंने भिन्न भिन्न लौकिक स्वरूप तथा भगवान् के नाम के माहात्म्य अर धर्म आदि के ऊपर कहे हैं। इनकी संख्या चार सौ चौहत्तर कही जाती है। इनमें से कुछ दोहे तो रामायण में से ज्यों के त्यों निकालकर रख दिए गए हैं। कुछ ऐसे हैं जिनका आशय सरलता से समझ में नहीं आता । चातक की न्योक्तियों मँ उनकी सच्ची लगन अंकित . है। इनमें से कुछ तो अत्यंत सुन्दर हैं; जेसे-- चातक तुलसी के मते, स्वातिहु पिये न पानि। पेम-तृसा बाढत भली; ष्टे घटेती आनि।॥ रटत रटत 'रसना लट, तसा सुखिगे अंग। तुलसी चातक-प्रेम को, नित नूतन रुचि रंग॥ बध्यो बधिकं परयो पुन्य जल, उलि उठाई चोच । तुलसी चातक-प्रेम-पठ, मरतहु लगी न खोच ॥ इंसमें कुछ दोहे ऐसे भी हैं जिनमे दाशनिक सिद्धांतों का प्रतिपादन हुआ है। अपने समय की शासन-प्रणाज्ञी के विषय में भी कुछ दोहे कहे हैं। गंगापुत्रों को दान देने की प्रणाली का भी विरोध किया गया हे। इस प्रकार तुलसीदासजी का यह ग्रंथ सभी विंषयों की विवेचना द्वारा अलंकृत है । अपने समय की दशा का संकेत करनेवाले गोसाइजी के कुछ दोहे नीचे दिए जाते हैं-- बादहिं सूद्र द्विजन सन, हम तुमते कुछ घाटि। जानहिं ब्रह्म सो विप्रवर, आ्रॉँख दिखावहिं डाँटि॥ एक सौ तैंतालीस ॥। साखी सबदी दोहरा, कहि किहनी उपखान। भगति निरूपहिं भगत कलि, निदर्हिं वेद पुरान ॥ पाँच सौ चौवन ।,
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निचली अदालत की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम और अन्य आरोपियों द्वारा मलखाना कक्ष में रखे गए दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी। इसके खिलाफ सीबीआइ ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
By Jp Yadav Publish Date: Wed, 10 Nov 2021 11:45 AM (IST)Updated Date: Wed, 10 Nov 2021 12:10 PM (IST)
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आइएनएक्स मीडिया के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सीबीआइ द्वारा निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम व अन्य आरोपितों द्वारा मलखाना कक्ष में रखे गए दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी। इसके खिलाफ सीबीआइ ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
Edited By:
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निचली अदालत की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम और अन्य आरोपियों द्वारा मलखाना कक्ष में रखे गए दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी। इसके खिलाफ सीबीआइ ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। By Jp Yadav Publish Date: Wed, दस नवंबर दो हज़ार इक्कीस ग्यारह:पैंतालीस AM Updated Date: Wed, दस नवंबर दो हज़ार इक्कीस बारह:दस PM नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आइएनएक्स मीडिया के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सीबीआइ द्वारा निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम व अन्य आरोपितों द्वारा मलखाना कक्ष में रखे गए दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी। इसके खिलाफ सीबीआइ ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। Edited By:
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Astro Tips : दैनिक दिनचर्या में पूजा पाठ का विशेष महत्व है. कई बार प्रतिदिन पूजा करने के बाद भी उचित फल नहीं मिलता है. ऐसे में पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए.
हिंदू धर्म (Hinduism) में पूजा को विशेष स्थान दिया गया है. पूजा पाठ का दैनिक दिनचर्या में भी विशेष महत्व है. लगभग सभी के घरों में पूजा का एक अलग स्थान होता है. हर कोई इस पूजा स्थल में भगवान का ध्यान करता है और शांति से अपने भगवान की पूजा करता है. भक्त अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिए कई तरह से पूजा पाठ करते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि प्रतिदिन पूजा करने के बाद भी आपका मन अशांत रहता है, या पूजा के समय मन इधर-उधर भटकता रहता है. कई बार पूजा (worship) करने के बाद भी उचित फल नहीं मिलता है. इसका कारण पूजा के दौरान कई तरह की गलतियां भी हो सकती हैं. ऐसे में रोजाना पूजा करना जितना जरूरी है उतना ही पूजा के कुछ (Astro Tips) नियमों का पालन करना भी जरूरी है, नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है.
अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल हमेशा ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. ये दिशा भगवान के मंदिर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है. लेकिन अगर आपके घर में पूजा का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में है तो पूजा का फल कम मिलेगा.
पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पश्चिम की ओर हो और मंदिर या भगवान का मुख पूर्व की ओर हो. इतना ही नहीं देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ के बल नहीं बैठना चाहिए.
अक्सर लोग जमीन पर बैठकर पूजा करने लगते हैं. लेकिन ये पूजा करने का सही तरीका नहीं है. पूजा के दौरान आसन का इस्तेमाल करना जरूरी होता है. ऐसा माना जाता है कि बिना आसन पर बैठे पूजा करने से दरिद्रता आती है. इसलिए पूजा करते समय साफ-सुथरे आसन का इस्तेमाल करना चाहिए.
अगर घर में कोई मंदिर या पूजा का स्थान हो तो सुबह-शाम दीपक अवश्य जलाएं. घर में दीये जलाने से भगवान की कृपा बनी रहती है.
भगवान विष्णु, गणेश, महादेव, सूर्य देव और देवी दुर्गा को पंचदेव कहा जाता है. ऐसे में प्रतिदिन पूजा करते समय इन पंचदेवों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ऐसा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति होती है.
(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
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Astro Tips : दैनिक दिनचर्या में पूजा पाठ का विशेष महत्व है. कई बार प्रतिदिन पूजा करने के बाद भी उचित फल नहीं मिलता है. ऐसे में पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए. हिंदू धर्म में पूजा को विशेष स्थान दिया गया है. पूजा पाठ का दैनिक दिनचर्या में भी विशेष महत्व है. लगभग सभी के घरों में पूजा का एक अलग स्थान होता है. हर कोई इस पूजा स्थल में भगवान का ध्यान करता है और शांति से अपने भगवान की पूजा करता है. भक्त अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिए कई तरह से पूजा पाठ करते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि प्रतिदिन पूजा करने के बाद भी आपका मन अशांत रहता है, या पूजा के समय मन इधर-उधर भटकता रहता है. कई बार पूजा करने के बाद भी उचित फल नहीं मिलता है. इसका कारण पूजा के दौरान कई तरह की गलतियां भी हो सकती हैं. ऐसे में रोजाना पूजा करना जितना जरूरी है उतना ही पूजा के कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी है, नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है. अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल हमेशा ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. ये दिशा भगवान के मंदिर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है. लेकिन अगर आपके घर में पूजा का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में है तो पूजा का फल कम मिलेगा. पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पश्चिम की ओर हो और मंदिर या भगवान का मुख पूर्व की ओर हो. इतना ही नहीं देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ के बल नहीं बैठना चाहिए. अक्सर लोग जमीन पर बैठकर पूजा करने लगते हैं. लेकिन ये पूजा करने का सही तरीका नहीं है. पूजा के दौरान आसन का इस्तेमाल करना जरूरी होता है. ऐसा माना जाता है कि बिना आसन पर बैठे पूजा करने से दरिद्रता आती है. इसलिए पूजा करते समय साफ-सुथरे आसन का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर घर में कोई मंदिर या पूजा का स्थान हो तो सुबह-शाम दीपक अवश्य जलाएं. घर में दीये जलाने से भगवान की कृपा बनी रहती है. भगवान विष्णु, गणेश, महादेव, सूर्य देव और देवी दुर्गा को पंचदेव कहा जाता है. ऐसे में प्रतिदिन पूजा करते समय इन पंचदेवों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ऐसा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति होती है.
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India vs England VVS Laxman reveals Why Virat Kohli Should remain Captain in All 3 formats: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच जारी 5 मैचों की टी20 सीरीज के बीच भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने विराट कोहली की कप्तानी को लेकर बड़ा बयान दिया है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट जगत में भारतीय टीम के लिये अलग-अलग प्रारूपों में अलग कप्तान बनाने की मांग करते हुए लगातार चर्चा की जा रही है कि क्यों विराट कोहली के पास सभी फॉर्मेटस की कप्तानी नहीं होनी चाहिये। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में रविवार को खेले गये दूसरे मैच के बाद वीवीएस लक्ष्मण ने इस चर्चा पर अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि आखिरकार क्यों भारतीय टीम की तीनों प्रारूपों में कप्तानी विराट कोहली के पास ही होनी चाहिये।
वीवीएस लक्ष्मण ने इस पर बात करते हुए कहा कि कोहली उन खिलाड़ियों में से है जो कि एक प्रारूप में सीमित नहीं हो सकते हैं और हर प्रारूप में जबरदस्त प्रदर्शन करते हैं। ऐसे में अलग-अलग प्रारूपों में एक के बजाय अनेक कप्तान रखने की बात का कोई मतलब ही नहीं बनता है।
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना रहा है कि जब तक किसी अच्छे खिलाड़ी पर कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं होती है वो अपने प्रदर्शन को लेकर सीरियस तो होता है पर उस जिम्मेदारी के साथ खेल का आनंद नहीं ले पाता है। वहीं पर विराट के साथ चीजें अलग हैं और वो कप्तानी के साथ बल्लेबाजी में भी अधिक फोकस नजर आते हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाने का काम करते हैं। अगर वो तीनों प्रारूप में उपलब्ध रहते हैं तो उनके पास ही तीनों प्रारूपों की कप्तानी होनी चाहिये। '
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पहले मैच में हार के बाद विराट कोहली बेटी के जन्म के लिये भारत लौट आये थे और उनकी गैर-मौजूदगी में अजिंक्य रहाणे ने टीम की कमान संभालते हुए ऐतिहासिक सीरीज जीतने का कारनामा किया था। वहीं पर विराट कोहली के आईसीसी टूर्नामेंट में अब तक एक बार भी जीत न हासिल कर पाने और रोहित शर्मा के आईपीएल में जबरदस्त रिकॉर्ड को देखते हुए टी20 प्रारूप में भी कप्तान बदलने को लेकर आवाज उठती रहती है।
वहीं इंग्लैंड के बारे में बात करते हुए लक्ष्मण ने कहा कि उनकी टीम में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जो रूट सीमित ओवर्स में रेगुलर नहीं है तो वहीं पर इयोन मोर्गन बतौर टेस्ट प्लेयर जाने नहीं जाते हैं। इस कारण उनकी मजबूरी है कि वो अलग-अलग प्रारूपों में अलग-अलग कप्तान रखें। वहीं पर भारत के लिये ऐसी कोई बंदिश नहीं है। विराट तीनों ही प्रारूप में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी सकारात्मक सोच, वर्क एथिक्स, फिटनेस के प्रति सजगता ने टीम को उस स्तर पर ला खड़ा किया है जिससे हमें नई भारतीय टीम नजर आती है जो कि प्रोफेशनल है।
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India vs England VVS Laxman reveals Why Virat Kohli Should remain Captain in All तीन formats: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पाँच मैचों की टीबीस सीरीज के बीच भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने विराट कोहली की कप्तानी को लेकर बड़ा बयान दिया है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट जगत में भारतीय टीम के लिये अलग-अलग प्रारूपों में अलग कप्तान बनाने की मांग करते हुए लगातार चर्चा की जा रही है कि क्यों विराट कोहली के पास सभी फॉर्मेटस की कप्तानी नहीं होनी चाहिये। अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में रविवार को खेले गये दूसरे मैच के बाद वीवीएस लक्ष्मण ने इस चर्चा पर अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि आखिरकार क्यों भारतीय टीम की तीनों प्रारूपों में कप्तानी विराट कोहली के पास ही होनी चाहिये। वीवीएस लक्ष्मण ने इस पर बात करते हुए कहा कि कोहली उन खिलाड़ियों में से है जो कि एक प्रारूप में सीमित नहीं हो सकते हैं और हर प्रारूप में जबरदस्त प्रदर्शन करते हैं। ऐसे में अलग-अलग प्रारूपों में एक के बजाय अनेक कप्तान रखने की बात का कोई मतलब ही नहीं बनता है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना रहा है कि जब तक किसी अच्छे खिलाड़ी पर कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं होती है वो अपने प्रदर्शन को लेकर सीरियस तो होता है पर उस जिम्मेदारी के साथ खेल का आनंद नहीं ले पाता है। वहीं पर विराट के साथ चीजें अलग हैं और वो कप्तानी के साथ बल्लेबाजी में भी अधिक फोकस नजर आते हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाने का काम करते हैं। अगर वो तीनों प्रारूप में उपलब्ध रहते हैं तो उनके पास ही तीनों प्रारूपों की कप्तानी होनी चाहिये। ' गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पहले मैच में हार के बाद विराट कोहली बेटी के जन्म के लिये भारत लौट आये थे और उनकी गैर-मौजूदगी में अजिंक्य रहाणे ने टीम की कमान संभालते हुए ऐतिहासिक सीरीज जीतने का कारनामा किया था। वहीं पर विराट कोहली के आईसीसी टूर्नामेंट में अब तक एक बार भी जीत न हासिल कर पाने और रोहित शर्मा के आईपीएल में जबरदस्त रिकॉर्ड को देखते हुए टीबीस प्रारूप में भी कप्तान बदलने को लेकर आवाज उठती रहती है। वहीं इंग्लैंड के बारे में बात करते हुए लक्ष्मण ने कहा कि उनकी टीम में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जो रूट सीमित ओवर्स में रेगुलर नहीं है तो वहीं पर इयोन मोर्गन बतौर टेस्ट प्लेयर जाने नहीं जाते हैं। इस कारण उनकी मजबूरी है कि वो अलग-अलग प्रारूपों में अलग-अलग कप्तान रखें। वहीं पर भारत के लिये ऐसी कोई बंदिश नहीं है। विराट तीनों ही प्रारूप में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी सकारात्मक सोच, वर्क एथिक्स, फिटनेस के प्रति सजगता ने टीम को उस स्तर पर ला खड़ा किया है जिससे हमें नई भारतीय टीम नजर आती है जो कि प्रोफेशनल है।
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पड़ती जिसकी ओर हमने आरंभ मे संकेत किया है। इससे 'लोश' और 'वैशल्य जैसे अनुक्रमों की संभावना पर भी विचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
४. हमारी परिभाषा के अनुसार ये वाक्प्रतीक यादृच्छिक होते है। इसका अर्थ यह है कि हमने जिन भावो, वस्तुओं के लिए कुछ शब्द चुने हैं, उनसे उनका कोई आन्तरिक सम्बन्ध नहीं है । एक विशेष प्रकार के फूल को हम 'गुलाब' इसीलिए कहते हैं कि हम परम्परागत रूप से उसे 'गुलाब' कहते आ रहे हैं। एक विशेष जानवर का द्योतन हम 'गाय' शब्द से केवल इसीलिए करते है कि हमने जिन लोगो से भाषा सीखी है, वे भी उसे 'गाय' ही कहते थे । स्वयं उस जानवर में ऐसा कोई गुण या लक्षण नहीं है जो हमे उसको 'गाय' कहने के लिए विवश करे । हम उसे *पाऊ, *भूना, *टेले, *कोचू या * सूक्लिन' भी कह सकते थे, यदि हमारे साथी हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करते । चिड़िया को हम 'खग' ही कहें, यह आवश्यक नही है, उसे हम 'पक्षी' भी कह सकते है । उसमें स्वतः कोई ऐसा गुण नहीं है, जिसके कारण हमें उसे 'खग' कहना पड़ता हो । वह 'आकाशगामी' है, इसलिए हम उसे खग कहते है, यह तर्क भाषा की यादृच्छिकता का खडन नहीं करता । यदि ऐसा ही है तो हम वायुयान को भी 'खग' कहते होते और अब रूस और अमरीका के अन्तरिक्षयात्रियों को भी 'खग' कहना प्रारम्भ कर दिया होता । हम पक्षियों को ही 'खग' इसलिए कहते हैं कि परम्परानुसार हम 'खग' शब्द में इसी अर्थ का ही समावेश करते रहे है । यदि 'खग' शब्द का अर्थ 'आकाशगामी भर होता और उसे प्रत्येक आकाशगामी जीव या वस्तु के लिए प्रयुक्त किया जाता होता तो भी वह अयादूच्छिक न होता । 'ख' को हम आकाश का अर्थ देते हैं, यह भी परम्परा की बात है, वर्ना हम इस शब्द का प्रयोग न करने के लिए भी स्वतन्त्र थे, आकाश के द्योतन के लिए किसी अन्य शब्द का प्रयोग करने के लिए भी स्वतंत्र थे और 'ख' का प्रयोग किसी भी अन्य अर्थ के लिए करने को स्वतंत्र थे । इसी प्रकार 'जानेवाला' को दुनियाँ में 'ग' ही कहा जाय, ऐसी कोई विवशता नहीं है और 'ग' का अर्थ दुनियाँ को 'जानेवाला' ही मानना पड़ेगा, ऐसा भी कोई विधान नहीं है ।
भाषा की इस यादृच्छिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है भाषाओं की विविधता । यदि वाक्प्रतीक यादृच्छिक न होकर अनिवार्य होते तो सारा ससार एक ही भाषा बोलता होता । हिन्दी या संस्कृत न जाननेवाले 'वृक्ष' का अर्थ नही समझ पाते । अंग्रेजी न जाननेवाले 'ट्री' का अर्थ नहीं जानते। यदि कोई समुदाय चाहे तो वृक्ष या ट्री को किसी और ही शब्द से द्योतित करने लगे। सभी लोग उस नये शब्द का ही प्रयोग प्रारंभ कर दें तो वृक्ष का अर्थ देनेवाला शब्द कोई भी हो सकता है । उदाहरणार्थ, बौम, आर्बर, देन्द्रोन, न, देव, मेदिस, कुओक्स, अगज सरीखा कोई भी शब्द उसी वस्तु के लिए धड़ल्ले के साथ प्रयुक्त हो सकता है, जिसे हम 'वृक्ष' या 'पेड़'
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पड़ती जिसकी ओर हमने आरंभ मे संकेत किया है। इससे 'लोश' और 'वैशल्य जैसे अनुक्रमों की संभावना पर भी विचार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। चार. हमारी परिभाषा के अनुसार ये वाक्प्रतीक यादृच्छिक होते है। इसका अर्थ यह है कि हमने जिन भावो, वस्तुओं के लिए कुछ शब्द चुने हैं, उनसे उनका कोई आन्तरिक सम्बन्ध नहीं है । एक विशेष प्रकार के फूल को हम 'गुलाब' इसीलिए कहते हैं कि हम परम्परागत रूप से उसे 'गुलाब' कहते आ रहे हैं। एक विशेष जानवर का द्योतन हम 'गाय' शब्द से केवल इसीलिए करते है कि हमने जिन लोगो से भाषा सीखी है, वे भी उसे 'गाय' ही कहते थे । स्वयं उस जानवर में ऐसा कोई गुण या लक्षण नहीं है जो हमे उसको 'गाय' कहने के लिए विवश करे । हम उसे *पाऊ, *भूना, *टेले, *कोचू या * सूक्लिन' भी कह सकते थे, यदि हमारे साथी हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करते । चिड़िया को हम 'खग' ही कहें, यह आवश्यक नही है, उसे हम 'पक्षी' भी कह सकते है । उसमें स्वतः कोई ऐसा गुण नहीं है, जिसके कारण हमें उसे 'खग' कहना पड़ता हो । वह 'आकाशगामी' है, इसलिए हम उसे खग कहते है, यह तर्क भाषा की यादृच्छिकता का खडन नहीं करता । यदि ऐसा ही है तो हम वायुयान को भी 'खग' कहते होते और अब रूस और अमरीका के अन्तरिक्षयात्रियों को भी 'खग' कहना प्रारम्भ कर दिया होता । हम पक्षियों को ही 'खग' इसलिए कहते हैं कि परम्परानुसार हम 'खग' शब्द में इसी अर्थ का ही समावेश करते रहे है । यदि 'खग' शब्द का अर्थ 'आकाशगामी भर होता और उसे प्रत्येक आकाशगामी जीव या वस्तु के लिए प्रयुक्त किया जाता होता तो भी वह अयादूच्छिक न होता । 'ख' को हम आकाश का अर्थ देते हैं, यह भी परम्परा की बात है, वर्ना हम इस शब्द का प्रयोग न करने के लिए भी स्वतन्त्र थे, आकाश के द्योतन के लिए किसी अन्य शब्द का प्रयोग करने के लिए भी स्वतंत्र थे और 'ख' का प्रयोग किसी भी अन्य अर्थ के लिए करने को स्वतंत्र थे । इसी प्रकार 'जानेवाला' को दुनियाँ में 'ग' ही कहा जाय, ऐसी कोई विवशता नहीं है और 'ग' का अर्थ दुनियाँ को 'जानेवाला' ही मानना पड़ेगा, ऐसा भी कोई विधान नहीं है । भाषा की इस यादृच्छिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है भाषाओं की विविधता । यदि वाक्प्रतीक यादृच्छिक न होकर अनिवार्य होते तो सारा ससार एक ही भाषा बोलता होता । हिन्दी या संस्कृत न जाननेवाले 'वृक्ष' का अर्थ नही समझ पाते । अंग्रेजी न जाननेवाले 'ट्री' का अर्थ नहीं जानते। यदि कोई समुदाय चाहे तो वृक्ष या ट्री को किसी और ही शब्द से द्योतित करने लगे। सभी लोग उस नये शब्द का ही प्रयोग प्रारंभ कर दें तो वृक्ष का अर्थ देनेवाला शब्द कोई भी हो सकता है । उदाहरणार्थ, बौम, आर्बर, देन्द्रोन, न, देव, मेदिस, कुओक्स, अगज सरीखा कोई भी शब्द उसी वस्तु के लिए धड़ल्ले के साथ प्रयुक्त हो सकता है, जिसे हम 'वृक्ष' या 'पेड़'
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मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel) ने राजभवन आयोजित एक गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार के 28 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। इसमें दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में डॉ गोविंद सिंह, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, हुकुम सिंह कराड़ा, डॉ विजयलक्ष्मी साधौ, सचिन यादव, तरूण भनोत, सुरेंद्र सिंह बघेल, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, लखन घनघोरिया, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, पी सी शर्मा, उमंग सिंघार, हर्ष यादव, जयवर्धन सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलवाई।
राज्यपाल ने प्रभुराम चौधरी, प्रियव्रत सिंह, सुखदेव पांसे, गोविंद सिंह राजपूत, श्रीमती इमरती देवी, आरिफ अकील, ब्रजेंद्र सिंह राठौर, ओमकार सिंह मरकाम, प्रदीप जायसवाल, लाखन सिंह यादव और तुलसीराम सिलावट को भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण कराई।
कमलनाथ ने 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। आज कुल 28 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की है। इस प्रकार अब प्रदेश में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 29 मंत्री हो गए हैं।
हार के बाद बोले शिवराज, 'चिंता की कोई बात नहीं, टाइगर अभी जिंदा है'
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद के रूप में 17 दिसंबर को शपथ ग्रहण की थी। वे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य निपटाकर 20 दिसंबर की रात्रि में मंत्रियों के नाम आदि तय करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए थे। वे आज वापस राजधानी भोपाल पहुंचेंगे और शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। कमलनाथ सरकार को बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक भी समर्थन दे रहे हैं। इनमें से कुछ को मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
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मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन आयोजित एक गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार के अट्ठाईस मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। इसमें दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली। आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में डॉ गोविंद सिंह, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, हुकुम सिंह कराड़ा, डॉ विजयलक्ष्मी साधौ, सचिन यादव, तरूण भनोत, सुरेंद्र सिंह बघेल, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, लखन घनघोरिया, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, पी सी शर्मा, उमंग सिंघार, हर्ष यादव, जयवर्धन सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलवाई। राज्यपाल ने प्रभुराम चौधरी, प्रियव्रत सिंह, सुखदेव पांसे, गोविंद सिंह राजपूत, श्रीमती इमरती देवी, आरिफ अकील, ब्रजेंद्र सिंह राठौर, ओमकार सिंह मरकाम, प्रदीप जायसवाल, लाखन सिंह यादव और तुलसीराम सिलावट को भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण कराई। कमलनाथ ने सत्रह दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। आज कुल अट्ठाईस मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की है। इस प्रकार अब प्रदेश में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल उनतीस मंत्री हो गए हैं। हार के बाद बोले शिवराज, 'चिंता की कोई बात नहीं, टाइगर अभी जिंदा है' कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद के रूप में सत्रह दिसंबर को शपथ ग्रहण की थी। वे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य निपटाकर बीस दिसंबर की रात्रि में मंत्रियों के नाम आदि तय करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए थे। वे आज वापस राजधानी भोपाल पहुंचेंगे और शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। कमलनाथ सरकार को बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक भी समर्थन दे रहे हैं। इनमें से कुछ को मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
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उपराज्यपाल की तरफ से खत में कहा गया है कि यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए बेहद ही गंभीर बात है। यहां तक कि जनसंख्या भी बढ़ रही है और और मौजूदा अस्पतालों में बिस्तरों की कमी अकारण बनी रहती है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल के बीच लेटर वॉर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केजरीवाल को एक और चिट्ठी लिख दी है। इस चिट्ठी में दिल्ली में अस्पतालों के प्रोजेक्ट को पूरा करने में हो रही असाधारण देरी पर एलजी ने सवाल उठाए हैं। खत में एलजी की तरफ से कहा गया है कि दिल्ली सरकार सिर्फ बढ़ा-चढ़ा कर पब्लिसिटी हासिल करने में जुटी हुई है। हालांकि, अभी इसपर आम आदमी पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। अपने खत में एलजी ने लिखा, 'ना सिर्फ सिरसपुर में बन रहे नये अस्पताल का निर्माण कार्य एक साल देरी से चल रहा है बल्कि लोक नायक अस्पातल, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल, डॉक्टर बीएस अंबेडकर अस्पताल, राव तुला राम अस्पताल और अरुणा असफ अली अस्पताल में बेडो की संख्या बढ़ाने का काम भी तीन साल से पूरा नहीं हुआ है। '
इस लेटर में आगे यह भी कहा गया है कि साल 2012-13 में इंदिरा गांधी अस्पताल में जो काम शुरू किया गये थे वो काम 10 साल बाद भी पूरे नहीं हुए। खत में लिखा गया है, 'यह दुर्भाग्य की बात है कि भगवान महावीर, अरुणा असफ अली और दीप चंद बंधू अस्पताल में जो काल साल 2019 में शुरू किये गये थे और जिन्हें साल 2020 में पूरा होने था वो भी अब तक पूरे नहीं हुए। इसके अलावा अभी तक इन कार्यों के पूरा होने की कोई तय तारीख का भी ऐलान नहीं किया गया है। '
एलजी ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'इनमें से कई अस्पतालों के प्रोजेक्ट को बड़ी ही प्रचार के साथ साल 2014 और 2019 में ऐलान किया गया था। यह भी कहा गया था कि यह प्रोजेक्टर साल 2017 और 2020 तक खत्म हो जाएंगे। अगर प्रोजेक्ट खत्म हो गए थे तो कोविड महमारी के दौरान दिल्ली के हजारों लोग अस्पताल में बेड की कमी से क्यों जूझ रहे थे। ' एलजी ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार द्वारा किये गये विभिन्न घोषणाओं को समय पर पूरा करने की सलाह केजरीवाल सरकार को दी है।
एलजी ने कहा कि सरकार की मंशा पब्लिसिटी पाने के अलावा और कुछ नहीं है। खत में कहा गया है कि यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए बेहद ही गंभीर बात है। यहां तक कि जनसंख्या भी बढ़ रही है और और मौजूदा अस्पतालों में बिस्तरों की कमी अकारण बनी रहती है। एलजी ने खत में लिखा, 'मैं यह कहने के लिए विवश हूं कि जमीन हकीकत बिल्कुल अलग है। एक भी नया अस्पताल अस्तित्व में नहीं आया। ना बिस्तर बढ़े और ना ही भवन बनें।
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उपराज्यपाल की तरफ से खत में कहा गया है कि यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए बेहद ही गंभीर बात है। यहां तक कि जनसंख्या भी बढ़ रही है और और मौजूदा अस्पतालों में बिस्तरों की कमी अकारण बनी रहती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल के बीच लेटर वॉर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केजरीवाल को एक और चिट्ठी लिख दी है। इस चिट्ठी में दिल्ली में अस्पतालों के प्रोजेक्ट को पूरा करने में हो रही असाधारण देरी पर एलजी ने सवाल उठाए हैं। खत में एलजी की तरफ से कहा गया है कि दिल्ली सरकार सिर्फ बढ़ा-चढ़ा कर पब्लिसिटी हासिल करने में जुटी हुई है। हालांकि, अभी इसपर आम आदमी पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। अपने खत में एलजी ने लिखा, 'ना सिर्फ सिरसपुर में बन रहे नये अस्पताल का निर्माण कार्य एक साल देरी से चल रहा है बल्कि लोक नायक अस्पातल, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल, डॉक्टर बीएस अंबेडकर अस्पताल, राव तुला राम अस्पताल और अरुणा असफ अली अस्पताल में बेडो की संख्या बढ़ाने का काम भी तीन साल से पूरा नहीं हुआ है। ' इस लेटर में आगे यह भी कहा गया है कि साल दो हज़ार बारह-तेरह में इंदिरा गांधी अस्पताल में जो काम शुरू किया गये थे वो काम दस साल बाद भी पूरे नहीं हुए। खत में लिखा गया है, 'यह दुर्भाग्य की बात है कि भगवान महावीर, अरुणा असफ अली और दीप चंद बंधू अस्पताल में जो काल साल दो हज़ार उन्नीस में शुरू किये गये थे और जिन्हें साल दो हज़ार बीस में पूरा होने था वो भी अब तक पूरे नहीं हुए। इसके अलावा अभी तक इन कार्यों के पूरा होने की कोई तय तारीख का भी ऐलान नहीं किया गया है। ' एलजी ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'इनमें से कई अस्पतालों के प्रोजेक्ट को बड़ी ही प्रचार के साथ साल दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस में ऐलान किया गया था। यह भी कहा गया था कि यह प्रोजेक्टर साल दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार बीस तक खत्म हो जाएंगे। अगर प्रोजेक्ट खत्म हो गए थे तो कोविड महमारी के दौरान दिल्ली के हजारों लोग अस्पताल में बेड की कमी से क्यों जूझ रहे थे। ' एलजी ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार द्वारा किये गये विभिन्न घोषणाओं को समय पर पूरा करने की सलाह केजरीवाल सरकार को दी है। एलजी ने कहा कि सरकार की मंशा पब्लिसिटी पाने के अलावा और कुछ नहीं है। खत में कहा गया है कि यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए बेहद ही गंभीर बात है। यहां तक कि जनसंख्या भी बढ़ रही है और और मौजूदा अस्पतालों में बिस्तरों की कमी अकारण बनी रहती है। एलजी ने खत में लिखा, 'मैं यह कहने के लिए विवश हूं कि जमीन हकीकत बिल्कुल अलग है। एक भी नया अस्पताल अस्तित्व में नहीं आया। ना बिस्तर बढ़े और ना ही भवन बनें।
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तमध्ये नानाविधयने भृलोकवरविधते
तद्राज्यं सुरनाथ तुल्यगदितं तत्केन संवण्यते ॥२२९७ ।। मत सजलद्दर जात कुशलो नाम्नाचन्द्रो नयं तत्पु गुरुरामदास विपुलो भुक्तंतु भोग्यं तदा ।
तत्मनुः कुलदीपवस्तु
नामासकरणा शुभं । प्रन्यौ हितेन कियते ॥
तत्पुत्रः परमधर्मस
गोपागिर गढ
उत्तम धान,
शु.वीर जह राजा मान ।
ता आगे चन्दन चौधरी, कीरती सच जग में विस्तरी ।।२२९९ जाति बरैया गुणइ गम्भीर, अति प्रताप कुल रंजन धीर ।
ता सुत रामदास परवान, ता सुन अस्नि महासुर ज्ञान ।। २३० ताप कुछ मण्डन 'परिमल्ल', बसे आगरा में अरि मल्ल । तापम बुद्धिहीन नहि आन, तिन सुनियो श्रीपाल पुरान ।।२३० १ ताकी छाइ छु मति भई, यह श्रीपाल कथा वरणई । नवर मिश्रित गुणह निवान, ताको चौपाई कियो वखान ।।२३०२ होय अशुद्ध जहां दान, फेर सवारो कवियन जान । बारबार जंपू कर जोर, बुधजन मोह देहु मत खेर ॥२३०३
बन्दूं जिन्शासनको धर्म, जा पसाय नाशै अधर्म । बन्दूं गुरु जे गुणके मूर, जिनसे होय ज्ञानको पूर ॥२३०४ बन्दूं माग्दा जो जिन भनी, जातें सुमति होय अति घनी । बन्दूं मुनिवर जे गुण धर्म, नवरस महिमा उदित कर्म ।।२३०५ बदूं भज्जन कुल सुख श्राम, बदूं धर्म बुद्धि वग्नाम । जयवन्तो अववर सुलतान, महिमा सागर महा सुजान ।। २३०६ जाके हृदय दशको वात्र, जीवन वबहू देय न त्रास । तामें एक अपूर्व रीति, सुरभी जो अति राखे प्रीति ॥
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तमध्ये नानाविधयने भृलोकवरविधते तद्राज्यं सुरनाथ तुल्यगदितं तत्केन संवण्यते ॥दो हज़ार दो सौ सत्तानवे ।। मत सजलद्दर जात कुशलो नाम्नाचन्द्रो नयं तत्पु गुरुरामदास विपुलो भुक्तंतु भोग्यं तदा । तत्मनुः कुलदीपवस्तु नामासकरणा शुभं । प्रन्यौ हितेन कियते ॥ तत्पुत्रः परमधर्मस गोपागिर गढ उत्तम धान, शु.वीर जह राजा मान । ता आगे चन्दन चौधरी, कीरती सच जग में विस्तरी ।।दो हज़ार दो सौ निन्यानवे जाति बरैया गुणइ गम्भीर, अति प्रताप कुल रंजन धीर । ता सुत रामदास परवान, ता सुन अस्नि महासुर ज्ञान ।। दो सौ तीस ताप कुछ मण्डन 'परिमल्ल', बसे आगरा में अरि मल्ल । तापम बुद्धिहीन नहि आन, तिन सुनियो श्रीपाल पुरान ।।दो सौ तीस एक ताकी छाइ छु मति भई, यह श्रीपाल कथा वरणई । नवर मिश्रित गुणह निवान, ताको चौपाई कियो वखान ।।दो हज़ार तीन सौ दो होय अशुद्ध जहां दान, फेर सवारो कवियन जान । बारबार जंपू कर जोर, बुधजन मोह देहु मत खेर ॥दो हज़ार तीन सौ तीन बन्दूं जिन्शासनको धर्म, जा पसाय नाशै अधर्म । बन्दूं गुरु जे गुणके मूर, जिनसे होय ज्ञानको पूर ॥दो हज़ार तीन सौ चार बन्दूं माग्दा जो जिन भनी, जातें सुमति होय अति घनी । बन्दूं मुनिवर जे गुण धर्म, नवरस महिमा उदित कर्म ।।दो हज़ार तीन सौ पाँच बदूं भज्जन कुल सुख श्राम, बदूं धर्म बुद्धि वग्नाम । जयवन्तो अववर सुलतान, महिमा सागर महा सुजान ।। दो हज़ार तीन सौ छः जाके हृदय दशको वात्र, जीवन वबहू देय न त्रास । तामें एक अपूर्व रीति, सुरभी जो अति राखे प्रीति ॥
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Lionel Messi gifts Gold Iphone: अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने फीफा विश्व कप 2022 जीतने की खुशी में टीम के सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को एक खास गिफ्ट देने का फैसला किया है. दरअसल, मेसी विश्व चैंपियन बनने पर काफी खुश हैं और उन्होंने इसे यादगार बनाने के लिए अपनी टीम के साथी खिलाड़ियों के साथ सपोर्ट को गोल्ड प्लेटेड कस्टमाइज्ड आईफोन गिफ्ट करने जा रहे हैं.
मेसी ने ये आईफोन पूरी तरह से पर्सनलाइज्ड बनवाया है. सभी आईफोन पर टीम के खिलाड़ियों के नाम और उनके जर्सी का नंबर लिखा है. आईफोन के पीछे वर्ल्ड कप चैंपियन 2022 लिखा है. मेसी ने सभी सदस्य के लिए 35 गोल्ड के आईफोन मंगाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट के यह सभी आईफोन की कीमत करीब 1. 72 करोड़ रुपये (175,000 पाउंड) बताई जा रही है.
बता दें कि कतर फीफा विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना का सामना फ्रांस के साथ हुआ था. अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट फ्रांस को 4-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया था. इससे पहले दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला निर्धारित समय पर स्कोर 3-3 की बराबरी पर रहा था. इस टूर्नामेंट में मेसी ने 7 गोल दागे थे.
अर्जेंटीना ने 36 साल बाद मेसी के नेतृत्व में विश्व कप की ट्रॉफी उठाई थी. इससे पहले दिवंगत महान खिलाड़ी डिएगो माराडोना की कप्तानी में अर्जेंटीना ने विश्व कप जीता था. लगभग 10 साल के इंतजार के बाद मेसी का विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ था. मेसी ने इससे पहले संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन चैंपियन बनने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया.
वहीं, लियोनेल मेसी ने हाल ही में किलियन एम्बाप्पे और करीम बेंजेमा को पछाड़ कर फीफा सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी (2022) का पुरस्कार अपने नाम किया है. बता दें कि मेसी ने पिछले 14 साल में सातवीं बार फीफा अवॉर्ड जीता है. इसके अलावा मेसी सात बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का बैलन डी'ओर पुरस्कार जीता चुके हैं.
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Lionel Messi gifts Gold Iphone: अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने फीफा विश्व कप दो हज़ार बाईस जीतने की खुशी में टीम के सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को एक खास गिफ्ट देने का फैसला किया है. दरअसल, मेसी विश्व चैंपियन बनने पर काफी खुश हैं और उन्होंने इसे यादगार बनाने के लिए अपनी टीम के साथी खिलाड़ियों के साथ सपोर्ट को गोल्ड प्लेटेड कस्टमाइज्ड आईफोन गिफ्ट करने जा रहे हैं. मेसी ने ये आईफोन पूरी तरह से पर्सनलाइज्ड बनवाया है. सभी आईफोन पर टीम के खिलाड़ियों के नाम और उनके जर्सी का नंबर लिखा है. आईफोन के पीछे वर्ल्ड कप चैंपियन दो हज़ार बाईस लिखा है. मेसी ने सभी सदस्य के लिए पैंतीस गोल्ड के आईफोन मंगाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार चौबीस कैरेट के यह सभी आईफोन की कीमत करीब एक. बहत्तर करोड़ रुपये बताई जा रही है. बता दें कि कतर फीफा विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना का सामना फ्रांस के साथ हुआ था. अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट फ्रांस को चार-दो से हराकर खिताब अपने नाम किया था. इससे पहले दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला निर्धारित समय पर स्कोर तीन-तीन की बराबरी पर रहा था. इस टूर्नामेंट में मेसी ने सात गोल दागे थे. अर्जेंटीना ने छत्तीस साल बाद मेसी के नेतृत्व में विश्व कप की ट्रॉफी उठाई थी. इससे पहले दिवंगत महान खिलाड़ी डिएगो माराडोना की कप्तानी में अर्जेंटीना ने विश्व कप जीता था. लगभग दस साल के इंतजार के बाद मेसी का विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ था. मेसी ने इससे पहले संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन चैंपियन बनने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया. वहीं, लियोनेल मेसी ने हाल ही में किलियन एम्बाप्पे और करीम बेंजेमा को पछाड़ कर फीफा सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी का पुरस्कार अपने नाम किया है. बता दें कि मेसी ने पिछले चौदह साल में सातवीं बार फीफा अवॉर्ड जीता है. इसके अलावा मेसी सात बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का बैलन डी'ओर पुरस्कार जीता चुके हैं.
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जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को नहीं देने पर HSIIDC के एमडी को कोर्ट ने नोटिस जारी करके पूछा कि क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए। इस मामले की सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।
रेवाड़ी, जागरण संवाददाता। धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा भू मालिकों को नहीं देने पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने हरियाणा राज्य औद्योगिक और आधारभूत संरचना विकास निगम (HSIIDC) के प्रबंध निदेशक, पंचकुला को नोटिस जारी करके पूछा है कि किसानों का मुआवजा नहीं देने पर क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए। इस मामले की सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।
HSIIDC ने वर्ष 2011 में गांव कापड़ीवास सहित अन्य गांवों की 1814 कनाल 15 मरला जमीन का अधिग्रहण धारूहेड़ा के इंडस्ट्रीयल सेक्टर 15,16 और 17 को विकसित करने के लिए किया था। यहां पर औद्योगिक क्षेत्र का विकास करने के साथ इंटीग्रेटिड काम्पलैक्स विकसित किया जाना था। निगम की तरफ से अधिग्रहित की गई जमीन के लिए प्रति एकड़ 40 से 50 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया था।
इस अवार्ड को लेकर कापड़ीवास सहित अन्य गांवों के काफी किसानों ने वर्ष 2016 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में वाद दायर करते हुए अवार्ड राशि को चुनौती दी थी। किसानों की तरफ से उनके अधिवक्ताओं ने तर्क दिया निगम की तरफ जहां पर जमीन अधिग्रहण किया गया वहां पर बाजार भाव 4 से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है जबकि अवार्ड बेहद कम सुनाया गया है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष 2019 में इस वाद पर फैसला देते हुए मुआवजा राशि को कम बताते हुए 80 लाख रुपये प्रति एकड़ के साथ स्ट्रक्चर का 53 लाख और बागवानी वाली जमीन के लिए एक करोड़ 70 लाख का मुआवजा तय किया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के इस फैसले पर किसानों ने वर्ष 2019 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रथम अपील की थी। इस अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संशोधित भूमि अधिग्रहण के तहत सभी लाभ का हकदार बताते हुए एक करोड़ 21 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था। वर्ष 2021 में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी HSIIDC ने किसानों को यह बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया।
इसको लेकर किसानों ने पिछले साल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. सुशील कुमार गर्ग की अदालत में एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर की थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एचएसआइआइडीसी के एमडी को नोटिस जारी किया है।
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जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को नहीं देने पर HSIIDC के एमडी को कोर्ट ने नोटिस जारी करके पूछा कि क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए। इस मामले की सुनवाई सत्ताईस अप्रैल को तय की गई है। रेवाड़ी, जागरण संवाददाता। धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा भू मालिकों को नहीं देने पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने हरियाणा राज्य औद्योगिक और आधारभूत संरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक, पंचकुला को नोटिस जारी करके पूछा है कि किसानों का मुआवजा नहीं देने पर क्यों न आपको जेल भेज दिया जाए। इस मामले की सुनवाई सत्ताईस अप्रैल को तय की गई है। HSIIDC ने वर्ष दो हज़ार ग्यारह में गांव कापड़ीवास सहित अन्य गांवों की एक हज़ार आठ सौ चौदह कनाल पंद्रह मरला जमीन का अधिग्रहण धारूहेड़ा के इंडस्ट्रीयल सेक्टर पंद्रह,सोलह और सत्रह को विकसित करने के लिए किया था। यहां पर औद्योगिक क्षेत्र का विकास करने के साथ इंटीग्रेटिड काम्पलैक्स विकसित किया जाना था। निगम की तरफ से अधिग्रहित की गई जमीन के लिए प्रति एकड़ चालीस से पचास लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया था। इस अवार्ड को लेकर कापड़ीवास सहित अन्य गांवों के काफी किसानों ने वर्ष दो हज़ार सोलह में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में वाद दायर करते हुए अवार्ड राशि को चुनौती दी थी। किसानों की तरफ से उनके अधिवक्ताओं ने तर्क दिया निगम की तरफ जहां पर जमीन अधिग्रहण किया गया वहां पर बाजार भाव चार से पाँच करोड़ रुपये प्रति एकड़ है जबकि अवार्ड बेहद कम सुनाया गया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष दो हज़ार उन्नीस में इस वाद पर फैसला देते हुए मुआवजा राशि को कम बताते हुए अस्सी लाख रुपये प्रति एकड़ के साथ स्ट्रक्चर का तिरेपन लाख और बागवानी वाली जमीन के लिए एक करोड़ सत्तर लाख का मुआवजा तय किया था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के इस फैसले पर किसानों ने वर्ष दो हज़ार उन्नीस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रथम अपील की थी। इस अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संशोधित भूमि अधिग्रहण के तहत सभी लाभ का हकदार बताते हुए एक करोड़ इक्कीस लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था। वर्ष दो हज़ार इक्कीस में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी HSIIDC ने किसानों को यह बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया। इसको लेकर किसानों ने पिछले साल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. सुशील कुमार गर्ग की अदालत में एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर की थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एचएसआइआइडीसी के एमडी को नोटिस जारी किया है।
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भारतीय संस्कृति की दृष्टि से मातृभूमि का अभिनन्दन
विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान हो !
१. धुलोक से मानो अवतीर्ण,
तीनों लोकों को दिव्य माधुर्य से पूर्ण करनेवाली, अभिलषित कामनाओं को देनेवाली
तथा दुःख- दारिद्र्य ( अलक्ष्मी) को हटानेवाली, देवीस्वरूपिणी भारत माता
सद्विचारों की साधना में हमारी सहायक हो !
२. मनुष्यों को मृत्यु से हटाकर
अमृतत्व की प्राप्ति का उपदेश देनेवाले
समस्त वेद, उपनिषद् तथा अन्य (बौद्ध, जैन आदि) धर्म ग्रन्थ जिस के निधि-स्वरूप हैं,
वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान ļ
३. जिसका अपकर्ष संसार में
धर्माचरण के अपकर्ष का कारण होता है,
जिसके उत्कर्ष में धर्माचरण का उत्कर्ष निहित है, जिससे धर्म को प्रेरणा प्राप्त होती है,
वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मात भूमि भारत देदीप्यमान हो !
४. देवगण, ऋषि, मुनि, राजर्ष
और पवित्रात्मा सन्त-महात्मागण सावधानता तथा तत्परता से
जिसके कल्याणमय स्वरूप की निरन्तर रक्षा करते आये हैं. वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान हो !
५. जिसकी महिमा महान् है,
देवगण भी जिसके स्वरूप का गान नहीं कर पाते, समुज्ज्वल तेज से देदीप्यमान
वह सर्व लोक-वन्दनीय हमारी मातृभूमि विरोधी शत्रुओं को शमन (निराकरण ) करनेवाली हो !
६० मातृभूमि भारत के दिव्य भावों से युक्त इस पवित्र अभिनन्दन का नित्य पाठ करने वाला मनुष्य प्रात्मकल्याण को प्राप्त होगा ।
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भारतीय संस्कृति की दृष्टि से मातृभूमि का अभिनन्दन विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान हो ! एक. धुलोक से मानो अवतीर्ण, तीनों लोकों को दिव्य माधुर्य से पूर्ण करनेवाली, अभिलषित कामनाओं को देनेवाली तथा दुःख- दारिद्र्य को हटानेवाली, देवीस्वरूपिणी भारत माता सद्विचारों की साधना में हमारी सहायक हो ! दो. मनुष्यों को मृत्यु से हटाकर अमृतत्व की प्राप्ति का उपदेश देनेवाले समस्त वेद, उपनिषद् तथा अन्य धर्म ग्रन्थ जिस के निधि-स्वरूप हैं, वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान ļ तीन. जिसका अपकर्ष संसार में धर्माचरण के अपकर्ष का कारण होता है, जिसके उत्कर्ष में धर्माचरण का उत्कर्ष निहित है, जिससे धर्म को प्रेरणा प्राप्त होती है, वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मात भूमि भारत देदीप्यमान हो ! चार. देवगण, ऋषि, मुनि, राजर्ष और पवित्रात्मा सन्त-महात्मागण सावधानता तथा तत्परता से जिसके कल्याणमय स्वरूप की निरन्तर रक्षा करते आये हैं. वह विश्वप्रसिद्ध हमारी मातृभूमि भारत देदीप्यमान हो ! पाँच. जिसकी महिमा महान् है, देवगण भी जिसके स्वरूप का गान नहीं कर पाते, समुज्ज्वल तेज से देदीप्यमान वह सर्व लोक-वन्दनीय हमारी मातृभूमि विरोधी शत्रुओं को शमन करनेवाली हो ! साठ मातृभूमि भारत के दिव्य भावों से युक्त इस पवित्र अभिनन्दन का नित्य पाठ करने वाला मनुष्य प्रात्मकल्याण को प्राप्त होगा ।
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नए साल की शुरुआत हो गई है. देशभर में सोमवार सुबह की शुरुआत ईश्वर की अराधना से हुई. वाराणसी में गंगा किनारे भव्य आरती हुई. ठंड में गंगा आरती की अपनी ही छठा थी. वहीं, मुंबई में सिद्धि विनायक मंदिर में सुबह-सुबह श्रद्धालु पहुंचे. कई लोगों ने नए साल की शुरुआत प्रयागराज के हनुमान मंदिर में दर्शन के साथ किए.
Have a wonderful 2020!
May this year be filled with joy and prosperity. May everyone be healthy and may everyone's aspirations be fulfilled.
आप सभी को साल 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं।
वहीं, नए वर्ष पर यात्रियों को झटका देते हुए भारतीय रेलवे ने यात्री किराया बढ़ा दिया है. रेलवे ने स्लीपर क्लास के लिए यात्री किराए में दो पैसे प्रति किलोमीटर और 3एसी, 2एसी और एसी प्रथम श्रेणी में चार पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की है. मंगलवार को जारी कमर्शियल सर्कुलर में कहा गया कि बढ़ा हुआ किराया एक जनवरी 2020 से लागू होगा.
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नए साल की शुरुआत हो गई है. देशभर में सोमवार सुबह की शुरुआत ईश्वर की अराधना से हुई. वाराणसी में गंगा किनारे भव्य आरती हुई. ठंड में गंगा आरती की अपनी ही छठा थी. वहीं, मुंबई में सिद्धि विनायक मंदिर में सुबह-सुबह श्रद्धालु पहुंचे. कई लोगों ने नए साल की शुरुआत प्रयागराज के हनुमान मंदिर में दर्शन के साथ किए. Have a wonderful दो हज़ार बीस! May this year be filled with joy and prosperity. May everyone be healthy and may everyone's aspirations be fulfilled. आप सभी को साल दो हज़ार बीस की हार्दिक शुभकामनाएं। वहीं, नए वर्ष पर यात्रियों को झटका देते हुए भारतीय रेलवे ने यात्री किराया बढ़ा दिया है. रेलवे ने स्लीपर क्लास के लिए यात्री किराए में दो पैसे प्रति किलोमीटर और तीनएसी, दोएसी और एसी प्रथम श्रेणी में चार पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की है. मंगलवार को जारी कमर्शियल सर्कुलर में कहा गया कि बढ़ा हुआ किराया एक जनवरी दो हज़ार बीस से लागू होगा.
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सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत से सरकारी बैंक खातों से छात्रवृत्ति के 1. 93 करोड़ रुपये उड़ाने के मामले में अब रकम वसूलने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए घोटाले के आरोपी पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर और दो स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आरसी जारी की गई हैं।
इस मामले में बनाई गई हाई लेवल इंक्वायरी कमेटी ने घोटाले के सबूत एकत्र किए हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है। घोटाले में एसबीआई बैंक के चार शाखा प्रबंधक भी आरोपी हैं। बताया जाता है कि इस मामले के आईओ की जांच में महकमे से जुडे़ कई अन्य लोगों के नाम भी प्रकाश में आ रहे हैं, जिसने नाम एफआईआर में शामिल किए जा सकते हैं।
इस वर्ष जून माह के अंतिम दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के 1. 93 करोड़ रुपये हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। समाज कल्याण विभाग के सरकारी बैंक खाते से यह रकम सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नवंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 के बीच ट्रांसफर की गई थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने जांच शुरू कराई।
आनन-फानन में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विकास मिश्रा ने पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, धर्मानंद भटनागर, सुरेंद्र सिंह, एसबीआई बैंक की सिविल लाइन, करुला शाखा, पीली कोठी शाखा, भोजपुर शाखा के प्रबंधकों के खिलाफ धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। डीएम ने जांच के लिए हाई लेवर इंक्वायरी कमेटी गठित की। जिसमें सीडीओ, डीडीओ, एडीएम, चीफ ट्रेजरी ऑफीसर और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया। कमेटी ने घोटाले से संबंधित सबूत एकत्र किए। अब कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, स्कूल प्रबंधक धर्मानंद भटनागर और सुरेंद्र सिंह से घोटाले की धनराशि वसूलने के लिए आरसी जारी की गई हैं।
जिस समय यह मामला उजागर हुआ तो एसएसपी नितिन तिवारी ने कहा था कि सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी हैं या नहीं इसकी जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से कराई जाएगी। यह जांच कहां तक पहुंची इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।
नियमों के अनुसार 50 लाख से अधिक के सरकारी गबन के मामले में जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) द्वारा की जाती है। लेकिन अभी तक इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है कि क्या यह विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को दी गई या नहीं। सवाल उठ रहा है कि इतनी ढिलाई क्यों? जबकि घोटाले के खुलासे के समय चर्चा थी कि इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू को दी जाएगी।
मामले की जांच जारी है। शीघ्र ही इसमें कार्रवाई भी होगी। महापौर चुनाव आदि के कारण थोड़ी देर हुई है। घोटाले की पूरी रकम वसूल की जाएगी इसके लिए सबूत एकत्र किए गए हैं।
इस मामले में धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। घोटाले से जुड़े काफी तथ्य एकत्र कर लिए गए हैं। इस मामले में शामिल रहे सभी लोगों पर शिकंजा कस दिया गया है। शीघ्र ही कार्रवाई होगी।
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सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत से सरकारी बैंक खातों से छात्रवृत्ति के एक. तिरानवे करोड़ रुपये उड़ाने के मामले में अब रकम वसूलने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए घोटाले के आरोपी पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर और दो स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आरसी जारी की गई हैं। इस मामले में बनाई गई हाई लेवल इंक्वायरी कमेटी ने घोटाले के सबूत एकत्र किए हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है। घोटाले में एसबीआई बैंक के चार शाखा प्रबंधक भी आरोपी हैं। बताया जाता है कि इस मामले के आईओ की जांच में महकमे से जुडे़ कई अन्य लोगों के नाम भी प्रकाश में आ रहे हैं, जिसने नाम एफआईआर में शामिल किए जा सकते हैं। इस वर्ष जून माह के अंतिम दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के एक. तिरानवे करोड़ रुपये हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। समाज कल्याण विभाग के सरकारी बैंक खाते से यह रकम सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नवंबर दो हज़ार पंद्रह से लेकर जनवरी दो हज़ार सोलह के बीच ट्रांसफर की गई थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने जांच शुरू कराई। आनन-फानन में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विकास मिश्रा ने पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, धर्मानंद भटनागर, सुरेंद्र सिंह, एसबीआई बैंक की सिविल लाइन, करुला शाखा, पीली कोठी शाखा, भोजपुर शाखा के प्रबंधकों के खिलाफ धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। डीएम ने जांच के लिए हाई लेवर इंक्वायरी कमेटी गठित की। जिसमें सीडीओ, डीडीओ, एडीएम, चीफ ट्रेजरी ऑफीसर और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया। कमेटी ने घोटाले से संबंधित सबूत एकत्र किए। अब कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, स्कूल प्रबंधक धर्मानंद भटनागर और सुरेंद्र सिंह से घोटाले की धनराशि वसूलने के लिए आरसी जारी की गई हैं। जिस समय यह मामला उजागर हुआ तो एसएसपी नितिन तिवारी ने कहा था कि सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी हैं या नहीं इसकी जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से कराई जाएगी। यह जांच कहां तक पहुंची इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार पचास लाख से अधिक के सरकारी गबन के मामले में जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जाती है। लेकिन अभी तक इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है कि क्या यह विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को दी गई या नहीं। सवाल उठ रहा है कि इतनी ढिलाई क्यों? जबकि घोटाले के खुलासे के समय चर्चा थी कि इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू को दी जाएगी। मामले की जांच जारी है। शीघ्र ही इसमें कार्रवाई भी होगी। महापौर चुनाव आदि के कारण थोड़ी देर हुई है। घोटाले की पूरी रकम वसूल की जाएगी इसके लिए सबूत एकत्र किए गए हैं। इस मामले में धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। घोटाले से जुड़े काफी तथ्य एकत्र कर लिए गए हैं। इस मामले में शामिल रहे सभी लोगों पर शिकंजा कस दिया गया है। शीघ्र ही कार्रवाई होगी।
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गगन बावा, गुरदासपुरः
श्री मति धन देवी डीएवी सीनियर सेकंडरी स्कूल गुरदासपुर में मुख्याध्यापिका शिप्रा गुप्ता की अध्यक्षता में वन-महोत्सव के मौके पर विध्यलाय के प्रांगण में पौधे रोपित किए गए। इस मौके पर मुख्याध्यापिका शिप्रा गुप्ता के साथ समूह स्टाफ ने भी भाग लिया। बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर पुण्य के भागी बने और बच्चों ने संकल्प भी लिया कि वे जहां भी खाली भूमि देखेंगे पौधे जरूर लगायेंगें और पर्यावरण की रक्षा करेंगे। मुख्याध्यापिका और समूह स्टाफ ने पौधे लगाकर आनंद का अनुभव किया।
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गगन बावा, गुरदासपुरः श्री मति धन देवी डीएवी सीनियर सेकंडरी स्कूल गुरदासपुर में मुख्याध्यापिका शिप्रा गुप्ता की अध्यक्षता में वन-महोत्सव के मौके पर विध्यलाय के प्रांगण में पौधे रोपित किए गए। इस मौके पर मुख्याध्यापिका शिप्रा गुप्ता के साथ समूह स्टाफ ने भी भाग लिया। बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर पुण्य के भागी बने और बच्चों ने संकल्प भी लिया कि वे जहां भी खाली भूमि देखेंगे पौधे जरूर लगायेंगें और पर्यावरण की रक्षा करेंगे। मुख्याध्यापिका और समूह स्टाफ ने पौधे लगाकर आनंद का अनुभव किया।
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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11 वें संस्करण की नीलामी रविवार को बेंगलुरू में समाप्त हो गई है। अबकी बार की नीलामी में कई चौंकाने वाले वाकया देखने को मिले। वेस्टइंडीज के तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल को जहां पहले दिन किसी भी टीम ने भाव नहीं दिया, लेकिन दूसरे दिन पंजाब ने उन्हें खरीद लिया। वहीं भारतीय तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा को कोई खरीददार नहीं मिला।
ऐसा ही कुछ हुआ है न्यूजीलैंड के गेंदबाज मिशेल मैकलेन्घन के साथ। उन्हें भी किसी टीम ने खऱीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यहां तक उनकी टीम मुंबई इंडियंस ने भी नहीं। हालांकि इस पूरी नीलामी के बाद मिशेल मैकलेन्घन ने आईपीएल को लेकर एक बड़ी बात कह दी है।
मैकलेन्घन ने मुंबई इंडियंस की तरफ से आईपीएल के तीन सीजन में 40 मैच खेले हैं। जिसमें उन्होंने 1329 रन देते हुए 54 विकेट झटके थे। तीन सीजन खेलने के बाद भी टीम फ्रेंचाइजी ने मिशेल पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
मैकलेन्घन प्रथण श्रेणी क्रिकेट के दस मैचों में 35 विकेट ले चुके हैं। साल 2012-13 में अपने पहले दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर मिशेल ने शानदार प्रदर्शन किया था। जिसमें इनका बेस्ट 20 रनों पर 4 विकेट रहा। 2015 आईपीएल में मुंबई इंडियंस को खिताब जिताने में मिशेल का अहम योगदान रहा। इसमें उन्होंने 12 मैचों में 386 रन देते हुए 18 विकेट अपने नाम किए थे।
Just a quick thanks to @mipaltan and @ImRo45 for the last 3 years. Was a great experience and enjoyed every moment. All the best this year and will watch on with interest.
मिशेल मैकलेन्घन ने पिछले तीन आईपीएल सीजन से मुंबई इंडियंस की तरह से खेल रहे थे। इससे पहले यह उम्मीद जातई जा रही थी कि टीम मैकलेन्घन को रिटेन करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मिशेल ने साल 2015,16 और 17 का आईपीएल मुंबई की तरफ से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया था।
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इंडियन प्रीमियर लीग के ग्यारह वें संस्करण की नीलामी रविवार को बेंगलुरू में समाप्त हो गई है। अबकी बार की नीलामी में कई चौंकाने वाले वाकया देखने को मिले। वेस्टइंडीज के तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल को जहां पहले दिन किसी भी टीम ने भाव नहीं दिया, लेकिन दूसरे दिन पंजाब ने उन्हें खरीद लिया। वहीं भारतीय तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा को कोई खरीददार नहीं मिला। ऐसा ही कुछ हुआ है न्यूजीलैंड के गेंदबाज मिशेल मैकलेन्घन के साथ। उन्हें भी किसी टीम ने खऱीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यहां तक उनकी टीम मुंबई इंडियंस ने भी नहीं। हालांकि इस पूरी नीलामी के बाद मिशेल मैकलेन्घन ने आईपीएल को लेकर एक बड़ी बात कह दी है। मैकलेन्घन ने मुंबई इंडियंस की तरफ से आईपीएल के तीन सीजन में चालीस मैच खेले हैं। जिसमें उन्होंने एक हज़ार तीन सौ उनतीस रन देते हुए चौवन विकेट झटके थे। तीन सीजन खेलने के बाद भी टीम फ्रेंचाइजी ने मिशेल पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। मैकलेन्घन प्रथण श्रेणी क्रिकेट के दस मैचों में पैंतीस विकेट ले चुके हैं। साल दो हज़ार बारह-तेरह में अपने पहले दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर मिशेल ने शानदार प्रदर्शन किया था। जिसमें इनका बेस्ट बीस रनों पर चार विकेट रहा। दो हज़ार पंद्रह आईपीएल में मुंबई इंडियंस को खिताब जिताने में मिशेल का अहम योगदान रहा। इसमें उन्होंने बारह मैचों में तीन सौ छियासी रन देते हुए अट्ठारह विकेट अपने नाम किए थे। Just a quick thanks to @mipaltan and @ImRoपैंतालीस for the last तीन years. Was a great experience and enjoyed every moment. All the best this year and will watch on with interest. मिशेल मैकलेन्घन ने पिछले तीन आईपीएल सीजन से मुंबई इंडियंस की तरह से खेल रहे थे। इससे पहले यह उम्मीद जातई जा रही थी कि टीम मैकलेन्घन को रिटेन करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मिशेल ने साल दो हज़ार पंद्रह,सोलह और सत्रह का आईपीएल मुंबई की तरफ से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया था।
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दिल्ली मेट्रो फिर से सुर्खियों में आ गयी है और इस बार भी कारण गलत है। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि एक युवा कपल किस करते देखें जा सकते हैं, यह हरकत उन्होंने दिल्ली मेट्रो में की है।
दिल्ली मेट्रो लगातार अश्लीलता की वजह से खबर में बना रहता है। अब इस बार एक कपल को अश्लीलता फैलाते देखा गया है। एक अन्य यात्री ने इस कपल का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो कि जंगल में आग की तरह वायरल हो गयी है।
दिल्ली जैसे शहर में मेट्रो ट्रैवलिंग का एक आसान व सस्ता साधन है जिस वजह से सरकार भी इसका विस्तार करने में लगी हुई है। मेट्रो में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी वर्ग के व्यक्ति सफर करते हैं, यहां तक कि महिलायें भी आसानी से सफर करती है।
लेकिन कुछ लोग अन्य यात्रियों के अनुभव को खराब करने में लगे हुए है। दिल्ली मेट्रो में पिछले कुछ महीनों में ही अश्लीलता फैलाने के कई केस सामने आये है जिसमें ना सिर्फ पुरुष बल्कि महिलायें व कपल भी शामिल है। अब एक युवा कपल का वीडियो सामने आया है।
जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है दोनों मेट्रो में दरवाजें के पास फर्श पर बैठे हुए है। लड़की लड़के के गोद में लेटी हुई है और दोनों एक दूसरे को किस कर रहे हैं। उनके सामने बैठे यात्री ने यह वीडियो लिया है।
ऐसे में यूजर्स का रिएक्शन अआना लाजमी है और लोग कपल के इस करतूत पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कुछ यूजर्स इन्हें बेशर्म बता रहे हैं तो कुछ दिल्ली मेट्रो से इनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं।
कुछ यूजर्स ने मजाक में लिखा है कि ऐसा लग रहा है कि लड़का, लडकी को सीपीआर दे रहा है। वीडियो को देख कर ऐसा लग रहा है कि लड़की नशे में है। नशे में होने पर पर्सनल ट्रांसपोर्ट की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करना अधिक उचित है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करते समय यात्रियों को अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए क्योकि इनमें सभी उम्र के लोग यात्रा करते हैं। कुछ समय पहले ही दिल्ली मेट्रो में छोटे कपड़े पहन कर सफर करती लड़की का वीडियो भी सामने आया था।
वहीं हाल ही में एक व्यक्ति को दिल्ली मेट्रो में मास्टरबेट करते देखा गया था। इसके बाद से डीएमआरसी ने मेट्रो ट्रेन में फ्लाइंग स्क्वाड को लाने की बात कही थी। यह फ्लाइंग स्क्वाड यात्रियों पर नजर रखने का काम करेगी।
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Don't Miss! दिल्ली मेट्रो फिर से सुर्खियों में आ गयी है और इस बार भी कारण गलत है। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि एक युवा कपल किस करते देखें जा सकते हैं, यह हरकत उन्होंने दिल्ली मेट्रो में की है। दिल्ली मेट्रो लगातार अश्लीलता की वजह से खबर में बना रहता है। अब इस बार एक कपल को अश्लीलता फैलाते देखा गया है। एक अन्य यात्री ने इस कपल का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो कि जंगल में आग की तरह वायरल हो गयी है। दिल्ली जैसे शहर में मेट्रो ट्रैवलिंग का एक आसान व सस्ता साधन है जिस वजह से सरकार भी इसका विस्तार करने में लगी हुई है। मेट्रो में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी वर्ग के व्यक्ति सफर करते हैं, यहां तक कि महिलायें भी आसानी से सफर करती है। लेकिन कुछ लोग अन्य यात्रियों के अनुभव को खराब करने में लगे हुए है। दिल्ली मेट्रो में पिछले कुछ महीनों में ही अश्लीलता फैलाने के कई केस सामने आये है जिसमें ना सिर्फ पुरुष बल्कि महिलायें व कपल भी शामिल है। अब एक युवा कपल का वीडियो सामने आया है। जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है दोनों मेट्रो में दरवाजें के पास फर्श पर बैठे हुए है। लड़की लड़के के गोद में लेटी हुई है और दोनों एक दूसरे को किस कर रहे हैं। उनके सामने बैठे यात्री ने यह वीडियो लिया है। ऐसे में यूजर्स का रिएक्शन अआना लाजमी है और लोग कपल के इस करतूत पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कुछ यूजर्स इन्हें बेशर्म बता रहे हैं तो कुछ दिल्ली मेट्रो से इनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने मजाक में लिखा है कि ऐसा लग रहा है कि लड़का, लडकी को सीपीआर दे रहा है। वीडियो को देख कर ऐसा लग रहा है कि लड़की नशे में है। नशे में होने पर पर्सनल ट्रांसपोर्ट की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करना अधिक उचित है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करते समय यात्रियों को अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए क्योकि इनमें सभी उम्र के लोग यात्रा करते हैं। कुछ समय पहले ही दिल्ली मेट्रो में छोटे कपड़े पहन कर सफर करती लड़की का वीडियो भी सामने आया था। वहीं हाल ही में एक व्यक्ति को दिल्ली मेट्रो में मास्टरबेट करते देखा गया था। इसके बाद से डीएमआरसी ने मेट्रो ट्रेन में फ्लाइंग स्क्वाड को लाने की बात कही थी। यह फ्लाइंग स्क्वाड यात्रियों पर नजर रखने का काम करेगी।
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हालांकि यह सच है कि अर्थव्यवस्था में सभी धन तीन कार्यों की सेवा करता है , न कि सभी पैसे बराबर बनाए जाते हैं।
कमोडिटी पैसा वह पैसा होता है जिसका मूल्य होता है भले ही इसे पैसे के रूप में उपयोग नहीं किया जा रहा हो। (इसे आमतौर पर आंतरिक मूल्य के रूप में जाना जाता है। ) बहुत से लोग कमोडिटी पैसों के उदाहरण के रूप में सोने का हवाला देते हैं क्योंकि वे कहते हैं कि सोने की आंतरिक मौद्रिक गुणों से अलग मूल्य है। हालांकि यह कुछ डिग्री के लिए सच है; वास्तव में, सोने के कई उपयोग होते हैं, यह ध्यान देने योग्य है कि सोने के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले उपयोग गैर-सजावटी वस्तुओं के बजाय पैसे और गहने बनाने के लिए होते हैं।
कमोडिटी बैकड मनी कमोडिटी मनी पर थोड़ी भिन्नता है। जबकि कमोडिटी मनी कमोडिटी को मुद्रा के रूप में सीधे इस्तेमाल करती है, कमोडिटी बैकड मनी पैसा है जिसे किसी विशिष्ट वस्तु की मांग पर आदान-प्रदान किया जा सकता है। सोना मानक कमोडिटी बैक किए गए पैसे के उपयोग का एक अच्छा उदाहरण है- सोने के मानक के तहत, लोग सचमुच सोने और सोने के रूप में सोना और व्यापार के लिए सीधे सोने के व्यापार के रूप में नहीं ले रहे थे, लेकिन सिस्टम ने ऐसा काम किया था कि मुद्रा धारक व्यापार कर सकते हैं निर्दिष्ट मुद्रा के लिए उनकी मुद्रा।
फिएट मनी पैसा है जिसका कोई आंतरिक मूल्य नहीं है लेकिन उसके पास पैसे के रूप में मूल्य है क्योंकि सरकार ने यह आदेश दिया है कि उसके पास उस उद्देश्य के लिए मूल्य है। कुछ हद तक counterintuitive, फिएट पैसे का उपयोग कर एक मौद्रिक प्रणाली निश्चित रूप से व्यवहार्य है और वास्तव में, आज ज्यादातर देशों द्वारा उपयोग किया जाता है। फिएट पैसा संभव है क्योंकि पैसे के तीन कार्य - विनिमय का माध्यम, खाते की एक इकाई, और मूल्य की एक दुकान - तब तक पूरा हो जाती है जब तक समाज में सभी लोग स्वीकार करते हैं कि फिएट पैसा मुद्रा का एक वैध रूप है ।
कम राजनीतिक चर्चा (यानी, अधिक सटीक, वस्तु-समर्थित) धन के मुद्दे पर बहुत अधिक राजनीतिक चर्चा केंद्र, लेकिन वास्तविकता में, दोनों के बीच भेद काफी बड़ा नहीं है क्योंकि लोग दो कारणों से सोचते हैं। सबसे पहले, फिएट पैसों पर एक आपत्ति आंतरिक मूल्य की कमी है, और फिएट पैसों के विरोधियों का दावा है कि फिएट पैसों का उपयोग करने वाली प्रणाली स्वाभाविक रूप से नाजुक है क्योंकि फिएट पैसों में गैर-धन मूल्य नहीं है।
हालांकि यह एक वैध चिंता है, फिर किसी को आश्चर्य करना चाहिए कि सोने द्वारा समर्थित मौद्रिक प्रणाली कितनी अलग है। यह देखते हुए कि गैर-सजावटी गुणों के लिए दुनिया की सोने की आपूर्ति का केवल एक छोटा सा हिस्सा उपयोग किया जाता है, क्या ऐसा नहीं है कि सोने का मूल्य अधिकतर है क्योंकि लोगों का मानना है कि इसका मूल्य मूल्य है, फिएट पैसों की तरह?
दूसरा, फिएट मनी के विरोधियों का दावा है कि एक विशिष्ट वस्तु के साथ इसे वापस किए बिना पैसा प्रिंट करने की क्षमता संभावित रूप से खतरनाक है। यह कुछ डिग्री के लिए भी एक वैध चिंता है, लेकिन वह जिसे पूरी तरह से कमोडिटी समर्थित बैक सिस्टम द्वारा नहीं रोका जाता है, क्योंकि सरकार के लिए अधिक पैसा पैदा करने या मुद्रा को पुनः संशोधित करने के लिए सरकार के लिए अधिकतर वस्तुएं फसल करना संभव है। अपने व्यापार में मूल्य बदल रहा है।
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हालांकि यह सच है कि अर्थव्यवस्था में सभी धन तीन कार्यों की सेवा करता है , न कि सभी पैसे बराबर बनाए जाते हैं। कमोडिटी पैसा वह पैसा होता है जिसका मूल्य होता है भले ही इसे पैसे के रूप में उपयोग नहीं किया जा रहा हो। बहुत से लोग कमोडिटी पैसों के उदाहरण के रूप में सोने का हवाला देते हैं क्योंकि वे कहते हैं कि सोने की आंतरिक मौद्रिक गुणों से अलग मूल्य है। हालांकि यह कुछ डिग्री के लिए सच है; वास्तव में, सोने के कई उपयोग होते हैं, यह ध्यान देने योग्य है कि सोने के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले उपयोग गैर-सजावटी वस्तुओं के बजाय पैसे और गहने बनाने के लिए होते हैं। कमोडिटी बैकड मनी कमोडिटी मनी पर थोड़ी भिन्नता है। जबकि कमोडिटी मनी कमोडिटी को मुद्रा के रूप में सीधे इस्तेमाल करती है, कमोडिटी बैकड मनी पैसा है जिसे किसी विशिष्ट वस्तु की मांग पर आदान-प्रदान किया जा सकता है। सोना मानक कमोडिटी बैक किए गए पैसे के उपयोग का एक अच्छा उदाहरण है- सोने के मानक के तहत, लोग सचमुच सोने और सोने के रूप में सोना और व्यापार के लिए सीधे सोने के व्यापार के रूप में नहीं ले रहे थे, लेकिन सिस्टम ने ऐसा काम किया था कि मुद्रा धारक व्यापार कर सकते हैं निर्दिष्ट मुद्रा के लिए उनकी मुद्रा। फिएट मनी पैसा है जिसका कोई आंतरिक मूल्य नहीं है लेकिन उसके पास पैसे के रूप में मूल्य है क्योंकि सरकार ने यह आदेश दिया है कि उसके पास उस उद्देश्य के लिए मूल्य है। कुछ हद तक counterintuitive, फिएट पैसे का उपयोग कर एक मौद्रिक प्रणाली निश्चित रूप से व्यवहार्य है और वास्तव में, आज ज्यादातर देशों द्वारा उपयोग किया जाता है। फिएट पैसा संभव है क्योंकि पैसे के तीन कार्य - विनिमय का माध्यम, खाते की एक इकाई, और मूल्य की एक दुकान - तब तक पूरा हो जाती है जब तक समाज में सभी लोग स्वीकार करते हैं कि फिएट पैसा मुद्रा का एक वैध रूप है । कम राजनीतिक चर्चा धन के मुद्दे पर बहुत अधिक राजनीतिक चर्चा केंद्र, लेकिन वास्तविकता में, दोनों के बीच भेद काफी बड़ा नहीं है क्योंकि लोग दो कारणों से सोचते हैं। सबसे पहले, फिएट पैसों पर एक आपत्ति आंतरिक मूल्य की कमी है, और फिएट पैसों के विरोधियों का दावा है कि फिएट पैसों का उपयोग करने वाली प्रणाली स्वाभाविक रूप से नाजुक है क्योंकि फिएट पैसों में गैर-धन मूल्य नहीं है। हालांकि यह एक वैध चिंता है, फिर किसी को आश्चर्य करना चाहिए कि सोने द्वारा समर्थित मौद्रिक प्रणाली कितनी अलग है। यह देखते हुए कि गैर-सजावटी गुणों के लिए दुनिया की सोने की आपूर्ति का केवल एक छोटा सा हिस्सा उपयोग किया जाता है, क्या ऐसा नहीं है कि सोने का मूल्य अधिकतर है क्योंकि लोगों का मानना है कि इसका मूल्य मूल्य है, फिएट पैसों की तरह? दूसरा, फिएट मनी के विरोधियों का दावा है कि एक विशिष्ट वस्तु के साथ इसे वापस किए बिना पैसा प्रिंट करने की क्षमता संभावित रूप से खतरनाक है। यह कुछ डिग्री के लिए भी एक वैध चिंता है, लेकिन वह जिसे पूरी तरह से कमोडिटी समर्थित बैक सिस्टम द्वारा नहीं रोका जाता है, क्योंकि सरकार के लिए अधिक पैसा पैदा करने या मुद्रा को पुनः संशोधित करने के लिए सरकार के लिए अधिकतर वस्तुएं फसल करना संभव है। अपने व्यापार में मूल्य बदल रहा है।
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मुंशी पुलिया से 1090 चौराहे के बीच बच्चों से भीख मंगवाने वाले भिखारी बंगाली ने अपने धंधे को सिर्फ भीख मांगने तक ही सीमित नहीं रखा था। उसने जिस्मफरोशी का गंदा कारोबार करने की सोची और शुरू कर दिया। बंगाली ने इसके लिए इंदिरानगर का चांदन गांव चुना जहां वह बिहार और असम की लड़कियों को लाता और उसने ये धन्धा करवाता।
लोग कहते हैं कि समझदार इंसान चेहरे को भी पढ़ लेता है और बता देता है कि सामने वाला इंसान कैसा है। पर इन कोरी कल्पनाओं को धता बताती एक ऐसी घटना सामने आई है कि जिसके बारे में सुनने के बाद लोगों के पैरौ तले जमीन खिसक गई। मामला देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का है जहां जिस्मफरोशी के बड़े धंधे का खुलासा हुआ है आश्चर्य की बात ये कि इस सेक्स रैकेट का सरगना एक दिव्यांग भिखारी निकला।
मामले का खुलासा भी बेहद रोचक तरीके से हुआ। दो लड़कियां किसी तरह से इस धंधे से निकल भागने में सफल रही। वह बादशाहनगर के स्टेशन पर पहुंची जहां उनकी गतिविधियों पर आरपीएफ सिपाहियों की नजर पड़ी। जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई तो सारा राज बाहर आ गया। आरपीएफ के चौकी इंचार्ज वंश बहादुर की शिकायत पर सेक्स रैकेट चलाने वाले दिव्याग भिखारी विजय उर्फ बंगाली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई और कुछ ही देर बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
मुंशी पुलिया से 1090 चौराहे के बीच बच्चों से भीख मंगवाने वाले भिखारी बंगाली ने अपने धंधे को सिर्फ भीख मांगने तक ही सीमित नहीं रखा था। उसने जिस्मफरोशी का गंदा कारोबार करने की सोची और शुरू कर दिया। बंगाली ने इसके लिए इंदिरानगर का चांदन गांव चुना जहां वह बिहार और असम की लड़कियों को लाता और उसने ये धन्धा करवाता।
बिहार और असम से लड़कियों को लखनऊ लाने के लिए ज्यादा पैसों का लालच दिया जाता था। लड़कियों को वहां से लाने के लिए भी कई और लोग इस धन्धे में शामिल किए गए थे। नाबालिग लड़कियों को यहां लाकर उन्हें नशे की लत लगाई जाती थी। उनके खानों में अफीम मिलाई जाती, उन्हें सिगरेट से जलाया जाता और उसके बाद उन्हें जिस्मफरोशी के कीचड़ में फंसा दिया जाता था।
इस सेक्स रैकेट का सरगना विजय बद्री उर्फ बंगाली प्रयागराज का रहने वाला है लेकिन पिछले कुछ सालों से उसने लखनऊ को अपना ठिकाना बना लिया था। और जिस्मफरोशी के धन्धे को बढ़ाने में लग गया। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार करके पूछताछ किया तो कई राज खुलकर सामने आ गए। उसके चंगुल से करीब एक दर्जन बच्चों को बचाया गया।
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मुंशी पुलिया से एक हज़ार नब्बे चौराहे के बीच बच्चों से भीख मंगवाने वाले भिखारी बंगाली ने अपने धंधे को सिर्फ भीख मांगने तक ही सीमित नहीं रखा था। उसने जिस्मफरोशी का गंदा कारोबार करने की सोची और शुरू कर दिया। बंगाली ने इसके लिए इंदिरानगर का चांदन गांव चुना जहां वह बिहार और असम की लड़कियों को लाता और उसने ये धन्धा करवाता। लोग कहते हैं कि समझदार इंसान चेहरे को भी पढ़ लेता है और बता देता है कि सामने वाला इंसान कैसा है। पर इन कोरी कल्पनाओं को धता बताती एक ऐसी घटना सामने आई है कि जिसके बारे में सुनने के बाद लोगों के पैरौ तले जमीन खिसक गई। मामला देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का है जहां जिस्मफरोशी के बड़े धंधे का खुलासा हुआ है आश्चर्य की बात ये कि इस सेक्स रैकेट का सरगना एक दिव्यांग भिखारी निकला। मामले का खुलासा भी बेहद रोचक तरीके से हुआ। दो लड़कियां किसी तरह से इस धंधे से निकल भागने में सफल रही। वह बादशाहनगर के स्टेशन पर पहुंची जहां उनकी गतिविधियों पर आरपीएफ सिपाहियों की नजर पड़ी। जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई तो सारा राज बाहर आ गया। आरपीएफ के चौकी इंचार्ज वंश बहादुर की शिकायत पर सेक्स रैकेट चलाने वाले दिव्याग भिखारी विजय उर्फ बंगाली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई और कुछ ही देर बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मुंशी पुलिया से एक हज़ार नब्बे चौराहे के बीच बच्चों से भीख मंगवाने वाले भिखारी बंगाली ने अपने धंधे को सिर्फ भीख मांगने तक ही सीमित नहीं रखा था। उसने जिस्मफरोशी का गंदा कारोबार करने की सोची और शुरू कर दिया। बंगाली ने इसके लिए इंदिरानगर का चांदन गांव चुना जहां वह बिहार और असम की लड़कियों को लाता और उसने ये धन्धा करवाता। बिहार और असम से लड़कियों को लखनऊ लाने के लिए ज्यादा पैसों का लालच दिया जाता था। लड़कियों को वहां से लाने के लिए भी कई और लोग इस धन्धे में शामिल किए गए थे। नाबालिग लड़कियों को यहां लाकर उन्हें नशे की लत लगाई जाती थी। उनके खानों में अफीम मिलाई जाती, उन्हें सिगरेट से जलाया जाता और उसके बाद उन्हें जिस्मफरोशी के कीचड़ में फंसा दिया जाता था। इस सेक्स रैकेट का सरगना विजय बद्री उर्फ बंगाली प्रयागराज का रहने वाला है लेकिन पिछले कुछ सालों से उसने लखनऊ को अपना ठिकाना बना लिया था। और जिस्मफरोशी के धन्धे को बढ़ाने में लग गया। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार करके पूछताछ किया तो कई राज खुलकर सामने आ गए। उसके चंगुल से करीब एक दर्जन बच्चों को बचाया गया।
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भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन" पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।
डिजिटल कनेक्टिविटी व्यक्तिगत, व्यावसायिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग बन गई है। सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों के डिजिटलीकरण में तेज वृद्धि ने दुनिया में क्रांति ला दी है, जिससे अर्थव्यवस्था, नवाचार, विज्ञान और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, स्थिरता, शासन और जीवन शैली तक हर चीज प्रभावित हुई है। हाल के वर्षों में डिजिटल कनेक्टिविटी की मांग कई गुना बढ़ गई है। महामारी के दौरान डिजिटल कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया जा चुका है, जिससे हर वर्ग के उपयोगकर्ताओं की तरफ से मांग में वृद्धि देखी गई, भले ही उनका स्थान कुछ भी हो यानी वे कहीं भी रहते हों।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) विस्तृत अध्ययन कराकर देश भर में सेवा की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है और सेवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हितधारकों को उपयुक्त निर्देश जारी कर रहा है। भले ही, जमीनी स्तर पर दूरसंचार सेवाओं के कवरेज में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं, फिर भी उपयोगकर्ताओं खासकर भवनों/आवासीय या वाणिज्यिक क्षेत्रों के अंदर सेवा मांगों के लिए जरूरी गुणवत्ता के संदर्भ से अभी भी कमियां देखी जा रही हैं।
भवनों के अंदर दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता उपभोक्ता हितों की सुरक्षा का एक अभिन्न अंग है। ट्राई ने पहले ही "डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भवनों या क्षेत्रों की रेटिंग" पर 20 फरवरी, 2023 की सिफारिश सहित विभिन्न नीतिगत पहल कर ली हैं। इन सिफारिशों में सहयोगात्मक और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण के माध्यम से उपभोक्ताओं को अच्छा डिजिटल कनेक्टिविटी अनुभव सुनिश्चित करने के लिए बिल्डिंग रेटिंग फ्रेमवर्क की शुरूआत करने का प्रावधान किया गया है।
एक नियामक ढांचा बनाने के लिए ट्राई ने अपनी टिप्पणियों और विश्लेषण में कहा है कि, "...ट्राई भवनों की रेटिंग के लिए उचित नियामक ढांचा लेकर आएगा..."
भवनों और क्षेत्रों के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन के उद्देश्य से विनियमन पर विचार विमर्श को "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन पर" परामर्श पत्र जारी किया गया है। इसमें इमारतों और निर्बाध उपभोक्ता अनुभव के लिए क्यूओएस में सुधार के उद्देश्य से डिजिटल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखा गया है।
यह दस्तावेज डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भवनों या क्षेत्रों की रेटिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है जो न केवल उपभोक्ताओं की वर्तमान अपेक्षाओं को पूरा करता है बल्कि प्रौद्योगिकियों के विकास या उपयोगकर्ताओं की मांग में बदलाव के साथ भविष्य के विस्तार या उन्नयन के लिए भी तैयार है। इस सीपी में सामान्य उपयोगकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और इकोसिस्टम के लिए रेटिंग ढांचे के लाभों पर भी चर्चा की गई है।
परामर्श पत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे तौर तरीकों और भारत में जीआरआईएचए या क्रेडिट रेटिंग जैसे रेटिंग ढांचे के आधार पर 'डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग ढांचे' के बारे में विस्तार से बताया गया है।
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर परामर्श पत्र डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन के उद्देश्य से एक मसौदा विनियमन उपलब्ध कराता है।
मसौदा नियमों के साथ-साथ, "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन" पर परामर्श पत्र ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर रखा गया है, जिसमें हितधारकों और दूरसंचार उपभोक्ताओं से इनपुट मांगा गया है। परामर्श पत्र में उठाए गए मुद्दों पर हितधारकों से 10 नवंबर, 2023 तक लिखित टिप्पणियां और जवाबी टिप्पणियां, यदि कोई हों, 24 नवंबर 2023 तक आमंत्रित की गई हैं।
टिप्पणियां और जवाबी टिप्पणियां, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, श्री तेजपाल सिंह, सलाहकार (क्यूओएस- I), भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण को ईमेलः adv-qos1@trai.gov.in पर भेजी जा सकती हैं। किसी भी स्पष्टीकरण/ जानकारी के लिए, श्री तेजपाल सिंह, सलाहकार (क्यूओएस- I) से दूरभाष नंबरः +91-11-2323-6516 पर संपर्क किया जा सकता है।
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Posted On: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने आज "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन" पर एक परामर्श पत्र जारी किया है। डिजिटल कनेक्टिविटी व्यक्तिगत, व्यावसायिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग बन गई है। सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों के डिजिटलीकरण में तेज वृद्धि ने दुनिया में क्रांति ला दी है, जिससे अर्थव्यवस्था, नवाचार, विज्ञान और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, स्थिरता, शासन और जीवन शैली तक हर चीज प्रभावित हुई है। हाल के वर्षों में डिजिटल कनेक्टिविटी की मांग कई गुना बढ़ गई है। महामारी के दौरान डिजिटल कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया जा चुका है, जिससे हर वर्ग के उपयोगकर्ताओं की तरफ से मांग में वृद्धि देखी गई, भले ही उनका स्थान कुछ भी हो यानी वे कहीं भी रहते हों। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण विस्तृत अध्ययन कराकर देश भर में सेवा की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है और सेवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हितधारकों को उपयुक्त निर्देश जारी कर रहा है। भले ही, जमीनी स्तर पर दूरसंचार सेवाओं के कवरेज में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं, फिर भी उपयोगकर्ताओं खासकर भवनों/आवासीय या वाणिज्यिक क्षेत्रों के अंदर सेवा मांगों के लिए जरूरी गुणवत्ता के संदर्भ से अभी भी कमियां देखी जा रही हैं। भवनों के अंदर दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता उपभोक्ता हितों की सुरक्षा का एक अभिन्न अंग है। ट्राई ने पहले ही "डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भवनों या क्षेत्रों की रेटिंग" पर बीस फरवरी, दो हज़ार तेईस की सिफारिश सहित विभिन्न नीतिगत पहल कर ली हैं। इन सिफारिशों में सहयोगात्मक और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण के माध्यम से उपभोक्ताओं को अच्छा डिजिटल कनेक्टिविटी अनुभव सुनिश्चित करने के लिए बिल्डिंग रेटिंग फ्रेमवर्क की शुरूआत करने का प्रावधान किया गया है। एक नियामक ढांचा बनाने के लिए ट्राई ने अपनी टिप्पणियों और विश्लेषण में कहा है कि, "...ट्राई भवनों की रेटिंग के लिए उचित नियामक ढांचा लेकर आएगा..." भवनों और क्षेत्रों के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन के उद्देश्य से विनियमन पर विचार विमर्श को "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन पर" परामर्श पत्र जारी किया गया है। इसमें इमारतों और निर्बाध उपभोक्ता अनुभव के लिए क्यूओएस में सुधार के उद्देश्य से डिजिटल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखा गया है। यह दस्तावेज डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए भवनों या क्षेत्रों की रेटिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है जो न केवल उपभोक्ताओं की वर्तमान अपेक्षाओं को पूरा करता है बल्कि प्रौद्योगिकियों के विकास या उपयोगकर्ताओं की मांग में बदलाव के साथ भविष्य के विस्तार या उन्नयन के लिए भी तैयार है। इस सीपी में सामान्य उपयोगकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और इकोसिस्टम के लिए रेटिंग ढांचे के लाभों पर भी चर्चा की गई है। परामर्श पत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे तौर तरीकों और भारत में जीआरआईएचए या क्रेडिट रेटिंग जैसे रेटिंग ढांचे के आधार पर 'डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग ढांचे' के बारे में विस्तार से बताया गया है। उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर परामर्श पत्र डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन के उद्देश्य से एक मसौदा विनियमन उपलब्ध कराता है। मसौदा नियमों के साथ-साथ, "भवनों या क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए रेटिंग फ्रेमवर्क पर विनियमन" पर परामर्श पत्र ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर रखा गया है, जिसमें हितधारकों और दूरसंचार उपभोक्ताओं से इनपुट मांगा गया है। परामर्श पत्र में उठाए गए मुद्दों पर हितधारकों से दस नवंबर, दो हज़ार तेईस तक लिखित टिप्पणियां और जवाबी टिप्पणियां, यदि कोई हों, चौबीस नवंबर दो हज़ार तेईस तक आमंत्रित की गई हैं। टिप्पणियां और जवाबी टिप्पणियां, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, श्री तेजपाल सिंह, सलाहकार , भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण को ईमेलः adv-qosएक@trai.gov.in पर भेजी जा सकती हैं। किसी भी स्पष्टीकरण/ जानकारी के लिए, श्री तेजपाल सिंह, सलाहकार से दूरभाष नंबरः +इक्यानवे नवंबर दो हज़ार तीन सौ तेईस-छः हज़ार पाँच सौ सोलह पर संपर्क किया जा सकता है।
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राजधानी के कबाड़खाना स्थित कब्रस्तान की जमीन को लेकर एक दिन पहले उठे विवाद में सोमवार को नया ट्विस्ट आ गया है। इस मामले को लेकर अदालती कार्यवाही से जुड़े मोहम्मद सुलेमान की तरफ से एडवोकेट रफी जुबैरी ने वक्फ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की है। अर्जेंट हियेरिंग को लेकर लगाई गई यह याचिका अदालत ने स्वीकार करते हुए 21 जनवरी को इस पर सुनवाई के लिए समय दिया है।
सोमवार को वक्फ ट्रिब्यूनल पहुंचे मोहम्मद सुलेमान और एडवोकेट रफी ने याचिका में कहा है कि रविवार को प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही उचित नहीं है। इस मामले को लेकर वक्फ ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में मामले लंबित हैं, जिसके चलते एकतरफा कार्यवाही किया जाना मुनासिब नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी एतराज उठाया है कि अदालत के जिस आदेश को लेकर यह कार्यवाही की गई है, उसकी प्रतिलिपि उन्हें नहीं सौंपी गई है। उन्होंने वक्फ ट्रिब्यूनल से इस आदेश की बारीकियों और दिए गए प्रावधानों का अध्ययन करने की मांग भी की है।
जानकारी के मुताबिक खसरा नंबर 268 की करीब 6. 51 एकड़ जमीन सुल्तान जहां बेगम ने सन् 1926 में कुंजीलाल को हिबा (दान) की थी। इसी जमीन के एक 2. 88 एकड़ जमीन पर कब्रस्तान मौजूद है। जिसपर कल्ले पीर सानी की दरगाह भी मौजूद है। जमीन के इस हिस्से को बाग कुंजीलाल के नाम से भी जाना जाता है। दरगाह की देखभाल करने वाले फैयाज अली ने वर्ष 1964 में इस विवादित जमीन का सौदा किया था। इस जमीन के दस्तावेज में भू-स्वामी के नाम के आगे फैयाज का नाम दर्ज था, इसके चलते उसने यह सौदा कर दिया। विवादित 37 हजार स्केयर फीट जमीन के अलावा बाकी की 2. 88 एकड़ का जमीन भी उसने ही किया है।
सूत्रों का कहना है कि कबाड़खाना की विवादित जमीन का सौदा सन् 1964 में हो चुका था। जबकि इसका वक्फ में रजिस्ट्रेशन वर्ष 1974 में कराया गया है। बताया जाता है कि कब्रस्तान जमीन करार देते हुए इस जमीन को लेकर वर्ष 2001 में विवाद शुरू हुआ। इस दौरान बिगड़े हालात के चलते करीब 60-65 लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी की गई थी। इसके बाद से यह मामला अदालत पहुंचा और तभी से इसके स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि इस दौरान अदालत ने विवादित जमीन पर रिसीवर नियुक्त कर दिया था, जो व्यवस्था अब तक जारी थी।
जानकारी के मुताबिक जमीन बिक जाने के करीब दस साल बाद वक्फ रिकार्ड में दर्ज हुई इस जमीन का करीब 6. 51 एकड़ क्षेत्र इसके निगराह और संरक्षकों ने सौदा कर दिया। धीरे-धीरे यहां आबादी बसती गई और कबस्तान की जमीन एक घनी आबादी में तब्दील हो गई। इस पर बसने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखते हैं।
लेकिन महज आधे एकड़ जैसी जगह पर विवाद के हालात उस समय बने, जब इसका सौदा किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को कर दिए जाने की बातें सामने आई । विवाद उस समय अधिक गहराने लगा, जब लोगों को इस बात की जानकारी मिली कि यह जमीन खरीदने वाले व्यक्ति ने इसको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दान कर दी है और यहां पर संघ का एक कार्यालय निर्मित किया जाना है। हालांकि संघ से जुड़े जिम्मेदारों ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस जमीन पर किसी तरह का अधिकार नहीं है और उनका यहां कोई निर्माण करने का इरादा नहीं है।
रविवार को कर्फ्यू के साए में रहे पुराने भोपाल के तीन थाना क्षेत्र रविवार की रात को इससे मुक्त कर दिए गए थे। देर रात कलेक्टर ने इसके आदेश जारी कर इन क्षेत्रों में महज धारा 144 लागू रहने की बात कही थी। इसके साथ ही जिन बाकी 8 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई थी, उस आदेश को भी शिथिल कर दिया गया है। बावजूद इसके कबाड़खाना के आसपास के अधिकांश क्षेत्र सोमवार को भी बंद दिखाई दिए।
किसी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने विवादित स्थान के आसपास पूरी तरह बैरिकेटिंग कर रखी है। बड़ी तादाद में मौजूद पुलिसकर्मियों ने इस इलाके को घेर रखा है और सतत निगरानी रखी जा रही है। इधर पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों की मौजूदगी में यहां बाउंड्री वॉल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। एसडीएम जमील खान ने बताया कि रविवार से लेकर सोमवार शाम तक किसी तरह के विवाद के कोई हालात नजर नहीं आए हैं। सोमवार देर रात या मंगलवार दोपहर तक बाउंड्री वॉल का काम पूरा होने के बाद पुलिस की निगरानी हटा दी जाएगी और क्षेत्र में लागू धारा 144 की स्थिति भी समाप्त कर दी जाएगी।
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राजधानी के कबाड़खाना स्थित कब्रस्तान की जमीन को लेकर एक दिन पहले उठे विवाद में सोमवार को नया ट्विस्ट आ गया है। इस मामले को लेकर अदालती कार्यवाही से जुड़े मोहम्मद सुलेमान की तरफ से एडवोकेट रफी जुबैरी ने वक्फ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की है। अर्जेंट हियेरिंग को लेकर लगाई गई यह याचिका अदालत ने स्वीकार करते हुए इक्कीस जनवरी को इस पर सुनवाई के लिए समय दिया है। सोमवार को वक्फ ट्रिब्यूनल पहुंचे मोहम्मद सुलेमान और एडवोकेट रफी ने याचिका में कहा है कि रविवार को प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही उचित नहीं है। इस मामले को लेकर वक्फ ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में मामले लंबित हैं, जिसके चलते एकतरफा कार्यवाही किया जाना मुनासिब नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी एतराज उठाया है कि अदालत के जिस आदेश को लेकर यह कार्यवाही की गई है, उसकी प्रतिलिपि उन्हें नहीं सौंपी गई है। उन्होंने वक्फ ट्रिब्यूनल से इस आदेश की बारीकियों और दिए गए प्रावधानों का अध्ययन करने की मांग भी की है। जानकारी के मुताबिक खसरा नंबर दो सौ अड़सठ की करीब छः. इक्यावन एकड़ जमीन सुल्तान जहां बेगम ने सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में कुंजीलाल को हिबा की थी। इसी जमीन के एक दो. अठासी एकड़ जमीन पर कब्रस्तान मौजूद है। जिसपर कल्ले पीर सानी की दरगाह भी मौजूद है। जमीन के इस हिस्से को बाग कुंजीलाल के नाम से भी जाना जाता है। दरगाह की देखभाल करने वाले फैयाज अली ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में इस विवादित जमीन का सौदा किया था। इस जमीन के दस्तावेज में भू-स्वामी के नाम के आगे फैयाज का नाम दर्ज था, इसके चलते उसने यह सौदा कर दिया। विवादित सैंतीस हजार स्केयर फीट जमीन के अलावा बाकी की दो. अठासी एकड़ का जमीन भी उसने ही किया है। सूत्रों का कहना है कि कबाड़खाना की विवादित जमीन का सौदा सन् एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में हो चुका था। जबकि इसका वक्फ में रजिस्ट्रेशन वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में कराया गया है। बताया जाता है कि कब्रस्तान जमीन करार देते हुए इस जमीन को लेकर वर्ष दो हज़ार एक में विवाद शुरू हुआ। इस दौरान बिगड़े हालात के चलते करीब साठ-पैंसठ लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी की गई थी। इसके बाद से यह मामला अदालत पहुंचा और तभी से इसके स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि इस दौरान अदालत ने विवादित जमीन पर रिसीवर नियुक्त कर दिया था, जो व्यवस्था अब तक जारी थी। जानकारी के मुताबिक जमीन बिक जाने के करीब दस साल बाद वक्फ रिकार्ड में दर्ज हुई इस जमीन का करीब छः. इक्यावन एकड़ क्षेत्र इसके निगराह और संरक्षकों ने सौदा कर दिया। धीरे-धीरे यहां आबादी बसती गई और कबस्तान की जमीन एक घनी आबादी में तब्दील हो गई। इस पर बसने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन महज आधे एकड़ जैसी जगह पर विवाद के हालात उस समय बने, जब इसका सौदा किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को कर दिए जाने की बातें सामने आई । विवाद उस समय अधिक गहराने लगा, जब लोगों को इस बात की जानकारी मिली कि यह जमीन खरीदने वाले व्यक्ति ने इसको राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दान कर दी है और यहां पर संघ का एक कार्यालय निर्मित किया जाना है। हालांकि संघ से जुड़े जिम्मेदारों ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस जमीन पर किसी तरह का अधिकार नहीं है और उनका यहां कोई निर्माण करने का इरादा नहीं है। रविवार को कर्फ्यू के साए में रहे पुराने भोपाल के तीन थाना क्षेत्र रविवार की रात को इससे मुक्त कर दिए गए थे। देर रात कलेक्टर ने इसके आदेश जारी कर इन क्षेत्रों में महज धारा एक सौ चौंतालीस लागू रहने की बात कही थी। इसके साथ ही जिन बाकी आठ थाना क्षेत्रों में धारा एक सौ चौंतालीस लागू की गई थी, उस आदेश को भी शिथिल कर दिया गया है। बावजूद इसके कबाड़खाना के आसपास के अधिकांश क्षेत्र सोमवार को भी बंद दिखाई दिए। किसी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने विवादित स्थान के आसपास पूरी तरह बैरिकेटिंग कर रखी है। बड़ी तादाद में मौजूद पुलिसकर्मियों ने इस इलाके को घेर रखा है और सतत निगरानी रखी जा रही है। इधर पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों की मौजूदगी में यहां बाउंड्री वॉल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। एसडीएम जमील खान ने बताया कि रविवार से लेकर सोमवार शाम तक किसी तरह के विवाद के कोई हालात नजर नहीं आए हैं। सोमवार देर रात या मंगलवार दोपहर तक बाउंड्री वॉल का काम पूरा होने के बाद पुलिस की निगरानी हटा दी जाएगी और क्षेत्र में लागू धारा एक सौ चौंतालीस की स्थिति भी समाप्त कर दी जाएगी।
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लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि का 7वां दीक्षांत समारोह 01 मार्च को प्रदेश की राज्यपाल एवं विवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पदमश्री चमू कृष्ण शास्त्री, विशिष्ट अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश एवं विशेष अतिथि रजनी तिवारी, राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार होंगी।
समारोह में 890 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी, साथ ही 47 छात्र एवं 63 छात्राओं को 110 स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ भावना मिश्रा के अनुसार 110 पदकों में 01 ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक, 01 कुलाधिपति पदक, 01 कुलपति पदक, स्नातक पाठ्यक्रमों में 27 स्वर्ण, 21 रजत, 19 कांस्य, परास्नातक पाठ्यक्रमों में 17 स्वर्ण, 13 रजत एवं 13 कांस्य पदक शामिल हैं।
अरबी विभाग की बीए ऑनर्स अरबी पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता नूर फातिमा (93. 29%) को ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक एवं कुलाधिपति पदक प्रदान किया जाएगा एवं शिक्षाशास्त्र विभाग के बीएड पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता कार्तिकेय तिवारी (87. 85%) को कुलपति पदक दिया जाएगा।
आज विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो एनबी सिंह की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह का पूर्वाभ्यास किया गया। इस अवसर पर कुलाधिपति के रूप में प्रो चन्दना डे, विभागाध्यक्ष शिक्षाशास्त्र विभाग, विशिष्ट अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय के रूप में डॉ प्रवीण कुमार राय, सह आचार्य, भूगोल विभाग एवं विशेष अतिथि रजनी तिवारी के रूप में प्रो तनवीर खदीजा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग ने कार्यवाही पूर्ण की। इस दौरान विवि के कुलसचिव अजय कृष्ण यादव ने शोभायात्रा की अगुवाई की। पूर्वाभ्यास में मेडल प्राप्तकर्ता भी उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह की पूर्व संध्या पर किए गए पूर्वाभ्यास में पदमश्री चमू कृष्ण शास्त्री जी भी मौजूद रहे। उन्होंने पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं एवं विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ इंटरएक्टिव सत्र में वार्तालाप की। शास्त्री जी ने उच्च शिक्षा में भाषा के महत्व और वर्गीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाषा के विभिन्न सोपानों की चर्चा करते हुए बताया कि भावों की अभिव्यक्ति के लिए भाषा में निपुणता आवश्यक है।
उन्होने कहा कि भारत हमेशा विभिन्न भाषाओं का देश रहा है एवं सभी भाषाएँ एक दूसरे की पूरक हैं। सभी भारतीय भाषाओं में हमें अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के बारे चर्चा करते हुए, भाषा से संदर्भित उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण यूट्यूब के लिंक पर देखा जा सकता है।
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लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि का सातवां दीक्षांत समारोह एक मार्च को प्रदेश की राज्यपाल एवं विवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पदमश्री चमू कृष्ण शास्त्री, विशिष्ट अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय, मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश एवं विशेष अतिथि रजनी तिवारी, राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार होंगी। समारोह में आठ सौ नब्बे विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी, साथ ही सैंतालीस छात्र एवं तिरेसठ छात्राओं को एक सौ दस स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ भावना मिश्रा के अनुसार एक सौ दस पदकों में एक ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक, एक कुलाधिपति पदक, एक कुलपति पदक, स्नातक पाठ्यक्रमों में सत्ताईस स्वर्ण, इक्कीस रजत, उन्नीस कांस्य, परास्नातक पाठ्यक्रमों में सत्रह स्वर्ण, तेरह रजत एवं तेरह कांस्य पदक शामिल हैं। अरबी विभाग की बीए ऑनर्स अरबी पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता नूर फातिमा को ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक एवं कुलाधिपति पदक प्रदान किया जाएगा एवं शिक्षाशास्त्र विभाग के बीएड पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता कार्तिकेय तिवारी को कुलपति पदक दिया जाएगा। आज विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो एनबी सिंह की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह का पूर्वाभ्यास किया गया। इस अवसर पर कुलाधिपति के रूप में प्रो चन्दना डे, विभागाध्यक्ष शिक्षाशास्त्र विभाग, विशिष्ट अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय के रूप में डॉ प्रवीण कुमार राय, सह आचार्य, भूगोल विभाग एवं विशेष अतिथि रजनी तिवारी के रूप में प्रो तनवीर खदीजा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग ने कार्यवाही पूर्ण की। इस दौरान विवि के कुलसचिव अजय कृष्ण यादव ने शोभायात्रा की अगुवाई की। पूर्वाभ्यास में मेडल प्राप्तकर्ता भी उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह की पूर्व संध्या पर किए गए पूर्वाभ्यास में पदमश्री चमू कृष्ण शास्त्री जी भी मौजूद रहे। उन्होंने पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं एवं विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ इंटरएक्टिव सत्र में वार्तालाप की। शास्त्री जी ने उच्च शिक्षा में भाषा के महत्व और वर्गीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाषा के विभिन्न सोपानों की चर्चा करते हुए बताया कि भावों की अभिव्यक्ति के लिए भाषा में निपुणता आवश्यक है। उन्होने कहा कि भारत हमेशा विभिन्न भाषाओं का देश रहा है एवं सभी भाषाएँ एक दूसरे की पूरक हैं। सभी भारतीय भाषाओं में हमें अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के बारे चर्चा करते हुए, भाषा से संदर्भित उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण यूट्यूब के लिंक पर देखा जा सकता है।
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दिल्ली के साकेत कोर्ट में मोकामा से बाहुबली निर्दलीय विधायक अनंत सिंह ने आत्म-समर्पण कर दिया। इससे पहले, अनंत सिंह ने गुरुवार देर शाम अपना तीसरा वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह पुलिस के सामने नहीं बल्कि अदालत में आत्म-समर्पण करेंगे। बाहुबली विधायक के घर से AK 47 राइफल और ग्रेनेड बरामद किया गया था और गिर-फ्तारी से बचने के लिए वह करीब एक हफ्ते से फरार है। इससे पहले वो दो वीडियो जारी कर चुके हैं। 19 अगस्त को अनंत सिंह ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि वह गिर-फ्तारी से नहीं घबराते हैं, वह अदालत के सामने 2 से 3 दिनों के बाद आत्म-समर्पण कर देंगे।
आधुनिक हथियार और राइफल बरामद होने के मद्देनज़र अनंत सिंह के खिलाफ आतंक-वादी विरोधी कानून - गैर-कानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम (UAPA) के द्वारा याचिका दायर किया गया था। हाल ही में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर लल्लन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन वह पराजित हो गई थी।
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दिल्ली के साकेत कोर्ट में मोकामा से बाहुबली निर्दलीय विधायक अनंत सिंह ने आत्म-समर्पण कर दिया। इससे पहले, अनंत सिंह ने गुरुवार देर शाम अपना तीसरा वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह पुलिस के सामने नहीं बल्कि अदालत में आत्म-समर्पण करेंगे। बाहुबली विधायक के घर से AK सैंतालीस राइफल और ग्रेनेड बरामद किया गया था और गिर-फ्तारी से बचने के लिए वह करीब एक हफ्ते से फरार है। इससे पहले वो दो वीडियो जारी कर चुके हैं। उन्नीस अगस्त को अनंत सिंह ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि वह गिर-फ्तारी से नहीं घबराते हैं, वह अदालत के सामने दो से तीन दिनों के बाद आत्म-समर्पण कर देंगे। आधुनिक हथियार और राइफल बरामद होने के मद्देनज़र अनंत सिंह के खिलाफ आतंक-वादी विरोधी कानून - गैर-कानूनी गतिविधियां अधिनियम के द्वारा याचिका दायर किया गया था। हाल ही में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर लल्लन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन वह पराजित हो गई थी।
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लैला मजनूं की अमर कहानी को बॉलीवुड में कई निर्माता-निर्देशकों ने सैकड़ों बार अलग-अलग अंदाज में बनाया है। कहानी इतनी बार बन चुकी है कि बासी पड़ गई। निर्माता इम्तियाज अली के भाई साजिद अपनी डेब्यू फिल्म में लैला-मजनूं की कहानी लाए हैं। जिसमें कश्मीर की पल-पल रंग बदल कर नई बनी रहती खूबसूरती के अलावा कुछ नया नहीं है। लेखक-निर्देशक ने कहानी पर गौर करने की जरूरत नहीं समझी। उन्हें लगा कि कश्मीर के सौंदर्य में डूबने के बाद दर्शक कहानी तक पहुंच ही नहीं पाएंगे।
किस्सा यह कि कॉलेज जाने वाली लैला (तृप्ति डिमरी) और कैस (अविनाश तिवारी) का मिलना, प्यार में पड़ना। फिर पता चलना कि उनके पिताओं में 36 का आंकड़ा है। घर के लोगों नाते-रिश्तेदारों का ही दुश्मन बन जाना। लैला की कहीं और शादी। कैस का बाहर चले जाना और हालात तथा वक्त का पहिया घूमने के बाद फिर लौट आना। पुराने प्यार का जागना, कैस का पागल हो जाना और अंत में दोनों का मौत की बांहों में समा जाना। शरीर मर जाता है और आत्मा अमर हो जाती है, वाले अंदाज में। फिल्म को भले ही लैला-मजनूं नाम दिया गया हो परंतु इसमें प्यार की वह कशिश नहीं, जो बांधे रखे।
एक अमर कहानी को नए जमाने की दिखने के बाद भी साजिद की लैला मजनूं बासी व्यंजन है। जिसे कश्मीर, कैमरे और संगीत के वरक से सजाने की कोशिश की गई है। कश्मीर यहां वैसा नहीं है, जैसा खबरों में आता है और 90 के दशक के प्यार अंदाज फिल्म में दिखता है। लेखक और निर्देशक ने प्यार के पुराने फार्मूलों का ही इस्तेमाल किया गया है। प्रेम कहानी कहते हुए साजिद अपना मौलिक अंदाज ढूंढने के बजाय भाई के बनाए रास्ते पर ही चलने की कोशिश करते हैं। कहानी के साथ स्क्रिप्ट भी कमजोर है। संतुलन कम है। पहला हिस्सा लैला के नाम है तो दूसरा हिस्सा कैस के।
फिल्म कई जगहों पर टीवी धारावाहिकों जैसी नजर आती है और बार-बार गाने आते हैं। इरशाद कामिल के गीत सुंदर हैं लेकिन पर्दे पर गानों का जादू नहीं जागता। अविनाश तिवारी ने कैस की भूमिका में उतरने की भरपूर कोशिश की और वह काफी हद तक कामयाब रहे। तृप्ति डिमरी सहज हैं। अन्य अभिनेता भी अपनी भूमिकाओं में फिट हैं। धीमी रफ्तार के बावजूद अंतिम आधे घंटे में फिल्म जरूर उठती है और कुछ आकर्षक लगती है। मगर इतना काफी नहीं। निर्देशक के रूप में साजिद प्रभाव नहीं छोड़ते। उन्हें अपने भाई की तरह प्रेम कहानियों का मोह छोड़ कर अपना व्याकरण खुद गढ़ना होगा।
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लैला मजनूं की अमर कहानी को बॉलीवुड में कई निर्माता-निर्देशकों ने सैकड़ों बार अलग-अलग अंदाज में बनाया है। कहानी इतनी बार बन चुकी है कि बासी पड़ गई। निर्माता इम्तियाज अली के भाई साजिद अपनी डेब्यू फिल्म में लैला-मजनूं की कहानी लाए हैं। जिसमें कश्मीर की पल-पल रंग बदल कर नई बनी रहती खूबसूरती के अलावा कुछ नया नहीं है। लेखक-निर्देशक ने कहानी पर गौर करने की जरूरत नहीं समझी। उन्हें लगा कि कश्मीर के सौंदर्य में डूबने के बाद दर्शक कहानी तक पहुंच ही नहीं पाएंगे। किस्सा यह कि कॉलेज जाने वाली लैला और कैस का मिलना, प्यार में पड़ना। फिर पता चलना कि उनके पिताओं में छत्तीस का आंकड़ा है। घर के लोगों नाते-रिश्तेदारों का ही दुश्मन बन जाना। लैला की कहीं और शादी। कैस का बाहर चले जाना और हालात तथा वक्त का पहिया घूमने के बाद फिर लौट आना। पुराने प्यार का जागना, कैस का पागल हो जाना और अंत में दोनों का मौत की बांहों में समा जाना। शरीर मर जाता है और आत्मा अमर हो जाती है, वाले अंदाज में। फिल्म को भले ही लैला-मजनूं नाम दिया गया हो परंतु इसमें प्यार की वह कशिश नहीं, जो बांधे रखे। एक अमर कहानी को नए जमाने की दिखने के बाद भी साजिद की लैला मजनूं बासी व्यंजन है। जिसे कश्मीर, कैमरे और संगीत के वरक से सजाने की कोशिश की गई है। कश्मीर यहां वैसा नहीं है, जैसा खबरों में आता है और नब्बे के दशक के प्यार अंदाज फिल्म में दिखता है। लेखक और निर्देशक ने प्यार के पुराने फार्मूलों का ही इस्तेमाल किया गया है। प्रेम कहानी कहते हुए साजिद अपना मौलिक अंदाज ढूंढने के बजाय भाई के बनाए रास्ते पर ही चलने की कोशिश करते हैं। कहानी के साथ स्क्रिप्ट भी कमजोर है। संतुलन कम है। पहला हिस्सा लैला के नाम है तो दूसरा हिस्सा कैस के। फिल्म कई जगहों पर टीवी धारावाहिकों जैसी नजर आती है और बार-बार गाने आते हैं। इरशाद कामिल के गीत सुंदर हैं लेकिन पर्दे पर गानों का जादू नहीं जागता। अविनाश तिवारी ने कैस की भूमिका में उतरने की भरपूर कोशिश की और वह काफी हद तक कामयाब रहे। तृप्ति डिमरी सहज हैं। अन्य अभिनेता भी अपनी भूमिकाओं में फिट हैं। धीमी रफ्तार के बावजूद अंतिम आधे घंटे में फिल्म जरूर उठती है और कुछ आकर्षक लगती है। मगर इतना काफी नहीं। निर्देशक के रूप में साजिद प्रभाव नहीं छोड़ते। उन्हें अपने भाई की तरह प्रेम कहानियों का मोह छोड़ कर अपना व्याकरण खुद गढ़ना होगा।
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कुछ दिनों पहले शेखर कपूर ने मॉब लिंचिंग को लेकर भी ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट पर जावेद अख्तर ने भी रिप्लाई किया था।
शेखर कपूर हमेशा ही अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में शेखर कपूर ने पीएम मोदी को शुक्रिया कहा है। दरअसल इस स्वतंत्रता दिवस पीएम मोदी ने अपने भाषण में पानी की समस्या पर अपनी बात रखी थी। इसी के लिए शेखर कपूर ने पीएम मोदी को शुक्रिया किया है।
अपने सोशल मीडिया पर शेखर कपूर ने ट्वीट करके लिखा है, 'शुक्रिया पीएम मोदी कि आपने पानी का मुद्दा उठाने के लिए। पानी के लिए लोगों को जागरुक करने के लिए। सभी को मिलकर पानी की समस्या को रिसॉल्व करना चाहिए। ' इस पोस्ट में शेखर कपूर ने पीएम मोदी का वीडियो भी शेयर किया है जिसमें पीएम पानी पर बोलते दिखाई दे रहे हैं।
शेखर कपूर ने आगे की पोस्ट में लिखा, 'जो पानी की बूंद आप नल से टपका रहे हैं वो आपकी नहीं है। ये एक साधारण स्त्रोत है जो सभी के लिए है। जब आप पानी की एक भी बूंद को बर्बाद करते हैं तब आप किसी दूसरे के लिए स्त्रोत को बर्बाद करते हैं। पानी जीवन है। नरेन्द्र मोदी का शुक्रिया जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया। '
शेखर कपूर हमेशा ही अपनी बात को रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले मॉब लिंचिंग को लेकर भी ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट पर जावेद अख्तर ने भी रिप्लाई किया था। इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल भी मचा था।
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कुछ दिनों पहले शेखर कपूर ने मॉब लिंचिंग को लेकर भी ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट पर जावेद अख्तर ने भी रिप्लाई किया था। शेखर कपूर हमेशा ही अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में शेखर कपूर ने पीएम मोदी को शुक्रिया कहा है। दरअसल इस स्वतंत्रता दिवस पीएम मोदी ने अपने भाषण में पानी की समस्या पर अपनी बात रखी थी। इसी के लिए शेखर कपूर ने पीएम मोदी को शुक्रिया किया है। अपने सोशल मीडिया पर शेखर कपूर ने ट्वीट करके लिखा है, 'शुक्रिया पीएम मोदी कि आपने पानी का मुद्दा उठाने के लिए। पानी के लिए लोगों को जागरुक करने के लिए। सभी को मिलकर पानी की समस्या को रिसॉल्व करना चाहिए। ' इस पोस्ट में शेखर कपूर ने पीएम मोदी का वीडियो भी शेयर किया है जिसमें पीएम पानी पर बोलते दिखाई दे रहे हैं। शेखर कपूर ने आगे की पोस्ट में लिखा, 'जो पानी की बूंद आप नल से टपका रहे हैं वो आपकी नहीं है। ये एक साधारण स्त्रोत है जो सभी के लिए है। जब आप पानी की एक भी बूंद को बर्बाद करते हैं तब आप किसी दूसरे के लिए स्त्रोत को बर्बाद करते हैं। पानी जीवन है। नरेन्द्र मोदी का शुक्रिया जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया। ' शेखर कपूर हमेशा ही अपनी बात को रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले मॉब लिंचिंग को लेकर भी ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट पर जावेद अख्तर ने भी रिप्लाई किया था। इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल भी मचा था।
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फ्रांसीसी राष्ट्रीय शिक्षा में संघ और सामाजिक कामकाज और दुरुपयोग, फ्रांसीसी बजट की पहली या दूसरी वस्तु (ऋण भार के साथ वर्षों के अनुसार बारी-बारी से)
फ्रांसीसी राष्ट्रीय शिक्षा बीमार हैः विद्यार्थियों की शिक्षा का स्तर स्वतंत्र रूप से गिर रहा है लेकिन फिर भी यह अधिक से अधिक महंगा है! क्यों? राष्ट्रीय शिक्षा का पैसा कहां जाता है?
- ए हमारे विकास और उपभोक्ता समाजों की शिक्षा प्रणाली पर एक और बहुत दिलचस्प वीडियो et संगत बहसः शिक्षा, क्यों?.
- और अंत में, ए ऋण संकट समाधान और राजनेताओं के झूठ पर "रेंट"
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फ्रांसीसी राष्ट्रीय शिक्षा में संघ और सामाजिक कामकाज और दुरुपयोग, फ्रांसीसी बजट की पहली या दूसरी वस्तु फ्रांसीसी राष्ट्रीय शिक्षा बीमार हैः विद्यार्थियों की शिक्षा का स्तर स्वतंत्र रूप से गिर रहा है लेकिन फिर भी यह अधिक से अधिक महंगा है! क्यों? राष्ट्रीय शिक्षा का पैसा कहां जाता है? - ए हमारे विकास और उपभोक्ता समाजों की शिक्षा प्रणाली पर एक और बहुत दिलचस्प वीडियो et संगत बहसः शिक्षा, क्यों?. - और अंत में, ए ऋण संकट समाधान और राजनेताओं के झूठ पर "रेंट"
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सर्दियों में कई जानवरों को जंगल में या शहर में रहने वाले है, लेकिन घर के बाहर के वातावरण में, जाने वाले कठिन और भूख समय हो जाता है। वे अक्सर भोजन पाने के लिए, एक परिणाम के रूप में वे भुखमरी से मौत का सामना करना मुश्किल हो गया। कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने? ठंड के मौसम जीवित नियमित निषेचन मदद और जो लोग जानवरों के प्रति उदासीन नहीं हैं के लिए देखभाल कर सकते हैं।
पक्षीः कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने?
अधिकांश सर्दियों शहर में रहने वाले पक्षियों की कुछ प्रजातियों पीड़ित - अगले हमें। जंगलों और खेतों में रहने वाले जंगली जानवरों, आमतौर पर सर्दियों के लिए शेयरों बनाने (और अभी भी जामुन कि शाखाओं पर बने रहे, शंकु में बीज और पेड़ों की छाल खा सकते हैं), तो शहर में रहने वाले पक्षियों, ठीक से तंग आ नहीं किया जा सकता।
उदाहरण के लिए, एक ही कबूतरों गौरैयों, bullfinches साथ chickadees कचरे को खाते हैं नहीं कर सकते। यह भोजन सही प्रकार है, क्योंकि वे नहीं सर्वाहारी हैं, कौवे की तरह नहीं है। नतीजतन, वे और अधिक मरने की संभावना है, खासकर जब attics कसकर (या घर पर भी attics के बिना) बंद हो जाती हैं, कहीं नहीं गर्म है वे है। इन जानवरों में, तेजी से गर्मी हस्तांतरण, और वे के रूप में संतुष्ट हैं, अच्छा लग रहा है। और जैसे ही वे भूखे हैं, वे अपनी ताकत खोने के लिए फ्रीज शुरू करते हैं।
कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने? सबसे अच्छा मदद एक नियमित रूप से निषेचन पक्षियों है। हम, फीडर लटका करने की जरूरत है, लेकिन ट्रंक पर नहीं और शाखाओं पर - खिड़कियों के पास। भूख पक्षियों भोजन के आदी और खतरे की सूचना नहीं है, वे शिकार करने के लिए, उदाहरण के लिए एक ही बिल्ली के लिए गिर सकता है,। और उन्हें बेहतर बीज (कच्चे, अनसाल्टेड), सूखे जामुन, रोटी के टुकड़ों (सफेद केवल) को खिलाने के लिए, यदि धन अनुमति देते हैं, आप अनाज मिश्रण एक दुकान में खरीद सकते हैं।
यह कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने, बताने के लिए है कि जंगली जानवरों विशेष शिकार खेत है, जहां वन योजना के अनुसार काम कर रहे हैं कर रहे हैं के बारे में उल्लेख करने के लिए आवश्यक है, और के लिए अतिरिक्त चारा घास, टहनियाँ, यहां तक कि पत्थर में नमक का इस्तेमाल किया। स्तनधारी इन उत्पादों के बिना नहीं रह सकते हैं। इसलिए वन उन्हें गर्मी के लिए, बर्फ सबसे घने लुभाने क्योंकि वसंत में, और जानवरों के लिए भोजन के लिए देखो और अधिक उसके लिए मुश्किल है।
सर्दियों में विशेष रूप से कठिन जंगल, बड़े पशु हो जाता है जब एक परत - बर्फ पर एक कठिन परत पिघल गया है। उनके पैर, विफल हो सकता है अपने घावों को पेश, अपने तेज धार में कटौती, और वे अब शिकारियों से दूर चला सकते हैं। इसलिए, एल्क, हिरण और जंगली भैंसों रेंजरों भोजन के लिए भांग पर रोटी, अनाज, नमक टीले खिलाया।
और फिर वहाँ जाते मानव सहायता की जरूरत है कि कर रहे हैं। और यह उन विद्यार्थियों को जो ठंड के मौसम में मुश्किल बाहरी स्थितियों में हुआ के भाग्य के बारे में पूछने के लिए महत्वपूर्ण है। हम पूरी तरह से घर खो के बारे में बात कर रहे हैं। वे किसी भी तरह, ओह कैसे नहीं आसान करने के लिए है क्योंकि वे गर्मी और निरंतर खिला के लिए और अधिक आदी रहे हैं।
सामान्य तौर पर, कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने, विस्तार द्वितीय श्रेणी में बच्चों के बाहर विश्व स्तर को बताओ। और यह सच है, यह बच्चों को प्रकृति के श्रद्धालु रवैया में एक बच्चे को लाने के लिए ही संभव है।
इस प्रकार, छात्रों को सलाह दी जाती है, अगर वे सड़क में पाया, उदाहरण के लिए, कुत्ते के लिए, ठंड से कांप,, मीडिया घोषणाओं और इंटरनेट के माध्यम से अपने मालिक खोजने की कोशिश चित्र लेने, और इसकी विस्तृत विवरण के साथ पशु की तस्वीरें पोस्ट कर। इसके अलावा, यह सब से पहले फ़ीड और बेचारा गर्म करने के लिए उपयोगी होता है।
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सर्दियों में कई जानवरों को जंगल में या शहर में रहने वाले है, लेकिन घर के बाहर के वातावरण में, जाने वाले कठिन और भूख समय हो जाता है। वे अक्सर भोजन पाने के लिए, एक परिणाम के रूप में वे भुखमरी से मौत का सामना करना मुश्किल हो गया। कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने? ठंड के मौसम जीवित नियमित निषेचन मदद और जो लोग जानवरों के प्रति उदासीन नहीं हैं के लिए देखभाल कर सकते हैं। पक्षीः कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने? अधिकांश सर्दियों शहर में रहने वाले पक्षियों की कुछ प्रजातियों पीड़ित - अगले हमें। जंगलों और खेतों में रहने वाले जंगली जानवरों, आमतौर पर सर्दियों के लिए शेयरों बनाने , तो शहर में रहने वाले पक्षियों, ठीक से तंग आ नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, एक ही कबूतरों गौरैयों, bullfinches साथ chickadees कचरे को खाते हैं नहीं कर सकते। यह भोजन सही प्रकार है, क्योंकि वे नहीं सर्वाहारी हैं, कौवे की तरह नहीं है। नतीजतन, वे और अधिक मरने की संभावना है, खासकर जब attics कसकर बंद हो जाती हैं, कहीं नहीं गर्म है वे है। इन जानवरों में, तेजी से गर्मी हस्तांतरण, और वे के रूप में संतुष्ट हैं, अच्छा लग रहा है। और जैसे ही वे भूखे हैं, वे अपनी ताकत खोने के लिए फ्रीज शुरू करते हैं। कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने? सबसे अच्छा मदद एक नियमित रूप से निषेचन पक्षियों है। हम, फीडर लटका करने की जरूरत है, लेकिन ट्रंक पर नहीं और शाखाओं पर - खिड़कियों के पास। भूख पक्षियों भोजन के आदी और खतरे की सूचना नहीं है, वे शिकार करने के लिए, उदाहरण के लिए एक ही बिल्ली के लिए गिर सकता है,। और उन्हें बेहतर बीज , सूखे जामुन, रोटी के टुकड़ों को खिलाने के लिए, यदि धन अनुमति देते हैं, आप अनाज मिश्रण एक दुकान में खरीद सकते हैं। यह कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने, बताने के लिए है कि जंगली जानवरों विशेष शिकार खेत है, जहां वन योजना के अनुसार काम कर रहे हैं कर रहे हैं के बारे में उल्लेख करने के लिए आवश्यक है, और के लिए अतिरिक्त चारा घास, टहनियाँ, यहां तक कि पत्थर में नमक का इस्तेमाल किया। स्तनधारी इन उत्पादों के बिना नहीं रह सकते हैं। इसलिए वन उन्हें गर्मी के लिए, बर्फ सबसे घने लुभाने क्योंकि वसंत में, और जानवरों के लिए भोजन के लिए देखो और अधिक उसके लिए मुश्किल है। सर्दियों में विशेष रूप से कठिन जंगल, बड़े पशु हो जाता है जब एक परत - बर्फ पर एक कठिन परत पिघल गया है। उनके पैर, विफल हो सकता है अपने घावों को पेश, अपने तेज धार में कटौती, और वे अब शिकारियों से दूर चला सकते हैं। इसलिए, एल्क, हिरण और जंगली भैंसों रेंजरों भोजन के लिए भांग पर रोटी, अनाज, नमक टीले खिलाया। और फिर वहाँ जाते मानव सहायता की जरूरत है कि कर रहे हैं। और यह उन विद्यार्थियों को जो ठंड के मौसम में मुश्किल बाहरी स्थितियों में हुआ के भाग्य के बारे में पूछने के लिए महत्वपूर्ण है। हम पूरी तरह से घर खो के बारे में बात कर रहे हैं। वे किसी भी तरह, ओह कैसे नहीं आसान करने के लिए है क्योंकि वे गर्मी और निरंतर खिला के लिए और अधिक आदी रहे हैं। सामान्य तौर पर, कैसे सर्दियों में जानवरों की मदद करने, विस्तार द्वितीय श्रेणी में बच्चों के बाहर विश्व स्तर को बताओ। और यह सच है, यह बच्चों को प्रकृति के श्रद्धालु रवैया में एक बच्चे को लाने के लिए ही संभव है। इस प्रकार, छात्रों को सलाह दी जाती है, अगर वे सड़क में पाया, उदाहरण के लिए, कुत्ते के लिए, ठंड से कांप,, मीडिया घोषणाओं और इंटरनेट के माध्यम से अपने मालिक खोजने की कोशिश चित्र लेने, और इसकी विस्तृत विवरण के साथ पशु की तस्वीरें पोस्ट कर। इसके अलावा, यह सब से पहले फ़ीड और बेचारा गर्म करने के लिए उपयोगी होता है।
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25 अक्टूबर, 2021 को निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat Mission) को लागू करने के लिए एक राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee - NSC) का गठन किया गया है।
निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat Mission)
- NIPUN का अर्थ है "National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy"।
- यह मिशन जुलाई, 2021 में "स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग" द्वारा लांच किया गया था।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता में सार्वभौमिक दक्षता के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से मिशन शुरू किया गया था।
- NEP 2020 में 2026-27 तक कक्षा 3 के अंत तक प्रत्येक बच्चे को मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (foundational literacy & numeracy) में सार्वभौमिक दक्षता (universal proficiency) प्रदान करने की परिकल्पना की गई है।
राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee - NSC)
सरकार ने निपुण भारत मिशन को लागू करने के लिए "राष्ट्रीय संचालन समिति" की स्थापना की है। इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगी।
राष्ट्रीय संचालन समिति की स्थापना "मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता पर राष्ट्रीय मिशन" (National Mission on Foundational Literacy & Numeracy) की प्रगति की निगरानी के उद्देश्य से की गई है। यह समिति नीतिगत मुद्दों पर मार्गदर्शन भी प्रदान करेगी और 2026-27 में वांछित लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगी।
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पच्चीस अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को निपुण भारत मिशन को लागू करने के लिए एक राष्ट्रीय संचालन समिति का गठन किया गया है। निपुण भारत मिशन - NIPUN का अर्थ है "National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy"। - यह मिशन जुलाई, दो हज़ार इक्कीस में "स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग" द्वारा लांच किया गया था। - राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के अनुसार मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता में सार्वभौमिक दक्षता के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से मिशन शुरू किया गया था। - NEP दो हज़ार बीस में दो हज़ार छब्बीस-सत्ताईस तक कक्षा तीन के अंत तक प्रत्येक बच्चे को मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता में सार्वभौमिक दक्षता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। राष्ट्रीय संचालन समिति सरकार ने निपुण भारत मिशन को लागू करने के लिए "राष्ट्रीय संचालन समिति" की स्थापना की है। इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगी। राष्ट्रीय संचालन समिति की स्थापना "मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता पर राष्ट्रीय मिशन" की प्रगति की निगरानी के उद्देश्य से की गई है। यह समिति नीतिगत मुद्दों पर मार्गदर्शन भी प्रदान करेगी और दो हज़ार छब्बीस-सत्ताईस में वांछित लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगी।
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के दिल्ली पहुंचने से लगाया जा सकता है। ममता बनर्जी बुधवार को दिल्ली पहुंची और दिल्ली पहुंचकर आम आदमी पार्टी की रैली में शामिल हुई। इसके बाद देर शाम तक एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के घर पर हुई विपक्षी बैठक में शिरकत की ममता की दिल्ली में बढ़ती सक्रियता से, लेफ्ट कुछ चिंतित नजर आ रहा है।
लड़ेगी।
सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की जरूरत है।
पहुंचाना चाहती है जिसका साक्ष्य भाजपा कार्यकाल में हुई ममता बनर्जी की तरक्की है।
भाजपा ने 48 सीटों पर विजय प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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के दिल्ली पहुंचने से लगाया जा सकता है। ममता बनर्जी बुधवार को दिल्ली पहुंची और दिल्ली पहुंचकर आम आदमी पार्टी की रैली में शामिल हुई। इसके बाद देर शाम तक एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के घर पर हुई विपक्षी बैठक में शिरकत की ममता की दिल्ली में बढ़ती सक्रियता से, लेफ्ट कुछ चिंतित नजर आ रहा है। लड़ेगी। सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की जरूरत है। पहुंचाना चाहती है जिसका साक्ष्य भाजपा कार्यकाल में हुई ममता बनर्जी की तरक्की है। भाजपा ने अड़तालीस सीटों पर विजय प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
ब्रह्मा सनातन धर्म के अनुसार सृजन के देव हैं। हिन्दू दर्शनशास्त्रों में ३ प्रमुख देव बताये गये है जिसमें ब्रह्मा सृष्टि के सर्जक, विष्णु पालक और महेश विलय करने वाले देवता हैं। व्यासलिखित पुराणों में ब्रह्मा का वर्णन किया गया है कि उनके चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं।Bruce Sullivan (1999), Seer of the Fifth Veda: Kr̥ṣṇa Dvaipāyana Vyāsa in the Mahābhārata, Motilal Banarsidass, ISBN 978-8120816763, pages 85-86 ब्रह्मा को स्वयंभू (स्वयं जन्म लेने वाला) और चार वेदों का निर्माता भी कहा जाता है।Barbara Holdrege (2012), Veda and Torah: Transcending the Textuality of Scripture, State University of New York Press, ISBN 978-1438406954, pages 88-89 हिन्दू विश्वास के अनुसार हर वेद ब्रह्मा के एक मुँह से निकला था। ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी सरस्वती ब्रह्मा की पत्नी हैं। बहुत से पुराणों में ब्रह्मा की रचनात्मक गतिविधि उनसे बड़े किसी देव की मौजूदगी और शक्ति पर निर्भर करती है। ये हिन्दू दर्शनशास्त्र की परम सत्य की आध्यात्मिक संकल्पना ब्रह्मन् से अलग हैं।James Lochtefeld, Brahman, The Illustrated Encyclopedia of Hinduism, Vol. मत्स्यावतार Matsyavatar भगवान विष्णु का अवतार है जो उनके दस अवतारों में से एक है। विष्णु को पालनकर्ता कहा जाता है अतः वह ब्रह्मांड की रक्षा हेतु विविध अवतार धरते हैं। .
ब्रह्मा और मत्स्य अवतार आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): विष्णु, वेद।
वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और शिव को माना जाता है। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, वहीं शिव को संहारक माना गया है। मूलतः विष्णु और शिव तथा ब्रह्मा भी एक ही हैं यह मान्यता भी बहुशः स्वीकृत रही है। न्याय को प्रश्रय, अन्याय के विनाश तथा जीव (मानव) को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में विष्णु मान्य रहे हैं। पुराणानुसार विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। कामदेव विष्णु जी का पुत्र था। विष्णु का निवास क्षीर सागर है। उनका शयन शेषनाग के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं। वह अपने नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म (कमल), अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा (कौमोदकी),ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख (पाञ्चजन्य) और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र(सुदर्शन) धारण करते हैं। शेष शय्या पर आसीन विष्णु, लक्ष्मी व ब्रह्मा के साथ, छंब पहाड़ी शैली के एक लघुचित्र में। .
वेद प्राचीन भारत के पवितत्रतम साहित्य हैं जो हिन्दुओं के प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ भी हैं। भारतीय संस्कृति में वेद सनातन वर्णाश्रम धर्म के, मूल और सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं, जो ईश्वर की वाणी है। ये विश्व के उन प्राचीनतम धार्मिक ग्रंथों में हैं जिनके पवित्र मन्त्र आज भी बड़ी आस्था और श्रद्धा से पढ़े और सुने जाते हैं। 'वेद' शब्द संस्कृत भाषा के विद् शब्द से बना है। इस तरह वेद का शाब्दिक अर्थ 'ज्ञान के ग्रंथ' है। इसी धातु से 'विदित' (जाना हुआ), 'विद्या' (ज्ञान), 'विद्वान' (ज्ञानी) जैसे शब्द आए हैं। आज 'चतुर्वेद' के रूप में ज्ञात इन ग्रंथों का विवरण इस प्रकार है -.
ब्रह्मा 21 संबंध है और मत्स्य अवतार 18 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 5.13% है = 2 / (21 + 18)।
यह लेख ब्रह्मा और मत्स्य अवतार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ब्रह्मा सनातन धर्म के अनुसार सृजन के देव हैं। हिन्दू दर्शनशास्त्रों में तीन प्रमुख देव बताये गये है जिसमें ब्रह्मा सृष्टि के सर्जक, विष्णु पालक और महेश विलय करने वाले देवता हैं। व्यासलिखित पुराणों में ब्रह्मा का वर्णन किया गया है कि उनके चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं।Bruce Sullivan , Seer of the Fifth Veda: Kr̥ṣṇa Dvaipāyana Vyāsa in the Mahābhārata, Motilal Banarsidass, ISBN नौ सौ अठहत्तर- आठ एक दो शून्य आठ एक छः सात छः तीन, pages पचासी-छियासी ब्रह्मा को स्वयंभू और चार वेदों का निर्माता भी कहा जाता है।Barbara Holdrege , Veda and Torah: Transcending the Textuality of Scripture, State University of New York Press, ISBN नौ सौ अठहत्तर- एक चार तीन आठ चार शून्य छः नौ पाँच चार, pages अठासी-नवासी हिन्दू विश्वास के अनुसार हर वेद ब्रह्मा के एक मुँह से निकला था। ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी सरस्वती ब्रह्मा की पत्नी हैं। बहुत से पुराणों में ब्रह्मा की रचनात्मक गतिविधि उनसे बड़े किसी देव की मौजूदगी और शक्ति पर निर्भर करती है। ये हिन्दू दर्शनशास्त्र की परम सत्य की आध्यात्मिक संकल्पना ब्रह्मन् से अलग हैं।James Lochtefeld, Brahman, The Illustrated Encyclopedia of Hinduism, Vol. मत्स्यावतार Matsyavatar भगवान विष्णु का अवतार है जो उनके दस अवतारों में से एक है। विष्णु को पालनकर्ता कहा जाता है अतः वह ब्रह्मांड की रक्षा हेतु विविध अवतार धरते हैं। . ब्रह्मा और मत्स्य अवतार आम में दो बातें हैं : विष्णु, वेद। वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रन्थों में बहुमान्य पुराणानुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और शिव को माना जाता है। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, वहीं शिव को संहारक माना गया है। मूलतः विष्णु और शिव तथा ब्रह्मा भी एक ही हैं यह मान्यता भी बहुशः स्वीकृत रही है। न्याय को प्रश्रय, अन्याय के विनाश तथा जीव को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में विष्णु मान्य रहे हैं। पुराणानुसार विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। कामदेव विष्णु जी का पुत्र था। विष्णु का निवास क्षीर सागर है। उनका शयन शेषनाग के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं। वह अपने नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म , अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा ,ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र धारण करते हैं। शेष शय्या पर आसीन विष्णु, लक्ष्मी व ब्रह्मा के साथ, छंब पहाड़ी शैली के एक लघुचित्र में। . वेद प्राचीन भारत के पवितत्रतम साहित्य हैं जो हिन्दुओं के प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ भी हैं। भारतीय संस्कृति में वेद सनातन वर्णाश्रम धर्म के, मूल और सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं, जो ईश्वर की वाणी है। ये विश्व के उन प्राचीनतम धार्मिक ग्रंथों में हैं जिनके पवित्र मन्त्र आज भी बड़ी आस्था और श्रद्धा से पढ़े और सुने जाते हैं। 'वेद' शब्द संस्कृत भाषा के विद् शब्द से बना है। इस तरह वेद का शाब्दिक अर्थ 'ज्ञान के ग्रंथ' है। इसी धातु से 'विदित' , 'विद्या' , 'विद्वान' जैसे शब्द आए हैं। आज 'चतुर्वेद' के रूप में ज्ञात इन ग्रंथों का विवरण इस प्रकार है -. ब्रह्मा इक्कीस संबंध है और मत्स्य अवतार अट्ठारह है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक पाँच.तेरह% है = दो / । यह लेख ब्रह्मा और मत्स्य अवतार के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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प्रीलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में देश में COVID-19 के संक्रमण को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं को देखकर भविष्य में इस वर्ग को ऐसी चुनौतियों से बचाने के लिये एक बेहतर विधिक प्रणाली की आवश्यकता महसूस हुई है।
मुख्य बिंदुः
- 25 मार्च, 2020 को देश में COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के बाद देश के कई हिस्सों में प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हुई है।
- इस दौरान मज़दूरों को रोज़गार, आश्रय, भोजन आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
- इस दौरान देश के कई हिस्सों में सरकारी व्यवस्था इन मज़दूरों की समस्या का समाधान करने में उतनी सफल नहीं रही है।
- इससे पहले भी देश में प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं के समाधान करने के लिये कई कानून जैसे-' अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979 (Inter-State Migrant Workmen Act- ISMW), 1979', और 'असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, {The Unorganised Workers' Social Security (UWSS) Act}, 2008' बनाए गए, परंतु कई कारणों से ये अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहे हैं।
अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979:
- प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं के समाधान के लिये बने कानूनी प्रावधानों में से एक वर्ष 1979 में लागू 'अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979' है।
- ISMW अधिनियम के अनुसार, अंतर्राज्यीय प्रवासी मज़दूर वह व्यक्ति है जो किसी ठेकेदार (Contractor) द्वारा या ठेकेदार के माध्यम से भर्ती किया गया हो।
- साथ ही यह अधिनियम केवल उन संस्थानों पर लागू होता है जहाँ पाँच या इससे अधिक प्रवासी कर्मचारी कार्यरत हों।
- गौरतलब है कि, देश के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत अधिकांश प्रवासी मज़दूर किसी पंजीकृत ठेकेदार के माध्यम से नहीं भर्ती किये जाते ऐसे में प्रवासी मज़दूरों की एक बड़ी आबादी इस अधिनियम का लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाती है।
- इसके अतिरिक्त यह अधिनियम 5 से कम प्रवासी कर्मचारियों वाले संस्थानों पर लागू नहीं होता अतः यह अधिनियम ऐसे संस्थानों में कार्यरत प्रवासी मज़दूरों की सहायता करने में असफल रहा है।
प्रवासी मज़दूरों के हितों की रक्षा के लिये अन्य कानूनी प्रावधानः
- प्रवासी मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य लाभ प्रदान करने के लिये वर्ष 2008 में 'असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008' लागू किया गया था।
- इस अधिनियम में असंगठित मज़दूर की परिभाषा के तहत घर पर रहकर कार्य करने वाले लोग, स्वरोज़गार से जुड़े लोग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े दिहाड़ी मज़दूरों को शामिल किया गया है।
- इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने हाल के वर्षों में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाओं को लागू किया है।
- असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों को वृद्धावस्था में संरक्षण प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maan-dhan Yojana)।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत अटल पेंशन योजना।
- आसान शर्तों पर इंश्योरेंस उपलब्ध कराने के लिये 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' (Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana- PMJJBY)।
- दुर्घटना बीमा के लिये प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana) आदि।
- UWSS अधिनियम के तहत दो महत्त्वपूर्ण व्यवस्थाएँ दी गई हैंः
- आँकड़ों से पता चलता है कि सरकार के कई प्रयासों के बावज़ूद भी ये योजनायें अपने अपेक्षित लक्ष्य प्राप्त करने में उतनी सफल नहीं रही हैं।
सरकारी योजनाओं की असफलता के कारणः
- सरकार द्वारा लागू अधिकांश योजनाओं में कई योजनाएँ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत एक बड़े श्रमिक वर्ग तक पहुँचने में असफल रही हैं।
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और इस क्षेत्र के रोज़गार के संबंध में एक व्यापक केंद्रीय डेटा के अभाव में सरकारें मज़दूरों की समस्याओं का आकलन करने में असफल रही हैं।
- सरकार की कई योजनाएँ नागरिकों को उनके राज्यों में ही उपलब्ध होती हैं ऐसे में प्रवासी मज़दूरों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।
- असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाले मज़दूरों को अधिकांशतः सरकार की योजनाओं की जानकारी नहीं होती है, ऐसे में जागरूकता और परामर्श के अभाव में बहुत से पात्र लोग भी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते।
- वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर सक्रिय अधिनियमों में आवश्यक परिवर्तन किये जाने चाहिये।
- कर्मचारियों को आधार कार्ड से जुड़े यूनीक वर्कर्स आइडेंटीफिकेशन नंबर (Unique Worker's Identification No.) प्रदान कर कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
- प्रवासी मज़दूरों के लिये देश के हर राज्य में मनरेगा, उज्ज्वला, सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी योजनाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिये।
- प्रवासी मज़दूरों के गृह राज्य, आयु, कार्य करने की क्षमता के आधार पर एक विस्तृत डेटाबेस स्थापित किया जाना चाहिये।
- राज्यों के बीच प्रवासी मज़दूरों से जुड़े विवादों के समाधान हेतु संविधान के अनुच्छेद-263 के तहत स्थापित 'अंतर्राज्यीय परिषद्' (The Inter-State Council-ISC) की सहायता ली जा सकती है।
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प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में देश में COVID-उन्नीस के संक्रमण को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं को देखकर भविष्य में इस वर्ग को ऐसी चुनौतियों से बचाने के लिये एक बेहतर विधिक प्रणाली की आवश्यकता महसूस हुई है। मुख्य बिंदुः - पच्चीस मार्च, दो हज़ार बीस को देश में COVID-उन्नीस के प्रसार को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के बाद देश के कई हिस्सों में प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हुई है। - इस दौरान मज़दूरों को रोज़गार, आश्रय, भोजन आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। - इस दौरान देश के कई हिस्सों में सरकारी व्यवस्था इन मज़दूरों की समस्या का समाधान करने में उतनी सफल नहीं रही है। - इससे पहले भी देश में प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं के समाधान करने के लिये कई कानून जैसे-' अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी , एक हज़ार नौ सौ उन्यासी', और 'असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, {The Unorganised Workers' Social Security Act}, दो हज़ार आठ' बनाए गए, परंतु कई कारणों से ये अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहे हैं। अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी: - प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं के समाधान के लिये बने कानूनी प्रावधानों में से एक वर्ष एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में लागू 'अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी' है। - ISMW अधिनियम के अनुसार, अंतर्राज्यीय प्रवासी मज़दूर वह व्यक्ति है जो किसी ठेकेदार द्वारा या ठेकेदार के माध्यम से भर्ती किया गया हो। - साथ ही यह अधिनियम केवल उन संस्थानों पर लागू होता है जहाँ पाँच या इससे अधिक प्रवासी कर्मचारी कार्यरत हों। - गौरतलब है कि, देश के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत अधिकांश प्रवासी मज़दूर किसी पंजीकृत ठेकेदार के माध्यम से नहीं भर्ती किये जाते ऐसे में प्रवासी मज़दूरों की एक बड़ी आबादी इस अधिनियम का लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाती है। - इसके अतिरिक्त यह अधिनियम पाँच से कम प्रवासी कर्मचारियों वाले संस्थानों पर लागू नहीं होता अतः यह अधिनियम ऐसे संस्थानों में कार्यरत प्रवासी मज़दूरों की सहायता करने में असफल रहा है। प्रवासी मज़दूरों के हितों की रक्षा के लिये अन्य कानूनी प्रावधानः - प्रवासी मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य लाभ प्रदान करने के लिये वर्ष दो हज़ार आठ में 'असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, दो हज़ार आठ' लागू किया गया था। - इस अधिनियम में असंगठित मज़दूर की परिभाषा के तहत घर पर रहकर कार्य करने वाले लोग, स्वरोज़गार से जुड़े लोग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े दिहाड़ी मज़दूरों को शामिल किया गया है। - इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने हाल के वर्षों में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाओं को लागू किया है। - असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों को वृद्धावस्था में संरक्षण प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना । - राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत अटल पेंशन योजना। - आसान शर्तों पर इंश्योरेंस उपलब्ध कराने के लिये 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' । - दुर्घटना बीमा के लिये प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना आदि। - UWSS अधिनियम के तहत दो महत्त्वपूर्ण व्यवस्थाएँ दी गई हैंः - आँकड़ों से पता चलता है कि सरकार के कई प्रयासों के बावज़ूद भी ये योजनायें अपने अपेक्षित लक्ष्य प्राप्त करने में उतनी सफल नहीं रही हैं। सरकारी योजनाओं की असफलता के कारणः - सरकार द्वारा लागू अधिकांश योजनाओं में कई योजनाएँ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत एक बड़े श्रमिक वर्ग तक पहुँचने में असफल रही हैं। - असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और इस क्षेत्र के रोज़गार के संबंध में एक व्यापक केंद्रीय डेटा के अभाव में सरकारें मज़दूरों की समस्याओं का आकलन करने में असफल रही हैं। - सरकार की कई योजनाएँ नागरिकों को उनके राज्यों में ही उपलब्ध होती हैं ऐसे में प्रवासी मज़दूरों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। - असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाले मज़दूरों को अधिकांशतः सरकार की योजनाओं की जानकारी नहीं होती है, ऐसे में जागरूकता और परामर्श के अभाव में बहुत से पात्र लोग भी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। - वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर सक्रिय अधिनियमों में आवश्यक परिवर्तन किये जाने चाहिये। - कर्मचारियों को आधार कार्ड से जुड़े यूनीक वर्कर्स आइडेंटीफिकेशन नंबर प्रदान कर कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। - प्रवासी मज़दूरों के लिये देश के हर राज्य में मनरेगा, उज्ज्वला, सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी योजनाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिये। - प्रवासी मज़दूरों के गृह राज्य, आयु, कार्य करने की क्षमता के आधार पर एक विस्तृत डेटाबेस स्थापित किया जाना चाहिये। - राज्यों के बीच प्रवासी मज़दूरों से जुड़े विवादों के समाधान हेतु संविधान के अनुच्छेद-दो सौ तिरेसठ के तहत स्थापित 'अंतर्राज्यीय परिषद्' की सहायता ली जा सकती है।
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FD Interest Rate: आज हम आपको उन प्राइवेट बैंकों के बारे में बताएंगे जो 5 साल की जमा पूंजी पर सबसे ज्यादा ब्याज देते हैं। ब्याज दर 4. 40 प्रतिशत से 6. 50 प्रतिशत तक है। इन निजी बैंकों में डीसीबी बैंक, इंडसइंड बैंक, आरबीएल बैंक, यस बैंक शामिल हैं। निवेश को सुरक्षित रखने के लिए लोग सरकारी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट FD स्कीम शुरू करते हैं। लेकिन जब रिटर्न की बात आती है तो छोटे बचत बैंक या गैर-वित्तीय संस्थान अधिक लाभ देते हैं।
एफडी ब्याज दर में कटौती क्योंः
रिजर्व बैंक ने तब से रेपो दर को अपरिवर्तित 4 प्रतिशत पर तय कर दिया है। इसके बाद से बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें घटा दी हैं। रेपो रेट पिछले एक साल से 4 फीसदी पर अटका हुआ है. इसका बड़ा असर एफडी की ब्याज दर पर देखने को मिल रहा है। जब से एफडी रिटर्न पूरी तरह से कर योग्य हो गया है, तब से एफडी आय में और भी गिरावट आ रही है। इससे निवेशक अपनी जमा पूंजी और रिटर्न को लेकर चिंतित हैं. इनमें देश के कई प्राइवेट बैंक ऐसे हैं जो रेपो रेट के असर की चिंता किए बिना निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे रहे हैं।
FD पर ऐसे कमाएं मोटा रिटर्नः
FD पर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिलाने में स्मॉल फाइनेंस बैंक अच्छी भूमिका निभा रहे हैं. ये बैंक और संस्थान औसत से ज्यादा ब्याज दर दे रहे हैं। निवेशक चाहे तो अपनी जमा पूंजी का कुछ हिस्सा इन निजी बैंकों की एफडी में जमा करा सकता है। यह योजना सरकारी बैंकों की नहीं है और निजी बैंकों द्वारा चलाई जाती है। इसलिए इसमें जोखिम की संभावना है लेकिन आप इसका इस्तेमाल अच्छा रिटर्न पाने के लिए कर सकते हैं। अगर निवेशक जोखिम से बचना चाहता है तो इसका भी एक उपाय है।
यह बैंक दे रहा ज्यादा ब्याजः
अगर आप एफडी में निवेश करना चाहते हैं तो नीचे दिखाए गए 10 निजी बैंकों में निवेश कर सकते हैं। इन बैंकों में यस बैंक, एक्सिस बैंक, आरबीएल बैंक और डीसीबी बैंक शामिल हैं। ये बैंक एफडी पर अच्छा ब्याज देते हैं। जिसमें आप 5 साल के लिए एफडी करवा सकते हैं और 4. 40 फीसदी से लेकर 6. 50 फीसदी तक का रिटर्न पा सकते हैं। ध्यान दें कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50 आधार अंकों का रिटर्न और भी अधिक है। यह नियम सभी बैंकों में लागू है। आइए जानते हैं इन 10 प्राइवेट बैंकों की एफडी दरों के बारे में।
नंबर 1 पर डीसीबी बैंकः
मुथूट फाइनेंस दे रहा है 8 फीसदी ब्याजः
छोटे बैंकों या गैर-वित्तीय संस्थानों की बात करें तो मुथूट फाइनेंस एफडी में 1 साल के लिए 8 फीसदी ब्याज मिलता है। उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 1 साल की एफडी पर 6. 75 फीसदी ब्याज दे रहा है। सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 3 साल से 5 साल की एफडी पर 6. 75% रिटर्न देता है। जना बैंक 3 साल 1 दिन से 5 साल तक की एफडी पर 6. 75 फीसदी ब्याज देता है। एसबीएम बैंक 1 साल से 1 साल 1 दिन की एफडी योजनाओं पर 6. 5 फीसदी ब्याज देता है। आरबीएल बैंक 5 साल की एफडी पर 6. 50 फीसदी ब्याज दे रहा है।
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FD Interest Rate: आज हम आपको उन प्राइवेट बैंकों के बारे में बताएंगे जो पाँच साल की जमा पूंजी पर सबसे ज्यादा ब्याज देते हैं। ब्याज दर चार. चालीस प्रतिशत से छः. पचास प्रतिशत तक है। इन निजी बैंकों में डीसीबी बैंक, इंडसइंड बैंक, आरबीएल बैंक, यस बैंक शामिल हैं। निवेश को सुरक्षित रखने के लिए लोग सरकारी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट FD स्कीम शुरू करते हैं। लेकिन जब रिटर्न की बात आती है तो छोटे बचत बैंक या गैर-वित्तीय संस्थान अधिक लाभ देते हैं। एफडी ब्याज दर में कटौती क्योंः रिजर्व बैंक ने तब से रेपो दर को अपरिवर्तित चार प्रतिशत पर तय कर दिया है। इसके बाद से बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें घटा दी हैं। रेपो रेट पिछले एक साल से चार फीसदी पर अटका हुआ है. इसका बड़ा असर एफडी की ब्याज दर पर देखने को मिल रहा है। जब से एफडी रिटर्न पूरी तरह से कर योग्य हो गया है, तब से एफडी आय में और भी गिरावट आ रही है। इससे निवेशक अपनी जमा पूंजी और रिटर्न को लेकर चिंतित हैं. इनमें देश के कई प्राइवेट बैंक ऐसे हैं जो रेपो रेट के असर की चिंता किए बिना निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे रहे हैं। FD पर ऐसे कमाएं मोटा रिटर्नः FD पर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिलाने में स्मॉल फाइनेंस बैंक अच्छी भूमिका निभा रहे हैं. ये बैंक और संस्थान औसत से ज्यादा ब्याज दर दे रहे हैं। निवेशक चाहे तो अपनी जमा पूंजी का कुछ हिस्सा इन निजी बैंकों की एफडी में जमा करा सकता है। यह योजना सरकारी बैंकों की नहीं है और निजी बैंकों द्वारा चलाई जाती है। इसलिए इसमें जोखिम की संभावना है लेकिन आप इसका इस्तेमाल अच्छा रिटर्न पाने के लिए कर सकते हैं। अगर निवेशक जोखिम से बचना चाहता है तो इसका भी एक उपाय है। यह बैंक दे रहा ज्यादा ब्याजः अगर आप एफडी में निवेश करना चाहते हैं तो नीचे दिखाए गए दस निजी बैंकों में निवेश कर सकते हैं। इन बैंकों में यस बैंक, एक्सिस बैंक, आरबीएल बैंक और डीसीबी बैंक शामिल हैं। ये बैंक एफडी पर अच्छा ब्याज देते हैं। जिसमें आप पाँच साल के लिए एफडी करवा सकते हैं और चार. चालीस फीसदी से लेकर छः. पचास फीसदी तक का रिटर्न पा सकते हैं। ध्यान दें कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए पचास आधार अंकों का रिटर्न और भी अधिक है। यह नियम सभी बैंकों में लागू है। आइए जानते हैं इन दस प्राइवेट बैंकों की एफडी दरों के बारे में। नंबर एक पर डीसीबी बैंकः मुथूट फाइनेंस दे रहा है आठ फीसदी ब्याजः छोटे बैंकों या गैर-वित्तीय संस्थानों की बात करें तो मुथूट फाइनेंस एफडी में एक साल के लिए आठ फीसदी ब्याज मिलता है। उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक एक साल की एफडी पर छः. पचहत्तर फीसदी ब्याज दे रहा है। सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक तीन साल से पाँच साल की एफडी पर छः. पचहत्तर% रिटर्न देता है। जना बैंक तीन साल एक दिन से पाँच साल तक की एफडी पर छः. पचहत्तर फीसदी ब्याज देता है। एसबीएम बैंक एक साल से एक साल एक दिन की एफडी योजनाओं पर छः. पाँच फीसदी ब्याज देता है। आरबीएल बैंक पाँच साल की एफडी पर छः. पचास फीसदी ब्याज दे रहा है।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और विराट कोहली एक बार फिर एक ही फ्रेम में नजर आए, दोनों हालिया तस्वीर में ब्रेकफास्ट का आनंद लेते दिखे हैं।
भारत ने द रोज बाउल में न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल के दूसरे दिन शनिवार को अपनी पहली पारी में लंच तक दो विकेट पर 69 रन बना लिए थे.
विराट कोहली और उनकी अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में मदद के लिये दो करोड़ रुपये का दान किया है।
यह 2008 का साल था जब बॉलीवुड अनुष्का शर्मा ने सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ रब ने बना दी जोड़ी के जरिए बॉलीवुड में शुरुआत की थी। अभिनेत्री ने अपनी इस जर्नी की शुरुआत बहुत पहले कर दी थी।
अनुष्का शर्मा ने अपने भाई और निर्माता कर्णेश शर्मा के साथ बचपन की एक प्यारी तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर की है। एक्ट्रेस की ये बचपन वाली फोटो सोशल मीडिया पर छा गई है।
आज नेशनल पेट डे है। इस दिन को उन बेजुबान जानवारों के लिए मनाया जाता है जो केवल प्यार की भाषा को समझते हैं। पेट्स सुख और दुख में आपके साथ खड़े रहते हैं और आपकी मनोदशा से आपको बेहतर समझते हैं।
इरफान खान के बेटे बाबिल खान, बॉलीवुड में डेब्यू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, उन्हें उनकी पहली फिल्म मिल गई है।
हाल ही में मां बनीं अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक मजेदार बिहाइंड-द-सीन (बीटीएस) वीडियो शेयर किया है, जहां उन्हें अपने क्रिकेटर पति विराट कोहली को उठाते हुए देखा जा सकता है।
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और उनकी पत्नी ने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी का नाम बताया है।
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के पिता बनने पर उनके भाई विकास कोहली ने उनकी बेटी की पहली झलक सोशल मीडिया पर शेयर की है। बहन भावना ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी।
अनुष्का शर्मा और विराट कोहली के नए साल के जश्न की इनसाइड तस्वीरें सभी का ध्यान खींच रही हैं।
विराट कोहली के साथ इस पार्टी में हार्दिक पांड्या और उनकी पत्नी नताशा स्तांकोविक के साथ कई और भी नजर आए। विराट कोहली ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।
कोहली के इस दमदार पारी के बाद उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने फ्लाइंग किस कर उनका अभिवादन किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर अनुष्का शर्मा की यह तस्वीर खूब वायरल हो रही है।
विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को लेकर दिए एक बयान के कारण पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर विवादों में आ गए हैं।
क्रिकेट और बॉलीवुड का गहरा नाता रहा है। जानें बॉलीवुड की ऐसी हीरोइनों के बारे में जिन्होंने क्रिकेटर्स का दिल चुराया और सात जन्मों के बंधन में बंध गईं।
अमूल इंडिया ने विराट और अनुष्का की कार्टून स्टाइल में तस्वीर शेयर की है और दोनों को अपने जीवन के इस नए अध्याय के लिए शुभकामनाएं दी।
अनुष्का शर्मा और विराट कोहली जल्द ही पेरेंट्स बनने वाले हैं। इस मौके पर आज हम आपको अनुष्का और विराट की सगाई, हल्दी और शादी से लेकर अब तक की वो तस्वीरें दिखातें है जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहीं।
टीम इंडिया और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के कप्तान विराट कोहली जल्द ही पिता बनने वाले हैं। दरअसल, कोहली ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर किया है, जिसमें उनका वाइफ अनुष्का शर्मा प्रेग्नेंट नजर आ रही है।
टीम इंडिया और रॉयल चैन्जर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा की एक तस्वीर शेयर की है। जिसमें वो प्रेग्नेंट नजर आ रही है।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और विराट कोहली एक बार फिर एक ही फ्रेम में नजर आए, दोनों हालिया तस्वीर में ब्रेकफास्ट का आनंद लेते दिखे हैं। भारत ने द रोज बाउल में न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के दूसरे दिन शनिवार को अपनी पहली पारी में लंच तक दो विकेट पर उनहत्तर रन बना लिए थे. विराट कोहली और उनकी अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा ने कोविड-उन्नीस महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में मदद के लिये दो करोड़ रुपये का दान किया है। यह दो हज़ार आठ का साल था जब बॉलीवुड अनुष्का शर्मा ने सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ रब ने बना दी जोड़ी के जरिए बॉलीवुड में शुरुआत की थी। अभिनेत्री ने अपनी इस जर्नी की शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। अनुष्का शर्मा ने अपने भाई और निर्माता कर्णेश शर्मा के साथ बचपन की एक प्यारी तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर की है। एक्ट्रेस की ये बचपन वाली फोटो सोशल मीडिया पर छा गई है। आज नेशनल पेट डे है। इस दिन को उन बेजुबान जानवारों के लिए मनाया जाता है जो केवल प्यार की भाषा को समझते हैं। पेट्स सुख और दुख में आपके साथ खड़े रहते हैं और आपकी मनोदशा से आपको बेहतर समझते हैं। इरफान खान के बेटे बाबिल खान, बॉलीवुड में डेब्यू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, उन्हें उनकी पहली फिल्म मिल गई है। हाल ही में मां बनीं अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक मजेदार बिहाइंड-द-सीन वीडियो शेयर किया है, जहां उन्हें अपने क्रिकेटर पति विराट कोहली को उठाते हुए देखा जा सकता है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और उनकी पत्नी ने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी का नाम बताया है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के पिता बनने पर उनके भाई विकास कोहली ने उनकी बेटी की पहली झलक सोशल मीडिया पर शेयर की है। बहन भावना ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली के नए साल के जश्न की इनसाइड तस्वीरें सभी का ध्यान खींच रही हैं। विराट कोहली के साथ इस पार्टी में हार्दिक पांड्या और उनकी पत्नी नताशा स्तांकोविक के साथ कई और भी नजर आए। विराट कोहली ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। कोहली के इस दमदार पारी के बाद उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने फ्लाइंग किस कर उनका अभिवादन किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर अनुष्का शर्मा की यह तस्वीर खूब वायरल हो रही है। विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को लेकर दिए एक बयान के कारण पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर विवादों में आ गए हैं। क्रिकेट और बॉलीवुड का गहरा नाता रहा है। जानें बॉलीवुड की ऐसी हीरोइनों के बारे में जिन्होंने क्रिकेटर्स का दिल चुराया और सात जन्मों के बंधन में बंध गईं। अमूल इंडिया ने विराट और अनुष्का की कार्टून स्टाइल में तस्वीर शेयर की है और दोनों को अपने जीवन के इस नए अध्याय के लिए शुभकामनाएं दी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली जल्द ही पेरेंट्स बनने वाले हैं। इस मौके पर आज हम आपको अनुष्का और विराट की सगाई, हल्दी और शादी से लेकर अब तक की वो तस्वीरें दिखातें है जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहीं। टीम इंडिया और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली जल्द ही पिता बनने वाले हैं। दरअसल, कोहली ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर किया है, जिसमें उनका वाइफ अनुष्का शर्मा प्रेग्नेंट नजर आ रही है। टीम इंडिया और रॉयल चैन्जर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा की एक तस्वीर शेयर की है। जिसमें वो प्रेग्नेंट नजर आ रही है।
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नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली वाशियों के इलाज के मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। ऐसे में यहां सभी लोग इलाज कर सकते है।
मायावती ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहाँ पूरे देश से लोग अपने जरूरी कार्यों से आते रहते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाता है तो उसको यह कहकर कि वह दिल्ली का नहीं है इसलिए दिल्ली सरकार उसका इलाज नहीं होने देगी, यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। केन्द्र को इसमें जरूर दखल देना चाहिये।
वहीं एक और ट्वीट में मायावती ने लिखा कि अनलाॅक-1 के तहत आज से जो भी स्थल व बाजार आदि खोले जा रहे हैं वहाँ जाने के लिए लोगों को सरकारी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिये। यदि बहुत जरूरी है तब ही वहाँ जाना चाहिये, वरना जाने से बचना चाहिये। बी. एस. पी की उनके हित में यही सलाह है।
आपको बता दें कि दिल्ली के सीएम ने रविवार को कहा था कि दिल्ली सरकार केंद्र के आदेश के मुताबिक सोमवार से दिल्ली में मॉल्स, रेस्टोरेंट,धार्मिक स्थल खोलने जा रही है। दिल्ली में होटल, बैंक्वेट हॉल को अभी नहीं खोला जा रहा है क्योंकि हो सकता है कि आने वाले वक्त में हमें इन्हें अस्पताल में बदलना पड़े।
दिल्ली सरकार के 10,000 बेड हैं, केंद्र सरकार के भी 10,000 बेड हैं। कैबिनेट ने ये फैसला लिया है कि दिल्ली के अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों के लिए रिज़र्व होने चााहिए, केंद्र सरकार के अस्पताल सबके लिए खुले रहेंगे।
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली वाशियों के इलाज के मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। ऐसे में यहां सभी लोग इलाज कर सकते है। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहाँ पूरे देश से लोग अपने जरूरी कार्यों से आते रहते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाता है तो उसको यह कहकर कि वह दिल्ली का नहीं है इसलिए दिल्ली सरकार उसका इलाज नहीं होने देगी, यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। केन्द्र को इसमें जरूर दखल देना चाहिये। वहीं एक और ट्वीट में मायावती ने लिखा कि अनलाॅक-एक के तहत आज से जो भी स्थल व बाजार आदि खोले जा रहे हैं वहाँ जाने के लिए लोगों को सरकारी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिये। यदि बहुत जरूरी है तब ही वहाँ जाना चाहिये, वरना जाने से बचना चाहिये। बी. एस. पी की उनके हित में यही सलाह है। आपको बता दें कि दिल्ली के सीएम ने रविवार को कहा था कि दिल्ली सरकार केंद्र के आदेश के मुताबिक सोमवार से दिल्ली में मॉल्स, रेस्टोरेंट,धार्मिक स्थल खोलने जा रही है। दिल्ली में होटल, बैंक्वेट हॉल को अभी नहीं खोला जा रहा है क्योंकि हो सकता है कि आने वाले वक्त में हमें इन्हें अस्पताल में बदलना पड़े। दिल्ली सरकार के दस,शून्य बेड हैं, केंद्र सरकार के भी दस,शून्य बेड हैं। कैबिनेट ने ये फैसला लिया है कि दिल्ली के अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों के लिए रिज़र्व होने चााहिए, केंद्र सरकार के अस्पताल सबके लिए खुले रहेंगे। As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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भीलवाड़ा । गंगापुर कस्बे में गर्मी में अकाल के दौरान पेयजल टेंकर चलाने के भूगतान को लेकर टेंकर मालिक जिला कलेक्ट्रट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे गये। उन्होंने भूगतान नहीं होने पर काली दिवाली मनाने का फैसला किया है।
टेंकर ठेकदार नवरत्न हिरण ने कहा कि इस भंयकर अकाल के समय में हमने गंगापुर,सहाडा व भीलवाड़ा क्षैत्र में पानी के टेंकरों की सप्लाई की थी। उसमें हम सभी ठेकदार,कुंऐ मालिक व टेंकर चालकों के मिलाकर कुल 2 से ढाई करोड रूपये का भुगतान बकाया चल रहा है। जिसके कारण अब हमारे सामने लेनदारों की भारी समस्या आ रही है। वह आए दिन हमें भुगतान के लिए परेशान कर रहे है। अब हमारे सामने भुख मरने तक की नौबत आ गयी है। इसके विरोध में हम जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दे रहे है। यदी अब भी हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो इस बार हम काली दिवाली मनायेगें।
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भीलवाड़ा । गंगापुर कस्बे में गर्मी में अकाल के दौरान पेयजल टेंकर चलाने के भूगतान को लेकर टेंकर मालिक जिला कलेक्ट्रट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे गये। उन्होंने भूगतान नहीं होने पर काली दिवाली मनाने का फैसला किया है। टेंकर ठेकदार नवरत्न हिरण ने कहा कि इस भंयकर अकाल के समय में हमने गंगापुर,सहाडा व भीलवाड़ा क्षैत्र में पानी के टेंकरों की सप्लाई की थी। उसमें हम सभी ठेकदार,कुंऐ मालिक व टेंकर चालकों के मिलाकर कुल दो से ढाई करोड रूपये का भुगतान बकाया चल रहा है। जिसके कारण अब हमारे सामने लेनदारों की भारी समस्या आ रही है। वह आए दिन हमें भुगतान के लिए परेशान कर रहे है। अब हमारे सामने भुख मरने तक की नौबत आ गयी है। इसके विरोध में हम जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दे रहे है। यदी अब भी हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो इस बार हम काली दिवाली मनायेगें।
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23 वर्षीय मुस्लिम युवक यामीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो का छाती पर टैटू गुदवाया है। उनका कहना है कि योगी उनके आदर्श हैं और ये उन्होंने खुद को तोहफा दिया है।
लखनऊ। ऐसे समय में राज्य में साम्प्रदायिकता के नाम पर बवाल और हिंसा हो रही है, यह खबर चेहरे पर मुस्कान ला देती है। 23 वर्षीय मुस्लिम युवक यामीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो का छाती पर टैटू गुदवाया है। उनका कहना है कि योगी उनके आदर्श हैं और उन्होंने इस महीने की शुरुआत में योगी के जन्मदिन पर टैटू बनवाकर खुद को तोहफा दिया है। सिद्दीकी फर्रुखाबाद और मैनपुरी जिलों की सीमा पर एक गांव में रहते हैं और यहां फुटवियर का कारोबार करते हैं।
सिद्दीकी ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि टैटू बनवाने के बाद से उन्हें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वह परेशान नहीं है। सिद्दीकी ने कहा कि मेरी इच्छा योगी आदित्यनाथ से मिलने और उन्हें टैटू दिखाने की है। मेरे मन में उनके लिए बहुत प्यार और सम्मान है। सत्ता में आने के बाद से उन्होंने उत्तर प्रदेश को बदल दिया है। कोई भेदभाव नहीं है और हिंदुओं और मुसलमानों को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
यामीन सिद्दीकी ने कहा कि दो महीने पहले मैंने एक न्यूज देखी उसमें योगी-मोदी की योजनाएं सर्व समाज के लिए हैं। वे अच्छी सरकार चला रहे हैं। इसी से मैं प्रभावित हुआ। ऐसा करके मुझे बहत अच्छा महसूस हो रहा है। सिद्दीकी ने ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा ईदगाह जैसे विवादास्पद मुद्दों पर बात करने से इनकार कर दिया। सिद्दीकी का कहना है कि यह अदालत को तय करना है।
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तेईस वर्षीय मुस्लिम युवक यामीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो का छाती पर टैटू गुदवाया है। उनका कहना है कि योगी उनके आदर्श हैं और ये उन्होंने खुद को तोहफा दिया है। लखनऊ। ऐसे समय में राज्य में साम्प्रदायिकता के नाम पर बवाल और हिंसा हो रही है, यह खबर चेहरे पर मुस्कान ला देती है। तेईस वर्षीय मुस्लिम युवक यामीन सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो का छाती पर टैटू गुदवाया है। उनका कहना है कि योगी उनके आदर्श हैं और उन्होंने इस महीने की शुरुआत में योगी के जन्मदिन पर टैटू बनवाकर खुद को तोहफा दिया है। सिद्दीकी फर्रुखाबाद और मैनपुरी जिलों की सीमा पर एक गांव में रहते हैं और यहां फुटवियर का कारोबार करते हैं। सिद्दीकी ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि टैटू बनवाने के बाद से उन्हें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वह परेशान नहीं है। सिद्दीकी ने कहा कि मेरी इच्छा योगी आदित्यनाथ से मिलने और उन्हें टैटू दिखाने की है। मेरे मन में उनके लिए बहुत प्यार और सम्मान है। सत्ता में आने के बाद से उन्होंने उत्तर प्रदेश को बदल दिया है। कोई भेदभाव नहीं है और हिंदुओं और मुसलमानों को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यामीन सिद्दीकी ने कहा कि दो महीने पहले मैंने एक न्यूज देखी उसमें योगी-मोदी की योजनाएं सर्व समाज के लिए हैं। वे अच्छी सरकार चला रहे हैं। इसी से मैं प्रभावित हुआ। ऐसा करके मुझे बहत अच्छा महसूस हो रहा है। सिद्दीकी ने ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा ईदगाह जैसे विवादास्पद मुद्दों पर बात करने से इनकार कर दिया। सिद्दीकी का कहना है कि यह अदालत को तय करना है।
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मधुरिमा का दिल मानो बल्लियों उछलने लगा।
उसने कभी नहीं सोचा था कि ज़िन्दगी में कभी ऐसे दिन भी आयेंगे। रंग भरे उमंग भरे!
किसने सोचा था कि जापान के तमाम बड़े शहरों से दूर निहायत ही अलग- थलग पड़ा ये छोटा सा कस्बा, और उसके किनारे पर बिल्कुल ग्रामीण इलाकों की तरह फ़ैला- बिखरा उसका ये फार्महाउस कभी इस तरह गुलज़ार भी होगा।
लेकिन तेन की मिलनसारिता और मेहनत के बदौलत ऐसे दिनों ने भी उसकी ज़िन्दगी के द्वार पर दस्तक दी जिनकी संभावित ख़ुशबू से ही उसके आने वाले दिन महक गए।
अपनी मां और पापा को ख़ुश देख कर नन्ही परी तनिष्मा भी इतराई सी फिरने लगी।
उसे उसकी मम्मी ने बताया कि तेरी नानी, मामा, मामी, चाचा सब यहां आयेंगे।
अब वो बेचारी क्या जाने कि नानी किसे कहते हैं? उससे मिलने तो उसकी दादियां ही कभी- कभी आया करती थीं। हां, नानी से वो भारत में मिली ज़रूर थी मगर तब की पुरानी बात उसे भला कब तक याद रहती?
बच्चे तो वैसे भी तोता- चश्म होते हैं, जो कुछ सामने रहे बस उसी को अपनी दुनिया समझते हैं।
और मामा- मामी - चाचा की परिभाषा तो वो इतनी ही समझी कि बहुत सारे लोग... ऐसे अंकल और आंटी का जमावड़ा जिन्हें मम्मा बहुत लाइक करती हैं और पापा बहुत रिस्पेक्ट करते हैं।
साथ ही वो ये भी समझ गई कि ये ग्रुप ऑफ़ पर्सन्स आते समय भी बहुत से गिफ्ट्स लाता है और जाते समय भी जिसके लोग बहुत सारी मनी देकर जाते हैं।
मधुरिमा ने दुगने उत्साह से घर को सजाना - संवारना शुरू किया। तरह - तरह के फूल, पौधे नर्सरी की मदद से लाती और उन्हें खुद रोपती, सींचती।
अपने बतख़, मुर्गाबियों, बटेरों के झुंड को ध्यान से देखती और सोचती कि इन उम्दा नस्ल के बेहतरीन पंछियों को देख कर उसके मेहमान कितने हर्षाएंगे!
उसने समय निकाल कर बाज़ार से शॉपिंग भी कर छोड़ी थी कि किसे क्या तोहफ़ा देना है, ताकि सबके आने से पहले ही वो सब तैयारी कर के रख सके।
ये मौक़ा बार - बार थोड़े ही आता है। जापान के सुदूर दक्षिण के इस इलाक़े में तो भारत के इन सैलानियों का आना "वन्स इन अ लाइफ टाइम" जैसा ही था। ये संयोग ही तो था कि मनन और मान्या की शादी अभी- अभी हुई थी और हनीमून ट्रिप के नाम पर वे लोग भी यहां आ रहे थे। वैसे उनके आने की असली वजह तो आगोश की मम्मी को कंपनी देने की ही रही।
और आगोश की मम्मी भी वैसे कहां आ पातीं। ये तो तेन ने ही ज़ोर देकर उन्हें बताया कि आगोश की जिस तरह की मूर्ति वो बनवाना चाहती हैं वो चाइना में ही नहीं, बल्कि जापान और कोरिया में भी ख़ूब बनने लगी है। बस, चटपट उन लोगों का कार्यक्रम बन गया।
एक बात सोच- सोच कर मधुरिमा बहुत शर्माती थी। उसका यह प्यारा सा घर उसके दोस्तों का हनीमून डेस्टिनेशन बनता जा रहा था किंतु वो ख़ुद? वो तो हनीमून के लिए यहां अब तक तरसती ही रही थी।
नहीं - नहीं, उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए। तेन उसके साथ है और उसे भरपूर प्यार करता है। उसकी हर इच्छा पूरी करता है, उसके आगे- पीछे फिरता है। दौलत का अंबार लगा है यहां। उसके पति तेन ने उसे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी।
अब अपने शरीर का कोई क्या करे? इस तकनीक संपन्न देश को वैसे भी वर्कॉलिक युवाओं का देश कहा जाता है। अपने काम के तनाव में डूबे यहां के लोग शरीर सुख के लिए तरह- तरह की दवाओं, तेलों और एक्सरसाइज पर ही निर्भर रहते हैं। ये लोग स्लिमफिट रहने और परिवार की जनसंख्या को लेकर भी बेहद सख़्त अनुशासन में रहना पसंद करते हैं।
तेन ही उसका सब कुछ है। अब और कुछ उसे सोचना भी नहीं चाहिए।
मधुरिमा के भीतर कोई लहर सी उठती और उसे सराबोर कर के निकल जाती। मधुरिमा के तन- मन का जैसे स्नान हो जाता।
हां! इस बार एक बात और थी। वह बिना कहे नहीं रहेगी मधुरिमा!
आर्यन ने उसे बताया था कि इस बार वह लंबे समय तक यहां रहने वाला है। उसकी एक फ़िल्म का क्लाइमैक्स शूट यहां जापान में ही होना था जिसके लिए ख़ुद तेन ने ही आगे बढ़ कर सारी व्यवस्था करवाई थी। इतना ही नहीं, बल्कि तेन ने शूटिंग के लिए नज़दीक के उस टापू पर अपनी खरीदी हुई जगह भी उपलब्ध कराई थी।
तेन ने दौड़ - भाग करके सब ज़रूरी परमीशन लेने का कष्ट भी उठाया था और आर्यन के प्रोड्यूसर को हर तरह का सहयोग देने का वादा भी किया था।
इसी भरोसे पर आर्यन यहां आ रहा था।
शुरू के कुछ दिन आर्यन जयपुर से आने वाले दल, अर्थात आंटी, मान्या और मनन के साथ भी वहां रहने वाला था।
मधुरिमा ने बेटी को उसका परिचय चाचा कह कर ही करवाया था।
मधुरिमा ये तय नहीं कर पा रही थी कि आर्यन के इतने लंबे स्टे से वो वास्तव में खुश थी या नहीं।
आर्यन इस फ़िल्म को अपने दिवंगत दोस्त आगोश को समर्पित करने की तैयारी कर चुका था।
आगोश की मम्मी का यहां शूटिंग देखने और आर्यन के साथ कुछ समय बिताने का कार्यक्रम इसी आधार पर बना था।
काश, मधुरिमा अपनी मम्मी से भी कह पाती कि इस समय आंटी के साथ कुछ समय के लिए यहां आने का कार्यक्रम वो भी बना लें।
लेकिन वो जानती थी कि मम्मी वहां घर अकेला छोड़ कर नहीं आएंगी।
कितना अंतर था भारत में और दूसरे उन्नत देशों में। भारत में लोग अपने घरों को सुख- सुविधा का गोदाम बना लेते हैं, फ़िर उसे अकेले छोड़ कर बाहर निकलने में डरते हैं। जबकि दूसरे देशों में लोग घर में केवल ज़रूरत का न्यूनतम सामान रखते हैं। कीमती चीज़ें बैंक आदि में रखते हैं।
मधुरिमा को शुरू- शुरू में यहां ये देख कर बड़ा अजीब सा लगता था कि लोग कुछ भी नया लाते ही पुराने को तुरंत दूसरे ज़रूरतमंद आदमी को दे देते हैं। वहां संग्रह वृत्ति नहीं होती।
भारत में यदि किसी घर में आठ- दस पैन रखे हों तो हो सकता है कि उनमें से दो- तीन ही चलते हों। लोग बल्ब या बैटरी बदलते हैं तो पुरानी बैटरी या फ्यूज्ड बल्ब को भी घर में ही रख लेते हैं।
प्रायः घरों में ऐसा सामान पाया जाता है जो दो- दो साल तक कोई काम नहीं आता, पर फेंका नहीं जाता।
ढीली ढेबरियां या बचा हुआ पेंट तक घर में सालों- साल रखा हुआ देखा जा सकता है।
घरों की गहरी सफ़ाई साल में एक बार उन भगवान के नाम पर होती है जो चौदह साल के लिए जंगल में जाते समय भी अपनी खड़ाऊं तक घर में ही छोड़ गए थे।
घर की साज- सज्जा ने मधुरिमा के दिन किसी उड़ते पंछी की भांति तेज़ी से निकाल दिए।
वह एक - एक दिन गिन रही थी।
उस दिन मधुरिमा हैरान रह गई जब उसने देखा कि तेन फ़ोन पर किसी से एक घंटे से भी ज्यादा समय से बातों में उलझा हुआ है।
नपा तुला बोलने वाला तेन किससे बात कर रहा था?
ओह! मुंबई से आर्यन का फ़ोन आया हुआ था।
आर्यन ने उसे बताया कि मुंबई पुलिस ने आगोश की मूर्ति चोरी का प्रकरण सुलझा लिया है।
मूर्ति बनाने वाले वहीद मियां का ही बड़ा बेटा ख़ुद चोर निकला जिसने तैयार मूर्ति कुछ तस्करों के हाथ बेच डाली और बाद में मूर्ति चोरी जाने का नाटक रच कर अपने बाप तक को मूर्ख बना दिया।
सारी बात सुन कर तेन ने भी दांतों तले अंगुली दबा ली।
संगमरमर के पत्थर से बनी इस मूर्ति का सौदा तस्करों ने पहले से ही कर लिया था। विचित्र बात ये थी कि इस मूर्ति में कुछ ख़ुफ़िया परिवर्तन इसे बनाने वाले कारीगर ने ख़ुद ही कर लिए।
मूर्ति के मुंह से लेकर पेट के दूसरे छोर तक आर- पार एक बेहद पतली खोखली नली बनाई गई थी। होठों और कमर के पिछले नीचे के भाग के बीच में खोखले भाग की बनावट ऐसी बनाई गई थी जिसमें भीतर अवैध सामान आसानी से छिपाया जा सके। ये कीमती ड्रग्स अथवा हीरों आदि के लिए निरापद कैरियर बन गई थी।
इस मूर्ति के मिलते ही तस्करों के खुफिया इरादे जाहिर हो गए थे। वो इसका इस्तेमाल स्मगलिंग में करने की तैयारी में थे।
वहीद मियां का बेटा सलाखों के पीछे था। किंतु इसे खरीदने की कोशिश करने वाले तस्कर अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए थे।
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मधुरिमा का दिल मानो बल्लियों उछलने लगा। उसने कभी नहीं सोचा था कि ज़िन्दगी में कभी ऐसे दिन भी आयेंगे। रंग भरे उमंग भरे! किसने सोचा था कि जापान के तमाम बड़े शहरों से दूर निहायत ही अलग- थलग पड़ा ये छोटा सा कस्बा, और उसके किनारे पर बिल्कुल ग्रामीण इलाकों की तरह फ़ैला- बिखरा उसका ये फार्महाउस कभी इस तरह गुलज़ार भी होगा। लेकिन तेन की मिलनसारिता और मेहनत के बदौलत ऐसे दिनों ने भी उसकी ज़िन्दगी के द्वार पर दस्तक दी जिनकी संभावित ख़ुशबू से ही उसके आने वाले दिन महक गए। अपनी मां और पापा को ख़ुश देख कर नन्ही परी तनिष्मा भी इतराई सी फिरने लगी। उसे उसकी मम्मी ने बताया कि तेरी नानी, मामा, मामी, चाचा सब यहां आयेंगे। अब वो बेचारी क्या जाने कि नानी किसे कहते हैं? उससे मिलने तो उसकी दादियां ही कभी- कभी आया करती थीं। हां, नानी से वो भारत में मिली ज़रूर थी मगर तब की पुरानी बात उसे भला कब तक याद रहती? बच्चे तो वैसे भी तोता- चश्म होते हैं, जो कुछ सामने रहे बस उसी को अपनी दुनिया समझते हैं। और मामा- मामी - चाचा की परिभाषा तो वो इतनी ही समझी कि बहुत सारे लोग... ऐसे अंकल और आंटी का जमावड़ा जिन्हें मम्मा बहुत लाइक करती हैं और पापा बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। साथ ही वो ये भी समझ गई कि ये ग्रुप ऑफ़ पर्सन्स आते समय भी बहुत से गिफ्ट्स लाता है और जाते समय भी जिसके लोग बहुत सारी मनी देकर जाते हैं। मधुरिमा ने दुगने उत्साह से घर को सजाना - संवारना शुरू किया। तरह - तरह के फूल, पौधे नर्सरी की मदद से लाती और उन्हें खुद रोपती, सींचती। अपने बतख़, मुर्गाबियों, बटेरों के झुंड को ध्यान से देखती और सोचती कि इन उम्दा नस्ल के बेहतरीन पंछियों को देख कर उसके मेहमान कितने हर्षाएंगे! उसने समय निकाल कर बाज़ार से शॉपिंग भी कर छोड़ी थी कि किसे क्या तोहफ़ा देना है, ताकि सबके आने से पहले ही वो सब तैयारी कर के रख सके। ये मौक़ा बार - बार थोड़े ही आता है। जापान के सुदूर दक्षिण के इस इलाक़े में तो भारत के इन सैलानियों का आना "वन्स इन अ लाइफ टाइम" जैसा ही था। ये संयोग ही तो था कि मनन और मान्या की शादी अभी- अभी हुई थी और हनीमून ट्रिप के नाम पर वे लोग भी यहां आ रहे थे। वैसे उनके आने की असली वजह तो आगोश की मम्मी को कंपनी देने की ही रही। और आगोश की मम्मी भी वैसे कहां आ पातीं। ये तो तेन ने ही ज़ोर देकर उन्हें बताया कि आगोश की जिस तरह की मूर्ति वो बनवाना चाहती हैं वो चाइना में ही नहीं, बल्कि जापान और कोरिया में भी ख़ूब बनने लगी है। बस, चटपट उन लोगों का कार्यक्रम बन गया। एक बात सोच- सोच कर मधुरिमा बहुत शर्माती थी। उसका यह प्यारा सा घर उसके दोस्तों का हनीमून डेस्टिनेशन बनता जा रहा था किंतु वो ख़ुद? वो तो हनीमून के लिए यहां अब तक तरसती ही रही थी। नहीं - नहीं, उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए। तेन उसके साथ है और उसे भरपूर प्यार करता है। उसकी हर इच्छा पूरी करता है, उसके आगे- पीछे फिरता है। दौलत का अंबार लगा है यहां। उसके पति तेन ने उसे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। अब अपने शरीर का कोई क्या करे? इस तकनीक संपन्न देश को वैसे भी वर्कॉलिक युवाओं का देश कहा जाता है। अपने काम के तनाव में डूबे यहां के लोग शरीर सुख के लिए तरह- तरह की दवाओं, तेलों और एक्सरसाइज पर ही निर्भर रहते हैं। ये लोग स्लिमफिट रहने और परिवार की जनसंख्या को लेकर भी बेहद सख़्त अनुशासन में रहना पसंद करते हैं। तेन ही उसका सब कुछ है। अब और कुछ उसे सोचना भी नहीं चाहिए। मधुरिमा के भीतर कोई लहर सी उठती और उसे सराबोर कर के निकल जाती। मधुरिमा के तन- मन का जैसे स्नान हो जाता। हां! इस बार एक बात और थी। वह बिना कहे नहीं रहेगी मधुरिमा! आर्यन ने उसे बताया था कि इस बार वह लंबे समय तक यहां रहने वाला है। उसकी एक फ़िल्म का क्लाइमैक्स शूट यहां जापान में ही होना था जिसके लिए ख़ुद तेन ने ही आगे बढ़ कर सारी व्यवस्था करवाई थी। इतना ही नहीं, बल्कि तेन ने शूटिंग के लिए नज़दीक के उस टापू पर अपनी खरीदी हुई जगह भी उपलब्ध कराई थी। तेन ने दौड़ - भाग करके सब ज़रूरी परमीशन लेने का कष्ट भी उठाया था और आर्यन के प्रोड्यूसर को हर तरह का सहयोग देने का वादा भी किया था। इसी भरोसे पर आर्यन यहां आ रहा था। शुरू के कुछ दिन आर्यन जयपुर से आने वाले दल, अर्थात आंटी, मान्या और मनन के साथ भी वहां रहने वाला था। मधुरिमा ने बेटी को उसका परिचय चाचा कह कर ही करवाया था। मधुरिमा ये तय नहीं कर पा रही थी कि आर्यन के इतने लंबे स्टे से वो वास्तव में खुश थी या नहीं। आर्यन इस फ़िल्म को अपने दिवंगत दोस्त आगोश को समर्पित करने की तैयारी कर चुका था। आगोश की मम्मी का यहां शूटिंग देखने और आर्यन के साथ कुछ समय बिताने का कार्यक्रम इसी आधार पर बना था। काश, मधुरिमा अपनी मम्मी से भी कह पाती कि इस समय आंटी के साथ कुछ समय के लिए यहां आने का कार्यक्रम वो भी बना लें। लेकिन वो जानती थी कि मम्मी वहां घर अकेला छोड़ कर नहीं आएंगी। कितना अंतर था भारत में और दूसरे उन्नत देशों में। भारत में लोग अपने घरों को सुख- सुविधा का गोदाम बना लेते हैं, फ़िर उसे अकेले छोड़ कर बाहर निकलने में डरते हैं। जबकि दूसरे देशों में लोग घर में केवल ज़रूरत का न्यूनतम सामान रखते हैं। कीमती चीज़ें बैंक आदि में रखते हैं। मधुरिमा को शुरू- शुरू में यहां ये देख कर बड़ा अजीब सा लगता था कि लोग कुछ भी नया लाते ही पुराने को तुरंत दूसरे ज़रूरतमंद आदमी को दे देते हैं। वहां संग्रह वृत्ति नहीं होती। भारत में यदि किसी घर में आठ- दस पैन रखे हों तो हो सकता है कि उनमें से दो- तीन ही चलते हों। लोग बल्ब या बैटरी बदलते हैं तो पुरानी बैटरी या फ्यूज्ड बल्ब को भी घर में ही रख लेते हैं। प्रायः घरों में ऐसा सामान पाया जाता है जो दो- दो साल तक कोई काम नहीं आता, पर फेंका नहीं जाता। ढीली ढेबरियां या बचा हुआ पेंट तक घर में सालों- साल रखा हुआ देखा जा सकता है। घरों की गहरी सफ़ाई साल में एक बार उन भगवान के नाम पर होती है जो चौदह साल के लिए जंगल में जाते समय भी अपनी खड़ाऊं तक घर में ही छोड़ गए थे। घर की साज- सज्जा ने मधुरिमा के दिन किसी उड़ते पंछी की भांति तेज़ी से निकाल दिए। वह एक - एक दिन गिन रही थी। उस दिन मधुरिमा हैरान रह गई जब उसने देखा कि तेन फ़ोन पर किसी से एक घंटे से भी ज्यादा समय से बातों में उलझा हुआ है। नपा तुला बोलने वाला तेन किससे बात कर रहा था? ओह! मुंबई से आर्यन का फ़ोन आया हुआ था। आर्यन ने उसे बताया कि मुंबई पुलिस ने आगोश की मूर्ति चोरी का प्रकरण सुलझा लिया है। मूर्ति बनाने वाले वहीद मियां का ही बड़ा बेटा ख़ुद चोर निकला जिसने तैयार मूर्ति कुछ तस्करों के हाथ बेच डाली और बाद में मूर्ति चोरी जाने का नाटक रच कर अपने बाप तक को मूर्ख बना दिया। सारी बात सुन कर तेन ने भी दांतों तले अंगुली दबा ली। संगमरमर के पत्थर से बनी इस मूर्ति का सौदा तस्करों ने पहले से ही कर लिया था। विचित्र बात ये थी कि इस मूर्ति में कुछ ख़ुफ़िया परिवर्तन इसे बनाने वाले कारीगर ने ख़ुद ही कर लिए। मूर्ति के मुंह से लेकर पेट के दूसरे छोर तक आर- पार एक बेहद पतली खोखली नली बनाई गई थी। होठों और कमर के पिछले नीचे के भाग के बीच में खोखले भाग की बनावट ऐसी बनाई गई थी जिसमें भीतर अवैध सामान आसानी से छिपाया जा सके। ये कीमती ड्रग्स अथवा हीरों आदि के लिए निरापद कैरियर बन गई थी। इस मूर्ति के मिलते ही तस्करों के खुफिया इरादे जाहिर हो गए थे। वो इसका इस्तेमाल स्मगलिंग में करने की तैयारी में थे। वहीद मियां का बेटा सलाखों के पीछे था। किंतु इसे खरीदने की कोशिश करने वाले तस्कर अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आए थे।
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चावल लगभग हर कोई खाना पसंद करता है। लोग भले की रात को चावल अवाइड कर देते हो लेकिन दोपहर के समय चावल तो जैसे उनकी फेवरेट डिश होती है। चावल खाने से पेट को भर ही जाता है लेकिन भूख भी बार-बार लगने लगती है। ज्यादा मात्रा में चावल का सेवन करने से शरीर को कई तरह से नुकसान भी पहुंच सकता है। अगर आप भी ज्यादा चावल का सेवन करते है तो इससे होने वाले नुकसान के बारे में जान लें।
एक कटोरी पके हुए चावल में कम से कम 10 चम्मच के बराबर कैलोरी होती है। रोजाना इसका सेवन करने से डायबिटीज का खतरा रहता है।
पके हुए चावल में कार्बोहाइट्रेड्स की मात्रा भी अधिक होती है जो वजन बढ़ाने का काम करती है।
वैसे तो चावल खाने से पेट जल्दी भर जाता है और यह आसानी से पच भी जाता है। लेकिन इनको खाने से बार-बार भूख लगने लगती है।
सफेद चावल में न्यूट्रिएंट्स की मात्रा काफी कम होती है, जिस वजह से शरीर को जरूरी विटामिन्स और न्यूट्रिएंट्स नहीं मिल पाते।
व्हाइट चावल में विटामिन सी की मात्रा कम होती है, जिस वजह से हड्डियों को कोई फायदा नहीं मिल पाता।
सफेद चावल में फाइबर्स की मात्रा काफी कम होती है। इनको ज्यादा मात्रा में खाने से पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।
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चावल लगभग हर कोई खाना पसंद करता है। लोग भले की रात को चावल अवाइड कर देते हो लेकिन दोपहर के समय चावल तो जैसे उनकी फेवरेट डिश होती है। चावल खाने से पेट को भर ही जाता है लेकिन भूख भी बार-बार लगने लगती है। ज्यादा मात्रा में चावल का सेवन करने से शरीर को कई तरह से नुकसान भी पहुंच सकता है। अगर आप भी ज्यादा चावल का सेवन करते है तो इससे होने वाले नुकसान के बारे में जान लें। एक कटोरी पके हुए चावल में कम से कम दस चम्मच के बराबर कैलोरी होती है। रोजाना इसका सेवन करने से डायबिटीज का खतरा रहता है। पके हुए चावल में कार्बोहाइट्रेड्स की मात्रा भी अधिक होती है जो वजन बढ़ाने का काम करती है। वैसे तो चावल खाने से पेट जल्दी भर जाता है और यह आसानी से पच भी जाता है। लेकिन इनको खाने से बार-बार भूख लगने लगती है। सफेद चावल में न्यूट्रिएंट्स की मात्रा काफी कम होती है, जिस वजह से शरीर को जरूरी विटामिन्स और न्यूट्रिएंट्स नहीं मिल पाते। व्हाइट चावल में विटामिन सी की मात्रा कम होती है, जिस वजह से हड्डियों को कोई फायदा नहीं मिल पाता। सफेद चावल में फाइबर्स की मात्रा काफी कम होती है। इनको ज्यादा मात्रा में खाने से पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।
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मीरजापुरः आयुक्त विन्ध्याचल मण्डल प्रीति शुुक्ला एवं आईजी विन्ध्याचल परिक्षेत्र पीयूष श्रीवास्तव ने 21 दिवसीय लॉकडाउन के स्थिति का जायजा लेने के लिये कलेक्ट्रेट में बनाये गये कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान आयुक्त द्वारा उपस्थिति कर्मचारियों से कंट्रोल रूम के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा कहा कि जो भी शिकायतें किसी भी माध्यम से प्राप्त हों उसे तत्काल संबंधित अधिकारी को अवगत कराया जाये तथा अधिकारी द्वारा शिकायतों का त्वरित समाधान किये जायें।
उन्होंने कहा कि यह भी प्रतिदिन रजिस्टर में दर्ज किया जाय। यह भी कहा कि उपस्थित कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिग का सही पालन करायें। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने शिकायत रजिस्टर में दर्ज दो-तीन शिकायतकर्ता के मोबाइल पर फोन लगाकर उनके निस्तारण के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिकायतकर्ता के द्वारा बताया गया कि उसके द्वारा राशन न मिलने का शिकायत थी। जिसे अपर जिलाधिकारी से वार्ता कर दूर कराया गया तथा कहा गया कि तत्काल राशन की दुकान पर जाये राशन मिल जायेगा।
मंडलायुक्त ने कहा कि राशन की दुकान पर जाने के लिये किसी को रोका न जाये। इसके पूर्व आयुक्त द्वारा नगर के दो राशन के दुकानों का निरीक्षण भी किया गया जहां पर उनके द्वारा वितरण प्रणाली का निरीक्षण किया और हिदायत दी कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर राशन दिया तथा घटतौली की शिकायत न आने पायें। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में लोग अपना राशन ले भी जा चुके हैं। आगे भी राशन की कहीं समस्या नहीं होने दी जायेगी।
मण्डलायुक्त ने लॉकडाउन के 10वें दिन सुरक्षा व्यवस्था को शुक्रवार के दिन अदा की जाने वाली जुमे की नमाज के दृष्टिगत थाना कोतवाली कटरा क्षेत्र के इमामबाड़ा जाकर जायजा लिया तथा सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश किये गये। कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिये विशेष रूप से सावधानियां बरतने व समय-समय से सेनेटाइजर होने एवं स्वच्छ रहने के लिए निर्देश दिया।
इस अवसर पर डीएम सुशील कुमार पटेल, एसपी डॉक्टर धर्मवीर सिंह, अपर जिलाधिकारी यूपी सिंह एसपी सिटी प्रकाश स्वरूप पांडेय, नगर मजिस्ट्रेट जगदम्बा सिंह के अलावा कंट्रोल रूम प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षण उपस्थित रहे।
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मीरजापुरः आयुक्त विन्ध्याचल मण्डल प्रीति शुुक्ला एवं आईजी विन्ध्याचल परिक्षेत्र पीयूष श्रीवास्तव ने इक्कीस दिवसीय लॉकडाउन के स्थिति का जायजा लेने के लिये कलेक्ट्रेट में बनाये गये कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान आयुक्त द्वारा उपस्थिति कर्मचारियों से कंट्रोल रूम के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा कहा कि जो भी शिकायतें किसी भी माध्यम से प्राप्त हों उसे तत्काल संबंधित अधिकारी को अवगत कराया जाये तथा अधिकारी द्वारा शिकायतों का त्वरित समाधान किये जायें। उन्होंने कहा कि यह भी प्रतिदिन रजिस्टर में दर्ज किया जाय। यह भी कहा कि उपस्थित कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिग का सही पालन करायें। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने शिकायत रजिस्टर में दर्ज दो-तीन शिकायतकर्ता के मोबाइल पर फोन लगाकर उनके निस्तारण के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिकायतकर्ता के द्वारा बताया गया कि उसके द्वारा राशन न मिलने का शिकायत थी। जिसे अपर जिलाधिकारी से वार्ता कर दूर कराया गया तथा कहा गया कि तत्काल राशन की दुकान पर जाये राशन मिल जायेगा। मंडलायुक्त ने कहा कि राशन की दुकान पर जाने के लिये किसी को रोका न जाये। इसके पूर्व आयुक्त द्वारा नगर के दो राशन के दुकानों का निरीक्षण भी किया गया जहां पर उनके द्वारा वितरण प्रणाली का निरीक्षण किया और हिदायत दी कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर राशन दिया तथा घटतौली की शिकायत न आने पायें। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में लोग अपना राशन ले भी जा चुके हैं। आगे भी राशन की कहीं समस्या नहीं होने दी जायेगी। मण्डलायुक्त ने लॉकडाउन के दसवें दिन सुरक्षा व्यवस्था को शुक्रवार के दिन अदा की जाने वाली जुमे की नमाज के दृष्टिगत थाना कोतवाली कटरा क्षेत्र के इमामबाड़ा जाकर जायजा लिया तथा सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश किये गये। कोविड-उन्नीस के संक्रमण से बचने के लिये विशेष रूप से सावधानियां बरतने व समय-समय से सेनेटाइजर होने एवं स्वच्छ रहने के लिए निर्देश दिया। इस अवसर पर डीएम सुशील कुमार पटेल, एसपी डॉक्टर धर्मवीर सिंह, अपर जिलाधिकारी यूपी सिंह एसपी सिटी प्रकाश स्वरूप पांडेय, नगर मजिस्ट्रेट जगदम्बा सिंह के अलावा कंट्रोल रूम प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षण उपस्थित रहे।
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Haryanvi Song : हरियाणवी डांसर सपना चौधरी (Sapna Choudhary) का आज कौन नहीं जानता। सपना चौधरी (Sapna Choudhary) ने अपनी मेहनत के दम पर अपने आप को एक ब्रांड बना लिया है। सपना चौधरी आज न सिर्फ हरियाणा बल्कि दुनिया भर में जानी जाती हैं। सपना चौधरी ने हरियाणा में एक से बढ़कर एक गाने दिए हैं। सपना चौधरी की शुरुआत भी काफी छोटे स्तर से हुई थी लेकिन वह कहा जाता है ना कि, आपकी मेहनत और लगन सच्ची हो तो आसमान भी झुक जाता है।
सपना (Sapna Choudhary) ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। आज उन्हें चाहने वालों की संख्या करोड़ों में है। बहरहाल हम बात करते हैं सपना चौधरी के हाल ही में वायरल हो रहे एक गाने के बारे में। सपना चौधरी का इन दिनों एक बेहतरीन गाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है।
सपना चौधरी का जो गाना वायरल हो रहा है। उस गाने के बोल हैं चांद से भी सूत्री Chand Se Bhi Suthri । सपना चौधरी का गाना सपना एंटरटेनमेंट चैनल से अपलोड किया गया है। सपना चौधरी के इस गाने के व्यूज के बारे में बात करें तो इस गाने को अब तक 33 लाख लोगों ने पसंद किया है और हजारों की संख्या में इस गाने को लाइक किया गया है।
गाना लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। सपना इस गाने में जबरदस्त तरीके से डांस कर रही है। और उन्हें देखने वाली भीड़ बेकाबू हुए जा रही है। हर कोई उनकी अदा का दीवाना हुए जा रहा है। सपना चौधरी के शो काफी मशहूर है। उनके शो में काफी भीड़ देखने को मिलती है।
इसके साथ ही वह हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब जैसे राज्यों में भी स्टेज शो करने जाती हैं। सपना चौधरी बिग बॉस का भी हिस्सा रह चुकी हैं। बिग बॉस से आने के बाद सपना चौधरी को कई सारी एल्बम में भी देखा गया है। इन दिनों सपना चौधरी का जलवा एक तरफा बना हुआ है।
नोटः हम आपके लिए ऐसे डांस वीडियो सिर्फ और सिर्फ आपके मनोरंजन के लिए लेकर आते हैं। ऐसे वीडियो से Timesbull. com का कोई लेना देना नहीं है।
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Haryanvi Song : हरियाणवी डांसर सपना चौधरी का आज कौन नहीं जानता। सपना चौधरी ने अपनी मेहनत के दम पर अपने आप को एक ब्रांड बना लिया है। सपना चौधरी आज न सिर्फ हरियाणा बल्कि दुनिया भर में जानी जाती हैं। सपना चौधरी ने हरियाणा में एक से बढ़कर एक गाने दिए हैं। सपना चौधरी की शुरुआत भी काफी छोटे स्तर से हुई थी लेकिन वह कहा जाता है ना कि, आपकी मेहनत और लगन सच्ची हो तो आसमान भी झुक जाता है। सपना ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। आज उन्हें चाहने वालों की संख्या करोड़ों में है। बहरहाल हम बात करते हैं सपना चौधरी के हाल ही में वायरल हो रहे एक गाने के बारे में। सपना चौधरी का इन दिनों एक बेहतरीन गाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है। सपना चौधरी का जो गाना वायरल हो रहा है। उस गाने के बोल हैं चांद से भी सूत्री Chand Se Bhi Suthri । सपना चौधरी का गाना सपना एंटरटेनमेंट चैनल से अपलोड किया गया है। सपना चौधरी के इस गाने के व्यूज के बारे में बात करें तो इस गाने को अब तक तैंतीस लाख लोगों ने पसंद किया है और हजारों की संख्या में इस गाने को लाइक किया गया है। गाना लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। सपना इस गाने में जबरदस्त तरीके से डांस कर रही है। और उन्हें देखने वाली भीड़ बेकाबू हुए जा रही है। हर कोई उनकी अदा का दीवाना हुए जा रहा है। सपना चौधरी के शो काफी मशहूर है। उनके शो में काफी भीड़ देखने को मिलती है। इसके साथ ही वह हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब जैसे राज्यों में भी स्टेज शो करने जाती हैं। सपना चौधरी बिग बॉस का भी हिस्सा रह चुकी हैं। बिग बॉस से आने के बाद सपना चौधरी को कई सारी एल्बम में भी देखा गया है। इन दिनों सपना चौधरी का जलवा एक तरफा बना हुआ है। नोटः हम आपके लिए ऐसे डांस वीडियो सिर्फ और सिर्फ आपके मनोरंजन के लिए लेकर आते हैं। ऐसे वीडियो से Timesbull. com का कोई लेना देना नहीं है।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी, कोई नई बात नहीं है। लेकिन, जिस पार्टी ने प्रतिपक्ष में रहकर, पक्ष को ललकारा था, आज वह भी उसी जाल में फंसे नजर आ रहे हैं। साफ है सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं लेकिन चरित्र नहीं। जब कच्चे तेल की कीमत कम थी, बावजूद इसके सरकार ने छूट नहीं दी, लेकिन जब तेल के दाम में वृद्धि हुई तो इसको बढ़ाया जा रहा। ऐसे में सरकार की मंशा साफ नजर आती है कि किस तरीके से मौके का फायदा उठाकर, आम आदमी की जेब पर प्रहार किया जाए और राज कोष को भरा जाए। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था पर कहीं महंगाई की मार न झेलनी पड़े।
23 फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय 'फिर बढ़ता कोरोना' लोगों की लापरवाही तथा कोरोना स्ट्रेन के फलस्वरूप एक बार फिर सिर उठाने लगा है। इन्हीं दिनों में पंजाब, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र से कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते केंद्र और राज्य सरकारों का चिंतित होना स्वाभाविक है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तो लॉकडाउन लगाने की चेतावनी दी है। अगर देश के अन्य भागों के लोगों ने सावधानियां नहीं बरती तो महामारी तेजी से फैल सकती है, जिसका खमियाजा हम पहले ही बहुत भुगत चुके हैं।
कांग्रेस के हाथ से पांच राज्य फिसल गए। कुछ महीनों पहले मध्य प्रदेश और हाल ही में पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार गिर गई। इसके पीछे कई कारण है। पद और धन बल के प्रलोभन में विधायकों को खरीदा जाता है। सरकार शासन चलाने में असमर्थ होती है। शक्ति परीक्षण में मध्य प्रदेश कमलनाथ सरकार को अल्पमत के कारण कुर्सी छोड़नी पड़ी। तख्तापलट रोकने के लिए सरकार को अंदरूनी गतिविधियों में सुधार लाना होगा। तब सरकार को गिरने से बचाया जा सकता है।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी, कोई नई बात नहीं है। लेकिन, जिस पार्टी ने प्रतिपक्ष में रहकर, पक्ष को ललकारा था, आज वह भी उसी जाल में फंसे नजर आ रहे हैं। साफ है सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं लेकिन चरित्र नहीं। जब कच्चे तेल की कीमत कम थी, बावजूद इसके सरकार ने छूट नहीं दी, लेकिन जब तेल के दाम में वृद्धि हुई तो इसको बढ़ाया जा रहा। ऐसे में सरकार की मंशा साफ नजर आती है कि किस तरीके से मौके का फायदा उठाकर, आम आदमी की जेब पर प्रहार किया जाए और राज कोष को भरा जाए। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था पर कहीं महंगाई की मार न झेलनी पड़े। तेईस फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय 'फिर बढ़ता कोरोना' लोगों की लापरवाही तथा कोरोना स्ट्रेन के फलस्वरूप एक बार फिर सिर उठाने लगा है। इन्हीं दिनों में पंजाब, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र से कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते केंद्र और राज्य सरकारों का चिंतित होना स्वाभाविक है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तो लॉकडाउन लगाने की चेतावनी दी है। अगर देश के अन्य भागों के लोगों ने सावधानियां नहीं बरती तो महामारी तेजी से फैल सकती है, जिसका खमियाजा हम पहले ही बहुत भुगत चुके हैं। कांग्रेस के हाथ से पांच राज्य फिसल गए। कुछ महीनों पहले मध्य प्रदेश और हाल ही में पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार गिर गई। इसके पीछे कई कारण है। पद और धन बल के प्रलोभन में विधायकों को खरीदा जाता है। सरकार शासन चलाने में असमर्थ होती है। शक्ति परीक्षण में मध्य प्रदेश कमलनाथ सरकार को अल्पमत के कारण कुर्सी छोड़नी पड़ी। तख्तापलट रोकने के लिए सरकार को अंदरूनी गतिविधियों में सुधार लाना होगा। तब सरकार को गिरने से बचाया जा सकता है।
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Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों जंगली हाथियों के उत्पात की वजह से ग्रामीण त्रस्त हैं. आए दिन हाथियों का झुंड किसी ना किसी किसान के खेत में लगी फसल को नष्ट कर रहे हैं और मकानाें को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं. रात के अंधेरे में तो हाथी उत्पात मचा ही रहे थे अब तो हाथियों का झुण्ड सुबह के उजाले में भी गांव में घुम रहा है. हाथियों का झुंड देखकर ग्रामीण बाहर निकलने से भी परहेज कर रहे हैं. जंगली हाथियों के उत्पात से ग्रामीण दहशत में है. शुक्रवार को नीमडीह प्रखंड अंतर्गत जुगिलोंग, पुरियारा व पारकीडीह गांव में 16-17 की संख्या में हाथियों का झुंड पहुंच गया. हाथियों के झुंड ने खेतों में लगी फसलों काे अपना आहार बनाया और उन्हें रौंद दिया.
हाथियों के झुंड का जंगल से निकलकर गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश है. लोगों का कहना है कि हाथियों को जंगल में रखना अब वन विभाग के वश की बात नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि हाथियों के झुंड का गांव में पहुंचने का सबसे बड़ा कारण दिन पर दिन जंगलों का सफाया होना है. हाथियों को जंगल में आहार नहीं मिलना भी इसका एक कारण हो सकता है. दलमा अभयारण्य में हाथियों के लिए सरकार करोड़ों रुपये देती है, लेकिन इसके बाद भी हाथी भोजन के लिए जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच रहे हैं.
हाथियों के झुंड द्वारा खेतों में किए गए नुकसान की किसानों ने भरपाई देने की मांग की है. प्रभावित किसानों ने सरकार से वन विभाग के माध्यम से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है. वहीं समाजसेवी सनातन गोराई ने कहा कि क्षेत्र में आए दिन हाथियों का झुंड फसलों व घरों का क्षति पहुंचा रहे हैं, लेकिन वन विभाग चीर निंद्रा में सोयी हुई है. कुछ महीने पहले चातरमा गांव के एक युवक को हाथियों ने कुचलकर मार दिया था. वन विभाग अगर सजग नहीं रहती है तो क्षेत्र में ऐसी घटना घटती रहेगी.
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Chandil : चांडिल अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों जंगली हाथियों के उत्पात की वजह से ग्रामीण त्रस्त हैं. आए दिन हाथियों का झुंड किसी ना किसी किसान के खेत में लगी फसल को नष्ट कर रहे हैं और मकानाें को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं. रात के अंधेरे में तो हाथी उत्पात मचा ही रहे थे अब तो हाथियों का झुण्ड सुबह के उजाले में भी गांव में घुम रहा है. हाथियों का झुंड देखकर ग्रामीण बाहर निकलने से भी परहेज कर रहे हैं. जंगली हाथियों के उत्पात से ग्रामीण दहशत में है. शुक्रवार को नीमडीह प्रखंड अंतर्गत जुगिलोंग, पुरियारा व पारकीडीह गांव में सोलह-सत्रह की संख्या में हाथियों का झुंड पहुंच गया. हाथियों के झुंड ने खेतों में लगी फसलों काे अपना आहार बनाया और उन्हें रौंद दिया. हाथियों के झुंड का जंगल से निकलकर गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश है. लोगों का कहना है कि हाथियों को जंगल में रखना अब वन विभाग के वश की बात नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि हाथियों के झुंड का गांव में पहुंचने का सबसे बड़ा कारण दिन पर दिन जंगलों का सफाया होना है. हाथियों को जंगल में आहार नहीं मिलना भी इसका एक कारण हो सकता है. दलमा अभयारण्य में हाथियों के लिए सरकार करोड़ों रुपये देती है, लेकिन इसके बाद भी हाथी भोजन के लिए जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच रहे हैं. हाथियों के झुंड द्वारा खेतों में किए गए नुकसान की किसानों ने भरपाई देने की मांग की है. प्रभावित किसानों ने सरकार से वन विभाग के माध्यम से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है. वहीं समाजसेवी सनातन गोराई ने कहा कि क्षेत्र में आए दिन हाथियों का झुंड फसलों व घरों का क्षति पहुंचा रहे हैं, लेकिन वन विभाग चीर निंद्रा में सोयी हुई है. कुछ महीने पहले चातरमा गांव के एक युवक को हाथियों ने कुचलकर मार दिया था. वन विभाग अगर सजग नहीं रहती है तो क्षेत्र में ऐसी घटना घटती रहेगी.
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IND vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खत्म हो चुका है। इस मैच में टीम इंडिया ने 5 विकेट से जीत दर्ज की है। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बोर्ड पर 188 रन लगाए थे। जवाब में भारतीय टीम ने 6 ओवरों से पहले ही अपने 3 विकेट गंवा दिए थे। लेकिन केएल राहुल की शानदार पारी के दम पर टीम इंडिया ने जीत हासिल की। इसी के साथ राहुल ने सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करने वालों का मुंह भी बंद कर दिया है।
टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने इस सीरीज के शुरू होने से पहले केएल राहुल को टीम से बाहर करने की खूब जिद की। वेंकटेश ने राहुल को टीम से बाहर कराने के लिए सोशल मीडिया पर जमकर आवाज उठाई। लेकिन जैसे ही केएल राहुल ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में नाबाद 75 रनों की शानदार पारी खेली तो उनके सुर पूरी तरह बदल गए। वेंकटेश ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दबाव में बेहतरीन संयम और केएल राहुल की शानदार पारी। रवींद्र जडेजा का शानदार समर्थन और भारत के लिए अच्छी जीत।
वेंकटेश प्रसाद के अलावा वसीम जाफर और आकाश चोपड़ा ने भी रवींद्र जडेजा और केएल राहुल की शानदार पारी की जमकर तारीफ की। जाफर ने लिखा कि दबाव में इन दोनों से शानदार खेल जागरूकता और संयम दिखाया। बहुत बढ़िया। वहीं आकाश चोपड़ा ने केएल राहुल का नाम लिए बिना उनकी जमकर तारीफ कर दी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए इस मुकाबले में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम 188 के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। जवाब में भारत ने इस टारगेट को 5 विकेट खोकर 39. 5 ओवर में ही चेज कर लिया। इस मैच में केएल राहुल ने शानदार अर्धशतक लगाया।
वहीं पहली पारी में भारत की ओर से मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को रन बनाने नहीं दिया और एक के बाद एक ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट झटक लिए। मोहम्मद सिराज ने भी 3 विकेट लिए और रवींद्र जडेजा ने भी 2, वहीं हार्दिक पांड्या और कुलदीप यादव को एक सफलता हाथ लगी। ऑस्ट्रेलिया की ओर ने कोई भी बल्लेबाज कुछ खास न कर सका।
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IND vs AUS: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खत्म हो चुका है। इस मैच में टीम इंडिया ने पाँच विकेट से जीत दर्ज की है। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बोर्ड पर एक सौ अठासी रन लगाए थे। जवाब में भारतीय टीम ने छः ओवरों से पहले ही अपने तीन विकेट गंवा दिए थे। लेकिन केएल राहुल की शानदार पारी के दम पर टीम इंडिया ने जीत हासिल की। इसी के साथ राहुल ने सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करने वालों का मुंह भी बंद कर दिया है। टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने इस सीरीज के शुरू होने से पहले केएल राहुल को टीम से बाहर करने की खूब जिद की। वेंकटेश ने राहुल को टीम से बाहर कराने के लिए सोशल मीडिया पर जमकर आवाज उठाई। लेकिन जैसे ही केएल राहुल ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में नाबाद पचहत्तर रनों की शानदार पारी खेली तो उनके सुर पूरी तरह बदल गए। वेंकटेश ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दबाव में बेहतरीन संयम और केएल राहुल की शानदार पारी। रवींद्र जडेजा का शानदार समर्थन और भारत के लिए अच्छी जीत। वेंकटेश प्रसाद के अलावा वसीम जाफर और आकाश चोपड़ा ने भी रवींद्र जडेजा और केएल राहुल की शानदार पारी की जमकर तारीफ की। जाफर ने लिखा कि दबाव में इन दोनों से शानदार खेल जागरूकता और संयम दिखाया। बहुत बढ़िया। वहीं आकाश चोपड़ा ने केएल राहुल का नाम लिए बिना उनकी जमकर तारीफ कर दी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए इस मुकाबले में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम एक सौ अठासी के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। जवाब में भारत ने इस टारगेट को पाँच विकेट खोकर उनतालीस. पाँच ओवर में ही चेज कर लिया। इस मैच में केएल राहुल ने शानदार अर्धशतक लगाया। वहीं पहली पारी में भारत की ओर से मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को रन बनाने नहीं दिया और एक के बाद एक ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट झटक लिए। मोहम्मद सिराज ने भी तीन विकेट लिए और रवींद्र जडेजा ने भी दो, वहीं हार्दिक पांड्या और कुलदीप यादव को एक सफलता हाथ लगी। ऑस्ट्रेलिया की ओर ने कोई भी बल्लेबाज कुछ खास न कर सका।
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आश्रमवासपर्व ]
जटिलां तापसी वृद्धां कुशकाशपरिक्षताम् 'मेरा अहोभाग्य कि मैं तपस्या में लगी हुई माता कुन्तीका दर्शन करूँगा। उनके सिरके बाल जटारूपमें परिणत हो गये होंगे ! वे तपस्विनी बूढ़ी माता कुश और काशके आसनोंपर शयन करने के कारण क्षतविक्षत हो रही होंगी ॥ ११ ॥ प्रासादहर्म्य संवृद्धामत्यन्तसुखभागिनीम् कदा तु जननीं श्रान्तां द्रक्ष्यामि भृशदुःखिताम् ॥ १२ ॥ 'जो महलों और अट्टालिकाओंमें पलकर बड़ी हुई हैं, अत्यन्त सुखकी भागिनी रही हैं, वे ही माता कुन्ती अब थककर अत्यन्त दुःख उठाती होंगी ! मुझे कब उनके दर्शन होंगे ? ॥ १२ ॥
अनित्याः खलु मर्त्यानां गतयो भरतर्षभ । कुन्ती राजसुता यत्र वसत्यसुखिता वने ॥ १३ ॥
'भरतश्रेष्ठ ! मनुष्योंकी गतियाँ निश्चय ही अनित्य होती हैं, जिनमें पड़कर राजकुमारी कुन्ती सुखोंसे वञ्चित हो वनमें निवास करती हैं' ॥ १३ ॥
सहदेववचः श्रुत्वा द्रौपदी योषितां वरा । उवाच देवी राजानमभिपूज्याभिनन्द्य च ॥ १४ ॥ सहदेवकी बात सुनकर नारियों में श्रेष्ठ महारानी द्रौपदी राजाका सत्कार करके उन्हें प्रसन्न करती हुई बोली - ॥१४॥ कदा द्रक्ष्यामि तां देवीं यदि जीवति सा पृथा । जीवन्त्या ह्यद्य मे प्रीतिर्भविष्यति जनाधिप ॥ १५ ॥
'नरेश्वर ! मैं अपनी सास कुन्तीदेवीका दर्शन कब करूँगी ? क्या वे अबतक जीवित होंगी १ यदि वे जीवित हों तो आज उनका दर्शन पाकर मुझे असीम प्रसन्नता होगी ॥ १५॥ एषा तेऽस्तु मतिर्नित्यं धर्मे ते रमतां मनः । योऽद्य त्वमस्मान् राजेन्द्र श्रेयसा योजयिष्यसि ॥१६॥
'राजेन्द्र ! आपकी बुद्धि सदा ऐसी ही बनी रहे। आपका मन धर्म में ही रमता रहे; क्योंकि आज आप हमलोगोंको माता कुन्तीका दर्शन कराकर परम कल्याणकी भागिनी बनायेंगे ॥ १६ ॥
अग्रपादस्थितं चेमं विद्धि राजन् वधूजनम् । काङ्क्षन्तं दर्शनं कुन्त्या गान्धार्याः श्वशुरस्य च ॥ १७ ॥
'राजन् ! आपको विदित हो कि अन्तःपुरकी सभी बहुएँ वनमें जानेके लिये पैर आगे बढ़ाये खड़ी हैं। वे सब-की-सब कुन्ती, गान्धारी तथा ससुरजीके दर्शन करना चाहती हैं' ॥ १७ ॥
इत्युक्तः स नृपो देव्या द्रौपद्या भरतर्षभ सेनाध्यक्षान् समानाय्य सर्वानिदमुवाच ह ॥ १८ ॥
'भरतभूषण ! द्रौपदीदेवीके ऐसा कहनेपर राजा युधिष्ठिर ने समस्त सेनापतियोंको बुलाकर कहा --॥ १८ ॥ निर्यातयत मे सेनां प्रभूतरथकुञ्जराम् । द्रक्ष्यामि वनसंस्थं च धृतराष्ट्र महीपतिम् ॥ १९ ॥
'तुमलोग बहुत-से रथ और हाथी-घोड़ोंसे सुसज्जित सेनाको कूच करने की आज्ञा दो। मैं वनवासी महाराज धृतराष्ट्र के दर्शन करने के लिये चलूँगा' ॥ १९ ॥ स्त्र्यध्यक्षांश्चाब्रवीद् राजा यानानि विविधानि मे । सज्जीक्रियन्तां सर्वाणि शिविकाश्च सहस्रशः ॥ २० ॥
इसके बाद राजाने रनिवासके अध्यक्षोंको आज्ञा दी - 'तुम सब लोग हमारे लिये भाँति-भाँतिके वाहन और पालकियोंको हजारोंकी संख्या में तैयार करो ॥ २० ॥ शकठापणवेशाच कोशः शिल्पिन एव च । निर्यान्तु कोषपालाश्च कुरुक्षेत्राश्रमं प्रति ॥ २१ ॥
'आवश्यक सामानोंसे लदे हुए छकड़े, बाजार, दुकानें, खजाना, कारीगर और कोषाध्यक्ष - ये सच कुरुक्षेत्रके आश्रमकी ओर रवाना हो जायँ ॥ २१ ॥ यश्च पौरजनः कश्चिद् द्रष्टुमिच्छति पार्थिवम् । अनावृतः सुविहितः स च यातु सुरक्षितः ॥ २२ ॥
'नगरवासियोंमें से जो कोई भी महाराजका दर्शन करना चाहता हो, उसे बेरोक-टोक सुविधापूर्वक सुरक्षितरूपसे चलने दिया जाय ॥ २२ ॥
सूदाः पौरोगवाश्चैव सर्व चैव महानसम् । विविधं भक्ष्यभोज्यं च शकटैरुह्यतां मम ॥ २३ ॥
'पाकशालाके अध्यक्ष और रसोइये भोजन बनाने के सब सामानों तथा भाँति-भाँतिके भक्ष्य-भोज्य पदार्थोंको मेरे छकड़ोंपर लादकर ले चलें ॥ २३ ॥ प्रयाणं घुष्यतां चैव श्वोभूत इति मा चिरम् । क्रियतां पथि चाप्यद्य वेश्मानि विविधानि च ॥ २४ ॥
'नगरमें यह घोषणा करा दी जाय कि 'कल सबेरे यात्रा की जायगी; इसलिये चलनेवालोको विलम्ब नहीं करना चाहिये ।' मार्गमें हमलोगोंके ठहरनेके लिये आज ही कई तरहके डेरे तैयार कर दिये जायँ ॥ २४ ॥
एवमाशाप्य राजा स भ्रातृभिः सहपाण्डवः ।
श्वोभूते निर्ययौ राजन् सस्त्रीवृद्धपुरःसरः ॥ २५ ॥
राजन् ! इस प्रकार आज्ञा देकर सबेरा होते ही अपने भाई पाण्डवोंसहित राजा युधिष्ठिरने स्त्री और बूढ़ोंको आगे करके नगरसे प्रस्थान किया ॥ २५ ॥
स बहिर्दिवसानेव जनौघं परिपालयन् ।
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आश्रमवासपर्व ] जटिलां तापसी वृद्धां कुशकाशपरिक्षताम् 'मेरा अहोभाग्य कि मैं तपस्या में लगी हुई माता कुन्तीका दर्शन करूँगा। उनके सिरके बाल जटारूपमें परिणत हो गये होंगे ! वे तपस्विनी बूढ़ी माता कुश और काशके आसनोंपर शयन करने के कारण क्षतविक्षत हो रही होंगी ॥ ग्यारह ॥ प्रासादहर्म्य संवृद्धामत्यन्तसुखभागिनीम् कदा तु जननीं श्रान्तां द्रक्ष्यामि भृशदुःखिताम् ॥ बारह ॥ 'जो महलों और अट्टालिकाओंमें पलकर बड़ी हुई हैं, अत्यन्त सुखकी भागिनी रही हैं, वे ही माता कुन्ती अब थककर अत्यन्त दुःख उठाती होंगी ! मुझे कब उनके दर्शन होंगे ? ॥ बारह ॥ अनित्याः खलु मर्त्यानां गतयो भरतर्षभ । कुन्ती राजसुता यत्र वसत्यसुखिता वने ॥ तेरह ॥ 'भरतश्रेष्ठ ! मनुष्योंकी गतियाँ निश्चय ही अनित्य होती हैं, जिनमें पड़कर राजकुमारी कुन्ती सुखोंसे वञ्चित हो वनमें निवास करती हैं' ॥ तेरह ॥ सहदेववचः श्रुत्वा द्रौपदी योषितां वरा । उवाच देवी राजानमभिपूज्याभिनन्द्य च ॥ चौदह ॥ सहदेवकी बात सुनकर नारियों में श्रेष्ठ महारानी द्रौपदी राजाका सत्कार करके उन्हें प्रसन्न करती हुई बोली - ॥चौदह॥ कदा द्रक्ष्यामि तां देवीं यदि जीवति सा पृथा । जीवन्त्या ह्यद्य मे प्रीतिर्भविष्यति जनाधिप ॥ पंद्रह ॥ 'नरेश्वर ! मैं अपनी सास कुन्तीदेवीका दर्शन कब करूँगी ? क्या वे अबतक जीवित होंगी एक यदि वे जीवित हों तो आज उनका दर्शन पाकर मुझे असीम प्रसन्नता होगी ॥ पंद्रह॥ एषा तेऽस्तु मतिर्नित्यं धर्मे ते रमतां मनः । योऽद्य त्वमस्मान् राजेन्द्र श्रेयसा योजयिष्यसि ॥सोलह॥ 'राजेन्द्र ! आपकी बुद्धि सदा ऐसी ही बनी रहे। आपका मन धर्म में ही रमता रहे; क्योंकि आज आप हमलोगोंको माता कुन्तीका दर्शन कराकर परम कल्याणकी भागिनी बनायेंगे ॥ सोलह ॥ अग्रपादस्थितं चेमं विद्धि राजन् वधूजनम् । काङ्क्षन्तं दर्शनं कुन्त्या गान्धार्याः श्वशुरस्य च ॥ सत्रह ॥ 'राजन् ! आपको विदित हो कि अन्तःपुरकी सभी बहुएँ वनमें जानेके लिये पैर आगे बढ़ाये खड़ी हैं। वे सब-की-सब कुन्ती, गान्धारी तथा ससुरजीके दर्शन करना चाहती हैं' ॥ सत्रह ॥ इत्युक्तः स नृपो देव्या द्रौपद्या भरतर्षभ सेनाध्यक्षान् समानाय्य सर्वानिदमुवाच ह ॥ अट्ठारह ॥ 'भरतभूषण ! द्रौपदीदेवीके ऐसा कहनेपर राजा युधिष्ठिर ने समस्त सेनापतियोंको बुलाकर कहा --॥ अट्ठारह ॥ निर्यातयत मे सेनां प्रभूतरथकुञ्जराम् । द्रक्ष्यामि वनसंस्थं च धृतराष्ट्र महीपतिम् ॥ उन्नीस ॥ 'तुमलोग बहुत-से रथ और हाथी-घोड़ोंसे सुसज्जित सेनाको कूच करने की आज्ञा दो। मैं वनवासी महाराज धृतराष्ट्र के दर्शन करने के लिये चलूँगा' ॥ उन्नीस ॥ स्त्र्यध्यक्षांश्चाब्रवीद् राजा यानानि विविधानि मे । सज्जीक्रियन्तां सर्वाणि शिविकाश्च सहस्रशः ॥ बीस ॥ इसके बाद राजाने रनिवासके अध्यक्षोंको आज्ञा दी - 'तुम सब लोग हमारे लिये भाँति-भाँतिके वाहन और पालकियोंको हजारोंकी संख्या में तैयार करो ॥ बीस ॥ शकठापणवेशाच कोशः शिल्पिन एव च । निर्यान्तु कोषपालाश्च कुरुक्षेत्राश्रमं प्रति ॥ इक्कीस ॥ 'आवश्यक सामानोंसे लदे हुए छकड़े, बाजार, दुकानें, खजाना, कारीगर और कोषाध्यक्ष - ये सच कुरुक्षेत्रके आश्रमकी ओर रवाना हो जायँ ॥ इक्कीस ॥ यश्च पौरजनः कश्चिद् द्रष्टुमिच्छति पार्थिवम् । अनावृतः सुविहितः स च यातु सुरक्षितः ॥ बाईस ॥ 'नगरवासियोंमें से जो कोई भी महाराजका दर्शन करना चाहता हो, उसे बेरोक-टोक सुविधापूर्वक सुरक्षितरूपसे चलने दिया जाय ॥ बाईस ॥ सूदाः पौरोगवाश्चैव सर्व चैव महानसम् । विविधं भक्ष्यभोज्यं च शकटैरुह्यतां मम ॥ तेईस ॥ 'पाकशालाके अध्यक्ष और रसोइये भोजन बनाने के सब सामानों तथा भाँति-भाँतिके भक्ष्य-भोज्य पदार्थोंको मेरे छकड़ोंपर लादकर ले चलें ॥ तेईस ॥ प्रयाणं घुष्यतां चैव श्वोभूत इति मा चिरम् । क्रियतां पथि चाप्यद्य वेश्मानि विविधानि च ॥ चौबीस ॥ 'नगरमें यह घोषणा करा दी जाय कि 'कल सबेरे यात्रा की जायगी; इसलिये चलनेवालोको विलम्ब नहीं करना चाहिये ।' मार्गमें हमलोगोंके ठहरनेके लिये आज ही कई तरहके डेरे तैयार कर दिये जायँ ॥ चौबीस ॥ एवमाशाप्य राजा स भ्रातृभिः सहपाण्डवः । श्वोभूते निर्ययौ राजन् सस्त्रीवृद्धपुरःसरः ॥ पच्चीस ॥ राजन् ! इस प्रकार आज्ञा देकर सबेरा होते ही अपने भाई पाण्डवोंसहित राजा युधिष्ठिरने स्त्री और बूढ़ोंको आगे करके नगरसे प्रस्थान किया ॥ पच्चीस ॥ स बहिर्दिवसानेव जनौघं परिपालयन् ।
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आर्यावर्तके बाहर भी ब्राह्मण पंडितोंका अधिकार था। क्षत्रियों का अधिकार राज्यशासनपर और ब्राह्मणोंका अधिकार धार्मिक विषयपर होता था। अतः इनके अधिकारों का परस्पर सघर्ष कमी नहीं होता था। इसप्रकार ब्राह्मणोंका सर्वत्र मान था, पर वैसा सम्मान क्षत्रियोंको प्राप्त होना
अशक्य था ।
काश्यपी पृथ्वी
पृथ्वीको " काश्यपी " कहा गया है अर्थात् यह सम्पूर्ण पृथ्वी काश्यप ऋषिकी है। यह सम्पूर्ण पृथ्वी किसी एक राजाकी कभी रही हो, ऐसा उल्लेख कहीं नहीं मिलता। पर इस पृथ्वीको ब्राह्मणको सम्पत्ति अवश्य बताई गई है।
ब्राह्मण स्वयं कभी राजा नहीं होते थे, वे राजाके पुरोहित बनते थे, पर राज्यके सत्र सूत्र इन्हीं ब्राह्मणके हाथों में होते थे । ये पुरोहित आजके पुरोहितोंकी तरह बर्भ और तिल लेकर वसुंदर भटकते नहीं थे, अपितु राजाकी सेना, अस्त्र, मण्डार, कोष और राज्य की सब औद्योगिक व्यवस्थाओंपर इन पुरोहितोंका अधिकार होता था। सन्धि और विग्रहका निश्चय भी पुरोहित हो करते थे, राजा तो केवल पुरोहितके आवेशोंका पालन करते थे ।
पुरोहितका कर्तव्य
एषामहं आयुधा संश्यामि जिष्णुर्येषामस्मि पुरोहितः । ( अथर्व )
"जिनका में पुरोहित हूं. उनके शस्त्रास्त्र में तीक्ष्ण करता हूं " यह एक पुरोहितका कथन है । इसपर से पुरोहित के अधिकारोंकी सीमाओंका अनुमान सहजहीमें लगाया जा सकता है। महाभारत में गन्धर्व चित्रसेनने भी पाण्डवों से कहा था कि जबतक तुम किसी श्रेष्ठ पुरोहितका सहारा न लोगे, तबतक तुम्हें राज्यकी प्राप्ति नहीं हो सकती। उस सलाह के अनुसार पाण्डवोंने धौम्यको अपना पुरोहित बनाया। इसप्रकार ब्राह्मणका कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक था। आज क्षत्रियोंका अधिकारक्षेत्र व्यापक हो गया है और ब्राह्मणोंका संकुचित
प्राचीनकालमें उत्तर भारत में ५०-५५ राजा थे और उन सबके पुरोहित ब्राह्मण ही थे और इन ब्राह्मणोंमें परस्पर एक सूत्रता थी। गुरु परम्परा, वेद परम्परा, विज्ञान परम्परा आदि सभी परम्परायें ब्राह्मणोंकी ही होती थीं और
सब ब्राह्मणोंका सिद्धान्त भी एक ही होता था। इस वजहसे उस समय ब्राह्मणोंका मूल्य भी बहुत ज्यादा था और इसी वजहसे क्षत्रिय भी ब्राह्मणोंसे दबते थे । प्रत्यक्षरूपसे राज्याविकारी न होते हुए भी ब्राह्मणोंने इसप्रकार अपना प्रभाव सबपर स्थापित कर रखा था। अथवा हम यों भी कह सकते है कि सब पृथ्वोपर ब्राह्मणोंकी सांस्कृतिक सत्ता थी, और क्षत्रिय राजाओंको सत्ता केवल अपने भूभागतक ही सीमित थी ।
ब्रह्मबल क्षेत्रबल
ब्राह्मणोंके इसी महत्त्वको देखकर विश्वामित्र के मुंह से भी निकल पडा, धिग्बलं क्षत्रियबलं ब्रह्मतेजो बलं बलं और उन्होंने भी क्षत्रियत्वका अपना चोला उतार फेंका और वे ब्राह्मणवर्णमें घुस गए। इसके बाद ऐसे विश्वामित्र की प्रसिद्धि ब्राह्मण के रूपमें ही सर्वत्र हुई और ब्राह्मणोंमें भी सम्माग्य स्थानपर उनकी प्रतिष्ठा हुई। ब्राह्मण होनेके बाद उन्होंने ब्राह्मण के सांस्कृतिकार्यका अधिक प्रचार
तत्कालीन ब्राह्मण यज्ञके द्वारा वैदिकधर्म और वैदिकसंस्कृतिका प्रचार करते थे। विश्वामित्र भी अपने समयके प्रतापी राजाओंमेंसे एक थे, अतः उनका प्रभाव अन्य राजाओंपर होना स्वाभाविक ही था। अतः विश्वामित्रको बिय केवल यज्ञ ही करना होता, तो वे किसी भी राजाके पास जाकर कहते कि में तुम्हारे राज्यमें यज्ञ करना चाहता हूं, तो संभवतः कोई भी राजा उनको इस बातको अस्वीकार न करता ; इसके विपरीत वह उनकी मदद हो करता । पर ये विश्वामित्र किसी भी वैदिकधर्मानुयायी आर्य राजाके राज्य में जाकर यज्ञ नहीं करते। वे तो जाकर विधर्मी राजसोंके राज्यमें यज्ञ करते हैं और इस बातका आग्रह करते हैं कि यदि इस यज्ञमें राक्षस विघ्न डालें, सो आर्यराजा उन रामसका संहार करके उप यज्ञको यथासांग पूर्ण करें। प्रायः तत्कालीन सभी ब्राह्मणोंकी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है। जिन देशोंमें आयोका राज्य होता, उस देशमें जाकर ये ब्राह्मण यज्ञ नहीं करते थे अपितु जहां राक्षसोंका राज्य होता, वहां जाकर ये ब्राह्मण अपनी पर्णकुटी बना लेते और यज्ञ करना शुरू कर देते थे। जब राजस इनके इन यशोंमें विघ्न उपस्थित करते तो ये ब्राह्मण उन राक्षसोंकी निन्दा करते ।
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आर्यावर्तके बाहर भी ब्राह्मण पंडितोंका अधिकार था। क्षत्रियों का अधिकार राज्यशासनपर और ब्राह्मणोंका अधिकार धार्मिक विषयपर होता था। अतः इनके अधिकारों का परस्पर सघर्ष कमी नहीं होता था। इसप्रकार ब्राह्मणोंका सर्वत्र मान था, पर वैसा सम्मान क्षत्रियोंको प्राप्त होना अशक्य था । काश्यपी पृथ्वी पृथ्वीको " काश्यपी " कहा गया है अर्थात् यह सम्पूर्ण पृथ्वी काश्यप ऋषिकी है। यह सम्पूर्ण पृथ्वी किसी एक राजाकी कभी रही हो, ऐसा उल्लेख कहीं नहीं मिलता। पर इस पृथ्वीको ब्राह्मणको सम्पत्ति अवश्य बताई गई है। ब्राह्मण स्वयं कभी राजा नहीं होते थे, वे राजाके पुरोहित बनते थे, पर राज्यके सत्र सूत्र इन्हीं ब्राह्मणके हाथों में होते थे । ये पुरोहित आजके पुरोहितोंकी तरह बर्भ और तिल लेकर वसुंदर भटकते नहीं थे, अपितु राजाकी सेना, अस्त्र, मण्डार, कोष और राज्य की सब औद्योगिक व्यवस्थाओंपर इन पुरोहितोंका अधिकार होता था। सन्धि और विग्रहका निश्चय भी पुरोहित हो करते थे, राजा तो केवल पुरोहितके आवेशोंका पालन करते थे । पुरोहितका कर्तव्य एषामहं आयुधा संश्यामि जिष्णुर्येषामस्मि पुरोहितः । "जिनका में पुरोहित हूं. उनके शस्त्रास्त्र में तीक्ष्ण करता हूं " यह एक पुरोहितका कथन है । इसपर से पुरोहित के अधिकारोंकी सीमाओंका अनुमान सहजहीमें लगाया जा सकता है। महाभारत में गन्धर्व चित्रसेनने भी पाण्डवों से कहा था कि जबतक तुम किसी श्रेष्ठ पुरोहितका सहारा न लोगे, तबतक तुम्हें राज्यकी प्राप्ति नहीं हो सकती। उस सलाह के अनुसार पाण्डवोंने धौम्यको अपना पुरोहित बनाया। इसप्रकार ब्राह्मणका कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक था। आज क्षत्रियोंका अधिकारक्षेत्र व्यापक हो गया है और ब्राह्मणोंका संकुचित प्राचीनकालमें उत्तर भारत में पचास-पचपन राजा थे और उन सबके पुरोहित ब्राह्मण ही थे और इन ब्राह्मणोंमें परस्पर एक सूत्रता थी। गुरु परम्परा, वेद परम्परा, विज्ञान परम्परा आदि सभी परम्परायें ब्राह्मणोंकी ही होती थीं और सब ब्राह्मणोंका सिद्धान्त भी एक ही होता था। इस वजहसे उस समय ब्राह्मणोंका मूल्य भी बहुत ज्यादा था और इसी वजहसे क्षत्रिय भी ब्राह्मणोंसे दबते थे । प्रत्यक्षरूपसे राज्याविकारी न होते हुए भी ब्राह्मणोंने इसप्रकार अपना प्रभाव सबपर स्थापित कर रखा था। अथवा हम यों भी कह सकते है कि सब पृथ्वोपर ब्राह्मणोंकी सांस्कृतिक सत्ता थी, और क्षत्रिय राजाओंको सत्ता केवल अपने भूभागतक ही सीमित थी । ब्रह्मबल क्षेत्रबल ब्राह्मणोंके इसी महत्त्वको देखकर विश्वामित्र के मुंह से भी निकल पडा, धिग्बलं क्षत्रियबलं ब्रह्मतेजो बलं बलं और उन्होंने भी क्षत्रियत्वका अपना चोला उतार फेंका और वे ब्राह्मणवर्णमें घुस गए। इसके बाद ऐसे विश्वामित्र की प्रसिद्धि ब्राह्मण के रूपमें ही सर्वत्र हुई और ब्राह्मणोंमें भी सम्माग्य स्थानपर उनकी प्रतिष्ठा हुई। ब्राह्मण होनेके बाद उन्होंने ब्राह्मण के सांस्कृतिकार्यका अधिक प्रचार तत्कालीन ब्राह्मण यज्ञके द्वारा वैदिकधर्म और वैदिकसंस्कृतिका प्रचार करते थे। विश्वामित्र भी अपने समयके प्रतापी राजाओंमेंसे एक थे, अतः उनका प्रभाव अन्य राजाओंपर होना स्वाभाविक ही था। अतः विश्वामित्रको बिय केवल यज्ञ ही करना होता, तो वे किसी भी राजाके पास जाकर कहते कि में तुम्हारे राज्यमें यज्ञ करना चाहता हूं, तो संभवतः कोई भी राजा उनको इस बातको अस्वीकार न करता ; इसके विपरीत वह उनकी मदद हो करता । पर ये विश्वामित्र किसी भी वैदिकधर्मानुयायी आर्य राजाके राज्य में जाकर यज्ञ नहीं करते। वे तो जाकर विधर्मी राजसोंके राज्यमें यज्ञ करते हैं और इस बातका आग्रह करते हैं कि यदि इस यज्ञमें राक्षस विघ्न डालें, सो आर्यराजा उन रामसका संहार करके उप यज्ञको यथासांग पूर्ण करें। प्रायः तत्कालीन सभी ब्राह्मणोंकी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है। जिन देशोंमें आयोका राज्य होता, उस देशमें जाकर ये ब्राह्मण यज्ञ नहीं करते थे अपितु जहां राक्षसोंका राज्य होता, वहां जाकर ये ब्राह्मण अपनी पर्णकुटी बना लेते और यज्ञ करना शुरू कर देते थे। जब राजस इनके इन यशोंमें विघ्न उपस्थित करते तो ये ब्राह्मण उन राक्षसोंकी निन्दा करते ।
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केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज एक वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से बेलापुर जेट्टी से मुंबई के नागरिकों के लिए वॉटर टैक्सी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वो वॉटर टैक्सी है जिसका सबसे ज्यादा इंतजार था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने मौके पर मौजूद रहकर समारोह की अध्यक्षता की और नवनिर्मित बेलापुर जेट्टी का उद्घाटन किया।
तटीय महाराष्ट्र के लोगों की लंबे समय से इसकी इच्छा थी। वॉटर टैक्सी सेवा पहली बार मुंबई और नवी मुंबई दोनों शहरों को जोड़ेगी। वॉटर टैक्सी सेवाएं डोमेस्टिक क्रूज़ टर्मिनल (डीसीटी) से शुरू होंगी और नेरुल, बेलापुर, एलीफेंटा द्वीप और जेएनपीटी के आस-पास के स्थानों को भी जोड़ेंगी। यह सेवा एक आरामदायक और तनाव मुक्त यात्रा का वादा करती है। साथ ही समय बचाने वाली है और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देती है।
वॉटर टैक्सी सेवाएं पर्यटन क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन देने जा रही हैं, विशेष रूप से नवी मुंबई से ऐतिहासिक एलीफेंटा गुफाओं की यात्रा को बल मिला है। यात्री नवी मुंबई से गेटवे ऑफ इंडिया तक आसानी से यात्रा कर सकेंगे।
नवनिर्मित बेलापुर घाट 8.37 करोड़ रुपये की लागत से बना है और इसे पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की सागरमाला योजना के तहत 50-50 मॉडल में फंड प्राप्त हुए है। नई जेट्टी भौचा ढाका, मांडवा, एलीफेंटा और करंजा जैसे स्थानों पर जहाजों की आवाजाही को सक्षम बनाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मुंबई मैरीटाइम बोर्ड और केंद्र तथा राज्य एजेंसियों की सराहना की जो नागरिकों को भारी लाभ पहुंचाते हुए पर्यटन को बढ़ावा और रोजगार सृजन के रास्ते खोलते हैं। मंत्री ने आगे कहा, "सागरमाला कार्यक्रम के तहत बंदरगाह आधुनिकीकरण, रेल, सड़क, क्रूज पर्यटन, आरओआरओ और यात्री जेटी, मत्स्य पालन, तटीय बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसी विभिन्न श्रेणियों में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। महाराष्ट्र में 1.05 करोड़ रुपये की लागत वाली 131 परियोजनाओं की कार्यान्वयन के लिए पहचान की गई है।"
केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी भी साझा की कि "131 में से 46 परियोजनाओं, जिनकी लागत 2078 करोड़ रुपए है, को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग की सागरमला योजना के तहत आर्थिक मदद प्राप्त हो रही है। महाराष्ट्र तट में शहरी जल परिवहन की अपार संभावनाएं हैं जो परिवहन का एक वैकल्पिक साधन बन सकता है। मुंबई फेरी व्हार्फ और मांडवा के बीच रोपैक्स आवाजाही के परिणामस्वरूप यात्रियों के लिए यात्रा के समय में कमी, वाहनों की त्वरित और चुस्त लोडिंग और अनलोडिंग प्रक्रिया के साथ सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। चार कलस्टर्स- पालघर, मुंबई और रायगढ़, रत्नागिरी तथा सिंधुदुर्ग में 32 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गईं हैं।
मंत्री ने कहा, "मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए, सागरमाला के तहत फंडिंग के लिए चार मछली पकड़ने की बंदरगाह परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। रत्नागिरी जिले में मिरकावाड़ा फिशिंग हार्बर का स्टेज II विस्तार पूरा हो चुका है, ससून डॉक का आधुनिकीकरण और सिंधुदुर्ग जिले में रायगढ़ और आनंदवाड़ी में करंजा का विकास कार्यान्वयन में है। इसके अलावा, मुंबई में मैलेट बंदर के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव सक्रिय रूप से विचाराधीन है।"
श्री सोनोवाल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास में सक्रिय भूमिका के लिए महाराष्ट्र सरकार को धन्यवाद दिया। अपनी बात समाप्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मेरा मानना है कि हम भाईचारे और एकता की भावना के साथ काम करते हुए टीम इंडिया के रूप में बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।"
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Posted On: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज एक वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से बेलापुर जेट्टी से मुंबई के नागरिकों के लिए वॉटर टैक्सी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वो वॉटर टैक्सी है जिसका सबसे ज्यादा इंतजार था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने मौके पर मौजूद रहकर समारोह की अध्यक्षता की और नवनिर्मित बेलापुर जेट्टी का उद्घाटन किया। तटीय महाराष्ट्र के लोगों की लंबे समय से इसकी इच्छा थी। वॉटर टैक्सी सेवा पहली बार मुंबई और नवी मुंबई दोनों शहरों को जोड़ेगी। वॉटर टैक्सी सेवाएं डोमेस्टिक क्रूज़ टर्मिनल से शुरू होंगी और नेरुल, बेलापुर, एलीफेंटा द्वीप और जेएनपीटी के आस-पास के स्थानों को भी जोड़ेंगी। यह सेवा एक आरामदायक और तनाव मुक्त यात्रा का वादा करती है। साथ ही समय बचाने वाली है और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देती है। वॉटर टैक्सी सेवाएं पर्यटन क्षेत्र को भारी प्रोत्साहन देने जा रही हैं, विशेष रूप से नवी मुंबई से ऐतिहासिक एलीफेंटा गुफाओं की यात्रा को बल मिला है। यात्री नवी मुंबई से गेटवे ऑफ इंडिया तक आसानी से यात्रा कर सकेंगे। नवनिर्मित बेलापुर घाट आठ.सैंतीस करोड़ रुपये की लागत से बना है और इसे पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की सागरमाला योजना के तहत पचास-पचास मॉडल में फंड प्राप्त हुए है। नई जेट्टी भौचा ढाका, मांडवा, एलीफेंटा और करंजा जैसे स्थानों पर जहाजों की आवाजाही को सक्षम बनाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मुंबई मैरीटाइम बोर्ड और केंद्र तथा राज्य एजेंसियों की सराहना की जो नागरिकों को भारी लाभ पहुंचाते हुए पर्यटन को बढ़ावा और रोजगार सृजन के रास्ते खोलते हैं। मंत्री ने आगे कहा, "सागरमाला कार्यक्रम के तहत बंदरगाह आधुनिकीकरण, रेल, सड़क, क्रूज पर्यटन, आरओआरओ और यात्री जेटी, मत्स्य पालन, तटीय बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसी विभिन्न श्रेणियों में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। महाराष्ट्र में एक.पाँच करोड़ रुपये की लागत वाली एक सौ इकतीस परियोजनाओं की कार्यान्वयन के लिए पहचान की गई है।" केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी भी साझा की कि "एक सौ इकतीस में से छियालीस परियोजनाओं, जिनकी लागत दो हज़ार अठहत्तर करोड़ रुपए है, को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग की सागरमला योजना के तहत आर्थिक मदद प्राप्त हो रही है। महाराष्ट्र तट में शहरी जल परिवहन की अपार संभावनाएं हैं जो परिवहन का एक वैकल्पिक साधन बन सकता है। मुंबई फेरी व्हार्फ और मांडवा के बीच रोपैक्स आवाजाही के परिणामस्वरूप यात्रियों के लिए यात्रा के समय में कमी, वाहनों की त्वरित और चुस्त लोडिंग और अनलोडिंग प्रक्रिया के साथ सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। चार कलस्टर्स- पालघर, मुंबई और रायगढ़, रत्नागिरी तथा सिंधुदुर्ग में बत्तीस से अधिक परियोजनाएं शुरू की गईं हैं। मंत्री ने कहा, "मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए, सागरमाला के तहत फंडिंग के लिए चार मछली पकड़ने की बंदरगाह परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। रत्नागिरी जिले में मिरकावाड़ा फिशिंग हार्बर का स्टेज II विस्तार पूरा हो चुका है, ससून डॉक का आधुनिकीकरण और सिंधुदुर्ग जिले में रायगढ़ और आनंदवाड़ी में करंजा का विकास कार्यान्वयन में है। इसके अलावा, मुंबई में मैलेट बंदर के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव सक्रिय रूप से विचाराधीन है।" श्री सोनोवाल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास में सक्रिय भूमिका के लिए महाराष्ट्र सरकार को धन्यवाद दिया। अपनी बात समाप्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, "पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मेरा मानना है कि हम भाईचारे और एकता की भावना के साथ काम करते हुए टीम इंडिया के रूप में बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।"
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विकास हुआ है और इसका संबंध उत्तर की अपेक्षा द्रविड़ जाति एवं संस्कृति से अधिक रहा है। यहाँ के राजाओं ने अनेक ऐसे भव्य मंदिर निर्माण करवाये हैं, जिनमें से कुछ तो संसार की अद्भुत इमारतों में से है । कहना न होगा कि उत्तर की भौति दक्षिण भारत मुसलमान विजेताओं द्वारा उतना आकांत नहीं हुआ, अतएव वहां की वास्तुकला अबतक रक्षित रह पाई है । इस परिस्थिति विशेष के कारण दक्षिण की वास्तुशैली का इतिहास कलाकृतियों में क्रमबद्ध रूप में सुरक्षित है। इस शैली का आरंभ ईस्वी सन के छठी शताब्दी में हुआ था, जो अबतक प्रचलित है ।
कहना न होगा कि दक्षिण की वास्तुकला अधिकांशतः प्रादेशिक शासकों को क्षेत्र - छाया में हुआ है, अतएव उस के आधार पर ऐतिहासिक एवं स्थानीय विशेषताओं को दृष्टिकोण में रखते हुये परमेश्वरीलाल गुप्त ने शासक वंशो के आधार पर विविध शैलियों में बाटा है, जो क्रमशः पल्लव, चोल, पांड्य, चालुक्य, विजय नगर और मथुरा आदि हैं । दक्षिण भारत का अधिकांश भाग दीर्घ काल तक विदेशी आतंक से सर्वथा मुक्त रहा है, जिसके कारण भारतीय कला एवं संस्कृति का विकास वहाँ निर्बाध रूप से हो पाया है । सांस्कृतिक दृष्टिसे इन समस्त वास्तु कृतियों को चालुक्य और द्रविड़ नामक दो बड़े समूहों में बाँट सकते है । द्रविड़ शैली के मंदिर म्हैसूर, हैदराबाद और उड़ीसा के किनारे के पास तथा देश के बिलकुल दक्षिण भाग में फैले हुये है, और चालुक्य शैली के इन प्रदेशों को छोड़ कर शेष समस्त दक्षिण में
पल्लव राजाओं द्वारा आरंभ कालीन प्रस्तर विद्ध मंदीर अपने विविध आकारों प्रकारों में अर्काट तथा त्रिचनापल्ली के जिलों के किलमविलगई, मल्लरम, दलवानुर, महेन्द्रवाड़ी, मंगलराजपुरम्, मैरवोण,
पृथामंगलम्, महावल्लीपुरम् तथा त्रिचनापल्ली नगर आदि में पाये जाते हैं । इन में अधिकांश के निर्माण का श्रेय तामिल सभ्यता में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले शासक महेन्द्रवर्मन् (६०० - ६२५ इस्वी) के हैं और उसी नाम पर पल्लव-मंदिरों की शैली को 'महेंद्र शैली' भी कहा जाता है। इन मंदिरों की सामान्य विशेषतायें, वर्गाकार गर्भगृह में लिंग की स्थापना, उसके सामने मोटे वर्गाकार स्तंभों से युक्त बरामदा सादे या पहलूदार टोड़े, गोल ढले हुये कारनीस सादी दीवाल, बीच बीच में नरमुण्ड मुक्त आराला ताख आदि हैं। कहीं कहीं बौद्ध शैली के बाढ़ ( रेलिंग ) भी पाये जाते हैं। इस शैली का विकसित रूप महावल्लीपुरम् और मम्मलपुरम् के संस्थापक नरसिंह वर्मन् । ६२५-६५० ईस्वी ) द्वारा निर्मित वास्तु में मिलता है। सातवीं शती में चट्टानों को काटकर बनाये हुये त्रिमूर्ति, वाराह, दुर्गा और पंच-पांडव के मंदिर भी इन प्रदेशों में प्राप्त होते हैं । पल्लव शैली का पूर्णतया विकसित रूप कांचीपुरम् के सुप्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर ( ७०० ईस्वी ) में देखने को मिलता है। चारों और स्तंभों से घिरे हुये इस मंदिर में रथ सदृश छोटे छोटे कमरे बने हुये हैं। सातवीं और आठवीं शताब्दियों में चालुक्य राजाओं द्वारा बनाये गये एलोरा के लयण-मंदिरों में से रावण की खाई, घुमर लेण तथा रामेश्वर प्रमुख है।
मैसूर और कनाड़ी प्रदेशों के प्राचीन सुंदर मंदिर अधिकतर मुसलमान आक्रमकों तथा पश्चात् कालीन मुस्लिम शासकों द्वारा नष्ट किये जा चुके हैं। इनमें से जो सुरक्षित बचे हैं उनमें गड़ग का सोमेश्वर मंदिर, इतभी काबड़ा मंदिर, मुक्तेश्वर का चंदरमपुरम् मंदिर, कुरूवत्ती का मल्लिकार्जुन का मंदिर ( तुंमभद्रा के दक्षिणी तट पर ) गालगानाथ
परमेश्वरीलाल गुप्त - भारतीय वास्तुकला, पृष्ठ ११८, वही पृष्ठ ११९.
का गालगंश्वर मंदिर, तथा हालवीद का केदारेश्वर का मंदिर आदि चालुक्य शैली के भव्यतम उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त सन् १००० ईस्वी से लेकर १३०० ईस्वी तक के तीन सौ वर्षों में मंसूर के हायसाल पाल राजाओं ने अनेक मंदिर बनवाये । मैसूर, हैदराबाद तथा बिलकुल दक्षिण भाग में असंख्य द्रविड़ मंदिर फैले हुये हैं, जिनका अलग अलग विवरण देना प्रस्तुत पुस्तक के लघु कलेवर में स्थानाभाव के कारण अनुपयुक्त होगा, परंतु यह उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती पृष्ठों में द्रविड़ शैली की जिन विशेषताओं पर विचार किया है, वे सभी विशेषतायें इन मंदिरों में मिलती हैं। कहना न होगा कि भारतीय धर्मसाधना के विविध संप्रदायों के अनुसार तत्संबंधीं मंदिरों में अलग अलग देवताओं की प्रतिष्ठा होती रही है, तथापि वास्तुकला की दृष्टि से उनमें प्रादेशिक विशेषता की एकरूपता है । चौदहवीं शताब्दी इस्वी से लेकर सोलहवीं शताब्दी ईस्वी तक के लगभग दो सौ वर्षों में प्रतिष्ठित रहने वाले विजय नगर साम्राज्य के शासकों के काल में मंदिरों के अतिरिक्त दक्षिण में अनेक सभागृह, पुस्तकालय तथा राजभवन निर्मित हुये, जिनमें से बहमनी साम्राज्य के विजेता सुल्तानों द्वारा सन १५६५ ईस्वी के ताली-कोट के युद्ध में नष्ट भ्रष्ट कर दिये गये ।
पूर्ववत पृष्ठों में भारतीय वास्तुकला का जो विवरण प्रस्तुत किया गया है उसके आधार पर दो महत्वपूर्ण तथ्य स्वभावतः सामने आ जाते हैं । १. जहाँ तक हिंदु वास्तु निर्माण की बात है वहाँ उसकी निमिति में देश के शासक तथा देश की जनता-दोनो का हाथ रहा है ।
२. दूसरे आगे चलकर जब देश मुस्लिम विजेताओं के अधिकार आया तो यहाँ की जनता की सांस्कृतिक प्रेरणा मंदिरों तथा धार्मिक डॉ. पी. के. आचार्य " भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता आधारभूत कलायें' पृष्ठ २१५.
संस्थानों का निर्माण कर वास्तुकला के क्षेत्र में निरंतर योग दान करती आई है । अति प्राचीन काल से लेकर आज तक के हिंदू वास्तु - निर्माण के पूर्ववर्ती विवरण के पश्चात् अब मुस्लिम वास्तुकला पर भी संक्षेप में विचार कर लेना आवश्यक होगा ।
मुस्लिम वास्तु :ईस्वी सन की तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभिक भाग से हमारे देश का संबंध एक नये प्रकार के शासन के साथ स्थापित हुआ, जो देश की दृष्टि से विदेशी, धर्म की दृष्टि से इतर धर्म को मानने वाले तथा स्वधर्म पर एकान्त निष्ठा रखते थे । इस नवागत शासन काल में बदलने वाली हमारे देश की राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आदि परिस्थितियों पर विचार करना प्रस्तुत पुस्तक का प्रतिपाद्य नहीं है । यहाँ हम उसके केवल उतने अंश पर विचार करेंगें जो वास्तु कला से संबंधित है । कहना न होगा कि गुलाम-वंशीय शासन के रूप में सर्वे प्रथम मुस्लिम राज्य की स्थापना दिल्ली के आस पास उत्तर भारत के छोटे से भाग में हुई थी तथा देश का शेष भाग छोटे मोटे स्वदेशी राज्यों में बंटा हुआ था। इसके अतिरिक्त उस काल से लेकर लगभग सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक उत्तर भारत अनेक मुस्लिम वंगों के उत्थान- पतन के दृश्य देखता आ रहा था । ऐसी अस्थायी परिस्थितियों के बीच शासक-वर्ग के लोग, जब कि स्वयं अपने अस्तित्व की रक्षा में संघर्ष रत हों के द्वारा वास्तु निर्माण की ओर ध्यान दिया जाना असंभव ही था। दूसरे इस्लाम धर्म मूर्ति-पूजा का कट्टर विरोधी था । अकबर के पूर्ववर्ती अधिकांश मुस्लिम सुल्तानों का दृष्टिकोण मूर्ति पूजा के संस्थान मंदिरों की प्रतिष्ठा के स्थान पर उनके तोड़ने फोड़ने का ही था। अतएब इस काल में परंपरागत मंदिर-वास्त का निरबाध निर्माण होना अथवा उसे प्रोत्साहन मिलना तो दूर की बात थी, अपितु प्राचीन वास्तु बड़े बड़े भवन तथा मंदिर नष्ट-भ्रष्ट हो किए गए ।
भारत की पांच कलाएँ
उपर्युक्त परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप इस्लामी शासन प्रारंभिक ढाई सौ वर्षों तक के काल के अंतर्गत मंदिर-वास्तु प्रायः नहीं के बराबर मिलता है । परन्तु कालान्तर में दो विशाल संस्कृतियों के सम्मिलन के द्वारा इस कला को नया मोड़ मिला इसमें संदेह नहीं । मृत्यु के पश्चात प्रतिष्ठित पुरूषों अथवा सत-फकीरों की यादगार मकबरे इत्यादि बनवाना मुस्लिम समाज में प्रचलित रहा है। इसके अतिरिक्त शासकों की भवन निर्माण - प्रियता भी इस क्षेत्र में सहायक बनी और उन्होंने अनेक अद्भुत इमारते, मस्जिदें, इमामबाड़े, मकबरे तथा किले बनवाये । डॉ. भगवत शरण उपाध्याय के मतानुसार मुसलमान सुल्तान गजब के निर्माता थे । १ इन्होंने जो वास्तु-निर्माण करवाया, उसके बनवाने में " खास हाथ हिन्दू शिल्पियों का था । इस देश में मुसलमानों की विशेष कर कला के क्षेत्र में तो कोई अभी अपनी परंपरा न थी, इससे उन्हें हिन्दू कारीगरों पर ही निर्भर करना पड़ा । इसी से शुरू की मुस्लिम इमारतें अधिकाधिक हिन्दू प्रभाव में आईं और उनके आकार-प्रकार अधिकाधिक हिन्दू-मंदिरों के भवनों के से हो गये ।" मुस्लिम वास्तु निर्माण के क्षेत्र में प्रथम मुसलमान सुल्तान कुतुबुद्दोन ऐबक द्वारा बनवाई हुई कुतुबमीनार का सबसे पहले उल्लेख किया जा सकता है। दिल्ली स्थित पृथ्वीराज चौहान के राजमहल को तोड़कर उसके मलवे द्वारा इस मीनार के बनवाने का कार्य आरंभ किया गया था और उसकी मृत्यु के पश्चात इस अधूरे कार्य की पूर्ति उसके उत्तराधिकारी सुल्तान अल्तमश द्वारा हुई। यह उल्लेखनीय है कि इसमें हिन्दू-प्रभाव झलकने के साथ साथ उसके पूर्ववर्ती चिन्ह भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं, परन्तु निर्माण की विशालता एवं भव्यता के कारण इसको
१] डॉ. भगवतशरण उपाध्याय : सांस्कृतिक भारत, १४ वा अध्याय, पृष्ठ १८३ शीर्षकः कला
२ वहीं पृष्ठ १८४, शीर्षक वहीं.
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विकास हुआ है और इसका संबंध उत्तर की अपेक्षा द्रविड़ जाति एवं संस्कृति से अधिक रहा है। यहाँ के राजाओं ने अनेक ऐसे भव्य मंदिर निर्माण करवाये हैं, जिनमें से कुछ तो संसार की अद्भुत इमारतों में से है । कहना न होगा कि उत्तर की भौति दक्षिण भारत मुसलमान विजेताओं द्वारा उतना आकांत नहीं हुआ, अतएव वहां की वास्तुकला अबतक रक्षित रह पाई है । इस परिस्थिति विशेष के कारण दक्षिण की वास्तुशैली का इतिहास कलाकृतियों में क्रमबद्ध रूप में सुरक्षित है। इस शैली का आरंभ ईस्वी सन के छठी शताब्दी में हुआ था, जो अबतक प्रचलित है । कहना न होगा कि दक्षिण की वास्तुकला अधिकांशतः प्रादेशिक शासकों को क्षेत्र - छाया में हुआ है, अतएव उस के आधार पर ऐतिहासिक एवं स्थानीय विशेषताओं को दृष्टिकोण में रखते हुये परमेश्वरीलाल गुप्त ने शासक वंशो के आधार पर विविध शैलियों में बाटा है, जो क्रमशः पल्लव, चोल, पांड्य, चालुक्य, विजय नगर और मथुरा आदि हैं । दक्षिण भारत का अधिकांश भाग दीर्घ काल तक विदेशी आतंक से सर्वथा मुक्त रहा है, जिसके कारण भारतीय कला एवं संस्कृति का विकास वहाँ निर्बाध रूप से हो पाया है । सांस्कृतिक दृष्टिसे इन समस्त वास्तु कृतियों को चालुक्य और द्रविड़ नामक दो बड़े समूहों में बाँट सकते है । द्रविड़ शैली के मंदिर म्हैसूर, हैदराबाद और उड़ीसा के किनारे के पास तथा देश के बिलकुल दक्षिण भाग में फैले हुये है, और चालुक्य शैली के इन प्रदेशों को छोड़ कर शेष समस्त दक्षिण में पल्लव राजाओं द्वारा आरंभ कालीन प्रस्तर विद्ध मंदीर अपने विविध आकारों प्रकारों में अर्काट तथा त्रिचनापल्ली के जिलों के किलमविलगई, मल्लरम, दलवानुर, महेन्द्रवाड़ी, मंगलराजपुरम्, मैरवोण, पृथामंगलम्, महावल्लीपुरम् तथा त्रिचनापल्ली नगर आदि में पाये जाते हैं । इन में अधिकांश के निर्माण का श्रेय तामिल सभ्यता में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले शासक महेन्द्रवर्मन् के हैं और उसी नाम पर पल्लव-मंदिरों की शैली को 'महेंद्र शैली' भी कहा जाता है। इन मंदिरों की सामान्य विशेषतायें, वर्गाकार गर्भगृह में लिंग की स्थापना, उसके सामने मोटे वर्गाकार स्तंभों से युक्त बरामदा सादे या पहलूदार टोड़े, गोल ढले हुये कारनीस सादी दीवाल, बीच बीच में नरमुण्ड मुक्त आराला ताख आदि हैं। कहीं कहीं बौद्ध शैली के बाढ़ भी पाये जाते हैं। इस शैली का विकसित रूप महावल्लीपुरम् और मम्मलपुरम् के संस्थापक नरसिंह वर्मन् । छः सौ पच्चीस-छः सौ पचास ईस्वी ) द्वारा निर्मित वास्तु में मिलता है। सातवीं शती में चट्टानों को काटकर बनाये हुये त्रिमूर्ति, वाराह, दुर्गा और पंच-पांडव के मंदिर भी इन प्रदेशों में प्राप्त होते हैं । पल्लव शैली का पूर्णतया विकसित रूप कांचीपुरम् के सुप्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर में देखने को मिलता है। चारों और स्तंभों से घिरे हुये इस मंदिर में रथ सदृश छोटे छोटे कमरे बने हुये हैं। सातवीं और आठवीं शताब्दियों में चालुक्य राजाओं द्वारा बनाये गये एलोरा के लयण-मंदिरों में से रावण की खाई, घुमर लेण तथा रामेश्वर प्रमुख है। मैसूर और कनाड़ी प्रदेशों के प्राचीन सुंदर मंदिर अधिकतर मुसलमान आक्रमकों तथा पश्चात् कालीन मुस्लिम शासकों द्वारा नष्ट किये जा चुके हैं। इनमें से जो सुरक्षित बचे हैं उनमें गड़ग का सोमेश्वर मंदिर, इतभी काबड़ा मंदिर, मुक्तेश्वर का चंदरमपुरम् मंदिर, कुरूवत्ती का मल्लिकार्जुन का मंदिर गालगानाथ परमेश्वरीलाल गुप्त - भारतीय वास्तुकला, पृष्ठ एक सौ अट्ठारह, वही पृष्ठ एक सौ उन्नीस. का गालगंश्वर मंदिर, तथा हालवीद का केदारेश्वर का मंदिर आदि चालुक्य शैली के भव्यतम उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त सन् एक हज़ार ईस्वी से लेकर एक हज़ार तीन सौ ईस्वी तक के तीन सौ वर्षों में मंसूर के हायसाल पाल राजाओं ने अनेक मंदिर बनवाये । मैसूर, हैदराबाद तथा बिलकुल दक्षिण भाग में असंख्य द्रविड़ मंदिर फैले हुये हैं, जिनका अलग अलग विवरण देना प्रस्तुत पुस्तक के लघु कलेवर में स्थानाभाव के कारण अनुपयुक्त होगा, परंतु यह उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती पृष्ठों में द्रविड़ शैली की जिन विशेषताओं पर विचार किया है, वे सभी विशेषतायें इन मंदिरों में मिलती हैं। कहना न होगा कि भारतीय धर्मसाधना के विविध संप्रदायों के अनुसार तत्संबंधीं मंदिरों में अलग अलग देवताओं की प्रतिष्ठा होती रही है, तथापि वास्तुकला की दृष्टि से उनमें प्रादेशिक विशेषता की एकरूपता है । चौदहवीं शताब्दी इस्वी से लेकर सोलहवीं शताब्दी ईस्वी तक के लगभग दो सौ वर्षों में प्रतिष्ठित रहने वाले विजय नगर साम्राज्य के शासकों के काल में मंदिरों के अतिरिक्त दक्षिण में अनेक सभागृह, पुस्तकालय तथा राजभवन निर्मित हुये, जिनमें से बहमनी साम्राज्य के विजेता सुल्तानों द्वारा सन एक हज़ार पाँच सौ पैंसठ ईस्वी के ताली-कोट के युद्ध में नष्ट भ्रष्ट कर दिये गये । पूर्ववत पृष्ठों में भारतीय वास्तुकला का जो विवरण प्रस्तुत किया गया है उसके आधार पर दो महत्वपूर्ण तथ्य स्वभावतः सामने आ जाते हैं । एक. जहाँ तक हिंदु वास्तु निर्माण की बात है वहाँ उसकी निमिति में देश के शासक तथा देश की जनता-दोनो का हाथ रहा है । दो. दूसरे आगे चलकर जब देश मुस्लिम विजेताओं के अधिकार आया तो यहाँ की जनता की सांस्कृतिक प्रेरणा मंदिरों तथा धार्मिक डॉ. पी. के. आचार्य " भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता आधारभूत कलायें' पृष्ठ दो सौ पंद्रह. संस्थानों का निर्माण कर वास्तुकला के क्षेत्र में निरंतर योग दान करती आई है । अति प्राचीन काल से लेकर आज तक के हिंदू वास्तु - निर्माण के पूर्ववर्ती विवरण के पश्चात् अब मुस्लिम वास्तुकला पर भी संक्षेप में विचार कर लेना आवश्यक होगा । मुस्लिम वास्तु :ईस्वी सन की तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभिक भाग से हमारे देश का संबंध एक नये प्रकार के शासन के साथ स्थापित हुआ, जो देश की दृष्टि से विदेशी, धर्म की दृष्टि से इतर धर्म को मानने वाले तथा स्वधर्म पर एकान्त निष्ठा रखते थे । इस नवागत शासन काल में बदलने वाली हमारे देश की राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आदि परिस्थितियों पर विचार करना प्रस्तुत पुस्तक का प्रतिपाद्य नहीं है । यहाँ हम उसके केवल उतने अंश पर विचार करेंगें जो वास्तु कला से संबंधित है । कहना न होगा कि गुलाम-वंशीय शासन के रूप में सर्वे प्रथम मुस्लिम राज्य की स्थापना दिल्ली के आस पास उत्तर भारत के छोटे से भाग में हुई थी तथा देश का शेष भाग छोटे मोटे स्वदेशी राज्यों में बंटा हुआ था। इसके अतिरिक्त उस काल से लेकर लगभग सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक उत्तर भारत अनेक मुस्लिम वंगों के उत्थान- पतन के दृश्य देखता आ रहा था । ऐसी अस्थायी परिस्थितियों के बीच शासक-वर्ग के लोग, जब कि स्वयं अपने अस्तित्व की रक्षा में संघर्ष रत हों के द्वारा वास्तु निर्माण की ओर ध्यान दिया जाना असंभव ही था। दूसरे इस्लाम धर्म मूर्ति-पूजा का कट्टर विरोधी था । अकबर के पूर्ववर्ती अधिकांश मुस्लिम सुल्तानों का दृष्टिकोण मूर्ति पूजा के संस्थान मंदिरों की प्रतिष्ठा के स्थान पर उनके तोड़ने फोड़ने का ही था। अतएब इस काल में परंपरागत मंदिर-वास्त का निरबाध निर्माण होना अथवा उसे प्रोत्साहन मिलना तो दूर की बात थी, अपितु प्राचीन वास्तु बड़े बड़े भवन तथा मंदिर नष्ट-भ्रष्ट हो किए गए । भारत की पांच कलाएँ उपर्युक्त परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप इस्लामी शासन प्रारंभिक ढाई सौ वर्षों तक के काल के अंतर्गत मंदिर-वास्तु प्रायः नहीं के बराबर मिलता है । परन्तु कालान्तर में दो विशाल संस्कृतियों के सम्मिलन के द्वारा इस कला को नया मोड़ मिला इसमें संदेह नहीं । मृत्यु के पश्चात प्रतिष्ठित पुरूषों अथवा सत-फकीरों की यादगार मकबरे इत्यादि बनवाना मुस्लिम समाज में प्रचलित रहा है। इसके अतिरिक्त शासकों की भवन निर्माण - प्रियता भी इस क्षेत्र में सहायक बनी और उन्होंने अनेक अद्भुत इमारते, मस्जिदें, इमामबाड़े, मकबरे तथा किले बनवाये । डॉ. भगवत शरण उपाध्याय के मतानुसार मुसलमान सुल्तान गजब के निर्माता थे । एक इन्होंने जो वास्तु-निर्माण करवाया, उसके बनवाने में " खास हाथ हिन्दू शिल्पियों का था । इस देश में मुसलमानों की विशेष कर कला के क्षेत्र में तो कोई अभी अपनी परंपरा न थी, इससे उन्हें हिन्दू कारीगरों पर ही निर्भर करना पड़ा । इसी से शुरू की मुस्लिम इमारतें अधिकाधिक हिन्दू प्रभाव में आईं और उनके आकार-प्रकार अधिकाधिक हिन्दू-मंदिरों के भवनों के से हो गये ।" मुस्लिम वास्तु निर्माण के क्षेत्र में प्रथम मुसलमान सुल्तान कुतुबुद्दोन ऐबक द्वारा बनवाई हुई कुतुबमीनार का सबसे पहले उल्लेख किया जा सकता है। दिल्ली स्थित पृथ्वीराज चौहान के राजमहल को तोड़कर उसके मलवे द्वारा इस मीनार के बनवाने का कार्य आरंभ किया गया था और उसकी मृत्यु के पश्चात इस अधूरे कार्य की पूर्ति उसके उत्तराधिकारी सुल्तान अल्तमश द्वारा हुई। यह उल्लेखनीय है कि इसमें हिन्दू-प्रभाव झलकने के साथ साथ उसके पूर्ववर्ती चिन्ह भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं, परन्तु निर्माण की विशालता एवं भव्यता के कारण इसको एक] डॉ. भगवतशरण उपाध्याय : सांस्कृतिक भारत, चौदह वा अध्याय, पृष्ठ एक सौ तिरासी शीर्षकः कला दो वहीं पृष्ठ एक सौ चौरासी, शीर्षक वहीं.
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राजधानी के दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शहरी इलाके में मतदान की गति धीमी रही तो दियारा इलाके में काफी तेजी से मतदान हुआ। गंगा के उस पार के इलाके में तो शाम पांच बजे तक लोग मतदान करते रहे। दियारा के बूथों पर लोगों का तांता लगा रहा। काफी संख्या में लोग शहर से भी जाकर मतदान किए। यहां मतदान करने वाले अधिकांश मतदाताओं का कहना था कि इस बार स्थानीय विधायक नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के लिए चेहरे पर दियारा इलाके में मतदान हो रहा है। नकटा दियारा के बूथ 198 पर तो 70 फीसद से भी ज्यादा मतदान हुआ। यहां पर कुल मतदाता 1026 हैं। इनमें से 700 से अधिक लोग शाम चार बजे तक ही मतदान कर चुके थे।
नकटा दियारा के पूर्व मुखिया प्रो. विजय कुमार यादव कहते हैं, दियारा में लोग काफी उत्साह से मतदान कर रहे हैं। यहां पर जिसको जिस पार्टी या संगठन को मतदान करना है, वह दे रहा है। किसी को कोई रोक-टोक नहीं है। बूथों पर शांतिपूर्ण माहौल रहने के कारण ही गांव के बुद्धिजीवी लोग मौजूद रहे।
शहर के मतदाताओं को दियारा के मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाले नाविकों का कहना था कि पिछले पंद्रह वर्षो में सबसे ज्यादा मतदाता इस बार दियारा इलाके में जाकर मतदान कर रहे हैं। इतनी ज्यादा संख्या में तो लोग मुखिया के चुनाव में भी मतदान करने नहीं जाते थे। दियारा के अधिकांश बूथों पर 52 फीसद से ज्यादा मतदान लोगों ने किया। यहां के मतदान केंद्र संख्या 194 पर 797 मतदाता थे, जिसमें से शाम चार बजे तक 414 मतदाताओं ने मतदान किया था। वहीं, मतदान केंद्र संख्या 194 (क) पर 628 मतदाताओं में से 344 ने मतदान किया।
दीघा के दियारा इलाके के साथ-साथ गंगा से सटी बस्तियों में भी जमकर मतदान हुआ। खासकर दीघा, जमाखारिज, निरालानगर, बांसकोठी, मखदुमपुर, शिवाजीनगर, कुर्जी, गोसाईटोला, मैनपुरा में शाम तक लोग आकर अपना मत देते रहे।
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राजधानी के दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शहरी इलाके में मतदान की गति धीमी रही तो दियारा इलाके में काफी तेजी से मतदान हुआ। गंगा के उस पार के इलाके में तो शाम पांच बजे तक लोग मतदान करते रहे। दियारा के बूथों पर लोगों का तांता लगा रहा। काफी संख्या में लोग शहर से भी जाकर मतदान किए। यहां मतदान करने वाले अधिकांश मतदाताओं का कहना था कि इस बार स्थानीय विधायक नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के लिए चेहरे पर दियारा इलाके में मतदान हो रहा है। नकटा दियारा के बूथ एक सौ अट्ठानवे पर तो सत्तर फीसद से भी ज्यादा मतदान हुआ। यहां पर कुल मतदाता एक हज़ार छब्बीस हैं। इनमें से सात सौ से अधिक लोग शाम चार बजे तक ही मतदान कर चुके थे। नकटा दियारा के पूर्व मुखिया प्रो. विजय कुमार यादव कहते हैं, दियारा में लोग काफी उत्साह से मतदान कर रहे हैं। यहां पर जिसको जिस पार्टी या संगठन को मतदान करना है, वह दे रहा है। किसी को कोई रोक-टोक नहीं है। बूथों पर शांतिपूर्ण माहौल रहने के कारण ही गांव के बुद्धिजीवी लोग मौजूद रहे। शहर के मतदाताओं को दियारा के मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाले नाविकों का कहना था कि पिछले पंद्रह वर्षो में सबसे ज्यादा मतदाता इस बार दियारा इलाके में जाकर मतदान कर रहे हैं। इतनी ज्यादा संख्या में तो लोग मुखिया के चुनाव में भी मतदान करने नहीं जाते थे। दियारा के अधिकांश बूथों पर बावन फीसद से ज्यादा मतदान लोगों ने किया। यहां के मतदान केंद्र संख्या एक सौ चौरानवे पर सात सौ सत्तानवे मतदाता थे, जिसमें से शाम चार बजे तक चार सौ चौदह मतदाताओं ने मतदान किया था। वहीं, मतदान केंद्र संख्या एक सौ चौरानवे पर छः सौ अट्ठाईस मतदाताओं में से तीन सौ चौंतालीस ने मतदान किया। दीघा के दियारा इलाके के साथ-साथ गंगा से सटी बस्तियों में भी जमकर मतदान हुआ। खासकर दीघा, जमाखारिज, निरालानगर, बांसकोठी, मखदुमपुर, शिवाजीनगर, कुर्जी, गोसाईटोला, मैनपुरा में शाम तक लोग आकर अपना मत देते रहे।
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फूलों को देखकर उन्होंने अपने हाथों को चलाना सीखा, खुद की कई ऐसी ही चीजों को देखकर उन्होंने एक नया डांस फार्म बना डाला और आज उनकी उम्र के लोग इस फार्म के दीवाने हैं। देहरादून के रहने वाले राघव अब राघव काकरोच के नाम से फेमस हैं। शुक्रवार को राघव शहर आए तो उनके साथ डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन टू के विनर फैसल खान भी मौजूद थे। यहां उन्होंने डीआईडी डांस के सुपर किड की घोषणा की जो जल्द ही जी टीवी पर शुरू होने वाला है।
राघव ने बताया कि वो बहुत ही बदमाश बच्चे थे। घर वाले भी उनसे काफी परेशान रहते थे। वो चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह वकील बनूं, लेकिन मैं तो अपनी दुनिया में मस्त था। मैंने कभी डांस सीखा ही नहीं। या यह कह सकता हूं कि देहरादून में कोई सीखने जैसा कुछ था ही नहीं.
मैं पढ़ाई तो करता था, लेकिन मैं डांस को भी एक एजुकेशन ही मानता हूं क्योंकि मैं इसमें जब एक डॉक्टर और इंजीनियर की तरह अर्न कर रहा हूं तो इसमें क्या बुराई है। मैं डीआईडी में टॉप पर था और इस बार सुपर किड में बच्चों का स्किपर बन कर उन्हें डांस सिखा रहा हूं। तो मेरा सफर काफी अच्छा ही रहा। साथ ही अपने टैलेंट को दुनिया के सामने लाने का मौका मिला।
डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन 2 के विनर फैसल ने बताया दोनों सीजन के बच्चों के साथ कम्पीट करने में काफी मजा आएगा। मेरे पापा ऑटो ड्राइवर हैं और मम्मी हाउस वाइफ। उन्होंने मुझे पढ़ाई के साथ डांस स्कूल में भी डाल दिया। फिर मेरे पढ़ाई में कुछ नम्बर कम आ गये तो पेरेंट्स ने कहा अब डांस स्कूल छुड़वाना ही पड़ेगा.
उन्हीं दिनों लिटिल मास्टर का ऑडीशन हो रहा था। मैंने कहा मुझे बस एक बार ऑडीशन दे लेने दो अगर आ गया तो ठीक वरना क्लास भी छोड़ दूंगा। मैंने ऑडीशन दिया, मैं सेलेक्ट हुआ और जीत भी गया तो अब सभी मेरे डांस से बहुत खुश हैं.
फूलों को देखकर उन्होंने अपने हाथों को चलाना सीखा, खुद की कई ऐसी ही चीजों को देखकर उन्होंने एक नया डांस फार्म बना डाला और आज उनकी उम्र के लोग इस फार्म के दीवाने हैं। देहरादून के रहने वाले राघव अब राघव काकरोच के नाम से फेमस हैं। शुक्रवार को राघव शहर आए तो उनके साथ डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन टू के विनर फैसल खान भी मौजूद थे। यहां उन्होंने डीआईडी डांस के सुपर किड की घोषणा की जो जल्द ही जी टीवी पर शुरू होने वाला है।
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फूलों को देखकर उन्होंने अपने हाथों को चलाना सीखा, खुद की कई ऐसी ही चीजों को देखकर उन्होंने एक नया डांस फार्म बना डाला और आज उनकी उम्र के लोग इस फार्म के दीवाने हैं। देहरादून के रहने वाले राघव अब राघव काकरोच के नाम से फेमस हैं। शुक्रवार को राघव शहर आए तो उनके साथ डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन टू के विनर फैसल खान भी मौजूद थे। यहां उन्होंने डीआईडी डांस के सुपर किड की घोषणा की जो जल्द ही जी टीवी पर शुरू होने वाला है। राघव ने बताया कि वो बहुत ही बदमाश बच्चे थे। घर वाले भी उनसे काफी परेशान रहते थे। वो चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह वकील बनूं, लेकिन मैं तो अपनी दुनिया में मस्त था। मैंने कभी डांस सीखा ही नहीं। या यह कह सकता हूं कि देहरादून में कोई सीखने जैसा कुछ था ही नहीं. मैं पढ़ाई तो करता था, लेकिन मैं डांस को भी एक एजुकेशन ही मानता हूं क्योंकि मैं इसमें जब एक डॉक्टर और इंजीनियर की तरह अर्न कर रहा हूं तो इसमें क्या बुराई है। मैं डीआईडी में टॉप पर था और इस बार सुपर किड में बच्चों का स्किपर बन कर उन्हें डांस सिखा रहा हूं। तो मेरा सफर काफी अच्छा ही रहा। साथ ही अपने टैलेंट को दुनिया के सामने लाने का मौका मिला। डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन दो के विनर फैसल ने बताया दोनों सीजन के बच्चों के साथ कम्पीट करने में काफी मजा आएगा। मेरे पापा ऑटो ड्राइवर हैं और मम्मी हाउस वाइफ। उन्होंने मुझे पढ़ाई के साथ डांस स्कूल में भी डाल दिया। फिर मेरे पढ़ाई में कुछ नम्बर कम आ गये तो पेरेंट्स ने कहा अब डांस स्कूल छुड़वाना ही पड़ेगा. उन्हीं दिनों लिटिल मास्टर का ऑडीशन हो रहा था। मैंने कहा मुझे बस एक बार ऑडीशन दे लेने दो अगर आ गया तो ठीक वरना क्लास भी छोड़ दूंगा। मैंने ऑडीशन दिया, मैं सेलेक्ट हुआ और जीत भी गया तो अब सभी मेरे डांस से बहुत खुश हैं. फूलों को देखकर उन्होंने अपने हाथों को चलाना सीखा, खुद की कई ऐसी ही चीजों को देखकर उन्होंने एक नया डांस फार्म बना डाला और आज उनकी उम्र के लोग इस फार्म के दीवाने हैं। देहरादून के रहने वाले राघव अब राघव काकरोच के नाम से फेमस हैं। शुक्रवार को राघव शहर आए तो उनके साथ डीआईडी लिटिल मास्टर सीजन टू के विनर फैसल खान भी मौजूद थे। यहां उन्होंने डीआईडी डांस के सुपर किड की घोषणा की जो जल्द ही जी टीवी पर शुरू होने वाला है।
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श्रेणिक चरित्र :: २०५
द्वादशः सर्गः
नौमि तं जिन सद्धर्मं सत्सिद्धांतभास्करम् । यस्य प्रसादतः प्राप्तं श्रेणिकेन सुखं परम् ॥१॥ कुर्वंतौ परमं धर्मं भुंक्तौ राज्यं च दंपती । गतं कालं न वित्तस्तौशर्माब्धवशवर्तिनौ ॥ २ ॥ यजंतौ जिनपादाब्जं ध्यायंतौ मुनिपुंगवम् । कृपाकृतितपापांगौ तिष्ठतस्तौ च दंपती ॥ ३ ॥ कदाचित्प्रथमं शास्त्रं त्रिषष्ठिस्मृतिगोचरं । अन्यदालोकसंस्थान व्याख्यानं शृणुतस्तकौ ॥४॥ अष्टोत्तरशतैभिन्नमहिंसाव्रतंमुत्तमम् । तथ्यवाचादिभेदं वा कर्णयंतौ निजेच्छया ॥५॥ द्रवति द्रोष्यति द्रव्यमदुद्रवदिति स्फुटम् । सद्भेदं सप्तभंगाढ्यं तौ च शुश्रुवतुः सदा ॥६॥ अपूर्वपाठपारीणौ धुरिणौ धर्मसंपदः । विपदः प्रतिकूलौ तौ रेमाते रतिमार वत् ॥७॥ दशांगभोगभोगाढ्यौ दार्याढ्यजनसेवितौ। रतिसंतृप्तसर्वाङ्गौ शचींद्राविवरेजतुः ॥८॥ सुषेणचरदेवोऽथ तस्या ब्रूणेऽभवत्सुतः । समैधे जठरे तस्याः क्रमेण गजसद्गतेः ॥९॥ आपांडुवदना क्षीणविग्रहा कलभाषिणी । ईषन्निद्रा समालभ्या जज्ञे सा भ्रूणभावतः ॥१०॥
जिस परमोत्तम धर्म की कृपा से मगध देश के स्वामी महाराज श्रेणिक को अनुपम सुख मिला। पापरूपी अन्धकार को सर्वथा नाश करने वाले उस परम धर्म के लिए नमस्कार है ।
महाराज श्रेणिक को जैनधर्म में जो सन्देह थे, सो सब हट गये थे इसलिए भली प्रकार जैन धर्म के पालक राज्य- सम्बन्धी अनेक भोग भोगने वाले शुभ मार्ग पर आरूढ़ राजा श्रेणिक और जैन विद्यापि रानी चेलना सानन्द राजगृह नगर में रहने लगे। कभी वे दोनों दंपती जिनेन्द्र भगवान् की पूजा करने लगे कभी मुनियों के उत्तमोत्तम गुणों का स्मरण करने लगे। कभी उन्होंने त्रेसठ महापुरुषों के पवित्र चरित्र से पूर्ण प्रथमानुयोग शास्त्र का स्वाध्याय किया । कभी लोक की लम्बाई-चौड़ाई आदि बतलाने वाले करणानुयोग शास्त्र को ये पढ़ने लगे । कभी-कभी अहिंसादि श्रावक और मुनियों के चरित्र को बतलाने वाले चरणानुयोग शास्त्र का उन्होंने श्रवण किया और कभी गुण, द्रव्य और पर्यायों का वास्तविक स्वरूप बतलाने वाले स्यादस्ति, स्यान्नास्ति इत्यादि सप्तभंगनिरूपक द्रव्यानुयोग शास्त्रों को विचारने लगे । इस प्रकार अनेक शास्त्रों के स्वाध्याय में प्रवीण धर्म-संपदा के धारक समस्त विपत्तियों से रहित रति और कामदेव तुल्य भोग भोगने वाले बड़े ऋद्धि धारक मनुष्यों से पूजित रतिजन्य सुख के भी भले प्रकार आस्वादक वे दोनों दंपती इन्द्र - इन्द्राणी के समान सुख भोगने लगे और भोगों में वे इतने लीन हो गये कि उन्हें जाता हुआ काल भी न जान पड़ने लगा ।
बहुत काल पर्यंत भोग भोगने पर रानी चेलना गर्भवती हुई। उसके गर्भ में सुषेणचर नामक देव ने आकर जन्म लिया । गर्भभार से रानी चेलना का मुख फीका पड़ गया। स्वाभाविक कृश शरीर और भी कृश हो गया । वचन भी वह धीरे-धीरे बोलने लग गई, गति भी मन्द हो गई और आलस्य ने भी उस पर पूरा पूरा प्रभाव जमा लिया ॥१-१०॥
२०६ :: श्रेणिक चरित्र
दुष्टदोहलकोद्भूत भावनातो बभूव सा । कृशांगा क्षीणभूषाढ्या निशांते द्यौर्वितारिकाः ॥ ११ ॥ तदप्राप्तां च तां वीक्ष्य गतदीप्तिनराधिपः । गदतिस्म शुभे भद्रे विशिष्टनयनोत्सवे ॥१२॥ काऽस्ति ते हृदि चिंता च सर्वगात्रविदाहिनी । इति संवादिता राज्ञी न ब्रूते च यथा कथम् ॥ १३ ॥ महाग्रहेण भूपेन पुनः संवादिता जगौ । मृगाक्षी गंदमामंदाक्षरासंवाष्पवादिनी ॥१४॥ नाथ किं जीवनेनैव मम दुर्मानसात्मनः । दुभ्रूणधारणाज्ज्ञज्ञे दुर्वांछा प्राणहारिणी ॥१५॥ वचनैः कथितुं शक्यां नो कथं कथयामि ताम् । तथाप्याख्यामि नाथाद्य तवाग्रहवशाद्विभोः ॥१६॥ वक्षः स्थलं विदार्यांशु लोहितस्येक्षितुं तव । वांछास्ति मे नराधीश कथं प्राप्या दुरावहा ॥१७॥
गर्भवती स्त्रियों को दोहले हुआ करते हैं और दोहलों से सन्तान के अच्छे-बुरे का पता लग जाता है क्योंकि यदि सन्तान उत्तम होगी तो उसकी माता को दोहले भी उत्तम होंगे और सन्तान खराब होगी तो दोहले भी खराब होंगे । रानी चेलना को भी दोहले होने लगे । चेलना के गर्भ में महाराज श्रेणिक का परम बैरी अनेक प्रकार कष्ट देने वाला पुत्र उत्पन्न होने वाला था इसलिए रानी को जितने भर दोहले हुए सब खराब ही हुए जिससे उसका शरीर दिनों-दिन क्षीण होने लगा । प्राणपति पर आगामी कष्ट आने से उसका सारा शरीर फीका पड़ गया प्रातः काल में तारागण जैसे मलिन कांति वाले जान पड़ते हैं रानी चेलना भी उसी प्रकार मलिन कांति वाली हो गई ।
किसी समय महाराज श्रेणिक की दृष्टि महारानी चेलना पर पड़ी । उसे इस प्रकार क्षीण और मलिन कांति वाली देख उन्हें अति दुःख हुआ । रानी के पास आकर वे स्नेह परिपूर्ण वचनों में इस प्रकार कहने लगे।
प्राण बल्लभे! मेरे नेत्रों को अतिशय आनन्द देने वाली प्रिये ! तुम्हारे चित्त में ऐसी कौन-सी प्रबल चिंता विद्यमान है जिससे तुम्हारा शरीर रात-दिन क्षीण और कांति - रहित होता चला जाता है। कृपा कर उस चिंता का कारण मुझसे कहो! बराबर उसको दूर करने के लिए प्रयत्न किया जायेगा। महाराज के ऐसे शुभ वचन सुन पहले तो लज्जावश रानी चेलना ने कुछ भी उत्तर न दिया किन्तु जब उसने महाराज का आग्रह विशेष देखा तो वह दुःखाश्रुओं को पोंछती हुई इस प्रकार विनय से कहने लगीप्राणनाथ! मुझ सरीखी अभागिनी डाकिनी स्त्री का संसार में जीना सर्वथा निस्सार है यह जो मैंने गर्भ धारण किया है सो गर्भ नहीं आपकी अभिलाषाओं को मूल से उखाड़ने वाला अंकुर बोया है। इस दुष्ट गर्भ की कृपा से मैं प्राण लेने वाली डाकिनी पैदा हुई हूँ । प्रभो! यद्यपि मैं अपने मुख से कुछ कहना नहीं चाहती तथापि आप के आग्रह वश कुछ कहती हूँ। मुझे यह खराब दोहला हुआ है कि आपके वक्षस्थल को विदार - रक्त देखूँ । इस दोहले की पूर्ति होना कठिन है इसलिए मैं इस प्रकार अति चिंतित हूँ।
रानी चेलना के ऐसे वचन सुन महाराज श्रेणिक ने उसी समय अपने वक्षस्थल को चीरा और उससे निकलते रक्त को रानी चेलना को दिखाकर उसकी इच्छा की पूर्ति की ।
श्रेणिक चरित्र :: २०७
श्रुत्वा विदार्य राजेशो हृदयं निजलोहितम् । प्रदर्श्य पूरयामास तद्वांछां चित्रदायिनीम् ॥ १८ ॥ परिपूर्ण ततो मासे सुतोऽजनि तयाशुभात् । तल्लाभं भूपतिः श्रुत्वा कुतश्चित्तोषमाप च ॥१९॥ वितीर्य विविधं दानं दीनानां च दयार्द्रधीः । तद्वक्त्रालोकनार्थं च प्रतस्थे स्थिरमानसः ॥२०॥ तदा बालो नृपं वीक्ष्य बद्धमुष्टिर्महाभयी । कुटिलास्यो रक्तनेत्रो वक्रभ्रकुटिरुन्नतः ॥२१॥ दष्टाधरस्तदा दुष्टो घर्षयन् रदनान्निजान् । दुर्भावभावनारूढः पूर्ववैरादभूत्क्षणात् ॥२२॥ तथा तं सा परिज्ञाय चेलना महिषी क्षणात् । दुःपुत्रं तं वने भीत्या तत्याज स्वहितेच्छया ॥२३॥ कथंचिद्भूपतिर्मत्वा वनमुक्तं शरीरजम् । राज्ञानाय्य सुमोहेन धात्र्याः स च समर्पितः ॥ २४॥ चकार कुणिकाख्यां च तस्य भूप मुदकृतः । ततः क्रमेण पुण्येन तत्र स ववृधे शुभः पुनः ॥२५॥ ततः क्रमेण चेलिन्या वारिषेणः सुतोऽभवत् । कलाविज्ञानरूपाढ्यः ससम्यक्त्वः शिवावहः ॥२६॥ हल्लस्ततो विहल्लश्च जितशत्रुः क्रमात्सुताः । तस्याऽजनि पुत्रोच्चैः पित्रोः प्रीतिविवर्द्धकाः ॥२७॥ ततः कतिपयैर्घस्त्रैर्गर्भोऽभूत्स्वप्नपूर्वकम् । तस्याः श्रेयः प्रभावेन जनयन् जगतां मुदम् ॥२८॥ आहारे मंदिमा जाता गतौ वाक्य निबंधने । तस्या भ्रूणप्रभावेन शरीरे पांडुतां गता ॥ २९ ॥ स्वल्पभूषामितस्पष्टाक्षराक्षीणसुविग्रहा। भग्नसुत्रिवलीभंगा माजनि माजनि प्रियदर्शना ॥ ३० ॥
नवम मास के पूर्ण होने पर रानी चेलना के पुत्र उत्पन्न हुआ पुत्रोत्पत्ति का समाचार महाराज के पास भी पहुँचा। उन्होंने दीन अनाथ याचकों को इच्छा भर दान दिया और पुत्र को देखने के लिए गर्भगृह में गये। ज्यों ही महाराज अपने पुत्र के पास गये । महाराज को देखते ही उसे पूर्व के भव का स्मरण हो आया । महाराज को पूर्वभव का अपना प्रबल बैरी जान मारे क्रोध के उसकी मुट्ठी बँध गई । मुख भयंकर और कुटिल हो गया। नेत्र आरक्त हो गये। मारे क्रोध के भौंहें चढ़ गई ।
ओठ डसने लगा और उसकी आँखें भी इधर-उधर फिरने लगीं । रानी ने जब उसकी यह दशा देखी तो उसे प्रबल अनिष्ट का करने वाला समझ वह डर गई । अपने हित की इच्छा से निर्मोह हो उसने वह पुत्र शीघ्र ही वन में भेज दिया। जब राजा को यह पता लगा कि रानी ने भयभीत हो पुत्र वन में भेज दिया है तो उससे न रहा गया पुत्र पर मोहवश उन्होंने शीघ्र ही उसे राजमंदिर में मंगा लिया उसे पालन-पोषण के लिए किसी धाय के हाथ सौंप दिया और उसका नाम कुणिक रख दिया एवं वह कुणिक दिनोंदिन बढ़ने लगा । कुमार कुणिक के बाद रानी चेलना के वारिषेण नाम का दूसरा पुत्र हुआ । कुमार वारिषेण अनेक ज्ञान-विज्ञानों का पारगामी, मनोहर रूप का धारक सम्यग्दर्शन से भूषित और मोक्षगामी था । वारिषेण के अनंतर - रानी चेलना के हल्ल-हल्ल के पीछे विदल - विदल के पीछे जितशत्रु ये तीन पुत्र और भी उत्पन्न हुए और ये तीनों ही कुमार माता-पिता को आनंदित करने वाले हुए ।
इस प्रकार इन पाँच पुत्रों के बाद रानी चेलना के प्रबल भाग्योदय से सबको आनंद देने वाला फिर गर्भ रह गया गर्भ के प्रसाद से रानी चेलना का आहार कम हो गया । गति भी धीमी हो गई। शरीर पर पीलापन छा गया । आवाज मंद हो गई । शरीर अतिकृश हो गया, पेट की त्रिवली
२०८ :: श्रेणिक चरित्र
कुचचूचकयोस्तस्तयाः कृष्णत्वं तत्प्रभावतः । जातशत्रुमुखे कर्तुं सूचनायैव सूचकम् ॥३१॥ ततो दोहको जज्ञे तस्या इति सुदुर्लभः । आरुह्य हस्तिनं भूत्या भ्रमिष्यामि च प्रावृषि ॥ ३२॥ तदा प्राप्ता कृशांगी सा समासीद् गजगामिनी । एकदा तां नृपो वीक्ष्य पप्रच्छ कृशकारणम् ॥३३॥ साऽप्राक्षीदुर्धराकांक्षीऽजनि मे हृदिवल्लभ । ग्रीष्मे गजं समारुह्य मेघवृष्टैः भ्रमाम्यहम् ॥ ३४ ॥ दुर्धरं तं परिज्ञाय ग्रीष्मे वृष्ट्याद्यभावतः । सचिंतो योषमादायास्थात्स स्थगितविग्रहः ॥ ३५॥ दुर्लालसं नृपं प्रेक्ष्याऽप्राक्षीदभयपंडितः । कथं तेऽद्य परा चिंता हृदि सर्वांग शोषिणी ॥ ३६॥ इति संवादितो भूपो जगौ तत्कारणं क्षणात् । श्रुत्वेति वचनं पुत्रः करिष्यामीति संजगौ ॥३७॥
भी छिप गई। होने वाला पुत्र समस्त शत्रुओं के मुख काले करेगा, इस बात को मानो बतलाये हुए ही उसके दोनों चूचक भी काले पड़ गये एवं गर्भ भार के सामने उसे भूषण भी नहीं रुचने लगे ॥११-३१॥
किसी समय रानी के मन में यह दोहला हुआ कि ग्रीष्मकाल में हाथी पर चढ़कर बरसते मेघ में इधर-उधर घूमे किन्तु इस इच्छा की पूर्ति उसे अति कठिन जान पड़ी । इसलिए उस चिंता से उसका शरीर दिनों-दिन अधिक क्षीण होने लगा । जब महाराज ने रानी को अति चिन्ता-ग्रस्त देखा तो उन्हें परम दुःख हुआ । चिन्ता का कारण जानने के लिए वे रानी से इस प्रकार कहने लगे ।
प्रिये ! मैं तुम्हारा शरीर दिनों-दिन क्षीण देखता चला जाता हूँ मुझे शरीर की क्षीणता का न विद्यापाठ कारण नहीं जान पड़ता तुम शीघ्र कहो तुम्हें कौन-सी चिन्ता ऐसी भयंकरता से सता रही है । महाराज के ऐसे वचन सुन रानी ने कहा- कृपानाथ ! मुझे यह दोहला हुआ है कि मैं ग्रीष्मकाल में बरसते हुए मेघ में हाथी पर चढ़कर घूमूं किन्तु यह इच्छा पूर्ण होनी दुःसाध्य है। इसलिए मेरा शरीर दिनों-दिन क्षीण होता चला जाता है ।
रानी की ऐसी कठिन इच्छा सुनी तो महाराज अचम्भे में पड़ गये । इस इच्छा को पूर्ण करने का उन्हें कोई उपाय न सूझा इसलिए वे मौन धारण कर निश्चेष्ट बैठ गये । अभय कुमार ने महाराज की यह दशा देखी तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ वे महाराज के सामने इस प्रकार विनय से पूछने लगे। पूज्य पिताजी! मैं आपको प्रबल चिन्ता से आतुर देख रहा हूँ। मुझे नहीं मालूम पड़ता अकारण आप क्यों चिन्ता कर रहे हैं ? कृपया चिन्ता का कारण मुझे भी बतावें । पुत्र अभयकुमार के ऐसे वचन सुन के महाराज श्रेणिक ने सारी आत्म कहानी कुमार को कह सुनाई और चिन्ता दूर करने का कोई उपाय न समझ वे अपना दुःख भी प्रकट करने लगे।
अभय कुमार अति बुद्धिमान् थे ज्यों ही उन्होंने पिताजी के मुख से चिन्ता का कारण सुना शीघ्र ही सन्तोषप्रद वचनों में उन्होंने कहा- पूज्यवर ! यह बात क्या कठिन है मैं अभी इस चिंता के हटाने का उपाय सोचता हूँ आप अपने चित्त को मलीन न करें तथा चिन्ता दूर करने का उपाय भी सोचने लगे।
श्रेणिक चरित्र :: २०९
अवलोकयितुं रात्रौ व्यंतरं पितृसद्वने। जगाम भयनिर्मुक्तोऽभयो बुद्धिमतां मतः ॥३८॥ अटन्वटतलेऽटव्यां ध्वांतसंलुप्तसत्पथि । ददर्श दीपिका पंक्तिमभयो भयवर्जितः ॥३९॥ घूकफूत्कार भीताढ्यं शृगालनिनदावहं । महाफणि फटाटोपं गजमर्दितपादपम् ॥४०॥ संदग्धार्द्धशवं भीमं मृतकोपांतमोदकम्। भग्नकुंभकपालाढ्यं मंदाग्निमदमोदितं ॥४१॥ संदग्धाद्धूतधामिल्य पताकं कुर्कुरस्वनं । भस्मसंभग्नसन्मार्गं नरदंतसुरत्नकम् ॥४२॥ पश्यन् श्मशानमापन्नो वटं दीपप्रकाशितम् । धूपधूमसमाकृष्ट व्यंतरं राजपुत्रकः ॥४३॥ सुगंधकुसुमैर्धीरं जपंतं स्थिरमानसम् । उद्विग्नं चिरकालेन सोऽद्राक्षीन्नरपुंगवम् ॥४४॥ तदेति स जगौ धीरः कत्स्वं कस्मात्समागतः । किं स्थानं तव किं नाम किं त्वं जपयसि स्फुटं ॥ ४५ ॥ इति पृष्टस्तदावादीद्वटस्थो राजदारकम् । शृणु धीर समाख्यानं मज्जं सुस्मयदायकं ॥४६॥ विजयार्द्धात्तरश्रेण्यां गगनप्रिये । भूपतिर्वायुवेगोऽहं विद्याधरनेश्वरः ॥४७॥
एकदा मंदरे रम्ये वंदितुं श्री जिनालयान् । जगामानेक भूमीश सेवितांहिः स्वमार्गतः ॥४८॥
कुछ समय सोचने पर उन्हें यह बात मालूम हुई कि यह काम बिना किसी व्यंतर की कृपा से नहीं हो सकता इसलिए आधी रात के समय घर से निकले । व्यंतर की खोज में किसी श्मशान भूमि की ओर चल दिये एवं वहाँ पहुँचकर किसी विशाल वट वृक्ष के नीचे इधर-उधर घूमने लगे । वह भयावह था। जगह-जगह वहाँ अजगर शब्द कर रहे थे, श्मशान उलूकों के फुत्कार कार शब्दों से व्याप्त था शृंगालों के भयंकर शब्दों से मदोन्मत्त हाथियों से अनेक वृक्ष उजड़े पड़े थे। अर्द्ध-दाह मुर्दे और फूटे घड़ों के समान उनके कपाल वहाँ जगह-जगह पड़े थे । मांसाहारी भयंकर जीवों के रौद्र शब्द क्षण-क्षण में सुनाई पड़ते थे । अनेक जगह वहाँ मुर्दे जल रहे थे ।
चारों ओर उनका धुँआ फैला हुआ था । मांसलोलुपी कुत्ते भी वहाँ जहाँ - तहाँ भयावह शब्द करते थे। चारों ओर वहाँ राख की ढेरियाँ पड़ी थीं। इसलिए मार्ग जानना भी कठिन पड़ जाता था एवं चारों ओर वहाँ हड्डियाँ भी पड़ी थीं । बहुत काल अंधकार में इधर-उधर घूमने पर किसी वटवृक्ष के नीचे कुछ दीपक जलते हुये कुमार को दीख पड़े वह उसी वृक्ष की ओर झुक पड़ा और वृक्ष के नीचे आकर उसे धीर- वीर जयशील स्थिरचित्त चिरकाल से उद्विग्न एवं जिसके चारों ओर फूल रखे हुए हैं कोई उत्तम पुरुष दीख पड़ा । पुरुष को ऐसी दशापन्न देख कुमार ने पूछा- भाई! तू कौन है? क्या तेरा नाम है? कहाँ से तू यहाँ आया ? तेरा निवास स्थान कहाँ हैं? और तू यहाँ आकर क्या सिद्ध करना चाहता है ? कुमार के ऐसे वचन सुन उस पुरुष ने कहा- राजकुमार! मेरा वृत्तांत अतिशय आश्चर्यकारी है यदि आप उसे सुनना चाहते हैं तो सुनें मैं कहता हूँ ॥३२-४६॥
विजयार्द्ध पर्वत की उत्तर दिशा में एक गगनप्रिय नामक नगर है । गगनप्रिय नगर का स्वामी अनेक विद्याधर और मनुष्यों से सेवित मैं राजा वायुवेग था । कदाचित् मुझे विजयार्द्ध पर्वत पर जिनेन्द्र चैत्यालयों के वन्दनार्थ अभिलाषा हुई। मैं अनेक राजाओं के साथ आकाश मार्ग से अनेक
२१० :: श्रेणिक चरित्र
विजयार्द्धाचले तत्र युग्मश्रेणी विराजते । वालुकापुरनाथस्य सर्वविद्याधरे शिनः ॥४९॥ सुभद्रा तनुजा रम्या यौवन श्री विडंबिता । सुभद्रा च नितंबस्य स्फीतस्य धारिणी शुभा ॥५०॥ वयस्याभिः समं दैवात्मंदिरे द्युतिसुंदरे । आजगाम मृगाक्षी सा दधती रतिसंभ्रमम् ॥५१॥ प्रेक्ष्य तां विह्वलीभूतः संहतः कामसायकैः । शिथिलीभूतसर्वांगो बभूवाहं च तन्मयः ॥५२॥ ततस्तां च समादायाटितो दिव्यं च भारतम् । चक्राणो जन्मसाफल्यं तया सार्द्धं समुत्सुकः ॥५३॥ खगचक्री परिज्ञाय तत्सखीवदनाद्वृतम् । तां मामनुसमायातो विमानैः पूरयन्दिशः ॥५४॥ तेनाहं युद्धवान् दीर्घं नानाविद्याधरेशिना । विद्याभिः खंडखंडैश्च विद्यावद्भिर्बलोद्धतैः ॥५५॥ समे विद्यां विहत्यैव तामादाय गतः पुरम् । भूगोचरो बभूवाहमत्रास्थां शोकलावितः ॥५६॥ द्वादशाब्दं च जाप्येनैतन्मंत्रस्य विषेत्स्यति । विद्यासमूहमेतद्धि विद्यते सूरिदेशने ॥५७॥ इत्थं कृतेऽपि विद्या नो नो सिद्धागंतुमुत्सुक । गृहमुद्विग्नचित्तोऽहमीहे मोहितमन्मतिः ॥५८॥ अभयोऽपि वचोऽवादीत्तन्मंत्रं मे निरूपय । ततो मंत्रं जगौ खगः कुमारं मार विभ्रमम् ॥ ५९॥
नगरों को निहारता हुआ विजयार्द्ध पर्वत पर आ गया। उसी समय राजकुमारी सुभद्रा जो कि बालकपुर के महाराजा की पुत्री थी । अपनी सखियों के साथ विजयार्द्ध पर्वत पर आई । राजकुमारी सुभद्रा अतिशय मनोहर थी । यौवन की अद्वितीय शोभा से मंडित थी, मृगनयनी थी। उसके स्थूल किन्तु मनोहर नितम्ब उसकी विचित्र शोभा बना रहे थे एवं रति के समान अनेक विलास संयुत होने से वह साक्षात् रति ही जान पड़ती थी। ज्यों ही कमल नेत्रा सुभद्रा पर मेरी दृष्टि पड़ी मैं बेहोश हो गया कामबाण मुझे बेहद रीति से बेधने लगे । मेरा तेजस्वी शरीर भी उस समय सर्वथा शिथिल हो गया विशेष कहाँ तक कहूँ तन्मय होकर मैं उसी का ध्यान करने लगा। सुभद्रा बिना जब मेरा एक क्षण भी वर्ष सरीखा बीतने लगा तो बिना किसी के पूछे मैं जबरन सुभद्रा को हर लाया और गगनप्रिय नगर में आकर आनन्द से उसके साथ भोग भोगने लगा। इधर मैं तो राजकुमारी सुभद्रा के साथ आनन्द से रहने लगा और उधर किसी सखी ने बालकपुर के स्वामी सुभद्रा के पिता से सारी बात कह सुनाई और मेरा ठिकाना भी बतला दिया सुभद्रा की इस प्रकार हरण वार्ता सुन मारे क्रोध के उसका शरीर भभक उठा और विमान पंक्तियों से समस्त गगन मंडल को आच्छादन करता हुआ शीघ्र ही गगनप्रिय नगर की ओर चल पड़ा । बालकपुर के स्वामी का इस प्रकार आगमन मैंने भी सुना अपनी सेना सजाकर मैं शीघ्र ही उसके सन्मुख आया । चिरकाल तक मैंने उसके साथ और अनेक विद्याओं को जानकर तीक्ष्ण खड्गों धारी उसके योद्धाओं के साथ युद्ध किया अन्त में बालकपुर के स्वामी ने अपने विद्या बल से मेरी समस्त विद्या छीन ली, सुभद्रा को भी जबरन ले गया । विद्या के अभाव से मैं विद्याधर भी भूमि गोचरी के समान रह गया। अनेक शोकों से आकुलित हो मैं पुनः उस विद्या के लिए यह मंत्र सिद्ध कर रहा हूँ बारह वर्ष पर्यन्त इस मंत्र के जपने से वह विद्या सिद्ध होगी ऐसा नैमित्तिक ने कहा है किन्तु बारह वर्ष बीत चुके अभी तक विद्या सिद्ध न हुई इसलिए मैं अब घर जाना चाहता हूँ । ज्यों ही कुमार ने उस
श्रेणिक चरित्र :: २११
सबीजं लघु संलभ्य जजाप वृषपाकतः । सिषेध निखिला विद्याः सर्वं पुण्यफलं हि वै ॥६० ॥ तत्प्रभावात्खगस्यापि विद्याः सिद्धाः शुभोदयात् । ततस्तौ स्नेहवृद्ध्यर्थमन्योन्यं नेमतुर्मुदा ॥६१ ॥ स चोद्वसितं लब्ध्वा रुष्टः संकल्पदंतिनम् । विकुर्व्य मेघसंघातं रोहयित्वा च चेलनां ॥६२ ॥ बभ्राम नगरं राज्ञी मासं पूर्णमनोरथा । समासेदे गृहं तूर्णं त्रिवलीभंगभेदिता ॥६३ ॥ संपूर्णादोहदाद्राज्ञी पूर्वावस्थां समत्यजत् । शुभं सुसातकुंभाभा वृक्षे वल्लीव नूतना ॥६४ ॥ सहासा सरसा सिद्ध सुसंगास्मरसायका । सा प्रसूत सुतं सारं गजादिसुकुमारकं ॥६५॥ ततो मेघकुमारं च तनुजं समजीजनत् । सप्तपुत्रैश्च सा रेजे तारका सप्तयोगिभिः ॥६६॥ अभिन्नसुखसंतानौ चेलना श्रेणिकौ परौ । रेमाते रतिसंपन्नावखिन्नौ रतिलीलया ॥६७॥ एकदा नृपसामंत किरीट तटरत्नजैः । मयूखैर्मंडितांह्रयब्जः सुशब्दमगधैः स्रुतः ॥ ६८ ॥ रत्नश्री चित्रनक्षत्र पवित्र गगनच्छवि। सिंहासनं समासीन उदयाद्रिं तमोहरः ॥ ६९ ॥ पयः पयोधि संरंगत्तरलोत्तुंग भंगुरैः । तरंगैरिव संवीज्यमानः खलु प्रकीर्णकैः ॥७०॥
पुरुष के मुख से ये समाचार सुने शीघ्र ही पूछाभाई वह कौन-सा मन्त्र है मुझे भी तो दिखाओ देखूँ तो वह कैसा कठिन है? कुमार के इस प्रकार पूछे जाने पर उस पुरुष ने शीघ्र ही वह मंत्र कुमार को बतला दिया । कुमार अतिशय पुण्यात्मा थे उस समय उनका भाग्य सुभाग्य था इसलिए उन्होंने मंत्र सीखकर शीघ्र ही इधर-उधर कुछ बीज क्षेपण कर दिये और बातोंबात में वह मंत्र सिद्ध कर लिया । मंत्र से जो जो विद्या सिद्ध होने वाली थी शीघ्र ही सिद्ध हो गई जिससे उसे परम संतोष हो गया एवं दोनों महानुभाव आपस में मिल - भेंट कर बड़े प्रेम से अपने-अपने स्थान चले गये।
मंत्र सिद्ध कर कुमार अपने घर (राजमहल) आये विद्या बल से उन्होंने शीघ्र ही कृत्रिम मेघ बना दिये। रानी चेलना को हाथी पर चढ़ा लिया इच्छानुसार और जहाँ-तहाँ घुमाया । जब उसके दोहले की पूर्ति हो गई तो वह अपने राजमहल में आ गई । दोहले की पूर्ति कठिन समझ जो उसके चित्त में खेद था वह दूर हो गया । अब उसका शरीर सुवर्ण के समान चमकने लगा। नवमास के बीत जाने पर रानी चेलना के अतिशय प्रतापी शत्रुओं का विजयी पुत्र उत्पन्न हुआ और दोहले के अनुसार उसका नाम राजकुमार रखा गया । राजकुमार के बाद रानी चेलना के मेघकुमार नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। सात ऋषियों से आकाश में जैसी तारा शोभित होती है रानी चेलना भी ठीक उसी प्रकार सात पुत्रों से शोभित होने लगी । इस प्रकार आपस में अतिशय सुखी समस्त खेदों से रहित वे दोनों दंपती आनन्दपूर्वक भोग भोगते राजगृह नगर में रहने लगे ॥४७-६७॥
कदाचित् अनेक राजा और सामंतों से सेवित भले प्रकार बन्दीजनों से स्तुत महाराज श्रेणिक छत्र और चंचल चमरों से शोभित अत्युन्नत सिंहासन पर बैठते ही जाते थे कि अचानक ही सभा में वनमाली आया। उसने विनय से महाराज को नमस्कार किया एवं षट्काल के फल और पुष्प महाराज को भेंटकर वह इस प्रकार निवेदन करने लगा। समस्त पुण्यों के भंडार ! बड़े-बड़े राजाओं
२१२ :: श्रेणिक चरित्र
संसदि श्रेणिको यावदास्ते छत्रपवित्रतः । तावत्प्रसूनलावी चा जगामद्वास्थवेदिनः ॥७१॥ तं प्रणम्य सभासीनं षट्कालप्रभवैर्वरैः । प्राभृतैः फलपुष्पैश्च नवीनैश्च व्यजिज्ञपत् ॥७२॥ निःशेषपुण्य संस्थान महीभृत्यूजितांह्रिक। करुणा क्रांतचेतस्क शक्रचक्र विभूतिभाक् ॥७३॥ देव! श्रेणिक! भूपेंद्र! राजंस्त्वद्वृषनोदितः । समाट वर्द्धमानेशो भगवान्विपुलाचले ॥७४॥ तत्प्रभावाद्वने जाता वनश्रीः सफलाऽखिला । सपुष्पा मदनोद्दीप्ता यौवनाद्योषिता यथा ॥७५॥ सरांसि रसपूर्णानि सपद्मानि वराणि च । निर्मलानि गभीराणि विद्वच्चेतांसीवा बभुः ॥७६ ॥ सवंशा तिलकोद्दीप्ता कुलीना मदनाकुला । सुवर्णा मन्मथारूढा वनश्री स्त्रीव संबभौ ॥७७॥ भृङ्गझंकार वाचाला पुष्पहास्या फलस्तनी । स्वरूप रक्तकामांगा वनश्रीर्योषितेवच ॥ ७८ ॥ नकुलाः सकला नागैररम्यंते प्रभावतः । मार्जारशिशवो राजन् मूषकैर्वैरदूषितैः ॥७९॥ सिंहशावं करेणुश्च स्तन्यं सुतस्यामोदतः । पाययति तथा धेनु द्वीपिशावं समीपगं ॥८०॥ से पूजित ! दयामय चित्त के धारक ! चक्र और इन्द्र की विभूति से शोभित! भो देव ! विपुलाचल पर्वत पर धर्म के स्वामी भगवान् महावीर का समवसरण आया है। भगवान् के समवसरण के प्रसाद से वनश्री साक्षात् स्त्री बन गई है क्योंकि स्त्री जैसी पुत्ररूपी फलयुक्त होती है वनश्री भी स्वादु और मनोहर फलयुक्त हो गई है। स्त्री जैसी सपुष्पा- रजोधर्म युक्त होती है । वनश्री भी सपुष्पा हरे-पीले अनेक फूलों से सज्जित हो जाती है। स्त्री जैसी यौवन अवस्था में मदनोदीप्ता-काम से दीप्त हो जाती है वनश्री भी मदनोदीप्ता मदन वृक्ष से शोभित हो जाती है। भगवान् के समवसरण की कृपा से तालाबों ने सज्जनों के चित्त की तुलना की है क्योंकि सज्जनों का चित्त जैसा रसपूर्ण करुणा आदि रसों से व्याप्त रहता है तालाब भी उसी प्रकार रसपूर्ण जल से भरे हुए हैं। सज्जनों का चित्त जैसा सपद्मा- अष्टदल कमलाकार होता है तालाब भी सपद्म मनोहर कमलों से शोभित हैं। सज्जन चित्त जैसा वर - उत्तम है तालाब भी वरउत्तम है । सज्जन चित्त जैसा निर्मल होता है तालाब भी उसी प्रकार निर्मल है। सज्जनों के चित्त जैसे गम्भीर होते हैं तालाब भी इस समय गम्भीर हैं इस प्रकार से भी वनश्री ने स्त्री की तुलना की है क्योंकि स्त्री जैसी सवंशा- कुलिना होती है वनश्री भी सवंशा- बांसों से शोभित है। स्त्री जैसी तिलकोदीप्ता - तिलक से शोभित रहती है वनश्री भी तिलकोदीप्ता - तिलक वृक्ष से शोभित है। स्त्री जैसी मदनाकुला - काम से व्याकुल रहती है वनश्री भी मदनाकुला - मदन वृक्षों से व्याप्त है। स्त्री जैसी सुवर्णा - मनोहर वर्ण वाली होती है वनश्री भी सुवर्णा-हरे - पीले वर्ण से युक्त है। स्त्री के सर्वांग में जैसा मन्मथ-काम जाज्वल्यमान रहता है वनश्री भी मन्मथ जाति के वृक्षों से जहाँ-तहाँ व्याप्त है। पद्मिनी स्त्री जैसी भौरों की जंघारों से युक्त रहती हैं वनश्री पुष्परूपी हास्य युक्त है । स्त्री जैसी स्तन युक्त होती है वनश्री भी ठीक उसी प्रकार फलरूपी स्तनों से शोभित है ॥६८-७८॥
प्रभो! इस समय नेवले आनन्द से सर्पों के साथ क्रीड़ा कर रहे हैं। बिल्ली के बच्चे बैर रहित मूसों के साथ खेल रहे हैं । अपना पुत्र समझ हथिनी सिंहनी के बच्चों को आनन्द से दूध
श्रेणिक चरित्र :: २१३
तत्प्रभावाद्विना वैरा रभवन् जंतवोऽखिलाः । नटंति नागतुंडिकादर्दुरा नागमूनि च ॥८१ ॥ देवदेव नरेशाद्यैः पर्युपासित शासन । समाट सन्मतिः केन तत्प्रभावो हि वर्ण्यते ॥८२ ॥ आनंद प्रमदालीढां गिरं श्रुत्वा वनेशिनः । नरेशो हर्षरोमां च चर्म देही बभूव च ॥८३॥ उत्थाय सहसा शूर गत्वा सप्तपदानि तां । अनमत्कुकुभां शुभ्रादभ्रर्कीतिः सुमूर्तिमान् ॥८४॥ शरीरजं तदा तस्मै भूषणं वसनं धनं । ददौ नृपो धृतानंद इंदोरिव सारित्पतिः ॥८५॥ आनंदान्नंद भेरीं स दापयामास भक्तितः । जगज्जाग्रत्कृते भूपो रक्षिताखिलः सत्क्षितिः ॥८६॥ केचिद्वीताश्रिता केचित्संदतोति दीपिताः । यथार्थ रथसंरूढाः समाजग्मुर्नृपांगणे ॥८७॥ ततः सांतपुरः पौरैर्नृपैः सामंत मंत्रिभिः । नाना सपर्यया युक्तैश्चचाल मगधेश्वरः ॥८८ ॥ । करेणुकर पादाब्ज समुत्थापित पांशवः । दानोदकेन ते नूनं विधाप्यंते च दंतिभिः ॥८९॥ कर्णजाहं वचो यत्र श्रूयते न जनैः क्वचित् । जयारव सुवाचालैरन्योन्यं मुख लोकनैः ॥९०॥ आनकादिक नादेनाकारयंतीव दिग्वधूः । सैन्याः संन्यस्त चेतस्का जिते जिताजवंजवे ॥११॥
पिला रही है और सिंहनी हथिनियों के बच्चों को प्रेम से दूध पिला रही है। प्रजापालक ! समवसरण के प्रताप से समस्त जीव बैर रहित हो गये हैं। मयूरगण सर्पों के मस्तकों पर आनन्द से नृत्य कर रहे हैं। विशेष कहाँ तक कहा जाये इस समय नहीं सम्भव भी काम बड़े-बड़े देवों से सेवित शाहर महावीर भगवान् की कृपा से हो रहे हैं। माली के इस प्रकार अचिंत्य प्रभावशाली भगवान् महावीर का आगमन सुन मारे आनन्द के महाराज का शरीर रोमांचित हो गया । श
उदयादि से जैसा सूर्य उदित होता है महाराज भी उसी प्रकार शीघ्र ही सिंहासन से उठ पड़े । जिस दिशा में भगवान् का समवसरण आया था उस दिशा की ओर सात पैड चलकर भगवान् को परोक्ष नमस्कार किया। उस समय जितने उनके शरीर पर कीमती भूषण और वस्त्र थे तत्काल उन्हें माली को दे दिया धन आदि देकर भी माली को सन्तुष्ट किया । समस्त जीवों की रक्षा करने वाले महाराज ने समस्त नगर निवासियों को जानकारी के लिए बड़ी भक्ति और आनन्द से नगर में ड्योढ़ी पिटवा दी । ड्योढ़ी की आवाज सुनते ही नगर निवासी शीघ्र ही राजमहल के आँगन में आ गये उनमें अनेक तो घोड़ों पर सवार थे, अनेक हाथी पर और अनेक रथों पर बैठे थे । सब नगर निवासियों के एक चित्त होते ही रानी, पुरवासी, राजा, सामंत और मंत्रियों से वेष्टित महाराज शीघ्र ही भगवान् की पूजार्थ वन की ओर चल दिये । मार्ग में घोड़े आदि के पैरों से जो धूल उठती थी वह हाथियों के मद जाल से शांत हो जाती थी ।
उस समय जीवों के कोलाहलों से समस्त आकाश व्याप्त था इसलिए कोई किसी की बात तक भी नहीं सुन सकता था । यदि किसी को किसी से कुछ कहना होता था तो वह उसकी मुँह की ओर देखता था और बड़े कष्ट से इशारे से अपना तात्पर्य उसे समझाता था। उस समय ऐसा जान पड़ता था मानो बाजों के शब्दों से सेना दिक्स्त्रियों को बुला रही है। उस समय सबों का चित्त कर्म विजयी भगवान् महावीर में लगा था और छत्रों का तेज सूर्य तेज को भी फीका कर रहा
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श्रेणिक चरित्र :: दो सौ पाँच द्वादशः सर्गः नौमि तं जिन सद्धर्मं सत्सिद्धांतभास्करम् । यस्य प्रसादतः प्राप्तं श्रेणिकेन सुखं परम् ॥एक॥ कुर्वंतौ परमं धर्मं भुंक्तौ राज्यं च दंपती । गतं कालं न वित्तस्तौशर्माब्धवशवर्तिनौ ॥ दो ॥ यजंतौ जिनपादाब्जं ध्यायंतौ मुनिपुंगवम् । कृपाकृतितपापांगौ तिष्ठतस्तौ च दंपती ॥ तीन ॥ कदाचित्प्रथमं शास्त्रं त्रिषष्ठिस्मृतिगोचरं । अन्यदालोकसंस्थान व्याख्यानं शृणुतस्तकौ ॥चार॥ अष्टोत्तरशतैभिन्नमहिंसाव्रतंमुत्तमम् । तथ्यवाचादिभेदं वा कर्णयंतौ निजेच्छया ॥पाँच॥ द्रवति द्रोष्यति द्रव्यमदुद्रवदिति स्फुटम् । सद्भेदं सप्तभंगाढ्यं तौ च शुश्रुवतुः सदा ॥छः॥ अपूर्वपाठपारीणौ धुरिणौ धर्मसंपदः । विपदः प्रतिकूलौ तौ रेमाते रतिमार वत् ॥सात॥ दशांगभोगभोगाढ्यौ दार्याढ्यजनसेवितौ। रतिसंतृप्तसर्वाङ्गौ शचींद्राविवरेजतुः ॥आठ॥ सुषेणचरदेवोऽथ तस्या ब्रूणेऽभवत्सुतः । समैधे जठरे तस्याः क्रमेण गजसद्गतेः ॥नौ॥ आपांडुवदना क्षीणविग्रहा कलभाषिणी । ईषन्निद्रा समालभ्या जज्ञे सा भ्रूणभावतः ॥दस॥ जिस परमोत्तम धर्म की कृपा से मगध देश के स्वामी महाराज श्रेणिक को अनुपम सुख मिला। पापरूपी अन्धकार को सर्वथा नाश करने वाले उस परम धर्म के लिए नमस्कार है । महाराज श्रेणिक को जैनधर्म में जो सन्देह थे, सो सब हट गये थे इसलिए भली प्रकार जैन धर्म के पालक राज्य- सम्बन्धी अनेक भोग भोगने वाले शुभ मार्ग पर आरूढ़ राजा श्रेणिक और जैन विद्यापि रानी चेलना सानन्द राजगृह नगर में रहने लगे। कभी वे दोनों दंपती जिनेन्द्र भगवान् की पूजा करने लगे कभी मुनियों के उत्तमोत्तम गुणों का स्मरण करने लगे। कभी उन्होंने त्रेसठ महापुरुषों के पवित्र चरित्र से पूर्ण प्रथमानुयोग शास्त्र का स्वाध्याय किया । कभी लोक की लम्बाई-चौड़ाई आदि बतलाने वाले करणानुयोग शास्त्र को ये पढ़ने लगे । कभी-कभी अहिंसादि श्रावक और मुनियों के चरित्र को बतलाने वाले चरणानुयोग शास्त्र का उन्होंने श्रवण किया और कभी गुण, द्रव्य और पर्यायों का वास्तविक स्वरूप बतलाने वाले स्यादस्ति, स्यान्नास्ति इत्यादि सप्तभंगनिरूपक द्रव्यानुयोग शास्त्रों को विचारने लगे । इस प्रकार अनेक शास्त्रों के स्वाध्याय में प्रवीण धर्म-संपदा के धारक समस्त विपत्तियों से रहित रति और कामदेव तुल्य भोग भोगने वाले बड़े ऋद्धि धारक मनुष्यों से पूजित रतिजन्य सुख के भी भले प्रकार आस्वादक वे दोनों दंपती इन्द्र - इन्द्राणी के समान सुख भोगने लगे और भोगों में वे इतने लीन हो गये कि उन्हें जाता हुआ काल भी न जान पड़ने लगा । बहुत काल पर्यंत भोग भोगने पर रानी चेलना गर्भवती हुई। उसके गर्भ में सुषेणचर नामक देव ने आकर जन्म लिया । गर्भभार से रानी चेलना का मुख फीका पड़ गया। स्वाभाविक कृश शरीर और भी कृश हो गया । वचन भी वह धीरे-धीरे बोलने लग गई, गति भी मन्द हो गई और आलस्य ने भी उस पर पूरा पूरा प्रभाव जमा लिया ॥एक-दस॥ दो सौ छः :: श्रेणिक चरित्र दुष्टदोहलकोद्भूत भावनातो बभूव सा । कृशांगा क्षीणभूषाढ्या निशांते द्यौर्वितारिकाः ॥ ग्यारह ॥ तदप्राप्तां च तां वीक्ष्य गतदीप्तिनराधिपः । गदतिस्म शुभे भद्रे विशिष्टनयनोत्सवे ॥बारह॥ काऽस्ति ते हृदि चिंता च सर्वगात्रविदाहिनी । इति संवादिता राज्ञी न ब्रूते च यथा कथम् ॥ तेरह ॥ महाग्रहेण भूपेन पुनः संवादिता जगौ । मृगाक्षी गंदमामंदाक्षरासंवाष्पवादिनी ॥चौदह॥ नाथ किं जीवनेनैव मम दुर्मानसात्मनः । दुभ्रूणधारणाज्ज्ञज्ञे दुर्वांछा प्राणहारिणी ॥पंद्रह॥ वचनैः कथितुं शक्यां नो कथं कथयामि ताम् । तथाप्याख्यामि नाथाद्य तवाग्रहवशाद्विभोः ॥सोलह॥ वक्षः स्थलं विदार्यांशु लोहितस्येक्षितुं तव । वांछास्ति मे नराधीश कथं प्राप्या दुरावहा ॥सत्रह॥ गर्भवती स्त्रियों को दोहले हुआ करते हैं और दोहलों से सन्तान के अच्छे-बुरे का पता लग जाता है क्योंकि यदि सन्तान उत्तम होगी तो उसकी माता को दोहले भी उत्तम होंगे और सन्तान खराब होगी तो दोहले भी खराब होंगे । रानी चेलना को भी दोहले होने लगे । चेलना के गर्भ में महाराज श्रेणिक का परम बैरी अनेक प्रकार कष्ट देने वाला पुत्र उत्पन्न होने वाला था इसलिए रानी को जितने भर दोहले हुए सब खराब ही हुए जिससे उसका शरीर दिनों-दिन क्षीण होने लगा । प्राणपति पर आगामी कष्ट आने से उसका सारा शरीर फीका पड़ गया प्रातः काल में तारागण जैसे मलिन कांति वाले जान पड़ते हैं रानी चेलना भी उसी प्रकार मलिन कांति वाली हो गई । किसी समय महाराज श्रेणिक की दृष्टि महारानी चेलना पर पड़ी । उसे इस प्रकार क्षीण और मलिन कांति वाली देख उन्हें अति दुःख हुआ । रानी के पास आकर वे स्नेह परिपूर्ण वचनों में इस प्रकार कहने लगे। प्राण बल्लभे! मेरे नेत्रों को अतिशय आनन्द देने वाली प्रिये ! तुम्हारे चित्त में ऐसी कौन-सी प्रबल चिंता विद्यमान है जिससे तुम्हारा शरीर रात-दिन क्षीण और कांति - रहित होता चला जाता है। कृपा कर उस चिंता का कारण मुझसे कहो! बराबर उसको दूर करने के लिए प्रयत्न किया जायेगा। महाराज के ऐसे शुभ वचन सुन पहले तो लज्जावश रानी चेलना ने कुछ भी उत्तर न दिया किन्तु जब उसने महाराज का आग्रह विशेष देखा तो वह दुःखाश्रुओं को पोंछती हुई इस प्रकार विनय से कहने लगीप्राणनाथ! मुझ सरीखी अभागिनी डाकिनी स्त्री का संसार में जीना सर्वथा निस्सार है यह जो मैंने गर्भ धारण किया है सो गर्भ नहीं आपकी अभिलाषाओं को मूल से उखाड़ने वाला अंकुर बोया है। इस दुष्ट गर्भ की कृपा से मैं प्राण लेने वाली डाकिनी पैदा हुई हूँ । प्रभो! यद्यपि मैं अपने मुख से कुछ कहना नहीं चाहती तथापि आप के आग्रह वश कुछ कहती हूँ। मुझे यह खराब दोहला हुआ है कि आपके वक्षस्थल को विदार - रक्त देखूँ । इस दोहले की पूर्ति होना कठिन है इसलिए मैं इस प्रकार अति चिंतित हूँ। रानी चेलना के ऐसे वचन सुन महाराज श्रेणिक ने उसी समय अपने वक्षस्थल को चीरा और उससे निकलते रक्त को रानी चेलना को दिखाकर उसकी इच्छा की पूर्ति की । श्रेणिक चरित्र :: दो सौ सात श्रुत्वा विदार्य राजेशो हृदयं निजलोहितम् । प्रदर्श्य पूरयामास तद्वांछां चित्रदायिनीम् ॥ अट्ठारह ॥ परिपूर्ण ततो मासे सुतोऽजनि तयाशुभात् । तल्लाभं भूपतिः श्रुत्वा कुतश्चित्तोषमाप च ॥उन्नीस॥ वितीर्य विविधं दानं दीनानां च दयार्द्रधीः । तद्वक्त्रालोकनार्थं च प्रतस्थे स्थिरमानसः ॥बीस॥ तदा बालो नृपं वीक्ष्य बद्धमुष्टिर्महाभयी । कुटिलास्यो रक्तनेत्रो वक्रभ्रकुटिरुन्नतः ॥इक्कीस॥ दष्टाधरस्तदा दुष्टो घर्षयन् रदनान्निजान् । दुर्भावभावनारूढः पूर्ववैरादभूत्क्षणात् ॥बाईस॥ तथा तं सा परिज्ञाय चेलना महिषी क्षणात् । दुःपुत्रं तं वने भीत्या तत्याज स्वहितेच्छया ॥तेईस॥ कथंचिद्भूपतिर्मत्वा वनमुक्तं शरीरजम् । राज्ञानाय्य सुमोहेन धात्र्याः स च समर्पितः ॥ चौबीस॥ चकार कुणिकाख्यां च तस्य भूप मुदकृतः । ततः क्रमेण पुण्येन तत्र स ववृधे शुभः पुनः ॥पच्चीस॥ ततः क्रमेण चेलिन्या वारिषेणः सुतोऽभवत् । कलाविज्ञानरूपाढ्यः ससम्यक्त्वः शिवावहः ॥छब्बीस॥ हल्लस्ततो विहल्लश्च जितशत्रुः क्रमात्सुताः । तस्याऽजनि पुत्रोच्चैः पित्रोः प्रीतिविवर्द्धकाः ॥सत्ताईस॥ ततः कतिपयैर्घस्त्रैर्गर्भोऽभूत्स्वप्नपूर्वकम् । तस्याः श्रेयः प्रभावेन जनयन् जगतां मुदम् ॥अट्ठाईस॥ आहारे मंदिमा जाता गतौ वाक्य निबंधने । तस्या भ्रूणप्रभावेन शरीरे पांडुतां गता ॥ उनतीस ॥ स्वल्पभूषामितस्पष्टाक्षराक्षीणसुविग्रहा। भग्नसुत्रिवलीभंगा माजनि माजनि प्रियदर्शना ॥ तीस ॥ नवम मास के पूर्ण होने पर रानी चेलना के पुत्र उत्पन्न हुआ पुत्रोत्पत्ति का समाचार महाराज के पास भी पहुँचा। उन्होंने दीन अनाथ याचकों को इच्छा भर दान दिया और पुत्र को देखने के लिए गर्भगृह में गये। ज्यों ही महाराज अपने पुत्र के पास गये । महाराज को देखते ही उसे पूर्व के भव का स्मरण हो आया । महाराज को पूर्वभव का अपना प्रबल बैरी जान मारे क्रोध के उसकी मुट्ठी बँध गई । मुख भयंकर और कुटिल हो गया। नेत्र आरक्त हो गये। मारे क्रोध के भौंहें चढ़ गई । ओठ डसने लगा और उसकी आँखें भी इधर-उधर फिरने लगीं । रानी ने जब उसकी यह दशा देखी तो उसे प्रबल अनिष्ट का करने वाला समझ वह डर गई । अपने हित की इच्छा से निर्मोह हो उसने वह पुत्र शीघ्र ही वन में भेज दिया। जब राजा को यह पता लगा कि रानी ने भयभीत हो पुत्र वन में भेज दिया है तो उससे न रहा गया पुत्र पर मोहवश उन्होंने शीघ्र ही उसे राजमंदिर में मंगा लिया उसे पालन-पोषण के लिए किसी धाय के हाथ सौंप दिया और उसका नाम कुणिक रख दिया एवं वह कुणिक दिनोंदिन बढ़ने लगा । कुमार कुणिक के बाद रानी चेलना के वारिषेण नाम का दूसरा पुत्र हुआ । कुमार वारिषेण अनेक ज्ञान-विज्ञानों का पारगामी, मनोहर रूप का धारक सम्यग्दर्शन से भूषित और मोक्षगामी था । वारिषेण के अनंतर - रानी चेलना के हल्ल-हल्ल के पीछे विदल - विदल के पीछे जितशत्रु ये तीन पुत्र और भी उत्पन्न हुए और ये तीनों ही कुमार माता-पिता को आनंदित करने वाले हुए । इस प्रकार इन पाँच पुत्रों के बाद रानी चेलना के प्रबल भाग्योदय से सबको आनंद देने वाला फिर गर्भ रह गया गर्भ के प्रसाद से रानी चेलना का आहार कम हो गया । गति भी धीमी हो गई। शरीर पर पीलापन छा गया । आवाज मंद हो गई । शरीर अतिकृश हो गया, पेट की त्रिवली दो सौ आठ :: श्रेणिक चरित्र कुचचूचकयोस्तस्तयाः कृष्णत्वं तत्प्रभावतः । जातशत्रुमुखे कर्तुं सूचनायैव सूचकम् ॥इकतीस॥ ततो दोहको जज्ञे तस्या इति सुदुर्लभः । आरुह्य हस्तिनं भूत्या भ्रमिष्यामि च प्रावृषि ॥ बत्तीस॥ तदा प्राप्ता कृशांगी सा समासीद् गजगामिनी । एकदा तां नृपो वीक्ष्य पप्रच्छ कृशकारणम् ॥तैंतीस॥ साऽप्राक्षीदुर्धराकांक्षीऽजनि मे हृदिवल्लभ । ग्रीष्मे गजं समारुह्य मेघवृष्टैः भ्रमाम्यहम् ॥ चौंतीस ॥ दुर्धरं तं परिज्ञाय ग्रीष्मे वृष्ट्याद्यभावतः । सचिंतो योषमादायास्थात्स स्थगितविग्रहः ॥ पैंतीस॥ दुर्लालसं नृपं प्रेक्ष्याऽप्राक्षीदभयपंडितः । कथं तेऽद्य परा चिंता हृदि सर्वांग शोषिणी ॥ छत्तीस॥ इति संवादितो भूपो जगौ तत्कारणं क्षणात् । श्रुत्वेति वचनं पुत्रः करिष्यामीति संजगौ ॥सैंतीस॥ भी छिप गई। होने वाला पुत्र समस्त शत्रुओं के मुख काले करेगा, इस बात को मानो बतलाये हुए ही उसके दोनों चूचक भी काले पड़ गये एवं गर्भ भार के सामने उसे भूषण भी नहीं रुचने लगे ॥ग्यारह-इकतीस॥ किसी समय रानी के मन में यह दोहला हुआ कि ग्रीष्मकाल में हाथी पर चढ़कर बरसते मेघ में इधर-उधर घूमे किन्तु इस इच्छा की पूर्ति उसे अति कठिन जान पड़ी । इसलिए उस चिंता से उसका शरीर दिनों-दिन अधिक क्षीण होने लगा । जब महाराज ने रानी को अति चिन्ता-ग्रस्त देखा तो उन्हें परम दुःख हुआ । चिन्ता का कारण जानने के लिए वे रानी से इस प्रकार कहने लगे । प्रिये ! मैं तुम्हारा शरीर दिनों-दिन क्षीण देखता चला जाता हूँ मुझे शरीर की क्षीणता का न विद्यापाठ कारण नहीं जान पड़ता तुम शीघ्र कहो तुम्हें कौन-सी चिन्ता ऐसी भयंकरता से सता रही है । महाराज के ऐसे वचन सुन रानी ने कहा- कृपानाथ ! मुझे यह दोहला हुआ है कि मैं ग्रीष्मकाल में बरसते हुए मेघ में हाथी पर चढ़कर घूमूं किन्तु यह इच्छा पूर्ण होनी दुःसाध्य है। इसलिए मेरा शरीर दिनों-दिन क्षीण होता चला जाता है । रानी की ऐसी कठिन इच्छा सुनी तो महाराज अचम्भे में पड़ गये । इस इच्छा को पूर्ण करने का उन्हें कोई उपाय न सूझा इसलिए वे मौन धारण कर निश्चेष्ट बैठ गये । अभय कुमार ने महाराज की यह दशा देखी तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ वे महाराज के सामने इस प्रकार विनय से पूछने लगे। पूज्य पिताजी! मैं आपको प्रबल चिन्ता से आतुर देख रहा हूँ। मुझे नहीं मालूम पड़ता अकारण आप क्यों चिन्ता कर रहे हैं ? कृपया चिन्ता का कारण मुझे भी बतावें । पुत्र अभयकुमार के ऐसे वचन सुन के महाराज श्रेणिक ने सारी आत्म कहानी कुमार को कह सुनाई और चिन्ता दूर करने का कोई उपाय न समझ वे अपना दुःख भी प्रकट करने लगे। अभय कुमार अति बुद्धिमान् थे ज्यों ही उन्होंने पिताजी के मुख से चिन्ता का कारण सुना शीघ्र ही सन्तोषप्रद वचनों में उन्होंने कहा- पूज्यवर ! यह बात क्या कठिन है मैं अभी इस चिंता के हटाने का उपाय सोचता हूँ आप अपने चित्त को मलीन न करें तथा चिन्ता दूर करने का उपाय भी सोचने लगे। श्रेणिक चरित्र :: दो सौ नौ अवलोकयितुं रात्रौ व्यंतरं पितृसद्वने। जगाम भयनिर्मुक्तोऽभयो बुद्धिमतां मतः ॥अड़तीस॥ अटन्वटतलेऽटव्यां ध्वांतसंलुप्तसत्पथि । ददर्श दीपिका पंक्तिमभयो भयवर्जितः ॥उनतालीस॥ घूकफूत्कार भीताढ्यं शृगालनिनदावहं । महाफणि फटाटोपं गजमर्दितपादपम् ॥चालीस॥ संदग्धार्द्धशवं भीमं मृतकोपांतमोदकम्। भग्नकुंभकपालाढ्यं मंदाग्निमदमोदितं ॥इकतालीस॥ संदग्धाद्धूतधामिल्य पताकं कुर्कुरस्वनं । भस्मसंभग्नसन्मार्गं नरदंतसुरत्नकम् ॥बयालीस॥ पश्यन् श्मशानमापन्नो वटं दीपप्रकाशितम् । धूपधूमसमाकृष्ट व्यंतरं राजपुत्रकः ॥तैंतालीस॥ सुगंधकुसुमैर्धीरं जपंतं स्थिरमानसम् । उद्विग्नं चिरकालेन सोऽद्राक्षीन्नरपुंगवम् ॥चौंतालीस॥ तदेति स जगौ धीरः कत्स्वं कस्मात्समागतः । किं स्थानं तव किं नाम किं त्वं जपयसि स्फुटं ॥ पैंतालीस ॥ इति पृष्टस्तदावादीद्वटस्थो राजदारकम् । शृणु धीर समाख्यानं मज्जं सुस्मयदायकं ॥छियालीस॥ विजयार्द्धात्तरश्रेण्यां गगनप्रिये । भूपतिर्वायुवेगोऽहं विद्याधरनेश्वरः ॥सैंतालीस॥ एकदा मंदरे रम्ये वंदितुं श्री जिनालयान् । जगामानेक भूमीश सेवितांहिः स्वमार्गतः ॥अड़तालीस॥ कुछ समय सोचने पर उन्हें यह बात मालूम हुई कि यह काम बिना किसी व्यंतर की कृपा से नहीं हो सकता इसलिए आधी रात के समय घर से निकले । व्यंतर की खोज में किसी श्मशान भूमि की ओर चल दिये एवं वहाँ पहुँचकर किसी विशाल वट वृक्ष के नीचे इधर-उधर घूमने लगे । वह भयावह था। जगह-जगह वहाँ अजगर शब्द कर रहे थे, श्मशान उलूकों के फुत्कार कार शब्दों से व्याप्त था शृंगालों के भयंकर शब्दों से मदोन्मत्त हाथियों से अनेक वृक्ष उजड़े पड़े थे। अर्द्ध-दाह मुर्दे और फूटे घड़ों के समान उनके कपाल वहाँ जगह-जगह पड़े थे । मांसाहारी भयंकर जीवों के रौद्र शब्द क्षण-क्षण में सुनाई पड़ते थे । अनेक जगह वहाँ मुर्दे जल रहे थे । चारों ओर उनका धुँआ फैला हुआ था । मांसलोलुपी कुत्ते भी वहाँ जहाँ - तहाँ भयावह शब्द करते थे। चारों ओर वहाँ राख की ढेरियाँ पड़ी थीं। इसलिए मार्ग जानना भी कठिन पड़ जाता था एवं चारों ओर वहाँ हड्डियाँ भी पड़ी थीं । बहुत काल अंधकार में इधर-उधर घूमने पर किसी वटवृक्ष के नीचे कुछ दीपक जलते हुये कुमार को दीख पड़े वह उसी वृक्ष की ओर झुक पड़ा और वृक्ष के नीचे आकर उसे धीर- वीर जयशील स्थिरचित्त चिरकाल से उद्विग्न एवं जिसके चारों ओर फूल रखे हुए हैं कोई उत्तम पुरुष दीख पड़ा । पुरुष को ऐसी दशापन्न देख कुमार ने पूछा- भाई! तू कौन है? क्या तेरा नाम है? कहाँ से तू यहाँ आया ? तेरा निवास स्थान कहाँ हैं? और तू यहाँ आकर क्या सिद्ध करना चाहता है ? कुमार के ऐसे वचन सुन उस पुरुष ने कहा- राजकुमार! मेरा वृत्तांत अतिशय आश्चर्यकारी है यदि आप उसे सुनना चाहते हैं तो सुनें मैं कहता हूँ ॥बत्तीस-छियालीस॥ विजयार्द्ध पर्वत की उत्तर दिशा में एक गगनप्रिय नामक नगर है । गगनप्रिय नगर का स्वामी अनेक विद्याधर और मनुष्यों से सेवित मैं राजा वायुवेग था । कदाचित् मुझे विजयार्द्ध पर्वत पर जिनेन्द्र चैत्यालयों के वन्दनार्थ अभिलाषा हुई। मैं अनेक राजाओं के साथ आकाश मार्ग से अनेक दो सौ दस :: श्रेणिक चरित्र विजयार्द्धाचले तत्र युग्मश्रेणी विराजते । वालुकापुरनाथस्य सर्वविद्याधरे शिनः ॥उनचास॥ सुभद्रा तनुजा रम्या यौवन श्री विडंबिता । सुभद्रा च नितंबस्य स्फीतस्य धारिणी शुभा ॥पचास॥ वयस्याभिः समं दैवात्मंदिरे द्युतिसुंदरे । आजगाम मृगाक्षी सा दधती रतिसंभ्रमम् ॥इक्यावन॥ प्रेक्ष्य तां विह्वलीभूतः संहतः कामसायकैः । शिथिलीभूतसर्वांगो बभूवाहं च तन्मयः ॥बावन॥ ततस्तां च समादायाटितो दिव्यं च भारतम् । चक्राणो जन्मसाफल्यं तया सार्द्धं समुत्सुकः ॥तिरेपन॥ खगचक्री परिज्ञाय तत्सखीवदनाद्वृतम् । तां मामनुसमायातो विमानैः पूरयन्दिशः ॥चौवन॥ तेनाहं युद्धवान् दीर्घं नानाविद्याधरेशिना । विद्याभिः खंडखंडैश्च विद्यावद्भिर्बलोद्धतैः ॥पचपन॥ समे विद्यां विहत्यैव तामादाय गतः पुरम् । भूगोचरो बभूवाहमत्रास्थां शोकलावितः ॥छप्पन॥ द्वादशाब्दं च जाप्येनैतन्मंत्रस्य विषेत्स्यति । विद्यासमूहमेतद्धि विद्यते सूरिदेशने ॥सत्तावन॥ इत्थं कृतेऽपि विद्या नो नो सिद्धागंतुमुत्सुक । गृहमुद्विग्नचित्तोऽहमीहे मोहितमन्मतिः ॥अट्ठावन॥ अभयोऽपि वचोऽवादीत्तन्मंत्रं मे निरूपय । ततो मंत्रं जगौ खगः कुमारं मार विभ्रमम् ॥ उनसठ॥ नगरों को निहारता हुआ विजयार्द्ध पर्वत पर आ गया। उसी समय राजकुमारी सुभद्रा जो कि बालकपुर के महाराजा की पुत्री थी । अपनी सखियों के साथ विजयार्द्ध पर्वत पर आई । राजकुमारी सुभद्रा अतिशय मनोहर थी । यौवन की अद्वितीय शोभा से मंडित थी, मृगनयनी थी। उसके स्थूल किन्तु मनोहर नितम्ब उसकी विचित्र शोभा बना रहे थे एवं रति के समान अनेक विलास संयुत होने से वह साक्षात् रति ही जान पड़ती थी। ज्यों ही कमल नेत्रा सुभद्रा पर मेरी दृष्टि पड़ी मैं बेहोश हो गया कामबाण मुझे बेहद रीति से बेधने लगे । मेरा तेजस्वी शरीर भी उस समय सर्वथा शिथिल हो गया विशेष कहाँ तक कहूँ तन्मय होकर मैं उसी का ध्यान करने लगा। सुभद्रा बिना जब मेरा एक क्षण भी वर्ष सरीखा बीतने लगा तो बिना किसी के पूछे मैं जबरन सुभद्रा को हर लाया और गगनप्रिय नगर में आकर आनन्द से उसके साथ भोग भोगने लगा। इधर मैं तो राजकुमारी सुभद्रा के साथ आनन्द से रहने लगा और उधर किसी सखी ने बालकपुर के स्वामी सुभद्रा के पिता से सारी बात कह सुनाई और मेरा ठिकाना भी बतला दिया सुभद्रा की इस प्रकार हरण वार्ता सुन मारे क्रोध के उसका शरीर भभक उठा और विमान पंक्तियों से समस्त गगन मंडल को आच्छादन करता हुआ शीघ्र ही गगनप्रिय नगर की ओर चल पड़ा । बालकपुर के स्वामी का इस प्रकार आगमन मैंने भी सुना अपनी सेना सजाकर मैं शीघ्र ही उसके सन्मुख आया । चिरकाल तक मैंने उसके साथ और अनेक विद्याओं को जानकर तीक्ष्ण खड्गों धारी उसके योद्धाओं के साथ युद्ध किया अन्त में बालकपुर के स्वामी ने अपने विद्या बल से मेरी समस्त विद्या छीन ली, सुभद्रा को भी जबरन ले गया । विद्या के अभाव से मैं विद्याधर भी भूमि गोचरी के समान रह गया। अनेक शोकों से आकुलित हो मैं पुनः उस विद्या के लिए यह मंत्र सिद्ध कर रहा हूँ बारह वर्ष पर्यन्त इस मंत्र के जपने से वह विद्या सिद्ध होगी ऐसा नैमित्तिक ने कहा है किन्तु बारह वर्ष बीत चुके अभी तक विद्या सिद्ध न हुई इसलिए मैं अब घर जाना चाहता हूँ । ज्यों ही कुमार ने उस श्रेणिक चरित्र :: दो सौ ग्यारह सबीजं लघु संलभ्य जजाप वृषपाकतः । सिषेध निखिला विद्याः सर्वं पुण्यफलं हि वै ॥साठ ॥ तत्प्रभावात्खगस्यापि विद्याः सिद्धाः शुभोदयात् । ततस्तौ स्नेहवृद्ध्यर्थमन्योन्यं नेमतुर्मुदा ॥इकसठ ॥ स चोद्वसितं लब्ध्वा रुष्टः संकल्पदंतिनम् । विकुर्व्य मेघसंघातं रोहयित्वा च चेलनां ॥बासठ ॥ बभ्राम नगरं राज्ञी मासं पूर्णमनोरथा । समासेदे गृहं तूर्णं त्रिवलीभंगभेदिता ॥तिरेसठ ॥ संपूर्णादोहदाद्राज्ञी पूर्वावस्थां समत्यजत् । शुभं सुसातकुंभाभा वृक्षे वल्लीव नूतना ॥चौंसठ ॥ सहासा सरसा सिद्ध सुसंगास्मरसायका । सा प्रसूत सुतं सारं गजादिसुकुमारकं ॥पैंसठ॥ ततो मेघकुमारं च तनुजं समजीजनत् । सप्तपुत्रैश्च सा रेजे तारका सप्तयोगिभिः ॥छयासठ॥ अभिन्नसुखसंतानौ चेलना श्रेणिकौ परौ । रेमाते रतिसंपन्नावखिन्नौ रतिलीलया ॥सरसठ॥ एकदा नृपसामंत किरीट तटरत्नजैः । मयूखैर्मंडितांह्रयब्जः सुशब्दमगधैः स्रुतः ॥ अड़सठ ॥ रत्नश्री चित्रनक्षत्र पवित्र गगनच्छवि। सिंहासनं समासीन उदयाद्रिं तमोहरः ॥ उनहत्तर ॥ पयः पयोधि संरंगत्तरलोत्तुंग भंगुरैः । तरंगैरिव संवीज्यमानः खलु प्रकीर्णकैः ॥सत्तर॥ पुरुष के मुख से ये समाचार सुने शीघ्र ही पूछाभाई वह कौन-सा मन्त्र है मुझे भी तो दिखाओ देखूँ तो वह कैसा कठिन है? कुमार के इस प्रकार पूछे जाने पर उस पुरुष ने शीघ्र ही वह मंत्र कुमार को बतला दिया । कुमार अतिशय पुण्यात्मा थे उस समय उनका भाग्य सुभाग्य था इसलिए उन्होंने मंत्र सीखकर शीघ्र ही इधर-उधर कुछ बीज क्षेपण कर दिये और बातोंबात में वह मंत्र सिद्ध कर लिया । मंत्र से जो जो विद्या सिद्ध होने वाली थी शीघ्र ही सिद्ध हो गई जिससे उसे परम संतोष हो गया एवं दोनों महानुभाव आपस में मिल - भेंट कर बड़े प्रेम से अपने-अपने स्थान चले गये। मंत्र सिद्ध कर कुमार अपने घर आये विद्या बल से उन्होंने शीघ्र ही कृत्रिम मेघ बना दिये। रानी चेलना को हाथी पर चढ़ा लिया इच्छानुसार और जहाँ-तहाँ घुमाया । जब उसके दोहले की पूर्ति हो गई तो वह अपने राजमहल में आ गई । दोहले की पूर्ति कठिन समझ जो उसके चित्त में खेद था वह दूर हो गया । अब उसका शरीर सुवर्ण के समान चमकने लगा। नवमास के बीत जाने पर रानी चेलना के अतिशय प्रतापी शत्रुओं का विजयी पुत्र उत्पन्न हुआ और दोहले के अनुसार उसका नाम राजकुमार रखा गया । राजकुमार के बाद रानी चेलना के मेघकुमार नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ। सात ऋषियों से आकाश में जैसी तारा शोभित होती है रानी चेलना भी ठीक उसी प्रकार सात पुत्रों से शोभित होने लगी । इस प्रकार आपस में अतिशय सुखी समस्त खेदों से रहित वे दोनों दंपती आनन्दपूर्वक भोग भोगते राजगृह नगर में रहने लगे ॥सैंतालीस-सरसठ॥ कदाचित् अनेक राजा और सामंतों से सेवित भले प्रकार बन्दीजनों से स्तुत महाराज श्रेणिक छत्र और चंचल चमरों से शोभित अत्युन्नत सिंहासन पर बैठते ही जाते थे कि अचानक ही सभा में वनमाली आया। उसने विनय से महाराज को नमस्कार किया एवं षट्काल के फल और पुष्प महाराज को भेंटकर वह इस प्रकार निवेदन करने लगा। समस्त पुण्यों के भंडार ! बड़े-बड़े राजाओं दो सौ बारह :: श्रेणिक चरित्र संसदि श्रेणिको यावदास्ते छत्रपवित्रतः । तावत्प्रसूनलावी चा जगामद्वास्थवेदिनः ॥इकहत्तर॥ तं प्रणम्य सभासीनं षट्कालप्रभवैर्वरैः । प्राभृतैः फलपुष्पैश्च नवीनैश्च व्यजिज्ञपत् ॥बहत्तर॥ निःशेषपुण्य संस्थान महीभृत्यूजितांह्रिक। करुणा क्रांतचेतस्क शक्रचक्र विभूतिभाक् ॥तिहत्तर॥ देव! श्रेणिक! भूपेंद्र! राजंस्त्वद्वृषनोदितः । समाट वर्द्धमानेशो भगवान्विपुलाचले ॥चौहत्तर॥ तत्प्रभावाद्वने जाता वनश्रीः सफलाऽखिला । सपुष्पा मदनोद्दीप्ता यौवनाद्योषिता यथा ॥पचहत्तर॥ सरांसि रसपूर्णानि सपद्मानि वराणि च । निर्मलानि गभीराणि विद्वच्चेतांसीवा बभुः ॥छिहत्तर ॥ सवंशा तिलकोद्दीप्ता कुलीना मदनाकुला । सुवर्णा मन्मथारूढा वनश्री स्त्रीव संबभौ ॥सतहत्तर॥ भृङ्गझंकार वाचाला पुष्पहास्या फलस्तनी । स्वरूप रक्तकामांगा वनश्रीर्योषितेवच ॥ अठहत्तर ॥ नकुलाः सकला नागैररम्यंते प्रभावतः । मार्जारशिशवो राजन् मूषकैर्वैरदूषितैः ॥उन्यासी॥ सिंहशावं करेणुश्च स्तन्यं सुतस्यामोदतः । पाययति तथा धेनु द्वीपिशावं समीपगं ॥अस्सी॥ से पूजित ! दयामय चित्त के धारक ! चक्र और इन्द्र की विभूति से शोभित! भो देव ! विपुलाचल पर्वत पर धर्म के स्वामी भगवान् महावीर का समवसरण आया है। भगवान् के समवसरण के प्रसाद से वनश्री साक्षात् स्त्री बन गई है क्योंकि स्त्री जैसी पुत्ररूपी फलयुक्त होती है वनश्री भी स्वादु और मनोहर फलयुक्त हो गई है। स्त्री जैसी सपुष्पा- रजोधर्म युक्त होती है । वनश्री भी सपुष्पा हरे-पीले अनेक फूलों से सज्जित हो जाती है। स्त्री जैसी यौवन अवस्था में मदनोदीप्ता-काम से दीप्त हो जाती है वनश्री भी मदनोदीप्ता मदन वृक्ष से शोभित हो जाती है। भगवान् के समवसरण की कृपा से तालाबों ने सज्जनों के चित्त की तुलना की है क्योंकि सज्जनों का चित्त जैसा रसपूर्ण करुणा आदि रसों से व्याप्त रहता है तालाब भी उसी प्रकार रसपूर्ण जल से भरे हुए हैं। सज्जनों का चित्त जैसा सपद्मा- अष्टदल कमलाकार होता है तालाब भी सपद्म मनोहर कमलों से शोभित हैं। सज्जन चित्त जैसा वर - उत्तम है तालाब भी वरउत्तम है । सज्जन चित्त जैसा निर्मल होता है तालाब भी उसी प्रकार निर्मल है। सज्जनों के चित्त जैसे गम्भीर होते हैं तालाब भी इस समय गम्भीर हैं इस प्रकार से भी वनश्री ने स्त्री की तुलना की है क्योंकि स्त्री जैसी सवंशा- कुलिना होती है वनश्री भी सवंशा- बांसों से शोभित है। स्त्री जैसी तिलकोदीप्ता - तिलक से शोभित रहती है वनश्री भी तिलकोदीप्ता - तिलक वृक्ष से शोभित है। स्त्री जैसी मदनाकुला - काम से व्याकुल रहती है वनश्री भी मदनाकुला - मदन वृक्षों से व्याप्त है। स्त्री जैसी सुवर्णा - मनोहर वर्ण वाली होती है वनश्री भी सुवर्णा-हरे - पीले वर्ण से युक्त है। स्त्री के सर्वांग में जैसा मन्मथ-काम जाज्वल्यमान रहता है वनश्री भी मन्मथ जाति के वृक्षों से जहाँ-तहाँ व्याप्त है। पद्मिनी स्त्री जैसी भौरों की जंघारों से युक्त रहती हैं वनश्री पुष्परूपी हास्य युक्त है । स्त्री जैसी स्तन युक्त होती है वनश्री भी ठीक उसी प्रकार फलरूपी स्तनों से शोभित है ॥अड़सठ-अठहत्तर॥ प्रभो! इस समय नेवले आनन्द से सर्पों के साथ क्रीड़ा कर रहे हैं। बिल्ली के बच्चे बैर रहित मूसों के साथ खेल रहे हैं । अपना पुत्र समझ हथिनी सिंहनी के बच्चों को आनन्द से दूध श्रेणिक चरित्र :: दो सौ तेरह तत्प्रभावाद्विना वैरा रभवन् जंतवोऽखिलाः । नटंति नागतुंडिकादर्दुरा नागमूनि च ॥इक्यासी ॥ देवदेव नरेशाद्यैः पर्युपासित शासन । समाट सन्मतिः केन तत्प्रभावो हि वर्ण्यते ॥बयासी ॥ आनंद प्रमदालीढां गिरं श्रुत्वा वनेशिनः । नरेशो हर्षरोमां च चर्म देही बभूव च ॥तिरासी॥ उत्थाय सहसा शूर गत्वा सप्तपदानि तां । अनमत्कुकुभां शुभ्रादभ्रर्कीतिः सुमूर्तिमान् ॥चौरासी॥ शरीरजं तदा तस्मै भूषणं वसनं धनं । ददौ नृपो धृतानंद इंदोरिव सारित्पतिः ॥पचासी॥ आनंदान्नंद भेरीं स दापयामास भक्तितः । जगज्जाग्रत्कृते भूपो रक्षिताखिलः सत्क्षितिः ॥छियासी॥ केचिद्वीताश्रिता केचित्संदतोति दीपिताः । यथार्थ रथसंरूढाः समाजग्मुर्नृपांगणे ॥सत्तासी॥ ततः सांतपुरः पौरैर्नृपैः सामंत मंत्रिभिः । नाना सपर्यया युक्तैश्चचाल मगधेश्वरः ॥अठासी ॥ । करेणुकर पादाब्ज समुत्थापित पांशवः । दानोदकेन ते नूनं विधाप्यंते च दंतिभिः ॥नवासी॥ कर्णजाहं वचो यत्र श्रूयते न जनैः क्वचित् । जयारव सुवाचालैरन्योन्यं मुख लोकनैः ॥नब्बे॥ आनकादिक नादेनाकारयंतीव दिग्वधूः । सैन्याः संन्यस्त चेतस्का जिते जिताजवंजवे ॥ग्यारह॥ पिला रही है और सिंहनी हथिनियों के बच्चों को प्रेम से दूध पिला रही है। प्रजापालक ! समवसरण के प्रताप से समस्त जीव बैर रहित हो गये हैं। मयूरगण सर्पों के मस्तकों पर आनन्द से नृत्य कर रहे हैं। विशेष कहाँ तक कहा जाये इस समय नहीं सम्भव भी काम बड़े-बड़े देवों से सेवित शाहर महावीर भगवान् की कृपा से हो रहे हैं। माली के इस प्रकार अचिंत्य प्रभावशाली भगवान् महावीर का आगमन सुन मारे आनन्द के महाराज का शरीर रोमांचित हो गया । श उदयादि से जैसा सूर्य उदित होता है महाराज भी उसी प्रकार शीघ्र ही सिंहासन से उठ पड़े । जिस दिशा में भगवान् का समवसरण आया था उस दिशा की ओर सात पैड चलकर भगवान् को परोक्ष नमस्कार किया। उस समय जितने उनके शरीर पर कीमती भूषण और वस्त्र थे तत्काल उन्हें माली को दे दिया धन आदि देकर भी माली को सन्तुष्ट किया । समस्त जीवों की रक्षा करने वाले महाराज ने समस्त नगर निवासियों को जानकारी के लिए बड़ी भक्ति और आनन्द से नगर में ड्योढ़ी पिटवा दी । ड्योढ़ी की आवाज सुनते ही नगर निवासी शीघ्र ही राजमहल के आँगन में आ गये उनमें अनेक तो घोड़ों पर सवार थे, अनेक हाथी पर और अनेक रथों पर बैठे थे । सब नगर निवासियों के एक चित्त होते ही रानी, पुरवासी, राजा, सामंत और मंत्रियों से वेष्टित महाराज शीघ्र ही भगवान् की पूजार्थ वन की ओर चल दिये । मार्ग में घोड़े आदि के पैरों से जो धूल उठती थी वह हाथियों के मद जाल से शांत हो जाती थी । उस समय जीवों के कोलाहलों से समस्त आकाश व्याप्त था इसलिए कोई किसी की बात तक भी नहीं सुन सकता था । यदि किसी को किसी से कुछ कहना होता था तो वह उसकी मुँह की ओर देखता था और बड़े कष्ट से इशारे से अपना तात्पर्य उसे समझाता था। उस समय ऐसा जान पड़ता था मानो बाजों के शब्दों से सेना दिक्स्त्रियों को बुला रही है। उस समय सबों का चित्त कर्म विजयी भगवान् महावीर में लगा था और छत्रों का तेज सूर्य तेज को भी फीका कर रहा
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शमी की तारीफों के पुल बांधते हुए विराट ने कहा कि चोटों से जूझने वाला यह गेंदबाज इस समय फिटनेस के मामले में सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है।
नेपियर, प्रेट्र। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने तेज गेंदबाज मुहम्मद शमी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि चोटों से जूझने वाला यह गेंदबाज इस समय फिटनेस के मामले में सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। शमी के साथ ऐसा भी दौर रहा जिसमें वह पिछले साल 'यो-यो' परीक्षण में विफल रहे और कुछ निजी मुद्दों में फंसा रहे, लेकिन शमी ने इन सब को पीछे छोड़ते हुए अपने 56वें मैच में 100 विकेट झटके।
कोहली ने मैच के बाद कहा, 'तेज गेंदबाजी समूह का मानना है कि वे किसी भी टीम को पस्त कर सकते हैं। शमी को खुद की काबिलियत और अपनी फिटनेस पर भरोसा है, मैंने अपने करियर में उसे इससे ज्यादा फिट नहीं देखा। उसने टेस्ट फॉर्म को वनडे क्रिकेट में भी जारी रखा। ' वह पिछले साल जून में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट से पहले 'यो यो' फिटनेस परीक्षण में विफल हो गए थे।
शमी की वापसी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हुई जिसमें उन्होंने टेस्ट सीरीज के दौरान 16 विकेट झटके थे। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ मैचों में यह हमारे संतुलित प्रदर्शन में से एक था। जब मैंने टॉस गंवाया तो मुझे लगा कि स्कोर 300 रन से ज्यादा जाएगा, लेकिन इस विकेट पर 150 के करीब रन शानदार रहे। पारी के दूसरे हाफ में पिच धीमी हो गई थी, लेकिन पहले हाफ में स्पिनरों ने अच्छी गेंदबाजी की। '
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शमी की तारीफों के पुल बांधते हुए विराट ने कहा कि चोटों से जूझने वाला यह गेंदबाज इस समय फिटनेस के मामले में सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। नेपियर, प्रेट्र। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने तेज गेंदबाज मुहम्मद शमी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि चोटों से जूझने वाला यह गेंदबाज इस समय फिटनेस के मामले में सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। शमी के साथ ऐसा भी दौर रहा जिसमें वह पिछले साल 'यो-यो' परीक्षण में विफल रहे और कुछ निजी मुद्दों में फंसा रहे, लेकिन शमी ने इन सब को पीछे छोड़ते हुए अपने छप्पनवें मैच में एक सौ विकेट झटके। कोहली ने मैच के बाद कहा, 'तेज गेंदबाजी समूह का मानना है कि वे किसी भी टीम को पस्त कर सकते हैं। शमी को खुद की काबिलियत और अपनी फिटनेस पर भरोसा है, मैंने अपने करियर में उसे इससे ज्यादा फिट नहीं देखा। उसने टेस्ट फॉर्म को वनडे क्रिकेट में भी जारी रखा। ' वह पिछले साल जून में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट से पहले 'यो यो' फिटनेस परीक्षण में विफल हो गए थे। शमी की वापसी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हुई जिसमें उन्होंने टेस्ट सीरीज के दौरान सोलह विकेट झटके थे। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ मैचों में यह हमारे संतुलित प्रदर्शन में से एक था। जब मैंने टॉस गंवाया तो मुझे लगा कि स्कोर तीन सौ रन से ज्यादा जाएगा, लेकिन इस विकेट पर एक सौ पचास के करीब रन शानदार रहे। पारी के दूसरे हाफ में पिच धीमी हो गई थी, लेकिन पहले हाफ में स्पिनरों ने अच्छी गेंदबाजी की। '
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पुरी दुनिया में कई ऐसे मामले देखे गए है कि जिसमें चीता और कुत्ते की दोस्ती देखने को तो नहीं मिलती है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को देखकर आपका ये भ्रम टूट जाएगा.
जी हां, चीता और कुत्ते की दोस्ती का कहानी आजकल सोशल मीडिया पर छाई हुई है। दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं और साथ-साथ खेलते भी हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि दोनों की मुलाकात इसी साल सितंबर में हुई थी और उसके बाद दोनों पक्के दोस्त बन गए.
अमेरिका के सिनसिनाटी जू का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह दोनों गार्डेन में खेलते नजर आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, चीते का बच्चा तीन महीने का है और उसका नाम क्रिस है, जबकि कुत्ते का नाम रेमस है.
हाल ही में वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ लोग यह वीडियो देखकर हैरान हैं तो कुछ लोगों ने दोनों की दोस्ती पर खुशी जताई है.
After a long day of play, it's time to snuggle.
एक यूजर ने लिखा है कि 'चीता और कुत्ते की दोस्ती वाकई काबिलेतारीफ है. इनको किसी की नजर ना लगे. ' वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा है कि हर जानवर और इंसान को ऐसी दोस्ती मिले, जो एक दूसरे का साथ ना छोड़ें.
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पुरी दुनिया में कई ऐसे मामले देखे गए है कि जिसमें चीता और कुत्ते की दोस्ती देखने को तो नहीं मिलती है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को देखकर आपका ये भ्रम टूट जाएगा. जी हां, चीता और कुत्ते की दोस्ती का कहानी आजकल सोशल मीडिया पर छाई हुई है। दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं और साथ-साथ खेलते भी हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि दोनों की मुलाकात इसी साल सितंबर में हुई थी और उसके बाद दोनों पक्के दोस्त बन गए. अमेरिका के सिनसिनाटी जू का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह दोनों गार्डेन में खेलते नजर आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, चीते का बच्चा तीन महीने का है और उसका नाम क्रिस है, जबकि कुत्ते का नाम रेमस है. हाल ही में वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ लोग यह वीडियो देखकर हैरान हैं तो कुछ लोगों ने दोनों की दोस्ती पर खुशी जताई है. After a long day of play, it's time to snuggle. एक यूजर ने लिखा है कि 'चीता और कुत्ते की दोस्ती वाकई काबिलेतारीफ है. इनको किसी की नजर ना लगे. ' वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा है कि हर जानवर और इंसान को ऐसी दोस्ती मिले, जो एक दूसरे का साथ ना छोड़ें.
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"पूर्व कार्य" शब्द का क्या अर्थ है?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार की वास्तविकताएं ऐसी हैं कि यह कर सकती हैठेकेदारों के बीच एक गलतफहमी है, जिसके कारण बाद में माल के वितरण के साथ समस्याएं हो सकती हैं, इसके भुगतान या कुछ और के साथ। ऐसी समस्याओं से बचने के लिए, संक्षेपों का एक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ बनाया गया था।
यह समझने के लिए कि इस शब्द का क्या अर्थ है,यह "फ्रैंको" शब्द का अनुवाद करने लायक है। यह अंग्रेजी शब्द "मुक्त" से आया, जिसका अर्थ है "मुफ़्त।" दूसरे शब्दों में, पूर्व कारखाना गोदाम, कारखाने, कारखाने इत्यादि से माल के मुक्त निर्यात का पदनाम है। यह उल्लेखनीय है कि इंकोटर्म 2010, जिसमें न केवल यह शब्द शामिल है, पूरी तरह से एकीकृत प्रकाशन है। यह केवल एक ही अर्थ में संक्षेप में संक्षेप में देता है। यह अनुबंध की प्रक्रिया को बहुत सरल बनाता है और पार्टियों के बीच अनुबंध के बीच गलतफहमी के जोखिम को कम करता है। उदाहरण के लिए, इंकोटर्म में "पूर्व कार्य" को EXW - Ex Works के रूप में नामित किया गया है। हालांकि, इन सभी शब्दकोषों में एक बात आम है। वे सभी माल की आपूर्ति से संबंधित हैं। यही है, इंकोटर्म एक संदर्भ पुस्तक है, जिसमें समुद्र, वायु, भूमि द्वारा माल के सभी संभावित प्रकार की डिलीवरी शामिल है। कारखाने के पूर्व कार्यों के अलावा, निर्देशिका में समझने वाले कई और शब्द हैं। साथ ही, यह भी जोड़ा जाना चाहिए कि इस संग्रह में सभी परिभाषाओं को तीन अक्षरों द्वारा इंगित किया गया है।
पूर्व कार्य - यह क्या है?
शब्द की सबसे सटीक परिभाषा लगता हैलगभग इस प्रकार है। सभी आवश्यकताओं की पूर्ति इस समय अंतिम मानी जाएगी जब माल नियंत्रण बिंदु तक पहुंच जाएंगे जिसमें इसे विक्रेता द्वारा वितरित किया जाना था। हालांकि, कुछ आरक्षण हैं। वे इस तथ्य में शामिल हैं कि विक्रेता स्वयं इस उत्पाद को परिवहन नहीं करता है। "पूर्व कार्य" शब्द का अर्थ है कि विक्रेता परिवहन और माल की लोडिंग के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। और माल के रास्ते पर भी वह इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है। उत्पाद के परिवहन के दौरान उत्पन्न होने वाले सभी जोखिम खरीदार द्वारा उठाए जाते हैं।
यदि अनुबंध के समापन पर विधि का चयन किया गया था(इंकोटर्म निर्देशिका के तहत EXW), यह समझना उचित है कि माल के लिए जोखिम और पूरी ज़िम्मेदारी खरीदार या इस माल के वाहक द्वारा ली जाती है, न कि इसके विक्रेता द्वारा। इस तरह के एक लेनदेन के समापन के बाद, कार्गो कार्यान्वयन इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। हालांकि, यह कथन केवल तभी वैध है जब कोई अतिरिक्त समझौता नहीं हुआ है। एक विकल्प है जिसमें विक्रेता को सामान लोड करने के लिए सभी जिम्मेदारी सौंपना संभव है, और परिवहन से जुड़े सभी जोखिमों को स्थानांतरित करना भी संभव है। हालांकि, इसके लिए, दोनों पक्षों को नियम और शर्तों पर सहमत होना चाहिए, और दस्तावेज़ में उन्हें ठीक करना होगा। यह स्पष्ट रूप से बताएगा कि जोखिम और देनदारी पूरी तरह विक्रेता पर हैं। अन्यथा, मानक शब्द "पूर्व कार्य" का अर्थ है कि यह सब खरीदार के साथ है। यह कहने लायक है कि रूसी संघ के क्षेत्र में EXW को एक सरल और अधिक समझने योग्य अभिव्यक्ति "स्व-वितरण" के साथ प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
अनुबंध समाप्त करते समय, प्रत्येक पार्टी किसी भी परिस्थिति को पूरा करने के लिए कार्य करती है। तो, विक्रेता निम्नलिखित करने के लिए बाध्य हैः
- विक्रेता सभी सामान प्रदान करने के लिए उपक्रम करता है,जो बिक्री के अनुबंध में निर्धारित किया गया था। इसके अलावा, वह उन सामानों के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज प्रदान करने के लिए बाध्य है जिन्हें खरीदार की आवश्यकता हो सकती है। नियम, एक नियम के रूप में, उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा की पुष्टि करते हैं।
- अगर खरीदार विक्रेता से पूछता हैमाल के निर्यात के लिए सभी कागजात प्राप्त करने में उनकी मदद करने के लिए, विक्रेता मदद करने के लिए बाध्य है। हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी लागत और जोखिम अभी भी खरीदार पर आते हैं।
- विक्रेता की ज़िम्मेदारी में शिपिंग भी शामिल हैअनुबंध में निर्दिष्ट जगह में कार्गो। आइटम अनलोडेड स्थिति में होना चाहिए। अनलोडिंग का समय और स्थान अक्सर पार्टियों द्वारा अग्रिम में बातचीत की जाती है, लेकिन यदि स्थान, उदाहरण के लिए, पहले से निर्दिष्ट नहीं किया गया था, तो विक्रेता को माल को निकटतम और सबसे उपयुक्त बिंदु पर पहुंचाने का अधिकार है।
- एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि जब तक खरीदार को डिलीवरी के स्थान पर माल वितरित नहीं किया जाता है, तब तक सभी जोखिम विक्रेता पर झूठ बोलते हैं।
- एक महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रेता को अपने खरीदार को सूचित करने के लिए बाध्य किया जाता है कि उसके माल कहाँ और कब स्थित होंगे ताकि वह आगे परिवहन के लिए इसे उठा सके।
स्वाभाविक रूप से, गाड़ी का अनुबंध एक पेपर है जो अनुबंध के दोनों किनारों पर दायित्व लगाता है। खरीदार के कर्तव्यों में निम्नलिखित मद शामिल हैंः
- पहली बात यह है कि खरीदार को लागू करना चाहिए वह माल के लिए भुगतान है जो पहले प्राप्त अनुबंध में दर्शाया गया था।
- निर्यात या आयात लाइसेंस प्राप्त करनाशुरुआत में माल के खरीदार के साथ निहित है। इसके अलावा, कागजात की प्राप्ति के बाद उत्पन्न होने वाले सभी जोखिम, साथ ही भविष्य की सभी लागतों को भी खरीदार द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए।
- वह पार्टी जो सामान खरीदती है उस दिन माल प्राप्त करने के लिए बाध्य होती है और उस समय जब इसे लोड होने की जगह पर पहुंचाया जाता है।
- खरीदार की जिम्मेदारियों में एक महत्वपूर्ण बिंदु होगाकि वह विक्रेता द्वारा लोड होने के बिंदु पर वितरित किए जाने के पल से सामान की ज़िम्मेदारी मानता है। यह इस तथ्य के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है कि उदाहरण के लिए, सभी खर्चों की आवश्यकता हो सकती है, माल के नुकसान के मामले में, खरीदार द्वारा लोडिंग बिंदु पर माल आने के पल से भी खरीदा जाता है।
- एक महत्वपूर्ण बात यह होगी कि खरीदार को माल के विक्रेता को सूचित करने के लिए बाध्य किया जाता है जिसे उसने अपना सामान प्राप्त किया था।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि माल के बाद के स्व-निर्यात के साथ अनुबंध का निष्कर्ष सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ नुकसान हैं।
इस समझौते का बहुत अप्रिय बिंदुयह है कि लोडर खरीदार के कंधों पर पड़ता है, हालांकि माल की विक्रेता अक्सर इस कार्रवाई को करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होती है। यह ध्यान देने योग्य भी है कि अगर कार्यान्वयनकर्ता लोडिंग करता है, तो सभी जोखिम अभी भी खरीदार के साथ झूठ बोलेंगे। यही कारण है कि संक्षिप्त नाम एफसीए के साथ एक समझौते को समाप्त करना बेहतर है, जो खरीदार से विक्रेता को लोड करने के जोखिम को स्थानांतरित करता है।
खरीदार के प्रयासों के कारण लोडिंग के अलावा, कुछ अप्रिय क्षण हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जब निष्कर्ष निकाला जाता हैईडब्ल्यू वर्क्स की शर्तों पर अनुबंध, कार्यान्वयन सीमा शुल्क औपचारिकताओं के कार्यान्वयन के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। वे सभी भी खरीदार के कंधों पर पड़ते हैं। इस वजह से, केवल ऐसे अनुबंध में प्रवेश करने की अनुशंसा की जाती है जब खरीदार को भरोसा है कि वह भविष्य में आवश्यक होने पर सभी सीमा शुल्क संचालन करने में सक्षम है।
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"पूर्व कार्य" शब्द का क्या अर्थ है? अंतरराष्ट्रीय व्यापार की वास्तविकताएं ऐसी हैं कि यह कर सकती हैठेकेदारों के बीच एक गलतफहमी है, जिसके कारण बाद में माल के वितरण के साथ समस्याएं हो सकती हैं, इसके भुगतान या कुछ और के साथ। ऐसी समस्याओं से बचने के लिए, संक्षेपों का एक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ बनाया गया था। यह समझने के लिए कि इस शब्द का क्या अर्थ है,यह "फ्रैंको" शब्द का अनुवाद करने लायक है। यह अंग्रेजी शब्द "मुक्त" से आया, जिसका अर्थ है "मुफ़्त।" दूसरे शब्दों में, पूर्व कारखाना गोदाम, कारखाने, कारखाने इत्यादि से माल के मुक्त निर्यात का पदनाम है। यह उल्लेखनीय है कि इंकोटर्म दो हज़ार दस, जिसमें न केवल यह शब्द शामिल है, पूरी तरह से एकीकृत प्रकाशन है। यह केवल एक ही अर्थ में संक्षेप में संक्षेप में देता है। यह अनुबंध की प्रक्रिया को बहुत सरल बनाता है और पार्टियों के बीच अनुबंध के बीच गलतफहमी के जोखिम को कम करता है। उदाहरण के लिए, इंकोटर्म में "पूर्व कार्य" को EXW - Ex Works के रूप में नामित किया गया है। हालांकि, इन सभी शब्दकोषों में एक बात आम है। वे सभी माल की आपूर्ति से संबंधित हैं। यही है, इंकोटर्म एक संदर्भ पुस्तक है, जिसमें समुद्र, वायु, भूमि द्वारा माल के सभी संभावित प्रकार की डिलीवरी शामिल है। कारखाने के पूर्व कार्यों के अलावा, निर्देशिका में समझने वाले कई और शब्द हैं। साथ ही, यह भी जोड़ा जाना चाहिए कि इस संग्रह में सभी परिभाषाओं को तीन अक्षरों द्वारा इंगित किया गया है। पूर्व कार्य - यह क्या है? शब्द की सबसे सटीक परिभाषा लगता हैलगभग इस प्रकार है। सभी आवश्यकताओं की पूर्ति इस समय अंतिम मानी जाएगी जब माल नियंत्रण बिंदु तक पहुंच जाएंगे जिसमें इसे विक्रेता द्वारा वितरित किया जाना था। हालांकि, कुछ आरक्षण हैं। वे इस तथ्य में शामिल हैं कि विक्रेता स्वयं इस उत्पाद को परिवहन नहीं करता है। "पूर्व कार्य" शब्द का अर्थ है कि विक्रेता परिवहन और माल की लोडिंग के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। और माल के रास्ते पर भी वह इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है। उत्पाद के परिवहन के दौरान उत्पन्न होने वाले सभी जोखिम खरीदार द्वारा उठाए जाते हैं। यदि अनुबंध के समापन पर विधि का चयन किया गया था, यह समझना उचित है कि माल के लिए जोखिम और पूरी ज़िम्मेदारी खरीदार या इस माल के वाहक द्वारा ली जाती है, न कि इसके विक्रेता द्वारा। इस तरह के एक लेनदेन के समापन के बाद, कार्गो कार्यान्वयन इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। हालांकि, यह कथन केवल तभी वैध है जब कोई अतिरिक्त समझौता नहीं हुआ है। एक विकल्प है जिसमें विक्रेता को सामान लोड करने के लिए सभी जिम्मेदारी सौंपना संभव है, और परिवहन से जुड़े सभी जोखिमों को स्थानांतरित करना भी संभव है। हालांकि, इसके लिए, दोनों पक्षों को नियम और शर्तों पर सहमत होना चाहिए, और दस्तावेज़ में उन्हें ठीक करना होगा। यह स्पष्ट रूप से बताएगा कि जोखिम और देनदारी पूरी तरह विक्रेता पर हैं। अन्यथा, मानक शब्द "पूर्व कार्य" का अर्थ है कि यह सब खरीदार के साथ है। यह कहने लायक है कि रूसी संघ के क्षेत्र में EXW को एक सरल और अधिक समझने योग्य अभिव्यक्ति "स्व-वितरण" के साथ प्रतिस्थापित किया जा सकता है। अनुबंध समाप्त करते समय, प्रत्येक पार्टी किसी भी परिस्थिति को पूरा करने के लिए कार्य करती है। तो, विक्रेता निम्नलिखित करने के लिए बाध्य हैः - विक्रेता सभी सामान प्रदान करने के लिए उपक्रम करता है,जो बिक्री के अनुबंध में निर्धारित किया गया था। इसके अलावा, वह उन सामानों के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज प्रदान करने के लिए बाध्य है जिन्हें खरीदार की आवश्यकता हो सकती है। नियम, एक नियम के रूप में, उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा की पुष्टि करते हैं। - अगर खरीदार विक्रेता से पूछता हैमाल के निर्यात के लिए सभी कागजात प्राप्त करने में उनकी मदद करने के लिए, विक्रेता मदद करने के लिए बाध्य है। हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी लागत और जोखिम अभी भी खरीदार पर आते हैं। - विक्रेता की ज़िम्मेदारी में शिपिंग भी शामिल हैअनुबंध में निर्दिष्ट जगह में कार्गो। आइटम अनलोडेड स्थिति में होना चाहिए। अनलोडिंग का समय और स्थान अक्सर पार्टियों द्वारा अग्रिम में बातचीत की जाती है, लेकिन यदि स्थान, उदाहरण के लिए, पहले से निर्दिष्ट नहीं किया गया था, तो विक्रेता को माल को निकटतम और सबसे उपयुक्त बिंदु पर पहुंचाने का अधिकार है। - एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि जब तक खरीदार को डिलीवरी के स्थान पर माल वितरित नहीं किया जाता है, तब तक सभी जोखिम विक्रेता पर झूठ बोलते हैं। - एक महत्वपूर्ण बात यह है कि विक्रेता को अपने खरीदार को सूचित करने के लिए बाध्य किया जाता है कि उसके माल कहाँ और कब स्थित होंगे ताकि वह आगे परिवहन के लिए इसे उठा सके। स्वाभाविक रूप से, गाड़ी का अनुबंध एक पेपर है जो अनुबंध के दोनों किनारों पर दायित्व लगाता है। खरीदार के कर्तव्यों में निम्नलिखित मद शामिल हैंः - पहली बात यह है कि खरीदार को लागू करना चाहिए वह माल के लिए भुगतान है जो पहले प्राप्त अनुबंध में दर्शाया गया था। - निर्यात या आयात लाइसेंस प्राप्त करनाशुरुआत में माल के खरीदार के साथ निहित है। इसके अलावा, कागजात की प्राप्ति के बाद उत्पन्न होने वाले सभी जोखिम, साथ ही भविष्य की सभी लागतों को भी खरीदार द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए। - वह पार्टी जो सामान खरीदती है उस दिन माल प्राप्त करने के लिए बाध्य होती है और उस समय जब इसे लोड होने की जगह पर पहुंचाया जाता है। - खरीदार की जिम्मेदारियों में एक महत्वपूर्ण बिंदु होगाकि वह विक्रेता द्वारा लोड होने के बिंदु पर वितरित किए जाने के पल से सामान की ज़िम्मेदारी मानता है। यह इस तथ्य के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है कि उदाहरण के लिए, सभी खर्चों की आवश्यकता हो सकती है, माल के नुकसान के मामले में, खरीदार द्वारा लोडिंग बिंदु पर माल आने के पल से भी खरीदा जाता है। - एक महत्वपूर्ण बात यह होगी कि खरीदार को माल के विक्रेता को सूचित करने के लिए बाध्य किया जाता है जिसे उसने अपना सामान प्राप्त किया था। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि माल के बाद के स्व-निर्यात के साथ अनुबंध का निष्कर्ष सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ नुकसान हैं। इस समझौते का बहुत अप्रिय बिंदुयह है कि लोडर खरीदार के कंधों पर पड़ता है, हालांकि माल की विक्रेता अक्सर इस कार्रवाई को करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होती है। यह ध्यान देने योग्य भी है कि अगर कार्यान्वयनकर्ता लोडिंग करता है, तो सभी जोखिम अभी भी खरीदार के साथ झूठ बोलेंगे। यही कारण है कि संक्षिप्त नाम एफसीए के साथ एक समझौते को समाप्त करना बेहतर है, जो खरीदार से विक्रेता को लोड करने के जोखिम को स्थानांतरित करता है। खरीदार के प्रयासों के कारण लोडिंग के अलावा, कुछ अप्रिय क्षण हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जब निष्कर्ष निकाला जाता हैईडब्ल्यू वर्क्स की शर्तों पर अनुबंध, कार्यान्वयन सीमा शुल्क औपचारिकताओं के कार्यान्वयन के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। वे सभी भी खरीदार के कंधों पर पड़ते हैं। इस वजह से, केवल ऐसे अनुबंध में प्रवेश करने की अनुशंसा की जाती है जब खरीदार को भरोसा है कि वह भविष्य में आवश्यक होने पर सभी सीमा शुल्क संचालन करने में सक्षम है।
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आज, बहुत से लोग अपने सामाजिक या निजी जीवन में अनुभव की जाने वाली समस्याओं से जूझ रहे हैं। जब इनमें से प्रत्येक समस्या कभी-कभी कठिन हो जाती है, तो इसे दूर करना अधिक कठिन हो जाता है। इसलिए, एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक के समर्थन से समस्याओं को दूर करना आसान है।
एक मनोवैज्ञानिक से सहायता प्राप्त करने से कई समस्याओं को अधिक आसानी से दूर करने और समाधान खोजने में मदद मिलती है। इसलिए, इस बहुत ही महत्वपूर्ण सेवा के साथ, व्यक्ति बहुत बेहतर महसूस करता है। साथ ही, जब मुझे आंतरिक शांति नहीं मिल पाती है, तो इन समस्याओं को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिक समर्थन का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए भी इज़मिर मनोवैज्ञानिक उनके सहयोग से समस्याओं को सर्वोत्तम तरीके से दूर करना संभव है।
इज़मिर मनोवैज्ञानिक सेवा अपने साथ कई फायदे लाती है। कभी-कभी, दैनिक जीवन के बाद अनुभव की जाने वाली समस्याएं आंतरिक बेचैनी या नाखुशी जैसी स्थितियों को जन्म देती हैं। यह लंबे समय में चिंता या अवसाद जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इन स्थितियों को दूर करने और आगे की प्रगति को रोकने के लिए, सबसे अच्छी बात यह है कि इज़मिर मनोवैज्ञानिक सहायता प्राप्त करना।
इस प्रकार, गंभीर मनोवैज्ञानिक स्थिति उत्पन्न होने से पहले कम समय में उपाय किए जाते हैं। सावधानी बरतने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति हर पहलू में बेहतर महसूस करे और अपनी समस्याओं को दूर करे। इन सबके अलावा, कभी-कभी जब व्यक्ति बहुत अकेलापन महसूस करता है या साझा करने की आवश्यकता महसूस करता है, तो उसे मनोवैज्ञानिक का समर्थन मिल सकता है। मनोवैज्ञानिक के समर्थन के लिए धन्यवाद, व्यक्ति आसानी से अपनी सभी समस्याओं या जो वे साझा करना चाहते हैं, साझा कर सकते हैं। इस संबंध में एक बहुत ही विश्वसनीय सेवा की पेशकश की जाती है।
ऑनलाइन थेरेपी, यह विशेष रूप से दैनिक जीवन में विभिन्न शहरों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही फायदेमंद सेवा है। ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के साथ, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति अपनी समस्याओं पर विजय प्राप्त करे और अधिक आसानी से उस पर विजय प्राप्त करे। अगर आप अलग-अलग शहरों में हैं तो भी उससे आसानी से इलाज संभव है। मनोवैज्ञानिकों के समर्थन के लिए धन्यवाद, ऑनलाइन थेरेपी के साथ-साथ समस्याएं मिट जाती हैं।
ऑनलाइन थेरेपी प्राप्त करना हमेशा एक लाभप्रद और अधिक व्यावहारिक तरीका होता है। इस पद्धति के लिए धन्यवाद, बहुत से लोग दूर से भी उपचार प्राप्त करके कई समस्याओं को दूर कर सकते हैं। ऑनलाइन थेरेपी और आमने-सामने उपचार प्राप्त करने के लिए आप सुरक्षित रूप से नोरा मनोविज्ञान साइट पर जा सकते हैं।
ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक सेवा लेने से, प्रत्येक आंतरिक या सामान्य समस्या का समाधान खोजना संभव है। इसलिए चिकित्सा प्राप्त करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है। एक मनोवैज्ञानिक का समर्थन प्राप्त करने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति पेशेवर रूप से कुछ समस्याओं को अधिक आसानी से दूर कर सकता है।
विशेष रूप से ऑनलाइन थेरेपी बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसे दूर से भी लिया जा सकता है। इसलिए, इज़मिर मनोवैज्ञानिक समर्थन के रूप में, कई समस्याओं को अधिक आसानी से दूर किया जा सकता है। ऑनलाइन थैरेपी से सभी समस्याओं के बारे में आमने-सामने और इंटरनेट पर बातचीत करके बात करना संभव है। चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, यह सेवा आसानी से प्राप्त करना संभव है।
ऑनलाइन थेरेपी एक पेशेवर सेवा प्राप्त करते समय, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति अपनी आंतरिक समस्याओं पर विश्वास के साथ विजय प्राप्त करे। हमेशा समस्या पर काबू पाने के अलावा, व्यक्ति को अच्छा महसूस करने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता भी मिल सकती है। मनोवैज्ञानिकों के सहयोग से, जीवन अधिक शांतिपूर्ण और अधिक साझा हो जाता है। साथ ही, बहुत से लोग अपने जीवन में अधिक सकारात्मक होने का प्रबंधन करते हैं, ऑनलाइन उपचारों के लिए धन्यवाद जो सकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव पैदा करते हैं। इसलिए, एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक का समर्थन प्राप्त करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है।
आप सबसे अधिक पेशेवर और गुणवत्तापूर्ण मनोविज्ञान सहायता प्राप्त करने के लिए नोरा मनोविज्ञान साइट पर जा सकते हैं।
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आज, बहुत से लोग अपने सामाजिक या निजी जीवन में अनुभव की जाने वाली समस्याओं से जूझ रहे हैं। जब इनमें से प्रत्येक समस्या कभी-कभी कठिन हो जाती है, तो इसे दूर करना अधिक कठिन हो जाता है। इसलिए, एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक के समर्थन से समस्याओं को दूर करना आसान है। एक मनोवैज्ञानिक से सहायता प्राप्त करने से कई समस्याओं को अधिक आसानी से दूर करने और समाधान खोजने में मदद मिलती है। इसलिए, इस बहुत ही महत्वपूर्ण सेवा के साथ, व्यक्ति बहुत बेहतर महसूस करता है। साथ ही, जब मुझे आंतरिक शांति नहीं मिल पाती है, तो इन समस्याओं को दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिक समर्थन का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए भी इज़मिर मनोवैज्ञानिक उनके सहयोग से समस्याओं को सर्वोत्तम तरीके से दूर करना संभव है। इज़मिर मनोवैज्ञानिक सेवा अपने साथ कई फायदे लाती है। कभी-कभी, दैनिक जीवन के बाद अनुभव की जाने वाली समस्याएं आंतरिक बेचैनी या नाखुशी जैसी स्थितियों को जन्म देती हैं। यह लंबे समय में चिंता या अवसाद जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इन स्थितियों को दूर करने और आगे की प्रगति को रोकने के लिए, सबसे अच्छी बात यह है कि इज़मिर मनोवैज्ञानिक सहायता प्राप्त करना। इस प्रकार, गंभीर मनोवैज्ञानिक स्थिति उत्पन्न होने से पहले कम समय में उपाय किए जाते हैं। सावधानी बरतने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति हर पहलू में बेहतर महसूस करे और अपनी समस्याओं को दूर करे। इन सबके अलावा, कभी-कभी जब व्यक्ति बहुत अकेलापन महसूस करता है या साझा करने की आवश्यकता महसूस करता है, तो उसे मनोवैज्ञानिक का समर्थन मिल सकता है। मनोवैज्ञानिक के समर्थन के लिए धन्यवाद, व्यक्ति आसानी से अपनी सभी समस्याओं या जो वे साझा करना चाहते हैं, साझा कर सकते हैं। इस संबंध में एक बहुत ही विश्वसनीय सेवा की पेशकश की जाती है। ऑनलाइन थेरेपी, यह विशेष रूप से दैनिक जीवन में विभिन्न शहरों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही फायदेमंद सेवा है। ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के साथ, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति अपनी समस्याओं पर विजय प्राप्त करे और अधिक आसानी से उस पर विजय प्राप्त करे। अगर आप अलग-अलग शहरों में हैं तो भी उससे आसानी से इलाज संभव है। मनोवैज्ञानिकों के समर्थन के लिए धन्यवाद, ऑनलाइन थेरेपी के साथ-साथ समस्याएं मिट जाती हैं। ऑनलाइन थेरेपी प्राप्त करना हमेशा एक लाभप्रद और अधिक व्यावहारिक तरीका होता है। इस पद्धति के लिए धन्यवाद, बहुत से लोग दूर से भी उपचार प्राप्त करके कई समस्याओं को दूर कर सकते हैं। ऑनलाइन थेरेपी और आमने-सामने उपचार प्राप्त करने के लिए आप सुरक्षित रूप से नोरा मनोविज्ञान साइट पर जा सकते हैं। ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक सेवा लेने से, प्रत्येक आंतरिक या सामान्य समस्या का समाधान खोजना संभव है। इसलिए चिकित्सा प्राप्त करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है। एक मनोवैज्ञानिक का समर्थन प्राप्त करने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति पेशेवर रूप से कुछ समस्याओं को अधिक आसानी से दूर कर सकता है। विशेष रूप से ऑनलाइन थेरेपी बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसे दूर से भी लिया जा सकता है। इसलिए, इज़मिर मनोवैज्ञानिक समर्थन के रूप में, कई समस्याओं को अधिक आसानी से दूर किया जा सकता है। ऑनलाइन थैरेपी से सभी समस्याओं के बारे में आमने-सामने और इंटरनेट पर बातचीत करके बात करना संभव है। चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, यह सेवा आसानी से प्राप्त करना संभव है। ऑनलाइन थेरेपी एक पेशेवर सेवा प्राप्त करते समय, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति अपनी आंतरिक समस्याओं पर विश्वास के साथ विजय प्राप्त करे। हमेशा समस्या पर काबू पाने के अलावा, व्यक्ति को अच्छा महसूस करने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता भी मिल सकती है। मनोवैज्ञानिकों के सहयोग से, जीवन अधिक शांतिपूर्ण और अधिक साझा हो जाता है। साथ ही, बहुत से लोग अपने जीवन में अधिक सकारात्मक होने का प्रबंधन करते हैं, ऑनलाइन उपचारों के लिए धन्यवाद जो सकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव पैदा करते हैं। इसलिए, एक पेशेवर मनोवैज्ञानिक का समर्थन प्राप्त करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है। आप सबसे अधिक पेशेवर और गुणवत्तापूर्ण मनोविज्ञान सहायता प्राप्त करने के लिए नोरा मनोविज्ञान साइट पर जा सकते हैं।
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नोकिया के बाद रिलायंस जियो के सस्ते फीचर फोन आने के बाद से स्मार्टफोन मार्किट में सस्ते हैंडसेट की बाढ़ सी आ गयी है. दूरसंचार कंपनियों से लेकर कई छोटी-बड़ी डिवाइस निर्माता कंपनिया बजट फीचर फोन पेश कर रही है. इसी क्रम में सस्ते बजट फोन बनाने वाली कंपनी Mtech मोबाइल्स ने अपना नया फीचर फोन भारतीय बाजार में पेश किया है. कंपनी ने इसे बॉस नाम से लांच किया है. इस किफायती फीचर फोन की कीमत 1149 रुपए रखी गयी है. इस फोन के लॉन्चिंग मौके पर कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये के ड्यूल सिम फोन है जिसमे में 2. 4 इंच की स्क्रीन दी गयी है.
एम टेक ने इसमें 2800 एमएएच की बैटरी उपलब्ध कराई है जिसे ले कंपनी का दावा है कि ये 12 घंटे लगातार बातचीत और 300 घंटे का स्टैंडबाई टाइम देने में सक्षम है. कंपनी ने इस हैंडसेट के साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए इसमें बूम बॉक्स स्पीकर का इस्तेमाल किया है. इस रेंज के फीचर फोन्स से खुद को अलग बनाने के लिए कंपनी ने इसमें ऑडियो/ वीडियो रिकार्डिंग के साथ एफएम रेडियो भी उपलब्ध कराया है.
कंपनी ने इस हैंडसेट को सभी रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिया है. साथ ही इसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे सभी ई कॉमर्स वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है. अगर आप भी ये फोन खरीदना चाहते है टी किसी भी नजदीकी मोबाइल विक्रेता से खरीद सकते है.
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नोकिया के बाद रिलायंस जियो के सस्ते फीचर फोन आने के बाद से स्मार्टफोन मार्किट में सस्ते हैंडसेट की बाढ़ सी आ गयी है. दूरसंचार कंपनियों से लेकर कई छोटी-बड़ी डिवाइस निर्माता कंपनिया बजट फीचर फोन पेश कर रही है. इसी क्रम में सस्ते बजट फोन बनाने वाली कंपनी Mtech मोबाइल्स ने अपना नया फीचर फोन भारतीय बाजार में पेश किया है. कंपनी ने इसे बॉस नाम से लांच किया है. इस किफायती फीचर फोन की कीमत एक हज़ार एक सौ उनचास रुपयापए रखी गयी है. इस फोन के लॉन्चिंग मौके पर कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये के ड्यूल सिम फोन है जिसमे में दो. चार इंच की स्क्रीन दी गयी है. एम टेक ने इसमें दो हज़ार आठ सौ एमएएच की बैटरी उपलब्ध कराई है जिसे ले कंपनी का दावा है कि ये बारह घंटाटे लगातार बातचीत और तीन सौ घंटाटे का स्टैंडबाई टाइम देने में सक्षम है. कंपनी ने इस हैंडसेट के साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए इसमें बूम बॉक्स स्पीकर का इस्तेमाल किया है. इस रेंज के फीचर फोन्स से खुद को अलग बनाने के लिए कंपनी ने इसमें ऑडियो/ वीडियो रिकार्डिंग के साथ एफएम रेडियो भी उपलब्ध कराया है. कंपनी ने इस हैंडसेट को सभी रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध करा दिया है. साथ ही इसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे सभी ई कॉमर्स वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है. अगर आप भी ये फोन खरीदना चाहते है टी किसी भी नजदीकी मोबाइल विक्रेता से खरीद सकते है.
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संतरा नीम फेस पैक कैसे बनाएं?
सबसे पहले एक बाउल लें। फिर आप इसमें चंदन पाउडर, संतरे का पाउडर और नीम पाउडर डालें। इसके बाद आप इसमें शहद और नींबू का रस डालें। फिर आप इन सारी चीजों को अच्छी तरह से मिलाकर स्मूद पेस्ट बना लें। अब आपका संतरा नीम फेस पैक बनकर तैयार हो चुका है।
संतरा नीम फेस पैक कैसे आजमाएं? पहले चेहरे को धोकर पोंछ लें। फिर आप तैयार पैक को अपने पूरे चेहरे पर अच्छी तरह से लगा लें। लगभग 20 मिनट तक लगाकर सुखाएं। फिर साधारण पानी से चेहरे को धोकर साफ कर ले।
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संतरा नीम फेस पैक कैसे बनाएं? सबसे पहले एक बाउल लें। फिर आप इसमें चंदन पाउडर, संतरे का पाउडर और नीम पाउडर डालें। इसके बाद आप इसमें शहद और नींबू का रस डालें। फिर आप इन सारी चीजों को अच्छी तरह से मिलाकर स्मूद पेस्ट बना लें। अब आपका संतरा नीम फेस पैक बनकर तैयार हो चुका है। संतरा नीम फेस पैक कैसे आजमाएं? पहले चेहरे को धोकर पोंछ लें। फिर आप तैयार पैक को अपने पूरे चेहरे पर अच्छी तरह से लगा लें। लगभग बीस मिनट तक लगाकर सुखाएं। फिर साधारण पानी से चेहरे को धोकर साफ कर ले।
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वाला है; [ सः=वहः ] जनान् प्रत्यङ् = सब जीवोंके भीतर ; ( अन्तर्यामीरूपसे ) तिष्ठति = स्थित है; (और) सर्वतोमुखः = सब ओर मुखवाला है ॥ १६ ॥
व्याख्या निश्चय ही ये ऊपर बताये हुए परमदेव ब्रह्म समस्त दिशा और अवान्तर दिशाओमे व्यास है अर्थात् सर्वत्र परिपूर्ण हैं। जगत्मे कोई भी ऐसा स्थान नहीं है, जहाँ वे न हो। वे ही प्रसिद्ध परब्रह्म परमात्मा सबसे पहले हिरण्यगर्भरूपमे प्रकट हुए थे । वे ही इस ब्रह्माण्डरूप गर्भमे अन्तर्यामीरूपसे स्थित हैं। वे ही इस समय जगत्के रूपमे प्रकट हैं और भविष्यमे अर्थात् प्रलयके बाद सृष्टिकालमे पुनः प्रकट होनेवाले हैं। वे समस्त जीवोके भीतर अन्तर्यामीरूपसे स्थित हैं, तथा सत्र ओर मुखवाले अर्थात् सबको सब ओरसे देखनेवाले हैं ॥ १६ ॥
यो देवो अग्रौ यो अप्सु यो विश्वं भुवनमाविवेश ।
य ओषधीषु यो वनस्पतिषु तस्मै देवाय नमो नमः ॥१७॥
यः =जो; देवः = परमदेव परमात्मा; अग्नौ = अग्निमे है; यः = जो; अप्सु जलमें है; यः = जो; विश्वम् भुवनम् आविवेश = समस्त लोकोंमें प्रविष्ट हो रहा है; यः = जो; ओषधीषु = ओषधियो में है; ( तथा ) यः= जो वनस्पतिषु = वनस्पतियोंमे है; तस्मै देवाय = उन परमदेव परमात्मा के लिये; नमः नमस्कार है; नमः=नमस्कार
व्याख्या - जो सर्वशक्तिमान् पूर्णब्रह्म परमदेव अग्निमे है, जो जलमे है, जो समस्त लोकोमे अन्तर्यामीरूपसे प्रविष्ट हो रहे हैं, जो ओषधियोंमे हैं और जो वनस्पतियोंमे हैं, अर्थात् जो सर्वत्र परिपूर्ण हैं, जिनका अनेक प्रकारसे पहले वर्णन कर आये हैं, उन परमदेव परमात्माको नमस्कार है! नमस्कार है। 'नमः' शब्दको दुहरानेका अभिप्राय अध्यायकी समाप्तिको सूचित करना है ॥ १७॥ ॥ द्वितीय अध्याय समाप्त ॥ २ ॥
तृतीय अध्याय
य एको जालवानीशत ईशनीभिः य एवैक उद्भवे सम्भवे च
सर्वाल्लोकानीशत ईशनीभिः । य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति ॥ १ ॥
यः= जो; एकः= एका जालवान् जगत्रूप जालका अधिपति; ईशनीभिः = अपनी स्वरूपभूत शासनशक्तियोद्वारा; ईशते = शासन करता है; ईरानीभिः = उन विविध शासन-शक्तियोद्वारा; सर्वान् = सम्पूर्ण; लोकान, ईशते= लोक्रोपर शासन करता है; य= ( तथा ) जो एकः = अकेला; एव=ही; सम्भवे च उद्भवे - सृष्टि और उसके विस्तारमे ( सर्वया समर्थ है); एतत् = इस ब्रह्मको; ये = जो महापुरुष; विदुः= जान लेते हैं; ते=चे; अमृताः =अमर; भवन्ति=हो जाते हैं ॥ १ ॥
व्याख्या -जो एक-अद्वितीय परमात्मा जगत्-रूप जालकी रचना करके अपनी स्वरूपभूत शासन-शक्तियों द्वारा उसपर शासन कर रहे हैं, तथा उन विविध शासन-शक्तियोद्वारा समस्त लोको और लोकपालोका यथायोग्य संचालन कर रहे हैं- 1 जिनके शासनमे ये सब अपने-अपने कर्तव्योका नियमपूर्वक पालन कर रहे हैं, तथा जो अकेले ही बिना किसी दूसरेकी सहायता लिये समस्त जगत्की उत्पत्ति और उसका विस्तार करनेमे सर्वथा समर्थ हैं, उन परब्रह्म परमेश्वरको जो महापुरुष तत्त्वसे जान लेते हैं, वे अमर हो जाते हैं - -जन्म-मृत्युके जालसे सदाके लिये छूट जाते हैं ॥ १ ॥
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर्य इमाँल्लोकानीशत ईशनीभिः । .प्रत्यङ् जनांस्तिष्ठति संचुकोचान्तकाले संसृज्य विश्वा भुवनानि गोपाः ॥ २ ॥
यः = जो; ईरानीभिः = अपनी स्वरूपभूत विविध शासन-शक्तियोद्वारा; इमान् = इन सब; लोकान् ईश = लोकोंपर शासन करता है; [ सः ] रुद्रवह रुद्रा एकः हि एक ही है; ( इसीलिये विद्वान् पुरुषोने जगन्के कारणका निश्चय करते समय ) द्वितीयाय न तस्थुः = दूसरेका आश्रय नही लिया; [ स= वह परमात्मा; ] जनान् प्रत्यङ् = समस्त
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वाला है; [ सः=वहः ] जनान् प्रत्यङ् = सब जीवोंके भीतर ; तिष्ठति = स्थित है; सर्वतोमुखः = सब ओर मुखवाला है ॥ सोलह ॥ व्याख्या निश्चय ही ये ऊपर बताये हुए परमदेव ब्रह्म समस्त दिशा और अवान्तर दिशाओमे व्यास है अर्थात् सर्वत्र परिपूर्ण हैं। जगत्मे कोई भी ऐसा स्थान नहीं है, जहाँ वे न हो। वे ही प्रसिद्ध परब्रह्म परमात्मा सबसे पहले हिरण्यगर्भरूपमे प्रकट हुए थे । वे ही इस ब्रह्माण्डरूप गर्भमे अन्तर्यामीरूपसे स्थित हैं। वे ही इस समय जगत्के रूपमे प्रकट हैं और भविष्यमे अर्थात् प्रलयके बाद सृष्टिकालमे पुनः प्रकट होनेवाले हैं। वे समस्त जीवोके भीतर अन्तर्यामीरूपसे स्थित हैं, तथा सत्र ओर मुखवाले अर्थात् सबको सब ओरसे देखनेवाले हैं ॥ सोलह ॥ यो देवो अग्रौ यो अप्सु यो विश्वं भुवनमाविवेश । य ओषधीषु यो वनस्पतिषु तस्मै देवाय नमो नमः ॥सत्रह॥ यः =जो; देवः = परमदेव परमात्मा; अग्नौ = अग्निमे है; यः = जो; अप्सु जलमें है; यः = जो; विश्वम् भुवनम् आविवेश = समस्त लोकोंमें प्रविष्ट हो रहा है; यः = जो; ओषधीषु = ओषधियो में है; यः= जो वनस्पतिषु = वनस्पतियोंमे है; तस्मै देवाय = उन परमदेव परमात्मा के लिये; नमः नमस्कार है; नमः=नमस्कार व्याख्या - जो सर्वशक्तिमान् पूर्णब्रह्म परमदेव अग्निमे है, जो जलमे है, जो समस्त लोकोमे अन्तर्यामीरूपसे प्रविष्ट हो रहे हैं, जो ओषधियोंमे हैं और जो वनस्पतियोंमे हैं, अर्थात् जो सर्वत्र परिपूर्ण हैं, जिनका अनेक प्रकारसे पहले वर्णन कर आये हैं, उन परमदेव परमात्माको नमस्कार है! नमस्कार है। 'नमः' शब्दको दुहरानेका अभिप्राय अध्यायकी समाप्तिको सूचित करना है ॥ सत्रह॥ ॥ द्वितीय अध्याय समाप्त ॥ दो ॥ तृतीय अध्याय य एको जालवानीशत ईशनीभिः य एवैक उद्भवे सम्भवे च सर्वाल्लोकानीशत ईशनीभिः । य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति ॥ एक ॥ यः= जो; एकः= एका जालवान् जगत्रूप जालका अधिपति; ईशनीभिः = अपनी स्वरूपभूत शासनशक्तियोद्वारा; ईशते = शासन करता है; ईरानीभिः = उन विविध शासन-शक्तियोद्वारा; सर्वान् = सम्पूर्ण; लोकान, ईशते= लोक्रोपर शासन करता है; य= जो एकः = अकेला; एव=ही; सम्भवे च उद्भवे - सृष्टि और उसके विस्तारमे ; एतत् = इस ब्रह्मको; ये = जो महापुरुष; विदुः= जान लेते हैं; ते=चे; अमृताः =अमर; भवन्ति=हो जाते हैं ॥ एक ॥ व्याख्या -जो एक-अद्वितीय परमात्मा जगत्-रूप जालकी रचना करके अपनी स्वरूपभूत शासन-शक्तियों द्वारा उसपर शासन कर रहे हैं, तथा उन विविध शासन-शक्तियोद्वारा समस्त लोको और लोकपालोका यथायोग्य संचालन कर रहे हैं- एक जिनके शासनमे ये सब अपने-अपने कर्तव्योका नियमपूर्वक पालन कर रहे हैं, तथा जो अकेले ही बिना किसी दूसरेकी सहायता लिये समस्त जगत्की उत्पत्ति और उसका विस्तार करनेमे सर्वथा समर्थ हैं, उन परब्रह्म परमेश्वरको जो महापुरुष तत्त्वसे जान लेते हैं, वे अमर हो जाते हैं - -जन्म-मृत्युके जालसे सदाके लिये छूट जाते हैं ॥ एक ॥ एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर्य इमाँल्लोकानीशत ईशनीभिः । .प्रत्यङ् जनांस्तिष्ठति संचुकोचान्तकाले संसृज्य विश्वा भुवनानि गोपाः ॥ दो ॥ यः = जो; ईरानीभिः = अपनी स्वरूपभूत विविध शासन-शक्तियोद्वारा; इमान् = इन सब; लोकान् ईश = लोकोंपर शासन करता है; [ सः ] रुद्रवह रुद्रा एकः हि एक ही है; द्वितीयाय न तस्थुः = दूसरेका आश्रय नही लिया; [ स= वह परमात्मा; ] जनान् प्रत्यङ् = समस्त
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31 दिसंबर 2020 की शाम गोयल ने ट्वीट किया, सिस्टम में इस समय जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है. अब तक 1.4 लाख लाइव ऑर्डर्स आ चुके हैं. इसमें से लगभग 20 हजार बिरयानी और 16 हजार पिज्जा के ऑर्डर्स हैं.
नया साल शुरू हो चुका है, ऐसे में नए साल का जश्न दुनियाभर में धूमधाम से मनाया गया. कोरोना के चलते कई लोगों ने इस बार कहीं बाहर ना जाकर घर पर ही सेलिब्रेट करने का फैसला किया. ऐसे में सबसे ज्यादा चांदी फूड ऐप और रेस्टोरेंट की हुई, जिनके पास 31 दिसंबर की शाम इतने ऑर्डर आए जिन्हें पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो गया. कोरोना महामारी के बीच कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू होने की वजह से लोगों ने जोमैटो के जरिए ही फूड ऑर्डर किये. इस बारे में ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया पर बताया भी है.
नये साल के मौके पर ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग ऐप जोमैटो ने रिकॉर्ड ऑर्डर बुक किये. जोमैटो को न्यू इयर ईव पर हर मिनट 4,100 ऑर्डर मिले जोकि अब तक का हाइएस्ट रिकॉर्ड है. जोमैटो के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल (Deepinder Goyal) ने इन ऑर्डर्स के बारे में ट्वीट के जरिए जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि उन ऑर्डर्स की वैल्यू क्या रही और उनकी टीम पर इन ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए कितना दबाव रहा.
31 दिसंबर 2020 की शाम गोयल ने ट्वीट किया, सिस्टम में इस समय जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है. अब तक 1.4 लाख लाइव ऑर्डर्स आ चुके हैं. इसमें से लगभग 20 हजार बिरयानी और 16 हजार पिज्जा के ऑर्डर्स हैं. इनमें से करीब 40 फीसदी चीज पिज्जा हैं. गोयल ने यह भी बताया कि देश के बाहर रहने वाले लोगों ने भी भारत में रह रहे लोगों के लिए खाना ऑर्डर किया. खासकर UAE, लेबनान और तुर्की से लोगों ने भारत में रह रहे अपने करीबियों के लिए ऑर्डर किया है.
Here's a heat map of "add to cart" events across the globe. 634k events in the last 30 minutes.
So many people outside of India are placing orders for their loved ones in India. ?
गोयल ने सिलसिलेवार ट्वीट्स में बताया कि उनके इस प्लेटफॉर्म पर अब तक की सबसे ज्यादा ऑर्डर वेलॉसिटी देखने को मिली है. गुरुवार शाम को 06:14 बजे 2,500 ऑर्डर्स पर मिनट मिल रहे थे. रात 08:22 बजे सबसे ज्यादा 4,100 ऑर्डर्स पर मिनट आए. वहीं एक जनवरी की दोपहर 4,254 ऑर्डर्स हर मिनट मिले. सोशल मीडिया पर भी लोग इन आंकड़ों को देखकर हैरान हो रहे हैं.
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इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस की शाम गोयल ने ट्वीट किया, सिस्टम में इस समय जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है. अब तक एक.चार लाख लाइव ऑर्डर्स आ चुके हैं. इसमें से लगभग बीस हजार बिरयानी और सोलह हजार पिज्जा के ऑर्डर्स हैं. नया साल शुरू हो चुका है, ऐसे में नए साल का जश्न दुनियाभर में धूमधाम से मनाया गया. कोरोना के चलते कई लोगों ने इस बार कहीं बाहर ना जाकर घर पर ही सेलिब्रेट करने का फैसला किया. ऐसे में सबसे ज्यादा चांदी फूड ऐप और रेस्टोरेंट की हुई, जिनके पास इकतीस दिसंबर की शाम इतने ऑर्डर आए जिन्हें पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो गया. कोरोना महामारी के बीच कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू होने की वजह से लोगों ने जोमैटो के जरिए ही फूड ऑर्डर किये. इस बारे में ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया पर बताया भी है. नये साल के मौके पर ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग ऐप जोमैटो ने रिकॉर्ड ऑर्डर बुक किये. जोमैटो को न्यू इयर ईव पर हर मिनट चार,एक सौ ऑर्डर मिले जोकि अब तक का हाइएस्ट रिकॉर्ड है. जोमैटो के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल ने इन ऑर्डर्स के बारे में ट्वीट के जरिए जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि उन ऑर्डर्स की वैल्यू क्या रही और उनकी टीम पर इन ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए कितना दबाव रहा. इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस की शाम गोयल ने ट्वीट किया, सिस्टम में इस समय जबरदस्त दबाव देखने को मिल रहा है. अब तक एक.चार लाख लाइव ऑर्डर्स आ चुके हैं. इसमें से लगभग बीस हजार बिरयानी और सोलह हजार पिज्जा के ऑर्डर्स हैं. इनमें से करीब चालीस फीसदी चीज पिज्जा हैं. गोयल ने यह भी बताया कि देश के बाहर रहने वाले लोगों ने भी भारत में रह रहे लोगों के लिए खाना ऑर्डर किया. खासकर UAE, लेबनान और तुर्की से लोगों ने भारत में रह रहे अपने करीबियों के लिए ऑर्डर किया है. Here's a heat map of "add to cart" events across the globe. छः सौ चौंतीसk events in the last तीस minutes. So many people outside of India are placing orders for their loved ones in India. ? गोयल ने सिलसिलेवार ट्वीट्स में बताया कि उनके इस प्लेटफॉर्म पर अब तक की सबसे ज्यादा ऑर्डर वेलॉसिटी देखने को मिली है. गुरुवार शाम को छः:चौदह बजे दो,पाँच सौ ऑर्डर्स पर मिनट मिल रहे थे. रात आठ:बाईस बजे सबसे ज्यादा चार,एक सौ ऑर्डर्स पर मिनट आए. वहीं एक जनवरी की दोपहर चार,दो सौ चौवन ऑर्डर्स हर मिनट मिले. सोशल मीडिया पर भी लोग इन आंकड़ों को देखकर हैरान हो रहे हैं.
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कोरोना वायरस के चलते देश भर में उद्योगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जिसमे चीनी उद्योग पर भी असर पडा है। इसके साथ ही गन्ना किसानों का कहना है की उनकी आर्थिक स्थिती भी कुछ ठीक नहीं क्यूंकि उन्हें मिलों के पास से अब तक गन्ना बकाया नहीं मिला है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक बेलगावी जिले में चीनी मिलों के पास लगभग 496 करोड़ रुपये बकाया है मार्च के पहले हफ्ते तक। मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के निर्देशों के बावजूद मिल मालिकों ने भुगतान में देरी की है। गन्ना भुगतान में देरी के चलते किसानों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लॉकडाउन किसानों के संकट को और गहरा कर सकता है।
चीनी से संबंधित कानूनों के अनुसार, मिलों को फसल की खरीद के 14 दिनों के भीतर उत्पादकों को भुगतान करना अनिवार्य है। वही दूसरी ओर चीनी मिलें भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। क्यूंकि उनका कहना है की चीनी की बिक्री ठप पड़ी है।
बेलगावी में अधिकांश किसान गन्ना फसल लेते हैं, और जिले में 26 चीनी मिलें हैं। टाइस ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, 19 मिलों ने 496 करोड़ रुपये के भुगतान करने में विफल रहे है।
राज्य गन्ना विकास और चीनी निदेशालय के आयुक्त द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1,10,23,688 टन गन्ना पेराई के लिए मिलों को बेचा गया है।
यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.
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कोरोना वायरस के चलते देश भर में उद्योगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जिसमे चीनी उद्योग पर भी असर पडा है। इसके साथ ही गन्ना किसानों का कहना है की उनकी आर्थिक स्थिती भी कुछ ठीक नहीं क्यूंकि उन्हें मिलों के पास से अब तक गन्ना बकाया नहीं मिला है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक बेलगावी जिले में चीनी मिलों के पास लगभग चार सौ छियानवे करोड़ रुपये बकाया है मार्च के पहले हफ्ते तक। मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के निर्देशों के बावजूद मिल मालिकों ने भुगतान में देरी की है। गन्ना भुगतान में देरी के चलते किसानों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लॉकडाउन किसानों के संकट को और गहरा कर सकता है। चीनी से संबंधित कानूनों के अनुसार, मिलों को फसल की खरीद के चौदह दिनों के भीतर उत्पादकों को भुगतान करना अनिवार्य है। वही दूसरी ओर चीनी मिलें भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। क्यूंकि उनका कहना है की चीनी की बिक्री ठप पड़ी है। बेलगावी में अधिकांश किसान गन्ना फसल लेते हैं, और जिले में छब्बीस चीनी मिलें हैं। टाइस ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, उन्नीस मिलों ने चार सौ छियानवे करोड़ रुपये के भुगतान करने में विफल रहे है। राज्य गन्ना विकास और चीनी निदेशालय के आयुक्त द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक,दस,तेईस,छः सौ अठासी टन गन्ना पेराई के लिए मिलों को बेचा गया है। यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.
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नई दिल्ली। ब्रिटिश शाही नौसेना सुरक्षा केंद्र के सुरक्षा निदेशक कॉमोडोर स्टुवर्ड एंडर्सन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय शिष्टमंडल दो दिन की भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसेना कमान की सरकारी यात्रा पर है। शिष्टमंडल ने 13 जून को कोच्चि नौसैनिक बेस में दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल आरजे नादकर्णी से मुलाकात की और पारस्परिक हित के विषयों पर चर्चा की।
ब्रिटिश शाही नौसेना के शिष्टमंडल ने दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ स्टाफ ऑफिसर (प्रशिक्षण) रियर एडमिरल पीके बहल और भारतीय नौसैनिक सुरक्षा दल के साथ समुद्र में सुरक्षित परिचालन तथा दोनों देशों की नौसेना के बीच परस्पर सहयोग के क्षेत्रों पर बातचीत की। शिष्टमंडल ने परिचालन समुद्री प्रशिक्षण तथा सुरक्षा से संबंधित विषयों पर फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग रियर एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन से बातचीत की। शाही नौसेना का सुरक्षा शिष्टमंडल कोच्चि स्थित विभिन्न इकाईयों को भी देखने गया। इन इकाईयों में आईएनएस गरुड़ पर जल बचाव प्रशिक्षण सुविधा तथा नेवीगेशन और डायरेक्शन स्कूल स्थित शिप हैंडलिंग सिमूलेटर शामिल है।
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नई दिल्ली। ब्रिटिश शाही नौसेना सुरक्षा केंद्र के सुरक्षा निदेशक कॉमोडोर स्टुवर्ड एंडर्सन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय शिष्टमंडल दो दिन की भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसेना कमान की सरकारी यात्रा पर है। शिष्टमंडल ने तेरह जून को कोच्चि नौसैनिक बेस में दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल आरजे नादकर्णी से मुलाकात की और पारस्परिक हित के विषयों पर चर्चा की। ब्रिटिश शाही नौसेना के शिष्टमंडल ने दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ स्टाफ ऑफिसर रियर एडमिरल पीके बहल और भारतीय नौसैनिक सुरक्षा दल के साथ समुद्र में सुरक्षित परिचालन तथा दोनों देशों की नौसेना के बीच परस्पर सहयोग के क्षेत्रों पर बातचीत की। शिष्टमंडल ने परिचालन समुद्री प्रशिक्षण तथा सुरक्षा से संबंधित विषयों पर फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग रियर एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन से बातचीत की। शाही नौसेना का सुरक्षा शिष्टमंडल कोच्चि स्थित विभिन्न इकाईयों को भी देखने गया। इन इकाईयों में आईएनएस गरुड़ पर जल बचाव प्रशिक्षण सुविधा तथा नेवीगेशन और डायरेक्शन स्कूल स्थित शिप हैंडलिंग सिमूलेटर शामिल है।
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"All insults or intimidations to a person will not be an offence under the Act unless such insult or intimidation is on account of victim belonging to Scheduled Caste or Scheduled Tribe...Thus, an offence under the Act would be made out when a member of the vulnerable section of the society is subjected to indignities, humiliations and harassment,"
( Excerpts of the three becnh view)
आला अदालत की त्रिसदस्यीय पीठ - जिसमें न्यायमूर्ति हेमन्त गुप्ता, न्यायमूर्ति ए नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अजय रोहतगी शामिल थे - ने पिछले दिनों उत्तराखंड उच्च अदालत के एक फैसले को उलटते हुए जो निर्णय सुनाया, उसकी अनुगूंज लम्बे समय तक बनी रहेगी। मालूम हो आला अदालत अनुसूचित तबके के व्यक्ति को निजी दायरे में कथित तौर पर झेलनी पड़ी गाली गलौज, अवमानना आदि पर गौर कर रही थी।
जिला पिथौरागढ़ ग्राम नयी बजेटी, तहसील पटटी चंडक में रहनेवाली अनुसूचित जाति से सम्बद्ध याचिकाकर्ता ने गांव के ही अन्य लोगों के खिलाफ यह प्रथम सूचना रिपोर्ट दायर की थी, जिनके साथ जमीन के एक टुकड़े को लेकर उसका विवाद चल रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक वह लोग न केवल उनके पति और परिवार के अन्य सदस्यों से गालीगलौज करते थे बल्कि 'जान से मारने की' धमकियां देते थे। 10 दिसम्बर 2019 को कथित तौर पर इन अभियुक्तों ने याचिकाकर्ता के घर में गैरकानूनी ढंग से प्रवेश किया और फिर 'मारने की धमकी' दी तथा जातिसूचक गालियां दीं थीं। घटना के दूसरे ही दिन भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452, 504, 506 और अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम 1982 की धारा 3/1/एक्स के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले को संज्ञान में लेते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी अभियुक्तों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे।
उच्च न्यायालय के फैसले पर गौर करते हुए आला अदालत ने बताया कि जिस धारा के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है /अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम 1982 की धारा 3/1/एक्स के तहत / वह धारा ही 3/1/आर से प्रतिस्थापित हो गयी है जिसके मुताबिक उत्पीड़ित तबके के किसी व्यक्ति को किसी 'सार्वजनिक निगाहों में' /पब्लिक व्यू में अपमानित करने की बात समाविष्ट की गयी है। स्वर्ण सिंह और अन्य बनाम राज्य / (2008) 8 SCC 435 /के मामले का उल्लेख करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि आखिर 'सार्वजनिक निगाहों में" किसे कहा जाए। 'स्वर्ण सिंह' मामले में उच्चतम अदालत के फैसले को देखते हुए इस त्रिसदस्यीय पीठ ने कहा कि चूंकि घटना घर की चहारदीवारी के अंदर हुई है इसलिए उसे सार्वजनिक निगाहों में नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति राव, गुप्ता, रोहतगी की इस पीठ ने इसी आधार पर उत्तराखंड उच्च अदालत द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम 1982 की धारा 3/1/ के तहत दायर मुकदमे को खारिज करने का आदेश देती है। उच्चतम अदालत के मुताबिक भारतीय दंड विधान की अन्य धाराओं के तहत अभियुक्तों पर मुकदमा जारी रहेगा।
आप इसे चुनावों की सरगर्मी कह सकते हैं कि अनुसूचित तबकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम 1989 /संशोधित/ की एक खास ढंग से की गयी इस व्याख्या के महत्वपूर्ण मसले पर अधिक चर्चा न हो सकी है।
प्रश्न उठता है कि आखिर इसे कैसे समझा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि उच्चतम अदालत के इस फैसले पर पहली संगठित प्रतिक्रिया दलित अधिकारों के लिए समर्पित तीन संगठनों - नेशनल दलित मूवमेण्ट फार जस्टिस, नेशनल कैम्पेन आन दलित हयूमन राइटस और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की मजबूती के लिए बने नेशनल कोएलिशन की तरफ से संयुक्त रूप से आयी है जिन्होंने कहा है कि प्रस्तुत फैसला "अस्प्रश्यता के खिलाफ संघर्ष की जड़ों' / @"the roots of fight against untouchability पर चोट करता है।
अपने साझा बयान में उनकी तरफ से कुछ महत्वपूर्ण मुददों को उठाया गया हैः
एक उन्होंने इस अधिनियम के उदात्त उददेश्यों के बावजूद इस अधिनियम पर अमल करने की रास्ते में आनेवाली बाधाओं को बताया है और कहा है कि इन उत्पीड़ित तबकों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ना आज भी कितना दुरूह है। बयान में इस बात का उल्लेख भी है कि अपने साथ हो रहे अन्याय अत्याचारों की शिकायत करने में भी किस तरह इन तबकों का बहुलांश आज भी हिचकता है क्योंकि उसे प्रतिमुकदमों का, प्रतिहिंसा का डर हमेशा रहता है। फिर इस प्रसंगविशेष पर अपने आप को फोकस करते हुए बयान बताता है किस तरह ग्राम बजेटी, जिला पिथौरागढ़ के इस मामले में पुलिस द्वारा अपनी जांच में भी कुछ लापरवाहियां बरती गयीं। उनके मुताबिक जांच के प्रारंभ से ही पुलिस अधिकारियों ने एससीएसटी एक्ट /1989/ से जुड़ी कुछ विशेष धाराओं को शामिल नहीं किया था जैसे धारा 3/1/यू/ और धारा 3/2/वीए आदि जबकि इन धाराओं को इसमें लगाना जरूरी था। इतना ही नहीं इसी अधिनियम की धारा 8 अपराध के अनुमान की बात करती है, जिसकी उपधारा /सी/ के मुताबिक "जब अभियुक्त को पीड़ित या उसके परिवार की निजी जानकारी होती है, तब अदालत यह अनुमान लगाती है कि अभियुक्त को उसकी जातीय या आदिवासी पहचान का अनुमान होगा ही"। बयान के मुताबिक विडम्बना ही है कि उच्चतम अदालत ने इस केस के इन कानूनी पक्षों पर गौर नहीं किया और ऐसा फैसला सुनाया जो "सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ" पड़ता है।
प्रस्तुत फैसले के खिलाफ अपनी राय का इजहार करने के बाद इनकी तरफ से सर्वोच्च न्यायालय से अपील की गयी है कि वह इस पूरे मामले को संविधान पीठ को सौंपे। सरकार से भी यह गुजारिश की गयी है कि वह इस फैसले के बारे में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल करे।
गौरतलब है कि फैसला सुनाने के दौरान उच्चतम अदालत ने अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम 1989 /संशोधित/ किस तरह अनुसूचित तबकों के नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए समर्पित है, उसके बारे में विशेष तौर पर रेखांकित किया था। ध्यान रहे संविधान की धारा 21 - जो जिन्दगी और व्यक्तिगत गरिमा के अधिकार को सुनिश्चित करने की बात करती है, उसे अगर हम ठीक से देखें तो निश्चित ही किसी उत्पीड़ित व्यक्ति को अपमान, प्रताडना का शिकार बनाना, वह किसी भी सूरत में उसके इन अधिकारों का उल्लंघन समझा जाना चाहिए, फिर भले उसे इन शाब्दिक अपमानों का शिकार कहीं भी किया जाए या होना पड़े।
तय बात है कि त्रिसदस्यीय पीठ का फैसला अगर एक नज़ीर बन जाता है तो ऐसे कई मामले - जिसमें अनुसूचित तबके से आने वाले सदस्य शाब्दिक अपमान, तिरस्कार का शिकार हुए - कभी नहीं सुर्खियों में आ सकेंगे, ऐसे मामलों में कार्रवाई की मांग करना तो असंभव हो जाएगा, क्योंकि ऐसे तमाम प्रसंग बिल्कुल निजी दायरों में ही संपन्न हुए होंगे, सार्वजनिक निगाहों से बिल्कुल दूर घटित हुए होंगे।
पायल तडवी की आत्महत्या के प्रसंग को ही देखें जो आदिवासी मुस्लिम तबके से सम्बधित थी तथा जो मुंबई के टी एन टोपीवाला नेशनल मेडिकल कालेज में एम डी की दूसरे वर्ष की छात्रा थी, जिसे कथित तौर पर उसके तीन सीनियर छात्राओं ने ही जातीय प्रताड़ना का शिकार बनाया था। उसे किन किन स्तरों पर अपमानित किया गया, फिर चाहे अपमानित करनेवाली टिप्पणियां हों या आपरेशन थिएटर में आपरेशन करने का मौका न देना हो, इस पर बहुत लिखा जा चुका है। उसकी इस प्रताडना में उसकी तीन रूम पार्टनर ही कथित तौर पर संलिप्त थीं।
आप कल्पना करें कि भविष्य में कोई उत्पीड़ित तबके का कोई व्यक्ति ऐसी प्रताड़ना को लेकर जो बिल्कुल रूम की चहारदीवारी में ही हो रही हो, प्रशासन से शिकायत भी करना चाहें तो क्या वह अब शिकायत भी कर सकता है क्योंकि उसके लिए मुमकिन नहीं होगा यह प्रमाणित करना कि उसके साथ भेदभाव निजी दायरों में नहीं हो रहा है, बल्कि सार्वजनिक निगाहों में हो रहा है।
शुद्धता और प्रदूषण का वह तर्क - जो जाति और उससे जुड़े बहिष्करण का आधार है - आई आई टी जैसे संस्थानों में भी बहुविध तरीकों से प्रतिबिम्बित होता है।
कहने का तात्पर्य यह है कि दलित आदिवासी अपमान में ऐसे प्रसंगों की भरमार रहती है जिसमें कथित वर्चस्वशाली जाति का व्यक्ति इशारों से या शब्दों पर खास जोर देने से या विशेष शब्दों के उच्चारण से ही आप को आप की हैसियत बता देता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा कुछ साल पहले पेश की गयी 'रिपोर्ट आन प्रिवेन्शन आफ एट्रासिटीज अगेन्स्ट एससीज्' ( अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचारों के निवारण की रिपोर्ट) इन बातों का विवरण पेश करती है कि किस तरह नागरिक समाज खुद जाति आधारित व्यवस्था से लाभान्वित होता है और किस तरह वह अस्तित्वमान गैरबराबरीपूर्ण सामाजिक रिश्तों को जारी रखने और समाज के वास्तविक जनतांत्रिकीकरण को बाधित करने के लिये प्रयासरत रहता है।
भारत के हर इन्साफपसन्द व्यक्ति के सामने यह सवाल आज भी जिन्दा खड़ा है।
(सुभाष गाताडे स्वतंत्र लेखक-पत्रकार हैं)
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"All insults or intimidations to a person will not be an offence under the Act unless such insult or intimidation is on account of victim belonging to Scheduled Caste or Scheduled Tribe...Thus, an offence under the Act would be made out when a member of the vulnerable section of the society is subjected to indignities, humiliations and harassment," आला अदालत की त्रिसदस्यीय पीठ - जिसमें न्यायमूर्ति हेमन्त गुप्ता, न्यायमूर्ति ए नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अजय रोहतगी शामिल थे - ने पिछले दिनों उत्तराखंड उच्च अदालत के एक फैसले को उलटते हुए जो निर्णय सुनाया, उसकी अनुगूंज लम्बे समय तक बनी रहेगी। मालूम हो आला अदालत अनुसूचित तबके के व्यक्ति को निजी दायरे में कथित तौर पर झेलनी पड़ी गाली गलौज, अवमानना आदि पर गौर कर रही थी। जिला पिथौरागढ़ ग्राम नयी बजेटी, तहसील पटटी चंडक में रहनेवाली अनुसूचित जाति से सम्बद्ध याचिकाकर्ता ने गांव के ही अन्य लोगों के खिलाफ यह प्रथम सूचना रिपोर्ट दायर की थी, जिनके साथ जमीन के एक टुकड़े को लेकर उसका विवाद चल रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक वह लोग न केवल उनके पति और परिवार के अन्य सदस्यों से गालीगलौज करते थे बल्कि 'जान से मारने की' धमकियां देते थे। दस दिसम्बर दो हज़ार उन्नीस को कथित तौर पर इन अभियुक्तों ने याचिकाकर्ता के घर में गैरकानूनी ढंग से प्रवेश किया और फिर 'मारने की धमकी' दी तथा जातिसूचक गालियां दीं थीं। घटना के दूसरे ही दिन भारतीय दंड संहिता की धाराओं चार सौ बावन, पाँच सौ चार, पाँच सौ छः और अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बयासी की धारा तीन/एक/एक्स के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले को संज्ञान में लेते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी अभियुक्तों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय के फैसले पर गौर करते हुए आला अदालत ने बताया कि जिस धारा के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है /अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बयासी की धारा तीन/एक/एक्स के तहत / वह धारा ही तीन/एक/आर से प्रतिस्थापित हो गयी है जिसके मुताबिक उत्पीड़ित तबके के किसी व्यक्ति को किसी 'सार्वजनिक निगाहों में' /पब्लिक व्यू में अपमानित करने की बात समाविष्ट की गयी है। स्वर्ण सिंह और अन्य बनाम राज्य / आठ SCC चार सौ पैंतीस /के मामले का उल्लेख करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि आखिर 'सार्वजनिक निगाहों में" किसे कहा जाए। 'स्वर्ण सिंह' मामले में उच्चतम अदालत के फैसले को देखते हुए इस त्रिसदस्यीय पीठ ने कहा कि चूंकि घटना घर की चहारदीवारी के अंदर हुई है इसलिए उसे सार्वजनिक निगाहों में नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति राव, गुप्ता, रोहतगी की इस पीठ ने इसी आधार पर उत्तराखंड उच्च अदालत द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ बयासी की धारा तीन/एक/ के तहत दायर मुकदमे को खारिज करने का आदेश देती है। उच्चतम अदालत के मुताबिक भारतीय दंड विधान की अन्य धाराओं के तहत अभियुक्तों पर मुकदमा जारी रहेगा। आप इसे चुनावों की सरगर्मी कह सकते हैं कि अनुसूचित तबकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ नवासी /संशोधित/ की एक खास ढंग से की गयी इस व्याख्या के महत्वपूर्ण मसले पर अधिक चर्चा न हो सकी है। प्रश्न उठता है कि आखिर इसे कैसे समझा जाना चाहिए। गौरतलब है कि उच्चतम अदालत के इस फैसले पर पहली संगठित प्रतिक्रिया दलित अधिकारों के लिए समर्पित तीन संगठनों - नेशनल दलित मूवमेण्ट फार जस्टिस, नेशनल कैम्पेन आन दलित हयूमन राइटस और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की मजबूती के लिए बने नेशनल कोएलिशन की तरफ से संयुक्त रूप से आयी है जिन्होंने कहा है कि प्रस्तुत फैसला "अस्प्रश्यता के खिलाफ संघर्ष की जड़ों' / @"the roots of fight against untouchability पर चोट करता है। अपने साझा बयान में उनकी तरफ से कुछ महत्वपूर्ण मुददों को उठाया गया हैः एक उन्होंने इस अधिनियम के उदात्त उददेश्यों के बावजूद इस अधिनियम पर अमल करने की रास्ते में आनेवाली बाधाओं को बताया है और कहा है कि इन उत्पीड़ित तबकों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ना आज भी कितना दुरूह है। बयान में इस बात का उल्लेख भी है कि अपने साथ हो रहे अन्याय अत्याचारों की शिकायत करने में भी किस तरह इन तबकों का बहुलांश आज भी हिचकता है क्योंकि उसे प्रतिमुकदमों का, प्रतिहिंसा का डर हमेशा रहता है। फिर इस प्रसंगविशेष पर अपने आप को फोकस करते हुए बयान बताता है किस तरह ग्राम बजेटी, जिला पिथौरागढ़ के इस मामले में पुलिस द्वारा अपनी जांच में भी कुछ लापरवाहियां बरती गयीं। उनके मुताबिक जांच के प्रारंभ से ही पुलिस अधिकारियों ने एससीएसटी एक्ट /एक हज़ार नौ सौ नवासी/ से जुड़ी कुछ विशेष धाराओं को शामिल नहीं किया था जैसे धारा तीन/एक/यू/ और धारा तीन/दो/वीए आदि जबकि इन धाराओं को इसमें लगाना जरूरी था। इतना ही नहीं इसी अधिनियम की धारा आठ अपराध के अनुमान की बात करती है, जिसकी उपधारा /सी/ के मुताबिक "जब अभियुक्त को पीड़ित या उसके परिवार की निजी जानकारी होती है, तब अदालत यह अनुमान लगाती है कि अभियुक्त को उसकी जातीय या आदिवासी पहचान का अनुमान होगा ही"। बयान के मुताबिक विडम्बना ही है कि उच्चतम अदालत ने इस केस के इन कानूनी पक्षों पर गौर नहीं किया और ऐसा फैसला सुनाया जो "सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ" पड़ता है। प्रस्तुत फैसले के खिलाफ अपनी राय का इजहार करने के बाद इनकी तरफ से सर्वोच्च न्यायालय से अपील की गयी है कि वह इस पूरे मामले को संविधान पीठ को सौंपे। सरकार से भी यह गुजारिश की गयी है कि वह इस फैसले के बारे में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल करे। गौरतलब है कि फैसला सुनाने के दौरान उच्चतम अदालत ने अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ नवासी /संशोधित/ किस तरह अनुसूचित तबकों के नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए समर्पित है, उसके बारे में विशेष तौर पर रेखांकित किया था। ध्यान रहे संविधान की धारा इक्कीस - जो जिन्दगी और व्यक्तिगत गरिमा के अधिकार को सुनिश्चित करने की बात करती है, उसे अगर हम ठीक से देखें तो निश्चित ही किसी उत्पीड़ित व्यक्ति को अपमान, प्रताडना का शिकार बनाना, वह किसी भी सूरत में उसके इन अधिकारों का उल्लंघन समझा जाना चाहिए, फिर भले उसे इन शाब्दिक अपमानों का शिकार कहीं भी किया जाए या होना पड़े। तय बात है कि त्रिसदस्यीय पीठ का फैसला अगर एक नज़ीर बन जाता है तो ऐसे कई मामले - जिसमें अनुसूचित तबके से आने वाले सदस्य शाब्दिक अपमान, तिरस्कार का शिकार हुए - कभी नहीं सुर्खियों में आ सकेंगे, ऐसे मामलों में कार्रवाई की मांग करना तो असंभव हो जाएगा, क्योंकि ऐसे तमाम प्रसंग बिल्कुल निजी दायरों में ही संपन्न हुए होंगे, सार्वजनिक निगाहों से बिल्कुल दूर घटित हुए होंगे। पायल तडवी की आत्महत्या के प्रसंग को ही देखें जो आदिवासी मुस्लिम तबके से सम्बधित थी तथा जो मुंबई के टी एन टोपीवाला नेशनल मेडिकल कालेज में एम डी की दूसरे वर्ष की छात्रा थी, जिसे कथित तौर पर उसके तीन सीनियर छात्राओं ने ही जातीय प्रताड़ना का शिकार बनाया था। उसे किन किन स्तरों पर अपमानित किया गया, फिर चाहे अपमानित करनेवाली टिप्पणियां हों या आपरेशन थिएटर में आपरेशन करने का मौका न देना हो, इस पर बहुत लिखा जा चुका है। उसकी इस प्रताडना में उसकी तीन रूम पार्टनर ही कथित तौर पर संलिप्त थीं। आप कल्पना करें कि भविष्य में कोई उत्पीड़ित तबके का कोई व्यक्ति ऐसी प्रताड़ना को लेकर जो बिल्कुल रूम की चहारदीवारी में ही हो रही हो, प्रशासन से शिकायत भी करना चाहें तो क्या वह अब शिकायत भी कर सकता है क्योंकि उसके लिए मुमकिन नहीं होगा यह प्रमाणित करना कि उसके साथ भेदभाव निजी दायरों में नहीं हो रहा है, बल्कि सार्वजनिक निगाहों में हो रहा है। शुद्धता और प्रदूषण का वह तर्क - जो जाति और उससे जुड़े बहिष्करण का आधार है - आई आई टी जैसे संस्थानों में भी बहुविध तरीकों से प्रतिबिम्बित होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि दलित आदिवासी अपमान में ऐसे प्रसंगों की भरमार रहती है जिसमें कथित वर्चस्वशाली जाति का व्यक्ति इशारों से या शब्दों पर खास जोर देने से या विशेष शब्दों के उच्चारण से ही आप को आप की हैसियत बता देता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा कुछ साल पहले पेश की गयी 'रिपोर्ट आन प्रिवेन्शन आफ एट्रासिटीज अगेन्स्ट एससीज्' इन बातों का विवरण पेश करती है कि किस तरह नागरिक समाज खुद जाति आधारित व्यवस्था से लाभान्वित होता है और किस तरह वह अस्तित्वमान गैरबराबरीपूर्ण सामाजिक रिश्तों को जारी रखने और समाज के वास्तविक जनतांत्रिकीकरण को बाधित करने के लिये प्रयासरत रहता है। भारत के हर इन्साफपसन्द व्यक्ति के सामने यह सवाल आज भी जिन्दा खड़ा है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
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६५. विरोधी स्थितियों में रुपवती के चरित्र की दृढ़ता, स्थिरता, व निर्मकता तथा वीर की दुष्ट व कुलप्रपंचात्मक प्रवृत्ति का निर्माण जितना स्पष्टता से मुहावरों के कारण इन सीमित उक्तियों से सम्भव हो सका उतना सामान्य कथनों से सम्भव न था । न विशिष्ट उक्तियों का अपना वर्ष है जो प्राक के मस्तिष्क में पहले से रहता है। उचित जवसरों पर मुहावरों का प्रयोग दर्शकों की कल्पनात्मक हृद्धि की सजा करके दृश्य चित्र को अधिक स्पष्ट निखार देने में योग देता है ।
६६ पयात्मक संवादों का विवेचन प्रस्तुत अध्याय के प्रारम्भ में किया जा चुका है। यहां उसके विभिन्न रूपों को उदाहरणों से समका पर्याप्त होगा ।
१- गद्य पद्य मिश्रित
६७ वालीच्य नाटकों में इसी संवाद रूप की नता है । पात्र गध में बात करते हुए तुरन्त ही पथ पर उतर जाते हैं। गथ में बभिव्यंजित मात्रों की अधिक प्रभावव्यंजक काने व क देने के लिए हिन्दी इन्द, उर्दू बहरों में उसका प्रस्तुतीकरण एक प्रकार की पुनरावृति मात्र है, क्योंकि नए भाषों और विचारों के प्रस्तुतीकरण में सम्भव ही किसी स्थल पर उसका प्रयोग हुवा हो । मैं इन्दों के वाकार-प्रकार पर यह अपने संक्षिप्त वौर विस्तृत दोनों ही रूपों में उपलब्ध है । दोहे के अतिरिक्त जहां कहीं नाटककार ने इप्पय कुण्डलियों से विस्तृत प्रयुक्त किए हैं, वहां संवादों का विस्तृत होना स्वाभाविक था ।
६८. पात्रों के वाचिक अभिनय बौर रंगपीठ पर प्रस्तुतिकरण की अपनी विशिष्ट शैली के कारण ये संवाद तत्कालीन नाट्य परिस्थितियों में पर्याप्त प्रमाव व्यंक थे। जिन्होंने उन संवों की रंगशाला में
इसके प्रमाण का बखान करते है। युद्धात्मक प्रसंगों पर बीश एवं उत्साहवर्द्धक होने के कारण बातावरण के निर्माण में गय की अपेक्षा पर संपादों की सार्थकता अधिक है । 'सीवा] Free में astथ यह के घोड़े के अपहरण पर लवकुश व रुपमण का यह विवाम एस बात का प्रमाण है
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पैंसठ. विरोधी स्थितियों में रुपवती के चरित्र की दृढ़ता, स्थिरता, व निर्मकता तथा वीर की दुष्ट व कुलप्रपंचात्मक प्रवृत्ति का निर्माण जितना स्पष्टता से मुहावरों के कारण इन सीमित उक्तियों से सम्भव हो सका उतना सामान्य कथनों से सम्भव न था । न विशिष्ट उक्तियों का अपना वर्ष है जो प्राक के मस्तिष्क में पहले से रहता है। उचित जवसरों पर मुहावरों का प्रयोग दर्शकों की कल्पनात्मक हृद्धि की सजा करके दृश्य चित्र को अधिक स्पष्ट निखार देने में योग देता है । छयासठ पयात्मक संवादों का विवेचन प्रस्तुत अध्याय के प्रारम्भ में किया जा चुका है। यहां उसके विभिन्न रूपों को उदाहरणों से समका पर्याप्त होगा । एक- गद्य पद्य मिश्रित सरसठ वालीच्य नाटकों में इसी संवाद रूप की नता है । पात्र गध में बात करते हुए तुरन्त ही पथ पर उतर जाते हैं। गथ में बभिव्यंजित मात्रों की अधिक प्रभावव्यंजक काने व क देने के लिए हिन्दी इन्द, उर्दू बहरों में उसका प्रस्तुतीकरण एक प्रकार की पुनरावृति मात्र है, क्योंकि नए भाषों और विचारों के प्रस्तुतीकरण में सम्भव ही किसी स्थल पर उसका प्रयोग हुवा हो । मैं इन्दों के वाकार-प्रकार पर यह अपने संक्षिप्त वौर विस्तृत दोनों ही रूपों में उपलब्ध है । दोहे के अतिरिक्त जहां कहीं नाटककार ने इप्पय कुण्डलियों से विस्तृत प्रयुक्त किए हैं, वहां संवादों का विस्तृत होना स्वाभाविक था । अड़सठ. पात्रों के वाचिक अभिनय बौर रंगपीठ पर प्रस्तुतिकरण की अपनी विशिष्ट शैली के कारण ये संवाद तत्कालीन नाट्य परिस्थितियों में पर्याप्त प्रमाव व्यंक थे। जिन्होंने उन संवों की रंगशाला में इसके प्रमाण का बखान करते है। युद्धात्मक प्रसंगों पर बीश एवं उत्साहवर्द्धक होने के कारण बातावरण के निर्माण में गय की अपेक्षा पर संपादों की सार्थकता अधिक है । 'सीवा] Free में astथ यह के घोड़े के अपहरण पर लवकुश व रुपमण का यह विवाम एस बात का प्रमाण है
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बनूड़ के समीप गांव टंगोरी वासी 31 साल की शीला को इस बात की बड़ी खुशी है कि यदि आगामी पंजाब विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी- 'आप' की सरकार बन गई तो उसे हर महीने 1,000 रुपए मिल जाया करेंगे क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐसी घोषणाअपने चुनावी वादे में कर रखी है। हालांकि रविवार को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक कदम आगे बढ़कर वादा किया कि सूबे में यदि सरकार कांग्रेस की बनती है तो वह हर महिला को हर महीने 1,100 रुपए देंगे।
चन्नी की इस घोषणा ने शीला को दुविधा में डाल दिया है क्योंकि अब वे सोच रही हैं, मैं अब वोट किसे दूं? मेरे गांव में हर कोई आप की ही चर्चा कर रहा है लेकिन कुछ महिलाएं सोचती हैं कि क्यों न कांग्रेस को वोट दिया जाए क्योंकि वह तो जीतने पर हमें 1,100 रुपए प्रतिमाह देने वाली है। मैंने कल चन्नी के इस एलान को टीवी पर सुना था।
दरअसल, राजनीतिक दलों के इन मुफ्त के चुनावी वादों के चक्कर में भ्रमित होने वाली शीला अकेली नहीं हैं। चन्नी के ही हलका चमकौर साहिब के गांव रौड़ा वासी चरण कौर कहती हैं, 'हमें अच्छे से पता है कि चुनाव जीतने के बाद कोई भी अपना वादा पूरा नहीं करने वाला लेकिन यह सब हमें लुभा जरूर रहे हैं। यह जानते-समझते हुए कि राजनीतिक दलों के ऐसे लोक-लुभावन वादे जनता को खूब पसंद आते हैं, तो राजनेता क्यों ऐसा करने में पीछे रहें और यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में ऐसे वादों की मानो झड़ी लगी है। ऐसे चुनावी वादे करने में पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी और दिल्ली के मुख्यमंत्री सबसे आगे हैं।
केजरीवाल ने अपनी चुनावी घोषणा में 18 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को पंजाब आप की सरकार बनने पर हर महीने 1000 रुपए देने का वादा किया है। असल में उनकी इस घोषणा पर बहस इसलिए हो रही है क्योंकि पंजाब में 1. 10 करोड़ महिलाएं हैं और राज्य में बिजली पर देय 10 हजार करोड़ रुपए की सबसिडी का बोझ पहले से है। यानी इस नई घोषणा के बाद पंजाब पर इतना ही बोझ और पड़ने वाला है जो पहले ही 2. 5 लाख करोड़ रुपए के कर्ज तले दबा है।
लेकिन बताया जाता है कि कांग्रेस को लगता है कि महिलाएं हर माह 1,000 रुपए रकम के प्रलोभन में आप की ओर आकर्षित हो रही हैं। यही सोचकर कांग्रेस ने रविवार को अपना भी पत्ता फेंका और मुख्यमंत्री चन्नी ने रविवार को प्रियंका गांधी की उपस्थिति में चुनावी रैली के मंच से पंजाब की महिलाओं के लिए 1,100 रुपए देने का वादा कर दिया। उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए हर साल आठ एलपीजी सिलेंडर देने का भी वादा कर दिया।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर सवाल उठाया कि यदि 'आप' सत्ता में आ भी गई तो अपना वादा पूरा करने के लिए रकम कहां से लाएगी। वैसे अमरिंदर और उनके गठबंधन में सहयोगी भाजपा की ओर से यह घोषणा की गई है कि वे पांच एकड़ से कम जमीन वाले सभी किसानों का कृषि कर्ज पूरा माफ कर देंगे।
इधर पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार कहा कि रेत तो अब भी पहले वाले दाम पर ही मिल रही है। उधर, मुख्यमंत्री चन्नी ने भी केवल शुल्क 100 रुपए प्रतिमाह तक सीमित कर देने की घोषणा कर दी और उन्होंने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है क्योंकि अब कई नेता कहने लगे हैं कि वे निजी केबल संचालकों की ओर से वसूले जा रहे शुल्क का दायरा तय नहीं कर सकते।
आप से बागी हुए उसके ही खरड़ से विधायक कंवर संधू जो पहले भी यह मसला उठाते आए हैं, का कहना है कि केबल शुल्क की सीमा केवल कानून बनाकर ही सीमित की जा सकती है। संधू का कहना है कि राजनीतिक दलों की ओर से आए दिन लुभावने वादों का एलान पंजाब के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। उनका कहना है कि ऐसी घोषणाएं करने से पहले इन पर शोध किया जाना जरूरी है, चूंकि पंजाब पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा है, ऐसे में इन वादों पर अमल कैसे हो पाएगा, यह बड़ा सवाल है। तब विकास के लिए पैसा कहां से आएगा।
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बनूड़ के समीप गांव टंगोरी वासी इकतीस साल की शीला को इस बात की बड़ी खुशी है कि यदि आगामी पंजाब विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी- 'आप' की सरकार बन गई तो उसे हर महीने एक,शून्य रुपयापए मिल जाया करेंगे क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐसी घोषणाअपने चुनावी वादे में कर रखी है। हालांकि रविवार को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक कदम आगे बढ़कर वादा किया कि सूबे में यदि सरकार कांग्रेस की बनती है तो वह हर महिला को हर महीने एक,एक सौ रुपयापए देंगे। चन्नी की इस घोषणा ने शीला को दुविधा में डाल दिया है क्योंकि अब वे सोच रही हैं, मैं अब वोट किसे दूं? मेरे गांव में हर कोई आप की ही चर्चा कर रहा है लेकिन कुछ महिलाएं सोचती हैं कि क्यों न कांग्रेस को वोट दिया जाए क्योंकि वह तो जीतने पर हमें एक,एक सौ रुपयापए प्रतिमाह देने वाली है। मैंने कल चन्नी के इस एलान को टीवी पर सुना था। दरअसल, राजनीतिक दलों के इन मुफ्त के चुनावी वादों के चक्कर में भ्रमित होने वाली शीला अकेली नहीं हैं। चन्नी के ही हलका चमकौर साहिब के गांव रौड़ा वासी चरण कौर कहती हैं, 'हमें अच्छे से पता है कि चुनाव जीतने के बाद कोई भी अपना वादा पूरा नहीं करने वाला लेकिन यह सब हमें लुभा जरूर रहे हैं। यह जानते-समझते हुए कि राजनीतिक दलों के ऐसे लोक-लुभावन वादे जनता को खूब पसंद आते हैं, तो राजनेता क्यों ऐसा करने में पीछे रहें और यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में ऐसे वादों की मानो झड़ी लगी है। ऐसे चुनावी वादे करने में पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी और दिल्ली के मुख्यमंत्री सबसे आगे हैं। केजरीवाल ने अपनी चुनावी घोषणा में अट्ठारह साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को पंजाब आप की सरकार बनने पर हर महीने एक हज़ार रुपयापए देने का वादा किया है। असल में उनकी इस घोषणा पर बहस इसलिए हो रही है क्योंकि पंजाब में एक. दस करोड़ महिलाएं हैं और राज्य में बिजली पर देय दस हजार करोड़ रुपए की सबसिडी का बोझ पहले से है। यानी इस नई घोषणा के बाद पंजाब पर इतना ही बोझ और पड़ने वाला है जो पहले ही दो. पाँच लाख करोड़ रुपए के कर्ज तले दबा है। लेकिन बताया जाता है कि कांग्रेस को लगता है कि महिलाएं हर माह एक,शून्य रुपयापए रकम के प्रलोभन में आप की ओर आकर्षित हो रही हैं। यही सोचकर कांग्रेस ने रविवार को अपना भी पत्ता फेंका और मुख्यमंत्री चन्नी ने रविवार को प्रियंका गांधी की उपस्थिति में चुनावी रैली के मंच से पंजाब की महिलाओं के लिए एक,एक सौ रुपयापए देने का वादा कर दिया। उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए हर साल आठ एलपीजी सिलेंडर देने का भी वादा कर दिया। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर सवाल उठाया कि यदि 'आप' सत्ता में आ भी गई तो अपना वादा पूरा करने के लिए रकम कहां से लाएगी। वैसे अमरिंदर और उनके गठबंधन में सहयोगी भाजपा की ओर से यह घोषणा की गई है कि वे पांच एकड़ से कम जमीन वाले सभी किसानों का कृषि कर्ज पूरा माफ कर देंगे। इधर पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार कहा कि रेत तो अब भी पहले वाले दाम पर ही मिल रही है। उधर, मुख्यमंत्री चन्नी ने भी केवल शुल्क एक सौ रुपयापए प्रतिमाह तक सीमित कर देने की घोषणा कर दी और उन्होंने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है क्योंकि अब कई नेता कहने लगे हैं कि वे निजी केबल संचालकों की ओर से वसूले जा रहे शुल्क का दायरा तय नहीं कर सकते। आप से बागी हुए उसके ही खरड़ से विधायक कंवर संधू जो पहले भी यह मसला उठाते आए हैं, का कहना है कि केबल शुल्क की सीमा केवल कानून बनाकर ही सीमित की जा सकती है। संधू का कहना है कि राजनीतिक दलों की ओर से आए दिन लुभावने वादों का एलान पंजाब के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। उनका कहना है कि ऐसी घोषणाएं करने से पहले इन पर शोध किया जाना जरूरी है, चूंकि पंजाब पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा है, ऐसे में इन वादों पर अमल कैसे हो पाएगा, यह बड़ा सवाल है। तब विकास के लिए पैसा कहां से आएगा।
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सीनाता के कारण देश और काल के अनुसार आदशों में विभिन्नता या जाती है। प्राचीन युग के लोगों ने कला के वाघन में कोई कसर वाकी न रखी। उन्होंने पशुता से को ऊँचा उठाना चाहा बौर मन के अनुशोलन को बनाया । फिर भी दृष्टिकोण में इतनी संकीर्णता आए दिन रही कि, कला का भी कोई आदर्श हो । समाज, धर्मसंकर धर्व-उत्पादन आदि आवश्यकताओं में कुछ सहायता । फल-स्वरूप, तज्ञ्जनित कला उसी विचार के केन्द्रीभूत हो । क्रमशः कला में सत, रज, तम - ये तीन प्रकार सन्निविष्ट वरों की कला और सभ्यो की फला के जादर्श भिन्न-भिन्न ।जिन्होंने दैहिक व्यापारों मे तुविधा उपस्थित करने के लिए चर्चा की, उनकी कला तामसी और राजसो कला में भुक हुई । जिन्होंने धर्म अर्थात् समाज की कल्याणमें कला को नियोजित किया वह मन-वृद्धि का अनुन सात्विकता-समन्वित हुआ। और इससे भी बढ़कर चन्होंने आत्मा को अपनाया, वे 'या'यात्मिकता के उन्नत राज्य में पहुँचे। भारत की कला अंतिम शो की अथवा आध्यात्मिक । भारतीय आदर्श की यह विशेषता है।
अच्छा, तो फला का भाग्यमिता क्या है या तो मन बुद्धि के परे आत्मा का शोषम विकाल हो, घरी लाघ्या११७
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सीनाता के कारण देश और काल के अनुसार आदशों में विभिन्नता या जाती है। प्राचीन युग के लोगों ने कला के वाघन में कोई कसर वाकी न रखी। उन्होंने पशुता से को ऊँचा उठाना चाहा बौर मन के अनुशोलन को बनाया । फिर भी दृष्टिकोण में इतनी संकीर्णता आए दिन रही कि, कला का भी कोई आदर्श हो । समाज, धर्मसंकर धर्व-उत्पादन आदि आवश्यकताओं में कुछ सहायता । फल-स्वरूप, तज्ञ्जनित कला उसी विचार के केन्द्रीभूत हो । क्रमशः कला में सत, रज, तम - ये तीन प्रकार सन्निविष्ट वरों की कला और सभ्यो की फला के जादर्श भिन्न-भिन्न ।जिन्होंने दैहिक व्यापारों मे तुविधा उपस्थित करने के लिए चर्चा की, उनकी कला तामसी और राजसो कला में भुक हुई । जिन्होंने धर्म अर्थात् समाज की कल्याणमें कला को नियोजित किया वह मन-वृद्धि का अनुन सात्विकता-समन्वित हुआ। और इससे भी बढ़कर चन्होंने आत्मा को अपनाया, वे 'या'यात्मिकता के उन्नत राज्य में पहुँचे। भारत की कला अंतिम शो की अथवा आध्यात्मिक । भारतीय आदर्श की यह विशेषता है। अच्छा, तो फला का भाग्यमिता क्या है या तो मन बुद्धि के परे आत्मा का शोषम विकाल हो, घरी लाघ्याएक सौ सत्रह
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मार्च महीना हिमाचल में ही नहीं, अपितु देश के अधिकांश राज्यों में विद्यार्थियों के लिए अहम माना जाता है, क्योंकि इस महीने विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। शिक्षा को प्रभावशाली व गुणात्मक बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाएं भी अपनी अहम भूमिका अदा करती आ रही हैं। जैसे मिड-डे-मील, आपरेशन ब्लैक बोर्ड एवं वोकेशनल एजुकेशन आदि। इन नीतियों के सही परिपालन एवं कार्यान्वयन की बदौलत ही हिमाचल के पहाड़ी प्रदेश होने के बावजूद इसकी साक्षरता दर लगभग 85 प्रतिशत के करीब है। वास्तव में यह सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है। प्रतियोगिता के इस दौर में हमें विभिन्न ग्लोबल चुनौतियों का सामना करना है। इसके लिए शिक्षा के आधुनिकीकरण व गुणवत्ता की ओर अधिक ध्यान देना होगा। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम, वर्चुअल लैब, ई-लर्निंग, अटल टिंकरिंग लैब जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश में विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा रही है। प्रदेश में शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरों को स्थापित किया जा रहा है, ताकि नकल पर पूरी तरह से काबू पाया जा सके। आगामी परीक्षाओं के दौर में अभिभावकों का दायित्व बन जाता है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई की ओर अधिक से अधिक प्रेरित करें और उन्हें नकल रूपी बुराई से मुकम्मल तौर से बचने के लिए प्रोत्साहित करें। अभिभावक बच्चों के तनाव प्रबंधन व विरोधाभास प्रबंधन में भी उनकी मदद कर सकते हैं। वास्तव में अभिभावकों का सबसे बड़ा निवेश बच्चों की शिक्षा ही तो है। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अध्यापकों के साथ-साथ समाज का भी अहम रोल रहता है। अतः प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए अध्यापकों के साथ-साथ समाज को भी आगे कदम बढ़ाने होंगे, ताकि सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में चलाई गई नीतियों का पूर्ण परिणाम हासिल कर शिक्षा के क्षेत्र में उज्ज्वल इबारत लिखी जा सके, क्योंकि शिक्षा अमूल्य धन है, जो मनुष्य को उसके मुकाम तक पहुंचाने में मदद करती है।
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मार्च महीना हिमाचल में ही नहीं, अपितु देश के अधिकांश राज्यों में विद्यार्थियों के लिए अहम माना जाता है, क्योंकि इस महीने विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। शिक्षा को प्रभावशाली व गुणात्मक बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाएं भी अपनी अहम भूमिका अदा करती आ रही हैं। जैसे मिड-डे-मील, आपरेशन ब्लैक बोर्ड एवं वोकेशनल एजुकेशन आदि। इन नीतियों के सही परिपालन एवं कार्यान्वयन की बदौलत ही हिमाचल के पहाड़ी प्रदेश होने के बावजूद इसकी साक्षरता दर लगभग पचासी प्रतिशत के करीब है। वास्तव में यह सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है। प्रतियोगिता के इस दौर में हमें विभिन्न ग्लोबल चुनौतियों का सामना करना है। इसके लिए शिक्षा के आधुनिकीकरण व गुणवत्ता की ओर अधिक ध्यान देना होगा। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम, वर्चुअल लैब, ई-लर्निंग, अटल टिंकरिंग लैब जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश में विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा रही है। प्रदेश में शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरों को स्थापित किया जा रहा है, ताकि नकल पर पूरी तरह से काबू पाया जा सके। आगामी परीक्षाओं के दौर में अभिभावकों का दायित्व बन जाता है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई की ओर अधिक से अधिक प्रेरित करें और उन्हें नकल रूपी बुराई से मुकम्मल तौर से बचने के लिए प्रोत्साहित करें। अभिभावक बच्चों के तनाव प्रबंधन व विरोधाभास प्रबंधन में भी उनकी मदद कर सकते हैं। वास्तव में अभिभावकों का सबसे बड़ा निवेश बच्चों की शिक्षा ही तो है। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अध्यापकों के साथ-साथ समाज का भी अहम रोल रहता है। अतः प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए अध्यापकों के साथ-साथ समाज को भी आगे कदम बढ़ाने होंगे, ताकि सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में चलाई गई नीतियों का पूर्ण परिणाम हासिल कर शिक्षा के क्षेत्र में उज्ज्वल इबारत लिखी जा सके, क्योंकि शिक्षा अमूल्य धन है, जो मनुष्य को उसके मुकाम तक पहुंचाने में मदद करती है।
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बारासात : बारासात अंचल के सासन थाना अंतर्गत दादपुर पंचायत के निवासी तृणमूल नेता आसेर अली मंडल के घर पर मंगलवार को बमबारी कर तोड़फोड़ किये जाने को लेकर इलाके में तनाव फैल गया। आसेर बारासात 2 नंबर पंचायत समिति के पीडब्ल्यूडी व परिवहन कर्माध्यक्ष हैं। आरोप है कि तृणमूल के ही एक वर्ग ने नेता पर अम्फान राहत सामग्री वितरण के साथ ही प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पक्षपात का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी और एक बार फिर उनमें इन सबको लेकर क्षोभ बढ़ा और उन्होंने गत रात वहां जाकर तोड़फोड़ मचा दी। तृणमूल नेता के घर को लक्ष्य कर की गयी बमबारी से इलाके के लोग आतंकित हो उठे और उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए विक्षोभ भी जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इलाके में आये दिन हिंसा की घटनाएं हो रही हैं और इस स्थिति में उन्हें पुलिस प्रशासन की सक्रिय भूमिका चाहिए। यहां बमबारी की घटना को लेकर तृणमूल का आपसी द्वंद्व उभरने का आरोप भाजपा की ओर से लगाया जा रहा है वहीं तृणमूल की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया। आसेर अली मंडल का आरोप है कि कुछ लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं मगर जब उनकी दाल नहीं गली तो उन्होंने उनके घर पर बमबारी की है। पुलिस ने इस बाबत आगे की कार्रवाई शुरू की है।
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बारासात : बारासात अंचल के सासन थाना अंतर्गत दादपुर पंचायत के निवासी तृणमूल नेता आसेर अली मंडल के घर पर मंगलवार को बमबारी कर तोड़फोड़ किये जाने को लेकर इलाके में तनाव फैल गया। आसेर बारासात दो नंबर पंचायत समिति के पीडब्ल्यूडी व परिवहन कर्माध्यक्ष हैं। आरोप है कि तृणमूल के ही एक वर्ग ने नेता पर अम्फान राहत सामग्री वितरण के साथ ही प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पक्षपात का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी और एक बार फिर उनमें इन सबको लेकर क्षोभ बढ़ा और उन्होंने गत रात वहां जाकर तोड़फोड़ मचा दी। तृणमूल नेता के घर को लक्ष्य कर की गयी बमबारी से इलाके के लोग आतंकित हो उठे और उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए विक्षोभ भी जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इलाके में आये दिन हिंसा की घटनाएं हो रही हैं और इस स्थिति में उन्हें पुलिस प्रशासन की सक्रिय भूमिका चाहिए। यहां बमबारी की घटना को लेकर तृणमूल का आपसी द्वंद्व उभरने का आरोप भाजपा की ओर से लगाया जा रहा है वहीं तृणमूल की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया। आसेर अली मंडल का आरोप है कि कुछ लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं मगर जब उनकी दाल नहीं गली तो उन्होंने उनके घर पर बमबारी की है। पुलिस ने इस बाबत आगे की कार्रवाई शुरू की है।
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रणविजय सिंह, नई दिल्ली। खतरनाक संक्रामक बीमारी टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए चौतरफा रणनीति तैयार कर ली गई है। अभी तक सिर्फ बच्चों को ही टीके लगाए जाते हैं। अब बड़ों को भी टीके लगाए जाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए जर्मनी में विकसित नए टीके का जल्द देश में वयस्कों पर ट्रायल शुरू किया जाएगा।
एम्स सहित बड़े अस्पतालों के डॉक्टर ट्रायल करेंगे। अब तक की स्थिति वर्तमान में टीबी से बचाव के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। यह राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल है। इसके बावजूद देशभर में करीब 23 लाख लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हैं।
इससे हर साल करीब 23 लाख लोगों की मौत हो जाती है। अकेले राजधानी दिल्ली में ही करीब 50,000 लोग टीबी से पीड़ित हैं और हर साल करीब साढ़े तीन हजार लोगों की मौत हो जाती है। उठ रहे सवाल कई अध्ययनों में बीसीजी टीके के सौ फीसदी प्रभावी होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण, घर के अंदर प्रदूषण व धूम्रपान टीबी का बड़ा कारण माना जाता है।
टीबी पीड़ित मरीजों में पांच फीसदी लोगों को ठीक होने के बाद यह बीमारी दोबारा हो जाती है। यही वजह है कि टीबी अब भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि जर्मनी ने बीसीजी का नया टीका विकसित किया है। इसका फेज एक का ट्रायल जर्मनी में हुआ था। फेज दो का ट्रायल अफ्रीका में बच्चों पर हो चुका है। तीसरे फेज का ट्रायल देश में वयस्कों पर किया जाएगा।
ट्रायल सफल होने पर ऐसे लोगों को टीका लगाया जा सकेगा, जो टीबी के पहले मरीज रहे हैं। उन्हें टीबी ठीक होने के बाद टीका लगाया जा सकेगा, ताकि दोबारा टीबी की बीमारी नहीं होने पाए। जिन्हें कभी बीमारी नहीं हुई हो, उन वयस्कों को भी टीका लगाया जा सकेगा।
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रणविजय सिंह, नई दिल्ली। खतरनाक संक्रामक बीमारी टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए चौतरफा रणनीति तैयार कर ली गई है। अभी तक सिर्फ बच्चों को ही टीके लगाए जाते हैं। अब बड़ों को भी टीके लगाए जाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए जर्मनी में विकसित नए टीके का जल्द देश में वयस्कों पर ट्रायल शुरू किया जाएगा। एम्स सहित बड़े अस्पतालों के डॉक्टर ट्रायल करेंगे। अब तक की स्थिति वर्तमान में टीबी से बचाव के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। यह राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल है। इसके बावजूद देशभर में करीब तेईस लाख लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हैं। इससे हर साल करीब तेईस लाख लोगों की मौत हो जाती है। अकेले राजधानी दिल्ली में ही करीब पचास,शून्य लोग टीबी से पीड़ित हैं और हर साल करीब साढ़े तीन हजार लोगों की मौत हो जाती है। उठ रहे सवाल कई अध्ययनों में बीसीजी टीके के सौ फीसदी प्रभावी होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण, घर के अंदर प्रदूषण व धूम्रपान टीबी का बड़ा कारण माना जाता है। टीबी पीड़ित मरीजों में पांच फीसदी लोगों को ठीक होने के बाद यह बीमारी दोबारा हो जाती है। यही वजह है कि टीबी अब भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि जर्मनी ने बीसीजी का नया टीका विकसित किया है। इसका फेज एक का ट्रायल जर्मनी में हुआ था। फेज दो का ट्रायल अफ्रीका में बच्चों पर हो चुका है। तीसरे फेज का ट्रायल देश में वयस्कों पर किया जाएगा। ट्रायल सफल होने पर ऐसे लोगों को टीका लगाया जा सकेगा, जो टीबी के पहले मरीज रहे हैं। उन्हें टीबी ठीक होने के बाद टीका लगाया जा सकेगा, ताकि दोबारा टीबी की बीमारी नहीं होने पाए। जिन्हें कभी बीमारी नहीं हुई हो, उन वयस्कों को भी टीका लगाया जा सकेगा।
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Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती के लिए आवेदन करें 2022 ऑनलाइन/ऑफ़लाइन 29/08/2022 से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें Kadapa District Andhra Pradesh, Cuddapah में Rs. 21,000 - Rs. 72,000 Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। Kadapa District Andhra Pradesh के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं।
Kadapa District Andhra Pradesh उन उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है जो B. Pharma, B. Sc, MBBS, GNM, D. Pharm, DMLT, BMLT, M. A, MSW की योग्यता रखते हैं। Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के पद के लिए पात्रता मानदंड और आवश्यक योग्यता को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। Kadapa District Andhra Pradesh में 16 रिक्तियां हैं और इच्छुक उम्मीदवार Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के पद का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन कर सकते हैं।
योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और 29/08/2022 से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती 2022 रिक्ति कुल 16 है। Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती 2022 के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें।
उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kadapa District Andhra Pradesh में Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा।
Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती 2022 वेतन Rs. 21,000 - Rs. 72,000 Per Month है। आमतौर पर, उम्मीदवारों के चयन के बाद उन्हें Medical Officer, Counsellor, More Vacancies Kadapa District Andhra Pradesh में पद के लिए वेतन सीमा के बारे में सूचित किया जाएगा।
Kadapa District Andhra Pradesh ने Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 29/08/2022 है। पद के लिए नौकरी का स्थान Cuddapah है।
Kadapa District Andhra Pradesh Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों को आमंत्रित करता है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 29/08/2022 है।
How to apply for Kadapa District Andhra Pradesh Recruitment 2022?
उम्मीदवार Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के लिए 29/08/2022 से पहले आधिकारिक वेबसाइट kadapa. ap. gov. in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन/ऑफ़लाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।
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Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती के लिए आवेदन करें दो हज़ार बाईस ऑनलाइन/ऑफ़लाइन उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें Kadapa District Andhra Pradesh, Cuddapah में Rs. इक्कीस,शून्य - Rs. बहत्तर,शून्य Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। Kadapa District Andhra Pradesh के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं। Kadapa District Andhra Pradesh उन उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है जो B. Pharma, B. Sc, MBBS, GNM, D. Pharm, DMLT, BMLT, M. A, MSW की योग्यता रखते हैं। Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के पद के लिए पात्रता मानदंड और आवश्यक योग्यता को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। Kadapa District Andhra Pradesh में सोलह रिक्तियां हैं और इच्छुक उम्मीदवार Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के पद का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन कर सकते हैं। योग्य उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस से पहले ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती दो हज़ार बाईस रिक्ति कुल सोलह है। Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती दो हज़ार बाईस के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Kadapa District Andhra Pradesh में Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के रूप में रखा जाएगा। Kadapa District Andhra Pradesh भर्ती दो हज़ार बाईस वेतन Rs. इक्कीस,शून्य - Rs. बहत्तर,शून्य Per Month है। आमतौर पर, उम्मीदवारों के चयन के बाद उन्हें Medical Officer, Counsellor, More Vacancies Kadapa District Andhra Pradesh में पद के लिए वेतन सीमा के बारे में सूचित किया जाएगा। Kadapa District Andhra Pradesh ने Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस है। पद के लिए नौकरी का स्थान Cuddapah है। Kadapa District Andhra Pradesh Medical Officer, Counsellor, More Vacancies रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों को आमंत्रित करता है और आवेदन करने की अंतिम तिथि उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस है। How to apply for Kadapa District Andhra Pradesh Recruitment दो हज़ार बाईस? उम्मीदवार Medical Officer, Counsellor, More Vacancies के लिए उनतीस अगस्त दो हज़ार बाईस से पहले आधिकारिक वेबसाइट kadapa. ap. gov. in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन/ऑफ़लाइन आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।
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नई दिल्ली. (Water parks) पानी से हमें भला ह कितना ही डर लगता हो लेकिन गर्मी के दिनों में हमें पानी में रहना अच्छा लगने लगता है। गर्मियों में हम पूल, समुद्री तट आदि पर जाने का मन बनाते हैं, लेकिन अक्सर समय की कमी और पैसे की तंगी के कारण हम अपने मन को मार लेते हैं।
हां, अगर जैसे-तैसे छुट्टी मिल भी जाए और घूमने का बजट बन भी जाए तो समस्या यह होती है कि हम जायें कहां? तो आइये हम बातते हैं दिल्ली, एनसीआर के कुछ Water parks बारे में, जहां आप न सिर्फ पानी में मस्ती कर सकते हैं बल्कि कई जबरदस्त राइड्स का भी मजा ले सकते हैं.
'फन एंड फूड विलेज' वाटर पार्क ('Fun and Food Village' Water Park)
अगर आप अपने वीकेंड को यादगार बनाने का सोच रहे हैं तो आपके लिए दिल्ली और हरियाणा की बार्डर के पास कापसहेड़ा में बना 'फन एंड फूड विलेज वाटर पार्क' Water park खूबसूरत डेस्टिनेशन है। वीकेंड स्पॉट के रूप में यह जगह दिल्ली में काफी लोकप्रिय ह। स्कूल के बच्चे हों या कॉलेज के टीनएजर्स या फिर ऑफिस गोअर्स, सबके लिए एक हॉट फेवरिट डेस्टिनेशन है।
आपकी कार आपको दिल्ली के किसी भी कोने से फन एंड फूड विलेज तक एक घंटे में पहुंचा देगी। लेकिन अगर आप मेट्रो से जाना चाहते हैं तो आपको द्वारका सेक्टर 21 मेट्रो स्टेशन तक जाना होगा। यहां से आप ऑटो के जरिए अगले 20 मिनट में इस मजेदार जगह तक पहुंच सकते हैं।
इसमें एंट्री के लिए अलग- अलग मानक हैं. प्रति कपल इंट्री 2000 से 2200 है। बच्चों के लिए 600 और प्रति व्यक्ति सिंगल एंट्री के लिए 1200 से 1300 से देने होंगे।
'ऑयस्टर्स बीच' वाटर पार्क ('Oysters Beach' Water Park)
ऑयस्टर्स बीच पार्क अन्य पार्कों की तुलना में थोड़ा सा अलग है। कहा जाता है कि यहां पूरा समुद्र वाला फील आता है क्योंकि यह वॉटर पार्क Water parks लगभग 10 एकड़ जमीन में फैला हुआ है। यह गुडगांव के अप्पू घर में है। यहां जाने के लिए मेट्रो स्टेशन हुड्डा सिटी सेंटर एकदम सटीक है। वैसे अपने निजी वाहन से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह सुबह 11: 00 से लेकर शाम 6:00 तक खुला रहता है। यहां एंट्री फीस बच्चों के लिए 600, वयस्कों के लिए 1000 से 1200 और बुजुर्गों के लिए 600 है।
'जस्ट चिल' वॉटर पार्क ('Just Chill' Water Park)
जस्ट चिल वॉटर पार्क के बारे में कहा जाता है कि यहां का पानी बहुत साफ सुथरा है। यहां स्लाइड्स के दौरान उठने वाली पानी की तरंगे राइड्स में रोमांच भरती है। यह दिल्ली की जीटी करनाल मेन रोड में स्थित जीटीबी मेमोरियल के नजदीक है। यहां जाने के लिए आप कैब का प्रयोग कर सकते हैं। यहां पर आप रेनबो, ब्लैक थ्रिल, मिनी एक्वा राइड्स, फ्रेंडशिप, गॉडजिला जैसी वॉटर राइड्स कर सकते हो. इसके अलावा आप यहां एडवेंचर गेम्स भी खेल सकते हो. इंडोर-आउटडोर गेम्स यहां खेलने की सुविधा है। अच्छी बात यह है कि यहां हम परिवार के साथ जा सकते हैं। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह 10 से शाम 7:00 बजे तक है. एंट्री फीस बच्चों के लिए 400 से 500 और सिंगल के लिए 500 से 800 रुपये है।
'वर्ल्डस ऑफ वंडर' वॉटर पार्क ('World of Wonder' water park)
नोएडा के ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल के पास वर्ल्डस ऑफ वंडर वॉटर पार्क है। इसमें 26 तरह की वॉटर राइड का मजा उठाया जा सकता है। साथ ही एम्यूजमेंट पार्क भी है। यहां गो कार्टिग भी होती है। यहां मेट्रो से आसानी से पहुंचा जा सकता है। वॉटर पार्क की टाइमिंग सुबह 11: 30 से शाम 8:00 बजे तक है। एंट्री फीस बच्चों के लिए 550 रुपए, वयस्कों के लिए 600 रुपये और बुजुर्गों के लिए 200 रुपये है।
'स्प्लैश' वॉटर पार्क ('Splash' Water Park)
वॉटर राइड्स के शौकीनों के लिए स्प्लैश वॉटर पार्क बेहद खास है. यहां आधुनिक स्लाइड्स और राइड्स को एंजॉय कर सकते हैं। यह अलीपुर (जीटी करनाल रोड, दिल्ली) में स्थित है। जिसे आप अपने वाहन से महज कुछ घंटों में तय कर सकते हैं। या फिर कैब, हरियाणा रोडवेज आदि का भी प्रयोग कर सकते हैं। यहां वेव पूल, किडीज पूल, साइक्लोन्स, स्केट स्लाइड्स, बुद्धा वॉटर फॉल, हराकारी स्लाइड आदि का आनंद उठा सकते हैं. मिनी ट्रेन का स़फर और वॉटर डांस ताजगी भर देता है. अच्छी बात यह है कि यहां बच्चों के लिए अलग से पूल है। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह 10से शाम 7:00 बजे तक है। एंट्री फीस बच्चों के लिए 516, कपल के लिए 1290 और सिंगल के लिए 903 रुपये है।
'एडवेंचर आइलैंड' वॉटर पार्क ('Adventure Island' Water Park)
एडवेंचर आइलैंड रोहिणी में स्थितहै. यहां 22 राइड्स हैं, जिनमें से चार वॉटर बेस्ड हैं. आप स्प्लैश डाउन, स्प्लैश ड्रंक, एचटूओ एक्वॉ प्ले, सी-होर्स, स्वान बोट, रेन डांस का लुत्फ उठा सकते हैं. एयर बस, ट्रेल ट्रेन, बंपर कार यानी और भी बहुत कुछ है यहां। यहां पहुंचने के लिए मेट्रो का प्रयोग कर सकते हैं। टिकट और टाइमिंग है सुबह 11बजे से शाम के 7 बजे तक खुला रहता है। यहां बड़ों के लिए 500 रुपये और बच्चों के 450 रुपये एंट्री फीस है।
'दिल्ली राइड्स' वॉटर पार्क ('Delhi Rides' Water Park)
दिल्ली राइड्स वॉटर पार्क दिल्ली के कालिंदी कुज में स्थित है. यहां ऑटो, कार आदि से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यह पार्क एम्यूजमेंट पार्क भी है। कहा जाता है कि वॉटर पार्क में मौजूद यहां हर राइड में पानी की बौछारें मिलेंगी यहां का पानी बहुत साफ-सुथरा है जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह चारों तरफ से बंद है। यह 5 एकड़ में बना हुआ है साथ ही यहां 250 पेड़ हैं जो वातावरण को तरोताजा रखने में मददगार बनते हैं। यहां रिवर बैंक भी है। यहां इंट्री सिंगल्स के लिए 350 से 450 है, कपल के लिए 800 और परिवार के लिए 900 है। परिवार में मां-बाप के साथ दो बच्चों को इंट्री दी जाती है।
क्लब प्लेटिनम दिल्ली-रोहतक रोड, बहादुरगढ़, हरियाणा में है। इसे फनटाउन भी कहा जाता है। यहां वॉटर पार्क और रिसॉर्ट है। इसमें अच्छे वॉटर स्लाइड्स, स्विमिंग पूल और छोटा एम्यूजमेंट पार्क है। वॉटर पार्क में मैजिक ट्विस्ट ब्लैक टनल, मल्टी लेन स्लाइड, फैमिली स्लाइड्स, स्पारइरल स्लाइड और डांस फ्लोर भी है। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह 10 से शाम 7:00 बजे तक है।
सबसे पहले एक छोटा सा बैग लें, जिसमें कुछ कपड़े रखे जा सकें।
दो तौलिया और एक जोड़ी कपडे़ साथ ले जाएं।
वॉटर पार्क में खाने का सामान ले जाने की इजाजत नहीं होती, इसलिए लंच तो वहीं करना होगा।
सनस्क्रीन रखना मत भूलना, सनग्लासेज भी जरूरी हैं।
लौटते वक्त भीगे हुए स्विमिंग सूट रखने के लिए एक प्लास्टिक बैग भी रखना होगा।
कुछ डिस्पोजेबल पानी की बोतलें भी रखी जा सकती हैं।
कुल मिलाकर बात यह है कि जब आपको अपने शहर में ही पानी के अंदर खेलने व मस्ती करने में मजा मिल सकता है तो हम बाहर क्यों जाएं। कहा जाता है कि वाटर पार्क की राइड्स तेज धूप के असर को छूमंतर कर देते हैं। तो फिर देर किस बात की है... हो जाइये तैयार... क्योंकि गर्मी अपनी दस्तक दे चुकी है और वाटर पार्क के दरवाजे भी आपके स्वागत के लिए बाहें फैलाए खड़े हुए हैं।
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नई दिल्ली. पानी से हमें भला ह कितना ही डर लगता हो लेकिन गर्मी के दिनों में हमें पानी में रहना अच्छा लगने लगता है। गर्मियों में हम पूल, समुद्री तट आदि पर जाने का मन बनाते हैं, लेकिन अक्सर समय की कमी और पैसे की तंगी के कारण हम अपने मन को मार लेते हैं। हां, अगर जैसे-तैसे छुट्टी मिल भी जाए और घूमने का बजट बन भी जाए तो समस्या यह होती है कि हम जायें कहां? तो आइये हम बातते हैं दिल्ली, एनसीआर के कुछ Water parks बारे में, जहां आप न सिर्फ पानी में मस्ती कर सकते हैं बल्कि कई जबरदस्त राइड्स का भी मजा ले सकते हैं. 'फन एंड फूड विलेज' वाटर पार्क अगर आप अपने वीकेंड को यादगार बनाने का सोच रहे हैं तो आपके लिए दिल्ली और हरियाणा की बार्डर के पास कापसहेड़ा में बना 'फन एंड फूड विलेज वाटर पार्क' Water park खूबसूरत डेस्टिनेशन है। वीकेंड स्पॉट के रूप में यह जगह दिल्ली में काफी लोकप्रिय ह। स्कूल के बच्चे हों या कॉलेज के टीनएजर्स या फिर ऑफिस गोअर्स, सबके लिए एक हॉट फेवरिट डेस्टिनेशन है। आपकी कार आपको दिल्ली के किसी भी कोने से फन एंड फूड विलेज तक एक घंटे में पहुंचा देगी। लेकिन अगर आप मेट्रो से जाना चाहते हैं तो आपको द्वारका सेक्टर इक्कीस मेट्रो स्टेशन तक जाना होगा। यहां से आप ऑटो के जरिए अगले बीस मिनट में इस मजेदार जगह तक पहुंच सकते हैं। इसमें एंट्री के लिए अलग- अलग मानक हैं. प्रति कपल इंट्री दो हज़ार से दो हज़ार दो सौ है। बच्चों के लिए छः सौ और प्रति व्यक्ति सिंगल एंट्री के लिए एक हज़ार दो सौ से एक हज़ार तीन सौ से देने होंगे। 'ऑयस्टर्स बीच' वाटर पार्क ऑयस्टर्स बीच पार्क अन्य पार्कों की तुलना में थोड़ा सा अलग है। कहा जाता है कि यहां पूरा समुद्र वाला फील आता है क्योंकि यह वॉटर पार्क Water parks लगभग दस एकड़ जमीन में फैला हुआ है। यह गुडगांव के अप्पू घर में है। यहां जाने के लिए मेट्रो स्टेशन हुड्डा सिटी सेंटर एकदम सटीक है। वैसे अपने निजी वाहन से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह सुबह ग्यारह: शून्य से लेकर शाम छः:शून्य तक खुला रहता है। यहां एंट्री फीस बच्चों के लिए छः सौ, वयस्कों के लिए एक हज़ार से एक हज़ार दो सौ और बुजुर्गों के लिए छः सौ है। 'जस्ट चिल' वॉटर पार्क जस्ट चिल वॉटर पार्क के बारे में कहा जाता है कि यहां का पानी बहुत साफ सुथरा है। यहां स्लाइड्स के दौरान उठने वाली पानी की तरंगे राइड्स में रोमांच भरती है। यह दिल्ली की जीटी करनाल मेन रोड में स्थित जीटीबी मेमोरियल के नजदीक है। यहां जाने के लिए आप कैब का प्रयोग कर सकते हैं। यहां पर आप रेनबो, ब्लैक थ्रिल, मिनी एक्वा राइड्स, फ्रेंडशिप, गॉडजिला जैसी वॉटर राइड्स कर सकते हो. इसके अलावा आप यहां एडवेंचर गेम्स भी खेल सकते हो. इंडोर-आउटडोर गेम्स यहां खेलने की सुविधा है। अच्छी बात यह है कि यहां हम परिवार के साथ जा सकते हैं। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह दस से शाम सात:शून्य बजे तक है. एंट्री फीस बच्चों के लिए चार सौ से पाँच सौ और सिंगल के लिए पाँच सौ से आठ सौ रुपयापये है। 'वर्ल्डस ऑफ वंडर' वॉटर पार्क नोएडा के ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल के पास वर्ल्डस ऑफ वंडर वॉटर पार्क है। इसमें छब्बीस तरह की वॉटर राइड का मजा उठाया जा सकता है। साथ ही एम्यूजमेंट पार्क भी है। यहां गो कार्टिग भी होती है। यहां मेट्रो से आसानी से पहुंचा जा सकता है। वॉटर पार्क की टाइमिंग सुबह ग्यारह: तीस से शाम आठ:शून्य बजे तक है। एंट्री फीस बच्चों के लिए पाँच सौ पचास रुपयापए, वयस्कों के लिए छः सौ रुपयापये और बुजुर्गों के लिए दो सौ रुपयापये है। 'स्प्लैश' वॉटर पार्क वॉटर राइड्स के शौकीनों के लिए स्प्लैश वॉटर पार्क बेहद खास है. यहां आधुनिक स्लाइड्स और राइड्स को एंजॉय कर सकते हैं। यह अलीपुर में स्थित है। जिसे आप अपने वाहन से महज कुछ घंटों में तय कर सकते हैं। या फिर कैब, हरियाणा रोडवेज आदि का भी प्रयोग कर सकते हैं। यहां वेव पूल, किडीज पूल, साइक्लोन्स, स्केट स्लाइड्स, बुद्धा वॉटर फॉल, हराकारी स्लाइड आदि का आनंद उठा सकते हैं. मिनी ट्रेन का स़फर और वॉटर डांस ताजगी भर देता है. अच्छी बात यह है कि यहां बच्चों के लिए अलग से पूल है। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह दससे शाम सात:शून्य बजे तक है। एंट्री फीस बच्चों के लिए पाँच सौ सोलह, कपल के लिए एक हज़ार दो सौ नब्बे और सिंगल के लिए नौ सौ तीन रुपयापये है। 'एडवेंचर आइलैंड' वॉटर पार्क एडवेंचर आइलैंड रोहिणी में स्थितहै. यहां बाईस राइड्स हैं, जिनमें से चार वॉटर बेस्ड हैं. आप स्प्लैश डाउन, स्प्लैश ड्रंक, एचटूओ एक्वॉ प्ले, सी-होर्स, स्वान बोट, रेन डांस का लुत्फ उठा सकते हैं. एयर बस, ट्रेल ट्रेन, बंपर कार यानी और भी बहुत कुछ है यहां। यहां पहुंचने के लिए मेट्रो का प्रयोग कर सकते हैं। टिकट और टाइमिंग है सुबह ग्यारहबजे से शाम के सात बजे तक खुला रहता है। यहां बड़ों के लिए पाँच सौ रुपयापये और बच्चों के चार सौ पचास रुपयापये एंट्री फीस है। 'दिल्ली राइड्स' वॉटर पार्क दिल्ली राइड्स वॉटर पार्क दिल्ली के कालिंदी कुज में स्थित है. यहां ऑटो, कार आदि से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यह पार्क एम्यूजमेंट पार्क भी है। कहा जाता है कि वॉटर पार्क में मौजूद यहां हर राइड में पानी की बौछारें मिलेंगी यहां का पानी बहुत साफ-सुथरा है जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह चारों तरफ से बंद है। यह पाँच एकड़ में बना हुआ है साथ ही यहां दो सौ पचास पेड़ हैं जो वातावरण को तरोताजा रखने में मददगार बनते हैं। यहां रिवर बैंक भी है। यहां इंट्री सिंगल्स के लिए तीन सौ पचास से चार सौ पचास है, कपल के लिए आठ सौ और परिवार के लिए नौ सौ है। परिवार में मां-बाप के साथ दो बच्चों को इंट्री दी जाती है। क्लब प्लेटिनम दिल्ली-रोहतक रोड, बहादुरगढ़, हरियाणा में है। इसे फनटाउन भी कहा जाता है। यहां वॉटर पार्क और रिसॉर्ट है। इसमें अच्छे वॉटर स्लाइड्स, स्विमिंग पूल और छोटा एम्यूजमेंट पार्क है। वॉटर पार्क में मैजिक ट्विस्ट ब्लैक टनल, मल्टी लेन स्लाइड, फैमिली स्लाइड्स, स्पारइरल स्लाइड और डांस फ्लोर भी है। वॉटर पार्क का टाइमिंग सुबह दस से शाम सात:शून्य बजे तक है। सबसे पहले एक छोटा सा बैग लें, जिसमें कुछ कपड़े रखे जा सकें। दो तौलिया और एक जोड़ी कपडे़ साथ ले जाएं। वॉटर पार्क में खाने का सामान ले जाने की इजाजत नहीं होती, इसलिए लंच तो वहीं करना होगा। सनस्क्रीन रखना मत भूलना, सनग्लासेज भी जरूरी हैं। लौटते वक्त भीगे हुए स्विमिंग सूट रखने के लिए एक प्लास्टिक बैग भी रखना होगा। कुछ डिस्पोजेबल पानी की बोतलें भी रखी जा सकती हैं। कुल मिलाकर बात यह है कि जब आपको अपने शहर में ही पानी के अंदर खेलने व मस्ती करने में मजा मिल सकता है तो हम बाहर क्यों जाएं। कहा जाता है कि वाटर पार्क की राइड्स तेज धूप के असर को छूमंतर कर देते हैं। तो फिर देर किस बात की है... हो जाइये तैयार... क्योंकि गर्मी अपनी दस्तक दे चुकी है और वाटर पार्क के दरवाजे भी आपके स्वागत के लिए बाहें फैलाए खड़े हुए हैं।
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गतवर्ष पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर बैट हमले में शहीद हुए तीन पोर्टरों और एक पैर गंवा चुके पोर्टर के परिजनों को सेना ने वित्तीय सहायता प्रदान की। सैन्य अधिकारियों ने शहीदों के परिजनों को आगे भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बता दें कि शनिवार दोपहर पुंछ स्थित सेना के नाटो ऑडोटोरियम के बाहर समारोह का आयोजन किया गया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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गतवर्ष पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर बैट हमले में शहीद हुए तीन पोर्टरों और एक पैर गंवा चुके पोर्टर के परिजनों को सेना ने वित्तीय सहायता प्रदान की। सैन्य अधिकारियों ने शहीदों के परिजनों को आगे भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बता दें कि शनिवार दोपहर पुंछ स्थित सेना के नाटो ऑडोटोरियम के बाहर समारोह का आयोजन किया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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अधिक लोकप्रिय रसायन शास्त्र असाइनमेंट में से एक एक जादूगर शिकार है, जहां छात्रों को वर्णन करने वाले सामानों की पहचान करने या लाने के लिए कहा जाता है। स्केवेंजर शिकार वस्तुओं के उदाहरण 'तत्व' या 'विषम मिश्रण' जैसी चीजें हैं। क्या कोई अतिरिक्त सामान है जो आप एक जादूगर शिकार में जोड़ देंगे या आपको असाइनमेंट खोजने के लिए कहा गया है?
सबसे पहले, सुराग के साथ शुरू करते हैं।
आप इस पृष्ठ को अपनी खुद की रसायन शास्त्र स्कैनेंजर शिकार शुरू करने के लिए प्रिंट कर सकते हैं या जवाब खोजने का प्रयास कर सकते हैं। ये वही सुराग प्लस उत्तर इस पृष्ठ के निचले हिस्से में पाए जाते हैं।
सल्फर, ग्रेफाइट (कार्बन)
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अधिक लोकप्रिय रसायन शास्त्र असाइनमेंट में से एक एक जादूगर शिकार है, जहां छात्रों को वर्णन करने वाले सामानों की पहचान करने या लाने के लिए कहा जाता है। स्केवेंजर शिकार वस्तुओं के उदाहरण 'तत्व' या 'विषम मिश्रण' जैसी चीजें हैं। क्या कोई अतिरिक्त सामान है जो आप एक जादूगर शिकार में जोड़ देंगे या आपको असाइनमेंट खोजने के लिए कहा गया है? सबसे पहले, सुराग के साथ शुरू करते हैं। आप इस पृष्ठ को अपनी खुद की रसायन शास्त्र स्कैनेंजर शिकार शुरू करने के लिए प्रिंट कर सकते हैं या जवाब खोजने का प्रयास कर सकते हैं। ये वही सुराग प्लस उत्तर इस पृष्ठ के निचले हिस्से में पाए जाते हैं। सल्फर, ग्रेफाइट
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बॉलीवुड में बहुत से जॉनर की फिल्में आए दिन रिलीज होती हैं। लेकिन कुछ जॉनर ऐसे होते हैं, जिन्हें दर्शक हमेशा देखना पसंद करते हैं। फिर चाहे वह हॉरर हो या कॉमेडी इन दोनों जॉनर के अपने दर्शक हैं। दर्शकों के बीच इनकी पॉपुलैरिटी को देखते हुए निर्माता इनकी खूब फिल्में बनाते हैं। बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों की भरमार है। इस साल भी कई कॉमेडी फिल्में रिलीज होने की कतार में हैं। आजकल बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बतौर कॉमेडी अभिनेता काम करने लगे हैं। यहां हम आपको बॉलीवुड की ऐसी जबरदस्त कॉमेडी फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें इस वीकेंड देखकर आपकी हंसी नहीं रोक पाएंगे।
साल 2006 में रिलीज हुई 'भागम भाग' एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है, जिसे देखने के बाद दर्शक आज भी लोटपोट हो जाते हैं। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गोविंदा, अक्षय कुमार और परेश रावल जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। ये तीनों पहली बार इस फिल्म में एक साथ स्क्रीन साझा करते हुए दिखाई दिए थे। इनके अलावा इस फिल्म में लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, अरबाज खान और राजपाल यादव भी थे। फिल्म की कॉमेडी दर्शकों द्वारा खूब पसंद की गई थी। यह फिल्म इस समय 'जी 5' और 'एमएक्स प्लेयर' पर स्ट्रीम की जा सकती है।
साल 2003 में रिलीज हुई सुपरहिट कॉमेडी फिल्म 'हंगामा' आज भी लोगों को हंसाने के का काम बखूबी करती है। कई सुपरहिट कॉमेडी फिल्मों का निर्देशन कर चुके निर्देशक प्रियदर्शन ने ही इस फिल्म को बनाया था। रिलीज होने के इतने साल बाद भी लोग इस फिल्म को नहीं भूल पाए हैं। 'हंगामा' में परेश रावल, आफताब शिवदासानी, शक्ति कपूर, राजपाल यादव, अक्षय खन्ना और रिमी सेन जैसे सितारे थे। हाल ही में इस फिल्म का सीक्वल भी आया था, जिससे शिल्पा शेट्टी ने बिग स्क्रीन पर वापसी की थी। 'हंगामा' ओटीटी प्लेटफॉर्म 'डिज्नी+हॉटस्टार' पर उपलब्ध है।
साल 2006 में रिलीज हुई इस बॉलीवुड कॉमेडी ड्रामा फिल्म में उनके साथ रितेश देशमुख, ओमपुरी और कॉमेडी किंग कहे जाने वाले परेश रावल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म गांव में रहकर छोटे-मोटे काम करके गुजारा करने वाले लोगों की कहानी है, जिनके हाथ अचानक से लॉटरी लग जाती है। फिल्म में दिखाई गई कॉमेडी से ये सभी स्टार्स अपने दर्शकों को खूब हंसाते हैं। छोटे बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की थी और आज भी यह बेस्ट कॉमेडी फिल्मों में से एक गिनी जाती है। यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जा सकती है।
साल 2007 में आई 'वेलकम' में सुपरस्टार अक्षय कुमार ने राजीव का किरदार निभाया था। जो अपने प्यार संजना को पाने के लिए उसके गुंडे भाईयों के साथ एक खेल खेलता है और यही फिल्म को मजेदार बनाता है। फिल्म के हर एक किरदार ने जबरदस्त कॉमेडी की थी। हमेशा की तरह परेश रावल का तो कोई जवाब ही नहीं था। इस फिल्म में उनके अलावा नाना पाटेकर, परेश रावल और अनिल कपूर भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म 'नेटफ्लिक्स' पर स्ट्रीम की जा सकती है।
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बॉलीवुड में बहुत से जॉनर की फिल्में आए दिन रिलीज होती हैं। लेकिन कुछ जॉनर ऐसे होते हैं, जिन्हें दर्शक हमेशा देखना पसंद करते हैं। फिर चाहे वह हॉरर हो या कॉमेडी इन दोनों जॉनर के अपने दर्शक हैं। दर्शकों के बीच इनकी पॉपुलैरिटी को देखते हुए निर्माता इनकी खूब फिल्में बनाते हैं। बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों की भरमार है। इस साल भी कई कॉमेडी फिल्में रिलीज होने की कतार में हैं। आजकल बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बतौर कॉमेडी अभिनेता काम करने लगे हैं। यहां हम आपको बॉलीवुड की ऐसी जबरदस्त कॉमेडी फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें इस वीकेंड देखकर आपकी हंसी नहीं रोक पाएंगे। साल दो हज़ार छः में रिलीज हुई 'भागम भाग' एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है, जिसे देखने के बाद दर्शक आज भी लोटपोट हो जाते हैं। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गोविंदा, अक्षय कुमार और परेश रावल जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। ये तीनों पहली बार इस फिल्म में एक साथ स्क्रीन साझा करते हुए दिखाई दिए थे। इनके अलावा इस फिल्म में लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, अरबाज खान और राजपाल यादव भी थे। फिल्म की कॉमेडी दर्शकों द्वारा खूब पसंद की गई थी। यह फिल्म इस समय 'जी पाँच' और 'एमएक्स प्लेयर' पर स्ट्रीम की जा सकती है। साल दो हज़ार तीन में रिलीज हुई सुपरहिट कॉमेडी फिल्म 'हंगामा' आज भी लोगों को हंसाने के का काम बखूबी करती है। कई सुपरहिट कॉमेडी फिल्मों का निर्देशन कर चुके निर्देशक प्रियदर्शन ने ही इस फिल्म को बनाया था। रिलीज होने के इतने साल बाद भी लोग इस फिल्म को नहीं भूल पाए हैं। 'हंगामा' में परेश रावल, आफताब शिवदासानी, शक्ति कपूर, राजपाल यादव, अक्षय खन्ना और रिमी सेन जैसे सितारे थे। हाल ही में इस फिल्म का सीक्वल भी आया था, जिससे शिल्पा शेट्टी ने बिग स्क्रीन पर वापसी की थी। 'हंगामा' ओटीटी प्लेटफॉर्म 'डिज्नी+हॉटस्टार' पर उपलब्ध है। साल दो हज़ार छः में रिलीज हुई इस बॉलीवुड कॉमेडी ड्रामा फिल्म में उनके साथ रितेश देशमुख, ओमपुरी और कॉमेडी किंग कहे जाने वाले परेश रावल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म गांव में रहकर छोटे-मोटे काम करके गुजारा करने वाले लोगों की कहानी है, जिनके हाथ अचानक से लॉटरी लग जाती है। फिल्म में दिखाई गई कॉमेडी से ये सभी स्टार्स अपने दर्शकों को खूब हंसाते हैं। छोटे बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की थी और आज भी यह बेस्ट कॉमेडी फिल्मों में से एक गिनी जाती है। यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जा सकती है। साल दो हज़ार सात में आई 'वेलकम' में सुपरस्टार अक्षय कुमार ने राजीव का किरदार निभाया था। जो अपने प्यार संजना को पाने के लिए उसके गुंडे भाईयों के साथ एक खेल खेलता है और यही फिल्म को मजेदार बनाता है। फिल्म के हर एक किरदार ने जबरदस्त कॉमेडी की थी। हमेशा की तरह परेश रावल का तो कोई जवाब ही नहीं था। इस फिल्म में उनके अलावा नाना पाटेकर, परेश रावल और अनिल कपूर भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म 'नेटफ्लिक्स' पर स्ट्रीम की जा सकती है।
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भारत अब 'क्वाड' देशों और अन्य प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों के साथ अपने नौसैनिक अभ्यासों को लगातार बढ़ा रहा है। जिसके साथ ही अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन सैन्य सहयोग मजबूत करने और क्वाड-प्लस नेवी ड्रिल को सुनिश्चित करने के लिए एशिया के लिए अपना पहला दौरा शुरू किया।
नई दिल्लीः भारत अब 'क्वाड' देशों और अन्य प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों के साथ अपने नौसैनिक अभ्यासों को लगातार बढ़ा रहा है। जिसके साथ ही अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन सैन्य सहयोग मजबूत करने और क्वाड-प्लस नेवी ड्रिल को सुनिश्चित करने के लिए एशिया के लिए अपना पहला दौरा शुरू किया।
आपको बता दें कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत- इन चारों देशों के सत्ताशीर्ष की हुई वर्चुअल बैठक को दुनिया के राजनयिक हलकों में एक गंभीर परिघटना के रूप में दर्ज किया गया है। क्वाड नाम से मशहूर इस गठबंधन को चीन विरोधी के तौर पर माना जा रहा है। एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच के रूप में यह 2007 से कायम है लेकिन इसकी शिखर बैठक पहली बार ही आयोजित हुई है और यही क्वाड की वास्तविक प्राण प्रतिष्ठा है।
हवाई में यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड में बोलते हुए, ऑस्टिन ने कहा कि वह जापान, दक्षिण कोरिया और भारत की यात्रा कर रहे थे, ताकि चीन के खिलाफ "गठबंधन और विश्वासघात" को और भी मजबूत किया जा सके। इस बारे में एक अधिकारी ने कहा, कि 'भारत, फ्रांस के साथ वरुण अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण महत्व रखता है, जिसके प्रमुख सैन्य साझेदार और समुद्री खुफिया जानकारी साझा करना वर्षों से बढ़ाया गया है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और कुछ अन्य देश क्वाड देशों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने नवंबर में भारत-प्रशांत को चीन के सामने सुरक्षित रखने के लिए शीर्ष पायदान 'मालाबार' नौसेना अभ्यास का 24 संचालन किया था। भारत ने अन्य तीन क्वाड राष्ट्रों के साथ-साथ फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र और उसके बाहर भी अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए पारस्परिक सैन्य लॉजिस्टिक समझौता किया है।
दोस्तों देश दुनिया की और को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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भारत अब 'क्वाड' देशों और अन्य प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों के साथ अपने नौसैनिक अभ्यासों को लगातार बढ़ा रहा है। जिसके साथ ही अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन सैन्य सहयोग मजबूत करने और क्वाड-प्लस नेवी ड्रिल को सुनिश्चित करने के लिए एशिया के लिए अपना पहला दौरा शुरू किया। नई दिल्लीः भारत अब 'क्वाड' देशों और अन्य प्रमुख रणनीतिक सहयोगियों के साथ अपने नौसैनिक अभ्यासों को लगातार बढ़ा रहा है। जिसके साथ ही अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन सैन्य सहयोग मजबूत करने और क्वाड-प्लस नेवी ड्रिल को सुनिश्चित करने के लिए एशिया के लिए अपना पहला दौरा शुरू किया। आपको बता दें कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत- इन चारों देशों के सत्ताशीर्ष की हुई वर्चुअल बैठक को दुनिया के राजनयिक हलकों में एक गंभीर परिघटना के रूप में दर्ज किया गया है। क्वाड नाम से मशहूर इस गठबंधन को चीन विरोधी के तौर पर माना जा रहा है। एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच के रूप में यह दो हज़ार सात से कायम है लेकिन इसकी शिखर बैठक पहली बार ही आयोजित हुई है और यही क्वाड की वास्तविक प्राण प्रतिष्ठा है। हवाई में यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड में बोलते हुए, ऑस्टिन ने कहा कि वह जापान, दक्षिण कोरिया और भारत की यात्रा कर रहे थे, ताकि चीन के खिलाफ "गठबंधन और विश्वासघात" को और भी मजबूत किया जा सके। इस बारे में एक अधिकारी ने कहा, कि 'भारत, फ्रांस के साथ वरुण अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण महत्व रखता है, जिसके प्रमुख सैन्य साझेदार और समुद्री खुफिया जानकारी साझा करना वर्षों से बढ़ाया गया है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और कुछ अन्य देश क्वाड देशों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जिन्होंने नवंबर में भारत-प्रशांत को चीन के सामने सुरक्षित रखने के लिए शीर्ष पायदान 'मालाबार' नौसेना अभ्यास का चौबीस संचालन किया था। भारत ने अन्य तीन क्वाड राष्ट्रों के साथ-साथ फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र और उसके बाहर भी अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए पारस्परिक सैन्य लॉजिस्टिक समझौता किया है। दोस्तों देश दुनिया की और को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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जिला कांगड़ा में मंगलवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गये हैं। भूकंप के झटके कांगड़ा रिजन में 6 बजकर 25 मिनट पर महसूस किए गये हैं और रिक्टर स्केल में भूकंप की तीव्रता 3. 0 आंकी गई है। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर तो नहीं है। लेकिन, झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकलना शुरू हो गए थे।
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जिला कांगड़ा में मंगलवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गये हैं। भूकंप के झटके कांगड़ा रिजन में छः बजकर पच्चीस मिनट पर महसूस किए गये हैं और रिक्टर स्केल में भूकंप की तीव्रता तीन. शून्य आंकी गई है। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर तो नहीं है। लेकिन, झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकलना शुरू हो गए थे।
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MP में शिवराज से नाराज हुए ब्राह्मण मंत्री! छोड़ा मंच मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच रिश्तों में तल्खी चल रही है। इसकी बानगी एकबार फिर CM हाउस में हुए पिछड़ा वर्ग सम्मान समारोह में देखने को मिली है । कार्यक्रम में गृहमंत्री को बोलने का मौका नहीं मिला। वहीं कार्यक्रम के अंत में जब CM का भाषण खत्म हुआ, तो गृहमंत्री ने नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का हाथ पकड़ा और उन्हें CM के करीब कर चुपचाप जाने लगे। मंत्री रामखेलावन पटेल ने उन्हें रोका भी, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर वे मंच छोड़कर चले गए। जिस समय गृहमंत्री ने मंच छोड़ा, तब पिछड़ा वर्ग के अलग-अलग समाजों के अध्यक्ष CM शिवराज का सम्मान कर रहे थे। ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के बीच रिश्तों में तल्खी नजर आई हो। तीन महीने पहले भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में CM के कार्यक्रम में मंच पर कुर्सी नहीं होने से गृहमंत्री नाराज दिखे थे। तब वह मंच के सामने ही कुर्सी लगाकर बैठ गए थे। उन्हें मनाकर मंच पर लाया गया था। शादी में डांस करते-करते बुजुर्ग की मौत आलीराजपुर में एक बुजुर्ग की डांस करते-करते मौत हो गई। एक शादी समारोह में बुजुर्ग डांस कर रहे थे। अचानक वो जमीन पर गिर गए। लोगों को लगा धूप के कारण बेहोश हो गए हैं। बुजुर्ग को होश में लाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनमें कोई हलचल नहीं हुई। बुजुर्ग के डांस करते-करते जमीन पर गिरने का वीडियो भी सामने आया है। भोपाल के ऐशबाग में बनेगा ओवरब्रिज राजधानी भोपाल के ऐशबाग में 17. 37 करोड़ रुपए से फ्लाईओवर ब्रिज बनेगा। इसकी लंबाई 648 मीटर और चौड़ाई साढ़े 8 मीटर रहेगी। ब्रिज के लिए भूमिपूजन शनिवार शाम को होगा। इसके 18 महीने के भीतर ब्रिज बनकर तैयार होगा और हर रोज एक लाख लोगों को फायदा होगा।
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MP में शिवराज से नाराज हुए ब्राह्मण मंत्री! छोड़ा मंच मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच रिश्तों में तल्खी चल रही है। इसकी बानगी एकबार फिर CM हाउस में हुए पिछड़ा वर्ग सम्मान समारोह में देखने को मिली है । कार्यक्रम में गृहमंत्री को बोलने का मौका नहीं मिला। वहीं कार्यक्रम के अंत में जब CM का भाषण खत्म हुआ, तो गृहमंत्री ने नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का हाथ पकड़ा और उन्हें CM के करीब कर चुपचाप जाने लगे। मंत्री रामखेलावन पटेल ने उन्हें रोका भी, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर वे मंच छोड़कर चले गए। जिस समय गृहमंत्री ने मंच छोड़ा, तब पिछड़ा वर्ग के अलग-अलग समाजों के अध्यक्ष CM शिवराज का सम्मान कर रहे थे। ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के बीच रिश्तों में तल्खी नजर आई हो। तीन महीने पहले भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में CM के कार्यक्रम में मंच पर कुर्सी नहीं होने से गृहमंत्री नाराज दिखे थे। तब वह मंच के सामने ही कुर्सी लगाकर बैठ गए थे। उन्हें मनाकर मंच पर लाया गया था। शादी में डांस करते-करते बुजुर्ग की मौत आलीराजपुर में एक बुजुर्ग की डांस करते-करते मौत हो गई। एक शादी समारोह में बुजुर्ग डांस कर रहे थे। अचानक वो जमीन पर गिर गए। लोगों को लगा धूप के कारण बेहोश हो गए हैं। बुजुर्ग को होश में लाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनमें कोई हलचल नहीं हुई। बुजुर्ग के डांस करते-करते जमीन पर गिरने का वीडियो भी सामने आया है। भोपाल के ऐशबाग में बनेगा ओवरब्रिज राजधानी भोपाल के ऐशबाग में सत्रह. सैंतीस करोड़ रुपए से फ्लाईओवर ब्रिज बनेगा। इसकी लंबाई छः सौ अड़तालीस मीटर और चौड़ाई साढ़े आठ मीटर रहेगी। ब्रिज के लिए भूमिपूजन शनिवार शाम को होगा। इसके अट्ठारह महीने के भीतर ब्रिज बनकर तैयार होगा और हर रोज एक लाख लोगों को फायदा होगा।
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- 19 min ago भयंकर सैलाब के बीच मनाली में फंसा ये एक्टर? वीडियो वायरल होते ही कांप गए फैंस के दिल!
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Ahsaas channa:जीतू भैया की कोटा फैक्ट्री और हॅास्टल डेज की एक्ट्रेस अहसास चन्ना ने वेब की दुनिया में अपनी पहचान कायम कर ली है। अहसास के लिए फिल्मों का सफर नया नहीं है। वह बहुत छोटी सी उम्र से एक्शन सुनती आ रही हैं। साल 2005 में अहसास ने 5 साल की उम्र में सुष्मिता सेन की फिल्म वास्तु शास्त्र में काम किया। इसके बाद ओह माय फ्रेंड गणेशा और कभी अलविदा ना कहना में भी अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत चुकी हैं। वेब की दुनिया में इन दिनों अहसास अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कर चुकी हैं। सोनी लिव की सीरीज गर्ल्स हॉस्टल 3 में भी वह दिखाई देंगी। बचपन में फिल्मों में मिली लोकप्रियता से लेकर जवानी के संघर्ष पर अहसास चन्ना ने Filmibeat से खास बात की है।
अहसास बताती हैं कि जब भी मैं कोई प्रोजेक्ट चुनती हूं तो पहले कहानी और फिर किरदार पर फोकस रहता है। मेरा ध्यान इसी पर रहता है कि किरदार क्या है? मुझे ऐसा लगता है किरदार छोटा हो या बड़ा मायने नहीं रखता। अगर किरदार को स्क्रीन पर जगह कम मिल रही है, लेकिन कहानी के हिसाब से उनकी भूमिका बड़ी है। मैं लिए वह ज्यादा महत्व रखता है।
बचपन में काम करने का बाद मुझे जो फेम मिला, उससे कोई नुकसान नहीं हुआ। मैं लकी हूं कि कम उम्र से काम मिलता चला गया है। लोगों ने मुझे इतना पसंद किया। भिन्न किरदार निभाने का अवसर मिला। बतौर एक्टर मेरे लिए यह फायदा रहा है। कई चीजों का अनुभव मुझे उम्र के शुरुआत में ही करने को मिला है।
जो अनुभव रहा है उससे ऐसा नहीं है कि मुझे कभी ऑडिशन नहीं देना पड़ा। मैंने बड़े होकर अपने हर काम के लिए ऑडिशन और लुक टेस्ट दिया है। ठीक इसी तरह मेरे लिए गर्ल्स हॉस्टल 3 सीरीज रही है। हम ऐसी कहानी कह रहे हैं कि जो लड़कियों पर हैं। हम ज्यादा तर देख नहीं पाते हैं कि लड़कियों के होस्टल में क्या होता है? वह किन घटनाओं का सामना करती हैं। खुश हूं कि वेब के जरिए मुझे इस तरह के किरदार जीने का मौका मिल रहा है।
मुझे अधिक वेब सीरीज में काम इसलिए मिल रहा है क्योंकि मैंने पहले ऐसी सीरीज की हैं। जहां मेरा काम और किरदार पसंद आया। इसी हिसाब से मुझे सीरीज में काम मिलता जा रहा है। फिल्मों को लिए हर किसी को ऑडिशन देना पड़ता है। मेहनत करनी होती है। मैं काफी ऑडिशन दे रही हूं। उम्मीद है कि 2023 में मैं आपको किसी फिल्म में दिखाई दूं। फिल्मों की तुलना में वेब सीरीज ज्यादा बन रही हैं।
मैं बोल्ड सीन के साथ हर तरह के काम करने के लिए खुद को तैयार रखा है। मुझे करीना कपूर खान, आलिया भट्ट पसंद हैं। लेकिन मैं अपनी छवि और अपना नाम बनाना चाहती हूं। मैं हर किसी से प्रेरित हूं। हर किसी के सफर से प्रेरणा मिलती है। मैं अपनी खुद की पहचान बनाना चाहती हूं। मैं खुद को लकी मानती हूं कि बचपन में ही मैंने कई बड़े सेलेब्स लेजेंड के साथ काम कर लिया। अभी भी मैं उनके साथ काम करना चाहती हूं।
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- उन्नीस मिनट ago भयंकर सैलाब के बीच मनाली में फंसा ये एक्टर? वीडियो वायरल होते ही कांप गए फैंस के दिल! Don't Miss! Ahsaas channa:जीतू भैया की कोटा फैक्ट्री और हॅास्टल डेज की एक्ट्रेस अहसास चन्ना ने वेब की दुनिया में अपनी पहचान कायम कर ली है। अहसास के लिए फिल्मों का सफर नया नहीं है। वह बहुत छोटी सी उम्र से एक्शन सुनती आ रही हैं। साल दो हज़ार पाँच में अहसास ने पाँच साल की उम्र में सुष्मिता सेन की फिल्म वास्तु शास्त्र में काम किया। इसके बाद ओह माय फ्रेंड गणेशा और कभी अलविदा ना कहना में भी अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत चुकी हैं। वेब की दुनिया में इन दिनों अहसास अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कर चुकी हैं। सोनी लिव की सीरीज गर्ल्स हॉस्टल तीन में भी वह दिखाई देंगी। बचपन में फिल्मों में मिली लोकप्रियता से लेकर जवानी के संघर्ष पर अहसास चन्ना ने Filmibeat से खास बात की है। अहसास बताती हैं कि जब भी मैं कोई प्रोजेक्ट चुनती हूं तो पहले कहानी और फिर किरदार पर फोकस रहता है। मेरा ध्यान इसी पर रहता है कि किरदार क्या है? मुझे ऐसा लगता है किरदार छोटा हो या बड़ा मायने नहीं रखता। अगर किरदार को स्क्रीन पर जगह कम मिल रही है, लेकिन कहानी के हिसाब से उनकी भूमिका बड़ी है। मैं लिए वह ज्यादा महत्व रखता है। बचपन में काम करने का बाद मुझे जो फेम मिला, उससे कोई नुकसान नहीं हुआ। मैं लकी हूं कि कम उम्र से काम मिलता चला गया है। लोगों ने मुझे इतना पसंद किया। भिन्न किरदार निभाने का अवसर मिला। बतौर एक्टर मेरे लिए यह फायदा रहा है। कई चीजों का अनुभव मुझे उम्र के शुरुआत में ही करने को मिला है। जो अनुभव रहा है उससे ऐसा नहीं है कि मुझे कभी ऑडिशन नहीं देना पड़ा। मैंने बड़े होकर अपने हर काम के लिए ऑडिशन और लुक टेस्ट दिया है। ठीक इसी तरह मेरे लिए गर्ल्स हॉस्टल तीन सीरीज रही है। हम ऐसी कहानी कह रहे हैं कि जो लड़कियों पर हैं। हम ज्यादा तर देख नहीं पाते हैं कि लड़कियों के होस्टल में क्या होता है? वह किन घटनाओं का सामना करती हैं। खुश हूं कि वेब के जरिए मुझे इस तरह के किरदार जीने का मौका मिल रहा है। मुझे अधिक वेब सीरीज में काम इसलिए मिल रहा है क्योंकि मैंने पहले ऐसी सीरीज की हैं। जहां मेरा काम और किरदार पसंद आया। इसी हिसाब से मुझे सीरीज में काम मिलता जा रहा है। फिल्मों को लिए हर किसी को ऑडिशन देना पड़ता है। मेहनत करनी होती है। मैं काफी ऑडिशन दे रही हूं। उम्मीद है कि दो हज़ार तेईस में मैं आपको किसी फिल्म में दिखाई दूं। फिल्मों की तुलना में वेब सीरीज ज्यादा बन रही हैं। मैं बोल्ड सीन के साथ हर तरह के काम करने के लिए खुद को तैयार रखा है। मुझे करीना कपूर खान, आलिया भट्ट पसंद हैं। लेकिन मैं अपनी छवि और अपना नाम बनाना चाहती हूं। मैं हर किसी से प्रेरित हूं। हर किसी के सफर से प्रेरणा मिलती है। मैं अपनी खुद की पहचान बनाना चाहती हूं। मैं खुद को लकी मानती हूं कि बचपन में ही मैंने कई बड़े सेलेब्स लेजेंड के साथ काम कर लिया। अभी भी मैं उनके साथ काम करना चाहती हूं।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने घोषणा की कि ग्राहक लेनदेन के लिए आरियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) का उपयोग करने के लिए समय-खिड़की को सभी कार्य दिवसों में शाम 4:30 बजे से शाम 6 बजे तक बढ़ाया जाएगा। यह 1 जून, 2019 से प्रभावी होगा। ग्राहक लेनदेन के लिए वर्तमान RTGS सेवा विंडो सुबह 8 बजे से शाम 4. 30 बजे तक बैंकों के लिए उपलब्ध है। एक कार्य दिवस पर। लेन-देन अब तीन विंडो के तहत होगाःसुबह 1. 8 से 11 बजे तकदोपहर 2. 11 से 1 बजेदोपहर 3. 1 से शाम 6 बजे तकलेनदेन के लिए शुल्कःसुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 11 बजे से 1 बजे के बीच किए गए प्रत्येक लेनदेन पर 2 रुपए का शुल्क लगाया जाएगा। 1pm और 6pm के बीच प्रत्येक लेनदेन के लिए 5 रुपए शुल्क लिया जाएगा। कारणःमार्च 2019 में लेन-देन की संख्या में 8% से 1,335 करोड़ रुपये की मजबूत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के बाद निर्णय लिया गया है। लेनदेन की कुल राशि 12% वर्ष-दर-वर्ष बढ़कर 1,255. 51 करोड़ रुपये हो गई। अप्रैल के महीने में, बैंकों और ग्राहकों ने संयुक्त रूप से 112 लाख करोड़ रुपये के 1. 14 करोड़ लेनदेन के लिए RTGS का उपयोग किया। वास्तविक समय सकल निपटान प्रणाली (RTGS):
आरटीजीएस धन हस्तांतरण का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है जहां संचरण वास्तविक समय के आधार पर होता है। आरटीजीएस को केंद्रीय बैंक द्वारा उच्च मूल्य के अंतरबैंक लेनदेन के लिए अनिवार्य भुगतान विधि माना जाता है।
आरटीजीएस प्रणाली मुख्य रूप से बड़े मूल्य के लेनदेन के लिए है। आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषित की जाने वाली न्यूनतम राशि 2 लाख रुपये है जिसमें कोई ऊपरी या अधिकतम छत नहीं है।
लाभार्थी खाता वास्तविक समय के आधार पर हस्तांतरित धन प्राप्त करता है। इंटरनेट बैंकिंग खातों वाले ग्राहक अपने दम पर आरटीजीएस लेनदेन कर सकते हैं।
आरटीजीएस धन हस्तांतरण का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है जहां संचरण वास्तविक समय के आधार पर होता है। आरटीजीएस को केंद्रीय बैंक द्वारा उच्च मूल्य के अंतरबैंक लेनदेन के लिए अनिवार्य भुगतान विधि माना जाता है।
आरटीजीएस प्रणाली मुख्य रूप से बड़े मूल्य के लेनदेन के लिए है। आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषित की जाने वाली न्यूनतम राशि 2 लाख रुपये है जिसमें कोई ऊपरी या अधिकतम छत नहीं है।
लाभार्थी खाता वास्तविक समय के आधार पर हस्तांतरित धन प्राप्त करता है। इंटरनेट बैंकिंग खातों वाले ग्राहक अपने दम पर आरटीजीएस लेनदेन कर सकते हैं।
भारतीय फ़ुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री को विश्व के 28 खिलाड़ियों में से एक चुना गया है, जिन्होंने COVID-19 महामारी से निपटने के लिए फीफा/FIFA के अभियान को संचालित किया है। उन्हें लियोनेल मेसी, फिलिप लाहम, इकर कैसिलास और कार्ल्स पुयोल के साथ चुना गया है।
मुख्य विशेषताएंः
मुख्य विशेषताएंः
भारत सरकार को अगले तीन महीनों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत 2 किलोग्राम अतिरिक्त खाद्यान्न की आपूर्ति करनी है। प्रति व्यक्ति कुल 7 किलोग्राम का कोटा दिया जाएगा। उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को घोषणा की गई थी।
मुख्य विशेषताएंः
मुख्य विशेषताएंः
विमानन कंसल्टेंसी कैपा इंडिया ने बताया कि भारत के विमानन उद्योग को जून तिमाही में 3-3. 6 बिलियन डॉलर का घाटा होने की उम्मीद है, जिसका शीर्षक 'भारतीय विमानन पर COVID-19 के संभावित वित्तीय प्रभाव का अनुमान' है।
नुकसान इसलिए है क्योंकि COVID-19 महामारी के कारण यात्रा प्रतिबंधों की श्रृंखला के बाद एयरलाइंस को भारी समस्या का सामना करना पड़ा है।
नुकसान इसलिए है क्योंकि COVID-19 महामारी के कारण यात्रा प्रतिबंधों की श्रृंखला के बाद एयरलाइंस को भारी समस्या का सामना करना पड़ा है।
उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने देश भर में लगाए गए 21 दिन के बंद के दौरान पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम कोरोनोवायरस प्रकोप के मद्देनजर आता है। इसकी जानकारी खाद्य सुरक्षा आयुक्त मिनिस्ती एस ने दी।
पान मसाला पर प्रतिबंधः
पान मसाला पर प्रतिबंधः
समीर अग्रवाल को वॉलमार्ट इंडिया का सीईओ नियुक्त किया गया है। अग्रवाल की नियुक्ति 1 अप्रैल से लागू होगी। वह डर्क वान डेन बर्घे, कार्यकारी उपाध्यक्ष और एशिया और ग्लोबल सोर्सिंग, वॉलमार्ट के क्षेत्रीय सीईओ को रिपोर्ट करेंगे।
अघरकर अनुसंधान संस्थान (ARI) वैज्ञानिकों ने बायोफोर्टिफाइड ड्यूरम गेहूं की किस्म MACS 4028 विकसित की है। नई गेहूं किस्म में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।
नई गेहूं किस्म एमएसीएस/MACS 4028:
नई गेहूं किस्म एमएसीएस/MACS 4028:
उद्देश्यः
उद्देश्यः
रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे पर यात्री ट्रेन सेवाओं को रद्द करने की अवधि बढ़ा दी है। यह कदम COVID-19 के मद्देनजर किए गए उपाय को जारी रखने के लिए है। प्रीमियम रेलगाड़ियों, यात्री ट्रेनों, उपनगरीय ट्रेनों और मेट्रो रेलवे, कोलकाता की ट्रेनों सहित सभी मेल / एक्सप्रेस ट्रेनों को 14 अप्रैल 2020 तक रद्द कर दिया गया है।
कोरोनावायरस का समुदाय प्रसार को रोकने के लिए भारत सरकार CoWin-20 शुरू करने जा रही है । CoWin-20 एक नया स्मार्टफोन ऐप है जिसका उद्देश्य व्यक्तियों को उनके स्मार्टफोन स्थानों द्वारा ट्रैक करना है। ऐप जल्द ही बनाया जाएगा और पूरे भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध होगा।
CoWin-20:
CoWin-20:
COVID-19 महामारी के प्रकोप के कारण भारत सरकार द्वारा दो चरणों में आयोजित की जाने वाली जनगणना 2021 को स्थगित कर दिया था।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर/NPR) का अपडेशन असम को छोड़कर सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना 2021 के चरण I के साथ किया जाएगा।
जनगणना भारत 2021:
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर/NPR) का अपडेशन असम को छोड़कर सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना 2021 के चरण I के साथ किया जाएगा।
जनगणना भारत 2021:
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखने की मंजूरी दी।
मुख्य विशेषताएंः
मुख्य विशेषताएंः
चीन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक व्यक्ति की मौत हंटावायरस से हुई। वह चीन के युन्नान प्रांत से था। उसकी मृत्यु शैंडोंग प्रांत जाने वाली बस में हुई। उसके साथ यात्रा करने वाले लोगों का परीक्षण किया गया है।
हंटावायरस :
हंटावायरस :
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भारतीय रिजर्व बैंक ने घोषणा की कि ग्राहक लेनदेन के लिए आरियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम का उपयोग करने के लिए समय-खिड़की को सभी कार्य दिवसों में शाम चार:तीस बजे से शाम छः बजे तक बढ़ाया जाएगा। यह एक जून, दो हज़ार उन्नीस से प्रभावी होगा। ग्राहक लेनदेन के लिए वर्तमान RTGS सेवा विंडो सुबह आठ बजे से शाम चार. तीस बजे तक बैंकों के लिए उपलब्ध है। एक कार्य दिवस पर। लेन-देन अब तीन विंडो के तहत होगाःसुबह एक. आठ से ग्यारह बजे तकदोपहर दो. ग्यारह से एक बजेदोपहर तीन. एक से शाम छः बजे तकलेनदेन के लिए शुल्कःसुबह आठ बजे से ग्यारह बजे के बीच लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्यारह बजे से एक बजे के बीच किए गए प्रत्येक लेनदेन पर दो रुपयापए का शुल्क लगाया जाएगा। एकpm और छःpm के बीच प्रत्येक लेनदेन के लिए पाँच रुपयापए शुल्क लिया जाएगा। कारणःमार्च दो हज़ार उन्नीस में लेन-देन की संख्या में आठ% से एक,तीन सौ पैंतीस करोड़ रुपये की मजबूत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के बाद निर्णय लिया गया है। लेनदेन की कुल राशि बारह% वर्ष-दर-वर्ष बढ़कर एक,दो सौ पचपन. इक्यावन करोड़ रुपये हो गई। अप्रैल के महीने में, बैंकों और ग्राहकों ने संयुक्त रूप से एक सौ बारह लाख करोड़ रुपये के एक. चौदह करोड़ लेनदेन के लिए RTGS का उपयोग किया। वास्तविक समय सकल निपटान प्रणाली : आरटीजीएस धन हस्तांतरण का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है जहां संचरण वास्तविक समय के आधार पर होता है। आरटीजीएस को केंद्रीय बैंक द्वारा उच्च मूल्य के अंतरबैंक लेनदेन के लिए अनिवार्य भुगतान विधि माना जाता है। आरटीजीएस प्रणाली मुख्य रूप से बड़े मूल्य के लेनदेन के लिए है। आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषित की जाने वाली न्यूनतम राशि दो लाख रुपये है जिसमें कोई ऊपरी या अधिकतम छत नहीं है। लाभार्थी खाता वास्तविक समय के आधार पर हस्तांतरित धन प्राप्त करता है। इंटरनेट बैंकिंग खातों वाले ग्राहक अपने दम पर आरटीजीएस लेनदेन कर सकते हैं। आरटीजीएस धन हस्तांतरण का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है जहां संचरण वास्तविक समय के आधार पर होता है। आरटीजीएस को केंद्रीय बैंक द्वारा उच्च मूल्य के अंतरबैंक लेनदेन के लिए अनिवार्य भुगतान विधि माना जाता है। आरटीजीएस प्रणाली मुख्य रूप से बड़े मूल्य के लेनदेन के लिए है। आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषित की जाने वाली न्यूनतम राशि दो लाख रुपये है जिसमें कोई ऊपरी या अधिकतम छत नहीं है। लाभार्थी खाता वास्तविक समय के आधार पर हस्तांतरित धन प्राप्त करता है। इंटरनेट बैंकिंग खातों वाले ग्राहक अपने दम पर आरटीजीएस लेनदेन कर सकते हैं। भारतीय फ़ुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री को विश्व के अट्ठाईस खिलाड़ियों में से एक चुना गया है, जिन्होंने COVID-उन्नीस महामारी से निपटने के लिए फीफा/FIFA के अभियान को संचालित किया है। उन्हें लियोनेल मेसी, फिलिप लाहम, इकर कैसिलास और कार्ल्स पुयोल के साथ चुना गया है। मुख्य विशेषताएंः मुख्य विशेषताएंः भारत सरकार को अगले तीन महीनों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दो किलोग्रामग्राम अतिरिक्त खाद्यान्न की आपूर्ति करनी है। प्रति व्यक्ति कुल सात किलोग्रामग्राम का कोटा दिया जाएगा। उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा छब्बीस मार्च को घोषणा की गई थी। मुख्य विशेषताएंः मुख्य विशेषताएंः विमानन कंसल्टेंसी कैपा इंडिया ने बताया कि भारत के विमानन उद्योग को जून तिमाही में तीन-तीन. छः बिलियन डॉलर का घाटा होने की उम्मीद है, जिसका शीर्षक 'भारतीय विमानन पर COVID-उन्नीस के संभावित वित्तीय प्रभाव का अनुमान' है। नुकसान इसलिए है क्योंकि COVID-उन्नीस महामारी के कारण यात्रा प्रतिबंधों की श्रृंखला के बाद एयरलाइंस को भारी समस्या का सामना करना पड़ा है। नुकसान इसलिए है क्योंकि COVID-उन्नीस महामारी के कारण यात्रा प्रतिबंधों की श्रृंखला के बाद एयरलाइंस को भारी समस्या का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने देश भर में लगाए गए इक्कीस दिन के बंद के दौरान पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम कोरोनोवायरस प्रकोप के मद्देनजर आता है। इसकी जानकारी खाद्य सुरक्षा आयुक्त मिनिस्ती एस ने दी। पान मसाला पर प्रतिबंधः पान मसाला पर प्रतिबंधः समीर अग्रवाल को वॉलमार्ट इंडिया का सीईओ नियुक्त किया गया है। अग्रवाल की नियुक्ति एक अप्रैल से लागू होगी। वह डर्क वान डेन बर्घे, कार्यकारी उपाध्यक्ष और एशिया और ग्लोबल सोर्सिंग, वॉलमार्ट के क्षेत्रीय सीईओ को रिपोर्ट करेंगे। अघरकर अनुसंधान संस्थान वैज्ञानिकों ने बायोफोर्टिफाइड ड्यूरम गेहूं की किस्म MACS चार हज़ार अट्ठाईस विकसित की है। नई गेहूं किस्म में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। नई गेहूं किस्म एमएसीएस/MACS चार हज़ार अट्ठाईस: नई गेहूं किस्म एमएसीएस/MACS चार हज़ार अट्ठाईस: उद्देश्यः उद्देश्यः रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे पर यात्री ट्रेन सेवाओं को रद्द करने की अवधि बढ़ा दी है। यह कदम COVID-उन्नीस के मद्देनजर किए गए उपाय को जारी रखने के लिए है। प्रीमियम रेलगाड़ियों, यात्री ट्रेनों, उपनगरीय ट्रेनों और मेट्रो रेलवे, कोलकाता की ट्रेनों सहित सभी मेल / एक्सप्रेस ट्रेनों को चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस तक रद्द कर दिया गया है। कोरोनावायरस का समुदाय प्रसार को रोकने के लिए भारत सरकार CoWin-बीस शुरू करने जा रही है । CoWin-बीस एक नया स्मार्टफोन ऐप है जिसका उद्देश्य व्यक्तियों को उनके स्मार्टफोन स्थानों द्वारा ट्रैक करना है। ऐप जल्द ही बनाया जाएगा और पूरे भारत में व्यापक रूप से उपलब्ध होगा। CoWin-बीस: CoWin-बीस: COVID-उन्नीस महामारी के प्रकोप के कारण भारत सरकार द्वारा दो चरणों में आयोजित की जाने वाली जनगणना दो हज़ार इक्कीस को स्थगित कर दिया था। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का अपडेशन असम को छोड़कर सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना दो हज़ार इक्कीस के चरण I के साथ किया जाएगा। जनगणना भारत दो हज़ार इक्कीस: राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का अपडेशन असम को छोड़कर सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना दो हज़ार इक्कीस के चरण I के साथ किया जाएगा। जनगणना भारत दो हज़ार इक्कीस: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखने की मंजूरी दी। मुख्य विशेषताएंः मुख्य विशेषताएंः चीन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक व्यक्ति की मौत हंटावायरस से हुई। वह चीन के युन्नान प्रांत से था। उसकी मृत्यु शैंडोंग प्रांत जाने वाली बस में हुई। उसके साथ यात्रा करने वाले लोगों का परीक्षण किया गया है। हंटावायरस : हंटावायरस :
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इंफाल से चुराचांदपुर जिले के एनएच-02 पर मंगलवार को चोरी की महिंद्रा बोलेरो पर यात्रा करते समय दो वाहन लिफ्टरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
अधिकारी ने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर कि कुछ अज्ञात लोगों ने किनौ बाजार से एक मालिक से संबंधित बोलेरो वाहन उठा लिया है। बिष्णुपुर पुलिस और नंबोल पुलिस स्टेशन की एक संयुक्त टीम ने अभियान शुरू किया।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक, बिष्णुपुर जिला एम हेरोजीत की निगरानी में अभियान ने एनएच 02 पर तलाशी और चेकिंग शुरू की और मंगलवार सुबह लगभग 4 बजे नियमित जांच चौकी-बिष्णुपुर पर एक महिंद्रा बोलेरो को रोका।
अधिकारी ने कहा कि दोनों से अलग-अलग प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस ने पुष्टि की कि काले रंग का वाहन इम्फाल पश्चिम जिले के सगोलबंद के एक इलाके से चुराया गया था।
अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तारी और वाहन को जब्त कर लिया गया जब वे इम्फाल से चुराचंदपुर जिला मुख्यालय की ओर बोलेरो से जा रहे थे।
अधिकारी ने खुलासा किया कि उनकी गिरफ्तारी के साथ एक और सफेद रंग की कार भी उनसे आगे की पूछताछ में बरामद करने में कामयाब रही।
उनके कब्जे से आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड और दो मोबाइल हैंडसेट सहित कई अंधाधुंध दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
अधिकारी ने कहा, गिरफ्तार किए गए वाहन लिफ्टरों की पहचान बाद में चुराचांदपुर जिले के न्यू बोलजांग गांव निवासी 37 वर्षीय लिंकहोमांग हाओकिप और मणिपुर के सेनापति जिले के खमेलोक गांव के 34 वर्षीय के सैथलीन के रूप में हुई। कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस स्टेशन।
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इंफाल से चुराचांदपुर जिले के एनएच-दो पर मंगलवार को चोरी की महिंद्रा बोलेरो पर यात्रा करते समय दो वाहन लिफ्टरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर कि कुछ अज्ञात लोगों ने किनौ बाजार से एक मालिक से संबंधित बोलेरो वाहन उठा लिया है। बिष्णुपुर पुलिस और नंबोल पुलिस स्टेशन की एक संयुक्त टीम ने अभियान शुरू किया। अधिकारी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक, बिष्णुपुर जिला एम हेरोजीत की निगरानी में अभियान ने एनएच दो पर तलाशी और चेकिंग शुरू की और मंगलवार सुबह लगभग चार बजे नियमित जांच चौकी-बिष्णुपुर पर एक महिंद्रा बोलेरो को रोका। अधिकारी ने कहा कि दोनों से अलग-अलग प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस ने पुष्टि की कि काले रंग का वाहन इम्फाल पश्चिम जिले के सगोलबंद के एक इलाके से चुराया गया था। अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तारी और वाहन को जब्त कर लिया गया जब वे इम्फाल से चुराचंदपुर जिला मुख्यालय की ओर बोलेरो से जा रहे थे। अधिकारी ने खुलासा किया कि उनकी गिरफ्तारी के साथ एक और सफेद रंग की कार भी उनसे आगे की पूछताछ में बरामद करने में कामयाब रही। उनके कब्जे से आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड और दो मोबाइल हैंडसेट सहित कई अंधाधुंध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अधिकारी ने कहा, गिरफ्तार किए गए वाहन लिफ्टरों की पहचान बाद में चुराचांदपुर जिले के न्यू बोलजांग गांव निवासी सैंतीस वर्षीय लिंकहोमांग हाओकिप और मणिपुर के सेनापति जिले के खमेलोक गांव के चौंतीस वर्षीय के सैथलीन के रूप में हुई। कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस स्टेशन।
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चिरंजी लाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन डगरोली में समाज को सेवा के माध्यम से स्वस्थ और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभालते हुए चिरंजीलाल कॉलेज आफ एजूकेशन डगरोली हसनपुर के स्वयंसेवियों ने तृतीय एक दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत जोश खरोश के साथ प्रतिभाग किया।
जिसका उद्घाटन समाजसेवी एवं शिक्षाविद् रमेश चंद्र ने किया। उन्होंने कॉलेज के नियमित एवं अथक प्रयासों के लिए प्रशंसा करते हुए कहा कि खादर क्षेत्र में शिक्षा एवं समाज सेवा के माध्यम से अभूतपूर्व विकास किया है। हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने की अहम भूमिका निभाई है। स्वयंसेवियों से आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लक्ष्य बनाकर उत्तम भविष्य के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नैतिक मूल्यों के अनुपालन पर जोर दिया।
विद्यार्थी जीवन सुनहरा समय होता है। मुख्यातिथि के बतौर कॉलेज प्रबंधिका अनुभा अग्रवाल ने ग्राम पंचायत एवं कॉलेज परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता अभियान के महत्व को समझाया। रैली के माध्यम से छात्राओं ने ग्रामीणों को अपने आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया । कार्यक्रम अधिकारी फरहा के नेतृत्व में डगरोली में जागरूकता रैली निकाली गई। जागरूकता रैली में बड़ी संख्या में छात्राएं बैनर लेकर चल रही थी । इस अवसर पर राजकुमार ,श्वेता गुप्ता ,सलोनी अग्रवाल ,शीतल, अनीता, सचिन, अमित कुमार, सरिता,अंजली आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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चिरंजी लाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन डगरोली में समाज को सेवा के माध्यम से स्वस्थ और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभालते हुए चिरंजीलाल कॉलेज आफ एजूकेशन डगरोली हसनपुर के स्वयंसेवियों ने तृतीय एक दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत जोश खरोश के साथ प्रतिभाग किया। जिसका उद्घाटन समाजसेवी एवं शिक्षाविद् रमेश चंद्र ने किया। उन्होंने कॉलेज के नियमित एवं अथक प्रयासों के लिए प्रशंसा करते हुए कहा कि खादर क्षेत्र में शिक्षा एवं समाज सेवा के माध्यम से अभूतपूर्व विकास किया है। हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने की अहम भूमिका निभाई है। स्वयंसेवियों से आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लक्ष्य बनाकर उत्तम भविष्य के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नैतिक मूल्यों के अनुपालन पर जोर दिया। विद्यार्थी जीवन सुनहरा समय होता है। मुख्यातिथि के बतौर कॉलेज प्रबंधिका अनुभा अग्रवाल ने ग्राम पंचायत एवं कॉलेज परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता अभियान के महत्व को समझाया। रैली के माध्यम से छात्राओं ने ग्रामीणों को अपने आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया । कार्यक्रम अधिकारी फरहा के नेतृत्व में डगरोली में जागरूकता रैली निकाली गई। जागरूकता रैली में बड़ी संख्या में छात्राएं बैनर लेकर चल रही थी । इस अवसर पर राजकुमार ,श्वेता गुप्ता ,सलोनी अग्रवाल ,शीतल, अनीता, सचिन, अमित कुमार, सरिता,अंजली आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पालन न करने से हमें दण्डित होना पडेगा। इस दण्ड के भय से भगवान की उपासना अत्यन्त नीच श्रेणी की उपासना कहो गई है। ऐसी उपासना का नाम यदि उपासना रखते हैं तो भो यह प्रेम की अत्यन्त अपरिणित अवस्था मात्र है। जब तक हृदय में किसी प्रकार का भय रहता है, तब तक उसमें प्रेम के रहने की सम्भावना कहाँ ? प्रेम स्वभावत सारे भय का नाश करके फेंकता है।
मान लो कि एक तरुणी जननी रास्ते पर जा रही है। एक इता उस पर भूक्ने लगता है और यह निकटवर्ती घर में घुस जाती है। किन्तु यदि उसका वथा उसके साथ हो और एक सिंह भी उस बच्चे पर मपढे, तो क्या माँ कहीं भागने अथवा छिपने का प्रयत्न करेगी ? अवश्य हो वह उस समय सिंह के मुँह में समा जायगी। धस्तु, प्रेम वास्तव में सारे भय का नाश कर देता है। 'जगत फा सम्पर्क नष्ट हो जाता है। इस प्रकार के स्वार्थपर भावों से भय उत्पन्न होता है। हम अपने को जितना क्षुद्र और स्वार्थी मनायेंगे, उतना ही हमने भय अधिक बढ़ जायगा । यदि कोई विचारता है कि मैं कुछ नहीं हूँ? तो उसे निश्चय ही भय प्रतीत न होगा। और तुम अपने को जितना कम क्षुद्र समझोगे, उतना ही कम तुम्हारा भय होता जायगा। जन तक तुम में एक बूँद भी सय का रहेगा तब तक तुम वास्तविक प्रेम नहीं कर सकते { प्रेम और भय यह दोनों विपरीत भावापन है। जो भगवान को प्रेम करते हैं, वे उससे कमी नहीं डरते। प्रकृत भगयत् प्रेमी,
"भगवान का नाम व्यर्थ मत ले ।" यह सुनकर हँसने लगते हैं। प्रेम धर्म में भगवान् को निन्दा का स्थान कहाँ ? चाहे जिस प्रकार तुम प्रभु का नाम जितना हो ले सकते हो, उतना ही तुम्हारा मगल होगा। तुम उसे प्रेम करते हो तभी तो तुम उसका नाम लेते हो।
प्रेम रूपी निकोण का तीसरा कोना यह है कि प्रेमिक के कोई ढो प्रिय नहीं हो सकते, क्योंकि यही तो प्रेमिकों का सर्वोक आदर्श होता है। जन तक हमारा प्रेम का पान ही हमारा सर्वोच्च आदर्श नहीं हो जाता, तय तक प्रकृत प्रेम नहीं उत्पन्न होता । हो सकता है कि अनेकों स्थलों में मनुष्य का प्रेम खरानी की ओर प्रयुक्त किया गया हो, किन्तु प्रेमिक के लिए उसकी प्रिय वस्तु ही उसका सर्वोय आदर्श होता है। कोई मनुष्य किसी कुत्सित व्यक्ति में ही अपना यह उथ आदर्श पाते हैं और कोई कोई भले व्यक्ति मे, परन्तु सर्वन ही केवल आदर्श हो के प्रति प्रकृत प्रगाढ प्रेम होता है। प्रत्येक व्यक्ति के उच्चतम आदर्श के के हो उसका ईश्वर कहते हैं । अज्ञानी हो या ज्ञानी, साधु हो अथव पापी, नर हो या नारी, शिक्षित हो अथवा आशिक्षित, स मनुष्यों का उघतम आदर्श ही ईश्वर है। सारे सौंदर्य, महत्त्व और शक्ति के उच्चतम आदर्श समूह की समष्टि करने से प्र भय और प्रियतम भगवान का पूर्ण भाव पाया जाता है। ये आदर्श प्रत्येक व्यक्ति के हृदय मे स्वभावत किसी न किसी रूप में वर्तमान रहते हैं।
यही आदर्श हमारे मन के अग अथवा अश विशेष है। मनुष्य प्रकृति मे जो सारी क्रियाओं का विकास पाया जाता Py वह सव आदर्शों को व्यवहारिक जीवन आचरण में परिणित करने की चेष्टा स्परूप है। हम अपने चारों ओर जो समाज में नाना प्रकार के व्यापार तथा आन्दोलन देखते हैं, वे सब भिन्न-भिन्न आत्माओं के विभिन्न आदर्शों को कार्यरूप में परिणित करने की चेष्टा के फल है। जो भीतर है, वही बाहर निकलने की चेष्टा करेगा। मनुष्य के हृदय में आदर्श का यह चिर-प्रवल प्रभाव ही वही एकमान सर्वनियन्त्री महाशक्ति है, जिसकी क्रिया मानव जाति में नियत रूप से वर्तमान रहती है। हो सकता है कि सौजन्म, हज्जारों वर्षों की चेष्टा के बाद मनुष्य ममके कि हमारे अन्तरथिस्त आदर्श वार कथाओं से सम्पूर्णतया सहमत नहीं हो सकते, और यह समझकर वह वहिजगत को अपने आदर्श के अनुसार बनाने की चेष्टा का परित्याग करदे और अपने आदर्श को उमी उपतम प्रेमभूमि से अपने आदर्श के रूप में उपासना करे। सन छोटे छोटे आदर्श इसी पूर्ण आदर्श के अन्तर्गत हैं। कहा जाता है और सबलोग इस कथन की सत्यता को स्वीकार करते हैं कि "यार सग हे यार मजेमन, वह है माझरण या है होम ।" और लोग कहेंगे कि यहाँ तो प्रेम को पात्र को दे डाला है, परन्तु जो प्रेमिक है, वह ब्राह्मण अथवा डोम नहीं देखते, वे तो उन्हें राजा-रानी समते हें। चाहे वह ब्राह्मण अथवा डोम शे, घाडे राजारानी हो । प्रकृत पक्ष में हमारे प्रेम के आधार१०८
"भगवान का नाम व्यर्थ मत ले ।" यह सुनकर हँसने लगते हैं। प्रेम धर्म में भगवान् को निन्दा का स्थान कहाँ ? चाहे जिस प्रकार तुम प्रभु का नाम जितना हो ले सकते हो, उतना ही तुम्हारा भगल होगा। तुम उसे प्रेम करते हो तभी तो तुम उसका नाम लेते हो ।
प्रेम रूपी त्रिकोण का तीसरा कोना यह है कि प्रेमिक के कोई दो प्रिय नहीं हो सकते, क्योंकि यही तो प्रेमिकों का सर्वोक आदर्श होता है । जन तक हमारा प्रेम का पान ही हमारा सर्वोच्च आदर्श नहीं हो जाता, तब तक प्रकृत प्रेम नहीं उत्पन्न होता ! हो सकता है कि अनेकों स्थलों में मनुष्य का प्रेम खराबी की ओर प्रयुक्त किया गया हो, किन्तु प्रेमिक के लिए उसकी प्रिय वस्तु ही उसका सर्वोच्च आदर्श होता है । कोई मनुष्य किसी कुत्सित व्यक्ति में ही अपना यह उच्च आदर्श पाते हैं और कोई कोई भले व्यक्ति में, परन्तु सर्वन ही फेवल आदर्श हो के प्रति प्रकृत प्रगाढ़ प्रेम होता है। प्रत्येक व्यक्ति के उच्चतम आदर्श को ही उसका ईश्वर कहते हैं । अज्ञानी हो या ज्ञानी, साधु हो अथ पापी, नर हो या नारी, शिक्षित हो अथवा आशिक्षित, स मनुष्यों का उच्चतम आदर्श ही ईश्वर है। सारे सौंदर्य, महत् और शक्ति के उच्चतम आदर्श समूह को समष्टि करने से भय और प्रियतम भगवान का पूर्ण भाव पाया जाता है। आदर्श प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में स्वभावत किसी-न-किसी रू में वर्तमान रहते हैं।
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पालन न करने से हमें दण्डित होना पडेगा। इस दण्ड के भय से भगवान की उपासना अत्यन्त नीच श्रेणी की उपासना कहो गई है। ऐसी उपासना का नाम यदि उपासना रखते हैं तो भो यह प्रेम की अत्यन्त अपरिणित अवस्था मात्र है। जब तक हृदय में किसी प्रकार का भय रहता है, तब तक उसमें प्रेम के रहने की सम्भावना कहाँ ? प्रेम स्वभावत सारे भय का नाश करके फेंकता है। मान लो कि एक तरुणी जननी रास्ते पर जा रही है। एक इता उस पर भूक्ने लगता है और यह निकटवर्ती घर में घुस जाती है। किन्तु यदि उसका वथा उसके साथ हो और एक सिंह भी उस बच्चे पर मपढे, तो क्या माँ कहीं भागने अथवा छिपने का प्रयत्न करेगी ? अवश्य हो वह उस समय सिंह के मुँह में समा जायगी। धस्तु, प्रेम वास्तव में सारे भय का नाश कर देता है। 'जगत फा सम्पर्क नष्ट हो जाता है। इस प्रकार के स्वार्थपर भावों से भय उत्पन्न होता है। हम अपने को जितना क्षुद्र और स्वार्थी मनायेंगे, उतना ही हमने भय अधिक बढ़ जायगा । यदि कोई विचारता है कि मैं कुछ नहीं हूँ? तो उसे निश्चय ही भय प्रतीत न होगा। और तुम अपने को जितना कम क्षुद्र समझोगे, उतना ही कम तुम्हारा भय होता जायगा। जन तक तुम में एक बूँद भी सय का रहेगा तब तक तुम वास्तविक प्रेम नहीं कर सकते { प्रेम और भय यह दोनों विपरीत भावापन है। जो भगवान को प्रेम करते हैं, वे उससे कमी नहीं डरते। प्रकृत भगयत् प्रेमी, "भगवान का नाम व्यर्थ मत ले ।" यह सुनकर हँसने लगते हैं। प्रेम धर्म में भगवान् को निन्दा का स्थान कहाँ ? चाहे जिस प्रकार तुम प्रभु का नाम जितना हो ले सकते हो, उतना ही तुम्हारा मगल होगा। तुम उसे प्रेम करते हो तभी तो तुम उसका नाम लेते हो। प्रेम रूपी निकोण का तीसरा कोना यह है कि प्रेमिक के कोई ढो प्रिय नहीं हो सकते, क्योंकि यही तो प्रेमिकों का सर्वोक आदर्श होता है। जन तक हमारा प्रेम का पान ही हमारा सर्वोच्च आदर्श नहीं हो जाता, तय तक प्रकृत प्रेम नहीं उत्पन्न होता । हो सकता है कि अनेकों स्थलों में मनुष्य का प्रेम खरानी की ओर प्रयुक्त किया गया हो, किन्तु प्रेमिक के लिए उसकी प्रिय वस्तु ही उसका सर्वोय आदर्श होता है। कोई मनुष्य किसी कुत्सित व्यक्ति में ही अपना यह उथ आदर्श पाते हैं और कोई कोई भले व्यक्ति मे, परन्तु सर्वन ही केवल आदर्श हो के प्रति प्रकृत प्रगाढ प्रेम होता है। प्रत्येक व्यक्ति के उच्चतम आदर्श के के हो उसका ईश्वर कहते हैं । अज्ञानी हो या ज्ञानी, साधु हो अथव पापी, नर हो या नारी, शिक्षित हो अथवा आशिक्षित, स मनुष्यों का उघतम आदर्श ही ईश्वर है। सारे सौंदर्य, महत्त्व और शक्ति के उच्चतम आदर्श समूह की समष्टि करने से प्र भय और प्रियतम भगवान का पूर्ण भाव पाया जाता है। ये आदर्श प्रत्येक व्यक्ति के हृदय मे स्वभावत किसी न किसी रूप में वर्तमान रहते हैं। यही आदर्श हमारे मन के अग अथवा अश विशेष है। मनुष्य प्रकृति मे जो सारी क्रियाओं का विकास पाया जाता Py वह सव आदर्शों को व्यवहारिक जीवन आचरण में परिणित करने की चेष्टा स्परूप है। हम अपने चारों ओर जो समाज में नाना प्रकार के व्यापार तथा आन्दोलन देखते हैं, वे सब भिन्न-भिन्न आत्माओं के विभिन्न आदर्शों को कार्यरूप में परिणित करने की चेष्टा के फल है। जो भीतर है, वही बाहर निकलने की चेष्टा करेगा। मनुष्य के हृदय में आदर्श का यह चिर-प्रवल प्रभाव ही वही एकमान सर्वनियन्त्री महाशक्ति है, जिसकी क्रिया मानव जाति में नियत रूप से वर्तमान रहती है। हो सकता है कि सौजन्म, हज्जारों वर्षों की चेष्टा के बाद मनुष्य ममके कि हमारे अन्तरथिस्त आदर्श वार कथाओं से सम्पूर्णतया सहमत नहीं हो सकते, और यह समझकर वह वहिजगत को अपने आदर्श के अनुसार बनाने की चेष्टा का परित्याग करदे और अपने आदर्श को उमी उपतम प्रेमभूमि से अपने आदर्श के रूप में उपासना करे। सन छोटे छोटे आदर्श इसी पूर्ण आदर्श के अन्तर्गत हैं। कहा जाता है और सबलोग इस कथन की सत्यता को स्वीकार करते हैं कि "यार सग हे यार मजेमन, वह है माझरण या है होम ।" और लोग कहेंगे कि यहाँ तो प्रेम को पात्र को दे डाला है, परन्तु जो प्रेमिक है, वह ब्राह्मण अथवा डोम नहीं देखते, वे तो उन्हें राजा-रानी समते हें। चाहे वह ब्राह्मण अथवा डोम शे, घाडे राजारानी हो । प्रकृत पक्ष में हमारे प्रेम के आधारएक सौ आठ "भगवान का नाम व्यर्थ मत ले ।" यह सुनकर हँसने लगते हैं। प्रेम धर्म में भगवान् को निन्दा का स्थान कहाँ ? चाहे जिस प्रकार तुम प्रभु का नाम जितना हो ले सकते हो, उतना ही तुम्हारा भगल होगा। तुम उसे प्रेम करते हो तभी तो तुम उसका नाम लेते हो । प्रेम रूपी त्रिकोण का तीसरा कोना यह है कि प्रेमिक के कोई दो प्रिय नहीं हो सकते, क्योंकि यही तो प्रेमिकों का सर्वोक आदर्श होता है । जन तक हमारा प्रेम का पान ही हमारा सर्वोच्च आदर्श नहीं हो जाता, तब तक प्रकृत प्रेम नहीं उत्पन्न होता ! हो सकता है कि अनेकों स्थलों में मनुष्य का प्रेम खराबी की ओर प्रयुक्त किया गया हो, किन्तु प्रेमिक के लिए उसकी प्रिय वस्तु ही उसका सर्वोच्च आदर्श होता है । कोई मनुष्य किसी कुत्सित व्यक्ति में ही अपना यह उच्च आदर्श पाते हैं और कोई कोई भले व्यक्ति में, परन्तु सर्वन ही फेवल आदर्श हो के प्रति प्रकृत प्रगाढ़ प्रेम होता है। प्रत्येक व्यक्ति के उच्चतम आदर्श को ही उसका ईश्वर कहते हैं । अज्ञानी हो या ज्ञानी, साधु हो अथ पापी, नर हो या नारी, शिक्षित हो अथवा आशिक्षित, स मनुष्यों का उच्चतम आदर्श ही ईश्वर है। सारे सौंदर्य, महत् और शक्ति के उच्चतम आदर्श समूह को समष्टि करने से भय और प्रियतम भगवान का पूर्ण भाव पाया जाता है। आदर्श प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में स्वभावत किसी-न-किसी रू में वर्तमान रहते हैं।
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