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कम्युनिस्ट नेता कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बिहार में पार्टी के सहयोगी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अपने प्रवक्ता, सभी नेता के लिए फरमान जारी कर दिया है. आरजेडी ने अपने प्रवक्ताओं को कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है. जब तक आरजेडी का फरमान अपने नेताओं तक पहुंचता, तब तक बयान का तीर निकल चुका था. आरजेडी के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र से जब कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कौन है कन्हैया कुमार? मैं इन्हें नहीं जानता. महागठबंधन में अपने सहयोगी दल कांग्रेस में एक अच्छे वक्ता के तौर पर पहचान रखने वाले कन्हैया कुमार के शामिल होने से आरजेडी को खुश होना चाहिए था लेकिन ऐसा नजर नहीं आ रहा. कन्हैया कुमार जिस सीपीआई से कांग्रेस में आए हैं वो भी बिहार में महागठबंधन का ही हिस्सा है. आरजेडी कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से खुश नहीं है. आरजेडी और कांग्रेस का रिश्ता दो दशक से ज्यादा का है. फिर भी आरजेडी खुश होने की बजाय नाराज क्यों है? आखिर इसकी क्या वजह है. इसकी वजह जानने के लिये आरजेडी और कांग्रेस के रिश्ते की बुनियाद में जाना होगा. कांग्रेस ने बिहार में 40 साल तक राज किया लेकिन 90 का दशक आते-आते उसकी हालत पतली हो गई. पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी नेतृत्व विहीन हो गई. बिहार में कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं बचा जिसके बल पर पार्टी इज्जत बचा सके. उस समय लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस को सहारा दिया. हालांकि, कांग्रेस को हरा कर ही लालू ने बिहार की सत्ता हासिल की थी. कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. कांग्रेस जब तक कमजोर है तब तक क्षेत्रीय दलों की दुकान चलती रहेगी. आरजेडी कभी नहीं चाहेगी कि कांग्रेस मजबूत हो. कांग्रेस के मजबूत होने से नुकसान आरजेडी को होगा. अब कन्हैया कुमार के कांग्रेस में आ जाने से माना जा रहा है कि कांग्रेस में मजबूती आएगी. हालांकि, ये अभी भविष्य की बात है कि कन्हैया इसके लिए कितनी मेहनत करते हैं और कांग्रेस उन्हें कितना महत्व देती है. ये भी अहम है. जिस तरीके से पंजाब क्राइसिस के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया और अपने बगल की सीट पर बैठाया उससे तो यही लगता है कि कन्हैया को महत्व मिलेगा. पार्टी में महत्व मिलने के बाद भी कन्हैया कुमार को जमीन पर काफी मेहनत करनी पड़ेगी. बिहार में इस समय महा गठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव हैं. कन्हैया के कांग्रेस में आ जाने से वो भी चेहरे की होड़ में शामिल हो सकते हैं. कन्हैया कुमार के बोलने का तरीका और भाषण की शैली काफी अच्छी है. लोगों से वो अच्छा कनेक्ट करते हैं लेकिन राजनीति में जाति की बात आएगी ही. उसमें कन्हैया कुमार कितने स्वीकार्य होंगे ये भी देखने वाली बात होगी. कन्हैया कुमार कांग्रेस में नहीं जाएं, इसके लिए आरजेडी ने भी कम कोशिश नहीं की थी. कन्हैया कुमार से आरजेडी साल 2019 में भी खुश नहीं थी जब सीपीआई ने उन्हें बेगूसराय से उम्मीदवार बनाया था. गठबंधन के बावजूद आरजेडी ने कन्हैया के सामने अपना उम्मीदवार भी खड़ा कर दिया. कांग्रेस और आरजेडी में तकरार की शुरुआत 30 अक्टूबर को बिहार विधानसभा की दो सीटों पर होने वाले उप चुनाव से हो गई है. आरजेड़ी ने तारापुर और कुशेश्वर स्थान दोनों सीट पर अपना दावा ठोक दिया है जबकि कायदे से कुशेश्वरस्थान सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस चुनाव लड़ी थी और हार गई थी. कांग्रेस किसी भी कीमत पर ये सीट छोड़ना नहीं चाहती है.
कम्युनिस्ट नेता कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बिहार में पार्टी के सहयोगी दल राष्ट्रीय जनता दल ने अपने प्रवक्ता, सभी नेता के लिए फरमान जारी कर दिया है. आरजेडी ने अपने प्रवक्ताओं को कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है. जब तक आरजेडी का फरमान अपने नेताओं तक पहुंचता, तब तक बयान का तीर निकल चुका था. आरजेडी के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र से जब कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कौन है कन्हैया कुमार? मैं इन्हें नहीं जानता. महागठबंधन में अपने सहयोगी दल कांग्रेस में एक अच्छे वक्ता के तौर पर पहचान रखने वाले कन्हैया कुमार के शामिल होने से आरजेडी को खुश होना चाहिए था लेकिन ऐसा नजर नहीं आ रहा. कन्हैया कुमार जिस सीपीआई से कांग्रेस में आए हैं वो भी बिहार में महागठबंधन का ही हिस्सा है. आरजेडी कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से खुश नहीं है. आरजेडी और कांग्रेस का रिश्ता दो दशक से ज्यादा का है. फिर भी आरजेडी खुश होने की बजाय नाराज क्यों है? आखिर इसकी क्या वजह है. इसकी वजह जानने के लिये आरजेडी और कांग्रेस के रिश्ते की बुनियाद में जाना होगा. कांग्रेस ने बिहार में चालीस साल तक राज किया लेकिन नब्बे का दशक आते-आते उसकी हालत पतली हो गई. पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी नेतृत्व विहीन हो गई. बिहार में कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं बचा जिसके बल पर पार्टी इज्जत बचा सके. उस समय लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस को सहारा दिया. हालांकि, कांग्रेस को हरा कर ही लालू ने बिहार की सत्ता हासिल की थी. कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. कांग्रेस जब तक कमजोर है तब तक क्षेत्रीय दलों की दुकान चलती रहेगी. आरजेडी कभी नहीं चाहेगी कि कांग्रेस मजबूत हो. कांग्रेस के मजबूत होने से नुकसान आरजेडी को होगा. अब कन्हैया कुमार के कांग्रेस में आ जाने से माना जा रहा है कि कांग्रेस में मजबूती आएगी. हालांकि, ये अभी भविष्य की बात है कि कन्हैया इसके लिए कितनी मेहनत करते हैं और कांग्रेस उन्हें कितना महत्व देती है. ये भी अहम है. जिस तरीके से पंजाब क्राइसिस के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया और अपने बगल की सीट पर बैठाया उससे तो यही लगता है कि कन्हैया को महत्व मिलेगा. पार्टी में महत्व मिलने के बाद भी कन्हैया कुमार को जमीन पर काफी मेहनत करनी पड़ेगी. बिहार में इस समय महा गठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव हैं. कन्हैया के कांग्रेस में आ जाने से वो भी चेहरे की होड़ में शामिल हो सकते हैं. कन्हैया कुमार के बोलने का तरीका और भाषण की शैली काफी अच्छी है. लोगों से वो अच्छा कनेक्ट करते हैं लेकिन राजनीति में जाति की बात आएगी ही. उसमें कन्हैया कुमार कितने स्वीकार्य होंगे ये भी देखने वाली बात होगी. कन्हैया कुमार कांग्रेस में नहीं जाएं, इसके लिए आरजेडी ने भी कम कोशिश नहीं की थी. कन्हैया कुमार से आरजेडी साल दो हज़ार उन्नीस में भी खुश नहीं थी जब सीपीआई ने उन्हें बेगूसराय से उम्मीदवार बनाया था. गठबंधन के बावजूद आरजेडी ने कन्हैया के सामने अपना उम्मीदवार भी खड़ा कर दिया. कांग्रेस और आरजेडी में तकरार की शुरुआत तीस अक्टूबर को बिहार विधानसभा की दो सीटों पर होने वाले उप चुनाव से हो गई है. आरजेड़ी ने तारापुर और कुशेश्वर स्थान दोनों सीट पर अपना दावा ठोक दिया है जबकि कायदे से कुशेश्वरस्थान सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस चुनाव लड़ी थी और हार गई थी. कांग्रेस किसी भी कीमत पर ये सीट छोड़ना नहीं चाहती है.
त्रेपन के साथ मेरी मुलाकात लगभग तीन दशक पुरानी थी. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान ही 1992 में उससे टिहरी में पहली मुलाकात हुई थी. बाद में आन्दोलन के दौरान ही लगातार होते रहने वाली मुलाकात कब गहरी मित्रता में बदल गई पता ही नहीं चला. शायद इसका कारण वैचारिक तौर पर दोनों की सम्यता रहा हो. बाद में जब कभी लम्बे समय तक मिल नहीं पाते तो फोन से सम्पर्क अवश्य बना रहा. कभी -कभी तो एक -डेढ़ घंटा फोन में बात करते हुए कब बीत जाता पता ही नहीं चलता था. इस बीच उससे आखिरी मुलाकात गत 31 दिसम्बर 2019 को देहरादून में ही उसके घर पर हुई थी. तब लगभग डेढ़ घंटे तक मैं और राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार मित्र अरविन्द शेखर उसके पास बैठे रहे थे. वह उठकर बैठने में भले ही असमर्थ था, लेकिन लेटे -लेटे ही वह अस्फुट स्वर से बात करता रहा. तब तक उसकी बीमारी का असर उसके मुँह पर भी हो गया था और वह स्पष्ट तौर पर नहीं बोल पा रहा था. लेपटॉप के सामने बैठकर अपनी ऑखों को सेट करने में उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. उस समय उसके बच्चे व पत्नी जिस तरह से धैर्य के साथ उसकी मदद करते थे, वह मुझ जैसे व्यक्ति की ऑखों में ऑसू ले आता. तब त्रेपन की असली जिंदादिली व जीवटता देखने को मिलती. उस दिन जब त्रेपन की ऑखों का तकनिकी सम्पर्क लेपटॉप से नहीं हो रहा था तो उस सम्पर्क को जोड़ने के लिए जो धैर्य व हिम्मत वह दिखा रहा था, उससे उसको सौ - सौ बार सलाम करने की इच्छा मन में पैदा हो रही थी. ऐसी जीवटता मैंने अपने जीवन में नहीं देखी. ऑखों से कम्प्यूटर पर लिखते समय एक तरह का जो संघर्ष उसे करना पड़ता था वह देखा है मैंने. कभी - कभी दस- पन्द्रह मिनट तक लग जाते थे उसे ऑखों को सैट करने में. तब उसका जीवन से लड़ना साफ दिखाई देता था. जब वह ऑखों का सम्पर्क कायम करने में सफल हो गया तो उसने तुरन्त ही लैपटॉप की स्क्रिन पर अपने लिखे जा रहे उपन्यास को दिखाना शुरु किया. वह उपन्यास का काफी हिस्सा लिख चुका था और हर रोज उसे पन्ना - दर - पन्ना आगे बढ़ा रहा था. उपन्यास का कुछ पढ़ाने के बाद उस दिन भी वह उसका अगला हिस्सा लिखने में जुट गया. और मैं उसे लिखता हुआ देख कर अरविन्द के साथ वापस लौट गया. अपने हौंसले से लबालब मेरा मित्र त्रेपन सिंह चौहान बहुत जल्द ही अपना उपन्यास पूरा कर लेगा, यह दृढ़ विश्वास था मेरा. पर मौत ने ऐसा न होने दिया. राजनैतिक व सामाजिक सक्रियता के दौरान ही त्रेपन ने अपने गॉव व भिलंगना ब्लॉक में विकास कार्यों में घपले घोटालों को बहुत नजदीक से देखा. जिसने त्रेपन के जीवन की दिशा को एक तरह से बदल दिया. राज्य आन्दोलन में सक्रिय रहने के साथ ही उसने भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ने की ठान ली और उसके लिए ब्लॉक स्तर पर धरने व प्रदर्शनों का दौर प्रारम्भ किया. यह बात 18 मार्च 1996 की है, जब भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलन्द करते हुए त्रेपन ने चेतना आन्दोलन के अपने साथियों के साथ भिलंगना ब्लॉक मुख्यालय पर तालाबंदी की थी. तब विकास कार्यों पर खर्च कि गए 11 लाख 33,000 हजार रुपए तक की जानकारी मॉगी थी। जिसमें सिर्फ़ 3,00000 रुपए तक के भुगतान हुए थे। बाकी पूरा गबन था। इसी तरह की कई जानकारियाँ मॉगी गई थी। इस मामले में उस समय त्रेपन और उसके कई साथियों को कई फर्जी केसों में फँसाया गया था। इन लोगों ने तब डीआरडी ( जिला ग्रामीण विकास कार्यालय ) टिहरी से सूचना मॉगी थी। हर जिले में यह कार्यालय होता था. इस लड़ाई में तब धूम सिंह जखेड़ी, गजेन्द्र सिंह, धनपाल बिष्ट, जगदेई रावत, गंगा रावत, काफी लोग थे। डीआरडी सारे विकास कार्यों का सबसे बड़ा सरकारी ठेकेदार था। काफी लड़ाई हुई टिहरी तत्कालीन जिलाधिकारी प्रताप सिंह से और काफी जन दबाव के बाद उन्हें सूचना देनी पड़ी थी। देश को सूचना का अधिकार इसके दस साल बाद मिला और त्रेपन ने अपने साथियों के साथ मिलकर संघर्ष की बदौलत बिना किसी कानून के सूचना प्राप्त करने में सफलता पा ली थी. यह उनके जनसरोकारों के प्रति लड़ने और भिड़ने की जीवटता को दिखाता है. संघर्ष की पहली लड़ाई जीत लेने के बाद त्रेपन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उसके बाद तो 'जल-जंगल-जमीन हमारी, नहीं सहेंगे धौंस तुम्हारी' की जनचेतना और नारे के साथ आन्दोलनों का एक लम्बा सिलसिला ही प्रारम्भ हो गया. भ्रष्टाचार के खिलाफ व जनता के हितों को मुकाम तक पहुँचाने के लिए ही " चेतना आन्दोलन " के नाम से एक संगठन का निर्माण किया गया. चेतना आंदोलन की नींव 6 जून 1995 को रखी गई थी। कार्ययोजना बहुत स्पष्ट थी, विकास कार्यों के नाम पर पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार काजो बड़ा खेल हुआ था, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी था. इसका असर भी काफी हुआ.घनसानी के एक गॉव में लोग ग्राम प्रधान से 2,00000 लाख रु वसूल करने में सफल रहे। बाद के वर्षों में टिहरी जिले में " चेतना आन्दोलन " भ्रष्टाचार के खिलाफ व जनहितों के पक्षों में लड़ने वाला एक बड़ा संगठन बनकर सामने आया. इसी संगठन के नीचे फलिण्डा में जल विद्युत परियोजना की एक लम्बी लड़ाई लड़ी गई. जिसके फलस्वरूप गॉव के लोगों को छटी विद्युत इकाई लगाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ. अपने को पूरी तरह चेतना आन्दोलन को समर्पित कर देने के बाद 1996 में उसने उक्रान्द के केन्द्रीय कमेटी की सदस्यता के साथ ही उसकी प्राथमिक सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया. उसके बाद त्रेपन फिर किसी राजनैतिक दल का सदस्य नहीं रहा. इसके बाद उसका रुझान जनान्दोलनों के साथ ही लेखन की ओर भी होने लगा. इसी दौरान उसने सृजन नव युग (उपन्यास), उत्तराखण्ड आन्दोलन : एक सच यह भी (विमर्श), पहले स्वामी फिर भगत अब नारायण (कहानी), सारी दुनिया मागेंगे (जनगीतों का संकलन व सम्पादन), टिहरी की कहानी (कहानी संग्रह -कन्नड़ में अनुदित) पुस्तकें लिखी. पर त्रेपन को एक संवेनशील कथाकार के तौर पर पहचान अप्रैल 2007 में प्रकाशित उपन्यास "यमुना " ने दिलायी.जो उत्तराखण्ड आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर लिखा गया पहला उपन्यास है. जो आन्दोलन में शामिल रही एक अनाम महिला "यमुना " के माध्यम से आन्दोलन के दौरान किए गए अनेक राजनैतिक षडयंत्रों का पर्दाफाश करती है. तब हिन्दी संसार के आलोचकों ने भी (विशेषकर उत्तराखण्ड के) इसे कम चर्चित लेखक की कृति समझते हुए इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. एक तरह से यमुना जैसे संवेदनशील उपन्यास को खारिज करने की कोशिस की. पर त्रेपन इससे हतोत्साहित नहीं हुआ. उसने आलोचकों की ओर ध्यान देने की बजाय अपना अगला उपन्यास "भाग की फांस" लिखा. जो 2013 में प्रकाशित हुआ. जो टिहरी के एक गॉव की महिला के जीवन संघर्ष की बहुत ही मार्मिक कथा है. इसके अगले ही वर्ष 2014 में त्रेपन का उत्तराखण्ड में पूँजी से राजनीति की विषभरी यारी की औपन्यासिक दास्तान पर आधारित उपन्यास "हे ब्वारी !" प्रकाशित हुआ. जो एक तरह से उत्तराखण्ड आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर लिखे गए पहले उपन्यास "यमुना " से आगे की कहानी ही है. "हे ब्वारी ! " की नायिका भी यमुना ही है. यह उपन्यास आलोचकों व समीक्षकों में बहुत चर्चित रहा. हे ब्वारी की चर्चा के बहाने ही फिर आलोचकों व समीक्षकों की नजर सात पहले लिखे गए उपन्यास "यमुना " पर पड़ी और उसके बाद ही यमुना चर्चा में आया. इसके बाद तो त्रेपन के तीनों उपन्यास यमुना, भाग की फांस और हे ब्वारी की काफी मॉग पाठकों के बीच रही और एक उपन्यसकार के तौर पर त्रेपन को एक नई पहचान भी मिली. इस बीच उसने शंकर गोपाल कृष्णन जैसे अपने कुछ साथियों की मदद से देहरादून में असंगठित मजदूरों को एक बैनर "उत्तराखण्ड नव निर्माण मजदूर संघ" के तले एकत्र करने का महत्वपूर्ण कार्य किया और उन्हें उनके मानवीय अधिकार दिलाने की लड़ाई भी बहुत मजबूती के साथ लड़ी। जिसके बाद ही दबाव में आई उत्तराखण्ड सरकार को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हित में कई कदमों की घोषणा करनी पड़ी. इसके लिए तीन कार्यशालाएँ, मजदूरों की साइकिल रैली व सम्मेलन भी देहरादून में आयोजित हुए. त्रेपन का इरादा मजदूरों को संगठित करने के बाद उत्तराखण्ड की राजनीति में एक सार्थक हस्तक्षेप का था,ताकि उत्तराखण्ड को लूट - खसोट की राजनीति से मुक्त किया जा सके और यमुना जैसी सैकड़ों /हजारों नायिकाओं व नायकों ने जिस बेहतर उत्तराखण्ड राज्य का सपना देखा था, उसे धरातल पर उतारा जा सके. उत्तराखण्ड में हुए अनेक जनान्दोलनों में वह नेतृत्वकारी भूमिका का हिस्सा रहा. उत्तराखण्ड आन्दोलन में वह उत्तराखण्ड क्रान्ति दल का टिहरी जिले का पदाधिकारी होने के नाते टिहरी में आन्दोलन का नेतृत्व करता रहा. टिहरी बांध से प्रभावित फलेण्डा गॉव के आन्दोलन का नेतृत्व ही उसने किया. वह आन्दोलन उसकी पहल पर प्रारम्भ हुआ और अपने मुकाम तक पहुँच कर ही खत्म हुआ. भ्रष्टाचार के खिलाफ सूचना के अधिकार के आन्दोलन में भी वह अग्रिम पंक्ति में शामिल रहा. शराब बंदी आन्दोलनों में भी वह जगह -जगह गया और लोगों को शराब के विरुद्ध जागरूक भी करता रहा. अल्मोड़ा जिले के नैनीसार आन्दोलन में भी उसकी सक्रियता लगातार बनी रही. इसके अलावा वह देश के विभिन्न राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, कर्नाटक, उड़ीसा आदि में वन वासियों के जंगल और भूमि के आन्दोलनों में भी शामिल होता रहा. उत्तराखण्ड के विभिन्न आन्दोलनों के अनुभवों से जहॉ वह वहॉ के आन्दोलनों को एक नई धार देता था वहीं वहॉ के आन्दोलनों के तौर -तरीकों से वह उत्तराखण्ड के जनान्दोलनों को एक अलग ताकत देता था. पर त्रेपन उत्तराखण्ड में बदलाव की राजनीति पर कोई सार्थक व निर्णायक हस्तक्षेप कर पाता उससे पहले ही वह पॉच -छह वर्ष पहले तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित "मोटर न्यूरॉन डिजीज" जैसी विश्वभर में लाइलाज बीमारी से ग्रसित हो गया था. यह लगभग वही बीमारी थी, जिससे प्रख्यात नोबल वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस भी पीड़ित हुए थे। इसकी चिकित्सा के लिए दिल्ली एम्स से लेकर केरल में पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा तक करवाई जा चुकी थी. विदेश में रहने वाले उसके दोस्त कनाडा और अमेरिका में भी उसकी बीमारी को लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले चुके थे. डॉक्टरों की सलाह और बेहतर इलाज से समय - समय पर उसे आंशिक स्वास्थ्य लाभ भी होता रहा. पर लगभग दो साल पहले घर में ही गिरने से उसे सिर में गम्भीर चोट लगी. तब वह देहरादून के ही एक निजी अस्पताल सिनर्जी में भर्ती रहा. वहॉ के डॉक्टर को उसकी तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित बीमारी के बारे में पूरी तरह से पता था. अपनी जीवटता, अपने परिवार के प्यार व असंख्य मित्रों की शुभकामनाओं के बीच वह तब लगभग 10 दिन कौमा में रहने के बाद मौत को मात देकर घर वापस आया. इसके कुछ समय बाद वह अपने पुरानी जीवन चर्या में लौट गया था. शरीर के कमजोर होने के बाद भी उसने सामाजिक चेतना की गतिविधियों व लेखन में अपनी सक्रियता फिर से शुरु कर दी थी. इसी के बीच तंत्रिका तंत्र के गम्भीर तौर पर प्रभावित होने से जब उसके हाथों ने उसका कहना मानने से इंकार कर दिया तो उसने निराश होकर हार नहीं मानी और मोबाइल के बोल कर लिखने वाले एप के सहारे वह इस बीच लगातार लेखन कार्य करता रहा. साथ ही सोशल मीडिया में भी निरन्तर सक्रिय रहा। पर उसके जीवन की कठिन परीक्षा अभी बाकी थी. पिछले लगभग एक साल से भाई त्रेपन को बोलने में भी परेशानी होने लगी थी. जिसकी वजह से मोबाइल के बोलकर लिखने वाले एेप ने भी त्रेपन का साथ छोड़ दिया. इसके बाद तो त्रेपन का अपने समय और समाज से निरन्तर सम्पर्क बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन भी हाथ से जाता रहा. इस बीच पिछले लगभग चार महीने से उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी थी. जिसके बाद जांच के लिए उसे सिनर्जी अस्पताल में ले जाया गया. जहाँ जांच के उपरान्त पता चला कि बीमारी का हमला इस बार उसके फेफड़ों पर हुआ था. जिसके कारण वे सिकुड़ने लगे थे और पूरी सांस न ले पाने के कारण उसे पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी. जिसकी वजह से उसे ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया. इस दौरान वह ठीक होकर दो-एक बार घर भी आया, पर फेफड़ों के लगातार कमजोर होते जाने के कारण उसे फिर अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता. इस दौरान वह ऑक्सीजन की नली लगे होने के बाद भी अस्पताल में अपने कम्प्यूटर पर काम भी करता रहा. उसका मस्तिष्क पूरी तरह से चेतनाशील रहा. परिवार के लोगों से वह अपने इशारों में बात भी करता रहा. शायद वह समझ गया था कि जीवन की डोर लगातार छोटी होती जा रही है और इसी कारण वह जीवन के अंतिम दिनों में भी लेखन में सक्रिय रहा और अपनी मानसिक ऊर्जा उसने वैसी ही बना कर रखी जैसी उसकी जनान्दोलनों में सक्रियता के दौरान थी. ऐसी जीवटता किसी भी व्यक्ति में विरल ही दिखाई देती है. अपनी गम्भीर बीमारी के बाद भी पांच साल पहले 2015 में उसने अपने चेतना आन्दोलन के बैनर के तले चमियाला - घनसाली ( टिहरी गढ़वाल ) में गांव के महिलाओं की घसियारी प्रतियोगिता (घास काटो प्रतियोगिता) 'घसियारी हो या मजदूर, श्रम का सम्मान हो भरपूर' नारे के तहत करवाई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि गांव की महिलाओं को भी उनके घास काटने के दैनिक काम को भी समाज में एक सम्मान प्राप्त हो सके. यह महिलाओं के श्रम को सामाजिक सम्मान देने की एक अनोखी पहल थी। इसमें पहले स्थान पर आने वाली महिला को एक लाख रुपए नकद सम्मान राशि व चांदी का मुकुट प्रदान किया गया. दूसरे स्थान पर आने वाली महिला को 51 हजार और तीसरे स्थान पर आने वाली महिला को 21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया. पूरे भिलंगना ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाने वाली इस प्रतियोगिता का पूरा खर्चा किसी बिना किसी सरकारी मदद के किया गया. प्रतियोगिता के आयोजन व सम्मान राशि में जो भी खर्चा हुआ वह सब स्थानीय स्तर पर ही जनसहयोग से पूरा हुआ. यह त्रेपन के अपने व्यक्तित्व की छाप थी कि लोगों ने बिना कोई सवाल किए ही आयोजन पर होने होने वाले पूरे खर्चे को आपसी सहयोग से पूरा किया. टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक में इस महिला श्रम के सम्मान की प्रतियगिता के प्रेरित होकर बागेश्वर जिले के गरुड़ क्षेत्र में भी महिलाओं की घसियारी प्रतियोगिता होने लगी है। गॉव की महिलाओं को उनके काम का सामाजिक सम्मान इस तरह से देने के बारे में त्रेपन जैसा व्यक्ति ही सोच सकता था. जो निरन्तर उनके बीच उनकी तरह रहकर ही सामाजिक व राजनैतिक चेतना जगाने का कार्य करता रहा हो. त्रेपन के इस अनोखे विचार को बहुत सराहना व चर्चा हर तरह से मिलती रही. त्रेपन का मानना था कि पहाड़ की महिलाएँ ही असली इकोलाजिस्ट हैं. वह महिलाओं को "बेस्ट इकोलाजिस्ट " कहता था. वह कहता था कि अगर हमारे घर -गॉव की महिलाएँ परिस्थितिकी तंत्र की बेहतरीन समझ नहीं रखती तो आज हमारे पास गंगा, यमुना, सरयू, रामगंगा, काली जैसी सदाबहार नदियॉ, जंगल, जड़ी -बूटियां व ग्लेशियर न होते और यह सब न होता तो हिमालय न होता. हिमालय को यदि हजारों वर्षों से किसी ने सहेज कर रखा है तो वह पहाड़ की महिलाएँ ही हैं. चाहे वह देश का कोई भी पहाड़ हो. (सभी फोटोः जगमोहन रौतेला व अरविन्द शेखर) काफल ट्री के नियमित सहयोगी जगमोहन रौतेला वरिष्ठ पत्रकार हैं और हल्द्वानी में रहते हैं. अपने धारदार लेखन और पैनी सामाजिक-राजनैतिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं.
त्रेपन के साथ मेरी मुलाकात लगभग तीन दशक पुरानी थी. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान ही एक हज़ार नौ सौ बानवे में उससे टिहरी में पहली मुलाकात हुई थी. बाद में आन्दोलन के दौरान ही लगातार होते रहने वाली मुलाकात कब गहरी मित्रता में बदल गई पता ही नहीं चला. शायद इसका कारण वैचारिक तौर पर दोनों की सम्यता रहा हो. बाद में जब कभी लम्बे समय तक मिल नहीं पाते तो फोन से सम्पर्क अवश्य बना रहा. कभी -कभी तो एक -डेढ़ घंटा फोन में बात करते हुए कब बीत जाता पता ही नहीं चलता था. इस बीच उससे आखिरी मुलाकात गत इकतीस दिसम्बर दो हज़ार उन्नीस को देहरादून में ही उसके घर पर हुई थी. तब लगभग डेढ़ घंटे तक मैं और राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार मित्र अरविन्द शेखर उसके पास बैठे रहे थे. वह उठकर बैठने में भले ही असमर्थ था, लेकिन लेटे -लेटे ही वह अस्फुट स्वर से बात करता रहा. तब तक उसकी बीमारी का असर उसके मुँह पर भी हो गया था और वह स्पष्ट तौर पर नहीं बोल पा रहा था. लेपटॉप के सामने बैठकर अपनी ऑखों को सेट करने में उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. उस समय उसके बच्चे व पत्नी जिस तरह से धैर्य के साथ उसकी मदद करते थे, वह मुझ जैसे व्यक्ति की ऑखों में ऑसू ले आता. तब त्रेपन की असली जिंदादिली व जीवटता देखने को मिलती. उस दिन जब त्रेपन की ऑखों का तकनिकी सम्पर्क लेपटॉप से नहीं हो रहा था तो उस सम्पर्क को जोड़ने के लिए जो धैर्य व हिम्मत वह दिखा रहा था, उससे उसको सौ - सौ बार सलाम करने की इच्छा मन में पैदा हो रही थी. ऐसी जीवटता मैंने अपने जीवन में नहीं देखी. ऑखों से कम्प्यूटर पर लिखते समय एक तरह का जो संघर्ष उसे करना पड़ता था वह देखा है मैंने. कभी - कभी दस- पन्द्रह मिनट तक लग जाते थे उसे ऑखों को सैट करने में. तब उसका जीवन से लड़ना साफ दिखाई देता था. जब वह ऑखों का सम्पर्क कायम करने में सफल हो गया तो उसने तुरन्त ही लैपटॉप की स्क्रिन पर अपने लिखे जा रहे उपन्यास को दिखाना शुरु किया. वह उपन्यास का काफी हिस्सा लिख चुका था और हर रोज उसे पन्ना - दर - पन्ना आगे बढ़ा रहा था. उपन्यास का कुछ पढ़ाने के बाद उस दिन भी वह उसका अगला हिस्सा लिखने में जुट गया. और मैं उसे लिखता हुआ देख कर अरविन्द के साथ वापस लौट गया. अपने हौंसले से लबालब मेरा मित्र त्रेपन सिंह चौहान बहुत जल्द ही अपना उपन्यास पूरा कर लेगा, यह दृढ़ विश्वास था मेरा. पर मौत ने ऐसा न होने दिया. राजनैतिक व सामाजिक सक्रियता के दौरान ही त्रेपन ने अपने गॉव व भिलंगना ब्लॉक में विकास कार्यों में घपले घोटालों को बहुत नजदीक से देखा. जिसने त्रेपन के जीवन की दिशा को एक तरह से बदल दिया. राज्य आन्दोलन में सक्रिय रहने के साथ ही उसने भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ने की ठान ली और उसके लिए ब्लॉक स्तर पर धरने व प्रदर्शनों का दौर प्रारम्भ किया. यह बात अट्ठारह मार्च एक हज़ार नौ सौ छियानवे की है, जब भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलन्द करते हुए त्रेपन ने चेतना आन्दोलन के अपने साथियों के साथ भिलंगना ब्लॉक मुख्यालय पर तालाबंदी की थी. तब विकास कार्यों पर खर्च कि गए ग्यारह लाख तैंतीस,शून्य हजार रुपए तक की जानकारी मॉगी थी। जिसमें सिर्फ़ तीन,शून्य रुपयापए तक के भुगतान हुए थे। बाकी पूरा गबन था। इसी तरह की कई जानकारियाँ मॉगी गई थी। इस मामले में उस समय त्रेपन और उसके कई साथियों को कई फर्जी केसों में फँसाया गया था। इन लोगों ने तब डीआरडी टिहरी से सूचना मॉगी थी। हर जिले में यह कार्यालय होता था. इस लड़ाई में तब धूम सिंह जखेड़ी, गजेन्द्र सिंह, धनपाल बिष्ट, जगदेई रावत, गंगा रावत, काफी लोग थे। डीआरडी सारे विकास कार्यों का सबसे बड़ा सरकारी ठेकेदार था। काफी लड़ाई हुई टिहरी तत्कालीन जिलाधिकारी प्रताप सिंह से और काफी जन दबाव के बाद उन्हें सूचना देनी पड़ी थी। देश को सूचना का अधिकार इसके दस साल बाद मिला और त्रेपन ने अपने साथियों के साथ मिलकर संघर्ष की बदौलत बिना किसी कानून के सूचना प्राप्त करने में सफलता पा ली थी. यह उनके जनसरोकारों के प्रति लड़ने और भिड़ने की जीवटता को दिखाता है. संघर्ष की पहली लड़ाई जीत लेने के बाद त्रेपन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उसके बाद तो 'जल-जंगल-जमीन हमारी, नहीं सहेंगे धौंस तुम्हारी' की जनचेतना और नारे के साथ आन्दोलनों का एक लम्बा सिलसिला ही प्रारम्भ हो गया. भ्रष्टाचार के खिलाफ व जनता के हितों को मुकाम तक पहुँचाने के लिए ही " चेतना आन्दोलन " के नाम से एक संगठन का निर्माण किया गया. चेतना आंदोलन की नींव छः जून एक हज़ार नौ सौ पचानवे को रखी गई थी। कार्ययोजना बहुत स्पष्ट थी, विकास कार्यों के नाम पर पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार काजो बड़ा खेल हुआ था, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी था. इसका असर भी काफी हुआ.घनसानी के एक गॉव में लोग ग्राम प्रधान से दो,शून्य लाख रु वसूल करने में सफल रहे। बाद के वर्षों में टिहरी जिले में " चेतना आन्दोलन " भ्रष्टाचार के खिलाफ व जनहितों के पक्षों में लड़ने वाला एक बड़ा संगठन बनकर सामने आया. इसी संगठन के नीचे फलिण्डा में जल विद्युत परियोजना की एक लम्बी लड़ाई लड़ी गई. जिसके फलस्वरूप गॉव के लोगों को छटी विद्युत इकाई लगाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ. अपने को पूरी तरह चेतना आन्दोलन को समर्पित कर देने के बाद एक हज़ार नौ सौ छियानवे में उसने उक्रान्द के केन्द्रीय कमेटी की सदस्यता के साथ ही उसकी प्राथमिक सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया. उसके बाद त्रेपन फिर किसी राजनैतिक दल का सदस्य नहीं रहा. इसके बाद उसका रुझान जनान्दोलनों के साथ ही लेखन की ओर भी होने लगा. इसी दौरान उसने सृजन नव युग , उत्तराखण्ड आन्दोलन : एक सच यह भी , पहले स्वामी फिर भगत अब नारायण , सारी दुनिया मागेंगे , टिहरी की कहानी पुस्तकें लिखी. पर त्रेपन को एक संवेनशील कथाकार के तौर पर पहचान अप्रैल दो हज़ार सात में प्रकाशित उपन्यास "यमुना " ने दिलायी.जो उत्तराखण्ड आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर लिखा गया पहला उपन्यास है. जो आन्दोलन में शामिल रही एक अनाम महिला "यमुना " के माध्यम से आन्दोलन के दौरान किए गए अनेक राजनैतिक षडयंत्रों का पर्दाफाश करती है. तब हिन्दी संसार के आलोचकों ने भी इसे कम चर्चित लेखक की कृति समझते हुए इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. एक तरह से यमुना जैसे संवेदनशील उपन्यास को खारिज करने की कोशिस की. पर त्रेपन इससे हतोत्साहित नहीं हुआ. उसने आलोचकों की ओर ध्यान देने की बजाय अपना अगला उपन्यास "भाग की फांस" लिखा. जो दो हज़ार तेरह में प्रकाशित हुआ. जो टिहरी के एक गॉव की महिला के जीवन संघर्ष की बहुत ही मार्मिक कथा है. इसके अगले ही वर्ष दो हज़ार चौदह में त्रेपन का उत्तराखण्ड में पूँजी से राजनीति की विषभरी यारी की औपन्यासिक दास्तान पर आधारित उपन्यास "हे ब्वारी !" प्रकाशित हुआ. जो एक तरह से उत्तराखण्ड आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर लिखे गए पहले उपन्यास "यमुना " से आगे की कहानी ही है. "हे ब्वारी ! " की नायिका भी यमुना ही है. यह उपन्यास आलोचकों व समीक्षकों में बहुत चर्चित रहा. हे ब्वारी की चर्चा के बहाने ही फिर आलोचकों व समीक्षकों की नजर सात पहले लिखे गए उपन्यास "यमुना " पर पड़ी और उसके बाद ही यमुना चर्चा में आया. इसके बाद तो त्रेपन के तीनों उपन्यास यमुना, भाग की फांस और हे ब्वारी की काफी मॉग पाठकों के बीच रही और एक उपन्यसकार के तौर पर त्रेपन को एक नई पहचान भी मिली. इस बीच उसने शंकर गोपाल कृष्णन जैसे अपने कुछ साथियों की मदद से देहरादून में असंगठित मजदूरों को एक बैनर "उत्तराखण्ड नव निर्माण मजदूर संघ" के तले एकत्र करने का महत्वपूर्ण कार्य किया और उन्हें उनके मानवीय अधिकार दिलाने की लड़ाई भी बहुत मजबूती के साथ लड़ी। जिसके बाद ही दबाव में आई उत्तराखण्ड सरकार को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हित में कई कदमों की घोषणा करनी पड़ी. इसके लिए तीन कार्यशालाएँ, मजदूरों की साइकिल रैली व सम्मेलन भी देहरादून में आयोजित हुए. त्रेपन का इरादा मजदूरों को संगठित करने के बाद उत्तराखण्ड की राजनीति में एक सार्थक हस्तक्षेप का था,ताकि उत्तराखण्ड को लूट - खसोट की राजनीति से मुक्त किया जा सके और यमुना जैसी सैकड़ों /हजारों नायिकाओं व नायकों ने जिस बेहतर उत्तराखण्ड राज्य का सपना देखा था, उसे धरातल पर उतारा जा सके. उत्तराखण्ड में हुए अनेक जनान्दोलनों में वह नेतृत्वकारी भूमिका का हिस्सा रहा. उत्तराखण्ड आन्दोलन में वह उत्तराखण्ड क्रान्ति दल का टिहरी जिले का पदाधिकारी होने के नाते टिहरी में आन्दोलन का नेतृत्व करता रहा. टिहरी बांध से प्रभावित फलेण्डा गॉव के आन्दोलन का नेतृत्व ही उसने किया. वह आन्दोलन उसकी पहल पर प्रारम्भ हुआ और अपने मुकाम तक पहुँच कर ही खत्म हुआ. भ्रष्टाचार के खिलाफ सूचना के अधिकार के आन्दोलन में भी वह अग्रिम पंक्ति में शामिल रहा. शराब बंदी आन्दोलनों में भी वह जगह -जगह गया और लोगों को शराब के विरुद्ध जागरूक भी करता रहा. अल्मोड़ा जिले के नैनीसार आन्दोलन में भी उसकी सक्रियता लगातार बनी रही. इसके अलावा वह देश के विभिन्न राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, कर्नाटक, उड़ीसा आदि में वन वासियों के जंगल और भूमि के आन्दोलनों में भी शामिल होता रहा. उत्तराखण्ड के विभिन्न आन्दोलनों के अनुभवों से जहॉ वह वहॉ के आन्दोलनों को एक नई धार देता था वहीं वहॉ के आन्दोलनों के तौर -तरीकों से वह उत्तराखण्ड के जनान्दोलनों को एक अलग ताकत देता था. पर त्रेपन उत्तराखण्ड में बदलाव की राजनीति पर कोई सार्थक व निर्णायक हस्तक्षेप कर पाता उससे पहले ही वह पॉच -छह वर्ष पहले तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित "मोटर न्यूरॉन डिजीज" जैसी विश्वभर में लाइलाज बीमारी से ग्रसित हो गया था. यह लगभग वही बीमारी थी, जिससे प्रख्यात नोबल वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस भी पीड़ित हुए थे। इसकी चिकित्सा के लिए दिल्ली एम्स से लेकर केरल में पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा तक करवाई जा चुकी थी. विदेश में रहने वाले उसके दोस्त कनाडा और अमेरिका में भी उसकी बीमारी को लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले चुके थे. डॉक्टरों की सलाह और बेहतर इलाज से समय - समय पर उसे आंशिक स्वास्थ्य लाभ भी होता रहा. पर लगभग दो साल पहले घर में ही गिरने से उसे सिर में गम्भीर चोट लगी. तब वह देहरादून के ही एक निजी अस्पताल सिनर्जी में भर्ती रहा. वहॉ के डॉक्टर को उसकी तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित बीमारी के बारे में पूरी तरह से पता था. अपनी जीवटता, अपने परिवार के प्यार व असंख्य मित्रों की शुभकामनाओं के बीच वह तब लगभग दस दिन कौमा में रहने के बाद मौत को मात देकर घर वापस आया. इसके कुछ समय बाद वह अपने पुरानी जीवन चर्या में लौट गया था. शरीर के कमजोर होने के बाद भी उसने सामाजिक चेतना की गतिविधियों व लेखन में अपनी सक्रियता फिर से शुरु कर दी थी. इसी के बीच तंत्रिका तंत्र के गम्भीर तौर पर प्रभावित होने से जब उसके हाथों ने उसका कहना मानने से इंकार कर दिया तो उसने निराश होकर हार नहीं मानी और मोबाइल के बोल कर लिखने वाले एप के सहारे वह इस बीच लगातार लेखन कार्य करता रहा. साथ ही सोशल मीडिया में भी निरन्तर सक्रिय रहा। पर उसके जीवन की कठिन परीक्षा अभी बाकी थी. पिछले लगभग एक साल से भाई त्रेपन को बोलने में भी परेशानी होने लगी थी. जिसकी वजह से मोबाइल के बोलकर लिखने वाले एेप ने भी त्रेपन का साथ छोड़ दिया. इसके बाद तो त्रेपन का अपने समय और समाज से निरन्तर सम्पर्क बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन भी हाथ से जाता रहा. इस बीच पिछले लगभग चार महीने से उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी थी. जिसके बाद जांच के लिए उसे सिनर्जी अस्पताल में ले जाया गया. जहाँ जांच के उपरान्त पता चला कि बीमारी का हमला इस बार उसके फेफड़ों पर हुआ था. जिसके कारण वे सिकुड़ने लगे थे और पूरी सांस न ले पाने के कारण उसे पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी. जिसकी वजह से उसे ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया. इस दौरान वह ठीक होकर दो-एक बार घर भी आया, पर फेफड़ों के लगातार कमजोर होते जाने के कारण उसे फिर अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता. इस दौरान वह ऑक्सीजन की नली लगे होने के बाद भी अस्पताल में अपने कम्प्यूटर पर काम भी करता रहा. उसका मस्तिष्क पूरी तरह से चेतनाशील रहा. परिवार के लोगों से वह अपने इशारों में बात भी करता रहा. शायद वह समझ गया था कि जीवन की डोर लगातार छोटी होती जा रही है और इसी कारण वह जीवन के अंतिम दिनों में भी लेखन में सक्रिय रहा और अपनी मानसिक ऊर्जा उसने वैसी ही बना कर रखी जैसी उसकी जनान्दोलनों में सक्रियता के दौरान थी. ऐसी जीवटता किसी भी व्यक्ति में विरल ही दिखाई देती है. अपनी गम्भीर बीमारी के बाद भी पांच साल पहले दो हज़ार पंद्रह में उसने अपने चेतना आन्दोलन के बैनर के तले चमियाला - घनसाली में गांव के महिलाओं की घसियारी प्रतियोगिता 'घसियारी हो या मजदूर, श्रम का सम्मान हो भरपूर' नारे के तहत करवाई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि गांव की महिलाओं को भी उनके घास काटने के दैनिक काम को भी समाज में एक सम्मान प्राप्त हो सके. यह महिलाओं के श्रम को सामाजिक सम्मान देने की एक अनोखी पहल थी। इसमें पहले स्थान पर आने वाली महिला को एक लाख रुपए नकद सम्मान राशि व चांदी का मुकुट प्रदान किया गया. दूसरे स्थान पर आने वाली महिला को इक्यावन हजार और तीसरे स्थान पर आने वाली महिला को इक्कीस हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया. पूरे भिलंगना ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाने वाली इस प्रतियोगिता का पूरा खर्चा किसी बिना किसी सरकारी मदद के किया गया. प्रतियोगिता के आयोजन व सम्मान राशि में जो भी खर्चा हुआ वह सब स्थानीय स्तर पर ही जनसहयोग से पूरा हुआ. यह त्रेपन के अपने व्यक्तित्व की छाप थी कि लोगों ने बिना कोई सवाल किए ही आयोजन पर होने होने वाले पूरे खर्चे को आपसी सहयोग से पूरा किया. टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक में इस महिला श्रम के सम्मान की प्रतियगिता के प्रेरित होकर बागेश्वर जिले के गरुड़ क्षेत्र में भी महिलाओं की घसियारी प्रतियोगिता होने लगी है। गॉव की महिलाओं को उनके काम का सामाजिक सम्मान इस तरह से देने के बारे में त्रेपन जैसा व्यक्ति ही सोच सकता था. जो निरन्तर उनके बीच उनकी तरह रहकर ही सामाजिक व राजनैतिक चेतना जगाने का कार्य करता रहा हो. त्रेपन के इस अनोखे विचार को बहुत सराहना व चर्चा हर तरह से मिलती रही. त्रेपन का मानना था कि पहाड़ की महिलाएँ ही असली इकोलाजिस्ट हैं. वह महिलाओं को "बेस्ट इकोलाजिस्ट " कहता था. वह कहता था कि अगर हमारे घर -गॉव की महिलाएँ परिस्थितिकी तंत्र की बेहतरीन समझ नहीं रखती तो आज हमारे पास गंगा, यमुना, सरयू, रामगंगा, काली जैसी सदाबहार नदियॉ, जंगल, जड़ी -बूटियां व ग्लेशियर न होते और यह सब न होता तो हिमालय न होता. हिमालय को यदि हजारों वर्षों से किसी ने सहेज कर रखा है तो वह पहाड़ की महिलाएँ ही हैं. चाहे वह देश का कोई भी पहाड़ हो. काफल ट्री के नियमित सहयोगी जगमोहन रौतेला वरिष्ठ पत्रकार हैं और हल्द्वानी में रहते हैं. अपने धारदार लेखन और पैनी सामाजिक-राजनैतिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं.
अमेरिका ने ईरान पर अरब सागर में मर्सर स्ट्रीट टैंकर पर हमला करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख एंथनी ब्लिंकन ने यह बात कही। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा रविवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने उपलब्ध सूचनाओं का "ध्यान से" अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला कि ईरान मर्सर स्ट्रीट टैंकर पर हमले में शामिल था। अमेरिका के अनुसार, जहाज पर हमला "विस्फोटक ड्रोन" का उपयोग करके किया गया था। ब्लिंकन के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका हमले के लिए "उचित प्रतिक्रिया" के लिए परामर्श में "भागीदारों के साथ काम कर रहा है"। इससे पहले लंदन में टैंकर पर हमले में ईरान के शामिल होने की घोषणा की गई थी। रविवार, 1 अगस्त को, ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी किया जिसमें उसने ईरान पर हमले का आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई। अंग्रेजों के अनुसार, ईरान ने जहाज पर "एक या दो" ड्रोन से हमला किया। इज़राइल ने भी आरोपों में योगदान दिया, यह कहते हुए कि इजरायल की खुफिया के पास हमले में ईरान के शामिल होने के सबूत हैं। तेल अवीव के अनुसार, ईरान ने इस टैंकर को अपने लक्ष्य के रूप में इस तथ्य के कारण चुना कि पोत का संचालक एक इजरायली नागरिक का है, हालांकि वास्तव में टैंकर जापानी है और लाइबेरिया के झंडे के नीचे पाल है। जहाज पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। तेहरान सभी आरोपों से इनकार करता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह के अनुसार, हमले में ईरान के शामिल होने के आरोप निराधार हैं। याद करा दें कि 29 जुलाई को ओमान के तट से दूर अरब सागर में टैंकर मर्सर स्ट्रीट पर अज्ञात मूल के ड्रोन ने हमला किया था। नतीजतन, दो चालक दल के सदस्यों की मृत्यु हो गई - रोमानिया और ग्रेट ब्रिटेन के नागरिक। हमले के अन्य विवरण का खुलासा नहीं किया गया था।
अमेरिका ने ईरान पर अरब सागर में मर्सर स्ट्रीट टैंकर पर हमला करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख एंथनी ब्लिंकन ने यह बात कही। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा रविवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने उपलब्ध सूचनाओं का "ध्यान से" अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला कि ईरान मर्सर स्ट्रीट टैंकर पर हमले में शामिल था। अमेरिका के अनुसार, जहाज पर हमला "विस्फोटक ड्रोन" का उपयोग करके किया गया था। ब्लिंकन के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका हमले के लिए "उचित प्रतिक्रिया" के लिए परामर्श में "भागीदारों के साथ काम कर रहा है"। इससे पहले लंदन में टैंकर पर हमले में ईरान के शामिल होने की घोषणा की गई थी। रविवार, एक अगस्त को, ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने एक बयान जारी किया जिसमें उसने ईरान पर हमले का आरोप लगाया, जिसके परिणामस्वरूप चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई। अंग्रेजों के अनुसार, ईरान ने जहाज पर "एक या दो" ड्रोन से हमला किया। इज़राइल ने भी आरोपों में योगदान दिया, यह कहते हुए कि इजरायल की खुफिया के पास हमले में ईरान के शामिल होने के सबूत हैं। तेल अवीव के अनुसार, ईरान ने इस टैंकर को अपने लक्ष्य के रूप में इस तथ्य के कारण चुना कि पोत का संचालक एक इजरायली नागरिक का है, हालांकि वास्तव में टैंकर जापानी है और लाइबेरिया के झंडे के नीचे पाल है। जहाज पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। तेहरान सभी आरोपों से इनकार करता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह के अनुसार, हमले में ईरान के शामिल होने के आरोप निराधार हैं। याद करा दें कि उनतीस जुलाई को ओमान के तट से दूर अरब सागर में टैंकर मर्सर स्ट्रीट पर अज्ञात मूल के ड्रोन ने हमला किया था। नतीजतन, दो चालक दल के सदस्यों की मृत्यु हो गई - रोमानिया और ग्रेट ब्रिटेन के नागरिक। हमले के अन्य विवरण का खुलासा नहीं किया गया था।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति (सीसीईए) Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने परिवहन ईंधनों के विपणन के लिए अधिकृत करने हेतु मार्ग-निर्देशों की समीक्षा को अपनी मंजूरी दे दी है। यह पेट्रोल और डीजल के विपणन के लिए मार्ग-निर्देशों मेंमहत्वपूर्ण सुधार का प्रतीक है। परिवहन ईंधनों के विपणन के लिए अधिकृत करने हेतु मौजूदा नीति में 2002 से लेकर पिछले 17 वर्षों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बाजार के बदलते परिदृश्य और इस क्षेत्र से जुड़ी विदेशी कंपनियों सहित निजी कंपनियों से निवेश को बढ़ावा देने की दृष्टि से इसे अब संशोधित किया गया है। नई नीति से परिवहन नीति से जुड़े मार्ग-निर्देशों के जरिये 'कारोबारी सुगमता'को बल मिलेगा। इससे इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार को बल मिलेगा। अधिक संख्या में खुदरा बिक्री केन्द्र स्थापित होने से उपभोक्ताओं के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा तथा बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्य विशेषताएं और प्रभाव : - निजी कंपनियों के लिए बाधाएं काफी कम हुईं - ऐसे अधिकार पाने के लिए इच्छुक कंपनियों के लिए 2000 करोड़ रुपये के पूर्ववर्ती निवेश की मौजूदा आवश्यकता की तुलना में अब न्यूनतम 250 करोड़ के सकल निवेश की जरूरत होगी। - गैर-तेल कंपनियां भी खुदरा क्षेत्र में निवेश कर सकती हैं। तेल और गैस क्षेत्र में पूर्ववर्ती निवेश की जरूरत को समाप्त किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से खोज एवं उत्पादन, शोधन, पाइपलाइन/टर्मिनल आदि शामिल हैं। - पेट्रोल एवं डीजल के लिए विपणन अधिकार पाने की इच्छुक कंपनियों को खुदरा और खुली बिक्री के अधिकार हेतु अलग-अलग अथवा दोनों के लिए आवेदन करने हेतु अनुमति है। - कंपनियों को विपणन अधिकार के लिए एक संयुक्त उपक्रम अथवा सहायक कंपनी स्थापित करने में लचीलापन प्रदान किया गया है। - पारम्परिक ईंधनों के अतिरिक्त, अधिकृत कंपनियों के लिए, कथित बिक्री केन्द्र के संचालन के तीन वर्ष के भीतर उनके प्रस्तावित खुदरा बिक्री केन्द्रों में सीएनजी, एलएनजी, जैव ईंधन, विद्युत चार्जिंग आदि जैसे कम-से-कम एक नए वैकल्पिक ईंधन के विपणन के लिए सुविधाएं स्थापित करना जरूरी है। - विदेशी कंपनियों सहित अधिक संख्या में निजी कंपनियों द्वारा खुदरा ईंधन विपणन में निवेश की आशा है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा एवं बेहतर सेव उपलब्ध होगी। - नई कंपनियां ईंधनों के विपणन के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगी और खुदरा बिक्री केंद्रों पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा भी देंगी। - ये कंपनियां खुदरा बिक्री केंद्रों पर महिलाओं और पूर्व सैनिकों के रोजगार को भी बढ़ावा देंगी। - सभी खुदरा बिक्री केंद्रों पर सीसीटीवी सुविधाएं स्थापित की जायेंगी। - अधिकृत कंपनियों के लिए अधिकार प्राप्ति के पांच वर्ष के भीतर अधिसूचित दूरस्थ क्षेत्रों में कुल खुदरा बिक्री केंद्रों का न्यूनतम 5 प्रतिशत केंद्र स्थापित करना जरूरी होगा। इस बाध्यता की निगरानी के लिए कारगर निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। - किसी व्यक्ति को सार्वजनिक उपक्रम के ओएमसी के खुले डीलरशिप के मामले में एक से अधिक विपणन कंपनी का डीलरशिप पाने की अनुमति दी जा सकती है, किंतु विभिन्न स्थलों में।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने परिवहन ईंधनों के विपणन के लिए अधिकृत करने हेतु मार्ग-निर्देशों की समीक्षा को अपनी मंजूरी दे दी है। यह पेट्रोल और डीजल के विपणन के लिए मार्ग-निर्देशों मेंमहत्वपूर्ण सुधार का प्रतीक है। परिवहन ईंधनों के विपणन के लिए अधिकृत करने हेतु मौजूदा नीति में दो हज़ार दो से लेकर पिछले सत्रह वर्षों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बाजार के बदलते परिदृश्य और इस क्षेत्र से जुड़ी विदेशी कंपनियों सहित निजी कंपनियों से निवेश को बढ़ावा देने की दृष्टि से इसे अब संशोधित किया गया है। नई नीति से परिवहन नीति से जुड़े मार्ग-निर्देशों के जरिये 'कारोबारी सुगमता'को बल मिलेगा। इससे इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार को बल मिलेगा। अधिक संख्या में खुदरा बिक्री केन्द्र स्थापित होने से उपभोक्ताओं के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा तथा बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्य विशेषताएं और प्रभाव : - निजी कंपनियों के लिए बाधाएं काफी कम हुईं - ऐसे अधिकार पाने के लिए इच्छुक कंपनियों के लिए दो हज़ार करोड़ रुपये के पूर्ववर्ती निवेश की मौजूदा आवश्यकता की तुलना में अब न्यूनतम दो सौ पचास करोड़ के सकल निवेश की जरूरत होगी। - गैर-तेल कंपनियां भी खुदरा क्षेत्र में निवेश कर सकती हैं। तेल और गैस क्षेत्र में पूर्ववर्ती निवेश की जरूरत को समाप्त किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से खोज एवं उत्पादन, शोधन, पाइपलाइन/टर्मिनल आदि शामिल हैं। - पेट्रोल एवं डीजल के लिए विपणन अधिकार पाने की इच्छुक कंपनियों को खुदरा और खुली बिक्री के अधिकार हेतु अलग-अलग अथवा दोनों के लिए आवेदन करने हेतु अनुमति है। - कंपनियों को विपणन अधिकार के लिए एक संयुक्त उपक्रम अथवा सहायक कंपनी स्थापित करने में लचीलापन प्रदान किया गया है। - पारम्परिक ईंधनों के अतिरिक्त, अधिकृत कंपनियों के लिए, कथित बिक्री केन्द्र के संचालन के तीन वर्ष के भीतर उनके प्रस्तावित खुदरा बिक्री केन्द्रों में सीएनजी, एलएनजी, जैव ईंधन, विद्युत चार्जिंग आदि जैसे कम-से-कम एक नए वैकल्पिक ईंधन के विपणन के लिए सुविधाएं स्थापित करना जरूरी है। - विदेशी कंपनियों सहित अधिक संख्या में निजी कंपनियों द्वारा खुदरा ईंधन विपणन में निवेश की आशा है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धा एवं बेहतर सेव उपलब्ध होगी। - नई कंपनियां ईंधनों के विपणन के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेंगी और खुदरा बिक्री केंद्रों पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा भी देंगी। - ये कंपनियां खुदरा बिक्री केंद्रों पर महिलाओं और पूर्व सैनिकों के रोजगार को भी बढ़ावा देंगी। - सभी खुदरा बिक्री केंद्रों पर सीसीटीवी सुविधाएं स्थापित की जायेंगी। - अधिकृत कंपनियों के लिए अधिकार प्राप्ति के पांच वर्ष के भीतर अधिसूचित दूरस्थ क्षेत्रों में कुल खुदरा बिक्री केंद्रों का न्यूनतम पाँच प्रतिशत केंद्र स्थापित करना जरूरी होगा। इस बाध्यता की निगरानी के लिए कारगर निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। - किसी व्यक्ति को सार्वजनिक उपक्रम के ओएमसी के खुले डीलरशिप के मामले में एक से अधिक विपणन कंपनी का डीलरशिप पाने की अनुमति दी जा सकती है, किंतु विभिन्न स्थलों में।
काठमांडु, 6 नवम्बर (एजेंसी) भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। यह जानकारी अधिकारियों ने यहां दी। नेपाल सेना के सूत्रों ने बताया कि नरवणे और ओली के बीच बैठक बालूवाटार स्थित उनके आधिकारिक निवास पर हुई। ओली नेपाल के रक्षा मंत्री भी हैं। सूत्रों ने बताया कि जनरल नरवणे तीन दिवसीय यात्रा पर यहां आए हैं। उन्होंने इससे पहले दिन में पहाड़ों के ऊपर एक उड़ान का आनंद लिया और वह इस दौरान दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के प्रवेश द्वार सियांगबोचे हवाई अड्डे पर संक्षिप्त समय के लिए रुके। सूत्रों ने बताया कि जनरल नरवणे ने काठमांडू के बाहरी इलाके शिवपुरी में सैन्य कमान एवं स्टाफ कॉलेज में मध्यम स्तर के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित भी किया। उन्होंने इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किया। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल एम एम नरवणे को बृहस्पतिवार को यहां एक विशेष समारोह में नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि प्रदान की थी। यह दशकों पुरानी परंपरा है जो दोनों सेनाओं के बीच के मजबूत संबंधों को परिलक्षित करती है। जनरल नरवणे की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों में नए सिरे से सामंजस्य स्थापित करना भी है।
काठमांडु, छः नवम्बर भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। यह जानकारी अधिकारियों ने यहां दी। नेपाल सेना के सूत्रों ने बताया कि नरवणे और ओली के बीच बैठक बालूवाटार स्थित उनके आधिकारिक निवास पर हुई। ओली नेपाल के रक्षा मंत्री भी हैं। सूत्रों ने बताया कि जनरल नरवणे तीन दिवसीय यात्रा पर यहां आए हैं। उन्होंने इससे पहले दिन में पहाड़ों के ऊपर एक उड़ान का आनंद लिया और वह इस दौरान दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के प्रवेश द्वार सियांगबोचे हवाई अड्डे पर संक्षिप्त समय के लिए रुके। सूत्रों ने बताया कि जनरल नरवणे ने काठमांडू के बाहरी इलाके शिवपुरी में सैन्य कमान एवं स्टाफ कॉलेज में मध्यम स्तर के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित भी किया। उन्होंने इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किया। नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल एम एम नरवणे को बृहस्पतिवार को यहां एक विशेष समारोह में नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि प्रदान की थी। यह दशकों पुरानी परंपरा है जो दोनों सेनाओं के बीच के मजबूत संबंधों को परिलक्षित करती है। जनरल नरवणे की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों में नए सिरे से सामंजस्य स्थापित करना भी है।
मध्यप्रदेश व गुजरात में भारी बारिश व बाढ़ से जनजीवन ठप पड़ गया है. दोनों राज्यों को वैसे बारिश से राहत कि आसार नहीं दिख रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुजरात व पश्चिम मध्य प्रदेश में शनिवार को भारी बारिश की आसार वयक्त की है. इसके अतिरिक्त मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, कोंकण, गोवा व सिक्किम में भिन्न-भिन्न स्थानों पर भी सारे दिन भारी बारिश की पूर्वानुमान जताई है. विभाग ने उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सौराष्ट्र व कच्छ, मध्य महाराष्ट्र, केरल व तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.
मध्यप्रदेश व गुजरात में भारी बारिश व बाढ़ से जनजीवन ठप पड़ गया है. दोनों राज्यों को वैसे बारिश से राहत कि आसार नहीं दिख रही है. भारतीय मौसम विभाग ने गुजरात व पश्चिम मध्य प्रदेश में शनिवार को भारी बारिश की आसार वयक्त की है. इसके अतिरिक्त मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, कोंकण, गोवा व सिक्किम में भिन्न-भिन्न स्थानों पर भी सारे दिन भारी बारिश की पूर्वानुमान जताई है. विभाग ने उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सौराष्ट्र व कच्छ, मध्य महाराष्ट्र, केरल व तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.
पोरोशेंको ने पहले कहा कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा की तारीख पर सहमति व्यक्त की, जो नए राष्ट्रपति के उद्घाटन के बाद होगी। उन्होंने कहा, "हम दोनों पार्टियों (यूएसए) के गंभीर समर्थन से खुश हैं। " "मुझे पूरा यकीन है कि हमारे सहयोग की निरंतरता बहुत प्रभावी होगी," पोरोशेंको ने कहा। हमेशा की तरह, मॉस्को की कुछ आलोचनाएं हुईं। पोरोशेंको ने रूस को "हमलावर" कहा और घोषणा की कि रूसी-विरोधी प्रतिबंधों की अस्वीकृति "पैन-यूरोपीय मूल्यों का उल्लंघन किए बिना असंभव है। "
पोरोशेंको ने पहले कहा कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी यात्रा की तारीख पर सहमति व्यक्त की, जो नए राष्ट्रपति के उद्घाटन के बाद होगी। उन्होंने कहा, "हम दोनों पार्टियों के गंभीर समर्थन से खुश हैं। " "मुझे पूरा यकीन है कि हमारे सहयोग की निरंतरता बहुत प्रभावी होगी," पोरोशेंको ने कहा। हमेशा की तरह, मॉस्को की कुछ आलोचनाएं हुईं। पोरोशेंको ने रूस को "हमलावर" कहा और घोषणा की कि रूसी-विरोधी प्रतिबंधों की अस्वीकृति "पैन-यूरोपीय मूल्यों का उल्लंघन किए बिना असंभव है। "
महिला सौंदर्य और आकर्षण की विशेषताओं में से एक - जाहिर है, लंबे और शराबी पलकें है। वे देखो पर जोर देना है, यह सेक्सी और अर्थपूर्ण हैं। हर महिला को अपने प्यारे और का एक स्वाभाविक गरिमा गर्व कर सकता है लंबे समय तक बरौनी। इस स्थिति में सुधार करने के लिए, वहाँ एक लोकप्रिय है पलकों के विकास के लिए उपकरण, यह प्रभावी और सुरक्षित है। जोर से मारना विभिन्न तरीकों घर में किया जाता है। ये बरौनी एक्सटेंशन और विशेष अस्तर का उपयोग शामिल है। इन तरीकों प्रभावी रहे हैं, लेकिन वे हर दिन इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, और इन प्रक्रियाओं के लिए समय हमेशा महिलाओं के लिए दुकान में नहीं है। प्राकृतिक लैश के लिए burdock या अरंडी का तेल लागू करने के लिए लोकप्रिय तरीका का उपयोग करें। कैसे पलकें विकसित करने के लिए घर पर, अरंडी का तेल के मास्क का उपयोग कर? किसी भी आधुनिक फार्मेसी बेचने अरंडी या छोटे शीशियों में burdock तेल में। आप इसे खरीदने के लिए, अच्छी तरह से पुराने शवों से ब्रश धो लो, और अपने बरौनी के सुझावों पर तेल के आवेदन के लिए उपयोग कर सकते है। हम जानते हैं कि यह आंख और पलकों में हिट नहीं करता अत्यधिक सावधानी के साथ ऐसा करना चाहिए,। तेल बहुत चिकना है, और अगर यह पलक त्वचा पर पड़ता है, यह उससे दूर करने के लिए मुश्किल है। भौंहों के विकास के लिए, आप सब्सट्रेट के एक कपास पैड का उपयोग कर सकते हैं। यह रात में तेल आइब्रो के लिए एक मुखौटा छोड़ने के लिए सलाह दी जाती है। आप पलकों पर तेल लागू करने के बाद, उन्हें एक सूखे कपड़े या कपास पट्टी 15 मिनट के बाद से पोंछ लिए। बरौनी विकास के लिए इस लोक उपाय बहुत प्रभावी ढंग से और कुछ ही हफ्तों में आप पहला परिणाम पहले से ही ध्यान देंगे। महत्वपूर्ण बात यह है हर दिन इस प्रक्रिया को करने के लिए मत भूलना। तुम भी समुद्र हिरन का सींग और जैतून का तेल का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने यह भी उपयोगी गुण और मदद बाल विकास को मजबूत करने के लिए है। वहाँ भी बरौनी विकास आधारित शोरबे कॉर्नफ़्लावर और कैमोमाइल के लिए एक लोक उपाय है। आप उबलते पानी फूलों की 1 बड़ा चम्मच और एक दिन जलसेक तनाव के साथ काढ़ा करने के लिए की जरूरत है। यह समाधान 10-15 मिनट के लिए पलकें और एक कपास पैड के साथ पलकें को लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, इस संरचना आँख थकान के लक्षणों को समाप्त। यह बहुत महत्वपूर्ण है और मालिश सदी के लिए उपयोगी पलकें और भौंहों की वृद्धि है। यह रक्त परिसंचरण में सुधार और उनके विकास को बढ़ावा। मालिश के लिए उपयोग कर मुसब्बर रस, तेल के साथ मिश्रित, अजमोद रस की एक छोटी राशि के अलावा के साथ। यह आपको लैश रेखा के साथ त्वचा में मला किए जाने की जरूरत का मतलब है। इसके अलावा मुखौटा के लिए आप मुसब्बर, विटामिन ए, और अरंडी का तेल का 1 बड़ा चम्मच का रस मिश्रण कर सकते हैं। ये घटक कनेक्ट होना आवश्यक है और 2-3 घंटे के लिए बरौनी पर डाल सोने के लिए खाना पकाने से पहले। कुछ समय के बाद, एक कपास पट्टी के साथ मुखौटा हटा दें। ये साधारण प्रक्रियाओं आप ज्यादा समय और श्रम लेने नहीं होगा, लेकिन एक परिणाम के रूप में आप हानिकारक रसायनों का उपयोग किए बिना एक मोटी शराबी और मोटा बरौनी मिलता है और यह भी उनके स्वास्थ्य समझौता किए बिना करते हैं। एक विशिष्ट स्वरूप को अपने प्रशंसकों के प्रति उदासीन नहीं छोड़ देंगे। लोक चिकित्सा में, वहाँ है, कई तरह के व्यंजनों हैं फिर भी, आप अशुद्धियों और योजकों का मुफ्त उपयोग कर सकते रेडीमेड अरंडी का तेल के साथ, इस बरौनी विकास के लिए एक लोक उपाय है, यह आसान आवेदन के लिए एक ब्रश के साथ विशेष ट्यूबों में कॉस्मेटिक की दुकानों में बेचा जाता है। करने के लिए कम बरौनी बाहर गिर, सुनिश्चित करें कि आप गुणवत्ता महंगा सौंदर्य प्रसाधन था बनाते हैं। कभी नहीं, एक लंबे समय के लिए एक ही मेकअप पहन अगर आप काम कर दिन के अंत में, पेंट बरौनी के साथ काम करने के लिए चला गया, या जब वे घर लौटने के लिए, आप मेकअप को धोने और आपकी त्वचा, भौहें और पलकें की जरूरत बाकी जाने की जरूरत है, और एक बार में सभी का सबसे अच्छा बनाने के लिए चेहरा और पलकें के लिए मुखौटा हाइड्रेटिंग। अपने बरौनी की देखभाल, तो वे लंबे समय से सुंदर और मोटी रहेगा।
महिला सौंदर्य और आकर्षण की विशेषताओं में से एक - जाहिर है, लंबे और शराबी पलकें है। वे देखो पर जोर देना है, यह सेक्सी और अर्थपूर्ण हैं। हर महिला को अपने प्यारे और का एक स्वाभाविक गरिमा गर्व कर सकता है लंबे समय तक बरौनी। इस स्थिति में सुधार करने के लिए, वहाँ एक लोकप्रिय है पलकों के विकास के लिए उपकरण, यह प्रभावी और सुरक्षित है। जोर से मारना विभिन्न तरीकों घर में किया जाता है। ये बरौनी एक्सटेंशन और विशेष अस्तर का उपयोग शामिल है। इन तरीकों प्रभावी रहे हैं, लेकिन वे हर दिन इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, और इन प्रक्रियाओं के लिए समय हमेशा महिलाओं के लिए दुकान में नहीं है। प्राकृतिक लैश के लिए burdock या अरंडी का तेल लागू करने के लिए लोकप्रिय तरीका का उपयोग करें। कैसे पलकें विकसित करने के लिए घर पर, अरंडी का तेल के मास्क का उपयोग कर? किसी भी आधुनिक फार्मेसी बेचने अरंडी या छोटे शीशियों में burdock तेल में। आप इसे खरीदने के लिए, अच्छी तरह से पुराने शवों से ब्रश धो लो, और अपने बरौनी के सुझावों पर तेल के आवेदन के लिए उपयोग कर सकते है। हम जानते हैं कि यह आंख और पलकों में हिट नहीं करता अत्यधिक सावधानी के साथ ऐसा करना चाहिए,। तेल बहुत चिकना है, और अगर यह पलक त्वचा पर पड़ता है, यह उससे दूर करने के लिए मुश्किल है। भौंहों के विकास के लिए, आप सब्सट्रेट के एक कपास पैड का उपयोग कर सकते हैं। यह रात में तेल आइब्रो के लिए एक मुखौटा छोड़ने के लिए सलाह दी जाती है। आप पलकों पर तेल लागू करने के बाद, उन्हें एक सूखे कपड़े या कपास पट्टी पंद्रह मिनट के बाद से पोंछ लिए। बरौनी विकास के लिए इस लोक उपाय बहुत प्रभावी ढंग से और कुछ ही हफ्तों में आप पहला परिणाम पहले से ही ध्यान देंगे। महत्वपूर्ण बात यह है हर दिन इस प्रक्रिया को करने के लिए मत भूलना। तुम भी समुद्र हिरन का सींग और जैतून का तेल का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने यह भी उपयोगी गुण और मदद बाल विकास को मजबूत करने के लिए है। वहाँ भी बरौनी विकास आधारित शोरबे कॉर्नफ़्लावर और कैमोमाइल के लिए एक लोक उपाय है। आप उबलते पानी फूलों की एक बड़ा चम्मच और एक दिन जलसेक तनाव के साथ काढ़ा करने के लिए की जरूरत है। यह समाधान दस-पंद्रह मिनट के लिए पलकें और एक कपास पैड के साथ पलकें को लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, इस संरचना आँख थकान के लक्षणों को समाप्त। यह बहुत महत्वपूर्ण है और मालिश सदी के लिए उपयोगी पलकें और भौंहों की वृद्धि है। यह रक्त परिसंचरण में सुधार और उनके विकास को बढ़ावा। मालिश के लिए उपयोग कर मुसब्बर रस, तेल के साथ मिश्रित, अजमोद रस की एक छोटी राशि के अलावा के साथ। यह आपको लैश रेखा के साथ त्वचा में मला किए जाने की जरूरत का मतलब है। इसके अलावा मुखौटा के लिए आप मुसब्बर, विटामिन ए, और अरंडी का तेल का एक बड़ा चम्मच का रस मिश्रण कर सकते हैं। ये घटक कनेक्ट होना आवश्यक है और दो-तीन घंटाटे के लिए बरौनी पर डाल सोने के लिए खाना पकाने से पहले। कुछ समय के बाद, एक कपास पट्टी के साथ मुखौटा हटा दें। ये साधारण प्रक्रियाओं आप ज्यादा समय और श्रम लेने नहीं होगा, लेकिन एक परिणाम के रूप में आप हानिकारक रसायनों का उपयोग किए बिना एक मोटी शराबी और मोटा बरौनी मिलता है और यह भी उनके स्वास्थ्य समझौता किए बिना करते हैं। एक विशिष्ट स्वरूप को अपने प्रशंसकों के प्रति उदासीन नहीं छोड़ देंगे। लोक चिकित्सा में, वहाँ है, कई तरह के व्यंजनों हैं फिर भी, आप अशुद्धियों और योजकों का मुफ्त उपयोग कर सकते रेडीमेड अरंडी का तेल के साथ, इस बरौनी विकास के लिए एक लोक उपाय है, यह आसान आवेदन के लिए एक ब्रश के साथ विशेष ट्यूबों में कॉस्मेटिक की दुकानों में बेचा जाता है। करने के लिए कम बरौनी बाहर गिर, सुनिश्चित करें कि आप गुणवत्ता महंगा सौंदर्य प्रसाधन था बनाते हैं। कभी नहीं, एक लंबे समय के लिए एक ही मेकअप पहन अगर आप काम कर दिन के अंत में, पेंट बरौनी के साथ काम करने के लिए चला गया, या जब वे घर लौटने के लिए, आप मेकअप को धोने और आपकी त्वचा, भौहें और पलकें की जरूरत बाकी जाने की जरूरत है, और एक बार में सभी का सबसे अच्छा बनाने के लिए चेहरा और पलकें के लिए मुखौटा हाइड्रेटिंग। अपने बरौनी की देखभाल, तो वे लंबे समय से सुंदर और मोटी रहेगा।
इंडियन आर्मी के सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर ने ग्रुप सी के 96 पदों पर भर्ती निकाली है। इन पदों के लिए आवेदन डाक से भेजने होंगे। 20 सितंबर 2022 तक आवेदन पहुंचना जरूरी है। रिक्त पदों में बार्बर, सफाईवाली चौकीदार, ट्रेड्समैन मेट शामिल हैं। परीक्षा की तिथि व स्थान की जानकारी बाद में दी जाएगी। ये भर्तियां लखनऊ, इलाहाबाद, देहरादून, फतेहगढ़, फैजाबाद, महू, रानीखेत, जबलपुर, गया, रुड़की, वाराणसी, दानापुर, मेरठ, नामकुम जैसी जगहों पर होगी। बार्बर की 12, चौकीदार की 21, सफाईवाली की 43 और ट्रेड्समैन मेट की 16 वैकेंसी हैं। 10वीं पास व संबंधित कार्य में एक साल का अनुभव। आयु सीमा - 18 से 25 वर्ष। सभी आरक्षित वर्गों को नियमों के मुताबिक छूट मिलेगी। HQ Central Commanded( BOO-II), Military Hospital Roorkee, Dist- Haridwar( Uttarakhand) PIN- 247667. आवेदन के साथ 100 रुपये का पोस्टल ऑर्डर भी लगाना होगा जो कि कमांडेंट एमएच रुड़की के नाम पर होगा। आवेदन के साथ दो पासपोर्ट साइज फोटो भी भेजनी होगी।
इंडियन आर्मी के सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर ने ग्रुप सी के छियानवे पदों पर भर्ती निकाली है। इन पदों के लिए आवेदन डाक से भेजने होंगे। बीस सितंबर दो हज़ार बाईस तक आवेदन पहुंचना जरूरी है। रिक्त पदों में बार्बर, सफाईवाली चौकीदार, ट्रेड्समैन मेट शामिल हैं। परीक्षा की तिथि व स्थान की जानकारी बाद में दी जाएगी। ये भर्तियां लखनऊ, इलाहाबाद, देहरादून, फतेहगढ़, फैजाबाद, महू, रानीखेत, जबलपुर, गया, रुड़की, वाराणसी, दानापुर, मेरठ, नामकुम जैसी जगहों पर होगी। बार्बर की बारह, चौकीदार की इक्कीस, सफाईवाली की तैंतालीस और ट्रेड्समैन मेट की सोलह वैकेंसी हैं। दसवीं पास व संबंधित कार्य में एक साल का अनुभव। आयु सीमा - अट्ठारह से पच्चीस वर्ष। सभी आरक्षित वर्गों को नियमों के मुताबिक छूट मिलेगी। HQ Central Commanded, Military Hospital Roorkee, Dist- Haridwar PIN- दो लाख सैंतालीस हज़ार छः सौ सरसठ. आवेदन के साथ एक सौ रुपयापये का पोस्टल ऑर्डर भी लगाना होगा जो कि कमांडेंट एमएच रुड़की के नाम पर होगा। आवेदन के साथ दो पासपोर्ट साइज फोटो भी भेजनी होगी।
अमेरिका ने अलास्का के आसमान में बहुत ऊंचाई पर उड़ रही एक अनजान वस्तु को जेट से हमला कर नीचे गिरा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को इसे गिराने के आदेश दिए थे. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया कि ये अनजानी वस्तु 'एक छोटी कार के आकार' की है और यात्री विमानों के लिए 'ख़तरा बन गई थी'. जॉन किर्बी ने कहा कि ये वस्तु कहां से आई थी और इसका क्या उद्देश्य है, ये अभी तक साफ़ नहीं है. ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब सप्ताह भर पहले अमेरिका के आसमान में उड़ रहे एक चीनी बलून को साउथ कैरोलीना तट पर सेना के एक विमान ने गिरा दिया था. शुक्रवार को व्हाइट हाउस में जॉन किर्बी ने बताया कि अलास्का के आसमान में मिली वस्तु को वायु सेना के एफ़-22 फाइटर जेट ने शुक्रवार को नीचे गिराया गया था. इसका मलबा चीनी बलून के मलबे के मुक़ाबले बहुत कम है. उन्होंने बताया कि ये वस्तु अलास्का के उत्तरी तट पर 40 हज़ार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी. जबकि यात्री विमान 40 से 45 हज़ार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं. ऐसे में ये यात्री विमानों के लिए ख़तरा बन सकता था. उन्होंने बताया कि जब इस वस्तु को गिराया गया तो ये 64 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से नॉर्थ पोल की तरफ़ बढ़ रही थी. हवा में कैसे उड़ रही थी ये वस्तु? इस वस्तु के मलबे की तलाश के लिए ब्यूफ़ोर्ट सागर के जमे हुए पानी के आसपास हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ़्ट को तैनात किया गया है. जॉन किर्बी ने कहा, "हमें नहीं पता कि ये किसका है. ये किसी सरकार का है या किसी कंपनी का या व्यक्ति की निजी वस्तु है. " गुरुवार रात को पहली बार इस वस्तु को आसमान में देखा गया था, हालांकि अधिकारियों ने इसके देखे जाने समय की पुष्टि नहीं की है. किर्बी ने कहा, "हम अपने हवाई क्षेत्र को लेकर बेहद सजग रहते हैं. राष्ट्रपति देश की सुरक्षा के दायित्व को सबसे ऊपर रखते हैं. " उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले दो फ़ाइटर विमानों ने इस वस्तु के आसपास चक्कर लगाया और ये सुनिश्चित किया कि इसमें कोई व्यक्ति सवार नहीं है. एबीसी न्यूज़ के मुताबिक़ इस वस्तु को कोई और चीज़ संचालित नहीं कर रही थी. मीडिया संस्थान के वैश्विक मामलों के पत्रकार मार्था रेडेट्ज़ ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से लिखा था, "ये वस्तु हवा में तैर रही थी. ये सिलिंडर आकार की थी और चांदी की चमक वाले स्लेटी रंग की थी. " रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने बताया कि ये वस्तु पिछले हफ़्ते मिले "चीनी गुब्बारे के आकार और ढांचे की तरह नहीं थी". उन्होंने पुष्टि की कि एफ़-22 जेट ने इस वस्तु को शुक्रवार को यूरोपीय समयानुसार एक बज तक 45 मिनट पर साइडविंडर मिसाइल से गिरा दिया था. जनरल राइडर ने कहा कि अभी तक काफ़ी मलबा इकट्ठा कर लिया गया है. इसे जहाजों पर लादकर 'विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला' में लाया जा रहा है. जॉन किर्बी ने ये पूरी तरह साफ़ नहीं किया कि ये कहां गिराया गया है लेकिन फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि गिरने से पहले ये वस्तु उत्तरी अलास्का के डेडहोर्स के ऊपर अमेरिकी हवाई क्षेत्र के लगभग 10 वर्ग मील के नज़दीक था. ये जगह कनाडा की सीमा से 130 मील दूर है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्विटर पर कहा कि उन्हें अमेरिकी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाली इस वस्तु के बारे में जानकारी दी गई थी और 'वो इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं'. वहीं व्हाइट हाउस के मुताबिक़ फिलहाल अमेरिका के हवाई क्षेत्र में चिंता पैदा करने वाली कोई वस्तु नहीं है. जॉन किर्बी ने कहा कि इस वस्तु को चलाने के लिए चीनी गुब्बारे जैसा इसमें कुछ नहीं था. ये हवा की गति से साथ बहता हुआ लग रहा था. चीनी गुब्बारे को पिछले शनिवार को गिराने के बाद रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने अपने चीनी समकक्ष को स्पेशल क्राइसिस लाइन पर संपर्क किया. लेकिन, रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ चीनी रक्षा मंत्री ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया था. चीनी अधिकारियों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि अमेरिका इस मामले का राजनीतिकरण कर रहा है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा है. वहीं, राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को साक्षात्कार में चीनी गुब्बारे को लेकर अमेरिकी प्रतिक्रिया का बचाव किया था. हालांकि, ये भी कहा था कि ये कोई बड़ा उल्लंघन नहीं था. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
अमेरिका ने अलास्का के आसमान में बहुत ऊंचाई पर उड़ रही एक अनजान वस्तु को जेट से हमला कर नीचे गिरा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को इसे गिराने के आदेश दिए थे. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया कि ये अनजानी वस्तु 'एक छोटी कार के आकार' की है और यात्री विमानों के लिए 'ख़तरा बन गई थी'. जॉन किर्बी ने कहा कि ये वस्तु कहां से आई थी और इसका क्या उद्देश्य है, ये अभी तक साफ़ नहीं है. ये फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब सप्ताह भर पहले अमेरिका के आसमान में उड़ रहे एक चीनी बलून को साउथ कैरोलीना तट पर सेना के एक विमान ने गिरा दिया था. शुक्रवार को व्हाइट हाउस में जॉन किर्बी ने बताया कि अलास्का के आसमान में मिली वस्तु को वायु सेना के एफ़-बाईस फाइटर जेट ने शुक्रवार को नीचे गिराया गया था. इसका मलबा चीनी बलून के मलबे के मुक़ाबले बहुत कम है. उन्होंने बताया कि ये वस्तु अलास्का के उत्तरी तट पर चालीस हज़ार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी. जबकि यात्री विमान चालीस से पैंतालीस हज़ार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं. ऐसे में ये यात्री विमानों के लिए ख़तरा बन सकता था. उन्होंने बताया कि जब इस वस्तु को गिराया गया तो ये चौंसठ किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से नॉर्थ पोल की तरफ़ बढ़ रही थी. हवा में कैसे उड़ रही थी ये वस्तु? इस वस्तु के मलबे की तलाश के लिए ब्यूफ़ोर्ट सागर के जमे हुए पानी के आसपास हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ़्ट को तैनात किया गया है. जॉन किर्बी ने कहा, "हमें नहीं पता कि ये किसका है. ये किसी सरकार का है या किसी कंपनी का या व्यक्ति की निजी वस्तु है. " गुरुवार रात को पहली बार इस वस्तु को आसमान में देखा गया था, हालांकि अधिकारियों ने इसके देखे जाने समय की पुष्टि नहीं की है. किर्बी ने कहा, "हम अपने हवाई क्षेत्र को लेकर बेहद सजग रहते हैं. राष्ट्रपति देश की सुरक्षा के दायित्व को सबसे ऊपर रखते हैं. " उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले दो फ़ाइटर विमानों ने इस वस्तु के आसपास चक्कर लगाया और ये सुनिश्चित किया कि इसमें कोई व्यक्ति सवार नहीं है. एबीसी न्यूज़ के मुताबिक़ इस वस्तु को कोई और चीज़ संचालित नहीं कर रही थी. मीडिया संस्थान के वैश्विक मामलों के पत्रकार मार्था रेडेट्ज़ ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से लिखा था, "ये वस्तु हवा में तैर रही थी. ये सिलिंडर आकार की थी और चांदी की चमक वाले स्लेटी रंग की थी. " रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने बताया कि ये वस्तु पिछले हफ़्ते मिले "चीनी गुब्बारे के आकार और ढांचे की तरह नहीं थी". उन्होंने पुष्टि की कि एफ़-बाईस जेट ने इस वस्तु को शुक्रवार को यूरोपीय समयानुसार एक बज तक पैंतालीस मिनट पर साइडविंडर मिसाइल से गिरा दिया था. जनरल राइडर ने कहा कि अभी तक काफ़ी मलबा इकट्ठा कर लिया गया है. इसे जहाजों पर लादकर 'विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला' में लाया जा रहा है. जॉन किर्बी ने ये पूरी तरह साफ़ नहीं किया कि ये कहां गिराया गया है लेकिन फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि गिरने से पहले ये वस्तु उत्तरी अलास्का के डेडहोर्स के ऊपर अमेरिकी हवाई क्षेत्र के लगभग दस वर्ग मील के नज़दीक था. ये जगह कनाडा की सीमा से एक सौ तीस मील दूर है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्विटर पर कहा कि उन्हें अमेरिकी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाली इस वस्तु के बारे में जानकारी दी गई थी और 'वो इस कार्रवाई का समर्थन करते हैं'. वहीं व्हाइट हाउस के मुताबिक़ फिलहाल अमेरिका के हवाई क्षेत्र में चिंता पैदा करने वाली कोई वस्तु नहीं है. जॉन किर्बी ने कहा कि इस वस्तु को चलाने के लिए चीनी गुब्बारे जैसा इसमें कुछ नहीं था. ये हवा की गति से साथ बहता हुआ लग रहा था. चीनी गुब्बारे को पिछले शनिवार को गिराने के बाद रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने अपने चीनी समकक्ष को स्पेशल क्राइसिस लाइन पर संपर्क किया. लेकिन, रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ चीनी रक्षा मंत्री ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया था. चीनी अधिकारियों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि अमेरिका इस मामले का राजनीतिकरण कर रहा है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा है. वहीं, राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को साक्षात्कार में चीनी गुब्बारे को लेकर अमेरिकी प्रतिक्रिया का बचाव किया था. हालांकि, ये भी कहा था कि ये कोई बड़ा उल्लंघन नहीं था.
कल तक समय नहीं था रिश्ते निभाने का पर आज समय ही समय है अतुल सोच रहा था। तीन दिन हो गए लाक्डाउन के। ऋचा के कामों में मदद किया ऑफ़िस का भी कुछ काम निपटाया पर अब बोरियत हो रही घर में। ऋचा ने सुझाव दिया क्यूँ ना हम विडिओ कॉल के ज़रिये सब रिश्तेदारो से बात करते हैं, समय भी कट जाएगा और सबको देख और बात कर लेंगे। फिर हम जुट गए, सच को बहुत अच्छा लगा, जिन बच्चा को छोटा देखा वो थोड़े बड़े हो गए, जो रिश्ते समय के अभाव में सूख रहे थे वो कुछ पल के छींटों से फिर जीवित होने लगे।
कल तक समय नहीं था रिश्ते निभाने का पर आज समय ही समय है अतुल सोच रहा था। तीन दिन हो गए लाक्डाउन के। ऋचा के कामों में मदद किया ऑफ़िस का भी कुछ काम निपटाया पर अब बोरियत हो रही घर में। ऋचा ने सुझाव दिया क्यूँ ना हम विडिओ कॉल के ज़रिये सब रिश्तेदारो से बात करते हैं, समय भी कट जाएगा और सबको देख और बात कर लेंगे। फिर हम जुट गए, सच को बहुत अच्छा लगा, जिन बच्चा को छोटा देखा वो थोड़े बड़े हो गए, जो रिश्ते समय के अभाव में सूख रहे थे वो कुछ पल के छींटों से फिर जीवित होने लगे।
असम की रहने वाली शकुंतला दलै गामलिन ने संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए दिव्यांगो के लिए किए गए सराहनीय कार्यों का ब्यौरा रखा है। शकुंतला भारत सरकार के दिव्यांग विकास मंत्रालय की सचिव हैं। उन्होंने 11 जून को आयोजित दिव्यांग अधिकार सम्मेलन में भारत की ओर से किए सराहनी कार्यों को पुरजोर तरीके रखा। शकुंतला ने अमेरीका न्यूयॉर्क में आयोजित दिव्यांग अधिकार सम्मेलन में अपना भाषण दिया जिसने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने भारत द्वारा दिव्यांगो के विकास के लिए किए कार्यों की जानकारी देते हुए सम्मेलन को संबोधित किया। श्रीमती गामलिन ने अपने भाषण में कहा कि दिव्यांग अगर चाहे तो एक आम इंसान की तरह अपनी जिंदगी जी सकते हैं।
असम की रहने वाली शकुंतला दलै गामलिन ने संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए दिव्यांगो के लिए किए गए सराहनीय कार्यों का ब्यौरा रखा है। शकुंतला भारत सरकार के दिव्यांग विकास मंत्रालय की सचिव हैं। उन्होंने ग्यारह जून को आयोजित दिव्यांग अधिकार सम्मेलन में भारत की ओर से किए सराहनी कार्यों को पुरजोर तरीके रखा। शकुंतला ने अमेरीका न्यूयॉर्क में आयोजित दिव्यांग अधिकार सम्मेलन में अपना भाषण दिया जिसने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होंने भारत द्वारा दिव्यांगो के विकास के लिए किए कार्यों की जानकारी देते हुए सम्मेलन को संबोधित किया। श्रीमती गामलिन ने अपने भाषण में कहा कि दिव्यांग अगर चाहे तो एक आम इंसान की तरह अपनी जिंदगी जी सकते हैं।
Zaheer Khan retires- भारत के दूसरे सबसे सफल फास्ट बॉलर जहीर खान ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंटले लिया है। कपिल देव के बाद टीम इंडिया के सबसे सफल तेज गेंदबाज जहीर खान को ही माना जाता है। जहीर ने क्रिकेट मैदान पर अपनी पारी क्रिकेटर युवराज सिंह के साथ ही शुरुआत की थी। जहीर ने भारत के लिए 92 टेस्ट, 200 वनडे और 17 टी20 मैच खेले है। तीनो फॉर्मेट में कुल मिलाकर उनके 610 विकेट हैं।
Zaheer Khan retires- भारत के दूसरे सबसे सफल फास्ट बॉलर जहीर खान ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंटले लिया है। कपिल देव के बाद टीम इंडिया के सबसे सफल तेज गेंदबाज जहीर खान को ही माना जाता है। जहीर ने क्रिकेट मैदान पर अपनी पारी क्रिकेटर युवराज सिंह के साथ ही शुरुआत की थी। जहीर ने भारत के लिए बानवे टेस्ट, दो सौ वनडे और सत्रह टीबीस मैच खेले है। तीनो फॉर्मेट में कुल मिलाकर उनके छः सौ दस विकेट हैं।
आचार्यशस्थितिरस्य पृष्ठे स्नानासनादीनि तदंतिके च । तथोत्तरस्यां जननोत्सवादि दीक्षावनं ज्ञानविभूतिसंझ ॥ १८ ॥ अरु याके पृष्ठ भागमें आचार्य अर इंद्रकी स्थिति करनी, अरु समीप हो स्नान सामयिक आदिको सभा अर ताके उत्तर में जन्मोत्सवसूचक सुमेरु पर्वत रचना अरु ताके अग्र दीक्षावन अरु समवसरण स्थान करना ॥ २१८ ॥ नृत्यालयादिः स्वकयोग्यभूमौ विकल्पनीयं परिणाहभागे । गर्भालयात्पश्चिमदिग्विभागे सामग्रिकाकल्पनमग्रभागे ॥ १६ ॥ संप्रेष्यकानामपि नृत्यगीतमतांडवं पुण्यविधानदक्षं । मार्गाविदूरा किल दानशाला सद्भेषजागारमपि कियावत् ॥ २० ॥ अरु अपनी योग्य दिशामें न त्य तांडव वादित्र आदिका स्थान बड़ा विशाल स्थानमें करना। अब इनका विधान कहैं हैं कि गर्भगृहका पश्चिमपार्श्व में सामग्रीकी कल्पना अरु अग्रभागमें में क्षक जनोंका स्थान अरु नृत्य गीत तांडव भी सन्मुख करना, अरु तहां पुण्यका विधानमें निपुण ऐसी दानशाला मार्ग के समीप किंचित दूर करनी । अर औषधगृह भी क्रियासंयुक्त दानशालाके समीप हो योग्य है ॥ २१८-२२० । निस्तारके धर्मनिरूपणं च पृच्छाश्रुतोद्घोषणवाचनादिः । गर्भोत्सवे मातृजनोपवेशः पृथगू नृपागारनिवेशनं च ॥ २१ ॥ अरु निस्तारक जो प्रश्नसभा तिसमें धर्म चर्चा अरु धर्म प्रश्न अर शास्त्रको पठन श्रवण करना, अरु गर्भ कल्याणगृहमें मातृजनोंका निवाश होय अरु भिन्न ही राजाका स्थानमें मंडप करे ॥ २२१ ॥ एवं विधिज्ञस्तु यथानुरूपं देशोचितं संविदधीत युक्त्या । गर्भालये स्थापनमीश्वराणां वेदीत्रिभूरुर्ध्वविशालमध्या ॥ २२ ॥ या प्रकार विधिने जाननहारो यथायोग्य देशकालोचित रचना युक्तिपूर्वक करौ । अर जो गर्भगृह है उसमें प्रतिबिंबनका स्थापन होय अरु वहां बेदी तीन कटिनीकी उर्ध्व-मध्य-अधोरूप विशाल कर ।। २२२ ॥
आचार्यशस्थितिरस्य पृष्ठे स्नानासनादीनि तदंतिके च । तथोत्तरस्यां जननोत्सवादि दीक्षावनं ज्ञानविभूतिसंझ ॥ अट्ठारह ॥ अरु याके पृष्ठ भागमें आचार्य अर इंद्रकी स्थिति करनी, अरु समीप हो स्नान सामयिक आदिको सभा अर ताके उत्तर में जन्मोत्सवसूचक सुमेरु पर्वत रचना अरु ताके अग्र दीक्षावन अरु समवसरण स्थान करना ॥ दो सौ अट्ठारह ॥ नृत्यालयादिः स्वकयोग्यभूमौ विकल्पनीयं परिणाहभागे । गर्भालयात्पश्चिमदिग्विभागे सामग्रिकाकल्पनमग्रभागे ॥ सोलह ॥ संप्रेष्यकानामपि नृत्यगीतमतांडवं पुण्यविधानदक्षं । मार्गाविदूरा किल दानशाला सद्भेषजागारमपि कियावत् ॥ बीस ॥ अरु अपनी योग्य दिशामें न त्य तांडव वादित्र आदिका स्थान बड़ा विशाल स्थानमें करना। अब इनका विधान कहैं हैं कि गर्भगृहका पश्चिमपार्श्व में सामग्रीकी कल्पना अरु अग्रभागमें में क्षक जनोंका स्थान अरु नृत्य गीत तांडव भी सन्मुख करना, अरु तहां पुण्यका विधानमें निपुण ऐसी दानशाला मार्ग के समीप किंचित दूर करनी । अर औषधगृह भी क्रियासंयुक्त दानशालाके समीप हो योग्य है ॥ दो सौ अट्ठारह-दो सौ बीस । निस्तारके धर्मनिरूपणं च पृच्छाश्रुतोद्घोषणवाचनादिः । गर्भोत्सवे मातृजनोपवेशः पृथगू नृपागारनिवेशनं च ॥ इक्कीस ॥ अरु निस्तारक जो प्रश्नसभा तिसमें धर्म चर्चा अरु धर्म प्रश्न अर शास्त्रको पठन श्रवण करना, अरु गर्भ कल्याणगृहमें मातृजनोंका निवाश होय अरु भिन्न ही राजाका स्थानमें मंडप करे ॥ दो सौ इक्कीस ॥ एवं विधिज्ञस्तु यथानुरूपं देशोचितं संविदधीत युक्त्या । गर्भालये स्थापनमीश्वराणां वेदीत्रिभूरुर्ध्वविशालमध्या ॥ बाईस ॥ या प्रकार विधिने जाननहारो यथायोग्य देशकालोचित रचना युक्तिपूर्वक करौ । अर जो गर्भगृह है उसमें प्रतिबिंबनका स्थापन होय अरु वहां बेदी तीन कटिनीकी उर्ध्व-मध्य-अधोरूप विशाल कर ।। दो सौ बाईस ॥
भारतीय टीकाकरण प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होनी है क्योंकि फाइजर सहित तीन वैक्सीन निर्माताओं ने भारत में अपने वैक्सीन उम्मीदवारों के आपातकालीन उपयोग प्राधिकार EUA के लिए आवेदन किया है। सही तारीख का जिक्र किए बिना मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात का ब्योरा उजागर किया कि पूरा टीकाकरण कार्यक्रम कैसे संचालित किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र ने एक आवेदन बनाया है जो शुरू से अंत तक प्रक्रिया की निगरानी करेगा। सह-विन, नया ऐप जो मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध होगा, इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईवीआईएन) का एक उन्नत संस्करण है। - प्रशासकों, टीका लगाने वालों और जो लोग इन वैक्सीन शॉट्स प्राप्त करने जा रहे हैं इस आवेदन का उपयोग कर सकते हैं। - सह-विन आवेदन के माध्यम से सह-रुग्णता वाले लोगों के लिए स्टेज 3 से स्व-पंजीकरण शुरू किया गया है। पहले दो चरण प्राथमिकता समूहों के डेटा पहले से ही संकलित या राज्य सरकार, चरण 1 सीमावर्ती कार्यकर्ताओं और चरण 2 आपातकालीन कार्यकर्ताओं द्वारा संकलन के तहत कर रहे हैं। - सह-विन एप्लिकेशन में पांच मॉड्यूल, प्रशासक मॉड्यूल, पंजीकरण मॉड्यूल, टीकाकरण मॉड्यूल, लाभार्थी पावती मॉड्यूल और रिपोर्ट मॉड्यूल हैं। प्रत्येक टीकाकरण में 30 मिनट का समय लगेगा और एक सत्र में 100 लोगों को टीका लगाया जाएगा। - प्रशासक मॉड्यूल के माध्यम से सत्र बना सकते हैं और संबंधित टीका लगाने वालों और प्रबंधकों को अधिसूचित किया जाएगा। - स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा या सर्वेक्षकों द्वारा प्रदान किए गए सह-रुग्णता पर थोक डेटा पंजीकरण मॉड्यूलमें अपलोड किया जा सकता है। - लाभार्थी विवरण सत्यापन और टीकाकरण की स्थिति को अद्यतन टीकाकरण मॉड्यूलमें किया जाएगा। -लाभार्थी पावती मॉड्यूल लाभार्थियों को एसएमएस भेजेगा, किसी व्यक्ति को टीका लगने के बाद क्यूआर-आधारित प्रमाण पत्र भी उत्पन्न करेगा। - रिपोर्ट मॉड्यूल इस बात की रिपोर्ट तैयार करेगा कि कितने वैक्सीन सत्र आयोजित किए गए हैं, कितने लोगों ने भाग लिया है, कितने लोगों को छोड़ दिया है आदि। - मुख्य सर्वर पर कोल्ड-स्टोरेज इकाइयों के तापमान का वास्तविक समय डेटा भी आवेदन द्वारा भेजा जाएगा। चरणों के समूह के बारे में सचिव ने बताया कि "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सरकार इस पर अंतिम कॉल करेगी और ये चरण अनुक्रमिक नहीं हो सकते हैं। टीकों की उपलब्धता के आधार पर, ये एक साथ चल सकते हैं। सचिव ने आश्वासन दिया, हर व्यक्ति जो टीका लगवाना चाहता है, उसे उनकी खुराक मिल जाएगी।
भारतीय टीकाकरण प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होनी है क्योंकि फाइजर सहित तीन वैक्सीन निर्माताओं ने भारत में अपने वैक्सीन उम्मीदवारों के आपातकालीन उपयोग प्राधिकार EUA के लिए आवेदन किया है। सही तारीख का जिक्र किए बिना मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात का ब्योरा उजागर किया कि पूरा टीकाकरण कार्यक्रम कैसे संचालित किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र ने एक आवेदन बनाया है जो शुरू से अंत तक प्रक्रिया की निगरानी करेगा। सह-विन, नया ऐप जो मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध होगा, इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क का एक उन्नत संस्करण है। - प्रशासकों, टीका लगाने वालों और जो लोग इन वैक्सीन शॉट्स प्राप्त करने जा रहे हैं इस आवेदन का उपयोग कर सकते हैं। - सह-विन आवेदन के माध्यम से सह-रुग्णता वाले लोगों के लिए स्टेज तीन से स्व-पंजीकरण शुरू किया गया है। पहले दो चरण प्राथमिकता समूहों के डेटा पहले से ही संकलित या राज्य सरकार, चरण एक सीमावर्ती कार्यकर्ताओं और चरण दो आपातकालीन कार्यकर्ताओं द्वारा संकलन के तहत कर रहे हैं। - सह-विन एप्लिकेशन में पांच मॉड्यूल, प्रशासक मॉड्यूल, पंजीकरण मॉड्यूल, टीकाकरण मॉड्यूल, लाभार्थी पावती मॉड्यूल और रिपोर्ट मॉड्यूल हैं। प्रत्येक टीकाकरण में तीस मिनट का समय लगेगा और एक सत्र में एक सौ लोगों को टीका लगाया जाएगा। - प्रशासक मॉड्यूल के माध्यम से सत्र बना सकते हैं और संबंधित टीका लगाने वालों और प्रबंधकों को अधिसूचित किया जाएगा। - स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा या सर्वेक्षकों द्वारा प्रदान किए गए सह-रुग्णता पर थोक डेटा पंजीकरण मॉड्यूलमें अपलोड किया जा सकता है। - लाभार्थी विवरण सत्यापन और टीकाकरण की स्थिति को अद्यतन टीकाकरण मॉड्यूलमें किया जाएगा। -लाभार्थी पावती मॉड्यूल लाभार्थियों को एसएमएस भेजेगा, किसी व्यक्ति को टीका लगने के बाद क्यूआर-आधारित प्रमाण पत्र भी उत्पन्न करेगा। - रिपोर्ट मॉड्यूल इस बात की रिपोर्ट तैयार करेगा कि कितने वैक्सीन सत्र आयोजित किए गए हैं, कितने लोगों ने भाग लिया है, कितने लोगों को छोड़ दिया है आदि। - मुख्य सर्वर पर कोल्ड-स्टोरेज इकाइयों के तापमान का वास्तविक समय डेटा भी आवेदन द्वारा भेजा जाएगा। चरणों के समूह के बारे में सचिव ने बताया कि "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सरकार इस पर अंतिम कॉल करेगी और ये चरण अनुक्रमिक नहीं हो सकते हैं। टीकों की उपलब्धता के आधार पर, ये एक साथ चल सकते हैं। सचिव ने आश्वासन दिया, हर व्यक्ति जो टीका लगवाना चाहता है, उसे उनकी खुराक मिल जाएगी।
राजधानी वैशालो को गणिका 'आम्रपाली' को केंद्रबिंदु बनाकर उस परपरा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है जिसके अनुसार उस युग मे नगरवधू को पूरे गण मे सम्मानित किया जाता था और समाज की सर्वाधिक सम्मानित एवं ऐश्वर्यशालिनी महिला होती थी । घटनाप्रधान इस उपन्यास मे आम्रपाली के चरित्र को अत्यंत कुशलतापूर्वक उरेहा गया है। आम्रपाली नगरवधू बन जाने तथा विलासप्रिय नवयुवको की कामवासना को उत्तेजित करने पर भी अपने शरीर को सर्वथा अछूता रखती है तथा वैशाली की इस परपरा की घोर निंदा करती है । पुरावालीन शब्दो का प्रयोग करते हुए वेश-विन्यास, रीति-नीति तथा विभिन्न स्थानो वे चित्रोपम प्रत्यकन द्वारा लेखक ने न केवल ऐति हासिक वातावरण की सफल सृष्टि की है अपितु इसे अत्यत रोचक भी बना दिया है । वंशिकतंत्रम् (मल० कृ० ) [ रचना काल -- अनुमानत ग्यारहवी शती के पूर्व ] कोई अनुभवी वेश्या अपनी पुनी को वेश्यावृत्ति के सारे मर्म सिखाती है । यह ग्रंथ शायद इसी भा की किसी सस्कृत-रचना का अनुवाद है । जिस गंभीरता एव आत्मीयता से माता पुत्री को वेश्यावृत्ति का उपदेश देती है वह दर्शनीय है - 'बेटी । यौवन युवतियो का कामास्न है और वह इद्रधनुप-सा क्षणिक है । यौवन में अजित सपत्ति से ही वार्धक्य का विशाल सागर पार करना पड़ता है। इस काव्य की भाषा मे मधुर मलयाळम तथा ललित संस्कृत का मणिप्रवाल प्रयोग है। वैष्णव पदावली साहित्य रात शुरू हुई । वस्तुत मध्य युग में चैतन्यदेव के जीवन के आधार पर ही चरितकाव्य की रचना की प्रथा प्रारंभ हुई थी। चैतन्यप्रभु की लोवोत्तर जीवन-Fथा के आधार पर गोविंददास (दे० ) ने 'कडचा', जयानंद (दे० ) ने 'चैतन्य मगल' (दे०), वृदावनदास (दे०) ने 'चैतन्य भागवत' (दे० ) एवं कविराज गोस्वामी ने 'चैतन्य चरितामृत' (दे० ) की रचना कर मध्ययुगीन बँगला-साहित्य को अपूर्व श्रीवृद्धि की इन चरित-काव्यो मे चैतन्य की जीवनमहिमा के साथ ही गौडोय वैष्णव भक्ति और उसकी दार्शनिवता की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है । इन ग्रंथो म 'चैतन्य चरितामृन' को सर्वश्रेष्ठ स्वीकार किया जाता है। पाडित्य, भक्ति और काव्य-कुशलता वा अपूर्व परिचय देते हुए कविराज गोस्वामी ने अपने इस वाव्य को चैतन्य वे वाङ्मय विग्रह का रूप दिया है । वैष्णवचरित्रकाव्य ( बँ० प्र० ) श्री चैतन्य महाप्रभु (दे०) के आविर्भाव के पूर्व से हो वडघडीदास ( दे० ), मालाधर वसु (दे० ) आदि वैष्णव कवि राधाकृष्ण के प्रेम-वर्णन और वैष्णव भक्ति के प्रसार मे सलग्न थे। मालाधर बसु वा श्रीकृष्ण विजय' (दे०) प्राकृतन्य युग का प्रथम उत्कृष्ट चरितवाव्य समझा जाता है। इसमे भागवत पुराण के दशम स्वछ का भावानुवाद किया गया है। यह वहा जाता है कि चैतन्यदेव ने इस पुस्तन मे अभिव्यजितत कृष्णलीला के लिए प्रथवार को मुक्त बैठ से प्रशसा की थी और स्वय इससे प्रभावित भी हुए थे। चरितकाव्य की वास्तविक परपरा श्री चैतन्यदेव के आविर्भाव एवं तिरोभाव के उपवैष्णव पदावली साहित्य (वॅ० प्र० ) जयदेव ( दे० ) के 'गीत गोविंद' (दे० ) तथा वड़ चडीदास ( चौदहवी शती) वे' 'श्रीकृष्ण कीर्तन (दे० ) एक मैथिली नवि विद्यापति (दे० ) की पदावली के प्रभावस्वरूप मध्ययुगीन बगला साहित्य में राधा कृष्ण की प्रेमलीला और वैष्णव भक्ति-भावना का अत्यधिक प्रसार हुआ । विशेषकर विद्यापति की पदावली से सपूर्ण वगाल इतना अधिक प्रभावित हुआ था कि मैथिली और अव हट्ट के साथ बँगला भाषा का सम्मिश्रण कर वैष्णव गीति-वविता के माध्यम के रूप में बगाली कवि-मानस में 'ब्रजबुलि' के नाम से एक नवीन भाषा की सृष्टि कर डाली और गेय पदावली मे वैष्णव रस धारा की उत्कृष्ट अभि व्यजना शुरू की। पद्रहवी शती मे श्री चैतन्य महाप्रभु ( दे० ) के आविर्भाव के उपरात कृष्ण लीला की भूमिका के रूप में पवियों ने चैतन्य लीला के पदो की भी रचना प्रारंभ की। इन पदो को गौरचद्रिका' नाम दिया गया । इस वैष्णव पदावली में प्रकृति का समस्त सौदर्य, मानवीय प्रेम के सारे सुकुमार भाव-विसास एव अतोद्रिय रस को अलौकिकता लौविक रूप म प्रस्ट हुई। इन पदावलियों में कविता सुगंभीर, स्वत स्फूर्त अनुभूति की सहज रमधारा म प्रभावित हुई है । पदावली साहित्य बंगाल वा अन्यतम काव्यवृतित्व है। यह बगाली जीवन की विशुद्धतम वाव्यमय अभिव्यक्ति है । बंगाल की समस्त मधुर और कोमल अनुभूति, उसकी भावमुग्धता, जीवन-दर्शन, प्रेमाभक्ति कोमलता सब कुछ इन पदों की सीमित परिधि में प्रकट हुआ है । गोविंददास (दे० ), ज्ञानदास (दे० ) और चंडीदास (दे०) पदावली साहित्य में सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। गोविंददास के पदों में गंभीर भावावेग के साथ युक्ति श्रृंखला का अनुवर्तन हुआ है और अलंकार- बहुल, भंकारप्रधान, मर्यादापूर्ण भाषा का प्रयोग हुआ है। वैष्णव पदावली का बंगाल के जन-मानस पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा था कि अनंतदास, वलरामदास, वासुदेव घोष आदि हिंदू पदकर्त्ताओं के अतिरिक्त दौलत-काजी (दे०), संयद आल।ओल (दे०) जैसे मुसलमान रचयिताओं ने भी अपनी वैष्णव भावानुभूति को काव्यरूप दिया है। व्यंग्य (ध्यंग्यार्थ) ( पारि०) व्यजना (दे० ) के शब्दशक्ति द्वारा जिस अथं की प्रतीति होती है उसे व्यंग्यार्थ कहते है । यह अर्थ वाच्यार्थ (मुख्यार्थ, अभिधेयार्थ) से नितात भिन्न होता है । यह भिन्नता निम्नोक्त नो तत्त्वो पर आधारित हैनिमित्त कारण, आश्रय, कार्य, काल, वोद्धा, संख्या, विषय, प्रतीति और स्वरूप ( सा० द० 5.2 ) । व्यग्यार्थ को प्रतीता नं, प्रतीयमानार्थ, ध्वन्यर्थ (अथवा ध्वनि (दे० ) आदि भी कहते हैं । 'व्यंग्यार्थ' की प्रतीति शब्द और अर्थ के शासन (व्याकरण-संगत शब्दज्ञान और मीमांसा - संगत अर्थ- ज्ञान ) से नही हो जाती, अपितु यह तो काव्य के मर्मज्ञ सहृदयों को ही होती है । ( ध्वन्या०] 1.7 ) व्यंग्यार्थ ( ध्वनि) के ही तारतम्य के आधार पर समस्त काव्य तीन प्रमुख प्रकारों में विभक्त किया गया है- ध्वनि काव्य, गुणीभूतव्यंग्य (दे० ) काव्य और चित्रकाव्य (दे० ) । इन तीनों में वाच्यार्थ की अपेक्षा व्यंग्याथं ( ध्वनि, ध्वन्यथं ) क्रमशः प्रधान, गौण और अस्फुट से रहता है। व्यंजना (पारि०) संस्कृत काव्यशास्त्र एवं व्याकरण में निरूपित शब्दशक्तियों - अभिधा (दे० ), लक्षणा (दे० ) और व्यंजना में से अंतिम, किंतु सर्वाधिक सशक्त अभिधा और लक्षणा का बाध होने पर शब्द की जिस शक्ति के द्वारा किसी शब्द अथवा वाक्य के किसी अन्य विशिष्ट अर्थ का अवबोध होता है वही शक्ति व्यंजना है। अभिधा शब्द के संकेतार्थ का वाचन करती है, लक्षणा मुख्यार्थ के बाधित होने पर उसी से संबंधित किसी अन्य अर्थ का वोध कराती है, किंतु व्यंजना से प्राप्त अर्थ इन दोनो शक्तियों के पूर्णतया असमर्थ होने पर ही प्राप्त होता है जो अनिवार्यतः अधिक गूढ़, कमनीय अद्भुत और मार्मिक होता है। व्यंजना की इम अर्थावबोधन प्रक्रिया को शास्त्र में 'ध्वनन' कहा गया है । ध्यंजना शक्ति के दो भेद किए गए हैं : 'गाब्दी व्यंजना' और 'आर्थी व्यंजना ।' । 'शाब्दी व्यंजना' अभिधामूला और लक्षणामूला दो प्रकार की होती है। 'आर्थी व्यंजना के ववत्, बोधव्य, काकु, वाक्य, वाच्य, अन्यसन्निधि, प्रस्ताव, देश, काल तथा चेप्टा के आधार पर दम भेद माने गए हैं । ध्वक्तिविवेक (सं० कृ० ) [ समय --- ग्यारहवीं शती का मध्यकाल । ग्यारहवीं शती के मध्यकाल में रचित 'व्यक्तिविवेक' ही संस्कृत साहित्य की एक ऐसी उल्लेम्य कृति है जिसने अनंदवर्धन (दे०) के ध्वनिसिद्धांत का प्रवल विरोध किया। इस ग्रंथ के रचनाकार महिमभट्ट (दे० ) स्वयं कहते हैं कि उनकी कृति की रचना का एकमात्र कारण 'ध्वनि' का सांगोपांग खंडन कर उसका अनुमान में अंतर्भाव करता है। इसलिए वे अनुमान की प्रक्रिया के आधार पर ध्वनि को उसके भेदोपभेदों सहित अनुमानगम्य सिद्ध करते हैं । इस ग्रंथ में काव्य के दोप, गुण, अलंकार एवं रसादि तत्त्वों की मीमांसा दर्शन और व्याकरण की पृष्ठभूमि में हुई है। यह भी इस ग्रंथ का एक वैशिष्ट्य है। इस ग्रंथ के विवेचन की प्रणाली प्रायः इस प्रकार रही है - वृत्ति, उदाहरण तथा अंत में कारिकाएँ । 'व्यक्तिविवेक' की अब तक कुल दो टीकाएँ उपलब्ध हुई हैं - - रय्यक (दे० ) - कृत व्यक्तिविवेक-व्याख्यान तथा 'मधुसूदन-विवृति' । व्यभिचारिभाव (पारि० ) भरत (दे० ) के निम्नोक्त सूत्र में 'व्यभिचारी' शब्द का प्रयोग मिलता है--विभावानुभाव व्यभिचारि संयोगाद्रसनिष्पत्तिः ' ( ना० शा० पष्ठ अध्याय ) । 'व्यभिचारी को ही व्यभिचारिभाव' तथा 'संचारिभाव' कहा जाता है। व्यभिचारिभाव' इसलिए कि ये भाव प्रत्येक स्थायिभाव के साथ विशेष रूप से अभिमुख होकर उसके अनुकूल (सहायक ) वरकर चलते हैं : विषादासि मुस्येन चरणाद् व्यभिचारिणः ( सा० द० 3.140 ) ।
राजधानी वैशालो को गणिका 'आम्रपाली' को केंद्रबिंदु बनाकर उस परपरा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है जिसके अनुसार उस युग मे नगरवधू को पूरे गण मे सम्मानित किया जाता था और समाज की सर्वाधिक सम्मानित एवं ऐश्वर्यशालिनी महिला होती थी । घटनाप्रधान इस उपन्यास मे आम्रपाली के चरित्र को अत्यंत कुशलतापूर्वक उरेहा गया है। आम्रपाली नगरवधू बन जाने तथा विलासप्रिय नवयुवको की कामवासना को उत्तेजित करने पर भी अपने शरीर को सर्वथा अछूता रखती है तथा वैशाली की इस परपरा की घोर निंदा करती है । पुरावालीन शब्दो का प्रयोग करते हुए वेश-विन्यास, रीति-नीति तथा विभिन्न स्थानो वे चित्रोपम प्रत्यकन द्वारा लेखक ने न केवल ऐति हासिक वातावरण की सफल सृष्टि की है अपितु इसे अत्यत रोचक भी बना दिया है । वंशिकतंत्रम् [ रचना काल -- अनुमानत ग्यारहवी शती के पूर्व ] कोई अनुभवी वेश्या अपनी पुनी को वेश्यावृत्ति के सारे मर्म सिखाती है । यह ग्रंथ शायद इसी भा की किसी सस्कृत-रचना का अनुवाद है । जिस गंभीरता एव आत्मीयता से माता पुत्री को वेश्यावृत्ति का उपदेश देती है वह दर्शनीय है - 'बेटी । यौवन युवतियो का कामास्न है और वह इद्रधनुप-सा क्षणिक है । यौवन में अजित सपत्ति से ही वार्धक्य का विशाल सागर पार करना पड़ता है। इस काव्य की भाषा मे मधुर मलयाळम तथा ललित संस्कृत का मणिप्रवाल प्रयोग है। वैष्णव पदावली साहित्य रात शुरू हुई । वस्तुत मध्य युग में चैतन्यदेव के जीवन के आधार पर ही चरितकाव्य की रचना की प्रथा प्रारंभ हुई थी। चैतन्यप्रभु की लोवोत्तर जीवन-Fथा के आधार पर गोविंददास ने 'कडचा', जयानंद ने 'चैतन्य मगल' , वृदावनदास ने 'चैतन्य भागवत' एवं कविराज गोस्वामी ने 'चैतन्य चरितामृत' की रचना कर मध्ययुगीन बँगला-साहित्य को अपूर्व श्रीवृद्धि की इन चरित-काव्यो मे चैतन्य की जीवनमहिमा के साथ ही गौडोय वैष्णव भक्ति और उसकी दार्शनिवता की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है । इन ग्रंथो म 'चैतन्य चरितामृन' को सर्वश्रेष्ठ स्वीकार किया जाता है। पाडित्य, भक्ति और काव्य-कुशलता वा अपूर्व परिचय देते हुए कविराज गोस्वामी ने अपने इस वाव्य को चैतन्य वे वाङ्मय विग्रह का रूप दिया है । वैष्णवचरित्रकाव्य श्री चैतन्य महाप्रभु के आविर्भाव के पूर्व से हो वडघडीदास , मालाधर वसु आदि वैष्णव कवि राधाकृष्ण के प्रेम-वर्णन और वैष्णव भक्ति के प्रसार मे सलग्न थे। मालाधर बसु वा श्रीकृष्ण विजय' प्राकृतन्य युग का प्रथम उत्कृष्ट चरितवाव्य समझा जाता है। इसमे भागवत पुराण के दशम स्वछ का भावानुवाद किया गया है। यह वहा जाता है कि चैतन्यदेव ने इस पुस्तन मे अभिव्यजितत कृष्णलीला के लिए प्रथवार को मुक्त बैठ से प्रशसा की थी और स्वय इससे प्रभावित भी हुए थे। चरितकाव्य की वास्तविक परपरा श्री चैतन्यदेव के आविर्भाव एवं तिरोभाव के उपवैष्णव पदावली साहित्य जयदेव के 'गीत गोविंद' तथा वड़ चडीदास वे' 'श्रीकृष्ण कीर्तन एक मैथिली नवि विद्यापति की पदावली के प्रभावस्वरूप मध्ययुगीन बगला साहित्य में राधा कृष्ण की प्रेमलीला और वैष्णव भक्ति-भावना का अत्यधिक प्रसार हुआ । विशेषकर विद्यापति की पदावली से सपूर्ण वगाल इतना अधिक प्रभावित हुआ था कि मैथिली और अव हट्ट के साथ बँगला भाषा का सम्मिश्रण कर वैष्णव गीति-वविता के माध्यम के रूप में बगाली कवि-मानस में 'ब्रजबुलि' के नाम से एक नवीन भाषा की सृष्टि कर डाली और गेय पदावली मे वैष्णव रस धारा की उत्कृष्ट अभि व्यजना शुरू की। पद्रहवी शती मे श्री चैतन्य महाप्रभु के आविर्भाव के उपरात कृष्ण लीला की भूमिका के रूप में पवियों ने चैतन्य लीला के पदो की भी रचना प्रारंभ की। इन पदो को गौरचद्रिका' नाम दिया गया । इस वैष्णव पदावली में प्रकृति का समस्त सौदर्य, मानवीय प्रेम के सारे सुकुमार भाव-विसास एव अतोद्रिय रस को अलौकिकता लौविक रूप म प्रस्ट हुई। इन पदावलियों में कविता सुगंभीर, स्वत स्फूर्त अनुभूति की सहज रमधारा म प्रभावित हुई है । पदावली साहित्य बंगाल वा अन्यतम काव्यवृतित्व है। यह बगाली जीवन की विशुद्धतम वाव्यमय अभिव्यक्ति है । बंगाल की समस्त मधुर और कोमल अनुभूति, उसकी भावमुग्धता, जीवन-दर्शन, प्रेमाभक्ति कोमलता सब कुछ इन पदों की सीमित परिधि में प्रकट हुआ है । गोविंददास , ज्ञानदास और चंडीदास पदावली साहित्य में सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। गोविंददास के पदों में गंभीर भावावेग के साथ युक्ति श्रृंखला का अनुवर्तन हुआ है और अलंकार- बहुल, भंकारप्रधान, मर्यादापूर्ण भाषा का प्रयोग हुआ है। वैष्णव पदावली का बंगाल के जन-मानस पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा था कि अनंतदास, वलरामदास, वासुदेव घोष आदि हिंदू पदकर्त्ताओं के अतिरिक्त दौलत-काजी , संयद आल।ओल जैसे मुसलमान रचयिताओं ने भी अपनी वैष्णव भावानुभूति को काव्यरूप दिया है। व्यंग्य व्यजना के शब्दशक्ति द्वारा जिस अथं की प्रतीति होती है उसे व्यंग्यार्थ कहते है । यह अर्थ वाच्यार्थ से नितात भिन्न होता है । यह भिन्नता निम्नोक्त नो तत्त्वो पर आधारित हैनिमित्त कारण, आश्रय, कार्य, काल, वोद्धा, संख्या, विषय, प्रतीति और स्वरूप । व्यग्यार्थ को प्रतीता नं, प्रतीयमानार्थ, ध्वन्यर्थ आदि भी कहते हैं । 'व्यंग्यार्थ' की प्रतीति शब्द और अर्थ के शासन से नही हो जाती, अपितु यह तो काव्य के मर्मज्ञ सहृदयों को ही होती है । व्यंग्यार्थ के ही तारतम्य के आधार पर समस्त काव्य तीन प्रमुख प्रकारों में विभक्त किया गया है- ध्वनि काव्य, गुणीभूतव्यंग्य काव्य और चित्रकाव्य । इन तीनों में वाच्यार्थ की अपेक्षा व्यंग्याथं क्रमशः प्रधान, गौण और अस्फुट से रहता है। व्यंजना संस्कृत काव्यशास्त्र एवं व्याकरण में निरूपित शब्दशक्तियों - अभिधा , लक्षणा और व्यंजना में से अंतिम, किंतु सर्वाधिक सशक्त अभिधा और लक्षणा का बाध होने पर शब्द की जिस शक्ति के द्वारा किसी शब्द अथवा वाक्य के किसी अन्य विशिष्ट अर्थ का अवबोध होता है वही शक्ति व्यंजना है। अभिधा शब्द के संकेतार्थ का वाचन करती है, लक्षणा मुख्यार्थ के बाधित होने पर उसी से संबंधित किसी अन्य अर्थ का वोध कराती है, किंतु व्यंजना से प्राप्त अर्थ इन दोनो शक्तियों के पूर्णतया असमर्थ होने पर ही प्राप्त होता है जो अनिवार्यतः अधिक गूढ़, कमनीय अद्भुत और मार्मिक होता है। व्यंजना की इम अर्थावबोधन प्रक्रिया को शास्त्र में 'ध्वनन' कहा गया है । ध्यंजना शक्ति के दो भेद किए गए हैं : 'गाब्दी व्यंजना' और 'आर्थी व्यंजना ।' । 'शाब्दी व्यंजना' अभिधामूला और लक्षणामूला दो प्रकार की होती है। 'आर्थी व्यंजना के ववत्, बोधव्य, काकु, वाक्य, वाच्य, अन्यसन्निधि, प्रस्ताव, देश, काल तथा चेप्टा के आधार पर दम भेद माने गए हैं । ध्वक्तिविवेक [ समय --- ग्यारहवीं शती का मध्यकाल । ग्यारहवीं शती के मध्यकाल में रचित 'व्यक्तिविवेक' ही संस्कृत साहित्य की एक ऐसी उल्लेम्य कृति है जिसने अनंदवर्धन के ध्वनिसिद्धांत का प्रवल विरोध किया। इस ग्रंथ के रचनाकार महिमभट्ट स्वयं कहते हैं कि उनकी कृति की रचना का एकमात्र कारण 'ध्वनि' का सांगोपांग खंडन कर उसका अनुमान में अंतर्भाव करता है। इसलिए वे अनुमान की प्रक्रिया के आधार पर ध्वनि को उसके भेदोपभेदों सहित अनुमानगम्य सिद्ध करते हैं । इस ग्रंथ में काव्य के दोप, गुण, अलंकार एवं रसादि तत्त्वों की मीमांसा दर्शन और व्याकरण की पृष्ठभूमि में हुई है। यह भी इस ग्रंथ का एक वैशिष्ट्य है। इस ग्रंथ के विवेचन की प्रणाली प्रायः इस प्रकार रही है - वृत्ति, उदाहरण तथा अंत में कारिकाएँ । 'व्यक्तिविवेक' की अब तक कुल दो टीकाएँ उपलब्ध हुई हैं - - रय्यक - कृत व्यक्तिविवेक-व्याख्यान तथा 'मधुसूदन-विवृति' । व्यभिचारिभाव भरत के निम्नोक्त सूत्र में 'व्यभिचारी' शब्द का प्रयोग मिलता है--विभावानुभाव व्यभिचारि संयोगाद्रसनिष्पत्तिः ' । 'व्यभिचारी को ही व्यभिचारिभाव' तथा 'संचारिभाव' कहा जाता है। व्यभिचारिभाव' इसलिए कि ये भाव प्रत्येक स्थायिभाव के साथ विशेष रूप से अभिमुख होकर उसके अनुकूल वरकर चलते हैं : विषादासि मुस्येन चरणाद् व्यभिचारिणः ।
पटना (आससे)। बिहार में कई जिलों में अचानक तापमान में गिरावट आयी है। पछुआ के कारण थोड़ी कनकनी का अनुभव भी होने लगा है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार यह कनकनी और बढऩे वाली है। दिसंबर के तीसरे सप्ताह यानि 21 दिसंबर से बिहार में सर्दी पूरे परवान पर होगी और जनवरी से शीतलहर का भी असर दिखेगा। बिहार मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान जताते हुए कहा है कि पिछले 4 दिनों में जिस तरह से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी जा रही है ऐसे में ठंड में तेजी से वृद्धि होने वाली है। वायुमंडल के निचले हिस्से में उत्तरी-पश्चिमी हवा का लगातार तेजी से प्रवाह बने रहने से अगले 5 दिनों में तापमान में भारी गिरावट की भी सम्भावना है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़े के अनुसार राज्य के 11 शहरों में तापमान में काफी कमी आई है। गया में 0. 5 डिग्री, औरंगाबाद में 0. 5, पूर्वी चंपारण में 2. 8, सुपौल में 0. 4 डिग्री, तापमान में गिरावट आई है। ज्यादातर शहरों का पारा 10 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। जिसमें पटना का न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस, पश्चिमी चंपारण का 10. 7 डिग्री, सहरसा का 10. 3 , पूसा का 9. 2 डिग्री, नालन्दा में 10 . 9 डिग्री समेत कई जिलों में 10 डिग्री और उसके आसपास तापमान रह रहा है। मौसम विभाग की मानें तो रात के तापमान में भी बदलाव होने लगी है और तापमान 2 से 3 डिग्री नीचे रह रहा है। यही वजह है कि गुरुवार को गया में सबसे अधिक ठंड का एहसास हुआ, जहां न्यूनतम तापमान 7. 6 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि पूर्वानुमान यह भी है कि अगले 4 दिनों में आकाश में घने कोहरे के भी कहर देखने को मिलेगा और विजिबलिटी 300 मीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि वर्तमान देर रात से सुबह के वक्त तक विजिबलिटी 500 मीटर से 800 मीटर तक रिकॉर्ड की गई है। पटना नौ डिग्री, गया 7. 6 डिग्री, भागलपुर 11. 7 डिग्री, पूर्णिया 10. 9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है।
पटना । बिहार में कई जिलों में अचानक तापमान में गिरावट आयी है। पछुआ के कारण थोड़ी कनकनी का अनुभव भी होने लगा है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार यह कनकनी और बढऩे वाली है। दिसंबर के तीसरे सप्ताह यानि इक्कीस दिसंबर से बिहार में सर्दी पूरे परवान पर होगी और जनवरी से शीतलहर का भी असर दिखेगा। बिहार मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान जताते हुए कहा है कि पिछले चार दिनों में जिस तरह से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी जा रही है ऐसे में ठंड में तेजी से वृद्धि होने वाली है। वायुमंडल के निचले हिस्से में उत्तरी-पश्चिमी हवा का लगातार तेजी से प्रवाह बने रहने से अगले पाँच दिनों में तापमान में भारी गिरावट की भी सम्भावना है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़े के अनुसार राज्य के ग्यारह शहरों में तापमान में काफी कमी आई है। गया में शून्य. पाँच डिग्री, औरंगाबाद में शून्य. पाँच, पूर्वी चंपारण में दो. आठ, सुपौल में शून्य. चार डिग्री, तापमान में गिरावट आई है। ज्यादातर शहरों का पारा दस डिग्री के आसपास पहुंच गया है। जिसमें पटना का न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस, पश्चिमी चंपारण का दस. सात डिग्री, सहरसा का दस. तीन , पूसा का नौ. दो डिग्री, नालन्दा में दस . नौ डिग्री समेत कई जिलों में दस डिग्री और उसके आसपास तापमान रह रहा है। मौसम विभाग की मानें तो रात के तापमान में भी बदलाव होने लगी है और तापमान दो से तीन डिग्री नीचे रह रहा है। यही वजह है कि गुरुवार को गया में सबसे अधिक ठंड का एहसास हुआ, जहां न्यूनतम तापमान सात. छः डिग्री तक पहुंच गया है जबकि पूर्वानुमान यह भी है कि अगले चार दिनों में आकाश में घने कोहरे के भी कहर देखने को मिलेगा और विजिबलिटी तीन सौ मीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि वर्तमान देर रात से सुबह के वक्त तक विजिबलिटी पाँच सौ मीटर से आठ सौ मीटर तक रिकॉर्ड की गई है। पटना नौ डिग्री, गया सात. छः डिग्री, भागलपुर ग्यारह. सात डिग्री, पूर्णिया दस. नौ डिग्री रिकॉर्ड किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पड़ोसी देश अक्सर ही उस पर आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करने का आरोप लगाते हैं। यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76 वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि नियम आधारित विश्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्वर में बोलना होगा। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अपनी सैन्य ताकत प्रदर्शित करने की ओर संभवतः इशारा करते हुए यह कहा। विश्व द्वारा प्रतिगामी सोच के बढ़ते खतरे और चरमपंथ का सामना करने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल एक राजनीतिक औजार के रूप में कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी समान रूप से एक बड़ा खतरा है। मोदी ने कहा कि महासागर भी एक साझा धरोहर है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पड़ोसी देश अक्सर ही उस पर आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करने का आरोप लगाते हैं। यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के छिहत्तर वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि नियम आधारित विश्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्वर में बोलना होगा। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अपनी सैन्य ताकत प्रदर्शित करने की ओर संभवतः इशारा करते हुए यह कहा। विश्व द्वारा प्रतिगामी सोच के बढ़ते खतरे और चरमपंथ का सामना करने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल एक राजनीतिक औजार के रूप में कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी समान रूप से एक बड़ा खतरा है। मोदी ने कहा कि महासागर भी एक साझा धरोहर है।
भाजपा में शामिल होते ही अपनी पुरानी पार्टी की सांसद जया बच्चन पर हमला कर फंसे नरेश अग्रवाल के नाम एक अनोखा रिकार्ड कहा जा सकता है। सियासत मे अपना बिरला चक्र पूरा करने वाले नरेश अग्रवाल शायद अगड़ी पंक्ति के कम नेताओं में होगें। लखऩऊः भाजपा में शामिल होते ही अपनी पुरानी पार्टी की सांसद जया बच्चन पर हमला कर फंसे नरेश अग्रवाल के नाम एक अनोखा रिकार्ड कहा जा सकता है। सियासत मे अपना बिरला चक्र पूरा करने वाले नरेश अग्रवाल शायद अगड़ी पंक्ति के कम नेताओं में होगें। नरेश अग्रवाल ने अब सभी बड़े दलों में रहने का रिकार्ड बना लिया है। इस रिकार्ड के अलावा नरेश अग्रवाल को उनके बिगड़े बोलों के लिए जाना जाता है। आइए हम ऐसे ही बयानों के बारे में बताते हैं जिन्हें अब नरेश अग्रवाल और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही भूल जाना चाहेंगे। नरेश जिस दल में रहे उसके विपक्षी नेताओँ की सबसे अगली पंक्ति के नामों पर प्रहार किया है। य़हां तक की उन्होंने देवी देवता तक को नहीं छोड़ा। राम में रम और जिन में जानकी वाले बयान को राज्यसभा की कार्यवाही से निकाल दिया गया था पर इस पर बहुत बवाल हो गया था। इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनको सजा देने वाले को ईनाम तक का ऐलान कर दिया था। अब भाजपा इसे याद नहीं रखना चाहेगी। नरेश अग्रवाल ने लखनऊ में आयोजित एक वैश्य सम्मेलन में पीएम मोदी पर हमला कर कहा था, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो तेली है। वह बनिया नहीं है, सिर्फ बनिया यानी वैश्य ही व्यापार कर सकता है। ' इस बयान के बाद नरेश अग्रवाल को मंच पर ही इसको लेकर विरोध झेलना पड़ा था। और तो और नरेश अग्रवाल ने भारतीय फौज की क्षमताओं पर भी शक किया था उन्होंने कहा था कि, "गृहमंत्री कहते हैं कि शहादत ख़ाली नहीं जाएगी, कोई हमारी तरफ आंख उठा कर नहीं देख सकता. रक्षा मंत्री भी बयान देती हैं, आंख तो रोज उठ रही है. अगर आतंकवादी ये हाल कर रहे हैं, पाकिस्तानी फौज आ जाएगी तो क्या हालत होगी. " पहले कांग्रेस, फिर सपा, फिर बसपा, फिर वापस सपा और अब भाजपा का चक्र उन्होंने पूरा कर लिया है। अपनी इस सियासी आदत के अलावा नरेश अग्रवाल का नाम अपने बड़बोलेपन और बिगड़े बोलों के लिए भी जाना जाता है। नरेश अग्रवाल ने सियसात में किसी को नहीं छोड़ा है। भाजपा में शामिल होते ही नरेश अग्रवाल को समझ में आ गया होगा कि राजनैतिक शैली को बदलने की जरुरत है। उन्होंने जया बच्चन पर बयान दिया तो पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज ने इसे अस्वीकार्य बता दिया। नरेश को वैसे भी यह समझने में देर नहीं लगती। सपा में रहते उन्होंने बसपा सुप्रीमो को न जाने क्या कहा था पर बसपा में शामिल होते ही कहा था वह अपना लिंगभेद तक भूलकर करता करती का अंतर भूल गये। नरेश अग्रवाल सियासत के पुराने खिलाडी है घाट घाट का पानी पिया है तो ज्यादा दिक्कत तो नहीं होगी। वैसे भी सियासत अनुकूलन का ही दूसरा नाम है।
भाजपा में शामिल होते ही अपनी पुरानी पार्टी की सांसद जया बच्चन पर हमला कर फंसे नरेश अग्रवाल के नाम एक अनोखा रिकार्ड कहा जा सकता है। सियासत मे अपना बिरला चक्र पूरा करने वाले नरेश अग्रवाल शायद अगड़ी पंक्ति के कम नेताओं में होगें। लखऩऊः भाजपा में शामिल होते ही अपनी पुरानी पार्टी की सांसद जया बच्चन पर हमला कर फंसे नरेश अग्रवाल के नाम एक अनोखा रिकार्ड कहा जा सकता है। सियासत मे अपना बिरला चक्र पूरा करने वाले नरेश अग्रवाल शायद अगड़ी पंक्ति के कम नेताओं में होगें। नरेश अग्रवाल ने अब सभी बड़े दलों में रहने का रिकार्ड बना लिया है। इस रिकार्ड के अलावा नरेश अग्रवाल को उनके बिगड़े बोलों के लिए जाना जाता है। आइए हम ऐसे ही बयानों के बारे में बताते हैं जिन्हें अब नरेश अग्रवाल और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही भूल जाना चाहेंगे। नरेश जिस दल में रहे उसके विपक्षी नेताओँ की सबसे अगली पंक्ति के नामों पर प्रहार किया है। य़हां तक की उन्होंने देवी देवता तक को नहीं छोड़ा। राम में रम और जिन में जानकी वाले बयान को राज्यसभा की कार्यवाही से निकाल दिया गया था पर इस पर बहुत बवाल हो गया था। इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनको सजा देने वाले को ईनाम तक का ऐलान कर दिया था। अब भाजपा इसे याद नहीं रखना चाहेगी। नरेश अग्रवाल ने लखनऊ में आयोजित एक वैश्य सम्मेलन में पीएम मोदी पर हमला कर कहा था, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो तेली है। वह बनिया नहीं है, सिर्फ बनिया यानी वैश्य ही व्यापार कर सकता है। ' इस बयान के बाद नरेश अग्रवाल को मंच पर ही इसको लेकर विरोध झेलना पड़ा था। और तो और नरेश अग्रवाल ने भारतीय फौज की क्षमताओं पर भी शक किया था उन्होंने कहा था कि, "गृहमंत्री कहते हैं कि शहादत ख़ाली नहीं जाएगी, कोई हमारी तरफ आंख उठा कर नहीं देख सकता. रक्षा मंत्री भी बयान देती हैं, आंख तो रोज उठ रही है. अगर आतंकवादी ये हाल कर रहे हैं, पाकिस्तानी फौज आ जाएगी तो क्या हालत होगी. " पहले कांग्रेस, फिर सपा, फिर बसपा, फिर वापस सपा और अब भाजपा का चक्र उन्होंने पूरा कर लिया है। अपनी इस सियासी आदत के अलावा नरेश अग्रवाल का नाम अपने बड़बोलेपन और बिगड़े बोलों के लिए भी जाना जाता है। नरेश अग्रवाल ने सियसात में किसी को नहीं छोड़ा है। भाजपा में शामिल होते ही नरेश अग्रवाल को समझ में आ गया होगा कि राजनैतिक शैली को बदलने की जरुरत है। उन्होंने जया बच्चन पर बयान दिया तो पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज ने इसे अस्वीकार्य बता दिया। नरेश को वैसे भी यह समझने में देर नहीं लगती। सपा में रहते उन्होंने बसपा सुप्रीमो को न जाने क्या कहा था पर बसपा में शामिल होते ही कहा था वह अपना लिंगभेद तक भूलकर करता करती का अंतर भूल गये। नरेश अग्रवाल सियासत के पुराने खिलाडी है घाट घाट का पानी पिया है तो ज्यादा दिक्कत तो नहीं होगी। वैसे भी सियासत अनुकूलन का ही दूसरा नाम है।
नसीरुद्दीन जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे तो वे मेडिकल स्टूडेंट परवीन मनारा सीकरी पर अपना दिल हार बैठे थे. वे नसीर से उम्र में 15 वर्ष बड़ी थी. मनारा पहले से शादीशुदा और एक बच्चे की मां भी थी. नसीरुद्दीन शाह का परिवार नहीं चाहता था कि, वे मनारा से शादी करे. लेकिन इन सबके बावजूद नसीर ने मनारा से शादी की थी. 1 नवंबर 1969 को नसीर ने घर वालों के ख़िलाफ़ जाकर मनारा से शादी कर ली. लेकिन यह शादी कुछ दिनों में ही टूट गई. शादी के 10 माह के बाद ही नसीर पिता बन गए थे. मनारा और नसीर के बीच मतभेद होने लगे थे और आख़िरकार आगे जाकर दोनों की राहें अलग हो गई. 1975 में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक पहली बार मिले थे. यह वो समय था जब दोनों अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे. दोनों ही नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में दाखिला ले चुके थे. नसीर और रत्ना ने पहली बार सत्यदेव दुबे के एक प्ले 'संभोग से संन्यास तक' में साथ काम किया था. इस प्ले की रिहर्सल के दौरान ही दोनों की मुलाक़ात हुई थी. अलग रहने लग गए थे. पहली पत्नी मनारा से तलाक लेने के बाद नसीर ने रत्ना पाठक के साथ नए सफ़र की शुरुआत की. नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक साल 1982 में एक सादे समारोह में एक दूसरे के हो गए. यह शादी रत्ना की मां के घर में हुई थी. नसीर से विवाह के बाद रत्ना पाठक ने धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया था.
नसीरुद्दीन जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे तो वे मेडिकल स्टूडेंट परवीन मनारा सीकरी पर अपना दिल हार बैठे थे. वे नसीर से उम्र में पंद्रह वर्ष बड़ी थी. मनारा पहले से शादीशुदा और एक बच्चे की मां भी थी. नसीरुद्दीन शाह का परिवार नहीं चाहता था कि, वे मनारा से शादी करे. लेकिन इन सबके बावजूद नसीर ने मनारा से शादी की थी. एक नवंबर एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर को नसीर ने घर वालों के ख़िलाफ़ जाकर मनारा से शादी कर ली. लेकिन यह शादी कुछ दिनों में ही टूट गई. शादी के दस माह के बाद ही नसीर पिता बन गए थे. मनारा और नसीर के बीच मतभेद होने लगे थे और आख़िरकार आगे जाकर दोनों की राहें अलग हो गई. एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक पहली बार मिले थे. यह वो समय था जब दोनों अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे. दोनों ही नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में दाखिला ले चुके थे. नसीर और रत्ना ने पहली बार सत्यदेव दुबे के एक प्ले 'संभोग से संन्यास तक' में साथ काम किया था. इस प्ले की रिहर्सल के दौरान ही दोनों की मुलाक़ात हुई थी. अलग रहने लग गए थे. पहली पत्नी मनारा से तलाक लेने के बाद नसीर ने रत्ना पाठक के साथ नए सफ़र की शुरुआत की. नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक साल एक हज़ार नौ सौ बयासी में एक सादे समारोह में एक दूसरे के हो गए. यह शादी रत्ना की मां के घर में हुई थी. नसीर से विवाह के बाद रत्ना पाठक ने धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया था.
शाम को सारे दिन की थकान के बावजूद सड़क पर ठहलना मेरा शौक है। गर्मी की तपन के बावजूद शाम की ठंडी हवा मन को सुकून देती है, आसमान पर पक्षियों को कारवां घरौंदों की तरफ लौटता हुआ चहचहाचट के घने शोर में भी संगीत की लय का आभास कराता है। हाथ में मोबाईल लिए थोड़ी ही दूर आगे बढ़ी, कि पड़ोसन आभा ने आवाज लगाई और उसके आग्रह पर हम दोनों लॉन में ही बैठ गए। इधर-उधर की बातों के साथ कुछ सुख-दुख बांटने से ही स्नेह बंध मजबूत होते हैं। फिर कुछ लोगों से "वेव लेंथ" मेच हो जाए तो सगे संबधियों से अधिक घनिष्ठता स्वाभाविक भी है। तभी मोबाईल की घंटी बज उठी। कोटा से आत्या के बेटे डॉ. प्रफुल्ल का फोन था। "दीदी एक सेड न्यूज है काकाजी नही रहें". . . . अरे कब? "अभी एक घंटे पहले" जवाब मिला। औपचारिक संवेदना के बाद मैंने पूछा "और दादा कैसे है"? उनकी हालत तो वैसी ही है और भी कमजोर हो गए हैं। न खाना खाते हैं, न दवाई लेते हैं, सब कुछ बिस्तर पर ही मैनेज करना होता है। मैंने नर्सिंग होम पर ही सब व्यवस्था कर रखी है, पर आई को सतत सेवा करनी पड़ती है उसके श्रम देखे नहीं जाते। प्रफुल्ल ने कहा - मैंने कहा आत्या का तो जीवन ही त्याग व सेवा का पर्याय रहा है, ईश्वर उसे शक्ति दे। मैं सुबह उससे बात करती हूं, कहकर फोन बंद किया। आभा ने पूछा "क्या हुआ? " तो मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं थी। काकाजी. . . आत्या के देवर, मेरा उनसे कोई नजदीकी रिश्ता नहीं, फिर भी आंखो की कोर गीली हो ही उठी। शायद आत्या के जीवन की कहानी याद करके। आत्या पापा की छोटी बहन, तीन भाईयों व तीन बहनों में पापा व काका के बाद आत्या का नंबर था। देखने में गोरी चिट्टी सुंदर अपने नाम "गुलाब" की सार्थकता सिद्ध करती, साथ ही अपने सरल सहज स्वभाव व प्रेमपूर्ण व्यवहार की वजह से सभी की लाड़ली थी। मैं पापा की सबसे बड़ी बेटी अतः सभी आत्याओं व काकाओं ने आजी आजोबा के साथ बहुत लाड़ प्यार दिया था। मेरे बचपन का हर किस्सा सुनाए बिना उनका मायके आना सार्थक नहीं होता व उसे सुन-सुन मेरे बाकी भाई बहन कभी खीजते, तो कभी मुझे चिढ़ाते। उन दिनों की सुनहरी यादें जीवन की अनमोल पूंजी हैं। बचपन में परीक्षाओं के खत्म होते ही इंतजार रहता, आत्याओं का अपने अपने बच्चों के साथ मायके आने का। घर पर हम छोटे बड़े मिलकर 10-11 बच्चे तो इकट्ठे होते ही, साथ में कोई छोटा गोद में खिलाने जैसा भाई या बहन होता जिसे खींच-खींच कर एक दूसरे से लड़-झगड़कर गोद में लटकाने की होड़ लगी रहती। सबका साथ खाना-पीना, मौज मस्ती, छोटे-छोटे सुख, छोटी-छोटी ख्वाहिशें एक रू. की भेल या गन्ने का रस पीकर तृप्त हुआ बचपन, आज की चकाचौंध व महंगे खिलौनों के न होने पर भी अधिक सुखी था। उन दिनों की यादें ही शायद चचेरे, ममेरे, मौसेरे, फुफेरे भाई बहनों के बीच गहरी आत्मीयता व अपनत्व बनाए रखने में सक्षम हैं। वरना आज के बच्चे तो हर रिश्ते को "कजिन" कहकर प्रारंभ होने से पूर्व ही दूरियां बना बैठते हैं। खैर तब बड़ी आत्या के साथ हर साल उनके देवर भी आते व हम सब उन्हें काकाजी कहकर बुलाते। काकाजी मेंटली रिटारडेड हैं यह समझ आने के बहुत पहले ही हम सब उनसे प्रेम व स्नेह के बंधन से इतने अधिक जुड़ गए थे कि उसमें उनकी इस कमजोरी का कोई स्थान नहीं था। उस समय मैंने 11 वीं का इम्तिहान दिया था और आत्या मायके आई हुई थीं। तब बातों ही बातों में उनका जीवन वृत्तांत उनसे सुनने को मिला था। बड़ी आत्या ने एम. ए. प्रथम श्रेणी में उर्त्तीण कर लिया था व उनके लिए लड़कों की तलाश जारी थी। मेरे जन्म के समय वे आजी के साथ पापा के यहां रहने आईं, तो पड़ोस में रहने वाले डॉ. आरस की मां को, वो भा गईं। पढ़ी-लिखी उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की की इतनी सादगी व शांत स्वभाव देख उन्होंने पापा के पास आत्या से अपने बेटे के रिश्ते का प्रस्ताव रखा। घर में आई बाबा व आजी के बीच काफी विचार विमर्श हुआ, क्योंकि डॉ. आरस विधुर थे व उनकी 1 साल की बच्ची थी। उनकी पत्नी का दस माह पहले ही देहांत हुआ था। सारी चर्चाओं का पटाक्षेप करने के लिए जब आत्या से राय मांगी गई तो उनका जवाब था 'अगर बाकी सब बातें आपके हिसाब से ठीक हैं तो केवल एक बच्ची के पिता होने से मुझे लड़के में कोई खोट नहीं लगती। अगर मेरा विवाह 2 वर्ष पूर्व हुआ होता तो क्या मेरी इतनी बड़ी बेटी नहीं होती? फिर उस बच्ची को भी तो मां चाहिए। मैं उसकी मां बनने को तैयार हूं। और फिर आत्या डॉ. आरस की पत्नी बन गईं। एक और जिम्मेदारी आत्या पर थी, मानसिक रूप से कमजोर " देवर" जिसे उन्होंने छोटे भाई के रूप में, प्रथम दिन से ही स्वीकारा था। केवल भाऊजी' कहती ही नहीं, मानती भी रही। काकाजी ने लक्ष्मण की तरह सदा भाभी को मान दिया। आत्या जब शादी होकर आईं तो उन्हे समझ में आया कि उनकी सास ने बेटे के लिए पत्नी व अपने लिए बहू के रूप में तो उन्हें स्वीकार कर लिया था, लेकिन उस छोटी बच्ची को अपने पल्लू से बांधे रखती व उसे उनके पास फटकने नहीं देती। बार-बार उसे यह एहसास दिलाती कि आत्या उसकी सौतेली मां है। दादी के लाड़ प्यार के कारण जब बेटी बिगड़ने लगी, तो आत्या ने अपना वह रूप भी दिखा दिया व बच्ची की सही अर्थो में मां बनने के लिए, कठोर भी बन बैठी। धीरे-धीरे प्यार से व अनुशासन से बच्ची को सही राह पर लाकर, संस्कार व स्नेह दे अपना बना लिया। फिर आत्या के 2 बेटे हुए। मां के संस्कारों के कारण दोनों ने दीदी को कभी अपनी सौतेली बहन नहीं समझा व उन तीनों का आपसी प्यार हमारे परिवार में मिसाल बन गया। तीनों बच्चों ने मानसिक रूप से कमजोर काका को सहजता से स्वीकारा व घर में पूर्ण आदर सम्मान दिया था। दिन बीतते गए, हम सब बड़े हुए। आत्या की बेटी की शादी हो गई, एक बेटा डॉक्टर व दूसरा इंजिनियर हो गया। सबकी शादियां हो गयी व मिलना जुलना केवल पारिवारिक सुख दुख के अवसरों पर ही होता रहा। तभी खबर मिली की सुहास, आत्या की बेटी गैस से दूध का बर्तन आंचल से उतारते वक्त जल गई हैं। तब उसके जुड़वा बच्चे मात्र 2 साल के थे। आत्या अपने बेटों की पढाई व परिवार की अन्य समस्याओं को अलग रख तुरं सुहास के ससुराल पहुंची उसके वृध्द सास-ससुर की असहायता को समझ स्वयं उसके घर पर 6 माह तक रहकर उसकी सेवा की। उसका आत्मबल बढ़ाया, उसके बच्चों की, सास ससुर की देखभाल की व उसे फिर जीने की राह दिखाई। सुहास सदा कहती है - इतनी सेवा तो शायद मेरी सगी मां भी नही कर पाती। आत्या कहती तुझे सिर्फ जनम भर नहीं दिया, है तो तू मेरी ही बेटी। इस सब में साथ दिया आत्या के देवर, काकाजी ने। वे खामोशी से भाभी की छाया बन उनके हर आदेश का पालन करते। आजोबा कहते सीता लक्ष्मण की जोड़ी है। मेरी गुलाब ही ऐसा कर सकती है और गर्व से उनकी आंखें भर आती। बाद में बच्चे अपनी अपनी प्रगति की राह पर चल पड़े, लेकिन आत्या फूफाजी व काकाजी, तीन प्राणियों की गृहस्थी स्वतंत्र रूप से चलती रही। बुआजी को कभी " काकाजी बोझ नहीं लगे, न ही स्वतंत्रता में बाधक। एक बार मैंने पूछा "आपको काकाजी का हमेशा साथ रहना खलता नहीं? तो कहने लगी - मैने उन्हें सदा से पहले तो भाई माना था, लेकिन सास ने मरते समय जब इनका ख्याल रखने का वचन मांगा तबसे इन्हें बेटा ही समझती हूं। सारी उम्र वे भी मेरे साथ, मेरे परिवार के लिये खटते रहे हैं। फिर उनका हमारे सिवा है भी कौन? वे मुझे वहिनी कहते हैं लेकिन मानते मां ही हैं। रिश्तों की गरिमा क्या हो, कैसी हो, इसकी मिसाल आत्या है। फूफाजी डाक्टर थे सारी उम्र सबको अपने कड़े अनुशासन में रखा। इतने त्याग, सामंजस्य, आत्मसमर्पण व समझदारी से सारे रिश्ते निभाने के बावजूद उन्होंने कभी आत्या की तारीफ नहीं की, बल्कि सारा श्रेय स्वयं लेते रहे व आत्या में नुक्स निकालते रहे थे। मैं कभी-कभी उनसे भिड़ लेती थी, व आत्या की तरफदारी करती पर वे कभी मानने को तैयार नहीं होते। पिछले साल जब फूफाजी की तबियत देखने हम कोटा गए थे, तब फूफाजी ने मुझसे अकेले में कहा - तेरी आत्या सचमुच धन्य है, जिसने मेरे जैसे जिद्दी व अहंकारी का साथ निभाया व मेरी सारी जिम्मेदारियां खामोशी व शांति से चुपचाप निभाती रही। मैं उससे शायद कभी कह नहीं पाऊं लेकिन तेरे सामने स्वीकारोक्ती करता हूं कि तेरी आत्या बहुत महान है। मुझ विधुर से शादी करने के लिए तैयार हुई। मेरी मां के कठोर व्यवहार को सहती रही, मेरे मंद बुध्दि भाई को प्यार व स्नेह दे उसका ख्याल आज तक रख रही है। मेरी बेटी को मां से बढ़कर प्यार दे अपना लिया है, यहां तक कि, उसके आग से झुलस जाने पर भी उसकी सेवा की हमारे बेटों को भी अच्छे संस्कार दिए। पर मैं अपनी अहंकार व घमंड में सदा उसे नीचा दिखाता रहा। वह मेरे जुल्म भी सहती रही पर कभी किसी से शिकायत नहीं की। उसकी सुंदरता से मैं मन ही मन आशंकित रहता कि अगर इसकी तारीफ करूंगा तो कहीं घमंड व अभिमान से सिर पर न बैठ जाए। अपनी शिक्षा व व्यवसाय को सदा श्रेष्ठ समझता रहा। मेरा पुरूषी अहम मुझे उसके व्यवहार त्याग व समर्पण की सराहना करने से सदा रोकता रहा और चाहकर भी मैं कभी खुलकर उसकी प्रशंसा नहीं कर पाया। मैंने कहा फूफाजी आप भी आत्या को बहुत चाहते हैं, एक बार कह दीजिए ना, शायद उसे भी सुकून मिले। मुझे लगा काश आत्या यह सुन पातीं, लेकिन वह तो काकाजी को खाना खिलाने में लगी थीं। तभी से काकाजी की तबियत भी बिगड़ती जा रही थी। आत्या को दो-दो लोगों की सेवा करनी पड़ रही थी जबकि वे स्वयं भी 75 वर्ष पूर्ण कर चुकी थीं। उनकी मदद के लिए बेटे के नर्सिंग होम के नौकर, नर्स रहते लेकिन सारी जिम्मेदारियां तो आत्या की ही थी। काकाजी की खबर सुन मन उदास हैं। जो हुआ अच्छा ही हुआ लेकिन आत्या से क्या बात करूंगी, पता नहीं। लाड़ला देवर ही नहीं उसके रूप में बेटा खोया है, पता नहीं कैसे रिएक्ट करें। यादों के कतरन संजोते-संजोते जाने कब नींद लग गई। पंद्रह दिन बीत गए सुबह 5 बजे मोबाईल की घंटी बजने से नींद खुली, डॉ प्रफुल्ल का नाम पढ़कर थोड़ी हैरानी के साथ बैचेनी भी हुई। हड़बड़ाकर उठी और मोबाईल ऑन किया, आवाज आयी दीदी "दादा" भी चल बसे। मैंने पूछा क्या हुआ था? उसने बताया बीमार तो थे ही। काकाजी का सबकुछ अपने हाथों से करने में असमर्थ, फिर भी 13 दिन तक सबकुछ किया। कल रात को केवल इतना कहा - चलो एक बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त हो गया। सुनकर मैं सन्न रह गई। इतना भातृ प्रेम मानो उसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए ही सांस रोके थे। सबको खबर की व आत्या से बात करने के लिए फोन लगाया कहा - आत्या स्वयं जल्दी आकर तेरे दुख में शामिल होना चाहती हूं, तूने सारी जिदंगी काकाजी व दादा की खूब सेवा की। आत्या का जवाब था - मैंने क्या किया, सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया। तेरे फूफाजी ने अपने भाई का सारी उम्र खयाल रखा व जाते हुए भी उन्हें सुकून था कि वे अपनी जिम्मेदारी निभा गए। उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी इसलिए यही सुकून है कि मेरे प्राण रहते ईश्वर ने उन्हें मुक्ति दे दी, वरना एक बोझ सीने पर रहता कि अपनी जिम्मेदारी बच्चों के सिर पर छोड़े जा रहे हैं। ईश्वर ने उन्हें मुक्त कर मुझे शांति से मरने का रास्ता दिखा दिया है। काकाजी के जाने के बाद ये अत्यंत भावुक हो गए थे। पिछले 13 दिनों में मुझसे बहुत बातें करते थे हर घटना, हर बात याद करके कभी मुझसे माफी मांगते तो कभी मेरा एहसान जताते। इन 13 दिनों में उन्होंने अपने मन की हर बात को मुझसे खुल कर कहा था। आखिरी दिन कह रहे थे - विश्वास न हो तो नीरू से फोन करके पूछ लेना। सच कहूं नीरू इनके मुंह से दो मीठे बोल, दो सराहना के बोल सुनने को तरसते जिंदगी बीत गई। अब तो मैंने सारी उम्मीदें ही छोड़ दी थी, पर चलो देर से ही सही जिंदगी भर की चाहत पूर्ण तो हुई। एक सुकून मन में रहेगा इनकी स्वीकारोक्ति का। फोन रखते हुए आंखों से बहती हुई अश्रुधारा को पोंछते हुए कोटा जाने की ठान ली। एक तरफ आत्या के वैधव्य का दुख था, पर दूसरी तरफ फूफाजी की स्वीकारोक्ति से उपजा सुकून आत्या के चेहरे पर देखने की चाहत।
शाम को सारे दिन की थकान के बावजूद सड़क पर ठहलना मेरा शौक है। गर्मी की तपन के बावजूद शाम की ठंडी हवा मन को सुकून देती है, आसमान पर पक्षियों को कारवां घरौंदों की तरफ लौटता हुआ चहचहाचट के घने शोर में भी संगीत की लय का आभास कराता है। हाथ में मोबाईल लिए थोड़ी ही दूर आगे बढ़ी, कि पड़ोसन आभा ने आवाज लगाई और उसके आग्रह पर हम दोनों लॉन में ही बैठ गए। इधर-उधर की बातों के साथ कुछ सुख-दुख बांटने से ही स्नेह बंध मजबूत होते हैं। फिर कुछ लोगों से "वेव लेंथ" मेच हो जाए तो सगे संबधियों से अधिक घनिष्ठता स्वाभाविक भी है। तभी मोबाईल की घंटी बज उठी। कोटा से आत्या के बेटे डॉ. प्रफुल्ल का फोन था। "दीदी एक सेड न्यूज है काकाजी नही रहें". . . . अरे कब? "अभी एक घंटे पहले" जवाब मिला। औपचारिक संवेदना के बाद मैंने पूछा "और दादा कैसे है"? उनकी हालत तो वैसी ही है और भी कमजोर हो गए हैं। न खाना खाते हैं, न दवाई लेते हैं, सब कुछ बिस्तर पर ही मैनेज करना होता है। मैंने नर्सिंग होम पर ही सब व्यवस्था कर रखी है, पर आई को सतत सेवा करनी पड़ती है उसके श्रम देखे नहीं जाते। प्रफुल्ल ने कहा - मैंने कहा आत्या का तो जीवन ही त्याग व सेवा का पर्याय रहा है, ईश्वर उसे शक्ति दे। मैं सुबह उससे बात करती हूं, कहकर फोन बंद किया। आभा ने पूछा "क्या हुआ? " तो मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं थी। काकाजी. . . आत्या के देवर, मेरा उनसे कोई नजदीकी रिश्ता नहीं, फिर भी आंखो की कोर गीली हो ही उठी। शायद आत्या के जीवन की कहानी याद करके। आत्या पापा की छोटी बहन, तीन भाईयों व तीन बहनों में पापा व काका के बाद आत्या का नंबर था। देखने में गोरी चिट्टी सुंदर अपने नाम "गुलाब" की सार्थकता सिद्ध करती, साथ ही अपने सरल सहज स्वभाव व प्रेमपूर्ण व्यवहार की वजह से सभी की लाड़ली थी। मैं पापा की सबसे बड़ी बेटी अतः सभी आत्याओं व काकाओं ने आजी आजोबा के साथ बहुत लाड़ प्यार दिया था। मेरे बचपन का हर किस्सा सुनाए बिना उनका मायके आना सार्थक नहीं होता व उसे सुन-सुन मेरे बाकी भाई बहन कभी खीजते, तो कभी मुझे चिढ़ाते। उन दिनों की सुनहरी यादें जीवन की अनमोल पूंजी हैं। बचपन में परीक्षाओं के खत्म होते ही इंतजार रहता, आत्याओं का अपने अपने बच्चों के साथ मायके आने का। घर पर हम छोटे बड़े मिलकर दस-ग्यारह बच्चे तो इकट्ठे होते ही, साथ में कोई छोटा गोद में खिलाने जैसा भाई या बहन होता जिसे खींच-खींच कर एक दूसरे से लड़-झगड़कर गोद में लटकाने की होड़ लगी रहती। सबका साथ खाना-पीना, मौज मस्ती, छोटे-छोटे सुख, छोटी-छोटी ख्वाहिशें एक रू. की भेल या गन्ने का रस पीकर तृप्त हुआ बचपन, आज की चकाचौंध व महंगे खिलौनों के न होने पर भी अधिक सुखी था। उन दिनों की यादें ही शायद चचेरे, ममेरे, मौसेरे, फुफेरे भाई बहनों के बीच गहरी आत्मीयता व अपनत्व बनाए रखने में सक्षम हैं। वरना आज के बच्चे तो हर रिश्ते को "कजिन" कहकर प्रारंभ होने से पूर्व ही दूरियां बना बैठते हैं। खैर तब बड़ी आत्या के साथ हर साल उनके देवर भी आते व हम सब उन्हें काकाजी कहकर बुलाते। काकाजी मेंटली रिटारडेड हैं यह समझ आने के बहुत पहले ही हम सब उनसे प्रेम व स्नेह के बंधन से इतने अधिक जुड़ गए थे कि उसमें उनकी इस कमजोरी का कोई स्थान नहीं था। उस समय मैंने ग्यारह वीं का इम्तिहान दिया था और आत्या मायके आई हुई थीं। तब बातों ही बातों में उनका जीवन वृत्तांत उनसे सुनने को मिला था। बड़ी आत्या ने एम. ए. प्रथम श्रेणी में उर्त्तीण कर लिया था व उनके लिए लड़कों की तलाश जारी थी। मेरे जन्म के समय वे आजी के साथ पापा के यहां रहने आईं, तो पड़ोस में रहने वाले डॉ. आरस की मां को, वो भा गईं। पढ़ी-लिखी उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की की इतनी सादगी व शांत स्वभाव देख उन्होंने पापा के पास आत्या से अपने बेटे के रिश्ते का प्रस्ताव रखा। घर में आई बाबा व आजी के बीच काफी विचार विमर्श हुआ, क्योंकि डॉ. आरस विधुर थे व उनकी एक साल की बच्ची थी। उनकी पत्नी का दस माह पहले ही देहांत हुआ था। सारी चर्चाओं का पटाक्षेप करने के लिए जब आत्या से राय मांगी गई तो उनका जवाब था 'अगर बाकी सब बातें आपके हिसाब से ठीक हैं तो केवल एक बच्ची के पिता होने से मुझे लड़के में कोई खोट नहीं लगती। अगर मेरा विवाह दो वर्ष पूर्व हुआ होता तो क्या मेरी इतनी बड़ी बेटी नहीं होती? फिर उस बच्ची को भी तो मां चाहिए। मैं उसकी मां बनने को तैयार हूं। और फिर आत्या डॉ. आरस की पत्नी बन गईं। एक और जिम्मेदारी आत्या पर थी, मानसिक रूप से कमजोर " देवर" जिसे उन्होंने छोटे भाई के रूप में, प्रथम दिन से ही स्वीकारा था। केवल भाऊजी' कहती ही नहीं, मानती भी रही। काकाजी ने लक्ष्मण की तरह सदा भाभी को मान दिया। आत्या जब शादी होकर आईं तो उन्हे समझ में आया कि उनकी सास ने बेटे के लिए पत्नी व अपने लिए बहू के रूप में तो उन्हें स्वीकार कर लिया था, लेकिन उस छोटी बच्ची को अपने पल्लू से बांधे रखती व उसे उनके पास फटकने नहीं देती। बार-बार उसे यह एहसास दिलाती कि आत्या उसकी सौतेली मां है। दादी के लाड़ प्यार के कारण जब बेटी बिगड़ने लगी, तो आत्या ने अपना वह रूप भी दिखा दिया व बच्ची की सही अर्थो में मां बनने के लिए, कठोर भी बन बैठी। धीरे-धीरे प्यार से व अनुशासन से बच्ची को सही राह पर लाकर, संस्कार व स्नेह दे अपना बना लिया। फिर आत्या के दो बेटे हुए। मां के संस्कारों के कारण दोनों ने दीदी को कभी अपनी सौतेली बहन नहीं समझा व उन तीनों का आपसी प्यार हमारे परिवार में मिसाल बन गया। तीनों बच्चों ने मानसिक रूप से कमजोर काका को सहजता से स्वीकारा व घर में पूर्ण आदर सम्मान दिया था। दिन बीतते गए, हम सब बड़े हुए। आत्या की बेटी की शादी हो गई, एक बेटा डॉक्टर व दूसरा इंजिनियर हो गया। सबकी शादियां हो गयी व मिलना जुलना केवल पारिवारिक सुख दुख के अवसरों पर ही होता रहा। तभी खबर मिली की सुहास, आत्या की बेटी गैस से दूध का बर्तन आंचल से उतारते वक्त जल गई हैं। तब उसके जुड़वा बच्चे मात्र दो साल के थे। आत्या अपने बेटों की पढाई व परिवार की अन्य समस्याओं को अलग रख तुरं सुहास के ससुराल पहुंची उसके वृध्द सास-ससुर की असहायता को समझ स्वयं उसके घर पर छः माह तक रहकर उसकी सेवा की। उसका आत्मबल बढ़ाया, उसके बच्चों की, सास ससुर की देखभाल की व उसे फिर जीने की राह दिखाई। सुहास सदा कहती है - इतनी सेवा तो शायद मेरी सगी मां भी नही कर पाती। आत्या कहती तुझे सिर्फ जनम भर नहीं दिया, है तो तू मेरी ही बेटी। इस सब में साथ दिया आत्या के देवर, काकाजी ने। वे खामोशी से भाभी की छाया बन उनके हर आदेश का पालन करते। आजोबा कहते सीता लक्ष्मण की जोड़ी है। मेरी गुलाब ही ऐसा कर सकती है और गर्व से उनकी आंखें भर आती। बाद में बच्चे अपनी अपनी प्रगति की राह पर चल पड़े, लेकिन आत्या फूफाजी व काकाजी, तीन प्राणियों की गृहस्थी स्वतंत्र रूप से चलती रही। बुआजी को कभी " काकाजी बोझ नहीं लगे, न ही स्वतंत्रता में बाधक। एक बार मैंने पूछा "आपको काकाजी का हमेशा साथ रहना खलता नहीं? तो कहने लगी - मैने उन्हें सदा से पहले तो भाई माना था, लेकिन सास ने मरते समय जब इनका ख्याल रखने का वचन मांगा तबसे इन्हें बेटा ही समझती हूं। सारी उम्र वे भी मेरे साथ, मेरे परिवार के लिये खटते रहे हैं। फिर उनका हमारे सिवा है भी कौन? वे मुझे वहिनी कहते हैं लेकिन मानते मां ही हैं। रिश्तों की गरिमा क्या हो, कैसी हो, इसकी मिसाल आत्या है। फूफाजी डाक्टर थे सारी उम्र सबको अपने कड़े अनुशासन में रखा। इतने त्याग, सामंजस्य, आत्मसमर्पण व समझदारी से सारे रिश्ते निभाने के बावजूद उन्होंने कभी आत्या की तारीफ नहीं की, बल्कि सारा श्रेय स्वयं लेते रहे व आत्या में नुक्स निकालते रहे थे। मैं कभी-कभी उनसे भिड़ लेती थी, व आत्या की तरफदारी करती पर वे कभी मानने को तैयार नहीं होते। पिछले साल जब फूफाजी की तबियत देखने हम कोटा गए थे, तब फूफाजी ने मुझसे अकेले में कहा - तेरी आत्या सचमुच धन्य है, जिसने मेरे जैसे जिद्दी व अहंकारी का साथ निभाया व मेरी सारी जिम्मेदारियां खामोशी व शांति से चुपचाप निभाती रही। मैं उससे शायद कभी कह नहीं पाऊं लेकिन तेरे सामने स्वीकारोक्ती करता हूं कि तेरी आत्या बहुत महान है। मुझ विधुर से शादी करने के लिए तैयार हुई। मेरी मां के कठोर व्यवहार को सहती रही, मेरे मंद बुध्दि भाई को प्यार व स्नेह दे उसका ख्याल आज तक रख रही है। मेरी बेटी को मां से बढ़कर प्यार दे अपना लिया है, यहां तक कि, उसके आग से झुलस जाने पर भी उसकी सेवा की हमारे बेटों को भी अच्छे संस्कार दिए। पर मैं अपनी अहंकार व घमंड में सदा उसे नीचा दिखाता रहा। वह मेरे जुल्म भी सहती रही पर कभी किसी से शिकायत नहीं की। उसकी सुंदरता से मैं मन ही मन आशंकित रहता कि अगर इसकी तारीफ करूंगा तो कहीं घमंड व अभिमान से सिर पर न बैठ जाए। अपनी शिक्षा व व्यवसाय को सदा श्रेष्ठ समझता रहा। मेरा पुरूषी अहम मुझे उसके व्यवहार त्याग व समर्पण की सराहना करने से सदा रोकता रहा और चाहकर भी मैं कभी खुलकर उसकी प्रशंसा नहीं कर पाया। मैंने कहा फूफाजी आप भी आत्या को बहुत चाहते हैं, एक बार कह दीजिए ना, शायद उसे भी सुकून मिले। मुझे लगा काश आत्या यह सुन पातीं, लेकिन वह तो काकाजी को खाना खिलाने में लगी थीं। तभी से काकाजी की तबियत भी बिगड़ती जा रही थी। आत्या को दो-दो लोगों की सेवा करनी पड़ रही थी जबकि वे स्वयं भी पचहत्तर वर्ष पूर्ण कर चुकी थीं। उनकी मदद के लिए बेटे के नर्सिंग होम के नौकर, नर्स रहते लेकिन सारी जिम्मेदारियां तो आत्या की ही थी। काकाजी की खबर सुन मन उदास हैं। जो हुआ अच्छा ही हुआ लेकिन आत्या से क्या बात करूंगी, पता नहीं। लाड़ला देवर ही नहीं उसके रूप में बेटा खोया है, पता नहीं कैसे रिएक्ट करें। यादों के कतरन संजोते-संजोते जाने कब नींद लग गई। पंद्रह दिन बीत गए सुबह पाँच बजे मोबाईल की घंटी बजने से नींद खुली, डॉ प्रफुल्ल का नाम पढ़कर थोड़ी हैरानी के साथ बैचेनी भी हुई। हड़बड़ाकर उठी और मोबाईल ऑन किया, आवाज आयी दीदी "दादा" भी चल बसे। मैंने पूछा क्या हुआ था? उसने बताया बीमार तो थे ही। काकाजी का सबकुछ अपने हाथों से करने में असमर्थ, फिर भी तेरह दिन तक सबकुछ किया। कल रात को केवल इतना कहा - चलो एक बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त हो गया। सुनकर मैं सन्न रह गई। इतना भातृ प्रेम मानो उसकी जिम्मेदारी निभाने के लिए ही सांस रोके थे। सबको खबर की व आत्या से बात करने के लिए फोन लगाया कहा - आत्या स्वयं जल्दी आकर तेरे दुख में शामिल होना चाहती हूं, तूने सारी जिदंगी काकाजी व दादा की खूब सेवा की। आत्या का जवाब था - मैंने क्या किया, सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया। तेरे फूफाजी ने अपने भाई का सारी उम्र खयाल रखा व जाते हुए भी उन्हें सुकून था कि वे अपनी जिम्मेदारी निभा गए। उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी इसलिए यही सुकून है कि मेरे प्राण रहते ईश्वर ने उन्हें मुक्ति दे दी, वरना एक बोझ सीने पर रहता कि अपनी जिम्मेदारी बच्चों के सिर पर छोड़े जा रहे हैं। ईश्वर ने उन्हें मुक्त कर मुझे शांति से मरने का रास्ता दिखा दिया है। काकाजी के जाने के बाद ये अत्यंत भावुक हो गए थे। पिछले तेरह दिनों में मुझसे बहुत बातें करते थे हर घटना, हर बात याद करके कभी मुझसे माफी मांगते तो कभी मेरा एहसान जताते। इन तेरह दिनों में उन्होंने अपने मन की हर बात को मुझसे खुल कर कहा था। आखिरी दिन कह रहे थे - विश्वास न हो तो नीरू से फोन करके पूछ लेना। सच कहूं नीरू इनके मुंह से दो मीठे बोल, दो सराहना के बोल सुनने को तरसते जिंदगी बीत गई। अब तो मैंने सारी उम्मीदें ही छोड़ दी थी, पर चलो देर से ही सही जिंदगी भर की चाहत पूर्ण तो हुई। एक सुकून मन में रहेगा इनकी स्वीकारोक्ति का। फोन रखते हुए आंखों से बहती हुई अश्रुधारा को पोंछते हुए कोटा जाने की ठान ली। एक तरफ आत्या के वैधव्य का दुख था, पर दूसरी तरफ फूफाजी की स्वीकारोक्ति से उपजा सुकून आत्या के चेहरे पर देखने की चाहत।
गन्नौर, 14 मार्च (निस) बादशाही रोड पर सोमवार को दुकान के आगे फ्लेक्स लगाते समय एक मजदूर व उसकी महिला सहयोगी को करंट लग गया। मजदूर की मौत हो गई। जबकि महिला मजदूर की हालत गंभीर है। बादशाही रोड पर प्रमोद निवासी शाहपुर तगा हाल महावीर नगर गन्नौर की रेलवे रोड पर कन्फेसरी की दुकान है। उस पर मजदूर यूपी निवासी उमेश व गन्नौर निवासी बबीता जनता स्कूल रोड पर दुकान के आगे बोर्ड लगा रहे थे। अचानक उमेश व बबीता को बिजली का करंट लग गया। गंभीर घायल उमेश की हादसे में मौत हो गई। जबकि बबीता घायल है।
गन्नौर, चौदह मार्च बादशाही रोड पर सोमवार को दुकान के आगे फ्लेक्स लगाते समय एक मजदूर व उसकी महिला सहयोगी को करंट लग गया। मजदूर की मौत हो गई। जबकि महिला मजदूर की हालत गंभीर है। बादशाही रोड पर प्रमोद निवासी शाहपुर तगा हाल महावीर नगर गन्नौर की रेलवे रोड पर कन्फेसरी की दुकान है। उस पर मजदूर यूपी निवासी उमेश व गन्नौर निवासी बबीता जनता स्कूल रोड पर दुकान के आगे बोर्ड लगा रहे थे। अचानक उमेश व बबीता को बिजली का करंट लग गया। गंभीर घायल उमेश की हादसे में मौत हो गई। जबकि बबीता घायल है।
Vikram Vedha actress Yogita Bihani: योगिता बिहानी ऋतिक रोशन और सैफ अली खान अभिनीत अपनी आगामी फिल्म विक्रम वेधा के प्रमोशन में जुटी हुई हैं। इस मौके के लिए स्टार ने सी-थ्रू मेश ड्रेस में दिखाई दीं। Yogita Bihani Latest Look: ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की आगामी फिल्म विक्रम वेधा की स्टार कास्ट फिल्म प्रमोशन में जुट गई है। इस मौके पर योगिता का जबरदस्त लुक सामने आया। बोल्ड स्टाइल स्टेटमेंट के साथ एक्ट्रेस एक सी-थ्रू मेश ड्रेस और हॉट पिंक ब्लेजर में दिखाई दीं। एक्ट्रसे की ये तस्वीरें काफी ज्यादा वायरल हो रही हैं। सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट गरिमा गर्ग ने योगिता को हेड-टर्निंग मेश ड्रेस और ब्लेजर में स्टाइल किया। योगिता बिहानी अपने इंस्टाग्राम पर अक्सर ही फैशनेबल फोटोज शेयर करती रहती हैं। हाल ही में फिल्म प्रमोशन के लिए उन्होंने एक ऑफ-व्हाइट ड्रेस को सी-थ्रू मेश फैब्रिक में चुना है। इस आउटफिट में एक्ट्रेस अपनी छत पर खड़ी हुई दिख रही हैं, वहीं उनका बोल्ड मेकअप लुक बहुत ही बढ़िया लग रहा था। एक्ट्रेस की इस आउटफिट में बॉडी-हगिंग सिल्हूट, कट-आउट और प्लंजिंग यू-नेकलाइन है। लुक के लेवल को अप करने के लिए और असे क्लासी बनाने के लिए हसीना ने हॉट पिंक ब्लेजर भी पहना है। जिसमें नॉच लैपल कॉलर, फ्रंट बटन क्लोजर, पुल-बैक फुल-लेंथ स्लीव्स, साइड में पैच पॉकेट, बॉडी फिटिंग और पैडेड कंधे थे। योगिता ने इस प्रमोशनल लुक को उन्होंने लेयर्ड बीडेड चेन्स और पेंडेंट के साथ नेकलेस, स्लीक ब्रेसलेट्स, मल्टी-कलर्ड स्टेटमेंट रिंग्स और स्ट्रैपी पिंक हाई हील्स के साथ एक्सेसराइज किया है। हसीना ने बोल्ड-मिनिमल लुक को कैरी किया है। योगिता ने कर्ल, स्मोकी आई शैडो, स्लीक ब्लैक आईलाइनर, लैशेस पर मस्कारा, ग्लॉसी पिंक लिप शेड, ब्लश्ड गाल, बीमिंग हाइलाइटर और ग्लैम पिक्स के साथ कॉन्टूरिंग की है। वहीं बालों को सेंटर-पार्टेड करके ओपन हेयरडू चुना। यह भी पढ़ेंः कियारा आडवाणी ने डीप नेक आउटफिट में इंटरनेट पर लगाई आग, लुक देख आप भी कह देंगे 'सो हॉट'
Vikram Vedha actress Yogita Bihani: योगिता बिहानी ऋतिक रोशन और सैफ अली खान अभिनीत अपनी आगामी फिल्म विक्रम वेधा के प्रमोशन में जुटी हुई हैं। इस मौके के लिए स्टार ने सी-थ्रू मेश ड्रेस में दिखाई दीं। Yogita Bihani Latest Look: ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की आगामी फिल्म विक्रम वेधा की स्टार कास्ट फिल्म प्रमोशन में जुट गई है। इस मौके पर योगिता का जबरदस्त लुक सामने आया। बोल्ड स्टाइल स्टेटमेंट के साथ एक्ट्रेस एक सी-थ्रू मेश ड्रेस और हॉट पिंक ब्लेजर में दिखाई दीं। एक्ट्रसे की ये तस्वीरें काफी ज्यादा वायरल हो रही हैं। सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट गरिमा गर्ग ने योगिता को हेड-टर्निंग मेश ड्रेस और ब्लेजर में स्टाइल किया। योगिता बिहानी अपने इंस्टाग्राम पर अक्सर ही फैशनेबल फोटोज शेयर करती रहती हैं। हाल ही में फिल्म प्रमोशन के लिए उन्होंने एक ऑफ-व्हाइट ड्रेस को सी-थ्रू मेश फैब्रिक में चुना है। इस आउटफिट में एक्ट्रेस अपनी छत पर खड़ी हुई दिख रही हैं, वहीं उनका बोल्ड मेकअप लुक बहुत ही बढ़िया लग रहा था। एक्ट्रेस की इस आउटफिट में बॉडी-हगिंग सिल्हूट, कट-आउट और प्लंजिंग यू-नेकलाइन है। लुक के लेवल को अप करने के लिए और असे क्लासी बनाने के लिए हसीना ने हॉट पिंक ब्लेजर भी पहना है। जिसमें नॉच लैपल कॉलर, फ्रंट बटन क्लोजर, पुल-बैक फुल-लेंथ स्लीव्स, साइड में पैच पॉकेट, बॉडी फिटिंग और पैडेड कंधे थे। योगिता ने इस प्रमोशनल लुक को उन्होंने लेयर्ड बीडेड चेन्स और पेंडेंट के साथ नेकलेस, स्लीक ब्रेसलेट्स, मल्टी-कलर्ड स्टेटमेंट रिंग्स और स्ट्रैपी पिंक हाई हील्स के साथ एक्सेसराइज किया है। हसीना ने बोल्ड-मिनिमल लुक को कैरी किया है। योगिता ने कर्ल, स्मोकी आई शैडो, स्लीक ब्लैक आईलाइनर, लैशेस पर मस्कारा, ग्लॉसी पिंक लिप शेड, ब्लश्ड गाल, बीमिंग हाइलाइटर और ग्लैम पिक्स के साथ कॉन्टूरिंग की है। वहीं बालों को सेंटर-पार्टेड करके ओपन हेयरडू चुना। यह भी पढ़ेंः कियारा आडवाणी ने डीप नेक आउटफिट में इंटरनेट पर लगाई आग, लुक देख आप भी कह देंगे 'सो हॉट'
Ikgdar 500 Injection डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। इसे मुख्यतः गैर-हॉजकिन लिंफोमा, क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इस दवाई Ikgdar 500 Injection को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Ikgdar 500 Injection की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। Ikgdar 500 Injection के सबसे सामान्य दुष्प्रभाव दुर्बलता हैं। कुछ मामलों में Ikgdar 500 Injection के कुछ अन्य साइड इफेक्ट भी देखे जा सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। Ikgdar 500 Injection के इस तरह के साइड इफेक्ट सामान्यतः लंबे समय तक नहीं रहते और एक बार इलाज पूरा होने जाने के बाद अपने आप खत्म हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा Ikgdar 500 Injection को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव गंभीर है। इसके अतिरिक्त Ikgdar 500 Injection का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Ikgdar 500 Injection से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। हाइपरकलेमिया इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। इनके आलावा कुछ अन्य समस्याएं भी हैं जिनमें Ikgdar 500 Injection लेने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बारे में जानकरी के लिए आगे पढ़ें। Ikgdar 500 Injection को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। उपरोक्त सभी जानकारीयों के साथ-साथ यह भी ध्यान रखें कि ड्राइविंग करते समय Ikgdar 500 Injection दवा लेना असुरक्षित है। यह भी ध्यान रखें कि इस दवा की लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ikgdar 500 Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ikgdar 500 Injection की खुराक अलग हो सकती है। क्या Ikgdar 500 Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Ikgdar से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें। क्या Ikgdar 500 Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Ikgdar को लेने वाली जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं, उन पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव होते है। इसलिए आपको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसे लेना चाहिए। Ikgdar 500 Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Ikgdar से किडनी प्रभावित हो सकती है। आप भी दवा से साइड इफेक्ट महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें। चिकित्सक से सलाह के बाद ही इसे दोबारा लें। Ikgdar 500 Injection का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Ikgdar से आपके लीवर पर कोई दबाव नहीं पड़ता है और यह लीवर के लिए सुरक्षित भी है। क्या ह्रदय पर Ikgdar 500 Injection का प्रभाव पड़ता है? जो पहले से हृदय रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए Ikgdar के दुष्परिणाम हो सकते हैं, यदि आप भी ऐसा कुछ महसूस करें तो दवा का सेवन ना करें और डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा को लें। क्या Ikgdar 500 Injection आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Ikgdar 500 Injection को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Ikgdar 500 Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Ikgdar 500 Injection को लने के बाद आप इस तरह का काम नहीं कर पाएंगे। क्या Ikgdar 500 Injection को लेना सुरखित है? हां, परंतु इसको लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ikgdar 500 Injection इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Ikgdar 500 Injection काम नहीं कर पाती है। क्या Ikgdar 500 Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Ikgdar 500 Injection और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है। जब Ikgdar 500 Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Ikgdar 500 Injection से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Rituxan (rituximab)
Ikgdar पाँच सौ Injection डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। इसे मुख्यतः गैर-हॉजकिन लिंफोमा, क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इस दवाई Ikgdar पाँच सौ Injection को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Ikgdar पाँच सौ Injection की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। Ikgdar पाँच सौ Injection के सबसे सामान्य दुष्प्रभाव दुर्बलता हैं। कुछ मामलों में Ikgdar पाँच सौ Injection के कुछ अन्य साइड इफेक्ट भी देखे जा सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। Ikgdar पाँच सौ Injection के इस तरह के साइड इफेक्ट सामान्यतः लंबे समय तक नहीं रहते और एक बार इलाज पूरा होने जाने के बाद अपने आप खत्म हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा Ikgdar पाँच सौ Injection को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव गंभीर है। इसके अतिरिक्त Ikgdar पाँच सौ Injection का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Ikgdar पाँच सौ Injection से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। हाइपरकलेमिया इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। इनके आलावा कुछ अन्य समस्याएं भी हैं जिनमें Ikgdar पाँच सौ Injection लेने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बारे में जानकरी के लिए आगे पढ़ें। Ikgdar पाँच सौ Injection को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। उपरोक्त सभी जानकारीयों के साथ-साथ यह भी ध्यान रखें कि ड्राइविंग करते समय Ikgdar पाँच सौ Injection दवा लेना असुरक्षित है। यह भी ध्यान रखें कि इस दवा की लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ikgdar पाँच सौ Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ikgdar पाँच सौ Injection की खुराक अलग हो सकती है। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Ikgdar से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Ikgdar को लेने वाली जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं, उन पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव होते है। इसलिए आपको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसे लेना चाहिए। Ikgdar पाँच सौ Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Ikgdar से किडनी प्रभावित हो सकती है। आप भी दवा से साइड इफेक्ट महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें। चिकित्सक से सलाह के बाद ही इसे दोबारा लें। Ikgdar पाँच सौ Injection का जिगर पर क्या असर होता है? Ikgdar से आपके लीवर पर कोई दबाव नहीं पड़ता है और यह लीवर के लिए सुरक्षित भी है। क्या ह्रदय पर Ikgdar पाँच सौ Injection का प्रभाव पड़ता है? जो पहले से हृदय रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए Ikgdar के दुष्परिणाम हो सकते हैं, यदि आप भी ऐसा कुछ महसूस करें तो दवा का सेवन ना करें और डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा को लें। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Ikgdar पाँच सौ Injection को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Ikgdar पाँच सौ Injection को लने के बाद आप इस तरह का काम नहीं कर पाएंगे। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection को लेना सुरखित है? हां, परंतु इसको लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ikgdar पाँच सौ Injection इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Ikgdar पाँच सौ Injection काम नहीं कर पाती है। क्या Ikgdar पाँच सौ Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Ikgdar पाँच सौ Injection और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है। जब Ikgdar पाँच सौ Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Ikgdar पाँच सौ Injection से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Rituxan
- जानें कौन है अमर सिंह चमकीला जिनकी 27 साल की उम्र में दिन दहाड़े हो गई थी हत्या, अब नेटफ्लिक्स ला रहा है फिल्म 'चमकीला'Bollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार मई 30, 2023 02:54 PM ISTअमर सिंह चमकीला पंजाब के वो सिंगर थे जो अपनी लाइव परफॉर्मेंसेस से दर्शकों को बांधकर रख देते थे. लेकिन एक दिन उनकी हत्या कर दी गई. अब उन पर फिल्म आ रही है, जानें कौन हैं अमर सिंह चमकीला. - AR Rahman के बेटे ने शेयर की क्रेन हादसा की तस्वीरें, फैमिली और फैंस के लिए एआर अमीन ने लिखा दिल छू लेने वाला ये पोस्टBollywood । Edited by: रोज़ी पंवार ।सोमवार मार्च 6, 2023 08:35 PM ISTअमीन ने हादसे वाली जगह की कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए इस जानलेवा घटना का सिलसिलेवार जिक्र भी किया है और कहा कि मैं आज अपने भगवान, पिता, शुभचिंतकों की वजह से जिंदा और सुरक्षित हूं. - Sania Mirza: सानिया मिर्जा के फेयरवेल बैश में पहुंची फराह खान, हुमा कुरैशी और महेश बाबू, सेलेब्स की तस्वीरें आई सामनेBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।मंगलवार मार्च 7, 2023 06:17 AM ISTसानिया मिर्जा की एक और करीबी दोस्त हुमा कुरैशी ने टेनिस आइकन के बैश की तस्वीरें शेयर की हैं. इसमें वह टेनिस स्टार के साथ नजर आ रही हैं. - एआर रहमान के बेटे एआर अमीन हैं बेहद हैंडसम और टैलेंटेड, PHOTOS देख कर फैंस बोले- ये तो हीरो दिखता हैBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार जनवरी 8, 2023 02:44 PM ISTएआर रहमान ने भी रजनीकांत के साथ अपनी तस्वीरें साझा की. उन्होंने हाल ही में संगीतकार की वर्चुअल रियलिटी फिल्म ले मस्क को देखते हुए अभिनेता की एक तस्वीर साझा की. - नेहा कक्कड़ और फाल्गुनी पाठक के सॉन्ग विवाद पर दिया एआर रहमान ने रिएक्शन, रीमेक गाने को बताया 'बर्बाद'Bollywood । Written by: आनंद कश्यप ।बुधवार सितम्बर 28, 2022 09:47 PM ISTजिसके बाद दोनों सिंगर सोशल मीडिया पर भिड़ गईं. अब इस पूरे मामले में भारत के दिग्गज म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. एआर रहमान ने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे से बातचीत की. - मां के साथ खड़ा ये बच्चा है इंडस्ट्री का नामी आर्टिस्ट, 15 अगस्त को इस सितारे की आवाज से गूंज उठेगा देश. . . Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।गुरुवार अगस्त 4, 2022 06:07 AM ISTतस्वीर में दिख रहा ये नन्हा बच्चा कोई और नहीं बल्कि जाने माने सिंगर, सॉन्ग राइटर, कंपोजर ए आर रहमान हैं. ये ए आर रहमान की बचपन की तस्वीर है जहां वे अपनी मां के साथ खड़े पोज देते दिखाई दे रहे हैं. - VIRAL: एआर रहमान की बेटी और दामाद की नई तस्वीरें आईं सामने, खातिजा का यूं सादगी भरा अंदाज देख फैन्स भी बोले- माशा अल्लाह. . . Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।गुरुवार जून 16, 2022 03:53 PM ISTइंडस्ट्री के मोस्ट पॉपलुर म्यूजिशियन एआर रहमान ने हाल ही में अपनी बेटी खातीजा की शादी की है. खातिजा की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया खूब छाई रहीं. खातिजा ने अपने सादा अंदाज से सभी का दिल जीत लिया था. - Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।सोमवार जून 13, 2022 07:01 AM ISTइंडस्ट्री के जाने माने आर्टिस्ट एआर रहमान ने हाल ही में अपनी बेटी खातीजा की शादी की है. खातीजा की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं. - Bollywood । Written by: Anand kashyap ।सोमवार मई 23, 2022 05:35 PM ISTफिल्म 'सफेद' लंबे समय से सुर्खियों में बनी हुई है. इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. खबरों की मानें तो फिल्म 'सफेद' की कहानी काफी लग रहने वाली है. - Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।रविवार मई 8, 2022 11:41 PM ISTआपको बता दें की एआर रहमान की बेटी की शादी रियासदीन रियान से की गई है. वे पेशे से एक ऑडियो इंजीनियर हैं. सिंगर ने अपनी फैमिली फोटो अपने इंस्टा हैंडल पर शेयर की थी.
- जानें कौन है अमर सिंह चमकीला जिनकी सत्ताईस साल की उम्र में दिन दहाड़े हो गई थी हत्या, अब नेटफ्लिक्स ला रहा है फिल्म 'चमकीला'Bollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।मंगलवार मई तीस, दो हज़ार तेईस दो:चौवन PM ISTअमर सिंह चमकीला पंजाब के वो सिंगर थे जो अपनी लाइव परफॉर्मेंसेस से दर्शकों को बांधकर रख देते थे. लेकिन एक दिन उनकी हत्या कर दी गई. अब उन पर फिल्म आ रही है, जानें कौन हैं अमर सिंह चमकीला. - AR Rahman के बेटे ने शेयर की क्रेन हादसा की तस्वीरें, फैमिली और फैंस के लिए एआर अमीन ने लिखा दिल छू लेने वाला ये पोस्टBollywood । Edited by: रोज़ी पंवार ।सोमवार मार्च छः, दो हज़ार तेईस आठ:पैंतीस PM ISTअमीन ने हादसे वाली जगह की कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए इस जानलेवा घटना का सिलसिलेवार जिक्र भी किया है और कहा कि मैं आज अपने भगवान, पिता, शुभचिंतकों की वजह से जिंदा और सुरक्षित हूं. - Sania Mirza: सानिया मिर्जा के फेयरवेल बैश में पहुंची फराह खान, हुमा कुरैशी और महेश बाबू, सेलेब्स की तस्वीरें आई सामनेBollywood । Written by: रोज़ी पंवार ।मंगलवार मार्च सात, दो हज़ार तेईस छः:सत्रह AM ISTसानिया मिर्जा की एक और करीबी दोस्त हुमा कुरैशी ने टेनिस आइकन के बैश की तस्वीरें शेयर की हैं. इसमें वह टेनिस स्टार के साथ नजर आ रही हैं. - एआर रहमान के बेटे एआर अमीन हैं बेहद हैंडसम और टैलेंटेड, PHOTOS देख कर फैंस बोले- ये तो हीरो दिखता हैBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार जनवरी आठ, दो हज़ार तेईस दो:चौंतालीस PM ISTएआर रहमान ने भी रजनीकांत के साथ अपनी तस्वीरें साझा की. उन्होंने हाल ही में संगीतकार की वर्चुअल रियलिटी फिल्म ले मस्क को देखते हुए अभिनेता की एक तस्वीर साझा की. - नेहा कक्कड़ और फाल्गुनी पाठक के सॉन्ग विवाद पर दिया एआर रहमान ने रिएक्शन, रीमेक गाने को बताया 'बर्बाद'Bollywood । Written by: आनंद कश्यप ।बुधवार सितम्बर अट्ठाईस, दो हज़ार बाईस नौ:सैंतालीस PM ISTजिसके बाद दोनों सिंगर सोशल मीडिया पर भिड़ गईं. अब इस पूरे मामले में भारत के दिग्गज म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. एआर रहमान ने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे से बातचीत की. - मां के साथ खड़ा ये बच्चा है इंडस्ट्री का नामी आर्टिस्ट, पंद्रह अगस्त को इस सितारे की आवाज से गूंज उठेगा देश. . . Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।गुरुवार अगस्त चार, दो हज़ार बाईस छः:सात AM ISTतस्वीर में दिख रहा ये नन्हा बच्चा कोई और नहीं बल्कि जाने माने सिंगर, सॉन्ग राइटर, कंपोजर ए आर रहमान हैं. ये ए आर रहमान की बचपन की तस्वीर है जहां वे अपनी मां के साथ खड़े पोज देते दिखाई दे रहे हैं. - VIRAL: एआर रहमान की बेटी और दामाद की नई तस्वीरें आईं सामने, खातिजा का यूं सादगी भरा अंदाज देख फैन्स भी बोले- माशा अल्लाह. . . Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।गुरुवार जून सोलह, दो हज़ार बाईस तीन:तिरेपन PM ISTइंडस्ट्री के मोस्ट पॉपलुर म्यूजिशियन एआर रहमान ने हाल ही में अपनी बेटी खातीजा की शादी की है. खातिजा की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया खूब छाई रहीं. खातिजा ने अपने सादा अंदाज से सभी का दिल जीत लिया था. - Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।सोमवार जून तेरह, दो हज़ार बाईस सात:एक AM ISTइंडस्ट्री के जाने माने आर्टिस्ट एआर रहमान ने हाल ही में अपनी बेटी खातीजा की शादी की है. खातीजा की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं. - Bollywood । Written by: Anand kashyap ।सोमवार मई तेईस, दो हज़ार बाईस पाँच:पैंतीस PM ISTफिल्म 'सफेद' लंबे समय से सुर्खियों में बनी हुई है. इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. खबरों की मानें तो फिल्म 'सफेद' की कहानी काफी लग रहने वाली है. - Bollywood । Written by: दीक्षा त्रिपाठी ।रविवार मई आठ, दो हज़ार बाईस ग्यारह:इकतालीस PM ISTआपको बता दें की एआर रहमान की बेटी की शादी रियासदीन रियान से की गई है. वे पेशे से एक ऑडियो इंजीनियर हैं. सिंगर ने अपनी फैमिली फोटो अपने इंस्टा हैंडल पर शेयर की थी.
जनज्वार ब्यूरो। मध्य प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने पर समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला को शुक्रवार को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। सपा की प्रदेश इकाई के पूर्व प्रवक्ता यश भारतीय ने बताया कि राज्य में शुक्रवार को राज्यसभा के लिए मतदान हुआ और पार्टी की ओर से व्हिप जारी किए जाने के बावजूद शुक्ला ने भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया, लिहाजा उन्हें पार्टी विरोध गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया गया है। सपा के आधिकारिक ट्वीट हेंडल पर एक ट्वीट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के बिजावर से सपा विधायक राजेश शुक्ला को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित किया जाता है। बता दें कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में बीजेपी ने अपनी दो सीटें बरकरार रखी हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस ने जीती है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के निर्वाचित उम्मीदवारों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सबसे अधिक वोटों से चुने गये हैं। दिग्विजय लगातार दूसरी बार मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं।
जनज्वार ब्यूरो। मध्य प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने पर समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला को शुक्रवार को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। सपा की प्रदेश इकाई के पूर्व प्रवक्ता यश भारतीय ने बताया कि राज्य में शुक्रवार को राज्यसभा के लिए मतदान हुआ और पार्टी की ओर से व्हिप जारी किए जाने के बावजूद शुक्ला ने भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया, लिहाजा उन्हें पार्टी विरोध गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया गया है। सपा के आधिकारिक ट्वीट हेंडल पर एक ट्वीट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के बिजावर से सपा विधायक राजेश शुक्ला को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित किया जाता है। बता दें कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में बीजेपी ने अपनी दो सीटें बरकरार रखी हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस ने जीती है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के निर्वाचित उम्मीदवारों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सबसे अधिक वोटों से चुने गये हैं। दिग्विजय लगातार दूसरी बार मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं।
२०६. 'काल' के 'अणु' लोकप्रमाण असंख्यात हैं। उस अणुमे रुक्ष अथवा स्निग्ध गुण नहीं हैं । इसलिये एक अणु दूसरेमे नहीं मिलता, और प्रत्येक पृथक् पृथक् रहता है। परमाणु-पुद्गलमें वह गुण होनेसे मूल सत्ता कायम रहकर उसका (परमाणु -पुद्गलका) स्कंध होता है। २०७. धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, (लोक) आकाशास्तिकाय और जीवास्तिकाय उसके भी असंख्यात प्रदेश हैं। और उसके प्रदेशमे रुक्ष अथवा स्निग्ध गुण नही है, फिर भी वे कालकी तरह प्रत्येक अणु अलग अलग रहनेके बदले एक समूह होकर रहते हैं। इसका कारण यह है कि काल प्रदेशात्मक नहीं हैं, परन्तु अणु होकर पृथक् पृथक् है, और धर्मास्तिकाय आदि चार द्रव्य प्रदेशात्मक है। २०८. वस्तुको समझानेके लिये अमुक नयसे भेदरूपसे वर्णन किया गया है। वस्तुतः वस्तु, उसके गुण और पर्याय यों तोन पृथक् पृथक् नहीं हैं, एक ही है । गुण और पर्यायके कारण वस्तुका स्वरूप समझ में आता है। जैसे मिस्री यह वस्तु, मिठास यह गुण और खुरदरा आकार यह पर्याय है। इन तीनोंको लेकर मिस्री है। मिठासवाले गुणके बिना मिस्री पहचानी नही जा सकती। वैसा ही कोई खुरदरे आकारवाला टुकड़ा हो, परन्तु उसमे खारेपनका गुण हो तो वह मिस्री नही परन्तु नमक है । इस जगह पदार्थकी प्रतीति अथवा ज्ञान, गुणके कारण होता है, इस तरह गुणी और गुण भिन्न नही है। फिर भी अमुक कारणको लेकर पदार्थका स्वरूप समझाने के लिये भिन्न कहे गये हैं। २०९. गुण और पर्यायके कारण पदार्थ है। यदि वे दोनों न हो तो फिर पदार्थका होना न होनेके बराबर है, क्योंकि वह किस कामका है ? २१० एक दूसरेसे विरुद्ध पदवाली ऐसी त्रिपदी पदार्थमात्रमे रही हुई है । ध्रुव अर्थात् सत्ता-अस्तित्व पदार्थका सदा है। उसके होनेपर भी पदार्थ मे उत्पाद और व्यय ये दो पद रहते हैं। पूर्व पर्यायका व्यय और उत्तर पर्यायका उत्पाद हुआ करता है । २११. इस पर्यायके परिवर्तनसे काल मालूम होता है । अथवा उस पर्यायका परिवर्तन होनेमें काल सहकारी है। २१२. प्रत्येक पदार्थमें समय-समयपर षटचक्र उठता है। वह यह कि संख्यातगुणवृद्धि, असंख्यात गुणवृद्धि, अनंतगुणवृद्धि, संख्यातगुणहानि, असंख्यातगुणहानि और अनंतगुणहानि; जिसका स्वरूप श्री वीतरागदेव अवाक्गोचर कहते हैं। २१३. आकाश के प्रदेशकी श्रेणि सम है। विषम मात्र एक प्रदेशको विदिशाकी श्रेणि है। समश्रेणि छः हैं और वे दो प्रवेशी है। पदार्थमात्रका गमन समश्रेणिसे होता है, विषमश्रेणिसे नही होता। क्योंकि आकाशके प्रदेशको समश्रेण है। इसी तरह पदार्थमात्रमे अगुरुलघु धर्म है। उस धर्मके कारण पदार्थ विषमश्रेणिसे गमन नही कर सकता । २१४. चक्षुरिंद्रियके सिवाय दूसरी इंद्रियोसे जो जाना जा सकता है उसका समावेश जाननेमें होता है। २१५. चक्षुरिद्रियसे जो देखा जाता है वह भी जानना है। जब तक संपूर्ण जानने-देखने में नहीं खाता तब तक जानना अधूरा माना जाता है, केवलज्ञान नही माना जाता । २१६. जहाँ त्रिकाल अवबोध है वहाँ सम्पूर्ण जानना होता है।
दो सौ छः. 'काल' के 'अणु' लोकप्रमाण असंख्यात हैं। उस अणुमे रुक्ष अथवा स्निग्ध गुण नहीं हैं । इसलिये एक अणु दूसरेमे नहीं मिलता, और प्रत्येक पृथक् पृथक् रहता है। परमाणु-पुद्गलमें वह गुण होनेसे मूल सत्ता कायम रहकर उसका स्कंध होता है। दो सौ सात. धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाशास्तिकाय और जीवास्तिकाय उसके भी असंख्यात प्रदेश हैं। और उसके प्रदेशमे रुक्ष अथवा स्निग्ध गुण नही है, फिर भी वे कालकी तरह प्रत्येक अणु अलग अलग रहनेके बदले एक समूह होकर रहते हैं। इसका कारण यह है कि काल प्रदेशात्मक नहीं हैं, परन्तु अणु होकर पृथक् पृथक् है, और धर्मास्तिकाय आदि चार द्रव्य प्रदेशात्मक है। दो सौ आठ. वस्तुको समझानेके लिये अमुक नयसे भेदरूपसे वर्णन किया गया है। वस्तुतः वस्तु, उसके गुण और पर्याय यों तोन पृथक् पृथक् नहीं हैं, एक ही है । गुण और पर्यायके कारण वस्तुका स्वरूप समझ में आता है। जैसे मिस्री यह वस्तु, मिठास यह गुण और खुरदरा आकार यह पर्याय है। इन तीनोंको लेकर मिस्री है। मिठासवाले गुणके बिना मिस्री पहचानी नही जा सकती। वैसा ही कोई खुरदरे आकारवाला टुकड़ा हो, परन्तु उसमे खारेपनका गुण हो तो वह मिस्री नही परन्तु नमक है । इस जगह पदार्थकी प्रतीति अथवा ज्ञान, गुणके कारण होता है, इस तरह गुणी और गुण भिन्न नही है। फिर भी अमुक कारणको लेकर पदार्थका स्वरूप समझाने के लिये भिन्न कहे गये हैं। दो सौ नौ. गुण और पर्यायके कारण पदार्थ है। यदि वे दोनों न हो तो फिर पदार्थका होना न होनेके बराबर है, क्योंकि वह किस कामका है ? दो सौ दस एक दूसरेसे विरुद्ध पदवाली ऐसी त्रिपदी पदार्थमात्रमे रही हुई है । ध्रुव अर्थात् सत्ता-अस्तित्व पदार्थका सदा है। उसके होनेपर भी पदार्थ मे उत्पाद और व्यय ये दो पद रहते हैं। पूर्व पर्यायका व्यय और उत्तर पर्यायका उत्पाद हुआ करता है । दो सौ ग्यारह. इस पर्यायके परिवर्तनसे काल मालूम होता है । अथवा उस पर्यायका परिवर्तन होनेमें काल सहकारी है। दो सौ बारह. प्रत्येक पदार्थमें समय-समयपर षटचक्र उठता है। वह यह कि संख्यातगुणवृद्धि, असंख्यात गुणवृद्धि, अनंतगुणवृद्धि, संख्यातगुणहानि, असंख्यातगुणहानि और अनंतगुणहानि; जिसका स्वरूप श्री वीतरागदेव अवाक्गोचर कहते हैं। दो सौ तेरह. आकाश के प्रदेशकी श्रेणि सम है। विषम मात्र एक प्रदेशको विदिशाकी श्रेणि है। समश्रेणि छः हैं और वे दो प्रवेशी है। पदार्थमात्रका गमन समश्रेणिसे होता है, विषमश्रेणिसे नही होता। क्योंकि आकाशके प्रदेशको समश्रेण है। इसी तरह पदार्थमात्रमे अगुरुलघु धर्म है। उस धर्मके कारण पदार्थ विषमश्रेणिसे गमन नही कर सकता । दो सौ चौदह. चक्षुरिंद्रियके सिवाय दूसरी इंद्रियोसे जो जाना जा सकता है उसका समावेश जाननेमें होता है। दो सौ पंद्रह. चक्षुरिद्रियसे जो देखा जाता है वह भी जानना है। जब तक संपूर्ण जानने-देखने में नहीं खाता तब तक जानना अधूरा माना जाता है, केवलज्ञान नही माना जाता । दो सौ सोलह. जहाँ त्रिकाल अवबोध है वहाँ सम्पूर्ण जानना होता है।
जयपुर। राजस्थान सरकार की ओर से प्रदेश के जिला अस्पतालों में निजी जनसहभागिता (पीपीपी) पर शुरू की जा रही डायलिसिस सुविधा के बाद अब मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी पीपीपी पर एक एक अतिरिक्त डायलिसिस सेंटर खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि इन सेंटर्स पर लिए जाने शुल्क को लेकर संशय भी है। पूर्व सरकार के समय प्रदेश में निःशुल्क जांच योजना के तहत मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डायलिसिस को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया गया था। जबकि अब पीपीपी में इनका शुल्क वसूल किए जाने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार जिला अस्पतालों में पीपीपी मोड पर नए सेंटर खोलने पर शुल्क वसूला भी जाता है तो दिक्तत नहीं आएगी लेकिन, यदि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अतिरिक्त सेंटर खोला जाता है तो वहां एक सेंटर पर निःशुल्क और दूसरे पर शुल्क की व्यवस्था हो जाएगी। इससे गफलत की आशंका बनी रहेगी। बताया जा रहा है कि इन पीपीपी सेंटर्स पर डायलिसिस करने वाले डॉक्टर भी तीन महीने का कोर्स करने वाले होंगे, जबकि इसके लिए पहले से राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय 2 साल का डायलिसिस तकनीशियन मान्य कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार ने इसकी मान्यता भी दे दी है। है। तीन महीने का कोर्स होने पर 2 साल के कोर्स का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। बड़ा सवाल यह है कि एक ही अस्पताल में एक सेंटर पर निःशुल्क और दूसरे पर सशुल्क डायलिसिस होने पर डॉक्टरों के सामने यह परेशानी खड़ी होगी कि उसे किस सेंटर पर रैफर किया जाए। क्योंकि मरीज तो निःशुल्क सेंटर पर ही जाना चाहेंगे। एसएमएस अस्पताल के नेफ्रोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय अग्रवाल के अनुसार डायलिसिस एक उपचार की विधा है। जिसे किडनी फेलियर के मरीज पर किया जाता है। यह जांच नहीं है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दूसरा सेंटर खोला भी जाए तो दरें तो समान ही होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर समस्या खड़ी हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज में इससे डीएम डिग्री अमान्य होने की भी संभावना रहेगी। डीएम की ट्रेनिंग भी पूरी तरह नहीं हो पाएगी।
जयपुर। राजस्थान सरकार की ओर से प्रदेश के जिला अस्पतालों में निजी जनसहभागिता पर शुरू की जा रही डायलिसिस सुविधा के बाद अब मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी पीपीपी पर एक एक अतिरिक्त डायलिसिस सेंटर खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि इन सेंटर्स पर लिए जाने शुल्क को लेकर संशय भी है। पूर्व सरकार के समय प्रदेश में निःशुल्क जांच योजना के तहत मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डायलिसिस को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया गया था। जबकि अब पीपीपी में इनका शुल्क वसूल किए जाने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार जिला अस्पतालों में पीपीपी मोड पर नए सेंटर खोलने पर शुल्क वसूला भी जाता है तो दिक्तत नहीं आएगी लेकिन, यदि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अतिरिक्त सेंटर खोला जाता है तो वहां एक सेंटर पर निःशुल्क और दूसरे पर शुल्क की व्यवस्था हो जाएगी। इससे गफलत की आशंका बनी रहेगी। बताया जा रहा है कि इन पीपीपी सेंटर्स पर डायलिसिस करने वाले डॉक्टर भी तीन महीने का कोर्स करने वाले होंगे, जबकि इसके लिए पहले से राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय दो साल का डायलिसिस तकनीशियन मान्य कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार ने इसकी मान्यता भी दे दी है। है। तीन महीने का कोर्स होने पर दो साल के कोर्स का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। बड़ा सवाल यह है कि एक ही अस्पताल में एक सेंटर पर निःशुल्क और दूसरे पर सशुल्क डायलिसिस होने पर डॉक्टरों के सामने यह परेशानी खड़ी होगी कि उसे किस सेंटर पर रैफर किया जाए। क्योंकि मरीज तो निःशुल्क सेंटर पर ही जाना चाहेंगे। एसएमएस अस्पताल के नेफ्रोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय अग्रवाल के अनुसार डायलिसिस एक उपचार की विधा है। जिसे किडनी फेलियर के मरीज पर किया जाता है। यह जांच नहीं है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दूसरा सेंटर खोला भी जाए तो दरें तो समान ही होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर समस्या खड़ी हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज में इससे डीएम डिग्री अमान्य होने की भी संभावना रहेगी। डीएम की ट्रेनिंग भी पूरी तरह नहीं हो पाएगी।
बहन से प्रेम विवाह करने पर भाई ने बहनोई की गोली मारकर हत्या कर दी। अछल्दा रेलवे स्टेशन पर सरेबाजार दिनदहाड़े हुई हत्या से हड़कंप मच गया। दुकानों के शटर गिर गए। पुलिस ने तमंचा लहरा रहे आरोपी को दौड़ाकर पकड़ लिया। गिरफ्तार कर उसे थाने लाई। बहनोई के भाई की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। अछल्दा थाना क्षेत्र के गांव रजुआमऊ निवासी राजीव कुमार ने साल भर पहले गांव की ही पिंकी से कोर्ट मैरिज की थी। इससे पिंकी के परिजन राजीव से रंजिश रखते थे। शादी के बाद से राजीव पत्नी के साथ दिल्ली में रहकर प्राईवेट नौकरी करता था। बुधवार को राजीव बोडेपुर निवासी अपने मामा के लड़के की शादी में शामिल होने आया था। शुक्रवार दोपहर वह बोडेपुर से अछल्दा रेलवे स्टेशन पर एक रिश्तेदार को लेने आया। स्टेशन रोड पर ही युवती के भाई पवन सिंह ने उसे घेर लिया और कनपटी पर तमंचा रख फायर कर दिया। गोली लगने से राजीव की मौके पर ही मौत हो गई। पवन ने दबंगई दिखाते हुए बाजार में भी तमंचा लहराया। इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर पवन तमंचा लहराते हुए भागने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। राजीव के भाई आशुतोष की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। युवक को गोली मारकर हत्या करने के बाद मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई। आरोपी पवन ने भीड़ पर भी फायर करने का प्रयास किया। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। एसओ अछल्दा अखिलेश यादव ने आरोपी से अपने को पुलिस के हवाले करने के लिए कहा। इस पर आरोपी पुलिस पर फायर झोंकते हुए भागने लगा। इस पर एसओ ने फोर्स को पैर में गोली मारने के आदेश दिए। कारतूस खत्म होने पर जब आरोपी की ओर से फायर बंद हुआ, तब पुलिस ने दौड़ाकर दबोच लिया। मृतक युवक के ननिहाल बोडेपुर में घटना के बाद कोहराम मच गया। शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। सभी परिजन आनन-फानन में मौके पर पहुंच गए। शादी की तैयारियां धरी रह गईं। ननिहाल में मृतक के मामा के लड़के की शादी थी। राजीव ने पिंकी से कोर्ट मैरिज की थी। इससे नाराज भाई पवन ने राजीव को मारने की धमकी दी थी। इसके बाद से राजीव पिंकी के साथ दिल्ली में रहने लगा। पवन बहुत समय से राजीव का इंतजार कर रहा था। उसे पता चला कि राजीव बोडेपुर गांव में मामा के यहां शादी में आया है तो उसने घात लगाकर गोली मार दी। मृतक के भाई आशुतोष ने बीजेपी कार्यकर्ता पर हत्या कराने का आरोप लगाया है। आरोप है कि आरोपी युवक और बीजेपी कार्यकर्ता एक साथ रहते हैं। इस पर पुलिस ने कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया। इससे बीजेपी कार्यकर्ता भड़क उठे। दिबियापुर विधायक लाखन सिंह राजपूत ने थाने पहुंचकर बीजेपी कार्यकर्ता को निर्दोष बताया। पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
बहन से प्रेम विवाह करने पर भाई ने बहनोई की गोली मारकर हत्या कर दी। अछल्दा रेलवे स्टेशन पर सरेबाजार दिनदहाड़े हुई हत्या से हड़कंप मच गया। दुकानों के शटर गिर गए। पुलिस ने तमंचा लहरा रहे आरोपी को दौड़ाकर पकड़ लिया। गिरफ्तार कर उसे थाने लाई। बहनोई के भाई की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। अछल्दा थाना क्षेत्र के गांव रजुआमऊ निवासी राजीव कुमार ने साल भर पहले गांव की ही पिंकी से कोर्ट मैरिज की थी। इससे पिंकी के परिजन राजीव से रंजिश रखते थे। शादी के बाद से राजीव पत्नी के साथ दिल्ली में रहकर प्राईवेट नौकरी करता था। बुधवार को राजीव बोडेपुर निवासी अपने मामा के लड़के की शादी में शामिल होने आया था। शुक्रवार दोपहर वह बोडेपुर से अछल्दा रेलवे स्टेशन पर एक रिश्तेदार को लेने आया। स्टेशन रोड पर ही युवती के भाई पवन सिंह ने उसे घेर लिया और कनपटी पर तमंचा रख फायर कर दिया। गोली लगने से राजीव की मौके पर ही मौत हो गई। पवन ने दबंगई दिखाते हुए बाजार में भी तमंचा लहराया। इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर पवन तमंचा लहराते हुए भागने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। राजीव के भाई आशुतोष की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। युवक को गोली मारकर हत्या करने के बाद मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई। आरोपी पवन ने भीड़ पर भी फायर करने का प्रयास किया। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। एसओ अछल्दा अखिलेश यादव ने आरोपी से अपने को पुलिस के हवाले करने के लिए कहा। इस पर आरोपी पुलिस पर फायर झोंकते हुए भागने लगा। इस पर एसओ ने फोर्स को पैर में गोली मारने के आदेश दिए। कारतूस खत्म होने पर जब आरोपी की ओर से फायर बंद हुआ, तब पुलिस ने दौड़ाकर दबोच लिया। मृतक युवक के ननिहाल बोडेपुर में घटना के बाद कोहराम मच गया। शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। सभी परिजन आनन-फानन में मौके पर पहुंच गए। शादी की तैयारियां धरी रह गईं। ननिहाल में मृतक के मामा के लड़के की शादी थी। राजीव ने पिंकी से कोर्ट मैरिज की थी। इससे नाराज भाई पवन ने राजीव को मारने की धमकी दी थी। इसके बाद से राजीव पिंकी के साथ दिल्ली में रहने लगा। पवन बहुत समय से राजीव का इंतजार कर रहा था। उसे पता चला कि राजीव बोडेपुर गांव में मामा के यहां शादी में आया है तो उसने घात लगाकर गोली मार दी। मृतक के भाई आशुतोष ने बीजेपी कार्यकर्ता पर हत्या कराने का आरोप लगाया है। आरोप है कि आरोपी युवक और बीजेपी कार्यकर्ता एक साथ रहते हैं। इस पर पुलिस ने कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया। इससे बीजेपी कार्यकर्ता भड़क उठे। दिबियापुर विधायक लाखन सिंह राजपूत ने थाने पहुंचकर बीजेपी कार्यकर्ता को निर्दोष बताया। पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
एक से बढ़कर एक बल्लेबाजों और गेंदबाजों से लैस टीम इंडिया T20 World Cup 2021 से बाहर हो गई है. रविवार को अबु धाबी में हुए मुकाबले में जैसे ही न्यूजीलैंड ने अपनी चौथी जीत दर्ज की टीम इंडिया का टी20 वर्ल्ड कप 2021 जीतने का सपना टूट गया. न्यूजीलैंड ने अफगानिस्तान को 8 विकेट से हराया और इसी के साथ ग्रुप 2 से पाकिस्तान-न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में जगह बनाई वहीं ग्रुप 1 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम को कामयाबी मिली. बता दें बतौर टी20 कप्तान विराट कोहली अपना आखिरी आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीत पाए. यही नहीं पूरे 9 साल बाद टीम इंडिया को आईसीसी टूर्नामेंट में इतना खराब दिन देखना पड़ा है.
एक से बढ़कर एक बल्लेबाजों और गेंदबाजों से लैस टीम इंडिया Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस से बाहर हो गई है. रविवार को अबु धाबी में हुए मुकाबले में जैसे ही न्यूजीलैंड ने अपनी चौथी जीत दर्ज की टीम इंडिया का टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस जीतने का सपना टूट गया. न्यूजीलैंड ने अफगानिस्तान को आठ विकेट से हराया और इसी के साथ ग्रुप दो से पाकिस्तान-न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में जगह बनाई वहीं ग्रुप एक में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम को कामयाबी मिली. बता दें बतौर टीबीस कप्तान विराट कोहली अपना आखिरी आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीत पाए. यही नहीं पूरे नौ साल बाद टीम इंडिया को आईसीसी टूर्नामेंट में इतना खराब दिन देखना पड़ा है.
आचार जीवन जामनगर की बीमारी के बाद पूज्यश्री उत्तरोत्तर अशक्त होते गए। मोरबी मे भी कई बार व्याख्यान वद करना पड़ा। अहमदावाद की जनता का पूज्यश्री से तथा पूज्यश्री को अहमदाबाद की जनता से बहुत कुछ आशाए थी । किन्तु अहमदाबाद आने पर अनेक शारीरिक उपद्रव उठ खडे हुए । बीमारी ने धर दबाया। या तो साधुओं का जीवन सयममय ही होता है किन्तु पूज्यश्री अपने भोजन पान में बेहद सयमी थे । जलगाँव मे हाथ के आपरेशन के बाद आपने अन्न का सेवन लगभग छोड़ दिया था । प्राय दूध और शाक पर ही रहते थे। जामनगर के बाद वह परहज और बढ़ गया अपने परहेज के कारण ही आप अहमदाबाद में अपना स्वास्थ्य सभाल सके । रोगा के साथ वृद्धावस्था अथवा वद्धावस्था के साथ रोग प्रबल वेग से आक्रमण करने लगे थे । पूज्यश्री अपने जीवन के तिरेसठ वष व्यतीत कर चुके थे । जनता जान गई थी कि आप अधिक विहार नहीं कर सकेंगे । वगडी छाटा गाँव है, यद्यपि वहीं स्थानकवासी सम्प्रदाय की जनसंख्या काफी है और गाँव के लिहाज से सम्पत्तिशाली लोग भी बहुत बडी संख्या में हैं, तथापि जनसङ्ख्या की दृष्टि से बगडो छोटा गाँव है । पूज्य के यौवन काल के लिए स्थान इतना उपयुक्त न था । यहाँ आपकी शक्तियों का पूरी तरह उपयोग नहीं हो सकता था। मगर अब ऐसा ही स्थान उप युक्त था जहाँ अधिक भीडभउक्का न हो, जलवायु अच्छा हो और शान्तिपूवक समय विताया जा सके। इन दष्टियो से वगडी स्थान उपयुक्त रहा ! वीकानेर की ओर पूज्यश्री के लिए अब स्थिरवास का समय आ गया था। इसके लिए भोनासर बीकानेर अजमर, ब्यावर रतलाम उदयपुर और जलगाव आदि से बहुत आग्रह था । मगर भीनासर वीकानेर की जनता चिरकाल से प्राथना कर रही थी। भीनासर बीकानेर का अहाभाग्य था कि पूज्यन उनकी प्राथना स्वीकार करनी और तन्नुसार उस और विहार कर दिया । सोजत सिटी से आप जयतारण पधारे। वहाँ जोधपुर का एक डेप्यूटेशन पूज्यश्री से जोध पुर पधारने की प्राथना करने आया । श्रीजसवन्तराज जो मेहता ट्रिव्यूट सुपरिटेंडेंट, जन समाज की ओर से तथा श्रीउमरावसिंहजी कोंसिल सेक्रेटरी तथा पुष्टिकर समाज के नेता श्रीटल्लूजी तथा ज्वालाप्रसादजी जनेतर समाज की ओर से नतत्व कर रहे थे। शेष सभी जोधपुर के प्रतिष्ठित और गण्यमान्य सज्जन थे । इन आगत सज्जनो ने शेष काल तक जोधपुर पधार कर विराजने की बाग्रहपूर्ण प्राथना की। पूज्यश्री ने फरमाया- मेरा शरीर अस्वस्थ है। चौमासे से पहले बीकानेर फरसने का वचन दिया जा चुका है। जोधपुर होकर बीकानेर पहूँचन मे समय ज्यादा लगेगा। इस अवस्था में गर्मी में मुझसे विहार होना कठिन है । अतएव अब जोधपुर ले जाने का आग्रह आप न करें । मेरी स्थिति का खयाल कीजिए।' वलु दा मे अस्वस्थता जोधपुर के सज्जन वापस लौट गए और पूज्यश्री विहार करके या पधारे। छाया म और जाघ मे पुसियाँ निकलने के कारण आप फिर अस्वस्थ हो गए। कुछ दिनों के लिए विहार स्थगित कर देना पडा। अजमेर के सुप्रसिद्ध डाक्टर सूरजनारायणजी ने पूज्यश्री में शरीर की परीक्षा की और विहार कम करने की सलाह दी। पूज्यश्री मे रुकने के कारण बसु दा मे आसपास के सैकड़ों दशनार्थी आने लगे । बल दा के प्रसिद्ध दानवीर, उदार हृदय सेठ छगनमली साहेब मूया ने की सब प्रकार से सभव सेवा बजाई, आगत अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया । सब प्रकार की सुविधाएँ दीं और अच्छा धर्मप्रेम प्रस्ट रिया ।
आचार जीवन जामनगर की बीमारी के बाद पूज्यश्री उत्तरोत्तर अशक्त होते गए। मोरबी मे भी कई बार व्याख्यान वद करना पड़ा। अहमदावाद की जनता का पूज्यश्री से तथा पूज्यश्री को अहमदाबाद की जनता से बहुत कुछ आशाए थी । किन्तु अहमदाबाद आने पर अनेक शारीरिक उपद्रव उठ खडे हुए । बीमारी ने धर दबाया। या तो साधुओं का जीवन सयममय ही होता है किन्तु पूज्यश्री अपने भोजन पान में बेहद सयमी थे । जलगाँव मे हाथ के आपरेशन के बाद आपने अन्न का सेवन लगभग छोड़ दिया था । प्राय दूध और शाक पर ही रहते थे। जामनगर के बाद वह परहज और बढ़ गया अपने परहेज के कारण ही आप अहमदाबाद में अपना स्वास्थ्य सभाल सके । रोगा के साथ वृद्धावस्था अथवा वद्धावस्था के साथ रोग प्रबल वेग से आक्रमण करने लगे थे । पूज्यश्री अपने जीवन के तिरेसठ वष व्यतीत कर चुके थे । जनता जान गई थी कि आप अधिक विहार नहीं कर सकेंगे । वगडी छाटा गाँव है, यद्यपि वहीं स्थानकवासी सम्प्रदाय की जनसंख्या काफी है और गाँव के लिहाज से सम्पत्तिशाली लोग भी बहुत बडी संख्या में हैं, तथापि जनसङ्ख्या की दृष्टि से बगडो छोटा गाँव है । पूज्य के यौवन काल के लिए स्थान इतना उपयुक्त न था । यहाँ आपकी शक्तियों का पूरी तरह उपयोग नहीं हो सकता था। मगर अब ऐसा ही स्थान उप युक्त था जहाँ अधिक भीडभउक्का न हो, जलवायु अच्छा हो और शान्तिपूवक समय विताया जा सके। इन दष्टियो से वगडी स्थान उपयुक्त रहा ! वीकानेर की ओर पूज्यश्री के लिए अब स्थिरवास का समय आ गया था। इसके लिए भोनासर बीकानेर अजमर, ब्यावर रतलाम उदयपुर और जलगाव आदि से बहुत आग्रह था । मगर भीनासर वीकानेर की जनता चिरकाल से प्राथना कर रही थी। भीनासर बीकानेर का अहाभाग्य था कि पूज्यन उनकी प्राथना स्वीकार करनी और तन्नुसार उस और विहार कर दिया । सोजत सिटी से आप जयतारण पधारे। वहाँ जोधपुर का एक डेप्यूटेशन पूज्यश्री से जोध पुर पधारने की प्राथना करने आया । श्रीजसवन्तराज जो मेहता ट्रिव्यूट सुपरिटेंडेंट, जन समाज की ओर से तथा श्रीउमरावसिंहजी कोंसिल सेक्रेटरी तथा पुष्टिकर समाज के नेता श्रीटल्लूजी तथा ज्वालाप्रसादजी जनेतर समाज की ओर से नतत्व कर रहे थे। शेष सभी जोधपुर के प्रतिष्ठित और गण्यमान्य सज्जन थे । इन आगत सज्जनो ने शेष काल तक जोधपुर पधार कर विराजने की बाग्रहपूर्ण प्राथना की। पूज्यश्री ने फरमाया- मेरा शरीर अस्वस्थ है। चौमासे से पहले बीकानेर फरसने का वचन दिया जा चुका है। जोधपुर होकर बीकानेर पहूँचन मे समय ज्यादा लगेगा। इस अवस्था में गर्मी में मुझसे विहार होना कठिन है । अतएव अब जोधपुर ले जाने का आग्रह आप न करें । मेरी स्थिति का खयाल कीजिए।' वलु दा मे अस्वस्थता जोधपुर के सज्जन वापस लौट गए और पूज्यश्री विहार करके या पधारे। छाया म और जाघ मे पुसियाँ निकलने के कारण आप फिर अस्वस्थ हो गए। कुछ दिनों के लिए विहार स्थगित कर देना पडा। अजमेर के सुप्रसिद्ध डाक्टर सूरजनारायणजी ने पूज्यश्री में शरीर की परीक्षा की और विहार कम करने की सलाह दी। पूज्यश्री मे रुकने के कारण बसु दा मे आसपास के सैकड़ों दशनार्थी आने लगे । बल दा के प्रसिद्ध दानवीर, उदार हृदय सेठ छगनमली साहेब मूया ने की सब प्रकार से सभव सेवा बजाई, आगत अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया । सब प्रकार की सुविधाएँ दीं और अच्छा धर्मप्रेम प्रस्ट रिया ।
भाषा की उत्पत्ति १ - भाषोत्पत्तिविषयक भिन्न भिन्न मत 'अतिपरिचयादवज्ञा' किसी से प्रति परिचय होने से उसके विषय में हमें बहुत कुछ श्रवशा हो जाती है, या कम से कम उसके विषय में अधिक उत्सुकता नहीं रहती। इस नियम के अनुसार भाषा के साथ हमारा प्रति गहरा संबन्ध होने से प्रायः यह प्रश्न भी हमारे मन में कभी पैदा नहीं होता कि मनुष्यभाषा की उत्पत्ति या प्रवृत्ति संसार में आदि आदि में किस प्रकार हुई होगी । एक साधारण अशिक्षित मनुष्य से यदि इस प्रश्न को पूछा जावे तो वह तो यही उत्तर देगा कि उसकी भाषा उसी रूप में जिसमें वह उसे बोलता है सदा से चली आई है। परन्तु एक वैज्ञानिक चर्चा में एक प्रशिक्षित मनुष्य की निराधार बुद्धि का कोई मूल्य न होने से इसके विषय में कुछ अधिक कहने की आवश्यकता नहीं । भाषा की परिवर्तनशीलता ऊपर अच्छी तरह दिखलाई जा चुकी है। इस परिच्छेद में हम भाषा की उत्पत्ति के विषय में जो विद्वानों के भिन्न भिन्न मत पाये जाते हैं उनका ही वर्णन तथा परीक्षा करेंगे । कथं पुनरिदं भगवतः पाणिनेराचार्यस्य लक्षणं प्रवृत्तम् । सिद्धे शब्दार्थसंबन्धे ।' अर्थात् पाणिनि प्राचार्य ने शब्द, अर्थ और इनके संबन्ध को स्वतःसिद्ध मानकर अपने शास्त्र की रचना की है। उदाहरण के लिये व्याकरण यह नहीं बतलाता कि श्रादि में 'गौ की एघणा' इस अर्थ को रखने वाला 'गवेषणा' शब्द 'अनुसन्धान' के अर्थ में कैसे प्रयुक्त होने लगा, तथा 'करिन्' शब्द से 'करिणा' होना तो स्वाभाविक है - परन्तु 'हरि' शब्द से 'हरिणा' कैसे बन गया। परन्तु भाषा- विज्ञान शब्द, अर्थ और इनके संबन्ध को सिद्ध मानकर प्रवृत्त नहीं होता । भाषा-विज्ञान की चेष्टा यही रहती है कि शब्दों के वर्तमान या सिद्ध रूपों के कारण को खोजकर उनके इतिहास और दूसरी मिलती-जुलती प्रचलित भाषाओं के साथ संबन्ध को प्रकट करे। दूसरे शब्दों में, व्याकरण भाषा के निष्पन्न स्वरूप को बतलाता है, परन्तु भाषा-विज्ञान उस स्वरूप के कारण या मूल की खोज करता है। इन भेदों से यह बात स्पष्ट है कि भाषा-विज्ञान व्याकरण का श्राधार भूत है। व्याकरण को भाषा-विज्ञान के अनुसार पीछे पीछे चलना पड़ता है। दूसरे शब्दों में, भाषा-विज्ञान व्याकरणों का व्याकरण है। इसी कारण कोई कोई इसको 'तुलनात्मक व्याकरण' कहते हैं। व्याकरण और निर्वचन-शास्त्र, १ महाभाष्य, पस्पशाहूनिक । ऊपर दिखला चुके हैं कि भाषा कभी एक स्थिर स्वरूप में नहीं रहती, और इसी से सदा परिवर्तन-शोल है । भिन्न भिन्न भाषाओं की रचना पर दृष्टि डालने से यह बात भी सिद्ध हो जाती है कि उनके विकास का आधार कुछ मूलतत्त्वों पर हैं। इन मूल-तत्वों को हम 'धातु' शब्द से निर्देश कर सकते हैं। संस्कृत आदि भाषाओं का जो इतिहास मिलता है उसका साक्ष्य भी इसी सिद्धान्त के पक्ष में है कि भाषाओं का आधार धातुयें हैं। परन्तु उपर्युक्त कथन से इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता कि भाषा को प्रारम्भिक प्रवृत्ति संसार में किस प्रकार हुई तथा उसका सबसे पहिला स्वरूप क्या था । भाषाओं के इतिहास का साक्ष्य इन प्रश्नों पर कुछ प्रकाश नहीं डालता । मनुष्य ने पृथ्वी पर पहिले-पहिल बोलना किस रूप में किस प्रकार प्रारम्भ किया ? इस प्रश्न के निर्णय करने का साधन यही है कि हम भाषा के भिन्न भिन्न रूपों की परस्पर तुलना- पूर्वक भाषा के स्वभाव पर विचार करें, मनुष्यों की भिन्न भिन्न स्वभावसिद्ध तथा कृत्रिम शक्तियों के विचार पुरःसर मनुष्य के सामान्य स्वभाव को समझे, और इस प्रकार भाषा-विषयक तथा मनुष्य स्वभाव-विषयक सामान्य सिद्धान्तों के आधार पर भाषा की उत्पत्ति के विषय में अनुमान द्वारा किसी निश्चय तक पहुँचने का प्रयत्न करें। इस प्रकार प्रतिजटिल होने पर भी यह प्रश्न बड़ा मनोरञ्जक नहीं है ऐसा ( जो कि भाषा - विज्ञान का एक आवश्यक श्रङ्ग है ) के संबन्ध को निरुक्तकार यास्क आचार्य अपने शब्दों में इस प्रकार कहते हैं :तदिदं विद्यास्थानं व्याकरणस्य कात्यै स्वार्थसाधकं च । अर्थात् निरुक्त या निर्वचन-शास्त्र अपने विशेष उद्देश्य की पूर्ति के साथ साथ व्याकरण की कृत्स्नता को भी संपादन करता है। ५ - साहित्य और भाषा - विज्ञान इसी प्रसङ्ग में साहित्य और भाषा-विज्ञान के संबन्ध के विषय में कुछ कहना आवश्यक है। एक साहित्य का पण्डित अपने को भाषा का विद्वान् समझता है । यह है भी ठीक, क्योंकि किसी भाषा का उत्कृष्ट या परिष्कृत स्वरूप उसके साहित्य से ही बनता है। भाषा-विज्ञान का विषय भाषा है यह ऊपर कह ही चुके हैं। परन्तु इस प्रकार भाषा से संबन्ध होने के कारण ऊपरी समानता होने पर भो दोनों में बड़ा भेद है । साहित्य के अध्ययन में भाषा का विचार प्राधान्येन अर्थ को दृष्टि से होता है। परन्तु भाषा-विज्ञान में भाषा के स्वरूप का ही विचार किया जाता है। साहित्य के पढ़ने वाले का उद्देश्य साहित्य में प्रकट किये गये सुन्दर सुन्दर विचारों का श्रास्वादन करना ही होता है। परन्तु भाषाविज्ञानी किसी
भाषा की उत्पत्ति एक - भाषोत्पत्तिविषयक भिन्न भिन्न मत 'अतिपरिचयादवज्ञा' किसी से प्रति परिचय होने से उसके विषय में हमें बहुत कुछ श्रवशा हो जाती है, या कम से कम उसके विषय में अधिक उत्सुकता नहीं रहती। इस नियम के अनुसार भाषा के साथ हमारा प्रति गहरा संबन्ध होने से प्रायः यह प्रश्न भी हमारे मन में कभी पैदा नहीं होता कि मनुष्यभाषा की उत्पत्ति या प्रवृत्ति संसार में आदि आदि में किस प्रकार हुई होगी । एक साधारण अशिक्षित मनुष्य से यदि इस प्रश्न को पूछा जावे तो वह तो यही उत्तर देगा कि उसकी भाषा उसी रूप में जिसमें वह उसे बोलता है सदा से चली आई है। परन्तु एक वैज्ञानिक चर्चा में एक प्रशिक्षित मनुष्य की निराधार बुद्धि का कोई मूल्य न होने से इसके विषय में कुछ अधिक कहने की आवश्यकता नहीं । भाषा की परिवर्तनशीलता ऊपर अच्छी तरह दिखलाई जा चुकी है। इस परिच्छेद में हम भाषा की उत्पत्ति के विषय में जो विद्वानों के भिन्न भिन्न मत पाये जाते हैं उनका ही वर्णन तथा परीक्षा करेंगे । कथं पुनरिदं भगवतः पाणिनेराचार्यस्य लक्षणं प्रवृत्तम् । सिद्धे शब्दार्थसंबन्धे ।' अर्थात् पाणिनि प्राचार्य ने शब्द, अर्थ और इनके संबन्ध को स्वतःसिद्ध मानकर अपने शास्त्र की रचना की है। उदाहरण के लिये व्याकरण यह नहीं बतलाता कि श्रादि में 'गौ की एघणा' इस अर्थ को रखने वाला 'गवेषणा' शब्द 'अनुसन्धान' के अर्थ में कैसे प्रयुक्त होने लगा, तथा 'करिन्' शब्द से 'करिणा' होना तो स्वाभाविक है - परन्तु 'हरि' शब्द से 'हरिणा' कैसे बन गया। परन्तु भाषा- विज्ञान शब्द, अर्थ और इनके संबन्ध को सिद्ध मानकर प्रवृत्त नहीं होता । भाषा-विज्ञान की चेष्टा यही रहती है कि शब्दों के वर्तमान या सिद्ध रूपों के कारण को खोजकर उनके इतिहास और दूसरी मिलती-जुलती प्रचलित भाषाओं के साथ संबन्ध को प्रकट करे। दूसरे शब्दों में, व्याकरण भाषा के निष्पन्न स्वरूप को बतलाता है, परन्तु भाषा-विज्ञान उस स्वरूप के कारण या मूल की खोज करता है। इन भेदों से यह बात स्पष्ट है कि भाषा-विज्ञान व्याकरण का श्राधार भूत है। व्याकरण को भाषा-विज्ञान के अनुसार पीछे पीछे चलना पड़ता है। दूसरे शब्दों में, भाषा-विज्ञान व्याकरणों का व्याकरण है। इसी कारण कोई कोई इसको 'तुलनात्मक व्याकरण' कहते हैं। व्याकरण और निर्वचन-शास्त्र, एक महाभाष्य, पस्पशाहूनिक । ऊपर दिखला चुके हैं कि भाषा कभी एक स्थिर स्वरूप में नहीं रहती, और इसी से सदा परिवर्तन-शोल है । भिन्न भिन्न भाषाओं की रचना पर दृष्टि डालने से यह बात भी सिद्ध हो जाती है कि उनके विकास का आधार कुछ मूलतत्त्वों पर हैं। इन मूल-तत्वों को हम 'धातु' शब्द से निर्देश कर सकते हैं। संस्कृत आदि भाषाओं का जो इतिहास मिलता है उसका साक्ष्य भी इसी सिद्धान्त के पक्ष में है कि भाषाओं का आधार धातुयें हैं। परन्तु उपर्युक्त कथन से इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता कि भाषा को प्रारम्भिक प्रवृत्ति संसार में किस प्रकार हुई तथा उसका सबसे पहिला स्वरूप क्या था । भाषाओं के इतिहास का साक्ष्य इन प्रश्नों पर कुछ प्रकाश नहीं डालता । मनुष्य ने पृथ्वी पर पहिले-पहिल बोलना किस रूप में किस प्रकार प्रारम्भ किया ? इस प्रश्न के निर्णय करने का साधन यही है कि हम भाषा के भिन्न भिन्न रूपों की परस्पर तुलना- पूर्वक भाषा के स्वभाव पर विचार करें, मनुष्यों की भिन्न भिन्न स्वभावसिद्ध तथा कृत्रिम शक्तियों के विचार पुरःसर मनुष्य के सामान्य स्वभाव को समझे, और इस प्रकार भाषा-विषयक तथा मनुष्य स्वभाव-विषयक सामान्य सिद्धान्तों के आधार पर भाषा की उत्पत्ति के विषय में अनुमान द्वारा किसी निश्चय तक पहुँचने का प्रयत्न करें। इस प्रकार प्रतिजटिल होने पर भी यह प्रश्न बड़ा मनोरञ्जक नहीं है ऐसा के संबन्ध को निरुक्तकार यास्क आचार्य अपने शब्दों में इस प्रकार कहते हैं :तदिदं विद्यास्थानं व्याकरणस्य कात्यै स्वार्थसाधकं च । अर्थात् निरुक्त या निर्वचन-शास्त्र अपने विशेष उद्देश्य की पूर्ति के साथ साथ व्याकरण की कृत्स्नता को भी संपादन करता है। पाँच - साहित्य और भाषा - विज्ञान इसी प्रसङ्ग में साहित्य और भाषा-विज्ञान के संबन्ध के विषय में कुछ कहना आवश्यक है। एक साहित्य का पण्डित अपने को भाषा का विद्वान् समझता है । यह है भी ठीक, क्योंकि किसी भाषा का उत्कृष्ट या परिष्कृत स्वरूप उसके साहित्य से ही बनता है। भाषा-विज्ञान का विषय भाषा है यह ऊपर कह ही चुके हैं। परन्तु इस प्रकार भाषा से संबन्ध होने के कारण ऊपरी समानता होने पर भो दोनों में बड़ा भेद है । साहित्य के अध्ययन में भाषा का विचार प्राधान्येन अर्थ को दृष्टि से होता है। परन्तु भाषा-विज्ञान में भाषा के स्वरूप का ही विचार किया जाता है। साहित्य के पढ़ने वाले का उद्देश्य साहित्य में प्रकट किये गये सुन्दर सुन्दर विचारों का श्रास्वादन करना ही होता है। परन्तु भाषाविज्ञानी किसी
कई वार टोटा आदि । ये द्वीन्द्रिय आदि जीव स्वयन से ज्ञात अज्ञात महान् अपकार भी करते हैं मच्छर मक्खी खटमल टिड्डियां रोगकीट, दाद प्लेग के कोड़े ये अनेक पशु मानवों को भारी कष्ट पहुंचाते हैं । जुआं खाया गया जलोदर करता है। मकड़ी कोढ़ को उपजाती है, वरै या ततैया बिच्छू कांतर डंस वृण के कीड़े काट कर हम आपको दुःखित कर रहे हैं। इनकी कुज्ञान न्यून नहीं है। हम आप अपने रक्त को नहीं पहिचानते हैं परन्तु मच्छर खटमलों जोंकों को रक्तपरीक्षा (ब्लड टैस्ट) करना है वहां बढ़िया स्वादु अल्पश्रमसाध्य रक्त है यह सो रहा है या जाग रहा है ? इन बातों को वे झट जांच लेते हैं । योग्य समय पर ये डांका डालने के लिये निकलते हैं । एकेन्द्रिय विकलत्रय जीवों के इन्द्रिय - लोलुपता कपायभाव विषय - गृद्धि अधिक हैं चींटियां चींटे सेरों नाज को इकट्ठा कर अपने घरों में गुप्त रख लेते हैं कोई भी चींटी वर्षा में नहीं भीगती है। वे प्रथम से सी मेंह, आंधी का परिज्ञान कर अपने सुरक्षित घरों में पहुंच जाती हैं । भले ही प्रमादी पुरुष या पशुओं के देखे बिना टट्टी पेशाब करने में सैकड़ों चींटियां मर जायें क्योंकि अदृष्ट मृष्ट मल उत्सर्ग करने वाले जीवों ने चींटियों को धोका दिया है। इसमें चींटियों का अपराध नहीं है । दूं ढते हुये कुछ खाद्य को पाकर एक चींटी अपने संग की हजारों लाखों चींटियों को इकट्ठा कर लेती है । चींटियों की पंक्ति आते जाते अपनी बिरादरी से संकेत द्वारा बातें कर लेती हैं। कटारदान में बीस गज दूर पर मिष्टान्न रक्खा है उसमें छोटी जाने माने योग्य सन्द भी है । कटोरदान पानी के किले या छींके के गढ़ पर धरा है । वह गम्य है या अगम्य है इन सब बातों को वे कुश्रु तज्ञान से जान लेती हैं चींटियों को ऐसे प्रतिबन्धों का ज्ञान प्रथम से ही अपने कुश्रुत से हो जाता है वे घर से ही नहीं निकलती हैं। श्रु तज्ञान से कुश्रु तज्ञान ती होता है । अवधिज्ञान से विभङ्ग चंट है । त्रीन्द्रिय जीवकी उत्कृष्ट ४६ दिन और चौइन्द्रिय की ६ मास है। जघन्य श्वास के भाग है । चींटियां अपने सम्पूर्छन अंडोंको बनाने के लिये न जाने कहां २ से सफेद द्रव द्रव्य लाती हैं। कुछ देरके मलमें उपज गईं चावल के हज़ारवें भाग छोटी २ लटों को मुंह से पकड़ कर पुनः मारकर गोल अण्डा सा बना लेती हैं उन अण्डोंको विलक्षण रासायनिक प्रक्रिया से सेवती हैं कभी अण्डों को हवा में रख देती हैं। सात दिन में वे अण्डे काली चींटियां बन जाते हैं। लाल काले चींटे भी वृक्षों के पत्र झुड में या भूमिछेदों में ऐसी ही जनन प्रक्रिया से सम्मृर्छन चींटों को बना लेते हैं । ये चींटा चींटियों के अण्डे कोई मिथुन संयोग - जन्य पेट से नहीं निकलते हैं। इनका अण्ड जन्म नहीं, किन्तु सम्मून जन्म है । ततैया, वर्र भी इसी प्रकार मक्खियों या अन्य कोड़ों को घातकर अपने छत्तों में लाकर बड़ी रासायनिक प्रक्रिया से कुछ दिन बन्द रखकर पतला लेप लगाकर छोड़ देते हैं। दस पांच दिन में वे सच ततैया वर्र बन जाते हैं । भौंरी (अंजिन यारी) बड़ी गवेषणा से झींगुर को पकड़कर डंक से मारकर अपने स्वनिर्मित बढ़िया चीनी मिट्टी के निरुपद्रव घर में घर देती है । जनन रसायन प्रक्रिया करती है पुनः गर्भस्थान का मुख ऋजु लेप देती है कुछ दिनों में वह झींगुर का मरा हुआ शरीर ही अंजनियरी का सम्मूईन काय बन जाता है । मधु मक्खी के जन्म, देशान्तरगमन, मधु अन्वेषण रक्षण या कुमतिज्ञान जन्य कुश्रु त ज्ञानों स्मरणों धाराओं अथवा लोभ, क्रोध, के कृत्य तो बहुत दिनों तक पठन की सामग्री है। मकड़ी छबरिया सरीखा चारों ओर ठीक नाप का जाल पूरती है। दूसरी जाति की चौइन्द्रिय मकड़ी दो भींति की संद में योनि स्थान बनाती है, न जाने कहांसे स्वापत्यशरीर योग्य नौ लाख कुल कोटि पदार्थों में से छेक कर क्या २ रसायन लाती है उसके ऊपर पांच पी के लट्ठा से भी बढ़ कर स्वच्छ, शुक्ल रेशम बनाकर रखूब कसकर उड़ा देती है स्वयं बाहर चली जाती है। कुछ काल पीछे उस गर्भागार में से दसों मकड़ियां उपज कर बाहर आ जाती हैं। गोम्मटसार में इन योनि और कुलों का वर्णन किया । मैंने इस जीवशरीरोत्पत्ति प्रक्रिया का कुछ स्वपनसा अध्ययन किया है। यहां इस रहस्य को लिखने का तात्पर्य यह है कि ऐसी करतूतें, मायाचार तीव्र लोभ, ताप क्रोध, सन्तानोपार्जन, गृहनिर्माण कला, स्वइष्टोपाय ढढना खाद्यसंग्रह, मिलकर शत्रु पर चढ़ाई करना ये सर्व प्रयत्न एकेन्द्रिय विकलत्रयोंके पाये जाते हैं। ये सब उन अनन्तानुबन्धी कषायों के कार्य हैं जिन कषायों के साथ व्यक्त अव्यक्त रूप से प्रदोष, निन्हव, केवलि अवर्णवाद संघ अवर्णवाद, निःशीलत्व, योगवक्रता, परनिन्दा, विघ्न करण आदि दोष पाये जाते हैं यो एकन्द्रिय और विकलत्रयों के सजातीय कषाय योगों द्वारा ऋष्ट कर्मों का चतुविध बन्ध होता रहता है। कर्मों में स्थिति न्यून पड़ती है अनुभाग तीव्र पड़ता है। अनुभाग ही पका बन्ध है इनका कुज्ञान अपेक्षाकृत न्यून नहीं है बड़ा बढ़िया है । कोई उच्च वैज्ञानिक याविष्कारक हजारों यंत्रों या पुद्गलों की सहायता से इन जीवित शरीरों को नहीं बना सकता है। कतिपय एकेन्द्रिय, विकलत्रय जीव तो स्वयं अपने सजातियों को बना लेते हैं। हां दूसरे सम्मृर्जन जीव जैसे छोटी २ मछलियां, मेंड़कियां, मक्खियां, घुन, गिड़ा, मच्छर, चौमासेकी रात्रि या दिन में उपजे असंख्य जीव तो स्त्रयोग्य कुल योनियोंमें निज कर्मवश मात्र अपने शरीरों को बना डालते हैं स्वापत्यों को नहीं। ये जीव सम्मन हैं इच्छा वश स्वापत्य शरीरों को नहीं बना पाते हैं । श्रोता जी ! अनन्तानन्त जीव प्रतिक्षण मररहे हैं वे कर्मयोग द्वारा नोकर्मोक कर पुनः अन्य योगों द्वारा कर्म नोकर्मों को खेंचकर स्वपर्याप्तियों से अपना शरीर तैयार करते हैं । जीव-शरीरों की सृष्टि के ढंग कई प्रकार के हैं। द्वादशाङ्ग में इन की उत्पत्ति प्रक्रिया ती विस्तृत गूंथी होगी। कभी उसका भी अध्ययन करेंगे। भावना ऊंची रक्खो । भावार्थ - पथरी, सेंधव, वनाग्नि, वात्या, निगोदिया, कटफूला, काई, साधारण, अमरबेल, शंख, सीप, चावल की लट, जुआं, लीख, इन्द्रगोप ( राम की गुड़िया) सड़ी कचौड़ी, सड़े अमरूदके जीव, फोड़ेके कीट, मांस रक्त जीव तंदुल राघव मत्स्य आदि अपने शरीरों को तत्काल तैयार कर लेते हैं अर्थात् योग्य कुल योनिस्थान मिलते ही झट उनका आदार कर स्वकीय योग पर्याप्तियों कार्मण शक्ति से प्राण मन बचन काय इन्द्रियोंको संमूर्धन बना डालते हैं । ये स्वकीय जाति वाले अपत्यों के शरीरों को नहीं रचते हैं मात्र अपना गात्र बनाया करते हैं । प्रति समय अनंत जीव मरते हैं । वे उसी सम योग्य योनियों में जन्म ले रहे हैं । कार्मणकाययोग के एक दो तीन समय भी चालू इसी उम्र में गिने जायंगे । इन सूक्ष्म तत्वोंका वर्णन गोम्मटसार में है। अन्य वि शाल शास्त्रों या प्रति पत्तिक श्रत अथवा द्वादशांग में विस्तृत प्रतिपादन किया गया होगा। ओं नमः द्वादशांग वाण्यै सरस्वत्यै । इस प्रकार भाव अभाव परिणामोंका पर्याप्त विवेचन हो चुका है। आप प्रबोधकर चुके होंगे अभावको थोड़ा और गम प्रमाण से समझ लो । अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे- न दन्यं न पलायनम् । (उक्तञ्च ) अजुनकी दो ही प्रतिज्ञायें थीं दीनता न करना और युद्ध भागना नहीं। 'अप्रादुर्भावः खलु, रागादीनाम् भवत्यहिंसेति । ( अमृतचन्द्रसूर) राग आदि नहीं उपजना ही अहिंसा है, अहिंसा भूतानाम् जगति विदितं ब्रह्म परमं । न सा तत्रारम्भोस्त्यणुः ( श्री समन्तभद्राचार्य) आरम्भ से भी हित हो रही हिंसा परमब्रह्म
कई वार टोटा आदि । ये द्वीन्द्रिय आदि जीव स्वयन से ज्ञात अज्ञात महान् अपकार भी करते हैं मच्छर मक्खी खटमल टिड्डियां रोगकीट, दाद प्लेग के कोड़े ये अनेक पशु मानवों को भारी कष्ट पहुंचाते हैं । जुआं खाया गया जलोदर करता है। मकड़ी कोढ़ को उपजाती है, वरै या ततैया बिच्छू कांतर डंस वृण के कीड़े काट कर हम आपको दुःखित कर रहे हैं। इनकी कुज्ञान न्यून नहीं है। हम आप अपने रक्त को नहीं पहिचानते हैं परन्तु मच्छर खटमलों जोंकों को रक्तपरीक्षा करना है वहां बढ़िया स्वादु अल्पश्रमसाध्य रक्त है यह सो रहा है या जाग रहा है ? इन बातों को वे झट जांच लेते हैं । योग्य समय पर ये डांका डालने के लिये निकलते हैं । एकेन्द्रिय विकलत्रय जीवों के इन्द्रिय - लोलुपता कपायभाव विषय - गृद्धि अधिक हैं चींटियां चींटे सेरों नाज को इकट्ठा कर अपने घरों में गुप्त रख लेते हैं कोई भी चींटी वर्षा में नहीं भीगती है। वे प्रथम से सी मेंह, आंधी का परिज्ञान कर अपने सुरक्षित घरों में पहुंच जाती हैं । भले ही प्रमादी पुरुष या पशुओं के देखे बिना टट्टी पेशाब करने में सैकड़ों चींटियां मर जायें क्योंकि अदृष्ट मृष्ट मल उत्सर्ग करने वाले जीवों ने चींटियों को धोका दिया है। इसमें चींटियों का अपराध नहीं है । दूं ढते हुये कुछ खाद्य को पाकर एक चींटी अपने संग की हजारों लाखों चींटियों को इकट्ठा कर लेती है । चींटियों की पंक्ति आते जाते अपनी बिरादरी से संकेत द्वारा बातें कर लेती हैं। कटारदान में बीस गज दूर पर मिष्टान्न रक्खा है उसमें छोटी जाने माने योग्य सन्द भी है । कटोरदान पानी के किले या छींके के गढ़ पर धरा है । वह गम्य है या अगम्य है इन सब बातों को वे कुश्रु तज्ञान से जान लेती हैं चींटियों को ऐसे प्रतिबन्धों का ज्ञान प्रथम से ही अपने कुश्रुत से हो जाता है वे घर से ही नहीं निकलती हैं। श्रु तज्ञान से कुश्रु तज्ञान ती होता है । अवधिज्ञान से विभङ्ग चंट है । त्रीन्द्रिय जीवकी उत्कृष्ट छियालीस दिन और चौइन्द्रिय की छः मास है। जघन्य श्वास के भाग है । चींटियां अपने सम्पूर्छन अंडोंको बनाने के लिये न जाने कहां दो से सफेद द्रव द्रव्य लाती हैं। कुछ देरके मलमें उपज गईं चावल के हज़ारवें भाग छोटी दो लटों को मुंह से पकड़ कर पुनः मारकर गोल अण्डा सा बना लेती हैं उन अण्डोंको विलक्षण रासायनिक प्रक्रिया से सेवती हैं कभी अण्डों को हवा में रख देती हैं। सात दिन में वे अण्डे काली चींटियां बन जाते हैं। लाल काले चींटे भी वृक्षों के पत्र झुड में या भूमिछेदों में ऐसी ही जनन प्रक्रिया से सम्मृर्छन चींटों को बना लेते हैं । ये चींटा चींटियों के अण्डे कोई मिथुन संयोग - जन्य पेट से नहीं निकलते हैं। इनका अण्ड जन्म नहीं, किन्तु सम्मून जन्म है । ततैया, वर्र भी इसी प्रकार मक्खियों या अन्य कोड़ों को घातकर अपने छत्तों में लाकर बड़ी रासायनिक प्रक्रिया से कुछ दिन बन्द रखकर पतला लेप लगाकर छोड़ देते हैं। दस पांच दिन में वे सच ततैया वर्र बन जाते हैं । भौंरी बड़ी गवेषणा से झींगुर को पकड़कर डंक से मारकर अपने स्वनिर्मित बढ़िया चीनी मिट्टी के निरुपद्रव घर में घर देती है । जनन रसायन प्रक्रिया करती है पुनः गर्भस्थान का मुख ऋजु लेप देती है कुछ दिनों में वह झींगुर का मरा हुआ शरीर ही अंजनियरी का सम्मूईन काय बन जाता है । मधु मक्खी के जन्म, देशान्तरगमन, मधु अन्वेषण रक्षण या कुमतिज्ञान जन्य कुश्रु त ज्ञानों स्मरणों धाराओं अथवा लोभ, क्रोध, के कृत्य तो बहुत दिनों तक पठन की सामग्री है। मकड़ी छबरिया सरीखा चारों ओर ठीक नाप का जाल पूरती है। दूसरी जाति की चौइन्द्रिय मकड़ी दो भींति की संद में योनि स्थान बनाती है, न जाने कहांसे स्वापत्यशरीर योग्य नौ लाख कुल कोटि पदार्थों में से छेक कर क्या दो रसायन लाती है उसके ऊपर पांच पी के लट्ठा से भी बढ़ कर स्वच्छ, शुक्ल रेशम बनाकर रखूब कसकर उड़ा देती है स्वयं बाहर चली जाती है। कुछ काल पीछे उस गर्भागार में से दसों मकड़ियां उपज कर बाहर आ जाती हैं। गोम्मटसार में इन योनि और कुलों का वर्णन किया । मैंने इस जीवशरीरोत्पत्ति प्रक्रिया का कुछ स्वपनसा अध्ययन किया है। यहां इस रहस्य को लिखने का तात्पर्य यह है कि ऐसी करतूतें, मायाचार तीव्र लोभ, ताप क्रोध, सन्तानोपार्जन, गृहनिर्माण कला, स्वइष्टोपाय ढढना खाद्यसंग्रह, मिलकर शत्रु पर चढ़ाई करना ये सर्व प्रयत्न एकेन्द्रिय विकलत्रयोंके पाये जाते हैं। ये सब उन अनन्तानुबन्धी कषायों के कार्य हैं जिन कषायों के साथ व्यक्त अव्यक्त रूप से प्रदोष, निन्हव, केवलि अवर्णवाद संघ अवर्णवाद, निःशीलत्व, योगवक्रता, परनिन्दा, विघ्न करण आदि दोष पाये जाते हैं यो एकन्द्रिय और विकलत्रयों के सजातीय कषाय योगों द्वारा ऋष्ट कर्मों का चतुविध बन्ध होता रहता है। कर्मों में स्थिति न्यून पड़ती है अनुभाग तीव्र पड़ता है। अनुभाग ही पका बन्ध है इनका कुज्ञान अपेक्षाकृत न्यून नहीं है बड़ा बढ़िया है । कोई उच्च वैज्ञानिक याविष्कारक हजारों यंत्रों या पुद्गलों की सहायता से इन जीवित शरीरों को नहीं बना सकता है। कतिपय एकेन्द्रिय, विकलत्रय जीव तो स्वयं अपने सजातियों को बना लेते हैं। हां दूसरे सम्मृर्जन जीव जैसे छोटी दो मछलियां, मेंड़कियां, मक्खियां, घुन, गिड़ा, मच्छर, चौमासेकी रात्रि या दिन में उपजे असंख्य जीव तो स्त्रयोग्य कुल योनियोंमें निज कर्मवश मात्र अपने शरीरों को बना डालते हैं स्वापत्यों को नहीं। ये जीव सम्मन हैं इच्छा वश स्वापत्य शरीरों को नहीं बना पाते हैं । श्रोता जी ! अनन्तानन्त जीव प्रतिक्षण मररहे हैं वे कर्मयोग द्वारा नोकर्मोक कर पुनः अन्य योगों द्वारा कर्म नोकर्मों को खेंचकर स्वपर्याप्तियों से अपना शरीर तैयार करते हैं । जीव-शरीरों की सृष्टि के ढंग कई प्रकार के हैं। द्वादशाङ्ग में इन की उत्पत्ति प्रक्रिया ती विस्तृत गूंथी होगी। कभी उसका भी अध्ययन करेंगे। भावना ऊंची रक्खो । भावार्थ - पथरी, सेंधव, वनाग्नि, वात्या, निगोदिया, कटफूला, काई, साधारण, अमरबेल, शंख, सीप, चावल की लट, जुआं, लीख, इन्द्रगोप सड़ी कचौड़ी, सड़े अमरूदके जीव, फोड़ेके कीट, मांस रक्त जीव तंदुल राघव मत्स्य आदि अपने शरीरों को तत्काल तैयार कर लेते हैं अर्थात् योग्य कुल योनिस्थान मिलते ही झट उनका आदार कर स्वकीय योग पर्याप्तियों कार्मण शक्ति से प्राण मन बचन काय इन्द्रियोंको संमूर्धन बना डालते हैं । ये स्वकीय जाति वाले अपत्यों के शरीरों को नहीं रचते हैं मात्र अपना गात्र बनाया करते हैं । प्रति समय अनंत जीव मरते हैं । वे उसी सम योग्य योनियों में जन्म ले रहे हैं । कार्मणकाययोग के एक दो तीन समय भी चालू इसी उम्र में गिने जायंगे । इन सूक्ष्म तत्वोंका वर्णन गोम्मटसार में है। अन्य वि शाल शास्त्रों या प्रति पत्तिक श्रत अथवा द्वादशांग में विस्तृत प्रतिपादन किया गया होगा। ओं नमः द्वादशांग वाण्यै सरस्वत्यै । इस प्रकार भाव अभाव परिणामोंका पर्याप्त विवेचन हो चुका है। आप प्रबोधकर चुके होंगे अभावको थोड़ा और गम प्रमाण से समझ लो । अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे- न दन्यं न पलायनम् । अजुनकी दो ही प्रतिज्ञायें थीं दीनता न करना और युद्ध भागना नहीं। 'अप्रादुर्भावः खलु, रागादीनाम् भवत्यहिंसेति । राग आदि नहीं उपजना ही अहिंसा है, अहिंसा भूतानाम् जगति विदितं ब्रह्म परमं । न सा तत्रारम्भोस्त्यणुः आरम्भ से भी हित हो रही हिंसा परमब्रह्म
हरियाणा में नए साल के दूसरे हफ्ते भी अफसरों की जिम्मेदारियां सरकार ने बदली है। IAS रवि प्रकाश गुप्ता को अभिलेखागार विभाग के डायरेक्टर जनरल पद से हटा दिया गया है। उन्हें अब पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी डिपार्टमेंट का कंट्रोलर बनाया गया है। HCS सतपाल शर्मा को एडिशनल डायरेक्टर (एडमिन) सेकेंडरी एजुकेशन और स्पेशल सेक्रेटरी हरियाणा स्कूल एजुकेशन की जिम्मेदारी दी गई है। HCS सतबीर सिंह के विभाग सरकार ने बदले हैं। उन्हें सेकेंडरी एजुकेशन के साथ ही टेक्निकल एजुकेशन का एडिशनल डायरेक्टर (एडमिन) की जिम्मेदारी दी गई है। यह पद रिक्त चल रहा था। HCS कंवर सिंह को म्युनिसिपल काउंसिल अंबाला सदर का एडमिनिस्ट्रेटर और अंबाला डिवीजन कमिश्नर का OSD बनाया गया है। HCS दिनेश को मानेसर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। यहां देखें पूरी लिस्ट. . This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा में नए साल के दूसरे हफ्ते भी अफसरों की जिम्मेदारियां सरकार ने बदली है। IAS रवि प्रकाश गुप्ता को अभिलेखागार विभाग के डायरेक्टर जनरल पद से हटा दिया गया है। उन्हें अब पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी डिपार्टमेंट का कंट्रोलर बनाया गया है। HCS सतपाल शर्मा को एडिशनल डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन और स्पेशल सेक्रेटरी हरियाणा स्कूल एजुकेशन की जिम्मेदारी दी गई है। HCS सतबीर सिंह के विभाग सरकार ने बदले हैं। उन्हें सेकेंडरी एजुकेशन के साथ ही टेक्निकल एजुकेशन का एडिशनल डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। यह पद रिक्त चल रहा था। HCS कंवर सिंह को म्युनिसिपल काउंसिल अंबाला सदर का एडमिनिस्ट्रेटर और अंबाला डिवीजन कमिश्नर का OSD बनाया गया है। HCS दिनेश को मानेसर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। यहां देखें पूरी लिस्ट. . This website follows the DNPA Code of Ethics.
नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की एक याचिका को 16 अगस्त को सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध किया, जिसमें उन्होंने आय से अधिक संपत्ति मामले में अवैध तरीके से जेल में रखने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में जेल अधिकारियों से पूछा कि मामले में उनके पहले ही चार साल की कैद की सजा काटने के आधार पर रिहाई के उनके अभिवेदन पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया है। इसे भी पढ़ेंः इस तरह घर में बनाएं दालचीनी का फेस पैक, चेहरे को होंगे कई लाभ! चौटाला (87) की ओर से वकील अमित साहनी ने कहा कि उन्होंने जेल अधिकारियों से अनुरोध किया है कि उनकी "वास्तविक शारीरिक हिरासत" का हिसाब लगाया जाए, लेकिन जेल में पांच साल बिताने के बाद भी उन्हें रिहा करने के बजाय उन्होंने इस विषय पर निचली अदालत को एक पत्र भेज दिया, जिसने इसका निस्तारण किया।
नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की एक याचिका को सोलह अगस्त को सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध किया, जिसमें उन्होंने आय से अधिक संपत्ति मामले में अवैध तरीके से जेल में रखने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में जेल अधिकारियों से पूछा कि मामले में उनके पहले ही चार साल की कैद की सजा काटने के आधार पर रिहाई के उनके अभिवेदन पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया है। इसे भी पढ़ेंः इस तरह घर में बनाएं दालचीनी का फेस पैक, चेहरे को होंगे कई लाभ! चौटाला की ओर से वकील अमित साहनी ने कहा कि उन्होंने जेल अधिकारियों से अनुरोध किया है कि उनकी "वास्तविक शारीरिक हिरासत" का हिसाब लगाया जाए, लेकिन जेल में पांच साल बिताने के बाद भी उन्हें रिहा करने के बजाय उन्होंने इस विषय पर निचली अदालत को एक पत्र भेज दिया, जिसने इसका निस्तारण किया।
इस पत्र की प्रथम एवं अन्तिम पंक्तियाँ विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य हैं । अन्तिम पंक्ति में उल्लिखित ऐसे प्रतिबन्धित नाटकों की सूची में अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी है जिनके जारी किये जाने का उल्लेख उपर्युक्त पत्र में किया गया है । सूची की बात कहे जाने से यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि निश्चय ही ऐसे प्रतिबन्धित नाटक एक नहीं, अनेक होंगे। ये प्रतिबन्धित नाटक अंग्रेजी शासन के लिये अच्छे खासे सिर दर्द रहे होंगे क्योंकि इनके मंचन से राजद्रोह फैलने का खतरा उत्पन्न होता था । यह अनुमान करना गलत नहीं होगा कि हिन्दी नाटककार और उनके नाटकों का मंचन करने वाले अभिनेता नाटक की इस ताकत को जानते थे और 1910 के आसपास हिन्दी क्षेत्र में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ असन्तोष और राजद्रोह फैलने के लिये ऐसे अनेक नाटक खेले जाते रहे होंगे । जबलपुर के डिप्टी कमिश्नर को सेन्ट्रल प्राविसेज़ के चीफ कमिश्नर के चीफ़ सेक्रेटरी द्वारा लिखित यह पत्र इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतेन्दु युग में नील देवी, भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी जैसे राष्ट्रीय नाटकों को जो धारा प्रवाहित हुई थी, वह अंग्रेजी शासन के तमाम दमन और आतंक के बावजूद मन्द नहीं पड़ी थी बल्कि उसमें बढ़ोत्तरी ही हुई थी । भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के जीवन काल में ही वायसराय परिषद् के विधि सदस्य माननीय हाबहाउस (Hobbhouse) 14 मार्च, 1876 को ड्रैमेटिक परफार्मेंस को प्रति सीमित करने वाला एक विधेयक पेश कर चुके थे । दूसरे ही दिन अर्थात् 15 मार्च, 1876 को उस समय के प्रसिद्ध पत्र 'इंग्लिश मैन' में इस बिल की विस्तृत रिर्पोटिंग की गई थी । हाबहाउस महोदय ने इस बिल को पेश करते हुये जो भाषण दिया था उसका एक अंश अविकल रूप से यहाँ उद्धृत किया जा रहा है"Now it had been found in all times and in all countries that no greater stimulus could be supplied to excite the passion of mankind than that supplied by means of the drama and that no beat was too difficult for a dramatist, who could produce any effect he pleased on the mind at the spectators." मानव समाज की भावनाओं को उभाड़ने और उत्तेजित करने की नाटक की इस उद्दाम शक्ति से भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और उनके सहयोगी नाटककार परिचित थे । भारतेन्दु जी के समय में अंग्रेजी शासन का शोषक चेहरा सामने आ चुका था और साहित्यकारों में यह समझ जाग चुकी थी कि अकाल, महामारी देवकृत नहीं हैं, वे अंग्रेजी शासन की शोषण नीति के अवश्यंभावी परिणाम हैं । महामारी और अकाल को तो अंग्रेजी हुकूमत दैवी आपदा कहकर सु बुक दोष हो सकती थी पर टैक्स और बेकारी तो उसकी नीतियों के प्रत्यक्ष कारनामे थे । कर देने के बाद किसान के पास खाने को कुछ नहीं बच रहता था । यह केवल भारतेन्दु के उत्तर प्रदेश की ही हालत नहीं थी, बुन्देलखण्ड के ईसुरी ने भी "आँसौं ले गयो साल करौंटा" जैसी फागो में सामान्य जन के पत्ते खाकर जीवन यापन के प्रयासों का रो-रो कर उल्लेख किया है । 'सार सुधानिधि' पत्र ने अंग्रेजों की शोषण नीति का पर्दाफाश करते हुये लिखा'टैक्स पर टैक्स, अकाल पर अकाल, मरी पर मरी, यहीं देखी जाती है । नित्य नये आइनों से बेधा जाता है और ईसुरी / 11
इस पत्र की प्रथम एवं अन्तिम पंक्तियाँ विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य हैं । अन्तिम पंक्ति में उल्लिखित ऐसे प्रतिबन्धित नाटकों की सूची में अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी है जिनके जारी किये जाने का उल्लेख उपर्युक्त पत्र में किया गया है । सूची की बात कहे जाने से यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि निश्चय ही ऐसे प्रतिबन्धित नाटक एक नहीं, अनेक होंगे। ये प्रतिबन्धित नाटक अंग्रेजी शासन के लिये अच्छे खासे सिर दर्द रहे होंगे क्योंकि इनके मंचन से राजद्रोह फैलने का खतरा उत्पन्न होता था । यह अनुमान करना गलत नहीं होगा कि हिन्दी नाटककार और उनके नाटकों का मंचन करने वाले अभिनेता नाटक की इस ताकत को जानते थे और एक हज़ार नौ सौ दस के आसपास हिन्दी क्षेत्र में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ असन्तोष और राजद्रोह फैलने के लिये ऐसे अनेक नाटक खेले जाते रहे होंगे । जबलपुर के डिप्टी कमिश्नर को सेन्ट्रल प्राविसेज़ के चीफ कमिश्नर के चीफ़ सेक्रेटरी द्वारा लिखित यह पत्र इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतेन्दु युग में नील देवी, भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी जैसे राष्ट्रीय नाटकों को जो धारा प्रवाहित हुई थी, वह अंग्रेजी शासन के तमाम दमन और आतंक के बावजूद मन्द नहीं पड़ी थी बल्कि उसमें बढ़ोत्तरी ही हुई थी । भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के जीवन काल में ही वायसराय परिषद् के विधि सदस्य माननीय हाबहाउस चौदह मार्च, एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर को ड्रैमेटिक परफार्मेंस को प्रति सीमित करने वाला एक विधेयक पेश कर चुके थे । दूसरे ही दिन अर्थात् पंद्रह मार्च, एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर को उस समय के प्रसिद्ध पत्र 'इंग्लिश मैन' में इस बिल की विस्तृत रिर्पोटिंग की गई थी । हाबहाउस महोदय ने इस बिल को पेश करते हुये जो भाषण दिया था उसका एक अंश अविकल रूप से यहाँ उद्धृत किया जा रहा है"Now it had been found in all times and in all countries that no greater stimulus could be supplied to excite the passion of mankind than that supplied by means of the drama and that no beat was too difficult for a dramatist, who could produce any effect he pleased on the mind at the spectators." मानव समाज की भावनाओं को उभाड़ने और उत्तेजित करने की नाटक की इस उद्दाम शक्ति से भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और उनके सहयोगी नाटककार परिचित थे । भारतेन्दु जी के समय में अंग्रेजी शासन का शोषक चेहरा सामने आ चुका था और साहित्यकारों में यह समझ जाग चुकी थी कि अकाल, महामारी देवकृत नहीं हैं, वे अंग्रेजी शासन की शोषण नीति के अवश्यंभावी परिणाम हैं । महामारी और अकाल को तो अंग्रेजी हुकूमत दैवी आपदा कहकर सु बुक दोष हो सकती थी पर टैक्स और बेकारी तो उसकी नीतियों के प्रत्यक्ष कारनामे थे । कर देने के बाद किसान के पास खाने को कुछ नहीं बच रहता था । यह केवल भारतेन्दु के उत्तर प्रदेश की ही हालत नहीं थी, बुन्देलखण्ड के ईसुरी ने भी "आँसौं ले गयो साल करौंटा" जैसी फागो में सामान्य जन के पत्ते खाकर जीवन यापन के प्रयासों का रो-रो कर उल्लेख किया है । 'सार सुधानिधि' पत्र ने अंग्रेजों की शोषण नीति का पर्दाफाश करते हुये लिखा'टैक्स पर टैक्स, अकाल पर अकाल, मरी पर मरी, यहीं देखी जाती है । नित्य नये आइनों से बेधा जाता है और ईसुरी / ग्यारह
तनाव आज की व्यस्त और प्रतिस्पर्धी दुनिया में एक आम कारक है. करियर, रिलेशनशिप, फ्रेंडशिप आदि के बारे में कई तरह का दबाव और तनाव होता है. हमें अपने दैनिक जीवन में बहुत सारी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जो हमें तनाव देते हैं. तो वास्तव में तनाव क्या है? तनाव एक ऐसी बात है जिसे हम ऐसी स्थितियों में अनुभव करते हैं जहां हम कुछ नियंत्रित या निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. इस अक्षमता के कारण होने वाली भावनात्मक तनाव और दबाव को मनोवैज्ञानिक तनाव कहा जाता है. तेज़ हार्ट रेट, अभिभूत, थकान, नींद में कठिनाई, निराशा और एक या अधिक तनाव के बारे में लगातार विचार मनोवैज्ञानिक तनाव के संकेत हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि तनाव लाभदायक हो सकता है? ठीक है, कम मात्रा में तनाव लाभदायक हो सकता है. यह फोकस, ऊर्जा, प्रदर्शन और प्रेरणा में मदद करता है. तनाव आपको तेज़ निर्णय लेने में मदद करता है, जो कुछ स्थितियों में अच्छा है. अच्छा तनाव यूस्ट्रेस कहलाता है. दूसरी ओर, तनाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके कुछ शारीरिक प्रभाव भी हैं. सिरदर्द, पाचन संबंधी समस्याएं, शरीर के दर्द और क्रॉनिक तनाव जैसे हल्के प्रभाव से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. समस्याओं की पहचान करना हमेशा उन्हें हल करने या प्रबंधित करने की दिशा में पहला कदम होता है. कई स्थितियां हैं जो तनाव पैदा करती हैं, इसलिए यहाँ कुछ तनाव हैंः - जीवन में बड़ा बदलाव. तनाव हमारे जीवन में स्थिर रहने जा रहा है और यह हमारे जीवन को प्रभावित करता है और हमारी वृद्धि को रोकता है, इसलिए, हमें तनाव प्रबंधित करना और इसके साथ रहना सीखना चाहिए. तनाव को मैनेज करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैंः अपने लिए दयालु रहें - आपको यह समझना होगा कि बस इसलिए कि आप तनाव में हैं, आप कमजोर, कम प्रतिभाशाली नहीं हैं या सक्षम नहीं हैं. आप जिन लोगों पर भरोसा कर सकते हैं उनकी गणना - जब भी आप तनाव महसूस करते हैं, वह किसी से संपर्क करें जिस पर आप भरोसा करते हैं. नियमित भोजन खाएं - उचित पोषण तनाव को मैनेज करने में मदद करता है. व्यायाम - नियमित व्यायाम आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपको अच्छा महसूस करता है क्योंकि व्यायाम के बाद आपका शरीर एंडोर्फिन रिलीज़ करता है. आराम पाएं - तनाव को मैनेज करने का एक तरीका है पर्याप्त आराम पाना. सोने के 7-9 घंटे का सही समय पाएं, और कुछ एमई-टाइम खुद को आराम देने के लिए बेहतर होगा. सहायता प्राप्त करेंः कभी-कभी तनाव नियंत्रण से बाहर हो सकता है, और आप निराशाजनक, जलन और निराशाजनक महसूस कर सकते हैं और इसका सामना नहीं कर सकते हैं. ठीक है, अगर तनाव को मैनेज करने के लिए उपरोक्त सुझावों में से कोई भी आपके लिए काम नहीं करता है, तो मदद लेने में संकोच न करें. अपने थेरेपिस्ट को कॉल करें और अपनी तनाव को कम करने के लिए उपचार या उपचार लेना शुरू करें.
तनाव आज की व्यस्त और प्रतिस्पर्धी दुनिया में एक आम कारक है. करियर, रिलेशनशिप, फ्रेंडशिप आदि के बारे में कई तरह का दबाव और तनाव होता है. हमें अपने दैनिक जीवन में बहुत सारी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जो हमें तनाव देते हैं. तो वास्तव में तनाव क्या है? तनाव एक ऐसी बात है जिसे हम ऐसी स्थितियों में अनुभव करते हैं जहां हम कुछ नियंत्रित या निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. इस अक्षमता के कारण होने वाली भावनात्मक तनाव और दबाव को मनोवैज्ञानिक तनाव कहा जाता है. तेज़ हार्ट रेट, अभिभूत, थकान, नींद में कठिनाई, निराशा और एक या अधिक तनाव के बारे में लगातार विचार मनोवैज्ञानिक तनाव के संकेत हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि तनाव लाभदायक हो सकता है? ठीक है, कम मात्रा में तनाव लाभदायक हो सकता है. यह फोकस, ऊर्जा, प्रदर्शन और प्रेरणा में मदद करता है. तनाव आपको तेज़ निर्णय लेने में मदद करता है, जो कुछ स्थितियों में अच्छा है. अच्छा तनाव यूस्ट्रेस कहलाता है. दूसरी ओर, तनाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके कुछ शारीरिक प्रभाव भी हैं. सिरदर्द, पाचन संबंधी समस्याएं, शरीर के दर्द और क्रॉनिक तनाव जैसे हल्के प्रभाव से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. समस्याओं की पहचान करना हमेशा उन्हें हल करने या प्रबंधित करने की दिशा में पहला कदम होता है. कई स्थितियां हैं जो तनाव पैदा करती हैं, इसलिए यहाँ कुछ तनाव हैंः - जीवन में बड़ा बदलाव. तनाव हमारे जीवन में स्थिर रहने जा रहा है और यह हमारे जीवन को प्रभावित करता है और हमारी वृद्धि को रोकता है, इसलिए, हमें तनाव प्रबंधित करना और इसके साथ रहना सीखना चाहिए. तनाव को मैनेज करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैंः अपने लिए दयालु रहें - आपको यह समझना होगा कि बस इसलिए कि आप तनाव में हैं, आप कमजोर, कम प्रतिभाशाली नहीं हैं या सक्षम नहीं हैं. आप जिन लोगों पर भरोसा कर सकते हैं उनकी गणना - जब भी आप तनाव महसूस करते हैं, वह किसी से संपर्क करें जिस पर आप भरोसा करते हैं. नियमित भोजन खाएं - उचित पोषण तनाव को मैनेज करने में मदद करता है. व्यायाम - नियमित व्यायाम आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपको अच्छा महसूस करता है क्योंकि व्यायाम के बाद आपका शरीर एंडोर्फिन रिलीज़ करता है. आराम पाएं - तनाव को मैनेज करने का एक तरीका है पर्याप्त आराम पाना. सोने के सात-नौ घंटाटे का सही समय पाएं, और कुछ एमई-टाइम खुद को आराम देने के लिए बेहतर होगा. सहायता प्राप्त करेंः कभी-कभी तनाव नियंत्रण से बाहर हो सकता है, और आप निराशाजनक, जलन और निराशाजनक महसूस कर सकते हैं और इसका सामना नहीं कर सकते हैं. ठीक है, अगर तनाव को मैनेज करने के लिए उपरोक्त सुझावों में से कोई भी आपके लिए काम नहीं करता है, तो मदद लेने में संकोच न करें. अपने थेरेपिस्ट को कॉल करें और अपनी तनाव को कम करने के लिए उपचार या उपचार लेना शुरू करें.
बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती यूं तो पिछले एक साल से सुशांत सिंह राजपूत के केस के सिलसिले में चर्चा में बनी हुई हैं, लेकिन इन दिनों एक्ट्रेस बिग बॉस 15 की वजह से खबरों में हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर बज़ है कि रिया सलमान ख़ान के शो में एंट्री कर सकती हैं। इतना ही नहीं खबर तो ये तक है कि रिया को लाने के लिए मेकर्स अच्छी खासी रकम अदा कर रहे हैं, लेकिन अब लेटेस्ट खबर में कुछ और ही कहानी निकल सामने आ रही है। लेटेस्ट अपटेड के मुताबिक रिया ने बिग बॉस 15 का ऑफर ठुकरा दिया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती यूं तो पिछले एक साल से सुशांत सिंह राजपूत के केस के सिलसिले में चर्चा में बनी हुई हैं लेकिन इन दिनों एक्ट्रेस बिग बॉस 15 की वजह से खबरों में हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर बज़ है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती यूं तो पिछले एक साल से सुशांत सिंह राजपूत के केस के सिलसिले में चर्चा में बनी हुई हैं, लेकिन इन दिनों एक्ट्रेस बिग बॉस पंद्रह की वजह से खबरों में हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर बज़ है कि रिया सलमान ख़ान के शो में एंट्री कर सकती हैं। इतना ही नहीं खबर तो ये तक है कि रिया को लाने के लिए मेकर्स अच्छी खासी रकम अदा कर रहे हैं, लेकिन अब लेटेस्ट खबर में कुछ और ही कहानी निकल सामने आ रही है। लेटेस्ट अपटेड के मुताबिक रिया ने बिग बॉस पंद्रह का ऑफर ठुकरा दिया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती यूं तो पिछले एक साल से सुशांत सिंह राजपूत के केस के सिलसिले में चर्चा में बनी हुई हैं लेकिन इन दिनों एक्ट्रेस बिग बॉस पंद्रह की वजह से खबरों में हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर बज़ है।
लगभग सभी लड़के डिजाइन करना पसंद करते हैं। उनके हाथों में आने वाली हर चीज में, वे असामान्य, आवश्यक, उपयोगी कुछ करने की कोशिश करते हैं। ऐसे व्यवसायिक लड़कों के माता-पिता बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि उनके असली पुरुष हैं। बच्चों में बनाने की इच्छा विकसित करने के लिए, आप एक लौह कन्स्ट्रक्टर खरीद सकते हैं। यह निश्चित रूप से सबसे उपयोगी खिलौनों में से एक है, क्योंकिः - दिमागीपन और अनुशासन के कौशल को प्रेरित करता है (यदि इसे सेट में दर्शाए गए योजना के अनुसार एकत्र किया जाता है); - रचनात्मक रूप से सोचने और कल्पना विकसित करने के लिए सिखाता है (यदि आप योजना छोड़ देते हैं और कल्पना की जाती है); - हाथों के छोटे मोटर कौशल विकसित करता है , जो कि किसी भी बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए बहुत उपयोगी है; - अक्सर स्कूल के पाठों में लड़कों द्वारा उपयोग किया जाता है। तो, बच्चों के लिए लोहे का कन्स्ट्रक्टर एक असली खोज और सबसे अच्छा खिलौना है। इसे लगभग किसी भी बच्चों की दुकान में अपेक्षाकृत किफायती मूल्य पर खरीदा जा सकता है। यह देखते हुए कि ऐसी चीज तोड़ना लगभग असंभव है (यदि केवल सभी विवरण खोने के लिए), और यह भी कि सभी सेटों को सभी प्रकार के डिज़ाइन बनाने के लिए सफलतापूर्वक संयुक्त किया जा सकता है, तो बच्चों के लोहे का कन्स्ट्रक्टर बच्चों के लिए सबसे मजेदार अधिकार और सबसे लाभदायक निवेश के अधिकार के लिए लड़ सकता है अभिभावकीय धन। सोवियत लौह कन्स्ट्रक्टर को याद रखें - यह हर लड़के का सपना था। ऐसे खिलौने विकास की श्रेणी से संबंधित हैं। जैसा कि कई उदाहरणों से दिखाया गया है, वे न केवल बच्चों को बल्कि वयस्कों को भी खेलना पसंद करते हैं, क्योंकि, एक नियम के रूप में, उन्हें सबसे कम उम्र के साथ इकट्ठा करने के लिए, आपको अपने पिता या मां की मदद की ज़रूरत है। इसलिए, उन्हें लड़के की उम्र को ध्यान में रखना होगाः 2-4 साल की उम्र के लिए, न्यूनतम विवरण वाले सबसे सरल मॉडल फिट होंगे, लेकिन पुराने, जटिल और जटिल मॉडल के लिए फिट होंगे। अब आप विभिन्न मॉडलों को इकट्ठा करने के लिए किट खरीद सकते हैंः स्कूटर, कार, ट्रक, हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, जहाजों, टैंक। गणना करें यह अनिश्चित काल तक संभव है। मुख्य बात यह है कि उस के स्वाद को जानना जिसके लिए खिलौना का मतलब पसंद में गलत नहीं होना चाहिए। सेट में सामान्य ग्रे रंग के साधारण एल्यूमीनियम विवरण हो सकते हैं, और रंगीन भाग हो सकते हैं, जो लौह घर के बने लेख की उपस्थिति पर बहुत सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। याद रखें कि यदि आपका बच्चा अभी तक 2 साल का नहीं है, तो डिजाइनरों के साथ काम करना अस्वीकार्य है, जब तक कि आप उसके साथ एक साथ खेल रहे हों, क्योंकि ऐसा लगता है कि वह एक छोटी सी जानकारी निगल जाएगा। सबसे पहले, ऑपरेटिंग प्रक्रिया को समझने के लिए मॉडल से जुड़े असेंबली निर्देशों का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है, जिसके बाद आप काम करना शुरू कर सकते हैं। जल्दी मत करो और सबकुछ एक साथ करने की कोशिश करें - इस बच्चे को सिखाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका ध्यान केवल 15-20 मिनटों को इकट्ठा करने पर केंद्रित हो सकता है, जिसके बाद उसे आराम करने, विचलित करने की आवश्यकता होती है। यदि आप नहीं करते हैं, तो गेम खुशी और लाभ नहीं लाएगा। निर्देशों के अनुसार विधानसभा वांछनीय है, लेकिन अनिवार्य नहीं है, लेकिन क्योंकि यदि आपका बच्चा कुछ अलग करना चाहता है, तो इसमें हस्तक्षेप न करें। एक छोटे शोधकर्ता की कल्पना सीमित करें! न केवल संयोजन में, बल्कि ऐसे निर्माणों के साथ खेलने में भी उन्हें प्रशिक्षित करना आवश्यक है। एकत्रित लौह मॉडल सावधानी से संग्रहीत किया जाना चाहिए। माता-पिता को केवल बच्चे की सहमति से विवरण के लिए उन्हें अलग करना चाहिए, इस प्रकार उनके काम के प्रति सम्मान दिखा रहा है, लेकिन यह बेहतर है कि लड़के द्वारा खुद को अलग किया जाता है, ताकि वह एक स्वतंत्र उपयोगी व्यवसाय बन सके। चुनते समय, तेज विवरण के बिना पर्यावरण के अनुकूल सेटों को वरीयता दें। वे किसी भी छुट्टी के लिए सबसे अच्छा उपहार होगा।
लगभग सभी लड़के डिजाइन करना पसंद करते हैं। उनके हाथों में आने वाली हर चीज में, वे असामान्य, आवश्यक, उपयोगी कुछ करने की कोशिश करते हैं। ऐसे व्यवसायिक लड़कों के माता-पिता बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि उनके असली पुरुष हैं। बच्चों में बनाने की इच्छा विकसित करने के लिए, आप एक लौह कन्स्ट्रक्टर खरीद सकते हैं। यह निश्चित रूप से सबसे उपयोगी खिलौनों में से एक है, क्योंकिः - दिमागीपन और अनुशासन के कौशल को प्रेरित करता है ; - रचनात्मक रूप से सोचने और कल्पना विकसित करने के लिए सिखाता है ; - हाथों के छोटे मोटर कौशल विकसित करता है , जो कि किसी भी बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए बहुत उपयोगी है; - अक्सर स्कूल के पाठों में लड़कों द्वारा उपयोग किया जाता है। तो, बच्चों के लिए लोहे का कन्स्ट्रक्टर एक असली खोज और सबसे अच्छा खिलौना है। इसे लगभग किसी भी बच्चों की दुकान में अपेक्षाकृत किफायती मूल्य पर खरीदा जा सकता है। यह देखते हुए कि ऐसी चीज तोड़ना लगभग असंभव है , और यह भी कि सभी सेटों को सभी प्रकार के डिज़ाइन बनाने के लिए सफलतापूर्वक संयुक्त किया जा सकता है, तो बच्चों के लोहे का कन्स्ट्रक्टर बच्चों के लिए सबसे मजेदार अधिकार और सबसे लाभदायक निवेश के अधिकार के लिए लड़ सकता है अभिभावकीय धन। सोवियत लौह कन्स्ट्रक्टर को याद रखें - यह हर लड़के का सपना था। ऐसे खिलौने विकास की श्रेणी से संबंधित हैं। जैसा कि कई उदाहरणों से दिखाया गया है, वे न केवल बच्चों को बल्कि वयस्कों को भी खेलना पसंद करते हैं, क्योंकि, एक नियम के रूप में, उन्हें सबसे कम उम्र के साथ इकट्ठा करने के लिए, आपको अपने पिता या मां की मदद की ज़रूरत है। इसलिए, उन्हें लड़के की उम्र को ध्यान में रखना होगाः दो-चार साल की उम्र के लिए, न्यूनतम विवरण वाले सबसे सरल मॉडल फिट होंगे, लेकिन पुराने, जटिल और जटिल मॉडल के लिए फिट होंगे। अब आप विभिन्न मॉडलों को इकट्ठा करने के लिए किट खरीद सकते हैंः स्कूटर, कार, ट्रक, हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, जहाजों, टैंक। गणना करें यह अनिश्चित काल तक संभव है। मुख्य बात यह है कि उस के स्वाद को जानना जिसके लिए खिलौना का मतलब पसंद में गलत नहीं होना चाहिए। सेट में सामान्य ग्रे रंग के साधारण एल्यूमीनियम विवरण हो सकते हैं, और रंगीन भाग हो सकते हैं, जो लौह घर के बने लेख की उपस्थिति पर बहुत सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। याद रखें कि यदि आपका बच्चा अभी तक दो साल का नहीं है, तो डिजाइनरों के साथ काम करना अस्वीकार्य है, जब तक कि आप उसके साथ एक साथ खेल रहे हों, क्योंकि ऐसा लगता है कि वह एक छोटी सी जानकारी निगल जाएगा। सबसे पहले, ऑपरेटिंग प्रक्रिया को समझने के लिए मॉडल से जुड़े असेंबली निर्देशों का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है, जिसके बाद आप काम करना शुरू कर सकते हैं। जल्दी मत करो और सबकुछ एक साथ करने की कोशिश करें - इस बच्चे को सिखाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका ध्यान केवल पंद्रह-बीस मिनटों को इकट्ठा करने पर केंद्रित हो सकता है, जिसके बाद उसे आराम करने, विचलित करने की आवश्यकता होती है। यदि आप नहीं करते हैं, तो गेम खुशी और लाभ नहीं लाएगा। निर्देशों के अनुसार विधानसभा वांछनीय है, लेकिन अनिवार्य नहीं है, लेकिन क्योंकि यदि आपका बच्चा कुछ अलग करना चाहता है, तो इसमें हस्तक्षेप न करें। एक छोटे शोधकर्ता की कल्पना सीमित करें! न केवल संयोजन में, बल्कि ऐसे निर्माणों के साथ खेलने में भी उन्हें प्रशिक्षित करना आवश्यक है। एकत्रित लौह मॉडल सावधानी से संग्रहीत किया जाना चाहिए। माता-पिता को केवल बच्चे की सहमति से विवरण के लिए उन्हें अलग करना चाहिए, इस प्रकार उनके काम के प्रति सम्मान दिखा रहा है, लेकिन यह बेहतर है कि लड़के द्वारा खुद को अलग किया जाता है, ताकि वह एक स्वतंत्र उपयोगी व्यवसाय बन सके। चुनते समय, तेज विवरण के बिना पर्यावरण के अनुकूल सेटों को वरीयता दें। वे किसी भी छुट्टी के लिए सबसे अच्छा उपहार होगा।
शब्बीर अहमद,भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। विभाग की माने तो प्रदेश में अगले 48 घंटे में 4 डिग्री तक तापमान में बढ़ोत्तरी होगी। एमपी के अधिकतर जिलों में 2 से 4 डिग्री तक पारा चढ़ेगा। जिससे लोगों को भारी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अभी प्रदेश के अधिकतर जिलों का तापमान 40 डिग्री के पार है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है की जल्द ही ये 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। फिलहाल प्रदेश में अधिकतम तापमान 43 डिग्री राजगढ़ जिले में दर्ज किया गया है। वहीं दमोह 42,खजुराहो 42. 4, नौगांव 41. 5,टीकमगढ़ 41. 5,सीधी 40. 6, दतिया 42. 7, धार 40. 4,ग्वालियर 41. 3,नर्मदापुरम 40. 9,खरगौन 41. 2,रतलाम 41,शिवपुरी का तापमान 41. 2 डिग्री के पार पहुंच गया है। कर्ण मिश्रा,ग्वालियर। ग्वालियर में भी भीषण गर्मी का दौर अब शुरू हो गया है। बीते 2 दिन से 40 डिग्री से ज्यादा का तापमान ग्वालियर में दर्ज किया जा रहा है। वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले 2 से 4 दिनों में तापमान में दो से 3 डिग्री की वृद्धि हो सकती है। राजस्थान के करीब होने के चलते यहां पर आने वाली गर्म हवाएं तापमान में वृद्धि कर रही है। यही वजह है कि लोग गर्मी से बचाव के लिए फेस कवर करके ही घर से बाहर निकल पा रहै है। ग्वालियर में अप्रैल महीने में तापमान 41 से 43 डिग्री के पास रह सकता है तो वहीं मई और जून में यह तापमान 45 डिग्री को भी क्रॉस कर सकता है। बीडी शर्मा,दमोह। इधर दमोह जिले में भी भीषण गर्मी का दौर जारी है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। वही लोग बाहरी काम निपटाने के लिए घरों से निकल रहे हैं और गर्मी से राहत पाने के लिए गमचे और चश्मे का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं गर्मी से बचने के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी लोगों द्वारा किया जा रहा है। रेणु अग्रवाल,धार। धार जिले में भी इन दिनों सूर्य देवता अपना कहर बरपा रहे है। अप्रैल महीने में धार का टेंपरेचर 38 डिग्री है वही धार जिले के निमाड़ क्षेत्र में मनावर व कुक्षी तकरीबन 40 डिग्री के ऊपर तापमान चल रहा है। सूरज की तपिश से लोग परेशान होकर गर्मी से परेशान होकर सिर पर कपड़ा ढक कर काम पर निकले हैं, और अपने कंठ की प्यास बुझाने के लिए गन्ने की चरखी और बर्फ के गोले की दुकान पर पहुंच रहे हैं। वहीं बढ़ती गर्मी की वजह से लोग सुबह-सुबह या फिर शाम को अपने जरुरी काम के लिए निकल रहे है। जबकि दोपहर में सड़के सुनसान नजर आने लगी है। मौसम विभाग की माने तो अभी गर्मी से राहत मिलने वाली नहीं है। ऐसे में प्रचंड गर्मी से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ताकि वे अपने आप को स्वस्थ रख सके।
शब्बीर अहमद,भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। विभाग की माने तो प्रदेश में अगले अड़तालीस घंटाटे में चार डिग्री तक तापमान में बढ़ोत्तरी होगी। एमपी के अधिकतर जिलों में दो से चार डिग्री तक पारा चढ़ेगा। जिससे लोगों को भारी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अभी प्रदेश के अधिकतर जिलों का तापमान चालीस डिग्री के पार है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है की जल्द ही ये पैंतालीस डिग्री तक पहुंच सकता है। फिलहाल प्रदेश में अधिकतम तापमान तैंतालीस डिग्री राजगढ़ जिले में दर्ज किया गया है। वहीं दमोह बयालीस,खजुराहो बयालीस. चार, नौगांव इकतालीस. पाँच,टीकमगढ़ इकतालीस. पाँच,सीधी चालीस. छः, दतिया बयालीस. सात, धार चालीस. चार,ग्वालियर इकतालीस. तीन,नर्मदापुरम चालीस. नौ,खरगौन इकतालीस. दो,रतलाम इकतालीस,शिवपुरी का तापमान इकतालीस. दो डिग्री के पार पहुंच गया है। कर्ण मिश्रा,ग्वालियर। ग्वालियर में भी भीषण गर्मी का दौर अब शुरू हो गया है। बीते दो दिन से चालीस डिग्री से ज्यादा का तापमान ग्वालियर में दर्ज किया जा रहा है। वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दो से चार दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री की वृद्धि हो सकती है। राजस्थान के करीब होने के चलते यहां पर आने वाली गर्म हवाएं तापमान में वृद्धि कर रही है। यही वजह है कि लोग गर्मी से बचाव के लिए फेस कवर करके ही घर से बाहर निकल पा रहै है। ग्वालियर में अप्रैल महीने में तापमान इकतालीस से तैंतालीस डिग्री के पास रह सकता है तो वहीं मई और जून में यह तापमान पैंतालीस डिग्री को भी क्रॉस कर सकता है। बीडी शर्मा,दमोह। इधर दमोह जिले में भी भीषण गर्मी का दौर जारी है। अधिकतम तापमान चालीस डिग्री के पार पहुंच गया है। वही लोग बाहरी काम निपटाने के लिए घरों से निकल रहे हैं और गर्मी से राहत पाने के लिए गमचे और चश्मे का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं गर्मी से बचने के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी लोगों द्वारा किया जा रहा है। रेणु अग्रवाल,धार। धार जिले में भी इन दिनों सूर्य देवता अपना कहर बरपा रहे है। अप्रैल महीने में धार का टेंपरेचर अड़तीस डिग्री है वही धार जिले के निमाड़ क्षेत्र में मनावर व कुक्षी तकरीबन चालीस डिग्री के ऊपर तापमान चल रहा है। सूरज की तपिश से लोग परेशान होकर गर्मी से परेशान होकर सिर पर कपड़ा ढक कर काम पर निकले हैं, और अपने कंठ की प्यास बुझाने के लिए गन्ने की चरखी और बर्फ के गोले की दुकान पर पहुंच रहे हैं। वहीं बढ़ती गर्मी की वजह से लोग सुबह-सुबह या फिर शाम को अपने जरुरी काम के लिए निकल रहे है। जबकि दोपहर में सड़के सुनसान नजर आने लगी है। मौसम विभाग की माने तो अभी गर्मी से राहत मिलने वाली नहीं है। ऐसे में प्रचंड गर्मी से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ताकि वे अपने आप को स्वस्थ रख सके।
नई दिल्लीः कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रदर्शन के बीच केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रियों ने बुधवार को बैठक की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने घर पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ वार्ता की है. बताया जा रहा है कि बैठक में तीनों मंत्रियों ने मंगलवार को केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई वार्ता पर विचार-विमर्श किया है. बता दें कि मंगलवार को किसानों के साथ हुई बैठक में नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल शामिल हुए थे. इस बीच खबर यह भी है कि केंद्र सरकार की कई मंत्रियों के सेक्रटरी सतह के अफसर प्रदर्शन कर रहे किसानों को समझाने और मनाने का प्रयास करेंगे. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों से बातचीत के लिए कई मंत्रालय के अफसरों की फहरिस्त तैयार कर रही है. इसमें तीनों कृषि कानूनों के कई प्रावधानों के प्रत्येक खंड पर चर्चा करने के लिए कृषि, गृह और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारी हिस्सा लेंगे. इसमें मुख्य रूप से सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे और किसानों को समझाने का प्रयास करेंगे. बताया जा रहा है कि, इस बातचीत में किसानों की समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा और धरना ख़त्म करवाने के लिए कोशिश की जाएंगी .
नई दिल्लीः कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रदर्शन के बीच केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रियों ने बुधवार को बैठक की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने घर पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ वार्ता की है. बताया जा रहा है कि बैठक में तीनों मंत्रियों ने मंगलवार को केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई वार्ता पर विचार-विमर्श किया है. बता दें कि मंगलवार को किसानों के साथ हुई बैठक में नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल शामिल हुए थे. इस बीच खबर यह भी है कि केंद्र सरकार की कई मंत्रियों के सेक्रटरी सतह के अफसर प्रदर्शन कर रहे किसानों को समझाने और मनाने का प्रयास करेंगे. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों से बातचीत के लिए कई मंत्रालय के अफसरों की फहरिस्त तैयार कर रही है. इसमें तीनों कृषि कानूनों के कई प्रावधानों के प्रत्येक खंड पर चर्चा करने के लिए कृषि, गृह और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारी हिस्सा लेंगे. इसमें मुख्य रूप से सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे और किसानों को समझाने का प्रयास करेंगे. बताया जा रहा है कि, इस बातचीत में किसानों की समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा और धरना ख़त्म करवाने के लिए कोशिश की जाएंगी .
नई दिल्लीः गंगूबाई काठियावाड़ी के हालिया टीज़र लॉन्च ने फिल्म के लिए बड़े पैमाने पर चर्चा और बहुत प्रत्याशा पैदा कर दी है। संजय लीला भंसाली ने अब तक फिर से भारतीय सिनेमा को गंगूबाई का एक शक्तिशाली बड़े पर्दे का किरदार दिया है, जिसमें आलिया भट्ट ने अभिनय किया है, फिल्म के टीज़र को लोग जमकर पसंद कर रहे है। काफी अटकलों के बाद, यह पुष्टि हो गई है कि अजय देवगन इस स्टेम-वाइंडिंग कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। अजय देवगन फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' की टीम से जुड़ेंगे और 27 फरवरी से मुंबई में लगे ग्रैंड सेट पर शूटिंग शुरू करेंगे। बताते चलें कि अजय देवगन और संजय लीला भंसाली 22 साल बाद एक साथ काम करने जा रहे हैं। इससे पहले दोनों ने फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' में एक साथ काम किया था। अजय देवगन कल 27 फरवरी को मुंबई में बनाए गए भव्य सेट पर गंगूबाई काठियावाड़ी टीम में शामिल होंगे। संजय लीला भंसाली और डॉ। जयंतीलाल गड़ा (पेन स्टूडियो) द्वारा निर्मित, गंगूबाई काठियावाड़ी इस साल 30 जुलाई को सिनेमा हॉल में हिट होने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
नई दिल्लीः गंगूबाई काठियावाड़ी के हालिया टीज़र लॉन्च ने फिल्म के लिए बड़े पैमाने पर चर्चा और बहुत प्रत्याशा पैदा कर दी है। संजय लीला भंसाली ने अब तक फिर से भारतीय सिनेमा को गंगूबाई का एक शक्तिशाली बड़े पर्दे का किरदार दिया है, जिसमें आलिया भट्ट ने अभिनय किया है, फिल्म के टीज़र को लोग जमकर पसंद कर रहे है। काफी अटकलों के बाद, यह पुष्टि हो गई है कि अजय देवगन इस स्टेम-वाइंडिंग कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। अजय देवगन फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' की टीम से जुड़ेंगे और सत्ताईस फरवरी से मुंबई में लगे ग्रैंड सेट पर शूटिंग शुरू करेंगे। बताते चलें कि अजय देवगन और संजय लीला भंसाली बाईस साल बाद एक साथ काम करने जा रहे हैं। इससे पहले दोनों ने फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' में एक साथ काम किया था। अजय देवगन कल सत्ताईस फरवरी को मुंबई में बनाए गए भव्य सेट पर गंगूबाई काठियावाड़ी टीम में शामिल होंगे। संजय लीला भंसाली और डॉ। जयंतीलाल गड़ा द्वारा निर्मित, गंगूबाई काठियावाड़ी इस साल तीस जुलाई को सिनेमा हॉल में हिट होने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इश्कबाज के लेटेस्ट एपिसोड में शिवाय रात में अचानक उठकर अपना लैपटॉप खोलता है। इसी बीच रूप वीर को आग लगाने की पूरी कहानी बताती रहती है। इश्कबाज के लेटेस्ट एपिसोड में शिवाय रात में अचानक उठकर अपना लैपटॉप खोलता है। इसी बीच रूप वीर को आग लगाने की पूरी कहानी बताती रहती है। मिस्टर कपूर को लगता है कि उसे तेज और शक्ति ने भेजा था। मिस्टर कपूर शक्ति को बुलाते हैं और उस पर बिना पूछे मिल में किसी को आग लगाने के लिए भेजने का इल्जाम लगाते हैं। शक्ति तेज की तरफ देखता है लेकिन वह यह बात नहीं मानता है। मिस्टर कपूर दोनों को फैक्ट्री बुलाते हैं। खुद को बचाने के लिए रूप मिस्टर कपूर पर वार कर देती है और तेज, जाह्नवी, पिंकी और शक्ति के आने से पहले छिप जाती है। हालांकि वह तेज को मिस्टर कपूर के शरीर से रॉड निकालते हुए फोटो खींच लेती है जिससे वह गुनाहगार लगे। परेशानी देखते हुए तेज और परिवार के बाकी सदस्य उस जगह से चुपचाप निकल लेते हैं। वीर यह जानकर हैरान रह जाता है कि उसकी मां ने मिस्टर कपूर को मार डाला, वह प्लान करता है कि वके प्रेस में ये तस्वीरें कैसे देंगे। रूप उसको बताती है कि ओबरॉय फैमिली के जाने के बाद उसने मिस्टर कपूर को दफनाने की कोशिश की थी लेकिन मिल के फोरमैन हर्षवर्धन त्रिपाठी ने उसे देख लिया। शिवाय को कहीं से मिल के फोरमैन की तस्वीर कंप्यूटर पर दिख जाती है और उसकी आंखें काफी जानी-पहचानी लगती हैं। अंकिता उठती है तो वह भी यही कहती है और पता लगाने की कोशिश करती है। रूप वीर को बताती है कि कैसे उसने हर्षवर्धन को पुलिस के सामने सस्पेक्ट बना दिया, वह बाद में उसे हॉस्पिटल लेकर गया था। हालांकि रूप ने उसे वहां भी नहीं छोड़ा। वह नर्स बनकर गई और वह किसी को सच बता पाता इससे पहले ही उसे मार डाला। ओबरॉय मैंशन पर रूप सबकी हमदर्दी हासिल करने में कामयाब हो जाती है। तेज और शक्ति उससे माफी मांगते है और घऱ पर ही रुकने को कहते हैं। वह उसके बच्चों की देखभाल करने के लिए भी कहते हैं। रूप और वीर इसके बाद पूरी सिचुएशन का फायदा उठाने का सोचते हैं।
इश्कबाज के लेटेस्ट एपिसोड में शिवाय रात में अचानक उठकर अपना लैपटॉप खोलता है। इसी बीच रूप वीर को आग लगाने की पूरी कहानी बताती रहती है। इश्कबाज के लेटेस्ट एपिसोड में शिवाय रात में अचानक उठकर अपना लैपटॉप खोलता है। इसी बीच रूप वीर को आग लगाने की पूरी कहानी बताती रहती है। मिस्टर कपूर को लगता है कि उसे तेज और शक्ति ने भेजा था। मिस्टर कपूर शक्ति को बुलाते हैं और उस पर बिना पूछे मिल में किसी को आग लगाने के लिए भेजने का इल्जाम लगाते हैं। शक्ति तेज की तरफ देखता है लेकिन वह यह बात नहीं मानता है। मिस्टर कपूर दोनों को फैक्ट्री बुलाते हैं। खुद को बचाने के लिए रूप मिस्टर कपूर पर वार कर देती है और तेज, जाह्नवी, पिंकी और शक्ति के आने से पहले छिप जाती है। हालांकि वह तेज को मिस्टर कपूर के शरीर से रॉड निकालते हुए फोटो खींच लेती है जिससे वह गुनाहगार लगे। परेशानी देखते हुए तेज और परिवार के बाकी सदस्य उस जगह से चुपचाप निकल लेते हैं। वीर यह जानकर हैरान रह जाता है कि उसकी मां ने मिस्टर कपूर को मार डाला, वह प्लान करता है कि वके प्रेस में ये तस्वीरें कैसे देंगे। रूप उसको बताती है कि ओबरॉय फैमिली के जाने के बाद उसने मिस्टर कपूर को दफनाने की कोशिश की थी लेकिन मिल के फोरमैन हर्षवर्धन त्रिपाठी ने उसे देख लिया। शिवाय को कहीं से मिल के फोरमैन की तस्वीर कंप्यूटर पर दिख जाती है और उसकी आंखें काफी जानी-पहचानी लगती हैं। अंकिता उठती है तो वह भी यही कहती है और पता लगाने की कोशिश करती है। रूप वीर को बताती है कि कैसे उसने हर्षवर्धन को पुलिस के सामने सस्पेक्ट बना दिया, वह बाद में उसे हॉस्पिटल लेकर गया था। हालांकि रूप ने उसे वहां भी नहीं छोड़ा। वह नर्स बनकर गई और वह किसी को सच बता पाता इससे पहले ही उसे मार डाला। ओबरॉय मैंशन पर रूप सबकी हमदर्दी हासिल करने में कामयाब हो जाती है। तेज और शक्ति उससे माफी मांगते है और घऱ पर ही रुकने को कहते हैं। वह उसके बच्चों की देखभाल करने के लिए भी कहते हैं। रूप और वीर इसके बाद पूरी सिचुएशन का फायदा उठाने का सोचते हैं।
आप आजका काम कल पर नही छोडते अन्यथा इतना विशाल कार्य कदापि नही हो पाता । डाक निकालने के समय तक और उसके बाद तक आप काम निपटाते रहते है । किसी भी धार्मिक साहित्यिक शैक्षणिक कार्यो में आप सबसे आगे रहते है । जयन्तियोंमें आपको उपस्थिति अनिवार्य है । वक्तृत्व कला आपकी ओजपूर्ण और सारतत्त्वसे ओत-प्रोत रहती है। विशाल अन्ययन एवं अथाह ज्ञान होनेके कारण आप किसी भी पिक्चर पर घन्टी बोल सकते है और मैकडों पेज लिख सकते है । स्कूलकी पांचवी कक्षा तक शिक्षित व्यक्ति ग्रेजुएटोके ग्रेजुएट व डाक्टरोके डाक्टर है । चुने हुए विपयपर डिग्री हासिल करनेवालोको आपके अथाह ज्ञानके सामने मस्तक झुका लेना पड़ता है। किसी भी विषयके शोध छात्र आपके गरणमें आनेपर ही अपनेको सही निर्देशन व नेतृत्व में आया महसूस करता है । और जिस विषयपर कुछ भी साहित्य उपलब्ध न होता हो वह आपके सानिध्य में प्रचुर सामग्री सम्पन्न अपना अध्ययन कक्ष बना सकता है। आप बहुतसे विद्वानोके लेखकोंके कवियोंके प्रेरणास्रोत हैं व गुरु है । उच्चकोटिके वर्माचार्यो साधु-साध्वियो व विद्वानोको उचित परामर्श देने योग्य होने के कारण हर क्षेत्र में आपका आदर है और आपकी सम्मतिको वडा ही मूल्यवान व आदरणीय, करणीय गिना जाता है । व्रत नियम, वृत्ति संक्षेप आप वचपन से ही व्रतनियमकी ओर अग्रसर रहे हैं । काकाजी अभयराजजीके पास प्राय ८-९ वर्षकी उम्र में आठम चौदस हरी न खाने व रात्रिभोजनका नियम ले लिया था । १८ वर्षकी उम्र में नित्य पीविहार, अभक्ष्य अनन्तकाय त्याग, आचार, विटूल वासी त्याग, शीतलासातम आदि ठण्डा न खाना, आर्द्रा नक्षत्र के बाद आमफल त्याग आदि सभी श्रावकोचित नियमोंमें रहते हैं । खाने-पीनेमें रसलोलुपता नहीं, कभी-कभी ऊणोदरी आदि करना, ऊपरसे नमक न लेना, जैसा हो उसीमें सन्तोप आदि गुणोंके कारण भोजन आलोचनादि विकथाओंसे विरत रहते हैं । आप दो वखत भोजन के सिवा प्राय कुछ नही लेते । प्रतिदिन प्राय पौरसी रहती है । चाय तो कभी भी नही पीते, दूध भी पोरसी आनेके बाद ही लेते हैं । नवकारसीसे पूर्व तो मुँह में पानी डालने का प्रश्न ही नही । इस अवस्थामें भी कठिन परिश्रम में लगे रहना यह तो अभ्यस्त हो गया है । यात्रामें आपके पास थोडेसे वस्त्र वीडिंगमें डाले रखते हैं, पेटी भी नहीं रखते । आपके पास भार रहता तो मात्र पुस्तकोका, साहित्य सामग्रीका । ग्रन्थोका शौक इतना है कि प्रति वर्प हजारो पुस्तकें संग्रह कर लेते हैं । नाटक, सिनेमा आदि खेल-तमाशे देखनेके लिये तो आपके पास समय ही कहाँ ? वेकारीकी गपशप और हथाई करनेसे विलकुल दूर रहते हैं । इतने व्यस्त रहते हुए भी जहाँ मिलने-जुलने जाना आवश्यक है और सामाजिक मर्यादा पालनका प्रसंग हो तो उसमें अपना समय देनेमें पीछे नहीं हटते । अनेक संस्थाओसे सम्वन्धित होनेसे व सार्वजनिक गतिविधियोंको सक्रिय योगदान करनेमें भी आप पश्चात्पद नही रहते। कई वर्षोंसे आप प्राय व्यापारसे निवृत्तसे हैं फिर भी वर्षमें दो मास अपने व्यापारिक केन्द्रोमें हो आते है । वामकाज देखकर उचित निर्देश देना व पत्र व्यवहार द्वारा निर्देश करना प्रेरणा देना आपका सतत चालू रहता है । खाता वही और हिसाव किताव के काम आप तुरन्त निरीक्षण कर निपटा देते हैं । चित्रक्ला, शिल्पकला, पुरातत्त्व, भापा विज्ञान व लिपि विज्ञानपर आपका अच्छा अभ्यास है। किसी भी वस्तु विषयको देखकर उसका मूल्याङ्कन करना व उसके तलस्पर्शी सतह पर अविकार पूर्वक कह देना यह आपकी बहुश्रुतता और विशेषज्ञताका द्योतक है। कलकत्ता यूनिवर्सिटीमें आपके भाषण, बम्बई यूनिर्वासटोमें महानिवन्ध परीक्षक होना, उदयपुर वाराणसी, दिल्ली आदि स्थानोमें आपके विविध विषयोमें भाषण होना इसका प्रवल प्रमाण है। विविध संस्थाओंने विद्वत्तासे प्रभावित होकर संघ रत्न आदि ३८२ : अगरचन्द नाहटा अभिनन्दन - प्रथ
आप आजका काम कल पर नही छोडते अन्यथा इतना विशाल कार्य कदापि नही हो पाता । डाक निकालने के समय तक और उसके बाद तक आप काम निपटाते रहते है । किसी भी धार्मिक साहित्यिक शैक्षणिक कार्यो में आप सबसे आगे रहते है । जयन्तियोंमें आपको उपस्थिति अनिवार्य है । वक्तृत्व कला आपकी ओजपूर्ण और सारतत्त्वसे ओत-प्रोत रहती है। विशाल अन्ययन एवं अथाह ज्ञान होनेके कारण आप किसी भी पिक्चर पर घन्टी बोल सकते है और मैकडों पेज लिख सकते है । स्कूलकी पांचवी कक्षा तक शिक्षित व्यक्ति ग्रेजुएटोके ग्रेजुएट व डाक्टरोके डाक्टर है । चुने हुए विपयपर डिग्री हासिल करनेवालोको आपके अथाह ज्ञानके सामने मस्तक झुका लेना पड़ता है। किसी भी विषयके शोध छात्र आपके गरणमें आनेपर ही अपनेको सही निर्देशन व नेतृत्व में आया महसूस करता है । और जिस विषयपर कुछ भी साहित्य उपलब्ध न होता हो वह आपके सानिध्य में प्रचुर सामग्री सम्पन्न अपना अध्ययन कक्ष बना सकता है। आप बहुतसे विद्वानोके लेखकोंके कवियोंके प्रेरणास्रोत हैं व गुरु है । उच्चकोटिके वर्माचार्यो साधु-साध्वियो व विद्वानोको उचित परामर्श देने योग्य होने के कारण हर क्षेत्र में आपका आदर है और आपकी सम्मतिको वडा ही मूल्यवान व आदरणीय, करणीय गिना जाता है । व्रत नियम, वृत्ति संक्षेप आप वचपन से ही व्रतनियमकी ओर अग्रसर रहे हैं । काकाजी अभयराजजीके पास प्राय आठ-नौ वर्षकी उम्र में आठम चौदस हरी न खाने व रात्रिभोजनका नियम ले लिया था । अट्ठारह वर्षकी उम्र में नित्य पीविहार, अभक्ष्य अनन्तकाय त्याग, आचार, विटूल वासी त्याग, शीतलासातम आदि ठण्डा न खाना, आर्द्रा नक्षत्र के बाद आमफल त्याग आदि सभी श्रावकोचित नियमोंमें रहते हैं । खाने-पीनेमें रसलोलुपता नहीं, कभी-कभी ऊणोदरी आदि करना, ऊपरसे नमक न लेना, जैसा हो उसीमें सन्तोप आदि गुणोंके कारण भोजन आलोचनादि विकथाओंसे विरत रहते हैं । आप दो वखत भोजन के सिवा प्राय कुछ नही लेते । प्रतिदिन प्राय पौरसी रहती है । चाय तो कभी भी नही पीते, दूध भी पोरसी आनेके बाद ही लेते हैं । नवकारसीसे पूर्व तो मुँह में पानी डालने का प्रश्न ही नही । इस अवस्थामें भी कठिन परिश्रम में लगे रहना यह तो अभ्यस्त हो गया है । यात्रामें आपके पास थोडेसे वस्त्र वीडिंगमें डाले रखते हैं, पेटी भी नहीं रखते । आपके पास भार रहता तो मात्र पुस्तकोका, साहित्य सामग्रीका । ग्रन्थोका शौक इतना है कि प्रति वर्प हजारो पुस्तकें संग्रह कर लेते हैं । नाटक, सिनेमा आदि खेल-तमाशे देखनेके लिये तो आपके पास समय ही कहाँ ? वेकारीकी गपशप और हथाई करनेसे विलकुल दूर रहते हैं । इतने व्यस्त रहते हुए भी जहाँ मिलने-जुलने जाना आवश्यक है और सामाजिक मर्यादा पालनका प्रसंग हो तो उसमें अपना समय देनेमें पीछे नहीं हटते । अनेक संस्थाओसे सम्वन्धित होनेसे व सार्वजनिक गतिविधियोंको सक्रिय योगदान करनेमें भी आप पश्चात्पद नही रहते। कई वर्षोंसे आप प्राय व्यापारसे निवृत्तसे हैं फिर भी वर्षमें दो मास अपने व्यापारिक केन्द्रोमें हो आते है । वामकाज देखकर उचित निर्देश देना व पत्र व्यवहार द्वारा निर्देश करना प्रेरणा देना आपका सतत चालू रहता है । खाता वही और हिसाव किताव के काम आप तुरन्त निरीक्षण कर निपटा देते हैं । चित्रक्ला, शिल्पकला, पुरातत्त्व, भापा विज्ञान व लिपि विज्ञानपर आपका अच्छा अभ्यास है। किसी भी वस्तु विषयको देखकर उसका मूल्याङ्कन करना व उसके तलस्पर्शी सतह पर अविकार पूर्वक कह देना यह आपकी बहुश्रुतता और विशेषज्ञताका द्योतक है। कलकत्ता यूनिवर्सिटीमें आपके भाषण, बम्बई यूनिर्वासटोमें महानिवन्ध परीक्षक होना, उदयपुर वाराणसी, दिल्ली आदि स्थानोमें आपके विविध विषयोमें भाषण होना इसका प्रवल प्रमाण है। विविध संस्थाओंने विद्वत्तासे प्रभावित होकर संघ रत्न आदि तीन सौ बयासी : अगरचन्द नाहटा अभिनन्दन - प्रथ
पदार्थ हमारे अस्तित्व की सामग्री है यह एक उद्देश्य वास्तविकता है, अंतरिक्ष भरता है और सभी जीवित और गैर-जीवित तत्वों का मुख्य घटक है। ज्ञान के दो प्रतीत होता है असंगत क्षेत्रों, जैसे कि विज्ञान और दर्शन, केवल एक ही बात से सहमत हैं - यह मामला सूक्ष्म और मैक्रो-विश्व के जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। क्या बात है जो हमारे चारों ओर से है और जिस से हम बना रहे हैं? यह ऐसे अजीब रूप क्यों लेते हैं, जिनमें से कई अभी तक हमारे पास नहीं हुए हैं? चलिए थोड़ी देर से इसे हल करने की कोशिश करते हैं। किस चीज से बना है, और यह कैसे हैइसलिए कार्डिनल उनके रूपों में परिवर्तन करता है, लोगों को प्राचीन काल के दिनों से सोचने लगे उन वर्षों में कोई सूक्ष्मदर्शी और दूरबीन नहीं थे, और यहां तक कि सबसे बुद्धिमान दार्शनिक किसी भी मानव अंग का अध्ययन नहीं कर सके थे या सिर्फ एक टुकड़ा जिस से एक कुर्सी परमाणु स्तर पर गिरा दिया गया था। हालांकि, प्राचीन पारिवारियों को स्पष्ट रूप से पता था कि अंतरिक्ष-समय क्या है और सभी तत्व इस पर कैसे व्यवहार करते हैं। यह वे थे जिन्होंने हमारे दिनों तक आने वाले उपचार को संकलित किया था। पदार्थ को दो हिस्सों में विभाजित किया गया थाः चीजें भर गईं, और घटनाएं - समय। उत्तरार्द्ध के निरंतर तरीकों की वजह से, सभी वस्तुओं और जीवित वस्तुओं का अपना रूप बदल सकता है। आदमी का जन्म हुआ, बूढ़ा हो गया और मर गया, पेड़ टूट गया, धातु जंग लगाया। 17 वीं शताब्दी में, भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ लीबनिज़ ने विषय को एक विषय के रूप में परिभाषित किया जो कि समय और स्थान के गुणों को निर्धारित करता था। बाद में आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत में उनके काम प्रकट हुए। अगर हम जैविक को बदलते हैंप्रकाशिकी, तो हम अपनी आँखों से देख सकते हैं कि पदार्थ में परमाणु होते हैं। यह इस शब्द का सरलतम विशेषता है, जिसमें कोई खंडन नहीं है और इसके आगे प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। परमाणु को हर चीज का सबसे छोटा कण कहा जाता है जो हमें चारों ओर से घेरे और खुद को। उनमें से प्रत्येक की संरचना समान है। लेकिन हमारी दुनिया के प्रत्येक तत्व के परमाणुओं में एक ही समय, बृहस्पति या कुत्ते जिगर के वातावरण में मीथेन बादल, इनकोडिंग है कि क्या वाहक ऑब्जेक्ट के गुणों के बारे में जानकारी में। एक परमाणु में नाभिक होते हैं जो हमेशा सकारात्मक रूप से चार्ज होते हैं, और इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या को देखते हुए मेल खाता कण विद्युत आवेश के दृष्टिकोण से तटस्थ हो जाता है। संतुलन परेशान है, तो परमाणु एक आयन एक सकारात्मक या नकारात्मक आरोप है कि में बदल जाती है। दूरबीन को एक तरफ धकेलना, हम, प्राप्त कियाकुछ ज्ञान, हम देखते हैं कि मामले में पदार्थ होते हैं। इसकी संरचना के कारण, जिसे प्रकाशिकी के माध्यम से देखा जा सकता है, यह चार एकीकृत राज्यों में से एक लेता हैः गैसीय, तरल, ठोस और प्लाज्मा उनमें से पहले तीन हम आसानी से एक ही पानी के उदाहरण से कल्पना कर सकते हैं, जो तरल पदार्थ, बर्फ में या गैस में बदल सकते हैं। कुछ अन्य तत्व केवल इन चार राज्यों में से एक में मौजूद हो सकते हैं। प्राचीन दर्शन में गहराई से, चार तत्वों के साथ एक सादृश्य नहीं आकर्षित करना असंभव है। साधुओं ने पानी, धरती, वायु और अग्नि उनके बीच अलग-अलग किया। यह स्पष्ट है कि हाल ही में एक लौ के अनुरूप प्लाज्मा की खोज की गई थी। जो स्कूल में भौतिकी पढ़ाते हैं वह यह जानते हैं किमामले में पदार्थ के समान ही होते हैं। परमाणुओं और उनके सबसे छोटे कण, चलती और टकराने, व्यक्तिगत आवृत्तियों के साथ खेतों को फैलाते हैं। वे एक विशेष पदार्थ के परमाणुओं के गुणों के आधार पर विद्युत चुम्बकीय, क्वांटम और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में तब्दील हो जाते हैं। चूंकि इस तरह की बातचीत और विकिरण हर जगह होते हैं, ये है कि मानव शरीर में, निर्वात में, और एक ब्लैक होल में, हमारे सभी मामले ऊर्जा से भर जाते हैं। प्रत्येक ऑब्जेक्ट में एक विशिष्ट फ़ील्ड है जिसमें विशेष गुण हैं। यह पता चला है कि ऊर्जा स्तर पर हम सभी विनिमय सूचनाएं जो हम बेहोश रूप से समझते हैं और प्रक्रिया करते हैं।
पदार्थ हमारे अस्तित्व की सामग्री है यह एक उद्देश्य वास्तविकता है, अंतरिक्ष भरता है और सभी जीवित और गैर-जीवित तत्वों का मुख्य घटक है। ज्ञान के दो प्रतीत होता है असंगत क्षेत्रों, जैसे कि विज्ञान और दर्शन, केवल एक ही बात से सहमत हैं - यह मामला सूक्ष्म और मैक्रो-विश्व के जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। क्या बात है जो हमारे चारों ओर से है और जिस से हम बना रहे हैं? यह ऐसे अजीब रूप क्यों लेते हैं, जिनमें से कई अभी तक हमारे पास नहीं हुए हैं? चलिए थोड़ी देर से इसे हल करने की कोशिश करते हैं। किस चीज से बना है, और यह कैसे हैइसलिए कार्डिनल उनके रूपों में परिवर्तन करता है, लोगों को प्राचीन काल के दिनों से सोचने लगे उन वर्षों में कोई सूक्ष्मदर्शी और दूरबीन नहीं थे, और यहां तक कि सबसे बुद्धिमान दार्शनिक किसी भी मानव अंग का अध्ययन नहीं कर सके थे या सिर्फ एक टुकड़ा जिस से एक कुर्सी परमाणु स्तर पर गिरा दिया गया था। हालांकि, प्राचीन पारिवारियों को स्पष्ट रूप से पता था कि अंतरिक्ष-समय क्या है और सभी तत्व इस पर कैसे व्यवहार करते हैं। यह वे थे जिन्होंने हमारे दिनों तक आने वाले उपचार को संकलित किया था। पदार्थ को दो हिस्सों में विभाजित किया गया थाः चीजें भर गईं, और घटनाएं - समय। उत्तरार्द्ध के निरंतर तरीकों की वजह से, सभी वस्तुओं और जीवित वस्तुओं का अपना रूप बदल सकता है। आदमी का जन्म हुआ, बूढ़ा हो गया और मर गया, पेड़ टूट गया, धातु जंग लगाया। सत्रह वीं शताब्दी में, भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ लीबनिज़ ने विषय को एक विषय के रूप में परिभाषित किया जो कि समय और स्थान के गुणों को निर्धारित करता था। बाद में आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत में उनके काम प्रकट हुए। अगर हम जैविक को बदलते हैंप्रकाशिकी, तो हम अपनी आँखों से देख सकते हैं कि पदार्थ में परमाणु होते हैं। यह इस शब्द का सरलतम विशेषता है, जिसमें कोई खंडन नहीं है और इसके आगे प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। परमाणु को हर चीज का सबसे छोटा कण कहा जाता है जो हमें चारों ओर से घेरे और खुद को। उनमें से प्रत्येक की संरचना समान है। लेकिन हमारी दुनिया के प्रत्येक तत्व के परमाणुओं में एक ही समय, बृहस्पति या कुत्ते जिगर के वातावरण में मीथेन बादल, इनकोडिंग है कि क्या वाहक ऑब्जेक्ट के गुणों के बारे में जानकारी में। एक परमाणु में नाभिक होते हैं जो हमेशा सकारात्मक रूप से चार्ज होते हैं, और इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या को देखते हुए मेल खाता कण विद्युत आवेश के दृष्टिकोण से तटस्थ हो जाता है। संतुलन परेशान है, तो परमाणु एक आयन एक सकारात्मक या नकारात्मक आरोप है कि में बदल जाती है। दूरबीन को एक तरफ धकेलना, हम, प्राप्त कियाकुछ ज्ञान, हम देखते हैं कि मामले में पदार्थ होते हैं। इसकी संरचना के कारण, जिसे प्रकाशिकी के माध्यम से देखा जा सकता है, यह चार एकीकृत राज्यों में से एक लेता हैः गैसीय, तरल, ठोस और प्लाज्मा उनमें से पहले तीन हम आसानी से एक ही पानी के उदाहरण से कल्पना कर सकते हैं, जो तरल पदार्थ, बर्फ में या गैस में बदल सकते हैं। कुछ अन्य तत्व केवल इन चार राज्यों में से एक में मौजूद हो सकते हैं। प्राचीन दर्शन में गहराई से, चार तत्वों के साथ एक सादृश्य नहीं आकर्षित करना असंभव है। साधुओं ने पानी, धरती, वायु और अग्नि उनके बीच अलग-अलग किया। यह स्पष्ट है कि हाल ही में एक लौ के अनुरूप प्लाज्मा की खोज की गई थी। जो स्कूल में भौतिकी पढ़ाते हैं वह यह जानते हैं किमामले में पदार्थ के समान ही होते हैं। परमाणुओं और उनके सबसे छोटे कण, चलती और टकराने, व्यक्तिगत आवृत्तियों के साथ खेतों को फैलाते हैं। वे एक विशेष पदार्थ के परमाणुओं के गुणों के आधार पर विद्युत चुम्बकीय, क्वांटम और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में तब्दील हो जाते हैं। चूंकि इस तरह की बातचीत और विकिरण हर जगह होते हैं, ये है कि मानव शरीर में, निर्वात में, और एक ब्लैक होल में, हमारे सभी मामले ऊर्जा से भर जाते हैं। प्रत्येक ऑब्जेक्ट में एक विशिष्ट फ़ील्ड है जिसमें विशेष गुण हैं। यह पता चला है कि ऊर्जा स्तर पर हम सभी विनिमय सूचनाएं जो हम बेहोश रूप से समझते हैं और प्रक्रिया करते हैं।
मुंबई : गडचिरोली के गोंडवाना विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहित करते समय इसमें गैरव्यवहार होने का प्रथम दृष्टया में दिखाई दे रहा है, इस पूरे मामले की जाँच एक महीने में पूरा किया जायेगा, इस तरह का आश्वासन उच्च व तंत्रशिक्षण राज्यमंत्री रविंद्र वायकर ने दिया है। आज विधान परिषद में प्रश्नोत्तर काल के दौरान वे बोल रहे थे। इस विषय के बारे में सदस्य सर्व श्री प्रा. अनिल सोले, नागोराव गाणार, धनंजय मुंडे आदि ने प्रश्न पूछा था।
मुंबई : गडचिरोली के गोंडवाना विश्वविद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहित करते समय इसमें गैरव्यवहार होने का प्रथम दृष्टया में दिखाई दे रहा है, इस पूरे मामले की जाँच एक महीने में पूरा किया जायेगा, इस तरह का आश्वासन उच्च व तंत्रशिक्षण राज्यमंत्री रविंद्र वायकर ने दिया है। आज विधान परिषद में प्रश्नोत्तर काल के दौरान वे बोल रहे थे। इस विषय के बारे में सदस्य सर्व श्री प्रा. अनिल सोले, नागोराव गाणार, धनंजय मुंडे आदि ने प्रश्न पूछा था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) पर एक परियोजना शुरू की है। यह कार्य क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) को सौंपा गया है। ओएनडीसी का उद्देश्य किसी विशिष्ट प्लेटफॉर्म के स्वतंत्र ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल और ओपन स्पेसिफिकेशंस का उपयोग करते हुए ओपन सोर्स्ड पद्धति पर विकसित ओपन नेटवर्क को बढ़ावा देना है। ओएनडीसी से पूरी मूल्य श्रृंखला को डिजिटाइज करने, परिचालन का मानकीकरण करने, आपूर्तिकर्ताओं के समावेशीकरण को बढ़ावा देने, लॉजिस्टिक्स में दक्षता हासिल करने और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य में सुधार होने की उम्मीद है। ओएनडीसी को डिजाइन करने और उसे अपनाने में तेजी लाने के लिए आवश्यक उपायों पर सरकार को सलाह देने के लिए एक सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। सलाहकार परिषद के सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगेः अतिरिक्त सचिव (आईटीईसी), डीपीआईआईटी न ही सलाहकार परिषद के संयोजक होंगे।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स पर एक परियोजना शुरू की है। यह कार्य क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया को सौंपा गया है। ओएनडीसी का उद्देश्य किसी विशिष्ट प्लेटफॉर्म के स्वतंत्र ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल और ओपन स्पेसिफिकेशंस का उपयोग करते हुए ओपन सोर्स्ड पद्धति पर विकसित ओपन नेटवर्क को बढ़ावा देना है। ओएनडीसी से पूरी मूल्य श्रृंखला को डिजिटाइज करने, परिचालन का मानकीकरण करने, आपूर्तिकर्ताओं के समावेशीकरण को बढ़ावा देने, लॉजिस्टिक्स में दक्षता हासिल करने और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य में सुधार होने की उम्मीद है। ओएनडीसी को डिजाइन करने और उसे अपनाने में तेजी लाने के लिए आवश्यक उपायों पर सरकार को सलाह देने के लिए एक सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। सलाहकार परिषद के सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगेः अतिरिक्त सचिव , डीपीआईआईटी न ही सलाहकार परिषद के संयोजक होंगे।
राजश्री के कोच ने बृहस्पतिवार को कटक में मंगलाबाग पुलिस थाने में उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद उनका शव पेड़ से लटकते मिला था. ओडिशा की महिला क्रिकेटर राजश्री स्वांई 11 जनवरी से लापता थी और उनका शव शुक्रवार को कटक के करीब घने जंगल में मिला. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. कटक के पुलिस उपायुक्त पिनाक मिश्रा ने कहा कि उनका शव अथागढ़ क्षेत्र में गुरूदिझाटिया जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ मिला था. पुलिस को अभी तक उनकी मौत के कारण का पता नहीं चला है. उनके परिवार ने हालांकि आरोप लगाया कि उसकी हत्या की गयी है क्योंकि उसके शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी आंखों को भी नुकसान पहुंचाया गया था. राजश्री का स्कूटर जंगल के करीब मिला था और उनका मोबाइल फोन भी बंद था.
राजश्री के कोच ने बृहस्पतिवार को कटक में मंगलाबाग पुलिस थाने में उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद उनका शव पेड़ से लटकते मिला था. ओडिशा की महिला क्रिकेटर राजश्री स्वांई ग्यारह जनवरी से लापता थी और उनका शव शुक्रवार को कटक के करीब घने जंगल में मिला. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. कटक के पुलिस उपायुक्त पिनाक मिश्रा ने कहा कि उनका शव अथागढ़ क्षेत्र में गुरूदिझाटिया जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ मिला था. पुलिस को अभी तक उनकी मौत के कारण का पता नहीं चला है. उनके परिवार ने हालांकि आरोप लगाया कि उसकी हत्या की गयी है क्योंकि उसके शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी आंखों को भी नुकसान पहुंचाया गया था. राजश्री का स्कूटर जंगल के करीब मिला था और उनका मोबाइल फोन भी बंद था.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कुछ घर ऐसे हैं, जहां परिवार के सदस्यों की हत्या के बाद उनके परिजनों को मजबूरन मकान ही छोड़ना पड़ गया। उन्हें इन घरों में रहने में डर लगता है। रहने से तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं और वर्षों पहले हुई विभत्स हत्याओं की यादें ताजा हो जाती है। हालांकि इस निजात पाने के लिए कुछ लोगों ने तो बकायदा पूजा- पाठ भी करवाया है। आइए हम आपको शहर की 3 ऐसी ही हत्याओं की घटना से रूबरू कराते हैं, जिनकी वजह से लंबे समय तक यहां दहशत फैली रही थी। हालांकि अब इन मकानों में कोई नहीं रहता है। जबकि इनमें से कुछ मकान तो खंडहर हो चुके हैं। शाहपुर के नीनाथापा स्थित थाड़ो लाइन गली के एक मकान में 31 जुलाई 2015 को सीआरपीएफ के हवलादार जयहिंद की पत्नी रजिया उर्फ राजी, बेटे अनूप, बेटी पूनम व रूबी की लाश मिली थी। चारों की धारदार हथियार से हत्या की गई थी। रजिया का शव बेडरूम में, बेटे का शव बगल के कमरे में बिस्तर पर, एक बेटी का शव सीढ़ियों पर और दूसरी बेटी का शव छत पर बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ा था। जयहिंद उस समय ड्यूटी पर तैनात थे। रजिया का फोन 29 जुलाई की रात से ही स्वीच आफ पड़ा था। पुलिस ने मामले में 11 महीने बाद नंदानगर निवासी टैंपो चालक अरूण दीक्षित को गिरफ्तार किया था। इस हत्या ने पूरे शहर में दहशत फैला दी थी। पुलिस के मुताबिक अरूण दीक्षित से महिला का संबंध था। 29 की रात उसका महिला से विवाद हुआ तो चारों की हत्या कर दी। तभी से यह मकान बंद पड़ा है। इसमें कोई नहीं रहता है। पति जयहिंद भी कुशीनगर स्थित अपने गांव पर ही रहते हैं। मोहल्ले के पवन और संतोष ने बताया कि हत्या के बाद कुछ सालों तक उन लोगों को रात में डर लगता था। कुछ दिन तक जयहिंद उस मकान में रहे भी लेकिन बाद में डर की वजह से ताला बंद कर चले गए। वह मकान भी बेचना चाहते हैं लेकिन, घटना की वजह से कोई खरीददार नहीं मिलता। 20 नवंबर 2001 को शहर के शिवाजी नगर कॉलोनी के एक मकान में बावरिया गिरोह ने तांडव मचाया था। राकेश राय सहित परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कर लूट पाट की गई थी। मकान के अलग- अलग कमरों में सदस्यों की लाशें पड़ी थी और फर्श भी खून से सना था। घटना ने पूरे शहर के लोगों के मन में खौफ भर दिया था। कई दिनों तक लोगों को उस घटना की याद आती रही। सालों तक मकान बंद पड़ा रहा। 21 साल में अब तक यह मकान 9 बार बिक चुका है। 4 वर्ष पूर्व बड़हलगंज इलाके के कवलभान यादव ने मकान को खरीद लिया। खरीदते समय उन्हें नहीं मालूम था कि वहां क्या हुआ है। कवलभान सहित 8 लोग इस मकान में रहने लगे। ये लोग मकान में पूजा पाठ भी कराए हैं। लेकिन आज भी इन्हें आवाजें सुनाई देती हैं और डर लगता है। 3 साल पहले हुई हत्या, रात में जाग जाता 'भूत' 22 अगस्त 2019 की रात कैंट इलाके के भैरोपुर में दवा व्यापारी रंजीत पासवान की घर में ही सोते समय गोली मारकर हत्या हुई थी। हत्या के समय बगल के कमरे में उनके भाई संजीव भी सोए थे। हत्या से मोहल्ले में दहशत फैला दी थी। अभी तक पुलिस ने मामले में हत्यारे को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। भाई संजीव इतने डरे हैं कि वे दिन में तो उस मकान में रहते हैं लेकिन रात में नहीं। शाम होते ही वह रिश्तेदार के घर चले जाते थे। उनका कहना है कि घर में रात के समय तरह तरह की आवाजें आती है। दिन में तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन लगता है रात होते ही यहां भूत जाग जाता है। इसके लिए वह पूजा पाठ भी करवा चुके हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। लिहाजा अब उन्होंने किराए का एक कमरा ले रखा है। जहां रात में वे सिर्फ सोने जाते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कुछ घर ऐसे हैं, जहां परिवार के सदस्यों की हत्या के बाद उनके परिजनों को मजबूरन मकान ही छोड़ना पड़ गया। उन्हें इन घरों में रहने में डर लगता है। रहने से तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं और वर्षों पहले हुई विभत्स हत्याओं की यादें ताजा हो जाती है। हालांकि इस निजात पाने के लिए कुछ लोगों ने तो बकायदा पूजा- पाठ भी करवाया है। आइए हम आपको शहर की तीन ऐसी ही हत्याओं की घटना से रूबरू कराते हैं, जिनकी वजह से लंबे समय तक यहां दहशत फैली रही थी। हालांकि अब इन मकानों में कोई नहीं रहता है। जबकि इनमें से कुछ मकान तो खंडहर हो चुके हैं। शाहपुर के नीनाथापा स्थित थाड़ो लाइन गली के एक मकान में इकतीस जुलाई दो हज़ार पंद्रह को सीआरपीएफ के हवलादार जयहिंद की पत्नी रजिया उर्फ राजी, बेटे अनूप, बेटी पूनम व रूबी की लाश मिली थी। चारों की धारदार हथियार से हत्या की गई थी। रजिया का शव बेडरूम में, बेटे का शव बगल के कमरे में बिस्तर पर, एक बेटी का शव सीढ़ियों पर और दूसरी बेटी का शव छत पर बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ा था। जयहिंद उस समय ड्यूटी पर तैनात थे। रजिया का फोन उनतीस जुलाई की रात से ही स्वीच आफ पड़ा था। पुलिस ने मामले में ग्यारह महीने बाद नंदानगर निवासी टैंपो चालक अरूण दीक्षित को गिरफ्तार किया था। इस हत्या ने पूरे शहर में दहशत फैला दी थी। पुलिस के मुताबिक अरूण दीक्षित से महिला का संबंध था। उनतीस की रात उसका महिला से विवाद हुआ तो चारों की हत्या कर दी। तभी से यह मकान बंद पड़ा है। इसमें कोई नहीं रहता है। पति जयहिंद भी कुशीनगर स्थित अपने गांव पर ही रहते हैं। मोहल्ले के पवन और संतोष ने बताया कि हत्या के बाद कुछ सालों तक उन लोगों को रात में डर लगता था। कुछ दिन तक जयहिंद उस मकान में रहे भी लेकिन बाद में डर की वजह से ताला बंद कर चले गए। वह मकान भी बेचना चाहते हैं लेकिन, घटना की वजह से कोई खरीददार नहीं मिलता। बीस नवंबर दो हज़ार एक को शहर के शिवाजी नगर कॉलोनी के एक मकान में बावरिया गिरोह ने तांडव मचाया था। राकेश राय सहित परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर लूट पाट की गई थी। मकान के अलग- अलग कमरों में सदस्यों की लाशें पड़ी थी और फर्श भी खून से सना था। घटना ने पूरे शहर के लोगों के मन में खौफ भर दिया था। कई दिनों तक लोगों को उस घटना की याद आती रही। सालों तक मकान बंद पड़ा रहा। इक्कीस साल में अब तक यह मकान नौ बार बिक चुका है। चार वर्ष पूर्व बड़हलगंज इलाके के कवलभान यादव ने मकान को खरीद लिया। खरीदते समय उन्हें नहीं मालूम था कि वहां क्या हुआ है। कवलभान सहित आठ लोग इस मकान में रहने लगे। ये लोग मकान में पूजा पाठ भी कराए हैं। लेकिन आज भी इन्हें आवाजें सुनाई देती हैं और डर लगता है। तीन साल पहले हुई हत्या, रात में जाग जाता 'भूत' बाईस अगस्त दो हज़ार उन्नीस की रात कैंट इलाके के भैरोपुर में दवा व्यापारी रंजीत पासवान की घर में ही सोते समय गोली मारकर हत्या हुई थी। हत्या के समय बगल के कमरे में उनके भाई संजीव भी सोए थे। हत्या से मोहल्ले में दहशत फैला दी थी। अभी तक पुलिस ने मामले में हत्यारे को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। भाई संजीव इतने डरे हैं कि वे दिन में तो उस मकान में रहते हैं लेकिन रात में नहीं। शाम होते ही वह रिश्तेदार के घर चले जाते थे। उनका कहना है कि घर में रात के समय तरह तरह की आवाजें आती है। दिन में तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन लगता है रात होते ही यहां भूत जाग जाता है। इसके लिए वह पूजा पाठ भी करवा चुके हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। लिहाजा अब उन्होंने किराए का एक कमरा ले रखा है। जहां रात में वे सिर्फ सोने जाते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यलय (आरजीपीवी) ने प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन भेजें। इसके लिए कॉलेजों से कहा गया है कि विद्यर्थियों का रिकॉर्ड स्कैन कर आरजीपीवी के ई-मेल पर भेजा जाए। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम जारी करने में दिक्कत नहीं होगी। आरजीपीवी अधिकारियों का कहना है कि कई बार परीक्षा के दौरान विद्यार्थी उत्तर पुस्तिका में रोल नंबर, विषय कोड लिखना भूल जाते हैं। कॉलेज स्तर पर भी इसकी जांच नहीं होती। इसके अलावा विद्यार्थियों का रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं होता है। इससे परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों को अनुपस्थित बता दिया जाता है और उनके परीक्षा परिणाम भी रुक जाते हैं। इस वजह से विद्यार्थियों को परेशानी होती है। गौरतलब है कि पिछले महीने आरजीपीवी की एक छात्रा को परीक्षा परिणाम में अनुपस्थित बता दिया था। इसके बाद आत्महत्या करने की कोशिष की थी, जबकि छात्रा अनुपस्थित नहीं थी। इसको देखते हुए अब आरजीपीवी व्यवस्था में सुधार कर रहा है। वहीं विवि ने विद्यार्थियों को ग्रेड के साथ उनके नंबर बताने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। इसके लिए कॉलेजों को निर्देशित किया है कि वे तत्काल कॉलेज में ही विद्यार्थियों को ग्रेड के साथ उनके नंबर भी बताएं। इससे विद्यार्थियों को अपने नंबर जानने के लिए आरजीपीवी नहीं आना पड़ेगा। विवि के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. मोहन सेन का कहना है कि निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यलय ने प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन भेजें। इसके लिए कॉलेजों से कहा गया है कि विद्यर्थियों का रिकॉर्ड स्कैन कर आरजीपीवी के ई-मेल पर भेजा जाए। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम जारी करने में दिक्कत नहीं होगी। आरजीपीवी अधिकारियों का कहना है कि कई बार परीक्षा के दौरान विद्यार्थी उत्तर पुस्तिका में रोल नंबर, विषय कोड लिखना भूल जाते हैं। कॉलेज स्तर पर भी इसकी जांच नहीं होती। इसके अलावा विद्यार्थियों का रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं होता है। इससे परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों को अनुपस्थित बता दिया जाता है और उनके परीक्षा परिणाम भी रुक जाते हैं। इस वजह से विद्यार्थियों को परेशानी होती है। गौरतलब है कि पिछले महीने आरजीपीवी की एक छात्रा को परीक्षा परिणाम में अनुपस्थित बता दिया था। इसके बाद आत्महत्या करने की कोशिष की थी, जबकि छात्रा अनुपस्थित नहीं थी। इसको देखते हुए अब आरजीपीवी व्यवस्था में सुधार कर रहा है। वहीं विवि ने विद्यार्थियों को ग्रेड के साथ उनके नंबर बताने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। इसके लिए कॉलेजों को निर्देशित किया है कि वे तत्काल कॉलेज में ही विद्यार्थियों को ग्रेड के साथ उनके नंबर भी बताएं। इससे विद्यार्थियों को अपने नंबर जानने के लिए आरजीपीवी नहीं आना पड़ेगा। विवि के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. मोहन सेन का कहना है कि निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता / ओडिशा (एएनआई)। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान यास बुधवार सुबह ओडिशा के तट से टकराने के बाद बेहद राैद्र रूप धारण कर चुका है। इसने पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कई इलाकों में तबाही मचाई है। ऐसे में शासन से लेकर प्रशासन तक राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक्टिव है। पश्चिम बंगाल में चक्रवात यास के बाद राहत कार्यों में विशाखापत्तनम से भारतीय नौसेना की सात टीमें भी जुटी हैं। भारतीय नौसेना ने गुरुवार को कहा विशाखापत्तनम से 7 भारतीय नौसेना की टीमें, जिसमें 2 डाइविंग और 5 बाढ़ राहत दल (FRT) शामिल हैं, ने पश्चिम बंगाल में 3 अलग-अलग स्थानों-दीघा, फ्रेजरगंज और डायमंड हार्बर में चक्रवात यास के बाद राहत अभियान चलाया है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) के अनुसार, अगले कुछ घंटे तक कोलकाता, पूर्वी और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों के कुछ हिस्सों में बिजली व गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को चक्रवात यास प्रभावित जिलों के 128 गांवों के सभी परिवारों के लिए सात दिन की राहत की घोषणा की। अगले 24 घंटे में सभी प्रमुख सड़कों और 80 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। सीएम पटनायक ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, सामुदायिक संगठनों और पुलिस को भी राहत व बचाव कार्य में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी। सीएम ने चक्रवात के दौरान प्रभावित जिलों में निरंतर स्वास्थ्य सेवा के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को धन्यवाद दिया।
कोलकाता / ओडिशा । बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान यास बुधवार सुबह ओडिशा के तट से टकराने के बाद बेहद राैद्र रूप धारण कर चुका है। इसने पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत कई इलाकों में तबाही मचाई है। ऐसे में शासन से लेकर प्रशासन तक राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक्टिव है। पश्चिम बंगाल में चक्रवात यास के बाद राहत कार्यों में विशाखापत्तनम से भारतीय नौसेना की सात टीमें भी जुटी हैं। भारतीय नौसेना ने गुरुवार को कहा विशाखापत्तनम से सात भारतीय नौसेना की टीमें, जिसमें दो डाइविंग और पाँच बाढ़ राहत दल शामिल हैं, ने पश्चिम बंगाल में तीन अलग-अलग स्थानों-दीघा, फ्रेजरगंज और डायमंड हार्बर में चक्रवात यास के बाद राहत अभियान चलाया है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले कुछ घंटे तक कोलकाता, पूर्वी और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों के कुछ हिस्सों में बिजली व गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को चक्रवात यास प्रभावित जिलों के एक सौ अट्ठाईस गांवों के सभी परिवारों के लिए सात दिन की राहत की घोषणा की। अगले चौबीस घंटाटे में सभी प्रमुख सड़कों और अस्सी प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। सीएम पटनायक ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, सामुदायिक संगठनों और पुलिस को भी राहत व बचाव कार्य में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी। सीएम ने चक्रवात के दौरान प्रभावित जिलों में निरंतर स्वास्थ्य सेवा के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को धन्यवाद दिया।
केंद्र सरकार के खिलाफ किसान सड़क पर हैं. किसान दिल्ली के बॉर्डर पर जुटे हुए हैं. इसी बीच राजस्थान के पंचायत चुनावों में बीजेपी को सफलता मिली है. पंचायत चुनावों के नतीजों से खुश बीजेपी ने कहा है कि किसान कृषि सुधारों के पक्ष में हैं. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राजस्थान में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में बीजेपो को अप्रत्याशित जीत मिली है. ग्रामीण इलाकों के ये ढाई करोड़ वोटर मुख्यतः किसान थे, ये उनका फैसला है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ट्रेंड ये रहा है कि जिसकी राज्य में सरकार होती है, उसे इन चुनावों में ज्यादा सफलता मिलती है, लेकिन इस बार उल्टा हुआ है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है जबकि मतदाताओं ने इस बार बीजेपी का साथ दिया है. देखें खास वीडियो.
केंद्र सरकार के खिलाफ किसान सड़क पर हैं. किसान दिल्ली के बॉर्डर पर जुटे हुए हैं. इसी बीच राजस्थान के पंचायत चुनावों में बीजेपी को सफलता मिली है. पंचायत चुनावों के नतीजों से खुश बीजेपी ने कहा है कि किसान कृषि सुधारों के पक्ष में हैं. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राजस्थान में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में बीजेपो को अप्रत्याशित जीत मिली है. ग्रामीण इलाकों के ये ढाई करोड़ वोटर मुख्यतः किसान थे, ये उनका फैसला है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ट्रेंड ये रहा है कि जिसकी राज्य में सरकार होती है, उसे इन चुनावों में ज्यादा सफलता मिलती है, लेकिन इस बार उल्टा हुआ है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है जबकि मतदाताओं ने इस बार बीजेपी का साथ दिया है. देखें खास वीडियो.
वाशिंगटनः अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति एवं रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान दल ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उपराष्ट्रपति पद उम्मीदवार एवं भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस पर प्रहार करते हुए उन्हें 'नैतिक और बौद्धिक स्तर पर दिवालिया' करार दिया है. उल्लेखनीय है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार 77 वर्षीय जो बाइडेन ने 55 वर्षीय हैरिस को उप राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनकर इतिहास रच दिया है. हैरिस अमेरिकी इतिहास में पहली काली महिला हैं जिन्हें किसी प्रमुख पार्टी ने उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. उल्लेखनीय है कि ट्रंप के चुनाव प्रचार दल में गिलफॉयले को सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. ट्रंप की बहू लारा ने कहा, 'बाइडेन और हैरिस मूल रूप से अमेरिका को बदलना चाहते हैं जो निश्चित तौर पर अमेरिका को समाजवादी देश बनाना है. वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा देश को पहले रखेंगे और अमेरिकियों की आजादी की रक्षा के लिए लड़ेंगे. कांग्रेस सदस्य एलिज स्टीफेनिक ने कहा कि अमेरिका के इतिहास में हैरिस सबसे कम प्रभावी सीनेटर हैं और उनकी असफलता का रिकॉर्ड स्वयं को बाइडेन से जोड़ने के साथ सामने आ गया है. वहीं, हैरिस ने कहा कि कोविड-19 पर राष्ट्रपति ट्रंप के कुप्रबंधन से अमेरिकी आर्थिक महामंदी के बाद सबसे बड़े आर्थिक संकट में फंस गए हैं.
वाशिंगटनः अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति एवं रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान दल ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उपराष्ट्रपति पद उम्मीदवार एवं भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस पर प्रहार करते हुए उन्हें 'नैतिक और बौद्धिक स्तर पर दिवालिया' करार दिया है. उल्लेखनीय है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार सतहत्तर वर्षीय जो बाइडेन ने पचपन वर्षीय हैरिस को उप राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनकर इतिहास रच दिया है. हैरिस अमेरिकी इतिहास में पहली काली महिला हैं जिन्हें किसी प्रमुख पार्टी ने उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. उल्लेखनीय है कि ट्रंप के चुनाव प्रचार दल में गिलफॉयले को सबसे ताकतवर व्यक्ति माना जाता है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. ट्रंप की बहू लारा ने कहा, 'बाइडेन और हैरिस मूल रूप से अमेरिका को बदलना चाहते हैं जो निश्चित तौर पर अमेरिका को समाजवादी देश बनाना है. वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा देश को पहले रखेंगे और अमेरिकियों की आजादी की रक्षा के लिए लड़ेंगे. कांग्रेस सदस्य एलिज स्टीफेनिक ने कहा कि अमेरिका के इतिहास में हैरिस सबसे कम प्रभावी सीनेटर हैं और उनकी असफलता का रिकॉर्ड स्वयं को बाइडेन से जोड़ने के साथ सामने आ गया है. वहीं, हैरिस ने कहा कि कोविड-उन्नीस पर राष्ट्रपति ट्रंप के कुप्रबंधन से अमेरिकी आर्थिक महामंदी के बाद सबसे बड़े आर्थिक संकट में फंस गए हैं.
LokSabha Election 2019: कैंट विधानसभा सीट पर रीता बहुगुणा जोशी के बाद अब कौन? भाजपा ने मंत्री जोशी को प्रयागराज सीट से मैदान में उतारा। चुनाव में दावेदारी को लेकर दिखने लगे हैं कई नाम। लखनऊ[अजय श्रीवास्तव]। परिणाम अगर सकारात्मक रहे तो कैंट विधानसभा सीट से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के बाद कौन? प्रयागराज संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में रीता बहुगुणा जोशी के नाम की घोषणा के साथ ही यह चर्चा लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में होने लगी है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मंगलवार शाम से शहर की कैंट विधानसभा सीट में संभावित उपचुनाव पर हर किसी की नजर थी। कैंट से विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की प्रयागराज वापसी ने उन नेताओं की सक्रियता बढ़ा दी है, जो कैंट सीट पर नजर लगाए थे। हालांकि, यह तो प्रयागराज लोकसभा सीट के चुनाव परिणाम से तय होगा कि कैंट सीट खाली होगी या नहीं? लेकिन मंगलवार शाम बाद भाजपा के एक नेता के समर्थकों में खुशी छा गई, जो कैंट सीट पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि, दावेदार तो बहुत हैं, लेकिन कैंट से चर्चा में जो नाम सामने आए, उनमें तीन बार विधायक रहे सुरेश तिवारी भी हैं। मौजूदा विधायक प्रो. रीता बहुगुणा जोशी अपने पुत्र मंयक जोशी को उपचुनाव में उतारकर सीट को अपने कब्जे में रखना चाहेंगी। कैंट क्षेत्र में मंयक जोशी की बढ़ती सक्रियता से यह चर्चा कुछ माह से चल रही थी कि रीता जोशी अपनी सीट पर उत्तराधिकारी पेश कर रही हैं। आरएसएस खेमे से प्रशांत भाटिया भी दावेदारों में हो सकते हैं। प्रशांत के पिता सतीश भाटिया 1991 और 1993 में कैंट से विधायक थे और 1991 में पहली बार उन्होंने भाजपा का परचम फहराया था। प्रशांत की मां संयुक्ता भाटिया मेयर हैं। लोकसभा सीट से टिकट न पाने से निराश दिख रहीं मुलायम की बहू अपर्णा यादव भी कैंट सीट पर एक बार फिर जोर-आजमाइश कर सकती हैं। वह किस दल से लड़ेंगी? यह भविष्य बताएगा। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में गठबंधन के चलते समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार किया था। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं रीता जोशी ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश तिवारी का पत्ता काट दिया था और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा का परचम लहराया था। रीता को टिकट दिए जाने से सुरेश तिवारी समर्थकों में निराशा दिखी थी। कैंट सीट इसलिए चर्चा में आ गई थी क्योंकि सपा उम्मीदवार अपर्णा यादव मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। सपा ने इस सीट पर ताकत झोंक दी थी। अन्य चुनावी सभाओं में नहीं गए मुलायम सिंह यादव ने कैंट विधानसभा सीट पर सभा की थी। खुद अखिलेश यादव भी सभा करने पहुंचे थे। वर्ष 2012 में कांग्रेस उम्मीदवार रीता जोशी ने कैंट सीट से मौजूदा भाजपा विधायक सुरेश तिवारी को हरा दिया था। रीता जोशी को 63052 तो सुरेश तिवारी को 41299 मत मिले थे। हालांकि, सुरेश तिवारी 2007, 2002 और 1996 में भी विधायक रहे तो इससे पहले भी भाजपा का इस सीट पर कब्जा था। इससे पहले 1991 और 1993 में सतीश भाटिया ने भाजपा का परचम लहराया था। 1957 से लेकर 1989 तक कैंट सीट दो चुनाव को छोड़कर सात चुनाव में कांग्रेस के कब्जे में रही थी। इससे पहले वर्ष 2012 में कलराज मिश्र पूर्वी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बने थे लेकिन वर्ष 2014 में वे देवरिया से सांसद हो गए थे। तब पूर्वी विधानसभा सीट पर उप चुनाव हुआ था और अपना राजनीतिक मंच तलाश रहे आशुतोष टंडन 'गोपाल'ं को विधानसभा पहुंचने का मौका मिला था। पूर्व मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन (अब बिहार के राज्यपाल) के पुत्र आशुतोष टंडन को यह सीट रास आ गई थी और सामान्य विधानसभा चुनाव में भी वह विधायक और फिर मंत्री बन गए।
LokSabha Election दो हज़ार उन्नीस: कैंट विधानसभा सीट पर रीता बहुगुणा जोशी के बाद अब कौन? भाजपा ने मंत्री जोशी को प्रयागराज सीट से मैदान में उतारा। चुनाव में दावेदारी को लेकर दिखने लगे हैं कई नाम। लखनऊ[अजय श्रीवास्तव]। परिणाम अगर सकारात्मक रहे तो कैंट विधानसभा सीट से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के बाद कौन? प्रयागराज संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में रीता बहुगुणा जोशी के नाम की घोषणा के साथ ही यह चर्चा लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में होने लगी है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मंगलवार शाम से शहर की कैंट विधानसभा सीट में संभावित उपचुनाव पर हर किसी की नजर थी। कैंट से विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की प्रयागराज वापसी ने उन नेताओं की सक्रियता बढ़ा दी है, जो कैंट सीट पर नजर लगाए थे। हालांकि, यह तो प्रयागराज लोकसभा सीट के चुनाव परिणाम से तय होगा कि कैंट सीट खाली होगी या नहीं? लेकिन मंगलवार शाम बाद भाजपा के एक नेता के समर्थकों में खुशी छा गई, जो कैंट सीट पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि, दावेदार तो बहुत हैं, लेकिन कैंट से चर्चा में जो नाम सामने आए, उनमें तीन बार विधायक रहे सुरेश तिवारी भी हैं। मौजूदा विधायक प्रो. रीता बहुगुणा जोशी अपने पुत्र मंयक जोशी को उपचुनाव में उतारकर सीट को अपने कब्जे में रखना चाहेंगी। कैंट क्षेत्र में मंयक जोशी की बढ़ती सक्रियता से यह चर्चा कुछ माह से चल रही थी कि रीता जोशी अपनी सीट पर उत्तराधिकारी पेश कर रही हैं। आरएसएस खेमे से प्रशांत भाटिया भी दावेदारों में हो सकते हैं। प्रशांत के पिता सतीश भाटिया एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे और एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में कैंट से विधायक थे और एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में पहली बार उन्होंने भाजपा का परचम फहराया था। प्रशांत की मां संयुक्ता भाटिया मेयर हैं। लोकसभा सीट से टिकट न पाने से निराश दिख रहीं मुलायम की बहू अपर्णा यादव भी कैंट सीट पर एक बार फिर जोर-आजमाइश कर सकती हैं। वह किस दल से लड़ेंगी? यह भविष्य बताएगा। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में गठबंधन के चलते समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार किया था। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं रीता जोशी ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश तिवारी का पत्ता काट दिया था और वर्ष दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा का परचम लहराया था। रीता को टिकट दिए जाने से सुरेश तिवारी समर्थकों में निराशा दिखी थी। कैंट सीट इसलिए चर्चा में आ गई थी क्योंकि सपा उम्मीदवार अपर्णा यादव मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। सपा ने इस सीट पर ताकत झोंक दी थी। अन्य चुनावी सभाओं में नहीं गए मुलायम सिंह यादव ने कैंट विधानसभा सीट पर सभा की थी। खुद अखिलेश यादव भी सभा करने पहुंचे थे। वर्ष दो हज़ार बारह में कांग्रेस उम्मीदवार रीता जोशी ने कैंट सीट से मौजूदा भाजपा विधायक सुरेश तिवारी को हरा दिया था। रीता जोशी को तिरेसठ हज़ार बावन तो सुरेश तिवारी को इकतालीस हज़ार दो सौ निन्यानवे मत मिले थे। हालांकि, सुरेश तिवारी दो हज़ार सात, दो हज़ार दो और एक हज़ार नौ सौ छियानवे में भी विधायक रहे तो इससे पहले भी भाजपा का इस सीट पर कब्जा था। इससे पहले एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे और एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में सतीश भाटिया ने भाजपा का परचम लहराया था। एक हज़ार नौ सौ सत्तावन से लेकर एक हज़ार नौ सौ नवासी तक कैंट सीट दो चुनाव को छोड़कर सात चुनाव में कांग्रेस के कब्जे में रही थी। इससे पहले वर्ष दो हज़ार बारह में कलराज मिश्र पूर्वी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बने थे लेकिन वर्ष दो हज़ार चौदह में वे देवरिया से सांसद हो गए थे। तब पूर्वी विधानसभा सीट पर उप चुनाव हुआ था और अपना राजनीतिक मंच तलाश रहे आशुतोष टंडन 'गोपाल'ं को विधानसभा पहुंचने का मौका मिला था। पूर्व मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के पुत्र आशुतोष टंडन को यह सीट रास आ गई थी और सामान्य विधानसभा चुनाव में भी वह विधायक और फिर मंत्री बन गए।
Happy Birthday Shahid Kapoor: हम आज बॉलीवुड (Bollywood) के एक ऐसे अभिनेता की बात करेंगे, जिन्हें उनके अभिनय के साथ साथ उनके डांस, लुक, रोमांटिक छवि के लिए जाना गया। वैसे तो वो एक बॉलीवुड (Bollywood) के बड़े स्टार के बेटे हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने लम्बे संघर्ष के बाद बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई है। हाँ हम बात कर आरहे हैं शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) की , जो मशहूर एक्टर पंकज कपूर (Pankaj Kapoor) के बेटे हैं। उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जीवन से जुड़ी खास बातें...जो शायद आप ना जानते हो। शाहिद कपूर पंकज कपूर (Pankaj Kapoor) के घर पैदा हुए थे, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साल 2016 में एक इंटरव्यू में बताया था कि कई बार ऐसा होता था कि उनके पास खाने के पैसे और ऑडिशन देने जाने के लिए किराया भी नहीं होता था। उन्होंने आगे कहा, 'मैंने वो जिंदगी जी है, जिसके बारे में मैं बात नहीं करता। लेकिन, यह मेरी सच्चाई है। A post shared by Shahid Kapoor (@shahidkapoor) शाहिद कपूर आज बॉलीवुड के टॉप एक्टर्स में से है एक हैं। हाल ही में उनकी फिल्म कबीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा काम किया था। लेकिन, क्या आप जानते हैं उन्हें बॉलीवुड में एंट्री से पहले करीब 100 फिल्मों में रिजेक्ट होना पड़ा था। उसके बाद उन्होंने अपनी पहली फिल्म इश्क-विश्क से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, इससे पहले उन्होंने टीवी विज्ञापन और बेक डांसर के तौर पर भी काम किया था। फिल्म 'इश्क विश्क' से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले शाहिद ने पहली बार में ही दर्शकों का दिल जीत लिया था। खास तौर से लड़कियों में तो इस रोमांटिक हीरो का काफी क्रेज देखने को मिला। इस फिल्म के लिए शाहिद को बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद 2006 में सूरज बड़जात्या की फिल्म 'विवाह' आई, जो बड़ी हिट साबित हुई। वहीं 2007 में इम्तियाज अली की 'जब वी मेट' को शाहिद की अब तक कि यादगार फिल्मों में शुमार किया जा सकता है। उनके करियर में कई करियर खास कमाल नहीं कर पाई तो कई फिल्मों ने हमेशा के लिए हिट कर दिया। 2009 में विशाल भारद्वाज की फिल्म 'कमीने' में अभिनय के लिए शाहिद को खूब वाहवाही मिली। शाहिद की करीना कपूर के साथ भी जोड़ी खूब जंची थी और उनके अफेयर्स की खबरें भी काफी सुर्खियों में रहीं। उसके बाद शाहिद ने हैदर, कमीने, उड़ता पंजाब, कबीर सिंह जैसी कई फिल्मों में काम किया और नाम भी कमाया।
Happy Birthday Shahid Kapoor: हम आज बॉलीवुड के एक ऐसे अभिनेता की बात करेंगे, जिन्हें उनके अभिनय के साथ साथ उनके डांस, लुक, रोमांटिक छवि के लिए जाना गया। वैसे तो वो एक बॉलीवुड के बड़े स्टार के बेटे हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने लम्बे संघर्ष के बाद बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई है। हाँ हम बात कर आरहे हैं शाहिद कपूर की , जो मशहूर एक्टर पंकज कपूर के बेटे हैं। उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जीवन से जुड़ी खास बातें...जो शायद आप ना जानते हो। शाहिद कपूर पंकज कपूर के घर पैदा हुए थे, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साल दो हज़ार सोलह में एक इंटरव्यू में बताया था कि कई बार ऐसा होता था कि उनके पास खाने के पैसे और ऑडिशन देने जाने के लिए किराया भी नहीं होता था। उन्होंने आगे कहा, 'मैंने वो जिंदगी जी है, जिसके बारे में मैं बात नहीं करता। लेकिन, यह मेरी सच्चाई है। A post shared by Shahid Kapoor शाहिद कपूर आज बॉलीवुड के टॉप एक्टर्स में से है एक हैं। हाल ही में उनकी फिल्म कबीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा काम किया था। लेकिन, क्या आप जानते हैं उन्हें बॉलीवुड में एंट्री से पहले करीब एक सौ फिल्मों में रिजेक्ट होना पड़ा था। उसके बाद उन्होंने अपनी पहली फिल्म इश्क-विश्क से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, इससे पहले उन्होंने टीवी विज्ञापन और बेक डांसर के तौर पर भी काम किया था। फिल्म 'इश्क विश्क' से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले शाहिद ने पहली बार में ही दर्शकों का दिल जीत लिया था। खास तौर से लड़कियों में तो इस रोमांटिक हीरो का काफी क्रेज देखने को मिला। इस फिल्म के लिए शाहिद को बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद दो हज़ार छः में सूरज बड़जात्या की फिल्म 'विवाह' आई, जो बड़ी हिट साबित हुई। वहीं दो हज़ार सात में इम्तियाज अली की 'जब वी मेट' को शाहिद की अब तक कि यादगार फिल्मों में शुमार किया जा सकता है। उनके करियर में कई करियर खास कमाल नहीं कर पाई तो कई फिल्मों ने हमेशा के लिए हिट कर दिया। दो हज़ार नौ में विशाल भारद्वाज की फिल्म 'कमीने' में अभिनय के लिए शाहिद को खूब वाहवाही मिली। शाहिद की करीना कपूर के साथ भी जोड़ी खूब जंची थी और उनके अफेयर्स की खबरें भी काफी सुर्खियों में रहीं। उसके बाद शाहिद ने हैदर, कमीने, उड़ता पंजाब, कबीर सिंह जैसी कई फिल्मों में काम किया और नाम भी कमाया।
नारायण एक साधारण व्यक्ति और पिता हैं, एक साधारण जीवन जीते हैं, और सभी पिताओं की तरह, उनका पुत्र कबीर उनका गौरव और आनंद है। कबीर, दोस्तों और साथियों से घिरा हुआ है, जिनके पास यह सब है, महान बाइक, नवीनतम फोन, तेज कारें और बहुत सारा पैसा खर्च करना। यह सब और बहुत कुछ उन्हें उनके धनी पिताओं ने दिया। दूसरी ओर कबीर के पिता नारायण अपने बेटे के लिए डीटीसी बस टिकट के अलावा कुछ भी नहीं खरीद सकते। अपने सभी दोस्तों को इस भोगवादी जीवन शैली को जीते हुए देखकर, कबीर अक्सर अपने पिता, एक पारंपरिक व्यक्ति, जो एक साधारण सुरक्षा पर्यवेक्षक के रूप में काम करते हैं, द्वारा कम बदला हुआ महसूस करता है। एक दिन कबीर के दोस्त, जो खुद बहुत पैसा कमा रहे हैं, उसे जल्दी पैसा कमाने का मौका देते हैं। इसी तरह की जीवन शैली के लिए हताशा और लालच से प्रेरित कबीर, पैसे कमाने का एक शॉर्टकट लेता है, और जल्द ही खुद को बड़ी परेशानी में पाता है। नारायण अपने बेटे को वापस जीतने के लिए लड़ते हैं और साथ ही उनकी गरिमा, सम्मान और सम्मान भी। There are no reviews at this moment.
नारायण एक साधारण व्यक्ति और पिता हैं, एक साधारण जीवन जीते हैं, और सभी पिताओं की तरह, उनका पुत्र कबीर उनका गौरव और आनंद है। कबीर, दोस्तों और साथियों से घिरा हुआ है, जिनके पास यह सब है, महान बाइक, नवीनतम फोन, तेज कारें और बहुत सारा पैसा खर्च करना। यह सब और बहुत कुछ उन्हें उनके धनी पिताओं ने दिया। दूसरी ओर कबीर के पिता नारायण अपने बेटे के लिए डीटीसी बस टिकट के अलावा कुछ भी नहीं खरीद सकते। अपने सभी दोस्तों को इस भोगवादी जीवन शैली को जीते हुए देखकर, कबीर अक्सर अपने पिता, एक पारंपरिक व्यक्ति, जो एक साधारण सुरक्षा पर्यवेक्षक के रूप में काम करते हैं, द्वारा कम बदला हुआ महसूस करता है। एक दिन कबीर के दोस्त, जो खुद बहुत पैसा कमा रहे हैं, उसे जल्दी पैसा कमाने का मौका देते हैं। इसी तरह की जीवन शैली के लिए हताशा और लालच से प्रेरित कबीर, पैसे कमाने का एक शॉर्टकट लेता है, और जल्द ही खुद को बड़ी परेशानी में पाता है। नारायण अपने बेटे को वापस जीतने के लिए लड़ते हैं और साथ ही उनकी गरिमा, सम्मान और सम्मान भी। There are no reviews at this moment.
(जी. एन. एस) ता. 25 सिलीगुड़ी पारंपरिक माने जाने वाली भारतीय महिलाएं अब अमेरिका में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उस समय मिला जब सिलीगुड़ी निवासी शिल्पा मित्तल को अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में सर्वश्रेष्ठ महिला एंट्रेपेन्योर एवार्ड 2017 प्रदान करने का निर्णय लिया गया. यह एवार्ड गोल्डन ब्रिज्स कंपनी ने उन्हें दी है. वह 18 सितंबर को अवार्ड लेने के लिए अमेरिका जा रही हैं.
ता. पच्चीस सिलीगुड़ी पारंपरिक माने जाने वाली भारतीय महिलाएं अब अमेरिका में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उस समय मिला जब सिलीगुड़ी निवासी शिल्पा मित्तल को अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में सर्वश्रेष्ठ महिला एंट्रेपेन्योर एवार्ड दो हज़ार सत्रह प्रदान करने का निर्णय लिया गया. यह एवार्ड गोल्डन ब्रिज्स कंपनी ने उन्हें दी है. वह अट्ठारह सितंबर को अवार्ड लेने के लिए अमेरिका जा रही हैं.
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर ब्राइट है, सरकार भी इस एरिया में तेजी से काम कर रही है। लोगों के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की इंपॉर्टेंस को लेकर अवेयरनेस से बढ़ेगा इनका स्कोप। देश को चाहिए ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो व्हीकल्स के एक्सपीरियंस को कंफर्टेबल बनाए। हाल ही में ऐसा ई-स्कूटर लॉन्च किया गया है जो 75 किमी पर ऑवर की स्पीड प्रोवाइड करता है और आने वाले टाइम में यह टेक्नोलॉजी सिर्फ इंप्रूव ही होती जाएगी। आने वाले वक्त में ऑटोमोबाइल्स इंडस्ट्री किस डायरेक्शन में मुडऩे वाली है? ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में फ्यूचर होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का। आज की डेट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर दो तरह से है। एक तो जो हम पॉल्यूशन की प्रॉब्लम को फेस कर रहे हैं, सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि ग्लोबली भी। ग्लोबल फोरम पर पॉल्यूशन एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है और इसका जो इंपैक्ट आज दिख रहा है, आने वाली जेनरेशन के लिए कम से कम 200 गुना ज्यादा होगा। अभी कुछ वक्त दिल्ली में जब बच्चों का लंग टेस्ट हुआ था, तो उसमें 60 परसेंट बच्चे फेल हो गए थे। ये इंडिकेट करता है कि हमें किसी न किसी तरह से पॉल्यूशन को कम करना है और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इसमें बहुत बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। ऑटो इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव क्या होने वाला है? सबसे बड़ा बदलाव होगा व्हीकल्स से निकलने वाले कार्बन को कम करने की कोशिश। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी अपना एक दायरा है लेकिन इसकी बड़ी भागेदारी होगी। लेकिन ये तभी होगा जब लोग ये समझेंगे कि उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की तरफ स्विच करके क्या फायदे हो सकते हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की खासियत है कि न उससे एयर पॉल्यूशन होगा न ही नॉइज पॉल्यूशन। इनफैक्ट, गवर्नमेंट ने तो ये भी कहा है कि 2030 तक ऑटोमाइल्स के मार्केट को पूरी तरह से चेंज कर दिया जाएगा। यानि पेट्रोल और डीजल के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी बड़ा मार्केट होगा। इंडिया ही नहीं, दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की टेक्नोलॉजी को इंप्रूव करने पर जोर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स फायदेमंद होने के बजाय लोगों के बीच पॉपुलर क्यों नहीं हैं? अभी तक जो भी प्रोडक्ट्स मार्केट में थे वो रेंज और क्वॉलिटी वाइज इतने नहीं थे। लोगों में इस बात को लेकर डर था कि अगर वो घर से निकले हैं तो वापस घर पहुंच पाएंगे या नहीं। अभी तक जो भी ई-स्कूटर्स लॉन्च किए गए थे, उनकी एफिशियंसी को लेकर भी ये डर था लोगों में कि ये ज्यादा लोड ले पाएंगे या नहीं, रास्ते में ही बैट्री खत्म हो गई तो क्या होगा। लेकिन अब ये सिर्फ लोगों की ही नहीं, ग्लोबल लेवल पर इंडिया और बाकी देशों की जरूरत बन गए हैं। यही वजह है इनकी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। इन्हें पेट्रोल और डीजल से रिप्लेस करना एक बड़ा चैलेंज है, कैसे होगा ये? जाहिर है कि जो चीजें इतने दशकों से लोगों के बीच हैं, उन्हें रिप्लेस करना चैलेंजिंग होगा। गवर्नमेंट भी इस इस डायरेक्शन में तेजी से काम कर रही है। एक मैन्युफैक्चरर के तौर पर सबसे बड़ा फैक्टर ये होगा कि हम लोगों को ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के ऑप्शंस दें, जिसको देखकर लोग ये सोचें कि उन्हें पेट्रोल और डीजल को छोड़कर इस पर स्विच करना है। यानि अगर लोगों को इन प्रोडक्ट्स की तरफ अट्रैक्ट करना है तो ये तभी होगा जब प्रोडक्ट्स बेस्ट क्वॉलिटी के होंगे और लोगों को कंवीनियंस प्रोवाइड करेंगे। इसलिए हम भी इसी डायरेक्शन में काम कर रहे हैं ताकि लोग ऑटोमोबाइल्स के इस सेग्मेट की तरफ स्विच कर सकें। जैसे कि कोशिश ये होगी, कि ई-व्हीकल्स मजबूत होने के साथ-साथ नॉर्मल बाइक्स और कार की तरह स्पीड भी प्रोवाइड करें। हमने हाल ही में ऐसा स्कूटर लॉन्च किया है जो 75 किमी पर ऑवर की स्पीड पर चलता है और सिंगल चार्ज में 170-200 किमी के डिस्टेंस को कवर करता है। इसके अलावा लोगों के बीच इसे लेकर भी अवेयरनेस की बहुत जरूरत है। गवर्नमेंट की पॉलिसीज को फॉलो करना और ये सोचना कि बेहतर कल के लिए जरूरी आवश्यकता है, इस तरह का एट्टियूड भी ऑटोमोबाइल्स के सेक्टर में बड़ा चेंज ला सकता है। क्या सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लॉन्च कर देना काफी है? जिस तरह फ्यूल स्टेशंस पेट्रोल होते हैं, क्या आने वाले वक्त में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए चार्जिंग स्टेशंस की जरूरत नहीं होगी? आप जो चार्जिंग स्टेशंस की बात कर रही हैं तो डेफिनेटली आने वाले वक्त में हमें ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्मूद फ्लो के लिए काम करे। हमारी गवर्नमेंट भी इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने का काम कर रही है। लेकिन अगर हम ओकीनावा की बात करें तो हमारा ध्येय ये है कि हम ऐसे स्कूटर्स बनाएं जो रास्ते में रुके ही नहीं। हम इस तरह के ई-टू व्हीलर्स पर कर रहे हैं, जो एक छोटी सी बैट्री पर काम करेंगे। मान लीजिए अगर रास्ते में आपकी बैट्री खत्म भी होती है तो आपको बस वो बैट्री निकालनी होगी और उसे किसी भी पांच एंपियर के प्लग से चार्ज करना होगा। यानि जिस तरह से आप अपना फोन चार्ज करते हैं, वैसे ही अपने स्कूटर की बैटरी भी चार्ज कर पाएंगे। हमारा पूरा फोकस होगा कि लोग जब चलें तो पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कि उन्हें कहीं रुकना नहीं पड़ेगा। जितेंद्र शर्मा ओकीनावा स्कूटर्स के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ओकीनावा ने हाल ही में इंडिया का पहला सबसे तेज स्पीड पर चलने वाला ई-स्कूटर लॉन्च किया है।
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर ब्राइट है, सरकार भी इस एरिया में तेजी से काम कर रही है। लोगों के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की इंपॉर्टेंस को लेकर अवेयरनेस से बढ़ेगा इनका स्कोप। देश को चाहिए ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो व्हीकल्स के एक्सपीरियंस को कंफर्टेबल बनाए। हाल ही में ऐसा ई-स्कूटर लॉन्च किया गया है जो पचहत्तर किमी पर ऑवर की स्पीड प्रोवाइड करता है और आने वाले टाइम में यह टेक्नोलॉजी सिर्फ इंप्रूव ही होती जाएगी। आने वाले वक्त में ऑटोमोबाइल्स इंडस्ट्री किस डायरेक्शन में मुडऩे वाली है? ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में फ्यूचर होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का। आज की डेट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर दो तरह से है। एक तो जो हम पॉल्यूशन की प्रॉब्लम को फेस कर रहे हैं, सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि ग्लोबली भी। ग्लोबल फोरम पर पॉल्यूशन एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है और इसका जो इंपैक्ट आज दिख रहा है, आने वाली जेनरेशन के लिए कम से कम दो सौ गुना ज्यादा होगा। अभी कुछ वक्त दिल्ली में जब बच्चों का लंग टेस्ट हुआ था, तो उसमें साठ परसेंट बच्चे फेल हो गए थे। ये इंडिकेट करता है कि हमें किसी न किसी तरह से पॉल्यूशन को कम करना है और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इसमें बहुत बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं। ऑटो इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव क्या होने वाला है? सबसे बड़ा बदलाव होगा व्हीकल्स से निकलने वाले कार्बन को कम करने की कोशिश। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी अपना एक दायरा है लेकिन इसकी बड़ी भागेदारी होगी। लेकिन ये तभी होगा जब लोग ये समझेंगे कि उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की तरफ स्विच करके क्या फायदे हो सकते हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की खासियत है कि न उससे एयर पॉल्यूशन होगा न ही नॉइज पॉल्यूशन। इनफैक्ट, गवर्नमेंट ने तो ये भी कहा है कि दो हज़ार तीस तक ऑटोमाइल्स के मार्केट को पूरी तरह से चेंज कर दिया जाएगा। यानि पेट्रोल और डीजल के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी बड़ा मार्केट होगा। इंडिया ही नहीं, दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की टेक्नोलॉजी को इंप्रूव करने पर जोर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स फायदेमंद होने के बजाय लोगों के बीच पॉपुलर क्यों नहीं हैं? अभी तक जो भी प्रोडक्ट्स मार्केट में थे वो रेंज और क्वॉलिटी वाइज इतने नहीं थे। लोगों में इस बात को लेकर डर था कि अगर वो घर से निकले हैं तो वापस घर पहुंच पाएंगे या नहीं। अभी तक जो भी ई-स्कूटर्स लॉन्च किए गए थे, उनकी एफिशियंसी को लेकर भी ये डर था लोगों में कि ये ज्यादा लोड ले पाएंगे या नहीं, रास्ते में ही बैट्री खत्म हो गई तो क्या होगा। लेकिन अब ये सिर्फ लोगों की ही नहीं, ग्लोबल लेवल पर इंडिया और बाकी देशों की जरूरत बन गए हैं। यही वजह है इनकी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। इन्हें पेट्रोल और डीजल से रिप्लेस करना एक बड़ा चैलेंज है, कैसे होगा ये? जाहिर है कि जो चीजें इतने दशकों से लोगों के बीच हैं, उन्हें रिप्लेस करना चैलेंजिंग होगा। गवर्नमेंट भी इस इस डायरेक्शन में तेजी से काम कर रही है। एक मैन्युफैक्चरर के तौर पर सबसे बड़ा फैक्टर ये होगा कि हम लोगों को ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के ऑप्शंस दें, जिसको देखकर लोग ये सोचें कि उन्हें पेट्रोल और डीजल को छोड़कर इस पर स्विच करना है। यानि अगर लोगों को इन प्रोडक्ट्स की तरफ अट्रैक्ट करना है तो ये तभी होगा जब प्रोडक्ट्स बेस्ट क्वॉलिटी के होंगे और लोगों को कंवीनियंस प्रोवाइड करेंगे। इसलिए हम भी इसी डायरेक्शन में काम कर रहे हैं ताकि लोग ऑटोमोबाइल्स के इस सेग्मेट की तरफ स्विच कर सकें। जैसे कि कोशिश ये होगी, कि ई-व्हीकल्स मजबूत होने के साथ-साथ नॉर्मल बाइक्स और कार की तरह स्पीड भी प्रोवाइड करें। हमने हाल ही में ऐसा स्कूटर लॉन्च किया है जो पचहत्तर किमी पर ऑवर की स्पीड पर चलता है और सिंगल चार्ज में एक सौ सत्तर-दो सौ किमी के डिस्टेंस को कवर करता है। इसके अलावा लोगों के बीच इसे लेकर भी अवेयरनेस की बहुत जरूरत है। गवर्नमेंट की पॉलिसीज को फॉलो करना और ये सोचना कि बेहतर कल के लिए जरूरी आवश्यकता है, इस तरह का एट्टियूड भी ऑटोमोबाइल्स के सेक्टर में बड़ा चेंज ला सकता है। क्या सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लॉन्च कर देना काफी है? जिस तरह फ्यूल स्टेशंस पेट्रोल होते हैं, क्या आने वाले वक्त में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए चार्जिंग स्टेशंस की जरूरत नहीं होगी? आप जो चार्जिंग स्टेशंस की बात कर रही हैं तो डेफिनेटली आने वाले वक्त में हमें ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्मूद फ्लो के लिए काम करे। हमारी गवर्नमेंट भी इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने का काम कर रही है। लेकिन अगर हम ओकीनावा की बात करें तो हमारा ध्येय ये है कि हम ऐसे स्कूटर्स बनाएं जो रास्ते में रुके ही नहीं। हम इस तरह के ई-टू व्हीलर्स पर कर रहे हैं, जो एक छोटी सी बैट्री पर काम करेंगे। मान लीजिए अगर रास्ते में आपकी बैट्री खत्म भी होती है तो आपको बस वो बैट्री निकालनी होगी और उसे किसी भी पांच एंपियर के प्लग से चार्ज करना होगा। यानि जिस तरह से आप अपना फोन चार्ज करते हैं, वैसे ही अपने स्कूटर की बैटरी भी चार्ज कर पाएंगे। हमारा पूरा फोकस होगा कि लोग जब चलें तो पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कि उन्हें कहीं रुकना नहीं पड़ेगा। जितेंद्र शर्मा ओकीनावा स्कूटर्स के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ओकीनावा ने हाल ही में इंडिया का पहला सबसे तेज स्पीड पर चलने वाला ई-स्कूटर लॉन्च किया है।
NEET Results 2020: शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नए सत्र में और देरी को रोकने के लिए नीट परिणाम जल्द ही घोषित किया जाएगा। NEET Results 2020: शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नए सत्र में और देरी को रोकने के लिए नीट परिणाम जल्द ही घोषित किया जाएगा। नीट उच्चतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक है, जो छात्रों को सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अवसर प्रदान करता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में देरी की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया, 13 सितंबर को कोविड -19 महामारी के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा के बीच नीट परीक्षा को आयोजित किया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 26 सितंबर को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET 2020) की आंसर की जारी थी। आंसर की जारी होने के बाद अगला कदम परिणामों की घोषणा है जो अब जल्द ही होने की उम्मीद है। नीट 2020 की परिणाम तिथि के नवीनतम अपडेट के अनुसार एनटीए अधिकारियों ने पुष्टि की कि परिणाम 12 अक्टूबर तक घोषित किया जाएगा। हालांकि एनटीए ने नीट-यूजी परिणामों की रिलीज की तारीख के बारे में अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इस वर्ष नीट 2020 की कटऑफ अधिक रहने की उम्मीद है क्योंकि परीक्षार्थियों की संख्या अधिक थी छात्रों और कोचिंग सेंटरों को तैयारी के लिए अधिक समय मिला और परीक्षा तुलनात्मक रूप से आसान थी। इसके विपरीत नीट 2020 कट-ऑफ में कुछ छूट हो सकती है क्योंकि महामारी के कारण उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल था क्योंकि उन्हें पिछले वर्षों की तरह तैयार करने के लिए उचित वातावरण नहीं मिला था। नीट 2020 के परिणाम, जेईई मेन्स 2020 के परिणाम की तरह ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए क्योंकि नीट मेडिकल और डेंटल कॉलेज प्रवेश के लिए केवल प्रवेश परीक्षा है और केंद्रीय और राज्यों के बीच विभाजित काउंसलिंग इसे एक लंबी प्रक्रिया बनाता है। कोरोनोवायरस महामारी पहले से ही शैक्षणिक कैलेंडर पर विनाशकारी प्रभाव डालती है।
NEET Results दो हज़ार बीस: शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नए सत्र में और देरी को रोकने के लिए नीट परिणाम जल्द ही घोषित किया जाएगा। NEET Results दो हज़ार बीस: शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नए सत्र में और देरी को रोकने के लिए नीट परिणाम जल्द ही घोषित किया जाएगा। नीट उच्चतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक है, जो छात्रों को सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अवसर प्रदान करता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में देरी की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया, तेरह सितंबर को कोविड -उन्नीस महामारी के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा के बीच नीट परीक्षा को आयोजित किया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छब्बीस सितंबर को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट की आंसर की जारी थी। आंसर की जारी होने के बाद अगला कदम परिणामों की घोषणा है जो अब जल्द ही होने की उम्मीद है। नीट दो हज़ार बीस की परिणाम तिथि के नवीनतम अपडेट के अनुसार एनटीए अधिकारियों ने पुष्टि की कि परिणाम बारह अक्टूबर तक घोषित किया जाएगा। हालांकि एनटीए ने नीट-यूजी परिणामों की रिलीज की तारीख के बारे में अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इस वर्ष नीट दो हज़ार बीस की कटऑफ अधिक रहने की उम्मीद है क्योंकि परीक्षार्थियों की संख्या अधिक थी छात्रों और कोचिंग सेंटरों को तैयारी के लिए अधिक समय मिला और परीक्षा तुलनात्मक रूप से आसान थी। इसके विपरीत नीट दो हज़ार बीस कट-ऑफ में कुछ छूट हो सकती है क्योंकि महामारी के कारण उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल था क्योंकि उन्हें पिछले वर्षों की तरह तैयार करने के लिए उचित वातावरण नहीं मिला था। नीट दो हज़ार बीस के परिणाम, जेईई मेन्स दो हज़ार बीस के परिणाम की तरह ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए क्योंकि नीट मेडिकल और डेंटल कॉलेज प्रवेश के लिए केवल प्रवेश परीक्षा है और केंद्रीय और राज्यों के बीच विभाजित काउंसलिंग इसे एक लंबी प्रक्रिया बनाता है। कोरोनोवायरस महामारी पहले से ही शैक्षणिक कैलेंडर पर विनाशकारी प्रभाव डालती है।
Recover your password. A password will be e-mailed to you. क्रिकेट को लग गया कोरोना का बड़ा ग्रहणः इस साल नहीं होगा एशिया कप टूर्नामेंट? जानिये बॉलीवुड के आज तक के 10 सबसे हैण्डसम एक्टर कौन से हैं ?
Recover your password. A password will be e-mailed to you. क्रिकेट को लग गया कोरोना का बड़ा ग्रहणः इस साल नहीं होगा एशिया कप टूर्नामेंट? जानिये बॉलीवुड के आज तक के दस सबसे हैण्डसम एक्टर कौन से हैं ?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश की 39 महिलाओं और संस्थाओं को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद महिलाओं को यह पुरस्कार देंगे। भारत सरकार महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान के मद्देनजर महिलाओं और संस्थानों को नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान करती है। इस साल इस विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन महिलाओं और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। सम्मानिक की जाने वाली महिलाएं समाज सुधार, विज्ञान, बिजनस, खेल, मनोरंजन और कला जगत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखती हैं। इन सभी सम्मानित होनेवाली महिलाओं और संस्थाओं को 8 मार्च को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश की उनतालीस महिलाओं और संस्थाओं को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद महिलाओं को यह पुरस्कार देंगे। भारत सरकार महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान के मद्देनजर महिलाओं और संस्थानों को नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान करती है। इस साल इस विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन महिलाओं और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। सम्मानिक की जाने वाली महिलाएं समाज सुधार, विज्ञान, बिजनस, खेल, मनोरंजन और कला जगत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखती हैं। इन सभी सम्मानित होनेवाली महिलाओं और संस्थाओं को आठ मार्च को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
Ranchi, 10 November : राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की ओर से 09 नवंबर को रांची के मोराबादी स्थित अभिवादन हॉल में स्टूडेंट्स सेल बैठक की गयी. इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष साधना ओझा की सहमति के बाद टीम का गठन किया गया. इस दौरान स्टूडेंट् सेल के अध्यक्ष आकाश सिंह राजपूत ने कहा कि इस संगठन का उद्देश्य लोगों को अधिकार दिलाना है. आज देश में कई स्थान ऐसे हैं जहां घटनाएं हो जाती, परंतु हमलोगों को जानकारी तक नहीं मिल पाती है. उन्होंने कहा कि हमलोग ऐसे लोगों को अधिकार दिलाएंगे. उनकी परेशानियों को दूर कर उनके हक के लिए कार्य किया जायेगा. झारखंड प्रदेश अध्यक्ष- आलोक दीवा, उपाध्यक्ष- राहुल लकड़ा, सचिव- स्वपिनल युवराज, अतुल राज, रांची जिला अध्यक्ष- मनीष सिंह, जिला उपाध्यक्ष- रितु राज, अंकुश, सचिव- सर्वेश श्रोयांश बनाए गये. इसके अलावा 50 अन्य लोगों ने सदस्यता ली.
Ranchi, दस नवंबरember : राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की ओर से नौ नवंबर को रांची के मोराबादी स्थित अभिवादन हॉल में स्टूडेंट्स सेल बैठक की गयी. इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष साधना ओझा की सहमति के बाद टीम का गठन किया गया. इस दौरान स्टूडेंट् सेल के अध्यक्ष आकाश सिंह राजपूत ने कहा कि इस संगठन का उद्देश्य लोगों को अधिकार दिलाना है. आज देश में कई स्थान ऐसे हैं जहां घटनाएं हो जाती, परंतु हमलोगों को जानकारी तक नहीं मिल पाती है. उन्होंने कहा कि हमलोग ऐसे लोगों को अधिकार दिलाएंगे. उनकी परेशानियों को दूर कर उनके हक के लिए कार्य किया जायेगा. झारखंड प्रदेश अध्यक्ष- आलोक दीवा, उपाध्यक्ष- राहुल लकड़ा, सचिव- स्वपिनल युवराज, अतुल राज, रांची जिला अध्यक्ष- मनीष सिंह, जिला उपाध्यक्ष- रितु राज, अंकुश, सचिव- सर्वेश श्रोयांश बनाए गये. इसके अलावा पचास अन्य लोगों ने सदस्यता ली.
इतिहास और पुराण की ब्राह्मी संहिता का ही नाम "महाभारत" है । यह पवित्र अर्थशास्त्र है, यह परमधर्म शास्त्र है और उच्चतम मोनशास्त्र है; यह महान् कल्याणकारी हे । धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का निचोद इस ग्रन्य में आया है। ) उपर्युक्त महाकाव्यों के पश्चात् संस्कृत में अन्य कई उल्लेखनीय महाकार्यों की रचना हो चुकी है। इनमें कवि कुलगुरु कालिदास का "खुवंश" महाकवि भारवि का "किरातार्जुनीय" तथा कवि शिरोमणि माघ का "शिशुपाल वध " ग्रादि प्रमुख हैं। भारतीय साहित्य के ये अमर ग्रन्थ रत्न हैं, जो निरन्तर भारत को पुण्य चरितों, इतिहास और पुराणों के सार, देव दानव के तत्त्वों की विशद व्याख्या भव्य एवं श्रोजपूर्ण काव्य शैली में करते रहे हैं। इनमें हिमालय-सी गरिमा एवं योज वर्तमान है । "साहित्य दर्पण" यादि काव्य शास्त्रों के लक्षणों के अनुसार इनमें सर्गबंध कथ चरित्र सृष्टि, विचार गांभीर्य ओजस्वी भाषा-शैली का निर्वाह है।
इतिहास और पुराण की ब्राह्मी संहिता का ही नाम "महाभारत" है । यह पवित्र अर्थशास्त्र है, यह परमधर्म शास्त्र है और उच्चतम मोनशास्त्र है; यह महान् कल्याणकारी हे । धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का निचोद इस ग्रन्य में आया है। ) उपर्युक्त महाकाव्यों के पश्चात् संस्कृत में अन्य कई उल्लेखनीय महाकार्यों की रचना हो चुकी है। इनमें कवि कुलगुरु कालिदास का "खुवंश" महाकवि भारवि का "किरातार्जुनीय" तथा कवि शिरोमणि माघ का "शिशुपाल वध " ग्रादि प्रमुख हैं। भारतीय साहित्य के ये अमर ग्रन्थ रत्न हैं, जो निरन्तर भारत को पुण्य चरितों, इतिहास और पुराणों के सार, देव दानव के तत्त्वों की विशद व्याख्या भव्य एवं श्रोजपूर्ण काव्य शैली में करते रहे हैं। इनमें हिमालय-सी गरिमा एवं योज वर्तमान है । "साहित्य दर्पण" यादि काव्य शास्त्रों के लक्षणों के अनुसार इनमें सर्गबंध कथ चरित्र सृष्टि, विचार गांभीर्य ओजस्वी भाषा-शैली का निर्वाह है।
कमितांग शासन में चीन साथ ही यह उस विश्व के लिए पूर्णतः विचित्र थी जिसकी कल्पना रूजवेल्ट तथा चचिल ने इतने विश्वस्त ढंग से तेहरान तथा माल्टा सम्मेलनों में की थी । वस्तुतः च्यांग-काई-शेक चीनी साहित्य में उपलब्ध नैतिक ज्ञान की घोर उत्तरोत्तर उन्मुख होता गया। वह अपने समकालीन यूरोप तथा अमेरिकी विश्व को पीछे छोड़ चुका था। किन्तु पश्चिमी सचिवों ने सर्वदा उसके विचारों को अस्पष्ट सामान्यीकरणों में प्रस्तुत किया जिससे ऐसा लगता था मानों वह भी टू मेन, आदिनावर, चर्चिल अथवा श्राइजनहावर के विचारों के प्रजातन्त्र में विश्वास करता था। किन्तु यदि इन विचारों को च्यांग-काई-शेक के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विरोधाभास है । यदि लोग ऐसा महसूस कर लेते हैं तो उचित है यदि नहीं देख पाते हैं तो उन्हें प्रतीक्षा करनी चाहिए क्योकि महत्वपूर्ण समस्या कही और ही विद्यमान है । च्यांग ने अपने लेखों तथा भाषणों में जो कुछ लिखा है वह चीन के लिए वस्तुतः महत्वपूर्ण है । 1930 में पूर्वार्द्ध से हो च्यांग को यह विचार चिन्तित करने लगा था कि जिन साम्यवादियों को वह भ्रष्ट समझता था वे जिस उत्साह का प्रदर्शन करते थे वह उसके सैनिक प्रदर्शित नहीं करते थे। बाद में वह जापानियों की दोपपुर्ण नीतियों के बावजूद उनकी सैनिक तथा आर्थिक नीतियों की सफलता से वह बड़ा दुखी हुआ। उसकी राजनीति विचारधारा का मूल आधार मानव व्यक्तित्व था श्रत उसने उस मानव व्यवहार की आचार संहिता को अपने विचार का केन्द्र बनाया जो मनुष्य के राजनीतिक निर्णयों के व्यावहारिक तथा तत्वदर्शन के पक्षों को स्पष्ट कर सके । एक राष्ट्र के व्यस्त नेता के लिए महायुद्ध तथा गृहयुद्ध के समय अपने तत्वदर्शन का निर्माण करना कोई सरल कार्य नहीं है । च्यांग चाहे हमारे दृष्टिकोण से सफल नहीं हुआ हो किन्तु इस सम्बन्ध में स्वयं उसका दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण है। उसके कई उत्तर धर्मं तथा राजनीति को मिश्रित करते हैं । इस दृष्टिकोण के अध्ययन की जितनी श्रावश्यकता पश्चिमी छात्रों व लेखकों के लिए 1930 में नहीं जितनी 1950 में है । च्यांग नेहरू तथा योशिदा से अधिक एशियाई है । वस्तुतः वह एशिया के कई नेताओं से अधिक एशिपाई है। च्यांग अभी भी अपना ध्यान वैयक्तिक भ्रष्टहीनता पर केन्द्रित करता है । वह 19वीं शताब्दी में जनरल रसेंग-क-फान द्वारा लिखी गई रचनाओं से उद्धररण देता है । यह वही प्रभावशाली व्यक्ति था जिसने चीन के नागरिक स्वयं सेवकों को प्रोत्साहित किया तथा उन्हें चीनी साम्राज्य को ताइपिंग विद्रोहियों से बचाने के लिए प्रेरित किया । सम्भवतः ऐसा दृष्टिकोण च्यांग की शक्ति व दुर्बलता दोनों के लिए उत्तरदायी है तथा उसकी सफलों व असफलताओंों दोनों का कारण हैं । राष्ट्रवादी पतनः एक तथ्य स्पष्ट है । 1949 में राष्ट्रवादी चीन के पतन का कारण च्यांग-काई-शेफ ही स्पष्ट नहीं कर सकता है। न ही मात्र कुमितांग दल की दुर्बलताएँ चीन की मुख्य भूमि से उसके पतन को स्पष्ट करती हैं। क्योंकि दो महायुद्धों के मध्यकाल में तथा द्वितीय महायुद्ध के रौरान सभी पाश्चात्य उदारवादी तथा अनुदारवादी यह मानते हैं कि यूरोप में एकमात्र चैकोस्लोवाकिया में प्रजातन्त्र सफल रहा था । किन्तु अन्ततः चैकोस्लोवाकिया में भी तानाशाही की स्थापना हुई । सौभाग्यवश यह भी प्रमाणित नहीं किया जा सकता है कि राष्ट्रवादी सरकार के
कमितांग शासन में चीन साथ ही यह उस विश्व के लिए पूर्णतः विचित्र थी जिसकी कल्पना रूजवेल्ट तथा चचिल ने इतने विश्वस्त ढंग से तेहरान तथा माल्टा सम्मेलनों में की थी । वस्तुतः च्यांग-काई-शेक चीनी साहित्य में उपलब्ध नैतिक ज्ञान की घोर उत्तरोत्तर उन्मुख होता गया। वह अपने समकालीन यूरोप तथा अमेरिकी विश्व को पीछे छोड़ चुका था। किन्तु पश्चिमी सचिवों ने सर्वदा उसके विचारों को अस्पष्ट सामान्यीकरणों में प्रस्तुत किया जिससे ऐसा लगता था मानों वह भी टू मेन, आदिनावर, चर्चिल अथवा श्राइजनहावर के विचारों के प्रजातन्त्र में विश्वास करता था। किन्तु यदि इन विचारों को च्यांग-काई-शेक के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विरोधाभास है । यदि लोग ऐसा महसूस कर लेते हैं तो उचित है यदि नहीं देख पाते हैं तो उन्हें प्रतीक्षा करनी चाहिए क्योकि महत्वपूर्ण समस्या कही और ही विद्यमान है । च्यांग ने अपने लेखों तथा भाषणों में जो कुछ लिखा है वह चीन के लिए वस्तुतः महत्वपूर्ण है । एक हज़ार नौ सौ तीस में पूर्वार्द्ध से हो च्यांग को यह विचार चिन्तित करने लगा था कि जिन साम्यवादियों को वह भ्रष्ट समझता था वे जिस उत्साह का प्रदर्शन करते थे वह उसके सैनिक प्रदर्शित नहीं करते थे। बाद में वह जापानियों की दोपपुर्ण नीतियों के बावजूद उनकी सैनिक तथा आर्थिक नीतियों की सफलता से वह बड़ा दुखी हुआ। उसकी राजनीति विचारधारा का मूल आधार मानव व्यक्तित्व था श्रत उसने उस मानव व्यवहार की आचार संहिता को अपने विचार का केन्द्र बनाया जो मनुष्य के राजनीतिक निर्णयों के व्यावहारिक तथा तत्वदर्शन के पक्षों को स्पष्ट कर सके । एक राष्ट्र के व्यस्त नेता के लिए महायुद्ध तथा गृहयुद्ध के समय अपने तत्वदर्शन का निर्माण करना कोई सरल कार्य नहीं है । च्यांग चाहे हमारे दृष्टिकोण से सफल नहीं हुआ हो किन्तु इस सम्बन्ध में स्वयं उसका दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण है। उसके कई उत्तर धर्मं तथा राजनीति को मिश्रित करते हैं । इस दृष्टिकोण के अध्ययन की जितनी श्रावश्यकता पश्चिमी छात्रों व लेखकों के लिए एक हज़ार नौ सौ तीस में नहीं जितनी एक हज़ार नौ सौ पचास में है । च्यांग नेहरू तथा योशिदा से अधिक एशियाई है । वस्तुतः वह एशिया के कई नेताओं से अधिक एशिपाई है। च्यांग अभी भी अपना ध्यान वैयक्तिक भ्रष्टहीनता पर केन्द्रित करता है । वह उन्नीसवीं शताब्दी में जनरल रसेंग-क-फान द्वारा लिखी गई रचनाओं से उद्धररण देता है । यह वही प्रभावशाली व्यक्ति था जिसने चीन के नागरिक स्वयं सेवकों को प्रोत्साहित किया तथा उन्हें चीनी साम्राज्य को ताइपिंग विद्रोहियों से बचाने के लिए प्रेरित किया । सम्भवतः ऐसा दृष्टिकोण च्यांग की शक्ति व दुर्बलता दोनों के लिए उत्तरदायी है तथा उसकी सफलों व असफलताओंों दोनों का कारण हैं । राष्ट्रवादी पतनः एक तथ्य स्पष्ट है । एक हज़ार नौ सौ उनचास में राष्ट्रवादी चीन के पतन का कारण च्यांग-काई-शेफ ही स्पष्ट नहीं कर सकता है। न ही मात्र कुमितांग दल की दुर्बलताएँ चीन की मुख्य भूमि से उसके पतन को स्पष्ट करती हैं। क्योंकि दो महायुद्धों के मध्यकाल में तथा द्वितीय महायुद्ध के रौरान सभी पाश्चात्य उदारवादी तथा अनुदारवादी यह मानते हैं कि यूरोप में एकमात्र चैकोस्लोवाकिया में प्रजातन्त्र सफल रहा था । किन्तु अन्ततः चैकोस्लोवाकिया में भी तानाशाही की स्थापना हुई । सौभाग्यवश यह भी प्रमाणित नहीं किया जा सकता है कि राष्ट्रवादी सरकार के
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उनकी डाइट पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है और इस काम में पौष्टिक खाद्य पदार्थ आपकी काफी मदद कर सकते हैं। माता-पिता को यह बात बखूबी मालूम होनी चाहिए कि बच्चे की डाइट में कौन-कौन से पोषक तत्वों को शामिल करना बहुत जरूरी है और उनकी अहमियत क्या है। चलिए फिर जानते हैं कि बच्चे का संपूर्ण विकास करने में कौन से पोषक तत्व अहम भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों के विकास के लिए उनकी डाइट में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को खासतौर से शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि कैल्शियम बच्चों के शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से बच्चों की लंबाई रुक सकती है और शरीर की हड्डियों और दांतो पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बढ़ते बच्चों की डाइट में दूध और हरी सब्जियों जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। जिस प्रकार से बड़ों की डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का शामिल होना जरूरी है, ठीक उसी प्रकार बच्चों के खाने में भी एक सही मात्रा में फाइबर होना आवश्यक है। दरअसल, आजकल बच्चों में भी मोटापा एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और फाइबर मोटापे को नियंत्रित करने का काम करता है। फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों के लिए बच्चों की डाइट में ओट्स, ब्रोकली, सेब, नाशपाती, एवोकाडो और सूखे मेवे आदि शामिल किए जा सकते हैं। आयरन भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक अहम पोषक तत्व है क्योंकि इससे भी उनका शारीरिक विकास होता है। वैसे भी आजकल बच्चे ठीक से खाना नहीं खाते हैं और आयरन युक्त चीजें उनकी भूख बढ़ाती हैं जिससे वे एक सही डाइट ले पाते हैं। आयरन युक्त खाद्य पदार्थो की बात करें तो बच्चों की डाइट में बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, साबुत अनाज और सूखे मेवे आदि को शामिल करना अच्छा विचार हो सकता है।
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उनकी डाइट पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है और इस काम में पौष्टिक खाद्य पदार्थ आपकी काफी मदद कर सकते हैं। माता-पिता को यह बात बखूबी मालूम होनी चाहिए कि बच्चे की डाइट में कौन-कौन से पोषक तत्वों को शामिल करना बहुत जरूरी है और उनकी अहमियत क्या है। चलिए फिर जानते हैं कि बच्चे का संपूर्ण विकास करने में कौन से पोषक तत्व अहम भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों के विकास के लिए उनकी डाइट में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को खासतौर से शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि कैल्शियम बच्चों के शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से बच्चों की लंबाई रुक सकती है और शरीर की हड्डियों और दांतो पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बढ़ते बच्चों की डाइट में दूध और हरी सब्जियों जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। जिस प्रकार से बड़ों की डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का शामिल होना जरूरी है, ठीक उसी प्रकार बच्चों के खाने में भी एक सही मात्रा में फाइबर होना आवश्यक है। दरअसल, आजकल बच्चों में भी मोटापा एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और फाइबर मोटापे को नियंत्रित करने का काम करता है। फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों के लिए बच्चों की डाइट में ओट्स, ब्रोकली, सेब, नाशपाती, एवोकाडो और सूखे मेवे आदि शामिल किए जा सकते हैं। आयरन भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक अहम पोषक तत्व है क्योंकि इससे भी उनका शारीरिक विकास होता है। वैसे भी आजकल बच्चे ठीक से खाना नहीं खाते हैं और आयरन युक्त चीजें उनकी भूख बढ़ाती हैं जिससे वे एक सही डाइट ले पाते हैं। आयरन युक्त खाद्य पदार्थो की बात करें तो बच्चों की डाइट में बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, साबुत अनाज और सूखे मेवे आदि को शामिल करना अच्छा विचार हो सकता है।
PATNA : CM नीतीश के आदेश का खुलेआम उल्लंघन, शराब मिलने के बाद भी किसी दारोगा को नहीं किया गया सस्पेंड=यह बिहार है। यहां जो हो रहा है वही सही है। ताजा मामाला शराबबंदी कानून को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में शराबबंदी कानून पर सीएम नीतीश के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.... 19 जगह शराब बनी, किसी दारोगा पर कार्रवाई नहींंःCM के आदेश के बाद भी सेफ हैं थानेदार, शराब मिलने पर करना है सस्पेंड : जहरीली शराब से मौत के मातम के बीच CM नीतीश कुमार के आदेश की हकीकत पुलिस के आंकड़ों में दिख रही है। CM का आदेश है कि जिस थाना क्षेत्र में शराब की खेप बरामद होगी, वहां का थानेदार सस्पेंड किया जाएगा। 7 दिन के आंकड़ों पर गौर करें तो 822 मामलों में 903 शराबियों को पकड़ा गया और 46 हजार लीटर से ज्यादा शराब पकड़ी गई। 19 जगहों पर भट्ठियां तोड़ी गई, लेकिन पुलिस पूरी तरह से सेफ है। अब तक राज्य में एक भी थानेदार पर गाज नहीं गिरी है। बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 15 से 21 नवंबर के बीच पूरे राज्य में शराबबंदी कानून को लेकर विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया है। इस दौरान पुलिस ने कुल 822 मामले दर्ज किए हैं, जिसमें 903 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की इस छापेमारी में लगभग 46,496 लीटर देसी और विदेशी शराब बरामद की गई है। 7 दिन में 122 दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों के साथ 28 चार-पहिया वाहन और 7 ट्रक, यानि कुल 157 वाहनों को जब्त किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि राज्य में ट्रकों से शराब की खेप आ रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि छापेमारी के दौरान 1,49,910 रुपए भी बरामद किए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई में 19 भट्ठियों को तोड़ा गया, लेकिन क्षेत्र के थानेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 18 जिलों; पटना, भागलपुर, खगड़िया, रोहतास, पूर्णिया, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, सहरसा, मधुबनी, बांका, जमुई, सिवान, गया, गोपालगंज, नवादा, रेल जिला जमालपुर एवं रेल जिला कटिहार में 100 लीटर से ज्यादा शराब की बरामदगी की गई है। इसके बाद भी किसी जिले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
PATNA : CM नीतीश के आदेश का खुलेआम उल्लंघन, शराब मिलने के बाद भी किसी दारोगा को नहीं किया गया सस्पेंड=यह बिहार है। यहां जो हो रहा है वही सही है। ताजा मामाला शराबबंदी कानून को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में शराबबंदी कानून पर सीएम नीतीश के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.... उन्नीस जगह शराब बनी, किसी दारोगा पर कार्रवाई नहींंःCM के आदेश के बाद भी सेफ हैं थानेदार, शराब मिलने पर करना है सस्पेंड : जहरीली शराब से मौत के मातम के बीच CM नीतीश कुमार के आदेश की हकीकत पुलिस के आंकड़ों में दिख रही है। CM का आदेश है कि जिस थाना क्षेत्र में शराब की खेप बरामद होगी, वहां का थानेदार सस्पेंड किया जाएगा। सात दिन के आंकड़ों पर गौर करें तो आठ सौ बाईस मामलों में नौ सौ तीन शराबियों को पकड़ा गया और छियालीस हजार लीटर से ज्यादा शराब पकड़ी गई। उन्नीस जगहों पर भट्ठियां तोड़ी गई, लेकिन पुलिस पूरी तरह से सेफ है। अब तक राज्य में एक भी थानेदार पर गाज नहीं गिरी है। बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पंद्रह से इक्कीस नवंबर के बीच पूरे राज्य में शराबबंदी कानून को लेकर विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया है। इस दौरान पुलिस ने कुल आठ सौ बाईस मामले दर्ज किए हैं, जिसमें नौ सौ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की इस छापेमारी में लगभग छियालीस,चार सौ छियानवे लीटरटर देसी और विदेशी शराब बरामद की गई है। सात दिन में एक सौ बाईस दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों के साथ अट्ठाईस चार-पहिया वाहन और सात ट्रक, यानि कुल एक सौ सत्तावन वाहनों को जब्त किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि राज्य में ट्रकों से शराब की खेप आ रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि छापेमारी के दौरान एक,उनचास,नौ सौ दस रुपयापए भी बरामद किए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई में उन्नीस भट्ठियों को तोड़ा गया, लेकिन क्षेत्र के थानेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य के अट्ठारह जिलों; पटना, भागलपुर, खगड़िया, रोहतास, पूर्णिया, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, सहरसा, मधुबनी, बांका, जमुई, सिवान, गया, गोपालगंज, नवादा, रेल जिला जमालपुर एवं रेल जिला कटिहार में एक सौ लीटरटर से ज्यादा शराब की बरामदगी की गई है। इसके बाद भी किसी जिले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
श्रीनगर, जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में दो वायुसैनिक शहीद हो गए। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि बांदीपुरा के हाजिन क्षेत्र में हुई मु"भेड़ में दो आतंकवादी भी मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में घायल हुए दो वायुसैनिकों ने बाद में दम तोड़ दिया। ये दोनों वायुसैनिक प्रशिक्षण के लिए आतंकवादियों के खिलाफ अभियान का हिस्सा थे। अधिकारी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने तक अभियान जारी था।
श्रीनगर, जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में दो वायुसैनिक शहीद हो गए। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि बांदीपुरा के हाजिन क्षेत्र में हुई मु"भेड़ में दो आतंकवादी भी मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में घायल हुए दो वायुसैनिकों ने बाद में दम तोड़ दिया। ये दोनों वायुसैनिक प्रशिक्षण के लिए आतंकवादियों के खिलाफ अभियान का हिस्सा थे। अधिकारी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने तक अभियान जारी था।
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री द्वारा फरीदाबाद के एयरफोर्स स्टेशन के 100 मीटर दायरे में बने मकानों की रजिस्ट्री खोले जाने के निर्णय से पूरे एनआईटी क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी कड़ी में एनआईटी के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नगेंद्र भड़ाना ने लोगों का मुंह मीठा कराते हुए इसे भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार का सराहनीय फैसला करार दिया। अनुमति प्रदान की जाए। इस अवसर पर पूर्व पार्षद गजेंद्रपाल, डा. अत्तर सिंह, भोपाल खटाना, सुरेंद्र रावत, संजय भड़ाना, विरेंद्र राठौर, जारिफ खान, मोहन, रवि ठाकुर, सुरेंद्र गोयल, पंडित रामभरोसे, विजय, मनोज, टिंकू नेगी, प्रदीप शर्मा, अजय, मोहित भाटी सहित अनेक लोग मौजूद थे।
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री द्वारा फरीदाबाद के एयरफोर्स स्टेशन के एक सौ मीटर दायरे में बने मकानों की रजिस्ट्री खोले जाने के निर्णय से पूरे एनआईटी क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी कड़ी में एनआईटी के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नगेंद्र भड़ाना ने लोगों का मुंह मीठा कराते हुए इसे भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार का सराहनीय फैसला करार दिया। अनुमति प्रदान की जाए। इस अवसर पर पूर्व पार्षद गजेंद्रपाल, डा. अत्तर सिंह, भोपाल खटाना, सुरेंद्र रावत, संजय भड़ाना, विरेंद्र राठौर, जारिफ खान, मोहन, रवि ठाकुर, सुरेंद्र गोयल, पंडित रामभरोसे, विजय, मनोज, टिंकू नेगी, प्रदीप शर्मा, अजय, मोहित भाटी सहित अनेक लोग मौजूद थे।
महिलाओं को आरक्षण देने का उद्देश्य मात्र उन्हें पद प्रदान करना नहीं है, बल्कि इन्हें समाज में समान रूप से सहभागी बनाना है। उनके स्तर में सुधार करना है व उन्हें इस प्रकार सशक्त बनाना है कि उनकी क्षमता का राष्ट्र व समाज हित में सदुपयोग हो सके। कार्यशील व कुशल नागरिकों की संख्या में वृद्धि हो सके। साथ ही महिलायें अनेक माध्यमों से स्वयं को छोटे-छोटे व्यवसायों में सम्बद्ध कर अपनी परिवार की व अन्ततः राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती हैं। किन्तु प्रस्तुत शोध हेतु किये गये सर्वेक्षणों से जो तथ्य उभरकर आये हैं वे बहुत उत्साहवर्द्धक नहीं है। सदियों से पुरुष प्रधान समाज में बन्धन में जीने की अभ्यस्त ग्रामीण महिलाओं से एक झटके में कुशल प्रशिक्षित राजनीतिक - प्रशासनिक कार्यकर्ता के रूप में दायित्व निर्वहन की तो अपेक्षा नहीं की जा सकती, किन्तु उन्हें जो पद और पदभार दिया गया है उसके अनुरूप कार्य हेतु पहल और प्रयास की तो अपेक्षा की ही जा सकती है। किन्तु नयी पंचायत व्यवस्था के पहले पाँच वर्षो के पंचायत प्रतिनिधियों और पिछले दो वर्षों के पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यों से इतना तो स्पष्ट हुआ है कि उनमें राजनीतिक चेतना का संचार तो हुआ है, किन्तु की गई अपेक्षाओं की दिशा में ठोस कार्य नही किये जा सकें हैं। अधिकांश महिलायें पद पर होते हुए भी निर्णय की प्रक्रिया से दूर केवल हस्ताक्षर करने व मुहर लगाने का कार्य कर रही है, जबकि शेष महत्वपूर्ण कार्य उनके रक्त संबंधियों ( पुत्र या पति) द्वारा किये जा रहें हैं। ऐसे में महिलाओ को आरक्षण देने की योजना के निहितार्थ नहीं पूरे हो सकते। अप्रत्यक्ष रूप से पंचायतों पर पुरूषों का ही कब्जा बना हुआ है और महिलायें केवल नाम के लिये पंचायत प्रमुख या सदस्य होती हैं। वास्तव में महिलाओं के कार्य व्यवहार की उक्त स्थिति का कारण महिलाओं की अपनी कुछ समस्यायें और कठिनाइयाँ है जो उनके कार्य-मार्ग में बाधक बन रही है और पंचायती राज के माध्यम से महिला सशक्तीकरण की प्रक्रिया को बाधित कर रही है। अस्तु यहाॅ. उन समस्याओं का उल्लेख अपरिहार्य होगा। महिला प्रतिनिधियों की समस्यायें पंचायती राज व्यवस्था के प्रत्येक स्तर पर विशेष रूप से ग्राम पंचायतों में, महिला प्रतिनिधियों को अपने कार्य सम्पादन के सम्बन्ध में जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उनमें से प्रमुख निम्नलिखित है 1. जागरूकता का अभाव गाँवों के विकास का कार्य महिला ग्राम प्रधानों अथवा सदस्यों द्वारा तभी समुचित ढंग से सम्पादित किया जा सकता है, जब उन्हें इस सम्बन्ध में व्यापक जानकारी हो । वे इनकी बारीकियों से परिचित हो तथा उनके अन्दर जिम्मेदारी से काम करने की तत्परता हो । किन्तु सर्वेक्षण हेतु चुने गये गाँवों के महिला प्रधानों व सदस्यों से जब यह पूछा गया कि विकास कार्यों के सम्बन्ध में चलायी जाने वाली योजनाओं की उन्हें जानकारी है? तो केवल 12 प्रतिशत महिलाओं ने हाँ में उत्तर दिया और वह भी अपने परिवर के पुरुष सदस्य की उपस्थिति व परामर्श के आधार पर । ' 2. अशिक्षा या अल्प शिक्षा :ग्रामीण महिलाओं में अशिक्षा अथवा अल्पशिक्षा उनके कार्य मार्ग में दूसरी महत्वपूर्ण बाधा है। पंचायतों के माध्यम से किये जाने वाले विकास कार्यों के सन्दर्भ में योजना बनाने व उन्हें संचालित करने हेतु प्रधानों व प्रतिनिधियों को अच्छी तरह शिक्षित होना चाहिये । अशिक्षित अथवा अल्प शिक्षित होने की दशा में वे सम्बन्धित समस्याओं की पहचान करने व उनके निराकरण में असमर्थ होंगी। जिससे समूचा तंत्र प्रभावित होगा और लक्ष्य दिशा हीन होगा। हमीरपुर जनपद में साक्षरता दर विशेष रूप से महिलाओं में बहुत कम हैं। 1991 की जनगणना के अनुसार 57.8 प्रतिशत पुरुष साक्षरता की तुलना में महिला साक्षरता मात्र 22.0 प्रतिशत है । यह प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में और भी कम हैं। यह महज संयोग है कि अध्ययन हेतु चुने गये 70 गाँवों में महिला ग्राम प्रधानों के जिन 24 ग्राम पंचायतों को चुना गया उनमें कोई भी ग्राम प्रधान निरक्षर नही थी। किन्तु 24 मे से 19 अर्थात 79.17 प्रतिशत महिला ग्राम प्रधान साक्षात्कार अनुसूची विधि से किये गये सर्वेक्षण के आधार पर।
महिलाओं को आरक्षण देने का उद्देश्य मात्र उन्हें पद प्रदान करना नहीं है, बल्कि इन्हें समाज में समान रूप से सहभागी बनाना है। उनके स्तर में सुधार करना है व उन्हें इस प्रकार सशक्त बनाना है कि उनकी क्षमता का राष्ट्र व समाज हित में सदुपयोग हो सके। कार्यशील व कुशल नागरिकों की संख्या में वृद्धि हो सके। साथ ही महिलायें अनेक माध्यमों से स्वयं को छोटे-छोटे व्यवसायों में सम्बद्ध कर अपनी परिवार की व अन्ततः राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती हैं। किन्तु प्रस्तुत शोध हेतु किये गये सर्वेक्षणों से जो तथ्य उभरकर आये हैं वे बहुत उत्साहवर्द्धक नहीं है। सदियों से पुरुष प्रधान समाज में बन्धन में जीने की अभ्यस्त ग्रामीण महिलाओं से एक झटके में कुशल प्रशिक्षित राजनीतिक - प्रशासनिक कार्यकर्ता के रूप में दायित्व निर्वहन की तो अपेक्षा नहीं की जा सकती, किन्तु उन्हें जो पद और पदभार दिया गया है उसके अनुरूप कार्य हेतु पहल और प्रयास की तो अपेक्षा की ही जा सकती है। किन्तु नयी पंचायत व्यवस्था के पहले पाँच वर्षो के पंचायत प्रतिनिधियों और पिछले दो वर्षों के पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यों से इतना तो स्पष्ट हुआ है कि उनमें राजनीतिक चेतना का संचार तो हुआ है, किन्तु की गई अपेक्षाओं की दिशा में ठोस कार्य नही किये जा सकें हैं। अधिकांश महिलायें पद पर होते हुए भी निर्णय की प्रक्रिया से दूर केवल हस्ताक्षर करने व मुहर लगाने का कार्य कर रही है, जबकि शेष महत्वपूर्ण कार्य उनके रक्त संबंधियों द्वारा किये जा रहें हैं। ऐसे में महिलाओ को आरक्षण देने की योजना के निहितार्थ नहीं पूरे हो सकते। अप्रत्यक्ष रूप से पंचायतों पर पुरूषों का ही कब्जा बना हुआ है और महिलायें केवल नाम के लिये पंचायत प्रमुख या सदस्य होती हैं। वास्तव में महिलाओं के कार्य व्यवहार की उक्त स्थिति का कारण महिलाओं की अपनी कुछ समस्यायें और कठिनाइयाँ है जो उनके कार्य-मार्ग में बाधक बन रही है और पंचायती राज के माध्यम से महिला सशक्तीकरण की प्रक्रिया को बाधित कर रही है। अस्तु यहाॅ. उन समस्याओं का उल्लेख अपरिहार्य होगा। महिला प्रतिनिधियों की समस्यायें पंचायती राज व्यवस्था के प्रत्येक स्तर पर विशेष रूप से ग्राम पंचायतों में, महिला प्रतिनिधियों को अपने कार्य सम्पादन के सम्बन्ध में जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उनमें से प्रमुख निम्नलिखित है एक. जागरूकता का अभाव गाँवों के विकास का कार्य महिला ग्राम प्रधानों अथवा सदस्यों द्वारा तभी समुचित ढंग से सम्पादित किया जा सकता है, जब उन्हें इस सम्बन्ध में व्यापक जानकारी हो । वे इनकी बारीकियों से परिचित हो तथा उनके अन्दर जिम्मेदारी से काम करने की तत्परता हो । किन्तु सर्वेक्षण हेतु चुने गये गाँवों के महिला प्रधानों व सदस्यों से जब यह पूछा गया कि विकास कार्यों के सम्बन्ध में चलायी जाने वाली योजनाओं की उन्हें जानकारी है? तो केवल बारह प्रतिशत महिलाओं ने हाँ में उत्तर दिया और वह भी अपने परिवर के पुरुष सदस्य की उपस्थिति व परामर्श के आधार पर । ' दो. अशिक्षा या अल्प शिक्षा :ग्रामीण महिलाओं में अशिक्षा अथवा अल्पशिक्षा उनके कार्य मार्ग में दूसरी महत्वपूर्ण बाधा है। पंचायतों के माध्यम से किये जाने वाले विकास कार्यों के सन्दर्भ में योजना बनाने व उन्हें संचालित करने हेतु प्रधानों व प्रतिनिधियों को अच्छी तरह शिक्षित होना चाहिये । अशिक्षित अथवा अल्प शिक्षित होने की दशा में वे सम्बन्धित समस्याओं की पहचान करने व उनके निराकरण में असमर्थ होंगी। जिससे समूचा तंत्र प्रभावित होगा और लक्ष्य दिशा हीन होगा। हमीरपुर जनपद में साक्षरता दर विशेष रूप से महिलाओं में बहुत कम हैं। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे की जनगणना के अनुसार सत्तावन.आठ प्रतिशत पुरुष साक्षरता की तुलना में महिला साक्षरता मात्र बाईस.शून्य प्रतिशत है । यह प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में और भी कम हैं। यह महज संयोग है कि अध्ययन हेतु चुने गये सत्तर गाँवों में महिला ग्राम प्रधानों के जिन चौबीस ग्राम पंचायतों को चुना गया उनमें कोई भी ग्राम प्रधान निरक्षर नही थी। किन्तु चौबीस मे से उन्नीस अर्थात उन्यासी.सत्रह प्रतिशत महिला ग्राम प्रधान साक्षात्कार अनुसूची विधि से किये गये सर्वेक्षण के आधार पर।
UGC की नई गाइडलाइंस के खिलाफ छात्रों ने अपनी याचिका (Plea) में मांग की है कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट (Result) उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की संशोधित गाइडलाइंस और फाइनल ईयर एग्जाम को लेकर आज हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. COVID-19 के बढ़ते प्रकोप के बीच UGC ने देशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और दूसरे उच्च शिक्षा संस्थानों में फाइनल ईयर या फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम कराने का फैसला लिया था. जिसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए कई याचिकाओं पर जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज सुनवाई की है. देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के करीब 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर UGC की 6 जुलाई को जारी की गई संशोधित गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की है. छात्रों ने अपनी याचिका में मांग की है कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए UGC से 29 जुलाई तक जवाब देने को कहा है. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी. UGC ने अपनी संशोधित गाइडलाइंस में देश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे फाइनल ईयर की परीक्षाएं 30 सिंतबर से पहले करा लें. Supreme Court seeks reply from University Grants Commission (UGC) on a batch of pleas challenging its circular seeking cancellation of final term examination in view of #COVID19. UGC to file reply by July 29. Matter to be heard on July 31.
UGC की नई गाइडलाइंस के खिलाफ छात्रों ने अपनी याचिका में मांग की है कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की संशोधित गाइडलाइंस और फाइनल ईयर एग्जाम को लेकर आज हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. COVID-उन्नीस के बढ़ते प्रकोप के बीच UGC ने देशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और दूसरे उच्च शिक्षा संस्थानों में फाइनल ईयर या फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम कराने का फैसला लिया था. जिसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए कई याचिकाओं पर जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज सुनवाई की है. देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के करीब इकतीस छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर UGC की छः जुलाई को जारी की गई संशोधित गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की है. छात्रों ने अपनी याचिका में मांग की है कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए UGC से उनतीस जुलाई तक जवाब देने को कहा है. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई इकतीस जुलाई को होगी. UGC ने अपनी संशोधित गाइडलाइंस में देश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे फाइनल ईयर की परीक्षाएं तीस सिंतबर से पहले करा लें. Supreme Court seeks reply from University Grants Commission on a batch of pleas challenging its circular seeking cancellation of final term examination in view of #COVIDउन्नीस. UGC to file reply by July उनतीस. Matter to be heard on July इकतीस.
आपने कई बार सुना होगा कि जमीन के छोटे से टुकड़े के लिए दो देश या भाई-भाई में खून खराबा हो जाता हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जमीन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस पर कोई भी देश अपना दावा नहीं चाहता हैं. सुनने में ये थोडा अजीब लगे लेकिन ये बिलकुल सच हैं. इस जमीन पर कोई देश पैर भी रखने को राजी नहीं हैं. जिस जगह की हम बात कर रहे हैं उस जगह का नाम 'बीर तविल' है. ये मिस्र और सूडान के बॉर्डर पर मौजूद 2060 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ लावारिस हिस्सा है. इस जमीन पर अभी तक किसी भी देश में अपने होने का दावा नहीं किया हैं. वर्ष 1899 में यूनाइेड किंगडम ने सूडान और मिस्र के बीच बॉर्डर का निर्धारण किया. लेकिन मिस्र और सूडान दोनों ने इस जमीन पर अपने अधिकार लेने से मना कर दिया था. क्यों नहीं चाहता कोई इस जमीन पर अधिकार? तविल लाल सागर के करीब एक रेगिस्तानी क्षेत्र हैं. वहां बेहद गरम और सुखी हवाए चलती हैं. इस क्षेत्र में दूर-दूर तक पानी या वनस्पति का नामो-निशान नहीं दिखाई देता हैं. यही कारण हैं इस स्थान पर जिंदा रहना असंभव हैं. लोगों का कहना हैं कि इस जमीन में तेल और सोने का भंडार हैं लेकिन फिर भी यहाँ कोई नहीं जाना जाता हैं. कहा जाता हैं कि जहाँ कोई नहीं पहुँच सकता हैं वहां भारतीय पहुँच सकते हैं. तविल पर भी इंदौर के रहने वाले एक शख्स ने अपना कब्जा किया था. सुयश दीक्षित नाम के इस युवक ने जगह को 'किंगडम ऑफ दीक्षित' का नाम दिया था. यहाँ तक कि अपने देश का झंडा भी लगा दिया था. इसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. सुयश दीक्षित ने एक वेबसाइट भी बनवाई और लोगों नागरिकता लेने के लिए भी कहा था. हालाँकि वह खुद ज्यादा दिनों तक वहां नहीं टिक पाए और वापसी अपने देश लौट आए और फिर दोबारा कभी वहां वापसी नहीं लौटे. दरअसल सुयश से पहले एक अमेरिकी और रुसी व्यक्ति भी इस जगह पर अपना दावा ठोक चुके हैं लेकिन कभी भी कोई इस वजह पर ज्यादा दिनों तक नहीं रुक पाया.
आपने कई बार सुना होगा कि जमीन के छोटे से टुकड़े के लिए दो देश या भाई-भाई में खून खराबा हो जाता हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जमीन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस पर कोई भी देश अपना दावा नहीं चाहता हैं. सुनने में ये थोडा अजीब लगे लेकिन ये बिलकुल सच हैं. इस जमीन पर कोई देश पैर भी रखने को राजी नहीं हैं. जिस जगह की हम बात कर रहे हैं उस जगह का नाम 'बीर तविल' है. ये मिस्र और सूडान के बॉर्डर पर मौजूद दो हज़ार साठ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ लावारिस हिस्सा है. इस जमीन पर अभी तक किसी भी देश में अपने होने का दावा नहीं किया हैं. वर्ष एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे में यूनाइेड किंगडम ने सूडान और मिस्र के बीच बॉर्डर का निर्धारण किया. लेकिन मिस्र और सूडान दोनों ने इस जमीन पर अपने अधिकार लेने से मना कर दिया था. क्यों नहीं चाहता कोई इस जमीन पर अधिकार? तविल लाल सागर के करीब एक रेगिस्तानी क्षेत्र हैं. वहां बेहद गरम और सुखी हवाए चलती हैं. इस क्षेत्र में दूर-दूर तक पानी या वनस्पति का नामो-निशान नहीं दिखाई देता हैं. यही कारण हैं इस स्थान पर जिंदा रहना असंभव हैं. लोगों का कहना हैं कि इस जमीन में तेल और सोने का भंडार हैं लेकिन फिर भी यहाँ कोई नहीं जाना जाता हैं. कहा जाता हैं कि जहाँ कोई नहीं पहुँच सकता हैं वहां भारतीय पहुँच सकते हैं. तविल पर भी इंदौर के रहने वाले एक शख्स ने अपना कब्जा किया था. सुयश दीक्षित नाम के इस युवक ने जगह को 'किंगडम ऑफ दीक्षित' का नाम दिया था. यहाँ तक कि अपने देश का झंडा भी लगा दिया था. इसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. सुयश दीक्षित ने एक वेबसाइट भी बनवाई और लोगों नागरिकता लेने के लिए भी कहा था. हालाँकि वह खुद ज्यादा दिनों तक वहां नहीं टिक पाए और वापसी अपने देश लौट आए और फिर दोबारा कभी वहां वापसी नहीं लौटे. दरअसल सुयश से पहले एक अमेरिकी और रुसी व्यक्ति भी इस जगह पर अपना दावा ठोक चुके हैं लेकिन कभी भी कोई इस वजह पर ज्यादा दिनों तक नहीं रुक पाया.
स्पष्ट हो जाता है । ये उक्तियाँ पूर्ण रूप से गम्भीर और समयोजन है, और भाष्यों में उनकी निरन्तरवृति दस बात की द्योतक है कि उनका वही प्रयोजन और तात्पर्य है । वे योग नहीं है वरन् सप्रयोजन वचन हैं और उनमें वह सिद्धान्त सन्निहित है जो श्री शकराभिमत वेदान्त का मूल आधार है तथा उपनिषदों और सूत्रकार की तुलना मे उनसे श्री शकराचार्य भिन्न विकास का स्पष्ट सूचक है । ३ - सृष्टि शास्त्र की समस्या का विकास परिणाम और विवर्त्त श्री शकराचार्य के अनुसार सृष्टि-विधान वेदान्त की एक रूढि अथवा मर्यादा मात्र है, कोई तालिक सिद्धान्त नहीं । उनके अनुसार सृष्टि, प्रवेश, परिणामादि की समस्त श्रुतियाँ अर्थवाद हैं, जिनका तात्पर्य स्वार्थ मे नही, ब्रह्म के साथ जगत् के तादात्म्य-भाव मे है । सृष्टि क्रम का निरूपण केवल कारणवाद के आधार पर हो सकता है और कारणवाद का द्रव्य की कार्य द्रव्य के रूप में वास्तविक परिणति है । किन्तु विकार्य ब्रह्म का परिणाम सभव नहीं है ७८ क्योंकि वह एक अध्यात्म तत्व है, द्रव्य नहीं । ३९ फिर कारण वाद एक अनुभव की सीमा के अन्तर्गत सिद्धान्त है और उम अध्यात्म तत्व के विषय में प्रयुक्त नहीं हो सकता जो विकाधार तथा उसकी सम्भावना का मूल है। अनुभव के अन्तर्गत भी कारणवाद का प्रयोग उन विरोध और व्याघातो से मुक्त नहीं है जिनमे जर्मन दार्शनिक 'कान्ट' ने चिन्तन के सिद्धान्तों की चरम पहेलियाँ देखी । कारणबाद के सिद्धान्त का अन्तर्भुत न्याय उसे अवस्था त्मकेन तत्त्वान्यत्वाभ्यमनिवर्चनीयेन ब्रह्मपरिणामादिसर्वव्यवहारास्पदत्व प्रतिपद्यते । पारमाथिकेन च स्वरूपेण सर्वव्यवहारातीतमपरिगतमवतिष्ठत । न चेय परिणाम श्रुति परिणामप्रतिपादनार्था तत्प्रतिपत्तौ फलानवगमात् सर्वव्यवहारही नब्रह्मात्मभावप्रतिपादनायी त्वंपा, तत्प्रतिपत्तौ फलावगमात् । ३८. पारमार्थिकेन रूपेण च सर्वव्यवहारातीतमपरिणतभवतिष्ठते । व० सू० ३९. अद्रव्यत्यानन्यत्वाच्च न कस्यचित्काय कारण वाऽऽत्मा । मा० का० भा० ४-५४ ।
स्पष्ट हो जाता है । ये उक्तियाँ पूर्ण रूप से गम्भीर और समयोजन है, और भाष्यों में उनकी निरन्तरवृति दस बात की द्योतक है कि उनका वही प्रयोजन और तात्पर्य है । वे योग नहीं है वरन् सप्रयोजन वचन हैं और उनमें वह सिद्धान्त सन्निहित है जो श्री शकराभिमत वेदान्त का मूल आधार है तथा उपनिषदों और सूत्रकार की तुलना मे उनसे श्री शकराचार्य भिन्न विकास का स्पष्ट सूचक है । तीन - सृष्टि शास्त्र की समस्या का विकास परिणाम और विवर्त्त श्री शकराचार्य के अनुसार सृष्टि-विधान वेदान्त की एक रूढि अथवा मर्यादा मात्र है, कोई तालिक सिद्धान्त नहीं । उनके अनुसार सृष्टि, प्रवेश, परिणामादि की समस्त श्रुतियाँ अर्थवाद हैं, जिनका तात्पर्य स्वार्थ मे नही, ब्रह्म के साथ जगत् के तादात्म्य-भाव मे है । सृष्टि क्रम का निरूपण केवल कारणवाद के आधार पर हो सकता है और कारणवाद का द्रव्य की कार्य द्रव्य के रूप में वास्तविक परिणति है । किन्तु विकार्य ब्रह्म का परिणाम सभव नहीं है अठहत्तर क्योंकि वह एक अध्यात्म तत्व है, द्रव्य नहीं । उनतालीस फिर कारण वाद एक अनुभव की सीमा के अन्तर्गत सिद्धान्त है और उम अध्यात्म तत्व के विषय में प्रयुक्त नहीं हो सकता जो विकाधार तथा उसकी सम्भावना का मूल है। अनुभव के अन्तर्गत भी कारणवाद का प्रयोग उन विरोध और व्याघातो से मुक्त नहीं है जिनमे जर्मन दार्शनिक 'कान्ट' ने चिन्तन के सिद्धान्तों की चरम पहेलियाँ देखी । कारणबाद के सिद्धान्त का अन्तर्भुत न्याय उसे अवस्था त्मकेन तत्त्वान्यत्वाभ्यमनिवर्चनीयेन ब्रह्मपरिणामादिसर्वव्यवहारास्पदत्व प्रतिपद्यते । पारमाथिकेन च स्वरूपेण सर्वव्यवहारातीतमपरिगतमवतिष्ठत । न चेय परिणाम श्रुति परिणामप्रतिपादनार्था तत्प्रतिपत्तौ फलानवगमात् सर्वव्यवहारही नब्रह्मात्मभावप्रतिपादनायी त्वंपा, तत्प्रतिपत्तौ फलावगमात् । अड़तीस. पारमार्थिकेन रूपेण च सर्वव्यवहारातीतमपरिणतभवतिष्ठते । वशून्य सूशून्य उनतालीस. अद्रव्यत्यानन्यत्वाच्च न कस्यचित्काय कारण वाऽऽत्मा । माशून्य काशून्य भाशून्य चार-चौवन ।
सिद्धार्थनगर । तीन (water level) दिन तक मानसूनी फुहारों के पड़ने के बाद शुक्रवार को स्थानीय स्तर पर मौसम साफ जरूर हो गया, लेकिन दक्षिण पश्चिम नेपाल के कई जिलों में हो रही वर्षा के कारण राप्ती नदी का जलस्तर (water level) तेजी से बढ़ रहा है। नदी का बढ़े हुए जलस्तर के कारण भरवठिया गांव की ओर तेजी से कटान भी होने लगा है। भरवठिया गांव से सटी राप्ती नदी बह रही है, लेकिन सुरक्षा के दृष्टकोण से 500 मीटर का गैप अभी तक नहीं भरा जा सका है। विकास कश्यप, एसडीएम, डुमरियागंज ने बताया कि नदी के बढ़ते जलस्तर पर निगाह राजस्व विभाग की टीम रख रही है। बाढ़ चौकियों को अलर्ट किया जा चुका है। सिंचाई विभाग को बचाव उपाय करने के लिए निर्देशित किया गया है। तटवर्ती ग्रामीणों की माने तो जलस्तर में लगभग डेढ़ मीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। नदी के तट पर बसे भरवठिया गांव पर बाढ़ का खतरा मड़राने लगा है क्योंकि नदी गांव की तरफ कटान करने लगी है। इस गांव के साथ आसपास के अन्य गांव को सुरक्षित रखने के लिए 500 मीटर का गैप भरा जाना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण न होने से कार्य नहीं हो सका। क्षेत्र के परवेज, मनीष, छोटे लाल, उमेश, अकबाल, नफीस, अनीष, रामसिंह, प्रदीप आदि ने बताया कि नदी अभी भी बढ़ रही है। हम लोगों के रात की नींद हराम हो गई है कि कहीं नदी गांव को काटकर खुद में विलीन न कर ले।
सिद्धार्थनगर । तीन दिन तक मानसूनी फुहारों के पड़ने के बाद शुक्रवार को स्थानीय स्तर पर मौसम साफ जरूर हो गया, लेकिन दक्षिण पश्चिम नेपाल के कई जिलों में हो रही वर्षा के कारण राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी का बढ़े हुए जलस्तर के कारण भरवठिया गांव की ओर तेजी से कटान भी होने लगा है। भरवठिया गांव से सटी राप्ती नदी बह रही है, लेकिन सुरक्षा के दृष्टकोण से पाँच सौ मीटर का गैप अभी तक नहीं भरा जा सका है। विकास कश्यप, एसडीएम, डुमरियागंज ने बताया कि नदी के बढ़ते जलस्तर पर निगाह राजस्व विभाग की टीम रख रही है। बाढ़ चौकियों को अलर्ट किया जा चुका है। सिंचाई विभाग को बचाव उपाय करने के लिए निर्देशित किया गया है। तटवर्ती ग्रामीणों की माने तो जलस्तर में लगभग डेढ़ मीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। नदी के तट पर बसे भरवठिया गांव पर बाढ़ का खतरा मड़राने लगा है क्योंकि नदी गांव की तरफ कटान करने लगी है। इस गांव के साथ आसपास के अन्य गांव को सुरक्षित रखने के लिए पाँच सौ मीटर का गैप भरा जाना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण न होने से कार्य नहीं हो सका। क्षेत्र के परवेज, मनीष, छोटे लाल, उमेश, अकबाल, नफीस, अनीष, रामसिंह, प्रदीप आदि ने बताया कि नदी अभी भी बढ़ रही है। हम लोगों के रात की नींद हराम हो गई है कि कहीं नदी गांव को काटकर खुद में विलीन न कर ले।
Faridabad/Alive News: शनिवार को सेक्टर 16 स्थित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ एम. के. गुप्ता के नेतृत्व में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का आयोजन दौलतपुर गांव में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शिक्षाविद डॉ. अनूप सांगवान ने अपने अनुभव सांझा किए। शिविर की सह आयोजक डॉ अंशु भट्ट ने सात दिवसीय शिविर की थीम कैशलैस ट्रांजेक्शन एंड डिजिटल इंडिया अवेयरनेस प्रोग्राम पर प्रकाश डाला एंव श्री अंकित कौशिक जी ने कैशलैस ट्रांजेक्शन की आवश्यकता हेतु स्वयं सेवको को जागरूक किया तथा सभी उपस्थित अतिथियों तथा एन. एस. एस. कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई जिसमें ग्रुप हरियाणवी डॉस, सोलो डॉस तथा सामूहिक गान मुख्य थे । शिविर के शुभारंभ पर महाविद्यालय के आचार्य हरवंश, विशाल और दुर्गेश शर्मा, मोना, पूजा आदि उपस्थित रहे ।
Faridabad/Alive News: शनिवार को सेक्टर सोलह स्थित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ एम. के. गुप्ता के नेतृत्व में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का आयोजन दौलतपुर गांव में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शिक्षाविद डॉ. अनूप सांगवान ने अपने अनुभव सांझा किए। शिविर की सह आयोजक डॉ अंशु भट्ट ने सात दिवसीय शिविर की थीम कैशलैस ट्रांजेक्शन एंड डिजिटल इंडिया अवेयरनेस प्रोग्राम पर प्रकाश डाला एंव श्री अंकित कौशिक जी ने कैशलैस ट्रांजेक्शन की आवश्यकता हेतु स्वयं सेवको को जागरूक किया तथा सभी उपस्थित अतिथियों तथा एन. एस. एस. कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई जिसमें ग्रुप हरियाणवी डॉस, सोलो डॉस तथा सामूहिक गान मुख्य थे । शिविर के शुभारंभ पर महाविद्यालय के आचार्य हरवंश, विशाल और दुर्गेश शर्मा, मोना, पूजा आदि उपस्थित रहे ।
पटना. पीएम नरेंद्र मोदी की जंयती को लेकर भाजपा 15 दिनों का सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम चला रही है। इस बीच भाजपा नेता मंटू शर्मा ने सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ क्षेत्रिय प्रभारी मीथिलेश तिवारी, अचल सिन्हा, जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार, मंडल अध्यक्ष तेज नारायण और सांसद रामकृपाल शामिल रहे। इस दौरान भाजपा नेता मंटू शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी ने पूरे विश्व में देश का शिर्ष ऊंचा किया है। आज पूरी दूनिया में भारत का नाम प्रतिष्ठा से लिया जाता है। उन्होंने देश के गरीब लोगों के लिए कई योजनाएं चलायी है। कोरोना वायरस को लेकर देश के लोगों को फ्री वैक्शीन लगवाई। गरीब लोगों को बहुत ही कम दरों पर अनाज दिया जा रहा है। आज देश द्रुतगति से आगे बढ़ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की जंयती को लेकर 17 सितंबर से भाजपा जनसेवा पखवाड़ा चला रही है। यह पखवाड़ा गांधी जंयती 2 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान भाजपा लोगों को पीएम मोदी की जन कल्याणकारी योजनाओं से अवगत करवा रही है। साथ में पौधारोपण और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम कर रही है।
पटना. पीएम नरेंद्र मोदी की जंयती को लेकर भाजपा पंद्रह दिनों का सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम चला रही है। इस बीच भाजपा नेता मंटू शर्मा ने सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ क्षेत्रिय प्रभारी मीथिलेश तिवारी, अचल सिन्हा, जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार, मंडल अध्यक्ष तेज नारायण और सांसद रामकृपाल शामिल रहे। इस दौरान भाजपा नेता मंटू शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी ने पूरे विश्व में देश का शिर्ष ऊंचा किया है। आज पूरी दूनिया में भारत का नाम प्रतिष्ठा से लिया जाता है। उन्होंने देश के गरीब लोगों के लिए कई योजनाएं चलायी है। कोरोना वायरस को लेकर देश के लोगों को फ्री वैक्शीन लगवाई। गरीब लोगों को बहुत ही कम दरों पर अनाज दिया जा रहा है। आज देश द्रुतगति से आगे बढ़ रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की जंयती को लेकर सत्रह सितंबर से भाजपा जनसेवा पखवाड़ा चला रही है। यह पखवाड़ा गांधी जंयती दो अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान भाजपा लोगों को पीएम मोदी की जन कल्याणकारी योजनाओं से अवगत करवा रही है। साथ में पौधारोपण और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम कर रही है।
चक्रधरपुरः चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी पंचायत मुख्यालयों में बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करेंगे. विधायक बनने के बाद श्री उरांव ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि चक्रधरपुर के सभी 23 और बंदगांव के सभी 13 पंचायतों में धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. अपने घोषणा के अनुरूप वीर बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के उपलक्ष में 10 प्रतिमाएं बनमालीपुर स्थित विधायक आवास पहुंचा. भगवान बिरसा मुंडा की 10 प्रतिमा विधायक सुखराम उरांव के पुत्र सन्नी उराँव ने आज सभी प्रतिमा को बनमालीपुर लाये। प्रारंभ में प्रमुख 10 पंचायतों में प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसके बाद चरण वार सभी पंचायत मुख्यालयों में प्रतिमा स्थापित की जाएगी. विधायक श्री उरांव ने बिरसा मुंडा को शहादत दिवस के उपलक्ष में श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात कहा कि चक्रधरपुर विधानसभा अंतर्गत सभी पंचायतों के प्रमुख स्थानों पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को स्थापित की घोषणा के अनुरूप भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर 10 प्रतिमा बनकर तैयार थी. जिसको विधायक आवास लाया गया. अब इन सभी प्रतिमाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रत्येक पंचायत में स्थापित करना शुभारंभ किया जाएगा.
चक्रधरपुरः चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी पंचायत मुख्यालयों में बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करेंगे. विधायक बनने के बाद श्री उरांव ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि चक्रधरपुर के सभी तेईस और बंदगांव के सभी तेरह पंचायतों में धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. अपने घोषणा के अनुरूप वीर बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के उपलक्ष में दस प्रतिमाएं बनमालीपुर स्थित विधायक आवास पहुंचा. भगवान बिरसा मुंडा की दस प्रतिमा विधायक सुखराम उरांव के पुत्र सन्नी उराँव ने आज सभी प्रतिमा को बनमालीपुर लाये। प्रारंभ में प्रमुख दस पंचायतों में प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसके बाद चरण वार सभी पंचायत मुख्यालयों में प्रतिमा स्थापित की जाएगी. विधायक श्री उरांव ने बिरसा मुंडा को शहादत दिवस के उपलक्ष में श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात कहा कि चक्रधरपुर विधानसभा अंतर्गत सभी पंचायतों के प्रमुख स्थानों पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को स्थापित की घोषणा के अनुरूप भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर दस प्रतिमा बनकर तैयार थी. जिसको विधायक आवास लाया गया. अब इन सभी प्रतिमाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रत्येक पंचायत में स्थापित करना शुभारंभ किया जाएगा.
गया। हाँ, यह ठाक है कि इससे मेरे उदयपुरवाले मंदिर पर लिखे गए पर्चों पर कोई असर न हुआ, न संशोधन ही करना पड़ा । घंटे०-उदयेश्वर मंदिर के पूरा बन जाने की तारीख लेखानुसार संवत् ११३७ वैशाख सुदी सप्तमी लिखी है - "श्रीमदुदयेश्वरदेवस्य ध्वजारोहः संपूर्णः । मंगलं महाश्रीः ।" मंदिरारंभ और पताका - श्रारोहण का यह लेख मंदिर के पूर्वोय भाग के एक पत्थर पर खुदा है। इसमें संदेह नहीं कि मि० गांगुली इस लेख से अनभिज्ञ थे, क्योंकि इसे कीलहॉर्न भी भूल गए हैं ( Indian Anti( quary XX 83 ) 1-के० पी० जायसवाल । (१६) जटमल की गोरा बादल की बात क्या वह गद्य में है ? [ लेखक - श्री नरोत्तमदास स्वामी एम० ए०, विशारद, बीकानेर ] जटमल की गोरा-बादल की बात हिंदी साहित्य की एक सुप्रसिद्ध महत्त्वपूर्ण रचना है। हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के इतिहास में उसका विशेष महत्व है जिसका कारण यह है कि वह खड़ी बोली में लिखी गई है। इससे पूर्व की खड़ी बोली की रचनाएँ, विशेषकर हिंदू लेखकों द्वारा लिखित, बहुत ही कम मिलती इतनी बड़ी पहली रचना तो संभवतया यही है। साहित्यिक दृष्टि से भी यह रचना बड़ी सुंदर है। वीररस की ऐसी फड़कती हुई रचना हिंदी में शायद ही दूसरी हा गोरा-बादल की बात का एक और महत्त्व हिंदी साहित्य के इतिहास में है । वह यह कि हिंदी में प्राचीन काल की जो एकाध गद्य-रचनाएँ मिलती हैं उनमें यह भी एक है । गोकुलनाथ की वैष्णवन को वारताओं को छोड़कर यह उनमें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण और संभवतः सबसे बड़ो भी, है । खड़ी बोली के गद्य की तो एक ही रचना ऐसी है जो इससे पूर्व की है और वह है नंगा भाट की चंद रुंद बरनन की महिमा । हिंदी के विद्वानों में अभी तक ऐसा ही प्रसिद्ध है 1 ਰਜਨੀ धारणा यही है कि जटमल ने अपनी यह कृति गद्य में लिखी थी। हिंदी की हस्त लिखित पुस्तकों की खोज काशी-नागरीप्रचारिणी सभा की अधीनता और देख-रेख में होती है। उसकी रिपोर्ट भी प्रकाशित होती है 1 सन् १९०१ की रिपोर्ट में इस कृति के विषय में इस प्रकार लिखा हैļ
गया। हाँ, यह ठाक है कि इससे मेरे उदयपुरवाले मंदिर पर लिखे गए पर्चों पर कोई असर न हुआ, न संशोधन ही करना पड़ा । घंटेशून्य-उदयेश्वर मंदिर के पूरा बन जाने की तारीख लेखानुसार संवत् एक हज़ार एक सौ सैंतीस वैशाख सुदी सप्तमी लिखी है - "श्रीमदुदयेश्वरदेवस्य ध्वजारोहः संपूर्णः । मंगलं महाश्रीः ।" मंदिरारंभ और पताका - श्रारोहण का यह लेख मंदिर के पूर्वोय भाग के एक पत्थर पर खुदा है। इसमें संदेह नहीं कि मिशून्य गांगुली इस लेख से अनभिज्ञ थे, क्योंकि इसे कीलहॉर्न भी भूल गए हैं एक-केशून्य पीशून्य जायसवाल । जटमल की गोरा बादल की बात क्या वह गद्य में है ? [ लेखक - श्री नरोत्तमदास स्वामी एमशून्य एशून्य, विशारद, बीकानेर ] जटमल की गोरा-बादल की बात हिंदी साहित्य की एक सुप्रसिद्ध महत्त्वपूर्ण रचना है। हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के इतिहास में उसका विशेष महत्व है जिसका कारण यह है कि वह खड़ी बोली में लिखी गई है। इससे पूर्व की खड़ी बोली की रचनाएँ, विशेषकर हिंदू लेखकों द्वारा लिखित, बहुत ही कम मिलती इतनी बड़ी पहली रचना तो संभवतया यही है। साहित्यिक दृष्टि से भी यह रचना बड़ी सुंदर है। वीररस की ऐसी फड़कती हुई रचना हिंदी में शायद ही दूसरी हा गोरा-बादल की बात का एक और महत्त्व हिंदी साहित्य के इतिहास में है । वह यह कि हिंदी में प्राचीन काल की जो एकाध गद्य-रचनाएँ मिलती हैं उनमें यह भी एक है । गोकुलनाथ की वैष्णवन को वारताओं को छोड़कर यह उनमें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण और संभवतः सबसे बड़ो भी, है । खड़ी बोली के गद्य की तो एक ही रचना ऐसी है जो इससे पूर्व की है और वह है नंगा भाट की चंद रुंद बरनन की महिमा । हिंदी के विद्वानों में अभी तक ऐसा ही प्रसिद्ध है एक ਰਜਨੀ धारणा यही है कि जटमल ने अपनी यह कृति गद्य में लिखी थी। हिंदी की हस्त लिखित पुस्तकों की खोज काशी-नागरीप्रचारिणी सभा की अधीनता और देख-रेख में होती है। उसकी रिपोर्ट भी प्रकाशित होती है एक सन् एक हज़ार नौ सौ एक की रिपोर्ट में इस कृति के विषय में इस प्रकार लिखा हैļ
हेल्थ डेस्कः मेडिकल साइंस के अनुसार वजाइना महिलाओं के शरीर का सबसे अहम पार्ट होता हैं। इसे स्वस्थ और फ़िट रखना महिलाओं की जिम्मेदारी होती हैं। क्यों की वजाइना के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह की बीमारियां फ़ैल सकती हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे चीजों के सेवन के बारे में जिन चीजों के सेवन से महिलाएं अपने वजाइना को स्वस्थ और फ़िट रख सकती हैं। 1 . नारियल पानी का सेवन : वजाइना को स्वस्थ और फ़िट रखने के लिए नारियल पानी का सेवन सबसे लाभकारी साबित होता हैं। क्यों की नारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। जो वजाइना में मौजूद बैक्ट्रिया को मारने का काम करते हैं। इससे वजाइना स्वस्थ और फ़िट रहता हैं तथा वजाइना में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती हैं। साथ ही साथ महिलाओं में वजाइनल कैंसर होने के चांस भी कम हो जाते हैं। 2 . ग्रीन टी का सेवन : एक शोध के अनुसार ग्रीन टी के सेवन करने से महिलाओं के वजाइना का ढीलापन कम जाता हैं तथा वजाइना स्वस्थ और सेहतमंद रहती हैं। इतना ही नहीं इसके सेवन से महिलाओं का मासिक धर्म भी सही समय पर होता हैं और महिलाएं खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सेहतमंद महसूस करती हैं। इसलिए सभी महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए। 3 . चुकंदर का सेवन : चुकंदर महिलाओं के वजाइना के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं। इसमें आयरन के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं जो वजाइना की कोशिकाओं में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करते हैं। इससे महिलाओं का वजाइना स्वस्थ और फ़िट रहता हैं तथा वजाइना में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आती हैं। इसलिए सभी महिलाओं को प्रतिदिन चुकंदर का सेवन करना चाहिए। ये उनके हेल्थ के लिए भी बहुत लाभकारी हैं।
हेल्थ डेस्कः मेडिकल साइंस के अनुसार वजाइना महिलाओं के शरीर का सबसे अहम पार्ट होता हैं। इसे स्वस्थ और फ़िट रखना महिलाओं की जिम्मेदारी होती हैं। क्यों की वजाइना के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह की बीमारियां फ़ैल सकती हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे कुछ ऐसे चीजों के सेवन के बारे में जिन चीजों के सेवन से महिलाएं अपने वजाइना को स्वस्थ और फ़िट रख सकती हैं। एक . नारियल पानी का सेवन : वजाइना को स्वस्थ और फ़िट रखने के लिए नारियल पानी का सेवन सबसे लाभकारी साबित होता हैं। क्यों की नारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। जो वजाइना में मौजूद बैक्ट्रिया को मारने का काम करते हैं। इससे वजाइना स्वस्थ और फ़िट रहता हैं तथा वजाइना में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती हैं। साथ ही साथ महिलाओं में वजाइनल कैंसर होने के चांस भी कम हो जाते हैं। दो . ग्रीन टी का सेवन : एक शोध के अनुसार ग्रीन टी के सेवन करने से महिलाओं के वजाइना का ढीलापन कम जाता हैं तथा वजाइना स्वस्थ और सेहतमंद रहती हैं। इतना ही नहीं इसके सेवन से महिलाओं का मासिक धर्म भी सही समय पर होता हैं और महिलाएं खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सेहतमंद महसूस करती हैं। इसलिए सभी महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए। तीन . चुकंदर का सेवन : चुकंदर महिलाओं के वजाइना के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं। इसमें आयरन के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं जो वजाइना की कोशिकाओं में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करते हैं। इससे महिलाओं का वजाइना स्वस्थ और फ़िट रहता हैं तथा वजाइना में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आती हैं। इसलिए सभी महिलाओं को प्रतिदिन चुकंदर का सेवन करना चाहिए। ये उनके हेल्थ के लिए भी बहुत लाभकारी हैं।
आष्टा। मोहम्मद सादिक। भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य दलो के प्रत्याशी सहित निर्दलीय भी चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगाकर मैदान में उतर आए है और क्षे़त्र का ऐसा कोई मतदान क्षे़त्र न हो जहां प्रत्याशी न गए होगे लगातार अपने पक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए लोगो से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है वही धार्मिक स्थानो पर भी जाकर अपनी मन्नत पूरी होने की प्रार्थना कर रहे है। कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह इंजीनियर सहित उनके साथ दर्जनो कार्यकर्ता का काफिला सोमवार को ग्राम अरोलिया परोलिया मालीखेड़ी देवरखेड़ी सांगाखेड़ी मेम्दा खेड़ी बालाखेड़ा लसूड़लिया पार खजुरिया कासम सहित कई गांव पहुचकर मतदाताओ से रू्रबरू हुए वही धार्मिक स्थानो पर पहुचकर बाबा साहब सहित भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया चुनावी जोर शोर लगातार जारी है। हर प्रत्याशी अपने स्तर पर मतदाता के बीच पहुचकर हाथ जोड़कर वोट देने की अपील कर रहा है।
आष्टा। मोहम्मद सादिक। भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य दलो के प्रत्याशी सहित निर्दलीय भी चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगाकर मैदान में उतर आए है और क्षे़त्र का ऐसा कोई मतदान क्षे़त्र न हो जहां प्रत्याशी न गए होगे लगातार अपने पक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए लोगो से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है वही धार्मिक स्थानो पर भी जाकर अपनी मन्नत पूरी होने की प्रार्थना कर रहे है। कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह इंजीनियर सहित उनके साथ दर्जनो कार्यकर्ता का काफिला सोमवार को ग्राम अरोलिया परोलिया मालीखेड़ी देवरखेड़ी सांगाखेड़ी मेम्दा खेड़ी बालाखेड़ा लसूड़लिया पार खजुरिया कासम सहित कई गांव पहुचकर मतदाताओ से रू्रबरू हुए वही धार्मिक स्थानो पर पहुचकर बाबा साहब सहित भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया चुनावी जोर शोर लगातार जारी है। हर प्रत्याशी अपने स्तर पर मतदाता के बीच पहुचकर हाथ जोड़कर वोट देने की अपील कर रहा है।
स्व-चालित बंदूक 2S9 "नोना-एस" को एक अद्वितीय तोपखाने प्रणाली माना जाता है, जिसे विशेष रूप से युद्ध के मैदान पर हवाई सैनिकों के प्रत्यक्ष अग्नि समर्थन के लिए बनाया गया था। ऐसी मशीन की आवश्यकता तब उत्पन्न हुई जब दुश्मन के इलाके में "पंख वाली पैदल सेना" का उपयोग करने की योजना बनाई गई। उसी समय, हवाई स्व-चालित तोपखाने प्रतिष्ठानों को एक बड़ी भूमिका सौंपी गई थी। हालाँकि, मौजूदा ASU-57 और ASU-85 मॉडल टैंकों से लड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। इसके अलावा, वे लैंडिंग के लिए बहुत उपयुक्त नहीं थे, क्योंकि इसके लिए रनवे पर एक परिवहन विमान की लैंडिंग की आवश्यकता थी, जिससे आश्चर्य की संभावना नहीं थी। इसीलिए 60 के दशक के मध्य में। अधिक सुविधाजनक और साथ ही शक्तिशाली मशीन बनाने के उद्देश्य से काम शुरू किया।
स्व-चालित बंदूक दोSनौ "नोना-एस" को एक अद्वितीय तोपखाने प्रणाली माना जाता है, जिसे विशेष रूप से युद्ध के मैदान पर हवाई सैनिकों के प्रत्यक्ष अग्नि समर्थन के लिए बनाया गया था। ऐसी मशीन की आवश्यकता तब उत्पन्न हुई जब दुश्मन के इलाके में "पंख वाली पैदल सेना" का उपयोग करने की योजना बनाई गई। उसी समय, हवाई स्व-चालित तोपखाने प्रतिष्ठानों को एक बड़ी भूमिका सौंपी गई थी। हालाँकि, मौजूदा ASU-सत्तावन और ASU-पचासी मॉडल टैंकों से लड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। इसके अलावा, वे लैंडिंग के लिए बहुत उपयुक्त नहीं थे, क्योंकि इसके लिए रनवे पर एक परिवहन विमान की लैंडिंग की आवश्यकता थी, जिससे आश्चर्य की संभावना नहीं थी। इसीलिए साठ के दशक के मध्य में। अधिक सुविधाजनक और साथ ही शक्तिशाली मशीन बनाने के उद्देश्य से काम शुरू किया।
केंद्र सरकार की ओर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाने की घोषणा करने और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन आंवटित करने के बाद प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बुधवार को कहा कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद कयामत तक मस्जिद ही रहेगी और किसी के पास भी मस्जिद के बदले दूसरी जगह जमीन लेने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी शख्स या संगठन मस्जिद के बदले में कहीं और जमीन नहीं ले सकता है। ऐसा करने का उसके पास अधिकार नहीं है। मस्जिद वक्फ होती है, जिसका मालिक अल्लाह होता है। गौरतलब है कि एक सदी से भी पुराने बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि मामले का उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ नवंबर को निपटारा कर दिया था और विवादित भूमि राम मंदिर के लिए रामलला विराजमान को दे दी थी, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ भूमि दिये जाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगाई।
केंद्र सरकार की ओर से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाने की घोषणा करने और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन आंवटित करने के बाद प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बुधवार को कहा कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद कयामत तक मस्जिद ही रहेगी और किसी के पास भी मस्जिद के बदले दूसरी जगह जमीन लेने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी शख्स या संगठन मस्जिद के बदले में कहीं और जमीन नहीं ले सकता है। ऐसा करने का उसके पास अधिकार नहीं है। मस्जिद वक्फ होती है, जिसका मालिक अल्लाह होता है। गौरतलब है कि एक सदी से भी पुराने बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि मामले का उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल नौ नवंबर को निपटारा कर दिया था और विवादित भूमि राम मंदिर के लिए रामलला विराजमान को दे दी थी, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ भूमि दिये जाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगाई।
आज इस लेख में हम आपको लाल अंगूर खाने के कुछ फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं। कुछ फल ऐसे होते है जिन्हें खाने से कई लाभ मिलते हैं। जैसे सेब, अनार, पपीता आदि ऐसे कई फल है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन होते हैं। कई बार डॉक्टर भी इन फलों को सेवन करने का सुझाव देते हैं। लाल अंगूर ऐसा ही एक फल है, जो विटामिन से भरपूर होता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंटस कई मायने से स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। यह कई बीमारियों में भी आपको सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। आज इस लेख में हम आपको लाल अंगूर खाने के कुछ फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं। तो चलिए जनाते हैं। जी हां, लाल अंगूर के सेवन से आंखों को कई तरीके से लाभ मिलते हैं। लाल अंगूर में मौजूद पोषक तत्व आपकी आंखों को कई बीमारी से भी दूर रखते हैं। कहा जाता है कि लाल अंगूर में मौजूद रेस्वेराट्रॉल आंखों को कमज़ोर होने में काफी मदद करते हैं। लाल अंगूर में विटामिन k की मात्रा भी मौजूद होते हैं जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। लाल अंगूर में विटामिन ई और सी के गुण भी पाए जाते हैं। लाल अंगूर के सेवन से त्वचा संबंधी समस्या को भी खत्म किया जा सकता है। लाल अंगूर में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट त्वचा को कोमल बनाए रखने में भी मदद करते हैं। कई लोगों का तो यह भी मानना है कि इसके सेवन से ऊम्र बढ़ने की प्रकिया की कमी में भी काफी मदद मिलती है। कई लोगों का मानना है कि लाल अंगूर शरीर में एनर्जी बढ़ाने के लिए सही फल है। ये भी कहा जाता है कि अगर कोई जल्दी थकावट महसूस करता है, तो उसके लिए लाला अंगूर सही फल है। लाल अंगूर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देता। इसके नियमित सेवन से वजन भी कम किया जा सकता है। लाल अंगूर को शरीर के लगभग सभी त्वचा के लिए बेस्ट माना जाता है। इसमें मौजूद रेस्वेराट्रोल गुण चेहरे पर होने वाले किसी भी मुहांसों की संभावना को बहुत जल्द खत्म कर देता है और आपको सुरक्षित रखता है। कई लोग ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने के लिए भी लाल अंगूर को कारगर मानते हैं। नोटः यह लेख सिर्फ आपके जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित जानकारी एक बार डॉक्टर से ज़रूर लें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
आज इस लेख में हम आपको लाल अंगूर खाने के कुछ फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं। कुछ फल ऐसे होते है जिन्हें खाने से कई लाभ मिलते हैं। जैसे सेब, अनार, पपीता आदि ऐसे कई फल है जिसमें भरपूर मात्रा में विटामिन होते हैं। कई बार डॉक्टर भी इन फलों को सेवन करने का सुझाव देते हैं। लाल अंगूर ऐसा ही एक फल है, जो विटामिन से भरपूर होता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंटस कई मायने से स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। यह कई बीमारियों में भी आपको सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। आज इस लेख में हम आपको लाल अंगूर खाने के कुछ फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं। तो चलिए जनाते हैं। जी हां, लाल अंगूर के सेवन से आंखों को कई तरीके से लाभ मिलते हैं। लाल अंगूर में मौजूद पोषक तत्व आपकी आंखों को कई बीमारी से भी दूर रखते हैं। कहा जाता है कि लाल अंगूर में मौजूद रेस्वेराट्रॉल आंखों को कमज़ोर होने में काफी मदद करते हैं। लाल अंगूर में विटामिन k की मात्रा भी मौजूद होते हैं जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। लाल अंगूर में विटामिन ई और सी के गुण भी पाए जाते हैं। लाल अंगूर के सेवन से त्वचा संबंधी समस्या को भी खत्म किया जा सकता है। लाल अंगूर में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट त्वचा को कोमल बनाए रखने में भी मदद करते हैं। कई लोगों का तो यह भी मानना है कि इसके सेवन से ऊम्र बढ़ने की प्रकिया की कमी में भी काफी मदद मिलती है। कई लोगों का मानना है कि लाल अंगूर शरीर में एनर्जी बढ़ाने के लिए सही फल है। ये भी कहा जाता है कि अगर कोई जल्दी थकावट महसूस करता है, तो उसके लिए लाला अंगूर सही फल है। लाल अंगूर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देता। इसके नियमित सेवन से वजन भी कम किया जा सकता है। लाल अंगूर को शरीर के लगभग सभी त्वचा के लिए बेस्ट माना जाता है। इसमें मौजूद रेस्वेराट्रोल गुण चेहरे पर होने वाले किसी भी मुहांसों की संभावना को बहुत जल्द खत्म कर देता है और आपको सुरक्षित रखता है। कई लोग ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने के लिए भी लाल अंगूर को कारगर मानते हैं। नोटः यह लेख सिर्फ आपके जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित जानकारी एक बार डॉक्टर से ज़रूर लें। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
नई दिल्ली : अन्य राज्यों के वित्त मंत्री की मौजूदगी और वित्त मंत्री अरण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद ने लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर कर का निर्धारण कर दिया है. विभिन्न वस्तुओं पर 5, 12, 18 और 28 फीसदी तक कर लगाया गया है. लेकिन गांधी टोपी, राष्ट्रीय झंडा और पूजन सामग्री को GST से मुक्त रखा गया है. गौरतलब है कि माल एवं सेवा कर (GST) की नई व्यवस्था में खादी धागा, गांधी टोपी, राष्ट्रीय झंडा और पूजा के सामान के तहत बेचे जाने वाले रूद्राक्ष, खड़ाउ, पंचामृत, तुलसी माला, पवित्र धागा और विभूति जैसी वस्तुओं को जीएसटी में छूट दी गई है. इसी तरह रेशम और जूट धागा को छूट श्रेणी में रखा गया है. जबकि 1,000 रुपये से कम के कंबल, पर्दा, बिछावन, शौचालय और रसोई गैस में इस्तेमाल होने वाले लिनेन, तौलिये , मच्छरदानी, बोरी, थैला, लाइफ जैकेट पर 5 फीसदी कर लगेगा. इसी तरह कपास , प्राकृतिक फाइबर तथा अन्य सभी धागा,अन्य सभी श्रेणी के कपड़ों पर 5 फीसदी कर तय किया गया है. वहीं 1000 से कम कीमत वाले मानव निर्मित परिधान पर 5 फीसदी कर लगेगा, इससे ज्यादा पर 18 फीसदी कर लगेगा. जबकि माचिस, डिब्बाबंद जैविक उर्वरक पर नई व्यवस्था में 5 फीसदी कर प्रस्तावित किया गया है.
नई दिल्ली : अन्य राज्यों के वित्त मंत्री की मौजूदगी और वित्त मंत्री अरण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद ने लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर कर का निर्धारण कर दिया है. विभिन्न वस्तुओं पर पाँच, बारह, अट्ठारह और अट्ठाईस फीसदी तक कर लगाया गया है. लेकिन गांधी टोपी, राष्ट्रीय झंडा और पूजन सामग्री को GST से मुक्त रखा गया है. गौरतलब है कि माल एवं सेवा कर की नई व्यवस्था में खादी धागा, गांधी टोपी, राष्ट्रीय झंडा और पूजा के सामान के तहत बेचे जाने वाले रूद्राक्ष, खड़ाउ, पंचामृत, तुलसी माला, पवित्र धागा और विभूति जैसी वस्तुओं को जीएसटी में छूट दी गई है. इसी तरह रेशम और जूट धागा को छूट श्रेणी में रखा गया है. जबकि एक,शून्य रुपयापये से कम के कंबल, पर्दा, बिछावन, शौचालय और रसोई गैस में इस्तेमाल होने वाले लिनेन, तौलिये , मच्छरदानी, बोरी, थैला, लाइफ जैकेट पर पाँच फीसदी कर लगेगा. इसी तरह कपास , प्राकृतिक फाइबर तथा अन्य सभी धागा,अन्य सभी श्रेणी के कपड़ों पर पाँच फीसदी कर तय किया गया है. वहीं एक हज़ार से कम कीमत वाले मानव निर्मित परिधान पर पाँच फीसदी कर लगेगा, इससे ज्यादा पर अट्ठारह फीसदी कर लगेगा. जबकि माचिस, डिब्बाबंद जैविक उर्वरक पर नई व्यवस्था में पाँच फीसदी कर प्रस्तावित किया गया है.
टॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माता Deekay को आज के समय में कौंन नहीं जानता है, वह हमेशा ही अपनी फिल्मों के चलते चर्चाओं में बने रहते है. वहीं निर्देशक Deekay ने साल 2014 में फिल्म यामिरुक्का बेमेयी के साथ अपनी निर्देशन करियर की शुरुआत की थी, और आरएस इन्फोटेनमेंट एल्डर कुमार द्वारा निर्मित फिल्म को आज रिलीज होने की 6 वीं वर्षगांठ मनाई गई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कृष्ण, रूपा मंजरी, ओविया, करुणाकरण, योगी बाबू, अवध कन्नदासन और अनासवारा अभिनीत फिल्म, जो एक डरावनी कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें प्रसाद द्वारा संगीत दिया गया था और यह एक व्यावसायिक सफलता थी. जानकारी के लिए हम बता दें कि अब निर्माता एलेरेड कुमार द्वारा यह खुलासा किया गया है कि टीम यामीरुक्का बेमेकी की अगली कड़ी बनाने की योजना बना रही है, और लॉक खत्म होने के बाद यामिरुका बायमी 2 को लॉन्च किया जाने वाला है. एलेड कुमार वर्तमान में वेट्टीमारन द्वारा निर्देशित एक फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें सोरी अभिनीत है.
टॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माता Deekay को आज के समय में कौंन नहीं जानता है, वह हमेशा ही अपनी फिल्मों के चलते चर्चाओं में बने रहते है. वहीं निर्देशक Deekay ने साल दो हज़ार चौदह में फिल्म यामिरुक्का बेमेयी के साथ अपनी निर्देशन करियर की शुरुआत की थी, और आरएस इन्फोटेनमेंट एल्डर कुमार द्वारा निर्मित फिल्म को आज रिलीज होने की छः वीं वर्षगांठ मनाई गई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कृष्ण, रूपा मंजरी, ओविया, करुणाकरण, योगी बाबू, अवध कन्नदासन और अनासवारा अभिनीत फिल्म, जो एक डरावनी कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें प्रसाद द्वारा संगीत दिया गया था और यह एक व्यावसायिक सफलता थी. जानकारी के लिए हम बता दें कि अब निर्माता एलेरेड कुमार द्वारा यह खुलासा किया गया है कि टीम यामीरुक्का बेमेकी की अगली कड़ी बनाने की योजना बना रही है, और लॉक खत्म होने के बाद यामिरुका बायमी दो को लॉन्च किया जाने वाला है. एलेड कुमार वर्तमान में वेट्टीमारन द्वारा निर्देशित एक फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें सोरी अभिनीत है.
प्रदेश में कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा 'मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, आपके सहयोग से हमने #COVID19 पर काफी हद तक काबू पा लिया है। प्रदेश में आर्थिक गतिविधियाँ भी शुरू हुई हैं। दोस्तों, अभी कोरोना संक्रमण समाप्त नहीं हुआ है। अगर हमने सावधानी का पालन नहीं किया तो यह भारी पड़ सकता है, इसलिए सावधान रहें, सुरक्षित रहें। मेरे प्रिय अन्नदाता किसान बंधुओं, आपने अन्न के उत्पादन के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये, इसके लिए मैं आपको प्रणाम करता हूँ! प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, लेकिन आप चिंता न करें, आपको किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे। मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, आपके सहयोग से हमने #COVID19 पर काफी हद तक काबू पा लिया है। प्रदेश में आर्थिक गतिविधियाँ भी शुरू हुई हैं।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा 'मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, आपके सहयोग से हमने #COVIDउन्नीस पर काफी हद तक काबू पा लिया है। प्रदेश में आर्थिक गतिविधियाँ भी शुरू हुई हैं। दोस्तों, अभी कोरोना संक्रमण समाप्त नहीं हुआ है। अगर हमने सावधानी का पालन नहीं किया तो यह भारी पड़ सकता है, इसलिए सावधान रहें, सुरक्षित रहें। मेरे प्रिय अन्नदाता किसान बंधुओं, आपने अन्न के उत्पादन के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये, इसके लिए मैं आपको प्रणाम करता हूँ! प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, लेकिन आप चिंता न करें, आपको किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे। मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, आपके सहयोग से हमने #COVIDउन्नीस पर काफी हद तक काबू पा लिया है। प्रदेश में आर्थिक गतिविधियाँ भी शुरू हुई हैं।
ऑस्ट्रेलिया 2-1 की बढ़त को एशेज की ट्रॉफी को बरकरार रखने के लिए स्टीव स्मिथ हर तरह से अपना योगदान दे रहे हैं। ओवल में खेले जा रहे पांचवे टेस्ट मैच में यह वाक्या उस वक्त हुआ जब क्रिस वोक्स के हाथ में गेंद थी और मिचेल मार्श गेंदबाजी कर रहे थे तभी वोक्स ने एक शॉट खेला जिसे सेकेंड स्लिप पर खड़े स्टीव स्मिथ ने हवा में छलांग लगाकर लपक लिया। एक तरफ वोक्स हैरान नजर आए तो वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी विकेट को सेलिब्रेट करते दिखे। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिष्ठित एशेज सीरीज के पांचवे टेस्ट के तीसरे दिन के खत्म होने तक इंग्लैंड ने 382 रनों की बढ़त बना ली है। जो डेनली की 90, बेन स्टोक्स 67, जोस बटलर 47 की मदद से 8 विकेट खोकर 313 रन बनाए हैं। इंग्लैंड की लगातार रनों की बढ़त से ऑस्ट्रेलाई क्रिकेट टीम दबाव में दिख रही है। अब ये आखिरी मैच ही बताएगा की एशेज की ट्रॉफी ऑस्ट्रेलिया के पास बरकरार रहेगी या इंग्लैंड यह मैच जीतकर बाजी पलट देगी। 1930 की एशेज सीरीज में सर डॉन ब्रैडमैन ने 5 मैचों में 7 पारियों में 4 शतकों की मदद से कुल 974 रन बनाकर एक सीरीज में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया था। उनका एक पारी में सर्वाधिक स्कोर 334 था। वहीं स्टीव स्मिथ अब दिग्गज के रिकॉर्ड से चंद कदम दूर हैं। स्टीव स्मिथ ने अब तक खेली गई अपनी 6 पारियों में 751 रन बना लिए हैं। अब उनके पास एक पारी बकाया है और यदि वह इस पारी में 223 रन बना लेते हैं तो वह ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया दो-एक की बढ़त को एशेज की ट्रॉफी को बरकरार रखने के लिए स्टीव स्मिथ हर तरह से अपना योगदान दे रहे हैं। ओवल में खेले जा रहे पांचवे टेस्ट मैच में यह वाक्या उस वक्त हुआ जब क्रिस वोक्स के हाथ में गेंद थी और मिचेल मार्श गेंदबाजी कर रहे थे तभी वोक्स ने एक शॉट खेला जिसे सेकेंड स्लिप पर खड़े स्टीव स्मिथ ने हवा में छलांग लगाकर लपक लिया। एक तरफ वोक्स हैरान नजर आए तो वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी विकेट को सेलिब्रेट करते दिखे। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिष्ठित एशेज सीरीज के पांचवे टेस्ट के तीसरे दिन के खत्म होने तक इंग्लैंड ने तीन सौ बयासी रनों की बढ़त बना ली है। जो डेनली की नब्बे, बेन स्टोक्स सरसठ, जोस बटलर सैंतालीस की मदद से आठ विकेट खोकर तीन सौ तेरह रन बनाए हैं। इंग्लैंड की लगातार रनों की बढ़त से ऑस्ट्रेलाई क्रिकेट टीम दबाव में दिख रही है। अब ये आखिरी मैच ही बताएगा की एशेज की ट्रॉफी ऑस्ट्रेलिया के पास बरकरार रहेगी या इंग्लैंड यह मैच जीतकर बाजी पलट देगी। एक हज़ार नौ सौ तीस की एशेज सीरीज में सर डॉन ब्रैडमैन ने पाँच मैचों में सात पारियों में चार शतकों की मदद से कुल नौ सौ चौहत्तर रन बनाकर एक सीरीज में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया था। उनका एक पारी में सर्वाधिक स्कोर तीन सौ चौंतीस था। वहीं स्टीव स्मिथ अब दिग्गज के रिकॉर्ड से चंद कदम दूर हैं। स्टीव स्मिथ ने अब तक खेली गई अपनी छः पारियों में सात सौ इक्यावन रन बना लिए हैं। अब उनके पास एक पारी बकाया है और यदि वह इस पारी में दो सौ तेईस रन बना लेते हैं तो वह ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।
मुंबई। महाराष्ट्र में किसके सिर सजेगा ताज, इसका फैसला आज शाम चार बजे मुबंई में होने वाली बीजेपी विधायक दल की बैठक में हो सकता है। खबर है कि महाराष्ट्र में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसके लिए आज बीजेपी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। विधायक दल का नेता चुनने के लिए होने वाली इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी महासचिव जेपी नड्डा और राजीव प्रताप रूडी भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ही विधायक दल के नेता हो सकते हैं। वहीं, खबर है कि महाराष्ट्र में नई सरकार की शपथ की तारीख फिर बदल दी गई है। सूत्रों के मुताबिक अब सरकार 31 अक्टूबर को शपथ लेगी। 30 अक्टूबर को पीएम मोदी शपथ समारोह में नहीं जा पाएंगे। इसके चलते बदलाव किया गया है। Â बीजेपी और शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर अब तक बात नहीं बनी है। शिवसेना सरकार में शामिल होने के सवाल पर चुप है, लेकिन उसने बतौर सीएम नितिन गडकरी को अपना समर्थन दिया है। दूसरी तरफ एनसीपी ने साफ कर दिया है कि अगर महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद विधानसभा के पटल पर मत विभाजन की आवश्यकता हुई तो उनकी पार्टी उससे में शामिल नहीं होगी यानी परोक्ष रूप से पार्टी का बीजेपी को समर्थन जारी रहेगा। Â एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि उनकी पार्टी राज्य में स्थिर सरकार चाहती है और ऎसी स्थिति में वो बीजेपी सरकार के खिलाफ नहीं जाना चाहती, इसलिए सदन में वोटिंग हुई तो वॉकआउट कर जाएगी।
मुंबई। महाराष्ट्र में किसके सिर सजेगा ताज, इसका फैसला आज शाम चार बजे मुबंई में होने वाली बीजेपी विधायक दल की बैठक में हो सकता है। खबर है कि महाराष्ट्र में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसके लिए आज बीजेपी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। विधायक दल का नेता चुनने के लिए होने वाली इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी महासचिव जेपी नड्डा और राजीव प्रताप रूडी भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ही विधायक दल के नेता हो सकते हैं। वहीं, खबर है कि महाराष्ट्र में नई सरकार की शपथ की तारीख फिर बदल दी गई है। सूत्रों के मुताबिक अब सरकार इकतीस अक्टूबर को शपथ लेगी। तीस अक्टूबर को पीएम मोदी शपथ समारोह में नहीं जा पाएंगे। इसके चलते बदलाव किया गया है। Â बीजेपी और शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर अब तक बात नहीं बनी है। शिवसेना सरकार में शामिल होने के सवाल पर चुप है, लेकिन उसने बतौर सीएम नितिन गडकरी को अपना समर्थन दिया है। दूसरी तरफ एनसीपी ने साफ कर दिया है कि अगर महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद विधानसभा के पटल पर मत विभाजन की आवश्यकता हुई तो उनकी पार्टी उससे में शामिल नहीं होगी यानी परोक्ष रूप से पार्टी का बीजेपी को समर्थन जारी रहेगा। Â एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि उनकी पार्टी राज्य में स्थिर सरकार चाहती है और ऎसी स्थिति में वो बीजेपी सरकार के खिलाफ नहीं जाना चाहती, इसलिए सदन में वोटिंग हुई तो वॉकआउट कर जाएगी।
भारतीय संविधान की अभिकल्पना महज समधर्मी राष्ट्र राज्य के लिए ही नहीं की गई थी, बल्कि उस प्राचीन सभ्यता के लिए भी की गई थी, जो सदियों से अनवरत चली आ रही है और जो लोगो, भाषाओ धर्मो, विश्वासो और संस्कृतियों की विविधताओ को अगीकार करती है इसका प्रारूप सपत्ति आधारित मताधिकार प्राप्त एव भारत के विभाजन की छाया और बाद के दौर में कार्य कर रहे एक उचित प्रतिनिधित्व व प्रतिभासपन्न व्यक्तियो के प्रभावशाली मिश्रण वाली सविधान सभा द्वारा 1946-1949 के दौरान तैयार किया गया इस संविधान की रचना लाखो भारतीयों की मागो तथा अभिलाषाओ की पूर्ति के लिए की गई थी यह जनसंख्या एक अप्रतिम और बहुरगी सास्कृतिक विविधता प्रदर्शित करती है जो हिदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन तथा अन्य आस्थाओ और नास्तिको से आई है लोगो का ऐसा क्षैतिज' विभाजन समाज के सपन्न और वचित लोगो के आतरिक विभाजन को छिपा नही पाया और वस्तुत इसने इन वर्गो मे 'ऊर्ध्वाधर' सामाजिक तथा आर्थिक अतर को और भी बढा दिया विभाजन से हुई अव्यवस्था तथा कई प्रदेशों के एकीकरण से एक गणतंत्र के बनने के बीच सविधान सभा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विभक्त एक मजबूत सघ की स्थापना की इस सघ का शासन संसदीय लोकतंत्र के सिद्धातो के अनुसार किया जाना था इसमें एक स्वतंत्र न्यायपालिका, मौलिक अधिकारो की गारटी और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धातो' के रूप में राष्ट्र के मार्गदर्शन हेतु सामाजिक न्याय के लक्ष्य परिभाषित थे मूल सिद्धांत यद्यपि सविधान सभा के प्रयासों की यह कहकर आलोचना की गई थी कि यह ब्रिटिश सरकार द्वारा 1935 में लागू गवर्नमेट ऑफ इंडिया ऐक्ट (भारत सरकार अधिनियम) के विस्तार से ज्यादा और कुछ नही है, तथापि यह सम्मिलन इसके कुछ हिस्सो के योग से कहीं अधिक सिद्ध हुआ इस तरह की अत्यत विविधतापूर्ण सभ्यता हेतु निर्मित सविधान मे कई असामान्य बातो का समावेश होना अपरिहार्य था बावजूद इसके भारतीय संविधान कई उभरते हुए पूर्व औपनिवेशिक राष्ट्रो के सविधान के लिए एक आदर्श साबित हुआ है यह कई विस्तृत सिद्धातो पर आधारित है 1 'जन प्रतिनिधित्व का सिद्धात' सार्वभौमिक मताधिकार से संबंधित प्रावधानो मे प्रतिबिंबित है इसमें अछूतो तथा निचले तबको (जिन्हे अनुसूचित जाति कहा जाता है), आदिवासियो (अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्दिष्ट ) तथा आग्ल- भारतीयो का विशेष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है विशेष प्रतिनिधित्व प्रावधान नवीकरण योग्य है तथा प्रत्येक दशक में इसका नवीनीकरण किया जाता है राजीव ध्रुवन 2 'लोकतान्त्रिक अधिशासन का सिद्धात संसदीय प्रणाली मे उसी प्रकार सम्मिलत है, जिस प्रकार ब्रिटिश वेस्टमिस्टर प्रणाली में केंद्र या संघ, दोनो के स्तर पर ओर राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो के स्तर पर अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति केंद्र में राष्ट्र का प्रधान होता है तथा केंद्र द्वारा मनोनीत राज्यपाल अथवा लेफ्टिनेट गवर्नर (उप-राज्यपाल) राज्य इकाइयो तथा केंद्रशासित प्रदेशो के प्रमुख होते है 3 'व्यक्तिगत तथा सामूहिक मानवाधिकारो नागरिक स्वतंत्रताओ तथा सामाजिक न्याय के सिद्धातो की घोषणा प्रस्तावना में की गई है इन्हे मौलिक अधिकारों के खड में दर्शाया गया है, नीति-निदेशक तत्त्व के खड मे ये लक्ष्य रूप में निर्धारित किए गए है तथा ये अनुसूचित जातियो, अनुसूचित जनजातियो, अन्य पिछडे वर्गों एवं अन्य के लिए बनाए गए कई विशेष प्रावधानो मे प्रतिबिवित होते है 4 केंद्रीकृत सघ का सिद्धात केंद्र तथा घटक इकाइयों के बीच अधिकारो तथा दायित्वो के वितरण में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है केंद्र को कुछ अभिभावी अधिकार प्रदान किए गए है, जबकि अन्य निर्णायक अधिकार राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो को दिए गए है 1992 से स्थानीय स्तर पर लोगों को कुछ सवैधानिक अधिकार देने के लिए बहुस्तरीय सवैधानिक रूप से सस्थापित स्थानीय सरकार का गठन किया गया 5 'न्यायिक अभिरक्षण का सिद्धात शक्तिशाली न्यायपालिका को सविधान की कार्यप्रणाली पर नजर रखने, कानूनी नियमों के अनुसार इसकी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने, लोकतत्र, मानवाधिकारो तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतो को लागू करने और दीवानी, फौजदारी व प्रशासनिक न्याय की प्रभावी प्रणाली का गठन करने की अनुमति प्रदान करता 6 'परिवर्तन तथा रूपातरण का सिद्धात' न केवल अस्थायी समस्याओं को सुलझाने के लिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी सविधान में समय-समय पर सशोधन किए जाने की अनुमति प्रदान करता है कि एक गरीब पूर्व औपनिवेशिक राष्ट्र को स्वतंत्र प्रभुसत्तापूर्ण, लोकतात्रिक, धर्मनिरपेक्ष तथा समाजवादी गणतंत्र के रूप में बदलने के लिए संविधान के समग्र उद्देश्यों की प्राप्ति हो सके सशोधन तथा अन्य परिवर्तन सविधानों को बतौर मापदड के नहीं बनाया जाता है सभी नही, लेकिन अधिकाश सविधान लचील होते के है आतरिक रूप से उन दैनिक क्रियाकलापो में परिवर्तन की गुजाइश होती है, जबकि बाह्य रूप से उन्हें सशोधनो द्वारा बदला जा सकता है ये समय के साथ विकसित होते हैं और हमेशा 'है' मे न होकर, समस्याओं तथा सभावनाओ का, जब भी वे उठ खडी हो, सामना करते हुए 'बन रहे की स्थिति में होते है भारतीय संविधान भी इसका अपवाद नही है भारतीय संविधान में अनेक प्रकार से बाह्य परिवर्तन किए जा सकते है साधारण संसदीय बहुमत द्वारा घटक राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो की सीमाओं सहित इसके कुछ हिस्सो में परिवर्तन किया जा सकता है अन्य हिस्सो को ससद के दोनो सदनो के दो-तिहाई बहुमत द्वारा ही बदला जा सकता है सघीय ढाचे से सबंधित प्रावधानो ने परिवर्तन के लिए केवल ससद का दो तिहाई बहुमत ही आवश्यक नहीं होता, बल्कि कम से कम आधे राज्यो की विधायिकाओ द्वारा अनुमोदन भी जरूरी होता हे बगावत द्वारा तख्तापलट कर सत्ता परिवर्तन दक्षिण एशिया तथा अन्य राष्ट्रो के सवैधानिक इतिहास का हिस्सा रहा है, लेकिन भारत सभवत आपातकाल (1975-77) के सदिग्ध मामले को छोड़कर इस सकट से दूर ही रहा है र विधान परिवर्तन के लिए जटिल प्रक्रिया होने के बावजूद भारतीय संविधान 2001 तक 84 सशोधना से बच नही पाया संविधान के पाठ की स्याही सूख भी नही पाई थी कि इसे बनाने वाली सवैधानिक समिति ने ही इसमे संशोधन कर डाला 1950-51 में पहली लोकसभा की भूमिका अदा करते हुए सविधान सभा ने ही जमीदारों के पक्ष मे दिए गए सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो के कुछ निर्णयो को, जो कृषि भूमि के पुनर्वितरण द्वारा किए जाने वाले भूमि सुधार मे बाधक थे तथा सकारात्मक कार्यवाही की सभावनाओं पर सदेह प्रकट करते थे और सरकार की लोक व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियो को प्रभावित करते थे, उलटने हेतु सविधान में संशोधन किया न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच मतभेद 1973 के प्रसिद्ध मौलिक अधिकार मामले तक 'सवेधानिक मच' के केंद्र में रहे, जब उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि संविधान को संशोधित करने की अपनी सपूर्ण शक्ति के बावजूद ससद संविधान के 'मूल ढाचे' मे परिवर्तन नही कर सकती यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि आखिर सविधान के मूल ढांचे में क्या शामिल है 1977 तथा 1997 के बीच विभिन्न निर्णयो मे सर्वोच्च न्यायालय के ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा मूल ढाचे का हिस्सा है तथा इसे हटाया नहीं जा सकता है राष्ट्रपति शासन (1993) तथा बाबरी मस्जिद प्रकरण (1994) मे धर्मनिरपेक्षता को संविधान के मूल ढाचे क एक अग के रूप में मान्यता दी गई 1976 में प्रस्तावना के संवैधानिक लक्ष्यों में समाजवाद के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता को जोड़ा गया तर्कसंगत रूप से, मुक्त बाजार के इस युग में भी, समाजवाद मूल ढांचे का एक भाग है कम से कम उस स्तर तक, जहा यह संविधान के समानतावादी सिद्धातो को सुदृढ करता है तथा सामाजिक व आर्थिक न्याय की प्राप्ति हेतु अधिमूल्यन व पुनर्वितरण के उपायो से अधिक लाभकारी है यद्यपि यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशिष्ट मान्यता दिए जाने से बचा रह गया है पर लोकतंत्र को राष्ट्र की प्रभुसत्ता तथा उसकी गणतात्रिक प्रकृति के साथ मूल ढाचे का हिस्सा निश्चित तौर पर मानना चाहिए फिर भी इसका निष्कर्ष यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि लोकतंत्र या लोकतात्रिक प्रतिनिधित्व (उदाहरण के लिए, ससदीय प्रणाली) के किसी विशिष्ट स्वरूप को भी मूल ढाचे के रूप मे सरक्षित किया जाएगा तथा यह अपरिवर्तनीय सवैधानिक सिद्धांत के रूप में संशोधन से बचा रहेगा भूमि सुधारो के विवादों के मूल में विद्यमान न्यायिक सर्वोच्चता के लिए संघर्ष के अलावा, संविधान को बदलने के अधिकार का उपयोग तथा दुरुपयोग, दोनो ही हुए है 1956 मे सघीय प्रणाली में विभाजन पश्चात के परिवर्तनों को शामिल करने के लिए कई सशोधन किए गए थे भूमि सुधार सशोधन (1951-1964 ) तथा संविधान संशोधन हेतु ससद के असीमित अधिकारों का समर्थन करने वाले संशोधन (1970-1971 ) को 1973 मे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित मूल ढाचे के सिद्धात से चुनौती का सामना करना पडा था आपातकालीन संशोधनो (1975-1977) की अभिकल्पना प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी के हाथो मे सत्तावादी नियन्त्रण बनाए रखने के लिए थी आपातकालीन सशोधनो को उलटने वाले संशोधन (1977-1979) कमजोर थे तथा उनमे से सभी लागू नहीं किए गए पजाब सशोधन (1987-1990) पजाब मे जारी आपातकाल की स्थिति- जो केंद्र से अलग होने हेतु एक सशस्त्र विद्रोह था - से निपटने हेतु सरकार की शक्ति का दायरा बढाने के लिए थे. दलबदल विरोधी संशोधन (1985) सासदो को ससदीय सरकार को अस्थिर करने से रोकने के लिए था पंचायत सशोधन (1991-1992) ने सघीय सवैधानिक प्रणाली में नए स्तर को जोड़कर उपेक्षित समुदायो तथा महिलाओ का स्थानीय शासन मे प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करवाया 1995 के संविधान संशोधन, 1992 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयो को उलटने के लिए किए गए थे, जिसके अंतर्गत प्रशासन मे उच्च पदोन्नति वाले पदो में सकारात्मक कार्यवाही करने से रोक लगाई गई थी 1990 के दशक में महिलाओं को ससद तथा राज्य विधानसभाओ में प्रतिनिधित्व प्रदान करने तथा संसदीय अधिशासन की अनिश्चितताओ को रोककर स्थिरता प्रदान करने के लिए सविधान संशोधन की योजना थी दुरुपयोग के सुस्पष्ट उदाहरणो के बावजूद सविधान मे मूलभूत सिद्धातो को वास्तविक क्षति पहुचाए बिना सविधान संशोधन के अधिकारा का आमतौर पर यथोचित तथा रचनात्मक रूप से ही प्रयोग किया गया है लोकतांत्रिक तथा संसदीय प्रक्रियाएं उपेक्षित समुदायो तथा समूहों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए विशेष प्रावधानो सहित सार्वभौमिक मताधिकार प्रणाली पर निर्मित भारत विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय लोकतत्र है 1951 में इसकी कुल आबादी 3569 करोड़ थी, जो 2001 में बढ़कर 1027 अरब हो गई है, जिसमे लगभग 40 प्रतिशत लोगो को मताधिकार प्राप्त है इतने बड़े चुनाव क्षेत्र हेतु चुनाव का आयोजन करने का विकट दायित्व सवैधानिक रूप से गठित एक स्वायत्त निकाय को सोपा गया है, जिसे 'चुनाव आयोग' कहते हे सवैधानिक अथवा न्यायिक समीक्षा को छोड़कर इसके पर्यवेक्षण, नियत्रण तथा चुनावों के निर्देश मे हस्तक्षेप नही किया जा सकता मतदान करने वाले निर्वाचन क्षेत्रों के सीमाकन का कार्य एक वैधानिक निकाय परिसीमन आयोग' को दिया गया है निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन के पश्चात प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक मतदाता सूची बनाई जाती है, जिसके आधार पर चुनाव कराए जाते है मतदान करने तथा चुनाव लड़ने की पात्रता आयु, मानसिक क्षमता, वित्तीय तथा आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे सवैधानिक व कानूनी मापदडो के आधार पर निर्धारित की जाती है चुनावो का निर्विघ्न सचालन सुनिश्चित करने तथा सामजस्य को हानि पहुचाने वाली घृणित, विभाजक या राजद्रोहात्मक अपीलो को रोकने हेतु कई चुनावी अपराधो तथा चुनावी दुराचारो के अभियोजन के लिए पहचान की गई है कुछ वर्षो से राजनीतिक दलो द्वारा 'पैसे व बाहुबल' वाले लोगो को चुनाव मैदान में उतारने के ऐसे तरीको पर चिता व्यक्त की जा रही है, जो चुनाव प्रक्रियाओं को दूषित करते है तथा ऐसे लोगो के चुने जाने मे सहायता करते है, जो गभीर अपराधो के अभियुक्त तो है, पर उन्हें सजा नही हुई है और सजा दिए जाने से व चुनाव लड़ने के अयोग्य हो सकते है इस तरह के लोगो को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सविधान तथा चुनाव कानून में संशोधन के सुझाव का विधि आयोग तथा अन्य लोगों ने भी समर्थन किया है, लेकिन अब तक इसे राजनीतिक समर्थन नहीं मिला है इसके बावजूद चुनाव प्रणाली भारतीय जनता के हाथों में भलीभाति कारगर सिद्ध हो रही है, जिसने शासकों को विवेकपूर्ण ढंग से निर्वाचित व अपदस्थ किया है ससदीय प्रणाली संसदीय प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री तथा उसके मंत्रिमंडल या मंत्रिपरिषद, जो सामूहिक रूप से लोकसभा ( ससद का प्रत्यक्ष निर्वाचित निचला सदन) के प्रति उत्तरदायी होते है, के सहयोग तथा 'सलाह' से कार्य करता है लोकसभा के सदस्य साधारण बहुमत द्वारा किसी भी सरकार को सत्ता से हटा सकते है सवैधानिक रूप से सुनिश्चित 'आवटन' तथा 'कार्य सपादन' द्वारा यह निर्धारित करने के लिए कि सरकार के लिए किस अधिकार को कोन प्रयोग में लाएगा, क्रमश केंद्र तथा राज्यो मे सभी कार्यकारी शक्तियो का प्रयोग क्रमश राष्ट्रपति तथा राज्यपाल के नाम पर किया जाता है इस सुझाव को कि राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह को अनदेखा करने के लिए स्वतंत्र है, 1973 मे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय से निर्णयात्मक रूप से अस्वीकार कर दिया इस निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि भारत द्वारा ब्रिटिश संसदीय प्रणाली अगीकार की गई है यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसमे कार्यकारी प्रमुख मंत्रिमंडल की सलाह को मानने के लिए वाध्य होता है मंत्रिमंडल के अदर प्रधानमंत्री सभी समकक्षा में प्रथम नहीं होता, बल्कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति के अनुसार पूरी तरह से सर्वेसर्वा होता है तथा वह सभी या किसी भी मंत्री को नियुक्त कर सकता है अथवा हटा सकता है बहरहाल, आपातकाल (1975-1977) के पश्चात इस तरह के स्वच्छाचारी अधिकारो तथा मत्रिमंडल के फैसले पर मात्र मुहर लगाने वाले राष्ट्रपतियों में विश्वास की कमी ने एक सवैधानिक संशोधन के लिए रास्ता बनाया इस सशोधन ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया कि वह मंत्रिमंडल के निर्णय को केवल एक बार अस्वीकार कर सकता है ऐसा करने की धमकियों के बावजूद किसी निर्णय को पुनर्विचार के लिए मंत्रिमंडल के पास वापस भेजने के अधिकार का उपयोग यदा-कदा ही किया गया है, जिससे ससदीय प्रणाली मे राष्ट्रपति की भूमिका प्रोत्साहित करने चेतावनी देने तथा सर्वशक्तिमान प्रधानमंत्री को सलाह देने के परपरागत कार्य तक ही सीमित रह जाती संसदीय प्रणाली को दुसाध्य रूप में देखा जाता है इसमें बड़ी संख्या में विधायक होते है, जिनके पास करने के लिए बहुत सारा विधायी तथा अन्य कार्य होता है इसकी प्रभावशीलता बढाने के लिए कई ससदीय समितियो, लोकपाल और लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग आदि का गठन किया गया, ताकि सुगन, प्रभावी तथा ईमानदार अधिशासन सुनिश्चित किया जा सके ससदीय प्रणाली मुख्यत निर्वाचन प्रणाली द्वारा सघीय संसद तथा राज्य विधानसभाओं में काम चलाने योग्य बहुमत पाने पर निर्भर है नेहरू युग (1950-1964) मे आमतौर पर केंद्र तथा राज्य सरकारों को स्पष्ट बहुमत हासिल था, किंतु 1959 के बाद से राज्यों की सत्ता केंद्र मे सत्ताधारी दल के अलावा दूसरे दलो तथा गठबधनो के हाथ में रहने लगी ऐसी राज्य सरकारे राजनीतिक जोड घटाव तथा केंद्र के सवैधानिक अधिकारो के दुरुपयोग का शिकार होकर निष्ठुरता से हटाई जाती रही है 1977--1979 मे ( आपातकाल के तुरंत बाद ) तथा 1989 से लेकर अब तक लापरवाह व अक्सर अवसरवादी गठबधन राजनीति ने केंद्र सरकारों की स्थिरता को कमजोर किया है 1985 में लाए गए दलबदल विरोधी सशोधनो की अभिकल्पना सदन में अपनी पार्टी के खिलाफ मतदान कर सरकार को गिराने की सासदो की प्रवृत्ति को रोकने (बशर्ते कि उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर न कर दिया जाए या वे सदन में दल की कुल संख्या की एक तिहाई की संख्या में विभाजित होकर अलग न हो जाए) के लिए की गई थी वे सशोधन, जिन्हे सर्वोच्च न्यायालय ने 1991 में लगभग खारिज कर दिया था, कुछ हद तक लागू किए गए, लेकिन वे कमजोर थे और उनका प्रभाव अस्थिर था सरकार को अस्थिर बनाने के भ्रष्ट तरीको का उपयोग अत्यधिक बढ़ गया इस प्रवृत्ति को 1998 मे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस निर्णय ने और अधिक बढावा दिया कि रिश्वत लेने वाले सासदो पर आपराधिक अभियोग नही लगाया जा सकता, क्योंकि इस तरह की रिश्वत उनके कामकाज की स्वायत्तता से जुड़ी है राजीव धवा व्यापक रूप से परंपराए दो श्रेणियों के अंतर्गत आती हैं मूल या प्राथमिक परपराए, जो शासन के ढाच को यथास्थान बनाए रखती है उदाहरण के लिए, राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह मानना आवश्यक होता है और ससद के निचले सदन में सरकार की पराजय होने पर मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना होता है गौण परपराए शासन करने वालो से एक यथोचित नैतिक जिम्मेदारी तथा राजनीतिक ईमानदारी की माग करती है अक्सर इन्हे भारत में स्वाभाविक रूप में देखा गया है उदाहरण के लिए, नेहरू युग मे किसी मंत्रालय में काई गलती या दुर्घटना हो जाने पर संबंधित मंत्री इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेत थे तथा मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे देते थे सासद अपने दल तथा उन कार्यक्रमो, जिनके आधार पर वे निर्वाचित हुए है, के प्रति निष्ठावान रहते थे सार्वजनिक पदो पर रहने वाले लोग अपनी संपत्ति अथवा व्यवसाय तथा अन्य सबधो की घोषणा करने से नहीं डरते थे राजनीतिक दृष्टि से सुविधा होने पर ही इन परपराओ का पालन होता है, अन्यथा इनकी अधिकाधिक उपक्षा की जाती रही है न्यायालय इन प्राथमिक परपराओ, गौण परपराओ के मामल मे तो और भी कम को औपचारिक रूप से प्रभावी बनाने या सुस्पष्ट करने के प्रति अनिच्छुक है सिर्फ उनको छोडकर, जो सविधान के मूल कार्यकलापो से जुडी हुई है हालांकि कुछ न्यायाधीशो ने कुछ परपराओ को मान्यता दी है, लेकिन वे वस्तुत वैधानिक रूप से लागू नही होती वे केवल उस स्थिति में प्रभावी रूप से कार्य कर सकती है, जब उन लोगो का समर्थन मिले, जिनके कार्यो को वे नियंत्रित करने जा रही है भारतीय प्रशासन की वास्तविक कार्यशैली को ऊपर उठाने के लिए ससद द्वारा कुछ परपराओ को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता है उदाहरण के लिए, यद्यपि भारत मे ससदीय प्रणाली उचित ढग से कार्य कर रही है, लेकिन कमजोर गठबधन सरकारी तथा व्यक्तिगत लाभ अथवा पदलोलुपता के कारण सरकार को गिराने वाले अवसरवादी नेताओ के दुर्बलीकरण के प्रभाव ने ससदीय प्रणाली को कमजोर बना रखा है इस समस्या की जड परपराओ द्वारा अनुशासित करने वाली मजबूत सस्थागत नैतिकता का अभाव हे सविधान के काले अक्षर तब तक बेहतर शासन की सुनिश्चितता प्रदान नही करेगे, जब तक भ्रष्टाचार रहित ईमानदार व पारदर्शी परिस्थितियो मे विधि तथा लोकतात्रिक जवाबदेही की सुनिश्चितता के लिए सस्थागत नैतिकता का उदय नहीं होता सघीय या अर्द्धसंघीय व्यवस्था 1947 में भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ और इसकी 550 रियासतो को यह विकल्प दिया गया था कि वे स्वतंत्र रहे या भारत अथवा पाकिस्तान में सम्मिलित हो जाए इस योजना के तहत उपमहाद्वीप का ऐसा बटवारा हो जाता, जिसे सुधारना कठिन होता, लेकिन विभाजन के हिसक आतक के बावजूद दो बड़े राष्ट्रो, भारत तथा पाकिस्तान में रियासतो का विलय कर लिया गया लेकिन कश्मीर दोनो राष्ट्रो के बीच विवाद का मुद्दा बना रहा 1950 से 1956 के बीच भारत के विभिन्न राजनीतिक भागो को तीन श्रेणियों में गठित किया गया था, जो मोटे तौर पर पूर्व - ब्रिटिश शासित ब्रिटिश प्रशासित तथा रियासतो से मिलकर बनी थी और भारतीय सघीय व्यवस्था, 1956 में पुनर्गठित की गई थी और तब से आज तक यह द्विस्तरीय व्यवस्था चली आ रही है केंद्र में सघीय सरकार तथा राज्यो एव केंद्रशासित प्रदेशो की सरकारे इन सभी इकाइयों का नियंत्रण संसदीय संस्थाओं के हाथ मे है, जबकि केंद्रशासित प्रदेशो के ज्यादातर प्रत्यक्ष अधिकार सधीय सरकार के पास है यह बता पाना बहुत कठिन है कि शासन की वास्तविक संघीय प्रणाली का स्वरूप क्या है भारतीय सघ को कई कारणो से अर्द्धसघीय कहा जाता है पहला ओर प्रमुख कारण यह है कि प्रातो तथा केंद्रशासित प्रदेशा की कोई भौगोलिक अखडता नही हे बड़े राज्यों को तोडकर प्रातो तथा केंद्रशासित प्रदेशो की रचना की गई है आध्र प्रदेश तथा केरल 1956 में बनाए गए बबई प्रात को 1960 मे महाराष्ट्र तथा गुजरात में बाटा गया हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश बनाए गए पूर्वोत्तर में सात प्रत वनाए गए 1972 में असम, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा तथा 1987 में मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश बने गोवा को 1960 मे केंद्रशासित प्रदेश के रूप में सघ में शामिल किया गया, जो 1987 मे पूर्ण राज्य बना सिक्किम को 1975 में राज्य बनाया गया दूसरा कारण यह है कि यद्यपि सभी प्रातो को समान दर्जा प्राप्त है और अपनी-अपनी जनसंख्या के अनुसार उन्हें संसद के दानो सदनों में प्रतिनिधित्व प्राप्त है, लेकिन भारतीय सविधान ने आवश्यकता पर आधारित असमान सघवाद के सिद्धात का विकास किया हे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों व कुछ अन्य राज्यो से सबंधित अनुच्छेदो तथा अन्य प्रावधानों में भी कुछ प्रातो को सवैधानिक प्राथमिकता का दर्जा दिया गया है तीसरा कारण है, आपातकाल के प्रावधानों ने केंद्र को व्यापक अधिकार दे दिया हे जिसकी मदद से वह किसी राज्य का शासन अपने हाथ में ले सकता है तथा राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है 1993 मे सीमित न्यायिक पुनर्निरीक्षण तथा 1979 म राष्ट्रपति को प्रस्ताव लौटाने का अधिकार दिए जाने के बावजूद राज्यों की निर्वाचित सरकारों को हटाने के लिए सघीय सरकारे आपात स्थितियों से संबंधित इन प्रावधानो का मनमाना उपयोग करती रही है ये तरीके प्रजातंत्र तथा सघवाद दोनो को कमजोर करते हे चौथा कारण है, सविधान ने सघीय शासन को कई प्रकार से अधिक शक्तिया दी है केंद्र की वैधानिक शक्तिया राज्यों की तुलना में अधिक व्यापक है, जिसमे विस्तृत अवशिष्ट शक्तिया भी शामिल है विशिष्ट राज्य सूची के कई विषयो ( उद्योग खनन और अन्य विषय ) का नियमन ससद द्वारा किया जाता है समवर्ती अधिकारों के मामले में भी केंद्र को राज्य से अधिक महत्त्व प्राप्त है राज्यसभा की सहमति से अथवा दो या अधिक राज्यों की सहमति से या सधि अथवा अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधो के पालन या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में सघ राज्य सूची के विषयो पर कानून बना सकता है प्रशासन पर केंद्र का सपूर्ण नियंत्रण, सवैधानिक रूप से निर्मित अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा राज्य को केंद्र की इच्छापूर्ति के लिए निर्देश देने के अधिकार द्वारा अधिक मजबूत हो गया है पाचवा कारण यह है कि राज्यो को राजस्व तथा अनुदान वितरण सुनिश्चित करने के लिए वित्त आयोग एव अन्य व्यवस्थाओं के बाद भी वित्तीय सघवाद की सवैधानिक योजना बहुत जटिल है और ज्यादा से ज्यादा केंद्र के पक्ष मे है राज्यों के पास राजस्व प्राप्त करने के अपर्याप्त स्वतंत्र स्रोत है और व केंद्र पर अत्यधिक निर्भर है तथा उसके कर्जदार भी है यद्यपि एक शक्तिशाली केंद्र सधवाद की भावना के विपरीत नहीं है, लेकिन संविधान द्वारा केंद्र को दिए गए विशेष एव उच्च अधिकार भारतीय सघवाद को शक्ति विभाजन मे भ्रमपूर्ण, बनावट मे केन्द्राभिमुख तथा कामकाज में अत्यधिक केंद्र - आश्रित बनाते है, हालाकि प्रत्येक राज्य की विशिष्ट एतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख किए विना भारतीय संघवाद का कोई भी विवरण पूरा नही हो सकता भाषाई तथा ऐतिहासिक आधारो पर भारत का सघीय विभाजन राष्ट्रीय एकता में बाधा बनने के बजाय देश की बहुभाषी और बहुसास्कृतिक समाज की सरचना को समृद्ध बनाता है सवैधानिक ढाचे मे सधीकृत इकाइयो के परिपक्व होते ही उनका स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व बन गया हे केंद्र में सत्तारूढ दल अक्सर क्षेत्रीय या राज्यों में सत्तारूढ दल से भिन्न होता है अपनी क्षेत्रीय सफलता की शक्ति से प्रेरित होकर अनेक राज्यों ने अधिक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता तथा प्रशासन में केंद्र के कम से कम हस्तक्षेप की माग की है, यदि भारत अपनी विशिष्ट विविधता को अधिक महत्त्व देना चाहता है, तो उसे अत्यधिक केंद्रीकृत संघीय ढांचे को ढीला करना होगा पचायत के माध्यम से स्थानीय शासन 1991-92 मे सविधान मे पचायत सशोधन के बाद द्विस्तरीय सघ प्रणाली ने, जिसमें प्रशासन केंद्र तथा राज्य के बीच बटा था, एक बहुस्तरीय संघीय ढांचे में प्रवेश किया, जिसके तहत प्रजातात्रिक स्थानीय शासन की गारटी दी गई और शहरी तथा ग्रामीण इलाको में सभी स्तरो पर नागरिको को सवैधानिक शक्तिया दी गई सामान्यत स्थानीय सरकार की योजना सविधान में नहीं लिखी गई है, लेकिन सविधान लागू होने के बाद कानून के जरिये उनका निर्माण किया जाता है पंचायत सशोधनो ने देश में स्थानीय सरकार व्यवस्था के ध्वस्त हो जाने की बात को स्वीकार किया और स्थानीय स्तरो पर स्वशासन के जरिय इसका विकल्प उपलब्ध कराया इस प्रकार निर्मित केवल पंचायत ही प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई स्थानीय सरकार का एकमात्र अग है प्रारंभ में यह योजना आदिवासी क्षेत्रो मे लागू नही थ्री लेकिन अब इन क्षेत्रों में भी इसे प्रभावी कर दिया गया है भारत मे बहुस्तरीय सधवाद को बहुत सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है पिछडो और उपेक्षितो की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए पचायत सशोधन ने उनके लिए विशेष प्रतिनिधित्व आरक्षित किया हे- विशेष रूप से महिलाओ, अनुसूचित जातियो, जनजातियो तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए, जिन्हे अन्य प्रकार से पचायत में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है इसका अनूठा परिणाम यह निकला है कि बहुत सी पचायतो की बागडोर इन उपेक्षित वर्गों के हाथो मे है, हालाकि स्थानीय सामाजिक ओर आर्थिक शक्तिया अब भी अधिकाश पचायतो पर हावी है इस प्रयोग को अन्य ससदीय गतिविधियों से लाभ मिलेगा उदाहरण के लिए, पचायतो को अधिक स्वायत्तता तथा राजस्व वसूली के अधिकार देन से स्थानीय स्तर पर नागरिको को शक्ति मिलेगी तथा समय के साथ उनकी कार्यप्रणाली में सुधार आपातकालीन शक्तिया भारत के लिए बनाए गए ब्रिटिश कानून के प्रावधानों को जस का तस स्वीकार करते हुए सविधान मे तीन तरह की आपात स्थितियों का प्रावधान किया गया है सामान्य आपातकाल, राज्य आपातकाल और वित्तीय आपातकाल सामान्य आपातकाल 'बाहरी आक्रमण' या देश के भीतर पूरे राष्ट्र मे या किसी हिस्से मे सशस्त्र विद्रोह की स्थिति है सामान्य आपातकाल के संवैधानिक प्रभावों में कुछ महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकारों का निलंबन, नागरिक स्वतंत्रता पर सख्त नियत्रण, प्रेस सेसरशिप तथा बिना सुनवाई के निषेधात्मक गिरफ्तारी की अनुमति सम्मिलित है यदि राष्ट्रपति पाते है कि ऐसी स्थिति निर्मित हो गई है, जिसमे राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नही चलाई जा सकती, तो केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य में आपातकाल घोषित कर सकती है ससद और कार्यपालिका राज्य का प्रशासन अपने हाथ में ले लेती है और प्रातीय प्रजातंत्र लगभग निलबित हो जाता है वित्तीय आपातकाल की घोषणा तब की जा सकती है, जब राष्ट्रपति स्वीकार करते है कि ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें देश या इसके किसी हिस्से की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में है.' इस आपातकाल के दौरान संविधान के उन प्रावधानों में संशोधन का अधिकार राष्ट्रपति को होता है, जो केंद्र तथा राज्य के बीच वित्तीय संसाधनों के आवटन से संबंधित है सामान्य आपातकाल तथा प्रातीय आपातकाल के ठीक विपरीत गणराज्य के पहले 50 वर्षो मे भारत में वित्तीय आपातकाल कभी नहीं लगाया गया प्रत्येक आपातकाल सघीय ढांचे का अतिक्रमण करता है और केंद्र को असाधारण अधिकार दे देता है आजाद भारत के इतिहास में सामान्य आपातकाल (1975-77) एक नाटकीय घटना है इसने बहुत ही सहजता से दिखा दिया कि सवैधानिक लोकतंत्र को ऐसी तानाशाही मे कैसे बदला जाता है, जिसमे सत्ता पूर्णत भ्रष्ट हो जाती है प्रत्यक्ष तौर पर तो आपातकाल की घोषणा आतरिक अस्थिरता से निपटने के लिए की गई थी, लेकिन वास्तव मे 1975 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव अदालत द्वारा रद्द कर दिए जाने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री बनाए रखने के लिए यह तरकीब लगाई गई थी सत्ता का दुरुपयोग, मनमानी गिरफ्तारिया, जनसचार माध्यमा की सेसरशिप तथा लोगो पर कई अत्याचारों ने आपातकाल के नाम पर धब्बा लगा दिया स्थिति तब और बिगड गई, जब बदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) के एक मामले मे सर्वोच्च न्यायालय ने एक विवादास्पद फैसले मे जिसकी काफी आलोचना हुई, न्यायिक पुनरावलोकन से इनकार कर दिया अदालत ने उन मामलो की समीक्षा से भी इनकार कर दिया, जिनमे निरोधी नजरबदी स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण थी उनका भी जिनमे आपातकाल के पश्चात सविधान में किए गए कुछ सशोधनो का उद्देश्य भविष्य में एकाधिकार प्राप्त करने की घटना को रोकना था बाहरी आक्रमण या आतरिक सशस्त्र विद्रोह की स्थिति मे आपातकाल लगाने के अधिकार सुरक्षित रखे गए है 1975-77 का आपातकाल भारत में पहला और सभवत आखिरी नहीं है उदाहरण के लिए, 1962 में चीन से युद्ध के वक्त एक सामान्य राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था, जो औपचारिक तौर पर छह वर्षो तक कायम रहा था हालाकि इसमे सदेह है कि अब भारत के नागरिक 1975-77 जैसे एक और सर्वाधिकारवादी आपातकाल को आसानी से सहन कर लेगे 1950 से 2000 के बीच विभिन्न राज्यो मे अनेक बार राष्ट्रपति शासन लागू किया जा चुका है ज्यादातर नामलो मे यह आवश्यकता के बजाय राजनीतिक सुविधा के लिए किया गया. इसकी शुरुआत नेहरू युग मे सत्ता के दुरुपयोग के साथ हुई और इंदिरा गाधी तथा उनके बाद के शासको के काल में इसमे अत्यधिक वृद्धि हुई उदाहरण के लिए, 1977 में जनता गठबधन सरकार ने नौ राज्यो मे राष्ट्रपति शासन लागू किया और 1980 में इंदिरा गांधी की कांग्रेस सत्ता मे लौटी, तब उसने भी नौ राज्यो मे राष्ट्रपति शासन लागू किया राष्ट्रपति शासन लगाने के अधिकार को अनुशासित करने के प्रयास पूरी तरह सफल नही हुए है 1979 के बाद राष्ट्रपति शासन एक वर्ष से अधिक समय के लिए नही लगाया जा सकता, हालांकि 1987 मे सविधान में संशोधन कर पंजाब में राष्ट्रपति शासन वनाए रखने का प्रावधान किया गया था, ताकि घुसपैठ से निपटा जा सके 'राजनीति से प्रेरित' आधार पर बिहार मे 1998 मे राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति ने एक बार अपने प्रस्ताव लौटाने के अधिकार राजीव धव का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति शासन टाल दिया था राष्ट्रपति शासन प्रकरण (1993) मे उच्चतम न्यायालय ने अल्प बहुमत से सुझाव दिया था कि अवाछित राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में वह संवैधानिक समीक्षा कर सकता है और चेतावनी दी कि जिन विधानसभाओं को समय से पूर्व या अन्यायपूर्ण ढंग से भग कर दिया गया है, उन्हे वह पुन स्थापित कर देगा हालाकि इन सशोधनात्मक ओर न्यायिक प्रयासो से सत्ता का दुरुपयोग रोका नहीं जा सका इसलिए कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के अधिकार को संविधान से पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए न्यायपालिका तथा समतावादी न्याय यद्यपि एक स्वतंत्र न्यायपालिका आजादी के आदोलन की महत्त्वपूर्ण मागो मे से एक थी, लेकिन भारतीय संविधान के निर्माता न्यायपालिका को अधिक अधिकार देने के प्रति सतर्क थे फिर भी उन्होने उच्च न्यायालयो तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रभावी किए जाने वाले मौलिक अधिकारो से सबंधित अध्याय तैयार किया उच्च न्यायपालिका द्वारा असवैधानिक, मनमाने या अनुचित वैधानिक या कार्यपालिक कार्यों को रद्द करने या उनकी समीक्षा करने से भी उन्हे एतराज नही रहा मौलिक अधिकारों को असख्य नियंत्रणो से घेरने तथा न्यायपालिका को कानून की विधिवत प्रक्रिया सुनिश्चित करने के व्यापक अधिकार देने से इनकार कर देने के साथ संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका को उससे भी कम भूमिका प्रदान की जो न्यायपालिका आने वाले वर्षो मे स्वयं को देना चाहती थी संविधान ने एक एकीकृत न्यायपालिका बनाई, जिसमे शीर्प पर उच्चतम न्यायालय तथा प्रत्येक राज्यो मे उच्च न्यायालय स्थापित किया गया प्रत्येक राज्य में निचली अदालतो की देखरेख और नियंत्रण उच्च न्यायालयो को सौपा गया अधिकाश मामलो में अपील उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय निपटा सकते है सविधान की व्याख्या, सत्ता का दुरुपयोग तथा मौलिक अधिकारो के मामलों में निर्णय करने का विशेषाधिकार उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो को है केंद्र तथा राज्य या राज्यो के बीच विवादो को निपटाने का एकमात्र अधिकार उच्चतम न्यायालय को है किसी न्यायिक संस्था की विशेष अपील सुनने और राष्ट्रपति द्वारा पूछे जाने पर उचित राय देने का भी इसे अधिकार है भारतीय उच्चतम न्यायालय विश्व के सर्वोच्च शक्तिशाली और काम के बोझ से दबे शीर्ष न्यायालयो मे से एक उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो मे नियुक्तिया वकील - समुदाय, न्यायपालिका तथा उच्चतम न्यायालय के मामले में अन्य विशिष्ट न्यायविदो मे से की जाती है सविधान निर्माताओ द्वारा न्यायिक नियुक्तियों की मूल प्रक्रिया राजनीतिक आधार पर परिकल्पित की गई थी, जिसमे राष्ट्रपति ( प्रधानमंत्री की सलाह पर) न्यायपालिका के परामर्श से उच्च न्यायिक नियुक्तियां करते थे लेकिन 1982, 1993 तथा 1998 के तीन मामलों के बाद परामर्श की आवश्यकता को परिभाषित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधीशो का एक समूह बनाकर उच्च न्यायालयो तथा उच्चतम न्यायालय में सभी नियुक्तियो की देखरेख तथा स्वीकृति का काम उसे सौप दिया. इस समूह का निर्माण न्यायिक विधि के निर्माण का एक उदाहरण है ओर मूल रूप से परिकल्पित निर्णायक अधिकारों से कही अधिक अधिकार न्यायाधीशो को देता है उच्च न्यायालयो तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशो को हटाने के प्रावधान जटिल है इनके तहत एक विशेष न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई और पुष्टि के लिए ससद के दोनों सदनों द्वारा महाभियोग की कार्यवाही आवश्यक है 1992 में संसद द्वारा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी रामास्वामी को एक न्यायिक अभिकरण द्वारा भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर महाभियोग प्रस्ताव पारित करने में विफल रहने के बाद यह चिता व्यक्त की गई थी कि उच्च तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशो को अनुशासित करना या हटाना संभव नहीं है. परिणामस्वरूप, विधि आयोग तथा अन्य क्षेत्रो से एक प्रस्ताव आया कि उच्च तथा उच्चतम न्यायालयो मे न्यायाधीशो की नियुक्तिया, उन्हे अनुशासित करने का दायित्व, उनके खिलाफ शिकायते सुनने और उन्हें पद से हटाए जाने के बारे मे निर्णय एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग को करना चाहिए, जो यह सुनिश्चित करे कि न्याय करने वाले व्यक्तियों का परीक्षण और उनकी जवाबदेही भी न्यायपूर्ण ढंग से की जाए मौलिक अधिकार और विधि का शासन मौलिक अधिकारों वाला अध्याय शासन के सभी पहलुओं को प्रस्तुत करता है, जिसमे शासन द्वारा नियत्रित सार्वजनिक उपक्रम, सभी कानून, नियम और भारतीय नागरिको व अन्य व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों के विषय में कार्यपालिका के आदेश शामिल है मौलिक अधिकारो मे समता का अधिकार (सकारात्मक गतिविधि की सभावनाओ सहित ), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सगठन सबधी स्वतंत्रता आवागमन की स्वतंत्रता व्यवसाय की स्वतंत्रता, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त जीवन तथा देहिक स्वतंत्रता से वचित नही किया जाना, शोषण से मुक्ति, धार्मिक तथा सास्कृतिक स्वतंत्रता और इन स्वतंत्रताओ की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार सम्मिलित है मौलिक अधिकारों के अध्याय को नीति-निदेशक तत्त्वो के अध्याय के साथ पढा जाना चाहिए, जो राष्ट्र के सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को परिभाषित करता है सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को राष्ट्र के शासन का आधार माना जाता है, हालाकि न्यायालय द्वारा इन्हे प्रभावी नहीं बनाया जा सकता उच्चतम न्यायालय की न्यायिक सर्वोच्चता की खोज 1950-52 में प्रारंभ हुई, जब न्यायालय ने भूस्वामियों के पक्ष मे निर्णय देते हुए कृषि सुधारों के प्रावधानों को अवैध घोषित कर दिया तथा सरकार के अभिवेचक (सेसर करने के अधिकारों में कटौती कर दी, जिससे जन-व्यवस्था बनाए रखने की उसकी क्षमता में कमी आ गई इसके बाद न्यायपालिका तथा विधायिका के बीच एक लबा सघर्ष सपत्ति के अधिकार के प्रश्न पर चला, जिसे 1978 में मोलिक अधिकार के तौर पर रद्द कर दिया गया यद्यपि 1950-77 के दौरान उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयो का लेखा स्वतंत्रता तथा मौलिक अधिकारो के प्रति चिता व्यक्त करने तथा सरकार द्वारा सामाजिक एवं आर्थिक नियमन नियंत्रण के एक व्यापक ढाचे पर सहमति के सकेत करने से भरा पडा है राष्ट्रीय आपातकाल (1975 - 77 ) के दौरान उच्चतम न्यायालय नागरिक स्वतंत्रताओ के रक्षक की अपनी भूमिका से पीछे हट गया हालाकि 1977 के बाद से उच्चतम न्यायलय ने एक नया मानवाधिकार न्यायशास्त्र तैयार किया, जीवन तथा स्वतंत्रता के अधिकार के दायरे को बढाकर इसमें गोपनीयता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण और अन्य अनेक उल्लखनीय अधिकारो को सम्मिलित किया गया और अदालत ने इन अधिकारों के सरक्षण के लिए कानून की एक सक्रिय प्रक्रिया लागू की सविधान के निर्माण के समय से उच्चतम न्यायालय प्रेस तथा नागरिको की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रजातान्त्रिक ढंग से काम करने के लिए नियम बनाने में पर्याप्त सर्तक रहा है समानता के प्रावधानों की व्यापक व्याख्या करते हुए अदालत ने एक सतुलित सकारात्मक कार्ययोजना का समर्थन किया उच्चतम न्यायालय ने नर्देशात्मक सिद्धातो के साथ शोषण विरोधी प्रावधानों की भी व्याख्या की तथा बधुआ और बाल श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए योजनाए तैयार की विभिन्न सरकारों द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारो को सीमित करने के प्रयासों को देखते हुए न्यायालय ने इन अधिकारों को पर्याप्त मान्यता प्रदान की, यद्यपि बहुधार्मिक तथा बहुसास्कृतिक समाज की समस्याओं के संदर्भ मे कुछ ज्यादा ही बराबरी बनाए रखने के आरोप में कुछ अदालती निर्णयों की आलोचना भी की गई है न्यायालय ने आपराधिक मामलो के संबंध में भी सिद्धात तैयार किए है तथा अत्याचार विरोधी विधिशास्त्र बनाकर यह सुनिश्चित किया है कि हिरासत मे कैदियों के साथ उचित व्यवहार हो ओर उन्हें सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए. न्यायिक पुनरावलोकन द्वारा प्रशासनिक प्रक्रियाओ का कडाई से विश्लेषण किया जाता है, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित रहे सुनिश्चित सवैधानिक मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए उच्च न्यायालयो तथा उच्चतम न्यायालय तक सीधी पहुच बनी हुई है भारत को अनेक सामाजिक क्रातियो और दैनिक प्रशासकीय व्यवस्था की विफलताए विरासत में मिली है वोहरा समिति की रिपोर्ट (1995) के अधिकृत फैसले से पता चलता है कि कानून के अनुसार शासन की व्यवस्था खतरे में हो सकती है और व्यापक रूप से तथा मीडिया की सतर्कता और न्यायालयो के नियत्रण से ही भारत में कानून के अनुसार लोकतात्रिक शासन सरक्षित है राजीव धवन भारत के उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा भारतीय विधि संस्थान में मानद व्याख्याता और अंतर्राष्ट्रीय न्यायविद् आयोग (आईसीजे) के सदस्य है इन्होने विधि एवं नागरिक विषयो पर कई पुस्तके, प्रबध और लेख लिखे है एस. ज़ेड कासिम समुद्र - विज्ञान के तत्त्व समुद्र - विज्ञान महासागर का उसकी समग्रता में वैज्ञानिक अध्ययन है यद्यपि यह भू-विज्ञान की एक शाखा के रूप में वर्गीकृत है, लेकिन इसकी प्रकृति बहुशाखीय है और लगभग सभी विज्ञान और उन्नत तकनीकों की सहायता से महासागरीय सर्वेक्षण इसमें समाहित है उच्च प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग ने इसे अपेक्षाकृत एक ऐसे नए विज्ञान का रूप दिया है, जो प्राचीन काल से मनुष्यों द्वारा किए गए समुद्री अवलोकनो से बहुत आगे तक जाता है समुद्र विज्ञान के सामान्य तौर पर निम्नलिखित वर्ग है 1 भौतिक समुद्र विज्ञान मे समुद्री धाराओ, समुद्र परिसचरण, ज्वार, तरग प्रणालियो, तापमान तथा लवणता का वितरण एव उमडने की परिघटना का विश्लेषण जैसी समुद्र की परिवर्तनशीलता और गतिकी का विश्लेषण किया जाता है इसके अंतर्गत जल के द्रव्यमानो और उनका अभिनिर्धारण तथा समुद्र के अभिलक्षणो की भविष्यवाणी का गणितीय प्रतिरूपण द्वारा अध्ययन शामिल है 2 रासायनिक समुद्र विज्ञान के अंतर्गत समुद्र का संगठन, समुद्र में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का वितरण, जल व अवसादो की उर्वरता (पोषक अश) तथा रासायनिक क्रिया, मानव गतिविधियों के कारण जलीय गुणवत्ता में परिवर्तन (प्रदूषण), मीठे पानी का समुद्र में गिरना, नदी अपवाह, अवसाद भार तथा अन्य कई समस्याएं शामिल है 3 जैव समुद्र विज्ञान समुद्री जीवन पर केंद्रित है इसके तहत समुद्र में जटिल जीवन-चक्र मे हिस्सा लेनेवाले सभी प्राणी और वनस्पतिया आती है यह चक्र अधिकतर तैरने वाले सूक्ष्म पादपो पर आधारित है, जो पादपप्लवक (फाइटोप्लैक्टॅन) कहलाते है और ऊर्जा प्रचुर जीवभार के प्राथमिक उत्पादक होते है ये पादपप्लवक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत सूक्ष्म प्राणीप्लवक (जूप्लेक्टॅन) से लेकर खाद्य श्रृंखला के उच्च जीवो तक जैसे शैलफिश, मछली तथा स्तनधारियो द्वारा उपभोग कर लिए जाते है 4 भू - वैज्ञानिक तथा भू-भौतिक समुद्र विज्ञान के अंतर्गत अवसादों, चट्टानो तथा समुद्र तल के खनिजो व अपतटीय तेल तथा गैस की खोज और विश्लेषण, महासागरीय बेसिन के उद्भव व इतिहास तथा भूपर्पटी (अर्थक्रस्ट) के प्रमुख सरचनात्मक लक्षणों का अध्ययन शामिल है 5 समुद्री यत्रीकरण एव अभियांत्रिकी- सभी प्रकार के उपकरणो जैसे अन्वेषी उपकरण की जानकारी पर जोर देती है जो जहाजो अथवा उपग्रहों से विभिन्न पैरामीटर का अध्ययन करने में काम आते है, जिसमे समुद्री सतह के तापमान, पानी का रग, समुद्र तल की बनावट, तटीय क्षरण, अवसादन जैव अवरोध (बायोफाउलिग ) तथा सक्षारण शामिल है f prep की पुरातत्व विज्ञान मे जलमग्न तटरेखाओ, डूबे हुए जहाजो की खोज हस्योद्घाटन के लिए इसके द्वारा गहरे शैक्षणिक महत्त्व की कई ऐति पता लगाया जा सकता है विज्ञानी प्रदत्त प्रसस्करण एक डाटा केंद्र में आधारित होता है, जो समुद्र विज्ञान सबधी तथ्यो (डाटा) के प्रसार के लिए जिम्मेदार हो उच्च गतिवाले कम्प्यूटरो द्वारा एक-दूसरे से जुड़े है समुद्र विज्ञानी मे भागीदारी निभाने वाले जहाज और समुद्र तट पर स्थित स नी प्राय विश्व के नहासागरों की चर्चा बड़े-बड़े बेसिनो से जुड़े खारे रूप में करते हैं, जो पृथ्वी की सतह के तीन- चोथाई भाग पर फैला दक्षिण एशिया की सीमाओ को बनाता है यह प्रशात और अटलाटि ये प्राय तीन महासागर कहलाते है हिंद महासागर कई देशो से देशो से, जो दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनि सात देशो में भारत, बाग्लादेश, पाकिस्तान तटवर्ती है, श्रीलका तथा ट्रान स्थलरुद्ध राष्ट्र है समद विज्ञान ऐतिहासिक सर्वेक्षण अनादि काल से भारतवासियों को समुद्र की गहरी जानकारी थी उन्होंने इसका उपयोग भोजन के स्रोत क रूप में और व्यापार, सचार तथा परिवहन के लिए किया प्राचीन पौराणिक वर्णन मे समुद्र मथन अर्थात उसकी सपत्ति के निष्कर्षण के लिए समुद्र को मथने की क्रिया, समुद्र की तलहटी से खनिज प्राप्त करने की आधुनिक तकनीक से अद्भुत साम्य रखती है सिधु घाटी सभ्यता के दौरान हडप्पा तथा मोहजोदाडो के निवासियों ने भी अपनी अभियांत्रिकी परियोजनाओं ने अपने समुद्री ज्ञान का उपयोग किया था उदाहरण के लिए, हडप्पावासियो ने लगभग 3,500 से 4,000 वर्ष पूर्व गुजरात के लोथल नामक स्थान पर ज्वार में जहाजो को शरण देने के लिए बेहतरीन गोदी का निर्माण किया था गोदी के अवशेष बताते है कि हडप्पावासियों को समुद्री तूफान तथा लहरो की प्रणाली व उनकी समयावधि की समझ थी प्रमाण यह भी बताते है कि मोहेजोदाडो के लोगो ने समुद्र की तटीय प्रणाली के व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग समुद्र किनारे अपने घरों के निर्माण तथा सफाई व कचरे व गदे पानी के निकास की सुविधाओ के लिए किया मध्यकालीन युग के दौरान समुद्र की परिस्थितियों तथा समुद्री जीवन पर उनके प्रभाव का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार किया गया था उस काल के मौजूदा प्रमाण दर्शाते है कि भारतीयो ने समुद्री यातायात परपरा की स्थापना की थी अंग्रेजो के आगमन के साथ ब्रिटिश व भारतीय प्रतिभाओं के समन्वय ने भारत मे समुद्र विज्ञान की नीव रखी बगाल की रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ने पहल की और भारतीय समुद्र सर्वेक्षण (इंडियन मैरीन सर्वे) की स्थापना 1874 में कलकत्ता ( वर्तमान कोलकाता) से हुई 1881 में 580 टन क सर्वेक्षण पोत आर आई एम एस इन्वेस्टिगेटर ने कार्य प्रारंभ किया इसके बाद 1908 में 1708 टन के इन्वेस्टिगेटर II को लाया गया तथा कुछ समुद्र विज्ञान सबधी अवलोकन (जीव विज्ञान के अलावा ) प्रारंभ हुए 1930 के दशक में पहले-पहल त्रावणकोर विश्वविद्यालय (वर्तमान केरल विश्वविद्यालय) तथा मद्रास विश्वविद्यालय में समुद्री जीव विज्ञान का विश्वविद्यालयस्तरीय अध्यापन एवं शोध गतिविधियों का सचालन शुरू हुआ बबई विश्वविद्यालय ने 1940 मे तथा आध्र विश्वविद्यालय ने 1950 के प्रारंभ मे इसका अनुसरण किया तदनतर 1960 मे दो केंद्र स्थापित हुए, एक अन्नामलाई विश्वविद्यालय मे जिसमे बाद मे समुद्र विज्ञान की सभी विधाओ की शुरुआत हुई बहरामपुर विश्वविद्यालय, उडीसा मे 1970 के मध्य में तथा गोण विश्वविद्यालय में 1980 में समुद्र विज्ञान के कार्यक्रमों की शुरुआत हुई आजादी के बाद 1947 में समुद्री ससाधनो के महत्त्व को पर्याप्त रूप से समझने की शुरुआत हुई तथ समुद्र के जैविक संसाधनों का पता लगान के लिए तमिलनाडु के मडपम केप में केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई 20वी शताब्दी के अंत तक भारत समुद्री खाद्य का विश्व में अग्रणी उत्पादक व निर्यातक बन गया 1950 के अंत तक समुद्र वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने यह अनुभव किया कि हिंद महासागर पर विश्व में सबसे कम अध्ययन हुआ है अत 1960 मे बहराष्ट्रीय कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय हिंद एस जेड कासिम हुने हुई लगना ही सह झगदै उन सक्छ a ৬দরf तक सगठन (यूनेस्को) तथा अतर्शासकीय महासागरीय आयोग द्वारा स गर्यक्रम में 20 देशों के 40 जहाजो ने भाग लिया, भारत के चार ज रही दिसबर 1965 मे कार्यक्रम के बद होने के बाद जनवरी 1966 ऑफ ओशिएनोग्राफी (एनआईओ) ने जन्म लिया वैज्ञानिक एवं औ की एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में एनआईओ ने कोचीन (व ग़ 1972 में इसे गोवा स्थानातरित कर दिया गया अब इसका मुख्याल द मुबई, कोच्चि तथा वॉल्टेयर मे है गोवा स्थित इसके विशाल परिस । कर्मचारी कार्यरत है दिसबर 1975 में एनआईओ ने भारत में निर्मि जलावतरित किया इस पोत ने हिद महासागर में कई सौ दौरे ए क्षेत्र का सर्वेक्षण किया • Bem vel pela g भारत सरकार ने प्रधानमंत्री के मातहत प्रभार मे समुद्र विकास विभाग उद्देश्य समुद्री क्षेत्र के तीव्र विकास को बढावा देना था विभाग पोत 'सागर कन्या' तथा 'सागर सपदा क्रमश 1983 तथा 1984 मे समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (नेशनल इस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉ टेका अध्ययन केंद्र की स्थापना की इसके अलावा समुद्री क्षेत्र मे • अटार्कटिका अभियान भारत का इस तरह का पहला अभियान द अटार्कटिका पहुचा भारत ने उस बर्फीले महाद्वीप पर दो स्थायी क सयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (1982 ) द्वारा एक नई व्यवस्था, विशिष्ट अ पॉमिक जोन) की स्थापना समुद्र अनुसंधान और संसाधन प्रबंधन व नहत तटीय राज्यो को अनन्य आर्थिक क्षेत्र पर अधिकार मिले हे श के क्षेत्र मे तट के बिंदु से 200 नॉटिकल मील तक का अधिका क्षेत्र लगभग 20 लाख 20 हजार वर्ग किमी है द्वारा समुद्र पुरातत्व केंद्र की स्थापना की गई थी. उपलब्धियो मे भारत काल के ऐतिहासिक द्वारका बदरगाह की खोज तथा कावेरी . पुहर बदरगाह के अन्वेषण का कार्य शामिल है. के लिए भारत का पहला सफल गहरा सागरीय अन्वेषण हिंद मह । 1981 तक अनुसंधान पोत गवेषणी का उपयोग करते हुए सचालि 26 जनवरी 1981 को 5,700 मीटर की गहराई से उठाया गया इस 'सागर कन्या' को पिड़ों के सर्वेक्षण में लगाया गया तथा सैकड़ो त से निकाले गए इनका उपयोग ताबा, निकल तथा कोबाल्ट के निष्क किया गया मध्य हिंद महासागर में कई लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र डो के कई नए सभावित स्थलो का सीमाकन हुआ इस कार्य के आ कास, जापान तथा तत्कालीन सोवियत संघ के साथ अग्रणी निवेश पहला देश था, जिसे 17 अगस्त 1987 को इटरनेशनल सीब्रेड 3 करण किग्सटन जमैका) द्वारा नाड्यूल्स पिड के दोहन एव विकास समग्र रूप में भारत ने समुद्र विज्ञान की सभी शाखाओ मे सार्थक योगदान दिया, जिसमे हिंद महासागर की लहरो तथा धाराओं की प्रणालियो, प्रवाह के तरीको, पोषक तत्त्वो, जैविक उत्पादकता, जल स्तभो मे ऑक्सीजन का वितरण, उमडने वाले क्षेत्रो, नदी मुहानो ( ज्वारनदमुखी प्रवाह के निदर्शन सहित) रेतीले तटो, तली समुदायो, पोषक तत्त्वो के चक्र, सूक्ष्म जैविकी, जैव अवरोध, तटीय भूक्षरण, उपकरण आवश्यकताओ, यात्रिक समस्याओं, समुद्री खरपतवारो, गरानो, प्रवाल भित्तियो, चुनिदा क्षेत्रो ने समुद्र विज्ञानी गतिविधि (निदर्श सहित), मॉनसून, चक्रवातो, सुदूर सवेदन तथा उपग्रह चित्रण, पौधो व प्राणियो से जैव सक्रिय पदार्थो, खनन एव खनिज नीति, अवसादन तथा अरब सागर व बंगाल की खाडी मे प्रदूषण के स्रोतो के अध्ययन शामिल है मैग्रोव की स्थिति पर रपट समुद्र विज्ञान मे दक्षिण एशिया की दृष्टि से विशेष रुचि का विषय मैग्रोव है, जो दलदली उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय झाडियो तथा अवस्तभ जड युक्त पेडो वाले जगल होते है ये भूसागरीय अंतरापृष्ठ तथा नदी के मुहानो मे ऊपरी धारा तक, जहा पानी मे कुछ मात्रा में खारापन होता है पाए जाते है तटों की सुरक्षा तथा मत्स्य एवं प्रवाल भित्तियो के स्वास्थ्य के लिए मैग्रोव जीवनदायी होते है, लेकिन उनका तीव्रता से ह्रास हो रहा है तथा ये दुनिया के सर्वाधिक सकटापन्न पारिस्थितिक तत्रों में से हें हिद- प्रशात क्षेत्र मे मैग्रोव की विविधता और बहुतायत है और खासकर बाग्लादेश व भारत में सुदरबन उल्लेखनीय है 21वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में मैग्रोव से ढका क्षेत्र 3,500 वर्ग किमी था, जिसका 9 / 10 भाग अडमान निकोबार द्वीप सहित पूर्वी तट से जुड़ा है तथा शेष दसवा भाग पश्चिमी तट से इनमे से कुछ शानदार मैग्रोव वन पश्चिम बंगाल के सुदरबन तथा अडमान निकोबार द्वीप मे है पश्चिमी तट पर मैग्रोव वन कहीं-कहीं छितरे हुए है, मानव गतिविधियों से इन्हे गभीर क्षति पहुंची है प्रवाल भित्ति (कोरल रीफ) की स्थिति पर रपट प्रवाल भित्ति उष्णकटिबंधीय सागरो के अद्वितीय एव शानदार पारिस्थितिक तत्र मे एक है यह विश्व के सर्वाधिक जैव समृद्ध पारिस्थितिक तत्रों में से है तथा समुद्र की जैविक गतिविधियों का प्रभावशाली लक्षण है यह कैल्शियम ( चूना) जमा करने वाले प्राणियो व शैवालो का बड़ा सकलन है, मुख्य रूप से ये पाषाण प्रवाल कहलाने वाले प्राणियो के है प्रवाल भित्तियों का निर्माण सैकडो, हज़ारो सालो से हो रहे कैल्शियम के लगातार जमा होते रहने का परिणाम है परतु भित्ति (रीफ) का विनाश बहुत ही जल्द हो सकता है पूरी दुनिया मे प्रवाल भित्ति की क्षति या विनाश खतरनाक रफ्तार से हो रहा है तथा समुद्रविज्ञानी इसके कारणों की छानबीन में लगे है उदाहरण के लिए, 1997-98 में प्रवालो के असामान्य रूप से विनाश तथा व्यापक रूप से उनके रंग उडने की घटना, जो गहन अध्ययनो का केंद्र रही है और जिसकी वजह से दक्षिण एशिया तथा अन्य क्षेत्रों के कई प्रभावित प्रवालो (कोरल्स) ने अपने सहजीवी शैवालो को निष्कासित कर दिया इससे उनका रंग उड़ने लगा और जीवनी शक्ति खत्म हो गई भित्तियों के स्वास्थ्य के लिए भावी सभावनाओ का सूक्ष्म परीक्षण जारी है भारत में तटीय प्रवाल भित्तिया मुख्य समुद्री तट पर बिखरे क्षेत्रों में पाई जाती है उदाहरण के लिए ये पश्चिम मे कच्छ की खाडी (गुजरात) नें तथा दक्षिण ( तमिलनाडु) मे पाक खाडी तथा मन्नार की खाडी मे मिलती है यद्यपि ये मुख्य रूप से चूने व कार्बाइड के कारखानो के उपयोग के लिए किए गए खनन से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है बाद में इन विनाशकारी गतिविधियों पर शासन द्वारा रोक लगा दी गई तथा कच्छ व मन्नार की खाड़ी के कई क्षेत्र सरक्षित घोषित कर दिए गए अडमान तथा निकोबार द्वीप के तटीय प्रवाल तथा लक्षद्वीप के प्रवाल द्वीपो के प्रवाल स्वस्थ हालत में है, यद्यपि 1998 मे रग उडने (विरजन) के कारण इन पर दुष्प्रभाव पड़ा था कुछ क्षेत्रो म उनका दोहन सजावटी सीपियो तथा मछलियो के लिए भी किया गया 1990 के दशक के अंत तक भारत में 200 से भी अधिक प्रवालो की प्रजातिया रिकॉर्ड की गई ऐसा माना जाता है कि इनमें से अधिकतर प्रजातिया अडमान-निकोबार द्वीपो में पाई जाती है समुद्र वैज्ञानिको तथा पर्यावरणविदों ने देश का आह्वान किया है कि कुछ क्षेत्रों को समुद्री उद्यान घोषित किया जाए, जिन्हें भूमि पर बनाए गए जैव नडल सरक्षित क्षेत्रों के समान ही दर्जा दिया जाए, ताकि भारत की सकटापन्न जैव विविधता का सरक्षण हो सके डॉ एस. जेड क़ासिम देश के पहले भारतीय अटार्कटिका अभियान दल के नेता, भारत सरकार के योजना आयोग के (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) सदस्य, भारत सरकार के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशिएनोग्राफी, गोवा के निदेशक और भारत सरकार के पर्यावरण विभाग तथा समुद्र विकास विभाग मे सचिव रहे है भारत की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों के निर्वाचित फेलो डॉ कासिम कई विश्वविद्यालयो म मानद प्रोफेसर, वर्ष 1992-93 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे कई पुस्तको के लेखक, 250 से भी अधिक शोधपत्रा का प्रकाशन, पद्मश्री व पद्म भूषण तथा ओशिएनोलॉजी इटरनेशनल-99 के पेसिफिक रिम लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
भारतीय संविधान की अभिकल्पना महज समधर्मी राष्ट्र राज्य के लिए ही नहीं की गई थी, बल्कि उस प्राचीन सभ्यता के लिए भी की गई थी, जो सदियों से अनवरत चली आ रही है और जो लोगो, भाषाओ धर्मो, विश्वासो और संस्कृतियों की विविधताओ को अगीकार करती है इसका प्रारूप सपत्ति आधारित मताधिकार प्राप्त एव भारत के विभाजन की छाया और बाद के दौर में कार्य कर रहे एक उचित प्रतिनिधित्व व प्रतिभासपन्न व्यक्तियो के प्रभावशाली मिश्रण वाली सविधान सभा द्वारा एक हज़ार नौ सौ छियालीस-एक हज़ार नौ सौ उनचास के दौरान तैयार किया गया इस संविधान की रचना लाखो भारतीयों की मागो तथा अभिलाषाओ की पूर्ति के लिए की गई थी यह जनसंख्या एक अप्रतिम और बहुरगी सास्कृतिक विविधता प्रदर्शित करती है जो हिदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन तथा अन्य आस्थाओ और नास्तिको से आई है लोगो का ऐसा क्षैतिज' विभाजन समाज के सपन्न और वचित लोगो के आतरिक विभाजन को छिपा नही पाया और वस्तुत इसने इन वर्गो मे 'ऊर्ध्वाधर' सामाजिक तथा आर्थिक अतर को और भी बढा दिया विभाजन से हुई अव्यवस्था तथा कई प्रदेशों के एकीकरण से एक गणतंत्र के बनने के बीच सविधान सभा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विभक्त एक मजबूत सघ की स्थापना की इस सघ का शासन संसदीय लोकतंत्र के सिद्धातो के अनुसार किया जाना था इसमें एक स्वतंत्र न्यायपालिका, मौलिक अधिकारो की गारटी और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धातो' के रूप में राष्ट्र के मार्गदर्शन हेतु सामाजिक न्याय के लक्ष्य परिभाषित थे मूल सिद्धांत यद्यपि सविधान सभा के प्रयासों की यह कहकर आलोचना की गई थी कि यह ब्रिटिश सरकार द्वारा एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में लागू गवर्नमेट ऑफ इंडिया ऐक्ट के विस्तार से ज्यादा और कुछ नही है, तथापि यह सम्मिलन इसके कुछ हिस्सो के योग से कहीं अधिक सिद्ध हुआ इस तरह की अत्यत विविधतापूर्ण सभ्यता हेतु निर्मित सविधान मे कई असामान्य बातो का समावेश होना अपरिहार्य था बावजूद इसके भारतीय संविधान कई उभरते हुए पूर्व औपनिवेशिक राष्ट्रो के सविधान के लिए एक आदर्श साबित हुआ है यह कई विस्तृत सिद्धातो पर आधारित है एक 'जन प्रतिनिधित्व का सिद्धात' सार्वभौमिक मताधिकार से संबंधित प्रावधानो मे प्रतिबिंबित है इसमें अछूतो तथा निचले तबको , आदिवासियो तथा आग्ल- भारतीयो का विशेष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है विशेष प्रतिनिधित्व प्रावधान नवीकरण योग्य है तथा प्रत्येक दशक में इसका नवीनीकरण किया जाता है राजीव ध्रुवन दो 'लोकतान्त्रिक अधिशासन का सिद्धात संसदीय प्रणाली मे उसी प्रकार सम्मिलत है, जिस प्रकार ब्रिटिश वेस्टमिस्टर प्रणाली में केंद्र या संघ, दोनो के स्तर पर ओर राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो के स्तर पर अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति केंद्र में राष्ट्र का प्रधान होता है तथा केंद्र द्वारा मनोनीत राज्यपाल अथवा लेफ्टिनेट गवर्नर राज्य इकाइयो तथा केंद्रशासित प्रदेशो के प्रमुख होते है तीन 'व्यक्तिगत तथा सामूहिक मानवाधिकारो नागरिक स्वतंत्रताओ तथा सामाजिक न्याय के सिद्धातो की घोषणा प्रस्तावना में की गई है इन्हे मौलिक अधिकारों के खड में दर्शाया गया है, नीति-निदेशक तत्त्व के खड मे ये लक्ष्य रूप में निर्धारित किए गए है तथा ये अनुसूचित जातियो, अनुसूचित जनजातियो, अन्य पिछडे वर्गों एवं अन्य के लिए बनाए गए कई विशेष प्रावधानो मे प्रतिबिवित होते है चार केंद्रीकृत सघ का सिद्धात केंद्र तथा घटक इकाइयों के बीच अधिकारो तथा दायित्वो के वितरण में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है केंद्र को कुछ अभिभावी अधिकार प्रदान किए गए है, जबकि अन्य निर्णायक अधिकार राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो को दिए गए है एक हज़ार नौ सौ बानवे से स्थानीय स्तर पर लोगों को कुछ सवैधानिक अधिकार देने के लिए बहुस्तरीय सवैधानिक रूप से सस्थापित स्थानीय सरकार का गठन किया गया पाँच 'न्यायिक अभिरक्षण का सिद्धात शक्तिशाली न्यायपालिका को सविधान की कार्यप्रणाली पर नजर रखने, कानूनी नियमों के अनुसार इसकी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने, लोकतत्र, मानवाधिकारो तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतो को लागू करने और दीवानी, फौजदारी व प्रशासनिक न्याय की प्रभावी प्रणाली का गठन करने की अनुमति प्रदान करता छः 'परिवर्तन तथा रूपातरण का सिद्धात' न केवल अस्थायी समस्याओं को सुलझाने के लिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी सविधान में समय-समय पर सशोधन किए जाने की अनुमति प्रदान करता है कि एक गरीब पूर्व औपनिवेशिक राष्ट्र को स्वतंत्र प्रभुसत्तापूर्ण, लोकतात्रिक, धर्मनिरपेक्ष तथा समाजवादी गणतंत्र के रूप में बदलने के लिए संविधान के समग्र उद्देश्यों की प्राप्ति हो सके सशोधन तथा अन्य परिवर्तन सविधानों को बतौर मापदड के नहीं बनाया जाता है सभी नही, लेकिन अधिकाश सविधान लचील होते के है आतरिक रूप से उन दैनिक क्रियाकलापो में परिवर्तन की गुजाइश होती है, जबकि बाह्य रूप से उन्हें सशोधनो द्वारा बदला जा सकता है ये समय के साथ विकसित होते हैं और हमेशा 'है' मे न होकर, समस्याओं तथा सभावनाओ का, जब भी वे उठ खडी हो, सामना करते हुए 'बन रहे की स्थिति में होते है भारतीय संविधान भी इसका अपवाद नही है भारतीय संविधान में अनेक प्रकार से बाह्य परिवर्तन किए जा सकते है साधारण संसदीय बहुमत द्वारा घटक राज्यो तथा केंद्रशासित प्रदेशो की सीमाओं सहित इसके कुछ हिस्सो में परिवर्तन किया जा सकता है अन्य हिस्सो को ससद के दोनो सदनो के दो-तिहाई बहुमत द्वारा ही बदला जा सकता है सघीय ढाचे से सबंधित प्रावधानो ने परिवर्तन के लिए केवल ससद का दो तिहाई बहुमत ही आवश्यक नहीं होता, बल्कि कम से कम आधे राज्यो की विधायिकाओ द्वारा अनुमोदन भी जरूरी होता हे बगावत द्वारा तख्तापलट कर सत्ता परिवर्तन दक्षिण एशिया तथा अन्य राष्ट्रो के सवैधानिक इतिहास का हिस्सा रहा है, लेकिन भारत सभवत आपातकाल के सदिग्ध मामले को छोड़कर इस सकट से दूर ही रहा है र विधान परिवर्तन के लिए जटिल प्रक्रिया होने के बावजूद भारतीय संविधान दो हज़ार एक तक चौरासी सशोधना से बच नही पाया संविधान के पाठ की स्याही सूख भी नही पाई थी कि इसे बनाने वाली सवैधानिक समिति ने ही इसमे संशोधन कर डाला एक हज़ार नौ सौ पचास-इक्यावन में पहली लोकसभा की भूमिका अदा करते हुए सविधान सभा ने ही जमीदारों के पक्ष मे दिए गए सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो के कुछ निर्णयो को, जो कृषि भूमि के पुनर्वितरण द्वारा किए जाने वाले भूमि सुधार मे बाधक थे तथा सकारात्मक कार्यवाही की सभावनाओं पर सदेह प्रकट करते थे और सरकार की लोक व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियो को प्रभावित करते थे, उलटने हेतु सविधान में संशोधन किया न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच मतभेद एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के प्रसिद्ध मौलिक अधिकार मामले तक 'सवेधानिक मच' के केंद्र में रहे, जब उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि संविधान को संशोधित करने की अपनी सपूर्ण शक्ति के बावजूद ससद संविधान के 'मूल ढाचे' मे परिवर्तन नही कर सकती यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि आखिर सविधान के मूल ढांचे में क्या शामिल है एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर तथा एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे के बीच विभिन्न निर्णयो मे सर्वोच्च न्यायालय के ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा मूल ढाचे का हिस्सा है तथा इसे हटाया नहीं जा सकता है राष्ट्रपति शासन तथा बाबरी मस्जिद प्रकरण मे धर्मनिरपेक्षता को संविधान के मूल ढाचे क एक अग के रूप में मान्यता दी गई एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में प्रस्तावना के संवैधानिक लक्ष्यों में समाजवाद के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता को जोड़ा गया तर्कसंगत रूप से, मुक्त बाजार के इस युग में भी, समाजवाद मूल ढांचे का एक भाग है कम से कम उस स्तर तक, जहा यह संविधान के समानतावादी सिद्धातो को सुदृढ करता है तथा सामाजिक व आर्थिक न्याय की प्राप्ति हेतु अधिमूल्यन व पुनर्वितरण के उपायो से अधिक लाभकारी है यद्यपि यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशिष्ट मान्यता दिए जाने से बचा रह गया है पर लोकतंत्र को राष्ट्र की प्रभुसत्ता तथा उसकी गणतात्रिक प्रकृति के साथ मूल ढाचे का हिस्सा निश्चित तौर पर मानना चाहिए फिर भी इसका निष्कर्ष यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि लोकतंत्र या लोकतात्रिक प्रतिनिधित्व के किसी विशिष्ट स्वरूप को भी मूल ढाचे के रूप मे सरक्षित किया जाएगा तथा यह अपरिवर्तनीय सवैधानिक सिद्धांत के रूप में संशोधन से बचा रहेगा भूमि सुधारो के विवादों के मूल में विद्यमान न्यायिक सर्वोच्चता के लिए संघर्ष के अलावा, संविधान को बदलने के अधिकार का उपयोग तथा दुरुपयोग, दोनो ही हुए है एक हज़ार नौ सौ छप्पन मे सघीय प्रणाली में विभाजन पश्चात के परिवर्तनों को शामिल करने के लिए कई सशोधन किए गए थे भूमि सुधार सशोधन तथा संविधान संशोधन हेतु ससद के असीमित अधिकारों का समर्थन करने वाले संशोधन को एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर मे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित मूल ढाचे के सिद्धात से चुनौती का सामना करना पडा था आपातकालीन संशोधनो की अभिकल्पना प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी के हाथो मे सत्तावादी नियन्त्रण बनाए रखने के लिए थी आपातकालीन सशोधनो को उलटने वाले संशोधन कमजोर थे तथा उनमे से सभी लागू नहीं किए गए पजाब सशोधन पजाब मे जारी आपातकाल की स्थिति- जो केंद्र से अलग होने हेतु एक सशस्त्र विद्रोह था - से निपटने हेतु सरकार की शक्ति का दायरा बढाने के लिए थे. दलबदल विरोधी संशोधन सासदो को ससदीय सरकार को अस्थिर करने से रोकने के लिए था पंचायत सशोधन ने सघीय सवैधानिक प्रणाली में नए स्तर को जोड़कर उपेक्षित समुदायो तथा महिलाओ का स्थानीय शासन मे प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करवाया एक हज़ार नौ सौ पचानवे के संविधान संशोधन, एक हज़ार नौ सौ बानवे में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयो को उलटने के लिए किए गए थे, जिसके अंतर्गत प्रशासन मे उच्च पदोन्नति वाले पदो में सकारात्मक कार्यवाही करने से रोक लगाई गई थी एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में महिलाओं को ससद तथा राज्य विधानसभाओ में प्रतिनिधित्व प्रदान करने तथा संसदीय अधिशासन की अनिश्चितताओ को रोककर स्थिरता प्रदान करने के लिए सविधान संशोधन की योजना थी दुरुपयोग के सुस्पष्ट उदाहरणो के बावजूद सविधान मे मूलभूत सिद्धातो को वास्तविक क्षति पहुचाए बिना सविधान संशोधन के अधिकारा का आमतौर पर यथोचित तथा रचनात्मक रूप से ही प्रयोग किया गया है लोकतांत्रिक तथा संसदीय प्रक्रियाएं उपेक्षित समुदायो तथा समूहों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए विशेष प्रावधानो सहित सार्वभौमिक मताधिकार प्रणाली पर निर्मित भारत विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय लोकतत्र है एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में इसकी कुल आबादी तीन हज़ार पाँच सौ उनहत्तर करोड़ थी, जो दो हज़ार एक में बढ़कर एक हज़ार सत्ताईस अरब हो गई है, जिसमे लगभग चालीस प्रतिशत लोगो को मताधिकार प्राप्त है इतने बड़े चुनाव क्षेत्र हेतु चुनाव का आयोजन करने का विकट दायित्व सवैधानिक रूप से गठित एक स्वायत्त निकाय को सोपा गया है, जिसे 'चुनाव आयोग' कहते हे सवैधानिक अथवा न्यायिक समीक्षा को छोड़कर इसके पर्यवेक्षण, नियत्रण तथा चुनावों के निर्देश मे हस्तक्षेप नही किया जा सकता मतदान करने वाले निर्वाचन क्षेत्रों के सीमाकन का कार्य एक वैधानिक निकाय परिसीमन आयोग' को दिया गया है निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन के पश्चात प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक मतदाता सूची बनाई जाती है, जिसके आधार पर चुनाव कराए जाते है मतदान करने तथा चुनाव लड़ने की पात्रता आयु, मानसिक क्षमता, वित्तीय तथा आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे सवैधानिक व कानूनी मापदडो के आधार पर निर्धारित की जाती है चुनावो का निर्विघ्न सचालन सुनिश्चित करने तथा सामजस्य को हानि पहुचाने वाली घृणित, विभाजक या राजद्रोहात्मक अपीलो को रोकने हेतु कई चुनावी अपराधो तथा चुनावी दुराचारो के अभियोजन के लिए पहचान की गई है कुछ वर्षो से राजनीतिक दलो द्वारा 'पैसे व बाहुबल' वाले लोगो को चुनाव मैदान में उतारने के ऐसे तरीको पर चिता व्यक्त की जा रही है, जो चुनाव प्रक्रियाओं को दूषित करते है तथा ऐसे लोगो के चुने जाने मे सहायता करते है, जो गभीर अपराधो के अभियुक्त तो है, पर उन्हें सजा नही हुई है और सजा दिए जाने से व चुनाव लड़ने के अयोग्य हो सकते है इस तरह के लोगो को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सविधान तथा चुनाव कानून में संशोधन के सुझाव का विधि आयोग तथा अन्य लोगों ने भी समर्थन किया है, लेकिन अब तक इसे राजनीतिक समर्थन नहीं मिला है इसके बावजूद चुनाव प्रणाली भारतीय जनता के हाथों में भलीभाति कारगर सिद्ध हो रही है, जिसने शासकों को विवेकपूर्ण ढंग से निर्वाचित व अपदस्थ किया है ससदीय प्रणाली संसदीय प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री तथा उसके मंत्रिमंडल या मंत्रिपरिषद, जो सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते है, के सहयोग तथा 'सलाह' से कार्य करता है लोकसभा के सदस्य साधारण बहुमत द्वारा किसी भी सरकार को सत्ता से हटा सकते है सवैधानिक रूप से सुनिश्चित 'आवटन' तथा 'कार्य सपादन' द्वारा यह निर्धारित करने के लिए कि सरकार के लिए किस अधिकार को कोन प्रयोग में लाएगा, क्रमश केंद्र तथा राज्यो मे सभी कार्यकारी शक्तियो का प्रयोग क्रमश राष्ट्रपति तथा राज्यपाल के नाम पर किया जाता है इस सुझाव को कि राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह को अनदेखा करने के लिए स्वतंत्र है, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर मे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय से निर्णयात्मक रूप से अस्वीकार कर दिया इस निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि भारत द्वारा ब्रिटिश संसदीय प्रणाली अगीकार की गई है यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसमे कार्यकारी प्रमुख मंत्रिमंडल की सलाह को मानने के लिए वाध्य होता है मंत्रिमंडल के अदर प्रधानमंत्री सभी समकक्षा में प्रथम नहीं होता, बल्कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति के अनुसार पूरी तरह से सर्वेसर्वा होता है तथा वह सभी या किसी भी मंत्री को नियुक्त कर सकता है अथवा हटा सकता है बहरहाल, आपातकाल के पश्चात इस तरह के स्वच्छाचारी अधिकारो तथा मत्रिमंडल के फैसले पर मात्र मुहर लगाने वाले राष्ट्रपतियों में विश्वास की कमी ने एक सवैधानिक संशोधन के लिए रास्ता बनाया इस सशोधन ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया कि वह मंत्रिमंडल के निर्णय को केवल एक बार अस्वीकार कर सकता है ऐसा करने की धमकियों के बावजूद किसी निर्णय को पुनर्विचार के लिए मंत्रिमंडल के पास वापस भेजने के अधिकार का उपयोग यदा-कदा ही किया गया है, जिससे ससदीय प्रणाली मे राष्ट्रपति की भूमिका प्रोत्साहित करने चेतावनी देने तथा सर्वशक्तिमान प्रधानमंत्री को सलाह देने के परपरागत कार्य तक ही सीमित रह जाती संसदीय प्रणाली को दुसाध्य रूप में देखा जाता है इसमें बड़ी संख्या में विधायक होते है, जिनके पास करने के लिए बहुत सारा विधायी तथा अन्य कार्य होता है इसकी प्रभावशीलता बढाने के लिए कई ससदीय समितियो, लोकपाल और लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग आदि का गठन किया गया, ताकि सुगन, प्रभावी तथा ईमानदार अधिशासन सुनिश्चित किया जा सके ससदीय प्रणाली मुख्यत निर्वाचन प्रणाली द्वारा सघीय संसद तथा राज्य विधानसभाओं में काम चलाने योग्य बहुमत पाने पर निर्भर है नेहरू युग मे आमतौर पर केंद्र तथा राज्य सरकारों को स्पष्ट बहुमत हासिल था, किंतु एक हज़ार नौ सौ उनसठ के बाद से राज्यों की सत्ता केंद्र मे सत्ताधारी दल के अलावा दूसरे दलो तथा गठबधनो के हाथ में रहने लगी ऐसी राज्य सरकारे राजनीतिक जोड घटाव तथा केंद्र के सवैधानिक अधिकारो के दुरुपयोग का शिकार होकर निष्ठुरता से हटाई जाती रही है एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर--एक हज़ार नौ सौ उन्यासी मे तथा एक हज़ार नौ सौ नवासी से लेकर अब तक लापरवाह व अक्सर अवसरवादी गठबधन राजनीति ने केंद्र सरकारों की स्थिरता को कमजोर किया है एक हज़ार नौ सौ पचासी में लाए गए दलबदल विरोधी सशोधनो की अभिकल्पना सदन में अपनी पार्टी के खिलाफ मतदान कर सरकार को गिराने की सासदो की प्रवृत्ति को रोकने के लिए की गई थी वे सशोधन, जिन्हे सर्वोच्च न्यायालय ने एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में लगभग खारिज कर दिया था, कुछ हद तक लागू किए गए, लेकिन वे कमजोर थे और उनका प्रभाव अस्थिर था सरकार को अस्थिर बनाने के भ्रष्ट तरीको का उपयोग अत्यधिक बढ़ गया इस प्रवृत्ति को एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे मे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए इस निर्णय ने और अधिक बढावा दिया कि रिश्वत लेने वाले सासदो पर आपराधिक अभियोग नही लगाया जा सकता, क्योंकि इस तरह की रिश्वत उनके कामकाज की स्वायत्तता से जुड़ी है राजीव धवा व्यापक रूप से परंपराए दो श्रेणियों के अंतर्गत आती हैं मूल या प्राथमिक परपराए, जो शासन के ढाच को यथास्थान बनाए रखती है उदाहरण के लिए, राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह मानना आवश्यक होता है और ससद के निचले सदन में सरकार की पराजय होने पर मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना होता है गौण परपराए शासन करने वालो से एक यथोचित नैतिक जिम्मेदारी तथा राजनीतिक ईमानदारी की माग करती है अक्सर इन्हे भारत में स्वाभाविक रूप में देखा गया है उदाहरण के लिए, नेहरू युग मे किसी मंत्रालय में काई गलती या दुर्घटना हो जाने पर संबंधित मंत्री इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेत थे तथा मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे देते थे सासद अपने दल तथा उन कार्यक्रमो, जिनके आधार पर वे निर्वाचित हुए है, के प्रति निष्ठावान रहते थे सार्वजनिक पदो पर रहने वाले लोग अपनी संपत्ति अथवा व्यवसाय तथा अन्य सबधो की घोषणा करने से नहीं डरते थे राजनीतिक दृष्टि से सुविधा होने पर ही इन परपराओ का पालन होता है, अन्यथा इनकी अधिकाधिक उपक्षा की जाती रही है न्यायालय इन प्राथमिक परपराओ, गौण परपराओ के मामल मे तो और भी कम को औपचारिक रूप से प्रभावी बनाने या सुस्पष्ट करने के प्रति अनिच्छुक है सिर्फ उनको छोडकर, जो सविधान के मूल कार्यकलापो से जुडी हुई है हालांकि कुछ न्यायाधीशो ने कुछ परपराओ को मान्यता दी है, लेकिन वे वस्तुत वैधानिक रूप से लागू नही होती वे केवल उस स्थिति में प्रभावी रूप से कार्य कर सकती है, जब उन लोगो का समर्थन मिले, जिनके कार्यो को वे नियंत्रित करने जा रही है भारतीय प्रशासन की वास्तविक कार्यशैली को ऊपर उठाने के लिए ससद द्वारा कुछ परपराओ को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता है उदाहरण के लिए, यद्यपि भारत मे ससदीय प्रणाली उचित ढग से कार्य कर रही है, लेकिन कमजोर गठबधन सरकारी तथा व्यक्तिगत लाभ अथवा पदलोलुपता के कारण सरकार को गिराने वाले अवसरवादी नेताओ के दुर्बलीकरण के प्रभाव ने ससदीय प्रणाली को कमजोर बना रखा है इस समस्या की जड परपराओ द्वारा अनुशासित करने वाली मजबूत सस्थागत नैतिकता का अभाव हे सविधान के काले अक्षर तब तक बेहतर शासन की सुनिश्चितता प्रदान नही करेगे, जब तक भ्रष्टाचार रहित ईमानदार व पारदर्शी परिस्थितियो मे विधि तथा लोकतात्रिक जवाबदेही की सुनिश्चितता के लिए सस्थागत नैतिकता का उदय नहीं होता सघीय या अर्द्धसंघीय व्यवस्था एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ और इसकी पाँच सौ पचास रियासतो को यह विकल्प दिया गया था कि वे स्वतंत्र रहे या भारत अथवा पाकिस्तान में सम्मिलित हो जाए इस योजना के तहत उपमहाद्वीप का ऐसा बटवारा हो जाता, जिसे सुधारना कठिन होता, लेकिन विभाजन के हिसक आतक के बावजूद दो बड़े राष्ट्रो, भारत तथा पाकिस्तान में रियासतो का विलय कर लिया गया लेकिन कश्मीर दोनो राष्ट्रो के बीच विवाद का मुद्दा बना रहा एक हज़ार नौ सौ पचास से एक हज़ार नौ सौ छप्पन के बीच भारत के विभिन्न राजनीतिक भागो को तीन श्रेणियों में गठित किया गया था, जो मोटे तौर पर पूर्व - ब्रिटिश शासित ब्रिटिश प्रशासित तथा रियासतो से मिलकर बनी थी और भारतीय सघीय व्यवस्था, एक हज़ार नौ सौ छप्पन में पुनर्गठित की गई थी और तब से आज तक यह द्विस्तरीय व्यवस्था चली आ रही है केंद्र में सघीय सरकार तथा राज्यो एव केंद्रशासित प्रदेशो की सरकारे इन सभी इकाइयों का नियंत्रण संसदीय संस्थाओं के हाथ मे है, जबकि केंद्रशासित प्रदेशो के ज्यादातर प्रत्यक्ष अधिकार सधीय सरकार के पास है यह बता पाना बहुत कठिन है कि शासन की वास्तविक संघीय प्रणाली का स्वरूप क्या है भारतीय सघ को कई कारणो से अर्द्धसघीय कहा जाता है पहला ओर प्रमुख कारण यह है कि प्रातो तथा केंद्रशासित प्रदेशा की कोई भौगोलिक अखडता नही हे बड़े राज्यों को तोडकर प्रातो तथा केंद्रशासित प्रदेशो की रचना की गई है आध्र प्रदेश तथा केरल एक हज़ार नौ सौ छप्पन में बनाए गए बबई प्रात को एक हज़ार नौ सौ साठ मे महाराष्ट्र तथा गुजरात में बाटा गया हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश बनाए गए पूर्वोत्तर में सात प्रत वनाए गए एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में असम, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा तथा एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश बने गोवा को एक हज़ार नौ सौ साठ मे केंद्रशासित प्रदेश के रूप में सघ में शामिल किया गया, जो एक हज़ार नौ सौ सत्तासी मे पूर्ण राज्य बना सिक्किम को एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में राज्य बनाया गया दूसरा कारण यह है कि यद्यपि सभी प्रातो को समान दर्जा प्राप्त है और अपनी-अपनी जनसंख्या के अनुसार उन्हें संसद के दानो सदनों में प्रतिनिधित्व प्राप्त है, लेकिन भारतीय सविधान ने आवश्यकता पर आधारित असमान सघवाद के सिद्धात का विकास किया हे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों व कुछ अन्य राज्यो से सबंधित अनुच्छेदो तथा अन्य प्रावधानों में भी कुछ प्रातो को सवैधानिक प्राथमिकता का दर्जा दिया गया है तीसरा कारण है, आपातकाल के प्रावधानों ने केंद्र को व्यापक अधिकार दे दिया हे जिसकी मदद से वह किसी राज्य का शासन अपने हाथ में ले सकता है तथा राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है एक हज़ार नौ सौ तिरानवे मे सीमित न्यायिक पुनर्निरीक्षण तथा एक हज़ार नौ सौ उन्यासी म राष्ट्रपति को प्रस्ताव लौटाने का अधिकार दिए जाने के बावजूद राज्यों की निर्वाचित सरकारों को हटाने के लिए सघीय सरकारे आपात स्थितियों से संबंधित इन प्रावधानो का मनमाना उपयोग करती रही है ये तरीके प्रजातंत्र तथा सघवाद दोनो को कमजोर करते हे चौथा कारण है, सविधान ने सघीय शासन को कई प्रकार से अधिक शक्तिया दी है केंद्र की वैधानिक शक्तिया राज्यों की तुलना में अधिक व्यापक है, जिसमे विस्तृत अवशिष्ट शक्तिया भी शामिल है विशिष्ट राज्य सूची के कई विषयो का नियमन ससद द्वारा किया जाता है समवर्ती अधिकारों के मामले में भी केंद्र को राज्य से अधिक महत्त्व प्राप्त है राज्यसभा की सहमति से अथवा दो या अधिक राज्यों की सहमति से या सधि अथवा अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधो के पालन या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में सघ राज्य सूची के विषयो पर कानून बना सकता है प्रशासन पर केंद्र का सपूर्ण नियंत्रण, सवैधानिक रूप से निर्मित अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा राज्य को केंद्र की इच्छापूर्ति के लिए निर्देश देने के अधिकार द्वारा अधिक मजबूत हो गया है पाचवा कारण यह है कि राज्यो को राजस्व तथा अनुदान वितरण सुनिश्चित करने के लिए वित्त आयोग एव अन्य व्यवस्थाओं के बाद भी वित्तीय सघवाद की सवैधानिक योजना बहुत जटिल है और ज्यादा से ज्यादा केंद्र के पक्ष मे है राज्यों के पास राजस्व प्राप्त करने के अपर्याप्त स्वतंत्र स्रोत है और व केंद्र पर अत्यधिक निर्भर है तथा उसके कर्जदार भी है यद्यपि एक शक्तिशाली केंद्र सधवाद की भावना के विपरीत नहीं है, लेकिन संविधान द्वारा केंद्र को दिए गए विशेष एव उच्च अधिकार भारतीय सघवाद को शक्ति विभाजन मे भ्रमपूर्ण, बनावट मे केन्द्राभिमुख तथा कामकाज में अत्यधिक केंद्र - आश्रित बनाते है, हालाकि प्रत्येक राज्य की विशिष्ट एतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख किए विना भारतीय संघवाद का कोई भी विवरण पूरा नही हो सकता भाषाई तथा ऐतिहासिक आधारो पर भारत का सघीय विभाजन राष्ट्रीय एकता में बाधा बनने के बजाय देश की बहुभाषी और बहुसास्कृतिक समाज की सरचना को समृद्ध बनाता है सवैधानिक ढाचे मे सधीकृत इकाइयो के परिपक्व होते ही उनका स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व बन गया हे केंद्र में सत्तारूढ दल अक्सर क्षेत्रीय या राज्यों में सत्तारूढ दल से भिन्न होता है अपनी क्षेत्रीय सफलता की शक्ति से प्रेरित होकर अनेक राज्यों ने अधिक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता तथा प्रशासन में केंद्र के कम से कम हस्तक्षेप की माग की है, यदि भारत अपनी विशिष्ट विविधता को अधिक महत्त्व देना चाहता है, तो उसे अत्यधिक केंद्रीकृत संघीय ढांचे को ढीला करना होगा पचायत के माध्यम से स्थानीय शासन एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे मे सविधान मे पचायत सशोधन के बाद द्विस्तरीय सघ प्रणाली ने, जिसमें प्रशासन केंद्र तथा राज्य के बीच बटा था, एक बहुस्तरीय संघीय ढांचे में प्रवेश किया, जिसके तहत प्रजातात्रिक स्थानीय शासन की गारटी दी गई और शहरी तथा ग्रामीण इलाको में सभी स्तरो पर नागरिको को सवैधानिक शक्तिया दी गई सामान्यत स्थानीय सरकार की योजना सविधान में नहीं लिखी गई है, लेकिन सविधान लागू होने के बाद कानून के जरिये उनका निर्माण किया जाता है पंचायत सशोधनो ने देश में स्थानीय सरकार व्यवस्था के ध्वस्त हो जाने की बात को स्वीकार किया और स्थानीय स्तरो पर स्वशासन के जरिय इसका विकल्प उपलब्ध कराया इस प्रकार निर्मित केवल पंचायत ही प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई स्थानीय सरकार का एकमात्र अग है प्रारंभ में यह योजना आदिवासी क्षेत्रो मे लागू नही थ्री लेकिन अब इन क्षेत्रों में भी इसे प्रभावी कर दिया गया है भारत मे बहुस्तरीय सधवाद को बहुत सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है पिछडो और उपेक्षितो की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए पचायत सशोधन ने उनके लिए विशेष प्रतिनिधित्व आरक्षित किया हे- विशेष रूप से महिलाओ, अनुसूचित जातियो, जनजातियो तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए, जिन्हे अन्य प्रकार से पचायत में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है इसका अनूठा परिणाम यह निकला है कि बहुत सी पचायतो की बागडोर इन उपेक्षित वर्गों के हाथो मे है, हालाकि स्थानीय सामाजिक ओर आर्थिक शक्तिया अब भी अधिकाश पचायतो पर हावी है इस प्रयोग को अन्य ससदीय गतिविधियों से लाभ मिलेगा उदाहरण के लिए, पचायतो को अधिक स्वायत्तता तथा राजस्व वसूली के अधिकार देन से स्थानीय स्तर पर नागरिको को शक्ति मिलेगी तथा समय के साथ उनकी कार्यप्रणाली में सुधार आपातकालीन शक्तिया भारत के लिए बनाए गए ब्रिटिश कानून के प्रावधानों को जस का तस स्वीकार करते हुए सविधान मे तीन तरह की आपात स्थितियों का प्रावधान किया गया है सामान्य आपातकाल, राज्य आपातकाल और वित्तीय आपातकाल सामान्य आपातकाल 'बाहरी आक्रमण' या देश के भीतर पूरे राष्ट्र मे या किसी हिस्से मे सशस्त्र विद्रोह की स्थिति है सामान्य आपातकाल के संवैधानिक प्रभावों में कुछ महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकारों का निलंबन, नागरिक स्वतंत्रता पर सख्त नियत्रण, प्रेस सेसरशिप तथा बिना सुनवाई के निषेधात्मक गिरफ्तारी की अनुमति सम्मिलित है यदि राष्ट्रपति पाते है कि ऐसी स्थिति निर्मित हो गई है, जिसमे राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नही चलाई जा सकती, तो केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य में आपातकाल घोषित कर सकती है ससद और कार्यपालिका राज्य का प्रशासन अपने हाथ में ले लेती है और प्रातीय प्रजातंत्र लगभग निलबित हो जाता है वित्तीय आपातकाल की घोषणा तब की जा सकती है, जब राष्ट्रपति स्वीकार करते है कि ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें देश या इसके किसी हिस्से की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में है.' इस आपातकाल के दौरान संविधान के उन प्रावधानों में संशोधन का अधिकार राष्ट्रपति को होता है, जो केंद्र तथा राज्य के बीच वित्तीय संसाधनों के आवटन से संबंधित है सामान्य आपातकाल तथा प्रातीय आपातकाल के ठीक विपरीत गणराज्य के पहले पचास वर्षो मे भारत में वित्तीय आपातकाल कभी नहीं लगाया गया प्रत्येक आपातकाल सघीय ढांचे का अतिक्रमण करता है और केंद्र को असाधारण अधिकार दे देता है आजाद भारत के इतिहास में सामान्य आपातकाल एक नाटकीय घटना है इसने बहुत ही सहजता से दिखा दिया कि सवैधानिक लोकतंत्र को ऐसी तानाशाही मे कैसे बदला जाता है, जिसमे सत्ता पूर्णत भ्रष्ट हो जाती है प्रत्यक्ष तौर पर तो आपातकाल की घोषणा आतरिक अस्थिरता से निपटने के लिए की गई थी, लेकिन वास्तव मे एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव अदालत द्वारा रद्द कर दिए जाने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री बनाए रखने के लिए यह तरकीब लगाई गई थी सत्ता का दुरुपयोग, मनमानी गिरफ्तारिया, जनसचार माध्यमा की सेसरशिप तथा लोगो पर कई अत्याचारों ने आपातकाल के नाम पर धब्बा लगा दिया स्थिति तब और बिगड गई, जब बदी प्रत्यक्षीकरण के एक मामले मे सर्वोच्च न्यायालय ने एक विवादास्पद फैसले मे जिसकी काफी आलोचना हुई, न्यायिक पुनरावलोकन से इनकार कर दिया अदालत ने उन मामलो की समीक्षा से भी इनकार कर दिया, जिनमे निरोधी नजरबदी स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण थी उनका भी जिनमे आपातकाल के पश्चात सविधान में किए गए कुछ सशोधनो का उद्देश्य भविष्य में एकाधिकार प्राप्त करने की घटना को रोकना था बाहरी आक्रमण या आतरिक सशस्त्र विद्रोह की स्थिति मे आपातकाल लगाने के अधिकार सुरक्षित रखे गए है एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर-सतहत्तर का आपातकाल भारत में पहला और सभवत आखिरी नहीं है उदाहरण के लिए, एक हज़ार नौ सौ बासठ में चीन से युद्ध के वक्त एक सामान्य राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था, जो औपचारिक तौर पर छह वर्षो तक कायम रहा था हालाकि इसमे सदेह है कि अब भारत के नागरिक एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर-सतहत्तर जैसे एक और सर्वाधिकारवादी आपातकाल को आसानी से सहन कर लेगे एक हज़ार नौ सौ पचास से दो हज़ार के बीच विभिन्न राज्यो मे अनेक बार राष्ट्रपति शासन लागू किया जा चुका है ज्यादातर नामलो मे यह आवश्यकता के बजाय राजनीतिक सुविधा के लिए किया गया. इसकी शुरुआत नेहरू युग मे सत्ता के दुरुपयोग के साथ हुई और इंदिरा गाधी तथा उनके बाद के शासको के काल में इसमे अत्यधिक वृद्धि हुई उदाहरण के लिए, एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में जनता गठबधन सरकार ने नौ राज्यो मे राष्ट्रपति शासन लागू किया और एक हज़ार नौ सौ अस्सी में इंदिरा गांधी की कांग्रेस सत्ता मे लौटी, तब उसने भी नौ राज्यो मे राष्ट्रपति शासन लागू किया राष्ट्रपति शासन लगाने के अधिकार को अनुशासित करने के प्रयास पूरी तरह सफल नही हुए है एक हज़ार नौ सौ उन्यासी के बाद राष्ट्रपति शासन एक वर्ष से अधिक समय के लिए नही लगाया जा सकता, हालांकि एक हज़ार नौ सौ सत्तासी मे सविधान में संशोधन कर पंजाब में राष्ट्रपति शासन वनाए रखने का प्रावधान किया गया था, ताकि घुसपैठ से निपटा जा सके 'राजनीति से प्रेरित' आधार पर बिहार मे एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे मे राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति ने एक बार अपने प्रस्ताव लौटाने के अधिकार राजीव धव का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति शासन टाल दिया था राष्ट्रपति शासन प्रकरण मे उच्चतम न्यायालय ने अल्प बहुमत से सुझाव दिया था कि अवाछित राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में वह संवैधानिक समीक्षा कर सकता है और चेतावनी दी कि जिन विधानसभाओं को समय से पूर्व या अन्यायपूर्ण ढंग से भग कर दिया गया है, उन्हे वह पुन स्थापित कर देगा हालाकि इन सशोधनात्मक ओर न्यायिक प्रयासो से सत्ता का दुरुपयोग रोका नहीं जा सका इसलिए कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के अधिकार को संविधान से पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए न्यायपालिका तथा समतावादी न्याय यद्यपि एक स्वतंत्र न्यायपालिका आजादी के आदोलन की महत्त्वपूर्ण मागो मे से एक थी, लेकिन भारतीय संविधान के निर्माता न्यायपालिका को अधिक अधिकार देने के प्रति सतर्क थे फिर भी उन्होने उच्च न्यायालयो तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रभावी किए जाने वाले मौलिक अधिकारो से सबंधित अध्याय तैयार किया उच्च न्यायपालिका द्वारा असवैधानिक, मनमाने या अनुचित वैधानिक या कार्यपालिक कार्यों को रद्द करने या उनकी समीक्षा करने से भी उन्हे एतराज नही रहा मौलिक अधिकारों को असख्य नियंत्रणो से घेरने तथा न्यायपालिका को कानून की विधिवत प्रक्रिया सुनिश्चित करने के व्यापक अधिकार देने से इनकार कर देने के साथ संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका को उससे भी कम भूमिका प्रदान की जो न्यायपालिका आने वाले वर्षो मे स्वयं को देना चाहती थी संविधान ने एक एकीकृत न्यायपालिका बनाई, जिसमे शीर्प पर उच्चतम न्यायालय तथा प्रत्येक राज्यो मे उच्च न्यायालय स्थापित किया गया प्रत्येक राज्य में निचली अदालतो की देखरेख और नियंत्रण उच्च न्यायालयो को सौपा गया अधिकाश मामलो में अपील उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय निपटा सकते है सविधान की व्याख्या, सत्ता का दुरुपयोग तथा मौलिक अधिकारो के मामलों में निर्णय करने का विशेषाधिकार उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो को है केंद्र तथा राज्य या राज्यो के बीच विवादो को निपटाने का एकमात्र अधिकार उच्चतम न्यायालय को है किसी न्यायिक संस्था की विशेष अपील सुनने और राष्ट्रपति द्वारा पूछे जाने पर उचित राय देने का भी इसे अधिकार है भारतीय उच्चतम न्यायालय विश्व के सर्वोच्च शक्तिशाली और काम के बोझ से दबे शीर्ष न्यायालयो मे से एक उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो मे नियुक्तिया वकील - समुदाय, न्यायपालिका तथा उच्चतम न्यायालय के मामले में अन्य विशिष्ट न्यायविदो मे से की जाती है सविधान निर्माताओ द्वारा न्यायिक नियुक्तियों की मूल प्रक्रिया राजनीतिक आधार पर परिकल्पित की गई थी, जिसमे राष्ट्रपति न्यायपालिका के परामर्श से उच्च न्यायिक नियुक्तियां करते थे लेकिन एक हज़ार नौ सौ बयासी, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे तथा एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के तीन मामलों के बाद परामर्श की आवश्यकता को परिभाषित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधीशो का एक समूह बनाकर उच्च न्यायालयो तथा उच्चतम न्यायालय में सभी नियुक्तियो की देखरेख तथा स्वीकृति का काम उसे सौप दिया. इस समूह का निर्माण न्यायिक विधि के निर्माण का एक उदाहरण है ओर मूल रूप से परिकल्पित निर्णायक अधिकारों से कही अधिक अधिकार न्यायाधीशो को देता है उच्च न्यायालयो तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशो को हटाने के प्रावधान जटिल है इनके तहत एक विशेष न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई और पुष्टि के लिए ससद के दोनों सदनों द्वारा महाभियोग की कार्यवाही आवश्यक है एक हज़ार नौ सौ बानवे में संसद द्वारा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी रामास्वामी को एक न्यायिक अभिकरण द्वारा भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर महाभियोग प्रस्ताव पारित करने में विफल रहने के बाद यह चिता व्यक्त की गई थी कि उच्च तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशो को अनुशासित करना या हटाना संभव नहीं है. परिणामस्वरूप, विधि आयोग तथा अन्य क्षेत्रो से एक प्रस्ताव आया कि उच्च तथा उच्चतम न्यायालयो मे न्यायाधीशो की नियुक्तिया, उन्हे अनुशासित करने का दायित्व, उनके खिलाफ शिकायते सुनने और उन्हें पद से हटाए जाने के बारे मे निर्णय एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग को करना चाहिए, जो यह सुनिश्चित करे कि न्याय करने वाले व्यक्तियों का परीक्षण और उनकी जवाबदेही भी न्यायपूर्ण ढंग से की जाए मौलिक अधिकार और विधि का शासन मौलिक अधिकारों वाला अध्याय शासन के सभी पहलुओं को प्रस्तुत करता है, जिसमे शासन द्वारा नियत्रित सार्वजनिक उपक्रम, सभी कानून, नियम और भारतीय नागरिको व अन्य व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों के विषय में कार्यपालिका के आदेश शामिल है मौलिक अधिकारो मे समता का अधिकार , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सगठन सबधी स्वतंत्रता आवागमन की स्वतंत्रता व्यवसाय की स्वतंत्रता, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त जीवन तथा देहिक स्वतंत्रता से वचित नही किया जाना, शोषण से मुक्ति, धार्मिक तथा सास्कृतिक स्वतंत्रता और इन स्वतंत्रताओ की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने का अधिकार सम्मिलित है मौलिक अधिकारों के अध्याय को नीति-निदेशक तत्त्वो के अध्याय के साथ पढा जाना चाहिए, जो राष्ट्र के सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को परिभाषित करता है सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को राष्ट्र के शासन का आधार माना जाता है, हालाकि न्यायालय द्वारा इन्हे प्रभावी नहीं बनाया जा सकता उच्चतम न्यायालय की न्यायिक सर्वोच्चता की खोज एक हज़ार नौ सौ पचास-बावन में प्रारंभ हुई, जब न्यायालय ने भूस्वामियों के पक्ष मे निर्णय देते हुए कृषि सुधारों के प्रावधानों को अवैध घोषित कर दिया तथा सरकार के अभिवेचक के दौरान उच्चतम न्यायालय नागरिक स्वतंत्रताओ के रक्षक की अपनी भूमिका से पीछे हट गया हालाकि एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के बाद से उच्चतम न्यायलय ने एक नया मानवाधिकार न्यायशास्त्र तैयार किया, जीवन तथा स्वतंत्रता के अधिकार के दायरे को बढाकर इसमें गोपनीयता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण और अन्य अनेक उल्लखनीय अधिकारो को सम्मिलित किया गया और अदालत ने इन अधिकारों के सरक्षण के लिए कानून की एक सक्रिय प्रक्रिया लागू की सविधान के निर्माण के समय से उच्चतम न्यायालय प्रेस तथा नागरिको की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रजातान्त्रिक ढंग से काम करने के लिए नियम बनाने में पर्याप्त सर्तक रहा है समानता के प्रावधानों की व्यापक व्याख्या करते हुए अदालत ने एक सतुलित सकारात्मक कार्ययोजना का समर्थन किया उच्चतम न्यायालय ने नर्देशात्मक सिद्धातो के साथ शोषण विरोधी प्रावधानों की भी व्याख्या की तथा बधुआ और बाल श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए योजनाए तैयार की विभिन्न सरकारों द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारो को सीमित करने के प्रयासों को देखते हुए न्यायालय ने इन अधिकारों को पर्याप्त मान्यता प्रदान की, यद्यपि बहुधार्मिक तथा बहुसास्कृतिक समाज की समस्याओं के संदर्भ मे कुछ ज्यादा ही बराबरी बनाए रखने के आरोप में कुछ अदालती निर्णयों की आलोचना भी की गई है न्यायालय ने आपराधिक मामलो के संबंध में भी सिद्धात तैयार किए है तथा अत्याचार विरोधी विधिशास्त्र बनाकर यह सुनिश्चित किया है कि हिरासत मे कैदियों के साथ उचित व्यवहार हो ओर उन्हें सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए. न्यायिक पुनरावलोकन द्वारा प्रशासनिक प्रक्रियाओ का कडाई से विश्लेषण किया जाता है, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित रहे सुनिश्चित सवैधानिक मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए उच्च न्यायालयो तथा उच्चतम न्यायालय तक सीधी पहुच बनी हुई है भारत को अनेक सामाजिक क्रातियो और दैनिक प्रशासकीय व्यवस्था की विफलताए विरासत में मिली है वोहरा समिति की रिपोर्ट के अधिकृत फैसले से पता चलता है कि कानून के अनुसार शासन की व्यवस्था खतरे में हो सकती है और व्यापक रूप से तथा मीडिया की सतर्कता और न्यायालयो के नियत्रण से ही भारत में कानून के अनुसार लोकतात्रिक शासन सरक्षित है राजीव धवन भारत के उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा भारतीय विधि संस्थान में मानद व्याख्याता और अंतर्राष्ट्रीय न्यायविद् आयोग के सदस्य है इन्होने विधि एवं नागरिक विषयो पर कई पुस्तके, प्रबध और लेख लिखे है एस. ज़ेड कासिम समुद्र - विज्ञान के तत्त्व समुद्र - विज्ञान महासागर का उसकी समग्रता में वैज्ञानिक अध्ययन है यद्यपि यह भू-विज्ञान की एक शाखा के रूप में वर्गीकृत है, लेकिन इसकी प्रकृति बहुशाखीय है और लगभग सभी विज्ञान और उन्नत तकनीकों की सहायता से महासागरीय सर्वेक्षण इसमें समाहित है उच्च प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग ने इसे अपेक्षाकृत एक ऐसे नए विज्ञान का रूप दिया है, जो प्राचीन काल से मनुष्यों द्वारा किए गए समुद्री अवलोकनो से बहुत आगे तक जाता है समुद्र विज्ञान के सामान्य तौर पर निम्नलिखित वर्ग है एक भौतिक समुद्र विज्ञान मे समुद्री धाराओ, समुद्र परिसचरण, ज्वार, तरग प्रणालियो, तापमान तथा लवणता का वितरण एव उमडने की परिघटना का विश्लेषण जैसी समुद्र की परिवर्तनशीलता और गतिकी का विश्लेषण किया जाता है इसके अंतर्गत जल के द्रव्यमानो और उनका अभिनिर्धारण तथा समुद्र के अभिलक्षणो की भविष्यवाणी का गणितीय प्रतिरूपण द्वारा अध्ययन शामिल है दो रासायनिक समुद्र विज्ञान के अंतर्गत समुद्र का संगठन, समुद्र में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का वितरण, जल व अवसादो की उर्वरता तथा रासायनिक क्रिया, मानव गतिविधियों के कारण जलीय गुणवत्ता में परिवर्तन , मीठे पानी का समुद्र में गिरना, नदी अपवाह, अवसाद भार तथा अन्य कई समस्याएं शामिल है तीन जैव समुद्र विज्ञान समुद्री जीवन पर केंद्रित है इसके तहत समुद्र में जटिल जीवन-चक्र मे हिस्सा लेनेवाले सभी प्राणी और वनस्पतिया आती है यह चक्र अधिकतर तैरने वाले सूक्ष्म पादपो पर आधारित है, जो पादपप्लवक कहलाते है और ऊर्जा प्रचुर जीवभार के प्राथमिक उत्पादक होते है ये पादपप्लवक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत सूक्ष्म प्राणीप्लवक से लेकर खाद्य श्रृंखला के उच्च जीवो तक जैसे शैलफिश, मछली तथा स्तनधारियो द्वारा उपभोग कर लिए जाते है चार भू - वैज्ञानिक तथा भू-भौतिक समुद्र विज्ञान के अंतर्गत अवसादों, चट्टानो तथा समुद्र तल के खनिजो व अपतटीय तेल तथा गैस की खोज और विश्लेषण, महासागरीय बेसिन के उद्भव व इतिहास तथा भूपर्पटी के प्रमुख सरचनात्मक लक्षणों का अध्ययन शामिल है पाँच समुद्री यत्रीकरण एव अभियांत्रिकी- सभी प्रकार के उपकरणो जैसे अन्वेषी उपकरण की जानकारी पर जोर देती है जो जहाजो अथवा उपग्रहों से विभिन्न पैरामीटर का अध्ययन करने में काम आते है, जिसमे समुद्री सतह के तापमान, पानी का रग, समुद्र तल की बनावट, तटीय क्षरण, अवसादन जैव अवरोध तथा सक्षारण शामिल है f prep की पुरातत्व विज्ञान मे जलमग्न तटरेखाओ, डूबे हुए जहाजो की खोज हस्योद्घाटन के लिए इसके द्वारा गहरे शैक्षणिक महत्त्व की कई ऐति पता लगाया जा सकता है विज्ञानी प्रदत्त प्रसस्करण एक डाटा केंद्र में आधारित होता है, जो समुद्र विज्ञान सबधी तथ्यो के प्रसार के लिए जिम्मेदार हो उच्च गतिवाले कम्प्यूटरो द्वारा एक-दूसरे से जुड़े है समुद्र विज्ञानी मे भागीदारी निभाने वाले जहाज और समुद्र तट पर स्थित स नी प्राय विश्व के नहासागरों की चर्चा बड़े-बड़े बेसिनो से जुड़े खारे रूप में करते हैं, जो पृथ्वी की सतह के तीन- चोथाई भाग पर फैला दक्षिण एशिया की सीमाओ को बनाता है यह प्रशात और अटलाटि ये प्राय तीन महासागर कहलाते है हिंद महासागर कई देशो से देशो से, जो दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनि सात देशो में भारत, बाग्लादेश, पाकिस्तान तटवर्ती है, श्रीलका तथा ट्रान स्थलरुद्ध राष्ट्र है समद विज्ञान ऐतिहासिक सर्वेक्षण अनादि काल से भारतवासियों को समुद्र की गहरी जानकारी थी उन्होंने इसका उपयोग भोजन के स्रोत क रूप में और व्यापार, सचार तथा परिवहन के लिए किया प्राचीन पौराणिक वर्णन मे समुद्र मथन अर्थात उसकी सपत्ति के निष्कर्षण के लिए समुद्र को मथने की क्रिया, समुद्र की तलहटी से खनिज प्राप्त करने की आधुनिक तकनीक से अद्भुत साम्य रखती है सिधु घाटी सभ्यता के दौरान हडप्पा तथा मोहजोदाडो के निवासियों ने भी अपनी अभियांत्रिकी परियोजनाओं ने अपने समुद्री ज्ञान का उपयोग किया था उदाहरण के लिए, हडप्पावासियो ने लगभग तीन,पाँच सौ से चार,शून्य वर्ष पूर्व गुजरात के लोथल नामक स्थान पर ज्वार में जहाजो को शरण देने के लिए बेहतरीन गोदी का निर्माण किया था गोदी के अवशेष बताते है कि हडप्पावासियों को समुद्री तूफान तथा लहरो की प्रणाली व उनकी समयावधि की समझ थी प्रमाण यह भी बताते है कि मोहेजोदाडो के लोगो ने समुद्र की तटीय प्रणाली के व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग समुद्र किनारे अपने घरों के निर्माण तथा सफाई व कचरे व गदे पानी के निकास की सुविधाओ के लिए किया मध्यकालीन युग के दौरान समुद्र की परिस्थितियों तथा समुद्री जीवन पर उनके प्रभाव का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार किया गया था उस काल के मौजूदा प्रमाण दर्शाते है कि भारतीयो ने समुद्री यातायात परपरा की स्थापना की थी अंग्रेजो के आगमन के साथ ब्रिटिश व भारतीय प्रतिभाओं के समन्वय ने भारत मे समुद्र विज्ञान की नीव रखी बगाल की रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ने पहल की और भारतीय समुद्र सर्वेक्षण की स्थापना एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर में कलकत्ता से हुई एक हज़ार आठ सौ इक्यासी में पाँच सौ अस्सी टन क सर्वेक्षण पोत आर आई एम एस इन्वेस्टिगेटर ने कार्य प्रारंभ किया इसके बाद एक हज़ार नौ सौ आठ में एक हज़ार सात सौ आठ टन के इन्वेस्टिगेटर II को लाया गया तथा कुछ समुद्र विज्ञान सबधी अवलोकन प्रारंभ हुए एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक में पहले-पहल त्रावणकोर विश्वविद्यालय तथा मद्रास विश्वविद्यालय में समुद्री जीव विज्ञान का विश्वविद्यालयस्तरीय अध्यापन एवं शोध गतिविधियों का सचालन शुरू हुआ बबई विश्वविद्यालय ने एक हज़ार नौ सौ चालीस मे तथा आध्र विश्वविद्यालय ने एक हज़ार नौ सौ पचास के प्रारंभ मे इसका अनुसरण किया तदनतर एक हज़ार नौ सौ साठ मे दो केंद्र स्थापित हुए, एक अन्नामलाई विश्वविद्यालय मे जिसमे बाद मे समुद्र विज्ञान की सभी विधाओ की शुरुआत हुई बहरामपुर विश्वविद्यालय, उडीसा मे एक हज़ार नौ सौ सत्तर के मध्य में तथा गोण विश्वविद्यालय में एक हज़ार नौ सौ अस्सी में समुद्र विज्ञान के कार्यक्रमों की शुरुआत हुई आजादी के बाद एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में समुद्री ससाधनो के महत्त्व को पर्याप्त रूप से समझने की शुरुआत हुई तथ समुद्र के जैविक संसाधनों का पता लगान के लिए तमिलनाडु के मडपम केप में केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई बीसवी शताब्दी के अंत तक भारत समुद्री खाद्य का विश्व में अग्रणी उत्पादक व निर्यातक बन गया एक हज़ार नौ सौ पचास के अंत तक समुद्र वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने यह अनुभव किया कि हिंद महासागर पर विश्व में सबसे कम अध्ययन हुआ है अत एक हज़ार नौ सौ साठ मे बहराष्ट्रीय कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय हिंद एस जेड कासिम हुने हुई लगना ही सह झगदै उन सक्छ a छःদরf तक सगठन तथा अतर्शासकीय महासागरीय आयोग द्वारा स गर्यक्रम में बीस देशों के चालीस जहाजो ने भाग लिया, भारत के चार ज रही दिसबर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ मे कार्यक्रम के बद होने के बाद जनवरी एक हज़ार नौ सौ छयासठ ऑफ ओशिएनोग्राफी ने जन्म लिया वैज्ञानिक एवं औ की एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला के रूप में एनआईओ ने कोचीन द्वारा एक नई व्यवस्था, विशिष्ट अ पॉमिक जोन) की स्थापना समुद्र अनुसंधान और संसाधन प्रबंधन व नहत तटीय राज्यो को अनन्य आर्थिक क्षेत्र पर अधिकार मिले हे श के क्षेत्र मे तट के बिंदु से दो सौ नॉटिकल मील तक का अधिका क्षेत्र लगभग बीस लाख बीस हजार वर्ग किमी है द्वारा समुद्र पुरातत्व केंद्र की स्थापना की गई थी. उपलब्धियो मे भारत काल के ऐतिहासिक द्वारका बदरगाह की खोज तथा कावेरी . पुहर बदरगाह के अन्वेषण का कार्य शामिल है. के लिए भारत का पहला सफल गहरा सागरीय अन्वेषण हिंद मह । एक हज़ार नौ सौ इक्यासी तक अनुसंधान पोत गवेषणी का उपयोग करते हुए सचालि छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ इक्यासी को पाँच,सात सौ मीटर की गहराई से उठाया गया इस 'सागर कन्या' को पिड़ों के सर्वेक्षण में लगाया गया तथा सैकड़ो त से निकाले गए इनका उपयोग ताबा, निकल तथा कोबाल्ट के निष्क किया गया मध्य हिंद महासागर में कई लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र डो के कई नए सभावित स्थलो का सीमाकन हुआ इस कार्य के आ कास, जापान तथा तत्कालीन सोवियत संघ के साथ अग्रणी निवेश पहला देश था, जिसे सत्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सत्तासी को इटरनेशनल सीब्रेड तीन करण किग्सटन जमैका) द्वारा नाड्यूल्स पिड के दोहन एव विकास समग्र रूप में भारत ने समुद्र विज्ञान की सभी शाखाओ मे सार्थक योगदान दिया, जिसमे हिंद महासागर की लहरो तथा धाराओं की प्रणालियो, प्रवाह के तरीको, पोषक तत्त्वो, जैविक उत्पादकता, जल स्तभो मे ऑक्सीजन का वितरण, उमडने वाले क्षेत्रो, नदी मुहानो रेतीले तटो, तली समुदायो, पोषक तत्त्वो के चक्र, सूक्ष्म जैविकी, जैव अवरोध, तटीय भूक्षरण, उपकरण आवश्यकताओ, यात्रिक समस्याओं, समुद्री खरपतवारो, गरानो, प्रवाल भित्तियो, चुनिदा क्षेत्रो ने समुद्र विज्ञानी गतिविधि , मॉनसून, चक्रवातो, सुदूर सवेदन तथा उपग्रह चित्रण, पौधो व प्राणियो से जैव सक्रिय पदार्थो, खनन एव खनिज नीति, अवसादन तथा अरब सागर व बंगाल की खाडी मे प्रदूषण के स्रोतो के अध्ययन शामिल है मैग्रोव की स्थिति पर रपट समुद्र विज्ञान मे दक्षिण एशिया की दृष्टि से विशेष रुचि का विषय मैग्रोव है, जो दलदली उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय झाडियो तथा अवस्तभ जड युक्त पेडो वाले जगल होते है ये भूसागरीय अंतरापृष्ठ तथा नदी के मुहानो मे ऊपरी धारा तक, जहा पानी मे कुछ मात्रा में खारापन होता है पाए जाते है तटों की सुरक्षा तथा मत्स्य एवं प्रवाल भित्तियो के स्वास्थ्य के लिए मैग्रोव जीवनदायी होते है, लेकिन उनका तीव्रता से ह्रास हो रहा है तथा ये दुनिया के सर्वाधिक सकटापन्न पारिस्थितिक तत्रों में से हें हिद- प्रशात क्षेत्र मे मैग्रोव की विविधता और बहुतायत है और खासकर बाग्लादेश व भारत में सुदरबन उल्लेखनीय है इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में मैग्रोव से ढका क्षेत्र तीन,पाँच सौ वर्ग किमी था, जिसका नौ / दस भाग अडमान निकोबार द्वीप सहित पूर्वी तट से जुड़ा है तथा शेष दसवा भाग पश्चिमी तट से इनमे से कुछ शानदार मैग्रोव वन पश्चिम बंगाल के सुदरबन तथा अडमान निकोबार द्वीप मे है पश्चिमी तट पर मैग्रोव वन कहीं-कहीं छितरे हुए है, मानव गतिविधियों से इन्हे गभीर क्षति पहुंची है प्रवाल भित्ति की स्थिति पर रपट प्रवाल भित्ति उष्णकटिबंधीय सागरो के अद्वितीय एव शानदार पारिस्थितिक तत्र मे एक है यह विश्व के सर्वाधिक जैव समृद्ध पारिस्थितिक तत्रों में से है तथा समुद्र की जैविक गतिविधियों का प्रभावशाली लक्षण है यह कैल्शियम जमा करने वाले प्राणियो व शैवालो का बड़ा सकलन है, मुख्य रूप से ये पाषाण प्रवाल कहलाने वाले प्राणियो के है प्रवाल भित्तियों का निर्माण सैकडो, हज़ारो सालो से हो रहे कैल्शियम के लगातार जमा होते रहने का परिणाम है परतु भित्ति का विनाश बहुत ही जल्द हो सकता है पूरी दुनिया मे प्रवाल भित्ति की क्षति या विनाश खतरनाक रफ्तार से हो रहा है तथा समुद्रविज्ञानी इसके कारणों की छानबीन में लगे है उदाहरण के लिए, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे-अट्ठानवे में प्रवालो के असामान्य रूप से विनाश तथा व्यापक रूप से उनके रंग उडने की घटना, जो गहन अध्ययनो का केंद्र रही है और जिसकी वजह से दक्षिण एशिया तथा अन्य क्षेत्रों के कई प्रभावित प्रवालो ने अपने सहजीवी शैवालो को निष्कासित कर दिया इससे उनका रंग उड़ने लगा और जीवनी शक्ति खत्म हो गई भित्तियों के स्वास्थ्य के लिए भावी सभावनाओ का सूक्ष्म परीक्षण जारी है भारत में तटीय प्रवाल भित्तिया मुख्य समुद्री तट पर बिखरे क्षेत्रों में पाई जाती है उदाहरण के लिए ये पश्चिम मे कच्छ की खाडी नें तथा दक्षिण मे पाक खाडी तथा मन्नार की खाडी मे मिलती है यद्यपि ये मुख्य रूप से चूने व कार्बाइड के कारखानो के उपयोग के लिए किए गए खनन से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है बाद में इन विनाशकारी गतिविधियों पर शासन द्वारा रोक लगा दी गई तथा कच्छ व मन्नार की खाड़ी के कई क्षेत्र सरक्षित घोषित कर दिए गए अडमान तथा निकोबार द्वीप के तटीय प्रवाल तथा लक्षद्वीप के प्रवाल द्वीपो के प्रवाल स्वस्थ हालत में है, यद्यपि एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे मे रग उडने के कारण इन पर दुष्प्रभाव पड़ा था कुछ क्षेत्रो म उनका दोहन सजावटी सीपियो तथा मछलियो के लिए भी किया गया एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक के अंत तक भारत में दो सौ से भी अधिक प्रवालो की प्रजातिया रिकॉर्ड की गई ऐसा माना जाता है कि इनमें से अधिकतर प्रजातिया अडमान-निकोबार द्वीपो में पाई जाती है समुद्र वैज्ञानिको तथा पर्यावरणविदों ने देश का आह्वान किया है कि कुछ क्षेत्रों को समुद्री उद्यान घोषित किया जाए, जिन्हें भूमि पर बनाए गए जैव नडल सरक्षित क्षेत्रों के समान ही दर्जा दिया जाए, ताकि भारत की सकटापन्न जैव विविधता का सरक्षण हो सके डॉ एस. जेड क़ासिम देश के पहले भारतीय अटार्कटिका अभियान दल के नेता, भारत सरकार के योजना आयोग के सदस्य, भारत सरकार के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशिएनोग्राफी, गोवा के निदेशक और भारत सरकार के पर्यावरण विभाग तथा समुद्र विकास विभाग मे सचिव रहे है भारत की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों के निर्वाचित फेलो डॉ कासिम कई विश्वविद्यालयो म मानद प्रोफेसर, वर्ष एक हज़ार नौ सौ बानवे-तिरानवे में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे कई पुस्तको के लेखक, दो सौ पचास से भी अधिक शोधपत्रा का प्रकाशन, पद्मश्री व पद्म भूषण तथा ओशिएनोलॉजी इटरनेशनल-निन्यानवे के पेसिफिक रिम लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
मंडी - अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के दौरान वल्लभ कालेज के प्रांगण और शौचालयों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन परिसर की सफाई व्यवस्था सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। मेले के दौरान कालेज परिसर सहित शौचलयों का आम जनता इस्तेमाल करती है। ऐसे में कालेज छात्रों की जगह जब हजारों की संख्या में मेले आए लोग शौचालय का इस्तेमाल करते हैं तो अव्यवस्था और गंदगी के आलम का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मंडी वल्लभ कालेज के शौचालयों की हालत तो पहले से ही दयनीय है, लेकिन शिवरात्रि के दौरान शौचलयों के आसपास गंदगी इतना ज्यादा बढ़ गई कि कालेज परिसर की कुछ जगह जाना भी दूर्भर हो गया था। ऐसे में सफाई-व्यवस्था की भी किसी ने सुध नहीं ली। थक-हार कर कालेज प्रशासन को अपने स्तर पर ही सफाई व्यवस्था के लिए प्रयास करने पड़ रहे हैं, जबकि मेले के दौरान और बाद में सफाई व्यवस्था का जिम्मा भी तय समितियों को संभालना चाहिए था। ऐसे में व्यवस्था पर सवाल उठाना लाजिमी है।
मंडी - अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के दौरान वल्लभ कालेज के प्रांगण और शौचालयों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन परिसर की सफाई व्यवस्था सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। मेले के दौरान कालेज परिसर सहित शौचलयों का आम जनता इस्तेमाल करती है। ऐसे में कालेज छात्रों की जगह जब हजारों की संख्या में मेले आए लोग शौचालय का इस्तेमाल करते हैं तो अव्यवस्था और गंदगी के आलम का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मंडी वल्लभ कालेज के शौचालयों की हालत तो पहले से ही दयनीय है, लेकिन शिवरात्रि के दौरान शौचलयों के आसपास गंदगी इतना ज्यादा बढ़ गई कि कालेज परिसर की कुछ जगह जाना भी दूर्भर हो गया था। ऐसे में सफाई-व्यवस्था की भी किसी ने सुध नहीं ली। थक-हार कर कालेज प्रशासन को अपने स्तर पर ही सफाई व्यवस्था के लिए प्रयास करने पड़ रहे हैं, जबकि मेले के दौरान और बाद में सफाई व्यवस्था का जिम्मा भी तय समितियों को संभालना चाहिए था। ऐसे में व्यवस्था पर सवाल उठाना लाजिमी है।
ज़िम्बाब्वे के खिलाफ टीम इंडिया के बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने एक बार फिर अपनी धाकड़ बल्लेबाजी दिखा महफिलें लूटने का काम किया। उन्होंने तूफ़ानी अर्धशतकीय पारी खेल भारतीय टीम की झोली में जीत डाल दी। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान जिस तरह के शॉट्स खेले उनका हर कोई मुरीद हो गया है। वहीं विराट कोहली भी सूर्या के फैन हो गए। उन्होंने SKY के एक पोस्ट पर कमेंट कर उनकी पारी की तारीफ करते दिखाई दिए। सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) इन दिनों अपनी शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। वह टीम के लिए बैक टू बैक विनिंग इनिंग खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं उन्होंने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए महज 25 गेंदों पर 61 रन जोड़े। अपनी इस पारी के दौरान वह नाबाद रहे। अगर मैच की बात करें तो भारतीय टीम ने केएल राहुल और सूर्यकुमार यादव की अर्धशतकीय पारी के दम पर निर्धारित 20 ओवरों में 187 रन का टारगेट सेट किया। जवाब में ज़िम्बाब्वे की टीम 17. 2 ओवर में 112 रन बनाकर ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भारत ने इस विश्व कप के सेमीफाइनल में भी एंट्री कर चुकी है जहां उसका सामना इंग्लैंड से होगा।
ज़िम्बाब्वे के खिलाफ टीम इंडिया के बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने एक बार फिर अपनी धाकड़ बल्लेबाजी दिखा महफिलें लूटने का काम किया। उन्होंने तूफ़ानी अर्धशतकीय पारी खेल भारतीय टीम की झोली में जीत डाल दी। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान जिस तरह के शॉट्स खेले उनका हर कोई मुरीद हो गया है। वहीं विराट कोहली भी सूर्या के फैन हो गए। उन्होंने SKY के एक पोस्ट पर कमेंट कर उनकी पारी की तारीफ करते दिखाई दिए। सूर्यकुमार यादव इन दिनों अपनी शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। वह टीम के लिए बैक टू बैक विनिंग इनिंग खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं उन्होंने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए महज पच्चीस गेंदों पर इकसठ रन जोड़े। अपनी इस पारी के दौरान वह नाबाद रहे। अगर मैच की बात करें तो भारतीय टीम ने केएल राहुल और सूर्यकुमार यादव की अर्धशतकीय पारी के दम पर निर्धारित बीस ओवरों में एक सौ सत्तासी रन का टारगेट सेट किया। जवाब में ज़िम्बाब्वे की टीम सत्रह. दो ओवर में एक सौ बारह रन बनाकर ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भारत ने इस विश्व कप के सेमीफाइनल में भी एंट्री कर चुकी है जहां उसका सामना इंग्लैंड से होगा।
जुलाई के लिए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद से कम आने से निवेशकों को राहत मिलने के बावजूद वैश्विक शेयर बाजारों में भारी बिकवाली हुई। जिसमें एशियाई बाजारों में 2 फीसदी की गिरावट देखी गई. भारतीय बेंचमार्क भी आधा फीसदी नीचे बंद होते दिखे. बीएसई सेंसेक्स 365.53 अंक गिरकर 65,322.65 पर और निफ्टी 114.80 अंक गिरकर 19,428.30 पर बंद हुआ। लार्ज-कैप के अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बिकवाली के कारण भी बाजार में व्यापक नरमी देखी गई। बीएसई पर कुल 3,724 काउंटरों पर कारोबार देखा गया। जिनमें से 2,049 नकारात्मक समापन दिखा रहे थे। जबकि 1,524 काउंटर सकारात्मक रूप से बंद देखे गए। 204 काउंटरों ने अपना वार्षिक शिखर बनाया। जबकि 27 काउंटरों ने 52-सप्ताह का न्यूनतम स्तर दिखाया। 7 काउंटर अपर सर्किट में बंद हुए जबकि 3 काउंटर लोअर सर्किट में बंद हुए। अमेरिका में जुलाई के लिए सीपीआई डेटा गुरुवार को जारी किया गया। जिसे उम्मीद से ज्यादा माना गया. हालांकि, बीच में इसमें नरमी देखी गई और इसके बाद डॉलर में शुरुआती कमजोरी देखने को मिली। हालाँकि, बाद में वह और मजबूत हो गये। जिसके पीछे शेयर बाजारों में आई व्यापक गिरावट थी. एशियाई बाज़ार 2 प्रतिशत तक की गिरावट का संकेत दे रहे थे। जिनमें से शुक्रवार को भारतीय बाजार की शुरुआत मामूली सकारात्मक रही। हालाँकि, बाज़ार हरे क्षेत्र में टिक नहीं सका और तुरंत लाल हो गया। बेंचमार्क निफ्टी 19,543.10 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले गिरकर 19,412.75 पर कारोबार कर रहा है। इस प्रकार यह हाल ही में दूसरी बार 19,500 से नीचे बंद हुआ। निफ्टी फ्यूचर निफ्टी कैश के मुकाबले 73 अंक के प्रीमियम के साथ 19,503 पर बंद हुआ। जिसने पिछले सत्र में देखे गए 56 अंक के प्रीमियम के मुकाबले सुधार का संकेत दिया। इस प्रकार, यह माना जा सकता है कि लंबी स्थिति को निचले शीर्षक में जोड़ा गया है। जिससे बाजार में गिरावट थमने का संकेत मिलता है। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 19,300 का स्तर टूटने पर ही बाजार में और गिरावट संभव है। अन्यथा इसके 19,400-19,700 के दायरे में कारोबार करते नजर आने की अधिक संभावना है। शुक्रवार को निफ्टी को समर्थन प्रदान करने वाले घटकों में एचसीएल टेक्नोलॉजी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, टाइटन कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, टीसीएस और एसबीआई शामिल थे। दूसरी ओर, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, डिविस लैब्स, एसबीआई लाइफ, यूपीएल, एशियन पेंट्स, टाटा कंज्यूमर्स, सन फार्मा, बीपीसीएल, एचयूएल, हिंडाल्को, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील, टेक महिंद्रा, इनफेसेस, हीरो मोटोकॉर्प, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज वित्त में उल्लेखनीय कमी आयी। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो पीएसयू बैंकों को छोड़कर सभी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.25 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। इसके घटकों में, IOB में 13.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा सेंट्रल बैंक, जेके बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पीएनबी, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक में भी खासी मजबूती देखी गई। निजी बैंक, धातु, आईटी, फार्मा, एफएमसीजी में नरमी देखी गई. निफ्टी फार्मा 1.5 फीसदी गिरा। बाजार हलकों का कहना है कि पिछले कुछ सत्रों से लगातार नई ऊंचाई बनाने के बाद फार्मा शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई है। फार्मा शेयरों में अल्केम लैब 8 फीसदी गिर गया। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। निफ्टी आईटी में एचसीएल टेक्नोलॉजी ने 2 अरब डॉलर के ऑर्डर पर 3.5 फीसदी की छलांग लगाई. इसके अलावा कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट, टीसीएस भी मजबूती के संकेत दे रहे थे। वहीं विप्रो, टेक महिंद्रा, इनफैसिस और एम्फेसिस में नरमी देखी गई। एनएसई डेरिवेटिव सेगमेंट पर नजर डालें तो इंडिया सीमेंट्स 5 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रही। आरईसी के अलावा, एचसीएल टेक्नोलॉजी, जिंदल स्टील, बीएचईएल, आईआरसीटीसी, कोफोर्ज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, पीएबी, पेज इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रिक, जीएमआर एयरपोर्ट्स, इंडस टावर्स, जुबिलेंट फूड, इंडियन होटल्स, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बर्गर पेंट्स, पावर ग्रिड में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। बैठक थी दूसरी ओर, अपोलो टायर्स, अल्केम लैब, इंफोएज, ज़ी एंटरटेनमेंट, कैन फिन होम्स, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, सीजी कंज्यूमर, कंटेनर कॉर्पोरेशन, सिंजेन इंटरनेशनल, लौरस लैब्स, जेके सीमेंट, मैक्स फाइनेंशियल, वेदांता, श्रीराम फाइनेंस प्रमुख रहे। अस्वीकार करने वाले वार्षिक या उच्चतम शिखर दर्शाने वाले कुछ काउंटरों में कल्याण ज्वैलर्स, हिंद कॉपर, सीई इंफे सिस्टम्स, सुप्रीम इंडस्ट्रीज 3एम इंडिया, मोतीलाल ओसवाल, श्याम मेटालिक्स, आरईसी और जिंदल स्टील शामिल हैं।
जुलाई के लिए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद से कम आने से निवेशकों को राहत मिलने के बावजूद वैश्विक शेयर बाजारों में भारी बिकवाली हुई। जिसमें एशियाई बाजारों में दो फीसदी की गिरावट देखी गई. भारतीय बेंचमार्क भी आधा फीसदी नीचे बंद होते दिखे. बीएसई सेंसेक्स तीन सौ पैंसठ.तिरेपन अंक गिरकर पैंसठ,तीन सौ बाईस.पैंसठ पर और निफ्टी एक सौ चौदह.अस्सी अंक गिरकर उन्नीस,चार सौ अट्ठाईस.तीस पर बंद हुआ। लार्ज-कैप के अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बिकवाली के कारण भी बाजार में व्यापक नरमी देखी गई। बीएसई पर कुल तीन,सात सौ चौबीस काउंटरों पर कारोबार देखा गया। जिनमें से दो,उनचास नकारात्मक समापन दिखा रहे थे। जबकि एक,पाँच सौ चौबीस काउंटर सकारात्मक रूप से बंद देखे गए। दो सौ चार काउंटरों ने अपना वार्षिक शिखर बनाया। जबकि सत्ताईस काउंटरों ने बावन-सप्ताह का न्यूनतम स्तर दिखाया। सात काउंटर अपर सर्किट में बंद हुए जबकि तीन काउंटर लोअर सर्किट में बंद हुए। अमेरिका में जुलाई के लिए सीपीआई डेटा गुरुवार को जारी किया गया। जिसे उम्मीद से ज्यादा माना गया. हालांकि, बीच में इसमें नरमी देखी गई और इसके बाद डॉलर में शुरुआती कमजोरी देखने को मिली। हालाँकि, बाद में वह और मजबूत हो गये। जिसके पीछे शेयर बाजारों में आई व्यापक गिरावट थी. एशियाई बाज़ार दो प्रतिशत तक की गिरावट का संकेत दे रहे थे। जिनमें से शुक्रवार को भारतीय बाजार की शुरुआत मामूली सकारात्मक रही। हालाँकि, बाज़ार हरे क्षेत्र में टिक नहीं सका और तुरंत लाल हो गया। बेंचमार्क निफ्टी उन्नीस,पाँच सौ तैंतालीस.दस के पिछले बंद स्तर के मुकाबले गिरकर उन्नीस,चार सौ बारह.पचहत्तर पर कारोबार कर रहा है। इस प्रकार यह हाल ही में दूसरी बार उन्नीस,पाँच सौ से नीचे बंद हुआ। निफ्टी फ्यूचर निफ्टी कैश के मुकाबले तिहत्तर अंक के प्रीमियम के साथ उन्नीस,पाँच सौ तीन पर बंद हुआ। जिसने पिछले सत्र में देखे गए छप्पन अंक के प्रीमियम के मुकाबले सुधार का संकेत दिया। इस प्रकार, यह माना जा सकता है कि लंबी स्थिति को निचले शीर्षक में जोड़ा गया है। जिससे बाजार में गिरावट थमने का संकेत मिलता है। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, उन्नीस,तीन सौ का स्तर टूटने पर ही बाजार में और गिरावट संभव है। अन्यथा इसके उन्नीस,चार सौ-उन्नीस,सात सौ के दायरे में कारोबार करते नजर आने की अधिक संभावना है। शुक्रवार को निफ्टी को समर्थन प्रदान करने वाले घटकों में एचसीएल टेक्नोलॉजी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, टाइटन कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, टीसीएस और एसबीआई शामिल थे। दूसरी ओर, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, डिविस लैब्स, एसबीआई लाइफ, यूपीएल, एशियन पेंट्स, टाटा कंज्यूमर्स, सन फार्मा, बीपीसीएल, एचयूएल, हिंडाल्को, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील, टेक महिंद्रा, इनफेसेस, हीरो मोटोकॉर्प, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज वित्त में उल्लेखनीय कमी आयी। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो पीएसयू बैंकों को छोड़कर सभी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक एक.पच्चीस फीसदी बढ़कर बंद हुआ। इसके घटकों में, IOB में तेरह.छः प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा सेंट्रल बैंक, जेके बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पीएनबी, इंडियन बैंक, यूनियन बैंक में भी खासी मजबूती देखी गई। निजी बैंक, धातु, आईटी, फार्मा, एफएमसीजी में नरमी देखी गई. निफ्टी फार्मा एक.पाँच फीसदी गिरा। बाजार हलकों का कहना है कि पिछले कुछ सत्रों से लगातार नई ऊंचाई बनाने के बाद फार्मा शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई है। फार्मा शेयरों में अल्केम लैब आठ फीसदी गिर गया। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। इसके अलावा बायोकॉन, डिविस लैब्स, टोरेंट फार्मा, सन फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफ, ल्यूपिन, सिप्ला में भी बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स ने भी चौथाई फीसदी गिरावट का संकेत दिया है. जिसमें यूनाइटेड स्पिरिट्स, पीएंडजी, टाटा कंज्यूमर्स, डाबर इंडिया, एचयूएल, नेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, गोदरेज कंज्यूमर जैसे काउंटर कमजोरी दिखा रहे थे। निफ्टी आईटी में एचसीएल टेक्नोलॉजी ने दो अरब डॉलर के ऑर्डर पर तीन.पाँच फीसदी की छलांग लगाई. इसके अलावा कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट, टीसीएस भी मजबूती के संकेत दे रहे थे। वहीं विप्रो, टेक महिंद्रा, इनफैसिस और एम्फेसिस में नरमी देखी गई। एनएसई डेरिवेटिव सेगमेंट पर नजर डालें तो इंडिया सीमेंट्स पाँच प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रही। आरईसी के अलावा, एचसीएल टेक्नोलॉजी, जिंदल स्टील, बीएचईएल, आईआरसीटीसी, कोफोर्ज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, पीएबी, पेज इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रिक, जीएमआर एयरपोर्ट्स, इंडस टावर्स, जुबिलेंट फूड, इंडियन होटल्स, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बर्गर पेंट्स, पावर ग्रिड में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। बैठक थी दूसरी ओर, अपोलो टायर्स, अल्केम लैब, इंफोएज, ज़ी एंटरटेनमेंट, कैन फिन होम्स, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, सीजी कंज्यूमर, कंटेनर कॉर्पोरेशन, सिंजेन इंटरनेशनल, लौरस लैब्स, जेके सीमेंट, मैक्स फाइनेंशियल, वेदांता, श्रीराम फाइनेंस प्रमुख रहे। अस्वीकार करने वाले वार्षिक या उच्चतम शिखर दर्शाने वाले कुछ काउंटरों में कल्याण ज्वैलर्स, हिंद कॉपर, सीई इंफे सिस्टम्स, सुप्रीम इंडस्ट्रीज तीनएम इंडिया, मोतीलाल ओसवाल, श्याम मेटालिक्स, आरईसी और जिंदल स्टील शामिल हैं।
फ़ैसला किया। उसने हुक को अपनी जगह से हटा दिया, और कोट फिर पहनकर देखा । अब कोट बिल्कुल ठीक था । उसने उसे तह कर फिर सन्दूक में रख दिया। अब वह निश्चित था । वह अपने सिर की हजामत से भी सन्तुष्ट था, लेकिन ग़ौर से शीशे में देखकर उसे लगा में कि उसकी चाँद बिल्कुल मुलायम नहीं थी । सिर पर थोड़े से रोएँ उगे थे, जो मुश्किल से नज़र आते थे । वह फ़ौरन जेल के क़ायदे के मुताबिक सिर पर उस्तरा फिरवाने 'मेजर' के पास गया। हालाँकि कल का मुआइना नहीं होने वाला था, लेकिन उसने सिर्फ़ अपनी अन्तरात्मा को शान्त करने के लिए हजामत करवाई, ताकि क्रिसमस से पहले उसका कोई फ़र्ज़ अधूरा न रह जाए। बचपन से ही उसके मन पर सैनिक चिह्नों, बटनों और वर्दी की हर छोटी-छोटी चीज़ का अमिट प्रभाव पड़ा था। उसे लगता था कि यह एक ऐसा फ़र्ज़ है, जिसके श्रौचित्य में किसी को सन्देह नहीं हो सकता। उसकी दृष्टि में यह किसी भी भद्र व्यक्ति के लिए सौन्दर्य की पराकाष्ठा थी । इसके बाद वार्ड का नम्बरदार होने की हैसियत से उसने सूखा घास मंगवाया और अपनी निगरानी में फर्श पर बिछवाया। दूसरे वार्डों में भी ऐसा ही किया गया था । न जाने किसलिए क्रिसमस के मौके पर फ़र्शों पर सूखा घास बिछाया जाता था । काम ख़त्म करने के बाद किम कीमच ने प्रार्थना की और बिस्तर पर लेटकर बच्चों की तरह मीठी नींद में सो गया, ताकि अगले दिन वह जल्द से जल्द उठ सके । बाक़ी सब क़ैदियों ने भी ऐसा ही किया । सब वार्डों में क़ैदी रोज़ से जल्दी ही सो गए । शाम के वक्त सब लोग जो काम करते थे वह भी आज बन्द हो गया था । किसी को ताश खेलने की होश नहीं थी, सब बेचैनी से क्रिसमस का इन्तज़ार कर रहे थे । क्रिसमस का दिन भी ना पहुँचा । सूरज निकलने से पहले, सुबह का नगाड़ा बजते ही सब वार्डों के दरवाज़े खोल दिए गए और जो सार्जेन्ट ड्यूटी पर तैनात था, उसने आकर कैदियों को गिना और
फ़ैसला किया। उसने हुक को अपनी जगह से हटा दिया, और कोट फिर पहनकर देखा । अब कोट बिल्कुल ठीक था । उसने उसे तह कर फिर सन्दूक में रख दिया। अब वह निश्चित था । वह अपने सिर की हजामत से भी सन्तुष्ट था, लेकिन ग़ौर से शीशे में देखकर उसे लगा में कि उसकी चाँद बिल्कुल मुलायम नहीं थी । सिर पर थोड़े से रोएँ उगे थे, जो मुश्किल से नज़र आते थे । वह फ़ौरन जेल के क़ायदे के मुताबिक सिर पर उस्तरा फिरवाने 'मेजर' के पास गया। हालाँकि कल का मुआइना नहीं होने वाला था, लेकिन उसने सिर्फ़ अपनी अन्तरात्मा को शान्त करने के लिए हजामत करवाई, ताकि क्रिसमस से पहले उसका कोई फ़र्ज़ अधूरा न रह जाए। बचपन से ही उसके मन पर सैनिक चिह्नों, बटनों और वर्दी की हर छोटी-छोटी चीज़ का अमिट प्रभाव पड़ा था। उसे लगता था कि यह एक ऐसा फ़र्ज़ है, जिसके श्रौचित्य में किसी को सन्देह नहीं हो सकता। उसकी दृष्टि में यह किसी भी भद्र व्यक्ति के लिए सौन्दर्य की पराकाष्ठा थी । इसके बाद वार्ड का नम्बरदार होने की हैसियत से उसने सूखा घास मंगवाया और अपनी निगरानी में फर्श पर बिछवाया। दूसरे वार्डों में भी ऐसा ही किया गया था । न जाने किसलिए क्रिसमस के मौके पर फ़र्शों पर सूखा घास बिछाया जाता था । काम ख़त्म करने के बाद किम कीमच ने प्रार्थना की और बिस्तर पर लेटकर बच्चों की तरह मीठी नींद में सो गया, ताकि अगले दिन वह जल्द से जल्द उठ सके । बाक़ी सब क़ैदियों ने भी ऐसा ही किया । सब वार्डों में क़ैदी रोज़ से जल्दी ही सो गए । शाम के वक्त सब लोग जो काम करते थे वह भी आज बन्द हो गया था । किसी को ताश खेलने की होश नहीं थी, सब बेचैनी से क्रिसमस का इन्तज़ार कर रहे थे । क्रिसमस का दिन भी ना पहुँचा । सूरज निकलने से पहले, सुबह का नगाड़ा बजते ही सब वार्डों के दरवाज़े खोल दिए गए और जो सार्जेन्ट ड्यूटी पर तैनात था, उसने आकर कैदियों को गिना और
महाराजगंज थाना क्षेत्र के बंगरा बाबा मोड़ के समीप मंगलवार की सुबह साइकिल से कोचिंग कर घर जा रहे छात्र को एक तेज रफ्तार बाईक सवार से सीधी टक्कर हो गई। जिसमें साईकिल सवार छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जख्मी छात्र को स्थानीय लोगों ने महाराजगंज पीएचसी लाया, जहां चिकित्सकों ने चिंताजनक स्थिति में सीवान सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहीं जख्मी छात्र का सीवान सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के संबंध में बताया जाता है कि थाना क्षेत्र के हहवां गांव निवासी अर्जुन प्रसाद के 17 वर्षीय इकलौते पुत्र आंशु कुमार इन्टर का छात्र था, जो कोचिंग करने के लिए महाराजगंज आता था। वह प्रतिदिन कि भांति मंगलवार को महाराजगंज में अभिनव क्लासेज में कोचिंग में पढ़ने आया था। आंशु कोचिंग कर के साईकिल से अपने घर हहवां वापस जा रहा था। तभी मांझी बरौली पथ के बंगरा गांव के बाबा मोड के पास तेज गति से आ रहे एक मोटरसाइकिल सवार ने उसे जोरदार घक्का मार दिया। जिससे वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। मोटरसाइकिल सवार मौके का फायदा उठाते हुए वहां से भाग गया। बाद में ज़ख्मी अंशु को पीएचसी लाया गया जहां से डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर सीवान रेफर कर दिया। सीवान सदर अस्पताल में इलाज के दौरान जख्मी अंशु की मौत हो गई। मौत की खबर सुन परिजनों में कोहराम मच गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
महाराजगंज थाना क्षेत्र के बंगरा बाबा मोड़ के समीप मंगलवार की सुबह साइकिल से कोचिंग कर घर जा रहे छात्र को एक तेज रफ्तार बाईक सवार से सीधी टक्कर हो गई। जिसमें साईकिल सवार छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जख्मी छात्र को स्थानीय लोगों ने महाराजगंज पीएचसी लाया, जहां चिकित्सकों ने चिंताजनक स्थिति में सीवान सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहीं जख्मी छात्र का सीवान सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के संबंध में बताया जाता है कि थाना क्षेत्र के हहवां गांव निवासी अर्जुन प्रसाद के सत्रह वर्षीय इकलौते पुत्र आंशु कुमार इन्टर का छात्र था, जो कोचिंग करने के लिए महाराजगंज आता था। वह प्रतिदिन कि भांति मंगलवार को महाराजगंज में अभिनव क्लासेज में कोचिंग में पढ़ने आया था। आंशु कोचिंग कर के साईकिल से अपने घर हहवां वापस जा रहा था। तभी मांझी बरौली पथ के बंगरा गांव के बाबा मोड के पास तेज गति से आ रहे एक मोटरसाइकिल सवार ने उसे जोरदार घक्का मार दिया। जिससे वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। मोटरसाइकिल सवार मौके का फायदा उठाते हुए वहां से भाग गया। बाद में ज़ख्मी अंशु को पीएचसी लाया गया जहां से डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर सीवान रेफर कर दिया। सीवान सदर अस्पताल में इलाज के दौरान जख्मी अंशु की मौत हो गई। मौत की खबर सुन परिजनों में कोहराम मच गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लखनऊ (ब्यूरो)। प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के तहत प्रदेश में अब तक 32, 526 ने जॉइन कर लिया है। वहीं 15 जिलों ने दूसरे चरण में नियुक्ति पत्र देने के लिए विज्ञापन निकाल दिया है। शासन ने अन्य जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी जल्द मेरिट जारी कर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। बता दें कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 72825 पदों पर प्रशिक्षु शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया जाना है। दूसरे चरण में 29 जनवरी से पांच फरवरी तक नियुक्ति पत्र जारी किए जाने हैं। शासन ने अब तक मेरिट जारी न करने वाले 60 जिलों के बेसिक शिक्षाधिकारियों को जल्द मेरिट जारी कर नियुक्ति पत्र देने की कार्यवाही पूरी कराने को कहा है। प्रशिक्षु शिक्षकों को नियुक्ति पत्र पाने के एक सप्ताह में कार्यभार ग्रहण करना होगा। प्रशिक्षु शिक्षक : नियुक्ति पत्र जल्द जारी करने के निर्देश : 32,526 ने अब तक किया जॉइन Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 8:24 AM Rating:
लखनऊ । प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के तहत प्रदेश में अब तक बत्तीस, पाँच सौ छब्बीस ने जॉइन कर लिया है। वहीं पंद्रह जिलों ने दूसरे चरण में नियुक्ति पत्र देने के लिए विज्ञापन निकाल दिया है। शासन ने अन्य जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी जल्द मेरिट जारी कर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। बता दें कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बहत्तर हज़ार आठ सौ पच्चीस पदों पर प्रशिक्षु शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया जाना है। दूसरे चरण में उनतीस जनवरी से पांच फरवरी तक नियुक्ति पत्र जारी किए जाने हैं। शासन ने अब तक मेरिट जारी न करने वाले साठ जिलों के बेसिक शिक्षाधिकारियों को जल्द मेरिट जारी कर नियुक्ति पत्र देने की कार्यवाही पूरी कराने को कहा है। प्रशिक्षु शिक्षकों को नियुक्ति पत्र पाने के एक सप्ताह में कार्यभार ग्रहण करना होगा। प्रशिक्षु शिक्षक : नियुक्ति पत्र जल्द जारी करने के निर्देश : बत्तीस,पाँच सौ छब्बीस ने अब तक किया जॉइन Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on आठ:चौबीस AM Rating:
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) दुनिया के 10वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं, इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर टाइकून गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनका परिवार है, जोकि फोर्ब्स की वार्षिक दुनिया की अरबपतियों की सूची (Forbes' annual world's billionaires list) में 11वें स्थान पर हैं. स्पेसएक्स और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने इस साल शीर्ष स्थान की रेस में अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस को पछाड़ दिया है. पृथ्वी के सबसे अमीर लोगों की 36वीं-वार्षिक रैंकिंग में 2,668 अरबपति हैं - एक साल पहले की तुलना में 87 कम. फोर्ब्स के अनुसार, "युद्ध, महामारी और सुस्त बाजार" ने अति-धनी लोगों को प्रभावित किया है. हालांकि, एक हजार अरबपति ऐसे हैं जो पहले की तुलना में अधिक अमीर हैं. अरबपतियों की सूची में 236 नए धन कुबेर हैं. अमेरिका 735 अरबपतियों की कुल 4. 7 ट्रिलियन डॉलर की कमाई के साथ लिस्ट में पहले स्थान पर है. रूस और चीन में अरबपतियों की संख्या में नाटकीय गिरावट देखने को मिली है. फोर्ब्स के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस में पिछले साल की तुलना में 34 अरबपति कम हुए हैं और टेक कंपनियों पर सरकारी कार्रवाई के बाद चीन में 87 अरबपति कम हुए हैं. बिजनेस मैगजीन ने बताया कि उसने 11 मार्च 2022 से स्टॉक की कीमतों और विनिमय दरों का इस्तेमाल नेट वर्थ की गणना के लिए किया है. 1. मुकेश अंबानी (वैश्विक रैंक 10) 2. गौतम अडानी (वैश्विक रैंक 11) 3. शिव नादर (वैश्विक रैंक 47) 4. साइरस पूनावाला (वैश्विक रैंक 56) 5. राधाकिशन दमानी (वैश्विक रैंक 81) 6. लक्ष्मी मित्तल (वैश्विक रैंक 89) 7. सावित्री जिंदल और परिवार (वैश्विक रैंक 91) 8. कुमार बिड़ला (वैश्विक रैंक 109) 9. दिलीप सांघवी (वैश्विक रैंक 115) 10. उदय कोटक (वैश्विक रैंक 129) सूची में अन्य भारतीयों में अजीम प्रेमजी, बजाज बंधु, राकेश झुनझुनवाला, फाल्गुनी नायर भी शामिल हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी दुनिया के दसवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं, इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर टाइकून गौतम अडानी और उनका परिवार है, जोकि फोर्ब्स की वार्षिक दुनिया की अरबपतियों की सूची में ग्यारहवें स्थान पर हैं. स्पेसएक्स और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने इस साल शीर्ष स्थान की रेस में अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस को पछाड़ दिया है. पृथ्वी के सबसे अमीर लोगों की छत्तीसवीं-वार्षिक रैंकिंग में दो,छः सौ अड़सठ अरबपति हैं - एक साल पहले की तुलना में सत्तासी कम. फोर्ब्स के अनुसार, "युद्ध, महामारी और सुस्त बाजार" ने अति-धनी लोगों को प्रभावित किया है. हालांकि, एक हजार अरबपति ऐसे हैं जो पहले की तुलना में अधिक अमीर हैं. अरबपतियों की सूची में दो सौ छत्तीस नए धन कुबेर हैं. अमेरिका सात सौ पैंतीस अरबपतियों की कुल चार. सात ट्रिलियन डॉलर की कमाई के साथ लिस्ट में पहले स्थान पर है. रूस और चीन में अरबपतियों की संख्या में नाटकीय गिरावट देखने को मिली है. फोर्ब्स के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस में पिछले साल की तुलना में चौंतीस अरबपति कम हुए हैं और टेक कंपनियों पर सरकारी कार्रवाई के बाद चीन में सत्तासी अरबपति कम हुए हैं. बिजनेस मैगजीन ने बताया कि उसने ग्यारह मार्च दो हज़ार बाईस से स्टॉक की कीमतों और विनिमय दरों का इस्तेमाल नेट वर्थ की गणना के लिए किया है. एक. मुकेश अंबानी दो. गौतम अडानी तीन. शिव नादर चार. साइरस पूनावाला पाँच. राधाकिशन दमानी छः. लक्ष्मी मित्तल सात. सावित्री जिंदल और परिवार आठ. कुमार बिड़ला नौ. दिलीप सांघवी दस. उदय कोटक सूची में अन्य भारतीयों में अजीम प्रेमजी, बजाज बंधु, राकेश झुनझुनवाला, फाल्गुनी नायर भी शामिल हैं.
गगन बावा, गुरदासपुरः एक्स सेंट्रल आर्मड पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन गुरदासपुर की अहम बैठक रिटायर एसपी चरण सिंह चाहल के घर पर हुई, जिसमें अर्धसैनिक बलों (बीएसएफ, सीआरपी, आईटीबीपी और सीआईएसएफ) से सेवामुक्त गजटेड अधिकारियों, नॉन गजटेड अधिकारियों की समस्याओं पर चर्चा की गई। इस दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए एनजीओ का गठन करने का फैसला किया गया। इसमें एनएस मान को नोडल अधिकारी, डीपी सिंह को अध्यक्ष, चरण सिंह चहल को उपाध्यक्ष, हरबंस सिंह मान को महासचिव, जागीर सिंह धारीवाल व जसवीर सिंह डाला को सचिव, दर्शन सिंह को कैशियर, हरजीत सिंह को कार्यपालक सदस्य और अशोक कुमार एडवोकेट को कानूनी सलाहकार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी एक्स आर्मी पर्सन के परिवार को कोई समस्या आती है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है। इस अवसर पर नोडल अधिकारी एनएस मान और अध्यक्ष डीपी सिंह को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।
गगन बावा, गुरदासपुरः एक्स सेंट्रल आर्मड पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन गुरदासपुर की अहम बैठक रिटायर एसपी चरण सिंह चाहल के घर पर हुई, जिसमें अर्धसैनिक बलों से सेवामुक्त गजटेड अधिकारियों, नॉन गजटेड अधिकारियों की समस्याओं पर चर्चा की गई। इस दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए एनजीओ का गठन करने का फैसला किया गया। इसमें एनएस मान को नोडल अधिकारी, डीपी सिंह को अध्यक्ष, चरण सिंह चहल को उपाध्यक्ष, हरबंस सिंह मान को महासचिव, जागीर सिंह धारीवाल व जसवीर सिंह डाला को सचिव, दर्शन सिंह को कैशियर, हरजीत सिंह को कार्यपालक सदस्य और अशोक कुमार एडवोकेट को कानूनी सलाहकार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी एक्स आर्मी पर्सन के परिवार को कोई समस्या आती है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है। इस अवसर पर नोडल अधिकारी एनएस मान और अध्यक्ष डीपी सिंह को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।
कल्याण आयुर्वेद - गर्मियों में आइसक्रीम का सेवन करना सभी को पसंद होता है. लेकिन मानसून के दिनों में आइसक्रीम का सेवन करने से शरीर को कई नुकसान हो सकते हैं. अगर आप भी मानसून में आइसक्रीम खाने के शौकीन हैं तो इसे खाने से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में जरूर जान ले. जैसे गले के लिए आइसक्रीम का सेवन किसी भी मौसम में फायदेमंद नहीं माना जाता है. ऐसे में यहां हम आपको बताएंगे कि मानसून के मौसम में आइसक्रीम का सेवन करने से आपकी सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं. मानसून के दिनों में वातावरण में ठंडक बढ़ जाती है. इस दौरान आपको ऐसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे शरीर को गर्माहट मिले. आइसक्रीम का सेवन करने से सर्दी का सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आपको मानसून के मौसम में मीठा खाने की क्रेविंग हो रही है, तो आप हलवे का सेवन कर सकते हैं. मानसून के दिनों में आप मूंग दाल को घी में भूनकर हेल्दी हलवा बनाकर खा सकते हैं. मानसून में आइसक्रीम ठंडा पानी या वर्क का सेवन करने से ब्रेन फ्रीज हो सकता है. आइसक्रीम ठंडी होती है और ठंडी चीजों का सेवन करने से दिमाग की नसों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जिससे सिर में तेज दर्द होता है. जिन लोगों को साइनस की समस्या है, उन्हें मानसून के मौसम में आइसक्रीम का सेवन करने से बिल्कुल बचना चाहिए. मानसून में आइसक्रीम का ज्यादा सेवन करने पर गले में इंफेक्शन का सामना करना पड़ सकता है. आइसक्रीम का सेवन करने से गले में इन्फेक्शन के साथ कफ की समस्या भी हो सकती है. कफ होने के कारण खांसी और बुखार भी आ सकता है. मानसून में आइसक्रीम का सेवन करने से गले में इंफेक्शन की समस्या हो सकती है. मानसून के दौरान इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ जाता है. इसलिए हम ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिससे इम्युनिटी बड़े. लेकिन मानसून के दौरान अगर आप आइसक्रीम का सेवन करेंगे तो आप की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है और आप का पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है. जिससे पेट से जुड़ी दिक्कतें होने लगती है. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताएं और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर करें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
कल्याण आयुर्वेद - गर्मियों में आइसक्रीम का सेवन करना सभी को पसंद होता है. लेकिन मानसून के दिनों में आइसक्रीम का सेवन करने से शरीर को कई नुकसान हो सकते हैं. अगर आप भी मानसून में आइसक्रीम खाने के शौकीन हैं तो इसे खाने से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में जरूर जान ले. जैसे गले के लिए आइसक्रीम का सेवन किसी भी मौसम में फायदेमंद नहीं माना जाता है. ऐसे में यहां हम आपको बताएंगे कि मानसून के मौसम में आइसक्रीम का सेवन करने से आपकी सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं. मानसून के दिनों में वातावरण में ठंडक बढ़ जाती है. इस दौरान आपको ऐसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे शरीर को गर्माहट मिले. आइसक्रीम का सेवन करने से सर्दी का सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आपको मानसून के मौसम में मीठा खाने की क्रेविंग हो रही है, तो आप हलवे का सेवन कर सकते हैं. मानसून के दिनों में आप मूंग दाल को घी में भूनकर हेल्दी हलवा बनाकर खा सकते हैं. मानसून में आइसक्रीम ठंडा पानी या वर्क का सेवन करने से ब्रेन फ्रीज हो सकता है. आइसक्रीम ठंडी होती है और ठंडी चीजों का सेवन करने से दिमाग की नसों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जिससे सिर में तेज दर्द होता है. जिन लोगों को साइनस की समस्या है, उन्हें मानसून के मौसम में आइसक्रीम का सेवन करने से बिल्कुल बचना चाहिए. मानसून में आइसक्रीम का ज्यादा सेवन करने पर गले में इंफेक्शन का सामना करना पड़ सकता है. आइसक्रीम का सेवन करने से गले में इन्फेक्शन के साथ कफ की समस्या भी हो सकती है. कफ होने के कारण खांसी और बुखार भी आ सकता है. मानसून में आइसक्रीम का सेवन करने से गले में इंफेक्शन की समस्या हो सकती है. मानसून के दौरान इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ जाता है. इसलिए हम ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिससे इम्युनिटी बड़े. लेकिन मानसून के दौरान अगर आप आइसक्रीम का सेवन करेंगे तो आप की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है और आप का पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है. जिससे पेट से जुड़ी दिक्कतें होने लगती है. आपको यह जानकारी कैसी लगी ? हमें कमेंट में जरूर बताएं और अगर अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें. साथ ही चैनल को फॉलो जरूर करें. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद.
कोलकाता, तीन अगस्त कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन जनहित याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया जिनमें पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच कराये जाने का अनुरोध किया गया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) अध्यक्ष द्वारा गठित सात सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश की है और इन मामलों की सुनवाई राज्य के बाहर होनी चाहिए। समिति ने कहा कि अन्य मामलों की जांच अदालत की निगरानी वाली एसआईटी (विशेष जांच दल) द्वारा की जानी चाहिए और निर्णय के लिए फास्ट ट्रैक अदालत, विशेष लोक अभियोजक और गवाह सुरक्षा योजना होनी चाहिए। मामले की सुनवाई मंगलवार को समाप्त हुई और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्तियों आई पी मुखर्जी, हरीश टंडन, सौमेन सेन और सुब्रत तालुकदार की पीठ ने आदेश सुरक्षित रख लिया। भारत संघ की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वाई जे दस्तूर ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सीबीआई जैसी किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच करने के लिए तैयार है। जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के परिणामस्वरूप लोगों पर हमला किया गया, घरों से पलायन किया गया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कोलकाता, तीन अगस्त कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन जनहित याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया जिनमें पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच कराये जाने का अनुरोध किया गया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष द्वारा गठित सात सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने की सिफारिश की है और इन मामलों की सुनवाई राज्य के बाहर होनी चाहिए। समिति ने कहा कि अन्य मामलों की जांच अदालत की निगरानी वाली एसआईटी द्वारा की जानी चाहिए और निर्णय के लिए फास्ट ट्रैक अदालत, विशेष लोक अभियोजक और गवाह सुरक्षा योजना होनी चाहिए। मामले की सुनवाई मंगलवार को समाप्त हुई और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्तियों आई पी मुखर्जी, हरीश टंडन, सौमेन सेन और सुब्रत तालुकदार की पीठ ने आदेश सुरक्षित रख लिया। भारत संघ की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वाई जे दस्तूर ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सीबीआई जैसी किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच करने के लिए तैयार है। जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा के परिणामस्वरूप लोगों पर हमला किया गया, घरों से पलायन किया गया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कांग्रेस के दो विधायकों पवन काजल और लखविंदर राणा के भाजपा में शामिल होते ही राजनीतिक उत्थान व पतन की कई कहानियां, अतीत से भविष्य तक जुड़ जाती हैं। जाहिर तौर पर इससे मिशन रिपीट में मिजाज बदलने की सौगंध का विस्तार होता है, लेकिन निजी रूप से भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के पद पर जयराम ठाकुर के पक्ष में पैदा किए जा रहे समीकरणों का यह उत्थान भी है। यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की परिपाटी में सजे-सजाए विधायकों की एक निजी कतार जोड़ी जा रही है। देहरा व जोगिंद्रनगर के निर्दलीय विधायकों को भाजपा में शामिल करने के बाद कांग्रेस के दो विधायक अगर पार्टी में शरीक हो रहे हैं, तो यह एक नए व्यक्तिवाद का विस्तार है, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री की निजी संपत्ति के मानिंद हो सकता है। उत्थान-पतन की कहानियों में भाजपा जिस खोए को पाना चाहती है, उसमें कांगड़ा के राजनीतिक यथार्थ को पढ़ा जाएगा और यह भीकि वर्तमान सरकार के दौर में इस क्षेत्र को 'मिशन रिटर्न' के अभिप्राय से किस हद तक देखा गया। यह प्रश्र भाजपा की धूमल से जयराम की सत्ता तक इतना तो साबित करता है कि कहीं न कहीं एक भावना यह जरूर घर कर रही है कि कांगड़ा के वजूद को सीमित करके एक ऐसा राजनीतिक समीकरण पैदा किया जाए, जो मुख्यमंत्रियों में व्यक्तिवाद को नए मुकाम तक पहुंचाए। बतौर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल इतने स्थापित हुए कि उनके सामने कांगड़ा घुटनों के बल हो गया और एक बार तो जिला का तीया पांचा करते हुए इसके टुकड़े तक सुनिश्चित कर दिए गए थे। इस बार ऐसा प्रत्यक्ष रूप में नहीं हुआ, लेकिन मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे ने कांगड़ा के नेताओं को औकात बता दी। सरवीण चौधरी, बिक्रम ठाकुर व राकेश पठानिया के विभागीय बजट जोड़ कर देखे जाएं, तो मालूम हो जाएगा कि इसी खाते से मंडी को क्या मिला। यह पहली बार हुआ जब कांगड़ा के तीन दिग्गज नेता किशन कपूर, रमेश धवाला व विपिन सिंह परमार सरकार के एहसास से दूर मंत्री पदों से बेदखल हो गए। इसमें सत्ता का दोष कम और कांगड़ा के नेताओं का कहीं अधिक रहा है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जिला विभाजन की स्वार्थी मांग केे पीछे जो नेता अलंकृत होना चाहते हैं, वे सीमित दायरे में भी कांगड़ा को नेतृत्व देने में विफल रहे हैं। आज की तारीख में कांगड़ा के राजनीतिक अनुपात में न तो नेतृत्व तैयार हो रहा है और न ही होने दिया जा रहा है। यह सवाल जितना कड़वा भाजपा से है, उतना ही कांग्रेस से भी है। कांग्रेस ने जिस तरजीह से पवन काजल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, उसका हश्र देख लिया। अब अगर चौधरी चंद्र कुमार नजर आए, तो कांग्रेस को अपनी आंखों से कुछ पट्टियां हटानी पड़ेंगी। कांग्रेस चुनाव समिति की घोषणा में कांग्रेस ने कांगड़ा की चाबी अगर विप्लव ठाकुर को सौंपी है, तो यह सुधीर शर्मा जैसे नेताओं को रोकने का प्रयास है। क्या पार्टी यह समझ रही है कि विप्लव की बागडोर में कांगड़ा से सत्ता का विजय पथ निकलता है और अगर ऐसे फैसले हाशिए बनाएंगे, तो कांग्रेस खुद के साथ दुश्मनी ही पैदा कर रही है। दूसरी ओर अगर नूरपुर, देहरा व पालमपुर को जिला बनाकर कोई भाजपा या कांग्रेसी नेता प्रदेश की सत्ता में कुछ पाना चाहता है, तो इससे बड़ा भ्रम और कोई नहीं। कभी सोलह विधानसभा क्षेत्रों (अब पंद्रह) की वजह से शांता कुमार सशक्त हुए थे, तो चार विधानसभाओं के जिला बनाकर कौन ऐसा नेता है जो जननायक बन जाएगा। आज की स्थिति में कांगड़ा के मंत्री अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। - (जारी)
कांग्रेस के दो विधायकों पवन काजल और लखविंदर राणा के भाजपा में शामिल होते ही राजनीतिक उत्थान व पतन की कई कहानियां, अतीत से भविष्य तक जुड़ जाती हैं। जाहिर तौर पर इससे मिशन रिपीट में मिजाज बदलने की सौगंध का विस्तार होता है, लेकिन निजी रूप से भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के पद पर जयराम ठाकुर के पक्ष में पैदा किए जा रहे समीकरणों का यह उत्थान भी है। यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की परिपाटी में सजे-सजाए विधायकों की एक निजी कतार जोड़ी जा रही है। देहरा व जोगिंद्रनगर के निर्दलीय विधायकों को भाजपा में शामिल करने के बाद कांग्रेस के दो विधायक अगर पार्टी में शरीक हो रहे हैं, तो यह एक नए व्यक्तिवाद का विस्तार है, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री की निजी संपत्ति के मानिंद हो सकता है। उत्थान-पतन की कहानियों में भाजपा जिस खोए को पाना चाहती है, उसमें कांगड़ा के राजनीतिक यथार्थ को पढ़ा जाएगा और यह भीकि वर्तमान सरकार के दौर में इस क्षेत्र को 'मिशन रिटर्न' के अभिप्राय से किस हद तक देखा गया। यह प्रश्र भाजपा की धूमल से जयराम की सत्ता तक इतना तो साबित करता है कि कहीं न कहीं एक भावना यह जरूर घर कर रही है कि कांगड़ा के वजूद को सीमित करके एक ऐसा राजनीतिक समीकरण पैदा किया जाए, जो मुख्यमंत्रियों में व्यक्तिवाद को नए मुकाम तक पहुंचाए। बतौर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल इतने स्थापित हुए कि उनके सामने कांगड़ा घुटनों के बल हो गया और एक बार तो जिला का तीया पांचा करते हुए इसके टुकड़े तक सुनिश्चित कर दिए गए थे। इस बार ऐसा प्रत्यक्ष रूप में नहीं हुआ, लेकिन मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे ने कांगड़ा के नेताओं को औकात बता दी। सरवीण चौधरी, बिक्रम ठाकुर व राकेश पठानिया के विभागीय बजट जोड़ कर देखे जाएं, तो मालूम हो जाएगा कि इसी खाते से मंडी को क्या मिला। यह पहली बार हुआ जब कांगड़ा के तीन दिग्गज नेता किशन कपूर, रमेश धवाला व विपिन सिंह परमार सरकार के एहसास से दूर मंत्री पदों से बेदखल हो गए। इसमें सत्ता का दोष कम और कांगड़ा के नेताओं का कहीं अधिक रहा है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जिला विभाजन की स्वार्थी मांग केे पीछे जो नेता अलंकृत होना चाहते हैं, वे सीमित दायरे में भी कांगड़ा को नेतृत्व देने में विफल रहे हैं। आज की तारीख में कांगड़ा के राजनीतिक अनुपात में न तो नेतृत्व तैयार हो रहा है और न ही होने दिया जा रहा है। यह सवाल जितना कड़वा भाजपा से है, उतना ही कांग्रेस से भी है। कांग्रेस ने जिस तरजीह से पवन काजल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, उसका हश्र देख लिया। अब अगर चौधरी चंद्र कुमार नजर आए, तो कांग्रेस को अपनी आंखों से कुछ पट्टियां हटानी पड़ेंगी। कांग्रेस चुनाव समिति की घोषणा में कांग्रेस ने कांगड़ा की चाबी अगर विप्लव ठाकुर को सौंपी है, तो यह सुधीर शर्मा जैसे नेताओं को रोकने का प्रयास है। क्या पार्टी यह समझ रही है कि विप्लव की बागडोर में कांगड़ा से सत्ता का विजय पथ निकलता है और अगर ऐसे फैसले हाशिए बनाएंगे, तो कांग्रेस खुद के साथ दुश्मनी ही पैदा कर रही है। दूसरी ओर अगर नूरपुर, देहरा व पालमपुर को जिला बनाकर कोई भाजपा या कांग्रेसी नेता प्रदेश की सत्ता में कुछ पाना चाहता है, तो इससे बड़ा भ्रम और कोई नहीं। कभी सोलह विधानसभा क्षेत्रों की वजह से शांता कुमार सशक्त हुए थे, तो चार विधानसभाओं के जिला बनाकर कौन ऐसा नेता है जो जननायक बन जाएगा। आज की स्थिति में कांगड़ा के मंत्री अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। -
आदरणीय साहित्य प्रेमियो, सादर अभिवादन. ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव, अंक- 32 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. (प्रस्तुत चित्र अंतरजाल से साभार लिया गया है) तो आइये, उठा लें अपनी-अपनी लेखनी और कर डालें इस चित्र का काव्यात्मक चित्रण ! आपको पुनः स्मरण करा दें कि छंदोत्सव का आयोजन मात्र भारतीय छंदों में लिखी गयी काव्य-रचनाओं पर ही आधारित होगा. इस छंदोत्सव में पोस्ट की गयी छंदबद्ध प्रविष्टियों के साथ कृपया सम्बंधित छंद का नाम व उस छंद की विधा का संक्षिप्त विवरण अवश्य लिखें. ऐसा न होने की दशा में आपकी प्रविष्टि ओबीओ प्रबंधन द्वारा अस्वीकार कर दी जायेगी. नोट : (1) 22 नवम्बर 2013 तक Reply Box बंद रहेगा, 23 नवम्बर दिन शनिवार से 24 नवम्बर दिन रविवार यानि दो दिनों के लिएReply Box रचना और टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा. सभी प्रतिभागियों से निवेदन है कि रचना छोटी एवं सारगर्भित हो, यानी घाव करे गंभीर वाली बात हो. रचना भारतीय छंदों की किसी विधा में प्रस्तुत की जा सकती है. यहाँ भी ओबीओ के आधार नियम लागू रहेंगे और केवल मौलिक एवं अप्रकाशित सनातनी छंद की रचनाएँ ही स्वीकार की जायेंगीं. विशेष : यदि आप अभी तक www.openbooksonline.com परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बारsign up कर लें. अति आवश्यक सूचना : आयोजन की अवधि के दौरान सदस्यगण अधिकतम दो स्तरीय प्रविष्टियाँ अर्थात प्रति दिन एक के हिसाब से पोस्ट कर सकेंगे. ध्यान रहे प्रति दिन एक, न कि एक ही दिन में दो रचनाएँ. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी । नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी. सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर एक बार संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय. (सदस्य प्रबंधन समूह) Replies are closed for this discussion. आदरणीय गीतिका जी, दोहावली का कथ्य आपको पसंद आया उसके लिए हार्दिक आभार आपका ! जिन शब्दों के प्रयोग से बचने का सुझाव दिया है भविष्य मैं उनको यथोचित ध्यान रखने का प्रयास रहेगा ! //करो एक दिन रात// का मतलब यहाँ ये है की मंजिल पाने के लिए दिन रात मेहनत करो ...... ये पंक्ति उस उस लोकोक्ति से प्रेरित है जहाँ किसी मेहनत काश इंसान के लिए कहा जा है उसने अपनी मंजिल पाने के लिए दिन - रात एक कर दिया ! आशा है अपनी इस पंक्ति का आशय आपको समझा सका होऊंगा ! आपके विचार और सुझावों के लिए हार्दिक आभार गीतिका जी .... ऐसे है मार्गदर्शन करती रहिये ..... आभार ! //करो एक दिन रात // के स्थान "एक करो दिन-रात" का प्रयोग करें तो कैसा रहे? //करो एक दिन रात // के स्थान "एक करो दिन-रात" का प्रयोग करें तो कैसा रहे? आदरणीय गीतिका जी शायद ये सर्वोत्तम होगा .... आपके बहुमूल्य सुझाव के लिए आपका हार्दिक आभार .... मैंने तत्परता से इस बदलाव को अपनी मूल प्रति मैं कर लिया है आभार ! सचिन भाई आपने थोड़ी जल्दबाजी कर दी दोहे आपसे समय की मांग कर रहे हैं कंटक त्रुटियों, शब्द चुनाव एवं गेयता पर ध्यान दें, कई दोहों में प्रवाह बाधित है खैर प्रयास हेतु बधाई स्वीकारें. भाई अरुण जी, आपकी बधाई हिरदय से स्वीकार और आपके द्वारा इंगित बिंदुओं के निराकरण पर निश्चित ही ध्यान देना होगा .... आपका हार्दिक धन्यबाद अरुण भाई ! लक्ष्य कठिन दुर्गम पथक, किन्तु अनवरत काम !! 1!! सेतु बाँधने के लिए, ये कितने गंभीर !!2!! धुन के पक्के हो अगर, होते सफल प्रयास !!3!! मिल जुलकर सब बढ़ चलें, जब मुश्किल हो राह । आयें अड़चन राह में, बढ़कर थामे बांह !!4!! मंजिल पाकर ही रुको , करो रात दिन एक । चींटी सच्ची लगन से, सेतु बनाये नेक !!5!! आदरणीय रविकर जी, सादर आपने शिल्प सम्बन्धी त्रुटियों को दूर करने के लिए इस रचना पर जितनी मेहनत की है उसके लिए मैं आपका हार्दिक आभारी हूँ ... आप गुणीजनों के सहयोग से हम रचनाकर्म के सीखनेवालों को अपने लेखन मैं उत्तरोत्तर सुधार का मौका मिलता है ...... आपके इस अनुपम सहयोग के लिए हार्दिक आभार आपका ! आहहा! जवाब नही आपकी कलम का, आ0 रविकर जी! पुनर्निर्माण भी इतना खूबसूरत! बधाई आदरणीय!
आदरणीय साहित्य प्रेमियो, सादर अभिवादन. ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव, अंक- बत्तीस में आप सभी का हार्दिक स्वागत है. तो आइये, उठा लें अपनी-अपनी लेखनी और कर डालें इस चित्र का काव्यात्मक चित्रण ! आपको पुनः स्मरण करा दें कि छंदोत्सव का आयोजन मात्र भारतीय छंदों में लिखी गयी काव्य-रचनाओं पर ही आधारित होगा. इस छंदोत्सव में पोस्ट की गयी छंदबद्ध प्रविष्टियों के साथ कृपया सम्बंधित छंद का नाम व उस छंद की विधा का संक्षिप्त विवरण अवश्य लिखें. ऐसा न होने की दशा में आपकी प्रविष्टि ओबीओ प्रबंधन द्वारा अस्वीकार कर दी जायेगी. नोट : बाईस नवम्बर दो हज़ार तेरह तक Reply Box बंद रहेगा, तेईस नवम्बर दिन शनिवार से चौबीस नवम्बर दिन रविवार यानि दो दिनों के लिएReply Box रचना और टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा. सभी प्रतिभागियों से निवेदन है कि रचना छोटी एवं सारगर्भित हो, यानी घाव करे गंभीर वाली बात हो. रचना भारतीय छंदों की किसी विधा में प्रस्तुत की जा सकती है. यहाँ भी ओबीओ के आधार नियम लागू रहेंगे और केवल मौलिक एवं अप्रकाशित सनातनी छंद की रचनाएँ ही स्वीकार की जायेंगीं. विशेष : यदि आप अभी तक www.openbooksonline.com परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बारsign up कर लें. अति आवश्यक सूचना : आयोजन की अवधि के दौरान सदस्यगण अधिकतम दो स्तरीय प्रविष्टियाँ अर्थात प्रति दिन एक के हिसाब से पोस्ट कर सकेंगे. ध्यान रहे प्रति दिन एक, न कि एक ही दिन में दो रचनाएँ. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी । नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी. सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर एक बार संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय. Replies are closed for this discussion. आदरणीय गीतिका जी, दोहावली का कथ्य आपको पसंद आया उसके लिए हार्दिक आभार आपका ! जिन शब्दों के प्रयोग से बचने का सुझाव दिया है भविष्य मैं उनको यथोचित ध्यान रखने का प्रयास रहेगा ! //करो एक दिन रात// का मतलब यहाँ ये है की मंजिल पाने के लिए दिन रात मेहनत करो ...... ये पंक्ति उस उस लोकोक्ति से प्रेरित है जहाँ किसी मेहनत काश इंसान के लिए कहा जा है उसने अपनी मंजिल पाने के लिए दिन - रात एक कर दिया ! आशा है अपनी इस पंक्ति का आशय आपको समझा सका होऊंगा ! आपके विचार और सुझावों के लिए हार्दिक आभार गीतिका जी .... ऐसे है मार्गदर्शन करती रहिये ..... आभार ! //करो एक दिन रात // के स्थान "एक करो दिन-रात" का प्रयोग करें तो कैसा रहे? //करो एक दिन रात // के स्थान "एक करो दिन-रात" का प्रयोग करें तो कैसा रहे? आदरणीय गीतिका जी शायद ये सर्वोत्तम होगा .... आपके बहुमूल्य सुझाव के लिए आपका हार्दिक आभार .... मैंने तत्परता से इस बदलाव को अपनी मूल प्रति मैं कर लिया है आभार ! सचिन भाई आपने थोड़ी जल्दबाजी कर दी दोहे आपसे समय की मांग कर रहे हैं कंटक त्रुटियों, शब्द चुनाव एवं गेयता पर ध्यान दें, कई दोहों में प्रवाह बाधित है खैर प्रयास हेतु बधाई स्वीकारें. भाई अरुण जी, आपकी बधाई हिरदय से स्वीकार और आपके द्वारा इंगित बिंदुओं के निराकरण पर निश्चित ही ध्यान देना होगा .... आपका हार्दिक धन्यबाद अरुण भाई ! लक्ष्य कठिन दुर्गम पथक, किन्तु अनवरत काम !! एक!! सेतु बाँधने के लिए, ये कितने गंभीर !!दो!! धुन के पक्के हो अगर, होते सफल प्रयास !!तीन!! मिल जुलकर सब बढ़ चलें, जब मुश्किल हो राह । आयें अड़चन राह में, बढ़कर थामे बांह !!चार!! मंजिल पाकर ही रुको , करो रात दिन एक । चींटी सच्ची लगन से, सेतु बनाये नेक !!पाँच!! आदरणीय रविकर जी, सादर आपने शिल्प सम्बन्धी त्रुटियों को दूर करने के लिए इस रचना पर जितनी मेहनत की है उसके लिए मैं आपका हार्दिक आभारी हूँ ... आप गुणीजनों के सहयोग से हम रचनाकर्म के सीखनेवालों को अपने लेखन मैं उत्तरोत्तर सुधार का मौका मिलता है ...... आपके इस अनुपम सहयोग के लिए हार्दिक आभार आपका ! आहहा! जवाब नही आपकी कलम का, आशून्य रविकर जी! पुनर्निर्माण भी इतना खूबसूरत! बधाई आदरणीय!