raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
क्योंकि आज की दुनिया में वहाँ कई खतरों हैं, यह समझ में आता है इसके विभिन्न अभिव्यक्तियों में सार की सुरक्षा पर विचार करने के लिए। कानून - इस अवधारणा को समझने के लिए, यह शुरू में सबसे विश्वसनीय स्रोतों में से एक से संपर्क करने के लिए आवश्यक है। रूसी कानून के अनुसार, सुरक्षा के रूप में, आप समाज, राज्य और बाह्य और आंतरिक खतरों से व्यक्ति के मौलिक हितों के संरक्षण की स्थिति का निर्धारण कर सकते हैं। महत्वपूर्ण हितों के तहत आवश्यकताओं कि विश्वसनीय प्रगतिशील किया जा रहा है और एक राज्य और समाज के रूप में अस्तित्व सक्षम करने के लिए आवश्यक हैं की समग्रता को समझना चाहिए। हम कारक है कि सुरक्षा को खतरे में डाल करने के लिए ध्यान देना चाहिए। विभिन्न कारकों और शर्तों है कि समाज, राज्य और व्यक्ति की महत्वपूर्ण हितों खतरे में पड़ सकता का एक सेटः खतरे की अवधारणा के रूप में इस व्यवहार किया जाना चाहिए। आदेश दोनों सार्वजनिक और निजी हितों की रक्षा के लिए विशेष उपकरण बनाए गए हैं। ये राज्य के हितों और अलग-अलग, कानून और आपसी जवाबदेही अभिनेताओं और समाज के संतुलन के रखरखाव शामिल हैं। पूरी तरह से सुरक्षा की अवधारणा का पता लगाने के क्रम में, यह अपनी वस्तुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। इस परिभाषा नागरिकों (उनके अधिकार और स्वतंत्रता), राज्य (संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, संवैधानिक व्यवस्था) और समाज (आध्यात्मिक और भौतिक मान) का सच है। बदले में, सुरक्षा गतिविधि की सामग्री के ऊपर वर्णित वस्तुओं, जो दोनों आंतरिक खतरों, और बाह्य हो सकते हैं करने के लिए क्षमता और वास्तविक खतरा से निर्धारित होता है। करने के लिए सुरक्षा की अवधारणा को पूरी तरह से लागू किया गया है, रूस के कानून अपनी एकीकृत नज़र से निर्धारित होता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। इसका प्रमुख घटक जानकारी और के संरक्षण कर रहे हैं आर्थिक हितों। यही कारण है कि इन दो क्षेत्रों के भीतर प्रक्रियाओं मध्यस्थता और सभी उद्योगों और दोनों संकीर्ण में और एक व्यापक अर्थों में लोक प्रशासन के साथ के लिए महत्वपूर्ण है। सुरक्षा की बुनियादी अवधारणाओं, रूसी कानून के अनुसार, राज्य के बहुराष्ट्रीय लोगों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित है क्योंकि यह केवल है शक्ति का स्रोत और रूस की संप्रभुता के अभिभावक। अगर हम पर विचार नागरिकों की सुरक्षा की अवधारणा कुछ हद तक व्यापक है, यह महत्वपूर्ण कार्यों और कारक है कि उसे करने के लिए एक संभावित खतरा हैं पर ध्यान देने लायक है। सुरक्षा के मुद्दे का एक और अधिक उद्देश्य आकलन के लिए जो नाम "सुरक्षा" है अलग शैक्षिक क्षेत्र, विकसित किया गया था। वातावरण में और अपने आप में मानव जानकारी, ऊर्जा या पदार्थों के परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण कार्यों के तहत। इस शब्दावली को देखते हुए, "सुरक्षा" की परिभाषा जीवन की गुणवत्ता का एक विशिष्ट स्तर है, जो खतरों और खतरों है कि महत्वपूर्ण नुकसान हो सकता है का निर्माण नहीं करता करने के लिए कम है। सामाजिक नेटवर्क और लोगों के संघों के अस्तित्व पर प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। यह जनता की सुरक्षा के दो गोल और एक विशेष व्यक्ति के बीच संभावित संघर्ष के अस्तित्व ध्यान देने योग्य है। तथ्य यह है कि कुछ निश्चित परिस्थितियों में यह एक ही समय में इन दोनों शर्तों को पूरा करने के लिए असंभव हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब एक निश्चित व्यक्ति समाज के हितों के लिए एक खतरा पैदा होने की शुरुआत है, अपनी खुद की सुरक्षा खतरे में है। सामान्य तौर पर, हम चाहते हैं कि आध्यात्मिक रूप से परिपक्व समुदाय, महत्वपूर्ण स्थितियों में जिसके सदस्य अधिकांश सुरक्षा के व्यक्तिगत भलाई रख सकते हैं ग्रहण कर सकते हैं। एक महत्वपूर्ण नैतिकता और कानून है कि विशेषाधिकार देना और जो बहुमत की खातिर, साथ ही उनके वंश के लिए अपने स्वयं के हितों का बलिदान का सम्मान की उपस्थिति है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो "समुदाय सुरक्षा" की अवधारणा का सार यह अपने मूल्य खो देंगे। आदेश परिस्थितियों और कार्रवाई है कि नागरिकों के लिए और एक पूरे के रूप राज्य के लिए खतरनाक हो सकता है रोकने के लिए, कुछ उपायों उपयोग किया जाता हैः - सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी विनियमन; - रणनीतिक योजना और इस क्षेत्र में सार्वजनिक नीति की परिभाषा; - खतरों को रोकने के लिए तकनीक का विकास करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक गतिविधियों के संगठन; - भविष्यवाणी, पहचान, मूल्यांकन और सुरक्षा के लिए खतरा का विश्लेषण; - अंतर्राष्ट्रीय सहयोग; - विकास, उत्पादन और विशेष और सैन्य उपकरणों और हथियारों के आधुनिक प्रकार के बाद परिचय; - निर्माण और लंबे समय तक और पहचान, रोकथाम और सुरक्षा के लिए खतरा दूर करने के लिए परिचालन उपायों का एक सेट के कार्यान्वयन; - स्थानीयकरण और कारकों खतरनाक के रूप में पहचान के प्रभाव के बाद के निराकरण; - राज्य और संघीय अधिकारियों के साथ-साथ सुरक्षा के क्षेत्र में नगर निगम के अधिकारियों की गतिविधियों के सक्षम समन्वय; - वित्तपोषण की लागत, संभावित खतरों से प्रभावी सुरक्षा के गठन के उद्देश्य से। अवधि सुरक्षा की अवधारणा भी कुछ तकनीकों है, जो खतरे के अभाव की गारंटी के उपयोग में शामिल हैंः - एक सुरक्षा प्रणाली; - हमलों की रोकथाम; - खतरों के सूत्रों के विनाश; - विनाशकारी कारकों के प्रतिरोध में वृद्धि हुई। इस अवधारणा के सार शक्ति का राज्य संस्थाओं और अर्थव्यवस्था जिसमें यह राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संभव है करने के लिए कम है। हम देश के लिए पर्याप्त रक्षा क्षमताओं और विकास के सामाजिक दिशा के बारे में बात कर रहे हैं यहां तक कि इस मामले में जहां आंतरिक और बाह्य प्रक्रियाओं अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों के निर्माण में। अवधारणा और अध्ययन सुरक्षा के प्रकार, कि आर्थिक सुरक्षा को समझना चाहिए - यह एक सैद्धांतिक अवधारणा है, लेकिन देश के एक व्यावहारिक सुरक्षा हितों नहीं है। सुनिश्चित करें कि यह संभव है की क्षमता और सरकारी संस्थानों की इच्छा समाज के सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के तंत्र को आकार, और रक्षा के लिए और राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास के हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रदान की है। राष्ट्रीय हितों के संरक्षण के लिए उपायों का यह सेट कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता हैः - रक्षा। हम सेना की संरचना और बाहरी खतरों को पीछे हटाने के अपने तत्परता के बारे में बात कर रहे हैं। - खाद्य। इस मामले में यह रूस और सहित अर्थव्यवस्था के कृषि क्षेत्र में, जहां आबादी सभी आवश्यक संसाधनों, गारंटी और क्षमता के साथ उपलब्ध कराया जाएगा की एक ऐसी हालत का एहसास करने के लिए आवश्यक है। इस मामले में, राज्य खाद्य भंडार आंतरिक और बाह्य स्थिति के प्रभाव में कम नहीं किया जाना चाहिए। - रक्षा उद्योग। यह सैन्य-औद्योगिक परिसर है, जो, अंतरराष्ट्रीय स्थिति के विकास के भी सबसे प्रतिकूल स्थितियों के तहत बचाव की मुद्रा में सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनुमति देता के राज्य का मतलब है। यह भू-राजनीतिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण कमी की स्थिति में सुरक्षा भी शामिल है। - वित्तीय। इस अवधि के वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली है, जिससे यह बाजार संस्थानों और सरकारी अधिकारियों से कार्य की सामान्य आर्थिक स्थिति की गारंटी करने के संभव हो जाता है की राज्य को समझना आवश्यक है। इंजीनियरिंग और तकनीकी, संगठनात्मक और कानूनीः सामान्य में, इस तरह के संरक्षण के तीन प्रमुख प्रकार हैं। सुरक्षा की अवधारणा, राज्य और सूचना के समाज के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन करने के लिए, वह अपने कानूनी अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर है। यह उपायों के इस सेट संरक्षण के अन्य दो प्रकार के आधार के रूप में माना जा सकता है। तकनीकी विकास के संदर्भ में, क्योंकि कंप्यूटर अपराध की संभावनाओं के कानूनी क्षेत्र के भीतर सूचना सुरक्षा (आईपी) सुनिश्चित करने के लिए, एक की जरूरत नहीं थी। आईपी के कानूनी समर्थन देश है, जो जानकारी और उनके उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी के उपचार से नियंत्रित होता है में नियमों और बल में फरमान पर आधारित है। आईपी के कानूनी रखरखाव का कार्यान्वयन राज्य से संबंधित है। जानकारी की रक्षा करने संगठनात्मक उपायों कार्य आप कार्यात्मक डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली, उनके संसाधनों के अत्यधिक दोहन, एक विशेष संस्था के कर्मचारियों की गतिविधियों और उपयोगकर्ता के साथ बातचीत को विनियमित करते हैं कि शामिल हैं। उपायों के इस पैकेज का नतीजा आईपी के लिए संभावित खतरों की प्राप्ति के किसी भी संभावनाओं को खत्म करने की है। इंजीनियरिंग और तकनीकी सहायता प्राप्ति के दो दिशाओं हैः - सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डेटा संरक्षण; - सूचना प्रणाली के तत्वों के भौतिक संरक्षण। पहले दिशा वायरस स्कैनर, प्रणाली लेखा परीक्षा, सिस्टम और नेटवर्क पर नज़र रखता है, और दूसरों के रूप में संरक्षण के इस तरह के उपायों का उपयोग कर के भीतर। इस मामले में दूसरे नंबर पर दिशा के संबंध में, के साथ, केबल प्रणाली, बिजली की आपूर्ति और डेटा है, जो उनकी दोहराव द्वारा किया जाता है की रक्षा के भौतिक साधन। आप समाज की अवधारणा और सुरक्षा के प्रकार है कि आधुनिक जीवन रक्षक प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है पर प्रभाव के रूप में एक सामान्य निष्कर्ष निकालना है, यह निष्कर्ष निकला कि रक्षा समाज के सामंजस्यपूर्ण अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है संभव है।
क्योंकि आज की दुनिया में वहाँ कई खतरों हैं, यह समझ में आता है इसके विभिन्न अभिव्यक्तियों में सार की सुरक्षा पर विचार करने के लिए। कानून - इस अवधारणा को समझने के लिए, यह शुरू में सबसे विश्वसनीय स्रोतों में से एक से संपर्क करने के लिए आवश्यक है। रूसी कानून के अनुसार, सुरक्षा के रूप में, आप समाज, राज्य और बाह्य और आंतरिक खतरों से व्यक्ति के मौलिक हितों के संरक्षण की स्थिति का निर्धारण कर सकते हैं। महत्वपूर्ण हितों के तहत आवश्यकताओं कि विश्वसनीय प्रगतिशील किया जा रहा है और एक राज्य और समाज के रूप में अस्तित्व सक्षम करने के लिए आवश्यक हैं की समग्रता को समझना चाहिए। हम कारक है कि सुरक्षा को खतरे में डाल करने के लिए ध्यान देना चाहिए। विभिन्न कारकों और शर्तों है कि समाज, राज्य और व्यक्ति की महत्वपूर्ण हितों खतरे में पड़ सकता का एक सेटः खतरे की अवधारणा के रूप में इस व्यवहार किया जाना चाहिए। आदेश दोनों सार्वजनिक और निजी हितों की रक्षा के लिए विशेष उपकरण बनाए गए हैं। ये राज्य के हितों और अलग-अलग, कानून और आपसी जवाबदेही अभिनेताओं और समाज के संतुलन के रखरखाव शामिल हैं। पूरी तरह से सुरक्षा की अवधारणा का पता लगाने के क्रम में, यह अपनी वस्तुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। इस परिभाषा नागरिकों , राज्य और समाज का सच है। बदले में, सुरक्षा गतिविधि की सामग्री के ऊपर वर्णित वस्तुओं, जो दोनों आंतरिक खतरों, और बाह्य हो सकते हैं करने के लिए क्षमता और वास्तविक खतरा से निर्धारित होता है। करने के लिए सुरक्षा की अवधारणा को पूरी तरह से लागू किया गया है, रूस के कानून अपनी एकीकृत नज़र से निर्धारित होता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। इसका प्रमुख घटक जानकारी और के संरक्षण कर रहे हैं आर्थिक हितों। यही कारण है कि इन दो क्षेत्रों के भीतर प्रक्रियाओं मध्यस्थता और सभी उद्योगों और दोनों संकीर्ण में और एक व्यापक अर्थों में लोक प्रशासन के साथ के लिए महत्वपूर्ण है। सुरक्षा की बुनियादी अवधारणाओं, रूसी कानून के अनुसार, राज्य के बहुराष्ट्रीय लोगों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित है क्योंकि यह केवल है शक्ति का स्रोत और रूस की संप्रभुता के अभिभावक। अगर हम पर विचार नागरिकों की सुरक्षा की अवधारणा कुछ हद तक व्यापक है, यह महत्वपूर्ण कार्यों और कारक है कि उसे करने के लिए एक संभावित खतरा हैं पर ध्यान देने लायक है। सुरक्षा के मुद्दे का एक और अधिक उद्देश्य आकलन के लिए जो नाम "सुरक्षा" है अलग शैक्षिक क्षेत्र, विकसित किया गया था। वातावरण में और अपने आप में मानव जानकारी, ऊर्जा या पदार्थों के परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण कार्यों के तहत। इस शब्दावली को देखते हुए, "सुरक्षा" की परिभाषा जीवन की गुणवत्ता का एक विशिष्ट स्तर है, जो खतरों और खतरों है कि महत्वपूर्ण नुकसान हो सकता है का निर्माण नहीं करता करने के लिए कम है। सामाजिक नेटवर्क और लोगों के संघों के अस्तित्व पर प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। यह जनता की सुरक्षा के दो गोल और एक विशेष व्यक्ति के बीच संभावित संघर्ष के अस्तित्व ध्यान देने योग्य है। तथ्य यह है कि कुछ निश्चित परिस्थितियों में यह एक ही समय में इन दोनों शर्तों को पूरा करने के लिए असंभव हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब एक निश्चित व्यक्ति समाज के हितों के लिए एक खतरा पैदा होने की शुरुआत है, अपनी खुद की सुरक्षा खतरे में है। सामान्य तौर पर, हम चाहते हैं कि आध्यात्मिक रूप से परिपक्व समुदाय, महत्वपूर्ण स्थितियों में जिसके सदस्य अधिकांश सुरक्षा के व्यक्तिगत भलाई रख सकते हैं ग्रहण कर सकते हैं। एक महत्वपूर्ण नैतिकता और कानून है कि विशेषाधिकार देना और जो बहुमत की खातिर, साथ ही उनके वंश के लिए अपने स्वयं के हितों का बलिदान का सम्मान की उपस्थिति है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो "समुदाय सुरक्षा" की अवधारणा का सार यह अपने मूल्य खो देंगे। आदेश परिस्थितियों और कार्रवाई है कि नागरिकों के लिए और एक पूरे के रूप राज्य के लिए खतरनाक हो सकता है रोकने के लिए, कुछ उपायों उपयोग किया जाता हैः - सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी विनियमन; - रणनीतिक योजना और इस क्षेत्र में सार्वजनिक नीति की परिभाषा; - खतरों को रोकने के लिए तकनीक का विकास करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक गतिविधियों के संगठन; - भविष्यवाणी, पहचान, मूल्यांकन और सुरक्षा के लिए खतरा का विश्लेषण; - अंतर्राष्ट्रीय सहयोग; - विकास, उत्पादन और विशेष और सैन्य उपकरणों और हथियारों के आधुनिक प्रकार के बाद परिचय; - निर्माण और लंबे समय तक और पहचान, रोकथाम और सुरक्षा के लिए खतरा दूर करने के लिए परिचालन उपायों का एक सेट के कार्यान्वयन; - स्थानीयकरण और कारकों खतरनाक के रूप में पहचान के प्रभाव के बाद के निराकरण; - राज्य और संघीय अधिकारियों के साथ-साथ सुरक्षा के क्षेत्र में नगर निगम के अधिकारियों की गतिविधियों के सक्षम समन्वय; - वित्तपोषण की लागत, संभावित खतरों से प्रभावी सुरक्षा के गठन के उद्देश्य से। अवधि सुरक्षा की अवधारणा भी कुछ तकनीकों है, जो खतरे के अभाव की गारंटी के उपयोग में शामिल हैंः - एक सुरक्षा प्रणाली; - हमलों की रोकथाम; - खतरों के सूत्रों के विनाश; - विनाशकारी कारकों के प्रतिरोध में वृद्धि हुई। इस अवधारणा के सार शक्ति का राज्य संस्थाओं और अर्थव्यवस्था जिसमें यह राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संभव है करने के लिए कम है। हम देश के लिए पर्याप्त रक्षा क्षमताओं और विकास के सामाजिक दिशा के बारे में बात कर रहे हैं यहां तक कि इस मामले में जहां आंतरिक और बाह्य प्रक्रियाओं अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों के निर्माण में। अवधारणा और अध्ययन सुरक्षा के प्रकार, कि आर्थिक सुरक्षा को समझना चाहिए - यह एक सैद्धांतिक अवधारणा है, लेकिन देश के एक व्यावहारिक सुरक्षा हितों नहीं है। सुनिश्चित करें कि यह संभव है की क्षमता और सरकारी संस्थानों की इच्छा समाज के सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के तंत्र को आकार, और रक्षा के लिए और राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास के हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रदान की है। राष्ट्रीय हितों के संरक्षण के लिए उपायों का यह सेट कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता हैः - रक्षा। हम सेना की संरचना और बाहरी खतरों को पीछे हटाने के अपने तत्परता के बारे में बात कर रहे हैं। - खाद्य। इस मामले में यह रूस और सहित अर्थव्यवस्था के कृषि क्षेत्र में, जहां आबादी सभी आवश्यक संसाधनों, गारंटी और क्षमता के साथ उपलब्ध कराया जाएगा की एक ऐसी हालत का एहसास करने के लिए आवश्यक है। इस मामले में, राज्य खाद्य भंडार आंतरिक और बाह्य स्थिति के प्रभाव में कम नहीं किया जाना चाहिए। - रक्षा उद्योग। यह सैन्य-औद्योगिक परिसर है, जो, अंतरराष्ट्रीय स्थिति के विकास के भी सबसे प्रतिकूल स्थितियों के तहत बचाव की मुद्रा में सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनुमति देता के राज्य का मतलब है। यह भू-राजनीतिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण कमी की स्थिति में सुरक्षा भी शामिल है। - वित्तीय। इस अवधि के वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली है, जिससे यह बाजार संस्थानों और सरकारी अधिकारियों से कार्य की सामान्य आर्थिक स्थिति की गारंटी करने के संभव हो जाता है की राज्य को समझना आवश्यक है। इंजीनियरिंग और तकनीकी, संगठनात्मक और कानूनीः सामान्य में, इस तरह के संरक्षण के तीन प्रमुख प्रकार हैं। सुरक्षा की अवधारणा, राज्य और सूचना के समाज के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन करने के लिए, वह अपने कानूनी अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर है। यह उपायों के इस सेट संरक्षण के अन्य दो प्रकार के आधार के रूप में माना जा सकता है। तकनीकी विकास के संदर्भ में, क्योंकि कंप्यूटर अपराध की संभावनाओं के कानूनी क्षेत्र के भीतर सूचना सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एक की जरूरत नहीं थी। आईपी के कानूनी समर्थन देश है, जो जानकारी और उनके उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी के उपचार से नियंत्रित होता है में नियमों और बल में फरमान पर आधारित है। आईपी के कानूनी रखरखाव का कार्यान्वयन राज्य से संबंधित है। जानकारी की रक्षा करने संगठनात्मक उपायों कार्य आप कार्यात्मक डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली, उनके संसाधनों के अत्यधिक दोहन, एक विशेष संस्था के कर्मचारियों की गतिविधियों और उपयोगकर्ता के साथ बातचीत को विनियमित करते हैं कि शामिल हैं। उपायों के इस पैकेज का नतीजा आईपी के लिए संभावित खतरों की प्राप्ति के किसी भी संभावनाओं को खत्म करने की है। इंजीनियरिंग और तकनीकी सहायता प्राप्ति के दो दिशाओं हैः - सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डेटा संरक्षण; - सूचना प्रणाली के तत्वों के भौतिक संरक्षण। पहले दिशा वायरस स्कैनर, प्रणाली लेखा परीक्षा, सिस्टम और नेटवर्क पर नज़र रखता है, और दूसरों के रूप में संरक्षण के इस तरह के उपायों का उपयोग कर के भीतर। इस मामले में दूसरे नंबर पर दिशा के संबंध में, के साथ, केबल प्रणाली, बिजली की आपूर्ति और डेटा है, जो उनकी दोहराव द्वारा किया जाता है की रक्षा के भौतिक साधन। आप समाज की अवधारणा और सुरक्षा के प्रकार है कि आधुनिक जीवन रक्षक प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है पर प्रभाव के रूप में एक सामान्य निष्कर्ष निकालना है, यह निष्कर्ष निकला कि रक्षा समाज के सामंजस्यपूर्ण अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है संभव है।
कैसे 2 सप्ताह या 3 महीने के लिए एक राहत प्रेस बनाने के लिए? गोल पेट - दोनों महिलाओं और पुरुषों है कि समस्याओं। कई लड़कियों के जन्म के बाद शरीर के इस क्षेत्र पर काम मजबूत बनाने के लिए लिया जाता है। पुरुषों 30-35 साल की उम्र से "मानवीय" करने के लिए अपनी कमर की चर्बी जमा करते हैं। प्रपत्र के नुकसान के लिए कारणों के एक बहुत कुछ हो सकता है - यह आवश्यक शारीरिक गतिविधि का अभाव है, और मोटापा, और तनाव, और चयापचय की प्रक्रिया के धीमा (जैसे आयु के रूप में और कुपोषण की वजह से अधिग्रहीत) है। कहाँ से शुरू करें? ग्रेट बिगड़ा एक छोटा सा टुकड़ा ही है, अभी या बाद में कैसे अपने पुराने फार्म में लौटने के लिए एक या दो महीने के लिए "का निर्माण" अपने राहत प्रेस के बारे में सोचना शुरू करते हैं। लेकिन इससे पहले कि आप प्रेस पर ही काम करने के लिए शुरू करते हैं, तो आप पेट पर चर्बी से छुटकारा पाने की जरूरत है। यह उसकी से था, और समय की राशि खर्च की जाएगी कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है पर निर्भर करता है। टोंड फिटनेस प्राप्त करने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम पर विचार करें। कार्यक्रम "3 महीने के लिए भू-भाग प्रेस" आप महत्वपूर्ण अतिरिक्त वसा को पेट है, तो आप एक लंबे समय तक परियोजना (कम से कम तीन महीने) का पालन करना पड़ता है। सब कुछ आप कार्यों के साथ कैसे पेश पर निर्भर करते हैं और क्या सभी निर्धारित निर्देशों का पालन करेंगे। समायोजन शक्ति - पहली बात शुरू करने के लिए की जरूरत है। कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशों पर विचार करने के लिए जो अपने आहार योजना के लिए की आवश्यकता होगी अनुसारः - भोजन हर 2. 5-3 घंटे होने चाहिए। 200-250 ग्राम के एक हिस्से को; - एक भोजन एक गिलास पानी पीने के लिए करने से पहले 25-30 मिनट; - चॉकलेट और केक को समाप्त। इसके बजाय, मीठा फल खाने, - बियर और इस तरह के नाश्ते के रूप में अपने कैलोरी 'दोस्त', का परित्याग; - प्रोटीन (चिकन स्तन, झींगा, मछली, मांस, अंडे, पनीर) पर दुबला; - नाश्ते के लिए (दलिया - सबसे अच्छा विकल्प) केवल स्वस्थ खाद्य पदार्थ खाने, - शरीर भूखा न दें। पावर निर्दिष्ट आइटम के लिए इसी, रक्त शर्करा के एक निरंतर स्तर को बनाए रखता है, इसलिए भोजन तुरंत ऊर्जा में संसाधित किया जाता है। कुछ समय के बाद, इस पर नियंत्रण शक्ति महसूस किया जाएगा - पेट में हल्कापन महसूस करते हैं और बेहतर समग्र स्वास्थ्य मिलता है। सही आहार चाहिए भी नहीं उन वसा द्रव्यमान के साथ, अपेक्षाकृत कम है के रूप में यह है बार ही प्रक्रिया के परिवर्तन में तेजी आएगी पर का पालन करें। डोनट्स और बहुत पतला बीच का अंतर केवल तथ्य यह है कि दूसरा, ज़रूरत से ज़्यादा पदार्थों के अभाव 2 सप्ताह के लिए राहत प्रेस खरीद करने के लिए खर्च कर (स्वाभाविक रूप से, पूरा कार्यक्रम बिछाने) में है। लेकिन प्रारंभिक दौर में रूपों के साथ महिलाओं के अतिरिक्त तरल वापस लेने और वसा, जो सुंदर की उपस्थिति से बचाता है के कई वर्षों से जमा को जलाने के लिए होगा , उसके पेट पर क्यूब्स क्योंकि अन्यथा उनकी उपस्थिति अधिक वजन छिपा हुआ है। उचित पोषण पहले दिन प्रशिक्षण के साथ संयुक्त किया जाना चाहिए। तो अगले कदम कैसे विशेष शारीरिक कार्यक्रम की मदद से एक राहत प्रेस बनाने के लिए देखो। प्रशिक्षण तीन चरणों, धीरे-धीरे वांछित सफलता प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया के होते हैं। प्रथम स्तर के उद्देश्य उत्पादन संख्या 2. बढ़ाना का स्तर है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, मुद्रा में सुधार, (यदि उपलब्ध हो) कम रीढ़ की हड्डी में तकलीफ की भावनाओं को समाप्त - यह सब गहन प्रशिक्षण के पहले चरण के प्राप्त परिणामों है। 3 महीने में राहत प्रेस और एक फ्लैट पेट प्राप्त करने के लिए, निश्चित रूप शुरू करने के लिए, आप ध्यान से प्रशिक्षण की गुणवत्ता और नियमितता पर नजर रखने की जरूरत है। इन दिशा-निर्देशों का पालन करेंः - प्रति सप्ताह तीन प्रशिक्षण सत्र निष्पादित करें। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। - पहले प्रशिक्षण एक दृष्टिकोण पर - यह 12 प्रतिनिधि है। , 1-2 repetitions के सेट की संख्या इस आंकड़े से शुरू बाद में व्यायाम बढ़ जाती है पर, 18-20 के लिए उन्हें लाने। - abdominals के लिए तीन अभ्यास और एक व्यायाम है कि पीठ के निचले हिस्से के लिए डिज़ाइन किया गया है - प्रशिक्षण कार्यक्रम का इष्टतम सामग्री, जिसके बाद, यह किसी भी अतिरिक्त उपकरणों के बिना घर पर एक राहत प्रेस को खोजने के लिए संभव है। निम्न स्तरों की सुविधाओं भेदः - पेट की मांसपेशियों के लिए नए अभ्यास के कारण लंबाई में प्रशिक्षण बढ़ जाती है, इस स्तर पर जो की संख्या छह हो जाएगा। - लोड लगातार बढ़ाना होगा। हैं, अभ्यास खत्म करने के बाद, आप नहीं भी थक गए हैं, कम repetitions के साथ एक पूरक दृष्टिकोण अपनाते हैं। - अभ्यास के बीच रोकें 5 सेकंड अधिक नहीं होनी चाहिए। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। अंतिम चरण के विशिष्ट लक्षणोंः - अब, प्रशिक्षण abdominals के लिए नौ व्यायाम और पीठ के निचले हिस्से के लिए एक व्यायाम के होते हैं। - प्रशिक्षण जगह चार बार एक हफ्ते में लेना चाहिए। - दृष्टिकोणों के बीच रोकें 30 सेकंड है, लेकिन कोई अधिक तक पहुंच सकता है। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, अपनी गर्दन और कंधों को आराम, और फिर हम उसके सिर के पीछे दोनों हाथों से शुरू करते हैं। पैर उठाता है और एक सही कोण पर अपने घुटनों को मोड़ ताकि मंजिल तक स्थिति समानांतर में निचले पैर, और जांघों सीधा कर रहे हैं। abdominals का निचला भाग तनाव, हम कूल्हों को उठाकर उनके आगे खींचने की कोशिश। फिर धीरे-धीरे कूल्हों वापस प्रारंभिक स्थिति के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद के संस्करण के रूप में इस अभ्यास को दोहराएँ रूप में कई बार। कैसे एक राहत प्रेस बनाने के लिए, व्यायाम संख्या 1 प्रदर्शन? सुनिश्चित करें कि आपके का निचला भाग बनाने abdominals छानबीन। लाभ पर्याप्त नहीं होगा अगर आंदोलन ऊपर और नीचे के प्रयासों को प्रोत्साहन देने के लिए कारण होते हैं। गर्दन और कंधों में ढील दी जानी चाहिए। मूल स्थिति जांघों तेजी से नीचे फेंक दिया और टांग की ओर लौटने जब कम नहीं है। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, घुटने पर अपने दाएं पैर मोड़, डाल उसे छोड़ दिया, ताकि उसके निचले पैर उनके घुटने पर रखा गया था। अपने सिर और पक्ष को कोहनी को हटाने के पीछे अपने दाहिने हाथ सेट करें। बाएं हाथ कमर क्षेत्र में उसके पेट पर है। कार्य सही परोक्ष पेट की मांसपेशियों, अपने दाएँ कंधे उठाते हैं और बाएं घुटने को leans। फिर धीरे धीरे अपनी मूल स्थिति में वापस हाथ लौट आते हैं। ब्लेड जमीन स्पर्श करते हैं, शुरू से ही दोहरा रहे हैं। repetitions की अपेक्षित संख्या पूरी करने के बाद, हाथ और पैर बदल जाते हैं। अब, दाहिने पैर के नीचे छोड़ दिया, सिर और बाएं हाथ के पीछे, जब सही - कमर पर। हम repetitions की संख्या समान करते हैं, विपरीत पैर के घुटने के अन्य कंधे उठाने। हमें पता लगाने के लिए इस अभ्यास के प्रदर्शन के न्यूनतम अवधि के लिए एक राहत प्रेस बनाने के लिए कुछ आइटमों की जांचः - धड़ वास्तव में, घुटने की ओर मोड़ तो कोहनी या कंधे में केवल आंदोलन के माध्यम से जाने नहीं देना चाहिए। बढ़ने से घुटने रखें। - व्यायाम के सकारात्मक और नकारात्मक हिस्सा धीरे धीरे और सावधानी से किया जाना चाहिए। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, पैर घुटनों पर तुला हुआ है, अपने सिर के पीछे हाथ हम अपनी गर्दन आराम करने लगते हैं। फर्श से अलग ऊपरी उदर severing ब्लेड तनाव और छाती की ओर घुटनों बढ़ा। हम एक अधिकतम तक पहुँचने और एक पल के लिए रहना। फिर धीरे से और धीरे धीरे कंधे वापस प्रारंभिक स्थिति को कम। एक बार जब ब्लेड जमीन को छूने, फिर से सभी को दोहराएँ। हम उसके पेट पर एक स्थान लेने, चेहरा नीचे, सीधे हथियारों (नीचे हथेलियों), और पैरों को शरीर समानांतर खींच। इसके साथ ही सीधे और दाएं हाथ अपने बाएं पैर उठा। दो सेकंड के लिए देरी हो रही है। फिर धीरे से और धीरे धीरे शुरू की स्थिति में लौटने। हाथ और पैर जमीन को छू रहे हैं, अपने बाएँ हाथ और दाहिने पैर के साथ व्यायाम को दोहराएँ। मेरे हाथ और पैर जब तक repetitions की अपेक्षित संख्या नहीं किया जा जाएगा। हम धीरज पर काम कर रहे हैं। , उसकी पीठ पर झूठ बोलना उसके हाथ खींच, शरीर के साथ फर्श पर हथेलियों, सही कोण को थोड़ा मोड़कर पैर उठाने। हम दोनों हाथों समर्थन का उपयोग, गर्दन आराम। श्रोणि मंजिल विच्छेद अधिकतम पेट का निचला भाग दबाव और इसे उठा। हम कुछ सेकंड के लिए स्थिति में रहना। फिर धीरे से और धीरे धीरे कमर के निचले हिस्से और मूल स्थिति में लौटने। एक बार जब श्रोणि मंजिल को छू लेती है, हम एक नए पुनरावृत्ति शुरू करते हैं। हमें कैसे ऊपर व्यायाम प्रदर्शन करके भौतिक और लौकिक लागत की एक न्यूनतम के साथ एक राहत प्रेस बनाने के लिए सीखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देंः - श्रोणि प्रेस के निचले हिस्से की वजह से उठाया जाना चाहिए, बल द्वारा अपने पैरों को पुश करने के बजाय। - हाथ केवल संतुलन के लिए उपयोग किया जाता है, ताकि वे अपने शरीर को धक्का नहीं करना चाहिए। - व्यायाम करने, रोकने के सकारात्मक चरण में समापन (अब रोकें, अधिक से अधिक कम प्रेस डिवीजन काम किया)। उभरे प्रेस लड़कियों प्रशंसा करने के लिए ईर्ष्या - और लड़कों हमेशा अलग भावनाओं की बाढ़ है। और सही आंकड़ा का राज केवल सुसंगत, कभी कभी भारी और नियमित रूप से प्रशिक्षण है। लेकिन कभी कभी आवश्यक खुद को आराम और उन्हें चारों ओर दुनिया का आनंद ले सकें।
कैसे दो सप्ताह या तीन महीने के लिए एक राहत प्रेस बनाने के लिए? गोल पेट - दोनों महिलाओं और पुरुषों है कि समस्याओं। कई लड़कियों के जन्म के बाद शरीर के इस क्षेत्र पर काम मजबूत बनाने के लिए लिया जाता है। पुरुषों तीस-पैंतीस साल की उम्र से "मानवीय" करने के लिए अपनी कमर की चर्बी जमा करते हैं। प्रपत्र के नुकसान के लिए कारणों के एक बहुत कुछ हो सकता है - यह आवश्यक शारीरिक गतिविधि का अभाव है, और मोटापा, और तनाव, और चयापचय की प्रक्रिया के धीमा है। कहाँ से शुरू करें? ग्रेट बिगड़ा एक छोटा सा टुकड़ा ही है, अभी या बाद में कैसे अपने पुराने फार्म में लौटने के लिए एक या दो महीने के लिए "का निर्माण" अपने राहत प्रेस के बारे में सोचना शुरू करते हैं। लेकिन इससे पहले कि आप प्रेस पर ही काम करने के लिए शुरू करते हैं, तो आप पेट पर चर्बी से छुटकारा पाने की जरूरत है। यह उसकी से था, और समय की राशि खर्च की जाएगी कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है पर निर्भर करता है। टोंड फिटनेस प्राप्त करने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम पर विचार करें। कार्यक्रम "तीन महीने के लिए भू-भाग प्रेस" आप महत्वपूर्ण अतिरिक्त वसा को पेट है, तो आप एक लंबे समय तक परियोजना का पालन करना पड़ता है। सब कुछ आप कार्यों के साथ कैसे पेश पर निर्भर करते हैं और क्या सभी निर्धारित निर्देशों का पालन करेंगे। समायोजन शक्ति - पहली बात शुरू करने के लिए की जरूरत है। कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशों पर विचार करने के लिए जो अपने आहार योजना के लिए की आवश्यकता होगी अनुसारः - भोजन हर दो. पाँच-तीन घंटाटे होने चाहिए। दो सौ-दो सौ पचास ग्राम के एक हिस्से को; - एक भोजन एक गिलास पानी पीने के लिए करने से पहले पच्चीस-तीस मिनट; - चॉकलेट और केक को समाप्त। इसके बजाय, मीठा फल खाने, - बियर और इस तरह के नाश्ते के रूप में अपने कैलोरी 'दोस्त', का परित्याग; - प्रोटीन पर दुबला; - नाश्ते के लिए केवल स्वस्थ खाद्य पदार्थ खाने, - शरीर भूखा न दें। पावर निर्दिष्ट आइटम के लिए इसी, रक्त शर्करा के एक निरंतर स्तर को बनाए रखता है, इसलिए भोजन तुरंत ऊर्जा में संसाधित किया जाता है। कुछ समय के बाद, इस पर नियंत्रण शक्ति महसूस किया जाएगा - पेट में हल्कापन महसूस करते हैं और बेहतर समग्र स्वास्थ्य मिलता है। सही आहार चाहिए भी नहीं उन वसा द्रव्यमान के साथ, अपेक्षाकृत कम है के रूप में यह है बार ही प्रक्रिया के परिवर्तन में तेजी आएगी पर का पालन करें। डोनट्स और बहुत पतला बीच का अंतर केवल तथ्य यह है कि दूसरा, ज़रूरत से ज़्यादा पदार्थों के अभाव दो सप्ताह के लिए राहत प्रेस खरीद करने के लिए खर्च कर में है। लेकिन प्रारंभिक दौर में रूपों के साथ महिलाओं के अतिरिक्त तरल वापस लेने और वसा, जो सुंदर की उपस्थिति से बचाता है के कई वर्षों से जमा को जलाने के लिए होगा , उसके पेट पर क्यूब्स क्योंकि अन्यथा उनकी उपस्थिति अधिक वजन छिपा हुआ है। उचित पोषण पहले दिन प्रशिक्षण के साथ संयुक्त किया जाना चाहिए। तो अगले कदम कैसे विशेष शारीरिक कार्यक्रम की मदद से एक राहत प्रेस बनाने के लिए देखो। प्रशिक्षण तीन चरणों, धीरे-धीरे वांछित सफलता प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया के होते हैं। प्रथम स्तर के उद्देश्य उत्पादन संख्या दो. बढ़ाना का स्तर है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, मुद्रा में सुधार, कम रीढ़ की हड्डी में तकलीफ की भावनाओं को समाप्त - यह सब गहन प्रशिक्षण के पहले चरण के प्राप्त परिणामों है। तीन महीने में राहत प्रेस और एक फ्लैट पेट प्राप्त करने के लिए, निश्चित रूप शुरू करने के लिए, आप ध्यान से प्रशिक्षण की गुणवत्ता और नियमितता पर नजर रखने की जरूरत है। इन दिशा-निर्देशों का पालन करेंः - प्रति सप्ताह तीन प्रशिक्षण सत्र निष्पादित करें। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। - पहले प्रशिक्षण एक दृष्टिकोण पर - यह बारह प्रतिनिधि है। , एक-दो repetitions के सेट की संख्या इस आंकड़े से शुरू बाद में व्यायाम बढ़ जाती है पर, अट्ठारह-बीस के लिए उन्हें लाने। - abdominals के लिए तीन अभ्यास और एक व्यायाम है कि पीठ के निचले हिस्से के लिए डिज़ाइन किया गया है - प्रशिक्षण कार्यक्रम का इष्टतम सामग्री, जिसके बाद, यह किसी भी अतिरिक्त उपकरणों के बिना घर पर एक राहत प्रेस को खोजने के लिए संभव है। निम्न स्तरों की सुविधाओं भेदः - पेट की मांसपेशियों के लिए नए अभ्यास के कारण लंबाई में प्रशिक्षण बढ़ जाती है, इस स्तर पर जो की संख्या छह हो जाएगा। - लोड लगातार बढ़ाना होगा। हैं, अभ्यास खत्म करने के बाद, आप नहीं भी थक गए हैं, कम repetitions के साथ एक पूरक दृष्टिकोण अपनाते हैं। - अभ्यास के बीच रोकें पाँच सेकंड अधिक नहीं होनी चाहिए। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। अंतिम चरण के विशिष्ट लक्षणोंः - अब, प्रशिक्षण abdominals के लिए नौ व्यायाम और पीठ के निचले हिस्से के लिए एक व्यायाम के होते हैं। - प्रशिक्षण जगह चार बार एक हफ्ते में लेना चाहिए। - दृष्टिकोणों के बीच रोकें तीस सेकंड है, लेकिन कोई अधिक तक पहुंच सकता है। - प्रत्येक व्यायाम करने के लिए एक दृष्टिकोण को पूरा करें। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, अपनी गर्दन और कंधों को आराम, और फिर हम उसके सिर के पीछे दोनों हाथों से शुरू करते हैं। पैर उठाता है और एक सही कोण पर अपने घुटनों को मोड़ ताकि मंजिल तक स्थिति समानांतर में निचले पैर, और जांघों सीधा कर रहे हैं। abdominals का निचला भाग तनाव, हम कूल्हों को उठाकर उनके आगे खींचने की कोशिश। फिर धीरे-धीरे कूल्हों वापस प्रारंभिक स्थिति के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद के संस्करण के रूप में इस अभ्यास को दोहराएँ रूप में कई बार। कैसे एक राहत प्रेस बनाने के लिए, व्यायाम संख्या एक प्रदर्शन? सुनिश्चित करें कि आपके का निचला भाग बनाने abdominals छानबीन। लाभ पर्याप्त नहीं होगा अगर आंदोलन ऊपर और नीचे के प्रयासों को प्रोत्साहन देने के लिए कारण होते हैं। गर्दन और कंधों में ढील दी जानी चाहिए। मूल स्थिति जांघों तेजी से नीचे फेंक दिया और टांग की ओर लौटने जब कम नहीं है। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, घुटने पर अपने दाएं पैर मोड़, डाल उसे छोड़ दिया, ताकि उसके निचले पैर उनके घुटने पर रखा गया था। अपने सिर और पक्ष को कोहनी को हटाने के पीछे अपने दाहिने हाथ सेट करें। बाएं हाथ कमर क्षेत्र में उसके पेट पर है। कार्य सही परोक्ष पेट की मांसपेशियों, अपने दाएँ कंधे उठाते हैं और बाएं घुटने को leans। फिर धीरे धीरे अपनी मूल स्थिति में वापस हाथ लौट आते हैं। ब्लेड जमीन स्पर्श करते हैं, शुरू से ही दोहरा रहे हैं। repetitions की अपेक्षित संख्या पूरी करने के बाद, हाथ और पैर बदल जाते हैं। अब, दाहिने पैर के नीचे छोड़ दिया, सिर और बाएं हाथ के पीछे, जब सही - कमर पर। हम repetitions की संख्या समान करते हैं, विपरीत पैर के घुटने के अन्य कंधे उठाने। हमें पता लगाने के लिए इस अभ्यास के प्रदर्शन के न्यूनतम अवधि के लिए एक राहत प्रेस बनाने के लिए कुछ आइटमों की जांचः - धड़ वास्तव में, घुटने की ओर मोड़ तो कोहनी या कंधे में केवल आंदोलन के माध्यम से जाने नहीं देना चाहिए। बढ़ने से घुटने रखें। - व्यायाम के सकारात्मक और नकारात्मक हिस्सा धीरे धीरे और सावधानी से किया जाना चाहिए। अपनी पीठ पर झूठ बोलना, पैर घुटनों पर तुला हुआ है, अपने सिर के पीछे हाथ हम अपनी गर्दन आराम करने लगते हैं। फर्श से अलग ऊपरी उदर severing ब्लेड तनाव और छाती की ओर घुटनों बढ़ा। हम एक अधिकतम तक पहुँचने और एक पल के लिए रहना। फिर धीरे से और धीरे धीरे कंधे वापस प्रारंभिक स्थिति को कम। एक बार जब ब्लेड जमीन को छूने, फिर से सभी को दोहराएँ। हम उसके पेट पर एक स्थान लेने, चेहरा नीचे, सीधे हथियारों , और पैरों को शरीर समानांतर खींच। इसके साथ ही सीधे और दाएं हाथ अपने बाएं पैर उठा। दो सेकंड के लिए देरी हो रही है। फिर धीरे से और धीरे धीरे शुरू की स्थिति में लौटने। हाथ और पैर जमीन को छू रहे हैं, अपने बाएँ हाथ और दाहिने पैर के साथ व्यायाम को दोहराएँ। मेरे हाथ और पैर जब तक repetitions की अपेक्षित संख्या नहीं किया जा जाएगा। हम धीरज पर काम कर रहे हैं। , उसकी पीठ पर झूठ बोलना उसके हाथ खींच, शरीर के साथ फर्श पर हथेलियों, सही कोण को थोड़ा मोड़कर पैर उठाने। हम दोनों हाथों समर्थन का उपयोग, गर्दन आराम। श्रोणि मंजिल विच्छेद अधिकतम पेट का निचला भाग दबाव और इसे उठा। हम कुछ सेकंड के लिए स्थिति में रहना। फिर धीरे से और धीरे धीरे कमर के निचले हिस्से और मूल स्थिति में लौटने। एक बार जब श्रोणि मंजिल को छू लेती है, हम एक नए पुनरावृत्ति शुरू करते हैं। हमें कैसे ऊपर व्यायाम प्रदर्शन करके भौतिक और लौकिक लागत की एक न्यूनतम के साथ एक राहत प्रेस बनाने के लिए सीखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देंः - श्रोणि प्रेस के निचले हिस्से की वजह से उठाया जाना चाहिए, बल द्वारा अपने पैरों को पुश करने के बजाय। - हाथ केवल संतुलन के लिए उपयोग किया जाता है, ताकि वे अपने शरीर को धक्का नहीं करना चाहिए। - व्यायाम करने, रोकने के सकारात्मक चरण में समापन । उभरे प्रेस लड़कियों प्रशंसा करने के लिए ईर्ष्या - और लड़कों हमेशा अलग भावनाओं की बाढ़ है। और सही आंकड़ा का राज केवल सुसंगत, कभी कभी भारी और नियमित रूप से प्रशिक्षण है। लेकिन कभी कभी आवश्यक खुद को आराम और उन्हें चारों ओर दुनिया का आनंद ले सकें।
माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 'विजन 2020' शीर्षक वाले अपने पहले एवं पिछले रेल बजट भाषण में स्पष्ट एवं गौर करने वाले लक्ष्य निर्धारित किये थे। निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्रम में भारतीय रेल ने पिछले 3 वर्षों में अभूतपूर्व सुधारात्मक कदम उठाये हैं। मांग के अनुरूप आरक्षित स्थान उपलब्ध कराने, मालगाड़ियों की समय-सारिणी बनाने, मानवरहित समपारों को समाप्त करने, मालगाड़ियों की औसत गति 50 कि. मी. प्र. घं. (वर्तमान औसत गति के दोगुना) करने, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति 80 कि. मी. प्र. घं. (वर्तमान के औसत से 60% की वृद्धि) करने, ट्रेनों की समयपालनता 95% तक रखने, स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चलाने तथा ट्रेनों से मल-मूत्र की निकासी को शून्य स्तर तक ले जाने जैसे विभिन्न पहलुओं को समाहित कर 'विजन 2020' के लक्ष्य निर्धारित किये गये थे। रेल मंत्रालय द्वारा किये जाने वाले कुछ सुधारात्मक कार्यों एवं महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं। प्रशासनिक सुधारः प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत शक्तियों के विकेन्द्रीकरण एवं व्यावहारिक स्तर पर हस्तांतरण, समझौता पत्र/परिणामी निष्पादन पैमाने (KRAs) के माध्यम से क्षेत्रीय रेलों की मॉनिटरिंग जैसे कार्य शामिल हैं। सभी अधिकारियों के लिए निष्पादन मूल्यांकन में संशोधन कर इसे और अधिक उद्देश्यपरक बनाया गया है। साथ ही निविदा प्रबंधन का भी पुनःनिर्धारण किया गया है तथा ई-खरीद तथा ई-भर्ती को शुरू कर पारदर्शिता के नये पैमानें स्थापित किये गये हैं। माल एवं यात्री सुधारः इसके अंतर्गत दरों, विभिन्न यात्री संवर्गों हेतु नये ट्रेन प्रोडक्ट जैसे अंत्योदय तथा हमसफर एक्सप्रेस इत्यादि की शुरूआत, नये युग की टिकटिंग प्रणाली को क्रियान्वित करना, प्रभावी सोशल मीडिया द्वारा अपनी तरह का एक विशेष शिकायत निपटान मशीनरी को लागू करना, स्टेशन पुनर्विकास भूमि तथा लघु सम्पत्तियों, प्रचारों इत्यादि के मुद्रीकरण द्वारा भाड़ों के अतिरिक्त राजस्व में वृद्धि तथा महत्त्वपूर्ण ग्राहक प्रबंधकों की नियुक्ति द्वारा सिंगल प्वाँइंट इत्यादि के रुप में सेवा देना इत्यादि शामिल हैं। संरचनात्मक सुधारः संरचनात्मक सुधारों में बजट के अतिरिक्त संसाधन शामिल हैं, जो पूँजी निवेशों को बढ़ावा देते हैं। सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि भारतीय जीवन बीमा के साथ सम्पर्क स्थापित कर आकर्षक शर्तों के साथ 1. 5 लाख करोड़ रु. का ऋण प्राप्त करना रहा। प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों के हितों की रक्षा तथा सक्षमता मानदण्ड तय करने तथा उचित किरायों को लागू करने हेतु कैबिनेट की स्वीकृति से रेल विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई, जो अगले 4 महीनों में क्रियान्वित हो जायेगा। संयुक्त उपक्रम की अभिसंकल्पना की गई है तथा राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसे क्रियान्वित किया गया है, जिससे राज्य की आधारभूत संरचनाओं के विकास की गति में तेजी आई है। वैज्ञानिक योजना पद्धति, परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से तैयार करने, डीपीआर तथा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने हेतु रेलवे योजना तथा निवेश संगठन की स्थापना की जायेगी। इसी प्रकार रेलवे एक विश्वस्तरीय आर एंड डी संगठन SRESHTHA स्थापित करने की प्रक्रिया में है। एक ICT की शुरूआत की गई है, जो रेलवे में सबसे डिजिटाइजेशन तथा ईआरपी पहल है। अगले 5 वर्षों में इसे क्रियान्वित करने का लक्ष्य है एवं इससे 55000 करोड़ रु. से अधिक की बचत होगी। रेलवे ने लेखा सुधार की सम्भावनाओं में वृद्धि करने तथा इसमें गति लाने के प्रति भी ध्यान दिया है। साथ ही विद्युत की ओपन एक्सेस खरीद भी लम्बे समय के पीपीए के माध्यम से अन्य ऊर्जा संरक्षण उपायों के साथ क्रियान्वित की गई है जिससे अगले 10 वर्षों में 41000 करोड़ रु. की बचत होगी। गवर्नेंस तथा संगठनात्मक पुनर्गठन इसके अंतर्गत सफाई, भाड़ों के अतिरिक्त आय, गति बढ़ाने इत्यादि जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की प्रगति में वृद्धि करने के उद्देश्य से क्रॉस फंक्शनल निदेशालयों का गठन किया गया है। महत्त्वपूर्ण रोलिंग स्टॉक तथा ट्रेक्शन विभाग के पुनर्गठन द्वारा संगठन का रिएलाइनमेंट किया जायेगा। इसके साथ ही प्रत्येक विभाग/कैडर के सचिव स्तर के पदों का सृजन तथा महाप्रबंधकों के स्थानांतरण एवं नियुक्ति को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जायेगा। इसी प्रकार मंडल रेल प्रबंधकों के चयन की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है, जिससे योग्य उम्मीदवारों का चयन होना सुनिश्चित हो सके।
माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 'विजन दो हज़ार बीस' शीर्षक वाले अपने पहले एवं पिछले रेल बजट भाषण में स्पष्ट एवं गौर करने वाले लक्ष्य निर्धारित किये थे। निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्रम में भारतीय रेल ने पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व सुधारात्मक कदम उठाये हैं। मांग के अनुरूप आरक्षित स्थान उपलब्ध कराने, मालगाड़ियों की समय-सारिणी बनाने, मानवरहित समपारों को समाप्त करने, मालगाड़ियों की औसत गति पचास कि. मी. प्र. घं. करने, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति अस्सी कि. मी. प्र. घं. करने, ट्रेनों की समयपालनता पचानवे% तक रखने, स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चलाने तथा ट्रेनों से मल-मूत्र की निकासी को शून्य स्तर तक ले जाने जैसे विभिन्न पहलुओं को समाहित कर 'विजन दो हज़ार बीस' के लक्ष्य निर्धारित किये गये थे। रेल मंत्रालय द्वारा किये जाने वाले कुछ सुधारात्मक कार्यों एवं महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं। प्रशासनिक सुधारः प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत शक्तियों के विकेन्द्रीकरण एवं व्यावहारिक स्तर पर हस्तांतरण, समझौता पत्र/परिणामी निष्पादन पैमाने के माध्यम से क्षेत्रीय रेलों की मॉनिटरिंग जैसे कार्य शामिल हैं। सभी अधिकारियों के लिए निष्पादन मूल्यांकन में संशोधन कर इसे और अधिक उद्देश्यपरक बनाया गया है। साथ ही निविदा प्रबंधन का भी पुनःनिर्धारण किया गया है तथा ई-खरीद तथा ई-भर्ती को शुरू कर पारदर्शिता के नये पैमानें स्थापित किये गये हैं। माल एवं यात्री सुधारः इसके अंतर्गत दरों, विभिन्न यात्री संवर्गों हेतु नये ट्रेन प्रोडक्ट जैसे अंत्योदय तथा हमसफर एक्सप्रेस इत्यादि की शुरूआत, नये युग की टिकटिंग प्रणाली को क्रियान्वित करना, प्रभावी सोशल मीडिया द्वारा अपनी तरह का एक विशेष शिकायत निपटान मशीनरी को लागू करना, स्टेशन पुनर्विकास भूमि तथा लघु सम्पत्तियों, प्रचारों इत्यादि के मुद्रीकरण द्वारा भाड़ों के अतिरिक्त राजस्व में वृद्धि तथा महत्त्वपूर्ण ग्राहक प्रबंधकों की नियुक्ति द्वारा सिंगल प्वाँइंट इत्यादि के रुप में सेवा देना इत्यादि शामिल हैं। संरचनात्मक सुधारः संरचनात्मक सुधारों में बजट के अतिरिक्त संसाधन शामिल हैं, जो पूँजी निवेशों को बढ़ावा देते हैं। सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि भारतीय जीवन बीमा के साथ सम्पर्क स्थापित कर आकर्षक शर्तों के साथ एक. पाँच लाख करोड़ रु. का ऋण प्राप्त करना रहा। प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों के हितों की रक्षा तथा सक्षमता मानदण्ड तय करने तथा उचित किरायों को लागू करने हेतु कैबिनेट की स्वीकृति से रेल विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई, जो अगले चार महीनों में क्रियान्वित हो जायेगा। संयुक्त उपक्रम की अभिसंकल्पना की गई है तथा राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसे क्रियान्वित किया गया है, जिससे राज्य की आधारभूत संरचनाओं के विकास की गति में तेजी आई है। वैज्ञानिक योजना पद्धति, परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से तैयार करने, डीपीआर तथा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने हेतु रेलवे योजना तथा निवेश संगठन की स्थापना की जायेगी। इसी प्रकार रेलवे एक विश्वस्तरीय आर एंड डी संगठन SRESHTHA स्थापित करने की प्रक्रिया में है। एक ICT की शुरूआत की गई है, जो रेलवे में सबसे डिजिटाइजेशन तथा ईआरपी पहल है। अगले पाँच वर्षों में इसे क्रियान्वित करने का लक्ष्य है एवं इससे पचपन हज़ार करोड़ रु. से अधिक की बचत होगी। रेलवे ने लेखा सुधार की सम्भावनाओं में वृद्धि करने तथा इसमें गति लाने के प्रति भी ध्यान दिया है। साथ ही विद्युत की ओपन एक्सेस खरीद भी लम्बे समय के पीपीए के माध्यम से अन्य ऊर्जा संरक्षण उपायों के साथ क्रियान्वित की गई है जिससे अगले दस वर्षों में इकतालीस हज़ार करोड़ रु. की बचत होगी। गवर्नेंस तथा संगठनात्मक पुनर्गठन इसके अंतर्गत सफाई, भाड़ों के अतिरिक्त आय, गति बढ़ाने इत्यादि जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की प्रगति में वृद्धि करने के उद्देश्य से क्रॉस फंक्शनल निदेशालयों का गठन किया गया है। महत्त्वपूर्ण रोलिंग स्टॉक तथा ट्रेक्शन विभाग के पुनर्गठन द्वारा संगठन का रिएलाइनमेंट किया जायेगा। इसके साथ ही प्रत्येक विभाग/कैडर के सचिव स्तर के पदों का सृजन तथा महाप्रबंधकों के स्थानांतरण एवं नियुक्ति को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जायेगा। इसी प्रकार मंडल रेल प्रबंधकों के चयन की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है, जिससे योग्य उम्मीदवारों का चयन होना सुनिश्चित हो सके।
दसवां प्रकरी शरीरज्ञान । पृथ्वी आदिलोकं आरे आकाशादि तत्व और कुलसृष्टीका देह जर्रातके इकट्ठे होनेसे बनता है जिनको अंग्रेजी में ऐटम कहते हैं । यह एक खयाली मूरत या सूक्ष्म शरीर जानना । अंग्रेज़ोंने बहुत प्रकारकी खुरदवीन ( माइ क्रोसकोप् ) बनाई हैं । जिनसे बहुत प्रकारकी मृष्टीकें ज़रेको देख सक्ते, हैं । यह ऐटम याने ज़र्स हमेशा चैतन्य है । व इन्मान् याने मनुष्य की बुनियाद बताते हैं । रुधिर इस शरीरका जीवन है अगर बहुत सांरा खून एकदम शरीर से निकल जावे तो आदमी एकदमसे मरसक्ती है। खूनकी मिकदार शरीरमें सारे वदनके आठवें हिस्से से लेकर चाधवें हिस्से तक होती है । वृनमें दो प्रकारकी वस्तु है । पतली और गाड़ी । पतला जुज़ ज्यादा होता है । और गढ़ेवाले हिस्से में बेशुमार ज़रीत होते हैं जिनके हर वक्त नाड़ीके भीतर, इकट्ठा होकर चलते रहने से एक प्रकारका शब्द होता है जिसको मकारध्वनि कहते हैं । इसको ॐ शब्द मानना यह उत्पत्ति लय तक याने पैदायश से मौत तक बराबर जारी रहता है. एक क्षणभरभी बन्द नहीं होता. 1 रुधिरके अन्दर एक मकाब मिलीमीटर में चालीस पचास लाख ज़रें होते हैं । एक मिलीमीटर लंबाई में एक इंचका पचासवां हिस्सा होता है । अगर सारी नाड़ियों को जो मनुष्य देह हैं अगर किसी जगह लंबाईमें बिछाकर नापाजावे तो तीनहज़ार' गज़ लंबी होती हैं सो समझना चाहिये ।
दसवां प्रकरी शरीरज्ञान । पृथ्वी आदिलोकं आरे आकाशादि तत्व और कुलसृष्टीका देह जर्रातके इकट्ठे होनेसे बनता है जिनको अंग्रेजी में ऐटम कहते हैं । यह एक खयाली मूरत या सूक्ष्म शरीर जानना । अंग्रेज़ोंने बहुत प्रकारकी खुरदवीन बनाई हैं । जिनसे बहुत प्रकारकी मृष्टीकें ज़रेको देख सक्ते, हैं । यह ऐटम याने ज़र्स हमेशा चैतन्य है । व इन्मान् याने मनुष्य की बुनियाद बताते हैं । रुधिर इस शरीरका जीवन है अगर बहुत सांरा खून एकदम शरीर से निकल जावे तो आदमी एकदमसे मरसक्ती है। खूनकी मिकदार शरीरमें सारे वदनके आठवें हिस्से से लेकर चाधवें हिस्से तक होती है । वृनमें दो प्रकारकी वस्तु है । पतली और गाड़ी । पतला जुज़ ज्यादा होता है । और गढ़ेवाले हिस्से में बेशुमार ज़रीत होते हैं जिनके हर वक्त नाड़ीके भीतर, इकट्ठा होकर चलते रहने से एक प्रकारका शब्द होता है जिसको मकारध्वनि कहते हैं । इसको ॐ शब्द मानना यह उत्पत्ति लय तक याने पैदायश से मौत तक बराबर जारी रहता है. एक क्षणभरभी बन्द नहीं होता. एक रुपयाधिरके अन्दर एक मकाब मिलीमीटर में चालीस पचास लाख ज़रें होते हैं । एक मिलीमीटर लंबाई में एक इंचका पचासवां हिस्सा होता है । अगर सारी नाड़ियों को जो मनुष्य देह हैं अगर किसी जगह लंबाईमें बिछाकर नापाजावे तो तीनहज़ार' गज़ लंबी होती हैं सो समझना चाहिये ।
Sarkari Naukri: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Western Coalfields Limited) ने भर्ती अभियान 2021 के तहत स्टाफ नर्स (ट्रेनी) T&S ग्रेड सी पर कुल 56 पदों पर यह भर्ती निकाली है. Government Jobs 2021: अगर आप मेडिकल फील्ड में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो आपके पास सुनहरा मौका है. वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने ट्रेनी स्टाफ नर्स (Staff Nurse Trainee) के पदों पर भर्ती निकाली है. सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) के इस पद के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है. अगर आप 12वीं पास हैं और साथ में नर्सिंग डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स किया है, तो आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Western Coalfields Limited) ने भर्ती अभियान 2021 के तहत स्टाफ नर्स (ट्रेनी) TS ग्रेड सी पर कुल 56 पदों पर यह भर्ती निकाली है. इनमें से 24 पद अनारक्षित हैं. जबकि 5 EWS, 8 SC, 4 ST और 15 पद OBC श्रेणी के लिए आरक्षित हैं. इन पदों के लिए आवेदन की तारीख 26 मई है. इन पदों पर आवेदन के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा का पास होना जरूरी है. साथ ही किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 साल का ए ग्रेड नर्सिंग डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स होना चाहिए. चुने गए अभ्यर्थियों को स्टाफ नर्स (ट्रेनी) के तौर पर नियुक्त किया जाएगा और एक साल की सफल ट्रेनिंग के बाद TS ग्रेड सी में रखा जाएगा. आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 18 साल है जबकि 13 मई, 2021 तक आवेदक की उम्र 30 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि आरक्षित वर्ग में सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु में छूट होगी. इन पदों पर चयन परीक्षा के आधार पर होगा. परीक्षा ऑनलाइन या ऑफलाइन होगी, इसकी जानकारी उम्मीदवारों को ईमेल या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी दे दी जाएगी. इसके अलावा परीक्षा की तारीख और स्थान की जानकारी भी दे दी जाएगी. योग्य उम्मीदवार वेतन और भत्ते के हकदार होंगे. शुरुआती मूल वेतन 31,852 रुपये प्रति माह दिया जाएगा. नियुक्त हुए आवेदकों को वेज बोर्ड के तहत डीए समेत अन्य सुविधाएं दी जाएंगी. योग्य आवेदक WCL की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करने के बाद सभी जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी recruitmentir.wcl@coalindia.in मेल आईडी पर भेजनी होगी.
Sarkari Naukri: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने भर्ती अभियान दो हज़ार इक्कीस के तहत स्टाफ नर्स T&S ग्रेड सी पर कुल छप्पन पदों पर यह भर्ती निकाली है. Government Jobs दो हज़ार इक्कीस: अगर आप मेडिकल फील्ड में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो आपके पास सुनहरा मौका है. वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने ट्रेनी स्टाफ नर्स के पदों पर भर्ती निकाली है. सरकारी नौकरी के इस पद के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है. अगर आप बारहवीं पास हैं और साथ में नर्सिंग डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स किया है, तो आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने भर्ती अभियान दो हज़ार इक्कीस के तहत स्टाफ नर्स TS ग्रेड सी पर कुल छप्पन पदों पर यह भर्ती निकाली है. इनमें से चौबीस पद अनारक्षित हैं. जबकि पाँच EWS, आठ SC, चार ST और पंद्रह पद OBC श्रेणी के लिए आरक्षित हैं. इन पदों के लिए आवेदन की तारीख छब्बीस मई है. इन पदों पर आवेदन के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से बारहवीं कक्षा का पास होना जरूरी है. साथ ही किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन साल का ए ग्रेड नर्सिंग डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स होना चाहिए. चुने गए अभ्यर्थियों को स्टाफ नर्स के तौर पर नियुक्त किया जाएगा और एक साल की सफल ट्रेनिंग के बाद TS ग्रेड सी में रखा जाएगा. आवेदन के लिए न्यूनतम आयु अट्ठारह साल है जबकि तेरह मई, दो हज़ार इक्कीस तक आवेदक की उम्र तीस साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि आरक्षित वर्ग में सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु में छूट होगी. इन पदों पर चयन परीक्षा के आधार पर होगा. परीक्षा ऑनलाइन या ऑफलाइन होगी, इसकी जानकारी उम्मीदवारों को ईमेल या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी दे दी जाएगी. इसके अलावा परीक्षा की तारीख और स्थान की जानकारी भी दे दी जाएगी. योग्य उम्मीदवार वेतन और भत्ते के हकदार होंगे. शुरुआती मूल वेतन इकतीस,आठ सौ बावन रुपयापये प्रति माह दिया जाएगा. नियुक्त हुए आवेदकों को वेज बोर्ड के तहत डीए समेत अन्य सुविधाएं दी जाएंगी. योग्य आवेदक WCL की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करने के बाद सभी जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी recruitmentir.wcl@coalindia.in मेल आईडी पर भेजनी होगी.
पूर्णिया के एक शिक्षक बच्चों को हिंदी की वर्णमाला गा-गाकर पढ़ा रहे हैं। उनका यह अंदाज न सिर्फ बच्चों को बहुत पसंद आ रहा है, बल्कि लोगों को भी खूब भा रहा है। बच्चे भी रूचि लेकर उसे पढ़ रहे हैं। स्कूल का नाम प्राथमिक विद्यालय सुगनी टोला है, जो वसंतपुर पंचायत में स्थित है। वहीं, शिक्षक हैं सतीश कुमार। हिंदी पढ़ाने के अंदाज बच्चों को इतना पसंद आया है कि स्कूल में उनकी उपस्थिति भी डबल हो गई है। शिक्षक सतीश कुमार ने हिंदी वर्णमाला को राइम्स के जरिए पढ़ाना शुरू किया है। साथ ही बच्चों को डांस कर एक्सप्रेशन के साथ क से कबूतर उड़ाया और ख से खाना खिलाया। वहीं, ग से गाना गाया तो घ से घड़े में ठंडा पानी। ङ का घर है खाली, बच्चों बजाओ ताली। बच्चे ताली भी बजा रहे हैं। इस अंदाज से बच्चे खूब इंजॉय करके स्कूल में पढ़ रहे हैं। इससे उनकी संख्या भी बढ़ गई है। शिक्षक सतीश ने बताया कि इस स्कूल में 150 बच्चे पढ़ रहे हैं। कक्षा 1 और 2 में पहले मुश्किल से 50 बच्चे ही आते थे, लेकिन पढ़ाने के अंदाज के बाद 100 बच्चे आना शुरू कर दिए हैं। बच्चों की संख्या में लगातार वृद्धि जारी है। प्राथमिक विद्यालय सुगनी टोला को न तो अपना भवन और न ही बैंच डेस्क। ऐसे में बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के बच्चों की पढ़ाई मुश्किल है, लेकिन शिक्षक सतीश ने अभाव को अवसर में बदल दिया। बच्चे अपने घर से बोरा लाकर भी शिक्षक की क्लास को मिस नहीं करते हैं। जबकि, इस स्कूल को 4 किलोमीटर दूर मध्य विद्यालय चपहरी में शिफ्ट कर दिया गया है। इस स्कूल में एक और प्राथमिक विद्यालय चलता है। कुल मिलाकर इस स्कूल में तीन स्कूल चलता है। प्राथमिक विद्यालय सुगनीटोला में कुल 150 बच्चे नामांकित हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए पहले एक शिक्षक डेप्युटेशन पर थे, लेकिन सतीश के आने के बाद शिक्षकों की संख्या दो हो गई। अब दो शिक्षकों के कंधे पर इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेवारी है। सतीश कुमार पूर्णिया के रहने वाले हैं, लेकिन स्कूल के बच्चों के बीच लेट से नहीं पहुंचे। इस वजह से उन्होंने रूपौली में ही रूम रेंट पर ले लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पूर्णिया के एक शिक्षक बच्चों को हिंदी की वर्णमाला गा-गाकर पढ़ा रहे हैं। उनका यह अंदाज न सिर्फ बच्चों को बहुत पसंद आ रहा है, बल्कि लोगों को भी खूब भा रहा है। बच्चे भी रूचि लेकर उसे पढ़ रहे हैं। स्कूल का नाम प्राथमिक विद्यालय सुगनी टोला है, जो वसंतपुर पंचायत में स्थित है। वहीं, शिक्षक हैं सतीश कुमार। हिंदी पढ़ाने के अंदाज बच्चों को इतना पसंद आया है कि स्कूल में उनकी उपस्थिति भी डबल हो गई है। शिक्षक सतीश कुमार ने हिंदी वर्णमाला को राइम्स के जरिए पढ़ाना शुरू किया है। साथ ही बच्चों को डांस कर एक्सप्रेशन के साथ क से कबूतर उड़ाया और ख से खाना खिलाया। वहीं, ग से गाना गाया तो घ से घड़े में ठंडा पानी। ङ का घर है खाली, बच्चों बजाओ ताली। बच्चे ताली भी बजा रहे हैं। इस अंदाज से बच्चे खूब इंजॉय करके स्कूल में पढ़ रहे हैं। इससे उनकी संख्या भी बढ़ गई है। शिक्षक सतीश ने बताया कि इस स्कूल में एक सौ पचास बच्चे पढ़ रहे हैं। कक्षा एक और दो में पहले मुश्किल से पचास बच्चे ही आते थे, लेकिन पढ़ाने के अंदाज के बाद एक सौ बच्चे आना शुरू कर दिए हैं। बच्चों की संख्या में लगातार वृद्धि जारी है। प्राथमिक विद्यालय सुगनी टोला को न तो अपना भवन और न ही बैंच डेस्क। ऐसे में बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के बच्चों की पढ़ाई मुश्किल है, लेकिन शिक्षक सतीश ने अभाव को अवसर में बदल दिया। बच्चे अपने घर से बोरा लाकर भी शिक्षक की क्लास को मिस नहीं करते हैं। जबकि, इस स्कूल को चार किलोग्राममीटर दूर मध्य विद्यालय चपहरी में शिफ्ट कर दिया गया है। इस स्कूल में एक और प्राथमिक विद्यालय चलता है। कुल मिलाकर इस स्कूल में तीन स्कूल चलता है। प्राथमिक विद्यालय सुगनीटोला में कुल एक सौ पचास बच्चे नामांकित हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए पहले एक शिक्षक डेप्युटेशन पर थे, लेकिन सतीश के आने के बाद शिक्षकों की संख्या दो हो गई। अब दो शिक्षकों के कंधे पर इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेवारी है। सतीश कुमार पूर्णिया के रहने वाले हैं, लेकिन स्कूल के बच्चों के बीच लेट से नहीं पहुंचे। इस वजह से उन्होंने रूपौली में ही रूम रेंट पर ले लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Tetmosol मुख्यतः स्किन इन्फेक्शन, खुजली, दाद, एथलीट फुट के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। चिकित्सा साहित्य में Tetmosol के दुष्प्रभावों के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, Tetmosol का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूर करें। Tetmosol Medicated Soap का उपयोग कैसे करें? - अपने आप को पानी से धोएं और Tetmosol Medicated Soap को सीधे गीली त्वचा पर लगा लें। अपने हाथों या स्पंज का प्रयोग करते हुए झाग बनाएं और फिर साफ पानी से धो लें। Tetmosol Medicated Soap से जुड़े सुझाव। - त्वचा को धोने के लिए सामान्य तापमान वाले पानी या हल्के गर्म पानी का प्रयोग करें। - Tetmosol Medicated Soap लगाने से पहले प्रभावित हिस्सा गीला होना चाहिए। - Tetmosol Medicated Soap उपयोग करने के बाद मॉइश्चराइजर लगाएं। - Tetmosol Medicated Soap का बहुत ज्यादा उपयोग न करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक का ही इस्तेमाल करें। - Tetmosol Medicated Soap को ठंडे, सूखे और सामान्य से कम तापमान पर रखें। Tetmosol Medicated Soap को फ्रिज में न रखें। - अगर आपको Tetmosol Medicated Soap से एलर्जी है तो उपयोग से पहले डॉक्टर से संपर्क करें। - अगर आप गर्भवती हैं तो Tetmosol Medicated Soap को प्रयोग में लाने से पहले डॉक्टर से बात जरूर कर लें। - जो महिलाएं स्तनपान करा रही हों उन्हें Tetmosol Medicated Soap के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
Tetmosol मुख्यतः स्किन इन्फेक्शन, खुजली, दाद, एथलीट फुट के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। चिकित्सा साहित्य में Tetmosol के दुष्प्रभावों के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, Tetmosol का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूर करें। Tetmosol Medicated Soap का उपयोग कैसे करें? - अपने आप को पानी से धोएं और Tetmosol Medicated Soap को सीधे गीली त्वचा पर लगा लें। अपने हाथों या स्पंज का प्रयोग करते हुए झाग बनाएं और फिर साफ पानी से धो लें। Tetmosol Medicated Soap से जुड़े सुझाव। - त्वचा को धोने के लिए सामान्य तापमान वाले पानी या हल्के गर्म पानी का प्रयोग करें। - Tetmosol Medicated Soap लगाने से पहले प्रभावित हिस्सा गीला होना चाहिए। - Tetmosol Medicated Soap उपयोग करने के बाद मॉइश्चराइजर लगाएं। - Tetmosol Medicated Soap का बहुत ज्यादा उपयोग न करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक का ही इस्तेमाल करें। - Tetmosol Medicated Soap को ठंडे, सूखे और सामान्य से कम तापमान पर रखें। Tetmosol Medicated Soap को फ्रिज में न रखें। - अगर आपको Tetmosol Medicated Soap से एलर्जी है तो उपयोग से पहले डॉक्टर से संपर्क करें। - अगर आप गर्भवती हैं तो Tetmosol Medicated Soap को प्रयोग में लाने से पहले डॉक्टर से बात जरूर कर लें। - जो महिलाएं स्तनपान करा रही हों उन्हें Tetmosol Medicated Soap के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
New Delhi. राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र व विधायक तेजप्रताप यादव ने सोमवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में जनता दरबार लगाया और पार्टी कार्यकर्ताओं व आम लोगों की समस्याएं सुनीं। सुबह पौने 11 बजे आते ही उनके निर्देश पर छात्र राजद कार्यकर्ताओं ने कुर्सी व टेबल कार्यालय के पीछे धूप में लगाया। तेज यादव ने आरोप लगाया कि जाम के कारण उन्हें आने में देरी हुई। वह करीब तीन घंटे कार्यालय में रहे। कहा कि वे नियमित रुप से पार्टी कार्यालय व जिलों में जनता दरबार लगाएंगे। तेज यादव ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता व जनता दूर-दराज से अपनी समस्या लेकर आती है। उनकी समस्याओं को हम दूर नहीं करेंगे तो कौन करेगा। पार्टी की कमान सौंपे जाने के सवाल पर कहा कि जिम्मेवारी मिलने पर क्यों नहीं पार्टी को संभालेंगे। युवा व छात्रों को आगे करना है, उन्हे टिकट दिलाने को लेकर लालू प्रसाद से भी कहेंगे। तेज यादव ने दुहराया कि उनका असली राजनीतिक दुश्मन आरएसएस है न कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। तेज प्रताप की इस पहल को पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। पटना जिला राजद अध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, ई. अशोक यादव, निराला यादव, निरंजन चंद्रवंशी, प्रमोद राम, चंदेश्वर प्रसाद सिंह, आकाश यादव सहित अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे।
New Delhi. राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र व विधायक तेजप्रताप यादव ने सोमवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में जनता दरबार लगाया और पार्टी कार्यकर्ताओं व आम लोगों की समस्याएं सुनीं। सुबह पौने ग्यारह बजे आते ही उनके निर्देश पर छात्र राजद कार्यकर्ताओं ने कुर्सी व टेबल कार्यालय के पीछे धूप में लगाया। तेज यादव ने आरोप लगाया कि जाम के कारण उन्हें आने में देरी हुई। वह करीब तीन घंटे कार्यालय में रहे। कहा कि वे नियमित रुप से पार्टी कार्यालय व जिलों में जनता दरबार लगाएंगे। तेज यादव ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता व जनता दूर-दराज से अपनी समस्या लेकर आती है। उनकी समस्याओं को हम दूर नहीं करेंगे तो कौन करेगा। पार्टी की कमान सौंपे जाने के सवाल पर कहा कि जिम्मेवारी मिलने पर क्यों नहीं पार्टी को संभालेंगे। युवा व छात्रों को आगे करना है, उन्हे टिकट दिलाने को लेकर लालू प्रसाद से भी कहेंगे। तेज यादव ने दुहराया कि उनका असली राजनीतिक दुश्मन आरएसएस है न कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। तेज प्रताप की इस पहल को पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। पटना जिला राजद अध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, ई. अशोक यादव, निराला यादव, निरंजन चंद्रवंशी, प्रमोद राम, चंदेश्वर प्रसाद सिंह, आकाश यादव सहित अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे।
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, भारत 1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने के अपने अधिकारों पर काम कर रहा है ताकि वह अपनी जमीन की सिंचाई कर सके। भारत और पाकिस्तान ने 9 साल की बातचीत के बाद 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता था। सिंधु जल संधि 1960 (Indus Water Treaty 1960) 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत, तीन पूर्वी नदियों रावी, सतलुज और ब्यास के सभी जल को विशेष रूप से उपयोग करने के लिए भारत को आवंटित किया गया था। दूसरी ओर, पश्चिमी नदियों जैसे सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। हालांकि, भारत को निर्दिष्ट घरेलू, गैर-उपभोग्य और कृषि उपयोग के लिए पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए अपवाद (exception) दिया गया था। भारत को पश्चिमी नदियों पर नदी परियोजनाओं के तहत जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार भी दिया गया है। सिंधु नदी प्रणाली (Indus River System) सिंधु नदी प्रणाली में सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज नदी शामिल हैं। यह बेसिन मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान द्वारा साझा किया जाता है। चीन और अफगानिस्तान का भी छोटा हिस्सा है। सिंधु (Indus) सिंधु एशिया में एक ट्रांसबाउंड्री नदी है और दक्षिण और पूर्वी एशिया की एक ट्रांस-हिमालयी नदी है। पश्चिमी तिब्बत में निकलने के बाद यह नदी 3,180 किलोमीटर की दूरी तक बहती है। यह कश्मीर के लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्रों के माध्यम से उत्तर पश्चिम में बहती है। फिर यह नंगा पर्वत पुंजक के बाद तेजी से बाईं ओर झुकती है। यह कराची के पास अरब सागर में गिरने से पहले पाकिस्तान से होकर बहती है।
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, भारत एक हज़ार नौ सौ साठ की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने के अपने अधिकारों पर काम कर रहा है ताकि वह अपनी जमीन की सिंचाई कर सके। भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की बातचीत के बाद एक हज़ार नौ सौ साठ में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता था। सिंधु जल संधि एक हज़ार नौ सौ साठ एक हज़ार नौ सौ साठ में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत, तीन पूर्वी नदियों रावी, सतलुज और ब्यास के सभी जल को विशेष रूप से उपयोग करने के लिए भारत को आवंटित किया गया था। दूसरी ओर, पश्चिमी नदियों जैसे सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। हालांकि, भारत को निर्दिष्ट घरेलू, गैर-उपभोग्य और कृषि उपयोग के लिए पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए अपवाद दिया गया था। भारत को पश्चिमी नदियों पर नदी परियोजनाओं के तहत जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार भी दिया गया है। सिंधु नदी प्रणाली सिंधु नदी प्रणाली में सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज नदी शामिल हैं। यह बेसिन मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान द्वारा साझा किया जाता है। चीन और अफगानिस्तान का भी छोटा हिस्सा है। सिंधु सिंधु एशिया में एक ट्रांसबाउंड्री नदी है और दक्षिण और पूर्वी एशिया की एक ट्रांस-हिमालयी नदी है। पश्चिमी तिब्बत में निकलने के बाद यह नदी तीन,एक सौ अस्सी किलोग्राममीटर की दूरी तक बहती है। यह कश्मीर के लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्रों के माध्यम से उत्तर पश्चिम में बहती है। फिर यह नंगा पर्वत पुंजक के बाद तेजी से बाईं ओर झुकती है। यह कराची के पास अरब सागर में गिरने से पहले पाकिस्तान से होकर बहती है।
Jija-sali ke masti ka video viral : भारतीय शादियों में तरह-तरह की रस्मे हैं। इस दौरान बहुत मजाक भी होता है। और हां, जब बात हो जीजा-साली के बीच मजाक की, तो भैया... कहने ही क्या। सोशल मीडिया पर जीजा-साली के मजाक से जुड़े कई वीडियो मिल जाएंगे। ताजा वीडियो भी कुछ ऐसा ही है, जिसे देखकर बहुत से लोग अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे। दरअसल, शादी की रस्म के दौरान साली ने अपने जीजा को ऐसे रसगुल्ला खिलाया कि वीडियो वायरल हो गया। यह क्लिप इंस्टाग्राम पेज ashiq. billota से 16 दिसंबर को पोस्ट किया गया था। हालांकि, इसकी पुष्टी नहीं हुई है कि यह वीडियो कब और कहां फिल्माया गया था। Jija-sali ke masti ka video viral : इस क्लिप में देखा जा सकता है कि दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर बैठे हैं। जहां कुछ लड़कियां भी मौजूद है। इस दौरान एक रस्म के लिए एक युवती दूल्हे को रसगुल्ला खिलाना चाहती है। पर दुल्हा काफी सतर्क नजर आता है। ऐसे में जब युवती रसगुल्ला दूल्हे के मुंह के पास लेकर जाती है, तो वह उसका हाथ पकड़ लेता है और रसगुल्ला खाने का प्रयास करता है। लेकिन इतने में युवती दूल्हे से पहले ही रसगुल्ला निपटा देती है। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोग हंसने लगते हैं। इस इंस्टाग्राम रील को अबतक 1 लाख 31 हजार व्यूज और 5 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही, यूजर्स इस पर मजेदार टिप्पणी भी कर रहे हैं। जैसे एक शख्स ने लिखा कि कमाल कर दिया।
Jija-sali ke masti ka video viral : भारतीय शादियों में तरह-तरह की रस्मे हैं। इस दौरान बहुत मजाक भी होता है। और हां, जब बात हो जीजा-साली के बीच मजाक की, तो भैया... कहने ही क्या। सोशल मीडिया पर जीजा-साली के मजाक से जुड़े कई वीडियो मिल जाएंगे। ताजा वीडियो भी कुछ ऐसा ही है, जिसे देखकर बहुत से लोग अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे। दरअसल, शादी की रस्म के दौरान साली ने अपने जीजा को ऐसे रसगुल्ला खिलाया कि वीडियो वायरल हो गया। यह क्लिप इंस्टाग्राम पेज ashiq. billota से सोलह दिसंबर को पोस्ट किया गया था। हालांकि, इसकी पुष्टी नहीं हुई है कि यह वीडियो कब और कहां फिल्माया गया था। Jija-sali ke masti ka video viral : इस क्लिप में देखा जा सकता है कि दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर बैठे हैं। जहां कुछ लड़कियां भी मौजूद है। इस दौरान एक रस्म के लिए एक युवती दूल्हे को रसगुल्ला खिलाना चाहती है। पर दुल्हा काफी सतर्क नजर आता है। ऐसे में जब युवती रसगुल्ला दूल्हे के मुंह के पास लेकर जाती है, तो वह उसका हाथ पकड़ लेता है और रसगुल्ला खाने का प्रयास करता है। लेकिन इतने में युवती दूल्हे से पहले ही रसगुल्ला निपटा देती है। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोग हंसने लगते हैं। इस इंस्टाग्राम रील को अबतक एक लाख इकतीस हजार व्यूज और पाँच हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही, यूजर्स इस पर मजेदार टिप्पणी भी कर रहे हैं। जैसे एक शख्स ने लिखा कि कमाल कर दिया।
महिलाओं के भूमि अधिकारों से जुड़े हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी इशारा है कि समुदाय-आधारित संगठनों को सशक्त बनाया जाना चाहिए। भूमि तक महिलाओं की पहुंच, स्वामित्व और नियंत्रण उन्हें वित्तीय सुरक्षा, आश्रय, आय और आजीविका के अवसर प्रदान कर सकता है। इसके बावजूद, भारत में इससे जुड़े प्रयासों के लिए आर्थिक मदद और महिलाओं के भूमि अधिकारों (वीमेन्स लैंड राइट्स - डब्ल्यूएलआर) से संबंधित हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी बनी हुई है। इस क्षेत्र में वुमैनिटी फाउंडेशन के काम के दौरान, हमने पाया कि ग्रामीण भारत में महिलाएं, कई मुद्दों जैसे घरेलू हिंसा, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, कौशल निर्माण एवं विकास जैसे सहयोगों के लिए अक्सर अपने समुदाय से जुड़े संगठनों से संपर्क करती हैं। कहने का मतलब है कि जब महिलाएं के सामने भूमि अधिकारों की बात आती है तो ये समुदाय-आधारित संगठन ही उनके संपर्क का पहला केंद्र बन जाते हैं। दुर्भाग्यवश, इनमें से कई संगठन हस्तक्षेप करने और पर्याप्त सहायता प्रदान करने में असमर्थ होते हैं। - उनके पास अपेक्षित तकनीकी कौशल और भूमि कानूनों और दावा प्रक्रियाओं की समझ की कमी के साथ-साथ हस्तक्षेप के लिए प्रमाणित रणनीतियों का अभाव भी होता है। - भूमि से संबंधित कानून और प्रक्रियाएं लगातार विकसित हो रही हैं। उदाहरण के लिए, डिजिटलीकरण की दिशा में सरकार का अभियान कई ऐसे समुदाय-आधारित संगठनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है जिनके पास ऐसी ऑनलाइन प्रक्रियाओं से जुड़ने के लिए ज्ञान, आत्मविश्वास और कनेक्टिविटी की कमी है। - भूमि अधिकारों पर काम करते समय, संगठनों को समुदायों के भीतर सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों जैसे जाति, वर्ग, लिंग और राजनीतिक मित्रता के जटिल, बहुस्तरीय कारकों का भी समाधान करने की आवश्यकता होती है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया लंबी हो जाती है। इसके समानांतर, डब्लूएलआर पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त आंकड़ों; व्यापक, कार्य-आधारित शोध, ओपन-सोर्स असेट्स; और सहयोग मंचों की जरूरत होती है जो चिकित्सकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, भूमि और लैंगिक मामलों के विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों समेत विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाते हैं। यह साफ है कि इस तंत्र के विभिन्न पहलुओं को परिपक्व बनाने की आवश्यकता है। वुमैनिटी फाउंडेशन में, हम जमीनी स्तर पर भूमि अधिकार कार्यक्रमों को लागू करने के लिए विभिन्न समाजसेवी भागीदार संगठनों को फंड मुहैया करवाते हैं। हालांकि, हम इस व्यवस्था के भीतर समाजसेवी संस्थाओं और अन्य संगठनों के एक बड़े समूह के लिए जागरूकता और तकनीकी क्षमता के निर्माण की आवश्यकता और महत्व को भी पहचानते हैं। इस लक्ष्य की दिशा में, हमारी पहलों में से एक डब्ल्यूएलआर कोर्स से क्षमता निर्माण है जो सभी समाजसेवी संस्थाओं के लिए उपलब्ध है। नीचे, हम कोर्स को संचालित करने के अपने अनुभव को रेखांकित कर रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे हमारी सीख हमारे काम को समृद्ध कर रही है। हमें बहुत पहले ही इस बात का एहसास हो गया था कि हमें समाजसेवी संस्थाओं के एक बड़े समूह को सक्रिय रूप से क्षमता-निर्माण सहायता प्रदान करके पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर किए जा रहे कार्यों को तेज करने और व्यापक बनाने की आवश्यकता है। इससे विशेष रूप से उन लोगों को लाभ होगा जो अनौपचारिक तरीके से भूमि अधिकार के मुद्दों से जुड़े हैं और जिनमें इससे अधिक गहराई से जुड़ने की क्षमता या आत्मविश्वास की कमी है। ऐसा करने के लिए, हमने महिलाओं और भूमि स्वामित्व के लिए कार्य समूह (डब्ल्यूजीडब्ल्यूएलओ) के साथ साझेदारी में भारत में डब्ल्यूएलआर पर एक औपचारिक पाठ्यक्रम बनाया - 45 संगठनों का एक नेटवर्क जो 2002 से महिलाओं की भूमि तक पहुंच और स्वामित्व पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य डब्लूएलआर पर पूरी जानकारी देने वाला डिजाइन तैयार करना और डब्लूजीडब्ल्यूएलओ के सदस्य संगठनों की सीख को हितधारकों के एक बड़े समूह तक पहुंचाना था। इससे तैयार हुए 90-घंटों के इस पाठ्यक्रम को 2022 में 50 ऐसे समाजसेवी प्रैक्टिशनर द्वारा स्वीकार किया गया जो अपनी समझ को बढ़ाने और अपने प्रोग्रामिंग में डब्ल्यूएलआर को शामिल करने की इच्छा रखते थे। अधिकांश प्रतिभागी ऐसे संगठनों से संबंधित थे जिन्होंने भूमि अधिकारों से जुड़ा कुछ काम किया था और वे डब्ल्यूएलआर पर काम करने के तरीकों पर विचार-विमर्श करना चाहते थे। प्रतिभागियों में मिडिल मैनेजर, प्रोग्राम मैनेजर, फ़ील्ड अधिकारी, शोधकर्ता और शिक्षाविद शामिल थे। समुदायों के साथ डब्ल्यूएलआर के बारे में बात करने और मुद्दे से संबंधित कानूनों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए सबसे कारगर रणनीतियों की खोज के अलावा, इस पाठ्यक्रम में एक व्यावहारिक तत्व भी शामिल है। प्रतिभागियों को उनके कामकाजी क्षेत्र के भीतर एक डब्लूएलआर परियोजना डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा, डब्लूजीडब्ल्यूएलओ ने, आठ सप्ताह की अवधि में अपनी परियोजनाओं को विकसित करने और निष्पादित करने के लिए उनका मार्गदर्शन भी किया। पाठ्यक्रम को अच्छी भागीदारी और प्रतिक्रिया मिली, और यह कुछ ऐसा है जिसका समर्थन हम साल 2023 में करना जारी रखेंगे। बहरहाल, हमने महसूस किया कि यह अकेले सभी हितधारकों तक नहीं पहुंच सकता है और न ही आवश्यक प्रभाव डाल सकता है; इसे क्षमता-निर्माण प्रयासों के अन्य तरीकों की मदद से पूरा किए जाने की जरूरत है। पाठ्यक्रम ने डब्लूएलआर के लिए एक परिचय के रूप में काम किया, विशेष रूप से यह समूह-1 में, कृषि भूमि और विरासत अधिकारों से संबंधित था। प्रतिभागियों से मिले फीडबैक के आधार पर, समूह-2 में अतिरिक्त घटक शामिल किए गए और कई तरह की भूमि और उन्हें नियंत्रित करने वाले कानूनों (उदाहरण के लिए, वन भूमि/वन अधिकार) को शामिल किया गया। लेकिन भविष्य के संस्करणों में विभिन्न धर्मों, जनजातियों और भौगोलिक क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किए जाने में अभी भी बढ़ोतरी की गुंजाइश है। डब्लूएलआर पर काम करने वाले फील्ड कैडर - समुदायों के लिए संपर्क के प्राथमिक बिंदु - भी समरूप नहीं हैं। उदाहरण के लिए, समुदायों के साथ काम करने वाली कई महिलाएं बहुत अधिक पढ़ और लिख नहीं सकती हैं। इसलिए, यह पाठ्यक्रम अपने वर्तमान रूप में उनके लिए उपयुक्त नहीं है और इसमें बदलाव की जरूरत है। इसने हमें इस विषय पर अपनी सोच को विस्तृत करने के लिए मजबूर किया कि इन मुद्दों पर काम करने वाले विविध कैडरों को व्यक्तिगत तरीके से प्रशिक्षण कैसे दिया जा सकता है। डब्ल्यूजीडब्ल्यूएलओ पाठ्यक्रम के माध्यम से सीखी गई बुनियादी बातों के अलावा, एक संगठन को उन कानूनों और प्रक्रियाओं के बारे में सीखने से लाभ होगा जो उस क्षेत्र में सबसे अधिक लागू होते हैं जहां वे काम करते हैं और जिन समुदायों के साथ वे काम करते हैं। यह उन्नत पाठ्यक्रमों के डिजाइन और वितरण को प्रभावित करता है, जिसे पर्याप्त रूप से प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता होगी। प्रासंगिक बनाने का अर्थ प्रासंगिक बनाने का अर्थ उनकी पहचान करना भी है जो स्थानीय रोल मॉडल और संसाधन होते हैं और जो इन संगठनों के साथ काम कर सकते हैं तथा स्थानीय भाषा में उनसे संवाद स्थापित करने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड के अल्मोडा में भूमि अधिकार मामले से निपटने वाले किसी संगठन के पास सहायता के लिए स्थानीय वकील से संपर्क करने का विकल्प है तो वह अपना काम अधिक कुशलता से करने में सक्षम होगा। इसलिए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि संगठनों के पास ऐसे स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता हो जो उन्हें अपने कामकाज के क्षेत्रों में डब्ल्यूएलआर कार्य करने में सक्षम बनाते हैं। वास्तविक और प्रभावी जमीनी कार्यान्वयन के लिए, डब्ल्यूएलआर एजेंडा को समाजसेवी संस्थाओं के सभी स्तरों पर लागू करने की आवश्यकता होगी। प्रोग्रामिंग में अधिक व्यापक बदलाव के लिए संगठन और उनके फील्ड कैडरों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है, जिसमें मुख्य रूप से स्थानीय समुदायों की महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं के इस कैडर की भाषा, समय की कमी आदि जैसी जरूरतों पर भी विचार करने की आवश्यकता है। इसलिए, पाठ्यक्रम को सरल बनाने और उसे ऑनलाइन या इलाके, भाषा, भूमि के प्रकार आदि के लिए स्थानीयकृत बनाकर उन तक ले जाने की जरूरत है। इससे प्रतिभागी पाठ्यक्रम को अपनी गति के अनुसार पूरा कर सकेंगे और स्वतंत्र रूप से उसके विकास की प्रक्रिया पर निगरानी रखने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, हम इसे स्थानीय लोगों के लिए ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाने के एक कदम के रूप में देखते हैं, जो डब्ल्यूएलआर के काम को संगठनों से परे ले जाने में सक्षम बनाएगा। इससे हमें यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि समुदायों में महिलाओं की भूमि तक पहुंच हो और डब्ल्यूएलआर का काम जमीन पर हो रहा हो। और यही हमारा अंतिम लक्ष्य भी है। डब्लूएलआर को सक्षम करने के लिए हस्तक्षेप कार्यक्रमों को लागू करने और भूमि अधिकार परिदृश्य के बारे में संगठनों के ज्ञान में सुधार करने के लिए कैडरों की क्षमता को विकसित करने की जरूरत है। इसलिए, हमारा यह मानना है कि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के अभ्यासकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अन्य तरीकों को एक साथ अपनाया जाना चाहिए। अन्य हितधारक क्या कर सकते हैं? फंडिंग या भूमि अधिकारों पर काम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए, इस मुद्दे से जुड़े संगठन, विकास-आधारित दृष्टिकोण अपना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, प्रकृति-आधारित आजीविका पर काम करने वाला एक संगठन भूमि-संबंधी मामलों में महिलाओं की भूमिका और निर्णय लेने की स्थिति को समझने के प्रयास से इसकी शुरुआत कर सकता है। इससे उन्हें मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने, समस्या के विस्तार की पहचान करने और जिस काम के लिए वे फंडिंग कर रहे हैं उसका दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए अपने हस्तक्षेप में बदलाव लाने में मदद मिल सकती है। जब महिला किसानों के पास भूमि पर उनके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होते हैं तो उस स्थिति में भी उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। इसलिए, छोटी जोत वाली महिला किसानों के लाभ के लिए तैयार किए गए कार्यक्रम चलाने वाले संगठनों को निश्चित रूप से महिलाओं के स्वामित्व और उनकी भूमि पर नियंत्रण से जुड़े संकेतक बनाना चाहिए। जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता पर काम करने वाले संगठनों का समर्थन करने वाले फंडरों को उनके द्वारा डिजाइन किए गए समाधानों और शमन में महिलाओं की भूमिका पर विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि लैंगिक दृष्टिकोण अपनाने से कार्यान्वयन योग्य, टिकाऊ और समुदायों के ज्ञान और वास्तविकताओं पर आधारित पर्यावरणीय समाधानों का निर्माण संभव है। आखिरकार, हमें सामान्य रूप से भूमि अधिकारों और विशेष रूप से महिलाओं के भूमि अधिकारों के बारे में हो रही चर्चा में परिवर्तन लाना होगा। वर्तमान में, यह क्षेत्र से अपरिचित लोगों के लिए कठिन हो सकता है और इससे इस क्षेत्र में काम करने वाले मुख्य लोगों को मूल कारण तक संसाधनों की पहुंच को संभव बनाने या उसे निर्देशित करने में मुश्किल होती है। नतीजतन, भूमि की पहुंच से जुड़े (और अक्सर आकस्मिक) कारणों का समर्थन करने के लिए उत्सुक हैं लेकिन डब्ल्यूएलआर के लिए प्रत्यक्ष फंडिंग बिखरी हुई है। डब्ल्यूएलआर से जुड़ी चर्चाओं कि दिशा बदलने से जमीनी स्तर पर वास्तविकताओं में होने वाले परिवर्तन की गति में वृद्धि आ सकती है। वुमैनिटी फाउंडेशन द्वारा समर्थित यह लेख पहले आईडीआर पर प्रकाशित किया गया है।
महिलाओं के भूमि अधिकारों से जुड़े हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी इशारा है कि समुदाय-आधारित संगठनों को सशक्त बनाया जाना चाहिए। भूमि तक महिलाओं की पहुंच, स्वामित्व और नियंत्रण उन्हें वित्तीय सुरक्षा, आश्रय, आय और आजीविका के अवसर प्रदान कर सकता है। इसके बावजूद, भारत में इससे जुड़े प्रयासों के लिए आर्थिक मदद और महिलाओं के भूमि अधिकारों से संबंधित हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी बनी हुई है। इस क्षेत्र में वुमैनिटी फाउंडेशन के काम के दौरान, हमने पाया कि ग्रामीण भारत में महिलाएं, कई मुद्दों जैसे घरेलू हिंसा, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, कौशल निर्माण एवं विकास जैसे सहयोगों के लिए अक्सर अपने समुदाय से जुड़े संगठनों से संपर्क करती हैं। कहने का मतलब है कि जब महिलाएं के सामने भूमि अधिकारों की बात आती है तो ये समुदाय-आधारित संगठन ही उनके संपर्क का पहला केंद्र बन जाते हैं। दुर्भाग्यवश, इनमें से कई संगठन हस्तक्षेप करने और पर्याप्त सहायता प्रदान करने में असमर्थ होते हैं। - उनके पास अपेक्षित तकनीकी कौशल और भूमि कानूनों और दावा प्रक्रियाओं की समझ की कमी के साथ-साथ हस्तक्षेप के लिए प्रमाणित रणनीतियों का अभाव भी होता है। - भूमि से संबंधित कानून और प्रक्रियाएं लगातार विकसित हो रही हैं। उदाहरण के लिए, डिजिटलीकरण की दिशा में सरकार का अभियान कई ऐसे समुदाय-आधारित संगठनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है जिनके पास ऐसी ऑनलाइन प्रक्रियाओं से जुड़ने के लिए ज्ञान, आत्मविश्वास और कनेक्टिविटी की कमी है। - भूमि अधिकारों पर काम करते समय, संगठनों को समुदायों के भीतर सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों जैसे जाति, वर्ग, लिंग और राजनीतिक मित्रता के जटिल, बहुस्तरीय कारकों का भी समाधान करने की आवश्यकता होती है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया लंबी हो जाती है। इसके समानांतर, डब्लूएलआर पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त आंकड़ों; व्यापक, कार्य-आधारित शोध, ओपन-सोर्स असेट्स; और सहयोग मंचों की जरूरत होती है जो चिकित्सकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, भूमि और लैंगिक मामलों के विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों समेत विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाते हैं। यह साफ है कि इस तंत्र के विभिन्न पहलुओं को परिपक्व बनाने की आवश्यकता है। वुमैनिटी फाउंडेशन में, हम जमीनी स्तर पर भूमि अधिकार कार्यक्रमों को लागू करने के लिए विभिन्न समाजसेवी भागीदार संगठनों को फंड मुहैया करवाते हैं। हालांकि, हम इस व्यवस्था के भीतर समाजसेवी संस्थाओं और अन्य संगठनों के एक बड़े समूह के लिए जागरूकता और तकनीकी क्षमता के निर्माण की आवश्यकता और महत्व को भी पहचानते हैं। इस लक्ष्य की दिशा में, हमारी पहलों में से एक डब्ल्यूएलआर कोर्स से क्षमता निर्माण है जो सभी समाजसेवी संस्थाओं के लिए उपलब्ध है। नीचे, हम कोर्स को संचालित करने के अपने अनुभव को रेखांकित कर रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे हमारी सीख हमारे काम को समृद्ध कर रही है। हमें बहुत पहले ही इस बात का एहसास हो गया था कि हमें समाजसेवी संस्थाओं के एक बड़े समूह को सक्रिय रूप से क्षमता-निर्माण सहायता प्रदान करके पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर किए जा रहे कार्यों को तेज करने और व्यापक बनाने की आवश्यकता है। इससे विशेष रूप से उन लोगों को लाभ होगा जो अनौपचारिक तरीके से भूमि अधिकार के मुद्दों से जुड़े हैं और जिनमें इससे अधिक गहराई से जुड़ने की क्षमता या आत्मविश्वास की कमी है। ऐसा करने के लिए, हमने महिलाओं और भूमि स्वामित्व के लिए कार्य समूह के साथ साझेदारी में भारत में डब्ल्यूएलआर पर एक औपचारिक पाठ्यक्रम बनाया - पैंतालीस संगठनों का एक नेटवर्क जो दो हज़ार दो से महिलाओं की भूमि तक पहुंच और स्वामित्व पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य डब्लूएलआर पर पूरी जानकारी देने वाला डिजाइन तैयार करना और डब्लूजीडब्ल्यूएलओ के सदस्य संगठनों की सीख को हितधारकों के एक बड़े समूह तक पहुंचाना था। इससे तैयार हुए नब्बे-घंटों के इस पाठ्यक्रम को दो हज़ार बाईस में पचास ऐसे समाजसेवी प्रैक्टिशनर द्वारा स्वीकार किया गया जो अपनी समझ को बढ़ाने और अपने प्रोग्रामिंग में डब्ल्यूएलआर को शामिल करने की इच्छा रखते थे। अधिकांश प्रतिभागी ऐसे संगठनों से संबंधित थे जिन्होंने भूमि अधिकारों से जुड़ा कुछ काम किया था और वे डब्ल्यूएलआर पर काम करने के तरीकों पर विचार-विमर्श करना चाहते थे। प्रतिभागियों में मिडिल मैनेजर, प्रोग्राम मैनेजर, फ़ील्ड अधिकारी, शोधकर्ता और शिक्षाविद शामिल थे। समुदायों के साथ डब्ल्यूएलआर के बारे में बात करने और मुद्दे से संबंधित कानूनों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए सबसे कारगर रणनीतियों की खोज के अलावा, इस पाठ्यक्रम में एक व्यावहारिक तत्व भी शामिल है। प्रतिभागियों को उनके कामकाजी क्षेत्र के भीतर एक डब्लूएलआर परियोजना डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा, डब्लूजीडब्ल्यूएलओ ने, आठ सप्ताह की अवधि में अपनी परियोजनाओं को विकसित करने और निष्पादित करने के लिए उनका मार्गदर्शन भी किया। पाठ्यक्रम को अच्छी भागीदारी और प्रतिक्रिया मिली, और यह कुछ ऐसा है जिसका समर्थन हम साल दो हज़ार तेईस में करना जारी रखेंगे। बहरहाल, हमने महसूस किया कि यह अकेले सभी हितधारकों तक नहीं पहुंच सकता है और न ही आवश्यक प्रभाव डाल सकता है; इसे क्षमता-निर्माण प्रयासों के अन्य तरीकों की मदद से पूरा किए जाने की जरूरत है। पाठ्यक्रम ने डब्लूएलआर के लिए एक परिचय के रूप में काम किया, विशेष रूप से यह समूह-एक में, कृषि भूमि और विरासत अधिकारों से संबंधित था। प्रतिभागियों से मिले फीडबैक के आधार पर, समूह-दो में अतिरिक्त घटक शामिल किए गए और कई तरह की भूमि और उन्हें नियंत्रित करने वाले कानूनों को शामिल किया गया। लेकिन भविष्य के संस्करणों में विभिन्न धर्मों, जनजातियों और भौगोलिक क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किए जाने में अभी भी बढ़ोतरी की गुंजाइश है। डब्लूएलआर पर काम करने वाले फील्ड कैडर - समुदायों के लिए संपर्क के प्राथमिक बिंदु - भी समरूप नहीं हैं। उदाहरण के लिए, समुदायों के साथ काम करने वाली कई महिलाएं बहुत अधिक पढ़ और लिख नहीं सकती हैं। इसलिए, यह पाठ्यक्रम अपने वर्तमान रूप में उनके लिए उपयुक्त नहीं है और इसमें बदलाव की जरूरत है। इसने हमें इस विषय पर अपनी सोच को विस्तृत करने के लिए मजबूर किया कि इन मुद्दों पर काम करने वाले विविध कैडरों को व्यक्तिगत तरीके से प्रशिक्षण कैसे दिया जा सकता है। डब्ल्यूजीडब्ल्यूएलओ पाठ्यक्रम के माध्यम से सीखी गई बुनियादी बातों के अलावा, एक संगठन को उन कानूनों और प्रक्रियाओं के बारे में सीखने से लाभ होगा जो उस क्षेत्र में सबसे अधिक लागू होते हैं जहां वे काम करते हैं और जिन समुदायों के साथ वे काम करते हैं। यह उन्नत पाठ्यक्रमों के डिजाइन और वितरण को प्रभावित करता है, जिसे पर्याप्त रूप से प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता होगी। प्रासंगिक बनाने का अर्थ प्रासंगिक बनाने का अर्थ उनकी पहचान करना भी है जो स्थानीय रोल मॉडल और संसाधन होते हैं और जो इन संगठनों के साथ काम कर सकते हैं तथा स्थानीय भाषा में उनसे संवाद स्थापित करने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड के अल्मोडा में भूमि अधिकार मामले से निपटने वाले किसी संगठन के पास सहायता के लिए स्थानीय वकील से संपर्क करने का विकल्प है तो वह अपना काम अधिक कुशलता से करने में सक्षम होगा। इसलिए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि संगठनों के पास ऐसे स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता हो जो उन्हें अपने कामकाज के क्षेत्रों में डब्ल्यूएलआर कार्य करने में सक्षम बनाते हैं। वास्तविक और प्रभावी जमीनी कार्यान्वयन के लिए, डब्ल्यूएलआर एजेंडा को समाजसेवी संस्थाओं के सभी स्तरों पर लागू करने की आवश्यकता होगी। प्रोग्रामिंग में अधिक व्यापक बदलाव के लिए संगठन और उनके फील्ड कैडरों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है, जिसमें मुख्य रूप से स्थानीय समुदायों की महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं के इस कैडर की भाषा, समय की कमी आदि जैसी जरूरतों पर भी विचार करने की आवश्यकता है। इसलिए, पाठ्यक्रम को सरल बनाने और उसे ऑनलाइन या इलाके, भाषा, भूमि के प्रकार आदि के लिए स्थानीयकृत बनाकर उन तक ले जाने की जरूरत है। इससे प्रतिभागी पाठ्यक्रम को अपनी गति के अनुसार पूरा कर सकेंगे और स्वतंत्र रूप से उसके विकास की प्रक्रिया पर निगरानी रखने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, हम इसे स्थानीय लोगों के लिए ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाने के एक कदम के रूप में देखते हैं, जो डब्ल्यूएलआर के काम को संगठनों से परे ले जाने में सक्षम बनाएगा। इससे हमें यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि समुदायों में महिलाओं की भूमि तक पहुंच हो और डब्ल्यूएलआर का काम जमीन पर हो रहा हो। और यही हमारा अंतिम लक्ष्य भी है। डब्लूएलआर को सक्षम करने के लिए हस्तक्षेप कार्यक्रमों को लागू करने और भूमि अधिकार परिदृश्य के बारे में संगठनों के ज्ञान में सुधार करने के लिए कैडरों की क्षमता को विकसित करने की जरूरत है। इसलिए, हमारा यह मानना है कि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के अभ्यासकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अन्य तरीकों को एक साथ अपनाया जाना चाहिए। अन्य हितधारक क्या कर सकते हैं? फंडिंग या भूमि अधिकारों पर काम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए, इस मुद्दे से जुड़े संगठन, विकास-आधारित दृष्टिकोण अपना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, प्रकृति-आधारित आजीविका पर काम करने वाला एक संगठन भूमि-संबंधी मामलों में महिलाओं की भूमिका और निर्णय लेने की स्थिति को समझने के प्रयास से इसकी शुरुआत कर सकता है। इससे उन्हें मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने, समस्या के विस्तार की पहचान करने और जिस काम के लिए वे फंडिंग कर रहे हैं उसका दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए अपने हस्तक्षेप में बदलाव लाने में मदद मिल सकती है। जब महिला किसानों के पास भूमि पर उनके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होते हैं तो उस स्थिति में भी उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। इसलिए, छोटी जोत वाली महिला किसानों के लाभ के लिए तैयार किए गए कार्यक्रम चलाने वाले संगठनों को निश्चित रूप से महिलाओं के स्वामित्व और उनकी भूमि पर नियंत्रण से जुड़े संकेतक बनाना चाहिए। जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता पर काम करने वाले संगठनों का समर्थन करने वाले फंडरों को उनके द्वारा डिजाइन किए गए समाधानों और शमन में महिलाओं की भूमिका पर विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि लैंगिक दृष्टिकोण अपनाने से कार्यान्वयन योग्य, टिकाऊ और समुदायों के ज्ञान और वास्तविकताओं पर आधारित पर्यावरणीय समाधानों का निर्माण संभव है। आखिरकार, हमें सामान्य रूप से भूमि अधिकारों और विशेष रूप से महिलाओं के भूमि अधिकारों के बारे में हो रही चर्चा में परिवर्तन लाना होगा। वर्तमान में, यह क्षेत्र से अपरिचित लोगों के लिए कठिन हो सकता है और इससे इस क्षेत्र में काम करने वाले मुख्य लोगों को मूल कारण तक संसाधनों की पहुंच को संभव बनाने या उसे निर्देशित करने में मुश्किल होती है। नतीजतन, भूमि की पहुंच से जुड़े कारणों का समर्थन करने के लिए उत्सुक हैं लेकिन डब्ल्यूएलआर के लिए प्रत्यक्ष फंडिंग बिखरी हुई है। डब्ल्यूएलआर से जुड़ी चर्चाओं कि दिशा बदलने से जमीनी स्तर पर वास्तविकताओं में होने वाले परिवर्तन की गति में वृद्धि आ सकती है। वुमैनिटी फाउंडेशन द्वारा समर्थित यह लेख पहले आईडीआर पर प्रकाशित किया गया है।
नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारत के दिग्गज क्रिकेट स्टार सचिन तेंदुलकर राज्य सभा के सदस्य हैं। क्रिकेट के मैदान में 24 साल के करियर के दौरान वह इक्के-दुक्के मौके पर ही मैदान से दूर रहे लेकिन जहां तक संसद सदस्य के नाते संसद पहुंचने का सवाल है तो उनका रिकार्ड बेहद खराब रहा है। राज्य सभा के 12 नामांकित सदस्यों में से एक सचिन और फिल्म अभिनेत्री रेखा का रिकार्ड संसद में मौजूदगी के मामले में सबसे खराब रहा है। सचिन 2012 में नामांकित किए गए थे और 2013 में क्रिकेट से संन्यास लिया था लेकिन तब से लेकर आज तक 348 दिनों के सत्र में वह सिर्फ 23 बार संसद में मौजूद रहे। रेखा तो इस दौरान सिर्फ 18 बार संसद पहुंचीं। रेखा को भी 2012 में नामांकित किया गया था। इस दौरान सचिन पर कुल 58.8 लाख रुपए खर्च हुए। यह राज्य सभा से प्राप्त आंकड़ा है। राज्य सभा सदस्य होने के नाते सचिन को प्रति माह 50 हजार रुपए का वेतन मिलता है। इसके अलावा प्रति माह 45 हजार रुपए संसदीय क्षेत्र के लिए खर्च, 15 हजार प्रति माह दफ्तर खर्च और यात्रा तथा दैनिक भत्ते मिलते हैं।
नई दिल्ली । भारत के दिग्गज क्रिकेट स्टार सचिन तेंदुलकर राज्य सभा के सदस्य हैं। क्रिकेट के मैदान में चौबीस साल के करियर के दौरान वह इक्के-दुक्के मौके पर ही मैदान से दूर रहे लेकिन जहां तक संसद सदस्य के नाते संसद पहुंचने का सवाल है तो उनका रिकार्ड बेहद खराब रहा है। राज्य सभा के बारह नामांकित सदस्यों में से एक सचिन और फिल्म अभिनेत्री रेखा का रिकार्ड संसद में मौजूदगी के मामले में सबसे खराब रहा है। सचिन दो हज़ार बारह में नामांकित किए गए थे और दो हज़ार तेरह में क्रिकेट से संन्यास लिया था लेकिन तब से लेकर आज तक तीन सौ अड़तालीस दिनों के सत्र में वह सिर्फ तेईस बार संसद में मौजूद रहे। रेखा तो इस दौरान सिर्फ अट्ठारह बार संसद पहुंचीं। रेखा को भी दो हज़ार बारह में नामांकित किया गया था। इस दौरान सचिन पर कुल अट्ठावन.आठ लाख रुपए खर्च हुए। यह राज्य सभा से प्राप्त आंकड़ा है। राज्य सभा सदस्य होने के नाते सचिन को प्रति माह पचास हजार रुपए का वेतन मिलता है। इसके अलावा प्रति माह पैंतालीस हजार रुपए संसदीय क्षेत्र के लिए खर्च, पंद्रह हजार प्रति माह दफ्तर खर्च और यात्रा तथा दैनिक भत्ते मिलते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधान परिषद गठन का प्रस्ताव हुआ पास, जोखिम में थी ममता बनर्जी की CM कुर्सी! West Bengal Assembly: फिलहाल देश के 6 राज्यों में विधान परिषद है, इनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के नाम शामिल हैं। एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती हैं। नई दिल्ली। इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा सीट से हार गईं थी। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेदु अधिकारी ने कड़ी टक्कर में मात दी थी। ऐसे में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को राज्य में बहुमत तो मिल गया लेकिन खुद बिना जीते ही राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं। इस हाल में ममता बनर्जी के सामने विधानसभा की सदस्यता लेने की मजबूरी थी। उन्हें अपनी सीएम कुर्सी बचाने के लिए 6 महीने के अंदर किसी भी हाल में विधानसभा का सदस्य होना जरूरी था। वैसे अन्य कुछ राज्यों में इस परिस्थिति में विधान परिषद के जरिए सदन में बने रहने का भी विकल्प है। लेकिन बंगाल में विधान परिषद न होने के चलते ममता बनर्जी के सामने संकट नजर आ रहा था। ऐसे में अब ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव दिया, जोकि मंगलवार को विधानसभा में पास भी हो गया है। बता दें कि बंगाल विधानसभा में विधान परिषद के गठन को लेकर पेश हुए प्रस्ताव के पक्ष में 196 सदस्यों ने वोट किया। वहीं इसके विरोध में 69 सदस्यों ने वोट किया। इस दौरान सदन में 265 सदस्य उपस्थित हुए थे। फिलहाल इसे राज्य में लागू करने से पहले संसद के दोनों सदनों से पारित कराना होगा। वहीं बंगाल में पहले भी विधान परिषद था, जिसे साल 1969 में हटा दिया गया था। अब टीएमसी एक बार फिर राज्य में विधान परिषद बनाने की मांग कर रही है। हालांकि भाजपा ने सरकार के इस प्रस्ताव पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन वामदलों ने ममता के इस फैसले पर विरोध जताया है। वामदलों का कहना है कि ममता का यह कदम राज्य के हित में नहीं है। फिलहाल देश के 6 राज्यों में विधान परिषद है, इनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के नाम शामिल हैं। एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं। इस लिहाज से बंगाल में यदि विधान परिषद बनता है तो उसमें 98 सदस्य ही हो सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधान परिषद गठन का प्रस्ताव हुआ पास, जोखिम में थी ममता बनर्जी की CM कुर्सी! West Bengal Assembly: फिलहाल देश के छः राज्यों में विधान परिषद है, इनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के नाम शामिल हैं। एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती हैं। नई दिल्ली। इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा सीट से हार गईं थी। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेदु अधिकारी ने कड़ी टक्कर में मात दी थी। ऐसे में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को राज्य में बहुमत तो मिल गया लेकिन खुद बिना जीते ही राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं। इस हाल में ममता बनर्जी के सामने विधानसभा की सदस्यता लेने की मजबूरी थी। उन्हें अपनी सीएम कुर्सी बचाने के लिए छः महीने के अंदर किसी भी हाल में विधानसभा का सदस्य होना जरूरी था। वैसे अन्य कुछ राज्यों में इस परिस्थिति में विधान परिषद के जरिए सदन में बने रहने का भी विकल्प है। लेकिन बंगाल में विधान परिषद न होने के चलते ममता बनर्जी के सामने संकट नजर आ रहा था। ऐसे में अब ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधान परिषद के गठन का प्रस्ताव दिया, जोकि मंगलवार को विधानसभा में पास भी हो गया है। बता दें कि बंगाल विधानसभा में विधान परिषद के गठन को लेकर पेश हुए प्रस्ताव के पक्ष में एक सौ छियानवे सदस्यों ने वोट किया। वहीं इसके विरोध में उनहत्तर सदस्यों ने वोट किया। इस दौरान सदन में दो सौ पैंसठ सदस्य उपस्थित हुए थे। फिलहाल इसे राज्य में लागू करने से पहले संसद के दोनों सदनों से पारित कराना होगा। वहीं बंगाल में पहले भी विधान परिषद था, जिसे साल एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में हटा दिया गया था। अब टीएमसी एक बार फिर राज्य में विधान परिषद बनाने की मांग कर रही है। हालांकि भाजपा ने सरकार के इस प्रस्ताव पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन वामदलों ने ममता के इस फैसले पर विरोध जताया है। वामदलों का कहना है कि ममता का यह कदम राज्य के हित में नहीं है। फिलहाल देश के छः राज्यों में विधान परिषद है, इनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के नाम शामिल हैं। एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में विधानसभा की दो सौ चौरानवे सीटें हैं। इस लिहाज से बंगाल में यदि विधान परिषद बनता है तो उसमें अट्ठानवे सदस्य ही हो सकते हैं।
बहराइच। कुछ साल पहले तक जो महिलाएं दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं, आज वही महिलाएं बचत के पैसे से समूह बनाकर खेती कर रही हैं। अनाज बेचकर जो बचत होती है उसे खर्च करने के बजाय बैंक में जमा कर रही हैं। नजमा के पास अपने खुद के खेत नहीं हैं, समूह में महिलाओं ने मिलकर पहले 20-30 रुपए महीने में बचत करनी वर्ष 2010 में शुरू की। 20 महिलाओं ने अपने समूह का नाम 'चमेली स्वयं सहायता' रखा। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
बहराइच। कुछ साल पहले तक जो महिलाएं दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं, आज वही महिलाएं बचत के पैसे से समूह बनाकर खेती कर रही हैं। अनाज बेचकर जो बचत होती है उसे खर्च करने के बजाय बैंक में जमा कर रही हैं। नजमा के पास अपने खुद के खेत नहीं हैं, समूह में महिलाओं ने मिलकर पहले बीस-तीस रुपयापए महीने में बचत करनी वर्ष दो हज़ार दस में शुरू की। बीस महिलाओं ने अपने समूह का नाम 'चमेली स्वयं सहायता' रखा। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
UKPSC PCS Prelims 2021: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने संयुक्त राज्य सिविल / उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा 2021 की तिथि घोषित कर दी है। अभ्यर्थी UKPSC की आधिकारिक वेबसाइट ukpsc. gov. in पर जारी परीक्षा शेड्यूल को चेक कर सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 3 अप्रैल 2022 को किया जाएगा। परीक्षा संबंधी अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी परीक्षा शेड्यूल को देख सकते हैं। बता दें कि कुल 318 रिक्त पदों पर भर्तियों के लिए इस परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। जारी नोटिफिकेशन के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर 16 मार्च 2022 को जारी किया जाएगा। जारी होने के बाद अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। परीक्षा का आयोजन कोरोना सुरक्षा दिशा-निर्देश के तहत किया जाएगा। सभी परीक्षार्थियों को केंद्र पर मास्क लगाकर ही जाना होगा। अभ्यर्थी इस बात का ध्यान रखें कि उन्हें डाक के जरिए एडमिट कार्ड नहीं भेजे जाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा राज्य भर में निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। बता दें कि पहले कुल 224 रिक्त पदों पर भर्तियां के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। उसके बाद 94 रिक्त पदों को और शामिल किया गया, जिसके बाद रिक्त पदों की संख्या 318 हो गई. आवेदन की प्रक्रिया 28 दिसंबर 2021 तक चली थी। सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ukpsc. gov. in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए संयुक्त राज्य सिविल / उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा एडमिट कार्ड के लिंक पर क्लिक करें। यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज कर सबमिट करें। एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। अब उसे डाउनलोड करें।
UKPSC PCS Prelims दो हज़ार इक्कीस: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने संयुक्त राज्य सिविल / उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा दो हज़ार इक्कीस की तिथि घोषित कर दी है। अभ्यर्थी UKPSC की आधिकारिक वेबसाइट ukpsc. gov. in पर जारी परीक्षा शेड्यूल को चेक कर सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन तीन अप्रैल दो हज़ार बाईस को किया जाएगा। परीक्षा संबंधी अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी परीक्षा शेड्यूल को देख सकते हैं। बता दें कि कुल तीन सौ अट्ठारह रिक्त पदों पर भर्तियों के लिए इस परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। जारी नोटिफिकेशन के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर सोलह मार्च दो हज़ार बाईस को जारी किया जाएगा। जारी होने के बाद अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। परीक्षा का आयोजन कोरोना सुरक्षा दिशा-निर्देश के तहत किया जाएगा। सभी परीक्षार्थियों को केंद्र पर मास्क लगाकर ही जाना होगा। अभ्यर्थी इस बात का ध्यान रखें कि उन्हें डाक के जरिए एडमिट कार्ड नहीं भेजे जाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा राज्य भर में निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। बता दें कि पहले कुल दो सौ चौबीस रिक्त पदों पर भर्तियां के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था। उसके बाद चौरानवे रिक्त पदों को और शामिल किया गया, जिसके बाद रिक्त पदों की संख्या तीन सौ अट्ठारह हो गई. आवेदन की प्रक्रिया अट्ठाईस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक चली थी। सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ukpsc. gov. in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए संयुक्त राज्य सिविल / उच्च अधीनस्थ सेवा परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा एडमिट कार्ड के लिंक पर क्लिक करें। यूजर आईडी और पासवर्ड दर्ज कर सबमिट करें। एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। अब उसे डाउनलोड करें।
दो जून को हुए भीषण रेल हादसे में 288 लोगों की मौत हो गई थी और एक हजार से अधिक यात्री घायल हो गये थे। रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जांच के दायरे में पांच रेलकर्मी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चार अन्य कर्मचारी सिग्नल से संबंधित काम करते हैं और इस महीने की शुरुआत में दुर्घटना के समय ड्यूटी पर थे। पांचों कर्मचारियों पर भविष्य में कोई भी कार्रवाई रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की दुर्घटना जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) दो जून को बाहानगा बाजार स्टेशन पर कथित आपराधिक लापरवाही के कारण हुई दुर्घटना की अलग से जांच कर रहा है। रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने इंटरलॉकिंग प्रणाली से संभावित छेड़छाड़ का संकेत दिया है, जिससे कोरोमंडल एक्सप्रेस के लिए सिग्नल हरा हो गया और यह लूप लाइन की ओर निर्देशित हो गई, जहां यह एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। स्वचालित इंटरलाकिंग प्रणाली में गड़बड़ी को इस घटना की बड़ी वजह के तौर पर देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा कि फिलहाल पांच रेलकर्मी जांच के केंद्र में हैं। सीआरएस से जल्द ही अंतिम रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि तीन संभावित परिदृश्यों की जांच की जा रही है - क्या प्रणाली से छेड़छाड़ जानबूझ कर की गई थी या यह गलती से हुआ या फिर यह क्षेत्र में चल रहे रखरखाव के काम का परिणाम था। दुर्घटना को लेकर विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना के बीच दो रेल कर्मचारी संघ रेलवे के समर्थन में सामने आए हैं। एक साझा बयान में, आल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (एआइआरएफ) और नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआइआर) के महासचिवों ने कहा कि वे रेल हादसे का राजनीतिकरण किए जाने से व्यथित हैं। इसमें कहा गया कि हम यह देख कर बहुत दुखी हैं कि कैसे इस रेल हादसे का राजनीतिकरण किया गया और रेलवे के प्रदर्शन पर सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में हमले किए जा रहे हैं। इस तरह का प्रत्येक हमला हमारी ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण का निरादर है।
दो जून को हुए भीषण रेल हादसे में दो सौ अठासी लोगों की मौत हो गई थी और एक हजार से अधिक यात्री घायल हो गये थे। रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जांच के दायरे में पांच रेलकर्मी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चार अन्य कर्मचारी सिग्नल से संबंधित काम करते हैं और इस महीने की शुरुआत में दुर्घटना के समय ड्यूटी पर थे। पांचों कर्मचारियों पर भविष्य में कोई भी कार्रवाई रेलवे सुरक्षा आयुक्त की दुर्घटना जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो दो जून को बाहानगा बाजार स्टेशन पर कथित आपराधिक लापरवाही के कारण हुई दुर्घटना की अलग से जांच कर रहा है। रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने इंटरलॉकिंग प्रणाली से संभावित छेड़छाड़ का संकेत दिया है, जिससे कोरोमंडल एक्सप्रेस के लिए सिग्नल हरा हो गया और यह लूप लाइन की ओर निर्देशित हो गई, जहां यह एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। स्वचालित इंटरलाकिंग प्रणाली में गड़बड़ी को इस घटना की बड़ी वजह के तौर पर देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा कि फिलहाल पांच रेलकर्मी जांच के केंद्र में हैं। सीआरएस से जल्द ही अंतिम रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि तीन संभावित परिदृश्यों की जांच की जा रही है - क्या प्रणाली से छेड़छाड़ जानबूझ कर की गई थी या यह गलती से हुआ या फिर यह क्षेत्र में चल रहे रखरखाव के काम का परिणाम था। दुर्घटना को लेकर विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना के बीच दो रेल कर्मचारी संघ रेलवे के समर्थन में सामने आए हैं। एक साझा बयान में, आल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमेन के महासचिवों ने कहा कि वे रेल हादसे का राजनीतिकरण किए जाने से व्यथित हैं। इसमें कहा गया कि हम यह देख कर बहुत दुखी हैं कि कैसे इस रेल हादसे का राजनीतिकरण किया गया और रेलवे के प्रदर्शन पर सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में हमले किए जा रहे हैं। इस तरह का प्रत्येक हमला हमारी ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण का निरादर है।
Holikotsav 2023: उत्तर प्रदेश के ब्रज में इस साल मार्च महीने से शुरू होने वाले 13 दिवसीय होलिकोत्सव से लेकर दिसंबर में होने वाली गीता जयंती तक धार्मिक त्योहारों-पर्वों पर लोकगीतों, भजनों के अलावा सूरदास, मीरा और रसखान के पद सुनने को मिलते रहेंगे। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद स्थानीय कलाकारों के साथ ही देश के मूर्धन्य कलाकार भी बुलाएगा। ब्रज रज उत्सव का प्रयोग दोहराया जाएगा। पारंपरिक आयोजनों के अलावा भी पर्यटकों के लिए ब्रज में काफी कुछ होगा। संगीत और नृत्य की दी जाएंगी प्रस्तुतियांकार्यक्रम में बाहर से आए कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां पेश करेंगे, जबकि स्थानीय कलाकारों को भी अपना हुनर दिखाने का मौका दिया जाएगा। सितंबर महीने में राधाष्टमी पर श्रीहरिदास अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा, यह दो दिवसीय होगा। इसमें संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। यह आयोजन वृंदावन में ऑडिटोरियम या मथुरा में मुक्ताकाशीय रंगमंच पर आयोजित कराया जाएगा। इस आयोजन में कई कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। सितंबर में ही पितृ पक्ष में पांच दिवसीय सांझी महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर रसखान समाधि परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। Sakshi Murder Case में पुलिस रडार पर Sahil के दोस्त, नई थ्योरी से होगी जांच!
Holikotsav दो हज़ार तेईस: उत्तर प्रदेश के ब्रज में इस साल मार्च महीने से शुरू होने वाले तेरह दिवसीय होलिकोत्सव से लेकर दिसंबर में होने वाली गीता जयंती तक धार्मिक त्योहारों-पर्वों पर लोकगीतों, भजनों के अलावा सूरदास, मीरा और रसखान के पद सुनने को मिलते रहेंगे। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद स्थानीय कलाकारों के साथ ही देश के मूर्धन्य कलाकार भी बुलाएगा। ब्रज रज उत्सव का प्रयोग दोहराया जाएगा। पारंपरिक आयोजनों के अलावा भी पर्यटकों के लिए ब्रज में काफी कुछ होगा। संगीत और नृत्य की दी जाएंगी प्रस्तुतियांकार्यक्रम में बाहर से आए कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां पेश करेंगे, जबकि स्थानीय कलाकारों को भी अपना हुनर दिखाने का मौका दिया जाएगा। सितंबर महीने में राधाष्टमी पर श्रीहरिदास अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा, यह दो दिवसीय होगा। इसमें संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। यह आयोजन वृंदावन में ऑडिटोरियम या मथुरा में मुक्ताकाशीय रंगमंच पर आयोजित कराया जाएगा। इस आयोजन में कई कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। सितंबर में ही पितृ पक्ष में पांच दिवसीय सांझी महोत्सव का आयोजन होगा। इस अवसर पर रसखान समाधि परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। Sakshi Murder Case में पुलिस रडार पर Sahil के दोस्त, नई थ्योरी से होगी जांच!
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस सिलेंडर 30 सितंबर 2020 को खत्म हो रही है। बता दें मोदी सरकार इस योजना के तहत गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देती है। कोरोना के चलते इस योजना के तहत मुफ्त सिलेंडर भी दिया गया। इसकी तारीख को अप्रैल से सितंबर तक बढ़ाया गया था। वहीं एक अक्टूबर को गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर और कामर्शियल गैस के रेट भी रिवाइज होंगे। हलवाई की दुकान पर मिलने वाले खाने-पीने के साामन की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए सरकार ने नए नियम लागू करने का फैसला किया है। एफएसएसएआई यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने नए नियम जारी किए है। एक अक्टूबर 2020 के बाद से, स्थानीय मिठाई की दुकानों को भी परातों एवं डब्बों में बिक्री के लिए रखे गए मिठाई के लिए 'निर्माण की तारीख' तथा उपयोग की उपयुक्त अवधि जैसी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। मौजूदा समय में, इन विवरणों को पहले से बंद डिब्बाबंद मिठाई के डिब्बे पर उल्लेख करना अनिवार्य है। बैंक ग्राहकों को अभी घर बैठे-बैठे चेक, डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर पिक करने जैसी गैर-वित्तीय सेवाएं ही मिलती हैं। इसके अलावा एफडी के ब्याज पर लगने वाला टैक्स बचाने के लिए जमा किए जाने वाले फॉर्म-15G व 15H, आयकर या जीएसटी चालान पिक करने के साथ ही अकाउंट स्टेटमेंट रिक्वेस्ट, टर्म डिपॉजिट रसीद की डिलीवरी की सुविधा भी ग्राहकों को घर पर ही उपलब्ध कराई जाती है। डोरस्टेप बैंकिंग सर्विस लॉन्च होने के बाद अब वित्तीय सेवाएं अक्टूबर 2020 से घर पर ही उपलब्ध होंगी। टीवी के विनिर्माण में उपयोग होने वाले ओपन सेल के आयात पर पांच प्रतिशत सीमा शुल्क एक अक्टूबर से फिर लगाया जाएगा। एक साल की छूट अवधि समाप्त होने के बाद यह शुल्क लगाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने यह जानकारी दी। सरकार ने पिछले साल टेलीविजन के महत्वपूर्ण उपकरण ओपन सेल पर एक साल के लिये यानी 30 सितंबर तक सीमा शुल्क से छूट दी थी। इसका कारण घरेलू उद्योग का क्षमता निर्माण के लिये समय मांगना था। टेलीविजन उद्योग का कहना है कि 32 इंच के टेलीविजन का दाम 600 रुपये और 42 इंच का दाम 1,200 से 1,500 रुपये बढ़ेगा। बड़े आकार के टेलीविजन के दाम में अधिक वृद्धि होगी। वित्त मंत्रालय के सूत्र ने कहा कि प्रमुख ब्रांड 32 इंच टीवी के लिये 2,700 रुपये और 42 इंच के लिये 4,000 से 4,500 रुपये की मूल कीमत पर ओपन सेल आयात कर रहे हैं। ऐसे में अगर ओपन सेल पर पांच प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है, यह 150 से 250 रुपये प्रति टेलीविजन से अधिक नहीं होगा। केंद्र सरकार ने विदेश पैसे भेजने पर टैक्स वसूलने से जुड़ा नया नियम बना दिया है। ये नियम 1 अक्टूबर 2020 से लागू हो जाएगा। ऐसे में अगर आप विदेश में पढ़ रहे अपने बच्चे के पास पैसे भेजते हैं या किसी रिश्तेदार की आर्थिक मदद करते हैं तो रकम पर 5 फीसद टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। फाइनेंस एक्ट, 2020 के मुताबिक, आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत विदेश पैसे भेजने वाले व्यक्ति को टीसीएस देना होगा। बता दें कि एलआरएस के तहत 2. 5 लाख डॉलर सालाना तक भेज सकते हैं, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता। इसी को टैक्स के दायरे में लाने के लिए टीसीएस देना होगा। जीएसटी परिषद की बैठक पांच अक्तूबर को होगी। पहले यह बैठक 19 सितंबर को होनी थी। केंद्र ने पिछले महीने फैसला किया था कि जीएसटी परिषद की 41वीं और 42वीं बैठक 27 अगस्त और 19 सितंबर को होगी। हालांकि, उस समय तक संसद के मानसून सत्र पर फैसला नहीं हुआ था। जीएसटी परिषद की पांच अक्टूबर को होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी संग्रहण में 2. 35 लाख करोड़ रुपये की कमी के वित्तपोषण के मुद्दे पर विवाद चल रहा है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस सिलेंडर तीस सितंबर दो हज़ार बीस को खत्म हो रही है। बता दें मोदी सरकार इस योजना के तहत गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देती है। कोरोना के चलते इस योजना के तहत मुफ्त सिलेंडर भी दिया गया। इसकी तारीख को अप्रैल से सितंबर तक बढ़ाया गया था। वहीं एक अक्टूबर को गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर और कामर्शियल गैस के रेट भी रिवाइज होंगे। हलवाई की दुकान पर मिलने वाले खाने-पीने के साामन की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए सरकार ने नए नियम लागू करने का फैसला किया है। एफएसएसएआई यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने नए नियम जारी किए है। एक अक्टूबर दो हज़ार बीस के बाद से, स्थानीय मिठाई की दुकानों को भी परातों एवं डब्बों में बिक्री के लिए रखे गए मिठाई के लिए 'निर्माण की तारीख' तथा उपयोग की उपयुक्त अवधि जैसी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। मौजूदा समय में, इन विवरणों को पहले से बंद डिब्बाबंद मिठाई के डिब्बे पर उल्लेख करना अनिवार्य है। बैंक ग्राहकों को अभी घर बैठे-बैठे चेक, डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर पिक करने जैसी गैर-वित्तीय सेवाएं ही मिलती हैं। इसके अलावा एफडी के ब्याज पर लगने वाला टैक्स बचाने के लिए जमा किए जाने वाले फॉर्म-पंद्रहG व पंद्रहH, आयकर या जीएसटी चालान पिक करने के साथ ही अकाउंट स्टेटमेंट रिक्वेस्ट, टर्म डिपॉजिट रसीद की डिलीवरी की सुविधा भी ग्राहकों को घर पर ही उपलब्ध कराई जाती है। डोरस्टेप बैंकिंग सर्विस लॉन्च होने के बाद अब वित्तीय सेवाएं अक्टूबर दो हज़ार बीस से घर पर ही उपलब्ध होंगी। टीवी के विनिर्माण में उपयोग होने वाले ओपन सेल के आयात पर पांच प्रतिशत सीमा शुल्क एक अक्टूबर से फिर लगाया जाएगा। एक साल की छूट अवधि समाप्त होने के बाद यह शुल्क लगाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने यह जानकारी दी। सरकार ने पिछले साल टेलीविजन के महत्वपूर्ण उपकरण ओपन सेल पर एक साल के लिये यानी तीस सितंबर तक सीमा शुल्क से छूट दी थी। इसका कारण घरेलू उद्योग का क्षमता निर्माण के लिये समय मांगना था। टेलीविजन उद्योग का कहना है कि बत्तीस इंच के टेलीविजन का दाम छः सौ रुपयापये और बयालीस इंच का दाम एक,दो सौ से एक,पाँच सौ रुपयापये बढ़ेगा। बड़े आकार के टेलीविजन के दाम में अधिक वृद्धि होगी। वित्त मंत्रालय के सूत्र ने कहा कि प्रमुख ब्रांड बत्तीस इंच टीवी के लिये दो,सात सौ रुपयापये और बयालीस इंच के लिये चार,शून्य से चार,पाँच सौ रुपयापये की मूल कीमत पर ओपन सेल आयात कर रहे हैं। ऐसे में अगर ओपन सेल पर पांच प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है, यह एक सौ पचास से दो सौ पचास रुपयापये प्रति टेलीविजन से अधिक नहीं होगा। केंद्र सरकार ने विदेश पैसे भेजने पर टैक्स वसूलने से जुड़ा नया नियम बना दिया है। ये नियम एक अक्टूबर दो हज़ार बीस से लागू हो जाएगा। ऐसे में अगर आप विदेश में पढ़ रहे अपने बच्चे के पास पैसे भेजते हैं या किसी रिश्तेदार की आर्थिक मदद करते हैं तो रकम पर पाँच फीसद टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। फाइनेंस एक्ट, दो हज़ार बीस के मुताबिक, आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत विदेश पैसे भेजने वाले व्यक्ति को टीसीएस देना होगा। बता दें कि एलआरएस के तहत दो. पाँच लाख डॉलर सालाना तक भेज सकते हैं, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता। इसी को टैक्स के दायरे में लाने के लिए टीसीएस देना होगा। जीएसटी परिषद की बैठक पांच अक्तूबर को होगी। पहले यह बैठक उन्नीस सितंबर को होनी थी। केंद्र ने पिछले महीने फैसला किया था कि जीएसटी परिषद की इकतालीसवीं और बयालीसवीं बैठक सत्ताईस अगस्त और उन्नीस सितंबर को होगी। हालांकि, उस समय तक संसद के मानसून सत्र पर फैसला नहीं हुआ था। जीएसटी परिषद की पांच अक्टूबर को होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी संग्रहण में दो. पैंतीस लाख करोड़ रुपये की कमी के वित्तपोषण के मुद्दे पर विवाद चल रहा है।
Quick links: Southeast Delhi Murder: दक्षिणपूर्वी दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में हुए हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। एक नाबालिग लड़के ने इसलिए 26 वर्षीय व्यक्ति की गला काटकर हत्या कर दी क्योंकि वह बार-बार उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। इतना ही नहीं, वह वीडियो बनाकर नाबालिग को ब्लैकमेल भी करता रहा। 30 अगस्त को हुए इस हत्याकांड की जांच के बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। ऐसा बताया जा रहा है कि मृतक पिछले दो महीने से नाबालिग लड़के का यौन शोषण कर रहा था। इससे तंग आकर लड़के ने आरोपी का गला काट दिया जिससे उसकी मौत हो गई। इतना ही नहीं, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मृत आरोपी ने किशोर का अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करके उसे वायरल करने की धमकी भी दी थी। पुलिस उपायुक्त (दक्षिणपूर्वी दिल्ली) राजेश देव ने कहा कि किशोर को पकड़ लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन और घटना के समय किशोर द्वारा पहने गए कपड़े और जूते भी बरामद कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि व्यक्ति 30 अगस्त को मृत पाया गया और उसकी गर्दन पर गहरी चोटें थीं। डीसीपी ने बताया कि 30 अगस्त को दोपहर करीब 2.15 बजे जामिया नगर थाने में सूचना मिली कि मकान नंबर एम-45, जामिया नगर, बटला हाउस में दूसरी मंजिल पर स्थित एक कमरे में खून बिखरा हुआ है। जब पुलिस वहां पहुंचीं तो उसे 28 साल के एक पुरुष का शव मिला। मृतक का नाम मोहम्मद वसीम था जो एक प्राइवेट ट्यूटर के रूप में काम करता था। पुलिस को पता चला कि यह प्रॉपर्टी मृतक के परिवार की है, जिसे किराये पर दिया गया था और कुछ दिन पहले ही खाली कराया गया था। वहीं, आरोपी अपने परिवार के साथ जाकिर नगर स्थित एक प्रॉपर्टी में रह रहा था। डीसीपी देव ने आगे बताया कि मृतक होमोसेक्सुअल था जिसे करीब दो महीने पहले नाबालिग के बारे में पता चला और बार-बार उसका यौन उत्पीड़न करने लगा। वह वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करता रहा। घटना के दिन भी उसने दुष्कर्म करने के लिए नाबालिग को बुलाया था जब पेपर कटर से उसकी हत्या कर दी गई।
Quick links: Southeast Delhi Murder: दक्षिणपूर्वी दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में हुए हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। एक नाबालिग लड़के ने इसलिए छब्बीस वर्षीय व्यक्ति की गला काटकर हत्या कर दी क्योंकि वह बार-बार उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। इतना ही नहीं, वह वीडियो बनाकर नाबालिग को ब्लैकमेल भी करता रहा। तीस अगस्त को हुए इस हत्याकांड की जांच के बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। ऐसा बताया जा रहा है कि मृतक पिछले दो महीने से नाबालिग लड़के का यौन शोषण कर रहा था। इससे तंग आकर लड़के ने आरोपी का गला काट दिया जिससे उसकी मौत हो गई। इतना ही नहीं, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मृत आरोपी ने किशोर का अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करके उसे वायरल करने की धमकी भी दी थी। पुलिस उपायुक्त राजेश देव ने कहा कि किशोर को पकड़ लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन और घटना के समय किशोर द्वारा पहने गए कपड़े और जूते भी बरामद कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि व्यक्ति तीस अगस्त को मृत पाया गया और उसकी गर्दन पर गहरी चोटें थीं। डीसीपी ने बताया कि तीस अगस्त को दोपहर करीब दो.पंद्रह बजे जामिया नगर थाने में सूचना मिली कि मकान नंबर एम-पैंतालीस, जामिया नगर, बटला हाउस में दूसरी मंजिल पर स्थित एक कमरे में खून बिखरा हुआ है। जब पुलिस वहां पहुंचीं तो उसे अट्ठाईस साल के एक पुरुष का शव मिला। मृतक का नाम मोहम्मद वसीम था जो एक प्राइवेट ट्यूटर के रूप में काम करता था। पुलिस को पता चला कि यह प्रॉपर्टी मृतक के परिवार की है, जिसे किराये पर दिया गया था और कुछ दिन पहले ही खाली कराया गया था। वहीं, आरोपी अपने परिवार के साथ जाकिर नगर स्थित एक प्रॉपर्टी में रह रहा था। डीसीपी देव ने आगे बताया कि मृतक होमोसेक्सुअल था जिसे करीब दो महीने पहले नाबालिग के बारे में पता चला और बार-बार उसका यौन उत्पीड़न करने लगा। वह वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करता रहा। घटना के दिन भी उसने दुष्कर्म करने के लिए नाबालिग को बुलाया था जब पेपर कटर से उसकी हत्या कर दी गई।
अगर हमारे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है तो जीवन में सारी चीजे गलत होने लगती है. घर में कुछ भी सही नहीं होता. घर में नकारात्मक ऊर्जा का कारन घर में सजावट के लिए लगी तस्वीरें भी हो सकती है. अगर आप चाहते है की आपके घर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे तो आपको वास्तु के अनुसार घर में इस तरह की तस्वीर लगाने से घर में खुशहाली आती है. 1-अपने घर के बेडरुम में श्रीकृष्ण की तस्वीर के साथ राधा की तस्वीर लगाना अच्छा होता है. ऐसी तस्वीर लगाने से पति-पत्नी में प्यार बढ़ता है और रिश्ते में मिठास आती है. 2-अगर आप अपने घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखना चाहते है तो अपने घर की पश्चिम दिशा की दीवार में सफेद बाघ की तस्वीर लगाना अच्छा माना जाता है. पर इस बात का हमेशा ध्यान रखे की तस्वीर गुस्से में वाली न हो . 3-अपने घर में सुख और समृद्धि लाना चाहते है तो अपने घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में पहाड़ की तस्वीर लगाएं. पर झरने की तस्वीर ना लगाए,झरने की तस्वीर घर में लगाना अच्छा नहीं होता है.
अगर हमारे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है तो जीवन में सारी चीजे गलत होने लगती है. घर में कुछ भी सही नहीं होता. घर में नकारात्मक ऊर्जा का कारन घर में सजावट के लिए लगी तस्वीरें भी हो सकती है. अगर आप चाहते है की आपके घर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे तो आपको वास्तु के अनुसार घर में इस तरह की तस्वीर लगाने से घर में खुशहाली आती है. एक-अपने घर के बेडरुम में श्रीकृष्ण की तस्वीर के साथ राधा की तस्वीर लगाना अच्छा होता है. ऐसी तस्वीर लगाने से पति-पत्नी में प्यार बढ़ता है और रिश्ते में मिठास आती है. दो-अगर आप अपने घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखना चाहते है तो अपने घर की पश्चिम दिशा की दीवार में सफेद बाघ की तस्वीर लगाना अच्छा माना जाता है. पर इस बात का हमेशा ध्यान रखे की तस्वीर गुस्से में वाली न हो . तीन-अपने घर में सुख और समृद्धि लाना चाहते है तो अपने घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में पहाड़ की तस्वीर लगाएं. पर झरने की तस्वीर ना लगाए,झरने की तस्वीर घर में लगाना अच्छा नहीं होता है.
बिहार में लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर बिहार एनडीए में तलवार खिंचती नजर आ रही है। जेडीयू नेता केसी त्यागी की चेतावनी पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए उतावलापन नहीं दिखाने की सलाह दी है। भागलपुर के बाद औरंगाबाद में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर है। औरंगाबाद में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं तो भागलपुर दंगा मामले के आरोपी और केन्द्रीय मंत्री के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे की अब तक नहीं हुई गिरफ्तारी ने नीतीश कुमार के सुशासन पर सवाल खड़ा कर दिया है। नीतीश भी लगातार जनता से अपील कर रहे हैं कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने न दें। ऐसे में उनकी पार्टी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। त्यागी ने इशारों-इशारों में बीजेपी को चेतावनी भी दे डाली है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी समेत घटक दल कोई ऐसा काम न करें, जिससे राज्य में एनडीए का घोषित एजेंडा प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि अगर सूबे में कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो एनडीए के साथ गठबंधन प्रभावित हो सकता है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने केसी त्यागी के बयान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे उतावलापन करार दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा है कि अर्जित मामले में कानून अपना काम कर रहा है। टाइगर ने कहा, "कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा, इसमें किसी के बयान का कोई मतलब नहीं है। किसी के बयान से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होने वाली नहीं है। लोगों को धैर्य रखना चाहिए। बहुत ज्यादा उतावलापन ठीक नहीं है। उन्होंने केसी त्यागी के बयान को छोटी-मोटी बात करार देते हुए कहा कि इससे गठबंधन पर फर्क पड़ने वाला नहीं है। साथ ही टाइगर ने त्यागी को उतावलापन नहीं दिखाने की नसीहत भी दे डाली है। इस बीच बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी ने इसे जनता को दिग्भ्रमित करने वाला और कोरी जुमलेबाजी करार दिया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सह विधायक भाई विरोंद्र ने कहा कि केसी त्यागी हों या प्रदेश के मुख्यमंत्री। सभी केवल जनता को दिग्भ्रमित करने के लिए जुमलेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "औरंगाबाद में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सैंकड़ों मुसलमानों की दुकानों में आग लगा दी गई है। दंगाइयों पर कार्रवाई करने की बजाय मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के नेता जुमलेबाजी कर रहे हैं, लेकिन जनता अब इनके जाल में फंसने वाली नहीं है। अब इनका पर्दाफाश हो चुका है। " भाई विरेंद्र ने केन्द्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और गिरिराज सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कई बार यह साबित हो चुका है कि एनडीए में शामिल लोग और बीजेपी के मंत्री बिहार में आकर एक समुदाय विशेष के खिलाफ दंगा भड़काने का काम करते हैं। अर्जित शाश्वत के मामले पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि जो दंगाई है, उसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है, क्योंकि वह केन्द्रीय मंत्री का बेटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार का लोगों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखनी की अपील महज दिखावा है। आज वह औरंगाबाद में दंगाइयों की गिरफ्तारी करवाने की बजाय हाथ पर हाथ रख कर क्यों बैठे हैं। आज यह साबित हो चुका है कि नीतीश कुमार दंगाइयों की गोद में जा कर बैठ गए हैं। आरजेडी प्रवक्ता ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने जानबूझ कर सांप्रदायिक दंगा फैलाने वालों की पार्टी के साथ गठबंधन किया है। यह लोग बिहार की शांति व्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं। दूसरी तरफ आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि केसी त्यागी के बयान का मतलब है कि वह यह मान रहे हैं कि उनके गठबंधन के जो सहयोगी हैं, उनकी वजह से बिहार में कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। और गठबंधन के पार्टनर ही नीतीश कुमार की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। तिवारी ने सवाल किया कि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ गए ही क्यों थे? वह जानते थे कि यह बीजेपी अटल बिहारी वाली नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह वाली है। 2014 के बाद से देश में जिस तरह का माहौल बना, वह सबके सामने है। फिर नीतीश कुमार सबकुछ जानकर क्यों गए। यह तो थूक कर चाटने वाली बात है। अगर एनडीए से गठबंधन टूटा तो क्या आरजेडी फिर से नीतीश कुमार के साथ जाएगा या चुनाव का रास्ता अपनाएगा। इस सवाल के जवाब में तिवारी ने कहा कि चुनाव ही एकमात्र विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जिस तरह से इधर से उधर जाने का ड्रामा करते रहे हैं, इससे सरकार का नैतिक बल समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो वह फिर से जनता के बीच जाकर मैंडेट हासिल करें।
बिहार में लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर बिहार एनडीए में तलवार खिंचती नजर आ रही है। जेडीयू नेता केसी त्यागी की चेतावनी पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए उतावलापन नहीं दिखाने की सलाह दी है। भागलपुर के बाद औरंगाबाद में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर है। औरंगाबाद में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं तो भागलपुर दंगा मामले के आरोपी और केन्द्रीय मंत्री के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे की अब तक नहीं हुई गिरफ्तारी ने नीतीश कुमार के सुशासन पर सवाल खड़ा कर दिया है। नीतीश भी लगातार जनता से अपील कर रहे हैं कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने न दें। ऐसे में उनकी पार्टी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। त्यागी ने इशारों-इशारों में बीजेपी को चेतावनी भी दे डाली है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी समेत घटक दल कोई ऐसा काम न करें, जिससे राज्य में एनडीए का घोषित एजेंडा प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि अगर सूबे में कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो एनडीए के साथ गठबंधन प्रभावित हो सकता है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने केसी त्यागी के बयान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे उतावलापन करार दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा है कि अर्जित मामले में कानून अपना काम कर रहा है। टाइगर ने कहा, "कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा, इसमें किसी के बयान का कोई मतलब नहीं है। किसी के बयान से कानूनी प्रक्रिया प्रभावित होने वाली नहीं है। लोगों को धैर्य रखना चाहिए। बहुत ज्यादा उतावलापन ठीक नहीं है। उन्होंने केसी त्यागी के बयान को छोटी-मोटी बात करार देते हुए कहा कि इससे गठबंधन पर फर्क पड़ने वाला नहीं है। साथ ही टाइगर ने त्यागी को उतावलापन नहीं दिखाने की नसीहत भी दे डाली है। इस बीच बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी ने इसे जनता को दिग्भ्रमित करने वाला और कोरी जुमलेबाजी करार दिया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सह विधायक भाई विरोंद्र ने कहा कि केसी त्यागी हों या प्रदेश के मुख्यमंत्री। सभी केवल जनता को दिग्भ्रमित करने के लिए जुमलेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "औरंगाबाद में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सैंकड़ों मुसलमानों की दुकानों में आग लगा दी गई है। दंगाइयों पर कार्रवाई करने की बजाय मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के नेता जुमलेबाजी कर रहे हैं, लेकिन जनता अब इनके जाल में फंसने वाली नहीं है। अब इनका पर्दाफाश हो चुका है। " भाई विरेंद्र ने केन्द्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और गिरिराज सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कई बार यह साबित हो चुका है कि एनडीए में शामिल लोग और बीजेपी के मंत्री बिहार में आकर एक समुदाय विशेष के खिलाफ दंगा भड़काने का काम करते हैं। अर्जित शाश्वत के मामले पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि जो दंगाई है, उसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है, क्योंकि वह केन्द्रीय मंत्री का बेटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार का लोगों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखनी की अपील महज दिखावा है। आज वह औरंगाबाद में दंगाइयों की गिरफ्तारी करवाने की बजाय हाथ पर हाथ रख कर क्यों बैठे हैं। आज यह साबित हो चुका है कि नीतीश कुमार दंगाइयों की गोद में जा कर बैठ गए हैं। आरजेडी प्रवक्ता ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने जानबूझ कर सांप्रदायिक दंगा फैलाने वालों की पार्टी के साथ गठबंधन किया है। यह लोग बिहार की शांति व्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं। दूसरी तरफ आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि केसी त्यागी के बयान का मतलब है कि वह यह मान रहे हैं कि उनके गठबंधन के जो सहयोगी हैं, उनकी वजह से बिहार में कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। और गठबंधन के पार्टनर ही नीतीश कुमार की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। तिवारी ने सवाल किया कि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ गए ही क्यों थे? वह जानते थे कि यह बीजेपी अटल बिहारी वाली नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह वाली है। दो हज़ार चौदह के बाद से देश में जिस तरह का माहौल बना, वह सबके सामने है। फिर नीतीश कुमार सबकुछ जानकर क्यों गए। यह तो थूक कर चाटने वाली बात है। अगर एनडीए से गठबंधन टूटा तो क्या आरजेडी फिर से नीतीश कुमार के साथ जाएगा या चुनाव का रास्ता अपनाएगा। इस सवाल के जवाब में तिवारी ने कहा कि चुनाव ही एकमात्र विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जिस तरह से इधर से उधर जाने का ड्रामा करते रहे हैं, इससे सरकार का नैतिक बल समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो वह फिर से जनता के बीच जाकर मैंडेट हासिल करें।
शिवपुरी के करैरा में चोरों ने एटीएम को डायनामाइट लगाकर उड़ा दिया। धमाके के साथ एटीएम मशीन के परखच्चे उड़ गए और उसमें भरे सात लाख रुपये सड़क पर फैल गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी माैके पर पहुंच गई। शिवपुरी, जेएनएन। मध्य प्रदेश के शिवपूरी से चोरी की एक चौका देने वाली घटना सामने आई है। यहां बदमाशों ने एटीएम से पैसे चुराने के चक्कर में उसे डायनामाइट लगाकर ही उड़ा दिया। धमाका इतना जोरदार था कि एटीएम के परखच्चे उड़ गए और सारा पैसा जमिन पर बिखर गया। धामाके की आवाज सुनकर लोगों की भीड़ जुटने लगी, जिसे देखकर बदमाश सारा कैश छोड़कर भाग गए। एटीएम में इस तरह से चोरी का यह पहला मामला है। घटना शिवपुरी जिले के करैरा इलाके की है। यहां पुराना बस स्टैंड पर इंडिया नंबर वन का एटीएम लगा हुआ था। जानकारी के मुताबिक इस एटीएम पर सिक्युरिटी गार्ड नहीं था, जिसके कारण बदमाश एटीएम को उड़ाने में कामयाब हो गए। घटना मंगलवार-बुधवार रात करीब ढ़ाई बजे की है। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है। मौके पर पहुंची पुलिस को घटना स्थल से करीब सात लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस को 6 लाख 72 हजार 500 रुपये के नोट सही सलामत मिले हैं। वहीं 28 हजार रुपये के कटे-फटे नोट मिले हैं। पुलिस ने एटीएम का संचालन करने वाली कंपनी से भी जानकारी मांगी है। कंपनी के कर्मचारियों के अनुसार सर्वर में देखने के बाद ही बताया जा सकेगा कि एटीएम में कुल कितने रुपये थे और इसमें से कितने रुपये बदमाश लेकर भागे हैं। वहीं, पुलिस आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज भी खंगालने में जुट गई है। इसके साथ ही पुलिस इस बात का भी पता लगाने में जुटी है कि बदमाशों को डायनामइट कहां से मिला था। बता दैं कि डायनामाइट से एटीएम में ब्लास्ट करने के लिए बदमाशों ने पास में ही मौजूद ट्रांसफार्मर से बिजली की सप्लाई ली थी। जैसे ही एटीएम मशीन में ब्लास्ट हुआ तो तारों की वजह से ट्रांसफार्मर में भी ब्लास्ट हो गया था। बता दें कि करीब एक साल पहले भी इसी तरह की घटना खनियांधाना में देखने को मिली थी। यहां चोरों ने एटीएम लूटने के लिए बारूद का इस्तेमाल किया था, लेकिन कामयाब नहीं हो सके थे। एटीएम में बड़ा ब्लास्ट नहीं हो पाया था। उस समय पास में ही रहने वाले खनियांधाना के तहसीलदार और चौकीदार ने घटना में रुपये लूटने से बचा लिए थे।
शिवपुरी के करैरा में चोरों ने एटीएम को डायनामाइट लगाकर उड़ा दिया। धमाके के साथ एटीएम मशीन के परखच्चे उड़ गए और उसमें भरे सात लाख रुपये सड़क पर फैल गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी माैके पर पहुंच गई। शिवपुरी, जेएनएन। मध्य प्रदेश के शिवपूरी से चोरी की एक चौका देने वाली घटना सामने आई है। यहां बदमाशों ने एटीएम से पैसे चुराने के चक्कर में उसे डायनामाइट लगाकर ही उड़ा दिया। धमाका इतना जोरदार था कि एटीएम के परखच्चे उड़ गए और सारा पैसा जमिन पर बिखर गया। धामाके की आवाज सुनकर लोगों की भीड़ जुटने लगी, जिसे देखकर बदमाश सारा कैश छोड़कर भाग गए। एटीएम में इस तरह से चोरी का यह पहला मामला है। घटना शिवपुरी जिले के करैरा इलाके की है। यहां पुराना बस स्टैंड पर इंडिया नंबर वन का एटीएम लगा हुआ था। जानकारी के मुताबिक इस एटीएम पर सिक्युरिटी गार्ड नहीं था, जिसके कारण बदमाश एटीएम को उड़ाने में कामयाब हो गए। घटना मंगलवार-बुधवार रात करीब ढ़ाई बजे की है। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है। मौके पर पहुंची पुलिस को घटना स्थल से करीब सात लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस को छः लाख बहत्तर हजार पाँच सौ रुपयापये के नोट सही सलामत मिले हैं। वहीं अट्ठाईस हजार रुपये के कटे-फटे नोट मिले हैं। पुलिस ने एटीएम का संचालन करने वाली कंपनी से भी जानकारी मांगी है। कंपनी के कर्मचारियों के अनुसार सर्वर में देखने के बाद ही बताया जा सकेगा कि एटीएम में कुल कितने रुपये थे और इसमें से कितने रुपये बदमाश लेकर भागे हैं। वहीं, पुलिस आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज भी खंगालने में जुट गई है। इसके साथ ही पुलिस इस बात का भी पता लगाने में जुटी है कि बदमाशों को डायनामइट कहां से मिला था। बता दैं कि डायनामाइट से एटीएम में ब्लास्ट करने के लिए बदमाशों ने पास में ही मौजूद ट्रांसफार्मर से बिजली की सप्लाई ली थी। जैसे ही एटीएम मशीन में ब्लास्ट हुआ तो तारों की वजह से ट्रांसफार्मर में भी ब्लास्ट हो गया था। बता दें कि करीब एक साल पहले भी इसी तरह की घटना खनियांधाना में देखने को मिली थी। यहां चोरों ने एटीएम लूटने के लिए बारूद का इस्तेमाल किया था, लेकिन कामयाब नहीं हो सके थे। एटीएम में बड़ा ब्लास्ट नहीं हो पाया था। उस समय पास में ही रहने वाले खनियांधाना के तहसीलदार और चौकीदार ने घटना में रुपये लूटने से बचा लिए थे।
देश के भविष्य के लिए आपको चिन्ताका क्या कारण है ? यदि मैं 'बाइबिल की भाषामें कहूँ तो इसका कारण हमारे हृदयकी वह भावशून्यता तथा कठोरता है जो कि जनता और उसकी निर्धनताके प्रति हमारी मनोवृत्तिसे प्रकट होती है। हमारे नवयुवक उच्च भावनाओं और मनोवेगोंसे परिपूर्ण हैं लेकिन अभीतक उन्होंने कोई निश्चित और व्यावहारिक रूप ग्रहण नहीं किया है । उदाहरण के लिए, यदि हमारे नवयुवकोंको सत्य और अहिंसा में जीवन्त और सक्रिय श्रद्धा होती तो अबतक हम कहीं अधिक प्रगति कर चुके होते । फिर भी हमारे सभी नवयुवकोंमें उदासीनता नहीं है। वास्तव में अपने कुछ शिक्षित नवयुवकों तथा नवयुवतियोंके निकट सहयोगके बिना मैं न तो जनतासे सम्पर्क स्थापित कर सकता था और न ही इतने बड़े पैमानेपर राष्ट्रकी सेवा ही कर सकता था और मेरी यह आशा बनी हुई है कि ये नवयुवक और नवयुवतियाँ खमीरका काम करेंगे और समय आनेपर सारी जनताका स्वरूप बदल कर रख देंगे । उसके बाद उन्होंने भारतवर्षके निर्माणमें हिन्दू, इस्लाम और ईसाई धर्मोंने जो महत्त्वपूर्ण योगदान दिया उसकी चर्चा को । भारतीय संस्कृति में हिन्दू धर्मका सबसे महत्त्वपूर्ण और महान् योगदान अहिंसाका सिद्धान्त है। पिछले तीन हजार या उससे भी अधिक वर्षोसे इसने देश के इतिहासको एक निश्चित दिशा दी है और आज भी भारतके करोड़ों लोगोंके लिए यह एक जीवन्त शक्ति है । यह एक विकासशील सिद्धान्त है, और इसका सन्देश आज भी दिया जा रहा है। इसकी शिक्षा हमारी जनताके मनोंमें इस हदतक पैठ चुकी है कि भारत में सैनिक क्रान्ति एक लगभग असम्भव-सी चोज बन गई है। इसका कारण यह नहीं है, जैसा कि कुछ लोग सोचते होंगे, कि हमारी जातिमें शारीरिक बल नहीं है - क्योंकि इसमें शारीरिक शक्तिकी उतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी कि किसी व्यक्तिकी हत्या के उद्देश्यसे गोली दागनेकी दानवीय इच्छा की - बल्कि यह है कि अहिंसाकी परम्पराने जनतामें अपनी जड़ें बहुत गहरी जमा ली हैं । भारतकी राष्ट्रीय संस्कृति में इस्लामका महत्त्वपूर्ण योगदान है इसकी ईश्वरके एक होनेमें पक्की श्रद्धा तथा इस्लामके अनुयायियोंमें मानव बन्धुत्व के सत्यका व्यवहारिक प्रयोग । मैं इन दो चीजोंको विशेष योगदान मानता हूँ । क्योंकि, हिन्दू धर्ममें तो बन्धुत्वकी भावनाको बहुत ज्यादा दार्शनिक जामा पहना दिया गया है । इसी तरह यद्यपि दार्शनिक हिन्दू धर्मका ईश्वर भी वही ईश्वर है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हिन्दू धर्मका व्यावहारिक पक्ष उतना अधिक दृढ़ और अटल नहीं है जितना कि इस्लामको । तब फिर भारत के राष्ट्रीय जीवनमें ईसाई धर्मका क्या योगदान है ? मेरा तात्पर्य ईसाई धर्मसे अलग ईसाका जो प्रभाव है उससे है; क्योंकि मुझे डर है कि इस समय दोनों में काफी अन्तर है। हाँ, बस यही तो कठिनाई है। एक धार्मिक गुरुकी शिक्षाओंको उसके अनुयायियोंके जीवनसे अलग करके देख सकना सम्भव नहीं है। दुर्भाग्यसे, पिछले डेढ़ सौ
देश के भविष्य के लिए आपको चिन्ताका क्या कारण है ? यदि मैं 'बाइबिल की भाषामें कहूँ तो इसका कारण हमारे हृदयकी वह भावशून्यता तथा कठोरता है जो कि जनता और उसकी निर्धनताके प्रति हमारी मनोवृत्तिसे प्रकट होती है। हमारे नवयुवक उच्च भावनाओं और मनोवेगोंसे परिपूर्ण हैं लेकिन अभीतक उन्होंने कोई निश्चित और व्यावहारिक रूप ग्रहण नहीं किया है । उदाहरण के लिए, यदि हमारे नवयुवकोंको सत्य और अहिंसा में जीवन्त और सक्रिय श्रद्धा होती तो अबतक हम कहीं अधिक प्रगति कर चुके होते । फिर भी हमारे सभी नवयुवकोंमें उदासीनता नहीं है। वास्तव में अपने कुछ शिक्षित नवयुवकों तथा नवयुवतियोंके निकट सहयोगके बिना मैं न तो जनतासे सम्पर्क स्थापित कर सकता था और न ही इतने बड़े पैमानेपर राष्ट्रकी सेवा ही कर सकता था और मेरी यह आशा बनी हुई है कि ये नवयुवक और नवयुवतियाँ खमीरका काम करेंगे और समय आनेपर सारी जनताका स्वरूप बदल कर रख देंगे । उसके बाद उन्होंने भारतवर्षके निर्माणमें हिन्दू, इस्लाम और ईसाई धर्मोंने जो महत्त्वपूर्ण योगदान दिया उसकी चर्चा को । भारतीय संस्कृति में हिन्दू धर्मका सबसे महत्त्वपूर्ण और महान् योगदान अहिंसाका सिद्धान्त है। पिछले तीन हजार या उससे भी अधिक वर्षोसे इसने देश के इतिहासको एक निश्चित दिशा दी है और आज भी भारतके करोड़ों लोगोंके लिए यह एक जीवन्त शक्ति है । यह एक विकासशील सिद्धान्त है, और इसका सन्देश आज भी दिया जा रहा है। इसकी शिक्षा हमारी जनताके मनोंमें इस हदतक पैठ चुकी है कि भारत में सैनिक क्रान्ति एक लगभग असम्भव-सी चोज बन गई है। इसका कारण यह नहीं है, जैसा कि कुछ लोग सोचते होंगे, कि हमारी जातिमें शारीरिक बल नहीं है - क्योंकि इसमें शारीरिक शक्तिकी उतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी कि किसी व्यक्तिकी हत्या के उद्देश्यसे गोली दागनेकी दानवीय इच्छा की - बल्कि यह है कि अहिंसाकी परम्पराने जनतामें अपनी जड़ें बहुत गहरी जमा ली हैं । भारतकी राष्ट्रीय संस्कृति में इस्लामका महत्त्वपूर्ण योगदान है इसकी ईश्वरके एक होनेमें पक्की श्रद्धा तथा इस्लामके अनुयायियोंमें मानव बन्धुत्व के सत्यका व्यवहारिक प्रयोग । मैं इन दो चीजोंको विशेष योगदान मानता हूँ । क्योंकि, हिन्दू धर्ममें तो बन्धुत्वकी भावनाको बहुत ज्यादा दार्शनिक जामा पहना दिया गया है । इसी तरह यद्यपि दार्शनिक हिन्दू धर्मका ईश्वर भी वही ईश्वर है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हिन्दू धर्मका व्यावहारिक पक्ष उतना अधिक दृढ़ और अटल नहीं है जितना कि इस्लामको । तब फिर भारत के राष्ट्रीय जीवनमें ईसाई धर्मका क्या योगदान है ? मेरा तात्पर्य ईसाई धर्मसे अलग ईसाका जो प्रभाव है उससे है; क्योंकि मुझे डर है कि इस समय दोनों में काफी अन्तर है। हाँ, बस यही तो कठिनाई है। एक धार्मिक गुरुकी शिक्षाओंको उसके अनुयायियोंके जीवनसे अलग करके देख सकना सम्भव नहीं है। दुर्भाग्यसे, पिछले डेढ़ सौ
मध्यप्रदेश में बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने की खबर आम हो चुकी हैं. ऐसे में अब कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक नर चीता ओबान रविवार को ग्रामीण इलाके में पहुंच गया. श्योपुरः मध्यप्रदेश में बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने की खबर आम हो चुकी हैं. ऐसे में अब कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक नर चीता ओबान रविवार को ग्रामीण इलाके में पहुंच गया. वह एक खेत में नजर भी आया जिसका वीडियो कुछ लोगों ने वायरल भी कर दिया. हालांकि कूनो के अमले ने 7 से 8 घण्टों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे पकड़ लिया और कूनो के जंगल मे वापस भेज कर राहत की सांस ली है. बता दें कि चीते को देखकर लोगों में काफी डर का माहौल हो गया था. DFO ने बताया कि नामिबिया से लाये गए 8 चीतों में से चार चीतों को खुले जंगल मे छोड़ा जा चुका है. खुले में छूट हुए चीते घूमते ही सामान्यतः जंगल से बाहर निकल आता है और कभी कभार नए इलाकों की ओर आने से ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच जाता है. जो आम बात है. फिलहाल नर चीता ओबान कूनो नेशनल पार्क में वापस लौट गया है. बता दें कि ग्रामीण इलाके में पहुंचने की सूचना मिलने पर वन अमला और चीता मित्र मौके पर पहुंच गए थे. कई घंटों से चीते को वापस जंगल की ओर भेजने की कोशिश अब की जा रही थी. जानकारी के मुताबिक कुनो नेशनल पार्क से 25 किलो मीटर दूर निकल गया था. बता दें कि विजयपुर के गोलीपुरा ओर झार बडौदा इलाके के खेत पर तफरीह करता चीता ओबान दिखाई दिया था. वन विभाग के मुताबिक ओबान की आखिरी लोकेशन बड़ौदा गांव मिली थी, एहतियात के तौर पर ग्रामीणों को जंगल की तरफ न जाने की नसीहत भी दी गई थी. ओबान के गले पर लगी कॉलर आईडी की मदद ली जा रही थी. अब लोगोनं ने राहत की सांस ली है. गौरतलब है कि पिछले साल सिंतबर के महीने में नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते बसाए गए है. हाल ही में एक मादा चीता साशा की किडनी संक्रमण से मौत हो चुकी है. जबकि एक मादा सयाया ने बीते दिनों ही 4 नन्हें शावकों को जन्म दिया है. वहीं इस साल 18 फरवरी को साउथ अफ्रीका से 12 नए चीते भी आए है. अब सभी चीतों को नया घर रास तो आ रहा है लेकिन वन विभाग की मुश्किलें भी बढ़ने लगी है.
मध्यप्रदेश में बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने की खबर आम हो चुकी हैं. ऐसे में अब कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक नर चीता ओबान रविवार को ग्रामीण इलाके में पहुंच गया. श्योपुरः मध्यप्रदेश में बाघों को रिहायशी इलाकों में जाने की खबर आम हो चुकी हैं. ऐसे में अब कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक नर चीता ओबान रविवार को ग्रामीण इलाके में पहुंच गया. वह एक खेत में नजर भी आया जिसका वीडियो कुछ लोगों ने वायरल भी कर दिया. हालांकि कूनो के अमले ने सात से आठ घण्टों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे पकड़ लिया और कूनो के जंगल मे वापस भेज कर राहत की सांस ली है. बता दें कि चीते को देखकर लोगों में काफी डर का माहौल हो गया था. DFO ने बताया कि नामिबिया से लाये गए आठ चीतों में से चार चीतों को खुले जंगल मे छोड़ा जा चुका है. खुले में छूट हुए चीते घूमते ही सामान्यतः जंगल से बाहर निकल आता है और कभी कभार नए इलाकों की ओर आने से ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच जाता है. जो आम बात है. फिलहाल नर चीता ओबान कूनो नेशनल पार्क में वापस लौट गया है. बता दें कि ग्रामीण इलाके में पहुंचने की सूचना मिलने पर वन अमला और चीता मित्र मौके पर पहुंच गए थे. कई घंटों से चीते को वापस जंगल की ओर भेजने की कोशिश अब की जा रही थी. जानकारी के मुताबिक कुनो नेशनल पार्क से पच्चीस किलो मीटर दूर निकल गया था. बता दें कि विजयपुर के गोलीपुरा ओर झार बडौदा इलाके के खेत पर तफरीह करता चीता ओबान दिखाई दिया था. वन विभाग के मुताबिक ओबान की आखिरी लोकेशन बड़ौदा गांव मिली थी, एहतियात के तौर पर ग्रामीणों को जंगल की तरफ न जाने की नसीहत भी दी गई थी. ओबान के गले पर लगी कॉलर आईडी की मदद ली जा रही थी. अब लोगोनं ने राहत की सांस ली है. गौरतलब है कि पिछले साल सिंतबर के महीने में नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क में आठ चीते बसाए गए है. हाल ही में एक मादा चीता साशा की किडनी संक्रमण से मौत हो चुकी है. जबकि एक मादा सयाया ने बीते दिनों ही चार नन्हें शावकों को जन्म दिया है. वहीं इस साल अट्ठारह फरवरी को साउथ अफ्रीका से बारह नए चीते भी आए है. अब सभी चीतों को नया घर रास तो आ रहा है लेकिन वन विभाग की मुश्किलें भी बढ़ने लगी है.
डोली के बाद घोड़ी और फिर कार पर सवार होकर आने वाले दूल्हे राजा जब बुलेट से ससुराल पहुंचे तो सेल्फी लेने वालों की होड़ लग गई। यही नही, बुलेट राजा ने अपनी दुल्हन की विदाई भी इसी ढंग से कराई। वह बुलेट पर बिठाकर दुल्हन को अपने घर ले गए तो रास्ते भर लोग सेल्फी लेते रहे। गुरुवार को शादी के बाद शुक्रवार को अनूठे ढंग से से हुई इस विदाई की हर तरफ चर्चा रही। बताते हैं कि नोटबंदी से हुई मुश्किल के बाद दूल्हे के मामा ने यह प्लान बनाया था। हालांकि नई नवेली दुल्हन संग बिना हेलमेट बुलेट से चलने वाले दूल्हे पर ट्रैफिक पुलिस की नजर नहीं पड़ी वरना मुश्किल बढ़ सकती थी। राजघाट, लाल डिग्गी रोड निवासी रमेश चंद के बेटे गौरव रेती रोड पर साइकिल की दुकान चलाते हैं। उनकी शादी देवरिया की अंकिता से 17 नवंबर की रात हुई। शुक्रवार सुबह दुल्हन की विदाई हुई तो लोग आश्चर्यचकित रह गए। न कार, न ड्राइवर, दूल्हे राजा बुलेट लेकर दुल्हन को ले जाने के लिए दरवाजे पर खड़े हो गए। दुल्हन ने भी दूल्हे का साथ दिया और बेझिझक बुलेट पर बैठ गई। सजी- धजी दुल्हन जब दूल्हे संग बुलेट पर शहर की सड़कों से गुजरी तो रास्ते में लोग भी रुककर देखने लगे। शहर में घूमते हुए घर पहुंचे दूल्हा- दुल्हन के साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। घर पहुंचने पर अंकिता का जोरदार स्वागत किया गया। गौरव ने बताया कि नोटबंदी में पैसे की दिक्कत को लेकर मामा ने यह प्लान बनाया था। गौरव ने बताया कि नोटबंदी से समस्या तो है लेकिन वे खुश हैं कि इसके बाद भी बुलेट से विदाई से उनकी शादी यादगार हो गई।
डोली के बाद घोड़ी और फिर कार पर सवार होकर आने वाले दूल्हे राजा जब बुलेट से ससुराल पहुंचे तो सेल्फी लेने वालों की होड़ लग गई। यही नही, बुलेट राजा ने अपनी दुल्हन की विदाई भी इसी ढंग से कराई। वह बुलेट पर बिठाकर दुल्हन को अपने घर ले गए तो रास्ते भर लोग सेल्फी लेते रहे। गुरुवार को शादी के बाद शुक्रवार को अनूठे ढंग से से हुई इस विदाई की हर तरफ चर्चा रही। बताते हैं कि नोटबंदी से हुई मुश्किल के बाद दूल्हे के मामा ने यह प्लान बनाया था। हालांकि नई नवेली दुल्हन संग बिना हेलमेट बुलेट से चलने वाले दूल्हे पर ट्रैफिक पुलिस की नजर नहीं पड़ी वरना मुश्किल बढ़ सकती थी। राजघाट, लाल डिग्गी रोड निवासी रमेश चंद के बेटे गौरव रेती रोड पर साइकिल की दुकान चलाते हैं। उनकी शादी देवरिया की अंकिता से सत्रह नवंबर की रात हुई। शुक्रवार सुबह दुल्हन की विदाई हुई तो लोग आश्चर्यचकित रह गए। न कार, न ड्राइवर, दूल्हे राजा बुलेट लेकर दुल्हन को ले जाने के लिए दरवाजे पर खड़े हो गए। दुल्हन ने भी दूल्हे का साथ दिया और बेझिझक बुलेट पर बैठ गई। सजी- धजी दुल्हन जब दूल्हे संग बुलेट पर शहर की सड़कों से गुजरी तो रास्ते में लोग भी रुककर देखने लगे। शहर में घूमते हुए घर पहुंचे दूल्हा- दुल्हन के साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। घर पहुंचने पर अंकिता का जोरदार स्वागत किया गया। गौरव ने बताया कि नोटबंदी में पैसे की दिक्कत को लेकर मामा ने यह प्लान बनाया था। गौरव ने बताया कि नोटबंदी से समस्या तो है लेकिन वे खुश हैं कि इसके बाद भी बुलेट से विदाई से उनकी शादी यादगार हो गई।
जद तांई कोई भाषा बणावटी न होवं तद तांई ऊं मैं अनेकरूपता रैगी ई । बरगावटी भाषा में ई असी बात देखना में श्रावं छं क ऊर्मे लिंग, वचन, कारक, वाच्य, काल,. पुरुष आदि नै दरसावा वेई कोई प्रत्यय मान ल्या जावं छै भर फेर वांका जोड़ सू प्रातिपदिका अर धातुवां नं ई' लायक वणा दी जावं छेक वै वाक्य में प्रयोग हो सके। अर अभिव्यक्ति कर सकें । असी भाषावां मैं तो शब्द का पुल्लिंग रूपां ने ई मुख्य मान्या जाव छै अर स्त्रीलिंग सदा ई प्रत्यय की सायता सू बरगाया जावै छ । असी भाषावां को व्याकरण घर सरल होवै - तनू सरल क ई पत्रिका का एक पाना मैं ऊ छप सकै छै अर तनू निरपवाद के ऊंके बारं जा'र कसी भी रूप ने समझवा की जरूरत न होवैगो । असो भाषावां में एक भाषा जमेनहाफ द्वारा बनाई एसपेरंन्तो छं, जीमैं नरी सारी पोथ्यां भी. छपी छै, पण ज्या घणां प्रचार-प्रसार के बाद भी चलण मैं न श्राई पुस्तकालय की -पोथ्य सर दो-च्यार मनख्या की कार नै न उलांग सकी । ई में संदेह कोईन क एस. पेरन्तो संसार की सब सू वैज्ञानिक भाषा छे घर सब सू सरल भी । संस्कृत वेई भी या खी जावै छे क वा भी संसार की वैज्ञानिक भाषावां मैं सू एफ छै, पण सरल कोई नें । ई की वैज्ञानिकता एसपेरेन्तो को वैज्ञानिकता सूं न्याळो छै । एसपेरेंन्तो जस्यां प्रापरणां दस-पाँच नियमों में ब'घ' र निरपवाद छै वस्यों ई संस्कृत भी शपणां सैकड़ा-हजारां नियमों में बंध'र निरपवाद छ । एक नं पूरी तरै समझवा वेई पूरी अष्टाध्यायी की जाणकारी जरूरी छं तो दूजी नै समझवा बेई एक पानां भर भी नियमां की जारणकारी घणी छै । ईसु ई संस्कृत जटिल छे घर एंसपेरैन्तो सरल । भाषा को विकास जटिलता सू सरलता की आडी हो छु । जद कोई भाषा वर्णं छै तद ऊमैं एक सम्बन्ध नै दराबा वेई घरगो सारी युक्तियां चाल खंडे छे भर वांको जंगळ-सोक खड़ी हो जावै छे । श्रादमी ऊ सारा जंगळ को बोझो न ढो संकेँ । ई सू समय के साथ-साथ वा सु कम चला का रूपां ने छोड़तो जावं छै पर वांकी जगं दूसरा रूपां सू काम लेबा लाग जावं छै । ग्रस्यां रूप घटे छै र भाषा अनेकरूपता सु एक रूपता को श्राडो जावै र्छ । संस्कृत में अनेकरूपता छी; ज्या घट' र पाली, प्राकृत, अपभ्रंश पर हिंदी या राजस्थानी मैं घणी थोड़ी रंगो। यू देखो क अकेला 'राम' का रूप संस्कृत में १६ छा, 'पांच रूपं दो-दो जग काम प्राव छ; जे घटता-घटतां हिन्दी या राजस्थानी में तीन रैग्या । घर 'राम' सू न्याळा घणां सारा शब्द छा; ज्यांकी रूप भी 'राम' सू न्याळा छे । अब हिन्दी, राजस्थानी का शब्दां के तीन प्रत्यय लगाकर सगळा शब्दां ने वाक्यां में प्रयोग करया जा सर्फ छे । हां, परसगं वांको सायता जरूर करे घं, जे सगळा रूप के साथ समान रूप सू प्रयोग में प्रावे छ । ई अनेकरूपता सू एकरूपता की भाषा यात्रा में विधन तद पैदा होवं छै जद दूजी भाषा या बोलो का रूप ऊमें घुसपैठ कर जायें घं। तद फेर रूप का झाड़-झखाड़ ऊंका सूदा गेला में रुप जावं घं। ऊं बगत प्रसी लागबा लार्ग चं जाही झापण पाछा वावड़ग्या होवां । पण यो बावड़ी फ़ोईनं, मार्ग चालबोई छ । न सू घवड़ाबा को जरूरत छं, न ज्यादा सोचबा-चच्यारवा को । समय के साथ पस्यां दन चली ग्या, ग्रस्या ये दन भी चल्या जावेगा। रूप का जगळ में सू फेर बाग को सरूप वण जावेगो, प्रापू-प्राप फटाई-छंटाई हो जायेंगो पर प्राकृतिक नियम के अनुसार योग्य म रूप वच जावंगा । राजस्थानी की अनेकरूपता को कारण दूजो घं। जी राजस्थानी में पार सृजन प्रतीत में शेयो भर काल ताई होतो रघो कर्मे अनेक कारणांसू ऊ सूजन बीच में जर्मा-जर्मा वंद-सो होग्यो । या दसा दस-बीस साल घाली । पर जद फेर प्रान्तीय भाषावा में लिखबा को माहौल देस में वण्यो तद राजस्थानी का परपरागत रूप मूं न जुड़ र झापणी प्रापणी बोलियां में लिखवा को चातो यहां होग्यो । ई सूं राजस्थानी बोलियां में रूप-रचना को जे प्रक्रियावां चाल से छे व लेमन में प्रागो। राजस्थानी के नाम पै ज्यो लेखन प्राजकास हो रयो छं ऊंको अनेकरूपता को यो ई कारण छ । सवाल पैदा होवं छं क राजस्थानी को या अनेकरूपता एकरूपता लेंगो काँई ? भाषा- विकास को नियम तो यो ई ६ क समय के साथ कम चलखहाला रू खुद ई मट जावैगा अर ज्यादा चलण हाळा रूप ₹' जावंगा । पण यो काम दस-पाच वरसां को कोईनँ भर न पांच-पचासवरसों को । यो तो सो-पचास बरसां में ईमान प्राप हो जावंगो । ६' बोचं जे समरथ लेखक मावेगा वांको भाषा दूजा लेनका ने पाकषित करेंगी घर छोटा-मोटा लेखक वाँका गेला पे चालबा लाग जायेगा । पंण आाज को श्रादमी सगळी बातां प्रकृति पै न छोड़बो घावं; ऊ तो निया मक वण' र ऊर्प फावू करबो छावं छ । प्रस्यांई माया कोई अनेकरूपता नं एकरूपता की श्राडो ले जाबा वेई गुजरातो की नई राजस्थानी में भी गांधी जो की जरूरत छं । राजस्थानी में कोई गाँधी जनमें मर वांका संकेत पं वर्तनी, रूप पादि में मानकता थरप दी जावे । एक दूजी युषित या हो सकै छ क राजस्थानी का लेखक अतीत का गद्य-पत्र की रूप प्रक्रिया सू जुड़े, घर ऊंई मादर्श मान र लिखे । अतीत की राजस्थानी में जा रुपता छो ऊने स्वीकारवा में कोई ने भापत्ति न होवंगी । हाँ; ई बगत जे लिख रया घं वनिं प्राचीन साहित्य पढ़ जरूर पहुँगो भर कसै जुड़बा को श्रम झेलणो पड़ेगो । - कन्हैयालाल शर्मा
जद तांई कोई भाषा बणावटी न होवं तद तांई ऊं मैं अनेकरूपता रैगी ई । बरगावटी भाषा में ई असी बात देखना में श्रावं छं क ऊर्मे लिंग, वचन, कारक, वाच्य, काल,. पुरुष आदि नै दरसावा वेई कोई प्रत्यय मान ल्या जावं छै भर फेर वांका जोड़ सू प्रातिपदिका अर धातुवां नं ई' लायक वणा दी जावं छेक वै वाक्य में प्रयोग हो सके। अर अभिव्यक्ति कर सकें । असी भाषावां मैं तो शब्द का पुल्लिंग रूपां ने ई मुख्य मान्या जाव छै अर स्त्रीलिंग सदा ई प्रत्यय की सायता सू बरगाया जावै छ । असी भाषावां को व्याकरण घर सरल होवै - तनू सरल क ई पत्रिका का एक पाना मैं ऊ छप सकै छै अर तनू निरपवाद के ऊंके बारं जा'र कसी भी रूप ने समझवा की जरूरत न होवैगो । असो भाषावां में एक भाषा जमेनहाफ द्वारा बनाई एसपेरंन्तो छं, जीमैं नरी सारी पोथ्यां भी. छपी छै, पण ज्या घणां प्रचार-प्रसार के बाद भी चलण मैं न श्राई पुस्तकालय की -पोथ्य सर दो-च्यार मनख्या की कार नै न उलांग सकी । ई में संदेह कोईन क एस. पेरन्तो संसार की सब सू वैज्ञानिक भाषा छे घर सब सू सरल भी । संस्कृत वेई भी या खी जावै छे क वा भी संसार की वैज्ञानिक भाषावां मैं सू एफ छै, पण सरल कोई नें । ई की वैज्ञानिकता एसपेरेन्तो को वैज्ञानिकता सूं न्याळो छै । एसपेरेंन्तो जस्यां प्रापरणां दस-पाँच नियमों में ब'घ' र निरपवाद छै वस्यों ई संस्कृत भी शपणां सैकड़ा-हजारां नियमों में बंध'र निरपवाद छ । एक नं पूरी तरै समझवा वेई पूरी अष्टाध्यायी की जाणकारी जरूरी छं तो दूजी नै समझवा बेई एक पानां भर भी नियमां की जारणकारी घणी छै । ईसु ई संस्कृत जटिल छे घर एंसपेरैन्तो सरल । भाषा को विकास जटिलता सू सरलता की आडी हो छु । जद कोई भाषा वर्णं छै तद ऊमैं एक सम्बन्ध नै दराबा वेई घरगो सारी युक्तियां चाल खंडे छे भर वांको जंगळ-सोक खड़ी हो जावै छे । श्रादमी ऊ सारा जंगळ को बोझो न ढो संकेँ । ई सू समय के साथ-साथ वा सु कम चला का रूपां ने छोड़तो जावं छै पर वांकी जगं दूसरा रूपां सू काम लेबा लाग जावं छै । ग्रस्यां रूप घटे छै र भाषा अनेकरूपता सु एक रूपता को श्राडो जावै र्छ । संस्कृत में अनेकरूपता छी; ज्या घट' र पाली, प्राकृत, अपभ्रंश पर हिंदी या राजस्थानी मैं घणी थोड़ी रंगो। यू देखो क अकेला 'राम' का रूप संस्कृत में सोलह छा, 'पांच रूपं दो-दो जग काम प्राव छ; जे घटता-घटतां हिन्दी या राजस्थानी में तीन रैग्या । घर 'राम' सू न्याळा घणां सारा शब्द छा; ज्यांकी रूप भी 'राम' सू न्याळा छे । अब हिन्दी, राजस्थानी का शब्दां के तीन प्रत्यय लगाकर सगळा शब्दां ने वाक्यां में प्रयोग करया जा सर्फ छे । हां, परसगं वांको सायता जरूर करे घं, जे सगळा रूप के साथ समान रूप सू प्रयोग में प्रावे छ । ई अनेकरूपता सू एकरूपता की भाषा यात्रा में विधन तद पैदा होवं छै जद दूजी भाषा या बोलो का रूप ऊमें घुसपैठ कर जायें घं। तद फेर रूप का झाड़-झखाड़ ऊंका सूदा गेला में रुप जावं घं। ऊं बगत प्रसी लागबा लार्ग चं जाही झापण पाछा वावड़ग्या होवां । पण यो बावड़ी फ़ोईनं, मार्ग चालबोई छ । न सू घवड़ाबा को जरूरत छं, न ज्यादा सोचबा-चच्यारवा को । समय के साथ पस्यां दन चली ग्या, ग्रस्या ये दन भी चल्या जावेगा। रूप का जगळ में सू फेर बाग को सरूप वण जावेगो, प्रापू-प्राप फटाई-छंटाई हो जायेंगो पर प्राकृतिक नियम के अनुसार योग्य म रूप वच जावंगा । राजस्थानी की अनेकरूपता को कारण दूजो घं। जी राजस्थानी में पार सृजन प्रतीत में शेयो भर काल ताई होतो रघो कर्मे अनेक कारणांसू ऊ सूजन बीच में जर्मा-जर्मा वंद-सो होग्यो । या दसा दस-बीस साल घाली । पर जद फेर प्रान्तीय भाषावा में लिखबा को माहौल देस में वण्यो तद राजस्थानी का परपरागत रूप मूं न जुड़ र झापणी प्रापणी बोलियां में लिखवा को चातो यहां होग्यो । ई सूं राजस्थानी बोलियां में रूप-रचना को जे प्रक्रियावां चाल से छे व लेमन में प्रागो। राजस्थानी के नाम पै ज्यो लेखन प्राजकास हो रयो छं ऊंको अनेकरूपता को यो ई कारण छ । सवाल पैदा होवं छं क राजस्थानी को या अनेकरूपता एकरूपता लेंगो काँई ? भाषा- विकास को नियम तो यो ई छः क समय के साथ कम चलखहाला रू खुद ई मट जावैगा अर ज्यादा चलण हाळा रूप ₹' जावंगा । पण यो काम दस-पाच वरसां को कोईनँ भर न पांच-पचासवरसों को । यो तो सो-पचास बरसां में ईमान प्राप हो जावंगो । छः' बोचं जे समरथ लेखक मावेगा वांको भाषा दूजा लेनका ने पाकषित करेंगी घर छोटा-मोटा लेखक वाँका गेला पे चालबा लाग जायेगा । पंण आाज को श्रादमी सगळी बातां प्रकृति पै न छोड़बो घावं; ऊ तो निया मक वण' र ऊर्प फावू करबो छावं छ । प्रस्यांई माया कोई अनेकरूपता नं एकरूपता की श्राडो ले जाबा वेई गुजरातो की नई राजस्थानी में भी गांधी जो की जरूरत छं । राजस्थानी में कोई गाँधी जनमें मर वांका संकेत पं वर्तनी, रूप पादि में मानकता थरप दी जावे । एक दूजी युषित या हो सकै छ क राजस्थानी का लेखक अतीत का गद्य-पत्र की रूप प्रक्रिया सू जुड़े, घर ऊंई मादर्श मान र लिखे । अतीत की राजस्थानी में जा रुपता छो ऊने स्वीकारवा में कोई ने भापत्ति न होवंगी । हाँ; ई बगत जे लिख रया घं वनिं प्राचीन साहित्य पढ़ जरूर पहुँगो भर कसै जुड़बा को श्रम झेलणो पड़ेगो । - कन्हैयालाल शर्मा
न्यूज डेस्कः नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को SBI अच्छा मौका दे रहा हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक में अफसर बन सकते हैं। इसके लिए SBI ने आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन भी जारी किया हैं। इसलिए मौका हाथ से जानें ना दें। आवेदन की तिथि। SBI द्वारा जारी सूचना के मुताबिक आप 13 जुलाई 2020 तक ऑनलाइन के द्वारा आवेदन कर सकते हैं। इसलिए आप जल्दी करें। योग्यता : SBI के इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार निर्धारित की गई हैं। इसकी जानकारी आप नोटिफिकेशन से प्राप्त करें। आयु सीमाः चयन प्रक्रियाः मिली जानकारी के मुताबिक इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन शॉटलिस्ट और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। आवेदन करने के लिए वेबसाइट लिंक :
न्यूज डेस्कः नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को SBI अच्छा मौका दे रहा हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक में अफसर बन सकते हैं। इसके लिए SBI ने आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन भी जारी किया हैं। इसलिए मौका हाथ से जानें ना दें। आवेदन की तिथि। SBI द्वारा जारी सूचना के मुताबिक आप तेरह जुलाई दो हज़ार बीस तक ऑनलाइन के द्वारा आवेदन कर सकते हैं। इसलिए आप जल्दी करें। योग्यता : SBI के इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार निर्धारित की गई हैं। इसकी जानकारी आप नोटिफिकेशन से प्राप्त करें। आयु सीमाः चयन प्रक्रियाः मिली जानकारी के मुताबिक इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन शॉटलिस्ट और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। आवेदन करने के लिए वेबसाइट लिंक :
उत्तराखंड में बारिश ने कहर मचा रखा है। इस आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। राज्य में बाढ़ और भूस्खलन का कहर लगातार जारी है। राज्य सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि लगातार हो रही बारिश के कारण चार लोग अब भी लापता हैं। एएनआई रिपोर्ट के अनुसार, 17 से 19 अक्टूबर के बीच आये इस कहर के कारण 26 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन से राज्य में कई जगहों पर मकान ढह गए हैं, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान हुआ है। इन हादसों में अब तक कुल 224 घर इसकी चपेट में आये हैं। वहीं बारिश से प्रभावित उत्तराखंड में अन्य राज्यों के कई लोगों के फंसे होने की खबर है। इससे पहले शुक्रवार को, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) के लिए अक्टूबर 2021 के महीने के लिए अपना वेतन देने का निर्णय लिया था। उन्होंने ट्वीट करके इसकी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, "राज्य में आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए मैंने माह अक्टूबर, 2021 का अपना वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने , "इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दे दिए थे।" दूसरी ओर, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के अलग-अलग हिस्सों में सर्च और बचाव अभियान जारी है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने राज्य भर में मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंसे कुल 60 लोगों को सुरक्षित निकला है। एसडीआरएफ की टीम ने बागेश्वर क्षेत्र से पांच शव भी बरामद किए हैं। एसडीआरएफ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सुंदरधुंगा ग्लेशियर क्षेत्र से चार लोगों को पहले ही बचाया जा चुका है, जबकि एक लापता है। 17 अक्टूबर से एसडीआरएफ ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बचाव अभियान शुरू किया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी राज्य में सड़कों, घरों और नदियों में बाढ़ आ गई है, जिससे लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। उत्तराखंड राज्य में बाढ़ और बारिश के कारण गंभीर स्थिति बनी हुई है। कई क्षेत्रों में सर्च अभियान अभी भी जारी है। 19 अक्टूबर को, उत्तराखंड ने बाढ़ से संबंधित मौतों में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की। नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी क्षेत्र, चंपावत, उधम सिंह नगर और बागेश्वर में बाढ़ से 50 से ज्यादा घर तबाह हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी देहरादून पहुंचे थे, जहां उन्होंने राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था।
उत्तराखंड में बारिश ने कहर मचा रखा है। इस आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर बहत्तर हो गई है। राज्य में बाढ़ और भूस्खलन का कहर लगातार जारी है। राज्य सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि लगातार हो रही बारिश के कारण चार लोग अब भी लापता हैं। एएनआई रिपोर्ट के अनुसार, सत्रह से उन्नीस अक्टूबर के बीच आये इस कहर के कारण छब्बीस लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन से राज्य में कई जगहों पर मकान ढह गए हैं, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान हुआ है। इन हादसों में अब तक कुल दो सौ चौबीस घर इसकी चपेट में आये हैं। वहीं बारिश से प्रभावित उत्तराखंड में अन्य राज्यों के कई लोगों के फंसे होने की खबर है। इससे पहले शुक्रवार को, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस के महीने के लिए अपना वेतन देने का निर्णय लिया था। उन्होंने ट्वीट करके इसकी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, "राज्य में आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए मैंने माह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस का अपना वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने , "इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दे दिए थे।" दूसरी ओर, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के अलग-अलग हिस्सों में सर्च और बचाव अभियान जारी है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने राज्य भर में मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंसे कुल साठ लोगों को सुरक्षित निकला है। एसडीआरएफ की टीम ने बागेश्वर क्षेत्र से पांच शव भी बरामद किए हैं। एसडीआरएफ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सुंदरधुंगा ग्लेशियर क्षेत्र से चार लोगों को पहले ही बचाया जा चुका है, जबकि एक लापता है। सत्रह अक्टूबर से एसडीआरएफ ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में बचाव अभियान शुरू किया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी राज्य में सड़कों, घरों और नदियों में बाढ़ आ गई है, जिससे लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। उत्तराखंड राज्य में बाढ़ और बारिश के कारण गंभीर स्थिति बनी हुई है। कई क्षेत्रों में सर्च अभियान अभी भी जारी है। उन्नीस अक्टूबर को, उत्तराखंड ने बाढ़ से संबंधित मौतों में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की। नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी क्षेत्र, चंपावत, उधम सिंह नगर और बागेश्वर में बाढ़ से पचास से ज्यादा घर तबाह हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी देहरादून पहुंचे थे, जहां उन्होंने राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था।
साउथ सिनेमा से एक और दुखी करने वाली खबर सामने आई है। तमिल इंडस्ट्री के मशहूर कॉमेडियन वादीवेल बालाजी का निधन हो गया है। वादीवेल पिछले करीब 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, जिसके बाद आज (गुरुवार) को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। महज 45 की उम्र में गुजरे वादीवेल के निधन से फैंस के साथ ही साथ सितारे भी शोक में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वादीवेल को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां वो पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर भी थे। वहीं दिल का दौरा पड़ने के बाद से ही वादीवेल को पैरालिसिस भी हो गया था। बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते बाद में उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। ऐसे में गुरुवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया। बता दें कि वादीवेल ने Adhu Idhu Edhu और Kalakka Povathu Yaaru शोज से दर्शकों का दिल जीता था। वहीं वो तमिल सिनेमा में भी अभिनय का दमखम दिखा चुके थे। वादीवेल आखिरी बार नयनतारा की हिट फिल्म Kolamaavu Kokila में काम करते नजर आए थे। ऐसा कहा जा रहा है कि लॉकडाउन में उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, जिसके चलते वो काफी समस्याओं से जूझ रहे थे। सोशल मीडिया पर फैंस और सितारे अभिनेता की तस्वीरें और वीडियोज साझा करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
साउथ सिनेमा से एक और दुखी करने वाली खबर सामने आई है। तमिल इंडस्ट्री के मशहूर कॉमेडियन वादीवेल बालाजी का निधन हो गया है। वादीवेल पिछले करीब पंद्रह दिनों से अस्पताल में भर्ती थे, जिसके बाद आज को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। महज पैंतालीस की उम्र में गुजरे वादीवेल के निधन से फैंस के साथ ही साथ सितारे भी शोक में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वादीवेल को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां वो पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर भी थे। वहीं दिल का दौरा पड़ने के बाद से ही वादीवेल को पैरालिसिस भी हो गया था। बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते बाद में उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। ऐसे में गुरुवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया। बता दें कि वादीवेल ने Adhu Idhu Edhu और Kalakka Povathu Yaaru शोज से दर्शकों का दिल जीता था। वहीं वो तमिल सिनेमा में भी अभिनय का दमखम दिखा चुके थे। वादीवेल आखिरी बार नयनतारा की हिट फिल्म Kolamaavu Kokila में काम करते नजर आए थे। ऐसा कहा जा रहा है कि लॉकडाउन में उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, जिसके चलते वो काफी समस्याओं से जूझ रहे थे। सोशल मीडिया पर फैंस और सितारे अभिनेता की तस्वीरें और वीडियोज साझा करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
वर्तमान हैं तो यह नहीं कहा जा सकता कि योजनाएँ तथा रूप ही निर्माता है । यह ससार परमात्माके मस्तिष्कमे वर्तमान था । विना सोचे समझे इसकी सृष्टि नहीं हुई है। परमात्माका ज्ञान और परमात्माकी सत्ता दोनों ही अनादि है । अतएव 'हमावुस्त के सिद्धान्तको विश्वात्मवाद ( Pantheism ) समझना ठीक नहीं । इसी चीजको और भी स्पष्ट करते हुऐ खाजा खाने कहा है कि परमात्मा अपने ही ज्ञानके आलोक मे प्रकट होता है। जिस प्रकारसे एक अधेरे अजायबघरमे गैसकी रोशनी जला दी जाय तो उस अजायबघरकी प्रत्येक वस्तु एक साथ ही आल्गेकित हो उठती है उसी तरहसे जब सत्ता ज्ञानसे आलोकित हो उठी तो यह ससार धीरे-धीरे विकसित होता हुआ दृश्यमान हुआ । इस ज्ञान के अभावको उस सत्ता की कमी नहीं कहा जा सकता बल्कि एक तरह से वह ( जान ) अपने आपमे ही जज्न हुआ रहता है और कुछ भी दृष्टिगोचर नहीं होता और जब वही अपनेते अपनेको स्वतन्त्र कर देता है तब उसके गुण प्रकट होते है'। अरबीने कहा है - अना अना वा अन्ता अन्ता ( मै, मैं ही हूँ और तू, तू ही है ) । वह अभिव्यक्त होता है लेकिन वही पदार्थोंकी जात ( सत्ता ) नहीं है । वह शै ( पदार्थ ) नहीं है, वह वही है । इन्सानुल कामिलके प्रणेता शेख करीमे जीली शुहूदिया शाखाके प्रवर्त्तक थे। जीलीका जन्म सन् १३६५-६६ ई० मे हुआ था और मृत्यु सन् १४०६ ई० से सन् १४१७ ई० के बीच किसी समय हुई थी । यह दूसरी प्रमुख शाखा है जिसने परमात्माके सम्बन्धमे अपने मत प्रकट किये है । ये वहदतुश शुहूदके सिद्धान्तको मानते है । इनका कहना है कि परमात्माका है स्वरूप ( जात ) इतना महान् है कि उसके सामने सृष्टिके अन्य पदार्थ नहीं - के बराबर है। उनके मतानुसार यह जात ( स्वरूप ) ही दृश्यमान है और सिफत ( गुण ) बराबर अव्यक्त रहती है जैसे उपकारीमें छिपे हुए उपकार
वर्तमान हैं तो यह नहीं कहा जा सकता कि योजनाएँ तथा रूप ही निर्माता है । यह ससार परमात्माके मस्तिष्कमे वर्तमान था । विना सोचे समझे इसकी सृष्टि नहीं हुई है। परमात्माका ज्ञान और परमात्माकी सत्ता दोनों ही अनादि है । अतएव 'हमावुस्त के सिद्धान्तको विश्वात्मवाद समझना ठीक नहीं । इसी चीजको और भी स्पष्ट करते हुऐ खाजा खाने कहा है कि परमात्मा अपने ही ज्ञानके आलोक मे प्रकट होता है। जिस प्रकारसे एक अधेरे अजायबघरमे गैसकी रोशनी जला दी जाय तो उस अजायबघरकी प्रत्येक वस्तु एक साथ ही आल्गेकित हो उठती है उसी तरहसे जब सत्ता ज्ञानसे आलोकित हो उठी तो यह ससार धीरे-धीरे विकसित होता हुआ दृश्यमान हुआ । इस ज्ञान के अभावको उस सत्ता की कमी नहीं कहा जा सकता बल्कि एक तरह से वह अपने आपमे ही जज्न हुआ रहता है और कुछ भी दृष्टिगोचर नहीं होता और जब वही अपनेते अपनेको स्वतन्त्र कर देता है तब उसके गुण प्रकट होते है'। अरबीने कहा है - अना अना वा अन्ता अन्ता । वह अभिव्यक्त होता है लेकिन वही पदार्थोंकी जात नहीं है । वह शै नहीं है, वह वही है । इन्सानुल कामिलके प्रणेता शेख करीमे जीली शुहूदिया शाखाके प्रवर्त्तक थे। जीलीका जन्म सन् एक हज़ार तीन सौ पैंसठ-छयासठ ईशून्य मे हुआ था और मृत्यु सन् एक हज़ार चार सौ छः ईशून्य से सन् एक हज़ार चार सौ सत्रह ईशून्य के बीच किसी समय हुई थी । यह दूसरी प्रमुख शाखा है जिसने परमात्माके सम्बन्धमे अपने मत प्रकट किये है । ये वहदतुश शुहूदके सिद्धान्तको मानते है । इनका कहना है कि परमात्माका है स्वरूप इतना महान् है कि उसके सामने सृष्टिके अन्य पदार्थ नहीं - के बराबर है। उनके मतानुसार यह जात ही दृश्यमान है और सिफत बराबर अव्यक्त रहती है जैसे उपकारीमें छिपे हुए उपकार
मौत से पहले अनिसिया के ये मैसेज, लोगों को नही सोने दे रहा है चैन की नींद. . सेक्स को लेकर इन 10 सितारों की राय जानकर, अच्छे-अच्छो के उड़ जाएगे होश! ! लड़का हो या लड़की, कान छिदवाने से होते है इतने बड़े फायदे, सुनकर यकीन नही कर पाएंगे! !
मौत से पहले अनिसिया के ये मैसेज, लोगों को नही सोने दे रहा है चैन की नींद. . सेक्स को लेकर इन दस सितारों की राय जानकर, अच्छे-अच्छो के उड़ जाएगे होश! ! लड़का हो या लड़की, कान छिदवाने से होते है इतने बड़े फायदे, सुनकर यकीन नही कर पाएंगे! !
आगराः जगदीशपुरा क्षेत्र में ग्यारहवीं की छात्रा को 'लव जेहाद' में फंसाकर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इसके लिए तीन बच्चों के पिता ने अपना नाम बदलकर छात्रा को दोस्ती के जाल में फांसा। चार दिन पूर्व रास्ते से अगवा कर फीरोजाबाद ले गया। वहां अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म किया। चंगुल से निकलकर भागी छात्रा ने मंगलवार शाम परिजनों के साथ थाने पहुंचकर पुलिस को मामले की जानकारी दी। जगदीशपुरा के किशोरपुरा क्षेत्र की रहने वाली १६ वर्षीय रीना (बदला नाम) ११वीं की छात्रा है। रीना के परिजनों के मुताबिक, तीन महीने पूर्व मुसलमान युवक ने राहुल बनकर उसे अपने जाल में फांस लिया। फीरोजाबाद का रहने वाला युवक उनकी बेटी से फोन पर बातचीत करने लगा। इस दौरान उसने अपना मजहब छिपाए रखा। पुत्री रीना १६ जनवरी को स्कूल गई थी, रास्ते से युवक ने अगवा कर लिया। उसे कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद फीरोजाबाद में किसी जगह एक मकान में रखकर अपने दो दोस्तों के साथ सामूहिक दुष्कर्म करता रहा। वहां रीना को उसके गैर मजहब व तीन बच्चों का पिता होने का पता चला। इस पर भागने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान युवक की पत्नी को हरकत का पता चला तो हंगामा कर दिया। एक दिन वहां पहुंचकर युवक के साथ मारपीट करके पुलिस को सूचना देने की धमकी दी। इस पर युवक व उसके साथी उसे छोड़कर भाग गए। उनके चंगुल से मुक्त होने के बाद वह फीरोजाबाद बस स्टैंड पहुंची। यहां एक वृद्धा को आपबीती सुनाई, वृद्धा ने दो अन्य लोगों का सहयोग लेकर किशोरी को आगरा भेजा। सोमवार को घर पहुंचकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। परिजन मंगलवार शाम छात्रा को लेकर थाने पहुंचे। छात्रा की तहरीर के बाद पुलिस हरकत में आ गई। एएसपी शैलेश कुमार पांडे के मुताबिक घटना छात्रा से मिली जानकारी के आधार पर जांच के लिए टीम को फीरोजाबाद भेजा गया है।
आगराः जगदीशपुरा क्षेत्र में ग्यारहवीं की छात्रा को 'लव जेहाद' में फंसाकर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इसके लिए तीन बच्चों के पिता ने अपना नाम बदलकर छात्रा को दोस्ती के जाल में फांसा। चार दिन पूर्व रास्ते से अगवा कर फीरोजाबाद ले गया। वहां अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म किया। चंगुल से निकलकर भागी छात्रा ने मंगलवार शाम परिजनों के साथ थाने पहुंचकर पुलिस को मामले की जानकारी दी। जगदीशपुरा के किशोरपुरा क्षेत्र की रहने वाली सोलह वर्षीय रीना ग्यारहवीं की छात्रा है। रीना के परिजनों के मुताबिक, तीन महीने पूर्व मुसलमान युवक ने राहुल बनकर उसे अपने जाल में फांस लिया। फीरोजाबाद का रहने वाला युवक उनकी बेटी से फोन पर बातचीत करने लगा। इस दौरान उसने अपना मजहब छिपाए रखा। पुत्री रीना सोलह जनवरी को स्कूल गई थी, रास्ते से युवक ने अगवा कर लिया। उसे कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद फीरोजाबाद में किसी जगह एक मकान में रखकर अपने दो दोस्तों के साथ सामूहिक दुष्कर्म करता रहा। वहां रीना को उसके गैर मजहब व तीन बच्चों का पिता होने का पता चला। इस पर भागने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान युवक की पत्नी को हरकत का पता चला तो हंगामा कर दिया। एक दिन वहां पहुंचकर युवक के साथ मारपीट करके पुलिस को सूचना देने की धमकी दी। इस पर युवक व उसके साथी उसे छोड़कर भाग गए। उनके चंगुल से मुक्त होने के बाद वह फीरोजाबाद बस स्टैंड पहुंची। यहां एक वृद्धा को आपबीती सुनाई, वृद्धा ने दो अन्य लोगों का सहयोग लेकर किशोरी को आगरा भेजा। सोमवार को घर पहुंचकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। परिजन मंगलवार शाम छात्रा को लेकर थाने पहुंचे। छात्रा की तहरीर के बाद पुलिस हरकत में आ गई। एएसपी शैलेश कुमार पांडे के मुताबिक घटना छात्रा से मिली जानकारी के आधार पर जांच के लिए टीम को फीरोजाबाद भेजा गया है।
बिहारः- बिहार में भाजपा की 11 जीती सीटों का सेहरा झारखंड भाजपा के माथे बंधा है. ये सीटें बिहपुर, कहलगांव, पीरपैंती, वजीरगंज, वारसलीगंज, मुंगेर, बांका, कटोरिया, जमुई और लखीसराय हैं. झारखंड की सीमावर्ती इन 11 सीटों पर चुनाव प्रबंधन की जिम्मेवारी केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड भाजपा को सौंपी थी. झारखंड के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल के नेतृत्व में प्रदेश के दौ सौ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगभग दो महीने इन सीटों पर कैंप किया. झारखंड भाजपा के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास ने भी अलग-अलग सीटों पर लगातार दौरा किया. केंद्रीय नेतृत्व की ओर से झारखंड भाजपा को बिहार की 19 सीटों पर जीत की रणनीति तैयार करने की जिम्मेवारी दी गई थी. भाजपा इनमें से आठ सीटें हार गईं. ये भागलपुर, गुरुआ, बोधगया, हिसुआ, रजौली, औरंगाबाद, गोह और अरवल हैं. फिर भी जीती गई सीटों का प्रतिशत अच्छा रहने के कारण केंद्रीय नेतृत्व नें झारखंड भाजपा को वाहवाही दी है. इन सीटों पर सामाजिक संतुलन साधने से लेकर स्थानीय चुनावी प्रबंधन और प्रभावकारी तत्वों के पहचान का जिम्मा झारखंड भाजपा को दिया गया था. किसी खास सामाजिक समीकरण वाले समर्थकों के नाराज होने की स्थिति में झारखंड के किसी वरिष्ठ नेता को बुलाकर उन्हें बिहार में समझाइश देने का टास्क सौंपा गया.
बिहारः- बिहार में भाजपा की ग्यारह जीती सीटों का सेहरा झारखंड भाजपा के माथे बंधा है. ये सीटें बिहपुर, कहलगांव, पीरपैंती, वजीरगंज, वारसलीगंज, मुंगेर, बांका, कटोरिया, जमुई और लखीसराय हैं. झारखंड की सीमावर्ती इन ग्यारह सीटों पर चुनाव प्रबंधन की जिम्मेवारी केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड भाजपा को सौंपी थी. झारखंड के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल के नेतृत्व में प्रदेश के दौ सौ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगभग दो महीने इन सीटों पर कैंप किया. झारखंड भाजपा के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास ने भी अलग-अलग सीटों पर लगातार दौरा किया. केंद्रीय नेतृत्व की ओर से झारखंड भाजपा को बिहार की उन्नीस सीटों पर जीत की रणनीति तैयार करने की जिम्मेवारी दी गई थी. भाजपा इनमें से आठ सीटें हार गईं. ये भागलपुर, गुरुआ, बोधगया, हिसुआ, रजौली, औरंगाबाद, गोह और अरवल हैं. फिर भी जीती गई सीटों का प्रतिशत अच्छा रहने के कारण केंद्रीय नेतृत्व नें झारखंड भाजपा को वाहवाही दी है. इन सीटों पर सामाजिक संतुलन साधने से लेकर स्थानीय चुनावी प्रबंधन और प्रभावकारी तत्वों के पहचान का जिम्मा झारखंड भाजपा को दिया गया था. किसी खास सामाजिक समीकरण वाले समर्थकों के नाराज होने की स्थिति में झारखंड के किसी वरिष्ठ नेता को बुलाकर उन्हें बिहार में समझाइश देने का टास्क सौंपा गया.
बॉलीवुड में नौकर बनकर सुपरहिट होने वाले लक्ष्मीकांत बेर्डे का जन्म आज ही के दिन हुआ था। बहुत कम उम्र में लक्ष्मीकांत बेर्डे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन लोग उन्हें भुला नहीं पाए। लक्ष्मीकांत बेर्डे ने अपने करियर में कई मराठी और बॉलीवुड फिल्मों में काम किया और वह सुपरहिट भी हुआ। लक्ष्मीकांत बेर्डे 90 के दशक की हर फिल्म में जरुरी बन गए थे और उन्हें आपने हर दूसरी फिल्म में देखा होगा। लक्ष्मीकांत बेर्डे मराठी सिनेमा का जाना-माना नाम था और जब उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली तो अपनी एंक्टिंग से सभी को दीवाना बना डाला। लक्ष्मीकांत बेर्डे ने कभी हीरो के दोस्त बनकर, कभी बड़े से बंगले के नौकर तो कभी माली बनकर हर किरदार से लोगों का दिल जीता। बहुत कम लोग जानते हैं लक्ष्मीकांत बेर्डे की पहली हिंदी फिल्म मैंने प्यार किया थी। इस फिल्म में वो सलमान खान के दोस्त के तौर पर दिखे थे और इन दोनों की जोड़ी को इतना पसंद किया गया कि उन्हें कई फिल्मों में सलमान के साथ कास्ट किया गया था। हम आपके हैं कौन, साजन में भी वो सलमान के साथ दिखे। इसी के साथ वह हम तुम्हारे हैं सनम, प्यार दीवाना होता है, बेटी नंबर 1, आरजू, राजाजी, तकदीरवाला, सैनिक, गुमराह, बेटा जैसी फिल्मों में भी नजर आए। हालाँकि 50 की उम्र में गंभीर बीमारी से जूझते हुए लक्ष्मीकांत बेर्डे ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। कहा जाता है उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी और 16 दिसंबर, 2004 को बेहतरीन एक्टर का निधन हुआ था।
बॉलीवुड में नौकर बनकर सुपरहिट होने वाले लक्ष्मीकांत बेर्डे का जन्म आज ही के दिन हुआ था। बहुत कम उम्र में लक्ष्मीकांत बेर्डे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन लोग उन्हें भुला नहीं पाए। लक्ष्मीकांत बेर्डे ने अपने करियर में कई मराठी और बॉलीवुड फिल्मों में काम किया और वह सुपरहिट भी हुआ। लक्ष्मीकांत बेर्डे नब्बे के दशक की हर फिल्म में जरुरी बन गए थे और उन्हें आपने हर दूसरी फिल्म में देखा होगा। लक्ष्मीकांत बेर्डे मराठी सिनेमा का जाना-माना नाम था और जब उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली तो अपनी एंक्टिंग से सभी को दीवाना बना डाला। लक्ष्मीकांत बेर्डे ने कभी हीरो के दोस्त बनकर, कभी बड़े से बंगले के नौकर तो कभी माली बनकर हर किरदार से लोगों का दिल जीता। बहुत कम लोग जानते हैं लक्ष्मीकांत बेर्डे की पहली हिंदी फिल्म मैंने प्यार किया थी। इस फिल्म में वो सलमान खान के दोस्त के तौर पर दिखे थे और इन दोनों की जोड़ी को इतना पसंद किया गया कि उन्हें कई फिल्मों में सलमान के साथ कास्ट किया गया था। हम आपके हैं कौन, साजन में भी वो सलमान के साथ दिखे। इसी के साथ वह हम तुम्हारे हैं सनम, प्यार दीवाना होता है, बेटी नंबर एक, आरजू, राजाजी, तकदीरवाला, सैनिक, गुमराह, बेटा जैसी फिल्मों में भी नजर आए। हालाँकि पचास की उम्र में गंभीर बीमारी से जूझते हुए लक्ष्मीकांत बेर्डे ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। कहा जाता है उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी और सोलह दिसंबर, दो हज़ार चार को बेहतरीन एक्टर का निधन हुआ था।
नव वर्ष के पहले सप्ताह में आपको अपनी लव लाइफ़ को लेकर थोड़ा सा बेचैनी रहेगी एवं चिंता अधिक करेंगे। यह भी हो सकता है कि आप इस बीच घर से बाहर अधिक रह रहे हों या फिर यात्रा कर रहे हों जिस वजह से दूरियां बढ़ रही हैं। इस सप्ताह संयम के साथ किसी भी निर्णय पर पहुंचना आपके हित में रहेगा। सप्ताह के अंत में आलस्य से घिरे रहेंगे एवं अपने प्रेम संबंध की तरफ़ अधिक ध्यान नहीं दे पाएंगे। वृषभ राशि वाले नए साल के पहले सप्ताह में अपने प्रेम संबंध को बातचीत के माध्यम से पुख्ता कर सकते हैं अन्यथा किसी ना किसी बात को लेकर आपसी मतभेद उत्पन्न हो सकता है। हालांकि यह क्षणिक ही रहेगा एवं सप्ताह के उत्तरार्द्ध में आपके प्रेम संबंध में रौनक वापस आएगी। आप अपने साथी के साथ एवं अपने प्रियजनों के सानिध्य में सुखद समय व्यतीत करेंगे। हो सकता है कि इस समय आपको कोई सरप्राइज गिफ्ट भी मिल जाए। यह सप्ताह आपकी लव लाइफ के लिए एक बेहतरीन सप्ताह है। आपसी अंडर्स्टैंडिंग बढ़ेगी एवं मन प्रफुल्लित रहेगा। जीवन में प्रेम में सुकून प्राप्त करने के कई अवसर इस सप्ताह वर्ष की शुरुआत से ही आपको प्राप्त होते जाएंगे। सप्ताह के अंत में जीवन में उतार-चढ़ाव तो रहेगा लेकिन लापरवाही नहीं बरतेंगे तो बेहतरीन परिणाम सामने आएंगे एवं लव लाइफ रोमांटिक रहेगी। कर्क राशि वालों के लिए साल के पहले सप्ताह में प्रेम संबंध सुदृढ़ होते दिखाई दे रहे हैं एवं नववर्ष की शुरुआत जीवन में सुख शांति लेकर आ रही है। आपसी प्रेम सुदृढ़ होगा। आप अपनी रिलेशनशिप को एक ठोस आधार देने के इच्छुक रहेंगे एवं अपने साथी के साथ किसी बेहतर स्थान पर शिफ्ट होने का मन भी बना सकते हैं। सप्ताह के अंत में किसी मातृतुल्य महिला को लेकर चिंता बढ़ सकती है जिस वजह से लव लाइफ में कष्ट बढ़ेंगे। सिंह राशि वालों के प्रेम संबंधों आपसी प्रेम में वृद्धि होगी एवं आप अपनी लव लाइफ़ से वर्ष की शुरुआत में काफ़ी ख़ुश रहेंगे। इस सप्ताह आप अपने प्रेम संबंध में एक बेहतर सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम रहेंगे। सप्ताह के अंत में जीवन में सुधार आता नज़र आ रहा है। कन्या राशि वालों के लिए प्रेम संबंधों में सुख समृद्धि के विशेष संयोग बन रहे हैं एवं जीवन में खुशियां दस्तक दे रही हैं। आप अपनी लव लाइफ में अपने साथी के सानिध्य में सुखद समय व्यतीत करेंगे। इस सप्ताह आप अपनी रोमांटिक लाइफ़ को लेकर काफ़ी रिलैक्स भी महसूस करेंगे। सप्ताह के अंत में अपने जीवनसाथी के साथ शांत एकांत समय व्यतीत करने का मन बनेगा या फिर किसी धार्मिक कार्यों में भी साथ में शामिल हो सकते हैं। तुला राशि वालों के लिए इस सप्ताह प्रेम संबंधों के मामले में सुख समृद्धि के विशेष योग बन रहे हैं। जीवन में आपका फोकस अपनी लव लाइफ़ की तरफ़ काफ़ी रहेगा। इस सप्ताह नव वर्ष की भी शुरुआत है एवं यह आपके लिए शुभ रहेगी। सप्ताह के अंत में आप अपने प्रेम संबंध से संतुष्ट रहेंगे एवं आपस में सामंजस्य भी स्थापित रहेगा। लव लाइफ में समय रोमांटिक बीतेगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए नव वर्ष की शुरुआत में रोमांस की एंट्री हो रही है एवं जीवन में सुख समृद्धि के संयोग भी बन रहे हैं। सप्ताह के उत्तरार्द्ध में आपसी प्रेम सुदृढ़ होगा एवं आप अपनी लव लाइफ़ में ख़ुश रहेंगे। सप्ताह के अंत में प्रेम संबंध सुदृढ़ होंगे एवं अपने जीवनसाथी के साथ सुखद समय व्यतीत होगा। धनु राशि वालों की लव लाइफ में इस सप्ताह काफी रौनक़ रहेगी एवं आपसी प्रेम में वृद्धि होगी। आप अपनी लव लाइफ़ से काफ़ी ख़ुश रहेंगे। आप में से कुछ एक के लिए विवाह के सुंदर संयोग भी बनते जा रहे हैं। संतान सुख भी इस सप्ताह प्राप्त होगा। यह सप्ताह अपने जीवन में एक नई शुरुआत करने का सप्ताह है एवं प्रेम संबंध सुदृढ़ होते जाएंगे। मकर राशि वालों के लिए प्रेम में सुख समृद्धि के शुभ संयोग इस सप्ताह बन रहे हैं एवं नव वर्ष में लव लाइफ में रोमांस की धमाकेदार एंट्री भी हो रही है। अपने जीवनसाथी के सानिध्य में समय व्यतीत करना आपके लिए जीवन में काफ़ी सुकून लेकर आ सकता है। सप्ताह के अंत में हालांकि स्थितियां साधारण रहेंगी एवं बातचीत द्वारा किसी भी मामले को सुलझाएंगे तो बेहतर होगा। इस सप्ताह आपको अपने प्रेम संबंधों में खुशियां प्राप्त होंगी। आपको बातचीत द्वारा स्थितियों को सुलझाना चाहिए ताकि आपसी अंडर्स्टैंडिंग बेहतर हो। सप्ताह के अंत में भी एकतरफा दृष्टिकोण से जीवन में आगे बढ़ेंगे तो कष्ट बढ़ सकते हैं। थोड़ा सा दूसरों की राय लेकर भी आगे बढ़ें तो बेहतर होगा। मीन राशि वालों को इस सप्ताह संयम के साथ अपने जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुंचना चाहिए तभी सुकून आएगा। सप्ताह की शुरुआत में किसी ऐसे व्यक्ति की वजह से आपसी मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं जिनकी आर्थिक मामलों में पकड़ बेहतर है। सप्ताह के अंत में किसी समाचार को प्राप्त कर मन दुखी रहेगा जिस वजह से लव लाइफ में अधिक ध्यान नहीं दे पाएंगे।
नव वर्ष के पहले सप्ताह में आपको अपनी लव लाइफ़ को लेकर थोड़ा सा बेचैनी रहेगी एवं चिंता अधिक करेंगे। यह भी हो सकता है कि आप इस बीच घर से बाहर अधिक रह रहे हों या फिर यात्रा कर रहे हों जिस वजह से दूरियां बढ़ रही हैं। इस सप्ताह संयम के साथ किसी भी निर्णय पर पहुंचना आपके हित में रहेगा। सप्ताह के अंत में आलस्य से घिरे रहेंगे एवं अपने प्रेम संबंध की तरफ़ अधिक ध्यान नहीं दे पाएंगे। वृषभ राशि वाले नए साल के पहले सप्ताह में अपने प्रेम संबंध को बातचीत के माध्यम से पुख्ता कर सकते हैं अन्यथा किसी ना किसी बात को लेकर आपसी मतभेद उत्पन्न हो सकता है। हालांकि यह क्षणिक ही रहेगा एवं सप्ताह के उत्तरार्द्ध में आपके प्रेम संबंध में रौनक वापस आएगी। आप अपने साथी के साथ एवं अपने प्रियजनों के सानिध्य में सुखद समय व्यतीत करेंगे। हो सकता है कि इस समय आपको कोई सरप्राइज गिफ्ट भी मिल जाए। यह सप्ताह आपकी लव लाइफ के लिए एक बेहतरीन सप्ताह है। आपसी अंडर्स्टैंडिंग बढ़ेगी एवं मन प्रफुल्लित रहेगा। जीवन में प्रेम में सुकून प्राप्त करने के कई अवसर इस सप्ताह वर्ष की शुरुआत से ही आपको प्राप्त होते जाएंगे। सप्ताह के अंत में जीवन में उतार-चढ़ाव तो रहेगा लेकिन लापरवाही नहीं बरतेंगे तो बेहतरीन परिणाम सामने आएंगे एवं लव लाइफ रोमांटिक रहेगी। कर्क राशि वालों के लिए साल के पहले सप्ताह में प्रेम संबंध सुदृढ़ होते दिखाई दे रहे हैं एवं नववर्ष की शुरुआत जीवन में सुख शांति लेकर आ रही है। आपसी प्रेम सुदृढ़ होगा। आप अपनी रिलेशनशिप को एक ठोस आधार देने के इच्छुक रहेंगे एवं अपने साथी के साथ किसी बेहतर स्थान पर शिफ्ट होने का मन भी बना सकते हैं। सप्ताह के अंत में किसी मातृतुल्य महिला को लेकर चिंता बढ़ सकती है जिस वजह से लव लाइफ में कष्ट बढ़ेंगे। सिंह राशि वालों के प्रेम संबंधों आपसी प्रेम में वृद्धि होगी एवं आप अपनी लव लाइफ़ से वर्ष की शुरुआत में काफ़ी ख़ुश रहेंगे। इस सप्ताह आप अपने प्रेम संबंध में एक बेहतर सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम रहेंगे। सप्ताह के अंत में जीवन में सुधार आता नज़र आ रहा है। कन्या राशि वालों के लिए प्रेम संबंधों में सुख समृद्धि के विशेष संयोग बन रहे हैं एवं जीवन में खुशियां दस्तक दे रही हैं। आप अपनी लव लाइफ में अपने साथी के सानिध्य में सुखद समय व्यतीत करेंगे। इस सप्ताह आप अपनी रोमांटिक लाइफ़ को लेकर काफ़ी रिलैक्स भी महसूस करेंगे। सप्ताह के अंत में अपने जीवनसाथी के साथ शांत एकांत समय व्यतीत करने का मन बनेगा या फिर किसी धार्मिक कार्यों में भी साथ में शामिल हो सकते हैं। तुला राशि वालों के लिए इस सप्ताह प्रेम संबंधों के मामले में सुख समृद्धि के विशेष योग बन रहे हैं। जीवन में आपका फोकस अपनी लव लाइफ़ की तरफ़ काफ़ी रहेगा। इस सप्ताह नव वर्ष की भी शुरुआत है एवं यह आपके लिए शुभ रहेगी। सप्ताह के अंत में आप अपने प्रेम संबंध से संतुष्ट रहेंगे एवं आपस में सामंजस्य भी स्थापित रहेगा। लव लाइफ में समय रोमांटिक बीतेगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए नव वर्ष की शुरुआत में रोमांस की एंट्री हो रही है एवं जीवन में सुख समृद्धि के संयोग भी बन रहे हैं। सप्ताह के उत्तरार्द्ध में आपसी प्रेम सुदृढ़ होगा एवं आप अपनी लव लाइफ़ में ख़ुश रहेंगे। सप्ताह के अंत में प्रेम संबंध सुदृढ़ होंगे एवं अपने जीवनसाथी के साथ सुखद समय व्यतीत होगा। धनु राशि वालों की लव लाइफ में इस सप्ताह काफी रौनक़ रहेगी एवं आपसी प्रेम में वृद्धि होगी। आप अपनी लव लाइफ़ से काफ़ी ख़ुश रहेंगे। आप में से कुछ एक के लिए विवाह के सुंदर संयोग भी बनते जा रहे हैं। संतान सुख भी इस सप्ताह प्राप्त होगा। यह सप्ताह अपने जीवन में एक नई शुरुआत करने का सप्ताह है एवं प्रेम संबंध सुदृढ़ होते जाएंगे। मकर राशि वालों के लिए प्रेम में सुख समृद्धि के शुभ संयोग इस सप्ताह बन रहे हैं एवं नव वर्ष में लव लाइफ में रोमांस की धमाकेदार एंट्री भी हो रही है। अपने जीवनसाथी के सानिध्य में समय व्यतीत करना आपके लिए जीवन में काफ़ी सुकून लेकर आ सकता है। सप्ताह के अंत में हालांकि स्थितियां साधारण रहेंगी एवं बातचीत द्वारा किसी भी मामले को सुलझाएंगे तो बेहतर होगा। इस सप्ताह आपको अपने प्रेम संबंधों में खुशियां प्राप्त होंगी। आपको बातचीत द्वारा स्थितियों को सुलझाना चाहिए ताकि आपसी अंडर्स्टैंडिंग बेहतर हो। सप्ताह के अंत में भी एकतरफा दृष्टिकोण से जीवन में आगे बढ़ेंगे तो कष्ट बढ़ सकते हैं। थोड़ा सा दूसरों की राय लेकर भी आगे बढ़ें तो बेहतर होगा। मीन राशि वालों को इस सप्ताह संयम के साथ अपने जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुंचना चाहिए तभी सुकून आएगा। सप्ताह की शुरुआत में किसी ऐसे व्यक्ति की वजह से आपसी मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं जिनकी आर्थिक मामलों में पकड़ बेहतर है। सप्ताह के अंत में किसी समाचार को प्राप्त कर मन दुखी रहेगा जिस वजह से लव लाइफ में अधिक ध्यान नहीं दे पाएंगे।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक के दौरान सांसदों की जमकर क्लास लगाई है। उन्होंने कहा कि अब अध्यक्ष राज्यसभा में आ गए हैं, आपके मौज-मस्ती के दिन बंद हो जाएंगे। मोदी ने कहा कि आप लोग अपने आपको क्या समझते हैं, आप कुछ भी नहीं हैं, मैं भी कुछ नहीं हूं जो है बीजेपी एक पार्टी है। मोदी ने कहा कि ये 3 लाइन का व्हिप क्या है, बार-बार व्हिप क्यों देना पड़ता है। अटेंडेंस के लिए क्यों कहा जाए। जिसको जो करना है करिए, 2019 में मैं देखूंगा। मोदी ने जन प्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 15 अगस्त से 30 अगस्त तक देशभर में संकल्प से सिद्धि कार्यक्dरम का आयोजन करें। उन्होंने साल 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिये संकल्पबद्ध होकर काम करने पर भी जोर दिया। मोदी ने कहा कि 1942 में जिस प्रकार से देश स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये जागृत हुआ था और उसके परिणामस्वरूप ही सन 1947 में देश आजाद हुआ। उसी प्रकार से 2017 से 2022 के बीच पांच साल की अवधि महत्वपूर्ण है और इस अवधि में न्यू इंडिया के नारे और संकल्प को पूरे देश में साकार करने की दिशा में हम सभी को प्रयास करना चाहिए। बै"क के बाद संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा के वरिष्" नेता अनंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बै"क के दौरान राज्यसभा के लिये निर्वाचित होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया और पिछले तीन वर्षों के दौरान पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनके कामकाज की प्रशंसा की। मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष होना कोई आसान काम नहीं है और अमित शाह ने अपने कौशल एवं क"िन परिश्रम से पार्टी संग"न का सफलतापूर्वक विस्तार किया है। भाजपा संसदीय दल की बै"क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शामिल हुए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बै"क क प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विचार रखे और संसद में पार्टी के सांसदों के गैरहाजिर रहने पर सख्त राय व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सांसदों की उपस्थिति के मुद्दे को उ"ाते हुए कहा कि सदन में सांसदों को उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा, आप और मैं कुछ नहीं हैं, जो है वह भाजपा है, पार्टी है। बार-बार व्हीप क्यों देना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भी प्रधानमंत्री ने सदन में सांसदों की उपस्थिति का मुद्दा उ"ाया था। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए सांसदों को सदन में रहने के लिए कहा था। हाल ही में संसदीय पार्टी की बै"क में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सदस्यों के सदन से अनुपस्थित रहने पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। संसद के वर्तमाल सत्र में ही राज्यसभा में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष का संशोधन के साथ पारित हो गया। इसके चलते केंद्र सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के पूरी संख्या में उपस्थित नहीं होने के कारण विपक्ष का संशोधन पारित हो गया था। कुछ समय पहले शाह ने संसदीय दल की बै"क में लगातार गैरहाजिरी होने पर नाराजगी और निराशा जाहिर की थी। उन्होंने पार्टी सांसदों को संसद के दोनों सदनों में मौजूद रहने को कहा। साथ ही ये भी हिदायत दी कि इस बात को हल्के में ना लिया जाए और दोबारा ऐसा ना हो। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उच्च सदन के लिये निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि सदन में गैर हाजिर रहने वाले पार्टी सदस्यों पर उनकी नजर रहेगी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक के दौरान सांसदों की जमकर क्लास लगाई है। उन्होंने कहा कि अब अध्यक्ष राज्यसभा में आ गए हैं, आपके मौज-मस्ती के दिन बंद हो जाएंगे। मोदी ने कहा कि आप लोग अपने आपको क्या समझते हैं, आप कुछ भी नहीं हैं, मैं भी कुछ नहीं हूं जो है बीजेपी एक पार्टी है। मोदी ने कहा कि ये तीन लाइन का व्हिप क्या है, बार-बार व्हिप क्यों देना पड़ता है। अटेंडेंस के लिए क्यों कहा जाए। जिसको जो करना है करिए, दो हज़ार उन्नीस में मैं देखूंगा। मोदी ने जन प्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पंद्रह अगस्त से तीस अगस्त तक देशभर में संकल्प से सिद्धि कार्यक्dरम का आयोजन करें। उन्होंने साल दो हज़ार बाईस तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिये संकल्पबद्ध होकर काम करने पर भी जोर दिया। मोदी ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ बयालीस में जिस प्रकार से देश स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये जागृत हुआ था और उसके परिणामस्वरूप ही सन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में देश आजाद हुआ। उसी प्रकार से दो हज़ार सत्रह से दो हज़ार बाईस के बीच पांच साल की अवधि महत्वपूर्ण है और इस अवधि में न्यू इंडिया के नारे और संकल्प को पूरे देश में साकार करने की दिशा में हम सभी को प्रयास करना चाहिए। बै"क के बाद संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा के वरिष्" नेता अनंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बै"क के दौरान राज्यसभा के लिये निर्वाचित होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया और पिछले तीन वर्षों के दौरान पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनके कामकाज की प्रशंसा की। मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष होना कोई आसान काम नहीं है और अमित शाह ने अपने कौशल एवं क"िन परिश्रम से पार्टी संग"न का सफलतापूर्वक विस्तार किया है। भाजपा संसदीय दल की बै"क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शामिल हुए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बै"क क प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विचार रखे और संसद में पार्टी के सांसदों के गैरहाजिर रहने पर सख्त राय व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सांसदों की उपस्थिति के मुद्दे को उ"ाते हुए कहा कि सदन में सांसदों को उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा, आप और मैं कुछ नहीं हैं, जो है वह भाजपा है, पार्टी है। बार-बार व्हीप क्यों देना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भी प्रधानमंत्री ने सदन में सांसदों की उपस्थिति का मुद्दा उ"ाया था। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए सांसदों को सदन में रहने के लिए कहा था। हाल ही में संसदीय पार्टी की बै"क में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सदस्यों के सदन से अनुपस्थित रहने पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। संसद के वर्तमाल सत्र में ही राज्यसभा में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष का संशोधन के साथ पारित हो गया। इसके चलते केंद्र सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के पूरी संख्या में उपस्थित नहीं होने के कारण विपक्ष का संशोधन पारित हो गया था। कुछ समय पहले शाह ने संसदीय दल की बै"क में लगातार गैरहाजिरी होने पर नाराजगी और निराशा जाहिर की थी। उन्होंने पार्टी सांसदों को संसद के दोनों सदनों में मौजूद रहने को कहा। साथ ही ये भी हिदायत दी कि इस बात को हल्के में ना लिया जाए और दोबारा ऐसा ना हो। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उच्च सदन के लिये निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि सदन में गैर हाजिर रहने वाले पार्टी सदस्यों पर उनकी नजर रहेगी।
प्रियंका चोपड़ा जोनस और रिचर्ड सीरीज- सिटाडेल में नाडिया सिंह और मेसन केन के रोल में हैं। उनका वह संगठन आजाद है। ठेके पर किसी भी देश की सुरक्षा का जिम्मा लेता है। उनका कार्यक्षेत्र पूरी दुनिया है। दोनों बेहद ताकतवर हैं, पर उन्हें और उनके संगठन के खिलाफ काम करने वाले भी लोग हैं। उनके नाम डालिया आर्चर और आंडेर्स सिजी हैं। इनके संगठन का नाम मॉनिकोर है। यहां कहानी सिटाडेल और मॉनिकोर के उम्दा जासूसों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के बारे में है। नाडिया और मेसन के सहयोगी बर्नार्ड ऑरलिक हैं। उन्हें दुश्मन जासूसों के नापाक मंसूबों को रोकना है। इसके लिए नाडिया और मेसन की सख्त जरूरत है। इस मोर्चे पर हालांकि बर्नार्ड ऑरलिक के सामने एक चुनौती है। वह यह कि नाडिया और मेसन की याद्दाश्त इटली के एक ट्रेन धमाके में जा चुकी है, जो उनके अपने ही संगठन के एक गद्दार का नतीजा है। साथ ही जासूसी के हिम्मती कारनामों से नाडिया और मेसन आठ साल से दूर भी हैं। इस परिस्थिति में भी नाडिया और मेसन से कैसे काम लिया जाता है और वो किस तरह संगठन के गद्दार को ढूंढ निकाल पाते हैं कि नहीं और डालिया आर्चर के मकसद को रोक पाते हैं कि नहीं, यह सीरीज उस बारे में है। सिटाडेल को जिस इरादे से क्रिएट किया गया है, वह यहां पूरी तरह जस्टिफाइड हुआ है। बड़े जासूसी संगठनों से ताल्लुक रखने वाले जासूसों के एक्शन और उनके हथियार, जगहें जहां उनकी मुठभेड़ होती हैं, सब कुछ को विहंगम स्केल यानी पैमाना प्रदान किया गया है। इटली में ट्रेन धमाके के बीच नाडिया, मेसन की दुश्मन संगठनों से जंग का सीक्वेंस आगे आने वाले घटनाक्रमों की रफ्तार और मिजाज को सेट कर देता है। रूसो ब्रद्रर्स की खासियत सीजी इफेक्ट में एक्शन के साथ साथ इमोशन को पिरोने की रही है। यह सीरीज अमेजन प्राइम पर आ गया है। यानी लोग मोबाइल, लैपटॉप और घर के बड़े स्क्रीन में इसे देखेंगे। इसके बावजूद यह एक बिग स्क्रीन स्पैक्टेकल वाली एक्सपीरिएंस देने में सक्षम है। ट्रेन की सभी बोगियां ब्लास्ट के बाद जिस कदर समुद्र में जल समाधि लेती है, वह किसी लार्जर दैन लाइफ मोमेंट से कम महसूस नहीं होता। सीरीज की कास्टिंग काफी अच्छी है। नाडिया बनीं प्रियंका हों या फिर मेसन के रोल में रिचर्ड मैडन और बाकी कलाकार ने भी अच्छा काम किया है। साथ ही उनके स्टंट भी प्रभावशाली हैं। प्रियंका चोपड़ा जोनस के चाहने वालों के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं। उन्होंने दिल खोलकर स्टंट किए हैं। हॉलीवुड में क्वांटिको में जो उनके स्टंट थे, यहां उन्होंने उसका विस्तार प्रदान किया है। रिचर्ड मेडन की कद काठी, फुर्ती और बॉडी लैंग्वेज किसी जासूस या सीक्रेट एजेंट के लिए काम करने वाले शख्स जैसा महसूस होता है। इससे पहले उनकी पांच साल पहले बॉडीगार्ड सीरीज आई थी। यह तेज रफ्तार, मसालेदार रोमांचक शो को पसंद करने वालों के लिए अमेजन प्राइम की ओर से तोहफा है। जिन लोगों को उनकी जैक रायन का पहला सीजन पसंद आया था, उन्हें सिटाडेल भी जोरदार महसूस होगी। यहां भी सभी घटनाक्रम की तीव्रता, रहस्यों का धमाकेदार खुलासा, वर्ल्ड पॉलिटिक्स दिखेगा। बेशक जैक राएन में एक आम इंसान हीरो बनता है। मामूली से लगने वाले टिप के सहारे खतरनाक आतंकियों की वाट लगाता है। यहां सिटैडल के नायक सुपरपावर से कम वाले नहीं हैं। उसे किस तरह दर्शकों को महसूस करवाना है, उसे बखूबी जाहिर किया गया है। यह सीरीज बिंज वॉच वाला नहीं है। पहला एपिसोड तो 28 अप्रैल को आ रहा है। उसके बाद के हफ्तो में बाकी के एपिसोड मई के आखिरी हफ्ते तक हफ्तावार रिलीज होते रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रियंका चोपड़ा जोनस और रिचर्ड सीरीज- सिटाडेल में नाडिया सिंह और मेसन केन के रोल में हैं। उनका वह संगठन आजाद है। ठेके पर किसी भी देश की सुरक्षा का जिम्मा लेता है। उनका कार्यक्षेत्र पूरी दुनिया है। दोनों बेहद ताकतवर हैं, पर उन्हें और उनके संगठन के खिलाफ काम करने वाले भी लोग हैं। उनके नाम डालिया आर्चर और आंडेर्स सिजी हैं। इनके संगठन का नाम मॉनिकोर है। यहां कहानी सिटाडेल और मॉनिकोर के उम्दा जासूसों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के बारे में है। नाडिया और मेसन के सहयोगी बर्नार्ड ऑरलिक हैं। उन्हें दुश्मन जासूसों के नापाक मंसूबों को रोकना है। इसके लिए नाडिया और मेसन की सख्त जरूरत है। इस मोर्चे पर हालांकि बर्नार्ड ऑरलिक के सामने एक चुनौती है। वह यह कि नाडिया और मेसन की याद्दाश्त इटली के एक ट्रेन धमाके में जा चुकी है, जो उनके अपने ही संगठन के एक गद्दार का नतीजा है। साथ ही जासूसी के हिम्मती कारनामों से नाडिया और मेसन आठ साल से दूर भी हैं। इस परिस्थिति में भी नाडिया और मेसन से कैसे काम लिया जाता है और वो किस तरह संगठन के गद्दार को ढूंढ निकाल पाते हैं कि नहीं और डालिया आर्चर के मकसद को रोक पाते हैं कि नहीं, यह सीरीज उस बारे में है। सिटाडेल को जिस इरादे से क्रिएट किया गया है, वह यहां पूरी तरह जस्टिफाइड हुआ है। बड़े जासूसी संगठनों से ताल्लुक रखने वाले जासूसों के एक्शन और उनके हथियार, जगहें जहां उनकी मुठभेड़ होती हैं, सब कुछ को विहंगम स्केल यानी पैमाना प्रदान किया गया है। इटली में ट्रेन धमाके के बीच नाडिया, मेसन की दुश्मन संगठनों से जंग का सीक्वेंस आगे आने वाले घटनाक्रमों की रफ्तार और मिजाज को सेट कर देता है। रूसो ब्रद्रर्स की खासियत सीजी इफेक्ट में एक्शन के साथ साथ इमोशन को पिरोने की रही है। यह सीरीज अमेजन प्राइम पर आ गया है। यानी लोग मोबाइल, लैपटॉप और घर के बड़े स्क्रीन में इसे देखेंगे। इसके बावजूद यह एक बिग स्क्रीन स्पैक्टेकल वाली एक्सपीरिएंस देने में सक्षम है। ट्रेन की सभी बोगियां ब्लास्ट के बाद जिस कदर समुद्र में जल समाधि लेती है, वह किसी लार्जर दैन लाइफ मोमेंट से कम महसूस नहीं होता। सीरीज की कास्टिंग काफी अच्छी है। नाडिया बनीं प्रियंका हों या फिर मेसन के रोल में रिचर्ड मैडन और बाकी कलाकार ने भी अच्छा काम किया है। साथ ही उनके स्टंट भी प्रभावशाली हैं। प्रियंका चोपड़ा जोनस के चाहने वालों के लिए यह किसी सौगात से कम नहीं। उन्होंने दिल खोलकर स्टंट किए हैं। हॉलीवुड में क्वांटिको में जो उनके स्टंट थे, यहां उन्होंने उसका विस्तार प्रदान किया है। रिचर्ड मेडन की कद काठी, फुर्ती और बॉडी लैंग्वेज किसी जासूस या सीक्रेट एजेंट के लिए काम करने वाले शख्स जैसा महसूस होता है। इससे पहले उनकी पांच साल पहले बॉडीगार्ड सीरीज आई थी। यह तेज रफ्तार, मसालेदार रोमांचक शो को पसंद करने वालों के लिए अमेजन प्राइम की ओर से तोहफा है। जिन लोगों को उनकी जैक रायन का पहला सीजन पसंद आया था, उन्हें सिटाडेल भी जोरदार महसूस होगी। यहां भी सभी घटनाक्रम की तीव्रता, रहस्यों का धमाकेदार खुलासा, वर्ल्ड पॉलिटिक्स दिखेगा। बेशक जैक राएन में एक आम इंसान हीरो बनता है। मामूली से लगने वाले टिप के सहारे खतरनाक आतंकियों की वाट लगाता है। यहां सिटैडल के नायक सुपरपावर से कम वाले नहीं हैं। उसे किस तरह दर्शकों को महसूस करवाना है, उसे बखूबी जाहिर किया गया है। यह सीरीज बिंज वॉच वाला नहीं है। पहला एपिसोड तो अट्ठाईस अप्रैल को आ रहा है। उसके बाद के हफ्तो में बाकी के एपिसोड मई के आखिरी हफ्ते तक हफ्तावार रिलीज होते रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
महायधे अणुभागबंधाहियारे णोक० मणुस० ओरालि० अंगो०- वज्जरि०-मणुसाणु० - अथिर-असुभ-अजस० उ० ज० ए०, ७० बे साग० सादि० । अणु० ज० ए०, उ० अंतो० । तिरिक्ख-मणुसायु० देवभंगो । देवायु० उ० ज० ए०, उ० अंतो० । अणु० ज० ए०, उ० बेसम० । देवगदि ०४ उ० णत्थि अंतरं । अणु० ज० ए०, उ० बेसाग० सादि० । तेजा० के० आहार० दुगपसत्य ०४ - अगु०३ - बादर-पज्जत - पत्ते ० -- णिमि० -- तित्थ० उ० पत्थि अंतरं । अणु० एग० । पम्माए पढमदंड ओरालियअंगोवंगो भाणिदव्वो । पंचिदि० - तस० वेडब्बि० भंगो' । सेसं तेज० भंगो । । मनुष्यगति, औदारिकशरीर , वर्षभनाराच संहनन, मनुष्यगत्यानुपूर्वी, अस्थिर, अशुभ और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धक। जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है । तिर्यश्चायु और मनुष्यायुका भङ्ग देवोंके समान है। देवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगतिचतुष्क के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर काल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर है। तैजसशरीर, कामरणशरीर, आहारकद्विक, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, बादर, पर्याप्त, प्रत्येक, निर्माण और तीर्थकरके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर काल एक समय है। पद्मलेश्या में प्रथम दण्डकमें औदारिक कहलाना चाहिए । पञ्चन्द्रिय जाति और त्रसका भङ्ग वैकियिकशरीरके समान है। तथा शेप भङ्ग पीतलेश्या के समान है। षिशेषार्थ-प्रथम दण्डक और दूसरे दण्डक में कही गई प्रकृतियोंका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध पीतलेश्याक प्रारम्भमें और अन्त में हो और मध्यमे न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर कहा है, तथा स्त्यानमृद्धिका बन्ध सम्यग्दृष्टिके नहीं होता, अतः आदिमें और अन्त में मिथ्यादृष्टि रखकर इनका बन्ध कराने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका भी उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर बन जाता है। सातावेदनीय आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध ऐसे अप्रमत्तसंगत के होता है जो आगे बढ़ रहा है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया है । तथा ये परावर्तमान प्रकृतियां हैं, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमु हूत कहा है। इसी प्रकार असतावेदनीय आदिके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर काल घाटत कर लेना चाहिए। तथा इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर ज्ञानावरणके समान घटित कर लेना चाहिए । देवोंके तिर्यवायु और मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना घटित करके बतला आये हैं । वह यहाँ भी बन जाता है, अतः देवोके समान कहा है । देवायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध अप्रमत्तसंयतके होता है और यहां पीतलेश्याका काल अन्तर्मुहूर्त है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कह । है । देवगत चारक उत्कृष्ट अनुभागबन्धका स्वामी सातावेदनीयके समान है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागधन्ध के अन्तरका निपध किया है। तथा सम्यग्दृष्टि मनुष्य के साधिक १. भा० प्रतौ उ० बेस• साग० तेजाक० इति पाठः । २. भा० प्रतौ पढमदंडयो इति पाठः । ३. ता० प्रतौ तेऊभंगो इति पाठः । ५८६. सुक्काए पंचणा० -छदसणा० - असादा ० - बारसक०-सत्तणोक०-अप्पसत्य०४उप० - अथिर--असुभ - अजस० -- पंचंत० उ० ज० ए० उ० अहारससा० सादि० । अणु० ज० ए०, उ० अंतो० । थीणगिद्धि०३ - मिच्छ० - अणंताणु०४ - इत्थि० णस पंचसंठा ०-पंचसंघ०--अप्पसत्थ०-दूर्भाग--दुस्सर--अणादे० -- णीचा० उ० ज० ए०, उ० अहारससा० सादि० । अणु० ज० ए०, उ० एकत्तीसं० देसू० । सादा ० -- पंचिंदि०तेजा०- - क० - समचदु० - पसत्थ०४ - अगु०३-पसत्थवि० -- तस०४ - थिरा दिछ० - णिमि०तित्थ० उच्चा० उ० णत्थि अंतरं । अणु० ज० ए० उ० अंतो० । मणुमायु० उ० अणु० ज० ए०, उ० छम्मासं देनू ० । देवायु० उ० ज० ए०, उक्क० अंतो ० । अणु० ज० ए०, उ० बेसम० । मणुस० ओरालि० ओरालि० अंगो०- मणुसायु० उ० ज० ए०, उ० तेत्तीसं देमू० । अणु० ज० ए०, उ० बेस० । देवगदि ०४ उ० णत्थि अंतरं । अणु० ज० अंतो०, दो सागरके अन्तरसे इनका बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर कहा है। देवगतिके समान तैजसशरीर आदिके उत्कृष्ट अनुभाग बन्धका स्वामी है, अतः इनके भी उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया है। तथा इनका उत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह काल एक समय है अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर एक समय कहा है । पद्मलेश्या में औदारिकशरीर के साथ औदारिक आङ्गोपाङ्गका नियमसे बन्ध होता है, क्योंकि इसके एकेन्द्रियजाति और स्थावरका बन्ध नहीं होता, अतः यहां औदारिक आङ्गोपाङ्गको प्रथम दण्डकमें परिगणित करनेको कहा है। तथा पेन्द्रियजाति और त्रसका भी नियमसे बन्ध होता है, अतः इनका अन्तर वैकियिकशरीर के समान प्राप्त होनेसे उसके साथ इनकी परिगणना की है। शेष स्पष्ट ही है । ५८६. शुक्ललेश्यामें पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, असातावेदनीय, बारह कपाय, सात नोकपाय, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, उपघात, अस्थिर, अशुभ, अयशः कीर्ति और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। स्त्यानगृद्धि तीन, मिथ्यात्व, अनन्तानुबन्धी चार, स्त्रीवेद, नपुंसकवेद, पाँच संस्थान, पाँच संहनन, अप्रशस्त विहायोगति, दुर्भग, दुःस्वर, अनादेय और नीचगांत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम इकतीस सागर है। सातावेदनीय, पचोद्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मरणशरीर, समचतुरस्र संस्थान, प्रशस्त वर्ण चतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, सचतुष्क, स्थिर आदि छह, निर्माण, तीर्थकर और उच्चगोत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है। देवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। मनुष्यगति औदारिकशरीर, औदारिक आङ्गोपन और मनुष्यगत्यानुपूर्वीके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका १. आ० प्रती० ए० अंतो• इति पाः । ४६ उ० तेतीसं० सादि० । आहारदुग० उ० णत्थि अंतरं । अणु० ज० उ० अंतो ० । बज्जरि० उ० ज० ए०, उ० तेत्तीसं [ देसू० ] । [ अणु० ] ज० ए०, उ० अंतो० । जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगतिचतुष्क के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तमुहूर्त है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तराल नहीं है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। वज्रर्षभनाराच संहननके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम अन्तमुहूर्त है । विशेषार्थ - शुक्ललेश्या में पाँच ज्ञानावरणादिका व स्त्यानगृद्धि तीन आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध सहस्रार कल्प तक होता है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर कहा है। तथा प्रथम दण्डकोक्त पाँच ज्ञानावरणादिका उपशमश्र रिकी अपेक्षा और असतावेदनीय आदि प्रकृतियोंके परावर्तमान होने के कारण इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है। तथा दूसरे दण्डकमें कही गई प्रकृतियोंका अन्तिम ग्रैवेयक तक ही बन्ध होता है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम इकतीस सागर कहा है । यहाँ प्रारम्भ और अन्त में बन्ध कराके और मध्य में अबन्धक रखकर यह अन्तरकाल ले आना चाहिए । सातावेदनीय आदिका क्षपक श्र में उत्कृष्ट अनुभागबन्ध होता है, अतः इसके अन्तरका निषेध किया है । तथा इन सब प्रकृतियोंका उपशम मेिं अपनी वन्धव्युच्छित्तिके बाद मरणकी अपेक्षा एक समय और वैसे अन्तर्मुहूर्त अन्तरकाल उपलब्ध होना सम्भव होने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। मनुष्यायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध देवोंके होता है और वहाँ आयुबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है अतः यहाँ मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना कहा है। देवायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मनुष्योंके होता है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। सर्वार्थसिद्धिके देवके मनुष्यगति आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध आयुके प्रारम्भमें और अन्त में हो यह सम्भव है, इसलिए इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर कहा है । देवगतिचतुष्क और आहारकद्विकका क्षपक में उत्कृष्ट अनुभागबन्ध होता है, अतः इसके अन्तरकालका निषेध किया है तथा यहाँ मनुष्योंमें कमसे कम अन्तमुहूर्त अन्तरसे और अधिक से अधिक साधिक तेतीस सागरके अन्तरसे इनका बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तर्मुहूर्त और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है। किन्तु यहाँ आहारकद्विकका अन्तर्मुहूर्त के बाद ही पुनः बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर अन्त मुहूर्त कहा है। मनुष्यगतिके समान वज्रर्षभनाराच संहननके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर घटित कर लेना चाहिए । तथा वज्रर्पभनाराचसंहनन सप्रतिपक्ष प्रकृति है, अतः इसके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है । १. आ० प्रतौ ज० ए० उ० अंतो० इति पाठः । २. ता० प्रतौ तेसीसं । दोश्र (भा) ० ज० ए० उ० अंतो०, आ० प्रतौ तेत्तीसं दोश्र/ ० उ० ज० ए० अंतो० इति पाठ । ओघं० । अब्भवसि० पंचणा० णवदसणा० मिच्छ०- - क० -- पसत्था पसत्य०४ - अगु० - उप०-णिमि०- - पंचंत० उ० ज० ए०, उ० अनंतका० । अणु० ज० ए०, उ० बेसम० । सादासाद०-छण्णोके०पंचिंदि ० - समचदु०० - समचदु० - पर० - उस्सा० - पसत्थ० तस०४ - धिराथिर-सुभासुभ--सुभग-सुस्सरआदे १०- जस० अजस० उ० जाणा० भंगो । अणु० ज० ए० उ० अंतो० । णपुंस०ओरालि० --पंचसंठा० - ओरालि० अंगो०- -छस्संघ० - अप्पस०-- दूभग- - दुस्सर- अणादे -- णीचा० उ० णाणा० भंगो । अणु० ज० ए०, उ० तिण्णि पलि० दे० । तिण्णिआयु०वेउच्चियछ० उक्क० अणु० ज० ए०, उ० अणंतका० । तिरिक्खायु० उ० अणु० ओघं । तिरिक्खगदि-तिरिक्खाणु० - उज्जो० उ णाणा० भंगो । अणु० ज० ए०, उ० एकत्तीसं० सादि० । मणुस०-मणुसाणु० - उच्चा० उ० णाणा० भंगो । अणु० ज० ए०, उ० । असंखेज्जा लोगा । चदुजादि-आदाव-थावरादि०४ उ० णाणा० भंगो । अणु० ज० ए०, उ० तेत्तीसं० सादि० । ५८७ भव्यों में ओघके समान भङ्ग है। अभव्योंमे पाँच ज्ञानावरण, नौ दर्शनावरण, मिथ्यात्व, सोलह कृपाय, भय, जुगुप्सा, तैजमशरीर, कार्मरणशरीर, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघु, उपघात, निर्माण और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है । साता वेदनीय, असाता वेदनीय, छह नोकपाय, पोन्द्रियजाति, समचतुरस्त्र संस्थान, परघात, उच्छ्वास, प्रशस्त विहायोगति, त्रस चतुष्क, स्थिर, अस्थिर, शुभ, अशुभ, सुभग, सुस्वर, आदेय, यशः कीति और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानाबरणके समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है । नपुंसकवंद औदारिकशरीर, पाँच संस्थान, औदारिक आङ्गोपाङ्ग, छह संहनन, अप्रशस्त विहायोगति, दुभंग, दुःस्वर, अनादेय और नीचगांत्र के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरणके समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तीन पल्य है। तीन आयु और वैकियिक छहके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल है। निर्यश्चायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर के समान है। निर्यप्रगति, तिर्यश्वगत्यानुपूर्वी और उद्योतके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक इकतीस सागर है। मनुष्यगति, मनुष्यगत्यानुपूर्वी और उच्चगांत्र के उत्कृष्ट अनुभागवन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर असंख्यात लोकप्रमाण है। चार जाति, आदि चार के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। विशेषार्थ - भव्योंमें आंधके समान व्यवस्था बन जाती है, अतः यह के समान कहा है। अभव्यों में आंधके समान अनन्त कालके अन्तरसे ज्ञानावरणाविका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध १. ता० प्रा० प्रत्योः सतयोक० इति पाठः । ५८८. खड्ग० पंचणा० - अदंसणा० -- असादा० -- चदुसंज० -- पंचणोक० -- अप्पसत्थ०४ - उप० - अथिर-असुभ-अजस० - पंचंत० उ० ज० ए०, उ० तेत्तीसं० सादि० । अणु० ज० ए०, उ० अंतो० । सादादिदंडओ ओघो। अक० उ० णाणा० भंगो । अणु० ओघो। मणुसायु० उ० अणु० ज० ए०, उ० छम्मासं देख० । देवायु० उ० अणु० ज० ए०, उ० पुब्बकोडितिभागा दं० । मणुसगदिपंचम० उ० ज० ए०, उ० तेत्तीसं० देसू० । अणु० ज० ए०, उ० बेसम० । देवगदि ०४ - आहारदु० उ० णत्थि अंतरं । अणु० ज० अंतो०, उ० तेत्तीसं० सादि० । सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अनन्तकाल कहा है। एक तिर्यवायुको छोड़कर अन्य सब प्रकृतियोंके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह अन्तर प्राप्त होता है, अतः वह ज्ञानावरण के समान कहा है। सातावेदनीय आदि सब परावर्तमान प्रकृतियाँ है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। नपुंसकवेद आदिका भोगभूमिमें पर्याप्त अवस्था में बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध का उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तीन पल्य वहा है। एकेन्द्रिय अवस्था में अनन्तकाल तक तीन आयु और वैकियिक छहका बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल कहा है । तिर्यवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अनन्तकाल तथा अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर सौ सागर पृथक्त्वप्रमाण ओघसे कह आये हैं । वह यहाँ सम्भव होने से आंधके समान कहा है। नौवें मैवेयक में और अन्तमुहूर्त काल तक आगे पीछे तिर्यश्चगतित्रिकका बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक इकतीस सागर कहा है। अग्निकायिक और वायुकायिक जीवोंके मनुष्यगतित्रिकका बन्ध कहीं होता और इनकी उत्कृष्ट कायस्थिति असंख्यात लोकप्रमाण है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर असंख्य लोकप्रमाण कहा है । चार जाति आदिका नरक और अन्तर्मुहूर्त तक आगे पीछे बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है । ५८८. क्षायिकसम्यक्त्वमें पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, असातावेदनीय, चार संज्वलन, पाँच नोकपाय, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, उपघात, अस्थिर, अशुभ, यशः कीर्ति और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है । सातादिदण्डकका भङ्ग ओघके समान है। ठकपायोंक उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका भङ्ग ओघके समान है। मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है। देवायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर पूर्वकोटिका, कुछ कम त्रिभागप्रमाण है। मनुष्यगतिपञ्चकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगति चतुष्क और आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तमुहूर्त है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। विशेषार्थ- क्षायिक सम्यक्त्वका उत्कृष्ट काल साधिक तेतीस सागर है। इसके प्रारम्भ में अन्तर परूषणा ५८६. वेदगे पंचणा० -छदंसणा०-चदुसंज०- पुरिस० --भय-दु०- अप्पसत्य०४. उप० - पंचंत० उ० अणु० णत्थि अंतरं । सादा० - थिर- सुभ-जस० उ० ज० ए०, उ० छावहि० देसू० सत्थाणे । अथवा णत्थि अंतरं । यदि दसणमोहक्खवगस्स उकस्ससामित्ते' त्थि अंतरं । अधापवत्तसंजदस्स कीरदि तदो छावहि सा० देस० । अणु० ज० ए०, उ० अंती० । असादा० अरदि० - सोग०-अथिर-असुभ-अजस० उ० णत्थि अंतरं । अणु० सादभंगो । अट्ठक० उ० णत्थि अंतरं । अणु० ओघं । णवरि ज० और अन्त में यथा सम्भव पाँच ज्ञानावरणादिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और बीचमं न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है। अन्य जिन प्रकृतियोंका यह अन्तर कहा है वह इसी प्रकार घटित कर लेना चाहिए । मात्र देवगति आदिके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह अन्तर लाते समय बीचमें उनका बन्ध न करावे । उसमें भी देवगतिचतुष्क और आहारकद्विककी उपशमश्रेणिमें बन्धव्युच्छित्ति करावे और अन्तर्मुहूर्तकालतक वहाँ रखकर इनका बन्ध होने के पहले मरण करावे । तथा तेतीस सागर तक देवपर्याय में रखकर देवगतिचतुष्कका तो मनुष्य होने के प्रथम समय से बन्ध करावे और आहारककिका अप्रमत्तसंयन होनेपर बन्ध करावे । यहाँ भी अधिकाल बाद संयम धारण करावे । पाँच ज्ञानावरणादिका उपशमश्रेणिमे कमसे कम एक समयतक और अधिकतमुहूर्ततक बन्ध न होनेसे तथा असतावेदनीय आदिका इसके पूर्व बन्ध न होने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है। किन्तु जिसने सातवेदनीय आदिपरावर्तमान प्रकृतियों की छठे गुणस्थानमें बन्धव्युच्छित्ति की है उसे अप्रमत्तमंत होने के बाद उपशमश्रेणिमे ले जाकर पुनः उतारकर इनका बन्ध करात्रें और जघन्य अन्तर एक समय परावर्तन द्वारा प्राप्त करे । सातादण्डकमें सातावेदनीय, पचेन्द्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मणशरीर, समचतुरस्त्रसंस्थान, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक प्रशस्त विहायोगति, वसचतुष्क, स्थिर आदि छह, निर्माण और तीर्थकर ये प्रकृतियाँ ली गई हैं। इनको अन्तर कहा है वह यहाँ बन जानेसे यह ओघके समान कहा हैं । आठ कपायोंके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका ओघ से जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम एक पूर्वकोटि कहा है । वह यहाँ भी घटित होता है, अतः यह ओघके समान कहा हैं । यहां मनुष्यायृका देवोंके और देवायुका मनुष्योंके बन्च होता है। अतः मूलमें जो अन्तर कहा है उसकी स्वामित्वके अनुसार संगति बिठा लेनी चाहिए । सर्वार्थसिद्धि प्रारम्भ और अन्तमें मनुष्यगतिपञ्चकका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और मध्य में न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर कहा है । ५८६. वेदकसम्यक्त्व में पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, चार संज्वलन, पुरुषवेद, भय, जुगुप्सा, अप्रशस्त वर्णचार, उपघात और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। सातावेदनीय, स्थिर, शुभ और यशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर स्वस्थानमें कुछ कम छपासठ सागर है। श्रथवा अन्तर काल नहीं है। यदि दर्शनमोहनीयके क्षपकके उत्कृष्ट स्वामित्व करते हैं तो अन्तरकाल नहीं है। और अधःप्रवृत्त के करते हैं तो कुछ कम छग्रासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है । असातावेदनीय, अरति, शोक, अस्थिर, अशुभ और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध का भङ्ग सातावेदनीयके समान है। आठ कपायोंके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। १. ता० प्रती उक्चर ससामित इति पाठः । अंतो० । हस्स-रदि उ० ज० ए०, उ० छावहि० दे० । अणु० ज० ए०, उ० अंतो० । दोआयु० उ० ज० ए०, उ० छावहि० दे० । अणु० ज० ए०, उ० तेत्तीसं० सादि ० । मणुसगदिपंचग० उ० ज० ए०, उ० छावद्वि० दे० । अणु० ज० ए० उ० पुन्चकोडी सादि० । देवगदि०४ - आहारदु० उ० मणुसगदिभंगो । अणु० ज० ए०, उ० तेत्तीसं सा० । णवरि आहारदुगं तेत्तीसं सादि० । पंचिदि० तेजा० क० - समचदु०-पसत्य०४अगु०३ - पसत्थ० तस०४ - सुभग सुस्सर आदे० --णिमि० - तित्थ० -- उच्चा० उ० णत्थि अंतरं । अथवा तेत्तीसं० सादि०, छावद्वि० देसू० । अणु० ए ० । अथवा ज० ए०, उ० बेसम० । समान है। इतनी विशेषता है कि जघन्य अन्तर अन्त मुहूर्त है । हास्य और रतिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। दो के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जवन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तैतीस सागर है। मनुष्यगतिपञ्चकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जवम्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक एक पूर्वकोटि हैं। देवगतिचतुक और आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका भङ्ग मनुष्यगतिके समान है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर तेतीस सागर है। इतनी विशेषता है कि आहारकद्विकका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। पञ्चन्द्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मणशरीर, समचतुरस्त्र संस्थान, प्रशस्त वरणचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, त्रसचतुष्क, सुभग, सुस्वर, आदेय, निर्माण, तीर्थंकर और उच्चगोत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अथवा साधिक तेतीस सागर और कुछ कम छयासठ सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर एक समय है। अथवा जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है । विशेपार्थ- वेदकसम्यक्त्वमें ज्ञानावरणादिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मिथ्यात्वके अभिमुख हुए जीवके होता है, अतः इनके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया । वेदकसम्यक्त्व के प्रारम्भ में और अन्त में सातादिकका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और मध्य में न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर कहा है। अन्य जिन प्रकृतियोंका यह अन्तर कहा है वह भी इसी प्रकार घटित करना चाहिए किन्तु यह अन्तर स्वस्थान की अपेक्षा कहा है। अर्थात् स्वस्थान अधःप्रवृत्तसंयत यदि उत्कृष्ट अनुभागबन्ध करता है तो ही जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर बनता है। और यदि दर्शनमोहनीय की क्षपणा करनेवाला उत्कृष्ट स्वामित्व करता है तो इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल सम्भव नहीं है। तथा ये परावर्तमान प्रकृतियाँ हैं, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमु हूर्त कहा है। मसातावेदनीय आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मिथ्यात्वके अभिमुख हुए जीवके अन्तिम समय में होता है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरकालका निषेध किया है। तथा परा१. ता० प्रा० प्रत्योः छावहि दो आ० ए० इति पाठ ।
महायधे अणुभागबंधाहियारे णोकशून्य मणुसशून्य ओरालिशून्य अंगोशून्य- वज्जरिशून्य-मणुसाणुशून्य - अथिर-असुभ-अजसशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, सत्तर बे सागशून्य सादिशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । तिरिक्ख-मणुसायुशून्य देवभंगो । देवायुशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसमशून्य । देवगदि चार उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसागशून्य सादिशून्य । तेजाशून्य केशून्य आहारशून्य दुगपसत्य चार - अगुतीन - बादर-पज्जत - पत्ते शून्य -- णिमिशून्य -- तित्थशून्य उशून्य पत्थि अंतरं । अणुशून्य एगशून्य । पम्माए पढमदंड ओरालियअंगोवंगो भाणिदव्वो । पंचिदिशून्य - तसशून्य वेडब्बिशून्य भंगो' । सेसं तेजशून्य भंगो । । मनुष्यगति, औदारिकशरीर , वर्षभनाराच संहनन, मनुष्यगत्यानुपूर्वी, अस्थिर, अशुभ और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धक। जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है । तिर्यश्चायु और मनुष्यायुका भङ्ग देवोंके समान है। देवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगतिचतुष्क के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर काल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर है। तैजसशरीर, कामरणशरीर, आहारकद्विक, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, बादर, पर्याप्त, प्रत्येक, निर्माण और तीर्थकरके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर काल एक समय है। पद्मलेश्या में प्रथम दण्डकमें औदारिक कहलाना चाहिए । पञ्चन्द्रिय जाति और त्रसका भङ्ग वैकियिकशरीरके समान है। तथा शेप भङ्ग पीतलेश्या के समान है। षिशेषार्थ-प्रथम दण्डक और दूसरे दण्डक में कही गई प्रकृतियोंका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध पीतलेश्याक प्रारम्भमें और अन्त में हो और मध्यमे न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर कहा है, तथा स्त्यानमृद्धिका बन्ध सम्यग्दृष्टिके नहीं होता, अतः आदिमें और अन्त में मिथ्यादृष्टि रखकर इनका बन्ध कराने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका भी उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर बन जाता है। सातावेदनीय आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध ऐसे अप्रमत्तसंगत के होता है जो आगे बढ़ रहा है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया है । तथा ये परावर्तमान प्रकृतियां हैं, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमु हूत कहा है। इसी प्रकार असतावेदनीय आदिके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर काल घाटत कर लेना चाहिए। तथा इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर ज्ञानावरणके समान घटित कर लेना चाहिए । देवोंके तिर्यवायु और मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना घटित करके बतला आये हैं । वह यहाँ भी बन जाता है, अतः देवोके समान कहा है । देवायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध अप्रमत्तसंयतके होता है और यहां पीतलेश्याका काल अन्तर्मुहूर्त है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कह । है । देवगत चारक उत्कृष्ट अनुभागबन्धका स्वामी सातावेदनीयके समान है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागधन्ध के अन्तरका निपध किया है। तथा सम्यग्दृष्टि मनुष्य के साधिक एक. भाशून्य प्रतौ उशून्य बेस• सागशून्य तेजाकशून्य इति पाठः । दो. भाशून्य प्रतौ पढमदंडयो इति पाठः । तीन. ताशून्य प्रतौ तेऊभंगो इति पाठः । पाँच सौ छियासी. सुक्काए पंचणाशून्य -छदसणाशून्य - असादा शून्य - बारसकशून्य-सत्तणोकशून्य-अप्पसत्यचारउपशून्य - अथिर--असुभ - अजसशून्य -- पंचंतशून्य उशून्य जशून्य एशून्य उशून्य अहारससाशून्य सादिशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । थीणगिद्धितीन - मिच्छशून्य - अणंताणुचार - इत्थिशून्य णस पंचसंठा शून्य-पंचसंघशून्य--अप्पसत्थशून्य-दूर्भाग--दुस्सर--अणादेशून्य -- णीचाशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अहारससाशून्य सादिशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य एकत्तीसंशून्य देसूशून्य । सादा शून्य -- पंचिंदिशून्यतेजाशून्य- - कशून्य - समचदुशून्य - पसत्थचार - अगुतीन-पसत्थविशून्य -- तसचार - थिरा दिछशून्य - णिमिशून्यतित्थशून्य उच्चाशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य जशून्य एशून्य उशून्य अंतोशून्य । मणुमायुशून्य उशून्य अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छम्मासं देनू शून्य । देवायुशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उक्कशून्य अंतो शून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसमशून्य । मणुसशून्य ओरालिशून्य ओरालिशून्य अंगोशून्य- मणुसायुशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसं देमूशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसशून्य । देवगदि चार उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य जशून्य अंतोशून्य, दो सागरके अन्तरसे इनका बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक दो सागर कहा है। देवगतिके समान तैजसशरीर आदिके उत्कृष्ट अनुभाग बन्धका स्वामी है, अतः इनके भी उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया है। तथा इनका उत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह काल एक समय है अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर एक समय कहा है । पद्मलेश्या में औदारिकशरीर के साथ औदारिक आङ्गोपाङ्गका नियमसे बन्ध होता है, क्योंकि इसके एकेन्द्रियजाति और स्थावरका बन्ध नहीं होता, अतः यहां औदारिक आङ्गोपाङ्गको प्रथम दण्डकमें परिगणित करनेको कहा है। तथा पेन्द्रियजाति और त्रसका भी नियमसे बन्ध होता है, अतः इनका अन्तर वैकियिकशरीर के समान प्राप्त होनेसे उसके साथ इनकी परिगणना की है। शेष स्पष्ट ही है । पाँच सौ छियासी. शुक्ललेश्यामें पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, असातावेदनीय, बारह कपाय, सात नोकपाय, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, उपघात, अस्थिर, अशुभ, अयशः कीर्ति और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। स्त्यानगृद्धि तीन, मिथ्यात्व, अनन्तानुबन्धी चार, स्त्रीवेद, नपुंसकवेद, पाँच संस्थान, पाँच संहनन, अप्रशस्त विहायोगति, दुर्भग, दुःस्वर, अनादेय और नीचगांत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम इकतीस सागर है। सातावेदनीय, पचोद्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मरणशरीर, समचतुरस्र संस्थान, प्रशस्त वर्ण चतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, सचतुष्क, स्थिर आदि छह, निर्माण, तीर्थकर और उच्चगोत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है। देवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। मनुष्यगति औदारिकशरीर, औदारिक आङ्गोपन और मनुष्यगत्यानुपूर्वीके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका एक. आशून्य प्रतीशून्य एशून्य अंतो• इति पाः । छियालीस उशून्य तेतीसंशून्य सादिशून्य । आहारदुगशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य जशून्य उशून्य अंतो शून्य । बज्जरिशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसं [ देसूशून्य ] । [ अणुशून्य ] जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगतिचतुष्क के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तमुहूर्त है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तराल नहीं है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। वज्रर्षभनाराच संहननके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम अन्तमुहूर्त है । विशेषार्थ - शुक्ललेश्या में पाँच ज्ञानावरणादिका व स्त्यानगृद्धि तीन आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध सहस्रार कल्प तक होता है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक अठारह सागर कहा है। तथा प्रथम दण्डकोक्त पाँच ज्ञानावरणादिका उपशमश्र रिकी अपेक्षा और असतावेदनीय आदि प्रकृतियोंके परावर्तमान होने के कारण इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है। तथा दूसरे दण्डकमें कही गई प्रकृतियोंका अन्तिम ग्रैवेयक तक ही बन्ध होता है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम इकतीस सागर कहा है । यहाँ प्रारम्भ और अन्त में बन्ध कराके और मध्य में अबन्धक रखकर यह अन्तरकाल ले आना चाहिए । सातावेदनीय आदिका क्षपक श्र में उत्कृष्ट अनुभागबन्ध होता है, अतः इसके अन्तरका निषेध किया है । तथा इन सब प्रकृतियोंका उपशम मेिं अपनी वन्धव्युच्छित्तिके बाद मरणकी अपेक्षा एक समय और वैसे अन्तर्मुहूर्त अन्तरकाल उपलब्ध होना सम्भव होने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। मनुष्यायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध देवोंके होता है और वहाँ आयुबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है अतः यहाँ मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना कहा है। देवायुका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मनुष्योंके होता है, अतः इसके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। सर्वार्थसिद्धिके देवके मनुष्यगति आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध आयुके प्रारम्भमें और अन्त में हो यह सम्भव है, इसलिए इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर कहा है । देवगतिचतुष्क और आहारकद्विकका क्षपक में उत्कृष्ट अनुभागबन्ध होता है, अतः इसके अन्तरकालका निषेध किया है तथा यहाँ मनुष्योंमें कमसे कम अन्तमुहूर्त अन्तरसे और अधिक से अधिक साधिक तेतीस सागरके अन्तरसे इनका बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तर्मुहूर्त और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है। किन्तु यहाँ आहारकद्विकका अन्तर्मुहूर्त के बाद ही पुनः बन्ध सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर अन्त मुहूर्त कहा है। मनुष्यगतिके समान वज्रर्षभनाराच संहननके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर घटित कर लेना चाहिए । तथा वज्रर्पभनाराचसंहनन सप्रतिपक्ष प्रकृति है, अतः इसके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है । एक. आशून्य प्रतौ जशून्य एशून्य उशून्य अंतोशून्य इति पाठः । दो. ताशून्य प्रतौ तेसीसं । दोश्र शून्य जशून्य एशून्य उशून्य अंतोशून्य, आशून्य प्रतौ तेत्तीसं दोश्र/ शून्य उशून्य जशून्य एशून्य अंतोशून्य इति पाठ । ओघंशून्य । अब्भवसिशून्य पंचणाशून्य णवदसणाशून्य मिच्छशून्य- - कशून्य -- पसत्था पसत्यचार - अगुशून्य - उपशून्य-णिमिशून्य- - पंचंतशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अनंतकाशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसमशून्य । सादासादशून्य-छण्णोकेशून्यपंचिंदि शून्य - समचदुशून्य - समचदुशून्य - परशून्य - उस्साशून्य - पसत्थशून्य तसचार - धिराथिर-सुभासुभ--सुभग-सुस्सरआदे दस- जसशून्य अजसशून्य उशून्य जाणाशून्य भंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य उशून्य अंतोशून्य । णपुंसशून्यओरालिशून्य --पंचसंठाशून्य - ओरालिशून्य अंगोशून्य- -छस्संघशून्य - अप्पसशून्य-- दूभग- - दुस्सर- अणादे -- णीचाशून्य उशून्य णाणाशून्य भंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तिण्णि पलिशून्य देशून्य । तिण्णिआयुशून्यवेउच्चियछशून्य उक्कशून्य अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अणंतकाशून्य । तिरिक्खायुशून्य उशून्य अणुशून्य ओघं । तिरिक्खगदि-तिरिक्खाणुशून्य - उज्जोशून्य उ णाणाशून्य भंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य एकत्तीसंशून्य सादिशून्य । मणुसशून्य-मणुसाणुशून्य - उच्चाशून्य उशून्य णाणाशून्य भंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य । असंखेज्जा लोगा । चदुजादि-आदाव-थावरादिचार उशून्य णाणाशून्य भंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसंशून्य सादिशून्य । पाँच सौ सत्तासी भव्यों में ओघके समान भङ्ग है। अभव्योंमे पाँच ज्ञानावरण, नौ दर्शनावरण, मिथ्यात्व, सोलह कृपाय, भय, जुगुप्सा, तैजमशरीर, कार्मरणशरीर, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघु, उपघात, निर्माण और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है । साता वेदनीय, असाता वेदनीय, छह नोकपाय, पोन्द्रियजाति, समचतुरस्त्र संस्थान, परघात, उच्छ्वास, प्रशस्त विहायोगति, त्रस चतुष्क, स्थिर, अस्थिर, शुभ, अशुभ, सुभग, सुस्वर, आदेय, यशः कीति और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानाबरणके समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त है । नपुंसकवंद औदारिकशरीर, पाँच संस्थान, औदारिक आङ्गोपाङ्ग, छह संहनन, अप्रशस्त विहायोगति, दुभंग, दुःस्वर, अनादेय और नीचगांत्र के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरणके समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तीन पल्य है। तीन आयु और वैकियिक छहके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल है। निर्यश्चायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर के समान है। निर्यप्रगति, तिर्यश्वगत्यानुपूर्वी और उद्योतके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक इकतीस सागर है। मनुष्यगति, मनुष्यगत्यानुपूर्वी और उच्चगांत्र के उत्कृष्ट अनुभागवन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर असंख्यात लोकप्रमाण है। चार जाति, आदि चार के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर ज्ञानावरण के समान है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। विशेषार्थ - भव्योंमें आंधके समान व्यवस्था बन जाती है, अतः यह के समान कहा है। अभव्यों में आंधके समान अनन्त कालके अन्तरसे ज्ञानावरणाविका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध एक. ताशून्य प्राशून्य प्रत्योः सतयोकशून्य इति पाठः । पाँच सौ अठासी. खड्गशून्य पंचणाशून्य - अदंसणाशून्य -- असादाशून्य -- चदुसंजशून्य -- पंचणोकशून्य -- अप्पसत्थचार - उपशून्य - अथिर-असुभ-अजसशून्य - पंचंतशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसंशून्य सादिशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । सादादिदंडओ ओघो। अकशून्य उशून्य णाणाशून्य भंगो । अणुशून्य ओघो। मणुसायुशून्य उशून्य अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छम्मासं देखशून्य । देवायुशून्य उशून्य अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य पुब्बकोडितिभागा दंशून्य । मणुसगदिपंचमशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसंशून्य देसूशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य बेसमशून्य । देवगदि चार - आहारदुशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य जशून्य अंतोशून्य, उशून्य तेत्तीसंशून्य सादिशून्य । सम्भव है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अनन्तकाल कहा है। एक तिर्यवायुको छोड़कर अन्य सब प्रकृतियोंके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह अन्तर प्राप्त होता है, अतः वह ज्ञानावरण के समान कहा है। सातावेदनीय आदि सब परावर्तमान प्रकृतियाँ है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त कहा है। नपुंसकवेद आदिका भोगभूमिमें पर्याप्त अवस्था में बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध का उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तीन पल्य वहा है। एकेन्द्रिय अवस्था में अनन्तकाल तक तीन आयु और वैकियिक छहका बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर अनन्त काल कहा है । तिर्यवायुके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अनन्तकाल तथा अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर सौ सागर पृथक्त्वप्रमाण ओघसे कह आये हैं । वह यहाँ सम्भव होने से आंधके समान कहा है। नौवें मैवेयक में और अन्तमुहूर्त काल तक आगे पीछे तिर्यश्चगतित्रिकका बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक इकतीस सागर कहा है। अग्निकायिक और वायुकायिक जीवोंके मनुष्यगतित्रिकका बन्ध कहीं होता और इनकी उत्कृष्ट कायस्थिति असंख्यात लोकप्रमाण है, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर असंख्य लोकप्रमाण कहा है । चार जाति आदिका नरक और अन्तर्मुहूर्त तक आगे पीछे बन्ध नहीं होता, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है । पाँच सौ अठासी. क्षायिकसम्यक्त्वमें पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, असातावेदनीय, चार संज्वलन, पाँच नोकपाय, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, उपघात, अस्थिर, अशुभ, यशः कीर्ति और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है । सातादिदण्डकका भङ्ग ओघके समान है। ठकपायोंक उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तर ज्ञानावरण के समान है और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका भङ्ग ओघके समान है। मनुष्यायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छह महीना है। देवायुके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर पूर्वकोटिका, कुछ कम त्रिभागप्रमाण है। मनुष्यगतिपञ्चकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है। देवगति चतुष्क और आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर अन्तमुहूर्त है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। विशेषार्थ- क्षायिक सम्यक्त्वका उत्कृष्ट काल साधिक तेतीस सागर है। इसके प्रारम्भ में अन्तर परूषणा पाँच सौ छियासी. वेदगे पंचणाशून्य -छदंसणाशून्य-चदुसंजशून्य- पुरिसशून्य --भय-दुशून्य- अप्पसत्यचार. उपशून्य - पंचंतशून्य उशून्य अणुशून्य णत्थि अंतरं । सादाशून्य - थिर- सुभ-जसशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छावहिशून्य देसूशून्य सत्थाणे । अथवा णत्थि अंतरं । यदि दसणमोहक्खवगस्स उकस्ससामित्ते' त्थि अंतरं । अधापवत्तसंजदस्स कीरदि तदो छावहि साशून्य देसशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतीशून्य । असादाशून्य अरदिशून्य - सोगशून्य-अथिर-असुभ-अजसशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य सादभंगो । अट्ठकशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अणुशून्य ओघं । णवरि जशून्य और अन्त में यथा सम्भव पाँच ज्ञानावरणादिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और बीचमं न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर कहा है। अन्य जिन प्रकृतियोंका यह अन्तर कहा है वह इसी प्रकार घटित कर लेना चाहिए । मात्र देवगति आदिके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका यह अन्तर लाते समय बीचमें उनका बन्ध न करावे । उसमें भी देवगतिचतुष्क और आहारकद्विककी उपशमश्रेणिमें बन्धव्युच्छित्ति करावे और अन्तर्मुहूर्तकालतक वहाँ रखकर इनका बन्ध होने के पहले मरण करावे । तथा तेतीस सागर तक देवपर्याय में रखकर देवगतिचतुष्कका तो मनुष्य होने के प्रथम समय से बन्ध करावे और आहारककिका अप्रमत्तसंयन होनेपर बन्ध करावे । यहाँ भी अधिकाल बाद संयम धारण करावे । पाँच ज्ञानावरणादिका उपशमश्रेणिमे कमसे कम एक समयतक और अधिकतमुहूर्ततक बन्ध न होनेसे तथा असतावेदनीय आदिका इसके पूर्व बन्ध न होने से इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमुहूर्त कहा है। किन्तु जिसने सातवेदनीय आदिपरावर्तमान प्रकृतियों की छठे गुणस्थानमें बन्धव्युच्छित्ति की है उसे अप्रमत्तमंत होने के बाद उपशमश्रेणिमे ले जाकर पुनः उतारकर इनका बन्ध करात्रें और जघन्य अन्तर एक समय परावर्तन द्वारा प्राप्त करे । सातादण्डकमें सातावेदनीय, पचेन्द्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मणशरीर, समचतुरस्त्रसंस्थान, प्रशस्त वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक प्रशस्त विहायोगति, वसचतुष्क, स्थिर आदि छह, निर्माण और तीर्थकर ये प्रकृतियाँ ली गई हैं। इनको अन्तर कहा है वह यहाँ बन जानेसे यह ओघके समान कहा हैं । आठ कपायोंके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका ओघ से जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम एक पूर्वकोटि कहा है । वह यहाँ भी घटित होता है, अतः यह ओघके समान कहा हैं । यहां मनुष्यायृका देवोंके और देवायुका मनुष्योंके बन्च होता है। अतः मूलमें जो अन्तर कहा है उसकी स्वामित्वके अनुसार संगति बिठा लेनी चाहिए । सर्वार्थसिद्धि प्रारम्भ और अन्तमें मनुष्यगतिपञ्चकका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और मध्य में न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम तेतीस सागर कहा है । पाँच सौ छियासी. वेदकसम्यक्त्व में पाँच ज्ञानावरण, छह दर्शनावरण, चार संज्वलन, पुरुषवेद, भय, जुगुप्सा, अप्रशस्त वर्णचार, उपघात और पाँच अन्तरायके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। सातावेदनीय, स्थिर, शुभ और यशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर स्वस्थानमें कुछ कम छपासठ सागर है। श्रथवा अन्तर काल नहीं है। यदि दर्शनमोहनीयके क्षपकके उत्कृष्ट स्वामित्व करते हैं तो अन्तरकाल नहीं है। और अधःप्रवृत्त के करते हैं तो कुछ कम छग्रासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है । असातावेदनीय, अरति, शोक, अस्थिर, अशुभ और अयशः कीर्तिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध का भङ्ग सातावेदनीयके समान है। आठ कपायोंके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। एक. ताशून्य प्रती उक्चर ससामित इति पाठः । अंतोशून्य । हस्स-रदि उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छावहिशून्य देशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य अंतोशून्य । दोआयुशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छावहिशून्य देशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसंशून्य सादि शून्य । मणुसगदिपंचगशून्य उशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य छावद्विशून्य देशून्य । अणुशून्य जशून्य एशून्य उशून्य पुन्चकोडी सादिशून्य । देवगदिचार - आहारदुशून्य उशून्य मणुसगदिभंगो । अणुशून्य जशून्य एशून्य, उशून्य तेत्तीसं साशून्य । णवरि आहारदुगं तेत्तीसं सादिशून्य । पंचिदिशून्य तेजाशून्य कशून्य - समचदुशून्य-पसत्यचारअगुतीन - पसत्थशून्य तसचार - सुभग सुस्सर आदेशून्य --णिमिशून्य - तित्थशून्य -- उच्चाशून्य उशून्य णत्थि अंतरं । अथवा तेत्तीसंशून्य सादिशून्य, छावद्विशून्य देसूशून्य । अणुशून्य ए शून्य । अथवा जशून्य एशून्य, उशून्य बेसमशून्य । समान है। इतनी विशेषता है कि जघन्य अन्तर अन्त मुहूर्त है । हास्य और रतिके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त है। दो के उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जवन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक तैतीस सागर है। मनुष्यगतिपञ्चकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका जवम्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर है। अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर साधिक एक पूर्वकोटि हैं। देवगतिचतुक और आहारकद्विकके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका भङ्ग मनुष्यगतिके समान है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर तेतीस सागर है। इतनी विशेषता है कि आहारकद्विकका उत्कृष्ट अन्तर साधिक तेतीस सागर है। पञ्चन्द्रियजाति, तैजसशरीर, कार्मणशरीर, समचतुरस्त्र संस्थान, प्रशस्त वरणचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, त्रसचतुष्क, सुभग, सुस्वर, आदेय, निर्माण, तीर्थंकर और उच्चगोत्रके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल नहीं है। अथवा साधिक तेतीस सागर और कुछ कम छयासठ सागर है । अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य और उत्कृष्ट अन्तर एक समय है। अथवा जघन्य अन्तर एक समय है और उत्कृष्ट अन्तर दो समय है । विशेपार्थ- वेदकसम्यक्त्वमें ज्ञानावरणादिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मिथ्यात्वके अभिमुख हुए जीवके होता है, अतः इनके उत्कृष्ट और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरका निषेध किया । वेदकसम्यक्त्व के प्रारम्भ में और अन्त में सातादिकका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध हो और मध्य में न हो यह सम्भव है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर कहा है। अन्य जिन प्रकृतियोंका यह अन्तर कहा है वह भी इसी प्रकार घटित करना चाहिए किन्तु यह अन्तर स्वस्थान की अपेक्षा कहा है। अर्थात् स्वस्थान अधःप्रवृत्तसंयत यदि उत्कृष्ट अनुभागबन्ध करता है तो ही जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर कुछ कम छयासठ सागर बनता है। और यदि दर्शनमोहनीय की क्षपणा करनेवाला उत्कृष्ट स्वामित्व करता है तो इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धका अन्तरकाल सम्भव नहीं है। तथा ये परावर्तमान प्रकृतियाँ हैं, अतः इनके अनुत्कृष्ट अनुभागबन्धका जघन्य अन्तर एक समय और उत्कृष्ट अन्तर अन्तमु हूर्त कहा है। मसातावेदनीय आदिका उत्कृष्ट अनुभागबन्ध मिथ्यात्वके अभिमुख हुए जीवके अन्तिम समय में होता है, अतः इनके उत्कृष्ट अनुभागबन्धके अन्तरकालका निषेध किया है। तथा पराएक. ताशून्य प्राशून्य प्रत्योः छावहि दो आशून्य एशून्य इति पाठ ।
कॉकटेल पार्टी में शिल्पा के स्टाइल में साड़ी ड्रैप करके आप सब की वाहवाही लूट सकती हैं। ये साड़ी आजकल ट्रेंड में है। अगर आपकी भी है शिल्पा जैसी फिगर तो इसे अपने वार्डरोब में शामिल करें। शिल्पा ने रेड कलर की ये बनारसी साड़ी करवाचौथ के मौके पर पहुंची है। लड़कियों को हल्की और लाइट वेट की साड़िया ही पसंद आती है। पफ ब्लाउज के साथ येलो कलर की इस साड़ी में शिल्पा गजब ढा रही हैं। हल्दी फंक्शन के लिए ये साड़ी बेस्ट रहेगी। व्हाइट कलर पर पोल्का डाउट वाली ये साड़ी किसी भी उम्र की महिलाओं पर अच्छे लगते हैं।
कॉकटेल पार्टी में शिल्पा के स्टाइल में साड़ी ड्रैप करके आप सब की वाहवाही लूट सकती हैं। ये साड़ी आजकल ट्रेंड में है। अगर आपकी भी है शिल्पा जैसी फिगर तो इसे अपने वार्डरोब में शामिल करें। शिल्पा ने रेड कलर की ये बनारसी साड़ी करवाचौथ के मौके पर पहुंची है। लड़कियों को हल्की और लाइट वेट की साड़िया ही पसंद आती है। पफ ब्लाउज के साथ येलो कलर की इस साड़ी में शिल्पा गजब ढा रही हैं। हल्दी फंक्शन के लिए ये साड़ी बेस्ट रहेगी। व्हाइट कलर पर पोल्का डाउट वाली ये साड़ी किसी भी उम्र की महिलाओं पर अच्छे लगते हैं।
श्रीमान प्रधान सेवक श्री नरेंद्र भाई मोदी जी, मै उत्तरप्रदेश का एक पेट्रोल पंप व्यवसाय करने वाला एक व्यापारी हूँ व् आपसे कहना चाहूँगा की पंप व्यवसाय एक उपवास में चल रहा है व् जीविका हेतु भी बहमुश्किल हो रहा है और यह स्तिथि काफी समय से चली आरही है व् छोटे व्यवसाय या कहना चाहूँगा की जो पंप धारक महीने में 50 किलो से 150 किलो तक है, उनके सामने जीविका का काफी समस्या है व् मिनिस्ट्री के प्रधान व् खुद मिनिस्ट्री इस तरफ कुछ करने में असफल रही है पिछले 2 साल के अंतराल में, बड़ा दुःख होता है यह कहते हुए आप जैसा नेतृत्व व् पंप व्यवसाय जैसा काम भी एक प्रशन चिन्ह की तरह रह गया है। आगे कहना चाहूँगा की हम 21वि सदी में जीविका कर रहे है व् सरकारी अमला 7व वेतन आयोग लेकर आया है,मै किसी बात पर कताशक नहीं करना चाहता पर, हम पंप व्यापारियो का कॉमिशन 1रुपया डीजल व् 2 रुपया पेट्रोल है और इसमें भी काफी खर्चे अभी जुड़े हुआ नहीं है। कहना चाहूँगा की आप की प्रणाली में यह कॉमिशन कुछ भी नहीं है व् तेल कंपनिया भी डीलरो को सही मात्रा में तेल देने में असमर्थ है,क्योंकि डीलरो को तेल में तेल पूरा नहीं मिलता,क्योंकि पूरी सप्लाई व्यवस्था चरमराई हुई है व् डीलर इस बात पर परेशान है। आगे डीलर को दूसरे राज्यो में कम कीमत का तेल होने से, तेल का आवागमन व् घटती बिक्री भी एक कारण है व् कंपनी इस पर कोई संज्ञान राज्य स्तर पर नहीं लेती और डीलरो को अकेला छोड़ दिया जाता है।आगे कहना चाहूँगा की डीलर इस व्यवसाय को छोड़ भी नहीं सकता क्योंकि कंपनी ने डीलर की कीमती ज़मीन किराये पर ली होती है जो की डीलर को सुनहरे सपने दिखा कर व् सही बिक्री दिखा कर कम किराये पर ले ली गई होती है,जो की कंपनी कभी छोड़ती नहीं है,जो की अपने आप में दुःख का विषय है। आगे डीलर का कॉमिशन इतना कम है की 50किलो से 150 किलो तक बेचने वाला डीलर अगर उसके पास और कोई व्यवस्था न हो तो बैंक के क़र्ज़ की किस्त तक नहीं दे पाता, इस विषय में पिछले 2 साल से कॉमिशन सही रूप से बढ़ने व् पेट्रोल व् डीजल की बिक्री अनुसार जिनका सेल कम है उनको ज़्यादा प्रदान करने या कम से कम 5रुपया पेट्रोल व् 3 रुपया डीजल करने हेतु काफी सुझाव दे दिए गए है,पर दुःख होता है की इस पर कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है व् इसमें कंपनी के अधिकारी काफी अछी तँखुऔ पर है व् डीलर हेतु कुछ भी नहीं सोचा जा रहा है। आपसे कहना चाहूँगा की ऊपर बताई गई परेशानी की वजह से कई डीलर या तो गलत तरह से बेईमानी करके अपना व्यापन करते है व् जो नहीं करते वो बंदी की कगार पर है व् मानसिक रूप से प्रताड़ित है। जो की चिंता का विषय है, हक़ीक़त में हर कोई पंप व्यवसाई को चोर की नज़रो से देखता है व् वो ऐसा किस लिए करता है,उसके पीछे का कारण जो है उसको कोई ठीक करने को तैयार नहीं है,कारण ऊपर आपके सामने है। आपका स्वच्छ भारत अभियान आया बहुत अच्छा लगा भागीदारी देकर पर कंपनी के अधिकारी प्रताड़ित करते है व् जुर्माने के तौर पर 10000 रुपया तक लिया जाता है,जब की पंप पर जो कॉमिशन यह कह के दिया गया था की इससे आप एक आदमी टॉयलेट की सफाई हेतु रखेंगे वो नाकाफी है एक कम सेल वाले पुम्पो पर इस तरह की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो रहा है। कृपया आप इसका संज्ञान ले व् डीलरो को उचित कॉमिशन हेतु जो सुझाव कंपनी व् मिनिस्ट्री के पास गए हुए है उनको आप अपनी देख रेख में करवाए तो बेहतर होगा,क्योंकि एक बहुत बड़ा तबका इस विषय पर आपसे आशा बंधे हुए है व् आपकी तरफ देख रहा है,कृपया जीविका हेतु संज्ञान ले व् इस मानसिक उत्पीड़न से छुटकारा आप ही दिला सकते है। कंपनी के उच्चाधिकारी इस विषय पर अछी तनख्वा लेकर अपने आप में व्यस्थ है व् कभी भी डीलर की उचित कॉमिशन व् जीविका हेतु कोई कदम उठाने में असमथ है या कहना चाहूँगा की करना नहीं चाहते। आपसे अनुरोध है की डीलरो को इस प्रकार के दलदल से बहार निकले व् कम बिक्री वाले डीलरो हेतु उचित व्यवस्था कराइ जाए। आपका एक प्रताड़ित डीलर बंधू, जो आपसे आशा रखता है व् बंदी की कगार पर है व् इस व्यवसाय व् व्यवस्था से मानसिक रूप से प्रताड़ित है।
श्रीमान प्रधान सेवक श्री नरेंद्र भाई मोदी जी, मै उत्तरप्रदेश का एक पेट्रोल पंप व्यवसाय करने वाला एक व्यापारी हूँ व् आपसे कहना चाहूँगा की पंप व्यवसाय एक उपवास में चल रहा है व् जीविका हेतु भी बहमुश्किल हो रहा है और यह स्तिथि काफी समय से चली आरही है व् छोटे व्यवसाय या कहना चाहूँगा की जो पंप धारक महीने में पचास किलो से एक सौ पचास किलो तक है, उनके सामने जीविका का काफी समस्या है व् मिनिस्ट्री के प्रधान व् खुद मिनिस्ट्री इस तरफ कुछ करने में असफल रही है पिछले दो साल के अंतराल में, बड़ा दुःख होता है यह कहते हुए आप जैसा नेतृत्व व् पंप व्यवसाय जैसा काम भी एक प्रशन चिन्ह की तरह रह गया है। आगे कहना चाहूँगा की हम इक्कीसवि सदी में जीविका कर रहे है व् सरकारी अमला सातव वेतन आयोग लेकर आया है,मै किसी बात पर कताशक नहीं करना चाहता पर, हम पंप व्यापारियो का कॉमिशन एक रुपयापया डीजल व् दो रुपयापया पेट्रोल है और इसमें भी काफी खर्चे अभी जुड़े हुआ नहीं है। कहना चाहूँगा की आप की प्रणाली में यह कॉमिशन कुछ भी नहीं है व् तेल कंपनिया भी डीलरो को सही मात्रा में तेल देने में असमर्थ है,क्योंकि डीलरो को तेल में तेल पूरा नहीं मिलता,क्योंकि पूरी सप्लाई व्यवस्था चरमराई हुई है व् डीलर इस बात पर परेशान है। आगे डीलर को दूसरे राज्यो में कम कीमत का तेल होने से, तेल का आवागमन व् घटती बिक्री भी एक कारण है व् कंपनी इस पर कोई संज्ञान राज्य स्तर पर नहीं लेती और डीलरो को अकेला छोड़ दिया जाता है।आगे कहना चाहूँगा की डीलर इस व्यवसाय को छोड़ भी नहीं सकता क्योंकि कंपनी ने डीलर की कीमती ज़मीन किराये पर ली होती है जो की डीलर को सुनहरे सपने दिखा कर व् सही बिक्री दिखा कर कम किराये पर ले ली गई होती है,जो की कंपनी कभी छोड़ती नहीं है,जो की अपने आप में दुःख का विषय है। आगे डीलर का कॉमिशन इतना कम है की पचासकिलो से एक सौ पचास किलो तक बेचने वाला डीलर अगर उसके पास और कोई व्यवस्था न हो तो बैंक के क़र्ज़ की किस्त तक नहीं दे पाता, इस विषय में पिछले दो साल से कॉमिशन सही रूप से बढ़ने व् पेट्रोल व् डीजल की बिक्री अनुसार जिनका सेल कम है उनको ज़्यादा प्रदान करने या कम से कम पाँच रुपयापया पेट्रोल व् तीन रुपयापया डीजल करने हेतु काफी सुझाव दे दिए गए है,पर दुःख होता है की इस पर कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है व् इसमें कंपनी के अधिकारी काफी अछी तँखुऔ पर है व् डीलर हेतु कुछ भी नहीं सोचा जा रहा है। आपसे कहना चाहूँगा की ऊपर बताई गई परेशानी की वजह से कई डीलर या तो गलत तरह से बेईमानी करके अपना व्यापन करते है व् जो नहीं करते वो बंदी की कगार पर है व् मानसिक रूप से प्रताड़ित है। जो की चिंता का विषय है, हक़ीक़त में हर कोई पंप व्यवसाई को चोर की नज़रो से देखता है व् वो ऐसा किस लिए करता है,उसके पीछे का कारण जो है उसको कोई ठीक करने को तैयार नहीं है,कारण ऊपर आपके सामने है। आपका स्वच्छ भारत अभियान आया बहुत अच्छा लगा भागीदारी देकर पर कंपनी के अधिकारी प्रताड़ित करते है व् जुर्माने के तौर पर दस हज़ार रुपयापया तक लिया जाता है,जब की पंप पर जो कॉमिशन यह कह के दिया गया था की इससे आप एक आदमी टॉयलेट की सफाई हेतु रखेंगे वो नाकाफी है एक कम सेल वाले पुम्पो पर इस तरह की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो रहा है। कृपया आप इसका संज्ञान ले व् डीलरो को उचित कॉमिशन हेतु जो सुझाव कंपनी व् मिनिस्ट्री के पास गए हुए है उनको आप अपनी देख रेख में करवाए तो बेहतर होगा,क्योंकि एक बहुत बड़ा तबका इस विषय पर आपसे आशा बंधे हुए है व् आपकी तरफ देख रहा है,कृपया जीविका हेतु संज्ञान ले व् इस मानसिक उत्पीड़न से छुटकारा आप ही दिला सकते है। कंपनी के उच्चाधिकारी इस विषय पर अछी तनख्वा लेकर अपने आप में व्यस्थ है व् कभी भी डीलर की उचित कॉमिशन व् जीविका हेतु कोई कदम उठाने में असमथ है या कहना चाहूँगा की करना नहीं चाहते। आपसे अनुरोध है की डीलरो को इस प्रकार के दलदल से बहार निकले व् कम बिक्री वाले डीलरो हेतु उचित व्यवस्था कराइ जाए। आपका एक प्रताड़ित डीलर बंधू, जो आपसे आशा रखता है व् बंदी की कगार पर है व् इस व्यवसाय व् व्यवस्था से मानसिक रूप से प्रताड़ित है।
राशिद खान ( Image Source : PTI ) IPL 2023 Orange And Purple Cap Race: आईपीएल 2023 की पर्पल कैप अब राशिद खान के पास पहुंच गई है. 25 अप्रैल को मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में उन्होंने दो विकेट चटकाए. राशिद खान इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में अब तक सबसे ज्यादा विकेट ले चुके हैं. लीग में प्रत्येक सीजन सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज को पर्पल कैप दी जाती है. इसी तरह हर सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज को ऑरेंज कैप दी जाती है. आइए आपको बताते हैं कि आईपीएल 2023 में पर्पल और ऑरेंज कैप की रेस में कौन से खिलाड़ी शामिल हैं? आईपीएल 2023 की पर्पल कैप मौजूदा समय में राशिद खान के पास है. वह 16वें सीजन में अब तक सबसे ज्यादा 14 विकेट ले चुके हैं. इस सत्र में उनका सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग प्रदर्शन 31 रन देकर 3 विकेट आउट करना रहा है. हालांकि पर्पल कैप के लिए उन्हें मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है. ये दोनों गेंदबाज अब तक 13-13 विकेट झटक चुके हैं. इसके अलावा युजवेंद्र चहल और तुषार देशपांडे भी इस लिस्ट में शामिल हैं. चहल और देशपांडे ने आईपीएल 2023 में अब तक 12-12 विकेट चटकाए हैं. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान फाफ डू प्लेसिस ने ऑरेंज कैप पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. उन्होंने आईपीएल 2023 में सबसे ज्यादा 405 रन बनाए हैं जिनमें 5 अर्धशतक शामिल हैं. 16वें सत्र में उनका हाईएस्ट स्कोर 84 रन रहा है. फाफ के अलावा किसी भी खिलाड़ी ने इस सीजन में अभी तक 400 रन का आंकड़ा पार नहीं किया है. हालांकि ऑरेंज कैप की रेस में कई खिलाड़ी और भी शामिल हैं. डेवोन कॉन्वे चेन्नई सुपर किंग्स 314 रन, डेविड वॉर्नर दिल्ली कैपिटल्स 306 रन, शुभमन गिल गुजरात जायंट्स 284 रन और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के विराट कोहली 279 रन बनाकर ऑरेंज कैप की रेस में बने हुए हैं.
राशिद खान IPL दो हज़ार तेईस Orange And Purple Cap Race: आईपीएल दो हज़ार तेईस की पर्पल कैप अब राशिद खान के पास पहुंच गई है. पच्चीस अप्रैल को मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में उन्होंने दो विकेट चटकाए. राशिद खान इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में अब तक सबसे ज्यादा विकेट ले चुके हैं. लीग में प्रत्येक सीजन सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज को पर्पल कैप दी जाती है. इसी तरह हर सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज को ऑरेंज कैप दी जाती है. आइए आपको बताते हैं कि आईपीएल दो हज़ार तेईस में पर्पल और ऑरेंज कैप की रेस में कौन से खिलाड़ी शामिल हैं? आईपीएल दो हज़ार तेईस की पर्पल कैप मौजूदा समय में राशिद खान के पास है. वह सोलहवें सीजन में अब तक सबसे ज्यादा चौदह विकेट ले चुके हैं. इस सत्र में उनका सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग प्रदर्शन इकतीस रन देकर तीन विकेट आउट करना रहा है. हालांकि पर्पल कैप के लिए उन्हें मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है. ये दोनों गेंदबाज अब तक तेरह-तेरह विकेट झटक चुके हैं. इसके अलावा युजवेंद्र चहल और तुषार देशपांडे भी इस लिस्ट में शामिल हैं. चहल और देशपांडे ने आईपीएल दो हज़ार तेईस में अब तक बारह-बारह विकेट चटकाए हैं. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान फाफ डू प्लेसिस ने ऑरेंज कैप पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. उन्होंने आईपीएल दो हज़ार तेईस में सबसे ज्यादा चार सौ पाँच रन बनाए हैं जिनमें पाँच अर्धशतक शामिल हैं. सोलहवें सत्र में उनका हाईएस्ट स्कोर चौरासी रन रहा है. फाफ के अलावा किसी भी खिलाड़ी ने इस सीजन में अभी तक चार सौ रन का आंकड़ा पार नहीं किया है. हालांकि ऑरेंज कैप की रेस में कई खिलाड़ी और भी शामिल हैं. डेवोन कॉन्वे चेन्नई सुपर किंग्स तीन सौ चौदह रन, डेविड वॉर्नर दिल्ली कैपिटल्स तीन सौ छः रन, शुभमन गिल गुजरात जायंट्स दो सौ चौरासी रन और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के विराट कोहली दो सौ उन्यासी रन बनाकर ऑरेंज कैप की रेस में बने हुए हैं.
है कि हम और वे शिथिल न पड़े, विचलित न हों और विश्राम न करें । आगामी आक्रमण का प्रश्न कान्ति के रचनात्मक कार्य के प्रश्न - अर्थात् कान्तिकारी सरकार की शाखाएं स्थापित करना - से सम्बद्ध है । पिछले प्रश्न से हिंसा और सशस्त्र सेनाएं रखने का प्रश्न सम्बन्धित है । इसलिए इस प्रश्न के सम्बन्ध में मैं अपना मत आपके सम्मुख प्रस्तुत करना चाहता हूँ, क्योंकि मेरे विचार मे हमारी क्रान्ति के भविष्य से इसका गहरा सम्बन्ध है । सब से पहले, मैं अनुभव करता हूँ कि वृटेन की सरकार ने इस कान्ति के समय किये गये हिंसात्मक कार्यों के सम्बन्ध मे जो शोर मचाया है उसके बारे मे कुछ शब्द कहूँ । अत्यधिक उत्त जना दिलाने पर कुछ हिंसात्मक कार्य अवश्य किये गये थे, लेकिन विद्रोह की विशालता और वैयक्तिक तथा सामूहिक अहिंसा के आश्चर्यजनक प्रयोग की तुलना में यह नगण्य है। शायद यह, अनुभव नहीं किया गया है कि विदेशी सत्ता के हजारों अंग्रेज और भारतीय कर्मचारियों का जीवन कुछ दिनों तक जनता की दया पर निर्भर था । जनता ने अपने शत्रु पर दया की और उनका जीवन तथा सम्मत्ति बख्श दी, और उन के हजारों वृद्धों और नवयुवको के शान्त और दिज्य साहस सम्बन्ध मे क्या कहना है जिन्होंने हाथ मे क्रांति का झंडा लिए और मुह से "इन्कलाब जिन्दाबाद" का नारा लगाते हुए अपने के सीने मे शत्रु की गोलियां खायी । क्या इस देवी उत्साह लिए अंग्रेजो के पास कोई प्रशंसा का शब्द है ? किसी भी स्थिति में, क्या यह उल्लेखनीय नहीं है कि वृटिश सत्ता जो हिंसा से ओत-प्रोत है, जो हिंसा पर आधारित है, जो प्रतिदिन अत्यधिक क्रूरतापूर्ण हिंसात्मक कार्य करती है, जो लाखो व्यक्तियों को पीसती है और उनका खून चूसती है, दूसरों के हिंसात्मक कार्यो पर इतना शोर मचाये । इससे ग्रेजों का क्या सम्बन्ध है कि उनसे लड़ने के लिए हम किन शस्त्रों का प्रयोग करते है ? क्या उन्होंने यह प्रतिज्ञा करली है कि यदि ही अहिंसात्मक रहे तो वे भी अहिंसात्मक नीति का पालन करेंगे ? हम चाहे किन्ही शस्त्रों का प्रयोग करे अंग्रेजी के पास तो हमारे लिए गोलियां, लूटमार, बलात्कार और अग्निकांड ही है । इसलिए इस सम्बन्ध में उनको मौन ही रहना चाहिए कि हम उनके विरुद्ध किस ढंग से लड़ते है । इसका निश्चय करना एकमात्र हमारा ही काम है । इस प्रश्न पर विचार करते हुए कि इसका इस पर प्रभाव पड़ता है, पहले मै आपको अहिंसा के सम्बन्ध में एक ओर गांधी जी और दूसरी ओर कार्यसमिति तथा ि भारतीय कांग्रेस महासमिति के विचारों में जो मतभेद है उसका स्मरण कराऊंगा। गांधी जी किसी भी स्थिति में से विचलित होने के लिए तैयार नहीं है। उनके लिए एक छान विश्वास और जीवन सिद्धान्त का है। लेकिन हाल के कि : ऐसा नहीं है । तभी कांग्रेस ने इस युद्ध के बीच बार बार कहा है कि यदि भारत स्वतन्त्र होगया था पहिराष्ट्रीय स्वय की स्थापना भी होगयी तो वह शस्त्रों में आकर शिंद करने के लिए तैयार हो जाएगी। नदि हम इसे प्रयोग करके जापान और जर्मनी के विरुद्ध लड़ने को तैयार है तब हमें वृटेन के विरुद्ध लड़ने में उसी ढंग का प्रयोग करने में क्यों इन्कार करना चाहिए ? इसका केवल यही उत्तर हो सकता है कि सत्ता-युक्त कांग्रेस सेना रख सकती है, परन्तु सत्ताहीन कांगस नहीं रख सकती । लेकिन यदि कांतिकारी सेना की स्थापना की गई या यदि वर्तमान भारतीय सेना या इसका एक भाग विद्रोह करदे तो क्या यह हमारे लिए असंगत नहीं होगा कि पहले तो हम सेना से विद्रोह करने के लिए अनुरोध करें और इसके बाद विद्रोहियों से यह कहें कि वे हथियार रख और नग्न सीने से की गोलियों का सामना करें ? कांग से की- गांधी जी की नहीं स्थिति के सम्बन्ध में - - मेरी निजी व्याख्या स्पष्ट निश्चित है । यदि देश स्वतन्त्र होगया तो काग्रेस हिंसात्मक रूप से आक्रमण का सामना करने • के लिए तैयार है। हमने अपने आपको स्वतन्त्र घोषित कर दिया है और वृटेन को आक्रान्ता राष्ट्र भी करार दे दिया। फलतः बम्बई प्रस्ताव के अन्तर्गत बृटेन से सशस्त्र लड़ना हमारे लिए उचित है । यदि यह गांधी जी के सिद्धान्तों के अनुरूप नहीं है तो इसमे मेरा कोई दोप नहीं। कार्यसमिति और असल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने गाधी जी के मत से भिन्न मत प्रगट किया है और अहिंसा का युद्ध में प्रयोग करने के सम्बन्ध में जो उनकी धारणा है उसको अस्वीकार किया है। ग्रेजी सत्ता ने इस प्रस्ताव को उचित रूप देने तथा नेतृत्व करने के लिए गांधी जी को अवसर नहीं दिया। इसलिए व्याख्या का अनुसरण करते हुए हमें गांधी जी के प्रति झूठा नहीं बनना चाहिए। जहां तक मेरा सम्बन्ध है, में अनुभव करता हूँ कि
है कि हम और वे शिथिल न पड़े, विचलित न हों और विश्राम न करें । आगामी आक्रमण का प्रश्न कान्ति के रचनात्मक कार्य के प्रश्न - अर्थात् कान्तिकारी सरकार की शाखाएं स्थापित करना - से सम्बद्ध है । पिछले प्रश्न से हिंसा और सशस्त्र सेनाएं रखने का प्रश्न सम्बन्धित है । इसलिए इस प्रश्न के सम्बन्ध में मैं अपना मत आपके सम्मुख प्रस्तुत करना चाहता हूँ, क्योंकि मेरे विचार मे हमारी क्रान्ति के भविष्य से इसका गहरा सम्बन्ध है । सब से पहले, मैं अनुभव करता हूँ कि वृटेन की सरकार ने इस कान्ति के समय किये गये हिंसात्मक कार्यों के सम्बन्ध मे जो शोर मचाया है उसके बारे मे कुछ शब्द कहूँ । अत्यधिक उत्त जना दिलाने पर कुछ हिंसात्मक कार्य अवश्य किये गये थे, लेकिन विद्रोह की विशालता और वैयक्तिक तथा सामूहिक अहिंसा के आश्चर्यजनक प्रयोग की तुलना में यह नगण्य है। शायद यह, अनुभव नहीं किया गया है कि विदेशी सत्ता के हजारों अंग्रेज और भारतीय कर्मचारियों का जीवन कुछ दिनों तक जनता की दया पर निर्भर था । जनता ने अपने शत्रु पर दया की और उनका जीवन तथा सम्मत्ति बख्श दी, और उन के हजारों वृद्धों और नवयुवको के शान्त और दिज्य साहस सम्बन्ध मे क्या कहना है जिन्होंने हाथ मे क्रांति का झंडा लिए और मुह से "इन्कलाब जिन्दाबाद" का नारा लगाते हुए अपने के सीने मे शत्रु की गोलियां खायी । क्या इस देवी उत्साह लिए अंग्रेजो के पास कोई प्रशंसा का शब्द है ? किसी भी स्थिति में, क्या यह उल्लेखनीय नहीं है कि वृटिश सत्ता जो हिंसा से ओत-प्रोत है, जो हिंसा पर आधारित है, जो प्रतिदिन अत्यधिक क्रूरतापूर्ण हिंसात्मक कार्य करती है, जो लाखो व्यक्तियों को पीसती है और उनका खून चूसती है, दूसरों के हिंसात्मक कार्यो पर इतना शोर मचाये । इससे ग्रेजों का क्या सम्बन्ध है कि उनसे लड़ने के लिए हम किन शस्त्रों का प्रयोग करते है ? क्या उन्होंने यह प्रतिज्ञा करली है कि यदि ही अहिंसात्मक रहे तो वे भी अहिंसात्मक नीति का पालन करेंगे ? हम चाहे किन्ही शस्त्रों का प्रयोग करे अंग्रेजी के पास तो हमारे लिए गोलियां, लूटमार, बलात्कार और अग्निकांड ही है । इसलिए इस सम्बन्ध में उनको मौन ही रहना चाहिए कि हम उनके विरुद्ध किस ढंग से लड़ते है । इसका निश्चय करना एकमात्र हमारा ही काम है । इस प्रश्न पर विचार करते हुए कि इसका इस पर प्रभाव पड़ता है, पहले मै आपको अहिंसा के सम्बन्ध में एक ओर गांधी जी और दूसरी ओर कार्यसमिति तथा ि भारतीय कांग्रेस महासमिति के विचारों में जो मतभेद है उसका स्मरण कराऊंगा। गांधी जी किसी भी स्थिति में से विचलित होने के लिए तैयार नहीं है। उनके लिए एक छान विश्वास और जीवन सिद्धान्त का है। लेकिन हाल के कि : ऐसा नहीं है । तभी कांग्रेस ने इस युद्ध के बीच बार बार कहा है कि यदि भारत स्वतन्त्र होगया था पहिराष्ट्रीय स्वय की स्थापना भी होगयी तो वह शस्त्रों में आकर शिंद करने के लिए तैयार हो जाएगी। नदि हम इसे प्रयोग करके जापान और जर्मनी के विरुद्ध लड़ने को तैयार है तब हमें वृटेन के विरुद्ध लड़ने में उसी ढंग का प्रयोग करने में क्यों इन्कार करना चाहिए ? इसका केवल यही उत्तर हो सकता है कि सत्ता-युक्त कांग्रेस सेना रख सकती है, परन्तु सत्ताहीन कांगस नहीं रख सकती । लेकिन यदि कांतिकारी सेना की स्थापना की गई या यदि वर्तमान भारतीय सेना या इसका एक भाग विद्रोह करदे तो क्या यह हमारे लिए असंगत नहीं होगा कि पहले तो हम सेना से विद्रोह करने के लिए अनुरोध करें और इसके बाद विद्रोहियों से यह कहें कि वे हथियार रख और नग्न सीने से की गोलियों का सामना करें ? कांग से की- गांधी जी की नहीं स्थिति के सम्बन्ध में - - मेरी निजी व्याख्या स्पष्ट निश्चित है । यदि देश स्वतन्त्र होगया तो काग्रेस हिंसात्मक रूप से आक्रमण का सामना करने • के लिए तैयार है। हमने अपने आपको स्वतन्त्र घोषित कर दिया है और वृटेन को आक्रान्ता राष्ट्र भी करार दे दिया। फलतः बम्बई प्रस्ताव के अन्तर्गत बृटेन से सशस्त्र लड़ना हमारे लिए उचित है । यदि यह गांधी जी के सिद्धान्तों के अनुरूप नहीं है तो इसमे मेरा कोई दोप नहीं। कार्यसमिति और असल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने गाधी जी के मत से भिन्न मत प्रगट किया है और अहिंसा का युद्ध में प्रयोग करने के सम्बन्ध में जो उनकी धारणा है उसको अस्वीकार किया है। ग्रेजी सत्ता ने इस प्रस्ताव को उचित रूप देने तथा नेतृत्व करने के लिए गांधी जी को अवसर नहीं दिया। इसलिए व्याख्या का अनुसरण करते हुए हमें गांधी जी के प्रति झूठा नहीं बनना चाहिए। जहां तक मेरा सम्बन्ध है, में अनुभव करता हूँ कि
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विपक्षी पार्टी के नेताओं से आयुष्मान भारत योजना पर सुझाव देने को कहा। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि सांसद आयुष्मान भारत के बारे में बात करते हैं और इनमें से कुछ इस योजना की तुलना अमेरिका और ब्रिटेन की योजना से कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हर देश की अपनी विशिष्ट परिस्थितियां होती हैं। आयुष्मान भारत परियोजना का उद्देश्य बुनियादी स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना है। साथ ही परिजन के बीमार होने और लंबे इलाज की स्थिति में परिवारों को वित्तीय सहायता मुहैया कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं जिस बात के लिए निश्चित हूं कि हम सहमत होंगे की स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को आयुष्मान भारत योजना में बेहतरी के लिए सलाह देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, हम आयुष्मान भारत योजना लाए हैं और मैं सहमत हूं कि इसमें कमी हो सकती है। इसलिए मैं विपक्षी पार्टी के नेताओं को इस योजना की बेहतरी के लिए सुझाव देने का निमंत्रण देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं विपक्षी पार्टियों से आग्रह करता हूं कि वे इन सुझावों पर विचार के लिए अपना-अपना कार्यबल बनाएं। मोदी ने कहा, सरकार हमेशा सलाह, फीडबैक लेने के लिए तैयार रहती है। आखिर, हम देश और गरीबों के लिए काम कर रहे हैं।
नई दिल्ली, सात फरवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विपक्षी पार्टी के नेताओं से आयुष्मान भारत योजना पर सुझाव देने को कहा। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि सांसद आयुष्मान भारत के बारे में बात करते हैं और इनमें से कुछ इस योजना की तुलना अमेरिका और ब्रिटेन की योजना से कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हर देश की अपनी विशिष्ट परिस्थितियां होती हैं। आयुष्मान भारत परियोजना का उद्देश्य बुनियादी स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना है। साथ ही परिजन के बीमार होने और लंबे इलाज की स्थिति में परिवारों को वित्तीय सहायता मुहैया कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं जिस बात के लिए निश्चित हूं कि हम सहमत होंगे की स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को आयुष्मान भारत योजना में बेहतरी के लिए सलाह देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, हम आयुष्मान भारत योजना लाए हैं और मैं सहमत हूं कि इसमें कमी हो सकती है। इसलिए मैं विपक्षी पार्टी के नेताओं को इस योजना की बेहतरी के लिए सुझाव देने का निमंत्रण देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं विपक्षी पार्टियों से आग्रह करता हूं कि वे इन सुझावों पर विचार के लिए अपना-अपना कार्यबल बनाएं। मोदी ने कहा, सरकार हमेशा सलाह, फीडबैक लेने के लिए तैयार रहती है। आखिर, हम देश और गरीबों के लिए काम कर रहे हैं।
पड़ जायगा ।" श्री जिला ने अपने व्याख्यान में बी की सीधी कार्यवाही समर्थन करते हुए कहा थाः"That the time has now come for the Muslim nation to resort to direct action to achieve Pakistan" अर्थात्, "अब समय भागवा है कि पाकिस्तान की प्राप्ति के लिए मुस्लिम राष्ट्र सौची कार्यवाही को अंगीकार करे।" अगे चलकर मि० लिना ने फिर कहाः"By this resolution recommending direct action the League was bidding "good by: to.. constitutional methods, the direct action was not to get out of the slavery under the British but against the contemplated future of casteHindu domiation." अर्थात् "यह प्रस्ताव, जिसमें सीधी कार्यवाही की सिफारिश की गई है उसके अनुसार लीग आन्दोलन की सारी वैधानिक पद्धतियों से भसीरी दुबा सलाम कर रही है। सोधी कार्यवाही का उद्देश्य केवल ब्रिटिश की गुलामी से मुक्त होना ही नहीं है, वरनू सवयं हिन्दुओं की गुलामी से भी छुटकारा पाना है।" इसी प्रकार के विचार अन्य मुस्लिम नेताओं ने भी प्रकट किये थे । मि० सोहराबवर्दी ने कहा था कि मुसलमान "मृत राष्ट्र नहीं है और उनके द्वारा जो प्रतिरोध होगा यह केवल शब्दों द्वारा न होगा।" बम्बई के मि० इस्माइल चुन्दरीगर ने बड़े ओश के यह प्रकट किया था कि ब्रिटिश को यह कोई अधिकार नहीं है कि मुसलमानों को ऐसे लोगों के आधीन करे, विभपर उन्होंने सैकड़ों तक राज्य किया था। मुहम्मद इस्माइल ने यह घोषित किया कि भारंतीय मुसलमान 'जोहाद' अर्थात् 'पवित्र युद्ध' के लिए कर्म क्षेत्र में उतर रहे हैं। शौकत हैमासखाँ ने कहा कि मुसलमानों को अगर अवसर दिया बाम तो वे अपनी वीरता के हाथ दिखाने के लिए तैयार हैं। मुस्लिम खींग के अप्रेल मास ११४५ के अधिवेशन में निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया गया थाः "The Muslim nation will never submit to any constitution for a United India and will never participate in any single constitution making machinery set up for the purpose." It demanded that the zones comprising Bengal and Assam in the North-East and the Punjab, the N. W. Frontier Provinca, Sindh and Beluchistan in the North-west of India...... where the Muslims are in a dominant majority, be constituted into a sovereign State"; that "two separate constitution making bodies be set up by the peoples of Pakistan and Hindustan for the purpose of framing their respective constitution. The League promised its co-operation in the formation of an Interim Government at the centre only when its main demands were conceded." अर्थात् मुस्लिम राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र के किसी विधान को स्वीकार न और वह इस उद्देश्य के लिए बनाए हुए किसी विधान-तन्त्र उसका का यह दावा है कि बंगाल, आसाम, पंजाब, केबिनेटमिशन और अन्तर्कालीन सरकार सीमाप्रान्त, सिंध, विवोचिस्तान आदि प्रान्तों में, जहां मुस्लिम बहुमत है, एक पूर्ण प्रभुता प्राप्त मुस्लिम राज्य का संगठन किया जाय और पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के दो भिन्न विधानों को बनाने के लिए दो विभिन्न विधान सभाओं का निर्माण किया जाय । केबिनेट मिशन और अन्तर्कीलोन सरकार कैबिनेट मिशन ने अपने वक्तव्य में भारतवर्ष में अन्तर्काखोन सरकार की स्थापना के लिए उत्सुकता प्रकट की। मि. विश्वा इस बात पर जोर देते रहे कि अन्तर्कालीन सरकार के संगठन में हिन्दू और मुसलमानों की संख्या बराबर रहे। उहोंने १२ जून को वाईसरॉग को जो पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने इस बात पर बहुत ज़ोर दिया था कि केबिनेट मिशन के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए यह सबसे अधिक आवश्यक है कि अन्तर्कालीन सरकार में हिन्दू और मुसलमानों की संख्या में समता ( Parity ) का सिद्धान्त स्वीकार किया जाय। इसके सिया केबिनेट मिशन की बोलना स्वीकार करने के लिए मुस्लिम बीम अपना भन्तिम निर्वान प्रकट नहीं कर सकती। कांग्रेस के तत्कालीन मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने १३ जून को वाइसरॉब को जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने समता (Parity) के सिद्धान्त का विरोध किया। उन्होंने अपने पत्र में ferat at:"My committee regret that they are unable to accept your suggestions for, the formation of the Provisional National Government. These tentative suggestions emphasise the principle of "Parity" to which we have been and are entirely opposed. In the composition of the cabinet suggested by you there is "parity" between the Hindus including the scheduled castes and the Muslim League, that is the number of the caste Hindus is actually less than the nominees of the Muslim League. The position thus is worse than it was in June 1945 at Simla, where, according to your declaration then, there was to be "parity" between caste Hindus and Muslims, leaving additional seats for the scheduled caste Hindus, The Muslim seats then were not reserved for Muslim League only but could include non-League Muslims. The present proposal thus puts the Hindus in a very unfair position and at the same time eliminates the non-League Muslims. My committee are not prepared to accept any such proposal. Indeed we have stated repeatedly we केविनेटविशन और अन्तली सरकार are opposed to "parity" in any shape or form. अर्थात "मेरी कमेटी इस बात पर दुःख प्रकट करती है कि वह काम चल्ला राष्ट्रीय सरकार स्थापित करने के लिये, श्रापके सुझाव स्वीकृत करने में असमर्थ है। ये प्रयोगात्मक सुझाव 'सम संख्या के प्रतिनिधित्व पर खोर देते हैं, जिनके कि हम पूर्णतया विरोधी हैं। आपके सुझाव के मुताबिक मन्त्रिमंडल के निर्माण में परिगणित-जातियां और हिन्दुओं को सम संख्या मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बराबर रक्खी गई है अर्थात सवर्ण हिन्दुओं की संख्या मुस्लिम लीग के मनोनीत सदस्यों से भी कम रक्खी गई है। यह स्थिति १६४५ के जून मास की स्थिति से भी खराब है, जिसमें आपने यह घोषणा की थी कि सवर्ण हिन्दू और मुसबमानो के बीच समसंख्या "Parity" होनी चाहिए और अतिरिक्त स्थान परिगस्थित सवर्ण हिन्दुओं ( Scheduled caste Hindus) के लिए छोड़ देना चाहिए। उस समय की योजना में मुस्लिमों के स्था (Seats ) कंबल मुस्लिम लीग हो के लिए रचित नहीं रक्खे गए पर उनमें गैर-लोगो मुसलमान भी शामिल किये गए के 17 इसी पत्र में आगे चलकर मौलाना साहिब ने यह प्रकट किया कमेटी को राय में मिलीजुली सरकार ( Coalition Govern ment ) की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि उसका दृष्टिको और कार्यक्रम ( Programme) समान रहे, इसके अतिरिक मौलाना साहिब ने अपने पत्र में गुटबाजी (Grouping) का विरोध करते हुए यह प्रकट किया कि देश का बहुत बड़ा जन समाज इस प्रकार की गुटबंदी ( Grouping ) के खिक्षाफ है और वह इसपर अपना तो क्रोध प्रकट कर रहा है। सोमाप्रान्त और भाग्राम ने इस प्रकार अनिवार्य गुट-बाजी के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई है। सिख इस गुट-बाजी में अपने आप को अकेखा पाते हैं और उनमें इसके खिलाफ कार आन्दोलन उठ रहा है। सिक्स लोग पंजाब में अल्पसंख्यक भारतवर्ष और उसका स्वातन्त्र संपाम कारण इस गुटवाजी के कारण बहुत ही निःसहाय हो जायेंगे। हम भी उनके इस विरोध के साथ सहानुभूति रखते हैं। क्योंकि हम खुद भी इस प्रकार की प्रान्तों को गुट-बाजी को अपने मौलिक सिद्धान्तों के खिलाफ समझते हैं। " मौलाना भाजाद ने यूरोपियनों को दिये जाने वाले प्रतिनिधित्व के विशेषाधिकारों का भी विरोध किया । इस प्रकार पत्र व्यवहार और वादानुवाद के होते हुए भी काग्रेस और लीग एक मस न हो सकी और तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड वेवश्च ने इन दोनों महान् राजनैतिक दलों में समझौता न होने के कारण अपनी असफलता की घोषणा की और इस सफलता की सारी जिम्मे दारी अपने सिर पर ली । १५ जून को वाइसरॉय ने श्री जिया को यह सूचित किया कि कांग्रेस प्रतिनिधियों के साथ अन्तर्कालीन सरकार के निर्माण में उनकी जो बातचीत हो रही थी वह असफल होगई है और वे इस सम्बन्ध में कक्ष अपना वक्तव्य प्रकाशित कर रहे हैं। १५ जून का वाइसरॉय ने मौलाका भाजाद को जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने यह प्रकट किया किः--"हम मारतीय स्वाधीनता के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हर सम्भव उपाय को काम में ले रहे हैं। हमने यह पहिले हो प्रकट कर दिया है कि सबसे पहिले भारतवासियों के प्रति निधियों के द्वारा नये विधान बनने की आवश्यकता है।" "केबिनेट मंत्रि-मंडल और मैं गुट-बाजों के सिद्धान्त के सम्बन्ध में आपकी जो श्रापनियां हैं, उनसे सभी परिचित हैं, मैं आप पर यह प्रकट कर देना चाहता हूँ कि १६ मई के केबिनेट मिशन के बचना में शान्दों की गुटबाजी को अनिवार्य नहीं रक्या गया है। उसने इस बात को प्रान्तों के प्रतिनिधियों के विसंग पर छोड़ा है, इसमें जो व्यवस्था गई है वह यह है कि कुछ विशिष्ट मान्छों के प्रतिनिधि गब्द अपने
पड़ जायगा ।" श्री जिला ने अपने व्याख्यान में बी की सीधी कार्यवाही समर्थन करते हुए कहा थाः"That the time has now come for the Muslim nation to resort to direct action to achieve Pakistan" अर्थात्, "अब समय भागवा है कि पाकिस्तान की प्राप्ति के लिए मुस्लिम राष्ट्र सौची कार्यवाही को अंगीकार करे।" अगे चलकर मिशून्य लिना ने फिर कहाः"By this resolution recommending direct action the League was bidding "good by: to.. constitutional methods, the direct action was not to get out of the slavery under the British but against the contemplated future of casteHindu domiation." अर्थात् "यह प्रस्ताव, जिसमें सीधी कार्यवाही की सिफारिश की गई है उसके अनुसार लीग आन्दोलन की सारी वैधानिक पद्धतियों से भसीरी दुबा सलाम कर रही है। सोधी कार्यवाही का उद्देश्य केवल ब्रिटिश की गुलामी से मुक्त होना ही नहीं है, वरनू सवयं हिन्दुओं की गुलामी से भी छुटकारा पाना है।" इसी प्रकार के विचार अन्य मुस्लिम नेताओं ने भी प्रकट किये थे । मिशून्य सोहराबवर्दी ने कहा था कि मुसलमान "मृत राष्ट्र नहीं है और उनके द्वारा जो प्रतिरोध होगा यह केवल शब्दों द्वारा न होगा।" बम्बई के मिशून्य इस्माइल चुन्दरीगर ने बड़े ओश के यह प्रकट किया था कि ब्रिटिश को यह कोई अधिकार नहीं है कि मुसलमानों को ऐसे लोगों के आधीन करे, विभपर उन्होंने सैकड़ों तक राज्य किया था। मुहम्मद इस्माइल ने यह घोषित किया कि भारंतीय मुसलमान 'जोहाद' अर्थात् 'पवित्र युद्ध' के लिए कर्म क्षेत्र में उतर रहे हैं। शौकत हैमासखाँ ने कहा कि मुसलमानों को अगर अवसर दिया बाम तो वे अपनी वीरता के हाथ दिखाने के लिए तैयार हैं। मुस्लिम खींग के अप्रेल मास एक हज़ार एक सौ पैंतालीस के अधिवेशन में निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया गया थाः "The Muslim nation will never submit to any constitution for a United India and will never participate in any single constitution making machinery set up for the purpose." It demanded that the zones comprising Bengal and Assam in the North-East and the Punjab, the N. W. Frontier Provinca, Sindh and Beluchistan in the North-west of India...... where the Muslims are in a dominant majority, be constituted into a sovereign State"; that "two separate constitution making bodies be set up by the peoples of Pakistan and Hindustan for the purpose of framing their respective constitution. The League promised its co-operation in the formation of an Interim Government at the centre only when its main demands were conceded." अर्थात् मुस्लिम राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र के किसी विधान को स्वीकार न और वह इस उद्देश्य के लिए बनाए हुए किसी विधान-तन्त्र उसका का यह दावा है कि बंगाल, आसाम, पंजाब, केबिनेटमिशन और अन्तर्कालीन सरकार सीमाप्रान्त, सिंध, विवोचिस्तान आदि प्रान्तों में, जहां मुस्लिम बहुमत है, एक पूर्ण प्रभुता प्राप्त मुस्लिम राज्य का संगठन किया जाय और पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के दो भिन्न विधानों को बनाने के लिए दो विभिन्न विधान सभाओं का निर्माण किया जाय । केबिनेट मिशन और अन्तर्कीलोन सरकार कैबिनेट मिशन ने अपने वक्तव्य में भारतवर्ष में अन्तर्काखोन सरकार की स्थापना के लिए उत्सुकता प्रकट की। मि. विश्वा इस बात पर जोर देते रहे कि अन्तर्कालीन सरकार के संगठन में हिन्दू और मुसलमानों की संख्या बराबर रहे। उहोंने बारह जून को वाईसरॉग को जो पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने इस बात पर बहुत ज़ोर दिया था कि केबिनेट मिशन के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए यह सबसे अधिक आवश्यक है कि अन्तर्कालीन सरकार में हिन्दू और मुसलमानों की संख्या में समता का सिद्धान्त स्वीकार किया जाय। इसके सिया केबिनेट मिशन की बोलना स्वीकार करने के लिए मुस्लिम बीम अपना भन्तिम निर्वान प्रकट नहीं कर सकती। कांग्रेस के तत्कालीन मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने तेरह जून को वाइसरॉब को जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने समता के सिद्धान्त का विरोध किया। उन्होंने अपने पत्र में ferat at:"My committee regret that they are unable to accept your suggestions for, the formation of the Provisional National Government. These tentative suggestions emphasise the principle of "Parity" to which we have been and are entirely opposed. In the composition of the cabinet suggested by you there is "parity" between the Hindus including the scheduled castes and the Muslim League, that is the number of the caste Hindus is actually less than the nominees of the Muslim League. The position thus is worse than it was in June एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस at Simla, where, according to your declaration then, there was to be "parity" between caste Hindus and Muslims, leaving additional seats for the scheduled caste Hindus, The Muslim seats then were not reserved for Muslim League only but could include non-League Muslims. The present proposal thus puts the Hindus in a very unfair position and at the same time eliminates the non-League Muslims. My committee are not prepared to accept any such proposal. Indeed we have stated repeatedly we केविनेटविशन और अन्तली सरकार are opposed to "parity" in any shape or form. अर्थात "मेरी कमेटी इस बात पर दुःख प्रकट करती है कि वह काम चल्ला राष्ट्रीय सरकार स्थापित करने के लिये, श्रापके सुझाव स्वीकृत करने में असमर्थ है। ये प्रयोगात्मक सुझाव 'सम संख्या के प्रतिनिधित्व पर खोर देते हैं, जिनके कि हम पूर्णतया विरोधी हैं। आपके सुझाव के मुताबिक मन्त्रिमंडल के निर्माण में परिगणित-जातियां और हिन्दुओं को सम संख्या मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बराबर रक्खी गई है अर्थात सवर्ण हिन्दुओं की संख्या मुस्लिम लीग के मनोनीत सदस्यों से भी कम रक्खी गई है। यह स्थिति एक हज़ार छः सौ पैंतालीस के जून मास की स्थिति से भी खराब है, जिसमें आपने यह घोषणा की थी कि सवर्ण हिन्दू और मुसबमानो के बीच समसंख्या "Parity" होनी चाहिए और अतिरिक्त स्थान परिगस्थित सवर्ण हिन्दुओं के लिए छोड़ देना चाहिए। उस समय की योजना में मुस्लिमों के स्था कंबल मुस्लिम लीग हो के लिए रचित नहीं रक्खे गए पर उनमें गैर-लोगो मुसलमान भी शामिल किये गए के सत्रह इसी पत्र में आगे चलकर मौलाना साहिब ने यह प्रकट किया कमेटी को राय में मिलीजुली सरकार की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि उसका दृष्टिको और कार्यक्रम समान रहे, इसके अतिरिक मौलाना साहिब ने अपने पत्र में गुटबाजी का विरोध करते हुए यह प्रकट किया कि देश का बहुत बड़ा जन समाज इस प्रकार की गुटबंदी के खिक्षाफ है और वह इसपर अपना तो क्रोध प्रकट कर रहा है। सोमाप्रान्त और भाग्राम ने इस प्रकार अनिवार्य गुट-बाजी के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई है। सिख इस गुट-बाजी में अपने आप को अकेखा पाते हैं और उनमें इसके खिलाफ कार आन्दोलन उठ रहा है। सिक्स लोग पंजाब में अल्पसंख्यक भारतवर्ष और उसका स्वातन्त्र संपाम कारण इस गुटवाजी के कारण बहुत ही निःसहाय हो जायेंगे। हम भी उनके इस विरोध के साथ सहानुभूति रखते हैं। क्योंकि हम खुद भी इस प्रकार की प्रान्तों को गुट-बाजी को अपने मौलिक सिद्धान्तों के खिलाफ समझते हैं। " मौलाना भाजाद ने यूरोपियनों को दिये जाने वाले प्रतिनिधित्व के विशेषाधिकारों का भी विरोध किया । इस प्रकार पत्र व्यवहार और वादानुवाद के होते हुए भी काग्रेस और लीग एक मस न हो सकी और तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड वेवश्च ने इन दोनों महान् राजनैतिक दलों में समझौता न होने के कारण अपनी असफलता की घोषणा की और इस सफलता की सारी जिम्मे दारी अपने सिर पर ली । पंद्रह जून को वाइसरॉय ने श्री जिया को यह सूचित किया कि कांग्रेस प्रतिनिधियों के साथ अन्तर्कालीन सरकार के निर्माण में उनकी जो बातचीत हो रही थी वह असफल होगई है और वे इस सम्बन्ध में कक्ष अपना वक्तव्य प्रकाशित कर रहे हैं। पंद्रह जून का वाइसरॉय ने मौलाका भाजाद को जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने यह प्रकट किया किः--"हम मारतीय स्वाधीनता के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हर सम्भव उपाय को काम में ले रहे हैं। हमने यह पहिले हो प्रकट कर दिया है कि सबसे पहिले भारतवासियों के प्रति निधियों के द्वारा नये विधान बनने की आवश्यकता है।" "केबिनेट मंत्रि-मंडल और मैं गुट-बाजों के सिद्धान्त के सम्बन्ध में आपकी जो श्रापनियां हैं, उनसे सभी परिचित हैं, मैं आप पर यह प्रकट कर देना चाहता हूँ कि सोलह मई के केबिनेट मिशन के बचना में शान्दों की गुटबाजी को अनिवार्य नहीं रक्या गया है। उसने इस बात को प्रान्तों के प्रतिनिधियों के विसंग पर छोड़ा है, इसमें जो व्यवस्था गई है वह यह है कि कुछ विशिष्ट मान्छों के प्रतिनिधि गब्द अपने
World Cup: वर्ल्ड कप के नॉकआउट में एंट्री मार इस छोटे से देश ने रचा इतिहास, दिल्ली बराबर है पॉपुलेशन! World Cup Knockouts : एक छोटे से देश ने वर्ल्ड कप के नॉकआउट में सीधी एंट्री मार ली, जिससे फैंस भी हैरान हैं. सबसे खास बात है कि इस देश की जनसंख्या करीब-करीब दिल्ली के बराबर है. अब ये देश वर्ल्ड कप में ट्रॉफी जीतने के मकसद से उतरेगा. World Cup Knockouts : वर्ल्ड कप के नॉकआउट में एक छोटे से देश ने सीधी एंट्री मार ली, जिससे फैंस खुश और हैरान हैं. सबसे खास बात है कि इस देश की जनसंख्या करीब-करीब दिल्ली के बराबर है. इस देश ने विरोधी टीम कोलंबिया को 1-0 के अंतर से मात दी. मोरक्को ने कोलंबिया को 1-0 से हराकर महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट में जगह बनाकर इतिहास रच दिया. वहीं, दो बार का चैंपियन जर्मनी दक्षिण कोरिया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर पहली बार नॉकआउट चरण में जगह बनाने में विफल रहा. मोरक्को पहला अरब या उत्तर अफ्रीकी देश है जिसने महिला वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण की बाधा को पार किया है और टूर्नामेंट में खेल रही 8 नई टीमों में पहली टीम है जिसने नॉकआउट में जगह बनाई. मोरक्को के लिए विजयी गोल पहले हाफ के इंजरी टाइम में अनीसा लाहमारी ने दागा. विरोधी टीम के गोलकीपर ने पेनल्टी किक पर शॉट को रोक दिया था लेकिन अनीसा ने रिबाउंड पर गोल दाग दिया. इस जीत की बदौलत मोरक्को ने ग्रुप एच में कोलंबिया के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट में जगह बनाई. इसके साथ ही 2 बार का चैंपियन जर्मनी टूर्नामेंट से बाहर हो गया. कोलंबिया और मोरक्को दोनों के समान छह अंक रहे जबकि जर्मनी चार अंक ही जुटा पाया. मोरक्को को टूर्नामेंट में अपने पदार्पण मैच में जर्मनी के खिलाफ 0-6 से हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इसके बाद उसने कोरिया और कोलंबिया को हराकर नॉकआउट में एंट्री मारी. दुनिया की दूसरे नंबर की टीम जर्मनी को ब्रिसबेन में इसी मुकाबले के साथ चल रहे एक अन्य ग्रुप मैच में दक्षिण कोरिया ने हराना था लेकिन यह मुकाबला 1-1 से बराबर रहा. कप्तान एलेक्सांद्रा पोप की अगुआई में जर्मनी ने कई मौके बनाए लेकिन टीम विजयी गोल दागने में विफल रही. महिला वर्ल्ड कप में नौवीं बार हिस्सा लेते हुए जर्मनी की टीम पहली बार ग्रुप चरण से आगे बढ़ने में नाकाम रही.
World Cup: वर्ल्ड कप के नॉकआउट में एंट्री मार इस छोटे से देश ने रचा इतिहास, दिल्ली बराबर है पॉपुलेशन! World Cup Knockouts : एक छोटे से देश ने वर्ल्ड कप के नॉकआउट में सीधी एंट्री मार ली, जिससे फैंस भी हैरान हैं. सबसे खास बात है कि इस देश की जनसंख्या करीब-करीब दिल्ली के बराबर है. अब ये देश वर्ल्ड कप में ट्रॉफी जीतने के मकसद से उतरेगा. World Cup Knockouts : वर्ल्ड कप के नॉकआउट में एक छोटे से देश ने सीधी एंट्री मार ली, जिससे फैंस खुश और हैरान हैं. सबसे खास बात है कि इस देश की जनसंख्या करीब-करीब दिल्ली के बराबर है. इस देश ने विरोधी टीम कोलंबिया को एक-शून्य के अंतर से मात दी. मोरक्को ने कोलंबिया को एक-शून्य से हराकर महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट में जगह बनाकर इतिहास रच दिया. वहीं, दो बार का चैंपियन जर्मनी दक्षिण कोरिया के खिलाफ एक-एक से ड्रॉ खेलकर पहली बार नॉकआउट चरण में जगह बनाने में विफल रहा. मोरक्को पहला अरब या उत्तर अफ्रीकी देश है जिसने महिला वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण की बाधा को पार किया है और टूर्नामेंट में खेल रही आठ नई टीमों में पहली टीम है जिसने नॉकआउट में जगह बनाई. मोरक्को के लिए विजयी गोल पहले हाफ के इंजरी टाइम में अनीसा लाहमारी ने दागा. विरोधी टीम के गोलकीपर ने पेनल्टी किक पर शॉट को रोक दिया था लेकिन अनीसा ने रिबाउंड पर गोल दाग दिया. इस जीत की बदौलत मोरक्को ने ग्रुप एच में कोलंबिया के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट में जगह बनाई. इसके साथ ही दो बार का चैंपियन जर्मनी टूर्नामेंट से बाहर हो गया. कोलंबिया और मोरक्को दोनों के समान छह अंक रहे जबकि जर्मनी चार अंक ही जुटा पाया. मोरक्को को टूर्नामेंट में अपने पदार्पण मैच में जर्मनी के खिलाफ शून्य-छः से हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इसके बाद उसने कोरिया और कोलंबिया को हराकर नॉकआउट में एंट्री मारी. दुनिया की दूसरे नंबर की टीम जर्मनी को ब्रिसबेन में इसी मुकाबले के साथ चल रहे एक अन्य ग्रुप मैच में दक्षिण कोरिया ने हराना था लेकिन यह मुकाबला एक-एक से बराबर रहा. कप्तान एलेक्सांद्रा पोप की अगुआई में जर्मनी ने कई मौके बनाए लेकिन टीम विजयी गोल दागने में विफल रही. महिला वर्ल्ड कप में नौवीं बार हिस्सा लेते हुए जर्मनी की टीम पहली बार ग्रुप चरण से आगे बढ़ने में नाकाम रही.
फ़िरोज़ाबाद जिले के बसई मुहम्मदपुर के गांव बिहारी पुर में स्थित ऐतिहासिक शिवमंदिर पर आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया। दरअसल, भारी वर्षा दौरान यह घटना घटी। तेज आवाज के साथ बिजली चमकी और मंदिर के गुंबर पर जा गिरी। जिससे मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि इस दौरान कोई जान-माल की क्षति नहीं हुई है। वहीं इस संबंध में पुजारी ने बताया कि , बारिश हो रही थी। तभी तेज आवाज के साथ बिजली गिरी। कहा कि पूरा मंदिर परिसर में तेज प्रकाश हुआ और लगा कि मंदिर के उपर बिजली गिरी है। सुबह देखने पर पता चला कि गुबंद क्षतिग्रस्त हुआ है। सुबह मंदिर पर बिजली गिरने की बात सुन बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और क्षतिग्रस्त हिस्से को देखने लगे। सैकड़ों वर्ष पुराना है यह शिव जी का मंदिर। ग्रामीणों ने बताया बिजली कड़कने की आवाज से लोग डर गए। सुबह देखा तो मंदिर की गुंबद टूटी हुई थी। मंदिर के अंदर गुम्मद के टुकड़े और कांच के शीशे बिगड़े पड़े हुए थे। सुबह से ही मंदिर में भगवान शिव की पूजा के लिए तांता लगा रहा। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोगों की सुबह से ही मंदिर में लगी भीड़। This website follows the DNPA Code of Ethics.
फ़िरोज़ाबाद जिले के बसई मुहम्मदपुर के गांव बिहारी पुर में स्थित ऐतिहासिक शिवमंदिर पर आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया। दरअसल, भारी वर्षा दौरान यह घटना घटी। तेज आवाज के साथ बिजली चमकी और मंदिर के गुंबर पर जा गिरी। जिससे मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि इस दौरान कोई जान-माल की क्षति नहीं हुई है। वहीं इस संबंध में पुजारी ने बताया कि , बारिश हो रही थी। तभी तेज आवाज के साथ बिजली गिरी। कहा कि पूरा मंदिर परिसर में तेज प्रकाश हुआ और लगा कि मंदिर के उपर बिजली गिरी है। सुबह देखने पर पता चला कि गुबंद क्षतिग्रस्त हुआ है। सुबह मंदिर पर बिजली गिरने की बात सुन बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए और क्षतिग्रस्त हिस्से को देखने लगे। सैकड़ों वर्ष पुराना है यह शिव जी का मंदिर। ग्रामीणों ने बताया बिजली कड़कने की आवाज से लोग डर गए। सुबह देखा तो मंदिर की गुंबद टूटी हुई थी। मंदिर के अंदर गुम्मद के टुकड़े और कांच के शीशे बिगड़े पड़े हुए थे। सुबह से ही मंदिर में भगवान शिव की पूजा के लिए तांता लगा रहा। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोगों की सुबह से ही मंदिर में लगी भीड़। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुंबई। रिलायंस जियो ने एक जनवरी 2021 से अपने नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में सभी ऑफ-नेट घरेलू वॉयस कॉल को मुफ्त करने की घोषणा की है. कंपनी ने इस संबंध में गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा कि शुक्रवार से सभी घरेलू वॉयस कॉल पर इंटरकनेक्ट यूसेज चार्जेस (IUCs) खत्म किए जाने को ध्यान में रखते हुए किया गया है. रिलायंस जियो की ओर से जारी बयान में बताया गया कि आईयूसी चार्ज के खत्म किए जाने के बाद एक जनवरी 2021 से ऑफ-नेट घरेलू वॉयस कॉल चार्ज को वापस लिए जाने के अपने वायदे को पूरा किया है. जियो नेटवर्क पर ऑन-नेट वॉयस कॉल पहले से ही मुफ्त है. दूरसंचार नियंत्रक के निर्देशों के मुताबिक, एक जनवरी 2021 से 'बिल एण्ड कीप' दौर शुरू हो रहा है. इसके साथ सभी घरेलू वॉयस कॉल पर लगने वाला आईसीयू चार्जेस खत्म हो गया है.
मुंबई। रिलायंस जियो ने एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस से अपने नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में सभी ऑफ-नेट घरेलू वॉयस कॉल को मुफ्त करने की घोषणा की है. कंपनी ने इस संबंध में गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा कि शुक्रवार से सभी घरेलू वॉयस कॉल पर इंटरकनेक्ट यूसेज चार्जेस खत्म किए जाने को ध्यान में रखते हुए किया गया है. रिलायंस जियो की ओर से जारी बयान में बताया गया कि आईयूसी चार्ज के खत्म किए जाने के बाद एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस से ऑफ-नेट घरेलू वॉयस कॉल चार्ज को वापस लिए जाने के अपने वायदे को पूरा किया है. जियो नेटवर्क पर ऑन-नेट वॉयस कॉल पहले से ही मुफ्त है. दूरसंचार नियंत्रक के निर्देशों के मुताबिक, एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस से 'बिल एण्ड कीप' दौर शुरू हो रहा है. इसके साथ सभी घरेलू वॉयस कॉल पर लगने वाला आईसीयू चार्जेस खत्म हो गया है.
ब्रेक्ज़िट पर ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे द्वारा संसद में लाया गया मसौदा प्रस्ताव वहाँ के हाउस ऑफ कॉमंस ने लगातार तीसरी बार खारिज कर दिया। 29 मार्च को हुए मतदान में उनके प्रस्ताव के विरोध में 344 और समर्थन में 286 वोट पड़े। इससे पहले भी दो बार उनके इस प्रस्ताव को 'हाउस ऑफ कॉमंस' में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने को लेकर स्थिति और उलझ गई है। यह मतदान ब्रेक्ज़िट के भविष्य पर नहीं, बल्कि इससे जुड़े कुछ मुद्दों पर किया गया था, जिनमें आयरलैंड सीमा को लेकर हुआ समझौता, यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने पर पैसों के लेनदेन और नागरिकों के अधिकार शामिल थे। आपको बता दें कि 29 मार्च, 2017 को ब्रिटेन सरकार ने अनुच्छेद-50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेक्ज़िट लागू होना था। लेकिन यह तभी हो पाता जब हाउस ऑफ कॉमंस में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री का प्रस्ताव पारित हो जाता। अब 12 अप्रैल तक ब्रिटेन को इसका कोई-न-कोई हल निकालना है क्योंकि ऐसा करना कानूनी रूप से बाध्यकरी है। ब्रेक्ज़िट की इस विषम स्थिति पर विचार करने के लिये यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने 10 अप्रैल को यूरोपीय नेताओं का एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन बुलाया है। ब्रिटेन की संसद में क्यों पहुँचा यह मुद्दा? दरअसल, 2017 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ब्रेक्ज़िट पर संसद में मतदान होना चाहिये कि क्या सरकार इसकी प्रक्रिया शुरू कर सकती है या नहीं? और इस मुद्दे पर स्कॉटलैंड, वेल्स तथा उत्तरी आयरलैंड की संसद से मंज़ूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि ब्रेक्ज़िट पर संसद की राय नहीं लेना अलोकतांत्रिक होगा। इस निर्णय के बाद ब्रिटिश सरकार लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 को आत्मनिर्णय के आधार पर लागू नहीं कर पाई और यह मामला संसद में लाना पड़ा। आपको बता दें कि लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 के तहत किसी सदस्य देश के यूरोपीय संघ से अलग होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है। क्या है ब्रेक्ज़िट? ब्रेक्ज़िट (Brexit) दो शब्दों- Britain+Exit से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ब्रिटेन का बाहर निकलना। दरअसल, यूरोपीय संघ में रहने या न रहने के सवाल पर यूनाइटेड किंगडम में 23 जून, 2016 को जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमें लगभग 52 फीसदी वोट यूरोपीय संघ से बाहर होने के पक्ष में पड़े थे। जनमत संग्रह में केवल एक प्रश्न पूछा गया था- क्या यूनाइटेड किंगडम को यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहना चाहिये या इसे छोड़ देना चाहिये? इसके पीछे ब्रिटेन की संप्रभुता, संस्कृति और पहचान बनाए रखने का तर्क देते हुए इसे Brexit नाम दिया गया। आपको बता दें कि ब्रेक्ज़िट पर जनमत संग्रह तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन का चुनावी वादा था, इसीलिये यह जनमत संग्रह हुआ और इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वह ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्षधर थे। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया 29 मार्च, 2019 तक पूरी हो जानी थी, लेकिन हालत यह है कि इसकी मंज़ूरी देने वालाअन्य और सर्वमान्य फॉर्मूला बनाया नहीं जा सका है। यदि हाउस ऑफ कॉमंस में प्रधानमंत्री का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता तो 29 मार्च की समय सीमा को 22 मई तक बढ़ाया जा सकता था, लेकिन अब ब्रिटेन को अलग होने के लिये 12 अप्रैल तक का ही वक्त मिलेगा...और तब तक उसके सामने सभी विकल्प खुले रहेंगे। यानी वह चाहे तो थेरेसा मे वाला समझौता स्वीकार करे या बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ छोड़ दे या लंबे समय तक इसका सदस्य बना रहे या फिर अनुच्छेद 50 को पूरी तरह रद्द कर दे। क्या है अनुच्छेद 50? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ब्रिटिश सरकार लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 को आत्मनिर्णय के आधार पर लागू नहीं कर पाई और यह मामला संसद में लाना पड़ा। आपको बता दें कि लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 के तहत किसी सदस्य देश के यूरोपीय संघ से अलग होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है। अर्थात् लिस्बन संधि का अनुच्छेद 50 यूरोपीय संघ के मौजूदा सदस्यों को संघ छोड़ने का अधिकार देता है। संघ से बाहर निकलने की रूपरेखा भी इसी अनुच्छेद के तहत निर्धारित होती है। इसके अंतर्गत बाहर निकल रहे देश को आपसी बातचीत कर सहमति के लिये दो साल का समय मिलता है। अनुच्छेद 50 लागू हो जाने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता, यह केवल वापस तभी होगा जब सभी सदस्य देश इसके लिये सहमत होंगे। - सबसे पहले बाहर जाने वाले देश को यूरोपीय परिषद को औपचारिक रूप से सूचित करना होगा। - यह बताना होगा कि वह किसी समझौते तक पहुँचने के लिये दो साल का समय दे रहा है। - वह देश यूरोपीय संघ की उन आंतरिक चर्चाओं का हिस्सा नहीं होगा, जिनमें उस देश पर बातचीत होगी। - बाहर निकलने के फैसले को बहुमत से मंज़ूरी मिलनी चाहिये। - इसके लिये यूरोपीय संसद के सदस्यों का सहयोग भी आवश्यक है। यूरोपीय संघ 28 देशों की एक आर्थिक और राजनीतिक पार्टनरशिप है, जो एक संधि के द्वारा आपस में जुड़े हुए हैं। दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में यह कोशिश की गई कि महाद्वीप के सभी देश आर्थिक रूप से एक साथ आएँ और एकजुट होकर एक व्यापार समूह का गठन करें। इसी को मद्देनज़र रखते हुए 1993 में यूरोपीय संघ का जन्म हुआ और 2004 में जब यूरो करेंसी लॉन्च की गई तब यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक रूप से एकजुट हो गया। यूरोपीय संघ एकल बाज़ार सिद्धांत पर काम करता है अर्थात् किसी भी तरह का सामान और व्यक्ति बिना किसी टैक्स या बिना किसी रुकावट के कहीं भी आ-जा सकते हैं एवं बिना रोक-टोक के नौकरी, व्यवसाय तथा स्थायी तौर पर निवास कर सकते हैं। - चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब ब्रिटेन सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का प्रस्ताव रख सकती है। - यूरोपीय आयोग कह चुका है कि यूरोपीय संघ अब बिना किसी समझौते के ब्रेक्ज़िट के लिये पूरी तरह से तैयार है। यूरोपीय संघ दिसंबर 2017 से इसके लिये तैयारी कर रहा है और अब 12 अप्रैल की आधी रात को 'बिना किसी समझौते के अलग होने के' परिदृश्य के लिये पूरी तरह से तैयार है। - एक अन्य उपाय के तहत इस मुद्दे पर दोबारा जनमत संग्रह भी कराया जा सकता है, लेकिन यह अपने आप नहीं हो सकता। इसके लिये चुनाव और जनमत संग्रह एक्ट 2000 के नियमों का पालन करना होगा। - वर्तमान परिस्थितियों में अगर 12 अप्रैल तक ब्रिटिश संसद में आम सहमति नहीं बन पाती है तो ब्रिटेन अपने आप यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा। - इस अनिश्चितता की वज़ह से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, जो पिछली तिमाही में 0.4% सिकुड़ गई। ब्रिटेन की सालाना विकास दर छह साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। नए चुनावों से भी यह दुविधा शायद ही खत्म हो, इसलिये एक विकल्प यह सुझाया जा रहा है कि यूरोपीय संघ छोड़ने को लेकर एक और जनमत संग्रह कराया जाए। इसके पीछे सोच यह है कि पिछले ढाई साल में लोगों का यह भ्रम टूट गया है कि इससे कोई हानि नहीं होगी। लेकिन अब एक बात जो तय है, वह यह कि निर्णय ब्रिटेन को करना है और जल्द करना है। लेकिन अनिर्णय और अनिश्चय की जिस स्थिति में वह फँसा है, उससे निकलना आसान नहीं है।
ब्रेक्ज़िट पर ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे द्वारा संसद में लाया गया मसौदा प्रस्ताव वहाँ के हाउस ऑफ कॉमंस ने लगातार तीसरी बार खारिज कर दिया। उनतीस मार्च को हुए मतदान में उनके प्रस्ताव के विरोध में तीन सौ चौंतालीस और समर्थन में दो सौ छियासी वोट पड़े। इससे पहले भी दो बार उनके इस प्रस्ताव को 'हाउस ऑफ कॉमंस' में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने को लेकर स्थिति और उलझ गई है। यह मतदान ब्रेक्ज़िट के भविष्य पर नहीं, बल्कि इससे जुड़े कुछ मुद्दों पर किया गया था, जिनमें आयरलैंड सीमा को लेकर हुआ समझौता, यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने पर पैसों के लेनदेन और नागरिकों के अधिकार शामिल थे। आपको बता दें कि उनतीस मार्च, दो हज़ार सत्रह को ब्रिटेन सरकार ने अनुच्छेद-पचास लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेक्ज़िट लागू होना था। लेकिन यह तभी हो पाता जब हाउस ऑफ कॉमंस में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री का प्रस्ताव पारित हो जाता। अब बारह अप्रैल तक ब्रिटेन को इसका कोई-न-कोई हल निकालना है क्योंकि ऐसा करना कानूनी रूप से बाध्यकरी है। ब्रेक्ज़िट की इस विषम स्थिति पर विचार करने के लिये यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने दस अप्रैल को यूरोपीय नेताओं का एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन बुलाया है। ब्रिटेन की संसद में क्यों पहुँचा यह मुद्दा? दरअसल, दो हज़ार सत्रह में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ब्रेक्ज़िट पर संसद में मतदान होना चाहिये कि क्या सरकार इसकी प्रक्रिया शुरू कर सकती है या नहीं? और इस मुद्दे पर स्कॉटलैंड, वेल्स तथा उत्तरी आयरलैंड की संसद से मंज़ूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि ब्रेक्ज़िट पर संसद की राय नहीं लेना अलोकतांत्रिक होगा। इस निर्णय के बाद ब्रिटिश सरकार लिस्बन संधि के अनुच्छेद पचास को आत्मनिर्णय के आधार पर लागू नहीं कर पाई और यह मामला संसद में लाना पड़ा। आपको बता दें कि लिस्बन संधि के अनुच्छेद पचास के तहत किसी सदस्य देश के यूरोपीय संघ से अलग होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है। क्या है ब्रेक्ज़िट? ब्रेक्ज़िट दो शब्दों- Britain+Exit से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ब्रिटेन का बाहर निकलना। दरअसल, यूरोपीय संघ में रहने या न रहने के सवाल पर यूनाइटेड किंगडम में तेईस जून, दो हज़ार सोलह को जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमें लगभग बावन फीसदी वोट यूरोपीय संघ से बाहर होने के पक्ष में पड़े थे। जनमत संग्रह में केवल एक प्रश्न पूछा गया था- क्या यूनाइटेड किंगडम को यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहना चाहिये या इसे छोड़ देना चाहिये? इसके पीछे ब्रिटेन की संप्रभुता, संस्कृति और पहचान बनाए रखने का तर्क देते हुए इसे Brexit नाम दिया गया। आपको बता दें कि ब्रेक्ज़िट पर जनमत संग्रह तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन का चुनावी वादा था, इसीलिये यह जनमत संग्रह हुआ और इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वह ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्षधर थे। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया उनतीस मार्च, दो हज़ार उन्नीस तक पूरी हो जानी थी, लेकिन हालत यह है कि इसकी मंज़ूरी देने वालाअन्य और सर्वमान्य फॉर्मूला बनाया नहीं जा सका है। यदि हाउस ऑफ कॉमंस में प्रधानमंत्री का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता तो उनतीस मार्च की समय सीमा को बाईस मई तक बढ़ाया जा सकता था, लेकिन अब ब्रिटेन को अलग होने के लिये बारह अप्रैल तक का ही वक्त मिलेगा...और तब तक उसके सामने सभी विकल्प खुले रहेंगे। यानी वह चाहे तो थेरेसा मे वाला समझौता स्वीकार करे या बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ छोड़ दे या लंबे समय तक इसका सदस्य बना रहे या फिर अनुच्छेद पचास को पूरी तरह रद्द कर दे। क्या है अनुच्छेद पचास? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ब्रिटिश सरकार लिस्बन संधि के अनुच्छेद पचास को आत्मनिर्णय के आधार पर लागू नहीं कर पाई और यह मामला संसद में लाना पड़ा। आपको बता दें कि लिस्बन संधि के अनुच्छेद पचास के तहत किसी सदस्य देश के यूरोपीय संघ से अलग होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है। अर्थात् लिस्बन संधि का अनुच्छेद पचास यूरोपीय संघ के मौजूदा सदस्यों को संघ छोड़ने का अधिकार देता है। संघ से बाहर निकलने की रूपरेखा भी इसी अनुच्छेद के तहत निर्धारित होती है। इसके अंतर्गत बाहर निकल रहे देश को आपसी बातचीत कर सहमति के लिये दो साल का समय मिलता है। अनुच्छेद पचास लागू हो जाने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता, यह केवल वापस तभी होगा जब सभी सदस्य देश इसके लिये सहमत होंगे। - सबसे पहले बाहर जाने वाले देश को यूरोपीय परिषद को औपचारिक रूप से सूचित करना होगा। - यह बताना होगा कि वह किसी समझौते तक पहुँचने के लिये दो साल का समय दे रहा है। - वह देश यूरोपीय संघ की उन आंतरिक चर्चाओं का हिस्सा नहीं होगा, जिनमें उस देश पर बातचीत होगी। - बाहर निकलने के फैसले को बहुमत से मंज़ूरी मिलनी चाहिये। - इसके लिये यूरोपीय संसद के सदस्यों का सहयोग भी आवश्यक है। यूरोपीय संघ अट्ठाईस देशों की एक आर्थिक और राजनीतिक पार्टनरशिप है, जो एक संधि के द्वारा आपस में जुड़े हुए हैं। दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में यह कोशिश की गई कि महाद्वीप के सभी देश आर्थिक रूप से एक साथ आएँ और एकजुट होकर एक व्यापार समूह का गठन करें। इसी को मद्देनज़र रखते हुए एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में यूरोपीय संघ का जन्म हुआ और दो हज़ार चार में जब यूरो करेंसी लॉन्च की गई तब यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक रूप से एकजुट हो गया। यूरोपीय संघ एकल बाज़ार सिद्धांत पर काम करता है अर्थात् किसी भी तरह का सामान और व्यक्ति बिना किसी टैक्स या बिना किसी रुकावट के कहीं भी आ-जा सकते हैं एवं बिना रोक-टोक के नौकरी, व्यवसाय तथा स्थायी तौर पर निवास कर सकते हैं। - चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब ब्रिटेन सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का प्रस्ताव रख सकती है। - यूरोपीय आयोग कह चुका है कि यूरोपीय संघ अब बिना किसी समझौते के ब्रेक्ज़िट के लिये पूरी तरह से तैयार है। यूरोपीय संघ दिसंबर दो हज़ार सत्रह से इसके लिये तैयारी कर रहा है और अब बारह अप्रैल की आधी रात को 'बिना किसी समझौते के अलग होने के' परिदृश्य के लिये पूरी तरह से तैयार है। - एक अन्य उपाय के तहत इस मुद्दे पर दोबारा जनमत संग्रह भी कराया जा सकता है, लेकिन यह अपने आप नहीं हो सकता। इसके लिये चुनाव और जनमत संग्रह एक्ट दो हज़ार के नियमों का पालन करना होगा। - वर्तमान परिस्थितियों में अगर बारह अप्रैल तक ब्रिटिश संसद में आम सहमति नहीं बन पाती है तो ब्रिटेन अपने आप यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा। - इस अनिश्चितता की वज़ह से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, जो पिछली तिमाही में शून्य.चार% सिकुड़ गई। ब्रिटेन की सालाना विकास दर छह साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। नए चुनावों से भी यह दुविधा शायद ही खत्म हो, इसलिये एक विकल्प यह सुझाया जा रहा है कि यूरोपीय संघ छोड़ने को लेकर एक और जनमत संग्रह कराया जाए। इसके पीछे सोच यह है कि पिछले ढाई साल में लोगों का यह भ्रम टूट गया है कि इससे कोई हानि नहीं होगी। लेकिन अब एक बात जो तय है, वह यह कि निर्णय ब्रिटेन को करना है और जल्द करना है। लेकिन अनिर्णय और अनिश्चय की जिस स्थिति में वह फँसा है, उससे निकलना आसान नहीं है।
(मऊ) : कोपागंज स्थानीय थाने की पुलिस ने मंगलवार की सुबह सेंदुराइच गांव में छापेमारी कर एक घर से 50 पेटी अवैध शराब बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस बरामद शराब की किमत लगभग तीन लाख रुपया आंक रही है। मंगलवार की सुबह मुखबिर ने कोपागंज थानाध्यक्ष कृष्ण मुरारी मिश्रा को सूचना कि सेंदुराइच गांव में दूसरे प्रांत की शराब भारी मात्रा में बेची जा रही है। सूचना पाते ही थानाध्यक्ष अपने हमराहियों के साथ सेंदुराइच गांव पहुंचे और संजय यादव के मकान में छापेमारी की। भारी संख्या में पुलिस को देख संजय के घर के पास लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने संजय के घर का हर एक कोना खंगाला लेकिन उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा। जब वे जाने लगे तो थानाध्यक्ष की नजर भूसा रखे कमरे पर पड़ी। इसके बाद जब हमराहियों ने भूसा हटा के देखा तो एक के बाद एक कर 50 पेटी शराब हाथ लगी। इसमें से 42 पेटी अंग्रेजी और आठ पेटी देशी शराब थी। अंग्रेजी शराब की बोतल पर मेड इन अरुणाचल लिखा हुआ था जबकि देशी शराब की बोतल पर गाजीपुर के नंदगंज डिस्टिलरी का पता अंकित था। बरामद शराब की कीमत पुलिस लगभग तीन लाख रुपया आंक रही है। पुलिस ने आरोपी संजय यादव को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी का पुलिस ने संबंधित धाराओं में चालान कर दिया। पुलिसिया कार्रवाई की जानकारी होते ही आरोपी को छुड़ाने और मामले को रफा-दफा करने की जुगाड़ में राजनैतिक दल के लाग भी जुट गए हैं।
: कोपागंज स्थानीय थाने की पुलिस ने मंगलवार की सुबह सेंदुराइच गांव में छापेमारी कर एक घर से पचास पेटी अवैध शराब बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस बरामद शराब की किमत लगभग तीन लाख रुपया आंक रही है। मंगलवार की सुबह मुखबिर ने कोपागंज थानाध्यक्ष कृष्ण मुरारी मिश्रा को सूचना कि सेंदुराइच गांव में दूसरे प्रांत की शराब भारी मात्रा में बेची जा रही है। सूचना पाते ही थानाध्यक्ष अपने हमराहियों के साथ सेंदुराइच गांव पहुंचे और संजय यादव के मकान में छापेमारी की। भारी संख्या में पुलिस को देख संजय के घर के पास लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने संजय के घर का हर एक कोना खंगाला लेकिन उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा। जब वे जाने लगे तो थानाध्यक्ष की नजर भूसा रखे कमरे पर पड़ी। इसके बाद जब हमराहियों ने भूसा हटा के देखा तो एक के बाद एक कर पचास पेटी शराब हाथ लगी। इसमें से बयालीस पेटी अंग्रेजी और आठ पेटी देशी शराब थी। अंग्रेजी शराब की बोतल पर मेड इन अरुणाचल लिखा हुआ था जबकि देशी शराब की बोतल पर गाजीपुर के नंदगंज डिस्टिलरी का पता अंकित था। बरामद शराब की कीमत पुलिस लगभग तीन लाख रुपया आंक रही है। पुलिस ने आरोपी संजय यादव को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी का पुलिस ने संबंधित धाराओं में चालान कर दिया। पुलिसिया कार्रवाई की जानकारी होते ही आरोपी को छुड़ाने और मामले को रफा-दफा करने की जुगाड़ में राजनैतिक दल के लाग भी जुट गए हैं।
प्रशांत 18 महीने बाद घर जा रहा था। बेंगलुरूः बैयप्पनहल्ली के एसएमवीटी स्टेशन पर एक अलग तरह की त्रासदी सामने आ रही है. ओडिशा दुर्घटना के बाद 2 जून से पूर्वी भारत की ओर जाने वाली पांच ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, सैकड़ों लोग स्टेशन पर फंसे हुए हैं, उन्हें पता नहीं है कि वे यहां कब तक रहेंगे। कॉफी बागान श्रमिक, निर्माण श्रमिक और घर के आंतरिक श्रमिक घर जाने वालों में से हैं क्योंकि बारिश का मौसम है और उन्हें अगले दो महीनों के लिए धान के खेतों में काम मिलेगा जबकि कुछ आपात स्थिति के लिए वापस आ रहे हैं। दो एनजीओ और एक ट्रेड यूनियन उनकी मदद कर रहे हैं और श्रम विभाग शनिवार शाम को उनके साथ शामिल हो गया। निर्माण व्यवसाय में कार्यरत वीएम प्रशांत और उनके बहनोई चिंतित थे। प्रशांत 18 महीने बाद घर जा रहा था। "मेरी माँ की तबीयत पूरी तरह से बिगड़ गई है। न्यू जलपाईगुड़ी में अपने घर जाने के लिए हमने गुवाहाटी एक्सप्रेस का तत्काल ए/सी टिकट बुक किया। शुक्रवार रात हमारी 11. 40 बजे की ट्रेन कैंसिल हो गई। हम घर जाने के लिए पूरी तरह से बेताब हैं और पता नहीं अगली ट्रेन कब चलाई जाएगी. तुमकुरु में एक नारियल पाउडर कारखाने में कार्यरत अमीन और दोस्तों का एक समूह सुबह 10 बजे एसएमवीटी स्टेशन पहुंचे। उनके सहकर्मी मोहम्मद तनवीर ने कहा, "हम हावड़ा के लिए अपनी 2. 15 बजे की ट्रेन के लिए समय पर ठीक होने के लिए सुबह 7 बजे तुमकुरु से निकल गए। " अनीन ने कहा, "एक साल बाद हम घर जा रहे हैं और ट्रेन को रद्द कर दिया गया है। " "रेलवे ने हमारे टिकट रद्द कर दिए और हमारे पैसे वापस कर दिए। हमने सुबह की ट्रेन के लिए आरक्षित टिकट बुक किया है जो दरबंगा तक जाती है। " उन्होंने कहा कि उन्हें बांटने वाले एक समूह से भोजन और पानी मिला। करीब 20 लोग अपना सामान तकिए के रूप में रखकर लेटे हुए थे। "हम निर्माण व्यवसाय और अन्य नौकरियों में कार्यरत हैं और एक ही गाँव के हैं। हम सभी ने धान के खेतों में काम करके जो पैसा कमाया जा सकता है, उसे भुनाने के लिए दो महीने के लिए घर जाने का फैसला किया, "शका लाल ने कहा।
प्रशांत अट्ठारह महीने बाद घर जा रहा था। बेंगलुरूः बैयप्पनहल्ली के एसएमवीटी स्टेशन पर एक अलग तरह की त्रासदी सामने आ रही है. ओडिशा दुर्घटना के बाद दो जून से पूर्वी भारत की ओर जाने वाली पांच ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, सैकड़ों लोग स्टेशन पर फंसे हुए हैं, उन्हें पता नहीं है कि वे यहां कब तक रहेंगे। कॉफी बागान श्रमिक, निर्माण श्रमिक और घर के आंतरिक श्रमिक घर जाने वालों में से हैं क्योंकि बारिश का मौसम है और उन्हें अगले दो महीनों के लिए धान के खेतों में काम मिलेगा जबकि कुछ आपात स्थिति के लिए वापस आ रहे हैं। दो एनजीओ और एक ट्रेड यूनियन उनकी मदद कर रहे हैं और श्रम विभाग शनिवार शाम को उनके साथ शामिल हो गया। निर्माण व्यवसाय में कार्यरत वीएम प्रशांत और उनके बहनोई चिंतित थे। प्रशांत अट्ठारह महीने बाद घर जा रहा था। "मेरी माँ की तबीयत पूरी तरह से बिगड़ गई है। न्यू जलपाईगुड़ी में अपने घर जाने के लिए हमने गुवाहाटी एक्सप्रेस का तत्काल ए/सी टिकट बुक किया। शुक्रवार रात हमारी ग्यारह. चालीस बजे की ट्रेन कैंसिल हो गई। हम घर जाने के लिए पूरी तरह से बेताब हैं और पता नहीं अगली ट्रेन कब चलाई जाएगी. तुमकुरु में एक नारियल पाउडर कारखाने में कार्यरत अमीन और दोस्तों का एक समूह सुबह दस बजे एसएमवीटी स्टेशन पहुंचे। उनके सहकर्मी मोहम्मद तनवीर ने कहा, "हम हावड़ा के लिए अपनी दो. पंद्रह बजे की ट्रेन के लिए समय पर ठीक होने के लिए सुबह सात बजे तुमकुरु से निकल गए। " अनीन ने कहा, "एक साल बाद हम घर जा रहे हैं और ट्रेन को रद्द कर दिया गया है। " "रेलवे ने हमारे टिकट रद्द कर दिए और हमारे पैसे वापस कर दिए। हमने सुबह की ट्रेन के लिए आरक्षित टिकट बुक किया है जो दरबंगा तक जाती है। " उन्होंने कहा कि उन्हें बांटने वाले एक समूह से भोजन और पानी मिला। करीब बीस लोग अपना सामान तकिए के रूप में रखकर लेटे हुए थे। "हम निर्माण व्यवसाय और अन्य नौकरियों में कार्यरत हैं और एक ही गाँव के हैं। हम सभी ने धान के खेतों में काम करके जो पैसा कमाया जा सकता है, उसे भुनाने के लिए दो महीने के लिए घर जाने का फैसला किया, "शका लाल ने कहा।
जिला पुलिस ने बैटरी चोर गिरोह को पकड़ा है। बैटरी चोरी मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले को लेकर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस टीम द्वारा महज कुछ समय से ही इस बैटरी चोरी मामले को सुलझाया है। वहीं, पुलिस अन्य मामलों की भी गहन जांच में जुटी हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार श्रीराम गांव गाहर भराड़ी जिला बिलासपुर ने पुलिस थाना बरमाणा में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी कि बरमाणा से डैहर रोड पर कबाड़ी की दुकान के पास अपना ट्रक खड़ा किया थ। जब वह रात करीब अढ़ाई बजे गाड़ी को भरने के लिए आए, तो गाड़ी के खिड़की के शीशे टूटे हुए थे। जब उन्होंने देखा, तो वह हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि गाड़ी की बैटरी चोरी है। वहीं, बताया जा रहा है कि उनके ट्रक के साथ खड़ी एक अन्य गाड़ी की बैटरी, जैक, गाड़ी की टंकी का सारा तेल गायब था। दोनों वाहन मालिकों को नुकसान झेलना पड़ा। वहीं, शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत बरमाणा थाना में दर्ज करवाई थी, जिसके चलते इस मामले को लेकर विशेष टीम का गठन किया गया था। वहीं, अब पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते दो आरोपियों को पकड़ा है। इन आरोपियों से चोरी का सामान भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस द्वारा इनके कब्जे से चोरी हुई चार बैटरियां, एक जैक को रिकवर किया है। इन लोगों के अन्य चोरियों में भी शामिल होने का अंदेशा है। पुलिस द्वारा जिन आरोपियों को पकड़ा गया है वह दोनों ही सदर क्षेत्र से संबधित हैं। उधर, इस बारे में डीएसपी हैडक्वार्टर राजकुमार ने बताया कि पुलिस ने बैटरी चोर मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जिला पुलिस ने बैटरी चोर गिरोह को पकड़ा है। बैटरी चोरी मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले को लेकर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस टीम द्वारा महज कुछ समय से ही इस बैटरी चोरी मामले को सुलझाया है। वहीं, पुलिस अन्य मामलों की भी गहन जांच में जुटी हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार श्रीराम गांव गाहर भराड़ी जिला बिलासपुर ने पुलिस थाना बरमाणा में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी कि बरमाणा से डैहर रोड पर कबाड़ी की दुकान के पास अपना ट्रक खड़ा किया थ। जब वह रात करीब अढ़ाई बजे गाड़ी को भरने के लिए आए, तो गाड़ी के खिड़की के शीशे टूटे हुए थे। जब उन्होंने देखा, तो वह हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि गाड़ी की बैटरी चोरी है। वहीं, बताया जा रहा है कि उनके ट्रक के साथ खड़ी एक अन्य गाड़ी की बैटरी, जैक, गाड़ी की टंकी का सारा तेल गायब था। दोनों वाहन मालिकों को नुकसान झेलना पड़ा। वहीं, शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत बरमाणा थाना में दर्ज करवाई थी, जिसके चलते इस मामले को लेकर विशेष टीम का गठन किया गया था। वहीं, अब पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते दो आरोपियों को पकड़ा है। इन आरोपियों से चोरी का सामान भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस द्वारा इनके कब्जे से चोरी हुई चार बैटरियां, एक जैक को रिकवर किया है। इन लोगों के अन्य चोरियों में भी शामिल होने का अंदेशा है। पुलिस द्वारा जिन आरोपियों को पकड़ा गया है वह दोनों ही सदर क्षेत्र से संबधित हैं। उधर, इस बारे में डीएसपी हैडक्वार्टर राजकुमार ने बताया कि पुलिस ने बैटरी चोर मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
इसमें कोई संदेह नहीं है की एलजी ने इसे एक बेहतरीन स्मार्टफ़ोन बनाया है. खूबियों में एलजी जी2 ना सिर्फ अपने फ्लैगशिप प्रतिद्वंदियों के बराबर है, बल्कि कुछ मामलों में यह उनसे बेहतर भी है. इसका डिस्प्ले अभी तक के सभी फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में सर्वोत्तम है. इसकी बैटरी लाइफ काफी अच्छी है और इसका कैमरा बहुत अच्छा परफॉरमेंस देता है. हमारी सलाह है कि एलजी जी2 एक काफी अच्छा स्मार्टफ़ोन है और इसे आप ज़रूर खरीदें. हमारा दावा है कि इस निर्णय के लिए आपको कभी अफ़सोस नहीं होगा. इस स्मार्टफ़ोन के साथ एलजी ने वास्तव में हमें हैरान कर दिया. एलजी जी2 निश्चित रूप से फ्लैगशिप कहे जाने योग्य है. इसका खूबसूरत डिस्प्ले इसके प्रतिद्वंदियों को बहुत पीछे कर देता है. इसका बेहतरीन आकार अन्य सभी 5-इंच वाले स्मार्टफोन्स को सोचने के लिए मजबूर कर देता है. इसका शानदार कैमरा जो कम रोशनी में भी बेहतरीन परफॉरमेंस देता है. इसकी बड़ी बैटरी जो एक बार चार्ज करने पर आसानी से दो दिन तक चल जाती है. इसकी सिर्फ एक ही कमी है, और वो है इसका पॉवर और वॉल्यूम की का असामान्य जगह पर होना, लेकिन यह कोई ऐसी बात नहीं कि इसके आप अभ्यस्त ना हो सकें. पहली नज़र में एलजी जी2 का डिज़ाइन काफी हद तक सैमसंग गैलेक्सी एस4 की तरह लगता है. एलजी ने डिज़ाइन के मामले में काफी सुधार किया है, क्योंकि जी2 में दाहिनी और बायीं तरफ कोई खाली जगह नहीं दिखाई देता है और स्क्रीन पूरी सतह पर फैली है. इसका आकार गैलेक्सी एस4 के लगभग बराबर है. 5. 2-इंच स्क्रीन होने के बावजूद जी2, नेक्सस 4 से कोई ज्यादा बड़ा नहीं है और कम ज़गह घेरने के कारण यह सोनी एक्सपीरिया जेड1 के सामने एक उदाहरण पेश करता है. साथ ही सोनी के नए यूजर इंटरफ़ेस से सीख लेते हुए एलजी ने भी रिटर्न, होम और ऑप्शन्स के लिए स्क्रीन के नीचे अलग से टच सेंसिटिव की देने की बजाय अब इन्हें यूजर इंटरफ़ेस में ही शामिल कर लिया है. एलजी जी2 में नए डिज़ाइन थीम के अंतर्गत वॉल्यूम रॉकर और पॉवर की को स्मार्टफ़ोन के पिछले हिस्से में दिया गया है, जो थोडा अजीब लगता है. यह परंपरागत डिज़ाइन से अलग है और इससे अभ्यस्त होने में थोडा वक्त लगता है. लेकिन एक बार इसकी आदत हो जाने के बाद फिर यह समस्या नहीं बनती. इस डिज़ाइन का फायदा ये है कि इससे फ़ोन के किनारे साफ़-सुथरे रहते हैं और एक तरफ सिर्फ सिम कार्ड स्लॉट है. माइक्रो यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और हैंड्स फ्री स्पीकर्स नीचे की तरफ हैं. हमारे पास जो एलजी जी2 रिव्यू के लिए आया वह सफ़ेद रंग का है. इस स्मार्टफ़ोन का पिछला हिस्सा फाइबरग्लास की तरह लगता है जो अच्छा दिखाई देता है. लेकिन इसकी कोई ज्यादा उपयोगिता नहीं है क्योंकि पिछला हिस्सा प्लेन होने के कारण यह कभी-कभी यह हाथ से फिसलने लगता है. इस फ़ोन का सफ़ेद रंग का फिनिश अच्छा दिखाई देता है. इस बात से थोड़ी निराशा ज़रूर होती है कि एलजी ने जी2 में पूरी तरह से प्लास्टिक का इस्तेमाल किया है, लेकिन यह अच्छे क्वालिटी का है. एलजी ने अपने इस 5. 2-इंच आईपीएस डिस्प्ले वाले स्मार्टफ़ोन जी2 को इस आकार में पेश किया है जो ज़्यादातर 5-इंच वाले फोन्स के लिए सिर्फ एक सपना है. इतना ही नहीं, इसका डिस्प्ले किसी भी स्मार्टफ़ोन में उपलब्ध अब तक के सर्वोत्तम डिस्प्ले में से एक है. इसके 5. 2-इंच स्क्रीन की पिक्सेल डेंसिटी 424पीपीआई है, जबकि गैलेक्सी एस4 के 5-इंच स्क्रीन की पिक्सेल डेंसिटी 441पीपीआई है. लेकिन दोनों में अंतर बिल्कुल मालूम नहीं पड़ता; बल्कि इसके उल्टे वास्तव में जी2 का डिस्प्ले ज्यादा क्रिस्प दिखाई देता है और इसमें रंग ज्यादा वास्तविक लगते हैं. इस बेहतरीन डिस्प्ले पर एचडी मीडिया बहुत अच्छे ढंग से चलता है. बहुत से स्मार्टफोन्स की तरह इसका भी स्क्रीन कुछ रिफ्लेक्टिव है, लेकिन इसके आईपीएस पैनल का देखने का एंगल काफी अच्छा है और साथ ही इसे बाहर रोशनी में भी देखा जा सकता है. इस समय उपलब्ध नवीनतम फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स गैलेक्सीएस4, एचटीसी वन और एक्सपीरिया जेड1 से तुलना करें तो एलजी जी2 का डिस्प्ले हर मामले में अब तक का सर्वोत्तम है - चाहे क्रिस्पनेस की बात हो, या रंग, देखने के एंगल और या बाहर रोशनी में दिखाई देने की बात हो. क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 800 प्रोसेसर और एड्रीनो 330 ग्राफ़िक्स के साथ एलजी जी2 एक बेहद शक्तिशाली स्मार्टफ़ोन है. इसकी तुलना सोनी एक्सपीरिया जेड1 से की जा सकती है जिसमे भी यही प्रोसेसर है. बेंचमार्क्स से पहले अगर हम वास्तविक इस्तेमाल में इसके परफॉरमेंस की बात करें, तो अन्य स्नैपड्रैगन 800 और 2जीबी रैम वाले स्मार्टफोन्स की तरह जी2 का परफॉरमेंस भी बेहद शानदार है. एप्स बहुत तेज़ी से खुलते हैं, इंटरफ़ेस काफी स्मूद है और बैकग्राउंड में किसी भी तरह का लोड इस फ़ोन के परफॉरमेंस को धीमा नहीं कर पाता है. लेकिन स्नैपड्रैगन 800 वाले अन्य स्मार्टफोन्स की तरह एलजी जी2 भी लोड ज्यादा होने पर काफी गर्म हो जाता है. इस पर 10 मिनट तक गेम चलाइए और इसका बैक पैनल गर्म होकर कुछ असुविधाजनक हो जाता है. कुल मिलाकर इस फ़ोन पर चाहे कितना भी लोड दें, यह सफलतापूर्वक उसे परफॉर्म करता है. हमे ऐसा कभी नहीं दिखा कि कोई भी लोड या गेम या कोई बेंचमार्क, स्नैपड्रैगन 800 प्रोसेसर के लिए मुश्किल साबित हुआ हो. एलजी जी2 का बड़ा 3000एमएएच बैटरी, इसमें प्रयुक्त शक्तिशाली प्रोसेसर के लिहाज़ से काफी अच्छा है. एक बार चार्ज करने पर यह लगभग दो दिन तक चल जाता है. यह बैटरी लाइफ लगातार 3जी के साथ मेल, फेसबुक और ट्विटर, वायस कॉल्स आदि, 20% ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने पर है, जो कि काफी अच्छा है. एक्सपीरिया ने बड़ी बैटरी के साथ हमें प्रभावित किया था, जी2 में भी वैसी ही बात है. बड़ी बैटरी निश्चित रूप से काफी सहायक सिद्ध होती है, स्मार्टफ़ोन निर्माताओं को इस तरफ अवश्य ध्यान देना चाहिए. एलजी जी2 में ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन के साथ 13 मेगापिक्सेल का कैमरा है. अच्छी रोशनी में तो इसके कैमरे का परफॉरमेंस काफी अच्छा है ही, लेकिन इसकी सबसे खास बात इसका कम रोशनी में बेहतरीन परफॉरमेंस है. हलांकि कैमरा कम रोशनी में फोकस करने में थोडा समय लेता है. कुल मिलाकर इसका कैमरा काफी अच्छा है, खासकर कम रोशनी में इसका परफॉरमेंस ज़बरदस्त है, जिसकी कमी आप अक्सर स्मार्टफोन्स कैमरों में महसूस करते हैं.
इसमें कोई संदेह नहीं है की एलजी ने इसे एक बेहतरीन स्मार्टफ़ोन बनाया है. खूबियों में एलजी जीदो ना सिर्फ अपने फ्लैगशिप प्रतिद्वंदियों के बराबर है, बल्कि कुछ मामलों में यह उनसे बेहतर भी है. इसका डिस्प्ले अभी तक के सभी फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में सर्वोत्तम है. इसकी बैटरी लाइफ काफी अच्छी है और इसका कैमरा बहुत अच्छा परफॉरमेंस देता है. हमारी सलाह है कि एलजी जीदो एक काफी अच्छा स्मार्टफ़ोन है और इसे आप ज़रूर खरीदें. हमारा दावा है कि इस निर्णय के लिए आपको कभी अफ़सोस नहीं होगा. इस स्मार्टफ़ोन के साथ एलजी ने वास्तव में हमें हैरान कर दिया. एलजी जीदो निश्चित रूप से फ्लैगशिप कहे जाने योग्य है. इसका खूबसूरत डिस्प्ले इसके प्रतिद्वंदियों को बहुत पीछे कर देता है. इसका बेहतरीन आकार अन्य सभी पाँच-इंच वाले स्मार्टफोन्स को सोचने के लिए मजबूर कर देता है. इसका शानदार कैमरा जो कम रोशनी में भी बेहतरीन परफॉरमेंस देता है. इसकी बड़ी बैटरी जो एक बार चार्ज करने पर आसानी से दो दिन तक चल जाती है. इसकी सिर्फ एक ही कमी है, और वो है इसका पॉवर और वॉल्यूम की का असामान्य जगह पर होना, लेकिन यह कोई ऐसी बात नहीं कि इसके आप अभ्यस्त ना हो सकें. पहली नज़र में एलजी जीदो का डिज़ाइन काफी हद तक सैमसंग गैलेक्सी एसचार की तरह लगता है. एलजी ने डिज़ाइन के मामले में काफी सुधार किया है, क्योंकि जीदो में दाहिनी और बायीं तरफ कोई खाली जगह नहीं दिखाई देता है और स्क्रीन पूरी सतह पर फैली है. इसका आकार गैलेक्सी एसचार के लगभग बराबर है. पाँच. दो-इंच स्क्रीन होने के बावजूद जीदो, नेक्सस चार से कोई ज्यादा बड़ा नहीं है और कम ज़गह घेरने के कारण यह सोनी एक्सपीरिया जेडएक के सामने एक उदाहरण पेश करता है. साथ ही सोनी के नए यूजर इंटरफ़ेस से सीख लेते हुए एलजी ने भी रिटर्न, होम और ऑप्शन्स के लिए स्क्रीन के नीचे अलग से टच सेंसिटिव की देने की बजाय अब इन्हें यूजर इंटरफ़ेस में ही शामिल कर लिया है. एलजी जीदो में नए डिज़ाइन थीम के अंतर्गत वॉल्यूम रॉकर और पॉवर की को स्मार्टफ़ोन के पिछले हिस्से में दिया गया है, जो थोडा अजीब लगता है. यह परंपरागत डिज़ाइन से अलग है और इससे अभ्यस्त होने में थोडा वक्त लगता है. लेकिन एक बार इसकी आदत हो जाने के बाद फिर यह समस्या नहीं बनती. इस डिज़ाइन का फायदा ये है कि इससे फ़ोन के किनारे साफ़-सुथरे रहते हैं और एक तरफ सिर्फ सिम कार्ड स्लॉट है. माइक्रो यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और हैंड्स फ्री स्पीकर्स नीचे की तरफ हैं. हमारे पास जो एलजी जीदो रिव्यू के लिए आया वह सफ़ेद रंग का है. इस स्मार्टफ़ोन का पिछला हिस्सा फाइबरग्लास की तरह लगता है जो अच्छा दिखाई देता है. लेकिन इसकी कोई ज्यादा उपयोगिता नहीं है क्योंकि पिछला हिस्सा प्लेन होने के कारण यह कभी-कभी यह हाथ से फिसलने लगता है. इस फ़ोन का सफ़ेद रंग का फिनिश अच्छा दिखाई देता है. इस बात से थोड़ी निराशा ज़रूर होती है कि एलजी ने जीदो में पूरी तरह से प्लास्टिक का इस्तेमाल किया है, लेकिन यह अच्छे क्वालिटी का है. एलजी ने अपने इस पाँच. दो-इंच आईपीएस डिस्प्ले वाले स्मार्टफ़ोन जीदो को इस आकार में पेश किया है जो ज़्यादातर पाँच-इंच वाले फोन्स के लिए सिर्फ एक सपना है. इतना ही नहीं, इसका डिस्प्ले किसी भी स्मार्टफ़ोन में उपलब्ध अब तक के सर्वोत्तम डिस्प्ले में से एक है. इसके पाँच. दो-इंच स्क्रीन की पिक्सेल डेंसिटी चार सौ चौबीसपीपीआई है, जबकि गैलेक्सी एसचार के पाँच-इंच स्क्रीन की पिक्सेल डेंसिटी चार सौ इकतालीसपीपीआई है. लेकिन दोनों में अंतर बिल्कुल मालूम नहीं पड़ता; बल्कि इसके उल्टे वास्तव में जीदो का डिस्प्ले ज्यादा क्रिस्प दिखाई देता है और इसमें रंग ज्यादा वास्तविक लगते हैं. इस बेहतरीन डिस्प्ले पर एचडी मीडिया बहुत अच्छे ढंग से चलता है. बहुत से स्मार्टफोन्स की तरह इसका भी स्क्रीन कुछ रिफ्लेक्टिव है, लेकिन इसके आईपीएस पैनल का देखने का एंगल काफी अच्छा है और साथ ही इसे बाहर रोशनी में भी देखा जा सकता है. इस समय उपलब्ध नवीनतम फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स गैलेक्सीएसचार, एचटीसी वन और एक्सपीरिया जेडएक से तुलना करें तो एलजी जीदो का डिस्प्ले हर मामले में अब तक का सर्वोत्तम है - चाहे क्रिस्पनेस की बात हो, या रंग, देखने के एंगल और या बाहर रोशनी में दिखाई देने की बात हो. क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ प्रोसेसर और एड्रीनो तीन सौ तीस ग्राफ़िक्स के साथ एलजी जीदो एक बेहद शक्तिशाली स्मार्टफ़ोन है. इसकी तुलना सोनी एक्सपीरिया जेडएक से की जा सकती है जिसमे भी यही प्रोसेसर है. बेंचमार्क्स से पहले अगर हम वास्तविक इस्तेमाल में इसके परफॉरमेंस की बात करें, तो अन्य स्नैपड्रैगन आठ सौ और दोजीबी रैम वाले स्मार्टफोन्स की तरह जीदो का परफॉरमेंस भी बेहद शानदार है. एप्स बहुत तेज़ी से खुलते हैं, इंटरफ़ेस काफी स्मूद है और बैकग्राउंड में किसी भी तरह का लोड इस फ़ोन के परफॉरमेंस को धीमा नहीं कर पाता है. लेकिन स्नैपड्रैगन आठ सौ वाले अन्य स्मार्टफोन्स की तरह एलजी जीदो भी लोड ज्यादा होने पर काफी गर्म हो जाता है. इस पर दस मिनट तक गेम चलाइए और इसका बैक पैनल गर्म होकर कुछ असुविधाजनक हो जाता है. कुल मिलाकर इस फ़ोन पर चाहे कितना भी लोड दें, यह सफलतापूर्वक उसे परफॉर्म करता है. हमे ऐसा कभी नहीं दिखा कि कोई भी लोड या गेम या कोई बेंचमार्क, स्नैपड्रैगन आठ सौ प्रोसेसर के लिए मुश्किल साबित हुआ हो. एलजी जीदो का बड़ा तीन हज़ारएमएएच बैटरी, इसमें प्रयुक्त शक्तिशाली प्रोसेसर के लिहाज़ से काफी अच्छा है. एक बार चार्ज करने पर यह लगभग दो दिन तक चल जाता है. यह बैटरी लाइफ लगातार तीनजी के साथ मेल, फेसबुक और ट्विटर, वायस कॉल्स आदि, बीस% ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने पर है, जो कि काफी अच्छा है. एक्सपीरिया ने बड़ी बैटरी के साथ हमें प्रभावित किया था, जीदो में भी वैसी ही बात है. बड़ी बैटरी निश्चित रूप से काफी सहायक सिद्ध होती है, स्मार्टफ़ोन निर्माताओं को इस तरफ अवश्य ध्यान देना चाहिए. एलजी जीदो में ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन के साथ तेरह मेगापिक्सेल का कैमरा है. अच्छी रोशनी में तो इसके कैमरे का परफॉरमेंस काफी अच्छा है ही, लेकिन इसकी सबसे खास बात इसका कम रोशनी में बेहतरीन परफॉरमेंस है. हलांकि कैमरा कम रोशनी में फोकस करने में थोडा समय लेता है. कुल मिलाकर इसका कैमरा काफी अच्छा है, खासकर कम रोशनी में इसका परफॉरमेंस ज़बरदस्त है, जिसकी कमी आप अक्सर स्मार्टफोन्स कैमरों में महसूस करते हैं.
जीवन में सफलता पाने के लिए कई उपाय किए जाते हैं. ऐसे में अगर आप अपने जीवन में हर काम में सफलत पाना चाहते हैं और आपको हर काम से खूब सारा धन कामना है तो आप कई उपाय कर सकते हैं. जी हाँ, वैसे ही हमारा जीवन परेशानियों से भरा पड़ा है और उससे उबरने के लिए लाखो जातां करने होते हैं. ऐसे में अगर आप इस उपाय को कर लें तो सभी परेशानिया खत्म हो सकती है. आइए बताते हैं वह उपाय. उपाय - इस उपाय को करने के लिए आपको सबसे पहले एक मिट्टी की सुराही या फिर एक मिट्टी का कटोरा लेना है. इसके बाद उसमें रूई की चार बत्ती लेना है और थोड़ा सा लोबान, धूप, घी आदि. अब सभी को लेकर एक साथ रख लेना है और सबको जला लेना है. अब इसके बाद उस सुराही या मिट्टी के कटोरे से धूप लगाते हुए उसको पूरे घर में घूमा लेना है. कहते हैं ऐसा करने से घर से नकारात्मक शक्ति का नाश हो जाता है और आपकी किस्मत में आने वाली सभी बाधाए भाग जाती है और आपकी कसिमत चमकने लगती है और सब कुछ अच्छा होने लगता है. ध्यान रहे कि इस उपाय को किसी भी बुधवार के दिन किया जा सकता है क्योंकि इसके लिए बुधवार का दिन ही उपयुक्त मन जाता है. आपको बता दें कि इस उपाय को महीने में एक बार जरुर करें क्योंकि ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा गायब हो जाती है और आपके घर में बुरी आत्माओं का प्रवेश भी नहीं हो पाएगा और आपको लाभ ही लाभ होगा. इसी के सतह अगर आप इसे महीने की शुरुआत में करते हैं तो यह सबसे लाभकारी होता है.
जीवन में सफलता पाने के लिए कई उपाय किए जाते हैं. ऐसे में अगर आप अपने जीवन में हर काम में सफलत पाना चाहते हैं और आपको हर काम से खूब सारा धन कामना है तो आप कई उपाय कर सकते हैं. जी हाँ, वैसे ही हमारा जीवन परेशानियों से भरा पड़ा है और उससे उबरने के लिए लाखो जातां करने होते हैं. ऐसे में अगर आप इस उपाय को कर लें तो सभी परेशानिया खत्म हो सकती है. आइए बताते हैं वह उपाय. उपाय - इस उपाय को करने के लिए आपको सबसे पहले एक मिट्टी की सुराही या फिर एक मिट्टी का कटोरा लेना है. इसके बाद उसमें रूई की चार बत्ती लेना है और थोड़ा सा लोबान, धूप, घी आदि. अब सभी को लेकर एक साथ रख लेना है और सबको जला लेना है. अब इसके बाद उस सुराही या मिट्टी के कटोरे से धूप लगाते हुए उसको पूरे घर में घूमा लेना है. कहते हैं ऐसा करने से घर से नकारात्मक शक्ति का नाश हो जाता है और आपकी किस्मत में आने वाली सभी बाधाए भाग जाती है और आपकी कसिमत चमकने लगती है और सब कुछ अच्छा होने लगता है. ध्यान रहे कि इस उपाय को किसी भी बुधवार के दिन किया जा सकता है क्योंकि इसके लिए बुधवार का दिन ही उपयुक्त मन जाता है. आपको बता दें कि इस उपाय को महीने में एक बार जरुर करें क्योंकि ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा गायब हो जाती है और आपके घर में बुरी आत्माओं का प्रवेश भी नहीं हो पाएगा और आपको लाभ ही लाभ होगा. इसी के सतह अगर आप इसे महीने की शुरुआत में करते हैं तो यह सबसे लाभकारी होता है.
यह एडिटोरियल 06/01/2022 को 'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित "Minding The Gender Gap" लेख पर आधारित है। इसमें विवाह के लिये कानूनी आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किये जाने के पक्ष और विपक्ष में दिये जा रहे तर्कों की चर्चा की गई है। पुरुषों और महिलाओं की विवाह योग्य आयु में एकरूपता लाने के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल का प्रस्ताव निश्चित रूप से 'सतत् विकास लक्ष्य-5' को साकार करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जहाँ राष्ट्र-राज्यों से लैंगिक समानता की प्राप्ति हेतु नीति-निर्माण की अपेक्षा की गई है। लेकिन केवल अच्छा इरादा ही अनुकूल परिणामों की गारंटी तो नहीं देता। व्यापक सामाजिक समर्थन के बिना लागू किये गए कानून प्रायः अपने उद्देश्यों की पूर्ति में तब भी विफल सिद्ध होते हैं जब उनके घोषित उद्देश्य और तर्क व्यापक सार्वजनिक भलाई का लक्ष्य रखते हों। - वर्तमान कानूनः हिंदुओं के लिये, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 विवाह हेतु लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित करता है। - इस्लाम में यौवन (Puberty) प्राप्त कर चुके नाबालिग के विवाह को वैध माना जाता है। - विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 भी महिलाओं और पुरुषों के लिये क्रमशः 18 और 21 वर्ष की आयु को विवाह हेतु न्यूनतम आयु के रूप में निर्धारित करता है। - लिंग अंतराल को कम करने हेतु भारत के प्रयासः भारत ने वर्ष 1993 में 'महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन' (Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination Against Women- CEDAW) की पुष्टि की थी। - इस कन्वेंशन का अनुच्छेद-16 बाल विवाह का कठोरता से निषेध करता है और सरकारों से महिलाओं के लिये न्यूनतम विवाह आयु का निर्धारण करने एवं उन्हें लागू करने की अपेक्षा करता है। - वर्ष 1998 से भारत ने विशेष रूप से मानव अधिकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय कानून का प्रवर्तन किया है, जिसे मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, 1948 जैसे अंतर्राष्ट्रीय साधनों के अनुरूप तैयार किया गया है। - न्यूनतम आयु निर्धारित करने के कारणः कानून द्वारा विशेष रूप से बाल विवाह को गैर-कानूनी घोषित करने और नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार पर रोक लगाने के लिये विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है। - बाल विवाह महिलाओं को अल्पायु गर्भावस्था (Early pregnancy), कुपोषण और हिंसा (मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक) का शिकार बनाता है। - अल्पायु गर्भावस्था बाल मृत्यु दर में वृद्धि के साथ भी संबद्ध है और माता के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। - बुनियादी अधिकारों का संरक्षणः अल्पायु विवाह और बाल विवाह के विरुद्ध महिलाओं की सुरक्षा वस्तुतः उनके बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा है और यह महत्त्वपूर्ण कदम देश की आधी आबादी के लिये व्यापक अधिकार-आधारित ढाँचा प्रदान करने हेतु संबंधित विधायी ढाँचे में परिवर्तन को बल देगा। - लिंग समानता लानाः विशेष विवाह अधिनियम की धारा 2(a) महिलाओं के लिये 18 वर्ष जबकि पुरुषों के लिये 21 वर्ष की विवाह योग्य कानूनी आयु घोषित करती है, लेकिन यह भेद रखने का कोई उचित तर्क मौजूद नहीं है। - जब पुरुषों और महिलाओं के लिये मतदान करने की आयु समान हो सकती है, उनके लिये सहमति, स्वेच्छा और वैध रूप से किसी अनुबंध में प्रवेश करने की आयु भी समान है, तो फिर विवाह के लिये समान आयु क्यों नहीं निर्धारित की जा सकती। - समान कानूनों से समानता की उत्पत्तिः समान कानूनों से समानता की उत्पत्ति होती है और सामाजिक परिवर्तन कानूनों के पूर्ववर्ती और उनके परिणाम दोनों ही होते हैं। - प्रगतिशील समाजों में कानून में परिवर्तन सामाजिक धारणाओं में परिवर्तन लाने की भी वृहत संभावना रखता है। - महिला सशक्तीकरण को सबल करनाः महिलाओं के विकास के कई संकेतक होते हैं जिनमें उच्च शिक्षा में छात्राओं के नामांकन में वृद्धि एक प्रमुख संकेतक है। - इसके अलावा, उज्ज्वला, मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के सबसे बड़े वर्ग के रूप में प्रकट किया है। - विवाह योग्य आयु में समानता के प्रवेश से महिला सशक्तीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। - आर्थिक रूप से आश्रित महिलाओं को लाभ की संभावना नहींः विवाह योग्य कानूनी आयु में वृद्धि का उद्देश्य भावना के स्तर पर तो अच्छा दिखता है, लेकिन सामाजिक जागरूकता में वृद्धि और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच में सुधार किये बिना यह महिलाओं को अधिक लाभ नहीं दे सकेगा। वस्तुस्थिति यह है कि युवा महिलाएँ अभी तक आर्थिक रूप से स्वतंत्र एवं सबल नहीं हो सकी हैं और पारिवारिक एवं सामाजिक दबाव में रहते हुए अपने अधिकारों एवं स्वतंत्रता का उपभोग करने में असमर्थ हैं। - कड़े कानूनों के बावजूद बाल विवाह का उच्च प्रचलनः 18 वर्ष से कम आयु के विवाह पर निषेध रखने वाला कानून किसी-न-किसी रूप में 1900 के दशक से ही प्रवर्तित रहा है, फिर भी वर्ष 2005 तक बाल विवाह पर लगभग कोई रोक नहीं लगी थी और 20-24 आयु वर्ग की महिलाओं में से लगभग आधी महिलाओं का विवाह न्यूनतम कानूनी आयु से पहले हो गया था। - अल्पायु विवाह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहींः भले ही प्रत्येक पाँच में से एक विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले संपन्न हुआ हो, लेकिन देश के आपराधिक रिकॉर्ड में अधिनियम के उल्लंघन का कोई उल्लेख शायद ही प्रकट हुआ हो। - बाल विवाह के उन्मूलन का कोई आश्वासन नहींः प्रभावित होने वाली विवाह योग्य आयु की महिलाओं की संख्या बहुत अधिक है, जिनमें से 60% से अधिक का 21 वर्ष से पहले विवाह हो जाता है। - 18 वर्ष की आयु से पहले महिलाओं के विवाह का उन्मूलन कर सकने की असमर्थता इस बात का कोई आश्वासन नहीं देती कि इस आयु को बढ़ाकर 21 किये जाने से अल्पायु विवाह का उन्मूलन हो सकेगा। - माता-पिता द्वारा कानूनों का दुरुपयोगः महिला अधिकार कार्यकर्त्ताओं के अनुसार माता-पिता प्रायः इस अधिनियम का दुरूपयोग अपनी इच्छा से विवाह करने वाली या बलात विवाह, घरेलू हिंसा और शिक्षा सुविधाओं के अभाव से बचने के लिये भाग जाने वाली अपनी बेटियों को दंडित करने के लिये करते हैं। - इस प्रकार, पितृसत्तात्मक व्यवस्था में अधिक संभावना यह है कि आयु सीमा में परिवर्तन से युवा वयस्कों पर माता-पिता की अधिकारिता में और वृद्धि ही होगी। - वस्तुनिष्ठ समानता सुनिश्चित करनाः जैविक, सामाजिक या डेटा एवं शोध-आधारित - कोई भी तर्क वैध विवाह में प्रवेश करने हेतु पुरुषों और महिलाओं के बीच आयु में असमानता को उचित नहीं ठहरा सकता है। - भारत ने वर्ष 1954 में विशेष विवाह अधिनियम के साथ निर्णय लिया था कि आयु एक वैध विवाह की बुनियादी आवश्यकताओं में से एक होनी चाहिये। इस संबंध में समानता का नहीं होना एकमात्र दोष था जिसे अब बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA), 2006 में संशोधन के माध्यम से दूर किया जा रहा है। - वंचित महिलाओं का सशक्तीकरणः वंचित महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये उनके प्रजनन अधिकारों का सम्मान किया जाना और अल्पायु विवाह की शिकार महिलाओं की बुनियादी संरचनात्मक वंचनाओं को दूर करने हेतु अधिकाधिक निवेश सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। - सरकार को समानता के मुद्दों को संबोधित करने में भी अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। उसे ऐसे उपाय करने होंगे जो वंचितों को अपनी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाए, उन्हें कॅॅरियर परामर्श प्रदान करे और कौशल एवं जॉब प्लेसमेंट को प्रोत्साहित करे। - सार्वजनिक परिवहन सहित सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के विषय को भी संबोधित करने की ज़रूरत है। - माता-पिता में व्यवहार परिवर्तन भी आवश्यक है, क्योंकि वे ही अंततः अधिकांश महिलाओं के लिये विवाह संबंधी निर्णय लेते हैं। - सरकार को समानता के मुद्दों को संबोधित करने में भी अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। उसे ऐसे उपाय करने होंगे जो वंचितों को अपनी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाए, उन्हें कॅॅरियर परामर्श प्रदान करे और कौशल एवं जॉब प्लेसमेंट को प्रोत्साहित करे। - महिलाओं में जागरूकता बढ़ानाः घोषित उद्देश्य को प्राप्त करने का एक अच्छा (किंतु कठिन) तरीका यह होगा कि बालिकाओं को अल्पायु गर्भधारण के खतरों के प्रति जागरूक बनाया जाए और उन्हें अपने स्वास्थ्य में सुधार हेतु तंत्र प्रदान किया जाए। - महिलाओं के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के संबंध में सामाजिक जागरूकता पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि बालिकाएँ स्कूल या कॉलेज छोड़ने के लिये बाध्य न की जाएँ। अभ्यास प्रश्नः "यद्यपि महिलाओं की विवाह योग्य कानूनी आयु को बढ़ाना लैंगिक समानता प्राप्त करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन मौजूदा नीतिगत ढाँचे और कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान देना अधिक महत्त्वपूर्ण है। चर्चा कीजिये।
यह एडिटोरियल छः जनवरी दो हज़ार बाईस को 'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित "Minding The Gender Gap" लेख पर आधारित है। इसमें विवाह के लिये कानूनी आयु को बढ़ाकर इक्कीस वर्ष किये जाने के पक्ष और विपक्ष में दिये जा रहे तर्कों की चर्चा की गई है। पुरुषों और महिलाओं की विवाह योग्य आयु में एकरूपता लाने के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल का प्रस्ताव निश्चित रूप से 'सतत् विकास लक्ष्य-पाँच' को साकार करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, जहाँ राष्ट्र-राज्यों से लैंगिक समानता की प्राप्ति हेतु नीति-निर्माण की अपेक्षा की गई है। लेकिन केवल अच्छा इरादा ही अनुकूल परिणामों की गारंटी तो नहीं देता। व्यापक सामाजिक समर्थन के बिना लागू किये गए कानून प्रायः अपने उद्देश्यों की पूर्ति में तब भी विफल सिद्ध होते हैं जब उनके घोषित उद्देश्य और तर्क व्यापक सार्वजनिक भलाई का लक्ष्य रखते हों। - वर्तमान कानूनः हिंदुओं के लिये, हिंदू विवाह अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पचपन विवाह हेतु लड़की की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु इक्कीस वर्ष निर्धारित करता है। - इस्लाम में यौवन प्राप्त कर चुके नाबालिग के विवाह को वैध माना जाता है। - विशेष विवाह अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चौवन और बाल विवाह निषेध अधिनियम, दो हज़ार छः भी महिलाओं और पुरुषों के लिये क्रमशः अट्ठारह और इक्कीस वर्ष की आयु को विवाह हेतु न्यूनतम आयु के रूप में निर्धारित करता है। - लिंग अंतराल को कम करने हेतु भारत के प्रयासः भारत ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में 'महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन' की पुष्टि की थी। - इस कन्वेंशन का अनुच्छेद-सोलह बाल विवाह का कठोरता से निषेध करता है और सरकारों से महिलाओं के लिये न्यूनतम विवाह आयु का निर्धारण करने एवं उन्हें लागू करने की अपेक्षा करता है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से भारत ने विशेष रूप से मानव अधिकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय कानून का प्रवर्तन किया है, जिसे मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस जैसे अंतर्राष्ट्रीय साधनों के अनुरूप तैयार किया गया है। - न्यूनतम आयु निर्धारित करने के कारणः कानून द्वारा विशेष रूप से बाल विवाह को गैर-कानूनी घोषित करने और नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार पर रोक लगाने के लिये विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है। - बाल विवाह महिलाओं को अल्पायु गर्भावस्था , कुपोषण और हिंसा का शिकार बनाता है। - अल्पायु गर्भावस्था बाल मृत्यु दर में वृद्धि के साथ भी संबद्ध है और माता के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। - बुनियादी अधिकारों का संरक्षणः अल्पायु विवाह और बाल विवाह के विरुद्ध महिलाओं की सुरक्षा वस्तुतः उनके बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा है और यह महत्त्वपूर्ण कदम देश की आधी आबादी के लिये व्यापक अधिकार-आधारित ढाँचा प्रदान करने हेतु संबंधित विधायी ढाँचे में परिवर्तन को बल देगा। - लिंग समानता लानाः विशेष विवाह अधिनियम की धारा दो महिलाओं के लिये अट्ठारह वर्ष जबकि पुरुषों के लिये इक्कीस वर्ष की विवाह योग्य कानूनी आयु घोषित करती है, लेकिन यह भेद रखने का कोई उचित तर्क मौजूद नहीं है। - जब पुरुषों और महिलाओं के लिये मतदान करने की आयु समान हो सकती है, उनके लिये सहमति, स्वेच्छा और वैध रूप से किसी अनुबंध में प्रवेश करने की आयु भी समान है, तो फिर विवाह के लिये समान आयु क्यों नहीं निर्धारित की जा सकती। - समान कानूनों से समानता की उत्पत्तिः समान कानूनों से समानता की उत्पत्ति होती है और सामाजिक परिवर्तन कानूनों के पूर्ववर्ती और उनके परिणाम दोनों ही होते हैं। - प्रगतिशील समाजों में कानून में परिवर्तन सामाजिक धारणाओं में परिवर्तन लाने की भी वृहत संभावना रखता है। - महिला सशक्तीकरण को सबल करनाः महिलाओं के विकास के कई संकेतक होते हैं जिनमें उच्च शिक्षा में छात्राओं के नामांकन में वृद्धि एक प्रमुख संकेतक है। - इसके अलावा, उज्ज्वला, मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के सबसे बड़े वर्ग के रूप में प्रकट किया है। - विवाह योग्य आयु में समानता के प्रवेश से महिला सशक्तीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। - आर्थिक रूप से आश्रित महिलाओं को लाभ की संभावना नहींः विवाह योग्य कानूनी आयु में वृद्धि का उद्देश्य भावना के स्तर पर तो अच्छा दिखता है, लेकिन सामाजिक जागरूकता में वृद्धि और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच में सुधार किये बिना यह महिलाओं को अधिक लाभ नहीं दे सकेगा। वस्तुस्थिति यह है कि युवा महिलाएँ अभी तक आर्थिक रूप से स्वतंत्र एवं सबल नहीं हो सकी हैं और पारिवारिक एवं सामाजिक दबाव में रहते हुए अपने अधिकारों एवं स्वतंत्रता का उपभोग करने में असमर्थ हैं। - कड़े कानूनों के बावजूद बाल विवाह का उच्च प्रचलनः अट्ठारह वर्ष से कम आयु के विवाह पर निषेध रखने वाला कानून किसी-न-किसी रूप में एक हज़ार नौ सौ के दशक से ही प्रवर्तित रहा है, फिर भी वर्ष दो हज़ार पाँच तक बाल विवाह पर लगभग कोई रोक नहीं लगी थी और बीस-चौबीस आयु वर्ग की महिलाओं में से लगभग आधी महिलाओं का विवाह न्यूनतम कानूनी आयु से पहले हो गया था। - अल्पायु विवाह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहींः भले ही प्रत्येक पाँच में से एक विवाह अट्ठारह वर्ष की आयु से पहले संपन्न हुआ हो, लेकिन देश के आपराधिक रिकॉर्ड में अधिनियम के उल्लंघन का कोई उल्लेख शायद ही प्रकट हुआ हो। - बाल विवाह के उन्मूलन का कोई आश्वासन नहींः प्रभावित होने वाली विवाह योग्य आयु की महिलाओं की संख्या बहुत अधिक है, जिनमें से साठ% से अधिक का इक्कीस वर्ष से पहले विवाह हो जाता है। - अट्ठारह वर्ष की आयु से पहले महिलाओं के विवाह का उन्मूलन कर सकने की असमर्थता इस बात का कोई आश्वासन नहीं देती कि इस आयु को बढ़ाकर इक्कीस किये जाने से अल्पायु विवाह का उन्मूलन हो सकेगा। - माता-पिता द्वारा कानूनों का दुरुपयोगः महिला अधिकार कार्यकर्त्ताओं के अनुसार माता-पिता प्रायः इस अधिनियम का दुरूपयोग अपनी इच्छा से विवाह करने वाली या बलात विवाह, घरेलू हिंसा और शिक्षा सुविधाओं के अभाव से बचने के लिये भाग जाने वाली अपनी बेटियों को दंडित करने के लिये करते हैं। - इस प्रकार, पितृसत्तात्मक व्यवस्था में अधिक संभावना यह है कि आयु सीमा में परिवर्तन से युवा वयस्कों पर माता-पिता की अधिकारिता में और वृद्धि ही होगी। - वस्तुनिष्ठ समानता सुनिश्चित करनाः जैविक, सामाजिक या डेटा एवं शोध-आधारित - कोई भी तर्क वैध विवाह में प्रवेश करने हेतु पुरुषों और महिलाओं के बीच आयु में असमानता को उचित नहीं ठहरा सकता है। - भारत ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौवन में विशेष विवाह अधिनियम के साथ निर्णय लिया था कि आयु एक वैध विवाह की बुनियादी आवश्यकताओं में से एक होनी चाहिये। इस संबंध में समानता का नहीं होना एकमात्र दोष था जिसे अब बाल विवाह निषेध अधिनियम , दो हज़ार छः में संशोधन के माध्यम से दूर किया जा रहा है। - वंचित महिलाओं का सशक्तीकरणः वंचित महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये उनके प्रजनन अधिकारों का सम्मान किया जाना और अल्पायु विवाह की शिकार महिलाओं की बुनियादी संरचनात्मक वंचनाओं को दूर करने हेतु अधिकाधिक निवेश सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। - सरकार को समानता के मुद्दों को संबोधित करने में भी अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। उसे ऐसे उपाय करने होंगे जो वंचितों को अपनी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाए, उन्हें कॅॅरियर परामर्श प्रदान करे और कौशल एवं जॉब प्लेसमेंट को प्रोत्साहित करे। - सार्वजनिक परिवहन सहित सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के विषय को भी संबोधित करने की ज़रूरत है। - माता-पिता में व्यवहार परिवर्तन भी आवश्यक है, क्योंकि वे ही अंततः अधिकांश महिलाओं के लिये विवाह संबंधी निर्णय लेते हैं। - सरकार को समानता के मुद्दों को संबोधित करने में भी अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। उसे ऐसे उपाय करने होंगे जो वंचितों को अपनी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाए, उन्हें कॅॅरियर परामर्श प्रदान करे और कौशल एवं जॉब प्लेसमेंट को प्रोत्साहित करे। - महिलाओं में जागरूकता बढ़ानाः घोषित उद्देश्य को प्राप्त करने का एक अच्छा तरीका यह होगा कि बालिकाओं को अल्पायु गर्भधारण के खतरों के प्रति जागरूक बनाया जाए और उन्हें अपने स्वास्थ्य में सुधार हेतु तंत्र प्रदान किया जाए। - महिलाओं के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के संबंध में सामाजिक जागरूकता पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि बालिकाएँ स्कूल या कॉलेज छोड़ने के लिये बाध्य न की जाएँ। अभ्यास प्रश्नः "यद्यपि महिलाओं की विवाह योग्य कानूनी आयु को बढ़ाना लैंगिक समानता प्राप्त करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन मौजूदा नीतिगत ढाँचे और कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान देना अधिक महत्त्वपूर्ण है। चर्चा कीजिये।
Baby Name: व्यक्ति के जीवन में उसका नाम बहुत मायने रखता है। व्यक्ति की पहचान उसके नाम से की जाती है और नाम का जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। नाम को व्यक्ति अपनी संस्कृति और अपने धर्म से जोड़ कर देखता है। कई बार इंसान अपने धर्म के अनुसार नाम रखता है तो कभी राशि के अनुसार या फिर उसे प्रभावित करने वाले लोगों के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखता है। आप किसी को उसके नाम से ही याद रख पाते हैं उसके गुण उसके नाम के बाद ही आते हैं। तो जब नाम व्यक्ति के जीवन में इतना महत्वपूर्ण है तो क्यों न आप भी नाम को गंभीरता से समझें और अपने बच्चों को एक अच्छा नाम दें। चलिए जानते हैं कि आप अपने बच्चे का नाम किस तरह से रख सकती हैं। राशि के आधार पर कई लोग अपने बच्चों का नाम रखते हैं। राशि के अंतर्गत जो भी अक्षर होते हैं उनसे नाम रखे जाते हैं। ये तरीका बेहद पुराना है जिसके अनुसार नाम रखे जाते हैं। पुराने समय से लोग ये मानते हैं कि इस तरह नाम रखना बहुत शुभ होता है। इसमें आपको अक्षर के बारे सोचना भी नहीं पड़ता आपको आसानी से एक अक्षर मिल जाता है। पुरातन काल ही नहीं बल्कि आज भी लोग अपने धर्म के देवी देवताओं के नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। उनका यकीन होता है कि वो जब अपने बच्चों को पुकारेंगे तो अपने ईष्ट का नाम ले सकेंगे यानी ईश्वर का नाम उनकी जबान पर बार-बार आ सकेगा और इस तरह ईश्वर का नाम उनके घर में गूंजेगा। आज भी लोग अपने ईष्ट के नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। आज कल लोगों को ग्रीक नाम रखने का शौक हो गया है। अंग्रेज़ी के नाम में भी लोगों की रूचि बढ़ी है। इस तरह के नाम काफी पसंद किए जा रहे हैं। ग्रीक नाम रखने की वजह जो ज़्यादातर लोगों को लगती है वो है इसका अलग होना। आप उसे ही याद रख पाते हैं जो कुछ अलग हो ऐसे में ग्रीक नाम आपको एक अलग पहचान देते हैं और वो अपनी ओर आकर्षित भी करते हैं। कई बार हमारे जीवन में ऐसे लोग होते हैं जन्हें हम बहुत पसंद करते हैं या उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं तो हम उनके नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। फिर चाहे वो कोई अभिनेता हो या कोई अभिनेत्री या फिर कोई आम व्यक्ति लेकिन आपकी नजर में बेहद ख़ास। ज़्यादातर लोग इस तरह नाम रखना पसंद करते हैं। आजकल हम कई माता पिता को देखते हैं कि वो अपने-अपने नाम का हिस्सा जोड़कर अपने बच्चे का नाम बनाते हैं। ये एक अच्छा तरीका है बच्चों का नाम रखने का। इस तरह आप एक प्यारा नाम रख सकते हैं। कई अभिनेता और अभिनेत्रियों ने भी अपने बच्चों के नाम रखे हैं। आप इन तरीकों से अपने बच्चों के नाम रख सकते हैं। क्योंकि आप नाम के महत्व को समझते हैं तो इसलिए ऐसा नाम रखें जो आपके बच्चों को एक अलग पहचान देता हो।
Baby Name: व्यक्ति के जीवन में उसका नाम बहुत मायने रखता है। व्यक्ति की पहचान उसके नाम से की जाती है और नाम का जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। नाम को व्यक्ति अपनी संस्कृति और अपने धर्म से जोड़ कर देखता है। कई बार इंसान अपने धर्म के अनुसार नाम रखता है तो कभी राशि के अनुसार या फिर उसे प्रभावित करने वाले लोगों के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखता है। आप किसी को उसके नाम से ही याद रख पाते हैं उसके गुण उसके नाम के बाद ही आते हैं। तो जब नाम व्यक्ति के जीवन में इतना महत्वपूर्ण है तो क्यों न आप भी नाम को गंभीरता से समझें और अपने बच्चों को एक अच्छा नाम दें। चलिए जानते हैं कि आप अपने बच्चे का नाम किस तरह से रख सकती हैं। राशि के आधार पर कई लोग अपने बच्चों का नाम रखते हैं। राशि के अंतर्गत जो भी अक्षर होते हैं उनसे नाम रखे जाते हैं। ये तरीका बेहद पुराना है जिसके अनुसार नाम रखे जाते हैं। पुराने समय से लोग ये मानते हैं कि इस तरह नाम रखना बहुत शुभ होता है। इसमें आपको अक्षर के बारे सोचना भी नहीं पड़ता आपको आसानी से एक अक्षर मिल जाता है। पुरातन काल ही नहीं बल्कि आज भी लोग अपने धर्म के देवी देवताओं के नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। उनका यकीन होता है कि वो जब अपने बच्चों को पुकारेंगे तो अपने ईष्ट का नाम ले सकेंगे यानी ईश्वर का नाम उनकी जबान पर बार-बार आ सकेगा और इस तरह ईश्वर का नाम उनके घर में गूंजेगा। आज भी लोग अपने ईष्ट के नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। आज कल लोगों को ग्रीक नाम रखने का शौक हो गया है। अंग्रेज़ी के नाम में भी लोगों की रूचि बढ़ी है। इस तरह के नाम काफी पसंद किए जा रहे हैं। ग्रीक नाम रखने की वजह जो ज़्यादातर लोगों को लगती है वो है इसका अलग होना। आप उसे ही याद रख पाते हैं जो कुछ अलग हो ऐसे में ग्रीक नाम आपको एक अलग पहचान देते हैं और वो अपनी ओर आकर्षित भी करते हैं। कई बार हमारे जीवन में ऐसे लोग होते हैं जन्हें हम बहुत पसंद करते हैं या उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं तो हम उनके नाम पर अपने बच्चों का नाम रखना पसंद करते हैं। फिर चाहे वो कोई अभिनेता हो या कोई अभिनेत्री या फिर कोई आम व्यक्ति लेकिन आपकी नजर में बेहद ख़ास। ज़्यादातर लोग इस तरह नाम रखना पसंद करते हैं। आजकल हम कई माता पिता को देखते हैं कि वो अपने-अपने नाम का हिस्सा जोड़कर अपने बच्चे का नाम बनाते हैं। ये एक अच्छा तरीका है बच्चों का नाम रखने का। इस तरह आप एक प्यारा नाम रख सकते हैं। कई अभिनेता और अभिनेत्रियों ने भी अपने बच्चों के नाम रखे हैं। आप इन तरीकों से अपने बच्चों के नाम रख सकते हैं। क्योंकि आप नाम के महत्व को समझते हैं तो इसलिए ऐसा नाम रखें जो आपके बच्चों को एक अलग पहचान देता हो।
Don't Miss! - Lifestyle New Year 2024: भारत में एक बार नहीं बल्कि 5 बार मनाया जाता है नया साल! जानिए कैसे? हिंदी सिनेमा की दिग्गज और खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक श्रीदेवी ने इस साल 24 फरवरी को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। बता दें कि आज उनकी बर्थ एनीवर्सिरी है और इस मौके धड़क गर्ल और उनकी बेटी जाह्नवी कपूर ने एक ऐसी फोटो पोस्ट की है जिसको देखकर आप खुश हो जाएंगे। बता दें कि इस फोटो में जाह्नवी कपूर इतनी छोटी है कि वो श्रीदेवी की गोद में है और बोनी कपूर उनके साथ खड़े है। इस फोटो को साझा करते हुए जाह्नवी ने पूरानी यादें ताजा कर दी है। जाह्नवी कपूर ने इस फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट तो किया लेकिन कुछ भी कैप्शन मे उन्होने नही लिखा है..मतलब उनकी भावनाएं आप बेहतर ढंग से समझ सकते है। श्रीदेवी की मौत अचानक दुबई में हुई थी और वो अपने किसी रिश्तेदार की शादी में शिरकत कर रही थी। उनकी अचानक मौत का किसी को भी यकीन नहीं हुआ था लेकिन वो हो चुका था जो हम सबने कभी नहीं सोचा होगा। उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाया गया और उनका अंतिन संस्कार किया गया। बर्थ एनीवर्सिरी के दिन उनके फैंस और जाह्नवी कपूर फिर उनको याद कर रहे है। जाह्नवी कपूर की फिल्म धड़क के लिए श्रीदेवी काफी ज्यादा मेहनत कर रही थी और वो चाहती थी कि इस फिल्म की रिलीज हो देख पाएं लेकिन उपरवाले को तो कुछ और ही मंजूर था। बता दें कि उनकी फिल्म धड़क रिलीज हुई और उसने बॉक्स ऑफिस में धमाल मचा दिया। आज तक की सबसे ज्यादा कमाने वाली डेब्युटेंट फिल्म बन गई है। बता दें कि इस समय जाह्नवी कपूर को फिल्म तख्त के लिए फाइनल कर लिया गया है और ये भी करण जौहर की ही फिल्म है। इस फिल्म में कई स्टार्स नजर आएंगे।
Don't Miss! - Lifestyle New Year दो हज़ार चौबीस: भारत में एक बार नहीं बल्कि पाँच बार मनाया जाता है नया साल! जानिए कैसे? हिंदी सिनेमा की दिग्गज और खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक श्रीदेवी ने इस साल चौबीस फरवरी को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। बता दें कि आज उनकी बर्थ एनीवर्सिरी है और इस मौके धड़क गर्ल और उनकी बेटी जाह्नवी कपूर ने एक ऐसी फोटो पोस्ट की है जिसको देखकर आप खुश हो जाएंगे। बता दें कि इस फोटो में जाह्नवी कपूर इतनी छोटी है कि वो श्रीदेवी की गोद में है और बोनी कपूर उनके साथ खड़े है। इस फोटो को साझा करते हुए जाह्नवी ने पूरानी यादें ताजा कर दी है। जाह्नवी कपूर ने इस फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट तो किया लेकिन कुछ भी कैप्शन मे उन्होने नही लिखा है..मतलब उनकी भावनाएं आप बेहतर ढंग से समझ सकते है। श्रीदेवी की मौत अचानक दुबई में हुई थी और वो अपने किसी रिश्तेदार की शादी में शिरकत कर रही थी। उनकी अचानक मौत का किसी को भी यकीन नहीं हुआ था लेकिन वो हो चुका था जो हम सबने कभी नहीं सोचा होगा। उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाया गया और उनका अंतिन संस्कार किया गया। बर्थ एनीवर्सिरी के दिन उनके फैंस और जाह्नवी कपूर फिर उनको याद कर रहे है। जाह्नवी कपूर की फिल्म धड़क के लिए श्रीदेवी काफी ज्यादा मेहनत कर रही थी और वो चाहती थी कि इस फिल्म की रिलीज हो देख पाएं लेकिन उपरवाले को तो कुछ और ही मंजूर था। बता दें कि उनकी फिल्म धड़क रिलीज हुई और उसने बॉक्स ऑफिस में धमाल मचा दिया। आज तक की सबसे ज्यादा कमाने वाली डेब्युटेंट फिल्म बन गई है। बता दें कि इस समय जाह्नवी कपूर को फिल्म तख्त के लिए फाइनल कर लिया गया है और ये भी करण जौहर की ही फिल्म है। इस फिल्म में कई स्टार्स नजर आएंगे।
स्पोर्ट्स डेस्क. भारत और न्यूजीलैंड के बीच दो मैच की टेस्ट सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला शनिवार से शुरू होने जा रहा है जिस पर सबकी नजर रहने वाली है, क्योंकि ये मुकाबला दोनों ही टीम के लिए काफी अहम है न्यूजीलैंड की टीम जहां इस मैच को भी जीतकर टीम इंडिया का टेस्ट सीरीज में भी क्लीन स्वीप करना चाहेगी तो वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम इस मैच को जीतकर टेस्ट सीरीज बचाना चाहेगी, साथ ही अपने इस दौरे का सुखद अंत करना चाहेगी लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा. सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा, मैच शनिवार 29 फरवरी से क्राइस्टचर्च में भारतीय समयानुसार तड़के सुबह चार बजे से शुरू होगा. भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेला जाएगा जहां टीम इंडिया पहली बार कोई टेस्ट मैच खेलेगी, टेस्ट मैच के दौरान पहले दिन बादल छाए रहेंगे, हलांकि बारिश की ज्यादा आशंका नहीं है, वहीं मैच के दूसरे, तीसरे और चौथे दिन कभी बादल कभी सूर्यदेव के दर्शन हो सकते हैं, कुछ इस तरह से आसार मौसम विभाग ने बताए हैं. दो मैच की टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड ने सीरीज के पहले टेस्ट मैच में जीत हासिल की थी, जिसके बाद भारतीय टीम के लिए सीरीज के इस दूसरे टेस्ट मैच में जीत जरूरी हो गया तभी ये सीरीज बच पाएगी, अगर भारतीय टीम ये सीरीज भी हारती है तो वनडे के बाद टेस्ट में भी क्लीन स्वीप हो जाएगा, सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया को 10 विकेट से करारी शिकस्त मिली थी. सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने निराश किया था, क्योंकि सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं कर सके थे, जिसके बाद भारतीय टीम की मुश्किल बढ़ गई थी और हालात ये थे कि टीम को 10 विकेट से मैच में शिकस्त मिली ऐसे में सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में सबकी नजर टीम इंडिया के बल्लेबाजों पर रहेगी.
स्पोर्ट्स डेस्क. भारत और न्यूजीलैंड के बीच दो मैच की टेस्ट सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला शनिवार से शुरू होने जा रहा है जिस पर सबकी नजर रहने वाली है, क्योंकि ये मुकाबला दोनों ही टीम के लिए काफी अहम है न्यूजीलैंड की टीम जहां इस मैच को भी जीतकर टीम इंडिया का टेस्ट सीरीज में भी क्लीन स्वीप करना चाहेगी तो वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम इस मैच को जीतकर टेस्ट सीरीज बचाना चाहेगी, साथ ही अपने इस दौरे का सुखद अंत करना चाहेगी लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा. सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा, मैच शनिवार उनतीस फरवरी से क्राइस्टचर्च में भारतीय समयानुसार तड़के सुबह चार बजे से शुरू होगा. भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेला जाएगा जहां टीम इंडिया पहली बार कोई टेस्ट मैच खेलेगी, टेस्ट मैच के दौरान पहले दिन बादल छाए रहेंगे, हलांकि बारिश की ज्यादा आशंका नहीं है, वहीं मैच के दूसरे, तीसरे और चौथे दिन कभी बादल कभी सूर्यदेव के दर्शन हो सकते हैं, कुछ इस तरह से आसार मौसम विभाग ने बताए हैं. दो मैच की टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड ने सीरीज के पहले टेस्ट मैच में जीत हासिल की थी, जिसके बाद भारतीय टीम के लिए सीरीज के इस दूसरे टेस्ट मैच में जीत जरूरी हो गया तभी ये सीरीज बच पाएगी, अगर भारतीय टीम ये सीरीज भी हारती है तो वनडे के बाद टेस्ट में भी क्लीन स्वीप हो जाएगा, सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया को दस विकेट से करारी शिकस्त मिली थी. सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने निराश किया था, क्योंकि सीरीज के पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं कर सके थे, जिसके बाद भारतीय टीम की मुश्किल बढ़ गई थी और हालात ये थे कि टीम को दस विकेट से मैच में शिकस्त मिली ऐसे में सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में सबकी नजर टीम इंडिया के बल्लेबाजों पर रहेगी.
अर्थात् हे देव ! स्तुति कर चुकनेपर मैं आपसे कोई वरदान नहीं मांगता । मांगूं क्या आप तो वीतराग हैं । और माँगूँ भी क्यों ? कोई समझदार व्यक्ति छायावाले पेड़के नीचे बैठकर पेड़से छाया थोड़े ही मांगता है । वह तो स्वयं विना मांगे ही मिल जाती है। ऐसे ही भगवान्की शरण में जाकर उनसे किसी वातकी कामना क्या करना । वहाँ जाकर सभी कामनाओं की पूर्ति स्वतः हो जाती है । तीर्थ-ग्रन्थकी परिकल्पना भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी बम्बईकी बहुत समयसे इच्छा और योजना थी कि समस्त दिगम्बर जैन तीर्थोंका प्रामाणिक परिचय एवं इतिहास तैयार कराया जाये । सन् १९५७-५८ में तीर्थक्षेत्र कमेटी के सहयोग से मैंने लगभग पांच सौ पृष्ठकी सामग्री तैयार भी की थी और समय-समयपर उसे तीर्थ क्षेत्र कमेटी के कार्यालय में भेजता भी रहता था । किन्तु उस समय उस सामग्रीका कुछ उपयोग नहीं हो सका। सन् १९७० में भगवान् महावीरके २५००वें निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में भारतवर्षके सम्पूर्ण दिगम्बर जैन तीर्थों के इतिहास, परम्परा और परिचय सम्बन्धी ग्रन्थके निर्माणका पुनः निश्चय किया गया । यह भी निर्णय हुआ कि यह ग्रन्थ भारतीय ज्ञानपीठके तत्त्वावधान में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी बम्बईकी ओरसे प्रकाशित किया जाये । भगवान् महावीरके २५०० वें निर्वाण महोत्सवकी अखिल भारतीय दिमम्बर जैन समितिके मान्य अध्यक्ष श्रीमान् साहू शान्तिप्रसादजीने, जो तीर्थक्षेत्र कमेटी के भी तत्कालीन अध्यक्ष थे, मुझे इस ग्रन्थके लेखन कार्यका दायित्व लेने के लिए प्रेरित किया और मैंने भी उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया । प्रस्तुत भाग २ की संयोजना 'भारतके दिगम्बर जैन तीर्थ' भाग १ में उत्तरप्रदेश और दिल्ली के तीर्थक्षेत्रों का विवरण दिया गया है । उसका प्रकाशन महावीर निर्वाण दिवस १३ नवम्बर १९७४ को हो चुका है। इसमें प्रायः २८० पृष्ठोंकी सामग्री के अतिरिक्त ८४ चित्र और ७ मानचित्र दिये गये हैं। उत्तरप्रदेशके सभी तीर्थोको ६ जनपदोंमें विभाजित किया गया है - (१) कुरुजांगल और शूरसेन, (२) उत्तराखण्ड, (३) पंचाल, (४) काशी और वत्स, ( ५ ) कोशल और ( ६ ) चेदि । इन छह जनपदों के मानचित्रों के साथ एक मानचित्र सम्पूर्ण उत्तरप्रदेशके तीर्थोंका दिया गया है । ये मानचित्र भारत सरकारके मानचित्र सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रमाणित और स्वीकृत करा लिये गये हैं। इसलिए इनकी प्रामाणिकता असन्दिग्ध है। इस ग्रन्थके अन्त में यात्रियों की सुविधाके लिए उत्तरप्रदेशके सम्पूर्ण तीर्थोका संक्षिप्त विवरण और यात्रा मार्ग दिया गया है । प्रस्तुत ग्रन्थ तीर्थ-ग्रन्थमालाका द्वितीय भाग है । इस भागमें विहार, बंगाल और उड़ोठाके तीर्थक्षेत्रों का विवरण है। इस भागकी रूपरेखा और तदनुसार सामग्रीका संयोजन इस प्रकार किया गया है(अ) विहार- बंगाल - उड़ीसाको सुविधा के लिए निम्नलिखित जनपदों में विभाजित किया गया हैः ( १ ) वज्जि - विदेह जनपद (२) अंग जनपद ( ३ ) मगध जनपद (४) भंगि जनपद ( ५ ) वंग जनपद (६) कॉलंग जनपद
अर्थात् हे देव ! स्तुति कर चुकनेपर मैं आपसे कोई वरदान नहीं मांगता । मांगूं क्या आप तो वीतराग हैं । और माँगूँ भी क्यों ? कोई समझदार व्यक्ति छायावाले पेड़के नीचे बैठकर पेड़से छाया थोड़े ही मांगता है । वह तो स्वयं विना मांगे ही मिल जाती है। ऐसे ही भगवान्की शरण में जाकर उनसे किसी वातकी कामना क्या करना । वहाँ जाकर सभी कामनाओं की पूर्ति स्वतः हो जाती है । तीर्थ-ग्रन्थकी परिकल्पना भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी बम्बईकी बहुत समयसे इच्छा और योजना थी कि समस्त दिगम्बर जैन तीर्थोंका प्रामाणिक परिचय एवं इतिहास तैयार कराया जाये । सन् एक हज़ार नौ सौ सत्तावन-अट्ठावन में तीर्थक्षेत्र कमेटी के सहयोग से मैंने लगभग पांच सौ पृष्ठकी सामग्री तैयार भी की थी और समय-समयपर उसे तीर्थ क्षेत्र कमेटी के कार्यालय में भेजता भी रहता था । किन्तु उस समय उस सामग्रीका कुछ उपयोग नहीं हो सका। सन् एक हज़ार नौ सौ सत्तर में भगवान् महावीरके दो हज़ार पाँच सौवें निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में भारतवर्षके सम्पूर्ण दिगम्बर जैन तीर्थों के इतिहास, परम्परा और परिचय सम्बन्धी ग्रन्थके निर्माणका पुनः निश्चय किया गया । यह भी निर्णय हुआ कि यह ग्रन्थ भारतीय ज्ञानपीठके तत्त्वावधान में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी बम्बईकी ओरसे प्रकाशित किया जाये । भगवान् महावीरके दो हज़ार पाँच सौ वें निर्वाण महोत्सवकी अखिल भारतीय दिमम्बर जैन समितिके मान्य अध्यक्ष श्रीमान् साहू शान्तिप्रसादजीने, जो तीर्थक्षेत्र कमेटी के भी तत्कालीन अध्यक्ष थे, मुझे इस ग्रन्थके लेखन कार्यका दायित्व लेने के लिए प्रेरित किया और मैंने भी उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया । प्रस्तुत भाग दो की संयोजना 'भारतके दिगम्बर जैन तीर्थ' भाग एक में उत्तरप्रदेश और दिल्ली के तीर्थक्षेत्रों का विवरण दिया गया है । उसका प्रकाशन महावीर निर्वाण दिवस तेरह नवम्बर एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर को हो चुका है। इसमें प्रायः दो सौ अस्सी पृष्ठोंकी सामग्री के अतिरिक्त चौरासी चित्र और सात मानचित्र दिये गये हैं। उत्तरप्रदेशके सभी तीर्थोको छः जनपदोंमें विभाजित किया गया है - कुरुजांगल और शूरसेन, उत्तराखण्ड, पंचाल, काशी और वत्स, कोशल और चेदि । इन छह जनपदों के मानचित्रों के साथ एक मानचित्र सम्पूर्ण उत्तरप्रदेशके तीर्थोंका दिया गया है । ये मानचित्र भारत सरकारके मानचित्र सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रमाणित और स्वीकृत करा लिये गये हैं। इसलिए इनकी प्रामाणिकता असन्दिग्ध है। इस ग्रन्थके अन्त में यात्रियों की सुविधाके लिए उत्तरप्रदेशके सम्पूर्ण तीर्थोका संक्षिप्त विवरण और यात्रा मार्ग दिया गया है । प्रस्तुत ग्रन्थ तीर्थ-ग्रन्थमालाका द्वितीय भाग है । इस भागमें विहार, बंगाल और उड़ोठाके तीर्थक्षेत्रों का विवरण है। इस भागकी रूपरेखा और तदनुसार सामग्रीका संयोजन इस प्रकार किया गया है विहार- बंगाल - उड़ीसाको सुविधा के लिए निम्नलिखित जनपदों में विभाजित किया गया हैः वज्जि - विदेह जनपद अंग जनपद मगध जनपद भंगि जनपद वंग जनपद कॉलंग जनपद
Bihar Board class 10th answer key 2020: जिन छात्रों को BSEB 10TH परीक्षा के आंसर की का इतंजार है, उनके लिए खुशखबरी है। दरअसल बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा की आंसर की ऑनलाइन जारी कर दी है। बीएसईबी परीक्षा पैटर्न के अनुसार, पूछे गए कुल प्रश्नों में से 50 प्रतिशत ऑब्जेक्टिव इन नेचर में ओएमआर शीट में उत्तर दिए गए थे। उम्मीदवार अब आंसर की के साथ अपने उत्तरों को मिलान कर सकते हैं। छात्र आंसर की को ऑनलाइन biharboardonline. bihar. gov. in पर चेक कर सकते हैं। बिहार बोर्ड ने थ्योरेटिकल प्रश्न-पत्रों के लिए 'आंसर की' जारी करने के साथ ही छात्रों से विभिन्न प्रश्नों के 'आंसर की' के संदर्भ में किसी भी प्रकार की आपत्ति को भी आमंत्रित किया है। यदि किसी छात्र को किसी प्रश्न के 'आंसर की' के लिए आपत्ति हो तो वे ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध कराये गये लिंक के माध्यम से आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 15 मार्च 2020 है। - बोर्ड परीक्षा की ऑफिशियल वेबसाइट, matobj. biharboardonline. com पर विजिट करें। - होम पेज पर मैट्रिक परीक्षा के लिए 'आंसर की' से सम्बन्धित लिंक पर क्लिक करें। - एक नये पेज खुलेगा जहां आपको अपनी परीक्षा, रोल कोड और रोल नंबर को सेलेक्ट करके सबमिट करना होगा। - जिसके बाद आप 'आंसर की' डाउनलोड कर पाएंगे।
Bihar Board class दसth answer key दो हज़ार बीस: जिन छात्रों को BSEB दसTH परीक्षा के आंसर की का इतंजार है, उनके लिए खुशखबरी है। दरअसल बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने कक्षा दसवीं बोर्ड परीक्षा की आंसर की ऑनलाइन जारी कर दी है। बीएसईबी परीक्षा पैटर्न के अनुसार, पूछे गए कुल प्रश्नों में से पचास प्रतिशत ऑब्जेक्टिव इन नेचर में ओएमआर शीट में उत्तर दिए गए थे। उम्मीदवार अब आंसर की के साथ अपने उत्तरों को मिलान कर सकते हैं। छात्र आंसर की को ऑनलाइन biharboardonline. bihar. gov. in पर चेक कर सकते हैं। बिहार बोर्ड ने थ्योरेटिकल प्रश्न-पत्रों के लिए 'आंसर की' जारी करने के साथ ही छात्रों से विभिन्न प्रश्नों के 'आंसर की' के संदर्भ में किसी भी प्रकार की आपत्ति को भी आमंत्रित किया है। यदि किसी छात्र को किसी प्रश्न के 'आंसर की' के लिए आपत्ति हो तो वे ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध कराये गये लिंक के माध्यम से आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि पंद्रह मार्च दो हज़ार बीस है। - बोर्ड परीक्षा की ऑफिशियल वेबसाइट, matobj. biharboardonline. com पर विजिट करें। - होम पेज पर मैट्रिक परीक्षा के लिए 'आंसर की' से सम्बन्धित लिंक पर क्लिक करें। - एक नये पेज खुलेगा जहां आपको अपनी परीक्षा, रोल कोड और रोल नंबर को सेलेक्ट करके सबमिट करना होगा। - जिसके बाद आप 'आंसर की' डाउनलोड कर पाएंगे।
Ghaziabad News: मंगलवार को खोड़ा के वंदना एंक्लेव की बिहारी कॉलोनी में एक घर के अंदर सिलेंडर फट गया। इस हादसे में परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार गाजियाबाद(Ghaziabad) के खोड़ा में धनंजय अपने परिवार के साथ रहते हैं। बुधवार की सुबह करीब 7:15 बजे जब धनंजय की पत्नी चाय बनाने के लिए रसाई में गई तो गैस रिसाव से सिलेंडर फट गया। इस हादसे में धनंजय, उनकी पत्नी खूशबू, बेटी डिंपल(9) साल और उनका एक रिश्तेदार राकेश घायल हो गया। आपको बता दें कि राकेश के सिर में गहरी चोट आई है। जिसकी वजह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसीपी इंदिरापुरम का कहना है कि सूचना मिलते ही खोड़ा पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इस हादसे में घर की दीवार भी गिरी है। This website uses cookies.
Ghaziabad News: मंगलवार को खोड़ा के वंदना एंक्लेव की बिहारी कॉलोनी में एक घर के अंदर सिलेंडर फट गया। इस हादसे में परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार गाजियाबाद के खोड़ा में धनंजय अपने परिवार के साथ रहते हैं। बुधवार की सुबह करीब सात:पंद्रह बजे जब धनंजय की पत्नी चाय बनाने के लिए रसाई में गई तो गैस रिसाव से सिलेंडर फट गया। इस हादसे में धनंजय, उनकी पत्नी खूशबू, बेटी डिंपल साल और उनका एक रिश्तेदार राकेश घायल हो गया। आपको बता दें कि राकेश के सिर में गहरी चोट आई है। जिसकी वजह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसीपी इंदिरापुरम का कहना है कि सूचना मिलते ही खोड़ा पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इस हादसे में घर की दीवार भी गिरी है। This website uses cookies.
मध्य प्रदेश के हलाली डैम पर दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां पर एक डॉक्टर की पत्नी की सेल्फी लेते समय पानी में गिरने से मौत हो गई। सोमवार सुबह तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा, मगर पानी में महिला का पता नहीं चल पाया। डॉक्टर की पत्नी ने ली 'मौत वाली सेल्फी', पति की आंखों के सामने हलाली डैम के पानी में गिरी भोपाल से 40 किमी दूर है हलाली डैम जानकारी के अनुसार भोपाल से करीब चालीस किलोमीटर दूर हलाली डैम है। यहां की नैसर्गिक सुंदरता देखने के लिए काफी लोग आते हैं। रविवार को छुट्टी होने के कारण भोपाल के कोलार में रहने वाले डॉक्टर उत्कर्ष मिश्रा भी अपनी पत्नी हिमानी हलाली डैम घूमने आए थे। 10 से 12 फीट नीचे पानी में गिरी मीडिया से बातचीत में डॉ. उत्कर्ष मिश्रा ने बताया कि वे अपने मोबाइल पर मैसेज चेक कर रहे थे। उसी दौरान उनकी पत्नी मोबाइल पर सेल्फी लेने लगी और उसका संतुलन बिगड़ने से वह 10 से 12 फीट नीचे डैम के पानी में गिरकर बह गई। दूसरे दिन भी नहीं मिला शव सूचना पाकर मौके पर तुरंत राहत टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। यह ऑपरेशन रात भर चला लेकिन बॉडी को ढूंढा नहीं जा सका। सोमवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन चला। तब भी महिला के शव का पता नहीं चल पाया।
मध्य प्रदेश के हलाली डैम पर दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां पर एक डॉक्टर की पत्नी की सेल्फी लेते समय पानी में गिरने से मौत हो गई। सोमवार सुबह तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा, मगर पानी में महिला का पता नहीं चल पाया। डॉक्टर की पत्नी ने ली 'मौत वाली सेल्फी', पति की आंखों के सामने हलाली डैम के पानी में गिरी भोपाल से चालीस किमी दूर है हलाली डैम जानकारी के अनुसार भोपाल से करीब चालीस किलोमीटर दूर हलाली डैम है। यहां की नैसर्गिक सुंदरता देखने के लिए काफी लोग आते हैं। रविवार को छुट्टी होने के कारण भोपाल के कोलार में रहने वाले डॉक्टर उत्कर्ष मिश्रा भी अपनी पत्नी हिमानी हलाली डैम घूमने आए थे। दस से बारह फीट नीचे पानी में गिरी मीडिया से बातचीत में डॉ. उत्कर्ष मिश्रा ने बताया कि वे अपने मोबाइल पर मैसेज चेक कर रहे थे। उसी दौरान उनकी पत्नी मोबाइल पर सेल्फी लेने लगी और उसका संतुलन बिगड़ने से वह दस से बारह फीट नीचे डैम के पानी में गिरकर बह गई। दूसरे दिन भी नहीं मिला शव सूचना पाकर मौके पर तुरंत राहत टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। यह ऑपरेशन रात भर चला लेकिन बॉडी को ढूंढा नहीं जा सका। सोमवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन चला। तब भी महिला के शव का पता नहीं चल पाया।
Latest Hindi Songs 2022: बरसात से जुड़े गाने श्रोताओं के दिल पर दस्तक जरूर देते हैं। ऐसा ही एक गाना अब शहीर शेख और जैस्मीन भसीन पर्दे पर लेकर आए हैं। सारेगामा के मॉनसून गीत इस बारिश में ये जोड़ी नजर आ रही है जिसे यासिर देसाई और नीति मोहन ने गाया है। यह रुहानी ट्रैक रिपुल शर्मा द्वारा रचित है, इस गीत को शरद त्रिपाठी ने लिखा है और आदित्य दत्त ने संगीत दिया है। अपने नए गाने को लेकर शहीर कहते हैं कि जब से मैं इसकी शूटिंग कर रहा हूं, तब से मैं इस बारिश में म्यूजिक वीडियो को लेकर बहुत उत्साहित हूं। यह पहली बार है जब मैंने जैस्मीन के साथ शूट किया है और यह मेरे लिए यह सबसे अच्छा अनुभव था। वहीं जैस्मीन को उम्मीद है कि ये गाना श्रोताओं की यादों का हिस्सा बन जाएगा। गाने में अपनी आवाज देने वाले यासिर देसाई का कहना है कि सावन की पहली बारिश बहुत खूबसूरत होती है, जैसे कि अपने प्रेमी के साथ बिताया गया समय। यही भावना इस गीत में बयां की गई है। नीति मोहन ने बताया कि इस बारिश में गाना बेहद आनंददायक रहा है। यह एक खूबसूरत रचना है जो उस मौसम की जीवंतता को पकड़ लेती है जिसे हम सभी प्यार से मनाते हैं।
Latest Hindi Songs दो हज़ार बाईस: बरसात से जुड़े गाने श्रोताओं के दिल पर दस्तक जरूर देते हैं। ऐसा ही एक गाना अब शहीर शेख और जैस्मीन भसीन पर्दे पर लेकर आए हैं। सारेगामा के मॉनसून गीत इस बारिश में ये जोड़ी नजर आ रही है जिसे यासिर देसाई और नीति मोहन ने गाया है। यह रुहानी ट्रैक रिपुल शर्मा द्वारा रचित है, इस गीत को शरद त्रिपाठी ने लिखा है और आदित्य दत्त ने संगीत दिया है। अपने नए गाने को लेकर शहीर कहते हैं कि जब से मैं इसकी शूटिंग कर रहा हूं, तब से मैं इस बारिश में म्यूजिक वीडियो को लेकर बहुत उत्साहित हूं। यह पहली बार है जब मैंने जैस्मीन के साथ शूट किया है और यह मेरे लिए यह सबसे अच्छा अनुभव था। वहीं जैस्मीन को उम्मीद है कि ये गाना श्रोताओं की यादों का हिस्सा बन जाएगा। गाने में अपनी आवाज देने वाले यासिर देसाई का कहना है कि सावन की पहली बारिश बहुत खूबसूरत होती है, जैसे कि अपने प्रेमी के साथ बिताया गया समय। यही भावना इस गीत में बयां की गई है। नीति मोहन ने बताया कि इस बारिश में गाना बेहद आनंददायक रहा है। यह एक खूबसूरत रचना है जो उस मौसम की जीवंतता को पकड़ लेती है जिसे हम सभी प्यार से मनाते हैं।
रूपांशु चौधरी/हजारीबाग. वैसे तो भारत में चाइनीज खानों का इतिहास पश्चिम बंगाल में बसे हाका प्रांत से आए लोगो से जुड़ा है. उन्हीं लोगो ने सर्वप्रथम इसे यहां के मसालों के साथ मिलाकर भारतीय रूप दिया था. इसके बाद चाइनीज खाना भारतीय लोगों के दिल में ऐसा बसा है, आज आपको हर गली, हर चौक, हर नुक्कड़ पर इसके स्टाल और दुकानें देखने को मिल जाएंगे. ऐसे ही हजारीबाग के कल्लू चौक पर स्थित है मिक्स मसाला रेस्टोरेंट. जहां आपको चाइनिज आइटमों के साथ भारतीय व्यंजन भी मिल जाएंगे, लेकिन दुकान पर चाइनिज आइटमों की मांग अधिक होती है. संचालक असलम अंसारी ने बताया कि वे इस धंधे को करने वाली तीसरी पीढ़ी है. दुकान खुलते ही खाने वालों की भीड़ जमा हो जाती है. शहर में हमारी कुल 4 दुकाने हैं. दुकान पर मिक्स चाउमीन 50 रुपये में हाफ और 100 रुपये में फुल, अंडा चाउमीन 35 रुपये में हाफ और 55 रुपये में फूल, वेज चाउमीन 25 रुपेय में हाफ व 50 रुपये में फूल, चिकन चाउमीन 45 रुपये में हाफ और 90 रुपये में फूल, मिक्स रोल 50, चिकेन रोल 45, एग रोल 30, वेज रोल 25, मिक्स सूप 40, चिकन सूप 30, चिकन बिरयानी 100/50, लच्छा पराठा 15 रुपये पीस, मसाला डोसा 40 रु पये में मिलता है. इसके अलावा दुकान पर सब्जी-पूरी और चिल्ली-पराठी भी परोसा जाता है. दुकान पर रोजाना 100 से 150 किलो चिकन की खपत है. .
रूपांशु चौधरी/हजारीबाग. वैसे तो भारत में चाइनीज खानों का इतिहास पश्चिम बंगाल में बसे हाका प्रांत से आए लोगो से जुड़ा है. उन्हीं लोगो ने सर्वप्रथम इसे यहां के मसालों के साथ मिलाकर भारतीय रूप दिया था. इसके बाद चाइनीज खाना भारतीय लोगों के दिल में ऐसा बसा है, आज आपको हर गली, हर चौक, हर नुक्कड़ पर इसके स्टाल और दुकानें देखने को मिल जाएंगे. ऐसे ही हजारीबाग के कल्लू चौक पर स्थित है मिक्स मसाला रेस्टोरेंट. जहां आपको चाइनिज आइटमों के साथ भारतीय व्यंजन भी मिल जाएंगे, लेकिन दुकान पर चाइनिज आइटमों की मांग अधिक होती है. संचालक असलम अंसारी ने बताया कि वे इस धंधे को करने वाली तीसरी पीढ़ी है. दुकान खुलते ही खाने वालों की भीड़ जमा हो जाती है. शहर में हमारी कुल चार दुकाने हैं. दुकान पर मिक्स चाउमीन पचास रुपयापये में हाफ और एक सौ रुपयापये में फुल, अंडा चाउमीन पैंतीस रुपयापये में हाफ और पचपन रुपयापये में फूल, वेज चाउमीन पच्चीस रुपयापेय में हाफ व पचास रुपयापये में फूल, चिकन चाउमीन पैंतालीस रुपयापये में हाफ और नब्बे रुपयापये में फूल, मिक्स रोल पचास, चिकेन रोल पैंतालीस, एग रोल तीस, वेज रोल पच्चीस, मिक्स सूप चालीस, चिकन सूप तीस, चिकन बिरयानी एक सौ/पचास, लच्छा पराठा पंद्रह रुपयापये पीस, मसाला डोसा चालीस रुपया पये में मिलता है. इसके अलावा दुकान पर सब्जी-पूरी और चिल्ली-पराठी भी परोसा जाता है. दुकान पर रोजाना एक सौ से एक सौ पचास किलो चिकन की खपत है. .
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। वारंट ऑफीसर चाको जोसफ, भारतीय वायु सेना में भारी यातायात स्क्वाड्रन, जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्र में १९६१ से फ्लाइट गनर के पद पर कार्यरत रहे। वे ४४वीं स्क्वाड्रन के संग संलग्न थे। अब तक उन्होंने कुल ३५०० घंटे की उड़ान भरीं, जिनमें से लगभग १६०० घंटे लद्दाख क्षेत्र की उड़ानें रहीं। गनरी लीडर के पद के सामान्य कार्यभार के अलावा, उन्होंने कनिष्ठ गनर्स को भी प्रशिक्षण दिया, साथ ही उन्हें इकाई की प्रचालन भूमिका से भी अवगत कराया। . १९७८ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . वारंट ऑफीसर चाको जोसफ और १९७८ आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): १ जनवरी। १ जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का पहला दिन है। वर्ष में अभी और ३६४ दिन बाकी है (लीप वर्ष में ३६५)। . वारंट ऑफीसर चाको जोसफ 18 संबंध है और १९७८ 47 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.54% है = 1 / (18 + 47)। यह लेख वारंट ऑफीसर चाको जोसफ और १९७८ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। वारंट ऑफीसर चाको जोसफ, भारतीय वायु सेना में भारी यातायात स्क्वाड्रन, जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्र में एक हज़ार नौ सौ इकसठ से फ्लाइट गनर के पद पर कार्यरत रहे। वे चौंतालीसवीं स्क्वाड्रन के संग संलग्न थे। अब तक उन्होंने कुल तीन हज़ार पाँच सौ घंटाटे की उड़ान भरीं, जिनमें से लगभग एक हज़ार छः सौ घंटाटे लद्दाख क्षेत्र की उड़ानें रहीं। गनरी लीडर के पद के सामान्य कार्यभार के अलावा, उन्होंने कनिष्ठ गनर्स को भी प्रशिक्षण दिया, साथ ही उन्हें इकाई की प्रचालन भूमिका से भी अवगत कराया। . एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . वारंट ऑफीसर चाको जोसफ और एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर आम में एक बात है : एक जनवरी। एक जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का पहला दिन है। वर्ष में अभी और तीन सौ चौंसठ दिन बाकी है । . वारंट ऑफीसर चाको जोसफ अट्ठारह संबंध है और एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर सैंतालीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.चौवन% है = एक / । यह लेख वारंट ऑफीसर चाको जोसफ और एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
कनाडा बैठकर आतंकी नेटवर्क चला रहे गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लंडा के चार गुर्गों को थाना मोहकमपुरा की पुलिस ने मंगलवार की सुबह वल्ला बाइपास से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से चार देसी पिस्तौल चार मैगजीन नौ कारतूस और एक बिना नंबर की स्विफ्ट कार बरामद की है। अमृतसर, जागरण संवाददाता : कनाडा बैठकर आतंकी नेटवर्क चला रहे कुख्यात गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लंडा के चार गुर्गों को थाना मोहकमपुरा की पुलिस ने मंगलवार की सुबह वल्ला बाइपास से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से चार देसी पिस्तौल, चार मैगजीन, नौ कारतूस और एक बिना नंबर की स्विफ्ट कार बरामद की है। डीसीपी मुखविंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि मामले की जांच करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी आरोपित तरनतारन जिले के रहने वाले हैं और सुखचैन सिंह का बेटा गुरलाल सिंह इसी साल खुफिया शाखा द्वारा दर्ज किए गए विस्फोटक पदार्थों के मामले में पुलिस को काफी दिनों से वांछित है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों की पहचान तरनतारन के भिखीविंड निवासी सुखचैन सिंह का बेटा गुरलाल सिंह, लखविंदर सिंह का बेटा गुरलाल सिंह उर्फ लाली, गुरुद्वारा गुरु का बाग के पास रहने वाला अरमानदीप सिंह उर्फ लक्खा और नानक दी कुटिया के पास रहने वाले राजबीर सिंह उर्फ राजा के रूप में बताई है। इंस्पेक्टर बिंदरजीत सिंह को सूचना मिली थी उक्त आरोपित बिना स्विफ्ट कार के वल्ला बाइपास से कत्थूनंगल की तरफ जा रहे हैं। इसी आधार पर पुलिस ने नाकाबंदी कर चारों को धर लिया। उनके कब्जे से चार देसी पिस्तौल, चार मैगजीन और नौ कारतूस बरामद किए गए। आरोपितों के कब्जे से मिले मोबाइल से पता चला कि वह मूल रूप से हरिके (तरनतारन) व वर्तमान में कनाडा बैठे कुख्यात गैंगस्टर लखबीर सिंह लंडा के इशारे पर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लखबीर सिंह लंडा पाकिस्तान में बैठे आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ मिलकर पंजाब में खूनी खेल खेल रहा है। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल से कई एप्लिकेशंस मिले हैं। जिनके माध्यम से आरोपित लखबीर से संपर्क में थे।
कनाडा बैठकर आतंकी नेटवर्क चला रहे गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लंडा के चार गुर्गों को थाना मोहकमपुरा की पुलिस ने मंगलवार की सुबह वल्ला बाइपास से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से चार देसी पिस्तौल चार मैगजीन नौ कारतूस और एक बिना नंबर की स्विफ्ट कार बरामद की है। अमृतसर, जागरण संवाददाता : कनाडा बैठकर आतंकी नेटवर्क चला रहे कुख्यात गैंगस्टर लखबीर सिंह उर्फ लंडा के चार गुर्गों को थाना मोहकमपुरा की पुलिस ने मंगलवार की सुबह वल्ला बाइपास से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से चार देसी पिस्तौल, चार मैगजीन, नौ कारतूस और एक बिना नंबर की स्विफ्ट कार बरामद की है। डीसीपी मुखविंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि मामले की जांच करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी आरोपित तरनतारन जिले के रहने वाले हैं और सुखचैन सिंह का बेटा गुरलाल सिंह इसी साल खुफिया शाखा द्वारा दर्ज किए गए विस्फोटक पदार्थों के मामले में पुलिस को काफी दिनों से वांछित है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों की पहचान तरनतारन के भिखीविंड निवासी सुखचैन सिंह का बेटा गुरलाल सिंह, लखविंदर सिंह का बेटा गुरलाल सिंह उर्फ लाली, गुरुद्वारा गुरु का बाग के पास रहने वाला अरमानदीप सिंह उर्फ लक्खा और नानक दी कुटिया के पास रहने वाले राजबीर सिंह उर्फ राजा के रूप में बताई है। इंस्पेक्टर बिंदरजीत सिंह को सूचना मिली थी उक्त आरोपित बिना स्विफ्ट कार के वल्ला बाइपास से कत्थूनंगल की तरफ जा रहे हैं। इसी आधार पर पुलिस ने नाकाबंदी कर चारों को धर लिया। उनके कब्जे से चार देसी पिस्तौल, चार मैगजीन और नौ कारतूस बरामद किए गए। आरोपितों के कब्जे से मिले मोबाइल से पता चला कि वह मूल रूप से हरिके व वर्तमान में कनाडा बैठे कुख्यात गैंगस्टर लखबीर सिंह लंडा के इशारे पर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लखबीर सिंह लंडा पाकिस्तान में बैठे आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ मिलकर पंजाब में खूनी खेल खेल रहा है। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल से कई एप्लिकेशंस मिले हैं। जिनके माध्यम से आरोपित लखबीर से संपर्क में थे।
नई दिल्ली। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी के घर पर सोमवार सुबह सीबीआई की टीम ने छापेमारी करने पहुंची है। सीबीआई राबड़ी देवी से नौकरी के बदले जमीन केस में पूछताछ कर रही है। इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी उनकी बेटी मीसा भारती समेत 10 से ज्यादा आरोपी हैं। अब राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की छापेमारी में दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसको अपमानजनक बताया है। सीएम केजरीवाल ने मीडिया से कहा- यह ग़लत(राबड़ी देवी के घर सीबीआई पहुंचने पर)है,विपक्ष के लोगों पर छापे मारना सही नहीं। मैंने कल कहा था कि यह ट्रेंड बन रहा है कि जिन राज्यों में विपक्ष है वहां उन्हें काम नहीं करने दिया जाएगा। विपक्ष को जांच एजेंसियों या राज्यपाल के जरिए परेशान किया जाता है।
नई दिल्ली। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी के घर पर सोमवार सुबह सीबीआई की टीम ने छापेमारी करने पहुंची है। सीबीआई राबड़ी देवी से नौकरी के बदले जमीन केस में पूछताछ कर रही है। इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी उनकी बेटी मीसा भारती समेत दस से ज्यादा आरोपी हैं। अब राबड़ी देवी के आवास पर सीबीआई की छापेमारी में दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसको अपमानजनक बताया है। सीएम केजरीवाल ने मीडिया से कहा- यह ग़लतहै,विपक्ष के लोगों पर छापे मारना सही नहीं। मैंने कल कहा था कि यह ट्रेंड बन रहा है कि जिन राज्यों में विपक्ष है वहां उन्हें काम नहीं करने दिया जाएगा। विपक्ष को जांच एजेंसियों या राज्यपाल के जरिए परेशान किया जाता है।
सरकारी ऑयल कंपनियों की ओर से आज सुबह जारी दर के अनुसार, राजस्थान में पेट्रोल 31 पैसे की वृद्धि के साथ 108. 69 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 29 पैसे की तेजी देखी गई, 93. 92 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इसके अतिरिक्त पंजाब और यूपी में ईंधन की मूल्य में बहुत हल्की बढ़त हुई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में पेट्रोल 0. 44 रुपये सस्ता होकर 106. 82 रुपये पर आ गया है. डीजल की बात करे तो यह 0. 41 रुपये गिरकर 93. 49 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है. सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों IOC, BPCL और HPCL के पेट्रोल-डीजल की मूल्य प्रत्येक दिन घटती-बढ़ती रहती हैं. पेट्रोल-डीजल का नया मूल्य प्रतिदिन सुबह 6 बजे अपडेट होता है. सुबह छह बजे से नयी दरें लागू हो जाती हैं. जिसमें एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़कर पेट्रोल डीजल का मूल्य लगभग दोगुना हो जाता है.
सरकारी ऑयल कंपनियों की ओर से आज सुबह जारी दर के अनुसार, राजस्थान में पेट्रोल इकतीस पैसे की वृद्धि के साथ एक सौ आठ. उनहत्तर रुपयापये प्रति लीटर और डीजल में उनतीस पैसे की तेजी देखी गई, तिरानवे. बानवे रुपयापये प्रति लीटर बिक रहा है. इसके अतिरिक्त पंजाब और यूपी में ईंधन की मूल्य में बहुत हल्की बढ़त हुई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में पेट्रोल शून्य. चौंतालीस रुपयापये सस्ता होकर एक सौ छः. बयासी रुपयापये पर आ गया है. डीजल की बात करे तो यह शून्य. इकतालीस रुपयापये गिरकर तिरानवे. उनचास रुपयापये प्रति लीटर में मिल रहा है. सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों IOC, BPCL और HPCL के पेट्रोल-डीजल की मूल्य प्रत्येक दिन घटती-बढ़ती रहती हैं. पेट्रोल-डीजल का नया मूल्य प्रतिदिन सुबह छः बजे अपडेट होता है. सुबह छह बजे से नयी दरें लागू हो जाती हैं. जिसमें एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़कर पेट्रोल डीजल का मूल्य लगभग दोगुना हो जाता है.
Posted On: कोविड-19 के खिलाफ देश की लड़ाई के समर्थन में तथा ऑपरेशन समुद्र सेतु II के हिस्से के रूप में सात भारतीय नौसेना जहाजों अर्थात् कोलकाता, कोच्चि, तलवार, टाबर, त्रिकंड, जलश्व तथा ऐरावत को विभिन्न देशों से लिक्विड मेडिकल ऑॅक्सीजन-फिल्ड क्रायोजेनिक कंटेनर्स और संबंधित मेडिकल इक्विपमेंट को पोत लदान के लिए तैनात किया गया है। आईएनएस कोलकाता तथा आईएनएस तलवार, जो फारस की खाड़ी में मिशन के लिए तैनात थे, जहाजों की पहली खेप थे जिन्हें तत्काल इस दायित्व के लिए डायवर्ट किया गया और उन्होंने 30 अप्रैल, 2021 को बहरीन के मनामा बंदरगाह में प्रवेश किया। 40 एमटी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के साथ चला आईएनएस तलवार अपने देश की तरफ लौट रहा है। आईएनएस कोलकाता मेडिकल आपूर्तियां लाने के लिए कतर के दोहा की ओर बढ़ा है और इसके बाद वह जहाज पर लिक्विड ऑक्सीजन टैंक चढ़ाने के लिए कुवैत जाएगा। इसी प्रकार, पूर्वी समुद्र तट पर, आईएनएस ऐरावत को भी इस दायित्व के लिए डायवर्ट कर दिया गया है जबकि आईएनएस जलश्व, वह एलपीडी जिसने पिछले वर्ष समुद्र सेतु के दौरान प्रमुख भूमिका निभाई थी, को रखरखाव की स्थिति से बाहर निकाल कर तैयार किया गया और इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए रवाना किया गया। आईएनएस ऐरावत का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक चढ़ाने के लिए सिंगापुर में प्रवेश करने का कार्यक्रम है और आईएनएस जलश्व अल्प सूचना पर मेडिकल स्टोर्स लाने में सहायता के लिए इस क्षेत्र में खड़ा है। जहाजों की दूसरी खेप जिसमें कोच्चि, टाबर, त्रिकंड शामिल हैं और जो अरब सागर में मिशन की तैनाती में थी, को भी राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल करने के लिए मोड़ दिया गया है। दक्षिणी नौसेना कमान से लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस शार्दुल को 48 घंटों के भीतर अभियान में शामिल करने के लिए तैयार किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर कोविड-19 के खिलाफ देश की लड़ाई में सहायता करने के लिए और अधिक जहाजों की तैनाती करने की भी भारतीय नौसेना के पास क्षमता है। उल्लेखनीय है कि ऑॅपरेशन समुद्र सेतु पिछले वर्ष नौसेना द्वारा आरंभ किया गया था और कोविड-19 के प्रकोप के बीच पड़ोसी देशों में फंसे लगभग 4000 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया था।
Posted On: कोविड-उन्नीस के खिलाफ देश की लड़ाई के समर्थन में तथा ऑपरेशन समुद्र सेतु II के हिस्से के रूप में सात भारतीय नौसेना जहाजों अर्थात् कोलकाता, कोच्चि, तलवार, टाबर, त्रिकंड, जलश्व तथा ऐरावत को विभिन्न देशों से लिक्विड मेडिकल ऑॅक्सीजन-फिल्ड क्रायोजेनिक कंटेनर्स और संबंधित मेडिकल इक्विपमेंट को पोत लदान के लिए तैनात किया गया है। आईएनएस कोलकाता तथा आईएनएस तलवार, जो फारस की खाड़ी में मिशन के लिए तैनात थे, जहाजों की पहली खेप थे जिन्हें तत्काल इस दायित्व के लिए डायवर्ट किया गया और उन्होंने तीस अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस को बहरीन के मनामा बंदरगाह में प्रवेश किया। चालीस एमटी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के साथ चला आईएनएस तलवार अपने देश की तरफ लौट रहा है। आईएनएस कोलकाता मेडिकल आपूर्तियां लाने के लिए कतर के दोहा की ओर बढ़ा है और इसके बाद वह जहाज पर लिक्विड ऑक्सीजन टैंक चढ़ाने के लिए कुवैत जाएगा। इसी प्रकार, पूर्वी समुद्र तट पर, आईएनएस ऐरावत को भी इस दायित्व के लिए डायवर्ट कर दिया गया है जबकि आईएनएस जलश्व, वह एलपीडी जिसने पिछले वर्ष समुद्र सेतु के दौरान प्रमुख भूमिका निभाई थी, को रखरखाव की स्थिति से बाहर निकाल कर तैयार किया गया और इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए रवाना किया गया। आईएनएस ऐरावत का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक चढ़ाने के लिए सिंगापुर में प्रवेश करने का कार्यक्रम है और आईएनएस जलश्व अल्प सूचना पर मेडिकल स्टोर्स लाने में सहायता के लिए इस क्षेत्र में खड़ा है। जहाजों की दूसरी खेप जिसमें कोच्चि, टाबर, त्रिकंड शामिल हैं और जो अरब सागर में मिशन की तैनाती में थी, को भी राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल करने के लिए मोड़ दिया गया है। दक्षिणी नौसेना कमान से लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस शार्दुल को अड़तालीस घंटाटों के भीतर अभियान में शामिल करने के लिए तैयार किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर कोविड-उन्नीस के खिलाफ देश की लड़ाई में सहायता करने के लिए और अधिक जहाजों की तैनाती करने की भी भारतीय नौसेना के पास क्षमता है। उल्लेखनीय है कि ऑॅपरेशन समुद्र सेतु पिछले वर्ष नौसेना द्वारा आरंभ किया गया था और कोविड-उन्नीस के प्रकोप के बीच पड़ोसी देशों में फंसे लगभग चार हज़ार भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया था।
कोलकाता नाइट राइडर्स की आईपीएल-13 में बाज़ीगरी जारी है. कोलकाता ने शनिवार को किंग्स इलेवन पंजाब के ख़िलाफ लगभग हारी बाज़ी जीतने का कमाल दिखाया. कोलकाता ने पंजाब को दो रन से मात दी. इसके पहले चेन्नई के ख़िलाफ़ बुधवार को भी केकेआर ने ऐसा ही करिश्मा किया था. ये कोलकाता की चौथी जीत है. केकेआर ने पिछले दो मैच जिस अंदाज़ में जीते हैं, उससे लग रहा है कि इस टीम के ख़िलाड़ियों ने टीम ओनर अभिनेता शाहरूख़ ख़ान की पुरानी फ़िल्म 'बाज़ीगर' के एक मशहूर डॉयलॉग को सूत्र वाक्य बना लिया है. बाज़ीगर फ़िल्म में शाहरूख़ का मशहूर डॉयलॉग था, "हार के जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं. " पंजाब के ख़िलाफ़ मैच में 14वें ओवर तक कोलकाता के लिए जीत दूर की कौड़ी दिख रही थी. 165 रन का लक्ष्य लेकर उतरी पंजाब की टीम 14 ओवर में बिना विकेट गंवाए 113 रन बना चुकी थी. आख़िरी छह ओवर में पंजाब को जीत के लिए 52 रन बनाने थे. तब मैच पूरी तरह पंजाब की पकड़ में माना जा रहा था लेकिन कोलकाता ने यहां से खेल का रुख बदल दिया. और पंजाब को पांच विकेट पर 162 रन के स्कोर तक ही पहुंचने दिया. 15वें ओवर में ओपनर मयंक अग्रवाल के रूप में पंजाब को पहला झटका लगा और मैच की स्क्रिप्ट बदल गई. आखिरी ओवर में पंजाब को जीत के लिए 14 रन बनाने थे लेकिन सुनील नरेन के इस ओवर में सिर्फ़ 11 रन ही बने. कोलकाता के लिए नरेन ने 28 रन देकर दो और प्रसिद्ध कृष्णा ने 29 रन देकर तीन विकेट लिए. इन दो गेंदबाजों ने ही पंजाब के हाथ से जीत छीन ली. पंजाब के लिए केएल राहुल ने 74 और मयंक अग्रवाल ने 56 रन बनाए. सात मैच खेल चुकी पंजाब टीम की ये छठी हार है. कोलकाता के बल्लेबाज़ बड़ा स्कोर नहीं बना पाए थे. गेंदबाज़ों के लिए ज़रूरी था कि वो शुरुआत से ही दबाव बनाएं. दूसरे ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर राहुल ने मौका भी दिया लेकिन आंद्रे रसेल कैच नहीं थाम सके. प्रसिद्ध के दूसरे ओवर में मयंक अग्रवाल ने दो चौके और एक छक्का जमाया. पांच ओवर के बाद दोनों ओपनर 36 रन जोड़े चुके थे. सातवें ओवर में स्कोर पचास रन के पार चला गया. 10 ओवर के बाद पंजाब का स्कोर था बिना नुकसान 76 रन. आठवें ओवर में दिनेश कार्तिक ने सुनील नरेन को गेंद थमाई लेकिन तब तक पंजाब के ओपनर जम चुके थे. 13वें ओवर में केएल राहुल ने पैट कमिंस पर लगातार दो चौके जमाकर हाफ सेंचुरी पूरी कर ली और टीम का स्कोर सौ रन के पार ले गए. इसी ओवर में मयंक अग्रवाल ने भी हाफ सेंचुरी पूरी कर ली. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. 15वें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा ने कोलकाता को पहली कामयाबी दिलाई. और यही मैच का टर्निंग प्वाइंट बना. प्रसिद्ध ने मयंक अग्रवाल का विकेट लिया. मयंक ने 39 गेंदों में छह चौके और एक छक्के की मदद से 56 रन बनाए. तीसरे नंबर पर आए निकोलस पूरन बड़ी पारी नहीं खेल सके और 18वें ओवर में सुनील नरेन का शिकार बन गए. उन्होंने 10 गेंद पर 16 रन बनाए. इस ओवर में नरेन ने सिर्फ़ दो रन दिए. आखिरी दो ओवर में पंजाब को 20 रन बनाने थे. 19वें ओवर में गेंद प्रसिद्ध कृष्णा के हाथ थी. प्रभसिमरन सिंह चौथी गेंद पर आउट हो गए. उनके ओवर की आखिरी गेंद पर कप्तान राहुल बोल्ड हो गए. वो 58 गेंद पर 74 रन बनाकर आउट हुए. 19वें ओवर में सिर्फ छह रन बने. आखिरी ओवर में पंजाब को 14 रन बनाने थे और गेंद सुनील नरेन के हाथ गेंद थी. ग्लेन मैक्सवेल ने पहली गेंद पर दो रन बनाए. दूसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना. तीसरी गेंद पर मैक्सवेल ने चौका जड़ा. आखिरी तीन गेंद पर पंजाब को आठ रन बनाने थे. चौथी गेंद पर केकेआर ने मैक्सवेल के ख़िलाफ़ एलबीडब्लू की अपील की. पांचवीं गेंद पर मनदीप सिंह आउट हो गए. वो खाता नहीं खोल सके. आखिरी गेंद पर जीत के लिए सात रन की जरूरत थी लेकिन मैक्सवेल चौका ही लगा पाए. केकेआर- 164/6 (20 ओवर) इसके पहले कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 164 रन बनाए. कोलकाता के लिए कप्तान दिनेश कार्तिक ने 29 गेंद में 58 रन की अहम पारी खेली. उन्होंने आठ चौके और दो छक्के जमाए. ओपनर शुभमन गिल ने 47 गेंदों पर 57 रन बनाए. बाकी बल्लेबाज़ कुछ ख़ास नहीं कर सके. चेन्नई के ख़िलाफ़ बल्ले का दम दिखाने वाले राहुल त्रिपाठी सिर्फ़ चार रन बनाकर सके. नीतीश राणा दो रन के निजी स्कोर पर रनआउट हो गए. इयॉन मोर्गन ने 24 और आंद्रे रसेल ने पांच रन बनाए. पंजाब के लिए मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई ने एक-एक विकेट लिया. बिश्नोई और सिंह ने चार ओवर में सिर्फ़ 25-25 रन दिए. दिनेश कार्तिक मैन ऑफ़ द मैच चुने गए. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
कोलकाता नाइट राइडर्स की आईपीएल-तेरह में बाज़ीगरी जारी है. कोलकाता ने शनिवार को किंग्स इलेवन पंजाब के ख़िलाफ लगभग हारी बाज़ी जीतने का कमाल दिखाया. कोलकाता ने पंजाब को दो रन से मात दी. इसके पहले चेन्नई के ख़िलाफ़ बुधवार को भी केकेआर ने ऐसा ही करिश्मा किया था. ये कोलकाता की चौथी जीत है. केकेआर ने पिछले दो मैच जिस अंदाज़ में जीते हैं, उससे लग रहा है कि इस टीम के ख़िलाड़ियों ने टीम ओनर अभिनेता शाहरूख़ ख़ान की पुरानी फ़िल्म 'बाज़ीगर' के एक मशहूर डॉयलॉग को सूत्र वाक्य बना लिया है. बाज़ीगर फ़िल्म में शाहरूख़ का मशहूर डॉयलॉग था, "हार के जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं. " पंजाब के ख़िलाफ़ मैच में चौदहवें ओवर तक कोलकाता के लिए जीत दूर की कौड़ी दिख रही थी. एक सौ पैंसठ रन का लक्ष्य लेकर उतरी पंजाब की टीम चौदह ओवर में बिना विकेट गंवाए एक सौ तेरह रन बना चुकी थी. आख़िरी छह ओवर में पंजाब को जीत के लिए बावन रन बनाने थे. तब मैच पूरी तरह पंजाब की पकड़ में माना जा रहा था लेकिन कोलकाता ने यहां से खेल का रुख बदल दिया. और पंजाब को पांच विकेट पर एक सौ बासठ रन के स्कोर तक ही पहुंचने दिया. पंद्रहवें ओवर में ओपनर मयंक अग्रवाल के रूप में पंजाब को पहला झटका लगा और मैच की स्क्रिप्ट बदल गई. आखिरी ओवर में पंजाब को जीत के लिए चौदह रन बनाने थे लेकिन सुनील नरेन के इस ओवर में सिर्फ़ ग्यारह रन ही बने. कोलकाता के लिए नरेन ने अट्ठाईस रन देकर दो और प्रसिद्ध कृष्णा ने उनतीस रन देकर तीन विकेट लिए. इन दो गेंदबाजों ने ही पंजाब के हाथ से जीत छीन ली. पंजाब के लिए केएल राहुल ने चौहत्तर और मयंक अग्रवाल ने छप्पन रन बनाए. सात मैच खेल चुकी पंजाब टीम की ये छठी हार है. कोलकाता के बल्लेबाज़ बड़ा स्कोर नहीं बना पाए थे. गेंदबाज़ों के लिए ज़रूरी था कि वो शुरुआत से ही दबाव बनाएं. दूसरे ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर राहुल ने मौका भी दिया लेकिन आंद्रे रसेल कैच नहीं थाम सके. प्रसिद्ध के दूसरे ओवर में मयंक अग्रवाल ने दो चौके और एक छक्का जमाया. पांच ओवर के बाद दोनों ओपनर छत्तीस रन जोड़े चुके थे. सातवें ओवर में स्कोर पचास रन के पार चला गया. दस ओवर के बाद पंजाब का स्कोर था बिना नुकसान छिहत्तर रन. आठवें ओवर में दिनेश कार्तिक ने सुनील नरेन को गेंद थमाई लेकिन तब तक पंजाब के ओपनर जम चुके थे. तेरहवें ओवर में केएल राहुल ने पैट कमिंस पर लगातार दो चौके जमाकर हाफ सेंचुरी पूरी कर ली और टीम का स्कोर सौ रन के पार ले गए. इसी ओवर में मयंक अग्रवाल ने भी हाफ सेंचुरी पूरी कर ली. उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. पंद्रहवें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा ने कोलकाता को पहली कामयाबी दिलाई. और यही मैच का टर्निंग प्वाइंट बना. प्रसिद्ध ने मयंक अग्रवाल का विकेट लिया. मयंक ने उनतालीस गेंदों में छह चौके और एक छक्के की मदद से छप्पन रन बनाए. तीसरे नंबर पर आए निकोलस पूरन बड़ी पारी नहीं खेल सके और अट्ठारहवें ओवर में सुनील नरेन का शिकार बन गए. उन्होंने दस गेंद पर सोलह रन बनाए. इस ओवर में नरेन ने सिर्फ़ दो रन दिए. आखिरी दो ओवर में पंजाब को बीस रन बनाने थे. उन्नीसवें ओवर में गेंद प्रसिद्ध कृष्णा के हाथ थी. प्रभसिमरन सिंह चौथी गेंद पर आउट हो गए. उनके ओवर की आखिरी गेंद पर कप्तान राहुल बोल्ड हो गए. वो अट्ठावन गेंद पर चौहत्तर रन बनाकर आउट हुए. उन्नीसवें ओवर में सिर्फ छह रन बने. आखिरी ओवर में पंजाब को चौदह रन बनाने थे और गेंद सुनील नरेन के हाथ गेंद थी. ग्लेन मैक्सवेल ने पहली गेंद पर दो रन बनाए. दूसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना. तीसरी गेंद पर मैक्सवेल ने चौका जड़ा. आखिरी तीन गेंद पर पंजाब को आठ रन बनाने थे. चौथी गेंद पर केकेआर ने मैक्सवेल के ख़िलाफ़ एलबीडब्लू की अपील की. पांचवीं गेंद पर मनदीप सिंह आउट हो गए. वो खाता नहीं खोल सके. आखिरी गेंद पर जीत के लिए सात रन की जरूरत थी लेकिन मैक्सवेल चौका ही लगा पाए. केकेआर- एक सौ चौंसठ/छः इसके पहले कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए बीस ओवर में छः विकेट पर एक सौ चौंसठ रन बनाए. कोलकाता के लिए कप्तान दिनेश कार्तिक ने उनतीस गेंद में अट्ठावन रन की अहम पारी खेली. उन्होंने आठ चौके और दो छक्के जमाए. ओपनर शुभमन गिल ने सैंतालीस गेंदों पर सत्तावन रन बनाए. बाकी बल्लेबाज़ कुछ ख़ास नहीं कर सके. चेन्नई के ख़िलाफ़ बल्ले का दम दिखाने वाले राहुल त्रिपाठी सिर्फ़ चार रन बनाकर सके. नीतीश राणा दो रन के निजी स्कोर पर रनआउट हो गए. इयॉन मोर्गन ने चौबीस और आंद्रे रसेल ने पांच रन बनाए. पंजाब के लिए मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई ने एक-एक विकेट लिया. बिश्नोई और सिंह ने चार ओवर में सिर्फ़ पच्चीस-पच्चीस रन दिए. दिनेश कार्तिक मैन ऑफ़ द मैच चुने गए.
SmackDown: WWE SmackDown के इस हफ्ते का एपिसोड काफी बेहतरीन साबित हुआ। स्मैकडाउन (SmackDown) के इस एपिसोड के दौरान कुछ बेहतरीन चीज़ें देखने को मिली और साथ ही, आने वाले समय के लिए कुछ बड़े ऐलान भी किये गए। इसके अलावा ब्लू ब्रांड में अगले हफ्ते SmackDown के लिए ब्रॉक लैसनर की वापसी की घोषणा हुई। साथ ही, SummerSlam में होने जा रहे अनडिस्प्यूटेड टैग टीम चैंपियनशिप मैच के गेस्ट रेफरी का भी खुलासा हो चुका है। इसके अलावा इस हफ्ते ब्लू ब्रांड में भारतीय सुपरस्टार के कैरेक्टर में बदलाव देखने को मिला। इन सब चीज़ों के अलावा भी शो में काफी कुछ देखने को मिला। आइए ज्यादा देर ना करते हुए इस हफ्ते WWE SmackDown से सामने आईं 5 बड़ी कहानियों पर एक नजर डालते हैं। नटालिया को इस हफ्ते ब्लू ब्रांड में कंटेडर्स मैच में SmackDown विमेंस चैंपियन लिव मॉर्गन का सामना करने का मौका मिला था। नटालिया के पास यह मैच जीतकर SummerSlam में होने जा रहे SmackDown विमेंस चैंपियनशिप मैच में जगह बनाने का मौका था, हालांकि, इस हफ्ते हुए मैच में लिव ने नटालिया को मात दी थी। इस हार के साथ ही नटालिया का इस साल SummerSlam में होने जा रहे SmackDown विमेंस चैंपियनशिप मैच में कम्पीट करने का सपना अधूरा रह गया। वहीं, लिव मॉर्गन को इस जीत से काफी मोमेंटम मिला है और ऐसा लग रहा है कि वो इस साल SummerSlam में रोंडा राउजी का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, लिव मॉर्गन के लिए इस मैच में रोंडा राउजी जैसी बड़ी सुपरस्टार को हराना इतना आसान नहीं होगा और इस मैच में लिव के उनका टाइटल गंवाने का भी खतरा होगा। WWE SmackDown के इस हफ्ते के शो के मेन इवेंट में एंजेलो डॉकिन्स ने जैफ जैरेट को विवादित तरीके से हराया। इस मैच के बाद एडम पीयर्स ने इस चीज़ का हवाला देते हुए कहा कि क्यों SummerSlam में होने जा रहे अनडिस्प्यूटेड टैग टीम चैंपियनशिप मैच में गेस्ट रेफरी की जरूरत है। इसके साथ ही पीयर्स ने गेस्ट रेफरी के नाम का भी खुलासा कर दिया। एडम पीयर्स ने खुलासा करते हुए बताया कि SummerSlam में होने जा रहे द उसोज vs स्ट्रीट प्रॉफिट्स मैच के गेस्ट रेफरी जैफ जैरेट होंगे। एडम पीयर्स का यह खुलासा काफी चौंकाने वाला था और शायद ही किसी ने सोचा होगा कि WWE जैफ जैरेट को गेस्ट रेफरी के रूप में चुनेगी। यह देखना रोचक होगा कि जैफ जैरेट SummerSlam में गेस्ट रेफरी की भूमिका ठीक तरह निभा पाते हैं या नहीं। WWE SmackDown में इस हफ्ते न्यू डे ने वाइकिंग रेडर्स का रूप लेकर उनका काफी मजाक उड़ाया था। इसके बाद जब वाइकिंग रेडर्स रिंग की तरफ बढ़े तो जिंदर महल और शैंकी ने उनपर हमला कर दिया। यही नहीं, न्यू डे ने भी जिंदर और शैंकी का साथ देते हुए वाइकिंग रेडर्स को वहां से भागने पर मजबूर कर दिया था। इस चीज़ के जरिए जिंदर & शैंकी ने पिछले हफ्ते वाइकिंग रेडर्स के खिलाफ टैग टीम मैच में मिली हार का बदला ले लिया। वहीं, जिंदर महल इसके बाद शैंकी और न्यू डे के साथ मिलकर जश्न मनाते हुए दिखाई दिए। ऐसा लग रहा है कि इस चीज़ के जरिए जिंदर महल का बेबीफेस टर्न कराया जा चुका है। WWE SmackDown में पिछले हफ्ते शेमस द्वारा बहाना बनाने की वजह से ड्रू मैकइंटायर के खिलाफ उनका अनडिस्प्यूटेड WWE यूनिवर्सल चैंपियनशिप कंटेडर्स मैच नहीं हो पाया था। इसके बाद इस हफ्ते SmackDown के एपिसोड के लिए यह मैच बुक किया गया। हालांकि, जब ड्रू मैकइंटायर और रिज हॉलैंड रिंग में थे तभी बुच ने बेल बजा दी थी। इस वजह से एक बार फिर ड्रू मैकइंटायर vs शेमस का मैच देखने को नहीं मिल पाया और इसके बजाए मैकइंटायर को रिज हॉलैंड का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ड्रू मैकइंटायर इस मैच में रिज हॉलैंड को हराने में कामयाब रहे थे और ऐसा लग रहा है कि मैकइंटायर को SummerSlam में ही शेमस का सामना करने का मौका मिल पाएगा। WWE Raw में इस हफ्ते ब्रॉक लैसनर की वापसी देखने को मिली थी और अब अगले हफ्ते SmackDown के एपिसोड के लिए भी लैसनर की वापसी का ऐलान कर दिया गया है। बता दें, इस हफ्ते रेड ब्रांड में ब्रॉक लैसनर ने अल्फा अकादमी पर जबरदस्त हमला करके उनका बुरा हाल कर दिया था। ऐसा लग रहा है कि ब्रॉक लैसनर अगले हफ्ते SmackDown में वापसी के बाद एक बार फिर बवाल मचाते हुए दिखाई दे सकते हैं। अभी यह साफ नहीं है कि रोमन रेंस अगले हफ्ते ब्लू ब्रांड में नजर आएंगे या नहीं। अगर रोमन रेंस अगले हफ्ते SmackDown में उपस्थित होते हैं तो रिंग में उनका ब्रॉक लैसनर से आमना-सामना देखने को मिल सकता है। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
SmackDown: WWE SmackDown के इस हफ्ते का एपिसोड काफी बेहतरीन साबित हुआ। स्मैकडाउन के इस एपिसोड के दौरान कुछ बेहतरीन चीज़ें देखने को मिली और साथ ही, आने वाले समय के लिए कुछ बड़े ऐलान भी किये गए। इसके अलावा ब्लू ब्रांड में अगले हफ्ते SmackDown के लिए ब्रॉक लैसनर की वापसी की घोषणा हुई। साथ ही, SummerSlam में होने जा रहे अनडिस्प्यूटेड टैग टीम चैंपियनशिप मैच के गेस्ट रेफरी का भी खुलासा हो चुका है। इसके अलावा इस हफ्ते ब्लू ब्रांड में भारतीय सुपरस्टार के कैरेक्टर में बदलाव देखने को मिला। इन सब चीज़ों के अलावा भी शो में काफी कुछ देखने को मिला। आइए ज्यादा देर ना करते हुए इस हफ्ते WWE SmackDown से सामने आईं पाँच बड़ी कहानियों पर एक नजर डालते हैं। नटालिया को इस हफ्ते ब्लू ब्रांड में कंटेडर्स मैच में SmackDown विमेंस चैंपियन लिव मॉर्गन का सामना करने का मौका मिला था। नटालिया के पास यह मैच जीतकर SummerSlam में होने जा रहे SmackDown विमेंस चैंपियनशिप मैच में जगह बनाने का मौका था, हालांकि, इस हफ्ते हुए मैच में लिव ने नटालिया को मात दी थी। इस हार के साथ ही नटालिया का इस साल SummerSlam में होने जा रहे SmackDown विमेंस चैंपियनशिप मैच में कम्पीट करने का सपना अधूरा रह गया। वहीं, लिव मॉर्गन को इस जीत से काफी मोमेंटम मिला है और ऐसा लग रहा है कि वो इस साल SummerSlam में रोंडा राउजी का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, लिव मॉर्गन के लिए इस मैच में रोंडा राउजी जैसी बड़ी सुपरस्टार को हराना इतना आसान नहीं होगा और इस मैच में लिव के उनका टाइटल गंवाने का भी खतरा होगा। WWE SmackDown के इस हफ्ते के शो के मेन इवेंट में एंजेलो डॉकिन्स ने जैफ जैरेट को विवादित तरीके से हराया। इस मैच के बाद एडम पीयर्स ने इस चीज़ का हवाला देते हुए कहा कि क्यों SummerSlam में होने जा रहे अनडिस्प्यूटेड टैग टीम चैंपियनशिप मैच में गेस्ट रेफरी की जरूरत है। इसके साथ ही पीयर्स ने गेस्ट रेफरी के नाम का भी खुलासा कर दिया। एडम पीयर्स ने खुलासा करते हुए बताया कि SummerSlam में होने जा रहे द उसोज vs स्ट्रीट प्रॉफिट्स मैच के गेस्ट रेफरी जैफ जैरेट होंगे। एडम पीयर्स का यह खुलासा काफी चौंकाने वाला था और शायद ही किसी ने सोचा होगा कि WWE जैफ जैरेट को गेस्ट रेफरी के रूप में चुनेगी। यह देखना रोचक होगा कि जैफ जैरेट SummerSlam में गेस्ट रेफरी की भूमिका ठीक तरह निभा पाते हैं या नहीं। WWE SmackDown में इस हफ्ते न्यू डे ने वाइकिंग रेडर्स का रूप लेकर उनका काफी मजाक उड़ाया था। इसके बाद जब वाइकिंग रेडर्स रिंग की तरफ बढ़े तो जिंदर महल और शैंकी ने उनपर हमला कर दिया। यही नहीं, न्यू डे ने भी जिंदर और शैंकी का साथ देते हुए वाइकिंग रेडर्स को वहां से भागने पर मजबूर कर दिया था। इस चीज़ के जरिए जिंदर & शैंकी ने पिछले हफ्ते वाइकिंग रेडर्स के खिलाफ टैग टीम मैच में मिली हार का बदला ले लिया। वहीं, जिंदर महल इसके बाद शैंकी और न्यू डे के साथ मिलकर जश्न मनाते हुए दिखाई दिए। ऐसा लग रहा है कि इस चीज़ के जरिए जिंदर महल का बेबीफेस टर्न कराया जा चुका है। WWE SmackDown में पिछले हफ्ते शेमस द्वारा बहाना बनाने की वजह से ड्रू मैकइंटायर के खिलाफ उनका अनडिस्प्यूटेड WWE यूनिवर्सल चैंपियनशिप कंटेडर्स मैच नहीं हो पाया था। इसके बाद इस हफ्ते SmackDown के एपिसोड के लिए यह मैच बुक किया गया। हालांकि, जब ड्रू मैकइंटायर और रिज हॉलैंड रिंग में थे तभी बुच ने बेल बजा दी थी। इस वजह से एक बार फिर ड्रू मैकइंटायर vs शेमस का मैच देखने को नहीं मिल पाया और इसके बजाए मैकइंटायर को रिज हॉलैंड का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ड्रू मैकइंटायर इस मैच में रिज हॉलैंड को हराने में कामयाब रहे थे और ऐसा लग रहा है कि मैकइंटायर को SummerSlam में ही शेमस का सामना करने का मौका मिल पाएगा। WWE Raw में इस हफ्ते ब्रॉक लैसनर की वापसी देखने को मिली थी और अब अगले हफ्ते SmackDown के एपिसोड के लिए भी लैसनर की वापसी का ऐलान कर दिया गया है। बता दें, इस हफ्ते रेड ब्रांड में ब्रॉक लैसनर ने अल्फा अकादमी पर जबरदस्त हमला करके उनका बुरा हाल कर दिया था। ऐसा लग रहा है कि ब्रॉक लैसनर अगले हफ्ते SmackDown में वापसी के बाद एक बार फिर बवाल मचाते हुए दिखाई दे सकते हैं। अभी यह साफ नहीं है कि रोमन रेंस अगले हफ्ते ब्लू ब्रांड में नजर आएंगे या नहीं। अगर रोमन रेंस अगले हफ्ते SmackDown में उपस्थित होते हैं तो रिंग में उनका ब्रॉक लैसनर से आमना-सामना देखने को मिल सकता है। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
स्वभाव तथा प्रमाद ये तामस गुण के लक्षण हैं। (मनु० 12-33 ) 28. ब्राह्मण की हत्या करने वाला, मद्यपान करने वाला, चोर और गुरु की स्त्री से व्यभिचार करने वाला ये भिन्न-भिन्न कर्म करने वाले महापापी हैं । ( मनु० ) 29. प्राणियों के लिए तीक्ष्ण तलवार तथा दूर रहने वाला सर्प उतना विनाशक नहीं होता जितना विनाशक शरीर में रहने वाला क्रोध होता है । ( आपस्तम्ब 10 - 4 ) 30. क्षमा प्राणियों का गुण है । क्षमावान् पुरुषों में इस एक दोष के अतिरिक्त दूसरा दोष नहीं कि लोग क्षमावान् पुरुष को असमर्थ समझते हैं । ( आपस्तम्ब 10- 10- 5 ) 31. दूसरा आहार न मिलने पर प्राणों का नाश होता है और रोग उत्पन्न होता है तो नियमपूर्वक मांस खाया जा सकता है। किन्तु यह विधान केवल आपत्काल के लिए है । ( मनु० 5-27-28) क्षमा, सत्य और शौच बिना कोई विशेषता विचारे सब वर्णो का विहित धर्म है। (शंखस्मृति 1-5) 33. हिंसा न करना, सत्य बोलना, चोरी न करना, शौच, इन्द्रियों को अपने वश में रखना, इन पांचों बातों को संक्षेप में मनु ने चातुर्वर्ण्य का धर्म कहा है । ( मनु० 10-63) जहाँ गुरु की बुराई या निन्दा होती हो, वहाँ ब्रह्मचारी कान बन्द कर ले या वहां से अन्यत्र चला जाय। ( मनु० 2-200 ) ब्रह्मचारी सर्वत्र अकेला ही सोए । कहीं इच्छापूर्वक वीर्यपात न करे । ऐसा करने पर वह अपने व्रत से भ्रष्ट हो जाता है । ( मनु० 2 ) जिस प्रकार सभी नद और नदियाँ समुद्र में आश्रय पाती हैं, उसी प्रकार सभी आश्रम, गृहस्थ आश्रम में आश्रय पाते हैं । ( मनु० 6-70 ) जो प्रति दिन दूसरे की स्त्री और धन का अपहरण करता है वह समस्त तीर्थो का अभिषेक भले ही करे, पापों से मुक्त नहीं हो सकता। (व्यास 4-5) आयु की अवधि, गृह का भेद, मन्त्र, मैथुन, औषधि, तप, दान, और अपमान को सर्वदा गोरय रखना चाहिए । (दक्षस्मृति 3-14 आंख से देखकर चलना चाहिए, पानी छानकर पीना चाहिए, सत्य से पवित्र वाणी कहनी चाहिए । मन को पवित्र कर सदाचरण करना चाहिए । ( मनु० 6-46) रामायण काल- राम वैदिक, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों में मर्यादा पुरुषोत्तम माने गए हैं । बौद्ध कवि कुमारलात ( ई० 100 ) की कल्पना मण्डलिका में रामायण के पारायण की चर्चा आयी है । जैन कवि विमत सूरि ने "पउम चरिउ" नामक प्राकृत भाषा के ग्रन्थ में रामकथा का अनुवाद किया है। इसकी रचना का समय लगभग 62 ई० माना जाता है ।। बाल्मीकि रामायण में राम का चरित्र नैतिकता का आदर्श है। राम किसी के गुण की अवहेलना नहीं करते। कोई कठोर वचन कहे तो उत्तर नहीं देते । वे अक्रोधी हैं । वे उपकार को भूलने वाले नहीं हैं । अपकार करने वालों के प्रति उनके मन में प्रतिशोध की भावना नहीं जागती। वे समय का सद्उपयोग करते हैं। उन्हें अपने पराक्रम का अहंकार नहीं है । वे असत्य भाषी भी नहीं है । चरित्र, ज्ञान और अवस्था में वे अपने से बड़ों का आदर करते है। वे दयाशील हैं। क्षात्र धर्म का पालन करते हैं। उनकी बुद्धि स्थित है, वे बुरी वस्तुओं तथा बुरे मनुष्यों का संग्रह करने वाले नहीं है। उनकी क्षमा पृथ्वी की क्षमा के समान है। राम कहते हैं- "राजा की आज्ञा से मैं अग्नि में कूद सकता हूं, तीक्ष्ण विष खा सकता हूं तथा समुद्र में गोते लगा सकता हूं । यदि हितकारी पिता, गुरु या राजा की ओर से मुझे वैसा करने के लिए आज्ञा मिल जाय । ( अयो० 18-22-17)। इससे बढ़कर दूसरा कोई धर्माचरण नहीं है, जैसा कि पिता की सेवा तथा उनकी आज्ञाओं का पालन है । अयो० 19-22 बाल्मीकि रामायण में कतिपय नैतिक श्रादर्श1. इस लोक के धर्म के फल की प्राप्ति में धर्म, अर्थ, काम निश्चय रूप से विद्यमान रहते हैं अर्थात् धर्म में ही, धर्म, काम तीनों उसी प्रकार सहायक होते है जिस प्रकार वेश्य, अभिजात तथा पुत्रवती भार्या धर्म, अर्थ और काम में सहायक होती है । (अयो० 21-57-58/21-57 ) 2. सत्य ही सब धर्मों का मूल है । अतः उससे बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है । दान, यज्ञ, हवन, तपस्या, वेद इन सबका मूल सत्य ही है। अतएव मनुष्य को सत्यपरायण होना चाहिए । ( अयो० 14-3-109-10/13/109-14) उत्साह सम्पत्ति का मूल है, उत्साह सबसे बड़ा सुख है । उत्साह सब कार्यों में सफलता प्रदान करता है । ( सुन्दर काण्ड 12-10-11 ) क्षमा चाहे पुरुष में हो, अथवा स्त्रिी में वह भूषण होती है । वह ही क्षमा देवताओं के लिए भी कठिन है, मानवों की बात ही क्या है ? क्षमा दान 1. भारतीय नीतिशास्त्र का इतिहास - पृ०142 5. क्रोधी मनुष्य कौन-सा पाप नहीं कर सकता ? वह गुरुजनों का भी वध कर सकता है, वह कठोर वचनों से सज्जनों का तिरस्कार कर सकता है। कुछ मनुष्य विवेकहीन हो जाता है। वह यह नहीं समझ पाता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। वह अकर्तव्य, अवाच्य नहीं जानता (सु० 55-4/ 55-5) है, क्षमा सत्य तथा क्षमा यज्ञ है, क्षमा यश तथा धर्म है । क्षमा में ही सारा संसार प्रतिष्ठित है। (सू० 33-7/33-8/33-9 ) उपकार के बदले में प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है । ( अ० 1-106) धनी हो या दरिद्र, दुःखी हो या सुखी, दोषी हो या निर्दोष पर मित्र ही मित्र के लिए शरण होता है । मित्र का उत्कट प्रेम देखकर उसके लिए मित्र धन त्याग, सुख त्याग देश त्याग भी करता है । ( कि० 8-8/8-9 ) गृहस्थों की स्त्रियां उनकी आत्मा है । (अयो० 30-24) कौसल्या दासी के समान, मित्र के समान, बहन के समान और माता के समान सदा व्यवहार करती आयी है। सर्वाधिक पुत्र को प्रिय मानने वाली तथा प्रिय बोलने वाली कौसल्या ने सदा मेरे प्रिय काम किए है । अयो 12-68/12-69) महाभारत काल - महाभारत संस्कृत साहित्य का सुप्रसिद्ध महाकाव्य है। इस में सब प्रकार का ज्ञान भरा हुआ है। यह कहा गया है धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के सम्बन्ध में जितना भी कुछ कथनीय है वह सब इस में कह दिया गया है जो कुछ इस में है वही अत्यन्त भी है जो इस में नहीं है वह कहीं भी नही है । इस कृति के अनुसार पूर्ण जीवन के चार उद्देश्य हैं --- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष । धर्म, वे नियम जिनके द्वारा हमारा व्यवहार इसलिए नियन्त्रित होना चाहिए कि संसार में सभी प्राणी एक दूसरे के साथ शान्तिपूर्वक रह सकें, सभी सुखी हो सकें, सभी को आवश्यकतानुसार और यथोचित अर्थ की प्राप्ति और कामोपभोग का सुख प्राप्त हो सके, जिनके अनुसार व्यवहार करने से मनुष्य ऐहिक और पारलौकिक उन्नति कर सके । 2 महाभारत-कार व्यास का मत स्पष्ट शब्दों में यह है कि मनुष्य को धर्म का पालन करने के लिये यदि जीवन का त्याग भी करना पड़े तो उचित है । धर्म का त्याग न काम के लिए, न भय के लिए और न जीवन के लिए ही कभी करना चाहिए । 1. महाभारत आदि पर्व - 62/53 2. भारतीय नीति शास्त्र - पू० 159 धर्म तो नित्य है सदा साथ रहने वाला है और सुख-दुःख अनित्य है । जीव नित्य है किन्तु कर्म करने के हेतु सभी अनित्य हैं । सत्य के व्यवहार करने का प्रयत्न करना चाहिए । सत्य से ही बल मिलता है। अपने आप को वश में रखने वालों को चाहिए कि कभी क्रूरता का व्यवहार न करें । सत्य और अहिंसा की महाभारत में प्रशंसा की गयी है और धार्मिक जीवन के ये दो महान् आधार माने गये हैं। 13 शत्रु असत्य आचरण को उत्पन्न करने वाले हैंक्रोध, काम, शोक, मोह, दूसरों पर शासन की इच्छा, हिंसा, लोभ, मद, मात्सर्य, ईर्ष्या, कुत्सा, असूया, तथा अकृपा। धर्म के लक्षणों का उल्लेख भी महाभारत में हुआ है-स्वायम्भुव मनु ने अद्रोह, सत्य बचन, संविभाग, दया, दम अपनी पत्नी के सन्तान उत्पन्न करना, मृदुता, लज्जा और चपलता रहित होना । (सं० म० भा० 12-3124) यज्ञ, स्वाध्याय, नितप, सत्य, क्षमा, दया और अलोभ ये धर्म के आठ प्रकार हैं । निश्चय ही अहिंसा, सत्य, अक्रोध, अक्रूरता दम, सीधापन धर्म के लक्षण हैं । (13-2.40 सं० म० भा० ) ब्रह्मचर्य से रहना, मांस और मदिरा का निषेध और मर्यादा तथा राम के भीतर रहना धर्म के लक्षण हैं। (13-2-41 सं० म० भा० ) अच्छे लोगों का यह सदा का धर्म है कि वे मन, वचन और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति द्वेष नहीं करते । शाश्वत आर्यत्वयुक्त आचार को जानकर दूसरों का उपकार करते हैं। किसी की अवहेलना नहीं करते। ( म० भा० 3-297 / 35, 36, 49) क्रोध के आवेग में कर्तव्य का ज्ञान नहीं रहता। यहाँ तक कि गुरुओं को भी कष्ट देने लगता है । क्रोधी व्यक्ति दक्षता, अभय, शौर्य और शीघ्र निर्णायकता को प्राप्त नहीं करता । वह माता-पिता आदि को भी मारने से नहीं चूकता । क्रोध पर नियन्त्रण करने वाला तत्वज्ञानियों की दृष्टि में तेजस्वी होता है ( म० भा० 329/18, 20, 28, 17) क्षमा ही धर्म है, क्षमा ही यज्ञ है, क्षमा ही वेद और श्रुति का उपदेश है, जो यह जानता है वह सब को क्षमा कर देता है। क्षमा तप है, क्षमा शैय है, क्षमा हो संसार को धारण किये हुए है । क्षमा अशक्त का बल है और शक्तिमान का भूषण है । जिसने क्षमा रूपी शस्त्र हाथ में ले रखा है, उस का दुर्जन भी कुछ बुरा नहीं कर सकता । ( म० भा० 3-29 / 36, 37, 40, 43, 42 ) सब से ऊँचा धर्म दूसरों के साथ अद्रोह, अनुग्रह और उपकार करना, सब के साथ मित्रता का वर्ताव करता है । ( सं० म० भा० 12/10-5-88 ) महाभारत में बहुत से ऐसे स्थल हैं जहां पर कृष्ण, युधिष्ठिर तथा अर्जुन को
स्वभाव तथा प्रमाद ये तामस गुण के लक्षण हैं। अट्ठाईस. ब्राह्मण की हत्या करने वाला, मद्यपान करने वाला, चोर और गुरु की स्त्री से व्यभिचार करने वाला ये भिन्न-भिन्न कर्म करने वाले महापापी हैं । उनतीस. प्राणियों के लिए तीक्ष्ण तलवार तथा दूर रहने वाला सर्प उतना विनाशक नहीं होता जितना विनाशक शरीर में रहने वाला क्रोध होता है । तीस. क्षमा प्राणियों का गुण है । क्षमावान् पुरुषों में इस एक दोष के अतिरिक्त दूसरा दोष नहीं कि लोग क्षमावान् पुरुष को असमर्थ समझते हैं । इकतीस. दूसरा आहार न मिलने पर प्राणों का नाश होता है और रोग उत्पन्न होता है तो नियमपूर्वक मांस खाया जा सकता है। किन्तु यह विधान केवल आपत्काल के लिए है । क्षमा, सत्य और शौच बिना कोई विशेषता विचारे सब वर्णो का विहित धर्म है। तैंतीस. हिंसा न करना, सत्य बोलना, चोरी न करना, शौच, इन्द्रियों को अपने वश में रखना, इन पांचों बातों को संक्षेप में मनु ने चातुर्वर्ण्य का धर्म कहा है । जहाँ गुरु की बुराई या निन्दा होती हो, वहाँ ब्रह्मचारी कान बन्द कर ले या वहां से अन्यत्र चला जाय। ब्रह्मचारी सर्वत्र अकेला ही सोए । कहीं इच्छापूर्वक वीर्यपात न करे । ऐसा करने पर वह अपने व्रत से भ्रष्ट हो जाता है । जिस प्रकार सभी नद और नदियाँ समुद्र में आश्रय पाती हैं, उसी प्रकार सभी आश्रम, गृहस्थ आश्रम में आश्रय पाते हैं । जो प्रति दिन दूसरे की स्त्री और धन का अपहरण करता है वह समस्त तीर्थो का अभिषेक भले ही करे, पापों से मुक्त नहीं हो सकता। आयु की अवधि, गृह का भेद, मन्त्र, मैथुन, औषधि, तप, दान, और अपमान को सर्वदा गोरय रखना चाहिए । रामायण काल- राम वैदिक, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों में मर्यादा पुरुषोत्तम माने गए हैं । बौद्ध कवि कुमारलात की कल्पना मण्डलिका में रामायण के पारायण की चर्चा आयी है । जैन कवि विमत सूरि ने "पउम चरिउ" नामक प्राकृत भाषा के ग्रन्थ में रामकथा का अनुवाद किया है। इसकी रचना का समय लगभग बासठ ईशून्य माना जाता है ।। बाल्मीकि रामायण में राम का चरित्र नैतिकता का आदर्श है। राम किसी के गुण की अवहेलना नहीं करते। कोई कठोर वचन कहे तो उत्तर नहीं देते । वे अक्रोधी हैं । वे उपकार को भूलने वाले नहीं हैं । अपकार करने वालों के प्रति उनके मन में प्रतिशोध की भावना नहीं जागती। वे समय का सद्उपयोग करते हैं। उन्हें अपने पराक्रम का अहंकार नहीं है । वे असत्य भाषी भी नहीं है । चरित्र, ज्ञान और अवस्था में वे अपने से बड़ों का आदर करते है। वे दयाशील हैं। क्षात्र धर्म का पालन करते हैं। उनकी बुद्धि स्थित है, वे बुरी वस्तुओं तथा बुरे मनुष्यों का संग्रह करने वाले नहीं है। उनकी क्षमा पृथ्वी की क्षमा के समान है। राम कहते हैं- "राजा की आज्ञा से मैं अग्नि में कूद सकता हूं, तीक्ष्ण विष खा सकता हूं तथा समुद्र में गोते लगा सकता हूं । यदि हितकारी पिता, गुरु या राजा की ओर से मुझे वैसा करने के लिए आज्ञा मिल जाय । । इससे बढ़कर दूसरा कोई धर्माचरण नहीं है, जैसा कि पिता की सेवा तथा उनकी आज्ञाओं का पालन है । अयोशून्य उन्नीस-बाईस बाल्मीकि रामायण में कतिपय नैतिक श्रादर्शएक. इस लोक के धर्म के फल की प्राप्ति में धर्म, अर्थ, काम निश्चय रूप से विद्यमान रहते हैं अर्थात् धर्म में ही, धर्म, काम तीनों उसी प्रकार सहायक होते है जिस प्रकार वेश्य, अभिजात तथा पुत्रवती भार्या धर्म, अर्थ और काम में सहायक होती है । दो. सत्य ही सब धर्मों का मूल है । अतः उससे बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है । दान, यज्ञ, हवन, तपस्या, वेद इन सबका मूल सत्य ही है। अतएव मनुष्य को सत्यपरायण होना चाहिए । उत्साह सम्पत्ति का मूल है, उत्साह सबसे बड़ा सुख है । उत्साह सब कार्यों में सफलता प्रदान करता है । क्षमा चाहे पुरुष में हो, अथवा स्त्रिी में वह भूषण होती है । वह ही क्षमा देवताओं के लिए भी कठिन है, मानवों की बात ही क्या है ? क्षमा दान एक. भारतीय नीतिशास्त्र का इतिहास - पृएक सौ बयालीस पाँच. क्रोधी मनुष्य कौन-सा पाप नहीं कर सकता ? वह गुरुजनों का भी वध कर सकता है, वह कठोर वचनों से सज्जनों का तिरस्कार कर सकता है। कुछ मनुष्य विवेकहीन हो जाता है। वह यह नहीं समझ पाता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। वह अकर्तव्य, अवाच्य नहीं जानता है, क्षमा सत्य तथा क्षमा यज्ञ है, क्षमा यश तथा धर्म है । क्षमा में ही सारा संसार प्रतिष्ठित है। उपकार के बदले में प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है । धनी हो या दरिद्र, दुःखी हो या सुखी, दोषी हो या निर्दोष पर मित्र ही मित्र के लिए शरण होता है । मित्र का उत्कट प्रेम देखकर उसके लिए मित्र धन त्याग, सुख त्याग देश त्याग भी करता है । गृहस्थों की स्त्रियां उनकी आत्मा है । कौसल्या दासी के समान, मित्र के समान, बहन के समान और माता के समान सदा व्यवहार करती आयी है। सर्वाधिक पुत्र को प्रिय मानने वाली तथा प्रिय बोलने वाली कौसल्या ने सदा मेरे प्रिय काम किए है । अयो बारह अड़सठ बारह-उनहत्तर) महाभारत काल - महाभारत संस्कृत साहित्य का सुप्रसिद्ध महाकाव्य है। इस में सब प्रकार का ज्ञान भरा हुआ है। यह कहा गया है धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के सम्बन्ध में जितना भी कुछ कथनीय है वह सब इस में कह दिया गया है जो कुछ इस में है वही अत्यन्त भी है जो इस में नहीं है वह कहीं भी नही है । इस कृति के अनुसार पूर्ण जीवन के चार उद्देश्य हैं --- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष । धर्म, वे नियम जिनके द्वारा हमारा व्यवहार इसलिए नियन्त्रित होना चाहिए कि संसार में सभी प्राणी एक दूसरे के साथ शान्तिपूर्वक रह सकें, सभी सुखी हो सकें, सभी को आवश्यकतानुसार और यथोचित अर्थ की प्राप्ति और कामोपभोग का सुख प्राप्त हो सके, जिनके अनुसार व्यवहार करने से मनुष्य ऐहिक और पारलौकिक उन्नति कर सके । दो महाभारत-कार व्यास का मत स्पष्ट शब्दों में यह है कि मनुष्य को धर्म का पालन करने के लिये यदि जीवन का त्याग भी करना पड़े तो उचित है । धर्म का त्याग न काम के लिए, न भय के लिए और न जीवन के लिए ही कभी करना चाहिए । एक. महाभारत आदि पर्व - बासठ/तिरेपन दो. भारतीय नीति शास्त्र - पूशून्य एक सौ उनसठ धर्म तो नित्य है सदा साथ रहने वाला है और सुख-दुःख अनित्य है । जीव नित्य है किन्तु कर्म करने के हेतु सभी अनित्य हैं । सत्य के व्यवहार करने का प्रयत्न करना चाहिए । सत्य से ही बल मिलता है। अपने आप को वश में रखने वालों को चाहिए कि कभी क्रूरता का व्यवहार न करें । सत्य और अहिंसा की महाभारत में प्रशंसा की गयी है और धार्मिक जीवन के ये दो महान् आधार माने गये हैं। तेरह शत्रु असत्य आचरण को उत्पन्न करने वाले हैंक्रोध, काम, शोक, मोह, दूसरों पर शासन की इच्छा, हिंसा, लोभ, मद, मात्सर्य, ईर्ष्या, कुत्सा, असूया, तथा अकृपा। धर्म के लक्षणों का उल्लेख भी महाभारत में हुआ है-स्वायम्भुव मनु ने अद्रोह, सत्य बचन, संविभाग, दया, दम अपनी पत्नी के सन्तान उत्पन्न करना, मृदुता, लज्जा और चपलता रहित होना । यज्ञ, स्वाध्याय, नितप, सत्य, क्षमा, दया और अलोभ ये धर्म के आठ प्रकार हैं । निश्चय ही अहिंसा, सत्य, अक्रोध, अक्रूरता दम, सीधापन धर्म के लक्षण हैं । ब्रह्मचर्य से रहना, मांस और मदिरा का निषेध और मर्यादा तथा राम के भीतर रहना धर्म के लक्षण हैं। अच्छे लोगों का यह सदा का धर्म है कि वे मन, वचन और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति द्वेष नहीं करते । शाश्वत आर्यत्वयुक्त आचार को जानकर दूसरों का उपकार करते हैं। किसी की अवहेलना नहीं करते। क्रोध के आवेग में कर्तव्य का ज्ञान नहीं रहता। यहाँ तक कि गुरुओं को भी कष्ट देने लगता है । क्रोधी व्यक्ति दक्षता, अभय, शौर्य और शीघ्र निर्णायकता को प्राप्त नहीं करता । वह माता-पिता आदि को भी मारने से नहीं चूकता । क्रोध पर नियन्त्रण करने वाला तत्वज्ञानियों की दृष्टि में तेजस्वी होता है क्षमा ही धर्म है, क्षमा ही यज्ञ है, क्षमा ही वेद और श्रुति का उपदेश है, जो यह जानता है वह सब को क्षमा कर देता है। क्षमा तप है, क्षमा शैय है, क्षमा हो संसार को धारण किये हुए है । क्षमा अशक्त का बल है और शक्तिमान का भूषण है । जिसने क्षमा रूपी शस्त्र हाथ में ले रखा है, उस का दुर्जन भी कुछ बुरा नहीं कर सकता । सब से ऊँचा धर्म दूसरों के साथ अद्रोह, अनुग्रह और उपकार करना, सब के साथ मित्रता का वर्ताव करता है । महाभारत में बहुत से ऐसे स्थल हैं जहां पर कृष्ण, युधिष्ठिर तथा अर्जुन को
जब भी शनिवार के दिन तेल दान करें तो उसमें अपनी परछाई जरूर देखें। सभी देवों में कर्मफलदाता का दर्जा भगवान शनिदेव को दिया जाता है। माना जाता है कि यदि यह रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक और यदि किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसे रंक से राज भी बना सकते हैं। इनका दिन शनिवार है इसलिए इस दिन किया गया कार्य पूरी तरह से सावधानी के साथ करना चाहिए। सरसों के तेल में लोहे की कील डालकर पीपल की जड़ में तेल चढ़ाएं। इससे भी शनिदेव जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। जब भी शनिवार के दिन तेल दान करें तो उसमें अपनी परछाई जरूर देखें। परछाई दिखने के बाद ही उसे दान करें। माना जाता है कि इससे शनिवार के दिन व्यक्ति को किसी भी प्रकार से कष्ट नहीं आता है। यदि आप शनि पूजा करते हैं तो शनिवार के दिन स्नानदि से निवृत्त होकर काले तिल में मिलाए हुए सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करें। मंत्रः आयुः प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्। देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गतः। । विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नमः। इस मंत्र के जाप के साथ पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें।
जब भी शनिवार के दिन तेल दान करें तो उसमें अपनी परछाई जरूर देखें। सभी देवों में कर्मफलदाता का दर्जा भगवान शनिदेव को दिया जाता है। माना जाता है कि यदि यह रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक और यदि किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसे रंक से राज भी बना सकते हैं। इनका दिन शनिवार है इसलिए इस दिन किया गया कार्य पूरी तरह से सावधानी के साथ करना चाहिए। सरसों के तेल में लोहे की कील डालकर पीपल की जड़ में तेल चढ़ाएं। इससे भी शनिदेव जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। जब भी शनिवार के दिन तेल दान करें तो उसमें अपनी परछाई जरूर देखें। परछाई दिखने के बाद ही उसे दान करें। माना जाता है कि इससे शनिवार के दिन व्यक्ति को किसी भी प्रकार से कष्ट नहीं आता है। यदि आप शनि पूजा करते हैं तो शनिवार के दिन स्नानदि से निवृत्त होकर काले तिल में मिलाए हुए सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करें। मंत्रः आयुः प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्। देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गतः। । विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नमः। इस मंत्र के जाप के साथ पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें।
inextlive के साथ रहिए खबरों की दुनिया से जुड़े। यहां पढ़िए Kagana Ranaut से जुड़ी हिन्दी न्यूज़ Kagana Ranaut Hindi News और ताजा खबरें Kagana Ranaut Latest News। देखिए Kagana Ranaut संबंधी ताजा वीडियो। साथ ही Kagana Ranaut की ताजा तस्वीरें। Kagana Ranaut से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज, वीडियो व फोटो एक साथ एक जगह। पाइए Kagana Ranaut से जुड़ी जानकारी जिसमें है आपकी रुचि या जो आ सकती है आपके काम। Kagana Ranaut से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को छूने वाली नवीनतम जानकारी, खबरें, वीडियो व तस्वीरें। राजनीति से लेकर टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट व संस्कृति जगत की ताजा हलचल के लिए बने रहिए inextlive के साथ.
inextlive के साथ रहिए खबरों की दुनिया से जुड़े। यहां पढ़िए Kagana Ranaut से जुड़ी हिन्दी न्यूज़ Kagana Ranaut Hindi News और ताजा खबरें Kagana Ranaut Latest News। देखिए Kagana Ranaut संबंधी ताजा वीडियो। साथ ही Kagana Ranaut की ताजा तस्वीरें। Kagana Ranaut से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज, वीडियो व फोटो एक साथ एक जगह। पाइए Kagana Ranaut से जुड़ी जानकारी जिसमें है आपकी रुचि या जो आ सकती है आपके काम। Kagana Ranaut से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को छूने वाली नवीनतम जानकारी, खबरें, वीडियो व तस्वीरें। राजनीति से लेकर टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट व संस्कृति जगत की ताजा हलचल के लिए बने रहिए inextlive के साथ.
मुंबई। आईपीएल के तीन दिग्गजों को टाटा आईपीएल 2022 में अब तक किन टीमों ने सबसे अधिक प्रभावित किया है। आईपीएल 2022 में सभी टीमों ने अपना पहला लीग मैच खेल लिया है, क्रिकेट विशेषज्ञ इरफान पठान, सुरेश रैना और धवल कुलकर्णी ने तीन ऐसी टीमों का नाम लिया जिन्होंने उन्हें अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। आईपीएल में पांच फ्रेंचाइजी टीमों के साथ खेल चुके भारतीय टीम के पूर्व आलराउंडर इरफान पठान ने टाटा आईपीएल 2022 के आधिकारिक प्रसारणकर्ता-स्टार स्पोर्ट्स के शो- क्रिकेट लाइव में कहा, "मैं दिल्ली की दिलेरी का कायल हूं। मुम्बई के खिलाफ वे जहां खड़े थे, मैच जिस सिचुएशन में था, वहां से वे मैच हार सकते थे लेकिन अक्षर पटेल ने शानदार बैटिंग की और मैच जिताया। अभी तो डेविड वार्नर आए नहीं है। अभी नोत्र्जे (एनरिक) फिट नहीं हुए हैं। अगर ये दोनों आ जाते हैं तो यह टीम और तगड़ी लगेगी। " भारतीय टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज और आईपीएल में कप्तानी कर चुके सुरेश रैना ने शो में कहा,"मुझे पंजाब ने बड़ा प्रभावित किया है। जिस तरह से वो खेले। नया कैप्टन, नई टीम, सारे प्लेयर्स ने अपना पूरा दमखम दिखाया। इन सबने मिलकर जिस तरह से 200 से अधिक का टारगेट चेस किया वह दर्शाता है कि उनका टीम काम्बीनेशन काफी अच्छा है और आने वाले समय में यह काफी काम करेगा। " मुम्बई इंडियंस, राजस्थान रायल्स और गुजरात लायंस के लिए खेल चुके भारत के पूर्व तेज गेंदबाज धवल कुलकर्णी ने कहा,"मुझे गुजरात टाइटंस ने काफी प्रभावित किया है। जिस तरह इस नई टीम ने नए टैलेंट और नए अवतार में दिख रहे हार्दिक पांड्या के साथ मिलकर काफी अच्छा परफॉरमेंस दिखाया। मैं इस टीम से काफी प्रभावित हूं। " ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
मुंबई। आईपीएल के तीन दिग्गजों को टाटा आईपीएल दो हज़ार बाईस में अब तक किन टीमों ने सबसे अधिक प्रभावित किया है। आईपीएल दो हज़ार बाईस में सभी टीमों ने अपना पहला लीग मैच खेल लिया है, क्रिकेट विशेषज्ञ इरफान पठान, सुरेश रैना और धवल कुलकर्णी ने तीन ऐसी टीमों का नाम लिया जिन्होंने उन्हें अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। आईपीएल में पांच फ्रेंचाइजी टीमों के साथ खेल चुके भारतीय टीम के पूर्व आलराउंडर इरफान पठान ने टाटा आईपीएल दो हज़ार बाईस के आधिकारिक प्रसारणकर्ता-स्टार स्पोर्ट्स के शो- क्रिकेट लाइव में कहा, "मैं दिल्ली की दिलेरी का कायल हूं। मुम्बई के खिलाफ वे जहां खड़े थे, मैच जिस सिचुएशन में था, वहां से वे मैच हार सकते थे लेकिन अक्षर पटेल ने शानदार बैटिंग की और मैच जिताया। अभी तो डेविड वार्नर आए नहीं है। अभी नोत्र्जे फिट नहीं हुए हैं। अगर ये दोनों आ जाते हैं तो यह टीम और तगड़ी लगेगी। " भारतीय टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज और आईपीएल में कप्तानी कर चुके सुरेश रैना ने शो में कहा,"मुझे पंजाब ने बड़ा प्रभावित किया है। जिस तरह से वो खेले। नया कैप्टन, नई टीम, सारे प्लेयर्स ने अपना पूरा दमखम दिखाया। इन सबने मिलकर जिस तरह से दो सौ से अधिक का टारगेट चेस किया वह दर्शाता है कि उनका टीम काम्बीनेशन काफी अच्छा है और आने वाले समय में यह काफी काम करेगा। " मुम्बई इंडियंस, राजस्थान रायल्स और गुजरात लायंस के लिए खेल चुके भारत के पूर्व तेज गेंदबाज धवल कुलकर्णी ने कहा,"मुझे गुजरात टाइटंस ने काफी प्रभावित किया है। जिस तरह इस नई टीम ने नए टैलेंट और नए अवतार में दिख रहे हार्दिक पांड्या के साथ मिलकर काफी अच्छा परफॉरमेंस दिखाया। मैं इस टीम से काफी प्रभावित हूं। " ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
"घर रख लोगी ? कब तक रखोगी ? अब हो गया, सो हो गया । पहले · से विचारा नहीं ? अब विचारने से क्या होगा ?" "तुम तो मुझी को दोष देते हो । कुवर में क्या दोष है, अपने ही माल में - खोट हो तो कोई क्या करे ?" "ठीक है । कुँवर चाहते हैं, तो जाने दो । अपना क्या ?" "नहीं । मैं तो नहीं जाने दूंगी । तुम इशारे से समझा दो । " "मुझ पर न छोड़ो । तुम परदा तो करती नहीं हो । खुलकर क्यों नहीं कह देती ?" * " तुम भी किसी काम के हो या नहीं - या सब मैं ही करू ?" उसके बाद तर्क बढ़ा और क्रोध बढ़ा । और मैं चला आया । कुँवर साहब कार से आये थे । शाम को मालूम हुआ कि चले जा रहे हैं । फिर कब आयेंगे, इसका ठिकाना न था । ऊपर से कोई बात न जान पड़ी । लेकिन मनोभावों में जो तनाव था, वह प्रकट हुए बिना न रहा । तैयारियाँ हो चुकी थीं, सामान लद गया था और कुँवर मेरे पास आये । मैंने कहा - "अभी जा रहे हो क्या ? " "जी । प्ररणाम करने आया हूं । " " कंदर्प को लेने फिर कब आ रहे हो ? " "देखिए, काम बहुत रहता है। " " अभी शायद तबीयत के सवब तुम्हारी सास ने पाँच-सात रोज के लिए कहा होगा। ठीक तो है, हफ्ते डेढ़-हफ्ते में आ जाना । " कुवर ने कहा - "अच्छा ।" लेकिन उस शब्द में आधार न था । इनकार न था, इतना अवश्य है । पर स्वीकार भी न था । अनमनापन प्रकट था । एक कठोर दृढ़ता का भी भाव था उसमें । जैसे यह प्रश्न मानसम्मान का हो । केवल समय का न हो, सिद्धान्त का हो । मैंने कहा - " फोन पर मैं तुम्हें कह दूंगा और तुम्हें फौरन आ जाना होगा ।"
"घर रख लोगी ? कब तक रखोगी ? अब हो गया, सो हो गया । पहले · से विचारा नहीं ? अब विचारने से क्या होगा ?" "तुम तो मुझी को दोष देते हो । कुवर में क्या दोष है, अपने ही माल में - खोट हो तो कोई क्या करे ?" "ठीक है । कुँवर चाहते हैं, तो जाने दो । अपना क्या ?" "नहीं । मैं तो नहीं जाने दूंगी । तुम इशारे से समझा दो । " "मुझ पर न छोड़ो । तुम परदा तो करती नहीं हो । खुलकर क्यों नहीं कह देती ?" * " तुम भी किसी काम के हो या नहीं - या सब मैं ही करू ?" उसके बाद तर्क बढ़ा और क्रोध बढ़ा । और मैं चला आया । कुँवर साहब कार से आये थे । शाम को मालूम हुआ कि चले जा रहे हैं । फिर कब आयेंगे, इसका ठिकाना न था । ऊपर से कोई बात न जान पड़ी । लेकिन मनोभावों में जो तनाव था, वह प्रकट हुए बिना न रहा । तैयारियाँ हो चुकी थीं, सामान लद गया था और कुँवर मेरे पास आये । मैंने कहा - "अभी जा रहे हो क्या ? " "जी । प्ररणाम करने आया हूं । " " कंदर्प को लेने फिर कब आ रहे हो ? " "देखिए, काम बहुत रहता है। " " अभी शायद तबीयत के सवब तुम्हारी सास ने पाँच-सात रोज के लिए कहा होगा। ठीक तो है, हफ्ते डेढ़-हफ्ते में आ जाना । " कुवर ने कहा - "अच्छा ।" लेकिन उस शब्द में आधार न था । इनकार न था, इतना अवश्य है । पर स्वीकार भी न था । अनमनापन प्रकट था । एक कठोर दृढ़ता का भी भाव था उसमें । जैसे यह प्रश्न मानसम्मान का हो । केवल समय का न हो, सिद्धान्त का हो । मैंने कहा - " फोन पर मैं तुम्हें कह दूंगा और तुम्हें फौरन आ जाना होगा ।"
पटना. लोकसभा चुनावों की तिथि के नजदीक आने पर जिले में तैनात अर्धसैनिक बल नागरिकों सुरक्षा का भाव उत्पन्न करने में लगे हैं। पुलिस के साथ मिल अलग-अलग जगहों पर फ्लैग मार्च किया जा रहा है। अर्धसैनिक बल की कंपनियों ने पटना जिले की कमान संभालते हुए संबंधित थाने की पुलिस के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया है। चुनाव सेल के प्रभारी एवं पटना के एएसपी अभियान अनिल सिंह ने बताया कि अर्धसैनिक बल विभिन्न थाना क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर फ्लैग मार्च कर रहे हैं। थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने इलाके के फरार और वांछित अपराधियों को गिरफ्तार करें। अशांति फैलाने वालों को चिह्नित कर सख्त निरोधात्मक कार्रवाई करें। शराबबंदी के निर्देशों का सख्ती से पालन करें। थाना क्षेत्र में सघन सुरक्षा जांच अभियान चलाकर हर आने-जाने वाले लोगों तथा वाहन पर नजर रखें। लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दानापुर मंडल में ट्रेनों की विशेष जांच की जा रही है। पैसा, शराब, हथियार तथा अन्य प्रतिबंधित सामान काेई ला या ले जा न सके, इसके लिए एहतियात बरती जा रही है। रेलवे सुरक्षा बल के जवान ट्रेनों की पैंट्री कार और लीज वाले पार्सल वैन पर खास नजर रख रहे हैं। बाहर से बुक कर विभिन्न स्टेशनों पर भेजे जा रहे पार्सलों की स्कैनर से जांच की जा रही है। स्टेशनों व यात्री बोगियों की जांच के लिए स्निफर डॉग्स को लगाया गया है। हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से भी सामान की जांच की जा रही है। विशेष परिस्थिति के लिए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को रिजर्व रखा गया है। पटना जंक्शन, आरा, बक्सर, दानापुर, राजेंद्रनगर, पाटलिपुत्र जंक्शन, मोकामा आदि स्टेशनों पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। रेल सुरक्षा बल के अधिकारियों ने जांच में सहयोग के लिए राजकीय रेल पुलिस, रेल प्रशासन और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है। आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट वीसी मल्लिकार्जुन ने कहा कि चुनाव के मद्देनजर सभी अधिकारियों और पोस्ट प्रभारियों को हर ट्रेन की जांच करने का निर्देश दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पटना. लोकसभा चुनावों की तिथि के नजदीक आने पर जिले में तैनात अर्धसैनिक बल नागरिकों सुरक्षा का भाव उत्पन्न करने में लगे हैं। पुलिस के साथ मिल अलग-अलग जगहों पर फ्लैग मार्च किया जा रहा है। अर्धसैनिक बल की कंपनियों ने पटना जिले की कमान संभालते हुए संबंधित थाने की पुलिस के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया है। चुनाव सेल के प्रभारी एवं पटना के एएसपी अभियान अनिल सिंह ने बताया कि अर्धसैनिक बल विभिन्न थाना क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर फ्लैग मार्च कर रहे हैं। थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने इलाके के फरार और वांछित अपराधियों को गिरफ्तार करें। अशांति फैलाने वालों को चिह्नित कर सख्त निरोधात्मक कार्रवाई करें। शराबबंदी के निर्देशों का सख्ती से पालन करें। थाना क्षेत्र में सघन सुरक्षा जांच अभियान चलाकर हर आने-जाने वाले लोगों तथा वाहन पर नजर रखें। लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दानापुर मंडल में ट्रेनों की विशेष जांच की जा रही है। पैसा, शराब, हथियार तथा अन्य प्रतिबंधित सामान काेई ला या ले जा न सके, इसके लिए एहतियात बरती जा रही है। रेलवे सुरक्षा बल के जवान ट्रेनों की पैंट्री कार और लीज वाले पार्सल वैन पर खास नजर रख रहे हैं। बाहर से बुक कर विभिन्न स्टेशनों पर भेजे जा रहे पार्सलों की स्कैनर से जांच की जा रही है। स्टेशनों व यात्री बोगियों की जांच के लिए स्निफर डॉग्स को लगाया गया है। हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से भी सामान की जांच की जा रही है। विशेष परिस्थिति के लिए क्विक रिस्पांस टीम को रिजर्व रखा गया है। पटना जंक्शन, आरा, बक्सर, दानापुर, राजेंद्रनगर, पाटलिपुत्र जंक्शन, मोकामा आदि स्टेशनों पर विशेष चौकसी बरती जा रही है। रेल सुरक्षा बल के अधिकारियों ने जांच में सहयोग के लिए राजकीय रेल पुलिस, रेल प्रशासन और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है। आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट वीसी मल्लिकार्जुन ने कहा कि चुनाव के मद्देनजर सभी अधिकारियों और पोस्ट प्रभारियों को हर ट्रेन की जांच करने का निर्देश दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नयी दिल्ली, 28 नवंबर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी के 250 सरकारी विद्यालयों की सूची जारी की, जिनका कायाकल्प आम आदमी पार्टी की सरकार ने गत पांच वर्षों में किया है। साथ ही, उन्होंने पंजाब को इसी तरह की सूची जारी करने की चुनौती दी, ताकि विद्यालयों में सुधार और उनके विकास के आधार पर दोनों सरकारों की तुलना की जा सके। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के शिक्षामंत्री परगट सिंह ने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार ने शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कोई काम नहीं किया है और चुनौती दी थी कि वह 250 विद्यालयों को देखना चाहते हैं जिनमें दिल्ली सरकार ने सुधार किया है। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इसलिए मैं आज दिल्ली सरकार के 250 विद्यालयों की सूची जारी कर रहा हूं, जिनका कायाकल्प गत पांच वर्षों में किया गया है। मैं पंजाब के शिक्षामंत्री से मांग करता हूं कि वह भी 250 सरकारी विद्यालयों की सूची जारी करें जहां सुधार किया गया है। " सिसोदिया दिल्ली के शिक्षा मंत्री भी हैं। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के शिक्षामंत्री इन (दिल्ली सरकार के) विद्यालयों का कभी भी दौरा कर सकते हैं और इसी प्रकार वह पंजाब सरकार के विद्यालयों की वास्तविकता जानने के लिए वहां का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज शाम (रविवार) तक पंजाब के शिक्षामंत्री सूची जारी कर देंगे। हम दोनों मीडिया के साथ वास्तविकता की जांच करने के लिए पंजाब और दिल्ली के विद्यालयों का दौरा कर सकते हैं। इसके बाद जनता तय करेगी कि किस सरकार ने बेहतर काम किया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, अट्ठाईस नवंबर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी के दो सौ पचास सरकारी विद्यालयों की सूची जारी की, जिनका कायाकल्प आम आदमी पार्टी की सरकार ने गत पांच वर्षों में किया है। साथ ही, उन्होंने पंजाब को इसी तरह की सूची जारी करने की चुनौती दी, ताकि विद्यालयों में सुधार और उनके विकास के आधार पर दोनों सरकारों की तुलना की जा सके। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के शिक्षामंत्री परगट सिंह ने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार ने शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कोई काम नहीं किया है और चुनौती दी थी कि वह दो सौ पचास विद्यालयों को देखना चाहते हैं जिनमें दिल्ली सरकार ने सुधार किया है। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इसलिए मैं आज दिल्ली सरकार के दो सौ पचास विद्यालयों की सूची जारी कर रहा हूं, जिनका कायाकल्प गत पांच वर्षों में किया गया है। मैं पंजाब के शिक्षामंत्री से मांग करता हूं कि वह भी दो सौ पचास सरकारी विद्यालयों की सूची जारी करें जहां सुधार किया गया है। " सिसोदिया दिल्ली के शिक्षा मंत्री भी हैं। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के शिक्षामंत्री इन विद्यालयों का कभी भी दौरा कर सकते हैं और इसी प्रकार वह पंजाब सरकार के विद्यालयों की वास्तविकता जानने के लिए वहां का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज शाम तक पंजाब के शिक्षामंत्री सूची जारी कर देंगे। हम दोनों मीडिया के साथ वास्तविकता की जांच करने के लिए पंजाब और दिल्ली के विद्यालयों का दौरा कर सकते हैं। इसके बाद जनता तय करेगी कि किस सरकार ने बेहतर काम किया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
अमरीका में एक ऐसा जीव खोजा गया है जिसके बारे में कहा जा रहा हैा कि यह डायनासोर से पहले पृथ्वी पर पाया जाता था। इस उभयचर जीव को साउथ फ्लोरिडा की तामियामी नहर में खोजा गया। फ्लोरिडा फिश एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन कमीशन के मुताबिक यह जीव जमीन और पानी दोनों जगहों पर रहते हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। लोग इस अजीब से कीड़े नुमा जीव को लेकर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। इसे रबर जैसा खिलौना भी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक मील दक्षिण में इस जीव को खोज लिया गया था, लेकिन इसकी पहचान करने में वैज्ञानिकों को काफी माथापच्ची करनी पड़ी। डीएनए जांच के बाद इसकी पहचान सीसिलियन के रूप में हुई। इसकी एक और पहचान टाइफ्लोनेक्टेस नटान के रूप में भी हुई जो डायनासोर से पहले पाए जाते थे। कोलमैन फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में हर्पेटोलॉजी कलेक्शन मैनेजर कोलमैन शेही का मानना है कि सीसिलियन के बारे में विज्ञान में कम जानकारी उपलब्ध है लेकिन यह खतरनाक नहीं है। संभवतः यह छोटे जानवरों को खाता होगा और बड़े जानवर इसे अपना शिकार बनाते होंगे। यह दक्षिण फ्लोरिडा में पाई जाने वाली एक और गैर-देशी प्रजाति हो सकती है। सेसिलियन ज्यादातर दक्षिण और मध्य अमरीका, अफ्रीका और दक्षिणी एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। प्रायः जमीन और भाप में छिपे रहते हैं।
अमरीका में एक ऐसा जीव खोजा गया है जिसके बारे में कहा जा रहा हैा कि यह डायनासोर से पहले पृथ्वी पर पाया जाता था। इस उभयचर जीव को साउथ फ्लोरिडा की तामियामी नहर में खोजा गया। फ्लोरिडा फिश एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन कमीशन के मुताबिक यह जीव जमीन और पानी दोनों जगहों पर रहते हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। लोग इस अजीब से कीड़े नुमा जीव को लेकर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। इसे रबर जैसा खिलौना भी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक मील दक्षिण में इस जीव को खोज लिया गया था, लेकिन इसकी पहचान करने में वैज्ञानिकों को काफी माथापच्ची करनी पड़ी। डीएनए जांच के बाद इसकी पहचान सीसिलियन के रूप में हुई। इसकी एक और पहचान टाइफ्लोनेक्टेस नटान के रूप में भी हुई जो डायनासोर से पहले पाए जाते थे। कोलमैन फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में हर्पेटोलॉजी कलेक्शन मैनेजर कोलमैन शेही का मानना है कि सीसिलियन के बारे में विज्ञान में कम जानकारी उपलब्ध है लेकिन यह खतरनाक नहीं है। संभवतः यह छोटे जानवरों को खाता होगा और बड़े जानवर इसे अपना शिकार बनाते होंगे। यह दक्षिण फ्लोरिडा में पाई जाने वाली एक और गैर-देशी प्रजाति हो सकती है। सेसिलियन ज्यादातर दक्षिण और मध्य अमरीका, अफ्रीका और दक्षिणी एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। प्रायः जमीन और भाप में छिपे रहते हैं।
देवाणुप्पिया ! हत्थिणाउरं नगरं, तत्थ णं तुमं पंडुरायं सपुत्तयं- जुहिट्ठिलं भीमसेणं अज्जुणं नउल सहदेव, दुज्जोहणं भाइसयसमग्ग गंगेयं विदुर दोण जयद्दहं सणि कीवं आसत्थामं करयल जाव कट्टु तहेव समोसरह ।' तत्पश्चात् (प्रथम दूत को द्वारिका भेजने के तुरन्त बाद मे) द्रुपद राजा ने दूसरे दूत को वुलाया । बुलाकर उससे कहा - 'देवानुप्रिय । तुम हस्तिनापुर नगर जाओ ।' वहाँ तुम पुत्रो सहित पाण्डु राजा को -- उनके पुत्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को, सौ भाइयो समेत दुर्योधन को, गागेय, विदुर, द्रोण, जयद्रथ, शकुनि, क्लीव (कर्ण) और अश्वत्थामा को दोनो हाथ जोडकर यावत् मस्तक पर अजलि करके उसी प्रकार ( पहले के समान ) कहना, यावत् - समय पर स्वयंवर मे पधारिए । ९६ - तए णं से दूए एवं वयासी जहा वासुदेवे, नवरं भेरी नत्थि, जाव जेणेव कंपिल्लपुरे नयरे तेणेव पहारेत्थ गमणाए । तत्पश्चात् दूत ने हस्तिनापुर जाकर उसी प्रकार कहा जैसा प्रथम दूत ने श्रीकृष्ण को कहा था । तव जैसा कृष्ण वासुदेव ने किया, वैसा ही पाण्डु राजा ने किया। विशेषता यह है कि हस्तिनापुर मे भेरी नही थी । (अतएव दूसरे उपाय से सव को सूचना देकर और साथ लेकर पाण्डु राजा भी) कापिल्यपुर नगर की ओर गमन करने को उद्यत हुए । अन्य दूतो का अन्यत्र प्रेषण ९७ -- एएणेव कमेणं तच्चं दूय चंपानर्यार, तत्थ णं तुम कण्हं अंगरायं, सेल्लं, नंदिरायं करयल तेहेव जाव समोसरह । इसी क्रम से तीसरे दूत को चम्पा नगरी भेजा और उससे कहा- तुम वहाँ जाकर अगराज कृष्ण को, सेल्लक राजा को और नदिराज को दोनो हाथ जोडकर यावत् कहना कि स्वयंवर मे पधारिए । ९८ - चउत्थं दूयं सुत्तिमइ नर्यार, तत्थ णं सिसुपालं दमघोससुयं पंचभाइसयसंपरिवुडं करयल तहेव-जाव समोसरह । चौथा दूत शुक्तिमती नगरी भेजा और उसे आदेश दिया - तुम दमघोष के पुत्र और पाच सौ भाइयो से परिवृत शिशुपाल राजा को हाथ जोडकर उसी प्रकार कहना, यावत् स्वयंवर मे पधारिए । ९९ - पंचमगं दूयं हत्थिसीसनगरं, तत्थ णं तुमं दमदंतं नाम रायं करयल तहेव जाव समोसरह । पाँचवा दूत हस्तीशीर्प नगर भेजा और कहा - तुम दमदत राजा को हाथ जोड कर उसी प्रकार कहना यावत् स्वयंवर मे पधारिए ।
देवाणुप्पिया ! हत्थिणाउरं नगरं, तत्थ णं तुमं पंडुरायं सपुत्तयं- जुहिट्ठिलं भीमसेणं अज्जुणं नउल सहदेव, दुज्जोहणं भाइसयसमग्ग गंगेयं विदुर दोण जयद्दहं सणि कीवं आसत्थामं करयल जाव कट्टु तहेव समोसरह ।' तत्पश्चात् द्रुपद राजा ने दूसरे दूत को वुलाया । बुलाकर उससे कहा - 'देवानुप्रिय । तुम हस्तिनापुर नगर जाओ ।' वहाँ तुम पुत्रो सहित पाण्डु राजा को -- उनके पुत्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को, सौ भाइयो समेत दुर्योधन को, गागेय, विदुर, द्रोण, जयद्रथ, शकुनि, क्लीव और अश्वत्थामा को दोनो हाथ जोडकर यावत् मस्तक पर अजलि करके उसी प्रकार कहना, यावत् - समय पर स्वयंवर मे पधारिए । छियानवे - तए णं से दूए एवं वयासी जहा वासुदेवे, नवरं भेरी नत्थि, जाव जेणेव कंपिल्लपुरे नयरे तेणेव पहारेत्थ गमणाए । तत्पश्चात् दूत ने हस्तिनापुर जाकर उसी प्रकार कहा जैसा प्रथम दूत ने श्रीकृष्ण को कहा था । तव जैसा कृष्ण वासुदेव ने किया, वैसा ही पाण्डु राजा ने किया। विशेषता यह है कि हस्तिनापुर मे भेरी नही थी । कापिल्यपुर नगर की ओर गमन करने को उद्यत हुए । अन्य दूतो का अन्यत्र प्रेषण सत्तानवे -- एएणेव कमेणं तच्चं दूय चंपानर्यार, तत्थ णं तुम कण्हं अंगरायं, सेल्लं, नंदिरायं करयल तेहेव जाव समोसरह । इसी क्रम से तीसरे दूत को चम्पा नगरी भेजा और उससे कहा- तुम वहाँ जाकर अगराज कृष्ण को, सेल्लक राजा को और नदिराज को दोनो हाथ जोडकर यावत् कहना कि स्वयंवर मे पधारिए । अट्ठानवे - चउत्थं दूयं सुत्तिमइ नर्यार, तत्थ णं सिसुपालं दमघोससुयं पंचभाइसयसंपरिवुडं करयल तहेव-जाव समोसरह । चौथा दूत शुक्तिमती नगरी भेजा और उसे आदेश दिया - तुम दमघोष के पुत्र और पाच सौ भाइयो से परिवृत शिशुपाल राजा को हाथ जोडकर उसी प्रकार कहना, यावत् स्वयंवर मे पधारिए । निन्यानवे - पंचमगं दूयं हत्थिसीसनगरं, तत्थ णं तुमं दमदंतं नाम रायं करयल तहेव जाव समोसरह । पाँचवा दूत हस्तीशीर्प नगर भेजा और कहा - तुम दमदत राजा को हाथ जोड कर उसी प्रकार कहना यावत् स्वयंवर मे पधारिए ।
गिरिराज सिंह ने कहा कि कश्मीर और pok की समस्या नेहरू जी की वजह से हुई. गिरिराज सिंह ने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा है की पाकिस्तान इनकी भाषा बोल रहा है या ये उसकी भाषा बोल रहे हैं. पाकिस्तानी मंत्री की राहुल गांधी का जिक्र करते हुए संयुक्त राज्य को चिट्ठी भेजे जाने के बाद पूरी भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमलावर हो गई है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि राहुल गांधी मोदी जी को गाली देते-देते अब देश को गाली देने लगे हैं. ये उनके डीएनए का दोष है. उन्होंने कहा कि कश्मीर और pok की समस्या नेहरू जी की वजह से हुई. गिरिराज सिंह ने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा है की पाकिस्तान इनकी भाषा बोल रहा है या ये उसकी भाषा बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि वो (राहुल गांधी) पाकिस्तान के हाथों का खिलौना बन गए हैं. जैसे नेहरू चले गए थे UN में वैसे ही इनका वक्तव्य भी चला गया यानी दोनों ने देश को नुकसान पहुंचाया. गिरिराज सिंह ने कहा कि आज राहुल गांधी की नींद तब खुली जब देश की जनता उनके खिलाफ सोशल मीडिया और हर जगह आने लगी. देश से उन्हें माफी मांगनी चाहिए. ये तो वही हुआ सबकुछ लुटाकर होश में आए तो क्या हुआ. उन्होंने कहा कि अब तो सबकुछ लुटा दिया है. एक कहावत है सौ जूता भी खाए और प्याज भी खाए. इन्होंने देश का इतना बड़ा नुकसान किया है कि इन्हें देश से माफी मांगना चाहिए. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कश्मीर का चहुमुखी विकास करना वहां का पश्मीना, वहां की ट्राउट मछली, शीप, लद्दाख का याक, वहां का कहवा और तमाम चीजें देश विदेश मे कैसे पहुंचे और उसका लाभ लोकल लोगों को मिले इसके लिए हमारा मंत्रालय भी काम करेगा.
गिरिराज सिंह ने कहा कि कश्मीर और pok की समस्या नेहरू जी की वजह से हुई. गिरिराज सिंह ने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा है की पाकिस्तान इनकी भाषा बोल रहा है या ये उसकी भाषा बोल रहे हैं. पाकिस्तानी मंत्री की राहुल गांधी का जिक्र करते हुए संयुक्त राज्य को चिट्ठी भेजे जाने के बाद पूरी भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमलावर हो गई है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि राहुल गांधी मोदी जी को गाली देते-देते अब देश को गाली देने लगे हैं. ये उनके डीएनए का दोष है. उन्होंने कहा कि कश्मीर और pok की समस्या नेहरू जी की वजह से हुई. गिरिराज सिंह ने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा है की पाकिस्तान इनकी भाषा बोल रहा है या ये उसकी भाषा बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि वो पाकिस्तान के हाथों का खिलौना बन गए हैं. जैसे नेहरू चले गए थे UN में वैसे ही इनका वक्तव्य भी चला गया यानी दोनों ने देश को नुकसान पहुंचाया. गिरिराज सिंह ने कहा कि आज राहुल गांधी की नींद तब खुली जब देश की जनता उनके खिलाफ सोशल मीडिया और हर जगह आने लगी. देश से उन्हें माफी मांगनी चाहिए. ये तो वही हुआ सबकुछ लुटाकर होश में आए तो क्या हुआ. उन्होंने कहा कि अब तो सबकुछ लुटा दिया है. एक कहावत है सौ जूता भी खाए और प्याज भी खाए. इन्होंने देश का इतना बड़ा नुकसान किया है कि इन्हें देश से माफी मांगना चाहिए. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कश्मीर का चहुमुखी विकास करना वहां का पश्मीना, वहां की ट्राउट मछली, शीप, लद्दाख का याक, वहां का कहवा और तमाम चीजें देश विदेश मे कैसे पहुंचे और उसका लाभ लोकल लोगों को मिले इसके लिए हमारा मंत्रालय भी काम करेगा.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मध्य प्रदेशः एमपी के ग्वालियर में एक हॉस्टल में रह रही महिला टीचर ने प्रेमी से खफा होकर अपनी जान दे दी। खुदकुशी से पहले उसने अपने ब्वॉयफ्रेंड को कई बार फोन किया, लेकिन जब उसने उठाया नहीं तो उसने अपनी अंतिम तस्वीर व्हाट्सएप पर भेज करके अपनी जिंदगी खत्म कर ली। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, ब्वॉयफ्रेंड की तलाश की जा रही है। ये भी पढ़ेंः - यहां जलती चिताओं के पास आखिर क्यों पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर? दैनिक भास्कर के मुताबिक, ग्वालियर के चना कोठार स्थित अन्नपूर्णा गर्ल्स हॉस्टल में रहकर 27 वर्षीय नीलम अरोरा एसआई की तैयारी भी कर रही थी। तैयारी के साथ ही वह संविदा पर एक स्कूल में पढ़ाने जाती थी। उसका दीप नाम के लड़के से प्रेम संबंध था। उसका ब्वॉयफ्रेंड अक्सर हॉस्टल में आया करता था कुछ दिनों से दोनों के बीच विवाद था। बताया जा रहा है कि नीलम ने अपने प्रेमी से बात करने की गुजारिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसने आखिरी मैसेज किया- कॉल रिसीव करो, नहीं तो दीप आज मैं अपने आप को खत्म कर लूंगी। आखिरी सांस तक तुम्हें प्यार किया है उसका यही नतीजा है। अब व्हाट्सएप पर मेरी लटकी लाश देखो, इसके बाद उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। हॉस्टल वार्डन मुन्नी ने बताया कि नीलम के साथ एक लड़का अक्सर आता था। कई बार वह अकेले भी आता था। नीलम एसआई की तैयारी के लिए कोच मुख्तयार सिंह से फिजीकल ट्रेनिंग ले रही थी, उसने 4 महीने पहले ही कोचिंग ज्वॉइन की थी, लेकिन पिछले 3-4 दिन से वहां नहीं गई थी नीलम मेहनती थी, उसे कभी तनाव में नहीं देखा गया था। थाना प्रभारी महेश शर्मा ने बताया कि दीपक ने पहले नीलम के मैसेज का जवाब नहीं दिया, लेकिन व्हाट्सएप देखते ही नीलम की फ्रेंड शिल्पी को फोन किया। उसके बाद शिल्पी अपनी दोस्त रितु के साथ नीलम के कमरे पर पहुंची। नीलम फांसी के फंदे से लटक रही थी दीप अभी भी कॉल नहीं उठा रहा है पुलिस इस मामले की जांच कर रही हैं।
मध्य प्रदेशः एमपी के ग्वालियर में एक हॉस्टल में रह रही महिला टीचर ने प्रेमी से खफा होकर अपनी जान दे दी। खुदकुशी से पहले उसने अपने ब्वॉयफ्रेंड को कई बार फोन किया, लेकिन जब उसने उठाया नहीं तो उसने अपनी अंतिम तस्वीर व्हाट्सएप पर भेज करके अपनी जिंदगी खत्म कर ली। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, ब्वॉयफ्रेंड की तलाश की जा रही है। ये भी पढ़ेंः - यहां जलती चिताओं के पास आखिर क्यों पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर? दैनिक भास्कर के मुताबिक, ग्वालियर के चना कोठार स्थित अन्नपूर्णा गर्ल्स हॉस्टल में रहकर सत्ताईस वर्षीय नीलम अरोरा एसआई की तैयारी भी कर रही थी। तैयारी के साथ ही वह संविदा पर एक स्कूल में पढ़ाने जाती थी। उसका दीप नाम के लड़के से प्रेम संबंध था। उसका ब्वॉयफ्रेंड अक्सर हॉस्टल में आया करता था कुछ दिनों से दोनों के बीच विवाद था। बताया जा रहा है कि नीलम ने अपने प्रेमी से बात करने की गुजारिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसने आखिरी मैसेज किया- कॉल रिसीव करो, नहीं तो दीप आज मैं अपने आप को खत्म कर लूंगी। आखिरी सांस तक तुम्हें प्यार किया है उसका यही नतीजा है। अब व्हाट्सएप पर मेरी लटकी लाश देखो, इसके बाद उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। हॉस्टल वार्डन मुन्नी ने बताया कि नीलम के साथ एक लड़का अक्सर आता था। कई बार वह अकेले भी आता था। नीलम एसआई की तैयारी के लिए कोच मुख्तयार सिंह से फिजीकल ट्रेनिंग ले रही थी, उसने चार महीने पहले ही कोचिंग ज्वॉइन की थी, लेकिन पिछले तीन-चार दिन से वहां नहीं गई थी नीलम मेहनती थी, उसे कभी तनाव में नहीं देखा गया था। थाना प्रभारी महेश शर्मा ने बताया कि दीपक ने पहले नीलम के मैसेज का जवाब नहीं दिया, लेकिन व्हाट्सएप देखते ही नीलम की फ्रेंड शिल्पी को फोन किया। उसके बाद शिल्पी अपनी दोस्त रितु के साथ नीलम के कमरे पर पहुंची। नीलम फांसी के फंदे से लटक रही थी दीप अभी भी कॉल नहीं उठा रहा है पुलिस इस मामले की जांच कर रही हैं।
बंजार - पांच दिवसीय जिला स्तरीय बंजार मेला सोमवार को आरंभ हो गया। एडीसी राकेश शर्मा ने दीप प्रज्वलन के साथ मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इससे पहले दो मिनट का मौन रखकर पूर्व आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री स्वर्गीय कर्ण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर एडीसी ने कहा कि मेले व उत्सव हमारी समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इनके माध्यम से आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को हमारी लोक संस्कृतिए परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू करवाया जाना अति आवश्यक है। तभी हमारी संस्कृति व धरोहरें बची रहेंगी। इससे पहले मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए मेला कमेटी के पदाधिकारी भोपाल ठाकुर ने बंजार मेले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार मेले में मुख्य देवता श्रंगा ऋषि के अलावा बंजार घाटी के डेढ़ दर्जन से अधिक देवी-देवता भाग ले रहे हैं। बीडीसी अध्यक्ष हेतराम ने भी एडीसी का स्वागत किया। समारोह में एसडीएम एमआर भारद्वाज, बीडीसी उपाध्यक्ष केवल राम ठाकुर, जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र शौरी, देवी-देवता कमेटी अध्यक्ष मोहर सिंह और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
बंजार - पांच दिवसीय जिला स्तरीय बंजार मेला सोमवार को आरंभ हो गया। एडीसी राकेश शर्मा ने दीप प्रज्वलन के साथ मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इससे पहले दो मिनट का मौन रखकर पूर्व आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री स्वर्गीय कर्ण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर एडीसी ने कहा कि मेले व उत्सव हमारी समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इनके माध्यम से आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को हमारी लोक संस्कृतिए परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू करवाया जाना अति आवश्यक है। तभी हमारी संस्कृति व धरोहरें बची रहेंगी। इससे पहले मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए मेला कमेटी के पदाधिकारी भोपाल ठाकुर ने बंजार मेले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार मेले में मुख्य देवता श्रंगा ऋषि के अलावा बंजार घाटी के डेढ़ दर्जन से अधिक देवी-देवता भाग ले रहे हैं। बीडीसी अध्यक्ष हेतराम ने भी एडीसी का स्वागत किया। समारोह में एसडीएम एमआर भारद्वाज, बीडीसी उपाध्यक्ष केवल राम ठाकुर, जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र शौरी, देवी-देवता कमेटी अध्यक्ष मोहर सिंह और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !
2 years of Pulwama Terror Attack: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दी। राजनाथ सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, "भारत राष्ट्र के लिए उनकी सेवा और सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। " Pulwama Attack 2 Anniversary: बहादुरों के बलिदान को याद करते हुए देशवासियों ने जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वहीं इस समय #PulwamaAttack ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ में कर्तव्य पालन के दौरान जनपद मुजफ्फरनगर निवासी सीआरपीएफ के शहीद डिप्टी कमाण्डेण्ट विकाश कुमार के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। Chhattisgarh Naxal: शनिवार को नक्सलियों(Naxals) के खिलाफ सुरक्षाबलों की संयुक्त पार्टी ताड़मेटला इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान देर रात नक्सलियों द्वारा लगाए गए स्पाइक होल में फंसकर कुछ जवान घायल हो गए हैं। Terrorist attack : जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के श्रीनगर (Srinagar) में सीआरपीएफ पार्टी (CRPF) पर संदिग्ध आतंकियों ने हमला (Terrorist Attack) कर दिया। हालांकि हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के श्रीनगर (Srinagar) के बटमालू (Batmaloo) में गुरुवार को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ (Encounter between terrorists and security forces) हुई। जिसमें सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। संसद भवन (Parliament House) के पास से बुधवार को एक संदिग्ध पकड़ा गया है। जिसके बाद सीआरपीएफ (CRPF) ने उसे हिरासत में लिया है। उसके पास से एक चिट्ठी और दो अलग-अलग पहचान पत्र बरामद हुए है। फिलहाल एजेंसियां जांच में जुटी हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस हफ्ते तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कुल 40 कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 20 कंपनियां जम्मू-कश्मीर से वापस लौट जाएंगी। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के बारामुला के खीरी (Kheri) इलाके में सीआरपीएफ (CRPF) की टीम पर आतंकी हमला (Terrorist attack) हुआ है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर रविवार को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोर जिले में आतंकवादियों के 4 सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।
दो years of Pulwama Terror Attack: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दी। राजनाथ सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, "भारत राष्ट्र के लिए उनकी सेवा और सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। " Pulwama Attack दो Anniversary: बहादुरों के बलिदान को याद करते हुए देशवासियों ने जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वहीं इस समय #PulwamaAttack ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ में कर्तव्य पालन के दौरान जनपद मुजफ्फरनगर निवासी सीआरपीएफ के शहीद डिप्टी कमाण्डेण्ट विकाश कुमार के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। Chhattisgarh Naxal: शनिवार को नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की संयुक्त पार्टी ताड़मेटला इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान देर रात नक्सलियों द्वारा लगाए गए स्पाइक होल में फंसकर कुछ जवान घायल हो गए हैं। Terrorist attack : जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सीआरपीएफ पार्टी पर संदिग्ध आतंकियों ने हमला कर दिया। हालांकि हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के बटमालू में गुरुवार को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। जिसमें सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। संसद भवन के पास से बुधवार को एक संदिग्ध पकड़ा गया है। जिसके बाद सीआरपीएफ ने उसे हिरासत में लिया है। उसके पास से एक चिट्ठी और दो अलग-अलग पहचान पत्र बरामद हुए है। फिलहाल एजेंसियां जांच में जुटी हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस हफ्ते तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कुल चालीस कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल , सीमा सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल की बीस कंपनियां जम्मू-कश्मीर से वापस लौट जाएंगी। जम्मू-कश्मीर के बारामुला के खीरी इलाके में सीआरपीएफ की टीम पर आतंकी हमला हुआ है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर रविवार को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोर जिले में आतंकवादियों के चार सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।
कश्मीर की एक छोटी लड़की का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर एक तूफान खड़ा कर दिया। लाखों लोगों ने देखा हैं। कश्मीर में मुख्य मार्ग और गलियों की खस्ता हाल सड़कों पर नन्ही रिपोर्टर के वीडियो ने इंटरनेट पर तूफान मचा दिया है। इंटरनेट उपयोक्ता गुलाबी जैकेट पहनी इस नन्हीं रिपोर्टर की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। हालांकि, नन्हीं रिपोर्टर ने यह वीडियो कब और कहां बनाया है, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो पायी है। दो मिनट आठ सेंकेड लंबे वीडियो में वह अपने कैमरा पर्सन जिसे वह 'मां' कह रही है, उन्हें सड़कों पर हुए गड्ढे दिखाने को कहते हुए बोल रही है, "इतनी गंदी रोड है कि मेहमान भी नहीं आ सकते। " गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में हाल ही में भारी बारिश और बर्फबारी हुई है। मोबाइल फोन पर शूट किए गए इस वीडियो में बच्ची बता रही है कि कैसे कीचड़ और बारिश के कारण सड़कों की हालत और खराब हो गई है। This 6-year-old cutie is from #Kashmir. Would love to see her as a reporter working for a national or international TV channel, 15 years later. वीडियो में वह दिखा रही है कि लोग कैसे सड़कों पर कचरा फेंक रहे हैं और कह रही है "सब गंदा हो गया है। " उत्साह से भरी नन्हीं रिपोर्टर अपने दर्शकों से वीडियो 'लाइक, शेयर और सब्सक्राइब' करने तथा अगले वीडियो में फिर से मिलने का वादा भी कर रही है। वीडियो को ट्विटर पर तमाम लोगों ने साझा किया है और एक लाख से ज्यादा लोगों ने इसे देखा है। यह पहली बार नहीं है जब घाटी के किसी बच्चे ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रशासन से अपील की है। पिछले साल छह साल की माहिरू इरफान ने 71 सेंकेंड के एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऑनलाइन कक्षाओं के लिए अधिकतम समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया था। वीडियो जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नजर में आने के बाद उन्होंने शिक्षा विभाग से 48 घंटों के भीतर नीति बनाने को कहा था।
कश्मीर की एक छोटी लड़की का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर एक तूफान खड़ा कर दिया। लाखों लोगों ने देखा हैं। कश्मीर में मुख्य मार्ग और गलियों की खस्ता हाल सड़कों पर नन्ही रिपोर्टर के वीडियो ने इंटरनेट पर तूफान मचा दिया है। इंटरनेट उपयोक्ता गुलाबी जैकेट पहनी इस नन्हीं रिपोर्टर की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। हालांकि, नन्हीं रिपोर्टर ने यह वीडियो कब और कहां बनाया है, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो पायी है। दो मिनट आठ सेंकेड लंबे वीडियो में वह अपने कैमरा पर्सन जिसे वह 'मां' कह रही है, उन्हें सड़कों पर हुए गड्ढे दिखाने को कहते हुए बोल रही है, "इतनी गंदी रोड है कि मेहमान भी नहीं आ सकते। " गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में हाल ही में भारी बारिश और बर्फबारी हुई है। मोबाइल फोन पर शूट किए गए इस वीडियो में बच्ची बता रही है कि कैसे कीचड़ और बारिश के कारण सड़कों की हालत और खराब हो गई है। This छः-year-old cutie is from #Kashmir. Would love to see her as a reporter working for a national or international TV channel, पंद्रह years later. वीडियो में वह दिखा रही है कि लोग कैसे सड़कों पर कचरा फेंक रहे हैं और कह रही है "सब गंदा हो गया है। " उत्साह से भरी नन्हीं रिपोर्टर अपने दर्शकों से वीडियो 'लाइक, शेयर और सब्सक्राइब' करने तथा अगले वीडियो में फिर से मिलने का वादा भी कर रही है। वीडियो को ट्विटर पर तमाम लोगों ने साझा किया है और एक लाख से ज्यादा लोगों ने इसे देखा है। यह पहली बार नहीं है जब घाटी के किसी बच्चे ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रशासन से अपील की है। पिछले साल छह साल की माहिरू इरफान ने इकहत्तर सेंकेंड के एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऑनलाइन कक्षाओं के लिए अधिकतम समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया था। वीडियो जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नजर में आने के बाद उन्होंने शिक्षा विभाग से अड़तालीस घंटाटों के भीतर नीति बनाने को कहा था।
बिरला ही दिन जाता होगा कि बाँके गुमान को भावजों के कटु वाक्य न सुनने पड़ते हों। ये विषैले शर कभी-कभी उसके कठोर हृदय में चुभ जाते; किन्तु यह घाव रात भर से अधिक न रहता। भोर होते ही थकान के साथ ही यह पीड़ा भी शांत हो जाती । तड़का हुआ, उसने हाथ-मुँह धोया, बंशी उठायी और तालाब की ओर चल खड़ा हुआ । भावजें फूलों की वर्षा किया करतीं; बूढ़े चौधरी पैंतरे बदलते रहते और भाई लोग तीखी निगाह से देखा करते, पर अपनी धुन का पूरा बाँका गुमान उन लोगों के बीच से इस तरह अकड़ता चला जाता, जैसे कोई मस्त हाथी कुत्तों के बीच से निकल जाता है। उसे सुमार्ग पर लाने के लिए क्याक्या उपाय नहीं किये गए। बाप समझाता- बेटा, ऐसी राह चलो जिसमें तुम्हें भी पैसे मिलें और गृहस्थी का भी निबाह हो। भाइयों के भरोसे कब तक रहोगे ? मैं पका आम टपक पड़ा या कल। फिर तुम्हारा निबाह कैसे होगा ? भाई बात भी न पूछेंगे; भावजों का रंग देख ही रहे हो। तुम्हारे भी लड़के-बाले हैं, उनका भार कैसे सँभालोगे ? खेती में जी न लगे, कहो कांस्टिबली में भरती करा दूँ ? बाँका गुमान खड़ा खड़ा यह सब सुनता, लेकिन पत्थर का देवता था, कभी न पसीजता। इन महाशय के अत्याचार का दंड उनकी स्त्री बेचारी को भोगना पड़ता था। मेहनत के घर के जितने काम होते, वे उसी के सिर थोपे जाते। उपले पाथती, कुएँ से पानी लाती, आटा पीसती और तिस पर भी जेठानियाँ सीधे मुँह बात न करतीं, वाक्य-बाणों से छेदा करतीं। एक बार जब वह पति से कई दिन रूठी रही, तो बाँके गुमान कुछ नर्म हुए। बाप से जा कर बोले- मुझे कोई दूकान खोलवा दीजिए। चौधरी ने परमात्मा को धन्यवाद दिया। फूले न समाये । कई सौ रुपये लगा कर कपड़े की दूकान खुलवा दी। गुमान के भाग जगे। तनजेब के चुन्नटदार कुरते बनवाये, मलमल का सोफा धानी रंग में रँगवाया। सौदा बिके या न बिके, उसे लाभ ही होना था ! दूकान खुली हुई है, दस-पाँच गाढ़े मित्र जमे हुए हैं, चरस की दम और खयाल की तानें उड़ रही हैंचल झटपट री, जमुना-तट री, खड़ो नटखट री। इस तरह तीन महीने चैन से कटे । बाँके गुमान ने खूब दिल खोल कर अरमान निकाले, यहाँ तक कि सारी लागत लाभ हो गई। टाट के टुकड़े के सिवा और कुछ न बचा । बूढ़े चौधरी कुएँ में गिरने चले, भावजों ने घोर आन्दोलन मचाया-अरे राम ! हमारे बच्चे और हम चीथड़ों को तरसें, गाढ़े का एक कुरता भी नसीब न हो, और इतनी बड़ी दूकान इस निखट्टू का कफन बन गई। अब कौन मुँह दिखाएगा ? कौन मुँह ले कर घर में पैर रखेगा ? किंतु बाँके गुमान के तेवर ज़रा भी मैले न हुए। वही मुँह लिए वह फिर घर आया और फिर वही पुरानी चाल चलने लगा। कानूनदाँ बितान उसके ये ठाट-बाट देख कर जल जाता। मैं सारे दिन पसीना बहाऊँ, मुझे नैनसुख का कुरता भी न मिले, यह अपाहिज सारे दिन चारपाई तोड़े और यों बन ठन कर निकले ? ऐसे वस्त्र तो शायद मुझे अपने ब्याह में भी न मिले होंगे। मीठे शान के हृदय में भी कुछ ऐसे ही विचार उठते थे। अंत में यह जलन न सही गई, और अग्नि भड़की, तो एक दिन कानूनदाँ बितान की पत्नी गुमान के सारे कपड़े उठा लाई और उन पर मिट्टी का तेल उँडेल कर आग लगा दी। ज्वाला उठी, सारे कपड़े देखतेदेखते जल कर राख हो गए। गुमान रोते थे। दोनों भाई खड़े तमाशा देखते थे। बूढ़े चौधरी ने यह दृश्य देखा, और सिर पीट लिया। यह द्वेषाग्नि है। घर को जला कर तब बुझेगी ।
बिरला ही दिन जाता होगा कि बाँके गुमान को भावजों के कटु वाक्य न सुनने पड़ते हों। ये विषैले शर कभी-कभी उसके कठोर हृदय में चुभ जाते; किन्तु यह घाव रात भर से अधिक न रहता। भोर होते ही थकान के साथ ही यह पीड़ा भी शांत हो जाती । तड़का हुआ, उसने हाथ-मुँह धोया, बंशी उठायी और तालाब की ओर चल खड़ा हुआ । भावजें फूलों की वर्षा किया करतीं; बूढ़े चौधरी पैंतरे बदलते रहते और भाई लोग तीखी निगाह से देखा करते, पर अपनी धुन का पूरा बाँका गुमान उन लोगों के बीच से इस तरह अकड़ता चला जाता, जैसे कोई मस्त हाथी कुत्तों के बीच से निकल जाता है। उसे सुमार्ग पर लाने के लिए क्याक्या उपाय नहीं किये गए। बाप समझाता- बेटा, ऐसी राह चलो जिसमें तुम्हें भी पैसे मिलें और गृहस्थी का भी निबाह हो। भाइयों के भरोसे कब तक रहोगे ? मैं पका आम टपक पड़ा या कल। फिर तुम्हारा निबाह कैसे होगा ? भाई बात भी न पूछेंगे; भावजों का रंग देख ही रहे हो। तुम्हारे भी लड़के-बाले हैं, उनका भार कैसे सँभालोगे ? खेती में जी न लगे, कहो कांस्टिबली में भरती करा दूँ ? बाँका गुमान खड़ा खड़ा यह सब सुनता, लेकिन पत्थर का देवता था, कभी न पसीजता। इन महाशय के अत्याचार का दंड उनकी स्त्री बेचारी को भोगना पड़ता था। मेहनत के घर के जितने काम होते, वे उसी के सिर थोपे जाते। उपले पाथती, कुएँ से पानी लाती, आटा पीसती और तिस पर भी जेठानियाँ सीधे मुँह बात न करतीं, वाक्य-बाणों से छेदा करतीं। एक बार जब वह पति से कई दिन रूठी रही, तो बाँके गुमान कुछ नर्म हुए। बाप से जा कर बोले- मुझे कोई दूकान खोलवा दीजिए। चौधरी ने परमात्मा को धन्यवाद दिया। फूले न समाये । कई सौ रुपये लगा कर कपड़े की दूकान खुलवा दी। गुमान के भाग जगे। तनजेब के चुन्नटदार कुरते बनवाये, मलमल का सोफा धानी रंग में रँगवाया। सौदा बिके या न बिके, उसे लाभ ही होना था ! दूकान खुली हुई है, दस-पाँच गाढ़े मित्र जमे हुए हैं, चरस की दम और खयाल की तानें उड़ रही हैंचल झटपट री, जमुना-तट री, खड़ो नटखट री। इस तरह तीन महीने चैन से कटे । बाँके गुमान ने खूब दिल खोल कर अरमान निकाले, यहाँ तक कि सारी लागत लाभ हो गई। टाट के टुकड़े के सिवा और कुछ न बचा । बूढ़े चौधरी कुएँ में गिरने चले, भावजों ने घोर आन्दोलन मचाया-अरे राम ! हमारे बच्चे और हम चीथड़ों को तरसें, गाढ़े का एक कुरता भी नसीब न हो, और इतनी बड़ी दूकान इस निखट्टू का कफन बन गई। अब कौन मुँह दिखाएगा ? कौन मुँह ले कर घर में पैर रखेगा ? किंतु बाँके गुमान के तेवर ज़रा भी मैले न हुए। वही मुँह लिए वह फिर घर आया और फिर वही पुरानी चाल चलने लगा। कानूनदाँ बितान उसके ये ठाट-बाट देख कर जल जाता। मैं सारे दिन पसीना बहाऊँ, मुझे नैनसुख का कुरता भी न मिले, यह अपाहिज सारे दिन चारपाई तोड़े और यों बन ठन कर निकले ? ऐसे वस्त्र तो शायद मुझे अपने ब्याह में भी न मिले होंगे। मीठे शान के हृदय में भी कुछ ऐसे ही विचार उठते थे। अंत में यह जलन न सही गई, और अग्नि भड़की, तो एक दिन कानूनदाँ बितान की पत्नी गुमान के सारे कपड़े उठा लाई और उन पर मिट्टी का तेल उँडेल कर आग लगा दी। ज्वाला उठी, सारे कपड़े देखतेदेखते जल कर राख हो गए। गुमान रोते थे। दोनों भाई खड़े तमाशा देखते थे। बूढ़े चौधरी ने यह दृश्य देखा, और सिर पीट लिया। यह द्वेषाग्नि है। घर को जला कर तब बुझेगी ।
वैसे पिछले दो दशक में करवा चौथ के सीन्स फिल्मों में कभी रोमांस को बढ़ाने के लिए तो कभी पति की हरकतों से पर्दा हटाने जैसे कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाने के लिए यूज़ करते रहे हैं। लेकिन करवाचौथ की पूजा को सही मायने में पर्दे पर पहली बार दिखाया निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने अपनी फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' से। इस फिल्म के बाद से ही करवाचौथ का फिल्मों में ट्रेंड शुरू हो गया। साल 1997 में आई शाहरुख और जूही चावला की फिल्म 'यस बॉस' में भी करवाचौथ के सीन का कहानी में खास महत्व दिखता है। यह सीन जूही चावला और शाहरुख के बीच फिल्म का सबसे भीवनात्नक सीन था। करवाचौथ मनाने के इस ट्रेंड में और ग्लैमर जोड़ने का काम किया करण जौहर ने अपनी फिल्म 'कभी खुशी, कभी गम' (2001) के इस गाने से जहां खास करवाचौथ का आयोजन किया जाता है। साल 2003 में आई फिल्म 'इश्क विश्क' में कॉलेज स्टूडेंट्स के लव लाइफ को दिखाया गया है और इस फिल्म में दिखाए करवाचौथ का सीन में आपको प्यार की मासीमियत की झलक मिलती है। फिल्म में कॉलेज में पढ़ने वाली अमृता राव अपने बॉयफ्रेंड राजीव (शाहिद कपूर) के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है। इस सीन के बाद कई यंग, लव बर्ड्स ने एक दूसरे के लिए करवाचौथ का व्रत करना शुरू कर दिया था। इन फिल्मों के अलावा जहर, बाबुल समेत कई दूसरी फिल्मों में भी करवाचौथ के सान्स दिखाए गए हैं। तो, अब आप समझ गए होंगे कि कैसे करवाचौथ को हम सबसे अच्छी तरह दर्शाए गए फिल्मों में से एक मान रहे हैं। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
वैसे पिछले दो दशक में करवा चौथ के सीन्स फिल्मों में कभी रोमांस को बढ़ाने के लिए तो कभी पति की हरकतों से पर्दा हटाने जैसे कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाने के लिए यूज़ करते रहे हैं। लेकिन करवाचौथ की पूजा को सही मायने में पर्दे पर पहली बार दिखाया निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने अपनी फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' से। इस फिल्म के बाद से ही करवाचौथ का फिल्मों में ट्रेंड शुरू हो गया। साल एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आई शाहरुख और जूही चावला की फिल्म 'यस बॉस' में भी करवाचौथ के सीन का कहानी में खास महत्व दिखता है। यह सीन जूही चावला और शाहरुख के बीच फिल्म का सबसे भीवनात्नक सीन था। करवाचौथ मनाने के इस ट्रेंड में और ग्लैमर जोड़ने का काम किया करण जौहर ने अपनी फिल्म 'कभी खुशी, कभी गम' के इस गाने से जहां खास करवाचौथ का आयोजन किया जाता है। साल दो हज़ार तीन में आई फिल्म 'इश्क विश्क' में कॉलेज स्टूडेंट्स के लव लाइफ को दिखाया गया है और इस फिल्म में दिखाए करवाचौथ का सीन में आपको प्यार की मासीमियत की झलक मिलती है। फिल्म में कॉलेज में पढ़ने वाली अमृता राव अपने बॉयफ्रेंड राजीव के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है। इस सीन के बाद कई यंग, लव बर्ड्स ने एक दूसरे के लिए करवाचौथ का व्रत करना शुरू कर दिया था। इन फिल्मों के अलावा जहर, बाबुल समेत कई दूसरी फिल्मों में भी करवाचौथ के सान्स दिखाए गए हैं। तो, अब आप समझ गए होंगे कि कैसे करवाचौथ को हम सबसे अच्छी तरह दर्शाए गए फिल्मों में से एक मान रहे हैं। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
Weather Condition Today: एक ओर जहां उत्तर भारत के राज्यों में ठंड लगातार बढ़ती ही जा रही है. वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्रदूषण की स्थिति भी और खराब होती जा रही है. आज बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सुचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, इसे बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है. आज मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. मौसम विभाग की मानें तो दिसंबर की शुरुआत से ही यहां हाड़ कपाने वाली ठंड पड़ सकती है. वहीं इस हफ्ते के अंत तक तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है. राजस्थान में लगातार सर्दी का सितम बढ़ता जा रहा है. आज यहां का मौसम साफ रहेगा. इस दौरान अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज बादल छाए रहने के साथ ही अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. अगर बात पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के मौसम की करें तो यहां अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. हालांकि इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है. जबकि मैदानी इलाको में न्यूनतम तापमान स्थिर बना रहेगा. उत्तर प्रदेश में आज बादल छाए रहने के आसार हैं. इस दौरान अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. अगर बात बिहार के मौसम की करें तो फिलहाल प्रदेश के ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान 10 और 14 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है. हालांकि मौसम विभाग की मानें तो अगले 2 दिनों में न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री तक नीचे लुड़क सकता है. मध्य प्रदेश में ठंड का आलम जारी है. यहां के 18 से भी ज्यादा जिलों में अभी से शीतलहर जारी है.
Weather Condition Today: एक ओर जहां उत्तर भारत के राज्यों में ठंड लगातार बढ़ती ही जा रही है. वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे प्रदूषण की स्थिति भी और खराब होती जा रही है. आज बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सुचकांक चार सौ के पार पहुंच गया है, इसे बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है. आज मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान अधिकतम तापमान सत्ताईस और न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. मौसम विभाग की मानें तो दिसंबर की शुरुआत से ही यहां हाड़ कपाने वाली ठंड पड़ सकती है. वहीं इस हफ्ते के अंत तक तापमान छः डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है. राजस्थान में लगातार सर्दी का सितम बढ़ता जा रहा है. आज यहां का मौसम साफ रहेगा. इस दौरान अधिकतम तापमान छब्बीस डिग्री और न्यूनतम तापमान ग्यारह डिग्री सेल्सियस रह सकता है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज बादल छाए रहने के साथ ही अधिकतम तापमान तैंतीस डिग्री और न्यूनतम तापमान तेईस डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. अगर बात पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के मौसम की करें तो यहां अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. हालांकि इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है. जबकि मैदानी इलाको में न्यूनतम तापमान स्थिर बना रहेगा. उत्तर प्रदेश में आज बादल छाए रहने के आसार हैं. इस दौरान अधिकतम तापमान छब्बीस डिग्री और न्यूनतम तापमान बारह डिग्री सेल्सियस रह सकता है. अगर बात बिहार के मौसम की करें तो फिलहाल प्रदेश के ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान दस और चौदह डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है. हालांकि मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री तक नीचे लुड़क सकता है. मध्य प्रदेश में ठंड का आलम जारी है. यहां के अट्ठारह से भी ज्यादा जिलों में अभी से शीतलहर जारी है.
अबरपति व्यापारियों को महीने में लाखों-करोड़ों रुपए की सैलरी लेने वाले लोगों के रूप में जाना जाता है। हालांकि शायद आप यह जानकर चौंक जाएं की एक भारतीय अरबपति व्यापारी ऐसा भी जो वित्त वर्ष 2019 में महज एक रुपए अपनी सैलरी के रूप में घर लेकर गया। वो है सन फार्मास्युटिकल के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप शांघवी, जिन्होंने 2018-19 के दौरान अपने मेहनताने में 99 फीसदी की कटौती की। उन्होंने अपने अधिकांश वेतन को त्यागने का फैसला लिया और सैलरी के रूप में महज एक रुपए घर लेकर गए। यहां नोट करने वाली है कि जब दवाई बनाने वाली कंपनी ने 27 फीसदी की शुद्ध मुनाफा कमाया, तब उन्होंने अपने वेतन में कटौती की, जबकि वित्त वर्ष 2018 में सांघवी की सैलरी 3 करोड़ रुपए घोषित की गई थी। फोर्ब्स के मुताबिक सांघवी और उनके परिवार कुल संपत्ति 10 मार्च, 2018 तक 12. 6 अरब डॉलर आंकी गई। सांघवी के बहनोई सुधीर वालिया ने भी इस दौरान महज एक रुपए का मेहनताना लिया। एक रिपोर्ट में बताया गया कि 31 मार्च, 2019 तक समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में सांघवी ने 2. 62 लाख रुपए की अतिरिक्त सेवाएं लीं। रिपोर्ट के मुताबिक सन फार्मा में उनके शेयर (9. 6 फीसदी) थे जिनकी कीमत 31 मार्च, 2018 और 31 मार्च, 2019 के बीच क्रमशः 11,411-11,039 करोड़ रुपए के बीच रही। 31 जुलाई को जब कंपनी में उनकी हिस्सेदारी का आंकलन किया गया तो यह 9,830 करोड़ रुपए बैठी। यहां ध्यान देने की बात है कि सन फार्मा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और भारत की सबसे अग्रणी कंपनी है जो जैनरिक दवाईंया बनाती है। वित्त वर्ष 2018 में कंपनी ने 3. 6 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त किया। सांघवी ने सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री शुरू करने के लिए 1983 में अपने पिता से महज 200 डॉलर उधार लिए और देखते ही देखते इतना बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया। कंपनी 150 देशों में अपने उत्पाद सप्लाई करती है और इसके 50,000 के करीब कर्मचारी है। हाल के सालों में सांघवी ने निजी तौर नवीकरणीय ऊर्जा, तेल और तेल के कारोबार में निवेश किया। उल्लेखनीय है कि शायद बहुत से लोगों को यह बात ना मालूम हो कि सांघवी अमीरी में साल 2015 में भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी से भी आगे निकल गए थे। उस वक्त सन फार्मा की संपत्ति उस वक्त 19 अरब डॉलर थी। हालांकि पिछले कुछ सालों में सन फार्मा वैल्यूएशन में गिरावट के कारण शांघवी को अपनी संपत्ति में 60 फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ। सन फार्मा की मार्केट में साल 2015-18 के बीच चालीस फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई क्योंकि अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कंपनी के हलोल प्लांट में उत्पादन में खामियों के चलते चेतावनी जारी की। फोर्ब्स के मुताबिक कंपनी साल 2016 में 16. 7 अरब डॉलर की संपत्ति थी जो 2019 में घटकर 7. 6 अरब डॉलर हो गई।
अबरपति व्यापारियों को महीने में लाखों-करोड़ों रुपए की सैलरी लेने वाले लोगों के रूप में जाना जाता है। हालांकि शायद आप यह जानकर चौंक जाएं की एक भारतीय अरबपति व्यापारी ऐसा भी जो वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस में महज एक रुपए अपनी सैलरी के रूप में घर लेकर गया। वो है सन फार्मास्युटिकल के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप शांघवी, जिन्होंने दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के दौरान अपने मेहनताने में निन्यानवे फीसदी की कटौती की। उन्होंने अपने अधिकांश वेतन को त्यागने का फैसला लिया और सैलरी के रूप में महज एक रुपए घर लेकर गए। यहां नोट करने वाली है कि जब दवाई बनाने वाली कंपनी ने सत्ताईस फीसदी की शुद्ध मुनाफा कमाया, तब उन्होंने अपने वेतन में कटौती की, जबकि वित्त वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में सांघवी की सैलरी तीन करोड़ रुपए घोषित की गई थी। फोर्ब्स के मुताबिक सांघवी और उनके परिवार कुल संपत्ति दस मार्च, दो हज़ार अट्ठारह तक बारह. छः अरब डॉलर आंकी गई। सांघवी के बहनोई सुधीर वालिया ने भी इस दौरान महज एक रुपए का मेहनताना लिया। एक रिपोर्ट में बताया गया कि इकतीस मार्च, दो हज़ार उन्नीस तक समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में सांघवी ने दो. बासठ लाख रुपए की अतिरिक्त सेवाएं लीं। रिपोर्ट के मुताबिक सन फार्मा में उनके शेयर थे जिनकी कीमत इकतीस मार्च, दो हज़ार अट्ठारह और इकतीस मार्च, दो हज़ार उन्नीस के बीच क्रमशः ग्यारह,चार सौ ग्यारह-ग्यारह,उनतालीस करोड़ रुपए के बीच रही। इकतीस जुलाई को जब कंपनी में उनकी हिस्सेदारी का आंकलन किया गया तो यह नौ,आठ सौ तीस करोड़ रुपए बैठी। यहां ध्यान देने की बात है कि सन फार्मा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और भारत की सबसे अग्रणी कंपनी है जो जैनरिक दवाईंया बनाती है। वित्त वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में कंपनी ने तीन. छः अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त किया। सांघवी ने सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री शुरू करने के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरासी में अपने पिता से महज दो सौ डॉलर उधार लिए और देखते ही देखते इतना बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया। कंपनी एक सौ पचास देशों में अपने उत्पाद सप्लाई करती है और इसके पचास,शून्य के करीब कर्मचारी है। हाल के सालों में सांघवी ने निजी तौर नवीकरणीय ऊर्जा, तेल और तेल के कारोबार में निवेश किया। उल्लेखनीय है कि शायद बहुत से लोगों को यह बात ना मालूम हो कि सांघवी अमीरी में साल दो हज़ार पंद्रह में भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी से भी आगे निकल गए थे। उस वक्त सन फार्मा की संपत्ति उस वक्त उन्नीस अरब डॉलर थी। हालांकि पिछले कुछ सालों में सन फार्मा वैल्यूएशन में गिरावट के कारण शांघवी को अपनी संपत्ति में साठ फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ। सन फार्मा की मार्केट में साल दो हज़ार पंद्रह-अट्ठारह के बीच चालीस फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई क्योंकि अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कंपनी के हलोल प्लांट में उत्पादन में खामियों के चलते चेतावनी जारी की। फोर्ब्स के मुताबिक कंपनी साल दो हज़ार सोलह में सोलह. सात अरब डॉलर की संपत्ति थी जो दो हज़ार उन्नीस में घटकर सात. छः अरब डॉलर हो गई।
रुपाणी ने आगे कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस की सरकार के वक्त देश में निराशा एवं हताशा थी, जिसने देश को सिर्फ नुकसान पहुंचाया, लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार को लेकर देश के लोगों में एक उम्मीद जगी है और उन उम्मीदों का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सही दिशा में तरक्की कर रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी के आधार पर पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा ऐलान किया गया था कि देश के संसाधनों पर अधिकार सिर्फ अल्पसंख्यकों को मिलेगा, जिस पर खूब विवाद भी हुआ, क्योंकि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही थी, लेकिन मोदी सरकार ने देश के गरीब, असहाय और वंचितों के लिए काम किया, जिसकी शुरुआत जनधन योजना से हुई। गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली भाजपा की सह-प्रभारी अलका गुर्जर एवं लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने मंगलवार को एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पिछले 9 सालों के दौरान मोदी सरकार द्वारा देश एवं दिल्ली में किए गए विकास कार्यो को गिनाते हुए केजरीवाल सरकार और कांग्रेस की जमकर आलोचना भी की। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आज दिल्ली में ही नहीं, पूरे देश में विपक्ष एकजुट नहीं है, बल्कि एक भ्रष्टाचारी दूसरे भ्रष्टाचारी को गले लगा रहा है। इसलिए इनके मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि देश आज प्रधानमंत्री मोदी के ईमानदार, कर्तव्यवान और विकास के लिए कार्य करने वाली सरकार के साथ खड़ा है। मनोज तिवारी ने अपने संसदीय क्षेत्र उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में कराए गए विकास कार्यो को गिनाते हुए कहा कि 2014 में जब वे पहली बार सांसद बने, तब उन्हें उत्तरी-पूर्वी दिल्ली अति पिछड़े संसदीय क्षेत्र के रूप में विरासत में मिला। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में कई बड़े विकास कार्य किए जो 70 साल में पहली बार किसी सरकार या सांसद की उपलब्धि है।
रुपाणी ने आगे कहा कि दो हज़ार चौदह से पहले कांग्रेस की सरकार के वक्त देश में निराशा एवं हताशा थी, जिसने देश को सिर्फ नुकसान पहुंचाया, लेकिन दो हज़ार चौदह के बाद मोदी सरकार को लेकर देश के लोगों में एक उम्मीद जगी है और उन उम्मीदों का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सही दिशा में तरक्की कर रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी के आधार पर पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा ऐलान किया गया था कि देश के संसाधनों पर अधिकार सिर्फ अल्पसंख्यकों को मिलेगा, जिस पर खूब विवाद भी हुआ, क्योंकि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही थी, लेकिन मोदी सरकार ने देश के गरीब, असहाय और वंचितों के लिए काम किया, जिसकी शुरुआत जनधन योजना से हुई। गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली भाजपा की सह-प्रभारी अलका गुर्जर एवं लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने मंगलवार को एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पिछले नौ सालों के दौरान मोदी सरकार द्वारा देश एवं दिल्ली में किए गए विकास कार्यो को गिनाते हुए केजरीवाल सरकार और कांग्रेस की जमकर आलोचना भी की। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आज दिल्ली में ही नहीं, पूरे देश में विपक्ष एकजुट नहीं है, बल्कि एक भ्रष्टाचारी दूसरे भ्रष्टाचारी को गले लगा रहा है। इसलिए इनके मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि देश आज प्रधानमंत्री मोदी के ईमानदार, कर्तव्यवान और विकास के लिए कार्य करने वाली सरकार के साथ खड़ा है। मनोज तिवारी ने अपने संसदीय क्षेत्र उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में कराए गए विकास कार्यो को गिनाते हुए कहा कि दो हज़ार चौदह में जब वे पहली बार सांसद बने, तब उन्हें उत्तरी-पूर्वी दिल्ली अति पिछड़े संसदीय क्षेत्र के रूप में विरासत में मिला। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में कई बड़े विकास कार्य किए जो सत्तर साल में पहली बार किसी सरकार या सांसद की उपलब्धि है।
21 वर्षीय सेलेना गोम्ज ने हाल ही में फ्लांट मैग्जीन के लिए लॉन्जरी फोटोशूट करवाया है। सिर्फ लॉन्जरी ही नहीं बल्कि बेड सीन देते हुए सेलेना ने ये फोटोशूट करवाया है जिसमें सेलेना एकदम अलग लुक में नजर आ रही हैं। इस फोटोशूट से सेलेना ने साबित कर दिया है कि वे अब डिज्नी गर्ल नहीं रहीं बल्कि बड़ी हो गई हैं। सेलेना का ये सेक्सी फोटोशूट फोटोग्राफर अमांडा डे ने किया है।
इक्कीस वर्षीय सेलेना गोम्ज ने हाल ही में फ्लांट मैग्जीन के लिए लॉन्जरी फोटोशूट करवाया है। सिर्फ लॉन्जरी ही नहीं बल्कि बेड सीन देते हुए सेलेना ने ये फोटोशूट करवाया है जिसमें सेलेना एकदम अलग लुक में नजर आ रही हैं। इस फोटोशूट से सेलेना ने साबित कर दिया है कि वे अब डिज्नी गर्ल नहीं रहीं बल्कि बड़ी हो गई हैं। सेलेना का ये सेक्सी फोटोशूट फोटोग्राफर अमांडा डे ने किया है।
(जी. एन. एस) ता. 11 नई दिल्ली पुलिस ने दुबई से लौटे गुलेल गैंग के बदमाश को उसके साथी के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मोहम्मद जाकिर (24) अैर एहसान (21) के रूप में हुई। पुलिस ने उनके पास से चोरी की एक बाइक, 5 लैपटॉप और वारदात में इस्तेमाल किया गया ऑटो भी बरामद किया है। पुलिस इनकी गिरफ्तारी से 9 मामले सॉल्व करने का दावा कर रही है।
ता. ग्यारह नई दिल्ली पुलिस ने दुबई से लौटे गुलेल गैंग के बदमाश को उसके साथी के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मोहम्मद जाकिर अैर एहसान के रूप में हुई। पुलिस ने उनके पास से चोरी की एक बाइक, पाँच लैपटॉप और वारदात में इस्तेमाल किया गया ऑटो भी बरामद किया है। पुलिस इनकी गिरफ्तारी से नौ मामले सॉल्व करने का दावा कर रही है।
आलीराजपुर। प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव द्वारा जनपद पंचायत चंद्रशेखर आजादनगर के ग्राम पंचायत रिंगोल में सुदूर संपर्क सड़क अंतर्गत एप्रोच रोड से शासकीय उचित मूल्य दुकान तक के नवीन रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। नए मार्ग की लंबाई करीब एक किमी है, जिस पर 14. 85 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष वकीलसिंह ठकराला, पूर्व विधायक माधोसिंह डावर, ग्राम सरपंच अनूपी बेन, रत्नाबाई मावी, एसडीएम किरण आंजदा आदि उपस्थित थे। आलीराजपुर। मप्र खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश की 18 खेल अकादमियों में चयन के लिए टैलेंट सर्च अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिला खेल अधिकारी संतरा निनामा ने बताया कि इसके तहत खेल परिसर आलीराजपुर में 27 अगस्त से चार सितंबर तक सुबह नौ से शाम पांच बजे के बीच चयन किया जाएगा। इसमें प्रथम चरण में जिला स्तर पर सात स्किल टेस्ट जैसे हाइट, वनज, सिट एंड रिच, फ्लेमेंगो, 50 मीटर स्पीड टेस्ट, पुश अप, सीट अप, 600 मीटर रनिंग आदि टेस्ट लिए जाएंगे। द्वितीय चरण में संभाग स्तर पर खेल अनुसार ट्रायल एवं तृतीय चरण में राज्य स्तर पर 10 दिवस के शिविर द्वारा खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। प्रवेश हेतु इच्छुक खिलाड़ियों को आनलाइन आवेदन में दिए गए मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से प्रवेश की सूचना दी जाएगी। बड़ी खट्टाली। स्थानीय चौकी प्रभारी कुलदीपसिंह राठौड़ का बोरी स्थानांतरण किया गया है। राठौड़ बोरी थाना प्रभारी बनाए गए हैं। स्थानीय पुलिस चौकी प्रांगण में उन्हें समारोहपूर्वक विदाई दी गई। प्रारंभ में एएसआई सुरेंद्रसिंह सिसौदिया ने राठौड़ का पुष्पाहार पहनाकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर पत्रकार अशोक हिंदुस्तानी, रमेश मेहता, संदीप परवाल, विजय मालवी, बिलाल खत्री, जयेस मालाणी, गणपत राठौड़, चैन सिंह डावर, सलीम बाबा आदि ने भी श्री राठौड़ का अभिनंदन किया। विदाई समारोह में एसआई राठौड़ ने कहा कि मुझे यहां कोविड लाकडाउन के दौरान ग्रामवासियों का विशेष सहयोग मिला। पुलिस और जनता के बीच हमेशा मधुर संबंध होना चाहिए।
आलीराजपुर। प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव द्वारा जनपद पंचायत चंद्रशेखर आजादनगर के ग्राम पंचायत रिंगोल में सुदूर संपर्क सड़क अंतर्गत एप्रोच रोड से शासकीय उचित मूल्य दुकान तक के नवीन रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। नए मार्ग की लंबाई करीब एक किमी है, जिस पर चौदह. पचासी लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष वकीलसिंह ठकराला, पूर्व विधायक माधोसिंह डावर, ग्राम सरपंच अनूपी बेन, रत्नाबाई मावी, एसडीएम किरण आंजदा आदि उपस्थित थे। आलीराजपुर। मप्र खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश की अट्ठारह खेल अकादमियों में चयन के लिए टैलेंट सर्च अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिला खेल अधिकारी संतरा निनामा ने बताया कि इसके तहत खेल परिसर आलीराजपुर में सत्ताईस अगस्त से चार सितंबर तक सुबह नौ से शाम पांच बजे के बीच चयन किया जाएगा। इसमें प्रथम चरण में जिला स्तर पर सात स्किल टेस्ट जैसे हाइट, वनज, सिट एंड रिच, फ्लेमेंगो, पचास मीटर स्पीड टेस्ट, पुश अप, सीट अप, छः सौ मीटर रनिंग आदि टेस्ट लिए जाएंगे। द्वितीय चरण में संभाग स्तर पर खेल अनुसार ट्रायल एवं तृतीय चरण में राज्य स्तर पर दस दिवस के शिविर द्वारा खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। प्रवेश हेतु इच्छुक खिलाड़ियों को आनलाइन आवेदन में दिए गए मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से प्रवेश की सूचना दी जाएगी। बड़ी खट्टाली। स्थानीय चौकी प्रभारी कुलदीपसिंह राठौड़ का बोरी स्थानांतरण किया गया है। राठौड़ बोरी थाना प्रभारी बनाए गए हैं। स्थानीय पुलिस चौकी प्रांगण में उन्हें समारोहपूर्वक विदाई दी गई। प्रारंभ में एएसआई सुरेंद्रसिंह सिसौदिया ने राठौड़ का पुष्पाहार पहनाकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर पत्रकार अशोक हिंदुस्तानी, रमेश मेहता, संदीप परवाल, विजय मालवी, बिलाल खत्री, जयेस मालाणी, गणपत राठौड़, चैन सिंह डावर, सलीम बाबा आदि ने भी श्री राठौड़ का अभिनंदन किया। विदाई समारोह में एसआई राठौड़ ने कहा कि मुझे यहां कोविड लाकडाउन के दौरान ग्रामवासियों का विशेष सहयोग मिला। पुलिस और जनता के बीच हमेशा मधुर संबंध होना चाहिए।
Shinzo Abe Murder Case: शिंजो आबे के हत्यारे ने पूछताछ में बताया- पहले एक धार्मिक संगठन के नेता को मारने की बनाई थी योजना! जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की कल शुक्रवार को नारा के पश्चिमी प्रांत में एक रेलवे स्टेशन के पास चुनावी सभा के दौरान भाषण देते वक्त पीछे से गोली मार दी गई जिससे उनकी मौत हो गई. हमलावर यामागामी को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया था. जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) की कल शुक्रवार को एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. फायरिंग के तुरंत बाद ही आबे पर फायरिंग करने वाले हत्यारे को हिरासत में ले लिया गया और अब उसके साथ इस वारदात को लेकर पूछताछ की जा रही है. इस बीच जापानी मीडिया ने आज शनिवार को पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि जिस संदिग्ध ने पूर्व प्रधानमंत्री आबे पर फायरिंग की, उसने पुलिस को बताया कि उसने शुरू में एक धार्मिक संगठन के एक नेता पर हमला करने की योजना बनाई थी. स्थानीय क्योडो न्यूज ने जापान पुलिस के हवाले से बताया कि 41 साल के तेत्सुया यामागामी ने पूछताछ में यह भी बताया है कि उसे एक "विशिष्ट संगठन"- संभवतः धार्मिक समूह- के खिलाफ शिकायत थी, जिसके बारे में उनका मानना था कि उनका संबंध शिंजो आबे से था. हालांकि रिपोर्ट में धार्मिक नेता की पहचान जाहिर नहीं की गई है. 67 साल के शिंजो आबे की कल शुक्रवार की सुबह नारा के पश्चिमी प्रांत में एक रेलवे स्टेशन के पास चुनावी सभा के दौरान भाषण देते वक्त पीछे से गोली मार दी गई जिससे उनकी मौत हो गई. हमलावर यामागामी को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया. जिस समय उसे पकड़ा गया वह होममेड गन लिए हुए था. पुलिस के अनुसार, यामागामी ने इस बात से इनकार किया है कि उसने कोई अपराध किया है क्योंकि वह आबे की राजनीतिक मान्यताओं का विरोध करता है. द जापान टाइम्स अखबार ने बताया कि हाई स्कूल से स्नातक होने के बाद हमलावर जीवन में क्या करना चाहता है, इसके बारे में भी उसे कोई आइडिया नहीं था. हालांकि दो महीने पहले खुद को 'थका हुआ' महसूस करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी. इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने कल शुक्रवार को नारा में उसके अपार्टमेंट पर छापेमारी की और वहां से विस्फोटक और होममेड गन बरामद कीं. देश के सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यामागामी ने 2005 में हिरोशिमा प्रीफेक्चर के क्योर बेस में मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस ऑफिसर के रूप में काम किया. हालांकि 2 साल पहले 2020 में, वह कंसाई क्षेत्र में एक निर्माण कंपनी में काम कर रहा था, लेकिन इस साल अप्रैल में, उसने कंपनी से कहा कि वह "थका हुआ" होने के कारण नौकरी छोड़ना चाहता है और फिर अगले महीने नौकरी छोड़ दी. दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री आबे का पार्थिव शरीर आज शनिवार को टोक्यो लाया गया. आबे पर कल नारा शहर में हमला किया गया. घायल अवस्था में उन्हें हवाई मार्ग के जरिए एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया लेकिन काफी खून बहने की वजह से उनकी मौत हो गई. पुलिस ने घटनास्थल पर ही हमलावर को पकड़ लिया. वह जापान की नौसेना का पूर्व सदस्य रहा है. पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल होम मेड गन बरामद कर ली और बाद में उसके अपार्टमेंट में कई और बंदूकें बरामद की गई.
Shinzo Abe Murder Case: शिंजो आबे के हत्यारे ने पूछताछ में बताया- पहले एक धार्मिक संगठन के नेता को मारने की बनाई थी योजना! जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की कल शुक्रवार को नारा के पश्चिमी प्रांत में एक रेलवे स्टेशन के पास चुनावी सभा के दौरान भाषण देते वक्त पीछे से गोली मार दी गई जिससे उनकी मौत हो गई. हमलावर यामागामी को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया था. जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की कल शुक्रवार को एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. फायरिंग के तुरंत बाद ही आबे पर फायरिंग करने वाले हत्यारे को हिरासत में ले लिया गया और अब उसके साथ इस वारदात को लेकर पूछताछ की जा रही है. इस बीच जापानी मीडिया ने आज शनिवार को पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि जिस संदिग्ध ने पूर्व प्रधानमंत्री आबे पर फायरिंग की, उसने पुलिस को बताया कि उसने शुरू में एक धार्मिक संगठन के एक नेता पर हमला करने की योजना बनाई थी. स्थानीय क्योडो न्यूज ने जापान पुलिस के हवाले से बताया कि इकतालीस साल के तेत्सुया यामागामी ने पूछताछ में यह भी बताया है कि उसे एक "विशिष्ट संगठन"- संभवतः धार्मिक समूह- के खिलाफ शिकायत थी, जिसके बारे में उनका मानना था कि उनका संबंध शिंजो आबे से था. हालांकि रिपोर्ट में धार्मिक नेता की पहचान जाहिर नहीं की गई है. सरसठ साल के शिंजो आबे की कल शुक्रवार की सुबह नारा के पश्चिमी प्रांत में एक रेलवे स्टेशन के पास चुनावी सभा के दौरान भाषण देते वक्त पीछे से गोली मार दी गई जिससे उनकी मौत हो गई. हमलावर यामागामी को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया. जिस समय उसे पकड़ा गया वह होममेड गन लिए हुए था. पुलिस के अनुसार, यामागामी ने इस बात से इनकार किया है कि उसने कोई अपराध किया है क्योंकि वह आबे की राजनीतिक मान्यताओं का विरोध करता है. द जापान टाइम्स अखबार ने बताया कि हाई स्कूल से स्नातक होने के बाद हमलावर जीवन में क्या करना चाहता है, इसके बारे में भी उसे कोई आइडिया नहीं था. हालांकि दो महीने पहले खुद को 'थका हुआ' महसूस करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी. इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने कल शुक्रवार को नारा में उसके अपार्टमेंट पर छापेमारी की और वहां से विस्फोटक और होममेड गन बरामद कीं. देश के सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यामागामी ने दो हज़ार पाँच में हिरोशिमा प्रीफेक्चर के क्योर बेस में मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस ऑफिसर के रूप में काम किया. हालांकि दो साल पहले दो हज़ार बीस में, वह कंसाई क्षेत्र में एक निर्माण कंपनी में काम कर रहा था, लेकिन इस साल अप्रैल में, उसने कंपनी से कहा कि वह "थका हुआ" होने के कारण नौकरी छोड़ना चाहता है और फिर अगले महीने नौकरी छोड़ दी. दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री आबे का पार्थिव शरीर आज शनिवार को टोक्यो लाया गया. आबे पर कल नारा शहर में हमला किया गया. घायल अवस्था में उन्हें हवाई मार्ग के जरिए एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया लेकिन काफी खून बहने की वजह से उनकी मौत हो गई. पुलिस ने घटनास्थल पर ही हमलावर को पकड़ लिया. वह जापान की नौसेना का पूर्व सदस्य रहा है. पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल होम मेड गन बरामद कर ली और बाद में उसके अपार्टमेंट में कई और बंदूकें बरामद की गई.
क्या भारत इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक नवाचार केंद्र बन सकता है, जो स्टार्ट अप लॉन्च करने के लिए किया जा सकता है ...ये लोग देश के सामने सबसे मुश्किल औद्योगिक और सामाजिक चुनौतियों को हल कर सकते हैं ? हम पहले से ही अच्छे इंजीनियरिंग छात्र प्रतिभा का पावरहाउस रहें हैं... लिहाजा आवश्यक है कि हमे सही तंत्र विकसित करने की जो उज्ज्वल और युवा उद्यमियों के लिए एक मंच प्रदान करने में सहायता करता है या कहें तो सहायक हो। यह वही टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स है जो इंडिया इनोवेशन चैलेंज डिज़ाइन प्रतियोगिता (आईआईसीडीसी) के साथ अपनी पहुंच स्थापित कर चुकी है, यही एक पहल है जो छात्रों के नेतृत्व वाली तकनीकी स्टार्टअप शुरू करने के लिए व उद्यमशीलता के विचारों को पहचानने और उन्हें सफल उद्यमों के रूप में बदलने के लिए उन्हें एक मंच प्रदान करता है...टीआई- आईआईसीडीसी ने आईआईएम-बैंगलोर, डीएसटी (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी), डीआईपीपी और माईगॉव जैसे संस्थानों से भागीदारी करके और जटिल चुनौतियों को सुलझाने के उद्देश्य से छात्रों के अवधारणात्मक तकनीकी आधारित विचारों का समर्थन कर रही है । आईआईसीडीसी के 2016 के संस्करण में कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, यातायात और अपशिष्ट प्रबंधन के रूप में विविध क्षेत्रों में, 624 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के अत्याधुनिक विचारों को देखा गया! भाग लेने वाली टीमों में से एक ने एंबुलेंसों को घनी आबादी वाले शहर क्षेत्रों को निकटतम अस्पताल तक पहुंचाते हुए, साथ ही साथ एम्बुलेंस के लिए रास्ता बनाने के लिए पहले यातायात सिग्नल के साथ संचार करने में मदद करने के लिए एक तकनीक की अवधारणा का विकास किया।जो वाकई में काबिले तारीफ था..इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में जो नमी, उर्वरता और अन्य मिट्टी के कारकों को मापने के लिए खेतों में एम्बेडेड सेंसर का उपयोग कर किसानों की फसल की प्रगति को ट्रैक करने में सहायता करने के उद्देश्य से एक और प्रौद्योगिकी समाधान भी सामने आया... इस जानकारी को किसान के स्मार्टफ़ोन पर वापस भेजा जा सकता है या कहें भेज देते हैं। इन सबके अलावा एक महिला टीम ने एक प्रौद्योगिकी समाधान प्रस्तुत किया जो अपशिष्ट को गीला और सूखा से अलग करेगा ....इस तकनीक का ग्रामीण और मेट्रो दोनों शहरों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। आईआईसीडीसी -2016 ने जबरदस्त भागीदारी देखी जबकि आईआईसीडीसी 2017 में पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर भागीदारी देखने को मिली है..ये पिछली संख्या के रेकार्ड को पार कर चुका है ! देशभर में 9 65 इंजीनियरिंग कॉलेजों और 15,380 छात्रों के 5049 से अधिक नवीन विचार (जो कि कई 'मेक इन इंडिया' क्षेत्रों के मानचित्र हैं) सामने आए हैं..., इस साल की चुनौती पिछली बार से बड़ा व बेहतर होने के साथ साथ अधिक उमंग से होने का वादा किया गया है। इस पहल को सरकार की 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम से भी प्रोत्साहन मिला है जो उद्यमियों को भारत में अपना पसंदीदा गंतव्य/ स्थान बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। आईआईसीडीसी 2017 में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, आभासी वास्तविकता, संवर्धित वास्तविकता आदि जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं की एक दिलचस्प प्रोजेक्ट देखने को मिल रहे है। प्रारंभिक तौर पर 5000 से अधिक प्रस्तुतियां हैं जिसे पूरी तरह से टीआई की आंतरिक समीक्षा टीम द्वारा जांच की गई हैं, जिसमें डोमेन विशेषज्ञ शामिल हैं।टीआई द्वारा चुने गए शीर्ष 1106 प्रोजेक्ट विचारों को अब आईआईएम-बी द्वारा और भी आगे की समीक्षा की जाएगी, और व्यापार योजना के प्रौद्योगिकी सुस्पष्टता और प्रभावशीलता जैसे मानदंडों पर निर्णय लिया जाएगा। इस साल लंबे प्रतियोगी यात्रा के आखिर में शीर्ष फाइनल टीम को डीएसटी से 3.5 करोड़ रुपये के वित्त पोषण के लिए अर्हता प्राप्त होगी । इस पूरे प्रक्रिया में तीन क्वालीफायर राउंड शामिल होंगे जहां मूल्यांकनकर्ता लागत-प्रभावशीलता, प्रतियोगिता, नवाचार, तकनीक का इस्तेमाल और व्यवसाय योजना के आधार पर परियोजनाओं का चयने करेंगे। सलाहकार प्रक्रिया में डीएसटी और आईआईएमबी के विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्शन होगा और प्रतिभागियों को उनके व्यवसाय कौशल को तेज करने और टिकाऊ स्टार्टअप लॉन्च करने के लिए आवश्यक कौशल बनाने के लिए सेमिनारों और कार्यशालाओं में भाग लेने के अवसर भी शामिल होंगे।
क्या भारत इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक नवाचार केंद्र बन सकता है, जो स्टार्ट अप लॉन्च करने के लिए किया जा सकता है ...ये लोग देश के सामने सबसे मुश्किल औद्योगिक और सामाजिक चुनौतियों को हल कर सकते हैं ? हम पहले से ही अच्छे इंजीनियरिंग छात्र प्रतिभा का पावरहाउस रहें हैं... लिहाजा आवश्यक है कि हमे सही तंत्र विकसित करने की जो उज्ज्वल और युवा उद्यमियों के लिए एक मंच प्रदान करने में सहायता करता है या कहें तो सहायक हो। यह वही टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स है जो इंडिया इनोवेशन चैलेंज डिज़ाइन प्रतियोगिता के साथ अपनी पहुंच स्थापित कर चुकी है, यही एक पहल है जो छात्रों के नेतृत्व वाली तकनीकी स्टार्टअप शुरू करने के लिए व उद्यमशीलता के विचारों को पहचानने और उन्हें सफल उद्यमों के रूप में बदलने के लिए उन्हें एक मंच प्रदान करता है...टीआई- आईआईसीडीसी ने आईआईएम-बैंगलोर, डीएसटी , डीआईपीपी और माईगॉव जैसे संस्थानों से भागीदारी करके और जटिल चुनौतियों को सुलझाने के उद्देश्य से छात्रों के अवधारणात्मक तकनीकी आधारित विचारों का समर्थन कर रही है । आईआईसीडीसी के दो हज़ार सोलह के संस्करण में कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, यातायात और अपशिष्ट प्रबंधन के रूप में विविध क्षेत्रों में, छः सौ चौबीस से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के अत्याधुनिक विचारों को देखा गया! भाग लेने वाली टीमों में से एक ने एंबुलेंसों को घनी आबादी वाले शहर क्षेत्रों को निकटतम अस्पताल तक पहुंचाते हुए, साथ ही साथ एम्बुलेंस के लिए रास्ता बनाने के लिए पहले यातायात सिग्नल के साथ संचार करने में मदद करने के लिए एक तकनीक की अवधारणा का विकास किया।जो वाकई में काबिले तारीफ था..इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में जो नमी, उर्वरता और अन्य मिट्टी के कारकों को मापने के लिए खेतों में एम्बेडेड सेंसर का उपयोग कर किसानों की फसल की प्रगति को ट्रैक करने में सहायता करने के उद्देश्य से एक और प्रौद्योगिकी समाधान भी सामने आया... इस जानकारी को किसान के स्मार्टफ़ोन पर वापस भेजा जा सकता है या कहें भेज देते हैं। इन सबके अलावा एक महिला टीम ने एक प्रौद्योगिकी समाधान प्रस्तुत किया जो अपशिष्ट को गीला और सूखा से अलग करेगा ....इस तकनीक का ग्रामीण और मेट्रो दोनों शहरों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। आईआईसीडीसी -दो हज़ार सोलह ने जबरदस्त भागीदारी देखी जबकि आईआईसीडीसी दो हज़ार सत्रह में पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर भागीदारी देखने को मिली है..ये पिछली संख्या के रेकार्ड को पार कर चुका है ! देशभर में नौ पैंसठ इंजीनियरिंग कॉलेजों और पंद्रह,तीन सौ अस्सी छात्रों के पाँच हज़ार उनचास से अधिक नवीन विचार सामने आए हैं..., इस साल की चुनौती पिछली बार से बड़ा व बेहतर होने के साथ साथ अधिक उमंग से होने का वादा किया गया है। इस पहल को सरकार की 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम से भी प्रोत्साहन मिला है जो उद्यमियों को भारत में अपना पसंदीदा गंतव्य/ स्थान बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। आईआईसीडीसी दो हज़ार सत्रह में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, आभासी वास्तविकता, संवर्धित वास्तविकता आदि जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं की एक दिलचस्प प्रोजेक्ट देखने को मिल रहे है। प्रारंभिक तौर पर पाँच हज़ार से अधिक प्रस्तुतियां हैं जिसे पूरी तरह से टीआई की आंतरिक समीक्षा टीम द्वारा जांच की गई हैं, जिसमें डोमेन विशेषज्ञ शामिल हैं।टीआई द्वारा चुने गए शीर्ष एक हज़ार एक सौ छः प्रोजेक्ट विचारों को अब आईआईएम-बी द्वारा और भी आगे की समीक्षा की जाएगी, और व्यापार योजना के प्रौद्योगिकी सुस्पष्टता और प्रभावशीलता जैसे मानदंडों पर निर्णय लिया जाएगा। इस साल लंबे प्रतियोगी यात्रा के आखिर में शीर्ष फाइनल टीम को डीएसटी से तीन.पाँच करोड़ रुपये के वित्त पोषण के लिए अर्हता प्राप्त होगी । इस पूरे प्रक्रिया में तीन क्वालीफायर राउंड शामिल होंगे जहां मूल्यांकनकर्ता लागत-प्रभावशीलता, प्रतियोगिता, नवाचार, तकनीक का इस्तेमाल और व्यवसाय योजना के आधार पर परियोजनाओं का चयने करेंगे। सलाहकार प्रक्रिया में डीएसटी और आईआईएमबी के विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्शन होगा और प्रतिभागियों को उनके व्यवसाय कौशल को तेज करने और टिकाऊ स्टार्टअप लॉन्च करने के लिए आवश्यक कौशल बनाने के लिए सेमिनारों और कार्यशालाओं में भाग लेने के अवसर भी शामिल होंगे।
Rajya Sabha Election लालू प्रसाद यादव ने राज्यसभा चुनाव में मीसा भारती के साथ फैयाज आलम को आरजेडी का ्रपत्याशी बनाया है। इससे तेजस्वी यादव के ए-टू-जेड समीकारण पर लालू का एम-वाई समीकरण भारी पड़ा है। पढ़ें इनसाइड स्टोरी। पटना, आनलाइन डेस्क। Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से सिटिंग मीसा भारती (Misa Bharti) तथा बिस्फी के पूर्व विधायक फैयाज आलम (Faiyaz Alam) ने नामांकन का पर्चा भर दिया है। इसके साथ लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के पुराने मुस्लिम-यादव समीकरण (M-Y Equation) की फिर चर्चा होने लगी है। लालू के बेटे व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सभी जातियों को साथ लेकर ए-टू-जेड समीकरण (A -to- Z Equation) बनाया है, जिसका बिहार विधान परिषद चुनाव (Bihar MLC Election) व बोचहा विधानसभा उपचुनाव (Bochaha Assembly By-Election) में बेहतर परिणाम मिला। लेकिन इसके तुरंत बाद आरजेडी ने राज्यभा चुनाव (Rajya Sabha Election) की दो सीटों में अपने एम-वाई समीकारण का ध्यान रखा है। आरजेडी से राज्यसभा चुनाव के लिए एक नाम जाे पहले से तय माना जा रहा था, वह लालू यादव की बेटी व सिटिंग राज्यसभा सदस्य मीसा भारती का है। पार्टी की दूसरी सीट को लेकर सस्पेंस अंतिम समय तक बना रहा। बीते दिनों सर्वसम्मति से राज्यसभा और विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करने के लिए आरजेडी के केंद्रीय व राज्य संसदीय बोर्ड की अलग-अलग बैठकें हुईं थीं। इनमें प्रत्याशियों का चयन करने के लिए लालू प्रसाद यादव को अधिकृत कर दिया गया। खास बात यह रही कि इन बैठकों में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पटना में रहकर भी शामिल नहीं हुए। जबकि, बैठक में मीसा भारती और तेज प्रताप यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) नाराज होकर बैठक से निकल गए। बैठक में हंगामा का बड़ा कारण आरजेडी व लालू परिवार में चल रही वर्चस्व की जंग को बताया गया। लालू परिवार में पार्टी में प्रत्याशियों को लेकर तनाव नई बात नहीं है। पहले के चुनावों में लालू के बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) पार्टी लाइन से अलग स्टैंड लेकर आरजेडी के खिलाफ जाते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई बैठक में तेजस्वी का शामिल नहीं होने तथा बैठक से जगदानंद सिंह के चले जाने से प्रत्याशियों को लेकर पार्टी व लालू परिवार में तनाव की चर्चा को बल मिला। अब बात लालू के एम-वाई समीकारण की। लालू प्रसाद यादव ने मुसलमानों व यादवों को वोट बैंक बनाकर बिहार में 15 साल तक बिहार की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। लेकिन वक्त के साथ जातियों व समुदायों पर आधिरित नए वोट बैंक भी बने। लव-कुश, दलित, महादलित आदि कई वोट बैंक व उनके नेता समाने आए। इस बीच पप्पू यादव (Pappu Yadav), असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) आदि कई नेताओं ने यादव व मुसलमान वोट बैंक वाले लालू के एम-वाई समीकारण में भी सेंध लगा दी। इसके बाद तेजस्वी यादव ने जाति की राजनीति से हटते हुए सबों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई। पार्टी ने इसे 'ए-टू-जेड' की नीति का नाम दिया। आरजेडी के मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि आरजेडी की पहले से ही सबों को साथ लेकर चलने की नीति रही है। बिहार विधान परिषद चुनाव व बोचहां के विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी को मिली जीत को इसी का परिणाम बताया गया। इस बीच लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला (Fodder Scam) के मामले में जमानत मिलने के बाद अब पटना आ चुके हैं। पार्टी के पुराने साथियों को साथ लेकर चलने की नीति में पुराने समीकरण को नजरअंदाज कर देना भी मुमकिन नहीं। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में आरजेडी ने लालू के एम-वाई समीकरण को तरजीह दी है।
Rajya Sabha Election लालू प्रसाद यादव ने राज्यसभा चुनाव में मीसा भारती के साथ फैयाज आलम को आरजेडी का ्रपत्याशी बनाया है। इससे तेजस्वी यादव के ए-टू-जेड समीकारण पर लालू का एम-वाई समीकरण भारी पड़ा है। पढ़ें इनसाइड स्टोरी। पटना, आनलाइन डेस्क। Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल से सिटिंग मीसा भारती तथा बिस्फी के पूर्व विधायक फैयाज आलम ने नामांकन का पर्चा भर दिया है। इसके साथ लालू प्रसाद यादव के पुराने मुस्लिम-यादव समीकरण की फिर चर्चा होने लगी है। लालू के बेटे व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सभी जातियों को साथ लेकर ए-टू-जेड समीकरण बनाया है, जिसका बिहार विधान परिषद चुनाव व बोचहा विधानसभा उपचुनाव में बेहतर परिणाम मिला। लेकिन इसके तुरंत बाद आरजेडी ने राज्यभा चुनाव की दो सीटों में अपने एम-वाई समीकारण का ध्यान रखा है। आरजेडी से राज्यसभा चुनाव के लिए एक नाम जाे पहले से तय माना जा रहा था, वह लालू यादव की बेटी व सिटिंग राज्यसभा सदस्य मीसा भारती का है। पार्टी की दूसरी सीट को लेकर सस्पेंस अंतिम समय तक बना रहा। बीते दिनों सर्वसम्मति से राज्यसभा और विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करने के लिए आरजेडी के केंद्रीय व राज्य संसदीय बोर्ड की अलग-अलग बैठकें हुईं थीं। इनमें प्रत्याशियों का चयन करने के लिए लालू प्रसाद यादव को अधिकृत कर दिया गया। खास बात यह रही कि इन बैठकों में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पटना में रहकर भी शामिल नहीं हुए। जबकि, बैठक में मीसा भारती और तेज प्रताप यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह नाराज होकर बैठक से निकल गए। बैठक में हंगामा का बड़ा कारण आरजेडी व लालू परिवार में चल रही वर्चस्व की जंग को बताया गया। लालू परिवार में पार्टी में प्रत्याशियों को लेकर तनाव नई बात नहीं है। पहले के चुनावों में लालू के बेटे तेज प्रताप यादव पार्टी लाइन से अलग स्टैंड लेकर आरजेडी के खिलाफ जाते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई बैठक में तेजस्वी का शामिल नहीं होने तथा बैठक से जगदानंद सिंह के चले जाने से प्रत्याशियों को लेकर पार्टी व लालू परिवार में तनाव की चर्चा को बल मिला। अब बात लालू के एम-वाई समीकारण की। लालू प्रसाद यादव ने मुसलमानों व यादवों को वोट बैंक बनाकर बिहार में पंद्रह साल तक बिहार की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। लेकिन वक्त के साथ जातियों व समुदायों पर आधिरित नए वोट बैंक भी बने। लव-कुश, दलित, महादलित आदि कई वोट बैंक व उनके नेता समाने आए। इस बीच पप्पू यादव , असदुद्दीन ओवैसी आदि कई नेताओं ने यादव व मुसलमान वोट बैंक वाले लालू के एम-वाई समीकारण में भी सेंध लगा दी। इसके बाद तेजस्वी यादव ने जाति की राजनीति से हटते हुए सबों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई। पार्टी ने इसे 'ए-टू-जेड' की नीति का नाम दिया। आरजेडी के मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि आरजेडी की पहले से ही सबों को साथ लेकर चलने की नीति रही है। बिहार विधान परिषद चुनाव व बोचहां के विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी को मिली जीत को इसी का परिणाम बताया गया। इस बीच लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के मामले में जमानत मिलने के बाद अब पटना आ चुके हैं। पार्टी के पुराने साथियों को साथ लेकर चलने की नीति में पुराने समीकरण को नजरअंदाज कर देना भी मुमकिन नहीं। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में आरजेडी ने लालू के एम-वाई समीकरण को तरजीह दी है।
झज्जर, 5 अप्रैल (हप्र) प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री एवं कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने अनिल विज पर निशाना साधा और कहा कि बेहतर हो कि विज साहब विधायकों व सरकारी अधिकारियों से भिड़ने की बजाय कानून व्यवस्था पर ध्यान दें। भुक्कल ने कहा कि देशभर में क्या हो रहा है, इस पर तुरंत ट्विट करने वाले अनिल विज इस बात पर भी ध्यान दें कि हरियाणा में क्या हो रहा है। भुक्कल ने कहा कि झज्जर हीं नहीं बल्कि सोनीपत, रोहतक, अंबाला, यमुनानगर समेत पूरे हरियाणा में अपराधी बेखौफ है। प्रदेश में आये दिन कहीं न कहीं चोरी, डकैती, लूटपाट की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार ने आमजन को भगवान भरोसे छोड़कर केवल सीएम, डिप्टी सीएम व मंत्रियों की सिक्योरिटी में पुलिस फोर्स को लगा रखा है। यहीं वजह है कि हरियाणा में अपराधियों ने सिर उठा रखे हैं और अपराधी बेखौफ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं।
झज्जर, पाँच अप्रैल प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री एवं कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने अनिल विज पर निशाना साधा और कहा कि बेहतर हो कि विज साहब विधायकों व सरकारी अधिकारियों से भिड़ने की बजाय कानून व्यवस्था पर ध्यान दें। भुक्कल ने कहा कि देशभर में क्या हो रहा है, इस पर तुरंत ट्विट करने वाले अनिल विज इस बात पर भी ध्यान दें कि हरियाणा में क्या हो रहा है। भुक्कल ने कहा कि झज्जर हीं नहीं बल्कि सोनीपत, रोहतक, अंबाला, यमुनानगर समेत पूरे हरियाणा में अपराधी बेखौफ है। प्रदेश में आये दिन कहीं न कहीं चोरी, डकैती, लूटपाट की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार ने आमजन को भगवान भरोसे छोड़कर केवल सीएम, डिप्टी सीएम व मंत्रियों की सिक्योरिटी में पुलिस फोर्स को लगा रखा है। यहीं वजह है कि हरियाणा में अपराधियों ने सिर उठा रखे हैं और अपराधी बेखौफ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं।
Ambedkarnagar News: अम्बेडकरनगर की विधानसभा अकबरपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक राम अचल राजभर के प्रतिनिधि बाल मुकुंद धुरिया ने सोशल साइट पर विवादित टिप्पणी की। फेसबुक वाल पर होने हनुमान जी को लेकर उनके पोस्ट से जिले की सियासत गरमा गई है। Ambedkarnagar News: भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री अतुल मिश्रा ने अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर कहा है कि हिन्दुओं के आराध्य हनुमान जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। इससे करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, इसलिए बालमुकुंद धुरिया के विरुद्ध कार्रवाई की जाये। अम्बेडकरनगर की विधानसभा अकबरपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक राम अचल राजभर के प्रतिनिधि बाल मुकुंद धुरिया ने सोशल साइट पर विवादित टिप्पणी की। फेसबुक वाल पर होने हनुमान जी को लेकर उनके पोस्ट से जिले की सियासत गरमा गई है। भाजपा युवा मोर्चा जिला महामंत्री ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर विधायक प्रतिनिधि पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, फेसबुक पर भी लोगों ने आक्रोश जताया है। पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। समाजवादी पार्टी से अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम अचल राजभर के बेहद करीबी, साये की तरह उनके साथ हर वक्त रहने वाले बाल मुकुंद धुरिया जो खुद को विधायक प्रतिनिधि भी बताते हैं, ने फेसबुक वॉल पर आज हनुमान जयंती पर पोस्ट लिखा, "जिन्हें अपने बाबा दादा की जयंती नहीं पता वो बन्दर की जयंती मना रहे हैं। " इस पोस्ट को लेकर जिले के लोग भी आक्रोशित हैं और उनकी प्रतिक्रिया भी सामन आई है। भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री अतुल मिश्रा ने अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर कहा है कि हिन्दुओं के आराध्य हनुमान जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। इससे करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, इसलिए बालमुकुंद धुरिया के विरुद्ध कार्रवाई की जाये। इस सम्बंध में सीओ अकबरपुर ने कहा कि तहरीर मिली है मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जब सपा विधायक राम अचल राजभर से बात करने का प्रयास किया गया तो वो जबाब देने से कतराते दिखे। जबकि बालमुकुंद धुरिया ने कहा कि उनकी मंशा किसी की भावना को ठेस पहुचाने की नहीं थी। विधायक प्रतिनिधि होने के बारे में गोल-मटोल जबाब देते हुए कहा कि उनके साथ रहता हूं। हालांकि, बाल मुकुंद खुद को विधायक का प्रतिनिधि बताते और लिखते भी हैं। फेसबुक पर उनका डीएम को लिखा गया पत्र भी है जिसमे उन्होंने खुद को विधायक प्रतिनिधि लिखा है।
Ambedkarnagar News: अम्बेडकरनगर की विधानसभा अकबरपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक राम अचल राजभर के प्रतिनिधि बाल मुकुंद धुरिया ने सोशल साइट पर विवादित टिप्पणी की। फेसबुक वाल पर होने हनुमान जी को लेकर उनके पोस्ट से जिले की सियासत गरमा गई है। Ambedkarnagar News: भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री अतुल मिश्रा ने अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर कहा है कि हिन्दुओं के आराध्य हनुमान जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। इससे करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, इसलिए बालमुकुंद धुरिया के विरुद्ध कार्रवाई की जाये। अम्बेडकरनगर की विधानसभा अकबरपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक राम अचल राजभर के प्रतिनिधि बाल मुकुंद धुरिया ने सोशल साइट पर विवादित टिप्पणी की। फेसबुक वाल पर होने हनुमान जी को लेकर उनके पोस्ट से जिले की सियासत गरमा गई है। भाजपा युवा मोर्चा जिला महामंत्री ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर विधायक प्रतिनिधि पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, फेसबुक पर भी लोगों ने आक्रोश जताया है। पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। समाजवादी पार्टी से अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम अचल राजभर के बेहद करीबी, साये की तरह उनके साथ हर वक्त रहने वाले बाल मुकुंद धुरिया जो खुद को विधायक प्रतिनिधि भी बताते हैं, ने फेसबुक वॉल पर आज हनुमान जयंती पर पोस्ट लिखा, "जिन्हें अपने बाबा दादा की जयंती नहीं पता वो बन्दर की जयंती मना रहे हैं। " इस पोस्ट को लेकर जिले के लोग भी आक्रोशित हैं और उनकी प्रतिक्रिया भी सामन आई है। भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री अतुल मिश्रा ने अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर कहा है कि हिन्दुओं के आराध्य हनुमान जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। इससे करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, इसलिए बालमुकुंद धुरिया के विरुद्ध कार्रवाई की जाये। इस सम्बंध में सीओ अकबरपुर ने कहा कि तहरीर मिली है मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जब सपा विधायक राम अचल राजभर से बात करने का प्रयास किया गया तो वो जबाब देने से कतराते दिखे। जबकि बालमुकुंद धुरिया ने कहा कि उनकी मंशा किसी की भावना को ठेस पहुचाने की नहीं थी। विधायक प्रतिनिधि होने के बारे में गोल-मटोल जबाब देते हुए कहा कि उनके साथ रहता हूं। हालांकि, बाल मुकुंद खुद को विधायक का प्रतिनिधि बताते और लिखते भी हैं। फेसबुक पर उनका डीएम को लिखा गया पत्र भी है जिसमे उन्होंने खुद को विधायक प्रतिनिधि लिखा है।
जीवाणु क्लॉस्ट्रिडियम diffifile में रहता हैप्रत्येक व्यक्ति का जीव। गहन प्रजनन की प्रवृत्ति है, क्योंकि यह खतरनाक हो जाता है, क्योंकि यह रोगजनक गुण प्राप्त करता है और कुछ बीमारियों का कारण बनता है। Anaerobes बाध्य करने के लिए संदर्भित करता है और ऑक्सीजन के बिना मौजूद हो सकता है। महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के काम में शामिल, जैसे प्रोटीन विभाजन, उत्तेजना और आंतों की दीवारों की toning। रूसी अनुवाद में "क्लॉस्ट्रिडियम" शब्दमतलब "धुरी"। सूक्ष्मजीवों के लिए एक समान नाम स्पोरुलेशन के बीच में सूजन की विशिष्टता के कारण है। अभी भी बैक्टीरिया एक धुरी के आकार को प्राप्त करने में सक्षम हैं। वे चार प्रकार में विभाजित हैंः क्लॉस्ट्रिडियम में रॉड की तरह आकार होता है। चेन और जोड़े में व्यवस्थित किया जा सकता है। यह पर्याप्त मोबाइल है। ऑक्सीजन की पूरी अनुपस्थिति की स्थितियों में, यह तीव्रता से गुणा करना शुरू कर देता है। सूक्ष्मजीव स्पोरस बनाते हैं, जो उन्हें एंटीबायोटिक्स, हीटिंग और कीटाणुशोधन के लिए विभिन्न दवाओं के प्रतिरोध प्रदान करता है। केंद्रीय विवाद एक धुरी के रूप में है, और जो अंततः स्थित है वह ड्रमस्टिक्स का आकार है। क्लॉस्ट्रिडियम diffifile दस्त से कारण बनता हैएंटीबायोटिक दवाओं। आमतौर पर आंतों के वातावरण में रहता है। अच्छे स्वास्थ्य के साथ, फायदेमंद सूक्ष्मजीव इस बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने के बाद, फायदेमंद बैक्टीरिया कम हो जाता है, और क्लॉस्ट्रिडियम की संख्या बढ़ जाती है, जो कोलाइटिस की उपस्थिति को उत्तेजित कर सकती है, जिससे गंभीर रोग और यहां तक कि किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर मरीजों के लिए सच है। क्लॉस्ट्रिडिया फार्म विषाक्त पदार्थों की सभी किस्में,एक निश्चित रोगविज्ञान की उपस्थिति को उत्तेजित करना। इसके प्रजनन के परिणामस्वरूप, यह विषाक्त ए और बी क्लॉस्ट्रिडियम difftyle पैदा करता है। पहले एंटरोटॉक्सिन कहा जाता है, और दूसरा को साइटोटोक्सिन कहा जाता है। वे कई लोगों में दस्त और कोलाइटिस का कारण हैं। क्लॉस्ट्रिडियम difftyle आमतौर पर रहता हैअस्पताल और नर्सिंग होम। कहीं भी हो सकता हैः फर्श पर, खिड़की के सिले, बेडसाइड टेबल, बिस्तर और शौचालयों में। दूषित सतह के संपर्क में जब सूक्ष्मजीव के विवाद अनियंत्रित रूप से हाथों में आते हैं। मुख्य रूप से fecal-oral मार्ग से फैल गया। बीजों के शरीर में प्रवेश करने के बाद, वे हैंआसानी से पेट से गुजरना और आंत में रहना। छोटी आंत के माध्यम में वे एक वनस्पति रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और सक्रिय रूप से गुणा करना शुरू कर देते हैं। बड़ी आंत में, बैक्टीरिया आंतों के गुंबदों में बसता है और विषाक्त पदार्थ ए और बी को छोड़ना शुरू करता है, जिसके परिणामस्वरूप आंतों के पर्यावरण की गंभीर सूजन होती है, जिससे क्षय और श्लेष्म के उत्पादों का विघटन होता है। स्यूडोमेब्र्रेन का गठन होता है। टोक्सिन ए सफेद रक्त कोशिकाओं को आकर्षित करना शुरू करता है, जबकि विषैले बी उपकला कोशिकाओं के विनाशकारी प्रभाव में शामिल होता है। ये प्रक्रियाएं कोलाइटिस, पानी के मल और छद्मकोश की उपस्थिति को उकसाती हैं। मूल रूप से क्लॉस्ट्रिडियम से जुड़े सभी पैथोलॉजीजएंटीबायोटिक्स के साथ-साथ सर्जरी के बाद उपचार के बाद मतभेद होते हैं। बुजुर्ग लोग 60 साल के बाद और लंबे समय तक इनपेशेंट उपचार पर हैं, साथ ही रोगी immunosuppressive दवा लेने वाले रोगी, विशेष रूप से सूक्ष्मजीवों के लिए कमजोर हैं। क्लॉस्ट्रिडियम difficile एक कमजोर या उत्तेजित करता हैमध्यम दस्त और मामूली पेट की ऐंठन। लेकिन असाधारण मामलों में, यह रोग कोलाइटिस के एक अधिक गंभीर रूप में गुजरता है। इस तरह के लक्षणों का कारण क्या हैः 3% मामलों में, रोगियों का एक गंभीर रूप हैरोग। इनमें से 30-85% मर जाते हैं। 20-25% रोगियों में, बीमारी बार-बार हो सकती है। पैथोलॉजी के अवशेष उन जीवाणुओं के कारण होते हैं जो चिकित्सा के बाद बड़ी आंत में बने होते हैं या क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल के नए संक्रमण के कारण होते हैं। रोग बच्चों को पीड़ित कर सकता है, खासतौर पर जो कमजोर हैं। एक एंटीबायोटिक-संबंधित दस्त (एएमए) हो सकता हैहल्के आंतों से एंटरोकॉलिसिस के गंभीर रूप तक विकास के विभिन्न चरणों में होते हैं, जिन्हें स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस कहा जाता है। इस रोगविज्ञान का कारण क्लॉस्ट्रिडियम डिफिफाइल के कारण एक संक्रमण है, जो एंटीबायोटिक थेरेपी के उपयोग के कारण कई मामलों में दिखाई देता है। डायरिया या स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस का कारण बननाएक व्यापक स्पेक्ट्रम के साथ एक एंटीबायोटिक का भी एक प्रशासन भी संभव है। इसके अलावा, रोग की उपस्थिति दवा के प्रशासन के खुराक और मोड पर निर्भर नहीं है। Clostridium difficile के कारण क्लॉस्ट्रिडियोज़िस निम्नलिखित रूपों में हो सकता हैः एएमए उन रोगियों में होता है जिन्होंने कोर्स पूरा कर लिया हैदीर्घकालिक चिकित्सा - अस्पताल में चार सप्ताह से अधिक। आंतों के वातावरण में क्लॉस्ट्रिडिया दवाओं के लिए एक निश्चित प्रतिरोध प्राप्त करते हैं। जब यह रोगविज्ञान होता है, तो पेरी-पूच जोन में दर्द होता है, जो बाद में पूरे पेट को प्रभावित करता है। रोगी की कुर्सी अधिक बार हो जाती है, लेकिन समग्र रूप से स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। क्लॉस्ट्रिडियम के कारण स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिसdifficile, लक्षण अधिक गंभीर हैं। रोगियों में डिस्बेक्टेरियोसिस दिखाई देता है, और क्लॉस्ट्रिडियम difficile की गतिविधि prevails। जीवाणु आंतों के श्लेष्मा को उपनिवेशित करता है और एक साइटोटोक्सिन और एंटरोटॉक्सिन उत्पन्न करता है। श्लेष्म झिल्ली की सूजन प्रक्रिया स्यूडोमब्र्रेन के गठन के साथ शुरू होती है। समय पर इलाज की अनुपस्थिति में, रोग प्रगति करता है और अधिक गंभीर जटिलताओं को देता है। आंतों की दीवार का छिद्र होता है, जो पेरिटोनिटिस का कारण बनता है। कुछ मामलों में, बीमारी की मौत हो जाती है। ऐसी बीमारी सबसे अधिक संवेदनशील हैकैंसर के मरीजों, बुजुर्ग लोगों और मरीजों ने सर्जरी की। पैथोलॉजी का विकास बुखार, पेट में दर्द और सिर, पेट फूलना, विच्छेदन, उल्टी के साथ होता है। शरीर के नशा के अन्य लक्षण हैं। मरीज़ वजन कम करते हैं, कुछ में एनोरेक्सिया, नैतिक अवसाद, अवसाद होता है। कैशक्सिया, प्रयास, टेनेसमस, दस्ताने के साथ डायरिया और दिन में 20 बार तक फाइब्रिन ओवरले भी होता है। जब विषाक्त पदार्थों के साथ जहर विकसित हो सकता हैनेक्रोटिक एंटरटाइटिस। इस मामले में, आंतों, क्षरण और अल्सर की दीवारों पर, नेक्रोसिस का फोकस बनता है। शरीर का तापमान बढ़ता है। एक ठंडा है डिस्प्सीसिया मनाया जाता है, मल का मिश्रण मिश्रण के साथ तरल हो जाता है। निदान के साथ, आंतों के paresis, hepatosplenomegaly निदान। संभावित आंतों का खून बह रहा है, अल्सर का छिद्रण, साथ ही साथ venules और धमनी के थ्रोम्बिसिस। अक्सर भोजन विषाक्तता का कारण बनता हैक्लॉस्ट्रिडियम, क्लॉस्ट्रिडियम diffifile सहित। इस बीमारी के नैदानिक लक्षण स्वयं को जहरीले रूप में प्रकट करते हैं। आम तौर पर, यह बुखार, पेट दर्द, दस्त, भूख की कमी, अपचन है। इस बीमारी के साथ सभी प्रकार के डिस्प्लेप्टिक और नशा के लक्षण प्रकट होते हैं। मरीज़ चिड़चिड़ाहट, सुस्त और बेचैन हो जाते हैं। नकारात्मक लक्षण लगभग 4 दिन तक चलते हैं और धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। संक्रमण की मुख्य विशेषता बंद हो जाती है,जो 25% मामलों में प्रकट होते हैं। उनकी घटना का कारण आंतों के वातावरण में स्थित बीमारियां हैं। बार-बार संक्रमण के मामलों को बाहर करना असंभव है। एक नियम के रूप में, चिकित्सा के तुरंत बाद, वसूली आती है, लेकिन 2-28 दिनों के लिए एक विलंब, रोग के शुरुआती अभिव्यक्ति के साथ इसके लक्षणों में समान हो सकता है। यदि शरीर में क्लॉस्ट्रिडियम विसारक का पता लगाया जाता है, तो उपचार तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। इस संक्रमण के कारण निम्नलिखित हैंः ये कारण शरीर को कमजोर करते हैं और क्लॉस्ट्रिडियम डिफॉल्ट के प्रजनन को बढ़ावा देते हैं। बीमारी का उपचार केवल रोगी के पूर्ण निदान के बाद ही होना चाहिए। रोग का निदान पहचान पर आधारित हैपैथोलॉजी के लक्षण और इसकी घटना के कारण। एनामेनेसिस को ध्यान में रखा जाता है, साथ ही महामारी विज्ञान कारक भी लिया जाता है। बीमारी के नैदानिक अभिव्यक्तियों पर ध्यान दें। निदान स्थापित करने के लिए, वाद्ययंत्र और प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग करें। Clostridium difficile के लिए मल का विश्लेषण किया जाता है। प्रयोगशाला में, ग्राम पॉजिटिव रॉड और उनके स्पायर निर्धारित होते हैं। एक माइक्रोस्कोपिक परीक्षा में, बायोमटेरियल एक विशेष तरीके से बोया जाता है और इसके आधार पर, रोगजनक सूक्ष्मजीवों की उपनिवेश निर्धारित होते हैं। ऐसे विश्लेषण की डिलीवरी के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। क्लॉस्ट्रिडिया की संख्या ग्राम स्मीयर द्वारा निर्धारित की जाती है। उसके बाद, बैक्टीरिया की प्रजातियों की पहचान की जाती है। Clostridium difficile पर कैल एक जीवाणु प्रयोगशाला में जांच की है। एक बीमारी का निदान करते समय,सफेद चूहों पर जैविक परीक्षण, जो शरीर के नशा के चरण को निर्धारित करता है, विषाक्त पदार्थ का पता लगाता है और रोग के उपचार के तरीकों को निर्धारित करने में मदद करता है। एक बीमारी का निदान करते समय, विशेष प्रतिरक्षा प्रयोगशालाओं में एक एंटीजन परीक्षण किया जाता है। विशेष मामलों में, एक्सप्रेस डायग्नोस्टिक्स को सौंपा जाता है, मल में एंटरोटॉक्सिन की उपस्थिति निर्धारित करने में मदद करता है। आंतों के अंग का बायोप्सी किया जाता है, जो सूजन foci के स्थान के बारे में पता करने की अनुमति देता है। सेरोडाइग्नोसिस आरएनजीए में विष की उपस्थिति का पता लगा सकता है। यह एक एंटी-डायग्नोस्टिक डायग्नोस्टिक के साथ एक साथ निर्धारित किया जाता है। प्रतिक्रिया का निरीक्षण करें, जो काउंटर इम्यूनोइलेक्ट्रोफोरोसिस के परिणामस्वरूप होता है। इंस्ट्रुमेंटल डायग्नोस्टिक्स आंतों के अंग की रेडियोग्राफी से ज्यादा कुछ नहीं है, जो यह निर्धारित करने की अनुमति देता है कि मानव शरीर के ऊतकों में गैस कहाँ जमा हुई है। सबसे सटीक टॉमोग्राफिक और एंडोस्कोपिक परीक्षा है। यह सूजन प्रक्रिया, साथ ही छद्मकोशब्रंथों का गठन दिखाता है। शिशुओं में क्लॉस्ट्रिडिया की बढ़ी हुई गतिविधिएक डिस्बेक्टेरियोसिस की उपस्थिति के बारे में बोलता है। इस रोगविज्ञान के साथ एक शिशु में, भूख, भूख में कमी, regurgitation मनाया जा सकता है। कभी-कभी परेशान नींद में अशांति और अनियमित मल। शिशुओं में बैक्टीरिया की संख्या 103-104 सीएफयू / जी से अधिक नहीं होनी चाहिए। संकेतक के अतिरिक्त को पैथोलॉजी माना जाता है, जिसका इलाज किया जाना चाहिए। यदि वितरित होने पर क्लॉस्ट्रिडियम की सामग्री सामान्य होती हैडिस्बिओसिस का विश्लेषण, इसका मतलब है कि आंत स्थिर रूप से काम कर रहा है। जब रोगजनक बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि आंतों का इलाज किया जाना चाहिए। आप Invitro में क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल पर एक अध्ययन कर सकते हैं। लगभग 1200 रूबल का विश्लेषण है। इसके आधार पर, अक्सर, आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। बैक्टीरिया क्लॉस्ट्रिडियम diffifile शायद ही कभी प्रभावित करता हैनवजात शिशु और जीवन के पहले वर्ष के टुकड़े। यह इस तथ्य के कारण है कि मां के दूध में विशेष एंटीबॉडी होती है जो क्लॉस्ट्रिडिया के खिलाफ प्रभावी होती है। जब एक एंटीबायोटिक-जुड़ेवयस्कों में बचपन में दस्त के सभी लक्षण। बच्चों में एंटरोकॉलिस और हल्के कोलाइटिस बिना विघटन और बुखार के होते हैं। मरीजों को पेट में दर्द के बारे में चिंतित हो सकता है जो क्षेत्र में पल्पेशन की विधि के साथ होता है। कभी-कभी मल में वृद्धि होती है, जो दस्त को उत्तेजित करती है, जिससे शरीर में पानी-इलेक्ट्रोलाइट खराबी होती है। बैक्टीरिया आवर्ती हो सकता हैकोलाइटिस के साथ क्लॉस्ट्रिडियोजिस के आवर्ती रूप। यह तब होता है जब रोग अंत तक ठीक नहीं होता है। इस मामले में, क्लॉस्ट्रिडियोजिस उपचार के बंद होने के 7-14 दिनों के बाद होता है। बचपन में स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिसएक तीव्र रूप में विकसित होता है। बीमारी के शुरुआती चरण में भूख नहीं है। पेट में बुखार, बेल्चिंग और स्पैम होता है। शरीर, दस्त और सूजन का एक नशा है। जब पेट के पैल्पेशन में दर्द होता है। कुर्सी अधिक बार हो जाती है। इसमें रक्त और श्लेष्म दिखाई देते हैं। फाइब्रिनस ओवरले के स्क्रैप हो सकते हैं। यदि दस्त अक्सर होता है, तो परिसंचरण विफलता के साथ एक एक्सकोक्सिक प्रभाव होता है। अलग मामलों में एक पतन हुआ था। स्यूडोमेब्रब्रोनस कोलाइटिस का विकास कभी-कभी छिद्रण, रक्तस्राव, और पेरिटोनिटिस की शुरुआत से बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में, बच्चों को न केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा देखा जाना चाहिए, बल्कि एक सर्जन द्वारा भी देखा जाना चाहिए। Clostridiosis केवल एक अस्पताल में इलाज किया जाता है। जब नशा होता है, साथ ही साथ डिस्प्लेप्टिक विकार, गैस्ट्रिक लैवेज निर्धारित किया जाता है और आंतों को एनीमा से साफ़ किया जाता है। पहले दिन, एक भूखे भूख आहार की सिफारिश की जाती है। दवाओं के उपयोग मेंएंटीबायोटिक दवाओं-makrolity। उन्हें संवेदनशील clostridia। "Clarithromycin" और "Azithromycin" सबसे अक्सर इन दवाओं के बीच किया जाता है। (लक्षण और उपचार अलग-अलग सेट चिकित्सक मरीज की हालत के आधार पर) चिकित्सा में विष क्लोस्ट्रीडियम डिफीसाइल उन के बीच में सेफालोसपोरिंस निकाल सकते हैं - "Cefazolin" और "Ceftriaxone"। अक्सर मुकाबला करने के लिए रोगजनक बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं पेनिसिलिन शामिल है, यह "Vancomycin" "Amoxiclav" है। यह भी "Metronidazole" प्रयोग किया जाता है। आंतों के पर्यावरण के माइक्रोफ्लोरा को बहाल करने के लिए,डॉक्टर प्रोबियोटिक और prebiotics निर्धारित करते हैं। हिलाक किला, एसिओल, लेक्टोफिल्टरम, बिफॉर्म, एंटरोल, लाइनएक्स, एंटरोल सबसे लोकप्रिय हैं। नशा को दूर करने के लिए, अनियंत्रित इंजेक्शन "Reopoliglyukin।" यदि आवश्यक हो, एंटीहिस्टामाइन और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स निर्धारित करें। एंटरोसॉर्बेंट्स, हेपेट्रोप्रोटेक्टर, विटामिन, नॉट्रोपिक्स, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स, साथ ही एंटीप्रेट्रिक दवाओं के साथ लक्षण उपचार। ऐसा माना जाता है कि चिकित्सा प्रभावी है अगरः यदि एंटीबैक्टीरियल थेरेपी क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल के लक्षणों से गुजरती नहीं है, तो उपचार समायोजित किया जाता है। कभी-कभी कोलोइट्रिडियम द्वारा ट्रिगर किया गया कोलाइटिसdifficile, शल्य चिकित्सा के साथ इलाज कर रहे हैं। आम तौर पर यह कोलन के छिद्र के साथ होता है और जब एक विषाक्त मेगाकोलन की उपस्थिति के साथ एक सूजन प्रक्रिया होती है, और यहां तक कि आंतों में बाधा भी होती है। ऑपरेशन तभी किया जाता है जब पर्याप्त रूढ़िवादी उपचार नतीजे न मिले। क्लॉस्ट्रिडियम diffifile की संक्रमण गंभीरता की अलग-अलग डिग्री में खुद को प्रकट करता है। पाठ्यक्रम और जटिलताओं की डिग्री की एक निश्चित प्रकृति है। जब बीमारी शुरू नहीं होती है और यह आसान होता है याऔसत गंभीरता, तो रोग 100% ठीक हो जाता है। बुखार 1-2 दिनों तक गायब हो जाता है, और दस्त 4 वें -7 वें दिन बंद हो जाता है। आंतों में बाधा, गुर्दे की विफलता और स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस के साथ, स्थिति भारी हो जाती है। क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल के लिए विश्लेषण आपको समय के साथ बीमारी के विकास को रोकने की अनुमति देता है, और समय-समय पर निवारक उपायों से छुटकारा पाने के लिए प्रकट होता हैः
जीवाणु क्लॉस्ट्रिडियम diffifile में रहता हैप्रत्येक व्यक्ति का जीव। गहन प्रजनन की प्रवृत्ति है, क्योंकि यह खतरनाक हो जाता है, क्योंकि यह रोगजनक गुण प्राप्त करता है और कुछ बीमारियों का कारण बनता है। Anaerobes बाध्य करने के लिए संदर्भित करता है और ऑक्सीजन के बिना मौजूद हो सकता है। महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के काम में शामिल, जैसे प्रोटीन विभाजन, उत्तेजना और आंतों की दीवारों की toning। रूसी अनुवाद में "क्लॉस्ट्रिडियम" शब्दमतलब "धुरी"। सूक्ष्मजीवों के लिए एक समान नाम स्पोरुलेशन के बीच में सूजन की विशिष्टता के कारण है। अभी भी बैक्टीरिया एक धुरी के आकार को प्राप्त करने में सक्षम हैं। वे चार प्रकार में विभाजित हैंः क्लॉस्ट्रिडियम में रॉड की तरह आकार होता है। चेन और जोड़े में व्यवस्थित किया जा सकता है। यह पर्याप्त मोबाइल है। ऑक्सीजन की पूरी अनुपस्थिति की स्थितियों में, यह तीव्रता से गुणा करना शुरू कर देता है। सूक्ष्मजीव स्पोरस बनाते हैं, जो उन्हें एंटीबायोटिक्स, हीटिंग और कीटाणुशोधन के लिए विभिन्न दवाओं के प्रतिरोध प्रदान करता है। केंद्रीय विवाद एक धुरी के रूप में है, और जो अंततः स्थित है वह ड्रमस्टिक्स का आकार है। क्लॉस्ट्रिडियम diffifile दस्त से कारण बनता हैएंटीबायोटिक दवाओं। आमतौर पर आंतों के वातावरण में रहता है। अच्छे स्वास्थ्य के साथ, फायदेमंद सूक्ष्मजीव इस बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने के बाद, फायदेमंद बैक्टीरिया कम हो जाता है, और क्लॉस्ट्रिडियम की संख्या बढ़ जाती है, जो कोलाइटिस की उपस्थिति को उत्तेजित कर सकती है, जिससे गंभीर रोग और यहां तक कि किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर मरीजों के लिए सच है। क्लॉस्ट्रिडिया फार्म विषाक्त पदार्थों की सभी किस्में,एक निश्चित रोगविज्ञान की उपस्थिति को उत्तेजित करना। इसके प्रजनन के परिणामस्वरूप, यह विषाक्त ए और बी क्लॉस्ट्रिडियम difftyle पैदा करता है। पहले एंटरोटॉक्सिन कहा जाता है, और दूसरा को साइटोटोक्सिन कहा जाता है। वे कई लोगों में दस्त और कोलाइटिस का कारण हैं। क्लॉस्ट्रिडियम difftyle आमतौर पर रहता हैअस्पताल और नर्सिंग होम। कहीं भी हो सकता हैः फर्श पर, खिड़की के सिले, बेडसाइड टेबल, बिस्तर और शौचालयों में। दूषित सतह के संपर्क में जब सूक्ष्मजीव के विवाद अनियंत्रित रूप से हाथों में आते हैं। मुख्य रूप से fecal-oral मार्ग से फैल गया। बीजों के शरीर में प्रवेश करने के बाद, वे हैंआसानी से पेट से गुजरना और आंत में रहना। छोटी आंत के माध्यम में वे एक वनस्पति रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और सक्रिय रूप से गुणा करना शुरू कर देते हैं। बड़ी आंत में, बैक्टीरिया आंतों के गुंबदों में बसता है और विषाक्त पदार्थ ए और बी को छोड़ना शुरू करता है, जिसके परिणामस्वरूप आंतों के पर्यावरण की गंभीर सूजन होती है, जिससे क्षय और श्लेष्म के उत्पादों का विघटन होता है। स्यूडोमेब्र्रेन का गठन होता है। टोक्सिन ए सफेद रक्त कोशिकाओं को आकर्षित करना शुरू करता है, जबकि विषैले बी उपकला कोशिकाओं के विनाशकारी प्रभाव में शामिल होता है। ये प्रक्रियाएं कोलाइटिस, पानी के मल और छद्मकोश की उपस्थिति को उकसाती हैं। मूल रूप से क्लॉस्ट्रिडियम से जुड़े सभी पैथोलॉजीजएंटीबायोटिक्स के साथ-साथ सर्जरी के बाद उपचार के बाद मतभेद होते हैं। बुजुर्ग लोग साठ साल के बाद और लंबे समय तक इनपेशेंट उपचार पर हैं, साथ ही रोगी immunosuppressive दवा लेने वाले रोगी, विशेष रूप से सूक्ष्मजीवों के लिए कमजोर हैं। क्लॉस्ट्रिडियम difficile एक कमजोर या उत्तेजित करता हैमध्यम दस्त और मामूली पेट की ऐंठन। लेकिन असाधारण मामलों में, यह रोग कोलाइटिस के एक अधिक गंभीर रूप में गुजरता है। इस तरह के लक्षणों का कारण क्या हैः तीन% मामलों में, रोगियों का एक गंभीर रूप हैरोग। इनमें से तीस-पचासी% मर जाते हैं। बीस-पच्चीस% रोगियों में, बीमारी बार-बार हो सकती है। पैथोलॉजी के अवशेष उन जीवाणुओं के कारण होते हैं जो चिकित्सा के बाद बड़ी आंत में बने होते हैं या क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल के नए संक्रमण के कारण होते हैं। रोग बच्चों को पीड़ित कर सकता है, खासतौर पर जो कमजोर हैं। एक एंटीबायोटिक-संबंधित दस्त हो सकता हैहल्के आंतों से एंटरोकॉलिसिस के गंभीर रूप तक विकास के विभिन्न चरणों में होते हैं, जिन्हें स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस कहा जाता है। इस रोगविज्ञान का कारण क्लॉस्ट्रिडियम डिफिफाइल के कारण एक संक्रमण है, जो एंटीबायोटिक थेरेपी के उपयोग के कारण कई मामलों में दिखाई देता है। डायरिया या स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस का कारण बननाएक व्यापक स्पेक्ट्रम के साथ एक एंटीबायोटिक का भी एक प्रशासन भी संभव है। इसके अलावा, रोग की उपस्थिति दवा के प्रशासन के खुराक और मोड पर निर्भर नहीं है। Clostridium difficile के कारण क्लॉस्ट्रिडियोज़िस निम्नलिखित रूपों में हो सकता हैः एएमए उन रोगियों में होता है जिन्होंने कोर्स पूरा कर लिया हैदीर्घकालिक चिकित्सा - अस्पताल में चार सप्ताह से अधिक। आंतों के वातावरण में क्लॉस्ट्रिडिया दवाओं के लिए एक निश्चित प्रतिरोध प्राप्त करते हैं। जब यह रोगविज्ञान होता है, तो पेरी-पूच जोन में दर्द होता है, जो बाद में पूरे पेट को प्रभावित करता है। रोगी की कुर्सी अधिक बार हो जाती है, लेकिन समग्र रूप से स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। क्लॉस्ट्रिडियम के कारण स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिसdifficile, लक्षण अधिक गंभीर हैं। रोगियों में डिस्बेक्टेरियोसिस दिखाई देता है, और क्लॉस्ट्रिडियम difficile की गतिविधि prevails। जीवाणु आंतों के श्लेष्मा को उपनिवेशित करता है और एक साइटोटोक्सिन और एंटरोटॉक्सिन उत्पन्न करता है। श्लेष्म झिल्ली की सूजन प्रक्रिया स्यूडोमब्र्रेन के गठन के साथ शुरू होती है। समय पर इलाज की अनुपस्थिति में, रोग प्रगति करता है और अधिक गंभीर जटिलताओं को देता है। आंतों की दीवार का छिद्र होता है, जो पेरिटोनिटिस का कारण बनता है। कुछ मामलों में, बीमारी की मौत हो जाती है। ऐसी बीमारी सबसे अधिक संवेदनशील हैकैंसर के मरीजों, बुजुर्ग लोगों और मरीजों ने सर्जरी की। पैथोलॉजी का विकास बुखार, पेट में दर्द और सिर, पेट फूलना, विच्छेदन, उल्टी के साथ होता है। शरीर के नशा के अन्य लक्षण हैं। मरीज़ वजन कम करते हैं, कुछ में एनोरेक्सिया, नैतिक अवसाद, अवसाद होता है। कैशक्सिया, प्रयास, टेनेसमस, दस्ताने के साथ डायरिया और दिन में बीस बार तक फाइब्रिन ओवरले भी होता है। जब विषाक्त पदार्थों के साथ जहर विकसित हो सकता हैनेक्रोटिक एंटरटाइटिस। इस मामले में, आंतों, क्षरण और अल्सर की दीवारों पर, नेक्रोसिस का फोकस बनता है। शरीर का तापमान बढ़ता है। एक ठंडा है डिस्प्सीसिया मनाया जाता है, मल का मिश्रण मिश्रण के साथ तरल हो जाता है। निदान के साथ, आंतों के paresis, hepatosplenomegaly निदान। संभावित आंतों का खून बह रहा है, अल्सर का छिद्रण, साथ ही साथ venules और धमनी के थ्रोम्बिसिस। अक्सर भोजन विषाक्तता का कारण बनता हैक्लॉस्ट्रिडियम, क्लॉस्ट्रिडियम diffifile सहित। इस बीमारी के नैदानिक लक्षण स्वयं को जहरीले रूप में प्रकट करते हैं। आम तौर पर, यह बुखार, पेट दर्द, दस्त, भूख की कमी, अपचन है। इस बीमारी के साथ सभी प्रकार के डिस्प्लेप्टिक और नशा के लक्षण प्रकट होते हैं। मरीज़ चिड़चिड़ाहट, सुस्त और बेचैन हो जाते हैं। नकारात्मक लक्षण लगभग चार दिन तक चलते हैं और धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। संक्रमण की मुख्य विशेषता बंद हो जाती है,जो पच्चीस% मामलों में प्रकट होते हैं। उनकी घटना का कारण आंतों के वातावरण में स्थित बीमारियां हैं। बार-बार संक्रमण के मामलों को बाहर करना असंभव है। एक नियम के रूप में, चिकित्सा के तुरंत बाद, वसूली आती है, लेकिन दो-अट्ठाईस दिनों के लिए एक विलंब, रोग के शुरुआती अभिव्यक्ति के साथ इसके लक्षणों में समान हो सकता है। यदि शरीर में क्लॉस्ट्रिडियम विसारक का पता लगाया जाता है, तो उपचार तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। इस संक्रमण के कारण निम्नलिखित हैंः ये कारण शरीर को कमजोर करते हैं और क्लॉस्ट्रिडियम डिफॉल्ट के प्रजनन को बढ़ावा देते हैं। बीमारी का उपचार केवल रोगी के पूर्ण निदान के बाद ही होना चाहिए। रोग का निदान पहचान पर आधारित हैपैथोलॉजी के लक्षण और इसकी घटना के कारण। एनामेनेसिस को ध्यान में रखा जाता है, साथ ही महामारी विज्ञान कारक भी लिया जाता है। बीमारी के नैदानिक अभिव्यक्तियों पर ध्यान दें। निदान स्थापित करने के लिए, वाद्ययंत्र और प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग करें। Clostridium difficile के लिए मल का विश्लेषण किया जाता है। प्रयोगशाला में, ग्राम पॉजिटिव रॉड और उनके स्पायर निर्धारित होते हैं। एक माइक्रोस्कोपिक परीक्षा में, बायोमटेरियल एक विशेष तरीके से बोया जाता है और इसके आधार पर, रोगजनक सूक्ष्मजीवों की उपनिवेश निर्धारित होते हैं। ऐसे विश्लेषण की डिलीवरी के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। क्लॉस्ट्रिडिया की संख्या ग्राम स्मीयर द्वारा निर्धारित की जाती है। उसके बाद, बैक्टीरिया की प्रजातियों की पहचान की जाती है। Clostridium difficile पर कैल एक जीवाणु प्रयोगशाला में जांच की है। एक बीमारी का निदान करते समय,सफेद चूहों पर जैविक परीक्षण, जो शरीर के नशा के चरण को निर्धारित करता है, विषाक्त पदार्थ का पता लगाता है और रोग के उपचार के तरीकों को निर्धारित करने में मदद करता है। एक बीमारी का निदान करते समय, विशेष प्रतिरक्षा प्रयोगशालाओं में एक एंटीजन परीक्षण किया जाता है। विशेष मामलों में, एक्सप्रेस डायग्नोस्टिक्स को सौंपा जाता है, मल में एंटरोटॉक्सिन की उपस्थिति निर्धारित करने में मदद करता है। आंतों के अंग का बायोप्सी किया जाता है, जो सूजन foci के स्थान के बारे में पता करने की अनुमति देता है। सेरोडाइग्नोसिस आरएनजीए में विष की उपस्थिति का पता लगा सकता है। यह एक एंटी-डायग्नोस्टिक डायग्नोस्टिक के साथ एक साथ निर्धारित किया जाता है। प्रतिक्रिया का निरीक्षण करें, जो काउंटर इम्यूनोइलेक्ट्रोफोरोसिस के परिणामस्वरूप होता है। इंस्ट्रुमेंटल डायग्नोस्टिक्स आंतों के अंग की रेडियोग्राफी से ज्यादा कुछ नहीं है, जो यह निर्धारित करने की अनुमति देता है कि मानव शरीर के ऊतकों में गैस कहाँ जमा हुई है। सबसे सटीक टॉमोग्राफिक और एंडोस्कोपिक परीक्षा है। यह सूजन प्रक्रिया, साथ ही छद्मकोशब्रंथों का गठन दिखाता है। शिशुओं में क्लॉस्ट्रिडिया की बढ़ी हुई गतिविधिएक डिस्बेक्टेरियोसिस की उपस्थिति के बारे में बोलता है। इस रोगविज्ञान के साथ एक शिशु में, भूख, भूख में कमी, regurgitation मनाया जा सकता है। कभी-कभी परेशान नींद में अशांति और अनियमित मल। शिशुओं में बैक्टीरिया की संख्या एक सौ तीन-एक सौ चार सीएफयू / जी से अधिक नहीं होनी चाहिए। संकेतक के अतिरिक्त को पैथोलॉजी माना जाता है, जिसका इलाज किया जाना चाहिए। यदि वितरित होने पर क्लॉस्ट्रिडियम की सामग्री सामान्य होती हैडिस्बिओसिस का विश्लेषण, इसका मतलब है कि आंत स्थिर रूप से काम कर रहा है। जब रोगजनक बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि आंतों का इलाज किया जाना चाहिए। आप Invitro में क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल पर एक अध्ययन कर सकते हैं। लगभग एक हज़ार दो सौ रूबल का विश्लेषण है। इसके आधार पर, अक्सर, आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। बैक्टीरिया क्लॉस्ट्रिडियम diffifile शायद ही कभी प्रभावित करता हैनवजात शिशु और जीवन के पहले वर्ष के टुकड़े। यह इस तथ्य के कारण है कि मां के दूध में विशेष एंटीबॉडी होती है जो क्लॉस्ट्रिडिया के खिलाफ प्रभावी होती है। जब एक एंटीबायोटिक-जुड़ेवयस्कों में बचपन में दस्त के सभी लक्षण। बच्चों में एंटरोकॉलिस और हल्के कोलाइटिस बिना विघटन और बुखार के होते हैं। मरीजों को पेट में दर्द के बारे में चिंतित हो सकता है जो क्षेत्र में पल्पेशन की विधि के साथ होता है। कभी-कभी मल में वृद्धि होती है, जो दस्त को उत्तेजित करती है, जिससे शरीर में पानी-इलेक्ट्रोलाइट खराबी होती है। बैक्टीरिया आवर्ती हो सकता हैकोलाइटिस के साथ क्लॉस्ट्रिडियोजिस के आवर्ती रूप। यह तब होता है जब रोग अंत तक ठीक नहीं होता है। इस मामले में, क्लॉस्ट्रिडियोजिस उपचार के बंद होने के सात-चौदह दिनों के बाद होता है। बचपन में स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिसएक तीव्र रूप में विकसित होता है। बीमारी के शुरुआती चरण में भूख नहीं है। पेट में बुखार, बेल्चिंग और स्पैम होता है। शरीर, दस्त और सूजन का एक नशा है। जब पेट के पैल्पेशन में दर्द होता है। कुर्सी अधिक बार हो जाती है। इसमें रक्त और श्लेष्म दिखाई देते हैं। फाइब्रिनस ओवरले के स्क्रैप हो सकते हैं। यदि दस्त अक्सर होता है, तो परिसंचरण विफलता के साथ एक एक्सकोक्सिक प्रभाव होता है। अलग मामलों में एक पतन हुआ था। स्यूडोमेब्रब्रोनस कोलाइटिस का विकास कभी-कभी छिद्रण, रक्तस्राव, और पेरिटोनिटिस की शुरुआत से बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में, बच्चों को न केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा देखा जाना चाहिए, बल्कि एक सर्जन द्वारा भी देखा जाना चाहिए। Clostridiosis केवल एक अस्पताल में इलाज किया जाता है। जब नशा होता है, साथ ही साथ डिस्प्लेप्टिक विकार, गैस्ट्रिक लैवेज निर्धारित किया जाता है और आंतों को एनीमा से साफ़ किया जाता है। पहले दिन, एक भूखे भूख आहार की सिफारिश की जाती है। दवाओं के उपयोग मेंएंटीबायोटिक दवाओं-makrolity। उन्हें संवेदनशील clostridia। "Clarithromycin" और "Azithromycin" सबसे अक्सर इन दवाओं के बीच किया जाता है। चिकित्सा में विष क्लोस्ट्रीडियम डिफीसाइल उन के बीच में सेफालोसपोरिंस निकाल सकते हैं - "Cefazolin" और "Ceftriaxone"। अक्सर मुकाबला करने के लिए रोगजनक बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं पेनिसिलिन शामिल है, यह "Vancomycin" "Amoxiclav" है। यह भी "Metronidazole" प्रयोग किया जाता है। आंतों के पर्यावरण के माइक्रोफ्लोरा को बहाल करने के लिए,डॉक्टर प्रोबियोटिक और prebiotics निर्धारित करते हैं। हिलाक किला, एसिओल, लेक्टोफिल्टरम, बिफॉर्म, एंटरोल, लाइनएक्स, एंटरोल सबसे लोकप्रिय हैं। नशा को दूर करने के लिए, अनियंत्रित इंजेक्शन "Reopoliglyukin।" यदि आवश्यक हो, एंटीहिस्टामाइन और कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स निर्धारित करें। एंटरोसॉर्बेंट्स, हेपेट्रोप्रोटेक्टर, विटामिन, नॉट्रोपिक्स, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स, साथ ही एंटीप्रेट्रिक दवाओं के साथ लक्षण उपचार। ऐसा माना जाता है कि चिकित्सा प्रभावी है अगरः यदि एंटीबैक्टीरियल थेरेपी क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल के लक्षणों से गुजरती नहीं है, तो उपचार समायोजित किया जाता है। कभी-कभी कोलोइट्रिडियम द्वारा ट्रिगर किया गया कोलाइटिसdifficile, शल्य चिकित्सा के साथ इलाज कर रहे हैं। आम तौर पर यह कोलन के छिद्र के साथ होता है और जब एक विषाक्त मेगाकोलन की उपस्थिति के साथ एक सूजन प्रक्रिया होती है, और यहां तक कि आंतों में बाधा भी होती है। ऑपरेशन तभी किया जाता है जब पर्याप्त रूढ़िवादी उपचार नतीजे न मिले। क्लॉस्ट्रिडियम diffifile की संक्रमण गंभीरता की अलग-अलग डिग्री में खुद को प्रकट करता है। पाठ्यक्रम और जटिलताओं की डिग्री की एक निश्चित प्रकृति है। जब बीमारी शुरू नहीं होती है और यह आसान होता है याऔसत गंभीरता, तो रोग एक सौ% ठीक हो जाता है। बुखार एक-दो दिनों तक गायब हो जाता है, और दस्त चार वें -सात वें दिन बंद हो जाता है। आंतों में बाधा, गुर्दे की विफलता और स्यूडोमब्रब्रोनस कोलाइटिस के साथ, स्थिति भारी हो जाती है। क्लॉस्ट्रिडियम डिफिसाइल के लिए विश्लेषण आपको समय के साथ बीमारी के विकास को रोकने की अनुमति देता है, और समय-समय पर निवारक उपायों से छुटकारा पाने के लिए प्रकट होता हैः
Desk :सुधाकर सिंह के इस्तीफा के बाद आज कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत अपना पदभार सभालेंगे। वे विकास भवन के मुख्य कार्यालय में पदभार लेंगे। इस दौरान विभागीय अधिकारी और आरजेडी के कई नेता मौजूद रहेंगे। कृषि से पहले कुमार सर्वजीत पर्यटन विभाग के मंत्री थे। आपको बता दें, पिछले दिनों ही सुधाकर सिंह के जगह कुमार सर्वजीत को कृषि मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं सुधाकर सिंह ने अपने ही विभाग के खिलाफ एक बयान दिया जिसके बाद उन्हें कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कुमार सर्वजीत बिहार के नए कृषि मंत्री बनाए गए।
Desk :सुधाकर सिंह के इस्तीफा के बाद आज कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत अपना पदभार सभालेंगे। वे विकास भवन के मुख्य कार्यालय में पदभार लेंगे। इस दौरान विभागीय अधिकारी और आरजेडी के कई नेता मौजूद रहेंगे। कृषि से पहले कुमार सर्वजीत पर्यटन विभाग के मंत्री थे। आपको बता दें, पिछले दिनों ही सुधाकर सिंह के जगह कुमार सर्वजीत को कृषि मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं सुधाकर सिंह ने अपने ही विभाग के खिलाफ एक बयान दिया जिसके बाद उन्हें कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कुमार सर्वजीत बिहार के नए कृषि मंत्री बनाए गए।